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चंडीगढ़ - च्हिंदू धर्म में गाय को देवी का दर्जा मिला है, गाय के भीतर देवी-देवताओं का वास माना जाता है, गाय को सताना या उसकी हत्या करना खुद के लिए नरक के दरवाजे खोलने के समान है। यह कथन पुलिस कमिश्नर डा. आरसी मिश्रा ने खड़क मंगोली ओल्ड पंचकूला, घग्घर नदी के समीप बैकुंठ धाम गोशाला के उद्घाटन समारोह के दौरान कहे। डा. आरसी मिश्रा ने घग्घर नदी से लेकर गौशाला तक कच्चे रास्ते को पक्का करवाने के लिए आश्वासन दिया। जानकारी के अनुसार वैकुंठ धाम गोशाला मे इस समय 160 गउएं है और 500 गउआें के लिए शेड बनाए गए है। इस दौरान गोशाला के प्रमुख संचालक एससी शर्मा, अग्रवाल विकास ट्रस्ट पंचकूला के प्रधान सत्यनरायण गुप्ता, कामधेनु गौशाला, पिंजौर के प्रधान अशोक सिंगला, स्वामी देवी दयाल इंस्टीच्यूट के उपप्रधान अशोक जिंदल, महासचिव अमित जिंदल, सह संचालक राकेश गोयल, सहयोगी मुकेश सिंगला, अमर स्टील, नरेश गोयल व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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| चंडीगढ़ - च्हिंदू धर्म में गाय को देवी का दर्जा मिला है, गाय के भीतर देवी-देवताओं का वास माना जाता है, गाय को सताना या उसकी हत्या करना खुद के लिए नरक के दरवाजे खोलने के समान है। यह कथन पुलिस कमिश्नर डा. आरसी मिश्रा ने खड़क मंगोली ओल्ड पंचकूला, घग्घर नदी के समीप बैकुंठ धाम गोशाला के उद्घाटन समारोह के दौरान कहे। डा. आरसी मिश्रा ने घग्घर नदी से लेकर गौशाला तक कच्चे रास्ते को पक्का करवाने के लिए आश्वासन दिया। जानकारी के अनुसार वैकुंठ धाम गोशाला मे इस समय एक सौ साठ गउएं है और पाँच सौ गउआें के लिए शेड बनाए गए है। इस दौरान गोशाला के प्रमुख संचालक एससी शर्मा, अग्रवाल विकास ट्रस्ट पंचकूला के प्रधान सत्यनरायण गुप्ता, कामधेनु गौशाला, पिंजौर के प्रधान अशोक सिंगला, स्वामी देवी दयाल इंस्टीच्यूट के उपप्रधान अशोक जिंदल, महासचिव अमित जिंदल, सह संचालक राकेश गोयल, सहयोगी मुकेश सिंगला, अमर स्टील, नरेश गोयल व गणमान्य लोग मौजूद रहे। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें ! |
हमीरपुर -शतरंज के नेशनल खिलाड़ी को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से बाहर रखने का आरोप लगा है। हमीरपुर में चली 11वीं अंडर-15 में एक छात्रा खिलाड़ी को मैच खेलने नहीं दिया गया। इसे दो घंटे तक प्रताडि़त करने की शिकायत पिता ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस अधीक्षक हमीरपुर को भेजी है।
आयुर्वेदिक विभाग किसानों के लिए क्लस्टर बनाकर जड़ी-बूटियां व औषधीय पौधे उगाएगा। किसान एक क्लस्टर में कम से कम दो हेक्टेयर भूमि पर औषधीय खेती करेंगे। आयुर्वेदा को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने यह पहल की है।
पुलिस थाना नादौन के तहत एक महिला की ब्यास में डूबकर मौत हो गई। नीना कुमारी (38) निवासी गांव डोडरू डाकघर सिल्ह तहसील ज्वालामुखी जिला कांगड़ा कपड़े धोने के लिए ब्यास किनारे गई थी। अचानक बढ़े जल स्तर के कारण महिला पानी में डूब गई। तीन दिन बाद महिला का शव नादौन अधिकार क्षेत्र के तहत ब्यास नदी में मिला है।
जिला के स्कूल प्रभारियों को शिक्षा विभाग ने खराब परीक्षा परिणाम देने पर नोटिस जारी किए हैं। तीस स्कूलों का दसवीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम 25 फीसदी रहा है। परीक्षा परिणाम खराब रहने पर विभाग ने स्कूल मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य समेत अध्यापकों से जवाब तलब किया है।
डा. राधाकृष्णन मेडिकल कालेज भवन के शिलान्यास एवं आवास भवन के उद्घाटन अवसर पर हमीरपुर में आयोजित कार्यक्रम में छुट्टी वाले दिन भी स्कूली छात्रों को बुला लिया गया। कई छात्र स्कूल ड्रेस में ही पहुंच गए। कार्यक्रम में बुलाए छात्रों की कोई सांस्कृतिक प्रस्तुति भी नहीं हुई। महज राष्ट्र गीत के लिए कुछ छात्राएं मंच पर आईं। सुबह से शाम तक बैठे छात्रों को पानी के सिवाए कुछ भी नसीब नहीं हुआ।
हमीरपुर-दिल्ली वाया भोटा बस अड्डा हमीरपुर से शाम 7:30 बजे, ऊना 10:15, चंडीगढ़ 1:15, दिल्ली 5:30, वापस रात्रि 9:20, चंडीगढ़ 1:15, ऊना 4:00, हमीरपुर में सुबह 6:30 बजे पहुंचेगी। हमीरपुर-दिल्ली वाया भोटा बस अड्डा हमीरपुर से रात 9:00 बजे, ऊना 11:45, चंडीगढ़ तीन बजे, दिल्ली 7:15 बजे, वापस रात्रि 8:42 चंडीगढ़ 12:30, ऊना 3:13, हमीरपुर में सुबह 5:30 बजे पहुंचेगी। पालमपुर-दिल्ली वाया भोटा हमीरपुर से रात 9:30 बजे, ऊना 12:40, चंडीगढ़ 3:35 बजे, दिल्ली आठ बजे, वापस रात्रि 9:40, चंडीगढ़ 1:30, ऊना सुबह 4:25 बजे, हमीरपुर में 7:30 बजे और पालमपुर में दस बजे पहुंचेगी। पालमपुर-दिल्ली वाया भोटा, हमीरपुर से सुबह 9:30 बजे, ऊना12:30, चंडीगढ़ 2:30, दिल्ली 7:30 वापस दिल्ली सुबह 7 बजे, चंडीगढ़ 12:15, ऊना तीन बजे, हमीरपुर 5:30 बजे, पालमपुर आठ बजे पहुंचेगी।
स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने वाला सिविल अस्पताल बड़सर इन दिनों खुद बीमार चल रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने सीएचसी से अपग्रेड कर सिविल अस्पताल बनाया था, लेकिन अभी तक यहां कोई बड़ा विशेषज्ञ तैनात नहीं किया गया। गौरतलब है कि यहां ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर से सटे गांव के लोग इलाज के लिए आते हैं।
| हमीरपुर -शतरंज के नेशनल खिलाड़ी को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से बाहर रखने का आरोप लगा है। हमीरपुर में चली ग्यारहवीं अंडर-पंद्रह में एक छात्रा खिलाड़ी को मैच खेलने नहीं दिया गया। इसे दो घंटे तक प्रताडि़त करने की शिकायत पिता ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस अधीक्षक हमीरपुर को भेजी है। आयुर्वेदिक विभाग किसानों के लिए क्लस्टर बनाकर जड़ी-बूटियां व औषधीय पौधे उगाएगा। किसान एक क्लस्टर में कम से कम दो हेक्टेयर भूमि पर औषधीय खेती करेंगे। आयुर्वेदा को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने यह पहल की है। पुलिस थाना नादौन के तहत एक महिला की ब्यास में डूबकर मौत हो गई। नीना कुमारी निवासी गांव डोडरू डाकघर सिल्ह तहसील ज्वालामुखी जिला कांगड़ा कपड़े धोने के लिए ब्यास किनारे गई थी। अचानक बढ़े जल स्तर के कारण महिला पानी में डूब गई। तीन दिन बाद महिला का शव नादौन अधिकार क्षेत्र के तहत ब्यास नदी में मिला है। जिला के स्कूल प्रभारियों को शिक्षा विभाग ने खराब परीक्षा परिणाम देने पर नोटिस जारी किए हैं। तीस स्कूलों का दसवीं और बारहवीं का परीक्षा परिणाम पच्चीस फीसदी रहा है। परीक्षा परिणाम खराब रहने पर विभाग ने स्कूल मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य समेत अध्यापकों से जवाब तलब किया है। डा. राधाकृष्णन मेडिकल कालेज भवन के शिलान्यास एवं आवास भवन के उद्घाटन अवसर पर हमीरपुर में आयोजित कार्यक्रम में छुट्टी वाले दिन भी स्कूली छात्रों को बुला लिया गया। कई छात्र स्कूल ड्रेस में ही पहुंच गए। कार्यक्रम में बुलाए छात्रों की कोई सांस्कृतिक प्रस्तुति भी नहीं हुई। महज राष्ट्र गीत के लिए कुछ छात्राएं मंच पर आईं। सुबह से शाम तक बैठे छात्रों को पानी के सिवाए कुछ भी नसीब नहीं हुआ। हमीरपुर-दिल्ली वाया भोटा बस अड्डा हमीरपुर से शाम सात:तीस बजे, ऊना दस:पंद्रह, चंडीगढ़ एक:पंद्रह, दिल्ली पाँच:तीस, वापस रात्रि नौ:बीस, चंडीगढ़ एक:पंद्रह, ऊना चार:शून्य, हमीरपुर में सुबह छः:तीस बजे पहुंचेगी। हमीरपुर-दिल्ली वाया भोटा बस अड्डा हमीरपुर से रात नौ:शून्य बजे, ऊना ग्यारह:पैंतालीस, चंडीगढ़ तीन बजे, दिल्ली सात:पंद्रह बजे, वापस रात्रि आठ:बयालीस चंडीगढ़ बारह:तीस, ऊना तीन:तेरह, हमीरपुर में सुबह पाँच:तीस बजे पहुंचेगी। पालमपुर-दिल्ली वाया भोटा हमीरपुर से रात नौ:तीस बजे, ऊना बारह:चालीस, चंडीगढ़ तीन:पैंतीस बजे, दिल्ली आठ बजे, वापस रात्रि नौ:चालीस, चंडीगढ़ एक:तीस, ऊना सुबह चार:पच्चीस बजे, हमीरपुर में सात:तीस बजे और पालमपुर में दस बजे पहुंचेगी। पालमपुर-दिल्ली वाया भोटा, हमीरपुर से सुबह नौ:तीस बजे, ऊनाबारह:तीस, चंडीगढ़ दो:तीस, दिल्ली सात:तीस वापस दिल्ली सुबह सात बजे, चंडीगढ़ बारह:पंद्रह, ऊना तीन बजे, हमीरपुर पाँच:तीस बजे, पालमपुर आठ बजे पहुंचेगी। स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने वाला सिविल अस्पताल बड़सर इन दिनों खुद बीमार चल रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने सीएचसी से अपग्रेड कर सिविल अस्पताल बनाया था, लेकिन अभी तक यहां कोई बड़ा विशेषज्ञ तैनात नहीं किया गया। गौरतलब है कि यहां ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर से सटे गांव के लोग इलाज के लिए आते हैं। |
मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने नामांकन दाखिल करने से पहले रोड शो करते हुए कार्यालय पहुंचे। इस रोड शो में उनके साथ केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी और उनकी पत्नी अमृता फडनवीस भी थीं। इससे पहले मुख्यमंत्री फडनवीस ने नामांकन दाखिल करने से पहले नागपुर सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की। इसके बाद नागपुर में उनका रोड शो प्रारंभ हुआ। रोड शो के दौरान सीएम फडणवीस के साथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी साथ हैं।
| मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने नामांकन दाखिल करने से पहले रोड शो करते हुए कार्यालय पहुंचे। इस रोड शो में उनके साथ केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी और उनकी पत्नी अमृता फडनवीस भी थीं। इससे पहले मुख्यमंत्री फडनवीस ने नामांकन दाखिल करने से पहले नागपुर सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की। इसके बाद नागपुर में उनका रोड शो प्रारंभ हुआ। रोड शो के दौरान सीएम फडणवीस के साथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी साथ हैं। |
टीवी चैनल स्टार प्लस के शो 'इक्यावन' में काम करने वाली एक्ट्रेस प्राची तहलान को शूटिंग के दौरान कुत्ते ने काट लिया। प्राची को दो जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ शूटिंग कर रही थीं जब यह हादसा हुआ। हुआ कुछ यूं कि दोनों में से एक कुत्ता अचानक गुस्से में आ गया और प्राची को डंडा लेकर कुत्ते से अपना बचाव करना पड़ा। उन्होंने नजदीक पड़ा डंडा उठा लिया और कुत्ते को मारना शुरू कर दिया। घटना के बारे में प्राची ने बताया- उसने मेरे शरीर के निचले हिस्से पर हमला किया और डंडा उठाने के चक्कर में कुत्ते ने मुझे बुरी तरह से काट भी लिया।
प्राची ने बताया- मुझे 2 इंजेक्शन्स दिए जा चुके हैं और डॉक्टर ने कहा है कि अभी 5 इंजेक्शन्स और दिए जाएंगे। हालांकि वह अभी पूरी तरह ठीक नहीं हैं और उन्हें जख्मों पर दर्द हो रहा है लेकिन वह अगले एपिसोड्स की शूटिंग में लग गई हैं। इन चोटों से पूरी तरह रिकवर करने में उन्हें वक्त लगेगा। प्राची आखिरी बार हमें टीवी शो "दिया और बाती हम" में नजर आई थीं। प्राची ने उस शो में एक पाकिस्तानी लड़की की भूमिका निभाई थी। इस शो में उनका काम इतना शानदार था कि शूटिंग के कुछ दी दिनों बाद उन्हें इस शो में लीड रोल प्ले करने का मौका मिल गया।
शो के लिए शर्त यह थी कि उन्हें अपना वजन कम करना था और इसलिए प्राची ने इस शो के लिए अपना कई किलो वजन घटाया था। इस शो (इक्यावन) में प्राची के किरदार का नाम 'सुशील' है और वह एक ऐसी लड़की हैं जिसने ऐसे परिवार में जन्म लिया है जहां कोई भी लड़की नहीं है। उनका पालन-पोषण भी उनके पिता और अन्य ने किया है। प्राची के इस सीन को करने के दौरान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर में आप प्राची को डंडे से कुत्ते को भगाने की कोशिश करते देख सकते हैं।
| टीवी चैनल स्टार प्लस के शो 'इक्यावन' में काम करने वाली एक्ट्रेस प्राची तहलान को शूटिंग के दौरान कुत्ते ने काट लिया। प्राची को दो जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ शूटिंग कर रही थीं जब यह हादसा हुआ। हुआ कुछ यूं कि दोनों में से एक कुत्ता अचानक गुस्से में आ गया और प्राची को डंडा लेकर कुत्ते से अपना बचाव करना पड़ा। उन्होंने नजदीक पड़ा डंडा उठा लिया और कुत्ते को मारना शुरू कर दिया। घटना के बारे में प्राची ने बताया- उसने मेरे शरीर के निचले हिस्से पर हमला किया और डंडा उठाने के चक्कर में कुत्ते ने मुझे बुरी तरह से काट भी लिया। प्राची ने बताया- मुझे दो इंजेक्शन्स दिए जा चुके हैं और डॉक्टर ने कहा है कि अभी पाँच इंजेक्शन्स और दिए जाएंगे। हालांकि वह अभी पूरी तरह ठीक नहीं हैं और उन्हें जख्मों पर दर्द हो रहा है लेकिन वह अगले एपिसोड्स की शूटिंग में लग गई हैं। इन चोटों से पूरी तरह रिकवर करने में उन्हें वक्त लगेगा। प्राची आखिरी बार हमें टीवी शो "दिया और बाती हम" में नजर आई थीं। प्राची ने उस शो में एक पाकिस्तानी लड़की की भूमिका निभाई थी। इस शो में उनका काम इतना शानदार था कि शूटिंग के कुछ दी दिनों बाद उन्हें इस शो में लीड रोल प्ले करने का मौका मिल गया। शो के लिए शर्त यह थी कि उन्हें अपना वजन कम करना था और इसलिए प्राची ने इस शो के लिए अपना कई किलो वजन घटाया था। इस शो में प्राची के किरदार का नाम 'सुशील' है और वह एक ऐसी लड़की हैं जिसने ऐसे परिवार में जन्म लिया है जहां कोई भी लड़की नहीं है। उनका पालन-पोषण भी उनके पिता और अन्य ने किया है। प्राची के इस सीन को करने के दौरान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर में आप प्राची को डंडे से कुत्ते को भगाने की कोशिश करते देख सकते हैं। |
हैदराबाद के कार्यकर्ताओं द्वारा महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपी बृज भूषण, एमपी-बीजेपी के खिलाफ रविवार, 21 मई, 23 को शाम 6. 30 से 8 बजे तक मकदूम प्रतिमा, टैंक बंड के सामने अचानक विरोध प्रदर्शन किया गया।
यह एक जीवंत जैविक विरोध था। कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली और आज न्याय के लिए संघर्ष कर रही महिला पहलवानों के साथ एकजुटता व्यक्त की और बृजभूषण शरण सिंह को पोस्को और बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार करने की भी मांग की।
संध्या पीओडब्ल्यू, जसवीन जयरथ, सारा मैथ्यूज, माजिद शुतारी, पद्मजा शॉ, इमरान सिद्दीकी, वर्षा, आनंद, दीप्ति, युवा छात्रों और अन्य जैसे कार्यकर्ताओं ने विरोध में भाग लिया। कुछ राहगीर विरोध में शामिल हुए और सड़क पर मौजूद कई लोगों ने प्रोत्साहन में हाथ हिलाया। संदेश जोर से और मजबूत रूप से आम जनता तक गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को विशेष रूप से बृजभूषण शरण सिंह को बचाना बंद करना चाहिए।
| हैदराबाद के कार्यकर्ताओं द्वारा महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपी बृज भूषण, एमपी-बीजेपी के खिलाफ रविवार, इक्कीस मई, तेईस को शाम छः. तीस से आठ बजे तक मकदूम प्रतिमा, टैंक बंड के सामने अचानक विरोध प्रदर्शन किया गया। यह एक जीवंत जैविक विरोध था। कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली और आज न्याय के लिए संघर्ष कर रही महिला पहलवानों के साथ एकजुटता व्यक्त की और बृजभूषण शरण सिंह को पोस्को और बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार करने की भी मांग की। संध्या पीओडब्ल्यू, जसवीन जयरथ, सारा मैथ्यूज, माजिद शुतारी, पद्मजा शॉ, इमरान सिद्दीकी, वर्षा, आनंद, दीप्ति, युवा छात्रों और अन्य जैसे कार्यकर्ताओं ने विरोध में भाग लिया। कुछ राहगीर विरोध में शामिल हुए और सड़क पर मौजूद कई लोगों ने प्रोत्साहन में हाथ हिलाया। संदेश जोर से और मजबूत रूप से आम जनता तक गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को विशेष रूप से बृजभूषण शरण सिंह को बचाना बंद करना चाहिए। |
इनेलो प्रत्याशी अशोक अरोड़ा को आज उस समय भारी सफलता मिली जब अग्रवाल समाज के पश्चात अब ब्राह्मण समाज, रोड़ समाज और बहावलपुर समाज ने भी उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया। इसी के साथ-साथ युवा हजकां के प्रदेश महासचिव अशोक शर्मा पहलवान तथा हजकां के वरिष्ठ नेता तथा हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास के अध्यक्ष पहन पहलवान ने अपने हजारों समर्थकों सहित इनेलो में शामिल होने की घोषणा करते हुए अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा तथा वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र शर्मा पार्षद ने भी अरोड़ा का समर्थन करने का ऐलान किया।
इनेलो प्रत्याशी अशोक अरोड़ा के सेक्टर-१७ में चुनावी कार्यालय के मुहूर्त पर आयोजित जनसभा में प्रदेश काग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष आरडी गोयल, मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रविंद्र गुप्ता, मंडी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सतप्रकाश गुप्ता, मुनीष शर्मा एडवोकेट, पूर्व नगर पार्षद सोहन चौधरी, ज्योतिसर गांव के पूर्व सरपंच बीरबल शर्मा ने भी सैंकड़ों समर्थकों सहित इनेलो का दामन थामा तथा अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। इसके अतिरिक्त सेठ गुलाब चंद के परिवार ने भी अशोक अरोड़ा को समर्थन देने का ऐलान किया। चुनावी कार्यालय का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य रामकुमार कश्यप और इनेलो के प्रदेश महासचिव अशोक शेरवाल ने रिबन काटकर किया। कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था। महिलाएं तथा युवा भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उद्घाटन के पश्चात अशोक अरोड़ा स्वयं टै्रक्टर चलाकर नामांकन पत्र भरने के लिए एसडीएम कार्यालय गए।
उद्घाटन अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए जिला परिषद के चेयरमैन प्रवीण चौधरी, श्री ब्राह्मण एवं तीर्थाेद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा, हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास के सरंक्षक पवन शर्मा पहलवान, अशोक शर्मा पहलवान, पार्षद विवेक मेहता, सब्जी मंडी एसोसिशन के प्रधान मुनीष अरोड़ा, अग्रवाल समाज के नेता विश्वपाल गोयल, प्रसिद्ध कथावाचक राजेंद्र पराशर, ओमप्रकाश हथीरा, मायाराम चंद्रभानपुरा, बूटा सिंह, जिला इनेलो प्रवक्ता रामपाल शर्मा, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अशोक भारद्वाज, विनय मोहन आश्री एडवोकेट, अनिल गुप्ता, नरेश मित्तल, रामस्वरूप चोपड़ा, सुनील कक्कड़, विक्रम तंवर लुखी, नितिन गोयल तथा बहावलपुर पंचायत के नेताओं ने भी अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। अरोड़ा ने इनेलो में शामिल होने वाले तथा समर्थन देने वालों का धन्यावाद करते हुए कहा कि वे कुुरुक्षेत्र की जनता का अहसान कभी नहीं उतार सकते। इस हल्के की जनता ने उन्हें चार बार विधायक बनाकर उन्हें जो सम्मान दिया है, वह उसके लिए हमेशा आभारी रहेंगे।
| इनेलो प्रत्याशी अशोक अरोड़ा को आज उस समय भारी सफलता मिली जब अग्रवाल समाज के पश्चात अब ब्राह्मण समाज, रोड़ समाज और बहावलपुर समाज ने भी उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया। इसी के साथ-साथ युवा हजकां के प्रदेश महासचिव अशोक शर्मा पहलवान तथा हजकां के वरिष्ठ नेता तथा हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास के अध्यक्ष पहन पहलवान ने अपने हजारों समर्थकों सहित इनेलो में शामिल होने की घोषणा करते हुए अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा तथा वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र शर्मा पार्षद ने भी अरोड़ा का समर्थन करने का ऐलान किया। इनेलो प्रत्याशी अशोक अरोड़ा के सेक्टर-सत्रह में चुनावी कार्यालय के मुहूर्त पर आयोजित जनसभा में प्रदेश काग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष आरडी गोयल, मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रविंद्र गुप्ता, मंडी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सतप्रकाश गुप्ता, मुनीष शर्मा एडवोकेट, पूर्व नगर पार्षद सोहन चौधरी, ज्योतिसर गांव के पूर्व सरपंच बीरबल शर्मा ने भी सैंकड़ों समर्थकों सहित इनेलो का दामन थामा तथा अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। इसके अतिरिक्त सेठ गुलाब चंद के परिवार ने भी अशोक अरोड़ा को समर्थन देने का ऐलान किया। चुनावी कार्यालय का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य रामकुमार कश्यप और इनेलो के प्रदेश महासचिव अशोक शेरवाल ने रिबन काटकर किया। कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था। महिलाएं तथा युवा भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उद्घाटन के पश्चात अशोक अरोड़ा स्वयं टै्रक्टर चलाकर नामांकन पत्र भरने के लिए एसडीएम कार्यालय गए। उद्घाटन अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए जिला परिषद के चेयरमैन प्रवीण चौधरी, श्री ब्राह्मण एवं तीर्थाेद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा, हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास के सरंक्षक पवन शर्मा पहलवान, अशोक शर्मा पहलवान, पार्षद विवेक मेहता, सब्जी मंडी एसोसिशन के प्रधान मुनीष अरोड़ा, अग्रवाल समाज के नेता विश्वपाल गोयल, प्रसिद्ध कथावाचक राजेंद्र पराशर, ओमप्रकाश हथीरा, मायाराम चंद्रभानपुरा, बूटा सिंह, जिला इनेलो प्रवक्ता रामपाल शर्मा, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अशोक भारद्वाज, विनय मोहन आश्री एडवोकेट, अनिल गुप्ता, नरेश मित्तल, रामस्वरूप चोपड़ा, सुनील कक्कड़, विक्रम तंवर लुखी, नितिन गोयल तथा बहावलपुर पंचायत के नेताओं ने भी अशोक अरोड़ा को भारी बहुमत से विजयी बनाने की अपील की। अरोड़ा ने इनेलो में शामिल होने वाले तथा समर्थन देने वालों का धन्यावाद करते हुए कहा कि वे कुुरुक्षेत्र की जनता का अहसान कभी नहीं उतार सकते। इस हल्के की जनता ने उन्हें चार बार विधायक बनाकर उन्हें जो सम्मान दिया है, वह उसके लिए हमेशा आभारी रहेंगे। |
सीबीआई बनाम सीबीआई भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को सीबीआई को फटकार लगाई है। अदालत ने सीबीआई से पूछा कि जांच के दौरान सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना का साइकोलॉजिकल और लाई डिटेक्टर टेस्ट क्यों नहीं कराया गया। इस मामले में हाल में अस्थाना को क्लीन चिट दी गई थी।
साथ ही सीबीआई के स्पेशल जज संजीव अग्रवाल ने शुरुआत में जांच करने वाले अधिकारी अजय कुमार बस्सी को 28 फरवरी को अदालत में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने केस डायरी ले ली है। कोर्ट ने कहा कि हम डिटेल स्टडी करेंगे कि आपने किस तरह से जांच की है? दरअसल सीबीआई इस मामले में पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को बचाने में लगी है और जाँच में लीपापोती कर रही है।
इस मामले में आज (बुधवार) राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को फटकार लगाई। कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का लाई डिटेक्टर और साइकोलॉजिकल टेस्ट क्यों नहीं कराया गया? कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि जांच अधिकारी अजय कुमार बस्सी कहां हैं।
जिस पर सीबीआई ने कहा कि बस्सी का पोर्ट ब्लेयर ट्रांसफर हुआ था, लेकिन वह नहीं गए और दिल्ली में हैं। वहीं अदालत ने सवाल पूछा कि आरोपी मनोज प्रसाद का वॉट्सऐप चैट की जांच की गई या नहीं? जिस पर सीबीआई ने हां में जवाब दिया। अब कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को करेगा।
कोर्ट ने सवाल किया कि सीबीआई ने राकेश अस्थाना को दूसरे आरोपियों के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ क्यों नहीं की? अदालत ने सीबीआई से पूछा कि जांच के दौरान क्या राकेश अस्थाना का मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान लिए गए थे? सीबीआई ने कोर्ट ने जवाब में कहा कि हमने राकेश अस्थाना से केवल पूछताछ की है। कोर्ट ने सीबीआई से इस केस से जुड़े सभी अहम लोगों का कॉल डिटेल मांगा है। अब सीबीआई को इस केस से जुड़े सभी लोगों के 15 अक्टूबर 2018 से 23 अक्टूबर 2018 तक के कॉल डिटेल देने होंगे। इससे पहले सीबीआई ने कोर्ट को केस डायरी दी और कहा कि इसमें पैसे के लेन-देन का रिकॉर्ड है।
कोर्ट ने सीबीआई से सवाल किया कि ये पीएमएलए का मामला नहीं है। आप क्यों इसको पीएमएलए केस की तरह देख रहे हैं? क्या बिचौलिया सोमेश प्रसाद का दो मोबाइल फोन आपने लिया? क्या सोमेश प्रसाद ने अपना ईमेल आपके सामने खोला? इस पर सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि नहीं ईमेल उसने नहीं खोला। दोनों फोन भी नहीं दिए। हमने नोटिस भेजा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सोमेश प्रसाद से बहुत कुछ सामने आ सकता था। अब तो सब खत्म हो गया।
इस मामले में सीबीआई की जांच पर अदालत ने पिछले सप्ताह नाराजगी जाहिर की थी और पूछा था कि जिन आरोपियों की इसमें बड़ी भूमिका है वे खुले क्यों घूम रहे हैं जबकि जांच एजेंसी अपने खुद के डीएसपी को गिरफ्तार कर चुकी है। जज ने कहा था कि आपने अपने ही डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर उनका करियर क्यों खराब किया, जबकि प्रमुख खिलाड़ी को अभी भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
सीबीआई ने अस्थाना और डीएसपी देवेन्द्र कुमार को 2018 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। दोनों को मामले में आरोपी बनाने के पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण इनके नाम आरोप पत्र के कॉलम 12 में लिखे गए थे। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ 2017 के मामले में सना पर भी जांच चल रही है।
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को सरकार ने 23 अक्तूबर 2018 की मध्यरात्रि को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार ने इसके साथ ही सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी छुट्टी पर भेजा गया था। ये दोनों अधिकारी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे। इसके अगले दिन ही वर्मा इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में आ गए।
कोर्ट ने इस मामले में सीवीसी से उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज की निगरानी में जांच भी करवाई थी, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया। कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ यह देखेंगे कि सरकार को वर्मा पर कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ 2017 के मामले में सना पर भी जांच चल रही है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)
| सीबीआई बनाम सीबीआई भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को सीबीआई को फटकार लगाई है। अदालत ने सीबीआई से पूछा कि जांच के दौरान सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना का साइकोलॉजिकल और लाई डिटेक्टर टेस्ट क्यों नहीं कराया गया। इस मामले में हाल में अस्थाना को क्लीन चिट दी गई थी। साथ ही सीबीआई के स्पेशल जज संजीव अग्रवाल ने शुरुआत में जांच करने वाले अधिकारी अजय कुमार बस्सी को अट्ठाईस फरवरी को अदालत में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने केस डायरी ले ली है। कोर्ट ने कहा कि हम डिटेल स्टडी करेंगे कि आपने किस तरह से जांच की है? दरअसल सीबीआई इस मामले में पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को बचाने में लगी है और जाँच में लीपापोती कर रही है। इस मामले में आज राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को फटकार लगाई। कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का लाई डिटेक्टर और साइकोलॉजिकल टेस्ट क्यों नहीं कराया गया? कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि जांच अधिकारी अजय कुमार बस्सी कहां हैं। जिस पर सीबीआई ने कहा कि बस्सी का पोर्ट ब्लेयर ट्रांसफर हुआ था, लेकिन वह नहीं गए और दिल्ली में हैं। वहीं अदालत ने सवाल पूछा कि आरोपी मनोज प्रसाद का वॉट्सऐप चैट की जांच की गई या नहीं? जिस पर सीबीआई ने हां में जवाब दिया। अब कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अट्ठाईस फरवरी को करेगा। कोर्ट ने सवाल किया कि सीबीआई ने राकेश अस्थाना को दूसरे आरोपियों के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ क्यों नहीं की? अदालत ने सीबीआई से पूछा कि जांच के दौरान क्या राकेश अस्थाना का मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान लिए गए थे? सीबीआई ने कोर्ट ने जवाब में कहा कि हमने राकेश अस्थाना से केवल पूछताछ की है। कोर्ट ने सीबीआई से इस केस से जुड़े सभी अहम लोगों का कॉल डिटेल मांगा है। अब सीबीआई को इस केस से जुड़े सभी लोगों के पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह से तेईस अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह तक के कॉल डिटेल देने होंगे। इससे पहले सीबीआई ने कोर्ट को केस डायरी दी और कहा कि इसमें पैसे के लेन-देन का रिकॉर्ड है। कोर्ट ने सीबीआई से सवाल किया कि ये पीएमएलए का मामला नहीं है। आप क्यों इसको पीएमएलए केस की तरह देख रहे हैं? क्या बिचौलिया सोमेश प्रसाद का दो मोबाइल फोन आपने लिया? क्या सोमेश प्रसाद ने अपना ईमेल आपके सामने खोला? इस पर सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि नहीं ईमेल उसने नहीं खोला। दोनों फोन भी नहीं दिए। हमने नोटिस भेजा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सोमेश प्रसाद से बहुत कुछ सामने आ सकता था। अब तो सब खत्म हो गया। इस मामले में सीबीआई की जांच पर अदालत ने पिछले सप्ताह नाराजगी जाहिर की थी और पूछा था कि जिन आरोपियों की इसमें बड़ी भूमिका है वे खुले क्यों घूम रहे हैं जबकि जांच एजेंसी अपने खुद के डीएसपी को गिरफ्तार कर चुकी है। जज ने कहा था कि आपने अपने ही डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर उनका करियर क्यों खराब किया, जबकि प्रमुख खिलाड़ी को अभी भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। सीबीआई ने अस्थाना और डीएसपी देवेन्द्र कुमार को दो हज़ार अट्ठारह में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। दोनों को मामले में आरोपी बनाने के पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण इनके नाम आरोप पत्र के कॉलम बारह में लिखे गए थे। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ दो हज़ार सत्रह के मामले में सना पर भी जांच चल रही है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को सरकार ने तेईस अक्तूबर दो हज़ार अट्ठारह की मध्यरात्रि को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार ने इसके साथ ही सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी छुट्टी पर भेजा गया था। ये दोनों अधिकारी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे। इसके अगले दिन ही वर्मा इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में आ गए। कोर्ट ने इस मामले में सीवीसी से उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज की निगरानी में जांच भी करवाई थी, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया। कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ यह देखेंगे कि सरकार को वर्मा पर कार्रवाई करने का अधिकार है या नहीं। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ दो हज़ार सत्रह के मामले में सना पर भी जांच चल रही है। |
प्रथम अध्याय : १३५
अष्टगुणसहितोऽहम् ॥६८॥
सूत्रार्थ में आठ गुणों से सहित हूँ। अर्थात् भगवान सिद्ध परमात्मा के समान में भी बाठ गुणों से सहित हूँ।
प्रथम - भगवान् सिद्ध परमेष्ठी के आठ गुण कौन से है ?
सम्मत्त णाण दसण वीरिय सुहुमं तहेव अवगहणं । अगुरुलहुमव्वावाई अट्टगुणा होति सिद्धाण ॥ अनंत सम्यक्त्व, अनन्तज्ञान, अनन्तदर्शन, अनन्तवीर्य, सूक्ष्मत्व, अवगाहन, अगुरुलघु और अव्याबाध ये सिद्ध परमेष्ठी के आठ गुण हैं।
प्रथम-किस कर्म के क्षय से कौन-सा गुण प्रकट होता है ? उत्तर-दर्शनावरण कर्म के क्षय से अनन्तदर्शन ।
ज्ञानावरण कर्म के क्षय से अनन्तज्ञान (केवलज्ञान ) । मोहनीय कर्म के क्षय से अनन्तसुख ( सम्यक्त्व ) । अन्तराय कर्म के क्षय से अनन्तवीर्यं । वेदनीय कर्म के क्षय से अव्याबाघ ।
आयु कर्म के क्षय से अवगाहनत्व । नाम कर्म के क्षय से सूक्ष्मत्व और
गोत्र कर्म के क्षय से अगुरुलघु गुण प्रकट होता है।
प्रथम-अष्टगुणों के लक्षण बताइये ?
उत्तर-केवलज्ञान के साथ होने वाले दर्शन को अनन्तदर्शन कहते हैं। त्रिकालवर्ती समस्त पदार्थों को जो ज्ञान युगपत् जानता है उस ज्ञान को अनन्तज्ञान कहते हैं।
अतीन्द्रिय आत्मीक शाश्वत सुख को जिसके पीछे दुख नहीं हैअनन्तसुख कहते हैं।
आत्मा की अनन्त शक्ति जो अन्तराय कर्म के अभाव में प्रगट होती है उसे अनन्तवीर्य कहते हैं। | प्रथम अध्याय : एक सौ पैंतीस अष्टगुणसहितोऽहम् ॥अड़सठ॥ सूत्रार्थ में आठ गुणों से सहित हूँ। अर्थात् भगवान सिद्ध परमात्मा के समान में भी बाठ गुणों से सहित हूँ। प्रथम - भगवान् सिद्ध परमेष्ठी के आठ गुण कौन से है ? सम्मत्त णाण दसण वीरिय सुहुमं तहेव अवगहणं । अगुरुलहुमव्वावाई अट्टगुणा होति सिद्धाण ॥ अनंत सम्यक्त्व, अनन्तज्ञान, अनन्तदर्शन, अनन्तवीर्य, सूक्ष्मत्व, अवगाहन, अगुरुलघु और अव्याबाध ये सिद्ध परमेष्ठी के आठ गुण हैं। प्रथम-किस कर्म के क्षय से कौन-सा गुण प्रकट होता है ? उत्तर-दर्शनावरण कर्म के क्षय से अनन्तदर्शन । ज्ञानावरण कर्म के क्षय से अनन्तज्ञान । मोहनीय कर्म के क्षय से अनन्तसुख । अन्तराय कर्म के क्षय से अनन्तवीर्यं । वेदनीय कर्म के क्षय से अव्याबाघ । आयु कर्म के क्षय से अवगाहनत्व । नाम कर्म के क्षय से सूक्ष्मत्व और गोत्र कर्म के क्षय से अगुरुलघु गुण प्रकट होता है। प्रथम-अष्टगुणों के लक्षण बताइये ? उत्तर-केवलज्ञान के साथ होने वाले दर्शन को अनन्तदर्शन कहते हैं। त्रिकालवर्ती समस्त पदार्थों को जो ज्ञान युगपत् जानता है उस ज्ञान को अनन्तज्ञान कहते हैं। अतीन्द्रिय आत्मीक शाश्वत सुख को जिसके पीछे दुख नहीं हैअनन्तसुख कहते हैं। आत्मा की अनन्त शक्ति जो अन्तराय कर्म के अभाव में प्रगट होती है उसे अनन्तवीर्य कहते हैं। |
तो, विमान के पंख के नीचे प्रकट होता है और शुरू होता हैजल्दी ग्रीस, रोड्स द्वीप आ रहा है। इस अद्भुत भूमि में क्या देखना है, जहां देवता भी ओलंपस से आराम के लिए उतरे? अधिकांश पर्यटक यहां धूप से स्नान करने और खरीदने के लिए आते हैं। और वे सही हैं। रोड्स में स्नान करने के लिए वास्तव में है। एक बार दो समुद्रों में अपनी पसंद परः भूमध्यसागरीय और एजियन। वे Prasonisi रेत बार बनाने, एक साथ शामिल हो। अधिकांश समुद्र तट कंकड़ कर रहे हैं। कुछ के लिए यह एक दोष है, लेकिन यूनानियों को अपने तटों पर बहुत गर्व है, उन्हें एक प्राचीन प्रकृति का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, कंकड़ शरीर से चिपके रहते हैं और बालों और आंखों में घिरा नहीं करते हैं। खैर, प्रेमी समुद्र के किनारे महलों का निर्माण करते हैं, स्थानीय निवासियों को त्सम्पिको के रेतीले तट पर भेजा जाता है।
लेकिन एक समुद्र तट छुट्टी सीमित नहीं होनी चाहिए। आप यूरोपीय सभ्यता के पालना में हैं, जिसका अर्थ है कि रोड्स में कुछ देखने के लिए है। भ्रमण कार्यक्रम में माउंट मोंटे स्मिथ की विजय शामिल है, जो बेलिकोस भिक्षु-होस्पिटलर के मध्ययुगीन किले की यात्रा है। आपको शहर की छायादार सड़कों और बंदरगाह की दृष्टि की भूलभुलैया के माध्यम से चलना होगा, जिसमें प्राचीन काल में, रोड्स के कोलोसस ने जवाब दिया था। यह दुनिया के प्राचीन दुनिया के आश्चर्यों के चमत्कारों में से एक है।
प्रकृति की सुंदरता के प्रेमियों के पास भी यही हैरोड्स को देखो। सिमी द्वीप के लिए क्रूज या फिलिरिमोस की चोटी पर चढ़ना, जिसे स्थानीय कैल्वारी कहा जाता है, आपको अविस्मरणीय विचार देगा। गर्म दोपहर में, तितलियों की घाटी में आराम करना अच्छा होता है, जहां हजारों विदेशी उज्ज्वल पतंग फटकारते हैं। साथ ही, आप लिंडोस में कैमरे के मेमोरी कार्ड में छवियों को लॉक कर सकते हैं। पहाड़ी के शीर्ष पर, जहां एथेनियन एक्रोपोलिस टावरों के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण है, आपको गधे द्वारा लिया जाएगा।
रोड्स युवा और सक्रिय लोगों में क्या देखना है? सभी प्रकार के डिस्को और क्लबों के साथ पसंदीदा स्थान - फलीराकी शहर। सर्फर्स ने खुद को इलियसॉस गांव बुक किया है। और जो समुद्र तट पर बसने के लिए द्वीप पर आए, रिसॉर्ट रिज़ॉर्ट इक्सिया। समुद्र के लिए पर्याप्त नहीं है - विशाल रोडियन पानी पार्क में आपका स्वागत है।
| तो, विमान के पंख के नीचे प्रकट होता है और शुरू होता हैजल्दी ग्रीस, रोड्स द्वीप आ रहा है। इस अद्भुत भूमि में क्या देखना है, जहां देवता भी ओलंपस से आराम के लिए उतरे? अधिकांश पर्यटक यहां धूप से स्नान करने और खरीदने के लिए आते हैं। और वे सही हैं। रोड्स में स्नान करने के लिए वास्तव में है। एक बार दो समुद्रों में अपनी पसंद परः भूमध्यसागरीय और एजियन। वे Prasonisi रेत बार बनाने, एक साथ शामिल हो। अधिकांश समुद्र तट कंकड़ कर रहे हैं। कुछ के लिए यह एक दोष है, लेकिन यूनानियों को अपने तटों पर बहुत गर्व है, उन्हें एक प्राचीन प्रकृति का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, कंकड़ शरीर से चिपके रहते हैं और बालों और आंखों में घिरा नहीं करते हैं। खैर, प्रेमी समुद्र के किनारे महलों का निर्माण करते हैं, स्थानीय निवासियों को त्सम्पिको के रेतीले तट पर भेजा जाता है। लेकिन एक समुद्र तट छुट्टी सीमित नहीं होनी चाहिए। आप यूरोपीय सभ्यता के पालना में हैं, जिसका अर्थ है कि रोड्स में कुछ देखने के लिए है। भ्रमण कार्यक्रम में माउंट मोंटे स्मिथ की विजय शामिल है, जो बेलिकोस भिक्षु-होस्पिटलर के मध्ययुगीन किले की यात्रा है। आपको शहर की छायादार सड़कों और बंदरगाह की दृष्टि की भूलभुलैया के माध्यम से चलना होगा, जिसमें प्राचीन काल में, रोड्स के कोलोसस ने जवाब दिया था। यह दुनिया के प्राचीन दुनिया के आश्चर्यों के चमत्कारों में से एक है। प्रकृति की सुंदरता के प्रेमियों के पास भी यही हैरोड्स को देखो। सिमी द्वीप के लिए क्रूज या फिलिरिमोस की चोटी पर चढ़ना, जिसे स्थानीय कैल्वारी कहा जाता है, आपको अविस्मरणीय विचार देगा। गर्म दोपहर में, तितलियों की घाटी में आराम करना अच्छा होता है, जहां हजारों विदेशी उज्ज्वल पतंग फटकारते हैं। साथ ही, आप लिंडोस में कैमरे के मेमोरी कार्ड में छवियों को लॉक कर सकते हैं। पहाड़ी के शीर्ष पर, जहां एथेनियन एक्रोपोलिस टावरों के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण है, आपको गधे द्वारा लिया जाएगा। रोड्स युवा और सक्रिय लोगों में क्या देखना है? सभी प्रकार के डिस्को और क्लबों के साथ पसंदीदा स्थान - फलीराकी शहर। सर्फर्स ने खुद को इलियसॉस गांव बुक किया है। और जो समुद्र तट पर बसने के लिए द्वीप पर आए, रिसॉर्ट रिज़ॉर्ट इक्सिया। समुद्र के लिए पर्याप्त नहीं है - विशाल रोडियन पानी पार्क में आपका स्वागत है। |
आपने चितौड़ का नाम तो सुना ही होगा। चित्तौड़ का नाम भी नहीं सुना तो पद्मावती का नाम तो जरूर सुना होगा। पद्मावती के पति का नाम राजा रतन सिंह था। कहते हैं इस राजा के पीठ के पीछे वार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई।
| आपने चितौड़ का नाम तो सुना ही होगा। चित्तौड़ का नाम भी नहीं सुना तो पद्मावती का नाम तो जरूर सुना होगा। पद्मावती के पति का नाम राजा रतन सिंह था। कहते हैं इस राजा के पीठ के पीछे वार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई। |
गर्मियों के मौसम में हर कोई ठंडा-ठंडा पानी पीना चाहता है। ऐसे में हर घर में फ्रिज का बोलबाला है। ऐसे में बहुत ही मुश्किल से किसी घर में मिट्टी के घड़े या फिर सुराही देखने को मिलते हैं। लेकिन बता दें कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से जहां व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से दूर रहेगा। वहीं वास्तु के अनुसार शनि, मंगल, बुध, चंद्रमा ग्रह मजबूत होने के साथ-साथ धन धान्य की प्राप्ति होगी। जानिए वास्तु के अनुसार, सुराही या घड़ा रखने की सही दिशा के साथ किन बातों का रखें ख्याल।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मिट्टी का घड़ा या फिर सुराही उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। क्योंकि इस दिशा में कुबेर भगवान के साथ वरुण देव की दिशा मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में रखने से दोनों देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
वास्तु के अनुसार, जब आप घड़ा या फिर सुराही खरीदकर लाते हैं तो उसे अच्छे से साफ करके पानी भर दें और इस पानी को सबसे पहले किसी कन्या को पिलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में उन्नति आती है।
| गर्मियों के मौसम में हर कोई ठंडा-ठंडा पानी पीना चाहता है। ऐसे में हर घर में फ्रिज का बोलबाला है। ऐसे में बहुत ही मुश्किल से किसी घर में मिट्टी के घड़े या फिर सुराही देखने को मिलते हैं। लेकिन बता दें कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से जहां व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से दूर रहेगा। वहीं वास्तु के अनुसार शनि, मंगल, बुध, चंद्रमा ग्रह मजबूत होने के साथ-साथ धन धान्य की प्राप्ति होगी। जानिए वास्तु के अनुसार, सुराही या घड़ा रखने की सही दिशा के साथ किन बातों का रखें ख्याल। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मिट्टी का घड़ा या फिर सुराही उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। क्योंकि इस दिशा में कुबेर भगवान के साथ वरुण देव की दिशा मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में रखने से दोनों देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और कभी भी धन की कमी नहीं होती है। वास्तु के अनुसार, जब आप घड़ा या फिर सुराही खरीदकर लाते हैं तो उसे अच्छे से साफ करके पानी भर दें और इस पानी को सबसे पहले किसी कन्या को पिलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में उन्नति आती है। |
IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टी 20 में टीम इंडिया ने 20 ओवर में 162 रन बनाए। इस मुकाले में टीम इंडिया के लिए दीपक हुड्डा और अक्षर पटेल ने शानदार पारियां खेलीं। दीपक ने 41, जबकि अक्षर ने 31 रन बनाए। इन दोनों खिलाड़ियों की पारियों के दम पर टीम इँडिया 162 रन बना सकी।
दीपक हुड्डा ने छठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मैदान पर हाहाकार मचा दिया। उन्होंने टीम इंडिया को न सिर्फ मुश्किल से निकाला बल्कि एक सम्मानजन स्कोर तक पहुंचा दिया। 41 रनों की तूफानी पारी में हुड्डा ने 4 छक्के लगाए।
Crucial partnership of 6️⃣8️⃣*(35)
श्रीलंका ने 94 रन पर भारत के 5 टॉप ऑर्डर बल्लेबाज आउट कर दिए थे। इस मुकाबले में श्रीलंका के लिए कसुन रजिता को छोड़कर सभी गेंदबाजों ने 1-1 विकेट अपने नाम किया है। सबसे ज्यादा रन कसुन रजिथा ने लुटाए, उन्होंने 4 ओवर में 47 रन दे दिए।
| IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टी बीस में टीम इंडिया ने बीस ओवर में एक सौ बासठ रन बनाए। इस मुकाले में टीम इंडिया के लिए दीपक हुड्डा और अक्षर पटेल ने शानदार पारियां खेलीं। दीपक ने इकतालीस, जबकि अक्षर ने इकतीस रन बनाए। इन दोनों खिलाड़ियों की पारियों के दम पर टीम इँडिया एक सौ बासठ रन बना सकी। दीपक हुड्डा ने छठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मैदान पर हाहाकार मचा दिया। उन्होंने टीम इंडिया को न सिर्फ मुश्किल से निकाला बल्कि एक सम्मानजन स्कोर तक पहुंचा दिया। इकतालीस रनों की तूफानी पारी में हुड्डा ने चार छक्के लगाए। Crucial partnership of छः️⃣आठ️⃣* श्रीलंका ने चौरानवे रन पर भारत के पाँच टॉप ऑर्डर बल्लेबाज आउट कर दिए थे। इस मुकाबले में श्रीलंका के लिए कसुन रजिता को छोड़कर सभी गेंदबाजों ने एक-एक विकेट अपने नाम किया है। सबसे ज्यादा रन कसुन रजिथा ने लुटाए, उन्होंने चार ओवर में सैंतालीस रन दे दिए। |
एक साल पहले, एक युगल जोड़े ने एक लकड़ी का जश्न मनायाशादी की सालगिरह - और यहां पहली "धातु" की सालगिरह है प्रत्येक पारित वर्ष के साथ, हरी शादी (शादी का दिन) दूर हो जाता है, पति का रिश्ता मजबूत हो जाता है, और यह शादी की तारीखों के नाम पर प्रतिबिंबित होता हैः कपास, पेपर, चमड़े, लिनन, और लकड़ी सभी पुराने परिवार बन जाते हैं, अधिक से अधिक यादें, रिवाज, पारिवारिक परंपराएं हैं। एक युवा जोड़े अब बहुत कुछ जोड़ती हैं आम तौर पर इस जयंती के लिए पहले से ही परिवार में एक बच्चा है, और, काफी संभवतः, एक भी नहीं। कास्ट लोहा शादी की तारीख है जो पति और पत्नी को एकजुट करे, उन्हें विश्वास करें कि जीवन में सब कुछ दूर किया जा सकता है यदि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर रहें। यह इस अवधि के लिए है - शादी के 6-7 साल बाद - कि परिवार के संबंधों के संकट का समय होता है जो लोग जीवित रहते हैं और छह से सात वर्षों में इस रेखा से आगे बढ़ते हैं, उन्हें अधिक महंगा "धातु" की वर्षगांठ तक रहने का मौका मिलता हैः टिन, स्टील, रजत, सोना आदि।
छह साल एक साथः परिवार की नींव रखी गई है, यह हर साल यह मजबूत करने के लिए तो किसी भी विपरीत परिस्थितियों से संरक्षित केवल बनी हुई है। कास्ट आयरन शादीः दयालु और मजबूत धातु - लोहा, लेकिन अभी भी नाजुक किसी न किसी तरह, और बदसूरत दिखने, काला। उन्होंने कहा कि फ्यूज और इसलिए किसी भी रूप ले सकता है। और आकार पारिवारिक रिश्ते के भविष्य केवल जोड़ी पर निर्भर करता हैः क्या वहाँ "लोहे" में दरारें या एक मजबूत धातु में यह "remelting" हो जाएगा। एक दूसरे के लिए मुख्य बात prisushivatsya,, में देना साथी की देखभाल - और फिर "कलाकारों" अंत में अधिक टिकाऊ और हल्का हो जाएगा। अगले, "धातु" शादी की तारीख करने के लिए जीवन में अपने साथी के साथ रहने के लिए, हम एक साधारण सच नहीं भूलना चाहिएः परिवार की खुशी दैनिक trifles, बलिदान और दया, धैर्य और क्षमा करने की क्षमता के से बना है।
कास्ट आयरन शादी को इकट्ठा करने के लिए एक कारण नहीं हैएक बड़ी और शोर कंपनी आम तौर पर माता-पिता, गवाह, करीबी रिश्तेदार और अच्छे दोस्त आमंत्रित हैं करीबी और दोस्त जीवनसाथी का परीक्षण करने के लिए कॉमिक प्रतियोगिता कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं, पति या पत्नी की आदतों और विशेषताओं के अपने ज्ञान की जांच कर सकते हैं। एक कास्ट-लौह शादी के साथ अभिवादन एक कवि, गीत या छःत्तुका रूप में पहना जा सकता है।
इस शादी के लिए, पत्नी चमकने के लिए सभी कच्चा लोहा के व्यंजनों को नियंत्रित करती है। डिश अलग तैयार कर रहे हैं लेकिन यह वांछनीय है कि वे (या उनका हिस्सा) कच्चा लोहा के एक पॉट (फ्राइंग पैन, पकाकर व्यंजन आदि) पर पकाया जाए।
शादी की तारीख के नाम से - कास्ट-लौह शादी -यह है कि आप इस दिन एक युवा परिवार पर शादी करने के लिए दे सकते हैं स्पष्ट है। और यह कच्चा लोहा का बना चीजों को पेश करने का फैसला किया। यह व्यावहारिक रसोई के बर्तन, हमेशा परिसर (पैन, बर्तन, आदि utyatnitsu) में वांछित हो सकता है। एक अच्छा उपहार छोटे घरेलू और रसोई उपकरणों (हार्वेस्टर aerogrill, ब्लेंडर, स्टीमर, माइक्रोवेव, टोस्टर, आदि) होगा। होने के लिए युवा फैशनेबल लोहे के फर्नीचर के लिए एक सुखद आश्चर्य (कुर्सियां, टेबल, आदि), मूल आंतरिक सजावट (मोमबत्ती, लोहा पशु आंकड़े, फोटो फ्रेम, लैंप, छोटे मूर्तियों और मूर्तिकला समूहों, फूलदान, बक्से, दीवार किए, छाते और इतने पर के लिए खड़े।)। पिछले कुछ वर्षों में एक युवा परिवार अपने स्वयं के कुटीर, या dacha हासिल कर ली है, तो मूल उपहार उनके लिए किया जाएगा कच्चा लोहा और चिमनी का एक ही सेट (फावड़ा, रेक, shiptsy) से बना जाली।
| एक साल पहले, एक युगल जोड़े ने एक लकड़ी का जश्न मनायाशादी की सालगिरह - और यहां पहली "धातु" की सालगिरह है प्रत्येक पारित वर्ष के साथ, हरी शादी दूर हो जाता है, पति का रिश्ता मजबूत हो जाता है, और यह शादी की तारीखों के नाम पर प्रतिबिंबित होता हैः कपास, पेपर, चमड़े, लिनन, और लकड़ी सभी पुराने परिवार बन जाते हैं, अधिक से अधिक यादें, रिवाज, पारिवारिक परंपराएं हैं। एक युवा जोड़े अब बहुत कुछ जोड़ती हैं आम तौर पर इस जयंती के लिए पहले से ही परिवार में एक बच्चा है, और, काफी संभवतः, एक भी नहीं। कास्ट लोहा शादी की तारीख है जो पति और पत्नी को एकजुट करे, उन्हें विश्वास करें कि जीवन में सब कुछ दूर किया जा सकता है यदि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर रहें। यह इस अवधि के लिए है - शादी के छः-सात साल बाद - कि परिवार के संबंधों के संकट का समय होता है जो लोग जीवित रहते हैं और छह से सात वर्षों में इस रेखा से आगे बढ़ते हैं, उन्हें अधिक महंगा "धातु" की वर्षगांठ तक रहने का मौका मिलता हैः टिन, स्टील, रजत, सोना आदि। छह साल एक साथः परिवार की नींव रखी गई है, यह हर साल यह मजबूत करने के लिए तो किसी भी विपरीत परिस्थितियों से संरक्षित केवल बनी हुई है। कास्ट आयरन शादीः दयालु और मजबूत धातु - लोहा, लेकिन अभी भी नाजुक किसी न किसी तरह, और बदसूरत दिखने, काला। उन्होंने कहा कि फ्यूज और इसलिए किसी भी रूप ले सकता है। और आकार पारिवारिक रिश्ते के भविष्य केवल जोड़ी पर निर्भर करता हैः क्या वहाँ "लोहे" में दरारें या एक मजबूत धातु में यह "remelting" हो जाएगा। एक दूसरे के लिए मुख्य बात prisushivatsya,, में देना साथी की देखभाल - और फिर "कलाकारों" अंत में अधिक टिकाऊ और हल्का हो जाएगा। अगले, "धातु" शादी की तारीख करने के लिए जीवन में अपने साथी के साथ रहने के लिए, हम एक साधारण सच नहीं भूलना चाहिएः परिवार की खुशी दैनिक trifles, बलिदान और दया, धैर्य और क्षमा करने की क्षमता के से बना है। कास्ट आयरन शादी को इकट्ठा करने के लिए एक कारण नहीं हैएक बड़ी और शोर कंपनी आम तौर पर माता-पिता, गवाह, करीबी रिश्तेदार और अच्छे दोस्त आमंत्रित हैं करीबी और दोस्त जीवनसाथी का परीक्षण करने के लिए कॉमिक प्रतियोगिता कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं, पति या पत्नी की आदतों और विशेषताओं के अपने ज्ञान की जांच कर सकते हैं। एक कास्ट-लौह शादी के साथ अभिवादन एक कवि, गीत या छःत्तुका रूप में पहना जा सकता है। इस शादी के लिए, पत्नी चमकने के लिए सभी कच्चा लोहा के व्यंजनों को नियंत्रित करती है। डिश अलग तैयार कर रहे हैं लेकिन यह वांछनीय है कि वे कच्चा लोहा के एक पॉट पर पकाया जाए। शादी की तारीख के नाम से - कास्ट-लौह शादी -यह है कि आप इस दिन एक युवा परिवार पर शादी करने के लिए दे सकते हैं स्पष्ट है। और यह कच्चा लोहा का बना चीजों को पेश करने का फैसला किया। यह व्यावहारिक रसोई के बर्तन, हमेशा परिसर में वांछित हो सकता है। एक अच्छा उपहार छोटे घरेलू और रसोई उपकरणों होगा। होने के लिए युवा फैशनेबल लोहे के फर्नीचर के लिए एक सुखद आश्चर्य , मूल आंतरिक सजावट । पिछले कुछ वर्षों में एक युवा परिवार अपने स्वयं के कुटीर, या dacha हासिल कर ली है, तो मूल उपहार उनके लिए किया जाएगा कच्चा लोहा और चिमनी का एक ही सेट से बना जाली। |
उच्चतर शिक्षा की अमरीकी संस्थाओ मे हारवर्ड के बाद उसी का स्थान था । १८ वी शताब्दि के वर्जीनिया में एक छोटे से समुदाय मे उच्चतर शिक्षा पाना कोई साधारण बात नही थी । १७२७ से ही कालेज के अन्तर्गत चार पृथक् स्कूल थे, १५ वर्ष तक के बच्चो के लिए एक 'ग्रामर स्कूल', एक दर्शनशास्त्र का स्कूल, एक स्नातकोत्तर अध्यात्मवादी स्कूल जिसका मूल उद्देश्य आग्लिकन धर्मप्रचार के लिए लोगो को प्रशिक्षित करना था और एक रेड इंडियन स्कूल भी था । दर्शनशास्त्र के स्कूल मे बी ए की डिग्री के लिए चार वर्ष का कोर्स रखा गया था । किन्तु जेफर्सन ने १५ वर्ष के बजाय, जो कि वहाँ भर्ती होने की सामान्य उम्र थी -- १७ वर्ष की अवस्था मे वहाँ प्रवेश किया और दो ही वर्ष तक वहाँ रहे ।
कालेज मे दो वर्ष का समय जेफर्सन ने किस प्रकार व्यतीत किया, इम वारे मे जानकारी कालेज जीवन के एक सहपाठी तथा स्वय जेफर्मन की अपनी आत्मकथा से मिलती है, जिसमे उन्होने उस प्रसिद्ध व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव का उल्लेख किया है, जिसने उनके अध्ययन का निर्देशन किया था
"यह मेरा सौभाग्य था और कदाचित् इसीने मेरे जीवन का भाग्य निर्णय भी किया कि स्काटलैण्ड के डा० विलियम स्माल गरिणत के तत्कालीन प्राध्यापक थे । वे विज्ञान की अधिकाश उपयोगी शाखाओ के उद्भट विद्वान, पत्रव्यवहार मे प्रवीण, व्यवहारकुशल तथा व्यापक और उदार विचार के व्यक्ति थे । मेरा अहोभाग्य था कि वे मेरे प्रति शीघ्र ही आकर्षित हो गये और उन्होने स्कूल के कामों से फुर्सत पाने के समय मुझे अपने सहवास मे रखा । उनके साथ वार्तालाप करके मुझे पहली बार विज्ञान की व्यापकता तथा सृष्टि की क्रमबद्धता के बारे मे जानकारी मिली । सौभाग्य से कालेज मे मेरे पहुचने के वाद ही दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक का स्थान रिक्त हुआ और उन्हे अस्थायी तौर पर वहाँ नियुक्त किया। उन्होंने पहली बार कालेज मे नीतिशास्त्र, अलकार शास्त्र और साहित्य पर नियमित व्याख्यान दिये । "
जिन लोगो को १७ वर्ष की वयमे ही एक उच्च कोटि के शिक्षक के प्रभाव मे आनेका सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वे शायद ही इस अपूर्व सम्मान को एक वृद्ध पुरुष का भावनात्मक प्रवाह समझेगे और जेफर्सन भी भावुकतावादी नही ये । उनके शिष्यो की श्रद्धाजलियो के अतिरिक्त डा स्माल के बारे मे और कुछ भी ज्ञात नही है। वर्जीनिया के रगमच पर उनका अल्पकालिक दर्शन हुआ । वे प्रोफेसर नियुक्त हुए और १७६४ मे उन्होने पदत्याग कर दिया ।
अपने जीवन के शेप दिन उन्होने बर्मिंत्रम मे बिताये और एरास्मस डार्विन तथा जेम्स वाट जैसे लोग उनके मित्रो मे थे ।
जैसा कि जेफर्सन ने कहा है, स्माल के द्वारा ही उनका अन्य व्यक्तियो से परिचय हुआ, जो इस छोटी-सी राजधानी के, जिस मे लगभग दो सौ मकान थे थे और जिसकी कुल आबादी निग्रोसहित लगभग एक हजार थी, गौरवतुल्य थे ।
इन दोनो व्यक्तियो मे एक तो उपनिवेश के एक अत्यन्त ख्यातिप्राप्त विद्वान वकील जार्ज वाइथ थे, जिनकी अवस्था उस समय लगभग ३४ वर्ष की थी और दूसरे थे लार्ड फाकियर, जो १७५८ से ही शाही लेफ्टिनन्ट गवर्नर थे । वे बडे ही योग्य और प्रगतिशील विचारो के थे और उस समय उनकी आयु लगभग ५० बर्ष की थी ।
यदि चारो व्यक्ति, जैसा कि जेफर्सन ने कहा है, एक मित्रमडली के अभिन्न अग बन गये तो इससे यह कल्पना नही करनी चाहिए कि जेफर्सन, जो इस मे सबसे छोटे थे, दम्भी थे और रात दिन उन्ही की सगति और बातचीत मे लगे रहते थे । फाकियर ने उन्हे सगीतप्रेमी बनाया, यद्यपि अपने दूसरे शौक ताश के खेल की ओर उन्हे वे आकृष्ट नहीं कर सके । जेफर्सन वायालिन पर गाने-बजाने मे अवश्य निपुण हो गये, किन्तु वे पढाई-लिखाई के बाद अपना अधिकाश समय ऐसे ही मनोरजनो मे लगाते थे, जो एक सुन्दर, सुडोल ओर सम्पन्न युवक की प्रवृत्तियों के अनुकूल होते है, जैसे नाटक, नृत्य, घुडदौड, मुर्गों की लडाई । इनमे उनका प्रथम असफल प्रणय भी शामिल है । अपनी स्वाभाविक लोकप्रियता और साहसिक भावनाओं के कारण जेफर्सन के जीवननिर्मारण-काल मे कही भी कलक या धूमिलता नही है, उन अवगुरगो और दूपित प्रवृत्तियो का समावेश भी नही हो सका, जो प्राय लोग महापुरुषों के प्रारम्भिक जीवन मे अनिवार्य मान बैठते है । जेफर्सन निस्सन्देह एक अद्भुत निष्कलुप युवक थे और उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे तत्कालीन समाज के उत्कट प्रलोभनो के शिकार नही हुए अर्थात् वे न तो शराबी बने और न जुआडी ।
लगभग आधी शताब्दि बाद उन्होने अपने एक १६ वर्षीय पौत्र को लिखा था- -"जब कभी कोई प्रलोभन उपस्थित होता तो मैं यह सोचकर आत्मसयम का आश्रय लेता कि इन परिस्थितियो मे डा स्माल, वाईथ या उनके अभिभावक पेटोन रनडोल्फ क्या करते ।" यह व्याख्या वास्तव मे युवको के लिए एक सीख के रूप में काम कर सकती है । जान पंडता है कि जेफर्सन की बौद्धिक
शक्ति मे इतनी गम्भीरता आ गयी थी कि वे यह अनुभव करने लगे कि मनोरजन उतना ही अच्छा है, जितना स्वास्थ्य तथा सन्तुलित सामान्य जीवन के लिए आवश्यक हो । इससे अधिक मनोरजन समय और बुद्धि का अपव्यय है । इसके अतिरिक्त, युवक की तरह अपने को प्रतिष्ठित स्थान पर पाकर तथा उसकी जिम्मेदारियो से कतराना सारहीन समझ कर उन्होने अपने आपको अपनी योग्यता के अनुसार इनके अनुकूल बनाने का दृढ निर्णय किया ।
कालेज छोडने के समय तक जेफर्मन की विचारधाराए काफी स्पष्ट हो चुकी थी । एक तो वे अब शास्त्रीय विद्वान हो चुके थे, दूसरे उन्होने यूनानी ओर लेटिन लेखको का गहन अध्ययन किया था, जिसका प्रमारण उनकी पुस्तको और साहित्य से मिलता है । डा एडरीने कोच ने अपनी हाल की पुस्तक जेफर्मन का दर्शनशास्त्र मे लिखा कि उनके नैतिक सिद्धान्तो का मूलाधार इपिक्यूरिन्स तथा स्टोइक विचारधाराओं के लेखको से प्रभावित था। उनकी राजनीतिक विचारधारा और नैतिक दृष्टिकोण की नीव भी इसी पर आधारित थी ।
आधुनिक दर्शनशास्त्र में उन पर अधिकतर लाक के महान व्यक्तित्व की छाया थी, कालेज छोडने के कुछ वर्षों बाद जेफर्मन को बोलिगब्रोक की दार्शनिक कृतियों के अध्ययन का अवसर मिला और हो सकता है कि उसीसे उन्हे अपने छात्र-जीवन की आग्लिकन रूढिवादिता से छुटकारा पाकर अपने समकालीन बुद्धिजीवियो की हेतुवादी आस्तिकता की ओर अग्रसर होने का प्रोत्साहन मिला, परन्तु नैतिकता को भी परिस्थिति के आधार पर कस कर तर्क के तराजू पर तौलने की यह प्रणाली उसके लिए कष्टकर व असुविधाजनक सिद्ध हुई जिसके लिए नैतिक सिद्धान्त बुनियादी तौर पर मार्गदर्शन के लिए महत्वपूर्ण थे । इसी के परिणामस्वरूप जेफर्सन ने वादमे १८ वी शताब्दि के उन अग्रेज और स्काटिश दार्शनिको के अतरात्मा से उत्प्रेरित नैतिक सिद्धान्तो के आधार पर अपने हेतुवादी दर्शन में संशोधन किया । १७८७ मे जेफर्सन ने अपने भतीजे को लिखे पत्र मे उद्घोपित किया, "मेरी राय मे तो नैतिक दर्शन पर भाषण सुनना समय का अपव्यय करना है । जिसने हमारी सृष्टि की, यदि उसने हमारे नैतिक आचरण के नियमो को भी विज्ञान का विषय बनाया होता तो वह अवकचरा व उटपटाग स्रष्टा सिद्ध होता । आज एक वैज्ञानिक की दृष्टि मे हजारो ऐसे है वैज्ञानिक नही है । एक हलवाहे और प्राध्यापक को नैतिकता का उपदेश
ए । हलवाहा यही निर्णय करेगा कि यह वात अच्छी और बहुत अच्छी
है, क्योकि वह कृत्रिम नियमो की भूलभूलैया मे नही पड़ा है।
यद्यपि दार्शनिक विचारधारा के विकास के साथ जेफर्मन क। सम्पर्क सदा बना रहा, तथापि उनकी विशेष रुचि 'प्राकृतिक दर्शन' मे अर्थात् भौतिक विज्ञान और विशेषकर प्राणी- विज्ञान मे रही । उनकी रुचि भूगर्भशास्त्र, प्रारणी - शास्त्र अथवा वनस्पति शास्त्र मे थी, जो प्राय उनके व्यक्तिगत कथनो तथा उनके अध्ययन एव पत्रव्यवहार में प्रकट होती थी, किन्तु यह रुचि विशुद्धत सैद्धान्तिक नही थी । उनका विश्वास था कि मानव समाज के उचित अध्ययन का साधन मानव है और यह विश्वास उस गताब्दि के पूर्णतया अनुकूल हो था । अपने वैज्ञानिक अध्ययन के परिणामस्वरूप उन्होने या तो मानव जीवविज्ञान एव मानव समाज पर विचा किया या उदाहरणार्थ, कृपि मे व्यावहारिक उपयोग किया, जिससे मानव समृद्धिशाली होकर नैतिक स्तर मे ऊपर उठ सके । जेफर्सन के विचारों में उपयोगितावाद अधिकाश मात्रा पाया मे जाता है ।
इसी प्रकार जेफर्सन की गरिणत मे वास्तविक अभिरुचि थी और प्राक्कलन तथा भौगोलिक व प्राकृतिक उपयोगिताओं के कारण गरिणत का विशेष महत्व भी था ।
यद्यपि जेफर्मन ने न केवल शास्त्रीय भाषाओं का, अपितु फासीसी, स्पेनिश तथा इटालियन और परिणामस्वरूप ऐग्लो-सेक्सन भाषाओ का पटना भी सीखा और यद्यपि वे उद्भट पाठक और पुस्तको के जयक मगहकर्ता बने और रहे, फिर भी उनकी विशुद्ध साहित्य सम्बधी कृतियों में विशेष रुचि कभी नहीं रही और उपन्यास तो वे कदाचित् ही पटते थे । दर्शनमात्र, इतिहास, कानून और राजनीति में उनकी स्थायी बौद्धिक रुचि बनी रही ।
जेफर्मन जैसे नवयुवक के लिए उसकी शिक्षा की अन्तिम मीटी कुछ कानूनी शिक्षा-प्राप्ति से ही थी । कानून की जानकारी की यह आवश्यक्ता औपनिवेशिक वर्जीनिया में बात करने के उत्साह के कारण नहीं थी। जबकि कुछ ही लोग कानून के पश्टिन होनाते थे, तो भी जवान लोगो को थोडी बहुत कानून को जानकारी होनी ही चाहिए, क्योकि नभी नवोदिन विकाशील समाज मे सम्पत्ति पर अधिकारसम्बन्धी विवाद अधिकारात हुआ ही करते और वे अधा पेचीदगीण होते थे ।
वन न
कभी इतना सरल नहीं पा कि कोई उनका पूर्ण विशेषज्ञ मानूनी प्रथा के साथ के कानून और
स्थायी कानूनो का जटिल सम्मिश्रण था, जिनकी व्याख्या भी इगलैंड और उपनिवेश के दोनो ही न्यायालयो ने की थी । यहाँ भी जेफर्तन वडे भाग्यशाली थे, वे जार्ज वाइय ( George Wythe ) के शिष्य वन गये, जो न केवल उस उपनिवेश के ख्यातिलब्ध वकील थे, अपितु अनेक अर्थो मे अत्यन्त प्रसिद्ध एव विद्वान नागरिक थे । वाइथ के निर्देशन मे जेफर्मन को न केवल वकील की दैनिक कार्यप्रणाली का अनुभव हुआ, वल्कि अंग्रेजी कानून तथा अंग्रेजी साविधानिक विचारधारा के मूल सिद्धान्तो का गम्भीर ज्ञान भी प्राप्त हुआ। उनके स्वाभाविक परामर्शदाता थे सर एडवर्ड कोक, जिनकी तुलना इगलैंड के सर विलियम ब्लैक से की जा सकती है ।
सामान्य कानूनी नियम-उपनियमो और रिपोर्टों के अतिरिक्त, जेफर्सन ने इस समय यूरोपीय लेखको के बुनियादी कानून और अन्तरराष्ट्रीय कानून का भी अध्ययन किया । इन लेखको का अमरीका की कानूनी और साविधानिक विचारधारा पर अत्यधिक प्रभाव पडा और इनकी छाप जेफर्सन पर भी अत्यन्त स्पष्ट रूप से परिलक्षित है । बुनियादी कानून विशेषज्ञ का प्रभाव मानव समाज के नैतिक विवानो की सामान्य सहिता के अस्तित्व की उस कल्पना के अनुकूल है जो जेफर्सन को दार्शनिक अध्ययन से प्राप्त हुई थी। इस प्रकार जेफर्मन प्रकृतिदत्त अधिकारों की पुष्टि के लिए दुहरा सवल पा गये और यही विचारधारा बाद मे उनके राजनीतिक सिद्धान्तो का आधार बनी । न्यूटन और लाक, कोक और वैटेल की इन कृतियो का सम्मिलित विचारधाराओं का प्रभाव विस्फोटक सिद्ध होता है, किन्तु इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ढेरो पुस्तके पढने मे लीन जिनमे से कई उन्ही के शब्दो मे नीरस थी - तथा उन्हें अपने पुस्तकालय मे जमाने तथा उनमे से कुछ उपयोगी पुस्तको को छाँटने मे व्यस्त जेफर्सन को इस बात की रचमात्र भी जानकारी नही थी ।
जेफर्सन ने १७६७ के आरम्भ में वकालत शुरू की । तीन या चार वर्ष तक उन्होने निस्सन्देह वडी तत्परता से सफल वकालत की, यद्यपि एक अच्छे वक्ता के रूप मे वे कभी नही चमके । जब उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधि आरम्भ की तो उत्तरोत्तर उनकी वकालत की उपेक्षा होती गयी और अन्त मे उन्होने १७७४ मे अपनी वकालत अपने चचेरे भाई एडमन्ड रण्डोल्फ को सौप दी ।
अनेक दृष्टियो से वाइथ के शिष्य के रूप मे ओर स्वतंत्र वकील के रूप मे जेफर्मन का जीवन वैसा ही था, जैसा कि उनके कालेज के दिनो मे था । जक आमोद-प्रमोद का वातावरण, उन परिवारो के युवको की सगति, | उच्चतर शिक्षा की अमरीकी संस्थाओ मे हारवर्ड के बाद उसी का स्थान था । अट्ठारह वी शताब्दि के वर्जीनिया में एक छोटे से समुदाय मे उच्चतर शिक्षा पाना कोई साधारण बात नही थी । एक हज़ार सात सौ सत्ताईस से ही कालेज के अन्तर्गत चार पृथक् स्कूल थे, पंद्रह वर्ष तक के बच्चो के लिए एक 'ग्रामर स्कूल', एक दर्शनशास्त्र का स्कूल, एक स्नातकोत्तर अध्यात्मवादी स्कूल जिसका मूल उद्देश्य आग्लिकन धर्मप्रचार के लिए लोगो को प्रशिक्षित करना था और एक रेड इंडियन स्कूल भी था । दर्शनशास्त्र के स्कूल मे बी ए की डिग्री के लिए चार वर्ष का कोर्स रखा गया था । किन्तु जेफर्सन ने पंद्रह वर्ष के बजाय, जो कि वहाँ भर्ती होने की सामान्य उम्र थी -- सत्रह वर्ष की अवस्था मे वहाँ प्रवेश किया और दो ही वर्ष तक वहाँ रहे । कालेज मे दो वर्ष का समय जेफर्सन ने किस प्रकार व्यतीत किया, इम वारे मे जानकारी कालेज जीवन के एक सहपाठी तथा स्वय जेफर्मन की अपनी आत्मकथा से मिलती है, जिसमे उन्होने उस प्रसिद्ध व्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रभाव का उल्लेख किया है, जिसने उनके अध्ययन का निर्देशन किया था "यह मेरा सौभाग्य था और कदाचित् इसीने मेरे जीवन का भाग्य निर्णय भी किया कि स्काटलैण्ड के डाशून्य विलियम स्माल गरिणत के तत्कालीन प्राध्यापक थे । वे विज्ञान की अधिकाश उपयोगी शाखाओ के उद्भट विद्वान, पत्रव्यवहार मे प्रवीण, व्यवहारकुशल तथा व्यापक और उदार विचार के व्यक्ति थे । मेरा अहोभाग्य था कि वे मेरे प्रति शीघ्र ही आकर्षित हो गये और उन्होने स्कूल के कामों से फुर्सत पाने के समय मुझे अपने सहवास मे रखा । उनके साथ वार्तालाप करके मुझे पहली बार विज्ञान की व्यापकता तथा सृष्टि की क्रमबद्धता के बारे मे जानकारी मिली । सौभाग्य से कालेज मे मेरे पहुचने के वाद ही दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक का स्थान रिक्त हुआ और उन्हे अस्थायी तौर पर वहाँ नियुक्त किया। उन्होंने पहली बार कालेज मे नीतिशास्त्र, अलकार शास्त्र और साहित्य पर नियमित व्याख्यान दिये । " जिन लोगो को सत्रह वर्ष की वयमे ही एक उच्च कोटि के शिक्षक के प्रभाव मे आनेका सौभाग्य प्राप्त हुआ है, वे शायद ही इस अपूर्व सम्मान को एक वृद्ध पुरुष का भावनात्मक प्रवाह समझेगे और जेफर्सन भी भावुकतावादी नही ये । उनके शिष्यो की श्रद्धाजलियो के अतिरिक्त डा स्माल के बारे मे और कुछ भी ज्ञात नही है। वर्जीनिया के रगमच पर उनका अल्पकालिक दर्शन हुआ । वे प्रोफेसर नियुक्त हुए और एक हज़ार सात सौ चौंसठ मे उन्होने पदत्याग कर दिया । अपने जीवन के शेप दिन उन्होने बर्मिंत्रम मे बिताये और एरास्मस डार्विन तथा जेम्स वाट जैसे लोग उनके मित्रो मे थे । जैसा कि जेफर्सन ने कहा है, स्माल के द्वारा ही उनका अन्य व्यक्तियो से परिचय हुआ, जो इस छोटी-सी राजधानी के, जिस मे लगभग दो सौ मकान थे थे और जिसकी कुल आबादी निग्रोसहित लगभग एक हजार थी, गौरवतुल्य थे । इन दोनो व्यक्तियो मे एक तो उपनिवेश के एक अत्यन्त ख्यातिप्राप्त विद्वान वकील जार्ज वाइथ थे, जिनकी अवस्था उस समय लगभग चौंतीस वर्ष की थी और दूसरे थे लार्ड फाकियर, जो एक हज़ार सात सौ अट्ठावन से ही शाही लेफ्टिनन्ट गवर्नर थे । वे बडे ही योग्य और प्रगतिशील विचारो के थे और उस समय उनकी आयु लगभग पचास बर्ष की थी । यदि चारो व्यक्ति, जैसा कि जेफर्सन ने कहा है, एक मित्रमडली के अभिन्न अग बन गये तो इससे यह कल्पना नही करनी चाहिए कि जेफर्सन, जो इस मे सबसे छोटे थे, दम्भी थे और रात दिन उन्ही की सगति और बातचीत मे लगे रहते थे । फाकियर ने उन्हे सगीतप्रेमी बनाया, यद्यपि अपने दूसरे शौक ताश के खेल की ओर उन्हे वे आकृष्ट नहीं कर सके । जेफर्सन वायालिन पर गाने-बजाने मे अवश्य निपुण हो गये, किन्तु वे पढाई-लिखाई के बाद अपना अधिकाश समय ऐसे ही मनोरजनो मे लगाते थे, जो एक सुन्दर, सुडोल ओर सम्पन्न युवक की प्रवृत्तियों के अनुकूल होते है, जैसे नाटक, नृत्य, घुडदौड, मुर्गों की लडाई । इनमे उनका प्रथम असफल प्रणय भी शामिल है । अपनी स्वाभाविक लोकप्रियता और साहसिक भावनाओं के कारण जेफर्सन के जीवननिर्मारण-काल मे कही भी कलक या धूमिलता नही है, उन अवगुरगो और दूपित प्रवृत्तियो का समावेश भी नही हो सका, जो प्राय लोग महापुरुषों के प्रारम्भिक जीवन मे अनिवार्य मान बैठते है । जेफर्सन निस्सन्देह एक अद्भुत निष्कलुप युवक थे और उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे तत्कालीन समाज के उत्कट प्रलोभनो के शिकार नही हुए अर्थात् वे न तो शराबी बने और न जुआडी । लगभग आधी शताब्दि बाद उन्होने अपने एक सोलह वर्षीय पौत्र को लिखा था- -"जब कभी कोई प्रलोभन उपस्थित होता तो मैं यह सोचकर आत्मसयम का आश्रय लेता कि इन परिस्थितियो मे डा स्माल, वाईथ या उनके अभिभावक पेटोन रनडोल्फ क्या करते ।" यह व्याख्या वास्तव मे युवको के लिए एक सीख के रूप में काम कर सकती है । जान पंडता है कि जेफर्सन की बौद्धिक शक्ति मे इतनी गम्भीरता आ गयी थी कि वे यह अनुभव करने लगे कि मनोरजन उतना ही अच्छा है, जितना स्वास्थ्य तथा सन्तुलित सामान्य जीवन के लिए आवश्यक हो । इससे अधिक मनोरजन समय और बुद्धि का अपव्यय है । इसके अतिरिक्त, युवक की तरह अपने को प्रतिष्ठित स्थान पर पाकर तथा उसकी जिम्मेदारियो से कतराना सारहीन समझ कर उन्होने अपने आपको अपनी योग्यता के अनुसार इनके अनुकूल बनाने का दृढ निर्णय किया । कालेज छोडने के समय तक जेफर्मन की विचारधाराए काफी स्पष्ट हो चुकी थी । एक तो वे अब शास्त्रीय विद्वान हो चुके थे, दूसरे उन्होने यूनानी ओर लेटिन लेखको का गहन अध्ययन किया था, जिसका प्रमारण उनकी पुस्तको और साहित्य से मिलता है । डा एडरीने कोच ने अपनी हाल की पुस्तक जेफर्मन का दर्शनशास्त्र मे लिखा कि उनके नैतिक सिद्धान्तो का मूलाधार इपिक्यूरिन्स तथा स्टोइक विचारधाराओं के लेखको से प्रभावित था। उनकी राजनीतिक विचारधारा और नैतिक दृष्टिकोण की नीव भी इसी पर आधारित थी । आधुनिक दर्शनशास्त्र में उन पर अधिकतर लाक के महान व्यक्तित्व की छाया थी, कालेज छोडने के कुछ वर्षों बाद जेफर्मन को बोलिगब्रोक की दार्शनिक कृतियों के अध्ययन का अवसर मिला और हो सकता है कि उसीसे उन्हे अपने छात्र-जीवन की आग्लिकन रूढिवादिता से छुटकारा पाकर अपने समकालीन बुद्धिजीवियो की हेतुवादी आस्तिकता की ओर अग्रसर होने का प्रोत्साहन मिला, परन्तु नैतिकता को भी परिस्थिति के आधार पर कस कर तर्क के तराजू पर तौलने की यह प्रणाली उसके लिए कष्टकर व असुविधाजनक सिद्ध हुई जिसके लिए नैतिक सिद्धान्त बुनियादी तौर पर मार्गदर्शन के लिए महत्वपूर्ण थे । इसी के परिणामस्वरूप जेफर्सन ने वादमे अट्ठारह वी शताब्दि के उन अग्रेज और स्काटिश दार्शनिको के अतरात्मा से उत्प्रेरित नैतिक सिद्धान्तो के आधार पर अपने हेतुवादी दर्शन में संशोधन किया । एक हज़ार सात सौ सत्तासी मे जेफर्सन ने अपने भतीजे को लिखे पत्र मे उद्घोपित किया, "मेरी राय मे तो नैतिक दर्शन पर भाषण सुनना समय का अपव्यय करना है । जिसने हमारी सृष्टि की, यदि उसने हमारे नैतिक आचरण के नियमो को भी विज्ञान का विषय बनाया होता तो वह अवकचरा व उटपटाग स्रष्टा सिद्ध होता । आज एक वैज्ञानिक की दृष्टि मे हजारो ऐसे है वैज्ञानिक नही है । एक हलवाहे और प्राध्यापक को नैतिकता का उपदेश ए । हलवाहा यही निर्णय करेगा कि यह वात अच्छी और बहुत अच्छी है, क्योकि वह कृत्रिम नियमो की भूलभूलैया मे नही पड़ा है। यद्यपि दार्शनिक विचारधारा के विकास के साथ जेफर्मन क। सम्पर्क सदा बना रहा, तथापि उनकी विशेष रुचि 'प्राकृतिक दर्शन' मे अर्थात् भौतिक विज्ञान और विशेषकर प्राणी- विज्ञान मे रही । उनकी रुचि भूगर्भशास्त्र, प्रारणी - शास्त्र अथवा वनस्पति शास्त्र मे थी, जो प्राय उनके व्यक्तिगत कथनो तथा उनके अध्ययन एव पत्रव्यवहार में प्रकट होती थी, किन्तु यह रुचि विशुद्धत सैद्धान्तिक नही थी । उनका विश्वास था कि मानव समाज के उचित अध्ययन का साधन मानव है और यह विश्वास उस गताब्दि के पूर्णतया अनुकूल हो था । अपने वैज्ञानिक अध्ययन के परिणामस्वरूप उन्होने या तो मानव जीवविज्ञान एव मानव समाज पर विचा किया या उदाहरणार्थ, कृपि मे व्यावहारिक उपयोग किया, जिससे मानव समृद्धिशाली होकर नैतिक स्तर मे ऊपर उठ सके । जेफर्सन के विचारों में उपयोगितावाद अधिकाश मात्रा पाया मे जाता है । इसी प्रकार जेफर्सन की गरिणत मे वास्तविक अभिरुचि थी और प्राक्कलन तथा भौगोलिक व प्राकृतिक उपयोगिताओं के कारण गरिणत का विशेष महत्व भी था । यद्यपि जेफर्मन ने न केवल शास्त्रीय भाषाओं का, अपितु फासीसी, स्पेनिश तथा इटालियन और परिणामस्वरूप ऐग्लो-सेक्सन भाषाओ का पटना भी सीखा और यद्यपि वे उद्भट पाठक और पुस्तको के जयक मगहकर्ता बने और रहे, फिर भी उनकी विशुद्ध साहित्य सम्बधी कृतियों में विशेष रुचि कभी नहीं रही और उपन्यास तो वे कदाचित् ही पटते थे । दर्शनमात्र, इतिहास, कानून और राजनीति में उनकी स्थायी बौद्धिक रुचि बनी रही । जेफर्मन जैसे नवयुवक के लिए उसकी शिक्षा की अन्तिम मीटी कुछ कानूनी शिक्षा-प्राप्ति से ही थी । कानून की जानकारी की यह आवश्यक्ता औपनिवेशिक वर्जीनिया में बात करने के उत्साह के कारण नहीं थी। जबकि कुछ ही लोग कानून के पश्टिन होनाते थे, तो भी जवान लोगो को थोडी बहुत कानून को जानकारी होनी ही चाहिए, क्योकि नभी नवोदिन विकाशील समाज मे सम्पत्ति पर अधिकारसम्बन्धी विवाद अधिकारात हुआ ही करते और वे अधा पेचीदगीण होते थे । वन न कभी इतना सरल नहीं पा कि कोई उनका पूर्ण विशेषज्ञ मानूनी प्रथा के साथ के कानून और स्थायी कानूनो का जटिल सम्मिश्रण था, जिनकी व्याख्या भी इगलैंड और उपनिवेश के दोनो ही न्यायालयो ने की थी । यहाँ भी जेफर्तन वडे भाग्यशाली थे, वे जार्ज वाइय के शिष्य वन गये, जो न केवल उस उपनिवेश के ख्यातिलब्ध वकील थे, अपितु अनेक अर्थो मे अत्यन्त प्रसिद्ध एव विद्वान नागरिक थे । वाइथ के निर्देशन मे जेफर्मन को न केवल वकील की दैनिक कार्यप्रणाली का अनुभव हुआ, वल्कि अंग्रेजी कानून तथा अंग्रेजी साविधानिक विचारधारा के मूल सिद्धान्तो का गम्भीर ज्ञान भी प्राप्त हुआ। उनके स्वाभाविक परामर्शदाता थे सर एडवर्ड कोक, जिनकी तुलना इगलैंड के सर विलियम ब्लैक से की जा सकती है । सामान्य कानूनी नियम-उपनियमो और रिपोर्टों के अतिरिक्त, जेफर्सन ने इस समय यूरोपीय लेखको के बुनियादी कानून और अन्तरराष्ट्रीय कानून का भी अध्ययन किया । इन लेखको का अमरीका की कानूनी और साविधानिक विचारधारा पर अत्यधिक प्रभाव पडा और इनकी छाप जेफर्सन पर भी अत्यन्त स्पष्ट रूप से परिलक्षित है । बुनियादी कानून विशेषज्ञ का प्रभाव मानव समाज के नैतिक विवानो की सामान्य सहिता के अस्तित्व की उस कल्पना के अनुकूल है जो जेफर्सन को दार्शनिक अध्ययन से प्राप्त हुई थी। इस प्रकार जेफर्मन प्रकृतिदत्त अधिकारों की पुष्टि के लिए दुहरा सवल पा गये और यही विचारधारा बाद मे उनके राजनीतिक सिद्धान्तो का आधार बनी । न्यूटन और लाक, कोक और वैटेल की इन कृतियो का सम्मिलित विचारधाराओं का प्रभाव विस्फोटक सिद्ध होता है, किन्तु इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ढेरो पुस्तके पढने मे लीन जिनमे से कई उन्ही के शब्दो मे नीरस थी - तथा उन्हें अपने पुस्तकालय मे जमाने तथा उनमे से कुछ उपयोगी पुस्तको को छाँटने मे व्यस्त जेफर्सन को इस बात की रचमात्र भी जानकारी नही थी । जेफर्सन ने एक हज़ार सात सौ सरसठ के आरम्भ में वकालत शुरू की । तीन या चार वर्ष तक उन्होने निस्सन्देह वडी तत्परता से सफल वकालत की, यद्यपि एक अच्छे वक्ता के रूप मे वे कभी नही चमके । जब उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधि आरम्भ की तो उत्तरोत्तर उनकी वकालत की उपेक्षा होती गयी और अन्त मे उन्होने एक हज़ार सात सौ चौहत्तर मे अपनी वकालत अपने चचेरे भाई एडमन्ड रण्डोल्फ को सौप दी । अनेक दृष्टियो से वाइथ के शिष्य के रूप मे ओर स्वतंत्र वकील के रूप मे जेफर्मन का जीवन वैसा ही था, जैसा कि उनके कालेज के दिनो मे था । जक आमोद-प्रमोद का वातावरण, उन परिवारो के युवको की सगति, |
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन के छात्र ने तनाव के चलते गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। छात्र को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन के छात्र ने तनाव के चलते गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। छात्र को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। घायल छात्र कश्मीर का रहने वाला है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक छात्र अब्दुल वाशिद अली को एसएस साउथ हाल में कमरा आवंटित हुआ है, लेकिन अभी तक मिल नहीं सका है। वह अभी बाहर किराए के कमरे में रहता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से अली तनाव (डिप्रेशन) में था। हालांकि अभी तनाव का कारण पता नहीं चल सका है। वाशिद बुधवार दोपहर अपने दोस्त जुनैद के पास उसके कमरे पर गया था। वहां वाशिद वॉशरूम में चला गया और काफी देर तक बाहर नहीं निकला।
दोस्त जुनैद वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर एक दोस्त ऊपर खिड़की के सहारे वॉशरूम में गया। इसके बाद जब दरवाजा खुला तो सभी वाशिद को देखकर दंग रह गए। उसका गला ब्लेड से कटा हुआ था। दोस्त उसे आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज लेकर गए, जहां उसका उपचार चल रहा है और हालत गंभीर बताई जा रही है।
| अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन के छात्र ने तनाव के चलते गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। छात्र को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन के छात्र ने तनाव के चलते गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। छात्र को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। घायल छात्र कश्मीर का रहने वाला है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक छात्र अब्दुल वाशिद अली को एसएस साउथ हाल में कमरा आवंटित हुआ है, लेकिन अभी तक मिल नहीं सका है। वह अभी बाहर किराए के कमरे में रहता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से अली तनाव में था। हालांकि अभी तनाव का कारण पता नहीं चल सका है। वाशिद बुधवार दोपहर अपने दोस्त जुनैद के पास उसके कमरे पर गया था। वहां वाशिद वॉशरूम में चला गया और काफी देर तक बाहर नहीं निकला। दोस्त जुनैद वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर एक दोस्त ऊपर खिड़की के सहारे वॉशरूम में गया। इसके बाद जब दरवाजा खुला तो सभी वाशिद को देखकर दंग रह गए। उसका गला ब्लेड से कटा हुआ था। दोस्त उसे आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज लेकर गए, जहां उसका उपचार चल रहा है और हालत गंभीर बताई जा रही है। |
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कृषि कानूनः बिचौलियों और आढ़तियों में क्या अंतर है? आढ़तियों को किसान अपना एटीएम क्यों कहते हैं?
संवादः कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों के बीच टकराव क्यों बढ़ता जा रहा?
सरल शब्दों में विशेषज्ञों से जानिए कृषि कानूनों से आम किसानों का फायदा है या नुकसान?
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एनीमिया मतलब खून की कमी। एनीमिया दुनिया भर में लगभग 1. 62 बिलियन लोगों को प्रभावित करता है। यह शरीर में आयरन की कमी के कारण होता है, जिससे हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है। हमारी रक्त कोशिकायें आयरन से बनी होती हैं, आयरन की कमी होने से रक्त कोशिकाओं के निर्माण के गलत प्रभाव पड़ता है, नतीजतन शरीर में खून की कमी हो जाती है। इस आर्टिकल में हम एनीमिया के लक्षण, एनीमिया के कारण और एनीमिया के रोगी को क्या खाना चाहिए, एनीमिया होने पर क्या नही खाना चाहिए के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।
एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य स्तर से नीचे चला जाता है। आरबीसी आपके शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन को पहुंचाने में मदद करता है।
हीमोग्लोबिन, आरबीसी में मौजूद एक लौह युक्त प्रोटीन होता है जो रक्त कोशिकाओं को लाल रंग प्रदान करता है। यह ऑक्सीजन को बांधने, संक्रमण से लड़ने और रक्त के थक्के के निर्माण से रक्त के नुकसान को रोकने में भी मदद करता है। एनीमिया होने के परिणामस्वरूप आपके शरीर के विभिन्न भागों में कम ऑक्सीजन पहुंचती है।
नतीजतन, आप निम्नलिखित लक्षण विकसित करते हैं।
एनीमिया विटामिन बी-12 और आयरन की कमी से होता है।
आरबीसी गिनती या हीमोग्लोबिन की कमी निम्न तीन मुख्य कारणों से हो सकती है।
एनीमिया होने पर आप निम्न पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करे।
विटामिन सी ज्यादातर खट्टे फलों में पाया जाता है। नारंगी, सेब, नींबू, अंगूर, आंवले, सेब और जामुन जैसे फल विटामिन सी और अन्य आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरे होते हैं जो आरबीसी और हीमोग्लोबिन के उत्पादन में मदद करते हैं।
सावधानीः दूध या किसी भी दूध आधारित उत्पादों को पीने के बाद विटामिन सी का सेवन करने से बचें।
यह एक सर्वविदित तथ्य है कि प्रोबायोटिक्स पाचन और आंत समारोह में सुधार करने में मदद करते हैं, क्योंकि प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थों में गुड गट बैक्टीरिया होते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रोबायोटिक्स विटामिन बी 12 और आयरन के स्तर को बढ़ाते हैं। दही प्रोबायोटिक्स का एक अच्छा स्रोत है। एक अध्ययन में एनीमिया से पीड़ित मरीजों को दही का सेवन करने को दिया गया कुछ दिन बाद उनके आरबीसी के स्तर और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार देखा गया है। दही एक अत्यंत स्वादिष्ट आहार है और इसको मधुमेह और मोटापा से पीड़ित लोग भी खा सकते हैं, बस डायबिटीज से पीड़ित रोगी दही में चीनी न मिलाएं।
सावधानीः अधिक मात्रा में प्रोबायोटिक्स का सेवन न करें क्योंकि अधिक मात्रा में प्रोबायोटिक का सेवन करके आपको पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
चौराई, पालक, मूली का साग, सरसों का साग, ब्रोकोली और चना जैसी हरी सब्जी आयरन के प्रधान स्रोत हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने से एनीमिया से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है।
सावधानीः अधिक मात्रा में हरे रस या हरी सब्जियों का सेवन न करें।
प्रति दिन अधिकतम 3-4 कप ही हरी सब्जियों का सेवन करे।
जब कोशिकाओं के पोषण और फंक्शन की बात आती है तो विटामिन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन की कमी से एनीमिया सहित गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। नियमित रूप से साग, अंडे और बीन्स का सेवन विटामिन बी 12 और फोलेट की कमी को रोकता है। अगर आपको साग, अंडे और बीन्स न पसंद हो तो आप डॉक्टर द्वारा प्रस्तावित विटामिन बी 12 और फोलेट की खुराक का सेवन भी कर सकते हैं।
आप हरे या पके केले का सेवन करके कम समय में ही अपने आयरन के स्तर में सुधार कर सकते हैं। केले लोहे, पोटेशियम, विटामिन सी और फोलेट से भरे होते हैं। वे आपके शरीर को स्वस्थ आरबीसी उत्पन्न करने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
सावधानीः केले में कैलोरी और पोटेशियम की उच्च मात्रा होती है, इसलिए केले के अत्यधिक सेवन से वजन बढ़ने और हाइपरकेलेमिया की समस्या हो सकता है।
खजूर और किशमिश आयरन और विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन सी आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में आयरन के अवशोषण में सुधार करता है।
सावधानीः खजूर और किशमिश में उच्च मात्रा में शुगर होती है जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकते हैं इसलिए मधुमेह के रोगी डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इनका सेवन करें।
एनीमिया में निम्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए;
| एनीमिया मतलब खून की कमी। एनीमिया दुनिया भर में लगभग एक. बासठ बिलियन लोगों को प्रभावित करता है। यह शरीर में आयरन की कमी के कारण होता है, जिससे हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है। हमारी रक्त कोशिकायें आयरन से बनी होती हैं, आयरन की कमी होने से रक्त कोशिकाओं के निर्माण के गलत प्रभाव पड़ता है, नतीजतन शरीर में खून की कमी हो जाती है। इस आर्टिकल में हम एनीमिया के लक्षण, एनीमिया के कारण और एनीमिया के रोगी को क्या खाना चाहिए, एनीमिया होने पर क्या नही खाना चाहिए के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य स्तर से नीचे चला जाता है। आरबीसी आपके शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन को पहुंचाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन, आरबीसी में मौजूद एक लौह युक्त प्रोटीन होता है जो रक्त कोशिकाओं को लाल रंग प्रदान करता है। यह ऑक्सीजन को बांधने, संक्रमण से लड़ने और रक्त के थक्के के निर्माण से रक्त के नुकसान को रोकने में भी मदद करता है। एनीमिया होने के परिणामस्वरूप आपके शरीर के विभिन्न भागों में कम ऑक्सीजन पहुंचती है। नतीजतन, आप निम्नलिखित लक्षण विकसित करते हैं। एनीमिया विटामिन बी-बारह और आयरन की कमी से होता है। आरबीसी गिनती या हीमोग्लोबिन की कमी निम्न तीन मुख्य कारणों से हो सकती है। एनीमिया होने पर आप निम्न पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करे। विटामिन सी ज्यादातर खट्टे फलों में पाया जाता है। नारंगी, सेब, नींबू, अंगूर, आंवले, सेब और जामुन जैसे फल विटामिन सी और अन्य आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरे होते हैं जो आरबीसी और हीमोग्लोबिन के उत्पादन में मदद करते हैं। सावधानीः दूध या किसी भी दूध आधारित उत्पादों को पीने के बाद विटामिन सी का सेवन करने से बचें। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि प्रोबायोटिक्स पाचन और आंत समारोह में सुधार करने में मदद करते हैं, क्योंकि प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थों में गुड गट बैक्टीरिया होते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रोबायोटिक्स विटामिन बी बारह और आयरन के स्तर को बढ़ाते हैं। दही प्रोबायोटिक्स का एक अच्छा स्रोत है। एक अध्ययन में एनीमिया से पीड़ित मरीजों को दही का सेवन करने को दिया गया कुछ दिन बाद उनके आरबीसी के स्तर और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार देखा गया है। दही एक अत्यंत स्वादिष्ट आहार है और इसको मधुमेह और मोटापा से पीड़ित लोग भी खा सकते हैं, बस डायबिटीज से पीड़ित रोगी दही में चीनी न मिलाएं। सावधानीः अधिक मात्रा में प्रोबायोटिक्स का सेवन न करें क्योंकि अधिक मात्रा में प्रोबायोटिक का सेवन करके आपको पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। चौराई, पालक, मूली का साग, सरसों का साग, ब्रोकोली और चना जैसी हरी सब्जी आयरन के प्रधान स्रोत हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने से एनीमिया से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है। सावधानीः अधिक मात्रा में हरे रस या हरी सब्जियों का सेवन न करें। प्रति दिन अधिकतम तीन-चार कप ही हरी सब्जियों का सेवन करे। जब कोशिकाओं के पोषण और फंक्शन की बात आती है तो विटामिन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन की कमी से एनीमिया सहित गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। नियमित रूप से साग, अंडे और बीन्स का सेवन विटामिन बी बारह और फोलेट की कमी को रोकता है। अगर आपको साग, अंडे और बीन्स न पसंद हो तो आप डॉक्टर द्वारा प्रस्तावित विटामिन बी बारह और फोलेट की खुराक का सेवन भी कर सकते हैं। आप हरे या पके केले का सेवन करके कम समय में ही अपने आयरन के स्तर में सुधार कर सकते हैं। केले लोहे, पोटेशियम, विटामिन सी और फोलेट से भरे होते हैं। वे आपके शरीर को स्वस्थ आरबीसी उत्पन्न करने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। सावधानीः केले में कैलोरी और पोटेशियम की उच्च मात्रा होती है, इसलिए केले के अत्यधिक सेवन से वजन बढ़ने और हाइपरकेलेमिया की समस्या हो सकता है। खजूर और किशमिश आयरन और विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन सी आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में आयरन के अवशोषण में सुधार करता है। सावधानीः खजूर और किशमिश में उच्च मात्रा में शुगर होती है जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकते हैं इसलिए मधुमेह के रोगी डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इनका सेवन करें। एनीमिया में निम्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए; |
ध्वनि प्रभाव और बिंबात्मक-रूपांतरण
ध्वनि प्रभाव लिखित शब्दो के बिंबात्मक रूपातरण के सर्वश्रेष्ठ उपकरणों में एक हैं। लेखक जिस आँधी-पानी-तूफान-बाढ- भूकप-युद्ध आदि की विभीषिका के वर्णन मे सफे-केसफ़े रग डालता है ध्वनि प्रभाव चद सेकेंड मे वे बिंब श्रोता के जहन में रच डालते हैं। समवेत कठो की मर्मर-ध्वनि सभा का, उत्तेजित स्वरो का एक प्रभाव मैच का और मदारी के डमरू, बाँसुरी वाले की धुन और कोलाहल का एक छोटा सा मोंताज मेले का दृश्य उपस्थित कर देता है। चंद लहरे समुद्र का, कल-कल कर स्वर पहाड़ी - नाले का, छपाक-छपाक की आवाज़ नदी का, चिड़ियों की चहचहाहट सुबह का पशुओ का रभाना और सामूहिक पग-ध्वनि गाँव की शाम का, झिंगूरो की आवाज और बीच-बीच मे कुत्तो का भौंकना रात का, जगल के सन्नाटे मे गूँजने वाली एक विशेष लकड़ी के कीड़े की आवाज जगल का तथा चमगादड़ों की फड़फड़ाहट और चद रहस्यमय रेडियोफोनिक प्रभाव भुतहा इमारत का बिंब निर्मित कर देते हैं। और ये बिंब लिखित शब्दों द्वारा निर्मित बिंबों से कहीं अधिक जीवत और प्रभावशाली होते हैं क्योंकि रेडियो अपने ध्वनि-प्रभावो से केवल संकेत देता है, श्रोता उन संकेतो के उद्बोधन की उगली थाम अपने सचित अनुभवो से अपना बिंब खुद रचता है।
केट चोपिन की कहानी 'तूफ़ान" में दो स्तरो पर तूफ़ान चल रहा है। छप्पर की पाटियो पर बूँदें इतनी ताक़त से गिर रही हैं जैसे उसे तोड़कर भीतर आने को बेसब्र हों; गिरती हुई बिजलियों की गरज-तड़क इतनी भयंकर है कि फ़र्श का बोर्ड हिल रहा है और दूसरी तरफ, सारे पितृसत्तात्मक मूल्यों को चुनौती देता एक तूफ़ान नायिका केलिक्स्टा को अपनी चपेट में लिए है जिसमे एक पति- इतर पुरुष के साथ मैथुनरत उसकी स्त्री - देह पहली बार अपने जन्मसिद्ध अधिकार का अनुभव कर रही है। स्पष्ट है कि विध्वंसक बारिश और बिजली गिरने, बादलों की गड़गड़ाहट और तेज़ हवा के प्रभाव दोनो स्तरों पर घटित हो रहे इस तूफ़ान के संप्रेषण में कितने महत्त्वपूर्ण होंगे।
1. कहानी - 'तूफ़ान' - केट चोपिन- अनु. इन्द्रमणि उपाध्याय - सग्रह 'खामोशी की परते' - पृ० १
शिवमूर्ति की ही एक अन्य कहानी 'सिरी उपमा जोग" में प्रसगवश अधिकारी नायक के मस्तिष्क मे सालों पहले पीछे छोड़ दिये गये गाँव और पत्नी-बच्चे उभरते हैं। इस 'मस्तिष्क मे उभर रहे' गाँव को प्रसारण में ध्वनि प्रभाव ही साकार कर सकता है। रहट की आवाज, गाय-बकरियो का स्वर और हलवाहे की 'हाँ-हाँ-च्च-च-टिक-टिक' - बस इतना सा ध्वनि-चित्र गाँव के खेत को उभारने के लिए काफी है। इसके ऊपर कहानी के ब्यौरे जिसमे कव्वा 'काँकाँ' कर रहा है और एक दुधमुँही बच्ची तोतली आवाज में उसकी नकल उतार रही है।
ग्राहम ग्रीन की एक कहानी 2 मे अंधेरे में चल रहे चोर सिपाही के खेल में अधेरे से अत्यन्त डरने वाले कमज़ोर दिल के अपने भाई को हौसला बँधाने की कोशिश मे पीटर चुपचाप उसके पास पहुँचकर उसका हाथ थाम लेता है और फ्रांसिस अधेरे में चुपचाप यूँ हाथ पकड़ लिए जाने से ही डर के मारे मर जाता है। कहानी मे पीटर के फ्रांसिस के पास पहुँचने का पूरा विवरण है लेकिन रेडियो मे ध्वनि प्रभाव इस प्रकार यह बिंब निर्मित करेगा -
(सन्नाटा। फिर एक आतंककारी संगीत प्रभाव । फ्रासिस की डरी सिसकरी । पाँव दबाकर चलने की आवाज़ । एक लकड़ी के तख्ते का चरमरा उठना । फ्रासिस की धौंकनी बनती साँसें। पदचाप। आलमारी का पल्ला खुलने की चूँऽऽ । तीव्रआतककारी सगीत।)
(viii) माइक का आत्मीय प्रयोग - रेडियो में माइक का प्रयोग एक कैमरे की तरह करते हैं। अभिनेता जरा सा आफ दि माइक (माइक से हटकर) बोलता है और श्रोता छवि बनाता है कि वह मुख्य घटनास्थल से दूर स्थित है; सामान्य संवादो / ध्वनियों के समानांतर कम स्वर-भार के सवाद/ध्वनियाँ सुनता है और अपने-आप उसके मस्तिष्क दृश्य का दूसरा परिपार्श्व उभर आता है। फेड-इन/ फ़ेड-आउट की
कहानी- 'सिरी उपमा जोग' - शिवमूर्ति- संग्रह 'केशर- कस्तूरी' -पृ. 63
2 कहानी - 'एक पार्टी का अत' ले. ग्राहम ग्रीन, अनु, अनुराधा महेंद्र, सग्रह 'कहानियों से गुजरती बीसवीं सदी | ध्वनि प्रभाव और बिंबात्मक-रूपांतरण ध्वनि प्रभाव लिखित शब्दो के बिंबात्मक रूपातरण के सर्वश्रेष्ठ उपकरणों में एक हैं। लेखक जिस आँधी-पानी-तूफान-बाढ- भूकप-युद्ध आदि की विभीषिका के वर्णन मे सफे-केसफ़े रग डालता है ध्वनि प्रभाव चद सेकेंड मे वे बिंब श्रोता के जहन में रच डालते हैं। समवेत कठो की मर्मर-ध्वनि सभा का, उत्तेजित स्वरो का एक प्रभाव मैच का और मदारी के डमरू, बाँसुरी वाले की धुन और कोलाहल का एक छोटा सा मोंताज मेले का दृश्य उपस्थित कर देता है। चंद लहरे समुद्र का, कल-कल कर स्वर पहाड़ी - नाले का, छपाक-छपाक की आवाज़ नदी का, चिड़ियों की चहचहाहट सुबह का पशुओ का रभाना और सामूहिक पग-ध्वनि गाँव की शाम का, झिंगूरो की आवाज और बीच-बीच मे कुत्तो का भौंकना रात का, जगल के सन्नाटे मे गूँजने वाली एक विशेष लकड़ी के कीड़े की आवाज जगल का तथा चमगादड़ों की फड़फड़ाहट और चद रहस्यमय रेडियोफोनिक प्रभाव भुतहा इमारत का बिंब निर्मित कर देते हैं। और ये बिंब लिखित शब्दों द्वारा निर्मित बिंबों से कहीं अधिक जीवत और प्रभावशाली होते हैं क्योंकि रेडियो अपने ध्वनि-प्रभावो से केवल संकेत देता है, श्रोता उन संकेतो के उद्बोधन की उगली थाम अपने सचित अनुभवो से अपना बिंब खुद रचता है। केट चोपिन की कहानी 'तूफ़ान" में दो स्तरो पर तूफ़ान चल रहा है। छप्पर की पाटियो पर बूँदें इतनी ताक़त से गिर रही हैं जैसे उसे तोड़कर भीतर आने को बेसब्र हों; गिरती हुई बिजलियों की गरज-तड़क इतनी भयंकर है कि फ़र्श का बोर्ड हिल रहा है और दूसरी तरफ, सारे पितृसत्तात्मक मूल्यों को चुनौती देता एक तूफ़ान नायिका केलिक्स्टा को अपनी चपेट में लिए है जिसमे एक पति- इतर पुरुष के साथ मैथुनरत उसकी स्त्री - देह पहली बार अपने जन्मसिद्ध अधिकार का अनुभव कर रही है। स्पष्ट है कि विध्वंसक बारिश और बिजली गिरने, बादलों की गड़गड़ाहट और तेज़ हवा के प्रभाव दोनो स्तरों पर घटित हो रहे इस तूफ़ान के संप्रेषण में कितने महत्त्वपूर्ण होंगे। एक. कहानी - 'तूफ़ान' - केट चोपिन- अनु. इन्द्रमणि उपाध्याय - सग्रह 'खामोशी की परते' - पृशून्य एक शिवमूर्ति की ही एक अन्य कहानी 'सिरी उपमा जोग" में प्रसगवश अधिकारी नायक के मस्तिष्क मे सालों पहले पीछे छोड़ दिये गये गाँव और पत्नी-बच्चे उभरते हैं। इस 'मस्तिष्क मे उभर रहे' गाँव को प्रसारण में ध्वनि प्रभाव ही साकार कर सकता है। रहट की आवाज, गाय-बकरियो का स्वर और हलवाहे की 'हाँ-हाँ-च्च-च-टिक-टिक' - बस इतना सा ध्वनि-चित्र गाँव के खेत को उभारने के लिए काफी है। इसके ऊपर कहानी के ब्यौरे जिसमे कव्वा 'काँकाँ' कर रहा है और एक दुधमुँही बच्ची तोतली आवाज में उसकी नकल उतार रही है। ग्राहम ग्रीन की एक कहानी दो मे अंधेरे में चल रहे चोर सिपाही के खेल में अधेरे से अत्यन्त डरने वाले कमज़ोर दिल के अपने भाई को हौसला बँधाने की कोशिश मे पीटर चुपचाप उसके पास पहुँचकर उसका हाथ थाम लेता है और फ्रांसिस अधेरे में चुपचाप यूँ हाथ पकड़ लिए जाने से ही डर के मारे मर जाता है। कहानी मे पीटर के फ्रांसिस के पास पहुँचने का पूरा विवरण है लेकिन रेडियो मे ध्वनि प्रभाव इस प्रकार यह बिंब निर्मित करेगा - माइक का आत्मीय प्रयोग - रेडियो में माइक का प्रयोग एक कैमरे की तरह करते हैं। अभिनेता जरा सा आफ दि माइक बोलता है और श्रोता छवि बनाता है कि वह मुख्य घटनास्थल से दूर स्थित है; सामान्य संवादो / ध्वनियों के समानांतर कम स्वर-भार के सवाद/ध्वनियाँ सुनता है और अपने-आप उसके मस्तिष्क दृश्य का दूसरा परिपार्श्व उभर आता है। फेड-इन/ फ़ेड-आउट की कहानी- 'सिरी उपमा जोग' - शिवमूर्ति- संग्रह 'केशर- कस्तूरी' -पृ. तिरेसठ दो कहानी - 'एक पार्टी का अत' ले. ग्राहम ग्रीन, अनु, अनुराधा महेंद्र, सग्रह 'कहानियों से गुजरती बीसवीं सदी |
हर महिला के लिए माँ बनना एक बेहद ही अलग और सुखद अनुभव होता है. 9 महीने तक एक महिला अपने गर्भ में एक नन्ही सी जान को पालती है. जिसके बाद वह वह उस नन्ही सी जान को इस दुनिया में लेकर आती है. इन 9 महीने के दौरान गर्भवती महिला को कई अनुभव होते है.
इस दौरान महिला के पेट में पल रहा बच्चा लात मरता है. जिसे बेबी किक भी कहा जाता है. आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताने जा रहे है. दरअसल बच्चा गर्भवती महिला के पेट से लात मार कर वातावरण में होने वाले बदलाव के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करवाता है.
गर्भवती महिला को गर्भ धारण करने के 13 महीने बाद इस घटना का अनुभव होता है. वही डॉक्टर भी इस बेबी किक को काउंट करने की सलाह देते है. जिससे यह पता लगाया जा सके की बच्चा स्वस्थ्य है या नहीं.
| हर महिला के लिए माँ बनना एक बेहद ही अलग और सुखद अनुभव होता है. नौ महीने तक एक महिला अपने गर्भ में एक नन्ही सी जान को पालती है. जिसके बाद वह वह उस नन्ही सी जान को इस दुनिया में लेकर आती है. इन नौ महीने के दौरान गर्भवती महिला को कई अनुभव होते है. इस दौरान महिला के पेट में पल रहा बच्चा लात मरता है. जिसे बेबी किक भी कहा जाता है. आज हम आपको इसके पीछे का कारण बताने जा रहे है. दरअसल बच्चा गर्भवती महिला के पेट से लात मार कर वातावरण में होने वाले बदलाव के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करवाता है. गर्भवती महिला को गर्भ धारण करने के तेरह महीने बाद इस घटना का अनुभव होता है. वही डॉक्टर भी इस बेबी किक को काउंट करने की सलाह देते है. जिससे यह पता लगाया जा सके की बच्चा स्वस्थ्य है या नहीं. |
इम इंडिया ने क्रिकेट जगत में आज ही के दिन अपने नाम का दुनिया भर में परचम लहराया था. 25 जून जिसे भारतीय क्रिकेट इतिहास में कभी नहीं भुलाया जा सकता. टीम इंडिया ने आज ही के दिन देशवासियों को ऐसा तोहफा दिया था जिसे याद कर आज भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. दरअसल, कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने आज ही के दिन विश्वकप खिताब पर पहली बार कब्ज़ा जमाया था . यह बात साल 1983 है जब दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज को धूल चटाते हुए विश्व कप का खिताब जीता था.
कपिल देव की कप्तानी वाली युवा भारतीय टीम ने 60 ओवर के विश्व कप को जीत हर तरफ सनसनी फैला दी थी. लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टीम इंडिया ने गॉर्डन ग्रीनिज, क्लाइव लॉयड और विवियन रिचर्डसन जैसे दिग्गजों से भरी टीम को महज 140 रन पर समेट फाइनल अपनी झोली में डाला था.
1983 विश्व कप में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के साथ तीन मुकाबले खेले जिसमें दो बार बाद में गेंदबाजी करते हुए जीत हासिल की. कमाल की बात यह रही की फाइनल में टॉस जीतने के बाद भी क्लाइव लॉयड ने भारत की मजबूत गेंदबाजी को नजर अंदाज करते हुए पहले गेंदबाजी चुनी. विश्व कप के इस निर्णायक मुकाबले में वेस्टइंडीज टीम के कप्तान क्लाइव लॉयड ने टॉस जीता था लेकिन उन्होंने गेंदबाजी करने का फैसला लिया. जिसके बाद भारतीय टीम ने भी कुछ ख़ास बल्लेबाजी नहीं की और 54. 4 ओवर में महज 183 रन बना कर ही आउट हो गयी. भारत की तरफ से कोई भी बल्लेबाज अर्द्धशतक नहीं बना पाया था और सबसे ज्यादा कृष्णमच्चारी श्रीकांत ने 38 रन बनाये थे. इस छोटे से लक्ष्य से ऐसा ही लग रहा था कि भारत यह मैच हार जायेगी.
मोहिंदर अमरनाथ को मैन ऑफ द मैच चुना गया था. अमरनाथ ने 26 रन के अहम योगदान करने के साथ-साथ तीन अहम विकेट भी चटकाए थे. रॉजर बिन्नी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे. उन्होंने 8 मुकाबलों में 18 विकेट झटके थे. अमरनाथ विकेट लेने वालों की लिस्ट में 17 विकेट के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर थे.
| इम इंडिया ने क्रिकेट जगत में आज ही के दिन अपने नाम का दुनिया भर में परचम लहराया था. पच्चीस जून जिसे भारतीय क्रिकेट इतिहास में कभी नहीं भुलाया जा सकता. टीम इंडिया ने आज ही के दिन देशवासियों को ऐसा तोहफा दिया था जिसे याद कर आज भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. दरअसल, कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने आज ही के दिन विश्वकप खिताब पर पहली बार कब्ज़ा जमाया था . यह बात साल एक हज़ार नौ सौ तिरासी है जब दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज को धूल चटाते हुए विश्व कप का खिताब जीता था. कपिल देव की कप्तानी वाली युवा भारतीय टीम ने साठ ओवर के विश्व कप को जीत हर तरफ सनसनी फैला दी थी. लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टीम इंडिया ने गॉर्डन ग्रीनिज, क्लाइव लॉयड और विवियन रिचर्डसन जैसे दिग्गजों से भरी टीम को महज एक सौ चालीस रन पर समेट फाइनल अपनी झोली में डाला था. एक हज़ार नौ सौ तिरासी विश्व कप में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के साथ तीन मुकाबले खेले जिसमें दो बार बाद में गेंदबाजी करते हुए जीत हासिल की. कमाल की बात यह रही की फाइनल में टॉस जीतने के बाद भी क्लाइव लॉयड ने भारत की मजबूत गेंदबाजी को नजर अंदाज करते हुए पहले गेंदबाजी चुनी. विश्व कप के इस निर्णायक मुकाबले में वेस्टइंडीज टीम के कप्तान क्लाइव लॉयड ने टॉस जीता था लेकिन उन्होंने गेंदबाजी करने का फैसला लिया. जिसके बाद भारतीय टीम ने भी कुछ ख़ास बल्लेबाजी नहीं की और चौवन. चार ओवर में महज एक सौ तिरासी रन बना कर ही आउट हो गयी. भारत की तरफ से कोई भी बल्लेबाज अर्द्धशतक नहीं बना पाया था और सबसे ज्यादा कृष्णमच्चारी श्रीकांत ने अड़तीस रन बनाये थे. इस छोटे से लक्ष्य से ऐसा ही लग रहा था कि भारत यह मैच हार जायेगी. मोहिंदर अमरनाथ को मैन ऑफ द मैच चुना गया था. अमरनाथ ने छब्बीस रन के अहम योगदान करने के साथ-साथ तीन अहम विकेट भी चटकाए थे. रॉजर बिन्नी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे. उन्होंने आठ मुकाबलों में अट्ठारह विकेट झटके थे. अमरनाथ विकेट लेने वालों की लिस्ट में सत्रह विकेट के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर थे. |
UP Election 2022: यूपी में पूरी तरह से चुनावी माहौल सज गया है, सभी दलों ने अपने-अपने दांव पेंच खेलने शुरू कर दिये हैं।
UP Election 2022: यूपी में पूरी तरह से चुनावी माहौल सज गया है, सभी दलों ने अपने-अपने दांव पेंच खेलने शुरू कर दिये हैं। समाजवादी पार्टी भी अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए मिशन 2022 को फतह करने की कोशिशों में लगी हुई है। लगातार समाजवादी पार्टी के बढ़ते कुनबे से जहां उनके कार्यकर्ता और नेता गदगद हैं तो वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की नजर हर उस व्यक्ति पर है जो पार्टी को जीत दिलाने में अहम रोल निभा सकता है। 'बाइस में बाइसिकल' को तेजी से दौड़ाकर सत्ता तक पहुंचाने के लिए वह एक नई रणनीति तैयार कर बीजेपी को टक्कर देने की सोच रहे हैं क्योंकि बीजेपी पहले ही इस फॉर्मूले को आजमा चुकी है।
बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव की नजर पूर्वांचल पर टिकी है। पूर्वांचल के लिए यह कहा जाता है कि यहां जिसे ज्यादा सीटें मिलीं वह यूपी की सत्ता पर काबिज हो जाता है। इसी के मद्देनज़र अखिलेश यादव ने 'बाइस में बाइसिकल' की फतह के लिए भोजपुरी कलाकारों को पार्टी से जोड़ने की योजना बनाई है। बीजेपी ने भोजपुरी के तीन बड़े स्टार मनोज तिवारी, रवि किशन और दिनेश यादव उर्फ निरहुआ को अपने साथ कर पूर्वांचल में कमल खिलाया था। अब अखिलेश यादव भी यहां साइकिल की रेस को बढ़ाने में लग गए हैं।
बता दें अभी कुछ ही महीने पहले भोजपुरी स्टार और गायक खेसारी लाल ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर सपा ज्वाइन की थी। अभी चंद रोज पहले गोरखपुर की रहने वाली भोजपुरी अभिनेत्री काजल निषाद ने भी साइकिल की सवारी की है। काजल निषाद कांग्रेस के टिकट पर गोरखपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं। अब 22 में सपा के लिए वोट मांगती दिखाई देंगी। सपा में शामिल होने के बाद खेसारी लाल यादव ने कहा था वह अखिलेश के साथ हर समय कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं। तब से ये अनुमान लगाया जा रहा था कि समाजवादी पार्टी भोजपुरी सितारों को साथ लेकर चलने जा रही है।
2014 में मोदी लहर के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ में बीजेपी के विजय रथ को रोक कर जीत हासिल की थी तो वहीं 2019 में इस जीत को अखिलेश यादव ने भी बरकरार रखा। बीजेपी बड़ी रणनीति के तहत भोजपुरी स्टार दिनेश लाल निरहुआ को मैदान में उतारा था । लेकिन वह भी अखिलेश यादव को नहीं हरा पाए। इस तरह आजमगढ़ मे सपा का दबदबा कायम रहा। अब 2022 में भी अखिलेश पूर्वांचल पर खास फोकस कर जहां अपने जनाधार को मजबूत कर रहे हैं तो वहीं भोजपुरी कलाकारों को पार्टी से जोड़कर उसे जीत में तब्दील करने की योजना पर भी काम करना शुरू कर दिया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कपीश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं,"सपा का सदैव यह लक्ष्य रहा है कि चाहे वह हमारे लोक कलाकार हों अथवा भोजपुरी फिल्म के कलाकार हों या बालीवुड के कलाकार अथवा खिलाड़ी हों, कवि हों या साहित्यकार, वाद्य के विधा से जुड़े समस्त कलाकार एवं खिलाड़ियों का सदैव समाजवादी पार्टी ने सम्मान किया है। यश भारतीय सम्मान की शुरुआत भी समाजवादी पार्टी की सरकार ने कलाकारों के उत्साहवर्धन के लिए की थी। यह एक उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार की अनूठी पहल थी। " उसी क्रम में आज भी चाहे वह हमारे अदाकार हों, गीतकार हों, फिल्मकार हों, साहित्यकार हों अथवा खिलाड़ी हों, समाजवादी पार्टी सब के मान सम्मान की रक्षा भी करेंगी उनका उत्साहवर्धन भी करेंगी। पार्टी का टिकट भी देगी उन्हें, पार्टी से जुड़ेगी भी और उन्हें अपने पार्टी का पदाधिकारी भी बनायेगी।
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो उनके साथ मनोज तिवारी, गोरखपुर से सांसद रवि किशन, स्टार निरहुआ समेत कई कलाकार जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी भोजपुरी कलाकारों को अपने पाले में लाने में सफल होती है तो उससे कहीं ना कहीं भाजपा को नुकसान जरूर होगा। हालांकि भाजपा का मानना है कि अखिलेश यादव के मिशन पूर्वांचल से उनकी पार्टी को कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है।
यूपी के लिए यह कहा जाता है कि जिस पार्टी को पूर्वांचल के मतदाताओं का साथ मिल गया वह यूपी की सत्ता पर काबिज हो जाता है। यूपी के 75 जिलों में 26 जिले पूर्वांचल में आते हैं । यहां विधानसभा की 156 सीटें हैं, जबकि लोकसभा की 29 सीटें हैं। अगर 2017 के विधान सभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने 156 में से 106 सीटों पर कब्जा किया था। वहीं समाजवादी पार्टी को 18, बसपा को 12, अपना दल को 8, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 4, कांग्रेस को 4 और निषाद पार्टी को 1 सीट पर जीत मिली थी, जबकि 3 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 29 में से 22 सीटें मिली थीं। सपा-बसपा गठबंधन को 6 सीटों पर जीत मिली थी। यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुला था।
पूर्वांचल के लिए राजनीतिक दलों ने जो जातिगत आंकड़े बनाए हैं, उसके तहत हरिजन, मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। पटेल और राजभर कुछ सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं।
यूपी के चुनाव में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब पार्टियां कलाकारों का सहारा लेकर विजय हासिल करने की जुगत में लगी हों। इससे पहले बीजेपी, सपा, कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार या फिर सितारों को चुनावी रण में उतार कर जीत का दांव चलते रहे हैं। अब फिर से जब चुनाव की रणभेरी बज चुकी है तो जाहिर है जाति धर्म की राजनीति के बाद अब क्षेत्र वादी राजनीति भी उत्तर प्रदेश में पांव पसार रही है।
| UP Election दो हज़ार बाईस: यूपी में पूरी तरह से चुनावी माहौल सज गया है, सभी दलों ने अपने-अपने दांव पेंच खेलने शुरू कर दिये हैं। UP Election दो हज़ार बाईस: यूपी में पूरी तरह से चुनावी माहौल सज गया है, सभी दलों ने अपने-अपने दांव पेंच खेलने शुरू कर दिये हैं। समाजवादी पार्टी भी अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए मिशन दो हज़ार बाईस को फतह करने की कोशिशों में लगी हुई है। लगातार समाजवादी पार्टी के बढ़ते कुनबे से जहां उनके कार्यकर्ता और नेता गदगद हैं तो वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की नजर हर उस व्यक्ति पर है जो पार्टी को जीत दिलाने में अहम रोल निभा सकता है। 'बाइस में बाइसिकल' को तेजी से दौड़ाकर सत्ता तक पहुंचाने के लिए वह एक नई रणनीति तैयार कर बीजेपी को टक्कर देने की सोच रहे हैं क्योंकि बीजेपी पहले ही इस फॉर्मूले को आजमा चुकी है। बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव की नजर पूर्वांचल पर टिकी है। पूर्वांचल के लिए यह कहा जाता है कि यहां जिसे ज्यादा सीटें मिलीं वह यूपी की सत्ता पर काबिज हो जाता है। इसी के मद्देनज़र अखिलेश यादव ने 'बाइस में बाइसिकल' की फतह के लिए भोजपुरी कलाकारों को पार्टी से जोड़ने की योजना बनाई है। बीजेपी ने भोजपुरी के तीन बड़े स्टार मनोज तिवारी, रवि किशन और दिनेश यादव उर्फ निरहुआ को अपने साथ कर पूर्वांचल में कमल खिलाया था। अब अखिलेश यादव भी यहां साइकिल की रेस को बढ़ाने में लग गए हैं। बता दें अभी कुछ ही महीने पहले भोजपुरी स्टार और गायक खेसारी लाल ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर सपा ज्वाइन की थी। अभी चंद रोज पहले गोरखपुर की रहने वाली भोजपुरी अभिनेत्री काजल निषाद ने भी साइकिल की सवारी की है। काजल निषाद कांग्रेस के टिकट पर गोरखपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं। अब बाईस में सपा के लिए वोट मांगती दिखाई देंगी। सपा में शामिल होने के बाद खेसारी लाल यादव ने कहा था वह अखिलेश के साथ हर समय कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं। तब से ये अनुमान लगाया जा रहा था कि समाजवादी पार्टी भोजपुरी सितारों को साथ लेकर चलने जा रही है। दो हज़ार चौदह में मोदी लहर के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ में बीजेपी के विजय रथ को रोक कर जीत हासिल की थी तो वहीं दो हज़ार उन्नीस में इस जीत को अखिलेश यादव ने भी बरकरार रखा। बीजेपी बड़ी रणनीति के तहत भोजपुरी स्टार दिनेश लाल निरहुआ को मैदान में उतारा था । लेकिन वह भी अखिलेश यादव को नहीं हरा पाए। इस तरह आजमगढ़ मे सपा का दबदबा कायम रहा। अब दो हज़ार बाईस में भी अखिलेश पूर्वांचल पर खास फोकस कर जहां अपने जनाधार को मजबूत कर रहे हैं तो वहीं भोजपुरी कलाकारों को पार्टी से जोड़कर उसे जीत में तब्दील करने की योजना पर भी काम करना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कपीश कुमार श्रीवास्तव कहते हैं,"सपा का सदैव यह लक्ष्य रहा है कि चाहे वह हमारे लोक कलाकार हों अथवा भोजपुरी फिल्म के कलाकार हों या बालीवुड के कलाकार अथवा खिलाड़ी हों, कवि हों या साहित्यकार, वाद्य के विधा से जुड़े समस्त कलाकार एवं खिलाड़ियों का सदैव समाजवादी पार्टी ने सम्मान किया है। यश भारतीय सम्मान की शुरुआत भी समाजवादी पार्टी की सरकार ने कलाकारों के उत्साहवर्धन के लिए की थी। यह एक उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार की अनूठी पहल थी। " उसी क्रम में आज भी चाहे वह हमारे अदाकार हों, गीतकार हों, फिल्मकार हों, साहित्यकार हों अथवा खिलाड़ी हों, समाजवादी पार्टी सब के मान सम्मान की रक्षा भी करेंगी उनका उत्साहवर्धन भी करेंगी। पार्टी का टिकट भी देगी उन्हें, पार्टी से जुड़ेगी भी और उन्हें अपने पार्टी का पदाधिकारी भी बनायेगी। भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो उनके साथ मनोज तिवारी, गोरखपुर से सांसद रवि किशन, स्टार निरहुआ समेत कई कलाकार जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी भोजपुरी कलाकारों को अपने पाले में लाने में सफल होती है तो उससे कहीं ना कहीं भाजपा को नुकसान जरूर होगा। हालांकि भाजपा का मानना है कि अखिलेश यादव के मिशन पूर्वांचल से उनकी पार्टी को कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। यूपी के लिए यह कहा जाता है कि जिस पार्टी को पूर्वांचल के मतदाताओं का साथ मिल गया वह यूपी की सत्ता पर काबिज हो जाता है। यूपी के पचहत्तर जिलों में छब्बीस जिले पूर्वांचल में आते हैं । यहां विधानसभा की एक सौ छप्पन सीटें हैं, जबकि लोकसभा की उनतीस सीटें हैं। अगर दो हज़ार सत्रह के विधान सभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने एक सौ छप्पन में से एक सौ छः सीटों पर कब्जा किया था। वहीं समाजवादी पार्टी को अट्ठारह, बसपा को बारह, अपना दल को आठ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को चार, कांग्रेस को चार और निषाद पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी, जबकि तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इसी तरह दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उनतीस में से बाईस सीटें मिली थीं। सपा-बसपा गठबंधन को छः सीटों पर जीत मिली थी। यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। पूर्वांचल के लिए राजनीतिक दलों ने जो जातिगत आंकड़े बनाए हैं, उसके तहत हरिजन, मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। पटेल और राजभर कुछ सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। यूपी के चुनाव में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब पार्टियां कलाकारों का सहारा लेकर विजय हासिल करने की जुगत में लगी हों। इससे पहले बीजेपी, सपा, कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार या फिर सितारों को चुनावी रण में उतार कर जीत का दांव चलते रहे हैं। अब फिर से जब चुनाव की रणभेरी बज चुकी है तो जाहिर है जाति धर्म की राजनीति के बाद अब क्षेत्र वादी राजनीति भी उत्तर प्रदेश में पांव पसार रही है। |
कर्नाटक में वोटों की गिनती के बीच शिगांव में बीजेपी कार्यालय में एक सांप घुस गया, जिसे देखने के बाद पार्टी कार्यालय में हाहाकर मच गया। इस बीच रेस्क्यू कर सांप को बाहर निकाल लिया गया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडियो पर खूब वायरल हो रहा है।
बीजेपी कार्यालय में घुसा सांप (Image Credit : @ANI/Twitter)
पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर'
News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र!
News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र!
News Ki Pathshala । Sushant Sinha । हिंदू साक्षी-मुस्लिम साहिल. . जांच में लव जिहाद का सच क्या निकला ?
Sawal Public Ka । Navika Kumar । देशतोड़ इकबाल को पढ़ेंगे, सावरकर से तौबा?
Sawal Public Ka । Navika Kumar । देशतोड़ इकबाल को पढ़ेंगे, सावरकर से तौबा?
| कर्नाटक में वोटों की गिनती के बीच शिगांव में बीजेपी कार्यालय में एक सांप घुस गया, जिसे देखने के बाद पार्टी कार्यालय में हाहाकर मच गया। इस बीच रेस्क्यू कर सांप को बाहर निकाल लिया गया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडियो पर खूब वायरल हो रहा है। बीजेपी कार्यालय में घुसा सांप पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । भारत का वो नया सैटेलाइट. . . जो रखेगा दुश्मनों पर नज़र! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । हिंदू साक्षी-मुस्लिम साहिल. . जांच में लव जिहाद का सच क्या निकला ? Sawal Public Ka । Navika Kumar । देशतोड़ इकबाल को पढ़ेंगे, सावरकर से तौबा? Sawal Public Ka । Navika Kumar । देशतोड़ इकबाल को पढ़ेंगे, सावरकर से तौबा? |
सके
जिले के प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह और श्रीमती गांधी ने बहत्तर वेलनेस सेन्टर की आधारशिला भी रखी
कन्नौज में सुगन्ध और सुरस विकास केन्द्र के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ईकोफ्रेंडली भट्ठी बनायी है जिससे न सिफ पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिलेगी बल्कि लगभग पचास प्रतिशत ईधन की बचत भी होगी
इस ईकोफ्रेंडली भटठी का सबसे ज्यादा फायदा जिले के परम्परागत इत्र कारोबार को मिलेगा
कन्नौज में आज भी इत्र प्राचीन पद्धति
से तैयार किया जाता है
समाप्त | सके जिले के प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह और श्रीमती गांधी ने बहत्तर वेलनेस सेन्टर की आधारशिला भी रखी कन्नौज में सुगन्ध और सुरस विकास केन्द्र के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ईकोफ्रेंडली भट्ठी बनायी है जिससे न सिफ पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिलेगी बल्कि लगभग पचास प्रतिशत ईधन की बचत भी होगी इस ईकोफ्रेंडली भटठी का सबसे ज्यादा फायदा जिले के परम्परागत इत्र कारोबार को मिलेगा कन्नौज में आज भी इत्र प्राचीन पद्धति से तैयार किया जाता है समाप्त |
2019 की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म 'वॉर' रही जिसमें रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ लीड रोल में थे। नायिका की भूमिका वाणी कपूर ने निभाई थी जिनका फिल्म में ज्यादा बड़ा रोल नहीं था। वॉर हिट रही, लेकिन लगा कि वाणी कपूर को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा क्योंकि वाणी को लंबे समय से कोई फिल्म नहीं मिली।
आखिरकार वाणी के हाथ एक बड़ी फिल्म लग गई है। खबर है कि अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'बेल बॉटम' में वाणी रोमांस करती नजर आएंगी।
बेलबॉटम को अनाउंस हुए लंबा समय हो गया है और अब इस फिल्म का काम तेजी से होने वाला है। सूत्रों के अनुसार वाणी इस फिल्म में अक्षय की पत्नी का रोल अदा करती दिखाई देंगी।
सूत्रों के अनुसार इस रोल को लेकर वाणी बेहद उत्साहित हैं। जैसे ही उन्हें यह रोल ऑफर हुआ उन्होंने फौरन हां कर दी। आखिर अक्षय जैसे सितारे के साथ काम करने का मौका वे कैसे छोड़ सकती हैं।
वाणी लंबे समय से बॉलीवुड में हैं, लेकिन अब तक उनका करियर रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। वॉर के बाद उन्होंने निर्माता-निर्देशकों का ध्यान खींचा है। संभव है कि अब बेल बॉटम के बाद वे तेजी से आगे बढ़ें।
| दो हज़ार उन्नीस की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म 'वॉर' रही जिसमें रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ लीड रोल में थे। नायिका की भूमिका वाणी कपूर ने निभाई थी जिनका फिल्म में ज्यादा बड़ा रोल नहीं था। वॉर हिट रही, लेकिन लगा कि वाणी कपूर को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा क्योंकि वाणी को लंबे समय से कोई फिल्म नहीं मिली। आखिरकार वाणी के हाथ एक बड़ी फिल्म लग गई है। खबर है कि अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'बेल बॉटम' में वाणी रोमांस करती नजर आएंगी। बेलबॉटम को अनाउंस हुए लंबा समय हो गया है और अब इस फिल्म का काम तेजी से होने वाला है। सूत्रों के अनुसार वाणी इस फिल्म में अक्षय की पत्नी का रोल अदा करती दिखाई देंगी। सूत्रों के अनुसार इस रोल को लेकर वाणी बेहद उत्साहित हैं। जैसे ही उन्हें यह रोल ऑफर हुआ उन्होंने फौरन हां कर दी। आखिर अक्षय जैसे सितारे के साथ काम करने का मौका वे कैसे छोड़ सकती हैं। वाणी लंबे समय से बॉलीवुड में हैं, लेकिन अब तक उनका करियर रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। वॉर के बाद उन्होंने निर्माता-निर्देशकों का ध्यान खींचा है। संभव है कि अब बेल बॉटम के बाद वे तेजी से आगे बढ़ें। |
सारमेलादन - दूसरों को रुलाने वाले बेकार कष्ट देने वाले लूटपाट करने वाले मनुष्य यमदूतों से भयंकर पीड़ा पाते हुए यहां इस नरक में आकर पड़ते हैं। यहां भयंकर राक्षसी कुत्ते उस पापी को बार-बार फाड़कर खाते हैं तथा पीड़ा देते हैं। अवीचि - अपने जीवन में जो मनुष्य झूठ का आश्रय करते हैं तथा इस तरह करके झूठी साक्षी देते हैं अथवा किसी को ठगते हैं। किसी अच्छे काम में झूठ बोलकर बाधा डालते हैं ऐसे मनुष्य को अविचि नाम के इस नरक में जाना पड़ता है। इन लोगों को यहां ऊंचे पर्वत के ऊपर ले जाया जाता है तथा वहां से नीचा मूढ़ करके पत्थरों पर फेंक देते हैं। अयपान - नाम के इस नरक में आने वाले पापियों को खुद अपने जीवन में शराब वगैरह पीता हो तथा खाने की वस्तुओं का निरादर किया हो, वे इस नरक में आकर पड़ते हैं। यहां उनको यमदूत जमीन पर सुलाते हैं और उनके मुंह को खोलकर उमसें गर्म किया हुआ लोहे के सीसे का रस डालते हैं। क्षारकर्दम - जो मनुष्य अपने से ऊंचे तथा बड़े को अभिमान से नबते नहीं तथा मान नहीं देते और उनका अपमान करते हैं, वे मनुष्य मरने के बाद क्षारकर्दम नाम के इस नरक में आकर पड़ते हैं। रक्षोगण भोजन-पुरुषों का बिना गलती के वध करने वाले अथवा पुरुषमेध यज्ञ करके आडंबर से पुरुष का वध करने वाले इस नरक में आते हैं फिर जो स्त्री अत्यंत कामीपने के लिए पुरुषों का वध करती है अथवा जीवन नष्ट करती है तो वह भी इस नरक में आती है यहां स्वयं के नाश किए पुरुष ही राक्षस के स्वरूप में आकर उनको भयंकर शस्त्रों से पीड़ा देते हैं तथा उनका मांस खाते हैं और लहू पीते हैं। शूलप्रोत-जिस तरह बंसरी बजते ही सांप अपना संधान भूलकर मदारी का भरोसा करके उसके हाथ की पकड़ में आ जाता है इसी तरह किसी को भी किसी प्रकार के विश्वास में लेकर किसी भी निरपराधी जीव को पीड़ा दी जाए तो उन मनुष्यों को भी मरने के बाद शूलप्रोत नाम के नरक में ले जाकर यमदूत उसको बड़े-बड़े भालों में पोकर ऊंचा आकाश में टांगे रहते हैं यहां भयंकर चोंच वाले बड़े-बड़े पक्षी बार-बार उसको चोंच मार के हैरान कर देते हैं तथा अनेक प्रकार के दुख देते हैं। द्वंद्वशूक-जो मनुष्य जहरीले होते हैं और जो द्वेष के कारण से निरंतर दूसरे प्राणियों को अथवा मनुष्यों को अनेक प्रकार की पीड़ा देते हैं, ऐसे मनुष्य इस नरक में आकर पड़ते हैं। हे ऋषियो, यहां बड़े भयंकर अजगर तथा सर्प अपने अनेक मुखों से बार-बार उस मनुष्य को निगलते और फिर बाहर निकालते हैं। अंबर निरोधन-जिस किसी को गड्ढे में, गुफा में, अंधेरे के कुआं में अथवा ऐसे मकान में कैद करके रखने में आवे तो उस कर्म के बदले में मनुष्य को मरने के बाद अंबर निरोधन नाम के नरक में जाना पड़ता है। इस नरक में ओंड़े अंधेरे वाले बड़े-बड़े गड्ढे होते हैं। उनमें पड़े हुए पापियों को अग्नि की भयंकर लपटों और धुएं द्वारा कष्ट मिलता है। पर्यावर्त-अतिथि देवोभव इस धर्म सूत्र का उल्लंघन करके जो मानव अपने घर में आए हुए अतिथि का सत्कार नहीं करते उनका तिरस्कार करते हैं अथवा उनके प्रति खोटे वचन बोलते हैं वे मानव इस नरक में जाते हैं। इस नरक में पड़े हुए मानव को भयंकर बज्र समान कठोर चोंच वाले अनेक पक्षी इस पापी को चोंच द्वारा खाते हैं और भयंकर पीड़ा देते हैं।
| सारमेलादन - दूसरों को रुलाने वाले बेकार कष्ट देने वाले लूटपाट करने वाले मनुष्य यमदूतों से भयंकर पीड़ा पाते हुए यहां इस नरक में आकर पड़ते हैं। यहां भयंकर राक्षसी कुत्ते उस पापी को बार-बार फाड़कर खाते हैं तथा पीड़ा देते हैं। अवीचि - अपने जीवन में जो मनुष्य झूठ का आश्रय करते हैं तथा इस तरह करके झूठी साक्षी देते हैं अथवा किसी को ठगते हैं। किसी अच्छे काम में झूठ बोलकर बाधा डालते हैं ऐसे मनुष्य को अविचि नाम के इस नरक में जाना पड़ता है। इन लोगों को यहां ऊंचे पर्वत के ऊपर ले जाया जाता है तथा वहां से नीचा मूढ़ करके पत्थरों पर फेंक देते हैं। अयपान - नाम के इस नरक में आने वाले पापियों को खुद अपने जीवन में शराब वगैरह पीता हो तथा खाने की वस्तुओं का निरादर किया हो, वे इस नरक में आकर पड़ते हैं। यहां उनको यमदूत जमीन पर सुलाते हैं और उनके मुंह को खोलकर उमसें गर्म किया हुआ लोहे के सीसे का रस डालते हैं। क्षारकर्दम - जो मनुष्य अपने से ऊंचे तथा बड़े को अभिमान से नबते नहीं तथा मान नहीं देते और उनका अपमान करते हैं, वे मनुष्य मरने के बाद क्षारकर्दम नाम के इस नरक में आकर पड़ते हैं। रक्षोगण भोजन-पुरुषों का बिना गलती के वध करने वाले अथवा पुरुषमेध यज्ञ करके आडंबर से पुरुष का वध करने वाले इस नरक में आते हैं फिर जो स्त्री अत्यंत कामीपने के लिए पुरुषों का वध करती है अथवा जीवन नष्ट करती है तो वह भी इस नरक में आती है यहां स्वयं के नाश किए पुरुष ही राक्षस के स्वरूप में आकर उनको भयंकर शस्त्रों से पीड़ा देते हैं तथा उनका मांस खाते हैं और लहू पीते हैं। शूलप्रोत-जिस तरह बंसरी बजते ही सांप अपना संधान भूलकर मदारी का भरोसा करके उसके हाथ की पकड़ में आ जाता है इसी तरह किसी को भी किसी प्रकार के विश्वास में लेकर किसी भी निरपराधी जीव को पीड़ा दी जाए तो उन मनुष्यों को भी मरने के बाद शूलप्रोत नाम के नरक में ले जाकर यमदूत उसको बड़े-बड़े भालों में पोकर ऊंचा आकाश में टांगे रहते हैं यहां भयंकर चोंच वाले बड़े-बड़े पक्षी बार-बार उसको चोंच मार के हैरान कर देते हैं तथा अनेक प्रकार के दुख देते हैं। द्वंद्वशूक-जो मनुष्य जहरीले होते हैं और जो द्वेष के कारण से निरंतर दूसरे प्राणियों को अथवा मनुष्यों को अनेक प्रकार की पीड़ा देते हैं, ऐसे मनुष्य इस नरक में आकर पड़ते हैं। हे ऋषियो, यहां बड़े भयंकर अजगर तथा सर्प अपने अनेक मुखों से बार-बार उस मनुष्य को निगलते और फिर बाहर निकालते हैं। अंबर निरोधन-जिस किसी को गड्ढे में, गुफा में, अंधेरे के कुआं में अथवा ऐसे मकान में कैद करके रखने में आवे तो उस कर्म के बदले में मनुष्य को मरने के बाद अंबर निरोधन नाम के नरक में जाना पड़ता है। इस नरक में ओंड़े अंधेरे वाले बड़े-बड़े गड्ढे होते हैं। उनमें पड़े हुए पापियों को अग्नि की भयंकर लपटों और धुएं द्वारा कष्ट मिलता है। पर्यावर्त-अतिथि देवोभव इस धर्म सूत्र का उल्लंघन करके जो मानव अपने घर में आए हुए अतिथि का सत्कार नहीं करते उनका तिरस्कार करते हैं अथवा उनके प्रति खोटे वचन बोलते हैं वे मानव इस नरक में जाते हैं। इस नरक में पड़े हुए मानव को भयंकर बज्र समान कठोर चोंच वाले अनेक पक्षी इस पापी को चोंच द्वारा खाते हैं और भयंकर पीड़ा देते हैं। |
नई दिल्ली, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। कैस्ट्रोल इंडिया के सीएसआर उपक्रम के एक भाग-कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली के विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) अजय कश्यप ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कैस्ट्रोल सारथी मित्र ट्रेनिंग सेंटर की।
कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम आगामी 2 वर्षों में सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और ष्टि जांच के माध्यम से 40,000 से ज्यादा ट्रक चालकों पर सकारात्मक असर डालने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
दिल्ली में 2 ट्रेनिंग सेंटर- संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में तथा पंजाबी बाग ट्रांसपोर्ट सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशिक्षण दिया जाएगा। ट्रांसपोटरों, उनके संगठनों तथा दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ करीबी तालमेल बिठाकर यह कार्यक्रम चलाने का इरादा है।
सहयोगपूर्ण सीएसआर कार्यक्रमों को लेकर काम करने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन सिनर्जी को इसका इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर बनाया गया है, जो इन केंद्रों को संचालित करेगा।
कार्यक्रम का श्रीगणेश करते हुए कश्यप ने कैस्ट्रोल द्वारा हाथ में लिए गए इस उपक्रम को लेकर कहा, दुर्घटनामुक्त शहर बनाने के लिए मेरे अधिकारी अहर्निश काम करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसमें अद्भुत संकल्प और जबर्दस्त प्रयास की जरूरत होती है तथा इसके लिए सड़क का उपयोग करने वाले तमाम लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर उतनी ही अधिक और उतनी ही सक्रिय भागेदारी तथा जागरूकता होनी चाहिए। हमारे इन कार्यों की मदद करने में सीएसआर के तहत मिलने वाला कॉरपोरेट समर्थन बड़ा मायने रखता है और इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए वह संसाधन उपलब्ध करवाता है।
कैस्ट्रोल इंडिया की बोर्ड सीएसआर समिति के सदस्य एवं प्रबंध निदेशक ओमर डोरमेन ने कहा कि कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम भारत में सड़क सुरक्षा का प्रचार-प्रसार करने की दिशा में कैस्ट्रोल द्वारा किए जा रहे प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम का ध्यान ट्रक चालकों पर केंद्रित है, जो हमारे समाज के अनसंग हीरो हैं।
| नई दिल्ली, छब्बीस सितम्बर । कैस्ट्रोल इंडिया के सीएसआर उपक्रम के एक भाग-कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली के विशेष पुलिस आयुक्त अजय कश्यप ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कैस्ट्रोल सारथी मित्र ट्रेनिंग सेंटर की। कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम आगामी दो वर्षों में सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और ष्टि जांच के माध्यम से चालीस,शून्य से ज्यादा ट्रक चालकों पर सकारात्मक असर डालने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। दिल्ली में दो ट्रेनिंग सेंटर- संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में तथा पंजाबी बाग ट्रांसपोर्ट सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशिक्षण दिया जाएगा। ट्रांसपोटरों, उनके संगठनों तथा दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ करीबी तालमेल बिठाकर यह कार्यक्रम चलाने का इरादा है। सहयोगपूर्ण सीएसआर कार्यक्रमों को लेकर काम करने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन सिनर्जी को इसका इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर बनाया गया है, जो इन केंद्रों को संचालित करेगा। कार्यक्रम का श्रीगणेश करते हुए कश्यप ने कैस्ट्रोल द्वारा हाथ में लिए गए इस उपक्रम को लेकर कहा, दुर्घटनामुक्त शहर बनाने के लिए मेरे अधिकारी अहर्निश काम करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसमें अद्भुत संकल्प और जबर्दस्त प्रयास की जरूरत होती है तथा इसके लिए सड़क का उपयोग करने वाले तमाम लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर उतनी ही अधिक और उतनी ही सक्रिय भागेदारी तथा जागरूकता होनी चाहिए। हमारे इन कार्यों की मदद करने में सीएसआर के तहत मिलने वाला कॉरपोरेट समर्थन बड़ा मायने रखता है और इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए वह संसाधन उपलब्ध करवाता है। कैस्ट्रोल इंडिया की बोर्ड सीएसआर समिति के सदस्य एवं प्रबंध निदेशक ओमर डोरमेन ने कहा कि कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम भारत में सड़क सुरक्षा का प्रचार-प्रसार करने की दिशा में कैस्ट्रोल द्वारा किए जा रहे प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। कैस्ट्रोल सारथी मित्र कार्यक्रम का ध्यान ट्रक चालकों पर केंद्रित है, जो हमारे समाज के अनसंग हीरो हैं। |
ALLAHABAD: करेली स्थित जीटीबी नगर के लोग पिछले करीब एक महीने से अधाधुंध बिजली कटौती से त्रस्त हैं। आए दिन बिजली गायब हो जाती है और 48 घंटे बाद आती है। फ्लक्चुएशन की स्थिति ये है कि दर्जनों घरों के बल्ब फ्यूज हो चुके हैं, वहीं इलेक्ट्रानिक उपकरण भी खराब हो रहे हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी खामी को दूर नहीं किया जा रहा है। दो दिन से तो पूरी तरह से बिजली ठप है, जिससे परेशान लोगों ने अब जिलाधिकारी व पूर्वाचल विद्युत वितरण खंड के एमडी से मदद की गुहार लगाई है।
करेलाबाग सब स्टेशन से पहलवान तिराहा पर लगे ट्रांसफार्मर से गुरुतेग बहादुर पार्क व बी ब्लॉक के इलाके में सप्लाई दी जाती है, लेकिन आए दिन खराबी के चलते इस इलाके के एक हजार से अधिक घरों को बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली आपूर्ति ठप होने से लोगों को पानी के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।
शनिवार की रात साढ़े ग्यारह बजे के बाद बिजली गुल हो गई। इसके बाद लगातार फ्लक्चुएट होती रही, लोगों ने सब स्टेशन फोन लगाया तो नम्बर स्विच आफ मिला। इस बीच बिजली फ्लक्चुएशन के चलते कई घरों के बल्ब फ्यूज हो गए। वहीं इलेक्ट्रानिक उपकरण खराब हो गए। रविवार सुबह आक्रोशित लोग सब स्टेशन पहुंचे इसके बाद फाल्ट बनाया गया। इलाके के रहने वाले शोएब, ताहिर ने आरोप लगाया की हर दूसरे दिन यहां की बिजली रात 12 बजे उड़ जाती है और अगले दिन सुबह या दोपहर बहाल होती है। कर्मचारियों की लापरवाही से आये दिन पहलवान तिराहे के ट्रांसफार्मर में खराबी बनी रहती है। इलाके के काशिम, जावेद, राकेश, गुड्डू, सर्फराज ने बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत हुई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। लोगों ने आपूर्ति में सुधार की गुहार जिलाधिकारी संजय कुमार, पूर्वाचल विद्युत वितरण निगम के एमडी एके सिंह व मुख्य अभियंता इलाहाबाद, अधिशासी अभियंता कल्याणी देवी से लगाई है।
| ALLAHABAD: करेली स्थित जीटीबी नगर के लोग पिछले करीब एक महीने से अधाधुंध बिजली कटौती से त्रस्त हैं। आए दिन बिजली गायब हो जाती है और अड़तालीस घंटाटे बाद आती है। फ्लक्चुएशन की स्थिति ये है कि दर्जनों घरों के बल्ब फ्यूज हो चुके हैं, वहीं इलेक्ट्रानिक उपकरण भी खराब हो रहे हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी खामी को दूर नहीं किया जा रहा है। दो दिन से तो पूरी तरह से बिजली ठप है, जिससे परेशान लोगों ने अब जिलाधिकारी व पूर्वाचल विद्युत वितरण खंड के एमडी से मदद की गुहार लगाई है। करेलाबाग सब स्टेशन से पहलवान तिराहा पर लगे ट्रांसफार्मर से गुरुतेग बहादुर पार्क व बी ब्लॉक के इलाके में सप्लाई दी जाती है, लेकिन आए दिन खराबी के चलते इस इलाके के एक हजार से अधिक घरों को बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली आपूर्ति ठप होने से लोगों को पानी के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। शनिवार की रात साढ़े ग्यारह बजे के बाद बिजली गुल हो गई। इसके बाद लगातार फ्लक्चुएट होती रही, लोगों ने सब स्टेशन फोन लगाया तो नम्बर स्विच आफ मिला। इस बीच बिजली फ्लक्चुएशन के चलते कई घरों के बल्ब फ्यूज हो गए। वहीं इलेक्ट्रानिक उपकरण खराब हो गए। रविवार सुबह आक्रोशित लोग सब स्टेशन पहुंचे इसके बाद फाल्ट बनाया गया। इलाके के रहने वाले शोएब, ताहिर ने आरोप लगाया की हर दूसरे दिन यहां की बिजली रात बारह बजे उड़ जाती है और अगले दिन सुबह या दोपहर बहाल होती है। कर्मचारियों की लापरवाही से आये दिन पहलवान तिराहे के ट्रांसफार्मर में खराबी बनी रहती है। इलाके के काशिम, जावेद, राकेश, गुड्डू, सर्फराज ने बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत हुई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। लोगों ने आपूर्ति में सुधार की गुहार जिलाधिकारी संजय कुमार, पूर्वाचल विद्युत वितरण निगम के एमडी एके सिंह व मुख्य अभियंता इलाहाबाद, अधिशासी अभियंता कल्याणी देवी से लगाई है। |
Odisha News: ओडिशा में मंगलवार को एक और रूसी नागरिक की मौत हो गई। बीते 15 दिनों में यह तीसरा मामला सामने आया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार रूसी युवक का शव जगतसिंहपुर जिले के पारादीप बंदरगाह पर लंगर डाले जहाज में पाया गया है। युवक की पहचान 51 वर्षीय मिलाकोव सर्गेई के रूप में हुई है। पुलिस को सुबह करीब 4 बजकर 30 मिनट पर जहाज के चेंबर में व्यक्ति का शव मृत मिला।
हालांकि पुलिस मौत के कारणों का पता लगा रही है। पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष पी एल हरानंद ने बताया कि रूसी इंजीनियर की मौत तत्काल कैसे हुई इसकी जांच चल रही है। बता दें कि इसके पहले दक्षिणी ओडिशा के रायगडा शहर में दिसंबर महीने में दो रूसी पर्यटकों की मौत की खबर सामने आई थी। 24 दिसंबर को खबर आई थी कि एक रूसी पर्यटक पावेल एंटोव की कथित तौर पर होटल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। सांसद एंतोव अपना 65वां जन्मदिन मनाने के लिए भारत आए थे। वहीं उनके दोस्त व्लादिमीर बिडेनोव इसके पहले 22 दिसंबर को अपने कमरे में मृत मिले थे। वह होटल की पहली मंजिल के कमरे में बेहोशी हालत में थे और उनके पास शराब की कुछ खाली बोतलें भी पड़ी हुई थीं। दोनों मामलों की जांच ओडिशा द्वारा की जा रही है। इसी बीच एक और पर्यटक की मौत की खबर सामने आ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि आज जो शव मिला है वह कार्गो शिप के क्रू मेम्बर में से एक था। मिलाकोव सर्गेई नाम का युवक कार्गो शिप जहाज 'एमबी अलदना' का चीफ इंजीनियर था। जानकारी अनुसार जहाज पारादीप के रास्ते बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह से होते हुए मंबई जा रहा था। इसी जहाज में सुबह करीब 4. 30 बजे रूसी नागरिक का शव पाया गया है।
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| Odisha News: ओडिशा में मंगलवार को एक और रूसी नागरिक की मौत हो गई। बीते पंद्रह दिनों में यह तीसरा मामला सामने आया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार रूसी युवक का शव जगतसिंहपुर जिले के पारादीप बंदरगाह पर लंगर डाले जहाज में पाया गया है। युवक की पहचान इक्यावन वर्षीय मिलाकोव सर्गेई के रूप में हुई है। पुलिस को सुबह करीब चार बजकर तीस मिनट पर जहाज के चेंबर में व्यक्ति का शव मृत मिला। हालांकि पुलिस मौत के कारणों का पता लगा रही है। पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष पी एल हरानंद ने बताया कि रूसी इंजीनियर की मौत तत्काल कैसे हुई इसकी जांच चल रही है। बता दें कि इसके पहले दक्षिणी ओडिशा के रायगडा शहर में दिसंबर महीने में दो रूसी पर्यटकों की मौत की खबर सामने आई थी। चौबीस दिसंबर को खबर आई थी कि एक रूसी पर्यटक पावेल एंटोव की कथित तौर पर होटल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। सांसद एंतोव अपना पैंसठवां जन्मदिन मनाने के लिए भारत आए थे। वहीं उनके दोस्त व्लादिमीर बिडेनोव इसके पहले बाईस दिसंबर को अपने कमरे में मृत मिले थे। वह होटल की पहली मंजिल के कमरे में बेहोशी हालत में थे और उनके पास शराब की कुछ खाली बोतलें भी पड़ी हुई थीं। दोनों मामलों की जांच ओडिशा द्वारा की जा रही है। इसी बीच एक और पर्यटक की मौत की खबर सामने आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि आज जो शव मिला है वह कार्गो शिप के क्रू मेम्बर में से एक था। मिलाकोव सर्गेई नाम का युवक कार्गो शिप जहाज 'एमबी अलदना' का चीफ इंजीनियर था। जानकारी अनुसार जहाज पारादीप के रास्ते बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह से होते हुए मंबई जा रहा था। इसी जहाज में सुबह करीब चार. तीस बजे रूसी नागरिक का शव पाया गया है। संबंधित खबरेंः |
ददाहू/श्रीरेणुकाजी - तहसील ददाहू बाजार में बढ़ते हुए यातायात तथा बढ़ते हुए ट्रैफिक दबाव को दुरुस्त करने के लिए मंगलवार को तहसीलदार ददाहू चेतन चौहान की अगवाई में पंचायत प्रतिनिधियों तथा लोक निर्माण, पुलिस तथा वरिष्ठ नागरिक सभा ने ददाहू बाजार का साइट का दौरा कर चार स्थानों पर लोडिंग-अनलोडिंग स्थान चिन्हित किए हैं। इसके अलावा ददाहू बाजार में पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बाजार में यलो लाइन लगाने का भी निर्णय लिया गया है। ददाहू बाजार को अब बस अड्डा ददाहू से एसबीआई तक नो पार्किंग जोन क्षेत्र घोषित करने के लिए प्रारूप उपायुक्त सिरमौर को भेजा जा रहा है। गौर हो कि ददाहू बाजार में दिनोदिन बढ़ रही यातायात समस्या तथा हर कहीं वाहनों को पार्क कर देने से पैदल चलने वालों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, जिसके चलते ददाहू पंचायत प्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ नागरिक सभा ने तहसीलदार ददाहू के माध्यम से इस समस्या को हल करने के लिए मसौदा तैयार किया है। यतहसीलदार ददाहू चेतन चौहान, प्रधान ग्राम पंचायत शकुंतला देवी, वरिष्ठ नागरिक एवं पेंशनर सभा के अध्यक्ष हरिराम शर्मा ने बताया कि ददाहू बाजार में होटल हिमलोक, जगराम होटल, गिरि ब्यू होटल, आर्य मेडिकल स्टोर तथा रेणुका मेडिकल स्टोर के पास चार स्थानों पर लोडिंग-अनलोडिंग वाहनों के स्थान चयनित किए गए हैं, जिसका मसौदा उपायुक्त सिरमौर को भेजा जा रहा है। वहीं तहसीलदार चेतन चौहान ने बताया कि बस अड्डा ददाहू से एसबीआई तक के स्थान को नो पार्किंग जोन घोषित करने के लिए भी प्रापोजल उपायुक्त सिरमौर को भेजी है।
| ददाहू/श्रीरेणुकाजी - तहसील ददाहू बाजार में बढ़ते हुए यातायात तथा बढ़ते हुए ट्रैफिक दबाव को दुरुस्त करने के लिए मंगलवार को तहसीलदार ददाहू चेतन चौहान की अगवाई में पंचायत प्रतिनिधियों तथा लोक निर्माण, पुलिस तथा वरिष्ठ नागरिक सभा ने ददाहू बाजार का साइट का दौरा कर चार स्थानों पर लोडिंग-अनलोडिंग स्थान चिन्हित किए हैं। इसके अलावा ददाहू बाजार में पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बाजार में यलो लाइन लगाने का भी निर्णय लिया गया है। ददाहू बाजार को अब बस अड्डा ददाहू से एसबीआई तक नो पार्किंग जोन क्षेत्र घोषित करने के लिए प्रारूप उपायुक्त सिरमौर को भेजा जा रहा है। गौर हो कि ददाहू बाजार में दिनोदिन बढ़ रही यातायात समस्या तथा हर कहीं वाहनों को पार्क कर देने से पैदल चलने वालों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, जिसके चलते ददाहू पंचायत प्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ नागरिक सभा ने तहसीलदार ददाहू के माध्यम से इस समस्या को हल करने के लिए मसौदा तैयार किया है। यतहसीलदार ददाहू चेतन चौहान, प्रधान ग्राम पंचायत शकुंतला देवी, वरिष्ठ नागरिक एवं पेंशनर सभा के अध्यक्ष हरिराम शर्मा ने बताया कि ददाहू बाजार में होटल हिमलोक, जगराम होटल, गिरि ब्यू होटल, आर्य मेडिकल स्टोर तथा रेणुका मेडिकल स्टोर के पास चार स्थानों पर लोडिंग-अनलोडिंग वाहनों के स्थान चयनित किए गए हैं, जिसका मसौदा उपायुक्त सिरमौर को भेजा जा रहा है। वहीं तहसीलदार चेतन चौहान ने बताया कि बस अड्डा ददाहू से एसबीआई तक के स्थान को नो पार्किंग जोन घोषित करने के लिए भी प्रापोजल उपायुक्त सिरमौर को भेजी है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पदक तालिका अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित है और आईओसी के अपने प्रकाशित पदक तालिका में सम्मेलन के अनुरूप है। डिफ़ॉल्ट रूप से, टेबल को देश के एथलीटों ने जीता जाने वाले स्वर्ण पदकों की संख्या के अनुसार आदेश दिया है; एक राष्ट्र एक एनओसी द्वारा प्रतिनिधित्व एक इकाई है। रजत पदक की संख्या को ध्यान में रखा जाता है और उसके बाद कांस्य पदक की संख्या। यदि राष्ट्र अभी भी बांध रहे हैं, तो समान रैंकिंग दी गई है और उन्हें वर्णानुक्रम में सूचीबद्ध किया गया है। दो-पुरुष बॉबलेय प्रतियोगिता में, एक टाई का मतलब है कि दो स्वर्ण पदक दिए गए, इसलिए इस आयोजन के लिए कोई रजत पदक नहीं दिया गया था। पुरुषों की सुपर जी स्कीइंग प्रतियोगिता में दूसरे के लिए एक टाई का मतलब था कि रजत पदक की एक जोड़ी बाहर दी गई थी, इसलिए इस समारोह के लिए कोई कांस्य पदक नहीं दिया गया था। चार व्यक्ति बॉब्सलेय में, तीसरे के लिए एक टाई के परिणामस्वरूप दो कांस्य पदक प्रदान किए गए। इन संबंधों के कारण, सम्मानित स्वर्ण पदकों की संख्या रजत या कांस्य पदक की तुलना में एक थी। स्नोबोर्डिंग में, कनाडा के रॉस रिबगलिति ने पुरुषों की विशालकाय स्लालॉम में स्वर्ण पदक जीता, लेकिन मैरिजुआना के लिए सकारात्मक जांच के बाद आईओसी द्वारा इसे संक्षिप्त रूप से छीन लिया गया था। कैनेडियन ओलंपिक संघ ने एक अपील दायर करने के बाद, हालांकि, आईओसी के निर्णय को उलट कर दिया गया था। मेजबान राष्ट्र (जापान) . चेक गणराज्य ने पहली बार ओलंपिक खेलों में 1994 में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भाग लिया था, और तब से हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लिया है। 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विघटन से पहले, चेक एथलीटों ने ओलंपिक में 1920 से 1992 तक चेकोस्लोवाकिया के रूप में और 1900 से 1912 तक बोहेमिया के रूप में भाग लिया था। चेक गणराज्य के एथलीट ने ग्रीष्मकालीन खेलों में कुल 56 पदक जीते हैं, कैनोइंग, एथलेटिक्स और शूटिंग शीर्ष पदक के उत्पादन वाले खेल के रूप में। राष्ट्र ने शीतकालीन खेलों में 24 पदक जीते हैं, ज्यादातर क्रॉस-कंट्री स्कीइंग, स्पीड स्केटिंग और अंततः लोकप्रिय आइस हॉकी में। पदक के मामले में सबसे सजाया चेक ओलंपियन के बाद चेक-चेकोस्लोवाक काल में क्रॉस-कंट्री स्कीयर केटिरिना न्यूमोनोवा (1998 और 2006 के बीच 6 पदक) हैं। चेक गणराज्य के लिए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति चेक ओलंपिक समिति है, जिसे 1899 में स्थापित किया गया था और 1993 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा अपने वर्तमान रूप में मान्यता प्राप्त थी। .
1998 शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
1998 शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका 1 संबंध नहीं है और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण 14 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (1 + 14)।
यह लेख 1998 शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पदक तालिका अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित है और आईओसी के अपने प्रकाशित पदक तालिका में सम्मेलन के अनुरूप है। डिफ़ॉल्ट रूप से, टेबल को देश के एथलीटों ने जीता जाने वाले स्वर्ण पदकों की संख्या के अनुसार आदेश दिया है; एक राष्ट्र एक एनओसी द्वारा प्रतिनिधित्व एक इकाई है। रजत पदक की संख्या को ध्यान में रखा जाता है और उसके बाद कांस्य पदक की संख्या। यदि राष्ट्र अभी भी बांध रहे हैं, तो समान रैंकिंग दी गई है और उन्हें वर्णानुक्रम में सूचीबद्ध किया गया है। दो-पुरुष बॉबलेय प्रतियोगिता में, एक टाई का मतलब है कि दो स्वर्ण पदक दिए गए, इसलिए इस आयोजन के लिए कोई रजत पदक नहीं दिया गया था। पुरुषों की सुपर जी स्कीइंग प्रतियोगिता में दूसरे के लिए एक टाई का मतलब था कि रजत पदक की एक जोड़ी बाहर दी गई थी, इसलिए इस समारोह के लिए कोई कांस्य पदक नहीं दिया गया था। चार व्यक्ति बॉब्सलेय में, तीसरे के लिए एक टाई के परिणामस्वरूप दो कांस्य पदक प्रदान किए गए। इन संबंधों के कारण, सम्मानित स्वर्ण पदकों की संख्या रजत या कांस्य पदक की तुलना में एक थी। स्नोबोर्डिंग में, कनाडा के रॉस रिबगलिति ने पुरुषों की विशालकाय स्लालॉम में स्वर्ण पदक जीता, लेकिन मैरिजुआना के लिए सकारात्मक जांच के बाद आईओसी द्वारा इसे संक्षिप्त रूप से छीन लिया गया था। कैनेडियन ओलंपिक संघ ने एक अपील दायर करने के बाद, हालांकि, आईओसी के निर्णय को उलट कर दिया गया था। मेजबान राष्ट्र . चेक गणराज्य ने पहली बार ओलंपिक खेलों में एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भाग लिया था, और तब से हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लिया है। एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में चेकोस्लोवाकिया के विघटन से पहले, चेक एथलीटों ने ओलंपिक में एक हज़ार नौ सौ बीस से एक हज़ार नौ सौ बानवे तक चेकोस्लोवाकिया के रूप में और एक हज़ार नौ सौ से एक हज़ार नौ सौ बारह तक बोहेमिया के रूप में भाग लिया था। चेक गणराज्य के एथलीट ने ग्रीष्मकालीन खेलों में कुल छप्पन पदक जीते हैं, कैनोइंग, एथलेटिक्स और शूटिंग शीर्ष पदक के उत्पादन वाले खेल के रूप में। राष्ट्र ने शीतकालीन खेलों में चौबीस पदक जीते हैं, ज्यादातर क्रॉस-कंट्री स्कीइंग, स्पीड स्केटिंग और अंततः लोकप्रिय आइस हॉकी में। पदक के मामले में सबसे सजाया चेक ओलंपियन के बाद चेक-चेकोस्लोवाक काल में क्रॉस-कंट्री स्कीयर केटिरिना न्यूमोनोवा हैं। चेक गणराज्य के लिए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति चेक ओलंपिक समिति है, जिसे एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे में स्थापित किया गया था और एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा अपने वर्तमान रूप में मान्यता प्राप्त थी। . एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण आम में शून्य बातें हैं । एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका एक संबंध नहीं है और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण चौदह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे शीतकालीन ओलंपिक पदक तालिका और चेक गणराज्य ओलंपिक विवरण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
करीब 6 महीनों से कोरोना को लेकर चीन खूब आलोचना झेल रहा है। कोरोना को लेकर लगातार चीन के वुहान शहर से खबरें आती रहीं है कि, कोरोना यहाीं से फैला है। यही कारण है कि, चीन और अमेरिका इक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गये क्योंकि कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में फैलाई है।
कोरोना के कहर के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिसमे दावा किया गया है कि, कोरोना चीन से नहीं बल्कि फ्रांस से फैला है। फ्रांस के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक टीम ने दावा किया है यूरोप में पहला कोरोना वायरस का केस जनवरी में नहीं आया था। यह उससे भी दो महीने पहले आया था। लेकिन तब उस समय डॉक्टर इस बीमारी और उसके लक्षणों को समझ नहीं पाए थे। अगर ये दावा सच निकला तो हो सकता है कि पूरी दुनिया का ध्यान चीन और वुहान से हटकर फ्रांस की तरफ चला जाए।
फ्रांस के एक अस्पताल ने नवंबर से दिसंबर के बीच अस्पतालों में फ्लू की शिकायत लेकर आए 2,500 से ज्यादा लोगों की एक्स-रे रिपोर्ट का अध्ययन किया है। अध्ययन में चौकांने वाला खुलासा किया गया कि केवल नवंबर में ही दो एक्स-रे रिपोर्ट ऐसी आईं, जिसमें कोरोना की पुष्टि हुई है।
ये बात अलग है कि उस समय डॉक्टर्स को कोरोना वायरस को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। उत्तर-पूर्व फ्रांस के कॉलमार में स्थित अल्बर्ट श्वित्जर अस्पताल के डॉक्टर माइकल श्मिट और उनकी टीम ने दावा किया है कि अभी तक यूरोप के जिन देशों में कोरोना के मामले जीरो माने जा रहे थे, वो सारे दावे गलत साबित हो सकते हैं।
फ्रांस के डॉक्टरों की टीम का दावा है कि ऐसा हो सकता है कि चीन में कोरोना का पहला मामला कभी आया ही ना हो क्योंकि यह संक्रमण नवबंर तक यूरोप में दस्तक दे चुका था।
हालांकि फ्रांस में कोरोना के संक्रमित मामले 1,90,000 के करीब हैं और 28,833 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित देशों में फ्रांस आठवें नंबर पर है।
कोलमार के अल्बर्ट श्वित्जर अस्पताल के डॉ. माइकल श्मिट और उनकी टीम ने दावा किया है कि अभी तक जिन्हें यूरोप के देशों में केस जीरो माना जा रहा है, वो दावे गलत भी साबित हो सकते हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया था कि वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण नवंबर में ही फैला था। डॉ. माइकल श्मिट कहते हैं कि सबसे पहले मरीज का पता लगाने के बाद बीमारी के फैलने और उसके प्रभाव का अध्ययन आसानी से हो सकता है। साथ ही वैक्सीन बनाने में भी मदद मिलेगी।
तमाम कोशिसों के बाद कोरोना की दवाई नहीं बन सकी है। जिसकी वजह से कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। और ऐसा कब तक होता रहेगा पता नहीं।
| करीब छः महीनों से कोरोना को लेकर चीन खूब आलोचना झेल रहा है। कोरोना को लेकर लगातार चीन के वुहान शहर से खबरें आती रहीं है कि, कोरोना यहाीं से फैला है। यही कारण है कि, चीन और अमेरिका इक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गये क्योंकि कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में फैलाई है। कोरोना के कहर के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिसमे दावा किया गया है कि, कोरोना चीन से नहीं बल्कि फ्रांस से फैला है। फ्रांस के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक टीम ने दावा किया है यूरोप में पहला कोरोना वायरस का केस जनवरी में नहीं आया था। यह उससे भी दो महीने पहले आया था। लेकिन तब उस समय डॉक्टर इस बीमारी और उसके लक्षणों को समझ नहीं पाए थे। अगर ये दावा सच निकला तो हो सकता है कि पूरी दुनिया का ध्यान चीन और वुहान से हटकर फ्रांस की तरफ चला जाए। फ्रांस के एक अस्पताल ने नवंबर से दिसंबर के बीच अस्पतालों में फ्लू की शिकायत लेकर आए दो,पाँच सौ से ज्यादा लोगों की एक्स-रे रिपोर्ट का अध्ययन किया है। अध्ययन में चौकांने वाला खुलासा किया गया कि केवल नवंबर में ही दो एक्स-रे रिपोर्ट ऐसी आईं, जिसमें कोरोना की पुष्टि हुई है। ये बात अलग है कि उस समय डॉक्टर्स को कोरोना वायरस को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। उत्तर-पूर्व फ्रांस के कॉलमार में स्थित अल्बर्ट श्वित्जर अस्पताल के डॉक्टर माइकल श्मिट और उनकी टीम ने दावा किया है कि अभी तक यूरोप के जिन देशों में कोरोना के मामले जीरो माने जा रहे थे, वो सारे दावे गलत साबित हो सकते हैं। फ्रांस के डॉक्टरों की टीम का दावा है कि ऐसा हो सकता है कि चीन में कोरोना का पहला मामला कभी आया ही ना हो क्योंकि यह संक्रमण नवबंर तक यूरोप में दस्तक दे चुका था। हालांकि फ्रांस में कोरोना के संक्रमित मामले एक,नब्बे,शून्य के करीब हैं और अट्ठाईस,आठ सौ तैंतीस लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित देशों में फ्रांस आठवें नंबर पर है। कोलमार के अल्बर्ट श्वित्जर अस्पताल के डॉ. माइकल श्मिट और उनकी टीम ने दावा किया है कि अभी तक जिन्हें यूरोप के देशों में केस जीरो माना जा रहा है, वो दावे गलत भी साबित हो सकते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया था कि वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण नवंबर में ही फैला था। डॉ. माइकल श्मिट कहते हैं कि सबसे पहले मरीज का पता लगाने के बाद बीमारी के फैलने और उसके प्रभाव का अध्ययन आसानी से हो सकता है। साथ ही वैक्सीन बनाने में भी मदद मिलेगी। तमाम कोशिसों के बाद कोरोना की दवाई नहीं बन सकी है। जिसकी वजह से कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। और ऐसा कब तक होता रहेगा पता नहीं। |
शादी के बाद पहली बार सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी को राजस्थान के जैसलमेर एयरपोर्ट पर साथ देखा गया. वहीं मुंबई एयरपोर्ट पर शाहिद कपूर को उनकी पत्नी मीरा राजपूत के साथ देखा गया.
कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा शादी के बाद पहली बार जैसलमेर एयरपोर्ट पर साथ नज़र आए. (फोटोः वरिंदर चावला)
कियारा आडवाणी ब्लैक को-ऑर्ड सेट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं, जिसे उन्होंने प्रिंटेड स्टोल के साथ लेयर किया था. (फोटोः वरिंदर चावला)
वहीं सिद्धार्थ मल्होत्रा जैकेट और डेनिम में काफी हैंडसम लग रहे थे. (फोटोः वरिंदर चावला)
इस दौरान न्यूली वेड कपल काफी खुश नज़र आया. (फोटोः वरिंदर चावला)
कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी में शामिल हुईं जूही चावला को जैसलमेर एयरपोर्ट पर देखा गया. (फोटोः वरिंदर चावला)
करण जौहर भी जैसलमेर एयरपोर्ट पर नज़र आए. (फोटोः वरिंदर चावला)
वहीं शाहिद कपूर और पत्नी मीरा राजपूत को मंगलवार रात मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया. (फोटोः वरिंदर चावला)
शाहिद कपूर और पत्नी मीरा राजपूत जैसलमेर से लौटे थे, जहां उन्होंने कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी में शिरकत की थी. (फोटोः वरिंदर चावला)
जैसलमेर एयरपोर्ट पर अरमान जैन और पत्नी अनीसा मल्होत्रा को साथ देखा गया. (फोटोः वरिंदर चावला)
'KGF 2' के स्टार यश को मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया. (फोटोः वरिंदर चावला)
वहीं जैसलमेर में मोहनलाल को भी देखा गया. हालांकि, वह वहां एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के सिलसिले में गए थे. (फोटोः वरिंदर चावला)
| शादी के बाद पहली बार सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी को राजस्थान के जैसलमेर एयरपोर्ट पर साथ देखा गया. वहीं मुंबई एयरपोर्ट पर शाहिद कपूर को उनकी पत्नी मीरा राजपूत के साथ देखा गया. कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा शादी के बाद पहली बार जैसलमेर एयरपोर्ट पर साथ नज़र आए. कियारा आडवाणी ब्लैक को-ऑर्ड सेट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं, जिसे उन्होंने प्रिंटेड स्टोल के साथ लेयर किया था. वहीं सिद्धार्थ मल्होत्रा जैकेट और डेनिम में काफी हैंडसम लग रहे थे. इस दौरान न्यूली वेड कपल काफी खुश नज़र आया. कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी में शामिल हुईं जूही चावला को जैसलमेर एयरपोर्ट पर देखा गया. करण जौहर भी जैसलमेर एयरपोर्ट पर नज़र आए. वहीं शाहिद कपूर और पत्नी मीरा राजपूत को मंगलवार रात मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया. शाहिद कपूर और पत्नी मीरा राजपूत जैसलमेर से लौटे थे, जहां उन्होंने कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी में शिरकत की थी. जैसलमेर एयरपोर्ट पर अरमान जैन और पत्नी अनीसा मल्होत्रा को साथ देखा गया. 'KGF दो' के स्टार यश को मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया. वहीं जैसलमेर में मोहनलाल को भी देखा गया. हालांकि, वह वहां एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के सिलसिले में गए थे. |
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर पंजाब के फिरोजपुर आएंगे। पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा फिलहाल दिन और समय तय नहीं हुआ लेकिन पीएम माेदी पीजीआइ प्रोजेक्ट के लिए फिरोजपुर आएंगे। प्रधानमंत्री के फिरोजपुर आने से एक बार फिर लोगों की उम्मीदें जगी है। नशे और बेरोजगारी से जूझ रहे जिले के लोगों को पीजीआइ प्रोजेक्ट से रोजगार मिलने से राहत मिलेगी। गाैरतलब है कि 5 जनवरी 2022 को पीजीआइ के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हाेने आ रहे प्रधानमंत्री के समाराेह काे लेकर बड़ा बवाल हाे गया था। मौसम खराब होने कारण पीएम माेदी का काफिला सड़क से गुजर रहा था तो किसानों ने गांव प्यारेआना में सड़क पर ट्रैफिक जाम कर दिया। सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री का काफिला 20 मिनट के इंतजार के बाद वापस लौट गया था।
हालांकि पुंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह 16 फरवरी को फिरोजपुर पहुंचे तो उन्होंने फिर से प्रधानमंत्री के आने का आश्वासन दिया था। भाजपा नेताओं की मानें तो अगर प्रधानमंत्री आते हैं तो पीजीआइ के अलावा फिरोजपुर के लिए 200 करोड़ की ग्रांट जरूर मिलती। इससे पहले वह हुसैनीवाला आए थे तो अमृत योजना के तहत वाटर सप्लाई और सीवरेज लाइनों के लिए 150 करोड़ दे गए थे। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि जब भी उनका कार्यक्रम तय हो जाएगा उसकी घोषणा कर दी जाएगी।
पिछली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लौटने से जिले को नुकसान हुआ है। माेदी देश और सीमा से सटे जिलों का विकास चाहते है। चंद लोगों ने रास्ता जाम कर उनको लौटा दिया था। ये बड़े गर्व का मौका था जब वे फिरोजपुर पहुंच रहे थे। अब तक तो पीजीआइ की इमारत आधे से ज्यादा तैयार हो जाती। एक बार फिर वह फिरोजपुर आएंगे। पिछली बार उनका कार्यक्रम तय होने में चार महीने का समय लग गया था। उनको पूरा देश देखना है। इस बार वे आए तो फिरोजपुर की कायाकल्प करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। सुरिंदर सिंह बग्गेके पिपल. जिला भाजपा प्रधान फिरोजपुर रिवायती पार्टियों से हटकर आम आदमी पार्टी से चुनाव जीतकर विधायक बने जिले के चारों हलकों के विकास का सुनहरा अवसर है। फिरोजपुर के विकास के लिए नवनियुक्त विधायक आवाज उठाते रहे है लेकिन अगर प्रधानमंत्री फिरोजपुर आते है तो जिले को मिलने वाली ग्रांट से विकास के रास्ते साफ हो जाएंगे। इससे पहले भी कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री फिरोजपुर के लिए ग्रांट दे चुके हैं।
| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर पंजाब के फिरोजपुर आएंगे। पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा फिलहाल दिन और समय तय नहीं हुआ लेकिन पीएम माेदी पीजीआइ प्रोजेक्ट के लिए फिरोजपुर आएंगे। प्रधानमंत्री के फिरोजपुर आने से एक बार फिर लोगों की उम्मीदें जगी है। नशे और बेरोजगारी से जूझ रहे जिले के लोगों को पीजीआइ प्रोजेक्ट से रोजगार मिलने से राहत मिलेगी। गाैरतलब है कि पाँच जनवरी दो हज़ार बाईस को पीजीआइ के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हाेने आ रहे प्रधानमंत्री के समाराेह काे लेकर बड़ा बवाल हाे गया था। मौसम खराब होने कारण पीएम माेदी का काफिला सड़क से गुजर रहा था तो किसानों ने गांव प्यारेआना में सड़क पर ट्रैफिक जाम कर दिया। सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री का काफिला बीस मिनट के इंतजार के बाद वापस लौट गया था। हालांकि पुंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह सोलह फरवरी को फिरोजपुर पहुंचे तो उन्होंने फिर से प्रधानमंत्री के आने का आश्वासन दिया था। भाजपा नेताओं की मानें तो अगर प्रधानमंत्री आते हैं तो पीजीआइ के अलावा फिरोजपुर के लिए दो सौ करोड़ की ग्रांट जरूर मिलती। इससे पहले वह हुसैनीवाला आए थे तो अमृत योजना के तहत वाटर सप्लाई और सीवरेज लाइनों के लिए एक सौ पचास करोड़ दे गए थे। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि जब भी उनका कार्यक्रम तय हो जाएगा उसकी घोषणा कर दी जाएगी। पिछली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लौटने से जिले को नुकसान हुआ है। माेदी देश और सीमा से सटे जिलों का विकास चाहते है। चंद लोगों ने रास्ता जाम कर उनको लौटा दिया था। ये बड़े गर्व का मौका था जब वे फिरोजपुर पहुंच रहे थे। अब तक तो पीजीआइ की इमारत आधे से ज्यादा तैयार हो जाती। एक बार फिर वह फिरोजपुर आएंगे। पिछली बार उनका कार्यक्रम तय होने में चार महीने का समय लग गया था। उनको पूरा देश देखना है। इस बार वे आए तो फिरोजपुर की कायाकल्प करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। सुरिंदर सिंह बग्गेके पिपल. जिला भाजपा प्रधान फिरोजपुर रिवायती पार्टियों से हटकर आम आदमी पार्टी से चुनाव जीतकर विधायक बने जिले के चारों हलकों के विकास का सुनहरा अवसर है। फिरोजपुर के विकास के लिए नवनियुक्त विधायक आवाज उठाते रहे है लेकिन अगर प्रधानमंत्री फिरोजपुर आते है तो जिले को मिलने वाली ग्रांट से विकास के रास्ते साफ हो जाएंगे। इससे पहले भी कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री फिरोजपुर के लिए ग्रांट दे चुके हैं। |
6890 THE GAZETTE OF INDIA NOV. 24, 2001 / AGRAHAYANA 3, 1923
1910-66 के मन कोद 9-11 के विपरीत होने के कारण उचित व वैध नही ह्र छत्र परिपत्र दिनाक 5-1-98 अधिनियम की चौथी अनुमची के साईटस नम्बर-3 के अनुरूप सेवा शर्मा से परिवर्तन है जो कि अधिनियम की धारा 9- ए के अनप नोटिस दिये बिना किये जान के कारण अनुचित एव अवैध है एब निरस्त किये जाने योग्य है । यह भी घोषित किया जाये कि बैंक कर्मतारी द्विपक्षीय समझौता दिनाक 19-10-66 के पैरा 9-11 के अनुसार स्थानापन्न भत्ता प्राप्त करने तथा पूर्व में कम भुगतान की गई स्थानापन्न भन्ने की राशि एरियर के रूप में प्राप्त करने के अधिकारी है।
प्रार्थी की ओर से जवाब में प्रारम्भिक आपत्तियां की गई कि संघ का विपक्षी संस्थान में कोई प्रस्तित्व नहो है । मघ मान्यता प्राप्त यूनियन नही है व विवाद विपक्षी संस्थान के अधिकाश कर्मचारीगण अथवा मान्यता प्राप्त यूनियन द्वारा नही उठाना गया, इस कारण अधिनियम के अन्तर्गत धारा 2 ( के) के अन्तर्गत यह औद्योगिक विवाद नहीं है। अधिनियम की धारा 9-ए केवल उन मामलो में लागू होती है जहा कि प्रबन्धक अधिनियम में वर्णित अनुसूची-4 मे उल्लेखित विषयों में कोई परिवर्तन कर रहे हों। विपक्षी द्वारा दिनाक 5-1-98 को जारी किया "गया परिपत्र द्विपक्षीय समझौता दिनांक 19-10-66 में तय की गई शर्तों के मल परिपेक्ष्य में स्पष्टीकरण किये जाने के संबंध में है जिस कारण अधिनियम की धारा 9-17 लागू नहीं होती व निर्देश देश अधिनियम के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है । प्रस्तुत मामला अधिनियम संलग्न अनमन्त्री-4 के अन्तर्गत नही माता । यह भी उल्लेख किया गया कि स्थानापन्न भना कभी भी यदि उस पद पर पदोन्नति कर दी जाये तो पदोन्नति के फलस्वरूप जो राशि प्राप्त होगी उभ राशि में अधिक राशि स्थानापन्न भने के रूप में नही हो सकती, इसलिये भी अनुसूची-4 के अन्तर्गत स्थानापन्न भत्ता नहीं पाता । यह भी श्रापत्ति की गई कि यदि समझोत की व्याख्या में कोई विवाद है तो उस हेतु धारा 36-0 के प्रावधानो के अन्तर्गत अधिकरण द्वारा व्याख्या की जा सकती है व इस हेतु विशेष विवाद सरकार द्वारा न्यायाधिकरण को प्रेषित करना आवश्यक है। क्लेम के खण्डानुसार जवाब में इस बाबत अनभिज्ञता प्रकट की गई कि सघ पंजीकृत है अथवा नही । दिनांक 19-10-66 का द्विपक्षीय समझौता स्वीकार किया गया । यह उमेख किया गया कि दिनांक 19-10-66 का द्विपक्षीय समझौता हा जिसमें अधीनस्थ स्टाफ व लिपिकीय संवर्ग की वेतन बला निम्न प्रकार श्री
( अ ) ( वेतन श्रृंखला अधीनस्थ स्टाप (रुपयों में)
( ब ) वेतन श्रृंखला लिपिकीय स्टाफ
3 2) वर्ष
दिनांक 5-1-98 को परिव भी जारी करना स्वीकार किया गया परन्तु यद्विपक्षीय समझाने की मल भावना के अन जारी होने का कथनाया । यह भी उल्लेख किया गया नि प्रस्तुत मामले में विवाद का निर्णय राष्ट्रीय व्यग्या त्रिकरण द्वारा ही किया जा सकता है हम अधिकरण के द्वारा नहीं, क्यादि उक्त विवाद के निर्णय से जो अर्थ निकलेगा वह सारे भारत की बैंकिग इण्डस्ट्री पर व सारे भारत के राज्यों में स्थित बैंक के कर्मचारिरों पर प्रभाव डालेगा। 1966 में समजता लागू होने के पश्चात् वेतन श्रृंखला में परिवर्तन हुआ, किन्तु उससे प्रभावित हुए अन्य प्रावधानी में परिवर्तन नही किया गया। यदि सघ की इस मार्ग को सीकर कर लिया जाए तो इसका आशय यह होगा कि यदि किसी अधीनस्थ स्टॉफ से लिपिकीय सवर्ग में कार्य करवाया जाता है तो उसे स्थानापन भन्ने के रूप में जो राशि देय होगी उससे कम राशि उस कर्मचारी को यदि लिपिकीय संवर्ग में स्थाई कर दिया जाता है ता स्थाई किए जाने पर देय होगी, जो किसी प्रकार से सुसंगत नहीं है 1
पक्षकारों के अभिकथनी के आधार पर निम्नाक्ति विवाद बिन्दु बनाए गए
( 1 ) या विपक्षी बैंक में कार्यरत लिपिकीय स्टाफ एवं सबोडिनेट स्टाफ प्रार्थी संघ के सदस्य व्हे ?
( 2 ) या जवाब की प्रारम्भिक प्रापनि संख्या 1 के अनुसार संघ द्वारा उठाया ग्यो श्रौद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2 ( क ) के अन्तर्गत प्रौद्योगिक विवाद " नहीं है ?
( 3 ) या जवाब की प्रारम्भिक आपत्ति मांध्या 1 के अनुसार सघ द्वारा उठाया गया विवाद व निर्देश "श्रौद्योगिक विवाद के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है, यदि हा तो इसका प्रभाव ?
( 4 ) या संघ द्वारा उठाये गये विवाद के गुणावगुण
पर सुनवाई का अधिकार इस प्रधिकरण को नहीं है
( 5 ) श्राया विपक्षी बैंक द्वारा जारी परिपत्र दिनांक 5-198 द्विपक्षीय समझौता दिनांक 19-10-66 के अनुच्छेद 9-11 के विपरीत है व प्रौद्योगिक विवाद प्रधिनियम, 1947 की धारा 9-ए का उल्लंघन करता है ?
संघ अथव] विपक्षी बँक के कर्मचारी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी है ? प्रार्थी की ओर से नी. पी. गुप्ता का प्रस्तुत किया गया, जिस पर प्रतिपरीक्षा करने का प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता को दिया गया । प्रलेखीय साय में प्रार्थी की ओर से दावेज इकूल्य 1 मे एब्ल्यू5 की प्रतिलिपि प्रस्तुत की गई। प्रप्रार्थी की ओर भवर सिंह पंवार का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया जिस पर | छः हज़ार आठ सौ नब्बे THE GAZETTE OF INDIA NOV. चौबीस, दो हज़ार एक / AGRAHAYANA तीन, एक हज़ार नौ सौ तेईस एक हज़ार नौ सौ दस-छयासठ के मन कोद नौ-ग्यारह के विपरीत होने के कारण उचित व वैध नही ह्र छत्र परिपत्र दिनाक पाँच जनवरी अट्ठानवे अधिनियम की चौथी अनुमची के साईटस नम्बर-तीन के अनुरूप सेवा शर्मा से परिवर्तन है जो कि अधिनियम की धारा नौ- ए के अनप नोटिस दिये बिना किये जान के कारण अनुचित एव अवैध है एब निरस्त किये जाने योग्य है । यह भी घोषित किया जाये कि बैंक कर्मतारी द्विपक्षीय समझौता दिनाक उन्नीस अक्टूबर छयासठ के पैरा नौ-ग्यारह के अनुसार स्थानापन्न भत्ता प्राप्त करने तथा पूर्व में कम भुगतान की गई स्थानापन्न भन्ने की राशि एरियर के रूप में प्राप्त करने के अधिकारी है। प्रार्थी की ओर से जवाब में प्रारम्भिक आपत्तियां की गई कि संघ का विपक्षी संस्थान में कोई प्रस्तित्व नहो है । मघ मान्यता प्राप्त यूनियन नही है व विवाद विपक्षी संस्थान के अधिकाश कर्मचारीगण अथवा मान्यता प्राप्त यूनियन द्वारा नही उठाना गया, इस कारण अधिनियम के अन्तर्गत धारा दो के अन्तर्गत यह औद्योगिक विवाद नहीं है। अधिनियम की धारा नौ-ए केवल उन मामलो में लागू होती है जहा कि प्रबन्धक अधिनियम में वर्णित अनुसूची-चार मे उल्लेखित विषयों में कोई परिवर्तन कर रहे हों। विपक्षी द्वारा दिनाक पाँच जनवरी अट्ठानवे को जारी किया "गया परिपत्र द्विपक्षीय समझौता दिनांक उन्नीस अक्टूबर छयासठ में तय की गई शर्तों के मल परिपेक्ष्य में स्पष्टीकरण किये जाने के संबंध में है जिस कारण अधिनियम की धारा नौ-सत्रह लागू नहीं होती व निर्देश देश अधिनियम के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है । प्रस्तुत मामला अधिनियम संलग्न अनमन्त्री-चार के अन्तर्गत नही माता । यह भी उल्लेख किया गया कि स्थानापन्न भना कभी भी यदि उस पद पर पदोन्नति कर दी जाये तो पदोन्नति के फलस्वरूप जो राशि प्राप्त होगी उभ राशि में अधिक राशि स्थानापन्न भने के रूप में नही हो सकती, इसलिये भी अनुसूची-चार के अन्तर्गत स्थानापन्न भत्ता नहीं पाता । यह भी श्रापत्ति की गई कि यदि समझोत की व्याख्या में कोई विवाद है तो उस हेतु धारा छत्तीस-शून्य के प्रावधानो के अन्तर्गत अधिकरण द्वारा व्याख्या की जा सकती है व इस हेतु विशेष विवाद सरकार द्वारा न्यायाधिकरण को प्रेषित करना आवश्यक है। क्लेम के खण्डानुसार जवाब में इस बाबत अनभिज्ञता प्रकट की गई कि सघ पंजीकृत है अथवा नही । दिनांक उन्नीस अक्टूबर छयासठ का द्विपक्षीय समझौता स्वीकार किया गया । यह उमेख किया गया कि दिनांक उन्नीस अक्टूबर छयासठ का द्विपक्षीय समझौता हा जिसमें अधीनस्थ स्टाफ व लिपिकीय संवर्ग की वेतन बला निम्न प्रकार श्री वेतन श्रृंखला लिपिकीय स्टाफ तीन दो) वर्ष दिनांक पाँच जनवरी अट्ठानवे को परिव भी जारी करना स्वीकार किया गया परन्तु यद्विपक्षीय समझाने की मल भावना के अन जारी होने का कथनाया । यह भी उल्लेख किया गया नि प्रस्तुत मामले में विवाद का निर्णय राष्ट्रीय व्यग्या त्रिकरण द्वारा ही किया जा सकता है हम अधिकरण के द्वारा नहीं, क्यादि उक्त विवाद के निर्णय से जो अर्थ निकलेगा वह सारे भारत की बैंकिग इण्डस्ट्री पर व सारे भारत के राज्यों में स्थित बैंक के कर्मचारिरों पर प्रभाव डालेगा। एक हज़ार नौ सौ छयासठ में समजता लागू होने के पश्चात् वेतन श्रृंखला में परिवर्तन हुआ, किन्तु उससे प्रभावित हुए अन्य प्रावधानी में परिवर्तन नही किया गया। यदि सघ की इस मार्ग को सीकर कर लिया जाए तो इसका आशय यह होगा कि यदि किसी अधीनस्थ स्टॉफ से लिपिकीय सवर्ग में कार्य करवाया जाता है तो उसे स्थानापन भन्ने के रूप में जो राशि देय होगी उससे कम राशि उस कर्मचारी को यदि लिपिकीय संवर्ग में स्थाई कर दिया जाता है ता स्थाई किए जाने पर देय होगी, जो किसी प्रकार से सुसंगत नहीं है एक पक्षकारों के अभिकथनी के आधार पर निम्नाक्ति विवाद बिन्दु बनाए गए या विपक्षी बैंक में कार्यरत लिपिकीय स्टाफ एवं सबोडिनेट स्टाफ प्रार्थी संघ के सदस्य व्हे ? या जवाब की प्रारम्भिक प्रापनि संख्या एक के अनुसार संघ द्वारा उठाया ग्यो श्रौद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा दो के अन्तर्गत प्रौद्योगिक विवाद " नहीं है ? या जवाब की प्रारम्भिक आपत्ति मांध्या एक के अनुसार सघ द्वारा उठाया गया विवाद व निर्देश "श्रौद्योगिक विवाद के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है, यदि हा तो इसका प्रभाव ? या संघ द्वारा उठाये गये विवाद के गुणावगुण पर सुनवाई का अधिकार इस प्रधिकरण को नहीं है श्राया विपक्षी बैंक द्वारा जारी परिपत्र दिनांक पाँच-एक सौ अट्ठानवे द्विपक्षीय समझौता दिनांक उन्नीस अक्टूबर छयासठ के अनुच्छेद नौ-ग्यारह के विपरीत है व प्रौद्योगिक विवाद प्रधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस की धारा नौ-ए का उल्लंघन करता है ? संघ अथव] विपक्षी बँक के कर्मचारी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी है ? प्रार्थी की ओर से नी. पी. गुप्ता का प्रस्तुत किया गया, जिस पर प्रतिपरीक्षा करने का प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता को दिया गया । प्रलेखीय साय में प्रार्थी की ओर से दावेज इकूल्य एक मे एब्ल्यूपाँच की प्रतिलिपि प्रस्तुत की गई। प्रप्रार्थी की ओर भवर सिंह पंवार का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया जिस पर |
मौजूदा दौर में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीवन स्मिथ किसी पहचान के मोहताज नहीं है। स्टीवन स्मिथ की गिनती इस दौर के सबसे बेस्ट बल्लेबाजों विराट कोहली, केन विलियम्सन या जो रूट के साथ की जाती है। स्मिथ के लिए साल 2018 की शुरुआत में बॉल टेंपरिंग कांड ने एक बड़े संकट में डाल दिया था, लेकिन अपने एक साल के बैन को पूरा करने के बाद लौटे और अभी तक बहुत ही जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं।
स्मिथ ने इस साल तो वनडे में अलग ही रूप में बल्लेबाजी की है। उन्होंने इस साल खेले गए वनडे मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने में दूसरा स्थान हासिल किया। स्मिथ के बल्ले से इस साल खेले 10 मैचों की केवल 9 पारियों में 568 रन निकले। उन्होंने ये रन 63. 11 की औसत से बनाए जिसमें 3 शतक और 2 फिफ्टी शामिल रही।
| मौजूदा दौर में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीवन स्मिथ किसी पहचान के मोहताज नहीं है। स्टीवन स्मिथ की गिनती इस दौर के सबसे बेस्ट बल्लेबाजों विराट कोहली, केन विलियम्सन या जो रूट के साथ की जाती है। स्मिथ के लिए साल दो हज़ार अट्ठारह की शुरुआत में बॉल टेंपरिंग कांड ने एक बड़े संकट में डाल दिया था, लेकिन अपने एक साल के बैन को पूरा करने के बाद लौटे और अभी तक बहुत ही जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं। स्मिथ ने इस साल तो वनडे में अलग ही रूप में बल्लेबाजी की है। उन्होंने इस साल खेले गए वनडे मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने में दूसरा स्थान हासिल किया। स्मिथ के बल्ले से इस साल खेले दस मैचों की केवल नौ पारियों में पाँच सौ अड़सठ रन निकले। उन्होंने ये रन तिरेसठ. ग्यारह की औसत से बनाए जिसमें तीन शतक और दो फिफ्टी शामिल रही। |
मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने कहा कि सीवरेज प्रणाली के आधुनिकीकरण से फैलती महामारी और उनके कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को रोकने में मदद मिलेगी.
देश में सीवेज को रोबोट की सहायता से साफ करने वाला केरल पहला राज्य बन गया है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केरल सरकार ने शुक्रवार को सीवेज को साफ करने के लिए रोबोट स्केवेंजर लॉन्च किया है, जो देश में सभी चालू मैनहोल्स को साफ करने में मदद करेगा. इस रोबोटिक तकनीक को यूज करने वाला केरल देश का पहला राज्य बन गया है. बता दें जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने गुरुवायूर सीवरेज परियोजना के तहत बैंडिकूट का शुभारंभ किया.
राज्य सरकार की 100-दिवसीय कार्य योजना के हिस्से के रूप में, केरल जल प्राधिकरण (केडब्ल्यूए) द्वारा गुरुवयूर सीवरेज परियोजना के तहत बैंडिकूट को शामिल किया गया है. इस तकनीक के आज जाने से सफाई कर्मचारियों के शारीरिक रूप से मैनहोल में प्रवेश करने की प्रथा समाप्त हो जाएगी. जेनरोबोटिक्स ने हाल ही में केरल स्टार्टअप मिशन द्वारा आयोजित हडल ग्लोबल 2022 कॉन्क्लेव में 'केरल प्राइड' पुरस्कार जीता है.
केरल के जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने नगर पालिका में बैंडिकूट की तैनाती का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि गुरुवायूर नगर पालिका में रोबोटिक मेहतर का शुभारंभ राज्य भर में मैनहोल की सफाई के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों के उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है. मंत्री ने कहा कि सीवरेज प्रणाली के आधुनिकीकरण से फैलती महामारी और उनके कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को रोकने में मदद मिलेगी.
वहीं पी कृष्णा पिल्लई स्क्वायर में आयोजित समारोह में जेनरोबोटिक इनोवेशन के निदेशक विमल गोविंद एमके ने प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बैंडिकूट केरल में सभी चालू सीवरेज और जल निकासी की सफाई करेगा. बैंडिकूट रोबोट वर्तमान में 17 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात हैं. 2018 में, KWA ने तिरुवनंतपुरम में मैनहोल की सफाई के लिए बैंडिकूट का उपयोग करना शुरू किया. बाद में, इसे एर्नाकुलम में भी पेश किया जाएगा.
| मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने कहा कि सीवरेज प्रणाली के आधुनिकीकरण से फैलती महामारी और उनके कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को रोकने में मदद मिलेगी. देश में सीवेज को रोबोट की सहायता से साफ करने वाला केरल पहला राज्य बन गया है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केरल सरकार ने शुक्रवार को सीवेज को साफ करने के लिए रोबोट स्केवेंजर लॉन्च किया है, जो देश में सभी चालू मैनहोल्स को साफ करने में मदद करेगा. इस रोबोटिक तकनीक को यूज करने वाला केरल देश का पहला राज्य बन गया है. बता दें जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने गुरुवायूर सीवरेज परियोजना के तहत बैंडिकूट का शुभारंभ किया. राज्य सरकार की एक सौ-दिवसीय कार्य योजना के हिस्से के रूप में, केरल जल प्राधिकरण द्वारा गुरुवयूर सीवरेज परियोजना के तहत बैंडिकूट को शामिल किया गया है. इस तकनीक के आज जाने से सफाई कर्मचारियों के शारीरिक रूप से मैनहोल में प्रवेश करने की प्रथा समाप्त हो जाएगी. जेनरोबोटिक्स ने हाल ही में केरल स्टार्टअप मिशन द्वारा आयोजित हडल ग्लोबल दो हज़ार बाईस कॉन्क्लेव में 'केरल प्राइड' पुरस्कार जीता है. केरल के जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टाइन ने नगर पालिका में बैंडिकूट की तैनाती का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि गुरुवायूर नगर पालिका में रोबोटिक मेहतर का शुभारंभ राज्य भर में मैनहोल की सफाई के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों के उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है. मंत्री ने कहा कि सीवरेज प्रणाली के आधुनिकीकरण से फैलती महामारी और उनके कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को रोकने में मदद मिलेगी. वहीं पी कृष्णा पिल्लई स्क्वायर में आयोजित समारोह में जेनरोबोटिक इनोवेशन के निदेशक विमल गोविंद एमके ने प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बैंडिकूट केरल में सभी चालू सीवरेज और जल निकासी की सफाई करेगा. बैंडिकूट रोबोट वर्तमान में सत्रह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात हैं. दो हज़ार अट्ठारह में, KWA ने तिरुवनंतपुरम में मैनहोल की सफाई के लिए बैंडिकूट का उपयोग करना शुरू किया. बाद में, इसे एर्नाकुलम में भी पेश किया जाएगा. |
Hyderabad : तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को तेलंगाना के सीएम पद की शपथ ली. बता दें कि केसीआर का यह लगातार दूसरा कार्यकाल है. जान लें कि टीआरएस के नवनिर्वाचित विधायकों ने बुधवार को टीआरएस मुख्यालय तेलंगाना भवन में आयोजित बैठक में केसीआर को अपना नेता चुना था. चूंकि मंत्रिमंडल का गठन अभी नहीं किया गया है. इस कारण केसीआर के साथ किसी भी मंत्री ने शपथ नहीं ली. खबरों के अनुसार मंत्रिमंडल का गठन कुछ दिन में हो सकता है. केसीआर ने नयी सरकार के गठन व शपथ ग्रहण समारोह के लिए अपना इस़्तीफा दे दिया था. इससे पूर्व टीआरएस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर टीआरएस विधायक दल की बैठक में केसीआर को सर्वसम्मति से दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव उन्हें सौंपा.
बता दें कि तेलंगाना में सात दिसंबर को हुए चुनाव में 119 सदस्यीय विधानसभा में टीआरएस को 88 सीटें हासिल हुई हैं. शपथ लेने के बाद टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल में सभी वर्गो को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करेंगे. बता दें कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के तहत मंत्रिमंडल में अधिकतम 18 सदस्य हो सकते हैं.
| Hyderabad : तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को तेलंगाना के सीएम पद की शपथ ली. बता दें कि केसीआर का यह लगातार दूसरा कार्यकाल है. जान लें कि टीआरएस के नवनिर्वाचित विधायकों ने बुधवार को टीआरएस मुख्यालय तेलंगाना भवन में आयोजित बैठक में केसीआर को अपना नेता चुना था. चूंकि मंत्रिमंडल का गठन अभी नहीं किया गया है. इस कारण केसीआर के साथ किसी भी मंत्री ने शपथ नहीं ली. खबरों के अनुसार मंत्रिमंडल का गठन कुछ दिन में हो सकता है. केसीआर ने नयी सरकार के गठन व शपथ ग्रहण समारोह के लिए अपना इस़्तीफा दे दिया था. इससे पूर्व टीआरएस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर टीआरएस विधायक दल की बैठक में केसीआर को सर्वसम्मति से दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव उन्हें सौंपा. बता दें कि तेलंगाना में सात दिसंबर को हुए चुनाव में एक सौ उन्नीस सदस्यीय विधानसभा में टीआरएस को अठासी सीटें हासिल हुई हैं. शपथ लेने के बाद टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल में सभी वर्गो को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करेंगे. बता दें कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के तहत मंत्रिमंडल में अधिकतम अट्ठारह सदस्य हो सकते हैं. |
वॉशिंगटन : विश्व की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के आईपीओ पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। कंपनी ने अपने इस पब्लिक इश्यू के लिए अमेरिकी शेयर बाजार नियामक के पास विवरण पुस्तिका दाखिल कर दी है। इस आइपीओ से वह 10 अरब डॉलर (करीब 50,000 करोड़ रुपये) तक जुटा सकती है। इस इश्यू के बाद कंपनी का बाजार मूल्यांकन 100 अरब डॉलर (लगभग 5,00,000 करोड़ रुपये) तक जा सकता है। किसी इंटरनेट कंपनी द्वारा यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
वैसे, कंपनी ने कहा है कि फिलहाल उसकी योजना शेयर बिक्री के जरिए 5 अरब डॉलर जुटाने की है। अगर निवेशकों का इसे ज्यादा समर्थन मिला तो यह रकम दोगुनी हो सकती है। फेसबुक के 80 करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं। कंपनी का इश्यू गूगल द्वारा वर्ष 2004 में लाए गए 1. 9 अरब डॉलर के आईपीओ से कहीं अधिक बड़ा होगा। इससे पहले इंटरनेट के क्षेत्र में सबसे बड़े आईपीओ लाने का खिताब गूगल के पास था। फेसबुक का आइपीओ मई में बाजार में आने की संभावना है। अमेरिकी बाजार नियामक सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन के पास दाखिल विवरण पुस्तिका में कंपनी ने कहा कि वर्ष 2011 में उसे 3. 71 अरब डॉलर की आय हुई। यह एक साल पहले हुई 1. 97 अरब डॉलर की आय से 88 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2011 में कंपनी का लाभ एक अरब डॉलर रहा। यह वर्ष 2010 के मुकाबले 65 प्रतिशत ज्यादा है। फेसबुक की आय में 85 प्रतिशत योगदान विज्ञापन से हुई आय का है।
फेसबुक ने कुछ सरकारों द्वारा सेंसरशिप और अन्य किस्म के प्रतिबंध का जोखिम बताया है। उसके मुताबिक इससे कंपनी का मुनाफा प्रभावित होने के आसार हैं। किसी अन्य देश का नाम लिए बगैर फेसबुक ने कहा कि वह चीन में प्रवेश करने का प्रयास करती रहेगी, जहां अब तक उसे व्यवसाय की अनुमति नहीं मिली है। भारत सरकार ने दिसंबर, 2011 में फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों से आपत्तिनजक तत्वों को प्रकाशित न करने का आदेश दिया था। जुकरबर्ग लेंगे एक डॉलर सालाना वेतन मार्क जुकरबर्ग फेसबुक के संस्थापक और सीईओ भले ही हों, लेकिन कंपनी की दूसरी सबसे ताकतवर कर्मचारी और सीएफओ शेरिल सैंडबर्ग को इस कंपनी में सबसे अधिक वेतन मिलता है। जुकरबर्ग का वेतन और घटेगा। वह सिर्फ नाममात्र के लिए एक डॉलर सालाना वेतन लेंगे। यह एक जनवरी 2013 से प्रभावी होगा। जुकरबर्ग को पिछले साल 14. 9 लाख डॉलर का वेतन मिला। फेसबुक की आइपीओ के लिए दाखिल की गई सूचनाओं के मुताबिक सैंडबर्ग दुनिया के इस सबसे बड़े सोशल नेटवर्क की सबसे अधिक वेतन पाने वाली कर्मचारी हैं। उन्हें वर्ष 2011 में 3. 08 करोड़ डॉलर का वेतन मिला।
| वॉशिंगटन : विश्व की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के आईपीओ पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। कंपनी ने अपने इस पब्लिक इश्यू के लिए अमेरिकी शेयर बाजार नियामक के पास विवरण पुस्तिका दाखिल कर दी है। इस आइपीओ से वह दस अरब डॉलर तक जुटा सकती है। इस इश्यू के बाद कंपनी का बाजार मूल्यांकन एक सौ अरब डॉलर तक जा सकता है। किसी इंटरनेट कंपनी द्वारा यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। वैसे, कंपनी ने कहा है कि फिलहाल उसकी योजना शेयर बिक्री के जरिए पाँच अरब डॉलर जुटाने की है। अगर निवेशकों का इसे ज्यादा समर्थन मिला तो यह रकम दोगुनी हो सकती है। फेसबुक के अस्सी करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं। कंपनी का इश्यू गूगल द्वारा वर्ष दो हज़ार चार में लाए गए एक. नौ अरब डॉलर के आईपीओ से कहीं अधिक बड़ा होगा। इससे पहले इंटरनेट के क्षेत्र में सबसे बड़े आईपीओ लाने का खिताब गूगल के पास था। फेसबुक का आइपीओ मई में बाजार में आने की संभावना है। अमेरिकी बाजार नियामक सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन के पास दाखिल विवरण पुस्तिका में कंपनी ने कहा कि वर्ष दो हज़ार ग्यारह में उसे तीन. इकहत्तर अरब डॉलर की आय हुई। यह एक साल पहले हुई एक. सत्तानवे अरब डॉलर की आय से अठासी प्रतिशत अधिक है। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में कंपनी का लाभ एक अरब डॉलर रहा। यह वर्ष दो हज़ार दस के मुकाबले पैंसठ प्रतिशत ज्यादा है। फेसबुक की आय में पचासी प्रतिशत योगदान विज्ञापन से हुई आय का है। फेसबुक ने कुछ सरकारों द्वारा सेंसरशिप और अन्य किस्म के प्रतिबंध का जोखिम बताया है। उसके मुताबिक इससे कंपनी का मुनाफा प्रभावित होने के आसार हैं। किसी अन्य देश का नाम लिए बगैर फेसबुक ने कहा कि वह चीन में प्रवेश करने का प्रयास करती रहेगी, जहां अब तक उसे व्यवसाय की अनुमति नहीं मिली है। भारत सरकार ने दिसंबर, दो हज़ार ग्यारह में फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों से आपत्तिनजक तत्वों को प्रकाशित न करने का आदेश दिया था। जुकरबर्ग लेंगे एक डॉलर सालाना वेतन मार्क जुकरबर्ग फेसबुक के संस्थापक और सीईओ भले ही हों, लेकिन कंपनी की दूसरी सबसे ताकतवर कर्मचारी और सीएफओ शेरिल सैंडबर्ग को इस कंपनी में सबसे अधिक वेतन मिलता है। जुकरबर्ग का वेतन और घटेगा। वह सिर्फ नाममात्र के लिए एक डॉलर सालाना वेतन लेंगे। यह एक जनवरी दो हज़ार तेरह से प्रभावी होगा। जुकरबर्ग को पिछले साल चौदह. नौ लाख डॉलर का वेतन मिला। फेसबुक की आइपीओ के लिए दाखिल की गई सूचनाओं के मुताबिक सैंडबर्ग दुनिया के इस सबसे बड़े सोशल नेटवर्क की सबसे अधिक वेतन पाने वाली कर्मचारी हैं। उन्हें वर्ष दो हज़ार ग्यारह में तीन. आठ करोड़ डॉलर का वेतन मिला। |
हमने ऐसे कई वीडियो देखे हैं जहां लोग अपने पालतू जानवरों से इस कदर जुड़े हुए हैं कि वे जहां भी जाते हैं उसे ले जाते हैं। यहां हमारे पास एक कुत्ते का ऐसा ही एक वीडियो है जो अपने मालिक के साथ स्कूटर पर यात्रा करना पसंद करता है। कुत्ता केरल के कोट्टायम जिले के एक पुलिस अधिकारी का है। उन्होंने 5 महीने पहले गली से पिल्ला उठाया था और जब से यह श्रीकुमार और उनके परिवार के साथ है। कुत्ते को अप्पू कहा जाता है और क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह एक आम दृश्य है कि श्रीकुमार के साथ स्कूटर पर 5 महीने का पिल्ला एक पिलर के रूप में बैठा है।
वीडियो को MediaoneTV Live ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। इस वीडियो रिपोर्ट में केरल पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक श्रीकुमार अपने कुत्ते के साथ Suzuki Access स्कूटर में यात्रा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। श्रीकुमार बताते हैं कि उन्होंने कुत्ते को बुनियादी प्रशिक्षण दिया था और इसने बहुत जल्दी निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद वह जब भी स्कूटर स्टार्ट करता तो पिल्ला स्कूटर में दिलचस्पी दिखाने लगा और मालिक के साथ जाना चाहता था। शुरू में तो इस पर मज़ा नहीं आया, लेकिन अंत में उन्होंने एक बार कुत्ते को अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
वह बिना किसी परेशानी के स्कूटर के सामने बैठ गया। तब से, अप्पू - कुत्ता स्थानीय यात्राओं पर मालिक के साथ जाएगा। वह आगे बैठने और पीछे की सीट पर बैठने में भी सहज हैं। वह तकनीकी रूप से सवार के कंधे पर अपने अग्रभागों के साथ खड़ा होता है। मालिक कुत्ते को केवल छोटी यात्राओं के लिए अपने साथ ले जाता है। श्रीकुमार का उल्लेख है कि जब भी वे बाहर जाते हैं तो उनका कुत्ता भी उनकी कार में उनके साथ जाता है। पहले कुत्ता सहज नहीं था, लेकिन अब इसकी आदत हो गई है।
अब जब भी वह स्कूटर शुरू करता है, अप्पू स्कूटर के पास दौड़ता हुआ आता है और उस पर चढ़ जाता है। कार में, वे बस दरवाजा खोलते हैं और वह प्रवेश करता है। हमें उम्मीद है कि श्रीकुमार अपने कुत्ते को स्कूटर पर अपने साथ सार्वजनिक सड़कों पर नहीं ले जाएंगे। अतीत में, ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां केरल मोटर वाहन विभाग ने ऐसे सवारों के खिलाफ कार्रवाई की है जो अपने पालतू जानवरों को सार्वजनिक सड़कों पर ले गए थे। मोटर वाहन विभाग ने पूर्व में सवार के खिलाफ जुर्माना इसलिए जारी किया क्योंकि वह बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चला रहा था और पालतू कुत्ते और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के जीवन को भी खतरे में डाल कर पीछे बैठा रहा था।
यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की खबर सामने आई है। ऑनलाइन कई वीडियो उपलब्ध हैं जहां पालतू जानवर अपने मालिकों के साथ दोपहिया वाहन पर देखे जाते हैं। इस मामले में श्रीकुमार का उल्लेख है कि उसने कुत्ते को प्रशिक्षित किया है और वह निर्देश सुनता है। दिन के अंत में, यह सिर्फ एक जानवर है और वे कई बार बहुत अप्रत्याशित हो सकते हैं। पीछे की सीट पर कुत्ते के साथ यात्रा करने से लोग सड़क पर अपना सिर घुमा सकते हैं और यह अन्य मोटर चालकों को भी विचलित कर सकता है क्योंकि यह ऐसा कुछ नहीं है जो हम आमतौर पर अपनी सड़कों पर देखते हैं। वर्तमान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो जानवरों को दोपहिया वाहन पर पीछे की सीट पर यात्रा करने की अनुमति देता है।
| हमने ऐसे कई वीडियो देखे हैं जहां लोग अपने पालतू जानवरों से इस कदर जुड़े हुए हैं कि वे जहां भी जाते हैं उसे ले जाते हैं। यहां हमारे पास एक कुत्ते का ऐसा ही एक वीडियो है जो अपने मालिक के साथ स्कूटर पर यात्रा करना पसंद करता है। कुत्ता केरल के कोट्टायम जिले के एक पुलिस अधिकारी का है। उन्होंने पाँच महीने पहले गली से पिल्ला उठाया था और जब से यह श्रीकुमार और उनके परिवार के साथ है। कुत्ते को अप्पू कहा जाता है और क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह एक आम दृश्य है कि श्रीकुमार के साथ स्कूटर पर पाँच महीने का पिल्ला एक पिलर के रूप में बैठा है। वीडियो को MediaoneTV Live ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। इस वीडियो रिपोर्ट में केरल पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक श्रीकुमार अपने कुत्ते के साथ Suzuki Access स्कूटर में यात्रा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। श्रीकुमार बताते हैं कि उन्होंने कुत्ते को बुनियादी प्रशिक्षण दिया था और इसने बहुत जल्दी निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद वह जब भी स्कूटर स्टार्ट करता तो पिल्ला स्कूटर में दिलचस्पी दिखाने लगा और मालिक के साथ जाना चाहता था। शुरू में तो इस पर मज़ा नहीं आया, लेकिन अंत में उन्होंने एक बार कुत्ते को अपने साथ ले जाने की कोशिश की। वह बिना किसी परेशानी के स्कूटर के सामने बैठ गया। तब से, अप्पू - कुत्ता स्थानीय यात्राओं पर मालिक के साथ जाएगा। वह आगे बैठने और पीछे की सीट पर बैठने में भी सहज हैं। वह तकनीकी रूप से सवार के कंधे पर अपने अग्रभागों के साथ खड़ा होता है। मालिक कुत्ते को केवल छोटी यात्राओं के लिए अपने साथ ले जाता है। श्रीकुमार का उल्लेख है कि जब भी वे बाहर जाते हैं तो उनका कुत्ता भी उनकी कार में उनके साथ जाता है। पहले कुत्ता सहज नहीं था, लेकिन अब इसकी आदत हो गई है। अब जब भी वह स्कूटर शुरू करता है, अप्पू स्कूटर के पास दौड़ता हुआ आता है और उस पर चढ़ जाता है। कार में, वे बस दरवाजा खोलते हैं और वह प्रवेश करता है। हमें उम्मीद है कि श्रीकुमार अपने कुत्ते को स्कूटर पर अपने साथ सार्वजनिक सड़कों पर नहीं ले जाएंगे। अतीत में, ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां केरल मोटर वाहन विभाग ने ऐसे सवारों के खिलाफ कार्रवाई की है जो अपने पालतू जानवरों को सार्वजनिक सड़कों पर ले गए थे। मोटर वाहन विभाग ने पूर्व में सवार के खिलाफ जुर्माना इसलिए जारी किया क्योंकि वह बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चला रहा था और पालतू कुत्ते और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के जीवन को भी खतरे में डाल कर पीछे बैठा रहा था। यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की खबर सामने आई है। ऑनलाइन कई वीडियो उपलब्ध हैं जहां पालतू जानवर अपने मालिकों के साथ दोपहिया वाहन पर देखे जाते हैं। इस मामले में श्रीकुमार का उल्लेख है कि उसने कुत्ते को प्रशिक्षित किया है और वह निर्देश सुनता है। दिन के अंत में, यह सिर्फ एक जानवर है और वे कई बार बहुत अप्रत्याशित हो सकते हैं। पीछे की सीट पर कुत्ते के साथ यात्रा करने से लोग सड़क पर अपना सिर घुमा सकते हैं और यह अन्य मोटर चालकों को भी विचलित कर सकता है क्योंकि यह ऐसा कुछ नहीं है जो हम आमतौर पर अपनी सड़कों पर देखते हैं। वर्तमान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो जानवरों को दोपहिया वाहन पर पीछे की सीट पर यात्रा करने की अनुमति देता है। |
कई बार अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपने नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज करा लिया है जिसे कोई भी गेंदबाज नहीं बनाना चाहेगा।
चहल के नाम वर्ल्ड कप के एक मैच में सबसे खराब गेंदबाजी का भारतीय रिकॉर्ड जुड़ गया है। मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ रविवार को वर्ल्ड कप के 38वें मुकाबले में अपने 10 ओवर के कोटे में चहल ने 88 रन लुटा डाले और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इस तरह से चहल भारत की ओर से वर्ल्ड कप के किसी एक मैच में सबसे महंगे गेंदबाज बन गए।
इससे पहले ये रिकॉर्ड टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ के नाम था जिन्होंने 2003 के वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 87 रन दिए थे।
इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर स्पिनर कर्सन घावरी का नंबर आता है जिन्होंने 1975 में लॉर्डस में इंग्लैंड के खिलाफ 83 रन खर्च किए थे।
28 वर्षीय चहल के नाम भारत की ओर से टी-20 इंटरनेशनल के किसी एक मैच में भी खराब गेंदबाजी का भारतीय रिकॉर्ड है। इस भारतीय स्पिनर ने पिछले वर्ष (2018) दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दूसरे टी-20 मैच में अपने चार ओवर के कोटे में 64 रन दिए थे। इस दौरान उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इस तरह से वह भारत की ओर से एक पारी में सबसे महंगे गेंदबाज बने थे।
इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पेसर जोगिंदर शर्मा के नाम था, जिन्होंने वर्ष 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ डरबन में अपने चार ओवर के कोटे में 57 रन लुटाए थे।
चहल इस विश्व कप के 6 मैचों में 10 विकेट झटक चुके हैं। इस दौरान उनकी श्रेष्ठ गेंदबाजी 51 रन देकर 4 विकेट रही है। उन्होंने छह पारियों में कुल 329 रन दिए हैं।
| कई बार अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपने नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज करा लिया है जिसे कोई भी गेंदबाज नहीं बनाना चाहेगा। चहल के नाम वर्ल्ड कप के एक मैच में सबसे खराब गेंदबाजी का भारतीय रिकॉर्ड जुड़ गया है। मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ रविवार को वर्ल्ड कप के अड़तीसवें मुकाबले में अपने दस ओवर के कोटे में चहल ने अठासी रन लुटा डाले और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इस तरह से चहल भारत की ओर से वर्ल्ड कप के किसी एक मैच में सबसे महंगे गेंदबाज बन गए। इससे पहले ये रिकॉर्ड टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ के नाम था जिन्होंने दो हज़ार तीन के वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सत्तासी रन दिए थे। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर स्पिनर कर्सन घावरी का नंबर आता है जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में लॉर्डस में इंग्लैंड के खिलाफ तिरासी रन खर्च किए थे। अट्ठाईस वर्षीय चहल के नाम भारत की ओर से टी-बीस इंटरनेशनल के किसी एक मैच में भी खराब गेंदबाजी का भारतीय रिकॉर्ड है। इस भारतीय स्पिनर ने पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दूसरे टी-बीस मैच में अपने चार ओवर के कोटे में चौंसठ रन दिए थे। इस दौरान उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इस तरह से वह भारत की ओर से एक पारी में सबसे महंगे गेंदबाज बने थे। इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पेसर जोगिंदर शर्मा के नाम था, जिन्होंने वर्ष दो हज़ार सात में इंग्लैंड के खिलाफ डरबन में अपने चार ओवर के कोटे में सत्तावन रन लुटाए थे। चहल इस विश्व कप के छः मैचों में दस विकेट झटक चुके हैं। इस दौरान उनकी श्रेष्ठ गेंदबाजी इक्यावन रन देकर चार विकेट रही है। उन्होंने छह पारियों में कुल तीन सौ उनतीस रन दिए हैं। |
उसे असाध्य समझना चाहिये । फुंसियोंके दर करने की दवा
इस रोग में सव शरीर में छोटी २ फुनिया शीतल के से होजाती है उनके वास्ते यह दवा करनी चाहिये सिंगरफ तीन माशे, रस कपूर छः माशे, अकरकरा एक तोला, कत्या एक तोला, छोटी इलायची एक तोला, इन सबको पान के रसमें मिलाकर चनेके वरावर गोलिया बनावे, आर सवेरेही एक गोली नित्य खाया करे और चनेकी रोटी घी और दही भोजन करे, इक्कीस दिनके सेवन करने से सब रोग निश्चय जाता रहेगा ।।
दूसरी दवा ।
रसकपूर, सिंगरफ, लौंग, सुहागा, सब एक एक तोला लेकर। इन सबको महीन पीसकर सात पुडिया बनावै, फिर सवेरे । ही एक पुडिया दही की मलाई में लपेटकर खिलावे दूध चांवल भोजन करावै और सब चीजों को परहेज है ॥ ॐ * विरेचन की औषवि *
जो किसी मनुष्य के शरीरमें काले वा नीले दाम पडगये तो पहिले तीन दिन खिचड़ी खिलाकर फिर यह जुल्लाब ना चाहिये । काला दाना नो माशे. आधा भुना और आ वा कच्चा कूटकर बगवरकी शक्कर मिलाकर तीन पुडिया बनावे और सवेरेही गरम जलके संग खिलाये और प्यास लगे जब गरम पानी पिलावे ।
यदि कण्ठ का काक जिसे कौआ कहते हैं बैठ गया होय तो यह विरेचन देवे, पिस्तेकी मिंगी, बादामकी मिंगी, चिल | उसे असाध्य समझना चाहिये । फुंसियोंके दर करने की दवा इस रोग में सव शरीर में छोटी दो फुनिया शीतल के से होजाती है उनके वास्ते यह दवा करनी चाहिये सिंगरफ तीन माशे, रस कपूर छः माशे, अकरकरा एक तोला, कत्या एक तोला, छोटी इलायची एक तोला, इन सबको पान के रसमें मिलाकर चनेके वरावर गोलिया बनावे, आर सवेरेही एक गोली नित्य खाया करे और चनेकी रोटी घी और दही भोजन करे, इक्कीस दिनके सेवन करने से सब रोग निश्चय जाता रहेगा ।। दूसरी दवा । रसकपूर, सिंगरफ, लौंग, सुहागा, सब एक एक तोला लेकर। इन सबको महीन पीसकर सात पुडिया बनावै, फिर सवेरे । ही एक पुडिया दही की मलाई में लपेटकर खिलावे दूध चांवल भोजन करावै और सब चीजों को परहेज है ॥ ॐ * विरेचन की औषवि * जो किसी मनुष्य के शरीरमें काले वा नीले दाम पडगये तो पहिले तीन दिन खिचड़ी खिलाकर फिर यह जुल्लाब ना चाहिये । काला दाना नो माशे. आधा भुना और आ वा कच्चा कूटकर बगवरकी शक्कर मिलाकर तीन पुडिया बनावे और सवेरेही गरम जलके संग खिलाये और प्यास लगे जब गरम पानी पिलावे । यदि कण्ठ का काक जिसे कौआ कहते हैं बैठ गया होय तो यह विरेचन देवे, पिस्तेकी मिंगी, बादामकी मिंगी, चिल |
बर्मिंघम में चल रहे भारत और इंग्लैंड (India vs England) के बीच टेस्ट मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. इंग्लैंड की टीम को जीतने के लिए 378 रन की जरूरत है. वहीं, भारतीय गेंदबाज पर इस मैच को जीताने का दारमदार है. टीम के कप्तान और गेंदबाज जसप्रीत बुमराह मैच को जीतने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं और अपने गेंद से इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर कहर बरपा रहे हैं. वहीं, दूसरी पारी में टीम इंडिया ने महज 245 रन ही बना सके. दूसरी पारी में ऋषभ पंत का बल्ला एक बार फिर चला और 57 रनों की पारी खेली. टेस्ट मैच के दोनों पारियों में शानदार बल्लेबाजी कर ऋषभ पंत ने अपने नाम कई रिकॉर्ड भी कर लिये हैं.
ऋषभ पंत ने पहली पारी में 146 रन बनाए थे. जिसमें 19 चौके और 4 छक्के जड़े थे. वहीं, दूसरी पारी में 57 रन बनाए इसमें भी उन्होंने 8 चौके जड़े. ऐसे में ऋषभ पंत दूसरे ऐसे विकेटकीपर बन गए हैं, जिन्होंन किसी एक ही टेस्ट में शतक और अर्धशतक जमाया है.
आपको बात दें, ऋषभ पंत ने 72 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है. साल 1973 में ब्रेबॉर्न में फारुख इंजीनियर ने इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में 121 रन और दूसरी पारी में 66 रन बनाए थे. वहीं, अब ऋषभ पंत ने पहली पारी में 146 रन और दूसरी पारी में 57 रन बनाकर उनका रिकॉर्ड तोड़ा है. फारुख इंजीनियर भी एक विकेटकीपर थे.
गौरतलब है कि, महेंद्र सिंह धोनी ने इसी मैदान में साल 2011 में खेले गए टेस्ट मैच में कुल 151 रन बनाए. जिसमें पहली पारी में 77 रन और दूसरी पारी में 74 रन बनाए थे. किसी एक टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर द्वारा सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में भी ऋषभ पंत तीसरे नंबर पर आ गए हैं.
यह भी पढ़ेंः इन 3 भारतीय क्रिकेटर्स को कोई बाॅलर नहीं कर पाया आउट, तीसरा नाम चौंका देगा!
ऋषभ पंत ने अपने धमाकेदार पारी से भारत को पहली पारी में मजबूत स्थिति में पहुंचाया. वहीं, दूसरी पारी में में भी सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में ऋषभ पंत ने अच्छी बल्लेबाजी की. उनके साथ दूसरी पारी में पुजारा ने भी 66 रन की पारी खेली. वहीं, पहली पारी में रविंद्र जडेजा ने साथ देते हुए 104 रन बनाए थे.
| बर्मिंघम में चल रहे भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. इंग्लैंड की टीम को जीतने के लिए तीन सौ अठहत्तर रन की जरूरत है. वहीं, भारतीय गेंदबाज पर इस मैच को जीताने का दारमदार है. टीम के कप्तान और गेंदबाज जसप्रीत बुमराह मैच को जीतने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं और अपने गेंद से इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर कहर बरपा रहे हैं. वहीं, दूसरी पारी में टीम इंडिया ने महज दो सौ पैंतालीस रन ही बना सके. दूसरी पारी में ऋषभ पंत का बल्ला एक बार फिर चला और सत्तावन रनों की पारी खेली. टेस्ट मैच के दोनों पारियों में शानदार बल्लेबाजी कर ऋषभ पंत ने अपने नाम कई रिकॉर्ड भी कर लिये हैं. ऋषभ पंत ने पहली पारी में एक सौ छियालीस रन बनाए थे. जिसमें उन्नीस चौके और चार छक्के जड़े थे. वहीं, दूसरी पारी में सत्तावन रन बनाए इसमें भी उन्होंने आठ चौके जड़े. ऐसे में ऋषभ पंत दूसरे ऐसे विकेटकीपर बन गए हैं, जिन्होंन किसी एक ही टेस्ट में शतक और अर्धशतक जमाया है. आपको बात दें, ऋषभ पंत ने बहत्तर साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है. साल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में ब्रेबॉर्न में फारुख इंजीनियर ने इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में एक सौ इक्कीस रन और दूसरी पारी में छयासठ रन बनाए थे. वहीं, अब ऋषभ पंत ने पहली पारी में एक सौ छियालीस रन और दूसरी पारी में सत्तावन रन बनाकर उनका रिकॉर्ड तोड़ा है. फारुख इंजीनियर भी एक विकेटकीपर थे. गौरतलब है कि, महेंद्र सिंह धोनी ने इसी मैदान में साल दो हज़ार ग्यारह में खेले गए टेस्ट मैच में कुल एक सौ इक्यावन रन बनाए. जिसमें पहली पारी में सतहत्तर रन और दूसरी पारी में चौहत्तर रन बनाए थे. किसी एक टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर द्वारा सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में भी ऋषभ पंत तीसरे नंबर पर आ गए हैं. यह भी पढ़ेंः इन तीन भारतीय क्रिकेटर्स को कोई बाॅलर नहीं कर पाया आउट, तीसरा नाम चौंका देगा! ऋषभ पंत ने अपने धमाकेदार पारी से भारत को पहली पारी में मजबूत स्थिति में पहुंचाया. वहीं, दूसरी पारी में में भी सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में ऋषभ पंत ने अच्छी बल्लेबाजी की. उनके साथ दूसरी पारी में पुजारा ने भी छयासठ रन की पारी खेली. वहीं, पहली पारी में रविंद्र जडेजा ने साथ देते हुए एक सौ चार रन बनाए थे. |
काउंटर / 193
तसवीर के आगे आंखें बन्द किए हनुमान चालीसा दोहराते मुनुआं के बापू... "हनुमान विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।"
कहां हुए मुमति के संगी। जब से सुमति आई, भगवान ही क्या, संगी-साथी भी दुश्मन बन बैठे, इससे तो अच्छी कुमति ही थी, पर उसी को रास नही आई थी वह जिन्दगी । कभी-कभी उसे लगता कि मनुआं के बापू की मौत की जिम्मेदार वह स्वयं है। उसने हो लड़-झगड़, रो-पीटकर उनकी पुरानी जिन्दगी को बदला था। कितनी शान्ति मिली थी उसे । जीवन की जैसे समस्त इच्छाएं पूरी हो गई थी । दहशत से मुक्ति मिली थी। पहले तो दिन-रात मनुआं के बापू से डरती रहती, ऊपर से हर समय दुश्मनों का डर, पुलिस का डर, चारों ओर डर-ही- डर...
गौने पर जब वह आई थी, तो कुछ दिन ही सही-सलामत कटे थे। पर धीरेधीरे वह सब समझ गई थी और समझने के साथ ही आतंक समा गया था मन में । लखन रात-रात भर गायब रहता। कभी-कभी कई दिन बाद आता। जब आता, तो शराब और गोश्त के बिना कौर तक न तोड़ता। उसे मालूम पड गया था कि लखन चोरी-चकारी से लेकर राहजनो तक करता है। जब कभी भी वह इसका विरोध करती, तो गालियां खाती। पर वह विरोध करती गई और समझती रही। मुनुआं के पेट में पड़ते ही उसकी दहशत कई गुना बढ़ गई थी । वह लखन से कहती, "देखो, तुम जे काम छोड़ देओ, जा खतरा की जिन्दगी मे कहा धरी ऐ । हम मेहनत की रूखी-सुखी खाय लिंगे, पर चैन की नीद तो सोइंगे। कलकू बच्चा होयगौ, कहा सोचेंगौ कि हमारे बापू बदमाश ए, और मान लेओ काऊ दिना पुलिस पकड़लै गई, तो हम कहां दर-दर की ठोकरें खागे ।"
" पुलिस से चौ डरत ए मूरख । पुलिस अपनौ कछू नाय कर सकत । जब तक कस्बा मे पंडिजी जिन्दा ऐ, पुलिस से डरन की नैकऊ जरूरत नांय । पूरौ थानो पंडिजी की घर और पडिजी को घर पुलिस को थानों । पंडिजी के जरिया दरोगा निरौ पैसा कमाता ऐ, मेरे सब ऊंच-नीच काम को हिस्सा पुलिस और पंडिजी ऊ तौलेत ऐन, पर तू जे बातें नांय समझेंगी।" लखन गर्व से कहता ।
मुनुआं के होते-होते लखन में काफी परिवर्तन आ गया था। कभी-कभी वह काफी उदासी से कहता, "तू सही कहत ऐ, जे खतरा, किल्लत और अपमान की जिन्दगी ऐ, पर छोड़नौ भौत मुश्किल ऐ । मान लेओ, सब छोड़ऊ दऊं, तो पुलिस और पंडिजी नांप छोड़ने दिगे। दौनन की आमदनी पै फरक पड़ेगो । पंडिजी तो जान के दुश्मन बन जाइंगे। उनके निरे गलत कामन में मैं सग रहौ हू । उनै पोल खुल जान को डर पैदा है जायगौ, और पुलिस को तो पचासियो झूठी गवाही में मैं गवाह रहौ हू । देख, एकदम तौ जा लेन से अलग है नाय पाउंगो, पर धीरे-धीरे मैं सब छोड़ दूंगौ। अपने गलत कामन की परछाई मनुआ पै नांय पड़न दुगो ।"
194 / प्रतिनिधि हिन्दी कहानियां 1985
सघन राचमुच धीरे-धीरे सब कामों से अलग हो गया था। गांव में ही जमीन बटाई पर लेकर मेती करने लगा था। करने से पंडितजी पं बहुत बुलावे आए, पर सन ने कस्बा जाना हो छोड़ दिया था। उसके गंगो-साथी उसके दुश्मन हो गए, पर गांव के लोग उसके इस परिवर्तन से बहुत गुण थे और उसे तो जैसे मन-मांगी मुराद मिल गई थी । यह मुनुआं को बाहों में भरे दिन-भर पहस्ती रहती । शेत पर रोटी ले जाते समय तो जैसे उसके पंग निकल आते। मेहनत में हूवे लखन को देखकर उसकी कसी कसी खिल जाती। महुआ की मोठी छाव में बैठकर लखन को घाना खिलाती और मनुओं को सोने से लगाए भविष्य के सुनहरे सपने बुनती। सघन भी मुगुम को गोदी में लेकर उछालता और अपनी थकान मिटाता । लखन के पसीने से सुगन्ध आती, मेहनत और लगन की सुगन्ध । कैसे सुख से दिन बीत रहे थे !
"सुख भरे दिनों के पंप लग जाते हैं। मालूम हो नहीं पड़ते, कब उड़ जाते है, पर दुध का एक पल भी पहाड़ हो जाता है," उसने सोचा और एक गहरी सांस भर के हाट को निहारा। यासी चहल-पहल थी। सूरज सिर पर सवार था । धूप की मार से उसकी आंखें चिलमिला रही थीं । मुनुआं की कुनमुनाहट सुनकर उसने धोती के पहने से उसे ढंका और फिर "टोकरी लो, टोकरी" की भरो-सी आवाज मुंह से निकाली। "आज एकउ गाहक नाय पर अबै तो टेम बाकी ऐ ।" वह हौले से बड़वडाई ।
आज का दिन उसे बहुत बड़ा लग रहा था। ऐसा हो बड़ा वह दिन लगा था। जिस दिन सुबह-सुबह पंडितजी उसके घर आए थे और लखन से बहुत देर घुसुरपुसुर करने के बाद लखन को कस्बे ले गए थे। जाते-जाते लयन कह् गया था, "तू चिन्ता मत करियो । मैं गओ और आओ। एक जरूरी काम ऐ ।" उसके मन को चैन नहीं पड़ रहा था। वह रोकना भी चाहती थी, पर जब तक वह कुछ कह पाती, लखन चला गया था। पूरे दिन उसके मन में अनजानी आशंकाएं उठती रही। बार-बार वह दरवाजे तक आकर देख जाती, पर निराश लौट आती। रहमराम करके दिन काट, शाम के झुटपुटे मे लखन ने घर में कदम रखा, तो उसकी जान में जान आई। पर लखन का बदहवाश परेशान-सा चेहरा देखकर कुछ भी नही पूछ पाई। खाना भी लखन ढंग से नहीं खा पाया था।
"चो परेशान ओ इतने ? पडिजी चौं आए हैं," बहुत देर बाद उसने डरतेडरते पूछा था। पर लखन चुप हो रहा था । बहुत देर गुमसुम रहने के बाद लखन के मुंह से बोल फूटे, "देख, मैंने पैलेई कई ही कि मैं बदमासी छोड़ऊ दऊं, तक पंडिजी और पुलिस नाय छोड़न देगी। बोई बात भई, जाको डर हो । ऊपर स बदमासन कूं खतम करने के आडर आए हैं। नए दरोगा कूं एक आदमी चाहिए काउंटर ( एनकाउंटर) के लइ ।"
माउंटर / 195
"काउंटर का होत ऐ?" यह पूछ बैठी ।
"काउंटर..." यह पोहंमोहंसा, "काउंटर मे होत ऐ बदमासन से पुलिस को मुठभेड़ और या मुठभेड़ में फाऊ बदमास का मारी जानी। पर हकीकत में..." यह फिर यो गया था यहीं। कुछ देर बाद बोला, "नए दरोगा कू तरक्को चाहिए, सो पंडिजी से एक आदमी मांगो ऐ, फाउंटर के सद । जाई से पडिजी मोए सं गए ऐ. मौसे के रए कि एक आदमी को काउंटर कराओ।" "घी बिना मुठभेड़ के ?"
"हां, सब ऐगेई चलत ऐ, तू नॉय समझेगी ।"
"दरोगा जी के इलाके में बदमास नांय मिले का ।"
"बदमास इलाके के सारे छोटे-बड़े बदमास भई पडिजो के बैठका मे बैठे हैं । दरोगाजी ऊभई ऐ, पर बदमासकूं मार के कौन हाइट मोल लें। ऊपर से आमदनी पऊ घोट पहुंचाय, सो फाळ सोधे-सच्चे आदमी कू मारनी चाहत ऐ, जासै कोई बहन-सुनन यारो नांव मिले। मैंनेऊं साफ मने कर दयो कि अब मैं जाझंझट में नाय पहुंगो जैसे-तैसे जा झंझट से बाहर निकर पायो हूं। भौत कही-सुनी भई, पंहिजो और दरोगाजी ने मोंए धमकीक दई कि तुमने जे काम नाय करवाओ, तो तुमें काऊं पैस मे बन्द कर दिगे। मैंने कई--कर देयो, पर अब मैं जे बदमासी के काम नाय करूंगी । भौत देर तक मौए रोके रखो। भां पं सराव और मुरगा की दावत उड़ रई। में उनके संग सामिल नाय भयौ, वो तो आनई नांय दे रये। पर ऊ बहानी बनाय के निकर आयो । पर तू चिन्ता छोड़ । आ मेरे पास आ, जे सब ऊंच-नीच तो लगी रहत ऐ ।" सधन ने जैसे स्वयं को समझाया ।
उसका मन अन्दर ही अन्दर बैठने-सा लगा था । कोई गोला-सा पेट मे घूमने लगा था । लयन उसे बांहों में समेटे हुए भी कहीं और था ।
"का सोच रए ओ ?*
"कछू ना ?" वह सरासर झूठ बोल के अपने विचारों के उलझाव में उलझ गया। "गुन मोए फरार होनो पहुँगो," थोड़ी देर बाद यह फिर बोला "मोए जे लगत ऐ कि पंडिजी मेरोई काउंटर करानी चाहत ऐ । अब मैं उनके काळ काम को नाम रहो ना, और में पंडिजी के भौत से राज जानत हूं। उनै डर है कि कऊं में पोलपट्टी नांय खोल देकं । सुनो, ऐ पढिजी चुनाव में खड़े होन की सोच रए हैं। मेरे पयाल से आज पंडिजी मोंए दरोगा जी कू दिखान ले गये। जासै दरोगाजी मोंए ढंग से पंचान लँ ।"
"तुम तो बोई डर रऐ औ ।" डर के बावजूद उसने हिम्मत बंधाई ।
"तू नई समझेगी जे बातें में सवेरे ई चलो जाउंगी । और सुन तूऊ मेरे संग घल । जे इलाका ई छोड़ दें । कऊं मेहनत मंजूरी करकं पेट पाल लिंगे। इन भेड़ियन से तो दूर रहेंगे।"
196 / प्रतिनिधि हिन्दी कहानियाँ 1985
अभी ये बातें चल ही रही थीं कि दरवाजे पर जीप रुकी। "ले आय गई पुलिस ।" जब तक वह उठकर भाग पाता, आंगन में लघ-पध सिपाही कूद पड़े और लखन को पकड़ के ले गए। वह रोती-चीखती रही। गांवभर मे जगार हो गई थी । भोर होते-होते गांव-भर में चर्चा फैल गई कि लखन का 'काउटर' हो गया। सब कुछ स्वप्न जैसा घटित हो गया। गांव-भर में आक्रोश फैल गया था, पर कोई कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था। वह कस्बे के बाजार मे भी रोती-चीखती रही । लोग उससे सहानुभूति दरसाने से भी डर रहे थे । पुलिस और पंडितजी के खिलाफ बोलने का साहस किसी में भी नहीं था। उसे तो लखन की लाश देखने को नहीं मिली थी। लाश तक नोंचकर खा गए पुलिस और उसके दलाल । बहुत दिनों तक वह इस उस के पास भागती रही, पर परिणाम शून्य ।
तभी गांव मे चुनाव की चर्चा गरमाने लगी । इक्का-दुक्का जीपें गांव में आने लगी थी। गांव वालो ने इस बार बोट मांगने वालो से यही शर्त रखी कि जो भी लखन के अपराधियों को सजा दिलवाएगा, पूरे गांव के बोट, उसी को जायेंगे । यह बात हवा में फैलकर प्रत्याशियों के कानों में भी पड़ी। अब रोज ही जोपें आने लगी । सभी दलों के सदस्य यह पूरा आश्वासन देते कि वे अपराधियों को सजा दिलवायेंगे, पर इस झूठी दिलासा से किसी का मन नहीं भरता था । यह बात प्रत्याशियो और उनके दल के लोगों की समझ में भी आ रही थी। तभी एक दल के प्रत्याशी ने उस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए । वे उसे तथा गांव के दसबीस लोगो को लेकर एस० एस० पी० डी० एस० पी० आदि से मिले । उन्हे समस्त स्थितियों से अवगत कराया। प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच का पूरा आश्वासन भी दिया गया। उस दल के लोग नित्य हो गाव में आते और लखन के एनकाउंटर की आग में लकड़िया डाल, गांव वालो की आग को सुलगाए रखते । सार्वजनिक भाषणो मे भी लखन के एनकाउंटर को खूब उछाला गया। खूब सहानुभूति जमा की गई। गांव के लोगो को तथा उसे भी भरोसा आ गया था कि उस दल के लोग सचमुच उनके साथ हैं और इस अन्याय का बदला दिलवायेंगे ।
गांव वालो ने एक मत से यह तय कर लिया कि वोट उसी दल के सदस्य को देगे और हुआ भी यही पूरे गांव का शत-प्रतिशत वोट उसी दल के सदस्य को पड़ा। इस आशा के साथ कि अब शीघ्र ही लखन के अपराधियों को सजा मिलेगी । पर गरीब की आशा भैंसे की आंत के समान लम्बी होती जाती है । चुनाव परिणाम घोषित हो गए। उनका प्रत्याशी जीत गया था। गाँव-भर में खुशिया मनाई गई थी। उसको भी कही लगा था कि अब लखन के हत्यारे अपनी करनी का फल भोगेगे, पर प्रतीक्षा पहाड़-सी बनती गई । चुनाव जीतने के बाद गाव वालो ने तथा उसने रोज ही प्रतीक्षा की कि नेताजी गांव में आयेंगे, पर | काउंटर / एक सौ तिरानवे तसवीर के आगे आंखें बन्द किए हनुमान चालीसा दोहराते मुनुआं के बापू... "हनुमान विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।" कहां हुए मुमति के संगी। जब से सुमति आई, भगवान ही क्या, संगी-साथी भी दुश्मन बन बैठे, इससे तो अच्छी कुमति ही थी, पर उसी को रास नही आई थी वह जिन्दगी । कभी-कभी उसे लगता कि मनुआं के बापू की मौत की जिम्मेदार वह स्वयं है। उसने हो लड़-झगड़, रो-पीटकर उनकी पुरानी जिन्दगी को बदला था। कितनी शान्ति मिली थी उसे । जीवन की जैसे समस्त इच्छाएं पूरी हो गई थी । दहशत से मुक्ति मिली थी। पहले तो दिन-रात मनुआं के बापू से डरती रहती, ऊपर से हर समय दुश्मनों का डर, पुलिस का डर, चारों ओर डर-ही- डर... गौने पर जब वह आई थी, तो कुछ दिन ही सही-सलामत कटे थे। पर धीरेधीरे वह सब समझ गई थी और समझने के साथ ही आतंक समा गया था मन में । लखन रात-रात भर गायब रहता। कभी-कभी कई दिन बाद आता। जब आता, तो शराब और गोश्त के बिना कौर तक न तोड़ता। उसे मालूम पड गया था कि लखन चोरी-चकारी से लेकर राहजनो तक करता है। जब कभी भी वह इसका विरोध करती, तो गालियां खाती। पर वह विरोध करती गई और समझती रही। मुनुआं के पेट में पड़ते ही उसकी दहशत कई गुना बढ़ गई थी । वह लखन से कहती, "देखो, तुम जे काम छोड़ देओ, जा खतरा की जिन्दगी मे कहा धरी ऐ । हम मेहनत की रूखी-सुखी खाय लिंगे, पर चैन की नीद तो सोइंगे। कलकू बच्चा होयगौ, कहा सोचेंगौ कि हमारे बापू बदमाश ए, और मान लेओ काऊ दिना पुलिस पकड़लै गई, तो हम कहां दर-दर की ठोकरें खागे ।" " पुलिस से चौ डरत ए मूरख । पुलिस अपनौ कछू नाय कर सकत । जब तक कस्बा मे पंडिजी जिन्दा ऐ, पुलिस से डरन की नैकऊ जरूरत नांय । पूरौ थानो पंडिजी की घर और पडिजी को घर पुलिस को थानों । पंडिजी के जरिया दरोगा निरौ पैसा कमाता ऐ, मेरे सब ऊंच-नीच काम को हिस्सा पुलिस और पंडिजी ऊ तौलेत ऐन, पर तू जे बातें नांय समझेंगी।" लखन गर्व से कहता । मुनुआं के होते-होते लखन में काफी परिवर्तन आ गया था। कभी-कभी वह काफी उदासी से कहता, "तू सही कहत ऐ, जे खतरा, किल्लत और अपमान की जिन्दगी ऐ, पर छोड़नौ भौत मुश्किल ऐ । मान लेओ, सब छोड़ऊ दऊं, तो पुलिस और पंडिजी नांप छोड़ने दिगे। दौनन की आमदनी पै फरक पड़ेगो । पंडिजी तो जान के दुश्मन बन जाइंगे। उनके निरे गलत कामन में मैं सग रहौ हू । उनै पोल खुल जान को डर पैदा है जायगौ, और पुलिस को तो पचासियो झूठी गवाही में मैं गवाह रहौ हू । देख, एकदम तौ जा लेन से अलग है नाय पाउंगो, पर धीरे-धीरे मैं सब छोड़ दूंगौ। अपने गलत कामन की परछाई मनुआ पै नांय पड़न दुगो ।" एक सौ चौरानवे / प्रतिनिधि हिन्दी कहानियां एक हज़ार नौ सौ पचासी सघन राचमुच धीरे-धीरे सब कामों से अलग हो गया था। गांव में ही जमीन बटाई पर लेकर मेती करने लगा था। करने से पंडितजी पं बहुत बुलावे आए, पर सन ने कस्बा जाना हो छोड़ दिया था। उसके गंगो-साथी उसके दुश्मन हो गए, पर गांव के लोग उसके इस परिवर्तन से बहुत गुण थे और उसे तो जैसे मन-मांगी मुराद मिल गई थी । यह मुनुआं को बाहों में भरे दिन-भर पहस्ती रहती । शेत पर रोटी ले जाते समय तो जैसे उसके पंग निकल आते। मेहनत में हूवे लखन को देखकर उसकी कसी कसी खिल जाती। महुआ की मोठी छाव में बैठकर लखन को घाना खिलाती और मनुओं को सोने से लगाए भविष्य के सुनहरे सपने बुनती। सघन भी मुगुम को गोदी में लेकर उछालता और अपनी थकान मिटाता । लखन के पसीने से सुगन्ध आती, मेहनत और लगन की सुगन्ध । कैसे सुख से दिन बीत रहे थे ! "सुख भरे दिनों के पंप लग जाते हैं। मालूम हो नहीं पड़ते, कब उड़ जाते है, पर दुध का एक पल भी पहाड़ हो जाता है," उसने सोचा और एक गहरी सांस भर के हाट को निहारा। यासी चहल-पहल थी। सूरज सिर पर सवार था । धूप की मार से उसकी आंखें चिलमिला रही थीं । मुनुआं की कुनमुनाहट सुनकर उसने धोती के पहने से उसे ढंका और फिर "टोकरी लो, टोकरी" की भरो-सी आवाज मुंह से निकाली। "आज एकउ गाहक नाय पर अबै तो टेम बाकी ऐ ।" वह हौले से बड़वडाई । आज का दिन उसे बहुत बड़ा लग रहा था। ऐसा हो बड़ा वह दिन लगा था। जिस दिन सुबह-सुबह पंडितजी उसके घर आए थे और लखन से बहुत देर घुसुरपुसुर करने के बाद लखन को कस्बे ले गए थे। जाते-जाते लयन कह् गया था, "तू चिन्ता मत करियो । मैं गओ और आओ। एक जरूरी काम ऐ ।" उसके मन को चैन नहीं पड़ रहा था। वह रोकना भी चाहती थी, पर जब तक वह कुछ कह पाती, लखन चला गया था। पूरे दिन उसके मन में अनजानी आशंकाएं उठती रही। बार-बार वह दरवाजे तक आकर देख जाती, पर निराश लौट आती। रहमराम करके दिन काट, शाम के झुटपुटे मे लखन ने घर में कदम रखा, तो उसकी जान में जान आई। पर लखन का बदहवाश परेशान-सा चेहरा देखकर कुछ भी नही पूछ पाई। खाना भी लखन ढंग से नहीं खा पाया था। "चो परेशान ओ इतने ? पडिजी चौं आए हैं," बहुत देर बाद उसने डरतेडरते पूछा था। पर लखन चुप हो रहा था । बहुत देर गुमसुम रहने के बाद लखन के मुंह से बोल फूटे, "देख, मैंने पैलेई कई ही कि मैं बदमासी छोड़ऊ दऊं, तक पंडिजी और पुलिस नाय छोड़न देगी। बोई बात भई, जाको डर हो । ऊपर स बदमासन कूं खतम करने के आडर आए हैं। नए दरोगा कूं एक आदमी चाहिए काउंटर के लइ ।" माउंटर / एक सौ पचानवे "काउंटर का होत ऐ?" यह पूछ बैठी । "काउंटर..." यह पोहंमोहंसा, "काउंटर मे होत ऐ बदमासन से पुलिस को मुठभेड़ और या मुठभेड़ में फाऊ बदमास का मारी जानी। पर हकीकत में..." यह फिर यो गया था यहीं। कुछ देर बाद बोला, "नए दरोगा कू तरक्को चाहिए, सो पंडिजी से एक आदमी मांगो ऐ, फाउंटर के सद । जाई से पडिजी मोए सं गए ऐ. मौसे के रए कि एक आदमी को काउंटर कराओ।" "घी बिना मुठभेड़ के ?" "हां, सब ऐगेई चलत ऐ, तू नॉय समझेगी ।" "दरोगा जी के इलाके में बदमास नांय मिले का ।" "बदमास इलाके के सारे छोटे-बड़े बदमास भई पडिजो के बैठका मे बैठे हैं । दरोगाजी ऊभई ऐ, पर बदमासकूं मार के कौन हाइट मोल लें। ऊपर से आमदनी पऊ घोट पहुंचाय, सो फाळ सोधे-सच्चे आदमी कू मारनी चाहत ऐ, जासै कोई बहन-सुनन यारो नांव मिले। मैंनेऊं साफ मने कर दयो कि अब मैं जाझंझट में नाय पहुंगो जैसे-तैसे जा झंझट से बाहर निकर पायो हूं। भौत कही-सुनी भई, पंहिजो और दरोगाजी ने मोंए धमकीक दई कि तुमने जे काम नाय करवाओ, तो तुमें काऊं पैस मे बन्द कर दिगे। मैंने कई--कर देयो, पर अब मैं जे बदमासी के काम नाय करूंगी । भौत देर तक मौए रोके रखो। भां पं सराव और मुरगा की दावत उड़ रई। में उनके संग सामिल नाय भयौ, वो तो आनई नांय दे रये। पर ऊ बहानी बनाय के निकर आयो । पर तू चिन्ता छोड़ । आ मेरे पास आ, जे सब ऊंच-नीच तो लगी रहत ऐ ।" सधन ने जैसे स्वयं को समझाया । उसका मन अन्दर ही अन्दर बैठने-सा लगा था । कोई गोला-सा पेट मे घूमने लगा था । लयन उसे बांहों में समेटे हुए भी कहीं और था । "का सोच रए ओ ?* "कछू ना ?" वह सरासर झूठ बोल के अपने विचारों के उलझाव में उलझ गया। "गुन मोए फरार होनो पहुँगो," थोड़ी देर बाद यह फिर बोला "मोए जे लगत ऐ कि पंडिजी मेरोई काउंटर करानी चाहत ऐ । अब मैं उनके काळ काम को नाम रहो ना, और में पंडिजी के भौत से राज जानत हूं। उनै डर है कि कऊं में पोलपट्टी नांय खोल देकं । सुनो, ऐ पढिजी चुनाव में खड़े होन की सोच रए हैं। मेरे पयाल से आज पंडिजी मोंए दरोगा जी कू दिखान ले गये। जासै दरोगाजी मोंए ढंग से पंचान लँ ।" "तुम तो बोई डर रऐ औ ।" डर के बावजूद उसने हिम्मत बंधाई । "तू नई समझेगी जे बातें में सवेरे ई चलो जाउंगी । और सुन तूऊ मेरे संग घल । जे इलाका ई छोड़ दें । कऊं मेहनत मंजूरी करकं पेट पाल लिंगे। इन भेड़ियन से तो दूर रहेंगे।" एक सौ छियानवे / प्रतिनिधि हिन्दी कहानियाँ एक हज़ार नौ सौ पचासी अभी ये बातें चल ही रही थीं कि दरवाजे पर जीप रुकी। "ले आय गई पुलिस ।" जब तक वह उठकर भाग पाता, आंगन में लघ-पध सिपाही कूद पड़े और लखन को पकड़ के ले गए। वह रोती-चीखती रही। गांवभर मे जगार हो गई थी । भोर होते-होते गांव-भर में चर्चा फैल गई कि लखन का 'काउटर' हो गया। सब कुछ स्वप्न जैसा घटित हो गया। गांव-भर में आक्रोश फैल गया था, पर कोई कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था। वह कस्बे के बाजार मे भी रोती-चीखती रही । लोग उससे सहानुभूति दरसाने से भी डर रहे थे । पुलिस और पंडितजी के खिलाफ बोलने का साहस किसी में भी नहीं था। उसे तो लखन की लाश देखने को नहीं मिली थी। लाश तक नोंचकर खा गए पुलिस और उसके दलाल । बहुत दिनों तक वह इस उस के पास भागती रही, पर परिणाम शून्य । तभी गांव मे चुनाव की चर्चा गरमाने लगी । इक्का-दुक्का जीपें गांव में आने लगी थी। गांव वालो ने इस बार बोट मांगने वालो से यही शर्त रखी कि जो भी लखन के अपराधियों को सजा दिलवाएगा, पूरे गांव के बोट, उसी को जायेंगे । यह बात हवा में फैलकर प्रत्याशियों के कानों में भी पड़ी। अब रोज ही जोपें आने लगी । सभी दलों के सदस्य यह पूरा आश्वासन देते कि वे अपराधियों को सजा दिलवायेंगे, पर इस झूठी दिलासा से किसी का मन नहीं भरता था । यह बात प्रत्याशियो और उनके दल के लोगों की समझ में भी आ रही थी। तभी एक दल के प्रत्याशी ने उस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए । वे उसे तथा गांव के दसबीस लोगो को लेकर एसशून्य एसशून्य पीशून्य डीशून्य एसशून्य पीशून्य आदि से मिले । उन्हे समस्त स्थितियों से अवगत कराया। प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच का पूरा आश्वासन भी दिया गया। उस दल के लोग नित्य हो गाव में आते और लखन के एनकाउंटर की आग में लकड़िया डाल, गांव वालो की आग को सुलगाए रखते । सार्वजनिक भाषणो मे भी लखन के एनकाउंटर को खूब उछाला गया। खूब सहानुभूति जमा की गई। गांव के लोगो को तथा उसे भी भरोसा आ गया था कि उस दल के लोग सचमुच उनके साथ हैं और इस अन्याय का बदला दिलवायेंगे । गांव वालो ने एक मत से यह तय कर लिया कि वोट उसी दल के सदस्य को देगे और हुआ भी यही पूरे गांव का शत-प्रतिशत वोट उसी दल के सदस्य को पड़ा। इस आशा के साथ कि अब शीघ्र ही लखन के अपराधियों को सजा मिलेगी । पर गरीब की आशा भैंसे की आंत के समान लम्बी होती जाती है । चुनाव परिणाम घोषित हो गए। उनका प्रत्याशी जीत गया था। गाँव-भर में खुशिया मनाई गई थी। उसको भी कही लगा था कि अब लखन के हत्यारे अपनी करनी का फल भोगेगे, पर प्रतीक्षा पहाड़-सी बनती गई । चुनाव जीतने के बाद गाव वालो ने तथा उसने रोज ही प्रतीक्षा की कि नेताजी गांव में आयेंगे, पर |
करियर डेस्क एअर इंडिया में प्रशिक्षु नियंत्रक के कुल 60 रिक्त पदों की भर्ती के लिए भर्ती निकली है। इच्छुक उम्मीदवार निचे दी गई जानकारी के अनुसार भर्ती के लिए आवेदन कर सकता है। उम्मीदवार को भर्ती के बारे में पूरी जानकारी होना जरुरी है।
पद का नाम : प्रशिक्षु नियंत्रक (Trainee Controllers)
आयु सीमा : 42 वर्ष। आयु के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए भर्ती की जारी अधिसूचना देखिये।
नौकरी का स्थान : जलविज्ञान भवन , रूरकी , 247667 उत्तराखंड।
परीक्षा शुल्क : 1000/- & No fee for SC/ST/Ex. SM कैंडिडेट्स।
शैक्षणिक योग्यता : B. E. /B. Tech कंप्यूटर साइंस में या इसके समकक्ष किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से 70 के PERCENTILE के साथ और इसके बाद GATE 2019 में या कंप्यूटर एप्लीकेशन में परास्नातक या किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से कंप्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर डिग्री कुल 60% अंकों के साथ। ।
चयन : उम्मीदवार का लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
नोटिफिकेशन के लिए यहां क्लिक करें।
| करियर डेस्क एअर इंडिया में प्रशिक्षु नियंत्रक के कुल साठ रिक्त पदों की भर्ती के लिए भर्ती निकली है। इच्छुक उम्मीदवार निचे दी गई जानकारी के अनुसार भर्ती के लिए आवेदन कर सकता है। उम्मीदवार को भर्ती के बारे में पूरी जानकारी होना जरुरी है। पद का नाम : प्रशिक्षु नियंत्रक आयु सीमा : बयालीस वर्ष। आयु के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए भर्ती की जारी अधिसूचना देखिये। नौकरी का स्थान : जलविज्ञान भवन , रूरकी , दो लाख सैंतालीस हज़ार छः सौ सरसठ उत्तराखंड। परीक्षा शुल्क : एक हज़ार/- & No fee for SC/ST/Ex. SM कैंडिडेट्स। शैक्षणिक योग्यता : B. E. /B. Tech कंप्यूटर साइंस में या इसके समकक्ष किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से सत्तर के PERCENTILE के साथ और इसके बाद GATE दो हज़ार उन्नीस में या कंप्यूटर एप्लीकेशन में परास्नातक या किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से कंप्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर डिग्री कुल साठ% अंकों के साथ। । चयन : उम्मीदवार का लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। नोटिफिकेशन के लिए यहां क्लिक करें। |
New Delhi: निजी सेक्टर के सहारे ट्रेन चलाने की कोशिश के बीच पहली बार केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी रूटों पर 151 आधुनिक ट्रेनों के जरिये यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगा है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र का निवेश 30 हजार करोड़ रुपये का होगा।
भारतीय रेल तंत्र में प्राइवेट प्लेयर के ट्रेन संचालन में शामिल होने से नौकरियां नहीं जाएंगी । इसके साथ ही रेलवे में इंफ्रा में सुधार और बढ़ोतरी होगी इसलिए नौकरी जाने के बजाए,नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। साथ ही प्राइवेट प्लेयर ट्रेन के किराए, भारतीय रेलवे ही तय करेगी लिहाज़ा महंगे किराए नहीं होंगे।
पिछले साल IRCTC ने पहली निजी ट्रेन लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस शुरू की थी। रेलवे के मुताबिक, इस कदम के पीछे मकसद भारतीय रेल में रखरखाव की कम लागत, कम ट्रांजिट टाइम के साथ नई तकनीक का विकास करना है और नौकरियों के अवसर बढ़ाना, बेहतर सुरक्षा और विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव कराना है।
भारतीय रेल नेटवर्क पर 109 जोड़ी रूट 12 क्लस्टर्स में होंगे। हर ट्रेन में कम से कम 16 कोच होंगे। इन रूटों पर चलने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। रेलवे ने यह भी कहा है कि इन आधुनिक ट्रेनों में से अधिकांश को 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही बनाया जाएगा।
वित्तीय व्यवस्था, अधिग्रहण, संचालन और ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की ही होगी। रेलवे ने कहा है कि वह 35 साल के लिए ये परियोजनाएं निजी कंपनियों को देगा।
निजी कंपनी को भारतीय रेलवे को फिक्स्ड हौलेज चार्ज, खपत के हिसाब से एनर्जी चार्ज और पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया से तय किया गया राजस्व का एक हिस्सा देना होगा। इन सभी ट्रेनों में ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के होंगे।
| New Delhi: निजी सेक्टर के सहारे ट्रेन चलाने की कोशिश के बीच पहली बार केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। रेल मंत्रालय ने एक सौ नौ जोड़ी रूटों पर एक सौ इक्यावन आधुनिक ट्रेनों के जरिये यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगा है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र का निवेश तीस हजार करोड़ रुपये का होगा। भारतीय रेल तंत्र में प्राइवेट प्लेयर के ट्रेन संचालन में शामिल होने से नौकरियां नहीं जाएंगी । इसके साथ ही रेलवे में इंफ्रा में सुधार और बढ़ोतरी होगी इसलिए नौकरी जाने के बजाए,नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। साथ ही प्राइवेट प्लेयर ट्रेन के किराए, भारतीय रेलवे ही तय करेगी लिहाज़ा महंगे किराए नहीं होंगे। पिछले साल IRCTC ने पहली निजी ट्रेन लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस शुरू की थी। रेलवे के मुताबिक, इस कदम के पीछे मकसद भारतीय रेल में रखरखाव की कम लागत, कम ट्रांजिट टाइम के साथ नई तकनीक का विकास करना है और नौकरियों के अवसर बढ़ाना, बेहतर सुरक्षा और विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव कराना है। भारतीय रेल नेटवर्क पर एक सौ नौ जोड़ी रूट बारह क्लस्टर्स में होंगे। हर ट्रेन में कम से कम सोलह कोच होंगे। इन रूटों पर चलने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार एक सौ साठ किलोग्राममीटर प्रति घंटा होगी। रेलवे ने यह भी कहा है कि इन आधुनिक ट्रेनों में से अधिकांश को 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही बनाया जाएगा। वित्तीय व्यवस्था, अधिग्रहण, संचालन और ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की ही होगी। रेलवे ने कहा है कि वह पैंतीस साल के लिए ये परियोजनाएं निजी कंपनियों को देगा। निजी कंपनी को भारतीय रेलवे को फिक्स्ड हौलेज चार्ज, खपत के हिसाब से एनर्जी चार्ज और पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया से तय किया गया राजस्व का एक हिस्सा देना होगा। इन सभी ट्रेनों में ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के होंगे। |
ग्वालियर । शहर के विश्व विद्यालय थाना क्षेत्र के सिटी सेंटर में स्थित बहुमंजिला इमारत सत्यम टावर से गिरकर एक वृद्ध की दर्दनाक मौत हो गई। वृद्ध नगर निगम रिटायर्ड अधिकारी बताए गए हैं। विश्व विद्यालय थाने के ए एस आई नगर निगम में वार्ड ऑफिसर रहे महेश कुमार मौर्य के मुताबिक राम नरेश राठौर कुछ साल पहले ही नगर निगम से रिटायर हुए थे। वह अपनी पत्नी के साथ अलकापुरी में स्थित सत्यम टावर की सातवीं मंजिल पर रहते थे। पड़ोसियों से पता चला है कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था उनका इलाज भी चल रहा था। रविवार को दिन में वो अपने फ्लैट की बालकनी से सर्दी के कारण सिर में पहनने वाला टोपा उठाने मुंडेर पर झुके तभी उनका पैर स्लिप हो गया और वे नीचे आ गिरे। नीचे गिरते ही उनकी की मौत हो गई। । घटनास्थल पर श्री राठौर का टोपा भी मिला है । इनका इकलौता बेटा दिल्ली में नौकरी करता है उसे पिता के निधन का समाचार से दिया गया है। वो ग्वालियर के लिए रवाना हो गया है। उधर पुलिस ने शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है।
| ग्वालियर । शहर के विश्व विद्यालय थाना क्षेत्र के सिटी सेंटर में स्थित बहुमंजिला इमारत सत्यम टावर से गिरकर एक वृद्ध की दर्दनाक मौत हो गई। वृद्ध नगर निगम रिटायर्ड अधिकारी बताए गए हैं। विश्व विद्यालय थाने के ए एस आई नगर निगम में वार्ड ऑफिसर रहे महेश कुमार मौर्य के मुताबिक राम नरेश राठौर कुछ साल पहले ही नगर निगम से रिटायर हुए थे। वह अपनी पत्नी के साथ अलकापुरी में स्थित सत्यम टावर की सातवीं मंजिल पर रहते थे। पड़ोसियों से पता चला है कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था उनका इलाज भी चल रहा था। रविवार को दिन में वो अपने फ्लैट की बालकनी से सर्दी के कारण सिर में पहनने वाला टोपा उठाने मुंडेर पर झुके तभी उनका पैर स्लिप हो गया और वे नीचे आ गिरे। नीचे गिरते ही उनकी की मौत हो गई। । घटनास्थल पर श्री राठौर का टोपा भी मिला है । इनका इकलौता बेटा दिल्ली में नौकरी करता है उसे पिता के निधन का समाचार से दिया गया है। वो ग्वालियर के लिए रवाना हो गया है। उधर पुलिस ने शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है। |
अब इस तस्वीर को देखिए इस तस्वीर को यदि आप अचानक देखेंगे तो आपको लगेगा कि बाज़ आई फोन चला रहा है पर असलियत तो यह है कि बाज़ खिड़की के बाहर बैठा है और खिड़की के अंदर जो व्यक्ति है वह फोन चला रहा है ।
अब इस तस्वीर को देखिए ऐसा लग रहा है कि इस लड़की के पंख निकल आए हैं पर जब ध्यान से आप देखेंगे तो पता चलेगा कि पर तो दीवार पंख बने हुए हैं और यह लड़की वहां से गुजर रही थी और किसी ने उसकी तस्वीर खींच ली ।
अब यह फोटो देखिए यह फोटो हर किसी को हैरान कर देती है इस तस्वीर को देखकर लगता है कि जैसे यह मक्खी किसी लाइट को लेकर उड़ रही है पर असलियत तो यह है कि इस फोटो को इतनी अच्छे तरीके से खींचा गया है कि यह मक्खी चंद्रमा को लेकर उड़ती हुई नजर आ रही है ।
और दूसरी में नजर आता है कि उसके बाल नहीं है ऐसे कैसे हो सकता है पर ध्यान से जब आप देखेंगे तो पता चलेगा कि उस व्यक्ति के पीछे एक लड़की खड़ी थी ।
यह तस्वीर बहुत ही लाजवाब है यह ट्रक जा रहा है और ऐसा लगता है कि सूरज को अपने ऊपर लाद कर ले कर जा रहा है पर यह तस्वीर इतने अच्छे तरीके से खींची गई है यह दृश्य सच में हैरान कर देता है ।
| अब इस तस्वीर को देखिए इस तस्वीर को यदि आप अचानक देखेंगे तो आपको लगेगा कि बाज़ आई फोन चला रहा है पर असलियत तो यह है कि बाज़ खिड़की के बाहर बैठा है और खिड़की के अंदर जो व्यक्ति है वह फोन चला रहा है । अब इस तस्वीर को देखिए ऐसा लग रहा है कि इस लड़की के पंख निकल आए हैं पर जब ध्यान से आप देखेंगे तो पता चलेगा कि पर तो दीवार पंख बने हुए हैं और यह लड़की वहां से गुजर रही थी और किसी ने उसकी तस्वीर खींच ली । अब यह फोटो देखिए यह फोटो हर किसी को हैरान कर देती है इस तस्वीर को देखकर लगता है कि जैसे यह मक्खी किसी लाइट को लेकर उड़ रही है पर असलियत तो यह है कि इस फोटो को इतनी अच्छे तरीके से खींचा गया है कि यह मक्खी चंद्रमा को लेकर उड़ती हुई नजर आ रही है । और दूसरी में नजर आता है कि उसके बाल नहीं है ऐसे कैसे हो सकता है पर ध्यान से जब आप देखेंगे तो पता चलेगा कि उस व्यक्ति के पीछे एक लड़की खड़ी थी । यह तस्वीर बहुत ही लाजवाब है यह ट्रक जा रहा है और ऐसा लगता है कि सूरज को अपने ऊपर लाद कर ले कर जा रहा है पर यह तस्वीर इतने अच्छे तरीके से खींची गई है यह दृश्य सच में हैरान कर देता है । |
PATNA : पटना समेत पूरे प्रदेश में मंगलवार देर शाम से बुधवार सुबह तक बारिश हुई। इस 12 घंटे में पटना में 94. 4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यही नहीं पूरे अगस्त में 141. 4 मिमी बारिश हुई थी। इस हिसाब से अगस्त की 86% बारिश मंगलवार रात से 12 घंटे में हुई। गांधी घाट के बाद अब दीघा में भी खतरे के निशान से ऊपर गंगा, पटना समेत 6 जिलों में हाई अलर्ट।
गंगा गांधी घाट के बाद बुधवार को दीघा में भी लाल निशान को पार कर गई। गंगा में उफान के बाद पटना, बक्सर, भागलपुर, भोजपुर, वैशाली व सारण में हाई अलर्ट कर दिया गया है। राहत अाैर बचाव के लिए एनडीअारएफ की 8 टीमें तैनात की गई हैं।
गंगा, पुनपुन व सोन लाल निशान के पार : तेज बारिश के कारण गंगा, सोन और पुनपुन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। तीनों नदियां पटना में खतरे के निशान को पार कर गई हैं। जलस्तर बढ़ने से दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन पांच नावों को संचालित कर रहा है ताकि विकट परिस्थिति में लोगों को गांवों से निकाला जा सके। बिंद टोली व एलसीटी घाट के पास रहने वाले लोगों को वहां से हटने को कहा गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की पांच टीमें लगातार गंगा में गश्त कर रही हैं। डीएम कुमार रवि ने बुधवार की सुबह पांच घाटों का निरीक्षण किया।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को अपराह्न दो बजे तक दीघाघाट में गंगा का जलस्तर 50. 27 मीटर था जो बुधवार की सुबह छह बजे तक 50. 57 मीटर हो गया जबकि यहां खतरे का निशान 50. 45 मीटर है। गांधीघाट में गंगा खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। हथिदह में गंगा का जलस्तर लाल निशान से 24 सेमी ऊपर रहा। सोन नदी का मनेर में जलस्तर बुधवार की सुबह तक 52. 52 मीटर हो गया। यहां नदी खतरे के निशान से 52 सेमी है। पुनपुन नदी का जलस्तर श्रीपालपुर में बुधवार की सुबह 49. 90 मीटर हो गया। यहां नदी खतरे के निशान पर पहुंच गई है।
| PATNA : पटना समेत पूरे प्रदेश में मंगलवार देर शाम से बुधवार सुबह तक बारिश हुई। इस बारह घंटाटे में पटना में चौरानवे. चार मिमी वर्षा दर्ज की गई। यही नहीं पूरे अगस्त में एक सौ इकतालीस. चार मिमी बारिश हुई थी। इस हिसाब से अगस्त की छियासी% बारिश मंगलवार रात से बारह घंटाटे में हुई। गांधी घाट के बाद अब दीघा में भी खतरे के निशान से ऊपर गंगा, पटना समेत छः जिलों में हाई अलर्ट। गंगा गांधी घाट के बाद बुधवार को दीघा में भी लाल निशान को पार कर गई। गंगा में उफान के बाद पटना, बक्सर, भागलपुर, भोजपुर, वैशाली व सारण में हाई अलर्ट कर दिया गया है। राहत अाैर बचाव के लिए एनडीअारएफ की आठ टीमें तैनात की गई हैं। गंगा, पुनपुन व सोन लाल निशान के पार : तेज बारिश के कारण गंगा, सोन और पुनपुन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। तीनों नदियां पटना में खतरे के निशान को पार कर गई हैं। जलस्तर बढ़ने से दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन पांच नावों को संचालित कर रहा है ताकि विकट परिस्थिति में लोगों को गांवों से निकाला जा सके। बिंद टोली व एलसीटी घाट के पास रहने वाले लोगों को वहां से हटने को कहा गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की पांच टीमें लगातार गंगा में गश्त कर रही हैं। डीएम कुमार रवि ने बुधवार की सुबह पांच घाटों का निरीक्षण किया। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को अपराह्न दो बजे तक दीघाघाट में गंगा का जलस्तर पचास. सत्ताईस मीटर था जो बुधवार की सुबह छह बजे तक पचास. सत्तावन मीटर हो गया जबकि यहां खतरे का निशान पचास. पैंतालीस मीटर है। गांधीघाट में गंगा खतरे के निशान से छब्बीस सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। हथिदह में गंगा का जलस्तर लाल निशान से चौबीस सेमी ऊपर रहा। सोन नदी का मनेर में जलस्तर बुधवार की सुबह तक बावन. बावन मीटर हो गया। यहां नदी खतरे के निशान से बावन सेमी है। पुनपुन नदी का जलस्तर श्रीपालपुर में बुधवार की सुबह उनचास. नब्बे मीटर हो गया। यहां नदी खतरे के निशान पर पहुंच गई है। |
"यह कन्या कमकरेखा, विवाह की चिन्ता के साथ समान रूप से बढ़ती हुई मेरे हृदय को व्यथित कर रही है ॥ २४॥
समुचित स्थान से भ्रष्ट गीति ( गान) के समान कन्या पराये व्यक्ति के भी कानों में उद्वेग उत्पन्न करती है ॥ २५॥
अज्ञान से कुपात्र में दी हुई विद्या के समान कुपात्र को दो हुई कन्या न यश के लिए होती है, न धर्म के लिए ही, प्रत्युत पश्चात्ताप के लिए होती है ॥ २६॥
अतः मैं इस कन्या को किस राजा के लिए दूं । इसके योग्य वर कौन होगा, यह मेरे हृदय में भारी चिन्ता हो रही है" ।।२७।।
यह सुनकर महारानी कनकप्रभा हंसकर राजा से बोली कि 'आप तो इस प्रकार चिन्तित हैं; किन्तु वह कनकरेखा तो विवाह ही नहीं करना चाहती ॥ २८॥
आज ही खेल में गुड़िया बनाती हुई उससे मैंने कहा कि 'मैं तुम्हारा विवाह कब देखूंगी ॥२९॥
मेरे ऐसा प्रश्न करते ही उसने रोष के साथ मुझसे कहा, 'म ऐसा मत कहो; ऐसा मत कहो, मुझे किसी के लिए भी न दो ॥ ३०॥
तुम्हारे साथ मेरा वियोग न होगा। मैं अविवाहित ही ठीक हूँ । यदि तुमने मेरा विवाह किया तो मुझे मरी ही समझो। इसमें कुछ कारण हैं ।।३१।।
यह सुनकर व्याकुल मैं तुम्हारे पास आई हूँ। विवाह न करनेवाली कन्या के लिए वर का सोचना ही व्यर्थ है ।। ३२ ।।
रानी के मुख से ऐसा सुनकर घबराया हुआ राजा कन्या के भवन में जाकर उससे बोला- 'बेटी, जिस पति को प्राप्ति के लिए देवताओं और दैत्यों की कन्याएँ तपस्या करके भगवान् से प्रार्थना करती हैं, उसे तू ने मना कर दिया ।।३३-३४।।
पिता की बातें सुनकर भूमि पर दृष्टि गड़ाई हुई राजकुमारी कनकरेखा बोली- ॥३५॥
'पिताजी मुझे विवाह की चाह नहीं है, तो इसमें आपको इतना आग्रह क्यों है ? ॥३६॥
पुत्री के इस प्रकार कहने पर बुद्धिमान् और परोपकारी राजा इस तरह कहने लगा- 'बेटी कन्यादान के विना पुरुष की पापशान्ति के लिए दूसरा कौन-सा उपाय है ?" ॥३७ ।। | "यह कन्या कमकरेखा, विवाह की चिन्ता के साथ समान रूप से बढ़ती हुई मेरे हृदय को व्यथित कर रही है ॥ चौबीस॥ समुचित स्थान से भ्रष्ट गीति के समान कन्या पराये व्यक्ति के भी कानों में उद्वेग उत्पन्न करती है ॥ पच्चीस॥ अज्ञान से कुपात्र में दी हुई विद्या के समान कुपात्र को दो हुई कन्या न यश के लिए होती है, न धर्म के लिए ही, प्रत्युत पश्चात्ताप के लिए होती है ॥ छब्बीस॥ अतः मैं इस कन्या को किस राजा के लिए दूं । इसके योग्य वर कौन होगा, यह मेरे हृदय में भारी चिन्ता हो रही है" ।।सत्ताईस।। यह सुनकर महारानी कनकप्रभा हंसकर राजा से बोली कि 'आप तो इस प्रकार चिन्तित हैं; किन्तु वह कनकरेखा तो विवाह ही नहीं करना चाहती ॥ अट्ठाईस॥ आज ही खेल में गुड़िया बनाती हुई उससे मैंने कहा कि 'मैं तुम्हारा विवाह कब देखूंगी ॥उनतीस॥ मेरे ऐसा प्रश्न करते ही उसने रोष के साथ मुझसे कहा, 'म ऐसा मत कहो; ऐसा मत कहो, मुझे किसी के लिए भी न दो ॥ तीस॥ तुम्हारे साथ मेरा वियोग न होगा। मैं अविवाहित ही ठीक हूँ । यदि तुमने मेरा विवाह किया तो मुझे मरी ही समझो। इसमें कुछ कारण हैं ।।इकतीस।। यह सुनकर व्याकुल मैं तुम्हारे पास आई हूँ। विवाह न करनेवाली कन्या के लिए वर का सोचना ही व्यर्थ है ।। बत्तीस ।। रानी के मुख से ऐसा सुनकर घबराया हुआ राजा कन्या के भवन में जाकर उससे बोला- 'बेटी, जिस पति को प्राप्ति के लिए देवताओं और दैत्यों की कन्याएँ तपस्या करके भगवान् से प्रार्थना करती हैं, उसे तू ने मना कर दिया ।।तैंतीस-चौंतीस।। पिता की बातें सुनकर भूमि पर दृष्टि गड़ाई हुई राजकुमारी कनकरेखा बोली- ॥पैंतीस॥ 'पिताजी मुझे विवाह की चाह नहीं है, तो इसमें आपको इतना आग्रह क्यों है ? ॥छत्तीस॥ पुत्री के इस प्रकार कहने पर बुद्धिमान् और परोपकारी राजा इस तरह कहने लगा- 'बेटी कन्यादान के विना पुरुष की पापशान्ति के लिए दूसरा कौन-सा उपाय है ?" ॥सैंतीस ।। |
आसाम के गोलाघाट में जेल से छूटने के बाद पति ने पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद वह खुद ही पुलिस के सामने गया और सरेंडर कर दिया। घटना गोलाघाट शहर के हिंदी स्कूल रोड की है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने पारिवारिक कलह के कारण वारदात को अंजाम दिया। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। लोग दहशत में है। वे इस घटना पर हैरानी जता रहे हैं। वहीं इस मामले में एक अधिकारी का कहना है कि आरोपी ने सोमवार को पारिवारिक विवाद के कारण पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी और फिर असम के गोलाघाट जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
असल में आरोपी पत्नी से मारपीट के आरोप में कुछ दिनों पहले ही जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह गोलाघाट शहर के हिंदी स्कूल रोड स्थित अपने ससुराल गया। वहां पहुंचने के बाद वह झगड़ा करने लगा। इसके बाद उसने चाकू से पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, वह पत्नी से अक्सर मारपीट करता था। जिससे तंग आकर पत्नी ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
अधिकारी ने आगे कहा कि आरोपी पत्नी से मारपीट के आरोप में जेल में था। रिहा होने के बाद वह घर गया और फिर से झगड़ा शुरू कर दिया। इसके बाद उसने पत्नी और सास-ससुर को मौत के घाट उतार दिया। घटना को अंजाम देने के बाद वह अपने 9 महीने के बेटे के साथ गोलाघाट पुलिस स्टेशन पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस ने कहा कि मृतका की पहचान संघमित्रा घोष और उसके माता-पिता संजीब घोष और जुनू घोष के रूप में की गई है। पुलिस ने बताया कि जब आरोपी परिवार के लोगों की हत्या कर रहा था तो उसकी पत्नी की छोटी बहन वीडियो कॉल पर थी। वह काजीरंगा विश्वविद्यालय की छात्रा है। वारदात के समय वह अपने परिवार के लोगों से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
| आसाम के गोलाघाट में जेल से छूटने के बाद पति ने पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद वह खुद ही पुलिस के सामने गया और सरेंडर कर दिया। घटना गोलाघाट शहर के हिंदी स्कूल रोड की है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने पारिवारिक कलह के कारण वारदात को अंजाम दिया। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। लोग दहशत में है। वे इस घटना पर हैरानी जता रहे हैं। वहीं इस मामले में एक अधिकारी का कहना है कि आरोपी ने सोमवार को पारिवारिक विवाद के कारण पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी और फिर असम के गोलाघाट जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। असल में आरोपी पत्नी से मारपीट के आरोप में कुछ दिनों पहले ही जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह गोलाघाट शहर के हिंदी स्कूल रोड स्थित अपने ससुराल गया। वहां पहुंचने के बाद वह झगड़ा करने लगा। इसके बाद उसने चाकू से पत्नी और सास-ससुर की हत्या कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, वह पत्नी से अक्सर मारपीट करता था। जिससे तंग आकर पत्नी ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अधिकारी ने आगे कहा कि आरोपी पत्नी से मारपीट के आरोप में जेल में था। रिहा होने के बाद वह घर गया और फिर से झगड़ा शुरू कर दिया। इसके बाद उसने पत्नी और सास-ससुर को मौत के घाट उतार दिया। घटना को अंजाम देने के बाद वह अपने नौ महीने के बेटे के साथ गोलाघाट पुलिस स्टेशन पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने कहा कि मृतका की पहचान संघमित्रा घोष और उसके माता-पिता संजीब घोष और जुनू घोष के रूप में की गई है। पुलिस ने बताया कि जब आरोपी परिवार के लोगों की हत्या कर रहा था तो उसकी पत्नी की छोटी बहन वीडियो कॉल पर थी। वह काजीरंगा विश्वविद्यालय की छात्रा है। वारदात के समय वह अपने परिवार के लोगों से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। |
क्रोएशिया में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 6. 3 मापी गई। झटके इतनी तेज थे कि क्रोएशिया की संसद के सत्र के दौरान सदस्य भागने लगे। वहीं, कई इमारतें भी गिर गईं।
वीडियो डेस्क। आपने वो कछुआ और खरगोश वाली कहानी जरूर सुनी होगी। जिसका अर्थ था कि निरंतर चलते रहने से ही सफलता हमारे कदम चूमती है। ऐसा ही कुछ हुआ ब्राजील में एक सुपरबाइक रेसर के साथ।
नई दिल्ली. साल 2020 पूरी दुनिया के लिए खराब साबित हुआ। ये साल खत्म होने वाला है फिर भी कोरोना के केस लगातार आ रहे हैं। हर दिन कोरोना से हजारों लोगों की मौतें हो रही हैं। इससे बचने के लिए वैक्सीन्स का ट्रायल होने शुरू हो गए हैं। भारत में आज से चार राज्यों असम, आंध्र, पंजाब और गुजरात में 29 दिसंबर तक वैक्सीन का मॉक ड्रील किया जा रहा है। पहले फेज में ये वैक्सीन्स हॉस्पिटल स्टाफ और बुजुर्गों को दी जा रही है। ऐसे में खुलासा हुआ है कि अमीर लोग नियमों को तोड़कर वैक्सीन लगवाने की कोशिश कर रहे हैं।
वीडियो डेस्क। क्रिसमस के दिन बुजुर्गों को खुशी बांटने की जगह सैंटा ने मौत बांट दी। बेल्जियम में केयर होम में रहने वाले लोगों के लिए वहां के कर्मचारियों ने सैंटा को गिफ्ट बांटने का काम दिया ताकि बुजुर्गों के चेहरे पर कुछ खुशी दिखाई दे उनका मनोबल बढ़े।
नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच पूरी दुनिया में क्रिसमस का त्योहार मनाया जा रहा है। कोरोना और प्रतिबंधों के चलते भले ही क्रिसमस की रौनक कम दिखी हो, लेकिन महामारी लोगों का धर्म के प्रति विश्वास नहीं हिला पाई। हालांकि, दुनिया भर में 17 लाख लोगों की मौत के बाद कुछ लोगों के लिए यह क्रिसमस शोक भरा है। आईए तस्वीरों में देखते हैं दुनिया में किस तरह से क्रिसमस मनाया गया है।
ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच अमेरिका बायोटेक कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी काम करेगी। कंपनी का कहना है कि उन्हें पहले से ही आशंका था कि कोरोना का नया स्ट्रेन आ सकता है , इसलिए पहले से ही वैक्सीन को उसी के हिसाब से तैयार किया गया था।
अमेरिका ने चीन को बड़ा झटका देते हुए तिब्बत में धार्मिक-आजादी से जुड़ा एक नया कानून पारित किया है। इस कानून को पारित करने को लेकर तिब्बत के राजनीतिक प्रमुख ने अमेरिका के फैसले का स्वागत किया है।
नमस्कार मेरा नाम है इंटरनेशनल खबरी और आज हम बात करेंगे एक नए कोरोनावायरस स्ट्रेन के बारे में। यह नया वायरस ब्रिटेन में खोजा गया है और यह मौजूदा कोविड-19 वायरस से 70 प्रतिशत ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। ब्रिटेन के एक लैब में RT-PCR टेस्ट के दौरान कोरोना वायरस के इस खतरनाक स्ट्रेन का पता चला है। टेस्ट के दौरान पता चला कि यह वायरस पहले के कोविड-19 वायरस की तुलना में ज्यादा संक्रामक है और सुपर स्प्रेडर है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नए वायरस के कारण कोरोना की वैक्सीन के कम प्रभावकारी होने की उम्मीद नहीं है।
| क्रोएशिया में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता छः. तीन मापी गई। झटके इतनी तेज थे कि क्रोएशिया की संसद के सत्र के दौरान सदस्य भागने लगे। वहीं, कई इमारतें भी गिर गईं। वीडियो डेस्क। आपने वो कछुआ और खरगोश वाली कहानी जरूर सुनी होगी। जिसका अर्थ था कि निरंतर चलते रहने से ही सफलता हमारे कदम चूमती है। ऐसा ही कुछ हुआ ब्राजील में एक सुपरबाइक रेसर के साथ। नई दिल्ली. साल दो हज़ार बीस पूरी दुनिया के लिए खराब साबित हुआ। ये साल खत्म होने वाला है फिर भी कोरोना के केस लगातार आ रहे हैं। हर दिन कोरोना से हजारों लोगों की मौतें हो रही हैं। इससे बचने के लिए वैक्सीन्स का ट्रायल होने शुरू हो गए हैं। भारत में आज से चार राज्यों असम, आंध्र, पंजाब और गुजरात में उनतीस दिसंबर तक वैक्सीन का मॉक ड्रील किया जा रहा है। पहले फेज में ये वैक्सीन्स हॉस्पिटल स्टाफ और बुजुर्गों को दी जा रही है। ऐसे में खुलासा हुआ है कि अमीर लोग नियमों को तोड़कर वैक्सीन लगवाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो डेस्क। क्रिसमस के दिन बुजुर्गों को खुशी बांटने की जगह सैंटा ने मौत बांट दी। बेल्जियम में केयर होम में रहने वाले लोगों के लिए वहां के कर्मचारियों ने सैंटा को गिफ्ट बांटने का काम दिया ताकि बुजुर्गों के चेहरे पर कुछ खुशी दिखाई दे उनका मनोबल बढ़े। नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच पूरी दुनिया में क्रिसमस का त्योहार मनाया जा रहा है। कोरोना और प्रतिबंधों के चलते भले ही क्रिसमस की रौनक कम दिखी हो, लेकिन महामारी लोगों का धर्म के प्रति विश्वास नहीं हिला पाई। हालांकि, दुनिया भर में सत्रह लाख लोगों की मौत के बाद कुछ लोगों के लिए यह क्रिसमस शोक भरा है। आईए तस्वीरों में देखते हैं दुनिया में किस तरह से क्रिसमस मनाया गया है। ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच अमेरिका बायोटेक कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी काम करेगी। कंपनी का कहना है कि उन्हें पहले से ही आशंका था कि कोरोना का नया स्ट्रेन आ सकता है , इसलिए पहले से ही वैक्सीन को उसी के हिसाब से तैयार किया गया था। अमेरिका ने चीन को बड़ा झटका देते हुए तिब्बत में धार्मिक-आजादी से जुड़ा एक नया कानून पारित किया है। इस कानून को पारित करने को लेकर तिब्बत के राजनीतिक प्रमुख ने अमेरिका के फैसले का स्वागत किया है। नमस्कार मेरा नाम है इंटरनेशनल खबरी और आज हम बात करेंगे एक नए कोरोनावायरस स्ट्रेन के बारे में। यह नया वायरस ब्रिटेन में खोजा गया है और यह मौजूदा कोविड-उन्नीस वायरस से सत्तर प्रतिशत ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। ब्रिटेन के एक लैब में RT-PCR टेस्ट के दौरान कोरोना वायरस के इस खतरनाक स्ट्रेन का पता चला है। टेस्ट के दौरान पता चला कि यह वायरस पहले के कोविड-उन्नीस वायरस की तुलना में ज्यादा संक्रामक है और सुपर स्प्रेडर है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नए वायरस के कारण कोरोना की वैक्सीन के कम प्रभावकारी होने की उम्मीद नहीं है। |
अपने चरम पर चमका श्री रजनीश की लोकप्रियता का सितारां!
एक महीने बाद रजनीश ने एक अन्य नाम धारण कर लिया - ओशो रजनीश । ओशो शब्द का प्रयोग पहले-पहल एका ने अपने गुरु बोधिधर्म के लिए किया था । ओशो का अर्थ है- पूर्ण पुरुष ।
कुछ महीने तक रजनीश ओशो रजनीश बने रहे। ऐसा लगता है कि वे अपने माता-पिता द्वारा दिये गये नाम से थक और ऊब गये थे। 15 सितंबर, 1989 को उन्होंने अपने नाम में से रजनीश को पूरी तरह निकालकर फेंक दिया और उनका नया नाम हो गया. केवल 'ओशो' ।
मृत्यु की तैयारी
रजनीश गुरु अथवा दैवी पुरुष होने का दावा नहीं करते, फिर भी वे अपने शिष्यों से आत्मसमर्पण की मांग करते हैं। वे कहते हैं, "मैं यह चेष्टा करूंगा कि तुम लय प्राप्त कर सको, लेकिन इसके लिए तुम्हारे सहयोग की आवश्यकता होगी। ....समर्पण भाव में रहो । जो कुछ होता जाये अथवा मैं जो कुछ करता जाऊं, उसके लिए तैयार रहो, भले ही मृत्यु आ जाये, तैयार रहो।.... कुछ हो पाना
तभी संभव है, जब तुम मुझ पर विश्वास कर सको। विश्वास का अर्थ है कि तुम सब कुछ मेरे हाथों में छोड़ दो। भले ही मृत्यु आ जाये, तुम शिकायत नहीं करोगे और अगर तुम इतना कर सको और तुम इस शिविर से वह व्यक्तित्व लेकर नहीं लौटोगे, जिसे लेकर तुम यहां आये थे। .... इस शिविर में पूरे समय अपने भीतर गहरे समर्पण का भाव महसूस करो।"
गुरु, मसीहा और अवतार की भांति रजनीश अपने शिष्यों से मुक्ति अथवा उन्नयन का वादा करते हैं, "मैं तुमसे वादा करता हूं कि तुम यहां से वैसे नहीं लौटोगे, जैसे तुम यहां आये थे।" मेहेर बाबा की भांति वे भी कहते हैं, "मैं शिक्षा देने नहीं, जगाने आया हूं।....में शिक्षक नहीं हूं।
रजनीश ने इस दावे के बावजूद कि वे शिक्षा नहीं देते, उनकी शिक्षाएं पांच सौ ग्रंथों में भरी पड़ी हैं और जब उनसे इस बात का जिक्र किया जाता है, तब भी वे यही कहते हैं कि वे कोई शिक्षा नहीं देते। वे अपनी शिक्षाओं और दूसरों की शिक्षाओं का भेद इस प्रकार समझाते हैं, "मेरी शिक्षाएं तो उस कांटे की तरह हैं, जिसका इस्तेमाल मैं तुम्हारे भीतर गड़ा हुआ कांटा निकालने के लिए करता हूं। जिस क्षण तुम्हारा कांटा निकल जायेगा, उसी क्षण दोनों कांटे फेंक दिये जायेंगे।
श्री रजनीश के पर्सनाहीन मुफ्त यौनाचार के दर्शन ने युवा पीढ़ी को विशेष रूप से प्रभावित किया।
• अपने भीतर दैवी चेतना के लिए स्थान बनाओ, तुम्हारे भीतर कोई भी खाली नहीं है, तुम कबाड़खाना बन गये हो । कुछ जगह बनाओ, दिमाग में जो कुछ है, उसे बाहर फेंक दो । कुछ जगह बनाओ, वह खाली जगह मेजबान बनेगी, दैवी अतिथि के लिए मेजबान।"
संभोग से समाधि
रजनीश ऐसा मानते हैं कि मानवीय व्यक्तित्व को धर्म ने बहुत हानि पहुंचायी है। धर्म ने मनुष्य की यौन भावना का दमन करने की कोशिश की है और वह संभोग को घिनौना, गंदा, पापपूर्ण और अपराधपूर्ण मानता है। रजनीश विवाह की संस्था के प्रति घृणा से भर उठे हैं। वे इसे जैविक दासता मानते हैं। वे अपने अनुयायियों से कहते हैं कि प्रेम को चेतन के स्तर तक ऊंचा उठा दो । उनको यौन प्रतिबंधों पर विश्वास नहीं है। वे कहते हैं, चाहे जिससे प्रेम करो । जब तुम्हें यह छूट होती है, तब तुम स्वतंत्रतापूर्वक प्रेम करते हो और प्रेम तुम्हारे पांव की बेड़ी नहीं बनता। तुम प्रेम में साझेदारी कर सकते हो.... दो व्यक्ति जब एक दूसरे की ऊष्मा का आनंद लेते हैं तो उसमें कोई समस्या ही नहीं रह जाती ।
रजनीश का दर्शन मुक्त प्रेम, मुक्त संभोग का दर्शन है। रजनीश प्रेम को जैविक स्तर से उठाकर चेतना के स्तर पर प्रतिष्ठित कर देते हैं और जब प्रेम उस स्तर पर पहुंच जाता है, तब वह बंधन नहीं रह जाता और चेतना की वह अवस्था आध्यात्मिक प्रेम की मनोभूमि तैयार कर देती है। आध्यात्मिक प्रेम दो व्यक्तियों के बीच नहीं होता, वह व्यक्ति और सर्वोच्च सत्ता के बीच होता है - अंश और पूर्ण के बीच, बिंदु और सागर के बीच । इस स्थिति में संभोग समाधि की ओर ले जाता है। यह प्रेम की भावना का उन्नयन (ऊंचा उठाना ) है ।
मुक्तिः आदि और अंत
रजनीश की शिक्षाओं में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान ध्यान का है, जिसके बारे में वे कहते हैं कि "ध्यान का आदि (आरंभ ) और अंत ( लक्ष्य) दोनों मुक्ति है। यह मुक्ति की आत्म-उन्नयन की कुंजी है।" उन्होंने ध्यान के साथ सक्रियता को जोड़ दिया है, क्योंकि उनकी दृष्टि में ध्यान अनिवार्यतः ऊर्जा की प्रक्रिया है।
उनकी दृष्टि में, "ध्यान चिंतन अथवा एकाग्रता नहीं है। चिंतन तो महज सोचने और विचारों को शुद्ध करने की प्रक्रिया है । .... ध्यान का अपना ही आनंद है और यह आनंद भोजन, संभोग, वस्त्र आदि किसी भी वस्तु और सुख से बढ़कर है । यह अंतिम आनंद है, परंतु ध्यान अंतःकरण की प्रक्रिया है। इसमें सोचने को कुछ नहीं रह जाता। इस अवस्था में शद्ध परम-तत्त्व ही शेष रह जाता है। ध्यान सोचने की प्रक्रिया नहीं है, वह किसी भी स्थिति में चिंतन नहीं है ।
रजनीश ने ध्यान की अनेक पद्धतियों का विकास किया है और उन सब के द्वारा साधक की समची वेदना अचेतन मन से चेतन मन के तल पर उभर आती है,
vix int
श्री रजनीश की गतिविधियों अमरीकी समाज को हराकर भरत कर डाया कि यह जैसे भी हो रजनीश से छुटकारा पाने के बहाने इंढ़ने समा sufre falvar aircut if varfter at विष्णतार कर ही किया गया। आव में श्री रजनीश पुनः भारत में अपने पूना स्थित आश्रम में तौट आये।
रजनीश का गत है कि जब वंदना चैतन केवल पर आ जाती है, तब वह नष्ट हो जाती है। ये ध्यान की एक प्रकार की मृत्यु मानते हैं। "अतीत के प्रति मृत्यु, आ की पूर्ण मृत्यु।" ध्यान अनंत के साथ एकाकार हो जाता है और वह समूचे व्यक्तित्व
का स्पांतरण कर डालता है।
रजनीश में अनेक प्रकार की ध्यान पद्धतियों का विकास किया है, जिनमें से थे पांच ध्यान पद्धतियों पर अधिक बल देते हैं--(1) डायनेमिक (सलिय) ध्यान, जिसकी अवधि एक घंटा है और चार अवस्थाएं-गहरा श्वास भरना, शक्ति को सुना छोड़ देना जिससे कि शरीर जो कुछ करना चाहे कर सके-उछल-कूद अथवा छ, छ, तू मिलाना और मन और शरीर में जो कुछ हो रहा है, उसको साश्रीभाव से देखना, (2) कुंडमिनी ध्यान। यह भी एक घंटा चलता है और इसकी भी चार अवरथाएं-- शरीर को हिलाना, नाचना, साक्षीभाव और विष्ट होकर भेट जाना, (3) नॉन-माइंड ध्यान, यह दो घंटे का ध्यान की और एमकी दो अवस्थाएं है। साधक एक घंटे तक एकांत में भारी करता चला जाता है और अपने दिमाग का गाग कमरा निकाल फेंकता है। उसके बाद एक घंटा सामोशी के साथ आस बंद करके उस सब को गाक्षीभाव से देखता सकता है, जो उसके तन और मन में हो सहा है, (4) भान अगे गैडीटेशन समय दो घंटा और दो अवस्थाएं। पहले एक घंटे में गांधकशिशुकी भातिव्यवहार करता है और दूसरे घंटे में साक्षी बन जाता है। (5) मिस्टिक भेज ध्यान रजनीश (ओशो) में यह ध्यान पद्धति अप्रैल, 1988 में खोजी और इसके बारे में वे करते हैं, "गौतम बुद्ध की विपश्यना ध्यान पद्धति के बाद पिछले पच्चीय सी वर्ष में ध्यान के क्षेत्र में यह मनसे बड़ी खोज है। ....मैंने अनेक ध्यान पद्धतियों का आविष्कार किया है, परंतु संभवतः यह सबसे अधिक गारभूत
और बुनियादी है। यह समूचे विश्व में व्याप्त हो सकती है।" इस ध्यान की अवधि 21 दिन है - सात दिन तक प्रतिदिन तीन घंटे हंसना, अगले सात दिन प्रतिदिन तीन घंटे रोना, आंसू गिराना और अंतिम सात दिन प्रतिदिन तीन घंटे साक्षीभाव अर्थात् सब को देखना, जो साधक के अपने भीतर घटित हो रहा है। मिस्टिक रोज मैडीटेशन कार्यक्रम के निदेशक का दावा है कि "यदि इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति ओशो की मिस्टिक रोज पद्धति से ध्यान करे तो समस्त संघर्ष और युद्ध तुरंत समाप्त हो जायेगा।
ओशो दिवंगत
19 जनवरी, 1990 को सायं 5.30 पर रजनीश ने अपने पुणे आश्रम में अपनी जीवन डोर समेट ली। उनकी दार्शनिकता जीवन के अंतिम क्षण तक ज्यों की त्यों बनी रही। उनके निजी चिकित्सक ने जब उनसे यह पूछा कि क्या उन्हें कृत्रिम श्वास दिलाने की तैयारी की जाये तो ओशों ने उत्तर दिया, "नहीं। यदि मेरी मृत्यु हो जाती है तो पीड़ा से स्वयं मुक्ति मिल जायेगी।
सच्ची वेदांती दृष्टि यही है - मृत्यु पीड़ा से मुक्ति है। वेदांत कहता है कि यह जगत पीड़ास्वरूप ही है। मृत्यु सच्चे योगी को पीड़ा से मुक्त कर देती है, क्योंकि उसके भीतर जगत की कामना नहीं रहती और वह आत्मस्थ हो जाता है। वह जन्म और मृत्यु के बंधन अर्थात् आवागमन के चक्र से मुक्त, जीवनमुक्त हो जाता है।
जब उनके चिकित्सक को ऐसा लगा कि ओशो का जीवन तेजी से समाप्त हो रहा है तो उसने उनसे कहा, "ओशो, मुझे ऐसा लगता है कि अब सब कुछ समाप्त हो रहा है।" यह सुनकर रजनीश ने शांत भाव से स्वीकृति में सिर हिलाया और आंखें बंद कर लीं। उनकी धीमी नब्ज़ थोड़ी देर तक चलती रही और उसके बाद लुप्त हो गयी । | अपने चरम पर चमका श्री रजनीश की लोकप्रियता का सितारां! एक महीने बाद रजनीश ने एक अन्य नाम धारण कर लिया - ओशो रजनीश । ओशो शब्द का प्रयोग पहले-पहल एका ने अपने गुरु बोधिधर्म के लिए किया था । ओशो का अर्थ है- पूर्ण पुरुष । कुछ महीने तक रजनीश ओशो रजनीश बने रहे। ऐसा लगता है कि वे अपने माता-पिता द्वारा दिये गये नाम से थक और ऊब गये थे। पंद्रह सितंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को उन्होंने अपने नाम में से रजनीश को पूरी तरह निकालकर फेंक दिया और उनका नया नाम हो गया. केवल 'ओशो' । मृत्यु की तैयारी रजनीश गुरु अथवा दैवी पुरुष होने का दावा नहीं करते, फिर भी वे अपने शिष्यों से आत्मसमर्पण की मांग करते हैं। वे कहते हैं, "मैं यह चेष्टा करूंगा कि तुम लय प्राप्त कर सको, लेकिन इसके लिए तुम्हारे सहयोग की आवश्यकता होगी। ....समर्पण भाव में रहो । जो कुछ होता जाये अथवा मैं जो कुछ करता जाऊं, उसके लिए तैयार रहो, भले ही मृत्यु आ जाये, तैयार रहो।.... कुछ हो पाना तभी संभव है, जब तुम मुझ पर विश्वास कर सको। विश्वास का अर्थ है कि तुम सब कुछ मेरे हाथों में छोड़ दो। भले ही मृत्यु आ जाये, तुम शिकायत नहीं करोगे और अगर तुम इतना कर सको और तुम इस शिविर से वह व्यक्तित्व लेकर नहीं लौटोगे, जिसे लेकर तुम यहां आये थे। .... इस शिविर में पूरे समय अपने भीतर गहरे समर्पण का भाव महसूस करो।" गुरु, मसीहा और अवतार की भांति रजनीश अपने शिष्यों से मुक्ति अथवा उन्नयन का वादा करते हैं, "मैं तुमसे वादा करता हूं कि तुम यहां से वैसे नहीं लौटोगे, जैसे तुम यहां आये थे।" मेहेर बाबा की भांति वे भी कहते हैं, "मैं शिक्षा देने नहीं, जगाने आया हूं।....में शिक्षक नहीं हूं। रजनीश ने इस दावे के बावजूद कि वे शिक्षा नहीं देते, उनकी शिक्षाएं पांच सौ ग्रंथों में भरी पड़ी हैं और जब उनसे इस बात का जिक्र किया जाता है, तब भी वे यही कहते हैं कि वे कोई शिक्षा नहीं देते। वे अपनी शिक्षाओं और दूसरों की शिक्षाओं का भेद इस प्रकार समझाते हैं, "मेरी शिक्षाएं तो उस कांटे की तरह हैं, जिसका इस्तेमाल मैं तुम्हारे भीतर गड़ा हुआ कांटा निकालने के लिए करता हूं। जिस क्षण तुम्हारा कांटा निकल जायेगा, उसी क्षण दोनों कांटे फेंक दिये जायेंगे। श्री रजनीश के पर्सनाहीन मुफ्त यौनाचार के दर्शन ने युवा पीढ़ी को विशेष रूप से प्रभावित किया। • अपने भीतर दैवी चेतना के लिए स्थान बनाओ, तुम्हारे भीतर कोई भी खाली नहीं है, तुम कबाड़खाना बन गये हो । कुछ जगह बनाओ, दिमाग में जो कुछ है, उसे बाहर फेंक दो । कुछ जगह बनाओ, वह खाली जगह मेजबान बनेगी, दैवी अतिथि के लिए मेजबान।" संभोग से समाधि रजनीश ऐसा मानते हैं कि मानवीय व्यक्तित्व को धर्म ने बहुत हानि पहुंचायी है। धर्म ने मनुष्य की यौन भावना का दमन करने की कोशिश की है और वह संभोग को घिनौना, गंदा, पापपूर्ण और अपराधपूर्ण मानता है। रजनीश विवाह की संस्था के प्रति घृणा से भर उठे हैं। वे इसे जैविक दासता मानते हैं। वे अपने अनुयायियों से कहते हैं कि प्रेम को चेतन के स्तर तक ऊंचा उठा दो । उनको यौन प्रतिबंधों पर विश्वास नहीं है। वे कहते हैं, चाहे जिससे प्रेम करो । जब तुम्हें यह छूट होती है, तब तुम स्वतंत्रतापूर्वक प्रेम करते हो और प्रेम तुम्हारे पांव की बेड़ी नहीं बनता। तुम प्रेम में साझेदारी कर सकते हो.... दो व्यक्ति जब एक दूसरे की ऊष्मा का आनंद लेते हैं तो उसमें कोई समस्या ही नहीं रह जाती । रजनीश का दर्शन मुक्त प्रेम, मुक्त संभोग का दर्शन है। रजनीश प्रेम को जैविक स्तर से उठाकर चेतना के स्तर पर प्रतिष्ठित कर देते हैं और जब प्रेम उस स्तर पर पहुंच जाता है, तब वह बंधन नहीं रह जाता और चेतना की वह अवस्था आध्यात्मिक प्रेम की मनोभूमि तैयार कर देती है। आध्यात्मिक प्रेम दो व्यक्तियों के बीच नहीं होता, वह व्यक्ति और सर्वोच्च सत्ता के बीच होता है - अंश और पूर्ण के बीच, बिंदु और सागर के बीच । इस स्थिति में संभोग समाधि की ओर ले जाता है। यह प्रेम की भावना का उन्नयन है । मुक्तिः आदि और अंत रजनीश की शिक्षाओं में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान ध्यान का है, जिसके बारे में वे कहते हैं कि "ध्यान का आदि और अंत दोनों मुक्ति है। यह मुक्ति की आत्म-उन्नयन की कुंजी है।" उन्होंने ध्यान के साथ सक्रियता को जोड़ दिया है, क्योंकि उनकी दृष्टि में ध्यान अनिवार्यतः ऊर्जा की प्रक्रिया है। उनकी दृष्टि में, "ध्यान चिंतन अथवा एकाग्रता नहीं है। चिंतन तो महज सोचने और विचारों को शुद्ध करने की प्रक्रिया है । .... ध्यान का अपना ही आनंद है और यह आनंद भोजन, संभोग, वस्त्र आदि किसी भी वस्तु और सुख से बढ़कर है । यह अंतिम आनंद है, परंतु ध्यान अंतःकरण की प्रक्रिया है। इसमें सोचने को कुछ नहीं रह जाता। इस अवस्था में शद्ध परम-तत्त्व ही शेष रह जाता है। ध्यान सोचने की प्रक्रिया नहीं है, वह किसी भी स्थिति में चिंतन नहीं है । रजनीश ने ध्यान की अनेक पद्धतियों का विकास किया है और उन सब के द्वारा साधक की समची वेदना अचेतन मन से चेतन मन के तल पर उभर आती है, vix int श्री रजनीश की गतिविधियों अमरीकी समाज को हराकर भरत कर डाया कि यह जैसे भी हो रजनीश से छुटकारा पाने के बहाने इंढ़ने समा sufre falvar aircut if varfter at विष्णतार कर ही किया गया। आव में श्री रजनीश पुनः भारत में अपने पूना स्थित आश्रम में तौट आये। रजनीश का गत है कि जब वंदना चैतन केवल पर आ जाती है, तब वह नष्ट हो जाती है। ये ध्यान की एक प्रकार की मृत्यु मानते हैं। "अतीत के प्रति मृत्यु, आ की पूर्ण मृत्यु।" ध्यान अनंत के साथ एकाकार हो जाता है और वह समूचे व्यक्तित्व का स्पांतरण कर डालता है। रजनीश में अनेक प्रकार की ध्यान पद्धतियों का विकास किया है, जिनमें से थे पांच ध्यान पद्धतियों पर अधिक बल देते हैं-- डायनेमिक ध्यान, जिसकी अवधि एक घंटा है और चार अवस्थाएं-गहरा श्वास भरना, शक्ति को सुना छोड़ देना जिससे कि शरीर जो कुछ करना चाहे कर सके-उछल-कूद अथवा छ, छ, तू मिलाना और मन और शरीर में जो कुछ हो रहा है, उसको साश्रीभाव से देखना, कुंडमिनी ध्यान। यह भी एक घंटा चलता है और इसकी भी चार अवरथाएं-- शरीर को हिलाना, नाचना, साक्षीभाव और विष्ट होकर भेट जाना, नॉन-माइंड ध्यान, यह दो घंटे का ध्यान की और एमकी दो अवस्थाएं है। साधक एक घंटे तक एकांत में भारी करता चला जाता है और अपने दिमाग का गाग कमरा निकाल फेंकता है। उसके बाद एक घंटा सामोशी के साथ आस बंद करके उस सब को गाक्षीभाव से देखता सकता है, जो उसके तन और मन में हो सहा है, भान अगे गैडीटेशन समय दो घंटा और दो अवस्थाएं। पहले एक घंटे में गांधकशिशुकी भातिव्यवहार करता है और दूसरे घंटे में साक्षी बन जाता है। मिस्टिक भेज ध्यान रजनीश में यह ध्यान पद्धति अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ अठासी में खोजी और इसके बारे में वे करते हैं, "गौतम बुद्ध की विपश्यना ध्यान पद्धति के बाद पिछले पच्चीय सी वर्ष में ध्यान के क्षेत्र में यह मनसे बड़ी खोज है। ....मैंने अनेक ध्यान पद्धतियों का आविष्कार किया है, परंतु संभवतः यह सबसे अधिक गारभूत और बुनियादी है। यह समूचे विश्व में व्याप्त हो सकती है।" इस ध्यान की अवधि इक्कीस दिन है - सात दिन तक प्रतिदिन तीन घंटे हंसना, अगले सात दिन प्रतिदिन तीन घंटे रोना, आंसू गिराना और अंतिम सात दिन प्रतिदिन तीन घंटे साक्षीभाव अर्थात् सब को देखना, जो साधक के अपने भीतर घटित हो रहा है। मिस्टिक रोज मैडीटेशन कार्यक्रम के निदेशक का दावा है कि "यदि इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति ओशो की मिस्टिक रोज पद्धति से ध्यान करे तो समस्त संघर्ष और युद्ध तुरंत समाप्त हो जायेगा। ओशो दिवंगत उन्नीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ नब्बे को सायं पाँच.तीस पर रजनीश ने अपने पुणे आश्रम में अपनी जीवन डोर समेट ली। उनकी दार्शनिकता जीवन के अंतिम क्षण तक ज्यों की त्यों बनी रही। उनके निजी चिकित्सक ने जब उनसे यह पूछा कि क्या उन्हें कृत्रिम श्वास दिलाने की तैयारी की जाये तो ओशों ने उत्तर दिया, "नहीं। यदि मेरी मृत्यु हो जाती है तो पीड़ा से स्वयं मुक्ति मिल जायेगी। सच्ची वेदांती दृष्टि यही है - मृत्यु पीड़ा से मुक्ति है। वेदांत कहता है कि यह जगत पीड़ास्वरूप ही है। मृत्यु सच्चे योगी को पीड़ा से मुक्त कर देती है, क्योंकि उसके भीतर जगत की कामना नहीं रहती और वह आत्मस्थ हो जाता है। वह जन्म और मृत्यु के बंधन अर्थात् आवागमन के चक्र से मुक्त, जीवनमुक्त हो जाता है। जब उनके चिकित्सक को ऐसा लगा कि ओशो का जीवन तेजी से समाप्त हो रहा है तो उसने उनसे कहा, "ओशो, मुझे ऐसा लगता है कि अब सब कुछ समाप्त हो रहा है।" यह सुनकर रजनीश ने शांत भाव से स्वीकृति में सिर हिलाया और आंखें बंद कर लीं। उनकी धीमी नब्ज़ थोड़ी देर तक चलती रही और उसके बाद लुप्त हो गयी । |
Esha Gupta Photo: सुपर बोल्ड एक्ट्रेस ईशा गुप्ता (Esha Gupta) ने एक बार फिर अपने फैंस के दिलों में खलबली मचा दी है. वह जब भी अपनी कोई फोटो शेयर करती हैं, तो इंटरनेट का पारा हाई हो जाता है. अब उन्होंने अपनी एक ऐसी फोटो पोस्ट की है, जिसे देखकर फैंस मदहोश हो रहे हैं. हर किसी की निगाहें उनके हुस्न पर टिक गई है.शॉर्ट ड्रेस में लगीं बेहद हॉटईशा गुप्ता (Esha Gupta) ने बेहद टाइट ड्रेस पहनी हैं जिसमें वह हद से ज्यादा हॉट लग रही हैं. उन्होंने अपने खूबसूरत नेल पेंट को फ्लॉन्ट किया है. वह उंगलियों में ढेर सारी रिंग्स पहने हुए नजर आ रही हैं जिन्हें उन्होंने कैमरे के सामने सेक्सी अंदाज में फ्लॉन्ट किए हैं. तस्वीर में उनका कातिलाना लुक देखते ही बन रहा है.लुक को ऐसे बनाया हॉटइसके अलावा ईशा गुप्ता (Esha Gupta) ने अपने हॉट लुक को स्पेशल टच दिया है. उन्होंने अपने बालों को पोनीटेल स्टाइल में बांधा हुआ है. कानों में डिजाइनर ईयररिंग्स पहने हैं, जो उनके लुक और हॉट बना रहे हैं. ईशा गुप्ता के किलर लुक पर फैंस फिदा हो गए हैं. कमेंट सेक्शन में उनकी जमकर तारीफ हो रही है. कोई उन्हें गॉर्जस कह रहा है, तो किसी ने हॉटी. इसके अलावा यूजर्स ने खूब फायर इमोजी शेयर की है.
चर्चा में रहा ईशा का ये फोटोशूटइससे पहले ईशा गुप्ता गुप्ता (Esha Gupta) ने हॉट फोटोशूट करवाया था, जिसका वीडियो खूब चर्चा में रहा. वीडियो में देखा जा सकता है कि ईशा फोटोज क्लिक करवाती नजर आ रही हैं. उन्होंने पिंक कलर की फ्लोरल प्रिंटेड ड्रेस में जमकर कहर ढाया. ईशा ने कैमरे के सामने बैठ-बैठकर तस्वीरें क्लिक करवाईं. वर्क फ्रंट की बात करें तो ईशा गुप्ता बॉबी देओल के साथ 'आश्रम 3' वेब सीरीज में नजर आएंगी. इसमें वह बॉबी देओल के प्रचारक का किरदार निभाएंगी.
| Esha Gupta Photo: सुपर बोल्ड एक्ट्रेस ईशा गुप्ता ने एक बार फिर अपने फैंस के दिलों में खलबली मचा दी है. वह जब भी अपनी कोई फोटो शेयर करती हैं, तो इंटरनेट का पारा हाई हो जाता है. अब उन्होंने अपनी एक ऐसी फोटो पोस्ट की है, जिसे देखकर फैंस मदहोश हो रहे हैं. हर किसी की निगाहें उनके हुस्न पर टिक गई है.शॉर्ट ड्रेस में लगीं बेहद हॉटईशा गुप्ता ने बेहद टाइट ड्रेस पहनी हैं जिसमें वह हद से ज्यादा हॉट लग रही हैं. उन्होंने अपने खूबसूरत नेल पेंट को फ्लॉन्ट किया है. वह उंगलियों में ढेर सारी रिंग्स पहने हुए नजर आ रही हैं जिन्हें उन्होंने कैमरे के सामने सेक्सी अंदाज में फ्लॉन्ट किए हैं. तस्वीर में उनका कातिलाना लुक देखते ही बन रहा है.लुक को ऐसे बनाया हॉटइसके अलावा ईशा गुप्ता ने अपने हॉट लुक को स्पेशल टच दिया है. उन्होंने अपने बालों को पोनीटेल स्टाइल में बांधा हुआ है. कानों में डिजाइनर ईयररिंग्स पहने हैं, जो उनके लुक और हॉट बना रहे हैं. ईशा गुप्ता के किलर लुक पर फैंस फिदा हो गए हैं. कमेंट सेक्शन में उनकी जमकर तारीफ हो रही है. कोई उन्हें गॉर्जस कह रहा है, तो किसी ने हॉटी. इसके अलावा यूजर्स ने खूब फायर इमोजी शेयर की है. चर्चा में रहा ईशा का ये फोटोशूटइससे पहले ईशा गुप्ता गुप्ता ने हॉट फोटोशूट करवाया था, जिसका वीडियो खूब चर्चा में रहा. वीडियो में देखा जा सकता है कि ईशा फोटोज क्लिक करवाती नजर आ रही हैं. उन्होंने पिंक कलर की फ्लोरल प्रिंटेड ड्रेस में जमकर कहर ढाया. ईशा ने कैमरे के सामने बैठ-बैठकर तस्वीरें क्लिक करवाईं. वर्क फ्रंट की बात करें तो ईशा गुप्ता बॉबी देओल के साथ 'आश्रम तीन' वेब सीरीज में नजर आएंगी. इसमें वह बॉबी देओल के प्रचारक का किरदार निभाएंगी. |
पाकिस्तान की टीम ने पिछले हफ्ते आगामी विश्वकप लिए अपनी 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की है। जिसमें उन्होने टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर को जगह नही दी है। 27वर्षीय बाएं-हाथ का तेज गेंदबाज जिसने 2017 चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की थी, वह इस समय गेंद के साथ संघर्ष करते नजर आ रहे है। तेज गेंदबाज ने अपने पिछले 14 एकदिवसीय मैचो में केवल 5 विकेट लिए है और वह लगातार 9 मैचो में बिना विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बने है। यहां तक कि कप्तान सरफराज अहमद ने स्ट्राइक गेंदबाज के चयन से पहले निराशावादी आवाज उठाई।
हालांकि, आमिर के प्रशंसक इस निर्णय से खुश नही है क्योंकि उन्हे विश्वकप की टीम में शामिल नही किया गया है। लेकिन उन्हे विश्वकप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज के लिए 17 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। अगर यहां पर बाएं हाथ के गेंदबाज कुछ अच्छा प्रदर्शन दिखाते है, तो उनके पास विश्वकप की टीम में शामिल होने का आखिरी मौका होगा। क्योंकी आईसीसी के नियम के अनुसार टीमें 23 मई से पहले विश्वकप की टीम में बदलाव कर सकती है।
लाहौर में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड हेडक्वार्टर में सरफराज के हवाले से कहा गया था,
कोच मिकी आर्थर ने कहा,
आमिर, जिनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 234 विकेट है, और 2017 चैंपियंस ट्रॉफी तक उनका 92 का औसत रहा है लेकिन अब वह इस समय पाकिस्तान के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन नही कर पा रहे है। और पूर्व चैंपियन टीम ने आमिर को शोपीस इवेंट के लिए टीम में शामिल नही किया है।
पाकिस्ता को विश्वकप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ पांच वनडे और एक टी-20 मैच की सीरीज खेलनी है और वह अपने विश्वकप अभियान की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ नॉटिंघम में करेंगे।
| पाकिस्तान की टीम ने पिछले हफ्ते आगामी विश्वकप लिए अपनी पंद्रह सदस्यीय टीम की घोषणा की है। जिसमें उन्होने टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर को जगह नही दी है। सत्ताईसवर्षीय बाएं-हाथ का तेज गेंदबाज जिसने दो हज़ार सत्रह चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की थी, वह इस समय गेंद के साथ संघर्ष करते नजर आ रहे है। तेज गेंदबाज ने अपने पिछले चौदह एकदिवसीय मैचो में केवल पाँच विकेट लिए है और वह लगातार नौ मैचो में बिना विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बने है। यहां तक कि कप्तान सरफराज अहमद ने स्ट्राइक गेंदबाज के चयन से पहले निराशावादी आवाज उठाई। हालांकि, आमिर के प्रशंसक इस निर्णय से खुश नही है क्योंकि उन्हे विश्वकप की टीम में शामिल नही किया गया है। लेकिन उन्हे विश्वकप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज के लिए सत्रह सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। अगर यहां पर बाएं हाथ के गेंदबाज कुछ अच्छा प्रदर्शन दिखाते है, तो उनके पास विश्वकप की टीम में शामिल होने का आखिरी मौका होगा। क्योंकी आईसीसी के नियम के अनुसार टीमें तेईस मई से पहले विश्वकप की टीम में बदलाव कर सकती है। लाहौर में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड हेडक्वार्टर में सरफराज के हवाले से कहा गया था, कोच मिकी आर्थर ने कहा, आमिर, जिनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो सौ चौंतीस विकेट है, और दो हज़ार सत्रह चैंपियंस ट्रॉफी तक उनका बानवे का औसत रहा है लेकिन अब वह इस समय पाकिस्तान के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन नही कर पा रहे है। और पूर्व चैंपियन टीम ने आमिर को शोपीस इवेंट के लिए टीम में शामिल नही किया है। पाकिस्ता को विश्वकप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ पांच वनडे और एक टी-बीस मैच की सीरीज खेलनी है और वह अपने विश्वकप अभियान की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ नॉटिंघम में करेंगे। |
आगरा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर रोकने पर पूरे प्रदेश में सपाइयों में आक्रोश फैल गया है। धौलपुर हाउस स्थित सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष रहीसुद्दीन के नेतृत्व में सपाइयों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंका। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पुतला दहन कर रहे सपाइयों को खदेड़ दिया, इस दौरान पुलिस से समाजवादी नेताओं की तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस की कार्रवाई को लेकर सपाइयों में आक्रोश है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एयरपोर्ट रोके जाने के विरोध में महानगर अध्यक्ष चौधरी वाजिद निसार के नेतृत्व में भाजपा सरकार का पुतला फूंका गया। फतेहाबाद रोड पर समाजवादियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान वाजिद निसार ने कहा कि ये कोशिश है अखिलेश यादव की आवाज युवाओं तक न पहुंचे, लेकिन भाजपा और योगी सरकार इस रणनीति में कभी सफल नहीं होगी। सौरभ गुप्ता, गौरव जैन, किशन यादव, बबलू शरीफ, मशरुर कुरेशी, मनमोहन शर्मा, देवेंद्र राठौर, निर्वेश शर्मा, मुन्ना मेव, लाला भाई आदि उपस्थित रहे।
| आगरा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर रोकने पर पूरे प्रदेश में सपाइयों में आक्रोश फैल गया है। धौलपुर हाउस स्थित सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष रहीसुद्दीन के नेतृत्व में सपाइयों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंका। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पुतला दहन कर रहे सपाइयों को खदेड़ दिया, इस दौरान पुलिस से समाजवादी नेताओं की तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस की कार्रवाई को लेकर सपाइयों में आक्रोश है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एयरपोर्ट रोके जाने के विरोध में महानगर अध्यक्ष चौधरी वाजिद निसार के नेतृत्व में भाजपा सरकार का पुतला फूंका गया। फतेहाबाद रोड पर समाजवादियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान वाजिद निसार ने कहा कि ये कोशिश है अखिलेश यादव की आवाज युवाओं तक न पहुंचे, लेकिन भाजपा और योगी सरकार इस रणनीति में कभी सफल नहीं होगी। सौरभ गुप्ता, गौरव जैन, किशन यादव, बबलू शरीफ, मशरुर कुरेशी, मनमोहन शर्मा, देवेंद्र राठौर, निर्वेश शर्मा, मुन्ना मेव, लाला भाई आदि उपस्थित रहे। |
इन्द्रियाँ शरीरके कान, नाक आदि अंगोंका नाम नहीं है। उन गोलकोंमें जो शक्ति है उसीको इन्द्रिय कहते हैं। इन पाँच ज्ञानेन्द्रियोंकी सहायता करनेवाली पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं - हाथ, पैर, वाणी, गुदा और उपस्थ (लिंग और योनि) । इन दसों इन्द्रियों में रसना (ज्ञानेन्द्रिय) और वाणी (कर्मेन्द्रिय) दोनोंका स्थान एक जीभ ही है। कर्मेन्द्रियोंकी अपेक्षा ज्ञानेन्द्रियाँ श्रेष्ठ और सूक्ष्म हैं ।
ज्ञानेन्द्रियोंका निग्रह करनेसे कर्मेन्द्रियोंका दमन आप ही हो जाता है। इन्द्रियाँ निरन्तर मनको विषयोंमें लगाती रहती हैं, पाँचोंमेंसे किसी एक भी इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेसे ही बड़ा अनर्थ हो जाता है, तब जो लोग इन पाँचोंके विषयमें आसक्त हैं उन अविवेकियोंके पतनमें तो शंका ही क्या है ?
एक-एक विषयकी आसक्तिसे किस प्रकार नाश होता है इसका पता इस प्रचलित दृष्टान्तसे लग सकता है - एक एक इन्द्रियबिषय लोलुप मीन मरत तुरंत अनाथ सम भृंग कुरंग शब्द - हरिणको वीणाका सुर बहुत प्यारा लगता है। व्याधलोग जंगलमें जाकर बड़े मीठे सुरोंमें वीणा बजाते हैं। वीणाकी सुरीली तान सुनते ही हरिण चारों ओरसे आकर उसके आस-पास खड़े हो जाते हैं और सब कुछ भूलकर उसीमें तन्मय हो जाते हैं । इस अवस्थामें पारधी उन्हें मार डालता है । यह एक कर्ण - इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेका फल है।
स्पर्श - हाथियों को पकड़नेवाले लोग गहरे गड्ढेके ऊपर बाँसका कमजोर मचान रखकर उसपर मिट्टी बिछा देते हैं और उसपर एक कागजकी हथिनी खड़ी कर देते हैं। हाथी काम-मदसे मतवाला होकर उसे स्पर्श करनेको दौड़ता है।
मचानपर आते ही उसके भारी बोझसे मचान टूट जाती है और हाथी तुरंत गड्ढे में गिर पड़ता है। तब लोहेकी मजबूत जंजीरसे लोग उसे बाँध लेते हैं । वनमें निर्भय विचरनेवाला बलवान् गजराज एक स्पर्श - इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेके कारण सहजहीमें अनाथकी तरह बँध जाता है।
रूप - दीपककी ज्योतिको देखकर पतंग मोहित हो जाता है। हजारों पतंग दीपककी लौमें पड़कर जल रहे हैं, इस बातको वह देखता है; परंतु रूपकी आसक्ति उसे दीपककी तरफ जबरदस्ती खींच लाती है। बेचारा दीपकमें जलकर प्राण खो देता है ।
रस - मछली जीभके स्वादके कारण जलसे बिछुड़कर मरती है। मछली पकड़नेवाले लोग बंसी- काँटेमें मांसका टुकड़ा या आँटेकी गोली लगा देते हैं। मछली उसका रस चखनेके लिये मतवाली - सी होकर दौड़ती है और पास आकर ज्यों ही काँटेपर मुँह मारती है त्यों ही मछली पकड़नेवाला रस्सीका झटका देता है, जिससे काँटा तुरंत ही मछलीके मुखमें बिंध जाता है और इस तरह वह मर जाती है ।
गन्ध - भ्रमर सुगन्धका बड़ा लोभी होता है। वह कमलके अंदर जाकर बैठ जाता है और उसकी सुगन्धमें आसक्त होकर सारी सुध-बुध भूल जाता है। सूर्य अस्त होनेपर जब कमलका मुख बंद हो जाता है, भ्रमर उसीके अंदर कैद हो जाता है। जो भ्रमर मजबूत- मजबूत काठमें छेद कर सकता है, वही सुगन्धकी आसक्तिसे कमलके कोमल पत्तोंको काटकर बाहर निकलनेमें समर्थ नहीं होता । रातको हाथी आकर कमलको उखाड़ लेता है। हाथीके दाँतोंमें कमलके साथ-साथ भ्रमर भी पिस जाता है। यह दशा एक नासिकाके विषयमें आसक्त होनेपर होती है।
तब फिर क्या किया जाय ? इन्द्रियोंका तो काम ही विषयोंको ग्रहण करना है। जबतक इन्द्रियाँ हैं तबतक यह कार्य बराबर चलता है। आँखें रूप ही देखती हैं। कानोंमें शब्द आते ही हैं । नाकसे गन्धका ग्रहण होना नहीं रुकता । कहीं भी खड़े या बैठे रहो, किसी चीजका स्पर्श होता ही है। कुछ भी खायँ, जीभको स्वादका पता लगता ही है । इन्द्रियोंका नाश तो हो नहीं सकता, यदि हठवश नाश किया जाय तो जीवन बिताने में बड़ी कठिनाई होती है, एक भी इन्द्रियका अभाव बड़ा दुःखदायी होता है। अंधे, बहरे और गूँगे मनुष्यको कितनी अड़चन होती है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
इसका उत्तर यह है कि इन्द्रियोंके नाशकी आवश्यकता नहीं है, आवश्यकता तो उनके बने रहनेकी ही है। ईश्वरने दया करके इन्द्रियाँ हमारे सुभीते और लाभके लिये ही हमें दी हैं। संयमपूर्वक उनका सदुपयोग करनेसे ही यथार्थ लाभ हो सकता है । यह हमारी ही भूल है कि हम विषयासक्तिसे उनका दुरुपयोग कर बार-बार कष्ट उठाते हैं। किस इन्द्रियकी क्यों आवश्यकता है, किससे कौन-सा कार्य नहीं करना चाहिये और कौन-सा करना चाहिये; इस विषयकी जानकारीके लिये कुछ विचार किया जाता है।
कानआवश्यकता - कानसे ही शब्दका ज्ञान होता है । बहरा मनुष्य अच्छी बातें, महात्मा पुरुषोंके उपदेश और व्यवहारकी आवश्यक बातें नहीं सुन सकता, जिससे उसकी लौकिक और पारलौकिक उन्नतिमें बड़ी बाधा आती है। चोर-डकैत या पशु-पक्षीकी आहट सुनकर उनसे बचना भी कान होनेसे ही सम्भव है।
क्या नहीं करना चाहिये - अपनी बड़ाई न सुने, (इससे अहंकार बढ़ता है) दूसरोंकी निन्दा न सुने, ( इससे घृणा, द्वेष, क्रोध और वैर आदि दोष अपने मनमें पैदा होते हैं, दूसरोंके पापके संस्कार मनपर जमते हैं ) । परचर्चा - फालतू बात न सुने, (इससे समय नष्ट होता है, निन्दा - स्तुतिको जगह रहती है, अपने मुँहसे झूठे शब्द निकल सकते हैं और घरका काम बिगड़ता है) । ईश्वर, देवता, गुरु, संत और शास्त्रोंकी निन्दा न सुने, (इससे अश्रद्धा होती है, अविश्वास बढ़ता है, नास्तिकता आती है, पाप लगता है, साधन बिगड़ता है) । वेश्याओंके गायन, अश्लील गीत, शृंगाररसकी गंदी कविता, धमाल, नाटकों और खेलोंके बुरे गायन, स्त्री- सम्बन्धी बातें, गंदे नाटक, उपन्यासादि न सुनें, ( इनसे मनमें विकार होता है; ब्रह्मचर्यका नाश होता है, मनकी चंचलता बढ़ती है, विलासिता आती है, धनका नाश होता है; व्यभिचारकी सम्भावना हो जाती है; भगवान्, धर्म, देश और जाति तथा कुटुम्बकी सेवाके कार्योंसे मन हट जाता है) । अपनेसे द्वेष रखनेवालेकी चर्चा न सुनें, (इससे वैर बढ़ता है) दूसरोंके भोगोंकी बातें न सुनें, (इससे लोभ बढ़ता है) ।
क्या करना चाहिये - व्यवहार - बर्तावकी अच्छी बातें सुनना, भगवान्का नाम, गुण और उनकी लीला कथाएँ सुनना; सत्संगमें भक्ति, ज्ञान-वैराग्य, सदाचार - सद्व्यवहारकी बातें सुनना; अपने दोष और दूसरोंके अनुकरण करनेयोग्य गुण सुनना; ईश्वरभक्ति, त्याग, वीरता और देश - भक्तिके सुन्दर गायन सुनना; महात्मा पुरुषोंका उपदेश सुनना और सद्गुरुसे परमात्माका गूढ़ तत्त्व सुनना आदि । स्मरण रखना चाहिये कि वेदान्त और भक्तिमें पहला साधन श्रवण ही है ।
त्वक् ( चमड़ी ) -
आवश्यकता-गरम, ठण्डे, कड़े, कोमल पदार्थों की पहचान इसीसे होती है। यह इन्द्रिय न हो तो पहचाननेकी शक्तिके अभावसे मनुष्यका आगमें जलना, पानीमें गलना, काँटोंसे छिद जाना और कीड़े-मकोड़ोंसे काटा जाना बहुत आसान होता है । इसके बिना संसारमें काम चलना बड़ा कठिन होता है।
क्या नहीं करना चाहिये - पर- स्त्रीका स्पर्श पुरुष और पराये पुरुषका स्पर्श स्त्री न करे, (इससे कामोद्दीपन होता है, व्यभिचार बढ़ता है)। कोमल गद्दे, तकिये, बिछौने, गलीचे आदिका सेवन भरसक न करे, (इससे आरामतलबी और आसक्ति बढ़ती है, अकर्मण्यता आती है) रेशमी, विदेशी या मिलके बने हुए वस्त्र न पहने (रेशम लाख जीवोंकी हिंसासे बनता है, विदेशी वस्त्रोंके सेवनसे देशका धर्म, धन और जीवन नाश हो रहा है। गरीबोंके मुँहका टुकड़ा छिनता है, पवित्रता नाश होती है, मिलोंके कपड़ोंसे भी पवित्रताका नाश और गरीबोंकी हानि होती है। महीन वस्त्रोंसे लज्जा जाती है, खर्च बढ़ता है, बाबूगिरी आती है) ।
यह इन्द्रिय बड़ी प्रबल है। बहुत से भाई-बहिन पाप समझकर विदेशी महीन वस्त्र इसीलिये पहनते हैं कि उनकी चमड़ीको मोटा वस्त्र सुहाता नहीं। स्पर्श-सुखकी इच्छा बड़े-बड़े लोगोंको पथभ्रष्ट कर देती है। रावणके विशाल साम्राज्य और बड़े कुलके सर्वनाशमें यही इन्द्रिय एक प्रधान कारण मानी जाती है। नहुषका इन्द्रपदसे पतन इसी इन्द्रियके कारण हुआ। अनेक बड़े-बड़े युद्धोंमें यही इन्द्रिय कारण थी, मुसलमानोंका पतन प्रायः इसी इन्द्रियकी विशेष लोलुपताके कारण हुआ । और भी अनेक उदाहरण हैं। स्त्रीके लिये पुरुषका और पुरुषके लिये
स्त्रीका अंग-स्पर्श मोहसे बड़ा सुखदायी मालूम हुआ करता है; परन्तु धर्म और स्वास्थ्यरूपी सुन्दर नगरको उजाड़नेके लिये यह स्पर्शसुख एक भयंकर शत्रु है।
क्या करना चाहिये - शीत- उष्ण और कंकड़-पत्थर आदिसे यथायोग्य बचना, कर्तव्यकी दृष्टिसे पुरुषके लिये अपनी विवाहिता स्त्रीका और स्त्रीके लिये विवाहित पतिका धर्मयुक्त मर्यादित स्पर्श करना, भगवान्की मूर्ति और संत, माता, पिता, गुरु आदिके चरणस्पर्श करना, श्रीगंगाजलका स्पर्श करना, गरीब, दीन-दुःखियोंकी सेवाके लिये उनके अंगोंका स्पर्श करना और शुद्ध मोटे वस्त्र पहनना आदि ।
आवश्यकता - आँख न हो तो परस्परमें लोग भिड़ जायँ, राह चलना कठिन हो जाय, गड्ढोंमें गिर जायँ, पत्थरोंसे टकरा जायँ, दीवालोंसे टकरा जायँ; संसारका प्रायः कोई काम ठीक सम्पन्न न हो, संत-महात्मा और भगवान्की मूर्तियोंके दर्शन न हों, प्रकृतिके पदार्थ कुछ भी देखनेको न मिलें। शास्त्रोंका - सद्ग्रन्थोंका अवलोकन होना असम्भव हो जाय; इन्हीं सब जीवनके आवश्यक कार्योंके लिये नेत्र- इन्द्रियकी बड़ी आवश्यकता है।
क्या नहीं करना चाहिये- स्त्रियाँ पुरुषोंके और पुरुष स्त्रियोंके रूपको बुरी दृष्टिसे न देखें । जहाँतक हो सके, परपुरुष और पर- स्त्रीके अंग देखनेकी चेष्टा ही न की जानी चाहिये, (इससे कामोद्दीपन होकर ब्रह्मचर्यका नाश होता है ) बुरे नाटक, सिनेमा, खेल, तमाशे, नाच-रंग न देखे, (इससे व्यर्थ धन खर्च होता है, मनमें बुरे भाव पैदा होते हैं, कुसंगकी
आदत पड़ती है, ब्रह्मचर्यका नाश होता है ।) मनको लुभानेवाले पदार्थ और घटनाएँ न देखें। गंदी चेष्टाएँ कदापि न देखें। ( महामुनि सौभरि मछलियोंकी कामक्रीड़ा देखकर ही प्रपंचमें फँसे थे। ब्राह्मणकुमार अजामिल क्षणभरके कामप्रसंगको देखकर ही महापापी बन गया था ।) परायी नयन- लुभावनी चीजें न देखें, (इससे मनमें कामना उत्पन्न होती है, लोभ बढ़ता है, जलन और दुःख होता है।) किसीकी चमकीली-भड़कीली पोशाक, टेढ़े-मेढ़े बाल और टेढ़ी चाल लोलुपतासे न देखें (इससे मोह पैदा होकर पतनका कारण होता है । बुरे भाव बहुत जल्दी ग्रहण किये जाते हैं) ।
क्या करना चाहिये - भगवान्, भक्त और संतोंका दर्शन करना, भगवल्लीलाओंका देखना, सत्शास्त्रों और सत्स्थानोंका देखना। भक्ति, प्रेम, वैराग्य और वीरता उत्पन्न करनेवाले चित्रोंका देखना, मार्ग देखकर चलना, यथायोग्य व्यवहारके लिये जगत्के पदार्थोंका अलोलुप दृष्टिसे निरीक्षण करना ।
जीभ -
ज्ञानेन्द्रियके नातेआवश्यकता - इससे खट्टे, कड़वे, रूखे पदार्थोंका पता लगता है, यह न हो तो खाद्य पदार्थोंके स्वादसे उनके गुणका पता न लगे, मनुष्य मीठा - ही - मीठा या नमक- ही - नमक खाकर बहुत जल्दी मर जाये ।
कर्मेन्द्रियके नातेमनुष्यके लिये सबसे प्रधान साधन वाणी है। वाणीसे ही मनुष्यका पता लगता है। प्रायः वाणी ही मनुष्यको ऊँचानीचा, गुणी- दुर्गुणी, साधु-नीच और भला-बुरा साबित
करती है। वाणीका कार्य जीभसे होता है, अतः इसकी बड़ी आवश्यकता है।
ज्ञानेन्द्रियकी हैसियतसे
क्या नहीं करना चाहिये - खट्टे मीठे, चरपरे पदार्थोंके स्वादमें नहीं फँसना चाहिये (इससे चटोरपन बढ़ता है, चटोरोंकी बड़ी दुर्गति होती है) । बहुत से लोग इसी कारण धर्मभ्रष्ट और दुःखी होते हैं। धर्म और स्वास्थ्यको भुलाकर चाहे जहाँ, चाहे सो खाना, पीना इसी इन्द्रियके कारण होता है। रोगी मनुष्य इसी इन्द्रियकी आसक्तिके कारण वैद्यकी आज्ञाके विरुद्ध कुपथ्य कर मृत्युको बुला लेते हैं। इसी इन्द्रियके कारण देवताओंतकके लिये बनी हुई रसोई भी पहले जूँठी कर दी जाती है। चटोरपनसे चोरीकी आदत पड़ती है। मीठा खानेकी आसक्तिसे मधुमेह और कृमिकी बीमारी, नमकीन तथा खट्टेकी आसक्तिसे वीर्यक्षयकी बीमारियाँ पैदा हो जाती हैं। बासी, तीखे, सड़े हुए (बड़े-अचार आदि) पदार्थोंकी आसक्तिसे तरह-तरहकी बीमारियाँ होती हैं और तामसिकता बढ़ती है। मद्य, मांस, डॉक्टरी दवाएँ और अपवित्र पदार्थोंका खान-पान न करे (इससे धर्म, धन, स्वास्थ्य, बुद्धि सबका नाश होता है।) चोरी, अन्यायका अपवित्र अन्न न खाय ( इससे बुद्धि बिगड़ती है। महाराज भीष्मतककी बुद्धि बिगड़ गयी थी । तमोगुणी बुद्धिसे तमोगुणी कार्य होते हैं और इससे उसका पतन हो जाता है) ।
कर्मेन्द्रियकी हैसियतसेकड़वा न बोले, ( इससे दूसरोंकी आत्माको बड़ा दुःख पहुँचता है, वैर बढ़ता है।) किसीकी निन्दा या चुगली न
करे, (इससे दूसरोंके पापोंका हिस्सा मिलता है। घृणा, द्वेष, वैर, क्रोध, हिंसा आदि दोष पैदा होते हैं। पराया और अपना नुकसान होता है। मामले-मुकद्दमे लग जाते हैं और पापोंके चित्र हृदयपर अंकित होते हैं ।) अपनी बड़ाई न करें, (इससे पुण्यका नाश होता है।) खुशामदपसंदगी आती है। अपना दान और परोपकार प्रकट न करे, (इससे उस पुण्यका नाश होता है। महाराज ययाति अपने दान-पुण्यका कथन अपने मुँहसे करनेके कारण ही पुण्योंके नाश होनेसे स्वर्गसे गिरा दिये गये थे।) किसीकी खुशामद न करे, (इससे झूठ बोलनेकी और चापलूस बननेकी आदत पड़ जाती है, तेज घट जाता है।) परचर्चा या फालतू बातें न करे, (इससे समय नष्ट होता है। झूठे शब्द निकलने लगते हैं। व्यर्थ निन्दास्तुति होती है। अनावश्यक संस्कार मनपर जमते हैं, पराये छिद्र देखनेकी आदत पड़ जाती है।) मिथ्या न बोले, (इससे प्रायः समस्त धर्मोंका नाश होता है, विश्वास चला जाता है, वाणीका तेज घट जाता है।) ताना न मारे, आक्षेप न करे, किसीकी अंगहीनता या कर्महीनताका दोष बताकर अर्थात् तू अन्धा है, बहरा है, कोढ़ी है, पापी है, तू राँड है आदि शब्दोंसे सम्बोधन न करे, ( इससे सुननेवालेके चित्तमें बड़ा दुःख होता है ।) अपशब्द न बोले, अश्लील न बोले, शृंगारके गाने न गावे, कामोद्दीपक शब्द न बोले, (इससे वीर्यनाश होकर अधःपतन होता है।) किसीसे अपने लिये कुछ भी न माँगे, (इससे तेज घटता है। माँगनेवाला लोगोंकी दृष्टिसे गिर जाता है, मानका नाश होता है।) हरि, गुरु, शास्त्र, संत, माता-पिता, गुरु- जनोंकी दोषचर्चा न करे ( इससे अश्रद्धा, अविश्वास, धृष्टता और उच्छृंखलता बढ़ती है) ।
ज्ञानेन्द्रियकी हैसियतसेक्या करना चाहिये - वस्तुओंके गुण-दोष पहचानकर जो वस्तु धर्म और स्वास्थ्यके अनुकूल हो तथा आयु, सत्त्व, बल, आरोग्यता, सुख और प्रीति आदिको बढ़ानेवाली हो, सात्त्विक हो, जिसके सेवनसे बुद्धि सात्त्विक हो सके ऐसी वस्तु सेवन करे। भगवान्के प्रसादका भोग लगावे, गंगाजल आदि पान करे-भगवान्का चरणामृत ले ।
कर्मेन्द्रियकी हैसियतसेसत्य, मीठे, हितकारी, उद्वेग न करनेवाले, सीधे और प्यारे वचन बोले, नम्रतासे बोले, भगवान्का नाम, गुण, जप-कीर्तन करे, अपने दोष और दूसरोंके अनुकरणीय गुणोंको प्रकट करे तथा थोड़ा बोले । ऐसी बातें कहे जिनसे दूसरोंके चित्तमें प्रसन्नता हो, सुनने और माननेमें सुख पहुँचे, इहलोक और परलोकमें कल्याण हो ।
नासिका -
आवश्यकता - नासिका गन्धके लिये है । यह न हो तो मनुष्य गंदी जगह रहकर और गंदी वस्तुओंका सेवनकर बीमार हो जाय। अच्छे पुरुषोंको और देवताओंको गन्दी वस्तुएँ प्रदान कर उनके अपमानका कारण बने । इन्हीं सब अभावोंकी पूर्तिके लिये नाककी आवश्यकता है ।
क्या नहीं करना चाहिये- अतर, फुलेल, एसेंस, सेंट आदिकी गन्धमें आसक्त न होवे, ( इससे विलासिता बढ़ती है । बुरी आदतें पड़ती हैं, धन और धर्म जाता है। उस सुगन्धको पाकर दूसरे लोगोंकी भी वैसी ही इच्छा होती है। पैसे नहीं होनेसे | इन्द्रियाँ शरीरके कान, नाक आदि अंगोंका नाम नहीं है। उन गोलकोंमें जो शक्ति है उसीको इन्द्रिय कहते हैं। इन पाँच ज्ञानेन्द्रियोंकी सहायता करनेवाली पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं - हाथ, पैर, वाणी, गुदा और उपस्थ । इन दसों इन्द्रियों में रसना और वाणी दोनोंका स्थान एक जीभ ही है। कर्मेन्द्रियोंकी अपेक्षा ज्ञानेन्द्रियाँ श्रेष्ठ और सूक्ष्म हैं । ज्ञानेन्द्रियोंका निग्रह करनेसे कर्मेन्द्रियोंका दमन आप ही हो जाता है। इन्द्रियाँ निरन्तर मनको विषयोंमें लगाती रहती हैं, पाँचोंमेंसे किसी एक भी इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेसे ही बड़ा अनर्थ हो जाता है, तब जो लोग इन पाँचोंके विषयमें आसक्त हैं उन अविवेकियोंके पतनमें तो शंका ही क्या है ? एक-एक विषयकी आसक्तिसे किस प्रकार नाश होता है इसका पता इस प्रचलित दृष्टान्तसे लग सकता है - एक एक इन्द्रियबिषय लोलुप मीन मरत तुरंत अनाथ सम भृंग कुरंग शब्द - हरिणको वीणाका सुर बहुत प्यारा लगता है। व्याधलोग जंगलमें जाकर बड़े मीठे सुरोंमें वीणा बजाते हैं। वीणाकी सुरीली तान सुनते ही हरिण चारों ओरसे आकर उसके आस-पास खड़े हो जाते हैं और सब कुछ भूलकर उसीमें तन्मय हो जाते हैं । इस अवस्थामें पारधी उन्हें मार डालता है । यह एक कर्ण - इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेका फल है। स्पर्श - हाथियों को पकड़नेवाले लोग गहरे गड्ढेके ऊपर बाँसका कमजोर मचान रखकर उसपर मिट्टी बिछा देते हैं और उसपर एक कागजकी हथिनी खड़ी कर देते हैं। हाथी काम-मदसे मतवाला होकर उसे स्पर्श करनेको दौड़ता है। मचानपर आते ही उसके भारी बोझसे मचान टूट जाती है और हाथी तुरंत गड्ढे में गिर पड़ता है। तब लोहेकी मजबूत जंजीरसे लोग उसे बाँध लेते हैं । वनमें निर्भय विचरनेवाला बलवान् गजराज एक स्पर्श - इन्द्रियके विषयमें आसक्त होनेके कारण सहजहीमें अनाथकी तरह बँध जाता है। रूप - दीपककी ज्योतिको देखकर पतंग मोहित हो जाता है। हजारों पतंग दीपककी लौमें पड़कर जल रहे हैं, इस बातको वह देखता है; परंतु रूपकी आसक्ति उसे दीपककी तरफ जबरदस्ती खींच लाती है। बेचारा दीपकमें जलकर प्राण खो देता है । रस - मछली जीभके स्वादके कारण जलसे बिछुड़कर मरती है। मछली पकड़नेवाले लोग बंसी- काँटेमें मांसका टुकड़ा या आँटेकी गोली लगा देते हैं। मछली उसका रस चखनेके लिये मतवाली - सी होकर दौड़ती है और पास आकर ज्यों ही काँटेपर मुँह मारती है त्यों ही मछली पकड़नेवाला रस्सीका झटका देता है, जिससे काँटा तुरंत ही मछलीके मुखमें बिंध जाता है और इस तरह वह मर जाती है । गन्ध - भ्रमर सुगन्धका बड़ा लोभी होता है। वह कमलके अंदर जाकर बैठ जाता है और उसकी सुगन्धमें आसक्त होकर सारी सुध-बुध भूल जाता है। सूर्य अस्त होनेपर जब कमलका मुख बंद हो जाता है, भ्रमर उसीके अंदर कैद हो जाता है। जो भ्रमर मजबूत- मजबूत काठमें छेद कर सकता है, वही सुगन्धकी आसक्तिसे कमलके कोमल पत्तोंको काटकर बाहर निकलनेमें समर्थ नहीं होता । रातको हाथी आकर कमलको उखाड़ लेता है। हाथीके दाँतोंमें कमलके साथ-साथ भ्रमर भी पिस जाता है। यह दशा एक नासिकाके विषयमें आसक्त होनेपर होती है। तब फिर क्या किया जाय ? इन्द्रियोंका तो काम ही विषयोंको ग्रहण करना है। जबतक इन्द्रियाँ हैं तबतक यह कार्य बराबर चलता है। आँखें रूप ही देखती हैं। कानोंमें शब्द आते ही हैं । नाकसे गन्धका ग्रहण होना नहीं रुकता । कहीं भी खड़े या बैठे रहो, किसी चीजका स्पर्श होता ही है। कुछ भी खायँ, जीभको स्वादका पता लगता ही है । इन्द्रियोंका नाश तो हो नहीं सकता, यदि हठवश नाश किया जाय तो जीवन बिताने में बड़ी कठिनाई होती है, एक भी इन्द्रियका अभाव बड़ा दुःखदायी होता है। अंधे, बहरे और गूँगे मनुष्यको कितनी अड़चन होती है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। इसका उत्तर यह है कि इन्द्रियोंके नाशकी आवश्यकता नहीं है, आवश्यकता तो उनके बने रहनेकी ही है। ईश्वरने दया करके इन्द्रियाँ हमारे सुभीते और लाभके लिये ही हमें दी हैं। संयमपूर्वक उनका सदुपयोग करनेसे ही यथार्थ लाभ हो सकता है । यह हमारी ही भूल है कि हम विषयासक्तिसे उनका दुरुपयोग कर बार-बार कष्ट उठाते हैं। किस इन्द्रियकी क्यों आवश्यकता है, किससे कौन-सा कार्य नहीं करना चाहिये और कौन-सा करना चाहिये; इस विषयकी जानकारीके लिये कुछ विचार किया जाता है। कानआवश्यकता - कानसे ही शब्दका ज्ञान होता है । बहरा मनुष्य अच्छी बातें, महात्मा पुरुषोंके उपदेश और व्यवहारकी आवश्यक बातें नहीं सुन सकता, जिससे उसकी लौकिक और पारलौकिक उन्नतिमें बड़ी बाधा आती है। चोर-डकैत या पशु-पक्षीकी आहट सुनकर उनसे बचना भी कान होनेसे ही सम्भव है। क्या नहीं करना चाहिये - अपनी बड़ाई न सुने, दूसरोंकी निन्दा न सुने, । परचर्चा - फालतू बात न सुने, । ईश्वर, देवता, गुरु, संत और शास्त्रोंकी निन्दा न सुने, । वेश्याओंके गायन, अश्लील गीत, शृंगाररसकी गंदी कविता, धमाल, नाटकों और खेलोंके बुरे गायन, स्त्री- सम्बन्धी बातें, गंदे नाटक, उपन्यासादि न सुनें, । अपनेसे द्वेष रखनेवालेकी चर्चा न सुनें, दूसरोंके भोगोंकी बातें न सुनें, । क्या करना चाहिये - व्यवहार - बर्तावकी अच्छी बातें सुनना, भगवान्का नाम, गुण और उनकी लीला कथाएँ सुनना; सत्संगमें भक्ति, ज्ञान-वैराग्य, सदाचार - सद्व्यवहारकी बातें सुनना; अपने दोष और दूसरोंके अनुकरण करनेयोग्य गुण सुनना; ईश्वरभक्ति, त्याग, वीरता और देश - भक्तिके सुन्दर गायन सुनना; महात्मा पुरुषोंका उपदेश सुनना और सद्गुरुसे परमात्माका गूढ़ तत्त्व सुनना आदि । स्मरण रखना चाहिये कि वेदान्त और भक्तिमें पहला साधन श्रवण ही है । त्वक् - आवश्यकता-गरम, ठण्डे, कड़े, कोमल पदार्थों की पहचान इसीसे होती है। यह इन्द्रिय न हो तो पहचाननेकी शक्तिके अभावसे मनुष्यका आगमें जलना, पानीमें गलना, काँटोंसे छिद जाना और कीड़े-मकोड़ोंसे काटा जाना बहुत आसान होता है । इसके बिना संसारमें काम चलना बड़ा कठिन होता है। क्या नहीं करना चाहिये - पर- स्त्रीका स्पर्श पुरुष और पराये पुरुषका स्पर्श स्त्री न करे, । कोमल गद्दे, तकिये, बिछौने, गलीचे आदिका सेवन भरसक न करे, रेशमी, विदेशी या मिलके बने हुए वस्त्र न पहने । यह इन्द्रिय बड़ी प्रबल है। बहुत से भाई-बहिन पाप समझकर विदेशी महीन वस्त्र इसीलिये पहनते हैं कि उनकी चमड़ीको मोटा वस्त्र सुहाता नहीं। स्पर्श-सुखकी इच्छा बड़े-बड़े लोगोंको पथभ्रष्ट कर देती है। रावणके विशाल साम्राज्य और बड़े कुलके सर्वनाशमें यही इन्द्रिय एक प्रधान कारण मानी जाती है। नहुषका इन्द्रपदसे पतन इसी इन्द्रियके कारण हुआ। अनेक बड़े-बड़े युद्धोंमें यही इन्द्रिय कारण थी, मुसलमानोंका पतन प्रायः इसी इन्द्रियकी विशेष लोलुपताके कारण हुआ । और भी अनेक उदाहरण हैं। स्त्रीके लिये पुरुषका और पुरुषके लिये स्त्रीका अंग-स्पर्श मोहसे बड़ा सुखदायी मालूम हुआ करता है; परन्तु धर्म और स्वास्थ्यरूपी सुन्दर नगरको उजाड़नेके लिये यह स्पर्शसुख एक भयंकर शत्रु है। क्या करना चाहिये - शीत- उष्ण और कंकड़-पत्थर आदिसे यथायोग्य बचना, कर्तव्यकी दृष्टिसे पुरुषके लिये अपनी विवाहिता स्त्रीका और स्त्रीके लिये विवाहित पतिका धर्मयुक्त मर्यादित स्पर्श करना, भगवान्की मूर्ति और संत, माता, पिता, गुरु आदिके चरणस्पर्श करना, श्रीगंगाजलका स्पर्श करना, गरीब, दीन-दुःखियोंकी सेवाके लिये उनके अंगोंका स्पर्श करना और शुद्ध मोटे वस्त्र पहनना आदि । आवश्यकता - आँख न हो तो परस्परमें लोग भिड़ जायँ, राह चलना कठिन हो जाय, गड्ढोंमें गिर जायँ, पत्थरोंसे टकरा जायँ, दीवालोंसे टकरा जायँ; संसारका प्रायः कोई काम ठीक सम्पन्न न हो, संत-महात्मा और भगवान्की मूर्तियोंके दर्शन न हों, प्रकृतिके पदार्थ कुछ भी देखनेको न मिलें। शास्त्रोंका - सद्ग्रन्थोंका अवलोकन होना असम्भव हो जाय; इन्हीं सब जीवनके आवश्यक कार्योंके लिये नेत्र- इन्द्रियकी बड़ी आवश्यकता है। क्या नहीं करना चाहिये- स्त्रियाँ पुरुषोंके और पुरुष स्त्रियोंके रूपको बुरी दृष्टिसे न देखें । जहाँतक हो सके, परपुरुष और पर- स्त्रीके अंग देखनेकी चेष्टा ही न की जानी चाहिये, बुरे नाटक, सिनेमा, खेल, तमाशे, नाच-रंग न देखे, मनको लुभानेवाले पदार्थ और घटनाएँ न देखें। गंदी चेष्टाएँ कदापि न देखें। परायी नयन- लुभावनी चीजें न देखें, किसीकी चमकीली-भड़कीली पोशाक, टेढ़े-मेढ़े बाल और टेढ़ी चाल लोलुपतासे न देखें । क्या करना चाहिये - भगवान्, भक्त और संतोंका दर्शन करना, भगवल्लीलाओंका देखना, सत्शास्त्रों और सत्स्थानोंका देखना। भक्ति, प्रेम, वैराग्य और वीरता उत्पन्न करनेवाले चित्रोंका देखना, मार्ग देखकर चलना, यथायोग्य व्यवहारके लिये जगत्के पदार्थोंका अलोलुप दृष्टिसे निरीक्षण करना । जीभ - ज्ञानेन्द्रियके नातेआवश्यकता - इससे खट्टे, कड़वे, रूखे पदार्थोंका पता लगता है, यह न हो तो खाद्य पदार्थोंके स्वादसे उनके गुणका पता न लगे, मनुष्य मीठा - ही - मीठा या नमक- ही - नमक खाकर बहुत जल्दी मर जाये । कर्मेन्द्रियके नातेमनुष्यके लिये सबसे प्रधान साधन वाणी है। वाणीसे ही मनुष्यका पता लगता है। प्रायः वाणी ही मनुष्यको ऊँचानीचा, गुणी- दुर्गुणी, साधु-नीच और भला-बुरा साबित करती है। वाणीका कार्य जीभसे होता है, अतः इसकी बड़ी आवश्यकता है। ज्ञानेन्द्रियकी हैसियतसे क्या नहीं करना चाहिये - खट्टे मीठे, चरपरे पदार्थोंके स्वादमें नहीं फँसना चाहिये । बहुत से लोग इसी कारण धर्मभ्रष्ट और दुःखी होते हैं। धर्म और स्वास्थ्यको भुलाकर चाहे जहाँ, चाहे सो खाना, पीना इसी इन्द्रियके कारण होता है। रोगी मनुष्य इसी इन्द्रियकी आसक्तिके कारण वैद्यकी आज्ञाके विरुद्ध कुपथ्य कर मृत्युको बुला लेते हैं। इसी इन्द्रियके कारण देवताओंतकके लिये बनी हुई रसोई भी पहले जूँठी कर दी जाती है। चटोरपनसे चोरीकी आदत पड़ती है। मीठा खानेकी आसक्तिसे मधुमेह और कृमिकी बीमारी, नमकीन तथा खट्टेकी आसक्तिसे वीर्यक्षयकी बीमारियाँ पैदा हो जाती हैं। बासी, तीखे, सड़े हुए पदार्थोंकी आसक्तिसे तरह-तरहकी बीमारियाँ होती हैं और तामसिकता बढ़ती है। मद्य, मांस, डॉक्टरी दवाएँ और अपवित्र पदार्थोंका खान-पान न करे चोरी, अन्यायका अपवित्र अन्न न खाय । कर्मेन्द्रियकी हैसियतसेकड़वा न बोले, किसीकी निन्दा या चुगली न करे, अपनी बड़ाई न करें, खुशामदपसंदगी आती है। अपना दान और परोपकार प्रकट न करे, किसीकी खुशामद न करे, परचर्चा या फालतू बातें न करे, मिथ्या न बोले, ताना न मारे, आक्षेप न करे, किसीकी अंगहीनता या कर्महीनताका दोष बताकर अर्थात् तू अन्धा है, बहरा है, कोढ़ी है, पापी है, तू राँड है आदि शब्दोंसे सम्बोधन न करे, अपशब्द न बोले, अश्लील न बोले, शृंगारके गाने न गावे, कामोद्दीपक शब्द न बोले, किसीसे अपने लिये कुछ भी न माँगे, हरि, गुरु, शास्त्र, संत, माता-पिता, गुरु- जनोंकी दोषचर्चा न करे । ज्ञानेन्द्रियकी हैसियतसेक्या करना चाहिये - वस्तुओंके गुण-दोष पहचानकर जो वस्तु धर्म और स्वास्थ्यके अनुकूल हो तथा आयु, सत्त्व, बल, आरोग्यता, सुख और प्रीति आदिको बढ़ानेवाली हो, सात्त्विक हो, जिसके सेवनसे बुद्धि सात्त्विक हो सके ऐसी वस्तु सेवन करे। भगवान्के प्रसादका भोग लगावे, गंगाजल आदि पान करे-भगवान्का चरणामृत ले । कर्मेन्द्रियकी हैसियतसेसत्य, मीठे, हितकारी, उद्वेग न करनेवाले, सीधे और प्यारे वचन बोले, नम्रतासे बोले, भगवान्का नाम, गुण, जप-कीर्तन करे, अपने दोष और दूसरोंके अनुकरणीय गुणोंको प्रकट करे तथा थोड़ा बोले । ऐसी बातें कहे जिनसे दूसरोंके चित्तमें प्रसन्नता हो, सुनने और माननेमें सुख पहुँचे, इहलोक और परलोकमें कल्याण हो । नासिका - आवश्यकता - नासिका गन्धके लिये है । यह न हो तो मनुष्य गंदी जगह रहकर और गंदी वस्तुओंका सेवनकर बीमार हो जाय। अच्छे पुरुषोंको और देवताओंको गन्दी वस्तुएँ प्रदान कर उनके अपमानका कारण बने । इन्हीं सब अभावोंकी पूर्तिके लिये नाककी आवश्यकता है । क्या नहीं करना चाहिये- अतर, फुलेल, एसेंस, सेंट आदिकी गन्धमें आसक्त न होवे, ( इससे विलासिता बढ़ती है । बुरी आदतें पड़ती हैं, धन और धर्म जाता है। उस सुगन्धको पाकर दूसरे लोगोंकी भी वैसी ही इच्छा होती है। पैसे नहीं होनेसे |
मोर उठ रहे थे । संशय की भावना छाई हुई थी। मेरे स्नायुवों में तुरन्त इस बातावरण की प्रतिक्रिया हुई । बीच में पड़ी बड़ी मेज के चारों ओर उत्तेजित व्यक्तियों का एक पूरा दल खड़ा हुआ था ।
... कल नाजियों का पूरी साज-सज्जा सहित पूर्वाभ्यास है। क्या सोशल डिमाकेट लोग...?"
"मैं बहुत से लोगों से बात कर चुका हूँ । वो लोग कल हमारे साथ सडकों पर होंगे।" फ्रांज ने शान्त स्वर में कहा
"२० जुलाई से बहुतेरे लोग अनुभव करने लगे हैं कि..." अनुभव करने से बढ़ कर अव संघर्ष में जुटने की जरूरत है... "एक व्यक्ति ने सन्देहयुक्त स्वर में जवाब दिया ।
'रेडी-मेड' ने अपनी जेब से एक अखबार निकाला। वह ब्रोनिकमेयर्स रेडी-टु-वियर टेलरिंग इस्टैबलिशमेंट में सहायक है, और उसे 'भलेमानुस' की तरह कपड़े पहने रहना पड़ता है । वह उस अखबार में से पढ़ता है : '... आशा की जानी चाहिए कि पुलिस के मुख्य प्रायुक्त देर से ही सही स्थिति की गम्भीरता को समझ जायेंगे।"
"जैसे कि पुलिस हमारा पक्ष ही तो लेगी ।"
"हमारे सोशल-डिमार्केट मित्रों को भी इस बात पर हँसी आती है । वे लोग कल मुझसे भेंट करने वाले हैं !"
मैंने उसके कंधे के ऊपर से झाँक कर अखबार को देखा। कार्ल लीबक्नेष्ट हाउस की तस्वीर छपी थी, और उसके ऊपर बड़े-बड़े अक्षरो मे लिखा था :
बुलो ग्लाट्ज तक एस० ए० सैनिकों को परे जैसे कि यह कोई भड़कानेवाली बात हो न हो !
हमारे पीछे की तरफ़ जोर से दरवाजा खुला । हम घूम कर देखने एक नौजवान कामरेड ने खिड़की से अपनी साइकिल टिका कर हॉल में प्रवेश किया ।
१४ : हमारी अपनी गली
"कामरेड फ्रांज के लिए !" उसने कहा ।
फांज ने सर हिला कर कहा - "ठीक ।"
atter ने
जेब से ढूंढ़ कर एक तह किया हुआ कागज का
टुकड़ा निकाला और फांज को पकड़ा दिया। उसके घुसते ही फ़ौरन दरवाजा जोर की आवाज के साथ बंद हो गया। बात चीत रुक गयी । सभी नजरें सफेद कागज के उस टुकड़े पर जम गयीं ।
फ्रांज ने मेरी ओर और रिचर्ड की ओर देख कर सिर हिलाया। अपने चौड़े कंधे हिलाता हुआ वह हमारे सामने से गुजरा। 'शक्तिशाली जिम !' हमने एक बार उसका यही नाम रख दिया था।
हम लोग बगल वाले कमरे में चले गये । फ्रांज ने कागज का वह पुर्जा हमें दे दिया।
"कल के लिए निर्देश । तुम तो जानते ही हो, रिचर्ड, कि तुम्हें अपने बिल्डिंग डिफेन्स ग्रूप ( भवन रक्षक टुकड़ियों) के साथ क्या करना चाहिए।'
"हाँ, मुझे अब जाना चाहिये ।" मोर रिचर्ड ने दृढ़तापूर्वक हमसे हाथ मिलाया ।
फ्रांज ने कामरेडों को एक-एक करके अन्दर बुलाना शुरू किया । गंभीर चेहरों का एक पूरा वृत्त बन गया। उसने एक के बाद एक स के चेहरों पर अपनी नजरें गड़ा दीं, जैसे कि वह एक बार फिर उन सब को परीक्षा लेना चाहता हो । उसने शांत किन्तु दृढ़ स्वर में और दे कर कहना शुरू किया :
"कामरेडो, मुझे ज्यादा बातें कहने की जरूरत नहीं । हम बिना संघर्ष किये हुए बलिन फासिस्टों को नहीं सौंप सकते । मैं बाद में को सूचित करूंगा कि कल हमें किस स्थान पर मिलना है। हम बिखरे हुये दलों को शवल में विभिन्न सड़कों पर से चलेंगे। आपको यही ध्यान रखना है, कि सब लोग समय के पथके रहें, और कोई अपने काम में चूके
हमारी अपनी गली : १५
नहीं । श्राप तीन या पाँच आदमियों के गुट बना कर कपड़े पहने हुए ही आज रात में सो जायँ । मजदूर आपसे आशा करते हैं, कि आप उनकी रक्षा करेंगे । मेरी बातें बिलकुल स्पष्ट हैं न ?"
सभी लोगों ने मौन हामी के भाव से सिर हिलाया। कमरा खाली हो गया ।
कमरे से हम चार लोग सब से आखीर में बाहर निकले - फ्रांश, रोथेकर, 'रेडी-मेड' और मैं । हमारी पदचाप सन्नाटी सड़क पर प्रतिध्वनित हो रही थी ।
इमारतों में चेतावनी पहुँचा दी गयी। रक्षा चौकियों को सावधान कर दिया गया। अगर कल लड़ाई होगी, तो कारखाने सोमवार को बंद हो जाने चाहिये, हालांकि हममें से सबसे अच्छे योद्धाओं ने एक लम्बे अरसे से सैनिक साज-सज्जा और सैनिक थैले को रोथेकर और अन्य अनेक ऐसे ही लोग ।
हम रोथेकर के मकान तक पहुँच गये । वह सीढ़ियों से ऊपर चला गया । टाउन हॉल की घड़ी से घंटे की आवाज आयी और दीवारों के बीच खो गयी। पुलिस की कार अभी भी गश्त लगी रही थी । उसकी हेडलाइट चन्द पलों के लिए सड़क पर प्रकाश पुंज बिखरे देतीं, और फिर गायब हो जाती । एक कार भोंपू की उनींदी सी आवाज करती चली गयो । रह-रह कर लारियाँ घरं घर, खड़-खड़ करती हमारे बगल से निकल जातीं । भूरी वर्दी वाले अभी भी शहर में घूम रहे थे ।
रोथेकर वापस आ गया। वह फांज के निकट खड़ा हो गया । धुंधलके में वह नाटा क्लर्क और भी जोना-सा लग रहा था और उसका निकल का चश्मा जैसे बड़ा सा हो गया था। उसकी शांत भाव से रुकरुक कर बात करने की आवाज़ हम सुन रहे थे ।
"फ्रांज, अगर मुझे कुछ हो जाय, तो मुझे इसका कोई भय नहीं है-" और उसने गहरी सांस ली। | मोर उठ रहे थे । संशय की भावना छाई हुई थी। मेरे स्नायुवों में तुरन्त इस बातावरण की प्रतिक्रिया हुई । बीच में पड़ी बड़ी मेज के चारों ओर उत्तेजित व्यक्तियों का एक पूरा दल खड़ा हुआ था । ... कल नाजियों का पूरी साज-सज्जा सहित पूर्वाभ्यास है। क्या सोशल डिमाकेट लोग...?" "मैं बहुत से लोगों से बात कर चुका हूँ । वो लोग कल हमारे साथ सडकों पर होंगे।" फ्रांज ने शान्त स्वर में कहा "बीस जुलाई से बहुतेरे लोग अनुभव करने लगे हैं कि..." अनुभव करने से बढ़ कर अव संघर्ष में जुटने की जरूरत है... "एक व्यक्ति ने सन्देहयुक्त स्वर में जवाब दिया । 'रेडी-मेड' ने अपनी जेब से एक अखबार निकाला। वह ब्रोनिकमेयर्स रेडी-टु-वियर टेलरिंग इस्टैबलिशमेंट में सहायक है, और उसे 'भलेमानुस' की तरह कपड़े पहने रहना पड़ता है । वह उस अखबार में से पढ़ता है : '... आशा की जानी चाहिए कि पुलिस के मुख्य प्रायुक्त देर से ही सही स्थिति की गम्भीरता को समझ जायेंगे।" "जैसे कि पुलिस हमारा पक्ष ही तो लेगी ।" "हमारे सोशल-डिमार्केट मित्रों को भी इस बात पर हँसी आती है । वे लोग कल मुझसे भेंट करने वाले हैं !" मैंने उसके कंधे के ऊपर से झाँक कर अखबार को देखा। कार्ल लीबक्नेष्ट हाउस की तस्वीर छपी थी, और उसके ऊपर बड़े-बड़े अक्षरो मे लिखा था : बुलो ग्लाट्ज तक एसशून्य एशून्य सैनिकों को परे जैसे कि यह कोई भड़कानेवाली बात हो न हो ! हमारे पीछे की तरफ़ जोर से दरवाजा खुला । हम घूम कर देखने एक नौजवान कामरेड ने खिड़की से अपनी साइकिल टिका कर हॉल में प्रवेश किया । चौदह : हमारी अपनी गली "कामरेड फ्रांज के लिए !" उसने कहा । फांज ने सर हिला कर कहा - "ठीक ।" atter ने जेब से ढूंढ़ कर एक तह किया हुआ कागज का टुकड़ा निकाला और फांज को पकड़ा दिया। उसके घुसते ही फ़ौरन दरवाजा जोर की आवाज के साथ बंद हो गया। बात चीत रुक गयी । सभी नजरें सफेद कागज के उस टुकड़े पर जम गयीं । फ्रांज ने मेरी ओर और रिचर्ड की ओर देख कर सिर हिलाया। अपने चौड़े कंधे हिलाता हुआ वह हमारे सामने से गुजरा। 'शक्तिशाली जिम !' हमने एक बार उसका यही नाम रख दिया था। हम लोग बगल वाले कमरे में चले गये । फ्रांज ने कागज का वह पुर्जा हमें दे दिया। "कल के लिए निर्देश । तुम तो जानते ही हो, रिचर्ड, कि तुम्हें अपने बिल्डिंग डिफेन्स ग्रूप के साथ क्या करना चाहिए।' "हाँ, मुझे अब जाना चाहिये ।" मोर रिचर्ड ने दृढ़तापूर्वक हमसे हाथ मिलाया । फ्रांज ने कामरेडों को एक-एक करके अन्दर बुलाना शुरू किया । गंभीर चेहरों का एक पूरा वृत्त बन गया। उसने एक के बाद एक स के चेहरों पर अपनी नजरें गड़ा दीं, जैसे कि वह एक बार फिर उन सब को परीक्षा लेना चाहता हो । उसने शांत किन्तु दृढ़ स्वर में और दे कर कहना शुरू किया : "कामरेडो, मुझे ज्यादा बातें कहने की जरूरत नहीं । हम बिना संघर्ष किये हुए बलिन फासिस्टों को नहीं सौंप सकते । मैं बाद में को सूचित करूंगा कि कल हमें किस स्थान पर मिलना है। हम बिखरे हुये दलों को शवल में विभिन्न सड़कों पर से चलेंगे। आपको यही ध्यान रखना है, कि सब लोग समय के पथके रहें, और कोई अपने काम में चूके हमारी अपनी गली : पंद्रह नहीं । श्राप तीन या पाँच आदमियों के गुट बना कर कपड़े पहने हुए ही आज रात में सो जायँ । मजदूर आपसे आशा करते हैं, कि आप उनकी रक्षा करेंगे । मेरी बातें बिलकुल स्पष्ट हैं न ?" सभी लोगों ने मौन हामी के भाव से सिर हिलाया। कमरा खाली हो गया । कमरे से हम चार लोग सब से आखीर में बाहर निकले - फ्रांश, रोथेकर, 'रेडी-मेड' और मैं । हमारी पदचाप सन्नाटी सड़क पर प्रतिध्वनित हो रही थी । इमारतों में चेतावनी पहुँचा दी गयी। रक्षा चौकियों को सावधान कर दिया गया। अगर कल लड़ाई होगी, तो कारखाने सोमवार को बंद हो जाने चाहिये, हालांकि हममें से सबसे अच्छे योद्धाओं ने एक लम्बे अरसे से सैनिक साज-सज्जा और सैनिक थैले को रोथेकर और अन्य अनेक ऐसे ही लोग । हम रोथेकर के मकान तक पहुँच गये । वह सीढ़ियों से ऊपर चला गया । टाउन हॉल की घड़ी से घंटे की आवाज आयी और दीवारों के बीच खो गयी। पुलिस की कार अभी भी गश्त लगी रही थी । उसकी हेडलाइट चन्द पलों के लिए सड़क पर प्रकाश पुंज बिखरे देतीं, और फिर गायब हो जाती । एक कार भोंपू की उनींदी सी आवाज करती चली गयो । रह-रह कर लारियाँ घरं घर, खड़-खड़ करती हमारे बगल से निकल जातीं । भूरी वर्दी वाले अभी भी शहर में घूम रहे थे । रोथेकर वापस आ गया। वह फांज के निकट खड़ा हो गया । धुंधलके में वह नाटा क्लर्क और भी जोना-सा लग रहा था और उसका निकल का चश्मा जैसे बड़ा सा हो गया था। उसकी शांत भाव से रुकरुक कर बात करने की आवाज़ हम सुन रहे थे । "फ्रांज, अगर मुझे कुछ हो जाय, तो मुझे इसका कोई भय नहीं है-" और उसने गहरी सांस ली। |
नई दिल्ली : ये घटना ब्रिटेन की है जहां एक महिला को उसके घर में दफन 135 साल पुराना वो सामान मिला जिसने उसे और उसके बच्चों को रोमांच से भर दिया. दरअसल महिला ने फैसला लिया कि वह अपने घर की कुछ मरम्मत करवाएगी. इस दौरान उसे एक पुरानी व्हिस्की की बोतल मिली. इस बोतल में कुछ ऐसा लिखा हुआ था जिसे पढ़कर पूरे परिवार के होश उड़ गए.
दरअसल व्हिस्की की ये बोतल 135 साल पुरानी थी. इस बोतल में एक नोट भी लिखा हुआ था. इस रहस्मयी मैसेज को पढ़कर पूरे परिवार रोमांच से भर गया. खबरों की मानें तो महिला का नाम एलिध स्टिम्पसन है. एलिध पेशे से जनरल फिजीशियन हैं. इसी सप्ताह वह अपने घर की मरम्मत करवा रही थीं. इसी बीच उन्हें अपने घर से क्वीन विक्टोरिया के दौर की एक ऐतिहासिक चीज़ हाथ लगी. इसे देख कर वह हैरान रही गईं. उनके घर काम कर रहे प्लंबर पीटर एलन ने इस बोतल को काफी सावधानी से जमीन के अंदर से निकाला. इस बोतल के अंदर एक लेटर भी लिखा हुआ था.
इस खत में 6 अक्टूबर 1887 की तारीख लिखी हुई थी. जिससे ये साफ़ था कि बोतल इसी घर के नीचे कई दशकों से दफन थी. इस लेटर में लिखा था- 'इस फर्श को बनाने वाले जेम्स रिची और जॉन ग्रीव ने इस व्हिस्की की बोतल से कभी शराब नहीं पी. ' इस मैसेज ने उन्हें काफी हैरान कर दिया क्योंकि ये मैसेज करीब 135 साल से सही सलामत दफन रहा. बोतल का मिलना थोड़ा अजीबोगरीब जरूर था लेकिन हैरानी की बात ये है कि ये उसी जगह मिली जहां काम के दौरान छेड़ किया जाना था. महिला का कहना है कि वह इसी तरह का कुछ लिखकर इसी तरह से दफन करेगी. ताकि आने वाले पीढ़ी भी इसे खोजे और रोमांचित हो.
| नई दिल्ली : ये घटना ब्रिटेन की है जहां एक महिला को उसके घर में दफन एक सौ पैंतीस साल पुराना वो सामान मिला जिसने उसे और उसके बच्चों को रोमांच से भर दिया. दरअसल महिला ने फैसला लिया कि वह अपने घर की कुछ मरम्मत करवाएगी. इस दौरान उसे एक पुरानी व्हिस्की की बोतल मिली. इस बोतल में कुछ ऐसा लिखा हुआ था जिसे पढ़कर पूरे परिवार के होश उड़ गए. दरअसल व्हिस्की की ये बोतल एक सौ पैंतीस साल पुरानी थी. इस बोतल में एक नोट भी लिखा हुआ था. इस रहस्मयी मैसेज को पढ़कर पूरे परिवार रोमांच से भर गया. खबरों की मानें तो महिला का नाम एलिध स्टिम्पसन है. एलिध पेशे से जनरल फिजीशियन हैं. इसी सप्ताह वह अपने घर की मरम्मत करवा रही थीं. इसी बीच उन्हें अपने घर से क्वीन विक्टोरिया के दौर की एक ऐतिहासिक चीज़ हाथ लगी. इसे देख कर वह हैरान रही गईं. उनके घर काम कर रहे प्लंबर पीटर एलन ने इस बोतल को काफी सावधानी से जमीन के अंदर से निकाला. इस बोतल के अंदर एक लेटर भी लिखा हुआ था. इस खत में छः अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ सत्तासी की तारीख लिखी हुई थी. जिससे ये साफ़ था कि बोतल इसी घर के नीचे कई दशकों से दफन थी. इस लेटर में लिखा था- 'इस फर्श को बनाने वाले जेम्स रिची और जॉन ग्रीव ने इस व्हिस्की की बोतल से कभी शराब नहीं पी. ' इस मैसेज ने उन्हें काफी हैरान कर दिया क्योंकि ये मैसेज करीब एक सौ पैंतीस साल से सही सलामत दफन रहा. बोतल का मिलना थोड़ा अजीबोगरीब जरूर था लेकिन हैरानी की बात ये है कि ये उसी जगह मिली जहां काम के दौरान छेड़ किया जाना था. महिला का कहना है कि वह इसी तरह का कुछ लिखकर इसी तरह से दफन करेगी. ताकि आने वाले पीढ़ी भी इसे खोजे और रोमांचित हो. |
Bareilly News: रेप मामले में कार्रवाई न होने से आहत छात्रा ने एडीजी कार्यालय में आत्महत्या का प्रयास किया। लड़की शिकायत लेकर पहुंची थी, इंस्पेक्टर ने कहा तुम्हारा मामला झूठा है।
Bareilly News: रेप मामले में कार्रवाई न होने से आहत छात्रा ने सोमवार (6 मार्च) को ADG दफ्तर में सुसाइड का प्रयास किया। आरोप है कि पीड़िता जब शिकायत लेकर एडीजी कार्यालय पहुंची तो वहां मौजूद इंस्पेक्टर ने साफ शब्दों में कहा, 'तुम्हारा मामला झूठा है। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। ' कहा जाता है इन शब्दों से छात्रा आहत हो कार्यालय से बाहर चली गई। ADG दफ्तर के बाहर लगे वाटर कूलर से पानी के साथ उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जहरीले पदार्थ के असर से वो बेहोश होकर गिर गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
एडीजी कार्यालय में छात्रा के खुदकुशी के प्रयास की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस वालों में अफरा-तफरी का आलम था। आनन-फानन में कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पीड़ित छात्रा को जिला अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डाक्टरों ने छात्रा की हालत खतरे से बहार बतायी है। स्थानीय कोतवाली पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है।
घटना के ठीक बाद ADG के PRO ने जहरीला पदार्थ खा चुकी छात्रा को को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान पता चला कि युवती काफी समय से सुनगढ़ी थाने में सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही है।
क्या कहती है पुलिस?
इस संबंध में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की शुरुआती जांच हो चुकी है। आरोप सही नहीं मिले। इस घटना के तार बरेली के बारादरी थाने से जुड़ा है। दरअसल, 28 फरवरी को शानू ठाकुर (Shanu Thakur) नाम के शख्स ने बलात्कार मामले में कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। पीड़िता, शानू ठाकुर के मामले में वादी और उसके पिता तथा परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना चाहती है।
क्या है मामला?
आरोपी सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के उसी गांव के रहने वाले हैं, जहां पीड़ित छात्रा रहती है। उस वक्त मामला बारादरी थाने में दर्ज किया गया था। ADG के PRO गीतेश कपिल ने बताया कि, युवती ने किस वक्त और कहां जहर खाया, इसकी पुष्टि नहीं हो रही। जब यह घटना बताई गई तो करीब 15 मिनट तक उन्होंने भी उससे बात की। एहतियातन छात्रा को जिला अस्पताल भेजा गया है। उसकी स्थित ठीक है।
| Bareilly News: रेप मामले में कार्रवाई न होने से आहत छात्रा ने एडीजी कार्यालय में आत्महत्या का प्रयास किया। लड़की शिकायत लेकर पहुंची थी, इंस्पेक्टर ने कहा तुम्हारा मामला झूठा है। Bareilly News: रेप मामले में कार्रवाई न होने से आहत छात्रा ने सोमवार को ADG दफ्तर में सुसाइड का प्रयास किया। आरोप है कि पीड़िता जब शिकायत लेकर एडीजी कार्यालय पहुंची तो वहां मौजूद इंस्पेक्टर ने साफ शब्दों में कहा, 'तुम्हारा मामला झूठा है। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। ' कहा जाता है इन शब्दों से छात्रा आहत हो कार्यालय से बाहर चली गई। ADG दफ्तर के बाहर लगे वाटर कूलर से पानी के साथ उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जहरीले पदार्थ के असर से वो बेहोश होकर गिर गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। एडीजी कार्यालय में छात्रा के खुदकुशी के प्रयास की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस वालों में अफरा-तफरी का आलम था। आनन-फानन में कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पीड़ित छात्रा को जिला अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डाक्टरों ने छात्रा की हालत खतरे से बहार बतायी है। स्थानीय कोतवाली पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। घटना के ठीक बाद ADG के PRO ने जहरीला पदार्थ खा चुकी छात्रा को को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान पता चला कि युवती काफी समय से सुनगढ़ी थाने में सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही है। क्या कहती है पुलिस? इस संबंध में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की शुरुआती जांच हो चुकी है। आरोप सही नहीं मिले। इस घटना के तार बरेली के बारादरी थाने से जुड़ा है। दरअसल, अट्ठाईस फरवरी को शानू ठाकुर नाम के शख्स ने बलात्कार मामले में कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। पीड़िता, शानू ठाकुर के मामले में वादी और उसके पिता तथा परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना चाहती है। क्या है मामला? आरोपी सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के उसी गांव के रहने वाले हैं, जहां पीड़ित छात्रा रहती है। उस वक्त मामला बारादरी थाने में दर्ज किया गया था। ADG के PRO गीतेश कपिल ने बताया कि, युवती ने किस वक्त और कहां जहर खाया, इसकी पुष्टि नहीं हो रही। जब यह घटना बताई गई तो करीब पंद्रह मिनट तक उन्होंने भी उससे बात की। एहतियातन छात्रा को जिला अस्पताल भेजा गया है। उसकी स्थित ठीक है। |
चिमनी एक उपकरण है जो दहन उत्पादों को हटाने में काम करता है। फर्नेस, बॉयलर या फायरप्लेस के इस तत्व का डिज़ाइन ऑपरेशन के दौरान इसके प्रभावी संचालन और सुरक्षा पर निर्भर करेगा।
उपयोग की जाने वाली सामग्री और लागत के बावजूद सभी प्रकार की चिमनी, समान आवश्यकताओं के अधीन हैंः
यह आवश्यकताओं की एक अपूर्ण सूची हैचिमनी। उन सभी को एक विशेष मानक दस्तावेज एसएनआईपी 41-01-2003 में वर्णित किया गया है। यह "ताप, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग" के लिए खड़ा है।
कुल मिलाकर, कई प्रकार के डिवाइस हैंः
शास्त्रीय संस्करण ईंट से बना थाचिनाई। यह छत सामग्री बिछाने के पहले या पहले, अंतिम चरण में बनाया गया है। इसे स्थापित करने के लिए ईंट चिनाई में एक विशेषज्ञ की भागीदारी की आवश्यकता है। खराब गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करते समय, यह जल्दी से विफल हो जाता है।
चिमनी मॉड्यूलर - आधुनिक विकास, के साथजिसकी रचना नवीनतम सामग्रियों का उपयोग करती है। यह निर्माण के किसी भी चरण में स्थापित है, सभी रूसी भवन कोडों को संतुष्ट करता है। यह निम्नलिखित प्रकार की सामग्रियों से बना हैः
मॉड्यूलर चिमनी स्थापित करते समय विशेषज्ञों की भागीदारी और विशिष्ट उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है। निर्माण इमारत के मुखौटे को खराब नहीं करता है।
यह मॉड्यूलर चिमनी मोटी दीवार वाली या पतली दीवार वाली स्टील से बना है और इसकी कक्षा में सबसे सस्ता है। एक पॉलिश बाहरी दीवार है जो इंटीरियर में अच्छी तरह से फिट बैठती है।
इस प्रकार की चिमनी का उपयोग केवल अंदर किया जाता हैइमारत। इसकी तीव्र शीतलन के कारण, संघनित गठन संभव है, जो कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करते समय एक हानिकारक पदार्थ बनाता है जिसका दोनों लोगों और उत्पाद पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मोटी दीवार वाली चिमनी मॉड्यूलर में सीमित सेवा जीवन होता है, और पतली दीवार वाली विविधता में यह भी छोटा होता है।
बाहरी उपयोग के लिएधातु चिमनी का डिजाइन मूल रूप से बदल दिया गया था, एक गर्मी-इन्सुलेटिंग अंतर जोड़ा गया था। ऐसा करने के लिए, एक दूसरे में डाले गए विभिन्न व्यास के दो धातु पाइप का उपयोग करें। उनके बीच की जगह खनिज ऊन से भरा है। यह चिमनी के अंदर उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए लंबे समय तक अनुमति देता है, बाहरी सर्किट को गर्म न करें। इस प्रकार, संघनन के गठन की शर्तें समाप्त हो जाती हैं। हालांकि, खराब संक्षारण प्रतिरोध के कारण, इस तरह की चिमनी मॉड्यूलर का जीवन सीमित है। इससे इसकी कम लोकप्रियता होती है।
मॉड्यूलर प्रणाली संरचनात्मक रूप से समान हैएक दो सर्किट स्टील चिमनी। स्टेनलेस स्टील के जबरदस्त भौतिक गुण हैं। पारंपरिक धातु की तुलना में, इसमें कम विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण होता है, बेहतर संक्षारण प्रतिरोध, सल्फ्यूरिक एसिड से प्रभावित नहीं होता है। इस डिजाइन की एकमात्र कमी इसकी लागत है। हालांकि, यदि आप अनुरूपता के जीवन की तुलना करते हैं, तो यह पता चला है कि यह कई गुना छोटा है, और इसके परिणामस्वरूप, सस्ते चिमनी की कुल लागत अंततः अधिक होगी।
वे एक विशेष संरचना से बने होते हैंमिट्टी, जो गर्मी से इलाज किया गया था। उन्हें सिरेमिक शैमोट ट्यूब भी कहा जाता है। संरचना का वजन अपेक्षाकृत छोटा है। बाहरी दीवारों के अलग-अलग आकार और पैटर्न होते हैं, टिकाऊ होते हैं, लेकिन कुछ देखभाल की आवश्यकता होती है। गर्म होने पर, हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जित न करें।
सरलीकृत स्थापना के लिए, मॉड्यूलर चिमनी सिस्टम विभिन्न फिटिंग प्रदान करते हैं जो लागत को कम करते हैं। आइए मॉड्यूलर सिस्टम के बुनियादी तत्वों पर विचार करेंः
भट्ठी से मॉड्यूलर चिमनी की स्थापना औरनीचे से चले जाओ। सभी तत्व एक साथ सील कर रहे हैं। इसे विशेष उपकरण, वेल्डिंग, सोल्डरिंग के उपयोग की आवश्यकता नहीं है। कनेक्शन विशेष दबाया grooves द्वारा किया जाता है। विभाजन को पार करते समय केवल गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है।
| चिमनी एक उपकरण है जो दहन उत्पादों को हटाने में काम करता है। फर्नेस, बॉयलर या फायरप्लेस के इस तत्व का डिज़ाइन ऑपरेशन के दौरान इसके प्रभावी संचालन और सुरक्षा पर निर्भर करेगा। उपयोग की जाने वाली सामग्री और लागत के बावजूद सभी प्रकार की चिमनी, समान आवश्यकताओं के अधीन हैंः यह आवश्यकताओं की एक अपूर्ण सूची हैचिमनी। उन सभी को एक विशेष मानक दस्तावेज एसएनआईपी इकतालीस जनवरी दो हज़ार तीन में वर्णित किया गया है। यह "ताप, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग" के लिए खड़ा है। कुल मिलाकर, कई प्रकार के डिवाइस हैंः शास्त्रीय संस्करण ईंट से बना थाचिनाई। यह छत सामग्री बिछाने के पहले या पहले, अंतिम चरण में बनाया गया है। इसे स्थापित करने के लिए ईंट चिनाई में एक विशेषज्ञ की भागीदारी की आवश्यकता है। खराब गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करते समय, यह जल्दी से विफल हो जाता है। चिमनी मॉड्यूलर - आधुनिक विकास, के साथजिसकी रचना नवीनतम सामग्रियों का उपयोग करती है। यह निर्माण के किसी भी चरण में स्थापित है, सभी रूसी भवन कोडों को संतुष्ट करता है। यह निम्नलिखित प्रकार की सामग्रियों से बना हैः मॉड्यूलर चिमनी स्थापित करते समय विशेषज्ञों की भागीदारी और विशिष्ट उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है। निर्माण इमारत के मुखौटे को खराब नहीं करता है। यह मॉड्यूलर चिमनी मोटी दीवार वाली या पतली दीवार वाली स्टील से बना है और इसकी कक्षा में सबसे सस्ता है। एक पॉलिश बाहरी दीवार है जो इंटीरियर में अच्छी तरह से फिट बैठती है। इस प्रकार की चिमनी का उपयोग केवल अंदर किया जाता हैइमारत। इसकी तीव्र शीतलन के कारण, संघनित गठन संभव है, जो कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करते समय एक हानिकारक पदार्थ बनाता है जिसका दोनों लोगों और उत्पाद पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मोटी दीवार वाली चिमनी मॉड्यूलर में सीमित सेवा जीवन होता है, और पतली दीवार वाली विविधता में यह भी छोटा होता है। बाहरी उपयोग के लिएधातु चिमनी का डिजाइन मूल रूप से बदल दिया गया था, एक गर्मी-इन्सुलेटिंग अंतर जोड़ा गया था। ऐसा करने के लिए, एक दूसरे में डाले गए विभिन्न व्यास के दो धातु पाइप का उपयोग करें। उनके बीच की जगह खनिज ऊन से भरा है। यह चिमनी के अंदर उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए लंबे समय तक अनुमति देता है, बाहरी सर्किट को गर्म न करें। इस प्रकार, संघनन के गठन की शर्तें समाप्त हो जाती हैं। हालांकि, खराब संक्षारण प्रतिरोध के कारण, इस तरह की चिमनी मॉड्यूलर का जीवन सीमित है। इससे इसकी कम लोकप्रियता होती है। मॉड्यूलर प्रणाली संरचनात्मक रूप से समान हैएक दो सर्किट स्टील चिमनी। स्टेनलेस स्टील के जबरदस्त भौतिक गुण हैं। पारंपरिक धातु की तुलना में, इसमें कम विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण होता है, बेहतर संक्षारण प्रतिरोध, सल्फ्यूरिक एसिड से प्रभावित नहीं होता है। इस डिजाइन की एकमात्र कमी इसकी लागत है। हालांकि, यदि आप अनुरूपता के जीवन की तुलना करते हैं, तो यह पता चला है कि यह कई गुना छोटा है, और इसके परिणामस्वरूप, सस्ते चिमनी की कुल लागत अंततः अधिक होगी। वे एक विशेष संरचना से बने होते हैंमिट्टी, जो गर्मी से इलाज किया गया था। उन्हें सिरेमिक शैमोट ट्यूब भी कहा जाता है। संरचना का वजन अपेक्षाकृत छोटा है। बाहरी दीवारों के अलग-अलग आकार और पैटर्न होते हैं, टिकाऊ होते हैं, लेकिन कुछ देखभाल की आवश्यकता होती है। गर्म होने पर, हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जित न करें। सरलीकृत स्थापना के लिए, मॉड्यूलर चिमनी सिस्टम विभिन्न फिटिंग प्रदान करते हैं जो लागत को कम करते हैं। आइए मॉड्यूलर सिस्टम के बुनियादी तत्वों पर विचार करेंः भट्ठी से मॉड्यूलर चिमनी की स्थापना औरनीचे से चले जाओ। सभी तत्व एक साथ सील कर रहे हैं। इसे विशेष उपकरण, वेल्डिंग, सोल्डरिंग के उपयोग की आवश्यकता नहीं है। कनेक्शन विशेष दबाया grooves द्वारा किया जाता है। विभाजन को पार करते समय केवल गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है। |
हो या सिद्धासन हो; पर बैठना चाहिये सरल भावसे । भगवान्ने गीतामे छठे अध्यायके १३वें श्लोकमे बताया है-ससं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥
'काया, सिर और गलेको समान एवं अचल धारण करके और स्थिर होकर, अपनी नासिकाके अग्र भागपर दृष्टि जमाकर, अन्य दिशाओको न देखता हुआ ( ध्यान करे )
ध्यानका स्थान एकान्त और पवित्र होना चाहिये। ध्यानके समय प्रथम 'नारायण' नामकी ध्वनि करके भगवान्का आवाहन करना चाहिये । 'नारायण' भगवान् विष्णुका नाम है । नारायण शब्दमे चार अक्षर है-ना रा य ण और भगवान् विष्णुके चार भुजाएँ है, चार ही आयुध है - शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म । ऐसे भगवान् विष्णुका ध्यान करना चाहिये । भगवान्का स्वरूप बहुत ही अद्भुत और सुन्दर है । भगवान्का ध्यान पहले बाहर आकाशमे करे । मानो भगवान् आकाशमे प्रकट हो गये है और आकाश मे स्थित होकर हमलोगोके ऊपर अपने दिव्य गुणोंकी ऐसी वर्षा कर रहे हैं कि हम अनुपम आनन्दका अनुभव करते हुए आनन्दमुग्ध हो रहे है । जैसे पूर्णिमाका चन्द्रमा आकाशमे स्थित होकर अमृतकी वर्षा करता है, वैसे ही आकाशमें स्थित होकर भगवान् अपने गुणोकी वर्षा कर रहे है । क्षमा, शान्ति, समता, ज्ञान, वैराग्य, दया, प्रेम और आनन्दकी मानो अजस्र वर्षा हो रही है और हमलोग उसमे सर्वथा मग्न हो रहे है । तदनन्तर ऐसा देखे कि भगवान् आकाशमे हमसे कुछ ही दूरपर स्थित है । उनका आकार करीब
५५॥ फुट लंवा और करीब ११ - १॥ फुट चौड़ा है । भगवान्के श्रीअङ्गका वर्ण आकाशके सदृश नील है, परंतु उस नीलिमाके साथ ही भगवान्मे अत्यन्त उज्ज्वल दिव्य प्रकाश है । अतएव नीलिमाके साथ उस प्रकाशकी उज्ज्वलताका सम्मिश्रण होनेसे एक विलक्षण वर्णकी ज्योति बन गयी है । इस प्रकारका भगवान्का चमकता हुआ नीलोज्ज्वल सुन्दर वर्ण है । भगवान्का शरीर दिव्य भगवत्स्वरूप ही है । हमलोगोंके शरीरकी धातु पार्थिव है, भगवान्का श्रीविग्रह तैजस धातुका और चिन्मय ( चेतन ) है । सूर्य लाल रंगका है, किंतु प्रकाश विशेष होनेसे और समीप आनेसे वह श्वेतोज्ज्वल रंगका दीखता है, इसी प्रकार भगवान्का स्वरूप नील वर्णका होने पर भी महान् प्रकाश होनेसे और समीप आनेसे वह ज्योतिर्मय श्वेत वर्ण-सा दीखता है । सूर्यके तेजमे बड़ी भारी गरमी रहती है, परंतु भगवान्के तेजोमय स्वरूप में दिव्य और सुहावनी शीतलता है । वह अपार शान्तिमय है । भगवान्के चरणयुगल बहुत ही सुन्दर और सुकोमल है । भगवान् के चरणतलोमे गुलावी रंगकी झलक है एवं सुन्दर-सुन्दर रेखाएँ हैं - ध्वजा, पताका, वज्र, अंकुश, यत्र, चक्र, शङ्ख तथा ऊर्ध्वरेखा आदि-आदि । भगवान् आकाशमे नीचे उतर आये है । उनके श्रीचरण जमीनको छू नही रहे है । देवता भी आकाशमें स्थित होते हैं, जमीनको नहीं छूते; फिर ये तो देवोके भी परम देव हैं । भगवान् के सुन्दर सुमृदुल चरणकमल बहुत ही चिकने हैं । उनकी अंगुलियाँ विशेष शोभायुक्त है। उनके चरणनखोकी दिव्यज्योति चमक रही है । भगवान् पीताम्बर पहने हुए और जैसे उनके चरण चमकीले, सुन्दर और सुकोमल है, ऐसे ही उनकी
पिंडलियाँ और दोनो घुटने तथा ऊरु ( जंघे ) भी हैं। भगवान्का कटिदेश बहुत पतला है, उसमें रत्नोज्ज्वल करधनी शोभित है, नाभि गम्भीर है, उदरपर त्रिबली - तीन रेखाएँ है । त्रिशाल वक्षःस्थल है, गले में अनेको प्रकारकी सुन्दर मालाएँ पहने है । सुन्दर दिव्य पुष्पोंकी एक माला घुटनोतक लटक रही है, दूसरी नाभितक है । मोतियों की माला, स्वर्णकी माला, चन्द्रहार, कौस्तुभमणि और रत्नजटित कंठा पहने है । विशाल चार भुजाएँ है, जिनमे दो भुजाएँ नीचेकी ओर लंवी पसरी हुई है। नीचेकी भुजाओमे गदा और पद्म है तथा ऊपरकी दोनों भुजाओपे शङ्ख और चक्र है । हस्ताङ्गुलियों में रत्नजटित अंगूठियाँ है। चारो हार्योोंने कड़े पहने हुए है ओर ऊपर बाजूबंद सुशोभित है । भुजाएँ चारों घुटनोतक लंबी है ओर बहुत ही सुन्दर है । ऊपरमे मोटी और नीचे से पतली है, पुष्ट हैं तथा चिकनी और चमकीली है। कंधे पुठ है । भगवान् यज्ञोपवीत धारण किये और । गुलेनार दुपट्टा ओढ़े हुए हैं । ग्रीवा अत्यन्त सुन्दर शङ्खके सदृश है, ठोडी बहुत ही मनोहर है, अधर और ओष्ठ लाल मणिके सदृश चमक रहे है । दाँतोकी पंक्ति मानो परमोज्ज्वल मोतियोकी पंक्ति है । जब भगवान् हॅसते है, तब ऐसा प्रतीत होता है, मानो सुन्दर सुषमायुक्त गुलाब या कमलका फूल खिला हुआ है । भगवान्की वाणी बड़ी ही कोमल, मधुर, सुन्दर और अर्थयुक्त है, कानोको अमृतके समान प्रिय लगती है । भगवान्की नासिका अति सुन्दर है । कपोल ( गाल ) चमक रहे है - उनपर गुलाबी रंगकी झलक है । कानोंमे रत्नजटित मकराकृति स्वर्णकुण्डल है, जिनकी झलक गालोंपर पड़ रही है और वे गाल चम चम चमक रहे हैं । भगवान् के दोनो नेत्र खिले हुए है,
जैसे प्रफुल्लित मनोहर कमलकुसुम हों । आकाशमे स्थित होकर भगवान् एकटक नेत्रोसे हमारी ओर देख रहे है और नेत्रों के द्वारा प्रेमामृतकी वर्षा कर रहे हैं । भगवान् समभावसे सबको देखते हैं, वड़े दयालु है, हमें दयाकी दृष्टिसे देख रहे हैं और मानो दया, प्रेम, ज्ञान, समता, शान्ति और आनन्दकी वर्षा कर रहे है । ऐसा लगता है कि दया, प्रेम, ज्ञान, समता, शान्ति और आनन्दकी बाढ़ आ गयी है । भगवान्के दर्शन, भाषण, स्पर्श सभी आनन्दमय है । भगवान् में जो अद्भुत मधुर गन्ध है, वह नासिकाको अमृतके समान प्रिय लगती है । भगवान्का स्पर्श करते हैं तो शरीरमे रोमाञ्च हो जाते है और हृदय ने बड़ी भारी प्रसन्नता होती है । भगवान्की भृकुटी सुन्दर, विशाल और मनोहर है । ललाट चमक रहा है, उसपर श्रीधारी तिलक सुशोभित है । ललाटपर काले घुँघराले केश चमक रहे है, केशोंपर रत्नजटित स्वर्णमुकुट सुशोभित है । भगवान्के मुखारबिन्दके चारों ओर प्रकाशकी किरणें फैली हुई हैं । भगवान्की सुन्दरता अलौकिक है, मनको वरवस आकर्षित करती है । भगवान् नेत्रोंसे हमें ऐसे देख रहे है, मानो पी ही जायेंगे। भगवान्मे पृथ्वी से बढ़कर क्षमा है, चन्द्रमा से बढ़कर शान्ति है और कामदेव से बढ़कर सुन्दरता है। कोटि-कोटि कामदेव भी उनकी सुन्दर नाके सामने लजा जाते हैं । उनके स्वरूपको देखकर पशु-पक्षी भी मोहित हो जाते हैं, मनुष्यकी तो बात ही क्या है ? उनके स्वरूपकी सुन्दरता अद्भुत है । जब भगवान् प्रकट होकर दर्शन देते है, तत्र इतना आनन्द आता है कि मनुष्यकी पलकें भी नहीं पड़ सकतीं । हृदय प्रफुल्लित हो जाता है । शरीरम रोमाञ्च और धड़कन होने लगती है । नेत्रोंमे प्रेमानन्दके
अश्रुओकी धारा बहने लगती है, वाणी गद्गद हो जाती है, कण्ठ रुक जाता है, हृदयमे आनन्द समाता नहीं । नेत्र एकटक वैसे ही देखते रहते है, जैसे चकोर पक्षी पूर्ण चन्द्रमाको देखता है। प्रभुसे हम प्रार्थना करते है कि जिस प्रकार से हम आपका ध्यानावस्थामे दिव्य दर्शन कर रहे हैं, इसी प्रकारका दर्शन हमे हर समय होता रहे । आपके नामका जप, स्वरूपका ध्यान नित्य - निरन्तर बना रहे । आपमे हमारी परम श्रद्धा हो, परम प्रेम हो । यही आप प्रार्थना है । आप ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, चन्द्रमा, आकाश, वायु, तेज, जल, पृथ्वी - सव कुछ हैं । आप ही इस विश्व के रचनेवाले हैं और आप ही रचनाकी सामग्री भी है । इस संसारके उपादानकारण और निर्मित्तकारण आप ही है । इसीलिये कहा जाता है कि जो कुछ है सब आपका ही स्वरूप है । आपसे यही प्रार्थना है कि जैसे आप बाहरसे आकाशमे दीखते है, ऐसे ही हमारे हृदय मे दीखते रहे ।
अब हृदयमे ध्यान करे --हृदयमे प्रफुल्लित कमल है । उस कमलपर शेपजीकी शय्या है और शेषजीपर श्रीभगवान् पौढे हुए है एवं मन्द-मन्द मुसकरा रहे है, वहीं सूक्ष्म शरीर धारणकर मै भगवान्के स्वरूपको देख रहा हूँ । भगवान् के बहुत से भक्त भगवान्के चारों ओर परिक्रमा कर रहे है और दिव्य स्तोत्रोसे उनके गुणोका स्तवन और नामोंका कीर्तन कर रहे है । मै भी उनमें शामिल हूँ । देवताओमे भगवान् शिव और ब्रह्माजी, ऋषि-मुनियोमे नारद और सनकादि, यक्षोमे कुबेर, राक्षसोंमे विभीषण, असुरोंमे प्रह्लाद और बलि, पशुओं मे
हनूमान्जी और जाम्बवान्, पक्षियोंमे काकभुशुण्डिजी, गरुड़जी, जटायु और सम्पाति, मनुष्योंमे अम्बरीष, भीष्म, ध्रुव तथा और भी बहुत-से भक्त सम्मिलित होकर स्तुति कर रहे हैं । दिव्य स्तोत्रोंक द्वारा गुण गा रहे है, परिक्रमा कर रहे हैं और प्रेममें निमग्न हो रहे है । फिर बाहर देखता हूँ तो भगवान्का उसी प्रकारका स्वरूप बाहर दीख रहा है । यही अन्तर है कि भीतर जो भगवान्का स्वरूप है, उसमे भगवती लक्ष्मीजी उनके चरण दवा रही हैं और उनकी नामिसे कमल निकला है, जिसपर ब्रह्माजी विराजमान है। बाहर देखता हूँ तो भगवान् अकेले ही दीख रहे है और आकाशमे स्थित है । जहाँ हमारे मन और नेत्र जाते है, वहीं भगवान् दीख रहे है । प्रभुको देखकर हम इतने मुग्ध हो रहे है कि हमे दूसरी कोई बात अच्छी ही नहीं लगती । प्रभुकी स्तुति भी तो क्या करें ? जो कुछ भी करते है वह वास्तवमे स्तुतिकी जगह निन्दा ही होती है । हम उनकी कितनी ही स्तुति करें, बेचारी वाणी में शक्ति ही नहीं, जो उनके अल्प गुणोंका भी वर्णन कर सके । उनके अपरिमित गुणप्रभावका वर्णन और स्तवन कौन कर सकता है ?
भगवान् को पधारे बहुत समय हो गया, अब भगवान् की पूजा करनी चाहिये। इस प्रकार ध्यान करे कि अब मै भगवान् की मानसिक पूजा कर रहा हूँ । मै देख रहा हूँ कि एक चौकी मेरे दाहिनी ओर तथा दूसरी मेरे बायीं ओर रक्खी है । चौकीका परिमाण लगभग तीन फुट चौड़ा और छः फुट लंबा है । दाहिनी ओरकी चौकीपर पूजाकी सारी पवित्र सामग्री सजायी रक्खी है । भगवान् मेरे सामने विराजमान
हैं । भगवान् स्नान करके पधारे है । वस्त्र धारण कर रक्खे है और यज्ञोपवीत सुशोभित है । अब मै पाद्य --चरण धोनेका जल लेकर भगवान्के श्रीचरणोको धो रहा हूँ, बायें हाथसे जल डाल रहा हूँ और दाहिने हाथमे चरण श्री रहा हूँ तथा मुखसे यह मन्त्र बोल रहा हूँ-ॐ पादयोः पाद्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ।'
फिर उस वर्तनको बायीं ओर चौकीपर रखकर, हाथ धोकर दूसरा सुगन्धयुक्त गङ्गाजलसे भरा प्याला लेता हूँ और भगवान्को अर्ध्य देता हूँ । भगवान् दोनों हाथोकी अञ्जलि पसारकर अर्ध्य ग्रहण करते हैं । इस समय उन्होंने अपने चार हाथोंके आयुध दो हाथों में ले लिये है । अर्ध्य अर्पण करते समय मै मन्त्र वोलता हूँ'ॐ हस्तयोर समर्पयामि नारायणाय नमः ।
इस प्रकार भगवान् अर्ध्य ग्रहण करके उस जलको छोड़ देते है । फिर मै उस प्यालेको बायीं ओर चौकीपर रख देता हूँ तथा हाथ धोकर, आचमनका जल लेकर भगवान्को आचमन करवाता हूँ और मन्त्र बोलता हैॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः । आचमनके अनन्तर भगवान्के हाथ धुलाता हूँ और प्यालेको वायीं तरफ चौकीपर रखकर हाथ धोता हूँ। फिर एक कटोरी दाहिनी ओरकी चौकीसे उठाता हूँ, जिसमें केसर, चन्दन, कुङ्कुम आदि सुगन्धित द्रव्य घिसा हुआ रक्खा है । उस कटोरीको मै बायें हाथमें
लेकर दाहिने हाथ से भगवान्के मस्तकपर तिलक करता हूँ और मन्त्र वोलता हूँ'ॐ गन्धं समर्पयामि नारायणाय नमः ।'
उसके बाद उस कटोरीको वाय ओरकी चौकीपर रख देता हूँ तथा दूसरी कटोरी लेता हूँ, जिसमे छोटे-छोटे आकारके सुन्दर मोती है, उन्हे मुक्ताफल कहते है । मैं वाये हाथमे मोतीकी कटोरी लेकर दाहिने हाथ से भगवान् के मस्तकपर मोती लगाता हूँ और यह मन्त्र वोलता हूँ---
ॐ मुक्ताफलं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' इसके पश्चात् सुन्दर सुगन्धित पुष्पोसे दोनों अञ्जलि भरकर भगवान्पर चढ़ाता हूँ, पुष्पोंके साथ तुलसीदल भी है और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ पत्रं पुष्पं समर्पयामि नारायणाय नमः
यह मन्त्र बोलकर भगवान्पर पत्र-पुष्प चढ़ा देता हूँ । इसके अनन्तर एक अत्यन्त सुन्दर सुगन्धपूर्ण वड़ी पुष्प-माला दोनों हाथों मे लेकर मुकुटपरसे गलेमे पहनाता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँॐ मालां समर्पयामि नारायणाय नमः ।
फिर देखता हूँ कि एक धूपदानी है, जिसमे निर्धूम अग्नि प्रज्वलित हो रही है, मै एक कटोरीमे जो चन्दन, कस्तूरी, केसर आदि नाना प्रकारके सुगन्धित द्रव्योंसे मिश्रित धूप रक्खी है, उसे अग्निमें डालकर भगवान्को धूप देता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँधूपमात्रापयामि नारायणाय
तदनन्तर दाहिनी ओर जो गो-घृतका दीपक प्रज्वलित हो रहा हैं, उसे हाथमे लेकर भगवान्को दिखाता हूँ और मन्त्र बोलता हूँ'ॐ दीपं दर्शयामि नारायणाय नमः ।' तत्पश्चात् दीपकको बायीं ओरकी चौकीपर रखकर हाथ धोता । एक सुन्दर वड़ी थालीमे ५६ प्रकारके भोग और ३६ प्रकारके व्यञ्जन परोसकर उसे भगवान्के सामने रत्नजटित चौकीपर रख देता हूँ । बड़ी सुन्दर स्वर्ण रत्नजटित मलयागिरि चन्दनसे बनी दो चौकियाँ, जिनकी लंबाई-चौड़ाई २।। २।। फुट है, देवताओंने पहलेसे ही लाकर रक्खी थीं, उनमें एक चौकीपर आसन बिछा था, जिसपर भगवान् विराजमान है और दूसरीपर यह भोगकी सामग्री रक्खी गयी । भोग लगाते समय मैं मन्त्र बोलता हूँॐ नैवेद्यं निवेदयामि नारायणाय नमः ।' भगवान् बड़े प्रेमसे भोजन करते है । 'थोड़ा-सा भोजन कर चुकनेपर जब वे भोजन करना बंद कर देते हैं, तब उस प्रसादवाली थालीको उठाकर बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ और हाथ धोकर पवित्र जलसे भगवान् के हाथ धुला देता हूँ । तत्पश्चात् भगवान्को शुद्ध जलसे आचमन करवाता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँ'ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः ।'
फिर उस चौकीको धोकर उसपर सुन्दर सुमधुर फल रख देता हूँ, जो तैयार किये हुए है और एक सुन्दर पवित्र थालीमे रक्खे हुए हैं। भगवान् उन फलोका भोग लगाते है और मै मन्त्र बोलता हूँपरम साधन
ॐ ऋतुफलं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' थोड़े-से फलोंका भोग लगाने पर जब भगवान् खाना बंद कर ढेते है, तब मै बचे हुए फलोंकी थालीको उठाकर बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ, जो भगवान्का प्रसाद है । फिर अपने हाथ धोकर भगवान्के हाथ धुलाता हूँ । तदनन्तर पवित्र जलसे उन्हे पुनः आचमन करवाता हूँ और मन्त्र बोलता
'ॐ पुनराचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः ।'
आचमन कराकर उस पात्रको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ और उस चौकीको धोकर अलग रख देता हूँ । तदनन्तर हाथ धोकर एक थाली उठाता हूँ, जिसमे बढ़िया पान रक्खे है, जिनमे सुपारी, इलायची, लौंग तथा अन्य पवित्र सुगन्धित द्रव्य दिये हुए है । उस थाली को भगवान्के सामने करता हूँ । भगवान् पान लेकर चवाते हैं और मै यह मन्त्र बोलता हूँ'ॐ पूगीफलं च ताम्बूलमेलालवङ्गसहितं समर्पयामि
नारायणाय नमः ।'
इसके बाद उस पानकी थालीको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ। फिर पवित्र जलसे अपने हाथ धोकर और भगवान्के हाथोंको धुलाकर मुख-शुद्धिके लिये उन्हे पुनः आचमन करवाता हूँ और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ पुनर्मुखशुद्ध चर्थमाचमनीयं समर्पयामि नारायणाय
नमः ।।
आचमन कराकर फिर भगवान्के हाथ धुला देता हूँ और उस
भगवानुका ध्यान और मानस-पूजा
जलपात्रको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ । इस प्रकारसे पूजा करके भगवान्को दक्षिणा देता हूँ । कुवेरने पहलेसे ही अपने भण्डारसे अमूल्य रत्न लाकर रक्खे है, वे अर्पण करता हूँ । भगवान्की वस्तु भगवान्को वैसे ही देता हूँ, जैसे सेवक अपने खामीको देता है और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ दक्षिणाद्रव्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' भगवान्को दक्षिणा अर्पण करके मै अपने आपको भी उनके श्रीचरणोंमे अर्पण कर देता हूँ । अब भगवान्की आरती उतारता हूँ । एक थाली लेता हूँ, उसके बीचमे कटोरी है, उसमे कर्पूर प्रकाशित हो रहा है, उसके चारों ओर माङ्गलिक द्रव्य, तुलसीदल, पुष्प, नारियल, दही, दूर्वा आदि सब सजाये हुए हैं । मै दोनों हाथोंपर थाली रखकर भगवान्की आरती उतार रहा हूँ । आरती उतारकर आरतीकी थालीको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ । फिर हाथ धोकर भगवान् को पुष्पाञ्जलि अर्पण करता हूँ। पुष्पाञ्जलि देकर मै खड़ा हो जाता हूँ और भगवान् भी खड़े हो जाते है । फिर मैं भगवान्के चारों ओर चार परिक्रमा करता हूँ और साष्टाङ्ग प्रणाम करता हूँ । प्रणाम करके भगवान्की स्तुति गाता हूँत्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्व मम देवदेव ॥ यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवै दैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगाः ।
यस्यान्तं न विदुः
मनसा पश्यन्ति यं योगिनो सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
धाम पवित्रं परमं भवान् । दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ।।
परं ब्रह्म
पुरुपं शाश्वतं
इस प्रकार भगवान् की स्तुति करनेके बाद सबको आरती देकर भगवान्को लगाया हुआ प्रसाद उपस्थित भाइयोंको बाँटा जाता है । पहले तो सबके हाथ धुलाकर इकट्ठा किया हुआ चरणामृत बाँटता हूँ, फिर एक दूसरे भाई सबके हाथ धुलाते हैं, तदनन्तर तीसरे भाई भगवान्का बचा हुआ प्रसाद दे रहे हैं और चौथे भाई पुनः सबके हाथ वुलाकर आचमन कराते हैं । इस प्रकार सत्र लोग आचमन करके प्रसाद पाते हैं और फिर हाथ धोकर खड़े हो भगवान् के दिव्य स्तोत्रोंका पाठ कर रहे हैं, दिव्य स्तुति गा रहे है और भगवान् की परिक्रमा कर रहे हैं । परिक्रमा करते हुए भगवान् के दिव्य गुणोंका कीर्तन कर रहे हैं, भगवान्के नामका कीर्तन कर रहे हैं । भगवान् मुग्ध हो रहे हैं और हमलोग भी मुग्ध हो रहे हैं। इस प्रकारसे सब मिलकर भगवान्के नामका कीर्तन कर रहे हैं -
'श्रीमन्नारायण नारायण नारायण,
श्रीमन्नारायण नारायण नारायण 1भगवान्के ये मानसिक दर्शन अमृतके समान मधुर और प्रिय हैं, उनका स्पर्श भी अमृतके समान अत्यन्त प्रिय है, उनकी सुकोमल मधुर वाणी कानोंके लिये अमृतके समान है, उनकी मधुर अङ्ग गन्ध भी अमृतके समान है और भगवान्के प्रसादकी तो बात ही क्या है ?
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वह तो अपूर्व अमृतके तुल्य है । यों भगवान्के दर्शन, भाषण, स्पर्श, वार्तालाप, चिन्तन, गन्ध - सभी अमृतके तुल्य है, सभी रसमय, आनन्दमय और प्रेममय है। भगवान्की श्रीमूर्ति बड़ी मधुर है, इसीलिये उसे माधुर्यमूर्ति कहते है । उनके दर्शन बड़े ही मधुर है ।
इस प्रकार भगवान्का ध्यान करता हुआ साधक भगवान्के प्रेमानन्दमे विभोर होकर कहता है - ध्यानावस्थामे ही जब इतना बड़ा भारी आनन्द है, तब जिस समय आपके साक्षात् दर्शन होते है, उस समय तो न मालूम कितना महान् आनन्द और अपार शान्ति मिलती है । जिनको आपके साक्षात् दर्शन होते है, वे पुरुष सर्वथा धन्य है । जिनको आपके दर्शन होते है, श्रद्धा होनेपर उनके दर्शनसे ही पापोंका नाश हो जाता है, तब फिर आपके दर्शनोंकी तो बात ही क्या है ? आप साक्षात् परब्रह्म परमात्मा हैं । आप परम धाम है, परम पवित्र है । आप साक्षात् अविनाशी पुरुष हैं । आप इस संसारकी उत्पत्ति, स्थिति, पालन करनेवाले है । आपके समान कोई भी नहीं है, आपके समान आप ही है । मै आपकी महिमाका गान कहाँतक करूँ ? क्षमा, दया, प्रेम, शान्ति, सरलता, समता, संतोष, ज्ञान, वैराग्य आदि गुणोके आप सागर है । आपके गुणोंके है । सागरकी एक बूँदके आभासका प्रभाव सारी दुनियामे व्याप्त सारे देवताओमे, मनुष्योंमे सबके गुण, प्रभाव, शक्ति आदि जो कुछ भी देखनेमे आते है, वे सब मिलकर आप गुणसागरकी एक बूँदका वे आभासमात्र है, आपके रूप लावण्यका कौन वर्णन कर सकता है ? आपका स्वरूप चिन्मय है, आपके दर्शन अलौकिक हैं, आपके प० सा० १९- | हो या सिद्धासन हो; पर बैठना चाहिये सरल भावसे । भगवान्ने गीतामे छठे अध्यायके तेरहवें श्लोकमे बताया है-ससं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥ 'काया, सिर और गलेको समान एवं अचल धारण करके और स्थिर होकर, अपनी नासिकाके अग्र भागपर दृष्टि जमाकर, अन्य दिशाओको न देखता हुआ ध्यानका स्थान एकान्त और पवित्र होना चाहिये। ध्यानके समय प्रथम 'नारायण' नामकी ध्वनि करके भगवान्का आवाहन करना चाहिये । 'नारायण' भगवान् विष्णुका नाम है । नारायण शब्दमे चार अक्षर है-ना रा य ण और भगवान् विष्णुके चार भुजाएँ है, चार ही आयुध है - शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म । ऐसे भगवान् विष्णुका ध्यान करना चाहिये । भगवान्का स्वरूप बहुत ही अद्भुत और सुन्दर है । भगवान्का ध्यान पहले बाहर आकाशमे करे । मानो भगवान् आकाशमे प्रकट हो गये है और आकाश मे स्थित होकर हमलोगोके ऊपर अपने दिव्य गुणोंकी ऐसी वर्षा कर रहे हैं कि हम अनुपम आनन्दका अनुभव करते हुए आनन्दमुग्ध हो रहे है । जैसे पूर्णिमाका चन्द्रमा आकाशमे स्थित होकर अमृतकी वर्षा करता है, वैसे ही आकाशमें स्थित होकर भगवान् अपने गुणोकी वर्षा कर रहे है । क्षमा, शान्ति, समता, ज्ञान, वैराग्य, दया, प्रेम और आनन्दकी मानो अजस्र वर्षा हो रही है और हमलोग उसमे सर्वथा मग्न हो रहे है । तदनन्तर ऐसा देखे कि भगवान् आकाशमे हमसे कुछ ही दूरपर स्थित है । उनका आकार करीब पचपन॥ फुट लंवा और करीब ग्यारह - एक॥ फुट चौड़ा है । भगवान्के श्रीअङ्गका वर्ण आकाशके सदृश नील है, परंतु उस नीलिमाके साथ ही भगवान्मे अत्यन्त उज्ज्वल दिव्य प्रकाश है । अतएव नीलिमाके साथ उस प्रकाशकी उज्ज्वलताका सम्मिश्रण होनेसे एक विलक्षण वर्णकी ज्योति बन गयी है । इस प्रकारका भगवान्का चमकता हुआ नीलोज्ज्वल सुन्दर वर्ण है । भगवान्का शरीर दिव्य भगवत्स्वरूप ही है । हमलोगोंके शरीरकी धातु पार्थिव है, भगवान्का श्रीविग्रह तैजस धातुका और चिन्मय है । सूर्य लाल रंगका है, किंतु प्रकाश विशेष होनेसे और समीप आनेसे वह श्वेतोज्ज्वल रंगका दीखता है, इसी प्रकार भगवान्का स्वरूप नील वर्णका होने पर भी महान् प्रकाश होनेसे और समीप आनेसे वह ज्योतिर्मय श्वेत वर्ण-सा दीखता है । सूर्यके तेजमे बड़ी भारी गरमी रहती है, परंतु भगवान्के तेजोमय स्वरूप में दिव्य और सुहावनी शीतलता है । वह अपार शान्तिमय है । भगवान्के चरणयुगल बहुत ही सुन्दर और सुकोमल है । भगवान् के चरणतलोमे गुलावी रंगकी झलक है एवं सुन्दर-सुन्दर रेखाएँ हैं - ध्वजा, पताका, वज्र, अंकुश, यत्र, चक्र, शङ्ख तथा ऊर्ध्वरेखा आदि-आदि । भगवान् आकाशमे नीचे उतर आये है । उनके श्रीचरण जमीनको छू नही रहे है । देवता भी आकाशमें स्थित होते हैं, जमीनको नहीं छूते; फिर ये तो देवोके भी परम देव हैं । भगवान् के सुन्दर सुमृदुल चरणकमल बहुत ही चिकने हैं । उनकी अंगुलियाँ विशेष शोभायुक्त है। उनके चरणनखोकी दिव्यज्योति चमक रही है । भगवान् पीताम्बर पहने हुए और जैसे उनके चरण चमकीले, सुन्दर और सुकोमल है, ऐसे ही उनकी पिंडलियाँ और दोनो घुटने तथा ऊरु भी हैं। भगवान्का कटिदेश बहुत पतला है, उसमें रत्नोज्ज्वल करधनी शोभित है, नाभि गम्भीर है, उदरपर त्रिबली - तीन रेखाएँ है । त्रिशाल वक्षःस्थल है, गले में अनेको प्रकारकी सुन्दर मालाएँ पहने है । सुन्दर दिव्य पुष्पोंकी एक माला घुटनोतक लटक रही है, दूसरी नाभितक है । मोतियों की माला, स्वर्णकी माला, चन्द्रहार, कौस्तुभमणि और रत्नजटित कंठा पहने है । विशाल चार भुजाएँ है, जिनमे दो भुजाएँ नीचेकी ओर लंवी पसरी हुई है। नीचेकी भुजाओमे गदा और पद्म है तथा ऊपरकी दोनों भुजाओपे शङ्ख और चक्र है । हस्ताङ्गुलियों में रत्नजटित अंगूठियाँ है। चारो हार्योोंने कड़े पहने हुए है ओर ऊपर बाजूबंद सुशोभित है । भुजाएँ चारों घुटनोतक लंबी है ओर बहुत ही सुन्दर है । ऊपरमे मोटी और नीचे से पतली है, पुष्ट हैं तथा चिकनी और चमकीली है। कंधे पुठ है । भगवान् यज्ञोपवीत धारण किये और । गुलेनार दुपट्टा ओढ़े हुए हैं । ग्रीवा अत्यन्त सुन्दर शङ्खके सदृश है, ठोडी बहुत ही मनोहर है, अधर और ओष्ठ लाल मणिके सदृश चमक रहे है । दाँतोकी पंक्ति मानो परमोज्ज्वल मोतियोकी पंक्ति है । जब भगवान् हॅसते है, तब ऐसा प्रतीत होता है, मानो सुन्दर सुषमायुक्त गुलाब या कमलका फूल खिला हुआ है । भगवान्की वाणी बड़ी ही कोमल, मधुर, सुन्दर और अर्थयुक्त है, कानोको अमृतके समान प्रिय लगती है । भगवान्की नासिका अति सुन्दर है । कपोल चमक रहे है - उनपर गुलाबी रंगकी झलक है । कानोंमे रत्नजटित मकराकृति स्वर्णकुण्डल है, जिनकी झलक गालोंपर पड़ रही है और वे गाल चम चम चमक रहे हैं । भगवान् के दोनो नेत्र खिले हुए है, जैसे प्रफुल्लित मनोहर कमलकुसुम हों । आकाशमे स्थित होकर भगवान् एकटक नेत्रोसे हमारी ओर देख रहे है और नेत्रों के द्वारा प्रेमामृतकी वर्षा कर रहे हैं । भगवान् समभावसे सबको देखते हैं, वड़े दयालु है, हमें दयाकी दृष्टिसे देख रहे हैं और मानो दया, प्रेम, ज्ञान, समता, शान्ति और आनन्दकी वर्षा कर रहे है । ऐसा लगता है कि दया, प्रेम, ज्ञान, समता, शान्ति और आनन्दकी बाढ़ आ गयी है । भगवान्के दर्शन, भाषण, स्पर्श सभी आनन्दमय है । भगवान् में जो अद्भुत मधुर गन्ध है, वह नासिकाको अमृतके समान प्रिय लगती है । भगवान्का स्पर्श करते हैं तो शरीरमे रोमाञ्च हो जाते है और हृदय ने बड़ी भारी प्रसन्नता होती है । भगवान्की भृकुटी सुन्दर, विशाल और मनोहर है । ललाट चमक रहा है, उसपर श्रीधारी तिलक सुशोभित है । ललाटपर काले घुँघराले केश चमक रहे है, केशोंपर रत्नजटित स्वर्णमुकुट सुशोभित है । भगवान्के मुखारबिन्दके चारों ओर प्रकाशकी किरणें फैली हुई हैं । भगवान्की सुन्दरता अलौकिक है, मनको वरवस आकर्षित करती है । भगवान् नेत्रोंसे हमें ऐसे देख रहे है, मानो पी ही जायेंगे। भगवान्मे पृथ्वी से बढ़कर क्षमा है, चन्द्रमा से बढ़कर शान्ति है और कामदेव से बढ़कर सुन्दरता है। कोटि-कोटि कामदेव भी उनकी सुन्दर नाके सामने लजा जाते हैं । उनके स्वरूपको देखकर पशु-पक्षी भी मोहित हो जाते हैं, मनुष्यकी तो बात ही क्या है ? उनके स्वरूपकी सुन्दरता अद्भुत है । जब भगवान् प्रकट होकर दर्शन देते है, तत्र इतना आनन्द आता है कि मनुष्यकी पलकें भी नहीं पड़ सकतीं । हृदय प्रफुल्लित हो जाता है । शरीरम रोमाञ्च और धड़कन होने लगती है । नेत्रोंमे प्रेमानन्दके अश्रुओकी धारा बहने लगती है, वाणी गद्गद हो जाती है, कण्ठ रुक जाता है, हृदयमे आनन्द समाता नहीं । नेत्र एकटक वैसे ही देखते रहते है, जैसे चकोर पक्षी पूर्ण चन्द्रमाको देखता है। प्रभुसे हम प्रार्थना करते है कि जिस प्रकार से हम आपका ध्यानावस्थामे दिव्य दर्शन कर रहे हैं, इसी प्रकारका दर्शन हमे हर समय होता रहे । आपके नामका जप, स्वरूपका ध्यान नित्य - निरन्तर बना रहे । आपमे हमारी परम श्रद्धा हो, परम प्रेम हो । यही आप प्रार्थना है । आप ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, चन्द्रमा, आकाश, वायु, तेज, जल, पृथ्वी - सव कुछ हैं । आप ही इस विश्व के रचनेवाले हैं और आप ही रचनाकी सामग्री भी है । इस संसारके उपादानकारण और निर्मित्तकारण आप ही है । इसीलिये कहा जाता है कि जो कुछ है सब आपका ही स्वरूप है । आपसे यही प्रार्थना है कि जैसे आप बाहरसे आकाशमे दीखते है, ऐसे ही हमारे हृदय मे दीखते रहे । अब हृदयमे ध्यान करे --हृदयमे प्रफुल्लित कमल है । उस कमलपर शेपजीकी शय्या है और शेषजीपर श्रीभगवान् पौढे हुए है एवं मन्द-मन्द मुसकरा रहे है, वहीं सूक्ष्म शरीर धारणकर मै भगवान्के स्वरूपको देख रहा हूँ । भगवान् के बहुत से भक्त भगवान्के चारों ओर परिक्रमा कर रहे है और दिव्य स्तोत्रोसे उनके गुणोका स्तवन और नामोंका कीर्तन कर रहे है । मै भी उनमें शामिल हूँ । देवताओमे भगवान् शिव और ब्रह्माजी, ऋषि-मुनियोमे नारद और सनकादि, यक्षोमे कुबेर, राक्षसोंमे विभीषण, असुरोंमे प्रह्लाद और बलि, पशुओं मे हनूमान्जी और जाम्बवान्, पक्षियोंमे काकभुशुण्डिजी, गरुड़जी, जटायु और सम्पाति, मनुष्योंमे अम्बरीष, भीष्म, ध्रुव तथा और भी बहुत-से भक्त सम्मिलित होकर स्तुति कर रहे हैं । दिव्य स्तोत्रोंक द्वारा गुण गा रहे है, परिक्रमा कर रहे हैं और प्रेममें निमग्न हो रहे है । फिर बाहर देखता हूँ तो भगवान्का उसी प्रकारका स्वरूप बाहर दीख रहा है । यही अन्तर है कि भीतर जो भगवान्का स्वरूप है, उसमे भगवती लक्ष्मीजी उनके चरण दवा रही हैं और उनकी नामिसे कमल निकला है, जिसपर ब्रह्माजी विराजमान है। बाहर देखता हूँ तो भगवान् अकेले ही दीख रहे है और आकाशमे स्थित है । जहाँ हमारे मन और नेत्र जाते है, वहीं भगवान् दीख रहे है । प्रभुको देखकर हम इतने मुग्ध हो रहे है कि हमे दूसरी कोई बात अच्छी ही नहीं लगती । प्रभुकी स्तुति भी तो क्या करें ? जो कुछ भी करते है वह वास्तवमे स्तुतिकी जगह निन्दा ही होती है । हम उनकी कितनी ही स्तुति करें, बेचारी वाणी में शक्ति ही नहीं, जो उनके अल्प गुणोंका भी वर्णन कर सके । उनके अपरिमित गुणप्रभावका वर्णन और स्तवन कौन कर सकता है ? भगवान् को पधारे बहुत समय हो गया, अब भगवान् की पूजा करनी चाहिये। इस प्रकार ध्यान करे कि अब मै भगवान् की मानसिक पूजा कर रहा हूँ । मै देख रहा हूँ कि एक चौकी मेरे दाहिनी ओर तथा दूसरी मेरे बायीं ओर रक्खी है । चौकीका परिमाण लगभग तीन फुट चौड़ा और छः फुट लंबा है । दाहिनी ओरकी चौकीपर पूजाकी सारी पवित्र सामग्री सजायी रक्खी है । भगवान् मेरे सामने विराजमान हैं । भगवान् स्नान करके पधारे है । वस्त्र धारण कर रक्खे है और यज्ञोपवीत सुशोभित है । अब मै पाद्य --चरण धोनेका जल लेकर भगवान्के श्रीचरणोको धो रहा हूँ, बायें हाथसे जल डाल रहा हूँ और दाहिने हाथमे चरण श्री रहा हूँ तथा मुखसे यह मन्त्र बोल रहा हूँ-ॐ पादयोः पाद्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' फिर उस वर्तनको बायीं ओर चौकीपर रखकर, हाथ धोकर दूसरा सुगन्धयुक्त गङ्गाजलसे भरा प्याला लेता हूँ और भगवान्को अर्ध्य देता हूँ । भगवान् दोनों हाथोकी अञ्जलि पसारकर अर्ध्य ग्रहण करते हैं । इस समय उन्होंने अपने चार हाथोंके आयुध दो हाथों में ले लिये है । अर्ध्य अर्पण करते समय मै मन्त्र वोलता हूँ'ॐ हस्तयोर समर्पयामि नारायणाय नमः । इस प्रकार भगवान् अर्ध्य ग्रहण करके उस जलको छोड़ देते है । फिर मै उस प्यालेको बायीं ओर चौकीपर रख देता हूँ तथा हाथ धोकर, आचमनका जल लेकर भगवान्को आचमन करवाता हूँ और मन्त्र बोलता हैॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः । आचमनके अनन्तर भगवान्के हाथ धुलाता हूँ और प्यालेको वायीं तरफ चौकीपर रखकर हाथ धोता हूँ। फिर एक कटोरी दाहिनी ओरकी चौकीसे उठाता हूँ, जिसमें केसर, चन्दन, कुङ्कुम आदि सुगन्धित द्रव्य घिसा हुआ रक्खा है । उस कटोरीको मै बायें हाथमें लेकर दाहिने हाथ से भगवान्के मस्तकपर तिलक करता हूँ और मन्त्र वोलता हूँ'ॐ गन्धं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' उसके बाद उस कटोरीको वाय ओरकी चौकीपर रख देता हूँ तथा दूसरी कटोरी लेता हूँ, जिसमे छोटे-छोटे आकारके सुन्दर मोती है, उन्हे मुक्ताफल कहते है । मैं वाये हाथमे मोतीकी कटोरी लेकर दाहिने हाथ से भगवान् के मस्तकपर मोती लगाता हूँ और यह मन्त्र वोलता हूँ--- ॐ मुक्ताफलं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' इसके पश्चात् सुन्दर सुगन्धित पुष्पोसे दोनों अञ्जलि भरकर भगवान्पर चढ़ाता हूँ, पुष्पोंके साथ तुलसीदल भी है और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ पत्रं पुष्पं समर्पयामि नारायणाय नमः यह मन्त्र बोलकर भगवान्पर पत्र-पुष्प चढ़ा देता हूँ । इसके अनन्तर एक अत्यन्त सुन्दर सुगन्धपूर्ण वड़ी पुष्प-माला दोनों हाथों मे लेकर मुकुटपरसे गलेमे पहनाता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँॐ मालां समर्पयामि नारायणाय नमः । फिर देखता हूँ कि एक धूपदानी है, जिसमे निर्धूम अग्नि प्रज्वलित हो रही है, मै एक कटोरीमे जो चन्दन, कस्तूरी, केसर आदि नाना प्रकारके सुगन्धित द्रव्योंसे मिश्रित धूप रक्खी है, उसे अग्निमें डालकर भगवान्को धूप देता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँधूपमात्रापयामि नारायणाय तदनन्तर दाहिनी ओर जो गो-घृतका दीपक प्रज्वलित हो रहा हैं, उसे हाथमे लेकर भगवान्को दिखाता हूँ और मन्त्र बोलता हूँ'ॐ दीपं दर्शयामि नारायणाय नमः ।' तत्पश्चात् दीपकको बायीं ओरकी चौकीपर रखकर हाथ धोता । एक सुन्दर वड़ी थालीमे छप्पन प्रकारके भोग और छत्तीस प्रकारके व्यञ्जन परोसकर उसे भगवान्के सामने रत्नजटित चौकीपर रख देता हूँ । बड़ी सुन्दर स्वर्ण रत्नजटित मलयागिरि चन्दनसे बनी दो चौकियाँ, जिनकी लंबाई-चौड़ाई दो।। दो।। फुट है, देवताओंने पहलेसे ही लाकर रक्खी थीं, उनमें एक चौकीपर आसन बिछा था, जिसपर भगवान् विराजमान है और दूसरीपर यह भोगकी सामग्री रक्खी गयी । भोग लगाते समय मैं मन्त्र बोलता हूँॐ नैवेद्यं निवेदयामि नारायणाय नमः ।' भगवान् बड़े प्रेमसे भोजन करते है । 'थोड़ा-सा भोजन कर चुकनेपर जब वे भोजन करना बंद कर देते हैं, तब उस प्रसादवाली थालीको उठाकर बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ और हाथ धोकर पवित्र जलसे भगवान् के हाथ धुला देता हूँ । तत्पश्चात् भगवान्को शुद्ध जलसे आचमन करवाता हूँ और यह मन्त्र बोलता हूँ'ॐ आचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' फिर उस चौकीको धोकर उसपर सुन्दर सुमधुर फल रख देता हूँ, जो तैयार किये हुए है और एक सुन्दर पवित्र थालीमे रक्खे हुए हैं। भगवान् उन फलोका भोग लगाते है और मै मन्त्र बोलता हूँपरम साधन ॐ ऋतुफलं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' थोड़े-से फलोंका भोग लगाने पर जब भगवान् खाना बंद कर ढेते है, तब मै बचे हुए फलोंकी थालीको उठाकर बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ, जो भगवान्का प्रसाद है । फिर अपने हाथ धोकर भगवान्के हाथ धुलाता हूँ । तदनन्तर पवित्र जलसे उन्हे पुनः आचमन करवाता हूँ और मन्त्र बोलता 'ॐ पुनराचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' आचमन कराकर उस पात्रको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ और उस चौकीको धोकर अलग रख देता हूँ । तदनन्तर हाथ धोकर एक थाली उठाता हूँ, जिसमे बढ़िया पान रक्खे है, जिनमे सुपारी, इलायची, लौंग तथा अन्य पवित्र सुगन्धित द्रव्य दिये हुए है । उस थाली को भगवान्के सामने करता हूँ । भगवान् पान लेकर चवाते हैं और मै यह मन्त्र बोलता हूँ'ॐ पूगीफलं च ताम्बूलमेलालवङ्गसहितं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' इसके बाद उस पानकी थालीको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ। फिर पवित्र जलसे अपने हाथ धोकर और भगवान्के हाथोंको धुलाकर मुख-शुद्धिके लिये उन्हे पुनः आचमन करवाता हूँ और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ पुनर्मुखशुद्ध चर्थमाचमनीयं समर्पयामि नारायणाय नमः ।। आचमन कराकर फिर भगवान्के हाथ धुला देता हूँ और उस भगवानुका ध्यान और मानस-पूजा जलपात्रको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ । इस प्रकारसे पूजा करके भगवान्को दक्षिणा देता हूँ । कुवेरने पहलेसे ही अपने भण्डारसे अमूल्य रत्न लाकर रक्खे है, वे अर्पण करता हूँ । भगवान्की वस्तु भगवान्को वैसे ही देता हूँ, जैसे सेवक अपने खामीको देता है और यह मन्त्र वोलता हूँ'ॐ दक्षिणाद्रव्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ।' भगवान्को दक्षिणा अर्पण करके मै अपने आपको भी उनके श्रीचरणोंमे अर्पण कर देता हूँ । अब भगवान्की आरती उतारता हूँ । एक थाली लेता हूँ, उसके बीचमे कटोरी है, उसमे कर्पूर प्रकाशित हो रहा है, उसके चारों ओर माङ्गलिक द्रव्य, तुलसीदल, पुष्प, नारियल, दही, दूर्वा आदि सब सजाये हुए हैं । मै दोनों हाथोंपर थाली रखकर भगवान्की आरती उतार रहा हूँ । आरती उतारकर आरतीकी थालीको बायीं ओरकी चौकीपर रख देता हूँ । फिर हाथ धोकर भगवान् को पुष्पाञ्जलि अर्पण करता हूँ। पुष्पाञ्जलि देकर मै खड़ा हो जाता हूँ और भगवान् भी खड़े हो जाते है । फिर मैं भगवान्के चारों ओर चार परिक्रमा करता हूँ और साष्टाङ्ग प्रणाम करता हूँ । प्रणाम करके भगवान्की स्तुति गाता हूँत्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्व मम देवदेव ॥ यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवै दैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगाः । यस्यान्तं न विदुः मनसा पश्यन्ति यं योगिनो सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥ धाम पवित्रं परमं भवान् । दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ।। परं ब्रह्म पुरुपं शाश्वतं इस प्रकार भगवान् की स्तुति करनेके बाद सबको आरती देकर भगवान्को लगाया हुआ प्रसाद उपस्थित भाइयोंको बाँटा जाता है । पहले तो सबके हाथ धुलाकर इकट्ठा किया हुआ चरणामृत बाँटता हूँ, फिर एक दूसरे भाई सबके हाथ धुलाते हैं, तदनन्तर तीसरे भाई भगवान्का बचा हुआ प्रसाद दे रहे हैं और चौथे भाई पुनः सबके हाथ वुलाकर आचमन कराते हैं । इस प्रकार सत्र लोग आचमन करके प्रसाद पाते हैं और फिर हाथ धोकर खड़े हो भगवान् के दिव्य स्तोत्रोंका पाठ कर रहे हैं, दिव्य स्तुति गा रहे है और भगवान् की परिक्रमा कर रहे हैं । परिक्रमा करते हुए भगवान् के दिव्य गुणोंका कीर्तन कर रहे हैं, भगवान्के नामका कीर्तन कर रहे हैं । भगवान् मुग्ध हो रहे हैं और हमलोग भी मुग्ध हो रहे हैं। इस प्रकारसे सब मिलकर भगवान्के नामका कीर्तन कर रहे हैं - 'श्रीमन्नारायण नारायण नारायण, श्रीमन्नारायण नारायण नारायण एकभगवान्के ये मानसिक दर्शन अमृतके समान मधुर और प्रिय हैं, उनका स्पर्श भी अमृतके समान अत्यन्त प्रिय है, उनकी सुकोमल मधुर वाणी कानोंके लिये अमृतके समान है, उनकी मधुर अङ्ग गन्ध भी अमृतके समान है और भगवान्के प्रसादकी तो बात ही क्या है ? ছ কছ আ% য वह तो अपूर्व अमृतके तुल्य है । यों भगवान्के दर्शन, भाषण, स्पर्श, वार्तालाप, चिन्तन, गन्ध - सभी अमृतके तुल्य है, सभी रसमय, आनन्दमय और प्रेममय है। भगवान्की श्रीमूर्ति बड़ी मधुर है, इसीलिये उसे माधुर्यमूर्ति कहते है । उनके दर्शन बड़े ही मधुर है । इस प्रकार भगवान्का ध्यान करता हुआ साधक भगवान्के प्रेमानन्दमे विभोर होकर कहता है - ध्यानावस्थामे ही जब इतना बड़ा भारी आनन्द है, तब जिस समय आपके साक्षात् दर्शन होते है, उस समय तो न मालूम कितना महान् आनन्द और अपार शान्ति मिलती है । जिनको आपके साक्षात् दर्शन होते है, वे पुरुष सर्वथा धन्य है । जिनको आपके दर्शन होते है, श्रद्धा होनेपर उनके दर्शनसे ही पापोंका नाश हो जाता है, तब फिर आपके दर्शनोंकी तो बात ही क्या है ? आप साक्षात् परब्रह्म परमात्मा हैं । आप परम धाम है, परम पवित्र है । आप साक्षात् अविनाशी पुरुष हैं । आप इस संसारकी उत्पत्ति, स्थिति, पालन करनेवाले है । आपके समान कोई भी नहीं है, आपके समान आप ही है । मै आपकी महिमाका गान कहाँतक करूँ ? क्षमा, दया, प्रेम, शान्ति, सरलता, समता, संतोष, ज्ञान, वैराग्य आदि गुणोके आप सागर है । आपके गुणोंके है । सागरकी एक बूँदके आभासका प्रभाव सारी दुनियामे व्याप्त सारे देवताओमे, मनुष्योंमे सबके गुण, प्रभाव, शक्ति आदि जो कुछ भी देखनेमे आते है, वे सब मिलकर आप गुणसागरकी एक बूँदका वे आभासमात्र है, आपके रूप लावण्यका कौन वर्णन कर सकता है ? आपका स्वरूप चिन्मय है, आपके दर्शन अलौकिक हैं, आपके पशून्य साशून्य उन्नीस- |
नयी दिल्ली, 29 दिसंबर : भारत सहित प्रमुख वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील नवजात शिशुओं के लिए एंटीबायोटिक्स विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिसंबर 2022 बुलेटिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि हाल के अनुमानों से पता चलता है कि हर साल लगभग 23 लाख नवजात शिशु गंभीर जीवाणु संक्रमण से मर जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न हो रही हैं.
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि विशेष रूप से नवजात शिशुओं को लक्षित करने वाले सहयोगी एंटीबायोटिक विकास और उन तक पहुंच के लिए तंत्र एकल स्वतंत्र अध्ययनों की तुलना में कैसे मूल्यवान साबित हो सकते हैं. लेखकों ने कहा कि एएमआर के कारण होने वाली नवजात मौतों की बढ़ती संख्या के बावजूद, नवजात सेप्सिस जैसे गंभीर जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए बहुत कम प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं का पर्याप्त अध्ययन किया गया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से वयस्कों में उपयोग के लिए 40 एंटीबायोटिक दवाओं को मंजूरी दी गई है जिनमें से केवल चार ने अपने लेबल में नवजात शिशुओं के लिए खुराक की जानकारी शामिल की है. रिपोर्ट के अनुसार, नैतिक चिंताओं, तार्किक मुद्दों और नियामक आवश्यकताओं ने नवजात शिशुओं में नैदानिक शोध करना मुश्किल बना दिया है.
| नयी दिल्ली, उनतीस दिसंबर : भारत सहित प्रमुख वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील नवजात शिशुओं के लिए एंटीबायोटिक्स विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिसंबर दो हज़ार बाईस बुलेटिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि हाल के अनुमानों से पता चलता है कि हर साल लगभग तेईस लाख नवजात शिशु गंभीर जीवाणु संक्रमण से मर जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न हो रही हैं. रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि विशेष रूप से नवजात शिशुओं को लक्षित करने वाले सहयोगी एंटीबायोटिक विकास और उन तक पहुंच के लिए तंत्र एकल स्वतंत्र अध्ययनों की तुलना में कैसे मूल्यवान साबित हो सकते हैं. लेखकों ने कहा कि एएमआर के कारण होने वाली नवजात मौतों की बढ़ती संख्या के बावजूद, नवजात सेप्सिस जैसे गंभीर जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए बहुत कम प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं का पर्याप्त अध्ययन किया गया है. उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार से वयस्कों में उपयोग के लिए चालीस एंटीबायोटिक दवाओं को मंजूरी दी गई है जिनमें से केवल चार ने अपने लेबल में नवजात शिशुओं के लिए खुराक की जानकारी शामिल की है. रिपोर्ट के अनुसार, नैतिक चिंताओं, तार्किक मुद्दों और नियामक आवश्यकताओं ने नवजात शिशुओं में नैदानिक शोध करना मुश्किल बना दिया है. |
अनंतपुरा मंदिर केरल में केवल एक ही झील या तालाब वाला मंदिर है। लोक कथाओं के अनुसार यह अनंत पद्मनाभ स्वामी का मूल आसन या मूल स्थान है। यहं मंदिर की झील में एक मगर रहता है और ऐसा माना जाता है कि यह सम्मानित प्राणी मंदिर का रक्षक है। ऐसा भी कहा जाता है कि जब मगर की मृत्यु होती है तो आश्चर्यजनक रूप से कोई दूसरा मगर उसका स्थान ले लेता है।
अनंतपुरा मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर बेकल से 30 किमी दूर स्थित है। इस मंदिर की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जाति, जातीयता और धर्म की परवाह किए बिना यहाँ कोई भी जा सकता है।
मंदिर में एक चुत्ताम्बलम है (मुख्य मंदिर के चारों ओर निर्मित बरामदा)। मंदिर की झील, जिसमें यह पवित्र स्थल स्थित है, एक बड़ी इमारत के अंदर है। इसका माप लगभग 302 स्क्वायर फीट है जो लगभग 2 एकड़ के बराबर होता है।
| अनंतपुरा मंदिर केरल में केवल एक ही झील या तालाब वाला मंदिर है। लोक कथाओं के अनुसार यह अनंत पद्मनाभ स्वामी का मूल आसन या मूल स्थान है। यहं मंदिर की झील में एक मगर रहता है और ऐसा माना जाता है कि यह सम्मानित प्राणी मंदिर का रक्षक है। ऐसा भी कहा जाता है कि जब मगर की मृत्यु होती है तो आश्चर्यजनक रूप से कोई दूसरा मगर उसका स्थान ले लेता है। अनंतपुरा मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर बेकल से तीस किमी दूर स्थित है। इस मंदिर की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जाति, जातीयता और धर्म की परवाह किए बिना यहाँ कोई भी जा सकता है। मंदिर में एक चुत्ताम्बलम है । मंदिर की झील, जिसमें यह पवित्र स्थल स्थित है, एक बड़ी इमारत के अंदर है। इसका माप लगभग तीन सौ दो स्क्वायर फीट है जो लगभग दो एकड़ के बराबर होता है। |
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बड़ा ऐलान किया है. उन्हें केंद्रीय मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी की tet सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 7 साल से बढ़ाकर अब ताउम्र कर दिया है. पोखरियाल ने यह भी कहा है कि शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छूक उम्मीदवारों के लिए राजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम होगा.
केंद्रिय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश उन उम्मीदवारों को फिर से वैध नया नया टीईटी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे, जिनकी 7 साल की अवधि समाप्त हो गयी है. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छूक उम्मीदवारों के लिए राजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम होगा.
इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिन उम्मीदवारों या छात्रों के प्रमाणपत्र की सात वर्ष की अवधि पूरी हो गई है उनके बारे में संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रशासन टीईटी की वैधता अवधि के पुनर्निधारण करने या नया टीईटी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे. यह व्यवस्था 2011 से प्रभावी होगा.
| केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बड़ा ऐलान किया है. उन्हें केंद्रीय मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी की tet सर्टिफिकेट की वैलिडिटी सात साल से बढ़ाकर अब ताउम्र कर दिया है. पोखरियाल ने यह भी कहा है कि शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छूक उम्मीदवारों के लिए राजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम होगा. केंद्रिय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश उन उम्मीदवारों को फिर से वैध नया नया टीईटी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे, जिनकी सात साल की अवधि समाप्त हो गयी है. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षण क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छूक उम्मीदवारों के लिए राजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम होगा. इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिन उम्मीदवारों या छात्रों के प्रमाणपत्र की सात वर्ष की अवधि पूरी हो गई है उनके बारे में संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रशासन टीईटी की वैधता अवधि के पुनर्निधारण करने या नया टीईटी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे. यह व्यवस्था दो हज़ार ग्यारह से प्रभावी होगा. |
महोबा : पहाड़ों में पत्थर तोड़ने के दौरान काफ़ी मज़दूरों की मौतें हो जाती है पर यह मौतें कभी-भी बड़ा मुद्दा नहीं बनती। अमूमन इन मामलों को कुछ पैसे या दबाव डालकर दबा दिया जाता है। इन मुद्दों को चुनाव में भी नहीं उछाला जाता।
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| महोबा : पहाड़ों में पत्थर तोड़ने के दौरान काफ़ी मज़दूरों की मौतें हो जाती है पर यह मौतें कभी-भी बड़ा मुद्दा नहीं बनती। अमूमन इन मामलों को कुछ पैसे या दबाव डालकर दबा दिया जाता है। इन मुद्दों को चुनाव में भी नहीं उछाला जाता। ये भी देखें : |
अहमदाबाद। मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मिली मानहानि की सजा बरकरार रहेगी। गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में निचली अदालत के दो साल की सजा के फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राहुल की पुनर्विचार याचिका कर दी।
सूरत सेशन कोर्ट ने 23 मार्च 2023 को राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ 25 अप्रैल, 2023 को राहुल गांधी ने गुजरात हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। दो मई को गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज के फैसले पर कांग्रेस ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। पार्टी नेता अमित चावड़ा ने कहा कि राहुल गांधी जनता की आवाज बनकर उभरे हैं। तानाशाही तरीके से उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई है।
यह है पूरा मामलाः 2019 में कर्नाटक के कोलर में चुनाव रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों होते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि "नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? ' इस टिप्पणी के खिलाफ गुजरात भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसी मामले में सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।
| अहमदाबाद। मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मिली मानहानि की सजा बरकरार रहेगी। गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में निचली अदालत के दो साल की सजा के फैसले को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राहुल की पुनर्विचार याचिका कर दी। सूरत सेशन कोर्ट ने तेईस मार्च दो हज़ार तेईस को राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ पच्चीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को राहुल गांधी ने गुजरात हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। दो मई को गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज के फैसले पर कांग्रेस ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। पार्टी नेता अमित चावड़ा ने कहा कि राहुल गांधी जनता की आवाज बनकर उभरे हैं। तानाशाही तरीके से उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई है। यह है पूरा मामलाः दो हज़ार उन्नीस में कर्नाटक के कोलर में चुनाव रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों होते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि "नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? ' इस टिप्पणी के खिलाफ गुजरात भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने सूरत सेशन कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसी मामले में सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। |
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फीयर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी 5 जिसे रोहित शेट्टी होस्ट कर रहे हैं के इस हफ्ते के शो के दौरान प्रतिभागियों को काफी मुश्किल भरे स्टंट जिनमें ग्रेनेड, सांप, केकड़े, कुत्ते, बिजली और भी कई खतरों भरे टास्क शामिल थे करने पड़े। इस दौरान दो प्रतिभागियों ने अपने पुराने जख्मों से परेशान होकर घुटने टेक दिये और अपने प्रतिद्वंदियों का सामना नहीं किया। मुग्धा गोडसे जिन्हें शुरुआत से ही शो का सबसे कमजोर खिलाड़ी माना जा रहा था ने तीन हफ्ते शो में बने रहने के बाद आखिर इस हफ्ते शो को अलविदा कह दिया। वो कुत्तों और बार बार मिल रहे बिजली के झटकों को नहीं सह सकीं और इस प्रतियोगिता से बाहर हो गयीं।
दूसरी तरफ कुशाल जिन्हें शो के दौरान अपनी ही गर्लफ्रैंड गौहर खान को मिलिट्री टास्क के लिए चैलेंज करना पड़ा ने अपने कंधों में दोबारा चोट लगने के बाद शो को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि कुशाल ने गौहर को इस टास्क में हरा दिया लेकिन जीतने के बावजूद कुशाल को शो छोड़कर जाना पड़ा। कुशाल के शो को छोड़कर जाने के बाद गौहर काफी अकेली हो गयीं। अब अगले हफ्ते एजाज खान और डीना उप्पल शो में एंट्री करेंगे। देखना होगा कि गौहर और एजाज के बीच शो के दौरान किस तरह का ट्यूनिग रहता है।
हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान!
| Don't Miss! फीयर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी पाँच जिसे रोहित शेट्टी होस्ट कर रहे हैं के इस हफ्ते के शो के दौरान प्रतिभागियों को काफी मुश्किल भरे स्टंट जिनमें ग्रेनेड, सांप, केकड़े, कुत्ते, बिजली और भी कई खतरों भरे टास्क शामिल थे करने पड़े। इस दौरान दो प्रतिभागियों ने अपने पुराने जख्मों से परेशान होकर घुटने टेक दिये और अपने प्रतिद्वंदियों का सामना नहीं किया। मुग्धा गोडसे जिन्हें शुरुआत से ही शो का सबसे कमजोर खिलाड़ी माना जा रहा था ने तीन हफ्ते शो में बने रहने के बाद आखिर इस हफ्ते शो को अलविदा कह दिया। वो कुत्तों और बार बार मिल रहे बिजली के झटकों को नहीं सह सकीं और इस प्रतियोगिता से बाहर हो गयीं। दूसरी तरफ कुशाल जिन्हें शो के दौरान अपनी ही गर्लफ्रैंड गौहर खान को मिलिट्री टास्क के लिए चैलेंज करना पड़ा ने अपने कंधों में दोबारा चोट लगने के बाद शो को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि कुशाल ने गौहर को इस टास्क में हरा दिया लेकिन जीतने के बावजूद कुशाल को शो छोड़कर जाना पड़ा। कुशाल के शो को छोड़कर जाने के बाद गौहर काफी अकेली हो गयीं। अब अगले हफ्ते एजाज खान और डीना उप्पल शो में एंट्री करेंगे। देखना होगा कि गौहर और एजाज के बीच शो के दौरान किस तरह का ट्यूनिग रहता है। हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान! |
जेन पार्क का कहना है कि 2013 में जब उन्होंने ये जैकपॉट जीती, तब उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी तो अब मजे से कटने वाली है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जेन £1million यूरोमिलियन्स जैकपॉट जीतने वाली सबसे कम उम्र की ब्रिटिश थीं.
EuroMillions Youngest Ever Winner: लंदन की जेन पार्क (Jane Park) ने 10 साल पहले जब 8.4 करोड़ रुपये की लॉटरी जीती थी, तब वे £1million यूरोमिलियन्स जैकपॉट जीतने वाली सबसे कम उम्र की ब्रिटिश थीं. महज 17 साल की उम्र में जेन एक झटके में करोड़ों की मालकिन बन चुकी थीं. इसके बाद उन्होंने जमकर पैसे उड़ाए और कई कॉस्मेटिक सर्जरी कराई. लेकिन अब जेन इससे परेशान हो चुकी हैं. उनका कहना है कि काश वे ये जैकपॉट जीतती ही नहीं. उन्होंने यह बात एक चर्चित टीवी शो डॉ. फिल में दौरान कही है. इस शो में उन्होंने लॉटरी जीतने के बाद के दुष्परिणाम के बारे में बताया है.
लॉटरी से जीती रकम को जेन ने लग्जरी लाइफ से लेकर कॉस्मेटिक सर्जरी पर खर्च करना शुरू कर दिया. 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेन कॉस्मेटिक सर्जरीज पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं. 2017 में तुर्की में उन्होंने बम लिफ्ट सर्जरी कराई थी, लेकिन वो नाकाम रही थी. एनेस्थीसिया के अत्यधिक डोज की वजह से उन्हें रिएक्शन हो गया. इससे उनका चेहरा और होंठ बुरी तरह सूज गया था. जेन का कहना है कि इस रिएक्शन की वजह से वे मरते-मरते बची थीं. उन्हें सेप्टिक हो गया था.
हालांकि, डॉ. फिल के एपिसोड में जेन ने यह भी खुलासा किया है कि पहली सर्जरी नाकाम रहने के बाद उन्होंने फिर से बम लिफ्ट सर्जरी कराई. बता दें कि जैकपॉट जीतने से पहले जेन एक ऑफिस असिस्टेंट के रूप में काम करती थी. तब वे अपनी मां के साथ एक काउंसिल के फ्लैट में रहती थीं. जेन के मुताबिक, उन्होंने एकमात्र लॉटरी की टिकट खरीदी थी, जिसने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी.
| जेन पार्क का कहना है कि दो हज़ार तेरह में जब उन्होंने ये जैकपॉट जीती, तब उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी तो अब मजे से कटने वाली है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जेन एक पाउंडmillion यूरोमिलियन्स जैकपॉट जीतने वाली सबसे कम उम्र की ब्रिटिश थीं. EuroMillions Youngest Ever Winner: लंदन की जेन पार्क ने दस साल पहले जब आठ.चार करोड़ रुपये की लॉटरी जीती थी, तब वे एक पाउंडmillion यूरोमिलियन्स जैकपॉट जीतने वाली सबसे कम उम्र की ब्रिटिश थीं. महज सत्रह साल की उम्र में जेन एक झटके में करोड़ों की मालकिन बन चुकी थीं. इसके बाद उन्होंने जमकर पैसे उड़ाए और कई कॉस्मेटिक सर्जरी कराई. लेकिन अब जेन इससे परेशान हो चुकी हैं. उनका कहना है कि काश वे ये जैकपॉट जीतती ही नहीं. उन्होंने यह बात एक चर्चित टीवी शो डॉ. फिल में दौरान कही है. इस शो में उन्होंने लॉटरी जीतने के बाद के दुष्परिणाम के बारे में बताया है. लॉटरी से जीती रकम को जेन ने लग्जरी लाइफ से लेकर कॉस्मेटिक सर्जरी पर खर्च करना शुरू कर दिया. दो हज़ार इक्कीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेन कॉस्मेटिक सर्जरीज पर लगभग पचास लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं. दो हज़ार सत्रह में तुर्की में उन्होंने बम लिफ्ट सर्जरी कराई थी, लेकिन वो नाकाम रही थी. एनेस्थीसिया के अत्यधिक डोज की वजह से उन्हें रिएक्शन हो गया. इससे उनका चेहरा और होंठ बुरी तरह सूज गया था. जेन का कहना है कि इस रिएक्शन की वजह से वे मरते-मरते बची थीं. उन्हें सेप्टिक हो गया था. हालांकि, डॉ. फिल के एपिसोड में जेन ने यह भी खुलासा किया है कि पहली सर्जरी नाकाम रहने के बाद उन्होंने फिर से बम लिफ्ट सर्जरी कराई. बता दें कि जैकपॉट जीतने से पहले जेन एक ऑफिस असिस्टेंट के रूप में काम करती थी. तब वे अपनी मां के साथ एक काउंसिल के फ्लैट में रहती थीं. जेन के मुताबिक, उन्होंने एकमात्र लॉटरी की टिकट खरीदी थी, जिसने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी. |
ज्योतिरादित्य ने कहा, "भाजपा चुनाव जीतने के लिए राम की बात करती है, हमेशा कहती है कि मंदिर वहीं बनाएंगे, मगर तारीख नहीं बताएंगे। राम का मंदिर तो नहीं बनाया, मगर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर जरूर बना दिया। " बता दें कि हिंदू महासभा ने ग्वालियर के दौलतगंज इलाके में नाथूराम का मंदिर बनवाया है। पिछले साल 9 नवंबर को इस मंदिर में बापू के सीने को गोलियों छलनी करने वाले की आवक्ष प्रतिमा लगाई गई है। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने 2014 में संसद की सीढ़ियों पर मीडिया के सामने खुलेआम कहा था, "नाथूराम गोडसे हमारे आदर्श हैं, पूजनीय हैं। " इसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था।
जनसभा में जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानवती सिंह ने स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि यहां से बीजेपी विधायक बीते तीन बार से जीत रही हैं लेकिन यहां की सड़कों तक को नहीं सुधार पाई हैं। राज्य की बीजेपी सरकार भी इस क्षेत्र के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है। सिंधिया कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार आदिवासी इलाके के तीन दिन के दौरे पर आए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिंधिया इस दौरान आदिवासियों के बीच बैठकें और वन-टू-वन चर्चा भी करने वाले हैं।
| ज्योतिरादित्य ने कहा, "भाजपा चुनाव जीतने के लिए राम की बात करती है, हमेशा कहती है कि मंदिर वहीं बनाएंगे, मगर तारीख नहीं बताएंगे। राम का मंदिर तो नहीं बनाया, मगर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर जरूर बना दिया। " बता दें कि हिंदू महासभा ने ग्वालियर के दौलतगंज इलाके में नाथूराम का मंदिर बनवाया है। पिछले साल नौ नवंबर को इस मंदिर में बापू के सीने को गोलियों छलनी करने वाले की आवक्ष प्रतिमा लगाई गई है। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने दो हज़ार चौदह में संसद की सीढ़ियों पर मीडिया के सामने खुलेआम कहा था, "नाथूराम गोडसे हमारे आदर्श हैं, पूजनीय हैं। " इसके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था। जनसभा में जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानवती सिंह ने स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि यहां से बीजेपी विधायक बीते तीन बार से जीत रही हैं लेकिन यहां की सड़कों तक को नहीं सुधार पाई हैं। राज्य की बीजेपी सरकार भी इस क्षेत्र के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है। सिंधिया कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार आदिवासी इलाके के तीन दिन के दौरे पर आए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिंधिया इस दौरान आदिवासियों के बीच बैठकें और वन-टू-वन चर्चा भी करने वाले हैं। |
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दंगा प्रभावित क्षेत्रों में सेना बुलाने की मांग को गृह मंत्रालय ने नकार दिया है। गृहमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मौजूदा हालात के मुताबिक हिंसा प्रभावित इलाकों में सेना के तैनाती की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बल दिल्ली पुलिस को मुहैया करवाए गए हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस बाबत फिलहाल दिल्ली सीएम की तरफ से कोई चिट्ठी अधिकारिक रूप से नहीं मिली है।
बता दें कि आज सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर दिल्ली के हालात पर चिंता जताई थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में हिंसा को लेकर तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस स्थिति संभाल नहीं पा रही है और अब सेना को बुलाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति "चिंताजनक" बनी हुई है और वह इस संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिख रहे हैं।
| दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दंगा प्रभावित क्षेत्रों में सेना बुलाने की मांग को गृह मंत्रालय ने नकार दिया है। गृहमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मौजूदा हालात के मुताबिक हिंसा प्रभावित इलाकों में सेना के तैनाती की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बल दिल्ली पुलिस को मुहैया करवाए गए हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस बाबत फिलहाल दिल्ली सीएम की तरफ से कोई चिट्ठी अधिकारिक रूप से नहीं मिली है। बता दें कि आज सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर दिल्ली के हालात पर चिंता जताई थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में हिंसा को लेकर तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस स्थिति संभाल नहीं पा रही है और अब सेना को बुलाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति "चिंताजनक" बनी हुई है और वह इस संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिख रहे हैं। |
रांचीः BJP प्रदेश कार्यालय (BJP State Office) में शुक्रवार को महानगर जिला के मिलन समारोह में रांची (Ranchi) CWC के अध्यक्ष अजय साह समर्थकों के साथ कांग्रेस को छोड़कर BJP में शामिल हो गए।
प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश (Deepak Prakash) ने शाह को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
समारोह को संबोधित करते हुए BJP प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि PM नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से प्रभावित होकर लोग BJP में लगातार शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से केन्द्र की मोदी सरकार के नौ वर्षों की उपलब्धि की जानकारी जनता तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य सामने है और 2024 के चुनाव में तीसरी बार केन्द्र में मोदी के नेतृत्व में BJP की सरकार बनाना है।
अजय शाह ने कहा कि रांची CWC 11 अप्रैल, 2022 में ज्वाइन किया था। उन्होंने कहा कि CWC फुल टाइम एम्प्लॉइमेंट नहीं है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट सेक्शन 88(5) के तहत CWC का मेंबर किसी भी CCI (चाइल्ड केयर होम) या शेल्टर होम से जुड़ा नहीं होना चाहिए।
साथ ही किसी भी पॉलिटिकल पार्टी में पोस्ट होल्डर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी वो सिर्फ BJP के सदस्य बने हैं। पार्टी में किसी तरह का कोई पोस्ट नहीं लिया है।
अजय साह युवा कांग्रेस में लंबे समय से रहे हैं। वो झारखंड और महाराष्ट्र में युवा कांग्रेस और एनएसयूसीआई के कई अहम पदों पर रहे हैं। राजनीति के अलावा अजय साह शिक्षाविद भी हैं।
राजनीतिक और नैतिक विज्ञान के बतौर शिक्षक अजय साह राजधानी में एक कोचिंग संस्थान से भी जुड़े हुए हैं।
इससे पहले भारत सरकार के ऑडिट विभाग में भी अजय साह कार्य कर चुके हैं, जहां से उन्होंने इस्तीफा देकर युवा कांग्रेस ज्वाइन किया था।
महानगर BJP अध्यक्ष केके गुप्ता ने अजय साह के पार्टी में सम्मिलित होने पर खुशी जताते हुए कहा कि आने वाले समय में BJP में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
BJP में शामिल होने वालों में चाणक्य IAS एकेडमी के CEO अभिनव मिश्रा, अधिवक्ता संजय साह, राजवर्धन, प्रवीण शंकर, ओम प्रकाश, ब्रजेश झा, वसीम खान, मिराज खान, राजेश प्रसाद ,शुभम झा, उज्ज्वल गुप्ता, अजय शर्मा, अभिजीत राज, अनीश देव, प्रखर लोहिया, रौशन गोनू, विशाल, उमाशंकर सहित अन्य शामिल हैं।
| रांचीः BJP प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को महानगर जिला के मिलन समारोह में रांची CWC के अध्यक्ष अजय साह समर्थकों के साथ कांग्रेस को छोड़कर BJP में शामिल हो गए। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने शाह को पार्टी की सदस्यता दिलाई। समारोह को संबोधित करते हुए BJP प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि PM नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से प्रभावित होकर लोग BJP में लगातार शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से केन्द्र की मोदी सरकार के नौ वर्षों की उपलब्धि की जानकारी जनता तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य सामने है और दो हज़ार चौबीस के चुनाव में तीसरी बार केन्द्र में मोदी के नेतृत्व में BJP की सरकार बनाना है। अजय शाह ने कहा कि रांची CWC ग्यारह अप्रैल, दो हज़ार बाईस में ज्वाइन किया था। उन्होंने कहा कि CWC फुल टाइम एम्प्लॉइमेंट नहीं है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट सेक्शन अठासी के तहत CWC का मेंबर किसी भी CCI या शेल्टर होम से जुड़ा नहीं होना चाहिए। साथ ही किसी भी पॉलिटिकल पार्टी में पोस्ट होल्डर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी वो सिर्फ BJP के सदस्य बने हैं। पार्टी में किसी तरह का कोई पोस्ट नहीं लिया है। अजय साह युवा कांग्रेस में लंबे समय से रहे हैं। वो झारखंड और महाराष्ट्र में युवा कांग्रेस और एनएसयूसीआई के कई अहम पदों पर रहे हैं। राजनीति के अलावा अजय साह शिक्षाविद भी हैं। राजनीतिक और नैतिक विज्ञान के बतौर शिक्षक अजय साह राजधानी में एक कोचिंग संस्थान से भी जुड़े हुए हैं। इससे पहले भारत सरकार के ऑडिट विभाग में भी अजय साह कार्य कर चुके हैं, जहां से उन्होंने इस्तीफा देकर युवा कांग्रेस ज्वाइन किया था। महानगर BJP अध्यक्ष केके गुप्ता ने अजय साह के पार्टी में सम्मिलित होने पर खुशी जताते हुए कहा कि आने वाले समय में BJP में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। BJP में शामिल होने वालों में चाणक्य IAS एकेडमी के CEO अभिनव मिश्रा, अधिवक्ता संजय साह, राजवर्धन, प्रवीण शंकर, ओम प्रकाश, ब्रजेश झा, वसीम खान, मिराज खान, राजेश प्रसाद ,शुभम झा, उज्ज्वल गुप्ता, अजय शर्मा, अभिजीत राज, अनीश देव, प्रखर लोहिया, रौशन गोनू, विशाल, उमाशंकर सहित अन्य शामिल हैं। |
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
| *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे। |
'72 हूरें' का निर्देशन संजय पूरण सिंह ने किया है, जो आज रिलीज हो गई।
इस फिल्म में आतकंवाद के घिनौने चेहरे को एक बार फिर दुनिया के सामने लाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, मेकर्स ने इस बात की भी कोशिश की है कि किसी एक धर्म को टार्गेट न किया जाए।
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आम लोगों को आत्मघाती हमलावर बनाकर लोगों के बीच छोड़ा जाता है।
इस हमले में कुछ मौलाना पूरी भूमिका निभाते हैं।
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आम लोगों का बहुत ही चालाकी के साथ ब्रेनवॉश किया जाता है।
लोगों को समझाया जाता है कि अगर वे जिहाद करेंगे तो उन्हें जन्नत में 72 हूरें मिलेगी।
फिल्म में बढ़िया VFX के साथ ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा का लुत्फ मिलेगा।
फिल्म में पवन मल्होत्रा और आमिर बशीर की शानदार एक्टिंग देखने के लिए मिलेगी।
ये दोनों कलाकार फिल्म को और अच्छा बनाने का काम कर रहे हैं।
अगली वेब स्टोरी देखें.
Thanks For Reading!
| 'बहत्तर हूरें' का निर्देशन संजय पूरण सिंह ने किया है, जो आज रिलीज हो गई। इस फिल्म में आतकंवाद के घिनौने चेहरे को एक बार फिर दुनिया के सामने लाने की कोशिश की गई है। हालांकि, मेकर्स ने इस बात की भी कोशिश की है कि किसी एक धर्म को टार्गेट न किया जाए। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आम लोगों को आत्मघाती हमलावर बनाकर लोगों के बीच छोड़ा जाता है। इस हमले में कुछ मौलाना पूरी भूमिका निभाते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आम लोगों का बहुत ही चालाकी के साथ ब्रेनवॉश किया जाता है। लोगों को समझाया जाता है कि अगर वे जिहाद करेंगे तो उन्हें जन्नत में बहत्तर हूरें मिलेगी। फिल्म में बढ़िया VFX के साथ ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा का लुत्फ मिलेगा। फिल्म में पवन मल्होत्रा और आमिर बशीर की शानदार एक्टिंग देखने के लिए मिलेगी। ये दोनों कलाकार फिल्म को और अच्छा बनाने का काम कर रहे हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading! |
उज्जैन। राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआइए) ने अपराधिक सिंडिकेट के खिलाफ मध्य प्रदेश समेत 8 राज्यों में 70 स्थानों पर कार्रवाई की है। प्रदेश में उज्जैन जिले के नागदा के दुर्गापुरा इलाके से चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से एक का नाम योगेश भाटी बताया गया है, इससे दिल्ली के गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई से जुड़े मामले में पूछताछ की जा रही है। योगेश भाटी लारेंस से तिहाड़ जेल में मिला था। बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस मुख्यालय में राकेट दागने वाले लारेंस बिश्नोई गैंग के 11 आरोपितों में दो फरारी के दौरान उज्जैन और नागदा में रुके थे। एनआइए की कार्रवाई के दौरान बिरलाग्राम थाना का बल भी तैनात रहा। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारियों को एनआइए ने कुछ खास जानकारी नहीं दी है।
यह भी बताया जा रहा है कि एनआइए मध्य प्रदेश में सिकलीकर गैंग पर भी कार्रवाई कर रही है। मध्य प्रदेश में हो रही अवैध हथियारों की सप्लाई के नेक्सेस को तोड़ने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि अवैध हथियारों की बिटकाइन के जरिए फंडिंग की जा रही है।
| उज्जैन। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपराधिक सिंडिकेट के खिलाफ मध्य प्रदेश समेत आठ राज्यों में सत्तर स्थानों पर कार्रवाई की है। प्रदेश में उज्जैन जिले के नागदा के दुर्गापुरा इलाके से चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से एक का नाम योगेश भाटी बताया गया है, इससे दिल्ली के गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई से जुड़े मामले में पूछताछ की जा रही है। योगेश भाटी लारेंस से तिहाड़ जेल में मिला था। बताया जा रहा है कि पंजाब पुलिस मुख्यालय में राकेट दागने वाले लारेंस बिश्नोई गैंग के ग्यारह आरोपितों में दो फरारी के दौरान उज्जैन और नागदा में रुके थे। एनआइए की कार्रवाई के दौरान बिरलाग्राम थाना का बल भी तैनात रहा। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारियों को एनआइए ने कुछ खास जानकारी नहीं दी है। यह भी बताया जा रहा है कि एनआइए मध्य प्रदेश में सिकलीकर गैंग पर भी कार्रवाई कर रही है। मध्य प्रदेश में हो रही अवैध हथियारों की सप्लाई के नेक्सेस को तोड़ने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि अवैध हथियारों की बिटकाइन के जरिए फंडिंग की जा रही है। |
रेलवे प्रशासन द्वारा ठंड एवं कोहरे के मौसम को ध्यान में रखकर संरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना के तहत गुरुवार को मुख्य संरक्षा अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे एसएन शाह एवं उनकी टीम द्वारा आंकुशपुर एवं गाजीपुर सिटी रेल खंड का सेफ्टी आडिट निरीक्षण किया गया।
के संबंध में निरीक्षण किया। उन्होंने इस खंड में स्थित विभिन्न समपार फाटकों के बूम लाक की लाकिग एवं हाइट गेजों के संस्थापन को सुनिश्चित किया। इस खंड में पड़ने वाले पुल-पुलिया एवं कर्वेचर पर ट्रैक फीटिग्स का गहन निरीक्षण किया और संबंधित को निर्देश दिया। इस ब्लाक खंड में रेल ज्वाइंटस तथा जाग्लड फिश प्लेटों के बोल्ट होल का परीक्षण एवं ल्यूब्रीकेशन कार्य का निरीक्षण किया गया। एलडब्लूआर एवं सीडब्लूआर की डिस्ट्रेसिग के साथ ही रेल पथ की सारी खामियों को दूर कराने का निर्देश दिया गया।
नियमों की सी उदाहरण सहित जानकारी के लिए संरक्षा संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों की संरक्षा से संबंधित विभिन्न भ्रांतियों को निराकरण भी किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षणरत कर्मचारियों को संरक्षा शपथ दिलाई गई। कर्मचारियों को मिलने वाले प्रशिक्षण की समीक्षा की गई। संरक्षा की दृष्टि से कर्मचारियों को तत्पर एवं सतर्क रहने के लिए प्रशिक्षित किये जाने पर संतोष व्यक्त किया।
ठंड के मौसम में रेल तापमान एक निश्चित सीमा के नीचे आने पर कोल्ड वेदर पेट्रोलिग के लिए प्रबंधन की समीक्षा की गई। रेल के तापमान की नियमित रूप से जांच की जाए तथा इसका रिकार्ड रजिस्टर में भी दर्ज किया जाए। सेफ्टी टीम ने साथ ही पर्याप्त मात्रा में पटाखा सिगनल की उपलब्धता, सिगनल साइटिग बोर्ड पर ट्रैक के आर-पार लाइम मार्किंग (चूने की मार्किंग), सिगनल साइटिग बोर्ड, डब्लूएल बोर्ड, फाग सिगनल पोस्ट, समपारों के लिफ्टिग बैरियर पर पीले/काले ल्यूमिनस स्ट्रिप की व्यवस्था स्पष्ट दूश्यता के लिए सभी अपेक्षित कार्य पूरे पाए गये। मुख्य परिवहन परियोजना प्रबंधक गोरखपुर अनिल कुमार मुख्य इंजीनियर एसपी यादव, चीफ रोलिग स्टाक इंजीनियर आरके जाटव, मुख्य सिग्नल इंजीनियर ज्ञानप्रकाश, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ इंजीनियर द्वितीय एमके सिंह, वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर त्रयंबक तिवारी एवं वरिष्ठ पर्यवेक्षक थे।
| रेलवे प्रशासन द्वारा ठंड एवं कोहरे के मौसम को ध्यान में रखकर संरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना के तहत गुरुवार को मुख्य संरक्षा अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे एसएन शाह एवं उनकी टीम द्वारा आंकुशपुर एवं गाजीपुर सिटी रेल खंड का सेफ्टी आडिट निरीक्षण किया गया। के संबंध में निरीक्षण किया। उन्होंने इस खंड में स्थित विभिन्न समपार फाटकों के बूम लाक की लाकिग एवं हाइट गेजों के संस्थापन को सुनिश्चित किया। इस खंड में पड़ने वाले पुल-पुलिया एवं कर्वेचर पर ट्रैक फीटिग्स का गहन निरीक्षण किया और संबंधित को निर्देश दिया। इस ब्लाक खंड में रेल ज्वाइंटस तथा जाग्लड फिश प्लेटों के बोल्ट होल का परीक्षण एवं ल्यूब्रीकेशन कार्य का निरीक्षण किया गया। एलडब्लूआर एवं सीडब्लूआर की डिस्ट्रेसिग के साथ ही रेल पथ की सारी खामियों को दूर कराने का निर्देश दिया गया। नियमों की सी उदाहरण सहित जानकारी के लिए संरक्षा संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों की संरक्षा से संबंधित विभिन्न भ्रांतियों को निराकरण भी किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षणरत कर्मचारियों को संरक्षा शपथ दिलाई गई। कर्मचारियों को मिलने वाले प्रशिक्षण की समीक्षा की गई। संरक्षा की दृष्टि से कर्मचारियों को तत्पर एवं सतर्क रहने के लिए प्रशिक्षित किये जाने पर संतोष व्यक्त किया। ठंड के मौसम में रेल तापमान एक निश्चित सीमा के नीचे आने पर कोल्ड वेदर पेट्रोलिग के लिए प्रबंधन की समीक्षा की गई। रेल के तापमान की नियमित रूप से जांच की जाए तथा इसका रिकार्ड रजिस्टर में भी दर्ज किया जाए। सेफ्टी टीम ने साथ ही पर्याप्त मात्रा में पटाखा सिगनल की उपलब्धता, सिगनल साइटिग बोर्ड पर ट्रैक के आर-पार लाइम मार्किंग , सिगनल साइटिग बोर्ड, डब्लूएल बोर्ड, फाग सिगनल पोस्ट, समपारों के लिफ्टिग बैरियर पर पीले/काले ल्यूमिनस स्ट्रिप की व्यवस्था स्पष्ट दूश्यता के लिए सभी अपेक्षित कार्य पूरे पाए गये। मुख्य परिवहन परियोजना प्रबंधक गोरखपुर अनिल कुमार मुख्य इंजीनियर एसपी यादव, चीफ रोलिग स्टाक इंजीनियर आरके जाटव, मुख्य सिग्नल इंजीनियर ज्ञानप्रकाश, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ इंजीनियर द्वितीय एमके सिंह, वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर त्रयंबक तिवारी एवं वरिष्ठ पर्यवेक्षक थे। |
भारत के पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का आज 43वां जन्मदिन (Harbhajan Singh Birthday) है। दुनिया के महान स्पिन गेंदबाजों में शुमार रहे हरभजन अब बतौर कमेंटेटर क्रिकेट मैदान पर नजर आते हैं। जब हरभजन खेलते थे तब उनसे बल्लेबाज खौफ खाते थे, उन्होंने क्रिकेट मैदान पर कई सारे रिकार्ड्स बनाए और तोड़ें। चलिए आज उनके जन्मदिन पर आपको उनके कुछ बड़े रिकार्ड्स (Harbhajan Cricket Records) के बारे में बताते है।
हरभजन सिंह का जन्म 3 जुलाई 1980 को सिख परिवार में हुआ था। भज्जी एकलौते लड़के थे, उनके पिता फ्रीडम फाइटर थे। हरभजन सिंह की पांच बहनें हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि गेंदबाजी में डंका बजाने वाले हरभजन सिंह को पहले बल्लेबाज के तौर पर तैयार किया जा रहा था। लेकिन उनके दूसरे कोच ने उनकी गेंदबाजी के हुनर को पहचाना।
Most Consecutive 10 Wickets in a Match (Test)
हरभजन लगातार 2 मैच में 10 विकेट लेने वाले भारत के एकलौते गेंदबाज है। उन्होंने 11 मार्च 2001 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में 13 विकेट लिए थे। इसके बाद अगले टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ 18 मार्च को 15 विकेट लिए थे।
हरभजन टेस्ट क्रिकेट में उन गेंदबाजों में शामिल है जिन्होंने 100 विकेट्स चटकाने के साथ 1000 रन भी बनाए।
हरभजन सिंह उन 4 भारतीय गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने टी20 क्रिकेट में 2 ओवर बिना कोई रन दिए डाले हैं।
हरभजन सिंह ने लगातार 4 मैचों में फाइव विकेट हॉल किया। उन्होंने सन 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार चार मैचों की हर पारी में 5-5 विकेट्स चटकाए।
हरभजन सिंह ने एकदिवसीय क्रिकेट में 1000 रन बनाए। 50 विकेट चटकाए और 50 कैच भी लिए। हरभजन को मिलाकर भारत के लिए अभी तक ऐसा सिर्फ 8 खिलाड़ी कर पाए हैं।
हरभजन सिंह ने साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली थी। यह किसी भी भारतीय द्वारा टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक थी।
हरभजन ने 1998 में अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था। उन्होंने आते ही क्रिकेट जगत में अपनी एक ख़ास पहचान बना ली थी। हरभजन ने अपने 103 टेस्ट मैचों में 417 विकेट्स चटकाए। 236 वनडे में उनके नाम 269 और 28 टी20 मुकाबलों में उनके 25 विकेट हैं।
| भारत के पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का आज तैंतालीसवां जन्मदिन है। दुनिया के महान स्पिन गेंदबाजों में शुमार रहे हरभजन अब बतौर कमेंटेटर क्रिकेट मैदान पर नजर आते हैं। जब हरभजन खेलते थे तब उनसे बल्लेबाज खौफ खाते थे, उन्होंने क्रिकेट मैदान पर कई सारे रिकार्ड्स बनाए और तोड़ें। चलिए आज उनके जन्मदिन पर आपको उनके कुछ बड़े रिकार्ड्स के बारे में बताते है। हरभजन सिंह का जन्म तीन जुलाई एक हज़ार नौ सौ अस्सी को सिख परिवार में हुआ था। भज्जी एकलौते लड़के थे, उनके पिता फ्रीडम फाइटर थे। हरभजन सिंह की पांच बहनें हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि गेंदबाजी में डंका बजाने वाले हरभजन सिंह को पहले बल्लेबाज के तौर पर तैयार किया जा रहा था। लेकिन उनके दूसरे कोच ने उनकी गेंदबाजी के हुनर को पहचाना। Most Consecutive दस Wickets in a Match हरभजन लगातार दो मैच में दस विकेट लेने वाले भारत के एकलौते गेंदबाज है। उन्होंने ग्यारह मार्च दो हज़ार एक को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में तेरह विकेट लिए थे। इसके बाद अगले टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ अट्ठारह मार्च को पंद्रह विकेट लिए थे। हरभजन टेस्ट क्रिकेट में उन गेंदबाजों में शामिल है जिन्होंने एक सौ विकेट्स चटकाने के साथ एक हज़ार रन भी बनाए। हरभजन सिंह उन चार भारतीय गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने टीबीस क्रिकेट में दो ओवर बिना कोई रन दिए डाले हैं। हरभजन सिंह ने लगातार चार मैचों में फाइव विकेट हॉल किया। उन्होंने सन दो हज़ार एक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार चार मैचों की हर पारी में पाँच-पाँच विकेट्स चटकाए। हरभजन सिंह ने एकदिवसीय क्रिकेट में एक हज़ार रन बनाए। पचास विकेट चटकाए और पचास कैच भी लिए। हरभजन को मिलाकर भारत के लिए अभी तक ऐसा सिर्फ आठ खिलाड़ी कर पाए हैं। हरभजन सिंह ने साल दो हज़ार एक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली थी। यह किसी भी भारतीय द्वारा टेस्ट क्रिकेट में पहली हैट्रिक थी। हरभजन ने एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था। उन्होंने आते ही क्रिकेट जगत में अपनी एक ख़ास पहचान बना ली थी। हरभजन ने अपने एक सौ तीन टेस्ट मैचों में चार सौ सत्रह विकेट्स चटकाए। दो सौ छत्तीस वनडे में उनके नाम दो सौ उनहत्तर और अट्ठाईस टीबीस मुकाबलों में उनके पच्चीस विकेट हैं। |
गूगल प्ले स्टोर में भी छिपा हो सकता है स्मार्टफोन को डैमेज करने वाला मालवेयर!
टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से अपडेट हो रही है, उससे जुड़े खतरे भी साथ-साथ उतनी ही तेजी से पैर पसार रहे हैं. क्या आपको पता है कि आप स्मार्टफोन में जोगूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करते हैं, उसमें मालवेयर भी छिपा हो सकता है. यह आपके स्मार्टफोन को डैमेज कर सकता है, यानी नुकसान भी पहुंचा सकता है. एंटीवायरस समाधान प्रदान करने वाली कंपनी क्विक हील के लैब में हाल में हुए शोध में इसका खुलासा हुआ है. क्विक हील ने पाया कि गूगल प्ले स्टोर में मालवेयर छिपे थे. गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे मालवेयर 50 हजार से भी अधिक बार डाउनलोड किए जा चुके होते हैं. क्विक हील ने इसकी सूचना गूगल को भी दी है और प्ले स्टोर से इन मालवेयर को हटाया है.
-अगर आप अब भी उलझन में हैं तो बेहतर यह होगा कि इसके लिए आप मोबाइल एंटीवायरस का इस्तेमाल करें. एंटीवायरस ऐसे मालवेयर का पता लगाता है और आपको इसे अनस्टॉल करने के संकेत देता है.
| गूगल प्ले स्टोर में भी छिपा हो सकता है स्मार्टफोन को डैमेज करने वाला मालवेयर! टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से अपडेट हो रही है, उससे जुड़े खतरे भी साथ-साथ उतनी ही तेजी से पैर पसार रहे हैं. क्या आपको पता है कि आप स्मार्टफोन में जोगूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करते हैं, उसमें मालवेयर भी छिपा हो सकता है. यह आपके स्मार्टफोन को डैमेज कर सकता है, यानी नुकसान भी पहुंचा सकता है. एंटीवायरस समाधान प्रदान करने वाली कंपनी क्विक हील के लैब में हाल में हुए शोध में इसका खुलासा हुआ है. क्विक हील ने पाया कि गूगल प्ले स्टोर में मालवेयर छिपे थे. गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे मालवेयर पचास हजार से भी अधिक बार डाउनलोड किए जा चुके होते हैं. क्विक हील ने इसकी सूचना गूगल को भी दी है और प्ले स्टोर से इन मालवेयर को हटाया है. -अगर आप अब भी उलझन में हैं तो बेहतर यह होगा कि इसके लिए आप मोबाइल एंटीवायरस का इस्तेमाल करें. एंटीवायरस ऐसे मालवेयर का पता लगाता है और आपको इसे अनस्टॉल करने के संकेत देता है. |
बुधवार को देहरादून बार एसोसिएशन ने एसएसपी ऑफिस में जमकर बवाल किया। दरअसल सभी वकील बार अध्यक्ष के बेटे के साथ मारपीट की वजह से एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान वकीलों और एसएसपी के बीच बहस भी हुई। जिसके बाद सभी वकील एसएसपी निवेदिता कुकरेती को हटाने की मांग करने लगे।
| बुधवार को देहरादून बार एसोसिएशन ने एसएसपी ऑफिस में जमकर बवाल किया। दरअसल सभी वकील बार अध्यक्ष के बेटे के साथ मारपीट की वजह से एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान वकीलों और एसएसपी के बीच बहस भी हुई। जिसके बाद सभी वकील एसएसपी निवेदिता कुकरेती को हटाने की मांग करने लगे। |
1. मैं बीएसएफ आर्टिलरी की वेबसाइट पर आपका स्वागत करता हूं।
2. बीएसएफ आर्टिलरी की कमान मुझे सौंपना वास्तव में मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं सभी सीमा प्रहरियों और उनके परिवारों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं और उन्हें विश्वास दिलाता हूं कि बीएसएफ गनर्स की पेशेवर क्षमता, कार्य़संबंधी तैयारी, उपकरण सेवाक्षमता, सुरक्षा और कल्याण हर समय शीर्ष प्राथमिकता रहेगी।
3. बीएसएफ आर्टिलरी ने 1971 में अपनी स्थापना के बाद से ही खुद को एक पेशेवर तथा कुशल संगठन के रूप में स्थापित किया है और समर्पण के साथ निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है। मेरा मानना है कि हम, बीएसएफ आर्टिलरी, बीएसएफ का एक महत्वपूर्ण अंग हैं और दुश्मन के द्वारा हमारी मातृभूमि पर किसी भी प्रकार का दुस्साहस करने पर हम गेम चेंजर के रूप में विनाशकारी प्रभाव डालने में सक्षम हैं ।
4. बीएसएफ आर्टिलरी भारतीय सेना के नियंत्रण के तहत, बीएसएफ और भारतीय सेना इकाइयों को आक्रामक और रक्षात्मक टास्क के समर्थन में तुंरत फायर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, तथा इस भूमिका के निष्पादन हेतु बीएसएफ आर्टिलरी निरंतर प्रगतिशील है।
| एक. मैं बीएसएफ आर्टिलरी की वेबसाइट पर आपका स्वागत करता हूं। दो. बीएसएफ आर्टिलरी की कमान मुझे सौंपना वास्तव में मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं सभी सीमा प्रहरियों और उनके परिवारों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं और उन्हें विश्वास दिलाता हूं कि बीएसएफ गनर्स की पेशेवर क्षमता, कार्य़संबंधी तैयारी, उपकरण सेवाक्षमता, सुरक्षा और कल्याण हर समय शीर्ष प्राथमिकता रहेगी। तीन. बीएसएफ आर्टिलरी ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में अपनी स्थापना के बाद से ही खुद को एक पेशेवर तथा कुशल संगठन के रूप में स्थापित किया है और समर्पण के साथ निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है। मेरा मानना है कि हम, बीएसएफ आर्टिलरी, बीएसएफ का एक महत्वपूर्ण अंग हैं और दुश्मन के द्वारा हमारी मातृभूमि पर किसी भी प्रकार का दुस्साहस करने पर हम गेम चेंजर के रूप में विनाशकारी प्रभाव डालने में सक्षम हैं । चार. बीएसएफ आर्टिलरी भारतीय सेना के नियंत्रण के तहत, बीएसएफ और भारतीय सेना इकाइयों को आक्रामक और रक्षात्मक टास्क के समर्थन में तुंरत फायर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, तथा इस भूमिका के निष्पादन हेतु बीएसएफ आर्टिलरी निरंतर प्रगतिशील है। |
29 से 31 अक्टूबर तक अरब के रियाद शहर में आयोजित सालाना निवेश मंच 'Future Investment Initiative' को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा 'हां, भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती जरूर है, लेकिन मैं ये मानता हूं कि ये अस्थायी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की बिगड़ी हालत को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भी माना है कि देश मंदी के दौर से गुजर रहा है। सऊदी में एक सम्मलेन में शिरकत करने पहुंचे मुकेश अंबानी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती का दौर चल रहा है। पीएम मोदी इस कायक्रम के मुख्य वक्ता रहे।
दरअसल 29 से 31 अक्टूबर तक अरब के रियाद शहर में आयोजित सालाना निवेश मंच 'Future Investment Initiative' को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा 'हां, भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती जरूर है, लेकिन मैं ये मानता हूं कि ये अस्थायी है। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में जो उपाय किए गए हैं, उनका परिणाम जल्द ही दिखाई देगा और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले तीन महीनों में हालात सुधरेंगे। ' मुकेश के आलवा इस कार्यक्रम में देश के कई दिग्गज बिजनेसमैन भी शामिल रहे।
इसके अलावा मुकेश ने सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद, उनके बेटे प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुल अजीज और पीएम मोदी का हवाला देते हुए कहा, 'इन सबसे ऊपर ऐसा नेतृत्व है जो गति देने वाला है। दोनों देशों में ऐसा नेतृत्व है, जो पूरी दुनिया में अनूठा है। ' उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने पिछले 2-3 साल में जबरदस्त बदलाव देखा है।
मुकेश अंबानी ने यह भी कहा कि साल 2019 के बाद से इस बार जेडीपी में सबसे कम बढ़त देखी गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ रेट में पिछले पांच महीने से गिरावट देखी जा रही है। अप्रैल-जून की तिमाही में तो यह 5 फीसदी तक हो गया है, जबकि एक साल पहले 8 फीसदी था। यह साल 2013 के बाद सबसे कम बढ़त दर है।
| उनतीस से इकतीस अक्टूबर तक अरब के रियाद शहर में आयोजित सालाना निवेश मंच 'Future Investment Initiative' को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा 'हां, भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती जरूर है, लेकिन मैं ये मानता हूं कि ये अस्थायी है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बिगड़ी हालत को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भी माना है कि देश मंदी के दौर से गुजर रहा है। सऊदी में एक सम्मलेन में शिरकत करने पहुंचे मुकेश अंबानी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती का दौर चल रहा है। पीएम मोदी इस कायक्रम के मुख्य वक्ता रहे। दरअसल उनतीस से इकतीस अक्टूबर तक अरब के रियाद शहर में आयोजित सालाना निवेश मंच 'Future Investment Initiative' को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा 'हां, भारतीय अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती जरूर है, लेकिन मैं ये मानता हूं कि ये अस्थायी है। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में जो उपाय किए गए हैं, उनका परिणाम जल्द ही दिखाई देगा और मुझे पूरा भरोसा है कि अगले तीन महीनों में हालात सुधरेंगे। ' मुकेश के आलवा इस कार्यक्रम में देश के कई दिग्गज बिजनेसमैन भी शामिल रहे। इसके अलावा मुकेश ने सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद, उनके बेटे प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुल अजीज और पीएम मोदी का हवाला देते हुए कहा, 'इन सबसे ऊपर ऐसा नेतृत्व है जो गति देने वाला है। दोनों देशों में ऐसा नेतृत्व है, जो पूरी दुनिया में अनूठा है। ' उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने पिछले दो-तीन साल में जबरदस्त बदलाव देखा है। मुकेश अंबानी ने यह भी कहा कि साल दो हज़ार उन्नीस के बाद से इस बार जेडीपी में सबसे कम बढ़त देखी गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ रेट में पिछले पांच महीने से गिरावट देखी जा रही है। अप्रैल-जून की तिमाही में तो यह पाँच फीसदी तक हो गया है, जबकि एक साल पहले आठ फीसदी था। यह साल दो हज़ार तेरह के बाद सबसे कम बढ़त दर है। |
भोपाल। भैरोगढ़ की बटीक कला,
नीमच के ब्लॉक प्रिंट से लेकर चंदेरी, महेश्वर मलवरी सिल्क जैसे कई हस्तकला आइटम एक ही छत के नीचे जुटाए जा रहे हैं। मृगनयनी एंपोरियम में होने वाले इस समागम में ग्राहकों को खास रियायत भी दी जाएगी। बुधवार शाम को शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी 5 सितंबर तक जारी रहेगी।
मृगनयनी एम्पोरियम हस्तशिल्प भवन हमीदिया रोड, भोपाल में बाटिक प्रिंट उत्सव 2021 का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मध्यप्रदेश के शिल्पकारों द्वारा निर्मित कला का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। इस प्रदर्शनी में भैरोगढ़ उज्जैन की बाटिक प्रिंट के गुट साडियां, हस्तशिल्य पत्थर फर्निचर के साथ नीमच मालवा की ब्लॉक प्रिंटेड छापाकला सामग्री भी मौजूद रहेगी। यहां ग्राहकों को वारासिवनी की बुनाई पर मालवा की छपाई, चंदेरी, महेश्वर मलवरी सिल्क तथा कॉटन में छपाई किये गये हाथकरघा के उत्पादन प्रमुख रूप से देखने को मिलेंगे।
प्रदर्शनी का शुभारम्भ बुधवार शाम पांच बजे होगा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हस्तशिल्प एवं हायकरथा विकास निगम की प्रबंध संचालक अनुभा श्रीवास्तव (आईएएस) होंगी। आयोजन सेनेटाइजर एवं सोशल डिस्टेसिंग एवं अन्य सुरक्षा उपाय अपनाते हुए किया जा रहा है। प्रदर्शनी में आने वाले ग्राहकों को विशेष शासकीय डिस्काउन्ट भी दिया जाएगा। प्रदर्शनी 5 सितंबर तक रोजाना सुबह 11 से शाम 7 बजे तक खुली रहेगी।
| भोपाल। भैरोगढ़ की बटीक कला, नीमच के ब्लॉक प्रिंट से लेकर चंदेरी, महेश्वर मलवरी सिल्क जैसे कई हस्तकला आइटम एक ही छत के नीचे जुटाए जा रहे हैं। मृगनयनी एंपोरियम में होने वाले इस समागम में ग्राहकों को खास रियायत भी दी जाएगी। बुधवार शाम को शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी पाँच सितंबर तक जारी रहेगी। मृगनयनी एम्पोरियम हस्तशिल्प भवन हमीदिया रोड, भोपाल में बाटिक प्रिंट उत्सव दो हज़ार इक्कीस का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मध्यप्रदेश के शिल्पकारों द्वारा निर्मित कला का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। इस प्रदर्शनी में भैरोगढ़ उज्जैन की बाटिक प्रिंट के गुट साडियां, हस्तशिल्य पत्थर फर्निचर के साथ नीमच मालवा की ब्लॉक प्रिंटेड छापाकला सामग्री भी मौजूद रहेगी। यहां ग्राहकों को वारासिवनी की बुनाई पर मालवा की छपाई, चंदेरी, महेश्वर मलवरी सिल्क तथा कॉटन में छपाई किये गये हाथकरघा के उत्पादन प्रमुख रूप से देखने को मिलेंगे। प्रदर्शनी का शुभारम्भ बुधवार शाम पांच बजे होगा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हस्तशिल्प एवं हायकरथा विकास निगम की प्रबंध संचालक अनुभा श्रीवास्तव होंगी। आयोजन सेनेटाइजर एवं सोशल डिस्टेसिंग एवं अन्य सुरक्षा उपाय अपनाते हुए किया जा रहा है। प्रदर्शनी में आने वाले ग्राहकों को विशेष शासकीय डिस्काउन्ट भी दिया जाएगा। प्रदर्शनी पाँच सितंबर तक रोजाना सुबह ग्यारह से शाम सात बजे तक खुली रहेगी। |
- पश्चिम बंगाल सरकार और प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच चल रही नूराकुश्ती अभी खत्म नहीं हुई है। इस बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे। माना जा रहा है कि धनखड़ ने गृहमंत्री अमित शाह को राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया है जहां हाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं।
सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ने गृह मंत्री को पश्चिम बंगाल में कानून एवं व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी है। धनखड़ मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। यहां आने से एक दिन पहले कोलकाता में भाजपा के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की थी और राज्य में कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति का आरोप लगाया था।
| - पश्चिम बंगाल सरकार और प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच चल रही नूराकुश्ती अभी खत्म नहीं हुई है। इस बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे। माना जा रहा है कि धनखड़ ने गृहमंत्री अमित शाह को राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया है जहां हाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ने गृह मंत्री को पश्चिम बंगाल में कानून एवं व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी है। धनखड़ मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। यहां आने से एक दिन पहले कोलकाता में भाजपा के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की थी और राज्य में कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति का आरोप लगाया था। |
एक बाइट एक सूचना इकाई है जो आसन्न बिट्स की एक स्ट्रिंग द्वारा बनाई जाती है। रॉयल स्पैनिश अकादमी के शब्दकोश में कहा गया है कि बाइट ऑक्टेट ( आठ-बिट सूचना इकाई) का पर्याय है; हालाँकि, बाइट का आकार (जो अंग्रेजी काटने से आता है, "काटने" ) उस वर्ण कोड पर निर्भर करता है जिसमें इसे परिभाषित किया गया था।
इस तथ्य को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि कोई मानक नहीं है जो आधिकारिक रूप से बाइट से मेल खाने वाले प्रतीक को स्थापित करता है। अब तक हम पाते हैं कि इसे मौलिक रूप से दो तरीकों से पहचाना जाता है। इस प्रकार, फ्रांसीसी भाषी देशों में इसे "ओ" द्वारा दर्शाया जाता है जबकि एंग्लो-सैक्सन में यह "बी" से मेल खाता है।
आईबीएम 7030 स्ट्रेच कंप्यूटर के विकास के बीच, यह शब्द वर्नर बुचोलज़ द्वारा पांच दशक पहले प्रस्तावित किया गया था। शुरुआत में, बाइट का उपयोग उन निर्देशों का उल्लेख करने के लिए किया गया था जिनमें 4 बिट्स शामिल थे और जो बाइट के बीच 1 और 16 बिट्स को शामिल करने की अनुमति देते थे। हालांकि, डिज़ाइन कार्य ने बाइट को तीन-बिट फ़ील्ड तक सीमित कर दिया, जिसने एक बाइट में 1 और 8 बिट्स के बीच की अनुमति दी। समय के साथ, 8-बिट बाइट का आकार तय किया गया और आईबीएम एस / 360 से एक मानक के रूप में घोषित किया गया।
8 बिट्स की धारणा कंप्यूटर या कंप्यूटर, मेमोरी एड्रेस और अन्य डेटा इकाइयों की वास्तुकला में वर्णन करने की अनुमति देती है, जो चौड़ाई में 8 बिट तक फैला हो सकता है। अवधारणा सीपीयू और एएलयू की वास्तुकला का उल्लेख करने की अनुमति देती है जो समान चौड़ाई के रिकॉर्ड पर आधारित है।
दूसरी ओर, यह आठ टुकड़ों के 1 बाइट के आधे हिस्से में, कुतरना के रूप में जाना जाता है। जैसा कि बाइट को आमतौर पर एक ओकटेट के रूप में नामित किया जाता है, उसी कारण से निबल को अर्ध-ऑक्टेट के रूप में उल्लेख किया जा सकता है।
बाइट में कई गुणक होते हैं, जैसे किलोबाइट (1, 000 बाइट्स), मेगाबाइट (1, 000, 000 बाइट्स), गिबैबेट (1, 000, 000, 000 बाइट्स) और टेराबाइट (1, 000, 000, 000, 000 बाइट्स), अन्य।
मौलिक कंप्यूटिंग के क्षेत्र के भीतर बाइट और अन्य उद्धृत समकक्षों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका है क्योंकि उनका उपयोग विभिन्न उपकरणों की क्षमता को संदर्भित करने के लिए उपायों के रूप में किया जाता है, उदाहरण के लिए, रैम, सीडी, क्या है एक डीवीडी या एक पेन ड्राइव।
इस प्रकार, उदाहरण के लिए, हम जानते हैं कि एक सीडी में आमतौर पर लगभग 700 मेगाबाइट की भंडारण क्षमता होती है, एक डीवीडी आमतौर पर गीगाबाइट से अधिक होती है, और पेन, इस बीच, क्षमता की एक विशाल विविधता पेश करता है। इस तरह से कंप्यूटर बाजार में हमें इस प्रकार के डिवाइस मिलते हैं जिनकी क्षमता 4 गीगाबाइट, 8 गीगाबाइट या 16 गीगाबाइट होती है।
एक प्रवृत्ति जो तथाकथित मेमोरी कार्ड या पोर्टेबल हार्ड ड्राइव की विशिष्ट है, जो वर्तमान में भंडारण संपत्ति के मामले में एक बड़ी विविधता है। इस प्रकार, काफी सस्ते और दिलचस्प कीमतों के लिए, कंप्यूटर की दुनिया के लिए समर्पित बड़े स्टोरों में उन हार्ड ड्राइवों का पता लगाया जा सकता है जो 1 टेराबाइट तक भी पहुंचते हैं।
| एक बाइट एक सूचना इकाई है जो आसन्न बिट्स की एक स्ट्रिंग द्वारा बनाई जाती है। रॉयल स्पैनिश अकादमी के शब्दकोश में कहा गया है कि बाइट ऑक्टेट का पर्याय है; हालाँकि, बाइट का आकार उस वर्ण कोड पर निर्भर करता है जिसमें इसे परिभाषित किया गया था। इस तथ्य को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि कोई मानक नहीं है जो आधिकारिक रूप से बाइट से मेल खाने वाले प्रतीक को स्थापित करता है। अब तक हम पाते हैं कि इसे मौलिक रूप से दो तरीकों से पहचाना जाता है। इस प्रकार, फ्रांसीसी भाषी देशों में इसे "ओ" द्वारा दर्शाया जाता है जबकि एंग्लो-सैक्सन में यह "बी" से मेल खाता है। आईबीएम सात हज़ार तीस स्ट्रेच कंप्यूटर के विकास के बीच, यह शब्द वर्नर बुचोलज़ द्वारा पांच दशक पहले प्रस्तावित किया गया था। शुरुआत में, बाइट का उपयोग उन निर्देशों का उल्लेख करने के लिए किया गया था जिनमें चार बिट्स शामिल थे और जो बाइट के बीच एक और सोलह बिट्स को शामिल करने की अनुमति देते थे। हालांकि, डिज़ाइन कार्य ने बाइट को तीन-बिट फ़ील्ड तक सीमित कर दिया, जिसने एक बाइट में एक और आठ बिट्स के बीच की अनुमति दी। समय के साथ, आठ-बिट बाइट का आकार तय किया गया और आईबीएम एस / तीन सौ साठ से एक मानक के रूप में घोषित किया गया। आठ बिट्स की धारणा कंप्यूटर या कंप्यूटर, मेमोरी एड्रेस और अन्य डेटा इकाइयों की वास्तुकला में वर्णन करने की अनुमति देती है, जो चौड़ाई में आठ बिट तक फैला हो सकता है। अवधारणा सीपीयू और एएलयू की वास्तुकला का उल्लेख करने की अनुमति देती है जो समान चौड़ाई के रिकॉर्ड पर आधारित है। दूसरी ओर, यह आठ टुकड़ों के एक बाइट के आधे हिस्से में, कुतरना के रूप में जाना जाता है। जैसा कि बाइट को आमतौर पर एक ओकटेट के रूप में नामित किया जाता है, उसी कारण से निबल को अर्ध-ऑक्टेट के रूप में उल्लेख किया जा सकता है। बाइट में कई गुणक होते हैं, जैसे किलोबाइट , मेगाबाइट , गिबैबेट और टेराबाइट , अन्य। मौलिक कंप्यूटिंग के क्षेत्र के भीतर बाइट और अन्य उद्धृत समकक्षों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका है क्योंकि उनका उपयोग विभिन्न उपकरणों की क्षमता को संदर्भित करने के लिए उपायों के रूप में किया जाता है, उदाहरण के लिए, रैम, सीडी, क्या है एक डीवीडी या एक पेन ड्राइव। इस प्रकार, उदाहरण के लिए, हम जानते हैं कि एक सीडी में आमतौर पर लगभग सात सौ मेगाबाइट की भंडारण क्षमता होती है, एक डीवीडी आमतौर पर गीगाबाइट से अधिक होती है, और पेन, इस बीच, क्षमता की एक विशाल विविधता पेश करता है। इस तरह से कंप्यूटर बाजार में हमें इस प्रकार के डिवाइस मिलते हैं जिनकी क्षमता चार गीगाबाइट, आठ गीगाबाइट या सोलह गीगाबाइट होती है। एक प्रवृत्ति जो तथाकथित मेमोरी कार्ड या पोर्टेबल हार्ड ड्राइव की विशिष्ट है, जो वर्तमान में भंडारण संपत्ति के मामले में एक बड़ी विविधता है। इस प्रकार, काफी सस्ते और दिलचस्प कीमतों के लिए, कंप्यूटर की दुनिया के लिए समर्पित बड़े स्टोरों में उन हार्ड ड्राइवों का पता लगाया जा सकता है जो एक टेराबाइट तक भी पहुंचते हैं। |
पनकी के गंगागंज में रहने वाले राम महेश की ऑटो पार्ट्स की दुकान है। उनकी फैमिली में पत्नी, बेटी कविता (दोनों काल्पनिक नाम) और एक बेटा है। कविता एसडी कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की स्टूडेंट है। वो करीब पांच महीने पहले घर से स्कूल जा रही थी। तभी रास्ते में इलाकाई निवासी अश्वनी प्रताप सिंह ने उसे रोक लिया। वो भी एसडी कॉलेज का स्टूडेंट है। उसने बहाने से कविता को बाइक में बैठा लिया। जिसके बाद वो कविता को बिठूर में एक रिश्तेदार के घर से कुछ पेपर लेने का बहाना बनाकर उसे वहां ले गया। वहां पर अश्वनी की आंटी और उसका दोस्त जयविंद मौजूद थे। अश्वनी के वहां पहुंचते ही आंटी ने कविता को कोल्ड ड्रिंक दी और कुछ काम का बहाना बनाकर पड़ोसी के घर चली गई। कविता कोल्ड ड्रिंक पीते ही बेहोश हो गई। जिसका फायदा उठाकर अश्वनी ने उसकी आबरू लूट ली और जयविंद ने उसका एमएमएस बना लिया।
कविता को होश आया, तो वो दर्द से कराह रही थी। उसने अश्वनी को थाने में एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी, तो उसने जयविंद से मोबाइल लेकर उसे रेप का एमएमएस दिखाया, तो उसके होश उड़ गए। अश्वनी ने उसको मुंह खोलने पर एमएमएस को इंटरनेट पर डालने की धमकी दी। वो अश्वनी के सामने गिड़गिड़ाने लगी, लेकिन उसका कलेजा नहीं पसीजा और वो उसको घर के पास छोड़कर चला गया। जिसके बाद अश्वनी उसको ब्लैकमेल करके बार-बार रेप करने लगा। अश्रि्वनी उसको बिठूर स्थित आंटी के घर ही ले जाता था।
कविता बदनामी के डर से चुप रही, लेकिन क्भ् सितंबर को वो घर से कॉलेज जा रही थी कि रास्ते में अश्वनी ने उसे रोक लिया और अपने साथ बाइक में बैठाकर चिडि़याघर ले गया। जहां जयविंद समेत दो लोग पहले से मौजूद थे। अश्वनी ने उनको देखते ही कविता से कहा कि अब तुमको इनके साथ भी शारीरिक संबंध बनाने होंगे। कविता ने मना किया, तो अश्वनी ने घर से लेकर कॉलेज तक रेप का एमएमएस फैलाने की धमकी दी। उसने कहा कि अगर तुम इन दोनों के साथ नहीं जाओगी, तो कल से किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहोगी। कविता को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे? उसने अश्वनी से कहा कि उसे एक घंटे के लिए कॉलेज जाना है। जिसके बाद वो दोनों के साथ चली जाएगी। जिसे सुनकर अश्वनी राजी हो गया और उसने कविता को कॉलेज के बाहर छोड़ दिया और कहा कि वो एक घंटे बाद उसे लेने के लिए कॉलेज आएगा।
घबराई कविता वहां से सीधे घर गई और परिजनों को सारी सच्चाई बता दी। जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने सीधे थाने में जाकर शिकायत की, तो एसओ गोपी चंद्र यादव ने उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली। इधर, बुधवार को मामले के तूल पकड़ने पर आला अधिकारियों ने पीडि़त परिवार से बात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
भ्। चकेरी में रिटायर्ड जवान ने अपनी बहु का एमएमएस बनाकर सर्कुलेट कर दिया था।
क्। एमएमएस से बचने का सबसे बड़ी बात ये है कि किसी पर भी विश्वास न करें। चाहें वो कोई भी हो। क्योंकि अगर एक बार वीडियो शूट हो गया तो फिर वो कहीं भी पहुंच सकता है।
ख्। मॉल्स, होटल-रेस्टोरेंट या पब्लिक प्लेस पर अलर्ट रहें।
फ्। इस बात का ध्यान रखें कि कहीं कोई आपका वीडियो या फोटो तो क्लिक नहीं कर रहा।
म्। अगर कोई आपकी फोटो धोखे से खींचकर डिलीट नहीं करता है तो फौरन इस बात की पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
इस मामले की तो पुलिस जांच कर रही है और आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन युवाओं को बहुत ध्यान रखने की जरुरत है। फेसबुक या किसी भी सोशल साइट्स में अपनी फोटो को अपलोड न करें। इतना ही नहीं जहां भी जाएं ये जरुर ध्यान रखें कि कौन आपकी फोटो खींच रहा है और क्यों? इसके अलावा पैरेंट्स को भी अलर्ट रहना होगा।
| पनकी के गंगागंज में रहने वाले राम महेश की ऑटो पार्ट्स की दुकान है। उनकी फैमिली में पत्नी, बेटी कविता और एक बेटा है। कविता एसडी कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की स्टूडेंट है। वो करीब पांच महीने पहले घर से स्कूल जा रही थी। तभी रास्ते में इलाकाई निवासी अश्वनी प्रताप सिंह ने उसे रोक लिया। वो भी एसडी कॉलेज का स्टूडेंट है। उसने बहाने से कविता को बाइक में बैठा लिया। जिसके बाद वो कविता को बिठूर में एक रिश्तेदार के घर से कुछ पेपर लेने का बहाना बनाकर उसे वहां ले गया। वहां पर अश्वनी की आंटी और उसका दोस्त जयविंद मौजूद थे। अश्वनी के वहां पहुंचते ही आंटी ने कविता को कोल्ड ड्रिंक दी और कुछ काम का बहाना बनाकर पड़ोसी के घर चली गई। कविता कोल्ड ड्रिंक पीते ही बेहोश हो गई। जिसका फायदा उठाकर अश्वनी ने उसकी आबरू लूट ली और जयविंद ने उसका एमएमएस बना लिया। कविता को होश आया, तो वो दर्द से कराह रही थी। उसने अश्वनी को थाने में एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी, तो उसने जयविंद से मोबाइल लेकर उसे रेप का एमएमएस दिखाया, तो उसके होश उड़ गए। अश्वनी ने उसको मुंह खोलने पर एमएमएस को इंटरनेट पर डालने की धमकी दी। वो अश्वनी के सामने गिड़गिड़ाने लगी, लेकिन उसका कलेजा नहीं पसीजा और वो उसको घर के पास छोड़कर चला गया। जिसके बाद अश्वनी उसको ब्लैकमेल करके बार-बार रेप करने लगा। अश्रि्वनी उसको बिठूर स्थित आंटी के घर ही ले जाता था। कविता बदनामी के डर से चुप रही, लेकिन क्भ् सितंबर को वो घर से कॉलेज जा रही थी कि रास्ते में अश्वनी ने उसे रोक लिया और अपने साथ बाइक में बैठाकर चिडि़याघर ले गया। जहां जयविंद समेत दो लोग पहले से मौजूद थे। अश्वनी ने उनको देखते ही कविता से कहा कि अब तुमको इनके साथ भी शारीरिक संबंध बनाने होंगे। कविता ने मना किया, तो अश्वनी ने घर से लेकर कॉलेज तक रेप का एमएमएस फैलाने की धमकी दी। उसने कहा कि अगर तुम इन दोनों के साथ नहीं जाओगी, तो कल से किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहोगी। कविता को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे? उसने अश्वनी से कहा कि उसे एक घंटे के लिए कॉलेज जाना है। जिसके बाद वो दोनों के साथ चली जाएगी। जिसे सुनकर अश्वनी राजी हो गया और उसने कविता को कॉलेज के बाहर छोड़ दिया और कहा कि वो एक घंटे बाद उसे लेने के लिए कॉलेज आएगा। घबराई कविता वहां से सीधे घर गई और परिजनों को सारी सच्चाई बता दी। जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने सीधे थाने में जाकर शिकायत की, तो एसओ गोपी चंद्र यादव ने उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली। इधर, बुधवार को मामले के तूल पकड़ने पर आला अधिकारियों ने पीडि़त परिवार से बात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। भ्। चकेरी में रिटायर्ड जवान ने अपनी बहु का एमएमएस बनाकर सर्कुलेट कर दिया था। क्। एमएमएस से बचने का सबसे बड़ी बात ये है कि किसी पर भी विश्वास न करें। चाहें वो कोई भी हो। क्योंकि अगर एक बार वीडियो शूट हो गया तो फिर वो कहीं भी पहुंच सकता है। ख्। मॉल्स, होटल-रेस्टोरेंट या पब्लिक प्लेस पर अलर्ट रहें। फ्। इस बात का ध्यान रखें कि कहीं कोई आपका वीडियो या फोटो तो क्लिक नहीं कर रहा। म्। अगर कोई आपकी फोटो धोखे से खींचकर डिलीट नहीं करता है तो फौरन इस बात की पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। इस मामले की तो पुलिस जांच कर रही है और आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन युवाओं को बहुत ध्यान रखने की जरुरत है। फेसबुक या किसी भी सोशल साइट्स में अपनी फोटो को अपलोड न करें। इतना ही नहीं जहां भी जाएं ये जरुर ध्यान रखें कि कौन आपकी फोटो खींच रहा है और क्यों? इसके अलावा पैरेंट्स को भी अलर्ट रहना होगा। |
शिमला - प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' के लिए शिमला में ऑडिशन 24 फरवरी को होंगे। ऑडिशन पीटरहाफ में होंगे। ऑडिशन के लिए रजिस्ट्रेशन का समय सुबह दस बजे का निर्धारित किया गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑडिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 'दिव्य हिमाचल' मीडिया गु्रप द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में ऑडिशन करवा दिए गए हैं। अब आखिर में शिमला में ऑडिशन होने जा रहे हैं। ऐसे में मॉडलिंग के क्षेत्र में ऊंचाइयां छूने का सपना देखने वाली युवतियां इस सुनहरे अवसर का फायदा उठा सकती हैं। ऐसे में 'मिस हिमाचल' प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शहर की बेटियों में खासा उत्साह है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए दूर-दूर से युवतियां शिमला के 'दिव्य हिमाचल' के कार्यालय में संर्पक साध रही हैं।
'मिस हिमाचल' प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष रखी गई है। ड्रेस कोड ब्लू जीन और टी-र्शट सहित हाई हिल्स अनिवार्य हैं। वहीं, प्रतियोगिता में भाग लेने वाली युवतियों की हाइट 5 फुट व इससे अधिक होनी चाहिए।
'दिव्य हिमाचल' समाचार पत्र के इस मेगा इवेंट से कई युवतियांे ने लंबा सफर तय किया है। हिमाचल की कई बेटियां रूपहले पर्दे पर धमाल मचा रही हैं।
ऑडिशन से संबंधित अधिक जानकारी के लिए 0177-2627667,7018004284,9418275533,7018024243 इन नंबरों पर संपर्क करें।
| शिमला - प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्र 'दिव्य हिमाचल' के मेगा इवेंट 'मिस हिमाचल' के लिए शिमला में ऑडिशन चौबीस फरवरी को होंगे। ऑडिशन पीटरहाफ में होंगे। ऑडिशन के लिए रजिस्ट्रेशन का समय सुबह दस बजे का निर्धारित किया गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑडिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 'दिव्य हिमाचल' मीडिया गु्रप द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में ऑडिशन करवा दिए गए हैं। अब आखिर में शिमला में ऑडिशन होने जा रहे हैं। ऐसे में मॉडलिंग के क्षेत्र में ऊंचाइयां छूने का सपना देखने वाली युवतियां इस सुनहरे अवसर का फायदा उठा सकती हैं। ऐसे में 'मिस हिमाचल' प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शहर की बेटियों में खासा उत्साह है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए दूर-दूर से युवतियां शिमला के 'दिव्य हिमाचल' के कार्यालय में संर्पक साध रही हैं। 'मिस हिमाचल' प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आयु सीमा अट्ठारह से पच्चीस वर्ष रखी गई है। ड्रेस कोड ब्लू जीन और टी-र्शट सहित हाई हिल्स अनिवार्य हैं। वहीं, प्रतियोगिता में भाग लेने वाली युवतियों की हाइट पाँच फुट व इससे अधिक होनी चाहिए। 'दिव्य हिमाचल' समाचार पत्र के इस मेगा इवेंट से कई युवतियांे ने लंबा सफर तय किया है। हिमाचल की कई बेटियां रूपहले पर्दे पर धमाल मचा रही हैं। ऑडिशन से संबंधित अधिक जानकारी के लिए एक सौ सतहत्तर-छब्बीस लाख सत्ताईस हज़ार छः सौ सरसठ, सात शून्य एक आठ शून्य शून्य चार दो आठ चार, नौ चार एक आठ दो सात पाँच पाँच तीन तीन, सात शून्य एक आठ शून्य दो चार दो चार तीन इन नंबरों पर संपर्क करें। |
माउड गोन (21 दिसंबर, 1866 - 27 अप्रैल, 1 9 53) को आयरिश नोबेल पुरस्कार विजेता कवि विलियम बटलर यॉट्स द्वारा असामान्य सौंदर्य और पुण्य की एक महिला के रूप में अमर किया गया था, लेकिन वह एक अशांत संगीत से कहीं ज्यादा थी। यह अंग्रेजी-जन्मी अभिनेत्री आयरिश क्रांतिकारी , आयरिश संस्कृति का एक चैंपियन और महिलाओं के अधिकारों का एक स्थिर बचावकर्ता बन गया ।
गॉन ने यॉट्स से कम से कम चार विवाह प्रस्तावों को खारिज कर दिया, और यह अनिश्चित प्यार यॉट्स कविता के विषयों में से एक बन गया।
"नो सेकेंड ट्रॉय" यॉट्स की सबसे लोकप्रिय कविताओं में से एक है, जो गॉन की सुंदरता और प्रतिभा का जश्न मना रहा है, और सामाजिक और राजनीतिक अशांति का वर्णन करता है जिसने स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए उसे और अन्य आयरिश देशभक्तों को प्रभावित किया।
"नो सेकेंड ट्रॉय", विलियम बटलर यॉट्स ("द ग्रीन हेलमेट और अन्य कविताओं" से, 1 9 12)
पुरुषों को सबसे हिंसक तरीके से अज्ञानी सिखाया है,
या महान पर छोटी सड़कों को फेंक दिया।
क्या वे इच्छा के बराबर साहस थे?
उस महानता ने आग के रूप में सरल बना दिया,
यह इस तरह की उम्र में प्राकृतिक नहीं है,
उच्च और अकेला और सबसे कठोर होने के नाते?
क्यों, वह क्या कर सकती है, वह क्या है?
क्या उसके लिए जलने के लिए एक और ट्रॉय था?
आज यह कविता क्यों प्रासंगिक है?
"नो सेकेंड ट्रॉय" उन प्रभावों का भावनात्मक और बौद्धिक स्नैपशॉट है जो 1 9वीं सदी के अंत और 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में आयरलैंड को आकार और विभाजित करते थे।
लेकिन यॉट्स ने गॉन को सामाजिक और राजनीतिक अशांति के एक उद्देश्य के रूप में वर्णित किया है, जिसने "अज्ञानी पुरुषों को सबसे हिंसक तरीके" सिखाया, माउद ने अपनी 1 9 38 की आत्मकथा "रानी के एक नौकर" में हिंसा को खारिज कर दिया।
उसने लिखाः "मैंने हमेशा युद्ध से नफरत की है और प्रकृति और दर्शन द्वारा शांतिवादी हूं, लेकिन यह वह अंग्रेजी है जो हमारे ऊपर युद्ध मजबूर कर रही है, और युद्ध का पहला सिद्धांत दुश्मन को मारना है। "
हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि येट्स गोन का प्रतीक या युवा महिलाओं और पुरुषों के रूप में एक रूपक के रूप में उपयोग करता है जो 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में आयरलैंड की अपनी प्रतिभा के लिए उपयुक्त आउटलेट नहीं ढूंढ सके।
गॉन के यॉट्स को अस्वीकार करने से, कवि को "नो सेकेंड ट्रॉय" में एक चरित्र के रूप में खुद को शामिल करने की अनुमति मिलती है। अनिश्चित प्यार के बारे में अपने व्यक्तिगत दुख पर प्रतिबिंबित करते समय, येट्स आयरलैंड के सामूहिक दुःख के साथ समानता खींचता है। वह देश को खुद के खिलाफ विभाजित करता है - वर्किंग क्लास बनाम ऊपरी वर्ग - और कवि, जैसे गॉन और उनके आयरिश समकालीन लोगों को, उनके "दिमाग, शरीर और आत्माओं" को संरेखित करने के लिए आवश्यक संतुलन नहीं मिला।
गॉन की असामान्य सुंदरता और प्रतिभा को पहचानकर, कविता आयरलैंड के युवाओं से ब्रिटिश साम्राज्य में एक व्यापक संकट के लिए जिम्मेदार है, जिसने हिंसा, दमन और सामाजिक और राजनीतिक अशांति को उकसाया।
| माउड गोन को आयरिश नोबेल पुरस्कार विजेता कवि विलियम बटलर यॉट्स द्वारा असामान्य सौंदर्य और पुण्य की एक महिला के रूप में अमर किया गया था, लेकिन वह एक अशांत संगीत से कहीं ज्यादा थी। यह अंग्रेजी-जन्मी अभिनेत्री आयरिश क्रांतिकारी , आयरिश संस्कृति का एक चैंपियन और महिलाओं के अधिकारों का एक स्थिर बचावकर्ता बन गया । गॉन ने यॉट्स से कम से कम चार विवाह प्रस्तावों को खारिज कर दिया, और यह अनिश्चित प्यार यॉट्स कविता के विषयों में से एक बन गया। "नो सेकेंड ट्रॉय" यॉट्स की सबसे लोकप्रिय कविताओं में से एक है, जो गॉन की सुंदरता और प्रतिभा का जश्न मना रहा है, और सामाजिक और राजनीतिक अशांति का वर्णन करता है जिसने स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए उसे और अन्य आयरिश देशभक्तों को प्रभावित किया। "नो सेकेंड ट्रॉय", विलियम बटलर यॉट्स पुरुषों को सबसे हिंसक तरीके से अज्ञानी सिखाया है, या महान पर छोटी सड़कों को फेंक दिया। क्या वे इच्छा के बराबर साहस थे? उस महानता ने आग के रूप में सरल बना दिया, यह इस तरह की उम्र में प्राकृतिक नहीं है, उच्च और अकेला और सबसे कठोर होने के नाते? क्यों, वह क्या कर सकती है, वह क्या है? क्या उसके लिए जलने के लिए एक और ट्रॉय था? आज यह कविता क्यों प्रासंगिक है? "नो सेकेंड ट्रॉय" उन प्रभावों का भावनात्मक और बौद्धिक स्नैपशॉट है जो एक नौवीं सदी के अंत और बीस वीं शताब्दी की शुरुआत में आयरलैंड को आकार और विभाजित करते थे। लेकिन यॉट्स ने गॉन को सामाजिक और राजनीतिक अशांति के एक उद्देश्य के रूप में वर्णित किया है, जिसने "अज्ञानी पुरुषों को सबसे हिंसक तरीके" सिखाया, माउद ने अपनी एक नौ अड़तीस की आत्मकथा "रानी के एक नौकर" में हिंसा को खारिज कर दिया। उसने लिखाः "मैंने हमेशा युद्ध से नफरत की है और प्रकृति और दर्शन द्वारा शांतिवादी हूं, लेकिन यह वह अंग्रेजी है जो हमारे ऊपर युद्ध मजबूर कर रही है, और युद्ध का पहला सिद्धांत दुश्मन को मारना है। " हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि येट्स गोन का प्रतीक या युवा महिलाओं और पुरुषों के रूप में एक रूपक के रूप में उपयोग करता है जो बीस वीं शताब्दी की शुरुआत में आयरलैंड की अपनी प्रतिभा के लिए उपयुक्त आउटलेट नहीं ढूंढ सके। गॉन के यॉट्स को अस्वीकार करने से, कवि को "नो सेकेंड ट्रॉय" में एक चरित्र के रूप में खुद को शामिल करने की अनुमति मिलती है। अनिश्चित प्यार के बारे में अपने व्यक्तिगत दुख पर प्रतिबिंबित करते समय, येट्स आयरलैंड के सामूहिक दुःख के साथ समानता खींचता है। वह देश को खुद के खिलाफ विभाजित करता है - वर्किंग क्लास बनाम ऊपरी वर्ग - और कवि, जैसे गॉन और उनके आयरिश समकालीन लोगों को, उनके "दिमाग, शरीर और आत्माओं" को संरेखित करने के लिए आवश्यक संतुलन नहीं मिला। गॉन की असामान्य सुंदरता और प्रतिभा को पहचानकर, कविता आयरलैंड के युवाओं से ब्रिटिश साम्राज्य में एक व्यापक संकट के लिए जिम्मेदार है, जिसने हिंसा, दमन और सामाजिक और राजनीतिक अशांति को उकसाया। |
इस सीजन में अपनी नौंवी हार से सनराइजर्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है. चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) इस सीजन में प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम है.
सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को हराकर चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने आईपीएल 2021 के प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के ने सीएसके को 11वीं बार आईपीएल के प्लेऑफ में पहुंचाया है. जीत के बाद धोनी सोशल मीडिया पर छा गए, क्योंकि उन्होंने विनिंग सिक्स जड़ा. इसके अलावा एक तस्वीर और सामने आई. SRH को मुकाबले में हार मिली, लेकिन उसके गेंदबाज राशिद खान को धोनी ने एक खास गिफ्ट दिया. दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर घूम रही हैं.
मैच के बाद राशिद खान धोनी के साथ हाथ में सीएसके की जर्सी लेकर बात करते हुए दिखे. यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. एमएस धोनी ने मुकाबले के बाद राशिद खान को सीएसके की अपनी जर्सी तोहफे में दी. आईपीएल में अक्सर देखने को मिलता है कि धोनी मैच के बाद युवा खिलाड़ियों से बात करते हुए नजर आते हैं.
राशिद खान आईपीएल के सबसे जबरदस्त गेंदबाजों में से एक हैं. मगर इसबार वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाए हैं. उनकी टीम SRH भी अब आईपीएल के प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है. इस सीजन में अपनी नौंवी हार से सनराइजर्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है. वह आखिरी स्थान पर बना हुई है. चेन्नई सुपर किंग्स इस सत्र में प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम है. उसने 12 आईपीएल में 11वीं बार प्लेऑफ में प्रवेश किया है. चेन्नई के खिलाफ मुकाबले में राशिद खान से चार ओवर में 27 रन देकर एक विकेट चटकाए.
राशिद खान ने आईपीएल 2021 में अब तक खेले 11 मुकाबले में 14 विकेट चटकाए हैं. सनराइजर्स के लिए राशिद सबसे प्रमुख हथियार हैं. वो कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं. उन्होंने इस लीग में दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी अपनी फिरकी पर नचाया है. मगर इस बार उनकी टीम का प्रदर्शन से निराशाजनक रहा है.
सनराइजर्स की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए शारजाह की धीमी पिच पर सात विकेट पर 134 रन ही बना पाई. चेन्नई ने 19.4 ओवर में चार विकेट पर 139 रन बनाकर 11 मैच में नौवीं जीत दर्ज करके अपने अंकों की संख्या 18 कर ली. हार के बाद सनराइजर्स के कप्तान केन विलियमसन ने कहा कि यदि उनके बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी संभाली होती और अच्छे रन बनाये होते तो इस मुकाबले का नतीज कुछ और होता.
| इस सीजन में अपनी नौंवी हार से सनराइजर्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है. चेन्नई सुपर किंग्स इस सीजन में प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम है. सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के ने सीएसके को ग्यारहवीं बार आईपीएल के प्लेऑफ में पहुंचाया है. जीत के बाद धोनी सोशल मीडिया पर छा गए, क्योंकि उन्होंने विनिंग सिक्स जड़ा. इसके अलावा एक तस्वीर और सामने आई. SRH को मुकाबले में हार मिली, लेकिन उसके गेंदबाज राशिद खान को धोनी ने एक खास गिफ्ट दिया. दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर घूम रही हैं. मैच के बाद राशिद खान धोनी के साथ हाथ में सीएसके की जर्सी लेकर बात करते हुए दिखे. यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. एमएस धोनी ने मुकाबले के बाद राशिद खान को सीएसके की अपनी जर्सी तोहफे में दी. आईपीएल में अक्सर देखने को मिलता है कि धोनी मैच के बाद युवा खिलाड़ियों से बात करते हुए नजर आते हैं. राशिद खान आईपीएल के सबसे जबरदस्त गेंदबाजों में से एक हैं. मगर इसबार वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाए हैं. उनकी टीम SRH भी अब आईपीएल के प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है. इस सीजन में अपनी नौंवी हार से सनराइजर्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई है. वह आखिरी स्थान पर बना हुई है. चेन्नई सुपर किंग्स इस सत्र में प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम है. उसने बारह आईपीएल में ग्यारहवीं बार प्लेऑफ में प्रवेश किया है. चेन्नई के खिलाफ मुकाबले में राशिद खान से चार ओवर में सत्ताईस रन देकर एक विकेट चटकाए. राशिद खान ने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में अब तक खेले ग्यारह मुकाबले में चौदह विकेट चटकाए हैं. सनराइजर्स के लिए राशिद सबसे प्रमुख हथियार हैं. वो कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं. उन्होंने इस लीग में दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी अपनी फिरकी पर नचाया है. मगर इस बार उनकी टीम का प्रदर्शन से निराशाजनक रहा है. सनराइजर्स की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए शारजाह की धीमी पिच पर सात विकेट पर एक सौ चौंतीस रन ही बना पाई. चेन्नई ने उन्नीस.चार ओवर में चार विकेट पर एक सौ उनतालीस रन बनाकर ग्यारह मैच में नौवीं जीत दर्ज करके अपने अंकों की संख्या अट्ठारह कर ली. हार के बाद सनराइजर्स के कप्तान केन विलियमसन ने कहा कि यदि उनके बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी संभाली होती और अच्छे रन बनाये होते तो इस मुकाबले का नतीज कुछ और होता. |
आर्थिक तंगी से परेशान आवास विकास निवासी युवक ने जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इसका पता चलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया।
रुद्रपुर, जेएनएन : आर्थिक तंगी से परेशान आवास विकास निवासी युवक ने जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इसका पता चलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंचे रेलवे और सिडकुल चौकी पुलिस ने जानकारी ली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान मृतक के पास से एक डायरी भी मिली। जिसमें उसने कई लोगों से लाखों रुपये लेने और बार-बार तकाजा करने पर भी न देने की बात लिखी है। डायरी के आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है।
पुलिस के मुताबिक आवास विकास जगतपुरा निवासी 35 वर्षीय सचिन गुप्ता पुत्र स्व. उमेश गुप्ता केटरिंग और टिफिन सप्लाई का काम करता था। बताया जा रहा है कि रविवार सुबह आर्थिक तंगी के चलते छतरपुर के पास नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूद गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसका पता चलते ही मृतक की पत्नी लक्ष्मी, पुत्र कृष्णा, पुत्री समेत अन्य परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर रेलवे पुलिस के एसआई आरके भारद्वाज, सिडकुल चौकी प्रभारी केजी मठपाल पुलिस कर्मियों के साथ पहुंचे और जानकारी ली। इस दौरान पुलिस को मृतक की जेब से एक डायरी बरामद हुई। जिस पर लिखा हुआ था कि उसे आवास विकास निवासी एक व्यक्ति से पांच लाख रुपये लेने थे। जो रकम का भुगतान नहीं कर रहा था। साथ ही मृतक सचिन ने अपने भाई को लिखा था कि वह आत्महत्या करने जा रहा है तो उसके बच्चों का ख्याल रखना।
बाद में पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रेलवे के आरपीएफ प्रभारी आरके भारद्वाज ने बताया कि आवास विकास निवासी सचिन ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की है। मौके से डायरी बरामद हुई है। जिस पर साफ तौर पर उसने आत्महत्या की बात लिखी है। सिडकुल चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
छतरपुर रेलवे ट्रैक पर सचिन के आत्महत्या करने के बाद नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस करीब एक घंटे तक रूकी रही। इससे ट्रेन में सवार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यही नहीं रेलवे ट्रैक पर लोगों का जमावड़ा लग गया। बाद में रेलवे और सिडकुल चौकी पुलिस के पहुंचने और शव को कब्जे में लेने के बाद ट्रेन रवाना हुई।
| आर्थिक तंगी से परेशान आवास विकास निवासी युवक ने जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इसका पता चलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। रुद्रपुर, जेएनएन : आर्थिक तंगी से परेशान आवास विकास निवासी युवक ने जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इसका पता चलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंचे रेलवे और सिडकुल चौकी पुलिस ने जानकारी ली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान मृतक के पास से एक डायरी भी मिली। जिसमें उसने कई लोगों से लाखों रुपये लेने और बार-बार तकाजा करने पर भी न देने की बात लिखी है। डायरी के आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस के मुताबिक आवास विकास जगतपुरा निवासी पैंतीस वर्षीय सचिन गुप्ता पुत्र स्व. उमेश गुप्ता केटरिंग और टिफिन सप्लाई का काम करता था। बताया जा रहा है कि रविवार सुबह आर्थिक तंगी के चलते छतरपुर के पास नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस के आगे कूद गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसका पता चलते ही मृतक की पत्नी लक्ष्मी, पुत्र कृष्णा, पुत्री समेत अन्य परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर रेलवे पुलिस के एसआई आरके भारद्वाज, सिडकुल चौकी प्रभारी केजी मठपाल पुलिस कर्मियों के साथ पहुंचे और जानकारी ली। इस दौरान पुलिस को मृतक की जेब से एक डायरी बरामद हुई। जिस पर लिखा हुआ था कि उसे आवास विकास निवासी एक व्यक्ति से पांच लाख रुपये लेने थे। जो रकम का भुगतान नहीं कर रहा था। साथ ही मृतक सचिन ने अपने भाई को लिखा था कि वह आत्महत्या करने जा रहा है तो उसके बच्चों का ख्याल रखना। बाद में पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रेलवे के आरपीएफ प्रभारी आरके भारद्वाज ने बताया कि आवास विकास निवासी सचिन ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की है। मौके से डायरी बरामद हुई है। जिस पर साफ तौर पर उसने आत्महत्या की बात लिखी है। सिडकुल चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। छतरपुर रेलवे ट्रैक पर सचिन के आत्महत्या करने के बाद नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस करीब एक घंटे तक रूकी रही। इससे ट्रेन में सवार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यही नहीं रेलवे ट्रैक पर लोगों का जमावड़ा लग गया। बाद में रेलवे और सिडकुल चौकी पुलिस के पहुंचने और शव को कब्जे में लेने के बाद ट्रेन रवाना हुई। |
रांची (ब्यूरो) । आदित्य विजन के 101वें शोरूम का उद्घाटन भागलपुर रोड, दुधानी, होण्डा शोरूम के पास, दुमका (झारखंड) में हुआ। आदित्य विजन उपभोक्ता उपकरणों के लिए बिहार-झारखंड का एक विश्वसनीय और अपने बेहतरीन सर्विस तथा शानदार ऑफर्स के लिए जाना हुआ नाम है। आदित्य विजन ने अपना पहला शोरूम 1999 में पटना के तारामंडल के सामने शुरू किया, उसके बाद यह कारवां आज 2023 में अपने 101 शोरूमों के साथ खड़ा है।
आदित्य विजन के निदेशक निशांत प्रभाकर ने बताया कि आदित्य विजन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में बिहार का सबसे पहला सूचीबद्ध इलेक्ट्रॉनिक रिटेल चेन है। इस अवसर पर उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों, शुभचिंतकों, सहयोगियों तथा ग्राहकों को उनके विश्वास के लिए उनका हार्दिक धन्यवाद किया कि उन्होने अपनी योग्यता, लगन और कर्मठता से आदित्य विजन को 1999 के पहले शोरूम से आज 101 वें शोरूम तक का सफर प्राप्त करने में सहयोग किया। इस दौरान हमने अपने ग्राहकों की सुविधा का निरंतर ख्याल रखा है जिससे उन्हें उनकी खरीदारी में हम अधिक से अधिक सहूलियत दे सके।
आदित्य विजन का मंत्र है अदा करें छोटी किस्तों में सिर्फ मूल, ब्याज जाएं बिल्कुल भूल। आदित्य विजन के निदेशक निशांत प्रभाकर ने बताया कि यहां 36 आसान लम्बी मासिक किश्तों पर ब्याज मुक्त फाइनांस की सुविधा हम देते है और डेबिट कार्ड। द्वारा पेपर लेस फायनांस की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। आदित्य विजन ग्राहकों को जीरो डाउन पेमेंट पर मनचाहा प्रोडक्ट घर ले जाने के साथ हाथों-हाथ डिलीवरी तथा मोबाइल पर सुपर एक्सचेंज ऑफर मुहैया करा रहा है।
| रांची । आदित्य विजन के एक सौ एकवें शोरूम का उद्घाटन भागलपुर रोड, दुधानी, होण्डा शोरूम के पास, दुमका में हुआ। आदित्य विजन उपभोक्ता उपकरणों के लिए बिहार-झारखंड का एक विश्वसनीय और अपने बेहतरीन सर्विस तथा शानदार ऑफर्स के लिए जाना हुआ नाम है। आदित्य विजन ने अपना पहला शोरूम एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में पटना के तारामंडल के सामने शुरू किया, उसके बाद यह कारवां आज दो हज़ार तेईस में अपने एक सौ एक शोरूमों के साथ खड़ा है। आदित्य विजन के निदेशक निशांत प्रभाकर ने बताया कि आदित्य विजन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बिहार का सबसे पहला सूचीबद्ध इलेक्ट्रॉनिक रिटेल चेन है। इस अवसर पर उन्होंने अपने सभी कर्मचारियों, शुभचिंतकों, सहयोगियों तथा ग्राहकों को उनके विश्वास के लिए उनका हार्दिक धन्यवाद किया कि उन्होने अपनी योग्यता, लगन और कर्मठता से आदित्य विजन को एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के पहले शोरूम से आज एक सौ एक वें शोरूम तक का सफर प्राप्त करने में सहयोग किया। इस दौरान हमने अपने ग्राहकों की सुविधा का निरंतर ख्याल रखा है जिससे उन्हें उनकी खरीदारी में हम अधिक से अधिक सहूलियत दे सके। आदित्य विजन का मंत्र है अदा करें छोटी किस्तों में सिर्फ मूल, ब्याज जाएं बिल्कुल भूल। आदित्य विजन के निदेशक निशांत प्रभाकर ने बताया कि यहां छत्तीस आसान लम्बी मासिक किश्तों पर ब्याज मुक्त फाइनांस की सुविधा हम देते है और डेबिट कार्ड। द्वारा पेपर लेस फायनांस की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। आदित्य विजन ग्राहकों को जीरो डाउन पेमेंट पर मनचाहा प्रोडक्ट घर ले जाने के साथ हाथों-हाथ डिलीवरी तथा मोबाइल पर सुपर एक्सचेंज ऑफर मुहैया करा रहा है। |
सुल्तानपुर। जिले की बेटियों ने अपनी लगन व मेहनत के दम पर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। समाज सेवा, खेल से लेकर सांस्कृतिक क्षेत्र तक में उनका दबदबा है। शिक्षा में बालिकाएं हर वर्ष बालकों को पीछे छोड़ती जा रही हैं। सरकारी सेवाओं में भी वे अपना स्थान बना रही हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर कुछ बालिकाओं ने अपनी उपलब्धियां व अनुभव साझा किए।
निराला नगर निवासी जयप्रकाश शर्मा की बेटी निष्ठा की बचपन से ही संगीत में रुचि रही। निष्ठा ने संगीत के क्षेत्र को ही कॅरिअर के रूप में चुना। माता-पिता की प्रेरणा व अपनी मेहनत से निष्ठा शर्मा ने कम समय में ही द वाइस इंडिया किड्स की विजेता बनकर अपनी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम कर ली। इसके बाद निष्ठा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निष्ठा शर्मा ने गायन के क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक पुरस्कार व सम्मान प्राप्त किया। उन्हें रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार, सुपर स्टार सिंगर सोनी टीवी फाइनलिस्ट, मुंबई के जुनून व मणिकर्णिका अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
विवेकनगर निवासी राधेकृष्ण तिवारी की पुत्री सोनल तिवारी ने हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके जिले का मान बढ़ाया है। सबसे पहले उन्होंने गोरखपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद केडी सिंह बाबू महिला छात्रावास में रहकर अपना प्रशिक्षण जारी रखा। लगन व मेहनत का नतीजा रहा कि सोनल को वर्ष 2019 में भुवनेश्वर में हुई आल इंडिया यूनिवर्सिटी हॉकी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल मिला। मौजूदा समय में वे इंफाल सांई सेंटर मणिपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। आगामी 15 फरवरी से आंध्र प्रदेश में होने वाली सीनियर महिला नेशनल हॉकी चैंपियनशिप के लिए उनका चयन यूपी टीम से हुआ है।
शास्त्रीनगर निवासी आशीष श्रीवास्तव की करीब 11 वर्षीय पुत्री अनन्या नृत्य के क्षेत्र में छोटी सी उम्र में ही अपना लोहा मनवाया है। अनन्या ने मात्र छह वर्ष की उम्र में ही 24 मिनट में 2306 कथक चक्कर लगाते हुए गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इसके बाद अनन्या के नाम एक के बाद एक उपलब्धि जुड़ती जा रही है। 98. 3 एफएम रेडियो के नृत्य कार्यक्रम में वाराणसी में विनर रही। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत केंद्रीय विद्यालय की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम की भी विजेता रही। अनन्या की प्रतिभा को देखते हुए भारत-भारती ने लोक मणि रत्न से सम्मानित किया है।
दूबेपुर क्षेत्र के उतुरी खुशियालपुर गांव निवासी राम सजीवन की पुत्री मनीषा का रुझान बचपन से ही प्रकृति की तरफ रहा। बचपन में मां से प्रेरित होकर राम चरित मानस का पाठ शुरू किया। प्रयागराज विश्वविद्यालय में संगीत से एमए की पढ़ाई के साथ वे राम चरित मानस का पाठ करने लगीं। मनीषा ने पर्यावरण के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करते हुए पौधरोपण के लिए प्रेरित किया। साथ ही बड़ी संख्या में पौधरोपण कराया। कोविड काल में समाज सेवा करते हुए मास्क व भोजन का वितरण किया। आज वे अपने क्षेत्र में समाज सेवा की पहचान बन चुकी हैं।
| सुल्तानपुर। जिले की बेटियों ने अपनी लगन व मेहनत के दम पर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। समाज सेवा, खेल से लेकर सांस्कृतिक क्षेत्र तक में उनका दबदबा है। शिक्षा में बालिकाएं हर वर्ष बालकों को पीछे छोड़ती जा रही हैं। सरकारी सेवाओं में भी वे अपना स्थान बना रही हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर कुछ बालिकाओं ने अपनी उपलब्धियां व अनुभव साझा किए। निराला नगर निवासी जयप्रकाश शर्मा की बेटी निष्ठा की बचपन से ही संगीत में रुचि रही। निष्ठा ने संगीत के क्षेत्र को ही कॅरिअर के रूप में चुना। माता-पिता की प्रेरणा व अपनी मेहनत से निष्ठा शर्मा ने कम समय में ही द वाइस इंडिया किड्स की विजेता बनकर अपनी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम कर ली। इसके बाद निष्ठा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निष्ठा शर्मा ने गायन के क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक पुरस्कार व सम्मान प्राप्त किया। उन्हें रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार, सुपर स्टार सिंगर सोनी टीवी फाइनलिस्ट, मुंबई के जुनून व मणिकर्णिका अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। विवेकनगर निवासी राधेकृष्ण तिवारी की पुत्री सोनल तिवारी ने हॉकी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके जिले का मान बढ़ाया है। सबसे पहले उन्होंने गोरखपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद केडी सिंह बाबू महिला छात्रावास में रहकर अपना प्रशिक्षण जारी रखा। लगन व मेहनत का नतीजा रहा कि सोनल को वर्ष दो हज़ार उन्नीस में भुवनेश्वर में हुई आल इंडिया यूनिवर्सिटी हॉकी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल मिला। मौजूदा समय में वे इंफाल सांई सेंटर मणिपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। आगामी पंद्रह फरवरी से आंध्र प्रदेश में होने वाली सीनियर महिला नेशनल हॉकी चैंपियनशिप के लिए उनका चयन यूपी टीम से हुआ है। शास्त्रीनगर निवासी आशीष श्रीवास्तव की करीब ग्यारह वर्षीय पुत्री अनन्या नृत्य के क्षेत्र में छोटी सी उम्र में ही अपना लोहा मनवाया है। अनन्या ने मात्र छह वर्ष की उम्र में ही चौबीस मिनट में दो हज़ार तीन सौ छः कथक चक्कर लगाते हुए गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इसके बाद अनन्या के नाम एक के बाद एक उपलब्धि जुड़ती जा रही है। अट्ठानवे. तीन एफएम रेडियो के नृत्य कार्यक्रम में वाराणसी में विनर रही। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत केंद्रीय विद्यालय की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम की भी विजेता रही। अनन्या की प्रतिभा को देखते हुए भारत-भारती ने लोक मणि रत्न से सम्मानित किया है। दूबेपुर क्षेत्र के उतुरी खुशियालपुर गांव निवासी राम सजीवन की पुत्री मनीषा का रुझान बचपन से ही प्रकृति की तरफ रहा। बचपन में मां से प्रेरित होकर राम चरित मानस का पाठ शुरू किया। प्रयागराज विश्वविद्यालय में संगीत से एमए की पढ़ाई के साथ वे राम चरित मानस का पाठ करने लगीं। मनीषा ने पर्यावरण के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करते हुए पौधरोपण के लिए प्रेरित किया। साथ ही बड़ी संख्या में पौधरोपण कराया। कोविड काल में समाज सेवा करते हुए मास्क व भोजन का वितरण किया। आज वे अपने क्षेत्र में समाज सेवा की पहचान बन चुकी हैं। |
पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने उच्चतम न्यायालय से 21-28 फरवरी के बीच फ्रांस जाने की इजाजत मांगी है। इस मामले पर अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अपनी प्रतिक्रिया 28 जनवरी तक दाखिल करने को कहा है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। जस्टिस गोगोई ने ईडी से अगले सोमवार तक कार्ति चिदंबरम की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
इससे पहले 16 जनवरी को इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई थी। गोगोई ने कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था, 'हमारे पास और भी काम हैं। ' रिपोर्ट के मुताबिक कार्ति चाहते थे कि उनकी उस याचिका पर तुरंत सुनाई की जाए जिसमें विदेश यात्रा के लिए इजाजत की मांग की गई है। लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया था।
बता दें कि नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति की विदेश यात्रा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, "कार्ति चिदंबरम का विदेश जाना उतना जरूरी नहीं है जिससे कि इसका असर अन्य प्रकरणों पर पड़े। " इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ थे। रिपोर्ट के मुताबिक गोगोई ने तुरंत सुनवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं को खारिज किया है।
इससे पहले नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति की विदेश यात्रा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, "कार्ति चिदंबरम का विदेश जाना उतना जरूरी नहीं है जिससे कि इसका असर अन्य प्रकरणों पर पड़े। " इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ थे। रिपोर्ट के मुताबिक गोगोई ने तुरंत सुनवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं को खारिज किया है।
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| पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने उच्चतम न्यायालय से इक्कीस-अट्ठाईस फरवरी के बीच फ्रांस जाने की इजाजत मांगी है। इस मामले पर अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को अपनी प्रतिक्रिया अट्ठाईस जनवरी तक दाखिल करने को कहा है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। जस्टिस गोगोई ने ईडी से अगले सोमवार तक कार्ति चिदंबरम की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। इससे पहले सोलह जनवरी को इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई थी। गोगोई ने कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था, 'हमारे पास और भी काम हैं। ' रिपोर्ट के मुताबिक कार्ति चाहते थे कि उनकी उस याचिका पर तुरंत सुनाई की जाए जिसमें विदेश यात्रा के लिए इजाजत की मांग की गई है। लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया था। बता दें कि नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति की विदेश यात्रा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, "कार्ति चिदंबरम का विदेश जाना उतना जरूरी नहीं है जिससे कि इसका असर अन्य प्रकरणों पर पड़े। " इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ थे। रिपोर्ट के मुताबिक गोगोई ने तुरंत सुनवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं को खारिज किया है। इससे पहले नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति की विदेश यात्रा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, "कार्ति चिदंबरम का विदेश जाना उतना जरूरी नहीं है जिससे कि इसका असर अन्य प्रकरणों पर पड़े। " इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ थे। रिपोर्ट के मुताबिक गोगोई ने तुरंत सुनवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं को खारिज किया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
राखी सावंत पूरे लॉकडाउन के दौरान पैपराजी से रूबरू होती रहीं। राखी को उनके बयानों के लिए जाना जाता है। वह हर मुद्दे पर अपनी राय रखती हैं फिर वह मुद्दा कोई भी हो। अब इन दिनों उनके वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। कभी वह राजनीति को लेकर बात करते नजर आती हैं तो कभी सेलेब्स को लेकर। राखी बीते दिनों से करण महरा और निशा की अनबन के बारे में बयान देती रहीं हैं। वैसे राखी एक ऐसी अदाकारा हैं जो अनजान लोगों की क्लास भी लगाने से पीछे नहीं हटतीं। अब इस समय भी राखी का एक वीडियो वायरल हो रहा है।
जी दरअसल बीते शनिवार को राखी सावंत पैपराजी से रूबरू हुईं और कई सवालों के जवाब दिए। इस दौरान राखी ने अभिनेता पर्ल वी पुरी की गिरफ्तारी पर बात की। उन्होंने पर्ल का समर्थन किया। राखी का कहना था कि इंडस्ट्री को किसी की नजर लग गई है हर दिन कोई ना कोई बुरी खबर सुनने को मिल ही जाती है। जिस दौरान राखी यह सब बातें कर रही थी उस दौरान एक शख्स उन्हें घूरने लगा। यह देखकर राखी भड़क गईं और उन्होंने अपनी बात रोककर उस शख्स से कहा, 'अंकल आप जाओ ना मैं इंटरव्यू कर रही हूं। आप क्यों देख रहे हो? लड़की नहीं देखी अंकल? जाओ ना, देखो उधर एक्सीडेंट हो जाएगा। '
इसके बाद फोटोग्राफर्स से राखी ने कहा, "वो मेरे को देख रहा है। मेरे कॉस्टूयम को देख रहा है। उधर से बस और गाड़ी आ रही है। " आप सभी को याद हो तो राखी सावंत ने बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया था। इस शो में वह वाइल्ड कार्ड के जरिए पहुंची थीं और टॉप 5 तक पहुंचने में कामयाब रहीं। शो के दौरान राखी को खूब प्यार मिला था।
पर्ल वी पुरी को नहीं मिली जमानत, भेजा गया 14 दिन की न्यायिक हिरासत में। । ।
शादी के लिए माहिरा जैसी लड़की चाहते हैं पारस छाबड़ा!
मेकअप और नो-मेकअप वाला वीडियो शेयर कर बोली निया शर्मा- झूठ बिकता है। । ।
| राखी सावंत पूरे लॉकडाउन के दौरान पैपराजी से रूबरू होती रहीं। राखी को उनके बयानों के लिए जाना जाता है। वह हर मुद्दे पर अपनी राय रखती हैं फिर वह मुद्दा कोई भी हो। अब इन दिनों उनके वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। कभी वह राजनीति को लेकर बात करते नजर आती हैं तो कभी सेलेब्स को लेकर। राखी बीते दिनों से करण महरा और निशा की अनबन के बारे में बयान देती रहीं हैं। वैसे राखी एक ऐसी अदाकारा हैं जो अनजान लोगों की क्लास भी लगाने से पीछे नहीं हटतीं। अब इस समय भी राखी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जी दरअसल बीते शनिवार को राखी सावंत पैपराजी से रूबरू हुईं और कई सवालों के जवाब दिए। इस दौरान राखी ने अभिनेता पर्ल वी पुरी की गिरफ्तारी पर बात की। उन्होंने पर्ल का समर्थन किया। राखी का कहना था कि इंडस्ट्री को किसी की नजर लग गई है हर दिन कोई ना कोई बुरी खबर सुनने को मिल ही जाती है। जिस दौरान राखी यह सब बातें कर रही थी उस दौरान एक शख्स उन्हें घूरने लगा। यह देखकर राखी भड़क गईं और उन्होंने अपनी बात रोककर उस शख्स से कहा, 'अंकल आप जाओ ना मैं इंटरव्यू कर रही हूं। आप क्यों देख रहे हो? लड़की नहीं देखी अंकल? जाओ ना, देखो उधर एक्सीडेंट हो जाएगा। ' इसके बाद फोटोग्राफर्स से राखी ने कहा, "वो मेरे को देख रहा है। मेरे कॉस्टूयम को देख रहा है। उधर से बस और गाड़ी आ रही है। " आप सभी को याद हो तो राखी सावंत ने बिग बॉस चौदह में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया था। इस शो में वह वाइल्ड कार्ड के जरिए पहुंची थीं और टॉप पाँच तक पहुंचने में कामयाब रहीं। शो के दौरान राखी को खूब प्यार मिला था। पर्ल वी पुरी को नहीं मिली जमानत, भेजा गया चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में। । । शादी के लिए माहिरा जैसी लड़की चाहते हैं पारस छाबड़ा! मेकअप और नो-मेकअप वाला वीडियो शेयर कर बोली निया शर्मा- झूठ बिकता है। । । |
के द्वारा सदमे के लिए दिये गये दानों का भी अभिलेखों में उल्लेख प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, इन्द्राग्निदत नाम के एक यवन ने कहा का करवाया था । जुन्नर में दरिल के मैदान का उल्लेख मिलता है। स्वाय से एक अभिलेख में मेरिवर्ण पेठडोर के द्वारा शास्यमुनि के देहावशेष की प्रतिष्ठा उल्लिक्षित है। उसी प्रदेश से डोर दलित के द्वारा एक तड़ाग के दाम काप्राप्त होता है। इस प्रसंग में यह स्मरणीय है कि सदनों की सदमे में रूचि अशोक के समय से मिश्रित होती है। अशोक ने उनमें प्रचार का उल्लेख किया है तथा अपने साम्राज्य में बसे हुए उनके नाम के लिए सवत माया और लिपि में अपनी धर्म प्रशस्ति' का प्रकाशन तक किया विध्य में धर्मरक्षित नाम के यवन को प्रचार कार्य के लिए बना ।
गान्धार कला-गन्धार भवनों का मुख्य केन्द्रमा तथा वहाँ सदन-शिल्प और बौद्ध आदर्श के समन्वय से एक विशिष्ट कला का उद्गम हुआ जिसे 'गन्धारकला' का नाम दिया गया है।" 'भवन-शिल्प' का गर्म यहाँ हेलेनिस्टिक अथवा रोमन प्रभाव है। दुर्भाग्यवश गान्धार प्रतिमाओं का कालनिर्णय अनिवार्यतया विवादग्रस्त है और बतए जहाँ कुछ विद्वान् गारवार-कता की उत्पत्ति प्रथम शती ई०पू० में मानते हैं कुछ अन्य उसे ई० प्रथम ताब्दी में रखते हैं। यह निस्सन्देह है कि इस कला के पोषकों में अपनों के स्थान पर एक और कुषाण हो प्रमुख प्रतीत होते हैं। बान्धार कला के विकास में वन कारीगरों और काम का हाथ था कि यवन शासकों का पहले यह माना जाता था कि युद्ध प्रतिमा को जन्म देने गधारकला को ही है। किन्तु इस पर सन्देह शकट किया गया है और यह है कि सम्रा में बुद्ध की प्रतिमा का आविर्भावस्वतन्त्र रीति से और सम्भवतः सम्पार प्रतिमा के पूर्व हुआ। ई० पू० दूसरी और पहली शताब्दियों में सभी बौद्ध सम्प्रदायों में यूनाधिका बुद्धभक्ति का विकास हुआ विवरण-गमन तथा बुद्धानुस्मृति प्रसिद्ध थी। बुद्ध भगवान के अनुस्मरण में उन्हें अंगविधा में विदित महापुरुष
लापरवाही गनिमा अब बुद्धिस्ट आर्ट एण्ड अदर एसेज चूनवेदेल, बुद्धिस्ट आर्ट इन इण्डिया; स्मि ए हिस्टरी ऑफाइन आर्ट इसडिएसोलोर, अडियर २० दिनपरि सार्शल दस्सिला ३ जि० | के द्वारा सदमे के लिए दिये गये दानों का भी अभिलेखों में उल्लेख प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, इन्द्राग्निदत नाम के एक यवन ने कहा का करवाया था । जुन्नर में दरिल के मैदान का उल्लेख मिलता है। स्वाय से एक अभिलेख में मेरिवर्ण पेठडोर के द्वारा शास्यमुनि के देहावशेष की प्रतिष्ठा उल्लिक्षित है। उसी प्रदेश से डोर दलित के द्वारा एक तड़ाग के दाम काप्राप्त होता है। इस प्रसंग में यह स्मरणीय है कि सदनों की सदमे में रूचि अशोक के समय से मिश्रित होती है। अशोक ने उनमें प्रचार का उल्लेख किया है तथा अपने साम्राज्य में बसे हुए उनके नाम के लिए सवत माया और लिपि में अपनी धर्म प्रशस्ति' का प्रकाशन तक किया विध्य में धर्मरक्षित नाम के यवन को प्रचार कार्य के लिए बना । गान्धार कला-गन्धार भवनों का मुख्य केन्द्रमा तथा वहाँ सदन-शिल्प और बौद्ध आदर्श के समन्वय से एक विशिष्ट कला का उद्गम हुआ जिसे 'गन्धारकला' का नाम दिया गया है।" 'भवन-शिल्प' का गर्म यहाँ हेलेनिस्टिक अथवा रोमन प्रभाव है। दुर्भाग्यवश गान्धार प्रतिमाओं का कालनिर्णय अनिवार्यतया विवादग्रस्त है और बतए जहाँ कुछ विद्वान् गारवार-कता की उत्पत्ति प्रथम शती ईशून्यपूशून्य में मानते हैं कुछ अन्य उसे ईशून्य प्रथम ताब्दी में रखते हैं। यह निस्सन्देह है कि इस कला के पोषकों में अपनों के स्थान पर एक और कुषाण हो प्रमुख प्रतीत होते हैं। बान्धार कला के विकास में वन कारीगरों और काम का हाथ था कि यवन शासकों का पहले यह माना जाता था कि युद्ध प्रतिमा को जन्म देने गधारकला को ही है। किन्तु इस पर सन्देह शकट किया गया है और यह है कि सम्रा में बुद्ध की प्रतिमा का आविर्भावस्वतन्त्र रीति से और सम्भवतः सम्पार प्रतिमा के पूर्व हुआ। ईशून्य पूशून्य दूसरी और पहली शताब्दियों में सभी बौद्ध सम्प्रदायों में यूनाधिका बुद्धभक्ति का विकास हुआ विवरण-गमन तथा बुद्धानुस्मृति प्रसिद्ध थी। बुद्ध भगवान के अनुस्मरण में उन्हें अंगविधा में विदित महापुरुष लापरवाही गनिमा अब बुद्धिस्ट आर्ट एण्ड अदर एसेज चूनवेदेल, बुद्धिस्ट आर्ट इन इण्डिया; स्मि ए हिस्टरी ऑफाइन आर्ट इसडिएसोलोर, अडियर बीस दिनपरि सार्शल दस्सिला तीन जिशून्य |
भारत सरकार ने 13 नवंबर से ऐसे किसी भी सौंदर्य उत्पाद के आयात पर रोक लगा दी है जिसे बनाने के लिए जानवरों पर परीक्षण किए गए हों. सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है.
इससे पहले भारत सरकार जून में एक अधिसूचना के जरिए भारत में सौंदर्य उत्पादों के निर्माण के लिए जानवरों पर परीक्षण करने पर रोक लगा चुकी है.
कई सौंदर्य उत्पादों के निर्माण के दौरान मनुष्यों से पहले जानवरों पर उनका परीक्षण किया जाता है, जैसे शैंपू, लिपस्टिक, मशकारा, टूथपेस्ट इत्यादि.
ये परीक्षण खरगोश, चूहे, हैम्सटर और ऐसे ही अन्य जानवरों पर किए जाते हैं.
इन परीक्षणों के लिए जानवरों के संग काफ़ी क्रूर व्यवहार किया जाता है.
जैसे, लिपस्टिक का परीक्षण करने के लिए चूहों का मुँह खोलकर उनके मसूढ़ों पर उसे मला जाता है और देखा जाता है कि उसका चूहों पर क्या असर हुआ है. क्या उनके मसूढ़ों पर छाले पड़े या नहीं.
इसी तरह शैम्पू के लिए खरगोशों को एक मशीन में बंद करके उनकी आंखों की पलकों को हटाकर उनमें शैम्पू का रसायन डाला जाता है और देखा जाता है कि क्या वो आंशिक या पूरी तरह से अंधे हो गए हैं.
जानवरों पर परीक्षण के मामले में सौंदर्य उत्पाद के लिए किए जाने वाले परीक्षण एक छोटा हिस्सा हैं.
जानवरों पर परीक्षण के व्यापक परिदृश्य को देखें तो यह जीत बहुत कम है मगर यह अच्छी शुरुआत है.
हम तक़रीबन सौ सालों से जानवरों पर परीक्षण करते आ रहे हैं. अगर इतने समय बाद भारत सरकार ने इसे रोका है यह बड़ी बात है.
इससे जानवरों को तो फ़ायदा होगा, साथ ही विज्ञान को भी फ़ायदा होगा.
भारत सरकार का क़दम इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि यह न केवल भारत बल्कि दूसरे देशों की प्रयोगशाला के जानवरों पर भी रोक लगाता है.
(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)
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| भारत सरकार ने तेरह नवंबर से ऐसे किसी भी सौंदर्य उत्पाद के आयात पर रोक लगा दी है जिसे बनाने के लिए जानवरों पर परीक्षण किए गए हों. सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. इससे पहले भारत सरकार जून में एक अधिसूचना के जरिए भारत में सौंदर्य उत्पादों के निर्माण के लिए जानवरों पर परीक्षण करने पर रोक लगा चुकी है. कई सौंदर्य उत्पादों के निर्माण के दौरान मनुष्यों से पहले जानवरों पर उनका परीक्षण किया जाता है, जैसे शैंपू, लिपस्टिक, मशकारा, टूथपेस्ट इत्यादि. ये परीक्षण खरगोश, चूहे, हैम्सटर और ऐसे ही अन्य जानवरों पर किए जाते हैं. इन परीक्षणों के लिए जानवरों के संग काफ़ी क्रूर व्यवहार किया जाता है. जैसे, लिपस्टिक का परीक्षण करने के लिए चूहों का मुँह खोलकर उनके मसूढ़ों पर उसे मला जाता है और देखा जाता है कि उसका चूहों पर क्या असर हुआ है. क्या उनके मसूढ़ों पर छाले पड़े या नहीं. इसी तरह शैम्पू के लिए खरगोशों को एक मशीन में बंद करके उनकी आंखों की पलकों को हटाकर उनमें शैम्पू का रसायन डाला जाता है और देखा जाता है कि क्या वो आंशिक या पूरी तरह से अंधे हो गए हैं. जानवरों पर परीक्षण के मामले में सौंदर्य उत्पाद के लिए किए जाने वाले परीक्षण एक छोटा हिस्सा हैं. जानवरों पर परीक्षण के व्यापक परिदृश्य को देखें तो यह जीत बहुत कम है मगर यह अच्छी शुरुआत है. हम तक़रीबन सौ सालों से जानवरों पर परीक्षण करते आ रहे हैं. अगर इतने समय बाद भारत सरकार ने इसे रोका है यह बड़ी बात है. इससे जानवरों को तो फ़ायदा होगा, साथ ही विज्ञान को भी फ़ायदा होगा. भारत सरकार का क़दम इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि यह न केवल भारत बल्कि दूसरे देशों की प्रयोगशाला के जानवरों पर भी रोक लगाता है. |
अतीतकाल में कर्म करते समय देखे गए सभी आलम्बन 'कर्मनिमित्त' कहलाते हैं । वह कर्मनिमित्त प्रत्त्युपन्न एवं अतीत - इस तरह दो प्रकार का हो होता है । विहार का दान करनेवाले को मरणासन्नकाल में जब 'विहार' अवभासित होता है या गोघातक को मरणासन्नकाल में 'गो' अवभासित होती है तो ये अतीत कर्मनिमित्त होते हैं । इस तरह अनेक भवों के कर्मनिमित्तों के अतीतभाव का विचार करना चाहिए । ( मरणासन्न काल में मन्दप्रवृत्ति के उत्पाद के विषय में 'वीथिपरिच्छेद-जवननियम' में कहा जा चुका है।)
प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त - प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त मुख्य रूप से नहीं होता । मरणासन्न जवन प्रतिसन्धिफल देने में समर्थ कर्म होने पर ही मुख्य रूप से प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त हो सकता है; किन्तु मरणासन्न जवन चूंकि नवप्रतिसन्धि को आलम्बन अवभासित होने के लिए कृत्य करता है, अतः वह स्वयं प्रतिसन्धिफल नहीं दे सकता । वह ( मरणासन्न जवन ) 'नवप्रतिसन्धि को आलम्बन अवभासित होने के लिए कृत्य. करना तथा स्वतः भी प्रतिसन्धिफल देना - इस प्रकार दो कृत्य सम्पन्न नहीं कर सकता । तथा च - कर्म द्वारा फल दिए जाने के स्थल में 'कटत्ता उपचितत्ता' - इस प्रकार कहा गया है। उसमें एक बार किए गए कर्म के लिए 'कटत्ता' तथा अनेक बार किए गए कर्म के लिए 'उपचितत्ता' कहा गया है। एक बार किया जाने से उसके द्वारा फल दिया जाना असम्भव होता है; अनेक बार किया जाने पर ही फल दिया जाना सम्भव होता है । मरणासन्नवीथि में अनेक बार करने का अवकाश ही नहीं है । "निकन्तिक्खणे द्वे हेतु सकुसला " - इस 'पटिसम्भिदामग्गपालि' में एक कुशल कर्म करने के अनस्तर उस कुशल के प्रति आसक्ति होने पर वह (कर्म) प्रतिसन्धि फल देने में समर्थ होता है - ऐसा कहा गया है। किन्तु मरणासन्नकाल में कर्म करने के अनन्तर उसके प्रति आसक्ति होने के लिए अवकाश नहीं है तथा मरणासन्न जवन यदि चक्षुर्द्वारिक-आदि पञ्चद्वारिक जवन होता है तो पञ्चद्वारिक जवन, अतिदुर्बल होने के कारण किसी एक कर्मपथ को करने में असमर्थ होता है। अतः उपर्युक्त कारणों से मरणासन्न जवन कर्मपथ नहीं हो सकता ! यदि कर्मपथ नहीं हो सकता है तो मरणासन्न जवन का प्रत्युत्पन्न आलम्बन भी मुख्य कर्मनिमित्त नहीं हो सकता है । किसी प्रकार सम्बन्ध रखनेवाला प्रतिरूपक कर्मनिमित्त ही हो सकता है ।
प्रतिरूपक कर्मनिमित्त - कोई व्यक्ति च्युति होने के लिए लेटा हुआ है। उसके शाति-सम्बन्धी उसे कुशल कर्म की प्राप्ति कराने के लिए फूल लेकर आते हैं। कुछ लोग कहते हैं 'इन पुष्पों द्वारा भगवान् का पूजन करो' । वह रोगी लेटे हुए ही उन पुष्पों से भगवान् की मानस पूजा करता है। उसमें कुशलजवन पुनः पुनः उत्पन्न हो रहे हैं। उसका कृतकर्म उपचित कर्म होता है। उन कुशलकर्मों के अवलम्बन से उन कुशल कर्मों के प्रति आसक्ति भी होती है। वे कुशल जवन आसन्नकर्म होकर मुख्यरूप से फल देनेवाले होते हैं। पुष्प मुख्यरूप से कर्मनिमित्त होते हैं। धीरे धीरे उसको | अतीतकाल में कर्म करते समय देखे गए सभी आलम्बन 'कर्मनिमित्त' कहलाते हैं । वह कर्मनिमित्त प्रत्त्युपन्न एवं अतीत - इस तरह दो प्रकार का हो होता है । विहार का दान करनेवाले को मरणासन्नकाल में जब 'विहार' अवभासित होता है या गोघातक को मरणासन्नकाल में 'गो' अवभासित होती है तो ये अतीत कर्मनिमित्त होते हैं । इस तरह अनेक भवों के कर्मनिमित्तों के अतीतभाव का विचार करना चाहिए । प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त - प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त मुख्य रूप से नहीं होता । मरणासन्न जवन प्रतिसन्धिफल देने में समर्थ कर्म होने पर ही मुख्य रूप से प्रत्युत्पन्न कर्मनिमित्त हो सकता है; किन्तु मरणासन्न जवन चूंकि नवप्रतिसन्धि को आलम्बन अवभासित होने के लिए कृत्य करता है, अतः वह स्वयं प्रतिसन्धिफल नहीं दे सकता । वह 'नवप्रतिसन्धि को आलम्बन अवभासित होने के लिए कृत्य. करना तथा स्वतः भी प्रतिसन्धिफल देना - इस प्रकार दो कृत्य सम्पन्न नहीं कर सकता । तथा च - कर्म द्वारा फल दिए जाने के स्थल में 'कटत्ता उपचितत्ता' - इस प्रकार कहा गया है। उसमें एक बार किए गए कर्म के लिए 'कटत्ता' तथा अनेक बार किए गए कर्म के लिए 'उपचितत्ता' कहा गया है। एक बार किया जाने से उसके द्वारा फल दिया जाना असम्भव होता है; अनेक बार किया जाने पर ही फल दिया जाना सम्भव होता है । मरणासन्नवीथि में अनेक बार करने का अवकाश ही नहीं है । "निकन्तिक्खणे द्वे हेतु सकुसला " - इस 'पटिसम्भिदामग्गपालि' में एक कुशल कर्म करने के अनस्तर उस कुशल के प्रति आसक्ति होने पर वह प्रतिसन्धि फल देने में समर्थ होता है - ऐसा कहा गया है। किन्तु मरणासन्नकाल में कर्म करने के अनन्तर उसके प्रति आसक्ति होने के लिए अवकाश नहीं है तथा मरणासन्न जवन यदि चक्षुर्द्वारिक-आदि पञ्चद्वारिक जवन होता है तो पञ्चद्वारिक जवन, अतिदुर्बल होने के कारण किसी एक कर्मपथ को करने में असमर्थ होता है। अतः उपर्युक्त कारणों से मरणासन्न जवन कर्मपथ नहीं हो सकता ! यदि कर्मपथ नहीं हो सकता है तो मरणासन्न जवन का प्रत्युत्पन्न आलम्बन भी मुख्य कर्मनिमित्त नहीं हो सकता है । किसी प्रकार सम्बन्ध रखनेवाला प्रतिरूपक कर्मनिमित्त ही हो सकता है । प्रतिरूपक कर्मनिमित्त - कोई व्यक्ति च्युति होने के लिए लेटा हुआ है। उसके शाति-सम्बन्धी उसे कुशल कर्म की प्राप्ति कराने के लिए फूल लेकर आते हैं। कुछ लोग कहते हैं 'इन पुष्पों द्वारा भगवान् का पूजन करो' । वह रोगी लेटे हुए ही उन पुष्पों से भगवान् की मानस पूजा करता है। उसमें कुशलजवन पुनः पुनः उत्पन्न हो रहे हैं। उसका कृतकर्म उपचित कर्म होता है। उन कुशलकर्मों के अवलम्बन से उन कुशल कर्मों के प्रति आसक्ति भी होती है। वे कुशल जवन आसन्नकर्म होकर मुख्यरूप से फल देनेवाले होते हैं। पुष्प मुख्यरूप से कर्मनिमित्त होते हैं। धीरे धीरे उसको |
हाल ही में, कौन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली महिला तैराक बनी है?
हाल ही में, भारतीय महिला तैराक "माना पटेल" ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं है। पाठकों को बता दे की माना पटेल से पहले अब तक किसी भी भारतीय महिला तैराक ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं किया था। माना पटेल अब भारत की तरफ से टोक्यो ओलंपिक में पदक के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगी।
Haal Hee Me , Bharateey Mahila Tairak " Mana Patel " Olympic Me Qualify Karne Wali Pehli Khiladi बनीं Hai . Pathakon Ko Bata De Ki Mana Patel Se Pehle Ab Tak Kisi Bhi Bharateey Mahila Tairak ne Olympic Ke Liye Qualify Nahi Kiya Tha . Mana Patel Ab Bharat Ki Taraf Se Tokyo Olympic Me Padak Ke Liye Apni Dawedari Pesh Karengi .
| हाल ही में, कौन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली भारत की पहली महिला तैराक बनी है? हाल ही में, भारतीय महिला तैराक "माना पटेल" ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं है। पाठकों को बता दे की माना पटेल से पहले अब तक किसी भी भारतीय महिला तैराक ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं किया था। माना पटेल अब भारत की तरफ से टोक्यो ओलंपिक में पदक के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगी। Haal Hee Me , Bharateey Mahila Tairak " Mana Patel " Olympic Me Qualify Karne Wali Pehli Khiladi बनीं Hai . Pathakon Ko Bata De Ki Mana Patel Se Pehle Ab Tak Kisi Bhi Bharateey Mahila Tairak ne Olympic Ke Liye Qualify Nahi Kiya Tha . Mana Patel Ab Bharat Ki Taraf Se Tokyo Olympic Me Padak Ke Liye Apni Dawedari Pesh Karengi . |
श्रीनगर - जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर सेक्टर से सीआरपीएफ और राष्ट्रीय रायफल्स के जवानों ने दो लश्कर के आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से सुरक्षाबलों ने एक ग्रेनेड और कई पत्रिकाएं बरामद की हैं। पुलिस पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर सेक्टर में सोपोर पुलिस, राष्ट्रीय रायफल्स और सीआरपीएफ के जवानों ने मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तोएबा के दो आतंकी तनवीर अहमद मीर और तनवीर अहमद नाजर को गिरफ्तार किया है। शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ आतंकी सोपोर में छिपे हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने भारतीय सेना के जवानों के साथ सोपोर सेक्टर की घेराबंदी की। खुद को घिरता देख आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। काफी देर चली फायरिंग के बाद दोनों लश्कर के आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आतंकियों के पास से एक ग्रेनेड और कुछ पत्रिकाएं बरामद हुई हैं। बता दें कि 15 जुलाई को भी कुपवाड़ा में सेना और आतंकियों के एक दल के बीच मुठभेड़ हुई थी। सेना के इस आपरेशन के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया गया था, जबकि दो सुरक्षाबल गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस आपरेशन के बाद कुपवाड़ा के पड़ोसी बारामूला जिला में जैश के तीन आतंकियों को गिरफ्तार भी किया गया था।
| श्रीनगर - जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर सेक्टर से सीआरपीएफ और राष्ट्रीय रायफल्स के जवानों ने दो लश्कर के आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से सुरक्षाबलों ने एक ग्रेनेड और कई पत्रिकाएं बरामद की हैं। पुलिस पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिला के सोपोर सेक्टर में सोपोर पुलिस, राष्ट्रीय रायफल्स और सीआरपीएफ के जवानों ने मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तोएबा के दो आतंकी तनवीर अहमद मीर और तनवीर अहमद नाजर को गिरफ्तार किया है। शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ आतंकी सोपोर में छिपे हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने भारतीय सेना के जवानों के साथ सोपोर सेक्टर की घेराबंदी की। खुद को घिरता देख आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। काफी देर चली फायरिंग के बाद दोनों लश्कर के आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आतंकियों के पास से एक ग्रेनेड और कुछ पत्रिकाएं बरामद हुई हैं। बता दें कि पंद्रह जुलाई को भी कुपवाड़ा में सेना और आतंकियों के एक दल के बीच मुठभेड़ हुई थी। सेना के इस आपरेशन के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया गया था, जबकि दो सुरक्षाबल गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस आपरेशन के बाद कुपवाड़ा के पड़ोसी बारामूला जिला में जैश के तीन आतंकियों को गिरफ्तार भी किया गया था। |
DELHI: पूरे बिहार में ही नहीं बल्कि देश में चर्चा का विषय था कि आखिरकार किन शर्तों पर तेजस्वी यादव नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने को तैयार हो गये थे. आज उसका खुलासा हो गया है. नीतीश कुमार ये साल बीतने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे और 2023 में तेजस्वी यादव बिहार के सीएम की कुर्सी संभालेंगे. राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने मीडिया से बात करते हुए ये खुलासा कर दिया।
जगदानंद सिंह ने क्या कहा?
राजद के प्रदेश अध्यक्ष जदगानंद सिंह के इस बयान के बाद बिहार में पाला बदल से पहले हुई डीलिंग सामने आ गयी है. दरअसल 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी बार-बार ये कह रहे थे कि वे किसी सूरत में नीतीश कुमार जैसे पलटीमार नेता से हाथ नहीं मिलायेंगे. लेकिन अचानक से पिछले महीने यानि अगस्त 2021 में तेजस्वी का हृदय परिवर्तन हुआ औऱ वे नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम बन गये. जेडीयू से लगभग दो गुणा विधायक होने के बाद भी तेजस्वी का डिप्टी सीएम बनकर संतुष्ट हो जाना सियासी जानकारों को हैरान कर रहा था. आज ये साफ हो गया कि डीलिंग क्या हुई है.
वैसे भी कल ही राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि वे तेजस्वी को बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. लालू यादव ने ये भी कहा था कि नीतीश देश की राजनीति करेंगे. लालू ने खुलकर ये नहीं बताया था कि कब नीतीश देश की राजनीति करेंगे और कब तेजस्वी सीएम बनेंगे. लेकिन लालू-तेजस्वी के सबसे करीबी नेता माने जाने वाले जगदानंद सिंह के बयान से सब साफ कर दिया है.
बता दें कि जगदानंद सिंह को लालू-तेजस्वी ने दोबारा राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह नीतीश मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री हैं. सुधाकर सिंह भ्रष्टाचार को लेकर अपने बयानों से काफी चर्चे में रह रहे हैं. उधर राजद के सम्मेलन में पार्टी के वरीय नेता शिवानंद तिवारी कह चुके हैं कि 2025 के बाद नीतीश कुमार को आश्रम खोल लेना चाहिये.
| DELHI: पूरे बिहार में ही नहीं बल्कि देश में चर्चा का विषय था कि आखिरकार किन शर्तों पर तेजस्वी यादव नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने को तैयार हो गये थे. आज उसका खुलासा हो गया है. नीतीश कुमार ये साल बीतने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे और दो हज़ार तेईस में तेजस्वी यादव बिहार के सीएम की कुर्सी संभालेंगे. राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने मीडिया से बात करते हुए ये खुलासा कर दिया। जगदानंद सिंह ने क्या कहा? राजद के प्रदेश अध्यक्ष जदगानंद सिंह के इस बयान के बाद बिहार में पाला बदल से पहले हुई डीलिंग सामने आ गयी है. दरअसल दो हज़ार बीस के विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी बार-बार ये कह रहे थे कि वे किसी सूरत में नीतीश कुमार जैसे पलटीमार नेता से हाथ नहीं मिलायेंगे. लेकिन अचानक से पिछले महीने यानि अगस्त दो हज़ार इक्कीस में तेजस्वी का हृदय परिवर्तन हुआ औऱ वे नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम बन गये. जेडीयू से लगभग दो गुणा विधायक होने के बाद भी तेजस्वी का डिप्टी सीएम बनकर संतुष्ट हो जाना सियासी जानकारों को हैरान कर रहा था. आज ये साफ हो गया कि डीलिंग क्या हुई है. वैसे भी कल ही राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि वे तेजस्वी को बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. लालू यादव ने ये भी कहा था कि नीतीश देश की राजनीति करेंगे. लालू ने खुलकर ये नहीं बताया था कि कब नीतीश देश की राजनीति करेंगे और कब तेजस्वी सीएम बनेंगे. लेकिन लालू-तेजस्वी के सबसे करीबी नेता माने जाने वाले जगदानंद सिंह के बयान से सब साफ कर दिया है. बता दें कि जगदानंद सिंह को लालू-तेजस्वी ने दोबारा राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह नीतीश मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री हैं. सुधाकर सिंह भ्रष्टाचार को लेकर अपने बयानों से काफी चर्चे में रह रहे हैं. उधर राजद के सम्मेलन में पार्टी के वरीय नेता शिवानंद तिवारी कह चुके हैं कि दो हज़ार पच्चीस के बाद नीतीश कुमार को आश्रम खोल लेना चाहिये. |
सुखनासीलाल - अच्छा, लेकिन किसी से जिक्र न हो । रणधीरसिंह के मिजाज को तो तुम जानते ही हो, उनके आने का समय हो गया चलो तुम्हारे हिसाब का जमा खर्च करा दें।
( दोनों गये )
[ इति तृतीय गर्भोक । ]
अथ चतुर्थ गर्भाक ।
स्थान, रणधीरसिंह का महल
( बीच में गोल मेज पर एक दर्पण रखा है, लंप जल रहा है, चारों तरफ मखमली कुर्सियाँ रखी हैं, दर्पण के सन्मुख चौबे जी एक कुर्सी पर रज लगाये बैठे हैं । )
चौबे जी - ( दर्पण में दूसरा चौबे समझ कर ) चोबे जूतुम राजी हो, मधुपुरी तेक दिन भये ? हमारे घरहू गये हे, हमारे छोरानै तुमको अपनों बाबा तो नांय समझ लो, ( डरकर मन में ) इनको यहाँ रहवो अच्छो नांहिं । ( प्रकट ) भैय्या यहां का तंत है तुम कहो तो इमहूँ तुमारे संग परदेस चलें, तुमनेँ भांगहू पीईके नांहिं ? नांहिं पीई होइ तो हमारे पास लुगदी तय्यार है; छान डारै । (१)
( रणधीर और रिपुदमन का प्रवेश )
( १ ) चौवे जी तुम राजी हो, मथुरा से आए कितने दिन हुए ? हमारे·घर भी गये थे। हमारे लड़के ने तुमको अपना बाबा तो नहीं समझ लिया । (डरकर मन में) इनका यहां रहना अच्छा नहीं । (प्रकट) भाई यहां क्या सार है, तुम कहो तो हम भी तुम्हारे साथ परदेश चलें, | सुखनासीलाल - अच्छा, लेकिन किसी से जिक्र न हो । रणधीरसिंह के मिजाज को तो तुम जानते ही हो, उनके आने का समय हो गया चलो तुम्हारे हिसाब का जमा खर्च करा दें। [ इति तृतीय गर्भोक । ] अथ चतुर्थ गर्भाक । स्थान, रणधीरसिंह का महल चौबे जी - चोबे जूतुम राजी हो, मधुपुरी तेक दिन भये ? हमारे घरहू गये हे, हमारे छोरानै तुमको अपनों बाबा तो नांय समझ लो, इनको यहाँ रहवो अच्छो नांहिं । भैय्या यहां का तंत है तुम कहो तो इमहूँ तुमारे संग परदेस चलें, तुमनेँ भांगहू पीईके नांहिं ? नांहिं पीई होइ तो हमारे पास लुगदी तय्यार है; छान डारै । चौवे जी तुम राजी हो, मथुरा से आए कितने दिन हुए ? हमारे·घर भी गये थे। हमारे लड़के ने तुमको अपना बाबा तो नहीं समझ लिया । इनका यहां रहना अच्छा नहीं । भाई यहां क्या सार है, तुम कहो तो हम भी तुम्हारे साथ परदेश चलें, |
न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच रविवार को पहला टी-20 मुकाबला खेला गया। पलेकल में खेले गए रोमांचक मुकाबले में न्यूजीलैंड ने बाजी मारी और श्रीलंका को 5 विकेट से हरा दिया।
हार के बावजूद श्रीलंका के नाम कई रिकॉर्ड भी दर्ज हो गए। कप्तान मलिंगा जहां 99 विकेट के साथ टी-20 में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने वहीं हार के साथ श्रीलंका टी-20 में सबसे अधिक 57 मैच हारने वाली टीम बन गई।
इसके अलावा श्रीलंका के खिलाड़ी इसुरु उडाना ने एक खास उपलब्धि अपने नाम कर ली। उडाना ने मात्र तीन गेंदों में 500 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 15 रन बनाए। वो अब दो से अधिक गेंदें खेलकर 500 के स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले पहले श्रीलंकाई और दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे उडाना ने तीन गेंदों में दो छक्के जड़े और नाबाद रहे।
उडाना से पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी एल्बी मोर्कल ने भारत के खिलाफ तीन गेंदों में 533. 33 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 16 रन बनाए थे।
| न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच रविवार को पहला टी-बीस मुकाबला खेला गया। पलेकल में खेले गए रोमांचक मुकाबले में न्यूजीलैंड ने बाजी मारी और श्रीलंका को पाँच विकेट से हरा दिया। हार के बावजूद श्रीलंका के नाम कई रिकॉर्ड भी दर्ज हो गए। कप्तान मलिंगा जहां निन्यानवे विकेट के साथ टी-बीस में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने वहीं हार के साथ श्रीलंका टी-बीस में सबसे अधिक सत्तावन मैच हारने वाली टीम बन गई। इसके अलावा श्रीलंका के खिलाड़ी इसुरु उडाना ने एक खास उपलब्धि अपने नाम कर ली। उडाना ने मात्र तीन गेंदों में पाँच सौ की स्ट्राइक रेट से नाबाद पंद्रह रन बनाए। वो अब दो से अधिक गेंदें खेलकर पाँच सौ के स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले पहले श्रीलंकाई और दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे उडाना ने तीन गेंदों में दो छक्के जड़े और नाबाद रहे। उडाना से पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी एल्बी मोर्कल ने भारत के खिलाफ तीन गेंदों में पाँच सौ तैंतीस. तैंतीस की स्ट्राइक रेट से नाबाद सोलह रन बनाए थे। |
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