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इश्क़ किया तो डूबेगा डूबेगा इश्क़ नहीं तो तैरेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू मस्ती में झूमेगा डोलेगा डोलेगा आँखों की भाषा बोलेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू किस्मत वाला डूबे यहां ये प्रेम का दरिया दर्द उसी को मिले यहां जिसे चाहे सांवरिया पी ले प्याला प्रेम ज़हर है चख ले हो.. (पी ले ना प्रेम ज़हर हो सागर में मिल जा लहर हो www.hinditracks.in बीत ना जाए उम्र हो मर ले तू जीना है अगर ) × 2 आजा ना पिया आजा ना पिया जिस्म का ये शहर बेस्ट पूरी जला जा फूँक दे मुझको आग में पिया हस्ती मेरी मिटा जा राख बना के मुझको उड़ा दे ओ मेरे रा पिया ओ मेरे रा पिया ओ मेरे रा पिया पिया.. (पी ले ना प्रेम ज़हर हो सागर में मिल जा लहर हो बीत ना जाए उम्र हो मर ले तू जीना है अगर ) × 2 आजा ना पिया आजा ना पिया कस ले मुझको पूरा पूरा तोड़ दे मुझको आजा सांस की आँधी मचा दे बनके तूफ़ान आजा नीदें हिला दे इश्क पिला दे ओ मेरे ज़हर पिया ओ मेरे ज़हर पिया इश्क़ किया तो डूबेगा डूबेगा इश्क़ नहीं तो तैरेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू मस्ती में झूमेगा डोलेगा डोलेगा आँखों की भाषा बोलेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू किस्मत वाला डूबे यहां ये प्रेम का दरिया दर्द उसी को मिले यहां जिसे चाहे सांवरिया पी ले प्याला प्रेम ज़हर है चख ले हो.. (पी ले ना प्रेम ज़हर हो सागर में मिल जा लहर हो बीत ना जाए उम्र हो मर ले तू जीना है अगर ) × 2
इश्क़ किया तो डूबेगा डूबेगा इश्क़ नहीं तो तैरेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू मस्ती में झूमेगा डोलेगा डोलेगा आँखों की भाषा बोलेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू किस्मत वाला डूबे यहां ये प्रेम का दरिया दर्द उसी को मिले यहां जिसे चाहे सांवरिया पी ले प्याला प्रेम ज़हर है चख ले हो.. × दो आजा ना पिया आजा ना पिया जिस्म का ये शहर बेस्ट पूरी जला जा फूँक दे मुझको आग में पिया हस्ती मेरी मिटा जा राख बना के मुझको उड़ा दे ओ मेरे रा पिया ओ मेरे रा पिया ओ मेरे रा पिया पिया.. × दो आजा ना पिया आजा ना पिया कस ले मुझको पूरा पूरा तोड़ दे मुझको आजा सांस की आँधी मचा दे बनके तूफ़ान आजा नीदें हिला दे इश्क पिला दे ओ मेरे ज़हर पिया ओ मेरे ज़हर पिया इश्क़ किया तो डूबेगा डूबेगा इश्क़ नहीं तो तैरेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू मस्ती में झूमेगा डोलेगा डोलेगा आँखों की भाषा बोलेगा तू इश्क़ में मर जा जी लेगा, जी लेगा तू किस्मत वाला डूबे यहां ये प्रेम का दरिया दर्द उसी को मिले यहां जिसे चाहे सांवरिया पी ले प्याला प्रेम ज़हर है चख ले हो.. × दो
वीरे दी वेडिंग एक महिला केन्द्रित फिल्म है। शशांक घोष निर्देशित इस फिल्म में करीना कपूर, सोनम कपूर,स्वरा भास्कर, और शिखा तल्सानिया मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। फिल्म की कहानी दिल्ली की चार लड़कियों और बचपन की दोस्त यानी कालिंदी, अवनी, मीरा और साक्षी के ऊपर आधारित है। जो एक अर्से बाद एक दूसरे से मिलती है। फिल्म की कहानी शुरू होती है, वीरे दी वेडिंग की शुरूआत चार टीनएज लड़कियों से होती है। जो लॉकर रूम में फाइनस एक्जाम के बारे में बात कर रही हैं। दस साल बाद ऑडिएंस को इन लड़कियों के एडल्टहुड में ले जाया जाता है। कालिंदी (करीना कपूर) को कमिटमेंट फोबिया है, जो कि उनके टूटे हुए घर की वजह से है। अवनी (सोनम कपूर) जो कि एक तलाकशुदा वकील हैं, उनकी मां शादी को लेकर अक्सर फोर्स करती रहती हैं। साक्षी (स्वरा भास्कर), एक अमीर लड़की है जिसकी शादी टूटने की कगार पर है। मीरा ( शिखा तल्सानिया) जिसके बड़े पापा उनसे रिश्ता इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि उसने एक फिरंगी से शादी की है। फिल्म वीरे दी वेडिंग का निर्माण रिया कपूर, निखिल द्विवेदी, एकता कपूर और शोभा कपूर ने बैनर बालाजी मोशन पिक्चर्स, अनिल कपूर फिल्म्स एंड कम्युनिकेशन नेटवर्क, केसर ब्रॉडकास्ट एंड मीडिया लिमिटेड के तहत किया है।
वीरे दी वेडिंग एक महिला केन्द्रित फिल्म है। शशांक घोष निर्देशित इस फिल्म में करीना कपूर, सोनम कपूर,स्वरा भास्कर, और शिखा तल्सानिया मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। फिल्म की कहानी दिल्ली की चार लड़कियों और बचपन की दोस्त यानी कालिंदी, अवनी, मीरा और साक्षी के ऊपर आधारित है। जो एक अर्से बाद एक दूसरे से मिलती है। फिल्म की कहानी शुरू होती है, वीरे दी वेडिंग की शुरूआत चार टीनएज लड़कियों से होती है। जो लॉकर रूम में फाइनस एक्जाम के बारे में बात कर रही हैं। दस साल बाद ऑडिएंस को इन लड़कियों के एडल्टहुड में ले जाया जाता है। कालिंदी को कमिटमेंट फोबिया है, जो कि उनके टूटे हुए घर की वजह से है। अवनी जो कि एक तलाकशुदा वकील हैं, उनकी मां शादी को लेकर अक्सर फोर्स करती रहती हैं। साक्षी , एक अमीर लड़की है जिसकी शादी टूटने की कगार पर है। मीरा जिसके बड़े पापा उनसे रिश्ता इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि उसने एक फिरंगी से शादी की है। फिल्म वीरे दी वेडिंग का निर्माण रिया कपूर, निखिल द्विवेदी, एकता कपूर और शोभा कपूर ने बैनर बालाजी मोशन पिक्चर्स, अनिल कपूर फिल्म्स एंड कम्युनिकेशन नेटवर्क, केसर ब्रॉडकास्ट एंड मीडिया लिमिटेड के तहत किया है।
-(पिछले अंक का शेष भाग) सन् 1938 से 1940 तक शेरजंग ने कुछ नहीं लिखा। रिहा होते ही उन्होंने जंगलों और पहाड़ों में घूमना शुरू किया। प्रजामंडल का काम भी करते थे। कुछ ही समय पश्चात वह देहरादून में जाकर ट्रेड यूनियन के काम में लग गए और साथ में कम्युनिस्ट पार्टी की पत्रिका 'चिंगारी' में काम करने लगे। देहरादून से दिल्ली आए अभी तीन-चार महीने ही हुए थे कि दूसरे विश्व युद्ध के छिड़ जाने के कारण सन् 1940 में राजनीतिक कार्यकत्र्ताओं और पुराने क्रांतिकारियों को नज़रबंद कर दिया गया। नजरबंदी की इस अवधि में शेरजंग ने तीन पुस्तकें लिखींः 'कार्लमाक्र्स की जीवनी और शिक्षा', 'कम्युनिस्ट रूस का इतिहास' तथा एक कविता संग्रह 'एक और अनेक क्षण'। पहली दो किताबें उर्दू में थीं जो भारत के बंटवारे से पहले लाहौर से छपी थीं। 'एक और अनेक क्षण' नामक कविता संग्रह कुछ वर्षों पश्चात सन् 1951 में सरस्वती प्रेस, बनारस से प्रकाशित हुआ। चार वर्षों की कैद के बाद वे सन् 1944 में बरेली से रिहा होकर दिल्ली आए। आते ही पूरी सक्रियता के साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में जुट गए। उन दिनों वे पुस्तकों को नियमित रूप से पढ़ते थे, लेकिन कुछ लिख नहीं पाये। सन् 1961-62 में आयु ने उन पर अपना प्रभाव डालना शुरू किया और उनके लिए पूरे जोश के साथ राजनीतिक व सामाजिक काम करना कठिन हो गया। उन्होंने पुनः अपने आपको पूर्णतः पढऩे-लिखने में लगा दिया। लिखना शेरजंग की मानसिक बाध्यता बन गई थी। वे लिखते थे, किंतु उसे प्रकाशित करवाने के लिए भाग-दौड़ नहीं करते थे। उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि उनके लेख प्रकाशित होंगे या नहीं। वे लिखते थे क्योंकि लिखने से उन्हें आनंद मिलता था। उन्होंने वन्य जीवन पर बहुत कुछ लिखा। उनकी कई पुस्तकों की पांडुलिपियां अप्रकाशित रहीं, जैसे गालिब की $गज़लें (हिंदी अनुवाद), हाफिज़ की $गज़लें (हिंदी अनुवाद), नीहूंचे का आदिमानव (जर्मन पुस्तक का हिंदी अनुवाद)। वृद्धावस्था में स्वास्थ्य के ढल जाने पर भी वे दिन में कुछ घंटे नियमित रूप से पढऩे-लिखने में लगाते थे। वे प्रायः रात को लिखते थे जिससे कि रात की शांति में वे अपने आपको एकाग्र कर निर्विघ्न रूप से काम कर सकें। भी-कभी शब्दों का प्रवाह बहुत सरल और सहज होता था। उनके विचार बड़ी सरलता और सहजता के साथ कागज़ पर अंकित होते जाते थे और सुंदर पंक्तियों व लेख की रचना हो जाती थी। लिखने का आनंद ही उनके लिखने की प्रेरणा थी और वही उनका पुरस्कार भी। शेरजंग की लेखनी के महज़ अज्ञेय ही मुरीद नहीं थे। हिंदी के एक अन्य महान लेखक जैनेंद्र ने 1937 में एक लेख में शेरजंग की एक रीति पुस्तिका 'लोरजा' का आलोचनात्मक परिचय दिया। जैनेंद्र लिखते हैं, 'चौधरी शेरजंग अब भी जेल में हैं। सन् 1932 में जेल में ही उनसे मिलना हुआ। वह अंग्रेजी में कविता करते हैं, उर्दू में भी कविता करते हैं और उनकी अंग्रेजी-उर्दू की रचनाओं का रसास्वादन सन् 32 में ही पा सका। तब वह भलीभांति हिंदी जानते थे, यह भी मैं नहीं कह सकता। आज सन् 37 में इन कविताओं को देखकर मुझे बहुत आश्चर्य और बहुत प्रसन्नता है। कविताओं को तो खुद पाठक देखेंगे ही। मुझे उस बारे में कहना क्या है? मुझ अनाड़ी को भी उनमें पद-लालित्य और स्वर-माधुर्य दीख गया है। काव्य से अधिक उसे रीति-काव्य कहिए। अर्थ-गरिमा प्रमुख नहीं, भावना की तरलता और मंजुलता इन गीतों में प्रकट होकर सामने आई है। मधुर पदों की लडिय़ां आपको इतनी मिलेंगी कि शायद मांग से ज्यादा और उनके लिए, मैं नहीं जानता कि पाठक क्यों और भी उनका कृतज्ञ नहीं हो सकता। ' 'लोरजा' शेरजंग की हिंदी कविताओं का पहला संग्रह है। उस समय शेरजंग लाहौर सैंट्रल जेल में आजीवन कारावास के दिन काट रहे थे। इसी कारण उनकी यह पुस्तक सन् 1937 में 'मृणाल' के नाम से प्रकाशित हुई। बंदीगृह का जीवन सदा और सबके लिए अत्यंत कष्टदायी होता है। लौह सलाखों और प्राचीरों से घिरा शरीर, गंदगी, निर्दयता, क्रूरता व अत्याचारों से भरा वातावरण हृदय और मन, दोनों को ही असहनीय पीड़ा को भी अपने में समाए रखते हैं। उस असहनीय पीड़ा में भी कविताओं की रचना करना उनकी प्रखर बुद्धि और उनकी असाधारण कल्पना शक्ति का चमत्कार है। उन्होंने कारावास की काल कोठरियों में मृत्यु मांगी तो गाकर, अंधकार को झुठलाया तो सपने संजोकर। उनका एक पद्यः- 'लुप्त हुआ दिन का उजियाला। /सो जा आशा स्पन्दन सो जा। । /विधुर हृदय के क्रन्दन सो जा। /झलका दे सपनों की हाला। । ' उनकी प्रत्येक कविता जेल के कलुषित वातावरण, लौह सलाखों, प्राचीरों और अंधकार की खुली तस्वीर है। उसके साथ-साथ उनकी कल्पना की उड़ान उन्हें उस नरक से निकाल कर उस प्राकृतिक सौंदर्य में भी ले जाती है, जिसकी गोद में उनका बचपन और किशोरावस्था बीती थी। कारावास ने उनके शरीर को अवश्य जकड़ा, परंतु मन को नहीं। वे सपने सजोते रहे, कल्पना के सहारे वनों, पर्वतों के सुंदर दृश्यों में भ्रमण करते रहे। वास्तविकता और कल्पना से संबंधित उनके दो पद्य हैंः-'लोह शिलाखाओं के पीछे/पाहन प्राचीरों के नीचे/इस निर्दयता की जगती में/शिकलों की झन-झन के पीछे/मतवाली मुस्कान-स्पर्श से/रच डालेगी आसवशाला/दूर कहीं से कोकिल का स्वर/प्रांगण में नित करता आकर/आम्रनिकुंज-निसुप्त सघनता/भर-भर कर निज स्वर में लाता/पर इस गायन मुखरित जग में/सखि, मैं विश्व-विहीन अकेला। ' जैसा पुस्तक का नाम है, वैसी ही इस पुस्तक में भिन्न-भिन्न भावों और रसों की लहरें आती हैं और जाती हैं। दुःख-पीड़ा, आशा-निराशा, विरह-मिलन आदि का चढ़ाव-उतार इस कविता संग्रह की विशेषता है। प्रारंभिक कविताओं की भाषा जटिल है, किन्तु जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, भाषा सरल होती जाती है। इसी प्रकार कवि की रचनाएं भी निराशा और अंधकार से धीरे-धीरे बाहर निकल कर आशा और आत्मविश्वास की ओर बढ़ती जाती हैं। इसके कुछ उदाहरणः 'निकल चला था जीवन में से/मानव जाति का गौरव/दया, प्रेम, उत्साह, न्याय शम/हो बैठे थे सब नीरव/साहस इस अंधेरे जग में/होम हुत्साहन-सम उगावल/जीवन प्रेरित मृदु स्मित लेकर/आई वह सुंदर निर्मल। /मृत प्राणों को मृदु पीड़ा ने/दे डाला जीवन वरदान। /अभिलाषाएं जाग उठी फिर/आशा ने फिर छेड़ी तान। ' उनकी पहली किताब 1935 में माहशेर ख्याल दिल्ली से छपी थी। यह एक उर्दू उपन्यास था जिसका शीर्षक था ओरेको परीना। दो साल बाद 1937 में उनका पहला काव्य संकलन 'लोरजा' नाम से छपा, शारदा मंदिर दिल्ली से। इससे अभिभूत होकर जैनेंद्र ने एक लेख 1937 में विशाल भारत में लिखा : लोरजा का आलोचनात्मक परिचय। तीसरी किताब 1947 में छपी। माक्र्स की जीवनी व शिक्षा नाम से उर्दू में 1948 में लाहौर के किताब मंजिल प्रकाशक से उनकी अंग्रेजी भाषा में किताब प्रकाशित हुई, 'हिस्ट्री ऑफ कम्यूनिस्ट रशिया' सरस्वती प्रैस, बनारस से 1951 में हिन्दी कविताओं को संग्रह प्रकाशित हुआ, एक और अनेक क्षण। हिंदी पाकेट बुक्स व लंदन के रॉबर्ट हाल से अंग्रेजी भाषा में एक किताब छपी, 'ट्रिस्ट विद टाइगरस। ' ओरिएंट लौंगमैन दिल्ली के प्रकाशन संस्थान से 1970 में 'रैम्बलिंगस इन टाइगरलैंड' पुस्तक छपी तो पीपुलस पब्लिकिशंग हॉउस नयी दिल्ली से 1978 में गनलोर नाम से आठवीं किताब छपी। 1991 में बी. आर. पब्लिशिंग हॉउस दिल्ली से प्रिजन डेज़ नाम से जेल में बिताए 14 सालों की कहानी बयान करती है। इसका अनुवाद उनकी पत्नी निर्मला शेरजंग ने 2000 में किया था, 'कारावास के दिन' नाम से। इसे राजकमल प्रकाशन ने छापा है। साल 1996 में शेरजंग के मरणोपरांत 2005 में एक और किताब छपी 'दस स्पेक जुरूस्थरा। ' कुल 10 किताबों के रचियता की तीन किताबों की पाण्डुलिपियां अप्रकाशित रहीं। यह बात सचमुच हैरतअंगेज है कि शेरजंग के महान व चमत्कारी व्यक्तित्व व कारनामों से अनेक महान विभूतियां अभिभूत रही जिनमें अज्ञेय, जैनेंद्र, बटुकेश्वर दत्त, इंद्र कुमार गुजराल और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू शामिल हैं। यह शेरजंग के अदम्य साहस और पराक्रम का ही परिणाम था कि नेहरू ने उन्हें पाकिस्तान के मुजाहिदों के $िखलाफ लडऩे के लिये 25 अक्तूबर 1947 को श्रीनगर भेजा। उन्होंने कश्मीर में स्वयं सेवकों का एक मिलीशिया ग्रुप तैयार किया जिसे कश्मीर नेशनल मिलीशिया के नाम से जाना गया। यह मिलीशिया ग्रुप पाकिस्तान द्वारा युद्ध के लिए भेजे गए अफगान पठानों से लड़ता रहा और विजय प्राप्त की। नेहरू शेरजंग की सेना दक्षता के कायल थे और दिल्ली में जब शेरजंग ने साम्प्रदायिक दंगों पर नियंत्रण पाने में कामयाबी हासिल की तो नेहरू को यह विश्वास हो गया था कि जंगे आजादी का जननायक शेरजंग कश्मीर में युद्ध के हालात पर काबू पा सकता है। कश्मीर की राज्य सरकार ने नेहरू के समक्ष शेरजंग को कर्नल के रैंक से सुशोभित किया था। -(शेष भाग अगले अंक में) कवि आत्मा रंजन का 'जीने के लिए जमीन' संग्रह दरअसल जीने के एहसास को खोजते हुए अस्तित्व के प्रश्न ढूंढ निकालता है। बहुकोणीय कविताओं का विशाल साम्राज्य बुनते, संवेदनाओं की खुदाई करते या जेहन से ही शब्दों की रस्साकशी करते साहित्य की उत्पत्ति में, कविताएं अभिव्यक्ति का सम्मोहन पैदा करती हैं, तो इनके भीतर संघर्ष भरे मजमून की व्याख्या छिपी है। 'दृश्य' कविता में कूड़ा बीनते हाथों में रची-बसी बदबू के बीच जिंदगी की महक और जरूरतों को बटोरती मांसपेशियों का घर्षण साफ है, 'आप देखना चाहें तो देख सकते हैं/झुकी इस पीठ के उस तरफ की/पस्त दुबली धूसर देह और शक्ल/सदियों से लगातार बलात् धकेला जा रहा जिसे/मनुष्य होने की उसकी अस्मिता से/बहुत नीचे। ' सदियों की छाती पर जैसे कविता सवार हो और पुश्तों का हिसाब हो रहा हो। कविता मोम सी होकर भी लोहे के सांचे में ढले, तो इसके होने की ठोस वजह, पाठक के धरातल को ऊर्जा देती है। आत्मा रंजन कोठरी और कोष्ठक के बाहर निकलती कविता के पालक हैं, तो इसकी परिभाषा में अपने परिवेश की मिट्टी जोड़ते हैं, 'जहां धूल आती है/मिट्टी आती है/वहां कुछ खुरदरापन/मटमैलापन/आ ही जाता है/चाहे कविता हो या जीवन/लेकिन वहां नमीं की भी रहती ही है/सबसे अधिक संभावना/और अंकुर की भी/उगने और पनपने की। ' इनकी कविता का चित्रण विचारों के कैनवास को विस्तृत आकार देता है। कविताओं में जड़ों की खोज और पूरे परिदृश्य के सोच का दायरा बढ़ता है, तो सामने आती हैं, 'जो उठाए हुए है आपका बोझ, दृश्य, खिलौनों में, बहुत सुंदर, सांकलें, असहमति, •िाद, डर, जीने के लिए •ामीन, जैसे शौर्य गाथाओं में स्त्री, कुछ आवाजें, किताब का सपना, थपकी और जड़ें' जैसी बेहतरीन रचनाएं। घास में कविता का व्याकरण ढूंढते कवि अपने हाथों में प्रकृति के बिंब लिए वह सब कुछ लिख रहे हैं, जो कविता की मौलिकता में विचरते-विचरते मीलों दूर निकल जाता है, 'जहां कुछ भी नहीं उगता/चट्टान के सख्त सीने पर भी उग आती है घास/कठिनतम में उगने और/जी पाने की दुर्दम्य हिम्मत है वह/बार-बार कुचले जाने के खिलाफ/उठ खड़े होने का नाम है घास...। ' संवेदना के गहरे समुद्र में कविता की आंख से गिरते मोती गिनें या उस दृष्टि का पीछा करें जो बारीकी से पूछ रही है, या कविताएं बहुत सारे प्रश्नों के ढेर को कुरेद कर पूछने की शक्ति प्रदान करती हैं, 'फिर से कैसी जिद है/कि या तो गाय को खाओ/या गोबर को/दूध का ममता का कोई हवाला नहीं/औरत को देह मानो या देवी/किताब को पूजो या जला डालो/किन्हीं उन्मादी नारों के बीच। ' कविताओं में साहसिक उड़ानें, मसलों की प्रासंगिकता और राष्ट्रीय चिंतन की धाराओं से निकले शब्द गूंज रहे हैं। 'जीने के लिए जमीन' का एक भीतरी दर्शन है जिसे हम 'बड़े लोगों के लिए युद्ध' के जरिए समझ सकते हैं, 'बहुत ऊंची उठेंगी दनदनातीं/चक्रवर्ती उनकी लालसाओं की तोपें/शालीन मोहक मुस्कान के नीचे दबी/फट पड़ेंगी •ाहरीली नफरत और क्रूरता की बारूद। ' आत्मा रंजन कविताओं के खेत में भाषा के पुराने औजार ढूंढते हैं, तो लोक परंपराओं का शब्दकोष उनके कंधे पर बैठकर हल चला देता है। इसी बहाने भाषा कुछ आंचलिक बीज चुन लेती है।
- सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तीस से एक हज़ार नौ सौ चालीस तक शेरजंग ने कुछ नहीं लिखा। रिहा होते ही उन्होंने जंगलों और पहाड़ों में घूमना शुरू किया। प्रजामंडल का काम भी करते थे। कुछ ही समय पश्चात वह देहरादून में जाकर ट्रेड यूनियन के काम में लग गए और साथ में कम्युनिस्ट पार्टी की पत्रिका 'चिंगारी' में काम करने लगे। देहरादून से दिल्ली आए अभी तीन-चार महीने ही हुए थे कि दूसरे विश्व युद्ध के छिड़ जाने के कारण सन् एक हज़ार नौ सौ चालीस में राजनीतिक कार्यकत्र्ताओं और पुराने क्रांतिकारियों को नज़रबंद कर दिया गया। नजरबंदी की इस अवधि में शेरजंग ने तीन पुस्तकें लिखींः 'कार्लमाक्र्स की जीवनी और शिक्षा', 'कम्युनिस्ट रूस का इतिहास' तथा एक कविता संग्रह 'एक और अनेक क्षण'। पहली दो किताबें उर्दू में थीं जो भारत के बंटवारे से पहले लाहौर से छपी थीं। 'एक और अनेक क्षण' नामक कविता संग्रह कुछ वर्षों पश्चात सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में सरस्वती प्रेस, बनारस से प्रकाशित हुआ। चार वर्षों की कैद के बाद वे सन् एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में बरेली से रिहा होकर दिल्ली आए। आते ही पूरी सक्रियता के साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में जुट गए। उन दिनों वे पुस्तकों को नियमित रूप से पढ़ते थे, लेकिन कुछ लिख नहीं पाये। सन् एक हज़ार नौ सौ इकसठ-बासठ में आयु ने उन पर अपना प्रभाव डालना शुरू किया और उनके लिए पूरे जोश के साथ राजनीतिक व सामाजिक काम करना कठिन हो गया। उन्होंने पुनः अपने आपको पूर्णतः पढऩे-लिखने में लगा दिया। लिखना शेरजंग की मानसिक बाध्यता बन गई थी। वे लिखते थे, किंतु उसे प्रकाशित करवाने के लिए भाग-दौड़ नहीं करते थे। उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि उनके लेख प्रकाशित होंगे या नहीं। वे लिखते थे क्योंकि लिखने से उन्हें आनंद मिलता था। उन्होंने वन्य जीवन पर बहुत कुछ लिखा। उनकी कई पुस्तकों की पांडुलिपियां अप्रकाशित रहीं, जैसे गालिब की $गज़लें , हाफिज़ की $गज़लें , नीहूंचे का आदिमानव । वृद्धावस्था में स्वास्थ्य के ढल जाने पर भी वे दिन में कुछ घंटे नियमित रूप से पढऩे-लिखने में लगाते थे। वे प्रायः रात को लिखते थे जिससे कि रात की शांति में वे अपने आपको एकाग्र कर निर्विघ्न रूप से काम कर सकें। भी-कभी शब्दों का प्रवाह बहुत सरल और सहज होता था। उनके विचार बड़ी सरलता और सहजता के साथ कागज़ पर अंकित होते जाते थे और सुंदर पंक्तियों व लेख की रचना हो जाती थी। लिखने का आनंद ही उनके लिखने की प्रेरणा थी और वही उनका पुरस्कार भी। शेरजंग की लेखनी के महज़ अज्ञेय ही मुरीद नहीं थे। हिंदी के एक अन्य महान लेखक जैनेंद्र ने एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में एक लेख में शेरजंग की एक रीति पुस्तिका 'लोरजा' का आलोचनात्मक परिचय दिया। जैनेंद्र लिखते हैं, 'चौधरी शेरजंग अब भी जेल में हैं। सन् एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में जेल में ही उनसे मिलना हुआ। वह अंग्रेजी में कविता करते हैं, उर्दू में भी कविता करते हैं और उनकी अंग्रेजी-उर्दू की रचनाओं का रसास्वादन सन् बत्तीस में ही पा सका। तब वह भलीभांति हिंदी जानते थे, यह भी मैं नहीं कह सकता। आज सन् सैंतीस में इन कविताओं को देखकर मुझे बहुत आश्चर्य और बहुत प्रसन्नता है। कविताओं को तो खुद पाठक देखेंगे ही। मुझे उस बारे में कहना क्या है? मुझ अनाड़ी को भी उनमें पद-लालित्य और स्वर-माधुर्य दीख गया है। काव्य से अधिक उसे रीति-काव्य कहिए। अर्थ-गरिमा प्रमुख नहीं, भावना की तरलता और मंजुलता इन गीतों में प्रकट होकर सामने आई है। मधुर पदों की लडिय़ां आपको इतनी मिलेंगी कि शायद मांग से ज्यादा और उनके लिए, मैं नहीं जानता कि पाठक क्यों और भी उनका कृतज्ञ नहीं हो सकता। ' 'लोरजा' शेरजंग की हिंदी कविताओं का पहला संग्रह है। उस समय शेरजंग लाहौर सैंट्रल जेल में आजीवन कारावास के दिन काट रहे थे। इसी कारण उनकी यह पुस्तक सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में 'मृणाल' के नाम से प्रकाशित हुई। बंदीगृह का जीवन सदा और सबके लिए अत्यंत कष्टदायी होता है। लौह सलाखों और प्राचीरों से घिरा शरीर, गंदगी, निर्दयता, क्रूरता व अत्याचारों से भरा वातावरण हृदय और मन, दोनों को ही असहनीय पीड़ा को भी अपने में समाए रखते हैं। उस असहनीय पीड़ा में भी कविताओं की रचना करना उनकी प्रखर बुद्धि और उनकी असाधारण कल्पना शक्ति का चमत्कार है। उन्होंने कारावास की काल कोठरियों में मृत्यु मांगी तो गाकर, अंधकार को झुठलाया तो सपने संजोकर। उनका एक पद्यः- 'लुप्त हुआ दिन का उजियाला। /सो जा आशा स्पन्दन सो जा। । /विधुर हृदय के क्रन्दन सो जा। /झलका दे सपनों की हाला। । ' उनकी प्रत्येक कविता जेल के कलुषित वातावरण, लौह सलाखों, प्राचीरों और अंधकार की खुली तस्वीर है। उसके साथ-साथ उनकी कल्पना की उड़ान उन्हें उस नरक से निकाल कर उस प्राकृतिक सौंदर्य में भी ले जाती है, जिसकी गोद में उनका बचपन और किशोरावस्था बीती थी। कारावास ने उनके शरीर को अवश्य जकड़ा, परंतु मन को नहीं। वे सपने सजोते रहे, कल्पना के सहारे वनों, पर्वतों के सुंदर दृश्यों में भ्रमण करते रहे। वास्तविकता और कल्पना से संबंधित उनके दो पद्य हैंः-'लोह शिलाखाओं के पीछे/पाहन प्राचीरों के नीचे/इस निर्दयता की जगती में/शिकलों की झन-झन के पीछे/मतवाली मुस्कान-स्पर्श से/रच डालेगी आसवशाला/दूर कहीं से कोकिल का स्वर/प्रांगण में नित करता आकर/आम्रनिकुंज-निसुप्त सघनता/भर-भर कर निज स्वर में लाता/पर इस गायन मुखरित जग में/सखि, मैं विश्व-विहीन अकेला। ' जैसा पुस्तक का नाम है, वैसी ही इस पुस्तक में भिन्न-भिन्न भावों और रसों की लहरें आती हैं और जाती हैं। दुःख-पीड़ा, आशा-निराशा, विरह-मिलन आदि का चढ़ाव-उतार इस कविता संग्रह की विशेषता है। प्रारंभिक कविताओं की भाषा जटिल है, किन्तु जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, भाषा सरल होती जाती है। इसी प्रकार कवि की रचनाएं भी निराशा और अंधकार से धीरे-धीरे बाहर निकल कर आशा और आत्मविश्वास की ओर बढ़ती जाती हैं। इसके कुछ उदाहरणः 'निकल चला था जीवन में से/मानव जाति का गौरव/दया, प्रेम, उत्साह, न्याय शम/हो बैठे थे सब नीरव/साहस इस अंधेरे जग में/होम हुत्साहन-सम उगावल/जीवन प्रेरित मृदु स्मित लेकर/आई वह सुंदर निर्मल। /मृत प्राणों को मृदु पीड़ा ने/दे डाला जीवन वरदान। /अभिलाषाएं जाग उठी फिर/आशा ने फिर छेड़ी तान। ' उनकी पहली किताब एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में माहशेर ख्याल दिल्ली से छपी थी। यह एक उर्दू उपन्यास था जिसका शीर्षक था ओरेको परीना। दो साल बाद एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में उनका पहला काव्य संकलन 'लोरजा' नाम से छपा, शारदा मंदिर दिल्ली से। इससे अभिभूत होकर जैनेंद्र ने एक लेख एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में विशाल भारत में लिखा : लोरजा का आलोचनात्मक परिचय। तीसरी किताब एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में छपी। माक्र्स की जीवनी व शिक्षा नाम से उर्दू में एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में लाहौर के किताब मंजिल प्रकाशक से उनकी अंग्रेजी भाषा में किताब प्रकाशित हुई, 'हिस्ट्री ऑफ कम्यूनिस्ट रशिया' सरस्वती प्रैस, बनारस से एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में हिन्दी कविताओं को संग्रह प्रकाशित हुआ, एक और अनेक क्षण। हिंदी पाकेट बुक्स व लंदन के रॉबर्ट हाल से अंग्रेजी भाषा में एक किताब छपी, 'ट्रिस्ट विद टाइगरस। ' ओरिएंट लौंगमैन दिल्ली के प्रकाशन संस्थान से एक हज़ार नौ सौ सत्तर में 'रैम्बलिंगस इन टाइगरलैंड' पुस्तक छपी तो पीपुलस पब्लिकिशंग हॉउस नयी दिल्ली से एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में गनलोर नाम से आठवीं किताब छपी। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में बी. आर. पब्लिशिंग हॉउस दिल्ली से प्रिजन डेज़ नाम से जेल में बिताए चौदह सालों की कहानी बयान करती है। इसका अनुवाद उनकी पत्नी निर्मला शेरजंग ने दो हज़ार में किया था, 'कारावास के दिन' नाम से। इसे राजकमल प्रकाशन ने छापा है। साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में शेरजंग के मरणोपरांत दो हज़ार पाँच में एक और किताब छपी 'दस स्पेक जुरूस्थरा। ' कुल दस किताबों के रचियता की तीन किताबों की पाण्डुलिपियां अप्रकाशित रहीं। यह बात सचमुच हैरतअंगेज है कि शेरजंग के महान व चमत्कारी व्यक्तित्व व कारनामों से अनेक महान विभूतियां अभिभूत रही जिनमें अज्ञेय, जैनेंद्र, बटुकेश्वर दत्त, इंद्र कुमार गुजराल और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू शामिल हैं। यह शेरजंग के अदम्य साहस और पराक्रम का ही परिणाम था कि नेहरू ने उन्हें पाकिस्तान के मुजाहिदों के $िखलाफ लडऩे के लिये पच्चीस अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को श्रीनगर भेजा। उन्होंने कश्मीर में स्वयं सेवकों का एक मिलीशिया ग्रुप तैयार किया जिसे कश्मीर नेशनल मिलीशिया के नाम से जाना गया। यह मिलीशिया ग्रुप पाकिस्तान द्वारा युद्ध के लिए भेजे गए अफगान पठानों से लड़ता रहा और विजय प्राप्त की। नेहरू शेरजंग की सेना दक्षता के कायल थे और दिल्ली में जब शेरजंग ने साम्प्रदायिक दंगों पर नियंत्रण पाने में कामयाबी हासिल की तो नेहरू को यह विश्वास हो गया था कि जंगे आजादी का जननायक शेरजंग कश्मीर में युद्ध के हालात पर काबू पा सकता है। कश्मीर की राज्य सरकार ने नेहरू के समक्ष शेरजंग को कर्नल के रैंक से सुशोभित किया था। - कवि आत्मा रंजन का 'जीने के लिए जमीन' संग्रह दरअसल जीने के एहसास को खोजते हुए अस्तित्व के प्रश्न ढूंढ निकालता है। बहुकोणीय कविताओं का विशाल साम्राज्य बुनते, संवेदनाओं की खुदाई करते या जेहन से ही शब्दों की रस्साकशी करते साहित्य की उत्पत्ति में, कविताएं अभिव्यक्ति का सम्मोहन पैदा करती हैं, तो इनके भीतर संघर्ष भरे मजमून की व्याख्या छिपी है। 'दृश्य' कविता में कूड़ा बीनते हाथों में रची-बसी बदबू के बीच जिंदगी की महक और जरूरतों को बटोरती मांसपेशियों का घर्षण साफ है, 'आप देखना चाहें तो देख सकते हैं/झुकी इस पीठ के उस तरफ की/पस्त दुबली धूसर देह और शक्ल/सदियों से लगातार बलात् धकेला जा रहा जिसे/मनुष्य होने की उसकी अस्मिता से/बहुत नीचे। ' सदियों की छाती पर जैसे कविता सवार हो और पुश्तों का हिसाब हो रहा हो। कविता मोम सी होकर भी लोहे के सांचे में ढले, तो इसके होने की ठोस वजह, पाठक के धरातल को ऊर्जा देती है। आत्मा रंजन कोठरी और कोष्ठक के बाहर निकलती कविता के पालक हैं, तो इसकी परिभाषा में अपने परिवेश की मिट्टी जोड़ते हैं, 'जहां धूल आती है/मिट्टी आती है/वहां कुछ खुरदरापन/मटमैलापन/आ ही जाता है/चाहे कविता हो या जीवन/लेकिन वहां नमीं की भी रहती ही है/सबसे अधिक संभावना/और अंकुर की भी/उगने और पनपने की। ' इनकी कविता का चित्रण विचारों के कैनवास को विस्तृत आकार देता है। कविताओं में जड़ों की खोज और पूरे परिदृश्य के सोच का दायरा बढ़ता है, तो सामने आती हैं, 'जो उठाए हुए है आपका बोझ, दृश्य, खिलौनों में, बहुत सुंदर, सांकलें, असहमति, •िाद, डर, जीने के लिए •ामीन, जैसे शौर्य गाथाओं में स्त्री, कुछ आवाजें, किताब का सपना, थपकी और जड़ें' जैसी बेहतरीन रचनाएं। घास में कविता का व्याकरण ढूंढते कवि अपने हाथों में प्रकृति के बिंब लिए वह सब कुछ लिख रहे हैं, जो कविता की मौलिकता में विचरते-विचरते मीलों दूर निकल जाता है, 'जहां कुछ भी नहीं उगता/चट्टान के सख्त सीने पर भी उग आती है घास/कठिनतम में उगने और/जी पाने की दुर्दम्य हिम्मत है वह/बार-बार कुचले जाने के खिलाफ/उठ खड़े होने का नाम है घास...। ' संवेदना के गहरे समुद्र में कविता की आंख से गिरते मोती गिनें या उस दृष्टि का पीछा करें जो बारीकी से पूछ रही है, या कविताएं बहुत सारे प्रश्नों के ढेर को कुरेद कर पूछने की शक्ति प्रदान करती हैं, 'फिर से कैसी जिद है/कि या तो गाय को खाओ/या गोबर को/दूध का ममता का कोई हवाला नहीं/औरत को देह मानो या देवी/किताब को पूजो या जला डालो/किन्हीं उन्मादी नारों के बीच। ' कविताओं में साहसिक उड़ानें, मसलों की प्रासंगिकता और राष्ट्रीय चिंतन की धाराओं से निकले शब्द गूंज रहे हैं। 'जीने के लिए जमीन' का एक भीतरी दर्शन है जिसे हम 'बड़े लोगों के लिए युद्ध' के जरिए समझ सकते हैं, 'बहुत ऊंची उठेंगी दनदनातीं/चक्रवर्ती उनकी लालसाओं की तोपें/शालीन मोहक मुस्कान के नीचे दबी/फट पड़ेंगी •ाहरीली नफरत और क्रूरता की बारूद। ' आत्मा रंजन कविताओं के खेत में भाषा के पुराने औजार ढूंढते हैं, तो लोक परंपराओं का शब्दकोष उनके कंधे पर बैठकर हल चला देता है। इसी बहाने भाषा कुछ आंचलिक बीज चुन लेती है।
कानपुरः कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद तमाम सवाल भी उठने लगे हैं। जिस तरह विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल उठा रहे थे, उसी तरह अब उसके एनकाउंटर को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि एक हफ्ते में अपने पांच गुर्गों के मारे जाने के बाद विकास दुबे को भी एनकाउंटर का भय सता रहा था और इसीलिए वह खुद सरेंडर करने के लिए उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचा था। हालांकि बाद में कहा गया कि विकास दुबे की पहचान स्पष्ट होने के बाद महाकाल मंदिर के सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। पकड़े जाने के 24 घंटे के अंदर ही उसके मुठभेड़ में मारे जाने के बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब देना मुश्किल होगा। दिनभर मीडिया में इस बात को लेकर खासी चर्चा थी कि विकास को चार्टर्ड प्लेन के जरिए उत्तर प्रदेश ले जाया जाएगा। चर्चा थी कि उसे प्लेन के जरिए उज्जैन से इंदौर और फिर यूपी ले जाने की तैयारी है। फिर अचानक शाम को इस तरह की खबर आई कि उसे सड़क के रास्ते ले जाया जाएगा और इसके लिए यूपी एसटीएफ की टीम उज्जैन पहुंच रही है। इस जानकारी के बाद माना जा रहा था कि यूपी एसटीएफ की टीम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विकास दुबे को उत्तर प्रदेश ले जाएगी मगर एसटीएफ की टीम पहुंची ही नहीं। विकास दुबे से कई घंटे की पूछताछ के बाद मध्य प्रदेश की पुलिस उसे लेकर उज्जैन से झांसी तक आई। मध्य प्रदेश की पुलिस ने जब विकास को यूपी पुलिस और एसटीएफ के हवाले किया तब विकास दुबे को ले जाने के लिए 10 से ज्यादा गाड़ियां तैयार थीं। इन्हीं में से एक गाड़ी में विकास दुबे को बैठाया गया और बाकी गाड़ियां उस गाड़ी के आगे पीछे लगी हुई थीं। उस समय भारी बारिश हो रही थी। मीडिया की टीमें भी इस काफिले के आगे पीछे लगी हुई थीं मगर पुलिस या किसी अन्य गाड़ी के साथ कोई हादसा नहीं हुआ। हादसा सिर्फ विकास की गाड़ी के साथ ही हुआ और अन्य सभी गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित रहीं। यह भी आरोप है कि काफिले के साथ चल रही मीडिया की गाड़ियों को अचानक रोक दिया गया। मुठभेड़ का समय सुबह 6:15 से 6:30 के बीच बताया जा रहा है और उस समय मीडिया की कोई भी गाड़ी मौके पर नहीं थी। काफिले के आगे पीछे चल रही गाड़ियों को अचानक चेकपोस्ट लगाकर रोक दिया गया था। बाद में खबर आई कि जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा हुआ था उस गाड़ी के पलटने के बाद हथियार छीन कर भागने की कोशिश के दौरान विकास दुबे मारा गया। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने भी इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्यों अचानक चेकिंग शुरू करके मीडिया की गाड़ियों को आने से रोक दिया गया। विकास दुबे के खिलाफ 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे और उसने 2 जुलाई की रात बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की जान ले ली थी। उस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पांच लाख का इनाम घोषित किया गया था। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या इतने बड़े कुख्यात गैंगस्टर को पुलिस बिना हथकड़ी पहनाए ला रही थी? क्या एसटीएफ की टीम ने उसके हाथ नहीं बांधे थे? इन सवालों का अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है। एनकाउंटर के बाद विकास दुबे की बॉडी तो हैलट अस्पताल जल्द ही पहुंच गई, लेकिन जो चार पुलिसकर्मी मुठभेड़ में घायल बताए जा रहे हैं उन्हें लेकर एंबुलेंस सुबह करीब 10:30 बजे हैलट अस्पताल पहुंची। मुठभेड़ स्थल भौती की दूरी कानपुर से महज 17 किलोमीटर ही है। इसे लेकर मीडिया ने सवाल भी किया कि मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मी इतनी देर से हैलट अस्पताल क्यों पहुंचे मगर पुलिस की ओर से इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने बिकरू की घटना के बाद कहा था कि विकास से पूछताछ की जाए तो कई बड़े बड़े लोगों के चेहरे बेनकाब होंगे। पूछताछ के दौरान वे आईएएस,आईपीएस और नेता बेनकाब होंगे जो समय-समय पर विकास की मदद करते रहे हैं। विकास दुबे के मारे जाने के बाद ऐसे सफेदपोश चेहरों से अब कभी नकाब नहीं उठ सकेगी। एनकाउंटर की घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दरअसल कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई है। दरअसल आरोप है कि विकास दुबे को हमेशा समय-समय पर सत्ता के गलियारे से भी मदद मिलती रही है और नेताओं के संरक्षण में ही वह अभी तक अपना अपराधिक कारोबार चलाता रहा है। उसके मारे जाने के बाद ऐसे सफेदपोश चेहरों का संकट टल गया है जिनका नाम विकास से पूछताछ के दौरान खुल सकता था। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कल विकास की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। विकास के मारे जाने के बाद उन्होंने कहा कि जिसका शक था वही हो गया। विकास दुबे के मारे जाने के बाद अब कभी यह नहीं उजागर नहीं हो पाएगा कि किन-किन राजनीतिक लोगों और पुलिस अधिकारियों का उसे संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में सभी एनकाउंटर का पैटर्न एक समान ही क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में पुलिस एनकाउंटर के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के मुताबिक सीआरपीसी की धारा 176 के तहत हर एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस को एनकाउंटर का अधिकार नहीं है। उसे सिर्फ खुद की हिफाजत करने का अधिकार है। यदि अपराधी से खुद को बचाने के लिए पुलिसकर्मी गोली चलाता है और इस दौरान अपराधी की मौत होती है तो इसे साबित करना भी जरूरी है। हालांकि इस मामले में जांच के बाद भी बहुत कुछ साफ होने की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।
कानपुरः कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद तमाम सवाल भी उठने लगे हैं। जिस तरह विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल उठा रहे थे, उसी तरह अब उसके एनकाउंटर को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि एक हफ्ते में अपने पांच गुर्गों के मारे जाने के बाद विकास दुबे को भी एनकाउंटर का भय सता रहा था और इसीलिए वह खुद सरेंडर करने के लिए उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचा था। हालांकि बाद में कहा गया कि विकास दुबे की पहचान स्पष्ट होने के बाद महाकाल मंदिर के सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। पकड़े जाने के चौबीस घंटाटे के अंदर ही उसके मुठभेड़ में मारे जाने के बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब देना मुश्किल होगा। दिनभर मीडिया में इस बात को लेकर खासी चर्चा थी कि विकास को चार्टर्ड प्लेन के जरिए उत्तर प्रदेश ले जाया जाएगा। चर्चा थी कि उसे प्लेन के जरिए उज्जैन से इंदौर और फिर यूपी ले जाने की तैयारी है। फिर अचानक शाम को इस तरह की खबर आई कि उसे सड़क के रास्ते ले जाया जाएगा और इसके लिए यूपी एसटीएफ की टीम उज्जैन पहुंच रही है। इस जानकारी के बाद माना जा रहा था कि यूपी एसटीएफ की टीम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विकास दुबे को उत्तर प्रदेश ले जाएगी मगर एसटीएफ की टीम पहुंची ही नहीं। विकास दुबे से कई घंटे की पूछताछ के बाद मध्य प्रदेश की पुलिस उसे लेकर उज्जैन से झांसी तक आई। मध्य प्रदेश की पुलिस ने जब विकास को यूपी पुलिस और एसटीएफ के हवाले किया तब विकास दुबे को ले जाने के लिए दस से ज्यादा गाड़ियां तैयार थीं। इन्हीं में से एक गाड़ी में विकास दुबे को बैठाया गया और बाकी गाड़ियां उस गाड़ी के आगे पीछे लगी हुई थीं। उस समय भारी बारिश हो रही थी। मीडिया की टीमें भी इस काफिले के आगे पीछे लगी हुई थीं मगर पुलिस या किसी अन्य गाड़ी के साथ कोई हादसा नहीं हुआ। हादसा सिर्फ विकास की गाड़ी के साथ ही हुआ और अन्य सभी गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित रहीं। यह भी आरोप है कि काफिले के साथ चल रही मीडिया की गाड़ियों को अचानक रोक दिया गया। मुठभेड़ का समय सुबह छः:पंद्रह से छः:तीस के बीच बताया जा रहा है और उस समय मीडिया की कोई भी गाड़ी मौके पर नहीं थी। काफिले के आगे पीछे चल रही गाड़ियों को अचानक चेकपोस्ट लगाकर रोक दिया गया था। बाद में खबर आई कि जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा हुआ था उस गाड़ी के पलटने के बाद हथियार छीन कर भागने की कोशिश के दौरान विकास दुबे मारा गया। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने भी इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्यों अचानक चेकिंग शुरू करके मीडिया की गाड़ियों को आने से रोक दिया गया। विकास दुबे के खिलाफ साठ से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे और उसने दो जुलाई की रात बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की जान ले ली थी। उस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पांच लाख का इनाम घोषित किया गया था। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या इतने बड़े कुख्यात गैंगस्टर को पुलिस बिना हथकड़ी पहनाए ला रही थी? क्या एसटीएफ की टीम ने उसके हाथ नहीं बांधे थे? इन सवालों का अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है। एनकाउंटर के बाद विकास दुबे की बॉडी तो हैलट अस्पताल जल्द ही पहुंच गई, लेकिन जो चार पुलिसकर्मी मुठभेड़ में घायल बताए जा रहे हैं उन्हें लेकर एंबुलेंस सुबह करीब दस:तीस बजे हैलट अस्पताल पहुंची। मुठभेड़ स्थल भौती की दूरी कानपुर से महज सत्रह किलोग्राममीटर ही है। इसे लेकर मीडिया ने सवाल भी किया कि मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मी इतनी देर से हैलट अस्पताल क्यों पहुंचे मगर पुलिस की ओर से इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने बिकरू की घटना के बाद कहा था कि विकास से पूछताछ की जाए तो कई बड़े बड़े लोगों के चेहरे बेनकाब होंगे। पूछताछ के दौरान वे आईएएस,आईपीएस और नेता बेनकाब होंगे जो समय-समय पर विकास की मदद करते रहे हैं। विकास दुबे के मारे जाने के बाद ऐसे सफेदपोश चेहरों से अब कभी नकाब नहीं उठ सकेगी। एनकाउंटर की घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दरअसल कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई है। दरअसल आरोप है कि विकास दुबे को हमेशा समय-समय पर सत्ता के गलियारे से भी मदद मिलती रही है और नेताओं के संरक्षण में ही वह अभी तक अपना अपराधिक कारोबार चलाता रहा है। उसके मारे जाने के बाद ऐसे सफेदपोश चेहरों का संकट टल गया है जिनका नाम विकास से पूछताछ के दौरान खुल सकता था। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कल विकास की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। विकास के मारे जाने के बाद उन्होंने कहा कि जिसका शक था वही हो गया। विकास दुबे के मारे जाने के बाद अब कभी यह नहीं उजागर नहीं हो पाएगा कि किन-किन राजनीतिक लोगों और पुलिस अधिकारियों का उसे संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में सभी एनकाउंटर का पैटर्न एक समान ही क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने दो हज़ार पंद्रह में पुलिस एनकाउंटर के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के मुताबिक सीआरपीसी की धारा एक सौ छिहत्तर के तहत हर एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस को एनकाउंटर का अधिकार नहीं है। उसे सिर्फ खुद की हिफाजत करने का अधिकार है। यदि अपराधी से खुद को बचाने के लिए पुलिसकर्मी गोली चलाता है और इस दौरान अपराधी की मौत होती है तो इसे साबित करना भी जरूरी है। हालांकि इस मामले में जांच के बाद भी बहुत कुछ साफ होने की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।
पुणे के मैदान पर मंगलवार रात आईपीएल 2022 का 39वां मैच खेला गया। इस मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टक्कर राजस्थान रॉयल्स से थी। मैच में बैंगलोर ने टॉस जीतकर राजस्थान को पहले बल्लेबाजी करने का न्योता दिया और शुरुआत में उनका फैसला सही भी साबित हुआ। सर्वाधिक रन बनाने वाले ओपनर जोस बटलर 8 रन बनाकर आउट हुए, जबकि 99 रन के अंदर राजस्थान के 5 विकेट गिर चुके थे। तभी रियान पराग एक्शन में आए और अपनी टीम की लाज बचाई। रियान पराग सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और शानदार अंदाज में अपनी टीम की पारी को ट्रैक पर ले आए। रियान पराग ने 31 गेंदों में नाबाद 56 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 4 शानदार छक्के और 3 चौके शामिल रहे। ये उन्हीं की पारी थी कि राजस्थान रॉयल्स ने किसी तरह 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 144 रन बना डाले। असम के 20 वर्षीय रियान पराग को दिसंबर 2018 में राजस्थान रॉयल्स ने पहली बार 20 लाख में खरीदा था। उन्होंने अपना पहली सीजन 2019 में खेला था और तब पचासा जड़कर वो आईपीएल इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए। तब वो सिर्फ 17 साल के थे। उस ऐतिहासिक सफलता के बाद उनका बल्ला फिर गरजा है लेकिन इसके लिए उनकी टीम व फैंस को तीन साल का इंतजार करना पड़ा। गौरतलब है कि राजस्थान रॉयल्स ने तब चौंकाया था पिछली नीलामी से पहले उनको रिलीज कर दिया गया और बाद में जब मेगा नीलामी का आयोजन हुआ तो राजस्थान रॉयल्स ने पराग को एक बार फिर खरीद लिया। Times Now Navbharat पर पढ़ें IPL 2022 News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
पुणे के मैदान पर मंगलवार रात आईपीएल दो हज़ार बाईस का उनतालीसवां मैच खेला गया। इस मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टक्कर राजस्थान रॉयल्स से थी। मैच में बैंगलोर ने टॉस जीतकर राजस्थान को पहले बल्लेबाजी करने का न्योता दिया और शुरुआत में उनका फैसला सही भी साबित हुआ। सर्वाधिक रन बनाने वाले ओपनर जोस बटलर आठ रन बनाकर आउट हुए, जबकि निन्यानवे रन के अंदर राजस्थान के पाँच विकेट गिर चुके थे। तभी रियान पराग एक्शन में आए और अपनी टीम की लाज बचाई। रियान पराग सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और शानदार अंदाज में अपनी टीम की पारी को ट्रैक पर ले आए। रियान पराग ने इकतीस गेंदों में नाबाद छप्पन रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में चार शानदार छक्के और तीन चौके शामिल रहे। ये उन्हीं की पारी थी कि राजस्थान रॉयल्स ने किसी तरह बीस ओवर में आठ विकेट खोकर एक सौ चौंतालीस रन बना डाले। असम के बीस वर्षीय रियान पराग को दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में राजस्थान रॉयल्स ने पहली बार बीस लाख में खरीदा था। उन्होंने अपना पहली सीजन दो हज़ार उन्नीस में खेला था और तब पचासा जड़कर वो आईपीएल इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए। तब वो सिर्फ सत्रह साल के थे। उस ऐतिहासिक सफलता के बाद उनका बल्ला फिर गरजा है लेकिन इसके लिए उनकी टीम व फैंस को तीन साल का इंतजार करना पड़ा। गौरतलब है कि राजस्थान रॉयल्स ने तब चौंकाया था पिछली नीलामी से पहले उनको रिलीज कर दिया गया और बाद में जब मेगा नीलामी का आयोजन हुआ तो राजस्थान रॉयल्स ने पराग को एक बार फिर खरीद लिया। Times Now Navbharat पर पढ़ें IPL दो हज़ार बाईस News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) नवीन परती / . / . ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) पुरानी परती / / . ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। इमारती लकडी के जंगल / / . ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती नवीन परती / . / . ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती पुरानी परती / / . ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। इमारती लकडी के जंगल / / . ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
जयपुर -प्रदेश आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक सभी तैयारियां प्रगति पर हैं। सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में आगामी 90 दिन में लीवर ट्रांसप्लांट प्रांरभ करने के लिए रोड-मेप तैयार कर लिया गया है। आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है एवं संबंधित चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों के प्रशिक्षण का कार्य भी यथाशीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र राठौड़ ने सोमवार को सायं स्वास्थ्य भवन में ट्रांसप्लांट कंसलटेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में आगामी 2 माह में कैडेवर किडनी ट्रांसप्लांट एवं आगामी 3 माह में कैडेवर लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ करने के लिए तैयार किये गये रोड-मेप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रांरभ में गैस्ट-फैकल्टी द्वारा आर्गन ट्रांसप्लांट किया जायेगा एवं स्थानीय चिकित्सकों को नियमित प्रशिक्षण उपरांत इस कार्य को निरंतर जारी रखा जायेगा। श्री राठौड़ ने बताया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज के स्तर पर आर्गन ट्रासप्लांट के लिए आवश्यक कार्याें में समन्वय के लिए डॉ. विनय तोमर को समन्वयक बनाते हुए अलग से इकाई गठित की गयी है, इस इकाई में डॉ. अजय शर्मा एवं डॉ. मनीष शर्मा को सह-समन्वयक बनाया गया है। इकाई में सर्जरी, एनेस्थिसिया, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, हिपाटालॉजी, पैथोलॉजी व ब्लड-बैंक के चिकित्सकों को शामिल किया गया है। यह चिकित्सक साप्ताहिक रूप से डॉ. क्रिस बेरी से सम्पर्क कर आवश्यक कार्यवाही करेंगे। डॉ. बेरी इन चिकित्सकों के साथ ही साप्ताहिक कार्यक्रम के अनुसार स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की ट्रासप्लांट सर्जरी पर कक्षायें भी लेंगे। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि एसएमएस हॉस्पिटल के स्तर पर आर्गन ट्रासप्लांट कार्याें में प्रशासनिक समन्वय हेतु अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. आर. एस. राव को जिम्मेदारी दी गयी है। इसी प्रकार निदेशालय स्तर पर संयुक्त निदेशक डॉ. आर. एल. मीणा को समन्वयक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि आर्गन ट्रासप्लांट इकाई के लिए अलग से परियोजना निदेशक की भी नियुक्ति की जायेगी। प्रोजेक्ट फेसिलिटेटर के रूप में श्री दिलीप जैन अपनी सेवाएं देंगे। वेब रजिस्ट्ररी कार्याें हेतु आई. टी. इकाई के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण दिया जायेगा एवं टोल-फ्री नं. 104 पर रोगियों के सवालों के जवाब हेतु कॉल-सेंटर सुविधा भी विकसित की जा रही है। श्री राठौड़ ने बताया कि एसएमएस हॉस्पिटल में आर्गन ट्रासप्लांट का कार्य करने के लिए इच्छुक चिकित्सकों से आवेदन लेकर उन्हें उच्च प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण हेतु भेजा जायेगा। मोहन फाउंडेशन-जयपुर सिटीजन फोरम के तत्वावधान में ब्रेन डेथ और अंगदान विषय पर आवश्यक प्रचार-प्रसार एवं सलाहकार सेवाएं सुलभ करवायी जायेंगी। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लीवर ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक 153 उपकरणों की सूची प्राप्त कर इन उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए वित्तीय संसाधनों सहित किसी भी संसाधन की किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जायेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये राज्य रजिस्ट्री प्रकोष्ठ, एप्रोप्रियेट कमेटी, व एडवाईजरी कमेटी का गठन एवं सलाहकार व नोडल अधिकारी नियुक्त किये जा चुकेे हैं। ऑथराईजेशन ऑथेरिटी एवं ब्रेन डेथ मामलों के लिए प्रमाणन समितियों का गठन किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी 2 माह में के डेवर किडनी ट्रांसप्लांट एवं 3 माह में लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ करने का हरसंभव प्रयास किया जायेगा। ट्रांसप्लांट कंसलटेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, निदेशालय के अधिकारीगण, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रबंधन एवं एसएमएस हॉस्पिटल के चिकित्सकों का आर्गनट्रांसप्लांट के लिए समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं एवं निर्धारित कार्य योजना के अनुसार एसएमएस में आगामी 90 दिनों में ही लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा। बैठक में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री जे. सी. महान्ति, राष्ट्रय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक श्री नवीन जैन, संयुक्त सचिव डॉ. एस. पी. सिंह, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुभाष नेपालिया, एसएमएस अधीक्षक डॉ. मानप्रकाश एवं मोहन फाउंडेशन-जयपुर सिटीजन फोरम की श्रीमती ावना जगवानी एवं उनके सहयोगियों सहित एसएमएस मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकगण मौजूद थे।
जयपुर -प्रदेश आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक सभी तैयारियां प्रगति पर हैं। सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में आगामी नब्बे दिन में लीवर ट्रांसप्लांट प्रांरभ करने के लिए रोड-मेप तैयार कर लिया गया है। आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है एवं संबंधित चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों के प्रशिक्षण का कार्य भी यथाशीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र राठौड़ ने सोमवार को सायं स्वास्थ्य भवन में ट्रांसप्लांट कंसलटेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में आगामी दो माह में कैडेवर किडनी ट्रांसप्लांट एवं आगामी तीन माह में कैडेवर लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ करने के लिए तैयार किये गये रोड-मेप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रांरभ में गैस्ट-फैकल्टी द्वारा आर्गन ट्रांसप्लांट किया जायेगा एवं स्थानीय चिकित्सकों को नियमित प्रशिक्षण उपरांत इस कार्य को निरंतर जारी रखा जायेगा। श्री राठौड़ ने बताया कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज के स्तर पर आर्गन ट्रासप्लांट के लिए आवश्यक कार्याें में समन्वय के लिए डॉ. विनय तोमर को समन्वयक बनाते हुए अलग से इकाई गठित की गयी है, इस इकाई में डॉ. अजय शर्मा एवं डॉ. मनीष शर्मा को सह-समन्वयक बनाया गया है। इकाई में सर्जरी, एनेस्थिसिया, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, हिपाटालॉजी, पैथोलॉजी व ब्लड-बैंक के चिकित्सकों को शामिल किया गया है। यह चिकित्सक साप्ताहिक रूप से डॉ. क्रिस बेरी से सम्पर्क कर आवश्यक कार्यवाही करेंगे। डॉ. बेरी इन चिकित्सकों के साथ ही साप्ताहिक कार्यक्रम के अनुसार स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की ट्रासप्लांट सर्जरी पर कक्षायें भी लेंगे। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि एसएमएस हॉस्पिटल के स्तर पर आर्गन ट्रासप्लांट कार्याें में प्रशासनिक समन्वय हेतु अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. आर. एस. राव को जिम्मेदारी दी गयी है। इसी प्रकार निदेशालय स्तर पर संयुक्त निदेशक डॉ. आर. एल. मीणा को समन्वयक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि आर्गन ट्रासप्लांट इकाई के लिए अलग से परियोजना निदेशक की भी नियुक्ति की जायेगी। प्रोजेक्ट फेसिलिटेटर के रूप में श्री दिलीप जैन अपनी सेवाएं देंगे। वेब रजिस्ट्ररी कार्याें हेतु आई. टी. इकाई के ऑपरेटर्स को प्रशिक्षण दिया जायेगा एवं टोल-फ्री नं. एक सौ चार पर रोगियों के सवालों के जवाब हेतु कॉल-सेंटर सुविधा भी विकसित की जा रही है। श्री राठौड़ ने बताया कि एसएमएस हॉस्पिटल में आर्गन ट्रासप्लांट का कार्य करने के लिए इच्छुक चिकित्सकों से आवेदन लेकर उन्हें उच्च प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण हेतु भेजा जायेगा। मोहन फाउंडेशन-जयपुर सिटीजन फोरम के तत्वावधान में ब्रेन डेथ और अंगदान विषय पर आवश्यक प्रचार-प्रसार एवं सलाहकार सेवाएं सुलभ करवायी जायेंगी। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लीवर ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक एक सौ तिरेपन उपकरणों की सूची प्राप्त कर इन उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए वित्तीय संसाधनों सहित किसी भी संसाधन की किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जायेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये राज्य रजिस्ट्री प्रकोष्ठ, एप्रोप्रियेट कमेटी, व एडवाईजरी कमेटी का गठन एवं सलाहकार व नोडल अधिकारी नियुक्त किये जा चुकेे हैं। ऑथराईजेशन ऑथेरिटी एवं ब्रेन डेथ मामलों के लिए प्रमाणन समितियों का गठन किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दो माह में के डेवर किडनी ट्रांसप्लांट एवं तीन माह में लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ करने का हरसंभव प्रयास किया जायेगा। ट्रांसप्लांट कंसलटेंट डॉ. क्रिस्टोफर बेरी ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, निदेशालय के अधिकारीगण, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रबंधन एवं एसएमएस हॉस्पिटल के चिकित्सकों का आर्गनट्रांसप्लांट के लिए समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं एवं निर्धारित कार्य योजना के अनुसार एसएमएस में आगामी नब्बे दिनों में ही लीवर ट्रांसप्लांट का कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा। बैठक में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री जे. सी. महान्ति, राष्ट्रय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक श्री नवीन जैन, संयुक्त सचिव डॉ. एस. पी. सिंह, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुभाष नेपालिया, एसएमएस अधीक्षक डॉ. मानप्रकाश एवं मोहन फाउंडेशन-जयपुर सिटीजन फोरम की श्रीमती ावना जगवानी एवं उनके सहयोगियों सहित एसएमएस मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकगण मौजूद थे।
पहली सोमवारी को शिवभक्तों की भीड़ विभिन्न शिवालयों पर उमड़ पड़ी। सुबह होते ही शिवभक्त नहा-धोकर पूजा-अर्चना करने शिवालय की ओर निकल पड़े। पूरे भक्तिभाव से लोगों ने भगवान शंकर पर जलाभिषेक कर सर्वमंगल कामना की। पौ फटते ही हजारों शिवभक्त जल लेकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। लोग अपने आराध्य देव की पूजा करने में लीन दिखे। खासकर महिलाओं में ज्यादा ही उत्साह था। बड़ी संख्या में सोमवार को उपवास रखकर पूजा-अर्चना की। कई मंदिरों में महादेव पर दूध, दही, शहद, घी, फलों के रस, शक्कर से भी अभीषेक किया गया। शिवालय घंटी के स्वरों के साथ बोल बम के जयकारों से गूंज उठे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भोले शंकर को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा- अर्चना की जाती है। सावन माह भोले शंकर को अतिप्रिय होता है। शिव जी को प्रसन्न करने शिवलिंग की पूजा- अर्चना की जाती है। शिवलिंग पर कुछ चीजें अर्पित करने से शिवजी की विशेष कृपा बरसती है। शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित बोधि मोदी शिव मंदिर, महात्मा गांधी स्कूल में स्थित शिव मंदिर, गुमो स्थित शिव मंदिर,खुदरा पट्टी स्थित शिव मंदिर, असनाबाद स्थित शिव मंदिर, ध्वजा धारी पहाड़ स्थित शिव मंदिर आदि जगहों पर भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
पहली सोमवारी को शिवभक्तों की भीड़ विभिन्न शिवालयों पर उमड़ पड़ी। सुबह होते ही शिवभक्त नहा-धोकर पूजा-अर्चना करने शिवालय की ओर निकल पड़े। पूरे भक्तिभाव से लोगों ने भगवान शंकर पर जलाभिषेक कर सर्वमंगल कामना की। पौ फटते ही हजारों शिवभक्त जल लेकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। लोग अपने आराध्य देव की पूजा करने में लीन दिखे। खासकर महिलाओं में ज्यादा ही उत्साह था। बड़ी संख्या में सोमवार को उपवास रखकर पूजा-अर्चना की। कई मंदिरों में महादेव पर दूध, दही, शहद, घी, फलों के रस, शक्कर से भी अभीषेक किया गया। शिवालय घंटी के स्वरों के साथ बोल बम के जयकारों से गूंज उठे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भोले शंकर को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा- अर्चना की जाती है। सावन माह भोले शंकर को अतिप्रिय होता है। शिव जी को प्रसन्न करने शिवलिंग की पूजा- अर्चना की जाती है। शिवलिंग पर कुछ चीजें अर्पित करने से शिवजी की विशेष कृपा बरसती है। शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित बोधि मोदी शिव मंदिर, महात्मा गांधी स्कूल में स्थित शिव मंदिर, गुमो स्थित शिव मंदिर,खुदरा पट्टी स्थित शिव मंदिर, असनाबाद स्थित शिव मंदिर, ध्वजा धारी पहाड़ स्थित शिव मंदिर आदि जगहों पर भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
हिमाचल में पहले कहा जाता था कि सरकार बदलने के लिए सिर्फ अढ़ाई लाख वोट ज्यादा चाहिए, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई। कांग्रेस को 40 सीटें मिली और भाजपा को 25, लेकिन इन 15 ज्यादा सीटों का फैसला महज एक फ़ीसदी से कम वोट से हो गया। विधानसभा चुनाव में वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को इस बार 43 फ़ीसदी वोट मिले हैं। कुल मतों में से इनकी संख्या 1814530 है, जबकि कांग्रेस को 43. 9 फ़ीसदी वोट पड़े और इनकी संख्या 1852504 है। मतलब यह है कि कांग्रेस को भाजपा से 37947 वोट ज्यादा मिले और इसी अंतर में 15 सीटें कांग्रेस को ज्यादा मिल गई। बागी होकर चुनाव लड़े निर्दलीयों ने भी 10 फ़ीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया है। इन्हें पूरे प्रदेश में 436413 वोट पड़े हैं, जबकि आम आदमी पार्टी एक फ़ीसदी पर ही सिमट के रह गई। माकपा को एक फ़ीसदी से भी कम वोट मिला और नोटा भी आधा फ़ीसदी तक ही पहुंच पाया। इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच में वोट शेयर का अंतर हैरान करने वाला है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 1846000 वोट मिले थे, वहीं इस बार 1814000 मिले हैं, लेकिन इतने कम अंतर से कांग्रेस के मुकाबले 15 सीटों का फर्क आ गया है। विधानसभा चुनाव में कुल वोट प्रतिशत भी बढक़र 75. 78 फ़ीसदी हो गया है। इससे पहले यह माना जाता था कि हिमाचल में सरकार बदलने के लिए चार से सात फ़ीसदी वोट सिंह की जरूरत होती है, लेकिन इस बार तो 1 फ़ीसदी से कम में ही फैसला हो गया। यह अपने आप में नया रिकॉर्ड होगा। हिमाचल की राजनीति में वोट का विभाजन 1998 में हुआ था, जब पं. सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस बनाकर मंडी जिला को बांट दिया था। उस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से 1. 14 लाख वोट ज्यादा मिले थे, लेकिन दोनों दलों की सीटें 31-31 ही आई थी। हिविंका ने इस चुनाव में करीब अढ़ाई लाख वोट लेकर 5 सीटें हासिल कर ली थी और धूमल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। फिर से अगला चुनाव 2003 में हुआ, जब महज 1. 71 लाख ज्यादा वोट के अंतर से कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस के वोट का अंतर महज 1. 60 लाख था, लेकिन भाजपा की सीटें कांग्रेस से दोगुनी थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में भी यह अंतर और कम हुआ, क्योंकि करीब 4 लाख वोट निर्दलीय ले गए और 05 जीत कर भी आए। इस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से 146563 वोट ज्यादा मिले, जबकि 10 सीटें ज्यादा आ गई। 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने कांग्रेस से 228982 वोट ज्यादा लिए और सीटें भी दोगुनी से ज्यादा आईं। शिमला - चौहदवीं विधानसभा में 18 सीटों में से करीब 21 सीटों पर नए चेहरे जीत कर आए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा कांग्रेस में तेरह भाजपा में सात और एक निर्दलीय विधायक बने हैं। कांग्रेस में पहली बार विधानसभा एंटर करने में शिमला शहरी से हरीश जनार्था, ठियोग से कुलदीप राठौर, धर्मपुर से चंद्रशेखर, नगरोटा बगवा से आरएस बाली, शाहपुर से केवल सिंह पठानिया, कसौली से विनोद सुल्तानपुरी, नाहन से अजय सोलंकी, भोरंज से सुरेश कुमार, चंबा शहरी से नीरज नैयर, मनाली से भुवनेश्वर गौड़, गगरेट से चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ से देवेंद्र भुट्टो और चिंतपूर्णी से सुदर्शन बबलू शामिल हैं। यदि भाजपा की बात करें तो भाजपा ने सबसे ज्यादा 25 नए चेहरे इस बार अपने टिकट पर मैदान में उतारे थे। इनमें से सरकाघाट से दिलीप ठाकुर, करसोग से दीप राज कपूर, नूरपुर से रणवीर निक्का, बिलासपुर शहरी से त्रिलोक जमवाल, भरमौर से डा. जनक राज, डलहौजी से डीएस ठाकुर और अन्य से लोकेंद्र ने चुनाव जीत लिया है, जबकि हमीरपुर शहरी सीट से आशीष शर्मा निर्दलीय विधायक के तौर पर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।
हिमाचल में पहले कहा जाता था कि सरकार बदलने के लिए सिर्फ अढ़ाई लाख वोट ज्यादा चाहिए, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई। कांग्रेस को चालीस सीटें मिली और भाजपा को पच्चीस, लेकिन इन पंद्रह ज्यादा सीटों का फैसला महज एक फ़ीसदी से कम वोट से हो गया। विधानसभा चुनाव में वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को इस बार तैंतालीस फ़ीसदी वोट मिले हैं। कुल मतों में से इनकी संख्या अट्ठारह लाख चौदह हज़ार पाँच सौ तीस है, जबकि कांग्रेस को तैंतालीस. नौ फ़ीसदी वोट पड़े और इनकी संख्या अट्ठारह लाख बावन हज़ार पाँच सौ चार है। मतलब यह है कि कांग्रेस को भाजपा से सैंतीस हज़ार नौ सौ सैंतालीस वोट ज्यादा मिले और इसी अंतर में पंद्रह सीटें कांग्रेस को ज्यादा मिल गई। बागी होकर चुनाव लड़े निर्दलीयों ने भी दस फ़ीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया है। इन्हें पूरे प्रदेश में चार लाख छत्तीस हज़ार चार सौ तेरह वोट पड़े हैं, जबकि आम आदमी पार्टी एक फ़ीसदी पर ही सिमट के रह गई। माकपा को एक फ़ीसदी से भी कम वोट मिला और नोटा भी आधा फ़ीसदी तक ही पहुंच पाया। इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच में वोट शेयर का अंतर हैरान करने वाला है। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अट्ठारह लाख छियालीस हज़ार वोट मिले थे, वहीं इस बार अट्ठारह लाख चौदह हज़ार मिले हैं, लेकिन इतने कम अंतर से कांग्रेस के मुकाबले पंद्रह सीटों का फर्क आ गया है। विधानसभा चुनाव में कुल वोट प्रतिशत भी बढक़र पचहत्तर. अठहत्तर फ़ीसदी हो गया है। इससे पहले यह माना जाता था कि हिमाचल में सरकार बदलने के लिए चार से सात फ़ीसदी वोट सिंह की जरूरत होती है, लेकिन इस बार तो एक फ़ीसदी से कम में ही फैसला हो गया। यह अपने आप में नया रिकॉर्ड होगा। हिमाचल की राजनीति में वोट का विभाजन एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में हुआ था, जब पं. सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस बनाकर मंडी जिला को बांट दिया था। उस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से एक. चौदह लाख वोट ज्यादा मिले थे, लेकिन दोनों दलों की सीटें इकतीस-इकतीस ही आई थी। हिविंका ने इस चुनाव में करीब अढ़ाई लाख वोट लेकर पाँच सीटें हासिल कर ली थी और धूमल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। फिर से अगला चुनाव दो हज़ार तीन में हुआ, जब महज एक. इकहत्तर लाख ज्यादा वोट के अंतर से कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी। इसके बाद दो हज़ार सात के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस के वोट का अंतर महज एक. साठ लाख था, लेकिन भाजपा की सीटें कांग्रेस से दोगुनी थी। दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में भी यह अंतर और कम हुआ, क्योंकि करीब चार लाख वोट निर्दलीय ले गए और पाँच जीत कर भी आए। इस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से एक लाख छियालीस हज़ार पाँच सौ तिरेसठ वोट ज्यादा मिले, जबकि दस सीटें ज्यादा आ गई। दो हज़ार सत्रह के पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने कांग्रेस से दो लाख अट्ठाईस हज़ार नौ सौ बयासी वोट ज्यादा लिए और सीटें भी दोगुनी से ज्यादा आईं। शिमला - चौहदवीं विधानसभा में अट्ठारह सीटों में से करीब इक्कीस सीटों पर नए चेहरे जीत कर आए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा कांग्रेस में तेरह भाजपा में सात और एक निर्दलीय विधायक बने हैं। कांग्रेस में पहली बार विधानसभा एंटर करने में शिमला शहरी से हरीश जनार्था, ठियोग से कुलदीप राठौर, धर्मपुर से चंद्रशेखर, नगरोटा बगवा से आरएस बाली, शाहपुर से केवल सिंह पठानिया, कसौली से विनोद सुल्तानपुरी, नाहन से अजय सोलंकी, भोरंज से सुरेश कुमार, चंबा शहरी से नीरज नैयर, मनाली से भुवनेश्वर गौड़, गगरेट से चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ से देवेंद्र भुट्टो और चिंतपूर्णी से सुदर्शन बबलू शामिल हैं। यदि भाजपा की बात करें तो भाजपा ने सबसे ज्यादा पच्चीस नए चेहरे इस बार अपने टिकट पर मैदान में उतारे थे। इनमें से सरकाघाट से दिलीप ठाकुर, करसोग से दीप राज कपूर, नूरपुर से रणवीर निक्का, बिलासपुर शहरी से त्रिलोक जमवाल, भरमौर से डा. जनक राज, डलहौजी से डीएस ठाकुर और अन्य से लोकेंद्र ने चुनाव जीत लिया है, जबकि हमीरपुर शहरी सीट से आशीष शर्मा निर्दलीय विधायक के तौर पर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।
कलाकारः सैफ अली खान, आलिया फर्नीचरवाला, तब्बू, कुबरा सैत, कुमुद मिश्रा, फरीदा जलाल, कुकू शारदा और चंकी पांडे आदि। साल की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तानाजीः द अनसंग वॉरियर' में उदयभान सिंह राठौड़ के किरदार में फिर से चमकने वाले सैफ अली खान इससे पहले और 'रेस 2' के बीच लाइन से 13 फ्लॉप फिल्में दे चुके हैं। सैफ की साल की दूसरी फिल्म 'जवानी जानेमन' जब सिनेमाघरों में आई है तो उनकी फिल्म 'तानाजी' भी तमाम सिनेमाघरों में अब तक चल रही है। लेकिन, इस फिल्म का कोई खास फायदा 'जवानी जानेमन' को मिलता दिखता नहीं क्योंकि दोनों फिल्मों का दर्शक वर्ग अलग अलग है। 'छिछोरे' किस्म के नायक हिंदी सिनेमा में 90 के दशकों तक ही चले, अब जमाना आयुष्मान खुराना और विकी कौशल जैसे नए नायकों का है और सिनेमा को लेकर दर्शकों की बदलती पसंद सैफ अली खान पर फिर एक बार भारी पड़ने वाली है। 'जवानी जानेमन' कहानी है जसविंदर सिंह उर्फ जैज की जिसके जीवन में मस्ती और मोहब्बत के सिवा दूसरा कोई खास काम दिखता नहीं है। अपनी से आधी उम्र की लड़कियों की सोहबत में उसकी जिंदगी बीत रही है और तभी कहानी में आता है ट्विस्ट टिया के रूप में। टिया कॉलेज की तरफ से एमस्टर्डम घूमने जाती है और गर्भवती हो जाती है। अपने पिता का पता लगाते लगाते वह जैज के घर आ धमकती है और कहानी में उसकी मां भी है। वह विपश्यना से सम्मोहित है और उसके पास योग का ऐसा खजाना है कि एक बार को तो बाबा रामदेव भी फेल हो जाएं। 'जवानी जानेमन' के साथ सबसे बड़ी दिक्कत है इसकी कहानी और इस फिल्म को बनाने का निर्माता जैकी भगनानी का मकसद। जैकी फिल्मों में बतौर हीरो पूरी तरह फ्लॉप हो चुके हैं। पिता वाशू भगनानी की अकूत दौलत को खर्च करने का उनके पास आसान तरीका है फिल्में बनाना। लेकिन, अपने पिता की तरह उनके पास सिनेमा की सही समझ नही है। वाशू ने हिंदी सिनेमा में 'हीरो नंबर वन', 'कुली नंबर वन', 'बीवी नंबर वन' और 'बड़े मियां छोटे मियां' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाईं। उन्हें हिंदी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज पता थी। जैकी के पास जो फिल्म डॉक्टर हैं, वे उनको सही सलाह नहीं दे रहे। 'जवानी जानेमन' बनाने वाली टीम का एक अतरंगी जीवनशैली में भरोसा करना ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। हिंदी सिनेमा के दर्शक कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएं, वे ऐसी छिछोरे किस्म के नायक से कभी लगाव महसूस नहीं कर सकते। सैफ अली खान ने अपनी तरफ से फिल्म को पटरी पर बनाए रखने की पूरी कोशिश की है। हर पल मस्ती में डूबे रहने वाले इंसान से एक पिता के किरदार में वह बहुत ही आसानी से पहुंच भी जाते हैं। लेकिन, फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं उनकी पूर्व पार्टनर तब्बू। तब्बू की अरसे बाद आई ये एक कमजोर फिल्म है। उनके संवाद हुसैन दलाल ने बहुत ही हल्के लिखे हैं और निर्देशक नितिन कक्कड़ एक सीन भी ऐसा नहीं बना पाए जो तब्बू के करियर ग्राफ में इस फिल्म को नगीना बना पाता। निर्माता और निर्देशक दोनों का पूरा जोर इस फिल्म में नए चेहरे आलिया फर्नीचरवाला को हिंदी सिनेमा की नई हीरोइन बनाने पर दिखता है। आलिया ने मेहनत भी काफी की है, लेकिन आलिया भट्ट, सारा अली खान और दिशा पटानी जैसी दमदार अभिनेत्रियों के बीच अपनी सुरक्षित जगह बना पाना उनके लिए अभी दूर की कौड़ी है। उन्हें अपने हिंदी उच्चारण पर भी अभी काफी काम करना है।
कलाकारः सैफ अली खान, आलिया फर्नीचरवाला, तब्बू, कुबरा सैत, कुमुद मिश्रा, फरीदा जलाल, कुकू शारदा और चंकी पांडे आदि। साल की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तानाजीः द अनसंग वॉरियर' में उदयभान सिंह राठौड़ के किरदार में फिर से चमकने वाले सैफ अली खान इससे पहले और 'रेस दो' के बीच लाइन से तेरह फ्लॉप फिल्में दे चुके हैं। सैफ की साल की दूसरी फिल्म 'जवानी जानेमन' जब सिनेमाघरों में आई है तो उनकी फिल्म 'तानाजी' भी तमाम सिनेमाघरों में अब तक चल रही है। लेकिन, इस फिल्म का कोई खास फायदा 'जवानी जानेमन' को मिलता दिखता नहीं क्योंकि दोनों फिल्मों का दर्शक वर्ग अलग अलग है। 'छिछोरे' किस्म के नायक हिंदी सिनेमा में नब्बे के दशकों तक ही चले, अब जमाना आयुष्मान खुराना और विकी कौशल जैसे नए नायकों का है और सिनेमा को लेकर दर्शकों की बदलती पसंद सैफ अली खान पर फिर एक बार भारी पड़ने वाली है। 'जवानी जानेमन' कहानी है जसविंदर सिंह उर्फ जैज की जिसके जीवन में मस्ती और मोहब्बत के सिवा दूसरा कोई खास काम दिखता नहीं है। अपनी से आधी उम्र की लड़कियों की सोहबत में उसकी जिंदगी बीत रही है और तभी कहानी में आता है ट्विस्ट टिया के रूप में। टिया कॉलेज की तरफ से एमस्टर्डम घूमने जाती है और गर्भवती हो जाती है। अपने पिता का पता लगाते लगाते वह जैज के घर आ धमकती है और कहानी में उसकी मां भी है। वह विपश्यना से सम्मोहित है और उसके पास योग का ऐसा खजाना है कि एक बार को तो बाबा रामदेव भी फेल हो जाएं। 'जवानी जानेमन' के साथ सबसे बड़ी दिक्कत है इसकी कहानी और इस फिल्म को बनाने का निर्माता जैकी भगनानी का मकसद। जैकी फिल्मों में बतौर हीरो पूरी तरह फ्लॉप हो चुके हैं। पिता वाशू भगनानी की अकूत दौलत को खर्च करने का उनके पास आसान तरीका है फिल्में बनाना। लेकिन, अपने पिता की तरह उनके पास सिनेमा की सही समझ नही है। वाशू ने हिंदी सिनेमा में 'हीरो नंबर वन', 'कुली नंबर वन', 'बीवी नंबर वन' और 'बड़े मियां छोटे मियां' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाईं। उन्हें हिंदी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज पता थी। जैकी के पास जो फिल्म डॉक्टर हैं, वे उनको सही सलाह नहीं दे रहे। 'जवानी जानेमन' बनाने वाली टीम का एक अतरंगी जीवनशैली में भरोसा करना ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। हिंदी सिनेमा के दर्शक कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएं, वे ऐसी छिछोरे किस्म के नायक से कभी लगाव महसूस नहीं कर सकते। सैफ अली खान ने अपनी तरफ से फिल्म को पटरी पर बनाए रखने की पूरी कोशिश की है। हर पल मस्ती में डूबे रहने वाले इंसान से एक पिता के किरदार में वह बहुत ही आसानी से पहुंच भी जाते हैं। लेकिन, फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं उनकी पूर्व पार्टनर तब्बू। तब्बू की अरसे बाद आई ये एक कमजोर फिल्म है। उनके संवाद हुसैन दलाल ने बहुत ही हल्के लिखे हैं और निर्देशक नितिन कक्कड़ एक सीन भी ऐसा नहीं बना पाए जो तब्बू के करियर ग्राफ में इस फिल्म को नगीना बना पाता। निर्माता और निर्देशक दोनों का पूरा जोर इस फिल्म में नए चेहरे आलिया फर्नीचरवाला को हिंदी सिनेमा की नई हीरोइन बनाने पर दिखता है। आलिया ने मेहनत भी काफी की है, लेकिन आलिया भट्ट, सारा अली खान और दिशा पटानी जैसी दमदार अभिनेत्रियों के बीच अपनी सुरक्षित जगह बना पाना उनके लिए अभी दूर की कौड़ी है। उन्हें अपने हिंदी उच्चारण पर भी अभी काफी काम करना है।
Katras : कतरास में प्रत्येक वर्ष बरसात के समय प्रमुख सड़कों सहित गली-मुहल्लों की हालत बदतर हो जाती है. नालियों में भरे कचरे की सफाई उचित ढंग से नहीं होने व अतिक्रमण के कारण नालियों का कचरा व गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. स्थिति काफ़ी नारकीय हो जाती है. पिछले दिनों नालियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ, परंतु पुनः बंद भी हो गया. स्थिति पहले की तरह होती जा रही है. मानसून अब आने ही वाला है. नालियों की सफाई का काम नगर निगम के कर्मी कर रहे हैं. परंतु कई जगहों पर नालियों पर अतिक्रमण से सफाई कर्मियों को भारी दिक्क़त भी हो रही है. कई जगहों पर दुकानों के बाहर नाली के ऊपर टाइल्स मार्बल लगाकर अतिक्रमण कर लिया गया है. इससे सफाई में परेशानी हो रही है. हालांकि कतरास नगर निगम प्रशासक शब्बीर आलम का दावा है कि बरसात के पहले कतरास में सभी नालियों की सफाई करा ली जाएगी. नालियों के ऊपर जो भी अतिक्रमण किया गया है, उसे हटाया जाएगा.
Katras : कतरास में प्रत्येक वर्ष बरसात के समय प्रमुख सड़कों सहित गली-मुहल्लों की हालत बदतर हो जाती है. नालियों में भरे कचरे की सफाई उचित ढंग से नहीं होने व अतिक्रमण के कारण नालियों का कचरा व गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. स्थिति काफ़ी नारकीय हो जाती है. पिछले दिनों नालियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ, परंतु पुनः बंद भी हो गया. स्थिति पहले की तरह होती जा रही है. मानसून अब आने ही वाला है. नालियों की सफाई का काम नगर निगम के कर्मी कर रहे हैं. परंतु कई जगहों पर नालियों पर अतिक्रमण से सफाई कर्मियों को भारी दिक्क़त भी हो रही है. कई जगहों पर दुकानों के बाहर नाली के ऊपर टाइल्स मार्बल लगाकर अतिक्रमण कर लिया गया है. इससे सफाई में परेशानी हो रही है. हालांकि कतरास नगर निगम प्रशासक शब्बीर आलम का दावा है कि बरसात के पहले कतरास में सभी नालियों की सफाई करा ली जाएगी. नालियों के ऊपर जो भी अतिक्रमण किया गया है, उसे हटाया जाएगा.
Posted On: भारत के तेल और गैस क्षेत्र में एमएसएमई परितंत्र के विकास के लिए एनएसआईसी और अरामको एशिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते से वैश्विक स्तर पर भारतीय एमएसएमई कंपनियों को विक्रेता के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी। इस समझौता ज्ञापन पर एनएसआईसी की ओर से निदेशक (पी एंड एम) श्री पी. उदय कुमार और अरामको की ओर से अरामको एशिया के निदेशक श्री मोहम्मद अल मुगहिराह ने हस्ताक्षर कियें। इस अवसर पर सउदी अरब के राजदूत डॉ. सैद बिन मोहम्मद अल सती, अरामको के रणनीतिक आपूर्ति प्रमुख श्री अब्दुल्ला मेलफी तथा 200 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। एमएसआईसी सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न कंपनी है। अरामको सउदी अरब सरकार की कंपनी है जो विश्व की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनी है। इस कंपनी का कुल राजस्व 355 बिलियन डॉलर (2018) और अनुमानित बाजार मूल्य 1.5 ट्रिलियन डॉलर है।
Posted On: भारत के तेल और गैस क्षेत्र में एमएसएमई परितंत्र के विकास के लिए एनएसआईसी और अरामको एशिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते से वैश्विक स्तर पर भारतीय एमएसएमई कंपनियों को विक्रेता के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी। इस समझौता ज्ञापन पर एनएसआईसी की ओर से निदेशक श्री पी. उदय कुमार और अरामको की ओर से अरामको एशिया के निदेशक श्री मोहम्मद अल मुगहिराह ने हस्ताक्षर कियें। इस अवसर पर सउदी अरब के राजदूत डॉ. सैद बिन मोहम्मद अल सती, अरामको के रणनीतिक आपूर्ति प्रमुख श्री अब्दुल्ला मेलफी तथा दो सौ से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। एमएसआईसी सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न कंपनी है। अरामको सउदी अरब सरकार की कंपनी है जो विश्व की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनी है। इस कंपनी का कुल राजस्व तीन सौ पचपन बिलियन डॉलर और अनुमानित बाजार मूल्य एक.पाँच ट्रिलियन डॉलर है।
पंचयात ज्वार के अंर्तगत वार्ड नंबर-एक में बरसाती पानी के चलते प्राथमिक स्कूल नारी ज्वार व एक गोशाला का लाखों रुपए का नुकसान हो गया है। गनीमत यह रही कि सुबह का वक्त होने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे। अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। गुरुवार को नारी खड्ड का पानी अचानक ज्वार पंचायत के वार्ड नंबर एक की तरफ बदल गया। इस दौरान पानी ने वार्ड नंबर एक में पहले गुरदेव की पशुशाला को अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद नारी ज्वार प्राथमिक स्कूल की चारदीवारी को तोड़ते हुए पास लगते नाले में पहुंचा दिया। पानी का बहाव इतना तीव्र था की पानी ने स्कूल की चार दीवारी तोडऩे के साथ-साथ तीन कमरों व बरामदे को भी अपनी चपेट में ले लिया। इसके चलते सभी कमरे व बरामदा मलबे से भर गए है। हालत यह हो गई है। स्कूल पहुंचे बच्चे कमरों में प्रवेश नहीं कर पाए। पानी का बहाव इतना तेज था की स्कूल की चारदीवारी टूटने के बाद उसका सारा सामान पानी में वह गया। उधर, गुरदेव की पशुशाला व मकान खतरे के कगार पर पहुंच जाने से प्रशासन ने घर के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने के आदेश दे दिए है। घटना की सूचना लगते ही तहसीलदार अंब उपशिक्षा निदेशक दविंद्र चंदेल, पंचायत प्रधान उपप्रधान व राजस्व विभाग की अन्य टीम मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लेने के बाद जरूरी दिशा निर्देश दिए। उपशिक्षा निदेशक दविंदर चंदेल व तहसीलदार अंब ने बताया कि गुरुवार को हुई बारिश के कारण नारी स्कूल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ-साथ एक पशुशाला व मकान भी खतरे में आ गए है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बारिश के दौरान चौंकने रहे।
पंचयात ज्वार के अंर्तगत वार्ड नंबर-एक में बरसाती पानी के चलते प्राथमिक स्कूल नारी ज्वार व एक गोशाला का लाखों रुपए का नुकसान हो गया है। गनीमत यह रही कि सुबह का वक्त होने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे। अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। गुरुवार को नारी खड्ड का पानी अचानक ज्वार पंचायत के वार्ड नंबर एक की तरफ बदल गया। इस दौरान पानी ने वार्ड नंबर एक में पहले गुरदेव की पशुशाला को अपनी चपेट में ले लिया। उसके बाद नारी ज्वार प्राथमिक स्कूल की चारदीवारी को तोड़ते हुए पास लगते नाले में पहुंचा दिया। पानी का बहाव इतना तीव्र था की पानी ने स्कूल की चार दीवारी तोडऩे के साथ-साथ तीन कमरों व बरामदे को भी अपनी चपेट में ले लिया। इसके चलते सभी कमरे व बरामदा मलबे से भर गए है। हालत यह हो गई है। स्कूल पहुंचे बच्चे कमरों में प्रवेश नहीं कर पाए। पानी का बहाव इतना तेज था की स्कूल की चारदीवारी टूटने के बाद उसका सारा सामान पानी में वह गया। उधर, गुरदेव की पशुशाला व मकान खतरे के कगार पर पहुंच जाने से प्रशासन ने घर के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने के आदेश दे दिए है। घटना की सूचना लगते ही तहसीलदार अंब उपशिक्षा निदेशक दविंद्र चंदेल, पंचायत प्रधान उपप्रधान व राजस्व विभाग की अन्य टीम मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लेने के बाद जरूरी दिशा निर्देश दिए। उपशिक्षा निदेशक दविंदर चंदेल व तहसीलदार अंब ने बताया कि गुरुवार को हुई बारिश के कारण नारी स्कूल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ-साथ एक पशुशाला व मकान भी खतरे में आ गए है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बारिश के दौरान चौंकने रहे।
एम्पीयर प्राइमस को पहली बार ऑटो एक्सपो में शोकेस किया गया था. (फोटो साभार ओवरड्राइव) नई दिल्ली. इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का शेयर बढ़ता जा रहा है. ऐसा केवल कारों में ही नहीं बल्कि टू व्हीलर में भी हो रहा है. खासकर स्कूटर सेगमेंट में लोग इलेक्ट्रिक को प्रिफरेंस बना रहे हैं. इस बात को देखते हुए कई कंपनियां अपने नए ई-स्कूटर भी लॉन्च कर रही हैं. अब इंडियन कंपनी ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने अपना नया स्कूटर एम्पीयर लॉन्च कर दिया है. स्कूटर की कई खासियत हैं लेकिन इसकी टॉप स्पीड और एक्सलरेशन इसको सभी से अलग खड़ा करता है. इसकी 4 किलोवॉट की मोटर सिर्फ 5 सेकेंड में ही इसे 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार देती है. वहीं ये 77 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. इसके लॉन्च के साथ ही ओला, एथर और बजाज जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलने जा रही है. स्कूटर में चार ड्राइविंग मोड्स भी हैं. इनमें ईको, सिटी, पावर और रिवर्स का मजा आप ले सकते हैं. स्कूटर की कीमत को भी काफी कंपीटीटिव रखा गया है. जानकारी के अनुसार एम्पीयर प्राइमस की एक्स शोरूम प्राइस 109900 रुपये रखी गई है. वहीं कंपनी ने दावा किया है कि ये एक्चुअल रनिंग कंडीशंस में सिंगल चार्ज पर 100 किमी. तक की रेंज देगा. ये रेंज पावर मोड में मिलेगी और यदि कोई ईको मोड में स्कूटर को रन करता है तो ये बढ़ भी सकती है. वहीं स्कूटर में एप कनेक्टिविटी, ब्लूटूथ, नेविगेशन जैसे कमाल के फीचर्स के साथ ही वन टच रिवर्स मोड भी है. स्कूटर में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क, रियर स्प्रिंग फोर्क, ड्रम ब्रेक्स, एप्रन माउंटेड टर्न इंडिकेटर्स, स्टेप अप सीट और सिंगल पीस ग्रैब्रिल भी इसको अलग पहचान देते हैं. स्कूटर चार कलर ऑप्शंस में अवेलेबल है. इसमें मैट फिनिश के साथ ही डुअल टोन का ऑप्शन भी है. आप हिमालयन वाइट, रॉयल ऑरेंज, हैवलॉक ब्लू और बक ब्लैक में से अपनी पसंद को चुन सकते हैं. माना जा रहा है कि ये ओला एस 1, बजाज चेतक, एथर और टीवीएस आई क्यूब जैसे मौजूद इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के साथ ही हीरो के विदा को भी भारी टक्कर देगा. हालांकि हाल ही में ओला के एक सस्ते और फीचर लोडेड स्कूटर के लॉन्च होने की भी चर्चा है. अब आने वाले समय में यदि ऐसा होता है तो इलेक्ट्रिक स्कूटर के बाजार में जबर्दस्त कॉम्पीटीशन होगा और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को होगा. .
एम्पीयर प्राइमस को पहली बार ऑटो एक्सपो में शोकेस किया गया था. नई दिल्ली. इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का शेयर बढ़ता जा रहा है. ऐसा केवल कारों में ही नहीं बल्कि टू व्हीलर में भी हो रहा है. खासकर स्कूटर सेगमेंट में लोग इलेक्ट्रिक को प्रिफरेंस बना रहे हैं. इस बात को देखते हुए कई कंपनियां अपने नए ई-स्कूटर भी लॉन्च कर रही हैं. अब इंडियन कंपनी ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने अपना नया स्कूटर एम्पीयर लॉन्च कर दिया है. स्कूटर की कई खासियत हैं लेकिन इसकी टॉप स्पीड और एक्सलरेशन इसको सभी से अलग खड़ा करता है. इसकी चार किलोग्रामवॉट की मोटर सिर्फ पाँच सेकेंड में ही इसे चालीस किमी. प्रति घंटे की रफ्तार देती है. वहीं ये सतहत्तर किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. इसके लॉन्च के साथ ही ओला, एथर और बजाज जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलने जा रही है. स्कूटर में चार ड्राइविंग मोड्स भी हैं. इनमें ईको, सिटी, पावर और रिवर्स का मजा आप ले सकते हैं. स्कूटर की कीमत को भी काफी कंपीटीटिव रखा गया है. जानकारी के अनुसार एम्पीयर प्राइमस की एक्स शोरूम प्राइस एक लाख नौ हज़ार नौ सौ रुपयापये रखी गई है. वहीं कंपनी ने दावा किया है कि ये एक्चुअल रनिंग कंडीशंस में सिंगल चार्ज पर एक सौ किमी. तक की रेंज देगा. ये रेंज पावर मोड में मिलेगी और यदि कोई ईको मोड में स्कूटर को रन करता है तो ये बढ़ भी सकती है. वहीं स्कूटर में एप कनेक्टिविटी, ब्लूटूथ, नेविगेशन जैसे कमाल के फीचर्स के साथ ही वन टच रिवर्स मोड भी है. स्कूटर में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क, रियर स्प्रिंग फोर्क, ड्रम ब्रेक्स, एप्रन माउंटेड टर्न इंडिकेटर्स, स्टेप अप सीट और सिंगल पीस ग्रैब्रिल भी इसको अलग पहचान देते हैं. स्कूटर चार कलर ऑप्शंस में अवेलेबल है. इसमें मैट फिनिश के साथ ही डुअल टोन का ऑप्शन भी है. आप हिमालयन वाइट, रॉयल ऑरेंज, हैवलॉक ब्लू और बक ब्लैक में से अपनी पसंद को चुन सकते हैं. माना जा रहा है कि ये ओला एस एक, बजाज चेतक, एथर और टीवीएस आई क्यूब जैसे मौजूद इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के साथ ही हीरो के विदा को भी भारी टक्कर देगा. हालांकि हाल ही में ओला के एक सस्ते और फीचर लोडेड स्कूटर के लॉन्च होने की भी चर्चा है. अब आने वाले समय में यदि ऐसा होता है तो इलेक्ट्रिक स्कूटर के बाजार में जबर्दस्त कॉम्पीटीशन होगा और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को होगा. .
होली-पहाड़ी से गिरकर काल का ग्रास बने होली के एक दुकानदार के परिवार की मदद के लिए होली बाजार के सभी व्यापारी आगे आए हैं। व्यापार मंडल होली ने पहल करते हुए मृतक दुकानदार के परिवार को 22 हजार की आर्थिक सहायता मुहैया करवाई है। व्यापार मंडल की इस पहल को सभी ने सराहा है। होली बाजार में दुकान चलाने वाले सुटकर गांव के भप्पा राम की गत दिनों पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई थी। मृतक अपने पीछे पत्नी समेत चार बच्चे छोड़ गया है। मृतक की तीन बेटियां और एक लड़का है। दुकान के जरिए ही परिवार का पालन पोषण चल रहा था। इस बीच हादसे में जान गवां देने के बाद मृतक भप्पा राम के परिवार के लिए बड़ी मुसीबत सामने आ गई है। इस दुखद घड़ी में व्यापार मंडल होली ने सभी दुकानदारों से राशि एकत्रित की और पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर 22 हजार की राशि प्रदान की है। व्यापार मंडल होली के प्रधान राकेश ठाकुर का कहना है कि सभी दुकानदार इस दुखद घड़ी में भप्पा राम के परिवार के साथ खड़े ह़ै। उन्होंने आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सभी दुकानदारों को भी आभार प्रकट किया है। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
होली-पहाड़ी से गिरकर काल का ग्रास बने होली के एक दुकानदार के परिवार की मदद के लिए होली बाजार के सभी व्यापारी आगे आए हैं। व्यापार मंडल होली ने पहल करते हुए मृतक दुकानदार के परिवार को बाईस हजार की आर्थिक सहायता मुहैया करवाई है। व्यापार मंडल की इस पहल को सभी ने सराहा है। होली बाजार में दुकान चलाने वाले सुटकर गांव के भप्पा राम की गत दिनों पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई थी। मृतक अपने पीछे पत्नी समेत चार बच्चे छोड़ गया है। मृतक की तीन बेटियां और एक लड़का है। दुकान के जरिए ही परिवार का पालन पोषण चल रहा था। इस बीच हादसे में जान गवां देने के बाद मृतक भप्पा राम के परिवार के लिए बड़ी मुसीबत सामने आ गई है। इस दुखद घड़ी में व्यापार मंडल होली ने सभी दुकानदारों से राशि एकत्रित की और पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर बाईस हजार की राशि प्रदान की है। व्यापार मंडल होली के प्रधान राकेश ठाकुर का कहना है कि सभी दुकानदार इस दुखद घड़ी में भप्पा राम के परिवार के साथ खड़े ह़ै। उन्होंने आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सभी दुकानदारों को भी आभार प्रकट किया है। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
Read in: सिंगल लड़के-लड़कियां वैलेंटाइन्स डे से ठीक पहले कर बैठते हैं ये ग़लतियां ! न्यू ईयर गिफ्ट आइडिया जो बनेंगे आपकी गर्लफ्रेंड के लिए ना भूलने वाले अनुभव! एक हेल्दी रिश्ते में नहीं महसूस होनी चाहिए ये 8 फीलिंग्स! भारतीय पुरूषों ने बताया, गर्लफ्रेंड की ये बातें उन्हें नहीं पसंद ! बॉयफ्रेंड की ये 10 चीजें लड़कियों को बिल्कुल नहीं पसंद ! ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां-पिता और बच्चों का रिश्ता दिखाती तस्वीरें! जब टाइम हो कम तो फॉलो करें ये 5 क्विकि सेक्स टिप्स! इन 5 आसान तरीकों से लाएं अपनी बोरिंग सेक्स लाइफ में नयी जान! प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स करने का कौन-सा अंदाज उनको आता है पसंद? कामासूत्रा के इन 6 facts के बारे में क्या आप जानते हैं?
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मिस वर्ल्ड 2021 का क्राउन पोलैंड की कैरोलिना बेलवास्का (Karolina Bielawska) को मिला है। वहीं भारतीय मूल की श्रीसैनी फर्स्ट रनरअप रहीं। इस ब्यूटी पेजेंट में मनसा वाराणसी, जहां भारत को रीप्रेजेंट कर रही थीं, वहीं भारतीय मूल की श्रीसैनी अमेरिका की ओर से थीं। वीडियो डेस्क। होली का त्योहार हो और बाजारों में रौनक ना हो तो त्योहार की चमक फीकी हो जाती है। लाल हरे पीले रंगों से बाजार पटे हुए हैं तो वहीं मथुरा और वृंदावन में होली की छठा ही अलग है। कोई कृष्ण की भक्ति में लीन होकर होली खेल रहा तो कोई भोले की भक्ति में सराबोर होकर भस्म को रंग रहा तो वहीं गंगा को घाटों पर गीतों के जरिए राजनीति के चटकारे भी लिये जा रहे हैं। वर्ल्ड न्यूज डेस्क. ये तस्वीरें उत्तरी जापान के फुकुशिमा(Fukushima in northern Japan) के तट पर बुधवार शाम को आए 7. 3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद की हैं, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी दी गई थी, हालांकि गुरुवार की सुबह अपेक्षाकृत छोटी सुनामी लहरें देखे जाने के बाद यह चेतावनी हटा ली गई। यानी बड़ा खतरा टल गया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने कहा कि भूकंप समुद्र से 60 किलोमीटर नीचे आया। भूकंप के कारण एक बुलेट ट्रेन पटरी से उतर गई। फुकुशिमा लगभग 11 साल पहले एक बड़े भूकंप और सूनामी से तबाह हो गया था। मार्च 2011 का भूकंप (रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 9 ) बुधवार को आए भूकंप की तुलना में काफी बड़ा था। बाढ़ ने फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बहा दिया था। उस आपदा में लगभग 15,000 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश बाढ़ के पानी से मारे गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के वित्त मंत्री तुलसी राजपक्षे से बुधवार को मुलाकात की। इस दौरान राजपक्षे ने श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के लिए भारत द्वारा दिए गए समर्थन के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन को 80 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सुरक्षा सहायता देने की घोषणा की। नए सहायता पैकेज में 9,000 एंटी-आर्मर सिस्टम, 800 एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और ड्रोन भी शामिल हैं। नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया कि रूस को यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित कर देना चाहिए। ICJ ने अपने आदेश में कहा कि रूसी संघ 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन के क्षेत्र में शुरू हुए सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित कर दे। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने 7. 3 तीव्रता के भूकंप की चपेट में आने के बाद मियागी और फुकुशिमा प्रान्त के कुछ हिस्सों में एक मीटर (3-फुट) तक समुद्री उछाल के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पर्ल हार्बर और 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों का हवाला दिया और अमेरिकी कांग्रेस से रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में और अधिक मदद की अपील की।
मिस वर्ल्ड दो हज़ार इक्कीस का क्राउन पोलैंड की कैरोलिना बेलवास्का को मिला है। वहीं भारतीय मूल की श्रीसैनी फर्स्ट रनरअप रहीं। इस ब्यूटी पेजेंट में मनसा वाराणसी, जहां भारत को रीप्रेजेंट कर रही थीं, वहीं भारतीय मूल की श्रीसैनी अमेरिका की ओर से थीं। वीडियो डेस्क। होली का त्योहार हो और बाजारों में रौनक ना हो तो त्योहार की चमक फीकी हो जाती है। लाल हरे पीले रंगों से बाजार पटे हुए हैं तो वहीं मथुरा और वृंदावन में होली की छठा ही अलग है। कोई कृष्ण की भक्ति में लीन होकर होली खेल रहा तो कोई भोले की भक्ति में सराबोर होकर भस्म को रंग रहा तो वहीं गंगा को घाटों पर गीतों के जरिए राजनीति के चटकारे भी लिये जा रहे हैं। वर्ल्ड न्यूज डेस्क. ये तस्वीरें उत्तरी जापान के फुकुशिमा के तट पर बुधवार शाम को आए सात. तीन तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद की हैं, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी दी गई थी, हालांकि गुरुवार की सुबह अपेक्षाकृत छोटी सुनामी लहरें देखे जाने के बाद यह चेतावनी हटा ली गई। यानी बड़ा खतरा टल गया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने कहा कि भूकंप समुद्र से साठ किलोग्राममीटर नीचे आया। भूकंप के कारण एक बुलेट ट्रेन पटरी से उतर गई। फुकुशिमा लगभग ग्यारह साल पहले एक बड़े भूकंप और सूनामी से तबाह हो गया था। मार्च दो हज़ार ग्यारह का भूकंप बुधवार को आए भूकंप की तुलना में काफी बड़ा था। बाढ़ ने फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बहा दिया था। उस आपदा में लगभग पंद्रह,शून्य लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश बाढ़ के पानी से मारे गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के वित्त मंत्री तुलसी राजपक्षे से बुधवार को मुलाकात की। इस दौरान राजपक्षे ने श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के लिए भारत द्वारा दिए गए समर्थन के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन को अस्सी करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सुरक्षा सहायता देने की घोषणा की। नए सहायता पैकेज में नौ,शून्य एंटी-आर्मर सिस्टम, आठ सौ एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और ड्रोन भी शामिल हैं। नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया कि रूस को यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित कर देना चाहिए। ICJ ने अपने आदेश में कहा कि रूसी संघ चौबीस फरवरी दो हज़ार बाईस को यूक्रेन के क्षेत्र में शुरू हुए सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित कर दे। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सात. तीन तीव्रता के भूकंप की चपेट में आने के बाद मियागी और फुकुशिमा प्रान्त के कुछ हिस्सों में एक मीटर तक समुद्री उछाल के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पर्ल हार्बर और ग्यारह सितंबर, दो हज़ार एक के आतंकवादी हमलों का हवाला दिया और अमेरिकी कांग्रेस से रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में और अधिक मदद की अपील की।
मुंबई. बॉलीवुड फिल्मों के लिए प्रतिष्ठित माने जाने वाले 61वें फिल्मफेयर अवॉर्ड का शुक्रवार रात ऐलान किया कर दिया गया है. फेल्मफेयर में इस बार संजय लीला भंसाली की फिल्म बाजीराव मस्तानी की धूम रही. फिल्म बाजीराव मस्तानी के लिए जहां संजय लीला भंसाली को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड मिला. वहीं रणवीर सिहं को सर्वश्रेष्ठ एक्टर और प्रियंका चोपड़ा को बेस्ट सपॉर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. फिल्मफेयर में फिल्म 'पीकू' को क्रिटिक च्वॉइस बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड दिया गया. इसके अलावा क्रिटिक्स चॉइस से नवाजी गई फिल्म पीकू के लिए दीपिका पादूकोण को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, तो अमिताभ बच्चन को इसी फिल्म के लिए क्रिटिक्स चॉइस बेस्ट ऐक्टर का अवार्ड दिया गया. फिल्म मसान के लिए नीरज घायवन को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवार्ड दिया गया. इसके अलावा बीते जमाने की मशहूर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया.
मुंबई. बॉलीवुड फिल्मों के लिए प्रतिष्ठित माने जाने वाले इकसठवें फिल्मफेयर अवॉर्ड का शुक्रवार रात ऐलान किया कर दिया गया है. फेल्मफेयर में इस बार संजय लीला भंसाली की फिल्म बाजीराव मस्तानी की धूम रही. फिल्म बाजीराव मस्तानी के लिए जहां संजय लीला भंसाली को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड मिला. वहीं रणवीर सिहं को सर्वश्रेष्ठ एक्टर और प्रियंका चोपड़ा को बेस्ट सपॉर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. फिल्मफेयर में फिल्म 'पीकू' को क्रिटिक च्वॉइस बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड दिया गया. इसके अलावा क्रिटिक्स चॉइस से नवाजी गई फिल्म पीकू के लिए दीपिका पादूकोण को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, तो अमिताभ बच्चन को इसी फिल्म के लिए क्रिटिक्स चॉइस बेस्ट ऐक्टर का अवार्ड दिया गया. फिल्म मसान के लिए नीरज घायवन को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवार्ड दिया गया. इसके अलावा बीते जमाने की मशहूर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया.
भगवान भोलेनाथ को साकार रूप में सर्प और डमरू के साथ त्रिशूल के साथ देखा जाता है। यही कारण है कि महादेव का त्रिशूल धारी भी कहा जाता है। भोलेनाथ को संहारक माना जाता है। हालांकि संहार करने के लिए उन्हें किसी शस्त्र की जरूरत नहीं होती है। त्रिशूल को एक प्रतीक के रूप में दिखाया जाता है। भगवान शिव का त्रिशूल पवित्रता एवं शुभ कर्म का प्रतीक है। कई शिवालयों में सोने चांदी और लोहे की धातु से बने त्रिशूल दिखाई देते हैं। त्रिशूल में जीवन के कई रहस्य है। हिंदू मान्यता के अनुसार ब्रह्मनाद से जब भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए, तभी सृष्टि में तीन गुण उत्पन्न हुए और शिव जी शूल बनें और इससे ही त्रिशूल का निर्माण हुआ। भगवान शिव जब प्रकट हुए थे, तब उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए थे और इन्हीं तीन गुणों से मिलकर भगवान भोलेनाथ शूल बनें और त्रिशूल बना। महादेव के त्रिशूल को तीन काल भूतकाल, भविष्य काल और वर्तमान काल से भी जोड़कर देखा जाता है। महादेव को भक्त त्रिकालदर्शी भी कहते हैं। भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल वाम भाग में स्थिर इड़ा, दक्षिण भाग में पिंगला और मध्य भाग में सुषुम्ना नाड़ी का भी प्रतीक माना जाता है।
भगवान भोलेनाथ को साकार रूप में सर्प और डमरू के साथ त्रिशूल के साथ देखा जाता है। यही कारण है कि महादेव का त्रिशूल धारी भी कहा जाता है। भोलेनाथ को संहारक माना जाता है। हालांकि संहार करने के लिए उन्हें किसी शस्त्र की जरूरत नहीं होती है। त्रिशूल को एक प्रतीक के रूप में दिखाया जाता है। भगवान शिव का त्रिशूल पवित्रता एवं शुभ कर्म का प्रतीक है। कई शिवालयों में सोने चांदी और लोहे की धातु से बने त्रिशूल दिखाई देते हैं। त्रिशूल में जीवन के कई रहस्य है। हिंदू मान्यता के अनुसार ब्रह्मनाद से जब भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए, तभी सृष्टि में तीन गुण उत्पन्न हुए और शिव जी शूल बनें और इससे ही त्रिशूल का निर्माण हुआ। भगवान शिव जब प्रकट हुए थे, तब उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए थे और इन्हीं तीन गुणों से मिलकर भगवान भोलेनाथ शूल बनें और त्रिशूल बना। महादेव के त्रिशूल को तीन काल भूतकाल, भविष्य काल और वर्तमान काल से भी जोड़कर देखा जाता है। महादेव को भक्त त्रिकालदर्शी भी कहते हैं। भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल वाम भाग में स्थिर इड़ा, दक्षिण भाग में पिंगला और मध्य भाग में सुषुम्ना नाड़ी का भी प्रतीक माना जाता है।
Jio ने अपने 499 रुपए वाले प्रीपेड प्लान को फिर से लॉन्च किया है. इस प्लान के साथ सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध है. टेलीकॉम कंपनियों के टैरिफ में बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने पोर्टफोलियो में कई प्रीपेड प्लान जोड़े और हटाए हैं. लेकिन अब यूजर्स की जरूरत को समझते हुए जियो ने ज्यादा इंटरनेट वाला प्लान वापस पेश किया है. टेलीकॉम कंपनी ने अपने 499 रुपए के प्रीपेड प्लान को रोजाना 2GB डेटा और ओटीटी प्लेटफॉर्म की मेंबरशिप के साथ फिर से लॉन्च किया है. Jio ने अपने 499 रुपए वाले प्रीपेड प्लान को फिर से लॉन्च किया है. इस प्लान के साथ Disney+ Hotstar सब्सक्रिप्शन एक साल की वैलिडिटी के साथ मिलेगा. साथ ही इस प्लान के तहत सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है. इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है. इस प्लान में रोजाना 2 जीबी डेटा मिलेगा. इस प्लान के साथ नए कस्टमर्स को जियो प्राइम मेंबरशिप भी मिलेगी. इस प्लान में Jio Cinema, Jio TV जैसे ऐप्स का सब्सक्रिप्शन भी मिलेगा. रिलायंस जियो 601 रुपए में ओटीटी एक्सेस के साथ एक और प्रीपेड प्लान पेश करता है. इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है और हर दिन 3GB डेटा के साथ-साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉल और रोजाना 100 SMS ऑफर करता है. इस प्लान में एक्स्ट्रा 6GB डेटा भी मिलता है. Jio का 601 रुपए का प्लान एक साल के Disney+ Hotstar मोबाइल एक्सेस के साथ आता है, जिसकी कीमत 499 रुपए है. एक और प्लान जो कंपनी 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ पेश करती है वह 419 रुपए में उपलब्ध है. टेलीकॉम कंपनी अनलिमिटेड वॉयस कॉल और 100 SMS के साथ रोजाना 3GB ऑफर करता है. डेली डेटा की लिमिट बढ़ाने के बाद स्पीड 64kbps तक कम हो जाती है. आपको एक साल का Disney+ Hotstar मोबाइल सब्सक्रिप्शन 499 रुपए बिना किसी एक्स्ट्रा कीमत के मिलता है. आपको Jio Apps और JioTV, JioCinema, JioSecurity और JioCloud सहित दूसरी मेंबरशिप का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है. डिजनी + हॉटस्टार सब्सक्रिप्शन के साथ आने वाला दूसरा प्लान 799 रुपए का प्लान है. टैरिफ बढ़ोतरी से पहले यह प्लान 666 रुपए का था. इस प्लान के साथ रोजाना 2GB डेटा मिलता है. यह भी एक अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्लान है जो 56 दिनों की वैलिडिटी के लिए रोजाना 100 SMS के साथ आता है.
Jio ने अपने चार सौ निन्यानवे रुपयापए वाले प्रीपेड प्लान को फिर से लॉन्च किया है. इस प्लान के साथ सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध है. टेलीकॉम कंपनियों के टैरिफ में बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो ने अपने पोर्टफोलियो में कई प्रीपेड प्लान जोड़े और हटाए हैं. लेकिन अब यूजर्स की जरूरत को समझते हुए जियो ने ज्यादा इंटरनेट वाला प्लान वापस पेश किया है. टेलीकॉम कंपनी ने अपने चार सौ निन्यानवे रुपयापए के प्रीपेड प्लान को रोजाना दोGB डेटा और ओटीटी प्लेटफॉर्म की मेंबरशिप के साथ फिर से लॉन्च किया है. Jio ने अपने चार सौ निन्यानवे रुपयापए वाले प्रीपेड प्लान को फिर से लॉन्च किया है. इस प्लान के साथ Disney+ Hotstar सब्सक्रिप्शन एक साल की वैलिडिटी के साथ मिलेगा. साथ ही इस प्लान के तहत सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है. इस प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है. इस प्लान में रोजाना दो जीबी डेटा मिलेगा. इस प्लान के साथ नए कस्टमर्स को जियो प्राइम मेंबरशिप भी मिलेगी. इस प्लान में Jio Cinema, Jio TV जैसे ऐप्स का सब्सक्रिप्शन भी मिलेगा. रिलायंस जियो छः सौ एक रुपयापए में ओटीटी एक्सेस के साथ एक और प्रीपेड प्लान पेश करता है. इस प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है और हर दिन तीनGB डेटा के साथ-साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉल और रोजाना एक सौ SMS ऑफर करता है. इस प्लान में एक्स्ट्रा छःGB डेटा भी मिलता है. Jio का छः सौ एक रुपयापए का प्लान एक साल के Disney+ Hotstar मोबाइल एक्सेस के साथ आता है, जिसकी कीमत चार सौ निन्यानवे रुपयापए है. एक और प्लान जो कंपनी अट्ठाईस दिनों की वैलिडिटी के साथ पेश करती है वह चार सौ उन्नीस रुपयापए में उपलब्ध है. टेलीकॉम कंपनी अनलिमिटेड वॉयस कॉल और एक सौ SMS के साथ रोजाना तीनGB ऑफर करता है. डेली डेटा की लिमिट बढ़ाने के बाद स्पीड चौंसठkbps तक कम हो जाती है. आपको एक साल का Disney+ Hotstar मोबाइल सब्सक्रिप्शन चार सौ निन्यानवे रुपयापए बिना किसी एक्स्ट्रा कीमत के मिलता है. आपको Jio Apps और JioTV, JioCinema, JioSecurity और JioCloud सहित दूसरी मेंबरशिप का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है. डिजनी + हॉटस्टार सब्सक्रिप्शन के साथ आने वाला दूसरा प्लान सात सौ निन्यानवे रुपयापए का प्लान है. टैरिफ बढ़ोतरी से पहले यह प्लान छः सौ छयासठ रुपयापए का था. इस प्लान के साथ रोजाना दोGB डेटा मिलता है. यह भी एक अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्लान है जो छप्पन दिनों की वैलिडिटी के लिए रोजाना एक सौ SMS के साथ आता है.
New Delhi: बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान की फिल्म पठान को रिलीज होने में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. सुपरस्टार के फैंस उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वह शाहरुख को लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर देख पाएं. बता दें कि, शाहरुख खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म 25 जनवरी को रिलीज होने जा रही है. हाल ही में ही पठान की ऑनलाइन टिकट साइटों पर एडवांस बुकिंग शुरु की गई थी. जहां एडवांस बुकिंग शुरु होने के मिनटों में हीं सीटें भरती नजर आ रही थी और अब ऐसा लगता है कि शाहरुख के फैंस अपने चहेते एक्टर को फिर से बड़े पर्दे पर देखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आपको बता दें कि, इंडस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम स्टारर 'पठान' ने एडवांस बुकिंग में 14.66 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. इसमें, सबसे ज्यादा कमाई यशराज फिल्म्स प्रोडक्शन के हिंदी और तेलुगू टिकटों की बिक्री से हुई है. साथ ही, एडवांस बुकिंग के पहले ही दिन फिल्म ने 2 लाख से अधिक के टिकट बेचे. यह राशि में कुल 14.66 करोड़ रुपये की कमाई हुई है. जहां, 1.79 करोड़ रुपये एनसीआर क्षेत्र से और 1.74 करोड़ रुपये मुंबई से आते हैं. इन आंकड़ों में बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता का भी प्रमुख योगदान है. खबरों की माने तो यह फिल्म शाहरुख की सबसे बड़ी शुरुआत, 'हैप्पी न्यू ईयर' के जैसे ही पहले दिन लगभग 40 करोड़ रुपये के साथ खुलेगी. इसके अलावा, कई ट्रेड एक्सपर्ट्स ने पहले दिन 'पठान' के लिए 40 करोड़ रुपये से अधिक की शुरुआत की भविष्यवाणी की है, हालांकि, वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक आसानी से जा सकता है. असल में, पठान के पहले दिन 50 करोड़ कमाने की बहुत अच्छी संभावना है. यह भी पढ़ें - फिल्मों की सक्सेस में आड़े आ रहा धर्म! मिल रहा Bholaa को प्यार और Pathaan को 'दुत्कार' इससे पहले, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर स्टारर 'ब्रह्मास्त्र' ने एडवांस बुकिंग में 19.66 करोड़ रुपये कलेक्ट किए थे. रिपोर्टों के अनुसार, 2022 की तीसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर, 'भूल भुलैया 2', ने अपनी एडवांस बुकिंग से 6.55 करोड़ रुपये की कमाई की थी और फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' ने 5.52 करोड़ रुपये का एडवांस बिजनेस किया था. अब देखना यह है कि, किंग खान की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है.
New Delhi: बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान की फिल्म पठान को रिलीज होने में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. सुपरस्टार के फैंस उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वह शाहरुख को लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर देख पाएं. बता दें कि, शाहरुख खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म पच्चीस जनवरी को रिलीज होने जा रही है. हाल ही में ही पठान की ऑनलाइन टिकट साइटों पर एडवांस बुकिंग शुरु की गई थी. जहां एडवांस बुकिंग शुरु होने के मिनटों में हीं सीटें भरती नजर आ रही थी और अब ऐसा लगता है कि शाहरुख के फैंस अपने चहेते एक्टर को फिर से बड़े पर्दे पर देखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आपको बता दें कि, इंडस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम स्टारर 'पठान' ने एडवांस बुकिंग में चौदह.छयासठ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. इसमें, सबसे ज्यादा कमाई यशराज फिल्म्स प्रोडक्शन के हिंदी और तेलुगू टिकटों की बिक्री से हुई है. साथ ही, एडवांस बुकिंग के पहले ही दिन फिल्म ने दो लाख से अधिक के टिकट बेचे. यह राशि में कुल चौदह.छयासठ करोड़ रुपये की कमाई हुई है. जहां, एक.उन्यासी करोड़ रुपये एनसीआर क्षेत्र से और एक.चौहत्तर करोड़ रुपये मुंबई से आते हैं. इन आंकड़ों में बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता का भी प्रमुख योगदान है. खबरों की माने तो यह फिल्म शाहरुख की सबसे बड़ी शुरुआत, 'हैप्पी न्यू ईयर' के जैसे ही पहले दिन लगभग चालीस करोड़ रुपये के साथ खुलेगी. इसके अलावा, कई ट्रेड एक्सपर्ट्स ने पहले दिन 'पठान' के लिए चालीस करोड़ रुपये से अधिक की शुरुआत की भविष्यवाणी की है, हालांकि, वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक आसानी से जा सकता है. असल में, पठान के पहले दिन पचास करोड़ कमाने की बहुत अच्छी संभावना है. यह भी पढ़ें - फिल्मों की सक्सेस में आड़े आ रहा धर्म! मिल रहा Bholaa को प्यार और Pathaan को 'दुत्कार' इससे पहले, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर स्टारर 'ब्रह्मास्त्र' ने एडवांस बुकिंग में उन्नीस.छयासठ करोड़ रुपये कलेक्ट किए थे. रिपोर्टों के अनुसार, दो हज़ार बाईस की तीसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर, 'भूल भुलैया दो', ने अपनी एडवांस बुकिंग से छः.पचपन करोड़ रुपये की कमाई की थी और फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' ने पाँच.बावन करोड़ रुपये का एडवांस बिजनेस किया था. अब देखना यह है कि, किंग खान की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है.
नई दिल्ली /सुनील पाण्डेय : भारतीय रेलवे में पहियों की कमी के चलते वंदेभारत जैसी वीआईपी ट्रेनें पटरी पर समय से नहीं उतर पा रही है। लेकिन बहुत जल्द समस्या खत्म हो जाएगी और अपने देश में ही यात्री डिब्बों और मालगाडिय़ों के लिए पहियों बनने लगेंगे। इसके लिए निजी क्षेत्र की कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर को चुना गया है। रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर उत्पादन क्षेत्र में पहले से काम कर रही है। कंपनी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित अपने स्टील प्लांट में देश की पहली रेल पहिया उत्पादन कारखाना लगाएगी। राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक इस महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देने के लिए कंपनी ने जीआईएफएलओ-हंगरी के साथ एक समझौता किया है। जीआईएफएलओ-हंगरी और जिन्दल स्टील के बीच यह तकनीकी करार नई दिल्ली में शुक्रवार को हंगरी दूतावास एवं फिक्की के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत-हंगरी बिजनेस फोरम में हुआ। इसके अनुसार प्लांट की शुरुआती उत्पादन क्षमता 25 हजार सेट पहिया प्रतिवर्ष होगी। बता दें कि वर्तमान में वंदेभारत के लिए विदेशों से पहिए मंगाए जा रहे हैं। इसके चलते विलंब भी हो चुका है। गौरतलब है कि जिन्दल स्टील भारतीय रेल के लिए विभिन्न श्रेणियों की पटरियां तैयार कर आपूर्ति कर रही है। कंपनी देश की विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं के लिए हेड हार्डेंड रेल भी तैयार कर रही है। रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए जिन्दल स्टील एसिमेट्रिक रेलों के लिए रेल फोर्जिंग यूनिट भी स्थापित कर रही है, जिसका इस्तेमाल रेल ट्रैक्स स्वीचेज, खासकर तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन में किया जाएगा। इस संबंध में जिन्दल स्टील एंड पावर के प्रबंध निदेशक वी. आर. शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गए आत्मनिर्भर भारत अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। रेल पहिया प्लांट से भारतीय रेल के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी और विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाले पहियों की उपलब्धता से हम भारत सरकार के दूरदर्शी गतिशक्ति अभियान को साकार करने में एक महत्वपूर्ण साझेदार साबित होंगे। शर्मा ने कहा कि अपनी क्षमताओं पर विश्वास और रेल परिवहन की आवश्यकताओं को समझते हुए जेएसपी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप रेल पटरियों की विभिन्न श्रेणियों की मांग पूरी करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। रायगढ़ की रेल मिल से भारतीय रेलवे और विभिन्न मेट्रो रेल परियोजनाओं को विशेष ग्रेड के रेल की आपूर्ति की जा रही है। बता दें कि जिन्दल स्टील एंड पावर 1080 एचएच एवं 1175 एचटी हेड हार्डेंड रेल ग्रेड की एकमात्र भारतीय निर्माता है। ये पटरियां 25 टन से अधिक भार वहन की क्षमता रखती हैं और तेज रफ्तार दौडऩे वाली गाडिय़ों के लिए उपयुक्त हैं। जेएसपी 60ई1, जेडयू1-60 और 60ई1ए1 मानदंडों के अनुरूपआर260 और 880 ग्रेड की पटरियों का भी निर्माण करता है और आर350 एचटी ग्रेड पटरियों का निर्यातक है।
नई दिल्ली /सुनील पाण्डेय : भारतीय रेलवे में पहियों की कमी के चलते वंदेभारत जैसी वीआईपी ट्रेनें पटरी पर समय से नहीं उतर पा रही है। लेकिन बहुत जल्द समस्या खत्म हो जाएगी और अपने देश में ही यात्री डिब्बों और मालगाडिय़ों के लिए पहियों बनने लगेंगे। इसके लिए निजी क्षेत्र की कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर को चुना गया है। रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर उत्पादन क्षेत्र में पहले से काम कर रही है। कंपनी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित अपने स्टील प्लांट में देश की पहली रेल पहिया उत्पादन कारखाना लगाएगी। राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक इस महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देने के लिए कंपनी ने जीआईएफएलओ-हंगरी के साथ एक समझौता किया है। जीआईएफएलओ-हंगरी और जिन्दल स्टील के बीच यह तकनीकी करार नई दिल्ली में शुक्रवार को हंगरी दूतावास एवं फिक्की के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारत-हंगरी बिजनेस फोरम में हुआ। इसके अनुसार प्लांट की शुरुआती उत्पादन क्षमता पच्चीस हजार सेट पहिया प्रतिवर्ष होगी। बता दें कि वर्तमान में वंदेभारत के लिए विदेशों से पहिए मंगाए जा रहे हैं। इसके चलते विलंब भी हो चुका है। गौरतलब है कि जिन्दल स्टील भारतीय रेल के लिए विभिन्न श्रेणियों की पटरियां तैयार कर आपूर्ति कर रही है। कंपनी देश की विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं के लिए हेड हार्डेंड रेल भी तैयार कर रही है। रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए जिन्दल स्टील एसिमेट्रिक रेलों के लिए रेल फोर्जिंग यूनिट भी स्थापित कर रही है, जिसका इस्तेमाल रेल ट्रैक्स स्वीचेज, खासकर तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन में किया जाएगा। इस संबंध में जिन्दल स्टील एंड पावर के प्रबंध निदेशक वी. आर. शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गए आत्मनिर्भर भारत अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। रेल पहिया प्लांट से भारतीय रेल के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी और विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाले पहियों की उपलब्धता से हम भारत सरकार के दूरदर्शी गतिशक्ति अभियान को साकार करने में एक महत्वपूर्ण साझेदार साबित होंगे। शर्मा ने कहा कि अपनी क्षमताओं पर विश्वास और रेल परिवहन की आवश्यकताओं को समझते हुए जेएसपी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप रेल पटरियों की विभिन्न श्रेणियों की मांग पूरी करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। रायगढ़ की रेल मिल से भारतीय रेलवे और विभिन्न मेट्रो रेल परियोजनाओं को विशेष ग्रेड के रेल की आपूर्ति की जा रही है। बता दें कि जिन्दल स्टील एंड पावर एक हज़ार अस्सी एचएच एवं एक हज़ार एक सौ पचहत्तर एचटी हेड हार्डेंड रेल ग्रेड की एकमात्र भारतीय निर्माता है। ये पटरियां पच्चीस टन से अधिक भार वहन की क्षमता रखती हैं और तेज रफ्तार दौडऩे वाली गाडिय़ों के लिए उपयुक्त हैं। जेएसपी साठईएक, जेडयूएक-साठ और साठईएकएएक मानदंडों के अनुरूपआरदो सौ साठ और आठ सौ अस्सी ग्रेड की पटरियों का भी निर्माण करता है और आरतीन सौ पचास एचटी ग्रेड पटरियों का निर्यातक है।
सलूणी। पटवार-कानूनगो संघ इकाई सलूणी के संपन्न चुनावों में पटवारी सुनील कुमार को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके अलावा सुशील कुमार उपप्रधान, संजीव कुमार सचिव, संजीत कुमार सहसचिव और कानूनगो सुरेंद्र कुमार कोषाध्यक्ष, राजेश कुमार व संघर्ष कुमार मीडिया प्रभारी, नजीर अहमद खान को वरिष्ठ सलाहकार व अमृत कुमार मुख्य सलाहकार और रीना कुमारी को सलाहकार का दायित्व सौंपा गया। बैठक में सुरेंद्र कुमार, अमृत कुमार, नजीर अहमद, रीना कुमारी, कुलदीप कुमार, जनक राज, नेक राम, सुशील कुमार, संजीत कुमार, रमेश कुमार, सुरेश कुमार, राजेश कुमार, संजीव कुमार, विपन कुमार, संघर्ष कुमार, विपन कुमार, सुनील कुमार व विपन कुमार सहित उपमंडल के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत पटवारी व कानूनगो ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
सलूणी। पटवार-कानूनगो संघ इकाई सलूणी के संपन्न चुनावों में पटवारी सुनील कुमार को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके अलावा सुशील कुमार उपप्रधान, संजीव कुमार सचिव, संजीत कुमार सहसचिव और कानूनगो सुरेंद्र कुमार कोषाध्यक्ष, राजेश कुमार व संघर्ष कुमार मीडिया प्रभारी, नजीर अहमद खान को वरिष्ठ सलाहकार व अमृत कुमार मुख्य सलाहकार और रीना कुमारी को सलाहकार का दायित्व सौंपा गया। बैठक में सुरेंद्र कुमार, अमृत कुमार, नजीर अहमद, रीना कुमारी, कुलदीप कुमार, जनक राज, नेक राम, सुशील कुमार, संजीत कुमार, रमेश कुमार, सुरेश कुमार, राजेश कुमार, संजीव कुमार, विपन कुमार, संघर्ष कुमार, विपन कुमार, सुनील कुमार व विपन कुमार सहित उपमंडल के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत पटवारी व कानूनगो ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
कलयुग में ऐसी तस्वीरें देखने को मिल रही जहां लोगो के लिए जन्म देने वाली मां और बाप बोझ हो रहे। ऐसे में अगर कोई सड़क पर पड़े व्यक्ति की सेवा को आगे बढ़े तो निश्चित ही उसकी प्रशंसा होगी। मास्टर निजाम ऐसे लोगो में ही हैं। उन्होंने लापता कापा को सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर ढूंढ निकाला बल्कि उनकी सेवा भी कर रहे हैं। बता दें कि कोतवाली नगर के नस्सरगंज गभड़िया के पास से 14 अप्रैल को 50 वर्षीय कामा लापता हो गया था। कामा की भाषा भी अजीब है कोई समझ नहीं सकता यह उनकी मुख्य कमजोरी है जो दरदर भटकने को मजबूर है। जिनकी सघन तलाश करने के लिये समाज सेवी निजाम खान और इसौली के सपा नेता मेराज अहमद ने सोशल मीडिया पर अपील किया और सुल्तानपुर से निकलने वाली मुख्य मार्गो में वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, लखनऊ, रायबरेली, कादीपुर व हलियापुर सभी सड़को पर चल रहे होटलों ढाबो पर खोजबीन किया। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, अस्पतालो में लेकिन कामा का कहीं पता नही चला। 18 अप्रैल को जिला अस्पताल से एक नर्स सुनीता का फोन समाजसेवी निजाम खान के मोबाइल पर आया कि आप कामा को जानते हैं? उसने डिटेल पूछी उसके बाद नर्स ने बताया कि जरनल वार्ड में बेड 5 पर कामा भर्ती है उसका इलाज चल रहा है। कामा के मिलने का सुराग मिलते ही निजाम की मानो मुंह मांगी मुराद पूरी हुई हो। आनन-फानन में वो एजाज खान, सुल्तान महमूद को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। कामा को देख कर जहां एक तरफ चेहरे पर खुशी छा गयी वही दूसरी तरफ उनकी दशा देख आंखे फटी की फटी रह गयी। कामा के बाएं पैर में फ्रैक्चर और हाथ पर वीगो लगा था। कामा निजाम खान को देखकर भावुक होकर रोने लगा। नर्स सुनीता ने जब बीएचटी पर कामा को एडमिट कराने वाले कि डिटेल दिखाई तो पता चला कि 16 अप्रैल की सुबह 8. 53 पर फरीदीपुर कॉलेज के गेट के सामने लावारिस घायल अवस्था में वो पड़ा मिला था। 108 एम्बुलेंस चालक अजय कुमार को फोन पर छात्र अभिषेक ने कामा के घायल होने सूचना दी थी। किसी बाइक ने कामा को पीछे से टक्कर मार दिया था जिससे गम्भीर रूप से वो घायल हो गया था। अस्पताल में भर्ती होने के उपरांत इनके पैर में फ्लास्टर चढ़ाया गया लावारिस के रूप में इलाज हो रहा था। लेकिन अब उसकी सेवा के लिये समाजसेवी निजाम खान व साथी आगे आए हैं। वहीं कामा की देखभाल करने के लिए निजाम ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सुरेशचंद्र कौशल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एससी गुप्ता इत्यादि डॉक्टरों और कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कलयुग में ऐसी तस्वीरें देखने को मिल रही जहां लोगो के लिए जन्म देने वाली मां और बाप बोझ हो रहे। ऐसे में अगर कोई सड़क पर पड़े व्यक्ति की सेवा को आगे बढ़े तो निश्चित ही उसकी प्रशंसा होगी। मास्टर निजाम ऐसे लोगो में ही हैं। उन्होंने लापता कापा को सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर ढूंढ निकाला बल्कि उनकी सेवा भी कर रहे हैं। बता दें कि कोतवाली नगर के नस्सरगंज गभड़िया के पास से चौदह अप्रैल को पचास वर्षीय कामा लापता हो गया था। कामा की भाषा भी अजीब है कोई समझ नहीं सकता यह उनकी मुख्य कमजोरी है जो दरदर भटकने को मजबूर है। जिनकी सघन तलाश करने के लिये समाज सेवी निजाम खान और इसौली के सपा नेता मेराज अहमद ने सोशल मीडिया पर अपील किया और सुल्तानपुर से निकलने वाली मुख्य मार्गो में वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, लखनऊ, रायबरेली, कादीपुर व हलियापुर सभी सड़को पर चल रहे होटलों ढाबो पर खोजबीन किया। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, अस्पतालो में लेकिन कामा का कहीं पता नही चला। अट्ठारह अप्रैल को जिला अस्पताल से एक नर्स सुनीता का फोन समाजसेवी निजाम खान के मोबाइल पर आया कि आप कामा को जानते हैं? उसने डिटेल पूछी उसके बाद नर्स ने बताया कि जरनल वार्ड में बेड पाँच पर कामा भर्ती है उसका इलाज चल रहा है। कामा के मिलने का सुराग मिलते ही निजाम की मानो मुंह मांगी मुराद पूरी हुई हो। आनन-फानन में वो एजाज खान, सुल्तान महमूद को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। कामा को देख कर जहां एक तरफ चेहरे पर खुशी छा गयी वही दूसरी तरफ उनकी दशा देख आंखे फटी की फटी रह गयी। कामा के बाएं पैर में फ्रैक्चर और हाथ पर वीगो लगा था। कामा निजाम खान को देखकर भावुक होकर रोने लगा। नर्स सुनीता ने जब बीएचटी पर कामा को एडमिट कराने वाले कि डिटेल दिखाई तो पता चला कि सोलह अप्रैल की सुबह आठ. तिरेपन पर फरीदीपुर कॉलेज के गेट के सामने लावारिस घायल अवस्था में वो पड़ा मिला था। एक सौ आठ एम्बुलेंस चालक अजय कुमार को फोन पर छात्र अभिषेक ने कामा के घायल होने सूचना दी थी। किसी बाइक ने कामा को पीछे से टक्कर मार दिया था जिससे गम्भीर रूप से वो घायल हो गया था। अस्पताल में भर्ती होने के उपरांत इनके पैर में फ्लास्टर चढ़ाया गया लावारिस के रूप में इलाज हो रहा था। लेकिन अब उसकी सेवा के लिये समाजसेवी निजाम खान व साथी आगे आए हैं। वहीं कामा की देखभाल करने के लिए निजाम ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सुरेशचंद्र कौशल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एससी गुप्ता इत्यादि डॉक्टरों और कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब सरकार ने यातायात नियमों में बदलाव किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नए यातायात नियमों के अनुसार, गति सीमा से अधिक, शराब या नशीली दवाओं के सेवन के दौरान ड्राइविंग करते वक्त पकड़े जाने पर आपको फाइन के साथ-साथ ब्लड डोनेट भी करना पड़ेगा। जैसे ही पंजाब सरकार ने यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले में जुर्माना राशि और लाइसेंस निलंबित करने के लिए एक नई अधिसूचना जारी की। उसके बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) एएस राय ने लोगों से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित नियमों का उल्लंघन नहीं करने का आग्रह किया है। परिवहन विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना का विवरण देते हुए एडीजीपी ने कहा कि अब निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने पर एक हजार रुपये जुर्माना के साथ पहली बार उल्लंघन करने पर तीन महीने की अवधि के लिए लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। तीन महीने के लाइसेंस निलंबन के साथ दूसरी बार उल्लंघन करने पर कंपोजिशन फीस दोगुनी यानी 2000 रुपये होगी। उन्होंने कहा कि लाल बत्ती के उल्लंघन की स्थिति में पहली और दूसरी बार उल्लंघन करने पर क्रमशः 1000 रुपये और 2000 रुपये की राशि का जुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाएगा। एडीजीपी (यातायात) ने कहा कि पूरे पंजाब में ट्रैफिक पुलिस विंग को नई अधिसूचना में निर्धारित निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में, पुलिस गति सीमा, लाल बत्ती का उल्लंघन, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने, वाहन चलाते समय शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव, ओवरलोडिंग और दो पहिया वाहनों पर दो से अधिक व्यक्तियों की सवारी करने पर कार्रवाई की जाएगी। आम जनता से सहयोग की मांग करते हुए, एएस राय ने कहा कि अब उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस एक अवधि के लिए निलंबित कर दिए जाएंगे। इसके अलावा उन्हें सक्षम अधिकारियों द्वारा सुझाए गए नियमों से गुजरना होगा। एडीजीपी ने माता-पिता और स्कूल अधिकारियों से कम उम्र के बच्चों / छात्रों को यातायात नियमों के बारे में शिक्षित करने के अलावा उन्हें वाहन चलाने से रोकने का भी आग्रह किया, जब तक कि उनके पास लाइसेंस न हो। उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि शहरों में किशोरों और अन्य युवाओं द्वारा ट्रिपल राइडिंग की जाती थी, जिसे निश्चित जुर्माना राशि लगाकर सख्ती से रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि अब सहायक उप निरीक्षक और उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारी को वाहन को तेज गति, लाल बत्ती का उल्लंघन, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने, शराब पीकर वाहन चलाने और ट्रिपल राइडिंग के लिए चालान करने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
पंजाब सरकार ने यातायात नियमों में बदलाव किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नए यातायात नियमों के अनुसार, गति सीमा से अधिक, शराब या नशीली दवाओं के सेवन के दौरान ड्राइविंग करते वक्त पकड़े जाने पर आपको फाइन के साथ-साथ ब्लड डोनेट भी करना पड़ेगा। जैसे ही पंजाब सरकार ने यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले में जुर्माना राशि और लाइसेंस निलंबित करने के लिए एक नई अधिसूचना जारी की। उसके बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एएस राय ने लोगों से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित नियमों का उल्लंघन नहीं करने का आग्रह किया है। परिवहन विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना का विवरण देते हुए एडीजीपी ने कहा कि अब निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने पर एक हजार रुपये जुर्माना के साथ पहली बार उल्लंघन करने पर तीन महीने की अवधि के लिए लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। तीन महीने के लाइसेंस निलंबन के साथ दूसरी बार उल्लंघन करने पर कंपोजिशन फीस दोगुनी यानी दो हज़ार रुपयापये होगी। उन्होंने कहा कि लाल बत्ती के उल्लंघन की स्थिति में पहली और दूसरी बार उल्लंघन करने पर क्रमशः एक हज़ार रुपयापये और दो हज़ार रुपयापये की राशि का जुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाएगा। एडीजीपी ने कहा कि पूरे पंजाब में ट्रैफिक पुलिस विंग को नई अधिसूचना में निर्धारित निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में, पुलिस गति सीमा, लाल बत्ती का उल्लंघन, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने, वाहन चलाते समय शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव, ओवरलोडिंग और दो पहिया वाहनों पर दो से अधिक व्यक्तियों की सवारी करने पर कार्रवाई की जाएगी। आम जनता से सहयोग की मांग करते हुए, एएस राय ने कहा कि अब उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस एक अवधि के लिए निलंबित कर दिए जाएंगे। इसके अलावा उन्हें सक्षम अधिकारियों द्वारा सुझाए गए नियमों से गुजरना होगा। एडीजीपी ने माता-पिता और स्कूल अधिकारियों से कम उम्र के बच्चों / छात्रों को यातायात नियमों के बारे में शिक्षित करने के अलावा उन्हें वाहन चलाने से रोकने का भी आग्रह किया, जब तक कि उनके पास लाइसेंस न हो। उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि शहरों में किशोरों और अन्य युवाओं द्वारा ट्रिपल राइडिंग की जाती थी, जिसे निश्चित जुर्माना राशि लगाकर सख्ती से रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि अब सहायक उप निरीक्षक और उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारी को वाहन को तेज गति, लाल बत्ती का उल्लंघन, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने, शराब पीकर वाहन चलाने और ट्रिपल राइडिंग के लिए चालान करने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले राज्य न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया दोनों के साथ कोरोना के डेल्टा संस्करण के खिलाफ अपनी कठिन लड़ाई में भयानक रूप से संघर्ष कर रहे हैं, जो डेल्टा मामलों की संख्या में लगातार बढ़ती स्पाइक का सामना कर रहे हैं। न्यू साउथ वेल्स, जहां जून के मध्य में अपनी राजधानी सिडनी में एक ही मामले के साथ प्रकोप शुरू हुआ, तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय संकट का केंद्र बना हुआ है, और 19 अगस्त तक, नवीनतम प्रकोप में कुल स्थानीय रूप से अधिग्रहित मामले पहुंच गए हैं। वही अब तक, न्यू साउथ वेल्स में 474 कोरोना रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 82 गहन देखभाल में हैं, जिनमें से 25 को वेंटिलेशन की आवश्यकता है। अन्य गंभीर दैनिक आंकड़ों में यह था कि 511 मामलों की जांच चल रही थी। समुदाय में 59 मामले संक्रामक थे, और 459 मामलों की अलगाव की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। साउथ वेल्स के अधिकारियों ने घोषणा की कि राज्य के क्षेत्रीय क्षेत्रों में लॉकडाउन 28 अगस्त तक बढ़ाया जाएगा, उसी तारीख को जब ग्रेटर सिडनी और आसपास के क्षेत्रों में लॉकडाउन समाप्त होने वाला है, क्योंकि राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में 25 नए मामलों का पता चला था। बढ़ते स्थानीय संचरण के साथ, टीकाकरण के लिए निवासियों की अधिक इच्छा आई, क्योंकि टीकाकरण के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले राज्य न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया दोनों के साथ कोरोना के डेल्टा संस्करण के खिलाफ अपनी कठिन लड़ाई में भयानक रूप से संघर्ष कर रहे हैं, जो डेल्टा मामलों की संख्या में लगातार बढ़ती स्पाइक का सामना कर रहे हैं। न्यू साउथ वेल्स, जहां जून के मध्य में अपनी राजधानी सिडनी में एक ही मामले के साथ प्रकोप शुरू हुआ, तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय संकट का केंद्र बना हुआ है, और उन्नीस अगस्त तक, नवीनतम प्रकोप में कुल स्थानीय रूप से अधिग्रहित मामले पहुंच गए हैं। वही अब तक, न्यू साउथ वेल्स में चार सौ चौहत्तर कोरोना रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से बयासी गहन देखभाल में हैं, जिनमें से पच्चीस को वेंटिलेशन की आवश्यकता है। अन्य गंभीर दैनिक आंकड़ों में यह था कि पाँच सौ ग्यारह मामलों की जांच चल रही थी। समुदाय में उनसठ मामले संक्रामक थे, और चार सौ उनसठ मामलों की अलगाव की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। साउथ वेल्स के अधिकारियों ने घोषणा की कि राज्य के क्षेत्रीय क्षेत्रों में लॉकडाउन अट्ठाईस अगस्त तक बढ़ाया जाएगा, उसी तारीख को जब ग्रेटर सिडनी और आसपास के क्षेत्रों में लॉकडाउन समाप्त होने वाला है, क्योंकि राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में पच्चीस नए मामलों का पता चला था। बढ़ते स्थानीय संचरण के साथ, टीकाकरण के लिए निवासियों की अधिक इच्छा आई, क्योंकि टीकाकरण के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
डुमरियागंज में अमरगढ़ के बलिदानियों की याद में जिले का सबसे ऊंचा 101 फीट झंडा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फहराया। उत्साह में लोग सराबोर दिखे। मेला जैसा द्श्य रहा। विभिन्न तरह के स्टाल भी लगाए गए थे। गोरखपुर, जागरण संवाददाता : सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में बजरंग चौक पर अमरगढ़ के बलिदानियों की याद में जिले का सबसे ऊंचा 101 फीट झंडा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फहराया। उत्साह में लोग सराबोर दिखे। मेला जैसा द्श्य रहा। विभिन्न तरह के स्टाल भी लगाए गए थे। विधायक ने कहा कि बलिदानियों की याद में डुमरियागंज में भव्य स्मारक बनाया जाएगा, जिसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस दौरान प्रभात फेरी निकाली गई। एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि द क्रुज आफ पर्ल राउंड द वर्ल्ड के 11 वें अध्याय में डुमरियागंज के अमरगढ़ के बलिदानियों का जिक्र है। एफ रोक्राफ्ट कमांडिग ब्रिगेडियर को सूचना मिली कि डुमरियागंज से एक मील दक्षिण आम के बाग में 1000 क्रांतिकारी मौजूद हैं। 26 नवंबर,1858 की अंग्रेजी सिपाहियों ने उन्हें घेर लिया। 80 क्रांतिकारी गोली से मारे गए। तमाम राप्ती में डूब गए। कैप्टन गिफर्ड सहित अन्य अंग्रेज भी मारे गए, जिनकी कब्र आज भी डुमरियागंज में मौजूद है और बलिदानियों की याद में तोरण द्वार बना है। इसके अलावा बलिदानियों के सम्मान में उल्लेखनीय कुछ नहीं हुआ। यह पहली बार विधायक के प्रयास से हुआ कि बलिदानियों की याद में सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया। संचालन रमेश कुमार श्रीवास्तव ने किया। जिला पंचायत अध्यक्ष शीतल सिंह, उपेंद्र सिंह, ब्लाक प्रमुख डुमरियागंज मानती त्रिपाठी, नरेंद्र मणि त्रिपाठी, भनवापुर शशिकला ओझा, लवकुश ओझा, निशा चौधरी मिठवल, आकाश सिंह, सीओ अजय कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार राजेश सिंह, बीडीओ डुमरियागंज सुशील कुमार अग्रहरि, धंनजय सिंह, ईओ शिवकुमार, बीईओ एसपी सिंह, सुनील पाठक, डा. विनोद मिश्रा, डा. वीके चतुर्वेदी, रमेश कुमार पांडेय, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, सत्येंद्र पांडेय, राम प्रकाश जायसवाल, राजीव अग्रहरि, एडीओ पंचायत बृजेश गुप्ता, हरिशंकर सिंह, अभिषेक सिंह, अभयराम पांडेय आदि मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस पर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में धूमधाम से आजादी का जश्न मनाया गया। शहीद बुधई स्मारक, भारत माता चौक, तहसील मुख्यालय, नगर पंचायत व थाना परिसर रंग-बिरंगे बिजली के झालरों से जगमगाता रहा। शोहरतगढ़ में अपना दल एस के कार्यालय पर विधायक अमर सिंह चौधरी ने ध्वजारोहण किया। खेतान बालिका विद्यालय के स्काउट गाइड के छात्र-छात्रों ने स्वच्छता को लेकर झांकी निकाली। तहसील मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी शिवमूर्ति सिंह, नगर पंचायत कार्यालय व शहीद बुधई स्मारक पर नगर पंचायत अध्यक्ष बबिता कसौधन, शिवपति डिग्री कालेज में प्राचार्य अरविंद सिंह, इंटर कालेज में प्रधानाचार्य डा. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, भारतीय स्टेट बैंक पर प्रबंधक ध्रुव आडवाणी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक डा. पीके वर्मा, रेलवे स्टेशन पर अधीक्षक भवेश कुमार, जूनियर हाईस्कूल पर खंड शिक्षा अधिकारी अभिमन्यु ने ध्वजारोहण किया। पकड़ी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार सुबास चंद्र ग्रामोदय विद्यालय बुढनाईया पर प्रधानाचार्य अनिल चौधरी, स्व. रामलखन जैसवाल जूनियर हाई स्कूल पर ओमप्रकाश जायसवाल, भपसी सा. स. समिति जोखवलिया पर अनिल मिश्रा, प्रा. वि. पकड़ी पर नंद किशोर यादव, मधवापुर में धर्मवीर, धनगढिया में पंकज कुमार, मेहनौली में रामू साहनी, बरैनिया में नाइम खां, नकाही में डल्लू चौधरी, भैसहवा में राजेंद्र, डाबरा में महबूब, बभनी में मोहम्मद सरीफ ने ध्वजारोहण किया।
डुमरियागंज में अमरगढ़ के बलिदानियों की याद में जिले का सबसे ऊंचा एक सौ एक फीट झंडा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फहराया। उत्साह में लोग सराबोर दिखे। मेला जैसा द्श्य रहा। विभिन्न तरह के स्टाल भी लगाए गए थे। गोरखपुर, जागरण संवाददाता : सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में बजरंग चौक पर अमरगढ़ के बलिदानियों की याद में जिले का सबसे ऊंचा एक सौ एक फीट झंडा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फहराया। उत्साह में लोग सराबोर दिखे। मेला जैसा द्श्य रहा। विभिन्न तरह के स्टाल भी लगाए गए थे। विधायक ने कहा कि बलिदानियों की याद में डुमरियागंज में भव्य स्मारक बनाया जाएगा, जिसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस दौरान प्रभात फेरी निकाली गई। एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि द क्रुज आफ पर्ल राउंड द वर्ल्ड के ग्यारह वें अध्याय में डुमरियागंज के अमरगढ़ के बलिदानियों का जिक्र है। एफ रोक्राफ्ट कमांडिग ब्रिगेडियर को सूचना मिली कि डुमरियागंज से एक मील दक्षिण आम के बाग में एक हज़ार क्रांतिकारी मौजूद हैं। छब्बीस नवंबर,एक हज़ार आठ सौ अट्ठावन की अंग्रेजी सिपाहियों ने उन्हें घेर लिया। अस्सी क्रांतिकारी गोली से मारे गए। तमाम राप्ती में डूब गए। कैप्टन गिफर्ड सहित अन्य अंग्रेज भी मारे गए, जिनकी कब्र आज भी डुमरियागंज में मौजूद है और बलिदानियों की याद में तोरण द्वार बना है। इसके अलावा बलिदानियों के सम्मान में उल्लेखनीय कुछ नहीं हुआ। यह पहली बार विधायक के प्रयास से हुआ कि बलिदानियों की याद में सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया। संचालन रमेश कुमार श्रीवास्तव ने किया। जिला पंचायत अध्यक्ष शीतल सिंह, उपेंद्र सिंह, ब्लाक प्रमुख डुमरियागंज मानती त्रिपाठी, नरेंद्र मणि त्रिपाठी, भनवापुर शशिकला ओझा, लवकुश ओझा, निशा चौधरी मिठवल, आकाश सिंह, सीओ अजय कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार राजेश सिंह, बीडीओ डुमरियागंज सुशील कुमार अग्रहरि, धंनजय सिंह, ईओ शिवकुमार, बीईओ एसपी सिंह, सुनील पाठक, डा. विनोद मिश्रा, डा. वीके चतुर्वेदी, रमेश कुमार पांडेय, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, सत्येंद्र पांडेय, राम प्रकाश जायसवाल, राजीव अग्रहरि, एडीओ पंचायत बृजेश गुप्ता, हरिशंकर सिंह, अभिषेक सिंह, अभयराम पांडेय आदि मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस पर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में धूमधाम से आजादी का जश्न मनाया गया। शहीद बुधई स्मारक, भारत माता चौक, तहसील मुख्यालय, नगर पंचायत व थाना परिसर रंग-बिरंगे बिजली के झालरों से जगमगाता रहा। शोहरतगढ़ में अपना दल एस के कार्यालय पर विधायक अमर सिंह चौधरी ने ध्वजारोहण किया। खेतान बालिका विद्यालय के स्काउट गाइड के छात्र-छात्रों ने स्वच्छता को लेकर झांकी निकाली। तहसील मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी शिवमूर्ति सिंह, नगर पंचायत कार्यालय व शहीद बुधई स्मारक पर नगर पंचायत अध्यक्ष बबिता कसौधन, शिवपति डिग्री कालेज में प्राचार्य अरविंद सिंह, इंटर कालेज में प्रधानाचार्य डा. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, भारतीय स्टेट बैंक पर प्रबंधक ध्रुव आडवाणी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक डा. पीके वर्मा, रेलवे स्टेशन पर अधीक्षक भवेश कुमार, जूनियर हाईस्कूल पर खंड शिक्षा अधिकारी अभिमन्यु ने ध्वजारोहण किया। पकड़ी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार सुबास चंद्र ग्रामोदय विद्यालय बुढनाईया पर प्रधानाचार्य अनिल चौधरी, स्व. रामलखन जैसवाल जूनियर हाई स्कूल पर ओमप्रकाश जायसवाल, भपसी सा. स. समिति जोखवलिया पर अनिल मिश्रा, प्रा. वि. पकड़ी पर नंद किशोर यादव, मधवापुर में धर्मवीर, धनगढिया में पंकज कुमार, मेहनौली में रामू साहनी, बरैनिया में नाइम खां, नकाही में डल्लू चौधरी, भैसहवा में राजेंद्र, डाबरा में महबूब, बभनी में मोहम्मद सरीफ ने ध्वजारोहण किया।
बॉलीवुड में कई सितारों की दोस्ती की मिसाल पेश की जाती है. जैकी श्रॉफ और सुनील शेट्टी भी ऐसे ही दोस्तों में से एक हैं. दोनों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी. टीवी गेम शो 'कौन बनेगा करोड़पति 13' में शानदार शुक्रवार में दोनों अपनी इसी दोस्ती की मिसाल पेश करने आए. शो के दौरान अमिताभ बच्चन दोनों की कुछ पोल खोलते भी नजर आए. अमिताभ बच्चन ने गेम शो के दौरान पूछा कि आप दोनों में से कौन अजीब स्थिति में एक-दूसरे को डालता है. इसपर दोनों ही जैकी श्रॉफ का नाम लेते हैं. सुनील शेट्टी कहते हैं कि दादा (जैकी श्रॉफ) कई बार हम सभी को अजीब स्थिति में डाल देते हैं. आज भी वह जगह नहीं देखते और अगर उन्हें सामने वाले का कोई कपड़ा पसंद आ रहा है, शर्ट वगैरह तो वह उससे एक्सचेंज कर लेते हैं, जबकि दादा खुद शानदार नजर आ रहे होते हैं. इस बात पर अमिताभ बच्चन ठहाके मारकर हंसते हैं. सवाल-जवाब के साथ वे अपने पुराने दिनों को भी याद करेंगे. 'केबीसी 13' में दोनों ही अमिताभ संग काफी मस्ती करते नजर आए. इस दौरान जैकी श्रॉफ ने बताया कि सुनील शेट्टी अपनी मां के बारे में भी बताते हैं. वह कहते हैं कि दादा ने बहुत खूबसूरत बात कही थी कि जब एक रूम की खोली में था और मां खांसती थी तो दादा को पता चल जाता था कि मां खांस रही है. जब बड़े घर में गए तो उन्हें पता ही नहीं चला कि मां कब गुजर गई. यह बात सुनकर जैकी खुद को रोक नहीं पाते हैं और फफक कर रो पड़ते हैं. सुनील और अमिताभ की भी आंखों में आंसू आ जाते हैं. इसके बाद बिग बी कहते हैं कि आजकल के जमाने में ऐसी दोस्ती बहुत कम देखने को मिलती है. आज भी सुनील शेट्टी के पसंद के कपड़े जैकी श्रॉफ पहनते हैं. दोनों ने मॉडलिंग के दिनों की शुरुआत साथ में की थी. तभी से दोनों अच्छे दोस्त हैं.
बॉलीवुड में कई सितारों की दोस्ती की मिसाल पेश की जाती है. जैकी श्रॉफ और सुनील शेट्टी भी ऐसे ही दोस्तों में से एक हैं. दोनों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की थी. टीवी गेम शो 'कौन बनेगा करोड़पति तेरह' में शानदार शुक्रवार में दोनों अपनी इसी दोस्ती की मिसाल पेश करने आए. शो के दौरान अमिताभ बच्चन दोनों की कुछ पोल खोलते भी नजर आए. अमिताभ बच्चन ने गेम शो के दौरान पूछा कि आप दोनों में से कौन अजीब स्थिति में एक-दूसरे को डालता है. इसपर दोनों ही जैकी श्रॉफ का नाम लेते हैं. सुनील शेट्टी कहते हैं कि दादा कई बार हम सभी को अजीब स्थिति में डाल देते हैं. आज भी वह जगह नहीं देखते और अगर उन्हें सामने वाले का कोई कपड़ा पसंद आ रहा है, शर्ट वगैरह तो वह उससे एक्सचेंज कर लेते हैं, जबकि दादा खुद शानदार नजर आ रहे होते हैं. इस बात पर अमिताभ बच्चन ठहाके मारकर हंसते हैं. सवाल-जवाब के साथ वे अपने पुराने दिनों को भी याद करेंगे. 'केबीसी तेरह' में दोनों ही अमिताभ संग काफी मस्ती करते नजर आए. इस दौरान जैकी श्रॉफ ने बताया कि सुनील शेट्टी अपनी मां के बारे में भी बताते हैं. वह कहते हैं कि दादा ने बहुत खूबसूरत बात कही थी कि जब एक रूम की खोली में था और मां खांसती थी तो दादा को पता चल जाता था कि मां खांस रही है. जब बड़े घर में गए तो उन्हें पता ही नहीं चला कि मां कब गुजर गई. यह बात सुनकर जैकी खुद को रोक नहीं पाते हैं और फफक कर रो पड़ते हैं. सुनील और अमिताभ की भी आंखों में आंसू आ जाते हैं. इसके बाद बिग बी कहते हैं कि आजकल के जमाने में ऐसी दोस्ती बहुत कम देखने को मिलती है. आज भी सुनील शेट्टी के पसंद के कपड़े जैकी श्रॉफ पहनते हैं. दोनों ने मॉडलिंग के दिनों की शुरुआत साथ में की थी. तभी से दोनों अच्छे दोस्त हैं.
बॉलीवु़ड के जाने माने फिल्म मेकर अनुराग कश्यप की बेटी आलिया कश्यप हमेशा मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती हैं। आलिया बीते काफी समय से लव लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। वहीं अब खबर है कि एक्ट्रेस ने अपने लॉन्ग टाइम विदेशी बॉयफ्रेंड शेन ग्रेगोइरे से लगाई कर ली है। दोनों एक दूसरे को काफी समय से डेट कर रहे थे अब दोनों ने शादी ने करने का फैसला कर लिया है। आलिया ने अपने बॉयफ्रेंड संग कुछ रोमांटिक तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी है। इस न्यूज के बाद उनके फैन्स की खुशी का ठिकाना नहीं है। सभी उनको बधाई दे रहे हैं। आलिया ने इन तस्वीरों के साथ एक लंबा पोस्ट भी लिखा है, उसमें क्या कहा है, आइए बताते हैं। आलिया कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विदेशी बॉयफ्रेंड के साथ सगाई की फोटोज इंडोनेशिया के बाली से इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। एक फोटो में वह अपनी सगाई की अंगूठी को फ्लॉन्ट कर रही हैं, तो दूसरी तस्वीर में वह लिपलॉक करती दिखाई दे रही हैं। दोनों ही तस्वीरों में कपल की खुशी देखते ही बन रही हैं। आलिया ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए एक नोट भी लिखा है। अन्नया पांडे ने लिखा - 'ओमजी'. . वहीं एक्ट्रेस जान्हवी कपूर ने इसपर हैरानी जताते हुए लिखा - 'क्या...। ' इसके अलावा एक्ट्रेस शनाया कपूर, सनी लियोन और राधिका सेठ समेत कई सेलेब्स और स्टार किड्स ने आलिया को बधाई दी।
बॉलीवु़ड के जाने माने फिल्म मेकर अनुराग कश्यप की बेटी आलिया कश्यप हमेशा मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती हैं। आलिया बीते काफी समय से लव लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। वहीं अब खबर है कि एक्ट्रेस ने अपने लॉन्ग टाइम विदेशी बॉयफ्रेंड शेन ग्रेगोइरे से लगाई कर ली है। दोनों एक दूसरे को काफी समय से डेट कर रहे थे अब दोनों ने शादी ने करने का फैसला कर लिया है। आलिया ने अपने बॉयफ्रेंड संग कुछ रोमांटिक तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी है। इस न्यूज के बाद उनके फैन्स की खुशी का ठिकाना नहीं है। सभी उनको बधाई दे रहे हैं। आलिया ने इन तस्वीरों के साथ एक लंबा पोस्ट भी लिखा है, उसमें क्या कहा है, आइए बताते हैं। आलिया कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विदेशी बॉयफ्रेंड के साथ सगाई की फोटोज इंडोनेशिया के बाली से इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। एक फोटो में वह अपनी सगाई की अंगूठी को फ्लॉन्ट कर रही हैं, तो दूसरी तस्वीर में वह लिपलॉक करती दिखाई दे रही हैं। दोनों ही तस्वीरों में कपल की खुशी देखते ही बन रही हैं। आलिया ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए एक नोट भी लिखा है। अन्नया पांडे ने लिखा - 'ओमजी'. . वहीं एक्ट्रेस जान्हवी कपूर ने इसपर हैरानी जताते हुए लिखा - 'क्या...। ' इसके अलावा एक्ट्रेस शनाया कपूर, सनी लियोन और राधिका सेठ समेत कई सेलेब्स और स्टार किड्स ने आलिया को बधाई दी।
लखनऊ, । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में सरकार के सौ दिन पूरा करने पर दस हजार से अधिक भर्तियों की घोषणा के क्रम में गृह विभाग ने सबसे पहले कदम आगे बढ़ा दिया है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाने के लिए पुलिस बल में नये पदों का सृजन प्रारम्भ कर दिया गया है। सृजित 5381 पदों पर भर्ती की शासन ने मंजूरी भी दे दी हैं। इनमें 86 राजपत्रित तथा 5295 अराजपत्रित पदों पर भर्ती की मंजूरी मिल गई है। उत्तर प्रदेश शासन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन के क्रम में पुलिस बल में आवश्यकतानुसारजनशक्ति की उपलब्ध्ता सुनिश्चित करने तथा पुलिस प्रशासन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नए पदों पर भर्ती की मंजूरी प्रदान कर दी है। इसका असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाये जाने तथा अपराधो पर प्रभावी नियंत्रण में पड़ेगा। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि पुलिस विभाग की विभिन्न इकाइयों जैसे साइबर क्राइम, फोंरेसिक साइंस, इंटरनेट मीडिया, एसटीएफ तथा एटीएस आदि के लिए 5381 नये पदों पर भर्ती की मंजूरी शासन से प्रदान की गई है। जिन 5381 पदों पर भर्ती होनी है, उनमें राजपत्रित श्रेणी के 86 व अराजपत्रित श्रेणी के 5295 पद है। राजपत्रित श्रेणी में तीन अपर पुलिस महानिदेशक, तीन पुलिस महानिरीक्षक, छह उप पुलिस महानिरीक्षक, 32 पुलिस अधीक्षक, सात अपर पुलिस अधीक्षक, सात, संयुक्त निदेशक अभियोजन का एक तथा 35 पुलिस उपाधीक्षक के पद हैं। अपर पुलिस महानिदेशक व पुलिस महानिरीक्षक के तीन-तीन पद उप पुलिस महानिरीक्षक के छह पद पुलिस कमिश्नरेट के जनपदों के लिए सृजित किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक के 32 में से एक पद एटीएस, 17 पद लखनऊ व गौतमबुद्वनगर में पुलिस कमिश्नर कार्यालय, 11 पद कानपुर व वाराणसी नगर में पुलिस कमिश्नर कार्यालय के लिए, एक पद साइबर क्राइम थाना तथा दो पद एटीएस के सुदृढ़ीकरण के लिए दिए गए हैं। इसके साथ ही अपर पुलिस अधीक्षक के सात पदों में से दो एटीएस, तीन साइबर क्राइम थाना तथा बिजनौर व गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए एक-एक पद सृजित किया गया है। संयुक्त निदेशक, अभियोजन का एक पद एटीएस के लिए सृजित किया गया है। पुुलिस उपाधीक्षक के 34 में से चार एटीएस, एक एसटीएफ अयोध्या, आठ रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम, एक पद चंदौली में अतिरिक्त सर्किल, एक पद ललितपुर में अतिरिक्त, एक पद संभल के नए सर्किल बहजोई, एक पद गोंडा सर्किल, 16 पद क्राइम थाने के संचालन तथा एक पद गोरखपुर के श्री गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए सृजित है।
लखनऊ, । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में सरकार के सौ दिन पूरा करने पर दस हजार से अधिक भर्तियों की घोषणा के क्रम में गृह विभाग ने सबसे पहले कदम आगे बढ़ा दिया है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाने के लिए पुलिस बल में नये पदों का सृजन प्रारम्भ कर दिया गया है। सृजित पाँच हज़ार तीन सौ इक्यासी पदों पर भर्ती की शासन ने मंजूरी भी दे दी हैं। इनमें छियासी राजपत्रित तथा पाँच हज़ार दो सौ पचानवे अराजपत्रित पदों पर भर्ती की मंजूरी मिल गई है। उत्तर प्रदेश शासन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन के क्रम में पुलिस बल में आवश्यकतानुसारजनशक्ति की उपलब्ध्ता सुनिश्चित करने तथा पुलिस प्रशासन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नए पदों पर भर्ती की मंजूरी प्रदान कर दी है। इसका असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाये जाने तथा अपराधो पर प्रभावी नियंत्रण में पड़ेगा। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि पुलिस विभाग की विभिन्न इकाइयों जैसे साइबर क्राइम, फोंरेसिक साइंस, इंटरनेट मीडिया, एसटीएफ तथा एटीएस आदि के लिए पाँच हज़ार तीन सौ इक्यासी नये पदों पर भर्ती की मंजूरी शासन से प्रदान की गई है। जिन पाँच हज़ार तीन सौ इक्यासी पदों पर भर्ती होनी है, उनमें राजपत्रित श्रेणी के छियासी व अराजपत्रित श्रेणी के पाँच हज़ार दो सौ पचानवे पद है। राजपत्रित श्रेणी में तीन अपर पुलिस महानिदेशक, तीन पुलिस महानिरीक्षक, छह उप पुलिस महानिरीक्षक, बत्तीस पुलिस अधीक्षक, सात अपर पुलिस अधीक्षक, सात, संयुक्त निदेशक अभियोजन का एक तथा पैंतीस पुलिस उपाधीक्षक के पद हैं। अपर पुलिस महानिदेशक व पुलिस महानिरीक्षक के तीन-तीन पद उप पुलिस महानिरीक्षक के छह पद पुलिस कमिश्नरेट के जनपदों के लिए सृजित किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक के बत्तीस में से एक पद एटीएस, सत्रह पद लखनऊ व गौतमबुद्वनगर में पुलिस कमिश्नर कार्यालय, ग्यारह पद कानपुर व वाराणसी नगर में पुलिस कमिश्नर कार्यालय के लिए, एक पद साइबर क्राइम थाना तथा दो पद एटीएस के सुदृढ़ीकरण के लिए दिए गए हैं। इसके साथ ही अपर पुलिस अधीक्षक के सात पदों में से दो एटीएस, तीन साइबर क्राइम थाना तथा बिजनौर व गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए एक-एक पद सृजित किया गया है। संयुक्त निदेशक, अभियोजन का एक पद एटीएस के लिए सृजित किया गया है। पुुलिस उपाधीक्षक के चौंतीस में से चार एटीएस, एक एसटीएफ अयोध्या, आठ रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम, एक पद चंदौली में अतिरिक्त सर्किल, एक पद ललितपुर में अतिरिक्त, एक पद संभल के नए सर्किल बहजोई, एक पद गोंडा सर्किल, सोलह पद क्राइम थाने के संचालन तथा एक पद गोरखपुर के श्री गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए सृजित है।
सपा शासन में पुलिस को अपनी भैंसों के पीछे दौड़ाने वाले आजम खां की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जनाब आजम खां जब सत्ता में रहे तो गवर्नर राम नाइक और उनके बीच तलवारें खिंचती रहीं। अब बारी गवर्नर साहब की है। जी हां उत्तर प्रदेश की नई धाकड़ सत्ता को गवर्नर ने लेटर लिखा है। गवर्नर ने योगी को पत्र लिखकर आजम पर कार्रवाई करने को कहा है। अखिलेश के खास मंत्री रहे आजम खां के खिलाफ सरकारी तथा वक्फ बोर्ड की संपत्ति के दुरुपयोग के आरोप हैं। समाजवादी पार्टी के रामपुर से विधायक आजम खां पर बेहद संगीन आरोप हैं। जिनमें सरकारी संपत्तियों, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के कब्जे के साथ ही साथ हेराफेरी तथा सरकारी खजाने के बड़े दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव के साथ ही सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेहद खास माने जाने वाले आजम खां रामपुर में मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाकर भी बेहद चर्चा में थे। आजम खां पर मदरसा आलिया पर कब्जा करने का आरोप है। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालय में सरकारी गेस्ट हाउस बनवाने तथा स्पोर्ट्स स्टेडियम का सामान रामपुर में अपने जौहर विश्वविद्यालय में ले जाने का आरोप है। आजम खां के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल (सीडब्ल्यूसी) ने 42 पन्नों की एक रिपोर्ट भी तैयार की थी। इस रिपोर्ट में वक्फ काउंसिल ने बेहद ईमानदार होने का दावा करने वाले आजम खां पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही रिपोर्ट जांच के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भी भेजी गई थी। ऐसे में राज्यपाल राम नाईक ने भी इन मामलों में पत्र लिख कर सीएम योगी से मामले पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। कांग्रेस नेता के शिकायती पत्र पर राज्यपाल ने लिखा मुख्यमंत्री को : पूर्व मंत्री आजम खां पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग व रामपुर की सरकारी इमारतों पर कब्जे की शिकायत पर राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच कराने को कहा है। रामपुर के कांग्रेसी नेता फैसल लाला ने 26 अप्रैल को राज्यपाल को आजम के खिलाफ 14 सूत्री ज्ञापन सौंपा था। जिसमें इल्जाम लगाया गया था कि पूर्व मंत्री ने सत्ता में रहते हुए सरकारी खजाने का जमकर दुरुयोग किया है। करोड़ों की लागत से बने रहे स्पोट्र्स स्टेडियम के सामान का इस्तेमाल जौहर विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। सरकारी इमारतों को एक रुपये की लीज पर जौहर ट्रस्ट को आवंटित कर दिया गया है। खां पर वित्तीय इल्जामों की फेहरिस्त भी थी। फैसल लाला के शिकायती पत्र को संलग्न करते हुए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि इल्जाम बेहद गंभीर प्रकृति हैं, जिसकी जांच कराई जानी चाहिए। ध्यान रहे, इससे पहले समाजवादी सरकार के दौरान भी फैसल लाला ने आजम खां के खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन दिया था, उस समय भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था, मगर उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
सपा शासन में पुलिस को अपनी भैंसों के पीछे दौड़ाने वाले आजम खां की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जनाब आजम खां जब सत्ता में रहे तो गवर्नर राम नाइक और उनके बीच तलवारें खिंचती रहीं। अब बारी गवर्नर साहब की है। जी हां उत्तर प्रदेश की नई धाकड़ सत्ता को गवर्नर ने लेटर लिखा है। गवर्नर ने योगी को पत्र लिखकर आजम पर कार्रवाई करने को कहा है। अखिलेश के खास मंत्री रहे आजम खां के खिलाफ सरकारी तथा वक्फ बोर्ड की संपत्ति के दुरुपयोग के आरोप हैं। समाजवादी पार्टी के रामपुर से विधायक आजम खां पर बेहद संगीन आरोप हैं। जिनमें सरकारी संपत्तियों, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के कब्जे के साथ ही साथ हेराफेरी तथा सरकारी खजाने के बड़े दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव के साथ ही सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेहद खास माने जाने वाले आजम खां रामपुर में मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाकर भी बेहद चर्चा में थे। आजम खां पर मदरसा आलिया पर कब्जा करने का आरोप है। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालय में सरकारी गेस्ट हाउस बनवाने तथा स्पोर्ट्स स्टेडियम का सामान रामपुर में अपने जौहर विश्वविद्यालय में ले जाने का आरोप है। आजम खां के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल ने बयालीस पन्नों की एक रिपोर्ट भी तैयार की थी। इस रिपोर्ट में वक्फ काउंसिल ने बेहद ईमानदार होने का दावा करने वाले आजम खां पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही रिपोर्ट जांच के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भी भेजी गई थी। ऐसे में राज्यपाल राम नाईक ने भी इन मामलों में पत्र लिख कर सीएम योगी से मामले पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। कांग्रेस नेता के शिकायती पत्र पर राज्यपाल ने लिखा मुख्यमंत्री को : पूर्व मंत्री आजम खां पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग व रामपुर की सरकारी इमारतों पर कब्जे की शिकायत पर राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच कराने को कहा है। रामपुर के कांग्रेसी नेता फैसल लाला ने छब्बीस अप्रैल को राज्यपाल को आजम के खिलाफ चौदह सूत्री ज्ञापन सौंपा था। जिसमें इल्जाम लगाया गया था कि पूर्व मंत्री ने सत्ता में रहते हुए सरकारी खजाने का जमकर दुरुयोग किया है। करोड़ों की लागत से बने रहे स्पोट्र्स स्टेडियम के सामान का इस्तेमाल जौहर विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। सरकारी इमारतों को एक रुपये की लीज पर जौहर ट्रस्ट को आवंटित कर दिया गया है। खां पर वित्तीय इल्जामों की फेहरिस्त भी थी। फैसल लाला के शिकायती पत्र को संलग्न करते हुए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि इल्जाम बेहद गंभीर प्रकृति हैं, जिसकी जांच कराई जानी चाहिए। ध्यान रहे, इससे पहले समाजवादी सरकार के दौरान भी फैसल लाला ने आजम खां के खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन दिया था, उस समय भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था, मगर उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
बारी के बीच से, बाला की मड़ई से सटकर राह गई थी। मड़ई के पास पहुँचा, तो अनायास ही निगाह घूम गई । बाला नाँद पर लगी भैंस को कुट्टी डाल रही थी। चन्दन से देखा-देखी हुई तो बाला के मुँह पर गुलाबी हँसी बिखर गई। चन्दन फिर आगे बढ़ गया। चन्दन दुआर पहुँचा तो ओंकार ने गोरुओं को नाँद से लगा दिया था। लाठी, दरी रखकर वह भूसी और जूठ ले आने घर चल दिया था। घर पहुँचते ही गुंजा ने टोक दिया, "आज तो देर हो गई, आँख लग गई थी क्या?" "हाँ।" चन्दन ने धीमे-से कह दिया। "बहुत धीरे से बोल रहे हो। आँखें तो चढ़ी हुई हैं। नींद नहीं आई क्या? आती भी कैसे? रात का पानी, बाप रे! बचे कि भीग गए थे?" "एकदम सराबोर!" चन्दन ठठाकर हँस पड़ा, "लाओ, भूसी- दाना दो । हाथ-मुँह धोके अभी दुआर से पलटता हूँ, बड़ी भूख लगी है, कोई बढ़िया चीज़ बना के रखे रहना।" दाना - भूसी देती हुई गुंजा उसका मुँह निहारती रही। ब्याह के बाद आज पहली बार वह खुलकर बोला था, अपने की तरह आत्मीयता दिखाकर । चन्दन दूध लेकर लौटा तो जलपान तैयार था । मोटे-मोटे घी में तले हुए चार 'लिट्' और बड़ी-सी गुड़ की एक भेली फोड़कर थाली में फैलाकर गुंजा ने चन्दन के आगे सरका दी। चन्दन खाने लगा, गुंजा ने सारा दूध औटने के लिए कड़ाही में डाल दिया। चारों लिट्टियाँ खाकर जब कटोरे-भर गरम दूध पेट में उतार गया, तो पीछे के खम्भे से पीठ टिकाकर चन्दन बोला, "अब जाके देह में जान आई है।" "क्यों, आज क्या बात है? अब तक बे-जान कैसे हो गए थे?" "देह ही तो है, डूबती - उतराती रहती है।" गुंजा के मुँह को ध्यान से देखते हुए चन्दन बोला। चन्दन की इस चितवन में गुंजा ने कुछ नयापन पाया, कोई भेद-भरी दृष्टि । एक अजीब-से जिज्ञासु भाव से वह चन्दन को देखती हुई बोली, "आज क्या बात है ?" "कुछ नहीं, तुमने पूछा तो वैसे ही कह दिया था। सकल पदारथ एहि जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।' अब मेरी कौन-कौन बात जानोगी? थोड़े दिनों में मेरा ब्याह होगा, मेरी औरत आएगी। मैं पूरा गृहस्थ बन जाऊँगा-फिर मुझमें नया क्या रह जाएगा, कभी रहा भी नहीं। जो था, उसका मोल-भाव करनेवाला, हाट उठ जाने के बाद आया...।" और चन्दन उठकर चला आया। गुंजा वैसे ही मुँह ताकती रह गई। उसके बाद से भादों की प्रत्येक रात, चन्दन ने पच्छिम की बारीवाले जनेरा के खेत की मचान पर ही काटी । जनेरा की बालें पकने लगीं, तो रात में सियार और बन्दर खेत पर अधिक चोट मारने लगे। रात में अब सोने को कम मिलता, अगोरवाई में जागना अधिक पड़ता था। चन्दन ने बाला को मचान पर रोज़-रोज़ आने से मना किया, "आख़िर ऐसे कब तक चलेगा रे?" "जब तक चलता है, चलने दो चन्दन!" "लेकिन कुछ "लोक-लाज तुम अपनी देखो चन्दन, अपनी चिन्ता मुझको है । " "मैं तो जब तक खेत नहीं कटता, मचान पर आऊँगा ही। लेकिन तुझे तो
बारी के बीच से, बाला की मड़ई से सटकर राह गई थी। मड़ई के पास पहुँचा, तो अनायास ही निगाह घूम गई । बाला नाँद पर लगी भैंस को कुट्टी डाल रही थी। चन्दन से देखा-देखी हुई तो बाला के मुँह पर गुलाबी हँसी बिखर गई। चन्दन फिर आगे बढ़ गया। चन्दन दुआर पहुँचा तो ओंकार ने गोरुओं को नाँद से लगा दिया था। लाठी, दरी रखकर वह भूसी और जूठ ले आने घर चल दिया था। घर पहुँचते ही गुंजा ने टोक दिया, "आज तो देर हो गई, आँख लग गई थी क्या?" "हाँ।" चन्दन ने धीमे-से कह दिया। "बहुत धीरे से बोल रहे हो। आँखें तो चढ़ी हुई हैं। नींद नहीं आई क्या? आती भी कैसे? रात का पानी, बाप रे! बचे कि भीग गए थे?" "एकदम सराबोर!" चन्दन ठठाकर हँस पड़ा, "लाओ, भूसी- दाना दो । हाथ-मुँह धोके अभी दुआर से पलटता हूँ, बड़ी भूख लगी है, कोई बढ़िया चीज़ बना के रखे रहना।" दाना - भूसी देती हुई गुंजा उसका मुँह निहारती रही। ब्याह के बाद आज पहली बार वह खुलकर बोला था, अपने की तरह आत्मीयता दिखाकर । चन्दन दूध लेकर लौटा तो जलपान तैयार था । मोटे-मोटे घी में तले हुए चार 'लिट्' और बड़ी-सी गुड़ की एक भेली फोड़कर थाली में फैलाकर गुंजा ने चन्दन के आगे सरका दी। चन्दन खाने लगा, गुंजा ने सारा दूध औटने के लिए कड़ाही में डाल दिया। चारों लिट्टियाँ खाकर जब कटोरे-भर गरम दूध पेट में उतार गया, तो पीछे के खम्भे से पीठ टिकाकर चन्दन बोला, "अब जाके देह में जान आई है।" "क्यों, आज क्या बात है? अब तक बे-जान कैसे हो गए थे?" "देह ही तो है, डूबती - उतराती रहती है।" गुंजा के मुँह को ध्यान से देखते हुए चन्दन बोला। चन्दन की इस चितवन में गुंजा ने कुछ नयापन पाया, कोई भेद-भरी दृष्टि । एक अजीब-से जिज्ञासु भाव से वह चन्दन को देखती हुई बोली, "आज क्या बात है ?" "कुछ नहीं, तुमने पूछा तो वैसे ही कह दिया था। सकल पदारथ एहि जग माहीं, करमहीन नर पावत नाहीं।' अब मेरी कौन-कौन बात जानोगी? थोड़े दिनों में मेरा ब्याह होगा, मेरी औरत आएगी। मैं पूरा गृहस्थ बन जाऊँगा-फिर मुझमें नया क्या रह जाएगा, कभी रहा भी नहीं। जो था, उसका मोल-भाव करनेवाला, हाट उठ जाने के बाद आया...।" और चन्दन उठकर चला आया। गुंजा वैसे ही मुँह ताकती रह गई। उसके बाद से भादों की प्रत्येक रात, चन्दन ने पच्छिम की बारीवाले जनेरा के खेत की मचान पर ही काटी । जनेरा की बालें पकने लगीं, तो रात में सियार और बन्दर खेत पर अधिक चोट मारने लगे। रात में अब सोने को कम मिलता, अगोरवाई में जागना अधिक पड़ता था। चन्दन ने बाला को मचान पर रोज़-रोज़ आने से मना किया, "आख़िर ऐसे कब तक चलेगा रे?" "जब तक चलता है, चलने दो चन्दन!" "लेकिन कुछ "लोक-लाज तुम अपनी देखो चन्दन, अपनी चिन्ता मुझको है । " "मैं तो जब तक खेत नहीं कटता, मचान पर आऊँगा ही। लेकिन तुझे तो
बराक ओबामाः अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 8. 51 करोड़ फॉलोअर्स हैं। यह मार्च 2007 में ट्वीटर पर आए थे। नरेंद्र मोदीः भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2. 74 करोड़ फॉलोअर्स हैं। इन्होंने जनवरी 2009 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। डोनॉल्ड ट्रंपः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के 2. 57 करोड़ फॉलोअर्स हैं। इन्होंने मार्च 2009 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। हिलेरी क्लिंटनः अमेरिका की हिलेरी क्लिंटन ने अप्रैल 2013 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। इनके 1. 34 करोड़ फॉलोअर्स हैं। मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूमः दुबई के राजा मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के 75 लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने 2009 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। सुषमा स्वराजः इसमें भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी 73 लाख फॉलोअर्स के साथ इसमें शामिल हैं। सुषमा नवंबर 2010 से ट्वीटर पर हैं। क्रिस्टिना फर्नाडिस डी किर्चनरः अर्जेटीना की पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टिना फर्नाडिस डी किर्चनर भी कम नहीं हैं। अप्रैल 2010 में ट्वीटर से जुड़ने के बाद इनके 48 लाख फॉलोअर्स हैं। डेविड कैमरनः यूके पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के 16 लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने मार्च 2008 में ट्वीटर पर शुरुआत की थी। निकोलस सरकोजीः फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के ट्वीटर पर 15 लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने फरवरी 2012 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। दिमित्री रोगोजिनः रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन के करीब 11 लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने जून 2010 में ट्वीटर ज्वाइन किया था। इस पाकिस्तानी रेस्टोरेंट में क्यूट फीमेल रोबोट परोसती है खाना, ऑर्डर देने के लिए लगती है भीड़!
बराक ओबामाः अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के आठ. इक्यावन करोड़ फॉलोअर्स हैं। यह मार्च दो हज़ार सात में ट्वीटर पर आए थे। नरेंद्र मोदीः भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो. चौहत्तर करोड़ फॉलोअर्स हैं। इन्होंने जनवरी दो हज़ार नौ में ट्वीटर ज्वाइन किया था। डोनॉल्ड ट्रंपः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के दो. सत्तावन करोड़ फॉलोअर्स हैं। इन्होंने मार्च दो हज़ार नौ में ट्वीटर ज्वाइन किया था। हिलेरी क्लिंटनः अमेरिका की हिलेरी क्लिंटन ने अप्रैल दो हज़ार तेरह में ट्वीटर ज्वाइन किया था। इनके एक. चौंतीस करोड़ फॉलोअर्स हैं। मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूमः दुबई के राजा मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के पचहत्तर लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने दो हज़ार नौ में ट्वीटर ज्वाइन किया था। सुषमा स्वराजः इसमें भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी तिहत्तर लाख फॉलोअर्स के साथ इसमें शामिल हैं। सुषमा नवंबर दो हज़ार दस से ट्वीटर पर हैं। क्रिस्टिना फर्नाडिस डी किर्चनरः अर्जेटीना की पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टिना फर्नाडिस डी किर्चनर भी कम नहीं हैं। अप्रैल दो हज़ार दस में ट्वीटर से जुड़ने के बाद इनके अड़तालीस लाख फॉलोअर्स हैं। डेविड कैमरनः यूके पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सोलह लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने मार्च दो हज़ार आठ में ट्वीटर पर शुरुआत की थी। निकोलस सरकोजीः फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के ट्वीटर पर पंद्रह लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने फरवरी दो हज़ार बारह में ट्वीटर ज्वाइन किया था। दिमित्री रोगोजिनः रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन के करीब ग्यारह लाख फॉलोअर्स हैं। इन्होंने जून दो हज़ार दस में ट्वीटर ज्वाइन किया था। इस पाकिस्तानी रेस्टोरेंट में क्यूट फीमेल रोबोट परोसती है खाना, ऑर्डर देने के लिए लगती है भीड़!
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के टेक्सास शहर के म्यूजियम में रखी गई वैक्स की मूर्ति को हटाने की नौबत आ गई। बता दें कि ट्रम्प की यह मूर्ति रूस के राष्ट्पति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन (Kim Jong-Un) के बीच थी। प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ समय से ट्रम्प की मूर्ति पर लोग हमले कर रहे थे। लोगों में ट्रम्प के प्रति घृणा की भावना देखी जा रही थी और ऐसे लोग म्यूजियम में रखी उनकी मूर्ति पर हमला करते थे। इसके बाद टेक्सास शहर के प्रशासन ने ट्रम्प की मूर्ति को म्यूजियम से हटाने का फैसला किया।
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टेक्सास शहर के म्यूजियम में रखी गई वैक्स की मूर्ति को हटाने की नौबत आ गई। बता दें कि ट्रम्प की यह मूर्ति रूस के राष्ट्पति व्लादिमीर पुतिन और नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के बीच थी। प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ समय से ट्रम्प की मूर्ति पर लोग हमले कर रहे थे। लोगों में ट्रम्प के प्रति घृणा की भावना देखी जा रही थी और ऐसे लोग म्यूजियम में रखी उनकी मूर्ति पर हमला करते थे। इसके बाद टेक्सास शहर के प्रशासन ने ट्रम्प की मूर्ति को म्यूजियम से हटाने का फैसला किया।
Nora Fatehi ने टाइट ड्रेस पहन ढाया कहर लाजवाब हुस्न और दिलकश अदाओ के सामने आइटम गर्ल Malaika का हुस्न फीका,फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय में अगर किसी अभिनेत्री की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है जो वह अभिनेत्री है नोरा फतेही। इस अभिनेत्री ने कम समय में ही अपनी दिलकश अदाओं से लोगों को ऐसा दीवाना बनाया है कि सभी लोग देखते ही देखते इस अभिनेत्री की जमकर तारीफ करते नजर आते हैं,आइये आज हम आपको इस अभिनेत्री की हॉट और बोल्ड तस्वीरों के बारे में बताते है! बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की नई आइटम गर्ल मलाइका अरोड़ा हाल फिलहाल में एक बार फिर से अपनी दिलकश अदाओं से लोगों के दिलों को जीत रही है। आपको बता दें कि यह खूबसूरत हसीना जब कभी भी मुंबई की सड़कों पर नजर आती है तब सभी लोगों की नजर उन के ऊपर टिक जाती है और नोरा भी इस दौरान अपने चाहने वालों को बिल्कुल निराश नहीं करती। खूबसूरत गाउन पहनकर यह अभिनेत्री अपनी दिलकश अदाएं दिखा रही थी जिसके ऊपर हर किसी की नजर टिकी हुई थी। आइए आपको बताते हैं इस दौरान कैसे नोरा ने कैमरे को देखते ही अपनी चाल बदल दी और इस तरह से मटक मटक कर चलने लगी जिसमें उनका टाइट फिगर साफ रूप से देखा जा रहा था और सभी लोग इसी वजह से इस अभिनेत्री का मजाक बनाने लगे हैं। इन दिनों एक बार फिर से सोशल मीडिया पर ऐसा ही देखने को मिल रहा है जब नोरा फतेही कार से उतरते ही बलखाती हुई चलती नजर आ रही है और जिस किसी ने भी नोरा फतेही की इस खूबसूरती को देखा है तो सभी लोग उनके दीवाने हुए जा रहे हैं। देखते ही देखते नोरा फतेही की यह तस्वीरें इंटरनेट पर धूम मचा रही है और सभी लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि नोरा फतेही से खूबसूरत फिगर इस समय पूरे बॉलीवुड में किसी का नहीं है और कहीं ना कहीं लोगों द्वारा कहीं यह बात बिल्कुल सच भी है।
Nora Fatehi ने टाइट ड्रेस पहन ढाया कहर लाजवाब हुस्न और दिलकश अदाओ के सामने आइटम गर्ल Malaika का हुस्न फीका,फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय में अगर किसी अभिनेत्री की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है जो वह अभिनेत्री है नोरा फतेही। इस अभिनेत्री ने कम समय में ही अपनी दिलकश अदाओं से लोगों को ऐसा दीवाना बनाया है कि सभी लोग देखते ही देखते इस अभिनेत्री की जमकर तारीफ करते नजर आते हैं,आइये आज हम आपको इस अभिनेत्री की हॉट और बोल्ड तस्वीरों के बारे में बताते है! बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की नई आइटम गर्ल मलाइका अरोड़ा हाल फिलहाल में एक बार फिर से अपनी दिलकश अदाओं से लोगों के दिलों को जीत रही है। आपको बता दें कि यह खूबसूरत हसीना जब कभी भी मुंबई की सड़कों पर नजर आती है तब सभी लोगों की नजर उन के ऊपर टिक जाती है और नोरा भी इस दौरान अपने चाहने वालों को बिल्कुल निराश नहीं करती। खूबसूरत गाउन पहनकर यह अभिनेत्री अपनी दिलकश अदाएं दिखा रही थी जिसके ऊपर हर किसी की नजर टिकी हुई थी। आइए आपको बताते हैं इस दौरान कैसे नोरा ने कैमरे को देखते ही अपनी चाल बदल दी और इस तरह से मटक मटक कर चलने लगी जिसमें उनका टाइट फिगर साफ रूप से देखा जा रहा था और सभी लोग इसी वजह से इस अभिनेत्री का मजाक बनाने लगे हैं। इन दिनों एक बार फिर से सोशल मीडिया पर ऐसा ही देखने को मिल रहा है जब नोरा फतेही कार से उतरते ही बलखाती हुई चलती नजर आ रही है और जिस किसी ने भी नोरा फतेही की इस खूबसूरती को देखा है तो सभी लोग उनके दीवाने हुए जा रहे हैं। देखते ही देखते नोरा फतेही की यह तस्वीरें इंटरनेट पर धूम मचा रही है और सभी लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि नोरा फतेही से खूबसूरत फिगर इस समय पूरे बॉलीवुड में किसी का नहीं है और कहीं ना कहीं लोगों द्वारा कहीं यह बात बिल्कुल सच भी है।
अमरावती प्रतिनिधि/दि. ६ - प्रति वर्ष स्थानीय श्री संत गाडगे महाराज समाधि मंदिर द्वारा कर्मयोगी श्री गाडगेबाबा का पुण्यतिथि महोत्सव बडी धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के खतरे एवं सरकार व प्रशासन की ओर से जारी आदेश की वजह से पुण्यतिथि महोत्सव को बडे ही साधे व सामान्य ढंग से मनाया जायेगा. साथ ही इस वर्ष यात्रा महोत्सव का आयोजन भी नहीं होगा. इस आशय की जानकारी देते हुए मंदिर के संस्थान के विश्वस्त बापूसाहब देशमुख ने सभी भाविकों से आवाहन किया कि, वे इस वर्ष अपने-अपने घरों में रहकर ही कर्मयोगी गाडगेबाबा को उनके पुण्यतिथि अवसर पर आदरांजलि अर्पित करें.
अमरावती प्रतिनिधि/दि. छः - प्रति वर्ष स्थानीय श्री संत गाडगे महाराज समाधि मंदिर द्वारा कर्मयोगी श्री गाडगेबाबा का पुण्यतिथि महोत्सव बडी धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के खतरे एवं सरकार व प्रशासन की ओर से जारी आदेश की वजह से पुण्यतिथि महोत्सव को बडे ही साधे व सामान्य ढंग से मनाया जायेगा. साथ ही इस वर्ष यात्रा महोत्सव का आयोजन भी नहीं होगा. इस आशय की जानकारी देते हुए मंदिर के संस्थान के विश्वस्त बापूसाहब देशमुख ने सभी भाविकों से आवाहन किया कि, वे इस वर्ष अपने-अपने घरों में रहकर ही कर्मयोगी गाडगेबाबा को उनके पुण्यतिथि अवसर पर आदरांजलि अर्पित करें.
गृहमंत्री के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं कराई? मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने परमबीर सिंह के वकील से कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई जाती तब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाएंगे। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने परमबीर के वकील से कहा कि आप ऐसा कोई मामला बताएं जिसमें बिना एफआईआर दर्ज किए मामले को सीबीआई जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया गया हो? माननीय जजों ने कहा कि इस मामले में आपने गृहमंत्री देशमुख के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई। बिना रिपोर्ट उसकी सीबीआई जांच कैसे कराई जा सकती है? परमबीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने सुनवाई की। सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विक्रम ननकारी ने कोर्ट में परमबीर सिंह का लिखा पत्र पढ़कर सुनाया और कहा कि इस पत्र से पता चलता है कि पुलिस किस दबाव में काम कर रही है और कितना राजनीतिक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि यह बातें एक अनुभवी अफसर ने रखी हैं। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा-आप कह रहे हैं कि देशमुख के खिलाफ जांच सीबीआई को दी जानी चाहिए। लेकिन एफआईआर कहां हैं, कोई भी जांच बिना एफआईआर के सीबीआई को नहीं सौंपी जा सकती। बता दें कि परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक खत लिखकर अनिल देशमुख (गृहमंत्री) पर आरोप लगाया था कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी को 100 करोड़ रुपए महीने की वसूली करने का टारगेट दिया था। इस पत्र को आधार बनाते हुए ही परमबीर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने सुनवाई से ही इंकार कर दिया था और कहा था कि आप पहले बॉम्बे हाई कोर्ट जाएं। सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह के वकील विक्रम ननवानी ने कहा कि एक ऐसे शख्स पर यह आरोप लगाए हैं, जो बीते 30 सालों से पुलिस सर्विस में हैं। इस पर चीफ जस्टिस दत्ता ने कहा कि भले ही आप पुलिस कमिश्नर रहे हैं, लेकिन आप कानून से ऊपर नहीं हैं। क्या पुलिस अधिकारी, मंत्री और नेता कानून से ऊपर हैं? खुद को बहुत ऊपर मत समझिए। जब आपको पता था कि बॉस अपराध कर रहा है तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? आप फेल हुए हैं। चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहाöकिसी भी मामले की जांच के लिए जरूरी है कि एफआईआर दर्ज हो। आपको इससे किसने रोका था? प्रथम दृष्ट्या हम यह मानते हैं कि एफआईआर के बिना किसी तरह की जांच नहीं हो सकती। मुंबई हाई कोर्ट ने पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अनिल देशमुख के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
गृहमंत्री के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं कराई? मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने परमबीर सिंह के वकील से कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई जाती तब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाएंगे। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने परमबीर के वकील से कहा कि आप ऐसा कोई मामला बताएं जिसमें बिना एफआईआर दर्ज किए मामले को सीबीआई जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया गया हो? माननीय जजों ने कहा कि इस मामले में आपने गृहमंत्री देशमुख के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई। बिना रिपोर्ट उसकी सीबीआई जांच कैसे कराई जा सकती है? परमबीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने सुनवाई की। सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विक्रम ननकारी ने कोर्ट में परमबीर सिंह का लिखा पत्र पढ़कर सुनाया और कहा कि इस पत्र से पता चलता है कि पुलिस किस दबाव में काम कर रही है और कितना राजनीतिक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि यह बातें एक अनुभवी अफसर ने रखी हैं। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा-आप कह रहे हैं कि देशमुख के खिलाफ जांच सीबीआई को दी जानी चाहिए। लेकिन एफआईआर कहां हैं, कोई भी जांच बिना एफआईआर के सीबीआई को नहीं सौंपी जा सकती। बता दें कि परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक खत लिखकर अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी को एक सौ करोड़ रुपए महीने की वसूली करने का टारगेट दिया था। इस पत्र को आधार बनाते हुए ही परमबीर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने सुनवाई से ही इंकार कर दिया था और कहा था कि आप पहले बॉम्बे हाई कोर्ट जाएं। सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह के वकील विक्रम ननवानी ने कहा कि एक ऐसे शख्स पर यह आरोप लगाए हैं, जो बीते तीस सालों से पुलिस सर्विस में हैं। इस पर चीफ जस्टिस दत्ता ने कहा कि भले ही आप पुलिस कमिश्नर रहे हैं, लेकिन आप कानून से ऊपर नहीं हैं। क्या पुलिस अधिकारी, मंत्री और नेता कानून से ऊपर हैं? खुद को बहुत ऊपर मत समझिए। जब आपको पता था कि बॉस अपराध कर रहा है तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? आप फेल हुए हैं। चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहाöकिसी भी मामले की जांच के लिए जरूरी है कि एफआईआर दर्ज हो। आपको इससे किसने रोका था? प्रथम दृष्ट्या हम यह मानते हैं कि एफआईआर के बिना किसी तरह की जांच नहीं हो सकती। मुंबई हाई कोर्ट ने पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अनिल देशमुख के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
अध्याय मात्र हैं अध्याय संख्या लेकर महापुराणत्व सम्बंध में खगोल रहता है. विष्णुभागवत में जिसप्रकार दार्शनिक तत्त्वप्रधान है यह देवीभागवत उसीप्रकार तंत्रानुसारी है । इसमें यथेष्ट तंत्रका प्रभाव लक्षित होताहै । इसकारणही देवीयामल आदि तांत्रिक ग्रंथों में इस देवीभागवतको प्राधान्य स्वीकृत हुआहे. किन्हीका मतहै कि देवताकी मूर्ति निर्माण करके प्रतिष्ठा करना तांत्रिक समयकी बात है प्रथम शताब्दी में तंत्रका विशेषप्रचारथा, ६ छठी शताब्दीकी नेपालसे तंत्रकी पोथीमिली है देवीभागवतमें पुरातनकथा होनेपरभी तांत्रिक प्रभाव के समय इसका फिर संस्कार हुआ था राधाकी उपासनाभी इसीका फलहै विष्णुभागवतमें गोपी और कृष्णका चरित्र विस्तृत होनेपरभी राधाका नाम नहीं है होता तो राधामाहात्म्य अवश्यहोता जहां देवीभागवतमें राधाचरित्र है वह विष्णु भगवान से पीछेका है कोई अंश इसमें विष्णुभागवतसे पहलेका भी हो तथापि यह संस्करण नवमशाताब्दीकाहे. किन्हींका है कि पूर्वकालमें एकही भागवतथी बौद्ध समय में ब्राह्मण धर्मके शोचनीय परिणामके साथ वह पुरातन भागवत लोप होगई जब फिर ब्राह्मण धर्मका अभ्युदय हुआ तब वैष्णवोंने दार्शनिक श्रीमद्भागवत और शाक्तिकोंने पौराणिक देवीभागवतका प्रचार किया इन कौरसाधु, कृष्णभट्ट, और गोपालचक्रवर्त्तीकी टीका, चूडामणिचक्रवर्तीकी अन्वयबोधिनी, नरसिहाचाय्यैको भावप्रकाशिका, नरहरिको तात्पर्य्यदीपिका, नारायण, भेदवादी यदुपति, वल्लभाचार्ग्य, विजयध्वज तीर्थ, विश्वनाथ चक्रवत्त, विष्णुस्वामी, वीरराघव, शिवराम, श्रीनिवासाचार्ग्य, सत्याभिनवतीर्थ, सुदर्शनसूरि हारेभानुशुक्ल आदिकीटीका इसके अतिरिक्त मधुसूदन सरस्वतीकी भागवत पुराणाय लोकत्रय टीका, कृष्णदीक्षितको सुबोतिनगोस्वामीकी वैष्णवतोषिणी, वासुदेवकी बुधरञ्जिनी, विठ्ठल दीक्षितका प्रकाश, ब्रह्मानन्द भारतीका एकादशस्कन्ध सारआदि उल्लेख योग्यहै ।
अध्याय मात्र हैं अध्याय संख्या लेकर महापुराणत्व सम्बंध में खगोल रहता है. विष्णुभागवत में जिसप्रकार दार्शनिक तत्त्वप्रधान है यह देवीभागवत उसीप्रकार तंत्रानुसारी है । इसमें यथेष्ट तंत्रका प्रभाव लक्षित होताहै । इसकारणही देवीयामल आदि तांत्रिक ग्रंथों में इस देवीभागवतको प्राधान्य स्वीकृत हुआहे. किन्हीका मतहै कि देवताकी मूर्ति निर्माण करके प्रतिष्ठा करना तांत्रिक समयकी बात है प्रथम शताब्दी में तंत्रका विशेषप्रचारथा, छः छठी शताब्दीकी नेपालसे तंत्रकी पोथीमिली है देवीभागवतमें पुरातनकथा होनेपरभी तांत्रिक प्रभाव के समय इसका फिर संस्कार हुआ था राधाकी उपासनाभी इसीका फलहै विष्णुभागवतमें गोपी और कृष्णका चरित्र विस्तृत होनेपरभी राधाका नाम नहीं है होता तो राधामाहात्म्य अवश्यहोता जहां देवीभागवतमें राधाचरित्र है वह विष्णु भगवान से पीछेका है कोई अंश इसमें विष्णुभागवतसे पहलेका भी हो तथापि यह संस्करण नवमशाताब्दीकाहे. किन्हींका है कि पूर्वकालमें एकही भागवतथी बौद्ध समय में ब्राह्मण धर्मके शोचनीय परिणामके साथ वह पुरातन भागवत लोप होगई जब फिर ब्राह्मण धर्मका अभ्युदय हुआ तब वैष्णवोंने दार्शनिक श्रीमद्भागवत और शाक्तिकोंने पौराणिक देवीभागवतका प्रचार किया इन कौरसाधु, कृष्णभट्ट, और गोपालचक्रवर्त्तीकी टीका, चूडामणिचक्रवर्तीकी अन्वयबोधिनी, नरसिहाचाय्यैको भावप्रकाशिका, नरहरिको तात्पर्य्यदीपिका, नारायण, भेदवादी यदुपति, वल्लभाचार्ग्य, विजयध्वज तीर्थ, विश्वनाथ चक्रवत्त, विष्णुस्वामी, वीरराघव, शिवराम, श्रीनिवासाचार्ग्य, सत्याभिनवतीर्थ, सुदर्शनसूरि हारेभानुशुक्ल आदिकीटीका इसके अतिरिक्त मधुसूदन सरस्वतीकी भागवत पुराणाय लोकत्रय टीका, कृष्णदीक्षितको सुबोतिनगोस्वामीकी वैष्णवतोषिणी, वासुदेवकी बुधरञ्जिनी, विठ्ठल दीक्षितका प्रकाश, ब्रह्मानन्द भारतीका एकादशस्कन्ध सारआदि उल्लेख योग्यहै ।
हिणी के दृष्टान्त देवे-दिखाये । वे इतना भी नहीं सोच सके कि यह उक्ति बहुत और मुसलमान शासन काल में प्रचलित हुई है। इस वैवाहिक रीति को सनातन तथा अनादि और अनन्त काल से चली आती हुई ही उन्होने माना । जाति के इस गुलाम मस्तिष्क पर हम अनेक बार लिखा चुके हैं, और हमारा विश्वास है कि गुलामी की इज्जत जिस जाति में इतनी बडी लगी हुई है, वह राजनीतिक कार्यों में त्याग की पराकाष्ठा तक पहुँचकर ध्येय को प्राप्त करने में उसी तरह प्रेरणा के द्वारा कुछ आगे बढकर अपने पूर्व स्थान को लौट सकती है। दूसरे देश, जहाँ राजनीतिक ध्येय प्राप्त हुए हैं, अपनी सामाजिक दशा में इतने पिछड़े हुए नहीं थे। वे नवीन भावना तथा नवीन कार्यक्रम को पहचानते थे। इसलिए भीतर से उनकी सहानुभूति थी । यहाँ देहात के लोग, जहाँ किसी-किसी गाँव में शुद्ध हिन्दी लिखनेवाला भी नहीं निकलता, राजनीति के ध्येय को प्राप्त कर अपने सुधारों के करने की कल्पना भी नहीं कर सकते, वे जानते भी नहीं कि हमारा राजनीति का ध्येय क्या है। सरकार के प्रति उनका हार्दिक असन्तोष अवश्य है. पुलिस का यथेच्छ दबाब उन्हें अखरता है, पर वे अपने विचारों के अनुसार ही राजनीतिक मामलों में टीका-टिप्पणियाँ करते हैं, जो निराशाजनक तथा वर्तमान समर के उत्तम भेद को न जानने की ही सूचना दे जाती हैं। इससे राजनीतिक ग्रान्दोलनों को जितना बल मिलना चाहिए, नहीं मिलता। मनुष्य अपने छोटे-छोटे स्वार्थों को तभी छोड सकता है, जब वह अपने सामने कोई बड़ा स्वार्थ रख लेता है, और उसे समझता हुआ उसकी तरफ अग्रसर होता है। यहाँ यू. पी. की जनता विचारों की इस हद तक नहीं पहुँच सकती। शिक्षा की कमी तथा रूढ़ियों का प्रावल्य होने के कारण वह अपने क्षुद्रतम स्वार्थ में ही पड़ी हुई है । जब छोटे त्याग द्वारा बड़े फल की प्राप्ति का दृश्य उसे दिखलाया जाता है, तब वह अपने छोटे की हानि और बडे फल की प्राप्ति को मरीचिका समझकर निरस्त हो जाती है। देश की यह बहुत ही दयनीय दशा है। सरकार बेचारी भारतवर्ष की रक्षा के लिए सामरिक खर्च भर का रुपया भी नहीं पाती, फिर देश के लिए शिक्षा को अनिवार्य करने का खर्च वह कहाँ से लाये ? समाज तैयार नहीं हो पाता और गुलामी के नये-नये बोक जो उस पर लदते रहते हैं, चुपचाप ढोता चला जा रहा है। मनुष्य को हर प्रकार की परतन्त्रता से मुक्ति तभी मिल सकती है, जब वह अपनी परतन्त्रता के स्वरूप को पहचाने। यदि मूर्ति ही समाज के मस्तिष्क में चरम-इष्ट-प्राप्ति रही, तो उनके फूटने पर हिन्दू मुसलमानों का भी चिरस्थायी रहेगा, और तब विचारक के रूप से किसी सरकार का रहना भी दार्शनिक सत्य की नींव मजबूत करेगा। पर यदि मूर्ति इष्ट-प्राप्ति का साधन रहेगी तो साधन का नष्ट होना दूसरी वस्तुओं की नश्वरता की तरह ही अवश्यम्भावी समझा जायगा, और एक साधन के नष्ट होने पर दूसरे के उद्भव की तरह, मूर्ति की जगह दूसरी मूर्ति बन या स्थापित हो जाया करेगो, और कभी वैमनस्य या हत्याकाण्ड को ज्वाला प्रचण्ड रूप धारण नहीं कर सकेगी। हिन्दुमुसलमानों का सौहार्द भी दृढ़ रहेगा, और फिर जनाब जान साहब के फैसले की भी किसी को यकता नहीं रहेगी। यह है धार्मिक विचारों की पहली सीढी फिर अगर समाज के लोगों की उपासना और पूजा के लिए अपने मन को स्थि करने के सिवा दूसरा बाहरी साधन ही न रह जाय, तो किसी बाह्य विक्षेप य बाहरी उपद्रव से शान्ति-भंग की कोई शंका भी न रहे। रही मन की बात । सं मन को स्थिर कर शान्ति की साधना की आदत डाल ही ली गयी है । वह टिप्पणिय । 20 उत्तेजना के लिए जगह कहाँ ? पर जब शान्ति का रूप कहीं बाहर होगा, तब उसके नष्ट होने पर शान्ति का भी नाश समझिए, और फिर प्रशान्त चित्त जो कुछ भी करें, थोड़ा है। जब अपने ही अन्दर शान्ति का रूप मिल जाता है, तब लड़ाई और कमजोरियों के बीज भी अपने ही अन्दर मिल जाते हैं, और उनका सुवार भी शान्ति की स्थापना द्वारा हो जाता है, और तब बाहर के सर्वस्व तक के लिए मनुष्य को किसी प्रकार का संकोच या भय नहीं होता । अन्तर के सुधार से बाहर का भी तमाम वातावरण शुद्ध हो जाता है। तव मनुष्य समझकर हो कुल काम करता है, इसलिए कि उसके अन्दर समझ की प्रतिष्ठा हो जाती है। देश के स्वाधीन काल के मनुष्यों को जब हम देखते हैं, तब उन्हें इसी तरह के विचारवाले पाते हैं, और स्थितप्रज्ञ समाज के एक ही केन्द्र से सहस्त्री बाराएँ फूटकर अनेक प्रकार के प्राकृतिक आविष्कार, सत्य, चमत्कार, काव्य, कला, शिल्प, वाणिज्य, राष्ट्रनीति, समाजनीति आदि के रूप में अपनी स्वतन्त्र दिशाओं से, स्वतन्त्र मार्ग से, बहती हुई पूर्णता के एक ही समुद्र से मिलती है। पर यदि एक ही धारा से तमाम धाराएँ तैयार करने की कोशिश की गयी, तो वे सब नहरे होंगी, प्राकृतिक प्रवाह नहीं । फिर उस एक धारा से इतना पानी भी art free सकता, जो तमाम नहरों को भरता रहे। हमें पहले समाज के पूर्ण मनुष्यों की आवश्यकता है, नियम जिनके बनाये हुए हैं, जो नियमों के बनाये हुए नहीं। '[ 'सुवा', मासिक, लखनऊ, जून, 1930 (सम्पादकीय) । असंकलित] "राष्ट्र भाषा का प्रश्न राष्ट्रीयता की भावना के उदय होते ही राष्ट्र-भाषा का प्रश्न आप-से-आप उठ खड़ा होता है। इस देश में ही नहीं, अन्य अनेक देश में राष्ट्र-भाषा का प्रश्न उठ चुका है, और परिस्थितियों के अनुसार अनेक रूपों में बढ़ प्रश्न हल भी किया गया । योरपीय इतिहास में रोमन साम्राज्य का एक विशेष महत्त्वपूर्ण युग गुजर चुका है। यूनान के पतन के उपरांत जब रोम की उन्नति हुई, और जब सारी गोरसोय सभ्यता का केन्द्र एथेस से हटकर रोम में थाया, तब वहाँ की लेटिन-भाषा की जैसी उन्नति हुई, इतिहास में उसका पूरा-पूरा उल्लेख है। सारे सभ्य योग्ण का झुकाव उसकी ओर हुआ और पीछे से बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में उसका प्रवेश भी हुआ। प्रवेश हुआ, यह नहीं कहना चाहिए; कहना चाहिए कि बड़े-बडे विश्वविद्यालय उसे प्रवेश देकर गौरव-सम्पन्न हुए। गौरव सम्पन्न हुए, यह यदि न कहे तो इतना तो अवश्य कहेंगे कि उन्होंने उसे प्रवेश देकर अपने की गौरव सम्म समभा। जं देश सभ्यता की दौड़ में जितना आगे रहता है, जिस देश का आदि जितना अधिक उत्थान होता है, उस देश की भाषा का भी उतना ही विस्तार, सम्मान आदि होता है। यूनान की भाषा की तुलना में रोम कीटन भाषा का विकास अधिक विस्तृत हुआ था, क्योंकि अन्य बातों के अतिरिक्त रोम लोगो में साम्राज्य - विजय की भावना प्रबल थी। रामन जहां-जह गये, ग्र 70 । विरान
हिणी के दृष्टान्त देवे-दिखाये । वे इतना भी नहीं सोच सके कि यह उक्ति बहुत और मुसलमान शासन काल में प्रचलित हुई है। इस वैवाहिक रीति को सनातन तथा अनादि और अनन्त काल से चली आती हुई ही उन्होने माना । जाति के इस गुलाम मस्तिष्क पर हम अनेक बार लिखा चुके हैं, और हमारा विश्वास है कि गुलामी की इज्जत जिस जाति में इतनी बडी लगी हुई है, वह राजनीतिक कार्यों में त्याग की पराकाष्ठा तक पहुँचकर ध्येय को प्राप्त करने में उसी तरह प्रेरणा के द्वारा कुछ आगे बढकर अपने पूर्व स्थान को लौट सकती है। दूसरे देश, जहाँ राजनीतिक ध्येय प्राप्त हुए हैं, अपनी सामाजिक दशा में इतने पिछड़े हुए नहीं थे। वे नवीन भावना तथा नवीन कार्यक्रम को पहचानते थे। इसलिए भीतर से उनकी सहानुभूति थी । यहाँ देहात के लोग, जहाँ किसी-किसी गाँव में शुद्ध हिन्दी लिखनेवाला भी नहीं निकलता, राजनीति के ध्येय को प्राप्त कर अपने सुधारों के करने की कल्पना भी नहीं कर सकते, वे जानते भी नहीं कि हमारा राजनीति का ध्येय क्या है। सरकार के प्रति उनका हार्दिक असन्तोष अवश्य है. पुलिस का यथेच्छ दबाब उन्हें अखरता है, पर वे अपने विचारों के अनुसार ही राजनीतिक मामलों में टीका-टिप्पणियाँ करते हैं, जो निराशाजनक तथा वर्तमान समर के उत्तम भेद को न जानने की ही सूचना दे जाती हैं। इससे राजनीतिक ग्रान्दोलनों को जितना बल मिलना चाहिए, नहीं मिलता। मनुष्य अपने छोटे-छोटे स्वार्थों को तभी छोड सकता है, जब वह अपने सामने कोई बड़ा स्वार्थ रख लेता है, और उसे समझता हुआ उसकी तरफ अग्रसर होता है। यहाँ यू. पी. की जनता विचारों की इस हद तक नहीं पहुँच सकती। शिक्षा की कमी तथा रूढ़ियों का प्रावल्य होने के कारण वह अपने क्षुद्रतम स्वार्थ में ही पड़ी हुई है । जब छोटे त्याग द्वारा बड़े फल की प्राप्ति का दृश्य उसे दिखलाया जाता है, तब वह अपने छोटे की हानि और बडे फल की प्राप्ति को मरीचिका समझकर निरस्त हो जाती है। देश की यह बहुत ही दयनीय दशा है। सरकार बेचारी भारतवर्ष की रक्षा के लिए सामरिक खर्च भर का रुपया भी नहीं पाती, फिर देश के लिए शिक्षा को अनिवार्य करने का खर्च वह कहाँ से लाये ? समाज तैयार नहीं हो पाता और गुलामी के नये-नये बोक जो उस पर लदते रहते हैं, चुपचाप ढोता चला जा रहा है। मनुष्य को हर प्रकार की परतन्त्रता से मुक्ति तभी मिल सकती है, जब वह अपनी परतन्त्रता के स्वरूप को पहचाने। यदि मूर्ति ही समाज के मस्तिष्क में चरम-इष्ट-प्राप्ति रही, तो उनके फूटने पर हिन्दू मुसलमानों का भी चिरस्थायी रहेगा, और तब विचारक के रूप से किसी सरकार का रहना भी दार्शनिक सत्य की नींव मजबूत करेगा। पर यदि मूर्ति इष्ट-प्राप्ति का साधन रहेगी तो साधन का नष्ट होना दूसरी वस्तुओं की नश्वरता की तरह ही अवश्यम्भावी समझा जायगा, और एक साधन के नष्ट होने पर दूसरे के उद्भव की तरह, मूर्ति की जगह दूसरी मूर्ति बन या स्थापित हो जाया करेगो, और कभी वैमनस्य या हत्याकाण्ड को ज्वाला प्रचण्ड रूप धारण नहीं कर सकेगी। हिन्दुमुसलमानों का सौहार्द भी दृढ़ रहेगा, और फिर जनाब जान साहब के फैसले की भी किसी को यकता नहीं रहेगी। यह है धार्मिक विचारों की पहली सीढी फिर अगर समाज के लोगों की उपासना और पूजा के लिए अपने मन को स्थि करने के सिवा दूसरा बाहरी साधन ही न रह जाय, तो किसी बाह्य विक्षेप य बाहरी उपद्रव से शान्ति-भंग की कोई शंका भी न रहे। रही मन की बात । सं मन को स्थिर कर शान्ति की साधना की आदत डाल ही ली गयी है । वह टिप्पणिय । बीस उत्तेजना के लिए जगह कहाँ ? पर जब शान्ति का रूप कहीं बाहर होगा, तब उसके नष्ट होने पर शान्ति का भी नाश समझिए, और फिर प्रशान्त चित्त जो कुछ भी करें, थोड़ा है। जब अपने ही अन्दर शान्ति का रूप मिल जाता है, तब लड़ाई और कमजोरियों के बीज भी अपने ही अन्दर मिल जाते हैं, और उनका सुवार भी शान्ति की स्थापना द्वारा हो जाता है, और तब बाहर के सर्वस्व तक के लिए मनुष्य को किसी प्रकार का संकोच या भय नहीं होता । अन्तर के सुधार से बाहर का भी तमाम वातावरण शुद्ध हो जाता है। तव मनुष्य समझकर हो कुल काम करता है, इसलिए कि उसके अन्दर समझ की प्रतिष्ठा हो जाती है। देश के स्वाधीन काल के मनुष्यों को जब हम देखते हैं, तब उन्हें इसी तरह के विचारवाले पाते हैं, और स्थितप्रज्ञ समाज के एक ही केन्द्र से सहस्त्री बाराएँ फूटकर अनेक प्रकार के प्राकृतिक आविष्कार, सत्य, चमत्कार, काव्य, कला, शिल्प, वाणिज्य, राष्ट्रनीति, समाजनीति आदि के रूप में अपनी स्वतन्त्र दिशाओं से, स्वतन्त्र मार्ग से, बहती हुई पूर्णता के एक ही समुद्र से मिलती है। पर यदि एक ही धारा से तमाम धाराएँ तैयार करने की कोशिश की गयी, तो वे सब नहरे होंगी, प्राकृतिक प्रवाह नहीं । फिर उस एक धारा से इतना पानी भी art free सकता, जो तमाम नहरों को भरता रहे। हमें पहले समाज के पूर्ण मनुष्यों की आवश्यकता है, नियम जिनके बनाये हुए हैं, जो नियमों के बनाये हुए नहीं। '[ 'सुवा', मासिक, लखनऊ, जून, एक हज़ार नौ सौ तीस । असंकलित] "राष्ट्र भाषा का प्रश्न राष्ट्रीयता की भावना के उदय होते ही राष्ट्र-भाषा का प्रश्न आप-से-आप उठ खड़ा होता है। इस देश में ही नहीं, अन्य अनेक देश में राष्ट्र-भाषा का प्रश्न उठ चुका है, और परिस्थितियों के अनुसार अनेक रूपों में बढ़ प्रश्न हल भी किया गया । योरपीय इतिहास में रोमन साम्राज्य का एक विशेष महत्त्वपूर्ण युग गुजर चुका है। यूनान के पतन के उपरांत जब रोम की उन्नति हुई, और जब सारी गोरसोय सभ्यता का केन्द्र एथेस से हटकर रोम में थाया, तब वहाँ की लेटिन-भाषा की जैसी उन्नति हुई, इतिहास में उसका पूरा-पूरा उल्लेख है। सारे सभ्य योग्ण का झुकाव उसकी ओर हुआ और पीछे से बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में उसका प्रवेश भी हुआ। प्रवेश हुआ, यह नहीं कहना चाहिए; कहना चाहिए कि बड़े-बडे विश्वविद्यालय उसे प्रवेश देकर गौरव-सम्पन्न हुए। गौरव सम्पन्न हुए, यह यदि न कहे तो इतना तो अवश्य कहेंगे कि उन्होंने उसे प्रवेश देकर अपने की गौरव सम्म समभा। जं देश सभ्यता की दौड़ में जितना आगे रहता है, जिस देश का आदि जितना अधिक उत्थान होता है, उस देश की भाषा का भी उतना ही विस्तार, सम्मान आदि होता है। यूनान की भाषा की तुलना में रोम कीटन भाषा का विकास अधिक विस्तृत हुआ था, क्योंकि अन्य बातों के अतिरिक्त रोम लोगो में साम्राज्य - विजय की भावना प्रबल थी। रामन जहां-जह गये, ग्र सत्तर । विरान
हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने इस वर्ष मानसून के सामान्य रहने की संभावना व्यक्त की है। - IMD के पहले पूर्वानुमान के अनुसार, प्रशांत महासागर में मौजूदा अल नीनो स्थितियों के कारण केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में देरी हो सकती है लेकिन यह वर्षभर सामान्य बना रहेगा। - अनुमान है कि अल-नीनो (El Nino) का असर जुलाई तक कम हो जाएगा जिससे मानसून के सामान्य रहने की संभावना बढ़ जाती है। - पूरे देश में वर्षा की मात्रा long-period average- LPA की लगभग 96 प्रतिशत होगी। ज्ञातव्य है कि LPA 1951 और 2000 के बीच 50 साल की अवधि में मानसूनी वर्षा का औसत है, जो 89 सेंटीमीटर है। - IMD, लंबी अवधि के औसत के हिसाब से 96-104 प्रतिशत के बीच वर्षा को सामान्य मानता है। - सामान्य मानसून के पूर्वानुमान से देश भर में कुछ राहत मिलेगी विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो वर्तमान में सूखे की स्थिति में हैं। - देश के 60 प्रतिशत कृषि क्षेत्र की सिंचाई बारिश के जल से होती हैं एवं 70 प्रतिशत वार्षिक वर्षा मानसून से प्राप्त होती है ऐसे में खेती और आर्थिक विकास के लिये मानसून का सामान्य रहना महत्त्वपूर्ण हो जाता है। - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर की जल और जलवायु प्रयोगशाला के अनुसार, भारतीय भू-भाग में 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में सूखे की स्थिति बनी हुई है, जिसमें 17 प्रतिशत क्षेत्र गंभीर रूप से सूखाग्रस्त है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) - IMD की स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी। - यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Science- MoES) की एक एजेंसी है। - यह मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिये ज़िम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।
हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष मानसून के सामान्य रहने की संभावना व्यक्त की है। - IMD के पहले पूर्वानुमान के अनुसार, प्रशांत महासागर में मौजूदा अल नीनो स्थितियों के कारण केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में देरी हो सकती है लेकिन यह वर्षभर सामान्य बना रहेगा। - अनुमान है कि अल-नीनो का असर जुलाई तक कम हो जाएगा जिससे मानसून के सामान्य रहने की संभावना बढ़ जाती है। - पूरे देश में वर्षा की मात्रा long-period average- LPA की लगभग छियानवे प्रतिशत होगी। ज्ञातव्य है कि LPA एक हज़ार नौ सौ इक्यावन और दो हज़ार के बीच पचास साल की अवधि में मानसूनी वर्षा का औसत है, जो नवासी सेंटीमीटर है। - IMD, लंबी अवधि के औसत के हिसाब से छियानवे-एक सौ चार प्रतिशत के बीच वर्षा को सामान्य मानता है। - सामान्य मानसून के पूर्वानुमान से देश भर में कुछ राहत मिलेगी विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो वर्तमान में सूखे की स्थिति में हैं। - देश के साठ प्रतिशत कृषि क्षेत्र की सिंचाई बारिश के जल से होती हैं एवं सत्तर प्रतिशत वार्षिक वर्षा मानसून से प्राप्त होती है ऐसे में खेती और आर्थिक विकास के लिये मानसून का सामान्य रहना महत्त्वपूर्ण हो जाता है। - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर की जल और जलवायु प्रयोगशाला के अनुसार, भारतीय भू-भाग में चालीस प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में सूखे की स्थिति बनी हुई है, जिसमें सत्रह प्रतिशत क्षेत्र गंभीर रूप से सूखाग्रस्त है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग - IMD की स्थापना वर्ष एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में हुई थी। - यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक एजेंसी है। - यह मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिये ज़िम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।
Missile Misfire: राजस्थान में सेना के अभ्यास के दौरान तीन मिसाइल के गलती से लॉन्च हो जाने का मामला सामने आया है। मिसाइल मिस फायर होते ही हवा में उड़ी और दूर जाकर फट गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। सैन्य अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। Missile Misfire : राजस्थान के पोकरण फायरिंग रेंज में तीन मिसाइल गलती से फायर हो जाने की खबर है। यहां सेना अभ्यास कर रही थी, जिसके दौरान यह घटना घटी है। दो मिसाइल का मलबा मिल गया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है। इस घटना के फोटो और वीडियो भी सामने आए हैं। जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में शुक्रवार को सेना के अभ्यास के दौरान तीन मिसाइलें मिसफायर हो गईं। मिली जानकारी के अनुसार मिस फायर होने के बाद मिसाइल अलग-अलग जगहों पर जैसलमेर में ही गिरी हैं। ये मिलाइल जमीन से हवा में मार करने वाली थी। हालांकि कौन सी मिसाइल मिस फायर हुई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि तीनों मिसाइलें आसमान में फटीं और फील्ड फायरिंग रेंज के बाहर जाकर गिरी। फील्ड फायरिंग रेंज के बाहर अजासर गांव के पास एक खेत में एक मिसाइल का मलबा मिला। दूसरी मिसाइल का मलबा सत्यया गांव के पास सुनसान इलाके में मिला है। तीसरे की खोज सेना कर रही है। मिसाइल मिसफायर की इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। मलबा खेतों में गिरा है, जिससे किसी को नुकसान नहीं हुआ है। घटना के पीछे के असल कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। सैन्य अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और जांच में जुटे हैं। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि एक इकाई के वार्षिक अभ्यास के दौरान गलती से मिसाइल चलने का मामला सामने आया है। प्रवक्ता ने कहा कि मिसाइल सुरक्षित रूप नष्ट हो गई। हालांकि मलबा आसपास के खेतों में गिर गया। उन्होंने कहा- "किसी भी कर्मचारी और संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। मामले की जांच की जा रही है। " मणिपुर में दंगा भड़काने वालों को अमित शाह का अल्टीमेटम, कहा- 'हथियार जमा कर दें नहीं तो होगी कार्रवाई' ट्रेंडिंगः
Missile Misfire: राजस्थान में सेना के अभ्यास के दौरान तीन मिसाइल के गलती से लॉन्च हो जाने का मामला सामने आया है। मिसाइल मिस फायर होते ही हवा में उड़ी और दूर जाकर फट गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। सैन्य अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। Missile Misfire : राजस्थान के पोकरण फायरिंग रेंज में तीन मिसाइल गलती से फायर हो जाने की खबर है। यहां सेना अभ्यास कर रही थी, जिसके दौरान यह घटना घटी है। दो मिसाइल का मलबा मिल गया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है। इस घटना के फोटो और वीडियो भी सामने आए हैं। जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में शुक्रवार को सेना के अभ्यास के दौरान तीन मिसाइलें मिसफायर हो गईं। मिली जानकारी के अनुसार मिस फायर होने के बाद मिसाइल अलग-अलग जगहों पर जैसलमेर में ही गिरी हैं। ये मिलाइल जमीन से हवा में मार करने वाली थी। हालांकि कौन सी मिसाइल मिस फायर हुई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि तीनों मिसाइलें आसमान में फटीं और फील्ड फायरिंग रेंज के बाहर जाकर गिरी। फील्ड फायरिंग रेंज के बाहर अजासर गांव के पास एक खेत में एक मिसाइल का मलबा मिला। दूसरी मिसाइल का मलबा सत्यया गांव के पास सुनसान इलाके में मिला है। तीसरे की खोज सेना कर रही है। मिसाइल मिसफायर की इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। मलबा खेतों में गिरा है, जिससे किसी को नुकसान नहीं हुआ है। घटना के पीछे के असल कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। सैन्य अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और जांच में जुटे हैं। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि एक इकाई के वार्षिक अभ्यास के दौरान गलती से मिसाइल चलने का मामला सामने आया है। प्रवक्ता ने कहा कि मिसाइल सुरक्षित रूप नष्ट हो गई। हालांकि मलबा आसपास के खेतों में गिर गया। उन्होंने कहा- "किसी भी कर्मचारी और संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। मामले की जांच की जा रही है। " मणिपुर में दंगा भड़काने वालों को अमित शाह का अल्टीमेटम, कहा- 'हथियार जमा कर दें नहीं तो होगी कार्रवाई' ट्रेंडिंगः
अगर आप समोसा खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए है. हर शहर में समोसे की एक ऐसी दुकान ज़रूर होती है. जहां दिन भर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. ऐसी ही एक दुकान पीलीभीत में है, जो जमुना समोसा कॉर्नर के नाम से फेमस है. पीलीभीत शहर की लोहमंडी में स्थित जमुना समोसा कॉर्नर तकरीबन 45 साल पुरानी दुकान है. ग्राहकों के मुताबिक यहां समोसे के साथ दी जाने वाली चटनी अपने आप में काफी यूनिक है. दुकानदार बताते हैं कि शहर के लोगों के अलावा अन्य क्षेत्र के लोग यहां के समोसे खाने आते है. एक दिन में यहां औसतन 800 से 1 हज़ार समोसों की बिक्री होती है. यह दुकान सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक खुली रहती है. खरीदारी के लिए बाहर से आये लोग इनकी दुकान पर जरूर जाते हैं. 5 मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण, इन राशियों का होगा भाग्योदय!
अगर आप समोसा खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए है. हर शहर में समोसे की एक ऐसी दुकान ज़रूर होती है. जहां दिन भर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. ऐसी ही एक दुकान पीलीभीत में है, जो जमुना समोसा कॉर्नर के नाम से फेमस है. पीलीभीत शहर की लोहमंडी में स्थित जमुना समोसा कॉर्नर तकरीबन पैंतालीस साल पुरानी दुकान है. ग्राहकों के मुताबिक यहां समोसे के साथ दी जाने वाली चटनी अपने आप में काफी यूनिक है. दुकानदार बताते हैं कि शहर के लोगों के अलावा अन्य क्षेत्र के लोग यहां के समोसे खाने आते है. एक दिन में यहां औसतन आठ सौ से एक हज़ार समोसों की बिक्री होती है. यह दुकान सुबह छः बजे से लेकर शाम के सात बजे तक खुली रहती है. खरीदारी के लिए बाहर से आये लोग इनकी दुकान पर जरूर जाते हैं. पाँच मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण, इन राशियों का होगा भाग्योदय!
तरह पीछे नहीं रहे। इन्होने भी ईरान के एक प्रान्त पर कब्जा जमा लिया । वही पर 'उर' राजवश को नीव पड गई । उर नगरी का भी निर्माण हो गया । उर नगरी को ही आज ईराक कहा जाता है। प्राचीन उर नगरी की आज खुदाई हो चुकी हैं। भूगर्भ से मिले सामान लन्दन के अजायच घर मे रखे गये है। विश्व के भूतत्त्ववेत्ताओं का कहना है कि उर' नगरी विश्व की प्राचीनतम नगरी थी। इस कथन का मतलब यह होता है कि चाक्षुष मनु के पुत्रो के पहले की कोई ऐतिहासिक सामग्री अभी तक पाश्चात्यो को वहाँ नहीं मिली है। इसीलिये वे लोग आयों को वही का आदिवासी कहने मे नही हिचकते । भारतीय विद्वान भी उन्ही की नकल किया करते हैं। लेकिन वे लोग चाक्षुप मनु के पहले के आर्य-वश वृक्ष पर विचार करने का कष्ट नहीं करते । चाक्षुप मनु छठे मनु थे। उनके पहले पांच मनुओं का काल भारत में ही वीत चुका था। इस देश का नामकरण 'भारतवर्ष भी हो चुका था । पजाब-हडप्पा मे उन लोगो का राज्य था। सरस्वती से सिन्धु नदी तक सप्त सिन्धव प्रदेश में राज्य उन्ही लोगो का था । इसीलिये मैक्स मूलर ने भी ठीक हो कहा है कि- "It can be now proved even by geographical evidence that the Zoroastrian had been settled in India before they emigrated to 'Persia." महाजल प्रलय मे मन्युपुरी सुपा नगरी तो मृत्यु सागर बन गई, इसलिये मन्यु - महाराज अपने परिवार परिजन सहित अजरवंजान मे आकर बस गये, किन्तु 'उर' नगरी उस विपत्ति से बच गई। उर राजनश दो सौ वर्षो तक चलता रहा (The English man dated 20 th April 1925) महाराज उर के राज्यपाल मे हो जनाब इब्राहिम थे, जो उनके भय से वहाँ से भाग गये थे । पर्शिया के प्राचीन इतिहास में जहाँ तहाँ उनका वर्णन है । भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग-चाक्षुप मन्वन्तरकाल के आरम्भ होते ही उनके पुत्र अत्यरातिजानन्तपति, अभिमन्यु, उर, पुर, तपोरत और उर-पुत्र अगिरा जादि छे भारतीय आयं विजेताओं ने अपना उपनिवेश पश्चिम एशिया तक बढा लिया । उन लोगों ने अपना राज्य ही नही बढाया बल्कि उसका सुन्दर ढंग से निर्माण किया । वहाँ भिन्न-भिन्न नामो से सभ्यता फैलाई । उन्हीं के बराबर सुमेर में रहते थे, जिनमे सुमेरियन सभ्यता वा जन्म हुआ 17 १. जोराष्ट्रियन भारतीय (मेक्समूलर ) । २ हिस्ट्री श्राफ सुमेर ।
तरह पीछे नहीं रहे। इन्होने भी ईरान के एक प्रान्त पर कब्जा जमा लिया । वही पर 'उर' राजवश को नीव पड गई । उर नगरी का भी निर्माण हो गया । उर नगरी को ही आज ईराक कहा जाता है। प्राचीन उर नगरी की आज खुदाई हो चुकी हैं। भूगर्भ से मिले सामान लन्दन के अजायच घर मे रखे गये है। विश्व के भूतत्त्ववेत्ताओं का कहना है कि उर' नगरी विश्व की प्राचीनतम नगरी थी। इस कथन का मतलब यह होता है कि चाक्षुष मनु के पुत्रो के पहले की कोई ऐतिहासिक सामग्री अभी तक पाश्चात्यो को वहाँ नहीं मिली है। इसीलिये वे लोग आयों को वही का आदिवासी कहने मे नही हिचकते । भारतीय विद्वान भी उन्ही की नकल किया करते हैं। लेकिन वे लोग चाक्षुप मनु के पहले के आर्य-वश वृक्ष पर विचार करने का कष्ट नहीं करते । चाक्षुप मनु छठे मनु थे। उनके पहले पांच मनुओं का काल भारत में ही वीत चुका था। इस देश का नामकरण 'भारतवर्ष भी हो चुका था । पजाब-हडप्पा मे उन लोगो का राज्य था। सरस्वती से सिन्धु नदी तक सप्त सिन्धव प्रदेश में राज्य उन्ही लोगो का था । इसीलिये मैक्स मूलर ने भी ठीक हो कहा है कि- "It can be now proved even by geographical evidence that the Zoroastrian had been settled in India before they emigrated to 'Persia." महाजल प्रलय मे मन्युपुरी सुपा नगरी तो मृत्यु सागर बन गई, इसलिये मन्यु - महाराज अपने परिवार परिजन सहित अजरवंजान मे आकर बस गये, किन्तु 'उर' नगरी उस विपत्ति से बच गई। उर राजनश दो सौ वर्षो तक चलता रहा महाराज उर के राज्यपाल मे हो जनाब इब्राहिम थे, जो उनके भय से वहाँ से भाग गये थे । पर्शिया के प्राचीन इतिहास में जहाँ तहाँ उनका वर्णन है । भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग-चाक्षुप मन्वन्तरकाल के आरम्भ होते ही उनके पुत्र अत्यरातिजानन्तपति, अभिमन्यु, उर, पुर, तपोरत और उर-पुत्र अगिरा जादि छे भारतीय आयं विजेताओं ने अपना उपनिवेश पश्चिम एशिया तक बढा लिया । उन लोगों ने अपना राज्य ही नही बढाया बल्कि उसका सुन्दर ढंग से निर्माण किया । वहाँ भिन्न-भिन्न नामो से सभ्यता फैलाई । उन्हीं के बराबर सुमेर में रहते थे, जिनमे सुमेरियन सभ्यता वा जन्म हुआ सत्रह एक. जोराष्ट्रियन भारतीय । दो हिस्ट्री श्राफ सुमेर ।
अफवाहें ऐसी भी थीं कि नरगिस ने बॉलीवुड को टाटा-बाय, बाय कर दिया है. वैसी ही एक तस्वीर नगरिस ने इंस्टा पर पोस्ट की है जिसमें उन्होंने बीकनी पहन रखी है और किसी साथी महिला के साथ बैठी हैं. दोनों के बीच एक बच्चा बैठा है. इस तस्वीर के कमेंट्स में भी ऐसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिससे साफ हो जाता है कि बहुत से लोगों को ये तस्वीर भा नहीं रही. कम से कम इन तस्वीरों से तो यही लगता है कि उनपर ब्रेकअप का खासा असर नहीं पड़ा है. नरगिस पिछले लंबे समय से विवादो में रही हैं. ब्रकअप की वजह ये बताई गई कि वे उदय से शादी करना चाहती थीं लेकिन उदय इसके खिलाफ थे. हाल ही में अफवाहों के बाज़ार से ख़बरें आती रहीं कि उनके कथित प्रेमी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया है. हाल की इन तस्वीरों में वे ग्रीस में छुट्टियां मानती दिखीं.
अफवाहें ऐसी भी थीं कि नरगिस ने बॉलीवुड को टाटा-बाय, बाय कर दिया है. वैसी ही एक तस्वीर नगरिस ने इंस्टा पर पोस्ट की है जिसमें उन्होंने बीकनी पहन रखी है और किसी साथी महिला के साथ बैठी हैं. दोनों के बीच एक बच्चा बैठा है. इस तस्वीर के कमेंट्स में भी ऐसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिससे साफ हो जाता है कि बहुत से लोगों को ये तस्वीर भा नहीं रही. कम से कम इन तस्वीरों से तो यही लगता है कि उनपर ब्रेकअप का खासा असर नहीं पड़ा है. नरगिस पिछले लंबे समय से विवादो में रही हैं. ब्रकअप की वजह ये बताई गई कि वे उदय से शादी करना चाहती थीं लेकिन उदय इसके खिलाफ थे. हाल ही में अफवाहों के बाज़ार से ख़बरें आती रहीं कि उनके कथित प्रेमी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया है. हाल की इन तस्वीरों में वे ग्रीस में छुट्टियां मानती दिखीं.
( २ ) इस छंद में क्रियोत्प्रेक्षा अलंकार है 1 अकुचहि बसन विभूषन परसत जो वपु । तेहि शरीर हर-हेतु असेउ बड़ तपु ॥ ३८ ॥ शब्दार्थ- बसन - वस्त्र । विभूषन (विभुषण ) - गहने, भूपण, अलंकार । परसत - छूते हुए । घपु - शरीर । अर्थ - पार्वतीजी के जिस शरीर को (कोमलता के कारण) गहने और वस्त्र भी छूने में सकुचते अथवा हिचकिचाते थे उसी शरीर से पार्वतीजी ने शिवजी के लिये कठिन तप आरंभ किया । टिप्पणी ( १ ) उक्त देवी तुल्य वाला मे कितना महान् साहस है ? मिलाइए मानस की निम्न लिखित उक्ति 'अति सुकुमार न तनु तपजोगू । पतिपद सुमिरि तजेठ सव भोगू ॥" ( २ ) इस छंद में संबंधातिशयोक्ति अलंकार है । पूजह सिवहि, समय तिहुँ करहि निमज्जन । देखि प्रेम वृतु नेमु सराहहिं सज्जन ॥ ४० ॥ शब्दार्थ - समय तिहुँ - तीनों काल ( प्रातः, मध्याह्न और संध्या के समय; इन्हीं समयों में हिंदुो की नयी संध्या का नियम है ) । निमज्जन - स्नान । अर्थ - उमादेवी तीनों समय स्नान तथा शिवजी का पूजन करती हैं । सज्जन लोग उनका प्रेम और व्रत-नियम देखकर उनकी प्रशंसा करते हैं । टिप्पणी- दूसरी पंक्ति मे छेकानुप्रास अलंकार है । नींद न भूख पियास, सरिस निसि बासरु । नयन नीर, सुख नाम, पुलक तनु, हिय हरु ॥ ४१ ॥
इस छंद में क्रियोत्प्रेक्षा अलंकार है एक अकुचहि बसन विभूषन परसत जो वपु । तेहि शरीर हर-हेतु असेउ बड़ तपु ॥ अड़तीस ॥ शब्दार्थ- बसन - वस्त्र । विभूषन - गहने, भूपण, अलंकार । परसत - छूते हुए । घपु - शरीर । अर्थ - पार्वतीजी के जिस शरीर को गहने और वस्त्र भी छूने में सकुचते अथवा हिचकिचाते थे उसी शरीर से पार्वतीजी ने शिवजी के लिये कठिन तप आरंभ किया । टिप्पणी उक्त देवी तुल्य वाला मे कितना महान् साहस है ? मिलाइए मानस की निम्न लिखित उक्ति 'अति सुकुमार न तनु तपजोगू । पतिपद सुमिरि तजेठ सव भोगू ॥" इस छंद में संबंधातिशयोक्ति अलंकार है । पूजह सिवहि, समय तिहुँ करहि निमज्जन । देखि प्रेम वृतु नेमु सराहहिं सज्जन ॥ चालीस ॥ शब्दार्थ - समय तिहुँ - तीनों काल । निमज्जन - स्नान । अर्थ - उमादेवी तीनों समय स्नान तथा शिवजी का पूजन करती हैं । सज्जन लोग उनका प्रेम और व्रत-नियम देखकर उनकी प्रशंसा करते हैं । टिप्पणी- दूसरी पंक्ति मे छेकानुप्रास अलंकार है । नींद न भूख पियास, सरिस निसि बासरु । नयन नीर, सुख नाम, पुलक तनु, हिय हरु ॥ इकतालीस ॥
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को फेल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है। इसके साथ ही किसी भी विद्यार्थी को बिना फेल किये आगे की कक्षा में प्रवेश देने के लिए भी निर्देश दिए गए है। लोक शिक्षण संचालनालय से आदेश जारी हुआ है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारी, संभागीय संयुक्त संचालक को आदेश जारी किया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को फेल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है। इसके साथ ही किसी भी विद्यार्थी को बिना फेल किये आगे की कक्षा में प्रवेश देने के लिए भी निर्देश दिए गए है। लोक शिक्षण संचालनालय से आदेश जारी हुआ है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारी, संभागीय संयुक्त संचालक को आदेश जारी किया गया है।
इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोनी बेयरस्टो (Jonny Bairstow) पर आईसीसी (ICC Code of Conduct) ने अश्लीलता फैलाने के आरोपों में कार्रवाई की है। टीम के मौजूदा इंग्लैंड दौरे (New Zealand vs England) के दौरान ऑकलैंड में खेले गए पांचवें और आखिरी टी20 मैच के दौरान बेयरस्टो ने मैदान पर अश्लील हरकत की, जिसके लिए फटकार लगाने के साथ-साथ आईसीसी ने उन्हें एक डिमेरिट अंक भी दिया। ऑकलैंड टी20 टाई होने के बाद इंग्लैंड की टीम ने सुपर ओवर में मैच अपने नाम किया था। इसके साथ ही मेहमान टीम ने पांच मैचों की टी20 सीरीज पर 3-2 से कब्जा कर लिया था। इस मैच में जोनी बेयरस्टो (Jonny Bairstow) ने 18 गेंद में 47 रन की पारी खेली। उन्हें खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिये आईसीसी आचार संहिता के लेवल एक का उल्लंघन का दोषी पाया गया। टी20 मुकाबले के दौरान सातवें ओवर में जोनी बेयरस्टो ने अश्लील व भद्दे इशारे किया थे, जो स्टंप माइक (Stump Mic) में कैद हो गई थी। उनकी इस हरकत को स्टंप माइक के माध्यम से सभी ने सुना। बाद में आईसीसी की तरफ से इसपर कार्रवाई की गई। इंग्लैंड की टीम अपने न्यूजीलैंड दौरे पर आज से दो दिवसीय प्रैक्टिस मैच खेल रही है। इसके बाद 15 नवंबर से दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होगी।
इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोनी बेयरस्टो पर आईसीसी ने अश्लीलता फैलाने के आरोपों में कार्रवाई की है। टीम के मौजूदा इंग्लैंड दौरे के दौरान ऑकलैंड में खेले गए पांचवें और आखिरी टीबीस मैच के दौरान बेयरस्टो ने मैदान पर अश्लील हरकत की, जिसके लिए फटकार लगाने के साथ-साथ आईसीसी ने उन्हें एक डिमेरिट अंक भी दिया। ऑकलैंड टीबीस टाई होने के बाद इंग्लैंड की टीम ने सुपर ओवर में मैच अपने नाम किया था। इसके साथ ही मेहमान टीम ने पांच मैचों की टीबीस सीरीज पर तीन-दो से कब्जा कर लिया था। इस मैच में जोनी बेयरस्टो ने अट्ठारह गेंद में सैंतालीस रन की पारी खेली। उन्हें खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के लिये आईसीसी आचार संहिता के लेवल एक का उल्लंघन का दोषी पाया गया। टीबीस मुकाबले के दौरान सातवें ओवर में जोनी बेयरस्टो ने अश्लील व भद्दे इशारे किया थे, जो स्टंप माइक में कैद हो गई थी। उनकी इस हरकत को स्टंप माइक के माध्यम से सभी ने सुना। बाद में आईसीसी की तरफ से इसपर कार्रवाई की गई। इंग्लैंड की टीम अपने न्यूजीलैंड दौरे पर आज से दो दिवसीय प्रैक्टिस मैच खेल रही है। इसके बाद पंद्रह नवंबर से दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होगी।
Publish Date: Tue, 30 Aug 2016 14:23:02 (IST) बंद लॉकअप के अंदर पुलिस अपराधियों के ऊपर कैसे थर्ड डिग्री की मार लगाती है, यह तो बहुत कम ही लोगों ने देखा होगा लेकिन रेलवे पुलिस के जवान ने मामूली चोरी पर एक युवक की जो भयानक पिटाई वो आप इस वायरल वीडियो में देख सकते हैं। एमपी के ग्वालियर रेलवे स्टेशन में चोरी के आरोप में पकड़े गए एक युवक पर जीआरपी कॉन्स्टेबल ने ऐसी बेरहमी दिखाई कि वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। वीडियो में जिस युवक को हवलदार घसीट के ले जा रहा है वो शनिवार रात जनरल टिकट काउंटर पर एक यात्री की जेब से मोबाइल पार करते हुए पकड़ा गया था। बाद में कांस्टेबल ने युवक को जमकर पीटा जिससे वो लगभग बेहोश हो गया। बेरहमी से पिटाई लगाते हुए देख वहां मौजूद कुछ यात्रियों ने उसे रोकने का भी प्रयास किया लेकिन कांस्टेबल नही रूका। इस दौरान घटना का वीडियो एक यात्री अपने कैमरे में कैद कर रहा था। बाद में वीडियो को सोशल साइट पर अपलोड किए जाने पर जीआरपी अधिकारियों ने तत्काल मामले की जानकारी ली। फिलहाल हवलदार को सस्पेंड कर मामले की जांच की जा रही है। .
Publish Date: Tue, तीस अगस्त दो हज़ार सोलह चौदह:तेईस:दो बंद लॉकअप के अंदर पुलिस अपराधियों के ऊपर कैसे थर्ड डिग्री की मार लगाती है, यह तो बहुत कम ही लोगों ने देखा होगा लेकिन रेलवे पुलिस के जवान ने मामूली चोरी पर एक युवक की जो भयानक पिटाई वो आप इस वायरल वीडियो में देख सकते हैं। एमपी के ग्वालियर रेलवे स्टेशन में चोरी के आरोप में पकड़े गए एक युवक पर जीआरपी कॉन्स्टेबल ने ऐसी बेरहमी दिखाई कि वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। वीडियो में जिस युवक को हवलदार घसीट के ले जा रहा है वो शनिवार रात जनरल टिकट काउंटर पर एक यात्री की जेब से मोबाइल पार करते हुए पकड़ा गया था। बाद में कांस्टेबल ने युवक को जमकर पीटा जिससे वो लगभग बेहोश हो गया। बेरहमी से पिटाई लगाते हुए देख वहां मौजूद कुछ यात्रियों ने उसे रोकने का भी प्रयास किया लेकिन कांस्टेबल नही रूका। इस दौरान घटना का वीडियो एक यात्री अपने कैमरे में कैद कर रहा था। बाद में वीडियो को सोशल साइट पर अपलोड किए जाने पर जीआरपी अधिकारियों ने तत्काल मामले की जानकारी ली। फिलहाल हवलदार को सस्पेंड कर मामले की जांच की जा रही है। .
टाइम ट्रैवल पर बहुत सी फिक्शन फिल्में बन चुकी हैं. टाइम ट्रैवल कर पाने का सपना हर इंसान कभी न कभी जरूर देखता है. दुनियाभर में बडे़ प्रयोग कर रहे वैज्ञानिक अब तक समय के पार जाने का कोई तरीका नहीं खोज सके हैं. रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि टाइम ट्रैवल का ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण से भी संबंध है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हम जितनी मजबूत ग्रेविटी के पास होंगे, समय उतना ही धीरे चलेगा. ब्लैक होल के पास बहुत ज्यादा ग्रेविटी होती है. वैज्ञानिक तो यहां तक मानते हैं कि इसमें एक हद के बाद प्रकाश और समय का मतलब खत्म हो जाता है. वैज्ञानिक परिकल्पना है कि आप जितनी देर ब्लैक होल के किनारे या उसके सेंटर पर बिताएंगे, उतनी देर में पृथ्वी पर शायद हजारों साल बीत जाएं. हालांकि, ब्लैक होल का अस्तित्व ही ऐसा है कि इन्हें नंगी आंखों या सामान्य टेलीस्कोप से देखा नहीं जा सकता. वहीं, यहां जाने के बाद क्या होगा, ये भी वैज्ञानिक अब तक नहीं जान सके हैं. ब्लैक होल के भीतर जाने पर क्या होगा, ये अब तक रहस्य है. कुछ वैज्ञानिक जरूर मानते हैं कि ब्लैक होल टाइम ट्रैवल तभी करा सकता है जब कोई उसके भीतर जा सके और फिर वापस भी लौट सके. ब्लैक होल और टाइम ट्रैवल को लेकर क्या वैज्ञानिक थ्योरीज हैं, इसे विस्तार से समझने के लिए नीचे क्लिक कीजिए.
टाइम ट्रैवल पर बहुत सी फिक्शन फिल्में बन चुकी हैं. टाइम ट्रैवल कर पाने का सपना हर इंसान कभी न कभी जरूर देखता है. दुनियाभर में बडे़ प्रयोग कर रहे वैज्ञानिक अब तक समय के पार जाने का कोई तरीका नहीं खोज सके हैं. रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि टाइम ट्रैवल का ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण से भी संबंध है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हम जितनी मजबूत ग्रेविटी के पास होंगे, समय उतना ही धीरे चलेगा. ब्लैक होल के पास बहुत ज्यादा ग्रेविटी होती है. वैज्ञानिक तो यहां तक मानते हैं कि इसमें एक हद के बाद प्रकाश और समय का मतलब खत्म हो जाता है. वैज्ञानिक परिकल्पना है कि आप जितनी देर ब्लैक होल के किनारे या उसके सेंटर पर बिताएंगे, उतनी देर में पृथ्वी पर शायद हजारों साल बीत जाएं. हालांकि, ब्लैक होल का अस्तित्व ही ऐसा है कि इन्हें नंगी आंखों या सामान्य टेलीस्कोप से देखा नहीं जा सकता. वहीं, यहां जाने के बाद क्या होगा, ये भी वैज्ञानिक अब तक नहीं जान सके हैं. ब्लैक होल के भीतर जाने पर क्या होगा, ये अब तक रहस्य है. कुछ वैज्ञानिक जरूर मानते हैं कि ब्लैक होल टाइम ट्रैवल तभी करा सकता है जब कोई उसके भीतर जा सके और फिर वापस भी लौट सके. ब्लैक होल और टाइम ट्रैवल को लेकर क्या वैज्ञानिक थ्योरीज हैं, इसे विस्तार से समझने के लिए नीचे क्लिक कीजिए.
महबूबाबाद। तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गयी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुडरु मंडल के मरीमिटा गांव में एक ऑटोरिक्शा के लॉरी से टकरा जाने से उसमें सवार छह लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। ऑटो में सवार लोग एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे। घटना के विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है।
महबूबाबाद। तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गयी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुडरु मंडल के मरीमिटा गांव में एक ऑटोरिक्शा के लॉरी से टकरा जाने से उसमें सवार छह लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। ऑटो में सवार लोग एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे। घटना के विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बास्केटबाल खिलाड़ियों में से एक, शाकिल ऑनिल -खेल के जीवित किंवदंती और एनबीए के प्रतीक। न केवल दर्शक, बल्कि विशेषज्ञ भी अपनी तकनीक, गति और गेम में सही ढंग से और जल्दी सोचने की क्षमता की प्रशंसा करते हैं। इसलिए, ऐसे व्यक्ति को ध्यान नहीं दिया जा सकता है। शाकिल ऑनिल मूल अमेरिकी है। उनका जन्म न्यू आर्क में हुआ था, जो न्यू जर्सी राज्य में स्थित है। जन्म तिथि - 6 मार्च, 1 9 72। यह उल्लेखनीय है कि अरबी भाषा से हमारे हीरो का नाम एक शाब्दिक अनुवाद है जो "छोटे योद्धा" जैसा लगता है। और मुझे कहना होगा कि यह पूरी तरह से विशेषता है। टेस्ट शकीला बचपन में पीछे हट गई। उनके पिता ने परिवार छोड़ दिया जब भविष्य का सितारा भी एक वर्ष पुराना नहीं था। बेशक, परिवार में एक ब्रेडविनर की कमी इसके भौतिक कल्याण को प्रभावित नहीं कर सका। लड़के ने एक माँ और यहां तक कि कुछ रिश्तेदारों को भी लाया। लेकिन, दुर्भाग्य से, पैसा बस पर्याप्त नहीं था। ओनल के छोटे परिवार को अक्सर गरीबों के लिए मुफ्त सामाजिक कैंटीन में खाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। हालांकि, कुछ समय बाद, लड़के की माँ मिलीखुद फिलिप हैरिसन नामक एक नया पति / पत्नी, जो एक गहरी सभ्य व्यक्ति बन गया, जिसने अपने नए परिवार के कल्याण को बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। ओनल के लिए इस तरह के जीवन की एकमात्र कमी यह थी कि उसका सौतेला पिता एक सैन्य व्यक्ति था, और परिवार को अक्सर अपने निवास स्थान को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता था। केवल शाकिल ओनल जब पंद्रह वर्ष की आयु तक पहुंच गया, परिवार टेक्सास राज्य में सैन एंटोनियो शहर में बसने में सक्षम था, जहां युवा व्यक्ति ने खेल खेलना शुरू कर दिया। हमारे नायक के लिए प्रतिस्पर्धा की यात्रा स्कूल में प्रवेश करने के बाद उपलब्ध हो गई। यह स्कूल टीम में है कि शाकिल ओनिल राज्य चैम्पियनशिप जीती, जिसके बाद वह कर सकता थाअन्य प्रतियोगिताओं में कई दृढ़ जीत जीतें। 1 9 8 9 में, बिग स्कैक लुइसियाना विश्वविद्यालय में एक छात्र बन गया, जहां उसका ट्रेनर डेल ब्राउन था। विश्वविद्यालय की टीम के खिलाड़ी होने के नाते, लड़का अपनी उम्र के खिलाड़ियों के बीच प्रतीकात्मक अमेरिकी टीम में कई बार हो सकता है। इस तरह की सफलता सर्वव्यापी एनबीए स्काउट्स द्वारा अनजान नहीं हुई, और शाकिला को ऑरलैंडो मैजिक क्लब में आमंत्रित किया गया, जिसमें एथलीट ने 7 वर्षों में 40 मिलियन डॉलर कमाए। आम तौर पर, अपने पूरे करियर में, ओनल ने खेलालॉस एंजिल्स लेकर्स, मियामी हीट, बोस्टन सेल्टिक्स, फीनिक्स, क्लीवलैंड कैवलियर जैसे क्लब। बास्केटबाल खिलाड़ी एनबीए के चार बार विजेता बनने में सक्षम था और कई अलग-अलग व्यक्तिगत पुरस्कार जीते, जिनमें से राष्ट्रीय बास्केट बॉल एसोसिएशन के पूरे अस्तित्व के लिए पचास सर्वश्रेष्ठ बास्केटबाल खिलाड़ियों के अलावा था। एक एथलीट की गेमिंग सुविधाओं के बारे में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि तीन सूचक शकीला ओनल कभी नहीं उसका हस्ताक्षर कास्ट नहीं था। यह भी उल्लेखनीय है कि शाकिल के अपने करियर के अंत में सफल शॉट्स का उच्चतम प्रतिशत है। राष्ट्रीय टीम के हिस्से के रूप में, ओनल ने 1 99 6 ओलंपिक जीता और 1 99 4 में विश्व चैंपियन बन गया। इस साल, शाक ने एक सुंदर निर्णायक कदम उठाया,अमेरिकी पुलिस की छवि में सुधार करने के उद्देश्य से। पौराणिक एथलीट फ्लोरिडा विभाग के एक रिजर्व अधिकारी बन गया। अब उनकी जिम्मेदारियों में सामुदायिक सेवा करना और युवाओं के साथ काम करना शामिल है। इसके अलावा, हम शाकिल ऑनिल के साथ फिल्मों को नोट करते हैं,जिनमें से 12 टुकड़े हैं, साथ ही एक टेलीविजन श्रृंखला और एक कार्टून जिसमें उन्होंने एक डबिंग कलाकार के रूप में कार्य किया था। और यद्यपि नौसिखिया अभिनेता को रॉटेन टमाटर नामक एक प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए दो बार नामित नहीं किया गया था, जिसे सीज़न के अंत में सबसे खराब अभिनेताओं से सम्मानित किया जाता है, फिर भी आज फिल्म में उनका काम बहुत बेहतर और अधिक पेशेवर बन गया है। अक्सर, एक पूर्व एथलीट एक मॉडल के रूप में फोटोग्राफी के लिए तैयार होता है और विभिन्न विज्ञापनों में भाग लेता है। वैसे, पैर शकीला ओनिल का आकार औसत व्यक्ति के लिए व्यावहारिक रूप से अटूट है। गणना की अमेरिकी प्रणाली के अनुसार, यह 23 के बराबर है। यूरोपीय लोगों के लिए, एक अलग संख्यात्मक पदनाम स्पष्ट होगा - 60 वें जूता आकार। इस वजह से, उसे अपनी शारीरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, स्नीकर्स, कस्टम-निर्मित में खेलना पड़ा।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बास्केटबाल खिलाड़ियों में से एक, शाकिल ऑनिल -खेल के जीवित किंवदंती और एनबीए के प्रतीक। न केवल दर्शक, बल्कि विशेषज्ञ भी अपनी तकनीक, गति और गेम में सही ढंग से और जल्दी सोचने की क्षमता की प्रशंसा करते हैं। इसलिए, ऐसे व्यक्ति को ध्यान नहीं दिया जा सकता है। शाकिल ऑनिल मूल अमेरिकी है। उनका जन्म न्यू आर्क में हुआ था, जो न्यू जर्सी राज्य में स्थित है। जन्म तिथि - छः मार्च, एक नौ बहत्तर। यह उल्लेखनीय है कि अरबी भाषा से हमारे हीरो का नाम एक शाब्दिक अनुवाद है जो "छोटे योद्धा" जैसा लगता है। और मुझे कहना होगा कि यह पूरी तरह से विशेषता है। टेस्ट शकीला बचपन में पीछे हट गई। उनके पिता ने परिवार छोड़ दिया जब भविष्य का सितारा भी एक वर्ष पुराना नहीं था। बेशक, परिवार में एक ब्रेडविनर की कमी इसके भौतिक कल्याण को प्रभावित नहीं कर सका। लड़के ने एक माँ और यहां तक कि कुछ रिश्तेदारों को भी लाया। लेकिन, दुर्भाग्य से, पैसा बस पर्याप्त नहीं था। ओनल के छोटे परिवार को अक्सर गरीबों के लिए मुफ्त सामाजिक कैंटीन में खाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। हालांकि, कुछ समय बाद, लड़के की माँ मिलीखुद फिलिप हैरिसन नामक एक नया पति / पत्नी, जो एक गहरी सभ्य व्यक्ति बन गया, जिसने अपने नए परिवार के कल्याण को बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। ओनल के लिए इस तरह के जीवन की एकमात्र कमी यह थी कि उसका सौतेला पिता एक सैन्य व्यक्ति था, और परिवार को अक्सर अपने निवास स्थान को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता था। केवल शाकिल ओनल जब पंद्रह वर्ष की आयु तक पहुंच गया, परिवार टेक्सास राज्य में सैन एंटोनियो शहर में बसने में सक्षम था, जहां युवा व्यक्ति ने खेल खेलना शुरू कर दिया। हमारे नायक के लिए प्रतिस्पर्धा की यात्रा स्कूल में प्रवेश करने के बाद उपलब्ध हो गई। यह स्कूल टीम में है कि शाकिल ओनिल राज्य चैम्पियनशिप जीती, जिसके बाद वह कर सकता थाअन्य प्रतियोगिताओं में कई दृढ़ जीत जीतें। एक नौ आठ नौ में, बिग स्कैक लुइसियाना विश्वविद्यालय में एक छात्र बन गया, जहां उसका ट्रेनर डेल ब्राउन था। विश्वविद्यालय की टीम के खिलाड़ी होने के नाते, लड़का अपनी उम्र के खिलाड़ियों के बीच प्रतीकात्मक अमेरिकी टीम में कई बार हो सकता है। इस तरह की सफलता सर्वव्यापी एनबीए स्काउट्स द्वारा अनजान नहीं हुई, और शाकिला को ऑरलैंडो मैजिक क्लब में आमंत्रित किया गया, जिसमें एथलीट ने सात वर्षों में चालीस मिलियन डॉलर कमाए। आम तौर पर, अपने पूरे करियर में, ओनल ने खेलालॉस एंजिल्स लेकर्स, मियामी हीट, बोस्टन सेल्टिक्स, फीनिक्स, क्लीवलैंड कैवलियर जैसे क्लब। बास्केटबाल खिलाड़ी एनबीए के चार बार विजेता बनने में सक्षम था और कई अलग-अलग व्यक्तिगत पुरस्कार जीते, जिनमें से राष्ट्रीय बास्केट बॉल एसोसिएशन के पूरे अस्तित्व के लिए पचास सर्वश्रेष्ठ बास्केटबाल खिलाड़ियों के अलावा था। एक एथलीट की गेमिंग सुविधाओं के बारे में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि तीन सूचक शकीला ओनल कभी नहीं उसका हस्ताक्षर कास्ट नहीं था। यह भी उल्लेखनीय है कि शाकिल के अपने करियर के अंत में सफल शॉट्स का उच्चतम प्रतिशत है। राष्ट्रीय टीम के हिस्से के रूप में, ओनल ने एक निन्यानवे छः ओलंपिक जीता और एक निन्यानवे चार में विश्व चैंपियन बन गया। इस साल, शाक ने एक सुंदर निर्णायक कदम उठाया,अमेरिकी पुलिस की छवि में सुधार करने के उद्देश्य से। पौराणिक एथलीट फ्लोरिडा विभाग के एक रिजर्व अधिकारी बन गया। अब उनकी जिम्मेदारियों में सामुदायिक सेवा करना और युवाओं के साथ काम करना शामिल है। इसके अलावा, हम शाकिल ऑनिल के साथ फिल्मों को नोट करते हैं,जिनमें से बारह टुकड़े हैं, साथ ही एक टेलीविजन श्रृंखला और एक कार्टून जिसमें उन्होंने एक डबिंग कलाकार के रूप में कार्य किया था। और यद्यपि नौसिखिया अभिनेता को रॉटेन टमाटर नामक एक प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए दो बार नामित नहीं किया गया था, जिसे सीज़न के अंत में सबसे खराब अभिनेताओं से सम्मानित किया जाता है, फिर भी आज फिल्म में उनका काम बहुत बेहतर और अधिक पेशेवर बन गया है। अक्सर, एक पूर्व एथलीट एक मॉडल के रूप में फोटोग्राफी के लिए तैयार होता है और विभिन्न विज्ञापनों में भाग लेता है। वैसे, पैर शकीला ओनिल का आकार औसत व्यक्ति के लिए व्यावहारिक रूप से अटूट है। गणना की अमेरिकी प्रणाली के अनुसार, यह तेईस के बराबर है। यूरोपीय लोगों के लिए, एक अलग संख्यात्मक पदनाम स्पष्ट होगा - साठ वें जूता आकार। इस वजह से, उसे अपनी शारीरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, स्नीकर्स, कस्टम-निर्मित में खेलना पड़ा।
शेयर बाजार में निवेश को लेकर आपके पास तमाम विकल्प रहते हैं फिर भी तमाम एक्सपर्ट्स आपको लॉन्ग टर्म निवेश की ही सलाह देते हैं, ऐसे में हम यहां आपके लिए कुछ चोटी के शेयर्स लेकर आए हैं जिसमें आप लंबी अवधि के निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। आइए देखते हैं देश के टॉप 10 शेयर्स जिसमें आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर सकते हैं। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) TCS देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। जबकि मार्केट कैप के हिसाब से टीसीएस देश की सबसे बड़ी कंपनी है। टीसीएस का मार्केट कैप 6 लाख 62 हजार 540. 80 करोड़ रुपए है। टीसीएस के शेयर्स लॉन्ग टर्म निवेश के लिए एक बेहतर विकल्प हैं। वर्तमान में टीसीएस के एक शेयर का भाव 3468. 80 रुपए है। देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर्स भी लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेहतर चुनाव हो सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट कैप 6 लाख 21 हजार 20. 05 करोड़ रुपए है। जबकि एक शेयर का भाव 980. 30 रुपए है। देश में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है ये निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है। HDFC बैंक के शेयर्स भी इस लिस्ट में शामिल हैं। HDFC बैंक देश के बड़े हाउसिंग फाइनेंस बैंक रुप में स्थापित हो चुका है। लंबी अवधि के लिए HDFC बैंक के शेयर्स भी आप खरीद सकते हैं। अभी HDFC बैंक का मार्केट कैप 5 लाख 25 हजार 64 करोड़ रुपए है जबकि एक शेयर का भाव 2,034. 85 रुपए है। आईटीसी के शेयर्स खरीदने की राय तमाम एक्सपर्ट्स लोगों को देते रहते हैं। होटल और फूड सेक्टर में ये कंपनी काफी तेजी से तरक्की कर रही है। आईटीसी की कुल मार्केट कैप 3 लाख 44 हजार 76. 86 करोड़ रुपए है। जबकि आईटीसी के एक शेयर का भाव 282. 25 रुपए है। हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड एक इंग्लैंड की कंपनी यूनीलीवर का एक भाग है, जो भारत में व्यापार करने के लिए यूनीलीवर ने भारत में पंजीकृत कराया। इस कंपनी का 67% लाभांश इंग्लैंड के पास चला जाता है। हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड की कुल मार्केट कैप 3 लाख 28 हजार 622 करोड़ रुपए है। जबकि हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड के एक शेयर का भाव 1521. 40 रुपए है। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक इंफोसिस के शेयर्स भी लंबी अवधि के निवेश के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इंफोसिस के दुनिया भर में 30 से अधिक कार्यालय हैं। इंफोसिस की कुल मार्केट कैप 2 लाख 61 हजार 053 करोड़ रुपए है। जबकि इंफोसिस के एक शेयर का भाव 1195. 30 रुपए है। ऑयल अैण्ड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) 23 जून 1993 से प्रारंभ हुई एक भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी है। यह भारत मे कच्चे तेल के कुल उत्पादन मे 77% और गैस के उत्पादन मे 81% का योगदान करती है। ओएनजीसी की कुल मार्केट कैप 2 लाख 42 हजार 382. 78 करोड़ रुपए है। जबकि इंफोसिस के एक शेयर का भाव 189. 65 रुपए है। देश के सबसे पुराने और सबसे बड़े बैंक एसबीआई के शेयर्स भी लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छी डील साबित हो सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में हाल ही में प्रमुख बैंको को मर्जर हुआ है जिससे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया दुनिया के टॉप-50 बड़े बैंको की सूची में शामिल हो गया है। एसबीआई की कुल मार्केट कैप 1 लाख 93 हजार 643. 05 करोड़ रुपए है। जबकि एसबीआई के एक शेयर का भाव 249. 45 रुपए है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) एक भारत का सार्वजनिक प्रतिष्ठान है। यह भारत और विश्व में भी सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जो कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ है। कोल इंडिया को जीरो डेब्ट कंपनी भी कहते हैं। कोल इंडिया का कुल मार्केट कैप 1 लाख 63 हजार 720. 44 करोड़ रुपए है। जबकि कोल इंडिया के एक शेयर का भाव 263. 75 रुपए है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक भारती एयरटेल के शेयर भी लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेहतर हैं। हालांकि जियो के प्रभाव के चलते कभी-कभार कंपनी के शेयर्स टूट जाते हैं पर उनकी रिकवरी भी तेजी से होती है। भारती एयरटेल का कुल मार्केट कैप 1 लाख 52 हजार 540. 78 करोड़ रुपए है। जबकि कोल इंडिया के एक शेयर का भाव 381. 60 रुपए है। बताए गए शेयर्स का आंकड़ा मनी रेडिफ डॉट कॉम से लिया गया है। शेयर बाजार के आंकड़ो में बदलाव होते रहते हैं इसलिए पाठक अपने विवेक से काम लेते हुए शेयर्स की खरीदारी करें, लेख पढ़ने के बाद यदि किसी व्यक्ति को इन शेयर्स को खरीदने या बेचने से किसी तरह की हानि होती है या लाभ होता है तो उसके लिए ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या फिर हिंदी गुडरिटर्न्स डॉट इन किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होंगे। पाठक अपने विवेक के आधार पर निर्णय लें।
शेयर बाजार में निवेश को लेकर आपके पास तमाम विकल्प रहते हैं फिर भी तमाम एक्सपर्ट्स आपको लॉन्ग टर्म निवेश की ही सलाह देते हैं, ऐसे में हम यहां आपके लिए कुछ चोटी के शेयर्स लेकर आए हैं जिसमें आप लंबी अवधि के निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। आइए देखते हैं देश के टॉप दस शेयर्स जिसमें आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर सकते हैं। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज TCS देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। जबकि मार्केट कैप के हिसाब से टीसीएस देश की सबसे बड़ी कंपनी है। टीसीएस का मार्केट कैप छः लाख बासठ हजार पाँच सौ चालीस. अस्सी करोड़ रुपए है। टीसीएस के शेयर्स लॉन्ग टर्म निवेश के लिए एक बेहतर विकल्प हैं। वर्तमान में टीसीएस के एक शेयर का भाव तीन हज़ार चार सौ अड़सठ. अस्सी रुपयापए है। देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर्स भी लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेहतर चुनाव हो सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट कैप छः लाख इक्कीस हजार बीस. पाँच करोड़ रुपए है। जबकि एक शेयर का भाव नौ सौ अस्सी. तीस रुपयापए है। देश में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है ये निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है। HDFC बैंक के शेयर्स भी इस लिस्ट में शामिल हैं। HDFC बैंक देश के बड़े हाउसिंग फाइनेंस बैंक रुप में स्थापित हो चुका है। लंबी अवधि के लिए HDFC बैंक के शेयर्स भी आप खरीद सकते हैं। अभी HDFC बैंक का मार्केट कैप पाँच लाख पच्चीस हजार चौंसठ करोड़ रुपए है जबकि एक शेयर का भाव दो,चौंतीस. पचासी रुपयापए है। आईटीसी के शेयर्स खरीदने की राय तमाम एक्सपर्ट्स लोगों को देते रहते हैं। होटल और फूड सेक्टर में ये कंपनी काफी तेजी से तरक्की कर रही है। आईटीसी की कुल मार्केट कैप तीन लाख चौंतालीस हजार छिहत्तर. छियासी करोड़ रुपए है। जबकि आईटीसी के एक शेयर का भाव दो सौ बयासी. पच्चीस रुपयापए है। हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड एक इंग्लैंड की कंपनी यूनीलीवर का एक भाग है, जो भारत में व्यापार करने के लिए यूनीलीवर ने भारत में पंजीकृत कराया। इस कंपनी का सरसठ% लाभांश इंग्लैंड के पास चला जाता है। हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड की कुल मार्केट कैप तीन लाख अट्ठाईस हजार छः सौ बाईस करोड़ रुपए है। जबकि हिंदुस्तान युनिलिवर लिमिटेड के एक शेयर का भाव एक हज़ार पाँच सौ इक्कीस. चालीस रुपयापए है। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक इंफोसिस के शेयर्स भी लंबी अवधि के निवेश के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इंफोसिस के दुनिया भर में तीस से अधिक कार्यालय हैं। इंफोसिस की कुल मार्केट कैप दो लाख इकसठ हजार तिरेपन करोड़ रुपए है। जबकि इंफोसिस के एक शेयर का भाव एक हज़ार एक सौ पचानवे. तीस रुपयापए है। ऑयल अैण्ड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड तेईस जून एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से प्रारंभ हुई एक भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी है। यह भारत मे कच्चे तेल के कुल उत्पादन मे सतहत्तर% और गैस के उत्पादन मे इक्यासी% का योगदान करती है। ओएनजीसी की कुल मार्केट कैप दो लाख बयालीस हजार तीन सौ बयासी. अठहत्तर करोड़ रुपए है। जबकि इंफोसिस के एक शेयर का भाव एक सौ नवासी. पैंसठ रुपयापए है। देश के सबसे पुराने और सबसे बड़े बैंक एसबीआई के शेयर्स भी लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छी डील साबित हो सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में हाल ही में प्रमुख बैंको को मर्जर हुआ है जिससे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया दुनिया के टॉप-पचास बड़े बैंको की सूची में शामिल हो गया है। एसबीआई की कुल मार्केट कैप एक लाख तिरानवे हजार छः सौ तैंतालीस. पाँच करोड़ रुपए है। जबकि एसबीआई के एक शेयर का भाव दो सौ उनचास. पैंतालीस रुपयापए है। कोल इंडिया लिमिटेड एक भारत का सार्वजनिक प्रतिष्ठान है। यह भारत और विश्व में भी सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जो कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ है। कोल इंडिया को जीरो डेब्ट कंपनी भी कहते हैं। कोल इंडिया का कुल मार्केट कैप एक लाख तिरेसठ हजार सात सौ बीस. चौंतालीस करोड़ रुपए है। जबकि कोल इंडिया के एक शेयर का भाव दो सौ तिरेसठ. पचहत्तर रुपयापए है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक भारती एयरटेल के शेयर भी लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेहतर हैं। हालांकि जियो के प्रभाव के चलते कभी-कभार कंपनी के शेयर्स टूट जाते हैं पर उनकी रिकवरी भी तेजी से होती है। भारती एयरटेल का कुल मार्केट कैप एक लाख बावन हजार पाँच सौ चालीस. अठहत्तर करोड़ रुपए है। जबकि कोल इंडिया के एक शेयर का भाव तीन सौ इक्यासी. साठ रुपयापए है। बताए गए शेयर्स का आंकड़ा मनी रेडिफ डॉट कॉम से लिया गया है। शेयर बाजार के आंकड़ो में बदलाव होते रहते हैं इसलिए पाठक अपने विवेक से काम लेते हुए शेयर्स की खरीदारी करें, लेख पढ़ने के बाद यदि किसी व्यक्ति को इन शेयर्स को खरीदने या बेचने से किसी तरह की हानि होती है या लाभ होता है तो उसके लिए ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या फिर हिंदी गुडरिटर्न्स डॉट इन किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होंगे। पाठक अपने विवेक के आधार पर निर्णय लें।
कुछ दिन हुए बम्बई - मेल से यात्रा करती हुई सिनेमा की एक अभिनेत्री को देखने के लिये इलाहाबाद स्टेशन पर हजारों आदमी एकत्र हो गये । उनमे विद्यार्थियों की संख्या बहुत थी । घन्टे गाड़ी को रुकना पड़ा । आध सिनेमा प्रेमियों ने जिस डिब्बे मे अभिनेत्री बैठी थी, उसके शीशे की खिड़कियों को तोड़ डाला, जय के नारे लगाये । इस उत्पात मे चार व्यक्ति घायल भी हो गये । किसी महात्मा, महापुरुष या देश के विशिष्ट नेता के दर्शनार्थ लोगों का जमा होना जैसे उनकी नैतिकता को सिद्ध करता है, वैसे ही केवल नाच गान तथा भाव व्यक्त करने मे चतुर नाना प्रकार की कमजोरियों से भरी हुई किसी एक नटी के दर्शनार्थ भीड़ का इकट्ठा होना और उत्पात मचाना नैतिकता के निम्न स्तर कायम के नग्न नृत्य का मूर्तिमान् प्रदर्शन कराता है। इसी दुर्भाग्य का उल्लेख करते हुये उत्तरप्रदेश के शिक्षा मन्त्री श्री हरगोविन्द सिंह जी ने कहा -- x x x लखनऊ मे बैठकर विभिन्न स्थानों से प्राप्त विद्यार्थियो की कृतियों के समाचार सुनकर मैं मारे शर्म के गड़ जाता हूँ । इलाहाबाद के स्टेशन पर कामिनी कौशल ( सिनेमा की एक नटी ) की जय के नारे लगाकर विद्यार्थियों ने जिस शिक्षा और नैतिक स्तर का परिचय दिया है क्या यही की शिक्षा का उद्देश्य है ? यदि हॉ, तो मैं समस्त विश्वविद्यालयों कालिका देव के लिये बन्द किया जाना ही श्रेयस्कर समझूगा । क्या हम 'कामिनी कौशल की जय' बोलने के लिए ही उन्हें तैयार कर रहे हैं ? एक दिन मैंने नैनीताल मे देखा कि विद्यार्थियों की बडी भीड़ चली जा रही है। पूछने पर मालूम हुआ कि किसी सिनेमा गृह में एक प्रसिद्ध एक्ट्रेस हुई थी। कल के विद्यार्थियों को फिल्मी अभिनेताओं के जीवन की प्रत्येक बात मालूम है, परन्तु अपने देश के इतिहास और अपने नेताओं के सम्बन्ध में उनका ज्ञान एकदम शून्य पड़ा है ! ( माननीय श्री हरगोविन्दसिह जी ) बिनु पानी सब सून ( श्री शिवनन्दन कपूर एम० ए० ) मनुष्य का निर्माण करते समय नारायण यानी पानी पर पैर पसारने वाले ईश्वर को पानी का ध्यान जरूर रहा होगा। उनके चारों ओर पानी के अतिरिक्त और है ही क्या ? उत्तर, दक्खिन, दाहिने, बायें हर ओर से हल्की-हल्की लहरों के थपेड़े । बस गहरी नीद मे पड़े रहते हैं । जगे तो सामने लक्ष्मी जी के मुखमडल पर वही पानी की बहार । फिर ब्रह्माजी की तो बात ही निराली है। वे तो काफी ऊँचे पर अड्डा जमाये हैं। साथ ही चतुर्मुख भी हैं । इसीलिये यदि उनके हाथ में सृष्टि रचना का कार्य रहा होगा तो पहला स्थान उन्होंने पानी को ही दिया होगा । गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी विश्व के पांच मेल रूपी पाँच सवारों में पानी का नाम गिनाया है । पर पता नहीं कैसे वे उसे दूसरे नम्बर पर बिठा गये । खानखाना रहीम भी खूत्र कह गये हैं :रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून और सचनुच पानी बिना सब सूना है । स्वास्थ्य के लिये, दैनिक कार्यों के लिये, अजी धर्म, कर्म, शर्म, कुछ भी ले लीजिये, सभी जगह पानी का ही वोल-चाला है। अभी आपका हुक्का पानी बन्द कर दें तो आप हो गये जाति बहिष्कृत । धर्म भ्रष्ट हो जाने पर तो कोई आपके हाथ का हुआ पानी भी न पियेगा, सच पूछिये तो पानी ही धर्म की निशानी है। भारत की दार्शनिकता मे इसीलिये तो इसका विशेष स्थान है । जीवन का नाम ही पानी है । तभी तो इसे पानी का बतासा या बुलबुला कह देते हैं । साथ ही : पानी केरा बुलबुला ऐसी हमरी जात ?
कुछ दिन हुए बम्बई - मेल से यात्रा करती हुई सिनेमा की एक अभिनेत्री को देखने के लिये इलाहाबाद स्टेशन पर हजारों आदमी एकत्र हो गये । उनमे विद्यार्थियों की संख्या बहुत थी । घन्टे गाड़ी को रुकना पड़ा । आध सिनेमा प्रेमियों ने जिस डिब्बे मे अभिनेत्री बैठी थी, उसके शीशे की खिड़कियों को तोड़ डाला, जय के नारे लगाये । इस उत्पात मे चार व्यक्ति घायल भी हो गये । किसी महात्मा, महापुरुष या देश के विशिष्ट नेता के दर्शनार्थ लोगों का जमा होना जैसे उनकी नैतिकता को सिद्ध करता है, वैसे ही केवल नाच गान तथा भाव व्यक्त करने मे चतुर नाना प्रकार की कमजोरियों से भरी हुई किसी एक नटी के दर्शनार्थ भीड़ का इकट्ठा होना और उत्पात मचाना नैतिकता के निम्न स्तर कायम के नग्न नृत्य का मूर्तिमान् प्रदर्शन कराता है। इसी दुर्भाग्य का उल्लेख करते हुये उत्तरप्रदेश के शिक्षा मन्त्री श्री हरगोविन्द सिंह जी ने कहा -- x x x लखनऊ मे बैठकर विभिन्न स्थानों से प्राप्त विद्यार्थियो की कृतियों के समाचार सुनकर मैं मारे शर्म के गड़ जाता हूँ । इलाहाबाद के स्टेशन पर कामिनी कौशल की जय के नारे लगाकर विद्यार्थियों ने जिस शिक्षा और नैतिक स्तर का परिचय दिया है क्या यही की शिक्षा का उद्देश्य है ? यदि हॉ, तो मैं समस्त विश्वविद्यालयों कालिका देव के लिये बन्द किया जाना ही श्रेयस्कर समझूगा । क्या हम 'कामिनी कौशल की जय' बोलने के लिए ही उन्हें तैयार कर रहे हैं ? एक दिन मैंने नैनीताल मे देखा कि विद्यार्थियों की बडी भीड़ चली जा रही है। पूछने पर मालूम हुआ कि किसी सिनेमा गृह में एक प्रसिद्ध एक्ट्रेस हुई थी। कल के विद्यार्थियों को फिल्मी अभिनेताओं के जीवन की प्रत्येक बात मालूम है, परन्तु अपने देश के इतिहास और अपने नेताओं के सम्बन्ध में उनका ज्ञान एकदम शून्य पड़ा है ! बिनु पानी सब सून मनुष्य का निर्माण करते समय नारायण यानी पानी पर पैर पसारने वाले ईश्वर को पानी का ध्यान जरूर रहा होगा। उनके चारों ओर पानी के अतिरिक्त और है ही क्या ? उत्तर, दक्खिन, दाहिने, बायें हर ओर से हल्की-हल्की लहरों के थपेड़े । बस गहरी नीद मे पड़े रहते हैं । जगे तो सामने लक्ष्मी जी के मुखमडल पर वही पानी की बहार । फिर ब्रह्माजी की तो बात ही निराली है। वे तो काफी ऊँचे पर अड्डा जमाये हैं। साथ ही चतुर्मुख भी हैं । इसीलिये यदि उनके हाथ में सृष्टि रचना का कार्य रहा होगा तो पहला स्थान उन्होंने पानी को ही दिया होगा । गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी विश्व के पांच मेल रूपी पाँच सवारों में पानी का नाम गिनाया है । पर पता नहीं कैसे वे उसे दूसरे नम्बर पर बिठा गये । खानखाना रहीम भी खूत्र कह गये हैं :रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून और सचनुच पानी बिना सब सूना है । स्वास्थ्य के लिये, दैनिक कार्यों के लिये, अजी धर्म, कर्म, शर्म, कुछ भी ले लीजिये, सभी जगह पानी का ही वोल-चाला है। अभी आपका हुक्का पानी बन्द कर दें तो आप हो गये जाति बहिष्कृत । धर्म भ्रष्ट हो जाने पर तो कोई आपके हाथ का हुआ पानी भी न पियेगा, सच पूछिये तो पानी ही धर्म की निशानी है। भारत की दार्शनिकता मे इसीलिये तो इसका विशेष स्थान है । जीवन का नाम ही पानी है । तभी तो इसे पानी का बतासा या बुलबुला कह देते हैं । साथ ही : पानी केरा बुलबुला ऐसी हमरी जात ?
नई दिल्ली। विश्व में तंबाकू के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष इस्तेमाल के कारण प्रति वर्ष करीब 60 लाख व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार यदि इस आदत पर अंकुश के लिए तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाये गये, तो वर्ष 2030 तक यह संख्या 80 लाख तक पहुंच सकती है। भारत में प्रत्येक 10 में से एक वयस्क व्यक्ति की मृत्यु तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। तंबाकू प्रति वर्ष 15 लाख कैंसर, 42 लाख हृदय रोगों और 37 लाख फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है। मुंह के कैंसर के सर्वाधिक रोगी अपने ही देश में पाये जाते हैं। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार बीड़ी, सिगरेट, गुटका, खाने के तंबाकू और सूंघने के तंबाकू आदि के रूप में देश में 4300 लाख (टन) तंबाकू खप जाता है। करीब 14 करोड़ पुरुष और चार करोड़ महिलाएं तंबाकू सेवन की आदी हैं और 15 से 49 वर्ष के आयु-वर्ग में 57 प्रतिशत पुरुष और 10 प्रतिशत महिलाएं, किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि तंबाकू वर्ष 2020 तक भारत में प्रति वर्ष 13 प्रतिशत व्यक्तियों की मृत्यु का जिम्मेदार बन जाएगा। तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति में यदि कोई हस्तक्षेप न किया गया, तो तीन करोड़ 84 लाख बीड़ी और सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों में क्रमशः तीन करोड़ 84 लाख और एक करोड़ 32 लाख व्यक्ति समय से पहले काल ग्रास बन जाएंगे। दूसरे दर्जे का धूम्रपान भी एक बड़ी समस्या है। कुछ तंबाकू उत्पादों को सुरक्षित माना जाता है जो कि गलत विश्वास है, क्योंकि तंबाकू का सेवन हररूप में नुकसानदेह है। गुटका, पैकेट जैसे मुद्दों को लेकर 2011 और 2012 में खाद्य सुरक्षा खाद्य मानक कानून में कई संशोधन किये गये। इन संशोधनों के परिणामस्वरूप 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें तंबाकू वाले गुटके और पान मसाले पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं, लेकिन उन प्रतिबंधों के अमल पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने ही संबद्ध राज्यों से प्रतिबंधों पर अमल को लेकर रिपोर्ट मांगी है। सितंबर 2012 में जारी नये नियमों के अनुसार तंबाकू उत्पादों की पैकिंग पर चित्रात्मक चेतावनी में तंबाकू के इस्तेमाल से प्रभावित होने वाले मानव अंगों को दर्शाना और लाल रंग में 'धूम्रपान जानलेवा है', तंबाकू 'जानलेवा है' लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। यह सब तंबाकू की पैकिंग के 40 प्रतिशत क्षेत्र में होना चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ के तत्वावधान में हाल ही में कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के सम्मेलनों में तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों और प्रायोजन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई। सम्मेलन में कहा गया कि प्रतिबंधों के बावजूद तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों की भरमार रहती है। सम्मेलन में शामिल गैर-सरकारी संगठनों में युवाओं में स्वास्थ्य से संबद्ध सूचना के सम्प्रेषण से जुड़ा संगठन-'हृदय' और वालेंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया-'वीएचएआई शामिल थे। तंबाकू-उत्पादों के विज्ञापन, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नियमन कानून 2003 के तहत प्रतिबंधित हैं। डब्ल्यूएचओ के अध्ययन के अनुसार धूम्रपान के आदी 70 प्रतिशत व्यक्ति धूम्रपान छोड़ने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन प्रति वर्ष उनमें से केवल 30 प्रतिशत व्यक्ति ही उसकी कोशिश करते हैं, जबकि उसमें सफलता केवल तीन से पांच प्रतिशत व्यक्तियों को ही मिल पाती है। इस वर्ष-विश्व तंबाकू विहीन दिवस (31 मई 2013) का आदर्श वाक्य है-'तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन संवर्द्धन और प्रायोजन पर प्रतिबंध'। डब्ल्यूएचओ के 2013 के अभियान का उद्देश्य तंबाकू उद्योग को, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, संवर्द्धन और प्रायोजन पर प्रतिबंधों को कुंद करने से रोकने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को तेज करना है, क्योंकि तंबाकू जनित बीमारियों से प्रति वर्ष मरने वाले 60 लाख व्यक्तियों में छह लाख व्यक्ति अप्रत्यक्ष धूम्रपान से मरते हैं। निःसंदेह जब तक नियमों, कानूनों और जन-जागरूकता, के जरिये तंबाकू-उपभोग की सभी किस्मों से छुटकारा नहीं पा लिया जाता, 'तंबाकू मुक्त भारत' का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली। विश्व में तंबाकू के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष इस्तेमाल के कारण प्रति वर्ष करीब साठ लाख व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यदि इस आदत पर अंकुश के लिए तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाये गये, तो वर्ष दो हज़ार तीस तक यह संख्या अस्सी लाख तक पहुंच सकती है। भारत में प्रत्येक दस में से एक वयस्क व्यक्ति की मृत्यु तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। तंबाकू प्रति वर्ष पंद्रह लाख कैंसर, बयालीस लाख हृदय रोगों और सैंतीस लाख फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है। मुंह के कैंसर के सर्वाधिक रोगी अपने ही देश में पाये जाते हैं। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार बीड़ी, सिगरेट, गुटका, खाने के तंबाकू और सूंघने के तंबाकू आदि के रूप में देश में चार हज़ार तीन सौ लाख तंबाकू खप जाता है। करीब चौदह करोड़ पुरुष और चार करोड़ महिलाएं तंबाकू सेवन की आदी हैं और पंद्रह से उनचास वर्ष के आयु-वर्ग में सत्तावन प्रतिशत पुरुष और दस प्रतिशत महिलाएं, किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि तंबाकू वर्ष दो हज़ार बीस तक भारत में प्रति वर्ष तेरह प्रतिशत व्यक्तियों की मृत्यु का जिम्मेदार बन जाएगा। तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति में यदि कोई हस्तक्षेप न किया गया, तो तीन करोड़ चौरासी लाख बीड़ी और सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों में क्रमशः तीन करोड़ चौरासी लाख और एक करोड़ बत्तीस लाख व्यक्ति समय से पहले काल ग्रास बन जाएंगे। दूसरे दर्जे का धूम्रपान भी एक बड़ी समस्या है। कुछ तंबाकू उत्पादों को सुरक्षित माना जाता है जो कि गलत विश्वास है, क्योंकि तंबाकू का सेवन हररूप में नुकसानदेह है। गुटका, पैकेट जैसे मुद्दों को लेकर दो हज़ार ग्यारह और दो हज़ार बारह में खाद्य सुरक्षा खाद्य मानक कानून में कई संशोधन किये गये। इन संशोधनों के परिणामस्वरूप चौबीस राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें तंबाकू वाले गुटके और पान मसाले पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं, लेकिन उन प्रतिबंधों के अमल पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने ही संबद्ध राज्यों से प्रतिबंधों पर अमल को लेकर रिपोर्ट मांगी है। सितंबर दो हज़ार बारह में जारी नये नियमों के अनुसार तंबाकू उत्पादों की पैकिंग पर चित्रात्मक चेतावनी में तंबाकू के इस्तेमाल से प्रभावित होने वाले मानव अंगों को दर्शाना और लाल रंग में 'धूम्रपान जानलेवा है', तंबाकू 'जानलेवा है' लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। यह सब तंबाकू की पैकिंग के चालीस प्रतिशत क्षेत्र में होना चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ के तत्वावधान में हाल ही में कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के सम्मेलनों में तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों और प्रायोजन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई। सम्मेलन में कहा गया कि प्रतिबंधों के बावजूद तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों की भरमार रहती है। सम्मेलन में शामिल गैर-सरकारी संगठनों में युवाओं में स्वास्थ्य से संबद्ध सूचना के सम्प्रेषण से जुड़ा संगठन-'हृदय' और वालेंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया-'वीएचएआई शामिल थे। तंबाकू-उत्पादों के विज्ञापन, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नियमन कानून दो हज़ार तीन के तहत प्रतिबंधित हैं। डब्ल्यूएचओ के अध्ययन के अनुसार धूम्रपान के आदी सत्तर प्रतिशत व्यक्ति धूम्रपान छोड़ने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन प्रति वर्ष उनमें से केवल तीस प्रतिशत व्यक्ति ही उसकी कोशिश करते हैं, जबकि उसमें सफलता केवल तीन से पांच प्रतिशत व्यक्तियों को ही मिल पाती है। इस वर्ष-विश्व तंबाकू विहीन दिवस का आदर्श वाक्य है-'तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन संवर्द्धन और प्रायोजन पर प्रतिबंध'। डब्ल्यूएचओ के दो हज़ार तेरह के अभियान का उद्देश्य तंबाकू उद्योग को, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, संवर्द्धन और प्रायोजन पर प्रतिबंधों को कुंद करने से रोकने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को तेज करना है, क्योंकि तंबाकू जनित बीमारियों से प्रति वर्ष मरने वाले साठ लाख व्यक्तियों में छह लाख व्यक्ति अप्रत्यक्ष धूम्रपान से मरते हैं। निःसंदेह जब तक नियमों, कानूनों और जन-जागरूकता, के जरिये तंबाकू-उपभोग की सभी किस्मों से छुटकारा नहीं पा लिया जाता, 'तंबाकू मुक्त भारत' का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
17 November 2022 Ka Meen Rashifal आज का मीन राशिफल : आज का मीन राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक अच्छा रहेगा। गृह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति बनने से बिजनेस में धनलाभ और नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। हालांकि, काम की अधिकता रहेगी, लेकिन अपने प्रयासों से कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेगा, लेकिन ध्यान रहे कि आपकी बातों से किसी को ठेस न पहुंचे। परिवार के साथ आनंदपूर्व समय बीतेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। सेहत का ध्यान रखें। राजनीति में सफलता हाथ लगेगी। जातक काम में भाग्य आपके लिए स्थितियां अनुकूल करेगा । जातक नौकरी में नया अवसर मिलेगा। - मीन राशि प्यार (Love) मीन राशि वाले आज जातक प्यार को लेकर परेशान रहेंगे। - मीन राशि परिवार ( Family) मीन राशि वाले आज जातक परिवार के लोगों के साथ मौज-मस्ती करेगे। - मीन राशि का उपाय ( Remedy) मीन राशि वाले आज जातक हनुमान जी की आराधना करें। - मीन राशि पूर्वाभास (Forecast) मीन राशि के जातक जातक पुराना काम पूरा करनेे का मन बनायेगे। - मीन राशि शुभ अंक और रंग (Lucky Number & Colour) 7, आसमानी। क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं। राशिफल क्या होता है? ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर 12 राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये 12 राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ? न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं। राशिफल की गणना किस पर आधारित है? जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
सत्रह नवंबरember दो हज़ार बाईस Ka Meen Rashifal आज का मीन राशिफल : आज का मीन राशिफल बताता है कि आज इस राशि के जातक अच्छा रहेगा। गृह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति बनने से बिजनेस में धनलाभ और नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। हालांकि, काम की अधिकता रहेगी, लेकिन अपने प्रयासों से कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेगा, लेकिन ध्यान रहे कि आपकी बातों से किसी को ठेस न पहुंचे। परिवार के साथ आनंदपूर्व समय बीतेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। सेहत का ध्यान रखें। राजनीति में सफलता हाथ लगेगी। जातक काम में भाग्य आपके लिए स्थितियां अनुकूल करेगा । जातक नौकरी में नया अवसर मिलेगा। - मीन राशि प्यार मीन राशि वाले आज जातक प्यार को लेकर परेशान रहेंगे। - मीन राशि परिवार मीन राशि वाले आज जातक परिवार के लोगों के साथ मौज-मस्ती करेगे। - मीन राशि का उपाय मीन राशि वाले आज जातक हनुमान जी की आराधना करें। - मीन राशि पूर्वाभास मीन राशि के जातक जातक पुराना काम पूरा करनेे का मन बनायेगे। - मीन राशि शुभ अंक और रंग सात, आसमानी। क्या राशिफल सही होता है? हम जो भी राशिफल देते है वो सामान्य दैनिक राशिफल ग्रहों की सटिक गणना पर आधारित होता है। जो नाम के आधार पर होता है। लेकिन दुनियाभर में करोड़ों लोगों के एक नाम और एक राशियां होती है तो जरूरी नहीं की फलादेश भी एक हो। यहां जो राशिफल दी जाती है वह सामान्य भविष्यफल है। किसी भी जातक को अपने भविष्य का सही फलादेश जन्म राशि नाम और जन्म तारीख और कुंडली के लग्न में स्थित ग्रह और राशि के आधार पर सटीक जानकारी ले सकते हैं। राशिफल क्या होता है? ज्योतिष विज्ञान की वह विधा जिसमें जातक के नाम राशि और ग्रहों के गोचरी की स्थिति को देखकर भविष्यवाणी की जाती है, उसे राशिफल कहते हैं। राशिफल के जरिए हम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक घटनाओं की जानकारी लेते हैं। इसके लिए हर दिन नौ ग्रहों और सत्ताईस नक्षत्रों की गणना और चंद्रमा की राशि में स्थिति के आधार पर बारह राशियों की भविष्यवाणी की जाती है। ये बारह राशियां इस प्रकार है- मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ व मीन। इनके फलादेश को राशिफल कहते हैं। क्या राशिफल नाम के अनुसार है ? न्यूजट्रैक. कॉम पर हम हर रोज दैनिक राशिफल देते हैं। जो नाम पर आधारित होता है। यह कुंडली में लग्न के अनुसार जन्म राशि होती है, लेकिन जिसे अपनी जन्मराशि का ज्ञान न हो वह अपने नाम से भी दैनिक फलादेश देख सकते हैं। राशिफल की गणना किस पर आधारित है? जो दैनिक राशिफल दी जाती है वह चंद्र राशि पर आधारित होती है, ज्योतिषविद से पता लगा सकते है। लेकिन इसके लिए जरूरी है आपको जन्म तारीख, स्थान और समय का सही पता तो सही फलादेश मिलेगा।
हर्षा को आइपीएल कमेंट्री टीम से हटाने के पीछे सीनियर क्रिकेटर्स! हर्षा भोगले को आइपीएल की कमेंट्री टीम से हटाए जाने के पीछ मुख्य वजह कुछ सीनियर भारतीय क्रिकेटर्स द्वारा टी-20 विश्व कप के दौरान कथित रूप से बीसीसीआइ पदाधिकारियों को उनकी शिकायत करना बताया जा रहा है। मुंबई। हर्षा भोगले को आइपीएल की कमेंट्री टीम से हटाए जाने के पीछ मुख्य वजह कुछ सीनियर भारतीय क्रिकेटर्स द्वारा टी-20 विश्व कप के दौरान कथित रूप से बीसीसीआइ पदाधिकारियों को उनकी शिकायत करना बताया जा रहा है। वैसे बीसीसीआइ अधिकारियों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, लेकिन सोशल मीडिया पर भोगले को जमकर समर्थन मिल रहा है। आइपीएल शुरू होने के दो दिन पहले तक भोगले कमेंट्री टीम में शामिल थे और इस लीग का संचालन करने वाले आइपीएल ने भोगले से एयर टिकट्स बुक करने के लिए रजामंदी मांगी थी। भोगले ने कहा- अगले दिन मुझे ई-मेल के द्वारा सूचित किया गया कि मेरी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। मुझे इसका कोई कारण नहीं बताया गया। वैसे सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का कद बहुत बड़ा है और उनका इस तरह के मामले से कुछ लेना देना नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भोगले को आइपीएल कमेंट्री टीम से इसलिए बाहर किया गया क्योंकि नागपुर में उनके और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी के बीच तीखी बहस हुई थी। टी-20 विश्व कप के दौरान अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर एक भारतीय कमेंटेटर की इसलिए आलोचना की थी कि वह दूसरे देश के खिलाड़ियों के बारे में ज्यादा बात कर रहा था। भारतीय कप्तान महेंद्रसिंह धौनी ने भी इसे रीट्वीट किया था।
हर्षा को आइपीएल कमेंट्री टीम से हटाने के पीछे सीनियर क्रिकेटर्स! हर्षा भोगले को आइपीएल की कमेंट्री टीम से हटाए जाने के पीछ मुख्य वजह कुछ सीनियर भारतीय क्रिकेटर्स द्वारा टी-बीस विश्व कप के दौरान कथित रूप से बीसीसीआइ पदाधिकारियों को उनकी शिकायत करना बताया जा रहा है। मुंबई। हर्षा भोगले को आइपीएल की कमेंट्री टीम से हटाए जाने के पीछ मुख्य वजह कुछ सीनियर भारतीय क्रिकेटर्स द्वारा टी-बीस विश्व कप के दौरान कथित रूप से बीसीसीआइ पदाधिकारियों को उनकी शिकायत करना बताया जा रहा है। वैसे बीसीसीआइ अधिकारियों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, लेकिन सोशल मीडिया पर भोगले को जमकर समर्थन मिल रहा है। आइपीएल शुरू होने के दो दिन पहले तक भोगले कमेंट्री टीम में शामिल थे और इस लीग का संचालन करने वाले आइपीएल ने भोगले से एयर टिकट्स बुक करने के लिए रजामंदी मांगी थी। भोगले ने कहा- अगले दिन मुझे ई-मेल के द्वारा सूचित किया गया कि मेरी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। मुझे इसका कोई कारण नहीं बताया गया। वैसे सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का कद बहुत बड़ा है और उनका इस तरह के मामले से कुछ लेना देना नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भोगले को आइपीएल कमेंट्री टीम से इसलिए बाहर किया गया क्योंकि नागपुर में उनके और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के एक अधिकारी के बीच तीखी बहस हुई थी। टी-बीस विश्व कप के दौरान अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर एक भारतीय कमेंटेटर की इसलिए आलोचना की थी कि वह दूसरे देश के खिलाड़ियों के बारे में ज्यादा बात कर रहा था। भारतीय कप्तान महेंद्रसिंह धौनी ने भी इसे रीट्वीट किया था।
संदेश एक ऐसी मिठाई जिसे हर कोई खाना पसंद करेगा। इसे पनीर के साथ तैयार किया जाता है। संदेश एक ऐसी मिठाई जिसे हर कोई खाना पसंद करेगा। इसे पनीर के साथ तैयार किया जाता है। आज हम लेकर आए हैं 2 तरह के संदेश की रेसिपी। जानते हैं इसे बनाने की विधि। 1. सबसे पहले कड़ाही में 1. 5 लीटर दूध डालें और उबाल लें। 2. 30 मिलीलीटर नींबू का रस मिलाएं और दूध को दही बनने तक लगातार हिलाएं। 3. एक मलमल के कपड़े में छेना को स्थानांतरित करें और अच्छी तरह से निचोड़ें। 4. छेने को पानी से धोकर अच्छी तरह निचोड़ लें। लगभग 30 मिनट तक रख दें। 5. अब इस छेना के साथ आटा तैयार करने का समय है। इसमें कोको पाऊडर डालें और अच्छी तरह फेंट लें। 6. फिर इसमें 50 ग्राम ब्राउन शुगर डालें और अच्छे से मिलाएं। 7. लगभग 5 - 7 मिनट के लिए मध्यम आंच पर पकाएं। 8. इसे गैस से हटाएं और लगभग 30 मिनट के लिए ठंडा करें। 9. अपने हाथ में कुछ मिश्रण लें और इसे एक गेंद में रोल करें, फिर इसे हल्का सा चपटा करें। 10. अपनी उंगली का उपयोग करके केंद्र में होल बनाएं। चॉकलेट छिड़क के साथ गार्निश करें। 11. 30 मिनट के लिए रेफ्रिजरेट करें। परोसें। 1. एक भारी बर्तन लें। इसमें 2 लीटर दूध डालें और उबाल लें। 2. 4 बड़े चम्मच नींबू का रस डालें और लगातार हिलाते रहें। 3. इसे एक कटोरे में स्थानांतरित करें। गुलाब सिरप, गुलाब सार, पाउडर चीनी अच्छी तरह से मिलाएं। 4. उन्हें एक ब्लेंडर में स्थानांतरित करें। 50 मिलीलीटर दूध मिलाएं। 5. अपने हाथ में कुछ मिश्रण लें और इसे एक गेंद में रोल करें, फिर इसे हल्का सा चपटा करें। 6. अपनी उंगली का उपयोग करके केंद्र में एक होल बनाएं। 7. बादाम, पिस्ता और सूखे गुलाब की पंखुड़ियों से गार्निश करें। 8. 30 मिनट के लिए रेफ्रिजरेट करें । परोसें।
संदेश एक ऐसी मिठाई जिसे हर कोई खाना पसंद करेगा। इसे पनीर के साथ तैयार किया जाता है। संदेश एक ऐसी मिठाई जिसे हर कोई खाना पसंद करेगा। इसे पनीर के साथ तैयार किया जाता है। आज हम लेकर आए हैं दो तरह के संदेश की रेसिपी। जानते हैं इसे बनाने की विधि। एक. सबसे पहले कड़ाही में एक. पाँच लीटरटर दूध डालें और उबाल लें। दो. तीस मिलीलीटर नींबू का रस मिलाएं और दूध को दही बनने तक लगातार हिलाएं। तीन. एक मलमल के कपड़े में छेना को स्थानांतरित करें और अच्छी तरह से निचोड़ें। चार. छेने को पानी से धोकर अच्छी तरह निचोड़ लें। लगभग तीस मिनट तक रख दें। पाँच. अब इस छेना के साथ आटा तैयार करने का समय है। इसमें कोको पाऊडर डालें और अच्छी तरह फेंट लें। छः. फिर इसमें पचास ग्राम ब्राउन शुगर डालें और अच्छे से मिलाएं। सात. लगभग पाँच - सात मिनट के लिए मध्यम आंच पर पकाएं। आठ. इसे गैस से हटाएं और लगभग तीस मिनट के लिए ठंडा करें। नौ. अपने हाथ में कुछ मिश्रण लें और इसे एक गेंद में रोल करें, फिर इसे हल्का सा चपटा करें। दस. अपनी उंगली का उपयोग करके केंद्र में होल बनाएं। चॉकलेट छिड़क के साथ गार्निश करें। ग्यारह. तीस मिनट के लिए रेफ्रिजरेट करें। परोसें। एक. एक भारी बर्तन लें। इसमें दो लीटरटर दूध डालें और उबाल लें। दो. चार बड़े चम्मच नींबू का रस डालें और लगातार हिलाते रहें। तीन. इसे एक कटोरे में स्थानांतरित करें। गुलाब सिरप, गुलाब सार, पाउडर चीनी अच्छी तरह से मिलाएं। चार. उन्हें एक ब्लेंडर में स्थानांतरित करें। पचास मिलीलीटर दूध मिलाएं। पाँच. अपने हाथ में कुछ मिश्रण लें और इसे एक गेंद में रोल करें, फिर इसे हल्का सा चपटा करें। छः. अपनी उंगली का उपयोग करके केंद्र में एक होल बनाएं। सात. बादाम, पिस्ता और सूखे गुलाब की पंखुड़ियों से गार्निश करें। आठ. तीस मिनट के लिए रेफ्रिजरेट करें । परोसें।
राजधानी अंकारा में हजारों महिलाएं एकत्रित हुईं. इन्होंने कहा कि अब यह ना तो चुप होंगी, ना डरेंगी और ना ही झुकेंगी. लोगों ने हैरानी जताई कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर सुधार करने के बजाय उनसे उनके अधिकार छीन रही है. ओजगुल नाम की एक छात्रा ने कहा, 'हम रोज सुबह उठकर महिला हत्याओं के बारे में पढ़ते हैं, अब सरकार के फैसले से देश में खुद को सुरक्षित महसूस कराना संभव नहीं होगा.'
राजधानी अंकारा में हजारों महिलाएं एकत्रित हुईं. इन्होंने कहा कि अब यह ना तो चुप होंगी, ना डरेंगी और ना ही झुकेंगी. लोगों ने हैरानी जताई कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर सुधार करने के बजाय उनसे उनके अधिकार छीन रही है. ओजगुल नाम की एक छात्रा ने कहा, 'हम रोज सुबह उठकर महिला हत्याओं के बारे में पढ़ते हैं, अब सरकार के फैसले से देश में खुद को सुरक्षित महसूस कराना संभव नहीं होगा.'
LUCKNOW: यदि आपने अब तक अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवाया है या फिर आरटीओ ऑफिस से संबंधित कोई अन्य कार्य वहां निर्धारित फीस देकर कराना है तो जल्दी करिए। नहीं तो आपको दोगुना शुल्क चुकाना होगा क्योंकि परिवहन विभाग ने आरटीओ ऑफिस में विभिन्न कार्यो के शुल्क को दोगुना करने की परमीशन दे दी है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। डीएल से लेकर गाडि़यों के फिटनेस तक का दोगुना शुल्क चुकाना होगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीओ ऑफिस में आने वालों को अब विभिन्न कामों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। इस संबंध में केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। शुल्क बढ़ाने के लिए परिवहन आयुक्त को भी पत्र लिखा जा चुका है। आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण, वाहनों के फिटनेस, स्थाई लाइसेंस, लर्निग लाइसेंस के अलावा ऑटो रिक्शा का परमिट शुल्क भी बढ़ाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग आरटीओ ऑफिस को हाइटेक बनाने जा रहा है। इसमें खर्च होने वाली रकम की व्यवस्था वह विभिन्न मद्दों के शुल्क को बढ़ाकर पूरा करेगा। आरटीओ के अधिकारियों ने बताया कि लगभग 22 साल पहले जो शुल्क आरटीओ ऑफिस में विविध कार्यो के लिए निर्धारित किये गये थे। वही आज भी वसूला जा रहा है। 1994 में दोबारा शुल्क के निर्धारण के बाद एक बार फिर से शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है। बता दें कि आरटीओ ऑफिस में 40 से अधिक तरह के शुल्क वसूले जाते हैं। (दो पहिया) (सभी प्रकार के) (तीन दिन केलिएए) (ऑल यूपी के लिएए) आरटीओ ऑफिस में विभिन्न मद्दों के शुल्क को बढ़ाने की तैयारी चल रही है, जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
LUCKNOW: यदि आपने अब तक अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवाया है या फिर आरटीओ ऑफिस से संबंधित कोई अन्य कार्य वहां निर्धारित फीस देकर कराना है तो जल्दी करिए। नहीं तो आपको दोगुना शुल्क चुकाना होगा क्योंकि परिवहन विभाग ने आरटीओ ऑफिस में विभिन्न कार्यो के शुल्क को दोगुना करने की परमीशन दे दी है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। डीएल से लेकर गाडि़यों के फिटनेस तक का दोगुना शुल्क चुकाना होगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीओ ऑफिस में आने वालों को अब विभिन्न कामों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। इस संबंध में केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। शुल्क बढ़ाने के लिए परिवहन आयुक्त को भी पत्र लिखा जा चुका है। आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण, वाहनों के फिटनेस, स्थाई लाइसेंस, लर्निग लाइसेंस के अलावा ऑटो रिक्शा का परमिट शुल्क भी बढ़ाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग आरटीओ ऑफिस को हाइटेक बनाने जा रहा है। इसमें खर्च होने वाली रकम की व्यवस्था वह विभिन्न मद्दों के शुल्क को बढ़ाकर पूरा करेगा। आरटीओ के अधिकारियों ने बताया कि लगभग बाईस साल पहले जो शुल्क आरटीओ ऑफिस में विविध कार्यो के लिए निर्धारित किये गये थे। वही आज भी वसूला जा रहा है। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में दोबारा शुल्क के निर्धारण के बाद एक बार फिर से शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है। बता दें कि आरटीओ ऑफिस में चालीस से अधिक तरह के शुल्क वसूले जाते हैं। आरटीओ ऑफिस में विभिन्न मद्दों के शुल्क को बढ़ाने की तैयारी चल रही है, जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बढ़े तनाव को कम करने के मकसद से भारत और पाकिस्तानी सेना के बीच सोमवार को हुई फ्लैग मीटिंग बेनतीजा रही। एलओसी पर उपजे ताजा तनाव के बाद भारत की पहल पर दोनों सेनाओं के बिग्रेडियर स्तर के अधिकारी सोमवार को पहली बार पुंछ के चक्का-दा-बाग सेक्टर में आमने सामने मिले। भारत की ओर से जवान के सिर काटे जाने से जुड़ी सभी शिकायतों को पाक ने सिरे से नकार दिया। इस पर भारतीय सेना की ओर से बात कर रहे ब्रिगेडियर तेज सिंह संधू ने अपने पाक समकक्ष को साफ संदेश दे दिया कि अब उनकी तरफ से की गई किसी भी हरकत का सही वक्त और सही जगह पर करारा जवाब दिया जाएगा। फ्लैग मीटिंग करीब 30 मिनट तक चली। सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि फ्लैग मीटिंग में भारत ने पाकिस्तान से एलओसी पर बार-बार की जा रही फायरिंग रोकने को कहा। बिग्रेडियर संधु ने अपने पाक समकक्ष से कहा कि पाकिस्तानी सेना संघर्ष विराम का पालन करते हुए भारतीय सीमा में घुसपैठ बंद करे। साथ ही पाकिस्तानी सेना से लांस नायक हेमराज के कटे सिर को वापस देने की मांग की। पाकिस्तानी बिग्रेडियर ने संधू की सभी बातों से इनकार करते हुए उलटा भारत पर ही आरोप थोप दिए। पाकिस्तान ने कहा कि भारत एलओसी पर बंकर बनाने जैसी हरकतें करता है जो संघर्ष विराम करार के खिलाफ है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि फायरिंग हमेशा भारतीय सेना की ओर से की जाती है और पाकिस्तान उस पर जवाबी कार्रवाई करता है। भारत को उम्मीद थी कि पाकिस्तान 8 जनवरी को सिर काटे जाने की घटना के बारे में जांच करने जैसे कदम उठाने का वादा करेगा। लेकिन पाकिस्तान ने उलटा भारत पर आरोप मढ़ते हुए तनाव कम करने के बाबत किसी तरह की पहल का आश्वासन नहीं दिया है। इस तरह एलओसी पर जारी तनाव घटाने को लेकर हुई फ्लैग मीटिंग किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
नियंत्रण रेखा पर बढ़े तनाव को कम करने के मकसद से भारत और पाकिस्तानी सेना के बीच सोमवार को हुई फ्लैग मीटिंग बेनतीजा रही। एलओसी पर उपजे ताजा तनाव के बाद भारत की पहल पर दोनों सेनाओं के बिग्रेडियर स्तर के अधिकारी सोमवार को पहली बार पुंछ के चक्का-दा-बाग सेक्टर में आमने सामने मिले। भारत की ओर से जवान के सिर काटे जाने से जुड़ी सभी शिकायतों को पाक ने सिरे से नकार दिया। इस पर भारतीय सेना की ओर से बात कर रहे ब्रिगेडियर तेज सिंह संधू ने अपने पाक समकक्ष को साफ संदेश दे दिया कि अब उनकी तरफ से की गई किसी भी हरकत का सही वक्त और सही जगह पर करारा जवाब दिया जाएगा। फ्लैग मीटिंग करीब तीस मिनट तक चली। सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि फ्लैग मीटिंग में भारत ने पाकिस्तान से एलओसी पर बार-बार की जा रही फायरिंग रोकने को कहा। बिग्रेडियर संधु ने अपने पाक समकक्ष से कहा कि पाकिस्तानी सेना संघर्ष विराम का पालन करते हुए भारतीय सीमा में घुसपैठ बंद करे। साथ ही पाकिस्तानी सेना से लांस नायक हेमराज के कटे सिर को वापस देने की मांग की। पाकिस्तानी बिग्रेडियर ने संधू की सभी बातों से इनकार करते हुए उलटा भारत पर ही आरोप थोप दिए। पाकिस्तान ने कहा कि भारत एलओसी पर बंकर बनाने जैसी हरकतें करता है जो संघर्ष विराम करार के खिलाफ है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि फायरिंग हमेशा भारतीय सेना की ओर से की जाती है और पाकिस्तान उस पर जवाबी कार्रवाई करता है। भारत को उम्मीद थी कि पाकिस्तान आठ जनवरी को सिर काटे जाने की घटना के बारे में जांच करने जैसे कदम उठाने का वादा करेगा। लेकिन पाकिस्तान ने उलटा भारत पर आरोप मढ़ते हुए तनाव कम करने के बाबत किसी तरह की पहल का आश्वासन नहीं दिया है। इस तरह एलओसी पर जारी तनाव घटाने को लेकर हुई फ्लैग मीटिंग किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को बिहार के नवीनगर जल संसाधन विभाग के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार ने बताया कि बिहार में उत्तर कोयल नहर पुनर्निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में डीपीआर तैयार किया गया है। - एग्जिक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार ने बताया कि डीपीआर तैयार करने के लिये औरंगाबाद के अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र प्रसाद को नोडल पदाधिकारी बनाया गया था। - उन्होंने बताया कि 1364 करोड़ रुपए की लागत से झारखंड व बिहार बॉर्डर के 103 आरडी से लेकर गया ज़िला स्थित नहर के अंतिम छोर तक 9 आरडी तक नहर का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। - उन्होंने बताया कि संभावित मार्च-अप्रैल माह से उत्तर कोयल कैनाल से लेकर सभी डिवीजन के डिस्ट्रीब्यूटरी पुल-पुलिया व फॉल से लेकर कल्वर्ट आदि का कार्य शुरू हो जाएगा। नहर के लाइनिंग व पुनर्निर्माण होने से ज़िले के किसानों को धान व रबी की सिंचाई करने में सहूलियत होगी। चर्चा में क्यों? 15 जनवरी, 2023 को राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने आमजन की परिवेदनाओं के त्वरित निस्तारण हेतु एक अभिनव पहल करते हुए अलवर ज़िले के गाँव पूनखर से 'हर घर पंचायत अभियान'का शुभारंभ किया। - सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि 'हर घर पंचायत अभियान'के तहत हर ग्रामीण क्षेत्र का भ्रमण कर, हर घर में पहुँचकर ग्रामीणों से संवाद किया जाएगा और ग्रामीणों की बिजली, पानी, विद्युत, सड़क आदि समस्याओं का समाधान किया जायेगा। - उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य रही है, जिसके तहत आमजन के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - उन्होंने ग्रामीणों को राज्य सरकार की पेंशन, पालनहार, मनरेगा सहित फ्लैगशिप योजनाओं की पंपलेट व प्रचार सामग्री वितरित कर जानकारी दी तथा ग्रामीणों से जागरूक रहकर इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। - मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों को मिल सके। इस उद्देश्य के साथ 'हर घर पंचायत अभियान'एवं जनसंवाद कार्यक्रम को अलवर ग्रामीण क्षेत्र में शुरू किया गया है, जिसके तहत घर-घर दस्तक देकर आमजन की परिवेदनाओं को सुनकर उनका हाथों-हाथ समाधान किया जाएगा। - इस तरह घर-घर पहुँचकर समस्याओं का समाधान करने वाला अभियान प्रदेश में पहली बार चलाया गया है, जो अपने आप में एक अनूठा कदम है। इस अभियान से आमजन की घर बैठे ही समस्याओं का समाधान हो सकेगा। चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि स्कूली बच्चों एवं जनमानस में विज्ञान के प्रति जागरूकता लाने और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से 21 से 24 जनवरी तक भोपाल में आठवें अंतर्राष्ट्रीय साइंस फेस्टिवल 2022 का आयोजन किया जायेगा। - आठवें साइंस फेस्टिवल का आयोजन भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर), अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग, विज्ञान भारती (विभा) तथा मौलाना आज़ाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मेनिट) के संयुक्त तत्त्वावधान में किया जा रहा है। - इस साइंस फेस्टिवल के लिये मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मेपकॉस्ट), भोपाल नोडल एजेंसी है। - 21 से 24 जनवरी के दौरान इस विज्ञान महोत्सव में देश भर से 8 हज़ार से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। आज़ादी के अमृतकाल में हो रहे इस महोत्सव का मुख्य विषय 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ अमृतकाल की ओर अग्रसर देश' है। - मेपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि इस साइंस फेस्टिवल के अंतर्गत ही 19 जनवरी से रन फॉर साइंस मैराथन का संयोजन मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से किया जा रहा है। साढ़े तीन किलोमीटर की मैराथन भोपाल के टी.टी नगर स्टेडियम से शुरू होगी और मेनिट कैंपस में समापन होगा। - उन्होंने बताया कि साइंस मैराथन का आयोजन भोपाल में पहली बार होने जा रहे 8वें भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव के तहत किया जा रहा है। रन में लगभग 2 हज़ार से अधिक स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थी तथा आमजन शामिल होंगे। चर्चा में क्यों? 15 जनवरी, 2023 को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने बताया कि राज्य में सरस्वती महोत्सव-2023 का आयोजन 25 जनवरी को यमुनानगर ज़िले के आदिबद्री व 26 जनवरी को कुरुक्षेत्र ज़िले के पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर किया जाएगा। - बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने बताया कि सरस्वती महोत्सव-2023 की शुरुआत आदिबद्री सरस्वती कुंड में 21 कुंडीय हवन यज्ञ से होगी, जिसको यादगार बनाने के लिये तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। - उन्होंने बताया कि इस महोत्सव का आयोजन बसंत पंचमी को लेकर किया जाता है। इस महोत्सव का शुभारंभ आदिबद्री सरस्वती उद्गम स्थल से किया जाएगा। - धुमन सिंह किरमच ने बताया कि हवन यज्ञ के साथ श्लोक एंव मंत्रोच्चारण के कार्यक्रम के साथ ही बच्चों की पेंटिंग व ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। इस प्रतियोगिता की थीम भी सरस्वती पर आधारित होगी। चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को झारखंड के गुमला ज़िले के डीसी सुशांत गौरव और गुमला नगर परिषद अध्यक्ष दीप नारायण उरांव ने शहर में झारखंड के पहले बर्तन बैंक का उद्घाटन संयुक्त रूप से किया। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक कदम आगे बढ़ाते हुए गुमला नगर परिषद ने यह पहल की है। - गुमला ज़िले के डीसी सुशांत गौरव ने बर्तन बैंक को सर्कुलर इकोनॉमी का बेहतर उदाहरण देते हुए नगर परिषद की इस पहल को अभिनव तथा अनुकरणीय बताया है। - नगर परिषद अध्यक्ष दीपनारायण उरांव ने बताया कि ज़्यादातर लोग शादी-ब्याह, सालगिरह और बर्थडे पार्टी जैसे आयोजनों में भोजन-पानी सर्व करने के लिये थर्मोकोल प्लेट और प्लास्टिक गिलास जैसे सस्ते साधन उपयोग करते हैं। फिर उस आयोजन के बाद यही थर्माकोल और प्लास्टिक बर्तन प्रदूषित कूड़ा बनकर शहर को गंदा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। - प्लास्टिक और थर्माकोल के बर्तनों को मात देने और पर्यावरण संरक्षण के लिये नगर परिषद प्रशासन ने शहर के जरूरतमंद नागरिकों को स्टील के बर्तन उपलब्ध करवाने के लिये यह बर्तन बैंक खोला है। - नगर परिषद उपाध्यक्ष कलीम अख्तर ने बताया कि नगर परिषद ने अपने खर्चे पर बड़ी संख्या में स्टील की थाली, गिलास, चम्मच, कटोरी आदि खरीदे हैं। लोगों की मांग पर उन्हें कुछ शर्तों पर ये स्टील के बर्तन सेट महज एक रुपया दर पर या अत्यंत गरीब होने पर निःशुल्क भी उपयोग करने के लिये उपलब्ध होगा। लेकिन, लोगों की भी ज़िम्मेदारी रहेगी कि वे थर्माकोल और प्लास्टिक गिलासों का उपयोग न करें। - कार्यपालक पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि इस बर्तन बैंक के संचालन का ज़िम्मा महिला स्वयं सहायता समूह को दिया गया है, ताकि बर्तन के प्रतीकात्मक किराये से आने वाली राशि से संबंधित महिला समूह की आय में कुछ न कुछ वृद्धि हो सके। - सदर एसडीओ रवि जैन ने कहा कि शहर को साफ-सुथरा रखना और पर्यावरण की रक्षा करना सबका दायित्व है और इस दायित्व को निभाने में कुछ न कुछ भूमिका यह बर्तन बैंक भी जरूर निभाएगा। - डीसी सुशांत गौरव ने बताया कि खिलौना बैंक और बर्तन बैंक की तर्ज पर गुमला में पुस्तक बैंक भी बनाया जा सकता है। चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में रायपुर में हुई छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गए। - इस बैठक में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण (संशोधन) विधेयक-2022 और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) विधेयक-2022 के अनुमोदन की अनुशंसा की गई। - गौरतलब है कि उक्त आरक्षण विधेयक में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये 32 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसका अनुमोदन न होने पर विभिन्न वर्गों के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग को भी नौकरियों में भर्ती तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश संबंधी कठिनाइयाँ आ रही हैं। इसके मद्देनज़र छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इसके अनुमोदन की अनुशंसा की गई। - बैठक में नगरनार इस्पात संयंत्र का निजीकरण नहीं करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का भी निर्णय लिया गया। - मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों में सामुदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बलरामपुर ज़िले के उत्तरी छोर पर स्थित सबसे ऊँची चोटी गौर-लाटा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने की घोषणा की है। - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि गौर-लाटा पर्यटन के लिहाज से अविश्वसनीय स्थान है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये ज़िला प्रशासन द्वारा यहाँ लगातार प्रयास किया जा रहा था। - विदित है कि 1225 मीटर ऊँची गौर-लाटा छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है और भौगोलिक संरचना के अनुसार यह पाट प्रदेश से संबंधित है। इस चोटी से छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित बड़े वन क्षेत्र की अद्भुत खूबसूरती नज़र आती है। - इस पहाड़ी पर कई गुफाएँ और प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं। वतर्मान में यह स्थान स्थानीय लोगों के पर्यटन के लिये पहली पसंद है, लेकिन अब पर्यटन स्थल क्षेत्र घोषित होने से यह क्षेत्र बेहतर रूप में उभरकर सामने आएगा। - छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी गौर-लाटा की पहाड़ी फिलहाल स्थानीय पर्वतारोहियों के लिये ट्रैकिंग के लिये भी प्रसिद्ध है। यहाँ अक्सर प्रशासनिक टीम और स्थानीय ग्रुप्स क्षेत्र को विकसित करने का संदेश लेकर गौर-लाटा की चढ़ाई करते हैं। हालाँकि कठिन रास्तों के कारण पर्यटकों की अभी भी यहाँ से दूरी बनी हुई है। इस कठिनाई को आसान बनाने के लिये बलरामपुर ज़िला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले से ही प्रयास किया जाता रहा है। - मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब गौर-लाटा बलरामपुर के गौरव के रूप में विकसित हो सकेगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलने के साथ ही पर्यटकों को भी प्रकृति का प्यार मिल सकेगा। चर्चा में क्यों? 16 जनवरी, 2023 को उत्तराखंड के परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि ने बताया कि राज्य में परिवहन विभाग जल्द ही वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिये भारत सीरीज नंबर शुरू करने जा रहा है, जिससे एक से अधिक राज्यों में ट्रांसफर होते रहने वाले सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कार्मिकों को राहत मिलेगी। - मुख्यालय सूत्रों के अनुसार परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि के निर्देश पर परिवहन आयुक्त मुख्यालय कैबिनेट के लिये वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिये भारत सीरीज नंबर का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। बीएस सीरीज का ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है। - विदित है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2021 में इस योजना को लॉन्च किया था। - उत्तराखंड में टैक्स राशि सामान्य वाहनों से ज्यादा होने की वजह से परिवहन विभाग इस पर पिछले काफी समय से विचार कर रहा था। - परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि ने बताया कि दूसरे राज्य में तबादला होने पर कार्मिकों को अपने वाहन का नए सिरे से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा। लंबे विचारमंथन के बाद परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय किया है। - भारत सीरीज की नंबर प्लेट लेने के लिये सेना, अर्द्धसैन्य बलों में कार्यरत कार्मिक इसके लिये पात्र होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वे कर्मचारी भी इस सीरीज में नंबर ले सकते हैं, जिनका दूसरे राज्यों में तबादला होता रहता है। इसी प्रकार जिन प्राइवेट कंपनियों में कार्मिकों के तबादले एक से दूसरे राज्यों में होते रहते हैं, वो भी इस सीरीज के लिये आवेदन कर सकते हैं।
चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को बिहार के नवीनगर जल संसाधन विभाग के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार ने बताया कि बिहार में उत्तर कोयल नहर पुनर्निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में डीपीआर तैयार किया गया है। - एग्जिक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार ने बताया कि डीपीआर तैयार करने के लिये औरंगाबाद के अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र प्रसाद को नोडल पदाधिकारी बनाया गया था। - उन्होंने बताया कि एक हज़ार तीन सौ चौंसठ करोड़ रुपए की लागत से झारखंड व बिहार बॉर्डर के एक सौ तीन आरडी से लेकर गया ज़िला स्थित नहर के अंतिम छोर तक नौ आरडी तक नहर का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। - उन्होंने बताया कि संभावित मार्च-अप्रैल माह से उत्तर कोयल कैनाल से लेकर सभी डिवीजन के डिस्ट्रीब्यूटरी पुल-पुलिया व फॉल से लेकर कल्वर्ट आदि का कार्य शुरू हो जाएगा। नहर के लाइनिंग व पुनर्निर्माण होने से ज़िले के किसानों को धान व रबी की सिंचाई करने में सहूलियत होगी। चर्चा में क्यों? पंद्रह जनवरी, दो हज़ार तेईस को राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने आमजन की परिवेदनाओं के त्वरित निस्तारण हेतु एक अभिनव पहल करते हुए अलवर ज़िले के गाँव पूनखर से 'हर घर पंचायत अभियान'का शुभारंभ किया। - सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि 'हर घर पंचायत अभियान'के तहत हर ग्रामीण क्षेत्र का भ्रमण कर, हर घर में पहुँचकर ग्रामीणों से संवाद किया जाएगा और ग्रामीणों की बिजली, पानी, विद्युत, सड़क आदि समस्याओं का समाधान किया जायेगा। - उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य रही है, जिसके तहत आमजन के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - उन्होंने ग्रामीणों को राज्य सरकार की पेंशन, पालनहार, मनरेगा सहित फ्लैगशिप योजनाओं की पंपलेट व प्रचार सामग्री वितरित कर जानकारी दी तथा ग्रामीणों से जागरूक रहकर इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। - मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों को मिल सके। इस उद्देश्य के साथ 'हर घर पंचायत अभियान'एवं जनसंवाद कार्यक्रम को अलवर ग्रामीण क्षेत्र में शुरू किया गया है, जिसके तहत घर-घर दस्तक देकर आमजन की परिवेदनाओं को सुनकर उनका हाथों-हाथ समाधान किया जाएगा। - इस तरह घर-घर पहुँचकर समस्याओं का समाधान करने वाला अभियान प्रदेश में पहली बार चलाया गया है, जो अपने आप में एक अनूठा कदम है। इस अभियान से आमजन की घर बैठे ही समस्याओं का समाधान हो सकेगा। चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि स्कूली बच्चों एवं जनमानस में विज्ञान के प्रति जागरूकता लाने और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से इक्कीस से चौबीस जनवरी तक भोपाल में आठवें अंतर्राष्ट्रीय साइंस फेस्टिवल दो हज़ार बाईस का आयोजन किया जायेगा। - आठवें साइंस फेस्टिवल का आयोजन भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् , अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग, विज्ञान भारती तथा मौलाना आज़ाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्त्वावधान में किया जा रहा है। - इस साइंस फेस्टिवल के लिये मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् , भोपाल नोडल एजेंसी है। - इक्कीस से चौबीस जनवरी के दौरान इस विज्ञान महोत्सव में देश भर से आठ हज़ार से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। आज़ादी के अमृतकाल में हो रहे इस महोत्सव का मुख्य विषय 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ अमृतकाल की ओर अग्रसर देश' है। - मेपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि इस साइंस फेस्टिवल के अंतर्गत ही उन्नीस जनवरी से रन फॉर साइंस मैराथन का संयोजन मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से किया जा रहा है। साढ़े तीन किलोमीटर की मैराथन भोपाल के टी.टी नगर स्टेडियम से शुरू होगी और मेनिट कैंपस में समापन होगा। - उन्होंने बताया कि साइंस मैराथन का आयोजन भोपाल में पहली बार होने जा रहे आठवें भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव के तहत किया जा रहा है। रन में लगभग दो हज़ार से अधिक स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थी तथा आमजन शामिल होंगे। चर्चा में क्यों? पंद्रह जनवरी, दो हज़ार तेईस को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने बताया कि राज्य में सरस्वती महोत्सव-दो हज़ार तेईस का आयोजन पच्चीस जनवरी को यमुनानगर ज़िले के आदिबद्री व छब्बीस जनवरी को कुरुक्षेत्र ज़िले के पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर किया जाएगा। - बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने बताया कि सरस्वती महोत्सव-दो हज़ार तेईस की शुरुआत आदिबद्री सरस्वती कुंड में इक्कीस कुंडीय हवन यज्ञ से होगी, जिसको यादगार बनाने के लिये तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। - उन्होंने बताया कि इस महोत्सव का आयोजन बसंत पंचमी को लेकर किया जाता है। इस महोत्सव का शुभारंभ आदिबद्री सरस्वती उद्गम स्थल से किया जाएगा। - धुमन सिंह किरमच ने बताया कि हवन यज्ञ के साथ श्लोक एंव मंत्रोच्चारण के कार्यक्रम के साथ ही बच्चों की पेंटिंग व ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। इस प्रतियोगिता की थीम भी सरस्वती पर आधारित होगी। चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को झारखंड के गुमला ज़िले के डीसी सुशांत गौरव और गुमला नगर परिषद अध्यक्ष दीप नारायण उरांव ने शहर में झारखंड के पहले बर्तन बैंक का उद्घाटन संयुक्त रूप से किया। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक कदम आगे बढ़ाते हुए गुमला नगर परिषद ने यह पहल की है। - गुमला ज़िले के डीसी सुशांत गौरव ने बर्तन बैंक को सर्कुलर इकोनॉमी का बेहतर उदाहरण देते हुए नगर परिषद की इस पहल को अभिनव तथा अनुकरणीय बताया है। - नगर परिषद अध्यक्ष दीपनारायण उरांव ने बताया कि ज़्यादातर लोग शादी-ब्याह, सालगिरह और बर्थडे पार्टी जैसे आयोजनों में भोजन-पानी सर्व करने के लिये थर्मोकोल प्लेट और प्लास्टिक गिलास जैसे सस्ते साधन उपयोग करते हैं। फिर उस आयोजन के बाद यही थर्माकोल और प्लास्टिक बर्तन प्रदूषित कूड़ा बनकर शहर को गंदा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। - प्लास्टिक और थर्माकोल के बर्तनों को मात देने और पर्यावरण संरक्षण के लिये नगर परिषद प्रशासन ने शहर के जरूरतमंद नागरिकों को स्टील के बर्तन उपलब्ध करवाने के लिये यह बर्तन बैंक खोला है। - नगर परिषद उपाध्यक्ष कलीम अख्तर ने बताया कि नगर परिषद ने अपने खर्चे पर बड़ी संख्या में स्टील की थाली, गिलास, चम्मच, कटोरी आदि खरीदे हैं। लोगों की मांग पर उन्हें कुछ शर्तों पर ये स्टील के बर्तन सेट महज एक रुपया दर पर या अत्यंत गरीब होने पर निःशुल्क भी उपयोग करने के लिये उपलब्ध होगा। लेकिन, लोगों की भी ज़िम्मेदारी रहेगी कि वे थर्माकोल और प्लास्टिक गिलासों का उपयोग न करें। - कार्यपालक पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि इस बर्तन बैंक के संचालन का ज़िम्मा महिला स्वयं सहायता समूह को दिया गया है, ताकि बर्तन के प्रतीकात्मक किराये से आने वाली राशि से संबंधित महिला समूह की आय में कुछ न कुछ वृद्धि हो सके। - सदर एसडीओ रवि जैन ने कहा कि शहर को साफ-सुथरा रखना और पर्यावरण की रक्षा करना सबका दायित्व है और इस दायित्व को निभाने में कुछ न कुछ भूमिका यह बर्तन बैंक भी जरूर निभाएगा। - डीसी सुशांत गौरव ने बताया कि खिलौना बैंक और बर्तन बैंक की तर्ज पर गुमला में पुस्तक बैंक भी बनाया जा सकता है। चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में रायपुर में हुई छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गए। - इस बैठक में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षण विधेयक-दो हज़ार बाईस और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्थान विधेयक-दो हज़ार बाईस के अनुमोदन की अनुशंसा की गई। - गौरतलब है कि उक्त आरक्षण विधेयक में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये बत्तीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसका अनुमोदन न होने पर विभिन्न वर्गों के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग को भी नौकरियों में भर्ती तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश संबंधी कठिनाइयाँ आ रही हैं। इसके मद्देनज़र छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इसके अनुमोदन की अनुशंसा की गई। - बैठक में नगरनार इस्पात संयंत्र का निजीकरण नहीं करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का भी निर्णय लिया गया। - मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों में सामुदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बलरामपुर ज़िले के उत्तरी छोर पर स्थित सबसे ऊँची चोटी गौर-लाटा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने की घोषणा की है। - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि गौर-लाटा पर्यटन के लिहाज से अविश्वसनीय स्थान है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये ज़िला प्रशासन द्वारा यहाँ लगातार प्रयास किया जा रहा था। - विदित है कि एक हज़ार दो सौ पच्चीस मीटर ऊँची गौर-लाटा छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है और भौगोलिक संरचना के अनुसार यह पाट प्रदेश से संबंधित है। इस चोटी से छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित बड़े वन क्षेत्र की अद्भुत खूबसूरती नज़र आती है। - इस पहाड़ी पर कई गुफाएँ और प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं। वतर्मान में यह स्थान स्थानीय लोगों के पर्यटन के लिये पहली पसंद है, लेकिन अब पर्यटन स्थल क्षेत्र घोषित होने से यह क्षेत्र बेहतर रूप में उभरकर सामने आएगा। - छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी गौर-लाटा की पहाड़ी फिलहाल स्थानीय पर्वतारोहियों के लिये ट्रैकिंग के लिये भी प्रसिद्ध है। यहाँ अक्सर प्रशासनिक टीम और स्थानीय ग्रुप्स क्षेत्र को विकसित करने का संदेश लेकर गौर-लाटा की चढ़ाई करते हैं। हालाँकि कठिन रास्तों के कारण पर्यटकों की अभी भी यहाँ से दूरी बनी हुई है। इस कठिनाई को आसान बनाने के लिये बलरामपुर ज़िला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले से ही प्रयास किया जाता रहा है। - मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब गौर-लाटा बलरामपुर के गौरव के रूप में विकसित हो सकेगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलने के साथ ही पर्यटकों को भी प्रकृति का प्यार मिल सकेगा। चर्चा में क्यों? सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को उत्तराखंड के परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि ने बताया कि राज्य में परिवहन विभाग जल्द ही वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिये भारत सीरीज नंबर शुरू करने जा रहा है, जिससे एक से अधिक राज्यों में ट्रांसफर होते रहने वाले सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कार्मिकों को राहत मिलेगी। - मुख्यालय सूत्रों के अनुसार परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि के निर्देश पर परिवहन आयुक्त मुख्यालय कैबिनेट के लिये वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिये भारत सीरीज नंबर का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। बीएस सीरीज का ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है। - विदित है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त दो हज़ार इक्कीस में इस योजना को लॉन्च किया था। - उत्तराखंड में टैक्स राशि सामान्य वाहनों से ज्यादा होने की वजह से परिवहन विभाग इस पर पिछले काफी समय से विचार कर रहा था। - परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकि ने बताया कि दूसरे राज्य में तबादला होने पर कार्मिकों को अपने वाहन का नए सिरे से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा। लंबे विचारमंथन के बाद परिवहन विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय किया है। - भारत सीरीज की नंबर प्लेट लेने के लिये सेना, अर्द्धसैन्य बलों में कार्यरत कार्मिक इसके लिये पात्र होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वे कर्मचारी भी इस सीरीज में नंबर ले सकते हैं, जिनका दूसरे राज्यों में तबादला होता रहता है। इसी प्रकार जिन प्राइवेट कंपनियों में कार्मिकों के तबादले एक से दूसरे राज्यों में होते रहते हैं, वो भी इस सीरीज के लिये आवेदन कर सकते हैं।
कहते हैं बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं. जिस सांचे में ढालो, ढल जाते हैं. लेकिन इस बग़दादी का क्या करें, जो बच्चों को दहशतगर्दी के सांचे में ढालने में लगा है. तभी तो सीरिया और इराक जैसे मुल्कों में हजारों बच्चे आज आईएसआईएस के चंगुल में फंस कर उस उम्र में मरने-मारने का सबक सीख रहे हैं, जिस उम्र में इंसान को ठीक से जीना भी नहीं आता.
कहते हैं बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं. जिस सांचे में ढालो, ढल जाते हैं. लेकिन इस बग़दादी का क्या करें, जो बच्चों को दहशतगर्दी के सांचे में ढालने में लगा है. तभी तो सीरिया और इराक जैसे मुल्कों में हजारों बच्चे आज आईएसआईएस के चंगुल में फंस कर उस उम्र में मरने-मारने का सबक सीख रहे हैं, जिस उम्र में इंसान को ठीक से जीना भी नहीं आता.
एंडी कोहेन ने पूछा था, "निक जोनास ने हाल ही में 'स्क्रीन क्वीन्स' और 'किंगडम' में गे कैरेक्टर निभाया था। हर गे इंसान चाहता है कि वह गे बन जाए। मैं नहीं (खुद को ओर इशारा करते हुए)। अगर निक जोनस को 1 से 10 तक के पैमाने पर मापा जाए तो वे कितने गे हैं? जैसे कि मैं इस पैमाने पर खुद को 10 नंबर देता हूं। " 30 साल की सलेना गोमेज ने एंडी कोहेन की बातों को ध्यान से सुना और जवाब दिया, "मैंने उन्हें डेट किया है, जीरो। " निक जोनस 2008 में सेलेना गोमेज के साथ रिलेशनशिप में आए थे, जजों उनके म्यूजिक वीडियो 'ब्रूनिन अप' में नज़र आई थीं। सेलेना गोमेज से पहले निक जोनस की जिंदगी में माइली सायरस थीं, जिनके साथ उनका रिश्ता लगभग डेढ़ साल चला था। सेलेना के बाद 2011 में निक की जिंदगी में ऑस्ट्रेलियन सिंगर डेल्टा गूड्रेम आईं, जिनसे भी उनका ब्रेक सालभर में हो गया था। 2013 में निक की जिंदगी में फैशन इन्फ्लूएंसर ओलिविया कल्पो आईं, जिनके साथ उनका रिश्ता 2015 में ब्रेकअप के बाद ख़त्म हुआ। मई 2018 में निक की नजदीकियां प्रियंका चोपड़ा के साथ बढीं और जून 2018 में उन्होंने उन्हें प्रोज कर दिया। अगस्त 2018 में उनका रोका हुआ और दिसंबर 2018 में कपल ने शादी कर ली। जनवरी 2022 में दोनों सरेगेसी के जरिए बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनास के पैरेंट्स बने। राजू श्रीवास्तव की LOVE STORY: जिस लड़की से शादी के लिए 12 साल रुके, आज डॉक्टर्स उसे पास तक नहीं जाने दे रहे! मां बनते ही सोनम कपूर का बिना पेंट, बिना ब्रा वाला मैटरनिटी फोटोशूट वायरल, भड़के लोग बोले- क्या बकवास है?
एंडी कोहेन ने पूछा था, "निक जोनास ने हाल ही में 'स्क्रीन क्वीन्स' और 'किंगडम' में गे कैरेक्टर निभाया था। हर गे इंसान चाहता है कि वह गे बन जाए। मैं नहीं । अगर निक जोनस को एक से दस तक के पैमाने पर मापा जाए तो वे कितने गे हैं? जैसे कि मैं इस पैमाने पर खुद को दस नंबर देता हूं। " तीस साल की सलेना गोमेज ने एंडी कोहेन की बातों को ध्यान से सुना और जवाब दिया, "मैंने उन्हें डेट किया है, जीरो। " निक जोनस दो हज़ार आठ में सेलेना गोमेज के साथ रिलेशनशिप में आए थे, जजों उनके म्यूजिक वीडियो 'ब्रूनिन अप' में नज़र आई थीं। सेलेना गोमेज से पहले निक जोनस की जिंदगी में माइली सायरस थीं, जिनके साथ उनका रिश्ता लगभग डेढ़ साल चला था। सेलेना के बाद दो हज़ार ग्यारह में निक की जिंदगी में ऑस्ट्रेलियन सिंगर डेल्टा गूड्रेम आईं, जिनसे भी उनका ब्रेक सालभर में हो गया था। दो हज़ार तेरह में निक की जिंदगी में फैशन इन्फ्लूएंसर ओलिविया कल्पो आईं, जिनके साथ उनका रिश्ता दो हज़ार पंद्रह में ब्रेकअप के बाद ख़त्म हुआ। मई दो हज़ार अट्ठारह में निक की नजदीकियां प्रियंका चोपड़ा के साथ बढीं और जून दो हज़ार अट्ठारह में उन्होंने उन्हें प्रोज कर दिया। अगस्त दो हज़ार अट्ठारह में उनका रोका हुआ और दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में कपल ने शादी कर ली। जनवरी दो हज़ार बाईस में दोनों सरेगेसी के जरिए बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनास के पैरेंट्स बने। राजू श्रीवास्तव की LOVE STORY: जिस लड़की से शादी के लिए बारह साल रुके, आज डॉक्टर्स उसे पास तक नहीं जाने दे रहे! मां बनते ही सोनम कपूर का बिना पेंट, बिना ब्रा वाला मैटरनिटी फोटोशूट वायरल, भड़के लोग बोले- क्या बकवास है?
. . पड़ोस में किसी ने रेडियो ऑन कर दिया था. गीत सुनकर मैंने अपनी दृष्टि आस-पास दौड़ाई. अनायास ही मुझे वह घटना स्मरण हो आयी. वैसा ही अनुकूल वातावरण, वैसी ही ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, वैसी ही हल्की-हल्की रिमझिम बारिश और वैसी ही काली-काली घटाएं. मैं पिताजी के किसी कार्यवश उनके एक मित्र के घर जा रहा था. पिछली रात्रि कई दिनों पश्चात हुयी वर्षा द्वारा भीषण गर्मी से राहत मिली थी. ठंडी-ठंडी हवा के झोंकों में मिट्टी की सोंधी-सोंधी महक आ रही थी. वर्षा तो थी, पर भिगोने के लिए पर्याप्त नहीं थी. बस हल्की-हल्की रिमझिम, नन्हीं-नन्हीं बुंदकियाँ. वृक्षों पर पत्रदल वर्षाजल में धुलकर मानो नव उमंगों से भर उठा था. वातावरण अत्यंत सुहावना प्रतीत होता था. मन अत्यंत प्रसन्न था. . पिताजी के मित्र के घर पहुँच कर मैंने घंटी बजा दी, और द्वार खुलने की प्रतीक्षा करने लगा. मैंने घर का बाहर से ही निरीक्षण किया. छोटा सा बरामदा था जो की जैसे अभी-अभी ही स्वच्छ किया गया था. किनारे-किनारे करीने से कतारबद्ध गमलों में मनीप्लांट लगा था. थोड़ी देर तक प्रतीक्षा करने के पश्चात भी जब द्वार न खुला तो मन कुछ व्याकुल हो उठा. मैंने ध्यान से सुनने का प्रयास किया. अन्दर रेडियो पर गीत बज रहा था. . . मैंने द्वार के कुंजी-छिद्र से भीतर झाँक कर देखा. एकाएक मुझे लगा की मानो मैं स्वप्नलोक में हूँ. भीतर प्रांगण में एक अत्यंत सुन्दर अष्ट-दशी यौवना रेडियो के सम्मुख बैठी अपने केश संवारने में तल्लीन थी. उसे अपने आस-पास की कोई सुध नहीं थी. श्वेत वर्ण, बड़ी-बड़ी काली चंचल आँखें, कुछ तीखी सी मुखाकृति, नीला परिधान, ललाट पर छोटी सी नीले ही रंग की बिंदी, मानो वह गीत की लय पर ही केश संवार रही हो. पहले वह अपने लम्बे काले बालों को सामने बाएं कंधे पर लाती, फिर धीरे-धीरे उनमें कंघी फिराते हुए ऊपर से नीचे तक ले जाती, फिर हल्का सा झटका देकर उन्हें पीछे की ओर करती और दर्पण में विभिन्न कोणों से अपना प्रतिविम्ब निहारती. और तब ऐसा प्रतीत होता मानो कहीं कोई त्रुटि रह गयी हो, बस फिर हल्का सा झटका और केश पुनः बाएं कंधे पर और पुनः वही सब कुछ. . किन्तु एक-एक हाव-भाव, एक-एक क्रिया सब कुछ मानो उसी गीत की लय पर. कदाचित वह मन ही मन उसी गीत को गुनगुना भी रही थी. मैंने ध्यान से देखा, उसकी मुखाकृति गीत की लय के साथ परिवर्तित सी हो रही थी. सम्पूर्ण तन्मयता, मात्र गीत एवं केश. . . ठीक उसी पंक्ति के साथ उसने तनिक ग्रीवा लम्बी कर, भवें ऊपर उठाकर दर्पण में झांका, फिर धीरे से उसके अधर खिंचे, अभी दन्त-श्रंखला दृष्टिगोचर भी नहीं हुयी थी कि धीरे से लजाकर उसने अपनी बांयी हथेली से हंसी छुपाते हुए ग्रीवा नीचे झुकाई और मुख दूसरी ओर घुमा लिया. . बस उस दृश्य को और देखने की क्षमता मुझमें नहीं थी. मैंने अपनी आँखें मूँद लीं. मन प्रसन्न तो था पर कुछ विचित्र से भाव आते थे, अपराध-बोध, या फिर ग्लानि, क्या कहूं उन्हें. गीत सुनायी तो देता था परन्तु कदाचित उसमें अब लय नहीं थी. गला शुष्क हो उठा था. तृप्त होकर भी मन स्वयं को कोसता था कि क्या अधिकार था मुझे उस निश्छल सौंदर्य को इस प्रकार छुप कर देखने का. मैं खड़ा हो गया और "ट्रिन-ट्रिन-ट्रिन", कई बार घंटी बजा दी. . पिताजी के मित्र ने द्वार खोला. मैंने उत्सुकता वश तिर्यक दृष्टि से उनके पीछे देखा. . वह वहाँ नहीं थी. गीत समाप्त हो चुका था. . -पंकज जौहरी.
. . पड़ोस में किसी ने रेडियो ऑन कर दिया था. गीत सुनकर मैंने अपनी दृष्टि आस-पास दौड़ाई. अनायास ही मुझे वह घटना स्मरण हो आयी. वैसा ही अनुकूल वातावरण, वैसी ही ठंडी-ठंडी हवा के झोंके, वैसी ही हल्की-हल्की रिमझिम बारिश और वैसी ही काली-काली घटाएं. मैं पिताजी के किसी कार्यवश उनके एक मित्र के घर जा रहा था. पिछली रात्रि कई दिनों पश्चात हुयी वर्षा द्वारा भीषण गर्मी से राहत मिली थी. ठंडी-ठंडी हवा के झोंकों में मिट्टी की सोंधी-सोंधी महक आ रही थी. वर्षा तो थी, पर भिगोने के लिए पर्याप्त नहीं थी. बस हल्की-हल्की रिमझिम, नन्हीं-नन्हीं बुंदकियाँ. वृक्षों पर पत्रदल वर्षाजल में धुलकर मानो नव उमंगों से भर उठा था. वातावरण अत्यंत सुहावना प्रतीत होता था. मन अत्यंत प्रसन्न था. . पिताजी के मित्र के घर पहुँच कर मैंने घंटी बजा दी, और द्वार खुलने की प्रतीक्षा करने लगा. मैंने घर का बाहर से ही निरीक्षण किया. छोटा सा बरामदा था जो की जैसे अभी-अभी ही स्वच्छ किया गया था. किनारे-किनारे करीने से कतारबद्ध गमलों में मनीप्लांट लगा था. थोड़ी देर तक प्रतीक्षा करने के पश्चात भी जब द्वार न खुला तो मन कुछ व्याकुल हो उठा. मैंने ध्यान से सुनने का प्रयास किया. अन्दर रेडियो पर गीत बज रहा था. . . मैंने द्वार के कुंजी-छिद्र से भीतर झाँक कर देखा. एकाएक मुझे लगा की मानो मैं स्वप्नलोक में हूँ. भीतर प्रांगण में एक अत्यंत सुन्दर अष्ट-दशी यौवना रेडियो के सम्मुख बैठी अपने केश संवारने में तल्लीन थी. उसे अपने आस-पास की कोई सुध नहीं थी. श्वेत वर्ण, बड़ी-बड़ी काली चंचल आँखें, कुछ तीखी सी मुखाकृति, नीला परिधान, ललाट पर छोटी सी नीले ही रंग की बिंदी, मानो वह गीत की लय पर ही केश संवार रही हो. पहले वह अपने लम्बे काले बालों को सामने बाएं कंधे पर लाती, फिर धीरे-धीरे उनमें कंघी फिराते हुए ऊपर से नीचे तक ले जाती, फिर हल्का सा झटका देकर उन्हें पीछे की ओर करती और दर्पण में विभिन्न कोणों से अपना प्रतिविम्ब निहारती. और तब ऐसा प्रतीत होता मानो कहीं कोई त्रुटि रह गयी हो, बस फिर हल्का सा झटका और केश पुनः बाएं कंधे पर और पुनः वही सब कुछ. . किन्तु एक-एक हाव-भाव, एक-एक क्रिया सब कुछ मानो उसी गीत की लय पर. कदाचित वह मन ही मन उसी गीत को गुनगुना भी रही थी. मैंने ध्यान से देखा, उसकी मुखाकृति गीत की लय के साथ परिवर्तित सी हो रही थी. सम्पूर्ण तन्मयता, मात्र गीत एवं केश. . . ठीक उसी पंक्ति के साथ उसने तनिक ग्रीवा लम्बी कर, भवें ऊपर उठाकर दर्पण में झांका, फिर धीरे से उसके अधर खिंचे, अभी दन्त-श्रंखला दृष्टिगोचर भी नहीं हुयी थी कि धीरे से लजाकर उसने अपनी बांयी हथेली से हंसी छुपाते हुए ग्रीवा नीचे झुकाई और मुख दूसरी ओर घुमा लिया. . बस उस दृश्य को और देखने की क्षमता मुझमें नहीं थी. मैंने अपनी आँखें मूँद लीं. मन प्रसन्न तो था पर कुछ विचित्र से भाव आते थे, अपराध-बोध, या फिर ग्लानि, क्या कहूं उन्हें. गीत सुनायी तो देता था परन्तु कदाचित उसमें अब लय नहीं थी. गला शुष्क हो उठा था. तृप्त होकर भी मन स्वयं को कोसता था कि क्या अधिकार था मुझे उस निश्छल सौंदर्य को इस प्रकार छुप कर देखने का. मैं खड़ा हो गया और "ट्रिन-ट्रिन-ट्रिन", कई बार घंटी बजा दी. . पिताजी के मित्र ने द्वार खोला. मैंने उत्सुकता वश तिर्यक दृष्टि से उनके पीछे देखा. . वह वहाँ नहीं थी. गीत समाप्त हो चुका था. . -पंकज जौहरी.
निज स्वभाव है। नीमल कटुरु, नीं सट्टा होता है वसे जात्माका भान सुशातिमय है । सासारिक मोद्धि होनेसे वही राग व किन्ही द्वेषमार नेसे आत्मा म्वभावमे रमण नही बरसका है इसीलिये यह अपने जापमे न ठहरा हुजा निज स्वाभानिक सुखशातिका भोग नही रसका। जिसका भार रागद्वेष मोहके द्वारा क्षोमित नहीं होता है वह अपने जापको देखता हुआ अपनी सुख शाति । भोग करसका है। जैसा स्वामी पूज्यपाढने कहा है --- रागद्वेपादिकलोलैरलाल यन्मनो जल । स पश्त्यात्मनस्तत्त्व तनत्व नेतरा जन ॥ भावार्थ-कामन रूपीनल रागद्वेष आदि लहरोंसे क्षोमित नहीं होता है वही आत्माके तत्त्वको देख सक्ता है। दूसरा कोई उसे नहीं देख सका है। जसे मिश्रीकी तरफ उपयोग जुडते ही मीठेपनका स्वाद जाता है वैसे आत्माके स्वभावकी तरफ उपयोग जुप्ते ही सुखशातिस स्वाद आजाता है। वाम्मे अपने ही शरीरम आत्माराम अपने ही साभाविक गुणोको लिये हुए विराजमान है इस बातका यथार्थ ज्ञान तथा श्रद्धान होना चाहिये, क्योकि जिस वस्तुन्त सच्चा ज्ञान तथा श्रद्धान हो जाता है उस वस्तु रचि हो जाती है अर्थात् उस वस्तुका शौक हो जाता है। सि वस्तुरा लौक हो जाता है उस वस्तुकी तरफ मन स्वय वारवार जाता है। श्री पूज्यपाद स्वामी करते है -
निज स्वभाव है। नीमल कटुरु, नीं सट्टा होता है वसे जात्माका भान सुशातिमय है । सासारिक मोद्धि होनेसे वही राग व किन्ही द्वेषमार नेसे आत्मा म्वभावमे रमण नही बरसका है इसीलिये यह अपने जापमे न ठहरा हुजा निज स्वाभानिक सुखशातिका भोग नही रसका। जिसका भार रागद्वेष मोहके द्वारा क्षोमित नहीं होता है वह अपने जापको देखता हुआ अपनी सुख शाति । भोग करसका है। जैसा स्वामी पूज्यपाढने कहा है --- रागद्वेपादिकलोलैरलाल यन्मनो जल । स पश्त्यात्मनस्तत्त्व तनत्व नेतरा जन ॥ भावार्थ-कामन रूपीनल रागद्वेष आदि लहरोंसे क्षोमित नहीं होता है वही आत्माके तत्त्वको देख सक्ता है। दूसरा कोई उसे नहीं देख सका है। जसे मिश्रीकी तरफ उपयोग जुडते ही मीठेपनका स्वाद जाता है वैसे आत्माके स्वभावकी तरफ उपयोग जुप्ते ही सुखशातिस स्वाद आजाता है। वाम्मे अपने ही शरीरम आत्माराम अपने ही साभाविक गुणोको लिये हुए विराजमान है इस बातका यथार्थ ज्ञान तथा श्रद्धान होना चाहिये, क्योकि जिस वस्तुन्त सच्चा ज्ञान तथा श्रद्धान हो जाता है उस वस्तु रचि हो जाती है अर्थात् उस वस्तुका शौक हो जाता है। सि वस्तुरा लौक हो जाता है उस वस्तुकी तरफ मन स्वय वारवार जाता है। श्री पूज्यपाद स्वामी करते है -
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने अमेठी दौरे के दूसरे दिन रविवार को स्थानीय लोगों से मुलाकात की। स्मृति ईरानी अमेठी के लोगों से उनकी परेशानियां भी सुनी। स्मृति ने यहां कहा कि राहुल गांधी अपने हैं लेकिन उन्होंने अमेठी से ठीक व्यवहार नहीं किया। स्मृति को बताया गया कि अमेठी में जमीन एक बड़ी चुनौती है। स्मृति से जब पूछा गया कि क्या राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की वजह से ये चुनौती बनी है। राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का नाम सुनकर स्मृति हंसी और बोली, समझदार को इशारा काफी है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने अमेठी दौरे के दूसरे दिन रविवार को स्थानीय लोगों से मुलाकात की। स्मृति ईरानी अमेठी के लोगों से उनकी परेशानियां भी सुनी। स्मृति ने यहां कहा कि राहुल गांधी अपने हैं लेकिन उन्होंने अमेठी से ठीक व्यवहार नहीं किया। स्मृति को बताया गया कि अमेठी में जमीन एक बड़ी चुनौती है। स्मृति से जब पूछा गया कि क्या राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की वजह से ये चुनौती बनी है। राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का नाम सुनकर स्मृति हंसी और बोली, समझदार को इशारा काफी है।
वर्तमान में, फार्मासिस्ट दवाओं रक्तचाप और सुधार को नियंत्रित करने की एक बड़ी संख्या विकसित कर रहे हैं। इस लेख में हम "dopegit" के रूप में इस दवा पर दिखेगाः यह करने के लिए उपयोग के लिए निर्देश, पढ़ना, रचना, मतभेद, और जारी रूपों। "Dopegit" क्या है? उपयोग के लिए निर्देश की रिपोर्ट है कि दवा "dopegit" लगातार उच्च रक्तचाप के रोगियों के उपचार के लिए है। कार्रवाई दवाओं "dopegit": - केंद्रीय निरोधात्मक प्रीसानेप्टिक रिसेप्टर्स उत्तेजक द्वारा सहानुभूति स्वर कम कर देता है; - अंतर्जात डोपामाइन की जगह; - पदार्थ "रेनिन" कहा जाता है की गतिविधि कम कर देता है; - रासायनिक पदार्थ-डीकार्बाक्सिलेज - एक एंजाइम व्यक्ति को रोकता है। परिणामस्वरूप, noradrenaline या एड्रेनालाईन के संश्लेषण कम कर दिया। दवा की रिलीज फार्म, दौर फ्लैट, सफेद या भूरा सफेद गोलियाँ हैं। "Dopegit" इसकी संरचना मिथाइलडोपा में शामिल है, हृदय समारोह पर कोई प्रभाव नहीं है। उनकी नियुक्ति क्षिप्रहृदयता आवश्यक नहीं है, गुर्दे में रक्त के प्रवाह को कम नहीं करता। निर्माता दिल दर में संभावित कमी की चेतावनी देते हैं। के लिए उपयोग "dopegit" दवा निर्देश भोजन के दौरान इसका इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती। गोली पीने के लिए बेहतर यह कुछ ही समय बाद भोजन या खाने से पहले है। वयस्कों के लिए, खुराक पहला टैबलेट 250 मिलीग्राम के पाठ्यक्रम के पहले 2 दिन में है। प्रतिदिन दवा की संख्या - 2-3। उपचार के पहले दिन के बाद दैनिक खुराक में, और यदि आवश्यक वृद्धि, कमी करनी चाहिए कैसे उपचारात्मक प्रभाव व्यक्त किया जाता है पर निर्भर करता है। खुराक बनाए रखने के लिए शारीरिक (सामान्य) रक्तचाप 2 जी, अधिकतम संभव खुराक पर निर्भर है - ठीक किया बिगड़ा गुर्दे समारोह खुराक के साथ लोगों के लिए 3 साल। तैयार करने की बुजुर्ग राशि प्रति दिन 0. 25 ग्राम के 1 गोलियाँ 2 बार सेट खुराक के काम पर रखा जा सकता है के लिए कम है। खुराक हमेशा एक डॉक्टर का चयन करेंगे, लेकिन उसके आत्म परिभाषा साइड इफेक्ट की एक मिसाल पैदा की संभावना है। दवा केवल उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह केवल एक सटीक निदान के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। उपयोग के लिए निर्देश पता चलता है कि दवा के साथ नहीं लिया जाना चाहिएः - लीवर सिरोसिस; - जिगर हेपेटाइटिस; - निर्माण के सक्रिय तत्व को अतिसंवेदनशीलता; - अवसाद; - जिगर समारोह में परिवर्तन; - फियोक्रोमोसाइटोमा; - रोधगलन (तीव्र); - एनीमिया, रक्तलायी ; - बच्चों 12 साल तक के आयु वर्ग के। - monoamine oxidase inhibitors प्राप्त करते हुए। गर्भावस्था के 3 तिमाही में दवा "dopegit" की नियुक्ति से पहले, डॉक्टर कैसे इस तरह के एक निर्णय का औचित्य साबित करने के बारे में सोचना चाहिए। यह जोखिम और माँ के लिए संभव सकारात्मक प्रभाव का आकलन करना चाहिए। गोलियां "dopegit" स्तनपान से भी सलाह नहीं दी जाती। सीएनएस, पीएनः अक्सर सिर, चक्कर आना, एक कमजोर या क्षणिक मनोविकृति, अवसाद, रात में बुरे सपने में उनींदापन, कमजोरी, दर्द होता है। शायद ही कभी बिगड़ा मस्तिष्क संचलन के साथ जुड़े लक्षण प्रकट कर सकते हैं। हृदय प्रणालीः एनजाइना वृद्धि हुई है, दिल की विफलता (क्रोनिक), के लक्षण बिगड़ती हाइपोटेंशन, ऑर्थोस्टैटिक, स्थानों सूजन, वजन में वृद्धि, कभी कभी मायोकार्डियम और पेरीकार्डियम में गड़बड़ी हो सकती है। पाचन तंत्रः मतली या उल्टी, पेट फूलना (पेट फूलना), कोलाइटिस, सूजन ग्रंथियों, जीभ घाव (अल्सर, काला), हेपेटाइटिस लार सकता है। इसके अलावा, लीवर एंजाइम सक्रिय रूप से स्रावित होते हैं। रक्त के शवः एनीमिया (रक्त अपघटन), leukopenia, कुछ अस्थि मज्जा समारोह के दमन, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया। एलर्जी की प्रतिक्रियाः बुखार, नेक्रोलिसिस (टॉक्सिक एपीडर्मल), वाहिकाशोथ। वहाँ नाक के रास्ते की एक भीड़ हो सकता है, बढ़ रही है अवशिष्ट नाइट्रोजन रक्त में। ड्रग "dopegit" पर्चे दवाओं को दर्शाता है।
वर्तमान में, फार्मासिस्ट दवाओं रक्तचाप और सुधार को नियंत्रित करने की एक बड़ी संख्या विकसित कर रहे हैं। इस लेख में हम "dopegit" के रूप में इस दवा पर दिखेगाः यह करने के लिए उपयोग के लिए निर्देश, पढ़ना, रचना, मतभेद, और जारी रूपों। "Dopegit" क्या है? उपयोग के लिए निर्देश की रिपोर्ट है कि दवा "dopegit" लगातार उच्च रक्तचाप के रोगियों के उपचार के लिए है। कार्रवाई दवाओं "dopegit": - केंद्रीय निरोधात्मक प्रीसानेप्टिक रिसेप्टर्स उत्तेजक द्वारा सहानुभूति स्वर कम कर देता है; - अंतर्जात डोपामाइन की जगह; - पदार्थ "रेनिन" कहा जाता है की गतिविधि कम कर देता है; - रासायनिक पदार्थ-डीकार्बाक्सिलेज - एक एंजाइम व्यक्ति को रोकता है। परिणामस्वरूप, noradrenaline या एड्रेनालाईन के संश्लेषण कम कर दिया। दवा की रिलीज फार्म, दौर फ्लैट, सफेद या भूरा सफेद गोलियाँ हैं। "Dopegit" इसकी संरचना मिथाइलडोपा में शामिल है, हृदय समारोह पर कोई प्रभाव नहीं है। उनकी नियुक्ति क्षिप्रहृदयता आवश्यक नहीं है, गुर्दे में रक्त के प्रवाह को कम नहीं करता। निर्माता दिल दर में संभावित कमी की चेतावनी देते हैं। के लिए उपयोग "dopegit" दवा निर्देश भोजन के दौरान इसका इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती। गोली पीने के लिए बेहतर यह कुछ ही समय बाद भोजन या खाने से पहले है। वयस्कों के लिए, खुराक पहला टैबलेट दो सौ पचास मिलीग्राम के पाठ्यक्रम के पहले दो दिन में है। प्रतिदिन दवा की संख्या - दो-तीन। उपचार के पहले दिन के बाद दैनिक खुराक में, और यदि आवश्यक वृद्धि, कमी करनी चाहिए कैसे उपचारात्मक प्रभाव व्यक्त किया जाता है पर निर्भर करता है। खुराक बनाए रखने के लिए शारीरिक रक्तचाप दो जी, अधिकतम संभव खुराक पर निर्भर है - ठीक किया बिगड़ा गुर्दे समारोह खुराक के साथ लोगों के लिए तीन साल। तैयार करने की बुजुर्ग राशि प्रति दिन शून्य. पच्चीस ग्राम के एक गोलियाँ दो बार सेट खुराक के काम पर रखा जा सकता है के लिए कम है। खुराक हमेशा एक डॉक्टर का चयन करेंगे, लेकिन उसके आत्म परिभाषा साइड इफेक्ट की एक मिसाल पैदा की संभावना है। दवा केवल उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह केवल एक सटीक निदान के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। उपयोग के लिए निर्देश पता चलता है कि दवा के साथ नहीं लिया जाना चाहिएः - लीवर सिरोसिस; - जिगर हेपेटाइटिस; - निर्माण के सक्रिय तत्व को अतिसंवेदनशीलता; - अवसाद; - जिगर समारोह में परिवर्तन; - फियोक्रोमोसाइटोमा; - रोधगलन ; - एनीमिया, रक्तलायी ; - बच्चों बारह साल तक के आयु वर्ग के। - monoamine oxidase inhibitors प्राप्त करते हुए। गर्भावस्था के तीन तिमाही में दवा "dopegit" की नियुक्ति से पहले, डॉक्टर कैसे इस तरह के एक निर्णय का औचित्य साबित करने के बारे में सोचना चाहिए। यह जोखिम और माँ के लिए संभव सकारात्मक प्रभाव का आकलन करना चाहिए। गोलियां "dopegit" स्तनपान से भी सलाह नहीं दी जाती। सीएनएस, पीएनः अक्सर सिर, चक्कर आना, एक कमजोर या क्षणिक मनोविकृति, अवसाद, रात में बुरे सपने में उनींदापन, कमजोरी, दर्द होता है। शायद ही कभी बिगड़ा मस्तिष्क संचलन के साथ जुड़े लक्षण प्रकट कर सकते हैं। हृदय प्रणालीः एनजाइना वृद्धि हुई है, दिल की विफलता , के लक्षण बिगड़ती हाइपोटेंशन, ऑर्थोस्टैटिक, स्थानों सूजन, वजन में वृद्धि, कभी कभी मायोकार्डियम और पेरीकार्डियम में गड़बड़ी हो सकती है। पाचन तंत्रः मतली या उल्टी, पेट फूलना , कोलाइटिस, सूजन ग्रंथियों, जीभ घाव , हेपेटाइटिस लार सकता है। इसके अलावा, लीवर एंजाइम सक्रिय रूप से स्रावित होते हैं। रक्त के शवः एनीमिया , leukopenia, कुछ अस्थि मज्जा समारोह के दमन, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया। एलर्जी की प्रतिक्रियाः बुखार, नेक्रोलिसिस , वाहिकाशोथ। वहाँ नाक के रास्ते की एक भीड़ हो सकता है, बढ़ रही है अवशिष्ट नाइट्रोजन रक्त में। ड्रग "dopegit" पर्चे दवाओं को दर्शाता है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जीवन पर लिखित किताब 'नीतीश कुमार : अंतरंग दोस्तों की नजर से' का विमोचन करेंगे. कार्यक्रम अपराह्न 4:30 बजे से पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह जीवनी उदय कांत समेत नीतीश कुमार के अंतरंग मित्रों ने लिखी है. राजकमल प्रकाशन के पटना शाखा प्रबंधक वेद प्रकाश ने बताया कि लोकार्पण से पहले ही बिहार समेत आसपास के राज्यों से भी किताब की काफी डिमांड आ रही है. इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी गयी है और सभी प्रमुख दुकानों पर भी उपलब्ध करा दी गयी है. कार्यक्रम स्थल पर भी इसकी बिक्री की व्यवस्था है. मुख्यमंत्री के जीवन पर लिखी पुस्तक के संबंध में उनके दोस्त व लेखक उदय कांत बताते हैं कि जब हम किसी विशिष्ट जन नेता की जीवनी पढ़ते हैं, तो उसमें उनकी राजनीतिक सफर की ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन हम उससे उन लोगों की परिस्थितियों और उस मानसिकता के बारे में बहुत कम जान पाते हैं, जिनके कारण वे आज किसी ऊंचाई पर पहुंच सके हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले में नीतीश कुमार के जीवन पर आधारित इस किताब के सुर कुछ अलहदा है. एक कस्बे के कूचे से शुरु हुआ यह ज़िन्दगीनामा, गर्दिश की गलियों से गुजर कर उनके आज के मुकाम तक पहुंचने में उनके संघर्षों की कहानी तो कहती ही है, साथ ही उनके व्यक्तिगत, पारिवारिक और राजनीतिक परिवेश के बारे में भी बहुत सी ऐसी कहानियां सामने लाती है, जिन पर वक्त के धूल की मोटी परत जम गई थी. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर, विधान परिषद के पूर्व सभापति जाबिर हुसैन और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली उपस्थित होंगे. वहीं, बतौर वक्ता मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी,मंत्री संजय कुमार झा, राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह और राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम का संचालन जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक नरेंद्र पाठक करेंगे.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जीवन पर लिखित किताब 'नीतीश कुमार : अंतरंग दोस्तों की नजर से' का विमोचन करेंगे. कार्यक्रम अपराह्न चार:तीस बजे से पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह जीवनी उदय कांत समेत नीतीश कुमार के अंतरंग मित्रों ने लिखी है. राजकमल प्रकाशन के पटना शाखा प्रबंधक वेद प्रकाश ने बताया कि लोकार्पण से पहले ही बिहार समेत आसपास के राज्यों से भी किताब की काफी डिमांड आ रही है. इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी गयी है और सभी प्रमुख दुकानों पर भी उपलब्ध करा दी गयी है. कार्यक्रम स्थल पर भी इसकी बिक्री की व्यवस्था है. मुख्यमंत्री के जीवन पर लिखी पुस्तक के संबंध में उनके दोस्त व लेखक उदय कांत बताते हैं कि जब हम किसी विशिष्ट जन नेता की जीवनी पढ़ते हैं, तो उसमें उनकी राजनीतिक सफर की ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन हम उससे उन लोगों की परिस्थितियों और उस मानसिकता के बारे में बहुत कम जान पाते हैं, जिनके कारण वे आज किसी ऊंचाई पर पहुंच सके हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले में नीतीश कुमार के जीवन पर आधारित इस किताब के सुर कुछ अलहदा है. एक कस्बे के कूचे से शुरु हुआ यह ज़िन्दगीनामा, गर्दिश की गलियों से गुजर कर उनके आज के मुकाम तक पहुंचने में उनके संघर्षों की कहानी तो कहती ही है, साथ ही उनके व्यक्तिगत, पारिवारिक और राजनीतिक परिवेश के बारे में भी बहुत सी ऐसी कहानियां सामने लाती है, जिन पर वक्त के धूल की मोटी परत जम गई थी. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर, विधान परिषद के पूर्व सभापति जाबिर हुसैन और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली उपस्थित होंगे. वहीं, बतौर वक्ता मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी,मंत्री संजय कुमार झा, राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह और राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम का संचालन जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक नरेंद्र पाठक करेंगे.
JEE Advanced 2020: हाल ही में एक प्रेस बयान में यह पुष्टि की गई है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) एडवांस्ड 2020 के सिलेबस में इस वर्ष के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। JEE Advanced 2020: हाल ही में एक प्रेस बयान में यह पुष्टि की गई है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) एडवांस्ड 2020 के सिलेबस में इस वर्ष के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। जेईई एडवांस्ड 2020 के आयोजन संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने पुष्टि की है कि इस साल प्रवेश परीक्षा के सिलेबस में कोई बदलाव नहीं होगा, हालांकि पिछली मीडिया रिपोर्टों में बदलाव की अटकलें लगाई गई थीं। आधिकारिक बयान में कहा गया है, कि मीडिया में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के संदर्भ में कि जेईई (एडवांस्ड) 2020 में परीक्षा पैटर्न में कुछ बदलाव देखे जा सकते हैं, आईआईटी दिल्ली जो कि आयोजन संस्थान है, स्पष्ट करना चाहेगी कि प्रवेश परीक्षा का पाठ्यक्रम में परिवर्तन की कोई योजना नहीं है। संस्थान ने यह भी पुष्टि की कि संयुक्त प्रवेश बोर्ड के साथ अगली बैठक में इस मामले पर चर्चा करने की कोई योजना नहीं है, जो देश भर के आईआईटी में प्रवेश आयोजित करने के लिए नियामक संस्था है। शुक्रवार को, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने ट्वीट किया था कि इस साल, कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के उन छात्रों के लिए विचार नहीं किया जाएगा, जिन्होंने जेईई एडवांस 2020 को मंजूरी दे दी है और आईआईटी में प्रवेश चाहते हैं।
JEE Advanced दो हज़ार बीस: हाल ही में एक प्रेस बयान में यह पुष्टि की गई है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड दो हज़ार बीस के सिलेबस में इस वर्ष के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। JEE Advanced दो हज़ार बीस: हाल ही में एक प्रेस बयान में यह पुष्टि की गई है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड दो हज़ार बीस के सिलेबस में इस वर्ष के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। जेईई एडवांस्ड दो हज़ार बीस के आयोजन संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने पुष्टि की है कि इस साल प्रवेश परीक्षा के सिलेबस में कोई बदलाव नहीं होगा, हालांकि पिछली मीडिया रिपोर्टों में बदलाव की अटकलें लगाई गई थीं। आधिकारिक बयान में कहा गया है, कि मीडिया में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के संदर्भ में कि जेईई दो हज़ार बीस में परीक्षा पैटर्न में कुछ बदलाव देखे जा सकते हैं, आईआईटी दिल्ली जो कि आयोजन संस्थान है, स्पष्ट करना चाहेगी कि प्रवेश परीक्षा का पाठ्यक्रम में परिवर्तन की कोई योजना नहीं है। संस्थान ने यह भी पुष्टि की कि संयुक्त प्रवेश बोर्ड के साथ अगली बैठक में इस मामले पर चर्चा करने की कोई योजना नहीं है, जो देश भर के आईआईटी में प्रवेश आयोजित करने के लिए नियामक संस्था है। शुक्रवार को, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने ट्वीट किया था कि इस साल, कक्षा बारह बोर्ड परीक्षा के उन छात्रों के लिए विचार नहीं किया जाएगा, जिन्होंने जेईई एडवांस दो हज़ार बीस को मंजूरी दे दी है और आईआईटी में प्रवेश चाहते हैं।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडोनेशिया देश ३४ प्रांतों में विभक्त है, जिन्हें इण्डोनेशियाई भाषा में प्रोविन्सी (provinsi) कहा जाता है। इनको सात विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में रखा जाता है - सुमात्रा, बाली और जावा द्वीप इनमें प्रमुख हैं। राष्ट्रीय राजधानी जकार्ता जावा में स्थित है। . मादूराई (Madurese) दक्षिणपूर्वी एशिया के इण्डोनेशिया देश के मादूरा द्वीप के मूल निवासियों का एक जातीय समूह है। यह समुदाय अब इण्डोनेशिया के कई प्रान्तों पर फैला हुआ है। जनसंख्या के हिसाब से यह इण्डोनेशिया का तीसरा सबसे बड़ा जातीय समुदाय है। मादूरा द्वीप पर कृषि-योग्य धरती सीमित है और सैंकड़ों वर्षों से यहाँ के लोग पड़ोस के जावा द्वीप जाते रहे हैं। अधिकतर मादूराई लोग अब मादूरा द्वीप से बाहर रहते हैं और पूर्व जावा प्रान्त की आधी से अधिक आबादी मादूराई है। . इंडोनेशिया के प्रांत और मादूराई लोग आम में 13 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): दक्षिण कालिमंतान, पश्चिम जावा, पश्चिम कालिमंतान, पूर्व जावा, पूर्व कालिमंतान, बाली, बांका-बेलितुंग द्वीपसमूह, मध्य जावा, मध्य कालिमंतान, जावा (द्वीप), जकार्ता, इंडोनेशिया, इंडोनेशियाई भाषा। दक्षिण कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप (बोर्नियो) पर स्थित है। बंजरमासीन इस प्रान्त की राजधानी है। . पश्चिम जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप के पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रान्त है। . पश्चिम कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप (बोर्नियो) पर स्थित है। प्रान्तीय लोग डायक, जावाई, मलय, मादूराई व अन्य समुदायों के सदस्य हैं। . पूर्व जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप पर स्थित एक प्रान्त है। मादूरा द्वीप भी इस प्रान्त का हिस्सा है। पश्चिम में इस प्रान्त की मध्य जावा के साथ भूमीय सरहद है और पूर्व में बाली जलसन्धि के पार बाली द्वीप है। . पूर्व कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप (बोर्नियो) पर स्थित है। . बाली इंडोनेशिया का एक द्वीप प्रान्त है। यह जावा के पूर्व में स्थित है। लोम्बोक बाली के पूर्व में द्वीप है। यहां के ब्राह्मी लेख २०० ईपू के पुराने के हैं। बालीद्वीप का नाम भी बहुत पुराना है। १५०० ई से पहले इंडोनेशिया में मजापहित हिन्दू साम्राज्य स्थापित था। जब यह साम्राज्य गिरा और मुसलमान सुलतानों ने सत्ता ले ली तो जावा और अन्य द्वीपों के अभिजात-वर्गीय बाली भाग आये। यहां में हिन्दु धर्म का पतन नही हुआ। बाली १०० वर्ष पहले तक स्वतन्त्र रहा पर अन्त में डच लोगों ने इसे परास्त कर लिया। यहां की जनता का बहुमत (९० प्रतिशत) हिन्दू धर्म में आस्था रखता है। यह विश्व विख्यात पर्यटन स्थान है जिसकी कला, संगीत, नृत्य और मन्दिर मनमोहक हैं। यहां की राजधानी देनपसार नगर है। उबुद मध्य बाली में नगर है। यह द्वीप में कला और संस्कृति का प्रधान स्थान है। कूटा दक्षिण बाली में नगर है। यहा २००२ में इसलामी आतंकवादियों ने बम विस्फोट किया जिसमे २०२ व्यक्ति मारे गये।जिम्बरन बाली में मछुओं का ग्राम और अब पर्यटन स्थल है। द्वीप के उत्तरी तट पर सिंहराज नगर स्थापित है। अगुंग पर्वत और ज्वालामुखी बतुर पर्वत दो ऊंची चोटियां हैं। "'बाली द्वीप"' . बांका-बेलितुंग इंडोनेशिया का एक प्रान्त है जो सुमात्रा द्वीप से पूर्व में स्थित है। इसमें दो मुख्य द्वीप - बांका और बेलितुंग - और कई सारे अन्य छोटे द्वीप सम्मिलित हैं। इन द्वीपों और सुमात्रा के बीच में बांका जलसन्धि है और इनके और बोर्नियो के बीच कारीमाता जलसन्धि है। बांका-बेलितुंग द्वीपों के उत्तर में दक्षिण चीन सागर और दक्षिण में जावा सागर है।, retrieved 17 January 2011 . मध्य जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप पर स्थित एक प्रान्त है। यह जावा का लगभग २५% क्षेत्रफल है। पश्चिम जावा और पूर्व जावा प्रांतों के बाद यह इण्डोनेशिया का तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला प्रान्त है। सांस्कृतिक रूप से योग्यकार्ता भी इसी मध्य जावा क्षेत्र का भाग है लेकिन प्रशासनिक रूप से उसे इस प्रान्त से अलग प्रशासित किया जाता है। . मध्य कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप (बोर्नियो) पर स्थित है। . जावा (द्वीप) मेरबाबु पर्वत ज्वालामुखी जावा द्वीप इंडोनेशिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। प्राचीन काल में इसका नाम यव द्वीप था और इसका वर्णन भारत के ग्रन्थों में बहुत आता है। यहां लगभग २००० वर्ष तक हिन्दू सभ्यता का प्रभुत्व रहा। अब भी यहां हिन्दुओं की बस्तियां कई स्थानों पर पाई जाती हैं। विशेषकर पूर्व जावा में मजापहित साम्राज्य के वंशज टेंगर लोग रहते हैं जो अब भी हिन्दू हैं। सुमेरू पर्वत और ब्रोमो पर्वत पूर्व जावा में यहां की और पूरे इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता (संस्कृतः जयकर्त) है। बोरोबुदुर और प्रमबनन मन्दिर यहां स्थित हैं। . जकार्ता इंडोनेशिया की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर है। जकार्ता जावा के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल ६६१कि.मी. इंडोनेशिया गणराज्य (दीपान्तर गणराज्य) दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। १७५०८ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 26 करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . इंडोनेशियाई (इंडोनेशियाई भाषाः Bahasa Indonesia, बहासा इंदोनेसिया) इंडोनेशिया की एकमात्र आधिकारिक और राष्ट्रीय भाषा है। यह मलय भाषा की एक मानक प्रयुक्ति पर आधारित है। मलय एक ऑस्ट्रोनीशियाई भाषा है जो बहुभाषीय इंडोनेशियाई द्वीपसमूह पर सम्पर्क भाषा के रूप में शताब्दियों से विस्तृत रही है। इंडोनेशिया विश्व का चौथी सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और इस कारण से इंडोनेशियाई विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। इसे बोलने वाले अधिकांश लोग इसके साथ-साथ अक्सर एक क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय उपभाषा सतति भी बोलते हैं। . इंडोनेशिया के प्रांत 55 संबंध है और मादूराई लोग 21 है। वे आम 13 में है, समानता सूचकांक 17.11% है = 13 / (55 + 21)। यह लेख इंडोनेशिया के प्रांत और मादूराई लोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडोनेशिया देश चौंतीस प्रांतों में विभक्त है, जिन्हें इण्डोनेशियाई भाषा में प्रोविन्सी कहा जाता है। इनको सात विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में रखा जाता है - सुमात्रा, बाली और जावा द्वीप इनमें प्रमुख हैं। राष्ट्रीय राजधानी जकार्ता जावा में स्थित है। . मादूराई दक्षिणपूर्वी एशिया के इण्डोनेशिया देश के मादूरा द्वीप के मूल निवासियों का एक जातीय समूह है। यह समुदाय अब इण्डोनेशिया के कई प्रान्तों पर फैला हुआ है। जनसंख्या के हिसाब से यह इण्डोनेशिया का तीसरा सबसे बड़ा जातीय समुदाय है। मादूरा द्वीप पर कृषि-योग्य धरती सीमित है और सैंकड़ों वर्षों से यहाँ के लोग पड़ोस के जावा द्वीप जाते रहे हैं। अधिकतर मादूराई लोग अब मादूरा द्वीप से बाहर रहते हैं और पूर्व जावा प्रान्त की आधी से अधिक आबादी मादूराई है। . इंडोनेशिया के प्रांत और मादूराई लोग आम में तेरह बातें हैं : दक्षिण कालिमंतान, पश्चिम जावा, पश्चिम कालिमंतान, पूर्व जावा, पूर्व कालिमंतान, बाली, बांका-बेलितुंग द्वीपसमूह, मध्य जावा, मध्य कालिमंतान, जावा , जकार्ता, इंडोनेशिया, इंडोनेशियाई भाषा। दक्षिण कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप पर स्थित है। बंजरमासीन इस प्रान्त की राजधानी है। . पश्चिम जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप के पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रान्त है। . पश्चिम कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप पर स्थित है। प्रान्तीय लोग डायक, जावाई, मलय, मादूराई व अन्य समुदायों के सदस्य हैं। . पूर्व जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप पर स्थित एक प्रान्त है। मादूरा द्वीप भी इस प्रान्त का हिस्सा है। पश्चिम में इस प्रान्त की मध्य जावा के साथ भूमीय सरहद है और पूर्व में बाली जलसन्धि के पार बाली द्वीप है। . पूर्व कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप पर स्थित है। . बाली इंडोनेशिया का एक द्वीप प्रान्त है। यह जावा के पूर्व में स्थित है। लोम्बोक बाली के पूर्व में द्वीप है। यहां के ब्राह्मी लेख दो सौ ईपू के पुराने के हैं। बालीद्वीप का नाम भी बहुत पुराना है। एक हज़ार पाँच सौ ई से पहले इंडोनेशिया में मजापहित हिन्दू साम्राज्य स्थापित था। जब यह साम्राज्य गिरा और मुसलमान सुलतानों ने सत्ता ले ली तो जावा और अन्य द्वीपों के अभिजात-वर्गीय बाली भाग आये। यहां में हिन्दु धर्म का पतन नही हुआ। बाली एक सौ वर्ष पहले तक स्वतन्त्र रहा पर अन्त में डच लोगों ने इसे परास्त कर लिया। यहां की जनता का बहुमत हिन्दू धर्म में आस्था रखता है। यह विश्व विख्यात पर्यटन स्थान है जिसकी कला, संगीत, नृत्य और मन्दिर मनमोहक हैं। यहां की राजधानी देनपसार नगर है। उबुद मध्य बाली में नगर है। यह द्वीप में कला और संस्कृति का प्रधान स्थान है। कूटा दक्षिण बाली में नगर है। यहा दो हज़ार दो में इसलामी आतंकवादियों ने बम विस्फोट किया जिसमे दो सौ दो व्यक्ति मारे गये।जिम्बरन बाली में मछुओं का ग्राम और अब पर्यटन स्थल है। द्वीप के उत्तरी तट पर सिंहराज नगर स्थापित है। अगुंग पर्वत और ज्वालामुखी बतुर पर्वत दो ऊंची चोटियां हैं। "'बाली द्वीप"' . बांका-बेलितुंग इंडोनेशिया का एक प्रान्त है जो सुमात्रा द्वीप से पूर्व में स्थित है। इसमें दो मुख्य द्वीप - बांका और बेलितुंग - और कई सारे अन्य छोटे द्वीप सम्मिलित हैं। इन द्वीपों और सुमात्रा के बीच में बांका जलसन्धि है और इनके और बोर्नियो के बीच कारीमाता जलसन्धि है। बांका-बेलितुंग द्वीपों के उत्तर में दक्षिण चीन सागर और दक्षिण में जावा सागर है।, retrieved सत्रह जनवरीuary दो हज़ार ग्यारह . मध्य जावा दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप पर स्थित एक प्रान्त है। यह जावा का लगभग पच्चीस% क्षेत्रफल है। पश्चिम जावा और पूर्व जावा प्रांतों के बाद यह इण्डोनेशिया का तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला प्रान्त है। सांस्कृतिक रूप से योग्यकार्ता भी इसी मध्य जावा क्षेत्र का भाग है लेकिन प्रशासनिक रूप से उसे इस प्रान्त से अलग प्रशासित किया जाता है। . मध्य कालिमंतान दक्षिणपूर्व एशिया के इण्डोनेशिया देश का एक प्रान्त है। यह कालिमंतान द्वीप पर स्थित है। . जावा मेरबाबु पर्वत ज्वालामुखी जावा द्वीप इंडोनेशिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। प्राचीन काल में इसका नाम यव द्वीप था और इसका वर्णन भारत के ग्रन्थों में बहुत आता है। यहां लगभग दो हज़ार वर्ष तक हिन्दू सभ्यता का प्रभुत्व रहा। अब भी यहां हिन्दुओं की बस्तियां कई स्थानों पर पाई जाती हैं। विशेषकर पूर्व जावा में मजापहित साम्राज्य के वंशज टेंगर लोग रहते हैं जो अब भी हिन्दू हैं। सुमेरू पर्वत और ब्रोमो पर्वत पूर्व जावा में यहां की और पूरे इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है। बोरोबुदुर और प्रमबनन मन्दिर यहां स्थित हैं। . जकार्ता इंडोनेशिया की राजधानी एवं सबसे बड़ा नगर है। जकार्ता जावा के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल छः सौ इकसठकि.मी. इंडोनेशिया गणराज्य दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। सत्रह हज़ार पाँच सौ आठ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग छब्बीस करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . इंडोनेशियाई इंडोनेशिया की एकमात्र आधिकारिक और राष्ट्रीय भाषा है। यह मलय भाषा की एक मानक प्रयुक्ति पर आधारित है। मलय एक ऑस्ट्रोनीशियाई भाषा है जो बहुभाषीय इंडोनेशियाई द्वीपसमूह पर सम्पर्क भाषा के रूप में शताब्दियों से विस्तृत रही है। इंडोनेशिया विश्व का चौथी सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और इस कारण से इंडोनेशियाई विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। इसे बोलने वाले अधिकांश लोग इसके साथ-साथ अक्सर एक क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय उपभाषा सतति भी बोलते हैं। . इंडोनेशिया के प्रांत पचपन संबंध है और मादूराई लोग इक्कीस है। वे आम तेरह में है, समानता सूचकांक सत्रह.ग्यारह% है = तेरह / । यह लेख इंडोनेशिया के प्रांत और मादूराई लोग के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज सुझाव दिया कि विभागीय स्थायी समितियां उन कैग रिपोर्टों की समीक्षा करें जिन्हें समय की कमी की वजह से लोक लेखा समिति (पीएसी) नहीं देख पाती है। सरकार पीएसी की सिफारिशें पर कार्रवाई करती है और कार्रवाई नोट समिति को भेजती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा आयोजित 28वें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुखर्जी ने कहा कि संसद के पास एक साल में सभी महत्वपूर्ण लेनदेन पर बड़ी मात्रा में रपटें आती हैं। उन्हेंने कहा कि समय की कमी की वजह से इनमें से सिर्फ कुछ रिपोर्टों की ही पीएसी द्वारा समीक्षा की जाती है। राष्ट्रपति ने कहा, ``ऐसे में लेनदेन के दूरसे मामलों का क्या होगा जो पीएसी द्वारा नहीं देखे गए हैं मैं लोकसभाध्यक्ष (सुमित्रा महाजन) को एक सुझाव देना चाहता हूं। वह इसे सरकार, प्रधानमंत्री तथा सदनें के नेता के साथ उ"ा सकती हैं। " मुखर्जी ने कहा कि संसद इस मुद्दे को देख सकती है कि क्या विभागों से सम्बद्ध संसदीय समितियें को कैग की उन रपटें की समीक्षा की अनुमति दी जाए, जिनकी समीक्षा पीएसी नहीं कर सकी हो। उन्हेंने कहा, ``निश्चित रूप से इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति की जरूरत है। लोकसभाध्यक्ष इस मामले में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं मुझे लगता है कि पीएसी द्वारा किए जाने वाले काम के अलावा कुछ अतिरिक्त जवाबदेही भी संभव है। " इस कार्यक्रम में लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पीएसी के चेयरमैन केवी थॉमस तथा कैग शशि कान्त शर्मा भी मौजूद थे।
विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज सुझाव दिया कि विभागीय स्थायी समितियां उन कैग रिपोर्टों की समीक्षा करें जिन्हें समय की कमी की वजह से लोक लेखा समिति नहीं देख पाती है। सरकार पीएसी की सिफारिशें पर कार्रवाई करती है और कार्रवाई नोट समिति को भेजती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा आयोजित अट्ठाईसवें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुखर्जी ने कहा कि संसद के पास एक साल में सभी महत्वपूर्ण लेनदेन पर बड़ी मात्रा में रपटें आती हैं। उन्हेंने कहा कि समय की कमी की वजह से इनमें से सिर्फ कुछ रिपोर्टों की ही पीएसी द्वारा समीक्षा की जाती है। राष्ट्रपति ने कहा, ``ऐसे में लेनदेन के दूरसे मामलों का क्या होगा जो पीएसी द्वारा नहीं देखे गए हैं मैं लोकसभाध्यक्ष को एक सुझाव देना चाहता हूं। वह इसे सरकार, प्रधानमंत्री तथा सदनें के नेता के साथ उ"ा सकती हैं। " मुखर्जी ने कहा कि संसद इस मुद्दे को देख सकती है कि क्या विभागों से सम्बद्ध संसदीय समितियें को कैग की उन रपटें की समीक्षा की अनुमति दी जाए, जिनकी समीक्षा पीएसी नहीं कर सकी हो। उन्हेंने कहा, ``निश्चित रूप से इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति की जरूरत है। लोकसभाध्यक्ष इस मामले में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं मुझे लगता है कि पीएसी द्वारा किए जाने वाले काम के अलावा कुछ अतिरिक्त जवाबदेही भी संभव है। " इस कार्यक्रम में लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पीएसी के चेयरमैन केवी थॉमस तथा कैग शशि कान्त शर्मा भी मौजूद थे।
इंडिया न्यूज, लखनऊ। Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail : मेरठ के जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी 18 फरवरी से गुमशुदा थे। 18 फरवरी को उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को चिट्ठी लिखकर 2 दिन की छुट्टी स्वीकृत कराई थी। छुट्टी के बाद भी डीडीओ दिग्विजय नाथ तिवारी नौकरी पर नहीं लौटे। करीब 8 दिन और बीते तो आला अफसरों को उनकी चिंता हुई। फरियादियों को भी उनके ऑफिस पर ताला लटका हुआ मिल रहा था। जब डीडीओ का पता नहीं चला, तो अफसरों ने जांच कराई जिसमें बताया गया कि डीडीओ लखनऊ जेल में बंद हैं। (Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail) मनरेगा घोटाले में आरोपी (Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail) मेरठ के जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ को सीबीआई ने मनरेगा घोटाले में आरोपी पाए जाने पर गिरफ्तार कर लिया था। संतकबीरनगर जिले में तैनाती के समय उन पर मनरेगा घोटाले के आरोप लगे थे। सीबीआई लंबे समय से निगरानी रख रही थी। जैसे ही दिग्विजय नाथ तिवारी को पता चला कि अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, तो मेरठ में चुनाव कराने के बाद 18 फरवरी को वह 2 दिन का अवकाश लेकर चले गए। 21 फरवरी को उन्हें छुट्टी से वापस मेरठ लौटना था, लेकिन वह नहीं आए। उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। बीडीओ के पद पर तैनात रह आर्थिक गड़बड़ी की थी (Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail) डीडीओ डीएन तिवारी के जेल में होने की तस्दीक तब हुई जब उनकी ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई। मामला 2007 से 2010 के दौरान संतकबीरनगर में हुए मनरेगा घोटाले से जुड़ा हुआ है। यहां बीडीओ के पद पर तैनात रहे डीएन तिवारी ने आर्थिक गड़बड़ी की थी। मनरेगा में करीब 250 करोड़ रुपये का घपला हुआ था। इस मामले में सीबीआई जांच चल रही थी। डीएन तिवारी ने इस मामले में एन्टीस्पेटरी बेल के लिए भी पहले आवेदन किया था। (Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail)
इंडिया न्यूज, लखनऊ। Meerut DDO Lodged in Lucknow Jail : मेरठ के जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी अट्ठारह फरवरी से गुमशुदा थे। अट्ठारह फरवरी को उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को चिट्ठी लिखकर दो दिन की छुट्टी स्वीकृत कराई थी। छुट्टी के बाद भी डीडीओ दिग्विजय नाथ तिवारी नौकरी पर नहीं लौटे। करीब आठ दिन और बीते तो आला अफसरों को उनकी चिंता हुई। फरियादियों को भी उनके ऑफिस पर ताला लटका हुआ मिल रहा था। जब डीडीओ का पता नहीं चला, तो अफसरों ने जांच कराई जिसमें बताया गया कि डीडीओ लखनऊ जेल में बंद हैं। मनरेगा घोटाले में आरोपी मेरठ के जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ को सीबीआई ने मनरेगा घोटाले में आरोपी पाए जाने पर गिरफ्तार कर लिया था। संतकबीरनगर जिले में तैनाती के समय उन पर मनरेगा घोटाले के आरोप लगे थे। सीबीआई लंबे समय से निगरानी रख रही थी। जैसे ही दिग्विजय नाथ तिवारी को पता चला कि अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, तो मेरठ में चुनाव कराने के बाद अट्ठारह फरवरी को वह दो दिन का अवकाश लेकर चले गए। इक्कीस फरवरी को उन्हें छुट्टी से वापस मेरठ लौटना था, लेकिन वह नहीं आए। उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। बीडीओ के पद पर तैनात रह आर्थिक गड़बड़ी की थी डीडीओ डीएन तिवारी के जेल में होने की तस्दीक तब हुई जब उनकी ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई। मामला दो हज़ार सात से दो हज़ार दस के दौरान संतकबीरनगर में हुए मनरेगा घोटाले से जुड़ा हुआ है। यहां बीडीओ के पद पर तैनात रहे डीएन तिवारी ने आर्थिक गड़बड़ी की थी। मनरेगा में करीब दो सौ पचास करोड़ रुपये का घपला हुआ था। इस मामले में सीबीआई जांच चल रही थी। डीएन तिवारी ने इस मामले में एन्टीस्पेटरी बेल के लिए भी पहले आवेदन किया था।
बांसडीह कस्बा निवासी 28 वर्षीय युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में अपने ही गर्दन पर धारदार हथियार से खुद को घायल कर लिया। आनन फानन में परिजनों द्वारा घायल युवक को इलाज हेतु जिलाचिकित्सालय ले जाया गया। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों ने प्रथमिक उपचार के बाद उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है। जिसका इलाज वाराणसी स्थित किसी निजी अस्पताल से चल रहा था। मिली जानकारी के अनुसार, बांसडीह नगर पंचायत के वार्ड नं 10 गुदरी बाजार निवासी धर्मवीर गुप्ता (28) वर्ष शनिवार की सुबह अचानक घर में रखे सब्जी काटने वाले हंसुए से अपने ही गर्दन पर वार कर खुद को लहूलुहान कर लिया। बगल के कमरे में सो रहे धर्मवीर की चीख सुनकर उसका छोटा भाई अभिषेक जब अन्दर की तरफ भागा तो कमरे का दृष्य़ देखकर सन्न रहा गया। वह भी चीखने चिल्लाने लगा। आनन फानन में परिजनों द्वारा धर्मवीर को जिलाचिकित्सालय ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे प्राथमिक उपचार के पश्चात गंभीर अवस्था में वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बांसडीह कस्बा निवासी अट्ठाईस वर्षीय युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में अपने ही गर्दन पर धारदार हथियार से खुद को घायल कर लिया। आनन फानन में परिजनों द्वारा घायल युवक को इलाज हेतु जिलाचिकित्सालय ले जाया गया। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों ने प्रथमिक उपचार के बाद उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है। जिसका इलाज वाराणसी स्थित किसी निजी अस्पताल से चल रहा था। मिली जानकारी के अनुसार, बांसडीह नगर पंचायत के वार्ड नं दस गुदरी बाजार निवासी धर्मवीर गुप्ता वर्ष शनिवार की सुबह अचानक घर में रखे सब्जी काटने वाले हंसुए से अपने ही गर्दन पर वार कर खुद को लहूलुहान कर लिया। बगल के कमरे में सो रहे धर्मवीर की चीख सुनकर उसका छोटा भाई अभिषेक जब अन्दर की तरफ भागा तो कमरे का दृष्य़ देखकर सन्न रहा गया। वह भी चीखने चिल्लाने लगा। आनन फानन में परिजनों द्वारा धर्मवीर को जिलाचिकित्सालय ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे प्राथमिक उपचार के पश्चात गंभीर अवस्था में वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इन Anti Hair Fall Shampoo में आपको नेचुरल इनग्रेडिएंट और आयुर्वेद के गुण मिलेंगे। ये ना केवल आपके बालों का झड़ना रोकेंगे बल्कि आपको हेयर ग्रोथ भी देंगे। इसके इस्तेमाल से आपके स्कैल्प क्लीन और डैंड्रफ फ्री रहेंगे। इतना ही नहीं ये Anti Hair Fall Shampoo आपके स्कैल्प के डीप में जाकर आपके बालों को मॉश्चराइज करता है और उन्हें सिल्की और स्मूथ बनाता है। Ustraa Anti Hairfall Shampoo : Mars by GHC Hairfall Control Pack : Uncle Tony Anti-Hairfall Shampoo : Organic Harvest Hairfall Control Shampoo : Bold Care Hairfall Control Pack : Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Mensxpपर उपलब्ध हैं।
इन Anti Hair Fall Shampoo में आपको नेचुरल इनग्रेडिएंट और आयुर्वेद के गुण मिलेंगे। ये ना केवल आपके बालों का झड़ना रोकेंगे बल्कि आपको हेयर ग्रोथ भी देंगे। इसके इस्तेमाल से आपके स्कैल्प क्लीन और डैंड्रफ फ्री रहेंगे। इतना ही नहीं ये Anti Hair Fall Shampoo आपके स्कैल्प के डीप में जाकर आपके बालों को मॉश्चराइज करता है और उन्हें सिल्की और स्मूथ बनाता है। Ustraa Anti Hairfall Shampoo : Mars by GHC Hairfall Control Pack : Uncle Tony Anti-Hairfall Shampoo : Organic Harvest Hairfall Control Shampoo : Bold Care Hairfall Control Pack : Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Mensxpपर उपलब्ध हैं।
चांदनी आप अँधेरे बीच इस संसार की उलटी रोत है जो - दूसरों को रोशनी दिखाता है वह स्वयं अँधेरे में रहता है, और पंडित जो दूसरों को ज्ञानोपदेश देता है वह भूखा रहता है या कुत्रर्म करता है। संसार की उलटी रीति पर कहते है । तुलनीय बंद० पंडित, वेद, ममालची इनकी उलटी रीति औरन गैल बतायकं आपुन नाके भींत । दे० 'पच और मसालची...। पंडित जी ! मेंढकी कब अंडे देती है ? -- किसी देहाती ने पंडित जी से पूछा कि मेंढकी किस ऋतु में अंडे देती है । जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति से कोई प्रश्न पूछता है जिससे उसका कोई संबंध न हो और न ही वह उसके संबंध में कुछ जानता हो तो प्रश्न करने वाले के प्रति व्यंग्य से कहते हैं। तुलनीपः राज० बारट जी! परड़ किता वेम ब्यावे ? पंडित जंसो सीख - पंडित लोग स्वयं चाहे कितने भी कुकर्म क्यों न करते रहें किंतु दूसरों को उपदेश देने से कभी नही चूकते। जो व्यक्ति दूसरों को उपदेश दे परन्तु स्वयं वैमा न करे उसके प्रति व्यग्य से कहते हैं । तुलनीय : भीली बामण वालो बबराहो है । पंडित तेरी गाय को शेर ने मार दिया, तो कहाउसको भगवान मारेंगे - ( क ) ब्राह्मणों को बलवान एवं पुरुषार्थी नही समझा जाता; वे स्वयं अपने शत्रु को दंः न देकर ईश्वर पर टालते रहते हैं, इसीलिए उनके प्रति व्यंग्य से कहते हैं। (ख) जो निर्बल को कष्ट देता है उसे ईश्वर ऋष्ट देता है । तुलनीय : माल० बामण थारी गाय ने नार मारे, तो के वण ने राम मारेगा; ब्रज० पंडिज्जी तुम्हारी गाय नाहर नें मारि दई - वाम भगमान मारंगो । पंडित दूसरे को ही प्रबोधते हैं अपने बंगन खाते हैंजो व्यक्ति स्वयं अनुचित या निन्द्य कार्य करे और दूसरों का वैगा करने से मना करे उसके प्रति व्यंग्य से कहते हैं । तुलनीय : भोज० अपने पांडे भन्टा खालं दुसरा के परबोधं । पंडित दूसरे को ही बुद्धि बेता है- ऊपर देखिए । तुलनीय : भोज० आने के पांड़े बुद्धि देलं; अपने पांडे घुलटिया लैलं ; पंज० पंडत दूजयां नूं ही मत देंदा है । पंडित दूसरे को ही सुविन बताते हैं - आडम्बरी व्यक्ति के लिए व्यंग्य से कहते हैं जो स्वयं बुरा काम करे और दूसरे को उपदेश दे । तुलनीय : मैथ० अनका के पांड़े दिन देस अपने सुखले बुकावस; भोज० पांडे आनके साइत बतावेंलं सुख करैल । पंडित सोई जो गाल बजावा - आजकल पंडित वही माने जाते हैं जो बहुत बोलते हैं, अर्थात् आजकल गप्पें झाड़ने वालों या झूठ बोलने वालों का अधिक आदर होता है। तुलनीय : पंज० पंडत ओह् जेड़ा मना बाले । पंसारी का नौकर, कसाई का कूकर - इन दोनों को खाने की कमी नहीं रहती है। पंसेरी में पाँच सेर का धोखा - पसेरी (पाँच सेर का बाट ) में पाँच सेर का धोखा हो गया। (क) जिस व्यक्ति के साथ कोई बहुत बड़ा धोखा हो जाय तो उसके प्रति कहते हैं । (ख) जब कोई किसी के साथ छोटे काम में भी अधिक ठगी कर जाता है तब भी कहते हैं । तुलनीय : राज० पंसेरी में पाँच सेर रो धोखो । पंसेरी में पाँच सेर की भूल - पंसेरी में पांच सेर की भूल हो गई अर्थात् बहुत बड़ी भूल हो गई। जो व्यक्ति कोई बहुत भारी भूल कर बैठे उसके प्रति कहते हैं । तुलनीय : राज० पंसेरी में पाँच सेररी भूल; ब्रज० पहंसेरी मे पाँच सेर की भूल पकने पर निबौली मोठी - पकने पर निवौली भी मीठी हो जाती है । अर्थात् ( क ) समय आने पर प्रत्येक वस्तु अच्छी लगती है । (ख) बुढ़ापा आने पर बुरे लोग भी अच्छे हो जाते हैं । तुलनीय : ब्रज० पकी निबौरी मीठी लगे । पकवान खाने को होता है तो स्त्रियाँ देवी पूजन को चलती हैं - स्त्रियों की पकवान खाने की इच्छा होती है तो वे पूजा करने का बहाना बनाती है और पूजन की आड़ में खूब पकवान पकाती हैं। स्त्रियों पर व्यंग्य मे कहते हैं। तुलनीय : अव० पकवान खायका भवा तो गोरिया चली देवी पुजन का । पकवान में लाडू सर्गों में साढू - पकवान में लड्डू और संबंधियों में साढू ( माली का पति ) सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अन्य संबंधियों की अपेक्षा साढू से अधिक संबंध रखने वाले के प्रति व्यंग्य में कहते है । तुलनीय : छत्तीस० कलेवा माँ लाडू, सगा माँ साढू; ब्रज० पकमान में लाड़, सगँन में साड़ू । पकाई खीर हो गया दलिया - अर्थात् किया तो अच्छा काम था परंतु हो गया बुरा । अच्छे काम का बुरा फल मिलने पर यह लोकोक्ति कही जाती है। पका कर दे तो खा लूं, सवारी लेके आए तो संग चलूं - पका कर खिलाएगा तो खा लूंगा और यदि सवारी लेकर आएगा तो साथ भी चला जाऊँगा । जब कोई व्यक्ति किसी की सहायता करने के लिए उससे बहुत खुशामद कराना चाहता है तो उसके प्रति व्यंग्य में कहते हैं । तुलनीय : गढ़०
चांदनी आप अँधेरे बीच इस संसार की उलटी रोत है जो - दूसरों को रोशनी दिखाता है वह स्वयं अँधेरे में रहता है, और पंडित जो दूसरों को ज्ञानोपदेश देता है वह भूखा रहता है या कुत्रर्म करता है। संसार की उलटी रीति पर कहते है । तुलनीय बंदशून्य पंडित, वेद, ममालची इनकी उलटी रीति औरन गैल बतायकं आपुन नाके भींत । देशून्य 'पच और मसालची...। पंडित जी ! मेंढकी कब अंडे देती है ? -- किसी देहाती ने पंडित जी से पूछा कि मेंढकी किस ऋतु में अंडे देती है । जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति से कोई प्रश्न पूछता है जिससे उसका कोई संबंध न हो और न ही वह उसके संबंध में कुछ जानता हो तो प्रश्न करने वाले के प्रति व्यंग्य से कहते हैं। तुलनीपः राजशून्य बारट जी! परड़ किता वेम ब्यावे ? पंडित जंसो सीख - पंडित लोग स्वयं चाहे कितने भी कुकर्म क्यों न करते रहें किंतु दूसरों को उपदेश देने से कभी नही चूकते। जो व्यक्ति दूसरों को उपदेश दे परन्तु स्वयं वैमा न करे उसके प्रति व्यग्य से कहते हैं । तुलनीय : भीली बामण वालो बबराहो है । पंडित तेरी गाय को शेर ने मार दिया, तो कहाउसको भगवान मारेंगे - ब्राह्मणों को बलवान एवं पुरुषार्थी नही समझा जाता; वे स्वयं अपने शत्रु को दंः न देकर ईश्वर पर टालते रहते हैं, इसीलिए उनके प्रति व्यंग्य से कहते हैं। जो निर्बल को कष्ट देता है उसे ईश्वर ऋष्ट देता है । तुलनीय : मालशून्य बामण थारी गाय ने नार मारे, तो के वण ने राम मारेगा; ब्रजशून्य पंडिज्जी तुम्हारी गाय नाहर नें मारि दई - वाम भगमान मारंगो । पंडित दूसरे को ही प्रबोधते हैं अपने बंगन खाते हैंजो व्यक्ति स्वयं अनुचित या निन्द्य कार्य करे और दूसरों का वैगा करने से मना करे उसके प्रति व्यंग्य से कहते हैं । तुलनीय : भोजशून्य अपने पांडे भन्टा खालं दुसरा के परबोधं । पंडित दूसरे को ही बुद्धि बेता है- ऊपर देखिए । तुलनीय : भोजशून्य आने के पांड़े बुद्धि देलं; अपने पांडे घुलटिया लैलं ; पंजशून्य पंडत दूजयां नूं ही मत देंदा है । पंडित दूसरे को ही सुविन बताते हैं - आडम्बरी व्यक्ति के लिए व्यंग्य से कहते हैं जो स्वयं बुरा काम करे और दूसरे को उपदेश दे । तुलनीय : मैथशून्य अनका के पांड़े दिन देस अपने सुखले बुकावस; भोजशून्य पांडे आनके साइत बतावेंलं सुख करैल । पंडित सोई जो गाल बजावा - आजकल पंडित वही माने जाते हैं जो बहुत बोलते हैं, अर्थात् आजकल गप्पें झाड़ने वालों या झूठ बोलने वालों का अधिक आदर होता है। तुलनीय : पंजशून्य पंडत ओह् जेड़ा मना बाले । पंसारी का नौकर, कसाई का कूकर - इन दोनों को खाने की कमी नहीं रहती है। पंसेरी में पाँच सेर का धोखा - पसेरी में पाँच सेर का धोखा हो गया। जिस व्यक्ति के साथ कोई बहुत बड़ा धोखा हो जाय तो उसके प्रति कहते हैं । जब कोई किसी के साथ छोटे काम में भी अधिक ठगी कर जाता है तब भी कहते हैं । तुलनीय : राजशून्य पंसेरी में पाँच सेर रो धोखो । पंसेरी में पाँच सेर की भूल - पंसेरी में पांच सेर की भूल हो गई अर्थात् बहुत बड़ी भूल हो गई। जो व्यक्ति कोई बहुत भारी भूल कर बैठे उसके प्रति कहते हैं । तुलनीय : राजशून्य पंसेरी में पाँच सेररी भूल; ब्रजशून्य पहंसेरी मे पाँच सेर की भूल पकने पर निबौली मोठी - पकने पर निवौली भी मीठी हो जाती है । अर्थात् समय आने पर प्रत्येक वस्तु अच्छी लगती है । बुढ़ापा आने पर बुरे लोग भी अच्छे हो जाते हैं । तुलनीय : ब्रजशून्य पकी निबौरी मीठी लगे । पकवान खाने को होता है तो स्त्रियाँ देवी पूजन को चलती हैं - स्त्रियों की पकवान खाने की इच्छा होती है तो वे पूजा करने का बहाना बनाती है और पूजन की आड़ में खूब पकवान पकाती हैं। स्त्रियों पर व्यंग्य मे कहते हैं। तुलनीय : अवशून्य पकवान खायका भवा तो गोरिया चली देवी पुजन का । पकवान में लाडू सर्गों में साढू - पकवान में लड्डू और संबंधियों में साढू सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अन्य संबंधियों की अपेक्षा साढू से अधिक संबंध रखने वाले के प्रति व्यंग्य में कहते है । तुलनीय : छत्तीसशून्य कलेवा माँ लाडू, सगा माँ साढू; ब्रजशून्य पकमान में लाड़, सगँन में साड़ू । पकाई खीर हो गया दलिया - अर्थात् किया तो अच्छा काम था परंतु हो गया बुरा । अच्छे काम का बुरा फल मिलने पर यह लोकोक्ति कही जाती है। पका कर दे तो खा लूं, सवारी लेके आए तो संग चलूं - पका कर खिलाएगा तो खा लूंगा और यदि सवारी लेकर आएगा तो साथ भी चला जाऊँगा । जब कोई व्यक्ति किसी की सहायता करने के लिए उससे बहुत खुशामद कराना चाहता है तो उसके प्रति व्यंग्य में कहते हैं । तुलनीय : गढ़शून्य
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने एक ब्यान जारी करते हुए जानकारी दी है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की प्रदेश समीक्षा, योजना बैठक आज हिन्दू आश्रम नाहन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री प्रफुल्ल आंकात जी विशेष रूप से उपस्थित रहें। नाहन में हुई अभाविप हिमाचल प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश समीक्षा - योजना बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार, प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुनील ठाकुर, प्रदेश मंत्री श्री आकाश नेगी, उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री विजय प्रताप एवं प्रदेश संगठन मंत्री श्री गौरव अत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। आकाश नेगी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की इस प्रदेश समीक्षा, योजना बैठक में विद्यार्थी परिषद द्वारा पूरे प्रदेश भर में किए गए संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक कार्यों की समीक्षा की गई। व आगमी पूरे प्रदेश में किए जाने वाले संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक कार्यों की योजना तैयार की गई। आकाश नेगी ने बताया कि इस बैठक में अलग अलग सत्रों में अलग अलग विषयों पर चर्चा कर उनकी रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में संगठनात्मक समीक्षा व योजना में अखिल भारतीय विद्यार्थी कार्यक्रमों में नौ जुलाई विद्यार्थी परिषद स्थापना दिवस ( राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस), आठ मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस व 6 दिसंबर सामाजिक समरसता दिवस की समीक्षा की गई। विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, व्यवसायिक शिक्षा, सदस्यता सम्मेलन, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, व्यवसायिक शिक्षा,नगर कार्यकारिणी, प्रदेश अभ्यास वर्ग, जिला अभ्यास वर्ग व इकाई अभ्यास वर्ग आदि पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर योजना बनाई गई। आयामों व गतिविधियों में व्यवसायिक कार्य, जनजातीय कार्य,छात्रा कार्य, छात्र उद्घोष, राष्ट्रीय कला मंच, विश्वविद्यालय कार्य,खेल , शोध, सेवार्थ विद्यार्थी, स्टूडेंट् फार सेवा , सोशल मीडिया, मीडिया, थिंक इंडिया,मेडिवीजन, एग्रीवीजन, आरटीआई व लीगल सैल व आगामी कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, सामाजिक अनुभूति आदि विषयों पर चर्चा करके आगामी रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहन मंथन करके प्रदेश स्तरीय आंदोलनों की रणनीति बनाई गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस बैठक में आगामी आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर किए जाने वाले आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की गई। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष करेगी 2 लाख से अधिक सदस्यता। वर्ष 2022-2023 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश में 1,06,859 सदस्यता की थी। छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लंबे समय से करती आ रही है। वर्ष 2013 में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार छात्र संघ चुनाव बहाल करने का काम किया था। चुनावों के समय भाजपा सरकार ने चुनावी वादे भी किए की छात्र संघ चुनावों को बहाल किया जाएगा। परंतु दोनों ही दलों ने हिमाचल प्रदेश के छात्रों के साथ छात्र संघ चुनाव को लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम किया है। हिमाचल प्रदेश के 131 महाविद्यालयों में से 75% महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य नहीं है। विद्यार्थी परिषद की इस प्रदेश समीक्षा योजना बैठक में इस पर भी प्रदेश स्तरीय आंदोलन की रुपरेखा तैयार की गई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में स्थाई कुलपति की नियुक्ति शीघ्र की जाएं। हिमाचल प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में शिक्षकों व गैर शिक्षकों की भर्तियां शीघ्र की जाएं। यूजी व पीजी के परीक्षा परिणामों में आ रही अनियमितताओं को शीघ्र दूर किया जाए। हिमाचल प्रदेश में शोधार्थियों के लिए शोध प्रोत्साहन राशि के लिए विद्यार्थी परिषद लंबे समय से मांग कर रही थी, और विद्यार्थी परिषद की 10 वर्षों की जीत के बाद हिमाचल प्रदेश की पूर्व सरकार ने इसको लागू भी किया । लेकिन अब वर्तमान हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस ओर कोई भी कदम नहीं उठाया है। हिमाचल प्रदेश के हॉर्टिकल्चर व एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को कम किए जाने की मांग विद्यार्थी परिषद करती है। ऑनलाइन ईआरपी प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएं। इस सभी विषयों पर आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थी परिषद आंदोलन करेगी। इस बैठक में पूरे हिमाचल प्रदेश से 47 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने एक ब्यान जारी करते हुए जानकारी दी है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की प्रदेश समीक्षा, योजना बैठक आज हिन्दू आश्रम नाहन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री प्रफुल्ल आंकात जी विशेष रूप से उपस्थित रहें। नाहन में हुई अभाविप हिमाचल प्रदेश की दो दिवसीय प्रदेश समीक्षा - योजना बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार, प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुनील ठाकुर, प्रदेश मंत्री श्री आकाश नेगी, उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री विजय प्रताप एवं प्रदेश संगठन मंत्री श्री गौरव अत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। आकाश नेगी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की इस प्रदेश समीक्षा, योजना बैठक में विद्यार्थी परिषद द्वारा पूरे प्रदेश भर में किए गए संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक कार्यों की समीक्षा की गई। व आगमी पूरे प्रदेश में किए जाने वाले संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक कार्यों की योजना तैयार की गई। आकाश नेगी ने बताया कि इस बैठक में अलग अलग सत्रों में अलग अलग विषयों पर चर्चा कर उनकी रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में संगठनात्मक समीक्षा व योजना में अखिल भारतीय विद्यार्थी कार्यक्रमों में नौ जुलाई विद्यार्थी परिषद स्थापना दिवस , आठ मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस व छः दिसंबर सामाजिक समरसता दिवस की समीक्षा की गई। विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, व्यवसायिक शिक्षा, सदस्यता सम्मेलन, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, व्यवसायिक शिक्षा,नगर कार्यकारिणी, प्रदेश अभ्यास वर्ग, जिला अभ्यास वर्ग व इकाई अभ्यास वर्ग आदि पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर योजना बनाई गई। आयामों व गतिविधियों में व्यवसायिक कार्य, जनजातीय कार्य,छात्रा कार्य, छात्र उद्घोष, राष्ट्रीय कला मंच, विश्वविद्यालय कार्य,खेल , शोध, सेवार्थ विद्यार्थी, स्टूडेंट् फार सेवा , सोशल मीडिया, मीडिया, थिंक इंडिया,मेडिवीजन, एग्रीवीजन, आरटीआई व लीगल सैल व आगामी कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, सामाजिक अनुभूति आदि विषयों पर चर्चा करके आगामी रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहन मंथन करके प्रदेश स्तरीय आंदोलनों की रणनीति बनाई गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस बैठक में आगामी आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर किए जाने वाले आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की गई। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष करेगी दो लाख से अधिक सदस्यता। वर्ष दो हज़ार बाईस-दो हज़ार तेईस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश में एक,छः,आठ सौ उनसठ सदस्यता की थी। छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लंबे समय से करती आ रही है। वर्ष दो हज़ार तेरह में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार छात्र संघ चुनाव बहाल करने का काम किया था। चुनावों के समय भाजपा सरकार ने चुनावी वादे भी किए की छात्र संघ चुनावों को बहाल किया जाएगा। परंतु दोनों ही दलों ने हिमाचल प्रदेश के छात्रों के साथ छात्र संघ चुनाव को लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम किया है। हिमाचल प्रदेश के एक सौ इकतीस महाविद्यालयों में से पचहत्तर% महाविद्यालयों में प्रधानाचार्य नहीं है। विद्यार्थी परिषद की इस प्रदेश समीक्षा योजना बैठक में इस पर भी प्रदेश स्तरीय आंदोलन की रुपरेखा तैयार की गई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में स्थाई कुलपति की नियुक्ति शीघ्र की जाएं। हिमाचल प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में शिक्षकों व गैर शिक्षकों की भर्तियां शीघ्र की जाएं। यूजी व पीजी के परीक्षा परिणामों में आ रही अनियमितताओं को शीघ्र दूर किया जाए। हिमाचल प्रदेश में शोधार्थियों के लिए शोध प्रोत्साहन राशि के लिए विद्यार्थी परिषद लंबे समय से मांग कर रही थी, और विद्यार्थी परिषद की दस वर्षों की जीत के बाद हिमाचल प्रदेश की पूर्व सरकार ने इसको लागू भी किया । लेकिन अब वर्तमान हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस ओर कोई भी कदम नहीं उठाया है। हिमाचल प्रदेश के हॉर्टिकल्चर व एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को कम किए जाने की मांग विद्यार्थी परिषद करती है। ऑनलाइन ईआरपी प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएं। इस सभी विषयों पर आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थी परिषद आंदोलन करेगी। इस बैठक में पूरे हिमाचल प्रदेश से सैंतालीस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
टेलीविजन के मशहूर रियलिटी शो बिग बॉस 15 में दर्शकों को रोजाना नए- नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं। शो में हर दिन आ रहे ट्विस्ट एंड टर्न लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। शो में एक तरफ जहां दर्शकों को लड़ाई- झगड़े देखने को मिल रहे हैं, तो वहीं कंटेस्टेंट की लव स्टोरी ने भी लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इसी क्रम में इस सीजन ईशान सहगल और मायशा अय्यर के लव एंगल ने भी शो में रहते हुए काफी सुर्खियां बटोरी थी। हालांकि, दोनों ही अब इस शो से बाहर हो चुके हैं। लेकिन ,शो से बाहर आने के बाद भी वह साथ नजर नजर आ रहे हैं। बिग बॉस के घर के आते ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया था। यहां तक कि वह एक-दूसरे को लेकर काफी सीरियस हो गए थे। ऐसे में कई लोगों ने ईशान और मायशा के रिलेशन पर सवाल उठाने खड़े कर दिए थे। वहीं, कई ने इसे दिखावा तक करार दिया था। हाल ही में अब मायशा अय्यर शो से बाहर आते ही उनके रिशेलन को झूठा बताने वालों को जमकर फटकार लगाई। एक वेबसाइट से बात करते हुए मायशा ने कहा, 'लोग कह रहे हैं कि मेरा और ईशान का प्यार स्क्रिप्टेड था। मैं लोगों से पूछना चाहती हूं कि अगर 15 साल का रिश्ता अचानक टूट सकता है तो क्या 3 दिन में किसी को प्यार हो सकता। ' उन्होंने आगे कहा कि 'लोग मेरे बारे में क्या सोचते है मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। शो में हमें एक महीने बिताने पर ही ऐसा लग रहा था जैसे हमने पूरी जिंदगी साथ बिता ली। मायशा कहती हैं कि प्यार की कोई एक्पायरी नहीं होती। प्यार कभी भी और किसी को भी हो सकता है। ' इससे पहले ईशान सहगल ने भी शो से बाहर आने के बाद मायशा के साथ अपने रिश्ते पर खुल कर बात की थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि, 'मेरी बहन ने मायशा से बात की है और वह उससे मिलने का बेसब्री से इंतजार भी कर रही है। इसके अवाला मैंने अपनी मां से भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें मुझ पर गर्व है और वह असल में उसे पसंद करती हैं। इधर, शो से बाहर आने के बाद अब यह कपल साथ में क्वालिटी टाइम बिता रहा है। हाल ही में दोनों अपनी डिनर डेट पर गए थे। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईशान और माइशा अपने रोमांटिक वेकेशन के लिए गोवा के लिए रवाना हो चुके हैं। कपल ने मुंबई एयरपोर्ट से सुबह की फ्लाइट ली और 2-3 दिनों के लिए एक-दूसरे के साथ समय बिताएंगे। ऐसे में अब फैंस को इनकी इस रोमांटिक ट्रिप की तस्वीरों का बेसब्री से इंतजार हैं।
टेलीविजन के मशहूर रियलिटी शो बिग बॉस पंद्रह में दर्शकों को रोजाना नए- नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं। शो में हर दिन आ रहे ट्विस्ट एंड टर्न लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। शो में एक तरफ जहां दर्शकों को लड़ाई- झगड़े देखने को मिल रहे हैं, तो वहीं कंटेस्टेंट की लव स्टोरी ने भी लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इसी क्रम में इस सीजन ईशान सहगल और मायशा अय्यर के लव एंगल ने भी शो में रहते हुए काफी सुर्खियां बटोरी थी। हालांकि, दोनों ही अब इस शो से बाहर हो चुके हैं। लेकिन ,शो से बाहर आने के बाद भी वह साथ नजर नजर आ रहे हैं। बिग बॉस के घर के आते ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया था। यहां तक कि वह एक-दूसरे को लेकर काफी सीरियस हो गए थे। ऐसे में कई लोगों ने ईशान और मायशा के रिलेशन पर सवाल उठाने खड़े कर दिए थे। वहीं, कई ने इसे दिखावा तक करार दिया था। हाल ही में अब मायशा अय्यर शो से बाहर आते ही उनके रिशेलन को झूठा बताने वालों को जमकर फटकार लगाई। एक वेबसाइट से बात करते हुए मायशा ने कहा, 'लोग कह रहे हैं कि मेरा और ईशान का प्यार स्क्रिप्टेड था। मैं लोगों से पूछना चाहती हूं कि अगर पंद्रह साल का रिश्ता अचानक टूट सकता है तो क्या तीन दिन में किसी को प्यार हो सकता। ' उन्होंने आगे कहा कि 'लोग मेरे बारे में क्या सोचते है मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। शो में हमें एक महीने बिताने पर ही ऐसा लग रहा था जैसे हमने पूरी जिंदगी साथ बिता ली। मायशा कहती हैं कि प्यार की कोई एक्पायरी नहीं होती। प्यार कभी भी और किसी को भी हो सकता है। ' इससे पहले ईशान सहगल ने भी शो से बाहर आने के बाद मायशा के साथ अपने रिश्ते पर खुल कर बात की थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि, 'मेरी बहन ने मायशा से बात की है और वह उससे मिलने का बेसब्री से इंतजार भी कर रही है। इसके अवाला मैंने अपनी मां से भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें मुझ पर गर्व है और वह असल में उसे पसंद करती हैं। इधर, शो से बाहर आने के बाद अब यह कपल साथ में क्वालिटी टाइम बिता रहा है। हाल ही में दोनों अपनी डिनर डेट पर गए थे। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईशान और माइशा अपने रोमांटिक वेकेशन के लिए गोवा के लिए रवाना हो चुके हैं। कपल ने मुंबई एयरपोर्ट से सुबह की फ्लाइट ली और दो-तीन दिनों के लिए एक-दूसरे के साथ समय बिताएंगे। ऐसे में अब फैंस को इनकी इस रोमांटिक ट्रिप की तस्वीरों का बेसब्री से इंतजार हैं।
राष्ट्रपति ने इराक़ यात्रा से वापसी पर कहा है कि कोई भी देश ईरान व इराक़ के बीच मतभेद पैदा नहीं कर सकता। डाॅक्टर हसन रूहानी ने बुधवार की रात इराक़ यात्रा की समाप्ति के बाद स्वदेश लौटने पर तेहरान हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक नया मोड़ बताया और आशा जताई कि यह यात्रा, दोनों राष्ट्रों और इसी तरह क्षेत्रीय संबंधों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और दोनों देशों हित में रहेगी। राष्ट्रपति ने बताया कि द्विपक्षीय वार्ताओं में इस बात पर बल दिया गया कि ईरान व इराक़ के घनिष्ठ संबंधों को इस प्रकार आगे बढ़ाया जाए कि अगले चरणों में अन्य देश भी इनमें शामिल हो सकें और ये संबंध त्रिपक्षीय व बहुपक्षीय बन सकें। डाॅक्टर हसन रूहानी ने बताया कि सुरक्षा व क्षेत्रीय मामलों में भी बहुत अच्छे समझौते हुए हैं और दोनों देशों की ओर से एक अत्यंत अहम संयुक्त बयान जारी किया गया तथा अहम दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने बताया कि इराक़ी अधिकारियों से मुलाक़ात में सीमावर्ती मामले पर भी बात हुई और इस संबंध में भी पिछले समझौतों के क्रियान्वयन पर बल दिया गया। राष्ट्रपति ने बताया कि इराक़ी अधिकारियों से मुलाक़ात में इस बात पर सहमति बनी कि पर्यटन विकास के लिए दोनों देशों के पर्यटकों का वीज़ा निःशुल्क रहे। उन्होंने कहा कि हर साल तीस लाख इराक़ी, ईरान आते हैं जबकि बीस लाख ईरानी, इराक़ जाते हैं। डाॅक्टर हसन रूहानी ने इराक़ को ईरानी वस्तुओं के निर्यात का पहला केंद्र बताया और कहा कि दोनों देशों के व्यापारियों के काम में सरलता के लिए इस बात पर सहमति हुई कि व्यापार वीज़ा जारी करने में अधिक सुविधाएं दी जाएं। (HN)
राष्ट्रपति ने इराक़ यात्रा से वापसी पर कहा है कि कोई भी देश ईरान व इराक़ के बीच मतभेद पैदा नहीं कर सकता। डाॅक्टर हसन रूहानी ने बुधवार की रात इराक़ यात्रा की समाप्ति के बाद स्वदेश लौटने पर तेहरान हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक नया मोड़ बताया और आशा जताई कि यह यात्रा, दोनों राष्ट्रों और इसी तरह क्षेत्रीय संबंधों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और दोनों देशों हित में रहेगी। राष्ट्रपति ने बताया कि द्विपक्षीय वार्ताओं में इस बात पर बल दिया गया कि ईरान व इराक़ के घनिष्ठ संबंधों को इस प्रकार आगे बढ़ाया जाए कि अगले चरणों में अन्य देश भी इनमें शामिल हो सकें और ये संबंध त्रिपक्षीय व बहुपक्षीय बन सकें। डाॅक्टर हसन रूहानी ने बताया कि सुरक्षा व क्षेत्रीय मामलों में भी बहुत अच्छे समझौते हुए हैं और दोनों देशों की ओर से एक अत्यंत अहम संयुक्त बयान जारी किया गया तथा अहम दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने बताया कि इराक़ी अधिकारियों से मुलाक़ात में सीमावर्ती मामले पर भी बात हुई और इस संबंध में भी पिछले समझौतों के क्रियान्वयन पर बल दिया गया। राष्ट्रपति ने बताया कि इराक़ी अधिकारियों से मुलाक़ात में इस बात पर सहमति बनी कि पर्यटन विकास के लिए दोनों देशों के पर्यटकों का वीज़ा निःशुल्क रहे। उन्होंने कहा कि हर साल तीस लाख इराक़ी, ईरान आते हैं जबकि बीस लाख ईरानी, इराक़ जाते हैं। डाॅक्टर हसन रूहानी ने इराक़ को ईरानी वस्तुओं के निर्यात का पहला केंद्र बताया और कहा कि दोनों देशों के व्यापारियों के काम में सरलता के लिए इस बात पर सहमति हुई कि व्यापार वीज़ा जारी करने में अधिक सुविधाएं दी जाएं।
विंडोज 10 ऑपरेटिंग सिस्टम के लांच होने के 24 घंटे के भीतर 1. 4 करोड़ से अधिक कंप्यूटरों पर यह लोड हो गया है. यह बात माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज के एक ब्लॉग पोस्ट में कही गई. 1. 4 करोड़ कंप्यूटरों में जहां विंडोज 10 लोड हो चुका है, वहीं काफी अपग्रेड करने अभी बाकी है. विंडोज 10 के लिए काफी मांग दर्ज की जा रही है. पूरी दुनिया में इसकी सकारात्मक प्रतिक्रिया की जा रही है. कंपनी आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में जल्द से जल्द विंडोज 10 अपग्रेड करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है.
विंडोज दस ऑपरेटिंग सिस्टम के लांच होने के चौबीस घंटाटे के भीतर एक. चार करोड़ से अधिक कंप्यूटरों पर यह लोड हो गया है. यह बात माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज के एक ब्लॉग पोस्ट में कही गई. एक. चार करोड़ कंप्यूटरों में जहां विंडोज दस लोड हो चुका है, वहीं काफी अपग्रेड करने अभी बाकी है. विंडोज दस के लिए काफी मांग दर्ज की जा रही है. पूरी दुनिया में इसकी सकारात्मक प्रतिक्रिया की जा रही है. कंपनी आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में जल्द से जल्द विंडोज दस अपग्रेड करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है.
आईपीएल में डेविड मिलर ने क्रिस जॉर्डन के खिलाफ 21 गेंदों पर बिना आउट हुए 36 रन बनाए हैं। टी20 इंटरनेशनल में भी जॉर्डन के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट 161 का है। वनडे में तो यह 218 का है। ऐसे में जब डेथ ओवर में दोनों की टक्कर होगी तो मुंबई इंडियंस को सचेत रहना होगा। आकाश मधवाल और शुभमन गिल की अभी तक सिर्फ एक ही बार टक्कर हुई है। गिल बेहतरीन फॉर्म में हैं तो मधवाल भी गेंद से कहर बरपा रहे। मुंबई और गुजरात के पहले मैच में मधवाल ने गिल का डंडा उड़ा दिया है। गिल को इस बार मधवाल से बचकर रहना होगा। मुंबई इंडियंस के ओपनर ईशान किशन गुजरात के पेसर मोहम्मद शमी के खिलाफ स्ट्रगल करते हैं। शमी के खिलाफ 51 गेंदों पर ईशान ने 57 रन बनाए हैं। हालांकि इसके बाद भी शमी उन्हें एक बार भी आउट नहीं कर सके हैं। ऐसे में दोनों के सामने ही चुनौती रहने वाली है। मुंबई इंडियंस के लिए पीयूष चावला कमाल की बॉलिंग कर रहे हैं। उनके सीधी टक्कर गुजरात के कप्तान हार्दिक पंड्या से हो सकती है। इस सीजन चावला उनका एक बार शिकार कर चुके हैं। 22 गेंदों पर अभी तक हार्दिक ने चावला के खिलाफ 46 रन बनाए हैं लेकिन 2 बार आउट भी हुए हैं। 2019 सीजन के एक मुकाबले को छोड़ दें तो चावला ही हार्दिक पर भारी पड़े हैं। मुंबई इंडियंस के कप्तान को राशिद खान हमेशा परेशान करते हैं। आईपीएल में राशिद के खिलाफ रोहित ने 29 गेंदों का सामना किया है। इसपर उनके बल्ले से सिर्फ 26 रन निकले हैं। इस दौरान रोहित 4 बार अपना विकेट खो चुके हैं।
आईपीएल में डेविड मिलर ने क्रिस जॉर्डन के खिलाफ इक्कीस गेंदों पर बिना आउट हुए छत्तीस रन बनाए हैं। टीबीस इंटरनेशनल में भी जॉर्डन के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट एक सौ इकसठ का है। वनडे में तो यह दो सौ अट्ठारह का है। ऐसे में जब डेथ ओवर में दोनों की टक्कर होगी तो मुंबई इंडियंस को सचेत रहना होगा। आकाश मधवाल और शुभमन गिल की अभी तक सिर्फ एक ही बार टक्कर हुई है। गिल बेहतरीन फॉर्म में हैं तो मधवाल भी गेंद से कहर बरपा रहे। मुंबई और गुजरात के पहले मैच में मधवाल ने गिल का डंडा उड़ा दिया है। गिल को इस बार मधवाल से बचकर रहना होगा। मुंबई इंडियंस के ओपनर ईशान किशन गुजरात के पेसर मोहम्मद शमी के खिलाफ स्ट्रगल करते हैं। शमी के खिलाफ इक्यावन गेंदों पर ईशान ने सत्तावन रन बनाए हैं। हालांकि इसके बाद भी शमी उन्हें एक बार भी आउट नहीं कर सके हैं। ऐसे में दोनों के सामने ही चुनौती रहने वाली है। मुंबई इंडियंस के लिए पीयूष चावला कमाल की बॉलिंग कर रहे हैं। उनके सीधी टक्कर गुजरात के कप्तान हार्दिक पंड्या से हो सकती है। इस सीजन चावला उनका एक बार शिकार कर चुके हैं। बाईस गेंदों पर अभी तक हार्दिक ने चावला के खिलाफ छियालीस रन बनाए हैं लेकिन दो बार आउट भी हुए हैं। दो हज़ार उन्नीस सीजन के एक मुकाबले को छोड़ दें तो चावला ही हार्दिक पर भारी पड़े हैं। मुंबई इंडियंस के कप्तान को राशिद खान हमेशा परेशान करते हैं। आईपीएल में राशिद के खिलाफ रोहित ने उनतीस गेंदों का सामना किया है। इसपर उनके बल्ले से सिर्फ छब्बीस रन निकले हैं। इस दौरान रोहित चार बार अपना विकेट खो चुके हैं।
नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण का चुनाव रविवार को होगा इसके पहले ही राजनीतिक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए पूरा जोर लगा दिया है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से प्रियंका गांधी ने इंसानियत की एक अनोखी मिसाल पेश की. उन्होंने कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार कर रहे नेताओं राजीव शुक्ला, मोहम्मद अजहरुद्दीन और हार्दिक पटेल को एक बच्ची के इलाज के लिए अचानक दिल्ली भेज दिया. रायबरेली की एक बेटी की हालत ज्यादा खराब होने के चलते उसे प्रयागराज में इलाज के लिए भेजा गया जहां उसकी हालत और भी गंभीर हो गई इस बात की जानकारी मिलते ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने बड़ी पहल की. उनके निर्देश पर चुनाव प्रचार छोड़ कांग्रेस नेता अजहरुद्दीन, राजीव शुक्ला और हार्दिक पटेल बीमार बच्ची के इलाज के लिए चार्टर्ड प्लेन से लेकर दिल्ली चले गए. रायबरेली की सलवन तहसील के बिसरिया गांव के रतिपाल की बेटी अंशू ट्यूमर से पीड़ित है, जिसके इलाज के लिए उसके घरवाले उसे प्रयागराज में कमला नेहरू अस्पताल लेकर आए जहां उसकी हालत काफी बिगड़ गई. परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी जिसके कारण वो बच्ची का इलाज करवाने में सक्षम नहीं थे. ऐसे में परिवार के लोगों ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा से संपर्क किया. उन्होंने प्रयागराज में चुनाव प्रचार कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को तत्काल बच्ची को दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने के लिए भेजने को कहा. इस पर उन्होंने चुनाव प्रचार बीच में छोड़ बच्ची को उपचार के लिए ले जाने की कवायद शुरू कर दी. कांग्रेस पदाधिकारी जितेंद्र तिवारी ने बताया कि निजी विमान छह सीटर होने के वजह से पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने पीड़ित बच्ची अंशु और उसके माता-पिता के साथ मो. अजहरुद्दीन और हार्दिक पटेल को बमरौली एयरपोर्ट से निजी विमान से दिल्ली भेज दिया गया. देर रात राजीव शुक्ला भी ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गए. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने बताया कि प्रियंका का निर्देश मिलने पर वह बच्ची को लेकर एम्स पहुंच गए हैं. बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उसका इलाज शुरू हो गया है.
नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के छठे चरण का चुनाव रविवार को होगा इसके पहले ही राजनीतिक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए पूरा जोर लगा दिया है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से प्रियंका गांधी ने इंसानियत की एक अनोखी मिसाल पेश की. उन्होंने कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार कर रहे नेताओं राजीव शुक्ला, मोहम्मद अजहरुद्दीन और हार्दिक पटेल को एक बच्ची के इलाज के लिए अचानक दिल्ली भेज दिया. रायबरेली की एक बेटी की हालत ज्यादा खराब होने के चलते उसे प्रयागराज में इलाज के लिए भेजा गया जहां उसकी हालत और भी गंभीर हो गई इस बात की जानकारी मिलते ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने बड़ी पहल की. उनके निर्देश पर चुनाव प्रचार छोड़ कांग्रेस नेता अजहरुद्दीन, राजीव शुक्ला और हार्दिक पटेल बीमार बच्ची के इलाज के लिए चार्टर्ड प्लेन से लेकर दिल्ली चले गए. रायबरेली की सलवन तहसील के बिसरिया गांव के रतिपाल की बेटी अंशू ट्यूमर से पीड़ित है, जिसके इलाज के लिए उसके घरवाले उसे प्रयागराज में कमला नेहरू अस्पताल लेकर आए जहां उसकी हालत काफी बिगड़ गई. परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी जिसके कारण वो बच्ची का इलाज करवाने में सक्षम नहीं थे. ऐसे में परिवार के लोगों ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा से संपर्क किया. उन्होंने प्रयागराज में चुनाव प्रचार कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला को तत्काल बच्ची को दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने के लिए भेजने को कहा. इस पर उन्होंने चुनाव प्रचार बीच में छोड़ बच्ची को उपचार के लिए ले जाने की कवायद शुरू कर दी. कांग्रेस पदाधिकारी जितेंद्र तिवारी ने बताया कि निजी विमान छह सीटर होने के वजह से पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने पीड़ित बच्ची अंशु और उसके माता-पिता के साथ मो. अजहरुद्दीन और हार्दिक पटेल को बमरौली एयरपोर्ट से निजी विमान से दिल्ली भेज दिया गया. देर रात राजीव शुक्ला भी ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गए. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने बताया कि प्रियंका का निर्देश मिलने पर वह बच्ची को लेकर एम्स पहुंच गए हैं. बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उसका इलाज शुरू हो गया है.
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। जैन आरोग्य नेचुरकेयर वेलफेयर सोसायटी की ओर से गोकलपुरी लाईओवर के नीचे गरीब लोगों को कंबल वितरित किये। सोसायटी की ओर से गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिये आयोजित कंबल वितरण कार्यत्रढम में मु य अतिथि के रूप में दिल्ली पदेश कांगेस कमेटी के अध्यक्ष और क्षेत्रीय लोकसभा सांसद जयपकाश अग्रवाल पमुख रूप से मौजूद थे। कार्यत्रढम की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष डॉ अनिल जैन ने की। इस अवसर पर एमसीडी शाहदरा नार्थ के पूर्व चेयरमैन ईश्वर सिंह बागड़ी, श्रीनिवास बागड़ी और अन्य नेता व सामाजिक कार्यकर्ता पमुख रूप से उपस्थित थे। श्री अग्रवाल ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। अगर गरीब व जरूरतमंद की मदद की जाए तो उसका निश्चित ही पल मिलता है। डॉ जैन ने कहा कि उनकी सोसायटी की ओर से जरूरतमंदों व गरीबों के लिये आमतौर पर तरह-तरह के कार्यत्रढम आयोजित किये जाते हैं।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। जैन आरोग्य नेचुरकेयर वेलफेयर सोसायटी की ओर से गोकलपुरी लाईओवर के नीचे गरीब लोगों को कंबल वितरित किये। सोसायटी की ओर से गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिये आयोजित कंबल वितरण कार्यत्रढम में मु य अतिथि के रूप में दिल्ली पदेश कांगेस कमेटी के अध्यक्ष और क्षेत्रीय लोकसभा सांसद जयपकाश अग्रवाल पमुख रूप से मौजूद थे। कार्यत्रढम की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष डॉ अनिल जैन ने की। इस अवसर पर एमसीडी शाहदरा नार्थ के पूर्व चेयरमैन ईश्वर सिंह बागड़ी, श्रीनिवास बागड़ी और अन्य नेता व सामाजिक कार्यकर्ता पमुख रूप से उपस्थित थे। श्री अग्रवाल ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। अगर गरीब व जरूरतमंद की मदद की जाए तो उसका निश्चित ही पल मिलता है। डॉ जैन ने कहा कि उनकी सोसायटी की ओर से जरूरतमंदों व गरीबों के लिये आमतौर पर तरह-तरह के कार्यत्रढम आयोजित किये जाते हैं।
कर्नाटक। कर्नाटक में कांग्रेस के प्रदेश यूथ अध्यक्ष रिज़वान अरशद ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महात्मा गांधी की हत्या वाले दिन आरएसएस ने मिठाई बांटी थी। रिज़वान ने संघ पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी आरएसएस की मानसिकता से हमेशा लड़ेगी। संघ देश को बांटना चाहता है और अपनी सहूलियत के हिसाब से काम करता है। इससे पहले राहुल गांधी भी एक जनसभा को संबोधित करते वक्त बोल गए थे की आरएसएस के लोगों ने महात्मा गांधी की हत्या की है। और उनकी सहयोगी पार्टी बीजेपी आज गांधी जी की बात करती है। इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। बता दें की रिज़वान अरशद कांग्रेस से बेंगलूरु लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। लेकिन वह बीजेपी नेता पीसी मोहन से हार गए थे।
कर्नाटक। कर्नाटक में कांग्रेस के प्रदेश यूथ अध्यक्ष रिज़वान अरशद ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महात्मा गांधी की हत्या वाले दिन आरएसएस ने मिठाई बांटी थी। रिज़वान ने संघ पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी आरएसएस की मानसिकता से हमेशा लड़ेगी। संघ देश को बांटना चाहता है और अपनी सहूलियत के हिसाब से काम करता है। इससे पहले राहुल गांधी भी एक जनसभा को संबोधित करते वक्त बोल गए थे की आरएसएस के लोगों ने महात्मा गांधी की हत्या की है। और उनकी सहयोगी पार्टी बीजेपी आज गांधी जी की बात करती है। इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। बता दें की रिज़वान अरशद कांग्रेस से बेंगलूरु लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। लेकिन वह बीजेपी नेता पीसी मोहन से हार गए थे।
मार्च 2005 में, एक खूबसूरत टोरंटो पड़ोस में एक सुंदर प्रशिक्षण सुविधा में एक धूप वसंत सुबह, मैं एक नए ग्राहक से मुलाकात की - हम उसे अन्ना कहेंगे - 10 वर्षों में अपने पहले असली प्रशिक्षण सत्र के लिए। जैसे-जैसे हम इतने सारे बुनियादी बॉडीवेट अभ्यासों से गुजरते थे, अन्ना हर आंदोलन के साथ अधिक से अधिक निराश हो गई जिससे उसकी परेशानी हुई और उसे अजीब और बेकार महसूस हुआ। निष्क्रियता के बहुत से वर्षों ने बुनियादी आंदोलनों को मुश्किल बना दिया था, भले ही अन्ना 25 साल पहले एक महान छात्र एथलीट थीं। हो सकता है कि आपने उस समय ऐसा महसूस किया हो... आपके मस्तिष्क को आपके शरीर को क्या करने के बारे में बता रहा था और आपकी मांसपेशियों को पूरा करने में क्या सक्षम था, इसके बीच "डिस्कनेक्ट" से निराश हो गया। और मैंने उसे क्या कहा? 5) यह स्वीकार करने के लिए कि चीजें रातोंरात नहीं बदलेगी, लेकिन समय और दृढ़ता के साथ, वह सफल हो जाएगी। तो छोटे बदलावों को आज शुरू करना शुरू करें, कल के लिए लगातार आदतें बनें जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ बड़े बदलाव आएंगे। वह कुंजी है। कोयले को हीरे में बदलने की तरह। इसमें समय लगता है, लेकिन समय के साथ लगातार दबाव चमत्कार कर सकते हैं। क्रेग बैलान्टाइन, सीएससीएस, पुरुषों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य सलाहकार और फैट लॉस के लिए अशांति प्रशिक्षण के लेखक हैं। क्रेग के अधिक के लिए वसा जलने workouts, वसा हानि युक्तियाँ, और "कार्डियो के डार्क साइड" पर मुफ्त रिपोर्ट, यहां क्लिक करे.
मार्च दो हज़ार पाँच में, एक खूबसूरत टोरंटो पड़ोस में एक सुंदर प्रशिक्षण सुविधा में एक धूप वसंत सुबह, मैं एक नए ग्राहक से मुलाकात की - हम उसे अन्ना कहेंगे - दस वर्षों में अपने पहले असली प्रशिक्षण सत्र के लिए। जैसे-जैसे हम इतने सारे बुनियादी बॉडीवेट अभ्यासों से गुजरते थे, अन्ना हर आंदोलन के साथ अधिक से अधिक निराश हो गई जिससे उसकी परेशानी हुई और उसे अजीब और बेकार महसूस हुआ। निष्क्रियता के बहुत से वर्षों ने बुनियादी आंदोलनों को मुश्किल बना दिया था, भले ही अन्ना पच्चीस साल पहले एक महान छात्र एथलीट थीं। हो सकता है कि आपने उस समय ऐसा महसूस किया हो... आपके मस्तिष्क को आपके शरीर को क्या करने के बारे में बता रहा था और आपकी मांसपेशियों को पूरा करने में क्या सक्षम था, इसके बीच "डिस्कनेक्ट" से निराश हो गया। और मैंने उसे क्या कहा? पाँच) यह स्वीकार करने के लिए कि चीजें रातोंरात नहीं बदलेगी, लेकिन समय और दृढ़ता के साथ, वह सफल हो जाएगी। तो छोटे बदलावों को आज शुरू करना शुरू करें, कल के लिए लगातार आदतें बनें जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ बड़े बदलाव आएंगे। वह कुंजी है। कोयले को हीरे में बदलने की तरह। इसमें समय लगता है, लेकिन समय के साथ लगातार दबाव चमत्कार कर सकते हैं। क्रेग बैलान्टाइन, सीएससीएस, पुरुषों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य सलाहकार और फैट लॉस के लिए अशांति प्रशिक्षण के लेखक हैं। क्रेग के अधिक के लिए वसा जलने workouts, वसा हानि युक्तियाँ, और "कार्डियो के डार्क साइड" पर मुफ्त रिपोर्ट, यहां क्लिक करे.
कोझिकोड, (भाषा)। पड़ोसी देश चीन के कम्युनिस्ट कामरेडों के प्रति दशकों तक झुकाव रखने के बाद माकपा चीनी कम्युन्स्टि पार्टी द्वारा दल में पूंजीवादियों को स्वीकार किए जाने जैसे नए कदमों को आलोचनात्मक दृष्टि से देख रही है। माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी द्वारा पार्टी की 20वीं कांगेस के समक्ष पेश किए गए सैद्धांतिक दस्तावेज मसौदे में कहा गया है कि आर्थिक असमानताओं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां चीन सहित अन्य साम्यवादी देशों में सामने आई हैं जिन्होंने विश्व की वर्तमान सचाइयों का सामना करने के लिए सुधार प्रक्रिया चलाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साम्यवादी बाजार अर्थव्यवस्था अपनाने वाले चीन में पिछले 18 साल में नगरीय. . . ग्रामीण आय का अंतराल 13 गुना हो गया है। चीन में अमेरिका को छोड़कर किसी अन्य देश से अधिक अरबपति हैं। मसौदे में कहा गया है कि चीन में हर साल भ्रष्टाचार के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में प्रशासनिक या पार्टी का अनुशासन तोड़ने के मामले में बहुत से लोगों को जेल भेजा गया है या दंडित किया गया है। माकपा का विचार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ःसीपीसीः के रुख को लेकर गंभीर है जिसने अपनी सोच से साम्राज्यवाद की अवधारणा को हटा दिया है। मसौदे में कहा गया है, साम्राज्यवाद विरोधी दिशा की अनुपस्थिति में, वहां इस बात के संकेत हैं कि राष्ट्रवाद चीनी युवकों की मुख्य भावना बन रहा है। माकपा 2002 में सीपीसी के पार्टी में पूंजीवादियों को स्वीकार किए जाने के फैसले को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती और वह महसूस करती है कि उद्यमियों एवं व्यवसायियों के प्रवेश से पार्टी की सैद्धांतिक और राजनीतिक स्थिति नए दबाव में आ सकती है।
कोझिकोड, । पड़ोसी देश चीन के कम्युनिस्ट कामरेडों के प्रति दशकों तक झुकाव रखने के बाद माकपा चीनी कम्युन्स्टि पार्टी द्वारा दल में पूंजीवादियों को स्वीकार किए जाने जैसे नए कदमों को आलोचनात्मक दृष्टि से देख रही है। माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी द्वारा पार्टी की बीसवीं कांगेस के समक्ष पेश किए गए सैद्धांतिक दस्तावेज मसौदे में कहा गया है कि आर्थिक असमानताओं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां चीन सहित अन्य साम्यवादी देशों में सामने आई हैं जिन्होंने विश्व की वर्तमान सचाइयों का सामना करने के लिए सुधार प्रक्रिया चलाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साम्यवादी बाजार अर्थव्यवस्था अपनाने वाले चीन में पिछले अट्ठारह साल में नगरीय. . . ग्रामीण आय का अंतराल तेरह गुना हो गया है। चीन में अमेरिका को छोड़कर किसी अन्य देश से अधिक अरबपति हैं। मसौदे में कहा गया है कि चीन में हर साल भ्रष्टाचार के हजारों मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में प्रशासनिक या पार्टी का अनुशासन तोड़ने के मामले में बहुत से लोगों को जेल भेजा गया है या दंडित किया गया है। माकपा का विचार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ःसीपीसीः के रुख को लेकर गंभीर है जिसने अपनी सोच से साम्राज्यवाद की अवधारणा को हटा दिया है। मसौदे में कहा गया है, साम्राज्यवाद विरोधी दिशा की अनुपस्थिति में, वहां इस बात के संकेत हैं कि राष्ट्रवाद चीनी युवकों की मुख्य भावना बन रहा है। माकपा दो हज़ार दो में सीपीसी के पार्टी में पूंजीवादियों को स्वीकार किए जाने के फैसले को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती और वह महसूस करती है कि उद्यमियों एवं व्यवसायियों के प्रवेश से पार्टी की सैद्धांतिक और राजनीतिक स्थिति नए दबाव में आ सकती है।
हो जायगा तब सरकारको उसका कोई-कोई निश्चित मर्म सामने रखना ही पड़ेगा। और तभी मैं तुम्हारे पास उसपर अपनी वापत्तियां निश्चित रूपमें भेजूंगा। तबतक तुम पूछताछ करनेवालोंको केवल साधारण जानकारी-भर बैठी रह सकती हो। मैने अभीतक तुम्हें जानबूझकर तारसे कोई सबर नहीं दी क्योंकि हम इस समय यहाँ कोई आन्दोलन नहीं चाहते। भारतसै भनेको प्रकट करते हुए चार पूछवाल की है। किन्तु मैने इवना ही उत्तर दिया कि इसपर बादमें वार पा मभी तो इतना ही कहना चाहिए कि सत्याग्रहको किसी भी बिम तक्तक सन्तोप नहीं होगा अबतक दो माँगें बिना किसी के स्वीकार नहीं की बार्ती - एक तो यह कि १९ ७ का कानून २ रव किया जाये और दूसरी यह कि कसौटीपर परे उतरनेवासे भारतीयोंको पजीबनके कानूनोसे मुक्त रखकर प्रवेश करने दिया जाये । यह विधेयक १९ ७ के एशियाई [ कानूम ] २ को स्पष्ट रूपसेर । करता है यदि वह दूसरी बातको भी उतने ही स्पष्ट रूपमें मान के तो फिर चाहे जन्य बातोंमें यह ना ही बुरा क्यो न हो इम अपने हथियार रखपे। इसका वर्ष नहीं कि हम यहाँ मा बहाँको सरकारको अपनी कठिनाइयोंकि मारेगे परेशान करना बन्य कर बजे परन्तु हम उसके कारण सत्याग्रह शुरू नहीं करेमे । फिलहाल हमारी को भी यही है कि हम अपना मान्योन सेक रहूँ । मात्रिकाएँ भेजनेके मान्दोलनको हम वैमानिक मान्यो कहते है तो इसलिए नही कि इस तरह सत्याग्रह उसका कोई अन्तर सूचित होता हो सत्याग्रह भी उतना ही वैज्ञानिक है जितना कि केवल मात्रिकाएँ भेजना । यह कैसा भुभ संयोग है कि श्री रिच ऐन मौकेपर यहाँ है। मैं समझता हूँ कि में स्वयं इस बात से सहमत हो कि इस समय उमका यहाँ रहना बहाँ रहनकी अपेक्षाही अधिक आवश्यक है। दुम निसंकोच अपनी यह सम्मति प्रकट कर हो कि केप और नेटाके लिए तो यह विषमक हृदसे ज्यादा बुरा है। वहाँ मारतीयो के लिए सैद्धान्तिक समानताका प्रस्त उखना महत्वपूर्ण नही है क्योंकि यह तो वहाँ प्राप्त ही है। इसलिए इस विधेयक के अन्तर्गत व्यावहारिक अधिकारोंका छीन लिया जाना एक बहुत ही मम्भीर और वास्तविक सिकाम की बात है उसका निराकरण बाबस्यक है और जसा कि तुमने देखा होगा केप और नेटासमें हसुरू हो गई है। मैं यही करता हूँ कि यह न कमसेकम इतनी तो होगी हो कि उसका सरकारपर बसर पड़ सके। श्री रिच और श्री पोषक दोनों स्थानों में है। यह देखकर मैं बेफिक हूँ। भी रिष बामा मानपत्र मिलमगर मैं तुम्हारे सुझाबके मुताबिक बकरा एक फम और मूल्यकी पर्ची तुम्हारे पास भेज दूंगा तबा महा हुमा मात्र उनको भेंट कर दूंगा। इस बार में समिति लिए १५ १ देि दिया का है। २. चिखल होन पर भी रि दिनमा सो १८३ १९१९ इंडियन कम
हो जायगा तब सरकारको उसका कोई-कोई निश्चित मर्म सामने रखना ही पड़ेगा। और तभी मैं तुम्हारे पास उसपर अपनी वापत्तियां निश्चित रूपमें भेजूंगा। तबतक तुम पूछताछ करनेवालोंको केवल साधारण जानकारी-भर बैठी रह सकती हो। मैने अभीतक तुम्हें जानबूझकर तारसे कोई सबर नहीं दी क्योंकि हम इस समय यहाँ कोई आन्दोलन नहीं चाहते। भारतसै भनेको प्रकट करते हुए चार पूछवाल की है। किन्तु मैने इवना ही उत्तर दिया कि इसपर बादमें वार पा मभी तो इतना ही कहना चाहिए कि सत्याग्रहको किसी भी बिम तक्तक सन्तोप नहीं होगा अबतक दो माँगें बिना किसी के स्वीकार नहीं की बार्ती - एक तो यह कि उन्नीस सात का कानून दो रव किया जाये और दूसरी यह कि कसौटीपर परे उतरनेवासे भारतीयोंको पजीबनके कानूनोसे मुक्त रखकर प्रवेश करने दिया जाये । यह विधेयक उन्नीस सात के एशियाई [ कानूम ] दो को स्पष्ट रूपसेर । करता है यदि वह दूसरी बातको भी उतने ही स्पष्ट रूपमें मान के तो फिर चाहे जन्य बातोंमें यह ना ही बुरा क्यो न हो इम अपने हथियार रखपे। इसका वर्ष नहीं कि हम यहाँ मा बहाँको सरकारको अपनी कठिनाइयोंकि मारेगे परेशान करना बन्य कर बजे परन्तु हम उसके कारण सत्याग्रह शुरू नहीं करेमे । फिलहाल हमारी को भी यही है कि हम अपना मान्योन सेक रहूँ । मात्रिकाएँ भेजनेके मान्दोलनको हम वैमानिक मान्यो कहते है तो इसलिए नही कि इस तरह सत्याग्रह उसका कोई अन्तर सूचित होता हो सत्याग्रह भी उतना ही वैज्ञानिक है जितना कि केवल मात्रिकाएँ भेजना । यह कैसा भुभ संयोग है कि श्री रिच ऐन मौकेपर यहाँ है। मैं समझता हूँ कि में स्वयं इस बात से सहमत हो कि इस समय उमका यहाँ रहना बहाँ रहनकी अपेक्षाही अधिक आवश्यक है। दुम निसंकोच अपनी यह सम्मति प्रकट कर हो कि केप और नेटाके लिए तो यह विषमक हृदसे ज्यादा बुरा है। वहाँ मारतीयो के लिए सैद्धान्तिक समानताका प्रस्त उखना महत्वपूर्ण नही है क्योंकि यह तो वहाँ प्राप्त ही है। इसलिए इस विधेयक के अन्तर्गत व्यावहारिक अधिकारोंका छीन लिया जाना एक बहुत ही मम्भीर और वास्तविक सिकाम की बात है उसका निराकरण बाबस्यक है और जसा कि तुमने देखा होगा केप और नेटासमें हसुरू हो गई है। मैं यही करता हूँ कि यह न कमसेकम इतनी तो होगी हो कि उसका सरकारपर बसर पड़ सके। श्री रिच और श्री पोषक दोनों स्थानों में है। यह देखकर मैं बेफिक हूँ। भी रिष बामा मानपत्र मिलमगर मैं तुम्हारे सुझाबके मुताबिक बकरा एक फम और मूल्यकी पर्ची तुम्हारे पास भेज दूंगा तबा महा हुमा मात्र उनको भेंट कर दूंगा। इस बार में समिति लिए पंद्रह एक देि दिया का है। दो. चिखल होन पर भी रि दिनमा सो एक सौ तिरासी एक हज़ार नौ सौ उन्नीस इंडियन कम
छत्तीसगढ़ सरकार जंगलों में होने वाली पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ियों की तस्करी को लेकर बेहद सख्त नजर आ रही है। राज्य का वन विभाग लगातार इस दिशा में कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में वन विभाग द्वारा शुक्रवार को छापामार कार्रवाई के दौरान सुकमा वनमंडल अंतर्गत 10 लाख रूपए से अधिक मूल्य की अवैध लकड़ी की जब्ती की कार्रवाई की गई। आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण के तहत कार्रवाई जारी है। मुख्य वनसंरक्षक मो. शाहिद से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दौरान सुकमा के तीन विभिन्न वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नीलावरम तथा आसपास के क्षेत्रों में विभागीय टीम द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाया गया। टीम में विभाग के 30 से अधिक कर्मचारियों का सक्रिय योगदान रहा। गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा वन अपराधों की रोकथाम तथा वनो की सुरक्षा के लिए अभियान लगातार जारी है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी कई कार्यक्रम चला रखे हैं,जहां सरकार वृक्षों को बचाने और नए पेड़ लगाने के लिए अभियान चला रही है,वहीं जंगलो में होने वाली कटाई को लेकर भी सख्त एक्शन ले रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार जंगलों में होने वाली पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ियों की तस्करी को लेकर बेहद सख्त नजर आ रही है। राज्य का वन विभाग लगातार इस दिशा में कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में वन विभाग द्वारा शुक्रवार को छापामार कार्रवाई के दौरान सुकमा वनमंडल अंतर्गत दस लाख रूपए से अधिक मूल्य की अवैध लकड़ी की जब्ती की कार्रवाई की गई। आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण के तहत कार्रवाई जारी है। मुख्य वनसंरक्षक मो. शाहिद से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दौरान सुकमा के तीन विभिन्न वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नीलावरम तथा आसपास के क्षेत्रों में विभागीय टीम द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाया गया। टीम में विभाग के तीस से अधिक कर्मचारियों का सक्रिय योगदान रहा। गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा वन अपराधों की रोकथाम तथा वनो की सुरक्षा के लिए अभियान लगातार जारी है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी कई कार्यक्रम चला रखे हैं,जहां सरकार वृक्षों को बचाने और नए पेड़ लगाने के लिए अभियान चला रही है,वहीं जंगलो में होने वाली कटाई को लेकर भी सख्त एक्शन ले रही है।
हालांकि मंदड़ियों ने बैलों को खुली छूट देने से परहेज किया, लेकिन बिटकॉइन कैश अपनी तात्कालिक बाधा को पार करने में कामयाब रहा और उसे 23.6% फाइबोनैचि स्तर पर समर्थन मिला। दूसरी ओर, भले ही डॉगकोइन और सोलाना टेक्निकल ने थोड़ा तेज पूर्वाग्रह प्रदर्शित किया, लेकिन उन्हें वॉल्यूम ऑसिलेटर के साथ मंदी के विचलन का सामना करना पड़ा। डॉगकोइन (DOGE) पिछले 55 दिनों में लगभग 48.96% पीछे हटने के बाद, सबसे बड़े मेम सिक्के को $0.162 और $0.182-अंक के बीच एक दोलन सीमा मिली। पिछले 19 दिनों में मंदड़ियों ने $0.162 के स्तर को छह बार फिर से परीक्षण किया, लेकिन सांडों ने अपनी पकड़ बनाए रखी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वॉल्यूम थरथरानवाला निचले स्तर को चिह्नित किया, जबकि मूल्य कार्रवाई में 23.6% फाइबोनैचि स्तर की ओर वृद्धि देखी गई। अब, जैसे ही DOGE ने $0.175 के निशान को पार किया, सुपरट्रेंड बैल के लिए आशान्वित लग रहा था क्योंकि यह खरीद संकेतों को चमकाता था। प्रेस समय के अनुसार, DOGE का कारोबार $0.1765 पर हुआ। आरएसआई पिछले तीन दिनों में लगातार सुधार हुआ और खरीदारी की ताकत को चुना। इसके अलावा, डीएमआई एक तेजी का पूर्वाग्रह प्रदर्शित किया लेकिन एडीएक्स काफी हद तक कमजोर रहा। 15 दिसंबर को कील (हरा) गिरने के बाद से $ 181 का स्तर ऑल्ट के लिए एक महत्वपूर्ण चिह्न बन गया है। SOL मंदड़ियों ने इस स्तर को सुनिश्चित किया है लेकिन पिछले दस दिनों में सांडों को उच्च निम्न स्तर पर जाने से रोकने में विफल रहे हैं। DOGE की तरह, वॉल्यूम थरथरानवाला पर चिह्नित निचले चढ़ाव पर ध्यान देना आवश्यक है, जो एक कमजोर तेजी का संकेत है। पांचवीं सबसे बड़ी क्रिप्टो ने पिछले तीन दिनों में वी-आकार की वसूली के बाद अपने 4-घंटे के चार्ट पर एक आरोही त्रिकोण का गठन किया। तत्काल परीक्षण समर्थन निचली ट्रेंडलाइन (सफेद) के पास खड़ा था जो कि 20-50 एसएमए के साथ $ 178.4-अंक के आसपास था। प्रेस समय में, एसओएल $ 178.5675 पर कारोबार कर रहा था। आरएसआई मध्य रेखा से थोड़ा नीचे होने के बाद तटस्थता दिखाई। आगे, डीएमआई एक मामूली मंदी के पूर्वाग्रह को दर्शाया। लेकिन एडीएक्स ने एसओएल के लिए कमजोर दिशात्मक प्रवृत्ति प्रदर्शित की। बिटकॉइन कैश (बीसीएच) अपने 4-घंटे के चार्ट पर एक अवरोही चौड़ीकरण (उलट पैटर्न) बनाने के बाद, altcoin ने 23.6% फाइबोनैचि स्तर से ऊपर अपेक्षित ब्रेकआउट देखा। मंदड़ियों ने $419 के निशान को लगभग छह बार पुनः परीक्षण किया, जबकि सांडों ने लगातार इस परीक्षण बिंदु को बरकरार रखा। 20 दिसंबर से ऑल्ट में 6.58% की दो-दिवसीय छलांग देखी गई, लेकिन इसके अल्पावधि प्रतिरोध से $ 446-अंक पर एक पुलबैक देखा गया। तब से, इसमें लगभग 2.58% की गिरावट आई है और 23.6% के स्तर पर समर्थन मिला है जो 20 (लाल) और 50 (हरा) के साथ भी ओवरलैप हुआ है। एसएमए. प्रेस समय के अनुसार, BCH $438.3 पर कारोबार कर रहा था। आरएसआई अपट्रेंड चमकने के बाद मिडलाइन पर खड़ा हुआ। इसके अलावा, ओबीवी पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट देखी जा रही है। लेकिन वो एडीएक्स एक अत्यंत कमजोर दिशात्मक प्रवृत्ति दिखाई।
हालांकि मंदड़ियों ने बैलों को खुली छूट देने से परहेज किया, लेकिन बिटकॉइन कैश अपनी तात्कालिक बाधा को पार करने में कामयाब रहा और उसे तेईस.छः% फाइबोनैचि स्तर पर समर्थन मिला। दूसरी ओर, भले ही डॉगकोइन और सोलाना टेक्निकल ने थोड़ा तेज पूर्वाग्रह प्रदर्शित किया, लेकिन उन्हें वॉल्यूम ऑसिलेटर के साथ मंदी के विचलन का सामना करना पड़ा। डॉगकोइन पिछले पचपन दिनों में लगभग अड़तालीस.छियानवे% पीछे हटने के बाद, सबसे बड़े मेम सिक्के को शून्य दशमलव एक सौ बासठ डॉलर और शून्य दशमलव एक सौ बयासी डॉलर-अंक के बीच एक दोलन सीमा मिली। पिछले उन्नीस दिनों में मंदड़ियों ने शून्य दशमलव एक सौ बासठ डॉलर के स्तर को छह बार फिर से परीक्षण किया, लेकिन सांडों ने अपनी पकड़ बनाए रखी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वॉल्यूम थरथरानवाला निचले स्तर को चिह्नित किया, जबकि मूल्य कार्रवाई में तेईस.छः% फाइबोनैचि स्तर की ओर वृद्धि देखी गई। अब, जैसे ही DOGE ने शून्य दशमलव एक सौ पचहत्तर डॉलर के निशान को पार किया, सुपरट्रेंड बैल के लिए आशान्वित लग रहा था क्योंकि यह खरीद संकेतों को चमकाता था। प्रेस समय के अनुसार, DOGE का कारोबार शून्य दशमलव एक हज़ार सात सौ पैंसठ डॉलर पर हुआ। आरएसआई पिछले तीन दिनों में लगातार सुधार हुआ और खरीदारी की ताकत को चुना। इसके अलावा, डीएमआई एक तेजी का पूर्वाग्रह प्रदर्शित किया लेकिन एडीएक्स काफी हद तक कमजोर रहा। पंद्रह दिसंबर को कील गिरने के बाद से एक सौ इक्यासी डॉलर का स्तर ऑल्ट के लिए एक महत्वपूर्ण चिह्न बन गया है। SOL मंदड़ियों ने इस स्तर को सुनिश्चित किया है लेकिन पिछले दस दिनों में सांडों को उच्च निम्न स्तर पर जाने से रोकने में विफल रहे हैं। DOGE की तरह, वॉल्यूम थरथरानवाला पर चिह्नित निचले चढ़ाव पर ध्यान देना आवश्यक है, जो एक कमजोर तेजी का संकेत है। पांचवीं सबसे बड़ी क्रिप्टो ने पिछले तीन दिनों में वी-आकार की वसूली के बाद अपने चार-घंटे के चार्ट पर एक आरोही त्रिकोण का गठन किया। तत्काल परीक्षण समर्थन निचली ट्रेंडलाइन के पास खड़ा था जो कि बीस-पचास एसएमए के साथ एक सौ अठहत्तर दशमलव चार डॉलर-अंक के आसपास था। प्रेस समय में, एसओएल एक सौ अठहत्तर दशमलव पाँच हज़ार छः सौ पचहत्तर डॉलर पर कारोबार कर रहा था। आरएसआई मध्य रेखा से थोड़ा नीचे होने के बाद तटस्थता दिखाई। आगे, डीएमआई एक मामूली मंदी के पूर्वाग्रह को दर्शाया। लेकिन एडीएक्स ने एसओएल के लिए कमजोर दिशात्मक प्रवृत्ति प्रदर्शित की। बिटकॉइन कैश अपने चार-घंटे के चार्ट पर एक अवरोही चौड़ीकरण बनाने के बाद, altcoin ने तेईस.छः% फाइबोनैचि स्तर से ऊपर अपेक्षित ब्रेकआउट देखा। मंदड़ियों ने चार सौ उन्नीस डॉलर के निशान को लगभग छह बार पुनः परीक्षण किया, जबकि सांडों ने लगातार इस परीक्षण बिंदु को बरकरार रखा। बीस दिसंबर से ऑल्ट में छः.अट्ठावन% की दो-दिवसीय छलांग देखी गई, लेकिन इसके अल्पावधि प्रतिरोध से चार सौ छियालीस डॉलर-अंक पर एक पुलबैक देखा गया। तब से, इसमें लगभग दो.अट्ठावन% की गिरावट आई है और तेईस.छः% के स्तर पर समर्थन मिला है जो बीस और पचास के साथ भी ओवरलैप हुआ है। एसएमए. प्रेस समय के अनुसार, BCH चार सौ अड़तीस दशमलव तीन डॉलर पर कारोबार कर रहा था। आरएसआई अपट्रेंड चमकने के बाद मिडलाइन पर खड़ा हुआ। इसके अलावा, ओबीवी पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट देखी जा रही है। लेकिन वो एडीएक्स एक अत्यंत कमजोर दिशात्मक प्रवृत्ति दिखाई।
ब्राजील में रहने वाले दुनिया के सबसे अकेले शख्स की मौत हो गई। मौत की जानकारी 23 अगस्त को मिली। शख्स ब्राजील के अमेजन के वर्षावनों में रहता था। इसे लोग मैन ऑफ होल कहते थे। वह 26 साल से जंगल में अकेले रह रहा था। आज तक उसको किसी ने देखा नहीं था और न ही उसकी कोई स्पष्ट तस्वीर थी। शख्स की उम्र 60 के करीब बताई जा रही है। यह अपने कबीले का आखिरी का मेंबर था। बाकी मेंबर को किसानों ने अपनी जमीन बढ़ाने के लिए मार दिया था। ब्राजील के कई लोगों ने अमेजन की जनजातियों के खत्म होने पर शोक जताया है। इसका शव भूसे की झोपड़ी के बाहर एक झूले में मिला। मौत की वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी। शख्स को मैन ऑफ होल के नाम से जाना जाता था, क्योंकि इसने 50 से ज्यादा झोपड़ियां बनाई थीं और इनमें 10 फीट के गड्ढ़े कर दिए थे। गड्ढ़ो में वह खुद रहता था और जंगली सूअर का शिकार भी करता था। यह दुनिया का सबसे अकेला मेंबर था, क्योंकि इसके कबीले में रहने वाले लोगों को किसानों ने 1970 के दशक में मार दिया था। किसानों ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि वे अपनी भूमि काे बढ़ाना चाहते थे। कबीले के लोगों के मरने के बाद वह किसानों से बचने के लिए इलाके की निगरानी खुद करता था। अगर बाहरी दुनिया का कोई भी व्यक्ति उससे कांटेक्ट करने की कोशिश करता तो वह तीर से हमला कर देता था। आज तक इस शख्स की कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई, क्योंकि यह किसी से मिलता ही नहीं था। कोई मिलने भी जाता था तो उस पर हमला कर देता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस शख्स के बारे में 1996 में पता चला था। गश्त के दौरान एक व्यक्ति ने एक झोपड़ी के बाहर इस शख्स को केले के पत्तों से बने पंखों में ढ़का हुआ पाया। शख्स ने मरने के पहले खुद केले के पत्तों से बने पंख भी लगाए थे। शव मिलने के करीब 40 दिन पहले इस व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। जहां वह शख्स रहता था वहां घुसपैठ के कोई सबूत नहीं मिले। उसकी झोपड़ी में कुछ उथल-पुथल नहीं हुई थी। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद यह पता लगाया जा सकेगा कि उसे कोई बीमारी तो नहीं थी। शख्स को किसी ने देखा नहीं था इसलिए वह किस भाषा में बात करता था और किस जाति का था कुछ पता नहीं। बताया जा रहा है कि ब्राजील में करीब 240 जनजातियां रहती हैं। इनमें से कई खतरे में हैं, क्योंकि वुडकटर लगातार पेड़ काट रहे हैं और किसान अपनी जमीन को बढ़ाने के लिए जनजातीय लोगों को मार रहे हैं। कई साल पुराने सबूत से पता चलता है कि उसने मक्का, मैनियोक, पपीता और केले के पेड़ भी लगाए थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ब्राजील में रहने वाले दुनिया के सबसे अकेले शख्स की मौत हो गई। मौत की जानकारी तेईस अगस्त को मिली। शख्स ब्राजील के अमेजन के वर्षावनों में रहता था। इसे लोग मैन ऑफ होल कहते थे। वह छब्बीस साल से जंगल में अकेले रह रहा था। आज तक उसको किसी ने देखा नहीं था और न ही उसकी कोई स्पष्ट तस्वीर थी। शख्स की उम्र साठ के करीब बताई जा रही है। यह अपने कबीले का आखिरी का मेंबर था। बाकी मेंबर को किसानों ने अपनी जमीन बढ़ाने के लिए मार दिया था। ब्राजील के कई लोगों ने अमेजन की जनजातियों के खत्म होने पर शोक जताया है। इसका शव भूसे की झोपड़ी के बाहर एक झूले में मिला। मौत की वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी। शख्स को मैन ऑफ होल के नाम से जाना जाता था, क्योंकि इसने पचास से ज्यादा झोपड़ियां बनाई थीं और इनमें दस फीट के गड्ढ़े कर दिए थे। गड्ढ़ो में वह खुद रहता था और जंगली सूअर का शिकार भी करता था। यह दुनिया का सबसे अकेला मेंबर था, क्योंकि इसके कबीले में रहने वाले लोगों को किसानों ने एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में मार दिया था। किसानों ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि वे अपनी भूमि काे बढ़ाना चाहते थे। कबीले के लोगों के मरने के बाद वह किसानों से बचने के लिए इलाके की निगरानी खुद करता था। अगर बाहरी दुनिया का कोई भी व्यक्ति उससे कांटेक्ट करने की कोशिश करता तो वह तीर से हमला कर देता था। आज तक इस शख्स की कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई, क्योंकि यह किसी से मिलता ही नहीं था। कोई मिलने भी जाता था तो उस पर हमला कर देता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस शख्स के बारे में एक हज़ार नौ सौ छियानवे में पता चला था। गश्त के दौरान एक व्यक्ति ने एक झोपड़ी के बाहर इस शख्स को केले के पत्तों से बने पंखों में ढ़का हुआ पाया। शख्स ने मरने के पहले खुद केले के पत्तों से बने पंख भी लगाए थे। शव मिलने के करीब चालीस दिन पहले इस व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। जहां वह शख्स रहता था वहां घुसपैठ के कोई सबूत नहीं मिले। उसकी झोपड़ी में कुछ उथल-पुथल नहीं हुई थी। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद यह पता लगाया जा सकेगा कि उसे कोई बीमारी तो नहीं थी। शख्स को किसी ने देखा नहीं था इसलिए वह किस भाषा में बात करता था और किस जाति का था कुछ पता नहीं। बताया जा रहा है कि ब्राजील में करीब दो सौ चालीस जनजातियां रहती हैं। इनमें से कई खतरे में हैं, क्योंकि वुडकटर लगातार पेड़ काट रहे हैं और किसान अपनी जमीन को बढ़ाने के लिए जनजातीय लोगों को मार रहे हैं। कई साल पुराने सबूत से पता चलता है कि उसने मक्का, मैनियोक, पपीता और केले के पेड़ भी लगाए थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूलों के खुलने को लेकर अभी भले ही संशय बना हुआ है, लेकिन सरकार ऑनलाइन पढ़ाई को समय पर शुरू करना चाहती है। मानव संसाधन विकास मंत्रलय में इसको लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। स्कूलों के लिए एक क्लास-एक चैनल की प्रस्तावित योजना के तहत 12 नए टीवी चैनलों को जून के अंत तक शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही दूसरे माध्यमों से भी छात्रों को घर बैठे ही पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी चल रही है। स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर नए सिरे से यह हलचल उस समय शुरू हुई है, जब स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां खत्म होने वाली हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों की छुट्टियां 19 जून को खत्म हो रही हैं। वहीं ज्यादातर राज्यों के स्कूलों की छुट्टियां भी 30 जून तक खत्म हो रही हैं। यानी एक जुलाई से स्कूल खुल जाना चाहिए। बहरहाल, स्कूल नहीं खुले तब भी छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की तैयारी है। इसके तहत स्कूलों के लिए प्रस्तावित 12 नए टीवी चैनलों को अब जून के अंत तक शुरू करने की योजना बनाई गई है। एनसीईआरटी और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) दोनों को ही जल्द-से-जल्द इससे जुड़ी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया है। एनसीईआरटी के एक करार के तहत रोटरी इंडिया ई-कंटेट तैयार करने का काम करेगी, जिसे एनसीईआरटी की मंजूरी के बाद टीवी चैनल पर प्रसारित किया जाएगा। स्कूलों के प्रस्तावित सभी 12 चैनल 24 घंटे संचालित होंगे। हालांकि इनमें हर दिन छह घंटे की ही नई अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जो दिन में तीन बार रिपीट की जाएगी। इसके साथ ही जिन छात्रों के पास इंटरनेट या मोबाइल है, उन्हें उसके जरिये भी पढ़ाने की योजना है।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूलों के खुलने को लेकर अभी भले ही संशय बना हुआ है, लेकिन सरकार ऑनलाइन पढ़ाई को समय पर शुरू करना चाहती है। मानव संसाधन विकास मंत्रलय में इसको लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। स्कूलों के लिए एक क्लास-एक चैनल की प्रस्तावित योजना के तहत बारह नए टीवी चैनलों को जून के अंत तक शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही दूसरे माध्यमों से भी छात्रों को घर बैठे ही पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी चल रही है। स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर नए सिरे से यह हलचल उस समय शुरू हुई है, जब स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां खत्म होने वाली हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों की छुट्टियां उन्नीस जून को खत्म हो रही हैं। वहीं ज्यादातर राज्यों के स्कूलों की छुट्टियां भी तीस जून तक खत्म हो रही हैं। यानी एक जुलाई से स्कूल खुल जाना चाहिए। बहरहाल, स्कूल नहीं खुले तब भी छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की तैयारी है। इसके तहत स्कूलों के लिए प्रस्तावित बारह नए टीवी चैनलों को अब जून के अंत तक शुरू करने की योजना बनाई गई है। एनसीईआरटी और केंद्रीय विद्यालय संगठन दोनों को ही जल्द-से-जल्द इससे जुड़ी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया है। एनसीईआरटी के एक करार के तहत रोटरी इंडिया ई-कंटेट तैयार करने का काम करेगी, जिसे एनसीईआरटी की मंजूरी के बाद टीवी चैनल पर प्रसारित किया जाएगा। स्कूलों के प्रस्तावित सभी बारह चैनल चौबीस घंटाटे संचालित होंगे। हालांकि इनमें हर दिन छह घंटे की ही नई अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जो दिन में तीन बार रिपीट की जाएगी। इसके साथ ही जिन छात्रों के पास इंटरनेट या मोबाइल है, उन्हें उसके जरिये भी पढ़ाने की योजना है।
कुमकुम, चंदन और विभूति - क्यों बांटे जाते हैं मंदिरों में? मंदिरों से लेकर स्त्रियों के माथे तक पर कुमकुम और विभूति जैसी चीज़ें इस्तेमाल होती हैं। मंदिरों में भी इन्हें बांटा जाता है। इस परंपरा के पीछे की वजह क्या है? प्रश्न : सद्गुरु, मंदिर और पूजास्थलों पर, हमें कुमकुम, चंदन और विभूति दी जाती है। क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? सद्गुरुः कुछ चीज़ें, दूसरी चीजों के मुकाबले अधिक तेजी से ऊर्जा को समेट पती हैं। अगर मेरे बगल में एक स्टील की रॉड, थोड़ी विभूति और एक इंसान खड़ा हो, तो वे मुझसे कितनी ऊर्जा ग्रहण करेंगे, वह अलग-अलग होगा। उन सभी के पास बराबर अवसर होता है, लेकिन वे सभी समान रूप से ऊर्जा को सोखते और कायम नहीं रखते। कुछ ऐसे पदार्थों की पहचान की गई है, जो ऊर्जा को आसानी से समेट पाते हैं, और उसे अपने पास कायम रख पाते हैं। उनमें एक विभूति है, जो बहुत ही संवेदनशील पदार्थ है। आप आसानी से उसे ऊर्जावान बनाकर किसी को दे सकते हैं। कुमकुम भी इसी तरह है। चंदन का लेप भी कुछ हद तक ऐसा ही है, लेकिन मैं इनमें से विभूति को सबसे ऊपर रखूंगा। कुमकुम कैसे बनाया जाता है? कुमकुम के रंग से धोखा न खाएं। कुमकुम हल्दी और चूने के मिश्रण से बनाया जाता है। जैसा कि लिंगभैरवी का कुमकुम बनाया जाता है। दुर्भाग्यवश, कई स्थानों पर यह सिर्फ एक कैमिकल पाउडर होता है। हल्दी में बहुत जबरदस्त गुण होते हैं। इस संस्कृति में इसे शुभ माना जाता है क्योंकि इसमें एक खास गुण होता है जिसे हमारी खुशहाली के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हमारा जीवन कैसा होगा, यह इससे तय होता है कि हमारी ऊर्जा, शरीर और मन कैसे काम करते हैं। वह आपके आस-पास की स्थितियों पर निर्भर नहीं करता। इस संस्कृति में यह तकनीक विकसित की गई कि अपनी ऊर्जा को एक खास दिशा में मोड़ने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अब अधिकांश महिलाएं कुमकुम के बदले प्लास्टिक का इस्तेमाल करने लगी हैं। आप विभूति या कुमकुम या हल्दी का इस्तेमाल कर सकती हैं या अगर आप नहीं चाहतीं, तो कुछ भी इस्तेमाल मत कीजिए। कुछ न लगाने में कोई बुराई नहीं है, मगर प्लास्टिक मत लगाइए। प्लास्टिक लगाना ऐसा ही है जैसे आपने अपनी तीसरी आंख बंद कर ली हो और उसे खोलना नहीं चाहते! महिलाएं कुंकुम क्यों लगाती हैं? प्रश्नः विवाहित स्त्रियों को मांग में कुमकुम क्यों लगाना होता है? उसकी क्या अहमियत है? सद्गुरुः महत्वपूर्ण चीज यह है कि वह हल्दी है। उसे लगाने से सेहत संबंधी और अन्य फायदे हैं। दूसरी चीज यह है कि उसे समाज में एक निशान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी स्त्री ने कुमकुम लगाया हुआ है, तो वह विवाहित है और इसलिए उसे अप्रोच नहीं करना है। यह सिर्फ एक संकेत है ताकि आपको हर किसी को यह बात बतानी न पड़े। पश्चिमी देशों में किसी को अंगूठी पहने देखकर आप जान जाते हैं कि वह शादीशुदा है। यहां अगर किसी औरत ने बिछुए पहने हैं और सिंदूर लगाया है, तो वह शादीशुदा है। यानी अब उसकी दूसरी जिम्मेदारियां भी हैं। यह समाज में व्यवस्था लाने का एक तरीका है, किसी की सामाजिक स्थिति पता लगाने का एक तरीका है। कई मंदिरों में अब भी बहुत शक्तिशाली ऊर्जा का कम्पन है, इसलिए इन चीज़ों को कुछ देर के लिए वहां रखा जाता है ताकि वे खुद में थोड़ी ऊर्जा समेट लें। इसका मकसद ऊर्जा को बांटना है, इसलिए वहां आने वाले लोगों को वह दिया जाता है।
कुमकुम, चंदन और विभूति - क्यों बांटे जाते हैं मंदिरों में? मंदिरों से लेकर स्त्रियों के माथे तक पर कुमकुम और विभूति जैसी चीज़ें इस्तेमाल होती हैं। मंदिरों में भी इन्हें बांटा जाता है। इस परंपरा के पीछे की वजह क्या है? प्रश्न : सद्गुरु, मंदिर और पूजास्थलों पर, हमें कुमकुम, चंदन और विभूति दी जाती है। क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? सद्गुरुः कुछ चीज़ें, दूसरी चीजों के मुकाबले अधिक तेजी से ऊर्जा को समेट पती हैं। अगर मेरे बगल में एक स्टील की रॉड, थोड़ी विभूति और एक इंसान खड़ा हो, तो वे मुझसे कितनी ऊर्जा ग्रहण करेंगे, वह अलग-अलग होगा। उन सभी के पास बराबर अवसर होता है, लेकिन वे सभी समान रूप से ऊर्जा को सोखते और कायम नहीं रखते। कुछ ऐसे पदार्थों की पहचान की गई है, जो ऊर्जा को आसानी से समेट पाते हैं, और उसे अपने पास कायम रख पाते हैं। उनमें एक विभूति है, जो बहुत ही संवेदनशील पदार्थ है। आप आसानी से उसे ऊर्जावान बनाकर किसी को दे सकते हैं। कुमकुम भी इसी तरह है। चंदन का लेप भी कुछ हद तक ऐसा ही है, लेकिन मैं इनमें से विभूति को सबसे ऊपर रखूंगा। कुमकुम कैसे बनाया जाता है? कुमकुम के रंग से धोखा न खाएं। कुमकुम हल्दी और चूने के मिश्रण से बनाया जाता है। जैसा कि लिंगभैरवी का कुमकुम बनाया जाता है। दुर्भाग्यवश, कई स्थानों पर यह सिर्फ एक कैमिकल पाउडर होता है। हल्दी में बहुत जबरदस्त गुण होते हैं। इस संस्कृति में इसे शुभ माना जाता है क्योंकि इसमें एक खास गुण होता है जिसे हमारी खुशहाली के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हमारा जीवन कैसा होगा, यह इससे तय होता है कि हमारी ऊर्जा, शरीर और मन कैसे काम करते हैं। वह आपके आस-पास की स्थितियों पर निर्भर नहीं करता। इस संस्कृति में यह तकनीक विकसित की गई कि अपनी ऊर्जा को एक खास दिशा में मोड़ने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अब अधिकांश महिलाएं कुमकुम के बदले प्लास्टिक का इस्तेमाल करने लगी हैं। आप विभूति या कुमकुम या हल्दी का इस्तेमाल कर सकती हैं या अगर आप नहीं चाहतीं, तो कुछ भी इस्तेमाल मत कीजिए। कुछ न लगाने में कोई बुराई नहीं है, मगर प्लास्टिक मत लगाइए। प्लास्टिक लगाना ऐसा ही है जैसे आपने अपनी तीसरी आंख बंद कर ली हो और उसे खोलना नहीं चाहते! महिलाएं कुंकुम क्यों लगाती हैं? प्रश्नः विवाहित स्त्रियों को मांग में कुमकुम क्यों लगाना होता है? उसकी क्या अहमियत है? सद्गुरुः महत्वपूर्ण चीज यह है कि वह हल्दी है। उसे लगाने से सेहत संबंधी और अन्य फायदे हैं। दूसरी चीज यह है कि उसे समाज में एक निशान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी स्त्री ने कुमकुम लगाया हुआ है, तो वह विवाहित है और इसलिए उसे अप्रोच नहीं करना है। यह सिर्फ एक संकेत है ताकि आपको हर किसी को यह बात बतानी न पड़े। पश्चिमी देशों में किसी को अंगूठी पहने देखकर आप जान जाते हैं कि वह शादीशुदा है। यहां अगर किसी औरत ने बिछुए पहने हैं और सिंदूर लगाया है, तो वह शादीशुदा है। यानी अब उसकी दूसरी जिम्मेदारियां भी हैं। यह समाज में व्यवस्था लाने का एक तरीका है, किसी की सामाजिक स्थिति पता लगाने का एक तरीका है। कई मंदिरों में अब भी बहुत शक्तिशाली ऊर्जा का कम्पन है, इसलिए इन चीज़ों को कुछ देर के लिए वहां रखा जाता है ताकि वे खुद में थोड़ी ऊर्जा समेट लें। इसका मकसद ऊर्जा को बांटना है, इसलिए वहां आने वाले लोगों को वह दिया जाता है।
टोहाना, 17 सितंबर (निस) गन्ना उत्पादक किसानों ने शुगर मिल गेट पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान चीनी मिल को चलाने की मांग कर रहे हैं, मगर प्राइवेट मिल मालिक मशीनों को उखाड़ कर पंजाब ले जाने की कार्रवाई कर रहे हैं। गन्ना उत्पादक किसानों ने सरकार एवं प्रशासन को चेताया कि प्राइवेट मिल मालिकों को मशीनरी उखाड़ने नहीं दिया जाएगा। किसानों की अगुआई किसान नेता चांदी राम कड़वासरा ने की। मंच संचालन ढाणी डूल्ट के राजबीर सोनी ने किया। कड़वासरा ने कहा कि धान की पराली जलाने व जल संरक्षण की समस्या को लेकर अगर सरकार गंभीर है, तो चीनी मिल को चलाना वर्तमान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चीनी मिल चलेगी तो इलाका में गन्ने की पैदावार अधिक मात्रा में होगी। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर भी गिर रहा है। इसलिए गन्ना बिजाई होने पर पानी की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि जिला फतेहाबाद की सबसे बड़ी औद्योगिक इकाई का प्राइवेट मिल मालिक नामोनिशान मिटाने पर तुले हुए हैं। इस अवसर पर कानूनी प्रक्रिया को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें भगवान पाल सिंह को प्रधान, रामकुमार शर्मा को सचिव, अजय कुमार को कोषाध्यक्ष व चांदी राम, करनैल सिंह, मास्टर करण सिंह को शामिल किया है। प्रदर्शनकारियों में किसान संघर्ष समिति के जिला प्रधान ओमप्रकाश मंडा, बलवीर सिंह दहिया ढाणी डूल्ट, भाजपा नेता रामनारायण विश्नोई आदि ने सीएम व डिप्टी सीएम के खिलाफ प्रदर्शन किया।
टोहाना, सत्रह सितंबर गन्ना उत्पादक किसानों ने शुगर मिल गेट पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान चीनी मिल को चलाने की मांग कर रहे हैं, मगर प्राइवेट मिल मालिक मशीनों को उखाड़ कर पंजाब ले जाने की कार्रवाई कर रहे हैं। गन्ना उत्पादक किसानों ने सरकार एवं प्रशासन को चेताया कि प्राइवेट मिल मालिकों को मशीनरी उखाड़ने नहीं दिया जाएगा। किसानों की अगुआई किसान नेता चांदी राम कड़वासरा ने की। मंच संचालन ढाणी डूल्ट के राजबीर सोनी ने किया। कड़वासरा ने कहा कि धान की पराली जलाने व जल संरक्षण की समस्या को लेकर अगर सरकार गंभीर है, तो चीनी मिल को चलाना वर्तमान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चीनी मिल चलेगी तो इलाका में गन्ने की पैदावार अधिक मात्रा में होगी। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर भी गिर रहा है। इसलिए गन्ना बिजाई होने पर पानी की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि जिला फतेहाबाद की सबसे बड़ी औद्योगिक इकाई का प्राइवेट मिल मालिक नामोनिशान मिटाने पर तुले हुए हैं। इस अवसर पर कानूनी प्रक्रिया को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें भगवान पाल सिंह को प्रधान, रामकुमार शर्मा को सचिव, अजय कुमार को कोषाध्यक्ष व चांदी राम, करनैल सिंह, मास्टर करण सिंह को शामिल किया है। प्रदर्शनकारियों में किसान संघर्ष समिति के जिला प्रधान ओमप्रकाश मंडा, बलवीर सिंह दहिया ढाणी डूल्ट, भाजपा नेता रामनारायण विश्नोई आदि ने सीएम व डिप्टी सीएम के खिलाफ प्रदर्शन किया।
* भायंमित * स्वाध्याय के अनूठे ग्रन्थ विश्व की पहेली [ लेखक - श्री बाबू पूर्णचन्द्र जी एडवोकेट ] पुस्तक का यह द्वितीय संशोधित व परिवधित संस्करण है। ससार मे अनेक वाद प्रचलित हैं, प्रत्येक वाद की अपनी मान्यतायें । कौन वाद उपयोगी और जीवन में सुख-शांति प्रदान कर सकता है, यह विश्व की एक पहेली है। वैदिक धर्मो ईश्वर जीव और प्रकृति को सत्ता अलग-अलग मानते हैं, और इसे हो वैदिक वंतवाद कहते हैं। विद्वान् लेखक ने इसी तंतवाद का इस पुस्तक मे विस्तृत रूप से प्रतिपादन किया है । मूल्य ३) रु० । स्वाध्याय और प्रवचन [ लेखक - श्री रामेश्वर शास्त्री, गुरुकुल बृन्दावन ] उच्चकोटि के वेद मन्त्रों का चयन करके विद्वान् लेखक ने यह पुस्तक लिखी है । मन्त्रों के शब्दार्थ के साथ वेद मन्त्रो के गूढ़ भावो को पूर्ण व्याख्या है। मूल्य १.५० पैसे । श्रीकृष्ण चरित्र [ लेखक - श्री डा० भवानीलाल भारतीय एम. ए. पी-एच. डी. ] विद्वान् लेखक ने भारतीय संस्कृति के उन्नायक श्रीकृष्ण का वैज्ञानिक विश्लेषण करके शुद्ध रूप इस पुस्तक मे रखा है। मूल्य ३.२५ पैसे । उपनिषद् संग्रह [ अपं० देवेन्द्रन14 गुरुकुल सिकन्दराबाद ] जनता के विशेष आग्रह पर इस पुस्तक का नवीन संशोधित व परिवधित संस्करण निकाला गया है। मूल्य ६) रु० । सांख्य दर्शन ( भाषा भाष्य ) [ आर्यजगत् के विशिष्ट विद्वान् स्वामी ब्रह्ममुनि द्वारा विरचित ] स्वामी जी ने इस पुस्तक मे सांख्य दर्शन जैसे गूढ विषय को रोचक सरल एवं सुबोध भाषा मे खोलकर समझाया है । इसके संस्कृत भाष्य पर उत्तर प्रदेश राज्य ने पुरस्कार दिया है। मूल्य ३) रु० । लेखक की अन्य महत्त्वपूर्ण रचनायें निरुक्त सम्मर्श मू० १५०० यजुर्वेदान्वयार्थ मू० १५० याज्ञवल्क्य शिक्षा मू० २.००, जीवन पथ मू० १२५ धार्मिक परीक्षाएं भारतवर्षीय आर्य विद्या परिषद् की विद्या विनोद, विद्यारत्न विद्या विशारद व विद्या वाचस्पति की परीक्षायें मण्डल के तत्वावधान में प्रतिवर्ष होती हैं। इन परीक्षाओ की समस्त पुस्तकें अन्य पुस्तक विक्रेताओ के अतिरिक्त हमारे यहाँ भी मिलती हैं। चारो वेद भाष्य, स्वामी दयानन्द कृत ग्रन्थ तथा आर्यसमाज की समस्त पुस्तकों का प्राप्ति स्थानःआर्य साहित्य मण्डल लिमिटेड श्रीनगर रोड अजमेर प्रत्यो का सूचना का पाठ्यविधि मुक्त मँगायें
* भायंमित * स्वाध्याय के अनूठे ग्रन्थ विश्व की पहेली [ लेखक - श्री बाबू पूर्णचन्द्र जी एडवोकेट ] पुस्तक का यह द्वितीय संशोधित व परिवधित संस्करण है। ससार मे अनेक वाद प्रचलित हैं, प्रत्येक वाद की अपनी मान्यतायें । कौन वाद उपयोगी और जीवन में सुख-शांति प्रदान कर सकता है, यह विश्व की एक पहेली है। वैदिक धर्मो ईश्वर जीव और प्रकृति को सत्ता अलग-अलग मानते हैं, और इसे हो वैदिक वंतवाद कहते हैं। विद्वान् लेखक ने इसी तंतवाद का इस पुस्तक मे विस्तृत रूप से प्रतिपादन किया है । मूल्य तीन) शून्य रुपया । स्वाध्याय और प्रवचन [ लेखक - श्री रामेश्वर शास्त्री, गुरुकुल बृन्दावन ] उच्चकोटि के वेद मन्त्रों का चयन करके विद्वान् लेखक ने यह पुस्तक लिखी है । मन्त्रों के शब्दार्थ के साथ वेद मन्त्रो के गूढ़ भावो को पूर्ण व्याख्या है। मूल्य एक.पचास पैसे । श्रीकृष्ण चरित्र [ लेखक - श्री डाशून्य भवानीलाल भारतीय एम. ए. पी-एच. डी. ] विद्वान् लेखक ने भारतीय संस्कृति के उन्नायक श्रीकृष्ण का वैज्ञानिक विश्लेषण करके शुद्ध रूप इस पुस्तक मे रखा है। मूल्य तीन.पच्चीस पैसे । उपनिषद् संग्रह [ अपंशून्य देवेन्द्रनचौदह गुरुकुल सिकन्दराबाद ] जनता के विशेष आग्रह पर इस पुस्तक का नवीन संशोधित व परिवधित संस्करण निकाला गया है। मूल्य छः) शून्य रुपया । सांख्य दर्शन [ आर्यजगत् के विशिष्ट विद्वान् स्वामी ब्रह्ममुनि द्वारा विरचित ] स्वामी जी ने इस पुस्तक मे सांख्य दर्शन जैसे गूढ विषय को रोचक सरल एवं सुबोध भाषा मे खोलकर समझाया है । इसके संस्कृत भाष्य पर उत्तर प्रदेश राज्य ने पुरस्कार दिया है। मूल्य तीन) शून्य रुपया । लेखक की अन्य महत्त्वपूर्ण रचनायें निरुक्त सम्मर्श मूशून्य एक हज़ार पाँच सौ यजुर्वेदान्वयार्थ मूशून्य एक सौ पचास याज्ञवल्क्य शिक्षा मूशून्य दो.शून्य, जीवन पथ मूशून्य एक सौ पच्चीस धार्मिक परीक्षाएं भारतवर्षीय आर्य विद्या परिषद् की विद्या विनोद, विद्यारत्न विद्या विशारद व विद्या वाचस्पति की परीक्षायें मण्डल के तत्वावधान में प्रतिवर्ष होती हैं। इन परीक्षाओ की समस्त पुस्तकें अन्य पुस्तक विक्रेताओ के अतिरिक्त हमारे यहाँ भी मिलती हैं। चारो वेद भाष्य, स्वामी दयानन्द कृत ग्रन्थ तथा आर्यसमाज की समस्त पुस्तकों का प्राप्ति स्थानःआर्य साहित्य मण्डल लिमिटेड श्रीनगर रोड अजमेर प्रत्यो का सूचना का पाठ्यविधि मुक्त मँगायें
स्वतंत्रता का कोई मूल्य नही। वह सिर्फ परतंत्रता को स्वतंत्रता का नाम देना होगा जो कि और खतरनाक है क्योंकि परतंत्रता परतंत्रता ही रहे, साफ परतंत्रता समझी जाये तो कम से कम आनेस्ट होती है। और जब हम स्वतंत्रता देने की बात करने लगते है लेकिन जब दी जाती है स्वतंत्रता, तो स्वतंत्रता नही रह जाती। कहीं दुनिया में अभी माँ बाप ने कोई स्वतंत्रता नही दी है और न शिक्षक ने कोई स्वतंत्रता दी है। स्वतंत्रता दे रहा है वह, यह मैं नहीं कह रहा हूँ। यह निगेटिव बात हुई कि हम स्वतंत्रता दें। न, मैं बहुत ही पाजिटिव बात कर रहा हूँ कि बच्चे को आदर, सम्मान, बच्चे से सीखने की सम्भावना। मैं बहुत दूसरी बात कर रहा हूँ। मै यह नही कह रहा हूँ कि परतंत्रता हटा लें। हटायेगा जो, वह मालिक है हटाने में भी बहुत पाजिटिव बात मैं यह कह रहा हूँ। बच्चों को स्वतंत्रता को नहीं देना है क्योंकि आप हैं कौन देने वाले ? और अगर आप स्वतंत्रता देने वाले हैं तो कल आप फिर कंट्रोल कर सकते हैं परतंत्रता फिर ला सकते हैं। लेना-देना आपके हाथ में हैं। यह मैं नहीं कह रहा हूँ मैं एक पाजिटिव वेल्यू की बात कर रहा हूँ। ओशो ने कहा है "मैं यह कह रहा हूँ कि बच्चें को आदर, सम्मान, रिवेरेन्स... । मैं यह भी नहीं कह रहा हूँ कि बच्चे माँ-बाप को आदर न दें अनादर की उनकी इच्छा नहीं है, मैं यह नही कह रहा हूँ। मैं माँ-बाप से यह कह रहा हूँ कि वह बच्चों को आदर दें। मां-बाप बर्दाश्त करने को राजी हो जायेगे कि हमें आदर न दिया जाये, इससे कोई बड़ी क्रांति नहीं होती। नहीं, बड़ी क्रांति का मतलब यह है कि मैं यह कह रहा हूँ कि बच्चा बहुत आदर योग्य है माँ-बाप टालरेट कर सकते हैं इस बात को कि बच्चे आदर न दें, यह टालरेंस होगी उनकी, यह उनकी सहिष्णुता होगी। सुशिक्षण होगा, सुसंस्कृति होगी, लेकिन जिस क्रांति की मैं बात कर रहा हूँ वह बहुत दूसरी है। " 1 वह मैं यह कह रहा हूँ कि मां-बाप की आदर मांगने की आकांक्षा ही गलत थी। बच्चें को आदर दिया जा सकें, इसकी सम्भावना खुलनी चाहिए। तब हम स्वतंत्रता देगें, ऐसा नहीं, 1 शिक्षा में क्रान्ति संकलन प्रेम कल्पना पृष्ठ 46 जिसको हम आदर करते हैं वह स्वतंत्र हो जाता है। स्वतंत्रता आदर के पीछे छाया की तरह चलती हैं जिसे हम आदर करते हैं उसे हम परतंत्र नहीं कर सकते। तब स्वतंत्रता सहज आयेगी। और जो यह ख्याल है, कि कंट्रोल न किया जाये, यह जो ख्याल है, कि बच्चे जैसे बढ़ना चाहे बढ़े, मैं इसके पक्ष में नही हूँ। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि बच्चे जैसे बढ़ना चाहे बढ़े, क्योंकि मैं मानता हूँ कि जरूरी है कि बच्चे को किसी दिन कोई हाथ का सहारा देकर पैर पर चलाये, नहीं तो अपने आप बच्चा पैर पर चलेगा नहीं। पीछे अभी कोई एक दस साल पहले कानपुर के पास एक भेड़ियों के द्वारा पाला हुआ एक बच्चा पकड़ा गया। वह चार हाथ पैर से चलता था। और छः महिने लगे उसको दो पैर पर खड़े होने की तैयारी करवाने में, और उसी तैयारी मे वह मरा, कयोंकि उसकी सारी मसल, सारी व्यवस्था चार हाथ-पैर से चलने वाली हो गयी, वह सब अकड़ गयी। इसके पहले भी कलकत्ते के जंगलों में पास में दो लड़कियाँ मिली वे भी भेड़िये उठाकर ले गये थे, उन्होंने पालीं। वे भी चार हाथ-पैर से चलती थीं, दो से नहीं चलती थीं। नहीं, मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि बच्चें को कोई सहयोग न दें, वह जैसा होना चाहे, हो जाये। यह भी बच्चे के प्रति अनादर का नया रूप है। यह भी बच्चे की असम्मान की नई प्रक्रिया है। अब तक बच्चे के लिए हम सब तरफ से ऐसा बनाना चाहिए, इसकी फिक्र में, अगर वह आप नहीं करने देते तो हम निगलेक्ट करते हैं कि बच्चे को जैसा होना हो, हो जाए। इसे हम स्वतंत्रता का नाम देगें, सब देगें, लेकिन बेईमानी की बात है। मैं नहीं मानता हूँ कि बिना पुरानी पीढ़ी के सहारे के बच्चा कुछ हो सकेगा, आदमी भी हो सकेगा, यह भी शक है और कुछ होना तो बहुत दूर की बात है। नहीं, सहारा तो देना होगा, लेकिन सहारा उसे बांधने वाला न हो। कंट्रोल भी रखना होगा, लेकिन कंट्रोल उसे बांधने वाला न हो, बल्कि अन्कंट्रोल में उसे पहुंचाने वाला हो। सारी कठिनाई यह है कि सीधे पोलैरिटी में सोचना तो सदा आसान पड़ जाता है। यह तो हम सोचते हैं कि पूरी तरह कंट्रोल्ड है कि खाये वही जो हम कहें, उठे तो तब जब हम कहें, सोये तो तब जब हम कहें, सांस ले तो तब जब हम कहें, यह तो कंट्रोल है। या आप कहते हैं कंट्रोल नहीं, बस ठीक है फिर। गडढे में गिरें तो हम खड़े होकर देखते रहें क्योंकि स्वतंत्रता है उसे कि उसे जो होना है हो जाये। अमरीका में वही हुआ। पहली पोलैरिटी से वह दूसरी पोलैरिटी पर गये। वह भी मां-बाप का क्रोध है। वह भी कहते हैं कि अगर सारे शिक्षा शास्त्री और सारे मनोवैज्ञानिक ये कहते हैं कि हमने बिगाड़ दिया है बच्चो को, तो ठीक है। तब हम छोड़ते हैं, अब जो होना है हो जाये। मैं दोनों में से दोनों के लिए राजी नहीं हूँ। दोनों ही गलत दृष्टिकोण हैं क्योंकि जिंदगी पोलैरिटी में नहीं बांटी जा सकती। जिंदगी सदा ही विराधी पोल्स को एक साथ लेकर चलती है और इसलिए जिंदगी का मामला बहुत ही नाजुक है । वह ऐसा नहीं है जैसा हम उसे पकड़ लेते हैं। वह ऐसा ईदर -आर वाला नहीं है, या तो यह या इससे उल्टा। यह भी और वह भी और दोनों के बीच से मार्ग जाता है। न, बच्चे को तो मां-बाप को नियंत्रण देना ही होगा! अपरिचित है, अज्ञात रास्तों पर है इसलिए सहारा तो उनको पूरा चाहिए, नियंत्रण उनको पूरा चाहिये। बस इतना ही ध्यान रखने की जरूरत है कि नियंत्रण बच्चे की आत्मा की हत्या करता है या इस बात के लिए बच्चे को योग्य बनाता है कि वह नियंत्रण दो तरह का हो सकता है। इसलिए कि नियंत्रण रोज बढ़ता चला जाये और अंत में फांसी बन जाये, या नियंत्रण इसलिए कि नियंत्रण रोज कम होता चला जाये ओर अंत में स्वतंत्रता बन जाये। पश्चिम में जो हुआ है वह सुखद नही हुआ। वह रिएक्शनरी है, रिवोल्युशनरी नहीं है, वह प्रतिक्रिया है। जो होना था उससे उल्टे जाने का ख्याल है। अगर आदमी को पैर के बल खड़े होकर अच्छी दुनिया नहीं बना पाया तो हम कहते हैं, हम शीर्षासन करके अच्छी दुनिया नहीं बना लेगें। लेकिन आदमी वही रहेगा। शीर्षासन करने से फर्क नहीं पड़ता। सिर्फ इन्वटेंड खड़ा हो जायेगा। सारी दुनिया की पांच-छह हजार साल की शिक्षा की जो व्यवस्था थी उससे उल्टी खड़ी हो गयी। वह भी नुकसान पहुंचा रही है। एक ऐसी शिक्षण व्यवस्था चाहिए जो पुरानी पीढ़ी को पूरी की पूरी तरह सहयोग ले लेती हो ओर फिर नयी पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से आगे जाने में बाधा न बनती हो । अभी हम कहते है कि हम बच्चो को स्वतंत्रता दे रहे हैं लेकिन हम देनेवाले बीच में खड़े हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता दी । यह स्वतंत्रता नहीं है, सम्मान की बात मैं कह रहा हूँ स्वतंत्रता की नहीं। बच्चे कोई कैदी नहीं हैं, कि जेल की दीवार तोड़ दी और जंजीर तोड़ दीं और कहा कि हाथ झाड़ा, अब जाओ। उनको स्वतंत्रता देने से कुछ होने वाला नहीं है। क्योंकि कोई कारागृह ऐसा नहीं है कि हमने उनको छोड़ दिया और मामला समाप्त हो गया। अब तुम्हें जहां जाना हो, तुम जा सकते हो। हमारी तरफ से स्वतंत्रत हो। यह सम्मान न हुआ, यह आदर न हुआ। यह आनेवाले, उगनेवाले सूरज के प्रति सदभाव न हुआ। यह सिर्फ क्रोध हुआ कि ठीक है, हमारी व्यवस्था को तुम कारागृह कहते हो? तो ठीक है, हम कारागृह के बाहर छोड़ देते हैं। तो एक मां और बाप अपने बेटे को छोड़ दें कि जब तुम्हें चलना हो तो दोनो पैर से चलना, अन्यथा जैसा तुम्हें करना हो। वह कभी दो पैर से खड़ा नहीं होगा। और इसकी बहुत चिंता न करें कि जो मैं कह रहा हूं, वह नया है या पुराना है, क्योंकि सत्य के नये और पुराने होने का कोई सवाल नहीं है। वह सत्य है या नहीं, ठीक है या नहीं, इसकी फिक्र करें। इस सदी में नये- पुराने ने एक अजीब तरह का वैल्यूएशन ले लिया है जिसका कोई मूल्य नहीं है। कुछ लोग है जो कहते हैं कि कोई चीज पुरानी है, इसलिए ठीक है। कुछ लोग है, जो कहते है कि कोई चीज नयी इसलिए ही ठीक है। ठीक होने का नये पुराने में कोई प्रयोजन नहीं है। पुराने में भी गलत था और नये में भी गलत है। पुराने में भी ठीक है। चिंता इसकी होनी चाहिए कि ठीक क्या है और कितने दूर तक हम पुराने का उपयोग कर सकते हैं। एक टोटल पर्सपेक्टिव के लिए पुरानी सारी शिक्षण पद्धति को समझा जाना जरूरी है, नयी सारी शिक्षण पद्धति को समझा जाना जरूरी है और दोनों के बीच एक माध्यम जो स्वतंत्रतापूर्ण नियंत्रण स्वतंत्रता को हो, और उसके बहुत गहरे में सम्मान छोटे के प्रति, बढ़ते हुए के प्रति आधार और केन्द्र बन सकें। बच्चों को हम जितना 'डोन्ट' नहीं कहने से बचा सकें, उतना अच्छा है। ऐसा पिछले पृष्ठ 53 सौ साल के सभी मनसशास्त्री कहेंगे लेकिन मैं पूरी तरह राजी नही हूँ। सारे मनसशास्त्री यह कहेंगे और बहुत दूर तक मैं कहूंगा कि बच्चे को जब तक बने हां कहा जा सके, तो ना नही कहना। और अगर ना भी कहना हो, तो उसे अगर हां के रूप में कहा जा सके, तो बहुत अच्छा है। जैसे बच्चा एक फूल तोड़ रहा है। तो उस रोकने की बजाय... यह कहना कि फूत मत तोड़ो, उसके हाथ में फव्वारा थमा देना बेहतर है, उससे कहना कि पानी डालो। फूल तोड़ना रूक जायेगा, वह पानी डालने में लग जायेगा। और ना कहने से हम बच सकेंगे, क्योंकि ना जो है वह उसे बार-बार अत्यंत पीड़ा में डाल जाता है। जहां भी बढ़ता है, वहीं ना खड़ा हो जाता है। वह उसकी सीमा बनने लगती है। वह परतंत्र अनुभव करने लगता है, गुलाम मालूम पड़ने लगता है कि कुछ भी करने की स्वतंत्रता नहीं है। न भी कहना हो तो उसको हां के ही रूप में कहने की कोशिश करनी चाहिए। सुना है कि भोज के दरबार में एक ज्योतिषी आया है और भोज ने अपनी कुंडली दिखायी है और उसने कहा कि महाराज, कि आप अपनी पत्नी को भी दफनाएंगे, आपने बाप का तो दफनाएंगे ही, अपने सब बेटों को भी आप दफनाएंगे। सबको मारकर तुम मरोंगे। भोज बहुत नाराज हो गया। उसने उसे कैद में डाल दिया। कालिदास बैठा सुनता था। बाद में रात जाकर कालिदास ने कहा कि वह बेचारा कुछ गलत नहीं कह रहा था, जो उसे दिखायी पड़ा था, वही कहा था, लेकिन शायद उसे कहने का ढंग नही आया। मैं एक श्लोक बनाकर लाया हूं। उस श्लोक में उसने कहा कि महाराज, आप धन्यभागी हो। आपके प्रियजनों को आपकी मृत्यु का दुख न होगा। ऐसा धन्यभाग मुश्किल से मिलता है। आप सौ वर्ष से ज्यादा जियोगे । जिसकी हम कामना करते हैं कि सौ वर्ष से ज्यादा कोइ जिये वह आपकी सुनिश्चित संभावना है। और धन्यभागी हैं आप कि आपके किसी प्रियजन का, न आपके बेटे को, न आपकी बैटी को, न आपकी पत्नी को आपकी मृत्यु का दुख नहीं होगा। और एक लाख मुद्राएं राजा ने कालीदास को भेंट की। ना में कही जानेवाली बात भी हां में कही जा सकती हैं इंकार करनेवाली बात भी स्वीकार में कहीं जा सकती है। यह ठीक है लेकिन यह अधूरा सत्य है। और इस पर पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों ने इतना जोर दिया कि दूसरे खतरे पैदा हो गये। अधूरे सत्य झूठ से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं। इसलिए अधूरा सत्य है कि जिंदगी तो नहीं कहेगी, आप मत कहो। मां ने नहीं कहा नहीं, पिता ने नहीं कहा नहीं, शिक्षक ने नहीं कहा नहीं। लेकिन जब लड़का बड़ा होगा, तब जिंदगी में हजार तरफ से 'नही' मिलेगा। और जो 'नही' से बिलकुल अपरिचित है वह इतना फ्रस्ट्रेट हो जायेगा जिसका कोई हिसाब नहीं नहीं की भी टेनिंग तो चाहिए पड़ेगी। नहीं तो एक लड़का, जो बीस वर्ष तक नहीं, नहीं सुना और जिसकी जिंदगी में कभी भी कहीं कोई रूकावट नहीं है, सब जगह हां था। जिंदगी इतनी फिक्र नहीं करेगी। जिंदगी मां नही है, जिंदगी पिता नहीं है, जिंदगी शिक्षक नहीं है। जिंदगी हजार जगह कहेगी कि नहीं। तब उस लड़के के प्राण पर ऐसा पड़ेगा कि मर गये, क्योंकि उसकी नहीं की कोई भी योजना उसके भीतर नहीं है। नहीं को सहने की कोई क्षमता उसके भीतर नहीं है। इसलिए पश्चिम बहुत कमजोर बच्चे पैदा कर रहा है जो इतनी छोटी-छोटी बातो से फ्रेस्ट्रेशन में चले जाते हैं कि जिनमें पुराना बच्चा कभी नहीं जाता। क्योंकि वह नहीं के लिए तैयार था। जिंदगी में हां भी है और नहीं भी है और उनका एक संतुलन है। तो मैं मानता हूं कि जहां तक तक बने, नहीं मत कहना और नहीं वहीं मत कहना जहां नहीं कहने में मजा आता है, वहां नहीं मत कहना । लेकिन जहां नहीं कहने से बच्चे के व्यक्तिव में रेजिस्टेंस बढ़ता हो, वहां नहीं का मतलब हमेशा नहीं रखना। नहीं तो मां-बाप के नहीं और हां में बहुत डांवाडोल होते रहते हैं वे, इसलिए बच्चे बहुत कन्फ्यूज्ड हो जाते हैं। बच्चा कहता है मुझे पिक्चर देखने जाना है, मां कहती है कि नहीं जाना ओर बच्चा दो दफे जोर से पैर पटकता है और मां कहती है, अच्छा जाओ। तो बच्चे को बहुत मुश्किल हो जाती है कि नहीं का मतलब क्या है, हां का मतलब क्या है? नहीं हां बन सकती है, हां नहीं बन सकती है। जिंदगी भर के लिए हम उसे एक बेगनेस दे रहे हैं, एक कन्फ्यूजन दे रहे हैं जो बहुत मुश्किल में पड़ जायेगा। अगर एक दफे बच्चे से कहो नही, तो इस दुनिया में अब दुबारा उसको हां मत बनाना ताकि बच्चा ठीक से समझे कि नहीं का मतलब नहीं होता है। हां का मतलब हां होता है। यह भी सिखाने की जरूरत है उसे कि नहीं का मतलब ना होता है और जब ना हो जाता है तो ना ही हो जाता है। नहीं तो मां-बाप बहुत जल्दी झुकते हैं। बजाय झुकने के पहले हां भर देना। बच्चा कहे कि पिक्चर जाना है, और रोज का अनुभव है, लेकिन हम कुछ सीखते नही हैं। तो पहले हम कहेंगे नहीं। असल में दूसरे को रोकने में बड़ा मजा आता है। अब वह सिर पीटेगा, चिल्लायेगा और खाना नहीं खायेगा ओर थाली फेंकगा। अब हम कहेंगे कि जाओ! हां का मजा भी चला गया उसके भीतर से, नहीं का अर्थ भी न रहा और प्रतिकार का उसने एक गलत ढंग सीखा। प्रतिकार का गलत ढंग सीखा जो कि जिंदगी भर उसका पीछा करेगा। बड़ा होकर भी वह बच्चों जैसा करेगां कल वह पति हो जायेगा और पत्नी पर नाराज होगा, तो इसी तरह थाली फेंकेगा जैसा उसने मां के सामने फेंक दिया था। उसी तरह पैर पटकेगा जैसा उसने मां के सामने फेंक दिया था। तब वह बहुत ही बेहूदा मालूम पड़ेगा। लेकिन हम उसे सिखा रहे हैं। नहीं, मेरी अपनी समझ है कि नहीं का भी उपयोग तो है, लेकिन व्यर्थ की चीजों में नहीं मत कहना। लेकिन नहीं की अपनी सार्थकता है क्योंकि जिंदगी आपकी फिक्र न करेंगी, वह नहीं कहेगी और जब कहेगी तो उसकी तैयारी होनी चाहिए और उसकी तैयारी भी शिक्षण का अनिवार्य अंग है। इसलिए पश्चिम के जो बच्चे हैं वे नहीं न कहने से बिगाड़े गये बच्चे हैं। उनको इधर पिछले पाचास-साठ साल में विशेषकर फ्रायड का प्रभाव जो पश्चिम की शिक्षा पर पड़ा, वह संघात्मक सिद्ध हुआ। उसने कुछ फायदे पहुंचाये, लेकिन उतने ही वजन के, शायद और ज्यादा वजन के नुकसान भी पहुंचाया। मैडम मांटेसरी की शिक्षा से बच्चों में क्या फर्क पड़ा? वह ठीक है या नही ? साधारण है, ठीक और गलत बहुत नहीं है मामला। मांटेसरी ने एक हिम्मत की ओर एक प्रयोग किया है, उस लिहाज से तारीफ की बात है, लेकिन कुछ विशेष फर्क नहीं पड़ा। क्योंकि विशेष फर्क जो है वह शिक्षा की पद्धति में कम, मां-बाप के होने के ढंग में और शिक्षक के होने के ढंग में ज्यादा है। वह बहुत बड़ा सवाल नहीं है। सवाल गहरा है और ज्यादा डीप रूटेड है, वह हममें है। अब जैसे एक बच्चा आपसे आकर कहता है कि मैं फूल तोड़ लूँ? तब आप दो क्षण भी नहीं सोचतीं कि फूल तोड़ने दिया जाये या नहीं। नहीं कहने में इतना मजा आता है कि नहीं। आप यह नहीं सोचते हैं कि फूल तोड़ा जा सकता है तो तोड़ लेने दो। यह सोचने की जरूरत नहीं है। बच्चा कहता है, मुझे बाहर खेलेने जाना है, आप कहते हैं, नहीं। हमारा 'नहीं' तो एकदम सामने खड़ा रहता है। वह भी हमारे फ्रस्ट्रेशन का हिस्सा है। हां कहने की हमें भी तो हिम्मत नहीं जुट पाती। अब बच्चा कहता है, बाहर खेलने जाना है तो मां बिना सोचे, नहीं कहने को तैयार है, वह रेडीमेड है और बच्चा जानता है कि रेडीमेड उत्तर है, इसने सोचकर नहीं दिया है। क्योंकि अब भी इसको प्रेस किया जा सकता है और यह कहे कि हां। क्योंकि अब सोचकर दिया गया है तो फिर हां नहीं होना चाहिए दुबारा। क्योंकि अगर बच्चे के अहित में ही है बाहर जाना तो फिर हां कैसे हुआ और अगर हां हो सका दो मिनट बाद, तो दो मिनट पहले नहीं होने की क्या जरूरत थी। यानी मेरा कहना यह है कि 'हाँ' साफ, 'नहीं' साफ, और दोनों में कभी कंफ्यूजन नहीं। वह बिलकुल साफ होना चाहिए। तब बच्चा एक तो अपने मां-बाप का क्लियर इमेज बना पाता है। बड़ी से बड़ी कठिनाई है कि मन में मां-बाप की साफ प्रतिभा नहीं बन पाती कि मां-बाप क्या चाहते है? क्या इरादे हैं। वह कभी पकड़ ही नही पाता है कि उनका क्या प्रयोजन है? उसे तो पता नही कि मां-बाप भी भीतर कंफ्यूज्ड हैं। उन्हें भी पता नहीं कि वे क्या कह रहे हैं, क्या कर रहे हैं, क्या नहीं कर रहे हैं। तो बच्चे के सामने बहुत स्पष्ट प्रतिभा मां-बाप की बननी चाहिए, शिक्षक की बननी चाहिए। तो बच्चे को अपनी प्रतिभा स्पष्ट बनाने में बड़ा सहयोग मिलता है। नहीं तो वह भी वेसा ही एक कंफ्यूज्ड, भ्रमित, उल्टे-सीधे खयालों से भरा आदमी बन जाता है। और तब उसे पता ही नहीं रहता कि वह
स्वतंत्रता का कोई मूल्य नही। वह सिर्फ परतंत्रता को स्वतंत्रता का नाम देना होगा जो कि और खतरनाक है क्योंकि परतंत्रता परतंत्रता ही रहे, साफ परतंत्रता समझी जाये तो कम से कम आनेस्ट होती है। और जब हम स्वतंत्रता देने की बात करने लगते है लेकिन जब दी जाती है स्वतंत्रता, तो स्वतंत्रता नही रह जाती। कहीं दुनिया में अभी माँ बाप ने कोई स्वतंत्रता नही दी है और न शिक्षक ने कोई स्वतंत्रता दी है। स्वतंत्रता दे रहा है वह, यह मैं नहीं कह रहा हूँ। यह निगेटिव बात हुई कि हम स्वतंत्रता दें। न, मैं बहुत ही पाजिटिव बात कर रहा हूँ कि बच्चे को आदर, सम्मान, बच्चे से सीखने की सम्भावना। मैं बहुत दूसरी बात कर रहा हूँ। मै यह नही कह रहा हूँ कि परतंत्रता हटा लें। हटायेगा जो, वह मालिक है हटाने में भी बहुत पाजिटिव बात मैं यह कह रहा हूँ। बच्चों को स्वतंत्रता को नहीं देना है क्योंकि आप हैं कौन देने वाले ? और अगर आप स्वतंत्रता देने वाले हैं तो कल आप फिर कंट्रोल कर सकते हैं परतंत्रता फिर ला सकते हैं। लेना-देना आपके हाथ में हैं। यह मैं नहीं कह रहा हूँ मैं एक पाजिटिव वेल्यू की बात कर रहा हूँ। ओशो ने कहा है "मैं यह कह रहा हूँ कि बच्चें को आदर, सम्मान, रिवेरेन्स... । मैं यह भी नहीं कह रहा हूँ कि बच्चे माँ-बाप को आदर न दें अनादर की उनकी इच्छा नहीं है, मैं यह नही कह रहा हूँ। मैं माँ-बाप से यह कह रहा हूँ कि वह बच्चों को आदर दें। मां-बाप बर्दाश्त करने को राजी हो जायेगे कि हमें आदर न दिया जाये, इससे कोई बड़ी क्रांति नहीं होती। नहीं, बड़ी क्रांति का मतलब यह है कि मैं यह कह रहा हूँ कि बच्चा बहुत आदर योग्य है माँ-बाप टालरेट कर सकते हैं इस बात को कि बच्चे आदर न दें, यह टालरेंस होगी उनकी, यह उनकी सहिष्णुता होगी। सुशिक्षण होगा, सुसंस्कृति होगी, लेकिन जिस क्रांति की मैं बात कर रहा हूँ वह बहुत दूसरी है। " एक वह मैं यह कह रहा हूँ कि मां-बाप की आदर मांगने की आकांक्षा ही गलत थी। बच्चें को आदर दिया जा सकें, इसकी सम्भावना खुलनी चाहिए। तब हम स्वतंत्रता देगें, ऐसा नहीं, एक शिक्षा में क्रान्ति संकलन प्रेम कल्पना पृष्ठ छियालीस जिसको हम आदर करते हैं वह स्वतंत्र हो जाता है। स्वतंत्रता आदर के पीछे छाया की तरह चलती हैं जिसे हम आदर करते हैं उसे हम परतंत्र नहीं कर सकते। तब स्वतंत्रता सहज आयेगी। और जो यह ख्याल है, कि कंट्रोल न किया जाये, यह जो ख्याल है, कि बच्चे जैसे बढ़ना चाहे बढ़े, मैं इसके पक्ष में नही हूँ। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि बच्चे जैसे बढ़ना चाहे बढ़े, क्योंकि मैं मानता हूँ कि जरूरी है कि बच्चे को किसी दिन कोई हाथ का सहारा देकर पैर पर चलाये, नहीं तो अपने आप बच्चा पैर पर चलेगा नहीं। पीछे अभी कोई एक दस साल पहले कानपुर के पास एक भेड़ियों के द्वारा पाला हुआ एक बच्चा पकड़ा गया। वह चार हाथ पैर से चलता था। और छः महिने लगे उसको दो पैर पर खड़े होने की तैयारी करवाने में, और उसी तैयारी मे वह मरा, कयोंकि उसकी सारी मसल, सारी व्यवस्था चार हाथ-पैर से चलने वाली हो गयी, वह सब अकड़ गयी। इसके पहले भी कलकत्ते के जंगलों में पास में दो लड़कियाँ मिली वे भी भेड़िये उठाकर ले गये थे, उन्होंने पालीं। वे भी चार हाथ-पैर से चलती थीं, दो से नहीं चलती थीं। नहीं, मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि बच्चें को कोई सहयोग न दें, वह जैसा होना चाहे, हो जाये। यह भी बच्चे के प्रति अनादर का नया रूप है। यह भी बच्चे की असम्मान की नई प्रक्रिया है। अब तक बच्चे के लिए हम सब तरफ से ऐसा बनाना चाहिए, इसकी फिक्र में, अगर वह आप नहीं करने देते तो हम निगलेक्ट करते हैं कि बच्चे को जैसा होना हो, हो जाए। इसे हम स्वतंत्रता का नाम देगें, सब देगें, लेकिन बेईमानी की बात है। मैं नहीं मानता हूँ कि बिना पुरानी पीढ़ी के सहारे के बच्चा कुछ हो सकेगा, आदमी भी हो सकेगा, यह भी शक है और कुछ होना तो बहुत दूर की बात है। नहीं, सहारा तो देना होगा, लेकिन सहारा उसे बांधने वाला न हो। कंट्रोल भी रखना होगा, लेकिन कंट्रोल उसे बांधने वाला न हो, बल्कि अन्कंट्रोल में उसे पहुंचाने वाला हो। सारी कठिनाई यह है कि सीधे पोलैरिटी में सोचना तो सदा आसान पड़ जाता है। यह तो हम सोचते हैं कि पूरी तरह कंट्रोल्ड है कि खाये वही जो हम कहें, उठे तो तब जब हम कहें, सोये तो तब जब हम कहें, सांस ले तो तब जब हम कहें, यह तो कंट्रोल है। या आप कहते हैं कंट्रोल नहीं, बस ठीक है फिर। गडढे में गिरें तो हम खड़े होकर देखते रहें क्योंकि स्वतंत्रता है उसे कि उसे जो होना है हो जाये। अमरीका में वही हुआ। पहली पोलैरिटी से वह दूसरी पोलैरिटी पर गये। वह भी मां-बाप का क्रोध है। वह भी कहते हैं कि अगर सारे शिक्षा शास्त्री और सारे मनोवैज्ञानिक ये कहते हैं कि हमने बिगाड़ दिया है बच्चो को, तो ठीक है। तब हम छोड़ते हैं, अब जो होना है हो जाये। मैं दोनों में से दोनों के लिए राजी नहीं हूँ। दोनों ही गलत दृष्टिकोण हैं क्योंकि जिंदगी पोलैरिटी में नहीं बांटी जा सकती। जिंदगी सदा ही विराधी पोल्स को एक साथ लेकर चलती है और इसलिए जिंदगी का मामला बहुत ही नाजुक है । वह ऐसा नहीं है जैसा हम उसे पकड़ लेते हैं। वह ऐसा ईदर -आर वाला नहीं है, या तो यह या इससे उल्टा। यह भी और वह भी और दोनों के बीच से मार्ग जाता है। न, बच्चे को तो मां-बाप को नियंत्रण देना ही होगा! अपरिचित है, अज्ञात रास्तों पर है इसलिए सहारा तो उनको पूरा चाहिए, नियंत्रण उनको पूरा चाहिये। बस इतना ही ध्यान रखने की जरूरत है कि नियंत्रण बच्चे की आत्मा की हत्या करता है या इस बात के लिए बच्चे को योग्य बनाता है कि वह नियंत्रण दो तरह का हो सकता है। इसलिए कि नियंत्रण रोज बढ़ता चला जाये और अंत में फांसी बन जाये, या नियंत्रण इसलिए कि नियंत्रण रोज कम होता चला जाये ओर अंत में स्वतंत्रता बन जाये। पश्चिम में जो हुआ है वह सुखद नही हुआ। वह रिएक्शनरी है, रिवोल्युशनरी नहीं है, वह प्रतिक्रिया है। जो होना था उससे उल्टे जाने का ख्याल है। अगर आदमी को पैर के बल खड़े होकर अच्छी दुनिया नहीं बना पाया तो हम कहते हैं, हम शीर्षासन करके अच्छी दुनिया नहीं बना लेगें। लेकिन आदमी वही रहेगा। शीर्षासन करने से फर्क नहीं पड़ता। सिर्फ इन्वटेंड खड़ा हो जायेगा। सारी दुनिया की पांच-छह हजार साल की शिक्षा की जो व्यवस्था थी उससे उल्टी खड़ी हो गयी। वह भी नुकसान पहुंचा रही है। एक ऐसी शिक्षण व्यवस्था चाहिए जो पुरानी पीढ़ी को पूरी की पूरी तरह सहयोग ले लेती हो ओर फिर नयी पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से आगे जाने में बाधा न बनती हो । अभी हम कहते है कि हम बच्चो को स्वतंत्रता दे रहे हैं लेकिन हम देनेवाले बीच में खड़े हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता दी । यह स्वतंत्रता नहीं है, सम्मान की बात मैं कह रहा हूँ स्वतंत्रता की नहीं। बच्चे कोई कैदी नहीं हैं, कि जेल की दीवार तोड़ दी और जंजीर तोड़ दीं और कहा कि हाथ झाड़ा, अब जाओ। उनको स्वतंत्रता देने से कुछ होने वाला नहीं है। क्योंकि कोई कारागृह ऐसा नहीं है कि हमने उनको छोड़ दिया और मामला समाप्त हो गया। अब तुम्हें जहां जाना हो, तुम जा सकते हो। हमारी तरफ से स्वतंत्रत हो। यह सम्मान न हुआ, यह आदर न हुआ। यह आनेवाले, उगनेवाले सूरज के प्रति सदभाव न हुआ। यह सिर्फ क्रोध हुआ कि ठीक है, हमारी व्यवस्था को तुम कारागृह कहते हो? तो ठीक है, हम कारागृह के बाहर छोड़ देते हैं। तो एक मां और बाप अपने बेटे को छोड़ दें कि जब तुम्हें चलना हो तो दोनो पैर से चलना, अन्यथा जैसा तुम्हें करना हो। वह कभी दो पैर से खड़ा नहीं होगा। और इसकी बहुत चिंता न करें कि जो मैं कह रहा हूं, वह नया है या पुराना है, क्योंकि सत्य के नये और पुराने होने का कोई सवाल नहीं है। वह सत्य है या नहीं, ठीक है या नहीं, इसकी फिक्र करें। इस सदी में नये- पुराने ने एक अजीब तरह का वैल्यूएशन ले लिया है जिसका कोई मूल्य नहीं है। कुछ लोग है जो कहते हैं कि कोई चीज पुरानी है, इसलिए ठीक है। कुछ लोग है, जो कहते है कि कोई चीज नयी इसलिए ही ठीक है। ठीक होने का नये पुराने में कोई प्रयोजन नहीं है। पुराने में भी गलत था और नये में भी गलत है। पुराने में भी ठीक है। चिंता इसकी होनी चाहिए कि ठीक क्या है और कितने दूर तक हम पुराने का उपयोग कर सकते हैं। एक टोटल पर्सपेक्टिव के लिए पुरानी सारी शिक्षण पद्धति को समझा जाना जरूरी है, नयी सारी शिक्षण पद्धति को समझा जाना जरूरी है और दोनों के बीच एक माध्यम जो स्वतंत्रतापूर्ण नियंत्रण स्वतंत्रता को हो, और उसके बहुत गहरे में सम्मान छोटे के प्रति, बढ़ते हुए के प्रति आधार और केन्द्र बन सकें। बच्चों को हम जितना 'डोन्ट' नहीं कहने से बचा सकें, उतना अच्छा है। ऐसा पिछले पृष्ठ तिरेपन सौ साल के सभी मनसशास्त्री कहेंगे लेकिन मैं पूरी तरह राजी नही हूँ। सारे मनसशास्त्री यह कहेंगे और बहुत दूर तक मैं कहूंगा कि बच्चे को जब तक बने हां कहा जा सके, तो ना नही कहना। और अगर ना भी कहना हो, तो उसे अगर हां के रूप में कहा जा सके, तो बहुत अच्छा है। जैसे बच्चा एक फूल तोड़ रहा है। तो उस रोकने की बजाय... यह कहना कि फूत मत तोड़ो, उसके हाथ में फव्वारा थमा देना बेहतर है, उससे कहना कि पानी डालो। फूल तोड़ना रूक जायेगा, वह पानी डालने में लग जायेगा। और ना कहने से हम बच सकेंगे, क्योंकि ना जो है वह उसे बार-बार अत्यंत पीड़ा में डाल जाता है। जहां भी बढ़ता है, वहीं ना खड़ा हो जाता है। वह उसकी सीमा बनने लगती है। वह परतंत्र अनुभव करने लगता है, गुलाम मालूम पड़ने लगता है कि कुछ भी करने की स्वतंत्रता नहीं है। न भी कहना हो तो उसको हां के ही रूप में कहने की कोशिश करनी चाहिए। सुना है कि भोज के दरबार में एक ज्योतिषी आया है और भोज ने अपनी कुंडली दिखायी है और उसने कहा कि महाराज, कि आप अपनी पत्नी को भी दफनाएंगे, आपने बाप का तो दफनाएंगे ही, अपने सब बेटों को भी आप दफनाएंगे। सबको मारकर तुम मरोंगे। भोज बहुत नाराज हो गया। उसने उसे कैद में डाल दिया। कालिदास बैठा सुनता था। बाद में रात जाकर कालिदास ने कहा कि वह बेचारा कुछ गलत नहीं कह रहा था, जो उसे दिखायी पड़ा था, वही कहा था, लेकिन शायद उसे कहने का ढंग नही आया। मैं एक श्लोक बनाकर लाया हूं। उस श्लोक में उसने कहा कि महाराज, आप धन्यभागी हो। आपके प्रियजनों को आपकी मृत्यु का दुख न होगा। ऐसा धन्यभाग मुश्किल से मिलता है। आप सौ वर्ष से ज्यादा जियोगे । जिसकी हम कामना करते हैं कि सौ वर्ष से ज्यादा कोइ जिये वह आपकी सुनिश्चित संभावना है। और धन्यभागी हैं आप कि आपके किसी प्रियजन का, न आपके बेटे को, न आपकी बैटी को, न आपकी पत्नी को आपकी मृत्यु का दुख नहीं होगा। और एक लाख मुद्राएं राजा ने कालीदास को भेंट की। ना में कही जानेवाली बात भी हां में कही जा सकती हैं इंकार करनेवाली बात भी स्वीकार में कहीं जा सकती है। यह ठीक है लेकिन यह अधूरा सत्य है। और इस पर पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों ने इतना जोर दिया कि दूसरे खतरे पैदा हो गये। अधूरे सत्य झूठ से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं। इसलिए अधूरा सत्य है कि जिंदगी तो नहीं कहेगी, आप मत कहो। मां ने नहीं कहा नहीं, पिता ने नहीं कहा नहीं, शिक्षक ने नहीं कहा नहीं। लेकिन जब लड़का बड़ा होगा, तब जिंदगी में हजार तरफ से 'नही' मिलेगा। और जो 'नही' से बिलकुल अपरिचित है वह इतना फ्रस्ट्रेट हो जायेगा जिसका कोई हिसाब नहीं नहीं की भी टेनिंग तो चाहिए पड़ेगी। नहीं तो एक लड़का, जो बीस वर्ष तक नहीं, नहीं सुना और जिसकी जिंदगी में कभी भी कहीं कोई रूकावट नहीं है, सब जगह हां था। जिंदगी इतनी फिक्र नहीं करेगी। जिंदगी मां नही है, जिंदगी पिता नहीं है, जिंदगी शिक्षक नहीं है। जिंदगी हजार जगह कहेगी कि नहीं। तब उस लड़के के प्राण पर ऐसा पड़ेगा कि मर गये, क्योंकि उसकी नहीं की कोई भी योजना उसके भीतर नहीं है। नहीं को सहने की कोई क्षमता उसके भीतर नहीं है। इसलिए पश्चिम बहुत कमजोर बच्चे पैदा कर रहा है जो इतनी छोटी-छोटी बातो से फ्रेस्ट्रेशन में चले जाते हैं कि जिनमें पुराना बच्चा कभी नहीं जाता। क्योंकि वह नहीं के लिए तैयार था। जिंदगी में हां भी है और नहीं भी है और उनका एक संतुलन है। तो मैं मानता हूं कि जहां तक तक बने, नहीं मत कहना और नहीं वहीं मत कहना जहां नहीं कहने में मजा आता है, वहां नहीं मत कहना । लेकिन जहां नहीं कहने से बच्चे के व्यक्तिव में रेजिस्टेंस बढ़ता हो, वहां नहीं का मतलब हमेशा नहीं रखना। नहीं तो मां-बाप के नहीं और हां में बहुत डांवाडोल होते रहते हैं वे, इसलिए बच्चे बहुत कन्फ्यूज्ड हो जाते हैं। बच्चा कहता है मुझे पिक्चर देखने जाना है, मां कहती है कि नहीं जाना ओर बच्चा दो दफे जोर से पैर पटकता है और मां कहती है, अच्छा जाओ। तो बच्चे को बहुत मुश्किल हो जाती है कि नहीं का मतलब क्या है, हां का मतलब क्या है? नहीं हां बन सकती है, हां नहीं बन सकती है। जिंदगी भर के लिए हम उसे एक बेगनेस दे रहे हैं, एक कन्फ्यूजन दे रहे हैं जो बहुत मुश्किल में पड़ जायेगा। अगर एक दफे बच्चे से कहो नही, तो इस दुनिया में अब दुबारा उसको हां मत बनाना ताकि बच्चा ठीक से समझे कि नहीं का मतलब नहीं होता है। हां का मतलब हां होता है। यह भी सिखाने की जरूरत है उसे कि नहीं का मतलब ना होता है और जब ना हो जाता है तो ना ही हो जाता है। नहीं तो मां-बाप बहुत जल्दी झुकते हैं। बजाय झुकने के पहले हां भर देना। बच्चा कहे कि पिक्चर जाना है, और रोज का अनुभव है, लेकिन हम कुछ सीखते नही हैं। तो पहले हम कहेंगे नहीं। असल में दूसरे को रोकने में बड़ा मजा आता है। अब वह सिर पीटेगा, चिल्लायेगा और खाना नहीं खायेगा ओर थाली फेंकगा। अब हम कहेंगे कि जाओ! हां का मजा भी चला गया उसके भीतर से, नहीं का अर्थ भी न रहा और प्रतिकार का उसने एक गलत ढंग सीखा। प्रतिकार का गलत ढंग सीखा जो कि जिंदगी भर उसका पीछा करेगा। बड़ा होकर भी वह बच्चों जैसा करेगां कल वह पति हो जायेगा और पत्नी पर नाराज होगा, तो इसी तरह थाली फेंकेगा जैसा उसने मां के सामने फेंक दिया था। उसी तरह पैर पटकेगा जैसा उसने मां के सामने फेंक दिया था। तब वह बहुत ही बेहूदा मालूम पड़ेगा। लेकिन हम उसे सिखा रहे हैं। नहीं, मेरी अपनी समझ है कि नहीं का भी उपयोग तो है, लेकिन व्यर्थ की चीजों में नहीं मत कहना। लेकिन नहीं की अपनी सार्थकता है क्योंकि जिंदगी आपकी फिक्र न करेंगी, वह नहीं कहेगी और जब कहेगी तो उसकी तैयारी होनी चाहिए और उसकी तैयारी भी शिक्षण का अनिवार्य अंग है। इसलिए पश्चिम के जो बच्चे हैं वे नहीं न कहने से बिगाड़े गये बच्चे हैं। उनको इधर पिछले पाचास-साठ साल में विशेषकर फ्रायड का प्रभाव जो पश्चिम की शिक्षा पर पड़ा, वह संघात्मक सिद्ध हुआ। उसने कुछ फायदे पहुंचाये, लेकिन उतने ही वजन के, शायद और ज्यादा वजन के नुकसान भी पहुंचाया। मैडम मांटेसरी की शिक्षा से बच्चों में क्या फर्क पड़ा? वह ठीक है या नही ? साधारण है, ठीक और गलत बहुत नहीं है मामला। मांटेसरी ने एक हिम्मत की ओर एक प्रयोग किया है, उस लिहाज से तारीफ की बात है, लेकिन कुछ विशेष फर्क नहीं पड़ा। क्योंकि विशेष फर्क जो है वह शिक्षा की पद्धति में कम, मां-बाप के होने के ढंग में और शिक्षक के होने के ढंग में ज्यादा है। वह बहुत बड़ा सवाल नहीं है। सवाल गहरा है और ज्यादा डीप रूटेड है, वह हममें है। अब जैसे एक बच्चा आपसे आकर कहता है कि मैं फूल तोड़ लूँ? तब आप दो क्षण भी नहीं सोचतीं कि फूल तोड़ने दिया जाये या नहीं। नहीं कहने में इतना मजा आता है कि नहीं। आप यह नहीं सोचते हैं कि फूल तोड़ा जा सकता है तो तोड़ लेने दो। यह सोचने की जरूरत नहीं है। बच्चा कहता है, मुझे बाहर खेलेने जाना है, आप कहते हैं, नहीं। हमारा 'नहीं' तो एकदम सामने खड़ा रहता है। वह भी हमारे फ्रस्ट्रेशन का हिस्सा है। हां कहने की हमें भी तो हिम्मत नहीं जुट पाती। अब बच्चा कहता है, बाहर खेलने जाना है तो मां बिना सोचे, नहीं कहने को तैयार है, वह रेडीमेड है और बच्चा जानता है कि रेडीमेड उत्तर है, इसने सोचकर नहीं दिया है। क्योंकि अब भी इसको प्रेस किया जा सकता है और यह कहे कि हां। क्योंकि अब सोचकर दिया गया है तो फिर हां नहीं होना चाहिए दुबारा। क्योंकि अगर बच्चे के अहित में ही है बाहर जाना तो फिर हां कैसे हुआ और अगर हां हो सका दो मिनट बाद, तो दो मिनट पहले नहीं होने की क्या जरूरत थी। यानी मेरा कहना यह है कि 'हाँ' साफ, 'नहीं' साफ, और दोनों में कभी कंफ्यूजन नहीं। वह बिलकुल साफ होना चाहिए। तब बच्चा एक तो अपने मां-बाप का क्लियर इमेज बना पाता है। बड़ी से बड़ी कठिनाई है कि मन में मां-बाप की साफ प्रतिभा नहीं बन पाती कि मां-बाप क्या चाहते है? क्या इरादे हैं। वह कभी पकड़ ही नही पाता है कि उनका क्या प्रयोजन है? उसे तो पता नही कि मां-बाप भी भीतर कंफ्यूज्ड हैं। उन्हें भी पता नहीं कि वे क्या कह रहे हैं, क्या कर रहे हैं, क्या नहीं कर रहे हैं। तो बच्चे के सामने बहुत स्पष्ट प्रतिभा मां-बाप की बननी चाहिए, शिक्षक की बननी चाहिए। तो बच्चे को अपनी प्रतिभा स्पष्ट बनाने में बड़ा सहयोग मिलता है। नहीं तो वह भी वेसा ही एक कंफ्यूज्ड, भ्रमित, उल्टे-सीधे खयालों से भरा आदमी बन जाता है। और तब उसे पता ही नहीं रहता कि वह
'ऐसा लग रहा है कि मैं सपने में सो रही हूं. पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर काफी कुछ चल रहा है. मैं एकदम खाली महसूस कर रही हूं. ' वो कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि मेरी जिंदगी में क्या हो रहा है. मैंने कुश्ती को सब कुछ दिया है. एक पदक हारते ही लोगों ने मुझे निर्जीव समझ लिया. टोक्यो ओलंपिक में कुछ खिलाड़ियों (Vinesh phogat) ने हार का मुंह देखा तो कुछ ने जीत हांसिल की. भले ही खेल में हार-जीत लगी रहती है लेकिन जीतने वाले और हारने वाले खिलाड़ियों के साथ कितना अलग व्यवहार किया जाता है, यह किसी से भी छिपा नहीं है. भला कौन खिलाड़ी ऐसा होगा जो दिन-रात मेहनत करने के बाद यह चाहता होगा कि वह हार जाए. वहीं दूसरी तरफ हारे हुए खिलाड़ियों के कमरों में खामाशी एक शोर है. वे सोच रहे होंगे कि मैंने कहां गलती कर दी, कैसे में चूक गया. मैं क्यों हार गया. वे अफसोस मना रहे होंगे. हारे हुए खिलाड़ी कितना बेचैन होंगे, उनको कितनी भी तसल्ली दे दो लेेकिन उनका दिल तो टूटा ही होगा, जो कब जुड़ेगा पता नहीं. अब भारत की शीर्ष महिला पहलवान विनेश फोगाट को ही देख लीजिए. जिन्हें भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) ने अनुशासनहीनता की वजह से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया. अब जाकर इस इस महिला पहलवान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपने दर्द को साझा किया है. इसके साथ ही विनेश ने फेडरेशन पर भी सवाल उठाए हैं. विनेश ने अपनी भावना को जिन शब्दों बयां किया है वह आपको भी भावुक कर सकती है. 'ऐसा लग रहा है कि मैं सपने में सो रही हूं. पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर काफी कुछ चल रहा है. मैं एकदम खाली महसूस कर रही हूं. ' वो कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि मेरी जिंदगी में क्या हो रहा है. मैंने कुश्ती को सब कुछ दिया है लेकिन एक पदक हारते ही लोगों ने मुझे निर्जीव समझ लिया. विनेश कहती हैं कि मेरे दिमाग में फिलहाल दो तरीके के ख्याल चल रहे हैं. एक ख्याल कहता है कि मैं अब कुश्ती से दूर हो जाऊं तो वहीं दूसरा ख्याल कहता है कि बिना लड़े दूर जाना मेरी सबसे बड़ी हार होगी. अभी, मैं सच में अपने परिवार पर ध्यान देना चाहती हूं लेकिन बाहर हर कोई मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे मैं मरी हुई चीज हूं. मैं जानती थी कि भारत में आप जितनी तेजी से उठते हैं उतनी ही तेजी से गिरते हैं. एक पदक खोने के साथ ही मेरा सब कुछ खत्म हो गया. कुश्ती को भूल जाइए, कम से कम इंसान को तो सामान्य रहने दीजिए. मेरे साथी एथलीट यह नहीं पूछते कि आपके साथ क्या गलत हुआ बल्कि वे यह बताते हैं कि आपने क्या गलत किया. वे आपसे कुछ पूछे बिना ही अपना नजरिया खुद बनाते हैं. कम से कम मुझसे कोई पूछो तो सही कि मैट पर मेरे साथ क्या हुआ. ओलंपिक में कोई भी एथलीट दबाव में नहीं होता है. मैं टोक्यो में, रियो में भी दबाव में थी लेकिन मुझे पता है कि मुझे इसे कैसे संभालना है. विनेश ने डब्ल्यूएफआई के आरोपों पर भी पलटवार किया है. दरअसल, संघ ने कहा था कि विनेश ने अपने साथी पहलवानों के साथ रहने और ट्रेनिंग करने से इंकार किया था. इस पर फोगाट ने कहा, कि 'भारतीय खिलाड़ियों की लगातार टेस्टिंग हो रही थी और मेरी टेस्टिंग नहीं हुई थी. मैं सिर्फ उन्हें सुरक्षित रखना चाहती थी. क्या मैं उनके पा जाकर उन्हं संक्रमित कर देती. . . इसमें बड़ी बात क्या है, दो-तीन दिनों बाद तो मैं उनके साथ थी और मैंने सीमा के साथ ट्रेनिंग भी की थी. ऐसे में उन्होंने कैसे आरोप लगा दिया कि मैं टीम के साथ नहीं रहना चाहती थी. विनेश ने खुलासा किया कि मुकाबले से एक दिन पहले मैंने कुछ नहीं खाया था और मुझे उल्टियां हो रही थीं. मेरे पास नमक के कैप्सूल थे, मैंने इलेक्ट्रोलाइट्स पिया. मुझे लो बल्ड प्रेशर की परेशानी है. मैने कोशिश की मेरा रक्तचाप सामान्य रहे, लेकिन कुछ काम नहीं कर रही था. 'मुझे दूसरे मैच में पता था कि मैं हार रही हूं, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पा रही थी. मेरा दिमाग पूरी तरह बंद हो गया था कि मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी. ' मुझे शूटिंग टीम से एक फिजियो सौंपा गया था. वह मेरे शरीर को नहीं समझती थी. मेरे खेल की बहुत अलग मांगें हैं. वह मेरी मदद नहीं कर सकती थी. उसे नहीं पता था कि आखिरी दिन जब मैं अपना वजन कम कर रही होती हूं तो क्या मुझे किन चीजों की जरूरत पड़ती है. वह शूटिंग की फिजियो थी वह कुश्ती की चीजों को कैसे समझती? यह हम दोनों के साथ अन्याय था. बाउट के दिन वजन घटाने के बाद, मेरे शरीर का तापमान गर्म हो गया था, मैं दर्द में थी. बस से स्टेडियम जाते समय मैंने मेरी फिजियो पूर्णिमाको फोन किया और उनसे पूछा कि मैं क्या कर सकती हूं. मैंने सांस लेने के कुछ व्यायाम किए लेकिन कोई असर नहीं हुआ. मैं नियंत्रण में महसूस नहीं कर रही था और कांप रही थी. मुझे पहली बार अगस्त 2020 में COVID हुआ, इसलिए मैं प्रोटीन को पचा नहीं पा रही हूं. एक साल से मेरे शरीर में प्रोटीन नहीं है. एशियन चैंपियनशिप के बाद जब मैं कजाकिस्तान से आने के बाद मैं फिर से बीमार पड़ गई. मेरा फिर से कोरोना का परीक्षण किया गया. आप जरा कल्पना कीजिए कि मैं ओलंपिक के इस चरण में कैसे पहुंच सकी हूं. मैं एक भावुक व्यक्ति हूं. जब 2019 में मैंने अपना वजन बदला तो मुझे तीन महीने अवसाद की समस्या थी. मैं सो नहीं पा रही, शायद कई दिनों तक मैं जागता ही रहूंगी. अगर कोई कोच थोड़ा भी ऊंचे स्वर में बोलता है तो मैं रोने लगती थी. एक एथलीट के रूप में मानसिक दबाव बहुत अधिक होता है. जब मैं एशियाई चैंपियनशिप में चोटिल हो गया थी तभी मुझे लगा कि यह मुझे यह सब छोड़ देना चाहिए. मैंने एक मनोवैज्ञानिक से बात की क्योंकि मुझे तब भावनात्मक समर्थन की जरूरत थी. परिवार में सभी ने मेरी मदद की लेकिन अंदर क्या चल रहा है, मैं सब कुछ व्यक्त नहीं कर सकती. क्या आपको लगता है कि मेडिटेशन करना और मनोवैज्ञानिक से बात करना काफी है? कुछ भी काफी नहीं है. हमारे साथ क्या हो रहा है यह केवल हम ही जानते हैं. मैंने किस टीम के साथ प्रशिक्षण नहीं लिया? मुझसे किसी ने नहीं पूछा कि मैंने क्या. . . अगर आप सच में गोल्ड मेडल की उम्मीद कर रहे थे तो मेरे साथ मेरी फिजियो पूर्णिमा होनी चाहिए थी? मेरे कोच वोलर ने मेरी मदद करने के लिए मेरे साथ यात्रा की. मेरे साथ लखनऊ में रहे जब उनका एक साल का बेटा बुडापेस्ट में था. COVID हिट होने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा और ओलंपिक स्थगित होने पर मुझे प्रेरित किया. उन्होंने अपने निजी जीवन की भी परवाह नहीं की, आप उस व्यक्ति को कैसे दोष दे सकते हैं? वोलर ने सब कुछ किया. मेरे हारने पर उन्होंने रोना बंद नहीं किया. उनकी पत्नी ने रोना बंद नहीं किया. वह 4 बार की ओलंपियन है और उच्च भार वर्ग से होने के कारण मेरे प्रशिक्षण में केवल मदद की थी. मैंने पिछले तीन सालों से उसी सपोर्ट स्टाफ के साथ जी रही थी. मैं मानसिक रूप से ठीक नहीं हुई हूं. घर पहुंचने के बाद से मैं सिर्फ एक बार सोई हूं. मैं गांव में पैदल घूमती रहती हूं. मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे सोने का दावेदार बना दो. मैं अपने लिए कुश्ती करती हूं और हारने के बाद सबसे पहले मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन मुझे अकेला छोड़ दो.
'ऐसा लग रहा है कि मैं सपने में सो रही हूं. पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर काफी कुछ चल रहा है. मैं एकदम खाली महसूस कर रही हूं. ' वो कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि मेरी जिंदगी में क्या हो रहा है. मैंने कुश्ती को सब कुछ दिया है. एक पदक हारते ही लोगों ने मुझे निर्जीव समझ लिया. टोक्यो ओलंपिक में कुछ खिलाड़ियों ने हार का मुंह देखा तो कुछ ने जीत हांसिल की. भले ही खेल में हार-जीत लगी रहती है लेकिन जीतने वाले और हारने वाले खिलाड़ियों के साथ कितना अलग व्यवहार किया जाता है, यह किसी से भी छिपा नहीं है. भला कौन खिलाड़ी ऐसा होगा जो दिन-रात मेहनत करने के बाद यह चाहता होगा कि वह हार जाए. वहीं दूसरी तरफ हारे हुए खिलाड़ियों के कमरों में खामाशी एक शोर है. वे सोच रहे होंगे कि मैंने कहां गलती कर दी, कैसे में चूक गया. मैं क्यों हार गया. वे अफसोस मना रहे होंगे. हारे हुए खिलाड़ी कितना बेचैन होंगे, उनको कितनी भी तसल्ली दे दो लेेकिन उनका दिल तो टूटा ही होगा, जो कब जुड़ेगा पता नहीं. अब भारत की शीर्ष महिला पहलवान विनेश फोगाट को ही देख लीजिए. जिन्हें भारतीय कुश्ती संघ ने अनुशासनहीनता की वजह से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया. अब जाकर इस इस महिला पहलवान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपने दर्द को साझा किया है. इसके साथ ही विनेश ने फेडरेशन पर भी सवाल उठाए हैं. विनेश ने अपनी भावना को जिन शब्दों बयां किया है वह आपको भी भावुक कर सकती है. 'ऐसा लग रहा है कि मैं सपने में सो रही हूं. पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर काफी कुछ चल रहा है. मैं एकदम खाली महसूस कर रही हूं. ' वो कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि मेरी जिंदगी में क्या हो रहा है. मैंने कुश्ती को सब कुछ दिया है लेकिन एक पदक हारते ही लोगों ने मुझे निर्जीव समझ लिया. विनेश कहती हैं कि मेरे दिमाग में फिलहाल दो तरीके के ख्याल चल रहे हैं. एक ख्याल कहता है कि मैं अब कुश्ती से दूर हो जाऊं तो वहीं दूसरा ख्याल कहता है कि बिना लड़े दूर जाना मेरी सबसे बड़ी हार होगी. अभी, मैं सच में अपने परिवार पर ध्यान देना चाहती हूं लेकिन बाहर हर कोई मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे मैं मरी हुई चीज हूं. मैं जानती थी कि भारत में आप जितनी तेजी से उठते हैं उतनी ही तेजी से गिरते हैं. एक पदक खोने के साथ ही मेरा सब कुछ खत्म हो गया. कुश्ती को भूल जाइए, कम से कम इंसान को तो सामान्य रहने दीजिए. मेरे साथी एथलीट यह नहीं पूछते कि आपके साथ क्या गलत हुआ बल्कि वे यह बताते हैं कि आपने क्या गलत किया. वे आपसे कुछ पूछे बिना ही अपना नजरिया खुद बनाते हैं. कम से कम मुझसे कोई पूछो तो सही कि मैट पर मेरे साथ क्या हुआ. ओलंपिक में कोई भी एथलीट दबाव में नहीं होता है. मैं टोक्यो में, रियो में भी दबाव में थी लेकिन मुझे पता है कि मुझे इसे कैसे संभालना है. विनेश ने डब्ल्यूएफआई के आरोपों पर भी पलटवार किया है. दरअसल, संघ ने कहा था कि विनेश ने अपने साथी पहलवानों के साथ रहने और ट्रेनिंग करने से इंकार किया था. इस पर फोगाट ने कहा, कि 'भारतीय खिलाड़ियों की लगातार टेस्टिंग हो रही थी और मेरी टेस्टिंग नहीं हुई थी. मैं सिर्फ उन्हें सुरक्षित रखना चाहती थी. क्या मैं उनके पा जाकर उन्हं संक्रमित कर देती. . . इसमें बड़ी बात क्या है, दो-तीन दिनों बाद तो मैं उनके साथ थी और मैंने सीमा के साथ ट्रेनिंग भी की थी. ऐसे में उन्होंने कैसे आरोप लगा दिया कि मैं टीम के साथ नहीं रहना चाहती थी. विनेश ने खुलासा किया कि मुकाबले से एक दिन पहले मैंने कुछ नहीं खाया था और मुझे उल्टियां हो रही थीं. मेरे पास नमक के कैप्सूल थे, मैंने इलेक्ट्रोलाइट्स पिया. मुझे लो बल्ड प्रेशर की परेशानी है. मैने कोशिश की मेरा रक्तचाप सामान्य रहे, लेकिन कुछ काम नहीं कर रही था. 'मुझे दूसरे मैच में पता था कि मैं हार रही हूं, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पा रही थी. मेरा दिमाग पूरी तरह बंद हो गया था कि मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी. ' मुझे शूटिंग टीम से एक फिजियो सौंपा गया था. वह मेरे शरीर को नहीं समझती थी. मेरे खेल की बहुत अलग मांगें हैं. वह मेरी मदद नहीं कर सकती थी. उसे नहीं पता था कि आखिरी दिन जब मैं अपना वजन कम कर रही होती हूं तो क्या मुझे किन चीजों की जरूरत पड़ती है. वह शूटिंग की फिजियो थी वह कुश्ती की चीजों को कैसे समझती? यह हम दोनों के साथ अन्याय था. बाउट के दिन वजन घटाने के बाद, मेरे शरीर का तापमान गर्म हो गया था, मैं दर्द में थी. बस से स्टेडियम जाते समय मैंने मेरी फिजियो पूर्णिमाको फोन किया और उनसे पूछा कि मैं क्या कर सकती हूं. मैंने सांस लेने के कुछ व्यायाम किए लेकिन कोई असर नहीं हुआ. मैं नियंत्रण में महसूस नहीं कर रही था और कांप रही थी. मुझे पहली बार अगस्त दो हज़ार बीस में COVID हुआ, इसलिए मैं प्रोटीन को पचा नहीं पा रही हूं. एक साल से मेरे शरीर में प्रोटीन नहीं है. एशियन चैंपियनशिप के बाद जब मैं कजाकिस्तान से आने के बाद मैं फिर से बीमार पड़ गई. मेरा फिर से कोरोना का परीक्षण किया गया. आप जरा कल्पना कीजिए कि मैं ओलंपिक के इस चरण में कैसे पहुंच सकी हूं. मैं एक भावुक व्यक्ति हूं. जब दो हज़ार उन्नीस में मैंने अपना वजन बदला तो मुझे तीन महीने अवसाद की समस्या थी. मैं सो नहीं पा रही, शायद कई दिनों तक मैं जागता ही रहूंगी. अगर कोई कोच थोड़ा भी ऊंचे स्वर में बोलता है तो मैं रोने लगती थी. एक एथलीट के रूप में मानसिक दबाव बहुत अधिक होता है. जब मैं एशियाई चैंपियनशिप में चोटिल हो गया थी तभी मुझे लगा कि यह मुझे यह सब छोड़ देना चाहिए. मैंने एक मनोवैज्ञानिक से बात की क्योंकि मुझे तब भावनात्मक समर्थन की जरूरत थी. परिवार में सभी ने मेरी मदद की लेकिन अंदर क्या चल रहा है, मैं सब कुछ व्यक्त नहीं कर सकती. क्या आपको लगता है कि मेडिटेशन करना और मनोवैज्ञानिक से बात करना काफी है? कुछ भी काफी नहीं है. हमारे साथ क्या हो रहा है यह केवल हम ही जानते हैं. मैंने किस टीम के साथ प्रशिक्षण नहीं लिया? मुझसे किसी ने नहीं पूछा कि मैंने क्या. . . अगर आप सच में गोल्ड मेडल की उम्मीद कर रहे थे तो मेरे साथ मेरी फिजियो पूर्णिमा होनी चाहिए थी? मेरे कोच वोलर ने मेरी मदद करने के लिए मेरे साथ यात्रा की. मेरे साथ लखनऊ में रहे जब उनका एक साल का बेटा बुडापेस्ट में था. COVID हिट होने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा और ओलंपिक स्थगित होने पर मुझे प्रेरित किया. उन्होंने अपने निजी जीवन की भी परवाह नहीं की, आप उस व्यक्ति को कैसे दोष दे सकते हैं? वोलर ने सब कुछ किया. मेरे हारने पर उन्होंने रोना बंद नहीं किया. उनकी पत्नी ने रोना बंद नहीं किया. वह चार बार की ओलंपियन है और उच्च भार वर्ग से होने के कारण मेरे प्रशिक्षण में केवल मदद की थी. मैंने पिछले तीन सालों से उसी सपोर्ट स्टाफ के साथ जी रही थी. मैं मानसिक रूप से ठीक नहीं हुई हूं. घर पहुंचने के बाद से मैं सिर्फ एक बार सोई हूं. मैं गांव में पैदल घूमती रहती हूं. मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे सोने का दावेदार बना दो. मैं अपने लिए कुश्ती करती हूं और हारने के बाद सबसे पहले मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन मुझे अकेला छोड़ दो.
कहानिया पर कान न दीजिये। कहानियो म कुछ का कुछ बन जाया करता है। वह खुद भी तो कहानिया गढता था। इससे कहानियों के परब को समझता था । किसी कतर उन कहानियो के फरेब पर जिन्दा भी रहता था। वहा करता था कि 'मेरी लिखाइ म लोग मुझे नेक तक मान लेते हैं। चलो अच्छा है ऐसे नेकी फलती और बदी मुझ तक सिमटी रहती है।' लेकिन इस लीपापोती के बावजूद मैं आप से मान लने को कहता हूँ कि आदमी वह एक्दम बुरान था । एकता वजह यह कि असल म आत्मी कोई भी बुरा नही होता । दूसरा यह कि जानत वूयते कोशि उसकी वदी स वचन की रहती थी जसे कि हर इसान की रहती है । शुरू से जनेद्र मे इरादे की ताकत की कमी देखी जा सकती है। वह किम्मत बनान वाला मे से न था, किम्मत ही उसे बनाती गई। जिन्दगी म उसकी कोई कारगुजारी नजर नहीं आती। एक मदम बहाव मे वह जिदगी बहती चली गई । एक भटके निरीह बालक को तरह उसके छुटपन के दिन गुजरे। वह मोचक-सा सब ओर दखता और कभी अपने लिए फसला करने की जरूरत न समझता । अग्रेजी मे जिसे half wit बहते हैं कुछ वही कफियत समझिये 1 अचरज में बौखलाया वह अपने साथियों के बीच रहता था और साथी सिफ उसे गवारा करते थे । अपनपन का और अपनी जगह का उसे पता न था। क्लास में किसी सजेक्ट या साल म पहले नम्बर आ गया तो दूसरे किसी मे एकदम पिछड रहा। ताज्जूच है कि फेल वह किसी दरजे म नहीं हुआ। पर पास होता गया तो आपने बावजूद । सदा एक खोये और भूल हुए ढब भ वह रहता था और दुनिया उस बाहर और मदर चारों तरफ चक्कर म तैरती हुई मालूम हाती थी जिसम बुछ उसकी समझ को पकडम न जाता था। घूम फिर कर एक ही मचाई उसके लिए रह जाती थी वह उसकी माँ । चलिये ऐसे मैट्रिक हो गया और वह वालिज मे पहुँचा । और कालिज भी छूट गया और वह दुनिया में आ पड़ा। पर दुनिया से उसकी किसी तरह की जान पहचान न थी। समुदर को लहरो पर तिनका तैरता है, क्योंकि हलवा होता है। उसम भो कही किमी तरफ से वजन न था और बरसा लहरा पर वह इधर-उधर उतरामा किया। कल्पना म लाइये एव तईस बरस के जवान का । उसम जिस्म होना चाहिए, होमला होना चाहिये, घरा होना चाहिए। आँसो में उसके रागनी और वत्मा म जनेद्रकुमार की मौत पर
कहानिया पर कान न दीजिये। कहानियो म कुछ का कुछ बन जाया करता है। वह खुद भी तो कहानिया गढता था। इससे कहानियों के परब को समझता था । किसी कतर उन कहानियो के फरेब पर जिन्दा भी रहता था। वहा करता था कि 'मेरी लिखाइ म लोग मुझे नेक तक मान लेते हैं। चलो अच्छा है ऐसे नेकी फलती और बदी मुझ तक सिमटी रहती है।' लेकिन इस लीपापोती के बावजूद मैं आप से मान लने को कहता हूँ कि आदमी वह एक्दम बुरान था । एकता वजह यह कि असल म आत्मी कोई भी बुरा नही होता । दूसरा यह कि जानत वूयते कोशि उसकी वदी स वचन की रहती थी जसे कि हर इसान की रहती है । शुरू से जनेद्र मे इरादे की ताकत की कमी देखी जा सकती है। वह किम्मत बनान वाला मे से न था, किम्मत ही उसे बनाती गई। जिन्दगी म उसकी कोई कारगुजारी नजर नहीं आती। एक मदम बहाव मे वह जिदगी बहती चली गई । एक भटके निरीह बालक को तरह उसके छुटपन के दिन गुजरे। वह मोचक-सा सब ओर दखता और कभी अपने लिए फसला करने की जरूरत न समझता । अग्रेजी मे जिसे half wit बहते हैं कुछ वही कफियत समझिये एक अचरज में बौखलाया वह अपने साथियों के बीच रहता था और साथी सिफ उसे गवारा करते थे । अपनपन का और अपनी जगह का उसे पता न था। क्लास में किसी सजेक्ट या साल म पहले नम्बर आ गया तो दूसरे किसी मे एकदम पिछड रहा। ताज्जूच है कि फेल वह किसी दरजे म नहीं हुआ। पर पास होता गया तो आपने बावजूद । सदा एक खोये और भूल हुए ढब भ वह रहता था और दुनिया उस बाहर और मदर चारों तरफ चक्कर म तैरती हुई मालूम हाती थी जिसम बुछ उसकी समझ को पकडम न जाता था। घूम फिर कर एक ही मचाई उसके लिए रह जाती थी वह उसकी माँ । चलिये ऐसे मैट्रिक हो गया और वह वालिज मे पहुँचा । और कालिज भी छूट गया और वह दुनिया में आ पड़ा। पर दुनिया से उसकी किसी तरह की जान पहचान न थी। समुदर को लहरो पर तिनका तैरता है, क्योंकि हलवा होता है। उसम भो कही किमी तरफ से वजन न था और बरसा लहरा पर वह इधर-उधर उतरामा किया। कल्पना म लाइये एव तईस बरस के जवान का । उसम जिस्म होना चाहिए, होमला होना चाहिये, घरा होना चाहिए। आँसो में उसके रागनी और वत्मा म जनेद्रकुमार की मौत पर
दिय गर, पेनमा और दाइमा से उसृष्ट सिद्धान्ता में आपकीय सहचरण वं धारणाओं का उपयोग किया गया है। इन रायमें सदव विशिष्ट आपक्षिवता का ही उपयोग हुआ है। किन्तु हमें विदि है पि अकेली विशिष्ट आपेक्षिस्ता पर्याप्त नहीं है और उनका व्यापवीकरण आवश्यक है। यही १९९६ में आइ स्टाइन ने किया था। अत यह बडे आश्चय की बात है कि आधुनिर भौतिक विज्ञान के दा महान सिद्धान्ता में व्यापक आपक्षिरता के सिद्धान्न में और क्वाटम सिद्धान्त में -याई सपक नही ह और वे एक दूसरे वो उपना करते ह ! किसी न किसी का इन दोना का सश्लेषण करने में किसी दिन त मिल जाना अत्यन्त आवश्यक है। व्यापक आपक्षियता के सिद्धात की प्रमुख स्परेगा का निर्माण कर लेने के पश्चात आइन्स्टाइन ऐमी युक्ति को सोज में लग गये जिससे गुरुत्वीय बल-क्षेत्र की विचित्रताओं वे द्वारा ही द्रव्य की पारमाणविक सरचना वा निरूपण संभव हो जाय। उसी समय वे निम्नलिखित प्रश्न के अध्ययन में भी व्यस्त थे । व्यापक आपक्षिक्ता सिद्धान्त में यह मान लिया जाता है कि वक दिव-बाल में किसी वस्तु की गति उसो दिकबाल की अल्पातरी रेसा वे द्वारा निरुपित होती है। इसी अधिमान्यता की सहायता से आइन्स्टा इन ने ग्रहा की सूय-परित्रमा के सूत्रों का पुननिगमन करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके अतिरिक्त इसी के द्वारा बुध के परिसौर विदु' वे दोघवालिक' प्रगमन' की व्याख्या हो सकी थी । विन्तु यदि हमें यह अभीष्ट हो कि गुरुत्वीय क्षेत्र की विचिनताओं के अस्तित्व के द्वारा द्रव्य की मूल कणिवाआ का निरूपण करें तो केवल गुरुत्व क्षेत्राय समीकरणा को ही लेकर यह प्रमाणित करना सभव हाना चाहिए कि ये विचिनताएँ दिक-वाल की अल्पा तरी रेखाआ पर ही गमन करती हैं और इस बात को स्वतंत्र अभि मान्यता के रूप में निविष्ट करने की आवश्यकता नही होनी चाहिए । दीघकाल तक आइन्स्टाइन इसी प्रश्न पर विचार करते रहे थे और १९२७ में ग्रोमर" के सहयोग से 1 Schwinger 2 Feynmann 3 Dvson 4 Relativistic Co vartance इन मिद्धान्तों का उद्देश्य क्ण निकायों के सवागपूर्ण तथा प्रकृष्ट आपेक्षिकीय सिद्धान्नका निर्माण है जो तरंगयानिकी को निकाय के लिए उपयुक्त बनाने की समस्या को हल करने के लिए आवश्यक है। इसका विवेचन परिच्छेद १२ के ख १ वे अन्त में किया गया है । १ 5 Curved space time 6 Geodesic 7 Mercury & Ierihelion 9 Secular 10 Advance 11 Grommer नपा प्रापिता मूल्य नियचर इच्छानुकूल प्रमय र प्रमाणित कास्य आइस्तान और उता महरा में प्रधित किया। इसमें नदिन भी भी हो गये थे। बाद में प्रमाण तथा हमाराजा प्रमय वे प्रमाण में और मर १९२७ में दिये हुए उस प्रमाण में कुछ माह जिग द्वारा मा यह सिद्ध किया था कि वणिया जिस (तग्ग की विविधता हा उसी तरग यी को दिशा में ही उस वणिरावा हाना । विनियर की परिभाषा में ही तर पन वा निविष्ट वरवे इस समा नता का अधिक परिच्छित वरन व प्रयतम व्यस्त है । यद्यपि जभी तन का प्रयामा भवन पूर्ण रूप से विश्वसनीय नही माने जा सस्त तब भी यह निश्चिन ह से विजिस दिना में व अग्रसर हो रहे है वह जत्या गचर ह क्यापि यह गभव ह नि इसा माग से व्यापर जापभिरना तथा रग-यानि के सम्मान में सपना मिट जाय । यति द्रव्य की वणिराजा वा (और उसी प्रकार पोटगना वा) दिवयालीय मापतन की विचित्रताओं द्वारा निमपित किया जाय और यह मान लिया जाय कि यह भापतत्र एव तरगित क्षेत्र द्वारा परिवटित है और यणिकाएँ स्वय भी उमी क्षेत्र की अग है तथा उम क्षत्र की परिभाषा में ही नियताव का प्रादुभाव हो जाता है ता वणिवासस्य वी जाइस्टाइन की धारणाआ तथा मरे द्वि-साधन गिद्धात की धारणाओं का सम्मेलन वरने में सफलता मिल मरतो ह । वित्तु क्या जापक्षिरता तथा कनाटमा का यह सुदर मदम्पण सचमुच सभव हा सवेगा ? यहता भविष्य ही बतायेगा । में इस बात का नितात आवश्यक मानता हूँ कि ऐसा सदलपण हा जाने पर तरग यात्रिी के जिम प्रचलित निश्चन में पारमाणविक निकाय वा क्वाटमीकरण तथा हाइजनबग की जनिश्चितताएँ और सामायत सूक्ष्म स्तरीय भौतिव मापा के परिणामा का प्रागुक्ति की जमभवता भी सम्मिलित ह उसके द्वारा अब तक जितने परिणाम प्राप्त हुए हैं और जितनी भी परिवलन की विधिया का उसमें उपयोग किया जाता है उन सनवी व्युत्पत्ति फिर मे करनी पड़ेगी और उनकी तब सगतता को फिर से प्रमाणित करना पडेगा। वित्तु तव शायद आप यह वह कि यदि प्रचलित निवचन में सभी प्रेशणीय घटनाआ की व्याख्या करने की सामथ्य है तव उसे बदलने की तथा द्वि-साधन और विचिनतायुक्त हरु आदि को निरयक जटिलताओं को प्रविष्ट करने की क्या जावश्यबता है ? इसमे तो नवीन विक्ट बाधाओं के प्रादुर्भाव की ही आशवा है। इसका 1 Infeld 2 Hoffmann 3 Space time Netrie
दिय गर, पेनमा और दाइमा से उसृष्ट सिद्धान्ता में आपकीय सहचरण वं धारणाओं का उपयोग किया गया है। इन रायमें सदव विशिष्ट आपक्षिवता का ही उपयोग हुआ है। किन्तु हमें विदि है पि अकेली विशिष्ट आपेक्षिस्ता पर्याप्त नहीं है और उनका व्यापवीकरण आवश्यक है। यही एक हज़ार नौ सौ छियानवे में आइ स्टाइन ने किया था। अत यह बडे आश्चय की बात है कि आधुनिर भौतिक विज्ञान के दा महान सिद्धान्ता में व्यापक आपक्षिरता के सिद्धान्न में और क्वाटम सिद्धान्त में -याई सपक नही ह और वे एक दूसरे वो उपना करते ह ! किसी न किसी का इन दोना का सश्लेषण करने में किसी दिन त मिल जाना अत्यन्त आवश्यक है। व्यापक आपक्षियता के सिद्धात की प्रमुख स्परेगा का निर्माण कर लेने के पश्चात आइन्स्टाइन ऐमी युक्ति को सोज में लग गये जिससे गुरुत्वीय बल-क्षेत्र की विचित्रताओं वे द्वारा ही द्रव्य की पारमाणविक सरचना वा निरूपण संभव हो जाय। उसी समय वे निम्नलिखित प्रश्न के अध्ययन में भी व्यस्त थे । व्यापक आपक्षिक्ता सिद्धान्त में यह मान लिया जाता है कि वक दिव-बाल में किसी वस्तु की गति उसो दिकबाल की अल्पातरी रेसा वे द्वारा निरुपित होती है। इसी अधिमान्यता की सहायता से आइन्स्टा इन ने ग्रहा की सूय-परित्रमा के सूत्रों का पुननिगमन करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके अतिरिक्त इसी के द्वारा बुध के परिसौर विदु' वे दोघवालिक' प्रगमन' की व्याख्या हो सकी थी । विन्तु यदि हमें यह अभीष्ट हो कि गुरुत्वीय क्षेत्र की विचिनताओं के अस्तित्व के द्वारा द्रव्य की मूल कणिवाआ का निरूपण करें तो केवल गुरुत्व क्षेत्राय समीकरणा को ही लेकर यह प्रमाणित करना सभव हाना चाहिए कि ये विचिनताएँ दिक-वाल की अल्पा तरी रेखाआ पर ही गमन करती हैं और इस बात को स्वतंत्र अभि मान्यता के रूप में निविष्ट करने की आवश्यकता नही होनी चाहिए । दीघकाल तक आइन्स्टाइन इसी प्रश्न पर विचार करते रहे थे और एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में ग्रोमर" के सहयोग से एक Schwinger दो Feynmann तीन Dvson चार Relativistic Co vartance इन मिद्धान्तों का उद्देश्य क्ण निकायों के सवागपूर्ण तथा प्रकृष्ट आपेक्षिकीय सिद्धान्नका निर्माण है जो तरंगयानिकी को निकाय के लिए उपयुक्त बनाने की समस्या को हल करने के लिए आवश्यक है। इसका विवेचन परिच्छेद बारह के ख एक वे अन्त में किया गया है । एक पाँच Curved space time छः Geodesic सात Mercury & Ierihelion नौ Secular दस Advance ग्यारह Grommer नपा प्रापिता मूल्य नियचर इच्छानुकूल प्रमय र प्रमाणित कास्य आइस्तान और उता महरा में प्रधित किया। इसमें नदिन भी भी हो गये थे। बाद में प्रमाण तथा हमाराजा प्रमय वे प्रमाण में और मर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में दिये हुए उस प्रमाण में कुछ माह जिग द्वारा मा यह सिद्ध किया था कि वणिया जिस दिवयालीय मापतन की विचित्रताओं द्वारा निमपित किया जाय और यह मान लिया जाय कि यह भापतत्र एव तरगित क्षेत्र द्वारा परिवटित है और यणिकाएँ स्वय भी उमी क्षेत्र की अग है तथा उम क्षत्र की परिभाषा में ही नियताव का प्रादुभाव हो जाता है ता वणिवासस्य वी जाइस्टाइन की धारणाआ तथा मरे द्वि-साधन गिद्धात की धारणाओं का सम्मेलन वरने में सफलता मिल मरतो ह । वित्तु क्या जापक्षिरता तथा कनाटमा का यह सुदर मदम्पण सचमुच सभव हा सवेगा ? यहता भविष्य ही बतायेगा । में इस बात का नितात आवश्यक मानता हूँ कि ऐसा सदलपण हा जाने पर तरग यात्रिी के जिम प्रचलित निश्चन में पारमाणविक निकाय वा क्वाटमीकरण तथा हाइजनबग की जनिश्चितताएँ और सामायत सूक्ष्म स्तरीय भौतिव मापा के परिणामा का प्रागुक्ति की जमभवता भी सम्मिलित ह उसके द्वारा अब तक जितने परिणाम प्राप्त हुए हैं और जितनी भी परिवलन की विधिया का उसमें उपयोग किया जाता है उन सनवी व्युत्पत्ति फिर मे करनी पड़ेगी और उनकी तब सगतता को फिर से प्रमाणित करना पडेगा। वित्तु तव शायद आप यह वह कि यदि प्रचलित निवचन में सभी प्रेशणीय घटनाआ की व्याख्या करने की सामथ्य है तव उसे बदलने की तथा द्वि-साधन और विचिनतायुक्त हरु आदि को निरयक जटिलताओं को प्रविष्ट करने की क्या जावश्यबता है ? इसमे तो नवीन विक्ट बाधाओं के प्रादुर्भाव की ही आशवा है। इसका एक Infeld दो Hoffmann तीन Space time Netrie
जन्म के बाद कितने दिनों बाद अलग होती है गर्भनाल? जन्म के बाद करीब 5 से 10 दिनों के बीच शिशु की गर्भनाल अलग होती है। हालांकि, कुछ मामलों में इसे अलग होने में तीन सप्ताह या इससे अधिक का समय लग जाता है। इस दौरान पेरेंट्स को बच्चे की गर्भनाल का अच्छे से देखभाल की जरूरत होती है। एक्सपर्ट अनुसार, जन्म के बाद बच्चे के ठूंठ को सूखा रखना चाहए। इसमें पानी लगाने से बचना चाहिए। हवा के संपर्क में इसे रखने से गर्भनाल सूखी रहती है। शिशु को डायपर पहनाते समय भी उसके ठूंठ के हिस्से को ढके ना। नहीं तो बच्चे के गर्भनाल को हवा नहीं लगेगी। इसके लिए आप डायपर के उस हिस्से को काटकर अलग करके बच्चे को पहनाएं। इसके साथ ही मूत्र के संपर्क में गर्भनाल को लगाने से बचें। शिशु के गर्भनाल की सफाई का खास ध्यान रखें। इसके लिए पानी को उबालकर ठंडा करें। फिर कॉटन पैड को पानी में डुबोकर शिशु की गर्भनाल को हल्के से साफ करें। इसे जोर से साफ करने से बचें नहीं तो शिशु को ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भनाल की सफाई करने के बाद इसपर आप एंटीसेप्टिक दवाएं लगा सकते हैं। इससे वह संक्रमण से सुरक्षित रहेगा। मगर एल्कोहल युक्त एंटीसेप्टिक ना लगाएं। इससे नाल को सूखने में समय अधिक लगता है। जैसे कि पहले ही बताया गया है कि शिशु की गर्भनाल को सूखने में उसे अच्छे से हवा लगने की जरूरत होती है। इसलिए उसकी नैपी को जोर से बांधने की जगह उसे थोड़ा ढीला रखएं। कसकर नैपी डालने से शिशु की स्किन पर रगड़ पड़ सकती है। इसके अलावा वहां खून निकलने की समस्या भी हो सकती है। नवजात शिशु को सूती व ढीले कपड़े पहनाने चाहिए। इससे उसकी नाभि पर कसाव व रगड़ नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही गर्भनाल को अच्छे से हवा लगने से वह जल्दी सूख सकता है। शिशु को पॉलिस्टर या फैशनेबल कपड़े पहनाने की गलती ना करें। इससे उसे इंफेक्शन, ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है। इसतरह आप इन आसान उपायों को अपनाकर शिशु की गर्भनाल की देखभाल कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ परेशानी होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
जन्म के बाद कितने दिनों बाद अलग होती है गर्भनाल? जन्म के बाद करीब पाँच से दस दिनों के बीच शिशु की गर्भनाल अलग होती है। हालांकि, कुछ मामलों में इसे अलग होने में तीन सप्ताह या इससे अधिक का समय लग जाता है। इस दौरान पेरेंट्स को बच्चे की गर्भनाल का अच्छे से देखभाल की जरूरत होती है। एक्सपर्ट अनुसार, जन्म के बाद बच्चे के ठूंठ को सूखा रखना चाहए। इसमें पानी लगाने से बचना चाहिए। हवा के संपर्क में इसे रखने से गर्भनाल सूखी रहती है। शिशु को डायपर पहनाते समय भी उसके ठूंठ के हिस्से को ढके ना। नहीं तो बच्चे के गर्भनाल को हवा नहीं लगेगी। इसके लिए आप डायपर के उस हिस्से को काटकर अलग करके बच्चे को पहनाएं। इसके साथ ही मूत्र के संपर्क में गर्भनाल को लगाने से बचें। शिशु के गर्भनाल की सफाई का खास ध्यान रखें। इसके लिए पानी को उबालकर ठंडा करें। फिर कॉटन पैड को पानी में डुबोकर शिशु की गर्भनाल को हल्के से साफ करें। इसे जोर से साफ करने से बचें नहीं तो शिशु को ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भनाल की सफाई करने के बाद इसपर आप एंटीसेप्टिक दवाएं लगा सकते हैं। इससे वह संक्रमण से सुरक्षित रहेगा। मगर एल्कोहल युक्त एंटीसेप्टिक ना लगाएं। इससे नाल को सूखने में समय अधिक लगता है। जैसे कि पहले ही बताया गया है कि शिशु की गर्भनाल को सूखने में उसे अच्छे से हवा लगने की जरूरत होती है। इसलिए उसकी नैपी को जोर से बांधने की जगह उसे थोड़ा ढीला रखएं। कसकर नैपी डालने से शिशु की स्किन पर रगड़ पड़ सकती है। इसके अलावा वहां खून निकलने की समस्या भी हो सकती है। नवजात शिशु को सूती व ढीले कपड़े पहनाने चाहिए। इससे उसकी नाभि पर कसाव व रगड़ नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही गर्भनाल को अच्छे से हवा लगने से वह जल्दी सूख सकता है। शिशु को पॉलिस्टर या फैशनेबल कपड़े पहनाने की गलती ना करें। इससे उसे इंफेक्शन, ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है। इसतरह आप इन आसान उपायों को अपनाकर शिशु की गर्भनाल की देखभाल कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ परेशानी होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
आस्ट्रेलिया की चार्ल्ज़ स्टीवर्ट युनिवर्सिटी के शिक्षक प्रोफ़ेसर ओज़ालेप ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह कोरोना वायरस मुसलमानों की आस्थाओं को चुनौती दे रहा है और बदल रहा है। उनके लेख का शीर्षक भी यही है। ओज़ालेप अपने लेख में लिखते हैं कि ईश्वर ने अपने पैग़म्बर के माध्यम से इस्लाम के नाम से जो धर्म भेजा है उसने स्वास्थ्य के संबंध में बड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं और आज भी यह निर्देश मुसलमानों के बीच प्रचलित हैं। मुसलमान आज दुनिया भर में कोरोना वायरस से पैदा होने वाले संकट से जूझ रहे हैं लेकिन इस्लाम धर्म ने आस्थाओं, मान्यताओं और सांस्कृतिक स्तर पर जो निर्देश सुझाए हैं वह कोरोना से लड़ने के लिए मुसलमानों के सामने बहुत से उपाय पेश करते हैं। कोरोना वायरस से बचने का एक महत्वपूर्ण उपाय व्यक्तिगत साफ़ सफ़ाई है। आज डाक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना वायरस से बचने के लिए कम से कम बीस सेकेंड तक साबुन से हाथों को दिन में कई बार धोना ज़रूरी है। क़ुरआन सूरए मुदस्सिर की आयत संख्या 74 में कहता है وَ ثِیابَكَ فَطَهِّرयानी अपने कपड़े पाक साफ़ रखो। सूरए बक़रा की आयत संख्या 222 में कहता है وَ یُحِبُّ الْمُتَطَهِّرین यानी ईश्वर पाक साफ़ रहने वालों को चाहता है। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि सफ़ाई सुथराई आधा ईमान है। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि खाना खाने से पहले और बाद में अपने हाथों को धोएं। मुसलमानों को हर दिन नमाज़ से पहले वुज़ू करने का निर्देश दिया गया है। वुज़ू में इंसान अपने हाथों और चेहरे को धोता है। वायरस को रोकने के लिए इतना काफ़ी नहीं है लेकिन प्रभावी ज़रूर है।
आस्ट्रेलिया की चार्ल्ज़ स्टीवर्ट युनिवर्सिटी के शिक्षक प्रोफ़ेसर ओज़ालेप ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह कोरोना वायरस मुसलमानों की आस्थाओं को चुनौती दे रहा है और बदल रहा है। उनके लेख का शीर्षक भी यही है। ओज़ालेप अपने लेख में लिखते हैं कि ईश्वर ने अपने पैग़म्बर के माध्यम से इस्लाम के नाम से जो धर्म भेजा है उसने स्वास्थ्य के संबंध में बड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं और आज भी यह निर्देश मुसलमानों के बीच प्रचलित हैं। मुसलमान आज दुनिया भर में कोरोना वायरस से पैदा होने वाले संकट से जूझ रहे हैं लेकिन इस्लाम धर्म ने आस्थाओं, मान्यताओं और सांस्कृतिक स्तर पर जो निर्देश सुझाए हैं वह कोरोना से लड़ने के लिए मुसलमानों के सामने बहुत से उपाय पेश करते हैं। कोरोना वायरस से बचने का एक महत्वपूर्ण उपाय व्यक्तिगत साफ़ सफ़ाई है। आज डाक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना वायरस से बचने के लिए कम से कम बीस सेकेंड तक साबुन से हाथों को दिन में कई बार धोना ज़रूरी है। क़ुरआन सूरए मुदस्सिर की आयत संख्या चौहत्तर में कहता है وَ ثِیابَكَ فَطَهِّرयानी अपने कपड़े पाक साफ़ रखो। सूरए बक़रा की आयत संख्या दो सौ बाईस में कहता है وَ یُحِبُّ الْمُتَطَهِّرین यानी ईश्वर पाक साफ़ रहने वालों को चाहता है। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि सफ़ाई सुथराई आधा ईमान है। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि खाना खाने से पहले और बाद में अपने हाथों को धोएं। मुसलमानों को हर दिन नमाज़ से पहले वुज़ू करने का निर्देश दिया गया है। वुज़ू में इंसान अपने हाथों और चेहरे को धोता है। वायरस को रोकने के लिए इतना काफ़ी नहीं है लेकिन प्रभावी ज़रूर है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के आरजेडी के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि शहाबुद्दीन तिहाड़ मे आम कैदियों की तरह ही रहेंगे और विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार में चल रहे केस में हिस्सा लेंगे। पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या में आरोपी शहाबुद्दीन को सीवान जेल से स्थानांतरित किए जाने की याचिका राजदेव की पत्नी ने दायर की थी। उनका कहना था कि केस की निष्पक्ष सुनवाई के लिए शहाबुद्दीन को स्थानांतरित किया जाना जरूरी है। शहाबुद्दीन पर सीवान जेल से सेल्फी पोस्ट करने का भी आरोप था जिस मामले में स्थानीय कोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के आरजेडी के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि शहाबुद्दीन तिहाड़ मे आम कैदियों की तरह ही रहेंगे और विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार में चल रहे केस में हिस्सा लेंगे। पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या में आरोपी शहाबुद्दीन को सीवान जेल से स्थानांतरित किए जाने की याचिका राजदेव की पत्नी ने दायर की थी। उनका कहना था कि केस की निष्पक्ष सुनवाई के लिए शहाबुद्दीन को स्थानांतरित किया जाना जरूरी है। शहाबुद्दीन पर सीवान जेल से सेल्फी पोस्ट करने का भी आरोप था जिस मामले में स्थानीय कोर्ट ने शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी।