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प्रवास वृहत् स्तर पर होता है । फ्रीडमैन का तीसरा प्रदेश संसाधन सम्पन्न सीमान्त प्रदेश का है जहाँ नवीन खनिजों के खोज एवं उनके विदोहन के कारण नवीन अधिवासों का विकास एवं उनकी सीमा में वृद्धि जैसी संभावनाएं विद्यमान रहती हैं । केन्द्रीय प्रदेश से सबसे दूरवर्ती प्रदेश को फ्रीडमैन ने अधोन्मुख प्रदेश की संज्ञा प्रदान की है जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था क्षीणकाय होती है तथा कृषि कार्य एवं उत्पादन न्यूनतम कोटि का होता है । मिरडल के मॉडल की भांति इसका प्रयोग भी आर्थिक एवं क्षेत्रीय विश्लेषण हेतु किया जाता है ।
रोस्टोव का 'आर्थिक बृद्धि की अवस्थाओं का मॉडल'
रोस्टोव ने किसी प्रदेश के आर्थिक विकास की पाँच अवस्थाएँ रुढ़िवादी समाज, ऊपर उठने की पूर्वावस्था, ऊपर उठने की अवस्था, चरमोत्कर्ष की अवस्था एवं अधिकतम् उपभोग की अवस्था स्वीकार की है । 24 इनका यह सिद्धान्त मुख्यतः नवीनतम् तकनीकों के परिप्रेक्ष्य में किसी प्रदेश में सामयिक आर्थिक वृद्धि का विश्लेषण करता है ।
रोस्टोव के सिद्धान्त की प्रथम अवस्था में मुख्य व्यवसाय निर्वाहन - कृषि होती है। इसमें संभावित संसाधानों की खोज भविष्य के गर्भ में है । कुछ दशकोंपरान्त ऊपर उठने के पूर्व की स्थिति आती है । तथा तीब्र आर्थिक विकास एवं व्यापार विस्तार होने लगता है । इसे द्वितीयावस्था कहा गया है । इस समय परम्परागत तकनीकों के साथ-साथ नवीनतम तकनीकों का प्रयोग भी प्रारम्भ हो जाता है । रोस्टोव के मॉडल की तृतीयावस्था में 'टेक-आफ' की स्थिति होती है जब नवीन परम्पराओं द्वारा प्राचीन परम्पराओं का प्रतिस्थापन कर लिया जाता है । इस अवस्था में आधुनिकतम् समाज के निर्माण के साथ ही राजनीतिक एवं सामाजिक स्वरुप परिवर्तित होने लगता है तथा औद्योगीकरण की प्रवृत्ति का जन्म होता है । चौथी अवस्था में औद्योगिक समाज सुसंगठित हो जाता है, नयी औद्योगिक इकाइयों के विकास के कारण पुरानी इकाइयाँ मृतप्राय हो जाती हैं तथा बृहत् नगरीय प्रदेश के विकास के साथ ही यातायात संरचना भी जटिलतम होती जाती है । इस अवस्था में पूंजी न्यास भी बढ़ने लगता है । पांचवी एवं अन्तिम अवस्था में सम्पूर्ण स्थितियाँ अपने चरमोत्कर्ष पर
होती हैं । व्यवसाय में तकनीकी व्यवसाय की प्रधानता हो जाती है । भौतिक सुख सुविधा की वृद्धि के साथ ही संसाधनों का वितरण सामाजिक कल्याण के कार्यों में होने लगता है तथा उत्पादकता की प्रचुरता भी काफी बढ़ जाती है ।
रोस्टोव का 'आर्थिक बृद्धि की अवस्थाओं का सिद्धान्त' भी आलोचनाओं से न बच सका । यह सिद्धान्त अपने पाँचों अवस्थाओं में सम्बन्ध को स्थापित करने वाले तन्त्र की व्याख्या नहीं करता है। किन्तु सम्पूर्ण आलोचनाओं के उपरान्त भी यह सिद्धान्त विकसित देशों के विश्लेषण में अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त सिद्ध हुआ है। विकासोन्मुख देशों में यह प्रक्रिया किस सीमा तक सार्थक है ? विचारणीय तथ्य है । निश्चित रूप से विकासशील अधिकांश राष्ट्र प्रथम तीन अवस्थाओं के अन्तर्गत ही आते हैं ( चित्र 1.2 ) ।
'विकास- ध्रुव सिद्धान्त'
विकास सम्बन्धी सिद्धान्तों में विकास ध्रुव सिद्धान्त का वर्तमान समय में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है । इस संकल्पना का सर्वप्रथम प्रतिपादन 1955 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पेराक्स25 महोदय ने किया । इस सिद्धान्त को भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण कार्य बाउडविले 26 ने किया । यह सिद्धान्त विकास के विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया तथा 'टाप-डाउन उपागम' को प्रश्रय देता है । इस सिद्धान्त के अनुसार किसी अविकसित क्षेत्र या प्रदेश का विकास, विकास सुविधा सम्पन्न चयनित विकास ध्रुवों के माध्यम से संभव है । इनके अनुसार विकास सुविधा सम्पन्न ऐसा केन्द्र आकर्षण एवं विकर्षण की प्रक्रिया से गुजरेगा जिसके कारण वहाँ से विकास की किरणें प्रस्फुटित होंगी तथा 'ट्रिकिल-डाउन' प्रक्रिया द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश विकसित होगा। बोडविले ने ऐसे ध्रुवों के रूप में विभिन्न संख्या एवं आकार की उन बस्तियों की पहचान की है जिनमें दूसरी बस्तियों को प्रभावित करने की पूर्णक्षमता हो । इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा केन्द्र अपने से छोटे केन्द्रों के माध्यम से सबसे छोटे - केन्द्र को प्रभावित करेगा तथा उन छोटे विकास केन्द्रों से सम्पूर्ण अविकसित क्षेत्र लाभ उठायेगा । इस प्रकार सम्पूर्ण प्रदेश विकास के प्रभाव में आजायेगा। इस प्रक्रिया में राष्ट्र स्तर | प्रवास वृहत् स्तर पर होता है । फ्रीडमैन का तीसरा प्रदेश संसाधन सम्पन्न सीमान्त प्रदेश का है जहाँ नवीन खनिजों के खोज एवं उनके विदोहन के कारण नवीन अधिवासों का विकास एवं उनकी सीमा में वृद्धि जैसी संभावनाएं विद्यमान रहती हैं । केन्द्रीय प्रदेश से सबसे दूरवर्ती प्रदेश को फ्रीडमैन ने अधोन्मुख प्रदेश की संज्ञा प्रदान की है जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था क्षीणकाय होती है तथा कृषि कार्य एवं उत्पादन न्यूनतम कोटि का होता है । मिरडल के मॉडल की भांति इसका प्रयोग भी आर्थिक एवं क्षेत्रीय विश्लेषण हेतु किया जाता है । रोस्टोव का 'आर्थिक बृद्धि की अवस्थाओं का मॉडल' रोस्टोव ने किसी प्रदेश के आर्थिक विकास की पाँच अवस्थाएँ रुढ़िवादी समाज, ऊपर उठने की पूर्वावस्था, ऊपर उठने की अवस्था, चरमोत्कर्ष की अवस्था एवं अधिकतम् उपभोग की अवस्था स्वीकार की है । चौबीस इनका यह सिद्धान्त मुख्यतः नवीनतम् तकनीकों के परिप्रेक्ष्य में किसी प्रदेश में सामयिक आर्थिक वृद्धि का विश्लेषण करता है । रोस्टोव के सिद्धान्त की प्रथम अवस्था में मुख्य व्यवसाय निर्वाहन - कृषि होती है। इसमें संभावित संसाधानों की खोज भविष्य के गर्भ में है । कुछ दशकोंपरान्त ऊपर उठने के पूर्व की स्थिति आती है । तथा तीब्र आर्थिक विकास एवं व्यापार विस्तार होने लगता है । इसे द्वितीयावस्था कहा गया है । इस समय परम्परागत तकनीकों के साथ-साथ नवीनतम तकनीकों का प्रयोग भी प्रारम्भ हो जाता है । रोस्टोव के मॉडल की तृतीयावस्था में 'टेक-आफ' की स्थिति होती है जब नवीन परम्पराओं द्वारा प्राचीन परम्पराओं का प्रतिस्थापन कर लिया जाता है । इस अवस्था में आधुनिकतम् समाज के निर्माण के साथ ही राजनीतिक एवं सामाजिक स्वरुप परिवर्तित होने लगता है तथा औद्योगीकरण की प्रवृत्ति का जन्म होता है । चौथी अवस्था में औद्योगिक समाज सुसंगठित हो जाता है, नयी औद्योगिक इकाइयों के विकास के कारण पुरानी इकाइयाँ मृतप्राय हो जाती हैं तथा बृहत् नगरीय प्रदेश के विकास के साथ ही यातायात संरचना भी जटिलतम होती जाती है । इस अवस्था में पूंजी न्यास भी बढ़ने लगता है । पांचवी एवं अन्तिम अवस्था में सम्पूर्ण स्थितियाँ अपने चरमोत्कर्ष पर होती हैं । व्यवसाय में तकनीकी व्यवसाय की प्रधानता हो जाती है । भौतिक सुख सुविधा की वृद्धि के साथ ही संसाधनों का वितरण सामाजिक कल्याण के कार्यों में होने लगता है तथा उत्पादकता की प्रचुरता भी काफी बढ़ जाती है । रोस्टोव का 'आर्थिक बृद्धि की अवस्थाओं का सिद्धान्त' भी आलोचनाओं से न बच सका । यह सिद्धान्त अपने पाँचों अवस्थाओं में सम्बन्ध को स्थापित करने वाले तन्त्र की व्याख्या नहीं करता है। किन्तु सम्पूर्ण आलोचनाओं के उपरान्त भी यह सिद्धान्त विकसित देशों के विश्लेषण में अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त सिद्ध हुआ है। विकासोन्मुख देशों में यह प्रक्रिया किस सीमा तक सार्थक है ? विचारणीय तथ्य है । निश्चित रूप से विकासशील अधिकांश राष्ट्र प्रथम तीन अवस्थाओं के अन्तर्गत ही आते हैं । 'विकास- ध्रुव सिद्धान्त' विकास सम्बन्धी सिद्धान्तों में विकास ध्रुव सिद्धान्त का वर्तमान समय में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है । इस संकल्पना का सर्वप्रथम प्रतिपादन एक हज़ार नौ सौ पचपन में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पेराक्सपच्चीस महोदय ने किया । इस सिद्धान्त को भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण कार्य बाउडविले छब्बीस ने किया । यह सिद्धान्त विकास के विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया तथा 'टाप-डाउन उपागम' को प्रश्रय देता है । इस सिद्धान्त के अनुसार किसी अविकसित क्षेत्र या प्रदेश का विकास, विकास सुविधा सम्पन्न चयनित विकास ध्रुवों के माध्यम से संभव है । इनके अनुसार विकास सुविधा सम्पन्न ऐसा केन्द्र आकर्षण एवं विकर्षण की प्रक्रिया से गुजरेगा जिसके कारण वहाँ से विकास की किरणें प्रस्फुटित होंगी तथा 'ट्रिकिल-डाउन' प्रक्रिया द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश विकसित होगा। बोडविले ने ऐसे ध्रुवों के रूप में विभिन्न संख्या एवं आकार की उन बस्तियों की पहचान की है जिनमें दूसरी बस्तियों को प्रभावित करने की पूर्णक्षमता हो । इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा केन्द्र अपने से छोटे केन्द्रों के माध्यम से सबसे छोटे - केन्द्र को प्रभावित करेगा तथा उन छोटे विकास केन्द्रों से सम्पूर्ण अविकसित क्षेत्र लाभ उठायेगा । इस प्रकार सम्पूर्ण प्रदेश विकास के प्रभाव में आजायेगा। इस प्रक्रिया में राष्ट्र स्तर |
अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन हो गया है, जिसकी वजह से 14 लोगों के मारे जाने की खबर है। यह घटना अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले की है, जहां पर भारी बारिश के चलते भूस्खलन हो गया। इस घटना के बाद रहत और बचाव कार्य जारी कर दिया गया, लेकिन किसी के भी बचने की संभावना नहीं है।
वहीं बारिश के कारण बचाव कार्य में भी अवरोध हो रहा है। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर जलाश पर्टिन ने बताया कि भूस्खलन में फं े 14 लोगों में किसी के भी जीवित बचने की संभावना बेहद कम है। बताया गया है कि दोपहर 3:30 बजे आए भूस्खलन में लपटप गांव के तीन घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसमें 14 लोग दब गए। वरिष्ठ अधिकारी ने इन लोगो के मरने की पुष्टि भी की है।
पापुमपारे जिले में पिछले चार दिन से बारिश हो रही है। लगातार बारिश से यहां हालात बेहद खराब हो गए हैं। प्रदेश के कई इलाके भूस्खलन से प्रभावित हैं। वही, दूसरी और भारी बारिश के कारण नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण बाढ़ जैसे हालत बने हैं।
गौरतलब है कि 19 जून को भी राज्य में लैंडस्लाइड ने तबाही मचाई थी। जब आर्मी जवानों ने अरुणाचल प्रदेश के भालुकपोंग के पास एक भूस्खलन स्थल से 70 महिलाओं और 50 बच्चों सहित कुल 200 लोगों को बचा लिया था। इससे पहले 1 जून को भी राज्य में भूस्खलन की घटना सामने आई थी।
| अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन हो गया है, जिसकी वजह से चौदह लोगों के मारे जाने की खबर है। यह घटना अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले की है, जहां पर भारी बारिश के चलते भूस्खलन हो गया। इस घटना के बाद रहत और बचाव कार्य जारी कर दिया गया, लेकिन किसी के भी बचने की संभावना नहीं है। वहीं बारिश के कारण बचाव कार्य में भी अवरोध हो रहा है। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर जलाश पर्टिन ने बताया कि भूस्खलन में फं े चौदह लोगों में किसी के भी जीवित बचने की संभावना बेहद कम है। बताया गया है कि दोपहर तीन:तीस बजे आए भूस्खलन में लपटप गांव के तीन घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसमें चौदह लोग दब गए। वरिष्ठ अधिकारी ने इन लोगो के मरने की पुष्टि भी की है। पापुमपारे जिले में पिछले चार दिन से बारिश हो रही है। लगातार बारिश से यहां हालात बेहद खराब हो गए हैं। प्रदेश के कई इलाके भूस्खलन से प्रभावित हैं। वही, दूसरी और भारी बारिश के कारण नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण बाढ़ जैसे हालत बने हैं। गौरतलब है कि उन्नीस जून को भी राज्य में लैंडस्लाइड ने तबाही मचाई थी। जब आर्मी जवानों ने अरुणाचल प्रदेश के भालुकपोंग के पास एक भूस्खलन स्थल से सत्तर महिलाओं और पचास बच्चों सहित कुल दो सौ लोगों को बचा लिया था। इससे पहले एक जून को भी राज्य में भूस्खलन की घटना सामने आई थी। |
हस्तरेखा शास्त्र अगर शुक्र पर्वत अच्छा उभार लिए और गुलाबी रंग का होता है तो यह बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे लोगों का व्यक्तित्व अच्छा होता है। साथ ही ये लोग समाज में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। इन लोगों की फ्रेंड सर्किल अच्छी होती है। साथ ही ये लोग लग्जीरियस लाइफ जीते हैं। इनको सारे भौतिक सुख प्राप्त होते हैं।
अगर किसी व्यक्ति के हाथ में शुक्र पर्वत उठा हुआ तो ऐसा व्यक्ति कामी हो सकता है। साथ ही ऐसे लोग जरूरत से ज्यादा शारीरिक सुख के बारे में सोचते हैं। लव लाइफ में भी इनके कई ब्रेकअप होते हैं। बहुत ही कम ऐसा होता कि ऐसे लोग किसी एक के प्रति ईमानदार होकर रह सकें। हालांकि ये लोग नाम और शौहरत खूब कमाते हैं। वहीं अगर शुक्र पर्वत दबा हुआ हो तो ऐसे लोगों शारीरिक सुख से वंचित रह जाते हैं।
हस्तरेखा शास्त्र अनुसार यदि किसी व्यक्ति के हथेली में त्रिभुज का निशान शुक्र पर्वत पर दिखाई दे तो यह व्यक्ति जीवन में सभी भौतिक सुखों को प्राप्त करता है। साथ ही इन लोगों को विपरीत लिंग के लोगों का दिल जीतना आता है। ये लोग स्वादिष्ट भोजन और अच्चे वस्त्र पहनने के शौकीन होते हैं।
हाथ के शुक्र पर्वत पर त्रिशूल का चिह्न बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे लोग किस्मत के धनी होते हैं। साथ ही ये लोग प्यार के मामले में भी लकी होते हैं। ये जिससे मोहब्बत करते हैं उसे पाकर ही रहते हैं। ये लोग धनवान भी होते हैं और इनके पास पैसे की कमी नहीं रहती।
| हस्तरेखा शास्त्र अगर शुक्र पर्वत अच्छा उभार लिए और गुलाबी रंग का होता है तो यह बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे लोगों का व्यक्तित्व अच्छा होता है। साथ ही ये लोग समाज में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। इन लोगों की फ्रेंड सर्किल अच्छी होती है। साथ ही ये लोग लग्जीरियस लाइफ जीते हैं। इनको सारे भौतिक सुख प्राप्त होते हैं। अगर किसी व्यक्ति के हाथ में शुक्र पर्वत उठा हुआ तो ऐसा व्यक्ति कामी हो सकता है। साथ ही ऐसे लोग जरूरत से ज्यादा शारीरिक सुख के बारे में सोचते हैं। लव लाइफ में भी इनके कई ब्रेकअप होते हैं। बहुत ही कम ऐसा होता कि ऐसे लोग किसी एक के प्रति ईमानदार होकर रह सकें। हालांकि ये लोग नाम और शौहरत खूब कमाते हैं। वहीं अगर शुक्र पर्वत दबा हुआ हो तो ऐसे लोगों शारीरिक सुख से वंचित रह जाते हैं। हस्तरेखा शास्त्र अनुसार यदि किसी व्यक्ति के हथेली में त्रिभुज का निशान शुक्र पर्वत पर दिखाई दे तो यह व्यक्ति जीवन में सभी भौतिक सुखों को प्राप्त करता है। साथ ही इन लोगों को विपरीत लिंग के लोगों का दिल जीतना आता है। ये लोग स्वादिष्ट भोजन और अच्चे वस्त्र पहनने के शौकीन होते हैं। हाथ के शुक्र पर्वत पर त्रिशूल का चिह्न बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे लोग किस्मत के धनी होते हैं। साथ ही ये लोग प्यार के मामले में भी लकी होते हैं। ये जिससे मोहब्बत करते हैं उसे पाकर ही रहते हैं। ये लोग धनवान भी होते हैं और इनके पास पैसे की कमी नहीं रहती। |
चार्ता एवं संलाप
हो गयी । नाव भी धीरे धीरे मठ पर आ गयी। स्वामी जी उस समय एकाग्रचित्त हो गाना गा रहे थे-~-'(केवल ) आशार आशा भवे आसा, आसा मात्र सार हल । एखन सन्ध्यावेलाय घरेर छेले घरे निये चल ।' (केवल आशा की आशा में दुनिया में आना हुआ, (और) आना भर ही सार हुआ । अव साँझ के समय ( मुझे ) घर के लड़के को घर ले चलो 1 )
आज १३ आषाढ़ (बंगाल सौर ) है । शिप्य वाली से सायंकाल के पूर्व मठ में आ गया है। उस समय उसके कार्य का स्थान वाली में ही है। आज वह ऑफ़िसवाली पोशाक पहनकर ही आया है, कपड़ा बदलने का समय उसे नही मिला । आते ही स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करके उसने उनका कुशल- समाचार पूछा। स्वामी जी बोले- "अच्छा हूँ । ( शिप्य की पोशाक देखकर ) तू कोटपैण्ट पहनता है, कॉलर क्यों नहीं लगाया ?" ऐसा कहने के बाद पास में खड़े स्वामी सारदानन्द को बुलाकर कहा, "मेरे जो कॉलर हैं, उनमें से दो कॉलर कल ( प्रातःकाल ) इसे दे देना तो ।" स्वामी सारदानन्द जी ने उनके आदेश को शिरोवार्य कर लिया ।
उसके पश्चात् शिष्य मठ के एक दूसरे कमरे में उस पोशाक को उतारकर मुंह-हाथ घोकर स्वामी जी के पास आया। स्वामी जी ने उस समय उससे कहा, "आहार, पोशाक और जातीय आचार-व्यवहार का परित्याग करने पर, धीरे धोरे जातीयता लुप्त हो जाती है। विद्या सभी से सीखी जा सकती है, परन्तु जिस | चार्ता एवं संलाप हो गयी । नाव भी धीरे धीरे मठ पर आ गयी। स्वामी जी उस समय एकाग्रचित्त हो गाना गा रहे थे-~-' आशार आशा भवे आसा, आसा मात्र सार हल । एखन सन्ध्यावेलाय घरेर छेले घरे निये चल ।' आना भर ही सार हुआ । अव साँझ के समय घर के लड़के को घर ले चलो एक ) आज तेरह आषाढ़ है । शिप्य वाली से सायंकाल के पूर्व मठ में आ गया है। उस समय उसके कार्य का स्थान वाली में ही है। आज वह ऑफ़िसवाली पोशाक पहनकर ही आया है, कपड़ा बदलने का समय उसे नही मिला । आते ही स्वामी जी के श्री चरणों में प्रणाम करके उसने उनका कुशल- समाचार पूछा। स्वामी जी बोले- "अच्छा हूँ । तू कोटपैण्ट पहनता है, कॉलर क्यों नहीं लगाया ?" ऐसा कहने के बाद पास में खड़े स्वामी सारदानन्द को बुलाकर कहा, "मेरे जो कॉलर हैं, उनमें से दो कॉलर कल इसे दे देना तो ।" स्वामी सारदानन्द जी ने उनके आदेश को शिरोवार्य कर लिया । उसके पश्चात् शिष्य मठ के एक दूसरे कमरे में उस पोशाक को उतारकर मुंह-हाथ घोकर स्वामी जी के पास आया। स्वामी जी ने उस समय उससे कहा, "आहार, पोशाक और जातीय आचार-व्यवहार का परित्याग करने पर, धीरे धोरे जातीयता लुप्त हो जाती है। विद्या सभी से सीखी जा सकती है, परन्तु जिस |
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भारत सरकार ने देश में सरकारी अस्पतालों के कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए कोई विशिष्ट सर्वेक्षण नहीं करवाया है। तथापि, अस्पतालों का कामकाज का मूल्यांकन करना एक नियमित सतत् प्रक्रिया है और पर्यवेक्षी प्राधिकारी नियमित रूप से इनके कामकाज की मॉनीटरिंग करते हैं।
डॉक्टरों की कमी की वजह से अस्पताल के विभिन्न विभागों में रोगी की प्रतीक्षा-सूची के संबंध में रोगियों से मंत्रालय में विभिन्न प्रकार की शिकायतें मिलती हैं। ऐसी शिकायतों को केन्द्र और राज्य सरकार, दोनों स्तरों पर संबद्ध प्राधिकारियों को भेजा जाता है, ताकि शिकायतों का निपटान किया जा सके।
केन्द्र सरकार के अस्पतालों और संस्थानों में उपचार के लिए आने वाले रोगियों की संख्या बिस्तरों की संख्या, कार्मिक शक्ति की संख्या और डॉक्टरों एवं अन्य संसाधनों के संदर्भ में उनकी निपटान क्षमता की अपेक्षा कहीं ज्यादा है। इन अस्पतालों और संस्थानों में व्यापक अवसंरचना और अन्य सेवाओं की उपलब्धता होने के बावजूद अवसंरचना और डॉक्टरों सहित उपलब्ध कार्मिक शक्ति पर दिनों-दिन बढ़ते हुए बोझ की वजह से कतिपय प्रक्रियाओं के लिए प्रतीक्षा अवधि है, जो इन अस्पतालों में विभाग-दर-विभाग भिन्न-भिन्न है। अतः विभिन्न विभाग रोगियों की स्थिति, अपेक्षित उपचार की तात्कालिकता और किसी दिवस विशेष को उपलब्ध बिस्तरों पर विचार करके दाखिले की आवश्यकता वाले रोगियों की अपनी खुद की प्रतीक्षा-सूची बनाते हैं। तथापि, बहिरंग रोगी विभाग (ओपीडी) में पंजीकृत सभी रोगियों को उस दिवस विशेष को डॉक्टरों द्वारा उपचार प्रदान किया जाता है।
रोगियों के प्रभावी शिकायत निपटान के लिए प्रत्येक अस्पताल में एक शिकायत निवारण अधिकारी नामोद्दिष्ट है। इसके अतिरिक्त, रोगी और उनके संबंधियों से शिकायतें लेने के लिए अस्पतालों की विशेष जगहों पर अनेक शिकायत पेटिकाएं लगाई गई हैं।
डॉक्टरों के मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमानित रिक्तियों के आधार परप्रतिवर्ष संघ लोक सेवा आयोग द्वारा केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा के जीडीएमओ उप संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा आयोजित की जाती हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा के विशेषज्ञ संवर्ग के रिक्त पदों को भरने के लिए मांग सूची संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भी भेजी जाती है। यूपीएससी से प्राप्त सिफारिशों के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति का प्रस्ताव दिया जाता है। यूपीएससी की सिफारिश के लंबित रहने तक संबंधित यूनिटों को पद पर अभ्यर्थी द्वारा नियमित आधार पर कार्यभार ग्रहण करने तक जनहित में कामचलाऊ व्यवस्था के रूप में रिक्त पदों पर संविदात्मक नियुक्तियां करने की अनुमति दी जाती है।
चूंकि 'स्वास्थ्य' राज्य का विषय है, अतः लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य परिचर्या सेवाएं प्रदान करने हेतु प्रयास करने का उत्तरदायित्व राज्य सरकार का है। केन्द्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना आदि जैसी योजनाओं/कार्यक्रमों के जरिए राज्य सरकार को सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों में मदद करती है।
राज्य सरकारी स्वास्थ्य परिचर्या सुविधा केन्द्रों में अपेक्षित चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों को नियुक्त करने के लिए अपने स्वयं के उपाय करती है और कार्यविधि कार्यान्वित करती है।
| Posted On: भारत सरकार ने देश में सरकारी अस्पतालों के कामकाज का मूल्यांकन करने के लिए कोई विशिष्ट सर्वेक्षण नहीं करवाया है। तथापि, अस्पतालों का कामकाज का मूल्यांकन करना एक नियमित सतत् प्रक्रिया है और पर्यवेक्षी प्राधिकारी नियमित रूप से इनके कामकाज की मॉनीटरिंग करते हैं। डॉक्टरों की कमी की वजह से अस्पताल के विभिन्न विभागों में रोगी की प्रतीक्षा-सूची के संबंध में रोगियों से मंत्रालय में विभिन्न प्रकार की शिकायतें मिलती हैं। ऐसी शिकायतों को केन्द्र और राज्य सरकार, दोनों स्तरों पर संबद्ध प्राधिकारियों को भेजा जाता है, ताकि शिकायतों का निपटान किया जा सके। केन्द्र सरकार के अस्पतालों और संस्थानों में उपचार के लिए आने वाले रोगियों की संख्या बिस्तरों की संख्या, कार्मिक शक्ति की संख्या और डॉक्टरों एवं अन्य संसाधनों के संदर्भ में उनकी निपटान क्षमता की अपेक्षा कहीं ज्यादा है। इन अस्पतालों और संस्थानों में व्यापक अवसंरचना और अन्य सेवाओं की उपलब्धता होने के बावजूद अवसंरचना और डॉक्टरों सहित उपलब्ध कार्मिक शक्ति पर दिनों-दिन बढ़ते हुए बोझ की वजह से कतिपय प्रक्रियाओं के लिए प्रतीक्षा अवधि है, जो इन अस्पतालों में विभाग-दर-विभाग भिन्न-भिन्न है। अतः विभिन्न विभाग रोगियों की स्थिति, अपेक्षित उपचार की तात्कालिकता और किसी दिवस विशेष को उपलब्ध बिस्तरों पर विचार करके दाखिले की आवश्यकता वाले रोगियों की अपनी खुद की प्रतीक्षा-सूची बनाते हैं। तथापि, बहिरंग रोगी विभाग में पंजीकृत सभी रोगियों को उस दिवस विशेष को डॉक्टरों द्वारा उपचार प्रदान किया जाता है। रोगियों के प्रभावी शिकायत निपटान के लिए प्रत्येक अस्पताल में एक शिकायत निवारण अधिकारी नामोद्दिष्ट है। इसके अतिरिक्त, रोगी और उनके संबंधियों से शिकायतें लेने के लिए अस्पतालों की विशेष जगहों पर अनेक शिकायत पेटिकाएं लगाई गई हैं। डॉक्टरों के मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमानित रिक्तियों के आधार परप्रतिवर्ष संघ लोक सेवा आयोग द्वारा केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा के जीडीएमओ उप संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा आयोजित की जाती हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा के विशेषज्ञ संवर्ग के रिक्त पदों को भरने के लिए मांग सूची संघ लोक सेवा आयोग को भी भेजी जाती है। यूपीएससी से प्राप्त सिफारिशों के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति का प्रस्ताव दिया जाता है। यूपीएससी की सिफारिश के लंबित रहने तक संबंधित यूनिटों को पद पर अभ्यर्थी द्वारा नियमित आधार पर कार्यभार ग्रहण करने तक जनहित में कामचलाऊ व्यवस्था के रूप में रिक्त पदों पर संविदात्मक नियुक्तियां करने की अनुमति दी जाती है। चूंकि 'स्वास्थ्य' राज्य का विषय है, अतः लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य परिचर्या सेवाएं प्रदान करने हेतु प्रयास करने का उत्तरदायित्व राज्य सरकार का है। केन्द्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना आदि जैसी योजनाओं/कार्यक्रमों के जरिए राज्य सरकार को सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों में मदद करती है। राज्य सरकारी स्वास्थ्य परिचर्या सुविधा केन्द्रों में अपेक्षित चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों को नियुक्त करने के लिए अपने स्वयं के उपाय करती है और कार्यविधि कार्यान्वित करती है। |
मशहूर कवि कुमार विश्वास पद्मावती के गुणगान में एक कविता पढ़ते हुए नज़र आ रहे है। यह कविता पंडित नरेंद्र मिश्र की कविता है। कुमार की आवाज़ में कविता सुनना लोगों को खूब भा रहा है। कविता का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।
इस वीडियो में कुमार कविता की शुरुआत 'दोहराता हूं सुनो रक्त से लिखी हुई कुर्बानी, जिसके कारण मिट्टी भी चंदन है राजस्थानी. . . से करते है। इस वीडियो में उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि किसी फिल्म से राजपूताना इतिहास का एक कण भी प्रभावित नहीं हो सकता। यदि इतिहास को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए।
मालूम हो कि इस कविता में महाराणा रतन सिंह को खिलजी द्वारा छल से बंधक बनाने और आगे की कहानी को बयां किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जयपुर में फिल्म 'पद्मावती' के सेट पर तोड़फोड़ और निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट हुई थी। यह मारपीट करणी सेना ने की थी।
| मशहूर कवि कुमार विश्वास पद्मावती के गुणगान में एक कविता पढ़ते हुए नज़र आ रहे है। यह कविता पंडित नरेंद्र मिश्र की कविता है। कुमार की आवाज़ में कविता सुनना लोगों को खूब भा रहा है। कविता का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो में कुमार कविता की शुरुआत 'दोहराता हूं सुनो रक्त से लिखी हुई कुर्बानी, जिसके कारण मिट्टी भी चंदन है राजस्थानी. . . से करते है। इस वीडियो में उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि किसी फिल्म से राजपूताना इतिहास का एक कण भी प्रभावित नहीं हो सकता। यदि इतिहास को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए। मालूम हो कि इस कविता में महाराणा रतन सिंह को खिलजी द्वारा छल से बंधक बनाने और आगे की कहानी को बयां किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जयपुर में फिल्म 'पद्मावती' के सेट पर तोड़फोड़ और निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट हुई थी। यह मारपीट करणी सेना ने की थी। |
लटकाने से खुल जायेगी। चाहे जादू के जरिये ही क्यों न बाँधी गयी हो और घर वालों या दुकान वालों के दुश्मन पराजित होंगे।
अल्लाह ने चाहा तो सारे काम पूरे होंगे। बड़ा परखा व जांचा हुआ तावीज व अमल है। पीर के दिन सूरज निकलने से तीसरे घण्टे में, जुमे के दिन सूरज निकलने से पाँचवें घण्टे में और जुमेरात को सूरज निकलने से पहले घण्टे में लिखें और शीशे के फ्रेम को यदा-कदा कपड़े से साफ करते रहें और नक्श को मोटे कलम से लिखवायें, ताकि दूर से दिखाई दे । नक्श यह है -
या अर्रहीमु या रहमानु या अल्लाहु या कादिरु या रज्जाकु या मालिकु या रज्जाकु कुल हुवल्लाहु अहदुन या रज्जाकु अल्हमदुलिल्लाहि या रज्जाकु अलहम्दु लिल्लाहि या रज्जाकु अल्लाहुस्समदु या रज्जाकु
• यदि किसी की दुकान न चलती हो और लाभ कम होता हो तो उसे चाहिये कि इस नक्श को लिखकर मोमजामा करके कपड़े का गिलाफ चढ़ाकर और एक डोरे से सीकर दुकान के अन्दर वाली चौखट पर कील ठोंक कर उसमें लटका दे । इस नक्श को मिशतरी की घड़ी में लिखे । जुमेरात को सूरज निकलने से पहले घण्टे में, पीर को सूरज निकलने से पहले तीसरे घण्टे में जुमा को सूरज निकलने से पाँचवें घण्टे में यह घड़ी होती है। नक्श यह है -
या बाअतुमविहि अल्लजी बिबाअिकुम फसतबशिरु
चोर के लिए अगल
• यदि किसी आदमी का माल चोरी चला गया हो और चोर का पता न चले तो इस दुआ को कसरत के साथ पढ़ने से यह मालूम हो जायेगा कि चोर कौन है या जो माल चोरी चला गया है, वह वापस मिल जायेगा । वह दुआ यह है -
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम० या वासिउल कन्फि व या अलश्शर्फि बिहुरमति अहलश्शर्फि इजबिर अला मा त-ल-फा बिहुरमति फातिमतिन व अबीहा व बाअलिहा व उबनयहा या बुनय्या इन्नाहा इन तकु मिस्काला हब्बतिम मिनखरदलिन फतकुन फी सखरतिन अव फिस्समावाति अवफिल अर्जि याति बिहल्लाहु इन्नल्लाहा लतीफुन खबीर० व लव तरा इज फजिऊ फला फवता व उखिजु मिन मकानिन करीबिव व कालू आमन्ना बिहि व अन्ना लहुमुत्तनावुशु मिम मकानिम बईद० अल्लाहुम्मा इजबिर कजा व कजा बिहक्कि यासीन वल कुरआनिल हकीमी व साद वल कुरआनि जिज्जिकरी व काफ वल कुरआनि वर्रहमानि अल्लमल कुरआना या इबादल्लाहिस्सालिहीना रुददू अलय्या जाल्लती यरहभुकुमुल्लाहु व अहबिसूहा इलय्या अल्लाहुम्मा ला तुफत्तनी बिहलकिहा वला तम्बगी बितलबिहा बिहक्कि जिबरीला व मीकाईला व इसराफीला व इजराईला व बिहक्कि मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलयहि व सल्लमा तसलीमन कसीरन अ-द-द खलकिका व रिजाई नफसिका वजिनता अरशिका व मिदादि कलिमातिका ०
• यदि कोई अपने घर या दुकान के माल में इस दुआ को लिखकर गत्ते पर चिपका दे तो सामान चोरी से बचा रहेगा। वह दुआ यह है -
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम० या हफीजु ला यन्सा व या मिन निअमती ला तहसी व या मल्लहुल उर्वतुल वुस्का व या मन लहुल इज्जतु वस्सनाउ वलहुल अस माउल हुस्ना इहफज कजा व कजा बिमा हफिजता बिहिल अर्जा वस्समा आ वलजाअत जहरी फी हिफजी जालिका इलल हय्यिलकय्यूमी फइन्नका कुलता व कवलुकलहक्कु इन्ना नहनु नज्जलनज्जिकरा व इन्ना लहु लहाफिजूना व सल्लल्लाहु तआला अला सय्यिदना मुहम्मदिव व अला आलिहि व सहबिहि
व सल्लमा ०
जो लोग चोरी में संलग्न हों या जिन पर संदेह हो उक्त सबके नाम अलगअलग परचों पर लिखे और पर्चियों को गेहूँ के आटे में जो गंधा हुआ हो गोलियाँ बना लें और उन पर पहले व बाद में ११ -११ बार दरूद शरीफ पढ़े और इसके बाद आयतुल कुर्सी, चारो कुल एक- एक बार पढ़े और इसके बाद तशतरी में पानी भरकर उसमें सब गोलियाँ एक साथ पानी में डाली जायेंगी । चोर की गोली पानी में डूबेगी नहीं और ऊपर ही तैरती रहेगी ।
• यदि किसी का माल चोरी हो गया हो तो उसे चाहिये कि सरसों के तेल के चिराग को सियाही या तवे की सियाही लेकर उसे थोड़े सरसों के तेल में मिलाकर एक नाबालिग लड़के या लड़की की हथेली में दोनों हाथों को मल दे और इसके
बाद सात दाने या नौ दाने उड़द के या जौ के लेकर इनमें से हर दाने पर एकएक बार यह दुआ पढ़कर एक दाने को उस लड़के या लड़की के मारता जाये। अल्लाह ने चाहा तो लड़के या लड़की के हाथों पर चोर की तस्वीर बन जायेगी। वह दुआ यह है -
अजमतु अलयकुम फतहून फतहून जिअतुका जिअतुका जिअतुका शफीअन शफीअन शफीअन अतीशन अतीशन अतीशन सुरूरन सुरूरन सुरूरन सुरूरन कुदूरन कुदूरन कुदूरन सहलन सहलन सहलन नहलन नहलन नहलन अहजिरू मिन जानिबिल मशारिकि वल मगारिबी बिहाक्कि सुलयमाना बिन दाउदा अलयहिमस्सलामु ०
• यदि किसी का माल चोरी हो गया हो और उसका पता न लगता हो तो उसे चाहिये कि एक चौकोर अर्थात् चार कोनों वाली कॉल लेकर उसके एक ओर यासीन वल कुरआन और दूसरी ओर वलकुरआनि और तीसरी ओर काफ वलकुरआनि और चौथी ओर हामीम अन सीन काफ० हाजा यवमा ला यन्तिकूना वला यूजनु लहुम फयातजिरूना लिखकर कील को जमीन पर गाड़ दे और यही कलिमात जो कील पर लिखे गये हैं, पढ़ता जाये; फिर जिन-जिन पर सन्देह हो, उन्हें इस कील पर खड़ा करे जो चोर होगा इस कील पर खड़ा नहीं होगा। यह मालूम हो जायेगा कि चोर कौन हैं ?
• यदि किसी का माल चोरी गया हो और पता न लगता हो तो उसे चाहिये कि जितने लोगों पर उसका संदेह है, उतने तरंज के पत्ते पर यह आयत लिखे और इस आयत के नीचे हर उस आदमी का नाम लिखता जाये जिस पर संदेह हो और फिर इन पत्तों में से एक-एक पत्ता आग में डालता जाये। इन्शाअल्लाह चोर के पेट में अवश्य ही दर्द होगा। वह आयत यह है -
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम० अस्सारिकु वस्सारिकतु फकतऊ अयदीयहुमा जजाअम बिमा क- स- बा नकालम मिनल्लाहि ०
• यदि किसी का माल चोरी हो गया हो और चोर का पता न चलता हो तो उसे चाहिये कि शन्गारफ इतनी मात्रा में ले कि रान के ऊपर मलने के बाद बचे नहीं और इस शन्गारफ को पानी में भिगोने के बाद इस पर दस बार दरूद शरीफ पढ़कर दम करे और उसे अपनी रान पर मले। इसके बाद अस्तुरा लेकर उस पर ४० बार इन नामों को पढ़े और दम करे और अस्तुरे से अपनी रान के बाल मुंडे । जब ऐसा करेगा तो चोर के सर के बाल आप से आप मुड़ेंगे। यह बड़ा अजीब अमल । यह अमल संदिग्ध लोगों को सामने बिठाकर किया जाये वे नाम ये हैं४५८
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम० अलीका मलीका तलीका सलीका बिहक्कि ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाही व अली वलिय्यिल्लाहि ०
आज्ञा पालन के लिए
जो आदमी इस दुआ 'या वददु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाहि' को सफेद रेशमी कपड़े के टुकड़े पर लिखकर अपने पास रखे और मोमजामा कर उस टुकड़े को इत्र में बसा ले तो अल्लाह आज्ञा पालन करने की तौफीक प्रदान करेगा और शैतान की चालों से बचायेगा और लोगों के दिलों में उसका आतंक बैठा दो। इस अमल को जुमे की नमाज के बाद उसी स्थान पर बैठकर किया जाये । इन्शा अल्लाह कामयाबी होगी।
हर जरूरत के लिए
जिस आदमी को किसी प्रकार की कोई जरूरत हो और लोगों में आदरसत्कार चाहता हो तो उसे चाहिये कि इस इबारत को ३७२ बार रोजाना सुबह नमाज फज्र के बाद दो जानू बैठकर दो गुलदस्ते सामने लाकर रखे या खुशबूदार फूलों के दो हार रख लो और एहराम बाँधकर जो कि खुश्बू से तर हुई रूई की बारीक बत्ती बनाकर और चमेली का तेल चिराग में डालकर रोशन करे; फिर यह अमल पढ़े। जो हाजित हो दुआ के समय खुदा से मांगे और इस तरह ११ दिन पूरे करे । अल्लाह ने चाहा तो दुआ बहुत जल्द कुबूल होगी। इस अमल को शुरू महीने को नौचन्दी जुमेरात से शुरू करे । इबादत यह है -
या अजीजु अज्जिजनी फी आयुनिन्नासि
एहतलाम (स्वप्नदोष) के लिए
यदि किसी आदमी को एहतलाम अधिक होता हो तो उसे चाहिये कि सोते समय अपने सीने पर शहादत की उंगली से 'उमर' लिख ले और जिस समय आँख खुल जाये तो फिर इसी तरह सीने पर 'उमर' लिख ले, फिर सो जाये। जितनी बार सोते-सोते आँख खुल जाये, हर बार उंगली से सीने पर 'उमर' लिख ले। इन्शा अल्लाह कभी एहतलाम न होगा।
रुकावंट के लिए
• इस नक्श को लिखकर हाजित के लिए समय पर मर्द अपनी जबान के नीचे रखे या धज्जी में लपेट कर मोमज़ामा करके अपनी कमर में बाँधे और जबान के नीचे रखे जाने वाला नक्श भी मोमजामा करके रखे। अल्लाह ने चाहा तो रुकावट होगी। वह नक्श यह है | लटकाने से खुल जायेगी। चाहे जादू के जरिये ही क्यों न बाँधी गयी हो और घर वालों या दुकान वालों के दुश्मन पराजित होंगे। अल्लाह ने चाहा तो सारे काम पूरे होंगे। बड़ा परखा व जांचा हुआ तावीज व अमल है। पीर के दिन सूरज निकलने से तीसरे घण्टे में, जुमे के दिन सूरज निकलने से पाँचवें घण्टे में और जुमेरात को सूरज निकलने से पहले घण्टे में लिखें और शीशे के फ्रेम को यदा-कदा कपड़े से साफ करते रहें और नक्श को मोटे कलम से लिखवायें, ताकि दूर से दिखाई दे । नक्श यह है - या अर्रहीमु या रहमानु या अल्लाहु या कादिरु या रज्जाकु या मालिकु या रज्जाकु कुल हुवल्लाहु अहदुन या रज्जाकु अल्हमदुलिल्लाहि या रज्जाकु अलहम्दु लिल्लाहि या रज्जाकु अल्लाहुस्समदु या रज्जाकु • यदि किसी की दुकान न चलती हो और लाभ कम होता हो तो उसे चाहिये कि इस नक्श को लिखकर मोमजामा करके कपड़े का गिलाफ चढ़ाकर और एक डोरे से सीकर दुकान के अन्दर वाली चौखट पर कील ठोंक कर उसमें लटका दे । इस नक्श को मिशतरी की घड़ी में लिखे । जुमेरात को सूरज निकलने से पहले घण्टे में, पीर को सूरज निकलने से पहले तीसरे घण्टे में जुमा को सूरज निकलने से पाँचवें घण्टे में यह घड़ी होती है। नक्श यह है - या बाअतुमविहि अल्लजी बिबाअिकुम फसतबशिरु चोर के लिए अगल • यदि किसी आदमी का माल चोरी चला गया हो और चोर का पता न चले तो इस दुआ को कसरत के साथ पढ़ने से यह मालूम हो जायेगा कि चोर कौन है या जो माल चोरी चला गया है, वह वापस मिल जायेगा । वह दुआ यह है - बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमशून्य या वासिउल कन्फि व या अलश्शर्फि बिहुरमति अहलश्शर्फि इजबिर अला मा त-ल-फा बिहुरमति फातिमतिन व अबीहा व बाअलिहा व उबनयहा या बुनय्या इन्नाहा इन तकु मिस्काला हब्बतिम मिनखरदलिन फतकुन फी सखरतिन अव फिस्समावाति अवफिल अर्जि याति बिहल्लाहु इन्नल्लाहा लतीफुन खबीरशून्य व लव तरा इज फजिऊ फला फवता व उखिजु मिन मकानिन करीबिव व कालू आमन्ना बिहि व अन्ना लहुमुत्तनावुशु मिम मकानिम बईदशून्य अल्लाहुम्मा इजबिर कजा व कजा बिहक्कि यासीन वल कुरआनिल हकीमी व साद वल कुरआनि जिज्जिकरी व काफ वल कुरआनि वर्रहमानि अल्लमल कुरआना या इबादल्लाहिस्सालिहीना रुददू अलय्या जाल्लती यरहभुकुमुल्लाहु व अहबिसूहा इलय्या अल्लाहुम्मा ला तुफत्तनी बिहलकिहा वला तम्बगी बितलबिहा बिहक्कि जिबरीला व मीकाईला व इसराफीला व इजराईला व बिहक्कि मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलयहि व सल्लमा तसलीमन कसीरन अ-द-द खलकिका व रिजाई नफसिका वजिनता अरशिका व मिदादि कलिमातिका शून्य • यदि कोई अपने घर या दुकान के माल में इस दुआ को लिखकर गत्ते पर चिपका दे तो सामान चोरी से बचा रहेगा। वह दुआ यह है - बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमशून्य या हफीजु ला यन्सा व या मिन निअमती ला तहसी व या मल्लहुल उर्वतुल वुस्का व या मन लहुल इज्जतु वस्सनाउ वलहुल अस माउल हुस्ना इहफज कजा व कजा बिमा हफिजता बिहिल अर्जा वस्समा आ वलजाअत जहरी फी हिफजी जालिका इलल हय्यिलकय्यूमी फइन्नका कुलता व कवलुकलहक्कु इन्ना नहनु नज्जलनज्जिकरा व इन्ना लहु लहाफिजूना व सल्लल्लाहु तआला अला सय्यिदना मुहम्मदिव व अला आलिहि व सहबिहि व सल्लमा शून्य जो लोग चोरी में संलग्न हों या जिन पर संदेह हो उक्त सबके नाम अलगअलग परचों पर लिखे और पर्चियों को गेहूँ के आटे में जो गंधा हुआ हो गोलियाँ बना लें और उन पर पहले व बाद में ग्यारह -ग्यारह बार दरूद शरीफ पढ़े और इसके बाद आयतुल कुर्सी, चारो कुल एक- एक बार पढ़े और इसके बाद तशतरी में पानी भरकर उसमें सब गोलियाँ एक साथ पानी में डाली जायेंगी । चोर की गोली पानी में डूबेगी नहीं और ऊपर ही तैरती रहेगी । • यदि किसी का माल चोरी हो गया हो तो उसे चाहिये कि सरसों के तेल के चिराग को सियाही या तवे की सियाही लेकर उसे थोड़े सरसों के तेल में मिलाकर एक नाबालिग लड़के या लड़की की हथेली में दोनों हाथों को मल दे और इसके बाद सात दाने या नौ दाने उड़द के या जौ के लेकर इनमें से हर दाने पर एकएक बार यह दुआ पढ़कर एक दाने को उस लड़के या लड़की के मारता जाये। अल्लाह ने चाहा तो लड़के या लड़की के हाथों पर चोर की तस्वीर बन जायेगी। वह दुआ यह है - अजमतु अलयकुम फतहून फतहून जिअतुका जिअतुका जिअतुका शफीअन शफीअन शफीअन अतीशन अतीशन अतीशन सुरूरन सुरूरन सुरूरन सुरूरन कुदूरन कुदूरन कुदूरन सहलन सहलन सहलन नहलन नहलन नहलन अहजिरू मिन जानिबिल मशारिकि वल मगारिबी बिहाक्कि सुलयमाना बिन दाउदा अलयहिमस्सलामु शून्य • यदि किसी का माल चोरी हो गया हो और उसका पता न लगता हो तो उसे चाहिये कि एक चौकोर अर्थात् चार कोनों वाली कॉल लेकर उसके एक ओर यासीन वल कुरआन और दूसरी ओर वलकुरआनि और तीसरी ओर काफ वलकुरआनि और चौथी ओर हामीम अन सीन काफशून्य हाजा यवमा ला यन्तिकूना वला यूजनु लहुम फयातजिरूना लिखकर कील को जमीन पर गाड़ दे और यही कलिमात जो कील पर लिखे गये हैं, पढ़ता जाये; फिर जिन-जिन पर सन्देह हो, उन्हें इस कील पर खड़ा करे जो चोर होगा इस कील पर खड़ा नहीं होगा। यह मालूम हो जायेगा कि चोर कौन हैं ? • यदि किसी का माल चोरी गया हो और पता न लगता हो तो उसे चाहिये कि जितने लोगों पर उसका संदेह है, उतने तरंज के पत्ते पर यह आयत लिखे और इस आयत के नीचे हर उस आदमी का नाम लिखता जाये जिस पर संदेह हो और फिर इन पत्तों में से एक-एक पत्ता आग में डालता जाये। इन्शाअल्लाह चोर के पेट में अवश्य ही दर्द होगा। वह आयत यह है - बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमशून्य अस्सारिकु वस्सारिकतु फकतऊ अयदीयहुमा जजाअम बिमा क- स- बा नकालम मिनल्लाहि शून्य • यदि किसी का माल चोरी हो गया हो और चोर का पता न चलता हो तो उसे चाहिये कि शन्गारफ इतनी मात्रा में ले कि रान के ऊपर मलने के बाद बचे नहीं और इस शन्गारफ को पानी में भिगोने के बाद इस पर दस बार दरूद शरीफ पढ़कर दम करे और उसे अपनी रान पर मले। इसके बाद अस्तुरा लेकर उस पर चालीस बार इन नामों को पढ़े और दम करे और अस्तुरे से अपनी रान के बाल मुंडे । जब ऐसा करेगा तो चोर के सर के बाल आप से आप मुड़ेंगे। यह बड़ा अजीब अमल । यह अमल संदिग्ध लोगों को सामने बिठाकर किया जाये वे नाम ये हैंचार सौ अट्ठावन बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमशून्य अलीका मलीका तलीका सलीका बिहक्कि ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाही व अली वलिय्यिल्लाहि शून्य आज्ञा पालन के लिए जो आदमी इस दुआ 'या वददु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाहि' को सफेद रेशमी कपड़े के टुकड़े पर लिखकर अपने पास रखे और मोमजामा कर उस टुकड़े को इत्र में बसा ले तो अल्लाह आज्ञा पालन करने की तौफीक प्रदान करेगा और शैतान की चालों से बचायेगा और लोगों के दिलों में उसका आतंक बैठा दो। इस अमल को जुमे की नमाज के बाद उसी स्थान पर बैठकर किया जाये । इन्शा अल्लाह कामयाबी होगी। हर जरूरत के लिए जिस आदमी को किसी प्रकार की कोई जरूरत हो और लोगों में आदरसत्कार चाहता हो तो उसे चाहिये कि इस इबारत को तीन सौ बहत्तर बार रोजाना सुबह नमाज फज्र के बाद दो जानू बैठकर दो गुलदस्ते सामने लाकर रखे या खुशबूदार फूलों के दो हार रख लो और एहराम बाँधकर जो कि खुश्बू से तर हुई रूई की बारीक बत्ती बनाकर और चमेली का तेल चिराग में डालकर रोशन करे; फिर यह अमल पढ़े। जो हाजित हो दुआ के समय खुदा से मांगे और इस तरह ग्यारह दिन पूरे करे । अल्लाह ने चाहा तो दुआ बहुत जल्द कुबूल होगी। इस अमल को शुरू महीने को नौचन्दी जुमेरात से शुरू करे । इबादत यह है - या अजीजु अज्जिजनी फी आयुनिन्नासि एहतलाम के लिए यदि किसी आदमी को एहतलाम अधिक होता हो तो उसे चाहिये कि सोते समय अपने सीने पर शहादत की उंगली से 'उमर' लिख ले और जिस समय आँख खुल जाये तो फिर इसी तरह सीने पर 'उमर' लिख ले, फिर सो जाये। जितनी बार सोते-सोते आँख खुल जाये, हर बार उंगली से सीने पर 'उमर' लिख ले। इन्शा अल्लाह कभी एहतलाम न होगा। रुकावंट के लिए • इस नक्श को लिखकर हाजित के लिए समय पर मर्द अपनी जबान के नीचे रखे या धज्जी में लपेट कर मोमज़ामा करके अपनी कमर में बाँधे और जबान के नीचे रखे जाने वाला नक्श भी मोमजामा करके रखे। अल्लाह ने चाहा तो रुकावट होगी। वह नक्श यह है |
श्रुतपंचमी पर्व एवं श्री जैन सिद्धान्त भवन का 95 वाँ वार्षिक प्रतिवेदन
श्रुतपंचमी के पावन पर्व एवं श्री जैन सिद्धान्त भवन, आरा के 95 व वार्षिकोत्सव के अवसर पर आप सभी महानुभावो, माताओ, बहनो विद्वज्जन, एवं उपस्थित भाई-बहनो का मैं हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ । आप सभी को मालूम ही है कि आज का दिन अत्यन्त पावन एवं पुनीत दिन है। हम सभी इस महान् जैनागम एवं श्रुत स्कन्ध यत्र की पूजा अर्चना के लिए एकत्रित हुए हैं जिस प्रथ को ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी में आज के ही दिन ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को आचार्य पुष्पदन्त ने लिपिवद्ध पूर्ण किया गया था । आज भवन का 95 वी वार्षिक प्रतिवेदन आप सभी के सामने प्रस्तुत करते हुए हम गौरवान्वित है।
आज से 154 वर्ष पूर्व पितामह १० प्रवर बाबू प्रभुदास जी ने अपने अथक परिश्रम से प्राचीन ग्रन्थो का भण्डार एकत्रित किया। बाबू प्रभुदास जी के पौत्र राजर्षि देव कुमार जैन का ध्यान जब शास्त्री की सुव्यवस्था की ओर गया तब भट्टारक श्री हर्षकीर्ति जी महाराज की प्रेरणा से इन्होंने श्री जैन सिद्धान्त भवन की स्थापना सन् 1903 ई० में आज ही के दिन कर एक अद्वितीय कार्य किया था और पितामह बाबू प्रभु दासजी द्वारा एकत्रित सभी ग्रन्थो को भवन को अर्पित कर दिया। साथ ही भट्टारक जी ने भी अपनी सम्पूर्ण हस्तलिखित ग्रन्थ को भवन को समर्पित कर दिया था ।
आप जानते हैं कि शास्त्र भण्डारी का महत्त्व मन्दिरो, चैत्यालयों मूत्तियों के निर्माण एवं पूजनादि से कम नहीं होता क्योकि तीर्थं करो, आचार्यो की वाणी इनमे सुरक्षित है। क्योकि ज्ञान के बिना क्रियाकाण्ड इच्छित फलदायी नहीं होते। देव गुरु एव धर्म का स्वरूप शास्त्रों में निहित है। प्राचीन काल में लोगो की स्मरणशक्ति प्रखर होती थी। शताब्दियों तक मौखिक पठन-पाठन की परम्परा थी किन्तु काल एव परिस्थितियाँ बदलती गयी। लोगो की स्मरणशक्ति क्षीण पड़ती गयी। ऐसी स्थिति में जिनवाणी के लुप्त होने की सम्भावनाएं बढ़ती गयी । उस समय श्रुतघर आचार्य घरसेन जी महाराज का जब यह आभास हुआ कि ज्ञानघारा लुप्त होती जा रही है तो उन्होंने आगम ग्रन्थों को लिपिबद्ध करने के निमित्त गिरनार पर्वत पर अपने दो शिष्यों मुनि पुष्पदन्त और मुनि भूतबलि के सहयोग से जैन धर्म के प्रमुख अगम षट्खण्डागम को लिपिबद्ध कराने का कार्य प्रारम्भ किया। प्रथम शिष्य मुनि पुष्पदन्त जी इसे अपने जीवन काल मे पूर्ण न कर सके किन्तु द्वितीय शिष्य मुनि भूतबलि ने पूर्व प्रथम शताब्दो | श्रुतपंचमी पर्व एवं श्री जैन सिद्धान्त भवन का पचानवे वाँ वार्षिक प्रतिवेदन श्रुतपंचमी के पावन पर्व एवं श्री जैन सिद्धान्त भवन, आरा के पचानवे व वार्षिकोत्सव के अवसर पर आप सभी महानुभावो, माताओ, बहनो विद्वज्जन, एवं उपस्थित भाई-बहनो का मैं हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ । आप सभी को मालूम ही है कि आज का दिन अत्यन्त पावन एवं पुनीत दिन है। हम सभी इस महान् जैनागम एवं श्रुत स्कन्ध यत्र की पूजा अर्चना के लिए एकत्रित हुए हैं जिस प्रथ को ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी में आज के ही दिन ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को आचार्य पुष्पदन्त ने लिपिवद्ध पूर्ण किया गया था । आज भवन का पचानवे वी वार्षिक प्रतिवेदन आप सभी के सामने प्रस्तुत करते हुए हम गौरवान्वित है। आज से एक सौ चौवन वर्ष पूर्व पितामह दस प्रवर बाबू प्रभुदास जी ने अपने अथक परिश्रम से प्राचीन ग्रन्थो का भण्डार एकत्रित किया। बाबू प्रभुदास जी के पौत्र राजर्षि देव कुमार जैन का ध्यान जब शास्त्री की सुव्यवस्था की ओर गया तब भट्टारक श्री हर्षकीर्ति जी महाराज की प्रेरणा से इन्होंने श्री जैन सिद्धान्त भवन की स्थापना सन् एक हज़ार नौ सौ तीन ईशून्य में आज ही के दिन कर एक अद्वितीय कार्य किया था और पितामह बाबू प्रभु दासजी द्वारा एकत्रित सभी ग्रन्थो को भवन को अर्पित कर दिया। साथ ही भट्टारक जी ने भी अपनी सम्पूर्ण हस्तलिखित ग्रन्थ को भवन को समर्पित कर दिया था । आप जानते हैं कि शास्त्र भण्डारी का महत्त्व मन्दिरो, चैत्यालयों मूत्तियों के निर्माण एवं पूजनादि से कम नहीं होता क्योकि तीर्थं करो, आचार्यो की वाणी इनमे सुरक्षित है। क्योकि ज्ञान के बिना क्रियाकाण्ड इच्छित फलदायी नहीं होते। देव गुरु एव धर्म का स्वरूप शास्त्रों में निहित है। प्राचीन काल में लोगो की स्मरणशक्ति प्रखर होती थी। शताब्दियों तक मौखिक पठन-पाठन की परम्परा थी किन्तु काल एव परिस्थितियाँ बदलती गयी। लोगो की स्मरणशक्ति क्षीण पड़ती गयी। ऐसी स्थिति में जिनवाणी के लुप्त होने की सम्भावनाएं बढ़ती गयी । उस समय श्रुतघर आचार्य घरसेन जी महाराज का जब यह आभास हुआ कि ज्ञानघारा लुप्त होती जा रही है तो उन्होंने आगम ग्रन्थों को लिपिबद्ध करने के निमित्त गिरनार पर्वत पर अपने दो शिष्यों मुनि पुष्पदन्त और मुनि भूतबलि के सहयोग से जैन धर्म के प्रमुख अगम षट्खण्डागम को लिपिबद्ध कराने का कार्य प्रारम्भ किया। प्रथम शिष्य मुनि पुष्पदन्त जी इसे अपने जीवन काल मे पूर्ण न कर सके किन्तु द्वितीय शिष्य मुनि भूतबलि ने पूर्व प्रथम शताब्दो |
घरसा संघने काफी जानकारी प्राप्त कर ली है और दूसरे अद्योगोंके बारेमें ग्रामोद्योग संघ जानकारी प्राप्त कर रहा है । अतः जोलिक रचना हो सकती है, वह चरखे आदि प्रामोद्योगों द्वारा ही हो सकती है, बैंमा मुझे लगता है । पर जिनको चरस्में श्रद्धा है, वे सत्र शिक्षक नहीं होते। हरअंक बढ़ओ बढ़ओगिरीका शास्त्री नहीं होता। जो अयोगका शास्त्र नहीं जानता, वह सुद्योग द्वारा सामान्य शिक्षा नहीं दे सकता। जिससे जिनको शिक्षाशास्त्र में दिलचस्पी है और चरखे अित्यादिमें दिलचस्प है, जैसे मनुष्य ही प्राथमिक शिक्षामें मेरा सुझाया हुआ कम दाखिल कर सकते हैं। मेरे पास आया हुआ श्री दिलम्बुश दीवानजीका पत्र असे लोगोंको मदद करेगा, यह मानकर असे नीचे पेश करता हूं :
स्वाश्रय और आयोग द्वारा शिक्षाके बारेमें आप 'हरिजन' और 'हरिजनबंधु' में जो सुन्दर विचार और अनुभव लिख रहे हैं, अनसे मुझे अपने यहांके अिस दिशाके कार्यमें जितना अधिक प्रोत्साहन और अत्तेजन मिलता है कि मैं यह पत्र लिखनेको प्रेरित हुआ हूं और आपकी सारी योजना कितनी योग्य है, बुसके बारे मेराह बताने के लिओ ललचाया हूं। दो दरससे मैं यहा छोटीसी अयोगशाला चला रहा हूं। असके अनुभव आपके विचारोंसे सूत्र मिलते जा रहे हैं, जिससे मुझे बहुत हपं होता है । जिसलिये आप जो क्रांतिकारी विचार बता रहे हैं, अनका में पूरी तरहसे स्वागत करता हूं और युसमें मेरी सौ फी सदी सहमति दे सकता हूं। यह मेरी अंEGET परिणाम नहीं है, बल्कि अनुभवजन्य तो है, जैसा आप समझ सकेंगे। आप सारे देशको उपयोगी हो, असी शास्त्रीय और सम्पूर्ण योजनाका विचार कर रहे हैं। मैं यहां जो काम कर रहा हूं, असमें पूर्णता और शास्त्रीयताकी काफी गुंजाबिश है और में अस दिशामें प्रयत्न कर रहा हूं। जिसमें अधिक पूर्ण बनने में अत्यन्त अत्साह और आनन्द मिलता है। पर दो वर्षसे मुझे जो भी अनुभव हो रहे हैं, अनके बारेमें अत्पन्न होनेवाले प्रश्नों पर जो कुछ चिन्तन, विचार वगैरा चल रहे हैं, अन परसे मुझे आपके स्वायी और अद्योगी शिक्षाके विचार बहुत ही योग्य और अनुभवसिद्ध हो सक्ने जैसे लगते हैं। मैं आपके विचार और मुद्दे समझ सका हूँ । तरह मेरा अनुभव भी असा होता जा रहा है किः | घरसा संघने काफी जानकारी प्राप्त कर ली है और दूसरे अद्योगोंके बारेमें ग्रामोद्योग संघ जानकारी प्राप्त कर रहा है । अतः जोलिक रचना हो सकती है, वह चरखे आदि प्रामोद्योगों द्वारा ही हो सकती है, बैंमा मुझे लगता है । पर जिनको चरस्में श्रद्धा है, वे सत्र शिक्षक नहीं होते। हरअंक बढ़ओ बढ़ओगिरीका शास्त्री नहीं होता। जो अयोगका शास्त्र नहीं जानता, वह सुद्योग द्वारा सामान्य शिक्षा नहीं दे सकता। जिससे जिनको शिक्षाशास्त्र में दिलचस्पी है और चरखे अित्यादिमें दिलचस्प है, जैसे मनुष्य ही प्राथमिक शिक्षामें मेरा सुझाया हुआ कम दाखिल कर सकते हैं। मेरे पास आया हुआ श्री दिलम्बुश दीवानजीका पत्र असे लोगोंको मदद करेगा, यह मानकर असे नीचे पेश करता हूं : स्वाश्रय और आयोग द्वारा शिक्षाके बारेमें आप 'हरिजन' और 'हरिजनबंधु' में जो सुन्दर विचार और अनुभव लिख रहे हैं, अनसे मुझे अपने यहांके अिस दिशाके कार्यमें जितना अधिक प्रोत्साहन और अत्तेजन मिलता है कि मैं यह पत्र लिखनेको प्रेरित हुआ हूं और आपकी सारी योजना कितनी योग्य है, बुसके बारे मेराह बताने के लिओ ललचाया हूं। दो दरससे मैं यहा छोटीसी अयोगशाला चला रहा हूं। असके अनुभव आपके विचारोंसे सूत्र मिलते जा रहे हैं, जिससे मुझे बहुत हपं होता है । जिसलिये आप जो क्रांतिकारी विचार बता रहे हैं, अनका में पूरी तरहसे स्वागत करता हूं और युसमें मेरी सौ फी सदी सहमति दे सकता हूं। यह मेरी अंEGET परिणाम नहीं है, बल्कि अनुभवजन्य तो है, जैसा आप समझ सकेंगे। आप सारे देशको उपयोगी हो, असी शास्त्रीय और सम्पूर्ण योजनाका विचार कर रहे हैं। मैं यहां जो काम कर रहा हूं, असमें पूर्णता और शास्त्रीयताकी काफी गुंजाबिश है और में अस दिशामें प्रयत्न कर रहा हूं। जिसमें अधिक पूर्ण बनने में अत्यन्त अत्साह और आनन्द मिलता है। पर दो वर्षसे मुझे जो भी अनुभव हो रहे हैं, अनके बारेमें अत्पन्न होनेवाले प्रश्नों पर जो कुछ चिन्तन, विचार वगैरा चल रहे हैं, अन परसे मुझे आपके स्वायी और अद्योगी शिक्षाके विचार बहुत ही योग्य और अनुभवसिद्ध हो सक्ने जैसे लगते हैं। मैं आपके विचार और मुद्दे समझ सका हूँ । तरह मेरा अनुभव भी असा होता जा रहा है किः |
भवभूति का काल सं० ७८० - ८०० के लगभग माना जाता है ।" अतः भवभूति के द्वारा स्मृत भर्तीश्वर सं० ७८० से पूर्ववर्ती है। कितना पूर्ववर्ती है यह अज्ञात है ।
भवभूति का व्याकरण ग्रन्थ - दुर्घटवृत्ति ७ । २ । ११७ में 'ज्योतिषं शास्त्रम्' में वृद्ध्यभाव के लिए भवभूति का एक वचन उद्ववृत है। उस से विदित होता है कि भवभूति ने कोई व्याकरण ग्रन्थ भी लिखा था ।
१५ - भट्ट जयन्त ( सं० जगभग ८२५ )
न्यायमञ्जरीकार जरन्नैयायिक भट्ट जयन्त ने पाणिनीय अष्टाध्यायी पर एक वृत्ति लिखी थी । इस का उल्लेख जयन्त ने स्वयं अपने 'अभिनवागमाडम्बर' नामक रूपक के प्रारम्भ में किया है। उस का लेख इस प्रकार हैअभवतः शैशव एवं व्याकरणविवरणकरणाद् वृत्तिकार इति प्रथितापरनाम्रो भट्टजयन्तस्य किमपि रूपकम् । M
भट्ट जयन्त ने न्यायमञ्जरी के अन्त में अपना जो परिचय दिया है उस से विदित होता है कि जयन्त के पिता का नाम 'चन्द्र' था । शास्त्रार्थी में जीतने के कारण वह जयन्त नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसका 'नववृत्ति - कार' नाम भी था । " जयन्त के पुत्र अभिनन्द ने कादम्बरीकथासार के प्रारम्भ में अपने कुल का कुछ परिचय दिया है। वह इस प्रकार हैगोड़वंशीय भारद्वाज कुल में शक्ति नाम का विद्वान् उत्पन्न हुआ । उसका पुत्र 'मित्र' और उसका शक्तिस्त्रामी हुआ । शक्तिस्वामी कर्कोट वंश के महाराज मुक्तापीड का मन्त्री था । शक्तिस्वामी का पुत्र कल्याणस्वामी
१. संस्कृत कविचर्चा पृष्ठ ३१३ । संस्कृत साहित्य का संक्षिप्त इतिहास पृष्ठ ३८६ । २. उच्यते-संशापूर्वकानित्यवादिति भवभूतिः । पृष्ठ ११५ ।
३. आचार्य पुष्पाञ्जलि वाल्यूम में पं० रामकृष्ण कवि का लेख, पृष्ठ ४७ ।
४. भट्टः चतुःशाखामिशः । जगद्वर मालतीमाधव की टीका के प्रारम्भ में । ५. वादेष्वाप्तजयो जयन्त इति यः ख्यातः सतामग्रणी रन्वर्थो नववृत्तिकार इति यं शंसन्ति नाम्ना बुघः । सूनुर्व्याप्तदिगन्तरस्य यशसा चन्द्रस्य चन्द्रस्विषा चक्रे चन्द्रकलावचूलाचरणध्यायी सधन्यां कृतिम् । पृष्ठ ६५६ ।
अष्टाध्यायी के वृतिकार
और उसका चन्द्र हुआ । चन्द्र का पुत्र जयन्त हुआ । उसका दूसरा नाम वृत्तिकार था । वह वेदवेदाङ्गों का ज्ञाता और सर्व शास्त्रार्थों का जीतने वाला था । उसका पुत्र साहित्यतत्त्वज्ञ अभिनन्द हुआ ।'
भट्ट जयन्त नैयायिकों में जरनैयायिक के नाम से प्रसिद्ध है । यह व्याकरण, साहित्य, न्याय और मीमांसाशास्त्र का महापण्डित था । इस के पितामह कल्याणस्वानी ने ग्राम की कामना से सांग्रहणीष्टि की थी । उस के अनन्तर उन्हें 'गौरमूलक' ग्राम की प्राप्ति हुई थी।
जयन्त का प्रपितामह शक्तिस्वामी कश्मीर के महाराज मुक्तापीड का मन्त्री था । मुक्तापीड का काल विक्रम की आठवीं शताब्दी का उत्तरार्ध है । अतः भट्ट जयन्त का काल विक्रम की नवम शताब्दी का पूर्वार्ध होगा ।
न्यायमञ्जरी - यह न्यायदर्शन के विशेष सूत्रों की विस्तृत टीका है । इसका लेख अत्यन्न प्रौढ़ और रचना शैली अत्यन्त परिष्कृत और प्राञ्जल है। न्याय के ग्रन्थों में इस का प्रमुख स्थान है ।
१. शक्तिर्नामाभवद् गौडो भारद्वाजकुले द्विजः । दीर्घाभिसारमासाद्यः कृतदारपरिग्रहः ।। तस्य मित्राभिधानोमूदात्मजस्तेजसां निधिः । जनेन दोषोपरमप्रबुद्धे - नाचितोदयः ।। स शक्तिस्वामिनं पुत्रमवाप श्रुतिशालिनम् । राशः कर्कोटवंशस्य मुक्तापीडस्य मन्त्रिणम् ।। कल्याणस्वामिनामास्य याज्ञवल्क्य इवाभवत् । तनयः शुद्धयोगार्द्ध निघू तभवकल्मषः ॥ श्रगाघहृदयात् तस्मात् परमेश्वरमण्डनम् । श्रजायत सुतः कान्तश्चन्द्रो दुग्धोदधेरिव ॥ पुत्रं कृतजनानन्दं स जयन्तमजीजनत् । व्यता कवित्ववक्तृत्वकला यत्र सरस्वती ॥ वृत्तिकार इति व्यक्तं द्वितीयं नाम बिभ्रतः । वेदवेदाङ्गविदुषः सर्वशास्त्रार्थवादिनः ॥ जयन्तनाम्नः सुधियः साधुसाहित्यतश्ववित् । सुनुः समभवत्तस्मादमिनन्द इति श्रुतः ।।
२. न्याय चिन्तामणि उपमान खण्ड, पृष्ठ ६१, कलकत्ता सोसाइटी संस्क० । ३. वेदप्रामाण्यसिद्धयर्थमित्थमेताः कथाः कृताः । न तु मीमांसकख्याति प्राप्तोस्मीत्यभिमानतः ॥ न्यायमञ्जरी पृष्ठ २६० । ४. तथा ह्यस्मस्पितामह एव ग्रामकामः सांग्रहण कृतवान्, स इष्टिसमाप्ति समनन्तरमेव गौरमूलकं ग्राममवाप । न्यायमझरी पृष्ठ २७४ ।
न्यायकलिका - गुणरत्न ने षड्दर्शन- समुच्चय की वृत्ति में इस ग्रन्थ का उल्लेख किया है। यह ग्रन्थ न्यायशास्त्र विषयक है। सरस्वती भवन ग्रन्थमाला काशी में प्रकाशित हो चुका है ।
पल्लव - डा० वी० राघवन् एम० ए० ने लिखा है कि श्रीदेव ने प्रमाणनयतत्त्वालोकालङ्कार की स्याद्वादरत्नाकर की टीका में जयन्त विरचित "पल्लव" ग्रन्थ के कई उद्धरण दिये हैं।' पल्लव और मञ्जरी समानार्थक हैं। पल्लव के उद्धृत न्यायमञ्जरी में उपलब्ध हो जाते हैं । अतः पल्लव न्यायमञ्जरी है ।
१६ - केशव ( सं० १९६५ से पूर्व )
केशव नाम के किसी तैयाकरण ने अष्टाध्यायी की एक वृत्ति लिखी थी । केशववृत्ति के अनेक उद्धरण व्याकरण ग्रन्थों में उपलब्ध होते हैं । पुरुषोत्तमदेव भाषावृत्ति में लिखता हैपृषोदरादित्वादिकारलोपे एकदेशविकारद्वारेण पर्षच्छब्दादपि वलजिति केशवः ।
केशववृत्तौ तु विकल्प उक्तः - हे प्रान्, हे प्राण वा भाषावृत्ति का व्याख्याता सृष्टिधराचार्य केशववृत्ति का एक श्लोक उद्धृत करता हैअपास्पाः पदमध्येऽपि न चैकस्मिन् पुना रविः । तस्माद्रोरीति सूत्रेऽस्मिन् पदस्येति न बध्यते ॥ गुरुपद हालदार ने अपने व्याकरण दर्शनेर इतिहास में लिखा हैअष्टाध्यायीर केशववृत्तिकार केशव परिडत इद्दार प्रवक्ता । भाषावृत्तिते ( ५ । २ । ११२ ) पुरुषोत्तमदेव, तन्त्रप्रदीपे ( १ । २ । ६ ॥ १ । ४ । ५५ ) मैत्रेयरक्षित, एवं हरिनामामृतव्याकरणे ( ५०० पृष्ठ ) श्रीजीवगोस्वामी केशवपरिडतेर नामस्मरण करियाछेन ।
इन उद्धरणों से केशव का अष्टाध्यायी की वृत्ति लिखना सुव्यक्त है ।
१. त्याद्वादरलाकर भाग १, पृष्ठ ६४, ३०२ । पृष्ठ ४३२, ४३३ तथा भाग ४, पृष्ठ ७८० । देखो प्रेमी अभिनन्दनम्रन्थ में डा० राघवन् का लेख ।
४. भाषावृत्ति पुढे ५४४ की
केशव का काल
केशव नाम के अनेक ग्रन्थकार हैं। उनमें से किस केशव ने अष्टाध्यायी की वृत्ति लिखी, यह अज्ञात है । पं० गुरुपद हालदार के लेख से विदित होता है कि यह वैयाकरण केशव मैत्रेय रक्षित से प्राचीन है। मैत्रेय रक्षित का काल सं० १९६५ के लगभग है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं । अतः केशव सं० ११६५ से पूर्ववर्ती है, इतना निश्चित है ।
१७ - इन्दुमित्र ( सं० ११५० से पूर्व )
विट्ठल ने प्रक्रियाकौमुदी की प्रसादनाम्नी टीका में इन्दुमित्र और इन्दुमती वृत्ति का का बहुधा उल्लेख किया है । इन्दुमित्र ने काशिका की 'अनुन्यास' नाम्नी एक व्याख्या लिखी थी । इसका वर्णन हम अगले "काशिका वृत्ति के व्याख्याकार" नामक अध्याय में करेंगे । यद्यपि इन्दुमित्रविरचित अष्टाध्यायीवृत्ति के कोई साक्षात् उद्धरण उपलब्ध नहीं हुए, तथापि विट्ठल द्वारा उद्धृत उद्धरणों को देखने से प्रतीत होता है कि इन्दुमती वृत्ति अष्टाध्यायी की वृत्ति थी और इसका रचयिता इन्दुमित्र था । यथा -
एतच्च इन्दुमित्रमतेनोक्तम् । प्रत्यय इति सूत्रे प्रत्यय्यते ज्ञायतेऽ र्थोऽस्मादिति प्रत्ययः । पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण इति घान्तस्य प्रत्यय शब्दस्यान्वर्धस्य निषेधो ज्ञापक इति भावः । तथा च इन्दुमत्यां वृत्तावुक्तम्- 'प्रतेस्तु व्यञ्जनव्यवहितो य इति न भवति निमित्तम्' इति केषाश्चिन्मते प्रतरपि भवति ।
अनेक ग्रन्थकार इन्दुमित्र को इन्दु नाम से भी स्मरण करते हैं । एक इन्दु अमरकोष की क्षीरस्वामी की व्याख्या में भी उधृत है, परन्तु वह वाग्भट्ट का साक्षात् शिष्य आयुर्वेदिक ग्रन्थकार पृथक् व्यक्ति है ।
सीरदेव ने अपनी परिभाषावृत्ति में अनुन्यासकार और मैत्रेय के निम्न पाठ उद्धवृत किये हैं१. पूर्व पृष्ठ ३६ = ।
३. भाग २, पृष्ठ १४५ ।
अनुन्यासकार - प्रत्ययसूत्रे अनुन्यासकार उक्तवान् प्रतियन्त्यनेनार्थानिति प्रत्ययः, एरच् ( ३ । ३ । ५६ ) इत्यच्, पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण ( ३।३।११८ ) इति वा घ इति ।।
मैत्रेय - मैत्रेयः पुनराह - 'पुंसि संज्ञायां ( ३ । ३११८) इतिघ एव । परच् ( ३ । ३ । ५६ ) इत्यच् प्रत्ययस्तु करणे ल्युटा बाधितत्वान्न ( शक्यते कर्तुम् । न च वा सरूपविधिरस्ति, कृतल्युडित्यादिवचनात् ।'
इन दोनों पाठों की पारस्परिक तुलना से स्पष्ट विदित होता है कि मैत्रेय रक्षित अनुन्यासकार का खण्डन कर रहा है । अतः इन्दुमित्र मैत्रेय रक्षित से पूर्वभावी है । इन्दुमित्र के ग्रन्थ की अनुन्यास संज्ञा से विदित होता है कि यह ग्रन्थ न्यास के अनन्तर रचा गया है । अतः इन्दुमित्र का काल सं० ८०० से ११५० के मध्य है, इतना ही स्थूल रूप से कहा जा सकता है ।
१८ - मैत्रेय रक्षित ( सं० १९६५ के लगभग )
मैत्रेय रक्षित ने अष्टाध्यायी की एक 'दुर्घटवृत्ति' लिखी थी । वह इस समय अनुपलब्ध है । उज्ज्वलदत्त ने अपनी उणादिवृत्ति में मैत्रेय रक्षित विरचित दुर्घटवृत्ति के निम्न पाठ उद्धृत किये हैंश्रीयमित्यपि भवतीति दुर्घटे रक्षितः ।
कृदिकारदिति ङीषि लक्ष्मीत्यपि भवतीति दुर्घटे रक्षितः । मैत्रेयविरचित दुर्घटवृत्ति के इनके अतिरिक्त अन्य उद्धरण उपलब्ध नहीं होते ।
शरणदेव ने भी एक दुर्घटवृत्ति लिखी है। सर्वरक्षित ने उसका संक्षेप और परिष्कार किया है । रक्षित शब्द से सर्वरक्षित का ग्रहण हो सकता है, परन्तु सर्वरक्षित द्वारा परिष्कृत दुर्घटवृत्ति में उपर्युक्त पाठ उपलब्ध नहीं होते। उज्ज्वलदत्त ने अन्य जितने उद्धरण रक्षित के नाम से उद्धृत किये हैं वे सब मैत्रेय रक्षित विरचित ग्रन्थों के हैं। अतः उज्ज्वलदत्तोद्धृत उपर्युक्त उद्धरण भी निश्चय ही मैत्रेय रक्षित विरचित दुर्घटवृत्ति के हैं।
१. १४ ७६ । शरणदेव ने इन उपर्युक्त दोनों पाठों को अपने शब्दों में उद्धृत किया है। देखो, दुर्घटवृत्ति पृष्ठ ६७ । २. पृष्ठ ८० । ३. पृष्ठ १४२ ।
मैत्रेयविरचित दुर्घटवृत्ति के विषय में हमें इससे अधिक ज्ञान नहीं है। मैत्रेय रक्षित का आनुमानिक काल लगभग संवत् १९६५ है, यह हम पूर्व पृष्ठ ३६८ पर लिख चुके हैं ।
१६ - पुरुषोत्तसदेव ( सं० १२०० से पूर्व )
पुरुषोत्तमदेव ने अटाध्यायी की एक लघु वृत्ति रची है। इसमें अष्टाध्यायी के केवल लौकिक सूत्रों की व्याख्या है । अत एव इसका दूसरा अन्वर्य नाम 'भाषावृत्ति' है । इस ग्रन्थ में अनेक ऐसे प्राचीन ग्रन्थों के उद्धरण उपलब्ध होते हैं, जो सम्प्रति अप्राप्य हैं ।
पुरुषोत्तमदेव के काल आदि के विषय में हम पूर्व 'महाभाष्य के टीकाकार' प्रकरण में लिख चुके हैं । '
सर्वानन्द अमरकोपटीकासर्वस्व में लिखता हैपुरुषोत्तमदेवेन गुर्दिणीत्यस्य दुर्घटेऽसाधुत्वमुक्तम् ।
इस पाठ से प्रतीत होता है कि पुरुषोत्तमदेव ने कोई 'दुर्घटवृत्ति' भी रची थी । शरणदेव ने अपनी दुर्घटवृत्ति में गुर्विणी पद का साधुत्व दर्शाया है। सर्वानन्द ने टीकासर्वस्व सं० १२१६ में लिखा था । शरणदेवीय दुर्घटवृत्ति का रचना-काल सं० १२३० है । अतः सर्वानन्द के उद्धरण में 'पुरुषोत्तमदेवेन' पाठ अनवधानता मूलक नहीं हो सकता । शरणदेव ने दुर्घटवृत्ति में पुरुषोत्तमदेव के नाम से अनेक ऐसे पाठ उद्ववृत किये हैं जो भाषावृत्ति में उपलब्ध नहीं होते। शरणदेव ने उन पाठों को पुरुषोत्तमदेव की दुर्घटवृत्ति अथवा अन्य ग्रन्थों से उद्धृत किया होगा ।
भाषावृत्ति व्याख्याता - सृष्टिधर
सृष्टिधर चक्रवर्ती ने भाषावृत्ति की 'भाषावृत्त्यर्थ विवृति' नाम्नी एक टीका लिखी है । यह व्याख्या बालकों के लिये उपयोगी है । लेखक
२. भाग २, पृष्ठ २७७ । ४. दुर्घट वृत्ति पृष्ठ १६, २७, ७१ ।
कई स्थानों पर उपहासास्पद अशुद्धियां की हैं । चक्रवर्ती उपाधि से व्यक्त होता है कि सृष्टिधर बङ्ग प्रान्त का रहने वाला था ।
काल - सृष्टिधर ने ग्रन्थ के आद्यन्त में अपना कोई परिचय नहीं दिया और न ग्रन्थ के निर्माणकाल का उल्लेख किया है । अतः सृष्टिधर का निश्चित काल अज्ञात है । सृष्टिधर ने भाषावृत्त्यर्थविवृति में निम्न ग्रन्थों और ग्रन्थकारों को उद्धृत किया है।
मेदिनी कोष, सरस्वतीकण्ठाभरण (८/२ । १३), मैत्रेयरक्षित, केशव, केशववृत्ति, उदात्तराघव, कातन्त्र परिशिष्ट (८ । २ । १९ ), धर्मकीर्ति रूपावतारकृत्, उपाध्यायसर्वस्व, हट्टचन्द्र ( ८ । २ । २९ ) कैयट, भाष्यटीका ( प्रदीप ), कविरहस्य ( ७१ २ ४३ ) मुरारि ( अनर्घराघव ) ( ३ । २, २६ ), कालिदास, भारवि, भट्टि, माघ, श्रीहर्ष ( नैषधचरितकार) वल्लभाचार्य ( माघकाव्यटीकाकार ) ( ३ । २।११२), क्रमदीश्वर ( ५१११७८), पद्मनाभ, मंजूषा ( ५ । ४ । १४३ ) ।
इनमें मञ्जूषा के अतिरिक्त कोई ग्रन्थ अथवा ग्रन्थकार विक्रम की १४ वीं शताब्दी से अर्वाचीन नहीं है। यह मञ्जूषा नागोजी भट्ट विरचित लघुमञ्जूषा नहीं है । नागोजी भट्ट का काल विक्रम की अठारहवीं शताब्दी का मध्य भाग है। भाषावृत्ति के संपादक ने शकाब्द_१६३१ और १६३६ अर्थात् वि० सं० १७६६ और १७७१ के भाषावृत्त्यर्धविवृति के दो हस्तलेखों का उल्लेख किया है। इससे स्पष्ट है कि भाषावृत्त्यर्थविवृति की रचना नागोजी भट्ट से पहले हुई है। हमारा विचार है कि सृष्टिधर विक्रम की १५ वीं शताब्दी का ग्रन्थकार है ।
शरणदेव ने अष्टाध्यायी पर 'दुर्घट' नाम्नी वृत्ति लिखी है। यह व्याख्या
१. भाषावृत्ति की भूमिका, पृष्ठ १० ।
२. भाषावृत्यर्थविवृति में उद्धृत मेदिनीकोष का काल विक्रम की १४ वीं शताब्दी माना जाता है, यह ठीक नहीं है । उगादिवृत्तिकार उज्ज्वलदत्त वि० सं० १२५० से पूर्ववर्ती है, यह हम "उरणादि के वृत्तिकार" प्रकरण में लिखेंगे । उज्ज्वलदत्त ने उणादिवृत्ति १।१०१, पृष्ठ ३६ पर मेदिनीकार को उद्धृत किया है । ४. भाषावृत्ति की भूमिका पृष्ठ १० की दि० ।
अष्टाध्यायी के विशेष सूत्रों पर है। संस्कृत भाषा के जो पद व्याकरण से साधारणतया सिद्ध नहीं होते, उन पदों के साधुत्वज्ञापन के लिये यह ग्रन्थ लिखा गया है । अत एव ग्रन्थकार ने इसका अन्वर्धनाम 'दुर्घटवृत्ति रक्खा है।
ग्रन्थकार ने मङ्गलश्लोक में सर्वज्ञ अपरनाम बुद्ध को नमस्कार किया है,' तथा बौद्ध ग्रन्थों के अनेक प्रयोगों का साधुत्व दर्शाया है। इससे प्रतीत होता है कि शरणदेव बाद्धमतावलम्बी था ।
काल - तरणदेव ने ग्रन्थ के आरम्भ में दुर्घटवृत्ति की रचना का समय शकाब्द १०९५ लिखा है, अर्थात् वि० सं० १२३० में यह ग्रन्थ लिखा गया ।
प्रतिसंस्कर्ता - दुर्घटवृत्ति के प्रारम्भ में लिखा है कि शरणदेव के कहने से श्रीसर्व-रक्षित ने इस ग्रन्थ का संक्षेप करके इसे प्रतिसंस्कृत किया । #
ग्रन्थ का वैशिष्ट्य - संस्कृत वाङ्मय के प्राचीन ग्रन्थों में प्रयुक्त शतशः दुःसाध्य प्रयोगों के साधुत्वनिदर्शन के लिये इस ग्रन्थ की रचना हुई है । प्राचीन काल में इस प्रकार के अनेक ग्रन्थ थे, मैत्रेय रक्षित और पुरुषोत्तमदेव विरचित दो दुर्घटवृत्तियों का वर्णन हम पूर्व कर चुके हैं । सम्प्रति केवल शरण देवीय दुर्घटवृत्ति उपलब्ध होती है। यद्यपि शब्दकौस्तुभ आदि अर्वाचीन ग्रन्थों में कहीं कहीं दुर्घटवृत्ति का खण्डन उपलब्ध होता है तथापि कृच्छ्रनाध्य प्रयोगों के साधुत्व दर्शाने के लिये इस ग्रन्थ में जिस शैली का आश्रय लिया है, उसका प्रायः अनुमरण अर्वाचीन ग्रन्थकार भी करते हैं । अतः 'गच्छतः स्खलन न्याय से इसके वैशिष्ट्य में किञ्चिन्मात्र न्यूनता नहीं आती ।
इस ग्रन्थ में एक महान् वैशिष्ट्य और भी है। ग्रन्थकार ने इस ग्रन्थ में अनेक प्राचीन ग्रन्थों और ग्रन्थकारों के वचन उद्धृत किये हैं। इनमें अनेक ग्रन्थ और ग्रन्थकार ऐसे हैं जिनका उल्लेख अन्यत्र नहीं मिलता। ग्रन्थकार
१. नत्वा शरणदेवेन सर्वज्ञं शानहेतवे । बृहद्ध जनाम्भोजकोशबीका सभास्वते ।। २. शाकमहीपतिवत्सरमाने एकनभोनवपञ्चचिमाने । दुर्घटवृत्तिरकारिमुदेव कण्ठविभूषणहारलदेव ।। ३. वाक्याच्छरणदेवस्य च्छायावग्रहपीडया । श्रीसर्वरक्षितेनैषा संक्षिप्य प्रतिसंस्कृता । | भवभूति का काल संशून्य सात सौ अस्सी - आठ सौ के लगभग माना जाता है ।" अतः भवभूति के द्वारा स्मृत भर्तीश्वर संशून्य सात सौ अस्सी से पूर्ववर्ती है। कितना पूर्ववर्ती है यह अज्ञात है । भवभूति का व्याकरण ग्रन्थ - दुर्घटवृत्ति सात । दो । एक सौ सत्रह में 'ज्योतिषं शास्त्रम्' में वृद्ध्यभाव के लिए भवभूति का एक वचन उद्ववृत है। उस से विदित होता है कि भवभूति ने कोई व्याकरण ग्रन्थ भी लिखा था । पंद्रह - भट्ट जयन्त न्यायमञ्जरीकार जरन्नैयायिक भट्ट जयन्त ने पाणिनीय अष्टाध्यायी पर एक वृत्ति लिखी थी । इस का उल्लेख जयन्त ने स्वयं अपने 'अभिनवागमाडम्बर' नामक रूपक के प्रारम्भ में किया है। उस का लेख इस प्रकार हैअभवतः शैशव एवं व्याकरणविवरणकरणाद् वृत्तिकार इति प्रथितापरनाम्रो भट्टजयन्तस्य किमपि रूपकम् । M भट्ट जयन्त ने न्यायमञ्जरी के अन्त में अपना जो परिचय दिया है उस से विदित होता है कि जयन्त के पिता का नाम 'चन्द्र' था । शास्त्रार्थी में जीतने के कारण वह जयन्त नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसका 'नववृत्ति - कार' नाम भी था । " जयन्त के पुत्र अभिनन्द ने कादम्बरीकथासार के प्रारम्भ में अपने कुल का कुछ परिचय दिया है। वह इस प्रकार हैगोड़वंशीय भारद्वाज कुल में शक्ति नाम का विद्वान् उत्पन्न हुआ । उसका पुत्र 'मित्र' और उसका शक्तिस्त्रामी हुआ । शक्तिस्वामी कर्कोट वंश के महाराज मुक्तापीड का मन्त्री था । शक्तिस्वामी का पुत्र कल्याणस्वामी एक. संस्कृत कविचर्चा पृष्ठ तीन सौ तेरह । संस्कृत साहित्य का संक्षिप्त इतिहास पृष्ठ तीन सौ छियासी । दो. उच्यते-संशापूर्वकानित्यवादिति भवभूतिः । पृष्ठ एक सौ पंद्रह । तीन. आचार्य पुष्पाञ्जलि वाल्यूम में पंशून्य रामकृष्ण कवि का लेख, पृष्ठ सैंतालीस । चार. भट्टः चतुःशाखामिशः । जगद्वर मालतीमाधव की टीका के प्रारम्भ में । पाँच. वादेष्वाप्तजयो जयन्त इति यः ख्यातः सतामग्रणी रन्वर्थो नववृत्तिकार इति यं शंसन्ति नाम्ना बुघः । सूनुर्व्याप्तदिगन्तरस्य यशसा चन्द्रस्य चन्द्रस्विषा चक्रे चन्द्रकलावचूलाचरणध्यायी सधन्यां कृतिम् । पृष्ठ छः सौ छप्पन । अष्टाध्यायी के वृतिकार और उसका चन्द्र हुआ । चन्द्र का पुत्र जयन्त हुआ । उसका दूसरा नाम वृत्तिकार था । वह वेदवेदाङ्गों का ज्ञाता और सर्व शास्त्रार्थों का जीतने वाला था । उसका पुत्र साहित्यतत्त्वज्ञ अभिनन्द हुआ ।' भट्ट जयन्त नैयायिकों में जरनैयायिक के नाम से प्रसिद्ध है । यह व्याकरण, साहित्य, न्याय और मीमांसाशास्त्र का महापण्डित था । इस के पितामह कल्याणस्वानी ने ग्राम की कामना से सांग्रहणीष्टि की थी । उस के अनन्तर उन्हें 'गौरमूलक' ग्राम की प्राप्ति हुई थी। जयन्त का प्रपितामह शक्तिस्वामी कश्मीर के महाराज मुक्तापीड का मन्त्री था । मुक्तापीड का काल विक्रम की आठवीं शताब्दी का उत्तरार्ध है । अतः भट्ट जयन्त का काल विक्रम की नवम शताब्दी का पूर्वार्ध होगा । न्यायमञ्जरी - यह न्यायदर्शन के विशेष सूत्रों की विस्तृत टीका है । इसका लेख अत्यन्न प्रौढ़ और रचना शैली अत्यन्त परिष्कृत और प्राञ्जल है। न्याय के ग्रन्थों में इस का प्रमुख स्थान है । एक. शक्तिर्नामाभवद् गौडो भारद्वाजकुले द्विजः । दीर्घाभिसारमासाद्यः कृतदारपरिग्रहः ।। तस्य मित्राभिधानोमूदात्मजस्तेजसां निधिः । जनेन दोषोपरमप्रबुद्धे - नाचितोदयः ।। स शक्तिस्वामिनं पुत्रमवाप श्रुतिशालिनम् । राशः कर्कोटवंशस्य मुक्तापीडस्य मन्त्रिणम् ।। कल्याणस्वामिनामास्य याज्ञवल्क्य इवाभवत् । तनयः शुद्धयोगार्द्ध निघू तभवकल्मषः ॥ श्रगाघहृदयात् तस्मात् परमेश्वरमण्डनम् । श्रजायत सुतः कान्तश्चन्द्रो दुग्धोदधेरिव ॥ पुत्रं कृतजनानन्दं स जयन्तमजीजनत् । व्यता कवित्ववक्तृत्वकला यत्र सरस्वती ॥ वृत्तिकार इति व्यक्तं द्वितीयं नाम बिभ्रतः । वेदवेदाङ्गविदुषः सर्वशास्त्रार्थवादिनः ॥ जयन्तनाम्नः सुधियः साधुसाहित्यतश्ववित् । सुनुः समभवत्तस्मादमिनन्द इति श्रुतः ।। दो. न्याय चिन्तामणि उपमान खण्ड, पृष्ठ इकसठ, कलकत्ता सोसाइटी संस्कशून्य । तीन. वेदप्रामाण्यसिद्धयर्थमित्थमेताः कथाः कृताः । न तु मीमांसकख्याति प्राप्तोस्मीत्यभिमानतः ॥ न्यायमञ्जरी पृष्ठ दो सौ साठ । चार. तथा ह्यस्मस्पितामह एव ग्रामकामः सांग्रहण कृतवान्, स इष्टिसमाप्ति समनन्तरमेव गौरमूलकं ग्राममवाप । न्यायमझरी पृष्ठ दो सौ चौहत्तर । न्यायकलिका - गुणरत्न ने षड्दर्शन- समुच्चय की वृत्ति में इस ग्रन्थ का उल्लेख किया है। यह ग्रन्थ न्यायशास्त्र विषयक है। सरस्वती भवन ग्रन्थमाला काशी में प्रकाशित हो चुका है । पल्लव - डाशून्य वीशून्य राघवन् एमशून्य एशून्य ने लिखा है कि श्रीदेव ने प्रमाणनयतत्त्वालोकालङ्कार की स्याद्वादरत्नाकर की टीका में जयन्त विरचित "पल्लव" ग्रन्थ के कई उद्धरण दिये हैं।' पल्लव और मञ्जरी समानार्थक हैं। पल्लव के उद्धृत न्यायमञ्जरी में उपलब्ध हो जाते हैं । अतः पल्लव न्यायमञ्जरी है । सोलह - केशव केशव नाम के किसी तैयाकरण ने अष्टाध्यायी की एक वृत्ति लिखी थी । केशववृत्ति के अनेक उद्धरण व्याकरण ग्रन्थों में उपलब्ध होते हैं । पुरुषोत्तमदेव भाषावृत्ति में लिखता हैपृषोदरादित्वादिकारलोपे एकदेशविकारद्वारेण पर्षच्छब्दादपि वलजिति केशवः । केशववृत्तौ तु विकल्प उक्तः - हे प्रान्, हे प्राण वा भाषावृत्ति का व्याख्याता सृष्टिधराचार्य केशववृत्ति का एक श्लोक उद्धृत करता हैअपास्पाः पदमध्येऽपि न चैकस्मिन् पुना रविः । तस्माद्रोरीति सूत्रेऽस्मिन् पदस्येति न बध्यते ॥ गुरुपद हालदार ने अपने व्याकरण दर्शनेर इतिहास में लिखा हैअष्टाध्यायीर केशववृत्तिकार केशव परिडत इद्दार प्रवक्ता । भाषावृत्तिते पुरुषोत्तमदेव, तन्त्रप्रदीपे मैत्रेयरक्षित, एवं हरिनामामृतव्याकरणे श्रीजीवगोस्वामी केशवपरिडतेर नामस्मरण करियाछेन । इन उद्धरणों से केशव का अष्टाध्यायी की वृत्ति लिखना सुव्यक्त है । एक. त्याद्वादरलाकर भाग एक, पृष्ठ चौंसठ, तीन सौ दो । पृष्ठ चार सौ बत्तीस, चार सौ तैंतीस तथा भाग चार, पृष्ठ सात सौ अस्सी । देखो प्रेमी अभिनन्दनम्रन्थ में डाशून्य राघवन् का लेख । चार. भाषावृत्ति पुढे पाँच सौ चौंतालीस की केशव का काल केशव नाम के अनेक ग्रन्थकार हैं। उनमें से किस केशव ने अष्टाध्यायी की वृत्ति लिखी, यह अज्ञात है । पंशून्य गुरुपद हालदार के लेख से विदित होता है कि यह वैयाकरण केशव मैत्रेय रक्षित से प्राचीन है। मैत्रेय रक्षित का काल संशून्य एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के लगभग है, यह हम पूर्व लिख चुके हैं । अतः केशव संशून्य एक हज़ार एक सौ पैंसठ से पूर्ववर्ती है, इतना निश्चित है । सत्रह - इन्दुमित्र विट्ठल ने प्रक्रियाकौमुदी की प्रसादनाम्नी टीका में इन्दुमित्र और इन्दुमती वृत्ति का का बहुधा उल्लेख किया है । इन्दुमित्र ने काशिका की 'अनुन्यास' नाम्नी एक व्याख्या लिखी थी । इसका वर्णन हम अगले "काशिका वृत्ति के व्याख्याकार" नामक अध्याय में करेंगे । यद्यपि इन्दुमित्रविरचित अष्टाध्यायीवृत्ति के कोई साक्षात् उद्धरण उपलब्ध नहीं हुए, तथापि विट्ठल द्वारा उद्धृत उद्धरणों को देखने से प्रतीत होता है कि इन्दुमती वृत्ति अष्टाध्यायी की वृत्ति थी और इसका रचयिता इन्दुमित्र था । यथा - एतच्च इन्दुमित्रमतेनोक्तम् । प्रत्यय इति सूत्रे प्रत्यय्यते ज्ञायतेऽ र्थोऽस्मादिति प्रत्ययः । पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण इति घान्तस्य प्रत्यय शब्दस्यान्वर्धस्य निषेधो ज्ञापक इति भावः । तथा च इन्दुमत्यां वृत्तावुक्तम्- 'प्रतेस्तु व्यञ्जनव्यवहितो य इति न भवति निमित्तम्' इति केषाश्चिन्मते प्रतरपि भवति । अनेक ग्रन्थकार इन्दुमित्र को इन्दु नाम से भी स्मरण करते हैं । एक इन्दु अमरकोष की क्षीरस्वामी की व्याख्या में भी उधृत है, परन्तु वह वाग्भट्ट का साक्षात् शिष्य आयुर्वेदिक ग्रन्थकार पृथक् व्यक्ति है । सीरदेव ने अपनी परिभाषावृत्ति में अनुन्यासकार और मैत्रेय के निम्न पाठ उद्धवृत किये हैंएक. पूर्व पृष्ठ छत्तीस = । तीन. भाग दो, पृष्ठ एक सौ पैंतालीस । अनुन्यासकार - प्रत्ययसूत्रे अनुन्यासकार उक्तवान् प्रतियन्त्यनेनार्थानिति प्रत्ययः, एरच् इत्यच्, पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण इति वा घ इति ।। मैत्रेय - मैत्रेयः पुनराह - 'पुंसि संज्ञायां इतिघ एव । परच् इत्यच् प्रत्ययस्तु करणे ल्युटा बाधितत्वान्न मैत्रेय रक्षित ने अष्टाध्यायी की एक 'दुर्घटवृत्ति' लिखी थी । वह इस समय अनुपलब्ध है । उज्ज्वलदत्त ने अपनी उणादिवृत्ति में मैत्रेय रक्षित विरचित दुर्घटवृत्ति के निम्न पाठ उद्धृत किये हैंश्रीयमित्यपि भवतीति दुर्घटे रक्षितः । कृदिकारदिति ङीषि लक्ष्मीत्यपि भवतीति दुर्घटे रक्षितः । मैत्रेयविरचित दुर्घटवृत्ति के इनके अतिरिक्त अन्य उद्धरण उपलब्ध नहीं होते । शरणदेव ने भी एक दुर्घटवृत्ति लिखी है। सर्वरक्षित ने उसका संक्षेप और परिष्कार किया है । रक्षित शब्द से सर्वरक्षित का ग्रहण हो सकता है, परन्तु सर्वरक्षित द्वारा परिष्कृत दुर्घटवृत्ति में उपर्युक्त पाठ उपलब्ध नहीं होते। उज्ज्वलदत्त ने अन्य जितने उद्धरण रक्षित के नाम से उद्धृत किये हैं वे सब मैत्रेय रक्षित विरचित ग्रन्थों के हैं। अतः उज्ज्वलदत्तोद्धृत उपर्युक्त उद्धरण भी निश्चय ही मैत्रेय रक्षित विरचित दुर्घटवृत्ति के हैं। एक. चौदह छिहत्तर । शरणदेव ने इन उपर्युक्त दोनों पाठों को अपने शब्दों में उद्धृत किया है। देखो, दुर्घटवृत्ति पृष्ठ सरसठ । दो. पृष्ठ अस्सी । तीन. पृष्ठ एक सौ बयालीस । मैत्रेयविरचित दुर्घटवृत्ति के विषय में हमें इससे अधिक ज्ञान नहीं है। मैत्रेय रक्षित का आनुमानिक काल लगभग संवत् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ है, यह हम पूर्व पृष्ठ तीन सौ अड़सठ पर लिख चुके हैं । सोलह - पुरुषोत्तसदेव पुरुषोत्तमदेव ने अटाध्यायी की एक लघु वृत्ति रची है। इसमें अष्टाध्यायी के केवल लौकिक सूत्रों की व्याख्या है । अत एव इसका दूसरा अन्वर्य नाम 'भाषावृत्ति' है । इस ग्रन्थ में अनेक ऐसे प्राचीन ग्रन्थों के उद्धरण उपलब्ध होते हैं, जो सम्प्रति अप्राप्य हैं । पुरुषोत्तमदेव के काल आदि के विषय में हम पूर्व 'महाभाष्य के टीकाकार' प्रकरण में लिख चुके हैं । ' सर्वानन्द अमरकोपटीकासर्वस्व में लिखता हैपुरुषोत्तमदेवेन गुर्दिणीत्यस्य दुर्घटेऽसाधुत्वमुक्तम् । इस पाठ से प्रतीत होता है कि पुरुषोत्तमदेव ने कोई 'दुर्घटवृत्ति' भी रची थी । शरणदेव ने अपनी दुर्घटवृत्ति में गुर्विणी पद का साधुत्व दर्शाया है। सर्वानन्द ने टीकासर्वस्व संशून्य एक हज़ार दो सौ सोलह में लिखा था । शरणदेवीय दुर्घटवृत्ति का रचना-काल संशून्य एक हज़ार दो सौ तीस है । अतः सर्वानन्द के उद्धरण में 'पुरुषोत्तमदेवेन' पाठ अनवधानता मूलक नहीं हो सकता । शरणदेव ने दुर्घटवृत्ति में पुरुषोत्तमदेव के नाम से अनेक ऐसे पाठ उद्ववृत किये हैं जो भाषावृत्ति में उपलब्ध नहीं होते। शरणदेव ने उन पाठों को पुरुषोत्तमदेव की दुर्घटवृत्ति अथवा अन्य ग्रन्थों से उद्धृत किया होगा । भाषावृत्ति व्याख्याता - सृष्टिधर सृष्टिधर चक्रवर्ती ने भाषावृत्ति की 'भाषावृत्त्यर्थ विवृति' नाम्नी एक टीका लिखी है । यह व्याख्या बालकों के लिये उपयोगी है । लेखक दो. भाग दो, पृष्ठ दो सौ सतहत्तर । चार. दुर्घट वृत्ति पृष्ठ सोलह, सत्ताईस, इकहत्तर । कई स्थानों पर उपहासास्पद अशुद्धियां की हैं । चक्रवर्ती उपाधि से व्यक्त होता है कि सृष्टिधर बङ्ग प्रान्त का रहने वाला था । काल - सृष्टिधर ने ग्रन्थ के आद्यन्त में अपना कोई परिचय नहीं दिया और न ग्रन्थ के निर्माणकाल का उल्लेख किया है । अतः सृष्टिधर का निश्चित काल अज्ञात है । सृष्टिधर ने भाषावृत्त्यर्थविवृति में निम्न ग्रन्थों और ग्रन्थकारों को उद्धृत किया है। मेदिनी कोष, सरस्वतीकण्ठाभरण , मैत्रेयरक्षित, केशव, केशववृत्ति, उदात्तराघव, कातन्त्र परिशिष्ट , धर्मकीर्ति रूपावतारकृत्, उपाध्यायसर्वस्व, हट्टचन्द्र कैयट, भाष्यटीका , कविरहस्य मुरारि , कालिदास, भारवि, भट्टि, माघ, श्रीहर्ष वल्लभाचार्य , क्रमदीश्वर , पद्मनाभ, मंजूषा । इनमें मञ्जूषा के अतिरिक्त कोई ग्रन्थ अथवा ग्रन्थकार विक्रम की चौदह वीं शताब्दी से अर्वाचीन नहीं है। यह मञ्जूषा नागोजी भट्ट विरचित लघुमञ्जूषा नहीं है । नागोजी भट्ट का काल विक्रम की अठारहवीं शताब्दी का मध्य भाग है। भाषावृत्ति के संपादक ने शकाब्द_एक हज़ार छः सौ इकतीस और एक हज़ार छः सौ छत्तीस अर्थात् विशून्य संशून्य एक हज़ार सात सौ छयासठ और एक हज़ार सात सौ इकहत्तर के भाषावृत्त्यर्धविवृति के दो हस्तलेखों का उल्लेख किया है। इससे स्पष्ट है कि भाषावृत्त्यर्थविवृति की रचना नागोजी भट्ट से पहले हुई है। हमारा विचार है कि सृष्टिधर विक्रम की पंद्रह वीं शताब्दी का ग्रन्थकार है । शरणदेव ने अष्टाध्यायी पर 'दुर्घट' नाम्नी वृत्ति लिखी है। यह व्याख्या एक. भाषावृत्ति की भूमिका, पृष्ठ दस । दो. भाषावृत्यर्थविवृति में उद्धृत मेदिनीकोष का काल विक्रम की चौदह वीं शताब्दी माना जाता है, यह ठीक नहीं है । उगादिवृत्तिकार उज्ज्वलदत्त विशून्य संशून्य एक हज़ार दो सौ पचास से पूर्ववर्ती है, यह हम "उरणादि के वृत्तिकार" प्रकरण में लिखेंगे । उज्ज्वलदत्त ने उणादिवृत्ति एक।एक सौ एक, पृष्ठ छत्तीस पर मेदिनीकार को उद्धृत किया है । चार. भाषावृत्ति की भूमिका पृष्ठ दस की दिशून्य । अष्टाध्यायी के विशेष सूत्रों पर है। संस्कृत भाषा के जो पद व्याकरण से साधारणतया सिद्ध नहीं होते, उन पदों के साधुत्वज्ञापन के लिये यह ग्रन्थ लिखा गया है । अत एव ग्रन्थकार ने इसका अन्वर्धनाम 'दुर्घटवृत्ति रक्खा है। ग्रन्थकार ने मङ्गलश्लोक में सर्वज्ञ अपरनाम बुद्ध को नमस्कार किया है,' तथा बौद्ध ग्रन्थों के अनेक प्रयोगों का साधुत्व दर्शाया है। इससे प्रतीत होता है कि शरणदेव बाद्धमतावलम्बी था । काल - तरणदेव ने ग्रन्थ के आरम्भ में दुर्घटवृत्ति की रचना का समय शकाब्द एक हज़ार पचानवे लिखा है, अर्थात् विशून्य संशून्य एक हज़ार दो सौ तीस में यह ग्रन्थ लिखा गया । प्रतिसंस्कर्ता - दुर्घटवृत्ति के प्रारम्भ में लिखा है कि शरणदेव के कहने से श्रीसर्व-रक्षित ने इस ग्रन्थ का संक्षेप करके इसे प्रतिसंस्कृत किया । # ग्रन्थ का वैशिष्ट्य - संस्कृत वाङ्मय के प्राचीन ग्रन्थों में प्रयुक्त शतशः दुःसाध्य प्रयोगों के साधुत्वनिदर्शन के लिये इस ग्रन्थ की रचना हुई है । प्राचीन काल में इस प्रकार के अनेक ग्रन्थ थे, मैत्रेय रक्षित और पुरुषोत्तमदेव विरचित दो दुर्घटवृत्तियों का वर्णन हम पूर्व कर चुके हैं । सम्प्रति केवल शरण देवीय दुर्घटवृत्ति उपलब्ध होती है। यद्यपि शब्दकौस्तुभ आदि अर्वाचीन ग्रन्थों में कहीं कहीं दुर्घटवृत्ति का खण्डन उपलब्ध होता है तथापि कृच्छ्रनाध्य प्रयोगों के साधुत्व दर्शाने के लिये इस ग्रन्थ में जिस शैली का आश्रय लिया है, उसका प्रायः अनुमरण अर्वाचीन ग्रन्थकार भी करते हैं । अतः 'गच्छतः स्खलन न्याय से इसके वैशिष्ट्य में किञ्चिन्मात्र न्यूनता नहीं आती । इस ग्रन्थ में एक महान् वैशिष्ट्य और भी है। ग्रन्थकार ने इस ग्रन्थ में अनेक प्राचीन ग्रन्थों और ग्रन्थकारों के वचन उद्धृत किये हैं। इनमें अनेक ग्रन्थ और ग्रन्थकार ऐसे हैं जिनका उल्लेख अन्यत्र नहीं मिलता। ग्रन्थकार एक. नत्वा शरणदेवेन सर्वज्ञं शानहेतवे । बृहद्ध जनाम्भोजकोशबीका सभास्वते ।। दो. शाकमहीपतिवत्सरमाने एकनभोनवपञ्चचिमाने । दुर्घटवृत्तिरकारिमुदेव कण्ठविभूषणहारलदेव ।। तीन. वाक्याच्छरणदेवस्य च्छायावग्रहपीडया । श्रीसर्वरक्षितेनैषा संक्षिप्य प्रतिसंस्कृता । |
नई दिल्लीः फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया हैl इसमें अनुपम खेर ने भारतीयों से अपील की है कि वे ऐसे लोगों को न जीतने दें, जो लोकतांत्रिक तौर पर चुनी गई सरकार की विश्वसनीयता को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। अनुपम खेर ने आरोप लगाया है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए कुछ चुनिंदा लोग अथक प्रयास कर रहे हैं।
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने साथी भारतीयों से ऐसे लोगों को अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होने देने की बात कही हैं।
अनुपम खेर ने यह कहते हुए वीडियो शुरू किया कि कुछ खास तरह के लोग हैं जो पिछले छह वर्षों से लोकतांत्रिक तौर से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं, जो बहुमत से भी सत्ता में वापिस आई है और इसकी विश्वसनीयता को खत्म करने का काम कर रहे है। वह कहते हैं कि बहुत योजनाबद्ध तरीके से इन चुनिंदा लोगों ने कई 'शातिर अभियान' चलाए हैं, जैसे कि असहिष्णुता, अवार्ड वापसी, राफेल घोटाला, 'चौकीदार चोर है' और बहुत कुछ। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने सरकार, देश और करोड़ों भारतीयों की उपलब्धियों को नीचा दिखाया है।
| नई दिल्लीः फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया हैl इसमें अनुपम खेर ने भारतीयों से अपील की है कि वे ऐसे लोगों को न जीतने दें, जो लोकतांत्रिक तौर पर चुनी गई सरकार की विश्वसनीयता को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। अनुपम खेर ने आरोप लगाया है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए कुछ चुनिंदा लोग अथक प्रयास कर रहे हैं। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने साथी भारतीयों से ऐसे लोगों को अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होने देने की बात कही हैं। अनुपम खेर ने यह कहते हुए वीडियो शुरू किया कि कुछ खास तरह के लोग हैं जो पिछले छह वर्षों से लोकतांत्रिक तौर से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं, जो बहुमत से भी सत्ता में वापिस आई है और इसकी विश्वसनीयता को खत्म करने का काम कर रहे है। वह कहते हैं कि बहुत योजनाबद्ध तरीके से इन चुनिंदा लोगों ने कई 'शातिर अभियान' चलाए हैं, जैसे कि असहिष्णुता, अवार्ड वापसी, राफेल घोटाला, 'चौकीदार चोर है' और बहुत कुछ। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने सरकार, देश और करोड़ों भारतीयों की उपलब्धियों को नीचा दिखाया है। |
रणजी ट्रॉफी 2019-20 (Ranji Trophy 2019-20) के फाइनल मैच के पहले दिन बंगाल के गेंदबाजों का बोलबाला रहा। मीडियम पेसर आकाश दीप (Akash Deep) ने बंगाल के लिए सर्वाधिक तीन विकेट लिए। साथ ही इशान पॉरेल (Ishan Porel) और शाहबाज अहमद (Shahbaz Ahmed) ने भी एक-एक सफलता हासिल की।
सौराष्ट्र की तरफ से एवी बरोट (54) और विश्वराज जडेजा (54) ने अर्धशतकीय पारियां खेली, जिसकी मदद से सौराष्ट्र ने रणजी ट्रॉफी फाइनल मुकाबले के पहले दिन पांच विकेट पर 206 रन का स्कोर बना लिया है।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सौराष्ट्र को उसके दोनों ओपनरों हार्विक देसाई (38) और बरोट ने पहले विकेट के लिए 82 रनों की साझेदारी करके अच्छी शुरुआत दी। देसाई को शाहबाज अहमद ने अभिषेक रमन के हाथों कैच कराया। देसाई ने 111 गेंदों पर पांच चौके लगाए। उनके आउट होने के बाद बरोट भी टीम के कुल 113 के स्कोर पर दूसरे बल्लेबाज के रूप में पवेलियन लौट गए।
बरोट ने 142 गेंदों पर छह चौके जड़े। सौराष्ट्र ने इसके बाद 163 के स्कोर पर विश्वराज को, 182 के स्कोर पर शेल्डन जैक्सन (14) और 206 के स्कोर पर चेतन सकारिया (4) का विकेट खोया। भारतीय टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा 24 गेंदों पर एक चौका लगाकर पांच रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट हुए।
विश्वराज ने 92 गेंदों पर सात चौके जड़े। जैक्सन ने 15 गेंदों पर तीन चौका लगाया। अर्पित वासवदा 94 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 29 रन बनाकर नाबाद लौटे। सकारिया के आउट होते ही स्टंप्स की घोषणा कर दी गई।
| रणजी ट्रॉफी दो हज़ार उन्नीस-बीस के फाइनल मैच के पहले दिन बंगाल के गेंदबाजों का बोलबाला रहा। मीडियम पेसर आकाश दीप ने बंगाल के लिए सर्वाधिक तीन विकेट लिए। साथ ही इशान पॉरेल और शाहबाज अहमद ने भी एक-एक सफलता हासिल की। सौराष्ट्र की तरफ से एवी बरोट और विश्वराज जडेजा ने अर्धशतकीय पारियां खेली, जिसकी मदद से सौराष्ट्र ने रणजी ट्रॉफी फाइनल मुकाबले के पहले दिन पांच विकेट पर दो सौ छः रन का स्कोर बना लिया है। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सौराष्ट्र को उसके दोनों ओपनरों हार्विक देसाई और बरोट ने पहले विकेट के लिए बयासी रनों की साझेदारी करके अच्छी शुरुआत दी। देसाई को शाहबाज अहमद ने अभिषेक रमन के हाथों कैच कराया। देसाई ने एक सौ ग्यारह गेंदों पर पांच चौके लगाए। उनके आउट होने के बाद बरोट भी टीम के कुल एक सौ तेरह के स्कोर पर दूसरे बल्लेबाज के रूप में पवेलियन लौट गए। बरोट ने एक सौ बयालीस गेंदों पर छह चौके जड़े। सौराष्ट्र ने इसके बाद एक सौ तिरेसठ के स्कोर पर विश्वराज को, एक सौ बयासी के स्कोर पर शेल्डन जैक्सन और दो सौ छः के स्कोर पर चेतन सकारिया का विकेट खोया। भारतीय टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा चौबीस गेंदों पर एक चौका लगाकर पांच रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट हुए। विश्वराज ने बानवे गेंदों पर सात चौके जड़े। जैक्सन ने पंद्रह गेंदों पर तीन चौका लगाया। अर्पित वासवदा चौरानवे गेंदों पर तीन चौकों की मदद से उनतीस रन बनाकर नाबाद लौटे। सकारिया के आउट होते ही स्टंप्स की घोषणा कर दी गई। |
दक्षिणपंथी तूफान के बीच हिंदी बेल्ट में पिछले एक दशक में समाजवादी राजनीति का सिकुड़ना समाजवादी नेतृत्व के अदूरदर्शिता और उत्तराधिकारियों की नाकामी है।
हिंदी बेल्ट के दो महत्वपूर्ण राज्य हैं उत्तर प्रदेश और बिहार। दोनों राज्यों में एक वक्त पर समाजवादी ताकतों का एकछत्र राज्य रहा है । लेकिन क्या वजह है कि इन दोनों राज्यों में इनका आधार सिकुड़ा है? दोनों राज्यों में सामाजिक न्याय की वैचारिक ताकतों में उभार की प्रक्रिया में एक साम्य है किंतु उभार के बाद दोनों राज्यों में इन ताकतों के व्यवहार में साफ-साफ भिन्नता रही। दक्षिणपंथी आंधी की कुलबुलाहट का अंदाजा जिसने बेहतर लगाया, आरएसएस के सामाजिक संस्कृतिकरण की गहनता को जिसने बखूबी समझा, इस काल में वही इमारतें बच सकीं, बाकी धराशायी हो गईं।
यदि दोनों राज्यों के वर्तमान हालात की बात करें, बिहार इस आंधी से सामाजिक स्तर पर ज्यादा कामयाब रहा जबकि उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना पूर्णतयः इसकी चपेट में आ गई। अब इसे क्या माना जाए? बीजेपी की सफलता या अन्य ताकतों (यथा सपा ,बसपा) की असफलता। पिछले एक दशक में कांशीराम और मुलायम की बनाई हुई सामाजिक और राजनीतिक जमीन पूरी तरह से खिसक गई। उत्तर प्रदेश में यह हालात आ गए कि सपा तो संगठन के रूप में थोड़ा बहुत जिंदा दिखती भी है, लेकिन बसपा कमोबेश संगठन के तौर पर समाप्त हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में अकेले राजद दक्षिणपंथी ताकतों के सामने दीवार की तरह खड़ी है। और यदि इसमें नीतीश कुमार (वैसे उन्हें भाजपा से अलग समझना गलत होगा) को भी जोड़ा जाए, तो भाजपा अपने चरम पर भी समाजवादी किले को भेदने में नाकाम रही है। उसका जो सबसे बड़ा कारण रहा, वह जमीन से लालू और उनके परिवार का जुड़े रहना और वैचारिक स्तर पर समझौते न करना है।
यदि एक ही वक्त की बात करें तो बिहार में लालू और उत्तर प्रदेश में मुलायम ने सत्ता में आने के बाद अलग-अलग तरीके से राजनैतिक व्यवहार किया। लालू ने ठेठ गंवई अंदाज में अपनी राजनीति की शुरुआत की और अंत तक तक अपनी उस छवि से पीछा छुड़ाने की कोशिश नहीं की जबकि मुलायम सिंह के राजनैतिक व्यवहार में कुछ कुछ अभिजात्यपन की झलक दिखने लगी थी।
दूसरा प्रमुख कारण इन दोनों ही महारथियों की धरातलीय राजनीति में दिखता है। सत्ता में रहने के बावजूद लालू ने जिस विचार के साथ राजनीति शुरु की थी, उसे बिखरने नहीं दिया। सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग में लालू की मकबूलियत कभी कम नहीं हुई, और उन्होंने सीना ठोक कर, खुले मंचों पर अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धता की हुंकार भरी। वहीं मुलायम सिंह ने सत्ता में आने के बाद धरातल और सामाजिक संरचना पर बुनियादी कार्य नहीं किया। वह धीरे धीरे ही सही, मनुवाद के मुखर विरोधी के बजाय, उसके समर्थक ज्यादा नजर आने लगे। हालांकि इससे मुलायम सिंह का योगदान कम नहीं हो जाता, उन्हें वंचित वर्ग की राजनैतिक एकजुटता के लिए आज भी श्रेय दिया जाना चाहिए। लेकिन गलती यह हुई, कि समाजवाद ने जिस ताकत का निवेश उन पर किया था, उसको मनुवाद की झोली में जाते हुए अपने सामने देखते रहे। वहीं प्रदेश की दूसरी बड़ी ताकत कांशीराम ने अपने राजनैतिक विचारों को काफी सटीक तरीके से वंचित वर्ग तक पहुँचाने में सफलता हासिल की लेकिन दुर्भाग्य यही था कि उनके पास ज्यादा वक्त नहीं बचा और शक्ति का हस्तांतरण जिन मायावती जी को हुआ, वह एक राजनैतिक फसल काटने के बाद मनुवादी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थीं।
तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है वह है इन राजनैतिक महारथियों के बाद का परिदृश्य। बिहार इस बात का साक्षात उदाहरण है कि बीजेपी अजेय नहीं है। लेकिन दोनों ही प्रदेशों में, लालू, मुलायम और कांशीराम के बाद की परिस्थितियाँ बहुत अलग हैं। बिहार में तेजस्वी यादव ने यह दिखा दिया कि गाँव और सड़कों तक आप की सक्रियता आज भी संगठन में जान डालने के लिए पर्याप्त है। बिहार में इस नवयुवक ने, मीडिया, संस्थाओं, बीजेपी और नीतीश के ताकतवर समुच्चय को अकेले थाम रखा है, तो इसका सबसे बड़ा कारण है आगे आकर नेतृत्व की क्षमता और कार्यकर्ताओं में यह भरोसा जगाना कि वह इन ताकतों से के सामने अकेले नहीं हैं। उनका नेता जमीन पर लाठी डंडे खाने की हिम्मत रखता है और जेल जाने से डरता नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में ठीक उल्टा हुआ। अखिलेश ने एक राजनैतिक फसल जो काटी, उसमें मैं आज भी मानता हूँ कि मुलायम और शिवपाल का जमीनी आधार था। उनका कार्यकर्ता अपने नेता से सीधे जुड़ा था। लेकिन धीरे-धीरे जैसे ही मुलायम सिंह परिदृश्य से बाहर हुए, यह आधार खिसक गया और बीजेपी के आक्रामक प्रचार का शिकार होकर उसका वोटर बन गया। इन सबके बीच तीसरी ताकत यानी की मायावती का अभिजात्यीकरण इस हद तक पहुँच गया कि उनका संगठन जमीन पर लुप्तप्राय होकर समाप्त हो गया। हकीकत यही है कि बसपा आज उत्तर प्रदेश में वोटकटवा पार्टी से ज्यादा कुछ नहीं रह गई है। इसका सबसे बड़ा कारण मायावती की निष्क्रियता और संगठन में वैचारिक मनुवादियों का वर्चस्व रहा जो समय आते ही अपने मूल विचार में वापस लौट गए।
अखिलेश यादव का राजनैतिक विजन निस्संदेह अच्छा होगा, लेकिन अगर आप एक राजनैतिक पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, और खासकर जब आप जानते हैं ना मीडिया आपके साथ आएगा, ना सिस्टम आपके साथ होगा, तो ऐसी परिस्थिति में आपके राजनैतिक विजन के साथ-साथ आपके साहस और जीवट की भी परीक्षा होती है। ट्विटर और फेसबुक से आपके कार्यकर्ता पर पड़ रही लाठी का हिसाब नहीं होता, उसके लिए आपको उनके कंधे से कंधा मिलाना होगा। जमीन बचानी है तो "सोफिस्टिकेड" राजनीति से काम नहीं चलने वाला।
यदि संपूर्णता में बात करें राजनैतिक अभिजात्यों ने लालू को जितना निशाना बनाया, मुलायम और मायावती के बारे में वह नरम रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि लालू बड़ा खतरा थे। मुलायम और मायावती अपने राजनैतिक जीवन में पाला बदलते रहे, लेकिन लालू ने कोर्ट, जेल ,मीडिया, सीबीआई के सामने कभी घुटने नहीं टेके जबकि माया और मुलायम ने अवसर देखते हुए इनकी गोद में जाने में भी कोताही नहीं बरती। इससे तात्कालिक फायदा जो भी रहा हो, लेकिन इनकी सियासी जमीन कालांतर में खिसक गई। जबकि लालू अभी भी बिहार में एक बड़ी ताकत हैं। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह राजनीति में होते हुए भी नेपथ्य में हैं, जबकि बिहार में लालू जेल में रहते हुए भी राजनीति के केंद्र में हैं। यह आपकी राजनैतिक और वैचारिक समृद्धता और समर्पण से हासिल होता है, सत्ता से नहीं।
| दक्षिणपंथी तूफान के बीच हिंदी बेल्ट में पिछले एक दशक में समाजवादी राजनीति का सिकुड़ना समाजवादी नेतृत्व के अदूरदर्शिता और उत्तराधिकारियों की नाकामी है। हिंदी बेल्ट के दो महत्वपूर्ण राज्य हैं उत्तर प्रदेश और बिहार। दोनों राज्यों में एक वक्त पर समाजवादी ताकतों का एकछत्र राज्य रहा है । लेकिन क्या वजह है कि इन दोनों राज्यों में इनका आधार सिकुड़ा है? दोनों राज्यों में सामाजिक न्याय की वैचारिक ताकतों में उभार की प्रक्रिया में एक साम्य है किंतु उभार के बाद दोनों राज्यों में इन ताकतों के व्यवहार में साफ-साफ भिन्नता रही। दक्षिणपंथी आंधी की कुलबुलाहट का अंदाजा जिसने बेहतर लगाया, आरएसएस के सामाजिक संस्कृतिकरण की गहनता को जिसने बखूबी समझा, इस काल में वही इमारतें बच सकीं, बाकी धराशायी हो गईं। यदि दोनों राज्यों के वर्तमान हालात की बात करें, बिहार इस आंधी से सामाजिक स्तर पर ज्यादा कामयाब रहा जबकि उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना पूर्णतयः इसकी चपेट में आ गई। अब इसे क्या माना जाए? बीजेपी की सफलता या अन्य ताकतों की असफलता। पिछले एक दशक में कांशीराम और मुलायम की बनाई हुई सामाजिक और राजनीतिक जमीन पूरी तरह से खिसक गई। उत्तर प्रदेश में यह हालात आ गए कि सपा तो संगठन के रूप में थोड़ा बहुत जिंदा दिखती भी है, लेकिन बसपा कमोबेश संगठन के तौर पर समाप्त हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में अकेले राजद दक्षिणपंथी ताकतों के सामने दीवार की तरह खड़ी है। और यदि इसमें नीतीश कुमार को भी जोड़ा जाए, तो भाजपा अपने चरम पर भी समाजवादी किले को भेदने में नाकाम रही है। उसका जो सबसे बड़ा कारण रहा, वह जमीन से लालू और उनके परिवार का जुड़े रहना और वैचारिक स्तर पर समझौते न करना है। यदि एक ही वक्त की बात करें तो बिहार में लालू और उत्तर प्रदेश में मुलायम ने सत्ता में आने के बाद अलग-अलग तरीके से राजनैतिक व्यवहार किया। लालू ने ठेठ गंवई अंदाज में अपनी राजनीति की शुरुआत की और अंत तक तक अपनी उस छवि से पीछा छुड़ाने की कोशिश नहीं की जबकि मुलायम सिंह के राजनैतिक व्यवहार में कुछ कुछ अभिजात्यपन की झलक दिखने लगी थी। दूसरा प्रमुख कारण इन दोनों ही महारथियों की धरातलीय राजनीति में दिखता है। सत्ता में रहने के बावजूद लालू ने जिस विचार के साथ राजनीति शुरु की थी, उसे बिखरने नहीं दिया। सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग में लालू की मकबूलियत कभी कम नहीं हुई, और उन्होंने सीना ठोक कर, खुले मंचों पर अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धता की हुंकार भरी। वहीं मुलायम सिंह ने सत्ता में आने के बाद धरातल और सामाजिक संरचना पर बुनियादी कार्य नहीं किया। वह धीरे धीरे ही सही, मनुवाद के मुखर विरोधी के बजाय, उसके समर्थक ज्यादा नजर आने लगे। हालांकि इससे मुलायम सिंह का योगदान कम नहीं हो जाता, उन्हें वंचित वर्ग की राजनैतिक एकजुटता के लिए आज भी श्रेय दिया जाना चाहिए। लेकिन गलती यह हुई, कि समाजवाद ने जिस ताकत का निवेश उन पर किया था, उसको मनुवाद की झोली में जाते हुए अपने सामने देखते रहे। वहीं प्रदेश की दूसरी बड़ी ताकत कांशीराम ने अपने राजनैतिक विचारों को काफी सटीक तरीके से वंचित वर्ग तक पहुँचाने में सफलता हासिल की लेकिन दुर्भाग्य यही था कि उनके पास ज्यादा वक्त नहीं बचा और शक्ति का हस्तांतरण जिन मायावती जी को हुआ, वह एक राजनैतिक फसल काटने के बाद मनुवादी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थीं। तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है वह है इन राजनैतिक महारथियों के बाद का परिदृश्य। बिहार इस बात का साक्षात उदाहरण है कि बीजेपी अजेय नहीं है। लेकिन दोनों ही प्रदेशों में, लालू, मुलायम और कांशीराम के बाद की परिस्थितियाँ बहुत अलग हैं। बिहार में तेजस्वी यादव ने यह दिखा दिया कि गाँव और सड़कों तक आप की सक्रियता आज भी संगठन में जान डालने के लिए पर्याप्त है। बिहार में इस नवयुवक ने, मीडिया, संस्थाओं, बीजेपी और नीतीश के ताकतवर समुच्चय को अकेले थाम रखा है, तो इसका सबसे बड़ा कारण है आगे आकर नेतृत्व की क्षमता और कार्यकर्ताओं में यह भरोसा जगाना कि वह इन ताकतों से के सामने अकेले नहीं हैं। उनका नेता जमीन पर लाठी डंडे खाने की हिम्मत रखता है और जेल जाने से डरता नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में ठीक उल्टा हुआ। अखिलेश ने एक राजनैतिक फसल जो काटी, उसमें मैं आज भी मानता हूँ कि मुलायम और शिवपाल का जमीनी आधार था। उनका कार्यकर्ता अपने नेता से सीधे जुड़ा था। लेकिन धीरे-धीरे जैसे ही मुलायम सिंह परिदृश्य से बाहर हुए, यह आधार खिसक गया और बीजेपी के आक्रामक प्रचार का शिकार होकर उसका वोटर बन गया। इन सबके बीच तीसरी ताकत यानी की मायावती का अभिजात्यीकरण इस हद तक पहुँच गया कि उनका संगठन जमीन पर लुप्तप्राय होकर समाप्त हो गया। हकीकत यही है कि बसपा आज उत्तर प्रदेश में वोटकटवा पार्टी से ज्यादा कुछ नहीं रह गई है। इसका सबसे बड़ा कारण मायावती की निष्क्रियता और संगठन में वैचारिक मनुवादियों का वर्चस्व रहा जो समय आते ही अपने मूल विचार में वापस लौट गए। अखिलेश यादव का राजनैतिक विजन निस्संदेह अच्छा होगा, लेकिन अगर आप एक राजनैतिक पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, और खासकर जब आप जानते हैं ना मीडिया आपके साथ आएगा, ना सिस्टम आपके साथ होगा, तो ऐसी परिस्थिति में आपके राजनैतिक विजन के साथ-साथ आपके साहस और जीवट की भी परीक्षा होती है। ट्विटर और फेसबुक से आपके कार्यकर्ता पर पड़ रही लाठी का हिसाब नहीं होता, उसके लिए आपको उनके कंधे से कंधा मिलाना होगा। जमीन बचानी है तो "सोफिस्टिकेड" राजनीति से काम नहीं चलने वाला। यदि संपूर्णता में बात करें राजनैतिक अभिजात्यों ने लालू को जितना निशाना बनाया, मुलायम और मायावती के बारे में वह नरम रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि लालू बड़ा खतरा थे। मुलायम और मायावती अपने राजनैतिक जीवन में पाला बदलते रहे, लेकिन लालू ने कोर्ट, जेल ,मीडिया, सीबीआई के सामने कभी घुटने नहीं टेके जबकि माया और मुलायम ने अवसर देखते हुए इनकी गोद में जाने में भी कोताही नहीं बरती। इससे तात्कालिक फायदा जो भी रहा हो, लेकिन इनकी सियासी जमीन कालांतर में खिसक गई। जबकि लालू अभी भी बिहार में एक बड़ी ताकत हैं। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह राजनीति में होते हुए भी नेपथ्य में हैं, जबकि बिहार में लालू जेल में रहते हुए भी राजनीति के केंद्र में हैं। यह आपकी राजनैतिक और वैचारिक समृद्धता और समर्पण से हासिल होता है, सत्ता से नहीं। |
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का आज अपना 50वां जन्मदिन (Birthday) मना रहें है। मास्टर ब्लास्टर ने अपने 50वें जन्मदिन की शूरूआत स्विमिंग पूल के किनारे बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए की और इसकी तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया में शेयर की है। उन्होंने दो तस्वीरे शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, टी टाइसः50 नॉटआउट।
सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ था। मराठी कवि रमेश तेंदुलकर के घर में जन्मे सचिन को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का काफी शौक था। इसी जूनुन ने उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बनाया। सचिन क्रिकेट जगत का एक ऐसा चमकता सितारा है, जिसे क्रिकेट की दुनिया का सर्वोच्च स्थान मिला है, इसीलिए उनके चाहने वालों ने उन्हें क्रिकेट के भगवान का दर्जा दिया।
महज 16 साल की छोटी उम्र में डेब्यू करने वाले सचिन ने अपने करियर में कई सारे रिकॉर्डस बनाए। वह एक युग की तरह रहे। उन्होंने विश्व क्रिकेट में जो मुकाम पाया उसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। सचिन ने 200 टेस्ट मैचों की 329 पारियों में 53. 48 की एवरेज से 15,921 रन बनाए, जिसमें उनका हाईएस्ट स्कोर 248 रन है। उन्होंने करियर में 100 शतक लगाए हैं और सभी शतक एक से बढ़कर एक हैं। लेकिन सचिन के अनुसार 1912 में पर्थ में लगाया गया शतक उनके करियर का सबसे बेहतरीन शतक में से एक था।
सचिन ने छोटी उम्र में ही टीम इंडिया की तरफ से सन 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की। सचिन ने साल 1990 में इंग्लैंड दौरे में अपने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाया। इस मैच में उन्होंने नाबाद 119 रन बनाए। 23 दिसम्बर 2012 को सचिन ने वन-डे क्रिकेट से संन्यास लिया। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 68 फिफ्टी और 51 सेन्चुरी हैं। वहीं, सचिन ने 463 वनडे मैचों की 452 पारियों में 44. 83 की एवरेज से 18,426 रन बनाए हैं. वनडे में उनके नाम 96 फिफ्टी और 49 सेन्चुरी दर्ज हैं।
दुनियाभर के सभी क्रिकेट प्रेमी सचिन को प्यार और सम्मान देते हैं। सचिन को साल 2014 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 2008 में सचिन को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सचिन को साल 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। सचिन को साल 2001 में महाराष्ट्र राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सन 1994 में खेल में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया।
सन 1997-98 में भारत के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित गया। 2010 में भारतीय वायु सेना द्वारा मानद ग्रुप कैप्टन की उपाधि दी गई। बीसीसीआई ने साल 2011 में सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर घोषित किया। सचिन को साल 2012 में राज्य सभा की सदस्यता मिली।
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| क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का आज अपना पचासवां जन्मदिन मना रहें है। मास्टर ब्लास्टर ने अपने पचासवें जन्मदिन की शूरूआत स्विमिंग पूल के किनारे बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए की और इसकी तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया में शेयर की है। उन्होंने दो तस्वीरे शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, टी टाइसःपचास नॉटआउट। सचिन का जन्म चौबीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को मुंबई में हुआ था। मराठी कवि रमेश तेंदुलकर के घर में जन्मे सचिन को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का काफी शौक था। इसी जूनुन ने उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बनाया। सचिन क्रिकेट जगत का एक ऐसा चमकता सितारा है, जिसे क्रिकेट की दुनिया का सर्वोच्च स्थान मिला है, इसीलिए उनके चाहने वालों ने उन्हें क्रिकेट के भगवान का दर्जा दिया। महज सोलह साल की छोटी उम्र में डेब्यू करने वाले सचिन ने अपने करियर में कई सारे रिकॉर्डस बनाए। वह एक युग की तरह रहे। उन्होंने विश्व क्रिकेट में जो मुकाम पाया उसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती। सचिन ने दो सौ टेस्ट मैचों की तीन सौ उनतीस पारियों में तिरेपन. अड़तालीस की एवरेज से पंद्रह,नौ सौ इक्कीस रन बनाए, जिसमें उनका हाईएस्ट स्कोर दो सौ अड़तालीस रन है। उन्होंने करियर में एक सौ शतक लगाए हैं और सभी शतक एक से बढ़कर एक हैं। लेकिन सचिन के अनुसार एक हज़ार नौ सौ बारह में पर्थ में लगाया गया शतक उनके करियर का सबसे बेहतरीन शतक में से एक था। सचिन ने छोटी उम्र में ही टीम इंडिया की तरफ से सन एक हज़ार नौ सौ नवासी में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की। सचिन ने साल एक हज़ार नौ सौ नब्बे में इंग्लैंड दौरे में अपने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाया। इस मैच में उन्होंने नाबाद एक सौ उन्नीस रन बनाए। तेईस दिसम्बर दो हज़ार बारह को सचिन ने वन-डे क्रिकेट से संन्यास लिया। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम अड़सठ फिफ्टी और इक्यावन सेन्चुरी हैं। वहीं, सचिन ने चार सौ तिरेसठ वनडे मैचों की चार सौ बावन पारियों में चौंतालीस. तिरासी की एवरेज से अट्ठारह,चार सौ छब्बीस रन बनाए हैं. वनडे में उनके नाम छियानवे फिफ्टी और उनचास सेन्चुरी दर्ज हैं। दुनियाभर के सभी क्रिकेट प्रेमी सचिन को प्यार और सम्मान देते हैं। सचिन को साल दो हज़ार चौदह में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया। दो हज़ार आठ में सचिन को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सचिन को साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। सचिन को साल दो हज़ार एक में महाराष्ट्र राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया. सन एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में खेल में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया। सन एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे-अट्ठानवे में भारत के सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित गया। दो हज़ार दस में भारतीय वायु सेना द्वारा मानद ग्रुप कैप्टन की उपाधि दी गई। बीसीसीआई ने साल दो हज़ार ग्यारह में सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर घोषित किया। सचिन को साल दो हज़ार बारह में राज्य सभा की सदस्यता मिली। |
नगर कोतवाली क्षेत्र की न्यू पंचवटी कॉलोनी में रहने वाले कारोबारी के साथ एक अजीबो. गरीब वाक्या सामने आया है। कारोबारी का कहना है कि कोटक महिन्द्रा बैंक के कर्मचारियों ने उनकी पत्नी को फोन कॉल पर धमकी दी। कहा कि अगर लोन की किश्त जमा नहीं तो वह उनके पति के सिर में इतनी कील ठोकेंगे कि वह गिन नहीं पाएगी।
| नगर कोतवाली क्षेत्र की न्यू पंचवटी कॉलोनी में रहने वाले कारोबारी के साथ एक अजीबो. गरीब वाक्या सामने आया है। कारोबारी का कहना है कि कोटक महिन्द्रा बैंक के कर्मचारियों ने उनकी पत्नी को फोन कॉल पर धमकी दी। कहा कि अगर लोन की किश्त जमा नहीं तो वह उनके पति के सिर में इतनी कील ठोकेंगे कि वह गिन नहीं पाएगी। |
सऊदी विदेश कार्यालय का कहना है कि hayya कार्ड धारक सऊदी अरब आने के लिए एक साझा मंच से ऑनलाइन वीज़ा ले सकते हैं। दरअसल कतर में फुटबॉल विश्व कप के प्रशंसक जिनके पास हया कार्ड हैं, वे ई-प्लेटफॉर्म https://visa. mofa. gov. sa के माध्यम से वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं. हया कार्ड को इस तरह पॉवरफुल बनाया गया है कि ये आपको टूर्नामेंट के दौरान सार्वजनिक परिवहन फ्री में दिलाएगा। यानी जब तक टूर्नामेंट को लेकर आप आवाजाही करेंगे तब तब आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे taxy इत्यादि का भाड़ा आपको नहीं देना पड़ेगा, ये मुफ्त होगा.
जिनके पास ये हया कार्ड होंगे उन्हें ही क़तर में प्रवेश करने की अनुमति मिलेगी और ये कार्ड दिखाने वालों को वीज़ा की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। जिस दिन मैच होंगे उस दिन मैच के टिकट के साथ हया कार्ड स्टेडियम में प्रवेश करने के दौरान दिखाने होंगे जिससे एंट्री मिल सके. चलिए अब इसी के साथ आगे बढ़ते और आपको बताते हैं कि hayya कार्ड सऊदी अरब में किस तरह प्रवेश दिला सकता है. दरअसल सऊदी विदेश मंत्रालय में वीजा के सामान्य विभाग के सहायक महानिदेशक, खालिद अल-श्मरी ने कहा है कि कतर में विश्व कप के लिए मुस्लिम हया कार्ड धारक अब मदीना भी जा सकते हैं और उमराह भी कर सकते हैं.
बता दे कि सऊदी अरब में प्रवेश करने का यह वीजा 11 नवंबर 2022 से 18 दिसंबर 2022 तक वैध रहेगा। यानी 18 दिसंबर तक आपको सऊदी अरब में रहने का सुनहरा मौका मिलेगा और उन्हें सऊदी में एंन्ट्री करने के लिए वीज़ा भी नहीं दिखाना पड़ेगा। यानी 'हया' कार्ड धारकों के लिए वीजा मुफ्त है. वहां इसके लिए कोई फीस नहीं है, मगर हाँ वीजा धारकों के लिए medical Insurance ज़रूरी है.
| सऊदी विदेश कार्यालय का कहना है कि hayya कार्ड धारक सऊदी अरब आने के लिए एक साझा मंच से ऑनलाइन वीज़ा ले सकते हैं। दरअसल कतर में फुटबॉल विश्व कप के प्रशंसक जिनके पास हया कार्ड हैं, वे ई-प्लेटफॉर्म https://visa. mofa. gov. sa के माध्यम से वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं. हया कार्ड को इस तरह पॉवरफुल बनाया गया है कि ये आपको टूर्नामेंट के दौरान सार्वजनिक परिवहन फ्री में दिलाएगा। यानी जब तक टूर्नामेंट को लेकर आप आवाजाही करेंगे तब तब आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे taxy इत्यादि का भाड़ा आपको नहीं देना पड़ेगा, ये मुफ्त होगा. जिनके पास ये हया कार्ड होंगे उन्हें ही क़तर में प्रवेश करने की अनुमति मिलेगी और ये कार्ड दिखाने वालों को वीज़ा की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। जिस दिन मैच होंगे उस दिन मैच के टिकट के साथ हया कार्ड स्टेडियम में प्रवेश करने के दौरान दिखाने होंगे जिससे एंट्री मिल सके. चलिए अब इसी के साथ आगे बढ़ते और आपको बताते हैं कि hayya कार्ड सऊदी अरब में किस तरह प्रवेश दिला सकता है. दरअसल सऊदी विदेश मंत्रालय में वीजा के सामान्य विभाग के सहायक महानिदेशक, खालिद अल-श्मरी ने कहा है कि कतर में विश्व कप के लिए मुस्लिम हया कार्ड धारक अब मदीना भी जा सकते हैं और उमराह भी कर सकते हैं. बता दे कि सऊदी अरब में प्रवेश करने का यह वीजा ग्यारह नवंबर दो हज़ार बाईस से अट्ठारह दिसंबर दो हज़ार बाईस तक वैध रहेगा। यानी अट्ठारह दिसंबर तक आपको सऊदी अरब में रहने का सुनहरा मौका मिलेगा और उन्हें सऊदी में एंन्ट्री करने के लिए वीज़ा भी नहीं दिखाना पड़ेगा। यानी 'हया' कार्ड धारकों के लिए वीजा मुफ्त है. वहां इसके लिए कोई फीस नहीं है, मगर हाँ वीजा धारकों के लिए medical Insurance ज़रूरी है. |
तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच की दूरी कम करने के लिए केरल सरकार के सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट को लेकर तिरुवनंतपुरम में गुरुवार को हंगामा हो गया। प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को रोकने पुलिस पहुंची तो कार्यकर्ता उन से भिड़ गए। पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जमकर मारपीट हुई। इस मारपीट का वीडियो भी वायरल हो रहा है।
रेलवे का सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट केरल में लोगों के निशाने पर है। लोग बड़ी संख्या में इस प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट सीएम पिनराई विजयन की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस प्रोजेक्ट के तहत 529 किलोमीटर की लंबी सिल्वर लाइन बिछाई जाएगी। तिरुवनंतपुरम को उत्तरी केरल के कासरगोड से कनेक्ट किया जाएगा। इस रेलवे लाइन में 11 स्टेशन बनाए जाएंगे जो 11 जिलों से गुजरेंगे।
अगर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है तो तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच की दूरी महज 4 घंटे में पूरी की जा सकेगी। अभी इस सफर में 12 घंटे लगते हैं। इस प्रोजेक्ट का कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) विरोध कर रहा है।
केरल सरकार राज्य के दो छोरों को जोड़ने के लिए 64000 करोड़ रुपए की लागत से सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट ला रही है। राज्य सरकार का कहना है कि जिले के शहरों में ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। अगर केरल के दक्षिण और उत्तर छोर को आपस में जोड़ दिया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाएगी।
केरल सरकार और रेल मंत्रालय मिलकर तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच 529. 45 किलोमीटर लंबा सेमी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर तैयार करने पर जुटा है। इसे ही सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट कहा गया है। रेलवे बोर्ड ने इसको 17 दिसंबर 2019 को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर दिया था, लेकिन मंजूरी के बाद से ही बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दलों ने विरोध शुरू कर दिया था।
अब लोग जानना चाहते हैं कि जब ये प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण है तो इसका विरोध क्यों हो रहा है। दरअसल, इसे लेकर एर्नाकुलम, कोट्टायम और कोझिकोड जिले में सबसे ज्यादा विरोध है। विरोध में सभी विपक्षी दल और पर्यावरणविद् शामिल हैं। इनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट का रूट वेटलैंड्स, धान के खेत और केरल की पहाड़ियों से रखा गया है। ऐसे में इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा।
इसकी वजह से 20 हजार से ज्यादा लोगों के सिर से छत छिन जाएगी। वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है, राज्य सरकार किसी भी कीमत पर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। कुछ लोग जनता को भटका रहे हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट हमारे बच्चों का भविष्य है।
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| तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच की दूरी कम करने के लिए केरल सरकार के सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट को लेकर तिरुवनंतपुरम में गुरुवार को हंगामा हो गया। प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को रोकने पुलिस पहुंची तो कार्यकर्ता उन से भिड़ गए। पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जमकर मारपीट हुई। इस मारपीट का वीडियो भी वायरल हो रहा है। रेलवे का सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट केरल में लोगों के निशाने पर है। लोग बड़ी संख्या में इस प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट सीएम पिनराई विजयन की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस प्रोजेक्ट के तहत पाँच सौ उनतीस किलोग्राममीटर की लंबी सिल्वर लाइन बिछाई जाएगी। तिरुवनंतपुरम को उत्तरी केरल के कासरगोड से कनेक्ट किया जाएगा। इस रेलवे लाइन में ग्यारह स्टेशन बनाए जाएंगे जो ग्यारह जिलों से गुजरेंगे। अगर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है तो तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच की दूरी महज चार घंटाटे में पूरी की जा सकेगी। अभी इस सफर में बारह घंटाटे लगते हैं। इस प्रोजेक्ट का कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट विरोध कर रहा है। केरल सरकार राज्य के दो छोरों को जोड़ने के लिए चौंसठ हज़ार करोड़ रुपए की लागत से सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट ला रही है। राज्य सरकार का कहना है कि जिले के शहरों में ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। अगर केरल के दक्षिण और उत्तर छोर को आपस में जोड़ दिया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाएगी। केरल सरकार और रेल मंत्रालय मिलकर तिरुवनंतपुरम से कासरगोड के बीच पाँच सौ उनतीस. पैंतालीस किलोग्राममीटर लंबा सेमी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर तैयार करने पर जुटा है। इसे ही सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट कहा गया है। रेलवे बोर्ड ने इसको सत्रह दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर दिया था, लेकिन मंजूरी के बाद से ही बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दलों ने विरोध शुरू कर दिया था। अब लोग जानना चाहते हैं कि जब ये प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण है तो इसका विरोध क्यों हो रहा है। दरअसल, इसे लेकर एर्नाकुलम, कोट्टायम और कोझिकोड जिले में सबसे ज्यादा विरोध है। विरोध में सभी विपक्षी दल और पर्यावरणविद् शामिल हैं। इनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट का रूट वेटलैंड्स, धान के खेत और केरल की पहाड़ियों से रखा गया है। ऐसे में इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा। इसकी वजह से बीस हजार से ज्यादा लोगों के सिर से छत छिन जाएगी। वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है, राज्य सरकार किसी भी कीमत पर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। कुछ लोग जनता को भटका रहे हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट हमारे बच्चों का भविष्य है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
प्रदीप मालवीय, उज्जैन। माता सीता के जीवन को लेकर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए बयान पर बवाल मच गया है। उज्जैन में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मंत्री यादव का पुतला दहन कर विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंत्री से अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की।
दरअसल, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान माता सीता पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि सीता माता का जीवन तलाक शुदा महिला जैसा था, जिस पर आपत्ति जताते हुए आज एनएसयूआई ने उज्जैन के टॉवर चौराहे पर उनका पुतला दहन किया और बयान पर माफी मांगने की मांग की ।
उच्च शिक्षा डॉ. मोहन यादव ने नागदा में कारसेवकों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मां सीता की तुलना आज की तलाकशुदा पत्नी की लाइफ से कर दी। मंत्री यादव ने कहा था कि 'जिस सीता माता को राम इतना बड़ा युद्ध करके लाए, उन्हें गर्भवती होने पर भी राज्य की मर्यादा के कारण छोड़ना पड़ा। उस सीता माता के बच्चों को जंगल में जन्म लेना पड़ा। वह माता इतने कष्ट के बावजूद भी पति के प्रति कितनी श्रद्धा करती है कि वह कष्टों को भूल कर भगवान राम के जीवन की मंगल कामना करती है। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है। भगवान राम के गुणों को बताने के लिए उन्होंने बच्चों को भी संस्कार दिए'। मंत्री यादव ने उनके धरती में समाने को लेकर भी बात कही और कहा कि 'आज की भाषा में इसे आत्महत्या कहा जाता है।
| प्रदीप मालवीय, उज्जैन। माता सीता के जीवन को लेकर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए बयान पर बवाल मच गया है। उज्जैन में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मंत्री यादव का पुतला दहन कर विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंत्री से अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की। दरअसल, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान माता सीता पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि सीता माता का जीवन तलाक शुदा महिला जैसा था, जिस पर आपत्ति जताते हुए आज एनएसयूआई ने उज्जैन के टॉवर चौराहे पर उनका पुतला दहन किया और बयान पर माफी मांगने की मांग की । उच्च शिक्षा डॉ. मोहन यादव ने नागदा में कारसेवकों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मां सीता की तुलना आज की तलाकशुदा पत्नी की लाइफ से कर दी। मंत्री यादव ने कहा था कि 'जिस सीता माता को राम इतना बड़ा युद्ध करके लाए, उन्हें गर्भवती होने पर भी राज्य की मर्यादा के कारण छोड़ना पड़ा। उस सीता माता के बच्चों को जंगल में जन्म लेना पड़ा। वह माता इतने कष्ट के बावजूद भी पति के प्रति कितनी श्रद्धा करती है कि वह कष्टों को भूल कर भगवान राम के जीवन की मंगल कामना करती है। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है। भगवान राम के गुणों को बताने के लिए उन्होंने बच्चों को भी संस्कार दिए'। मंत्री यादव ने उनके धरती में समाने को लेकर भी बात कही और कहा कि 'आज की भाषा में इसे आत्महत्या कहा जाता है। |
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Poonam Pandey Braless Video: पूनम पांडे बिंदास अंदाज में अपनी लाइफ जी रही हैं। सैम बॉम्बे से अलग होने के पूनम और भी ज्यादा बेबाक हो गई हैं और आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी बढ़ती जवानी के एक से बढ़कर एक शानदार तस्वीरें और वीडियो शेयर कर फैंस को टीज करती रहती हैं।
अब एक बार फिर से पूनम पांडे ने अपना नया वीडियो इंस्टाग्राम पर ड्रॉप किया है जो कि आग की तरह वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पूनम पांडे ब्रालैस अंदाज में बेहद खूबसूरत ड्रेस में अपने हैवी कर्व्स फ्लॉन्ट करती दिखाई दे रही हैं। पूनम ने रेट्रो सॉन्ग मिला ना तुम तो हम घबराएं पर ऐसे हिल हिल कर डांस किया उनके बदन का एक अंग साफ दिखाई दे रहा है।
इसके साथ ही पूनम पांडे के नित नए वीडियो का बेसब्री से इंतजार करने वाले फैंस के लिए उनका ये वीडियो किसी ट्रीट से कम साबित नहीं हो रहा है। फैंस पूनम पांडे के इस वीडियो को देखने के बार बार उनके इंस्टाग्राम का रुख कर रहे हैं। हसीना इस वीडियो में काफी बोल्ड मूव्स दिखा रही है।
आपको बता दें कि यंगस्टर्स के बीच पूनम का अलग ही क्रेज बना रहता है। अपनी इन सिजलिंग फोटो से वो अपनी परफेक्ट टोन्ड बॉडी को फ्लॉन्ट करने का एक भी मौका नहीं छोड़ती हैं।
यही नहीं कैज्युल और इंडियन ट्रेडिशनल अवतार में भी वो सोशल मीडिया पर नजर आ जाती हैं। पूनम पांडे सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी एक से बढ़कर एक बोल्ड और हॉट तस्वरी सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती हैं।
पूनम पांडे के लुक्स इंटरनेट पर वायरल होने में ज्यादा समय नहीं लेते हैं। इसके साथ ही ये हसीना अपनी पर्सनल लाइफ और लव लाइफ को लेकर भी काफी चर्चाओं में रहती है।
| Don't Miss! Poonam Pandey Braless Video: पूनम पांडे बिंदास अंदाज में अपनी लाइफ जी रही हैं। सैम बॉम्बे से अलग होने के पूनम और भी ज्यादा बेबाक हो गई हैं और आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी बढ़ती जवानी के एक से बढ़कर एक शानदार तस्वीरें और वीडियो शेयर कर फैंस को टीज करती रहती हैं। अब एक बार फिर से पूनम पांडे ने अपना नया वीडियो इंस्टाग्राम पर ड्रॉप किया है जो कि आग की तरह वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पूनम पांडे ब्रालैस अंदाज में बेहद खूबसूरत ड्रेस में अपने हैवी कर्व्स फ्लॉन्ट करती दिखाई दे रही हैं। पूनम ने रेट्रो सॉन्ग मिला ना तुम तो हम घबराएं पर ऐसे हिल हिल कर डांस किया उनके बदन का एक अंग साफ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही पूनम पांडे के नित नए वीडियो का बेसब्री से इंतजार करने वाले फैंस के लिए उनका ये वीडियो किसी ट्रीट से कम साबित नहीं हो रहा है। फैंस पूनम पांडे के इस वीडियो को देखने के बार बार उनके इंस्टाग्राम का रुख कर रहे हैं। हसीना इस वीडियो में काफी बोल्ड मूव्स दिखा रही है। आपको बता दें कि यंगस्टर्स के बीच पूनम का अलग ही क्रेज बना रहता है। अपनी इन सिजलिंग फोटो से वो अपनी परफेक्ट टोन्ड बॉडी को फ्लॉन्ट करने का एक भी मौका नहीं छोड़ती हैं। यही नहीं कैज्युल और इंडियन ट्रेडिशनल अवतार में भी वो सोशल मीडिया पर नजर आ जाती हैं। पूनम पांडे सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और आए दिन अपनी एक से बढ़कर एक बोल्ड और हॉट तस्वरी सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती हैं। पूनम पांडे के लुक्स इंटरनेट पर वायरल होने में ज्यादा समय नहीं लेते हैं। इसके साथ ही ये हसीना अपनी पर्सनल लाइफ और लव लाइफ को लेकर भी काफी चर्चाओं में रहती है। |
Lalit Kumar (चर्चा । योगदान)
('{{GKGlobal}} {{GKRachna ।रचनाकार=रामचन्द्र शुक्ल ।संग्रह=भाषा, साह...' के साथ नया पन्ना बनाया)
Lalit Kumar (चर्चा । योगदान)
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।पंक्ति 20:
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ये हूण सबसे पहले सन् 350 ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् 425 ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् 483 ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् 513 में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया।
ये हूण सबसे पहले सन् 350 ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् 425 ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् 483 ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् 513 में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया।
ये हूण सबसे पहले सन् 350 ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् 425 ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् 483 ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् 513 में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया।
पारसीकांस्ततो जेतुं प्रतस्थे स्थलवर्त्मना।
1. यह जान लेना आवश्यक है कि मिहिरकुल शैव सम्प्रदाय का अनुयायी था। उसकी क्रूरता की कई कथाएँ प्रसिद्ध हैं। राजतरंगिणी में लिखा है कि एक बार उसने एक हाथी को एक ऊँचे पहाड़ पर से केवल उसका चिल्लाना और छटपटाना देखने के लिए गिरवाया था। ऐसे अत्याचारी की मृत्यु से देशभर में आनंद छा गया।
यवनीमुखपद्मानां सेहे मधुमदं न सः।
संग्रामस्तुमुलस्तस्य पाश्चात्यैरश्वसाधानैः।
भल्लापवजिंतैस्तेषां शिरोभिः श्मश्रुलैर्महीम।
अपनीतशिरस्त्राणाः शेषास्तं शरणं ययुः।
विनयंते स्म तद्योधा मधुभिर्विजयश्रमम।
ततः प्रतस्थे कौबेरीं भास्वानिव रघुर्दिशम।
विनीताध्वश्रमास्तस्य सिंधुतीर विचेष्टनैः।
तत्रा हूणावरोधानां भर्तृषुव्यक्त विक्रमम।
कांबोजाः समरे सोढुंतस्य वीर्यमनीश्वराः।
तेषां सदश्वभूयिष्ठास्तुक्ष् द्रविणराशयः।
ततो गौरी गुरुं शैलमारुरोहाश्वसाधनः।
शशंस तुल्य सत्वानां सैन्यघोषेऽप्य संभ्रमम।
भूर्जेषु मर्मरी भूताः कीचक ध्वनि हेतवः।
विशश्रमुर्निमेरुणां छाया स्वध्यास्य सैनिकाः।
सरलासक्त मात्तांग ग्रैवेयस्फुरितत्विषः।
तस्योत्सृष्टनिवासेषु कंठरज्जुक्षतत्वचः।
तत्राजन्यं रघोघोरं पर्वतीयैर्गणैरभूत।
शरैरुत्सवसंकेतांस कृत्वा विरतोत्सवान।
परस्परेण विज्ञातस्तेषूपायनपाणिषु।
तत्राक्षोभ्यं यशोराशिं निवेश्यावरुरोह सः।
ऊपर के श्लोकों में रघु की पश्चिम की ओर की चढ़ाई का वर्णन है। इस यात्रा में जिन स्थानों और मार्गो का वर्णन है वे ध्यान देने योग्य हैं। पश्चिम समुद्रतट होते हुए रघु चित्रकूट पर पहुँचे जो अवंती के पश्चिम विंध्य पर्वत के छोर पर है। यहाँ से पारसियों को जीतने के लिए रघु स्थल मार्ग से गए। वहाँ पाश्चात्य सवारों के साथ घोर युद्ध हुआ जिसमें उनके दाढ़ी वाले सिरों से पृथ्वी ढक गई। जो यवन पगड़ी उतारकर उनकी शरण में आए उन्हें रघु ने छोड़ दिया। यहाँ रघु के योद्धाओं ने दाक्ष (अंगूर) के बगीचों से घिरी हुई भूमि पर जहाँ चमड़ों के आसन बिछे हुए थे मधा(मद्य) द्वारा श्रम मिटाया। फिर उत्तर दिशा वालों को उखाड़ने के लिए रघु कुबेर की दिशा (उत्तर) में गए। सिन्धु (पाठान्तर वक्षु) नदी के किनारे लेटे हुए रघु के घोड़ों ने केसर लगे हुए कन्धो को झाड़ा। उत्तर दिशा में हूणों के साथ रघु ने जो पराक्रम दिखाया वह हूण स्त्रियों के कपोलों पर लाली के रूप में दिखाई पड़ा। कम्बोज वाले तो रघु के हाथियों के बंधनों से रगड़े हुए अखरोटों के साथ ही नम्र हुए। कम्बोज वाले अपने यहाँ के घोड़े और सुवर्ण की राशि भेंट में ले आए। वहाँ से रघु हिमालय पर चढ़े। उनके घोड़ों के टाप से उठी हुई धातु रज़ मानो शिखरों को और भी ऊँचा करती थी। मार्ग में भोजपत्रो में मर्मर शब्द करती हुई, बाँसों में सनसनाती हुई तथा गंगा के जलकणों को लिए हुए वायु सेवन किया। किरातों ने जब उनके छोड़े हुए डेरों को देखा तब उन्होंने गले की रस्सी से छिली छाल वाले देवदारों से रघु के हाथियों की ऊँचाई का अनुमान किया। इसके उपरान्त उत्सव-संकेत नामक पर्वतीय गणों के साथ घोर युद्ध हुआ। उन्हें उत्सव-हीन करके रघु ने किन्नरों से अपनी विजय के गीत गवाए। इस प्रकार हिमालय में अचल कीर्ति राशि स्थापित करके रावण के उठाए पर्वत (कैलाश) को लज्जित सा करते हुए रघु (हिमालय से) उतरे।
ऊपर जो कालिदास का वर्णन है उसपर विचार करने के पहले यह समझ रखना चाहिए कि कोई कवि जब किसी पुराने आख्यान का वर्णन करने बैठता है तब या तो परंपरा से चली आती हुई रीति का अनुसरण करता है, अर्थात् उन्ही बातों का वर्णन करता है जिनका वर्णन बराबर होता गया है, अथवा इस बात का ऐतिहासिक प्रयत्न करता है कि जिस काल का वर्णन वह कर रहा है उसी काल की प्रचलित रीति, नीति और व्यवस्था का उसमें समावेश हो, अथवा अपने वर्णन में सजीवता लाने के लिए वह अपने समय की प्रचलित व्यवस्था, रीति, नीति आदि का पुरानी से पुरानी कथा के वर्णन में भी सन्निवेश करता है। किस कवि ने कौन सा वर्णन किस भाव से लिखा है यह बात कवि के समय की प्रचलित व्यवस्था का थोड़ा बहुत ज्ञान रहने से ही निश्चित हो सकती है। कालिदास ने इतिहास, पुराण आदि का खूब अध्ययन किया था पर यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपना वर्णन उनमें उल्लिखित व्यवस्था से बद्ध होकर नहीं किया है। रघु वैदिक युग के सम्राट थे पर कालिदास ने यह चेष्टा नहीं की है कि रघुवंश में उन्ही बातों का वर्णन आवे जिनका रघु आदि के समय में होना रामायण, महाभारत आदि से पाया जाता है। कालिदास ने अपने वर्णन में देश की उस स्थिति और रीति-नीति आदि का आभास दिया है जो उनके समय में थे। यही सिद्धांत स्थिर करके विद्वानों ने कालिदास का समय निश्चित किया है और उन्हें उस काल में रखा है जिस काल की प्रचलित रीति-नीति आदि का आभास उनकी रचनाओं में मिलता है।
कालिदास रघु को किन-किन देशों में किस-किस प्रकार ले गए हैं यह देखना चाहिए। कालिदास रघु को त्रिकूट से स्थल मार्ग से फारस ले गए हैं। स्थलमार्ग कहने से यह सूचित होता है कि फारस जाने का रास्ता समुद्र से भी था। यदि रघु अपरान्त (बम्बई के पास का समुद्रतट) से होकर गए तो उन्होंने विंध्य पर्वत को उसके पश्चिमी छोर पर अनूप देश के पास पार किया होगा जहाँ त्रिकूट पर्वत पड़ा होगा। यहाँ से मार्ग मरुभूमि के किनारे-किनारे आधुनिक सक्कर होता हुआ बोलन की घाटी पार करके खोजक अमराँ नाम के पहाड़ों के पास निकला होगा। फिर इन पहाड़ों की परिक्रमा करते हुए जिरिश्क जाना पड़ता होगा। वहाँ से इलमन्द नदी का किनारा पकड़े हुए दक्षिण फारस में जाने का मार्ग रहा होगा जो जरथुस्त्रा का कार्यक्षेत्र होने के कारण बहुत पवित्र माना जाता था और जिसका लगाव भारतवर्ष से बहुत कुछ था। कालिदास के वर्णन से प्रकट है कि उन्हें पारसियों और पारदों के संबंध में अच्छी जानकारी थी। इतिहास में दोनों अच्छे घुड़सवार प्रसिद्ध हैं जिसका उल्लेख कालिदास ने भी किया है। जब पारसी लोग पराजित हुए तब उन्होंने अपनी पगड़ियाँ उतार और उन्हें गले में डाल अधीनता स्वीकार की। पारसी लोग दाढ़ियाँ रखते थे इसका पता पुराने चित्रो और मूर्तियों से भी लगता है।
1. वंक्षुयह वंक्षु नद अफगानिस्थान के उत्तर बदशाँ प्रदेश में है और उन पाँच नदियों (पंजाब) में है जिनसे मिलकर ऑक्सस या आमू दरिया बना है जो तुर्किस्तान की ओर जाता है। पामीर और बदखशाँ में जो अक्सु नाम की धारा है वही ऋग्वेद का प्राचीन वंक्षु है जिसका अपभ्रंश यूनानियों ने ऑक्सस किया रा. चं. शु।
पाठ है। मल्लिनाथ को भी 'सिन्धु' पाठ खटका था इसी से उन्हें अपनी टीका में 'सिन्धु' को काश्मीर की एक नदी लिखना पड़ा। पर दक्षिण पारस से उत्तर जाने पर एक बार काश्मीर के उत्तर पहुँच जाना ठीक नहीं जँचता। इससे 'वंक्षु' पाठ ही ठीक जान पड़ता है। इसी वंक्षु को यूनानियों ने ऑक्सस लिखा है और आजकल आमू दरिया कहते हैं। ऑक्सस या आमू दरिया पाँच नदियों के मेल से बना है जिनमें अक्साब और बक्शाब मुख्य है। इनके बीच के प्रदेश को अरबवाले खत्ताल और फारसवाले हयताल कहते हैं। इसी हयताल शब्द के अनुसार रोमन लोग हूणों को इफथलाइट कहते थे क्योंकि जैसा पहले कहा जा चुका है हूण लोग पहले ऑक्सस या वंक्षु नद के किनारे ही आकर जमे थे।
इसी प्रदेश से लगा हुआ पूरब की ओर बदखशाँ है जिसे ऑक्सस या वंक्षु नद घेरे हुए है। फारसी किताबों में इस प्रदेश की बड़ी महिमा लिखी है। यहाँ का लाल प्रसिद्ध था और कहते थे कि यहाँ की नदियाँ सोने की रेत बिछाती हैं। बदखशाँ और पूरब जाने पर हम वंक्षु नद के उद्गमों तक पहुँचते हैं जहाँ वक्शांब प्रदेश है जो काश्मीर की सीमा पर पड़ता है। पामीर के नीचे वंक्षु और यारखंड नदी के उद्गमों तथा काश्मीर के उत्तर गई हुई सिन्धु नदी की धारा के बीच बहुत संकीर्ण प्रदेश पड़ता है जिससे होकर पुराने समय में लोग तिब्बत और तुर्किस्तान की ओर जाते थे। वंक्षु या वक्शाब के उद्गमों तक जाने के लिए बलख होता हुआ रास्ता गया है। अस्तु, यदि कालिदास के ध्यान में कोई सड़क रही होगी तो यही बलख वाली जिससे होकर सिकंदर भी बलख में पहुँचा था। इस प्रकार कालिदास के अनुसार रघु बलख तक तो उसी रास्ते से गए होंगे जिस रास्ते सिकंदर गया। बलख से रघु पश्चिम की ओर न जाकर बदखशाँ होते हुए उत्तर पूर्व की ओर मुड़े होंगे और कुछ चलकर कम्बोज प्रदेश की सीमा पर पहुँचे होंगे। कालिदास के इस मार्ग से भारतवर्ष की उत्तर पश्चिम सीमा का आभास मिलता है जो पारदों के समय से लेकर ईसा की तीसरी क्या पाँचवीं छठीं शताब्दी तक समझी जाती थी।
काम्बोजों को जीतकर रघु ने हिमालय की चढ़ाई आरंभ की। काश्मीर के पूर्व लद्दाख होते हुए तिब्बत जाने का पुराना मार्ग है। पर उक्त प्रदेश में उस समय दरद नामक म्लेच्छ बसते थे जिनका कोई उल्लेख कालिदास ने नहीं किया है। इससे जान पड़ता है कि कालिदास रघु को पूरब की ओर से किसी दूसरे मार्ग से ले गए हैं क्योंकि 73वें श्लोक के अनुसार रघु की सेना ने गंगा के शीतल जलकण मिली हुई वायु से अपनी थकावट मिटाई थी। कैलाश के दिखाई पड़ने का भी उल्लेख है। इससे कालिदास का यही अभिप्राय जान पड़ता है कि रघु गंगोत्री और केदारनाथ के रास्ते हिमालय से उतरे।
कालिदास के वर्णन से इतना तो स्पष्ट है कि उनके समय में हूण लोगवंक्षु या ऑक्सस नदी के उत्तरी तट पर बसे थे जो ईसा की चौथी और पाँचवीं शताब्दी में (जबकि एशिया और यूरोप में उनका अधिकार खूब फैला था) उनका प्रधन स्थान रहा। उस प्रदेश में हूण कब आए इस प्रश्न के साथ यह भी संशय हो सकता है कि संभव है हूणों के वहाँ बसने के पूर्व जो जाति वहाँ रहती हो उसे भारतवासी हूण कहते रहे हों। पर इसका कोई प्रमाण या आधार नहीं मिलता।
ईसा से छह सौ वर्ष पहले चीन साम्राज्य के सात खण्ड हो गए- शू, चाओ, वेइ, हन, यन-चाओ, त्सी, और त्सीन। इनमें से उत्तरी राज्य यन-चाओ और त्सीन (शीन या चीन) हयंग-नु के पड़ोसी थे। ईसवीं सन् से 321 वर्ष पूर्व शेष छह राज्यों ने मिलकर त्सीन राज्य पर चढ़ाई की, पर त्सीन राज्य ने उन सबको परास्त किया और त्सीन राजवंश का शी-ह्नांग -टी ही सारे चीन का एकछत्र राजा हुआ (ईसा से 246 वर्ष पूर्व)। यह बड़ा प्रतापी राजा हुआ। इसने सामन्त राज्यों की व्यवस्था तोड़ दी और भिन्न-भिन्न प्रदेशों में अपनी ओर से शासक नियुक्त करके भेजे। राज्य भर में इसने बहुत सी नहरें और सड़कें बनवाईं तथा प्रजा की सुविधा के लिए और भी बड़े-बड़े काम किए। अपने राज्य में सब प्रकार से शांति स्थापित करके शी-ह्नांग-टी ने चीन के पुराने शत्रु हयंग-नु तातारों पर चढ़ाई की जिनके आक्रमणों से चीन के लोग तंग थे। उसने चीन के बिलकुल पास बसने वाले हयंग-नु लोगों का ध्वंस किया और जो बचे उन सबको भगाकर मंगोलिया प्रदेश में कर दिया। इस प्रकार शत्रुओं का दमन करके उसने चीन साम्राज्य की सीमा बहुत बढ़ाई। सबसे भारी काम तो उसने यह किया कि हयंग-नु तातारियों की रोक के लिए कहकहा दीवार पूरी कराई जो संसार के अद्भुत पदार्थों में है। इस दीवार का बनना ईसा से 214 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था। पुरानी चाल के पंडित लोग सामन्त व्यवस्था के पक्ष में बहुत कुछ कहा करते थे और प्रमाण में प्राचीन इतिहासों के दृष्टान्त दिया करते थे। इस पर शी-ह्नांग-टी इतना बिगड़ा कि उसने अपने राज्य का सारा पुराना इतिहास नष्ट करा दिया। उसकी इस बर्बरता का बहुत कुछ प्रायश्चित उसके पुत्र ह्नेंग-टी (194-179 ईसा से पूर्व) ने किया जो भारतीय सम्राट् पुष्यमित्र और खारवेल तथा वाधीक देश (बलख) के यवन राजा मिनांडर (बौद्धो के मिलिंद) का समकालीन था।
शी-ह्नांग-टी के राजत्वकाल के पिछले दिनों में हयंग-नु तातारों का राजा अपने पुत्र माओं-तुन द्वारा मार डाला गया। माओं-तुन बड़ा प्रतापी हुआ। उसने अपना राज्य जापान समुद्र से लेकर यूरोप में वोल्गा नदी के किनारे तक बढ़ाया। यहीं तक नहीं, उसके पिता के समय में उत्तर चीन का जितना भाग चीनियों ने निकाल लिया था उसने 300000 सेना लेकर उस पर फिर अपना अधिकार जमा लिया। पहले कहा जा चुका है कि शी-ह्नांग-टी के पीछे उसका पुत्र ह्नेंग-टी गद्दी पर बैठा जिसने विद्या और साहित्य की बहुत उन्नति की, बहुत से पुस्तकालय खोले और अपने पिता द्वारा पहुँची हुई हानि की बहुत कुछ पूर्ति की। उसके राज्य में चारों ओर सुख शांति थी। पर हयंग-नु लोगों के आक्रमण बन्द नहीं हुए थे इससे चीन सम्राट ने उनका उच्छेद अत्यन्त आवश्यक समझा। हयंग-नु लोगों के जब चीन पर सब आक्रमण व्यर्थ हुए और वे हर बार हटा दिए गए तब उन्होंने अपना क्रोध यू-ची लोगों पर निकाला जो कं-सू राज्य के पश्चिम में पड़ते थे। यू-ची लोग अपने स्थान से एकबारगी थियान-ज्ञन पर्वत के पार तुर्किस्तान और कैस्पियन सागर के बीच के प्रदेशों में भाग दिए गए। चीनी सम्राट ने अच्छा अवसर देख यूचियों से संधि का प्रस्ताव किया जिसमें बड़ी सफलता हुई। संधि का प्रस्ताव लेकर चंग-किन नामक जो राजदूत पश्चिम गया था उसे बलख (वाधीक) तक जाना पड़ा था क्योंकि यूचियों का अधिकार उस समय बलख तक हो गया था। बलख तक पहुँचने पर उस चीनी राजदूत का ध्यान भारतवर्ष की ओर गया और बहुत से पेड़-पौधो और जन्तु तथा सभ्यता के बहुत से आचार व्यव्हार पश्चिम से चीन में गए। बू-टी (140-86 ईसा पूर्व) के समय में हयंग-नु लोगों का बल टूट गया और पूर्वी तुर्किस्तान चीन साम्राज्य के अंतर्गत हुआ। फिर तो फारस और रोम तक से चीन का व्यापार स्थापित हो गया और व्यापारी बेधड़क एक देश से दूसरे देश में जाने लगे। ईसवीं सन् के आरंभ में चीन में हान वंश (जिसमें ह्नेटी और बू-टी आदि थे) के हाथ से राज्य निकल गया। सन् 58 ई. के लगभग उसी वंश के राजा ने फिर शांति स्थापित की। उसी के पुत्र मिंग-टी के समय में अर्थात् सन् 65 ईसवीं में बौद्ध धर्म भारत से चीन पहुँचा। इसी समय के लगभग प्रसिद्ध सेनापति पन्-चाओ तुर्किस्तान में शन्शन् के राजा के पास चीन का राजदूत होकर गया जिसके प्रभाव से शन्शन्, खुतन और काशगर के राज्य चीन साम्राज्य के आज्ञानुवर्ती हुए। इसी समय से समझना चाहिए कि हयंग-नु जाति चीन के उत्तर से सब दिन के लिए भगा दी गई। अपने स्थान से हटने पर हयंग-नु लोगों से सुग्धा देश (समरकन्द के आसपास का प्रदेश) पर अधिकार किया और अलान (जो पूर्वकाल में यन-शाई कहलाते थे) लोगों को परास्त करके उनके राजा को मार डाला। यहीं से उनके दल यूरोप और एशिया के कई भागों में बढ़ते गए और हूण के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह तो हुई चीन के उत्तर में बसने वाले हयंग-नु की बात। जो हयंग-नु दक्षिण में बसे थे वे सब सन् 215 ईसवीं में चीन सम्राट के अधीन हो गए। आगे चलकर थोड़े ही दिनों में जब परस्पर विरोध के कारण चीन की शक्ति उतनी न रही तब चौथी शताब्दी में हयंग-नु लोगों ने चीन पर फिर आक्रमण किया। इस बार वे हूण के नाम से जगत्प्रसिद्ध हो गए थे, भारत की सीमा से लेकर रोमन साम्राज्य की सीमा तक वे फैले थे।
ऊपर के उद्धरण में फ्रिनी शब्द भ्रम से फानी के स्थान पर लिखा गया है, जिसका अर्थ अरण्यवासी होता है। हूणों के अरण्यवासी होने की बात गाथिक लोगों में भी प्रसिद्ध थी। गाथिक इतिहासकार कसिओडोरस के ये वाक्य और ग्रंथो में उध्दृत मिलते हैं।
इस उदाहरण से पता चलता है कि गाथ लोग अरण्यवासी हूणों को हूण पिता और मग माता से उत्पन्न मानते थे।
हयंग-नु लोगों को उस समय साधारण लोग वन-दैत्य कहते थे। पारसी लोग भी उन्हें देव ही समझते थे। प्राचीन यूनान और रोमन लोगों ने जिन्हें फानी (अरण्यवासी) लिखा है, वे ये हयंग-नु ही थे, इसका प्रमाण स्ट्रेबो के लेख से मिलता है। स्ट्रेबो के भूगोल के अनुसार मिनांडर ने ईसा से 600 वर्ष पूर्व अपना राज्य चीन की सीमा और फानी लोगों के देश तक बढ़ाया। यह पहले ही लिखा जा चुका है कि मिनांडर के समय में चीन का बादशाह ह्ने-टी था। अस्तु, आयोलोडोरस नामक वाधीकवासी यवन (यूनानी) ने अपनी पार्थिका (पारद देश के वृत्तांत) में जिस फानी राज्य का उल्लेख किया है वह हयंग-नु राज्य ही था, जिसका शासक उस समय परम प्रचंड माओन्तुन था। चीनियों के लेखों से तो इस बात का पूरा निश्चय हो जाता है। चीनी हयंग-नु लोगों को क्वै-फांग भी कहते थे। 'क्वै' शब्द का अर्थ है दैत्य या दानव। एक चीनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि 'यिन' वंश के लोग उन्हीं को क्वै फांग कहते थे जिन्हें पहले 'हान' वंश (जिसमें शी-ह्नां टी और ह्नेटी थे) के लोग हयंग-नु कहते थे। प्राचीन चीनी इतिहासकार सी-म-चंग ने भी ऐसा ही लिखा है सी-म-चंग के अनुसार यव-शोन के समय में शोन-बे कहलाते थे। 'इन' वंश के समय में उनके देश को क्वै-फांट कहते थे। 'चाओ' के समय में वे हून-यून और 'हान' वंश के समय में हयंग-नु कहलाते थे।
ऊपर के विवरणों से स्पष्ट है कि हयंग-नु लोगों को किसी समय चीनी लोग भी दैत्य दानव कहते थे और यह बात जनसाधारण के बीच फैलते-फैलते रोमन लोगों तक पहुँची। अस्तु, इसमें अब कोई संदेह नहीं रहा कि हयंग-नु और हूण को उनके पड़ोसी चीनी एक ही समझते थे।
हूणों के मातृकुल पर विचार करने से यही प्रतीत होता है कि मग स्त्रियाँ जिनका ऊपर उल्लेख हुआ है जेटे जाति की थीं जो चीन के किनारे बसती थीं। यूनानी (यवन) और रोमन लेखक हूणों को मसाजेटे जाति से निकले हुए मानते थे। अमिएनस मार्सेलिनस ने तो स्पष्ट लिखा है कि हूण लोग आलन लोगों से मिलते जुलते थे जो यूरोप के डोन नदी से लेकर सिन्धु नदी तक फैले थे और पहले मसाजेटे कहलाते थे। हयंग-नु लोगों द्वारा उनके पराजित होने के पहले चीनी उन्हें अनसाई या यनसाई कहते थे। मग स्त्रियों से जो हूणों की उत्पत्ति मानी जाती थी वह इस कारण कि मग स्त्रियाँ जादू-टोना करने में प्रसिद्ध थीं। ऐसी मायाविनी स्त्रियों से हूण जैसे दैत्यों को उत्पन्न मानना स्वाभाविक ही था।
यह पहले ही कहा जा चुका है कि ओरोसियस के भूगोल में हूण-शक उत्तरकुरु के पास रहते थे। संस्कृत ग्रंथो में उत्तरकुरु जाति हिमालय के उस पार कही गई है। पुराणों में तो उत्तरकुरु विलक्षण रंगरूप के और अत्यंत दीर्घजीवी लिखे गए हैं। प्राचीन यूनानियों ने भी उनका ऐसा ही पौराणिक वर्णन किया है। पर महाभारत में उनका मनुष्य ही के रूप में वर्णन हुआ है और लिखा है कि पांडु के समय में उनके यहाँ एक स्त्री कई पति करती थी। और अधिक प्राचीन ग्रंथो की ओर जाते हैं तो उनमें उनका सीधा-सादा उल्लेख मिलता है। ऐतरेय ब्राह्मण ने लिखा है कि वे हिमालय के उस पार बसते थे। उत्तरकुरु यद्यपि देवभूमि कहा गया है पर यह भी लिखा गया है कि वशिष्ठ सत्यहव्य का शिष्य ज्ञानन्तपि अत्याराति उसे जीतना चाहता था। इसे हम किस्सा कहानी नहीं मान सकते। उत्तरकुरु के साथ ही हमें उत्तरमद्रों का उल्लेख मिलता है जिनका बहुत कुछ संबंध काम्बोजों से था। काम्बोज औपमन्यव मद्रगार का शिष्य कहा गया है। शतपथ ब्राह्मण में एक आख्यान है कि कुरुपांचाल ब्राह्मणों और उत्तरीय ब्राह्मणों के बीच झगड़ा हुआ जिसमें उत्तरी ब्राह्मणों की विजय हुई। आख्यान में यह भी है कि उत्तरी ब्राह्मणों की भाषा कुरुपांचालों की भाषा से मिलती जुलती थी। उनकी भाषा बहुत विशुद्ध मानी जाती थी। और बहुत से ब्राह्मण अध्ययन के लिए उत्तराखंड में जाते थे। बौद्ध कथाओं से भी यह जाना जाता है कि गांधार बहुत दिनों तक प्रधन विद्यापीठ रहा जहाँ बड़े-बड़े राजकुमार राजनीति आदि की शिक्षा के लिए जाते थे। बुद्ध के समय में कोशल के राजा प्रसेन्जित शिक्षा के लिए तक्षशिला गए थे। सिंहलद्वीप के इतिहास ग्रंथ महावंश में लिखा है कि जिस समय महास्तूप बन रहा था उस समय कुछ श्रमण एक विशेष प्रकार का पत्थर लाने के लिए उत्तरकुरु भेजे गए थे। अस्तु यदि हम उत्तरकुरु टारिम के कछार के उस स्थान को मानें जो अब चीनी तुर्किस्तान कहलाता है तो असंगत न होगा। उत्तरकुरु को चीन और भारत सीमा पर तथा हयंग-नु के पास होना चाहिए।
(नागरीप्रचारिणी पत्रिाका, 1919 ई.)
1. Indian Antiquity में प्रकाशित प्रो. कृष्णस्वामी ऐयंगर एम. ए. के लेख का आधार।
| Lalit Kumar Lalit Kumar ।पंक्ति तेरह: ।पंक्ति तेरह: ।पंक्ति बीस: ।पंक्ति उन्नीस: ये हूण सबसे पहले सन् तीन सौ पचास ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् चार सौ पच्चीस ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् चार सौ तिरासी ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् पाँच सौ तेरह में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया। ये हूण सबसे पहले सन् तीन सौ पचास ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् चार सौ पच्चीस ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् चार सौ तिरासी ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् पाँच सौ तेरह में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया। ये हूण सबसे पहले सन् तीन सौ पचास ईसवीं के लगभग बादशाह शापूर के समय में फारस की पूर्वी सीमा पर पहुँचे थे। फारसी इतिहासकारों ने लिखा है कि, "शापूर ने उन्हें हराकर अपने अनुकूल संधिपत्र लिखने पर बाध्य किया"। यहाँ तक कि जब शापूर ने रोमन लोगों पर चढ़ाई की थी तब उसकी सेना में हूण लोग भी थे। सन् चार सौ पच्चीस ईसवीं के पीछे हूणों ने जब फिर वंक्षुनद पार किया तब बहराम गोर ने उन्हें हराकर फिर वंक्षुनद के पार भगा दिया। इस प्रकार थोड़े दिनों के लिए तो वे हटा दिए गए पर पारसी सीमा पर वे घनघोर घटा के समान छाए रहे और पारसी बादशाहों को बराबर तंग करते रहे। यहाँ तक कि सन् चार सौ तिरासी ईसवीं में फारस के बादशाह फीरोज़ ने हूणों के बादशाह खुशनेवाज़ के हाथ से गहरी हार खाई और उसी लड़ाई में वह मारा भी गया। हूण्राज ने फीरोज़ के उत्तराधिकारी कुबाद से दो वर्ष तक कर वसूल किया। कुबाद और हूणों से दस वर्ष तक लड़ाई होती रही। अंत में सन् पाँच सौ तेरह में कुबाद ने उनका पूर्ण रूप से दमन किया और ईरान हूणों की बाधा से मुक्त हो गया। पारसीकांस्ततो जेतुं प्रतस्थे स्थलवर्त्मना। एक. यह जान लेना आवश्यक है कि मिहिरकुल शैव सम्प्रदाय का अनुयायी था। उसकी क्रूरता की कई कथाएँ प्रसिद्ध हैं। राजतरंगिणी में लिखा है कि एक बार उसने एक हाथी को एक ऊँचे पहाड़ पर से केवल उसका चिल्लाना और छटपटाना देखने के लिए गिरवाया था। ऐसे अत्याचारी की मृत्यु से देशभर में आनंद छा गया। यवनीमुखपद्मानां सेहे मधुमदं न सः। संग्रामस्तुमुलस्तस्य पाश्चात्यैरश्वसाधानैः। भल्लापवजिंतैस्तेषां शिरोभिः श्मश्रुलैर्महीम। अपनीतशिरस्त्राणाः शेषास्तं शरणं ययुः। विनयंते स्म तद्योधा मधुभिर्विजयश्रमम। ततः प्रतस्थे कौबेरीं भास्वानिव रघुर्दिशम। विनीताध्वश्रमास्तस्य सिंधुतीर विचेष्टनैः। तत्रा हूणावरोधानां भर्तृषुव्यक्त विक्रमम। कांबोजाः समरे सोढुंतस्य वीर्यमनीश्वराः। तेषां सदश्वभूयिष्ठास्तुक्ष् द्रविणराशयः। ततो गौरी गुरुं शैलमारुरोहाश्वसाधनः। शशंस तुल्य सत्वानां सैन्यघोषेऽप्य संभ्रमम। भूर्जेषु मर्मरी भूताः कीचक ध्वनि हेतवः। विशश्रमुर्निमेरुणां छाया स्वध्यास्य सैनिकाः। सरलासक्त मात्तांग ग्रैवेयस्फुरितत्विषः। तस्योत्सृष्टनिवासेषु कंठरज्जुक्षतत्वचः। तत्राजन्यं रघोघोरं पर्वतीयैर्गणैरभूत। शरैरुत्सवसंकेतांस कृत्वा विरतोत्सवान। परस्परेण विज्ञातस्तेषूपायनपाणिषु। तत्राक्षोभ्यं यशोराशिं निवेश्यावरुरोह सः। ऊपर के श्लोकों में रघु की पश्चिम की ओर की चढ़ाई का वर्णन है। इस यात्रा में जिन स्थानों और मार्गो का वर्णन है वे ध्यान देने योग्य हैं। पश्चिम समुद्रतट होते हुए रघु चित्रकूट पर पहुँचे जो अवंती के पश्चिम विंध्य पर्वत के छोर पर है। यहाँ से पारसियों को जीतने के लिए रघु स्थल मार्ग से गए। वहाँ पाश्चात्य सवारों के साथ घोर युद्ध हुआ जिसमें उनके दाढ़ी वाले सिरों से पृथ्वी ढक गई। जो यवन पगड़ी उतारकर उनकी शरण में आए उन्हें रघु ने छोड़ दिया। यहाँ रघु के योद्धाओं ने दाक्ष के बगीचों से घिरी हुई भूमि पर जहाँ चमड़ों के आसन बिछे हुए थे मधा द्वारा श्रम मिटाया। फिर उत्तर दिशा वालों को उखाड़ने के लिए रघु कुबेर की दिशा में गए। सिन्धु नदी के किनारे लेटे हुए रघु के घोड़ों ने केसर लगे हुए कन्धो को झाड़ा। उत्तर दिशा में हूणों के साथ रघु ने जो पराक्रम दिखाया वह हूण स्त्रियों के कपोलों पर लाली के रूप में दिखाई पड़ा। कम्बोज वाले तो रघु के हाथियों के बंधनों से रगड़े हुए अखरोटों के साथ ही नम्र हुए। कम्बोज वाले अपने यहाँ के घोड़े और सुवर्ण की राशि भेंट में ले आए। वहाँ से रघु हिमालय पर चढ़े। उनके घोड़ों के टाप से उठी हुई धातु रज़ मानो शिखरों को और भी ऊँचा करती थी। मार्ग में भोजपत्रो में मर्मर शब्द करती हुई, बाँसों में सनसनाती हुई तथा गंगा के जलकणों को लिए हुए वायु सेवन किया। किरातों ने जब उनके छोड़े हुए डेरों को देखा तब उन्होंने गले की रस्सी से छिली छाल वाले देवदारों से रघु के हाथियों की ऊँचाई का अनुमान किया। इसके उपरान्त उत्सव-संकेत नामक पर्वतीय गणों के साथ घोर युद्ध हुआ। उन्हें उत्सव-हीन करके रघु ने किन्नरों से अपनी विजय के गीत गवाए। इस प्रकार हिमालय में अचल कीर्ति राशि स्थापित करके रावण के उठाए पर्वत को लज्जित सा करते हुए रघु उतरे। ऊपर जो कालिदास का वर्णन है उसपर विचार करने के पहले यह समझ रखना चाहिए कि कोई कवि जब किसी पुराने आख्यान का वर्णन करने बैठता है तब या तो परंपरा से चली आती हुई रीति का अनुसरण करता है, अर्थात् उन्ही बातों का वर्णन करता है जिनका वर्णन बराबर होता गया है, अथवा इस बात का ऐतिहासिक प्रयत्न करता है कि जिस काल का वर्णन वह कर रहा है उसी काल की प्रचलित रीति, नीति और व्यवस्था का उसमें समावेश हो, अथवा अपने वर्णन में सजीवता लाने के लिए वह अपने समय की प्रचलित व्यवस्था, रीति, नीति आदि का पुरानी से पुरानी कथा के वर्णन में भी सन्निवेश करता है। किस कवि ने कौन सा वर्णन किस भाव से लिखा है यह बात कवि के समय की प्रचलित व्यवस्था का थोड़ा बहुत ज्ञान रहने से ही निश्चित हो सकती है। कालिदास ने इतिहास, पुराण आदि का खूब अध्ययन किया था पर यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपना वर्णन उनमें उल्लिखित व्यवस्था से बद्ध होकर नहीं किया है। रघु वैदिक युग के सम्राट थे पर कालिदास ने यह चेष्टा नहीं की है कि रघुवंश में उन्ही बातों का वर्णन आवे जिनका रघु आदि के समय में होना रामायण, महाभारत आदि से पाया जाता है। कालिदास ने अपने वर्णन में देश की उस स्थिति और रीति-नीति आदि का आभास दिया है जो उनके समय में थे। यही सिद्धांत स्थिर करके विद्वानों ने कालिदास का समय निश्चित किया है और उन्हें उस काल में रखा है जिस काल की प्रचलित रीति-नीति आदि का आभास उनकी रचनाओं में मिलता है। कालिदास रघु को किन-किन देशों में किस-किस प्रकार ले गए हैं यह देखना चाहिए। कालिदास रघु को त्रिकूट से स्थल मार्ग से फारस ले गए हैं। स्थलमार्ग कहने से यह सूचित होता है कि फारस जाने का रास्ता समुद्र से भी था। यदि रघु अपरान्त से होकर गए तो उन्होंने विंध्य पर्वत को उसके पश्चिमी छोर पर अनूप देश के पास पार किया होगा जहाँ त्रिकूट पर्वत पड़ा होगा। यहाँ से मार्ग मरुभूमि के किनारे-किनारे आधुनिक सक्कर होता हुआ बोलन की घाटी पार करके खोजक अमराँ नाम के पहाड़ों के पास निकला होगा। फिर इन पहाड़ों की परिक्रमा करते हुए जिरिश्क जाना पड़ता होगा। वहाँ से इलमन्द नदी का किनारा पकड़े हुए दक्षिण फारस में जाने का मार्ग रहा होगा जो जरथुस्त्रा का कार्यक्षेत्र होने के कारण बहुत पवित्र माना जाता था और जिसका लगाव भारतवर्ष से बहुत कुछ था। कालिदास के वर्णन से प्रकट है कि उन्हें पारसियों और पारदों के संबंध में अच्छी जानकारी थी। इतिहास में दोनों अच्छे घुड़सवार प्रसिद्ध हैं जिसका उल्लेख कालिदास ने भी किया है। जब पारसी लोग पराजित हुए तब उन्होंने अपनी पगड़ियाँ उतार और उन्हें गले में डाल अधीनता स्वीकार की। पारसी लोग दाढ़ियाँ रखते थे इसका पता पुराने चित्रो और मूर्तियों से भी लगता है। एक. वंक्षुयह वंक्षु नद अफगानिस्थान के उत्तर बदशाँ प्रदेश में है और उन पाँच नदियों में है जिनसे मिलकर ऑक्सस या आमू दरिया बना है जो तुर्किस्तान की ओर जाता है। पामीर और बदखशाँ में जो अक्सु नाम की धारा है वही ऋग्वेद का प्राचीन वंक्षु है जिसका अपभ्रंश यूनानियों ने ऑक्सस किया रा. चं. शु। पाठ है। मल्लिनाथ को भी 'सिन्धु' पाठ खटका था इसी से उन्हें अपनी टीका में 'सिन्धु' को काश्मीर की एक नदी लिखना पड़ा। पर दक्षिण पारस से उत्तर जाने पर एक बार काश्मीर के उत्तर पहुँच जाना ठीक नहीं जँचता। इससे 'वंक्षु' पाठ ही ठीक जान पड़ता है। इसी वंक्षु को यूनानियों ने ऑक्सस लिखा है और आजकल आमू दरिया कहते हैं। ऑक्सस या आमू दरिया पाँच नदियों के मेल से बना है जिनमें अक्साब और बक्शाब मुख्य है। इनके बीच के प्रदेश को अरबवाले खत्ताल और फारसवाले हयताल कहते हैं। इसी हयताल शब्द के अनुसार रोमन लोग हूणों को इफथलाइट कहते थे क्योंकि जैसा पहले कहा जा चुका है हूण लोग पहले ऑक्सस या वंक्षु नद के किनारे ही आकर जमे थे। इसी प्रदेश से लगा हुआ पूरब की ओर बदखशाँ है जिसे ऑक्सस या वंक्षु नद घेरे हुए है। फारसी किताबों में इस प्रदेश की बड़ी महिमा लिखी है। यहाँ का लाल प्रसिद्ध था और कहते थे कि यहाँ की नदियाँ सोने की रेत बिछाती हैं। बदखशाँ और पूरब जाने पर हम वंक्षु नद के उद्गमों तक पहुँचते हैं जहाँ वक्शांब प्रदेश है जो काश्मीर की सीमा पर पड़ता है। पामीर के नीचे वंक्षु और यारखंड नदी के उद्गमों तथा काश्मीर के उत्तर गई हुई सिन्धु नदी की धारा के बीच बहुत संकीर्ण प्रदेश पड़ता है जिससे होकर पुराने समय में लोग तिब्बत और तुर्किस्तान की ओर जाते थे। वंक्षु या वक्शाब के उद्गमों तक जाने के लिए बलख होता हुआ रास्ता गया है। अस्तु, यदि कालिदास के ध्यान में कोई सड़क रही होगी तो यही बलख वाली जिससे होकर सिकंदर भी बलख में पहुँचा था। इस प्रकार कालिदास के अनुसार रघु बलख तक तो उसी रास्ते से गए होंगे जिस रास्ते सिकंदर गया। बलख से रघु पश्चिम की ओर न जाकर बदखशाँ होते हुए उत्तर पूर्व की ओर मुड़े होंगे और कुछ चलकर कम्बोज प्रदेश की सीमा पर पहुँचे होंगे। कालिदास के इस मार्ग से भारतवर्ष की उत्तर पश्चिम सीमा का आभास मिलता है जो पारदों के समय से लेकर ईसा की तीसरी क्या पाँचवीं छठीं शताब्दी तक समझी जाती थी। काम्बोजों को जीतकर रघु ने हिमालय की चढ़ाई आरंभ की। काश्मीर के पूर्व लद्दाख होते हुए तिब्बत जाने का पुराना मार्ग है। पर उक्त प्रदेश में उस समय दरद नामक म्लेच्छ बसते थे जिनका कोई उल्लेख कालिदास ने नहीं किया है। इससे जान पड़ता है कि कालिदास रघु को पूरब की ओर से किसी दूसरे मार्ग से ले गए हैं क्योंकि तिहत्तरवें श्लोक के अनुसार रघु की सेना ने गंगा के शीतल जलकण मिली हुई वायु से अपनी थकावट मिटाई थी। कैलाश के दिखाई पड़ने का भी उल्लेख है। इससे कालिदास का यही अभिप्राय जान पड़ता है कि रघु गंगोत्री और केदारनाथ के रास्ते हिमालय से उतरे। कालिदास के वर्णन से इतना तो स्पष्ट है कि उनके समय में हूण लोगवंक्षु या ऑक्सस नदी के उत्तरी तट पर बसे थे जो ईसा की चौथी और पाँचवीं शताब्दी में उनका प्रधन स्थान रहा। उस प्रदेश में हूण कब आए इस प्रश्न के साथ यह भी संशय हो सकता है कि संभव है हूणों के वहाँ बसने के पूर्व जो जाति वहाँ रहती हो उसे भारतवासी हूण कहते रहे हों। पर इसका कोई प्रमाण या आधार नहीं मिलता। ईसा से छह सौ वर्ष पहले चीन साम्राज्य के सात खण्ड हो गए- शू, चाओ, वेइ, हन, यन-चाओ, त्सी, और त्सीन। इनमें से उत्तरी राज्य यन-चाओ और त्सीन हयंग-नु के पड़ोसी थे। ईसवीं सन् से तीन सौ इक्कीस वर्ष पूर्व शेष छह राज्यों ने मिलकर त्सीन राज्य पर चढ़ाई की, पर त्सीन राज्य ने उन सबको परास्त किया और त्सीन राजवंश का शी-ह्नांग -टी ही सारे चीन का एकछत्र राजा हुआ । यह बड़ा प्रतापी राजा हुआ। इसने सामन्त राज्यों की व्यवस्था तोड़ दी और भिन्न-भिन्न प्रदेशों में अपनी ओर से शासक नियुक्त करके भेजे। राज्य भर में इसने बहुत सी नहरें और सड़कें बनवाईं तथा प्रजा की सुविधा के लिए और भी बड़े-बड़े काम किए। अपने राज्य में सब प्रकार से शांति स्थापित करके शी-ह्नांग-टी ने चीन के पुराने शत्रु हयंग-नु तातारों पर चढ़ाई की जिनके आक्रमणों से चीन के लोग तंग थे। उसने चीन के बिलकुल पास बसने वाले हयंग-नु लोगों का ध्वंस किया और जो बचे उन सबको भगाकर मंगोलिया प्रदेश में कर दिया। इस प्रकार शत्रुओं का दमन करके उसने चीन साम्राज्य की सीमा बहुत बढ़ाई। सबसे भारी काम तो उसने यह किया कि हयंग-नु तातारियों की रोक के लिए कहकहा दीवार पूरी कराई जो संसार के अद्भुत पदार्थों में है। इस दीवार का बनना ईसा से दो सौ चौदह वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था। पुरानी चाल के पंडित लोग सामन्त व्यवस्था के पक्ष में बहुत कुछ कहा करते थे और प्रमाण में प्राचीन इतिहासों के दृष्टान्त दिया करते थे। इस पर शी-ह्नांग-टी इतना बिगड़ा कि उसने अपने राज्य का सारा पुराना इतिहास नष्ट करा दिया। उसकी इस बर्बरता का बहुत कुछ प्रायश्चित उसके पुत्र ह्नेंग-टी ने किया जो भारतीय सम्राट् पुष्यमित्र और खारवेल तथा वाधीक देश के यवन राजा मिनांडर का समकालीन था। शी-ह्नांग-टी के राजत्वकाल के पिछले दिनों में हयंग-नु तातारों का राजा अपने पुत्र माओं-तुन द्वारा मार डाला गया। माओं-तुन बड़ा प्रतापी हुआ। उसने अपना राज्य जापान समुद्र से लेकर यूरोप में वोल्गा नदी के किनारे तक बढ़ाया। यहीं तक नहीं, उसके पिता के समय में उत्तर चीन का जितना भाग चीनियों ने निकाल लिया था उसने तीन लाख सेना लेकर उस पर फिर अपना अधिकार जमा लिया। पहले कहा जा चुका है कि शी-ह्नांग-टी के पीछे उसका पुत्र ह्नेंग-टी गद्दी पर बैठा जिसने विद्या और साहित्य की बहुत उन्नति की, बहुत से पुस्तकालय खोले और अपने पिता द्वारा पहुँची हुई हानि की बहुत कुछ पूर्ति की। उसके राज्य में चारों ओर सुख शांति थी। पर हयंग-नु लोगों के आक्रमण बन्द नहीं हुए थे इससे चीन सम्राट ने उनका उच्छेद अत्यन्त आवश्यक समझा। हयंग-नु लोगों के जब चीन पर सब आक्रमण व्यर्थ हुए और वे हर बार हटा दिए गए तब उन्होंने अपना क्रोध यू-ची लोगों पर निकाला जो कं-सू राज्य के पश्चिम में पड़ते थे। यू-ची लोग अपने स्थान से एकबारगी थियान-ज्ञन पर्वत के पार तुर्किस्तान और कैस्पियन सागर के बीच के प्रदेशों में भाग दिए गए। चीनी सम्राट ने अच्छा अवसर देख यूचियों से संधि का प्रस्ताव किया जिसमें बड़ी सफलता हुई। संधि का प्रस्ताव लेकर चंग-किन नामक जो राजदूत पश्चिम गया था उसे बलख तक जाना पड़ा था क्योंकि यूचियों का अधिकार उस समय बलख तक हो गया था। बलख तक पहुँचने पर उस चीनी राजदूत का ध्यान भारतवर्ष की ओर गया और बहुत से पेड़-पौधो और जन्तु तथा सभ्यता के बहुत से आचार व्यव्हार पश्चिम से चीन में गए। बू-टी के समय में हयंग-नु लोगों का बल टूट गया और पूर्वी तुर्किस्तान चीन साम्राज्य के अंतर्गत हुआ। फिर तो फारस और रोम तक से चीन का व्यापार स्थापित हो गया और व्यापारी बेधड़क एक देश से दूसरे देश में जाने लगे। ईसवीं सन् के आरंभ में चीन में हान वंश के हाथ से राज्य निकल गया। सन् अट्ठावन ई. के लगभग उसी वंश के राजा ने फिर शांति स्थापित की। उसी के पुत्र मिंग-टी के समय में अर्थात् सन् पैंसठ ईसवीं में बौद्ध धर्म भारत से चीन पहुँचा। इसी समय के लगभग प्रसिद्ध सेनापति पन्-चाओ तुर्किस्तान में शन्शन् के राजा के पास चीन का राजदूत होकर गया जिसके प्रभाव से शन्शन्, खुतन और काशगर के राज्य चीन साम्राज्य के आज्ञानुवर्ती हुए। इसी समय से समझना चाहिए कि हयंग-नु जाति चीन के उत्तर से सब दिन के लिए भगा दी गई। अपने स्थान से हटने पर हयंग-नु लोगों से सुग्धा देश पर अधिकार किया और अलान लोगों को परास्त करके उनके राजा को मार डाला। यहीं से उनके दल यूरोप और एशिया के कई भागों में बढ़ते गए और हूण के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह तो हुई चीन के उत्तर में बसने वाले हयंग-नु की बात। जो हयंग-नु दक्षिण में बसे थे वे सब सन् दो सौ पंद्रह ईसवीं में चीन सम्राट के अधीन हो गए। आगे चलकर थोड़े ही दिनों में जब परस्पर विरोध के कारण चीन की शक्ति उतनी न रही तब चौथी शताब्दी में हयंग-नु लोगों ने चीन पर फिर आक्रमण किया। इस बार वे हूण के नाम से जगत्प्रसिद्ध हो गए थे, भारत की सीमा से लेकर रोमन साम्राज्य की सीमा तक वे फैले थे। ऊपर के उद्धरण में फ्रिनी शब्द भ्रम से फानी के स्थान पर लिखा गया है, जिसका अर्थ अरण्यवासी होता है। हूणों के अरण्यवासी होने की बात गाथिक लोगों में भी प्रसिद्ध थी। गाथिक इतिहासकार कसिओडोरस के ये वाक्य और ग्रंथो में उध्दृत मिलते हैं। इस उदाहरण से पता चलता है कि गाथ लोग अरण्यवासी हूणों को हूण पिता और मग माता से उत्पन्न मानते थे। हयंग-नु लोगों को उस समय साधारण लोग वन-दैत्य कहते थे। पारसी लोग भी उन्हें देव ही समझते थे। प्राचीन यूनान और रोमन लोगों ने जिन्हें फानी लिखा है, वे ये हयंग-नु ही थे, इसका प्रमाण स्ट्रेबो के लेख से मिलता है। स्ट्रेबो के भूगोल के अनुसार मिनांडर ने ईसा से छः सौ वर्ष पूर्व अपना राज्य चीन की सीमा और फानी लोगों के देश तक बढ़ाया। यह पहले ही लिखा जा चुका है कि मिनांडर के समय में चीन का बादशाह ह्ने-टी था। अस्तु, आयोलोडोरस नामक वाधीकवासी यवन ने अपनी पार्थिका में जिस फानी राज्य का उल्लेख किया है वह हयंग-नु राज्य ही था, जिसका शासक उस समय परम प्रचंड माओन्तुन था। चीनियों के लेखों से तो इस बात का पूरा निश्चय हो जाता है। चीनी हयंग-नु लोगों को क्वै-फांग भी कहते थे। 'क्वै' शब्द का अर्थ है दैत्य या दानव। एक चीनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि 'यिन' वंश के लोग उन्हीं को क्वै फांग कहते थे जिन्हें पहले 'हान' वंश के लोग हयंग-नु कहते थे। प्राचीन चीनी इतिहासकार सी-म-चंग ने भी ऐसा ही लिखा है सी-म-चंग के अनुसार यव-शोन के समय में शोन-बे कहलाते थे। 'इन' वंश के समय में उनके देश को क्वै-फांट कहते थे। 'चाओ' के समय में वे हून-यून और 'हान' वंश के समय में हयंग-नु कहलाते थे। ऊपर के विवरणों से स्पष्ट है कि हयंग-नु लोगों को किसी समय चीनी लोग भी दैत्य दानव कहते थे और यह बात जनसाधारण के बीच फैलते-फैलते रोमन लोगों तक पहुँची। अस्तु, इसमें अब कोई संदेह नहीं रहा कि हयंग-नु और हूण को उनके पड़ोसी चीनी एक ही समझते थे। हूणों के मातृकुल पर विचार करने से यही प्रतीत होता है कि मग स्त्रियाँ जिनका ऊपर उल्लेख हुआ है जेटे जाति की थीं जो चीन के किनारे बसती थीं। यूनानी और रोमन लेखक हूणों को मसाजेटे जाति से निकले हुए मानते थे। अमिएनस मार्सेलिनस ने तो स्पष्ट लिखा है कि हूण लोग आलन लोगों से मिलते जुलते थे जो यूरोप के डोन नदी से लेकर सिन्धु नदी तक फैले थे और पहले मसाजेटे कहलाते थे। हयंग-नु लोगों द्वारा उनके पराजित होने के पहले चीनी उन्हें अनसाई या यनसाई कहते थे। मग स्त्रियों से जो हूणों की उत्पत्ति मानी जाती थी वह इस कारण कि मग स्त्रियाँ जादू-टोना करने में प्रसिद्ध थीं। ऐसी मायाविनी स्त्रियों से हूण जैसे दैत्यों को उत्पन्न मानना स्वाभाविक ही था। यह पहले ही कहा जा चुका है कि ओरोसियस के भूगोल में हूण-शक उत्तरकुरु के पास रहते थे। संस्कृत ग्रंथो में उत्तरकुरु जाति हिमालय के उस पार कही गई है। पुराणों में तो उत्तरकुरु विलक्षण रंगरूप के और अत्यंत दीर्घजीवी लिखे गए हैं। प्राचीन यूनानियों ने भी उनका ऐसा ही पौराणिक वर्णन किया है। पर महाभारत में उनका मनुष्य ही के रूप में वर्णन हुआ है और लिखा है कि पांडु के समय में उनके यहाँ एक स्त्री कई पति करती थी। और अधिक प्राचीन ग्रंथो की ओर जाते हैं तो उनमें उनका सीधा-सादा उल्लेख मिलता है। ऐतरेय ब्राह्मण ने लिखा है कि वे हिमालय के उस पार बसते थे। उत्तरकुरु यद्यपि देवभूमि कहा गया है पर यह भी लिखा गया है कि वशिष्ठ सत्यहव्य का शिष्य ज्ञानन्तपि अत्याराति उसे जीतना चाहता था। इसे हम किस्सा कहानी नहीं मान सकते। उत्तरकुरु के साथ ही हमें उत्तरमद्रों का उल्लेख मिलता है जिनका बहुत कुछ संबंध काम्बोजों से था। काम्बोज औपमन्यव मद्रगार का शिष्य कहा गया है। शतपथ ब्राह्मण में एक आख्यान है कि कुरुपांचाल ब्राह्मणों और उत्तरीय ब्राह्मणों के बीच झगड़ा हुआ जिसमें उत्तरी ब्राह्मणों की विजय हुई। आख्यान में यह भी है कि उत्तरी ब्राह्मणों की भाषा कुरुपांचालों की भाषा से मिलती जुलती थी। उनकी भाषा बहुत विशुद्ध मानी जाती थी। और बहुत से ब्राह्मण अध्ययन के लिए उत्तराखंड में जाते थे। बौद्ध कथाओं से भी यह जाना जाता है कि गांधार बहुत दिनों तक प्रधन विद्यापीठ रहा जहाँ बड़े-बड़े राजकुमार राजनीति आदि की शिक्षा के लिए जाते थे। बुद्ध के समय में कोशल के राजा प्रसेन्जित शिक्षा के लिए तक्षशिला गए थे। सिंहलद्वीप के इतिहास ग्रंथ महावंश में लिखा है कि जिस समय महास्तूप बन रहा था उस समय कुछ श्रमण एक विशेष प्रकार का पत्थर लाने के लिए उत्तरकुरु भेजे गए थे। अस्तु यदि हम उत्तरकुरु टारिम के कछार के उस स्थान को मानें जो अब चीनी तुर्किस्तान कहलाता है तो असंगत न होगा। उत्तरकुरु को चीन और भारत सीमा पर तथा हयंग-नु के पास होना चाहिए। एक. Indian Antiquity में प्रकाशित प्रो. कृष्णस्वामी ऐयंगर एम. ए. के लेख का आधार। |
नई दिल्ली, (आईएएनएस)। नौसेना का एक मानवरहित विमान (यूएवी) बंगाल की खाड़ी में समुदी अभ्यास से लौटते समय गुरुवार को विशाखापटनम के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दुर्घटनाग्रस्त पायलट रहित विमान सर्चर एमके द्वितीय एक सामरिक मानवरहित विमान था। इसका इस्तेमाल निगरानी, टोह लेने, लक्ष्य हासिल करने और नुकसान के आकलन के लिए होता था। नौसेना के एक पवक्ता ने बताया, "दुर्घटना में किसी जान अथवा माल के नुकसान की सूचना नहीं है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई इसका पता लगाने के लिए जांच का आदेश दे दिया गया है। उन्होंने बताया, "यूएवी विशाखापटनम स्थित अपने सैन्य ठिकाने पर लौट रहा था तभी वह डॉल्फिन हिल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
| नई दिल्ली, । नौसेना का एक मानवरहित विमान बंगाल की खाड़ी में समुदी अभ्यास से लौटते समय गुरुवार को विशाखापटनम के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दुर्घटनाग्रस्त पायलट रहित विमान सर्चर एमके द्वितीय एक सामरिक मानवरहित विमान था। इसका इस्तेमाल निगरानी, टोह लेने, लक्ष्य हासिल करने और नुकसान के आकलन के लिए होता था। नौसेना के एक पवक्ता ने बताया, "दुर्घटना में किसी जान अथवा माल के नुकसान की सूचना नहीं है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई इसका पता लगाने के लिए जांच का आदेश दे दिया गया है। उन्होंने बताया, "यूएवी विशाखापटनम स्थित अपने सैन्य ठिकाने पर लौट रहा था तभी वह डॉल्फिन हिल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। |
jaipur, 23 जून . Chief Minister Ashok Gehlot ने कहा कि State government जनभावना के अनुरूप सभी वर्गों के विकास के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है. Rajasthan चहुंमुखी विकास के कारण देशभर में मॉडल स्टेट बनकर उभरा है. उन्होंने कहा कि राज्य की अनूठी योजनाओं की देशभर में चर्चा है. कई योजनाएं ऐसी हैं जो Rajasthan के अलावा देश के किसी भी राज्य में नहीं है. उन्होंने कहा कि State government का ध्येय हर जरूरतमंद व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदेशभर में महंगाई राहत कैंपों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें 10 महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ देकर लोगों को महंगाई से राहत दी जा रही है.
गहलोत Friday को Bharatpur की कुम्हेर तहसील के सैंत गांव में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि डीग को जिला बनाने से क्षेत्र में प्रशासनिक इकाइयां मजबूत होंगी और लोगों को अपने कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. Chief Minister ने कहा कि हम पूर्वी Rajasthan नहर परियोजना (ईआरसीपी) के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं. यह परियोजना Bharatpur समेत 13 जिलों में पेयजल एवं सिंचाई जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को वादा निभाते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना चाहिए.
Bharatpur में Chief Minister ने 16. 30 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास किया. इनमें 2 करोड़ रुपये की लागत से राजपुरा से पपरेरा सड़क निर्माण, 2. 25 करोड़ की लागत से सत्यनगर से जरहरा वायां विजयनगर सड़क निर्माण, 2. 25 करोड़ की लागत से पाहुआ से सिरसई सड़क निर्माण, कौंरेर (डीग) में 1. 43 करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण, आदिबद्री ग्राम पसोपा में 2. 64 करोड़ से अधिक की लागत से तप्त कुण्ड, गौशाला, चुग्गाघर, समाधि स्थल और भागवत स्थल का निर्माण कार्य, गांव पसोपा (डीग) में 2. 56 करोड़ से अधिक की लागत से पशुपति मन्दिर का निर्माण एवं गंगोत्री, यमुनोत्री, लक्ष्मण झूला, (आदिबद्रीनाथ) हर की पेडी मंदिर डीग का निर्माण कार्य, गांव पसोपा (डीग) में 3. 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पशुपतिनाथ मंदिर का विकास कार्य शामिल हैं.
इसी तरह, Bharatpur में 4. 78 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ. इनमें पैंघोर में 2 करोड़ रुपये की लागत से चामड माता मन्दिर विकास एवं सौन्दर्यीकरण, परिक्रमा मार्ग पूंछरी (डीग) में 1. 78 करोड़ की लागत से कर्व स्टोन, बोलार्ड एवं आयरन फैंसिंग का निर्माण कार्य, परिक्रमा मार्ग पूंछरी में एक करोड़ रुपये की लागत से गिरिराज तीर्थ क्षेत्र पूंछरी का विकास कार्य शामिल हैं.
इससे पूर्व, Chief Minister के सैंत पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने डीग कोे नवीन जिला बनाने के लिए Chief Minister का स्वागत एवं अभिनन्दन किया. इस अवसर पर Chief Minister ने महंगाई राहत केैंप का अवलोकन कर लाभार्थियों से बातचीत की. यहां उपस्थित कार्मिकों के प्रतिनिधिमंडल ने पुरानी पेंशन योजना के लिए Chief Minister का धन्यवाद ज्ञापित किया. कैंप में उपस्थित किसानों ने अलग कृषि बजट पेश करने, 2 हजार यूनिट निःशुल्क बिजली तथा तारबंदी जैसी योजनाओं के लिए Chief Minister का आभार जताया. Chief Minister ने कन्यादान योजना के तहत लाभार्थियों तथा स्वयं सहायता समूहों को चैक सौंपे एवं दिव्यांगजनों को Chief Minister दिव्यांग स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरित की.
कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेशचन्द मीणा, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह अवाना, Punjab के पूर्व उप Chief Minister सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा एवं विधायक वाजिब अली सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे.
| jaipur, तेईस जून . Chief Minister Ashok Gehlot ने कहा कि State government जनभावना के अनुरूप सभी वर्गों के विकास के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है. Rajasthan चहुंमुखी विकास के कारण देशभर में मॉडल स्टेट बनकर उभरा है. उन्होंने कहा कि राज्य की अनूठी योजनाओं की देशभर में चर्चा है. कई योजनाएं ऐसी हैं जो Rajasthan के अलावा देश के किसी भी राज्य में नहीं है. उन्होंने कहा कि State government का ध्येय हर जरूरतमंद व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदेशभर में महंगाई राहत कैंपों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें दस महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ देकर लोगों को महंगाई से राहत दी जा रही है. गहलोत Friday को Bharatpur की कुम्हेर तहसील के सैंत गांव में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि डीग को जिला बनाने से क्षेत्र में प्रशासनिक इकाइयां मजबूत होंगी और लोगों को अपने कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. Chief Minister ने कहा कि हम पूर्वी Rajasthan नहर परियोजना के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं. यह परियोजना Bharatpur समेत तेरह जिलों में पेयजल एवं सिंचाई जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को वादा निभाते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना चाहिए. Bharatpur में Chief Minister ने सोलह. तीस करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास किया. इनमें दो करोड़ रुपये की लागत से राजपुरा से पपरेरा सड़क निर्माण, दो. पच्चीस करोड़ की लागत से सत्यनगर से जरहरा वायां विजयनगर सड़क निर्माण, दो. पच्चीस करोड़ की लागत से पाहुआ से सिरसई सड़क निर्माण, कौंरेर में एक. तैंतालीस करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण, आदिबद्री ग्राम पसोपा में दो. चौंसठ करोड़ से अधिक की लागत से तप्त कुण्ड, गौशाला, चुग्गाघर, समाधि स्थल और भागवत स्थल का निर्माण कार्य, गांव पसोपा में दो. छप्पन करोड़ से अधिक की लागत से पशुपति मन्दिर का निर्माण एवं गंगोत्री, यमुनोत्री, लक्ष्मण झूला, हर की पेडी मंदिर डीग का निर्माण कार्य, गांव पसोपा में तीन. सोलह करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पशुपतिनाथ मंदिर का विकास कार्य शामिल हैं. इसी तरह, Bharatpur में चार. अठहत्तर करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ. इनमें पैंघोर में दो करोड़ रुपये की लागत से चामड माता मन्दिर विकास एवं सौन्दर्यीकरण, परिक्रमा मार्ग पूंछरी में एक. अठहत्तर करोड़ की लागत से कर्व स्टोन, बोलार्ड एवं आयरन फैंसिंग का निर्माण कार्य, परिक्रमा मार्ग पूंछरी में एक करोड़ रुपये की लागत से गिरिराज तीर्थ क्षेत्र पूंछरी का विकास कार्य शामिल हैं. इससे पूर्व, Chief Minister के सैंत पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने डीग कोे नवीन जिला बनाने के लिए Chief Minister का स्वागत एवं अभिनन्दन किया. इस अवसर पर Chief Minister ने महंगाई राहत केैंप का अवलोकन कर लाभार्थियों से बातचीत की. यहां उपस्थित कार्मिकों के प्रतिनिधिमंडल ने पुरानी पेंशन योजना के लिए Chief Minister का धन्यवाद ज्ञापित किया. कैंप में उपस्थित किसानों ने अलग कृषि बजट पेश करने, दो हजार यूनिट निःशुल्क बिजली तथा तारबंदी जैसी योजनाओं के लिए Chief Minister का आभार जताया. Chief Minister ने कन्यादान योजना के तहत लाभार्थियों तथा स्वयं सहायता समूहों को चैक सौंपे एवं दिव्यांगजनों को Chief Minister दिव्यांग स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरित की. कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेशचन्द मीणा, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह अवाना, Punjab के पूर्व उप Chief Minister सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा एवं विधायक वाजिब अली सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे. |
तारा सुतारिया ने (Tara Sutaria) अपना 26वां जन्मदिन फिल्म तड़प में अपने को-एक्टर अहान शेट्टी (Ahaan Shetty) के साथ अपनी फिल्म का प्रमोशन करते हुए मीडिया के साथ सेलिब्रेट किया।
बॉलीवुड एक्ट्रेस तारा सुतारिया (Tara Sutaria) 19 नवंबर 2021 को 26 साल की हो गई हैं। इस खास मौके को तारा ने फिल्म तड़प में अपने को-एक्टर अहान शेट्टी के साथ अपनी फिल्म का प्रमोशन करते हुए मीडिया के साथ सेलिब्रेट किया। इस खास मौके पर कई लोग मौजूद रहे और तारा को बर्थडे की बधाइयां दीं। उनके जन्मदिन पर तारा को कई सेलेब्स से भी बधाई मिली है। हमारे इस स्पेशल वीडियो में नजर डालिए तारा के बर्थडे सेलिब्रेशन पर, आपको बता दें कि तारा सुतारिया ने साल 2019 में आई फिल्म स्टूडेंट ऑफ द इयर 2 से अपने करियर की शुरुआत की थी।
| तारा सुतारिया ने अपना छब्बीसवां जन्मदिन फिल्म तड़प में अपने को-एक्टर अहान शेट्टी के साथ अपनी फिल्म का प्रमोशन करते हुए मीडिया के साथ सेलिब्रेट किया। बॉलीवुड एक्ट्रेस तारा सुतारिया उन्नीस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को छब्बीस साल की हो गई हैं। इस खास मौके को तारा ने फिल्म तड़प में अपने को-एक्टर अहान शेट्टी के साथ अपनी फिल्म का प्रमोशन करते हुए मीडिया के साथ सेलिब्रेट किया। इस खास मौके पर कई लोग मौजूद रहे और तारा को बर्थडे की बधाइयां दीं। उनके जन्मदिन पर तारा को कई सेलेब्स से भी बधाई मिली है। हमारे इस स्पेशल वीडियो में नजर डालिए तारा के बर्थडे सेलिब्रेशन पर, आपको बता दें कि तारा सुतारिया ने साल दो हज़ार उन्नीस में आई फिल्म स्टूडेंट ऑफ द इयर दो से अपने करियर की शुरुआत की थी। |
(ज्योतिरादित्य सिंधिया, फाइल फोटो) ( Image Source : PTI )
MP Politics News: पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamal Nath) की नई रणनीति से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के समर्थक विधायक और मंत्री टेंशन में आ गए हैं. कांग्रेस (Congress) की प्लानिंग सिंधिया समर्थक विधायकों को उन्हीं के गढ़ में घेरना है. हालांकि कांग्रेस की इस प्लानिंग का जवाब देने के लिए सिंधिया ने भी कमर कस ली है और वह अब दिल्ली से ज्यादा मध्य प्रदेश में समय दे रहे हैं.
कांग्रेस द्वारा बनाई गई प्लानिंग का श्री गणेश आज से होने जा रहा है. कमलनाथ गुरुवार को उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के विधानसभा क्षेत्र बदनावरी पहुंच रहे हैं, जहां वह सभा को संबोधित करेंगे. इधर राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निर्वाचन क्षेत्र दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें जीत का मंत्र देंगे. इधर अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक भी मंत्रियों के क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे. जल्द ही मंत्रियों के क्षेत्रों में कांग्रेस एक-एक जनसभा आयोजित करने जा रही है.
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जिन समर्थक विधायकों और मंत्रियों ने कांग्रेस सरकार से इस्तीफा दिया था उनमें प्रदुम्न सिंह तोमर, रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, रक्षा संत्राव भांडेर, जजपाल सिंह जज्जी, इमरत देवी, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, सुरेश धाकड़, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, ओपी एस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिरराज दंडोतिया, जसवंत जाटव, गोविंद राजपूत, हरददीप डंग, मुन्नालाल गोयल, ब्रिजेन्द्र यादव, मोहन सिंह राठौड़, बिसाहूलाल सिंह, ऐदल सिंह कसाना, मनोज चौधरी शामिल थे. इनमें छह मंत्री भी थे, जिनमें गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रधुम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी और महेन्द्र सिंह सिसोदिया शामिल हैं.
इधर कांग्रेस द्वारा बनाई गई प्लानिंग का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कमर कस ली है. सिंधिया अपना ज्यादा से ज्यादा समय मध्य प्रदेश को देने लगे हैं. लगभग सप्ताह में एक या दो बार सिंधिया का मध्य प्रदेश में किसी न किसी जिले में दौरा बना रहता है. सिंधिया अपने दौरे पर समर्थक विधायकों के लिए जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
| MP Politics News: पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की नई रणनीति से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायक और मंत्री टेंशन में आ गए हैं. कांग्रेस की प्लानिंग सिंधिया समर्थक विधायकों को उन्हीं के गढ़ में घेरना है. हालांकि कांग्रेस की इस प्लानिंग का जवाब देने के लिए सिंधिया ने भी कमर कस ली है और वह अब दिल्ली से ज्यादा मध्य प्रदेश में समय दे रहे हैं. कांग्रेस द्वारा बनाई गई प्लानिंग का श्री गणेश आज से होने जा रहा है. कमलनाथ गुरुवार को उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के विधानसभा क्षेत्र बदनावरी पहुंच रहे हैं, जहां वह सभा को संबोधित करेंगे. इधर राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निर्वाचन क्षेत्र दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें जीत का मंत्र देंगे. इधर अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक भी मंत्रियों के क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे. जल्द ही मंत्रियों के क्षेत्रों में कांग्रेस एक-एक जनसभा आयोजित करने जा रही है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जिन समर्थक विधायकों और मंत्रियों ने कांग्रेस सरकार से इस्तीफा दिया था उनमें प्रदुम्न सिंह तोमर, रघुराज कंसाना, कमलेश जाटव, रक्षा संत्राव भांडेर, जजपाल सिंह जज्जी, इमरत देवी, प्रभुराम चौधरी, तुलसी सिलावट, सुरेश धाकड़, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, ओपी एस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिरराज दंडोतिया, जसवंत जाटव, गोविंद राजपूत, हरददीप डंग, मुन्नालाल गोयल, ब्रिजेन्द्र यादव, मोहन सिंह राठौड़, बिसाहूलाल सिंह, ऐदल सिंह कसाना, मनोज चौधरी शामिल थे. इनमें छह मंत्री भी थे, जिनमें गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रधुम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी और महेन्द्र सिंह सिसोदिया शामिल हैं. इधर कांग्रेस द्वारा बनाई गई प्लानिंग का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कमर कस ली है. सिंधिया अपना ज्यादा से ज्यादा समय मध्य प्रदेश को देने लगे हैं. लगभग सप्ताह में एक या दो बार सिंधिया का मध्य प्रदेश में किसी न किसी जिले में दौरा बना रहता है. सिंधिया अपने दौरे पर समर्थक विधायकों के लिए जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. |
Navratri March 2020: चैत्र नवरात्रि 2020, 25 मार्च से शुरू होने जा रही है जिसका समापन 2 अप्रैल को होगा। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी मां के अलग-अलग नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि देवी मां इन दिनों अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। इस बार की नवरात्रि में कई शुभ योग भी बन रहे हैं। नवरात्रि में चार सर्वार्थसिद्धि योग, एक अमृतसिद्धि योग और एक रवियोग रहेगा। जिसमें पूजा करना काफी फलदायी माना जा रहा है।
चैत्र नवरात्रि के नौ दिन (Chaitra Navratri Date):
नवरात्रि का महत्वः साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं। दो गुप्त रूप से तो दो सार्वजनिक रूप से मनाई जाती है। जिनमें चैत्र और आश्विन माह में पड़ने वाली नवरात्रि को सभी लोग जानते हैं। गुप्त नवरात्रि आषाढ़ और माघ महीने में आती हैं। इन गुप्त नवरात्रि में देवी मां को प्रसन्न करने के लिए तांत्रिक साधना की जाती है। नवरात्रि का हर एक दिन शुभ माना जाता है। इन नौ दिनों में किसी भी तरह के विशेष कार्य बिना मुहूर्त के किये जा सकते हैं।
चैत्र नवरात्रि में इन कामों को करने से बचना चाहिएः नवरात्र की शुरुआत से लेकर समाप्ति तक नाखूनों को नहीं काटना चाहिए। इन दिनों में अपने बाल भी नहीं कटवाने चाहिए। संभव हो तो सिलाई-बुनाई का काम भी नहीं करने से बचें मुख्य तौर पर वो लोग जिन्होंने मां दुर्गा के व्रत रखें हैं। इस अवधि में किसी की निंदा भी नहीं करना चाहिए। महिलाओं का सम्मान करें। शराब, मांस, तंबाकू इत्यादि पदार्थों का सेवन नहीं करें। नौ दिनों तक यदि संभव है तो चमड़े से बनी वस्तुओं का भूलकर भी प्रयोग ना करें।
| Navratri March दो हज़ार बीस: चैत्र नवरात्रि दो हज़ार बीस, पच्चीस मार्च से शुरू होने जा रही है जिसका समापन दो अप्रैल को होगा। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी मां के अलग-अलग नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि देवी मां इन दिनों अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। इस बार की नवरात्रि में कई शुभ योग भी बन रहे हैं। नवरात्रि में चार सर्वार्थसिद्धि योग, एक अमृतसिद्धि योग और एक रवियोग रहेगा। जिसमें पूजा करना काफी फलदायी माना जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिन : नवरात्रि का महत्वः साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं। दो गुप्त रूप से तो दो सार्वजनिक रूप से मनाई जाती है। जिनमें चैत्र और आश्विन माह में पड़ने वाली नवरात्रि को सभी लोग जानते हैं। गुप्त नवरात्रि आषाढ़ और माघ महीने में आती हैं। इन गुप्त नवरात्रि में देवी मां को प्रसन्न करने के लिए तांत्रिक साधना की जाती है। नवरात्रि का हर एक दिन शुभ माना जाता है। इन नौ दिनों में किसी भी तरह के विशेष कार्य बिना मुहूर्त के किये जा सकते हैं। चैत्र नवरात्रि में इन कामों को करने से बचना चाहिएः नवरात्र की शुरुआत से लेकर समाप्ति तक नाखूनों को नहीं काटना चाहिए। इन दिनों में अपने बाल भी नहीं कटवाने चाहिए। संभव हो तो सिलाई-बुनाई का काम भी नहीं करने से बचें मुख्य तौर पर वो लोग जिन्होंने मां दुर्गा के व्रत रखें हैं। इस अवधि में किसी की निंदा भी नहीं करना चाहिए। महिलाओं का सम्मान करें। शराब, मांस, तंबाकू इत्यादि पदार्थों का सेवन नहीं करें। नौ दिनों तक यदि संभव है तो चमड़े से बनी वस्तुओं का भूलकर भी प्रयोग ना करें। |
जिम्मेदार नागरिकों से यह अनुरोध किया जाता है कि खुले में पाए गए कंकाल के बारे में नजदीकी वायुसेना इकाई तथा थाने को सचेत करें। फ्लाई पास्ट के मार्ग में आने वाले असुरक्षित क्षेत्रों में पालम, नजफगढ़ नाला, तिहाड़ जेल, युद्ध सामधि क्षेत्र तथा राष्ट्रपति भवन के आसपास के इलाके शामिल हैं।
पक्षियां कम ऊंचाई पर विमानों की उड़ान में जोखिम पैदा करती हैं। खुले में खाद्य सामग्री फेंके जाने से उन पर पक्षियां मंडराती हैं। भारतीय वायुसेना सुरक्षित फ्लाई पास्ट सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली तथा आसपास के नागरिकों से अनुरोध करती है कि वे खुले में खाद्य सामग्री तथा कचरा न डालें। खुले में पाए गए कंकाल के बारे में नजदीकी वायुसेना इकाई तथा थाने को सचेत करें।
| जिम्मेदार नागरिकों से यह अनुरोध किया जाता है कि खुले में पाए गए कंकाल के बारे में नजदीकी वायुसेना इकाई तथा थाने को सचेत करें। फ्लाई पास्ट के मार्ग में आने वाले असुरक्षित क्षेत्रों में पालम, नजफगढ़ नाला, तिहाड़ जेल, युद्ध सामधि क्षेत्र तथा राष्ट्रपति भवन के आसपास के इलाके शामिल हैं। पक्षियां कम ऊंचाई पर विमानों की उड़ान में जोखिम पैदा करती हैं। खुले में खाद्य सामग्री फेंके जाने से उन पर पक्षियां मंडराती हैं। भारतीय वायुसेना सुरक्षित फ्लाई पास्ट सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली तथा आसपास के नागरिकों से अनुरोध करती है कि वे खुले में खाद्य सामग्री तथा कचरा न डालें। खुले में पाए गए कंकाल के बारे में नजदीकी वायुसेना इकाई तथा थाने को सचेत करें। |
लगभग कोई औरत इस तरह के मैनिक्योर और पैडीक्योर के रूप में प्रक्रियाओं के बिना पूरा हो गया है। इस मामले में, निष्पक्ष सेक्स उनमें से आशा की जाती है, न केवल एक अच्छा परिणाम - सुंदर और सुथरे नाखून, लेकिन संभव के रूप में लंबे समय के लिए इसे सहेजें। इस क्षेत्र में एक वास्तविक खोज हाल ही में कील सेवाओं की दुनिया में दिखाई दिया है नाखून जेल चपड़ा।
चपड़ा - विशेष कील कोटिंग है कि पेंट और जैल का सबसे अच्छा गुण को जोड़ती है। यह मैनीक्योर की स्थिरता को बढ़ाने और अपने नाखूनों संतृप्त चमकीले रंग देने के लिए करना है। चपड़ा - इसका मतलब है, बिना गंध और चोटों की एक किस्म के लिए प्रतिरोधी है, यह लागू करने के लिए बहुत तेजी से और दूर करने के लिए आसान है। इसके अलावा, कोटिंग संरचना इस तरह के dibutyl phthalate, और formaldehyde राल, टोल्यूनि के रूप में हानिकारक अशुद्धियों, शामिल नहीं है।
चपड़ा नाखून और नाखून के लिए एक संकर जेल है। यह प्रसिद्ध सजावटी कोटिंग्स के सभी बेहतरीन सुविधाओं को जोड़ती है। वाहन के बारे में चपड़ा समीक्षा केवल सकारात्मक रहे हैं। इसकी मुख्य लाभ पर विचार करेंः
• पूर्व नाखून के आवेदन करने के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है;
• नाखून प्लेट घायल नहीं करता है;
• लागू करते हैं और जल्दी से सूख जाता है करने के लिए आसान;
• allergenic न करें और त्वचा की जलन का कारण नहीं है;
• नाखून के वजन में वृद्धि न करें;
• रंग की एक विस्तृत श्रृंखला;
• एक विशेष तरल के साथ को धोने के लिए बहुत ही आसान।
मंजिल पॉलिश चपड़ा एक महान टॉनिक biogelevoe stratifying और भंगुर नाखून के लिए इसका मतलब यह भी है। पेशेवर नाखून सेवा में इसका उपयोग कई यूरोपीय देशों में बहुत अच्छी तरह से काम किया है।
साथ रूस में उद्भव का मतलब है चपड़ा (समीक्षा यह पुष्टि) मैनीक्योर प्रक्रिया बहुत सरल है। इस कोटिंग का उपयोग करना, अपनी सही सूत्र के कारण नाखून आकर्षक बस कुछ ही मिनटों देने की अनुमति देता है।
मैनीक्योर लेपित सामान्य करने के लिए इसी तरह की चपड़ा। सबसे पहले, नाखून साफ, cuticles हटाने। नाखून प्लेट की सतह एक विशेष degreasing एजेंट के साथ व्यवहार किया जाता है, और फिर एक हिस्से में लेपित चपड़ा। सुखाने और एक पराबैंगनी दीपक, जिसके तहत दो मिनट के लिए आयोजित करने के अंगुलियों के उपयोग से नाखून पर कोटिंग के इलाज के लिए। क्योंकि यह स्नेहन निकल जाते हैं और समय की बचत होती तेजी से सूखने और, इस उपकरण का एक फायदा है। इसके बाद, दो परतों रंग वार्निश, जो फिर से तय हो गई है लागू होता है।
एक सार्वभौमिक मैनीक्योर इस्तेमाल किया जा सकता निष्पादित करने के लिए कोट चपड़ा। उसके बारे में जवाब भी महानः दो सप्ताह तक आयोजित करता है और समायोजन की आवश्यकता नहीं है। यह एक नियमित रूप से फ्रेंच मैनीक्योर के रूप में किया जाता है। नाखून सफाई और आधार टिंट पहले उत्पादन आवेदन किया। विज़ार्ड फिर एक "मुस्कान" ड्रॉ और सेक्विन या अन्य सजावटी तत्वों की सतह से सजाया गया।
, नाखून के आसपास छल्ली और त्वचा को छूने के लिए नहीं है क्योंकि यह बाद में लाह प्लेट छीलने का कारण बन सकता सुनिश्चित करने के लिए जब कोटिंग बहुत महत्वपूर्ण है।
समीक्षा चलता है कि के निर्माताओं के बीच जेल वार्निश सबसे प्रसिद्ध OPI (Axxium लाइन) और कर रहे हैं क्रिएटिव कील डिजाइन , अपनी लाइन चपड़ा, जिसका नाम सब जेल लाह के लिए नामों के बराबर, लंबी अवधि के कवर उपलब्ध कराने के साथ बन गया है। इन ब्रांडों - उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ बहुत लोकप्रिय, विश्वसनीय।
Axxium और चपड़ा नाखून के बारे में 14 दिनों पर या यहाँ तक कि लंबे समय तक रहते हैं। उन्होंने यह भी एक बहुत व्यापक रंग श्रेणी है जो सभी स्वाद के अनुरूप एक छाया चुनने की अनुमति देता है।
तथ्य यह है कि इस तरह के कवरेज के लिए कीमत बहुत अधिक है के बावजूद, यह मांग कम नहीं बन जाता है। बल्कि, त्रुटिहीन गुणवत्ता हर दिन अधिक प्रशंसकों को आकर्षित करती है। आज हम कई फैशनपरस्त देख सकते हैं, नाखून इस अद्भुत, बहुत प्रभावी साधन के साथ कवर किया जाता है।
| लगभग कोई औरत इस तरह के मैनिक्योर और पैडीक्योर के रूप में प्रक्रियाओं के बिना पूरा हो गया है। इस मामले में, निष्पक्ष सेक्स उनमें से आशा की जाती है, न केवल एक अच्छा परिणाम - सुंदर और सुथरे नाखून, लेकिन संभव के रूप में लंबे समय के लिए इसे सहेजें। इस क्षेत्र में एक वास्तविक खोज हाल ही में कील सेवाओं की दुनिया में दिखाई दिया है नाखून जेल चपड़ा। चपड़ा - विशेष कील कोटिंग है कि पेंट और जैल का सबसे अच्छा गुण को जोड़ती है। यह मैनीक्योर की स्थिरता को बढ़ाने और अपने नाखूनों संतृप्त चमकीले रंग देने के लिए करना है। चपड़ा - इसका मतलब है, बिना गंध और चोटों की एक किस्म के लिए प्रतिरोधी है, यह लागू करने के लिए बहुत तेजी से और दूर करने के लिए आसान है। इसके अलावा, कोटिंग संरचना इस तरह के dibutyl phthalate, और formaldehyde राल, टोल्यूनि के रूप में हानिकारक अशुद्धियों, शामिल नहीं है। चपड़ा नाखून और नाखून के लिए एक संकर जेल है। यह प्रसिद्ध सजावटी कोटिंग्स के सभी बेहतरीन सुविधाओं को जोड़ती है। वाहन के बारे में चपड़ा समीक्षा केवल सकारात्मक रहे हैं। इसकी मुख्य लाभ पर विचार करेंः • पूर्व नाखून के आवेदन करने के लिए विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है; • नाखून प्लेट घायल नहीं करता है; • लागू करते हैं और जल्दी से सूख जाता है करने के लिए आसान; • allergenic न करें और त्वचा की जलन का कारण नहीं है; • नाखून के वजन में वृद्धि न करें; • रंग की एक विस्तृत श्रृंखला; • एक विशेष तरल के साथ को धोने के लिए बहुत ही आसान। मंजिल पॉलिश चपड़ा एक महान टॉनिक biogelevoe stratifying और भंगुर नाखून के लिए इसका मतलब यह भी है। पेशेवर नाखून सेवा में इसका उपयोग कई यूरोपीय देशों में बहुत अच्छी तरह से काम किया है। साथ रूस में उद्भव का मतलब है चपड़ा मैनीक्योर प्रक्रिया बहुत सरल है। इस कोटिंग का उपयोग करना, अपनी सही सूत्र के कारण नाखून आकर्षक बस कुछ ही मिनटों देने की अनुमति देता है। मैनीक्योर लेपित सामान्य करने के लिए इसी तरह की चपड़ा। सबसे पहले, नाखून साफ, cuticles हटाने। नाखून प्लेट की सतह एक विशेष degreasing एजेंट के साथ व्यवहार किया जाता है, और फिर एक हिस्से में लेपित चपड़ा। सुखाने और एक पराबैंगनी दीपक, जिसके तहत दो मिनट के लिए आयोजित करने के अंगुलियों के उपयोग से नाखून पर कोटिंग के इलाज के लिए। क्योंकि यह स्नेहन निकल जाते हैं और समय की बचत होती तेजी से सूखने और, इस उपकरण का एक फायदा है। इसके बाद, दो परतों रंग वार्निश, जो फिर से तय हो गई है लागू होता है। एक सार्वभौमिक मैनीक्योर इस्तेमाल किया जा सकता निष्पादित करने के लिए कोट चपड़ा। उसके बारे में जवाब भी महानः दो सप्ताह तक आयोजित करता है और समायोजन की आवश्यकता नहीं है। यह एक नियमित रूप से फ्रेंच मैनीक्योर के रूप में किया जाता है। नाखून सफाई और आधार टिंट पहले उत्पादन आवेदन किया। विज़ार्ड फिर एक "मुस्कान" ड्रॉ और सेक्विन या अन्य सजावटी तत्वों की सतह से सजाया गया। , नाखून के आसपास छल्ली और त्वचा को छूने के लिए नहीं है क्योंकि यह बाद में लाह प्लेट छीलने का कारण बन सकता सुनिश्चित करने के लिए जब कोटिंग बहुत महत्वपूर्ण है। समीक्षा चलता है कि के निर्माताओं के बीच जेल वार्निश सबसे प्रसिद्ध OPI और कर रहे हैं क्रिएटिव कील डिजाइन , अपनी लाइन चपड़ा, जिसका नाम सब जेल लाह के लिए नामों के बराबर, लंबी अवधि के कवर उपलब्ध कराने के साथ बन गया है। इन ब्रांडों - उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ बहुत लोकप्रिय, विश्वसनीय। Axxium और चपड़ा नाखून के बारे में चौदह दिनों पर या यहाँ तक कि लंबे समय तक रहते हैं। उन्होंने यह भी एक बहुत व्यापक रंग श्रेणी है जो सभी स्वाद के अनुरूप एक छाया चुनने की अनुमति देता है। तथ्य यह है कि इस तरह के कवरेज के लिए कीमत बहुत अधिक है के बावजूद, यह मांग कम नहीं बन जाता है। बल्कि, त्रुटिहीन गुणवत्ता हर दिन अधिक प्रशंसकों को आकर्षित करती है। आज हम कई फैशनपरस्त देख सकते हैं, नाखून इस अद्भुत, बहुत प्रभावी साधन के साथ कवर किया जाता है। |
Kolhan University Form छात्र संघों ने इसके लिए आंदोलन भी किया था तथा कुलपति को ज्ञापन सौंपा भी था। अंतत कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी सेमेस्टर वन थ्री व छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा फार्म भरने का मौका दिया गया।
जमशेदपुर, जासं। कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी व पीजी सेमेस्टर वन, यूजी सेमेस्टर थ्री व छह का परीक्षा फार्म की तिथि निकालने के दौरान परीक्षा नियंत्रक की ओर से यह स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी हाल में निर्धारित समय सीमा के बाद फार्म भरने की तिथि को नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके लिए छात्रों को दो सप्ताह का समय भी दिया गया। अब विश्वविद्यालय अपनी बात पर अडिग नहीं रह पा रहा है। परीक्षा फार्म भरने की तिथियों के समाप्त होने के बाद एक बार फिर फार्म भरने की तिथियों का विस्तार दे दिया गया।
छात्र संघों ने इसके लिए आंदोलन भी किया था तथा कुलपति को ज्ञापन सौंपा भी था। अंततः कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी सेमेस्टर वन, थ्री व छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा फार्म भरने का मौका दिया गया। विद्यार्थी अपना 1000 रुपये विलंब शुल्क के साथ आगामी 30 जुलाई तक परीक्षा फार्म भर सकते हैं। इसके अलावा पीजी सेमेस्टर वन के विद्यार्थी भी 1000 रुपये विलंब शुल्क के साथ 20 जुलाई तक परीक्षा फार्म भर सकते हैं। मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति प्रो. डॉ. गंगाधर पांडा को मांग पत्र सौंपा था। जिसमें विद्यार्थियों को दोबारा मौका देने की बात कही गई थी।
छात्र प्रतिनिधियों ने कहा था कि इंटरनेट की समस्या कोल्हान के क्षेत्र में लगातार होती है। इसके कारण विद्यार्थियों को परीक्षा फार्म भरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई विद्यार्थी परीक्षा फार्म भरने से वंचित रह गए थे। विश्वविद्यालय की ओर से दोबारा मौका देने से विद्यार्थी आसानी से अपना परीक्षा फार्म भर सकते हैं। इधर, परीक्षा नियंत्रक डॉ अजय कुमार चौधरी ने कहा कि निर्धारित समय पर विद्यार्थी अपना परीक्षा फार्म भरे। छात्र प्रतिनिधियों के मांग के बाद सभी विद्यार्थियों को दोबारा मौका दिया गया है।
| Kolhan University Form छात्र संघों ने इसके लिए आंदोलन भी किया था तथा कुलपति को ज्ञापन सौंपा भी था। अंतत कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी सेमेस्टर वन थ्री व छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा फार्म भरने का मौका दिया गया। जमशेदपुर, जासं। कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी व पीजी सेमेस्टर वन, यूजी सेमेस्टर थ्री व छह का परीक्षा फार्म की तिथि निकालने के दौरान परीक्षा नियंत्रक की ओर से यह स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी हाल में निर्धारित समय सीमा के बाद फार्म भरने की तिथि को नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके लिए छात्रों को दो सप्ताह का समय भी दिया गया। अब विश्वविद्यालय अपनी बात पर अडिग नहीं रह पा रहा है। परीक्षा फार्म भरने की तिथियों के समाप्त होने के बाद एक बार फिर फार्म भरने की तिथियों का विस्तार दे दिया गया। छात्र संघों ने इसके लिए आंदोलन भी किया था तथा कुलपति को ज्ञापन सौंपा भी था। अंततः कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से यूजी सेमेस्टर वन, थ्री व छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा फार्म भरने का मौका दिया गया। विद्यार्थी अपना एक हज़ार रुपयापये विलंब शुल्क के साथ आगामी तीस जुलाई तक परीक्षा फार्म भर सकते हैं। इसके अलावा पीजी सेमेस्टर वन के विद्यार्थी भी एक हज़ार रुपयापये विलंब शुल्क के साथ बीस जुलाई तक परीक्षा फार्म भर सकते हैं। मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति प्रो. डॉ. गंगाधर पांडा को मांग पत्र सौंपा था। जिसमें विद्यार्थियों को दोबारा मौका देने की बात कही गई थी। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा था कि इंटरनेट की समस्या कोल्हान के क्षेत्र में लगातार होती है। इसके कारण विद्यार्थियों को परीक्षा फार्म भरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई विद्यार्थी परीक्षा फार्म भरने से वंचित रह गए थे। विश्वविद्यालय की ओर से दोबारा मौका देने से विद्यार्थी आसानी से अपना परीक्षा फार्म भर सकते हैं। इधर, परीक्षा नियंत्रक डॉ अजय कुमार चौधरी ने कहा कि निर्धारित समय पर विद्यार्थी अपना परीक्षा फार्म भरे। छात्र प्रतिनिधियों के मांग के बाद सभी विद्यार्थियों को दोबारा मौका दिया गया है। |
पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पाक ने रिहा करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों की वजह से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने शांति के लिए उठाए गए कदम के तहत गुरुवार को ऐलान किया कि भारतीय पायलट अभिनंदन को शुक्रवार को रिहा कर दिया जाएगा। इमरान के इस ऐलान के बाद कुछ पाकिस्तानी उन से नाराज नज़र आ रहे हैं। ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। ये वीडियो किसी पाकिस्तानी न्यूज़ चेंनल का है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक टीवी डिबेट में तीन पैनेलिस्ट बैठे हुए हैं। उन में से एक पैनेलिस्ट ने पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहन राखी है और वह शख्स जोर-जोर से चिल्ला रहा है और इमरान खान के इस फैसले की आलोचना कर रहा है।
पैनेलिस्ट ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस निर्णय पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा "इमरान किस लिए अपने आप को बेइज़्ज़त करा रहे हैं। भारत पूरी दुनिया में प्रोपेगेंडा कर रहा है कि पाकिस्तान ने सरेंडर कर दिया, पाकिस्तान डर गया, पाकिस्तान ने शिकस्त खा ली। किस किसिम की जिल्लत ये करा रहे हैं पाकिस्तान की? मैं थोड़ा भावुक हो रहा हूं लेकिन इसे हमें रोकना होगा। तुम भारत को ये आदमी वापस नहीं दे सकते। " बता दें कि भारत की ओर से बिना किसी शर्त के विंग कमांडर को रिहा करने की बात कही ग। जिसके कुछ समय बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शांति भावना के तहत भारतीय पायलट अभिनंदन की रिहाई का ऐलान कर दिया।
विंग कमांडर अभिनंदन आज वाघा बॉर्डर के जरिए भारत वापस आएंगे। कमांडर को लेने के लिए भारत सरकार का एक प्रतिनिधि मंडल जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान अभिनंदन को अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस को सौंपेगा या भारतीय अधिकारियों को। वायुसेना उप प्रमुख एयर वाइस मार्शल आर जी के कपूर के मुताबिक अभिनंदन जिस मिग 21 विमान को उड़ा रहे थे, वह हवाई संघर्ष के दौरान क्रैश हो गया था। उन्होंने कहा कि अभिनंदन सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे लेकिन उनका पैराशूट पाकिस्तान की ओर बढ़ गया और तब से पाकिस्तान में हैं। बता दें मंगलवार को भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान में जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविर को निशाना बनाया गया था जिसके बाद पाकिस्तानी विमानों ने भारतीय वायु सीमा का उल्लंघन किया और इसके बाद उत्पन्न घटनाक्रम के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
| पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पाक ने रिहा करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों की वजह से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने शांति के लिए उठाए गए कदम के तहत गुरुवार को ऐलान किया कि भारतीय पायलट अभिनंदन को शुक्रवार को रिहा कर दिया जाएगा। इमरान के इस ऐलान के बाद कुछ पाकिस्तानी उन से नाराज नज़र आ रहे हैं। ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। ये वीडियो किसी पाकिस्तानी न्यूज़ चेंनल का है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक टीवी डिबेट में तीन पैनेलिस्ट बैठे हुए हैं। उन में से एक पैनेलिस्ट ने पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहन राखी है और वह शख्स जोर-जोर से चिल्ला रहा है और इमरान खान के इस फैसले की आलोचना कर रहा है। पैनेलिस्ट ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के इस निर्णय पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा "इमरान किस लिए अपने आप को बेइज़्ज़त करा रहे हैं। भारत पूरी दुनिया में प्रोपेगेंडा कर रहा है कि पाकिस्तान ने सरेंडर कर दिया, पाकिस्तान डर गया, पाकिस्तान ने शिकस्त खा ली। किस किसिम की जिल्लत ये करा रहे हैं पाकिस्तान की? मैं थोड़ा भावुक हो रहा हूं लेकिन इसे हमें रोकना होगा। तुम भारत को ये आदमी वापस नहीं दे सकते। " बता दें कि भारत की ओर से बिना किसी शर्त के विंग कमांडर को रिहा करने की बात कही ग। जिसके कुछ समय बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शांति भावना के तहत भारतीय पायलट अभिनंदन की रिहाई का ऐलान कर दिया। विंग कमांडर अभिनंदन आज वाघा बॉर्डर के जरिए भारत वापस आएंगे। कमांडर को लेने के लिए भारत सरकार का एक प्रतिनिधि मंडल जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान अभिनंदन को अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस को सौंपेगा या भारतीय अधिकारियों को। वायुसेना उप प्रमुख एयर वाइस मार्शल आर जी के कपूर के मुताबिक अभिनंदन जिस मिग इक्कीस विमान को उड़ा रहे थे, वह हवाई संघर्ष के दौरान क्रैश हो गया था। उन्होंने कहा कि अभिनंदन सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे लेकिन उनका पैराशूट पाकिस्तान की ओर बढ़ गया और तब से पाकिस्तान में हैं। बता दें मंगलवार को भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान में जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविर को निशाना बनाया गया था जिसके बाद पाकिस्तानी विमानों ने भारतीय वायु सीमा का उल्लंघन किया और इसके बाद उत्पन्न घटनाक्रम के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। |
भाषा का इस्तेमाल सार्थक व मीठे संवाद के बजाय अभद्र बोल, बेतुके, विवादास्पद बयानों व कड़वे बोल के लिए किया जाए, तो कुछ बात नहीं बनती है। कुछ समय से यह देखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जाएगा कि नेताओं की जुबान से बेतुके विवादास्पद व कड़वे बोल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नेताओं को अपनी नहीं तो कम से कम अपनी कुर्सी की मर्यादा का तो ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि ऐसी वाणी से उनके व्यक्तित्व व कुर्सी की मर्यादा पर ही दाग नहीं लगता है, बल्कि देश का नाम भी बदनाम हो जाता है। देश के बच्चों व खासकर युवा वर्ग में गलत संदेश जाता है। सभी राजनीतिक नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने स्वार्थ के लिए अपनी वाणी पर काबू रखें क्योंकि जुबान से निकला शब्द और कमान से निकला तीर कभी वापस नहीं आते हैं।
अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
| भाषा का इस्तेमाल सार्थक व मीठे संवाद के बजाय अभद्र बोल, बेतुके, विवादास्पद बयानों व कड़वे बोल के लिए किया जाए, तो कुछ बात नहीं बनती है। कुछ समय से यह देखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जाएगा कि नेताओं की जुबान से बेतुके विवादास्पद व कड़वे बोल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नेताओं को अपनी नहीं तो कम से कम अपनी कुर्सी की मर्यादा का तो ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि ऐसी वाणी से उनके व्यक्तित्व व कुर्सी की मर्यादा पर ही दाग नहीं लगता है, बल्कि देश का नाम भी बदनाम हो जाता है। देश के बच्चों व खासकर युवा वर्ग में गलत संदेश जाता है। सभी राजनीतिक नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने स्वार्थ के लिए अपनी वाणी पर काबू रखें क्योंकि जुबान से निकला शब्द और कमान से निकला तीर कभी वापस नहीं आते हैं। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन! |
महामारी के दौर में देश के ऊपर ISIS अब खतरा बन कर मंडरा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की 24 पन्ने की एक रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS/ISIL के 180-200 सदस्य भारत में सक्रिय हैं।
नई दिल्ली। महामारी के दौर में देश के ऊपर ISIS अब खतरा बन कर मंडरा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की 24 पन्ने की एक रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS/ISIL के 180-200 सदस्य भारत में सक्रिय हैं। ये सभी सदस्य केरल और कर्नाटक राज्यों में फैले हुए हैं। आतंकी संगठन ISIS ने भारत में 'विलायाह ऑफ हिंद' प्रांत बनाए जाने का ऐलान किया है।
सामने आई संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में ये बताया गया है कि ISIS कोविड-19 महामारी के नाम पर लोगों से पैसे मांग रहा है और उनके बीच अपना प्रोपेगेंडा फैला रहा है। ऐसे में एक मैगजीन भी मिली है, जिसमें लॉकडाउन के दौरान प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की जा रही है।
इस मैगजीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों से कोविड कैरियर्स बनकर देश में वायरस फैलाने को कहा गया है। इसमें सभी मुस्लिमों से महामारी को अवसर बताते हुए कोरोना जेहाद फैलाने को कहा गया है।
साथ ही भारतीय जांच एजेंसियों को इस दिशा में काफी सफलता भी मिली है। उन्होंने केरल और कर्नाटक में ऐसे कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की है। ये सभी लोग टेलीग्राम के जरिए अपना संगठन चलाते हैं। इसके साथ ही फेसबुक पर भी फेक नाम के साथ एक्टिव हैं।
इस मामले में स्पेशल सेल और NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) खुरासान मॉड्यूल की जांच-पड़ताल कर रही है, जो मैगजीन के जरिए प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। इस मामले में अब तक पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनके 5 सदस्यों के नाम हैं- हिना बशीर बेग, जहानजेब, अब्दुल बाशित, सादिया अनवर शेख और नबेल।
लेकिन मार्च महीने में ISIS के एक मॉड्यूल का पर्दाफाश हो गया था। इसके बावजूद भारत विरोधी मैगजीन का प्रकाशन हो रहा है। इसके बाद तीसरे और छठे एडिशन की मैगजीन मिली है।
इसमें लॉकडाउन के दौरान प्रकाशित एक मैगजीन जिसका नाम मौलाना साद और जमात दिया गया है। उसमें मौलाना साद की कथित कोरोना फैलाने को लेकर प्रशंसा की गई है। वहीं दिल्ली हिंसा मामले में गिरफ्तार जामिया छात्रों को लेकर लोगों से बदला लेने की अपील की गई है।
साथ ही इस मैगजीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों को कोरोना महामारी का लाभ लेते हुए कोरोना कैरियर बनकर वायरस फैलाने को कहा गया है। इसके अलावा पुलिस के खिलाफ वुल्फ अटैक करने को लेकर भी प्रोत्साहित किया गया है। इस मैगजीन में पूरी तरह से देश में साजिश रचने की गंध आ रही है।
| महामारी के दौर में देश के ऊपर ISIS अब खतरा बन कर मंडरा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की चौबीस पन्ने की एक रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS/ISIL के एक सौ अस्सी-दो सौ सदस्य भारत में सक्रिय हैं। नई दिल्ली। महामारी के दौर में देश के ऊपर ISIS अब खतरा बन कर मंडरा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की चौबीस पन्ने की एक रिपोर्ट सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS/ISIL के एक सौ अस्सी-दो सौ सदस्य भारत में सक्रिय हैं। ये सभी सदस्य केरल और कर्नाटक राज्यों में फैले हुए हैं। आतंकी संगठन ISIS ने भारत में 'विलायाह ऑफ हिंद' प्रांत बनाए जाने का ऐलान किया है। सामने आई संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में ये बताया गया है कि ISIS कोविड-उन्नीस महामारी के नाम पर लोगों से पैसे मांग रहा है और उनके बीच अपना प्रोपेगेंडा फैला रहा है। ऐसे में एक मैगजीन भी मिली है, जिसमें लॉकडाउन के दौरान प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इस मैगजीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों से कोविड कैरियर्स बनकर देश में वायरस फैलाने को कहा गया है। इसमें सभी मुस्लिमों से महामारी को अवसर बताते हुए कोरोना जेहाद फैलाने को कहा गया है। साथ ही भारतीय जांच एजेंसियों को इस दिशा में काफी सफलता भी मिली है। उन्होंने केरल और कर्नाटक में ऐसे कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की है। ये सभी लोग टेलीग्राम के जरिए अपना संगठन चलाते हैं। इसके साथ ही फेसबुक पर भी फेक नाम के साथ एक्टिव हैं। इस मामले में स्पेशल सेल और NIA खुरासान मॉड्यूल की जांच-पड़ताल कर रही है, जो मैगजीन के जरिए प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। इस मामले में अब तक पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पाँच सदस्यों के नाम हैं- हिना बशीर बेग, जहानजेब, अब्दुल बाशित, सादिया अनवर शेख और नबेल। लेकिन मार्च महीने में ISIS के एक मॉड्यूल का पर्दाफाश हो गया था। इसके बावजूद भारत विरोधी मैगजीन का प्रकाशन हो रहा है। इसके बाद तीसरे और छठे एडिशन की मैगजीन मिली है। इसमें लॉकडाउन के दौरान प्रकाशित एक मैगजीन जिसका नाम मौलाना साद और जमात दिया गया है। उसमें मौलाना साद की कथित कोरोना फैलाने को लेकर प्रशंसा की गई है। वहीं दिल्ली हिंसा मामले में गिरफ्तार जामिया छात्रों को लेकर लोगों से बदला लेने की अपील की गई है। साथ ही इस मैगजीन में मुस्लिम समुदाय के लोगों को कोरोना महामारी का लाभ लेते हुए कोरोना कैरियर बनकर वायरस फैलाने को कहा गया है। इसके अलावा पुलिस के खिलाफ वुल्फ अटैक करने को लेकर भी प्रोत्साहित किया गया है। इस मैगजीन में पूरी तरह से देश में साजिश रचने की गंध आ रही है। |
आज का सिविल इंजीनियर क्या करता है? वह बैठकर कंकरीट के अंदर डालने के लिए लोहे को डिज़ाइन कर रहा होता है। इसको सिविल इंजीनियरिंग कहते हैं ।
इस्लाम और सय्याहत ( घूमने ) का इल्म क़ुरआन मजीद में इर्शाद फरमाया
ji ऐ मेरे
महबूब आप फ़रमा दीजिए कि तुम ज़मीन के अंदर सैर करो तुम देखो इस बात को किlajis is is झुठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ। तो यह सफ़र का हुक्म, यह घूमने का हुक्म यह चीज़ों से और तारीख़ से इबरत हासिल करने का हुक्म अल्लाह का क़ुरआन हमें दे रहा है। अगर इंसान अल्लाह तआला के इस हुक्म पर इबरत हासिल करने के लिए दुनिया का सफर करता है तो ठीक इस्लामी काम कर रहा है ।
इब्ने मौकुल एक मुसलमान घुमक्कड़ था। जिसने अठ्ठाइस साल तक पूरी दुनिया के अंदर सैर व सफर किया और उसके बाद उसने एक किताब तर्तीब दी । इस्लामी दुनिया आज उन्हें साहिबुल मसालिक वल मुमालिक वल मग़ादिर वल मुहालिक' कहती है । इसी तरह इब्ने बतूता ने भी पूरी दुनिया का सफर किया और सफ़र की यादगार 'सफ़रनामा' किताब की सूरत में छोड़ गया ।
मख़्लूक में गौर फिक्र इस्लामी हुक्म है
दुनिया की दूसरी चीज़ों को ले लीजिए । अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त इर्शाद फरमाते हैंः
اولم ينظروا في ملكوت السموات والارض وما خلق الله من شيء . *
खुत्बाते फ़क़ीर - 2 क्या ये नहीं देखते
में और जो चीजें
अल्लाह तआला ने पैदा की हैं। फरमायाls is shadi जाउ और आसमान में ग़ौर नहीं करते कि हमने उसको कैसे बुलन्दियाँ अता फरमायीं। खंड Jhaचा जाउके क्यों नहीं देखते कि अल्लाह तआला ने पहाड़ों को मेख़ों की तरह ज़मीन पर कैसे गाड़ दिया? Q is के और क्यों ग़ौर नहीं करते कि हमने ज़मीन को कैसे बिछा दिया । तो आज इंसान अल्लाह रब्बुलइज्ज़त की बनाई हुई काएनात में ग़ौर कर रहा होता है तो गोया वह अपने परवरदिगार के हुक्म पर लब्बैक कर रहा होता है ।
साइंस इस्लाम के तराज़ू पर
एक बात अच्छी तरह दिमाग़ में बिठाने की ज़रूरत है कि अगर कोई इंसान साइंस के पैमाने पर इस्लाम को तोलने में लग जाएगा तो नुक़सान उठाएगा । इसलिए कि साइंस की तहकीक़ तो बढ़ती चली जाएगी । इस्लाम को साइंस के तराज़ू पर तोलने की मिसाल तो ऐसी है जैसे कोई सुनार की तराज़ू पर ओहद पहाड़ तोलने लग जाए । क्या ऐसा हो सकता है कि सुनार की तराज़ू हो और कहा जाए कि इस पर हिमालय पहाड़ को तोल कर दिखा दे? कोई भी नहीं तोल सकेगा। इसी तरह साइंस की तराज़ू पर हम इस्लाम को नहीं तोल सकते। हाँ साइंस की हक़ीक़त को देखना हो तो कि यह अपनी आख़िरी मंज़िल तक पहुँच चुकी है या नहीं? तो उसे इस्लाम के तराज़ू पर तोलें क्योंकि हमें अल्लाह तआला ने क़ुरआन पाक में काएनात की सदाक़तें बता दीं हैं । आइए कुछ मिसालों पर गौर कीजिए :
पानी जिंदगी का लाज़मी हिस्सा है
आज हमें क़ुरआन मजीद में से बड़े साइंसी राज़ मिलते हैं। इंसान हैरान होता है कि चौदह सौ साल पहले जबकि साइंसी समझ इतनी नहीं थी तो कैसे क़ुरआन पाक में यह हिकमतें बयान कर दी गयीं? इससे क़ुरआन पाक की हक़ होना हमारे सामने आता है। मसलन फ़रमाया गया ये J5 shall jo ular 39 और हमने पानी से हर चीज़ को जिंदगी बख़्शी । आज साइंस भी यही कहती है कि वाकई अगर कहीं जिंदगी का तसव्वुर है तो पानी इसके लिए ज़रूरी चीज़ है और जहाँ पानी नहीं वहाँ जिंदगी का तसव्वुर भी मुमकिन नहीं, सुब्हान अल्लाह ।
ऐटम और मालिक्योल का तसव्वुर
क़ुरआन मजीद की रोशनी में
फिर एक जगह फ़रमाया
खुत्वाते फकीर.
गैब का जानने वाला है,
यानी वह रब्बुलइज्ज़त
لا يعزب عنه مثقال ذرة في السموات ولا في الارض
उससे छुप नहीं सकता कोई भी ज़र्रा जो आसमान व ज़मीन में Sg, Us on बल्कि इससे भी छोटा या इससे बड़ा। अच्छा आज के दौर में यह खुली हकीकृत है कि पूरी काएनात के माद्दे की बुनियादी इकाई ऐटम है। तो यह 'मिस्काला ज़र्रा' क्या है? वही ऐटम मिस्काला ज़र्रा कहलाएगा । और यह जो फ़रमाया कि तो फिर यहाँ असग़र
का क्या मतलब? इलैक्ट्रान, प्रोटान और न्युट्रान ये सब के सब
ऐटम के ज़रात से छोटे हैं। इसलिए ये असग़र कहलाएंगे। अगर शुआओं (Rays) की मिसाल ली जाए तो अल्फा, बेटा और गमा शुआऐं भी असग़र की मिसालें हैं और जो आगे फरमाया ४५ (51 अकबर से क्या मुराद लिया जा सकता है कि ऐटम मिलकर मालीक्योल बन जाते हैं या अकबर से शिहाब व साकिब (Metroits) भी हो सकते हैं जो दुनिया पर बरसते हैं । तो फ़रमाया कि ज़र्रे से छोटी या ज़र्रे से बड़ी कोई चीज़ भी ऐसी नहीं जो अल्लाह के इल्म से छुपी हुई हो । से
इंसान की हिफाज़त का क़ुदरती इंतिज़ाम
यह शिहाबे इस दुनिया के ऊपर बारिश की तरह बरस रहे हैं । के आप हैरान होंगे कि आज की साइंस कहती है कि ख़ला में हर वक़्त शिहाबों की गोला बारी हो रही है । यह शिहाबे आमतौर पर बहुत छोटे होते हैं। चंद मिलीमीटर भी हो सकते हैं। भला ये कितनी तेज़ी से सफर करते हैं? 150 किलोमीटर सेकेंड की रफ़्तार से मगर अल्लाह तआला ने ज़मीन से 80 किलोमीटर ऊपर फ़िज़ा का एक हिस्सा बना दिया कि यह आते हैं और वहाँ आकर बिखर जाते हैं। इंसान को पता ही नहीं कि कितनी ख़तरनाक चीज़ों से अल्लाह तआला उसकी हिफाज़त फ़रमा रहे हैं । 'जिनियस बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड' में लिखा है कि हर दिन में चार सौ टन वज़न शिहाबों की शकल में बरसाया जा रहा है ।
बंगला देश में मैटराइट्स (शिहाबों) की बारिश
एक दफा बंगला देश में शिहाबों की बारिश हुई । इस आजिज़ ने उन पत्थरों को एक अजाइब घर में अपनी आँखों से देखा।
उनका साइज़ काफी बड़ा था। मैं हैरान हुआ कि इतने बड़े शिहाबे भी आ सकते हैं। जी हाँ रशिया में एक शिहाब गिरा जिसने ज़मीन पर दो सौ मीटर की गहराई कर दी। यह कुछ बातें तो बीच में अर्ज कर दी गयी हैं ।
इस्लाम और साइंस के हिसाब से काएनात का अंजाम
साइंस कहती है कि एक बड़ा धमाका हुआ था जिसकी वजह से काएनात बनी और अल्लाह तआला फरमाते कि यह ज़मीन व आसमान अपने बनने से पहले 'दुख़ान' यानी धुँआ थे। धुँआ आसानी से समझने के लिए लफ़्ज़ है वरना तो आज के दौर में इसी को गैस कहते हैं । यह आसमान और ज़मीन गैस की शक्ल में थे कि अल्लाह तआला के हुक्म से बड़ा धमाका (Big Bang ) हुआ और काएनात बना दी गई ।
यहाँ पर एक मज़े की बात और बताता चलूँ कि आजकल न्यूयार्क के एक प्लानिटेरियम ( Palntarium) में एक साइंसी फ़िल्म (Documentary) दिखाई जा रही है जिसमें सात बड़े दिलचसा सवालों के जवाब समझाए गए हैं। उनमें से एक सवाल आज के उनवान के बारे में है कि इस काएनात का अंजाम क्या है? तो अमरीका के साइंसदान आज यह साबित कर रहे हैं कि काएनात फैलती चली जा रही है और एक वक्त ऐसा आएगा कि यह फैलाब रुकेगा और वह दोबारा सिकुड़ेगी जिसके नतीजे में एक और धमाका होगा उसका नाम उन्होंने रखा है 'दूसरा बड़ा धमाका' (Another Big Bang) । जबकि हम कयामत को दूसरा | आज का सिविल इंजीनियर क्या करता है? वह बैठकर कंकरीट के अंदर डालने के लिए लोहे को डिज़ाइन कर रहा होता है। इसको सिविल इंजीनियरिंग कहते हैं । इस्लाम और सय्याहत का इल्म क़ुरआन मजीद में इर्शाद फरमाया ji ऐ मेरे महबूब आप फ़रमा दीजिए कि तुम ज़मीन के अंदर सैर करो तुम देखो इस बात को किlajis is is झुठलाने वालों का क्या अंजाम हुआ। तो यह सफ़र का हुक्म, यह घूमने का हुक्म यह चीज़ों से और तारीख़ से इबरत हासिल करने का हुक्म अल्लाह का क़ुरआन हमें दे रहा है। अगर इंसान अल्लाह तआला के इस हुक्म पर इबरत हासिल करने के लिए दुनिया का सफर करता है तो ठीक इस्लामी काम कर रहा है । इब्ने मौकुल एक मुसलमान घुमक्कड़ था। जिसने अठ्ठाइस साल तक पूरी दुनिया के अंदर सैर व सफर किया और उसके बाद उसने एक किताब तर्तीब दी । इस्लामी दुनिया आज उन्हें साहिबुल मसालिक वल मुमालिक वल मग़ादिर वल मुहालिक' कहती है । इसी तरह इब्ने बतूता ने भी पूरी दुनिया का सफर किया और सफ़र की यादगार 'सफ़रनामा' किताब की सूरत में छोड़ गया । मख़्लूक में गौर फिक्र इस्लामी हुक्म है दुनिया की दूसरी चीज़ों को ले लीजिए । अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त इर्शाद फरमाते हैंः اولم ينظروا في ملكوت السموات والارض وما خلق الله من شيء . * खुत्बाते फ़क़ीर - दो क्या ये नहीं देखते में और जो चीजें अल्लाह तआला ने पैदा की हैं। फरमायाls is shadi जाउ और आसमान में ग़ौर नहीं करते कि हमने उसको कैसे बुलन्दियाँ अता फरमायीं। खंड Jhaचा जाउके क्यों नहीं देखते कि अल्लाह तआला ने पहाड़ों को मेख़ों की तरह ज़मीन पर कैसे गाड़ दिया? Q is के और क्यों ग़ौर नहीं करते कि हमने ज़मीन को कैसे बिछा दिया । तो आज इंसान अल्लाह रब्बुलइज्ज़त की बनाई हुई काएनात में ग़ौर कर रहा होता है तो गोया वह अपने परवरदिगार के हुक्म पर लब्बैक कर रहा होता है । साइंस इस्लाम के तराज़ू पर एक बात अच्छी तरह दिमाग़ में बिठाने की ज़रूरत है कि अगर कोई इंसान साइंस के पैमाने पर इस्लाम को तोलने में लग जाएगा तो नुक़सान उठाएगा । इसलिए कि साइंस की तहकीक़ तो बढ़ती चली जाएगी । इस्लाम को साइंस के तराज़ू पर तोलने की मिसाल तो ऐसी है जैसे कोई सुनार की तराज़ू पर ओहद पहाड़ तोलने लग जाए । क्या ऐसा हो सकता है कि सुनार की तराज़ू हो और कहा जाए कि इस पर हिमालय पहाड़ को तोल कर दिखा दे? कोई भी नहीं तोल सकेगा। इसी तरह साइंस की तराज़ू पर हम इस्लाम को नहीं तोल सकते। हाँ साइंस की हक़ीक़त को देखना हो तो कि यह अपनी आख़िरी मंज़िल तक पहुँच चुकी है या नहीं? तो उसे इस्लाम के तराज़ू पर तोलें क्योंकि हमें अल्लाह तआला ने क़ुरआन पाक में काएनात की सदाक़तें बता दीं हैं । आइए कुछ मिसालों पर गौर कीजिए : पानी जिंदगी का लाज़मी हिस्सा है आज हमें क़ुरआन मजीद में से बड़े साइंसी राज़ मिलते हैं। इंसान हैरान होता है कि चौदह सौ साल पहले जबकि साइंसी समझ इतनी नहीं थी तो कैसे क़ुरआन पाक में यह हिकमतें बयान कर दी गयीं? इससे क़ुरआन पाक की हक़ होना हमारे सामने आता है। मसलन फ़रमाया गया ये Jपाँच shall jo ular उनतालीस और हमने पानी से हर चीज़ को जिंदगी बख़्शी । आज साइंस भी यही कहती है कि वाकई अगर कहीं जिंदगी का तसव्वुर है तो पानी इसके लिए ज़रूरी चीज़ है और जहाँ पानी नहीं वहाँ जिंदगी का तसव्वुर भी मुमकिन नहीं, सुब्हान अल्लाह । ऐटम और मालिक्योल का तसव्वुर क़ुरआन मजीद की रोशनी में फिर एक जगह फ़रमाया खुत्वाते फकीर. गैब का जानने वाला है, यानी वह रब्बुलइज्ज़त لا يعزب عنه مثقال ذرة في السموات ولا في الارض उससे छुप नहीं सकता कोई भी ज़र्रा जो आसमान व ज़मीन में Sg, Us on बल्कि इससे भी छोटा या इससे बड़ा। अच्छा आज के दौर में यह खुली हकीकृत है कि पूरी काएनात के माद्दे की बुनियादी इकाई ऐटम है। तो यह 'मिस्काला ज़र्रा' क्या है? वही ऐटम मिस्काला ज़र्रा कहलाएगा । और यह जो फ़रमाया कि तो फिर यहाँ असग़र का क्या मतलब? इलैक्ट्रान, प्रोटान और न्युट्रान ये सब के सब ऐटम के ज़रात से छोटे हैं। इसलिए ये असग़र कहलाएंगे। अगर शुआओं की मिसाल ली जाए तो अल्फा, बेटा और गमा शुआऐं भी असग़र की मिसालें हैं और जो आगे फरमाया पैंतालीस भी हो सकते हैं जो दुनिया पर बरसते हैं । तो फ़रमाया कि ज़र्रे से छोटी या ज़र्रे से बड़ी कोई चीज़ भी ऐसी नहीं जो अल्लाह के इल्म से छुपी हुई हो । से इंसान की हिफाज़त का क़ुदरती इंतिज़ाम यह शिहाबे इस दुनिया के ऊपर बारिश की तरह बरस रहे हैं । के आप हैरान होंगे कि आज की साइंस कहती है कि ख़ला में हर वक़्त शिहाबों की गोला बारी हो रही है । यह शिहाबे आमतौर पर बहुत छोटे होते हैं। चंद मिलीमीटर भी हो सकते हैं। भला ये कितनी तेज़ी से सफर करते हैं? एक सौ पचास किलोग्राममीटर सेकेंड की रफ़्तार से मगर अल्लाह तआला ने ज़मीन से अस्सी किलोग्राममीटर ऊपर फ़िज़ा का एक हिस्सा बना दिया कि यह आते हैं और वहाँ आकर बिखर जाते हैं। इंसान को पता ही नहीं कि कितनी ख़तरनाक चीज़ों से अल्लाह तआला उसकी हिफाज़त फ़रमा रहे हैं । 'जिनियस बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड' में लिखा है कि हर दिन में चार सौ टन वज़न शिहाबों की शकल में बरसाया जा रहा है । बंगला देश में मैटराइट्स की बारिश एक दफा बंगला देश में शिहाबों की बारिश हुई । इस आजिज़ ने उन पत्थरों को एक अजाइब घर में अपनी आँखों से देखा। उनका साइज़ काफी बड़ा था। मैं हैरान हुआ कि इतने बड़े शिहाबे भी आ सकते हैं। जी हाँ रशिया में एक शिहाब गिरा जिसने ज़मीन पर दो सौ मीटर की गहराई कर दी। यह कुछ बातें तो बीच में अर्ज कर दी गयी हैं । इस्लाम और साइंस के हिसाब से काएनात का अंजाम साइंस कहती है कि एक बड़ा धमाका हुआ था जिसकी वजह से काएनात बनी और अल्लाह तआला फरमाते कि यह ज़मीन व आसमान अपने बनने से पहले 'दुख़ान' यानी धुँआ थे। धुँआ आसानी से समझने के लिए लफ़्ज़ है वरना तो आज के दौर में इसी को गैस कहते हैं । यह आसमान और ज़मीन गैस की शक्ल में थे कि अल्लाह तआला के हुक्म से बड़ा धमाका हुआ और काएनात बना दी गई । यहाँ पर एक मज़े की बात और बताता चलूँ कि आजकल न्यूयार्क के एक प्लानिटेरियम में एक साइंसी फ़िल्म दिखाई जा रही है जिसमें सात बड़े दिलचसा सवालों के जवाब समझाए गए हैं। उनमें से एक सवाल आज के उनवान के बारे में है कि इस काएनात का अंजाम क्या है? तो अमरीका के साइंसदान आज यह साबित कर रहे हैं कि काएनात फैलती चली जा रही है और एक वक्त ऐसा आएगा कि यह फैलाब रुकेगा और वह दोबारा सिकुड़ेगी जिसके नतीजे में एक और धमाका होगा उसका नाम उन्होंने रखा है 'दूसरा बड़ा धमाका' । जबकि हम कयामत को दूसरा |
अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपनी और रणबीर कपूर की शादी की अफवाहों के बीच स्पष्ट कर दिया है कि उनके प्रशंसकों व शुभचिंतकों को उनकी शादी के लिए इंतजार करना पड़ेगा।ऐसी खबरें हैं कि आलिया अभिनेता रणबीर कपूर के साथ 2019 में शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। जबकि आलिया ने कहा कि अभी लोगों को इंतजार करना पड़ेगा।
आलिया ने रविवार को लक्स गोल्डन रोज अवॉड्र्स 2018 के मौके पर मीडिया से कहा, "अगर लोग मेरी शादी का इंतजार कर रहे हैं तो उन्हें इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।" आलिया और रणबीर के बीच के संबंधों की चर्चा काफी समय से चल रही है। दोनों सोनम कपूर और आनंद आहूजा की शादी के रिसेप्शन में हाथ में हाथ डाले नजर आए थे। वे फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में साथ नजर आएंगे।
| अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपनी और रणबीर कपूर की शादी की अफवाहों के बीच स्पष्ट कर दिया है कि उनके प्रशंसकों व शुभचिंतकों को उनकी शादी के लिए इंतजार करना पड़ेगा।ऐसी खबरें हैं कि आलिया अभिनेता रणबीर कपूर के साथ दो हज़ार उन्नीस में शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। जबकि आलिया ने कहा कि अभी लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। आलिया ने रविवार को लक्स गोल्डन रोज अवॉड्र्स दो हज़ार अट्ठारह के मौके पर मीडिया से कहा, "अगर लोग मेरी शादी का इंतजार कर रहे हैं तो उन्हें इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।" आलिया और रणबीर के बीच के संबंधों की चर्चा काफी समय से चल रही है। दोनों सोनम कपूर और आनंद आहूजा की शादी के रिसेप्शन में हाथ में हाथ डाले नजर आए थे। वे फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में साथ नजर आएंगे। |
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में ओड़गी ब्लाक अंतर्गत ग्राम सौहार के पास मिले शवों की पहचान नाना और नातिन के रूप में हुई है। दोनों भैयाथान क्षेत्र के ग्राम चिकनी से मेहमानी कर अपने गांव जॉज लौट रहे थे। इसी दौरान महान नदी पार करते समय बाढ़ में बह गए थे। शिनाख्त के बाद रविवार को शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों गांवों को जोड़ने के लिए नदी पर पुल नहीं है। इसके चलते हर सल लोगों की मौतें होती हैं।
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| छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में ओड़गी ब्लाक अंतर्गत ग्राम सौहार के पास मिले शवों की पहचान नाना और नातिन के रूप में हुई है। दोनों भैयाथान क्षेत्र के ग्राम चिकनी से मेहमानी कर अपने गांव जॉज लौट रहे थे। इसी दौरान महान नदी पार करते समय बाढ़ में बह गए थे। शिनाख्त के बाद रविवार को शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों गांवों को जोड़ने के लिए नदी पर पुल नहीं है। इसके चलते हर सल लोगों की मौतें होती हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना का जो हेलीकाप्टर क्रैश हुआ है वो देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किया जाता है। ये देश का ऐसा हेलीकाप्टर है जो सियाचिन में किसी भी समय मदद भेज सकता है।
नई दिल्ली (आनलाइन डेस्क)। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को जो एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर क्रैश हुआ है उसको भारतीय सेना के लिए बेहद खास माना जाता है। इसके खास होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि ये एक मल्टीरोल हेलीकाप्टर है। इसका अर्थ है कि ये अकेला हेलीकाप्टर भारतीय सेना की कई जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस हेलीकाप्टर को हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। इसका नाम है ध्रुव। जैसा कि इसके नाम से ही पता चल जाता है कि ये वजन में हल्का है इसलिए ये कई तरह की खूबियों से लैस हो सकता है।
करीब 16 मीटर लंबाई वाले इस हेलीकाप्टर को नेवी, कोस्टगार्ड और एयरफोर्स में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ये सिविल आपरेशन में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कई खूबियों में से एक है कि ये किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है और दिन या रात में दुश्मन पर हमला भी कर सकता है। रेस्क्यू से लेकर अटैक तक, हर जगह इसका इस्तेमाल बखूबी किया जा सकता है। एचएएल ने इस एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर Dhruv को Mk-I (मार्क-1), Mk-II, Mk-III and Mk-IV के अलग-अलग वैरिएंट में तैयार किया है।
एचएएल इस तरह के अब तक करीब 250 से अधिक हेलीकाप्टर तैयार कर चुका है। ये हेलीकाप्टर केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किए जा रहे हैं। भारतीय सेना को मार्च 2002 में पहली बार ध्रुव हेलीकाप्टर हासिल हुआ था। जून 2008 तक 76 और 2017 तक 227 हेलीकाप्टरों की डिलीवीरी की जा चुकी है। एयरफोर्स की सारंग टीम अपने करतब दिखाने के लिए इन्हीं हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल करती है। इस हेलीकाप्टर की खूबियों की वजह से ही वर्ष 2008 में इक्वाडोर की तरफ से पहली बार एचएएल को विदेशी आर्डर मिला था।
2006 में गुजरात में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान इस हेलीकाप्टर की मदद से 500 से अधिक लोगों को बचाया गया था। ध्रुव भारतीय सेना का वो हेलीकाप्टर है जो सियाचिन की बर्फ से ढकी चोटियों पर किसी भी मौसम में तैनात जवानों को उनकी जरूरत का हर सामान मुहैया करवाता है। वर्ष 2007 में इस हेलीकाप्टर की सियाचिन में तैनाती की औपचारिक घोषणा की गई थी। 27500 फीट की ऊंचाई पर खराब मौसम में भी उड़ान भर पाने की क्षमता वाला ये देश का सबसे ताकतवर हेलीकाप्टर है।
वर्ष 2007 में इस हेलीकाप्टर ने हाईएल्टीट्यूड टेस्ट पास किया था। इस हेलीकाप्टर को ताकत देने वाला इंजन शक्ति भी पूरी तरह देश में ही निर्मित है। इसमें लगे उन सिस्टम की बात की जाए जो इसको हाईटैक बनाते हैं तो इसमें जीपीएस के अलावा डापलर नेविगेशन सिस्टम, डिस्टेंस मेजरिंग इक्यूपमेंट, एयर स्पीड इंडीकेटर, आटोमैटिक डायरेक्शन फाइंडर, रेडियो एल्टिमीटर, वीएचएफ ओमइंडायरेक्टशपनल रेंजर एंड इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम है। इसमें बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए भी कई हाईटैक इक्यूपमेंट्स लगाए गए हैं।
इसमें लगाए जाने वाले हथियारों की बात करें तो इसमें 8 anti-armour missiles, 4 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल 4 rocket pod, THL 20 20mm गन, M621 कैनन, एंटी टैंक मिसाइल नाग और एंटी शिप मिसाइल तक लगाई जा सकती है।
| अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना का जो हेलीकाप्टर क्रैश हुआ है वो देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किया जाता है। ये देश का ऐसा हेलीकाप्टर है जो सियाचिन में किसी भी समय मदद भेज सकता है। नई दिल्ली । अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को जो एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर क्रैश हुआ है उसको भारतीय सेना के लिए बेहद खास माना जाता है। इसके खास होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि ये एक मल्टीरोल हेलीकाप्टर है। इसका अर्थ है कि ये अकेला हेलीकाप्टर भारतीय सेना की कई जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस हेलीकाप्टर को हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। इसका नाम है ध्रुव। जैसा कि इसके नाम से ही पता चल जाता है कि ये वजन में हल्का है इसलिए ये कई तरह की खूबियों से लैस हो सकता है। करीब सोलह मीटर लंबाई वाले इस हेलीकाप्टर को नेवी, कोस्टगार्ड और एयरफोर्स में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ये सिविल आपरेशन में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कई खूबियों में से एक है कि ये किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है और दिन या रात में दुश्मन पर हमला भी कर सकता है। रेस्क्यू से लेकर अटैक तक, हर जगह इसका इस्तेमाल बखूबी किया जा सकता है। एचएएल ने इस एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर Dhruv को Mk-I , Mk-II, Mk-III and Mk-IV के अलग-अलग वैरिएंट में तैयार किया है। एचएएल इस तरह के अब तक करीब दो सौ पचास से अधिक हेलीकाप्टर तैयार कर चुका है। ये हेलीकाप्टर केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किए जा रहे हैं। भारतीय सेना को मार्च दो हज़ार दो में पहली बार ध्रुव हेलीकाप्टर हासिल हुआ था। जून दो हज़ार आठ तक छिहत्तर और दो हज़ार सत्रह तक दो सौ सत्ताईस हेलीकाप्टरों की डिलीवीरी की जा चुकी है। एयरफोर्स की सारंग टीम अपने करतब दिखाने के लिए इन्हीं हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल करती है। इस हेलीकाप्टर की खूबियों की वजह से ही वर्ष दो हज़ार आठ में इक्वाडोर की तरफ से पहली बार एचएएल को विदेशी आर्डर मिला था। दो हज़ार छः में गुजरात में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान इस हेलीकाप्टर की मदद से पाँच सौ से अधिक लोगों को बचाया गया था। ध्रुव भारतीय सेना का वो हेलीकाप्टर है जो सियाचिन की बर्फ से ढकी चोटियों पर किसी भी मौसम में तैनात जवानों को उनकी जरूरत का हर सामान मुहैया करवाता है। वर्ष दो हज़ार सात में इस हेलीकाप्टर की सियाचिन में तैनाती की औपचारिक घोषणा की गई थी। सत्ताईस हज़ार पाँच सौ फीट की ऊंचाई पर खराब मौसम में भी उड़ान भर पाने की क्षमता वाला ये देश का सबसे ताकतवर हेलीकाप्टर है। वर्ष दो हज़ार सात में इस हेलीकाप्टर ने हाईएल्टीट्यूड टेस्ट पास किया था। इस हेलीकाप्टर को ताकत देने वाला इंजन शक्ति भी पूरी तरह देश में ही निर्मित है। इसमें लगे उन सिस्टम की बात की जाए जो इसको हाईटैक बनाते हैं तो इसमें जीपीएस के अलावा डापलर नेविगेशन सिस्टम, डिस्टेंस मेजरिंग इक्यूपमेंट, एयर स्पीड इंडीकेटर, आटोमैटिक डायरेक्शन फाइंडर, रेडियो एल्टिमीटर, वीएचएफ ओमइंडायरेक्टशपनल रेंजर एंड इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम है। इसमें बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए भी कई हाईटैक इक्यूपमेंट्स लगाए गए हैं। इसमें लगाए जाने वाले हथियारों की बात करें तो इसमें आठ anti-armour missiles, चार हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल चार rocket pod, THL बीस बीस मिलीमीटर गन, Mछः सौ इक्कीस कैनन, एंटी टैंक मिसाइल नाग और एंटी शिप मिसाइल तक लगाई जा सकती है। |
इटली कोकीन मिला समुद्र मेंः 2 टन कोकीन पूर्वी सिसिली, इटली के समुद्र में तैरता हुआ मिला। बाजार के हिसाब से 2 टन कोकीन की कीमत करीब 440 मिलियन यूरो (36 अरब रुपए) है। कोकीन को इतालवी सीमा शुल्क पुलिस अधिकारियों ने सोमवार (17 अप्रैल) को जब्त किया था।
इटली के स्थानीय अखबार गार्डिया डि फिनांजा ने एक बयान में कहा कि कोकीन करीब 70 वाटरप्रूफ पैकेट में पाया गया। पैकेट को काफी सावधानी से सील किया गया था। इसे मछुआरों के जालों की मदद से इकट्ठा किया गया था और चमकदार सिग्नलिंग उपकरणों से लैस किया गया था।
कोकीन के पैकेट की पैकेजिंग स्टाइल और उसमें लगे ट्रैकिंग सिस्टम से पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद पुलिस ने जांच की. साल 2021 में भी इटली की पुलिस ने समुद्र से 20 टन कोकीन जब्त किया था.
इटली की पुलिस को साल 2021 के दौरान ड्रग्स की जानकारी पर काबू पाने में कामयाबी मिली थी। इटली की एंटी ड्रग्स यूनिट ने पिछले साल जून 2022 के दौरान जारी आंकड़ों में इस संबंध में जानकारी दी थी। इसके साथ ही इटली के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साल 2021 में सबसे ज्यादा ड्रग्स पकड़ा गया है.
साल 2018 की तुलना में इटली में कोकीन का निर्यात पांच गुना बढ़ा है। इटली में 2018 में पुलिस ने 3. 6 टन कोकीन जब्त की थी। इटली की पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, ड्रग्स की सप्लाई के लिए इटली को मुख्य जरिया माना जाता है। यहां बाल्कन आपराधिक गिरोह मादक पदार्थों के कारोबार में सक्रिय हैं।
इटली में 2 टन कोकीन बरामद होने पर उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने ट्वीट कर बधाई दी और कहा कि इस असाधारण ऑपरेशन के लिए गार्डिया डी फिनान्ज़ा को बधाई. मैं ऐसी सभी अवैध गतिविधियों के खिलाफ हूं।
| इटली कोकीन मिला समुद्र मेंः दो टन कोकीन पूर्वी सिसिली, इटली के समुद्र में तैरता हुआ मिला। बाजार के हिसाब से दो टन कोकीन की कीमत करीब चार सौ चालीस मिलियन यूरो है। कोकीन को इतालवी सीमा शुल्क पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को जब्त किया था। इटली के स्थानीय अखबार गार्डिया डि फिनांजा ने एक बयान में कहा कि कोकीन करीब सत्तर वाटरप्रूफ पैकेट में पाया गया। पैकेट को काफी सावधानी से सील किया गया था। इसे मछुआरों के जालों की मदद से इकट्ठा किया गया था और चमकदार सिग्नलिंग उपकरणों से लैस किया गया था। कोकीन के पैकेट की पैकेजिंग स्टाइल और उसमें लगे ट्रैकिंग सिस्टम से पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद पुलिस ने जांच की. साल दो हज़ार इक्कीस में भी इटली की पुलिस ने समुद्र से बीस टन कोकीन जब्त किया था. इटली की पुलिस को साल दो हज़ार इक्कीस के दौरान ड्रग्स की जानकारी पर काबू पाने में कामयाबी मिली थी। इटली की एंटी ड्रग्स यूनिट ने पिछले साल जून दो हज़ार बाईस के दौरान जारी आंकड़ों में इस संबंध में जानकारी दी थी। इसके साथ ही इटली के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साल दो हज़ार इक्कीस में सबसे ज्यादा ड्रग्स पकड़ा गया है. साल दो हज़ार अट्ठारह की तुलना में इटली में कोकीन का निर्यात पांच गुना बढ़ा है। इटली में दो हज़ार अट्ठारह में पुलिस ने तीन. छः टन कोकीन जब्त की थी। इटली की पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, ड्रग्स की सप्लाई के लिए इटली को मुख्य जरिया माना जाता है। यहां बाल्कन आपराधिक गिरोह मादक पदार्थों के कारोबार में सक्रिय हैं। इटली में दो टन कोकीन बरामद होने पर उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने ट्वीट कर बधाई दी और कहा कि इस असाधारण ऑपरेशन के लिए गार्डिया डी फिनान्ज़ा को बधाई. मैं ऐसी सभी अवैध गतिविधियों के खिलाफ हूं। |
गृह मंत्रालय ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2020) को दो पन्ने की एडवायजरी जारी कर कहा कि जूम (zoom) ऐप सुरक्षित नहीं है और सरकारी अधिकारी आधिकारिक कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करें। गृह मंत्रालय के साइबर समन्वय केंद्र (साइकोर्ड) ने एक परामर्श में यह चेतावनी जारी की है। इससे पहले यह चेतावनी, कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) द्वारा जारी की गई थी। मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा आधिकारिक कार्यों के लिए इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल नहीं किया जाए।
कोरोना वायरस महामारी पर काबू के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान घर से काम करने वाले अधिकारियों के लिए जूम एक लोकप्रिय मंच बन गया। मंत्रालय ने कहा कि दस्तावेज में सर्ट-इन द्वारा पहले जारी परामर्श का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि जूम एक सुरक्षित मंच नहीं है। यह निर्देश उन लोगों की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं जो अब भी व्यक्तिगत मकसदों के लिए इस मंच का उपयोग करते हैं।
कोरोना वायरस से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए इन लिंक्स पर क्लिक करें । गृह मंत्रालय ने जारी की डिटेल गाइडलाइंस । क्या पालतू कुत्ता-बिल्ली से भी फैल सकता है कोरोना वायरस? । घर बैठे इस तरह बनाएं फेस मास्क । इन वेबसाइट और ऐप्स से पाएं कोरोना वायरस के सटीक आंकड़ों की जानकारी, दुनिया और भारत के हर राज्य की मिलेगी डिटेल । क्या गर्मी बढ़ते ही खत्म हो जाएगा कोरोना वायरस?
एक अधिकारी ने कहा कि कारोबारी हों या सरकारी अधिकारी इसका इस्तेमाल करने से बंचे। भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने पहले ही उपयोगकर्ताओं को इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप में लगाई जाने वाली सेंध को लेकर जागरूक किया था। पासवर्ड लीक होने और हैकर्स द्वारा वीडियो कॉल कांफ्रेंस के दौरान हाईजैक किए जाने की शिकायतों के बाद ये गाइडलाइन जारी की गई हैं। (एजेंसी इनपुट सहित)
| गृह मंत्रालय ने गुरुवार को दो पन्ने की एडवायजरी जारी कर कहा कि जूम ऐप सुरक्षित नहीं है और सरकारी अधिकारी आधिकारिक कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करें। गृह मंत्रालय के साइबर समन्वय केंद्र ने एक परामर्श में यह चेतावनी जारी की है। इससे पहले यह चेतावनी, कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा जारी की गई थी। मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा आधिकारिक कार्यों के लिए इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल नहीं किया जाए। कोरोना वायरस महामारी पर काबू के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान घर से काम करने वाले अधिकारियों के लिए जूम एक लोकप्रिय मंच बन गया। मंत्रालय ने कहा कि दस्तावेज में सर्ट-इन द्वारा पहले जारी परामर्श का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि जूम एक सुरक्षित मंच नहीं है। यह निर्देश उन लोगों की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं जो अब भी व्यक्तिगत मकसदों के लिए इस मंच का उपयोग करते हैं। कोरोना वायरस से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए इन लिंक्स पर क्लिक करें । गृह मंत्रालय ने जारी की डिटेल गाइडलाइंस । क्या पालतू कुत्ता-बिल्ली से भी फैल सकता है कोरोना वायरस? । घर बैठे इस तरह बनाएं फेस मास्क । इन वेबसाइट और ऐप्स से पाएं कोरोना वायरस के सटीक आंकड़ों की जानकारी, दुनिया और भारत के हर राज्य की मिलेगी डिटेल । क्या गर्मी बढ़ते ही खत्म हो जाएगा कोरोना वायरस? एक अधिकारी ने कहा कि कारोबारी हों या सरकारी अधिकारी इसका इस्तेमाल करने से बंचे। भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने पहले ही उपयोगकर्ताओं को इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप में लगाई जाने वाली सेंध को लेकर जागरूक किया था। पासवर्ड लीक होने और हैकर्स द्वारा वीडियो कॉल कांफ्रेंस के दौरान हाईजैक किए जाने की शिकायतों के बाद ये गाइडलाइन जारी की गई हैं। |
"मैं जा रही हूं बाबूजी, 9 बजने वाले हैं," कम्मो ने कहा.
"बाबूजी, मुझे अकेले कोई डर नहीं लगता. मैं ऐसे लोगों से बखूबी निबटना जानती हूं," कम्मो ने राजेश की ओर देखते हुए कहा और कमरे से बाहर निकल गई.
कुछ देर बाद राजेश उठे और दरवाजा बंद कर बिस्तर पर बैठ गए.
राजेश की उम्र 62 साल हो चुकी थी. 2 साल पहले वे एक सरकारी महकमे से अफसर रिटायर हुए थे. परिवार में पत्नी कमला और 2 बेटे विकेश और विजय थे. दोनों बेटों को पढ़ालिखा कर इंजीनियर बनाया. दोनों ने बेंगलुरु में नौकरी कर ली. दोनों की शादी कर दी गई और वे अपनी पत्नियों के साथ खूब मजे में रह रहे थे.
जब तक पत्नी कमला का साथ रहा, राजेश को कुछ भी कमी महसूस न हुई. नौकरी के दौरान खूब पैसा कमाया. बड़ा 4 कमरों का मकान बना लिया. पिछले साल एक दिन कमला को हार्ट अटैक हुआ और अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया.
कमला के मरने के बाद राजेश बिलकुल अकेले हो गए. दिन तो किसी तरह कट जाता, पर रात काटनी बहुत मुश्किल हो जाती.
विकेश और विजय ने बारबार फोन कर के उन को अपने पास बुला लिया. दोनों के घर एकएक महीना बिता कर वे फिर यहां अपने मकान में आ गए.
सुबह का नाश्ता, सफाई, पोंछा व कपड़ों की धुलाई का काम जमुना करती थी. दोपहर व शाम का खाना शांति बनाती थी.
| "मैं जा रही हूं बाबूजी, नौ बजने वाले हैं," कम्मो ने कहा. "बाबूजी, मुझे अकेले कोई डर नहीं लगता. मैं ऐसे लोगों से बखूबी निबटना जानती हूं," कम्मो ने राजेश की ओर देखते हुए कहा और कमरे से बाहर निकल गई. कुछ देर बाद राजेश उठे और दरवाजा बंद कर बिस्तर पर बैठ गए. राजेश की उम्र बासठ साल हो चुकी थी. दो साल पहले वे एक सरकारी महकमे से अफसर रिटायर हुए थे. परिवार में पत्नी कमला और दो बेटे विकेश और विजय थे. दोनों बेटों को पढ़ालिखा कर इंजीनियर बनाया. दोनों ने बेंगलुरु में नौकरी कर ली. दोनों की शादी कर दी गई और वे अपनी पत्नियों के साथ खूब मजे में रह रहे थे. जब तक पत्नी कमला का साथ रहा, राजेश को कुछ भी कमी महसूस न हुई. नौकरी के दौरान खूब पैसा कमाया. बड़ा चार कमरों का मकान बना लिया. पिछले साल एक दिन कमला को हार्ट अटैक हुआ और अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया. कमला के मरने के बाद राजेश बिलकुल अकेले हो गए. दिन तो किसी तरह कट जाता, पर रात काटनी बहुत मुश्किल हो जाती. विकेश और विजय ने बारबार फोन कर के उन को अपने पास बुला लिया. दोनों के घर एकएक महीना बिता कर वे फिर यहां अपने मकान में आ गए. सुबह का नाश्ता, सफाई, पोंछा व कपड़ों की धुलाई का काम जमुना करती थी. दोपहर व शाम का खाना शांति बनाती थी. |
नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन पुस्तक प्रेमियों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली. पाठक अपने प्रिय रचनाकार से मिलने के लिए आतुर देखे गए.
विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन चर्चित युवा कवि गीत चतुर्वेदी का जलवा देखने को मिला. हिंदी युग्म के स्टॉल पर गीत चतुर्वेदी का उपन्यास सिमसिम का लोकार्पण किया गया. युवाओं के पसंदीदा लेखक नीलोत्पल मृणाल ने गीत चतुर्वेदी के उपन्यास का लोकार्पण किया.
अपने नए उपन्यास सिमसिम के बारे में गीत चतुर्वेदी ने बताया कि इनसान के हर रिश्ते के बीच एक दरवाजा होता है. इस कहानी में रिश्तों के दरवाजे को सिमसिम नाम दिया गया है. खुशियों के गुप्तचर जैसी चर्चित पुस्तक के लेखक गीत चतुर्वेदी बताते हैं जिस इनसान को इस सिमसिम दरवाजे को खोलने का मंत्र मिल जाता है तो उसे जीवन की खुशियों का अनमोल खजाना मिल जाता है.
गीत चतुर्वेदी ने उपन्यास की कहानी के बारे में बताया कि यह कहानी भारत-पाकिस्तान विजाभन के समय से शुरू होती है. कहानी का पात्र बंटवारे के समय सिंध से निकलकर भारत आता है. इस बंटवारे में वह मातृभूमि के साथ पहला प्यार भी खो देता है. कहानी कई रोचक मोड़ों से गुजरते हुए आगे बढ़ती है.
पुस्तक मेला में सर्वभाषा ट्रस्ट प्रकाशन भी चर्चा के केंद्र में रहा. यादों का उपवन, इनसाइट्स इनटू पीपल मैनेजमेंट, धक से लागल बात बावरी, अशोक लव की स्त्री विषयक कहानियां, बकरी कौन चराए, कुछ चिंतन कुछ सुध और बंगड़ गुरू सहित कई पुस्तकों को लोकार्पण किया गया.
सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर भोजपुरी भाषा और साहित्य के चर्चित लेखक जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की पुस्तक 'धक से लागल बात बावरी' का लोकार्पण किया गया. जयप्रकाश द्विवेदी को उत्कृष्ट भोजपुरी साहित्य लेखन के लिए भिखारी ठाकुर सम्मान और काव्य कौस्तुभ जैसी मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है.
सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर चर्चित लेखक अशोक लव की कहानिया का संग्रह 'अशोक लव की स्त्री विषयक कहानियां' का भी लोकार्पण किया गया. इस पुस्तक का संपादन केशव मोहन पाण्डेय ने किया है. इस संग्रह में पिछले 4 दशकों की स्त्रियों पर केंद्रित कहानियां हैं.
सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर कवयित्री पूनम मिश्रा के नए कविता संग्रह 'यादों का उपवन' का भी विमोचन किया गया. पूनम मिश्रा ने बताया कि इस कविता संग्रह के केंद्र बिन्दु में स्त्री, उसका समर्पण और उसकी पहचान का द्वन्द है. पूनम मिश्रा पेशे से अध्यापक रही हैं. इससे पहले उनका कविता संग्रह 'पतझड़ और बहार' भी काफी चर्चित रह चुका है.
विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन चर्चित युवा कवि गीत चतुर्वेदी का जलवा देखने को मिला. हिंदी युग्म के स्टॉल पर गीत चतुर्वेदी का उपन्यास सिमसिम का लोकार्पण किया गया. युवाओं के पसंदीदा लेखक नीलोत्पल मृणाल ने गीत चतुर्वेदी के उपन्यास का लोकार्पण किया.
| नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन पुस्तक प्रेमियों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली. पाठक अपने प्रिय रचनाकार से मिलने के लिए आतुर देखे गए. विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन चर्चित युवा कवि गीत चतुर्वेदी का जलवा देखने को मिला. हिंदी युग्म के स्टॉल पर गीत चतुर्वेदी का उपन्यास सिमसिम का लोकार्पण किया गया. युवाओं के पसंदीदा लेखक नीलोत्पल मृणाल ने गीत चतुर्वेदी के उपन्यास का लोकार्पण किया. अपने नए उपन्यास सिमसिम के बारे में गीत चतुर्वेदी ने बताया कि इनसान के हर रिश्ते के बीच एक दरवाजा होता है. इस कहानी में रिश्तों के दरवाजे को सिमसिम नाम दिया गया है. खुशियों के गुप्तचर जैसी चर्चित पुस्तक के लेखक गीत चतुर्वेदी बताते हैं जिस इनसान को इस सिमसिम दरवाजे को खोलने का मंत्र मिल जाता है तो उसे जीवन की खुशियों का अनमोल खजाना मिल जाता है. गीत चतुर्वेदी ने उपन्यास की कहानी के बारे में बताया कि यह कहानी भारत-पाकिस्तान विजाभन के समय से शुरू होती है. कहानी का पात्र बंटवारे के समय सिंध से निकलकर भारत आता है. इस बंटवारे में वह मातृभूमि के साथ पहला प्यार भी खो देता है. कहानी कई रोचक मोड़ों से गुजरते हुए आगे बढ़ती है. पुस्तक मेला में सर्वभाषा ट्रस्ट प्रकाशन भी चर्चा के केंद्र में रहा. यादों का उपवन, इनसाइट्स इनटू पीपल मैनेजमेंट, धक से लागल बात बावरी, अशोक लव की स्त्री विषयक कहानियां, बकरी कौन चराए, कुछ चिंतन कुछ सुध और बंगड़ गुरू सहित कई पुस्तकों को लोकार्पण किया गया. सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर भोजपुरी भाषा और साहित्य के चर्चित लेखक जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की पुस्तक 'धक से लागल बात बावरी' का लोकार्पण किया गया. जयप्रकाश द्विवेदी को उत्कृष्ट भोजपुरी साहित्य लेखन के लिए भिखारी ठाकुर सम्मान और काव्य कौस्तुभ जैसी मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है. सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर चर्चित लेखक अशोक लव की कहानिया का संग्रह 'अशोक लव की स्त्री विषयक कहानियां' का भी लोकार्पण किया गया. इस पुस्तक का संपादन केशव मोहन पाण्डेय ने किया है. इस संग्रह में पिछले चार दशकों की स्त्रियों पर केंद्रित कहानियां हैं. सर्वभाषा प्रकाशन के स्टॉल पर कवयित्री पूनम मिश्रा के नए कविता संग्रह 'यादों का उपवन' का भी विमोचन किया गया. पूनम मिश्रा ने बताया कि इस कविता संग्रह के केंद्र बिन्दु में स्त्री, उसका समर्पण और उसकी पहचान का द्वन्द है. पूनम मिश्रा पेशे से अध्यापक रही हैं. इससे पहले उनका कविता संग्रह 'पतझड़ और बहार' भी काफी चर्चित रह चुका है. विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन चर्चित युवा कवि गीत चतुर्वेदी का जलवा देखने को मिला. हिंदी युग्म के स्टॉल पर गीत चतुर्वेदी का उपन्यास सिमसिम का लोकार्पण किया गया. युवाओं के पसंदीदा लेखक नीलोत्पल मृणाल ने गीत चतुर्वेदी के उपन्यास का लोकार्पण किया. |
वाशिंगटन, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने को लेकर चीन की प्रतिक्रिया की 'बहुत गंभीरता से जांच' शुरू की है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने महामारी के बढ़ते प्रकोप के चलते चीन पर सख्ती दिखाई। वह महामारी के प्रसार को रोकने और इस पर अंकुश लगाने के प्रयास में चीन के लिए अमेरिकी सीमाओं को बंद करने के अपने फैसले को कही बार सही बताते आए हैं।
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि निर्णय से अमेरिका को तैयारी के लिए समय मिला, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसका लाभ नहीं उठा पाया।
| वाशिंगटन, अट्ठाईस अप्रैल । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने को लेकर चीन की प्रतिक्रिया की 'बहुत गंभीरता से जांच' शुरू की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने महामारी के बढ़ते प्रकोप के चलते चीन पर सख्ती दिखाई। वह महामारी के प्रसार को रोकने और इस पर अंकुश लगाने के प्रयास में चीन के लिए अमेरिकी सीमाओं को बंद करने के अपने फैसले को कही बार सही बताते आए हैं। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि निर्णय से अमेरिका को तैयारी के लिए समय मिला, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसका लाभ नहीं उठा पाया। |
देवानुभाव से दैविक प्रभाव से लब्ध प्राप्त स्वायत्त मेरी ऐसी दिव्य देवऋद्धि, देवद्युति पर प्रहार करते हुए, मौत से न डरते हुए मेरे यहाँ बाण गिराया है ! यो कहकर वह अपने सिंहासन से उठा औौर जहाँ वह नामाकित बाण पडा था, वहाँ भाया । वहाँ भाकर उस बाण को उठाया, नामाकन देखा । देखकर उसके मन में ऐसा चिन्तन, विचार, मनोभाव तथा संकल्प उत्पन्न हुम्रा - जम्बूद्वीप के अन्तर्वर्ती भरतक्षेत्र में भरत नामक चातुरन्त चक्रवर्ती राजा उत्पन्न हुआ है। प्रतः प्रतीत, प्रत्युत्पन्न तथा अनागत - भूत, वर्तमान एव भविष्यवर्ती क्षुद्र हिमवान् गिरिकुमार देवो के लिए यह उचित है - परंपरागत व्यवहारानुरूप है कि वे (चक्रवर्ती) राजा को उपहार भेट करे। इसलिए मैं भी जाऊँ, राजा को उपहार भेट करू । यो विचार कर ) उसने प्रीतिदान भेट के रूप मे सर्वोषधियाँ, कल्पवृक्ष - के फूलो की माला, गोशीर्ष चन्दन हिमवान् कुज मे उत्पन्न होने वाला चन्दन- विशेष, कटक (त्रुटित, वस्त्र, भ्राभूषण, नामाकित बाण), पद्मद्रह- पद्म नामक ( ह्रद ) का जल लिया। यह सव लेकर उत्कृष्ट तीव्र गति द्वारा वह राजा भरत के पास आया। प्राकर बोला में क्षुद्र हिमवान् पर्वत की सीमा मे देवानुप्रिय के - आपके देश का वासी हूँ। मैं आपका आज्ञानुवर्ती सेवक हूँ । आपका उत्तर दिशा का अन्तपाल हूँ - उपद्रव - निवारक हूँ । अतः देवानुप्रिय । आप मेरे द्वारा उपहृत भेट स्वीकार कर । यो कहकर उसने सर्वोषधि, माला गोशीर्ष चन्दन, कटक, त्रुटित, वस्त्र, आभूषण, नामाकित बाण तथा पद्मह्रद का जल भेंट किया। राजा भरत ने क्षुद्र हिमवान् - गिरिकुमार देव द्वारा इस प्रकार भेट किये गये उपहार स्वीकार किये । स्वीकार करके क्षुद्र हिमवान् - गिरिकुमार देव को विदा किया ।
ऋषमकूट पर नामांकन
७९. तए णं से भरहे राया तुरए णिगिन्हइ २ सा रह परावतेइ २ ता जेणेव उसहकूडे तेणेव उवागच्छद २ ता उसहकूडं पव्वय तिक्खुत्तो रहसिरेणं फुसइ २ ता तुरए णिगिव्हड २ ता रहं ठवेइ २ त्ता छत्तलं दुवालसंसिअं प्रट्टकण्णिअं ग्रहिगरणिसंठिअं सोवण्णिअं कागणिरयणं परामुसइ २ ता उसमकूडस्स पव्वयस्स पुरस्थिमिल्लसि कडगंसि णामग पाउडेइप्रोसप्पिणीइमीसे, तइम्राए समाए पच्छिमे भाए । ग्रहमंसि चक्कवट्टी, भरहो भरहो इस नामधिज्जेणं ॥१॥ अहमसि पढमराया, अयं भरहाहियो गरवरियो । गरिथ महं पडिसतू, जिअं मए भारहं वास ॥ २ ॥
इति कट्टु णाभगं प्राउडेइ, णामगं ग्राउडिता रहं परावतेइ २ ता जेणेब विजयखंधावारजिवेसे, जेणेव बाहिरिमा उवट्ठाणसाला तेणेव उदागच्छड २ ता ( तुरए णिगिव्ह २ ता रहं ठवेइ २ ता हाम्रो पञ्चोरुहति २ सा जेणेव मज्जणघरे तेणेव उवागच्छति २ ता मज्जणघरं प्रणुपविसइ २ ता जाव ससिव्व पिप्रवंसने परवई मज्जणघराम्रो पडिणिक्खमह २ ता जेणेव भोम्रणमंडवे तेणेव उवागच्छद्र २ त्ता भोग्रणमंडवंसि सुहासणवरगए अट्टममतं पारेइ २ ता भोग्रणमंडवाओो पडिणिक्ख मइ २ ता जेणेव बाहिरिया उबट्ठाणसाला जेणेव सीहासणे तेणेव उवागच्छद २ ता सोहासणब रगए पुरत्याभिमुहे जिसीभइ २ ता मट्टारस सेणिप्पणीको सद्दावेद २ ता एवं बयासी-खिप्पामेव भो | देवानुभाव से दैविक प्रभाव से लब्ध प्राप्त स्वायत्त मेरी ऐसी दिव्य देवऋद्धि, देवद्युति पर प्रहार करते हुए, मौत से न डरते हुए मेरे यहाँ बाण गिराया है ! यो कहकर वह अपने सिंहासन से उठा औौर जहाँ वह नामाकित बाण पडा था, वहाँ भाया । वहाँ भाकर उस बाण को उठाया, नामाकन देखा । देखकर उसके मन में ऐसा चिन्तन, विचार, मनोभाव तथा संकल्प उत्पन्न हुम्रा - जम्बूद्वीप के अन्तर्वर्ती भरतक्षेत्र में भरत नामक चातुरन्त चक्रवर्ती राजा उत्पन्न हुआ है। प्रतः प्रतीत, प्रत्युत्पन्न तथा अनागत - भूत, वर्तमान एव भविष्यवर्ती क्षुद्र हिमवान् गिरिकुमार देवो के लिए यह उचित है - परंपरागत व्यवहारानुरूप है कि वे राजा को उपहार भेट करे। इसलिए मैं भी जाऊँ, राजा को उपहार भेट करू । यो विचार कर ) उसने प्रीतिदान भेट के रूप मे सर्वोषधियाँ, कल्पवृक्ष - के फूलो की माला, गोशीर्ष चन्दन हिमवान् कुज मे उत्पन्न होने वाला चन्दन- विशेष, कटक , पद्मद्रह- पद्म नामक का जल लिया। यह सव लेकर उत्कृष्ट तीव्र गति द्वारा वह राजा भरत के पास आया। प्राकर बोला में क्षुद्र हिमवान् पर्वत की सीमा मे देवानुप्रिय के - आपके देश का वासी हूँ। मैं आपका आज्ञानुवर्ती सेवक हूँ । आपका उत्तर दिशा का अन्तपाल हूँ - उपद्रव - निवारक हूँ । अतः देवानुप्रिय । आप मेरे द्वारा उपहृत भेट स्वीकार कर । यो कहकर उसने सर्वोषधि, माला गोशीर्ष चन्दन, कटक, त्रुटित, वस्त्र, आभूषण, नामाकित बाण तथा पद्मह्रद का जल भेंट किया। राजा भरत ने क्षुद्र हिमवान् - गिरिकुमार देव द्वारा इस प्रकार भेट किये गये उपहार स्वीकार किये । स्वीकार करके क्षुद्र हिमवान् - गिरिकुमार देव को विदा किया । ऋषमकूट पर नामांकन उन्यासी. तए णं से भरहे राया तुरए णिगिन्हइ दो सा रह परावतेइ दो ता जेणेव उसहकूडे तेणेव उवागच्छद दो ता उसहकूडं पव्वय तिक्खुत्तो रहसिरेणं फुसइ दो ता तुरए णिगिव्हड दो ता रहं ठवेइ दो त्ता छत्तलं दुवालसंसिअं प्रट्टकण्णिअं ग्रहिगरणिसंठिअं सोवण्णिअं कागणिरयणं परामुसइ दो ता उसमकूडस्स पव्वयस्स पुरस्थिमिल्लसि कडगंसि णामग पाउडेइप्रोसप्पिणीइमीसे, तइम्राए समाए पच्छिमे भाए । ग्रहमंसि चक्कवट्टी, भरहो भरहो इस नामधिज्जेणं ॥एक॥ अहमसि पढमराया, अयं भरहाहियो गरवरियो । गरिथ महं पडिसतू, जिअं मए भारहं वास ॥ दो ॥ इति कट्टु णाभगं प्राउडेइ, णामगं ग्राउडिता रहं परावतेइ दो ता जेणेब विजयखंधावारजिवेसे, जेणेव बाहिरिमा उवट्ठाणसाला तेणेव उदागच्छड दो ता ( तुरए णिगिव्ह दो ता रहं ठवेइ दो ता हाम्रो पञ्चोरुहति दो सा जेणेव मज्जणघरे तेणेव उवागच्छति दो ता मज्जणघरं प्रणुपविसइ दो ता जाव ससिव्व पिप्रवंसने परवई मज्जणघराम्रो पडिणिक्खमह दो ता जेणेव भोम्रणमंडवे तेणेव उवागच्छद्र दो त्ता भोग्रणमंडवंसि सुहासणवरगए अट्टममतं पारेइ दो ता भोग्रणमंडवाओो पडिणिक्ख मइ दो ता जेणेव बाहिरिया उबट्ठाणसाला जेणेव सीहासणे तेणेव उवागच्छद दो ता सोहासणब रगए पुरत्याभिमुहे जिसीभइ दो ता मट्टारस सेणिप्पणीको सद्दावेद दो ता एवं बयासी-खिप्पामेव भो |
Hate Speech: भड़काऊ भाषणों के बढ़ते मामलों के लिए न्यायपालिका की कमियां भी ज़िम्मेदार!
Hate Speech अर्थात भड़काऊ भाषण के मुद्दे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती स्वागत योग्य है, लेकिन इसके कई पहलू हैं, जिन्हें सावधानी से देखे जाने की ज़रूरत है। आज अगर देश में धर्म के नाम पर घृणा का माहौल देखने को मिल रहा है, तो ऐसा लोकतंत्र के सभी अंगों की विफलता के कारण हो रहा है, जिसमें स्वयं न्यायपालिका भी शामिल है।
पिछले कुछ महीनों में हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया और टीवी एंकरों से लेकर सरकार और पुलिस तक सबको लपेटा है, लेकिन न तो वह न्यायिक विफलता के बारे में बात कर रहा है, न ही वह निष्पक्षता से इस समस्या को देखने की कोशिश कर पा रहा है।
एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को हेट स्पीच के एक स्पष्ट मामले में हैदराबाद की विशेष अदालत द्वारा बरी किया जाना जहां न्यायिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है, वहीं नूपुर शर्मा और मोहम्मद जुबैर के मामलों में जस्टिस एसएन ढींगरा जैसे कई पूर्व न्यायविदों ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणियों को पक्षपातपूर्ण और गैरज़रूरी माना था।
सुप्रीम कोर्ट की ताज़ा टिप्पणियां भी किसी निष्पक्ष व्यक्ति, संगठन या अधिवक्ता की याचिका पर नहीं आई हैं, बल्कि एक ऐसी एकतरफा याचिका पर आई हैं, जिसमें कहा गया है कि देश में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और उन्हें आतंकित करने की कोशिशें की जा रही हैं। यानी केवल एक ही समुदाय को पीड़ित की तरह प्रोजेक्ट किया गया है, जबकि हिंसा और भड़काऊ बयानबाज़ियों में कथित रूप से यह पीड़ित समुदाय सबसे आगे है।
अर्द्धसत्य पर आधारित इस याचिका को दायर करने वाले सज्जन हैं शाहीन अब्दुल्ला और उनके पैरवीकार वकील हैं कपिल सिब्बल, जो पहले कांग्रेस के नेता रहे और अब समाजवादी पार्टी के नेता हैं।
सवाल है कि क्या अर्द्धसत्य पर आधारित तथ्यों और दलीलों वाली इस तरह की एकपक्षीय याचिका को सुनकर सांप्रदायिकता और हेट स्पीच जैसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्षतापूर्वक सही निष्कर्ष और समाधान तक पहुंचना संभव है?
हेट स्पीच के मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, इस बात से रत्ती भर भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन जब मीडिया रिपोर्ट्स में न्यायपालिका द्वारा यह कहा गया बताया जाता है कि "हमने ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी" तो हैरानी होती है।
सत्य और तथ्य से परे ऐसी टिप्पणियां उस देश में की जा रही हैं, जिस देश का धर्म के नाम पर लाखों बेगुनाह लोगों के कत्लेआम के उपरांत विभाजन तक हो चुका है और जिस देश के उत्तरी राज्य जम्मू और कश्मीर में धर्म के नाम पर ही कश्मीरी पंडितों का जातीय सफाया करने की कोशिशें तक की जा चुकी हैं। इसके फलस्वरूप विस्थापित हुए लाखों लोगों को आज 32 साल बाद भी वापस बसाया नहीं जा सका है।
धर्म के नाम पर ही इस देश ने संसद और लाल किले से लेकर अनेक शहरों, बाज़ारों, मंदिरों, मस्जिदों, होटलों, रेलवे स्टेशनों, बसों, रेलगाड़ियों इत्यादि पर ऐसे-ऐसे आतंकवादी हमले भी झेले हैं, जिनमें हज़ारों बेगुनाह लोगों की जानें गई हैं। हैरानी की बात यह भी है कि आज़ाद भारत में जिस समुदाय की आबादी सबसे तीव्र गति से बढ़ी है, उसे ही एकतरफा तरीके से पीड़ित बताने का छद्म रचा जा रहा है।
ऐसे में न्यायपालिका को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सांप्रदायिकता और हेट स्पीच जैसे संवेदनशील मामलों में राजनीतिक मकसद वाले लोग उसका या उसकी टिप्पणियों और फैसलों का इस्तेमाल अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए न कर सकें। साथ ही, उसे पूरी तरह से निष्पक्ष रहते और दिखते हुए बिल्कुल व्यावहारिक समाधान पेश करने होंगे।
खबरों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच को रोकने की ज़िम्मेदारी काफी हद तक पुलिस पर डाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना शिकायत या एफआईआर दर्ज हुए भी वह हेट स्पीच के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करे। सवाल है कि क्या बिना शिकायत या बिना एफआईआर के पुलिस द्वारा अपने विवेक से किसी को भी उठा लिया जाना एक किस्म की अराजकता को जन्म नहीं देगा?
क्या माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस बात का अंदाज़ा है कि इनमें कितनी कार्रवाइयां सही होंगी, कितनी कार्रवाइयां सत्तारूढ़ दलों के राजनीतिक हितों को साधने के लिए की जा सकती हैं और कितनी कार्रवाइयां स्वयं पुलिस के लोग उत्पीड़न और वसूली के मकसद से कर सकते हैं?
फिर यह भी सवाल है कि क्या पुलिस न्याय करने में सक्षम प्राधिकरण बन गया है? अगर वाकई पुलिस ऐसा करना शुरू कर दे, तो अदालतों में केवल हेट स्पीच के ऐसे कितने सारे मामलों की बाढ़ आ जाएगी?
फिर जब मामला अदालतों में आएगा, तो क्या गारंटी है कि वहां एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी की तरह अन्य अनेक लोगों को भी बरी नहीं कर दिया जाएगा? क्या अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे मामलों में न्यायपालिका की भी जवाबदेही सुनिश्चित किये बिना सुप्रीम कोर्ट कोई समाधान प्रस्तुत कर सकता है?
अकबरुद्दीन ओवैसी पर 2012 के भड़काऊ भाषण पर लोअर कोर्ट का फैसला 10 साल बाद 2022 में आया, वह भी त्रुटिपूर्ण। सोचने की बात है कि ऐसे मामलों के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते-पहुंचते और न्याय होते-होते न जाने कितने दशक लग जाएंगे। क्या इस तरह की लेट-लतीफी और ढिलाई से हेट स्पीच जैसे गंभीर अपराधों को रोका जा सकता है?
यहां यह बात भी गौर करने लायक है, कई मामलों में स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने ही पुलिस को निर्देशित किया है कि शिकायत या एफआईआर दर्ज किये जाने के बाद भी मामले की ठीक से छानबीन किये बिना किसी की गिरफ्तारी न हो। एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का 2018 का फैसला इसका उदाहरण है, जिसे दलित समुदाय के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने पलट दिया था। लेकिन हेट स्पीच के मामले में वही सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि शिकायत हो न हो, एफआईआर हो न हो, स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई कीजिए।
क्या इस तरह के विरोधाभासी निर्देशों, टिप्पणियों और फैसलों की बजाय न्यायपालिका को व्यावहारिक रुख नहीं अपनाना चाहिए? क्या सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि इस देश की पुलिस वाकई इतनी सक्षम, ईमानदार, स्वतंत्र और निष्पक्ष है कि उसके कंधों पर स्वविवेक का झोला भी टांग दिया जाए?
यदि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सुप्रीम कोर्ट पर देश के संविधान की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, तो स्वयं सुप्रीम कोर्ट भी एक ऐसा तंत्र क्यों विकसित नहीं करता, जिसकी सहायता से ऐसे मामलों में वह खुद भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सके? सुप्रीम कोर्ट तो वह सक्षम प्राधिकरण है, जो सरकार और पुलिस को नोटिस भी जारी कर सकता है, निर्देश भी दे सकता है और सुनवाई करके त्वरित न्याय और फैसले भी कर सकता है।
इसकी बजाय देश में हेट स्पीच देने वाले को पकड़ने के लिए हर आदमी के पीछे पुलिस कॉन्सटेबल छोड़ देने से क्या हासिल होगा? आवश्यकता तो है शीर्ष पर बैठे लोगों के हेट स्पीच को पकड़ने की, जो देश का माहौल खराब करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
अगर शीर्षस्थ लोगों के खिलाफ कार्रवाइयां होने लगेंगी, तो नीचे के लोग तो खुद ही हेट स्पीच बंद कर देंगे। क्या सुप्रीम कोर्ट स्वयं भी एक ऐसा मॉनिटरिंग सेल नहीं बना सकता, जो मेनस्ट्रीम मीडिया में आने वाले नेताओं के बयानों की संविधान के आईने में समीक्षा करे और उसके असंवैधानिक पाए जाने की स्थिति में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे?
लोकतंत्र के दूसरे स्तंभों से ज़िम्मेदारी की अपेक्षा करना अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह है कि न्यायपालिका स्वयं भी अधिक ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है। )
| Hate Speech: भड़काऊ भाषणों के बढ़ते मामलों के लिए न्यायपालिका की कमियां भी ज़िम्मेदार! Hate Speech अर्थात भड़काऊ भाषण के मुद्दे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती स्वागत योग्य है, लेकिन इसके कई पहलू हैं, जिन्हें सावधानी से देखे जाने की ज़रूरत है। आज अगर देश में धर्म के नाम पर घृणा का माहौल देखने को मिल रहा है, तो ऐसा लोकतंत्र के सभी अंगों की विफलता के कारण हो रहा है, जिसमें स्वयं न्यायपालिका भी शामिल है। पिछले कुछ महीनों में हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया और टीवी एंकरों से लेकर सरकार और पुलिस तक सबको लपेटा है, लेकिन न तो वह न्यायिक विफलता के बारे में बात कर रहा है, न ही वह निष्पक्षता से इस समस्या को देखने की कोशिश कर पा रहा है। एआईएमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को हेट स्पीच के एक स्पष्ट मामले में हैदराबाद की विशेष अदालत द्वारा बरी किया जाना जहां न्यायिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है, वहीं नूपुर शर्मा और मोहम्मद जुबैर के मामलों में जस्टिस एसएन ढींगरा जैसे कई पूर्व न्यायविदों ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणियों को पक्षपातपूर्ण और गैरज़रूरी माना था। सुप्रीम कोर्ट की ताज़ा टिप्पणियां भी किसी निष्पक्ष व्यक्ति, संगठन या अधिवक्ता की याचिका पर नहीं आई हैं, बल्कि एक ऐसी एकतरफा याचिका पर आई हैं, जिसमें कहा गया है कि देश में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और उन्हें आतंकित करने की कोशिशें की जा रही हैं। यानी केवल एक ही समुदाय को पीड़ित की तरह प्रोजेक्ट किया गया है, जबकि हिंसा और भड़काऊ बयानबाज़ियों में कथित रूप से यह पीड़ित समुदाय सबसे आगे है। अर्द्धसत्य पर आधारित इस याचिका को दायर करने वाले सज्जन हैं शाहीन अब्दुल्ला और उनके पैरवीकार वकील हैं कपिल सिब्बल, जो पहले कांग्रेस के नेता रहे और अब समाजवादी पार्टी के नेता हैं। सवाल है कि क्या अर्द्धसत्य पर आधारित तथ्यों और दलीलों वाली इस तरह की एकपक्षीय याचिका को सुनकर सांप्रदायिकता और हेट स्पीच जैसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्षतापूर्वक सही निष्कर्ष और समाधान तक पहुंचना संभव है? हेट स्पीच के मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, इस बात से रत्ती भर भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन जब मीडिया रिपोर्ट्स में न्यायपालिका द्वारा यह कहा गया बताया जाता है कि "हमने ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी" तो हैरानी होती है। सत्य और तथ्य से परे ऐसी टिप्पणियां उस देश में की जा रही हैं, जिस देश का धर्म के नाम पर लाखों बेगुनाह लोगों के कत्लेआम के उपरांत विभाजन तक हो चुका है और जिस देश के उत्तरी राज्य जम्मू और कश्मीर में धर्म के नाम पर ही कश्मीरी पंडितों का जातीय सफाया करने की कोशिशें तक की जा चुकी हैं। इसके फलस्वरूप विस्थापित हुए लाखों लोगों को आज बत्तीस साल बाद भी वापस बसाया नहीं जा सका है। धर्म के नाम पर ही इस देश ने संसद और लाल किले से लेकर अनेक शहरों, बाज़ारों, मंदिरों, मस्जिदों, होटलों, रेलवे स्टेशनों, बसों, रेलगाड़ियों इत्यादि पर ऐसे-ऐसे आतंकवादी हमले भी झेले हैं, जिनमें हज़ारों बेगुनाह लोगों की जानें गई हैं। हैरानी की बात यह भी है कि आज़ाद भारत में जिस समुदाय की आबादी सबसे तीव्र गति से बढ़ी है, उसे ही एकतरफा तरीके से पीड़ित बताने का छद्म रचा जा रहा है। ऐसे में न्यायपालिका को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सांप्रदायिकता और हेट स्पीच जैसे संवेदनशील मामलों में राजनीतिक मकसद वाले लोग उसका या उसकी टिप्पणियों और फैसलों का इस्तेमाल अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए न कर सकें। साथ ही, उसे पूरी तरह से निष्पक्ष रहते और दिखते हुए बिल्कुल व्यावहारिक समाधान पेश करने होंगे। खबरों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच को रोकने की ज़िम्मेदारी काफी हद तक पुलिस पर डाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना शिकायत या एफआईआर दर्ज हुए भी वह हेट स्पीच के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करे। सवाल है कि क्या बिना शिकायत या बिना एफआईआर के पुलिस द्वारा अपने विवेक से किसी को भी उठा लिया जाना एक किस्म की अराजकता को जन्म नहीं देगा? क्या माननीय सुप्रीम कोर्ट को इस बात का अंदाज़ा है कि इनमें कितनी कार्रवाइयां सही होंगी, कितनी कार्रवाइयां सत्तारूढ़ दलों के राजनीतिक हितों को साधने के लिए की जा सकती हैं और कितनी कार्रवाइयां स्वयं पुलिस के लोग उत्पीड़न और वसूली के मकसद से कर सकते हैं? फिर यह भी सवाल है कि क्या पुलिस न्याय करने में सक्षम प्राधिकरण बन गया है? अगर वाकई पुलिस ऐसा करना शुरू कर दे, तो अदालतों में केवल हेट स्पीच के ऐसे कितने सारे मामलों की बाढ़ आ जाएगी? फिर जब मामला अदालतों में आएगा, तो क्या गारंटी है कि वहां एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी की तरह अन्य अनेक लोगों को भी बरी नहीं कर दिया जाएगा? क्या अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे मामलों में न्यायपालिका की भी जवाबदेही सुनिश्चित किये बिना सुप्रीम कोर्ट कोई समाधान प्रस्तुत कर सकता है? अकबरुद्दीन ओवैसी पर दो हज़ार बारह के भड़काऊ भाषण पर लोअर कोर्ट का फैसला दस साल बाद दो हज़ार बाईस में आया, वह भी त्रुटिपूर्ण। सोचने की बात है कि ऐसे मामलों के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते-पहुंचते और न्याय होते-होते न जाने कितने दशक लग जाएंगे। क्या इस तरह की लेट-लतीफी और ढिलाई से हेट स्पीच जैसे गंभीर अपराधों को रोका जा सकता है? यहां यह बात भी गौर करने लायक है, कई मामलों में स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने ही पुलिस को निर्देशित किया है कि शिकायत या एफआईआर दर्ज किये जाने के बाद भी मामले की ठीक से छानबीन किये बिना किसी की गिरफ्तारी न हो। एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का दो हज़ार अट्ठारह का फैसला इसका उदाहरण है, जिसे दलित समुदाय के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने पलट दिया था। लेकिन हेट स्पीच के मामले में वही सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि शिकायत हो न हो, एफआईआर हो न हो, स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई कीजिए। क्या इस तरह के विरोधाभासी निर्देशों, टिप्पणियों और फैसलों की बजाय न्यायपालिका को व्यावहारिक रुख नहीं अपनाना चाहिए? क्या सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि इस देश की पुलिस वाकई इतनी सक्षम, ईमानदार, स्वतंत्र और निष्पक्ष है कि उसके कंधों पर स्वविवेक का झोला भी टांग दिया जाए? यदि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सुप्रीम कोर्ट पर देश के संविधान की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, तो स्वयं सुप्रीम कोर्ट भी एक ऐसा तंत्र क्यों विकसित नहीं करता, जिसकी सहायता से ऐसे मामलों में वह खुद भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सके? सुप्रीम कोर्ट तो वह सक्षम प्राधिकरण है, जो सरकार और पुलिस को नोटिस भी जारी कर सकता है, निर्देश भी दे सकता है और सुनवाई करके त्वरित न्याय और फैसले भी कर सकता है। इसकी बजाय देश में हेट स्पीच देने वाले को पकड़ने के लिए हर आदमी के पीछे पुलिस कॉन्सटेबल छोड़ देने से क्या हासिल होगा? आवश्यकता तो है शीर्ष पर बैठे लोगों के हेट स्पीच को पकड़ने की, जो देश का माहौल खराब करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। अगर शीर्षस्थ लोगों के खिलाफ कार्रवाइयां होने लगेंगी, तो नीचे के लोग तो खुद ही हेट स्पीच बंद कर देंगे। क्या सुप्रीम कोर्ट स्वयं भी एक ऐसा मॉनिटरिंग सेल नहीं बना सकता, जो मेनस्ट्रीम मीडिया में आने वाले नेताओं के बयानों की संविधान के आईने में समीक्षा करे और उसके असंवैधानिक पाए जाने की स्थिति में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे? लोकतंत्र के दूसरे स्तंभों से ज़िम्मेदारी की अपेक्षा करना अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह है कि न्यायपालिका स्वयं भी अधिक ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए क्या कदम उठा रही है? |
अगरतला (आईएएनएस)। रियो ओलम्पिक में देश के नाम रोशन करने वाली महिला जिम्नास्ट दीपा कर्माकर हैदराबाद जिला बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष द्वारा पुरस्कार स्वरूप दी जाने वाली बीएमडब्ल्यू कार को लेकर पशोपेश में फंस गई हैं।
रियो ओलम्पिक में मामूली अंकों के अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं दीपा को रजत पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु और कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक के साथ हैदराबाद जिला बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष वी. चामुण्डेश्वरनाथ ने अगस्त में बीएमडब्ल्यू कार भेंट की थी।
दीपा ने हालांकि मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया था कि वह भेंट में मिली कार चामुण्डेश्वरनाथ को लौटाना चाहती हैं। बल्कि उन्होंने कहा कि वह त्रिपुरा में इस महंगी कार के रखरखाव और मरम्मत की सुविधा न होने के कारण वापस कर रही हैं।
दीपा ने कहा, "मेरे कोच बिशेश्वर नंदी ने चामुण्डेश्वनाथ से इन सब बातों पर चर्चा की। उन्होंने मुझे भेंट की गई कार की कीमत के बराबर धनराशि मेरे बैंक खाते में जमा करवाने पर सहमति व्यक्त की है। वह हमें इस बीएमडब्ल्यू कार के बदले जो भी राशि भेंट करेंगे हमें खुशी होगी।"
अगरतला की रहने वाली दीपा ने कहा कि उन्होंने यह फैसला खुद नहीं लिया है बल्कि कोच और परिवार के सभी सदस्यों से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।
दीपा ने अपनी आगे की तैयारियों के बारे में बताया, "अब मैं एक महीने बाद जर्मनी में होने वाली चैलेंजर्स कप की तैयारियों में जुट गई हूं। कोच सर ने मुझे भेंट में मिली महंगी चीजों के बारे में चिंता करने की बजाय अपना पूरा ध्यान आगामी चुनौतियों पर केंद्रित करने की सलाह दी है।"
| अगरतला । रियो ओलम्पिक में देश के नाम रोशन करने वाली महिला जिम्नास्ट दीपा कर्माकर हैदराबाद जिला बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष द्वारा पुरस्कार स्वरूप दी जाने वाली बीएमडब्ल्यू कार को लेकर पशोपेश में फंस गई हैं। रियो ओलम्पिक में मामूली अंकों के अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं दीपा को रजत पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु और कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक के साथ हैदराबाद जिला बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष वी. चामुण्डेश्वरनाथ ने अगस्त में बीएमडब्ल्यू कार भेंट की थी। दीपा ने हालांकि मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया था कि वह भेंट में मिली कार चामुण्डेश्वरनाथ को लौटाना चाहती हैं। बल्कि उन्होंने कहा कि वह त्रिपुरा में इस महंगी कार के रखरखाव और मरम्मत की सुविधा न होने के कारण वापस कर रही हैं। दीपा ने कहा, "मेरे कोच बिशेश्वर नंदी ने चामुण्डेश्वनाथ से इन सब बातों पर चर्चा की। उन्होंने मुझे भेंट की गई कार की कीमत के बराबर धनराशि मेरे बैंक खाते में जमा करवाने पर सहमति व्यक्त की है। वह हमें इस बीएमडब्ल्यू कार के बदले जो भी राशि भेंट करेंगे हमें खुशी होगी।" अगरतला की रहने वाली दीपा ने कहा कि उन्होंने यह फैसला खुद नहीं लिया है बल्कि कोच और परिवार के सभी सदस्यों से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। दीपा ने अपनी आगे की तैयारियों के बारे में बताया, "अब मैं एक महीने बाद जर्मनी में होने वाली चैलेंजर्स कप की तैयारियों में जुट गई हूं। कोच सर ने मुझे भेंट में मिली महंगी चीजों के बारे में चिंता करने की बजाय अपना पूरा ध्यान आगामी चुनौतियों पर केंद्रित करने की सलाह दी है।" |
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में अगर सूर्य अशुभ स्थिति में हो तो उससे बचने के लिए कई प्रकार के रत्न पहने जाते हैं। इन सभी में माणिक यानी रूबी सबसे उत्तम होता है।
माणिक के प्रकारः रंगभेद से माणिक पांच प्रकार का होता है।
पद्मरागः हल्की पीली आभा से युक्त गहरे लाल रंग का तप्त कंचन जैसा और प्रकाश किरणें देने वाला।
सौगन्धिकः अनार के दाने के रंग जैसे दूसरे नंबर का यह माणिक पद्मराग की अपेक्षा कम असर का होता है।
नीलागन्धीः इस रत्न का रंग हल्की और नीली आभा लिए है।
कुरुबिन्दः हल्की पीली आभा से युक्त यह रत्न चमक में अधिक होता है।
जामुनीः लाल कनेर या जामुन के रंग का यह रत्न सामान्य मूल्य का होता है।
1. वैसे तो माणिक्य के कई उपरत्न होते हैं लेकिन उनमें से प्रमुख हैं, रेड गार्नेट यानी तामड़ा, रेड टर्मेलाइन यानी लाल तुरमली, स्पिनील या स्पाइनल यानी कंटकिज़, रेड स्वरोस्की आदि।
2. माणिक रत्न का प्रमुख उपरत्न लालड़ी अथवा सूर्यमणि को माना है। लाल, लालड़ी, माणिक्य मणि यह सब एक ही हैं। रंगभेद से लालड़ी दस प्रकार की पायी जाती है। यह भेद बहुत ही सूक्ष्म होते हैं।
3. माणिक को तांबे या सोने की अंगूठी में जड़वाकर अनामिका में धारण करते हैं। माणिक के सभी उपरत्नों को चांदी में पहना जा सकता है। खालिस तांबे की अंगूठी से भी सूर्य पीड़ा को शांत किया जा सकता है।
4. माणिक को नीलम, हीरा और गोमेद के साथ पहनना नुकसानदायक हो सकता है। माणिक को मोती, पन्ना, मूंगा और पुखराज के साथ पहन सकते हैं।
5. माणिक्य को लोहे की अंगूठी में जड़वाकर पहनना नुकसानदायक है। माणिक्य का प्रभाव अंगूठी में जड़ाने के समय से 4 वर्षों तक रहता है, इसके बाद दूसरा माणिक्य जड़वाना चाहिए।
| ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में अगर सूर्य अशुभ स्थिति में हो तो उससे बचने के लिए कई प्रकार के रत्न पहने जाते हैं। इन सभी में माणिक यानी रूबी सबसे उत्तम होता है। माणिक के प्रकारः रंगभेद से माणिक पांच प्रकार का होता है। पद्मरागः हल्की पीली आभा से युक्त गहरे लाल रंग का तप्त कंचन जैसा और प्रकाश किरणें देने वाला। सौगन्धिकः अनार के दाने के रंग जैसे दूसरे नंबर का यह माणिक पद्मराग की अपेक्षा कम असर का होता है। नीलागन्धीः इस रत्न का रंग हल्की और नीली आभा लिए है। कुरुबिन्दः हल्की पीली आभा से युक्त यह रत्न चमक में अधिक होता है। जामुनीः लाल कनेर या जामुन के रंग का यह रत्न सामान्य मूल्य का होता है। एक. वैसे तो माणिक्य के कई उपरत्न होते हैं लेकिन उनमें से प्रमुख हैं, रेड गार्नेट यानी तामड़ा, रेड टर्मेलाइन यानी लाल तुरमली, स्पिनील या स्पाइनल यानी कंटकिज़, रेड स्वरोस्की आदि। दो. माणिक रत्न का प्रमुख उपरत्न लालड़ी अथवा सूर्यमणि को माना है। लाल, लालड़ी, माणिक्य मणि यह सब एक ही हैं। रंगभेद से लालड़ी दस प्रकार की पायी जाती है। यह भेद बहुत ही सूक्ष्म होते हैं। तीन. माणिक को तांबे या सोने की अंगूठी में जड़वाकर अनामिका में धारण करते हैं। माणिक के सभी उपरत्नों को चांदी में पहना जा सकता है। खालिस तांबे की अंगूठी से भी सूर्य पीड़ा को शांत किया जा सकता है। चार. माणिक को नीलम, हीरा और गोमेद के साथ पहनना नुकसानदायक हो सकता है। माणिक को मोती, पन्ना, मूंगा और पुखराज के साथ पहन सकते हैं। पाँच. माणिक्य को लोहे की अंगूठी में जड़वाकर पहनना नुकसानदायक है। माणिक्य का प्रभाव अंगूठी में जड़ाने के समय से चार वर्षों तक रहता है, इसके बाद दूसरा माणिक्य जड़वाना चाहिए। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
भोजपुरी निर्देशक मोहम्मद हबीब की आगामी भोजपुरी फिल्म 'प्रेमयुद्ध' की शूटिंग अब मुंबई में शुरू होने जा रही हैं. वहीं अब इस फिल्म के पहले शेड्यूल की शूटिंग रांची में समाप्त की जा चुकी है. आपको बता दें कि ये जानकारी फिल्म के निर्माता आर. के. सिंह ने दी. इस दौरान उन्होंने बताया कि मुंबई में हम पहले ही फिल्म 'प्रेमयुद्ध' के गाने की शूटिंग समाप्त कर चुके हैं और अब उसके बाद हमने रांची में फिल्म के मुख्य हिस्से की शूटिंग भी पूरी कर ली हैं.
बताया जा रहा हैं कि फाइनल शूटिंग मुंबई में होंगे और इसक लिए सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. रांची में शूटिंग का अनुभव काफी अच्छा रहा हैं ऐसा कहना हैं निर्माता का. इस फिल्म का निर्माण आर. के. एंटरटेंमेंट के बैनर तले किया जा रहा हैं. इस फिल्म में गौरव झा, पूनम दुबे, नीलू शंकर सिंह ,संजय पांडेय,अयाज खान,समर्थ चतुर्वेदी,अनूप अरोरा,शशि सागर,जे. नीलम और प्रकाश जैश आदि मुख्य भूमिका मेंनजर आने वाले हैं.
फिल्म की शूटिंग को लेकर गौरव ने बताया कि फिल्म तो अच्छी है ही, साथ ही हमने रांची लोकेशन को भी खूब इंजॉय किया गया हैं. हमने खूब मेहनत भी की. सेट का माहौल काफी खुशनुमा था, जिस वजह से हमने तय समय से अपनी फिल्म की शूटिंग समाप्त कर ली. इसके लिए उन्होंने आर. के. सिंह और निर्देशक मोहम्मद हबीब का धन्यवाद दिया.
| भोजपुरी निर्देशक मोहम्मद हबीब की आगामी भोजपुरी फिल्म 'प्रेमयुद्ध' की शूटिंग अब मुंबई में शुरू होने जा रही हैं. वहीं अब इस फिल्म के पहले शेड्यूल की शूटिंग रांची में समाप्त की जा चुकी है. आपको बता दें कि ये जानकारी फिल्म के निर्माता आर. के. सिंह ने दी. इस दौरान उन्होंने बताया कि मुंबई में हम पहले ही फिल्म 'प्रेमयुद्ध' के गाने की शूटिंग समाप्त कर चुके हैं और अब उसके बाद हमने रांची में फिल्म के मुख्य हिस्से की शूटिंग भी पूरी कर ली हैं. बताया जा रहा हैं कि फाइनल शूटिंग मुंबई में होंगे और इसक लिए सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. रांची में शूटिंग का अनुभव काफी अच्छा रहा हैं ऐसा कहना हैं निर्माता का. इस फिल्म का निर्माण आर. के. एंटरटेंमेंट के बैनर तले किया जा रहा हैं. इस फिल्म में गौरव झा, पूनम दुबे, नीलू शंकर सिंह ,संजय पांडेय,अयाज खान,समर्थ चतुर्वेदी,अनूप अरोरा,शशि सागर,जे. नीलम और प्रकाश जैश आदि मुख्य भूमिका मेंनजर आने वाले हैं. फिल्म की शूटिंग को लेकर गौरव ने बताया कि फिल्म तो अच्छी है ही, साथ ही हमने रांची लोकेशन को भी खूब इंजॉय किया गया हैं. हमने खूब मेहनत भी की. सेट का माहौल काफी खुशनुमा था, जिस वजह से हमने तय समय से अपनी फिल्म की शूटिंग समाप्त कर ली. इसके लिए उन्होंने आर. के. सिंह और निर्देशक मोहम्मद हबीब का धन्यवाद दिया. |
वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में जुलाई के आखिरी दिनों में की गयी कटौती के बाद ग्राहकों द्वारा खरीदारी स्थगित करने से अगत महीने में जीएसटी संग्रह में गिर कर संग्रह 93,960 करोड़ रुपए रहा जबकि इस दौरान दाखिल रिटर्न की संख्या ऊंची रही।
मलेशिया की एयर एशिया बरहाद और टाटा समूह द्वारा परिचालित एयर एशिया इंडिया ने सीमित समय के लिए 1,399 रुपए में अंतरराष्ट्रीय उड़ान और 999 रुपए में घरेलू उड़ान की पेशकश की है।
पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच दिल्ली और एनसीआर के लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ानेवाली एक और खबर है।
खाड़ी देशों के बीच चल रहे राजनयिक विवाद के बीच सऊदी अरब के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि देश ऐसी एक नहर की खुदाई की योजना के साथ आगे बढ़ रहा हो, जो पड़ोसी देश कतर को एक द्वीप में बदल कर रख देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की शुरुआत की। पोस्टल डिपार्टमेंट के बड़े नेटवर्क की मदद से पेमेंट्स बैंक आम जनता को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
अमेरिका में पिछले तीन सप्ताह में पहली बार तेल के कुओं की संख्या बढ़ने से कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को कच्चे तेल के दाम में गिरावट दर्ज की गई।
पाकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री आवास में मौजूद आवश्यकता से अधिक लग्जरी वाहनों की बिक्री का निर्णय किया है। शनिवार को आई एक खबर के मुताबिक नई सरकार के खर्च को कम करने के अभियान के तहत यह फैसला किया गया है।
सुधा भारद्वाज ने जांच एजेंसी द्वारा उन पर लगा गए सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 24 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान 44. 5 करोड़ डॉलर बढ़ गया।
देश की सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट एमसीएलआर में 0. 2 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।
पिछले एक सप्ताह की बात करें तो पेट्रोल की कीमतें 90 पैसे बढ़ चुकी हैं। वहीं डीजल के दाम में 1. 10 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है।
विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए 9 अरब डॉलर की जरूरत है। इसके लिए फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कांग्रेस ने आज भाजपा सरकार पर भारतीय नागरिकों के बजाये दूसरे देशों को पेट्रोल और डीजल सस्ते दामों पर बेचने का आरोप लगाया।
आइडिया और वोडाफोन के विलय को सरकार ने देश के दूरसंचार क्षेत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है और कहा है कि इससे देश में प्रतिस्पर्धा का माहौल सुधरेगा।
आठ बुनियादी उद्योगों की जुलाई में वृद्धि दर 6. 6% रही। इसकी प्रमुख वजह कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट और उवर्रकों का उत्पादन बेहतर रहना है।
विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने से वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8. 2 प्रतिशत दर्ज की गई।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा कि अगर डब्ल्यूटीओ खुद को दुरुस्त नहीं करता है, अमेरिका उससे अलग हो जाएगा।
डाकिया अब सिर्फ डाक ही नहीं आपके द्वार तक बैंक भी लेकर आ रहा है। भारतीय डाक के विशाल नेटवर्क के माध्यम से इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक पूरे देश में बैंकिंग सेवा प्रदान करने के लिए तैयार है।
| वस्तु एवं सेवा कर की दरों में जुलाई के आखिरी दिनों में की गयी कटौती के बाद ग्राहकों द्वारा खरीदारी स्थगित करने से अगत महीने में जीएसटी संग्रह में गिर कर संग्रह तिरानवे,नौ सौ साठ करोड़ रुपए रहा जबकि इस दौरान दाखिल रिटर्न की संख्या ऊंची रही। मलेशिया की एयर एशिया बरहाद और टाटा समूह द्वारा परिचालित एयर एशिया इंडिया ने सीमित समय के लिए एक,तीन सौ निन्यानवे रुपयापए में अंतरराष्ट्रीय उड़ान और नौ सौ निन्यानवे रुपयापए में घरेलू उड़ान की पेशकश की है। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच दिल्ली और एनसीआर के लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ानेवाली एक और खबर है। खाड़ी देशों के बीच चल रहे राजनयिक विवाद के बीच सऊदी अरब के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि देश ऐसी एक नहर की खुदाई की योजना के साथ आगे बढ़ रहा हो, जो पड़ोसी देश कतर को एक द्वीप में बदल कर रख देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत की। पोस्टल डिपार्टमेंट के बड़े नेटवर्क की मदद से पेमेंट्स बैंक आम जनता को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराएगा। अमेरिका में पिछले तीन सप्ताह में पहली बार तेल के कुओं की संख्या बढ़ने से कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को कच्चे तेल के दाम में गिरावट दर्ज की गई। पाकिस्तान सरकार ने प्रधानमंत्री आवास में मौजूद आवश्यकता से अधिक लग्जरी वाहनों की बिक्री का निर्णय किया है। शनिवार को आई एक खबर के मुताबिक नई सरकार के खर्च को कम करने के अभियान के तहत यह फैसला किया गया है। सुधा भारद्वाज ने जांच एजेंसी द्वारा उन पर लगा गए सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चौबीस अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान चौंतालीस. पाँच करोड़ डॉलर बढ़ गया। देश की सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट एमसीएलआर में शून्य. दो प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो पेट्रोल की कीमतें नब्बे पैसे बढ़ चुकी हैं। वहीं डीजल के दाम में एक. दस रुपयापए की बढ़ोत्तरी हुई है। विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए नौ अरब डॉलर की जरूरत है। इसके लिए फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कांग्रेस ने आज भाजपा सरकार पर भारतीय नागरिकों के बजाये दूसरे देशों को पेट्रोल और डीजल सस्ते दामों पर बेचने का आरोप लगाया। आइडिया और वोडाफोन के विलय को सरकार ने देश के दूरसंचार क्षेत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है और कहा है कि इससे देश में प्रतिस्पर्धा का माहौल सुधरेगा। आठ बुनियादी उद्योगों की जुलाई में वृद्धि दर छः. छः% रही। इसकी प्रमुख वजह कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट और उवर्रकों का उत्पादन बेहतर रहना है। विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने से वित्त वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर आठ. दो प्रतिशत दर्ज की गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा कि अगर डब्ल्यूटीओ खुद को दुरुस्त नहीं करता है, अमेरिका उससे अलग हो जाएगा। डाकिया अब सिर्फ डाक ही नहीं आपके द्वार तक बैंक भी लेकर आ रहा है। भारतीय डाक के विशाल नेटवर्क के माध्यम से इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक पूरे देश में बैंकिंग सेवा प्रदान करने के लिए तैयार है। |
दुमकाः झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के पोरैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार में उनके और पार्टी से निष्कासित विधायक बंधु तिर्की होने को सिरे से खारिज किया है.
यादव आज यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि वे और बंधु तिर्की की बजह मंत्रिमंडल के विस्तार में बाधक बनने का कोई प्रश्न ही नहीं है. मंत्री किन्हें बनाया जाये, यह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है.
उन्होंने झाविमो के भाजपा में विलय के सवाल पर कहा कि जब से गठबंधन का दौर चला है तब से शीर्ष नेतृत्व को सरकार चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. हर नेता मंत्री बनना चाहता है. कुनबे को संभालकर चलना कठिन काम है. किसके साथ रहेंगे, किसके दल में शामिल होंगे, दो फरवरी तक सारी चीज से पर्दा उठ जाएगा. जनता भी सब जान जाएगी, लेकिन थोड़ा इंतजार करना होगा.
पोड़ैयाहाट से झाविमो विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि जिस जगह से उनके क्षेत्र की जनता का भला होगा, प्रदीप उसके साथ खड़ा होगा. पूछने पर उन्होंने कहा कि पद से मुक्त करने वाला ही सही जबाब दे सकता है. जनता की आवाज बंद नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि मंत्री बनना या नहीं बनना यह तो मुख्यमंत्री के हाथ में हैं. मंत्री बनना जनता के बीच जाने का साधन होता है. कौन मंत्री नहीं बनना चाहता है. राजनीति में कदम रखने वाला हर व्यक्ति मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बनना चाहता है.
उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के सवाल कहा कि उनके कांग्रेस में जाने पर यदि जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी पद से इस्तीफा देने की बात कहते हैं तो यह उनकी राय हो सकती है. यह इरफान ही बेहतर बता सकते हैं.
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने यहां आये यादव ने कहा कि उनके और बंधु तिर्की की वजह से सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाने का प्रश्न बेबुनियाद है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर निशाना साधते हुए कहा कि रघुवर दास जी तो पूरे पांच साल तक सरकार चलाने के बाद भी एक मंत्री पद पर किसी को नहीं बैठा सके.
| दुमकाः झारखंड विकास मोर्चा के पोरैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार में उनके और पार्टी से निष्कासित विधायक बंधु तिर्की होने को सिरे से खारिज किया है. यादव आज यहां संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि वे और बंधु तिर्की की बजह मंत्रिमंडल के विस्तार में बाधक बनने का कोई प्रश्न ही नहीं है. मंत्री किन्हें बनाया जाये, यह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने झाविमो के भाजपा में विलय के सवाल पर कहा कि जब से गठबंधन का दौर चला है तब से शीर्ष नेतृत्व को सरकार चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. हर नेता मंत्री बनना चाहता है. कुनबे को संभालकर चलना कठिन काम है. किसके साथ रहेंगे, किसके दल में शामिल होंगे, दो फरवरी तक सारी चीज से पर्दा उठ जाएगा. जनता भी सब जान जाएगी, लेकिन थोड़ा इंतजार करना होगा. पोड़ैयाहाट से झाविमो विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि जिस जगह से उनके क्षेत्र की जनता का भला होगा, प्रदीप उसके साथ खड़ा होगा. पूछने पर उन्होंने कहा कि पद से मुक्त करने वाला ही सही जबाब दे सकता है. जनता की आवाज बंद नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मंत्री बनना या नहीं बनना यह तो मुख्यमंत्री के हाथ में हैं. मंत्री बनना जनता के बीच जाने का साधन होता है. कौन मंत्री नहीं बनना चाहता है. राजनीति में कदम रखने वाला हर व्यक्ति मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बनना चाहता है. उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के सवाल कहा कि उनके कांग्रेस में जाने पर यदि जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी पद से इस्तीफा देने की बात कहते हैं तो यह उनकी राय हो सकती है. यह इरफान ही बेहतर बता सकते हैं. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने यहां आये यादव ने कहा कि उनके और बंधु तिर्की की वजह से सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाने का प्रश्न बेबुनियाद है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर निशाना साधते हुए कहा कि रघुवर दास जी तो पूरे पांच साल तक सरकार चलाने के बाद भी एक मंत्री पद पर किसी को नहीं बैठा सके. |
आगरा। Big Accident शहर के डौकी थाना क्षेत्र के ग्राम माहपाट में गुरुवार सुबह स्कूल बस का इंतजार कर रहे 6 बच्चों को एक तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। जिससे तीन बच्चों की मौत हो गई। वहीं तीन बच्चे घायल है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
बता दें कि बच्चे सड़क के किनारे खड़े थे, जब फतेहाबाद रोड से आ रही एक कार ने उनमें से छह को कुचल दिया। जान बचाकर भागे कुछ बच्चों ने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। सहायक पुलिस आयुक्त फतेहाबाद, सौरभ सिंह ने कहा कि इस घटना में तीन बच्चों की मौत हो गई। उन्होंने कहा, तीन और बच्चों को चोटें आई हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नाकाबंदी हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
| आगरा। Big Accident शहर के डौकी थाना क्षेत्र के ग्राम माहपाट में गुरुवार सुबह स्कूल बस का इंतजार कर रहे छः बच्चों को एक तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। जिससे तीन बच्चों की मौत हो गई। वहीं तीन बच्चे घायल है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। बता दें कि बच्चे सड़क के किनारे खड़े थे, जब फतेहाबाद रोड से आ रही एक कार ने उनमें से छह को कुचल दिया। जान बचाकर भागे कुछ बच्चों ने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। सहायक पुलिस आयुक्त फतेहाबाद, सौरभ सिंह ने कहा कि इस घटना में तीन बच्चों की मौत हो गई। उन्होंने कहा, तीन और बच्चों को चोटें आई हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नाकाबंदी हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। |
इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे सीरीज के दौरान तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला, जहां पर उन्होंने पहले मैच के दौरान तूफानी शुरुआत की। प्रसिद्ध कृष्णा ने 4 विकेट लेते हुए सभी दर्शकों का दिल जीत लिया।
बता दें कि प्रसिद्ध कृष्णा डेब्यू मैच के दौरान भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी बन गए। प्रसिद्ध कृष्णा के इस रिकॉर्ड के दौरान उनके परिवार में खुशी का माहौल रहा। पूरे परिवार में मिठाई बांटी गई और उनके मामा ने खुशी-खुशी में अपनी शॉप पर फ्री का सामान भी दिया।
इस दौरान सबसे ज्यादा प्रसन्न थे, प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद। कृष्णा के क्रिकेट करियर में उनका अहम योगदान है, जो कि अपने समय में भी बॉलिंग ऑलराउंडर रह चुके हैं। प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद ने कहा कि, मैच के समय इंग्लैंड की पारी में घर के सभी सदस्य एक जगह पर जमा थे, कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला। सब लोग कृष्णा के डेब्यू की बधाइयां दे रहे हैं और पार्टी के बारे में भी कह रहे हैं।
बात की जाए प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद की तो वह अपने समय में बॉलिंग ऑलराउंडर थे लेकिन बाद में एक्सीडेंट हो जाने की वजह से उनके पैर में रोड डालनी पड़ी थी। जिस वजह से वह आगे नहीं खेल सके। उस समय प्रसिद्ध कृष्णा स्कूल की क्रिकेट टीम में शामिल होते थे। प्रसिद्ध कृष्णा की टैलेंट के बारे में उनके मामा को कर्नाटक के पूर्व क्रिकेटर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, प्रसिद्ध कृष्णा को क्लब क्रिकेट में खेलने का मौका मिलना चाहिए। इसके बाद उन्हें माउंट जॉय क्लब में भेजा गया, जहां पर कृष्णा ने 6 महीने तक समय बिताया। माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी बी के रवि प्रसिद्ध कृष्णा के बारे में एक किस्सा भी सुनाते हैं।
माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी ने बताया कि, "जब प्रसिद्ध कृष्णा कैंप में आए थे, तो वे काफी ज्यादा पतले और लंबे थे। हमलोग जब भी किसी लंबे खिलाड़ी को देखते हैं तो हम उसे ही बॉल थमा देते हैं। जब मैंने उनसे यह पूछा कि, कैसी गेंदबाजी करोगे? ? तो उन्होंने कहा कि, मैं तेज बॉल फेंकना चाहता हूं! तो हमने उससे कहा कि, भारत में तो कोई भी तेज गेंदबाज नहीं है? सबके साथ मीडियम फास्ट ही है! इसके बाद उन्होंने दोहराते हुए कहा कि, नहीं सर मैं तो तेज गेंदबाज ही हूं"।
माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी ने प्रसिद्ध कृष्णा के बारे में तारीफ करते हुए कहा कि, कृष्णा के क्लब में आने से पहले टीम काफी ज्यादा संघर्ष कर रही थी, लेकिन जब कृष्णा टीम में आए तो क्लब की किस्मत ही बदल गई थी। उनके प्रदर्शन के बाद टीम फर्स्ट डिवीजन में आ गई थी। बल्लेबाजों को उन्होंने काफी परेशान किया था। कई बात टीम के खिलाड़ी भी कहते थे कि, उसे क्यों ले लेते हो? आराम का मौका भी दिया करो।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, प्रसिद्ध कृष्णा को बांग्लादेश खिलाफ T20 सीरीज के लिए खेलने का मौका मिलने वाला था, लेकिन उस दौरान बात चोटिल हो गए थे। जिस कारण में शामिल नहीं हो सके। रोहित शर्मा ने भी प्रसिद्ध कृष्णा को टीम में लेने की जाहिर की थी, लेकिन चोट के चलते उन्हें मना करना पड़ा था।
माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी बीके रवि ने बताया कि, साल 2019 में विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल मैच होने के दौरान वे बेंगलुरु गए थे। उस दौरान उनसे पूछा गया कि, प्रसिद्ध कृष्णा को दलीप ट्रॉफी की टीम में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा? ? तब उन्होंने कहा कि, क्या दलीप ट्रॉफी! ! उसे तो बांग्लादेश के खिलाफ T20 सीरीज में भी लिया जा रहा है, लेकिन चोटिल होने के कारण वे शामिल नहीं हो सके।
| इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे सीरीज के दौरान तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला, जहां पर उन्होंने पहले मैच के दौरान तूफानी शुरुआत की। प्रसिद्ध कृष्णा ने चार विकेट लेते हुए सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। बता दें कि प्रसिद्ध कृष्णा डेब्यू मैच के दौरान भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी बन गए। प्रसिद्ध कृष्णा के इस रिकॉर्ड के दौरान उनके परिवार में खुशी का माहौल रहा। पूरे परिवार में मिठाई बांटी गई और उनके मामा ने खुशी-खुशी में अपनी शॉप पर फ्री का सामान भी दिया। इस दौरान सबसे ज्यादा प्रसन्न थे, प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद। कृष्णा के क्रिकेट करियर में उनका अहम योगदान है, जो कि अपने समय में भी बॉलिंग ऑलराउंडर रह चुके हैं। प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद ने कहा कि, मैच के समय इंग्लैंड की पारी में घर के सभी सदस्य एक जगह पर जमा थे, कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला। सब लोग कृष्णा के डेब्यू की बधाइयां दे रहे हैं और पार्टी के बारे में भी कह रहे हैं। बात की जाए प्रसिद्ध कृष्णा के मामा कृष्णा प्रसाद की तो वह अपने समय में बॉलिंग ऑलराउंडर थे लेकिन बाद में एक्सीडेंट हो जाने की वजह से उनके पैर में रोड डालनी पड़ी थी। जिस वजह से वह आगे नहीं खेल सके। उस समय प्रसिद्ध कृष्णा स्कूल की क्रिकेट टीम में शामिल होते थे। प्रसिद्ध कृष्णा की टैलेंट के बारे में उनके मामा को कर्नाटक के पूर्व क्रिकेटर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, प्रसिद्ध कृष्णा को क्लब क्रिकेट में खेलने का मौका मिलना चाहिए। इसके बाद उन्हें माउंट जॉय क्लब में भेजा गया, जहां पर कृष्णा ने छः महीने तक समय बिताया। माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी बी के रवि प्रसिद्ध कृष्णा के बारे में एक किस्सा भी सुनाते हैं। माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी ने बताया कि, "जब प्रसिद्ध कृष्णा कैंप में आए थे, तो वे काफी ज्यादा पतले और लंबे थे। हमलोग जब भी किसी लंबे खिलाड़ी को देखते हैं तो हम उसे ही बॉल थमा देते हैं। जब मैंने उनसे यह पूछा कि, कैसी गेंदबाजी करोगे? ? तो उन्होंने कहा कि, मैं तेज बॉल फेंकना चाहता हूं! तो हमने उससे कहा कि, भारत में तो कोई भी तेज गेंदबाज नहीं है? सबके साथ मीडियम फास्ट ही है! इसके बाद उन्होंने दोहराते हुए कहा कि, नहीं सर मैं तो तेज गेंदबाज ही हूं"। माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी ने प्रसिद्ध कृष्णा के बारे में तारीफ करते हुए कहा कि, कृष्णा के क्लब में आने से पहले टीम काफी ज्यादा संघर्ष कर रही थी, लेकिन जब कृष्णा टीम में आए तो क्लब की किस्मत ही बदल गई थी। उनके प्रदर्शन के बाद टीम फर्स्ट डिवीजन में आ गई थी। बल्लेबाजों को उन्होंने काफी परेशान किया था। कई बात टीम के खिलाड़ी भी कहते थे कि, उसे क्यों ले लेते हो? आराम का मौका भी दिया करो। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, प्रसिद्ध कृष्णा को बांग्लादेश खिलाफ Tबीस सीरीज के लिए खेलने का मौका मिलने वाला था, लेकिन उस दौरान बात चोटिल हो गए थे। जिस कारण में शामिल नहीं हो सके। रोहित शर्मा ने भी प्रसिद्ध कृष्णा को टीम में लेने की जाहिर की थी, लेकिन चोट के चलते उन्हें मना करना पड़ा था। माउंटजॉय क्लब के सेक्रेटरी बीके रवि ने बताया कि, साल दो हज़ार उन्नीस में विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल मैच होने के दौरान वे बेंगलुरु गए थे। उस दौरान उनसे पूछा गया कि, प्रसिद्ध कृष्णा को दलीप ट्रॉफी की टीम में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा? ? तब उन्होंने कहा कि, क्या दलीप ट्रॉफी! ! उसे तो बांग्लादेश के खिलाफ Tबीस सीरीज में भी लिया जा रहा है, लेकिन चोटिल होने के कारण वे शामिल नहीं हो सके। |
भी हैं* · । कृष्ण की होली- लीला से खीझ कर जब कोई गोपी उन्हें बाँस या लकुट से मारना चाहती है तब दूसरी उसे रोक कर कहती है - इन्हे मत मार; इनके सुकुमार शरीर पर चोट लग जायगी। इनकी माधुरी मूर्ति 'मारने' के लिए नहीं, " की ओट में रखने के योग्य है २१ । ललिता और चंद्रावली पीछे से आकर हरि को पकड़ती और सब सखियाँ सिमटकर उन्हें घेर लेती हैं। कोई पीतांबर भटकती है, कोई मुरली छीन लेती है, कोई मुख से मुख मिलाती है और कोई उन्हें अंक में भर लेती है । कोई कहती है कि तुमने हमारे 'चीर' हरे थे; आज उसका बदला लेना है; इसीलिए राधा के पैर पड़ो, तभी तुम्हें छुटकारा मिलेगा ।
इस प्रकार लाल-पीली अँगिया और साड़ी पहने, पान खाये, काजल लगाये व्रज की गलियों में हरि के संग फाग खेलती और गाली गाती व्रज बालाएँ घूमती फिरती हैं 3 । जब कभी वे श्याम को आता देखती हैं, तब उन्हें पकड़ने की योजना बनाती हैं । ललिता एक 'खोरिं' में छिप जाती है और श्याम के निकट आने पर दौड़कर पकड़ लेती है । तब वह उनसे कहती है - हमारे साथ अब तक आज उसका फल जान लोगे। तब कोई गोपी मुरली छीनती है, कोई पीतांबर पकड़ती है, कोई उनके बाल गूंथकर बेनी बनाती है, कोई लोचन
ख. इत 'लिये कनक लकुटिया नागरि', उत जेरी घरे ग्वार - सा० २८६५ ।
२०. 'मारति बाँस' लिए उन्नत कर भागत गोप त्रियनि सौं हारी - सा० २८६३ । २१. खेलत में रिस ना करि नागरि, स्यामहिं लागै चोट ।
मोहन हैं अति माधुरि-मूत, राखिये अंचलोट- सा० २८६५ । पाछे तैं ललिता चंद्रावलि, हरि पकरे भुज भरि कौरी की । ब्रज जुवती देखतहीं धाईं, जहाँ तहाँ तैं चहुँ ओरी की ।
इक पट पीतांबर गहि झटक्यौ, इक मुरली लई कर मोरी की ।
इक मुख सौं मुख जोरि रहति, इक अंक भरति रति-पति ओोरी की ।
' तब तुम चीर हरे जमुना तट', सुधि बिसरे माखन चोरी की । 'अब हम दाउँ आपनो लैहैं, पाइ परौ राधा गोरी की' - सा० २८७२ ।
२३. हरि सँग खेलन फागु चलीं ।
चोवा चंदन अगरु अरगजा छिरकति नगर-गलीं ।
राती पीरी अँगिया पहिरे, नव तन भूमक सारी ।
मुख तमोर, नैननि भरि काजर, देहिं भावती गारी - सा० २८७३ । | भी हैं* · । कृष्ण की होली- लीला से खीझ कर जब कोई गोपी उन्हें बाँस या लकुट से मारना चाहती है तब दूसरी उसे रोक कर कहती है - इन्हे मत मार; इनके सुकुमार शरीर पर चोट लग जायगी। इनकी माधुरी मूर्ति 'मारने' के लिए नहीं, " की ओट में रखने के योग्य है इक्कीस । ललिता और चंद्रावली पीछे से आकर हरि को पकड़ती और सब सखियाँ सिमटकर उन्हें घेर लेती हैं। कोई पीतांबर भटकती है, कोई मुरली छीन लेती है, कोई मुख से मुख मिलाती है और कोई उन्हें अंक में भर लेती है । कोई कहती है कि तुमने हमारे 'चीर' हरे थे; आज उसका बदला लेना है; इसीलिए राधा के पैर पड़ो, तभी तुम्हें छुटकारा मिलेगा । इस प्रकार लाल-पीली अँगिया और साड़ी पहने, पान खाये, काजल लगाये व्रज की गलियों में हरि के संग फाग खेलती और गाली गाती व्रज बालाएँ घूमती फिरती हैं तीन । जब कभी वे श्याम को आता देखती हैं, तब उन्हें पकड़ने की योजना बनाती हैं । ललिता एक 'खोरिं' में छिप जाती है और श्याम के निकट आने पर दौड़कर पकड़ लेती है । तब वह उनसे कहती है - हमारे साथ अब तक आज उसका फल जान लोगे। तब कोई गोपी मुरली छीनती है, कोई पीतांबर पकड़ती है, कोई उनके बाल गूंथकर बेनी बनाती है, कोई लोचन ख. इत 'लिये कनक लकुटिया नागरि', उत जेरी घरे ग्वार - साशून्य दो हज़ार आठ सौ पैंसठ । बीस. 'मारति बाँस' लिए उन्नत कर भागत गोप त्रियनि सौं हारी - साशून्य दो हज़ार आठ सौ तिरेसठ । इक्कीस. खेलत में रिस ना करि नागरि, स्यामहिं लागै चोट । मोहन हैं अति माधुरि-मूत, राखिये अंचलोट- साशून्य दो हज़ार आठ सौ पैंसठ । पाछे तैं ललिता चंद्रावलि, हरि पकरे भुज भरि कौरी की । ब्रज जुवती देखतहीं धाईं, जहाँ तहाँ तैं चहुँ ओरी की । इक पट पीतांबर गहि झटक्यौ, इक मुरली लई कर मोरी की । इक मुख सौं मुख जोरि रहति, इक अंक भरति रति-पति ओोरी की । ' तब तुम चीर हरे जमुना तट', सुधि बिसरे माखन चोरी की । 'अब हम दाउँ आपनो लैहैं, पाइ परौ राधा गोरी की' - साशून्य दो हज़ार आठ सौ बहत्तर । तेईस. हरि सँग खेलन फागु चलीं । चोवा चंदन अगरु अरगजा छिरकति नगर-गलीं । राती पीरी अँगिया पहिरे, नव तन भूमक सारी । मुख तमोर, नैननि भरि काजर, देहिं भावती गारी - साशून्य दो हज़ार आठ सौ तिहत्तर । |
Swine Flu: बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह को हुआ स्वाइन फ्लू, एम्स में एडमिट!
Big News: आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद की तबियत बिगड़ी ,जानिए क्यों !
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एक अच्छा बजट होटल काटा बीच एसपी हाउस3 * काटा और Karon समुद्र तटों के बीच अंडमान सागर के तट पर फुकेत के द्वीप पर स्थित है,। हवाई अड्डे की दूरी लगभग पचास किलोमीटर है। द्वीप की राजधानी के लिए कार द्वारा - फुकेत टाउन - लगभग आधे घंटे के लिए जाना उन लोगों के लिए जो इन जगहों से प्यार करते हैं, यह होटल सुरम्य परिवेश के माध्यम से यात्रा करने के लिए एक उत्कृष्ट प्रारंभिक बिंदु है। तथ्य यह है कि एक चट्टान पर है यह होटल और समुद्र तट ऊपर की ओर चलने के लिए है विशेष रूप से - इसके लिए कीमत के रूप में, तो यह ज्यादा ओवरलैप कुछ नुकसान थाई "treshki" में निहित है। आप और अधिक आराम से आराम करने के लिए चाहते हैं, आप होटल की तरह श्रेणी के विकल्प पर विचार कर सकते हैं - "। Beach Boutique हाउस" इस हालांकि, भी, "तीन रूबल", लेकिन यह सीधे समुद्र तट पर, बस समुद्र से कुछ ही कदम दूर है।
पर्यटकों का मानना है कि जगह जहांहोटल, बहुत अच्छा। वहाँ से फुकेत में दोनों प्रसिद्ध समुद्र तट से पहले दस से पंद्रह मिनट की पैदल दूरी पर जाने के लिए। होटल में एक अद्भुत दृश्य के साथ एक पहाड़ी पर खड़ा है। सही होटल के बगल में वहाँ सस्ती उत्पादों के साथ एक दुकान है। दूर एक छोटी सी आगे - दुकानों, कैफे और हर कदम पर मुद्रा विनिमय। मिनी गोल्फ का एक खेल के लिए क्षेत्र, "जुरासिक" की शैली में बनाया - होटल Kata Beach सपा हाउस के नजदीक प्रसिद्ध "डिनो पार्क" है। आगंतुकों गुफा, डायनासोर मॉडल, उनकी हड्डियों और अन्य खनिजों के कंकाल देख सकते हैं। होटल "डुकी खेल बार", जहाँ आप केवल पी सकते हैं नहीं और एक जलपान, लेकिन यह भी एक फुटबॉल मैच के प्रसारण देख से पैदल दूरी में। एक के पास Karon समुद्र तट, होटल से सिर्फ एक दस मिनट की पैदल दूरी पर, एक अच्छा इनडोर बाजार है जहाँ आप स्मृति चिन्ह और कपड़े, और खाना खरीद कर सकते हैं। शॉपिंग और मनोरंजन परिसर "Dzhangeseylon" जहां एक सिनेमा, स्पा, बुटीक और कई रेस्तरां - होटल से दस मिनट की ड्राइव। प्रवेश द्वार पर ठीक है तुम एक स्कूटर किराये पर ले सकते।
इस द्वीप को सबसे दिलचस्प माना जाता है औरथाईलैंड में एक विविध रिसॉर्ट। यहां जाएं और बच्चों के साथ परिवार, और "गो-शो" के प्रेमी, और जो विदेशी, प्राचीन मंदिरों और अद्भुत प्रकृति की प्रशंसा करना चाहते हैं जैसा कि द्वीप बहुत बड़ा है, हर कोई अपनी पसंद के लिए एक कोने मिल जाएगा - एकांत और विश्राम के समर्थक, और जो सभ्यता, नाइट क्लबों और डिस्को के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं करते हैं उदाहरण के लिए, काटा बीच क्षेत्र, जहां यह होटल स्थित है, बस आराम की छुट्टी के लिए उपयुक्त है। इसी समय, इसमें अच्छी संरचना है - यहां कई दुकानें और रेस्तरां हैं समुद्र तट ही दो भागों में विभाजित है। सबसे सुसज्जित और पर्यटकों से भरा "कोटा-याय" कहा जाता है यह बच्चों के परिवारों के लिए अच्छा है यह यहां सुरक्षित है, पानी की अच्छी पहुंच। समुद्र तट के पास कई दुकानें हैं, और एक बार एक बार एक ऐसा बाजार होता है जहां स्थानीय लोग खरीदारी करते हैं। यह यहाँ है कि आप लगभग एक देनदार राशि के लिए अच्छी मछली और समुद्री भोजन खरीद सकते हैं "काता-नोइ" एक शांत एकांत बे है। वहाँ कुछ लोग हैं, और एक सुनसान द्वीप की छाप बना है। पर्यटकों का दावा है कि समुद्र तट स्वयं बहुत साफ और बेहतर है। अगर आप बरसात के मौसम में आएंगे तो निराशा न करें - यह सर्फर्स के लिए समय है।
होटल काटा बीच एसपी हाउस 3 * (फुकेत, काटा)कई इमारतों में शामिल हैं, जिन्हें लैटिन वर्णमाला के अक्षरों के नाम पर रखा गया है। पुरानी और नई इमारतें हैं, इसलिए कमरे की सुविधा इस बात पर निर्भर करती है कि आप कहां आबादी वाले हैं। होटल में आंगन में एक रेस्तरां, बार, स्विमिंग पूल है, जो सनबाथिंग के लिए छत से घिरा हुआ है। क्षेत्र स्वयं स्वच्छ, कॉम्पैक्ट है। इस तथ्य के बावजूद कि यह बहुत सारे कैफे, मालिश पार्लर्स और मनोरंजन हैं, वहां पर्याप्त शांत है। तथ्य यह है कि होटल की इमारतें सड़क से काफी दूर हैं, और इसलिए आप शांति से सो सकते हैं - कोई संगीत नहीं, कोई आवाज नहीं सुनाई जा सकती है।
होटल काटा बीच एसपी हाउस 3 * बहुत बड़ा नहीं है। इसमें दो मेहमानों के लिए डिजाइन किए गए पचास कमरे हैं। अतिथि कमरे बहुत आरामदायक और विशाल हैं। उत्कृष्ट ध्वनि इन्सुलेशन। कमरों में एक रेफ्रिजरेटर, टीवी, एयर कंडीशनिंग, चाय और कॉफी मेकर, सुरक्षित है। व्यंजन भी हैं - मग, सॉकर। प्रत्येक कमरे में एक बालकनी है, जहां कपड़े, टेबल और कुर्सियों के लिए एक ड्रायर है। उस पर आप बैठ सकते हैं और रात्रिभोज कर सकते हैं। बाथरूम में एक शैम्पू और एक तरल साबुन है। अच्छे दबाव के साथ हमेशा गर्म और ठंडा पानी होता है। कमरे को साफ किया जाता है, जैसे तौलिए बदलते हैं। वैसे, एयर कंडीशनिंग पर्यटकों के साथ अधिक सावधान रहने की सलाह दी जाती है - यह सीधे बिस्तर से ऊपर स्थित है, यह उड़ सकता है। इसलिए, कुछ केवल छत पंखे का उपयोग करना पसंद करते हैं। विभिन्न आकारों के बहुत सारे अलमारियां हैं, जिन पर चीजों को रखना सुविधाजनक है। काटा बीच एसपी हाउस (फुकेत) में सर्वश्रेष्ठ, पर्यटक इमारत डी पर विचार करते हैं, जो पूल द्वारा स्थित है, और ई (हाल ही में बनाया गया)। इमारतों ए और बी में, कमरे थोड़ा छोटे हैं, लेकिन उनका "भरना" लगभग समान है।
काटा बीच एसपी हाउस 3 * में आप कर सकते हैंकार पार्क करें। रिसेप्शन पर एक कैमरा है जहां आप प्रस्थान की उम्मीद करते हैं तो आप सामान छोड़ सकते हैं। कमरे और पूरे क्षेत्र में, "वाई-फाई" पकड़ता है। केवल कमरे में इसका उपयोग करने के लिए आपको अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यदि कोई बच्चा जो दस साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाया है, तो वह आपके साथ कमरे में रह सकता है। और नाश्ते के लिए वह डबल छूट के हकदार है। होटल के कर्मचारी पेशेवर, दोस्ताना, सहायक हैं। किसी भी उभरती समस्याओं को हल किया जाता है। रिसेप्शन पर आप पासपोर्ट की प्रतियां मुफ्त में कर सकते हैं। होटल में एक डॉक्टर का कार्यालय, ड्राई क्लीनिंग और कपड़े धोने का काम है।
होटल काटा बीच एसपी हाउस पर्यटकों मेंज्यादातर नाश्ता। होटल में सुबह के भोजन मेहमानों की प्रशंसा के लायक हैं। नाश्ते के लिए एक आमलेट, बेकन, सॉसेज, टमाटर, तरबूज के स्लाइस दें। इसके अलावा, हमेशा असीमित मात्रा में कॉफी, चाय, टोस्ट, विभिन्न जाम उपलब्ध होते हैं। होटल में एक रेस्तरां भी है जो न केवल थाई, बल्कि यूरोपीय व्यंजन परोसता है। समुद्री भोजन विशेष रूप से अच्छा है - हमेशा ताजा और अच्छी तरह से पकाया जाता है। लेकिन, सिद्धांत रूप में, दोपहर के भोजन और रात का खाना सैकड़ों अलग-अलग स्थानों में हो सकता है - रेस्तरां से सड़क कैफे और "makashnits।" आप पचास बाहट प्रति व्यक्ति से पांच सौ तक खा सकते हैं - यह आपके बटुए और खाने की आदतों पर निर्भर करता है।
कैफे "काटा विला" में, जो बाईं ओर हैहोटल सपा हाउस (फुकेत, काटा समुद्र तट), निः शुल्क लंच और रात्रिभोज के लिए कूपन दे। यही कारण है, अगर तुम वहाँ पैसे, खिलाने के लिए दूसरे प्रस्ताव के लिए एक बार खाने जाएगा "Chardjui आलू का।"
काटा बीच एसपी हाउस होटल3 * (फुकेत, काटा) केवल दो समुद्र तट - काटा और करन। वे होटल से लगभग उसी दूरी पर हैं, उन्हें पहाड़ी से उतरने की जरूरत है। काटा शांत तैराकी के प्रेमियों के लिए उपयुक्त है, वहां साफ है, व्यावहारिक रूप से कोई लहर नहीं है। दोनों समुद्र तट सुसज्जित हैं, आप छतरियों और सूर्य लाउंजर्स किराए पर ले सकते हैं। करन उन लोगों की तरह अधिक है जो तरंगों पर "कूदना" पसंद करते हैं, और इसके अलावा, अद्भुत सनसेट्स भी हैं। यहां आप पत्थरों के पास मास्क के साथ तैर सकते हैं। हालांकि पानी के नीचे की दुनिया लाल सागर के समान नहीं है, वहां बहुत सारी मछली हैं। करन बीच पर, पर्यटकों को होटल "मरीना" के क्षेत्र से घूमने की सलाह दी जाती है - विशेष रूप से शाम को बहुत सुंदर है। एक ही कीमत के लिए हर जगह सनबेड - एक सौ बाहट प्रति दिन। आप छोड़ सकते हैं, अपने तौलिए छोड़ सकते हैं, कोई भी स्पर्श नहीं करेगा। होटल के आंगन में एक स्विमिंग पूल है - छोटा लेकिन साफ और आरामदायक। वहां पर्यटकों को समुद्र के बाद आराम करना पसंद है। विशेष रूप से दोपहर में वह छाया में पूरी तरह से है।
काटा बीच हाउस में छुट्टियों की यात्राफुकेत के आसपास पर्यटन स्थलों का भ्रमण पर्यटन। आखिरकार, इस अद्भुत द्वीप पर जाने के लिए और इसके आकर्षण के कुछ भी देखने के लिए एक बड़ा पर्यटक पाप है। मछलीघर, राष्ट्रीय उद्यान Sirinat, तितली और आर्किड उद्यान, एक साँप खेत, मंदिरों (विशेष रूप से वाट Chapong), "बिग बुद्ध" की एक मूर्ति - यह सब आप दौरों पर या अपने दम पर देख सकते हैं, एक टैक्सी या "टुक-टुक" किराया। आप प्रकृति के रोमांच और अद्भुत प्रदर्शन दोनों प्राप्त करेंगे। तुम्हारे लिए, सांप नृत्य करेंगे, और शार्क आपके हाथों पर होंगे। और आप एक थाई गांव के लिए एक नृवंशविज्ञान यात्रा पर जा सकते हैं। वहां आप प्रसिद्ध मुक्केबाजी और यहां तक कि स्थानीय शादी की रीति-रिवाजों को भी देखेंगे। और Sirinat आप फुकेत में सबसे आश्चर्यजनक समुद्र तटों और पानी पार्क "स्पलैश जंगल", जो उदासीन न वयस्कों और न ही बच्चों को नहीं छोड़ देंगे पर जाएँ।
पर्यटक ज्यादातर इस तथ्य के बारे में लिखते हैं कि यह हैएक अच्छा होटल जो आराम से रहने और विश्राम के लिए उपयुक्त है, और साथ ही आप बहुत पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं। कुछ ने फुकेत में एक स्टॉप के लिए इसे आदर्श विकल्प भी कहा। फिर आप और समुद्र, और सूर्य, और खरीदारी, और संज्ञानात्मक पर्यटन, और विदेशी प्रकृति। बेशक, यह महलों और सभी समावेशी प्रेमियों के लिए नहीं है। कमरे साफ, साफ, सुखद, उज्ज्वल हैं। इस तथ्य के बावजूद कि यह एक होटल है, पर्यटकों को घर पर महसूस हुआ। शांत, कोई भी आराम करने और यहां तक कि ध्यान में हस्तक्षेप नहीं करता है। ऐसा लगता है कि आसपास की सुंदरता केवल आपके लिए ही बनाई गई है।
| एक अच्छा बजट होटल काटा बीच एसपी हाउसतीन * काटा और Karon समुद्र तटों के बीच अंडमान सागर के तट पर फुकेत के द्वीप पर स्थित है,। हवाई अड्डे की दूरी लगभग पचास किलोमीटर है। द्वीप की राजधानी के लिए कार द्वारा - फुकेत टाउन - लगभग आधे घंटे के लिए जाना उन लोगों के लिए जो इन जगहों से प्यार करते हैं, यह होटल सुरम्य परिवेश के माध्यम से यात्रा करने के लिए एक उत्कृष्ट प्रारंभिक बिंदु है। तथ्य यह है कि एक चट्टान पर है यह होटल और समुद्र तट ऊपर की ओर चलने के लिए है विशेष रूप से - इसके लिए कीमत के रूप में, तो यह ज्यादा ओवरलैप कुछ नुकसान थाई "treshki" में निहित है। आप और अधिक आराम से आराम करने के लिए चाहते हैं, आप होटल की तरह श्रेणी के विकल्प पर विचार कर सकते हैं - "। Beach Boutique हाउस" इस हालांकि, भी, "तीन रूबल", लेकिन यह सीधे समुद्र तट पर, बस समुद्र से कुछ ही कदम दूर है। पर्यटकों का मानना है कि जगह जहांहोटल, बहुत अच्छा। वहाँ से फुकेत में दोनों प्रसिद्ध समुद्र तट से पहले दस से पंद्रह मिनट की पैदल दूरी पर जाने के लिए। होटल में एक अद्भुत दृश्य के साथ एक पहाड़ी पर खड़ा है। सही होटल के बगल में वहाँ सस्ती उत्पादों के साथ एक दुकान है। दूर एक छोटी सी आगे - दुकानों, कैफे और हर कदम पर मुद्रा विनिमय। मिनी गोल्फ का एक खेल के लिए क्षेत्र, "जुरासिक" की शैली में बनाया - होटल Kata Beach सपा हाउस के नजदीक प्रसिद्ध "डिनो पार्क" है। आगंतुकों गुफा, डायनासोर मॉडल, उनकी हड्डियों और अन्य खनिजों के कंकाल देख सकते हैं। होटल "डुकी खेल बार", जहाँ आप केवल पी सकते हैं नहीं और एक जलपान, लेकिन यह भी एक फुटबॉल मैच के प्रसारण देख से पैदल दूरी में। एक के पास Karon समुद्र तट, होटल से सिर्फ एक दस मिनट की पैदल दूरी पर, एक अच्छा इनडोर बाजार है जहाँ आप स्मृति चिन्ह और कपड़े, और खाना खरीद कर सकते हैं। शॉपिंग और मनोरंजन परिसर "Dzhangeseylon" जहां एक सिनेमा, स्पा, बुटीक और कई रेस्तरां - होटल से दस मिनट की ड्राइव। प्रवेश द्वार पर ठीक है तुम एक स्कूटर किराये पर ले सकते। इस द्वीप को सबसे दिलचस्प माना जाता है औरथाईलैंड में एक विविध रिसॉर्ट। यहां जाएं और बच्चों के साथ परिवार, और "गो-शो" के प्रेमी, और जो विदेशी, प्राचीन मंदिरों और अद्भुत प्रकृति की प्रशंसा करना चाहते हैं जैसा कि द्वीप बहुत बड़ा है, हर कोई अपनी पसंद के लिए एक कोने मिल जाएगा - एकांत और विश्राम के समर्थक, और जो सभ्यता, नाइट क्लबों और डिस्को के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं करते हैं उदाहरण के लिए, काटा बीच क्षेत्र, जहां यह होटल स्थित है, बस आराम की छुट्टी के लिए उपयुक्त है। इसी समय, इसमें अच्छी संरचना है - यहां कई दुकानें और रेस्तरां हैं समुद्र तट ही दो भागों में विभाजित है। सबसे सुसज्जित और पर्यटकों से भरा "कोटा-याय" कहा जाता है यह बच्चों के परिवारों के लिए अच्छा है यह यहां सुरक्षित है, पानी की अच्छी पहुंच। समुद्र तट के पास कई दुकानें हैं, और एक बार एक बार एक ऐसा बाजार होता है जहां स्थानीय लोग खरीदारी करते हैं। यह यहाँ है कि आप लगभग एक देनदार राशि के लिए अच्छी मछली और समुद्री भोजन खरीद सकते हैं "काता-नोइ" एक शांत एकांत बे है। वहाँ कुछ लोग हैं, और एक सुनसान द्वीप की छाप बना है। पर्यटकों का दावा है कि समुद्र तट स्वयं बहुत साफ और बेहतर है। अगर आप बरसात के मौसम में आएंगे तो निराशा न करें - यह सर्फर्स के लिए समय है। होटल काटा बीच एसपी हाउस तीन * कई इमारतों में शामिल हैं, जिन्हें लैटिन वर्णमाला के अक्षरों के नाम पर रखा गया है। पुरानी और नई इमारतें हैं, इसलिए कमरे की सुविधा इस बात पर निर्भर करती है कि आप कहां आबादी वाले हैं। होटल में आंगन में एक रेस्तरां, बार, स्विमिंग पूल है, जो सनबाथिंग के लिए छत से घिरा हुआ है। क्षेत्र स्वयं स्वच्छ, कॉम्पैक्ट है। इस तथ्य के बावजूद कि यह बहुत सारे कैफे, मालिश पार्लर्स और मनोरंजन हैं, वहां पर्याप्त शांत है। तथ्य यह है कि होटल की इमारतें सड़क से काफी दूर हैं, और इसलिए आप शांति से सो सकते हैं - कोई संगीत नहीं, कोई आवाज नहीं सुनाई जा सकती है। होटल काटा बीच एसपी हाउस तीन * बहुत बड़ा नहीं है। इसमें दो मेहमानों के लिए डिजाइन किए गए पचास कमरे हैं। अतिथि कमरे बहुत आरामदायक और विशाल हैं। उत्कृष्ट ध्वनि इन्सुलेशन। कमरों में एक रेफ्रिजरेटर, टीवी, एयर कंडीशनिंग, चाय और कॉफी मेकर, सुरक्षित है। व्यंजन भी हैं - मग, सॉकर। प्रत्येक कमरे में एक बालकनी है, जहां कपड़े, टेबल और कुर्सियों के लिए एक ड्रायर है। उस पर आप बैठ सकते हैं और रात्रिभोज कर सकते हैं। बाथरूम में एक शैम्पू और एक तरल साबुन है। अच्छे दबाव के साथ हमेशा गर्म और ठंडा पानी होता है। कमरे को साफ किया जाता है, जैसे तौलिए बदलते हैं। वैसे, एयर कंडीशनिंग पर्यटकों के साथ अधिक सावधान रहने की सलाह दी जाती है - यह सीधे बिस्तर से ऊपर स्थित है, यह उड़ सकता है। इसलिए, कुछ केवल छत पंखे का उपयोग करना पसंद करते हैं। विभिन्न आकारों के बहुत सारे अलमारियां हैं, जिन पर चीजों को रखना सुविधाजनक है। काटा बीच एसपी हाउस में सर्वश्रेष्ठ, पर्यटक इमारत डी पर विचार करते हैं, जो पूल द्वारा स्थित है, और ई । इमारतों ए और बी में, कमरे थोड़ा छोटे हैं, लेकिन उनका "भरना" लगभग समान है। काटा बीच एसपी हाउस तीन * में आप कर सकते हैंकार पार्क करें। रिसेप्शन पर एक कैमरा है जहां आप प्रस्थान की उम्मीद करते हैं तो आप सामान छोड़ सकते हैं। कमरे और पूरे क्षेत्र में, "वाई-फाई" पकड़ता है। केवल कमरे में इसका उपयोग करने के लिए आपको अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यदि कोई बच्चा जो दस साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाया है, तो वह आपके साथ कमरे में रह सकता है। और नाश्ते के लिए वह डबल छूट के हकदार है। होटल के कर्मचारी पेशेवर, दोस्ताना, सहायक हैं। किसी भी उभरती समस्याओं को हल किया जाता है। रिसेप्शन पर आप पासपोर्ट की प्रतियां मुफ्त में कर सकते हैं। होटल में एक डॉक्टर का कार्यालय, ड्राई क्लीनिंग और कपड़े धोने का काम है। होटल काटा बीच एसपी हाउस पर्यटकों मेंज्यादातर नाश्ता। होटल में सुबह के भोजन मेहमानों की प्रशंसा के लायक हैं। नाश्ते के लिए एक आमलेट, बेकन, सॉसेज, टमाटर, तरबूज के स्लाइस दें। इसके अलावा, हमेशा असीमित मात्रा में कॉफी, चाय, टोस्ट, विभिन्न जाम उपलब्ध होते हैं। होटल में एक रेस्तरां भी है जो न केवल थाई, बल्कि यूरोपीय व्यंजन परोसता है। समुद्री भोजन विशेष रूप से अच्छा है - हमेशा ताजा और अच्छी तरह से पकाया जाता है। लेकिन, सिद्धांत रूप में, दोपहर के भोजन और रात का खाना सैकड़ों अलग-अलग स्थानों में हो सकता है - रेस्तरां से सड़क कैफे और "makashnits।" आप पचास बाहट प्रति व्यक्ति से पांच सौ तक खा सकते हैं - यह आपके बटुए और खाने की आदतों पर निर्भर करता है। कैफे "काटा विला" में, जो बाईं ओर हैहोटल सपा हाउस , निः शुल्क लंच और रात्रिभोज के लिए कूपन दे। यही कारण है, अगर तुम वहाँ पैसे, खिलाने के लिए दूसरे प्रस्ताव के लिए एक बार खाने जाएगा "Chardjui आलू का।" काटा बीच एसपी हाउस होटलतीन * केवल दो समुद्र तट - काटा और करन। वे होटल से लगभग उसी दूरी पर हैं, उन्हें पहाड़ी से उतरने की जरूरत है। काटा शांत तैराकी के प्रेमियों के लिए उपयुक्त है, वहां साफ है, व्यावहारिक रूप से कोई लहर नहीं है। दोनों समुद्र तट सुसज्जित हैं, आप छतरियों और सूर्य लाउंजर्स किराए पर ले सकते हैं। करन उन लोगों की तरह अधिक है जो तरंगों पर "कूदना" पसंद करते हैं, और इसके अलावा, अद्भुत सनसेट्स भी हैं। यहां आप पत्थरों के पास मास्क के साथ तैर सकते हैं। हालांकि पानी के नीचे की दुनिया लाल सागर के समान नहीं है, वहां बहुत सारी मछली हैं। करन बीच पर, पर्यटकों को होटल "मरीना" के क्षेत्र से घूमने की सलाह दी जाती है - विशेष रूप से शाम को बहुत सुंदर है। एक ही कीमत के लिए हर जगह सनबेड - एक सौ बाहट प्रति दिन। आप छोड़ सकते हैं, अपने तौलिए छोड़ सकते हैं, कोई भी स्पर्श नहीं करेगा। होटल के आंगन में एक स्विमिंग पूल है - छोटा लेकिन साफ और आरामदायक। वहां पर्यटकों को समुद्र के बाद आराम करना पसंद है। विशेष रूप से दोपहर में वह छाया में पूरी तरह से है। काटा बीच हाउस में छुट्टियों की यात्राफुकेत के आसपास पर्यटन स्थलों का भ्रमण पर्यटन। आखिरकार, इस अद्भुत द्वीप पर जाने के लिए और इसके आकर्षण के कुछ भी देखने के लिए एक बड़ा पर्यटक पाप है। मछलीघर, राष्ट्रीय उद्यान Sirinat, तितली और आर्किड उद्यान, एक साँप खेत, मंदिरों , "बिग बुद्ध" की एक मूर्ति - यह सब आप दौरों पर या अपने दम पर देख सकते हैं, एक टैक्सी या "टुक-टुक" किराया। आप प्रकृति के रोमांच और अद्भुत प्रदर्शन दोनों प्राप्त करेंगे। तुम्हारे लिए, सांप नृत्य करेंगे, और शार्क आपके हाथों पर होंगे। और आप एक थाई गांव के लिए एक नृवंशविज्ञान यात्रा पर जा सकते हैं। वहां आप प्रसिद्ध मुक्केबाजी और यहां तक कि स्थानीय शादी की रीति-रिवाजों को भी देखेंगे। और Sirinat आप फुकेत में सबसे आश्चर्यजनक समुद्र तटों और पानी पार्क "स्पलैश जंगल", जो उदासीन न वयस्कों और न ही बच्चों को नहीं छोड़ देंगे पर जाएँ। पर्यटक ज्यादातर इस तथ्य के बारे में लिखते हैं कि यह हैएक अच्छा होटल जो आराम से रहने और विश्राम के लिए उपयुक्त है, और साथ ही आप बहुत पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं। कुछ ने फुकेत में एक स्टॉप के लिए इसे आदर्श विकल्प भी कहा। फिर आप और समुद्र, और सूर्य, और खरीदारी, और संज्ञानात्मक पर्यटन, और विदेशी प्रकृति। बेशक, यह महलों और सभी समावेशी प्रेमियों के लिए नहीं है। कमरे साफ, साफ, सुखद, उज्ज्वल हैं। इस तथ्य के बावजूद कि यह एक होटल है, पर्यटकों को घर पर महसूस हुआ। शांत, कोई भी आराम करने और यहां तक कि ध्यान में हस्तक्षेप नहीं करता है। ऐसा लगता है कि आसपास की सुंदरता केवल आपके लिए ही बनाई गई है। |
बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार का कैबिनेट विस्तार मंगलवार को हो गया. नीतीश की नई कैबिनेट में 31 नेताओं को राज्यपाल फागू चौहान ने मंत्री पद की शपथ दिलाई. महागठबंधन की सरकार में आरजेडी से 16, जेडीयू से 11, कांग्रेस से 2, हम से एक और एक निर्दलीय ने शपथ ली. जेडीयू के कोटे से एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाया गया, इस तरह नीतीश के हिस्से में 12 मंत्री पद आए हैं.
जेडीयू कोटे से बिजेंद्र प्रसाद यादव एक बार फिर मंत्री बने हैं, नीतीश सरकार में यादव चेहरा हैं. बिहार के कोसी क्षेत्र से आते हैं, जहां यादव मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. सुपौल सीट से बिजेंद्र प्रसाद यादव ने लगातार आठवीं बार जीत दर्ज की है.
जेडीयू कोटे से अशोक चौधरी को एक बार फिर नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट में जगह दी है. वो महादलित समुदाय से आते हैं और जेडीयू की दलित राजनीति के फॉर्मूले में फिट हैं. हालांकि, अशोक चौधरी एमएलसी हैं. अशोक चौधरी ने मार्च 2018 में कांग्रेस को अलविदा कह कर जेडीयू का दामन थामा था. नीतीश के करीबी और विश्वासपात्र माने जाते हैं.
जेडीयू कोटे से विजय चौधरी को नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जो भूमिहार समुदाय से आते हैं. बिहार की राजनीति में भूमिहार काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. विजय चौधरी नीतीश की अगुवाई वाली पिछली महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्यक्ष थे, लेकिन 2020 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था और फिर से मंत्री बने हैं. सरायरंजन सीट से वो विधायक हैं.
जेडीयू कोटे से लेसी सिंह एक बार फिर से मंत्री बनी हैं. नीतीश की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में खाद्य-उपभोक्ता मंत्री पद का जिम्मा संभाल रही थीं. नीतीश कुमार के साथ लेसी सिंह समता पार्टी के जमाने से जुड़ी हुई हैं. सीमांचल से आती हैं और धमदाहा विधानसभा सीट से विधायक हैं. 2014 में आपदा प्रबंधन और समाज कल्याण मंत्री बनी थीं. पूर्णिया के सरसी में लेसी सिंह का जन्म 5 जनवरी 1974 को हुआ और यादव समुदाय से आती हैं.
जेडीयू कोटे से शीला मंडल को मंत्री बनाया गया है. बिहार में अतिपिछड़ा समुदाय की धानुक जातीय से शीला मंडल आती हैं, जो कि नीतीश का मजबूत वोटबैंक माना जाता है. मिथिलांचल के फुलपरास से जेडीयू की विधायक हैं. हालांकि, वो पहली बार विधायक बनीं और उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है. एनडीए सरकार के दौरान भी मंत्री रही हैं.
जेडीयू कोटे से श्रवण कुमार एक बार फिर से मंत्री बने हैं. वो नीतीश कुमार की कुर्मी जाति से आते हैं. सीएम के गृह जिले नालंदा से आते हैं और सातवीं बार श्रवण कुमार विधायक हैं. 1995 से लगातार नालंदा विधान सभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जेडीयू के सियासी समीकरण के लिहाज से काफी फिट माने जाते हैं. समता पार्टी के दौर से नीतीश के साथ हैं और उनके सबसे खास हैं.
जेडीयू कोटे से सुनील कुमार मंत्री बने हैं. वह गोपालगंज जिले के भोरे सीट से जेडीयू के विधायक हैं. नीतीश कुमार ने सुनील कुमार को मौका देकर दलित राजनीति को साधने का काम किया है. सुनील कुमार बिहार पुलिस के एडीजी रहे हैं और वो रिटारमेंट के बाद 2020 में जेडीयू का दामन थामा था और पहली बार में विधायक बने और उसके बाद एनडीए सरकार में मंत्री रहे और दूसरी बार उन्हें मौका दिया है.
जेडीयू कोटे से मदन सहनी एक बार फिर मंत्री बने हैं. 2020 में बनी एनडीए सरकार में समाज कल्याण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे. मदन सहनी दरभंगा जिले के बहादुरपुर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं. वो अतिपिछड़े समुदाय से आते हैं, जो जेडीयू का मजबूत वोटबैंक माना जाता है.
नीतीश कुमार के राइट हैंड माने जाने वाले संजय कुमार झा एक बार फिर से मंत्री बने हैं. मिथिलांचल से आते हैं और ब्राह्मण समुदाय से हैं. एनडीए सरकार में संजय झा जलसंसाधन, सूचना और जनसंपर्क सहकारिता मंत्री थे. नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते हैं.
जेडीयू कोटे से जमा खान एक बार फिर से मंत्री बने हैं. जमा खान 2020 में कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में जेडीयू का दामन थाम लिया था. इसके बाद ही जमा खान को अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया था. बिहार के भोजपुर इलाके से आते हैं और जेडीयू में एकलौते मुस्लिम चेहरा हैं.
जेडीयू कोटे से जयंत राज कुशवाहा को मंत्री बनाया है और बांका क्षेत्र से आते हैं. एनीडीए सरकार के दौरान वे मंत्रिमंडल के सबसे युवा चेहरों के रूप में थे. उनकी उम्र केवल 36 साल है. उनके पिता जनार्दन मांझी दो बार अमरपुर और एक बार बेलहर से विधायक रहे हैं. इस बार उनकी जगह उनके बेटे जयंत राज को अमरपुर का टिकट दिया गया था और जीतने में सफल रहे. कुशवाहा समाज से आते हैं.
लालू प्रसाद यादव को बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर से कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है. तेज प्रताप दूसरी बार विधायक हैं. पहली बार महुआ सीट से विधायक रहे हैं और इस बार हसनपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 2015 में बनी महागठबंधन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं.
आरजेडी कोटे से आलोक मेहता को मंत्री बनाया है. लालू परिवार के बेहद करीबी और सुलझे हुए नेता हैं. आलोक मेहता आरजेडी में उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपनी सादगी और सूझबूझ से आरजेडी जैसी पार्टी में बेदाग छवि रखते हैं. ये कोइरी समाज से आते हैं और आरजेडी के अतिपछड़ा चेहरा हैं.
आरजेडी कोटे से मंत्री बने सुरेंद्र यादव को मंत्री बनाया गया है. 7 बार बेलागंज विधानसभा सीट के विधायक और लोकसभा सांसद रहे सुरेंद्र प्रसाद यादव साउथ बिहार इलाके से आते हैं. सुरेंद्र प्रसाद यादव आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं. जहानाबाद सीट से सांसद रह चुके हैं और दबंग नेता माने जाते हैं. संसद रहते हुए लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को फाड़ दिया था.
आरजेडी कोटे से रामानंद यादव मंत्री बने हैं. लालू परिवार के करीबी और पार्टी के दिग्गज नेता माने जाते हैं. बिहार के फतुहा विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बने हैं. आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं.
आरजेडी कोटे से समीर कुमार महासेठ मंत्री बने हैं. मिथालांचल के मधुबनी विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं. वह अपने छात्र जीवन से ही यानी 1977 से ही राजनीति में शामिल हुए थे. ये 2003 से 2009 तक एमएलसी रहे. अतिपिछड़े समुदाय के सूड़ी समाज से आते हैं.
आरजेडी कोटे से चंद्रशेखर यादव मंत्री बने हैं. लालू परिवार के करीबी माने जाने वाले चंद्रशेखर को कैबिनेट में शामिल किया गया है, जो आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं.
आरजेडी कोटे से इसराइल मंसूरी मंत्री बने हैं. बिहार में पहली बार धुनिया समाज से कोई मंत्री और विधायक बना है. वो मुजफ्फरपुर की कांटी विधानसभा से विधायक हैं. . इसराइल मुस्लिम समुदाय के अत्यंत पिछड़े वर्ग के धुनिया जाति से आते हैं. आजादी के बाद बिहार में पहली बार मंसूरी समाज का कोई नेता विधानसभा में है. तेजस्वी यादव के द्वारा सामाजिक न्याय के प्रयासों का यह अंतिम कतार तक विस्तार माना जा रहा है. बिहार में कुल 16 प्रतिशत मुसलमानों की आबादी है जिसमें मंसूरी समाज की करीब साढ़े तीन फीसदी संख्या है. सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से यह बिरादरी मुस्लिमों में काफी वंचित रही है, ऐसे में आरजेडी ने उन्हें टिकट देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कवायद की है.
आरजेडी कोटे से कुमार सर्वजीत को भी मंत्री बनाया गया है. बोधगया विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक हैं. आरजेडी के दलित चेहरा माने जाते हैं. वो साउथ बिहार से आते हैं और दलित समीकरण को देखते हुए मौका दिया है. सर्वजीत के पिता मगध से सांसद रह चुके हैं. 2005 के विधानसभा चुनाव में गया जिले के इमामगंज सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजेश कुमार की हत्या चुनावी सभा से लौटने के दौरान करा दी गई, जिसके बाद कुमार सर्वजीत ने कदम रखा. बोधगया के राजद विधायक कुमार सर्वजीत अपने पिता पूर्व सांसद स्व. राजेश कुमार की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए मगध दलितों के साथ-साथ सभी जाति के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं.
आरजेडी कोटे से अनीता देवी मंत्री बनी हैं. तेजस्वी यादव के करीबी मानी जाती हैं और वो अतिपिछड़ा समुदाय के आती हैं. रोहतास जिला के नोखा विधानसभा क्षेत्र के महागठबंधन के राजद का नेतृत्व कर विधायक बनी अनिता देवी आज बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में पर्यटन मंत्री है. सियासत में आने से पहले वो शिक्षिका थी. पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय जंगी चौधरी की पुत्रवधू पूर्व मंत्री आनंद मोहन की पत्नी हैं.
आरजेडी कोटे से ललित यादव मंत्री बनाए गए हैं. मिथालांचल के दरभंगा ग्रामीण सीट से विधायक हैं. मिथिला के सियासी समीकरण को देखते हुए तेजस्वी यादव ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी है. आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं.
आरजेडी कोटे से सुधाकर सिंह मंत्री बने हैं. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह हैं. साल 2020 में रामगढ़ सीट से आरजेडी के विधायक बने हैं. बिहार के सियासी समीकरण को देखते हुए आरजेडी ने राजपूत चेहरे के तौर पर उन्हें कैबिनेट में शामिल किया है.
आरजेडी कोटे से जितेंद्र कुमार राय को मंत्री बनाया गया है. सारण जिले के मढ़ौरा विधानसभा सीट से जितेंद्र कुमार राय तीसरी बार विधायक हैं. उनके पिता यदुवंशी राय भी इस सीट से दो बार विधायक रहे हैं. वो यादव समुदाय से आते हैं और दिग्गज नेता माने जाते हैं. भोजपुरी बेल्ट से आते हैं.
आरजेडी कोटे से एमएलसी कार्तिक सिंह को मंत्री बनाया गया गया है. आनंत सिंह के करीबी माने जाने वाले कार्तिक अपने समर्थकों के बीच 'कार्तिक मास्टर' के नाम से मशहूर हैं. 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कार्तिक मास्टर और अनंत सिंह की दोस्ती परवान चढ़ी. इसके बाद में अनंत सिंह के अहम चुनावी रणनीतिकार के रूप में कार्तिक मास्टर को पहचान मिली. भूमिहार वोटों के समीकरण को देखते हुए आरजेडी ने कार्तिक सिंह को कैबिनेट में जगह दी है.
आरजेडी कोटे से शाहनवाज आलम को मंत्री बनाया गया है. शाहनवाज दूसरी बार विधायक हैं और 2020 में AIMIM के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन बाद में उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया. सीमांचल के इलाके से आते हैं. अरारिया जिले की जोकीहाट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज आलम हैं और अपने भाई को हराकर विधायक बने हैं. मुस्लिम प्रतिनिधित्व के रूप में उन्हें महागठबंधन सरकार में जगह मिली है.
आरजेडी कोटे से सुरेंद्र राम को मंत्री बने हैं. सारण के गरखा सीट से आरजेडी के विधायक हैं. आरजेडी की दलित राजनीति के तहत सुरेंद्र राम को कैबिनेट में शामिल किया गया है.
आरजेडी कोटे से शमीम अहमद मंत्री बने हैं. पूर्वी चंपारण के नरकटिया सीट से दूसरी बार विधायक हैं. शमीम पेश से डाक्टर और 2010 में पहला चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गई थे. उनके पिता भी डाक्टर रहे हैं. डॉ शमीम अहमद का जन्म 6 जनवरी 1972 को एक प्रसिद्ध गांव खैरवा दरगाह में हुआ हैं और आरजेडी के मुस्लिम राजनीति के लिए फिट माने जाते हैं.
कांग्रेस कोटे से मुरारी लाल गौतम मंत्री बने हैं. सासाराम जिले के चेनारी विधानसभा सीट से वो विधायक हैं. बिहार में कांग्रेस की दलित राजनीति के रूप में उन्हें कैबिनेट में जगह दी है ताकि अपने कोर वोटबैंक को साधा जा सके.
कांग्रेस से आफाक आलम को मंत्री बनाया गया है. वो चार बार के विधायक हैं. कांग्रेस के टिकट पर 2005 से लेकर लगातार चुनाव जीत रहे हैं और विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं. कांग्रेस में मुस्लिम चेहरे के तौर पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है.
जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से उनके बेटे संतोष सुमन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. महादलित समुदाय से आते हैं और विधान परिषद सदस्य हैं. एनडीए सरकार के दौरान भी मंत्री थे.
निर्दलीय विधायक सुमित सिंह को भी नीतीश कैबिनेट में जगह मिली है. उन्हें जेडीयू कोटे से मंत्री बनाया गया है और इससे पहले भी एनडीए सरकार के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हैं. सुमित सिंह बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे हैं और उनके दादा श्रीकृष्णानंद सिंह दो बार चकई से चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं. सुमित सिंह जमुई जिले की चकिया सीट से निर्दलीय विधायक हैं. तमाम निजी और पारिवारिक संकटों के बावजूद सुमित सिंह को सफलता मिली। उनके भाई अभय भी विधायक रह चुके हैं। 2010 में उन्होंने पारिवारिक विवाद की वजह से अपनी पत्नी और बेटी को मारकर खुदकुशी कर ली थी.
| बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार का कैबिनेट विस्तार मंगलवार को हो गया. नीतीश की नई कैबिनेट में इकतीस नेताओं को राज्यपाल फागू चौहान ने मंत्री पद की शपथ दिलाई. महागठबंधन की सरकार में आरजेडी से सोलह, जेडीयू से ग्यारह, कांग्रेस से दो, हम से एक और एक निर्दलीय ने शपथ ली. जेडीयू के कोटे से एक निर्दलीय विधायक को मंत्री बनाया गया, इस तरह नीतीश के हिस्से में बारह मंत्री पद आए हैं. जेडीयू कोटे से बिजेंद्र प्रसाद यादव एक बार फिर मंत्री बने हैं, नीतीश सरकार में यादव चेहरा हैं. बिहार के कोसी क्षेत्र से आते हैं, जहां यादव मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. सुपौल सीट से बिजेंद्र प्रसाद यादव ने लगातार आठवीं बार जीत दर्ज की है. जेडीयू कोटे से अशोक चौधरी को एक बार फिर नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट में जगह दी है. वो महादलित समुदाय से आते हैं और जेडीयू की दलित राजनीति के फॉर्मूले में फिट हैं. हालांकि, अशोक चौधरी एमएलसी हैं. अशोक चौधरी ने मार्च दो हज़ार अट्ठारह में कांग्रेस को अलविदा कह कर जेडीयू का दामन थामा था. नीतीश के करीबी और विश्वासपात्र माने जाते हैं. जेडीयू कोटे से विजय चौधरी को नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जो भूमिहार समुदाय से आते हैं. बिहार की राजनीति में भूमिहार काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. विजय चौधरी नीतीश की अगुवाई वाली पिछली महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्यक्ष थे, लेकिन दो हज़ार बीस में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था और फिर से मंत्री बने हैं. सरायरंजन सीट से वो विधायक हैं. जेडीयू कोटे से लेसी सिंह एक बार फिर से मंत्री बनी हैं. नीतीश की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में खाद्य-उपभोक्ता मंत्री पद का जिम्मा संभाल रही थीं. नीतीश कुमार के साथ लेसी सिंह समता पार्टी के जमाने से जुड़ी हुई हैं. सीमांचल से आती हैं और धमदाहा विधानसभा सीट से विधायक हैं. दो हज़ार चौदह में आपदा प्रबंधन और समाज कल्याण मंत्री बनी थीं. पूर्णिया के सरसी में लेसी सिंह का जन्म पाँच जनवरी एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर को हुआ और यादव समुदाय से आती हैं. जेडीयू कोटे से शीला मंडल को मंत्री बनाया गया है. बिहार में अतिपिछड़ा समुदाय की धानुक जातीय से शीला मंडल आती हैं, जो कि नीतीश का मजबूत वोटबैंक माना जाता है. मिथिलांचल के फुलपरास से जेडीयू की विधायक हैं. हालांकि, वो पहली बार विधायक बनीं और उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है. एनडीए सरकार के दौरान भी मंत्री रही हैं. जेडीयू कोटे से श्रवण कुमार एक बार फिर से मंत्री बने हैं. वो नीतीश कुमार की कुर्मी जाति से आते हैं. सीएम के गृह जिले नालंदा से आते हैं और सातवीं बार श्रवण कुमार विधायक हैं. एक हज़ार नौ सौ पचानवे से लगातार नालंदा विधान सभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जेडीयू के सियासी समीकरण के लिहाज से काफी फिट माने जाते हैं. समता पार्टी के दौर से नीतीश के साथ हैं और उनके सबसे खास हैं. जेडीयू कोटे से सुनील कुमार मंत्री बने हैं. वह गोपालगंज जिले के भोरे सीट से जेडीयू के विधायक हैं. नीतीश कुमार ने सुनील कुमार को मौका देकर दलित राजनीति को साधने का काम किया है. सुनील कुमार बिहार पुलिस के एडीजी रहे हैं और वो रिटारमेंट के बाद दो हज़ार बीस में जेडीयू का दामन थामा था और पहली बार में विधायक बने और उसके बाद एनडीए सरकार में मंत्री रहे और दूसरी बार उन्हें मौका दिया है. जेडीयू कोटे से मदन सहनी एक बार फिर मंत्री बने हैं. दो हज़ार बीस में बनी एनडीए सरकार में समाज कल्याण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे. मदन सहनी दरभंगा जिले के बहादुरपुर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं. वो अतिपिछड़े समुदाय से आते हैं, जो जेडीयू का मजबूत वोटबैंक माना जाता है. नीतीश कुमार के राइट हैंड माने जाने वाले संजय कुमार झा एक बार फिर से मंत्री बने हैं. मिथिलांचल से आते हैं और ब्राह्मण समुदाय से हैं. एनडीए सरकार में संजय झा जलसंसाधन, सूचना और जनसंपर्क सहकारिता मंत्री थे. नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते हैं. जेडीयू कोटे से जमा खान एक बार फिर से मंत्री बने हैं. जमा खान दो हज़ार बीस में कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में जेडीयू का दामन थाम लिया था. इसके बाद ही जमा खान को अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया था. बिहार के भोजपुर इलाके से आते हैं और जेडीयू में एकलौते मुस्लिम चेहरा हैं. जेडीयू कोटे से जयंत राज कुशवाहा को मंत्री बनाया है और बांका क्षेत्र से आते हैं. एनीडीए सरकार के दौरान वे मंत्रिमंडल के सबसे युवा चेहरों के रूप में थे. उनकी उम्र केवल छत्तीस साल है. उनके पिता जनार्दन मांझी दो बार अमरपुर और एक बार बेलहर से विधायक रहे हैं. इस बार उनकी जगह उनके बेटे जयंत राज को अमरपुर का टिकट दिया गया था और जीतने में सफल रहे. कुशवाहा समाज से आते हैं. लालू प्रसाद यादव को बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर से कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है. तेज प्रताप दूसरी बार विधायक हैं. पहली बार महुआ सीट से विधायक रहे हैं और इस बार हसनपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. दो हज़ार पंद्रह में बनी महागठबंधन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. आरजेडी कोटे से आलोक मेहता को मंत्री बनाया है. लालू परिवार के बेहद करीबी और सुलझे हुए नेता हैं. आलोक मेहता आरजेडी में उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपनी सादगी और सूझबूझ से आरजेडी जैसी पार्टी में बेदाग छवि रखते हैं. ये कोइरी समाज से आते हैं और आरजेडी के अतिपछड़ा चेहरा हैं. आरजेडी कोटे से मंत्री बने सुरेंद्र यादव को मंत्री बनाया गया है. सात बार बेलागंज विधानसभा सीट के विधायक और लोकसभा सांसद रहे सुरेंद्र प्रसाद यादव साउथ बिहार इलाके से आते हैं. सुरेंद्र प्रसाद यादव आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं. जहानाबाद सीट से सांसद रह चुके हैं और दबंग नेता माने जाते हैं. संसद रहते हुए लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को फाड़ दिया था. आरजेडी कोटे से रामानंद यादव मंत्री बने हैं. लालू परिवार के करीबी और पार्टी के दिग्गज नेता माने जाते हैं. बिहार के फतुहा विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बने हैं. आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं. आरजेडी कोटे से समीर कुमार महासेठ मंत्री बने हैं. मिथालांचल के मधुबनी विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने हैं. वह अपने छात्र जीवन से ही यानी एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर से ही राजनीति में शामिल हुए थे. ये दो हज़ार तीन से दो हज़ार नौ तक एमएलसी रहे. अतिपिछड़े समुदाय के सूड़ी समाज से आते हैं. आरजेडी कोटे से चंद्रशेखर यादव मंत्री बने हैं. लालू परिवार के करीबी माने जाने वाले चंद्रशेखर को कैबिनेट में शामिल किया गया है, जो आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं. आरजेडी कोटे से इसराइल मंसूरी मंत्री बने हैं. बिहार में पहली बार धुनिया समाज से कोई मंत्री और विधायक बना है. वो मुजफ्फरपुर की कांटी विधानसभा से विधायक हैं. . इसराइल मुस्लिम समुदाय के अत्यंत पिछड़े वर्ग के धुनिया जाति से आते हैं. आजादी के बाद बिहार में पहली बार मंसूरी समाज का कोई नेता विधानसभा में है. तेजस्वी यादव के द्वारा सामाजिक न्याय के प्रयासों का यह अंतिम कतार तक विस्तार माना जा रहा है. बिहार में कुल सोलह प्रतिशत मुसलमानों की आबादी है जिसमें मंसूरी समाज की करीब साढ़े तीन फीसदी संख्या है. सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से यह बिरादरी मुस्लिमों में काफी वंचित रही है, ऐसे में आरजेडी ने उन्हें टिकट देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कवायद की है. आरजेडी कोटे से कुमार सर्वजीत को भी मंत्री बनाया गया है. बोधगया विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक हैं. आरजेडी के दलित चेहरा माने जाते हैं. वो साउथ बिहार से आते हैं और दलित समीकरण को देखते हुए मौका दिया है. सर्वजीत के पिता मगध से सांसद रह चुके हैं. दो हज़ार पाँच के विधानसभा चुनाव में गया जिले के इमामगंज सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजेश कुमार की हत्या चुनावी सभा से लौटने के दौरान करा दी गई, जिसके बाद कुमार सर्वजीत ने कदम रखा. बोधगया के राजद विधायक कुमार सर्वजीत अपने पिता पूर्व सांसद स्व. राजेश कुमार की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए मगध दलितों के साथ-साथ सभी जाति के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं. आरजेडी कोटे से अनीता देवी मंत्री बनी हैं. तेजस्वी यादव के करीबी मानी जाती हैं और वो अतिपिछड़ा समुदाय के आती हैं. रोहतास जिला के नोखा विधानसभा क्षेत्र के महागठबंधन के राजद का नेतृत्व कर विधायक बनी अनिता देवी आज बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में पर्यटन मंत्री है. सियासत में आने से पहले वो शिक्षिका थी. पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय जंगी चौधरी की पुत्रवधू पूर्व मंत्री आनंद मोहन की पत्नी हैं. आरजेडी कोटे से ललित यादव मंत्री बनाए गए हैं. मिथालांचल के दरभंगा ग्रामीण सीट से विधायक हैं. मिथिला के सियासी समीकरण को देखते हुए तेजस्वी यादव ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी है. आरजेडी के कोर वोटबैंक यादव समुदाय से आते हैं. आरजेडी कोटे से सुधाकर सिंह मंत्री बने हैं. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह हैं. साल दो हज़ार बीस में रामगढ़ सीट से आरजेडी के विधायक बने हैं. बिहार के सियासी समीकरण को देखते हुए आरजेडी ने राजपूत चेहरे के तौर पर उन्हें कैबिनेट में शामिल किया है. आरजेडी कोटे से जितेंद्र कुमार राय को मंत्री बनाया गया है. सारण जिले के मढ़ौरा विधानसभा सीट से जितेंद्र कुमार राय तीसरी बार विधायक हैं. उनके पिता यदुवंशी राय भी इस सीट से दो बार विधायक रहे हैं. वो यादव समुदाय से आते हैं और दिग्गज नेता माने जाते हैं. भोजपुरी बेल्ट से आते हैं. आरजेडी कोटे से एमएलसी कार्तिक सिंह को मंत्री बनाया गया गया है. आनंत सिंह के करीबी माने जाने वाले कार्तिक अपने समर्थकों के बीच 'कार्तिक मास्टर' के नाम से मशहूर हैं. दो हज़ार पाँच के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कार्तिक मास्टर और अनंत सिंह की दोस्ती परवान चढ़ी. इसके बाद में अनंत सिंह के अहम चुनावी रणनीतिकार के रूप में कार्तिक मास्टर को पहचान मिली. भूमिहार वोटों के समीकरण को देखते हुए आरजेडी ने कार्तिक सिंह को कैबिनेट में जगह दी है. आरजेडी कोटे से शाहनवाज आलम को मंत्री बनाया गया है. शाहनवाज दूसरी बार विधायक हैं और दो हज़ार बीस में AIMIM के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन बाद में उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया. सीमांचल के इलाके से आते हैं. अरारिया जिले की जोकीहाट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज आलम हैं और अपने भाई को हराकर विधायक बने हैं. मुस्लिम प्रतिनिधित्व के रूप में उन्हें महागठबंधन सरकार में जगह मिली है. आरजेडी कोटे से सुरेंद्र राम को मंत्री बने हैं. सारण के गरखा सीट से आरजेडी के विधायक हैं. आरजेडी की दलित राजनीति के तहत सुरेंद्र राम को कैबिनेट में शामिल किया गया है. आरजेडी कोटे से शमीम अहमद मंत्री बने हैं. पूर्वी चंपारण के नरकटिया सीट से दूसरी बार विधायक हैं. शमीम पेश से डाक्टर और दो हज़ार दस में पहला चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गई थे. उनके पिता भी डाक्टर रहे हैं. डॉ शमीम अहमद का जन्म छः जनवरी एक हज़ार नौ सौ बहत्तर को एक प्रसिद्ध गांव खैरवा दरगाह में हुआ हैं और आरजेडी के मुस्लिम राजनीति के लिए फिट माने जाते हैं. कांग्रेस कोटे से मुरारी लाल गौतम मंत्री बने हैं. सासाराम जिले के चेनारी विधानसभा सीट से वो विधायक हैं. बिहार में कांग्रेस की दलित राजनीति के रूप में उन्हें कैबिनेट में जगह दी है ताकि अपने कोर वोटबैंक को साधा जा सके. कांग्रेस से आफाक आलम को मंत्री बनाया गया है. वो चार बार के विधायक हैं. कांग्रेस के टिकट पर दो हज़ार पाँच से लेकर लगातार चुनाव जीत रहे हैं और विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं. कांग्रेस में मुस्लिम चेहरे के तौर पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है. जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से उनके बेटे संतोष सुमन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. महादलित समुदाय से आते हैं और विधान परिषद सदस्य हैं. एनडीए सरकार के दौरान भी मंत्री थे. निर्दलीय विधायक सुमित सिंह को भी नीतीश कैबिनेट में जगह मिली है. उन्हें जेडीयू कोटे से मंत्री बनाया गया है और इससे पहले भी एनडीए सरकार के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हैं. सुमित सिंह बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे हैं और उनके दादा श्रीकृष्णानंद सिंह दो बार चकई से चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं. सुमित सिंह जमुई जिले की चकिया सीट से निर्दलीय विधायक हैं. तमाम निजी और पारिवारिक संकटों के बावजूद सुमित सिंह को सफलता मिली। उनके भाई अभय भी विधायक रह चुके हैं। दो हज़ार दस में उन्होंने पारिवारिक विवाद की वजह से अपनी पत्नी और बेटी को मारकर खुदकुशी कर ली थी. |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की एक अदालत ने तीन साल पहले एक धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर की हत्या के मामले में दो लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है.
फरवरी 2013 में धर्म निरपेक्ष लेखकों और ब्लॉगरों के एक जुलूस से लौटते हुए रजीब हैदर की हत्या कर दी गई थी. वे नास्तिक थे.
अदालत ने एक प्रतिबंधित इस्लामी गुट के प्रमुख को पांच साल की जेल की सज़ा सुनाई है.
बांग्लादेश में ब्लॉगर्स की हत्या के सिलसिले में ये किसी अदालत का पहला फैसला है.
ये लेखक 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए ज़िम्मेदार इस्लामी नेताओं को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग कर रहे थे.
अदालत ने अंसरुल्लाह बांग्ला संगठन को धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों पर कई हमलों के लिए दोषी करार दिया.
वर्ष 2015 में बांग्लादेश में पांच लेखकों और ब्लॉगरों की हत्या की गई है.
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| बांग्लादेश की राजधानी ढाका की एक अदालत ने तीन साल पहले एक धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर की हत्या के मामले में दो लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है. फरवरी दो हज़ार तेरह में धर्म निरपेक्ष लेखकों और ब्लॉगरों के एक जुलूस से लौटते हुए रजीब हैदर की हत्या कर दी गई थी. वे नास्तिक थे. अदालत ने एक प्रतिबंधित इस्लामी गुट के प्रमुख को पांच साल की जेल की सज़ा सुनाई है. बांग्लादेश में ब्लॉगर्स की हत्या के सिलसिले में ये किसी अदालत का पहला फैसला है. ये लेखक एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के लिए ज़िम्मेदार इस्लामी नेताओं को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग कर रहे थे. अदालत ने अंसरुल्लाह बांग्ला संगठन को धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों पर कई हमलों के लिए दोषी करार दिया. वर्ष दो हज़ार पंद्रह में बांग्लादेश में पांच लेखकों और ब्लॉगरों की हत्या की गई है. |
भाजपा राश्ट्रीय महासचिव राम माधव ने आज राजभवन में राज्यपाल एन. एन. वोहरा से भेंट की। माधव ने राज्यपाल के साथ राज्य सरकार के समक्ष उभरती चुनौतियों से सम्बंधित मुददों तथा श्री अमरनाथ यात्रा के लिए किये गये प्रबंधों के बारे में चर्चा की।
Punjab 140301 (India)
| भाजपा राश्ट्रीय महासचिव राम माधव ने आज राजभवन में राज्यपाल एन. एन. वोहरा से भेंट की। माधव ने राज्यपाल के साथ राज्य सरकार के समक्ष उभरती चुनौतियों से सम्बंधित मुददों तथा श्री अमरनाथ यात्रा के लिए किये गये प्रबंधों के बारे में चर्चा की। Punjab एक लाख चालीस हज़ार तीन सौ एक |
चेन्नईः पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद का बुधवार को आईपीएल 2021 के 14वें मैच में आमना-सामना हुआ। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसके सलामी बल्लेबाज केएल राहुल 6 गेंदों में महज 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। राहुल को भुवनेश्वर कुमार चौथे ओवर में केदार जाधव के हाथों लपकवाया। राहुल भले ही सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे हों, लेकिन उन्होंने कुछ ही रन बनाने के दौरान एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली, जो बतौर भारतीय बल्लेबाज एक रिकॉर्ड है। उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी पछाड़ दिया है।
इस मैच में सिर्फ 4 रन की पारी खेलने वाले केएल राहुल ने टी20 क्रिकेट में बतौर भारतीय सबसे तेज 5000 रन पूरे कर लिए है। राहुल ने इस मामले में विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ दिया है। राहुल के अब टी20 क्रिकेट की 143 पारियों में 5003 रन हो चुके हैं। इस दौरान उनका औसत 42 का रहा है जबकि उनका स्ट्राइक रेट 138 का है। वे अब तक लीग और इंटरनेशनल क्रिकेट में 4 शतक और 41 अर्धशतक ठोक चुके हैं।
ओवरऑल टी20 में सबसे तेज 5 हजार रन बनाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के ताबड़तोड़ बल्लेबाज और आईपीएल में राहुल की ही टीम के खिलाड़ी क्रिस गेल के नाम पर है। उन्होंने 132 पारियों में ये कारनामा किया था। राहुल ने ऑस्ट्रेलिया के शॉन मार्श को इस मामले में पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर जगह बनाई। मार्श ने 144 पारियों में ऐसा किया था।
| चेन्नईः पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद का बुधवार को आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के चौदहवें मैच में आमना-सामना हुआ। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसके सलामी बल्लेबाज केएल राहुल छः गेंदों में महज चार रन बनाकर पवेलियन लौट गए। राहुल को भुवनेश्वर कुमार चौथे ओवर में केदार जाधव के हाथों लपकवाया। राहुल भले ही सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे हों, लेकिन उन्होंने कुछ ही रन बनाने के दौरान एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली, जो बतौर भारतीय बल्लेबाज एक रिकॉर्ड है। उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी पछाड़ दिया है। इस मैच में सिर्फ चार रन की पारी खेलने वाले केएल राहुल ने टीबीस क्रिकेट में बतौर भारतीय सबसे तेज पाँच हज़ार रन पूरे कर लिए है। राहुल ने इस मामले में विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ दिया है। राहुल के अब टीबीस क्रिकेट की एक सौ तैंतालीस पारियों में पाँच हज़ार तीन रन हो चुके हैं। इस दौरान उनका औसत बयालीस का रहा है जबकि उनका स्ट्राइक रेट एक सौ अड़तीस का है। वे अब तक लीग और इंटरनेशनल क्रिकेट में चार शतक और इकतालीस अर्धशतक ठोक चुके हैं। ओवरऑल टीबीस में सबसे तेज पाँच हजार रन बनाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के ताबड़तोड़ बल्लेबाज और आईपीएल में राहुल की ही टीम के खिलाड़ी क्रिस गेल के नाम पर है। उन्होंने एक सौ बत्तीस पारियों में ये कारनामा किया था। राहुल ने ऑस्ट्रेलिया के शॉन मार्श को इस मामले में पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर जगह बनाई। मार्श ने एक सौ चौंतालीस पारियों में ऐसा किया था। |
NewDelhi : तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आज पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार विपक्षी नेताओं का दल जंतर मंतर पहुंचा. विपक्षी नेताओं के इस ग्रुप में कई विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल थे. प्रदर्शन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, संजय राउत, मनोज झा, डीएमके के टी शिवा समेत अन्य नेता मौजूद रहे. खबरों के अनुसार दिन के 12. 30 बजे संसद से विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बस पर जंतर-मंतर के लिए निकला.
देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए यह एकजुटता जरूरी है। श्री @RahulGandhi जी ने सभी विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के साथ किसान, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की।
जंतर-मंतर पहुंच कर राहुल गांधी ने कहा कि पूरा विपक्ष किसानों के समर्थन में संसद से यहां आये हैं. यहां पर विपक्ष हिन्दुस्तान के सभी किसानों को अपना पूरा का पूरा समर्थन देने पहुंचा है. राहुल ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को इन तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करना ही होगा. कहा कि इस पर चर्चा से काम नहीं चलने वाला.
राहुल गांधी ने कहा कि संसद में क्या हो रहा है, यह आप जानते हैं? संसद में हम पेगासस पर चर्चा करना चाहते हैं लेकिन इस पर बहस नहीं हो रही है. राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश में सभी के फोन में पेगासस भर दिया है. बता दें कि विपक्ष के इस प्रदर्शन में ममता बनर्जी की टीएमसी, मायावती की बीएसपी और अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप शामिल नहीं है.
जान लें कि जंतर-मंतर पर इन दिनों किसानों ने अपनी संसद लगा रखी है. किसान नये कृषि कानूनों के खिलाफ 11 बजे से लेकर 5 बजे तक किसान संसद लगाते हैं. वे केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं के साथ किसानों के मुद्दे पर मीटिंग की. कांग्रेस ने कहा है कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरूरी है. राहुल गांधी ने सभी विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के साथ किसान, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की.
| NewDelhi : तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आज पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार विपक्षी नेताओं का दल जंतर मंतर पहुंचा. विपक्षी नेताओं के इस ग्रुप में कई विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल थे. प्रदर्शन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, संजय राउत, मनोज झा, डीएमके के टी शिवा समेत अन्य नेता मौजूद रहे. खबरों के अनुसार दिन के बारह. तीस बजे संसद से विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बस पर जंतर-मंतर के लिए निकला. देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए यह एकजुटता जरूरी है। श्री @RahulGandhi जी ने सभी विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के साथ किसान, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की। जंतर-मंतर पहुंच कर राहुल गांधी ने कहा कि पूरा विपक्ष किसानों के समर्थन में संसद से यहां आये हैं. यहां पर विपक्ष हिन्दुस्तान के सभी किसानों को अपना पूरा का पूरा समर्थन देने पहुंचा है. राहुल ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को इन तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करना ही होगा. कहा कि इस पर चर्चा से काम नहीं चलने वाला. राहुल गांधी ने कहा कि संसद में क्या हो रहा है, यह आप जानते हैं? संसद में हम पेगासस पर चर्चा करना चाहते हैं लेकिन इस पर बहस नहीं हो रही है. राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश में सभी के फोन में पेगासस भर दिया है. बता दें कि विपक्ष के इस प्रदर्शन में ममता बनर्जी की टीएमसी, मायावती की बीएसपी और अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप शामिल नहीं है. जान लें कि जंतर-मंतर पर इन दिनों किसानों ने अपनी संसद लगा रखी है. किसान नये कृषि कानूनों के खिलाफ ग्यारह बजे से लेकर पाँच बजे तक किसान संसद लगाते हैं. वे केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं के साथ किसानों के मुद्दे पर मीटिंग की. कांग्रेस ने कहा है कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरूरी है. राहुल गांधी ने सभी विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के साथ किसान, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की. |
हिमाचल प्रदेश में मानसून कहर बनकर टूट पड़ा है। पिछले 2 दिनों से जारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। पहाड़ों पानी सैलाब बनकर बस्तियों को बहा ले गया। इस हादसे में 10 लोगों के लापता होने की खबर है।
कांगड़ा. हिमाचल प्रदेश में पिछले 2 दिनों की बारिश ने तबाही मचा दी। खासकर; कांगड़ा जिले के लिए तो मानसून आफत की बारिश लेकर आया। पहाड़ों से मानों सैलाब फूट पड़ा। गाड़ियां पत्तों की तरह बह गईं। हादसे में 10 लोग लापता हैं। उनके जीवित होने की अब दुआएं हो रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ को लेकर दुःख जताते हुए लोगों की सलामती की कामना है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने कांगड़ा जिले के बोह गांव में कल क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद बचाव अभियान जारी रखा है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया-पिछले दो दिन से हो रही बारिश की वजह से धर्मशाला में काफी नुकसान हुआ है। इसी वजह से प्रदेश में 2 लोगों की मृत्यु भी हुई है और कांगड़ा में 10 लोग लापता है जिनकी तलाश जारी है। जैसे ही हालात सुधरते हैं, मैं धर्मशाला जाकर स्थिति का जायजा लूंगा।
| हिमाचल प्रदेश में मानसून कहर बनकर टूट पड़ा है। पिछले दो दिनों से जारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। पहाड़ों पानी सैलाब बनकर बस्तियों को बहा ले गया। इस हादसे में दस लोगों के लापता होने की खबर है। कांगड़ा. हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दिनों की बारिश ने तबाही मचा दी। खासकर; कांगड़ा जिले के लिए तो मानसून आफत की बारिश लेकर आया। पहाड़ों से मानों सैलाब फूट पड़ा। गाड़ियां पत्तों की तरह बह गईं। हादसे में दस लोग लापता हैं। उनके जीवित होने की अब दुआएं हो रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ को लेकर दुःख जताते हुए लोगों की सलामती की कामना है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने कांगड़ा जिले के बोह गांव में कल क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद बचाव अभियान जारी रखा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया-पिछले दो दिन से हो रही बारिश की वजह से धर्मशाला में काफी नुकसान हुआ है। इसी वजह से प्रदेश में दो लोगों की मृत्यु भी हुई है और कांगड़ा में दस लोग लापता है जिनकी तलाश जारी है। जैसे ही हालात सुधरते हैं, मैं धर्मशाला जाकर स्थिति का जायजा लूंगा। |
Hyundai ने अपनी Verna सेडान को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। फेसलिफ़्टेड Hyundai Verna, जिसे पिछले साल भारतीय बाज़ार में लॉन्च किया गया था, अब इस सेगमेंट में वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay प्राप्त करने वाली पहली कार बन गई है। हालांकि यह उद्योग की पहली विशेषता नहीं है, वर्ना इस सेगमेंट में इसे पाने वाली एकमात्र कार है। वरना का मुकाबला Honda City और Maruti Suzuki Ciaz से है।
Verna के दो ट्रिम्स अब बेहतर कनेक्टिविटी फीचर के साथ अपडेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम ऑफर करते हैं। नई सुविधा के साथ केवल S+ और SX ट्रिम उपलब्ध हैं। S+ की कीमत 10.98 लाख रुपये से 13.36 लाख रुपये, एक्स-शोरूम, जबकि SX की कीमत भारतीय बाजार में 10.98 लाख रुपये से 13.36 लाख रुपये के बीच है।
Hyundai ने एस ट्रिम के साथ 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन को बंद करके वर्ना लाइन-अप को अपडेट किया। यह इंजन केवल उच्च S + ट्रिम के साथ उपलब्ध है, जिसे अपडेट प्राप्त हुआ है। जहां Verna पहले से ही सुविधाओं से भरी हुई थी, वहीं नया कनेक्टिविटी फीचर इसे और भी अधिक फीचर से भरा बनाता है।
कार में अन्यथा कोई बदलाव नहीं है। इसमें एचडी डिस्प्ले के साथ वही 8.0-इंच AVN यूनिट मिलता है जो टॉप-एंड SX(O) के साथ BlueLink सिस्टम भी प्रदान करता है। Verna के अन्य सभी वेरिएंट में बेस ई वेरिएंट को छोड़कर पहले से ही फैक्ट्री-फिटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि टॉप-एंड SX (ओ) अभी भी वायरलेस Android Auto और ऐप्पल कारप्ले की पेशकश नहीं करता है। समान सुविधाओं का उपयोग करने के लिए इसे अभी भी फोन से वायर्ड कनेक्शन की आवश्यकता होती है।
Hyundai ने पहले ही वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को मिड-लेवल i20 Sportz ट्रिम के साथ पेश किया था।
Hyundai ने Verna S+ वैरिएंट को अपडेट के साथ पेश किया है। पहले ट्रिम केवल 1.5-लीटर डीजल इंजन विकल्प के साथ उपलब्ध था। अब यह 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन विकल्प के साथ भी उपलब्ध है। यह अधिकतम 115 पीएस की पावर पैदा करता है। Hyundai ने अब S पेट्रोल ट्रिम को बंद कर दिया है। दोनों वैरिएंट के बीच एकमात्र बड़ा अंतर पहिए के आकार का है। S+ में 16-इंच का व्हील मिलता है जबकि S ट्रिम में 15-इंच के छोटे व्हील मिलते हैं।
Hyundai Verna के साथ 1.5-लीटर डीजल इंजन विकल्प भी प्रदान करता है। यह अधिकतम 115 पीएस की पावर पैदा करता है। डीजल इंजन छह-स्पीड मैनुअल के साथ-साथ छह-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर के साथ उपलब्ध है। पेट्रोल इंजन में सिक्स-स्पीड मैनुअल और सीवीटी ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता है। और भी अधिक शक्तिशाली 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन विकल्प है जो अधिकतम 120 PS उत्पन्न करता है। यह केवल सात-स्पीड ड्यूल-क्लच ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है।
फीचर लिस्ट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। Hyundai Verna के टॉप-एंड वेरिएंट में Arkamys साउंड सिस्टम, कूल्ड ग्लोवबॉक्स, डुअल-टोन व्हील्स, प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स, वायरलेस फोन चार्जर, इलेक्ट्रिकली पावर्ड सनरूफ, रियरव्यू कैमरा, ऑटो-डिमिंग रियर व्यू मिरर, ऑटोमैटिक हेडलैम्प्स और बहुत कुछ मिलता है।
| Hyundai ने अपनी Verna सेडान को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। फेसलिफ़्टेड Hyundai Verna, जिसे पिछले साल भारतीय बाज़ार में लॉन्च किया गया था, अब इस सेगमेंट में वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay प्राप्त करने वाली पहली कार बन गई है। हालांकि यह उद्योग की पहली विशेषता नहीं है, वर्ना इस सेगमेंट में इसे पाने वाली एकमात्र कार है। वरना का मुकाबला Honda City और Maruti Suzuki Ciaz से है। Verna के दो ट्रिम्स अब बेहतर कनेक्टिविटी फीचर के साथ अपडेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम ऑफर करते हैं। नई सुविधा के साथ केवल S+ और SX ट्रिम उपलब्ध हैं। S+ की कीमत दस.अट्ठानवे लाख रुपये से तेरह.छत्तीस लाख रुपये, एक्स-शोरूम, जबकि SX की कीमत भारतीय बाजार में दस.अट्ठानवे लाख रुपये से तेरह.छत्तीस लाख रुपये के बीच है। Hyundai ने एस ट्रिम के साथ एक.पाँच-लीटर पेट्रोल इंजन को बंद करके वर्ना लाइन-अप को अपडेट किया। यह इंजन केवल उच्च S + ट्रिम के साथ उपलब्ध है, जिसे अपडेट प्राप्त हुआ है। जहां Verna पहले से ही सुविधाओं से भरी हुई थी, वहीं नया कनेक्टिविटी फीचर इसे और भी अधिक फीचर से भरा बनाता है। कार में अन्यथा कोई बदलाव नहीं है। इसमें एचडी डिस्प्ले के साथ वही आठ.शून्य-इंच AVN यूनिट मिलता है जो टॉप-एंड SX के साथ BlueLink सिस्टम भी प्रदान करता है। Verna के अन्य सभी वेरिएंट में बेस ई वेरिएंट को छोड़कर पहले से ही फैक्ट्री-फिटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि टॉप-एंड SX अभी भी वायरलेस Android Auto और ऐप्पल कारप्ले की पेशकश नहीं करता है। समान सुविधाओं का उपयोग करने के लिए इसे अभी भी फोन से वायर्ड कनेक्शन की आवश्यकता होती है। Hyundai ने पहले ही वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay को मिड-लेवल iबीस Sportz ट्रिम के साथ पेश किया था। Hyundai ने Verna S+ वैरिएंट को अपडेट के साथ पेश किया है। पहले ट्रिम केवल एक.पाँच-लीटर डीजल इंजन विकल्प के साथ उपलब्ध था। अब यह एक.पाँच-लीटर पेट्रोल इंजन विकल्प के साथ भी उपलब्ध है। यह अधिकतम एक सौ पंद्रह पीएस की पावर पैदा करता है। Hyundai ने अब S पेट्रोल ट्रिम को बंद कर दिया है। दोनों वैरिएंट के बीच एकमात्र बड़ा अंतर पहिए के आकार का है। S+ में सोलह-इंच का व्हील मिलता है जबकि S ट्रिम में पंद्रह-इंच के छोटे व्हील मिलते हैं। Hyundai Verna के साथ एक.पाँच-लीटर डीजल इंजन विकल्प भी प्रदान करता है। यह अधिकतम एक सौ पंद्रह पीएस की पावर पैदा करता है। डीजल इंजन छह-स्पीड मैनुअल के साथ-साथ छह-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर के साथ उपलब्ध है। पेट्रोल इंजन में सिक्स-स्पीड मैनुअल और सीवीटी ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता है। और भी अधिक शक्तिशाली एक.शून्य-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन विकल्प है जो अधिकतम एक सौ बीस PS उत्पन्न करता है। यह केवल सात-स्पीड ड्यूल-क्लच ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है। फीचर लिस्ट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। Hyundai Verna के टॉप-एंड वेरिएंट में Arkamys साउंड सिस्टम, कूल्ड ग्लोवबॉक्स, डुअल-टोन व्हील्स, प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स, वायरलेस फोन चार्जर, इलेक्ट्रिकली पावर्ड सनरूफ, रियरव्यू कैमरा, ऑटो-डिमिंग रियर व्यू मिरर, ऑटोमैटिक हेडलैम्प्स और बहुत कुछ मिलता है। |
वीर्य, गोपुररक्षित, सुश्रुत का उल्लेख है।' डल्हण ने भोज, निमि, कांकायन, गार्ग्य और गालव का भी समावेश किया है। इस प्रकार वाग्भट ने पुनर्वसु - संप्रदाय तथा धन्वन्तरि - संप्रदाय दोनों के आचार्यों का उल्लेख किया है। निमि, कांकायन, गार्ग्य,- गालव, कराल शालाक्यतंत्र के आचार्य हैं। माण्डव्य रसायन तंत्र के प्रणेता हैं। हैं चक्रपाणि तथा डल्हण दोनों ने कराल का उल्लेख किया है । शालाक्य में इनका एक विशिष्ट संप्रदाय था ऐसा प्रतीत होता है । आलम्बायन, भोज और वैतरण अगदतन्त्र के भी आचार्य हैं । विष-वेगों के संबंध में पुनर्वसु, नग्नजित्, विदेहपति, आलम्बायन तथा धन्वन्तरि के मतों का उल्लेख किया गया है । ४ राजर्षि नग्नजित का उल्लेख भेलसंहिता तथा शतपथब्राह्मण में हुआ है। भगवान बुद्ध के पूर्ववर्ती आचार्यों में उनकी गणना की गई है। विदेहपति जनक हैं । सर्वार्थसिद्ध अब्जन इन्हीं के द्वारा उपदिष्ट कहा गया हैं।" विष प्रकरण में कौटिल्य तथा चाणक्य के कई योग आये हैं। इससे प्रतीत होता हैं कि कौटल्य का अर्थशास्त्र वाग्भट के काल मे एक प्रचलित ग्रन्थ था । शंकर, अस्थिक और काश्यप को सूत्रकार कहा गया है और विषप्रकरण में उनकी अर्चना करने को लिखा है। अनुमान होता हैं कि कि ये अगदतंत्र के आचार्य थे और उनकी संहिताएँ इस विषय पर प्रचलित थीं । कश्यप और काश्यप का साथ-साथ निर्देश चरक में भी हुआ है। विष प्रकरण में इनका नाम आता है तथा कौमारभृत्य के आचार्यों में भी इनकी गणना है । वृद्धकाश्यप का भी निर्देश है (सं० उ० ११४३ ) । आमंजुश्रीमूलकल्प ( ५३/५८६ ) में राजगृह निवासी महाकाश्यप नामक एक ब्राह्मण श्रावक का उल्लेख है । नावनीतक में भी कौमारभृत्य - प्रकरण में अनेक योग काश्यप के नाम दिये हैं। ये एक ही थे या भिन्न कहना कठिन है। उशना और बृहस्पति के अगद विष-प्रकरण में निर्दिष्ट
।" ये स्मृतिकार उशना और बृहस्पति से भिन्न हैं या अभिन्न यह भी विचारणीय विषय है। गौतम, वशिष्ठ, अगस्त्य और नारद का चरक ने भी उल्लेख किया है । ये प्राचीन महर्षि या देवर्षि हैं। गौतम के नाम पर एक विषहर चूर्ण है, सम्भवतः गौतम की कोई संहिता भी रही होगी। वाग्भट ने तुम्बुरु का भी नाम दिया है।
२. वही डल्हण टीका
३. गणनाथ सेनः प्रत्यक्षशारीर ( भूमिका ) पृ० ३७ ४. सं० उ० ४०/२६.२३
५. "विदेहाधिपोपदिष्टेन सर्वार्थसिद्धेनांजनेन" - सं० सू० ४९९
९. प्रत्यक्ष शारीर ( भूमिका ) १० २७ | वीर्य, गोपुररक्षित, सुश्रुत का उल्लेख है।' डल्हण ने भोज, निमि, कांकायन, गार्ग्य और गालव का भी समावेश किया है। इस प्रकार वाग्भट ने पुनर्वसु - संप्रदाय तथा धन्वन्तरि - संप्रदाय दोनों के आचार्यों का उल्लेख किया है। निमि, कांकायन, गार्ग्य,- गालव, कराल शालाक्यतंत्र के आचार्य हैं। माण्डव्य रसायन तंत्र के प्रणेता हैं। हैं चक्रपाणि तथा डल्हण दोनों ने कराल का उल्लेख किया है । शालाक्य में इनका एक विशिष्ट संप्रदाय था ऐसा प्रतीत होता है । आलम्बायन, भोज और वैतरण अगदतन्त्र के भी आचार्य हैं । विष-वेगों के संबंध में पुनर्वसु, नग्नजित्, विदेहपति, आलम्बायन तथा धन्वन्तरि के मतों का उल्लेख किया गया है । चार राजर्षि नग्नजित का उल्लेख भेलसंहिता तथा शतपथब्राह्मण में हुआ है। भगवान बुद्ध के पूर्ववर्ती आचार्यों में उनकी गणना की गई है। विदेहपति जनक हैं । सर्वार्थसिद्ध अब्जन इन्हीं के द्वारा उपदिष्ट कहा गया हैं।" विष प्रकरण में कौटिल्य तथा चाणक्य के कई योग आये हैं। इससे प्रतीत होता हैं कि कौटल्य का अर्थशास्त्र वाग्भट के काल मे एक प्रचलित ग्रन्थ था । शंकर, अस्थिक और काश्यप को सूत्रकार कहा गया है और विषप्रकरण में उनकी अर्चना करने को लिखा है। अनुमान होता हैं कि कि ये अगदतंत्र के आचार्य थे और उनकी संहिताएँ इस विषय पर प्रचलित थीं । कश्यप और काश्यप का साथ-साथ निर्देश चरक में भी हुआ है। विष प्रकरण में इनका नाम आता है तथा कौमारभृत्य के आचार्यों में भी इनकी गणना है । वृद्धकाश्यप का भी निर्देश है । आमंजुश्रीमूलकल्प में राजगृह निवासी महाकाश्यप नामक एक ब्राह्मण श्रावक का उल्लेख है । नावनीतक में भी कौमारभृत्य - प्रकरण में अनेक योग काश्यप के नाम दिये हैं। ये एक ही थे या भिन्न कहना कठिन है। उशना और बृहस्पति के अगद विष-प्रकरण में निर्दिष्ट ।" ये स्मृतिकार उशना और बृहस्पति से भिन्न हैं या अभिन्न यह भी विचारणीय विषय है। गौतम, वशिष्ठ, अगस्त्य और नारद का चरक ने भी उल्लेख किया है । ये प्राचीन महर्षि या देवर्षि हैं। गौतम के नाम पर एक विषहर चूर्ण है, सम्भवतः गौतम की कोई संहिता भी रही होगी। वाग्भट ने तुम्बुरु का भी नाम दिया है। दो. वही डल्हण टीका तीन. गणनाथ सेनः प्रत्यक्षशारीर पृशून्य सैंतीस चार. संशून्य उशून्य चालीस/छब्बीस.तेईस पाँच. "विदेहाधिपोपदिष्टेन सर्वार्थसिद्धेनांजनेन" - संशून्य सूशून्य चार सौ निन्यानवे नौ. प्रत्यक्ष शारीर दस सत्ताईस |
बढ़ती आबादी और मनुष्यों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह किस कदर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है, इसकी एक बानगी सामने आयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में कुल 86 तालाब हैं जिनमें से मात्र 20 ही अस्तित्व में रह गए हैं। जबकि 8 तालाब का नामोनिशां तक नहीं बचा है। दरअसल मुंबई की एनजीओ वाचडॉग फाउंडेशन ने मुंबई के डीपी प्लान का कुछ दिन पहले अध्ययन किया था। जब इस एनजीओ को तालाबो की स्थिति के बारे में पता चला तो इन्हें यकीन नहीं हुआ। इन्होने सारी जानकारी बीएमसी से मांगी।
एनजीओ वाचडॉग फाउंडेशन गॉडफ्रे पेमेंटा कहते हैं कि बीएमसी कमिश्नर अजोय मेहता और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने ई-मेल के द्वारा जो रिपोर्ट भेजी वो काफी चौकाने वाली थी। रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में इस समय मात्र 20 तालाब ही अस्तित्व में हैं जिनमे से 8 नष्ट हो गये हैं, जबकि इनकी संख्या 86 है। पेमेंटा मुंबई लाइव से बात करते हुए आगे कहते हैं कि यह सारे तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गए। पेमेंटा कहते हैं कि इन सारे तालाबो को फिर से जीवित करने की जरुरत है।
आरे के संरक्षण में आवाज उठाने वाली वनशक्ति प्रकल्प के संचालक स्टालिन दयानंद कहते हैं कि मुंबई में पहले काफी तालाब थे लेकिन अब तालाबो की संख्या में काफी कमी आई है। यह तालाब बारिश के पानी को रोकने के काम आते थे, अब इन्हें पाट कर इन पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग बना दी गयी। आने वाले समय में इसका परिणाम लोगों पर पड़ेगा।
जैसे जैसे आबादी बढ़ रही है वैसे वैसे लोगों की जरूरतें भी बढ़ रही हैं। बड़ें पैमाने पर तालाबो पर अतिक्रमण किया गया है। जंगलों को काट कर कांक्रीट के जंगल खड़े किये जा रहे हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ आने वाले समय में अपना असर जरुर दिखाएगा।
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| बढ़ती आबादी और मनुष्यों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह किस कदर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है, इसकी एक बानगी सामने आयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में कुल छियासी तालाब हैं जिनमें से मात्र बीस ही अस्तित्व में रह गए हैं। जबकि आठ तालाब का नामोनिशां तक नहीं बचा है। दरअसल मुंबई की एनजीओ वाचडॉग फाउंडेशन ने मुंबई के डीपी प्लान का कुछ दिन पहले अध्ययन किया था। जब इस एनजीओ को तालाबो की स्थिति के बारे में पता चला तो इन्हें यकीन नहीं हुआ। इन्होने सारी जानकारी बीएमसी से मांगी। एनजीओ वाचडॉग फाउंडेशन गॉडफ्रे पेमेंटा कहते हैं कि बीएमसी कमिश्नर अजोय मेहता और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने ई-मेल के द्वारा जो रिपोर्ट भेजी वो काफी चौकाने वाली थी। रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में इस समय मात्र बीस तालाब ही अस्तित्व में हैं जिनमे से आठ नष्ट हो गये हैं, जबकि इनकी संख्या छियासी है। पेमेंटा मुंबई लाइव से बात करते हुए आगे कहते हैं कि यह सारे तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गए। पेमेंटा कहते हैं कि इन सारे तालाबो को फिर से जीवित करने की जरुरत है। आरे के संरक्षण में आवाज उठाने वाली वनशक्ति प्रकल्प के संचालक स्टालिन दयानंद कहते हैं कि मुंबई में पहले काफी तालाब थे लेकिन अब तालाबो की संख्या में काफी कमी आई है। यह तालाब बारिश के पानी को रोकने के काम आते थे, अब इन्हें पाट कर इन पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग बना दी गयी। आने वाले समय में इसका परिणाम लोगों पर पड़ेगा। जैसे जैसे आबादी बढ़ रही है वैसे वैसे लोगों की जरूरतें भी बढ़ रही हैं। बड़ें पैमाने पर तालाबो पर अतिक्रमण किया गया है। जंगलों को काट कर कांक्रीट के जंगल खड़े किये जा रहे हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ आने वाले समय में अपना असर जरुर दिखाएगा। डाउनलोड करें Mumbai live APP और रहें हर छोटी बड़ी खबर से अपडेट। मुंबई से जुड़ी हर खबर की ताज़ा अपडेट पाने के लिए Mumbai live के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें। |
नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा ने एकबार फिर राहुल गांधी की क्षमता और योगयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने चुटकी लेते हुए कहाकि राहुल गांधी ही 10 साल से कांग्रेस पार्टी को चला रहे हैं। सोनिया गांधी तो सिर्फ नाम की अध्यक्ष हैं। वैंकेया नायडू ने कहा कि ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है क्योंकि कांग्रेस डूबती नाव है चाहे कुछ हो। उन्होने कहा कि अब कोई भी कांग्रेस को डूबने से बचा नही सकता है।
| नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा ने एकबार फिर राहुल गांधी की क्षमता और योगयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने चुटकी लेते हुए कहाकि राहुल गांधी ही दस साल से कांग्रेस पार्टी को चला रहे हैं। सोनिया गांधी तो सिर्फ नाम की अध्यक्ष हैं। वैंकेया नायडू ने कहा कि ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है क्योंकि कांग्रेस डूबती नाव है चाहे कुछ हो। उन्होने कहा कि अब कोई भी कांग्रेस को डूबने से बचा नही सकता है। |
नयी दिल्ली । पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर कायराना हमले के बाद भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान से सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा वापस लेने का निर्णय लिया है, साथ ही भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर हर संभव कदम उठाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ये निर्णय लिए गये। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैठक में पुलवामा में हुई घटना के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस कायराना हमले को अंजाम देने वाले और उनका समर्थन करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी तथा सुरक्षा बलों इसके लिए निर्देश दे दिये गये हैं।
उन्होंने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू कश्मीर जा रहे हैं और शनिवार को लौटने के बाद वह राजधानी में सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों को इस घटना की जानकारी तथा स्थिति अवगत करायेंगे।
जेटली ने कहा कि भारत ने 1986 में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के संबंध में एक समझौते का प्रस्ताव रखा था लेकिन आतंकवाद शब्द की परिभाषा को लेकर सहमति नहीं बन पाने के चलते इससे संबंधित प्रस्ताव 33 वर्षों में भी पारित नहीं हो सका था। अब भारत इसे पारित कराने के लिए दोबारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजी करने के लिए सभी कूटनीतिक कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा कि बैठक में यह बात सामने आयी कि इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मिले हैं। इसे देखते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्णय लिए गये हैं। पहले कदम के तहत केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय पाकिस्तान से सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करेगा। विदेश मंत्रालय भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए सभी बड़े देशों के साथ बात करेगा और इसके लिए हर संभव कूटनीतिक कदम उठायेगा।
जेटली ने बताया कि बैठक में गुरुवार को हुए हमले में बलिदान देने वाले शहीदों की शहादत को नमन किया गया और समूचे राष्ट्र की ओर से उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की गयी। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ से कहा गया है कि शहीदों के पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की जाए। श्री जेटली के साथ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी थीं।
बैठक में इन दोनों के अलावा मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुखों और सीआरपीएफ के महानिदेशक आर. आर. भटनागर ने भी हिस्सा लिया। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी स्कोर्पियो गुरुवार को सीआरपीएफ के काफिले की एक बस से टकरा दी जिससे हुए विस्फोट में 40 से अधिक जवान शहीद हो गये और इतने ही घायल हो गये।
| नयी दिल्ली । पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर कायराना हमले के बाद भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान से सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा वापस लेने का निर्णय लिया है, साथ ही भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर हर संभव कदम उठाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ये निर्णय लिए गये। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैठक में पुलवामा में हुई घटना के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस कायराना हमले को अंजाम देने वाले और उनका समर्थन करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी तथा सुरक्षा बलों इसके लिए निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू कश्मीर जा रहे हैं और शनिवार को लौटने के बाद वह राजधानी में सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों को इस घटना की जानकारी तथा स्थिति अवगत करायेंगे। जेटली ने कहा कि भारत ने एक हज़ार नौ सौ छियासी में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के संबंध में एक समझौते का प्रस्ताव रखा था लेकिन आतंकवाद शब्द की परिभाषा को लेकर सहमति नहीं बन पाने के चलते इससे संबंधित प्रस्ताव तैंतीस वर्षों में भी पारित नहीं हो सका था। अब भारत इसे पारित कराने के लिए दोबारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजी करने के लिए सभी कूटनीतिक कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि बैठक में यह बात सामने आयी कि इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मिले हैं। इसे देखते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्णय लिए गये हैं। पहले कदम के तहत केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय पाकिस्तान से सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करेगा। विदेश मंत्रालय भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए सभी बड़े देशों के साथ बात करेगा और इसके लिए हर संभव कूटनीतिक कदम उठायेगा। जेटली ने बताया कि बैठक में गुरुवार को हुए हमले में बलिदान देने वाले शहीदों की शहादत को नमन किया गया और समूचे राष्ट्र की ओर से उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की गयी। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ से कहा गया है कि शहीदों के पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की जाए। श्री जेटली के साथ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी थीं। बैठक में इन दोनों के अलावा मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुखों और सीआरपीएफ के महानिदेशक आर. आर. भटनागर ने भी हिस्सा लिया। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी स्कोर्पियो गुरुवार को सीआरपीएफ के काफिले की एक बस से टकरा दी जिससे हुए विस्फोट में चालीस से अधिक जवान शहीद हो गये और इतने ही घायल हो गये। |
Don't Miss!
टाइगर ज़िंदा है की रिलीज में महज कुछ दिन का समय और बचा है। लेकिन इससे पहले सलमान और प्रभाष के फैंस के लिए ये खबर साल 2017 का असली धमाका लेकर आयी है।
साल अंत की और है ऐसे में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के हिसाब किताब के बीच एक बेहद चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है। हमारे पास इस साल टीवी पर सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले एक्टर में सलमान खान और प्रभाष का नाम सामने आया है।
हालांकि प्रभाष ने सलमान को मात देते हुए नंबर 1 की जगह पायी है। वहीं सलमान 2 नंबर की जगह पर बने हुए हैं। 201.90 मिलियन व्यू के साथ बाहुबली के कारण प्रभाष नंबर 1 पर रहे हैं। बाहुबली के कारण प्रभाष के खाते में 500 करोड़ से अधिक कमाई आयी है।
ट्यूबलाइट के फैल हो जाने के बावजूद बिग बॉस और टाइगर ज़िंदा है की चर्चा ने सलमान को 124.02 व्यू के साथ नंबर2 पर रखा है। इसके अलावा नंबर 3 पर साउथ सुपरस्टार विजय का नाम भी शामिल है।
यानी कुलमिलाकर देखा जाए तो इस साल टीवी की दुनिया में फिल्म की दुनिया का राज रहा है।बहरहाल,क्या आप जानते हैं कि टीवी पर फ्लॅाप फिल्में भी कई बार ब्लाॅकबस्टर साबित हुई हैं..यहां देखिए..
| Don't Miss! टाइगर ज़िंदा है की रिलीज में महज कुछ दिन का समय और बचा है। लेकिन इससे पहले सलमान और प्रभाष के फैंस के लिए ये खबर साल दो हज़ार सत्रह का असली धमाका लेकर आयी है। साल अंत की और है ऐसे में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के हिसाब किताब के बीच एक बेहद चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है। हमारे पास इस साल टीवी पर सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले एक्टर में सलमान खान और प्रभाष का नाम सामने आया है। हालांकि प्रभाष ने सलमान को मात देते हुए नंबर एक की जगह पायी है। वहीं सलमान दो नंबर की जगह पर बने हुए हैं। दो सौ एक.नब्बे मिलियन व्यू के साथ बाहुबली के कारण प्रभाष नंबर एक पर रहे हैं। बाहुबली के कारण प्रभाष के खाते में पाँच सौ करोड़ से अधिक कमाई आयी है। ट्यूबलाइट के फैल हो जाने के बावजूद बिग बॉस और टाइगर ज़िंदा है की चर्चा ने सलमान को एक सौ चौबीस.दो व्यू के साथ नंबरदो पर रखा है। इसके अलावा नंबर तीन पर साउथ सुपरस्टार विजय का नाम भी शामिल है। यानी कुलमिलाकर देखा जाए तो इस साल टीवी की दुनिया में फिल्म की दुनिया का राज रहा है।बहरहाल,क्या आप जानते हैं कि टीवी पर फ्लॅाप फिल्में भी कई बार ब्लाॅकबस्टर साबित हुई हैं..यहां देखिए.. |
केरल में भारतीय जनता पार्टी की सांसद शोभा करंदलाजे के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। उन पर धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। इसको लेकर उन्होंने 22 जनवरी को एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि केरल सरकार पर आरोप लगाया था मलप्पुरम में हिंदू परिवारों को पानी नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने नागरिकता अधिनियम में संशोधन का समर्थन किया है।
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि केरल दूसरा कश्मीर बनने की ओर बढ़ रहा है। मल्लापुरम की कुट्टीपुरम पंचायत के हिंदुओं के यहां पानी सप्लाई रोक दी गई थी क्योंकि उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून का समर्थन किया था। इसके बाद शुक्रवार को भी शोभा करंदलाजे ने ट्वीट कर केरल सरकार पर हमला बोला।
Hindus of Kuttipuram Panchayat of Malappuram was denied water supply as they supported #CAA2019. #SevaBharati has been supplying water ever since.
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि केरल सरकार की जय हो! चेरुकुन्नू के दलित परिवारों के साथ भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया। उन्होंने कहा कि इस पक्षपाती वाम सरकार और दमनकारी रणनीति के खिलाफ पूरे समाज को एकजुट होने का समय आ गया है। इसके अलावा उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि केरल में इतिहास दोहराता है?
| केरल में भारतीय जनता पार्टी की सांसद शोभा करंदलाजे के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। उन पर धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। इसको लेकर उन्होंने बाईस जनवरी को एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि केरल सरकार पर आरोप लगाया था मलप्पुरम में हिंदू परिवारों को पानी नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने नागरिकता अधिनियम में संशोधन का समर्थन किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि केरल दूसरा कश्मीर बनने की ओर बढ़ रहा है। मल्लापुरम की कुट्टीपुरम पंचायत के हिंदुओं के यहां पानी सप्लाई रोक दी गई थी क्योंकि उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून का समर्थन किया था। इसके बाद शुक्रवार को भी शोभा करंदलाजे ने ट्वीट कर केरल सरकार पर हमला बोला। Hindus of Kuttipuram Panchayat of Malappuram was denied water supply as they supported #CAAदो हज़ार उन्नीस. #SevaBharati has been supplying water ever since. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि केरल सरकार की जय हो! चेरुकुन्नू के दलित परिवारों के साथ भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया। उन्होंने कहा कि इस पक्षपाती वाम सरकार और दमनकारी रणनीति के खिलाफ पूरे समाज को एकजुट होने का समय आ गया है। इसके अलावा उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि केरल में इतिहास दोहराता है? |
महाराष्ट्र में दो सिनेमाघरों ने खुलने के तुरंत बाद ही सलमान खान की फिल्म 'राधे' से अपनी शुरुआत करने का फैसला किया लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
इब्राहिम की गाय को जबरदस्ती घसीटने की घिनौनी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। गाय के मालिक ने मालपे पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता के परिवार वालों ने पति समेत 9 लोगों पर तीन तलाक, मारपीट और घरेलू हिंसा समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया है।
| महाराष्ट्र में दो सिनेमाघरों ने खुलने के तुरंत बाद ही सलमान खान की फिल्म 'राधे' से अपनी शुरुआत करने का फैसला किया लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इब्राहिम की गाय को जबरदस्ती घसीटने की घिनौनी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। गाय के मालिक ने मालपे पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के परिवार वालों ने पति समेत नौ लोगों पर तीन तलाक, मारपीट और घरेलू हिंसा समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया है। |
घायल की पहचान अरविंद के रूप में हुई। जबकि आरोपी की पहचान अवधेश के रूप में हुई। अस्पताल ले जाने पर गंभीर रूप से घायल अरविंद को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तफ्तीश के दौरान पता लगा कि मृतक और आरोपी दोनों ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं।
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली सरिता विहार थाना इलाके में हुई रोडरेज की एक वारदात में एक ई-रिक्शा वाले ने दूसरे ई-रिक्शा वाले की छाती में सुआं घोंपकर हत्या कर दी। मामले में आरोपी ई-रिक्शा ड्राइवर को पकड़ लिया गया है। वारदात सोमवार रात की है। पुलिस के पास रात करीब 8:30 बजे कॉल की गई। हत्या का कारण दोनों रिक्शा का टच होना बताया जा रहा है, जिससे भड़ककर आरोपी ने दूसरे ई-रिक्शा वाले को मार डाला।
दिल्ली में फिर रफ्तार का कहरः अलग-अलग सड़क हादसों में 3 लोगों की मौत साउथ-ईस्ट दिल्ली की डीसीपी ईशा पांडे ने बताया कि मृतक का नाम अरविंद है। जबकि गिरफ्तार आरोपी का नाम अवधेश उर्फ पप्पू है। दोनों मदनपुर खादर और राजस्थानी कैंप के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले में सोमवार रात को झगड़े की कॉल मिली थी। पुलिस को बताया गया था कि एलआईजी फ्लैट सरिता विहार के पास यह झगड़ा हुआ है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि घायल को उनके आने से पहले ही उनके रिश्तेदार प्राइवेट हॉस्पिटल ले जा चुके थे। घायल की पहचान अरविंद के रूप में हुई। जबकि आरोपी की पहचान अवधेश के रूप में हुई। अस्पताल ले जाने पर गंभीर रूप से घायल अरविंद को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तफ्तीश के दौरान पता लगा कि मृतक और आरोपी दोनों ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं। दोनों के बीच ई-रिक्शा टच होने को लेकर झगड़ा हुआ था। यह बात आगे बढ़ती गई। इसी दौरान आरोपी अवधेश ने सुआं निकालकर अरविंद की छाती में घोंप दिया। मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
शराब पीने से रोक रही थी पत्नी, रसोई के चाकू से कर दी हत्या, पति अरेस्ट ई-रिक्शा और बाइक की टक्कर में दो युवक जख्मी बाइक और ई रिक्शा की टक्कर में दो युवक जख्मी हो गए। दोनों को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया गया। जख्मी होने की वजह से पुलिस पीड़ितों का बयान दर्ज नहीं कर पाई। मंगलवार को बुध विहार पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया। पुलिस के अनुसार, अभिषेक (23) परिवार के साथ शर्मा कॉलोनी बुध विहार में रहता है। वह प्राइवेट जॉब करता है। रविवार को वह अपने रिश्ते के भाई सोनू उर्फ अजय के साथ बाइक से अशोक विहार जा रहा था। बाइक सोनू चला रहा था। जब वे रोहिणी सेक्टर 5 पहुंचे तो सामने से अचानक एक ई-रिक्शा तेजी से आया और उनकी बाइक को टक्कर मार दी। जिससे दोनों भाई सड़क पर गिरकर जख्मी हो गए। एक्सिडेंट के पास मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने उसी रिक्शा से उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया। हॉस्पिटल से ही पुलिस को कॉल कर एक्सिडेंट की सूचना दी गई, लेकिन जख्मी होने की वजह से वे पुलिस को बयान नहीं दे पाए थे। मंगलवार को पुलिस ने पीड़ितों का बयान दर्ज कर ई रिक्शा ड्राइवर जतिन के खिलाफ मामला दर्ज किया।
| घायल की पहचान अरविंद के रूप में हुई। जबकि आरोपी की पहचान अवधेश के रूप में हुई। अस्पताल ले जाने पर गंभीर रूप से घायल अरविंद को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तफ्तीश के दौरान पता लगा कि मृतक और आरोपी दोनों ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं। विशेष संवाददाता, नई दिल्ली सरिता विहार थाना इलाके में हुई रोडरेज की एक वारदात में एक ई-रिक्शा वाले ने दूसरे ई-रिक्शा वाले की छाती में सुआं घोंपकर हत्या कर दी। मामले में आरोपी ई-रिक्शा ड्राइवर को पकड़ लिया गया है। वारदात सोमवार रात की है। पुलिस के पास रात करीब आठ:तीस बजे कॉल की गई। हत्या का कारण दोनों रिक्शा का टच होना बताया जा रहा है, जिससे भड़ककर आरोपी ने दूसरे ई-रिक्शा वाले को मार डाला। दिल्ली में फिर रफ्तार का कहरः अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत साउथ-ईस्ट दिल्ली की डीसीपी ईशा पांडे ने बताया कि मृतक का नाम अरविंद है। जबकि गिरफ्तार आरोपी का नाम अवधेश उर्फ पप्पू है। दोनों मदनपुर खादर और राजस्थानी कैंप के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले में सोमवार रात को झगड़े की कॉल मिली थी। पुलिस को बताया गया था कि एलआईजी फ्लैट सरिता विहार के पास यह झगड़ा हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि घायल को उनके आने से पहले ही उनके रिश्तेदार प्राइवेट हॉस्पिटल ले जा चुके थे। घायल की पहचान अरविंद के रूप में हुई। जबकि आरोपी की पहचान अवधेश के रूप में हुई। अस्पताल ले जाने पर गंभीर रूप से घायल अरविंद को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तफ्तीश के दौरान पता लगा कि मृतक और आरोपी दोनों ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं। दोनों के बीच ई-रिक्शा टच होने को लेकर झगड़ा हुआ था। यह बात आगे बढ़ती गई। इसी दौरान आरोपी अवधेश ने सुआं निकालकर अरविंद की छाती में घोंप दिया। मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। शराब पीने से रोक रही थी पत्नी, रसोई के चाकू से कर दी हत्या, पति अरेस्ट ई-रिक्शा और बाइक की टक्कर में दो युवक जख्मी बाइक और ई रिक्शा की टक्कर में दो युवक जख्मी हो गए। दोनों को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया गया। जख्मी होने की वजह से पुलिस पीड़ितों का बयान दर्ज नहीं कर पाई। मंगलवार को बुध विहार पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया। पुलिस के अनुसार, अभिषेक परिवार के साथ शर्मा कॉलोनी बुध विहार में रहता है। वह प्राइवेट जॉब करता है। रविवार को वह अपने रिश्ते के भाई सोनू उर्फ अजय के साथ बाइक से अशोक विहार जा रहा था। बाइक सोनू चला रहा था। जब वे रोहिणी सेक्टर पाँच पहुंचे तो सामने से अचानक एक ई-रिक्शा तेजी से आया और उनकी बाइक को टक्कर मार दी। जिससे दोनों भाई सड़क पर गिरकर जख्मी हो गए। एक्सिडेंट के पास मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने उसी रिक्शा से उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया। हॉस्पिटल से ही पुलिस को कॉल कर एक्सिडेंट की सूचना दी गई, लेकिन जख्मी होने की वजह से वे पुलिस को बयान नहीं दे पाए थे। मंगलवार को पुलिस ने पीड़ितों का बयान दर्ज कर ई रिक्शा ड्राइवर जतिन के खिलाफ मामला दर्ज किया। |
नई दिल्ली। अतीक अहमद के बाद अब तिहाड़ जेल में गैंगवॉर हुई है जिसके तहत गैंगस्टर ताजपुरिया की सुआ मारकर हत्या कर दी गई है। टिल्लू पर जेल में बंद गैंगस्टर योगेश टुंडा ने लोहे की रॉड से बने सुए से हमला किया। टिल्लू को इलाज के लिए पश्चिमी दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसें बचाया नहीं जा सका। आपको बता दें कि टिल्लू रोहिणी कोर्ट में हुई फायरिंग मामले में मुख्य साजिशकर्ता था। रोहिणी कोर्ट शूटआउट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी मारा गया था।
खबर है कि टिल्लू ताजपुरिया तिहाड़ जेल की हाई रिस्क वॉर्ड में ग्राउंड फ्लोर पर बंद था। टिल्लू पर सुबह करीब 6. 15 मिनट पर जेल में ही बंद 4 बदमाशों दीपक उर्फ तीतर, योगेश उर्फ टुंडा, राजेंद्र और रियाज खान ने सुए से हमला कर दिया। इन लोगों ने लोहे की रॉड से सुआ बनाया था। घायल अवस्था में टिल्लू को अस्पताल ले जाया गया। इससे पहले जेल में ही प्रिंस तेवतिया नाम के बदमाश की हत्या की गई थी।
सुनील मान उर्फ टिल्लू ताजपुरिया, दिल्ली में अलीपुर के पास ही ताजपुर गांव का रहने वाला था। ये कुख्यात गैंगस्टर बाहरी दिल्ली और हरियाणा से अपना गैंग चलाता था। टिल्लू ने दिल्ली की मंडोली जेल में बैठे-बैठे ही गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या करवा दी थी। उसने रोहिणी कोर्ट में अपने शूटर भेजकर इस हत्या को अंजाम दिलावाया था। हालांकि, पुलिस ने दोनों सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया था। टिल्लू ने अपने साथ पवन की हत्या का बदला लेने के लिए ही गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या करवाई थी।
टिल्लू ताजपुरिया की गैंगस्टर जितेंद्र गोगी से भी अदावत थी। कभी जितेंद्र गोगी और टिल्लू ताजपुरिया जिगरी दोस्त हुआ करते थे। दोनों दिल्ली के श्रद्धानंद कॉलेज में साथ पढ़ते थे। साल 2013 में कॉलेज में छात्र संघ चुनाव से दोनों की बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई। जितेंद्र अलीपुर गांव का रहने वाला था। दोनों के बीच दोस्ती में जब दरार आ गई तो दोनों ने अलग-अलग मिलकर वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। टिल्लू आगे चलकर नीरज बवानिया सिंडिकेट का हिस्सा हो गया। कुलदीप फज्जा और रोहित भी टिल्लू गैंग के ही मेंबर थे। साल 2018 में बुराड़ी इलाके में टिल्लू गैंग ने एक गैंगवॉर के अंजाम दिया था। इसमें तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि 5 लोग घायल हुए थे। इसमें जितेंद्र गोगी का नाम सामने आया था।
दिल्ली में कुख्यात गैंगस्टर नीतू दाबोदिया की साल 2013 में एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इसके बाद दिल्ली का डॉन कहलाने वाला नीरज बवानिया भी जेल चला गया। इसके बाद से टिल्लू और गोगी के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई थी। जितेंद्र गोगी की मौत के बाद टिल्लू का दबदबा बढ़ गया था। टिल्लू को पुलिस ने साल 2016 में अरेस्ट किया गया था। इसके बाद से वह तिहाड़ से ही अपने गैंग को ऑपरेट कर रहा था। इस बीच खबर थी कि टिल्लू को तिहाड़ में मारने की साजिश पहले भी असफल हो गई थी। लॉरेन्स बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग मिलकर टिल्लू की हत्या की फिराक में थे।
| नई दिल्ली। अतीक अहमद के बाद अब तिहाड़ जेल में गैंगवॉर हुई है जिसके तहत गैंगस्टर ताजपुरिया की सुआ मारकर हत्या कर दी गई है। टिल्लू पर जेल में बंद गैंगस्टर योगेश टुंडा ने लोहे की रॉड से बने सुए से हमला किया। टिल्लू को इलाज के लिए पश्चिमी दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसें बचाया नहीं जा सका। आपको बता दें कि टिल्लू रोहिणी कोर्ट में हुई फायरिंग मामले में मुख्य साजिशकर्ता था। रोहिणी कोर्ट शूटआउट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी मारा गया था। खबर है कि टिल्लू ताजपुरिया तिहाड़ जेल की हाई रिस्क वॉर्ड में ग्राउंड फ्लोर पर बंद था। टिल्लू पर सुबह करीब छः. पंद्रह मिनट पर जेल में ही बंद चार बदमाशों दीपक उर्फ तीतर, योगेश उर्फ टुंडा, राजेंद्र और रियाज खान ने सुए से हमला कर दिया। इन लोगों ने लोहे की रॉड से सुआ बनाया था। घायल अवस्था में टिल्लू को अस्पताल ले जाया गया। इससे पहले जेल में ही प्रिंस तेवतिया नाम के बदमाश की हत्या की गई थी। सुनील मान उर्फ टिल्लू ताजपुरिया, दिल्ली में अलीपुर के पास ही ताजपुर गांव का रहने वाला था। ये कुख्यात गैंगस्टर बाहरी दिल्ली और हरियाणा से अपना गैंग चलाता था। टिल्लू ने दिल्ली की मंडोली जेल में बैठे-बैठे ही गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या करवा दी थी। उसने रोहिणी कोर्ट में अपने शूटर भेजकर इस हत्या को अंजाम दिलावाया था। हालांकि, पुलिस ने दोनों सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया था। टिल्लू ने अपने साथ पवन की हत्या का बदला लेने के लिए ही गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या करवाई थी। टिल्लू ताजपुरिया की गैंगस्टर जितेंद्र गोगी से भी अदावत थी। कभी जितेंद्र गोगी और टिल्लू ताजपुरिया जिगरी दोस्त हुआ करते थे। दोनों दिल्ली के श्रद्धानंद कॉलेज में साथ पढ़ते थे। साल दो हज़ार तेरह में कॉलेज में छात्र संघ चुनाव से दोनों की बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई। जितेंद्र अलीपुर गांव का रहने वाला था। दोनों के बीच दोस्ती में जब दरार आ गई तो दोनों ने अलग-अलग मिलकर वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। टिल्लू आगे चलकर नीरज बवानिया सिंडिकेट का हिस्सा हो गया। कुलदीप फज्जा और रोहित भी टिल्लू गैंग के ही मेंबर थे। साल दो हज़ार अट्ठारह में बुराड़ी इलाके में टिल्लू गैंग ने एक गैंगवॉर के अंजाम दिया था। इसमें तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि पाँच लोग घायल हुए थे। इसमें जितेंद्र गोगी का नाम सामने आया था। दिल्ली में कुख्यात गैंगस्टर नीतू दाबोदिया की साल दो हज़ार तेरह में एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इसके बाद दिल्ली का डॉन कहलाने वाला नीरज बवानिया भी जेल चला गया। इसके बाद से टिल्लू और गोगी के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई थी। जितेंद्र गोगी की मौत के बाद टिल्लू का दबदबा बढ़ गया था। टिल्लू को पुलिस ने साल दो हज़ार सोलह में अरेस्ट किया गया था। इसके बाद से वह तिहाड़ से ही अपने गैंग को ऑपरेट कर रहा था। इस बीच खबर थी कि टिल्लू को तिहाड़ में मारने की साजिश पहले भी असफल हो गई थी। लॉरेन्स बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग मिलकर टिल्लू की हत्या की फिराक में थे। |
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। न्यू लाइफ मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड एवं आठ लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने अस्पताल के डायरेक्टर सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है आरोपितों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विजय नगर पुलिस ने बताया कि अग्निकांड हादसे की जांच पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर शुरू कर दी गई है, जिसमें प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल के डायरेक्टर एवं मैनेजर द्वारा सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए थे, जिस कारण अस्पताल में आग लगने के बाद 8 लोगों की मृत्यु हो गई है और 5 घायल हैं। अस्पताल द्वारा जो फायर ब्रिगेड के एनओसी ली गई थी, वह भी मार्च 2022 में समाप्त हो गई थी। अस्पताल में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्थाएं नहीं थीं और ऐसे हादसों की दशा में लोगों के निकलने के लिए कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। अस्पताल सुंदरीकरण में बिल्डिंग के सामने प्लास्टिक और फाइबर की कांच जैसी दिखने वाली सीट लगाई गई थी, जिस कारण आग तेजी से फैली थी।
जबलपुर में निजी हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड में अस्पताल के संचालकों पर केस रजिस्टर्ड किया गया है और अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सीएसपी गढा तुषार सिंह ने बताया कि थाना विजय नगर में अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर निशांत गुप्ता, डॉ सुरेश पटेल, डॉ संजय पटेल डॉ संतोष सोनी एवं मैनेजर राम सोनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या एवं गैर इरादतन हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। आरोपित मैनेजर राम सोनी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। शेष फरार आरोपितों की तलाश जारी है।
Koo Appजबलपुर में निजी हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड में अस्पताल के संचालकों पर केस रजिस्टर्ड किया गया है और अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। हादसे की जांच के लिए सरकार ने डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है।
| जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। न्यू लाइफ मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड एवं आठ लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने अस्पताल के डायरेक्टर सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है आरोपितों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। विजय नगर पुलिस ने बताया कि अग्निकांड हादसे की जांच पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर शुरू कर दी गई है, जिसमें प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल के डायरेक्टर एवं मैनेजर द्वारा सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए थे, जिस कारण अस्पताल में आग लगने के बाद आठ लोगों की मृत्यु हो गई है और पाँच घायल हैं। अस्पताल द्वारा जो फायर ब्रिगेड के एनओसी ली गई थी, वह भी मार्च दो हज़ार बाईस में समाप्त हो गई थी। अस्पताल में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्थाएं नहीं थीं और ऐसे हादसों की दशा में लोगों के निकलने के लिए कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। अस्पताल सुंदरीकरण में बिल्डिंग के सामने प्लास्टिक और फाइबर की कांच जैसी दिखने वाली सीट लगाई गई थी, जिस कारण आग तेजी से फैली थी। जबलपुर में निजी हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड में अस्पताल के संचालकों पर केस रजिस्टर्ड किया गया है और अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीएसपी गढा तुषार सिंह ने बताया कि थाना विजय नगर में अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर निशांत गुप्ता, डॉ सुरेश पटेल, डॉ संजय पटेल डॉ संतोष सोनी एवं मैनेजर राम सोनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या एवं गैर इरादतन हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। आरोपित मैनेजर राम सोनी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। शेष फरार आरोपितों की तलाश जारी है। Koo Appजबलपुर में निजी हॉस्पिटल में हुए अग्निकांड में अस्पताल के संचालकों पर केस रजिस्टर्ड किया गया है और अस्पताल के मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। हादसे की जांच के लिए सरकार ने डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। |
थाना बी डिवीजन की पुलिस ने चोरी के एक मोटरसाइकिल सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
श्री दरबार साहिब के लंगर में घोटाले के मामले एस. जी. पी. सी. ने बड़ा एक्शन लिया है।
गांव लदेह में 65 वर्षीय बुजुर्ग की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या करने का सूचना प्राप्त हुई है।
अमृतसर-मिलान-टोरंटो के लिए अपनी पहली उड़ान भरेगी।
यात्रियों को पता चला कि वे मौत के मुंह से बचकर वापस दिल्ली हवाई अड्डे पर लौट आए हैं।
बैसाखी के मौके पर पाकिस्तान के गुरुधामों के दर्शन करने के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अहम जानकारी सामने आई है।
बी. एस. एफ. बटालियन 101 के तहत आती चौकी एम. पी. बेस से हेरोइन के 5 बोतल बरामद की गई हैं।
पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर नशे की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है।
जिले में करोड़ों रुपए की लागत से स्थित केंद्रीय जेल गोइंदवाल साहिब में से मोबाइल व नशीले पदार्थ बरामद होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
हमीरपुर जिले में आबकारी एवं टैक्स विभाग ने अमृतसर के 2 सगे भाइयों से 1. 10 करोड़ का सोना बरामद किया है।
पूरे पंथ का कर्त्तव्य है कि वह केवल श्री अकाल तख्त की मर्यादा को स्वीकार करे।
जहां उन्होंने डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की।
9 दिन के बाद कब्र से बाहर निकाले गए मृतक नवजात के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।
नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत चलाई जा रही 'राही योजना' को लेकर अहम जानकारी दी है।
इलाका फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर गुरचेतन सिंह से संपर्क नहीं हो सका।
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| थाना बी डिवीजन की पुलिस ने चोरी के एक मोटरसाइकिल सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। श्री दरबार साहिब के लंगर में घोटाले के मामले एस. जी. पी. सी. ने बड़ा एक्शन लिया है। गांव लदेह में पैंसठ वर्षीय बुजुर्ग की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या करने का सूचना प्राप्त हुई है। अमृतसर-मिलान-टोरंटो के लिए अपनी पहली उड़ान भरेगी। यात्रियों को पता चला कि वे मौत के मुंह से बचकर वापस दिल्ली हवाई अड्डे पर लौट आए हैं। बैसाखी के मौके पर पाकिस्तान के गुरुधामों के दर्शन करने के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अहम जानकारी सामने आई है। बी. एस. एफ. बटालियन एक सौ एक के तहत आती चौकी एम. पी. बेस से हेरोइन के पाँच बोतल बरामद की गई हैं। पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर नशे की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। जिले में करोड़ों रुपए की लागत से स्थित केंद्रीय जेल गोइंदवाल साहिब में से मोबाइल व नशीले पदार्थ बरामद होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हमीरपुर जिले में आबकारी एवं टैक्स विभाग ने अमृतसर के दो सगे भाइयों से एक. दस करोड़ का सोना बरामद किया है। पूरे पंथ का कर्त्तव्य है कि वह केवल श्री अकाल तख्त की मर्यादा को स्वीकार करे। जहां उन्होंने डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की। नौ दिन के बाद कब्र से बाहर निकाले गए मृतक नवजात के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत चलाई जा रही 'राही योजना' को लेकर अहम जानकारी दी है। इलाका फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर गुरचेतन सिंह से संपर्क नहीं हो सका। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service. |
मध्य प्रदेश से एक हैरान कर देने वाला वीडियाे सामने आया है. एमपी के नरसिंहपुर जिले के एक तालाब में दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों मेढक निकल रहे हैं. यह पीले रंग के मेढक हैं जिन्हें देखकर किसान अपने-अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं.
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के आमगांव बड़ा में बरसात होते ही बड़ी संख्या में दुर्लभ प्रजाति के पीले रंग के मेढक देखे गए. इतनी भारी तादाद में गहरे पीले रंग के मेढक देखकर आम लोगों में इनके ज़हरीले होने की आशंका हुई और लोग इनसे डरकर दूर भागने लगे. इन्हें मारने का प्रयास भी किया जाने लगा.
लोग इन दुर्लभ मेढकों को देखकर आश्चर्य में थे और इनके ज़हरीले होने की आशंका के चलते डरे हुए भी थे जिसके चलते लोगों द्वारा इन्हें नुक़सान पहुंचाने का प्रयास किया गया.
जानकारी के अभाव में लोग इस दुर्लभ प्रजाति के मेढक को जहरीला समझते हैं जबकि पर्यावरणविद् की मानें तो मेढकों की यह दुर्लभ प्रजाति भारत में पाया जाने वाला इंडियन बुल फ्रॉग है जो प्रजनन काल में अपना रंग बदल कर गहरा पीला कर लेता हैं. इस वजह से लोग इसे जहरीला समझते हैं जबकि यह मेढक क़तई ज़हरीले नहीं होते हैं.
पर्यावरणविद आलोक तिवारी ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति का यह इंडियन बुल फ्रॉग किसानों के लिए भी लाभदायक है और ईको फ़्रेंडली भी है. हमें इससे डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इस प्रजाति को सहेजने की ज़रूरत है.
आलोक तिवारी ने इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा कि जानकारी के अभाव और अज्ञानता के चलते लोग प्रकृति के ऐसे दोस्तों को नुक़सान पहुंचाने लगते हैं जो प्रकृति के लिए और हमारे लिए लाभदायक हैं. हमें ज़रूरत है कि बुल फ्रॉग जैसे दुर्लभ जीवों से डरें नहीं बल्कि इनका प्रकृति के लिए लाभ और जानकारी लोगों तक पहुंचाएं.
| मध्य प्रदेश से एक हैरान कर देने वाला वीडियाे सामने आया है. एमपी के नरसिंहपुर जिले के एक तालाब में दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों मेढक निकल रहे हैं. यह पीले रंग के मेढक हैं जिन्हें देखकर किसान अपने-अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं. मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के आमगांव बड़ा में बरसात होते ही बड़ी संख्या में दुर्लभ प्रजाति के पीले रंग के मेढक देखे गए. इतनी भारी तादाद में गहरे पीले रंग के मेढक देखकर आम लोगों में इनके ज़हरीले होने की आशंका हुई और लोग इनसे डरकर दूर भागने लगे. इन्हें मारने का प्रयास भी किया जाने लगा. लोग इन दुर्लभ मेढकों को देखकर आश्चर्य में थे और इनके ज़हरीले होने की आशंका के चलते डरे हुए भी थे जिसके चलते लोगों द्वारा इन्हें नुक़सान पहुंचाने का प्रयास किया गया. जानकारी के अभाव में लोग इस दुर्लभ प्रजाति के मेढक को जहरीला समझते हैं जबकि पर्यावरणविद् की मानें तो मेढकों की यह दुर्लभ प्रजाति भारत में पाया जाने वाला इंडियन बुल फ्रॉग है जो प्रजनन काल में अपना रंग बदल कर गहरा पीला कर लेता हैं. इस वजह से लोग इसे जहरीला समझते हैं जबकि यह मेढक क़तई ज़हरीले नहीं होते हैं. पर्यावरणविद आलोक तिवारी ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति का यह इंडियन बुल फ्रॉग किसानों के लिए भी लाभदायक है और ईको फ़्रेंडली भी है. हमें इससे डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इस प्रजाति को सहेजने की ज़रूरत है. आलोक तिवारी ने इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा कि जानकारी के अभाव और अज्ञानता के चलते लोग प्रकृति के ऐसे दोस्तों को नुक़सान पहुंचाने लगते हैं जो प्रकृति के लिए और हमारे लिए लाभदायक हैं. हमें ज़रूरत है कि बुल फ्रॉग जैसे दुर्लभ जीवों से डरें नहीं बल्कि इनका प्रकृति के लिए लाभ और जानकारी लोगों तक पहुंचाएं. |
यह ज्ञात है कि फल और सब्जियों के रस से ताजा निचोड़ा विटामिन का एक भंडार है। इसलिए, juicer एक उपकरण है जो परिवार के लिए आवश्यक है, जहां वे एक दफ़्ती में कारखाने के उत्पाद के बजाय केवल ताजा और स्वस्थ रस का उपयोग करना पसंद करते हैं। हालांकि, डिवाइस गुणात्मक रूप से काम करने के लिए, यह लंबे समय तक सेवा करता है और सभी अनुरोधों को संतुष्ट करता है, एक विश्वसनीय डिवाइस खरीदना महत्वपूर्ण है। तो, यह सही juicer का चयन करने के बारे में है।
साइट्रस juicer कैसे चुनें?
एक juicer का चयन, एक संभावित खरीदार को यह तय करने की जरूरत है कि वह किस प्रकार का रस पीएगाः सुबह में क्लासिक नारंगी का रस जीवंतता या विभिन्न फलों या सब्जियों से। पहले मामले में, एक साइट्रस प्रेस उपयुक्त है। इसका उपयोग केवल मंडारिन, संतरे, अंगूर या नींबू को प्रसंस्करण के लिए किया जा सकता है। इस डिवाइस में छोटे आयाम हैं, थोड़ी सी जगह लेती है और आमतौर पर सस्ती होती है। साइट्रस juicer एक रिब्ड शंकु के आकार का नोक, एक मोटर और रस इकट्ठा करने के लिए एक कंटेनर होते हैं। नोजल आधे खट्टे पर दबाकर रस प्राप्त किया जाता है। नोजल में छेद के माध्यम से, परिणामी रस कंटेनर में बहता है।
घर के लिए इस तरह के एक juicer चुनते समय, कई मानकों को ध्यान में रखना आवश्यक है, उदाहरण के लिए, डिवाइस की शक्ति। इस प्रकार का juicer, यह 20 से 80 वाट तक है। इस आंकड़े जितना अधिक होगा, तेज़ी से आपको एक उत्साही पेय मिलेगा। रस एकत्र करने के लिए कंटेनर की मात्रा पर भी ध्यान देंः यह 400 मिलीलीटर से 1. 2 एल तक है। लेकिन चूंकि ताजा निचोड़ा हुआ साइट्रस का रस तुरंत शराब पीना चाहिए और इसे संग्रहित नहीं किया जाना चाहिए, 1-3 चश्मा की क्षमता वाले मॉडल को वरीयता दें। इसके अलावा, इस डिवाइस का चयन करते समय, आप अतिरिक्त कार्यों पर ध्यान दे सकते हैं, उदाहरण के लिए, रिवर्स मोड, जिसमें नोजल मोटर को विभिन्न दिशाओं में घुमाता है, जो आपको अधिक रस सिखाता है। डिवाइस को लीवर के साथ उपयोग करना सुविधाजनक है जो नोजल पर साइट्रस रखता है।
एक सार्वभौमिक juicer कैसे चुनें?
तथाकथित सार्वभौमिक juicers आपको विभिन्न फलों, सब्जियों और जामुन से रस प्राप्त करने की अनुमति देता है। लेकिन, दुर्भाग्य से, सब कुछ नहीं। आम तौर पर निर्माता निर्देश में निर्दिष्ट करते हैं, जो फल लागू नहीं किए जा सकते हैं। डिवाइस निम्नानुसार काम करता हैः फल गर्दन के माध्यम से डिस्क ग्राटर तक धक्का देता है और कुचल दिया जाता है, और फिर विभाजक में, द्रव्यमान से केन्द्रापसारक बल कंटेनर में छेद के माध्यम से रस को निचोड़ता है। दो प्रकार के विभाजक हैं - बेलनाकार और शंकुधारी प्रकार। पहले प्रकार में, कताई की डिग्री 90% है, और दूसरे 70% में। निचोड़ा हुआ लुगदी एक विशेष हटाने योग्य कंटेनर में फेंक दिया जाता है।
टमाटर , सेब, नाशपाती, गोभी या चुकंदर के लिए ऐसे juicer चुनते समय, सबसे पहले बिजली पर ध्यान देना। ऐसे मॉडल के लिए इसका न्यूनतम संकेत 250 से 1500 वाट तक है। विभाजक की रोटेशन की गति भी महत्वपूर्ण है। उच्च गति की उपस्थिति ठोस उत्पादों को पीसने के लिए संभव बनाता है। अधिकांश डिवाइस 2-3 गति से लैस हैं। इष्टतम आंकड़ा 7-10 हजार आरपीएम है। खरीदने से पहले, juicer के आकार के बारे में सोचो। कुछ शक्तिशाली मॉडल बल्कि आयामी हैं, और इसलिए उन्हें छोटी रसोई में उपयोग करने के लिए असुविधाजनक है। सार्वभौमिक juicers के कई आधुनिक मॉडल के लिए एक जलाशय से लैस हैं एक पैमाने के साथ रस, विभाजक की सफाई के लिए एक ब्रश, अतिरिक्त नोजल और उत्पादों को खिलाने के लिए एक ट्रे।
अक्सर, ग्राहक एक स्क्रू juicer की पसंद का चयन कर सकते हैं। मांस ग्राइंडर के साथ काम करने के सिद्धांत के अनुसार इस तरह का एक सार्वभौमिक उपकरण, जहां ऑगर स्क्रू फल को पकड़ता है, उसे मोड़ता है और रस को निचोड़ा जाता है, मांस को अलग कर देता है। यह juicer का एक बहुत ही प्रभावी प्रकार है, इसे अक्सर अनाज, जड़ी बूटियों, जामुन जैसे उत्पादों से रस का उत्पादन करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
उन्हें चुनते समय, स्टेनलेस स्टील, बिजली (यह 150-250 डब्ल्यू छोटा है), स्क्रू की गति (40 से 110 आरपीएम) से बने गुणवत्ता वाले हिस्सों द्वारा निर्देशित किया जाए।
| यह ज्ञात है कि फल और सब्जियों के रस से ताजा निचोड़ा विटामिन का एक भंडार है। इसलिए, juicer एक उपकरण है जो परिवार के लिए आवश्यक है, जहां वे एक दफ़्ती में कारखाने के उत्पाद के बजाय केवल ताजा और स्वस्थ रस का उपयोग करना पसंद करते हैं। हालांकि, डिवाइस गुणात्मक रूप से काम करने के लिए, यह लंबे समय तक सेवा करता है और सभी अनुरोधों को संतुष्ट करता है, एक विश्वसनीय डिवाइस खरीदना महत्वपूर्ण है। तो, यह सही juicer का चयन करने के बारे में है। साइट्रस juicer कैसे चुनें? एक juicer का चयन, एक संभावित खरीदार को यह तय करने की जरूरत है कि वह किस प्रकार का रस पीएगाः सुबह में क्लासिक नारंगी का रस जीवंतता या विभिन्न फलों या सब्जियों से। पहले मामले में, एक साइट्रस प्रेस उपयुक्त है। इसका उपयोग केवल मंडारिन, संतरे, अंगूर या नींबू को प्रसंस्करण के लिए किया जा सकता है। इस डिवाइस में छोटे आयाम हैं, थोड़ी सी जगह लेती है और आमतौर पर सस्ती होती है। साइट्रस juicer एक रिब्ड शंकु के आकार का नोक, एक मोटर और रस इकट्ठा करने के लिए एक कंटेनर होते हैं। नोजल आधे खट्टे पर दबाकर रस प्राप्त किया जाता है। नोजल में छेद के माध्यम से, परिणामी रस कंटेनर में बहता है। घर के लिए इस तरह के एक juicer चुनते समय, कई मानकों को ध्यान में रखना आवश्यक है, उदाहरण के लिए, डिवाइस की शक्ति। इस प्रकार का juicer, यह बीस से अस्सी वाट तक है। इस आंकड़े जितना अधिक होगा, तेज़ी से आपको एक उत्साही पेय मिलेगा। रस एकत्र करने के लिए कंटेनर की मात्रा पर भी ध्यान देंः यह चार सौ मिलीलीटर से एक. दो एल तक है। लेकिन चूंकि ताजा निचोड़ा हुआ साइट्रस का रस तुरंत शराब पीना चाहिए और इसे संग्रहित नहीं किया जाना चाहिए, एक-तीन चश्मा की क्षमता वाले मॉडल को वरीयता दें। इसके अलावा, इस डिवाइस का चयन करते समय, आप अतिरिक्त कार्यों पर ध्यान दे सकते हैं, उदाहरण के लिए, रिवर्स मोड, जिसमें नोजल मोटर को विभिन्न दिशाओं में घुमाता है, जो आपको अधिक रस सिखाता है। डिवाइस को लीवर के साथ उपयोग करना सुविधाजनक है जो नोजल पर साइट्रस रखता है। एक सार्वभौमिक juicer कैसे चुनें? तथाकथित सार्वभौमिक juicers आपको विभिन्न फलों, सब्जियों और जामुन से रस प्राप्त करने की अनुमति देता है। लेकिन, दुर्भाग्य से, सब कुछ नहीं। आम तौर पर निर्माता निर्देश में निर्दिष्ट करते हैं, जो फल लागू नहीं किए जा सकते हैं। डिवाइस निम्नानुसार काम करता हैः फल गर्दन के माध्यम से डिस्क ग्राटर तक धक्का देता है और कुचल दिया जाता है, और फिर विभाजक में, द्रव्यमान से केन्द्रापसारक बल कंटेनर में छेद के माध्यम से रस को निचोड़ता है। दो प्रकार के विभाजक हैं - बेलनाकार और शंकुधारी प्रकार। पहले प्रकार में, कताई की डिग्री नब्बे% है, और दूसरे सत्तर% में। निचोड़ा हुआ लुगदी एक विशेष हटाने योग्य कंटेनर में फेंक दिया जाता है। टमाटर , सेब, नाशपाती, गोभी या चुकंदर के लिए ऐसे juicer चुनते समय, सबसे पहले बिजली पर ध्यान देना। ऐसे मॉडल के लिए इसका न्यूनतम संकेत दो सौ पचास से एक हज़ार पाँच सौ वाट तक है। विभाजक की रोटेशन की गति भी महत्वपूर्ण है। उच्च गति की उपस्थिति ठोस उत्पादों को पीसने के लिए संभव बनाता है। अधिकांश डिवाइस दो-तीन गति से लैस हैं। इष्टतम आंकड़ा सात-दस हजार आरपीएम है। खरीदने से पहले, juicer के आकार के बारे में सोचो। कुछ शक्तिशाली मॉडल बल्कि आयामी हैं, और इसलिए उन्हें छोटी रसोई में उपयोग करने के लिए असुविधाजनक है। सार्वभौमिक juicers के कई आधुनिक मॉडल के लिए एक जलाशय से लैस हैं एक पैमाने के साथ रस, विभाजक की सफाई के लिए एक ब्रश, अतिरिक्त नोजल और उत्पादों को खिलाने के लिए एक ट्रे। अक्सर, ग्राहक एक स्क्रू juicer की पसंद का चयन कर सकते हैं। मांस ग्राइंडर के साथ काम करने के सिद्धांत के अनुसार इस तरह का एक सार्वभौमिक उपकरण, जहां ऑगर स्क्रू फल को पकड़ता है, उसे मोड़ता है और रस को निचोड़ा जाता है, मांस को अलग कर देता है। यह juicer का एक बहुत ही प्रभावी प्रकार है, इसे अक्सर अनाज, जड़ी बूटियों, जामुन जैसे उत्पादों से रस का उत्पादन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। उन्हें चुनते समय, स्टेनलेस स्टील, बिजली , स्क्रू की गति से बने गुणवत्ता वाले हिस्सों द्वारा निर्देशित किया जाए। |
नेताओं के खिलाफ़ झूठी बयानबाज़ी का आरोप लगाया.
बीजेपी के महासचिव भूपेंद्र यादव ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा,
करें और उनके झूठ को लेकर स्पष्टीकरण मांगे.
मौजूदगी की मांग की है.
सिन्हा, सौगत रॉय और महुआ मित्रा ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात की.
अगर हमारी सरकार आती है तो हम गारंटी देते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू नहीं होने देंगे और इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे.
2000 रुपये दिए जाएंगे.
दिया है.
मुकाबले बनाने का वादा किया है.
निशाना यहाँ शुभेंदु अधिकारी पर था.
आने पर प्रदेश में शिक्षकों की तादाद दोगुनी की जायेगी.
मुसलमानों के बीच बँटवारा कर रही हैं.
पर बात की.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले के बारे में बात हुई.
प्रदेश में 'फ़्री और फ़ेयर' चुनाव कराने की अपील की है.
बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जो दूसरी सूची जारी की है,
सोमन मित्रा की पत्नी शिखा मित्रा ने कहा है कि 'वे आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. ' जबकि बीजेपी ने उन्हें कोलकाता की चौरिंगी सीट से अपना उम्मीदवार बताया है.
बता रहे हैं कि हमने बीजेपी जॉइन कर ली है. कोई बताये कि पूरा प्लेटफ़ॉर्म अलग है,
चुनाव के लिये बृहस्पतिवार को अपने 148 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें शिखा मित्रा, पार्टी के उपाध्यक्ष मुकुल रॉय, पार्टी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा का नाम शामिल है.
इस ग़लती पर पार्टी का मज़ाक बना रहे हैं.
पिछले सप्ताह, एक 31 वर्षीय नेता ने केरल में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था और उन्होंने कहा था कि वे राजनीति छोड़ रहे हैं.
अभिनेता अरुण गोविल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने की कोशिश की.
को धर्म मानता हूँ. लिहाज़ा, किसी अधर्मी का अत्याचार इतना दुख नहीं पहुँचाता,
63 वर्षीय गोविल को लेकर बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में शामिल होंगे.
राजधानी स्थित भाजपा मुख्यालय में बृहस्पतिवार को गोविल ने संवाददाता सममेलन में केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी और पार्टी महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली.
यह जानकारी दी है.
के लिए आठ चरणों में होने वाला चुनाव 27 मार्च को शुरू होगा और दो मई को नतीजे आएंगे.
से कम 191 उम्मीदवार योग्य पाए गए हैं. '
नमस्कार!
के अपडेट्स पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.
| नेताओं के खिलाफ़ झूठी बयानबाज़ी का आरोप लगाया. बीजेपी के महासचिव भूपेंद्र यादव ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, करें और उनके झूठ को लेकर स्पष्टीकरण मांगे. मौजूदगी की मांग की है. सिन्हा, सौगत रॉय और महुआ मित्रा ने भी चुनाव आयोग से मुलाकात की. अगर हमारी सरकार आती है तो हम गारंटी देते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होने देंगे और इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे. दो हज़ार रुपयापये दिए जाएंगे. दिया है. मुकाबले बनाने का वादा किया है. निशाना यहाँ शुभेंदु अधिकारी पर था. आने पर प्रदेश में शिक्षकों की तादाद दोगुनी की जायेगी. मुसलमानों के बीच बँटवारा कर रही हैं. पर बात की. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले के बारे में बात हुई. प्रदेश में 'फ़्री और फ़ेयर' चुनाव कराने की अपील की है. बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जो दूसरी सूची जारी की है, सोमन मित्रा की पत्नी शिखा मित्रा ने कहा है कि 'वे आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. ' जबकि बीजेपी ने उन्हें कोलकाता की चौरिंगी सीट से अपना उम्मीदवार बताया है. बता रहे हैं कि हमने बीजेपी जॉइन कर ली है. कोई बताये कि पूरा प्लेटफ़ॉर्म अलग है, चुनाव के लिये बृहस्पतिवार को अपने एक सौ अड़तालीस उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें शिखा मित्रा, पार्टी के उपाध्यक्ष मुकुल रॉय, पार्टी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा का नाम शामिल है. इस ग़लती पर पार्टी का मज़ाक बना रहे हैं. पिछले सप्ताह, एक इकतीस वर्षीय नेता ने केरल में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था और उन्होंने कहा था कि वे राजनीति छोड़ रहे हैं. अभिनेता अरुण गोविल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरने की कोशिश की. को धर्म मानता हूँ. लिहाज़ा, किसी अधर्मी का अत्याचार इतना दुख नहीं पहुँचाता, तिरेसठ वर्षीय गोविल को लेकर बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में शामिल होंगे. राजधानी स्थित भाजपा मुख्यालय में बृहस्पतिवार को गोविल ने संवाददाता सममेलन में केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी और पार्टी महासचिव अरुण सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली. यह जानकारी दी है. के लिए आठ चरणों में होने वाला चुनाव सत्ताईस मार्च को शुरू होगा और दो मई को नतीजे आएंगे. से कम एक सौ इक्यानवे उम्मीदवार योग्य पाए गए हैं. ' नमस्कार! के अपडेट्स पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें. |
उत्तरप्रदेश / बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 14 साल की एक नाबालिग अपनी मां के साथ प्लास्टिक के एक थैले में 4 महीने का भ्रूण लेकर इंसाफ की गुहार लगा रही है। करीब 6 महीने पहले गांव के ही एक शख्स की हैवानियत का शिकार हुई मासूम आरोपी को सजा दिलाने के लिए थाने के चक्कर काट रही है, लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
दरसअल, इस मासूम से दरिंदगी का सिलसिला करीब 6 महीने पहले शुरू हुआ जब इसके घर के सामने ही रहने वाले एक शख्स ने इसे अगवा कर बलात्कार किया। यही नहीं आरोपी शख्स ने दो बार फिर पीड़ित को अपनी हवस का शिकार बनाया। पीड़ित के पेट में दर्द होने के बाद जब डॉक्टर को दिखाया गया तो पता चला कि वो गर्भवती है। इसके बाद घटना का खुलासा हुआ। पीड़ित नाबालिग के परिजनों ने आरोपी के परिवार वालों से बात की। आरोपी के घरवालो ने पीड़ित नाबालिग का साथ देने के बजाय और भी घिनौना काम कर डाला।
बच्ची की मां के मुताबिक आरोपी के परिजनों ने जबरन एक अवैध क्लीनिक में ले जाकर उसका पीड़ित नाबालिग का गर्भपात करवा दिया, जिस महिला ने गर्भपात किया वह कोई डॉक्टर नहीं थी बल्कि अवैध रूप से डिलीवरी सेंटर और मेडिकल स्टोर चलाती थी। पुलिस में शिकायत के बाद डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया और अवैध डिलीवरी सेंटर को सील कर दिया गया। नाबालिग बच्ची का गर्भपात करवाने वाली झोलाछाप डॉक्टर तो सलाखों के पीछे पहुंच गई। गर्भपात करवाने के आरोपी भी हिरासत में हैं, लेकिन पीड़ित नाबालिग के साथ बलात्कार करने वाला आरोपी अब तक फरार है। पुलिस आरोपी को जगह जगह तलाश कर रही है।
| उत्तरप्रदेश / बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में चौदह साल की एक नाबालिग अपनी मां के साथ प्लास्टिक के एक थैले में चार महीने का भ्रूण लेकर इंसाफ की गुहार लगा रही है। करीब छः महीने पहले गांव के ही एक शख्स की हैवानियत का शिकार हुई मासूम आरोपी को सजा दिलाने के लिए थाने के चक्कर काट रही है, लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। दरसअल, इस मासूम से दरिंदगी का सिलसिला करीब छः महीने पहले शुरू हुआ जब इसके घर के सामने ही रहने वाले एक शख्स ने इसे अगवा कर बलात्कार किया। यही नहीं आरोपी शख्स ने दो बार फिर पीड़ित को अपनी हवस का शिकार बनाया। पीड़ित के पेट में दर्द होने के बाद जब डॉक्टर को दिखाया गया तो पता चला कि वो गर्भवती है। इसके बाद घटना का खुलासा हुआ। पीड़ित नाबालिग के परिजनों ने आरोपी के परिवार वालों से बात की। आरोपी के घरवालो ने पीड़ित नाबालिग का साथ देने के बजाय और भी घिनौना काम कर डाला। बच्ची की मां के मुताबिक आरोपी के परिजनों ने जबरन एक अवैध क्लीनिक में ले जाकर उसका पीड़ित नाबालिग का गर्भपात करवा दिया, जिस महिला ने गर्भपात किया वह कोई डॉक्टर नहीं थी बल्कि अवैध रूप से डिलीवरी सेंटर और मेडिकल स्टोर चलाती थी। पुलिस में शिकायत के बाद डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया और अवैध डिलीवरी सेंटर को सील कर दिया गया। नाबालिग बच्ची का गर्भपात करवाने वाली झोलाछाप डॉक्टर तो सलाखों के पीछे पहुंच गई। गर्भपात करवाने के आरोपी भी हिरासत में हैं, लेकिन पीड़ित नाबालिग के साथ बलात्कार करने वाला आरोपी अब तक फरार है। पुलिस आरोपी को जगह जगह तलाश कर रही है। |
पिछले दिनों 13 से 15 फरवरी तक दरगाह आला हजरत मदरसा इस्लामिक स्टडी सेंटर में हुए सेमिनार में उलमा के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे गए। यूट्यूब से कमाई जायज या नाजायज, इस पर अगले वर्ष निर्णय लेने को कहा गया। इसके अलावा दो अन्य सवालों हेयर ट्रांसप्लांट, आईब्रो बनवाना और एसएमएस पर तलाक देना शरीयता क्या कहती है', इन पर विमर्श हुआ।
भौंहें छटवाना जायज नहींजमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि उलमा पैनल के सामने एक व्यक्ति का सवाल आया कि हेयर ट्रांसप्लांट उपचार की श्रेणी में आता है या नहीं? इस पर जवाब दिया कि हेयर ट्रांसप्लांट जायज है। इसका संदर्भ था कि यदि किसी कारण से जन्मजात बाल गिर गए तो अपने बाल दोबारा उगवाने का उपचार कर सकते हैं। मगर, अपने सिर पर किसी अन्य व्यक्ति या पशु के बाल उगाना जायज नहीं है। एक अन्य सवाल में भौंहों छांटना और पतली कराना या मुड़वाना नाजायज बताया गया। इसका संदर्भ था कि इसकी मूल स्वरूप में छेड़छाड़ न हो। हेयर संबंधी नियम पुरुष और महिला दोनों पर समान लागू होंगे।
तलाक पर यह कहाकानूनन तीन तलाक जुर्म है मगर, शरीयत का संदर्भ देकर इस पर लगातार चर्चा हो रही। एक व्यक्ति ने सवाल किया कि शौहर ने बीवी को 'एक तलाक' देने के लिए एसएमएस भेजा। वह इसे एक या तीन बार भेजे तो क्या तीन तलाक मानी जाएगी या नहीं ? जवाब आया कि इसे एक तलाक ही माना जाएगा। इस स्थिति में एक तलाक को तीन बार जोर देकर लिखा गया हो। यदि तलाक भेजने से इरादे से मोबाइल फोन पर संबंधित शब्द टाइप कर दिए, तब भी तलाक मान्य होगा। भले ही वह संदेश बीवी को भेजा जाए, या न भेजा जाए। संदेश डिलीट कर देने पर भी तलाक माना जाएगा। एसएमएस को शरीयत की रोशनी में खत या अन्य संदेश साधन की तरह माना गया है। ऐसी स्थिति में एसएमएस पर भेजे गए संदेश जायज माने जाएंगे।
जमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि तीन दिवसीय सेमिनार में प्रमुख सवाल रखे गए थे। उलमा ने शरीयत की रोशनी में इन पर विमर्श किया था। जिसके बाद काजी एक हिंदुस्तान ने हेयर ट्रांसप्लांट और एसएमएस से संबंधित सवालों के जवाब तय कर दिए हैं।
| पिछले दिनों तेरह से पंद्रह फरवरी तक दरगाह आला हजरत मदरसा इस्लामिक स्टडी सेंटर में हुए सेमिनार में उलमा के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे गए। यूट्यूब से कमाई जायज या नाजायज, इस पर अगले वर्ष निर्णय लेने को कहा गया। इसके अलावा दो अन्य सवालों हेयर ट्रांसप्लांट, आईब्रो बनवाना और एसएमएस पर तलाक देना शरीयता क्या कहती है', इन पर विमर्श हुआ। भौंहें छटवाना जायज नहींजमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि उलमा पैनल के सामने एक व्यक्ति का सवाल आया कि हेयर ट्रांसप्लांट उपचार की श्रेणी में आता है या नहीं? इस पर जवाब दिया कि हेयर ट्रांसप्लांट जायज है। इसका संदर्भ था कि यदि किसी कारण से जन्मजात बाल गिर गए तो अपने बाल दोबारा उगवाने का उपचार कर सकते हैं। मगर, अपने सिर पर किसी अन्य व्यक्ति या पशु के बाल उगाना जायज नहीं है। एक अन्य सवाल में भौंहों छांटना और पतली कराना या मुड़वाना नाजायज बताया गया। इसका संदर्भ था कि इसकी मूल स्वरूप में छेड़छाड़ न हो। हेयर संबंधी नियम पुरुष और महिला दोनों पर समान लागू होंगे। तलाक पर यह कहाकानूनन तीन तलाक जुर्म है मगर, शरीयत का संदर्भ देकर इस पर लगातार चर्चा हो रही। एक व्यक्ति ने सवाल किया कि शौहर ने बीवी को 'एक तलाक' देने के लिए एसएमएस भेजा। वह इसे एक या तीन बार भेजे तो क्या तीन तलाक मानी जाएगी या नहीं ? जवाब आया कि इसे एक तलाक ही माना जाएगा। इस स्थिति में एक तलाक को तीन बार जोर देकर लिखा गया हो। यदि तलाक भेजने से इरादे से मोबाइल फोन पर संबंधित शब्द टाइप कर दिए, तब भी तलाक मान्य होगा। भले ही वह संदेश बीवी को भेजा जाए, या न भेजा जाए। संदेश डिलीट कर देने पर भी तलाक माना जाएगा। एसएमएस को शरीयत की रोशनी में खत या अन्य संदेश साधन की तरह माना गया है। ऐसी स्थिति में एसएमएस पर भेजे गए संदेश जायज माने जाएंगे। जमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि तीन दिवसीय सेमिनार में प्रमुख सवाल रखे गए थे। उलमा ने शरीयत की रोशनी में इन पर विमर्श किया था। जिसके बाद काजी एक हिंदुस्तान ने हेयर ट्रांसप्लांट और एसएमएस से संबंधित सवालों के जवाब तय कर दिए हैं। |
नई दिल्लीः अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की लव-स्टोरी के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं पता, लेकिन हाल ही में अभिषेक ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 'उमराव जान' के बाद उन्होंने ऐश्वर्या को प्रपोज किया था।
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2018 में अभिषेक ने ऐश्वर्या संग अपने रोमांस पर कहा- "अपनी शुरुआती फिल्मों में मैंने ऐश्वर्या के साथ काम किया था। हमने साथ में पहले ढ़ाई अक्षर प्रेम के में काम किया था। हम तबसे दोस्त थे। हम बहुत अच्छे दोस्त थे। हम साथ में कुछ ना कहो की शूटिंग की भी शूटिंग कर रहे थे। हमारी दोस्ती बहुत अच्छी थी और समय के साथ वह दोस्ती से भी आगे बढ़ गई। "
उन्होंने आगे कहा- "उमराव जान के दौरान चीजें गंभीर हो गई थीं। उसके बाद मैंने उन्हें प्रपोज किया था, फिर हमारी शादी हुई और अब हमारी खूबसूरत बेटी आराध्या है। "
अभिषेक ने ऐश्वर्या को सुपरवुमेन भी कहा। उन्होंने कहा- "वह जो भी काम करती हैं, पूवी निष्ठा के साथ करती हैं, चाहे वह एक्टिंग हो या मां के तौर पर हो। "
आपको बता दें कि अभिषेक और ऐश्वर्या 'गुलाब जामुन' में नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू होगी।
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| नई दिल्लीः अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की लव-स्टोरी के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं पता, लेकिन हाल ही में अभिषेक ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 'उमराव जान' के बाद उन्होंने ऐश्वर्या को प्रपोज किया था। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार अट्ठारह में अभिषेक ने ऐश्वर्या संग अपने रोमांस पर कहा- "अपनी शुरुआती फिल्मों में मैंने ऐश्वर्या के साथ काम किया था। हमने साथ में पहले ढ़ाई अक्षर प्रेम के में काम किया था। हम तबसे दोस्त थे। हम बहुत अच्छे दोस्त थे। हम साथ में कुछ ना कहो की शूटिंग की भी शूटिंग कर रहे थे। हमारी दोस्ती बहुत अच्छी थी और समय के साथ वह दोस्ती से भी आगे बढ़ गई। " उन्होंने आगे कहा- "उमराव जान के दौरान चीजें गंभीर हो गई थीं। उसके बाद मैंने उन्हें प्रपोज किया था, फिर हमारी शादी हुई और अब हमारी खूबसूरत बेटी आराध्या है। " अभिषेक ने ऐश्वर्या को सुपरवुमेन भी कहा। उन्होंने कहा- "वह जो भी काम करती हैं, पूवी निष्ठा के साथ करती हैं, चाहे वह एक्टिंग हो या मां के तौर पर हो। " आपको बता दें कि अभिषेक और ऐश्वर्या 'गुलाब जामुन' में नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू होगी। Also Read: |
स्ट्रीट डांसर 3D (Street Dancer 3D) स्टारर नोरा फतेही (Nora Fatehi) के गर्मी गाने में फिर से एक बार फिर इंटरनेट पर आग लगा दी हैं। गर्मी गाने में नोरा फतेही की सेंसुअल मूव्स को लोगों ने बेहद पसंद किया जा रहा है। यह गाना 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन रिलीज़ हुआ था और 24 घंटे अंदर ही नोरा के सुपरहिट गाने 'दिलबर' (Dilbar) और 'साकी साकी' (Saki Saki) का रिकॉर्ड तोड़ चूका है।
इस गाने में नोरा फतेही और वरुण धवन डांस करते नज़र आ रहे हैं। गर्मी गाने को 24 घंटे के अंदर 30 मिलियन लोग देख चुके है। अब तक इस गाने को 4 मिलियन लोग देख चुके हैं और इस बात से नोरा काफी एक्साइटेड हैं।
नोरा फ़तेही ने गर्मी गाना लांच के दिन लाल ड्रेस में बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी। आपको बात दे, गर्मी गाना लांच से पहले रिलीज़ हो चूका था। इस गाने में नोरा के डांस को लोगों ने बेहद पसंद किया है इसलिए नोरा जहां भी फिल्म प्रमोशन के लिए जा रही हैं, फैंस उन पर बेशुमार प्यार लूटा रहे हैं।
इस वीडियो में वरुण ने कमेंट में लिखा है कि - नोरा चर्च जरूर जाना। आगे रेमो डिसूज़ा लिख हैं- "वो भी अकेले। " वो इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले जब नोरा वरुण धवन और फिल्म के निर्देशक रेमो डिसूजा के साथ फिल्म के प्रोमोशन के सिलसिले में ही क्रिसमस के मौके पर मुंबई के एक चर्च में पहुंची थीं। नोरा और वरुण यह जानते थे कि फैंस अगर उन्हें पहचानेंगे तो भीड़ बढ़ेगी तो वे लोग चेहरे पर मास्क लगा कर पहुंचे थे।
लेकिन अचानक ही जब फैंस को पता चला कि नोरा और वरुण चर्च आये हैं तो वह नोरा की एक झलक पाने के लिए बेक़रार हो गए और फिर वहां उन्होंने काफी भीड़ लगा दी, सभी नोरा से मिलना और फोटो खिंचवाना चाह रहे थे। वरुण ने इस बात का पूरा ख्याल रखा और नोरा को किसी तरह से भीड़ से निकाला और वहीं खड़े एक स्कूटर पर बैठकर वरुण और नोरा फैंस के बीच से निकल गए।
| स्ट्रीट डांसर तीनD स्टारर नोरा फतेही के गर्मी गाने में फिर से एक बार फिर इंटरनेट पर आग लगा दी हैं। गर्मी गाने में नोरा फतेही की सेंसुअल मूव्स को लोगों ने बेहद पसंद किया जा रहा है। यह गाना पच्चीस दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन रिलीज़ हुआ था और चौबीस घंटाटे अंदर ही नोरा के सुपरहिट गाने 'दिलबर' और 'साकी साकी' का रिकॉर्ड तोड़ चूका है। इस गाने में नोरा फतेही और वरुण धवन डांस करते नज़र आ रहे हैं। गर्मी गाने को चौबीस घंटाटे के अंदर तीस मिलियन लोग देख चुके है। अब तक इस गाने को चार मिलियन लोग देख चुके हैं और इस बात से नोरा काफी एक्साइटेड हैं। नोरा फ़तेही ने गर्मी गाना लांच के दिन लाल ड्रेस में बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी। आपको बात दे, गर्मी गाना लांच से पहले रिलीज़ हो चूका था। इस गाने में नोरा के डांस को लोगों ने बेहद पसंद किया है इसलिए नोरा जहां भी फिल्म प्रमोशन के लिए जा रही हैं, फैंस उन पर बेशुमार प्यार लूटा रहे हैं। इस वीडियो में वरुण ने कमेंट में लिखा है कि - नोरा चर्च जरूर जाना। आगे रेमो डिसूज़ा लिख हैं- "वो भी अकेले। " वो इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले जब नोरा वरुण धवन और फिल्म के निर्देशक रेमो डिसूजा के साथ फिल्म के प्रोमोशन के सिलसिले में ही क्रिसमस के मौके पर मुंबई के एक चर्च में पहुंची थीं। नोरा और वरुण यह जानते थे कि फैंस अगर उन्हें पहचानेंगे तो भीड़ बढ़ेगी तो वे लोग चेहरे पर मास्क लगा कर पहुंचे थे। लेकिन अचानक ही जब फैंस को पता चला कि नोरा और वरुण चर्च आये हैं तो वह नोरा की एक झलक पाने के लिए बेक़रार हो गए और फिर वहां उन्होंने काफी भीड़ लगा दी, सभी नोरा से मिलना और फोटो खिंचवाना चाह रहे थे। वरुण ने इस बात का पूरा ख्याल रखा और नोरा को किसी तरह से भीड़ से निकाला और वहीं खड़े एक स्कूटर पर बैठकर वरुण और नोरा फैंस के बीच से निकल गए। |
Don't Miss!
फिल्म लगान और मुन्नाभाई एमबीबीएस से उन्हें बॉलीवुड में पहचान बनाने का मौका तो मिला। लेकिन बाद में उन्हें कोई खास फिल्में नहीं मिलीं। लेकिन एक बार फिर वह फिल्म मिलता है चांस बाय चांस में नजर आनेवाली हैं। जेसी फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता जवाहर एल जयरथ और निर्देशक रमेश मोदी हैं।
मौज-मस्ती, उछल-कूद से सराबोर इस फिल्म में ग्रेसी सिंह का कॉमिक हंगामा है। फिल्म में उनके अभिनय की नयी प्रतिभा देखने को मिलेगी। फिल्म में सना गोविल, असलम खान, विशाल कौशिक, टिकू,जवाहर, महेश ठाकुर की भी मुख्य भूमिकाएं हैं। दिव्या का आयटम गीत भी है। लक बाय चांस का संगीत किसी और ने नहीं खुद जतीन ललित ने तय किया है। वह भी लंबे अरसे के बाद फिर से बॉलीवुड में वापसी कर रहे हैं।
Actress Gracy Singh is ready for new Pari. she is very exited for her new film.
| Don't Miss! फिल्म लगान और मुन्नाभाई एमबीबीएस से उन्हें बॉलीवुड में पहचान बनाने का मौका तो मिला। लेकिन बाद में उन्हें कोई खास फिल्में नहीं मिलीं। लेकिन एक बार फिर वह फिल्म मिलता है चांस बाय चांस में नजर आनेवाली हैं। जेसी फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता जवाहर एल जयरथ और निर्देशक रमेश मोदी हैं। मौज-मस्ती, उछल-कूद से सराबोर इस फिल्म में ग्रेसी सिंह का कॉमिक हंगामा है। फिल्म में उनके अभिनय की नयी प्रतिभा देखने को मिलेगी। फिल्म में सना गोविल, असलम खान, विशाल कौशिक, टिकू,जवाहर, महेश ठाकुर की भी मुख्य भूमिकाएं हैं। दिव्या का आयटम गीत भी है। लक बाय चांस का संगीत किसी और ने नहीं खुद जतीन ललित ने तय किया है। वह भी लंबे अरसे के बाद फिर से बॉलीवुड में वापसी कर रहे हैं। Actress Gracy Singh is ready for new Pari. she is very exited for her new film. |
अमरावती/दि. 25- बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र में शामिल अंजनगांव बारी गांव के नागरिकों को पीने के पानी हेतु हमेशा ही काफी तकलीफों का सामना करना पडता था. इस स्थिति से क्षेत्र के विधायक रवि राणा ने राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेेंद्र फडणवीस को अवगत कराया. जिन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए अंजनगांव बारी गांव के लिए पूरक जलापूर्ति योजना हेतु 44. 05 लाख रूपये की निधी को प्रशासकीय मान्यता प्रदान की है. जिसके चलते अब जल्द ही अंजनगांव बारी में जलापूर्ति योजना का काम शुरू होगा.
इस संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से विभागीय आयुक्त सहित जीवन प्राधिकरण के अधिक्षक अभियंता कार्यालय को आवश्यक दिशानिर्देश प्राप्त हुए है. जिनमें अंजनगांव बारी में जल्द से जल्द जलापूर्ति योजना का काम शुरू किये जाने की बात कही गई है.
| अमरावती/दि. पच्चीस- बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र में शामिल अंजनगांव बारी गांव के नागरिकों को पीने के पानी हेतु हमेशा ही काफी तकलीफों का सामना करना पडता था. इस स्थिति से क्षेत्र के विधायक रवि राणा ने राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेेंद्र फडणवीस को अवगत कराया. जिन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए अंजनगांव बारी गांव के लिए पूरक जलापूर्ति योजना हेतु चौंतालीस. पाँच लाख रूपये की निधी को प्रशासकीय मान्यता प्रदान की है. जिसके चलते अब जल्द ही अंजनगांव बारी में जलापूर्ति योजना का काम शुरू होगा. इस संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से विभागीय आयुक्त सहित जीवन प्राधिकरण के अधिक्षक अभियंता कार्यालय को आवश्यक दिशानिर्देश प्राप्त हुए है. जिनमें अंजनगांव बारी में जल्द से जल्द जलापूर्ति योजना का काम शुरू किये जाने की बात कही गई है. |
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (एजेंसी)
पश्चिमी दिल्ली के ख्याला क्षेत्र में स्थित एक फैक्टरी की छत शनिवार को ढह गई जिससे 4 मजदूरों की मौत हो गई तथा 2 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ख्याला के विष्णु गार्डन इलाके में स्थित फैक्टरी में मोटर वाइंडिंग का काम होता था। दिल्ली अग्निशमन सेवा के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि पूर्वाह्न लगभग 10 बजे मिली सूचना के बाद दमकल की चार गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) सुबोध कुमार ने कहा कि घटना के समय तीन महिलाओं समेत 6 मजदूर फैक्टरी में मौजूद थे। दल ने उन्हें बाहर निकाला और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल तथा गुरु गोबिंद सिंह सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल ले जाने पर 6 में से 4 मजदूरों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और दो का इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान साइना (36), गुड्डी (45), ट्विंकल (25) और रमेश (35) के रूप में की गई है।
| नयी दिल्ली, उन्नीस दिसंबर पश्चिमी दिल्ली के ख्याला क्षेत्र में स्थित एक फैक्टरी की छत शनिवार को ढह गई जिससे चार मजदूरों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ख्याला के विष्णु गार्डन इलाके में स्थित फैक्टरी में मोटर वाइंडिंग का काम होता था। दिल्ली अग्निशमन सेवा के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि पूर्वाह्न लगभग दस बजे मिली सूचना के बाद दमकल की चार गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सुबोध कुमार ने कहा कि घटना के समय तीन महिलाओं समेत छः मजदूर फैक्टरी में मौजूद थे। दल ने उन्हें बाहर निकाला और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल तथा गुरु गोबिंद सिंह सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल ले जाने पर छः में से चार मजदूरों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और दो का इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान साइना , गुड्डी , ट्विंकल और रमेश के रूप में की गई है। |
[ १०७ ठहराता है जो प्राधुनिक कांव्य-चितन का मेरुदंड है । उसको यह निर्वैयक्तिकता भी जीवनगत मूल्यों की सापेक्षता मे मान्य है, जो लेखक की अपनी प्रस्थापना है ।
इस प्रकार पुस्तक में संग्रहीत ११ निबंध, साहित्य के विविव भगों का विश्लेषरण एवं विवेचन प्रस्तुत करते हुए लेवक की कुछ महत्वपूर्ण मान्यताओं एवं प्रस्थापनाओ को समक्ष रखते हैं। संपूर्ण रुप में पुस्तक काव्य-शास्त्रीय दृष्टि से पठनीय है । भाषा संस्कृतनिष्ठ है और विजय के अनुसार भाषा का प्रयोग भी हुआ है, पर इतना मानना पड़ेगा कि प्राचार्य जो की भाषा संस्कृतनिष्ठ होने के काररण कही-कही पर दुरुह हो गयी है और कही कही पर वाक्य-विन्यास जटिल भी हो गये हैं । ऐसे स्थल कम ही है ।
(घ) + हिंन्दी साहित्य - एक आधुनिक परिदृश्य,
त्रिशंकु, प्रात्मनेपद भौर प्रतीक के पाठकों के लिये अज्ञेय की यह नवीन पुस्तक एक विस्तृत 'कैनवास' को हमारे सामने रखती है । इस पुस्तक के अनेक निबंध हिंदी साहित्य से ही सम्बंधित है, पर उनमे से कुछ निबंध अत्यंत सामान्य है जो साहित्यिक विधाओं के विकास एवं स्वरूप से सम्बंधित है। इन निबंधों मे अज्ञेय ने केवल एक पिष्टपेषण मात्र किया है और पाठ्यक्रम की दृष्टि से लिखे गए निबंध लगते हैं । बात यह है कि ये निबंध अज्ञेय के है, इसी से प्रकाशक ने उन्हे छाप दिया है अन्यथा उनका स्तर किसी विशिष्ठ आयाम को उद्घाटित नही करता है । ऐसे निबंध है प्राधुनिक उपन्यास, प्रेमचंद और परिवर्ती उपन्यास, कहानी - पृष्ठभूमि और हिन्दी एकांकी पृष्ठभूमि जिनमे तथ्यों को दुहराया भर गया है। प्रेमचंद के उपन्यासों से आधुनिक उपन्यास किन किन दृष्टियों से मिन्न है, यह विषय इतना पिटा हुआ है कि इस निबंध को पढ़कर किसी भी नई बात का ज्ञान नही होता है। इसी प्रकार कहानी और उपन्यास की पृष्ठभूमि नामक निबंधों मे अग्रेजी उपन्यासों के स्वरूप विश्लेषरण तथा विकास स्थितियों को दिखाया गया है । इस विश्लेषरण के दौरान एक बात यह भी कही गई कि हक्सले एक ऐसा लेखक है जो छद्भ- आधुनिकता का परि चायक है (१० ७८) क्योंकि अज्ञेय के अनुसार हक्सले किसी प्रतिमान की खोज में न लग प्राध्यात्मिक अन्वेषण की भोर अग्रसर होता है । यह बात कुछ अटपटी सी लगती है क्योंकि हक्सले के "पाउट काउन्टरपाउन्ट" में जो आध्यात्मिक अन्वेषरण है, वह क्या अपने में एक मूल्य या प्रतिमान नही हैं ? इस प्रकार के निष्कर्ष यदा कदा प्राप्त होते हैं जब कि विडंबना यह है कि अज्ञेय स्वयं रहस्यवादी होते जा रहे है !!
उपन्यासों के अन्तर्गत एक निबंध में (साहित्यिक प्रवृत्तियों को सामाजिक पृष्ठभूमि) प्रेमचंद तथा निराला के कृतित्व को लेकर कुछ वाते कहीं गई है जो विचारणीय है। प्रेमचंद के उपन्यासों पर एक सामान्य दृष्टि का परिचय देते हुए आज्ञेय नें प्रेमचंद के यथार्थ को खंडित माना है, उन्ही के शब्दों मे-"प्रेमचंद का यथार्थ खंडित
+ हिन्दी साहित्य- एक आधुनिक परिदृश्य, ले० प्रज्ञय, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली (1967) | [ एक सौ सात ठहराता है जो प्राधुनिक कांव्य-चितन का मेरुदंड है । उसको यह निर्वैयक्तिकता भी जीवनगत मूल्यों की सापेक्षता मे मान्य है, जो लेखक की अपनी प्रस्थापना है । इस प्रकार पुस्तक में संग्रहीत ग्यारह निबंध, साहित्य के विविव भगों का विश्लेषरण एवं विवेचन प्रस्तुत करते हुए लेवक की कुछ महत्वपूर्ण मान्यताओं एवं प्रस्थापनाओ को समक्ष रखते हैं। संपूर्ण रुप में पुस्तक काव्य-शास्त्रीय दृष्टि से पठनीय है । भाषा संस्कृतनिष्ठ है और विजय के अनुसार भाषा का प्रयोग भी हुआ है, पर इतना मानना पड़ेगा कि प्राचार्य जो की भाषा संस्कृतनिष्ठ होने के काररण कही-कही पर दुरुह हो गयी है और कही कही पर वाक्य-विन्यास जटिल भी हो गये हैं । ऐसे स्थल कम ही है । + हिंन्दी साहित्य - एक आधुनिक परिदृश्य, त्रिशंकु, प्रात्मनेपद भौर प्रतीक के पाठकों के लिये अज्ञेय की यह नवीन पुस्तक एक विस्तृत 'कैनवास' को हमारे सामने रखती है । इस पुस्तक के अनेक निबंध हिंदी साहित्य से ही सम्बंधित है, पर उनमे से कुछ निबंध अत्यंत सामान्य है जो साहित्यिक विधाओं के विकास एवं स्वरूप से सम्बंधित है। इन निबंधों मे अज्ञेय ने केवल एक पिष्टपेषण मात्र किया है और पाठ्यक्रम की दृष्टि से लिखे गए निबंध लगते हैं । बात यह है कि ये निबंध अज्ञेय के है, इसी से प्रकाशक ने उन्हे छाप दिया है अन्यथा उनका स्तर किसी विशिष्ठ आयाम को उद्घाटित नही करता है । ऐसे निबंध है प्राधुनिक उपन्यास, प्रेमचंद और परिवर्ती उपन्यास, कहानी - पृष्ठभूमि और हिन्दी एकांकी पृष्ठभूमि जिनमे तथ्यों को दुहराया भर गया है। प्रेमचंद के उपन्यासों से आधुनिक उपन्यास किन किन दृष्टियों से मिन्न है, यह विषय इतना पिटा हुआ है कि इस निबंध को पढ़कर किसी भी नई बात का ज्ञान नही होता है। इसी प्रकार कहानी और उपन्यास की पृष्ठभूमि नामक निबंधों मे अग्रेजी उपन्यासों के स्वरूप विश्लेषरण तथा विकास स्थितियों को दिखाया गया है । इस विश्लेषरण के दौरान एक बात यह भी कही गई कि हक्सले एक ऐसा लेखक है जो छद्भ- आधुनिकता का परि चायक है क्योंकि अज्ञेय के अनुसार हक्सले किसी प्रतिमान की खोज में न लग प्राध्यात्मिक अन्वेषण की भोर अग्रसर होता है । यह बात कुछ अटपटी सी लगती है क्योंकि हक्सले के "पाउट काउन्टरपाउन्ट" में जो आध्यात्मिक अन्वेषरण है, वह क्या अपने में एक मूल्य या प्रतिमान नही हैं ? इस प्रकार के निष्कर्ष यदा कदा प्राप्त होते हैं जब कि विडंबना यह है कि अज्ञेय स्वयं रहस्यवादी होते जा रहे है !! उपन्यासों के अन्तर्गत एक निबंध में प्रेमचंद तथा निराला के कृतित्व को लेकर कुछ वाते कहीं गई है जो विचारणीय है। प्रेमचंद के उपन्यासों पर एक सामान्य दृष्टि का परिचय देते हुए आज्ञेय नें प्रेमचंद के यथार्थ को खंडित माना है, उन्ही के शब्दों मे-"प्रेमचंद का यथार्थ खंडित + हिन्दी साहित्य- एक आधुनिक परिदृश्य, लेशून्य प्रज्ञय, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली |
सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। अपनी गजलों और गानों से सभी का दिल जीतने वाले मोहम्मद रफी ने कई गाने गाए हैं। रफी साहब ने 1980 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम संस्कार के समय 10,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे। सिर्फ इतना ही नहीं उनके निधन पर सरकार ने उनके सम्मान में दो दिन के शोक की घोषणा की थी। आइए आपको मोहम्मद रफी के सदाबहार गानों के बारे में बताते हैं।
बहारो फूल बरसाओः
लाल छड़ी मैदान खड़ीः
ये रेशमी जुल्फेंः
आने से उसके आए बहारः
मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गयाः
जो वादा किया वो निभाना पड़ेगाः
| सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी का जन्म चौबीस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौबीस को अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। अपनी गजलों और गानों से सभी का दिल जीतने वाले मोहम्मद रफी ने कई गाने गाए हैं। रफी साहब ने एक हज़ार नौ सौ अस्सी में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम संस्कार के समय दस,शून्य से ज्यादा लोग मौजूद थे। सिर्फ इतना ही नहीं उनके निधन पर सरकार ने उनके सम्मान में दो दिन के शोक की घोषणा की थी। आइए आपको मोहम्मद रफी के सदाबहार गानों के बारे में बताते हैं। बहारो फूल बरसाओः लाल छड़ी मैदान खड़ीः ये रेशमी जुल्फेंः आने से उसके आए बहारः मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गयाः जो वादा किया वो निभाना पड़ेगाः |
यूक्रेन की पहली उप विदेश मंत्री एमीन दझापरोवा ने सोमवार को विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा से मुलाकात की। वह पिछले साल 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सरकार के अधिकारियों से मिलने वाले कीव के पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं। झापरोवा विदेश राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्री मीनाक्षी लेखी से भी मुलाकात करेंगी और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिश्री से भी मिलेंगी।
यूक्रेनी मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, पीएम मोदी से फोन पर बात कर उन्हें अपने देश बुलाना चाहते हैं। पीएम मोदी इससे पहले भी जेलेंस्की से फोन पर बात कर चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि समस्या का सैन्य समाधान नहीं हो सकता और भारत शांति के किसी भी प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है।
| यूक्रेन की पहली उप विदेश मंत्री एमीन दझापरोवा ने सोमवार को विदेश मंत्रालय के सचिव संजय वर्मा से मुलाकात की। वह पिछले साल चौबीस फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सरकार के अधिकारियों से मिलने वाले कीव के पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं। झापरोवा विदेश राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्री मीनाक्षी लेखी से भी मुलाकात करेंगी और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिश्री से भी मिलेंगी। यूक्रेनी मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, पीएम मोदी से फोन पर बात कर उन्हें अपने देश बुलाना चाहते हैं। पीएम मोदी इससे पहले भी जेलेंस्की से फोन पर बात कर चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि समस्या का सैन्य समाधान नहीं हो सकता और भारत शांति के किसी भी प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है। |
प्रखंड के उटेशरा पंचायत व सितुआहा पंचायत के दो दर्जन से अधिक भूमिहीन परिवारों ने रहने के लिए भूमि व बासगीत पर्चा की मांग को लेकर मंगलवार को सलखुआ अंचल कार्यालय का घेराव किया।
घेराबंदी कर रहे भूमिहीन परिवार का कहना था कि वर्षों से हमलोगों कोसी तटबंध के किनारे रहकर हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलकर विस्थापित हो तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। वर्षो बित गए पर हम भूमिहीन परिवार को ना ही पुनर्वास दिया गया है और ना ही भूमि। भूमिहीन परिवार के सदस्यों ने कहा कि हमलोगों के पास जमीन नहीं है। और कोसी तटबंध के निकट घर के पीछे जिनकी जमीन है वो जमीनदार हमलोगों को घर हटाने व यहां से जमीन खाली करने की बात कह रहे हैं । जबकि हमलोग रिटायर बाँध व कोसी बाँध के किनारे बसे हुए हैं। ऐसे में हम जमीन खाली कर कहां जाएंगे। भूमिहीन परिवार ने अंचल कार्यालय का घेराव करते हुए जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि पहले हमलोग को बसने के लिए जमीन मिलेगी तभी हमलोग कोसी बाँध खाली करेंगे। हमलोग सीओ से मिलना चाह रहे हैं। लेकिन सीओ को कार्यालय में नहीं देख हंगामा करने लगे।
वहीं इस मामले की जानकारी मिलने पर सलखुआ अंचलाधिकारी श्यामकिशोर यादव ने कहा कि लोक शिकायत निवारण (आयुक्त) के कार्यालय में उपस्थित होना था। मीटिंग में उपस्थित होने के कारण अंचल कार्यालय नहीं आ सके। उन्होंने कहा कि जिन भूमिहीन परिवार को जमीन नहीं है, वे आवेदन दें। राजस्व कर्मचारी से जांच करवाकर सूची बनाई जाएगी, जहां भी बिहार सरकार की जमीन होगी, वहां प्रत्येक परिवार को जमीन दी जाएगी। आवेदन मिलने पर परिवारों को चिह्नित करने के बाद सूची बनाने का आदेश राजस्व कर्मचारी को दिया जाएगा। जिसके बाद तैयार सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अंचल के घेराव करने में सीता देवी, जानकी देवी, पछिया देवी, समिता देवी, कला देवी, बेचनी देवी, वंदना देवी, रंजुला देवी, पार्वती देवी, समिया देवी, तारणी राम, ब्रह्मदेव राम, गुलाय देवी, अर्चना देवी, कमल चौधरी, गुलाय सादा, कमलेश्वरी राम सहित दो दर्जन से अधिक मध्यम टोला उटेशरा, सितुआहा व पचभिरा के भूमिहीन परिवार मौजूद थे।
| प्रखंड के उटेशरा पंचायत व सितुआहा पंचायत के दो दर्जन से अधिक भूमिहीन परिवारों ने रहने के लिए भूमि व बासगीत पर्चा की मांग को लेकर मंगलवार को सलखुआ अंचल कार्यालय का घेराव किया। घेराबंदी कर रहे भूमिहीन परिवार का कहना था कि वर्षों से हमलोगों कोसी तटबंध के किनारे रहकर हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलकर विस्थापित हो तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। वर्षो बित गए पर हम भूमिहीन परिवार को ना ही पुनर्वास दिया गया है और ना ही भूमि। भूमिहीन परिवार के सदस्यों ने कहा कि हमलोगों के पास जमीन नहीं है। और कोसी तटबंध के निकट घर के पीछे जिनकी जमीन है वो जमीनदार हमलोगों को घर हटाने व यहां से जमीन खाली करने की बात कह रहे हैं । जबकि हमलोग रिटायर बाँध व कोसी बाँध के किनारे बसे हुए हैं। ऐसे में हम जमीन खाली कर कहां जाएंगे। भूमिहीन परिवार ने अंचल कार्यालय का घेराव करते हुए जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि पहले हमलोग को बसने के लिए जमीन मिलेगी तभी हमलोग कोसी बाँध खाली करेंगे। हमलोग सीओ से मिलना चाह रहे हैं। लेकिन सीओ को कार्यालय में नहीं देख हंगामा करने लगे। वहीं इस मामले की जानकारी मिलने पर सलखुआ अंचलाधिकारी श्यामकिशोर यादव ने कहा कि लोक शिकायत निवारण के कार्यालय में उपस्थित होना था। मीटिंग में उपस्थित होने के कारण अंचल कार्यालय नहीं आ सके। उन्होंने कहा कि जिन भूमिहीन परिवार को जमीन नहीं है, वे आवेदन दें। राजस्व कर्मचारी से जांच करवाकर सूची बनाई जाएगी, जहां भी बिहार सरकार की जमीन होगी, वहां प्रत्येक परिवार को जमीन दी जाएगी। आवेदन मिलने पर परिवारों को चिह्नित करने के बाद सूची बनाने का आदेश राजस्व कर्मचारी को दिया जाएगा। जिसके बाद तैयार सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अंचल के घेराव करने में सीता देवी, जानकी देवी, पछिया देवी, समिता देवी, कला देवी, बेचनी देवी, वंदना देवी, रंजुला देवी, पार्वती देवी, समिया देवी, तारणी राम, ब्रह्मदेव राम, गुलाय देवी, अर्चना देवी, कमल चौधरी, गुलाय सादा, कमलेश्वरी राम सहित दो दर्जन से अधिक मध्यम टोला उटेशरा, सितुआहा व पचभिरा के भूमिहीन परिवार मौजूद थे। |
मनी में बदलने के घपलेबाजी को सामने लाया गया है। जिसमे एचडीफीसी बैंक,आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक शामिल है। इन बेंकों के द्वारा चलाए जा रहे मनी लाउन्ड्रिंग रैकेट का कोबरा पोस्ट ने विडियो फुटेज भी तैयार किया है। कोबरा पोस्ट का यह भी कहना है कि उसके पास जो भी सबूत है सभी स्पष्ट हैं।
अनिरुद्ध बहल के अनुसार इस धंधे में शामिल जिन तीन बैंकों के नाम सामने आये हैं वह धरल्ले से अपना यह घपलेबाजी का कारोबार चला रहे हैं। यहाँ ड्राफ्ट के जरिए ब्लैक मनी जमा किए जाते हैं। इसके लिए ग्राहकों से न तो पैन कार्ड मांगे जाते है और न ही केवाईसी की जानकारी ली जाती है। इन बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्टिंग के दौरान कोबरा पोस्ट के पत्रकारों को धरल्ले से यह बताया कि किस तरह इंश्योरेंस और दूसरे इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट की मदद से यह बैंक ब्लैक मनी की बड़ी से बड़ी रकम को वाइट मनी में बदल देते हैं।
अनिरुद्ध बहल ने यह भी बतया है कि जब कोबरा पोस्ट की टीम इन बैंकों की कई ब्रांचों और इनकी सहयोगी बीमा कंपनियों के दफ्तरों में गए तो इन्हें पता चला कि किस तरह इन बैंकों में मनी लाउन्ड्रिंग में घपलेबाजी का काम बेरोकटोक किया जा रहा है। इन बैंकों की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग की सेवाओं का बिल्कुल खुले तौर पर प्रस्ताव रखा जाता है। यह बैंक उन कस्टमर्स को भी ये सुविधाएं देतें है, जो गैर कानूनी रकम को निवेश करना चाहते हैं। यहाँ गैर-कानूनी तरीके से कमाए गये धन को निवेश करने के लिए कई सुझाव भी दिए जाते हैं।
कोबरा पोस्ट ने यह दावा किया है कि यह बैंक आसानी से पैसे जमा करवाने और ज्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए ये सभी बनाए गये नियमों का उलंघन बिना किसी खौफ के कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद अभी तक तीनों बैंको में से किसी बैंक ने कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।
| मनी में बदलने के घपलेबाजी को सामने लाया गया है। जिसमे एचडीफीसी बैंक,आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक शामिल है। इन बेंकों के द्वारा चलाए जा रहे मनी लाउन्ड्रिंग रैकेट का कोबरा पोस्ट ने विडियो फुटेज भी तैयार किया है। कोबरा पोस्ट का यह भी कहना है कि उसके पास जो भी सबूत है सभी स्पष्ट हैं। अनिरुद्ध बहल के अनुसार इस धंधे में शामिल जिन तीन बैंकों के नाम सामने आये हैं वह धरल्ले से अपना यह घपलेबाजी का कारोबार चला रहे हैं। यहाँ ड्राफ्ट के जरिए ब्लैक मनी जमा किए जाते हैं। इसके लिए ग्राहकों से न तो पैन कार्ड मांगे जाते है और न ही केवाईसी की जानकारी ली जाती है। इन बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्टिंग के दौरान कोबरा पोस्ट के पत्रकारों को धरल्ले से यह बताया कि किस तरह इंश्योरेंस और दूसरे इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट की मदद से यह बैंक ब्लैक मनी की बड़ी से बड़ी रकम को वाइट मनी में बदल देते हैं। अनिरुद्ध बहल ने यह भी बतया है कि जब कोबरा पोस्ट की टीम इन बैंकों की कई ब्रांचों और इनकी सहयोगी बीमा कंपनियों के दफ्तरों में गए तो इन्हें पता चला कि किस तरह इन बैंकों में मनी लाउन्ड्रिंग में घपलेबाजी का काम बेरोकटोक किया जा रहा है। इन बैंकों की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग की सेवाओं का बिल्कुल खुले तौर पर प्रस्ताव रखा जाता है। यह बैंक उन कस्टमर्स को भी ये सुविधाएं देतें है, जो गैर कानूनी रकम को निवेश करना चाहते हैं। यहाँ गैर-कानूनी तरीके से कमाए गये धन को निवेश करने के लिए कई सुझाव भी दिए जाते हैं। कोबरा पोस्ट ने यह दावा किया है कि यह बैंक आसानी से पैसे जमा करवाने और ज्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए ये सभी बनाए गये नियमों का उलंघन बिना किसी खौफ के कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद अभी तक तीनों बैंको में से किसी बैंक ने कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। |
साड़ी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। साड़ी ऐसा परिधान है जो भारत को एक सूत्र में बांधती है और अनेकता में एकता का संदेश देती है। पारम्परिक कला के साथ ही विभिन्न राज्यों की साडिय़ाँ उन स्थलों की संस्कृति का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक और पूर्व से लेकर पश्चिम भारत तक की संस्कृति वहाँ की साडिय़ों में दिखाई देती है। उत्तर के बनारस की बनारसी साड़ी तो दक्षिण भारत से कंजीवरम साड़ी राजसी लुक के लिए पसन्द करी जाती हैं। पूर्व में बंगाल की काँथा साड़ी की पहचान है तो पश्चिम से गुजरात की बांधनी साड़ी मन को मोह लेती है। राजस्थान की लहरिया और बंधेज की साडिय़ों को भला कौन भूल सकता है। लहरिया और बंधेज की साडिय़ों की माँग पश्चिमी देशों में सर्वाधिक है।
वहीं दूसरी ओर युवतियों में सलवार सूट को लेकर अपना एक अलग क्रेज नजर आता है। कोई भी फंक्शन हो, त्योंहार हो, हर औरत सबसे सुन्दर दिखना चाहती है। ऐसे में सभी महिलाओं की पहली पसन्द ट्रेडिशनल सलवार सूट ही होते हैं। लेकिन इतने सारे विकल्प होते हैं कि समझ में नहीं आता कौन सा सूट लें और कौन सा नहीं लें। सलवार सूट ट्रेडिशनल आउटफिट होने के साथ-साथ अब और भी स्टाइलिश एवं ट्रैंडी हो गया है। इसे न सिर्फ शुद्ध भारतीय परिवेश बल्कि इंडो वेस्टर्न स्टाइल में भी कैरी किया जा सकता है। इन दिनों 70 के दशक के रेट्रो लुक और पंजाब के पटियाला शहर में महाराजाओं द्वारा पहनी जाने वाली पटियाला सलवार के फैशन का दौर है।
| साड़ी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। साड़ी ऐसा परिधान है जो भारत को एक सूत्र में बांधती है और अनेकता में एकता का संदेश देती है। पारम्परिक कला के साथ ही विभिन्न राज्यों की साडिय़ाँ उन स्थलों की संस्कृति का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक और पूर्व से लेकर पश्चिम भारत तक की संस्कृति वहाँ की साडिय़ों में दिखाई देती है। उत्तर के बनारस की बनारसी साड़ी तो दक्षिण भारत से कंजीवरम साड़ी राजसी लुक के लिए पसन्द करी जाती हैं। पूर्व में बंगाल की काँथा साड़ी की पहचान है तो पश्चिम से गुजरात की बांधनी साड़ी मन को मोह लेती है। राजस्थान की लहरिया और बंधेज की साडिय़ों को भला कौन भूल सकता है। लहरिया और बंधेज की साडिय़ों की माँग पश्चिमी देशों में सर्वाधिक है। वहीं दूसरी ओर युवतियों में सलवार सूट को लेकर अपना एक अलग क्रेज नजर आता है। कोई भी फंक्शन हो, त्योंहार हो, हर औरत सबसे सुन्दर दिखना चाहती है। ऐसे में सभी महिलाओं की पहली पसन्द ट्रेडिशनल सलवार सूट ही होते हैं। लेकिन इतने सारे विकल्प होते हैं कि समझ में नहीं आता कौन सा सूट लें और कौन सा नहीं लें। सलवार सूट ट्रेडिशनल आउटफिट होने के साथ-साथ अब और भी स्टाइलिश एवं ट्रैंडी हो गया है। इसे न सिर्फ शुद्ध भारतीय परिवेश बल्कि इंडो वेस्टर्न स्टाइल में भी कैरी किया जा सकता है। इन दिनों सत्तर के दशक के रेट्रो लुक और पंजाब के पटियाला शहर में महाराजाओं द्वारा पहनी जाने वाली पटियाला सलवार के फैशन का दौर है। |
नई दिल्ली। मुंबई में रहने वाले कार्तिक और उनकी पत्नी दोनों मल्टीनेशनल फर्म में जॉब करते हैं। वे सुबह 8 बजे ऑफिस निकल जाते हैं, और रात करीब 9 बजे ही घर लौटते हैं। पिछले सप्ताह कार्तिक ने एलपीजी डीलर के पास नए सिलेंडर के लिए बुकिंग करवाई थी। डिलिवरी बॉय जब गैस सिलिंडर लेकर पहुंचा तो उनके घर पर ताला लगा था। वह वापस लौट गया। कल रात जब कार्तिक की पत्नी खाना बना ही रही थी कि गैस खत्म हो गई। स्पेयर सिलेंडर था नहीं, वीकेंड में भी अभी 4 दिन बचे थे। कार्तिक को अगले दिन सिर्फ गैस सिलिंडर के लिए छुट्टी लेनी पड़ी। ऐसे में उन्हें वीकेंड तक बाहर से खाना मंगाकर काम चलाना पड़ा। कार्तिक जैसी मुश्किल आप में से कई वर्किंग कपल्स या सिंगल और बैचलर्स के सामने आती होगी, जो रसोई गैस का प्रयोग तो करते हैं लेकिन गैस डिविलरी के वक्त मौजूद रहना एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन आप चाहें तो आप प्रिवर्ड टाइम डिलिवरी का फायदा उठा सकते हैं। जिसके तहत आप अपने घर पर अपने समय अनुसार सिलेंडर मंगा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए आपको बता दें कि हर टाइम स्लॉट के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान करना पड़ता है।
1. प्रिफर्ड टाइम कस्टमर- आप सोमवार से शुक्रवार के बीच किसी भी समय का चयन कर सकते हैं। एक निश्चित टाइम स्लॉट पर अगर आप डिलिवरी नहीं ले पाए तो डिस्ट्रिब्यूटर अगले दिन उसी समय पर फिर ले आएगा।
2. प्रिफर्ड डे और टाइम कस्टमर- आप समय के साथ साथ अपने मन मुताबिक दिन का भी चयन कर सकते हैं। मसलन, आप अपने सिलेंडर की डिलिवरी केवल उस निश्चित दिन और समय पर ही लेना चाहते हैं। अगर किन्ही वजहों से आप डिलिवरी नहीं ले पाते तो अगले हफ्ते उसी दिन और उसी समय पर फिर से आपके पास डिलिवरी पहुंच जाएगी।
3. शनिवार या रविवार प्रिफर्ड कस्टमर- आप शनिवार और रविवार में से किसी भी दिन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच अपना सिलेंडर डिलिवर करा सकते हैं।
यह सुविधा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (इंडेन) के सभी डिस्ट्रिब्यूटर्स के पास उपलब्ध है जिनके कस्टमर्स मुंबई, कोलकता, दिल्ली, चेन्नई, बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, सोनीपत, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, मीरा भयंदर आदि में हैं। इस स्कीम को 10 लाख के ऊपर की आबादी वाले शहरों में जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। प्रिफर्ड टाइम कस्टमर बनने के लिए आपको रजिस्टर कराना होगा। आप www. indane. co की साइट पर जाकर भी रजिस्टर करा सकते हैं।
ध्यान रहे अगर आप एक बार अपने तय किए गए समय पर उपलब्ध नहीं मिले तो आपकी डिलिवरी अगले हफ्ते के उस दिन और उस समय पर ही आएगा। और अगले हफ्ते भी अगर आप नहीं ले सके तो आपके प्रिफर्ड टाइम कस्टमर का स्टेटस अगले 6 महीनों के लिए हटा दिया जाएगा और आपकी रिफिल बुकिंग कैंसल कर दी जाती है। इसे फिर से शुरु करने का फैसला डिस्ट्रिब्यूटर का होता है।
| नई दिल्ली। मुंबई में रहने वाले कार्तिक और उनकी पत्नी दोनों मल्टीनेशनल फर्म में जॉब करते हैं। वे सुबह आठ बजे ऑफिस निकल जाते हैं, और रात करीब नौ बजे ही घर लौटते हैं। पिछले सप्ताह कार्तिक ने एलपीजी डीलर के पास नए सिलेंडर के लिए बुकिंग करवाई थी। डिलिवरी बॉय जब गैस सिलिंडर लेकर पहुंचा तो उनके घर पर ताला लगा था। वह वापस लौट गया। कल रात जब कार्तिक की पत्नी खाना बना ही रही थी कि गैस खत्म हो गई। स्पेयर सिलेंडर था नहीं, वीकेंड में भी अभी चार दिन बचे थे। कार्तिक को अगले दिन सिर्फ गैस सिलिंडर के लिए छुट्टी लेनी पड़ी। ऐसे में उन्हें वीकेंड तक बाहर से खाना मंगाकर काम चलाना पड़ा। कार्तिक जैसी मुश्किल आप में से कई वर्किंग कपल्स या सिंगल और बैचलर्स के सामने आती होगी, जो रसोई गैस का प्रयोग तो करते हैं लेकिन गैस डिविलरी के वक्त मौजूद रहना एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन आप चाहें तो आप प्रिवर्ड टाइम डिलिवरी का फायदा उठा सकते हैं। जिसके तहत आप अपने घर पर अपने समय अनुसार सिलेंडर मंगा सकते हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए आपको बता दें कि हर टाइम स्लॉट के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान करना पड़ता है। एक. प्रिफर्ड टाइम कस्टमर- आप सोमवार से शुक्रवार के बीच किसी भी समय का चयन कर सकते हैं। एक निश्चित टाइम स्लॉट पर अगर आप डिलिवरी नहीं ले पाए तो डिस्ट्रिब्यूटर अगले दिन उसी समय पर फिर ले आएगा। दो. प्रिफर्ड डे और टाइम कस्टमर- आप समय के साथ साथ अपने मन मुताबिक दिन का भी चयन कर सकते हैं। मसलन, आप अपने सिलेंडर की डिलिवरी केवल उस निश्चित दिन और समय पर ही लेना चाहते हैं। अगर किन्ही वजहों से आप डिलिवरी नहीं ले पाते तो अगले हफ्ते उसी दिन और उसी समय पर फिर से आपके पास डिलिवरी पहुंच जाएगी। तीन. शनिवार या रविवार प्रिफर्ड कस्टमर- आप शनिवार और रविवार में से किसी भी दिन सुबह आठ बजे से शाम छः बजे के बीच अपना सिलेंडर डिलिवर करा सकते हैं। यह सुविधा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सभी डिस्ट्रिब्यूटर्स के पास उपलब्ध है जिनके कस्टमर्स मुंबई, कोलकता, दिल्ली, चेन्नई, बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, सोनीपत, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, मीरा भयंदर आदि में हैं। इस स्कीम को दस लाख के ऊपर की आबादी वाले शहरों में जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। प्रिफर्ड टाइम कस्टमर बनने के लिए आपको रजिस्टर कराना होगा। आप www. indane. co की साइट पर जाकर भी रजिस्टर करा सकते हैं। ध्यान रहे अगर आप एक बार अपने तय किए गए समय पर उपलब्ध नहीं मिले तो आपकी डिलिवरी अगले हफ्ते के उस दिन और उस समय पर ही आएगा। और अगले हफ्ते भी अगर आप नहीं ले सके तो आपके प्रिफर्ड टाइम कस्टमर का स्टेटस अगले छः महीनों के लिए हटा दिया जाएगा और आपकी रिफिल बुकिंग कैंसल कर दी जाती है। इसे फिर से शुरु करने का फैसला डिस्ट्रिब्यूटर का होता है। |
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 'गुड' गवर्नेंस नीति की खुद ही बलाईयां लेते नहीं थकते। पर देश के बेहतरीन दिमाग़ों के लिए जानी जाने वाली आईएएस बिरादरी के लिए चुने जाने वाले पूर्व आईएएस कनन गोपीनाथन ऐसा नहीं मानते। वो कहते हैं कि "मुझे नहीं लगता कि इस सरकार के पास सोचने की क्षमता है। इलेक्शन जीतने की है, पर सरकार चलाने की न नाॅलेज है न कैपिसिटी है।" कनन जंतर-मंतर पर यूथ इंडिया के सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में निकाले गए "पीस एंड जस्टिस" मार्च में हिस्सा लेने आए थे। कनन गोपीनाथन वही आईएएस अफसर हैं जो भारत सरकार के कश्मीर में धारा 370 हटाने और वहां के लोगों के मूल अधिकारों को छीनने के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
बता दें कि यंग इंडिया के आह्वान पर 3 मार्च को सीएए, एनआरसी, एनपीआर के खि़लाफ़ और दिल्ली में मुसलमानों के साथ सत्ता की सरपरस्ती में पुलिस की देख-रेख में जो हिंसा को अंजाम दिया गया है उसके विरोध में रामलीला मैदान में देश भर से आए नौजवान पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने जगह-जगह धरपकड़ शुरू कर दी। हालांकि पहले से इस कार्यक्रम की परमिशन आयोजकों द्वारा ले ली गई थी। पर ऐन वक़्त पर बताया गया कि उनकी अनुमति ख़ारिज कर दी गई। इसके साथ ही उनको जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से भी मना कर दिया गया। बावजूद इसके युवाओं ने जबरन जंतर-मंतर पर सभा की।
सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मंच से ऐलान किया कि हमें एनआरसी पूरे देश में कहीं भी नहीं चाहिये। बिहार की नीतिश-बीजेपी सरकार की आंदोलन के दबाव में बदली बोली पर उन्होनें कहा कि अभी हमने देखा कि बिहार विधान सभा में हमारे विधायकों ने जब बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने की मांग उठाई तो नितीश जी ने बीच का रास्ता निकाला और उन्होंने भी कह दिया कि बिहार को एनआरसी नहीं चाहिये। और हमने देखा कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने भी हां कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के लोग जो जगह-जगह एनआरसी-एनआरसी कर रहे हैं आज वो बिहार विधान सभा में इस आंदोलन के बढ़ते दबाव के आगे कह रहे हैं कि बिहार को एनआरसी नहीं चाहिये। बिहार को अगर नहीं चाहिये तो बंगाल को क्यों चाहिये? बिहार-बंगाल को नहीं चाहिये तो पूरे हिंदुस्तान को एनआरसी नहीं चाहिये। और इसीलिए हम किसी एक राज्य की बात करने नहीं आए हैं। एनआरसी को पूरी तरह से वापस करो।
ये कह रहे हैं कि एनआरसी अभी नहीं लागू होगा। इसका मतलब क्या है\ अभी तक कोई योजना नहीं बनी है। इसका मतलब क्या\ इसका मतलब है कि ये अपने हिसाब से समय चुनकर एनआरसी हमारे ऊपर थोपना चाहते हैं। हम ये एलान करने आए हैं कि अभी नहीं और कभी भी नहीं। इस देश में हमें एनआरसी मंजूर नहीं है। हम कतई इसे लागू नहीं होने देंगे। एनपीआर एनआरसी का ही दूसरा नाम है।
माले के दिल्ली सचिव रवि राय ने बताया कि दिल्ली पुलिस नहीं बल्कि पूरी दिल्ली की पुलिस ने मिलकर आज होम मिनिस्ट्री के इशारे पर यंग इंडिया के मार्च पर हमला किया। रामलीला मैदान से सैकड़ों युवाओं को गिरफ्तार किया गया। यूपी से निकलने वाली 20 से ज्यादा बसों को रोक दिया गया। इनके बस ड्राइवरों तक को गिरफ्तार किया गया। इंद्रलोक से आने वाली महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और स्टेडियम में डिटेन कर के रखा गया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक से युवाओं को डिटेन किया गया। विश्वविद्यालय मेट्रो का गेट बंद कर दिया गया। दिल्ली के हर हिस्से से जहां से भी मार्च के लिए लोग निकल रहे थे वहां पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इतनी मुस्तैदी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के समय पुलिस ने नहीं दिखाई। लेकिन आज जब यंग इंडिया सड़क पर उतर कर इसके लिए जिम्मेदार अमित शाह का इस्तीफा मांगने निकली तो गजब मुस्तैदी दिखाई। अभी 4 दिन पहले इस हिंसा के एक और मास्टर माइंड कपिल मिश्रा को गोली मारो मार्का शांति रैली की इजाज़त दी गयी लेकिन आज युवाओं को अमन और न्याय के लिये मार्च करने से रोकने की हर संभव कोशिश की गई।
लेकिन इनके हर दमन से लड़ते हुए हजारों नौजवान जन्तर मन्तर पहुंचे और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
यंग इंडिया से जुड़ीं दिल्ली यूनिवर्सिटी से पाॅलिटिकल सांइस में एमए कर रही दामिनी ने बताया कि यंग इंडिया सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में एक मंच का गठन किया गया था जिसमें देश भर से बहुत से छात्र संगठन जुडे़ हैं। लाॅयर्स एसोसिएशन्स हैं। डाॅक्टर्स एसोसिएशन हैं। ट्रेड यूनियन हैं। किसान भी हिस्सा ले रहे हैं। और टीचर्स एसोसिएशन भी हैं। पुलिस ने रामलीला मैदान से हमें हटा दिया। पर फिर भी यहां जंतर-मंतर पर लोग इकट्ठा हुए हैं। क्योंकि हम दिल्ली में ये दंगा नहीं बर्दाश्त कर सकते। अपने हिंदू-मुस्लिम भाई-बहनों और दोस्तों पर ये जुल्म बर्दाश्त नहीं करेंगे।
आॅल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन (एपवा) की सचिव कविता कृष्णन ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। सरकार के जन विरोधी रवैये पर कविता कहती हैं कि "दिल्ली पुलिस जंतर-मतंर पर आने वाले हर शख़्स का वीडियो ले रही है। कैमरा लगा है यहां। हर व्यक्ति से पूछ रही है आप कहां, किस प्रदर्शन में जा रहे हो? मैं ये पूछना चाहती हूं कि दिल्ली में जहां दंगे हो रहे थे, हत्याएं हो रही थीं, आगजनी हो रही थी वहां आपने जगह-जगह कैमरे तोड़ दिए। ताकि पहचान न हो पाए कि कौन लोग गुनहगार हैं। दंगाईयों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने वहां काम किया। दिल्ली पुलिस ने घायल लोगों को लात मारी है और उन्हें अस्पताल पहुंचने से रोका है।
यहां शांति के लिए जो लोग जुट रहे हैं। बिल्कुल निहत्थे, शांति के लिए सिर्फ़ अपनी आवाज़ लेकर संविधान, लोकतंत्र की रक्षा के लिए जुट रहे हैं, सरकार से सवाल करने जुट रहे हैं। उनके वीडियो बना रहे हैं, पहचान कर रहे हैं। कह रहे हैं कि आपमें से एक-एक को हम याद रखेंगे।
सरकार से सवाल करना लोकतंत्र की परिभाषा है। सरकार से सीएए, एनपीआर,एनआरसी को लेकर सवाल करना लोकतंत्र की परिभाषा है। ये सरकार की तरफ से दिया जाने वाला कोई तोहफ़ा नहीं है जो फ्री में दिया जा रहा है। ये हमारा संवैधानिक अधिकार है।
अमितशाह जिनकी दिल्ली पुलिस है उनकी क्या मंशा है इससे बिल्कुल साफ पता चल रही है। आप सोचते हैं कि उनको सिर्फ कैरियर चाहिये। बढ़िया से बढ़िया देश की सेवा करने के लिए आईएएस जैसे पद कनन गोपीनाथन जैसे लोगों ने छोड़े हैं। जब उनको लगा कि देश की सेवा और सरकार की सेवा में फर्क़ है। ऐसी सरकार की सेवा मैं नहीं करूंगा जो कश्मीर को बंदी बना रहे हैं और पूरे देश में फासीवादी कानून को लागू कर रहे हैं। इसलिए वो देश की सेवा में उतर गए हैं। ये हैं युवाओं की स्प्रिट। यंग इंडिया देश को बचाने का काम करेगा। हिंदू-मुस्लिम, सिख हैं जो देश को बचा रहे हैं। इन लोगों में अभी भी भारत जिंदा है। भगत सिंह का भारत ज़िन्दा है। अंबेडकर का भारत ज़िन्दा है। फातिमा का भारत ज़िन्दा है।
उमर ख़ालिद ने कहा कि 17 फरवरी को मेरा महाराष्ट्र में दिया एक भाषण जिसके लिए मुझे दोषी बनाया जा रहा है। जो मैंने वहां बोला वो बात आज यहां फिर से दोहराने में मुझे कोई गुरेज़ नहीं है। मैंने बोला था कि जब डोनाल्ड ट्रंप भारत आएंगे तो हम ये बताएंगे कि भारत के अंदर महात्मा गांधी के उसूलों की धज्ज्यिां उड़ाई जा रही हैं। मैं फिर से बोलता हूं आज हमारे देश के अंदर जब गोली मारो चिल्ला-चिल्लाकर बोलते हैं तब इस दिल्ली में जिस दिल्ली में महात्मा गांधी ने अपना आखि़री उपवास हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए रखा, जब उस दिल्ली को जलाया जा रहा है मैं फिर से बोलता हूं इस देश की सरकार महात्मा गांधी के उसूलों की धज्जियां उड़ा रही है।
सरकार देश को बांटने का काम करेगी तो हम महात्मा गांधी के उसूलों को बचाने का और इस देश को जोड़ने का काम करेंगे। हम सड़कों पर संविधान को बचाने आते हैं। संविधान का दायरा वो पार करते हैं जो खुलेआम गोली मारो चिल्ला रहे हैं। हिम्मत है ज़ी न्यूज़, टाइम्स नाॅउ में तो चलाओ अनुराग ठाकुर पर एक दिन प्राइम टाइम। कपिल मिश्रा पर प्राइम टाइम।
यंग इंडिया के मंच से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने दिल्ली दंगों के लिए सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि "जो भी दंगा हुआ दिल्ली में 23 तारीख़ को कपिल मिश्रा के भाषण के बाद हुआ। वो बड़े-बड़े भाषण दे रहा था। डीसीपी बराबर में खड़े थे। इतने हथियार और पत्थर सब हमने देखे। कैसे पहुंचे ? ये सब सरकार ने किया है। राज्य प्रायोजित दंगा है ये। सरकार रोक सकती थी। गृह मंत्री रोक सकते थे। रोका क्यों नहीं? क्योंकि आम लोग मरे। इससे उनकी राजनीति चमकेगी।
कनन गोपीनाथन ने मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए उन महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित किया जो देश में नफ़रत को पालने-पोसने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुसलमानों को एक-दूसरे से दूर नहीं पास रहकर नफ़रत की राजनीति को हराना होगा।
सवालः दिल्ली में दंगे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार की आलोचना हो रही है। इसको आप किस नज़रिये से देखते हैं?
कनन गोपीनाथनः भारत का विश्व स्तर पर एक डेमोक्रेटिक-प्रोग्रेसिव, सोशल सोसाइटी होने की कैपिटल थी। जिस वक़्त सभी देश बोलते थे कि ये देश आगे नहीं जाएगा तब भी हम एक लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ते रहे। आज हर जगह आप देखेंगे हमारे मंत्री, फाॅरेन सेक्रेटरी यही कह रहे हैं कि एनआरसी से बांग्लादेश में असर नहीं पड़ेगा। मलेशिया सवाल पूछेगा तो हम उसका पाम आॅयल नहीं लेंगे। अभी इंडोनेशिया, ईरान, टर्की, इंग्लैंड ने भी सवाल उठाया। यूएन के सेक्रेटरी जनरल, एक्टिविस्ट लगातार बोल रहे हैं। आज की लड़ाई में सारा विश्वास जो हमने विदेश में पाया है आज के आज ख़त्म करना चाहते हैं।
कल के लिए कुछ रहे ना। वो समझ नहीं पा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि इस सरकार के पास सोचने की क्षमता है। इलेक्शन जीतने की है, पर सरकार चलाने की न नाॅलेज है न कैपिसिटी है। सिर्फ इसी बात पर नहीं, आप अर्थव्यवस्था देख लीजिये, रोज़गार, फाॅरन पाॅलिसी देख लीजिये। इंटरनल हारमनी देख लीजिये। हर एक चीज़ में गवर्नेंस कैसे होना है इसका कोई आईडिया नहीं है, कैपिसिटी नहीं है।
सवालः क्या ब्यूरोक्रेसी पर दबाव बनाया जा रहा है?
कनन गोपीनाथनः अभी ब्यूरोक्रेसी को साइन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि आपने उन्हें रिक्रूट किया है दिमाग़ चलाने के लिए। और आप चाहते हैं कि हम जो बोल रहे हैं वो बस वही करते रहें। उन्हें अपना दिमाग़ इस्तेमाल नहीं करने देने के चलते ही आप ऐसी बेवकूफ़ियां कर रहे हैं।
सवालः दिल्ली में मुसलमानों के घर चुन-चुनकर जलाए गए हैं। ग़रीब से ग़रीब को भी नहीं बक्शा गया है। मुसलमानों का कहना है कि 370 की वजह से हमें अगल माना जाता था अब तो वो भी हटा दिया फिर हमारे साथ ये सलूक क्यों?
कनन गोपीनाथनः कहीं न कहीं एक दूसरे के ऊपर शक़ को बढ़ाते गए और उस शक़ में जिस तरीके़ से भी नफ़रत डाली जा सकती है उसे डालकर वोट की राजनीति खेलते गए। इसीलिए आज हम यहां पर हैं। इसे हमें मानना पड़ेगा और दोबारा विश्वास बहाली के लिए फिर से काम शुरु करना पड़ेगा। हम एक-दूसरे को मिलें तो शक़ की नहीं प्यार की नज़र से देखें। हम इस देश के नागरिक हैं सभी। ऐसे शुरु करके आगे बढ़ना पड़ेगा। जैसे हिंदू ख़तरे में है एक तरह का नरेटिव खड़ा किया गया इसके कारण एक परसीक्यूशन मोड क्रिएट किया गया। इस लेवल तक नफ़रत भर दी है लगातार। उसी के बल पर आज सरकार भी बनी हुई है। मैं समझता हूं इसको रोकना ज़रूरी है। मीडिया के नाते, जनता-नागरिक के नाते हमें ये मेहनत करना ज़रूरी है।
सवालः दिल्ली में जो हुआ वो कपिल मिश्रा से शुरु नहीं हुआ। इसकी तैयारी पहले से थी। ये फिर से ना हो इसके लिए आप क्या सोच रहे हैं? लग रहा है ये यहीं रुकने वाला नहीं है।
कनन गोपीनाथनः मैं ये समझता हूं कि हमें एक-दूसरे के साथ ज़्यादा मिलना जुलना होगा। जिसे हम एवायड कर रहे हैं। वो चाहते हैं कि घेटोइज़ हो जाएं। मुसलमान एक जगह रहें। हिंदू एक जगह रहें। फिर उसमें भी आपस में बांटे। एक जाति एक जगह दूसरी जाति दूसरी जगह। इस तरह की घेटोइज़्म जब हो जाए तो एक दूसरे के लिए शक़-नफ़रत फैलाना बहुत आसान है। तो साथ में रहकर जब दंगा हो जाता है तो इसलिए अलग-अलग रहने लगते हैं। बहुत लंबा वक़्त लगेगा। एक दिन में नहीं होगा। हमें मेहनत करनी होगी। हम सबको मेहनत करनी होगी ताकि ये नफ़रत समाज से निकल जाए।
(जनचौक दिल्ली की हेड वीना की रिपोर्ट।)
| नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 'गुड' गवर्नेंस नीति की खुद ही बलाईयां लेते नहीं थकते। पर देश के बेहतरीन दिमाग़ों के लिए जानी जाने वाली आईएएस बिरादरी के लिए चुने जाने वाले पूर्व आईएएस कनन गोपीनाथन ऐसा नहीं मानते। वो कहते हैं कि "मुझे नहीं लगता कि इस सरकार के पास सोचने की क्षमता है। इलेक्शन जीतने की है, पर सरकार चलाने की न नाॅलेज है न कैपिसिटी है।" कनन जंतर-मंतर पर यूथ इंडिया के सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में निकाले गए "पीस एंड जस्टिस" मार्च में हिस्सा लेने आए थे। कनन गोपीनाथन वही आईएएस अफसर हैं जो भारत सरकार के कश्मीर में धारा तीन सौ सत्तर हटाने और वहां के लोगों के मूल अधिकारों को छीनने के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। बता दें कि यंग इंडिया के आह्वान पर तीन मार्च को सीएए, एनआरसी, एनपीआर के खि़लाफ़ और दिल्ली में मुसलमानों के साथ सत्ता की सरपरस्ती में पुलिस की देख-रेख में जो हिंसा को अंजाम दिया गया है उसके विरोध में रामलीला मैदान में देश भर से आए नौजवान पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने जगह-जगह धरपकड़ शुरू कर दी। हालांकि पहले से इस कार्यक्रम की परमिशन आयोजकों द्वारा ले ली गई थी। पर ऐन वक़्त पर बताया गया कि उनकी अनुमति ख़ारिज कर दी गई। इसके साथ ही उनको जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से भी मना कर दिया गया। बावजूद इसके युवाओं ने जबरन जंतर-मंतर पर सभा की। सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मंच से ऐलान किया कि हमें एनआरसी पूरे देश में कहीं भी नहीं चाहिये। बिहार की नीतिश-बीजेपी सरकार की आंदोलन के दबाव में बदली बोली पर उन्होनें कहा कि अभी हमने देखा कि बिहार विधान सभा में हमारे विधायकों ने जब बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने की मांग उठाई तो नितीश जी ने बीच का रास्ता निकाला और उन्होंने भी कह दिया कि बिहार को एनआरसी नहीं चाहिये। और हमने देखा कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने भी हां कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के लोग जो जगह-जगह एनआरसी-एनआरसी कर रहे हैं आज वो बिहार विधान सभा में इस आंदोलन के बढ़ते दबाव के आगे कह रहे हैं कि बिहार को एनआरसी नहीं चाहिये। बिहार को अगर नहीं चाहिये तो बंगाल को क्यों चाहिये? बिहार-बंगाल को नहीं चाहिये तो पूरे हिंदुस्तान को एनआरसी नहीं चाहिये। और इसीलिए हम किसी एक राज्य की बात करने नहीं आए हैं। एनआरसी को पूरी तरह से वापस करो। ये कह रहे हैं कि एनआरसी अभी नहीं लागू होगा। इसका मतलब क्या है\ अभी तक कोई योजना नहीं बनी है। इसका मतलब क्या\ इसका मतलब है कि ये अपने हिसाब से समय चुनकर एनआरसी हमारे ऊपर थोपना चाहते हैं। हम ये एलान करने आए हैं कि अभी नहीं और कभी भी नहीं। इस देश में हमें एनआरसी मंजूर नहीं है। हम कतई इसे लागू नहीं होने देंगे। एनपीआर एनआरसी का ही दूसरा नाम है। माले के दिल्ली सचिव रवि राय ने बताया कि दिल्ली पुलिस नहीं बल्कि पूरी दिल्ली की पुलिस ने मिलकर आज होम मिनिस्ट्री के इशारे पर यंग इंडिया के मार्च पर हमला किया। रामलीला मैदान से सैकड़ों युवाओं को गिरफ्तार किया गया। यूपी से निकलने वाली बीस से ज्यादा बसों को रोक दिया गया। इनके बस ड्राइवरों तक को गिरफ्तार किया गया। इंद्रलोक से आने वाली महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई और स्टेडियम में डिटेन कर के रखा गया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक से युवाओं को डिटेन किया गया। विश्वविद्यालय मेट्रो का गेट बंद कर दिया गया। दिल्ली के हर हिस्से से जहां से भी मार्च के लिए लोग निकल रहे थे वहां पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इतनी मुस्तैदी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के समय पुलिस ने नहीं दिखाई। लेकिन आज जब यंग इंडिया सड़क पर उतर कर इसके लिए जिम्मेदार अमित शाह का इस्तीफा मांगने निकली तो गजब मुस्तैदी दिखाई। अभी चार दिन पहले इस हिंसा के एक और मास्टर माइंड कपिल मिश्रा को गोली मारो मार्का शांति रैली की इजाज़त दी गयी लेकिन आज युवाओं को अमन और न्याय के लिये मार्च करने से रोकने की हर संभव कोशिश की गई। लेकिन इनके हर दमन से लड़ते हुए हजारों नौजवान जन्तर मन्तर पहुंचे और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। यंग इंडिया से जुड़ीं दिल्ली यूनिवर्सिटी से पाॅलिटिकल सांइस में एमए कर रही दामिनी ने बताया कि यंग इंडिया सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में एक मंच का गठन किया गया था जिसमें देश भर से बहुत से छात्र संगठन जुडे़ हैं। लाॅयर्स एसोसिएशन्स हैं। डाॅक्टर्स एसोसिएशन हैं। ट्रेड यूनियन हैं। किसान भी हिस्सा ले रहे हैं। और टीचर्स एसोसिएशन भी हैं। पुलिस ने रामलीला मैदान से हमें हटा दिया। पर फिर भी यहां जंतर-मंतर पर लोग इकट्ठा हुए हैं। क्योंकि हम दिल्ली में ये दंगा नहीं बर्दाश्त कर सकते। अपने हिंदू-मुस्लिम भाई-बहनों और दोस्तों पर ये जुल्म बर्दाश्त नहीं करेंगे। आॅल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। सरकार के जन विरोधी रवैये पर कविता कहती हैं कि "दिल्ली पुलिस जंतर-मतंर पर आने वाले हर शख़्स का वीडियो ले रही है। कैमरा लगा है यहां। हर व्यक्ति से पूछ रही है आप कहां, किस प्रदर्शन में जा रहे हो? मैं ये पूछना चाहती हूं कि दिल्ली में जहां दंगे हो रहे थे, हत्याएं हो रही थीं, आगजनी हो रही थी वहां आपने जगह-जगह कैमरे तोड़ दिए। ताकि पहचान न हो पाए कि कौन लोग गुनहगार हैं। दंगाईयों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने वहां काम किया। दिल्ली पुलिस ने घायल लोगों को लात मारी है और उन्हें अस्पताल पहुंचने से रोका है। यहां शांति के लिए जो लोग जुट रहे हैं। बिल्कुल निहत्थे, शांति के लिए सिर्फ़ अपनी आवाज़ लेकर संविधान, लोकतंत्र की रक्षा के लिए जुट रहे हैं, सरकार से सवाल करने जुट रहे हैं। उनके वीडियो बना रहे हैं, पहचान कर रहे हैं। कह रहे हैं कि आपमें से एक-एक को हम याद रखेंगे। सरकार से सवाल करना लोकतंत्र की परिभाषा है। सरकार से सीएए, एनपीआर,एनआरसी को लेकर सवाल करना लोकतंत्र की परिभाषा है। ये सरकार की तरफ से दिया जाने वाला कोई तोहफ़ा नहीं है जो फ्री में दिया जा रहा है। ये हमारा संवैधानिक अधिकार है। अमितशाह जिनकी दिल्ली पुलिस है उनकी क्या मंशा है इससे बिल्कुल साफ पता चल रही है। आप सोचते हैं कि उनको सिर्फ कैरियर चाहिये। बढ़िया से बढ़िया देश की सेवा करने के लिए आईएएस जैसे पद कनन गोपीनाथन जैसे लोगों ने छोड़े हैं। जब उनको लगा कि देश की सेवा और सरकार की सेवा में फर्क़ है। ऐसी सरकार की सेवा मैं नहीं करूंगा जो कश्मीर को बंदी बना रहे हैं और पूरे देश में फासीवादी कानून को लागू कर रहे हैं। इसलिए वो देश की सेवा में उतर गए हैं। ये हैं युवाओं की स्प्रिट। यंग इंडिया देश को बचाने का काम करेगा। हिंदू-मुस्लिम, सिख हैं जो देश को बचा रहे हैं। इन लोगों में अभी भी भारत जिंदा है। भगत सिंह का भारत ज़िन्दा है। अंबेडकर का भारत ज़िन्दा है। फातिमा का भारत ज़िन्दा है। उमर ख़ालिद ने कहा कि सत्रह फरवरी को मेरा महाराष्ट्र में दिया एक भाषण जिसके लिए मुझे दोषी बनाया जा रहा है। जो मैंने वहां बोला वो बात आज यहां फिर से दोहराने में मुझे कोई गुरेज़ नहीं है। मैंने बोला था कि जब डोनाल्ड ट्रंप भारत आएंगे तो हम ये बताएंगे कि भारत के अंदर महात्मा गांधी के उसूलों की धज्ज्यिां उड़ाई जा रही हैं। मैं फिर से बोलता हूं आज हमारे देश के अंदर जब गोली मारो चिल्ला-चिल्लाकर बोलते हैं तब इस दिल्ली में जिस दिल्ली में महात्मा गांधी ने अपना आखि़री उपवास हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए रखा, जब उस दिल्ली को जलाया जा रहा है मैं फिर से बोलता हूं इस देश की सरकार महात्मा गांधी के उसूलों की धज्जियां उड़ा रही है। सरकार देश को बांटने का काम करेगी तो हम महात्मा गांधी के उसूलों को बचाने का और इस देश को जोड़ने का काम करेंगे। हम सड़कों पर संविधान को बचाने आते हैं। संविधान का दायरा वो पार करते हैं जो खुलेआम गोली मारो चिल्ला रहे हैं। हिम्मत है ज़ी न्यूज़, टाइम्स नाॅउ में तो चलाओ अनुराग ठाकुर पर एक दिन प्राइम टाइम। कपिल मिश्रा पर प्राइम टाइम। यंग इंडिया के मंच से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने दिल्ली दंगों के लिए सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि "जो भी दंगा हुआ दिल्ली में तेईस तारीख़ को कपिल मिश्रा के भाषण के बाद हुआ। वो बड़े-बड़े भाषण दे रहा था। डीसीपी बराबर में खड़े थे। इतने हथियार और पत्थर सब हमने देखे। कैसे पहुंचे ? ये सब सरकार ने किया है। राज्य प्रायोजित दंगा है ये। सरकार रोक सकती थी। गृह मंत्री रोक सकते थे। रोका क्यों नहीं? क्योंकि आम लोग मरे। इससे उनकी राजनीति चमकेगी। कनन गोपीनाथन ने मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए उन महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित किया जो देश में नफ़रत को पालने-पोसने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुसलमानों को एक-दूसरे से दूर नहीं पास रहकर नफ़रत की राजनीति को हराना होगा। सवालः दिल्ली में दंगे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार की आलोचना हो रही है। इसको आप किस नज़रिये से देखते हैं? कनन गोपीनाथनः भारत का विश्व स्तर पर एक डेमोक्रेटिक-प्रोग्रेसिव, सोशल सोसाइटी होने की कैपिटल थी। जिस वक़्त सभी देश बोलते थे कि ये देश आगे नहीं जाएगा तब भी हम एक लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ते रहे। आज हर जगह आप देखेंगे हमारे मंत्री, फाॅरेन सेक्रेटरी यही कह रहे हैं कि एनआरसी से बांग्लादेश में असर नहीं पड़ेगा। मलेशिया सवाल पूछेगा तो हम उसका पाम आॅयल नहीं लेंगे। अभी इंडोनेशिया, ईरान, टर्की, इंग्लैंड ने भी सवाल उठाया। यूएन के सेक्रेटरी जनरल, एक्टिविस्ट लगातार बोल रहे हैं। आज की लड़ाई में सारा विश्वास जो हमने विदेश में पाया है आज के आज ख़त्म करना चाहते हैं। कल के लिए कुछ रहे ना। वो समझ नहीं पा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि इस सरकार के पास सोचने की क्षमता है। इलेक्शन जीतने की है, पर सरकार चलाने की न नाॅलेज है न कैपिसिटी है। सिर्फ इसी बात पर नहीं, आप अर्थव्यवस्था देख लीजिये, रोज़गार, फाॅरन पाॅलिसी देख लीजिये। इंटरनल हारमनी देख लीजिये। हर एक चीज़ में गवर्नेंस कैसे होना है इसका कोई आईडिया नहीं है, कैपिसिटी नहीं है। सवालः क्या ब्यूरोक्रेसी पर दबाव बनाया जा रहा है? कनन गोपीनाथनः अभी ब्यूरोक्रेसी को साइन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि आपने उन्हें रिक्रूट किया है दिमाग़ चलाने के लिए। और आप चाहते हैं कि हम जो बोल रहे हैं वो बस वही करते रहें। उन्हें अपना दिमाग़ इस्तेमाल नहीं करने देने के चलते ही आप ऐसी बेवकूफ़ियां कर रहे हैं। सवालः दिल्ली में मुसलमानों के घर चुन-चुनकर जलाए गए हैं। ग़रीब से ग़रीब को भी नहीं बक्शा गया है। मुसलमानों का कहना है कि तीन सौ सत्तर की वजह से हमें अगल माना जाता था अब तो वो भी हटा दिया फिर हमारे साथ ये सलूक क्यों? कनन गोपीनाथनः कहीं न कहीं एक दूसरे के ऊपर शक़ को बढ़ाते गए और उस शक़ में जिस तरीके़ से भी नफ़रत डाली जा सकती है उसे डालकर वोट की राजनीति खेलते गए। इसीलिए आज हम यहां पर हैं। इसे हमें मानना पड़ेगा और दोबारा विश्वास बहाली के लिए फिर से काम शुरु करना पड़ेगा। हम एक-दूसरे को मिलें तो शक़ की नहीं प्यार की नज़र से देखें। हम इस देश के नागरिक हैं सभी। ऐसे शुरु करके आगे बढ़ना पड़ेगा। जैसे हिंदू ख़तरे में है एक तरह का नरेटिव खड़ा किया गया इसके कारण एक परसीक्यूशन मोड क्रिएट किया गया। इस लेवल तक नफ़रत भर दी है लगातार। उसी के बल पर आज सरकार भी बनी हुई है। मैं समझता हूं इसको रोकना ज़रूरी है। मीडिया के नाते, जनता-नागरिक के नाते हमें ये मेहनत करना ज़रूरी है। सवालः दिल्ली में जो हुआ वो कपिल मिश्रा से शुरु नहीं हुआ। इसकी तैयारी पहले से थी। ये फिर से ना हो इसके लिए आप क्या सोच रहे हैं? लग रहा है ये यहीं रुकने वाला नहीं है। कनन गोपीनाथनः मैं ये समझता हूं कि हमें एक-दूसरे के साथ ज़्यादा मिलना जुलना होगा। जिसे हम एवायड कर रहे हैं। वो चाहते हैं कि घेटोइज़ हो जाएं। मुसलमान एक जगह रहें। हिंदू एक जगह रहें। फिर उसमें भी आपस में बांटे। एक जाति एक जगह दूसरी जाति दूसरी जगह। इस तरह की घेटोइज़्म जब हो जाए तो एक दूसरे के लिए शक़-नफ़रत फैलाना बहुत आसान है। तो साथ में रहकर जब दंगा हो जाता है तो इसलिए अलग-अलग रहने लगते हैं। बहुत लंबा वक़्त लगेगा। एक दिन में नहीं होगा। हमें मेहनत करनी होगी। हम सबको मेहनत करनी होगी ताकि ये नफ़रत समाज से निकल जाए। |
स्वती और पितरों को नमस्कार करे।' इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिधु का संभव नहीं । अथर्ववेद १९ ३२/९ इसमें 'सरस्वती' शब्द नहीं है । तैत्तिरीय संहिता ११८ । १३।३ का मंत्रार्थ यह है : - 'अग्नि के लिये स्वाहा, सोम के लिये स्वाहा, सूर्य के लिये स्वाहा, सरस्वती के लिये स्वाहा, के इत्यादि । इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिधु नहीं । वाजसनेयी संहिता १९ / ९३ में इन्द्र के रूपाधान का वर्णन है। 'वैद्य अश्विनीकुमारों ने इन्द्र के अंगवाले आत्मा का आाधान किया और सरस्वती ने उस आत्मा को अंगों से युक्त किया । और अश्विनीकुमारों ने इन्द्र के जगत्पूज्य रूप, आयु और नेत्रों को ध्यानन्द देनेवाले चन्द्रमा से अनश्वर बनाया।' इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिंधु का संभव नहीं । वाज० ३४।११ का मंत्रार्थ यह है : - 'समान प्रवाहवाली सहायक नदियों के साथ पाँच नदियाँ सरस्वती मे जाती है। वही सरस्वती देश मे पाँच रूप से नदी हुई; अर्थात् पाँचों नदियाँ अपना रूप छोड़कर सरस्वती ही हो गई।' इसमे 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीनदी' ही है, सिधु करना ठीक नहीं। क्योंकि सिधु की सहायक आठ से अधिक नदियाँ हैं । शतपथ ब्राह्मण ३।६।२।४ में पुरोडाश के विधान के लिये एक आख्यायिका है । वह यह है : - 'ऋषियों ने यह सुना कि देवताओं ने यज्ञ से स्वर्ग को जीता और वे देवता लोग मधुमक्खी जिस प्रकार शहद को पीकर खाली छत्ते को छोड़कर उड़ जाती है, उसी प्रकार यज्ञ को यूप से आच्छादितकर चले गये। ऋषियों ने विचारा कि हम भी मनुष्यों के लिये यज्ञ करें, तब यज्ञ को ढूँढ़ा । यज्ञ | स्वती और पितरों को नमस्कार करे।' इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिधु का संभव नहीं । अथर्ववेद उन्नीस बत्तीस/नौ इसमें 'सरस्वती' शब्द नहीं है । तैत्तिरीय संहिता एक सौ अट्ठारह । तेरह।तीन का मंत्रार्थ यह है : - 'अग्नि के लिये स्वाहा, सोम के लिये स्वाहा, सूर्य के लिये स्वाहा, सरस्वती के लिये स्वाहा, के इत्यादि । इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिधु नहीं । वाजसनेयी संहिता उन्नीस / तिरानवे में इन्द्र के रूपाधान का वर्णन है। 'वैद्य अश्विनीकुमारों ने इन्द्र के अंगवाले आत्मा का आाधान किया और सरस्वती ने उस आत्मा को अंगों से युक्त किया । और अश्विनीकुमारों ने इन्द्र के जगत्पूज्य रूप, आयु और नेत्रों को ध्यानन्द देनेवाले चन्द्रमा से अनश्वर बनाया।' इसमें 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीदेवी' है, सिंधु का संभव नहीं । वाजशून्य चौंतीस।ग्यारह का मंत्रार्थ यह है : - 'समान प्रवाहवाली सहायक नदियों के साथ पाँच नदियाँ सरस्वती मे जाती है। वही सरस्वती देश मे पाँच रूप से नदी हुई; अर्थात् पाँचों नदियाँ अपना रूप छोड़कर सरस्वती ही हो गई।' इसमे 'सरस्वती' का अर्थ 'सरस्वतीनदी' ही है, सिधु करना ठीक नहीं। क्योंकि सिधु की सहायक आठ से अधिक नदियाँ हैं । शतपथ ब्राह्मण तीन।छः।दो।चार में पुरोडाश के विधान के लिये एक आख्यायिका है । वह यह है : - 'ऋषियों ने यह सुना कि देवताओं ने यज्ञ से स्वर्ग को जीता और वे देवता लोग मधुमक्खी जिस प्रकार शहद को पीकर खाली छत्ते को छोड़कर उड़ जाती है, उसी प्रकार यज्ञ को यूप से आच्छादितकर चले गये। ऋषियों ने विचारा कि हम भी मनुष्यों के लिये यज्ञ करें, तब यज्ञ को ढूँढ़ा । यज्ञ |
पंचकूला/चंडीगढ़ (नस) :
पंचकूला के विकास को गति देने में दिन-रात एक कर रहे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचन्द गुप्ता अब हर महीने विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड चैक करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अध्यक्ष ने हर महीने के पहले शुक्रवार को विधानसभा क्षेत्र के अंतगर्त विकास कार्यों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। आज विधानसभा अध्यक्ष ने जुलाई के पहले सप्ताह में समीक्षा बैठक बुलाई। ज्ञानचंद गुप्ता ने आज एक करोड़ रुपये से अधिक राशि वाले विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उनके साथ उपायुक्त विनय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि माता मनसा देवी श्राईंन बोर्ड परिसर में वृद्धाश्रम के निर्माण का 70 प्रतिशत कार्य हो चुका है और यह जनवरी 2022 से पहले पूरा हो जायेगा। बैठक में बताया गया कि पिंजौर में एप्पल, फ्रूट और वेजीटेबल मार्केंट के फेज 1 का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य 30 सितंबर 2021 तक पूरा कर लिया जायेगा।
| पंचकूला/चंडीगढ़ : पंचकूला के विकास को गति देने में दिन-रात एक कर रहे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचन्द गुप्ता अब हर महीने विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड चैक करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अध्यक्ष ने हर महीने के पहले शुक्रवार को विधानसभा क्षेत्र के अंतगर्त विकास कार्यों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। आज विधानसभा अध्यक्ष ने जुलाई के पहले सप्ताह में समीक्षा बैठक बुलाई। ज्ञानचंद गुप्ता ने आज एक करोड़ रुपये से अधिक राशि वाले विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उनके साथ उपायुक्त विनय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि माता मनसा देवी श्राईंन बोर्ड परिसर में वृद्धाश्रम के निर्माण का सत्तर प्रतिशत कार्य हो चुका है और यह जनवरी दो हज़ार बाईस से पहले पूरा हो जायेगा। बैठक में बताया गया कि पिंजौर में एप्पल, फ्रूट और वेजीटेबल मार्केंट के फेज एक का नब्बे प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य तीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस तक पूरा कर लिया जायेगा। |
अवफिर अतमें कहते है -- "अहं त्वा सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि, मा गुच. । " मै मोक्ष दाता समर्थ हू । तुम मोक्षकी चिंता मत करो । तुम तो एक साधनाकी ही चिंता करो ।
मोक्षको भूल जानेसे साधना उत्कृष्ट होगी और मोक्ष ही मोहित होकर तुम्हारे पास चला आवेगा । मोक्ष-निरपेक्ष वृत्तिसे अपनी साधनामें ही रत रहनेवाले साधकके गलेमें मोक्ष-लक्ष्मी जयमाला डालती है।
जहा साधनाकी पराकाष्ठा होती है, वही सिद्धि हाथ जोड़कर खडी रहती है। जिस घर जाना है, वह अगर वृक्षके नीचे खडा होकर 'घर-घर' का जाप करेगा, तो इससे घर तो दूर ही रहेगा, उल्टा उसे जगलमें ही रहनेकी नौवत आ जायगी । घरको याद करते हुए अगर रास्ते में आराम करने लग जाओगे तो उस अतिम विश्राम स्थानसे दूर रह जाओगे । मुझे तो चलनेका ही उद्योग करना चाहिए । इसीसे घर एकदम सामने आ जायगा । मोक्षके आलसी स्मरणसे मेरे प्रयत्नमें - -मेरी साधनामें-शिथिलता मायगी मोर मोक्ष मुझसे दूर चला जायगा । मोक्षकी उपेक्षा करके सतत साधना - रत रहना ही मोक्षको पास बुलानेका उपाय है। अकर्मस्थिति - विश्राति की लालसा मत रखो । साधनाका ही प्रेम रखो तो मोक्ष सामने खडा होगा। उत्तर-उत्तर चिल्लानेसे सवालका उत्तर नहीं मिलता। उसका जो तरीका मुझे मिला है, उसीसे सिलसिलेवार उत्तर मिलेगा। वह तरीका जहा खतम होता है, वही उसका उत्तर मौजूद है । समाप्तिके पहले समाप्ति कैसे हो जायगी ? तरीकेसे पहले उत्तर कैसे मिलेगा ? साघकावस्था में सिद्धावस्था कैसे प्राप्त होगी ? पानीमें डुबकिया खाते हुए परले पारके मौज-मजेमें ध्यान रहेगा तो कैसे काम चलेगा ? उस समय तो एक-एक हाथ मारकर आगे जानेमें ही सारा ध्यान और सारी शक्ति लगानी चाहिए। पहले साधना पूरी करो, समुद्र लाघो, वस, मोक्ष अपने आप ही मिल जायगा।
ज्ञानी पुरुषकी अतिम अवस्थामें सव क्रिया लुप्त हो जाती है, शून्य-रूप हो जाती है । पर इसका यह मतलब नहीं है कि अतिम स्थिति में किया होगी
ही नही। उसके द्वारा किया होगी भी भर नहीं भी होगी। अतिम स्थिति अत्यंत रमणीय व उदात्त है। इस अवस्थामें जो भी कुछ होगा, उसकी उसे चिता नही होती। जो भी होगा, वह शुभ और सुदर ही होगा। सावनाकी पराकाष्ठा-दशापर वह खडा है। यहां सब कुछ करनेपर भी वह कुछ नही करता । संहार करनेपर भी संहार नहीं करता। कल्याण करनेपर भी कल्याण नहीं करता ।
यह अतिम मोक्षावस्था हो साधककी साधनाकी पराकाष्ठा है। साधनाकी पराकाष्ठाके मानी हैं सायनाकी सहजावस्था । वहा इस बातकी कल्पना भी नही रहती कि में कुछ कर रहा हूँ । अथवा इस दशाको में साधककी साधनाको 'अनैतिकता' कहूगा । सिद्धावस्था नैतिक अवस्था नहीं है। छोटा बच्चा सच बोलता है, पर वह नैतिक नहीं है, क्योकि झूठ क्या है, यह तो वह जानता ही नही। असत्यसे परिचित होनेपर भी सत्य बोलना नैतिक कर्म है। सिद्धावस्थामें असत्य है ही नहीं । यहा तो सत्य ही है। इसलिए वहा नीति नही । निषिद्ध वस्तु वहा खडी ही नही रह सकती। जो नही सुनना चाहते वह कानके अदर जाता ही नही । जो नही देखना चाहते, वह आखें देखती ही नही। जो होना चाहिए, वही हाथोंसे होता है। उसका प्रयत्न नहीं करना पड़ता। जिसे टालना चाहिए, उसे टालना नही पटता। वह अपने आप ही टल जाता है। यही नीतिशून्य अवस्था है। यह जो साधनाकी पराकाष्ठा, सहजावस्था, अनैतिकता या अतिनैतिकता कहो, उस अतिनैतिकतामें ही नीतिका परम उत्कर्ष है। 'अतिनैतिकता' शब्द मुझे खूब सूझा अथवा इस दशाको 'सात्त्विक साधनाकी नि सत्त्वता' कह सकते है।
किस तरह इस दशाका वर्णन करें ? जिस तरह ग्रहणके पहले उसके वेघ लग जाते हैं, उसी तरह शरीरान्त हो जानेपर आनेवाली मोक्ष दशाकी छाया देह गिरनेके पहले ही पडने लग जाती है। देहावस्थामें ही भावी मोक्ष स्थितिका अनुभव होने लगता है। इस स्थितिका वर्णन करते हुए वाणी लड़खड़ाती है। वह कितनी भी हिंसा करे, फिर भी कुछ नही करता । उसकी क्रिया अब किस नापसे नापी जाय ? जो कुछ उसके द्वारा होगा, वह सव सात्त्विक कर्म ही होगा। सब क्रियाके क्षय हो जानेपर | अवफिर अतमें कहते है -- "अहं त्वा सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि, मा गुच. । " मै मोक्ष दाता समर्थ हू । तुम मोक्षकी चिंता मत करो । तुम तो एक साधनाकी ही चिंता करो । मोक्षको भूल जानेसे साधना उत्कृष्ट होगी और मोक्ष ही मोहित होकर तुम्हारे पास चला आवेगा । मोक्ष-निरपेक्ष वृत्तिसे अपनी साधनामें ही रत रहनेवाले साधकके गलेमें मोक्ष-लक्ष्मी जयमाला डालती है। जहा साधनाकी पराकाष्ठा होती है, वही सिद्धि हाथ जोड़कर खडी रहती है। जिस घर जाना है, वह अगर वृक्षके नीचे खडा होकर 'घर-घर' का जाप करेगा, तो इससे घर तो दूर ही रहेगा, उल्टा उसे जगलमें ही रहनेकी नौवत आ जायगी । घरको याद करते हुए अगर रास्ते में आराम करने लग जाओगे तो उस अतिम विश्राम स्थानसे दूर रह जाओगे । मुझे तो चलनेका ही उद्योग करना चाहिए । इसीसे घर एकदम सामने आ जायगा । मोक्षके आलसी स्मरणसे मेरे प्रयत्नमें - -मेरी साधनामें-शिथिलता मायगी मोर मोक्ष मुझसे दूर चला जायगा । मोक्षकी उपेक्षा करके सतत साधना - रत रहना ही मोक्षको पास बुलानेका उपाय है। अकर्मस्थिति - विश्राति की लालसा मत रखो । साधनाका ही प्रेम रखो तो मोक्ष सामने खडा होगा। उत्तर-उत्तर चिल्लानेसे सवालका उत्तर नहीं मिलता। उसका जो तरीका मुझे मिला है, उसीसे सिलसिलेवार उत्तर मिलेगा। वह तरीका जहा खतम होता है, वही उसका उत्तर मौजूद है । समाप्तिके पहले समाप्ति कैसे हो जायगी ? तरीकेसे पहले उत्तर कैसे मिलेगा ? साघकावस्था में सिद्धावस्था कैसे प्राप्त होगी ? पानीमें डुबकिया खाते हुए परले पारके मौज-मजेमें ध्यान रहेगा तो कैसे काम चलेगा ? उस समय तो एक-एक हाथ मारकर आगे जानेमें ही सारा ध्यान और सारी शक्ति लगानी चाहिए। पहले साधना पूरी करो, समुद्र लाघो, वस, मोक्ष अपने आप ही मिल जायगा। ज्ञानी पुरुषकी अतिम अवस्थामें सव क्रिया लुप्त हो जाती है, शून्य-रूप हो जाती है । पर इसका यह मतलब नहीं है कि अतिम स्थिति में किया होगी ही नही। उसके द्वारा किया होगी भी भर नहीं भी होगी। अतिम स्थिति अत्यंत रमणीय व उदात्त है। इस अवस्थामें जो भी कुछ होगा, उसकी उसे चिता नही होती। जो भी होगा, वह शुभ और सुदर ही होगा। सावनाकी पराकाष्ठा-दशापर वह खडा है। यहां सब कुछ करनेपर भी वह कुछ नही करता । संहार करनेपर भी संहार नहीं करता। कल्याण करनेपर भी कल्याण नहीं करता । यह अतिम मोक्षावस्था हो साधककी साधनाकी पराकाष्ठा है। साधनाकी पराकाष्ठाके मानी हैं सायनाकी सहजावस्था । वहा इस बातकी कल्पना भी नही रहती कि में कुछ कर रहा हूँ । अथवा इस दशाको में साधककी साधनाको 'अनैतिकता' कहूगा । सिद्धावस्था नैतिक अवस्था नहीं है। छोटा बच्चा सच बोलता है, पर वह नैतिक नहीं है, क्योकि झूठ क्या है, यह तो वह जानता ही नही। असत्यसे परिचित होनेपर भी सत्य बोलना नैतिक कर्म है। सिद्धावस्थामें असत्य है ही नहीं । यहा तो सत्य ही है। इसलिए वहा नीति नही । निषिद्ध वस्तु वहा खडी ही नही रह सकती। जो नही सुनना चाहते वह कानके अदर जाता ही नही । जो नही देखना चाहते, वह आखें देखती ही नही। जो होना चाहिए, वही हाथोंसे होता है। उसका प्रयत्न नहीं करना पड़ता। जिसे टालना चाहिए, उसे टालना नही पटता। वह अपने आप ही टल जाता है। यही नीतिशून्य अवस्था है। यह जो साधनाकी पराकाष्ठा, सहजावस्था, अनैतिकता या अतिनैतिकता कहो, उस अतिनैतिकतामें ही नीतिका परम उत्कर्ष है। 'अतिनैतिकता' शब्द मुझे खूब सूझा अथवा इस दशाको 'सात्त्विक साधनाकी नि सत्त्वता' कह सकते है। किस तरह इस दशाका वर्णन करें ? जिस तरह ग्रहणके पहले उसके वेघ लग जाते हैं, उसी तरह शरीरान्त हो जानेपर आनेवाली मोक्ष दशाकी छाया देह गिरनेके पहले ही पडने लग जाती है। देहावस्थामें ही भावी मोक्ष स्थितिका अनुभव होने लगता है। इस स्थितिका वर्णन करते हुए वाणी लड़खड़ाती है। वह कितनी भी हिंसा करे, फिर भी कुछ नही करता । उसकी क्रिया अब किस नापसे नापी जाय ? जो कुछ उसके द्वारा होगा, वह सव सात्त्विक कर्म ही होगा। सब क्रियाके क्षय हो जानेपर |
बेंगलुरू में एक सप्ताह पहले हुई पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में 12 सितम्बर को देशभर से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने एक रैली निकाली। इस रैली में दस हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की। लोगों का कहना था कि 'सांप्रदायिक ताकतों ने देश को फासीवाद के कगार पर ला कट खड़ा कर दिया है'।
प्रदर्शनकारियों ने सिर पर काले रंग की पट्टियां बांध रखी थीं, जिन पर लिखा था 'मैं गौरी हूं'। रैली के दौरान लोगों ने 'गौरी लंकेश अमर रहे' जैसे नारे लगाते हुए हत्यारों को जल्द पकड़ने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने शहर के रेलवे स्टेशन से सेंट्रल कॉलेज मैदान तक मार्च किया, जहां शाम को एक विरोध बैठक का भी आयोजन किया गया।
इस विरोध बैठक में भाग लेने वालों में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, पत्रकार पी. साईंनाथ और सागरिका घोष, स्वराज इंडिया के नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव, डॉक्यूमेंटरी निर्माता आनंद पटवर्धन और राकेश शर्मा और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, कविता कृष्णन और जिग्नेश मेवानी के अलावा फिल्म निर्माता प्रकाश राय भी शामिल हैं।
इस रैली में कर्नाटक जनशक्ति, आम आदमी पार्टी के सदस्यों और कई छात्र संगठनों के सदस्यों ने भी भाग लिया। गौरतलब है कि कन्नड़ टेब्लॉइड 'गौरी लंकेश पत्रिके' की संपादक गौरी की अज्ञात लोगों ने पांच सितंबर को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी।
बेंगलुरू में एक सप्ताह पहले हुई पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में 12 सितम्बर को देशभर से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने एक रैली निकाली। इस रैली में दस हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की। लोगों का कहना था कि 'सांप्रदायिक ताकतों ने देश को फासीवाद के कगार पर ला कट खड़ा कर दिया है'।
| बेंगलुरू में एक सप्ताह पहले हुई पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में बारह सितम्बर को देशभर से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने एक रैली निकाली। इस रैली में दस हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की। लोगों का कहना था कि 'सांप्रदायिक ताकतों ने देश को फासीवाद के कगार पर ला कट खड़ा कर दिया है'। प्रदर्शनकारियों ने सिर पर काले रंग की पट्टियां बांध रखी थीं, जिन पर लिखा था 'मैं गौरी हूं'। रैली के दौरान लोगों ने 'गौरी लंकेश अमर रहे' जैसे नारे लगाते हुए हत्यारों को जल्द पकड़ने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने शहर के रेलवे स्टेशन से सेंट्रल कॉलेज मैदान तक मार्च किया, जहां शाम को एक विरोध बैठक का भी आयोजन किया गया। इस विरोध बैठक में भाग लेने वालों में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, पत्रकार पी. साईंनाथ और सागरिका घोष, स्वराज इंडिया के नेता प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव, डॉक्यूमेंटरी निर्माता आनंद पटवर्धन और राकेश शर्मा और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, कविता कृष्णन और जिग्नेश मेवानी के अलावा फिल्म निर्माता प्रकाश राय भी शामिल हैं। इस रैली में कर्नाटक जनशक्ति, आम आदमी पार्टी के सदस्यों और कई छात्र संगठनों के सदस्यों ने भी भाग लिया। गौरतलब है कि कन्नड़ टेब्लॉइड 'गौरी लंकेश पत्रिके' की संपादक गौरी की अज्ञात लोगों ने पांच सितंबर को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। बेंगलुरू में एक सप्ताह पहले हुई पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में बारह सितम्बर को देशभर से आए सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने एक रैली निकाली। इस रैली में दस हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की। लोगों का कहना था कि 'सांप्रदायिक ताकतों ने देश को फासीवाद के कगार पर ला कट खड़ा कर दिया है'। |
यह वह समय है जब सारा पॉलिन की योजनाएं सफलीभूत होंगी। अपनी सृजनात्मक बुद्धि के कारण सारा पॉलिन सफल होंगे। प्रणय एवम् प्रेम संबंधों के लिहाज से भी यह अच्छा समय है। सारा पॉलिन की सारी जरूरतें पूर्ण करने के लिये मित्र तत्पर रहेंगे। सारा पॉलिन के लेखन की लोग सराहना करेंगे।
इस अवधि में सारा पॉलिन काफी सुखी रहेंगे। नौकरी के हालात सुधरेंगे। प्रचुर लाभ होने की संभावना है। पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। सारा पॉलिन अपनी अड़चनें और बाधाएं दूर करने और शत्रुओं का दमन करने के लिये चेष्टारत रहेंगे। कार इत्यादि चलाते समय सावधानी बरतें।
इस अवधि के दौरान सारा पॉलिन का अपने प्रति विश्वास बहुत बढ़ा चढ़ा रहेगा। सारा पॉलिन निडर संघर्षप्रेमी और झगड़े झंझट से डरने वाले नहीं होंगे। सारा पॉलिन की मेहनत और कर्मठता से व्यापार धंधे में विकास होगा। वरिष्ठ लोगों और सत्ताधारी व्यक्तियों से सारा पॉलिन के संबंध मधुर रहेंगे। साथ ही साथ सारा पॉलिन के व्यापारिक क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी। एक सोची हुई यात्रा पूरी करने से असीमित लाभ प्राप्त करेंगे। प्रतिस्पर्धा में विजयी रहकर सारा पॉलिन अपने शत्रुओं का पराभव कर देंगे। स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा रहेगा।
इस अवधि में सारा पॉलिन वैवाहिक सुख भोगेंगे। व्यापार या नौकरी इत्यादि के विकासशील होने की अच्छी संभावनाएं रहेंगी। बहु प्रतीक्षित यात्रा करेंगे। परिवार का वातावरण भी सौमनस्यपूर्ण रहेगा। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। सारा पॉलिन निडर रहेंगे और शत्रुगण सामने आने की हिम्मत नहीं करेंगे। दर्शन व साहित्य में रूचि जागृत होगी। विद्वानों से सम्पर्क बढें़गे। सारा पॉलिन अत्यधिक सम्मानप्रिय व्यक्ति समझे जायेंगे और विख्यात होंगे।
सारा पॉलिन अपने कार्यक्षेत्र में बहुत अच्छा काम करेंगे। नौकरी या व्यवसाय की परिस्थितियों में काफी सुधार आएगा। प्रभावशाली व्यक्तियों से सारा पॉलिन के सम्पर्क बढेंगे। रोजमर्रा के जीवन में सारा पॉलिन अत्यधिक स्फूर्तिवान महसूस करेंगे। विरोधियों की सारा पॉलिन के सामने पड़ने की हिम्मत ही नहीं पड़ेगी। आर्थिक रूप से यह बहुत अच्छा समय सिद्ध होगा। छोटी यात्राएं उपयोगी रहेंगी। परिवार का माहौल पूर्ण संतोषप्रद रहेगा। इस अवधि के मध्य में छोटी मोटी बीमारी होने की संभावना है जिस पर सारा पॉलिन को थोड़ा बहुत ध्यान रखने की आवश्यकता है।
इस अवधि में अपनी पैनी विवेक बुद्धि और सही अंदाज लगाने की क्षमता के कारण सारा पॉलिन प्रचुर सम्मान प्राप्त करेंगे। सारा पॉलिन की कल्पना अत्यधिक सक्रिय रहेगी। नये उद्यमों में निश्चित सफलता प्राप्त करेंगे। यह समय प्रणय और रोमान्स के लिये भी अच्छा है। सारा पॉलिन के सृजन बोध की सराहना की जायेगी। पारिवारिक सुख बढा चढ़ा रहेगा। मित्र और शुभ चिन्तक पूरा सहारा देंगे। इस अवधि के दौरान सारा पॉलिन महत्वपूर्ण व्यक्तियों के सम्पर्क में आयेंगे। एक यादगार यात्रा होने की भी संभावना है।
इस अवधि के दौरान वैचारिक स्पष्टता का अभाव रहेगा। साधारण रूप से प्रसन्नता नहीं मिलेगी। पारिवारिक वातावरण भी परेशान रखेगा। छोटी छोटी बातों पर झगड़ें और विवाद हो सकते हैं। व्यापार धन्धा भी मन्दा चलेगा। अगर नौकरी करते हैं तो नौकरी के हालात भी संतोषप्रद नहीं होंगे। इस अवधि में सारा पॉलिन के शीघ्र व्याधिग्रस्त होने की प्रवृति रहेगी। परिवारजनों की बीमारी चिन्तित रखेगी। वैसे सारा पॉलिन का मन धार्मिक क्रिया कलाप की ओर झुका रहेगा और सारा पॉलिन पवित्र स्थलों की यात्रा करेंगे।
इस अवधि में सारा पॉलिन का सौजन्यता पूर्ण व्यवहार रहेगा और सारा पॉलिन मनमुटाव से बचेंगे। एक आनन्द दायक यात्रा की प्रबल संभावना है। स्त्री वर्ग का भी साथ रहेगा। संगति व अन्य ललित कलाओं सुगध एवम् सौन्दर्यपूर्ण वस्तुओं की ओर सारा पॉलिन का झुकाव रहेगा। अपने व्यवसाय और व्यापार में सारा पॉलिन बहुत अच्छा काम करेंगे। अपने प्रयत्नों से आय वृव्दि प्राप्त करेंगे। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। छोटी मोटी बीमारियां हो सकती हैं। सारा पॉलिन का मिलनसार स्वभाव होगा और कई लोगों के सम्पर्क में आयेंगे।
इस अवधि में सारा पॉलिन जीवन का बड़े उत्साह और उल्लास से स्वागत करेंगे प्रणय प्रेम संबंधों के लिये यह समय श्रेयस्कर नहीं है। बहुत अधिक सोच विचार हानिकर हो सकता है इसलिये इससे सारा पॉलिन बचें। अचानक यात्रा की संभावना भी हो सकती है।
| यह वह समय है जब सारा पॉलिन की योजनाएं सफलीभूत होंगी। अपनी सृजनात्मक बुद्धि के कारण सारा पॉलिन सफल होंगे। प्रणय एवम् प्रेम संबंधों के लिहाज से भी यह अच्छा समय है। सारा पॉलिन की सारी जरूरतें पूर्ण करने के लिये मित्र तत्पर रहेंगे। सारा पॉलिन के लेखन की लोग सराहना करेंगे। इस अवधि में सारा पॉलिन काफी सुखी रहेंगे। नौकरी के हालात सुधरेंगे। प्रचुर लाभ होने की संभावना है। पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। सारा पॉलिन अपनी अड़चनें और बाधाएं दूर करने और शत्रुओं का दमन करने के लिये चेष्टारत रहेंगे। कार इत्यादि चलाते समय सावधानी बरतें। इस अवधि के दौरान सारा पॉलिन का अपने प्रति विश्वास बहुत बढ़ा चढ़ा रहेगा। सारा पॉलिन निडर संघर्षप्रेमी और झगड़े झंझट से डरने वाले नहीं होंगे। सारा पॉलिन की मेहनत और कर्मठता से व्यापार धंधे में विकास होगा। वरिष्ठ लोगों और सत्ताधारी व्यक्तियों से सारा पॉलिन के संबंध मधुर रहेंगे। साथ ही साथ सारा पॉलिन के व्यापारिक क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी। एक सोची हुई यात्रा पूरी करने से असीमित लाभ प्राप्त करेंगे। प्रतिस्पर्धा में विजयी रहकर सारा पॉलिन अपने शत्रुओं का पराभव कर देंगे। स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा रहेगा। इस अवधि में सारा पॉलिन वैवाहिक सुख भोगेंगे। व्यापार या नौकरी इत्यादि के विकासशील होने की अच्छी संभावनाएं रहेंगी। बहु प्रतीक्षित यात्रा करेंगे। परिवार का वातावरण भी सौमनस्यपूर्ण रहेगा। इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। सारा पॉलिन निडर रहेंगे और शत्रुगण सामने आने की हिम्मत नहीं करेंगे। दर्शन व साहित्य में रूचि जागृत होगी। विद्वानों से सम्पर्क बढें़गे। सारा पॉलिन अत्यधिक सम्मानप्रिय व्यक्ति समझे जायेंगे और विख्यात होंगे। सारा पॉलिन अपने कार्यक्षेत्र में बहुत अच्छा काम करेंगे। नौकरी या व्यवसाय की परिस्थितियों में काफी सुधार आएगा। प्रभावशाली व्यक्तियों से सारा पॉलिन के सम्पर्क बढेंगे। रोजमर्रा के जीवन में सारा पॉलिन अत्यधिक स्फूर्तिवान महसूस करेंगे। विरोधियों की सारा पॉलिन के सामने पड़ने की हिम्मत ही नहीं पड़ेगी। आर्थिक रूप से यह बहुत अच्छा समय सिद्ध होगा। छोटी यात्राएं उपयोगी रहेंगी। परिवार का माहौल पूर्ण संतोषप्रद रहेगा। इस अवधि के मध्य में छोटी मोटी बीमारी होने की संभावना है जिस पर सारा पॉलिन को थोड़ा बहुत ध्यान रखने की आवश्यकता है। इस अवधि में अपनी पैनी विवेक बुद्धि और सही अंदाज लगाने की क्षमता के कारण सारा पॉलिन प्रचुर सम्मान प्राप्त करेंगे। सारा पॉलिन की कल्पना अत्यधिक सक्रिय रहेगी। नये उद्यमों में निश्चित सफलता प्राप्त करेंगे। यह समय प्रणय और रोमान्स के लिये भी अच्छा है। सारा पॉलिन के सृजन बोध की सराहना की जायेगी। पारिवारिक सुख बढा चढ़ा रहेगा। मित्र और शुभ चिन्तक पूरा सहारा देंगे। इस अवधि के दौरान सारा पॉलिन महत्वपूर्ण व्यक्तियों के सम्पर्क में आयेंगे। एक यादगार यात्रा होने की भी संभावना है। इस अवधि के दौरान वैचारिक स्पष्टता का अभाव रहेगा। साधारण रूप से प्रसन्नता नहीं मिलेगी। पारिवारिक वातावरण भी परेशान रखेगा। छोटी छोटी बातों पर झगड़ें और विवाद हो सकते हैं। व्यापार धन्धा भी मन्दा चलेगा। अगर नौकरी करते हैं तो नौकरी के हालात भी संतोषप्रद नहीं होंगे। इस अवधि में सारा पॉलिन के शीघ्र व्याधिग्रस्त होने की प्रवृति रहेगी। परिवारजनों की बीमारी चिन्तित रखेगी। वैसे सारा पॉलिन का मन धार्मिक क्रिया कलाप की ओर झुका रहेगा और सारा पॉलिन पवित्र स्थलों की यात्रा करेंगे। इस अवधि में सारा पॉलिन का सौजन्यता पूर्ण व्यवहार रहेगा और सारा पॉलिन मनमुटाव से बचेंगे। एक आनन्द दायक यात्रा की प्रबल संभावना है। स्त्री वर्ग का भी साथ रहेगा। संगति व अन्य ललित कलाओं सुगध एवम् सौन्दर्यपूर्ण वस्तुओं की ओर सारा पॉलिन का झुकाव रहेगा। अपने व्यवसाय और व्यापार में सारा पॉलिन बहुत अच्छा काम करेंगे। अपने प्रयत्नों से आय वृव्दि प्राप्त करेंगे। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। छोटी मोटी बीमारियां हो सकती हैं। सारा पॉलिन का मिलनसार स्वभाव होगा और कई लोगों के सम्पर्क में आयेंगे। इस अवधि में सारा पॉलिन जीवन का बड़े उत्साह और उल्लास से स्वागत करेंगे प्रणय प्रेम संबंधों के लिये यह समय श्रेयस्कर नहीं है। बहुत अधिक सोच विचार हानिकर हो सकता है इसलिये इससे सारा पॉलिन बचें। अचानक यात्रा की संभावना भी हो सकती है। |
हसेरन कस्बा के गढी मोहल्ला में रविवार देर शाम किशोर ने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना लगते ही घर परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल है।
मृतक अंशु (17वर्ष) ने इसी वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। वह अपने घर पर मोबाइल दिलाए जाने की रट लगाए हुए था। घर के लोगों ने कहा परीक्षा पास कर लो उसके बाद फोन दिला देंगे। किशोर दो-तीन दिनों से नाराज चल रहा था। रविवार देर शाम घर के लोग दूसरे मकान मे जानवरों के लिए चारा करने गए हुए थे। किशोर ने मौका पाकर साड़ी से फांसी का फंदा डाल जीवन लीला समाप्त कर ली।
किशोर अपने छह भाई-बहनों में चौथे नंबर का था। जिसमें 5 भाई , एक बहन है । सबसे बड़ा भाई देवेंद्र , अंकुर, राघवेंद्र , बहन देवकी वही छोटा भाई आकाश है।
किशोर अपने माता पिता के साथ खेतों में भी काम करता था। इसके साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में हाईस्कूल की परीक्षा दे चुका था। परीक्षा परिणाम आना बाकी था। किशोर मोबाइल को लेकर काफी उदास रहता था। मोबाइल ना दिलाए जाने को लेकर किशोर ने आत्महत्या कर ली। उसके दो बड़े भाई देवेंद्र और राघवेंद्र दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। तब जाकर कहीं घर परिवार का पालन पोषण करते हैं। सूचना लगते ही घर परिवार में कोहराम मच गया। घर के लोगों ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
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| हसेरन कस्बा के गढी मोहल्ला में रविवार देर शाम किशोर ने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना लगते ही घर परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक अंशु ने इसी वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। वह अपने घर पर मोबाइल दिलाए जाने की रट लगाए हुए था। घर के लोगों ने कहा परीक्षा पास कर लो उसके बाद फोन दिला देंगे। किशोर दो-तीन दिनों से नाराज चल रहा था। रविवार देर शाम घर के लोग दूसरे मकान मे जानवरों के लिए चारा करने गए हुए थे। किशोर ने मौका पाकर साड़ी से फांसी का फंदा डाल जीवन लीला समाप्त कर ली। किशोर अपने छह भाई-बहनों में चौथे नंबर का था। जिसमें पाँच भाई , एक बहन है । सबसे बड़ा भाई देवेंद्र , अंकुर, राघवेंद्र , बहन देवकी वही छोटा भाई आकाश है। किशोर अपने माता पिता के साथ खेतों में भी काम करता था। इसके साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में हाईस्कूल की परीक्षा दे चुका था। परीक्षा परिणाम आना बाकी था। किशोर मोबाइल को लेकर काफी उदास रहता था। मोबाइल ना दिलाए जाने को लेकर किशोर ने आत्महत्या कर ली। उसके दो बड़े भाई देवेंद्र और राघवेंद्र दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। तब जाकर कहीं घर परिवार का पालन पोषण करते हैं। सूचना लगते ही घर परिवार में कोहराम मच गया। घर के लोगों ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
डेरा सच्चा सौदा सिरसा की राजनीतिक विंग ने पंजाब के तलवंडी साबो से उम्मीदवार हरमिंदर सिंह जस्सी को अपना समर्थन दिया है। जस्सी डेरा प्रमुख राम रहीम का समधी है और निर्दलीय चुनाव लड़ रहा है। राजनीतिक विंग के इंचार्ज राम सिंह का कहना है कि जस्सी किसी पार्टी से नहीं हैं। हम उनकी रिश्तेदारी करके मदद कर रहे हैं। हमारे प्रेमी और हलके के प्रेमी चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हम उम्मीदवारों को वोट डालेंगे, न कि नोटा दबाएंगे।
बता दें कि डेरा प्रमुख के बेटे जसमीत इंसां की शादी हरमिंदर सिह जस्सी की बेटी के साथ हुई है। जस्सी ने जनवरी में सिरसा जाकर राजनीतिक विंग के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। जस्सी पहले कांग्रेस में थे, परंतु अबकी बार टिकट न मिलने के कारण आजाद खड़े हो गए हैं। इससे पहले वे तीन चुनाव लगातार हार चुके हैं। तलवंडी में चुनाव प्रचार के दौरान पंजाबी गायिका जसविंदर बराड़ उनके लिए अखाड़ा लगाकर प्रचार कर रही हैं।
वर्ष 2012 के चुनाव में हरमिंद्र सिंह जस्सी बठिंडा विधानसभा क्षेत्र से शिअद के प्रत्याशी सरूप चंद्र सिंगला से 6445 वोटों से हार गया था। 2014 तलवंडी साबो उपचुनाव में भी जस्सी को हार का सामना करना पड़ा। 2017 के चुनाव में मोड़ मंडी से हार हुई। इस चुनाव में मौड़ मंडी में जस्सी की रैली में भी ब्लास्ट भी हुआ था, जिसमें करीब 7 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच पंजाब की एसआईटी कर रही है। इस ब्लॉस्ट के तार भी डेरे से जुड़े हुए हैं। डेरे की वर्कशॉप के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मालवा में आने वाले फिरोजपुर, मोगा, फाजिल्का, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, संगरूर, बरनाला, मलेरकोटला, फतेहगढ़ साहिब जिले आते हैं। मालवा बेल्ट में 69 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां डेरा का प्रभाव माना जाता था। समय के साथ डेरे ने हर राज्य में अपनी 45 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया।
पंजाब में साल 2007, 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में डेरा की दखलांदाजी रही थी। साल 2014 के लोकसभा व अक्तूबर 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में डेरा ने खुलकर भाजपा का समर्थन किया था। खुद डेरा प्रमुख ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम के स्वच्छ भारत मिशन की सराहना करते हुए समर्थन दिया।
इससे पहले पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह 2012 के विधानसभा चुनाव में गए थे। उनकी पत्नी परनीत कौर और बेटा भी वोटों के लिए डेरे में गया। बादल पिता-पुत्र भी वोटों के लिए डेरा की हाजिरी भर चुके हैं। फरवरी 2017 में हुए पंजाब विधानसभा के चुनाव में पंजाब के सैकड़ों नेताओं ने डेरा में दस्तक दी थी।
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| डेरा सच्चा सौदा सिरसा की राजनीतिक विंग ने पंजाब के तलवंडी साबो से उम्मीदवार हरमिंदर सिंह जस्सी को अपना समर्थन दिया है। जस्सी डेरा प्रमुख राम रहीम का समधी है और निर्दलीय चुनाव लड़ रहा है। राजनीतिक विंग के इंचार्ज राम सिंह का कहना है कि जस्सी किसी पार्टी से नहीं हैं। हम उनकी रिश्तेदारी करके मदद कर रहे हैं। हमारे प्रेमी और हलके के प्रेमी चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हम उम्मीदवारों को वोट डालेंगे, न कि नोटा दबाएंगे। बता दें कि डेरा प्रमुख के बेटे जसमीत इंसां की शादी हरमिंदर सिह जस्सी की बेटी के साथ हुई है। जस्सी ने जनवरी में सिरसा जाकर राजनीतिक विंग के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। जस्सी पहले कांग्रेस में थे, परंतु अबकी बार टिकट न मिलने के कारण आजाद खड़े हो गए हैं। इससे पहले वे तीन चुनाव लगातार हार चुके हैं। तलवंडी में चुनाव प्रचार के दौरान पंजाबी गायिका जसविंदर बराड़ उनके लिए अखाड़ा लगाकर प्रचार कर रही हैं। वर्ष दो हज़ार बारह के चुनाव में हरमिंद्र सिंह जस्सी बठिंडा विधानसभा क्षेत्र से शिअद के प्रत्याशी सरूप चंद्र सिंगला से छः हज़ार चार सौ पैंतालीस वोटों से हार गया था। दो हज़ार चौदह तलवंडी साबो उपचुनाव में भी जस्सी को हार का सामना करना पड़ा। दो हज़ार सत्रह के चुनाव में मोड़ मंडी से हार हुई। इस चुनाव में मौड़ मंडी में जस्सी की रैली में भी ब्लास्ट भी हुआ था, जिसमें करीब सात लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच पंजाब की एसआईटी कर रही है। इस ब्लॉस्ट के तार भी डेरे से जुड़े हुए हैं। डेरे की वर्कशॉप के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मालवा में आने वाले फिरोजपुर, मोगा, फाजिल्का, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, संगरूर, बरनाला, मलेरकोटला, फतेहगढ़ साहिब जिले आते हैं। मालवा बेल्ट में उनहत्तर विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां डेरा का प्रभाव माना जाता था। समय के साथ डेरे ने हर राज्य में अपनी पैंतालीस सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। पंजाब में साल दो हज़ार सात, दो हज़ार बारह व दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में डेरा की दखलांदाजी रही थी। साल दो हज़ार चौदह के लोकसभा व अक्तूबर दो हज़ार चौदह के हरियाणा विधानसभा चुनाव में डेरा ने खुलकर भाजपा का समर्थन किया था। खुद डेरा प्रमुख ने दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में पीएम के स्वच्छ भारत मिशन की सराहना करते हुए समर्थन दिया। इससे पहले पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में गए थे। उनकी पत्नी परनीत कौर और बेटा भी वोटों के लिए डेरे में गया। बादल पिता-पुत्र भी वोटों के लिए डेरा की हाजिरी भर चुके हैं। फरवरी दो हज़ार सत्रह में हुए पंजाब विधानसभा के चुनाव में पंजाब के सैकड़ों नेताओं ने डेरा में दस्तक दी थी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
" यतिजी, दैव तो इस प्रकार कई बार कुंपित हुआ और रीझा है। मुझे उसकी परवा नहीं है ! "
" मंडलेश्वर, राजा रावणका अभिमान भी चूर्ण हो गया है, ध्यान रखिए। इस समय मैं शत्रु नहीं, मित्रके रूपमें कह रहा हूँ कि तुम्हारे दिन पूरे हो गये हैंः 1 जितने दिन रहे हैं, उनका सदुपयोग कर लो ।"
" सदुपयोग यही कि जितना भी हो सके, श्रावकोंको पीस डालूँ । इन पापि - योंने मेरा सब कुछ लूट-खसोट लिया है। अब और भी अधिक लुट जाऊँगा, इसकी मुझे परवाह नहीं ।
" अब वे आपके हाथों अधिक न पिसँगे ।"
"" क्यों ? "
" गुरुदेवका वचन है - " क्या १७
" जिनभगवान्के शत्रु मेरे हाथों ठिकाने लगनेवाले हैं। " मंडलेश्वरको कॅपीकॅपी आ गई। वह मौन होकर खड़ा रह गया।
राजा, वर्षोंसे आप जिनभगवानके दीन सेवकोंको जला रहे हैं; इसलिए आप माफ़ नहीं किये जा सकते । फिर भी आप वीर पुरुष हैं और गुजरातके अलंकार। "
" आपकी क्षमाकी किसे परवाह है। " राजपूतने तिरस्कारसे हँसते हुए कहा । " न हो; परन्तु राजाकी मृत्यु हो जानेपर बहुत उपद्रव मचेगा । यदि कभी मेरे योग्य कोई काम पड़े, तो - "
" मुझे काम पढ़े ? " मंडलेश्वरने गर्वसे हँसते हुए कहा ।
राजा, आप बुद्धिमान् हैं, शूरवीर है। धर्म-विरोध न होता, तो आपकी उन्नति देखकर मैं प्रसन्न होता। फिर भी आजकी भेटके संस्मरण-स्वरूप मैं वचन देता हूँ, उसे याद रखना । किसी दिन काम पड़े, तो आनन्दसूरिसे कहना, वह करेगा।
"यतिजी, मंडलेश्वर याचना नहीं करता, न कमी करेगा। जिस प्रकार घनके अभिमानमें आवक लोग फूल रहे हैं, उसी प्रकार अपनी भुजाओंके चलपर हम भी मस्त हैं ।
" जैसी आपकी इच्छा ! परन्तु देखो, सावधान रहना । " मंडलेश्वर डरता नहीं है। " तो भी मौतका डर तो है ?
" यतिजी, मृत्यु मेरे लिए एक खिलवाड़ है।
" जैसी इच्छा । अच्छा, मैं जाता हूँ। मैं उस ओरसे आया हूँ, उसी ओर जाऊँगा।" कहकर यति झरोखेकी दूसरी ओर चला गया ।
मंडलेश्वर विचार ही विचारमें मूछे चबाने लगा। उसके मस्तिष्कमे सन्ध्यासमयका भूत और यतिकी आगाही घूमने लगी। कितने ही वर्ष हुए उसने अकेले अपने हाथों अपने मंडलको छोटा-सा राज्य बना लिया था। उसके नामका डंका सारे गुजरातमे बज रहा था; परन्तु देहस्थलीमे पड़े रहना उसे भला नहीं मालूम होता था। पाटन उसके विचारसे सृष्टिका मुकुट था । उसमें महामणिकी भाँति सुशोभित होनेकी उसे बड़ी भारी आकांक्षा थी । इस ओर पाटनके शासक उसे निर्बल बनानेका प्रयत्न कर रहे थे । और यद्यपि उनका यह प्रयत्न अधिकाश निष्फल हो गया था, तथापि उसने इस समय मंडलेश्वरको उलझनमे डाल दिया था।
४- मुंजाल
आनन्दसूरि झरोखेके दूसरे छोरपर पहुँच गया । वह अपने मनमे फूल रहा था। गुरुदेवसे आज्ञा लेकर जब चन्द्रावतीसे वह पाटन आया, तब उसे यह आशा नहीं थी कि ऐसे शुभ शकुन होंगे।
महाराज ! " एक स्त्रीका स्वर सुनाई पड़ा। यति विचारोंसे जागृत हुआ, "कौन, रेणुका ?
" जी हॉ, पधारिए । मैंने मंत्रीजीको आपका पत्र दे दिया है और वे आपको बुला रहे हैं । " कहाँ है ? " | " यतिजी, दैव तो इस प्रकार कई बार कुंपित हुआ और रीझा है। मुझे उसकी परवा नहीं है ! " " मंडलेश्वर, राजा रावणका अभिमान भी चूर्ण हो गया है, ध्यान रखिए। इस समय मैं शत्रु नहीं, मित्रके रूपमें कह रहा हूँ कि तुम्हारे दिन पूरे हो गये हैंः एक जितने दिन रहे हैं, उनका सदुपयोग कर लो ।" " सदुपयोग यही कि जितना भी हो सके, श्रावकोंको पीस डालूँ । इन पापि - योंने मेरा सब कुछ लूट-खसोट लिया है। अब और भी अधिक लुट जाऊँगा, इसकी मुझे परवाह नहीं । " अब वे आपके हाथों अधिक न पिसँगे ।" "" क्यों ? " " गुरुदेवका वचन है - " क्या सत्रह " जिनभगवान्के शत्रु मेरे हाथों ठिकाने लगनेवाले हैं। " मंडलेश्वरको कॅपीकॅपी आ गई। वह मौन होकर खड़ा रह गया। राजा, वर्षोंसे आप जिनभगवानके दीन सेवकोंको जला रहे हैं; इसलिए आप माफ़ नहीं किये जा सकते । फिर भी आप वीर पुरुष हैं और गुजरातके अलंकार। " " आपकी क्षमाकी किसे परवाह है। " राजपूतने तिरस्कारसे हँसते हुए कहा । " न हो; परन्तु राजाकी मृत्यु हो जानेपर बहुत उपद्रव मचेगा । यदि कभी मेरे योग्य कोई काम पड़े, तो - " " मुझे काम पढ़े ? " मंडलेश्वरने गर्वसे हँसते हुए कहा । राजा, आप बुद्धिमान् हैं, शूरवीर है। धर्म-विरोध न होता, तो आपकी उन्नति देखकर मैं प्रसन्न होता। फिर भी आजकी भेटके संस्मरण-स्वरूप मैं वचन देता हूँ, उसे याद रखना । किसी दिन काम पड़े, तो आनन्दसूरिसे कहना, वह करेगा। "यतिजी, मंडलेश्वर याचना नहीं करता, न कमी करेगा। जिस प्रकार घनके अभिमानमें आवक लोग फूल रहे हैं, उसी प्रकार अपनी भुजाओंके चलपर हम भी मस्त हैं । " जैसी आपकी इच्छा ! परन्तु देखो, सावधान रहना । " मंडलेश्वर डरता नहीं है। " तो भी मौतका डर तो है ? " यतिजी, मृत्यु मेरे लिए एक खिलवाड़ है। " जैसी इच्छा । अच्छा, मैं जाता हूँ। मैं उस ओरसे आया हूँ, उसी ओर जाऊँगा।" कहकर यति झरोखेकी दूसरी ओर चला गया । मंडलेश्वर विचार ही विचारमें मूछे चबाने लगा। उसके मस्तिष्कमे सन्ध्यासमयका भूत और यतिकी आगाही घूमने लगी। कितने ही वर्ष हुए उसने अकेले अपने हाथों अपने मंडलको छोटा-सा राज्य बना लिया था। उसके नामका डंका सारे गुजरातमे बज रहा था; परन्तु देहस्थलीमे पड़े रहना उसे भला नहीं मालूम होता था। पाटन उसके विचारसे सृष्टिका मुकुट था । उसमें महामणिकी भाँति सुशोभित होनेकी उसे बड़ी भारी आकांक्षा थी । इस ओर पाटनके शासक उसे निर्बल बनानेका प्रयत्न कर रहे थे । और यद्यपि उनका यह प्रयत्न अधिकाश निष्फल हो गया था, तथापि उसने इस समय मंडलेश्वरको उलझनमे डाल दिया था। चार- मुंजाल आनन्दसूरि झरोखेके दूसरे छोरपर पहुँच गया । वह अपने मनमे फूल रहा था। गुरुदेवसे आज्ञा लेकर जब चन्द्रावतीसे वह पाटन आया, तब उसे यह आशा नहीं थी कि ऐसे शुभ शकुन होंगे। महाराज ! " एक स्त्रीका स्वर सुनाई पड़ा। यति विचारोंसे जागृत हुआ, "कौन, रेणुका ? " जी हॉ, पधारिए । मैंने मंत्रीजीको आपका पत्र दे दिया है और वे आपको बुला रहे हैं । " कहाँ है ? " |
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंगलवार को देश के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने भाषण में चुनाव में हुई कथित धांधली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रमुख सियासी दलों की शिकायतों का हल करना चाहिए।
जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हुसैन ने कहा, "मुल्क में आम चुनाव पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून के तहत कराया गया। इस कानून के तहत पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को शक्तिशाली और स्वतंत्र बनाया गया है। ईसीपी द्वारा चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जाने के बावजूद कुछ समूहों ने चिंता जाहिर की है। चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि वह उनकी चिंताएं दूर करे। "
25 जुलाई को हुए आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और पीपीपी जैसी देश की प्रमुख पार्टियां चुनाव नतीजों में धांधली के आरोप लगा रही हैं।
| इस्लामाबाद। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंगलवार को देश के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए अपने भाषण में चुनाव में हुई कथित धांधली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रमुख सियासी दलों की शिकायतों का हल करना चाहिए। जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में बहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हुसैन ने कहा, "मुल्क में आम चुनाव पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून के तहत कराया गया। इस कानून के तहत पाकिस्तान चुनाव आयोग को शक्तिशाली और स्वतंत्र बनाया गया है। ईसीपी द्वारा चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जाने के बावजूद कुछ समूहों ने चिंता जाहिर की है। चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि वह उनकी चिंताएं दूर करे। " पच्चीस जुलाई को हुए आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और पीपीपी जैसी देश की प्रमुख पार्टियां चुनाव नतीजों में धांधली के आरोप लगा रही हैं। |
नई दिल्लीः विराट कोहली और एमएस धोनी विश्व क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ी हैं। दोनों ने क्रिकेट में रनों का अंबार लगाया है और लीडर के रूप में भी टीम का शानदार नेतृत्व किया है। दोनों ने भारतीय टीम को कई यादगार जीत दिलाई। हालांकि, जब पढ़ाई की बात आती है, तो दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन क्रिकेट के समान उच्च दर्जे का नजर नहीं आता। एमएस धोनी के 10वीं क्लास में 66 प्रतिशत जबकि 12वीं क्लास में 56 प्रतिशत आए थे।
जब धोनी 12वीं क्लास में थे, तब उन्हें रांची के बाहर क्रिकेट मैच खेलने के लिए जाना होता था। उनकी यह यात्रा फिल्म एमएस धोनीः द अनटोल्ड स्टोरी में भी दिखाई गई है, जो सितंबर 2016 में रीलिज हुई थी। धोनी ने इस बात का खुलासा तब भी किया था जब वह दिल्ली में वीरेंद्र सहवाग के स्कूल में गए थे। जहां तक 31 साल के विराट कोहली का सवाल है, तो पढ़ाई में उनका कभी मन नहीं लगा। दिल्ली में जन्में क्रिकेटर के लिए गणित का विषय किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। उन्हें 100 में से एक डिजिट में नंबर आते थे।
विराट कोहली ने पिछले साल एक चैट शो में कहा था, 'गणित। हमारी परीक्षा होती थी और 100 में से मुझे सबसे ज्यादा मार्क्स आते थे 3। ठीक है। मैं इतना अच्छा था गणित विषय में। मुझे समझ नहीं आया कि कोई आखिर क्यों गणित को इतना सीखने में जुटा रहता है। मुझे इसके पीछे की चीजें कभी समझ नहीं आई। मैंने कभी अपनी जिंदगी में इन फॉर्मूलों का उपयोग होते नहीं देखा। '
विराट कोहली ने अपने लिए कहा था कि क्रिकेट खेलने से कई ज्यादा कठिन था गणित में कड़ी मेहनत करना। उन्होंने कहा था, 'मैं बस 10वीं कक्षा पास कर लेना चाहता था क्योंकि ये राज्य स्तर की होती है और इसके बाद आपको चुनना होता है कि गणित पढ़नी है या नहीं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि मैंने क्रिकेट में कभी इतनी मेहनत नहीं की, जितनी मैंने परीक्षा पास करने में की थी। '
किसी युवा के लिए पढ़ना और क्रिकेट में करियर बनाना आसान काम नहीं है। सचिन तेंदुलकर 10वीं की परीक्षा पास नहीं कर पाए और उन्होंने दोबारा इसे पास करने का प्रयास ही नहीं किया। तब तक वो राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहन चुके थे। हालांकि, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और जवागल श्रीनाथ का पढ़ाई में रिकॉर्ड शानदार हैं और इन सभी ने क्रिकेट रिकॉर्ड बुक में अपनी अलग पहचान बनाई है।
| नई दिल्लीः विराट कोहली और एमएस धोनी विश्व क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ी हैं। दोनों ने क्रिकेट में रनों का अंबार लगाया है और लीडर के रूप में भी टीम का शानदार नेतृत्व किया है। दोनों ने भारतीय टीम को कई यादगार जीत दिलाई। हालांकि, जब पढ़ाई की बात आती है, तो दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन क्रिकेट के समान उच्च दर्जे का नजर नहीं आता। एमएस धोनी के दसवीं क्लास में छयासठ प्रतिशत जबकि बारहवीं क्लास में छप्पन प्रतिशत आए थे। जब धोनी बारहवीं क्लास में थे, तब उन्हें रांची के बाहर क्रिकेट मैच खेलने के लिए जाना होता था। उनकी यह यात्रा फिल्म एमएस धोनीः द अनटोल्ड स्टोरी में भी दिखाई गई है, जो सितंबर दो हज़ार सोलह में रीलिज हुई थी। धोनी ने इस बात का खुलासा तब भी किया था जब वह दिल्ली में वीरेंद्र सहवाग के स्कूल में गए थे। जहां तक इकतीस साल के विराट कोहली का सवाल है, तो पढ़ाई में उनका कभी मन नहीं लगा। दिल्ली में जन्में क्रिकेटर के लिए गणित का विषय किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। उन्हें एक सौ में से एक डिजिट में नंबर आते थे। विराट कोहली ने पिछले साल एक चैट शो में कहा था, 'गणित। हमारी परीक्षा होती थी और एक सौ में से मुझे सबसे ज्यादा मार्क्स आते थे तीन। ठीक है। मैं इतना अच्छा था गणित विषय में। मुझे समझ नहीं आया कि कोई आखिर क्यों गणित को इतना सीखने में जुटा रहता है। मुझे इसके पीछे की चीजें कभी समझ नहीं आई। मैंने कभी अपनी जिंदगी में इन फॉर्मूलों का उपयोग होते नहीं देखा। ' विराट कोहली ने अपने लिए कहा था कि क्रिकेट खेलने से कई ज्यादा कठिन था गणित में कड़ी मेहनत करना। उन्होंने कहा था, 'मैं बस दसवीं कक्षा पास कर लेना चाहता था क्योंकि ये राज्य स्तर की होती है और इसके बाद आपको चुनना होता है कि गणित पढ़नी है या नहीं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि मैंने क्रिकेट में कभी इतनी मेहनत नहीं की, जितनी मैंने परीक्षा पास करने में की थी। ' किसी युवा के लिए पढ़ना और क्रिकेट में करियर बनाना आसान काम नहीं है। सचिन तेंदुलकर दसवीं की परीक्षा पास नहीं कर पाए और उन्होंने दोबारा इसे पास करने का प्रयास ही नहीं किया। तब तक वो राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहन चुके थे। हालांकि, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और जवागल श्रीनाथ का पढ़ाई में रिकॉर्ड शानदार हैं और इन सभी ने क्रिकेट रिकॉर्ड बुक में अपनी अलग पहचान बनाई है। |
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