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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ममता कालिया (02 नवम्बर,1940) एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता और पत्रकारिता अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में हस्तक्षेप रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने 200 से अधिक कहानियों की रचना की है। वर्तमान में वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका "हिन्दी" की संपादिका हैं। . स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख संस्मरण कहलाता है। यात्रा साहित्य भी इसके अन्तर्गत आता है। संस्मरण को साहित्यिक निबन्ध की एक प्रवृत्ति भी माना जा सकता है। ऐसी रचनाओं को 'संस्मरणात्मक निबंध' कहा जा सकता है। व्यापक रूप से संस्मरण आत्मचरित के अन्तर्गत लिया जा सकता है। किन्तु संस्मरण और आत्मचरित के दृष्टिकोण में मौलिक अन्तर है। आत्मचरित के लेखक का मुख्य उद्देश्य अपनी जीवनकथा का वर्णन करना होता है। इसमें कथा का प्रमुख पात्र स्वयं लेखक होता है। संस्मरण लेखक का दृष्टिकोण भिन्न रहता है। संस्मरण में लेखक जो कुछ स्वयं देखता है और स्वयं अनुभव करता है उसी का चित्रण करता है। लेखक की स्वयं की अनुभूतियाँ तथा संवेदनायें संस्मरण में अन्तर्निहित रहती हैं। इस दृष्टि से संस्मरण का लेखक निबन्धकार के अधिक निकट है। वह अपने चारों ओर के जीवन का वर्णन करता है। इतिहासकार के समान वह केवल यथातथ्य विवरण प्रस्तुत नहीं करता है। पाश्चात्य साहित्य में साहित्यकारों के अतिरिक्त अनेक राजनेताओं तथा सेनानायकों ने भी अपने संस्मरण लिखे हैं, जिनका साहित्यिक महत्त्व स्वीकारा गया है। . ममता कालिया और संस्मरण आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): निबन्ध, रवीन्द्र कालिया। निबन्ध (Essay) गद्य लेखन की एक विधा है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है। निबंध के पर्याय रूप में सन्दर्भ, रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है। लेकिन साहित्यिक आलोचना में सर्वाधिक प्रचलित शब्द निबंध ही है। इसे अंग्रेजी के कम्पोज़ीशन और एस्से के अर्थ में ग्रहण किया जाता है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार संस्कृत में भी निबंध का साहित्य है। प्राचीन संस्कृत साहित्य के उन निबंधों में धर्मशास्त्रीय सिद्धांतों की तार्किक व्याख्या की जाती थी। उनमें व्यक्तित्व की विशेषता नहीं होती थी। किन्तु वर्तमान काल के निबंध संस्कृत के निबंधों से ठीक उलटे हैं। उनमें व्यक्तित्व या वैयक्तिकता का गुण सर्वप्रधान है। इतिहास-बोध परम्परा की रूढ़ियों से मनुष्य के व्यक्तित्व को मुक्त करता है। निबंध की विधा का संबंध इसी इतिहास-बोध से है। यही कारण है कि निबंध की प्रधान विशेषता व्यक्तित्व का प्रकाशन है। निबंध की सबसे अच्छी परिभाषा है- इस परिभाषा में अतिव्याप्ति दोष है। लेकिन निबंध का रूप साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा इतना स्वतंत्र है कि उसकी सटीक परिभाषा करना अत्यंत कठिन है। . हिंदी साहित्य में रवींद्र कालिया की ख्याति उपन्यासकार, कहानीकार और संस्मरण लेखक के अलावा एक ऐसे बेहतरीन संपादक के रूप में है, जो मृतप्रायः पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते हैं। रवींद्र कालिया हिंदी के उन गिने-चुने संपादकों में से एक हैं, जिन्हें पाठकों की नब्ज़ और बाज़ार का खेल दोनों का पता है। 11 नवम्बर, 1939 को जालंधर में जन्मे रवीन्द्र कालिया हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्होंने 'नया ज्ञानोदय' के संपादन का दायित्व संभालते ही उसे हिंदी साहित्य की अनिवार्य पत्रिका बना दिया। धर्मयुग में रवींद्र कालिया के योगदान से सारा साहित्य-जगत परिचित है। रवीन्द्र कालिया ग़ालिब छुटी शराब में लिखते हैं "मोहन राकेश ने अपने मोटे चश्मे के भीतर से खास परिचित निगाहों से देखते हुए उनसे पूछा / 'बम्बई जाओगे?' / 'बम्बई ?' कोई गोष्ठी है क्या?' / 'नहीं, 'धर्मयुग' में।' / 'धर्मयुग' एक बड़ा नाम था, सहसा विश्वास न हुआ। / उन्होंने अगले रोज़ घर पर बुलाया और मुझ से सादे काग़ज़ पर 'धर्मयुग' के लिए एक अर्ज़ी लिखवायी और कुछ ही दिनों में नौकरी ही नहीं, दस इन्क्रीमेंट्स भी दिलवा दिये...." रवीन्द्रजी ने वागर्थ, गंगा जमुना, वर्ष का प्रख्यात कथाकार अमरकांत पर एकाग्र अंक, मोहन राकेश संचयन, अमरकांत संचयन सहित अनेक पुस्तकों का संपादन किया है। हाल ही में उन्होंने साहित्य की अति महत्वपूर्ण ३१ वर्षों से प्रकशित हो रही 'वर्तमान साहित्य' में सलाहकार संपादक का कार्यभार सम्हाला है। . ममता कालिया 22 संबंध है और संस्मरण 52 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.70% है = 2 / (22 + 52)। यह लेख ममता कालिया और संस्मरण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ममता कालिया एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता और पत्रकारिता अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में हस्तक्षेप रखती हैं। हिन्दी कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। लगभग आधी सदी के काल खण्ड में उन्होंने दो सौ से अधिक कहानियों की रचना की है। वर्तमान में वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका "हिन्दी" की संपादिका हैं। . स्मृति के आधार पर किसी विषय पर अथवा किसी व्यक्ति पर लिखित आलेख संस्मरण कहलाता है। यात्रा साहित्य भी इसके अन्तर्गत आता है। संस्मरण को साहित्यिक निबन्ध की एक प्रवृत्ति भी माना जा सकता है। ऐसी रचनाओं को 'संस्मरणात्मक निबंध' कहा जा सकता है। व्यापक रूप से संस्मरण आत्मचरित के अन्तर्गत लिया जा सकता है। किन्तु संस्मरण और आत्मचरित के दृष्टिकोण में मौलिक अन्तर है। आत्मचरित के लेखक का मुख्य उद्देश्य अपनी जीवनकथा का वर्णन करना होता है। इसमें कथा का प्रमुख पात्र स्वयं लेखक होता है। संस्मरण लेखक का दृष्टिकोण भिन्न रहता है। संस्मरण में लेखक जो कुछ स्वयं देखता है और स्वयं अनुभव करता है उसी का चित्रण करता है। लेखक की स्वयं की अनुभूतियाँ तथा संवेदनायें संस्मरण में अन्तर्निहित रहती हैं। इस दृष्टि से संस्मरण का लेखक निबन्धकार के अधिक निकट है। वह अपने चारों ओर के जीवन का वर्णन करता है। इतिहासकार के समान वह केवल यथातथ्य विवरण प्रस्तुत नहीं करता है। पाश्चात्य साहित्य में साहित्यकारों के अतिरिक्त अनेक राजनेताओं तथा सेनानायकों ने भी अपने संस्मरण लिखे हैं, जिनका साहित्यिक महत्त्व स्वीकारा गया है। . ममता कालिया और संस्मरण आम में दो बातें हैं : निबन्ध, रवीन्द्र कालिया। निबन्ध गद्य लेखन की एक विधा है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है। निबंध के पर्याय रूप में सन्दर्भ, रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है। लेकिन साहित्यिक आलोचना में सर्वाधिक प्रचलित शब्द निबंध ही है। इसे अंग्रेजी के कम्पोज़ीशन और एस्से के अर्थ में ग्रहण किया जाता है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार संस्कृत में भी निबंध का साहित्य है। प्राचीन संस्कृत साहित्य के उन निबंधों में धर्मशास्त्रीय सिद्धांतों की तार्किक व्याख्या की जाती थी। उनमें व्यक्तित्व की विशेषता नहीं होती थी। किन्तु वर्तमान काल के निबंध संस्कृत के निबंधों से ठीक उलटे हैं। उनमें व्यक्तित्व या वैयक्तिकता का गुण सर्वप्रधान है। इतिहास-बोध परम्परा की रूढ़ियों से मनुष्य के व्यक्तित्व को मुक्त करता है। निबंध की विधा का संबंध इसी इतिहास-बोध से है। यही कारण है कि निबंध की प्रधान विशेषता व्यक्तित्व का प्रकाशन है। निबंध की सबसे अच्छी परिभाषा है- इस परिभाषा में अतिव्याप्ति दोष है। लेकिन निबंध का रूप साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा इतना स्वतंत्र है कि उसकी सटीक परिभाषा करना अत्यंत कठिन है। . हिंदी साहित्य में रवींद्र कालिया की ख्याति उपन्यासकार, कहानीकार और संस्मरण लेखक के अलावा एक ऐसे बेहतरीन संपादक के रूप में है, जो मृतप्रायः पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते हैं। रवींद्र कालिया हिंदी के उन गिने-चुने संपादकों में से एक हैं, जिन्हें पाठकों की नब्ज़ और बाज़ार का खेल दोनों का पता है। ग्यारह नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ उनतालीस को जालंधर में जन्मे रवीन्द्र कालिया हाल ही में भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्होंने 'नया ज्ञानोदय' के संपादन का दायित्व संभालते ही उसे हिंदी साहित्य की अनिवार्य पत्रिका बना दिया। धर्मयुग में रवींद्र कालिया के योगदान से सारा साहित्य-जगत परिचित है। रवीन्द्र कालिया ग़ालिब छुटी शराब में लिखते हैं "मोहन राकेश ने अपने मोटे चश्मे के भीतर से खास परिचित निगाहों से देखते हुए उनसे पूछा / 'बम्बई जाओगे?' / 'बम्बई ?' कोई गोष्ठी है क्या?' / 'नहीं, 'धर्मयुग' में।' / 'धर्मयुग' एक बड़ा नाम था, सहसा विश्वास न हुआ। / उन्होंने अगले रोज़ घर पर बुलाया और मुझ से सादे काग़ज़ पर 'धर्मयुग' के लिए एक अर्ज़ी लिखवायी और कुछ ही दिनों में नौकरी ही नहीं, दस इन्क्रीमेंट्स भी दिलवा दिये...." रवीन्द्रजी ने वागर्थ, गंगा जमुना, वर्ष का प्रख्यात कथाकार अमरकांत पर एकाग्र अंक, मोहन राकेश संचयन, अमरकांत संचयन सहित अनेक पुस्तकों का संपादन किया है। हाल ही में उन्होंने साहित्य की अति महत्वपूर्ण इकतीस वर्षों से प्रकशित हो रही 'वर्तमान साहित्य' में सलाहकार संपादक का कार्यभार सम्हाला है। . ममता कालिया बाईस संबंध है और संस्मरण बावन है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.सत्तर% है = दो / । यह लेख ममता कालिया और संस्मरण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE - Central Board of Secondary Education) की ओर से बीते सोमवार देश विदेश के करीब 22 हजार स्कूलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की गई। इसमें सीबीएसई की चेयरपर्सन अनीता करवल ने स्कूलों को परीक्षा और कॉपियों के मूल्यांकन से संबंधित कई हिदायतें दी हैं। सीबीएसई द्वारा स्कूलों के साथ की गई लाइव स्ट्रीमिंग सेशन में बताया गया है कि बोर्ड परीक्षा के छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन की भी जांच की जाएगी। ये जांच कई स्तर पर होगी। इसमें सॉफ्टवेयर की भी मदद ली जाएगी। यानी परीक्षकों, जांचकर्ताओं व अन्य अधिकारियों द्वारा कॉपियों के मूल्यांकन की जांच किए जाने के बाद कंप्यूटर सॉफ्टरवेयर (टेक्नोलॉजी) की मदद से भी जांच होगी। ताकि मूल्यांकन में किसी भी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आ सके और समय पर उसमें सुधार किया जा सके। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा में रेगुलर और प्राइवेट दो तरह के विद्यार्थी शामिल होते हैं। रेगुलर वे होते हैं जो किसी स्कूल में दाखिला लेकर निरंतर कक्षाएं करते हैं। जबकि प्राइवेट विद्यार्थी किसी स्कूल के जरिए फॉर्म भरकर सीधे बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं। सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से बीते सोमवार देश विदेश के करीब बाईस हजार स्कूलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की गई। इसमें सीबीएसई की चेयरपर्सन अनीता करवल ने स्कूलों को परीक्षा और कॉपियों के मूल्यांकन से संबंधित कई हिदायतें दी हैं। सीबीएसई द्वारा स्कूलों के साथ की गई लाइव स्ट्रीमिंग सेशन में बताया गया है कि बोर्ड परीक्षा के छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन की भी जांच की जाएगी। ये जांच कई स्तर पर होगी। इसमें सॉफ्टवेयर की भी मदद ली जाएगी। यानी परीक्षकों, जांचकर्ताओं व अन्य अधिकारियों द्वारा कॉपियों के मूल्यांकन की जांच किए जाने के बाद कंप्यूटर सॉफ्टरवेयर की मदद से भी जांच होगी। ताकि मूल्यांकन में किसी भी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आ सके और समय पर उसमें सुधार किया जा सके। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा में रेगुलर और प्राइवेट दो तरह के विद्यार्थी शामिल होते हैं। रेगुलर वे होते हैं जो किसी स्कूल में दाखिला लेकर निरंतर कक्षाएं करते हैं। जबकि प्राइवेट विद्यार्थी किसी स्कूल के जरिए फॉर्म भरकर सीधे बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं। सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।
Don't Miss! ज़ोया अख्तर बॉलीवुड के उन फिल्ममेकर्स में हैं, जिनकी फिल्मों को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह रहता है। खासकर युवाओं के बीच उनकी फिल्मों की बहुत पॉपुलैरिटी देखी जाती है। अब जबकि ज़ोया अख्तर की अगली फिल्म को लेकर अफवाहें शुरु हो चुकी हैं, लोग इसकी आधिकारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। खास बात है कि रिपोर्ट्स के अनुसार, ज़ोया इस फिल्म से तीन स्टारकिड्स को लॉन्च करने वाली हैं। जी हां, ना केवल सुहाना खान, बल्कि फिल्म निर्माता- निर्देशक जोया अख्तर कॉमिक बुक आर्ची पर आधारित अपने डिजिटल वेंचर के साथ 3 स्टारकिड्स लॉन्च करने वाली हैं। सुहाना खान के साथ फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा और बोनी कपूर की बेटी खुशी कपूर भी दिखेंगे। ये एक हाई स्कूल लव ट्रांगल ड्रामा होगा। जल्द ही फिल्म की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, जहां फिल्म से जुड़ी बातें बाहर नहीं आई हैं. . पिंकविला के एक रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म में सुहाना और खुशी. . आर्ची कॉमिक के किरदार बेट्टी और वेरोनिका का किरदार निभाने वाली हैं। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
Don't Miss! ज़ोया अख्तर बॉलीवुड के उन फिल्ममेकर्स में हैं, जिनकी फिल्मों को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह रहता है। खासकर युवाओं के बीच उनकी फिल्मों की बहुत पॉपुलैरिटी देखी जाती है। अब जबकि ज़ोया अख्तर की अगली फिल्म को लेकर अफवाहें शुरु हो चुकी हैं, लोग इसकी आधिकारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। खास बात है कि रिपोर्ट्स के अनुसार, ज़ोया इस फिल्म से तीन स्टारकिड्स को लॉन्च करने वाली हैं। जी हां, ना केवल सुहाना खान, बल्कि फिल्म निर्माता- निर्देशक जोया अख्तर कॉमिक बुक आर्ची पर आधारित अपने डिजिटल वेंचर के साथ तीन स्टारकिड्स लॉन्च करने वाली हैं। सुहाना खान के साथ फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा और बोनी कपूर की बेटी खुशी कपूर भी दिखेंगे। ये एक हाई स्कूल लव ट्रांगल ड्रामा होगा। जल्द ही फिल्म की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, जहां फिल्म से जुड़ी बातें बाहर नहीं आई हैं. . पिंकविला के एक रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म में सुहाना और खुशी. . आर्ची कॉमिक के किरदार बेट्टी और वेरोनिका का किरदार निभाने वाली हैं। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के बारे में अगर आप जानकारी चाहते है तो इसके लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी ले सकते है। इसके साथ ही आपका नाम लाभार्थियों की लिस्ट में है या नहीं इसकी जानकारी भी टोल फ्री नंबर पर कॉल करके पता कर सकते है। 14555 नबंर पर कॉल करके आप अपना नाम लाभार्थियों की लिस्ट में चेक कर सकते है वहीं सरकारी हेल्पलाइन नंबर 9868914555 पर कॉल करके आप अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है। आयुष्मान भारत (पीएम-जय)दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जिसका उद्देश्य प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 10. 74 करोड़ से भी अधिक गरीब और वंचित परिवारों (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों को) मुहैया कराना जो भारतीय आबादी का 40 फीसदी हिस्सा हैं। यह संख्या और शामिल किए गए परिवार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (SECC 2011) के अभाव और व्यावसायिक मापदण्डों पर आधारित हैं। (पीएम-जय)को पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (NHPS) के नाम से जाना जाता था। पूर्ववर्ती राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (RSBY), जिसका प्रमोचन 2008 में हुआ था, का विलय (पीएम-जय) में किया गया। इसलिए (पीएम-जय)के तहत, उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जो RSBY में उल्लिखित थे, लेकिन SECC 2011 के डेटाबेस में मौजूद नहीं हैं। (पीएम-जय)पूरी तरह से एक सरकार द्वारा वित्त-पोषित योजना है जिसकी कार्यान्वयन की लागत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बाटी गई है। - (पीएम-जय)पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त-पोषित दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजना है। - यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है। - 10. 74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं। - (पीएम-जय)सेवा संस्थान अर्थात "अस्पतालों" में लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क प्रदान करती है। - (पीएम-जय)चिकित्सा उपचार से उत्पन अत्यधिक ख़र्चे को कम करने में मदद करती है, जो प्रत्येक वर्ष लगभग 6 करोड़ भारतीयों को गरीबी की रेखा से नीचे पहुंचा देता है। - इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं। - इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है। - इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है। - (पीएम-जय)एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं। - इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं। - स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है। भारत में कई सरकारी वित्त-पोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं रही है जिनके अंतर्गत विभिन्न राज्यों में प्रति परिवार 30,000 रुपये से लेकर 3,00,000 रुपये तक की धन राशि मुहैया कराई जाती थी जो असमानता उत्पन करती थीं। (पीएम-जय) समस्त लाभार्थियों को सूचीबद्ध माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5,00,000 रुपये मुहैया कराती है। इस योजना के तहत निम्नलिखित उपचार निशुल्क उपलब्ध हैं। - चिकित्सा आरोपण सेवाएं (जहां आवश्यक हो) इस योजना में 5,00,000 रुपये का लाभ पूरे परिवार को मिलता है, यानेकि इसका उपयोग परिवार के एक या सभी सदस्यों द्वारा किया जा सकता है। RSBY योजना के तहत पाँच सदस्यों की पारिवारिक सीमा थी। उन योजनाओं से सीख लेते हुए, (पीएम-जय)की संरचना इस प्रकार की गई है कि परिवार के आकार या सदस्यों की उम्र पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। इसके एलवा, पहले से मौजूद विभिन बीमारियों को इस योजना में पहले दिन से ही शामिल किया जाता है। इसका मतलब यह है कि (पीएम-जय)में नामांकित होने से पहले किसी भी क़िस्म की बीमारी या स्वास्थ्य अस्थिथि से पीड़ित व्यक्ति उन सभी चिकित्सीय परिस्थितियों के लिए, और साथ ही पीएम-जय योजना के तहत सारे उपचार, प्राप्त करने के लिए पहले दिन से ही लाभार्थी है।
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के बारे में अगर आप जानकारी चाहते है तो इसके लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी ले सकते है। इसके साथ ही आपका नाम लाभार्थियों की लिस्ट में है या नहीं इसकी जानकारी भी टोल फ्री नंबर पर कॉल करके पता कर सकते है। चौदह हज़ार पाँच सौ पचपन नबंर पर कॉल करके आप अपना नाम लाभार्थियों की लिस्ट में चेक कर सकते है वहीं सरकारी हेल्पलाइन नंबर नौ आठ छः आठ नौ एक चार पाँच पाँच पाँच पर कॉल करके आप अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है। आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जिसका उद्देश्य प्रति परिवार प्रति वर्ष पाँच लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दस. चौहत्तर करोड़ से भी अधिक गरीब और वंचित परिवारों मुहैया कराना जो भारतीय आबादी का चालीस फीसदी हिस्सा हैं। यह संख्या और शामिल किए गए परिवार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना दो हज़ार ग्यारह के अभाव और व्यावसायिक मापदण्डों पर आधारित हैं। को पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के नाम से जाना जाता था। पूर्ववर्ती राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना , जिसका प्रमोचन दो हज़ार आठ में हुआ था, का विलय में किया गया। इसलिए के तहत, उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जो RSBY में उल्लिखित थे, लेकिन SECC दो हज़ार ग्यारह के डेटाबेस में मौजूद नहीं हैं। पूरी तरह से एक सरकार द्वारा वित्त-पोषित योजना है जिसकी कार्यान्वयन की लागत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बाटी गई है। - पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त-पोषित दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजना है। - यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पाँच लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है। - दस. चौहत्तर करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं। - सेवा संस्थान अर्थात "अस्पतालों" में लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क प्रदान करती है। - चिकित्सा उपचार से उत्पन अत्यधिक ख़र्चे को कम करने में मदद करती है, जो प्रत्येक वर्ष लगभग छः करोड़ भारतीयों को गरीबी की रेखा से नीचे पहुंचा देता है। - इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से तीन दिन पहले और पंद्रह दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं। - इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है। - इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है। - एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं। - इस योजना में लगभग एक,तीन सौ तिरानवे प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं। - स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है। भारत में कई सरकारी वित्त-पोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं रही है जिनके अंतर्गत विभिन्न राज्यों में प्रति परिवार तीस,शून्य रुपयापये से लेकर तीन,शून्य,शून्य रुपयापये तक की धन राशि मुहैया कराई जाती थी जो असमानता उत्पन करती थीं। समस्त लाभार्थियों को सूचीबद्ध माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पाँच,शून्य,शून्य रुपयापये मुहैया कराती है। इस योजना के तहत निम्नलिखित उपचार निशुल्क उपलब्ध हैं। - चिकित्सा आरोपण सेवाएं इस योजना में पाँच,शून्य,शून्य रुपयापये का लाभ पूरे परिवार को मिलता है, यानेकि इसका उपयोग परिवार के एक या सभी सदस्यों द्वारा किया जा सकता है। RSBY योजना के तहत पाँच सदस्यों की पारिवारिक सीमा थी। उन योजनाओं से सीख लेते हुए, की संरचना इस प्रकार की गई है कि परिवार के आकार या सदस्यों की उम्र पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। इसके एलवा, पहले से मौजूद विभिन बीमारियों को इस योजना में पहले दिन से ही शामिल किया जाता है। इसका मतलब यह है कि में नामांकित होने से पहले किसी भी क़िस्म की बीमारी या स्वास्थ्य अस्थिथि से पीड़ित व्यक्ति उन सभी चिकित्सीय परिस्थितियों के लिए, और साथ ही पीएम-जय योजना के तहत सारे उपचार, प्राप्त करने के लिए पहले दिन से ही लाभार्थी है।
राज्य के सरकारी स्कूलों में स्वर्ण जयंती मिडल छात्रवृत्ति छात्रों के बैंक खातों में डाल दी गई है। लगभग दो माह से छात्र इस छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे थे। छात्रवृत्ति के लिए एससीईआरटी सोलन की ओर से राज्य स्तर पर परीक्षा करवाई गई थी। प्रदेश भर से 100 विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति दी जानी है। गौर रहे कि स्वर्ण जयंती मिडल छात्रवृत्ति योजना छठी कक्षा में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक स्तर पर प्रतिभा की पहचान और पोषण करने के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति परीक्षा में योग्यता के आधार पर पात्र विद्यार्थियों को तीन वर्षों के लिए कक्षा छठी से आठवीं तक प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्राप्त होगी। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्र की स्कूल में 75 फीसदी उपस्थिति, अन्य किसी भी छात्रवृत्ति का लाभ न लेना अनिवार्य है। पात्र विद्यार्थी को छठी कक्षा में 4,000 प्रतिमाह, सातवीं कक्षा में 5,000 प्रतिमाह, आठवीं कक्षा में 6,000 प्रतिमाह रुपए छात्रवृत्ति प्राप्त होगी।
राज्य के सरकारी स्कूलों में स्वर्ण जयंती मिडल छात्रवृत्ति छात्रों के बैंक खातों में डाल दी गई है। लगभग दो माह से छात्र इस छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे थे। छात्रवृत्ति के लिए एससीईआरटी सोलन की ओर से राज्य स्तर पर परीक्षा करवाई गई थी। प्रदेश भर से एक सौ विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति दी जानी है। गौर रहे कि स्वर्ण जयंती मिडल छात्रवृत्ति योजना छठी कक्षा में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक स्तर पर प्रतिभा की पहचान और पोषण करने के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति परीक्षा में योग्यता के आधार पर पात्र विद्यार्थियों को तीन वर्षों के लिए कक्षा छठी से आठवीं तक प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्राप्त होगी। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्र की स्कूल में पचहत्तर फीसदी उपस्थिति, अन्य किसी भी छात्रवृत्ति का लाभ न लेना अनिवार्य है। पात्र विद्यार्थी को छठी कक्षा में चार,शून्य प्रतिमाह, सातवीं कक्षा में पाँच,शून्य प्रतिमाह, आठवीं कक्षा में छः,शून्य प्रतिमाह रुपए छात्रवृत्ति प्राप्त होगी।
बीजापुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर में विधायक विक्रम मंडावी के काफिले में नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का बयान सामने आया है। गृह मंत्री साहू ने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी को सुरक्षा बलों और एसपी के द्वारा रोका गया कि बिना जानकारी या सूचना के उधर मत जाइए। लेकिन अभी तक उनपर नक्सली हमले की जानकारी नहीं आई है। विधायक के काफिले में शामिल जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप का कहना है कि फायरिंग हुई है। काफिले के पीछे पत्रकारों का डर भी था उन्होंने भी फायरिंग होते नहीं देखी लेकिन टायर बदलते जरूर देखा। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार सभी कुशल मंगल है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि अभी प्राप्त जानकारी के अनुसार विक्रम मंडावी डांलूर की तरफ़ दौरे में जाने वाले थे। उनको सुरक्षा बलों के द्वारा एसपी के द्वारा रोका गया कि उधर मत जाइए। बिना सूचना बिना फोर्स बिना सिक्योरिटी के जाना उचित नहीं है। वह गए और वहां जाने के बाद भी रोका गया। उनको कहा गया कि हेलीकॉप्टर हमारे पास है उससे कर देते हैं लेकिन वह गए भी और साकुशल वापस भी आए हैं। उनके काफिले पर कहीं पर भी नक्सली हमले की जानकारी नही आई है। उनके पीछे जिला पंचायत सदस्य आ रही थी उनका कहना है फायरिंग हुआ है। उनके पीछे पत्रकारों का दल था वह भी आया। उन पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई ना उन्होंने कुछ जानकारी दी। उनके गाड़ी का टायर बदलते जरूर देखा। और विस्तृत जानकारी मंगाया जा रहा है। वहां पर सब कुशल है और कोई भी कैजुअल्टी नहीं हुई है। बता दें कि नक्सल संवेदनशील क्षेत्र गंगालूर के बाजार में नुक्कड़ सभा के बाद वहां से लौटते हुए बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी के वाहनों के दल पर नक्सलियों ने गोलीबारी की है। एक सप्ताह पहले पदेड़ा गांव के समीप जंगल में जिस जगह पर नक्सलियों ने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के दो टिप्पर में आगजनी की थी। मंगलवार की शाम करीब चार बजे उसी जगह पर दल में शामिल जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप की वाहन टोयोटा अर्बन कूजर पर फायरिंग की गई है। वाहन के पहिए पर गोली लगने से वह फट गया, जिसके बाद वाहन चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी को उसी अवस्था में पीछे ले जाकर पदेड़ा गांव में रोक दिया। इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। विधायक मंडावी ने कहा कि उन्हें इस बात की सूचना बीजापुर पहुंचने के बाद मिली है और उनके दल में शामिल सभी सुरक्षित हैं। एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने बताया कि घटना की सूचना मिली है पर अभी तक पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। मामले की विवेचना के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप ने बताया कि नुक्कड़ सभा के बाद सभी अपने-अपने वाहन में बैठकर जिला मुख्यालय की ओर निकल गए। सबसे आगे विधायक विक्रम मंडावी की गाड़ी निकली। इसके पांच मिनट बाद वे वहां से निकली। गंगालूर से दस किमी आगे चलकर पदेड़ा गांव पार करते ही चार-पांच वर्दीधारी नक्सली जंगल से निकलकर सामने आए और वाहन पर फायरिंग शुरु कर दी। एक गोली टायर में लगी, जिससे वह फट गया। वाहन चालक ने तुरंत ही गाड़ी को पीछे लेकर पदेड़ा गांव में वाहन को रोका। काफिले में पीछे आ रहे मीडियाकर्मी और अन्य वाहन भी पदेड़ा में ही ठहर गए। पदेड़ा संवेदनशील गांव है। इसे भांपते हुए करीब एक घंटे बाद मीडियाकर्मी अपनी वाहन छोड़कर पैदल ही वहां से आगे बढ़े, जिसके कुछ देर बाद जिला पंचायत सदस्य कश्यप भी वहां से निकलकर बीजापुर पहुंची। गंगालूर की सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, कांगेस जिलाध्यक्ष लालू राठौर, जनपद उपाध्यक्ष सोनू पोटाम, जनपद अध्यक्ष बोधी गायता, सांसद प्रतिनिधि वेणुगोपाल राव, नगरपालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर सहित अन्य कांग्रेसी सम्मिलित होने पहुंचे थे।
बीजापुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर में विधायक विक्रम मंडावी के काफिले में नक्सली हमले को लेकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का बयान सामने आया है। गृह मंत्री साहू ने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी को सुरक्षा बलों और एसपी के द्वारा रोका गया कि बिना जानकारी या सूचना के उधर मत जाइए। लेकिन अभी तक उनपर नक्सली हमले की जानकारी नहीं आई है। विधायक के काफिले में शामिल जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप का कहना है कि फायरिंग हुई है। काफिले के पीछे पत्रकारों का डर भी था उन्होंने भी फायरिंग होते नहीं देखी लेकिन टायर बदलते जरूर देखा। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार सभी कुशल मंगल है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि अभी प्राप्त जानकारी के अनुसार विक्रम मंडावी डांलूर की तरफ़ दौरे में जाने वाले थे। उनको सुरक्षा बलों के द्वारा एसपी के द्वारा रोका गया कि उधर मत जाइए। बिना सूचना बिना फोर्स बिना सिक्योरिटी के जाना उचित नहीं है। वह गए और वहां जाने के बाद भी रोका गया। उनको कहा गया कि हेलीकॉप्टर हमारे पास है उससे कर देते हैं लेकिन वह गए भी और साकुशल वापस भी आए हैं। उनके काफिले पर कहीं पर भी नक्सली हमले की जानकारी नही आई है। उनके पीछे जिला पंचायत सदस्य आ रही थी उनका कहना है फायरिंग हुआ है। उनके पीछे पत्रकारों का दल था वह भी आया। उन पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई ना उन्होंने कुछ जानकारी दी। उनके गाड़ी का टायर बदलते जरूर देखा। और विस्तृत जानकारी मंगाया जा रहा है। वहां पर सब कुशल है और कोई भी कैजुअल्टी नहीं हुई है। बता दें कि नक्सल संवेदनशील क्षेत्र गंगालूर के बाजार में नुक्कड़ सभा के बाद वहां से लौटते हुए बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी के वाहनों के दल पर नक्सलियों ने गोलीबारी की है। एक सप्ताह पहले पदेड़ा गांव के समीप जंगल में जिस जगह पर नक्सलियों ने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के दो टिप्पर में आगजनी की थी। मंगलवार की शाम करीब चार बजे उसी जगह पर दल में शामिल जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप की वाहन टोयोटा अर्बन कूजर पर फायरिंग की गई है। वाहन के पहिए पर गोली लगने से वह फट गया, जिसके बाद वाहन चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी को उसी अवस्था में पीछे ले जाकर पदेड़ा गांव में रोक दिया। इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। विधायक मंडावी ने कहा कि उन्हें इस बात की सूचना बीजापुर पहुंचने के बाद मिली है और उनके दल में शामिल सभी सुरक्षित हैं। एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने बताया कि घटना की सूचना मिली है पर अभी तक पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। मामले की विवेचना के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप ने बताया कि नुक्कड़ सभा के बाद सभी अपने-अपने वाहन में बैठकर जिला मुख्यालय की ओर निकल गए। सबसे आगे विधायक विक्रम मंडावी की गाड़ी निकली। इसके पांच मिनट बाद वे वहां से निकली। गंगालूर से दस किमी आगे चलकर पदेड़ा गांव पार करते ही चार-पांच वर्दीधारी नक्सली जंगल से निकलकर सामने आए और वाहन पर फायरिंग शुरु कर दी। एक गोली टायर में लगी, जिससे वह फट गया। वाहन चालक ने तुरंत ही गाड़ी को पीछे लेकर पदेड़ा गांव में वाहन को रोका। काफिले में पीछे आ रहे मीडियाकर्मी और अन्य वाहन भी पदेड़ा में ही ठहर गए। पदेड़ा संवेदनशील गांव है। इसे भांपते हुए करीब एक घंटे बाद मीडियाकर्मी अपनी वाहन छोड़कर पैदल ही वहां से आगे बढ़े, जिसके कुछ देर बाद जिला पंचायत सदस्य कश्यप भी वहां से निकलकर बीजापुर पहुंची। गंगालूर की सभा में जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, कांगेस जिलाध्यक्ष लालू राठौर, जनपद उपाध्यक्ष सोनू पोटाम, जनपद अध्यक्ष बोधी गायता, सांसद प्रतिनिधि वेणुगोपाल राव, नगरपालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर सहित अन्य कांग्रेसी सम्मिलित होने पहुंचे थे।
सुंदरता को निखारने के लिए जरूरी नहीं है कि महंगे या ब्रांडेड सौंदर्य प्रसाधनों का ही उपयोग किया जाए। इसके लिए आप घर में ही कुछ चीजों का उपयोग कर अपने सौंदर्य को बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं इसी बारे में कुछ बातें यहां बतायी जा रही हैं। नींबू के रस में आंवले का चूर्ण मिलाकर बालों की जड़ों में लगाने से बाल जल्दी बढ़ते हैं। रात को आंवले का चूर्ण भिगो दें और सुबह उन्हें मसलकर पानी निकाल लें। इस पानी में एक-दो कागजी नींबू निचोड़ दें। उसी पानी से बाल धो लें। पके व सूखे आंवले के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाएं। आप चाहें तो उसमें चमेली का तेल भी डाल सकती हैं। फिर उस तेल से सिर पर मालिश करें। तरोताजा और नर्म-मुलायम बन जाएगी। 15 दिन में एक बार चेहरे को भाप अवश्य दें। इसके लिए उबलते पानी में धुला साफ पुदीना, तुलसी की पत्ति और एक चम्मच नींबू का रस डालकर उबालें और इस पानी की भाप लें। नहाने के पानी में एक नींबू का रस मिलाएं। इससे न सिर्फ ताजगी मिलेगी बल्कि त्वचा भी निखरेगी। थोड़े से गर्म पानी में नींबू का रस मिला लें और इस पानी से बालों को फाइनल रिंस करें, बालों में नई चमक आ जाएगी। नींबू के रस और शहद को पानी में मिलाकर बालों में लगाने से रुखापन कम होता है। 3 नींबू, 1 ककड़ी, 1 संतरा और 1 चाय का चम्मच गुलाबजल, मिलाकर रख लें और चेहरे पर नियमित लगाएं। इससे लैकहेड्स की समस्या से छुटकारा मिलता है। बेसन, नींबू का रस और दही इन सबको समान मात्रा में लेकर बालों में मसाज करें, फिर बालों को धो लें। आखिर में बालों को नींबू के पानी से फाइनल रिंस करें।
सुंदरता को निखारने के लिए जरूरी नहीं है कि महंगे या ब्रांडेड सौंदर्य प्रसाधनों का ही उपयोग किया जाए। इसके लिए आप घर में ही कुछ चीजों का उपयोग कर अपने सौंदर्य को बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं इसी बारे में कुछ बातें यहां बतायी जा रही हैं। नींबू के रस में आंवले का चूर्ण मिलाकर बालों की जड़ों में लगाने से बाल जल्दी बढ़ते हैं। रात को आंवले का चूर्ण भिगो दें और सुबह उन्हें मसलकर पानी निकाल लें। इस पानी में एक-दो कागजी नींबू निचोड़ दें। उसी पानी से बाल धो लें। पके व सूखे आंवले के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाएं। आप चाहें तो उसमें चमेली का तेल भी डाल सकती हैं। फिर उस तेल से सिर पर मालिश करें। तरोताजा और नर्म-मुलायम बन जाएगी। पंद्रह दिन में एक बार चेहरे को भाप अवश्य दें। इसके लिए उबलते पानी में धुला साफ पुदीना, तुलसी की पत्ति और एक चम्मच नींबू का रस डालकर उबालें और इस पानी की भाप लें। नहाने के पानी में एक नींबू का रस मिलाएं। इससे न सिर्फ ताजगी मिलेगी बल्कि त्वचा भी निखरेगी। थोड़े से गर्म पानी में नींबू का रस मिला लें और इस पानी से बालों को फाइनल रिंस करें, बालों में नई चमक आ जाएगी। नींबू के रस और शहद को पानी में मिलाकर बालों में लगाने से रुखापन कम होता है। तीन नींबू, एक ककड़ी, एक संतरा और एक चाय का चम्मच गुलाबजल, मिलाकर रख लें और चेहरे पर नियमित लगाएं। इससे लैकहेड्स की समस्या से छुटकारा मिलता है। बेसन, नींबू का रस और दही इन सबको समान मात्रा में लेकर बालों में मसाज करें, फिर बालों को धो लें। आखिर में बालों को नींबू के पानी से फाइनल रिंस करें।
Jhansi Web Series On OTT: अगर आप इस एक्शन ड्रामा फिल्म का लुत्फ़ उठाना चाहते हैं तो इसे आप डिज़्नी हॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफार्म पर जाकर बात कर सकते हैं। जब ये सीरीज आई तो इसके दूसरे सीजन को लेकर भी खबरें सामने आनी लगी। ये खबरें मिलीं कि झांसी वेब सीरीज के दूसरे सीजन को भी जनवरी 2023 में रिलीज़ किया जाएगा। यहां हम झांसी वेब सीरीज की दूसरे सीजन की रिलीज़ डेट आपको बताएंगे। नई दिल्ली। अक्टूबर 2022 में ओटीटी प्लेटफार्म डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर एक वेब सीरीज आती थी जिसका नाम है झांसी। ये महिला प्रधान सीरीज है। जिसकी मुख्य पात्र एक महिला है। इस सीरीज को तेलुगु भाषा में निर्माण किया गया है। लेकिन इसे आप हिंदी और अन्य भाषा में भी देख सकते हैं। इस फिल्म को क्रिटिक और दर्शकों की तरफ से अच्छा प्यार मिला है। फिल्म में साऊथ सिनेमा की जानी मानी अंजलि ने मुख्य पात्र की भूमिका निभाई है। इस सीरीज से उन्होंने अपना ओटीटी पर डेव्यू भी किया है। अगर आप इस एक्शन ड्रामा फिल्म का लुत्फ़ उठाना चाहते हैं तो इसे आप डिज़्नी हॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफार्म पर जाकर बात कर सकते हैं। जब ये सीरीज आई तो इसके दूसरे सीजन को लेकर भी खबरें सामने आनी लगी। ये खबरें मिलीं कि झांसी वेब सीरीज के दूसरे सीजन को भी जनवरी 2023 में रिलीज़ किया जाएगा। यहां हम झांसी वेब सीरीज की दूसरे सीजन की रिलीज़ डेट आपको बताएंगे। झांसी वेब सीरीज के सीजन 2 की चर्चा जोरों पर थी। जनवरी 2023 में इसका दूसरा सीजन आएगा ये तय था लेकिन कोई तारिख सुनिश्चित नहीं थी अब इस वेब सीरीज की तारीख भी बता दी गई है और आपको बता दें 19 जनवरी 2023 को झांसी का दूसरा सीजन डिज़्नी हॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ किया जाएगा। झांसी के सीजन 2 में सीजन 1 के आगे की कहानी को दिखाया जाएगा। सीजन 1 में हमने देखा था कैसे झांसी जो गुंडों के द्वारा हमला करने के बाद एक वाटर फॉल में गिर जाती है। जिसके बाद उसे गांववाले बचाते हैं। इस घटना के बाद उसे अपना अतीत याद नहीं रहता है और फिर वो एक हैदराबाद के एक सम्राट के पास रहने लगती है। हैदराबाद का सम्राट उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता है लेकिन झांसी इसके लिए राजी नहीं होती है। झांसी अपनी पुरानी जिंदगी को याद करने की कोशिश करती है लेकिन उसे कुछ याद नहीं रहता है अब सीजन 2 की कहानी यहीं से आगे बढ़ाई जाएगी। Jhansi is back with a double dose of action, adventure, and drama! ? ? Season 2 premieres January 19, only on #DisneyPlusHotstar. झांसी सीजन 2 में आपको देखने को मिलेगा कि कैसे अंजलि को अपने बचपन का कुछ याद नहीं है लेकिन उसने अपने कई दुश्मन बना लिए हैं और इसके इर्द गिर्द कहानी देखने को मिलने वाली है। हाल ही में अंजलि ने फॉल सीरीज में भी काम किया है जिसे डिज़्नी हॉटस्टार के ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ किया गया था इसके अलावा ज़ी5 पर भी उनकी एक वेब सीरीज Bahishkarana में भी वो देखने को मिलेंगी।
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लंदनः ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, जिसके बाद वैज्ञानिकों और दुनिया के लोगों में खौफ और हड़कंप है। ब्रिटेन ने भी अपने यहां सख्ती को बढ़ा दिया है। इसके मद्देनजर ब्रिटेन में सबसे सख्त लॉकडाउन लागू किया गया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने चेतावनी दी है कि लंदन महीनों तक लॉकडाउन के अधीन रह सकता है क्योंकि टीकाकरण शुरू होने तक कोरोना वायरस के अत्यधिक संक्रामक होने के कारण उसे काबू में रखना बहुत मुश्किल होगा। मैट हैनकॉक ने कहा है कि टियर-4 इलाकों में रहने वाले लोगों को इस तरह से व्यवहार करना चाहिए कि उनके पास वायरस हो सकता है। यही एकमात्र तरीका है, जिससे हम इसे नियंत्रण में रख सकते हैं। स्थिति बहुत गंभीर है और वायरस के नए प्रकार ने इसे और अधिक कठिन बना दिया है। बता दें कि टियर-4 सबसे कड़ा प्रतिबंध है, जिसे ब्रिटेन के कुछ इलाकों में लगाने का एलान किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को उनकी टिप्पणी के कुछ ही समय बाद ब्रिटिश राजधानी और दक्षिण पूर्व इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में टियर-4 के प्रतिबंध लागू हो गए। नए प्रतिबंध 30 दिसंबर तक लागू रहेंगे। ब्रिटेन के जिन इलाक़ों में टियर-4 के प्रतिबंध लागू हैं, वहां लोगों को अपने घरों में ही रहने, जरूरत न होने पर घर से बाहर नहीं निकलने, अपने इलाके से बाहर न जाने और दूसरे इलाकों के लोगों से न मिलने के लिए कहा गया। साथ ही इन इलाकों में घर से बाहर निकल कर सार्वजनिक जगहों पर एक व्यक्ति केवल एक ही व्यक्ति से मुलाक़ात करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने कहा कि हमें नए संस्करण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सभी अलग-अलग उपाय अपनाने होंगे। पुराने संस्करण के कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए यही मूलभूत समस्या रही। हैनकॉक ने ऐसे लोगों की भी आलोचना की जो चौथे चरण के लॉकडाउन लागू करने से पहले लंदन से फरार हो गए, यह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने लंदन, दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी इंग्लैंड में क्रिसमस के कार्यक्रम को प्रभावी रूप से रद्द कर दिया क्योंकि रविवार आधी रात से इस क्षेत्र में दो सप्ताह के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। बोरिस जॉनसन ने स्पष्ट किया कि क्रिसमस इस बार पहले से अलग होगा। उन्होंने कहा कि पहले जो योजना तैयार की गई थी, उसके अनुसार इस बार हम क्रिसमस नहीं मना सकते। लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के डॉ. एरिक वोल्ज ने कहा कि फिलहाल जो दिखाई दे रहा है, उसके मुताबिक यह बहुत तेजी से फैल रहा है। इस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। उधर, ब्रिटिश सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वालेंस ने कहा कि इसकी मौजूदगी अन्य देशों में भी हो सकती है, लेकिन इसकी शुरुआत ब्रिटेन से हुई है। ब्रिटेन के पीएम बोरिस जानसन ने पिछले शनिवार को बताया था कि यूके में मिला नया स्ट्रेन करीब 60-70 फीसद तक अधिक संक्रामक है। लिहाजा ये पहले से ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, इसकी वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। इटली में जिन दो मरीजों में इस वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, वे कुछ दिन पहले लंदन से आए थे। फिलहाल दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है। जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड समेत यूरोप के कई देशों ने ब्रिटेन की फ्लाइट पर ही बैन लगा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोरोना के इस नए स्ट्रेन पर अध्ययन किया जा रहा है।
लंदनः ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, जिसके बाद वैज्ञानिकों और दुनिया के लोगों में खौफ और हड़कंप है। ब्रिटेन ने भी अपने यहां सख्ती को बढ़ा दिया है। इसके मद्देनजर ब्रिटेन में सबसे सख्त लॉकडाउन लागू किया गया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने चेतावनी दी है कि लंदन महीनों तक लॉकडाउन के अधीन रह सकता है क्योंकि टीकाकरण शुरू होने तक कोरोना वायरस के अत्यधिक संक्रामक होने के कारण उसे काबू में रखना बहुत मुश्किल होगा। मैट हैनकॉक ने कहा है कि टियर-चार इलाकों में रहने वाले लोगों को इस तरह से व्यवहार करना चाहिए कि उनके पास वायरस हो सकता है। यही एकमात्र तरीका है, जिससे हम इसे नियंत्रण में रख सकते हैं। स्थिति बहुत गंभीर है और वायरस के नए प्रकार ने इसे और अधिक कठिन बना दिया है। बता दें कि टियर-चार सबसे कड़ा प्रतिबंध है, जिसे ब्रिटेन के कुछ इलाकों में लगाने का एलान किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को उनकी टिप्पणी के कुछ ही समय बाद ब्रिटिश राजधानी और दक्षिण पूर्व इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में टियर-चार के प्रतिबंध लागू हो गए। नए प्रतिबंध तीस दिसंबर तक लागू रहेंगे। ब्रिटेन के जिन इलाक़ों में टियर-चार के प्रतिबंध लागू हैं, वहां लोगों को अपने घरों में ही रहने, जरूरत न होने पर घर से बाहर नहीं निकलने, अपने इलाके से बाहर न जाने और दूसरे इलाकों के लोगों से न मिलने के लिए कहा गया। साथ ही इन इलाकों में घर से बाहर निकल कर सार्वजनिक जगहों पर एक व्यक्ति केवल एक ही व्यक्ति से मुलाक़ात करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने कहा कि हमें नए संस्करण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सभी अलग-अलग उपाय अपनाने होंगे। पुराने संस्करण के कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए यही मूलभूत समस्या रही। हैनकॉक ने ऐसे लोगों की भी आलोचना की जो चौथे चरण के लॉकडाउन लागू करने से पहले लंदन से फरार हो गए, यह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने लंदन, दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी इंग्लैंड में क्रिसमस के कार्यक्रम को प्रभावी रूप से रद्द कर दिया क्योंकि रविवार आधी रात से इस क्षेत्र में दो सप्ताह के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। बोरिस जॉनसन ने स्पष्ट किया कि क्रिसमस इस बार पहले से अलग होगा। उन्होंने कहा कि पहले जो योजना तैयार की गई थी, उसके अनुसार इस बार हम क्रिसमस नहीं मना सकते। लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के डॉ. एरिक वोल्ज ने कहा कि फिलहाल जो दिखाई दे रहा है, उसके मुताबिक यह बहुत तेजी से फैल रहा है। इस पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। उधर, ब्रिटिश सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वालेंस ने कहा कि इसकी मौजूदगी अन्य देशों में भी हो सकती है, लेकिन इसकी शुरुआत ब्रिटेन से हुई है। ब्रिटेन के पीएम बोरिस जानसन ने पिछले शनिवार को बताया था कि यूके में मिला नया स्ट्रेन करीब साठ-सत्तर फीसद तक अधिक संक्रामक है। लिहाजा ये पहले से ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, इसकी वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। इटली में जिन दो मरीजों में इस वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, वे कुछ दिन पहले लंदन से आए थे। फिलहाल दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है। जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड समेत यूरोप के कई देशों ने ब्रिटेन की फ्लाइट पर ही बैन लगा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोरोना के इस नए स्ट्रेन पर अध्ययन किया जा रहा है।
एक बार की बात है भगवान बुद्ध कहीं जा रहे थे। रास्ते में थोड़ी देर के लिए वह एक पेड़ के नीचे रुक गए वह आम का पेड़ था। उस पेड़ पर आम लगे हुए थे। वहां कई बच्चे खेल रहे थे। खेलते -खेलते उनका ध्यान पेड़ पर लगे आम की ओर गया। उन्होंने पत्थर मारकर आम तोड़ने शुरू कर दिया। आम नीचे गिरने लगे और बच्चे उन्हें उठाकर खाने लगे। अचानक एक लड़के का हाथ चूक गया और एक पत्थर आम में लगने की बजाय भगवान् बुद्ध के सिर में लग गया और खून निकल आया। यह देख कर बच्चे बहुत घबराये, वह बोले अब क्या करें! उनका खेल बंद हो गया। वे बुद्ध के पास गए और बोले 'हमसे भूल हो गई है हमें क्षमा कर दीजिए। बुद्ध की आँखों में आंसू भरे थे। उन्होंने बच्चों से कहा तुम लोग परेशान मत हो,जाओ जाकर खेलो। बच्चे बोले आपको चोट आयी है। दर्द से आपकी आँखों में आंसू आ गए है। मुझे दुख जरूर है पर इस छूट का नहीं। तब किस बात का, एक बच्चे ने पूंछा। भगवान बुद्ध ने कहा, तुमने पेड़ को पत्थर मारे, उसने तुम्हें आम दिया। मुझे दुख इस बात का है कि पत्थर मारने के बदले मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका। बच्चे इस बात को सुनकर सिर झुका कर चले गए।
एक बार की बात है भगवान बुद्ध कहीं जा रहे थे। रास्ते में थोड़ी देर के लिए वह एक पेड़ के नीचे रुक गए वह आम का पेड़ था। उस पेड़ पर आम लगे हुए थे। वहां कई बच्चे खेल रहे थे। खेलते -खेलते उनका ध्यान पेड़ पर लगे आम की ओर गया। उन्होंने पत्थर मारकर आम तोड़ने शुरू कर दिया। आम नीचे गिरने लगे और बच्चे उन्हें उठाकर खाने लगे। अचानक एक लड़के का हाथ चूक गया और एक पत्थर आम में लगने की बजाय भगवान् बुद्ध के सिर में लग गया और खून निकल आया। यह देख कर बच्चे बहुत घबराये, वह बोले अब क्या करें! उनका खेल बंद हो गया। वे बुद्ध के पास गए और बोले 'हमसे भूल हो गई है हमें क्षमा कर दीजिए। बुद्ध की आँखों में आंसू भरे थे। उन्होंने बच्चों से कहा तुम लोग परेशान मत हो,जाओ जाकर खेलो। बच्चे बोले आपको चोट आयी है। दर्द से आपकी आँखों में आंसू आ गए है। मुझे दुख जरूर है पर इस छूट का नहीं। तब किस बात का, एक बच्चे ने पूंछा। भगवान बुद्ध ने कहा, तुमने पेड़ को पत्थर मारे, उसने तुम्हें आम दिया। मुझे दुख इस बात का है कि पत्थर मारने के बदले मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका। बच्चे इस बात को सुनकर सिर झुका कर चले गए।
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के एक छात्र को स्कूल प्रबंधन ने महज इसलिए निष्कासित कर दिया गया कि उसकी दादी ने सूचनाधिकार (आरटीआई) के तहत अपने पोते की फीस से जुड़ी जानकारी मांगी। शिकायत मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह मामला इटावा के बसरेहर थानाक्षेत्र के सरस्वती विद्या मंदिर (इंटर कालेज) का है। छात्र अमोघ पाठक की दादी ने आरटीआई दायर कर फीस संबंधी जानकारी मांगी थी। आरोप है कि इसी से नाराज होकर स्कूल प्रबंधन ने चौथी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे को निकाल दिया। बच्चे को बीच सत्र में स्कूल से निकाले जाने से अभिभावक परेशान हैं। इधर, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चे के 'पिता का चरित्र' ठीक नहीं है। इसलिए बच्चे को यहां पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में (25-30 वर्षों में) पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के एक छात्र को स्कूल प्रबंधन ने महज इसलिए निष्कासित कर दिया गया कि उसकी दादी ने सूचनाधिकार के तहत अपने पोते की फीस से जुड़ी जानकारी मांगी। शिकायत मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह मामला इटावा के बसरेहर थानाक्षेत्र के सरस्वती विद्या मंदिर का है। छात्र अमोघ पाठक की दादी ने आरटीआई दायर कर फीस संबंधी जानकारी मांगी थी। आरोप है कि इसी से नाराज होकर स्कूल प्रबंधन ने चौथी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे को निकाल दिया। बच्चे को बीच सत्र में स्कूल से निकाले जाने से अभिभावक परेशान हैं। इधर, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चे के 'पिता का चरित्र' ठीक नहीं है। इसलिए बच्चे को यहां पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। पणजी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य व हिंदी पखवाड़ा के समापन समारोह में भारतीय नौसेना एवम होली ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम कवि सम्मेलन अद्वतीय रहा। रियर एडमिरल, कमोडोर, कैप्टन, कमांडर, लेफ़्टिनेंट कमांडर व कनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों ने होली ग्रुप की भूरि-भूरि प्रशंसा किया। अधिकारियों ने कहा आप सबकी गरिमामय उपस्थिति और होली टीम की मेहनत की वजह से हम लोग एक और मील का पत्थर गाड़ने में सफल रहे। हमारे होली के उन साथियों को कोटि -कोटि धन्यवाद जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा विशेषत सूरज नाईक, जे के सिंह, सरोज राय व बीएम यादव ने टीम वर्क का परिचय देते हुए कामयाबी का झंडा गाड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे दूसरे होली ग्रुप के मेम्बर, जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम में भाग लिया। इनके अतिरिक्त होली ग्रुप के दूसरे मेम्बर, जिन्होंने पहुँचकर कार्यक्रम में चार चाँद लगाये, उनमे विसन सिंह, प्रेम मिश्रा, सुशील शुक्ला व अभिलाष द्विवेदी की भूमिका सराहनीय रही। अंततः आप सबको सफल कार्यक्रम की हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की अनंत शुभ कामनाएँ प्रेषित। भारतीय नौसेना के जवानों के अनुसार , ऐसा सुंदर कार्यक्रम/आयोजन व होली ग्रुप द्वारा दी गई प्रस्तुति उनके सर्विस जीवन में पहली बार हुआ है एवम सबके चेहरे पर मुस्कान थी व होली ग्रुप के लिए कृतज्ञता।
एक अधिकारी ने कहा कि नए उच्च न्यायालय भवन में 25 वातानुकूलित अदालत कक्ष और वकीलों के लिए 1,200 लोगों के बैठने की क्षमता वाले दो हॉल और 540 कक्ष हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों झारखंड के तीन दिवसीय दौरे हैं। इन दौरान वह कार्यक्रमों में भी भाग ले रही हैं। उन्होंने बुधवार को रांची में करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित झारखंड उच्च न्यायालय के नए भवन का उद्घाटन किया। नए उच्च न्यायालय का 165 एकड़ परिसर क्षेत्र के मामले में देश में सबसे बड़ा है। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। एक अधिकारी ने कहा कि नए उच्च न्यायालय भवन में 25 वातानुकूलित अदालत कक्ष और वकीलों के लिए 1,200 लोगों के बैठने की क्षमता वाले दो हॉल और 540 कक्ष हैं। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देवघर, झारखंड में बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन किए और सभी देशवासियों के कल्याण हेतु प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने रांची में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा और परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की प्रतिमाओं पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि कभी-कभी अदालती आदेश लागू नहीं होते। सरकार और भारत के मुख्य न्यायाधीश को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को सही मायने में न्याय मिले। यहां झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि अनुकूल फैसला आने के बाद भी लोगों की खुशी कभी-कभी अल्पकालिक होती है, क्योंकि अदालत के आदेश लागू नहीं हो पाते। राष्ट्रपति ने हिंदी में बोलने के लिए सीजेआई की सराहना करते हुए कहा कि न्याय की भाषा समावेशी होनी चाहिए। मुर्मू ने कहा कई बार, न्याय की महंगी प्रक्रिया इसे आम लोगों की पहुंच से दूर कर देती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
एक अधिकारी ने कहा कि नए उच्च न्यायालय भवन में पच्चीस वातानुकूलित अदालत कक्ष और वकीलों के लिए एक,दो सौ लोगों के बैठने की क्षमता वाले दो हॉल और पाँच सौ चालीस कक्ष हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों झारखंड के तीन दिवसीय दौरे हैं। इन दौरान वह कार्यक्रमों में भी भाग ले रही हैं। उन्होंने बुधवार को रांची में करीब पाँच सौ पचास करोड़ रुपये की लागत से निर्मित झारखंड उच्च न्यायालय के नए भवन का उद्घाटन किया। नए उच्च न्यायालय का एक सौ पैंसठ एकड़ परिसर क्षेत्र के मामले में देश में सबसे बड़ा है। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। एक अधिकारी ने कहा कि नए उच्च न्यायालय भवन में पच्चीस वातानुकूलित अदालत कक्ष और वकीलों के लिए एक,दो सौ लोगों के बैठने की क्षमता वाले दो हॉल और पाँच सौ चालीस कक्ष हैं। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देवघर, झारखंड में बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन किए और सभी देशवासियों के कल्याण हेतु प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने रांची में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा और परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की प्रतिमाओं पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि कभी-कभी अदालती आदेश लागू नहीं होते। सरकार और भारत के मुख्य न्यायाधीश को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को सही मायने में न्याय मिले। यहां झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि अनुकूल फैसला आने के बाद भी लोगों की खुशी कभी-कभी अल्पकालिक होती है, क्योंकि अदालत के आदेश लागू नहीं हो पाते। राष्ट्रपति ने हिंदी में बोलने के लिए सीजेआई की सराहना करते हुए कहा कि न्याय की भाषा समावेशी होनी चाहिए। मुर्मू ने कहा कई बार, न्याय की महंगी प्रक्रिया इसे आम लोगों की पहुंच से दूर कर देती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
गयाः बोधगया में तिब्बती आध्यात्मिक बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा (Dalai Lama) एक महीने के प्रवास पर हैं. करीब एक लाख विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की आने की संभावना है. विदेशी पर्यटकों के आने का सिलसिला जारी है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एहतियात के तौर पर गया एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और तिब्बत मंदिर के समीप रैपिड एंटीजन टेस्ट का शिविर व केंद्र बनाया गया है. इधर, रविवार को जांच के दौरान चार लोग कोरोना (Corona Virus) से संक्रमित पाए गए हैं. इसमें तीन लोग इंग्लैंड से हैं तो एक म्यांमार के मिले हैं. इस खबर के आते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है.33 लोगों को थी सर्दी और खांसी की शिकायत गया पहुंचे 33 विदेशियों को सर्दी खांसी की शिकायत होने के बाद आरटी पीसीआर जांच कराई गई जिसमें चार की रिपोर्ट कोरोना से संक्रमित होने की आई है. सभी 33 यात्री गया एयरपोर्ट पर 20 दिसंबर को बैंकॉक से आए थे. संक्रमित में तीन इंग्लैंड के रहने वाले हैं जिन्हें बोधगया के एक होटल में मेडिकल किट देकर होम आइसोलेट कर दिया गया है. वहीं एक म्यांमार का रहने वाला था जो दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है. इस खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट है. कोरोना को लेकर तैयार हॉस्पिटलसिविल सर्जन डॉ रंजन कुमार सिंह ने बताया की कोरोना के नए वेरिएंट के बढ़ते कुप्रभाव को देखते हुए एयरपोर्ट पर दो शिफ्ट और रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्टों में कोरोना की जांच की जा रही है. चूंकि दलाई लामा के आगमन के बाद विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या पहुंचने वाली हैं और उनके आने का सिलसिला शुरू है. इसे देखते हुए बोधगया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 बेड, एनएमसीएच के पूरी बिल्डिंग को और गया सदर अस्पताल के 10 आईसीयू बेड को रिजर्व रखा गया है. वहीं कोरोना जांच केंद्र को क्रियाशील कर दिया गया है.दलाई लामा के कार्यक्रम में आएंगे लाखों लोगबता दें कि बोधगया में तिब्बती आध्यात्मिक बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा एक महीने के प्रवास पर हैं. उनका तिब्बत मंदिर में आवासन स्थल बनाया गया है. आगामी 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक कालचक्र मैदान में प्रवचन देंगे. उनके प्रवचन में शामिल होने के लिए 50 से अधिक देशों से विदेशी पर्यटक,बौद्ध अनुयायी और बौद्ध लामाओ ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है. ऐसे में कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर बोधगया में आयोजित प्रवचन में मास्क को अनिवार्य का एडवाइजरी डीएम डॉ त्यागराजन एसएम ने किया है.
गयाः बोधगया में तिब्बती आध्यात्मिक बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा एक महीने के प्रवास पर हैं. करीब एक लाख विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की आने की संभावना है. विदेशी पर्यटकों के आने का सिलसिला जारी है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एहतियात के तौर पर गया एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और तिब्बत मंदिर के समीप रैपिड एंटीजन टेस्ट का शिविर व केंद्र बनाया गया है. इधर, रविवार को जांच के दौरान चार लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. इसमें तीन लोग इंग्लैंड से हैं तो एक म्यांमार के मिले हैं. इस खबर के आते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है.तैंतीस लोगों को थी सर्दी और खांसी की शिकायत गया पहुंचे तैंतीस विदेशियों को सर्दी खांसी की शिकायत होने के बाद आरटी पीसीआर जांच कराई गई जिसमें चार की रिपोर्ट कोरोना से संक्रमित होने की आई है. सभी तैंतीस यात्री गया एयरपोर्ट पर बीस दिसंबर को बैंकॉक से आए थे. संक्रमित में तीन इंग्लैंड के रहने वाले हैं जिन्हें बोधगया के एक होटल में मेडिकल किट देकर होम आइसोलेट कर दिया गया है. वहीं एक म्यांमार का रहने वाला था जो दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है. इस खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट है. कोरोना को लेकर तैयार हॉस्पिटलसिविल सर्जन डॉ रंजन कुमार सिंह ने बताया की कोरोना के नए वेरिएंट के बढ़ते कुप्रभाव को देखते हुए एयरपोर्ट पर दो शिफ्ट और रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्टों में कोरोना की जांच की जा रही है. चूंकि दलाई लामा के आगमन के बाद विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या पहुंचने वाली हैं और उनके आने का सिलसिला शुरू है. इसे देखते हुए बोधगया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दस बेड, एनएमसीएच के पूरी बिल्डिंग को और गया सदर अस्पताल के दस आईसीयू बेड को रिजर्व रखा गया है. वहीं कोरोना जांच केंद्र को क्रियाशील कर दिया गया है.दलाई लामा के कार्यक्रम में आएंगे लाखों लोगबता दें कि बोधगया में तिब्बती आध्यात्मिक बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा एक महीने के प्रवास पर हैं. उनका तिब्बत मंदिर में आवासन स्थल बनाया गया है. आगामी उनतीस दिसंबर से इकतीस दिसंबर तक कालचक्र मैदान में प्रवचन देंगे. उनके प्रवचन में शामिल होने के लिए पचास से अधिक देशों से विदेशी पर्यटक,बौद्ध अनुयायी और बौद्ध लामाओ ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है. ऐसे में कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर बोधगया में आयोजित प्रवचन में मास्क को अनिवार्य का एडवाइजरी डीएम डॉ त्यागराजन एसएम ने किया है.
बिलासपुर(निप्र)। पेशे से वकील लखन लाल साहू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत संगठन के कामकाज से शुरू की। विधानसभा के परिसीमन से पहले प्रदेश भाजपा ने जरहागांव को मंडल बनाया था। श्री साहू जरहागांव मंडल के अध्यक्ष के रूप में . . . chhattisgarhSun, 16 Mar 2014 02:57 AM (IST) लोकसभा चुनाव के मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने रविवार को साफ किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। nationalSun, 09 Feb 2014 08:30 PM (IST)
बिलासपुर। पेशे से वकील लखन लाल साहू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत संगठन के कामकाज से शुरू की। विधानसभा के परिसीमन से पहले प्रदेश भाजपा ने जरहागांव को मंडल बनाया था। श्री साहू जरहागांव मंडल के अध्यक्ष के रूप में . . . chhattisgarhSun, सोलह मार्च दो हज़ार चौदह दो:सत्तावन AM लोकसभा चुनाव के मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने रविवार को साफ किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। nationalSun, नौ फ़रवरी दो हज़ार चौदह आठ:तीस PM
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 31 जुलाई से चंबा जिला के तीन दिवसीय प्रवास पर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री रविवार सवेरे हेलीकाप्टर के जरिए चंबा हेलीपैड पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे चंबा के ऐतिहासिक चौगान में आयोजित होने वाले प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के 75 वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर बाद चौगान में दंगल प्रतियोगिता के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर विजेता व उपविजेता पहलवानों को पुरस्कृत करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मिंजर मेला के समापन मौके पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा की अगवाई करेंगे। मुख्यमंत्री मंजरी गार्डन में रावी नदी में मिंजर विसर्जित करने की रस्म अदा करेंगे। मुख्यमंत्री मिंजर मेला की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्यातिथि उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। पहली अगस्त को मुख्यमंत्री सुबह दस बजे भरमौर रवाना होंगे। मुख्यमंत्री भरमौर हेलीपैड में आयोजित होने वाले प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के 75 वर्ष कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री डलहौजी रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का रात्रि ठहराव डलहौजी सर्किट हाउस में रहेगा। मुख्यमंत्री 2 अगस्त को चुवाड़ी में सुबह 11 बजे राज्य स्तरीय वन महोत्सव की अध्यक्षता करने के पश्चात चुवाड़ी चौगान में प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के 75 वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर बाद शिमला रवाना होंगे। उपायुक्त डीसी राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे के आयोजन को लेकर तैयारियों को पूरा कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इकतीस जुलाई से चंबा जिला के तीन दिवसीय प्रवास पर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री रविवार सवेरे हेलीकाप्टर के जरिए चंबा हेलीपैड पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर बारह बजे चंबा के ऐतिहासिक चौगान में आयोजित होने वाले प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के पचहत्तर वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर बाद चौगान में दंगल प्रतियोगिता के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर विजेता व उपविजेता पहलवानों को पुरस्कृत करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मिंजर मेला के समापन मौके पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा की अगवाई करेंगे। मुख्यमंत्री मंजरी गार्डन में रावी नदी में मिंजर विसर्जित करने की रस्म अदा करेंगे। मुख्यमंत्री मिंजर मेला की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्यातिथि उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। पहली अगस्त को मुख्यमंत्री सुबह दस बजे भरमौर रवाना होंगे। मुख्यमंत्री भरमौर हेलीपैड में आयोजित होने वाले प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के पचहत्तर वर्ष कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री डलहौजी रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का रात्रि ठहराव डलहौजी सर्किट हाउस में रहेगा। मुख्यमंत्री दो अगस्त को चुवाड़ी में सुबह ग्यारह बजे राज्य स्तरीय वन महोत्सव की अध्यक्षता करने के पश्चात चुवाड़ी चौगान में प्रगतिशील हिमाचल स्थापना के पचहत्तर वर्ष कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर बाद शिमला रवाना होंगे। उपायुक्त डीसी राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे के आयोजन को लेकर तैयारियों को पूरा कर लिया गया है।
Ghatshila (Rajesh Chowbey) : राम जन्मोत्सव के बाद दशमी तिथि को क्षेत्र के सात अखाड़ा कमेटी द्वारा शुक्रवार को शोभा यात्रा निकाली गई. शोभायात्रा में क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों के साथ महिला, पुरुष व बच्चे शामिल हुए. घाटशिला मुख्य शहर से कुल सात अखाड़ा कमेटी द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई. हजारों की संख्या में लोगों ने जय श्री राम का उद्घोष करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए. जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र राममय बन गया. विधायक रामदास सोरेन, पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित कई जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न अखाड़ा कमेटी के लोगों से मिलकर रामनवमी की बधाई दी. शोभा यात्रा के दौरान नारी शक्ति एवं युवाओं द्वारा एक से बढ़कर एक करतब दिखाया. युवाओं द्वारा हैरतअंगेज करतब देखने के लिए पूरे शहरी क्षेत्र में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. शोभा यात्रा में राजस्टेट से लेकर मऊभंडार, टुमांनडूंगरी तक जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा सेवा शिविर लगाए गए थे. शोभायात्रा में शामिल एवं आने जाने वाले राहगीरों के लिए शीतल पेय एवं जलपान की व्यवस्था की गई. शोभा यात्रा के दौरान अनुमंडल प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी. प्रत्येक अखाड़ा कमेटी के साथ दंडाधिकारी एवं पुलिस बल तैनात किए गए थे.
Ghatshila : राम जन्मोत्सव के बाद दशमी तिथि को क्षेत्र के सात अखाड़ा कमेटी द्वारा शुक्रवार को शोभा यात्रा निकाली गई. शोभायात्रा में क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों के साथ महिला, पुरुष व बच्चे शामिल हुए. घाटशिला मुख्य शहर से कुल सात अखाड़ा कमेटी द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई. हजारों की संख्या में लोगों ने जय श्री राम का उद्घोष करते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए. जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र राममय बन गया. विधायक रामदास सोरेन, पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित कई जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न अखाड़ा कमेटी के लोगों से मिलकर रामनवमी की बधाई दी. शोभा यात्रा के दौरान नारी शक्ति एवं युवाओं द्वारा एक से बढ़कर एक करतब दिखाया. युवाओं द्वारा हैरतअंगेज करतब देखने के लिए पूरे शहरी क्षेत्र में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. शोभा यात्रा में राजस्टेट से लेकर मऊभंडार, टुमांनडूंगरी तक जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा सेवा शिविर लगाए गए थे. शोभायात्रा में शामिल एवं आने जाने वाले राहगीरों के लिए शीतल पेय एवं जलपान की व्यवस्था की गई. शोभा यात्रा के दौरान अनुमंडल प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी. प्रत्येक अखाड़ा कमेटी के साथ दंडाधिकारी एवं पुलिस बल तैनात किए गए थे.
फिर भी उसके पहनने का ढग निराला था जिसे देखकर कोई भी कह सकता था कि वह रूसी है, जिगीत नही । बात यही थी यद्यपि सही नही थी। परन्तु इन सबके होते हुए भी देखनेवाले कह सकते थे कि वह स्वस्थ है, खुश है और उसे श्रात्मसतोष है। " हाँ तुम्हे विचित्र ज़रूर लगता होगा, " वन्यूशा बोला, जरा इन लोगो से खुद वातचीत करके तो देखो । वे तुमसे बात न करेंगे वल्कि तुम्हारी मुखालिफत करेगे । तुम उनसे एक वात भी नहीं कहला सकते ! " दहलीज़ पर वाल्टी फेंकते हुए वन्यूशा ने कहा, "कुछ भी हो वे रूसी जैसे तो नही लगते । " " तुम्हे गाँव के मुखिया से कहना चाहिए । लेकिन मुझे क्या मालूम वह कहाँ रहता है ?" उसने चिढी हुई आवाज में कहा । मगर किसने तुम्हे इतना घवडा दिया है ? चारो ओर निगाह डालते हुए श्रोलेनिन ने पूछा । शैतान ही जाने । हुँह । यहाँ कोई असली मालिक नही । लोगो का कहना है कि वह किमी 'ऋिगा' में गया है । और वह वुटिया । वह तो पूरी चुडैल है । हे भगवान रक्षा करो, रक्षा करो।" सिर पर हाथ रखकर वन्यूशा बोला, "मैं नहीं जानता कि हम यहाँ कैसे रहेगे। मुझे यकीन है कि ये लोग तातारो मे भी गये चीते हैं, और कहते हैं अपने को ईसाई । तातार बुरा ज़रूर है परन्तु होता उदार है। 'किया गया है', हुँह । उनका यह 'किया' क्या वला है मैं नहीं जानता, वन्यूशा वोला और उसने दूसरी ओर मुँह फेर लिया । नदी के किनारे पर एक न्यान जिसे मछली मारने के लिए चारों ओर से घेर दिया जाता है।
फिर भी उसके पहनने का ढग निराला था जिसे देखकर कोई भी कह सकता था कि वह रूसी है, जिगीत नही । बात यही थी यद्यपि सही नही थी। परन्तु इन सबके होते हुए भी देखनेवाले कह सकते थे कि वह स्वस्थ है, खुश है और उसे श्रात्मसतोष है। " हाँ तुम्हे विचित्र ज़रूर लगता होगा, " वन्यूशा बोला, जरा इन लोगो से खुद वातचीत करके तो देखो । वे तुमसे बात न करेंगे वल्कि तुम्हारी मुखालिफत करेगे । तुम उनसे एक वात भी नहीं कहला सकते ! " दहलीज़ पर वाल्टी फेंकते हुए वन्यूशा ने कहा, "कुछ भी हो वे रूसी जैसे तो नही लगते । " " तुम्हे गाँव के मुखिया से कहना चाहिए । लेकिन मुझे क्या मालूम वह कहाँ रहता है ?" उसने चिढी हुई आवाज में कहा । मगर किसने तुम्हे इतना घवडा दिया है ? चारो ओर निगाह डालते हुए श्रोलेनिन ने पूछा । शैतान ही जाने । हुँह । यहाँ कोई असली मालिक नही । लोगो का कहना है कि वह किमी 'ऋिगा' में गया है । और वह वुटिया । वह तो पूरी चुडैल है । हे भगवान रक्षा करो, रक्षा करो।" सिर पर हाथ रखकर वन्यूशा बोला, "मैं नहीं जानता कि हम यहाँ कैसे रहेगे। मुझे यकीन है कि ये लोग तातारो मे भी गये चीते हैं, और कहते हैं अपने को ईसाई । तातार बुरा ज़रूर है परन्तु होता उदार है। 'किया गया है', हुँह । उनका यह 'किया' क्या वला है मैं नहीं जानता, वन्यूशा वोला और उसने दूसरी ओर मुँह फेर लिया । नदी के किनारे पर एक न्यान जिसे मछली मारने के लिए चारों ओर से घेर दिया जाता है।
भुवनेश्वर. आज कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के लोग समाज में नकारात्मक माहौल खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की भी नकारात्मक छवि स्थापित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। आज शिक्षा भी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में शिक्षकों के प्रति नकारात्मक सोच को बदलने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने का कार्य हमारे कार्यकर्ता मीडिया के माध्यम से करें। उक्ताशय के उद्गार अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अ भा संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने महासंघ की चार दिवसीय मीडिया कार्यकर्ताओं की क्षेत्रशः बैठकों के समारोप में 13 मई को पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र की बैठक में व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय निराशा का चल रहा है, हम सब इस निराशा के वातावरण को दूर करने का प्रयास करें और अपनी श्रेष्ठ प्राचीन परम्पराओं को स्थापित करें। इसके लिए हमारी प्रांत, जिला एवं विकास खंडों की मीडिया टोलियां सक्रिय हों और मीडिया के सभी संसाधनों का सदुपयोग करते हुए शैक्षिक महासंघ के अच्छे कार्यों को शिक्षकों एवं समाज तक ले जाकर अन्यान्य संगठनों के लिए भी आदर्श बनें। बैठक के प्रथम दिन 10 मई को दक्षिण मध्य क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के अ. भा. अध्यक्ष प्रो. जे. पी. सिंघल ने कहा कि भारतीय चिंतन और भारतीय संस्कृति को साथ लेकर अपने कार्य-व्यवहार के माध्यम से हम शिक्षा जगत में नए प्रतिमान स्थापित करें। आपने मीडिया के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से हम महासंघ द्वारा शिक्षा व शिक्षकों के क्षेत्र में किए जा रहे अच्छे कार्यों के साथ साथ अपने वैचारिक अधिष्ठान को शिक्षकों व समाज तक पहुंचाने का कार्य करें। आपने महासंघ द्वारा विभिन्न सम सामयिक विषयों पर आयोजित अखिल भारतीय शोध लेखन प्रतियोगिता में मीडिया के माध्यम से महाविद्यालयीन एवं स्कूली शिक्षकों की अधिकाधिक सहभागिता का भी आह्वान किया। महासंघ के अ भा महामंत्री शिवानन्द सिंदनकेरा ने मीडिया टोली की चार दिवसीय क्षेत्रशः बैठकों की प्रस्तावना रखते हुए मीडिया के कार्य व महत्व पर प्रकाश डाला और देश भर के संबद्ध संगठनों द्वारा चल रहे मीडिया कार्यों का वृत्त लिया गया। बैठक के द्वितीय दिवस 11 भी को उत्तर मध्य क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के अ. भा. सह संगठन मंत्री ओमपाल सिंह ने कहा कि संगठन एक सतत यात्रा है और मीडिया एक माध्यम है संगठन के कार्य को आगे बढ़ाने का। हम मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए कम शब्दों में अपनी बात प्रभावी तरीके से रखें। मीडिया कार्यकर्ताओं की समझ बढ़े। कार्यकर्ताओं को ऊंचा मन लेकर चलना पड़ेगा, प्रत्येक कार्यकर्ता तक इस संदेश को लेकर जाना होगा। बैठक के तृतीय दिवस 12 मई को पूर्व, पूर्वोत्तर एवं मध्य पूर्व क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा प्रभारी महेंद्र कुमार ने कहा कि हमें चुनौतियों को अवसर के रूप में उपयोग करना होगा। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मीडिया टोली की बड़ी भूमिका है। अपनी भूमिका को समझते हुए हमारी मीडिया टोली आगे बढ़े तो हम समाज में एक सकारात्मक वातावरण खड़ा करने में सफल होंगे। चतुर्दिवसीय इस बैठक में अ. भा. मीडिया प्रकोष्ठ प्रमुख विजय कुमार सिंह ने मीडिया टोली का विस्तार, उसकी नियमित बैठकें, परस्पर संवाद एवं कार्य विभाजन तथा मीडिया के सभी संसाधनों का सावधानी पूर्वक प्रभावी सदुपयोग करते हुए अपने कार्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। आपने आगामी 27-28 मई को महासंघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय मीडिया कार्यशाला की जानकारी देते हुए उसमें सभी अपेक्षित कार्यकर्ताओं से अनिवार्यतः उपस्थित रहने का अनुरोध किया। मीडिया टोली के उत्तर क्षेत्र प्रभारी दर्शन भारती ने देश भर के मीडिया कार्यकर्ताओं को 'समाचार लेखन, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में हमारी भूमिका एवं सावधानियां' विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन देते हुए मीडिया की बारीकियों से अवगत कराया। अ. भा. मीडिया टोली के दक्षिण क्षेत्र प्रभारी प्रो. सुभाष आठवले ने महासंघ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय शोध पत्र लेखन प्रतियोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला एवं देश भर के मीडिया कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे स्वयं भी इस शोध लेखन प्रतियोगिता में सहभागिता करें तथा अधिकाधिक शिक्षकों को इस शोध लेखन प्रतियोगिता में सहभागिता हेतु प्रेरित करें। बैठक का संचालन प्रथम एवं अंतिम दिन प्रो. सुभाष आठवले ने, द्वितीय दिवस दर्शन भारती ने और तृतीय दिवस पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रभारी ज्ञानेंद्र नाथ सिंह ने किया। बैठक में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के केंद्रीय पदाधिकारियों, अ भा मीडिया टोली, राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री एवं मीडिया प्रमुखों, सह प्रमुखों तथा राज्य मीडिया टोली के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। बैठक का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। भुवनेश्वर. आज कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के लोग समाज में नकारात्मक माहौल खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की भी नकारात्मक छवि स्थापित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। आज शिक्षा भी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में शिक्षकों के प्रति नकारात्मक सोच को बदलने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने का कार्य हमारे कार्यकर्ता मीडिया के माध्यम से करें। उक्ताशय के उद्गार अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अ भा संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने महासंघ की चार दिवसीय मीडिया कार्यकर्ताओं की क्षेत्रशः बैठकों के समारोप में 13 मई को पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र की बैठक में व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय निराशा का चल रहा है, हम सब इस निराशा के वातावरण को दूर करने का प्रयास करें और अपनी श्रेष्ठ प्राचीन परम्पराओं को स्थापित करें। इसके लिए हमारी प्रांत, जिला एवं विकास खंडों की मीडिया टोलियां सक्रिय हों और मीडिया के सभी संसाधनों का सदुपयोग करते हुए शैक्षिक महासंघ के अच्छे कार्यों को शिक्षकों एवं समाज तक ले जाकर अन्यान्य संगठनों के लिए भी आदर्श बनें।
भुवनेश्वर. आज कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के लोग समाज में नकारात्मक माहौल खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की भी नकारात्मक छवि स्थापित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। आज शिक्षा भी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में शिक्षकों के प्रति नकारात्मक सोच को बदलने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने का कार्य हमारे कार्यकर्ता मीडिया के माध्यम से करें। उक्ताशय के उद्गार अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अ भा संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने महासंघ की चार दिवसीय मीडिया कार्यकर्ताओं की क्षेत्रशः बैठकों के समारोप में तेरह मई को पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र की बैठक में व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय निराशा का चल रहा है, हम सब इस निराशा के वातावरण को दूर करने का प्रयास करें और अपनी श्रेष्ठ प्राचीन परम्पराओं को स्थापित करें। इसके लिए हमारी प्रांत, जिला एवं विकास खंडों की मीडिया टोलियां सक्रिय हों और मीडिया के सभी संसाधनों का सदुपयोग करते हुए शैक्षिक महासंघ के अच्छे कार्यों को शिक्षकों एवं समाज तक ले जाकर अन्यान्य संगठनों के लिए भी आदर्श बनें। बैठक के प्रथम दिन दस मई को दक्षिण मध्य क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के अ. भा. अध्यक्ष प्रो. जे. पी. सिंघल ने कहा कि भारतीय चिंतन और भारतीय संस्कृति को साथ लेकर अपने कार्य-व्यवहार के माध्यम से हम शिक्षा जगत में नए प्रतिमान स्थापित करें। आपने मीडिया के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से हम महासंघ द्वारा शिक्षा व शिक्षकों के क्षेत्र में किए जा रहे अच्छे कार्यों के साथ साथ अपने वैचारिक अधिष्ठान को शिक्षकों व समाज तक पहुंचाने का कार्य करें। आपने महासंघ द्वारा विभिन्न सम सामयिक विषयों पर आयोजित अखिल भारतीय शोध लेखन प्रतियोगिता में मीडिया के माध्यम से महाविद्यालयीन एवं स्कूली शिक्षकों की अधिकाधिक सहभागिता का भी आह्वान किया। महासंघ के अ भा महामंत्री शिवानन्द सिंदनकेरा ने मीडिया टोली की चार दिवसीय क्षेत्रशः बैठकों की प्रस्तावना रखते हुए मीडिया के कार्य व महत्व पर प्रकाश डाला और देश भर के संबद्ध संगठनों द्वारा चल रहे मीडिया कार्यों का वृत्त लिया गया। बैठक के द्वितीय दिवस ग्यारह भी को उत्तर मध्य क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए महासंघ के अ. भा. सह संगठन मंत्री ओमपाल सिंह ने कहा कि संगठन एक सतत यात्रा है और मीडिया एक माध्यम है संगठन के कार्य को आगे बढ़ाने का। हम मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए कम शब्दों में अपनी बात प्रभावी तरीके से रखें। मीडिया कार्यकर्ताओं की समझ बढ़े। कार्यकर्ताओं को ऊंचा मन लेकर चलना पड़ेगा, प्रत्येक कार्यकर्ता तक इस संदेश को लेकर जाना होगा। बैठक के तृतीय दिवस बारह मई को पूर्व, पूर्वोत्तर एवं मध्य पूर्व क्षेत्र की बैठक को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा प्रभारी महेंद्र कुमार ने कहा कि हमें चुनौतियों को अवसर के रूप में उपयोग करना होगा। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मीडिया टोली की बड़ी भूमिका है। अपनी भूमिका को समझते हुए हमारी मीडिया टोली आगे बढ़े तो हम समाज में एक सकारात्मक वातावरण खड़ा करने में सफल होंगे। चतुर्दिवसीय इस बैठक में अ. भा. मीडिया प्रकोष्ठ प्रमुख विजय कुमार सिंह ने मीडिया टोली का विस्तार, उसकी नियमित बैठकें, परस्पर संवाद एवं कार्य विभाजन तथा मीडिया के सभी संसाधनों का सावधानी पूर्वक प्रभावी सदुपयोग करते हुए अपने कार्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। आपने आगामी सत्ताईस-अट्ठाईस मई को महासंघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय मीडिया कार्यशाला की जानकारी देते हुए उसमें सभी अपेक्षित कार्यकर्ताओं से अनिवार्यतः उपस्थित रहने का अनुरोध किया। मीडिया टोली के उत्तर क्षेत्र प्रभारी दर्शन भारती ने देश भर के मीडिया कार्यकर्ताओं को 'समाचार लेखन, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में हमारी भूमिका एवं सावधानियां' विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन देते हुए मीडिया की बारीकियों से अवगत कराया। अ. भा. मीडिया टोली के दक्षिण क्षेत्र प्रभारी प्रो. सुभाष आठवले ने महासंघ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय शोध पत्र लेखन प्रतियोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला एवं देश भर के मीडिया कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे स्वयं भी इस शोध लेखन प्रतियोगिता में सहभागिता करें तथा अधिकाधिक शिक्षकों को इस शोध लेखन प्रतियोगिता में सहभागिता हेतु प्रेरित करें। बैठक का संचालन प्रथम एवं अंतिम दिन प्रो. सुभाष आठवले ने, द्वितीय दिवस दर्शन भारती ने और तृतीय दिवस पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रभारी ज्ञानेंद्र नाथ सिंह ने किया। बैठक में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के केंद्रीय पदाधिकारियों, अ भा मीडिया टोली, राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री एवं मीडिया प्रमुखों, सह प्रमुखों तथा राज्य मीडिया टोली के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। बैठक का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। भुवनेश्वर. आज कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के लोग समाज में नकारात्मक माहौल खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों की भी नकारात्मक छवि स्थापित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। आज शिक्षा भी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में शिक्षकों के प्रति नकारात्मक सोच को बदलने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने का कार्य हमारे कार्यकर्ता मीडिया के माध्यम से करें। उक्ताशय के उद्गार अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अ भा संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने महासंघ की चार दिवसीय मीडिया कार्यकर्ताओं की क्षेत्रशः बैठकों के समारोप में तेरह मई को पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र की बैठक में व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय निराशा का चल रहा है, हम सब इस निराशा के वातावरण को दूर करने का प्रयास करें और अपनी श्रेष्ठ प्राचीन परम्पराओं को स्थापित करें। इसके लिए हमारी प्रांत, जिला एवं विकास खंडों की मीडिया टोलियां सक्रिय हों और मीडिया के सभी संसाधनों का सदुपयोग करते हुए शैक्षिक महासंघ के अच्छे कार्यों को शिक्षकों एवं समाज तक ले जाकर अन्यान्य संगठनों के लिए भी आदर्श बनें।
You Searched For "Business News In Hindi" Kulhad Making Business: 5 हजार रूपए में शुरू करे कुल्हड़ बनाने और बेचने का बिजनेस, हर महीने होगी लाखो की कमाई, जानिए कैसे? कुल्हड़ बनाने और बेचने के बिजनेस से आप घर बैठे लाखो रूपए कमा सकते है. बेरोजगारों की आ गई मौज, अब हर महीना कमाएं इतने रुपये, जानिए! अगर आप भी बेरोजगारी से जूझ रहे है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है.
You Searched For "Business News In Hindi" Kulhad Making Business: पाँच हजार रूपए में शुरू करे कुल्हड़ बनाने और बेचने का बिजनेस, हर महीने होगी लाखो की कमाई, जानिए कैसे? कुल्हड़ बनाने और बेचने के बिजनेस से आप घर बैठे लाखो रूपए कमा सकते है. बेरोजगारों की आ गई मौज, अब हर महीना कमाएं इतने रुपये, जानिए! अगर आप भी बेरोजगारी से जूझ रहे है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है.
वह समय शीघ्र ही आने वाला है - वह प्रभात शीघ्र ही उगने वाली है, जब कि ऐसी शिक्षाओं से नवयुवक विभूषित किये जावेंगे जिससे कि वे अपनी योग्यता का बखूबी उपयोग कर सकें और अपने ज्ञान का हर समय उपयोग कर सके और सर्व साधारण में बिना किसी हिचकिचाहट से अपने मन्तव्यों को साहसपूर्वक प्रकाशित कर सकें । आत्म-संयम और आत्म-विश्वास का उन्हें पाठ पढ़ाया जायगा । भविष्य में जो शिक्षा दी जावेगी उस का सार यही होगा कि जो कुछ विद्यार्थी जानता है, उसका वह जब चाहे तब प्रकाश कर सके -- अपनी विद्या का इच्छानुसार उपयोग कर सके । हम देखते हैं बहुत से विश्वविद्यालय के उपाधिधारी ग्रेजुएट बहुत से विषयों में वैसे ही कमजोर और गतिहीन निकलते हैं, जैसेवे कालेज में प्रवेश करने के समय थे । वह शिक्षा किस काम की जिसमें लड़कों को अपनी शक्तियों का अपनी परिस्थिति का स्वामी होना न सिखाया जावे; जिसमें लड़कों को यह न बताया जावे कि अपनी विद्या बुद्धि का काम पड़ने पर फ़ौरन उपयोग कैसे किया जा सक्ता है । कालेज का वह ग्रेजुएट जो डरपोक है, शंकाशील है - जो पब्लिक में या दूसरे किसी स्थान में काम पड़ने पर अपनी विद्याबुद्धि का प्रकाश नहीं कर सकता, कभी महत्व प्राप्त नहीं कर सकता, कभी समाज में उसका वज़न पैदा नहीं हो सकता । काम पड़ने पर जिस ज्ञान का उपयोग न हो सके, वह ज्ञान कि काम का ? वह समय आ रहा है जब कि हर बच्चे को अपने आप में
वह समय शीघ्र ही आने वाला है - वह प्रभात शीघ्र ही उगने वाली है, जब कि ऐसी शिक्षाओं से नवयुवक विभूषित किये जावेंगे जिससे कि वे अपनी योग्यता का बखूबी उपयोग कर सकें और अपने ज्ञान का हर समय उपयोग कर सके और सर्व साधारण में बिना किसी हिचकिचाहट से अपने मन्तव्यों को साहसपूर्वक प्रकाशित कर सकें । आत्म-संयम और आत्म-विश्वास का उन्हें पाठ पढ़ाया जायगा । भविष्य में जो शिक्षा दी जावेगी उस का सार यही होगा कि जो कुछ विद्यार्थी जानता है, उसका वह जब चाहे तब प्रकाश कर सके -- अपनी विद्या का इच्छानुसार उपयोग कर सके । हम देखते हैं बहुत से विश्वविद्यालय के उपाधिधारी ग्रेजुएट बहुत से विषयों में वैसे ही कमजोर और गतिहीन निकलते हैं, जैसेवे कालेज में प्रवेश करने के समय थे । वह शिक्षा किस काम की जिसमें लड़कों को अपनी शक्तियों का अपनी परिस्थिति का स्वामी होना न सिखाया जावे; जिसमें लड़कों को यह न बताया जावे कि अपनी विद्या बुद्धि का काम पड़ने पर फ़ौरन उपयोग कैसे किया जा सक्ता है । कालेज का वह ग्रेजुएट जो डरपोक है, शंकाशील है - जो पब्लिक में या दूसरे किसी स्थान में काम पड़ने पर अपनी विद्याबुद्धि का प्रकाश नहीं कर सकता, कभी महत्व प्राप्त नहीं कर सकता, कभी समाज में उसका वज़न पैदा नहीं हो सकता । काम पड़ने पर जिस ज्ञान का उपयोग न हो सके, वह ज्ञान कि काम का ? वह समय आ रहा है जब कि हर बच्चे को अपने आप में
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले का दिल को दहला देने वाला एक वीडियो (Shocking Video) सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक प्रेमिका (Girlfriend) अपने प्रेमी से विवाह करके साथ चलने की जिद कर रही है। इससे नाराज होकर प्रेमी ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए पहले तो प्रेमिका को जोरदार तमाचा मारा। फिर प्रेमिका को जमीन पर पटककर लात और घूंसो से जमकर पिटाई कर डाली। हाथापाई के दौरान प्रेमिका बेहोश हो गई। काफी देर तक वह बेहोशी की हालत में सड़क किनारे पड़ी रही। उसके बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को उपचार के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया। हाथापाई के आरोपी पुरुष के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक यह वायरल वीडियो रीवा जिले के मऊगंज का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में प्रेमी अपनी प्रेमिका की इस कदर पिटाई कर रहा है कि उसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। वीडियो में प्रेमी प्रेमिका गांव की सुनसान सड़क पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा और सुना जा सकता है की प्रेमिका अपने प्रेमी से विवाह करने की जिद पर अड़ी थी। उसका बोलना था की विवाह करके साथ चलते हैं। बस यही बात प्रेमी को नागवार गुजरी। उसके बाद उसने अपनी प्रेमिका के साथ गाली गलौच करते हुए बड़ी बेरहमी से उसकी पिटाई कर डाली। प्रेमी ने पहले प्रेमिका को थप्पड़ जड़ा फिर उसे जमीन पर पटककर लातें मरता रहा। हाथापाई की वजह से महिला बेहोश हो गई। हाथापाई के बाद महिला घंटों बेहोशी की हालत में सड़क किनारे पड़ी रही। वहीं हाथापाई के पूरा घटनाक्रम को पास ही खड़े पुरुष के परिचित अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। काफी देर बाद गांव के ही कुछ लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस का इत्तला दी। मामले को लेकर एडिशनल एसपी अनिल सोनकर ने बताया की वायरल वीडियो की घटना बीते बुधवार की है। पुरुष और महिला दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की जानकारी प्राप्त हुई है। हाथापाई करने वाला पुरुष मऊगंज स्थित ढेरा गांव का निवासी है। जबकि महिला अन्य किसी गांव की है। दोनों के बीच किसी बात को लेकर टकराव हुआ था। उसके बाद लड़के ने लड़की की पिटाई कर दी। पुलिस महिला और वीडियो बनाने वाले पुरुष को अपने साथ ले आई। महिला को उपचार के लिए हॉस्पिटल भेज दिया गया। थाने पहुंची महिला की मां ने किसी तरह की पुलिस कार्रवाई नहीं करवाई है। पुलिस ने अपने स्तर पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुरुष के विरूद्ध मामला दर्ज किया है।
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले का दिल को दहला देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक प्रेमिका अपने प्रेमी से विवाह करके साथ चलने की जिद कर रही है। इससे नाराज होकर प्रेमी ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए पहले तो प्रेमिका को जोरदार तमाचा मारा। फिर प्रेमिका को जमीन पर पटककर लात और घूंसो से जमकर पिटाई कर डाली। हाथापाई के दौरान प्रेमिका बेहोश हो गई। काफी देर तक वह बेहोशी की हालत में सड़क किनारे पड़ी रही। उसके बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने एक सौ नंबर पर पुलिस को सूचना दी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को उपचार के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया। हाथापाई के आरोपी पुरुष के विरूद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक यह वायरल वीडियो रीवा जिले के मऊगंज का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में प्रेमी अपनी प्रेमिका की इस कदर पिटाई कर रहा है कि उसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। वीडियो में प्रेमी प्रेमिका गांव की सुनसान सड़क पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा और सुना जा सकता है की प्रेमिका अपने प्रेमी से विवाह करने की जिद पर अड़ी थी। उसका बोलना था की विवाह करके साथ चलते हैं। बस यही बात प्रेमी को नागवार गुजरी। उसके बाद उसने अपनी प्रेमिका के साथ गाली गलौच करते हुए बड़ी बेरहमी से उसकी पिटाई कर डाली। प्रेमी ने पहले प्रेमिका को थप्पड़ जड़ा फिर उसे जमीन पर पटककर लातें मरता रहा। हाथापाई की वजह से महिला बेहोश हो गई। हाथापाई के बाद महिला घंटों बेहोशी की हालत में सड़क किनारे पड़ी रही। वहीं हाथापाई के पूरा घटनाक्रम को पास ही खड़े पुरुष के परिचित अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। काफी देर बाद गांव के ही कुछ लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस का इत्तला दी। मामले को लेकर एडिशनल एसपी अनिल सोनकर ने बताया की वायरल वीडियो की घटना बीते बुधवार की है। पुरुष और महिला दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की जानकारी प्राप्त हुई है। हाथापाई करने वाला पुरुष मऊगंज स्थित ढेरा गांव का निवासी है। जबकि महिला अन्य किसी गांव की है। दोनों के बीच किसी बात को लेकर टकराव हुआ था। उसके बाद लड़के ने लड़की की पिटाई कर दी। पुलिस महिला और वीडियो बनाने वाले पुरुष को अपने साथ ले आई। महिला को उपचार के लिए हॉस्पिटल भेज दिया गया। थाने पहुंची महिला की मां ने किसी तरह की पुलिस कार्रवाई नहीं करवाई है। पुलिस ने अपने स्तर पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुरुष के विरूद्ध मामला दर्ज किया है।
Kaka New Punjabi Gaana Video Agg Pyar Di: पंजाबी सिंगर काका के गाने के लाखों लोग दीवाने हैं। काका के गाने रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा जाते हैं। आपको बता दें कि फिलहाल ही यूट्यूब पर काका का एक नया पंजाबी गाना रिलीज हुआ है, जिसका टाइटल अग प्यार दी है। इस गाने के वीडियो को काफी अच्छे से दर्शाया गया है। गाने के वीडियो में हीरोइन शादी के जोड़े में नजर आ रही हैं, जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही हैं। यूट्यूब पर अब तक इस गाने के वीडियो को 20 लाख 17 हजार व्यूज मिल चुके हैं। इंस्टाग्राम पर भी ये गाना काफी वायरल हो रहा है। यहां देखिए काका का नया पंजाबी गाना।
Kaka New Punjabi Gaana Video Agg Pyar Di: पंजाबी सिंगर काका के गाने के लाखों लोग दीवाने हैं। काका के गाने रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा जाते हैं। आपको बता दें कि फिलहाल ही यूट्यूब पर काका का एक नया पंजाबी गाना रिलीज हुआ है, जिसका टाइटल अग प्यार दी है। इस गाने के वीडियो को काफी अच्छे से दर्शाया गया है। गाने के वीडियो में हीरोइन शादी के जोड़े में नजर आ रही हैं, जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही हैं। यूट्यूब पर अब तक इस गाने के वीडियो को बीस लाख सत्रह हजार व्यूज मिल चुके हैं। इंस्टाग्राम पर भी ये गाना काफी वायरल हो रहा है। यहां देखिए काका का नया पंजाबी गाना।
Delhi University Recruitment 2023: दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के कई पदों पर भर्तियां की जा रही हैं। जिसके लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। योग्यता इन पदों पर भर्ती के लिए जो अभ्यर्थी आवेदन करना चाहते हैं, वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन की योग्यता, आयु सीमा और शैक्षिक योग्यता से जुड़ी डिटेल्स चेक कर सकते हैं। क्योंकि अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की योग्यता अलग-अलग है। आवेदन शुल्क यूआर/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी के आवेदकों और महिला आवेदकों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा। एक बार भुगतान किया गया शुल्क किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं किया जाएगा। अधिक जानकारी अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया इन पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए ऐसे करें आवेदन - सबसे पहले अभ्यर्थी du. ac. nic पर जाएं। - इसके बाद रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें। - पर्सनल डिटेल्स इंटर कर सबमिट करें। - असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का फॉर्म भरें - इसके बाद फीस भरें और सबमिट करें। - इसके बाद फॉर्म की प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें।
Delhi University Recruitment दो हज़ार तेईस: दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के कई पदों पर भर्तियां की जा रही हैं। जिसके लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। योग्यता इन पदों पर भर्ती के लिए जो अभ्यर्थी आवेदन करना चाहते हैं, वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन की योग्यता, आयु सीमा और शैक्षिक योग्यता से जुड़ी डिटेल्स चेक कर सकते हैं। क्योंकि अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की योग्यता अलग-अलग है। आवेदन शुल्क यूआर/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क पाँच सौ रुपयापये है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी के आवेदकों और महिला आवेदकों से कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा। एक बार भुगतान किया गया शुल्क किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं किया जाएगा। अधिक जानकारी अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया इन पदों पर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए ऐसे करें आवेदन - सबसे पहले अभ्यर्थी du. ac. nic पर जाएं। - इसके बाद रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें। - पर्सनल डिटेल्स इंटर कर सबमिट करें। - असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का फॉर्म भरें - इसके बाद फीस भरें और सबमिट करें। - इसके बाद फॉर्म की प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें।
सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने गुरुवार को देश के पूर्वी प्रांत में 42. 6 अरब डॉलर की तेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया। सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) ने कहा कि सऊदी तेल कंपनी (आरामको) की परियोजनाओं से प्रति दिन तीन लाख बैरल कच्चे तेल और गैस के उत्पादन की उम्मीद है। एसपीए ने कहा कि यह कार्यक्रम आरामको की कच्चे तेल की पहली खेप की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित हुआ है, जिसे सऊदी अरब के संस्थापक अब्दुलअजीज अल सऊद के द्वारा शुरू किया गया था। इसके अलावा शाह ने मंगलवार को भी 92. 2 अरब डॉलर मूल्य की अन्य औद्योगिक परियोजनाएं शुरू की थी।
सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने गुरुवार को देश के पूर्वी प्रांत में बयालीस. छः अरब डॉलर की तेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया। सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि सऊदी तेल कंपनी की परियोजनाओं से प्रति दिन तीन लाख बैरल कच्चे तेल और गैस के उत्पादन की उम्मीद है। एसपीए ने कहा कि यह कार्यक्रम आरामको की कच्चे तेल की पहली खेप की अस्सीवीं वर्षगांठ पर आयोजित हुआ है, जिसे सऊदी अरब के संस्थापक अब्दुलअजीज अल सऊद के द्वारा शुरू किया गया था। इसके अलावा शाह ने मंगलवार को भी बानवे. दो अरब डॉलर मूल्य की अन्य औद्योगिक परियोजनाएं शुरू की थी।
गौरतलब है कि पिछले महीने आईएनएस सिंधुरत्न में हुए हादसे में लेफ्टिनेंट कमांडर कपीश मुवाल और लेफ्टिनेंट मनोरंजन कुमार चौधरी की मौत हो गई थी। इसके बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल डी. के. जोशी ने 26 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। सरकार को इस अहम पद को जल्द से जल्द भरना है।
गौरतलब है कि पिछले महीने आईएनएस सिंधुरत्न में हुए हादसे में लेफ्टिनेंट कमांडर कपीश मुवाल और लेफ्टिनेंट मनोरंजन कुमार चौधरी की मौत हो गई थी। इसके बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल डी. के. जोशी ने छब्बीस फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। सरकार को इस अहम पद को जल्द से जल्द भरना है।
Siddharthnagar News: बढ़नी कस्बे में बनाया गया रैन बसेरा कहां स्थित हैं, लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। कारण है इनका रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से दूर होना। Siddharthnagar News: बीते कई दिनों से जारी शीत लहर और कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन बेहाल है। ठंड और गलन से लोग कांपते नजर आ रहे हैं। बढ़नी कस्बे में ठंड से बचाव के लिए आबादी के बाहर बने रैन बसेरे में सन्नाटा पसरा हुआ है। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा बनाये गए रैन बसेरा तक पहुंचने के लिए किसी भी स्थान पर एक अदद बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। जिससे जरूरतमंदों को वहां तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़नी कस्बे में बनाया गया रैन बसेरा कहां स्थित हैं, लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। कारण है इनका रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से दूर होना। रात के समय बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाले लोगों को अगर रैन बसेरे में ठहरना पड़ जाए तो पहले उनको कई जगह इनका पता पूछना पड़ता है। रैन बसेरा कहाँ पर बना है ? इससे संबंधित किसी भी तरह का कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। अगर एकाध व्यक्ति पूछताछ करके इसका पता जान भी लेता है तो जान माल की सुरक्षा के कारण वहां जाता ही नहीं है। कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशन रोडवेज बस स्टैंड जैसे साग्निका स्थानों पर रैन बसेरा बनाए जाने की व्यवस्था की गई है मगर नगर पंचायत द्वारा घोर लापरवाही बरतते हुए इन स्थानों पर किसी भी तरह का कोई रैन बसेरा नहीं बनाया गया है। जिससे दूर-दराज के क्षेत्र से आने वाले यात्रियों को स्टेशन पर बैठकर ही रात काटनी पड़ती है। ठिठुरन भरी रात में जरूरतमंदों को ठहरने के लिए परेशानी न उठानी पड़े इसके लिए पश्चिम पोखरे के मैरेज हॉल में अस्थायी रैन बसेरा बनाया गया है।
Siddharthnagar News: बढ़नी कस्बे में बनाया गया रैन बसेरा कहां स्थित हैं, लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। कारण है इनका रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से दूर होना। Siddharthnagar News: बीते कई दिनों से जारी शीत लहर और कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन बेहाल है। ठंड और गलन से लोग कांपते नजर आ रहे हैं। बढ़नी कस्बे में ठंड से बचाव के लिए आबादी के बाहर बने रैन बसेरे में सन्नाटा पसरा हुआ है। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा बनाये गए रैन बसेरा तक पहुंचने के लिए किसी भी स्थान पर एक अदद बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। जिससे जरूरतमंदों को वहां तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़नी कस्बे में बनाया गया रैन बसेरा कहां स्थित हैं, लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। कारण है इनका रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से दूर होना। रात के समय बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाले लोगों को अगर रैन बसेरे में ठहरना पड़ जाए तो पहले उनको कई जगह इनका पता पूछना पड़ता है। रैन बसेरा कहाँ पर बना है ? इससे संबंधित किसी भी तरह का कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। अगर एकाध व्यक्ति पूछताछ करके इसका पता जान भी लेता है तो जान माल की सुरक्षा के कारण वहां जाता ही नहीं है। कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशन रोडवेज बस स्टैंड जैसे साग्निका स्थानों पर रैन बसेरा बनाए जाने की व्यवस्था की गई है मगर नगर पंचायत द्वारा घोर लापरवाही बरतते हुए इन स्थानों पर किसी भी तरह का कोई रैन बसेरा नहीं बनाया गया है। जिससे दूर-दराज के क्षेत्र से आने वाले यात्रियों को स्टेशन पर बैठकर ही रात काटनी पड़ती है। ठिठुरन भरी रात में जरूरतमंदों को ठहरने के लिए परेशानी न उठानी पड़े इसके लिए पश्चिम पोखरे के मैरेज हॉल में अस्थायी रैन बसेरा बनाया गया है।
मनु तथा याज्ञवल्क्य दोनों शिल्प को शुद्रजनोचित व्यवसाय मानते है । ( मनु० १०, १०० ; याज्ञ० ५, १२० ) । द्विजजन इस व्यवसाय को केवल आपद्धर्म के रूप में अपना सकते हैं । ( मनु १०, ११६; याज्ञ० पृ० ३२९, ४२ ) । ( वेदाध्ययन करने वाले ब्रह्मचारी के लिये संगीत का सेवन सर्वथा निषिद्ध माना गया है) गोभिल गृह्यसूत्र के अनुसार विद्यार्थी के लिये कौशीलव, गन्ध, अंजन आदि उपभोग सर्वथा निषिद्ध है - 'कौशीलवगन्धांजनानि' ( आपस्तम्ब १, १, ३, ११-१२ ) विद्यार्थी जनों के लिये नृत्य प्रेक्षण तक निषिद्ध माना गया है ( गौतम १५, १८ ) । ( बारस्कर गृह्यसूत्र में गीत, वाद्य, नृत्य ये कलायें समस्त ब्राह्मण वर्ग के लिये वर्ज्य मानी गई हैं। मनु के अनुसार गीत, वाद्य तथा नृत्य ऐसे ब्रह्मचारी के लिये वर्ज्य हैं जो गुरुगृह में विद्यार्जनार्थं निवास करता हो ( १, १७८ ) । गुरुगृह में जबतक उसका निवास है तब तक वह किसी ऐसे कार्य को न करे जो उसको तपोवृद्धि में व्याघात पहुँचाये ।) जो ब्रह्मचारी आगे चल कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहता है, उसके लिये आवश्यक है कि वह ३६ वर्ष तक गुरुगृह में निवास कर त्रैवेदिक व्रत का मनोयोगपूर्वक आचरण करे । ऋक्, यजु तथा साम इन तीनों का व्यापक एवं सम्पूर्ण अध्ययन करना ही अन्तेवासी का परम कर्तव्य है ( मनु ३, १ ) । प्रत्येक वेद के सांग एवं समीचीन अध्ययन के लिये न्यूनतम द्वादश वर्ष का काल आवश्यक माना जाता था । अपनी विद्यार्थि - दशा में वेदविद्या के साथ अभीष्ट कलाओं का अध्ययन ब्रह्मचारी कर सकता है यदि वह मूल उद्देश्य में विशेष न डालता हो । मनु के अनुसार वैदिक कर्मानुष्ठान को सर्वथा छोड़ कर केवलमात्र शिल्पों का अध्ययन कुल को हीन बनाता है यद्यपि उसको सुरक्षित रखते हुए शिल्पों का अध्ययन सम्मत हो सकता है ( ३.६५ ) । ऐसी शिल्प - विद्या किसी भी स्रोत से निःसंकोच प्राप्त कर लेनी चाहिये ऐसा मनु का विधान है - 'विविधानि व शिल्पानि समादेयानि सर्वंतः' ( ३, २४० ) । स्त्री, रत्न, विद्या, धर्म, शौच तथा सुभाषित प्राप्त करने में जिस प्रकार प्राप्ति-स्थान का विचार अशोभनीय है, ठीक उसी प्रकार कला के अधिकारी पुरुष को सामाजिक प्रतिष्ठा विद्यार्थि-जनों के लिये विचारणीय नहीं ( ३, २३९-२४० ) । कला के आचार्य, निम्नकुलीन क्यों न हों, वे विद्यार्थी के लिये वैसे ही श्रद्धाभाजन हैं, जैसे उच्चकुलीन गुरुजन । (य याज्ञवल्क्य का मत है कि शिल्पार्थी छात्र को नियतकाल तक आचार्य के निजी निरीक्षण में कला का अध्ययन करना चाहिये । यदि नियतकाल की समाप्ति से पूर्व वह अपनी कला से अल्पाधिक द्रव्यलाभ करता है, तो वह द्रव्य आचार्य को अर्पित किया जाना चाहिये ) ( १४, १८४ ) । शिल्प नियतकाल से पूर्व
मनु तथा याज्ञवल्क्य दोनों शिल्प को शुद्रजनोचित व्यवसाय मानते है । । द्विजजन इस व्यवसाय को केवल आपद्धर्म के रूप में अपना सकते हैं । । गोभिल गृह्यसूत्र के अनुसार विद्यार्थी के लिये कौशीलव, गन्ध, अंजन आदि उपभोग सर्वथा निषिद्ध है - 'कौशीलवगन्धांजनानि' विद्यार्थी जनों के लिये नृत्य प्रेक्षण तक निषिद्ध माना गया है । । गुरुगृह में जबतक उसका निवास है तब तक वह किसी ऐसे कार्य को न करे जो उसको तपोवृद्धि में व्याघात पहुँचाये ।) जो ब्रह्मचारी आगे चल कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहता है, उसके लिये आवश्यक है कि वह छत्तीस वर्ष तक गुरुगृह में निवास कर त्रैवेदिक व्रत का मनोयोगपूर्वक आचरण करे । ऋक्, यजु तथा साम इन तीनों का व्यापक एवं सम्पूर्ण अध्ययन करना ही अन्तेवासी का परम कर्तव्य है । प्रत्येक वेद के सांग एवं समीचीन अध्ययन के लिये न्यूनतम द्वादश वर्ष का काल आवश्यक माना जाता था । अपनी विद्यार्थि - दशा में वेदविद्या के साथ अभीष्ट कलाओं का अध्ययन ब्रह्मचारी कर सकता है यदि वह मूल उद्देश्य में विशेष न डालता हो । मनु के अनुसार वैदिक कर्मानुष्ठान को सर्वथा छोड़ कर केवलमात्र शिल्पों का अध्ययन कुल को हीन बनाता है यद्यपि उसको सुरक्षित रखते हुए शिल्पों का अध्ययन सम्मत हो सकता है । ऐसी शिल्प - विद्या किसी भी स्रोत से निःसंकोच प्राप्त कर लेनी चाहिये ऐसा मनु का विधान है - 'विविधानि व शिल्पानि समादेयानि सर्वंतः' । स्त्री, रत्न, विद्या, धर्म, शौच तथा सुभाषित प्राप्त करने में जिस प्रकार प्राप्ति-स्थान का विचार अशोभनीय है, ठीक उसी प्रकार कला के अधिकारी पुरुष को सामाजिक प्रतिष्ठा विद्यार्थि-जनों के लिये विचारणीय नहीं । कला के आचार्य, निम्नकुलीन क्यों न हों, वे विद्यार्थी के लिये वैसे ही श्रद्धाभाजन हैं, जैसे उच्चकुलीन गुरुजन । । शिल्प नियतकाल से पूर्व
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मुकाबला खेलने से पहले टीम इंडिया लीसेस्टरशायर के खिला 4 दिनों का वॉर्म अप मैच खेल रही है। इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की शुरूआत बेहद ही खराब रही लेकिन टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली(Virat Kohli) विकेटकीपर बल्लेबाज के एस भरत के साथ मिलकर पारी को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन दोनों ने मिलकर टीम को के स्कोर को 200 के पार पहुंचाया। गुरूवार को शुरू हुए वॉर्म अप मुकाबले में Virat Kohli के फॉर्म को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि वह आज एक बड़ी खेलकर जायेंगे लेकिन लीसेस्टरशायर के गेंदबाज रोमन वॉकर ने इनके इस सपने को चकनाचूर कर दिया। हालांकि एलबीडब्ल्यू आउट होने के बाद कोहली अंपायर के फैसले से खुश नहीं दिखे। गुरूवार को भार-लीसेस्टरशायर के बीच खेले गये वॉर्म अप मुकाबले के पहले दिन टीम इंडिया की शुरूआत बेहद ही निराशाजनक रही और महज 50 की स्कोर में दोनों ही ओपनर पवेलियन लौट गये। हनुमा विहारी ने भी कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रहे। जिसके बाद Virat Kohli और के एस भरत ने मिलकर पारी को संभालते हुए कुछ शानदार शॉट्स खेले। Virat Kohli की बल्लेबाजी को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि वह बड़ी पारी खेलकर ही जायेंगे लेकिन लीसेस्टरशायर के गेंदबाज रोमन वॉकर ने विराट के सपने के साथ साथ फैंस के सपने को भी चकनाचूर करते हुए उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। दरअसल वॉकर ने कोहली को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया जिसके बाद अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया। Virat Kohli अंपायर के फैसले से संतुष्ट नहीं दिख रहे थे। Virat Kohli के पैड्स पर जब गेंद लगी तो फील्डिंग टीम ने अपील कर दी जिसके बाद अंपायर ने काफी समय लेने के बाद अपनी उंगली खड़ी कर दी। अंपायर के उंगली खड़ी करते ही Virat Kohli के होश ही उड़ गये और वे इशारों ही इशारों में अपनी नराजगी जताते हुए दिखे। इस दौरान वह अंपायर से पूछते रह कि वह आउट कैसे हुए? बता दें कि इस वॉर्म अप मुकाबले में डीआरएस उपलब्ध नहीं है जिस वजह से उन्हें अंपायर के फैसले को न चाहते हुए भी मानना ही पड़ा। Virat Kohli के कई फैंस का मानना है कि वह नॉटआउट थे और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। ☝️ । Kohli (33) lbw Walker. @RomanWalker17 strikes again! This time he hits the pads of Kohli, and after a long wait the umpire's finger goes up. लीसेस्टरशायर के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए जहां एक तरफ टॉप ऑर्डर बुरी तरह से फ्लॉप रही तो वहीं मीडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करने आये विकेटकीपर बल्लेबाज के एस भरत ने Virat Kohli के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाते हुए अर्धशतक भी जड़ा। भरत ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 8 चौको और 1 छक्के की मदद से 70 रन बनाकर नाबाद खेल रहे हैं। वहीं टीम इंडिया की बात करें तो पहले दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया ने 8 विकेट खोकर 246 रन बना चुकी है जहां के एस भरत के साथ दूसरी तरफ मोहम्मद शमी 18 रन बनाकर नाबाद खेल रहे हैं।
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मुकाबला खेलने से पहले टीम इंडिया लीसेस्टरशायर के खिला चार दिनों का वॉर्म अप मैच खेल रही है। इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की शुरूआत बेहद ही खराब रही लेकिन टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली विकेटकीपर बल्लेबाज के एस भरत के साथ मिलकर पारी को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन दोनों ने मिलकर टीम को के स्कोर को दो सौ के पार पहुंचाया। गुरूवार को शुरू हुए वॉर्म अप मुकाबले में Virat Kohli के फॉर्म को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि वह आज एक बड़ी खेलकर जायेंगे लेकिन लीसेस्टरशायर के गेंदबाज रोमन वॉकर ने इनके इस सपने को चकनाचूर कर दिया। हालांकि एलबीडब्ल्यू आउट होने के बाद कोहली अंपायर के फैसले से खुश नहीं दिखे। गुरूवार को भार-लीसेस्टरशायर के बीच खेले गये वॉर्म अप मुकाबले के पहले दिन टीम इंडिया की शुरूआत बेहद ही निराशाजनक रही और महज पचास की स्कोर में दोनों ही ओपनर पवेलियन लौट गये। हनुमा विहारी ने भी कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रहे। जिसके बाद Virat Kohli और के एस भरत ने मिलकर पारी को संभालते हुए कुछ शानदार शॉट्स खेले। Virat Kohli की बल्लेबाजी को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि वह बड़ी पारी खेलकर ही जायेंगे लेकिन लीसेस्टरशायर के गेंदबाज रोमन वॉकर ने विराट के सपने के साथ साथ फैंस के सपने को भी चकनाचूर करते हुए उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। दरअसल वॉकर ने कोहली को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया जिसके बाद अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया। Virat Kohli अंपायर के फैसले से संतुष्ट नहीं दिख रहे थे। Virat Kohli के पैड्स पर जब गेंद लगी तो फील्डिंग टीम ने अपील कर दी जिसके बाद अंपायर ने काफी समय लेने के बाद अपनी उंगली खड़ी कर दी। अंपायर के उंगली खड़ी करते ही Virat Kohli के होश ही उड़ गये और वे इशारों ही इशारों में अपनी नराजगी जताते हुए दिखे। इस दौरान वह अंपायर से पूछते रह कि वह आउट कैसे हुए? बता दें कि इस वॉर्म अप मुकाबले में डीआरएस उपलब्ध नहीं है जिस वजह से उन्हें अंपायर के फैसले को न चाहते हुए भी मानना ही पड़ा। Virat Kohli के कई फैंस का मानना है कि वह नॉटआउट थे और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। ☝️ । Kohli lbw Walker. @RomanWalkerसत्रह strikes again! This time he hits the pads of Kohli, and after a long wait the umpire's finger goes up. लीसेस्टरशायर के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए जहां एक तरफ टॉप ऑर्डर बुरी तरह से फ्लॉप रही तो वहीं मीडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करने आये विकेटकीपर बल्लेबाज के एस भरत ने Virat Kohli के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाते हुए अर्धशतक भी जड़ा। भरत ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक आठ चौको और एक छक्के की मदद से सत्तर रन बनाकर नाबाद खेल रहे हैं। वहीं टीम इंडिया की बात करें तो पहले दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया ने आठ विकेट खोकर दो सौ छियालीस रन बना चुकी है जहां के एस भरत के साथ दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अट्ठारह रन बनाकर नाबाद खेल रहे हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
कार की बेकाबू रफ्तार ने दो युवकों की जान ले ली। आधी रात को लखनऊ से रायबरेली पहुंची कार सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में घुस गई। इस भीषण हादसे में कार सवार समेत लखनऊ के दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात लगभग 12 बजे कबरई से गिट्टी लादकर अयोध्या जा रहा ट्रेलर लालगंज-बछरांवा मुख्य मार्ग पर तहसील के सामने अचानक खराब हो गया। चालक जयकरन तथा खलासी योगेंद्र नीचे उतरकर पहियों के आगे-पीछे ईंट लगा रहे थे, तभी लालगंज की तरफ से आ रही तेज रफ्तार कार ट्रेलर में भिड़ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कार सवार दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को किसी प्रकार कार से बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान सत्येंद्र पुत्र चंद्रपाल सिंह व सीमान सिंह पुत्र कृष्णपालसिंह निवासी आईमामऊ,अर्जुनगंज, लखनऊ के रूप में हुई है। कोतवाल इंद्रपाल सिंह ने बताया कि शवो को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ट्रेलर के चालक व परिचालक को पकड़ा गया है। खड़े वाहन में कार के भिड़ने की वजह से दुर्घटना हुई है। उल्लेखनीय है कि लालगंज-फतेहपुर मुख्य मार्ग पर ढाबों के निकट भी सड़क के दोनों तरफ मौरंग,गिट्टी लादे व खाली ट्रक चौबीसों घंटे खड़े रहते हैं जो दुर्घटनाओं का सबब बनते रहते हैं। इनकी चपेट में आने वालों को जान गंवानी पड़ती है, लेकिन पुलिस और परिवहन विभाग बेफिक्र है।
कार की बेकाबू रफ्तार ने दो युवकों की जान ले ली। आधी रात को लखनऊ से रायबरेली पहुंची कार सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में घुस गई। इस भीषण हादसे में कार सवार समेत लखनऊ के दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात लगभग बारह बजे कबरई से गिट्टी लादकर अयोध्या जा रहा ट्रेलर लालगंज-बछरांवा मुख्य मार्ग पर तहसील के सामने अचानक खराब हो गया। चालक जयकरन तथा खलासी योगेंद्र नीचे उतरकर पहियों के आगे-पीछे ईंट लगा रहे थे, तभी लालगंज की तरफ से आ रही तेज रफ्तार कार ट्रेलर में भिड़ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कार सवार दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को किसी प्रकार कार से बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान सत्येंद्र पुत्र चंद्रपाल सिंह व सीमान सिंह पुत्र कृष्णपालसिंह निवासी आईमामऊ,अर्जुनगंज, लखनऊ के रूप में हुई है। कोतवाल इंद्रपाल सिंह ने बताया कि शवो को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ट्रेलर के चालक व परिचालक को पकड़ा गया है। खड़े वाहन में कार के भिड़ने की वजह से दुर्घटना हुई है। उल्लेखनीय है कि लालगंज-फतेहपुर मुख्य मार्ग पर ढाबों के निकट भी सड़क के दोनों तरफ मौरंग,गिट्टी लादे व खाली ट्रक चौबीसों घंटे खड़े रहते हैं जो दुर्घटनाओं का सबब बनते रहते हैं। इनकी चपेट में आने वालों को जान गंवानी पड़ती है, लेकिन पुलिस और परिवहन विभाग बेफिक्र है।
श्रीदेवी शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गई थीं, ये उस वक्त की बात है जब वे फिल्म 'जुदाई' की शूटिंग में व्यस्त थी। फिर 7 महीने बाद उन्होंने बोनी कपूर से शादी की। नेहा धूपिया अंगद बेदी के साथ शादी के 6 महीने के अंदर ही मां बन गई थीं। मई में उनकी हुई और उसी साल नवंबर में उन्होंने बेटी मेहर की जन्म दिया। बाद में नेहा ने ये स्वीकार किया था कि वह पहले से प्रेगनेंट थीं। कल्कि कोचलिन अपने ब्वायफ्रेंड हर्सबर्ग से शादी से पहले प्रेगनेंट हुई, उन्होंने फरवरी 2020 में सैफो नाम की अपनी पहली बेटी को जन्म दिया। महिमा चौधरी के ब्यॉयफ्रेंड को लेकर चर्चें काफी बार मीडिया के सामने आया करते थे, लेकिन फिर 2006 में उनकी शादी ने सबको हैरान कर दिया। उसके तुरंत बेटी का जन्म होने पर साफ हो गया कि वे शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गई थीं। नताशा स्टेनकोविक जोकि मॉडल से एक्ट्रेस बनीं, वे भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के साथ रिलेशनशिप में थीं तभी उन्होंने जनवरी 2020 में अफेयर के कुछ महीने बाद अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया था। सारिका हासन एक्टर कमल हासन की दूसरी पत्नी हैं। सारिका कमल से उस समय प्रेग्नेंट हो गई थी जब ने अपनी पत्नी को तलाक भी नहीं दिया था। तब साथ रहते हुए उन्होंने पहली बेटी श्रुति हासन को जन्म दिया। अमृता अरोड़ा के प्रेग्नेंट होने की खबर पहले अफवाह लगी, लेकिन उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। वे बिजनेसमैन ब्यॉयफ्रेंड शकील लडक को डेट कर रही थी। लेकिन अमृता शादी से पहले ही प्रेग्नेंट होने की खबर से भी इंकार करती हैं। गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने अपने ब्वायफ्रेंड अर्जुन रामपाल से प्रेग्नेंट होने की खबर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। उन्होंने 2019 में बेटे एरिक को जन्म दिया। इस कपल ने अभी तक शादी के बारे में जानकारी शेयर नहीं की है।
श्रीदेवी शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गई थीं, ये उस वक्त की बात है जब वे फिल्म 'जुदाई' की शूटिंग में व्यस्त थी। फिर सात महीने बाद उन्होंने बोनी कपूर से शादी की। नेहा धूपिया अंगद बेदी के साथ शादी के छः महीने के अंदर ही मां बन गई थीं। मई में उनकी हुई और उसी साल नवंबर में उन्होंने बेटी मेहर की जन्म दिया। बाद में नेहा ने ये स्वीकार किया था कि वह पहले से प्रेगनेंट थीं। कल्कि कोचलिन अपने ब्वायफ्रेंड हर्सबर्ग से शादी से पहले प्रेगनेंट हुई, उन्होंने फरवरी दो हज़ार बीस में सैफो नाम की अपनी पहली बेटी को जन्म दिया। महिमा चौधरी के ब्यॉयफ्रेंड को लेकर चर्चें काफी बार मीडिया के सामने आया करते थे, लेकिन फिर दो हज़ार छः में उनकी शादी ने सबको हैरान कर दिया। उसके तुरंत बेटी का जन्म होने पर साफ हो गया कि वे शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गई थीं। नताशा स्टेनकोविक जोकि मॉडल से एक्ट्रेस बनीं, वे भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के साथ रिलेशनशिप में थीं तभी उन्होंने जनवरी दो हज़ार बीस में अफेयर के कुछ महीने बाद अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया था। सारिका हासन एक्टर कमल हासन की दूसरी पत्नी हैं। सारिका कमल से उस समय प्रेग्नेंट हो गई थी जब ने अपनी पत्नी को तलाक भी नहीं दिया था। तब साथ रहते हुए उन्होंने पहली बेटी श्रुति हासन को जन्म दिया। अमृता अरोड़ा के प्रेग्नेंट होने की खबर पहले अफवाह लगी, लेकिन उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। वे बिजनेसमैन ब्यॉयफ्रेंड शकील लडक को डेट कर रही थी। लेकिन अमृता शादी से पहले ही प्रेग्नेंट होने की खबर से भी इंकार करती हैं। गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने अपने ब्वायफ्रेंड अर्जुन रामपाल से प्रेग्नेंट होने की खबर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। उन्होंने दो हज़ार उन्नीस में बेटे एरिक को जन्म दिया। इस कपल ने अभी तक शादी के बारे में जानकारी शेयर नहीं की है।
प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में शोधकर्त्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने भारत की सोन नदी घाटी में 80,000-65,000 वर्ष पूर्व के मनुष्यों की निरंतर उपस्थिति के प्रमाण खोजे हैं। मुख्य बिंदुः - ये शोध कार्य मध्य भारत के ऊपरी सोन नदी-घाटी में ढाबा (Dhaba) नामक स्थल की की 'ट्रेंचेज़' (Trenches) में किये गए। - इस पुरातात्त्विक उत्खनन से लगभग 80,000 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में मानव व्यवसाय (लिथिक या पत्थर उद्योग) के प्रमाण मिले हैं। - मेगालिथिक उपकरण लगभग 80,000-65,000 वर्ष पूर्व के हैं, जबकि सूक्ष्म-पाषाण उपकरण लगभग 50,000 वर्ष पूर्व के हैं। पाषाण कालः - पुरातत्वविदों ने आरंभिक काल को पुरा पाषण काल कहा है, यह नाम पुरास्थलों से प्राप्त पत्थर के औजारों के महत्त्व को बताता है। पुरापाषाण कालः - 20 लाख-12 हज़ार वर्ष पूर्व का समय। - इसको भी तीन काल आरंभिक, मध्य तथा उत्तर पुरापाषाण काल में विभाजित किया जाता है। मध्यपाषण काल (मेसोलिथ): - इसे माइक्रोलिथिक या सूक्ष्मपाषण काल भी कहा जाता है क्योंकि औजारों में लकड़ी या हड्डियों के मुट्ठे लगे होते हैं। नवपाषाण कालः - 10 हज़ार वर्ष पूर्व के बाद का समय। शोध का महत्त्वः - यह शोध दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मानव आबादी की पहली उपस्थिति तथा अफ्रीका से मानव विसरण (Dispersal) को समझने में मदद करेगा। - ढ़ाबा का लिथिक उद्योग अफ्रीकी एवं अरब के मध्य पाषाण युग के विभिन्न उपकरणों तथा ऑस्ट्रेलिया की शुरुआती कलाकृतियों से मिलते हैं, जिससे यह पता चलता है की ये संभवतः होमो सेपियन्स के उत्पाद है क्योंकि उनका अफ्रीका से बाहर पूर्व दिशा में विसरण हुआ था। - यह अध्ययन इस सामान्य दृष्टिकोण का खंडन करता है कि आधुनिक मानव का 50,000 वर्ष पूर्व ही अफ्रीका से बाहर विसरण हुआ है जबकि बताता है की टोबा ज्वालामुखी महाविस्फोट के दौरान भी यहाँ मानव की उपस्थिति रही है। - अफ्रीका और अरब में पहले पाए गए उपकरणों की समानता के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि वे होमो सेपियन्स द्वारा बनाए गए थे। टोबा ज्वालामुखी विस्फोट तथा मानव प्रजातिः - लगभग 74,000 वर्ष पूर्व, सुमात्रा के टोबा ज्वालामुखी में सुपर-विस्फोट हुआ जिससे पृथ्वी के कई हिस्सों में लगभग एक दशक से अधिक लंबी अवधि के लिये शीत मौसम की दशाएँ व्याप्त हो गई। यह विस्फोट पिछले 2 मिलियन वर्षों में सबसे बड़ा था। - ऐसा माना जाता है इस ज्वालामुखी जनित शीतकाल से पृथ्वी की सतह लगभग एक हज़ार साल तक ठंडी रही तथा इससे मानव (Hominins) की विशाल आबादी नष्ट हो गई। - यह माना गया कि इससे नाटकीय रूप से जलवायु परिवर्तन हुआ और इसने पूरे एशिया में आबादी को कम कर दिया। हालाँकि, भारत के पुरातात्विक साक्ष्य इन सिद्धांतों का समर्थन नहीं करते हैं। - 'ज्वालामुखी शीतकाल' (Volcanic Winter) परिकल्पना के अनुसार, इस ज्वालामुखी के कारण मनुष्यों के जीन पूल (जीनों से संबंधित संपूर्ण सूचना) में बाधा उत्पन्न हुई तथा अफ्रीका के अलावा संपूर्ण मनुष्य जाति नष्ट हो गई तथा यह आबादी अफ्रीका से विसरित हो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बस गई। ज्वालामुखी शीतकाल संकल्पनाः - इसे वायुमंडलीय धूलि परिकल्पना (Atmospheric Dust Hypothesis) के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें ज्वालामुखी विस्फोट की क्रिया में एयरोसोल्स (Aerosols), ज्वालामुखी धूल-कण, सल्फ्यूरिक अम्ल आदि के उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापमान में कमी आती है क्योंकि ये सौर्यिक विकिरण को परावर्तित करके (जिसे ऐल्बिडो (Albedo) भी कहा जाता है) अल्पकालिक शीतलन प्रभाव पैदा करते है। - दीर्घकालिक शीतलन प्रभाव मुख्य रूप से समतापमंडल में सल्फर गैसों के उत्सर्जन पर निर्भर होते हैं, जहाँ वे सल्फ्यूरिक अम्ल बनने की प्रतिक्रियाओं की एक शृंखला से गुजरकर एरोसोल का निर्माण कर सकते हैं। - यह समतापमंडलीय एरोसोल सौर्यिक विकिरण का ऐल्बिडो कर पार्थिव सतह को ठंडा तथा पार्थिव विकिरण को अवशोषित करके समतापमंडल को गर्म करते हैं। - इस प्रकार वायुमंडलीय ऊष्मन एवं शीतलन प्रभाव, क्षोभमंडल और समतापमंडल पर अलग अलग होता है। - इस शोध के अनुसार विस्फोट से पूर्व से ही उत्तरी भारत में बसे प्रारंभिक मनुष्यों की आबादी (74,000 वर्ष पूर्व ) थी और यह तबाही की अवधि के दौरान तथा बहुत बाद तक रही। - जीवाश्म साक्ष्य बताते हैं कि आधुनिक मानव का अफ्रीका से 200,000 वर्ष पूर्व ग्रीक, अरब और चीन में 80-100,000 वर्ष पूर्व, सुमात्रा में टोबा ज्वालामुखी विस्फोट से ठीक पूर्व तथा ऑस्ट्रेलिया में 65,000 वर्ष पूर्व विवरण हो चुका था। - सोन नदी भारत के मध्य प्रदेश राज्य से निकल कर उत्तर प्रदेश, झारखंड की पहाड़ियों से गुजरते हुए पटना के समीप गंगा नदी में मिलती है। - इस नदी में बालू का रंग पीला होने से इसके सोने की तरह चमकने के कारण इसका नाम सोन पड़ा। - सोन घाटी भू-गर्भिक तौर पर दक्षिण-पश्चिम में नर्मदा नदी घाटी का लगभग अनवरत विस्तार है। यह शोध मानव प्रजाति की उत्पति को समझने में वैज्ञानिक सोच को अधिक व्यापक करेगा तथा वैश्विक समुदाय का ध्यान पुनः अपनी और आकर्षित करेगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (The Indian National Centre for Ocean Information Services-INCOIS), हैदराबाद ने अपने विविध उपयोगकर्त्ताओं को बेहतर ढंग से सागरीय सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु तीन नवीन सेवाएँ प्रारम्भ की है। - वर्ष 1999 में स्थापित यह संस्थान, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ( Ministry of Earth Sciences)के तहत एक स्वायत्त संगठन है। - INCOIS सागरीय क्षेत्र में उपयोगकर्त्ताओं को कई प्रकार की निःशुल्क सेवाएँ प्रदान करता है। यह मछुआरों से लेकर अपतटीय तेल अन्वेषण उद्योगों जैसे विशिष्ठ उपयोगकर्ताओं को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। - यह भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (Indian Tsunami Early Warning Centre- ITEWC) के माध्यम से सुनामी, तूफान की लहरों आदि पर तटीय आबादी के लिये निगरानी और चेतावनी सेवाएं प्रदान करता है। - इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर (ITEWC), INCOIS, हैदराबाद की एक इकाई है जो वैश्विक महासागरों में होने वाली सुनामी की घटनाओं में सलाह तथा पूर्वानुमान जारी करता है। - ITEWC प्रणाली में17 ब्रॉडबैंड भूकंपीय स्टेशनों का नेटवर्क ( जो वास्तविक समय में भूकंपीय निगरानी करता है), 4 बॉटम प्रेशर रिकार्डर (Bottom Pressure Recorders- BPR) और 25 ज्वार गेज (Tide Gauge)( जो विभिन्न तटीय स्थानों पर स्थापित हैं) शामिल हैं। - यह केंद्र पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक महासागरों में होने वाली सुनामी हेतु उत्तरदायी भूकंपों का पता लगाने में सक्षम है। प्रारंभ की नवीन सेवाएँः - लघु पोत सलाहकार और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली (Small Vessel Advisory and Forecast Services System- SVAS): - महातरंग महोर्मि पूर्वानुमान प्रणाली (Swell Surge Forecast System- SSFS): - यह भारत की विशाल तटीय आबादी के लिये तरंगों के संदर्भ में पूर्वानुमान सूचना जारी करेगा। - एल्गी ब्लूम सूचना सेवा (Algal Bloom Information Service- ABIS): - इस सेवा के द्वारा हानिकारक एल्गी प्रस्फुटन के संदर्भ में सूचना जारी की जाएगी। सेवाओं की आवश्यकताः - छोटे मछली पालक जहाज दिशा की तथा सागरीय क्षेत्र के संबंध में उचित समय पर सही जानकारी के अभाव में अन्य देशों यथा- पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि के सागरीय क्षेत्रों में चले जाते हैं जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। - SWAS प्रणाली भारतीय तटीय जल क्षेत्र में में काम करने वाले छोटे जहाजों के लिये सलाहकार और पूर्वानुमान सेवा उपलब्ध करायेगी। SWAS प्रणाली उपयोगकर्ताओं को संभावित क्षेत्रों के बारे में चेतावनी देती है ताकि जहाज पुनः लौट सके। - महातरंग महोर्मि (विशाल तरंगे) के कारण तटीय इलाकों में फ्लैश-बाढ़ (अचानक तेज बारिश या तटीय तरंगों के कारण बाढ़) की घटनाएँ होती हैं, जिससे तटीय इलाकों में विशाल जन-धन की हानि होती है। - SSFS प्रणाली के माध्यम से महातरंग महोर्मि की पूर्व सूचना दी जा सकेगी। - इस प्रकार की तरंगे मुख्यतया भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर उत्पन्न होती है। महातरंग महोर्मि (Swell Surge): - ये विशेष प्रकार की सागरीय तरंगे होती है जिनकी उत्पति सागर तट से काफी दूर होती है तथा ये लंबी दूरी तय करने के बाद तटीय क्षेत्रों में पहुँचती है। - इन तरंगों की उत्पत्ति के समय स्थानीय हवाओं या तटीय वातावरण में कोई बदलाव नहीं होता है अतः इनका पूर्वानुमान करना आसान नहीं होता। - मछलीपट्नम (आंध्र प्रदेश) - नागपट्टनम (तमिलनाडु) - कच्छ की खाड़ी (गुजरात) - 'एल्गी प्रस्फुटन' के कारण तटीय मत्स्य पालन, समुद्री जीवन और जल की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती हैं अतः मछुआरों, पर्यावरण विशेषज्ञ आदि को इसके पूर्वानुमान की आवश्यकता पड़ती थी। - INCOIS-ABIS उत्तरी हिंद महासागर के ऊपर फाइटोप्लैंकटन प्रस्फुटन के अनुपात तथा सागरीय भौतिक दशाओं के आधार पर इन घटनाओं के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा। - एल्गी प्रस्फुटन के ऐसे चार संभावित क्षेत्रों की पहचान ब्लूम हॉटस्पॉट्स (Bloom Hotspots) के रूप में की गई है। सेवाओं का महत्त्वः - पड़ोसी देशों से मत्स्यन की सागरीय सीमा से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। - मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा मिलने से 'नीली अर्थव्यवस्था' (Blue economy)के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। - "सागर हमारे गृह के सीमांत संसाधन है।" ( Oceans are the Frontier Resource of our Earth) अतः इन सेवाओं से गहन सागरीय अर्थव्यवस्था (Deep sea economy) पर भारत की समझ को बढ़ावा मिलेगा। के.एम.पणिक्कर ने 'भारतीय इतिहास पर समुद्री शक्ति के प्रभाव' निबंध में हिन्द महासागर के महत्त्व को उजागर करते हुए लिखा है कि भारत को सागरीय संसाधनों का अधिकतम दोहन करना चाहिये। अतः हाल ही में प्रारंभ की गयी सेवाएँ उनके इस अभिकथन की पुष्टि करते हैं। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? अफगानिस्तान में करीब दो दशकों से जारी हिंसा को रोकने के लिये 29 फरवरी, 2020 को खाड़ी देश कतर की राजधानी दोहा में होने वाले अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते के लिये कतर द्वारा भारत को भी आमंत्रित किया गया है। मुख्य बिंदुः - भारत ने दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिये अपना प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिये कतर में भारत के राजदूत 'पी. कुमारन' को भेजने का फैसला किया है। - यह पहला अवसर होगा कि भारत का कोई आधिकारिक प्रतिनिधि एक ऐसे समारोह में भाग लेगा जहाँ तालिबान के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। - वर्ष 1996 और 2001 के बीच जब अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में था, तब भारत ने इसे कूटनीतिक और आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी थी। - तालिबान का उदय 90 के दशक में उत्तरी पाकिस्तान में अफगानिस्तान से सोवियत संघ सेना की वापसी के पश्चात् हुआ। उत्तरी पाकिस्तान के साथ-साथ तालिबान ने पश्तूनों के नेतृत्व में अफगानिस्तान में भी अपनी मज़बूत पृष्ठभूमि बनाई। - विदित है कि तालिबान की स्थापना और प्रसार में सबसे अधिक योगदान धार्मिक संस्थानों एवं मदरसों का था जिन्हें सऊदी अरब द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता था। - अफगानिस्तान से सोवियत संघ की वापसी के पश्चात् वहाँ कई गुटों में आपसी संघर्ष शुरू हो गया था और इससे जन-सामान्य बुरी तरह से परेशान था ऐसी परिस्थिति में राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर अफगानिस्तान में भी तालिबान का स्वागत किया गया। - प्रारंभ में तालिबान को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाने तथा विवादित क्षेत्रों में अपना नियंत्रण स्थापित कर शांति स्थापित करने जैसी गतिविधियों के कारण सफलता मिली। - प्रारंभ में दक्षिण-पश्चिम अफगानिस्तान में तालिबान ने अपना प्रभाव बढ़ाया तथा इसके पश्चात् ईरान सीमा से लगे हेरात प्रांत पर अधिकार कर लिया। - धीरे-धीरे तालिबान पर मानवाधिकार का उल्लंघन और सांस्कृतिक दुर्व्यवहार के आरोप लगने लगे। तालिबान द्वारा विश्व प्रसिद्ध बामियान बुद्ध प्रतिमाओं को नष्ट करने की विशेष रूप से आलोचना की गई। - तालिबान द्वारा न्यूयॉर्क पर किये गए हमले के पश्चात् इसका वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ा इसके शीर्ष नेता ओसामा बिन लादेन को इन हमलों का दोषी बताया गया। - पिछले कुछ समय से अफगानिस्तान में तालिबान का दबदबा फिर से बढ़ा है और पाकिस्तान में भी उसकी स्थिति मज़बूत हुई है। - अमेरिका द्वारा किसी भी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने से पहले संघर्ष विराम की मांग की गई थी। शांति समझौते के बाद अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में 19 वर्ष से सक्रिय सैन्य अभियान को समाप्त कर अपने सैनिकों को वापस लाया जा सकेगा। समझौते के बारे मेंः - 21 फरवरी, 2020 को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा था कि अफगानिस्तान में लंबी अवधि से हिंसा में कमी को देखते हुए 29 फरवरी को अमेरिका और तालिबान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। - वर्ष 1999 में IC-814 विमान के अपहरण के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत सरकार के प्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से तालिबान से जुड़े मामलों में शामिल होंगे। - माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वार्ता के बाद यह नीतिगत बदलाव आया है। वैसे मॉस्को में वर्ष 2018 में तालिबान की मौजूदगी वाली वार्ता में भारत ने अनौपचारिक शिरकत की थी। नए परिप्रेक्ष्य में पहला कदमः - अफगानिस्तान में नई वास्तविकताओं को देखते हुए, भारत अब तालिबान के साथ राजनयिक रूप से जुड़ने के लिये आगे बढ़ रहा है। - समझौता-हस्ताक्षर समारोह में भारत की उपस्थिति संभवतः कूटनीतिक संबंधों के उदघाटन का पहला संकेत है। - भारत के अफगानिस्तान में कई महत्त्वपूर्ण रणनीतिक हित हैं, यहाँ भारत ने कई विकास परियोजनाओं पर काम किया है। क्या हैं भारतीय चिंताएँ? - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान जारी किये गए संयुक्त बयान में अफगानिस्तान पर भारत की चिंताओं को बहुत अच्छी तरह से दर्शाया गया था। - यह संयुक्त बयान अफगान के नेतृत्व वाली और अफगान के स्वामित्व वाली शांति प्रक्रिया के बारे में बात करता है लेकिन यह अफगान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया का उल्लेख नहीं करता है, क्योंकि वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा नियंत्रित की जाती है। - तालिबान का अफगानिस्तान में फिर से स्थापित होने से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये भी एक बड़ा खतरा है। ऐसे में भारत को ये सुनिश्चित करना होगा कि यदि ये समझौता होता है तो क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में न पड़ने पाए। - भारत की चिंता यह भी है कि अगर अमेरिका अपनी सेना को अफगानिस्तान से हटा लेता है पाकिस्तान अपने यहाँ उत्पन्न हो रहे आतंकवाद को तालिबान और अफगानिस्तान को ज़िम्मेदार ठहरा सकता है। - कई पश्चिमी पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह समझौता अफगानिस्तान में शांति के लिये एक मौका का प्रतिनिधित्व कर सकता है, परंतु भारत और अधिक सतर्क है क्योंकि इससे पाकिस्तान को बल मिलने की संभावना है। भारत-अमेरिका और अफगानिस्तानः - भारत और अमेरिका एकजुट, संप्रभु, लोकतांत्रिक, समावेशी, स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान में अपने-अपने हित रखते हैं। - ये दोनों देश अफगान के नेतृत्व वाली और अफगान के स्वामित्व वाली शांति और सुलह प्रक्रिया का समर्थन करते हैं जिसके परिणामस्वरूप अफगानिस्तान में स्थायी शांति स्थापित हो जिसके फलस्वरूप हिंसा की समाप्ति हो तथा आतंकवादी ठिकानों का विनाश किया जा सके। - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को स्थिर बनाने में सहायता करने के लिये विकास और सुरक्षा सहायता प्रदान करने में भारत की भूमिका का स्वागत किया। - वर्ष 2017 में नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस की यात्रा के दौरान जारी अंतिम संयुक्त बयान में भी डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र, स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिये भारतीय योगदान का स्वागत किया था। - अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधित सामरिक भागीदारी के महत्त्व को समझते हुए दोनों देशों ने अफगानिस्तान के भविष्य के समर्थन में परामर्श और सहयोग जारी रखने के लिये प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है। - इस मुद्दे पर भारत अमेरिका के अलावा, अफगानिस्तान, रूस, ईरान, सऊदी अरब और चीन जैसे सभी राजनीतिक सक्रिय पक्षों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रहा है। आगे की राहः - अफगानिस्तान के संदर्भ में भारत के स्थायी लक्ष्य स्पष्ट हैं- अफगानिस्तान में विकास में लगे करोड़ों डॉलर व्यर्थ न जाने पाएँ, काबुल में मित्र सरकार बनी रहे, ईरान-अफगान सीमा तक निर्बाध पहुँच बनी रहे और वहाँ के पाँचों वाणिज्य दूतावास बराबर काम करते रहें। इस एजेंडे की सुरक्षा के लिये भारत को अपनी कूटनीति में कुछ बदलाव करने भी पड़ें तो उसे पीछे नहीं हटना चाहिये, क्योंकि यही समय की मांग है। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? श्रीलंका ने युद्धोत्तर जवाबदेही एवं सुलह पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से स्वयं को अलग करने की आधिकारिक घोषणा की है। श्रीलंका के विदेश मंत्री के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को इस संदर्भ में आधिकारिक सूचना दे दी गई है। क्या है संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव? - दरअसल श्रीलंका के गृहयुद्ध (वर्ष 2009) के अंतिम दौर में श्रीलंकाई सेना पर लगभग 45000 से अधिक निर्दोष लोगों की हत्या और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था। - ज्ञात हो कि श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति, गोतबाया राजपक्षे गृह युद्ध के दौरान श्रीलंका के रक्षा सचिव थे और उनके भाई महिंदा राजपक्षे उस समय श्रीलंका के राष्ट्रपति थे। - इसी विषय को लेकर वर्ष 2015 में गृहयुद्ध के 6 वर्षों बाद तत्कालीन श्रीलंकाई सरकार ने 11 अन्य देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया था, जिसमें श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जाँच की बात कही गई। - इस प्रस्ताव में व्यापक सुधारों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से श्रीलंका में घरेलू जवाबदेही तंत्र विकसित करने का प्रावधान है। - प्रस्ताव के अनुसार, श्रीलंका राष्ट्रमंडल और अन्य विदेशी न्यायाधीशों, बचाव पक्ष के वकीलों और जाँचकर्त्ताओं की भागीदारी के साथ एक विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया स्थापित करेगा। - श्रीलंका के इस कदम के परिणामस्वरूप गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्षता से जाँच संभव नहीं हो पाएगी जिसके कारण पीड़ितों के लिये न्याय प्राप्त करना अपेक्षाकृत काफी कठिन हो जाएगा। - यदि स्थिति ऐसी ही रहती है तो संभव है कि गृहयुद्ध के दौरान हुई घटनाएँ श्रीलंका में एक बार पुनः देखने को मिलें। - संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट के अनुसार, कल्याणकारी राज्य का यह कर्त्तव्य है कि वह देश में सभी समुदायों को एक साथ लेकर चले, न कि किसी समुदाय विशिष्ट को। - वर्ष 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होने के बाद से ही श्रीलंका या तत्कालीन 'सीलोन' जातीय संघर्ष का सामना कर रहा था। - वर्ष 2001 की सरकारी जनगणना के अनुसार, श्रीलंका की मुख्य जातीय आबादी में सिंहली (82%), तमिल (9.4%) और श्रीलंकाई मूर (7.9%) शामिल हैं। - सिंहलियों ने औपनिवेशिक काल के दौरान तमिलों के प्रति ब्रिटिश पक्षपात का विरोध किया और आज़ादी के बाद के वर्षों में उन्होंने तमिल प्रवासी बागान श्रमिकों को देश से विस्थापित कर दिया तथा सिंहल को आधिकारिक भाषा बना दिया। - वर्ष 1972 में सिंहलियों ने देश का नाम 'सीलोन' से बदलकर श्रीलंका कर दिया और बौद्ध धर्म को राष्ट्र का प्राथमिक धर्म घोषित कर दिया गया। - तमिलों और सिंहलियों के बीच जातीय तनाव और संघर्ष बढ़ने के बाद वर्ष 1976 में वेलुपिल्लई प्रभाकरन के नेतृत्व में लिट्टे (LTTE) का गठन किया गया और इसने उत्तरी एवं पूर्वी श्रीलंका, जहाँ अधिकांश तमिल निवास करते थे, में 'एक तमिल मातृभूमि' के लिये प्रचार करना प्रारंभ कर दिया। - वर्ष 1983 में लिट्टे ने श्रीलंकाई सेना की एक टुकड़ी पर हमला कर दिया, इसमें 13 सैनिकों की मौत हो गई। विदित है कि इस घटनाक्रम से श्रीलंका में दंगे भड़क गए जिसमें लगभग 2,500 तमिल लोग मारे गए। - इसके पश्चात् श्रीलंकाई तमिलों और बहुसंख्यक सिंहलियों के मध्य प्रत्यक्ष युद्ध शुरू हो गया। ध्यातव्य है कि भारत ने श्रीलंका के इस गृहयुद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई और श्रीलंका के संघर्ष को एक राजनीतिक समाधान प्रदान करने के लिये वर्ष 1987 में भारत-श्रीलंका समझौते पर हस्ताक्षर किये। - भारत ने ऑपरेशन पवन के तहत लिट्टे को समाप्त करने के लिये श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) तैनात कर दी। हालाँकि हिंसा बढ़ने के 3 वर्षों बाद ही IPKF को वहाँ से हटा दिया गया। श्रीलंका सरकार का युद्धोत्तर जवाबदेही एवं सुलह पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से स्वयं को अलग करने का निर्णय स्पष्ट तौर पर मानवाधिकार संरक्षण को लेकर वैश्विक समुदाय के प्रयासों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा। आवश्यक है कि श्रीलंकाई सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे ताकि मानवाधिकार संरक्षण के प्रयासों को कमज़ोर होने से बचाया जा सके। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेरोगेसी की प्रक्रिया को विनियमित करने से संबंधित सेरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2020 [Surrogacy (Regulation) Bill, 2020] को मंज़ूरी प्रदान कर दी है। - ध्यातव्य है कि नवीनतम विधेयक अगस्त 2019 में लोकसभा से पारित सेरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2019 का संशोधित संस्करण है क्योंकि 2019 के विधेयक को राज्यसभा में प्रवर समिति (Select Committee) को भेज दिया गया था। - मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंज़ूरी देने से पहले राज्यसभा की प्रवर समिति की सभी सिफारिशों को शामिल किया है। - सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2020 का उद्देश्य व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाना और परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देना है। - मानव भ्रूण की बिक्री और खरीद सहित वाणिज्यिक सरोगेसी निषिद्ध होगी और निःसंतान दंपतियों को नैतिक सरोगेसी की शर्तों को पूरा करने पर ही सेरोगेसी की अनुमति दी जाएगी। - इस विधेयक के 'करीबी रिश्तेदारों' (Close Relatives) वाले खंड को हटा दिया गया है तथा अब यह विधेयक किसी 'इच्छुक' (Willing) महिला को सरोगेट मदर बनने की अनुमति देता है जिससे विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के अलावा निःसंतान भारतीय जोड़ों को लाभ प्राप्त होगा। - यह विधेयक सेरोगेसी से संबंधित प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करने के लिये केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सेरोगेसी बोर्ड (National Surrogacy Board ) एवं राज्य स्तर पर राज्य सरोगेसी बोर्ड (State Surrogacy Board) के गठन का प्रावधान करता है। - विधेयक के अनुसार, केवल भारतीय दंपति ही सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं। - यह विधेयक इच्छुक भारतीय निःसंतान विवाहित जोड़े जिसमें महिला की उम्र 23-50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26-55 वर्ष हो, को नैतिक परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है। - इसके अतिरिक्त यह विधेयक यह भी सुनिश्चित करता है कि इच्छुक दंपति किसी भी स्थिति में सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़े नहीं। नवजात बच्चा उन सभी अधिकारों का हकदार होगा जो एक प्राकृतिक बच्चे को उपलब्ध होते हैं। - यह विधेयक सरोगेसी क्लीनिकों को विनियमित करने का प्रयास भी करता है। सरोगेसी या इससे संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिये देश में सभी सरोगेसी क्लीनिकों का उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा पंजीकृत होना आवश्यक है। - यह विधेयक सरोगेट मदर के लिये बीमा कवरेज सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों का प्रावधान करता है। ध्यातव्य है कि सरोगेट मदर के लिये प्रस्तावित बीमा कवर को पहले के संस्करण में प्रदान किये गए 16 महीनों से बढ़ाकर अब 36 महीने कर दिया गया है। - यह विधेयक यह भी निर्दिष्ट करता है कि सरोगेसी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का लिंग चयन नहीं किया जा सकता है। - यह विधेयक निःसंतान दंपति के लिये सरोगेसी की प्रक्रिया से पहले आवश्यकता और पात्रता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य बनाता है। - इस विधेयक से व्यावसायिक सेरोगेसी को प्रतिबंधित किये जाने से सेरोगेसी के व्यापार को रोका जा सकता है क्योंकि इसमें महिलाओं (सेरोगेट मदर) के अधिकारों का उल्लंघन होता था। - विधेयक में सेरोगेट मदर के लिये बीमा कवर को 16 माह से बढ़ाकर 36 माह कर दिया गया है जिससे सेरोगेट मदर के हितों की रक्षा की जा सकेगी। - सेरोगेसी बोर्ड के गठन के फलस्वरूप सेरोगेसी की प्रक्रिया का विनियमन बेहतर तरीके से संभव होगा। - सभी सरोगेसी क्लीनिकों को उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा पंजीकृत होना आवश्यक है जिससे सेरोगेसी के गैर-कानूनी प्रयासों को रोका जा सकेगा। - साथ ही विधेयक में नवजात शिशु के अधिकारों को भी सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है जो कि बाल अधिकारों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। - विधेयक में निहित प्रावधानों का बेहतर क्रियान्वयन सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी कानून में उल्लिखित बातों के धरातल पर क्रियान्वयन से ही कानून के उद्देश्य पूरे किये जा सकते हैं। - सेरोगेसी से संबंधित जटिलताओं और चुनौतियों को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिये तथा इस प्रक्रिया से संबंधित सभी शब्दावलियों को परिभाषित किया जाना चाहिये। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में अमेरिकी संसद (United States Congress) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव (House of Representatives) ने लिंचिंग के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किया है। - अमेरिका के निचले सदन द्वारा पारित इस प्रस्ताव में लिंचिंग को अपराध घोषित करते हुए आजीवन कारावास या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। - अमेरिका में हत्या उन अपराधों में शामिल है जिनके लिये मुकदमा राज्य या स्थानीय स्तर पर चलाया जाता है। किंतु अमेरिका का यह नया विधेयक लिंचिंग को एक संघीय अपराध घोषित करता है। - ध्यातव्य है कि इस विधेयक का नाम एम्मेट टिल (Emmett Till) नाम पर रखा गया है, जिसकी मात्र 14 वर्ष की उम्र में वर्ष 1955 में लिंचिंग कर दी गई थी। - जब अनियंत्रित भीड़ द्वारा किसी दोषी को उसके किये अपराध के लिये या कभी-कभी अफवाहों के आधार पर ही बिना अपराध किये भी तत्काल सज़ा दी जाए अथवा उसे पीट-पीट कर मार डाला जाए तो इसे भीड़ द्वारा की गई हिंसा या लिंचिंग कहते हैं। - इस तरह की हिंसा में किसी कानूनी प्रक्रिया या सिद्धांत का पालन नहीं किया जाता और यह पूर्णतः गैर-कानूनी होती है। - विधेयक के अनुसार, अमेरिका में वर्ष 1882 से वर्ष 1968 के मध्य लगभग 4,700 लोग, मुख्य रूप से अफ्रीकी-अमेरिकी लिंचिंग का शिकार हुए और इन लिंचिंग के 99 प्रतिशत अपराधियों को दंडित नहीं किया जा सका। - अमेरिकी गृहयुद्ध के पश्चात् 1800 के दशक के अंत में जब दासों को मुक्त कर दिया गया तो अमेरिका में लिंचिंग की संख्या अचानक बढ़ने लगी। 1930 के दशक में इसमें कमी आने के पश्चात् 1960 के दशक में लिंचिंग में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिली। - दरअसल गृहयुद्ध के पश्चात् अमेरिका में जब गोरे अमेरिकी अपना सामाजिक प्रभुत्व बनाए रखने में असमर्थ रहे तब कई विद्रोही समूहों का जन्म हुआ। - इन समूहों ने आम लोगों को गोरों की सत्ता बनाए रखने के लिये हिंसा करने को उकसाया और खुद भी कई हत्याओं को अंजाम दिया। - उल्लेखनीय है कि वर्ष 1918 के बाद से अमेरिकी काॅन्ग्रेस में 200 से अधिक एंटी-लिंचिंग विधेयक प्रस्तुत किये गए हैं, किंतु इनमें से कोई भी पारित नहीं हो सका। - भारत में भी मॉब लिंचिंग एक चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है। देश में वर्ष 2017 का पहलू खान हत्याकांड मॉब लिंचिंग का एक बहुचर्चित उदाहरण है, जिसमें कुछ तथाकथित गौ रक्षकों की भीड़ ने गौ तस्करी के झूठे आरोप में पहलू खान की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। - यह तो सिर्फ राजस्थान का ही उदाहरण है, इसके अतिरिक्त देश के कई अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आई हैं। - भारत में धर्म और जाति के नाम पर होने वाली हिंसा की जड़ें काफी मज़बूत हैं। देश में लगातार बढ़ रहीं लिंचिंग की घटनाएँ अधिकांशतः असहिष्णुता और अन्य धर्म तथा जाति के प्रति घृणा का परिणाम है। - वर्ष 2002 में हरियाणा के पाँच दलितों की गौ हत्या के आरोप में लिंचिंग कर दी गई थी। वहीं सितंबर 2015 में एक अज्ञात समूह ने मोहम्मद अखलाक और उसके बेटे दानिश पर गाय की हत्या करने और मांस का भंडारण करने का आरोप लगाते हुए पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी। - इन घटनाओं से मॉब लिंचिंग में धर्म और जाति का दृष्टिकोण स्पष्ट तौर पर ज़ाहिर होता है। - लिंचिंग जैसी घटनाएँ ज़ाहिर तौर पर किसी भी समाज की प्रगति में बाधक होती हैं। अतः नीति निर्माताओं के लिये इन्हें जल्द-से-जल्द रोकना आवश्यक हो जाता है। - देश में मणिपुर, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाए गए हैं। - हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव द्वारा किया गया यह प्रयास अवश्य ही सामाजिक एवं आर्थिक रूप से शोषित वर्गों और हाशिये पर मौजूद समुदायों के मध्य विश्वास पैदा करेगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में खगोलविदों ने पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए एक छोटी सी वस्तु देखी, जिसे उन्होंने 'मिनी-मून' या पृथ्वी के 'दूसरे उपग्रह' की संज्ञा दी है। मुख्य बिंदुः - खगोलविदों ने इस अस्थायी मिनी-मून को '2020 CD3' नाम दिया है। - 2020 सीडी-3 नामक मिनी-मून की खोज 15 फरवरी को नासा द्वारा वित्तपोषित एरिज़ोना स्थित 'कैटालिना स्काई सर्वे' (Catalina Sky Survey-CSS) के कैस्पर विर्ज़चोस (Kacper Wierzchos) और टेडी प्रुइने (Teddy Pruyne) नामक खगोलविदों द्वारा की गई। - अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (International Astronomical Union-IAU) के 'माइनर प्लैनेट सेंटर' (Minor Planet Center) ने इस खोज के संदर्भ में कहा कि इसके ऑर्बिट इंटीग्रेशन से यह ज्ञात होता है कि यह अस्थायी रूप से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बँधा हुआ है। - यह वास्तव में एक क्षुद्रग्रह है, जो कि एक कार के आकार का है; इसका व्यास लगभग 1.9-3.5 मीटर है और यह हमारे स्थायी उपग्रह चंद्रमा के समान नहीं है। - यह एक अस्थायी मिनी-मून है, कुछ समय बाद यह पृथ्वी की कक्षा से मुक्त हो जाएगा और अपने रास्ते से हट जाएगा। क्या होता है अस्थायी मिनी-मून? - ये एक प्रकार के क्षुद्रग्रह होते हैं जो कभी-कभी अपनी कक्षा को छोड़कर पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर उसके प्राकृतिक ग्रह की तरह उसकी परिक्रमा करने लगते हैं परंतु यह परिक्रमण अस्थायी होता है अतः इसे अस्थायी मिनी-मून कहते हैं। - 2020 सीडी-3 पृथ्वी से कुछ दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। इस तरह के क्षुद्रग्रह को 'टेंपररली कैप्चर्ड ऑब्जेक्ट' (Temporarily Captured Object- TCO) कहा जाता है। - ऐसे क्षुद्रग्रहों की कक्षा अस्थिर होती है। - ऐसे ग्रहों को हमारे स्थायी चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के साथ-साथ सूर्य के प्रभाव का भी सामना करना पड़ता है। - एक बार पृथ्वी की कक्षा में आने के बाद ऐसी वस्तुएँ आमतौर पर मुक्त होने के पश्चात् सूर्य के आस-पास की स्वतंत्र कक्षा में चली जाती हैं। - शोधकर्त्ताओं के अनुसार, 2020 सीडी 3 को तीन वर्ष पहले पृथ्वी की कक्षा में देखा गया था। पूर्व उदहारणः - यह पहली बार नहीं है जब पृथ्वी के एक से ज़्यादा चंद्रमा का पता चला हो। इसके पहले वर्ष 2006 में RH120 नामक पृथ्वी के अस्थायी चंद्रमा का पता चला था। - RH120 सितंबर 2006 से जून 2007 तक पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के भीतर बना रहा। इसके बाद यह पृथ्वी के गुरुत्त्वीय क्षेत्र से बाहर निकल गया। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघः - यह पेशेवर खगोलविदों का एक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1919 में की गई थी। - इसका केंद्रीय सचिवालय पेरिस में है। - इस संघ का उद्देश्य खगोलशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान और अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। - जब भी ब्रह्मांड में कोई नई वस्तु पाई जाती है तो खगोलीय संघ द्वारा दिये गए नाम ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होते हैं। - अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ की महासभा की बैठक तीन वर्ष में एक बार की जाती है। - अगली IAU की बैठक का आयोजन वर्ष 2021 में दक्षिण कोरिया के बुसान में किया जाएगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? मिज़ोरम सरकार ने वर्ष 1873 के 'बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन' (Bengal Eastern Frontier Regulation- BEFR) और वर्ष 1993 के 'लुशाई हिल्स अधिसूचना' (Lushai Hills Notification) की इनर लाइन के आधार पर असम के साथ सीमा संशोधन की माँग की है। - वर्ष 1972 में केंद्र शासित प्रदेश और वर्ष 1987 में राज्य बनने से पहले मिज़ोरम असम का लुशाई हिल्स ज़िला था। - स्वतंत्रता के बाद से असम को विभाजित कर मिज़ोरम और नगालैंड जैसे नए राज्यों का गठन किया गया। - चूँकि राज्यों की सीमाएँ जनजातीय क्षेत्र एवं पहचान का अनुसरण नहीं करती हैं जिसके कारण विभिन्न जनजातियों के मध्य आपसी संघर्ष उत्पन्न होता है और राजनीतिक एवं सीमा विवाद का कारण बनता है। - मिज़ोरम दक्षिणी असम के साथ 123 किलोमीटर की सीमा साझा करता है और असम के 509 वर्ग मील के हिस्से पर यह कहकर दावा करता है कि पड़ोसी राज्य ने इस पर कब्ज़ा कर लिया है। दोनों राज्यों के बीच इस सीमा के विस्तार को लेकर विवाद है। - इस सीमा पर कई हिंसक घटनाएँ भी हो चुकी हैं जो विवाद को बढ़ावा देने का कार्य करती रही हैं। (Inner Line Permit- ILP): - ILP एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है जिसे भारत सरकार द्वारा किसी भारतीय नागरिक को संरक्षित क्षेत्र में सीमित समय के लिये आंतरिक यात्रा की मंज़ूरी देने हेतु जारी किया जाता है। - इसे बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के आधार पर लागू किया गया था। - यह अधिनियम पूर्वोत्तर के पहाड़ी आदिवासियों से ब्रिटिश हितों की रक्षा करने के लिये बनाया गया था क्योंकि वे ब्रिटिश नागरिकों (British Subjects) के संरक्षित क्षेत्रों में प्रायः घुसपैठ किया करते थे। - इसके तहत दो समुदायों के बीच क्षेत्रों के विभाजन के लिये इनर लाइन (Inner Line) नामक एक काल्पनिक रेखा का निर्माण किया गया ताकि दोनों पक्षों के लोग बिना परमिट के एक-दूसरे के क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें। - आगंतुकों को इस संरक्षित क्षेत्र में संपत्ति खरीदने का अधिकार नहीं होता है। - अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड तथा मिज़ोरम राज्यों के मूल निवासियों की पहचान को बनाए रखने के लिये यहाँ बाहरी व्यक्तियों का ILP के बिना प्रवेश निषिद्ध है। - इस दस्तावेज़ की सेवा-शर्तें और प्रतिबंध राज्यों की अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार लागू किये गए हैं। - BEFR अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम और नगालैंड में अनिवासी भारतीयों को अस्थायी प्रवास के लिये आंतरिक लाइन परमिट के बिना अनुमति नहीं देता है। विवाद का प्रभावः - यह सीमा विवाद राज्यों के आपसी सहयोग को प्रभावित करेगा तथा नृजातीय संघर्ष को बढ़ावा देगा। - इससे विवादित क्षेत्र की विकास प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जिससे वहाँ के लोग दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करेंगे। समाधान के उपायः - दोनों राज्यों को आपसी वार्ता के माध्यम से सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास करना चाहिये। - दोनों राज्यों में आपसी सहमति न बनने की स्थिति में केंद्र सरकार की मदद से इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। - बदलते परिदृश्य में सरकारों को क्षेत्रवाद के स्वरूप को समझना होगा। यदि यह विकास की मांग तक सीमित है तो उचित है, परंतु यदि क्षेत्रीय टकराव को बढ़ावा देने वाला है तो इसे रोकने के प्रयास किये जाने चाहिये। - वर्तमान में क्षेत्रवाद संसाधनों पर अधिकार करने और विकास की लालसा के कारण अधिक पनपता दिखाई दे रहा है। इसका एक ही उपाय है कि विकास योजनाओं का विस्तार सुदूर तक हो। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक दशक से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के फलस्वरूप प्रस्तावित थर्टी मीटर टेलीस्कोप (Thirty Metre Telescope- TMT) को परियोजना के सह-निर्माता देश (भारत सहित ) किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना चाहते हैं। थर्टी मीटर टेलीस्कोपः - दुनिया के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप, TMT का निर्माण हवाई द्वीप समूह के मौना की (Mauna Kea) द्वीप पर किया जा रहा है अतः इसे हवाई टेलीस्कोप के नाम से भी जाना जाता है। - TMT, एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) परियोजना है जिसमें पाँच देश- कनाडा, अमेरिका, चीन, भारत तथा जापान शामिल हैं। - परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 2 बिलियन डाॅलर है। - TMT टेलीस्कोप की सहायता से अंतरिक्ष तथा ब्रह्मांडीय वस्तुओं का व्यापक निरीक्षण किया जा सकेगा। - यह टेलीस्कोप हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में 12 गुना अधिक बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेगा। विवाद का कारणः - प्रस्तावित स्थल मौना की द्वीप को स्थानीय हवाईयन लोगों द्वारा पवित्र स्थल माना जाता है जिससे वे प्रस्तावित परियोजना का प्रारंभ से विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि वहाँ पहले से ही बहुत अधिक वेधशालाएँ हैं तथा अब वहाँ इस प्रकार का एक और टेलीस्कोप स्थापित किया गया तो इससे स्थानीय संस्कृति प्रभावित होगी। मौना की (Mauna Kea): - मौना की द्वीप हवाई द्वीप समूह का एक निष्क्रिय ज्वालामुखी द्वीप है जिसकी सागर तल (Sea Level) तथा सागर आधार तल (Sea Base) से ऊँचाई क्रमशः 4,207.3 मीटर और 10,200 मीटर है। - सागर तल के आधार यह हवाई राज्य का सबसे ऊँचा स्थान है जबकि सागर आधार तल के आधार पर दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है। - इसके अलावा मौना की द्वीप को हवाई राज्य द्वारा संरक्षण क्षेत्र के रूप में भी नामित किया गया है तथा विभिन्न पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन (Environmental Impact Statement- EIS) रिपोर्टों से पता चला है कि इन परियोजनाओं ने क्षेत्र में पर्यावरण कुप्रबंधन को बढ़ाया है। पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथनः - संयुक्त राज्य अमेरिका के पर्यावरण कानून के तहत एक पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन, मानव के पर्यावरण को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने से पूर्व अपनाई जाने वाली विशिष्ट कार्यप्रणाली है। - यह कार्य वर्ष 1969 के अमेरिका के राष्ट्रीय पर्यावरण नीति अधिनियम (National Environmental Policy Act- NEPA) में बताई गयी प्रक्रिया के तहत होता है। - NEPA के तहत पर्यावरण समीक्षा में विश्लेषण के तीन अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। - श्रेणीबद्ध निष्कासन निर्धारण (Categorical Exclusion- CATEX) - पर्यावरणीय आकलन (Environmental Assessment- EA) - पर्यावरणीय प्रभाव कथन अभिकथन (EIS) - पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन पर्यावरण समीक्षा के विश्लेषण का तीसरा चरण होता है जिसका कार्य किसी भी परियोजना का विस्तृत आकलन करना है। - इस परियोजना को विज्ञान बनाम संस्कृति के मध्य विवाद का रंग देने की कोशिश की जा रही है। विज्ञान बनाम संस्कृति (Science vs culture): - मौना की द्वीप के संरक्षण की वकालत करने वाले हवाईवासी लोगों को विज्ञान विरोधी और पिछड़ा कहा जा रहा है। - विज्ञान बनाम संस्कृति के मध्य विवाद का जन्म 1600 के दशक से माना जाता है जब कैथोलिक चर्च पादरियों द्वारा काॅपरनिकस और गैलीलियो जैसे खगोलविदों को परेशान किया गया था। - लेकिन वर्तमान में पश्चिमी परंपराओं को गैर-पश्चिमी परंपराओं से श्रेष्ठ बताने के लिये इसका प्रयोग किया जा रहा है। - इस परियोजना के स्थापना स्थल मौना की द्वीप को लेकर वर्ष 2014 से ही विवाद चल रहा था, जिसे वर्ष 2018 में हवाई सर्वोच्च न्यायालय ने समाप्त किया तथा परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। - लेकिन परियोजना के समर्थकों देशों ने तब से कोई प्रगति नहीं की है, क्योंकि निर्माण कार्य वर्ष 2015 और वर्ष 2019 में पहले ही दो बार बाधित हो चुके थे तथा इसके आगे भी विरोध की संभावना नज़र आ रही है। - इस परियोजना में लगभग पाँच साल की देरी हुई है इसलिये वर्ष 2025 तक इसका परिचालन प्रारंभ होने की संभावना है । टेलीस्कोप का निर्माण यहाँ क्यों? - वैज्ञानिकों ने चिली, मैक्सिको, भारत और हवाई में विभिन्न स्थलों पर परीक्षण किये तथा वर्ष 2009 में मौना की द्वीप को आदर्श स्थल के रूप में चुना। - टेलीस्कोप के लिये आवश्यक आदर्श परिस्थितियाँ यथा- आदर्श ऊँचाई, वायुमंडलीय दशाएँ जैसे कि बादल निर्माण, वायु की गति, वायु का तापमान, सौर विकिरण, जमीन की शीतलन दर आदि सभी यहाँ अनुकूल है। भारत की भागीदारीः - भारत भी परियोजना से जुड़े पाँच देशों में से एक हैं तथा भारत की तरफ से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology- DST) तथा परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy- DAE) संयुक्त रूप से इस परियोजना में शामिल होंगे। - भारत एक दिए गए वर्ष में उपलब्ध समय स्लॉट के 10% का उपयोग कर सकेगा, जिसका निर्धारण मौद्रिक और अवसंरचनात्मक योगदान के आधार पर किया जाएगा। भारत का योगदान 200 मिलियन डाॅलर होगा, जो प्रस्तावित योजना की लागत का दसवाँ हिस्सा है। - टेलीस्कोप निर्माण में कुल 492 पॉलिश किए गए दर्पणों की आवश्यकता होगी जिनमें से भारत को 83 दर्पणों का निर्माण करना है। परियोजना में देरी होने से इन दर्पणों के विनिर्माण अनुबंधों में भी देरी हो रही है। आगे की संभावनाः - टेलीस्कोप लगाने के लिये दूसरी सबसे अच्छी अवस्थिति स्पेन के कैनरी द्वीप समूह के ला पाल्मा (La Palma) द्वीप है, जिसे नवीन परियोजना स्थल के रूप में चुना जा सकता है। - हानले, लद्दाख (Hanle, Ladakh) भी TMT की मेजबानी करने के लिये एक स्थल चुना जा सकता है। कैनरी द्वीपसमूह (Canary Islands): - यह स्पेन द्वारा नियंत्रित द्वीपों का एक समूह है जो अफ़्रीका के उत्तर पश्चिमी छोर पर अटलांटिक महासागर में स्थित है। इस द्वीपसमूह में कई द्वीप है यथा तेनरीफ (Tenerife), ला पाल्मा (La Palma), ला गोमेरा (La Gomera) आदि। भारत की मेजबानी में विवादः - महत्वाकांक्षी विज्ञान परियोजनाओं की मेजबानी के साथ भारत की भी अपनी समस्याएँ रही हैं यथा- तमिलनाडु में थेनी (Theni) में प्रस्तावित भारतीय न्यूट्रिनो वेधशाला (Indian Neutrino Observatory- INO), राज्य में विरोध के कारण पहले ही ठप हो गई है, ऐसे में नवीन परियोजनाओं की मेजबानी करना भारत के लिये आसान नहीं होगी। हनले (Hanle): - यह भारतीय संघशासित प्रदेश लद्दाख का एक ऐतिहासिक गाँव है, जो प्राचीन लद्दाख-तिब्बत व्यापार मार्ग पर हनले नदी घाटी में स्थित है। - यह खगोलीय अवलोकन के लिये दुनिया के सबसे ऊँचे स्थलों में से एक है। थेनी (Theni): - यह तमिलनाडु का एक ज़िला है जो पश्चिमी घाट के समीप स्थित है। इसके तहत लगभग 1200 मीटर ऊँचे चट्टानी पहाड़ों के नीचे सुरंग में विस्तरीय प्रयोगशाला बनायी जायेगी, जिससे पश्चिमी घाट की जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। आगे की राहः - ऐसी वैज्ञानिक परियोजनाओं में विज्ञान और संस्कृति के बीच की लड़ाई जैसे रंग देने के स्थान पर स्थानीय लोगों के अधिकारों तथा संस्कृति को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ाना चाहिये। म्याँमार के राष्ट्रपति यू विन मियंट चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के मध्य 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए हैं। अधिकतर समझौतों में मुख्य रूप से म्याँमार के संघर्ष प्रभावित रखाइन प्रांत में भारत की सहायता के तहत चल रही विकास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन समझौतों में 'मानव तस्करी' की रोकथाम के लिये सहयोग, तस्करी पीड़ितों को बचाने, खोजने, वापसी और पुनः मुख्यधारा में लाना भी शामिल है। साथ ही समझौतों में आपूर्ति प्रणालियों के निर्माण, सौर ऊर्जा द्वारा प्राप्त बिजली के वितरण के साथ-साथ रखाइन प्रांत में सड़कों और स्कूलों के निर्माण पर ध्यान दिया गया है। म्याँमार के रखाइन प्रांत में बौद्ध समुदाय और रोहिंग्या समुदाय के बीच संघर्ष चल रहा है। यह संघर्ष द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शुरू हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रोहिंग्या मुसलमानों ने एक अलग मुस्लिम प्रांत के बदले में रखाइन के बौद्धों के खिलाफ अंग्रेज़ों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखेंगे। यह एक्सप्रेस-वे फरवरी 2018 में सरकार द्वारा घोषित उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे सहमति के बिंदुओं को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाया जा रहा यह एक्सप्रेस-वे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और जालौन ज़िलों से होकर गुज़रेगा। यह एक्सप्रेस-वे बुंदेलखंड क्षेत्र को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 296 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे से चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, ओरैया और इटावा ज़िलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मराठी को 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा देने का आग्रह किया है। विधानसभा में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के मराठी भाषा मंत्री सुभाष देसाई द्वारा प्रस्तुत किया गया था। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि मराठी एक प्राचीन भाषा है और दावा किया कि यह संस्कृत से भी पुरानी है। ध्यातव्य है कि वर्तमान में छः भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया है, जो इस प्रकार हैं- तमिल (2004), संस्कृत (2005), कन्नड़ (2008), तेलुगू (2008), मलयालम (2013), ओडिया (2014)। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार, किसी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में अधिसूचित करने से प्राप्त होने वाले लाभ इस प्रकार हैं- (1) भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में प्रख्यात विद्वानों के लिये दो प्रमुख वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों का वितरण (2) शास्त्रीय भाषाओं में अध्ययन के लिये उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना (3) मानव संसाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुरोध करता है कि वह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शास्त्रीय भाषाओं के लिये पेशेवर अध्यापकों के कुछ पदों की घोषणा करें। प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को देश भर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। ज्ञात हो कि भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (Sir CV Raman) ने 28 फरवरी, 1928 को रमन प्रभाव की खोज की थी। उन्हीं के सम्मान में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष के लिये राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 'विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएँ' (Women in Science) है। इसका मूल उद्देश्य छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित एवं प्रेरित करना तथा लोगों को विज्ञान व वैज्ञानिक उपलब्धियों से अवगत कराना है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की कम संख्या भागीदारी पर अफसोस प्रकट किया। आँकड़ों के अनुसार, देश में महिला वैज्ञानिक मात्र 15 प्रतिशत हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत 30 प्रतिशत है। सर जॉन टेनिएल (Sir John Tenniel) का जन्म 28 फरवरी, 1820 को लंदन में हुआ था। जॉन टेनिएल 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी चित्रकार, ग्राफिक हास्यकार और राजनीतिक कार्टूनिस्ट थे। 28 फरवरी, 2020 को उनका 200वाँ जन्मदिवस मनाया जा रहा है। सर जॉन टेनिएल की जीवन परिस्थितयाँ अत्यंत कठिन रहीं, 20 वर्ष की उम्र में एक हादसे की वजह से उनकी दाएँ आँख की रोशनी चली गई। लेकिन फिर भी सर जॉन टेनिएल ने हार नहीं मानी और एलिस इन वंडरलैंड (Alice in Wonderland) जैसे प्रसिद्ध कैरेक्टर्स को चित्रित किया। वर्ष 1893 में उनकी कलात्मक उपलब्धियों के लिये उन्हें नाइट की उपाधि दी गई।
प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में शोधकर्त्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने भारत की सोन नदी घाटी में अस्सी,शून्य-पैंसठ,शून्य वर्ष पूर्व के मनुष्यों की निरंतर उपस्थिति के प्रमाण खोजे हैं। मुख्य बिंदुः - ये शोध कार्य मध्य भारत के ऊपरी सोन नदी-घाटी में ढाबा नामक स्थल की की 'ट्रेंचेज़' में किये गए। - इस पुरातात्त्विक उत्खनन से लगभग अस्सी,शून्य वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में मानव व्यवसाय के प्रमाण मिले हैं। - मेगालिथिक उपकरण लगभग अस्सी,शून्य-पैंसठ,शून्य वर्ष पूर्व के हैं, जबकि सूक्ष्म-पाषाण उपकरण लगभग पचास,शून्य वर्ष पूर्व के हैं। पाषाण कालः - पुरातत्वविदों ने आरंभिक काल को पुरा पाषण काल कहा है, यह नाम पुरास्थलों से प्राप्त पत्थर के औजारों के महत्त्व को बताता है। पुरापाषाण कालः - बीस लाख-बारह हज़ार वर्ष पूर्व का समय। - इसको भी तीन काल आरंभिक, मध्य तथा उत्तर पुरापाषाण काल में विभाजित किया जाता है। मध्यपाषण काल : - इसे माइक्रोलिथिक या सूक्ष्मपाषण काल भी कहा जाता है क्योंकि औजारों में लकड़ी या हड्डियों के मुट्ठे लगे होते हैं। नवपाषाण कालः - दस हज़ार वर्ष पूर्व के बाद का समय। शोध का महत्त्वः - यह शोध दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मानव आबादी की पहली उपस्थिति तथा अफ्रीका से मानव विसरण को समझने में मदद करेगा। - ढ़ाबा का लिथिक उद्योग अफ्रीकी एवं अरब के मध्य पाषाण युग के विभिन्न उपकरणों तथा ऑस्ट्रेलिया की शुरुआती कलाकृतियों से मिलते हैं, जिससे यह पता चलता है की ये संभवतः होमो सेपियन्स के उत्पाद है क्योंकि उनका अफ्रीका से बाहर पूर्व दिशा में विसरण हुआ था। - यह अध्ययन इस सामान्य दृष्टिकोण का खंडन करता है कि आधुनिक मानव का पचास,शून्य वर्ष पूर्व ही अफ्रीका से बाहर विसरण हुआ है जबकि बताता है की टोबा ज्वालामुखी महाविस्फोट के दौरान भी यहाँ मानव की उपस्थिति रही है। - अफ्रीका और अरब में पहले पाए गए उपकरणों की समानता के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि वे होमो सेपियन्स द्वारा बनाए गए थे। टोबा ज्वालामुखी विस्फोट तथा मानव प्रजातिः - लगभग चौहत्तर,शून्य वर्ष पूर्व, सुमात्रा के टोबा ज्वालामुखी में सुपर-विस्फोट हुआ जिससे पृथ्वी के कई हिस्सों में लगभग एक दशक से अधिक लंबी अवधि के लिये शीत मौसम की दशाएँ व्याप्त हो गई। यह विस्फोट पिछले दो मिलियन वर्षों में सबसे बड़ा था। - ऐसा माना जाता है इस ज्वालामुखी जनित शीतकाल से पृथ्वी की सतह लगभग एक हज़ार साल तक ठंडी रही तथा इससे मानव की विशाल आबादी नष्ट हो गई। - यह माना गया कि इससे नाटकीय रूप से जलवायु परिवर्तन हुआ और इसने पूरे एशिया में आबादी को कम कर दिया। हालाँकि, भारत के पुरातात्विक साक्ष्य इन सिद्धांतों का समर्थन नहीं करते हैं। - 'ज्वालामुखी शीतकाल' परिकल्पना के अनुसार, इस ज्वालामुखी के कारण मनुष्यों के जीन पूल में बाधा उत्पन्न हुई तथा अफ्रीका के अलावा संपूर्ण मनुष्य जाति नष्ट हो गई तथा यह आबादी अफ्रीका से विसरित हो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बस गई। ज्वालामुखी शीतकाल संकल्पनाः - इसे वायुमंडलीय धूलि परिकल्पना के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें ज्वालामुखी विस्फोट की क्रिया में एयरोसोल्स , ज्वालामुखी धूल-कण, सल्फ्यूरिक अम्ल आदि के उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापमान में कमी आती है क्योंकि ये सौर्यिक विकिरण को परावर्तित करके भी कहा जाता है) अल्पकालिक शीतलन प्रभाव पैदा करते है। - दीर्घकालिक शीतलन प्रभाव मुख्य रूप से समतापमंडल में सल्फर गैसों के उत्सर्जन पर निर्भर होते हैं, जहाँ वे सल्फ्यूरिक अम्ल बनने की प्रतिक्रियाओं की एक शृंखला से गुजरकर एरोसोल का निर्माण कर सकते हैं। - यह समतापमंडलीय एरोसोल सौर्यिक विकिरण का ऐल्बिडो कर पार्थिव सतह को ठंडा तथा पार्थिव विकिरण को अवशोषित करके समतापमंडल को गर्म करते हैं। - इस प्रकार वायुमंडलीय ऊष्मन एवं शीतलन प्रभाव, क्षोभमंडल और समतापमंडल पर अलग अलग होता है। - इस शोध के अनुसार विस्फोट से पूर्व से ही उत्तरी भारत में बसे प्रारंभिक मनुष्यों की आबादी थी और यह तबाही की अवधि के दौरान तथा बहुत बाद तक रही। - जीवाश्म साक्ष्य बताते हैं कि आधुनिक मानव का अफ्रीका से दो सौ,शून्य वर्ष पूर्व ग्रीक, अरब और चीन में अस्सी-एक सौ,शून्य वर्ष पूर्व, सुमात्रा में टोबा ज्वालामुखी विस्फोट से ठीक पूर्व तथा ऑस्ट्रेलिया में पैंसठ,शून्य वर्ष पूर्व विवरण हो चुका था। - सोन नदी भारत के मध्य प्रदेश राज्य से निकल कर उत्तर प्रदेश, झारखंड की पहाड़ियों से गुजरते हुए पटना के समीप गंगा नदी में मिलती है। - इस नदी में बालू का रंग पीला होने से इसके सोने की तरह चमकने के कारण इसका नाम सोन पड़ा। - सोन घाटी भू-गर्भिक तौर पर दक्षिण-पश्चिम में नर्मदा नदी घाटी का लगभग अनवरत विस्तार है। यह शोध मानव प्रजाति की उत्पति को समझने में वैज्ञानिक सोच को अधिक व्यापक करेगा तथा वैश्विक समुदाय का ध्यान पुनः अपनी और आकर्षित करेगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज , हैदराबाद ने अपने विविध उपयोगकर्त्ताओं को बेहतर ढंग से सागरीय सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु तीन नवीन सेवाएँ प्रारम्भ की है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में स्थापित यह संस्थान, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। - INCOIS सागरीय क्षेत्र में उपयोगकर्त्ताओं को कई प्रकार की निःशुल्क सेवाएँ प्रदान करता है। यह मछुआरों से लेकर अपतटीय तेल अन्वेषण उद्योगों जैसे विशिष्ठ उपयोगकर्ताओं को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। - यह भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र के माध्यम से सुनामी, तूफान की लहरों आदि पर तटीय आबादी के लिये निगरानी और चेतावनी सेवाएं प्रदान करता है। - इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर , INCOIS, हैदराबाद की एक इकाई है जो वैश्विक महासागरों में होने वाली सुनामी की घटनाओं में सलाह तथा पूर्वानुमान जारी करता है। - ITEWC प्रणाली मेंसत्रह ब्रॉडबैंड भूकंपीय स्टेशनों का नेटवर्क , चार बॉटम प्रेशर रिकार्डर और पच्चीस ज्वार गेज शामिल हैं। - यह केंद्र पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक महासागरों में होने वाली सुनामी हेतु उत्तरदायी भूकंपों का पता लगाने में सक्षम है। प्रारंभ की नवीन सेवाएँः - लघु पोत सलाहकार और पूर्वानुमान सेवा प्रणाली : - महातरंग महोर्मि पूर्वानुमान प्रणाली : - यह भारत की विशाल तटीय आबादी के लिये तरंगों के संदर्भ में पूर्वानुमान सूचना जारी करेगा। - एल्गी ब्लूम सूचना सेवा : - इस सेवा के द्वारा हानिकारक एल्गी प्रस्फुटन के संदर्भ में सूचना जारी की जाएगी। सेवाओं की आवश्यकताः - छोटे मछली पालक जहाज दिशा की तथा सागरीय क्षेत्र के संबंध में उचित समय पर सही जानकारी के अभाव में अन्य देशों यथा- पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि के सागरीय क्षेत्रों में चले जाते हैं जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। - SWAS प्रणाली भारतीय तटीय जल क्षेत्र में में काम करने वाले छोटे जहाजों के लिये सलाहकार और पूर्वानुमान सेवा उपलब्ध करायेगी। SWAS प्रणाली उपयोगकर्ताओं को संभावित क्षेत्रों के बारे में चेतावनी देती है ताकि जहाज पुनः लौट सके। - महातरंग महोर्मि के कारण तटीय इलाकों में फ्लैश-बाढ़ की घटनाएँ होती हैं, जिससे तटीय इलाकों में विशाल जन-धन की हानि होती है। - SSFS प्रणाली के माध्यम से महातरंग महोर्मि की पूर्व सूचना दी जा सकेगी। - इस प्रकार की तरंगे मुख्यतया भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर उत्पन्न होती है। महातरंग महोर्मि : - ये विशेष प्रकार की सागरीय तरंगे होती है जिनकी उत्पति सागर तट से काफी दूर होती है तथा ये लंबी दूरी तय करने के बाद तटीय क्षेत्रों में पहुँचती है। - इन तरंगों की उत्पत्ति के समय स्थानीय हवाओं या तटीय वातावरण में कोई बदलाव नहीं होता है अतः इनका पूर्वानुमान करना आसान नहीं होता। - मछलीपट्नम - नागपट्टनम - कच्छ की खाड़ी - 'एल्गी प्रस्फुटन' के कारण तटीय मत्स्य पालन, समुद्री जीवन और जल की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती हैं अतः मछुआरों, पर्यावरण विशेषज्ञ आदि को इसके पूर्वानुमान की आवश्यकता पड़ती थी। - INCOIS-ABIS उत्तरी हिंद महासागर के ऊपर फाइटोप्लैंकटन प्रस्फुटन के अनुपात तथा सागरीय भौतिक दशाओं के आधार पर इन घटनाओं के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा। - एल्गी प्रस्फुटन के ऐसे चार संभावित क्षेत्रों की पहचान ब्लूम हॉटस्पॉट्स के रूप में की गई है। सेवाओं का महत्त्वः - पड़ोसी देशों से मत्स्यन की सागरीय सीमा से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। - मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा मिलने से 'नीली अर्थव्यवस्था' के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। - "सागर हमारे गृह के सीमांत संसाधन है।" अतः इन सेवाओं से गहन सागरीय अर्थव्यवस्था पर भारत की समझ को बढ़ावा मिलेगा। के.एम.पणिक्कर ने 'भारतीय इतिहास पर समुद्री शक्ति के प्रभाव' निबंध में हिन्द महासागर के महत्त्व को उजागर करते हुए लिखा है कि भारत को सागरीय संसाधनों का अधिकतम दोहन करना चाहिये। अतः हाल ही में प्रारंभ की गयी सेवाएँ उनके इस अभिकथन की पुष्टि करते हैं। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? अफगानिस्तान में करीब दो दशकों से जारी हिंसा को रोकने के लिये उनतीस फरवरी, दो हज़ार बीस को खाड़ी देश कतर की राजधानी दोहा में होने वाले अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते के लिये कतर द्वारा भारत को भी आमंत्रित किया गया है। मुख्य बिंदुः - भारत ने दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिये अपना प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिये कतर में भारत के राजदूत 'पी. कुमारन' को भेजने का फैसला किया है। - यह पहला अवसर होगा कि भारत का कोई आधिकारिक प्रतिनिधि एक ऐसे समारोह में भाग लेगा जहाँ तालिबान के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे और दो हज़ार एक के बीच जब अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में था, तब भारत ने इसे कूटनीतिक और आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी थी। - तालिबान का उदय नब्बे के दशक में उत्तरी पाकिस्तान में अफगानिस्तान से सोवियत संघ सेना की वापसी के पश्चात् हुआ। उत्तरी पाकिस्तान के साथ-साथ तालिबान ने पश्तूनों के नेतृत्व में अफगानिस्तान में भी अपनी मज़बूत पृष्ठभूमि बनाई। - विदित है कि तालिबान की स्थापना और प्रसार में सबसे अधिक योगदान धार्मिक संस्थानों एवं मदरसों का था जिन्हें सऊदी अरब द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता था। - अफगानिस्तान से सोवियत संघ की वापसी के पश्चात् वहाँ कई गुटों में आपसी संघर्ष शुरू हो गया था और इससे जन-सामान्य बुरी तरह से परेशान था ऐसी परिस्थिति में राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर अफगानिस्तान में भी तालिबान का स्वागत किया गया। - प्रारंभ में तालिबान को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाने तथा विवादित क्षेत्रों में अपना नियंत्रण स्थापित कर शांति स्थापित करने जैसी गतिविधियों के कारण सफलता मिली। - प्रारंभ में दक्षिण-पश्चिम अफगानिस्तान में तालिबान ने अपना प्रभाव बढ़ाया तथा इसके पश्चात् ईरान सीमा से लगे हेरात प्रांत पर अधिकार कर लिया। - धीरे-धीरे तालिबान पर मानवाधिकार का उल्लंघन और सांस्कृतिक दुर्व्यवहार के आरोप लगने लगे। तालिबान द्वारा विश्व प्रसिद्ध बामियान बुद्ध प्रतिमाओं को नष्ट करने की विशेष रूप से आलोचना की गई। - तालिबान द्वारा न्यूयॉर्क पर किये गए हमले के पश्चात् इसका वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ा इसके शीर्ष नेता ओसामा बिन लादेन को इन हमलों का दोषी बताया गया। - पिछले कुछ समय से अफगानिस्तान में तालिबान का दबदबा फिर से बढ़ा है और पाकिस्तान में भी उसकी स्थिति मज़बूत हुई है। - अमेरिका द्वारा किसी भी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने से पहले संघर्ष विराम की मांग की गई थी। शांति समझौते के बाद अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में उन्नीस वर्ष से सक्रिय सैन्य अभियान को समाप्त कर अपने सैनिकों को वापस लाया जा सकेगा। समझौते के बारे मेंः - इक्कीस फरवरी, दो हज़ार बीस को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा था कि अफगानिस्तान में लंबी अवधि से हिंसा में कमी को देखते हुए उनतीस फरवरी को अमेरिका और तालिबान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में IC-आठ सौ चौदह विमान के अपहरण के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत सरकार के प्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से तालिबान से जुड़े मामलों में शामिल होंगे। - माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वार्ता के बाद यह नीतिगत बदलाव आया है। वैसे मॉस्को में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में तालिबान की मौजूदगी वाली वार्ता में भारत ने अनौपचारिक शिरकत की थी। नए परिप्रेक्ष्य में पहला कदमः - अफगानिस्तान में नई वास्तविकताओं को देखते हुए, भारत अब तालिबान के साथ राजनयिक रूप से जुड़ने के लिये आगे बढ़ रहा है। - समझौता-हस्ताक्षर समारोह में भारत की उपस्थिति संभवतः कूटनीतिक संबंधों के उदघाटन का पहला संकेत है। - भारत के अफगानिस्तान में कई महत्त्वपूर्ण रणनीतिक हित हैं, यहाँ भारत ने कई विकास परियोजनाओं पर काम किया है। क्या हैं भारतीय चिंताएँ? - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान जारी किये गए संयुक्त बयान में अफगानिस्तान पर भारत की चिंताओं को बहुत अच्छी तरह से दर्शाया गया था। - यह संयुक्त बयान अफगान के नेतृत्व वाली और अफगान के स्वामित्व वाली शांति प्रक्रिया के बारे में बात करता है लेकिन यह अफगान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया का उल्लेख नहीं करता है, क्योंकि वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा नियंत्रित की जाती है। - तालिबान का अफगानिस्तान में फिर से स्थापित होने से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये भी एक बड़ा खतरा है। ऐसे में भारत को ये सुनिश्चित करना होगा कि यदि ये समझौता होता है तो क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में न पड़ने पाए। - भारत की चिंता यह भी है कि अगर अमेरिका अपनी सेना को अफगानिस्तान से हटा लेता है पाकिस्तान अपने यहाँ उत्पन्न हो रहे आतंकवाद को तालिबान और अफगानिस्तान को ज़िम्मेदार ठहरा सकता है। - कई पश्चिमी पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह समझौता अफगानिस्तान में शांति के लिये एक मौका का प्रतिनिधित्व कर सकता है, परंतु भारत और अधिक सतर्क है क्योंकि इससे पाकिस्तान को बल मिलने की संभावना है। भारत-अमेरिका और अफगानिस्तानः - भारत और अमेरिका एकजुट, संप्रभु, लोकतांत्रिक, समावेशी, स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान में अपने-अपने हित रखते हैं। - ये दोनों देश अफगान के नेतृत्व वाली और अफगान के स्वामित्व वाली शांति और सुलह प्रक्रिया का समर्थन करते हैं जिसके परिणामस्वरूप अफगानिस्तान में स्थायी शांति स्थापित हो जिसके फलस्वरूप हिंसा की समाप्ति हो तथा आतंकवादी ठिकानों का विनाश किया जा सके। - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को स्थिर बनाने में सहायता करने के लिये विकास और सुरक्षा सहायता प्रदान करने में भारत की भूमिका का स्वागत किया। - वर्ष दो हज़ार सत्रह में नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस की यात्रा के दौरान जारी अंतिम संयुक्त बयान में भी डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र, स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिये भारतीय योगदान का स्वागत किया था। - अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधित सामरिक भागीदारी के महत्त्व को समझते हुए दोनों देशों ने अफगानिस्तान के भविष्य के समर्थन में परामर्श और सहयोग जारी रखने के लिये प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है। - इस मुद्दे पर भारत अमेरिका के अलावा, अफगानिस्तान, रूस, ईरान, सऊदी अरब और चीन जैसे सभी राजनीतिक सक्रिय पक्षों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रहा है। आगे की राहः - अफगानिस्तान के संदर्भ में भारत के स्थायी लक्ष्य स्पष्ट हैं- अफगानिस्तान में विकास में लगे करोड़ों डॉलर व्यर्थ न जाने पाएँ, काबुल में मित्र सरकार बनी रहे, ईरान-अफगान सीमा तक निर्बाध पहुँच बनी रहे और वहाँ के पाँचों वाणिज्य दूतावास बराबर काम करते रहें। इस एजेंडे की सुरक्षा के लिये भारत को अपनी कूटनीति में कुछ बदलाव करने भी पड़ें तो उसे पीछे नहीं हटना चाहिये, क्योंकि यही समय की मांग है। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? श्रीलंका ने युद्धोत्तर जवाबदेही एवं सुलह पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से स्वयं को अलग करने की आधिकारिक घोषणा की है। श्रीलंका के विदेश मंत्री के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को इस संदर्भ में आधिकारिक सूचना दे दी गई है। क्या है संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव? - दरअसल श्रीलंका के गृहयुद्ध के अंतिम दौर में श्रीलंकाई सेना पर लगभग पैंतालीस हज़ार से अधिक निर्दोष लोगों की हत्या और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था। - ज्ञात हो कि श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति, गोतबाया राजपक्षे गृह युद्ध के दौरान श्रीलंका के रक्षा सचिव थे और उनके भाई महिंदा राजपक्षे उस समय श्रीलंका के राष्ट्रपति थे। - इसी विषय को लेकर वर्ष दो हज़ार पंद्रह में गृहयुद्ध के छः वर्षों बाद तत्कालीन श्रीलंकाई सरकार ने ग्यारह अन्य देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया था, जिसमें श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जाँच की बात कही गई। - इस प्रस्ताव में व्यापक सुधारों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से श्रीलंका में घरेलू जवाबदेही तंत्र विकसित करने का प्रावधान है। - प्रस्ताव के अनुसार, श्रीलंका राष्ट्रमंडल और अन्य विदेशी न्यायाधीशों, बचाव पक्ष के वकीलों और जाँचकर्त्ताओं की भागीदारी के साथ एक विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया स्थापित करेगा। - श्रीलंका के इस कदम के परिणामस्वरूप गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्षता से जाँच संभव नहीं हो पाएगी जिसके कारण पीड़ितों के लिये न्याय प्राप्त करना अपेक्षाकृत काफी कठिन हो जाएगा। - यदि स्थिति ऐसी ही रहती है तो संभव है कि गृहयुद्ध के दौरान हुई घटनाएँ श्रीलंका में एक बार पुनः देखने को मिलें। - संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट के अनुसार, कल्याणकारी राज्य का यह कर्त्तव्य है कि वह देश में सभी समुदायों को एक साथ लेकर चले, न कि किसी समुदाय विशिष्ट को। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होने के बाद से ही श्रीलंका या तत्कालीन 'सीलोन' जातीय संघर्ष का सामना कर रहा था। - वर्ष दो हज़ार एक की सरकारी जनगणना के अनुसार, श्रीलंका की मुख्य जातीय आबादी में सिंहली , तमिल और श्रीलंकाई मूर शामिल हैं। - सिंहलियों ने औपनिवेशिक काल के दौरान तमिलों के प्रति ब्रिटिश पक्षपात का विरोध किया और आज़ादी के बाद के वर्षों में उन्होंने तमिल प्रवासी बागान श्रमिकों को देश से विस्थापित कर दिया तथा सिंहल को आधिकारिक भाषा बना दिया। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में सिंहलियों ने देश का नाम 'सीलोन' से बदलकर श्रीलंका कर दिया और बौद्ध धर्म को राष्ट्र का प्राथमिक धर्म घोषित कर दिया गया। - तमिलों और सिंहलियों के बीच जातीय तनाव और संघर्ष बढ़ने के बाद वर्ष एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में वेलुपिल्लई प्रभाकरन के नेतृत्व में लिट्टे का गठन किया गया और इसने उत्तरी एवं पूर्वी श्रीलंका, जहाँ अधिकांश तमिल निवास करते थे, में 'एक तमिल मातृभूमि' के लिये प्रचार करना प्रारंभ कर दिया। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरासी में लिट्टे ने श्रीलंकाई सेना की एक टुकड़ी पर हमला कर दिया, इसमें तेरह सैनिकों की मौत हो गई। विदित है कि इस घटनाक्रम से श्रीलंका में दंगे भड़क गए जिसमें लगभग दो,पाँच सौ तमिल लोग मारे गए। - इसके पश्चात् श्रीलंकाई तमिलों और बहुसंख्यक सिंहलियों के मध्य प्रत्यक्ष युद्ध शुरू हो गया। ध्यातव्य है कि भारत ने श्रीलंका के इस गृहयुद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई और श्रीलंका के संघर्ष को एक राजनीतिक समाधान प्रदान करने के लिये वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में भारत-श्रीलंका समझौते पर हस्ताक्षर किये। - भारत ने ऑपरेशन पवन के तहत लिट्टे को समाप्त करने के लिये श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स तैनात कर दी। हालाँकि हिंसा बढ़ने के तीन वर्षों बाद ही IPKF को वहाँ से हटा दिया गया। श्रीलंका सरकार का युद्धोत्तर जवाबदेही एवं सुलह पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से स्वयं को अलग करने का निर्णय स्पष्ट तौर पर मानवाधिकार संरक्षण को लेकर वैश्विक समुदाय के प्रयासों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा। आवश्यक है कि श्रीलंकाई सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे ताकि मानवाधिकार संरक्षण के प्रयासों को कमज़ोर होने से बचाया जा सके। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेरोगेसी की प्रक्रिया को विनियमित करने से संबंधित सेरोगेसी विधेयक, दो हज़ार बीस [Surrogacy Bill, दो हज़ार बीस] को मंज़ूरी प्रदान कर दी है। - ध्यातव्य है कि नवीनतम विधेयक अगस्त दो हज़ार उन्नीस में लोकसभा से पारित सेरोगेसी विधेयक दो हज़ार उन्नीस का संशोधित संस्करण है क्योंकि दो हज़ार उन्नीस के विधेयक को राज्यसभा में प्रवर समिति को भेज दिया गया था। - मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंज़ूरी देने से पहले राज्यसभा की प्रवर समिति की सभी सिफारिशों को शामिल किया है। - सरोगेसी विधेयक, दो हज़ार बीस का उद्देश्य व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाना और परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देना है। - मानव भ्रूण की बिक्री और खरीद सहित वाणिज्यिक सरोगेसी निषिद्ध होगी और निःसंतान दंपतियों को नैतिक सरोगेसी की शर्तों को पूरा करने पर ही सेरोगेसी की अनुमति दी जाएगी। - इस विधेयक के 'करीबी रिश्तेदारों' वाले खंड को हटा दिया गया है तथा अब यह विधेयक किसी 'इच्छुक' महिला को सरोगेट मदर बनने की अनुमति देता है जिससे विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के अलावा निःसंतान भारतीय जोड़ों को लाभ प्राप्त होगा। - यह विधेयक सेरोगेसी से संबंधित प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करने के लिये केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सेरोगेसी बोर्ड एवं राज्य स्तर पर राज्य सरोगेसी बोर्ड के गठन का प्रावधान करता है। - विधेयक के अनुसार, केवल भारतीय दंपति ही सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं। - यह विधेयक इच्छुक भारतीय निःसंतान विवाहित जोड़े जिसमें महिला की उम्र तेईस-पचास वर्ष और पुरुष की उम्र छब्बीस-पचपन वर्ष हो, को नैतिक परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है। - इसके अतिरिक्त यह विधेयक यह भी सुनिश्चित करता है कि इच्छुक दंपति किसी भी स्थिति में सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़े नहीं। नवजात बच्चा उन सभी अधिकारों का हकदार होगा जो एक प्राकृतिक बच्चे को उपलब्ध होते हैं। - यह विधेयक सरोगेसी क्लीनिकों को विनियमित करने का प्रयास भी करता है। सरोगेसी या इससे संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिये देश में सभी सरोगेसी क्लीनिकों का उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा पंजीकृत होना आवश्यक है। - यह विधेयक सरोगेट मदर के लिये बीमा कवरेज सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों का प्रावधान करता है। ध्यातव्य है कि सरोगेट मदर के लिये प्रस्तावित बीमा कवर को पहले के संस्करण में प्रदान किये गए सोलह महीनों से बढ़ाकर अब छत्तीस महीने कर दिया गया है। - यह विधेयक यह भी निर्दिष्ट करता है कि सरोगेसी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का लिंग चयन नहीं किया जा सकता है। - यह विधेयक निःसंतान दंपति के लिये सरोगेसी की प्रक्रिया से पहले आवश्यकता और पात्रता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य बनाता है। - इस विधेयक से व्यावसायिक सेरोगेसी को प्रतिबंधित किये जाने से सेरोगेसी के व्यापार को रोका जा सकता है क्योंकि इसमें महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता था। - विधेयक में सेरोगेट मदर के लिये बीमा कवर को सोलह माह से बढ़ाकर छत्तीस माह कर दिया गया है जिससे सेरोगेट मदर के हितों की रक्षा की जा सकेगी। - सेरोगेसी बोर्ड के गठन के फलस्वरूप सेरोगेसी की प्रक्रिया का विनियमन बेहतर तरीके से संभव होगा। - सभी सरोगेसी क्लीनिकों को उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा पंजीकृत होना आवश्यक है जिससे सेरोगेसी के गैर-कानूनी प्रयासों को रोका जा सकेगा। - साथ ही विधेयक में नवजात शिशु के अधिकारों को भी सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है जो कि बाल अधिकारों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। - विधेयक में निहित प्रावधानों का बेहतर क्रियान्वयन सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी कानून में उल्लिखित बातों के धरातल पर क्रियान्वयन से ही कानून के उद्देश्य पूरे किये जा सकते हैं। - सेरोगेसी से संबंधित जटिलताओं और चुनौतियों को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिये तथा इस प्रक्रिया से संबंधित सभी शब्दावलियों को परिभाषित किया जाना चाहिये। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव ने लिंचिंग के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किया है। - अमेरिका के निचले सदन द्वारा पारित इस प्रस्ताव में लिंचिंग को अपराध घोषित करते हुए आजीवन कारावास या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। - अमेरिका में हत्या उन अपराधों में शामिल है जिनके लिये मुकदमा राज्य या स्थानीय स्तर पर चलाया जाता है। किंतु अमेरिका का यह नया विधेयक लिंचिंग को एक संघीय अपराध घोषित करता है। - ध्यातव्य है कि इस विधेयक का नाम एम्मेट टिल नाम पर रखा गया है, जिसकी मात्र चौदह वर्ष की उम्र में वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचपन में लिंचिंग कर दी गई थी। - जब अनियंत्रित भीड़ द्वारा किसी दोषी को उसके किये अपराध के लिये या कभी-कभी अफवाहों के आधार पर ही बिना अपराध किये भी तत्काल सज़ा दी जाए अथवा उसे पीट-पीट कर मार डाला जाए तो इसे भीड़ द्वारा की गई हिंसा या लिंचिंग कहते हैं। - इस तरह की हिंसा में किसी कानूनी प्रक्रिया या सिद्धांत का पालन नहीं किया जाता और यह पूर्णतः गैर-कानूनी होती है। - विधेयक के अनुसार, अमेरिका में वर्ष एक हज़ार आठ सौ बयासी से वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़सठ के मध्य लगभग चार,सात सौ लोग, मुख्य रूप से अफ्रीकी-अमेरिकी लिंचिंग का शिकार हुए और इन लिंचिंग के निन्यानवे प्रतिशत अपराधियों को दंडित नहीं किया जा सका। - अमेरिकी गृहयुद्ध के पश्चात् एक हज़ार आठ सौ के दशक के अंत में जब दासों को मुक्त कर दिया गया तो अमेरिका में लिंचिंग की संख्या अचानक बढ़ने लगी। एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक में इसमें कमी आने के पश्चात् एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में लिंचिंग में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिली। - दरअसल गृहयुद्ध के पश्चात् अमेरिका में जब गोरे अमेरिकी अपना सामाजिक प्रभुत्व बनाए रखने में असमर्थ रहे तब कई विद्रोही समूहों का जन्म हुआ। - इन समूहों ने आम लोगों को गोरों की सत्ता बनाए रखने के लिये हिंसा करने को उकसाया और खुद भी कई हत्याओं को अंजाम दिया। - उल्लेखनीय है कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह के बाद से अमेरिकी काॅन्ग्रेस में दो सौ से अधिक एंटी-लिंचिंग विधेयक प्रस्तुत किये गए हैं, किंतु इनमें से कोई भी पारित नहीं हो सका। - भारत में भी मॉब लिंचिंग एक चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है। देश में वर्ष दो हज़ार सत्रह का पहलू खान हत्याकांड मॉब लिंचिंग का एक बहुचर्चित उदाहरण है, जिसमें कुछ तथाकथित गौ रक्षकों की भीड़ ने गौ तस्करी के झूठे आरोप में पहलू खान की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। - यह तो सिर्फ राजस्थान का ही उदाहरण है, इसके अतिरिक्त देश के कई अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आई हैं। - भारत में धर्म और जाति के नाम पर होने वाली हिंसा की जड़ें काफी मज़बूत हैं। देश में लगातार बढ़ रहीं लिंचिंग की घटनाएँ अधिकांशतः असहिष्णुता और अन्य धर्म तथा जाति के प्रति घृणा का परिणाम है। - वर्ष दो हज़ार दो में हरियाणा के पाँच दलितों की गौ हत्या के आरोप में लिंचिंग कर दी गई थी। वहीं सितंबर दो हज़ार पंद्रह में एक अज्ञात समूह ने मोहम्मद अखलाक और उसके बेटे दानिश पर गाय की हत्या करने और मांस का भंडारण करने का आरोप लगाते हुए पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी। - इन घटनाओं से मॉब लिंचिंग में धर्म और जाति का दृष्टिकोण स्पष्ट तौर पर ज़ाहिर होता है। - लिंचिंग जैसी घटनाएँ ज़ाहिर तौर पर किसी भी समाज की प्रगति में बाधक होती हैं। अतः नीति निर्माताओं के लिये इन्हें जल्द-से-जल्द रोकना आवश्यक हो जाता है। - देश में मणिपुर, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाए गए हैं। - हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव द्वारा किया गया यह प्रयास अवश्य ही सामाजिक एवं आर्थिक रूप से शोषित वर्गों और हाशिये पर मौजूद समुदायों के मध्य विश्वास पैदा करेगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में खगोलविदों ने पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए एक छोटी सी वस्तु देखी, जिसे उन्होंने 'मिनी-मून' या पृथ्वी के 'दूसरे उपग्रह' की संज्ञा दी है। मुख्य बिंदुः - खगोलविदों ने इस अस्थायी मिनी-मून को 'दो हज़ार बीस CDतीन' नाम दिया है। - दो हज़ार बीस सीडी-तीन नामक मिनी-मून की खोज पंद्रह फरवरी को नासा द्वारा वित्तपोषित एरिज़ोना स्थित 'कैटालिना स्काई सर्वे' के कैस्पर विर्ज़चोस और टेडी प्रुइने नामक खगोलविदों द्वारा की गई। - अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के 'माइनर प्लैनेट सेंटर' ने इस खोज के संदर्भ में कहा कि इसके ऑर्बिट इंटीग्रेशन से यह ज्ञात होता है कि यह अस्थायी रूप से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बँधा हुआ है। - यह वास्तव में एक क्षुद्रग्रह है, जो कि एक कार के आकार का है; इसका व्यास लगभग एक.नौ-तीन दशमलव पाँच मीटर है और यह हमारे स्थायी उपग्रह चंद्रमा के समान नहीं है। - यह एक अस्थायी मिनी-मून है, कुछ समय बाद यह पृथ्वी की कक्षा से मुक्त हो जाएगा और अपने रास्ते से हट जाएगा। क्या होता है अस्थायी मिनी-मून? - ये एक प्रकार के क्षुद्रग्रह होते हैं जो कभी-कभी अपनी कक्षा को छोड़कर पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर उसके प्राकृतिक ग्रह की तरह उसकी परिक्रमा करने लगते हैं परंतु यह परिक्रमण अस्थायी होता है अतः इसे अस्थायी मिनी-मून कहते हैं। - दो हज़ार बीस सीडी-तीन पृथ्वी से कुछ दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। इस तरह के क्षुद्रग्रह को 'टेंपररली कैप्चर्ड ऑब्जेक्ट' कहा जाता है। - ऐसे क्षुद्रग्रहों की कक्षा अस्थिर होती है। - ऐसे ग्रहों को हमारे स्थायी चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के साथ-साथ सूर्य के प्रभाव का भी सामना करना पड़ता है। - एक बार पृथ्वी की कक्षा में आने के बाद ऐसी वस्तुएँ आमतौर पर मुक्त होने के पश्चात् सूर्य के आस-पास की स्वतंत्र कक्षा में चली जाती हैं। - शोधकर्त्ताओं के अनुसार, दो हज़ार बीस सीडी तीन को तीन वर्ष पहले पृथ्वी की कक्षा में देखा गया था। पूर्व उदहारणः - यह पहली बार नहीं है जब पृथ्वी के एक से ज़्यादा चंद्रमा का पता चला हो। इसके पहले वर्ष दो हज़ार छः में RHएक सौ बीस नामक पृथ्वी के अस्थायी चंद्रमा का पता चला था। - RHएक सौ बीस सितंबर दो हज़ार छः से जून दो हज़ार सात तक पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के भीतर बना रहा। इसके बाद यह पृथ्वी के गुरुत्त्वीय क्षेत्र से बाहर निकल गया। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघः - यह पेशेवर खगोलविदों का एक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में की गई थी। - इसका केंद्रीय सचिवालय पेरिस में है। - इस संघ का उद्देश्य खगोलशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान और अध्ययन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है। - जब भी ब्रह्मांड में कोई नई वस्तु पाई जाती है तो खगोलीय संघ द्वारा दिये गए नाम ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होते हैं। - अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ की महासभा की बैठक तीन वर्ष में एक बार की जाती है। - अगली IAU की बैठक का आयोजन वर्ष दो हज़ार इक्कीस में दक्षिण कोरिया के बुसान में किया जाएगा। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? मिज़ोरम सरकार ने वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर के 'बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन' और वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के 'लुशाई हिल्स अधिसूचना' की इनर लाइन के आधार पर असम के साथ सीमा संशोधन की माँग की है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में केंद्र शासित प्रदेश और वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में राज्य बनने से पहले मिज़ोरम असम का लुशाई हिल्स ज़िला था। - स्वतंत्रता के बाद से असम को विभाजित कर मिज़ोरम और नगालैंड जैसे नए राज्यों का गठन किया गया। - चूँकि राज्यों की सीमाएँ जनजातीय क्षेत्र एवं पहचान का अनुसरण नहीं करती हैं जिसके कारण विभिन्न जनजातियों के मध्य आपसी संघर्ष उत्पन्न होता है और राजनीतिक एवं सीमा विवाद का कारण बनता है। - मिज़ोरम दक्षिणी असम के साथ एक सौ तेईस किलोग्राममीटर की सीमा साझा करता है और असम के पाँच सौ नौ वर्ग मील के हिस्से पर यह कहकर दावा करता है कि पड़ोसी राज्य ने इस पर कब्ज़ा कर लिया है। दोनों राज्यों के बीच इस सीमा के विस्तार को लेकर विवाद है। - इस सीमा पर कई हिंसक घटनाएँ भी हो चुकी हैं जो विवाद को बढ़ावा देने का कार्य करती रही हैं। : - ILP एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है जिसे भारत सरकार द्वारा किसी भारतीय नागरिक को संरक्षित क्षेत्र में सीमित समय के लिये आंतरिक यात्रा की मंज़ूरी देने हेतु जारी किया जाता है। - इसे बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर के आधार पर लागू किया गया था। - यह अधिनियम पूर्वोत्तर के पहाड़ी आदिवासियों से ब्रिटिश हितों की रक्षा करने के लिये बनाया गया था क्योंकि वे ब्रिटिश नागरिकों के संरक्षित क्षेत्रों में प्रायः घुसपैठ किया करते थे। - इसके तहत दो समुदायों के बीच क्षेत्रों के विभाजन के लिये इनर लाइन नामक एक काल्पनिक रेखा का निर्माण किया गया ताकि दोनों पक्षों के लोग बिना परमिट के एक-दूसरे के क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें। - आगंतुकों को इस संरक्षित क्षेत्र में संपत्ति खरीदने का अधिकार नहीं होता है। - अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड तथा मिज़ोरम राज्यों के मूल निवासियों की पहचान को बनाए रखने के लिये यहाँ बाहरी व्यक्तियों का ILP के बिना प्रवेश निषिद्ध है। - इस दस्तावेज़ की सेवा-शर्तें और प्रतिबंध राज्यों की अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार लागू किये गए हैं। - BEFR अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम और नगालैंड में अनिवासी भारतीयों को अस्थायी प्रवास के लिये आंतरिक लाइन परमिट के बिना अनुमति नहीं देता है। विवाद का प्रभावः - यह सीमा विवाद राज्यों के आपसी सहयोग को प्रभावित करेगा तथा नृजातीय संघर्ष को बढ़ावा देगा। - इससे विवादित क्षेत्र की विकास प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जिससे वहाँ के लोग दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करेंगे। समाधान के उपायः - दोनों राज्यों को आपसी वार्ता के माध्यम से सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास करना चाहिये। - दोनों राज्यों में आपसी सहमति न बनने की स्थिति में केंद्र सरकार की मदद से इस समस्या को सुलझाया जा सकता है। - बदलते परिदृश्य में सरकारों को क्षेत्रवाद के स्वरूप को समझना होगा। यदि यह विकास की मांग तक सीमित है तो उचित है, परंतु यदि क्षेत्रीय टकराव को बढ़ावा देने वाला है तो इसे रोकने के प्रयास किये जाने चाहिये। - वर्तमान में क्षेत्रवाद संसाधनों पर अधिकार करने और विकास की लालसा के कारण अधिक पनपता दिखाई दे रहा है। इसका एक ही उपाय है कि विकास योजनाओं का विस्तार सुदूर तक हो। प्रीलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में एक दशक से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के फलस्वरूप प्रस्तावित थर्टी मीटर टेलीस्कोप को परियोजना के सह-निर्माता देश किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना चाहते हैं। थर्टी मीटर टेलीस्कोपः - दुनिया के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप, TMT का निर्माण हवाई द्वीप समूह के मौना की द्वीप पर किया जा रहा है अतः इसे हवाई टेलीस्कोप के नाम से भी जाना जाता है। - TMT, एक संयुक्त उद्यम परियोजना है जिसमें पाँच देश- कनाडा, अमेरिका, चीन, भारत तथा जापान शामिल हैं। - परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग दो बिलियन डाॅलर है। - TMT टेलीस्कोप की सहायता से अंतरिक्ष तथा ब्रह्मांडीय वस्तुओं का व्यापक निरीक्षण किया जा सकेगा। - यह टेलीस्कोप हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में बारह गुना अधिक बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेगा। विवाद का कारणः - प्रस्तावित स्थल मौना की द्वीप को स्थानीय हवाईयन लोगों द्वारा पवित्र स्थल माना जाता है जिससे वे प्रस्तावित परियोजना का प्रारंभ से विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि वहाँ पहले से ही बहुत अधिक वेधशालाएँ हैं तथा अब वहाँ इस प्रकार का एक और टेलीस्कोप स्थापित किया गया तो इससे स्थानीय संस्कृति प्रभावित होगी। मौना की : - मौना की द्वीप हवाई द्वीप समूह का एक निष्क्रिय ज्वालामुखी द्वीप है जिसकी सागर तल तथा सागर आधार तल से ऊँचाई क्रमशः चार,दो सौ सात दशमलव तीन मीटर और दस,दो सौ मीटर है। - सागर तल के आधार यह हवाई राज्य का सबसे ऊँचा स्थान है जबकि सागर आधार तल के आधार पर दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है। - इसके अलावा मौना की द्वीप को हवाई राज्य द्वारा संरक्षण क्षेत्र के रूप में भी नामित किया गया है तथा विभिन्न पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन रिपोर्टों से पता चला है कि इन परियोजनाओं ने क्षेत्र में पर्यावरण कुप्रबंधन को बढ़ाया है। पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथनः - संयुक्त राज्य अमेरिका के पर्यावरण कानून के तहत एक पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन, मानव के पर्यावरण को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने से पूर्व अपनाई जाने वाली विशिष्ट कार्यप्रणाली है। - यह कार्य वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर के अमेरिका के राष्ट्रीय पर्यावरण नीति अधिनियम में बताई गयी प्रक्रिया के तहत होता है। - NEPA के तहत पर्यावरण समीक्षा में विश्लेषण के तीन अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। - श्रेणीबद्ध निष्कासन निर्धारण - पर्यावरणीय आकलन - पर्यावरणीय प्रभाव कथन अभिकथन - पर्यावरणीय प्रभाव अभिकथन पर्यावरण समीक्षा के विश्लेषण का तीसरा चरण होता है जिसका कार्य किसी भी परियोजना का विस्तृत आकलन करना है। - इस परियोजना को विज्ञान बनाम संस्कृति के मध्य विवाद का रंग देने की कोशिश की जा रही है। विज्ञान बनाम संस्कृति : - मौना की द्वीप के संरक्षण की वकालत करने वाले हवाईवासी लोगों को विज्ञान विरोधी और पिछड़ा कहा जा रहा है। - विज्ञान बनाम संस्कृति के मध्य विवाद का जन्म एक हज़ार छः सौ के दशक से माना जाता है जब कैथोलिक चर्च पादरियों द्वारा काॅपरनिकस और गैलीलियो जैसे खगोलविदों को परेशान किया गया था। - लेकिन वर्तमान में पश्चिमी परंपराओं को गैर-पश्चिमी परंपराओं से श्रेष्ठ बताने के लिये इसका प्रयोग किया जा रहा है। - इस परियोजना के स्थापना स्थल मौना की द्वीप को लेकर वर्ष दो हज़ार चौदह से ही विवाद चल रहा था, जिसे वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में हवाई सर्वोच्च न्यायालय ने समाप्त किया तथा परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। - लेकिन परियोजना के समर्थकों देशों ने तब से कोई प्रगति नहीं की है, क्योंकि निर्माण कार्य वर्ष दो हज़ार पंद्रह और वर्ष दो हज़ार उन्नीस में पहले ही दो बार बाधित हो चुके थे तथा इसके आगे भी विरोध की संभावना नज़र आ रही है। - इस परियोजना में लगभग पाँच साल की देरी हुई है इसलिये वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक इसका परिचालन प्रारंभ होने की संभावना है । टेलीस्कोप का निर्माण यहाँ क्यों? - वैज्ञानिकों ने चिली, मैक्सिको, भारत और हवाई में विभिन्न स्थलों पर परीक्षण किये तथा वर्ष दो हज़ार नौ में मौना की द्वीप को आदर्श स्थल के रूप में चुना। - टेलीस्कोप के लिये आवश्यक आदर्श परिस्थितियाँ यथा- आदर्श ऊँचाई, वायुमंडलीय दशाएँ जैसे कि बादल निर्माण, वायु की गति, वायु का तापमान, सौर विकिरण, जमीन की शीतलन दर आदि सभी यहाँ अनुकूल है। भारत की भागीदारीः - भारत भी परियोजना से जुड़े पाँच देशों में से एक हैं तथा भारत की तरफ से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा परमाणु ऊर्जा विभाग संयुक्त रूप से इस परियोजना में शामिल होंगे। - भारत एक दिए गए वर्ष में उपलब्ध समय स्लॉट के दस% का उपयोग कर सकेगा, जिसका निर्धारण मौद्रिक और अवसंरचनात्मक योगदान के आधार पर किया जाएगा। भारत का योगदान दो सौ मिलियन डाॅलर होगा, जो प्रस्तावित योजना की लागत का दसवाँ हिस्सा है। - टेलीस्कोप निर्माण में कुल चार सौ बानवे पॉलिश किए गए दर्पणों की आवश्यकता होगी जिनमें से भारत को तिरासी दर्पणों का निर्माण करना है। परियोजना में देरी होने से इन दर्पणों के विनिर्माण अनुबंधों में भी देरी हो रही है। आगे की संभावनाः - टेलीस्कोप लगाने के लिये दूसरी सबसे अच्छी अवस्थिति स्पेन के कैनरी द्वीप समूह के ला पाल्मा द्वीप है, जिसे नवीन परियोजना स्थल के रूप में चुना जा सकता है। - हानले, लद्दाख भी TMT की मेजबानी करने के लिये एक स्थल चुना जा सकता है। कैनरी द्वीपसमूह : - यह स्पेन द्वारा नियंत्रित द्वीपों का एक समूह है जो अफ़्रीका के उत्तर पश्चिमी छोर पर अटलांटिक महासागर में स्थित है। इस द्वीपसमूह में कई द्वीप है यथा तेनरीफ , ला पाल्मा , ला गोमेरा आदि। भारत की मेजबानी में विवादः - महत्वाकांक्षी विज्ञान परियोजनाओं की मेजबानी के साथ भारत की भी अपनी समस्याएँ रही हैं यथा- तमिलनाडु में थेनी में प्रस्तावित भारतीय न्यूट्रिनो वेधशाला , राज्य में विरोध के कारण पहले ही ठप हो गई है, ऐसे में नवीन परियोजनाओं की मेजबानी करना भारत के लिये आसान नहीं होगी। हनले : - यह भारतीय संघशासित प्रदेश लद्दाख का एक ऐतिहासिक गाँव है, जो प्राचीन लद्दाख-तिब्बत व्यापार मार्ग पर हनले नदी घाटी में स्थित है। - यह खगोलीय अवलोकन के लिये दुनिया के सबसे ऊँचे स्थलों में से एक है। थेनी : - यह तमिलनाडु का एक ज़िला है जो पश्चिमी घाट के समीप स्थित है। इसके तहत लगभग एक हज़ार दो सौ मीटर ऊँचे चट्टानी पहाड़ों के नीचे सुरंग में विस्तरीय प्रयोगशाला बनायी जायेगी, जिससे पश्चिमी घाट की जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। आगे की राहः - ऐसी वैज्ञानिक परियोजनाओं में विज्ञान और संस्कृति के बीच की लड़ाई जैसे रंग देने के स्थान पर स्थानीय लोगों के अधिकारों तथा संस्कृति को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ाना चाहिये। म्याँमार के राष्ट्रपति यू विन मियंट चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के मध्य दस समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए हैं। अधिकतर समझौतों में मुख्य रूप से म्याँमार के संघर्ष प्रभावित रखाइन प्रांत में भारत की सहायता के तहत चल रही विकास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन समझौतों में 'मानव तस्करी' की रोकथाम के लिये सहयोग, तस्करी पीड़ितों को बचाने, खोजने, वापसी और पुनः मुख्यधारा में लाना भी शामिल है। साथ ही समझौतों में आपूर्ति प्रणालियों के निर्माण, सौर ऊर्जा द्वारा प्राप्त बिजली के वितरण के साथ-साथ रखाइन प्रांत में सड़कों और स्कूलों के निर्माण पर ध्यान दिया गया है। म्याँमार के रखाइन प्रांत में बौद्ध समुदाय और रोहिंग्या समुदाय के बीच संघर्ष चल रहा है। यह संघर्ष द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शुरू हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रोहिंग्या मुसलमानों ने एक अलग मुस्लिम प्रांत के बदले में रखाइन के बौद्धों के खिलाफ अंग्रेज़ों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनतीस फरवरी, दो हज़ार बीस को चित्रकूट में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखेंगे। यह एक्सप्रेस-वे फरवरी दो हज़ार अट्ठारह में सरकार द्वारा घोषित उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे सहमति के बिंदुओं को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाया जा रहा यह एक्सप्रेस-वे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और जालौन ज़िलों से होकर गुज़रेगा। यह एक्सप्रेस-वे बुंदेलखंड क्षेत्र को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दो सौ छियानवे किलोग्राममीटर लंबे एक्सप्रेस-वे से चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, ओरैया और इटावा ज़िलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मराठी को 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा देने का आग्रह किया है। विधानसभा में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के मराठी भाषा मंत्री सुभाष देसाई द्वारा प्रस्तुत किया गया था। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि मराठी एक प्राचीन भाषा है और दावा किया कि यह संस्कृत से भी पुरानी है। ध्यातव्य है कि वर्तमान में छः भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया है, जो इस प्रकार हैं- तमिल , संस्कृत , कन्नड़ , तेलुगू , मलयालम , ओडिया । मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार, किसी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में अधिसूचित करने से प्राप्त होने वाले लाभ इस प्रकार हैं- भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में प्रख्यात विद्वानों के लिये दो प्रमुख वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों का वितरण शास्त्रीय भाषाओं में अध्ययन के लिये उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना मानव संसाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुरोध करता है कि वह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शास्त्रीय भाषाओं के लिये पेशेवर अध्यापकों के कुछ पदों की घोषणा करें। प्रत्येक वर्ष अट्ठाईस फरवरी को देश भर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। ज्ञात हो कि भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने अट्ठाईस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस को रमन प्रभाव की खोज की थी। उन्हीं के सम्मान में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष के लिये राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम 'विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएँ' है। इसका मूल उद्देश्य छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित एवं प्रेरित करना तथा लोगों को विज्ञान व वैज्ञानिक उपलब्धियों से अवगत कराना है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की कम संख्या भागीदारी पर अफसोस प्रकट किया। आँकड़ों के अनुसार, देश में महिला वैज्ञानिक मात्र पंद्रह प्रतिशत हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत तीस प्रतिशत है। सर जॉन टेनिएल का जन्म अट्ठाईस फरवरी, एक हज़ार आठ सौ बीस को लंदन में हुआ था। जॉन टेनिएल उन्नीसवीं शताब्दी के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी चित्रकार, ग्राफिक हास्यकार और राजनीतिक कार्टूनिस्ट थे। अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार बीस को उनका दो सौवाँ जन्मदिवस मनाया जा रहा है। सर जॉन टेनिएल की जीवन परिस्थितयाँ अत्यंत कठिन रहीं, बीस वर्ष की उम्र में एक हादसे की वजह से उनकी दाएँ आँख की रोशनी चली गई। लेकिन फिर भी सर जॉन टेनिएल ने हार नहीं मानी और एलिस इन वंडरलैंड जैसे प्रसिद्ध कैरेक्टर्स को चित्रित किया। वर्ष एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में उनकी कलात्मक उपलब्धियों के लिये उन्हें नाइट की उपाधि दी गई।
और तव तुरत पहला प्रश्न यह उठता है कि क्या यह संसार एक -ऐसी चीज है जिसमें एक ही प्रकारके क्रिया व्यापार सर्वदा चलते रहते हैं और उन व्यापारोंमें कोई परिवर्तन नहीं होता अथवा इस जगत् में कोई क्रमविकासको प्रवृत्ति है, कोई क्रमविकासात्मक तथ्य है, आरोहणकी कोई सीढ़ी कहीं है जो आदि आपातदृश्य निश्चेतनासे अधिकाधिक विकसित चेतनाकी ओर जाती है, प्रत्येक विकाससे फिर और भी अधिक ऊपर उठती है और ऐसी उच्चतम ऊंचाईमें जा पहुंचती है जो अभी हमारी सामान्य पहुंचके भीतर नहीं है ? यदि ऐसा है तो इस प्रगतिका क्या अर्थ है, इसका मौलिक सिद्धांत क्या है, इसकी युक्तिसंगत परिणति क्या है ? यहां प्रत्येक वस्तु ही, ऐसा लगता है कि, एक ऐसी प्रगतिकी ओर संकेत कर रही है और यह एक तथ्य है और यह प्रगति, यह क्रमविकास महज भौतिक नहीं वरन् आध्यात्मिक है। इस विषय में भी आध्यात्मिक अनुभवकी एक धारा है जो इस समर्थन करती है और जिसमें हम देखते हैं कि जिस निश्चेतनासे सव कुछ आरंभ होता है वह महज ऊपरसे देखने में ही निश्चेतन है, क्योंकि उसके अंदर अनंत संभावनाओंसे युक्त एक निर्वात्तत चेतना विद्यमान है, एक ऐसी चेतना है जो सीमित नहीं है बल्कि विश्वव्यापी और अनंत है, एक प्रच्छन्न और स्वयं-कारारुद्ध भागवत चेतना है जो जड़तत्त्व में कारावद्ध तो है पर अपनी गुह्य गहराइयों में प्रत्येक संभावनाको बहन करती है। इस आपातदृश्य निश्चेतनामेंसे प्रत्येक संभावना वारी-वारीसे प्रकट होती है, सबसे पहले व्यवस्थित जड़तत्त्व आया जो अंतर्यामी आत्माको छिपाये है, फिर प्राणतत्त्व पौधोंमें प्रकट हुआ और बढ़ते हुए मनके साथ पशुओंमें युक्त हुआ, फिर स्वयं मन विकसित हुआ और मनुष्य में सुव्यवस्थित हुआ । यह जो क्रमविकास है, यह जो आध्यात्मिक प्रगति है, क्या यह मनुष्य नामधारी अपूर्ण मनोमय सत्ता में आकर यहीं एकाएक रुक जाती है? अथवा, क्या इसका रहस्य सिर्फ जन्म-जन्मांतरोंकी एक परंपरा ही है जिसका एकमात्र उद्देश्य या परिणति है उस विन्दुकी ओर जाने का प्रयास करना जहां वह अपनी व्यर्थताको समझ जाय, अपने आपका परित्याग कर दे और एक छलांग भरकर किसी मूल अज सत् या असत्में चली जाय ? यहां कम-से-कम यह संभावना है, निश्चयताका एक विन्दु आता है जहां पता चलता है कि हम जिसे मन कहते हैं उससे कहीं अधिक महान् एक चेतना है और सीढ़ीपर और भी अधिक ऊपर उठनेपर H16.3 हम एक ऐसा बिंदु पा सकते हैं जहां स्थूल निश्चेतनाका, प्राण और मनके अज्ञानका प्रभाव समाप्त हो जाता है; चेतनाका एक ऐसा तत्त्व अभिव्यक्त होने में समर्थ हो जाता है जो केवल आंशिक रूपमें, अपूर्ण रूपमें ही नहीं बल्कि आद्योपांत और संपूर्ण रूपसे इस कारावद्ध भगवान्को उन्मुक्त करता है। इस दृष्टिसे क्रमविकासका प्रत्येक स्तर चेतनाकी अधिकाधिक उच्च शक्तिके अवतरणके फलस्वरूप सिद्ध हुआ प्रतीत होता है, हर स्तरमें पार्थिव स्तर ऊपर उठता है, एक नवीन स्तर निर्मित होता है, पर अभी भी उच्चतम शक्तियोंका अवतरण होना बाकी है और जब उनका अवतरण होगा तभी पार्थिव जीवनकी जटिल प्रहेलिका अपना समाधान प्राप्त करेगी और फिर न केवल अंतरात्मा वल्कि स्वयं प्रकृति भी अपनी मुक्ति पा जायेगी। यही वह सत्य है जिसकी झलक कमी-कभी, उसके भावकी अधिकाधिक पूर्णता के साथ उस साधक श्रेणीको मिलती रही है जिन्हें तंत्र वीर साधक और दिव्य साधक कहा करता था और जिसकी शायद अब इस हदतक तैयारी हो चुकी है कि वह पूर्ण रूपसे प्रकट और अनुभूत हो । तव, हम कह सकते हैं कि, संसारमें संघर्प और दुःख-संताप और अंधकारका जितना भी भारी बोझ क्यों न हो, यदि उसके उच्च परिणामके रूपमें यह चीज हमारी प्रतीक्षा करती हो तो जो कुछ भी अबतक गुजर चुका है उसे शक्तिशाली और साहसिक व्यक्ति आनेवाली गरिमाका बहुत बड़ा मूल्य नहीं समझेंगे। जो हो, छाया उठ रही है; एक ऐसी भागवत ज्योति है जो संसारके ऊपर छायी हुई है और वह केवल सुदूर स्थित ऐसा प्रकाश ही नहीं है जिसके साथ कोई संपर्क न किया जा सके । यह सच है कि यह समस्या अभी भी बनी हुई है कि जो कुछ अभी है वह सव क्यों आवश्यक हुआ - - ये कठोर आरंभ, यह दीर्घ और तूफानी यात्रा क्यों आवश्यक हुई - भला इतने भारी और दुःखदायी मूल्यकी मांग क्यों की गयी, अशुभ और दुःख-कष्ट यहां हमेशा क्यों बने रहे । अज्ञान में यह पतन क्यों हुआ, इसका सशक्त कारण क्या था, इसके विपरीत, यह कैसे संभव हुआ, इस विषय में सभी आध्यात्मिक अनुभूतियाँ पर्याप्त मात्रामें एकमत हैं। विभाजन, पृथक्त्व, शाश्वत और एकमेवसे विच्छिन्न करनेवाले तत्त्वने इसे घटित कराया। यह इस कारण संभव हुआ कि अहंने संसारमें अपने आपको स्थापित किया और भगवान्के साथ अपने एकत्व तथा सर्वके साथ अपनी एकताके बदले अपनी निजी कामना तथा आत्मानुमोदनपर बल दिया। इसका कारण यह था कि सभी शक्तियों में सामंजस्य स्थापित करनेवाली एक परात्पर शक्ति, ज्ञान और ज्योतिके स्थानमें वस्तुओंकी प्रत्येक भावना, शक्ति, आकृतिको उस हदतक कार्यान्वित होने दिया गया जिस हदतक वह अनंत संभावनाओंके ढेरके वीच अपनी पृथक् इच्छासे तथा अनिवार्यतः अंत में दूसरोंके साथ संघर्ष करके कार्यान्वित कर सकती थी । विभाजन, अहंकार, अपूर्ण चेतना तथा एक पृथक् आत्म-स्थापना के लिये अंधकारमें टटोलना तथा संघर्ष करना ही इस जगत् के दुःख-संताप और अज्ञानके प्रभावशाली कारण हैं । एक वार जव चेतनाएं उस एक चेतनासे पृथक् हो गयीं तो वे अनिवार्य रूपसे अज्ञानमें पतित हो गयीं और अज्ञानका अंतिम परिणाम था निश्चेतना । एक अंधकारपूर्ण विशाल निश्चेतनासे यह स्थूल जगत् निकलता है और उसके भीतरसे एक अंतरात्मा प्रकट होता है जो प्रच्छन्न दिव्य ज्योतिकी ओर आकर्षित होकर क्रमविकासके द्वारा चेतनामें जानेका संघर्ष कर रहा है, लुप्त भगवत्ताकी ओर, जिससे कि वह आया था, ऊपर उठ रहा पर अभी मी उठ रहा है अंवभावसे ही। पर यह सब एकदम घटित ही क्यों हुआ? इस प्रश्नको उठाने और इसका उत्तर देनेका जो एक सामान्य तरीका है उसे आरंभसे ही हटा देना चाहिये - वह है मानवीय तरीका, और उसका नैतिक विद्रोह और अस्वीकृति, उसका भावात्मक क्रंदन । क्योंकि, सच पूछा जाय तो किसी विश्वातीत, निरंकुश, वैयक्तिक देवने, जो स्वयं इस पतनमें अंतर्निहित नहीं है, अपनी आज्ञासे मनमौजी ढंगसे वने जीवोंपर बुराई और दुःखतापको नहीं लादा है। हम जानते हैं कि भगवान् एक अनंत सत्ता हैं जिनकी अनंत अभिव्यक्तिके अंदर ये चीजें आयी हैं - स्वयं भगवान् ही यहां हैं, हमारे पीछे विद्यमान हैं, अभिव्यक्तिके अंदर ओतप्रोत हैं, अपने एकत्वसे जगत्को धारण किये हुए हैं; स्वयं भगवान् ही हमारे अंदर विद्यमान रहकर इस पतनके बोझको और इसके अंधकारमय परिणामको धारण किये हुए हैं। यदि वह भगवत्सत्ता ऊपर अपनी पूर्ण ज्योति, शांति और आनंदमें विद्यमान है तो वह यहां भी है; उसकी ज्योति, शांति और आनंद यहां गुप्त रूपसे सब कुछको सहारा दे रहे हैं; स्वयं हम लोगोंके भीतर एक आत्मा है, एक केंद्रीय सता है जो उपरितलीय व्यक्तित्वोंकी श्रेणीसे कहीं अधिक महान् है और जो स्वयं परात्पर भगवान्की तरह ही उस नियतिसे दमित नहीं होती जिसे कि वे (उपरि
और तव तुरत पहला प्रश्न यह उठता है कि क्या यह संसार एक -ऐसी चीज है जिसमें एक ही प्रकारके क्रिया व्यापार सर्वदा चलते रहते हैं और उन व्यापारोंमें कोई परिवर्तन नहीं होता अथवा इस जगत् में कोई क्रमविकासको प्रवृत्ति है, कोई क्रमविकासात्मक तथ्य है, आरोहणकी कोई सीढ़ी कहीं है जो आदि आपातदृश्य निश्चेतनासे अधिकाधिक विकसित चेतनाकी ओर जाती है, प्रत्येक विकाससे फिर और भी अधिक ऊपर उठती है और ऐसी उच्चतम ऊंचाईमें जा पहुंचती है जो अभी हमारी सामान्य पहुंचके भीतर नहीं है ? यदि ऐसा है तो इस प्रगतिका क्या अर्थ है, इसका मौलिक सिद्धांत क्या है, इसकी युक्तिसंगत परिणति क्या है ? यहां प्रत्येक वस्तु ही, ऐसा लगता है कि, एक ऐसी प्रगतिकी ओर संकेत कर रही है और यह एक तथ्य है और यह प्रगति, यह क्रमविकास महज भौतिक नहीं वरन् आध्यात्मिक है। इस विषय में भी आध्यात्मिक अनुभवकी एक धारा है जो इस समर्थन करती है और जिसमें हम देखते हैं कि जिस निश्चेतनासे सव कुछ आरंभ होता है वह महज ऊपरसे देखने में ही निश्चेतन है, क्योंकि उसके अंदर अनंत संभावनाओंसे युक्त एक निर्वात्तत चेतना विद्यमान है, एक ऐसी चेतना है जो सीमित नहीं है बल्कि विश्वव्यापी और अनंत है, एक प्रच्छन्न और स्वयं-कारारुद्ध भागवत चेतना है जो जड़तत्त्व में कारावद्ध तो है पर अपनी गुह्य गहराइयों में प्रत्येक संभावनाको बहन करती है। इस आपातदृश्य निश्चेतनामेंसे प्रत्येक संभावना वारी-वारीसे प्रकट होती है, सबसे पहले व्यवस्थित जड़तत्त्व आया जो अंतर्यामी आत्माको छिपाये है, फिर प्राणतत्त्व पौधोंमें प्रकट हुआ और बढ़ते हुए मनके साथ पशुओंमें युक्त हुआ, फिर स्वयं मन विकसित हुआ और मनुष्य में सुव्यवस्थित हुआ । यह जो क्रमविकास है, यह जो आध्यात्मिक प्रगति है, क्या यह मनुष्य नामधारी अपूर्ण मनोमय सत्ता में आकर यहीं एकाएक रुक जाती है? अथवा, क्या इसका रहस्य सिर्फ जन्म-जन्मांतरोंकी एक परंपरा ही है जिसका एकमात्र उद्देश्य या परिणति है उस विन्दुकी ओर जाने का प्रयास करना जहां वह अपनी व्यर्थताको समझ जाय, अपने आपका परित्याग कर दे और एक छलांग भरकर किसी मूल अज सत् या असत्में चली जाय ? यहां कम-से-कम यह संभावना है, निश्चयताका एक विन्दु आता है जहां पता चलता है कि हम जिसे मन कहते हैं उससे कहीं अधिक महान् एक चेतना है और सीढ़ीपर और भी अधिक ऊपर उठनेपर Hसोलह.तीन हम एक ऐसा बिंदु पा सकते हैं जहां स्थूल निश्चेतनाका, प्राण और मनके अज्ञानका प्रभाव समाप्त हो जाता है; चेतनाका एक ऐसा तत्त्व अभिव्यक्त होने में समर्थ हो जाता है जो केवल आंशिक रूपमें, अपूर्ण रूपमें ही नहीं बल्कि आद्योपांत और संपूर्ण रूपसे इस कारावद्ध भगवान्को उन्मुक्त करता है। इस दृष्टिसे क्रमविकासका प्रत्येक स्तर चेतनाकी अधिकाधिक उच्च शक्तिके अवतरणके फलस्वरूप सिद्ध हुआ प्रतीत होता है, हर स्तरमें पार्थिव स्तर ऊपर उठता है, एक नवीन स्तर निर्मित होता है, पर अभी भी उच्चतम शक्तियोंका अवतरण होना बाकी है और जब उनका अवतरण होगा तभी पार्थिव जीवनकी जटिल प्रहेलिका अपना समाधान प्राप्त करेगी और फिर न केवल अंतरात्मा वल्कि स्वयं प्रकृति भी अपनी मुक्ति पा जायेगी। यही वह सत्य है जिसकी झलक कमी-कभी, उसके भावकी अधिकाधिक पूर्णता के साथ उस साधक श्रेणीको मिलती रही है जिन्हें तंत्र वीर साधक और दिव्य साधक कहा करता था और जिसकी शायद अब इस हदतक तैयारी हो चुकी है कि वह पूर्ण रूपसे प्रकट और अनुभूत हो । तव, हम कह सकते हैं कि, संसारमें संघर्प और दुःख-संताप और अंधकारका जितना भी भारी बोझ क्यों न हो, यदि उसके उच्च परिणामके रूपमें यह चीज हमारी प्रतीक्षा करती हो तो जो कुछ भी अबतक गुजर चुका है उसे शक्तिशाली और साहसिक व्यक्ति आनेवाली गरिमाका बहुत बड़ा मूल्य नहीं समझेंगे। जो हो, छाया उठ रही है; एक ऐसी भागवत ज्योति है जो संसारके ऊपर छायी हुई है और वह केवल सुदूर स्थित ऐसा प्रकाश ही नहीं है जिसके साथ कोई संपर्क न किया जा सके । यह सच है कि यह समस्या अभी भी बनी हुई है कि जो कुछ अभी है वह सव क्यों आवश्यक हुआ - - ये कठोर आरंभ, यह दीर्घ और तूफानी यात्रा क्यों आवश्यक हुई - भला इतने भारी और दुःखदायी मूल्यकी मांग क्यों की गयी, अशुभ और दुःख-कष्ट यहां हमेशा क्यों बने रहे । अज्ञान में यह पतन क्यों हुआ, इसका सशक्त कारण क्या था, इसके विपरीत, यह कैसे संभव हुआ, इस विषय में सभी आध्यात्मिक अनुभूतियाँ पर्याप्त मात्रामें एकमत हैं। विभाजन, पृथक्त्व, शाश्वत और एकमेवसे विच्छिन्न करनेवाले तत्त्वने इसे घटित कराया। यह इस कारण संभव हुआ कि अहंने संसारमें अपने आपको स्थापित किया और भगवान्के साथ अपने एकत्व तथा सर्वके साथ अपनी एकताके बदले अपनी निजी कामना तथा आत्मानुमोदनपर बल दिया। इसका कारण यह था कि सभी शक्तियों में सामंजस्य स्थापित करनेवाली एक परात्पर शक्ति, ज्ञान और ज्योतिके स्थानमें वस्तुओंकी प्रत्येक भावना, शक्ति, आकृतिको उस हदतक कार्यान्वित होने दिया गया जिस हदतक वह अनंत संभावनाओंके ढेरके वीच अपनी पृथक् इच्छासे तथा अनिवार्यतः अंत में दूसरोंके साथ संघर्ष करके कार्यान्वित कर सकती थी । विभाजन, अहंकार, अपूर्ण चेतना तथा एक पृथक् आत्म-स्थापना के लिये अंधकारमें टटोलना तथा संघर्ष करना ही इस जगत् के दुःख-संताप और अज्ञानके प्रभावशाली कारण हैं । एक वार जव चेतनाएं उस एक चेतनासे पृथक् हो गयीं तो वे अनिवार्य रूपसे अज्ञानमें पतित हो गयीं और अज्ञानका अंतिम परिणाम था निश्चेतना । एक अंधकारपूर्ण विशाल निश्चेतनासे यह स्थूल जगत् निकलता है और उसके भीतरसे एक अंतरात्मा प्रकट होता है जो प्रच्छन्न दिव्य ज्योतिकी ओर आकर्षित होकर क्रमविकासके द्वारा चेतनामें जानेका संघर्ष कर रहा है, लुप्त भगवत्ताकी ओर, जिससे कि वह आया था, ऊपर उठ रहा पर अभी मी उठ रहा है अंवभावसे ही। पर यह सब एकदम घटित ही क्यों हुआ? इस प्रश्नको उठाने और इसका उत्तर देनेका जो एक सामान्य तरीका है उसे आरंभसे ही हटा देना चाहिये - वह है मानवीय तरीका, और उसका नैतिक विद्रोह और अस्वीकृति, उसका भावात्मक क्रंदन । क्योंकि, सच पूछा जाय तो किसी विश्वातीत, निरंकुश, वैयक्तिक देवने, जो स्वयं इस पतनमें अंतर्निहित नहीं है, अपनी आज्ञासे मनमौजी ढंगसे वने जीवोंपर बुराई और दुःखतापको नहीं लादा है। हम जानते हैं कि भगवान् एक अनंत सत्ता हैं जिनकी अनंत अभिव्यक्तिके अंदर ये चीजें आयी हैं - स्वयं भगवान् ही यहां हैं, हमारे पीछे विद्यमान हैं, अभिव्यक्तिके अंदर ओतप्रोत हैं, अपने एकत्वसे जगत्को धारण किये हुए हैं; स्वयं भगवान् ही हमारे अंदर विद्यमान रहकर इस पतनके बोझको और इसके अंधकारमय परिणामको धारण किये हुए हैं। यदि वह भगवत्सत्ता ऊपर अपनी पूर्ण ज्योति, शांति और आनंदमें विद्यमान है तो वह यहां भी है; उसकी ज्योति, शांति और आनंद यहां गुप्त रूपसे सब कुछको सहारा दे रहे हैं; स्वयं हम लोगोंके भीतर एक आत्मा है, एक केंद्रीय सता है जो उपरितलीय व्यक्तित्वोंकी श्रेणीसे कहीं अधिक महान् है और जो स्वयं परात्पर भगवान्की तरह ही उस नियतिसे दमित नहीं होती जिसे कि वे (उपरि
त्रिपुरा कैबिनेट हाल ही में बड़ा फैसला लिया है, जिसमें लंबित विभागीय कार्यवाही निपटाने के लिए सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसमें सिविल सेवा और न्यायपालिका से सेवानिवृत्त अधिकारियों को लंबित विभागीय कार्यवाही निपटाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए त्रिपुरा सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। त्रिपुरा मंत्री सुशांत चौधरी (Sushanta Chowdhury) ने सूचित किया कि राज्य सरकार के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ लंबित विभागीय कार्यवाही की समीक्षा करने के बाद त्रिपुरा सरकार (Tripura govt. ) द्वारा निर्णय लिया गया। चौधरी (Sushanta Chowdhury) ने खुलासा करते हुए बताया कि त्रिपुरा सरकारी प्रशासन को वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, कई राज्य सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति उनके खिलाफ लंबित कार्यवाही के कारण लंबित है। चौधरी ने कहा कि "मंत्रिमंडल (cabinet) ने लंबित विभागीय पूछताछ के पूरा होने के लिए सेवानिवृत्त IAS, त्रिपुरा सिविल सेवा और त्रिपुरा न्यायिक सेवा अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। " इस बीच, त्रिपुरा कैबिनेट (Tripura cabinet) ने त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज और फोरेंसिक विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए आवंटन भूमि के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी है। जबकि, त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज के लिए 25 एकड़ जमीन को मंजूरी दे दी गई है, जो फोरेंसिक विश्वविद्यालय के लिए 49. 21 एकड़ भूमि को मंजूरी दे दी गई है।
त्रिपुरा कैबिनेट हाल ही में बड़ा फैसला लिया है, जिसमें लंबित विभागीय कार्यवाही निपटाने के लिए सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसमें सिविल सेवा और न्यायपालिका से सेवानिवृत्त अधिकारियों को लंबित विभागीय कार्यवाही निपटाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए त्रिपुरा सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। त्रिपुरा मंत्री सुशांत चौधरी ने सूचित किया कि राज्य सरकार के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ लंबित विभागीय कार्यवाही की समीक्षा करने के बाद त्रिपुरा सरकार द्वारा निर्णय लिया गया। चौधरी ने खुलासा करते हुए बताया कि त्रिपुरा सरकारी प्रशासन को वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, कई राज्य सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति उनके खिलाफ लंबित कार्यवाही के कारण लंबित है। चौधरी ने कहा कि "मंत्रिमंडल ने लंबित विभागीय पूछताछ के पूरा होने के लिए सेवानिवृत्त IAS, त्रिपुरा सिविल सेवा और त्रिपुरा न्यायिक सेवा अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। " इस बीच, त्रिपुरा कैबिनेट ने त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज और फोरेंसिक विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए आवंटन भूमि के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी है। जबकि, त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज के लिए पच्चीस एकड़ जमीन को मंजूरी दे दी गई है, जो फोरेंसिक विश्वविद्यालय के लिए उनचास. इक्कीस एकड़ भूमि को मंजूरी दे दी गई है।
लीला - मदनदहन, यज्ञनाशन, त्रिपुर- विध्वंसन ग - मूल शब्दों की निरूक्तिअंधरा अथवा करनेवाली माता है जो शिव की अर्द्धांगिनी है । के लिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह विश्व का पालन अविनाशी होने से शंकर को अक्षर कहा गया है। अखिलेश -- अखिल सम्पूर्ण के अर्थ में है । अचल, अचलेश्वर - अलीगढ़ के अचल ताल पर अचलेश्वर महादेव का मंदिर है। यह कैलास की ओर भी संकेत करता है । असर, अद्रिनारायण - शिव कैलाश पर रहने के कारण सम्पूर्ण हिमालय पर शासन करते हैं । यह विस्तृत पर्वतमाला स्वर्ण, रत्न आदिमूल्य पदार्थों का कोष है। इन्हीं कारणों से शिव के ये नाम रखे गये हैं। प्रदेसर ईश्वर (पार्वती) + ईश्वर से बना है । अभयंकर अभय - आपत्ति से बचाने के लिए अभयदान देनेवाले अर्थात् शंकर । अमृत - अविनाशी । अर्धेदुभूषण - शिव के मस्तिष्क पर द्वितीया का चंद्रमा है। इसलिए उनको कहा गया है । आशुतोष- शिव बड़ी आसानी से शीघ्र ही संतुष्ट हो जाते हैं। किसी कवि ने कहा है :-- "चार फल पैये फूल एक दें धतूरे को" यह शंकर का व्यंग्यात्मक नाम प्रतीत होता है । इंदुकांत - चंद्रमा के स्वामी, चंद्रमा शिवजी के भाल पर सुशोभित है । इंदुशेखर-चन्द्रभूषण (शिव) । ईशन -- ईशान का विकृत रूप है । शिव ऋष्ट दिग्पालों में से एक है जो ईशान दिशा के स्वामी हैं । ( ईशन एक नदी का नाम भी है) उम्र - (क्रुद्ध) दुष्टों को दण्ड देने के लिए कभी-कभी शिव को उग्र रूप धारण करना पड़ता है। चौसानेश्वर---प्रौसान का शुद्ध रूप अवसान = शेष, मृत्यु, मरघट । कटेश्वर ---(कट + ईश्वर) कट = शव, श्मशान, खंडित, समय । इससे मूर्ति के खंडित होने का संकेत मिलता है। कपर्दी-जटा (कपर्द) धारी होने के कारण शिव को कपर्दी कहते हैं । जटिल जटाजूट होने से इनको धूर्जंटी कहते हैं । कालेंद्र, कालेश्वर -- शिव काल के भी काल हैं इसलिए उन्हें कालेश्वर या महाकाल कहा है। काशीनरेश -- विश्वनाथ काशी के राजा माने जाते हैं । कुटेश्वर- गंगोत्री जानेवाले मार्ग से देव प्रयाग के आगे खोवा गाँव से गंगा के किनारे कुटेश्वर महादेव को जाने का रास्ता है, कुट पर्वत को कहते हैं । कुशे श्वर- (१) दरभंगा से ३० मील पूर्व कुश मुनि के आश्रम के पास कुशेश्वरनाथ महादेव का मंदिर हैं । (२) नासिक की यात्रा में ब्रह्मगिरि परिक्रमा में कुशेश्वर महादेव का मंदिर है । कुरेश्वर-प्रयाग से लगभग ४ मील पश्चिम की ओर गंगा के तट पर कुरेश्वर महादेव का मंदिर है। यह कौरवों द्वारा स्थापित बतलाया जाता है । केंद्रपाल - केंद्र (क = रुद्र या सूर्य, इन्द्र = स्वामी) शिव के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो सूर्य के स्वामी हैं। (केन्द्र= राजधानी, प्रशिक्षण कला केन्द्र, नाभिकेन्द्र, लग्न के १, ४, ७, १० केन्द्र है)
लीला - मदनदहन, यज्ञनाशन, त्रिपुर- विध्वंसन ग - मूल शब्दों की निरूक्तिअंधरा अथवा करनेवाली माता है जो शिव की अर्द्धांगिनी है । के लिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह विश्व का पालन अविनाशी होने से शंकर को अक्षर कहा गया है। अखिलेश -- अखिल सम्पूर्ण के अर्थ में है । अचल, अचलेश्वर - अलीगढ़ के अचल ताल पर अचलेश्वर महादेव का मंदिर है। यह कैलास की ओर भी संकेत करता है । असर, अद्रिनारायण - शिव कैलाश पर रहने के कारण सम्पूर्ण हिमालय पर शासन करते हैं । यह विस्तृत पर्वतमाला स्वर्ण, रत्न आदिमूल्य पदार्थों का कोष है। इन्हीं कारणों से शिव के ये नाम रखे गये हैं। प्रदेसर ईश्वर + ईश्वर से बना है । अभयंकर अभय - आपत्ति से बचाने के लिए अभयदान देनेवाले अर्थात् शंकर । अमृत - अविनाशी । अर्धेदुभूषण - शिव के मस्तिष्क पर द्वितीया का चंद्रमा है। इसलिए उनको कहा गया है । आशुतोष- शिव बड़ी आसानी से शीघ्र ही संतुष्ट हो जाते हैं। किसी कवि ने कहा है :-- "चार फल पैये फूल एक दें धतूरे को" यह शंकर का व्यंग्यात्मक नाम प्रतीत होता है । इंदुकांत - चंद्रमा के स्वामी, चंद्रमा शिवजी के भाल पर सुशोभित है । इंदुशेखर-चन्द्रभूषण । ईशन -- ईशान का विकृत रूप है । शिव ऋष्ट दिग्पालों में से एक है जो ईशान दिशा के स्वामी हैं । उम्र - दुष्टों को दण्ड देने के लिए कभी-कभी शिव को उग्र रूप धारण करना पड़ता है। चौसानेश्वर---प्रौसान का शुद्ध रूप अवसान = शेष, मृत्यु, मरघट । कटेश्वर --- कट = शव, श्मशान, खंडित, समय । इससे मूर्ति के खंडित होने का संकेत मिलता है। कपर्दी-जटा धारी होने के कारण शिव को कपर्दी कहते हैं । जटिल जटाजूट होने से इनको धूर्जंटी कहते हैं । कालेंद्र, कालेश्वर -- शिव काल के भी काल हैं इसलिए उन्हें कालेश्वर या महाकाल कहा है। काशीनरेश -- विश्वनाथ काशी के राजा माने जाते हैं । कुटेश्वर- गंगोत्री जानेवाले मार्ग से देव प्रयाग के आगे खोवा गाँव से गंगा के किनारे कुटेश्वर महादेव को जाने का रास्ता है, कुट पर्वत को कहते हैं । कुशे श्वर- दरभंगा से तीस मील पूर्व कुश मुनि के आश्रम के पास कुशेश्वरनाथ महादेव का मंदिर हैं । नासिक की यात्रा में ब्रह्मगिरि परिक्रमा में कुशेश्वर महादेव का मंदिर है । कुरेश्वर-प्रयाग से लगभग चार मील पश्चिम की ओर गंगा के तट पर कुरेश्वर महादेव का मंदिर है। यह कौरवों द्वारा स्थापित बतलाया जाता है । केंद्रपाल - केंद्र शिव के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो सूर्य के स्वामी हैं।
मध्यकासी पन्द्र-साहित्य गत है किन्तु मम वाच्यार्य नहीं । महांकारिक मत अधिक सहायता नहीं करता। उसटबाँसियों की परम्परा का पूर्ण राण समर्म विरोध-मूलक कथनों में है। का विश्वास है कि अनुमूर्ति स्व-सवेध है, बानी के बयोबर। उस बनुमूर्ति की अभिव्यक्ति वह बाम बाबी के माध्यम से करता है, मत वाण्याम से सफेठा ही महत्वपूर्ण है। माम्मात्मिक रस पत्र की पकड़ में नहीं जा सकता। धात्विक नियम में इस रूप का बहन है और कान की कृपा से प्राप्त होता है जिसने ऐसे गुरु का सत्संग नहीं किया वह शास्त्राभिमानी मूढ़ है और उसकी मुताको सिद्ध करने के लिए संबैता है। पण्डितों में संदों के इस पैसैको स्वीकार नहीं किया। संघ उसे पण्डित नहीं मानता को बाह्माचार में फैसा है, जो बह्मविद है नही जाह्मण है, जी जानी है समझता है, बही पण्डित है 1 है कोई ऐसा जो इस (ज्ञान) को जाने ? यसमितिकता नाष सम्प्रदाय से प्राप्त भी पतिको है और भाव-सम्मान में भक्ति भाषमा का अभाग-सा था बत योगी की भावना की संता का उपदेष । १ पंडित होईसुपरहि विचार मूरचि मोहित है कोईयांनी ही संतो भी यह पर बरचार्ग । छोईन्धिसोई बाधा सोई नगद
मध्यकासी पन्द्र-साहित्य गत है किन्तु मम वाच्यार्य नहीं । महांकारिक मत अधिक सहायता नहीं करता। उसटबाँसियों की परम्परा का पूर्ण राण समर्म विरोध-मूलक कथनों में है। का विश्वास है कि अनुमूर्ति स्व-सवेध है, बानी के बयोबर। उस बनुमूर्ति की अभिव्यक्ति वह बाम बाबी के माध्यम से करता है, मत वाण्याम से सफेठा ही महत्वपूर्ण है। माम्मात्मिक रस पत्र की पकड़ में नहीं जा सकता। धात्विक नियम में इस रूप का बहन है और कान की कृपा से प्राप्त होता है जिसने ऐसे गुरु का सत्संग नहीं किया वह शास्त्राभिमानी मूढ़ है और उसकी मुताको सिद्ध करने के लिए संबैता है। पण्डितों में संदों के इस पैसैको स्वीकार नहीं किया। संघ उसे पण्डित नहीं मानता को बाह्माचार में फैसा है, जो बह्मविद है नही जाह्मण है, जी जानी है समझता है, बही पण्डित है एक है कोई ऐसा जो इस को जाने ? यसमितिकता नाष सम्प्रदाय से प्राप्त भी पतिको है और भाव-सम्मान में भक्ति भाषमा का अभाग-सा था बत योगी की भावना की संता का उपदेष । एक पंडित होईसुपरहि विचार मूरचि मोहित है कोईयांनी ही संतो भी यह पर बरचार्ग । छोईन्धिसोई बाधा सोई नगद
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कांग्रेसियों की शिकायत पर खरोरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया में सारागांव निवासी ललित यादव द्वारा अभद्र टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को देखते ही युवा कांग्रेसी भड़क गए। युवा कांग्रेस अध्यक्ष अंकित वर्मा ने रविवार रात को बड़ी संख्या में खरोरा पुलिस थाना पहुंचकर आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मामला मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी होने से उक्त मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाई और आरोपी के खिलाफ धारा-67A का अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कांग्रेसियों की शिकायत पर खरोरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया में सारागांव निवासी ललित यादव द्वारा अभद्र टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को देखते ही युवा कांग्रेसी भड़क गए। युवा कांग्रेस अध्यक्ष अंकित वर्मा ने रविवार रात को बड़ी संख्या में खरोरा पुलिस थाना पहुंचकर आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। मामला मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी होने से उक्त मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाई और आरोपी के खिलाफ धारा-सरसठ एम्पीयर का अपराध दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
देहरादून, 22 दिसंबर उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को एक जिलाधिकारी द्वारा विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथसिंह चौहान को दो टूक जवाब दिए जाने का मामला गूंजा जिसे गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सरकार से संबंधित अधिकारी से खेद प्रकट करवाने को कहा। अध्यक्ष अग्रवाल ने यह भी कहा कि अगर सरकार के इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो विधानसभा पीठ इसका संज्ञान लेगी। राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठा। चौहान की ओर से रखे गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के समर्थन में आये कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि चौहान ने अपने क्षेत्र में तीन कोविड-19 मरीजों की मौत के बाद उन्होंने अल्मोडा के जिलाधिकारी को मुख्य चिकित्साधिकारी को मौके पर भेजने को कहा था जिस पर जिलाधिकारी ने उन्हें दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वह अधिकारी को नहीं भेजेंगे। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने प्रदेश में नौकरशाही के निरंकुश होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग हर विधायक उसके हाथों अपमान झेल रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी को बुलाकर ऐसा संदेश दिया जाना चाहिए कि उसका अपराध क्षमायोग्य नहीं है। अन्य कांग्रेस सदस्यों प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन आदि ने भी ह्रदयेश का समर्थन करके अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उपाध्यक्ष चौहान ने उन्हें इस मामले के बारे में सोमवार दोपहर को बताया था और उसी समय उन्होंने जिलाधिकारी को फोन करके उनसे सत्र की समाप्ति के बाद उपाध्यक्ष चौहान से मिलकर खेद प्रकट करने के निर्देश दे दिए थे। अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि यह गंभीर विषय है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी से निर्देशों का पालन करवाया जाए अन्यथा पीठ इसका संज्ञान लेगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
देहरादून, बाईस दिसंबर उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को एक जिलाधिकारी द्वारा विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथसिंह चौहान को दो टूक जवाब दिए जाने का मामला गूंजा जिसे गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सरकार से संबंधित अधिकारी से खेद प्रकट करवाने को कहा। अध्यक्ष अग्रवाल ने यह भी कहा कि अगर सरकार के इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो विधानसभा पीठ इसका संज्ञान लेगी। राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठा। चौहान की ओर से रखे गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के समर्थन में आये कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि चौहान ने अपने क्षेत्र में तीन कोविड-उन्नीस मरीजों की मौत के बाद उन्होंने अल्मोडा के जिलाधिकारी को मुख्य चिकित्साधिकारी को मौके पर भेजने को कहा था जिस पर जिलाधिकारी ने उन्हें दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वह अधिकारी को नहीं भेजेंगे। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने प्रदेश में नौकरशाही के निरंकुश होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग हर विधायक उसके हाथों अपमान झेल रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी को बुलाकर ऐसा संदेश दिया जाना चाहिए कि उसका अपराध क्षमायोग्य नहीं है। अन्य कांग्रेस सदस्यों प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन आदि ने भी ह्रदयेश का समर्थन करके अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उपाध्यक्ष चौहान ने उन्हें इस मामले के बारे में सोमवार दोपहर को बताया था और उसी समय उन्होंने जिलाधिकारी को फोन करके उनसे सत्र की समाप्ति के बाद उपाध्यक्ष चौहान से मिलकर खेद प्रकट करने के निर्देश दे दिए थे। अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि यह गंभीर विषय है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी से निर्देशों का पालन करवाया जाए अन्यथा पीठ इसका संज्ञान लेगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
टीवी की दुनिया से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली हिना खान इन दिनों सुर्खियों में हैं। हिना अक्सर अपने रिलेशनशिप और कभी फिटनेस की वजह से सोशल मीडिया पर हावी रहती हैं। हाल ही में हिना खान ने एक्सरसाइज और पिलेट के वीडियो शेयर किए हैं, जिनसे आप हिना से प्रेरणा भी ले सकते हैं। हिना खान लॉकडाउन के दिनों में अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल का बहुत ख्याल रख रही हैं। हिना खान चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हों, वह एक्सरसाइज और पाइलेट्स के लिए समय निकाल लेती हैं। हिना ग्रिल की मदद से बालकनी पर खड़ी हो गईं, जिसका वीडियो उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। हिना बर्रे इस वीडियो में पिलाटेट करती हुई नजर आ रही हैं। वहीं हिना खान भी रॉकी जायसवाल के साथ रिलेशनशिप को लेकर काफी चर्चा में हैं। हाल ही में हिना ने फैंस को सरप्राइज करते हुए रॉकी जायसवाल के साथ कुछ फोटोज शेयर की हैं। रॉकी जायसवाल की तारीफ करते हुए, हिना खान ने लिखा कि आप हमेशा मेरे लिए खड़े रहे, मेरा समर्थन किया और प्यार दिया। जबकि हिना खान इस समय रॉकी जायसवाल के साथ काफी चर्चा में हैं। हाल ही में हिना ने फैंस को सरप्राइज करते हुए रॉकी जायसवाल के साथ कुछ फोटोज शेयर की हैं। हिना खान ने रॉकी जायसवाल की तारीफ की और लिखा कि आप हमेशा मेरे लिए खड़े रहे, मेरा समर्थन किया और प्यार दिया।
टीवी की दुनिया से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली हिना खान इन दिनों सुर्खियों में हैं। हिना अक्सर अपने रिलेशनशिप और कभी फिटनेस की वजह से सोशल मीडिया पर हावी रहती हैं। हाल ही में हिना खान ने एक्सरसाइज और पिलेट के वीडियो शेयर किए हैं, जिनसे आप हिना से प्रेरणा भी ले सकते हैं। हिना खान लॉकडाउन के दिनों में अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल का बहुत ख्याल रख रही हैं। हिना खान चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हों, वह एक्सरसाइज और पाइलेट्स के लिए समय निकाल लेती हैं। हिना ग्रिल की मदद से बालकनी पर खड़ी हो गईं, जिसका वीडियो उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। हिना बर्रे इस वीडियो में पिलाटेट करती हुई नजर आ रही हैं। वहीं हिना खान भी रॉकी जायसवाल के साथ रिलेशनशिप को लेकर काफी चर्चा में हैं। हाल ही में हिना ने फैंस को सरप्राइज करते हुए रॉकी जायसवाल के साथ कुछ फोटोज शेयर की हैं। रॉकी जायसवाल की तारीफ करते हुए, हिना खान ने लिखा कि आप हमेशा मेरे लिए खड़े रहे, मेरा समर्थन किया और प्यार दिया। जबकि हिना खान इस समय रॉकी जायसवाल के साथ काफी चर्चा में हैं। हाल ही में हिना ने फैंस को सरप्राइज करते हुए रॉकी जायसवाल के साथ कुछ फोटोज शेयर की हैं। हिना खान ने रॉकी जायसवाल की तारीफ की और लिखा कि आप हमेशा मेरे लिए खड़े रहे, मेरा समर्थन किया और प्यार दिया।
पाकिस्तान के कराची में कामरान अल्ला बख्स ने इस्लाम कबूल कर के अपने साथ निकाह न करने पर ईसाई लड़की सुनीता मसीह पर तेज़ाब फेंका। चल रहा इलाज। दिल्ली में एक 17 साल की लड़की पर तेजाब से हमला हुआ। कंगना ने प्रतिक्रिया देते हुए याद किया कि कैसे उनकी बहन पर भी सड़क छाप आशिक ने तेजाब फेंका था। छात्रा अपनी बहन के साथ स्कूल जाने के लिए निकली थी। तभी बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने पीड़िता पर तेजाब फेंक दिया। LG ने पुलिस को तलब किया। एसिड अटैक के मामलों में दोषसिद्धि की दर बेहद कम है। इसके बिना तेजाब हमला करने वाले दरिंदों में वह खौफ पैदा नहीं होगा, जिसकी बात गौतम गंभीर कर रहे हैं। दिल्ली में अपनी छोटी बहन के साथ जा रही 17 साल की एक लड़की पर बाइक सवारों ने एसिड फेंक दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई है। आमिर खान को बाइक लेनी थी। बीवी हिना परवीन पर इसके लिए 70 हजार रुपए अपने मायके से लाने को कहा। हिना पैसे लेकर नहीं लौटी तो आमिर ने उस पर तेजाब उड़ेल दिया। मामला झारखंड के रांची का है। एमपी में नवरात्रि पर माँ दुर्गा का दर्शन गई एक युवती पर समुदाय विशेष के बदमाशों ने केमिकल का स्प्रे कर दिया। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। कर्नाटक के बेंगलुरु में अहमद ने निकाह का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद महिला के चेहरे पर एसिड फेंक दिया। महिला तलाकशुदा और 3 बच्चों की माँ है। केरल में 2 बच्चों की माँ शीबा ने शादी से इनकार करने पर अरुण नाम के एक शख्स के चेहरे पर तेजाब फेंका। घायल के आँखों की रोशनी जाने का खतरा।
पाकिस्तान के कराची में कामरान अल्ला बख्स ने इस्लाम कबूल कर के अपने साथ निकाह न करने पर ईसाई लड़की सुनीता मसीह पर तेज़ाब फेंका। चल रहा इलाज। दिल्ली में एक सत्रह साल की लड़की पर तेजाब से हमला हुआ। कंगना ने प्रतिक्रिया देते हुए याद किया कि कैसे उनकी बहन पर भी सड़क छाप आशिक ने तेजाब फेंका था। छात्रा अपनी बहन के साथ स्कूल जाने के लिए निकली थी। तभी बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने पीड़िता पर तेजाब फेंक दिया। LG ने पुलिस को तलब किया। एसिड अटैक के मामलों में दोषसिद्धि की दर बेहद कम है। इसके बिना तेजाब हमला करने वाले दरिंदों में वह खौफ पैदा नहीं होगा, जिसकी बात गौतम गंभीर कर रहे हैं। दिल्ली में अपनी छोटी बहन के साथ जा रही सत्रह साल की एक लड़की पर बाइक सवारों ने एसिड फेंक दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई है। आमिर खान को बाइक लेनी थी। बीवी हिना परवीन पर इसके लिए सत्तर हजार रुपए अपने मायके से लाने को कहा। हिना पैसे लेकर नहीं लौटी तो आमिर ने उस पर तेजाब उड़ेल दिया। मामला झारखंड के रांची का है। एमपी में नवरात्रि पर माँ दुर्गा का दर्शन गई एक युवती पर समुदाय विशेष के बदमाशों ने केमिकल का स्प्रे कर दिया। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। कर्नाटक के बेंगलुरु में अहमद ने निकाह का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद महिला के चेहरे पर एसिड फेंक दिया। महिला तलाकशुदा और तीन बच्चों की माँ है। केरल में दो बच्चों की माँ शीबा ने शादी से इनकार करने पर अरुण नाम के एक शख्स के चेहरे पर तेजाब फेंका। घायल के आँखों की रोशनी जाने का खतरा।
ALLAHABAD: मुट्ठीगंज पुलिस ने कई माह से चल रही असलहा बनाने एक फैक्ट्री का बड़ा खुलासा किया है। पकड़ी गई फैक्ट्री से कई निर्मित और अर्द्धनिर्मित तमंचे व नाल एवं तमंचा बनाने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं। मौके से पुलिस ने दो लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इन्होंने पुलिस को बताया कि यहां तैयार किए गए असलहों की सप्लाई वे आसपास के जनपदों में किया करते थे। पुलिस को देखते ही मौके से कई लोग फरार हो गए। जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। थानाध्यक्ष निशीकांत राय को खबर मिली थी कि बलुआघाट चौराहे पर एक व्यक्ति कई तमंचों को बेचने के लिए किसी का इंतजार कर रहा है। खबर मिलते ही हमराहियों के साथ मौके पर पहुंच कर उन्होंने उस व्यक्ति को दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक पकड़े गए शख्स ने अपना नाम इन्द्रजीत विश्वकर्मा निवासी मालवीय नगर बताया। उसने पुलिस को यह भी जानकारी दी कि गोविंदपुर एरिया स्थित एक टेंट हाउस के अंदर फैक्ट्री है। इसी फैक्ट्री में असलहे बनाए जाते हैं। यहां तैयार किए गए असलहों की सप्लाई शहर व आसपास के जनपदों में की जाती है। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए लोगों ने कबूला है कि असलहों को बेचने का काम गोविंदपुर निवासी शहीम बाबा किया करता है। इन तमाम जानकारियों को करने के बाद पुलिस ने बगैर देर किए टेंट हाउस में छापेमारी करके असला बनाने की फैक्ट्री को बरामद कर लिया। इस दौरान पुलिस ने मौके से खुल्दाबाद निवासी शमीम अख्तर पुत्र अंसार अहमद को गिरफ्तार कर लिया। जबकि शहीम पुलिस को देखते ही भाग निकला। असलहा बनाने की पकड़ी गई फैक्ट्री टेंट हाउस में कई माह से चल रही थी। असलहों के साथ मौके से दो अभियुक्त भी पकड़े गए हैं। दोनों ने पूछताछ में कई अहमद जानकारियां दीं हैं, जिस पर पुलिस काम कर रही है। फरार अभियुक्तों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
ALLAHABAD: मुट्ठीगंज पुलिस ने कई माह से चल रही असलहा बनाने एक फैक्ट्री का बड़ा खुलासा किया है। पकड़ी गई फैक्ट्री से कई निर्मित और अर्द्धनिर्मित तमंचे व नाल एवं तमंचा बनाने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं। मौके से पुलिस ने दो लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इन्होंने पुलिस को बताया कि यहां तैयार किए गए असलहों की सप्लाई वे आसपास के जनपदों में किया करते थे। पुलिस को देखते ही मौके से कई लोग फरार हो गए। जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। थानाध्यक्ष निशीकांत राय को खबर मिली थी कि बलुआघाट चौराहे पर एक व्यक्ति कई तमंचों को बेचने के लिए किसी का इंतजार कर रहा है। खबर मिलते ही हमराहियों के साथ मौके पर पहुंच कर उन्होंने उस व्यक्ति को दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक पकड़े गए शख्स ने अपना नाम इन्द्रजीत विश्वकर्मा निवासी मालवीय नगर बताया। उसने पुलिस को यह भी जानकारी दी कि गोविंदपुर एरिया स्थित एक टेंट हाउस के अंदर फैक्ट्री है। इसी फैक्ट्री में असलहे बनाए जाते हैं। यहां तैयार किए गए असलहों की सप्लाई शहर व आसपास के जनपदों में की जाती है। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए लोगों ने कबूला है कि असलहों को बेचने का काम गोविंदपुर निवासी शहीम बाबा किया करता है। इन तमाम जानकारियों को करने के बाद पुलिस ने बगैर देर किए टेंट हाउस में छापेमारी करके असला बनाने की फैक्ट्री को बरामद कर लिया। इस दौरान पुलिस ने मौके से खुल्दाबाद निवासी शमीम अख्तर पुत्र अंसार अहमद को गिरफ्तार कर लिया। जबकि शहीम पुलिस को देखते ही भाग निकला। असलहा बनाने की पकड़ी गई फैक्ट्री टेंट हाउस में कई माह से चल रही थी। असलहों के साथ मौके से दो अभियुक्त भी पकड़े गए हैं। दोनों ने पूछताछ में कई अहमद जानकारियां दीं हैं, जिस पर पुलिस काम कर रही है। फरार अभियुक्तों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
जिंदगी में कितनी ही मुश्किलें आएं, लेकिन अगर खुद पर यकीन हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। इसका एक example है विनी हार्लो जिन्होनें अपनी जिंदगी में किया कुछ ऐसा कि खुद ही बदल दी अपनी लाईफ। Winnie को विटिलिगो का issue है जिसके चलते छोटी उम्र से ही लोगों के तानों से लेकर बुलीइंग का शिकार होना पड़ता था। ये सब इतना ज्यादा हो गया था कि विनी ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया था और होम-स्कूलिंग शुरू कर दी थी। वह बाहर निकलने से भी हिचकिचाने लगीं। हालांकि, 16 साल की उम्र में ऐसे इंसान से मिली, जिसने सेल्फ-कॉन्फिडेंस word तक को भूल चुकी विनी को न जाने कितनों के लिए role model बना दिया। कभी जिस लड़की के skin के सफेद धब्बों को देख लोग मजाक उड़ाया करते थे, आज उससे मिलने तक के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। इसलिए कहते है ना किस्मत बदलते देर नही लगती बस अपने सेल्फ-कॉन्फिडेंस को गिरने मत दिजीए. . . एक ओर जहां लोग इस मॉडल की कहानी को देखने के बाद मोटिवेटिड होते हैं, तो वहीं इसके उलट विनी खुद को रोल मॉडल नहीं मानतीं। फोर्ब्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि रोल मॉडल्स में विश्वास नहीं रखतीं। वह नहीं चाहती कि कोई उनके जैसा बनने की कोशिश करे, बल्कि उनका मानना है कि व्यक्ति को अपना ही बेटर वर्जन बनना चाहिए। विनी की कहानी जानने से पहले आपको थोड़ा विटिलिगो के बारे में बताते हैं। ये एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है, जिसमें स्किन पिग्मेंट या कलर के पैच बनने लगते हैं। ऐसा तब होता है, जब Pigment बनाने वाले स्किन सेल्स मेलनायट पर शरीर में हमला होता है और वो खत्म होने लगते हैं। इस वजह से skin पर सफेद रंग के धब्बे बनना शुरू हो जाते हैं। कई रिसर्च में Vitiligo को ऑटोइम्यून बीमारी बताया गया है। इस मेडिकल कंडिशन में बीमारी से लड़ने के लिए बॉडी में मौजूद इम्यून सेल्स हेल्दी टिशूज को ही निशाना बनाने लगते हैं। विटिलिगो का अब तक कोई इलाज सामने नहीं आ सका है। टीनेजर में विनी में आत्मविश्वास नाम की चीज खत्म हो चुकी थी। उन्होंने एक Interview में बात करते हुए कहा था 'विटिलिगो ने मेरे सेल्फ कॉन्फिडेंस को कभी भी प्रभावित नहीं किया। ये तो आसपास के लोग थे, जिन्होंने मेरे कॉन्फिडेंस को तोड़कर रख दिया। ' विनी करीब 16 साल की थीं, जब उनकी मुलाकात टोरंटो के जर्नलिस्ट शैनन बूडरैम से हुई। इन्होंने हार्लो की कहानी और विटिलिगो की स्थिति पर वीडियो बनाया, जिसे यूट्यूब पर जल्द ही 1 लाख से ज्यादा हिट्स मिल गए। बूडरैम ने विनी को बताया कि वह कैमरे के सामने कितनी नैचरल हैं और इस वजह से उन्होंने उन्हें मॉडलिंग में जाने का सुझाव दिया। कुछ सालों बाद Winnie ने America's Next Top Model में हिस्सा लिया। वह विनर भले ही नहीं बन सकीं, लेकिन लोगों के बीच जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। विनी हार्लो ने अब दूसरे उनके बारे में क्या सोचते हैं, इस पर ध्यान देना बंद करके खुद को स्वीकार करना शुरू किया, तब उनके लिए सबकुछ बदल गया। विक्टोरियाज सीक्रेट के लिए मॉडलिंग करने से लेकर नामी लग्जरी लेबल तक के लिए उन्हें फीचर किया जाने लगा। आज की तारीख में वह सुपरमॉडल का टाइटल हासिल कर चुकी हैं और उनकी नेट-वर्थ करोड़ों में है। वह इतनी हाइ-प्रोफाइल सिलेब बन चुकी हैं कि अब उनसे मिलने के लिए भी पहले अपॉइंटमेंट तक लेना पड़ता है और अगर किसी शो का हिस्सा बनाना हो, तो एडवांस में डेट्स बुक करनी पड़ती हैं।
जिंदगी में कितनी ही मुश्किलें आएं, लेकिन अगर खुद पर यकीन हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। इसका एक example है विनी हार्लो जिन्होनें अपनी जिंदगी में किया कुछ ऐसा कि खुद ही बदल दी अपनी लाईफ। Winnie को विटिलिगो का issue है जिसके चलते छोटी उम्र से ही लोगों के तानों से लेकर बुलीइंग का शिकार होना पड़ता था। ये सब इतना ज्यादा हो गया था कि विनी ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया था और होम-स्कूलिंग शुरू कर दी थी। वह बाहर निकलने से भी हिचकिचाने लगीं। हालांकि, सोलह साल की उम्र में ऐसे इंसान से मिली, जिसने सेल्फ-कॉन्फिडेंस word तक को भूल चुकी विनी को न जाने कितनों के लिए role model बना दिया। कभी जिस लड़की के skin के सफेद धब्बों को देख लोग मजाक उड़ाया करते थे, आज उससे मिलने तक के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। इसलिए कहते है ना किस्मत बदलते देर नही लगती बस अपने सेल्फ-कॉन्फिडेंस को गिरने मत दिजीए. . . एक ओर जहां लोग इस मॉडल की कहानी को देखने के बाद मोटिवेटिड होते हैं, तो वहीं इसके उलट विनी खुद को रोल मॉडल नहीं मानतीं। फोर्ब्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि रोल मॉडल्स में विश्वास नहीं रखतीं। वह नहीं चाहती कि कोई उनके जैसा बनने की कोशिश करे, बल्कि उनका मानना है कि व्यक्ति को अपना ही बेटर वर्जन बनना चाहिए। विनी की कहानी जानने से पहले आपको थोड़ा विटिलिगो के बारे में बताते हैं। ये एक क्रॉनिक डिसऑर्डर है, जिसमें स्किन पिग्मेंट या कलर के पैच बनने लगते हैं। ऐसा तब होता है, जब Pigment बनाने वाले स्किन सेल्स मेलनायट पर शरीर में हमला होता है और वो खत्म होने लगते हैं। इस वजह से skin पर सफेद रंग के धब्बे बनना शुरू हो जाते हैं। कई रिसर्च में Vitiligo को ऑटोइम्यून बीमारी बताया गया है। इस मेडिकल कंडिशन में बीमारी से लड़ने के लिए बॉडी में मौजूद इम्यून सेल्स हेल्दी टिशूज को ही निशाना बनाने लगते हैं। विटिलिगो का अब तक कोई इलाज सामने नहीं आ सका है। टीनेजर में विनी में आत्मविश्वास नाम की चीज खत्म हो चुकी थी। उन्होंने एक Interview में बात करते हुए कहा था 'विटिलिगो ने मेरे सेल्फ कॉन्फिडेंस को कभी भी प्रभावित नहीं किया। ये तो आसपास के लोग थे, जिन्होंने मेरे कॉन्फिडेंस को तोड़कर रख दिया। ' विनी करीब सोलह साल की थीं, जब उनकी मुलाकात टोरंटो के जर्नलिस्ट शैनन बूडरैम से हुई। इन्होंने हार्लो की कहानी और विटिलिगो की स्थिति पर वीडियो बनाया, जिसे यूट्यूब पर जल्द ही एक लाख से ज्यादा हिट्स मिल गए। बूडरैम ने विनी को बताया कि वह कैमरे के सामने कितनी नैचरल हैं और इस वजह से उन्होंने उन्हें मॉडलिंग में जाने का सुझाव दिया। कुछ सालों बाद Winnie ने America's Next Top Model में हिस्सा लिया। वह विनर भले ही नहीं बन सकीं, लेकिन लोगों के बीच जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। विनी हार्लो ने अब दूसरे उनके बारे में क्या सोचते हैं, इस पर ध्यान देना बंद करके खुद को स्वीकार करना शुरू किया, तब उनके लिए सबकुछ बदल गया। विक्टोरियाज सीक्रेट के लिए मॉडलिंग करने से लेकर नामी लग्जरी लेबल तक के लिए उन्हें फीचर किया जाने लगा। आज की तारीख में वह सुपरमॉडल का टाइटल हासिल कर चुकी हैं और उनकी नेट-वर्थ करोड़ों में है। वह इतनी हाइ-प्रोफाइल सिलेब बन चुकी हैं कि अब उनसे मिलने के लिए भी पहले अपॉइंटमेंट तक लेना पड़ता है और अगर किसी शो का हिस्सा बनाना हो, तो एडवांस में डेट्स बुक करनी पड़ती हैं।
योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भडक़ उठे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा है कि उन्हें अपने मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए और वह बताएं कि उनकी सरकार किसानों को एमएसपी देने के समर्थन में है या विरोध में खड़ी है। लखनऊः योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भडक़ उठे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा है कि उन्हें अपने मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए और वह बताएं कि उनकी सरकार किसानों को एमएसपी देने के समर्थन में है या विरोध में खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसानों को गुंडा कहने वाले मंत्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने शनिवार को एक वीडियो बयान जारी कर योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के मंत्री ने जिस तरह किसानों को लेकर अनर्गल बातें की हैं। किसानों को गुंडा कहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री को देश के किसानों से माफी मांगनी होगी। किसानों को गुंडा कहने वालों को देश की जनता बर्दाश्त नहीं करने वाली है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री किसानों के बारे में बात कर रहे हैं ऐसे में जरूरी हो गया है कि मुख्यमंत्री खुद बताएं कि वह किसानों के साथ हैं या उनका विरोध कर रहे हैं। किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ यह सरकार है या इसका भी विरोध करती है। मुख्यमंत्री को बताना होगा कि उनकी सरकार जमाखोरों के साथ खड़ी है या किसानों के साथ खड़ी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैसे तो योगी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार ने अब तक किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले सारे काम किए हैं। प्रदेश में किसानों का धान नहीं बिक रहा है। आधे से भी कम दाम पर किसानों को अपना धान स्थानीय व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। गन्ना किसानों को चार साल में बढ़ा हुआ दाम नहीं मिला और बिके हुए गन्ने का भी मूल्य नहीं मिल सका है। किसानों की मदद करने के बजाय सरकार के मंत्री उन्हें गुंडा बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में अगर सीएम ने माफी नही मांगी तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और योगी सरकार को चैन से नहीं बैठने देगी।
योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भडक़ उठे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा है कि उन्हें अपने मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए और वह बताएं कि उनकी सरकार किसानों को एमएसपी देने के समर्थन में है या विरोध में खड़ी है। लखनऊः योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भडक़ उठे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा है कि उन्हें अपने मंत्री पर कार्रवाई करनी चाहिए और वह बताएं कि उनकी सरकार किसानों को एमएसपी देने के समर्थन में है या विरोध में खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसानों को गुंडा कहने वाले मंत्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने शनिवार को एक वीडियो बयान जारी कर योगी सरकार के मंत्री अनिल शर्मा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के मंत्री ने जिस तरह किसानों को लेकर अनर्गल बातें की हैं। किसानों को गुंडा कहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री को देश के किसानों से माफी मांगनी होगी। किसानों को गुंडा कहने वालों को देश की जनता बर्दाश्त नहीं करने वाली है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री किसानों के बारे में बात कर रहे हैं ऐसे में जरूरी हो गया है कि मुख्यमंत्री खुद बताएं कि वह किसानों के साथ हैं या उनका विरोध कर रहे हैं। किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ यह सरकार है या इसका भी विरोध करती है। मुख्यमंत्री को बताना होगा कि उनकी सरकार जमाखोरों के साथ खड़ी है या किसानों के साथ खड़ी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैसे तो योगी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार ने अब तक किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले सारे काम किए हैं। प्रदेश में किसानों का धान नहीं बिक रहा है। आधे से भी कम दाम पर किसानों को अपना धान स्थानीय व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। गन्ना किसानों को चार साल में बढ़ा हुआ दाम नहीं मिला और बिके हुए गन्ने का भी मूल्य नहीं मिल सका है। किसानों की मदद करने के बजाय सरकार के मंत्री उन्हें गुंडा बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में अगर सीएम ने माफी नही मांगी तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और योगी सरकार को चैन से नहीं बैठने देगी।
दूध सेहत के लिए ही नहीं त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है। शायद यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग 'दूधो नहाओ' यानी दूध से नहाने का आशीर्वाद देते आए हैं। दूध से नहाना जहां संपन्न ता की निशानी माना जाता है, वहीं सचमुच दूध से नहाने के सेहत को भी बहुत से लाभी हैं। इससे सुंदरता तो बढ़ती ही है। मिल्के बाथ न सिर्फ आपके स्किन को कोमल बनाता है, बल्कि ये त्वकचा को पोषण भी देता है। तो चलिए जानते हैं मिल्क बाथ लेना ब्यूटी के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है।
दूध सेहत के लिए ही नहीं त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है। शायद यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग 'दूधो नहाओ' यानी दूध से नहाने का आशीर्वाद देते आए हैं। दूध से नहाना जहां संपन्न ता की निशानी माना जाता है, वहीं सचमुच दूध से नहाने के सेहत को भी बहुत से लाभी हैं। इससे सुंदरता तो बढ़ती ही है। मिल्के बाथ न सिर्फ आपके स्किन को कोमल बनाता है, बल्कि ये त्वकचा को पोषण भी देता है। तो चलिए जानते हैं मिल्क बाथ लेना ब्यूटी के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शिवसेना सांसद, संजय राउत ने उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू को एक खत लिखा और कहा कि ईडी उनसे जुड़े 17 साल पूराने मामले पर कारवाई कर रही और इसके पीछे केंद्र सरकार का हाथ है. इसके साथ ही संजय राउत ने ये दावा किया कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार को गिराने में सहायता करने की बात कही, ताकि राज्य में मध्यावधि चुनाव हो सके. सजंय राउत ने ये खत विपक्ष के नेताओं को भी भेजा और कहा कि ये हमारे लिए बहुत मुश्किल समय है और आप लोग हमारा सहयोग करें. अब इस खत के बाद महाराष्ट्र के साथ ही पूरे देश मे बयानों का दौर चल पड़ा. बहस शुरू हो गई. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि बीजेपी चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, राज्य में महा विकास आघाड़ी सरकार पांच साल पूरा करेगी. तो वो कौन सा मामला है, जिसका ज़िक्र संजय राउत कर रहे हैं और ईडी जिस पर कार्रवाई कर रही है? कोरोना वायरस ने दो साल पहले जब दुनिया में दस्तक दी थी तो करीब 23 हजार भारतीय बच्चे ऐसे थे, जो चीन में पढ़ाई कर रहे थे और उन्हें वापस भारत बुला लिया गया था. लेकिन अब दो साल गुजर चुके हैं, स्थिति पहले से काफी सामान्य हुई है और इसी बीच चीन ने पाकिस्तानी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस बुलाया है. वहीं, मंगोलिया, श्रीलंका, सिंगापुर जैसे देशों के बच्चों को भी वो बुलाने पर विचार कर रहा है. लेकिन इन सब के इतर भारत के नाम की चर्चा कहीं नहीं है और न ही इसको लेकर चीन साफ-साफ कुछ बोल रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो विदेशी छात्रों को पढ़ाई के लिए चीन लौटने की अनुमति एक coordinated तरीके से देने पर विचार कर रहा है. वहीं, हमने हाल ही में देखा कि भारत ने बीजिंट विंटर ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बॉयकॉट किया, इसके अलावा चीन के साथ करीब 2 सालों से बॉर्डर कांफ्लिक्ट को लेकर भी विवाद बना हुआ है और इन सब के बीच अब चीन का भारत के बच्चों को उनकी पढ़ाई पूरी करने के लिए ना बुलाना क्या इशारा कर रहा है और ये बात कितनी गंभीर है? वेस्टइंडीज से दूसरा ओडीआई मुकाबला भारत ने जीत लिया. सीरीज तीन ही मैच की है सो इस जीत के साथ सीरीज पर भी टीम इंडिया ने कब्जा जमा लिया. इस साल टीम इंडिया की यह पहली सीरीज है, जो उसने जीती है. साथ ही ऐज ए फुलटाइम कैप्टन रोहित शर्मा ने यह पहली सीरीज जीती है. तो वापस लौटते हैं मैच पर. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 237 रन बनाए थे. सूर्यकुमार यादव ने सबसे ज्यादा 64 रन का योगदान दिया. वैसे तो टारगेट बहुत ज्यादा नहीं था, लेकिन इसका पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज 193 रन पर ही ऑल आउट हो गई. भारत के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने 4 विकेट चटकाए और मैन ऑफ द मैच भी बने. तो भारत के लिए इस मैच के पॉजिटिव्स क्या रहे, रोहित शर्मा ने अपने किस फैसले से फैन्स को हैरान कर दिया और अगले मैच में टीम में क्या फेरबदल हो सकते हैं? इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.
शिवसेना सांसद, संजय राउत ने उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू को एक खत लिखा और कहा कि ईडी उनसे जुड़े सत्रह साल पूराने मामले पर कारवाई कर रही और इसके पीछे केंद्र सरकार का हाथ है. इसके साथ ही संजय राउत ने ये दावा किया कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार को गिराने में सहायता करने की बात कही, ताकि राज्य में मध्यावधि चुनाव हो सके. सजंय राउत ने ये खत विपक्ष के नेताओं को भी भेजा और कहा कि ये हमारे लिए बहुत मुश्किल समय है और आप लोग हमारा सहयोग करें. अब इस खत के बाद महाराष्ट्र के साथ ही पूरे देश मे बयानों का दौर चल पड़ा. बहस शुरू हो गई. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि बीजेपी चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, राज्य में महा विकास आघाड़ी सरकार पांच साल पूरा करेगी. तो वो कौन सा मामला है, जिसका ज़िक्र संजय राउत कर रहे हैं और ईडी जिस पर कार्रवाई कर रही है? कोरोना वायरस ने दो साल पहले जब दुनिया में दस्तक दी थी तो करीब तेईस हजार भारतीय बच्चे ऐसे थे, जो चीन में पढ़ाई कर रहे थे और उन्हें वापस भारत बुला लिया गया था. लेकिन अब दो साल गुजर चुके हैं, स्थिति पहले से काफी सामान्य हुई है और इसी बीच चीन ने पाकिस्तानी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस बुलाया है. वहीं, मंगोलिया, श्रीलंका, सिंगापुर जैसे देशों के बच्चों को भी वो बुलाने पर विचार कर रहा है. लेकिन इन सब के इतर भारत के नाम की चर्चा कहीं नहीं है और न ही इसको लेकर चीन साफ-साफ कुछ बोल रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो विदेशी छात्रों को पढ़ाई के लिए चीन लौटने की अनुमति एक coordinated तरीके से देने पर विचार कर रहा है. वहीं, हमने हाल ही में देखा कि भारत ने बीजिंट विंटर ओलंपिक का डिप्लोमेटिक बॉयकॉट किया, इसके अलावा चीन के साथ करीब दो सालों से बॉर्डर कांफ्लिक्ट को लेकर भी विवाद बना हुआ है और इन सब के बीच अब चीन का भारत के बच्चों को उनकी पढ़ाई पूरी करने के लिए ना बुलाना क्या इशारा कर रहा है और ये बात कितनी गंभीर है? वेस्टइंडीज से दूसरा ओडीआई मुकाबला भारत ने जीत लिया. सीरीज तीन ही मैच की है सो इस जीत के साथ सीरीज पर भी टीम इंडिया ने कब्जा जमा लिया. इस साल टीम इंडिया की यह पहली सीरीज है, जो उसने जीती है. साथ ही ऐज ए फुलटाइम कैप्टन रोहित शर्मा ने यह पहली सीरीज जीती है. तो वापस लौटते हैं मैच पर. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दो सौ सैंतीस रन बनाए थे. सूर्यकुमार यादव ने सबसे ज्यादा चौंसठ रन का योगदान दिया. वैसे तो टारगेट बहुत ज्यादा नहीं था, लेकिन इसका पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज एक सौ तिरानवे रन पर ही ऑल आउट हो गई. भारत के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने चार विकेट चटकाए और मैन ऑफ द मैच भी बने. तो भारत के लिए इस मैच के पॉजिटिव्स क्या रहे, रोहित शर्मा ने अपने किस फैसले से फैन्स को हैरान कर दिया और अगले मैच में टीम में क्या फेरबदल हो सकते हैं? इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.
लखनऊ। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से चयनित 573 जूनियर इंजीनियर राज्य में जल जीवन मिशन योजना को रफ्तार देने के लिए तैयार हैं। हर घर जल योजना में तेजी लाने और योजनाओं को समय से पूरा करने की अहम जिम्मेदारी इन युवा इंजीनियरों पर होगी। विभाग ने सोमवार से नव चयनित जूनियर इंजीनियरों का 3 दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है। प्रशिक्षण के बाद इनको खासकर बुंदेलखंड, विंध्य, प्रयागराज, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और चंदौली जैसे जिलों में भेजकर वहां परियोजनाओं को समय से पहले तेज गति से पूरा कराने के लिए तैनाती दी जाएगी। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव के निर्देशन में सोमवार से बक्शी का तालाब स्थित राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में नव चयनित जूनियर इंजीनियरों का 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण का शुभारंभ जल निगम के एमडी बलकार सिंह और राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रिय रंजन कुमार ने किया। विभाग के अधिकारियों ने नव चयनित जूनियर इंजीनियरों को जल जीवन मिशन योजना की अवधारणा, उद्देश्य एवं घटक, क्रियान्वयन और रणनीति के साथ-साथ फील्ड में उनके सामने आने वाली चुनौतियां और उनके समाधान की भी जानकारी दी। विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की गई। बता दें कि सरकारी विभाग में नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने नौकरियों का खास तोहफा दिया है। पहली बार संविदा के आधार पर बड़े ही निष्पक्ष, व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से जूनियर इंजीनियरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया गया है।
लखनऊ। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से चयनित पाँच सौ तिहत्तर जूनियर इंजीनियर राज्य में जल जीवन मिशन योजना को रफ्तार देने के लिए तैयार हैं। हर घर जल योजना में तेजी लाने और योजनाओं को समय से पूरा करने की अहम जिम्मेदारी इन युवा इंजीनियरों पर होगी। विभाग ने सोमवार से नव चयनित जूनियर इंजीनियरों का तीन दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है। प्रशिक्षण के बाद इनको खासकर बुंदेलखंड, विंध्य, प्रयागराज, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और चंदौली जैसे जिलों में भेजकर वहां परियोजनाओं को समय से पहले तेज गति से पूरा कराने के लिए तैनाती दी जाएगी। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव के निर्देशन में सोमवार से बक्शी का तालाब स्थित राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में नव चयनित जूनियर इंजीनियरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण का शुभारंभ जल निगम के एमडी बलकार सिंह और राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रिय रंजन कुमार ने किया। विभाग के अधिकारियों ने नव चयनित जूनियर इंजीनियरों को जल जीवन मिशन योजना की अवधारणा, उद्देश्य एवं घटक, क्रियान्वयन और रणनीति के साथ-साथ फील्ड में उनके सामने आने वाली चुनौतियां और उनके समाधान की भी जानकारी दी। विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की गई। बता दें कि सरकारी विभाग में नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने नौकरियों का खास तोहफा दिया है। पहली बार संविदा के आधार पर बड़े ही निष्पक्ष, व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से जूनियर इंजीनियरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया गया है।
इन फिल्मों में काम कर चुके हैं आर्यन खान (Aryan Khan) इन दिनों लोग एक ही बात कह रहे हैं कि शाहरुख खान के बेटे का करियर तो शुरु होने से पहले ही खत्म हो गया है। बीते दिनों ही एक क्रूज पार्टी के दौरान एनसीबी ने आर्यन खान समेट कई लोगों को गिरफ्तार किया है और आरोप लगाया गया है कि इस पार्टी में खुलेआम ड्रग्स का इस्तेमाल हो रहा था। आर्यन खान के करियर की बात करें तो बहुत कम लोगों को पता है कि वो सालों पहले ही इंडस्ट्री में एंट्री मार चुके हैं। चलिए जानते हैं कि आखिर किन-किन फिल्मों में आर्यन खान ने काम किया है?
इन फिल्मों में काम कर चुके हैं आर्यन खान इन दिनों लोग एक ही बात कह रहे हैं कि शाहरुख खान के बेटे का करियर तो शुरु होने से पहले ही खत्म हो गया है। बीते दिनों ही एक क्रूज पार्टी के दौरान एनसीबी ने आर्यन खान समेट कई लोगों को गिरफ्तार किया है और आरोप लगाया गया है कि इस पार्टी में खुलेआम ड्रग्स का इस्तेमाल हो रहा था। आर्यन खान के करियर की बात करें तो बहुत कम लोगों को पता है कि वो सालों पहले ही इंडस्ट्री में एंट्री मार चुके हैं। चलिए जानते हैं कि आखिर किन-किन फिल्मों में आर्यन खान ने काम किया है?
हुड्डा के ट्वीटर अकाउंट पर @iLove Albaik लिखा गया है, वहीं राव इंद्रजीत सिंह के ट्वीटर अकाउंट पर उर्दू भाषा में मैसेज लिखा गया है। हरियाणा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Hooda) और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह (Rao Inderjit Singh) का ट्वीटर अकाउंट हैक करने का मामला सामने आया है। हुड्डा के ट्वीटर अकाउंट पर @iLove Albaik लिखा गया है, वहीं राव इंद्रजीत सिंह के ट्वीटर अकाउंट पर उर्दू भाषा में एक ट्वीट किया गया है। इसके बाद साइबर पुलिस ने दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी है। पता लगाया जा रहा कि इसे कहां से हैक किया है। वहीं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट हैक होने की शिकायत दूरसंचार मंत्रालय और ट्विटर में भी दर्ज कराई है।
हुड्डा के ट्वीटर अकाउंट पर @iLove Albaik लिखा गया है, वहीं राव इंद्रजीत सिंह के ट्वीटर अकाउंट पर उर्दू भाषा में मैसेज लिखा गया है। हरियाणा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का ट्वीटर अकाउंट हैक करने का मामला सामने आया है। हुड्डा के ट्वीटर अकाउंट पर @iLove Albaik लिखा गया है, वहीं राव इंद्रजीत सिंह के ट्वीटर अकाउंट पर उर्दू भाषा में एक ट्वीट किया गया है। इसके बाद साइबर पुलिस ने दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी है। पता लगाया जा रहा कि इसे कहां से हैक किया है। वहीं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट हैक होने की शिकायत दूरसंचार मंत्रालय और ट्विटर में भी दर्ज कराई है।
पलिया कलां सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज पलिया के छात्र छात्राओं ने लखीमपुर एवं पलिया के दसवें संयुक्त संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में अपना कीर्तिमान स्थापित किया। इसमें जनपद में विद्या भारती के सभी 15 विद्यालयों ने सहभाग किया। स्कूल के 8 छात्र और 6 छात्राओं ने इन खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसमें से छात्र आलोक यादव ने प्रतिस्पर्धा में नया इतिहास रचा। आलोक ने अंडर-17 ऊंची कूद में अंडर-19 के छात्राओं का भी रिकॉर्ड तोड़कर 145 सेण्टीमीटर की ऊंची कूद कूदकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। तीन छात्राओं और एक छात्र आलोक यादव ने इन सभी विद्यालयों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ कर स्वर्ण पदक जीता। छात्र आलोक यादव एवं बहन मुस्कान पाल ने रिले रेस सहित 4 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। सभी चारों प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय तृतीय में से कोई न कोई स्थान अवश्य हासिल किया। विद्यालय के सभी 14 प्रतिभागियों में 12 ने अपनी प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धात्मक वृत्ति के साथ प्रथम तीन स्थानों में अपना स्थान अवश्य बनाया। कुल मिलाकर विद्यालय को 26 पदक प्राप्त हुए। प्रबन्धक रामबचन तिवारी ने आज की वन्दना सभा में समय से पहुंचकर वन्दना के बाद छात्र छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। छात्र छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए रामबचन तिवारी ने खेल के माध्यम से समय पालन में सुधार के प्रति इंगित करते हुए कहा कि समय पालन की व्यवस्था का शिक्षण खेल प्रतियोगिताओं के अतिरिक्त अन्य कहीं से इतना सटीक तरीके से नहीं प्राप्त हो सकता। प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा ने सभी भैया बहनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम, इसी लिए विद्या भारती की योजना से चलने वाले विद्यालयों में भैया बहनों के सर्वांगीण विकास का आधार लेकर शारीरिक, प्राणिक, बौद्धिक, मानसिक, नैतिक एवं अध्यात्मिक विकास के लिए पञ्च कोषात्मक विकास के उद्देश्य से पञ्च पदी एवं पञ्च मुखी शिक्षण की व्यवस्था की गई है। 100 मीटर दौड़ उत्कर्ष राना - तृतीय स्थान प्राप्त किया है। आज वंदना सभा में सभी प्रतिभागी छात्र छात्राओं को विद्यालय के प्रबन्धक रामबचन तिवारी ने प्रतिभागियों को मेडल पहनाकर एवं पुरस्कार देकर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर सभी आचार्य आचार्या उपस्थित रहीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पलिया कलां सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज पलिया के छात्र छात्राओं ने लखीमपुर एवं पलिया के दसवें संयुक्त संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में अपना कीर्तिमान स्थापित किया। इसमें जनपद में विद्या भारती के सभी पंद्रह विद्यालयों ने सहभाग किया। स्कूल के आठ छात्र और छः छात्राओं ने इन खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसमें से छात्र आलोक यादव ने प्रतिस्पर्धा में नया इतिहास रचा। आलोक ने अंडर-सत्रह ऊंची कूद में अंडर-उन्नीस के छात्राओं का भी रिकॉर्ड तोड़कर एक सौ पैंतालीस सेण्टीमीटर की ऊंची कूद कूदकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। तीन छात्राओं और एक छात्र आलोक यादव ने इन सभी विद्यालयों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ कर स्वर्ण पदक जीता। छात्र आलोक यादव एवं बहन मुस्कान पाल ने रिले रेस सहित चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। सभी चारों प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय तृतीय में से कोई न कोई स्थान अवश्य हासिल किया। विद्यालय के सभी चौदह प्रतिभागियों में बारह ने अपनी प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धात्मक वृत्ति के साथ प्रथम तीन स्थानों में अपना स्थान अवश्य बनाया। कुल मिलाकर विद्यालय को छब्बीस पदक प्राप्त हुए। प्रबन्धक रामबचन तिवारी ने आज की वन्दना सभा में समय से पहुंचकर वन्दना के बाद छात्र छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। छात्र छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए रामबचन तिवारी ने खेल के माध्यम से समय पालन में सुधार के प्रति इंगित करते हुए कहा कि समय पालन की व्यवस्था का शिक्षण खेल प्रतियोगिताओं के अतिरिक्त अन्य कहीं से इतना सटीक तरीके से नहीं प्राप्त हो सकता। प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा ने सभी भैया बहनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम, इसी लिए विद्या भारती की योजना से चलने वाले विद्यालयों में भैया बहनों के सर्वांगीण विकास का आधार लेकर शारीरिक, प्राणिक, बौद्धिक, मानसिक, नैतिक एवं अध्यात्मिक विकास के लिए पञ्च कोषात्मक विकास के उद्देश्य से पञ्च पदी एवं पञ्च मुखी शिक्षण की व्यवस्था की गई है। एक सौ मीटर दौड़ उत्कर्ष राना - तृतीय स्थान प्राप्त किया है। आज वंदना सभा में सभी प्रतिभागी छात्र छात्राओं को विद्यालय के प्रबन्धक रामबचन तिवारी ने प्रतिभागियों को मेडल पहनाकर एवं पुरस्कार देकर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर सभी आचार्य आचार्या उपस्थित रहीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुरादाबाद (एएनआई)। फिल्म एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी ने उन्हें तलाक का नोटिस भेजा है और उनसे मेंटिनेंस मांगा है। आलिया सिद्दीकी के वकील अभय सहाय ने एएनआई को कहा, 'व्हाट्सएप और ईमेल पर 7 मई को नोटिस भेजा गया था। कोरोना वायरस की वजह से वर्तमान में सभी डाक सेवाएं बंद हैं। मेरे क्लाइंट ने भी 13 मई को फिर से नोटिस भेजा था लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ' उन्होंने कहा, 'हमने अभिनेता को 15 दिनों का समय दिया है। अगर वो वह जवाब नहीं देते हैं तो कोर्ट खुलने पर हम जब भी अदालत में याचिका दायर करेंगे। ' उन्होंने कहा, 'हमने रखरखाव और तलाक का दावा किया है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप हैं पर मैं इसके बारे में नहीं बताऊंगा क्योंकि मैं गोपनीयता बनाए रखना चाहता हूं। ' सूत्रों के मुताबिक नवाजुद्दीन सिद्दीकी का परिवार मुजफ्फरनगर में 14 दिन के क्वाॅरंटीन में है।
मुरादाबाद । फिल्म एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी ने उन्हें तलाक का नोटिस भेजा है और उनसे मेंटिनेंस मांगा है। आलिया सिद्दीकी के वकील अभय सहाय ने एएनआई को कहा, 'व्हाट्सएप और ईमेल पर सात मई को नोटिस भेजा गया था। कोरोना वायरस की वजह से वर्तमान में सभी डाक सेवाएं बंद हैं। मेरे क्लाइंट ने भी तेरह मई को फिर से नोटिस भेजा था लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ' उन्होंने कहा, 'हमने अभिनेता को पंद्रह दिनों का समय दिया है। अगर वो वह जवाब नहीं देते हैं तो कोर्ट खुलने पर हम जब भी अदालत में याचिका दायर करेंगे। ' उन्होंने कहा, 'हमने रखरखाव और तलाक का दावा किया है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप हैं पर मैं इसके बारे में नहीं बताऊंगा क्योंकि मैं गोपनीयता बनाए रखना चाहता हूं। ' सूत्रों के मुताबिक नवाजुद्दीन सिद्दीकी का परिवार मुजफ्फरनगर में चौदह दिन के क्वाॅरंटीन में है।
दिल्ली में दो माह से जारी किसान आंदोलन 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा में बदल गया। अब मामले में एक्शन जोर पर है। मामले में एक्शन की शुरुआत हो गई है। दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय ने सख्त हिदायत दी है कि जिन किसान नेताओं पर मुकदमा दर्ज है, उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होगा। उनके पासपोर्ट भी जब्त होंगे। बता दें कि किसी आरोपी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया जाता है ताकि उसे विदेश यात्रा करने से रोका जा सके। दिल्ली पुलिस ने 20 आरोपी किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा- मंगलवार को किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैला हुआ है। अधिकारी ने कहा कि शाह दिल्ली में स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और बुधवार देर रात और फिर गुरुवार को बैठकें आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह आरोपी किसान नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे। गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव के बाद पुलिस का कहना है कि किसान नेताओं ने हमें धोखा दिया, हालांकि किसान नेता कह रहे हैं कि पुलिस ने रूट को लेकर कंफ्यूजन पैदा किया। साथ ही, किसानों ने भी बवाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली में किसान परेड के दौरान उपद्रवियों द्वारा की गई हिंसा के बाद आंदोलनों को खत्म किया जाने लगा है। दो किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे आंदोलन को वापस लेने का ऐलान किया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने गाजीपुर और नोएडा बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन को वापस ले लिया। इसके साथ भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर गंभीर आरोप भी लगाए। किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने कहा कि हम लोगों को पिटवाने के लिए यहां नहीं आए हैं। देश को हम बदनाम नहीं करना चाहते हैं। वीएम सिंह ने कहा कि राकेश टिकैत ने एक भी मीटिंग में गन्ना किसानों की मांग नहीं उठाई।
दिल्ली में दो माह से जारी किसान आंदोलन छब्बीस जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा में बदल गया। अब मामले में एक्शन जोर पर है। मामले में एक्शन की शुरुआत हो गई है। दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय ने सख्त हिदायत दी है कि जिन किसान नेताओं पर मुकदमा दर्ज है, उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होगा। उनके पासपोर्ट भी जब्त होंगे। बता दें कि किसी आरोपी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया जाता है ताकि उसे विदेश यात्रा करने से रोका जा सके। दिल्ली पुलिस ने बीस आरोपी किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा- मंगलवार को किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैला हुआ है। अधिकारी ने कहा कि शाह दिल्ली में स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और बुधवार देर रात और फिर गुरुवार को बैठकें आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह आरोपी किसान नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे। गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव के बाद पुलिस का कहना है कि किसान नेताओं ने हमें धोखा दिया, हालांकि किसान नेता कह रहे हैं कि पुलिस ने रूट को लेकर कंफ्यूजन पैदा किया। साथ ही, किसानों ने भी बवाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली में किसान परेड के दौरान उपद्रवियों द्वारा की गई हिंसा के बाद आंदोलनों को खत्म किया जाने लगा है। दो किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे आंदोलन को वापस लेने का ऐलान किया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन ने गाजीपुर और नोएडा बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन को वापस ले लिया। इसके साथ भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर गंभीर आरोप भी लगाए। किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने कहा कि हम लोगों को पिटवाने के लिए यहां नहीं आए हैं। देश को हम बदनाम नहीं करना चाहते हैं। वीएम सिंह ने कहा कि राकेश टिकैत ने एक भी मीटिंग में गन्ना किसानों की मांग नहीं उठाई।
इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में बतौर डिफेंडिंग चैंपियन उतरी मुंबई इंडियन की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। लगातार हार के बाद अब टीम जीत की पटरी पर लौटती नजर आ रही है। पिछले तीन मुकाबले जीत मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने अपने प्लेऑफ की उम्मीदें बनाए रखी है। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ रोहित में एक खास रिकॉर्ड बनाने वाले हैं। आईपीएल की सबसे सफल टीम मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा आज बतौर कप्तान अपना सौंवा टी-20 मैच खेलने जा रहे हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर उतरने के साथ ही वह महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली के बाद 100 टी-20 मैच में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। रोहित शर्मा ने अब तक आईपीएल में कुल 85 मैचों में टीम की कप्तानी की है। चैंपियंस लीग 20-20 के 5 मैचों में रोहित मुंबई की कमान संभाल चुके हैं। वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय टीम की तरफ से 9 मुकाबलों में उनको कप्तानी करने का मौका मिला है। रोहित ने अपनी कप्तानी में मुंबई को तीन आईपीएल का खिताब जिताया है। साल 2013 में उनकी कप्तानी में ही टीम ने चैंपियंस लीग 20-20 का कप भी अपने नाम किया था। टी-20 में रोहित शर्मा बतौर कप्तान अपना 100वां मैच खेलेने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी होंगे। रोहित से पहले महेन्द्र सिंह धोनी, गौतम गंभीर और विराट कोहली ये उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में बतौर डिफेंडिंग चैंपियन उतरी मुंबई इंडियन की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। लगातार हार के बाद अब टीम जीत की पटरी पर लौटती नजर आ रही है। पिछले तीन मुकाबले जीत मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने अपने प्लेऑफ की उम्मीदें बनाए रखी है। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ रोहित में एक खास रिकॉर्ड बनाने वाले हैं। आईपीएल की सबसे सफल टीम मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा आज बतौर कप्तान अपना सौंवा टी-बीस मैच खेलने जा रहे हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर उतरने के साथ ही वह महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली के बाद एक सौ टी-बीस मैच में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। रोहित शर्मा ने अब तक आईपीएल में कुल पचासी मैचों में टीम की कप्तानी की है। चैंपियंस लीग बीस-बीस के पाँच मैचों में रोहित मुंबई की कमान संभाल चुके हैं। वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय टीम की तरफ से नौ मुकाबलों में उनको कप्तानी करने का मौका मिला है। रोहित ने अपनी कप्तानी में मुंबई को तीन आईपीएल का खिताब जिताया है। साल दो हज़ार तेरह में उनकी कप्तानी में ही टीम ने चैंपियंस लीग बीस-बीस का कप भी अपने नाम किया था। टी-बीस में रोहित शर्मा बतौर कप्तान अपना एक सौवां मैच खेलेने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी होंगे। रोहित से पहले महेन्द्र सिंह धोनी, गौतम गंभीर और विराट कोहली ये उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को हुए छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के परिणाम में देरी करने पर आक्रोशित छात्रों ने करीब आठ बजे रात में पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस और पीएसी के जवानों ने सड़क पर लाठियां भांजकर छात्रों को खदेड़ा। करीब एक घंटे से अधिक समय तक छात्र अंधेरे का फायदा उठाकर विभिन्न गलियों से पुलिस और पीएसी पर पथराव करते रहे। पथराव में एक यात्री बस का शीशा टूट गया और सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। छात्रों और पुलिस के बीच बवाल की सूचना प्रसारित होने के बाद जिले के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। परिणाम की घोषणा होने तक पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक और सीओ मौके पर डटे रहे। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को चार बजे शुरू हुई मतगणना के करीब चार घंटे बाद तक रिजल्ट घोषित नहीं किया गया। जीत-हार की कयासबाजी के बीच रात आठ बजे तक जीत की घोषणा नहीं हुई। इससे आक्रोशित होकर कुछ उद्वेलित छात्रों ने सुरक्षा में तैनात पीएसी और पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया। गलियों में छिपकर पथराव कर रहे छात्रों को पुलिस और पीएसी ने खदेड़ा, लेकिन जैसे ही पीएसी और पुलिस वहां से हटती छात्र फिर पहुंचकर पथराव शुरू कर देते। करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चले इस गुरिल्ला युद्ध के दौरान पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शुक्ला, अपर पुलिस अधीक्षक उमेश चंद्र श्रीवास्तव, सीओ ज्ञानपुर सुखसागर शुक्ला, सीओ औराई श्रीकांत प्रजापति ज्ञानपुर नगर का चक्रमण करते रहे। किसी अनहोनी को लेकर लगातार पुलिस चौकस रही। छात्रों ने एक बस का शीशा तोड़ दिया।
ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को हुए छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के परिणाम में देरी करने पर आक्रोशित छात्रों ने करीब आठ बजे रात में पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस और पीएसी के जवानों ने सड़क पर लाठियां भांजकर छात्रों को खदेड़ा। करीब एक घंटे से अधिक समय तक छात्र अंधेरे का फायदा उठाकर विभिन्न गलियों से पुलिस और पीएसी पर पथराव करते रहे। पथराव में एक यात्री बस का शीशा टूट गया और सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। छात्रों और पुलिस के बीच बवाल की सूचना प्रसारित होने के बाद जिले के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। परिणाम की घोषणा होने तक पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक और सीओ मौके पर डटे रहे। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को चार बजे शुरू हुई मतगणना के करीब चार घंटे बाद तक रिजल्ट घोषित नहीं किया गया। जीत-हार की कयासबाजी के बीच रात आठ बजे तक जीत की घोषणा नहीं हुई। इससे आक्रोशित होकर कुछ उद्वेलित छात्रों ने सुरक्षा में तैनात पीएसी और पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया। गलियों में छिपकर पथराव कर रहे छात्रों को पुलिस और पीएसी ने खदेड़ा, लेकिन जैसे ही पीएसी और पुलिस वहां से हटती छात्र फिर पहुंचकर पथराव शुरू कर देते। करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चले इस गुरिल्ला युद्ध के दौरान पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शुक्ला, अपर पुलिस अधीक्षक उमेश चंद्र श्रीवास्तव, सीओ ज्ञानपुर सुखसागर शुक्ला, सीओ औराई श्रीकांत प्रजापति ज्ञानपुर नगर का चक्रमण करते रहे। किसी अनहोनी को लेकर लगातार पुलिस चौकस रही। छात्रों ने एक बस का शीशा तोड़ दिया।
जिला कांगड़ा के उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने आज धर्मशाला के मिनी सचिवालय में कोविड-19 होम आइसोलेशन किट एवं जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर उपस्थित पत्रकारों से बातचीत के दौरान उपायुक्त ने कहा कि कोविड-19 बीमारी से जागरूक करने के लिए नेशनल हाईवे पर होर्डिंग लगाए जाएंगे और 31 अक्टूबर तक हर गांव में इस जागरूकता अभियान को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। डीसी ने कहा कि आने वाले समय में जिला कांगड़ा में लोगों की टेस्टिंग पर फोकस रहेगा। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों और विभिन्न होटलों में काम कर रहे स्टाफ की टेस्टिंग का शेड्यूल बनाया जा चुका है। उन्होंने कांगड़ा के लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 के लक्षण आने पर लोग घबराए नहीं लक्षणों के आते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें ताकि समय रहते मरीजों का सही इलाज किया जा सके।
जिला कांगड़ा के उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने आज धर्मशाला के मिनी सचिवालय में कोविड-उन्नीस होम आइसोलेशन किट एवं जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर उपस्थित पत्रकारों से बातचीत के दौरान उपायुक्त ने कहा कि कोविड-उन्नीस बीमारी से जागरूक करने के लिए नेशनल हाईवे पर होर्डिंग लगाए जाएंगे और इकतीस अक्टूबर तक हर गांव में इस जागरूकता अभियान को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। डीसी ने कहा कि आने वाले समय में जिला कांगड़ा में लोगों की टेस्टिंग पर फोकस रहेगा। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों और विभिन्न होटलों में काम कर रहे स्टाफ की टेस्टिंग का शेड्यूल बनाया जा चुका है। उन्होंने कांगड़ा के लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोविड-उन्नीस के लक्षण आने पर लोग घबराए नहीं लक्षणों के आते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें ताकि समय रहते मरीजों का सही इलाज किया जा सके।
WWE Smackdown Highlights-Big E Injury: फ्राइडे नाइट स्मैकडाउन (Friday Night Smackdown) के आज रात के एपिसोड में रिज हॉलैंड और शेमस (Ridge Holland and Sheamus) ने कोफी किंग्सटन और बिग ई ( Kofi Kingston and Big E) का सामना किया था। लेकिन इस मैच के दौरान बिग ई आज रात बुरी तरह से घायल हो गए और उनकी गर्दन में चोट लग गई। जिसके बाद उन्हें तुरंत ही मेडिकल स्टाफ रिंग साइड पर आ गया और बिग ई को स्ट्रेचर पर बाहर ले गया। बिग ई को यह चोट उस समय लगी जब इस मैच के दौरान रिज हॉलैंड ने बिग को रिंग के बाहर एक बेली-टू-बेली सुपलेक्स लगाया था। लेकिन इस सुपलेक्स बाद बिग ई अपने सिर के बल जमीन पर आकर गिरे। जिसके बाद मेडिक्स तुरंत आ गए और उन्होंने बिग ई की तरफ अपना रुख किया जबकि रिंग के अंदर शेमस ने किंग्सटन को पिन करके इस मैच को समाप्त कर दिया। बिग ई की इस चोट का एक वीडियो एक डब्ल्यूडब्ल्यूई की फैंस के द्वारा भी शेयर किया गया है। जहां मेडिकल स्टाफ के द्वारा बिग ई को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा जा सकता है। वहीं इसके अलावा बिग ई ने भी अपने फैंस के लिए एक सेल्फी वीडियो जारी करते हुए संदेश दिया है। जिसमें उन्होंने घोषणा की है कि हॉलैंड के साथ स्पॉट के दौरान उनकी गर्दन में यह चोट आई है। डब्ल्यूडब्ल्यूई की तरफ से बिग ई की इस चोट की गंभीरता के बारे में अभी कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन जैसे ही डब्ल्यूडब्ल्यूई की तरफ से बिग ई की चोट के बारे में कोई अन्य जानकारी दी जाती है तो हम आपको यहां अपडेट कर देंगे।
WWE Smackdown Highlights-Big E Injury: फ्राइडे नाइट स्मैकडाउन के आज रात के एपिसोड में रिज हॉलैंड और शेमस ने कोफी किंग्सटन और बिग ई का सामना किया था। लेकिन इस मैच के दौरान बिग ई आज रात बुरी तरह से घायल हो गए और उनकी गर्दन में चोट लग गई। जिसके बाद उन्हें तुरंत ही मेडिकल स्टाफ रिंग साइड पर आ गया और बिग ई को स्ट्रेचर पर बाहर ले गया। बिग ई को यह चोट उस समय लगी जब इस मैच के दौरान रिज हॉलैंड ने बिग को रिंग के बाहर एक बेली-टू-बेली सुपलेक्स लगाया था। लेकिन इस सुपलेक्स बाद बिग ई अपने सिर के बल जमीन पर आकर गिरे। जिसके बाद मेडिक्स तुरंत आ गए और उन्होंने बिग ई की तरफ अपना रुख किया जबकि रिंग के अंदर शेमस ने किंग्सटन को पिन करके इस मैच को समाप्त कर दिया। बिग ई की इस चोट का एक वीडियो एक डब्ल्यूडब्ल्यूई की फैंस के द्वारा भी शेयर किया गया है। जहां मेडिकल स्टाफ के द्वारा बिग ई को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा जा सकता है। वहीं इसके अलावा बिग ई ने भी अपने फैंस के लिए एक सेल्फी वीडियो जारी करते हुए संदेश दिया है। जिसमें उन्होंने घोषणा की है कि हॉलैंड के साथ स्पॉट के दौरान उनकी गर्दन में यह चोट आई है। डब्ल्यूडब्ल्यूई की तरफ से बिग ई की इस चोट की गंभीरता के बारे में अभी कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन जैसे ही डब्ल्यूडब्ल्यूई की तरफ से बिग ई की चोट के बारे में कोई अन्य जानकारी दी जाती है तो हम आपको यहां अपडेट कर देंगे।
'मिस्टर खिलाड़ी' अक्षय कुमार की अगली फिल्म 'पैडमैन' रिलीज के लिए पूरी तैयार है। ट्विंकल खन्ना के प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म 'पैडमैन" अगले साल 26 जनवरी को रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय के अपोजिट राधिका आप्टे और सोनम कपूर नजर आने वाली हैं। अक्षय कुमार ने बुधवार को फिल्म से जुड़े दो फोटोज सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट किए। जिसके बाद देखते ही देखते पैडमैन ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। पहली फोटो में अक्षय की पत्नी का किरदार निभा रहीं राधिका आप्टे नजर आ रही है। ब्लैक एंड वाइट इस तस्वीर में दोनों फब रहे हैं। दूसरी तस्वीर अक्षय सोनम कपूर के साथ दिख रिक्शे की बैलगाड़ी की सवारी करते बेहद खुश दिखाई पड़ रहे हैं। हालांकि ये फोटो कलरफुल है। इन दोनों ही फोटो में अक्षय दो अलग लुक में दिख रहे हैं. राधिका आप्टे के साथ जहां वह तेल लगे बालों के साथ देसी अवतार में दिख रहे हैं, जबकि सोनम के साथ वह शर्ट-पेंट पहने शहरी लुक में जंच रहे हैं। अक्षय ने अपनी यह फोटो पोस्ट करते हुए कैप्शन दिया, 'वह कारण, जिसके चलते वह पैडमैन बना. . जानिए 26 जनवरी, 2018 को'। बता दें कि फिल्म का डायरेक्शन आर बाल्कि कर रहे हैं तो प्रोडक्शन ट्विंकल खन्ना। उन्होंने भी ट्वीट कर इन तस्वीरों के साथ अपनी भी एक फोटो पोस्ट की। महावारी जैसी विषय पर बन रही फिल्म में अक्षय 'पैडमैन' अरुणाचलम मुरुगनंथा नाम के शख्स का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जिसमें महिलाओं की भलाई के लिए सस्ते दाम पर सैनिटरी नैपकिन बनाने की कहानी रूपहले पर्दे पर दिखाई जाएगी।
'मिस्टर खिलाड़ी' अक्षय कुमार की अगली फिल्म 'पैडमैन' रिलीज के लिए पूरी तैयार है। ट्विंकल खन्ना के प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म 'पैडमैन" अगले साल छब्बीस जनवरी को रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय के अपोजिट राधिका आप्टे और सोनम कपूर नजर आने वाली हैं। अक्षय कुमार ने बुधवार को फिल्म से जुड़े दो फोटोज सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट किए। जिसके बाद देखते ही देखते पैडमैन ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। पहली फोटो में अक्षय की पत्नी का किरदार निभा रहीं राधिका आप्टे नजर आ रही है। ब्लैक एंड वाइट इस तस्वीर में दोनों फब रहे हैं। दूसरी तस्वीर अक्षय सोनम कपूर के साथ दिख रिक्शे की बैलगाड़ी की सवारी करते बेहद खुश दिखाई पड़ रहे हैं। हालांकि ये फोटो कलरफुल है। इन दोनों ही फोटो में अक्षय दो अलग लुक में दिख रहे हैं. राधिका आप्टे के साथ जहां वह तेल लगे बालों के साथ देसी अवतार में दिख रहे हैं, जबकि सोनम के साथ वह शर्ट-पेंट पहने शहरी लुक में जंच रहे हैं। अक्षय ने अपनी यह फोटो पोस्ट करते हुए कैप्शन दिया, 'वह कारण, जिसके चलते वह पैडमैन बना. . जानिए छब्बीस जनवरी, दो हज़ार अट्ठारह को'। बता दें कि फिल्म का डायरेक्शन आर बाल्कि कर रहे हैं तो प्रोडक्शन ट्विंकल खन्ना। उन्होंने भी ट्वीट कर इन तस्वीरों के साथ अपनी भी एक फोटो पोस्ट की। महावारी जैसी विषय पर बन रही फिल्म में अक्षय 'पैडमैन' अरुणाचलम मुरुगनंथा नाम के शख्स का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जिसमें महिलाओं की भलाई के लिए सस्ते दाम पर सैनिटरी नैपकिन बनाने की कहानी रूपहले पर्दे पर दिखाई जाएगी।
चित्रकूट जनपद में कोरोना संकटकाल में ग़रीबों के मददगार बने परहित सेवा संस्थान को बाँदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में कोरोना योद्धा का सम्मान दिया गया है। प्रबंधक ने ग्रहण किया कोरोना योद्धा सम्मान कोरोना संकटकाल में जब मानव जीवन एक बड़ी वैश्विक महामारी से जूझ रहा था। उस समय भी कुछ ऐसे देवदूत भी थे। जिन्होंने असहायों और ग़रीबों की मदद की। चित्रकूट के एनजीओ परहित सेवा संस्थान ने चित्रकूट के आदिवासी इलाको सहित तक़रीबन 20 हज़ार परिवारों को कोरोना संकटकाल के दौरान राशन किट और अन्य स्वास्थ्य सामग्रियाँ बाँटी थी। इसके साथ ही इसी दौरान 10 आदिवासी बहनों की शादी में भी सहयोग किया । इन्ही कार्यों को देखते हुए बाँदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुए कार्यक्रम में परहित सेवा संस्थान को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया ।
चित्रकूट जनपद में कोरोना संकटकाल में ग़रीबों के मददगार बने परहित सेवा संस्थान को बाँदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में कोरोना योद्धा का सम्मान दिया गया है। प्रबंधक ने ग्रहण किया कोरोना योद्धा सम्मान कोरोना संकटकाल में जब मानव जीवन एक बड़ी वैश्विक महामारी से जूझ रहा था। उस समय भी कुछ ऐसे देवदूत भी थे। जिन्होंने असहायों और ग़रीबों की मदद की। चित्रकूट के एनजीओ परहित सेवा संस्थान ने चित्रकूट के आदिवासी इलाको सहित तक़रीबन बीस हज़ार परिवारों को कोरोना संकटकाल के दौरान राशन किट और अन्य स्वास्थ्य सामग्रियाँ बाँटी थी। इसके साथ ही इसी दौरान दस आदिवासी बहनों की शादी में भी सहयोग किया । इन्ही कार्यों को देखते हुए बाँदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुए कार्यक्रम में परहित सेवा संस्थान को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया ।
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लेकर तीखा बयान देने वालों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम भी जुड़ गया है. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सवाल दागा कि क्या हमारा देश धर्मशाला हो गया है? उन्होंने कहा, 'जो बाहरी लोग यहां आकर बस गए हैं. ऐसे लोगों को खदेड़ा जाना चाहिए.' आमतौर पर रमन सिंह किसी भी मामले में तल्ख टिप्पणियों से बचते हैं,लेकिन दुर्ग में उन्होंने कहा कि किसी घर में चार लोग रहते हैं, बाहर से दो लोग आ जाएं और बोलें कि यहीं रहेंगे, यहीं खाएंगे, यहीं सोएंगे और खाने में हिस्सा भी मांगेंगे तो क्या उन्हें दिया जाएगा. NRC को लेकर पूरे देश में अच्छी खासी बहस छिड़ गई है. रमन सिंह भी NRC के पक्ष में मजबूती से साथ आ खड़े हुए है. उन्होंने कहा कि जो लोग बाहर से आए हैं वो अपनी नागरिकता प्रमाणित करें, वरना अपने देश वापस चले जाएं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही NRC कमेटी गठित की गई है. कांग्रेस ने भी इसके गठन में अपनी सहमति दी थी, लेकिन अब समझ से परे है कि कांग्रेस इस मामले को ट्विस्ट कर रही है. NRC के विरोध को लेकर TMC और उसकी नेता ममता बनर्जी अपने कड़े तेवर दिखा रही हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी अपना पक्ष रखकर इस मामले में मैदान में कूद पड़े हैं. मोबाइल तिहार में हिस्सा लेने दुर्ग पहुंचे मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पहले तो अपनी सरकार की 15 साल की उपलब्धियां गिनाई. फिर लोगों को मोबाइल बांटा. अपने भाषण में रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की जनता को बताया कि किस तरह से उनकी सरकार राज्य को विकास के पथ पर लेकर आई है. उन्होंने प्रदेश में खुशहाली का दावा किया और यह कटाक्ष भी किया कि छत्तीसगढ़ राज्य घुसपैठियों से मुक्त है. मंच से उतारते ही मुख्यमंत्री रमन सिंह ने TMC और ममता बनर्जी पर निशाना साधा. अपने बयान में रमन सिंह ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने खुलेतौर पर कहा कि जो बाहर से आए हैं उन्हें खदेड़ा जाना चाहिए. रमन सिंह ने असम में घुसपैठियों को खदेड़ने को लेकर चले आठ साल के आंदोलन का जिक्र भी किया. असम में NRC का दूसरा ड्राफ्ट जारी होने के बाद से पूरा मामला गरमाया हुआ है. अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान के निर्देश के बाद ही मुख्यमंत्री रमन सिंह ने NRC को लेकर तल्ख टिप्पणी की है.
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स को लेकर तीखा बयान देने वालों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम भी जुड़ गया है. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सवाल दागा कि क्या हमारा देश धर्मशाला हो गया है? उन्होंने कहा, 'जो बाहरी लोग यहां आकर बस गए हैं. ऐसे लोगों को खदेड़ा जाना चाहिए.' आमतौर पर रमन सिंह किसी भी मामले में तल्ख टिप्पणियों से बचते हैं,लेकिन दुर्ग में उन्होंने कहा कि किसी घर में चार लोग रहते हैं, बाहर से दो लोग आ जाएं और बोलें कि यहीं रहेंगे, यहीं खाएंगे, यहीं सोएंगे और खाने में हिस्सा भी मांगेंगे तो क्या उन्हें दिया जाएगा. NRC को लेकर पूरे देश में अच्छी खासी बहस छिड़ गई है. रमन सिंह भी NRC के पक्ष में मजबूती से साथ आ खड़े हुए है. उन्होंने कहा कि जो लोग बाहर से आए हैं वो अपनी नागरिकता प्रमाणित करें, वरना अपने देश वापस चले जाएं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही NRC कमेटी गठित की गई है. कांग्रेस ने भी इसके गठन में अपनी सहमति दी थी, लेकिन अब समझ से परे है कि कांग्रेस इस मामले को ट्विस्ट कर रही है. NRC के विरोध को लेकर TMC और उसकी नेता ममता बनर्जी अपने कड़े तेवर दिखा रही हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी अपना पक्ष रखकर इस मामले में मैदान में कूद पड़े हैं. मोबाइल तिहार में हिस्सा लेने दुर्ग पहुंचे मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पहले तो अपनी सरकार की पंद्रह साल की उपलब्धियां गिनाई. फिर लोगों को मोबाइल बांटा. अपने भाषण में रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की जनता को बताया कि किस तरह से उनकी सरकार राज्य को विकास के पथ पर लेकर आई है. उन्होंने प्रदेश में खुशहाली का दावा किया और यह कटाक्ष भी किया कि छत्तीसगढ़ राज्य घुसपैठियों से मुक्त है. मंच से उतारते ही मुख्यमंत्री रमन सिंह ने TMC और ममता बनर्जी पर निशाना साधा. अपने बयान में रमन सिंह ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने खुलेतौर पर कहा कि जो बाहर से आए हैं उन्हें खदेड़ा जाना चाहिए. रमन सिंह ने असम में घुसपैठियों को खदेड़ने को लेकर चले आठ साल के आंदोलन का जिक्र भी किया. असम में NRC का दूसरा ड्राफ्ट जारी होने के बाद से पूरा मामला गरमाया हुआ है. अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान के निर्देश के बाद ही मुख्यमंत्री रमन सिंह ने NRC को लेकर तल्ख टिप्पणी की है.
को आसान बनाने के लिए मल की गतिविधियों को बढ़ाकर काम करता है। अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित इस दवा को ठीक से लें। लूज़ ओरल सोल्यूशन शुरू करने से पहले, अगर आप गर्भवती हैं/स्तनपान करा रही हैं तो अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें। ।Lactulose(10.0 ग्राम)/15ml) एमबीबीएस, एमडी (फार्माकोलॉजी) एमबीबीएस, एमडी (फार्माकोलॉजी)
को आसान बनाने के लिए मल की गतिविधियों को बढ़ाकर काम करता है। अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित इस दवा को ठीक से लें। लूज़ ओरल सोल्यूशन शुरू करने से पहले, अगर आप गर्भवती हैं/स्तनपान करा रही हैं तो अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें। ।Lactulose/पंद्रह मिलीलीटर) एमबीबीएस, एमडी एमबीबीएस, एमडी
पुलिस की कार्रवाई की जद में एफसीआई गोदाम के सरकारी कर्मचारी भी आ रहे हैं। आईकार्ड दिखाकर गोदाम तक जाने वाले कर्मचारियों से पुलिस ने अभद्रता करते हुए चालान काट दिए। ऐसे में एफसीआई कर्मियों में रोष बढ़ गया है। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि यदि उन्हें पास उपलब्ध नहीं कराए गए तो गोदाम बंद कर देंगे। आला अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। परतापुर में एफसीआई गोदाम के इंचार्ज विकास शर्मा हैं। विकास शर्मा बुधवार को अपने वाहन से गोदाम जा रहे थे। चेकिंग के दौरान उन्हें पुलिस ने दिल्ली रोड पर रोक लिया। पुलिस टीम को विकास शर्मा ने आईकार्ड दिखाया और बताया कि वह गोदाम जा रहे हैं। बताया कि केंद्र सरकार का निर्देश है कि खाद्य सामग्री और एफसीआई गोदाम लगातार खुलेंगे। बावजूद इसके पुलिसकर्मी नहीं माने और विकास शर्मा का चालान कर दिया। पुलिस ने कह दिया कि बिना वाहन पास आगे जाने नहीं दिया जाएगा। विकास शर्मा जैसे तैसे गोदाम पहुंचे तो पता चला कि दो अन्य कर्मचारियों के भी चालान पुलिस ने किए हैं। कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि उन्हें पास जारी नहीं किए गए तो काम रोक दिया जाएगा। एफसीआई गोदाम से राशन लेकर एक ट्रक परीक्षितगढ़ क्षेत्र गया था। राशन उतारने के बाद ट्रक वापस आ रहा था। अब्दुल्लापुर क्षेत्र में भावनपुर पुलिस ने ट्रक रोक लिया। चालक ने कागजात दिखाया। बावजूद इसके पुलिस ने चालक से गाली गलौज कर दी। चालक की ओर से आईजी मेरठ प्रवीण कुमार का सीयूजी नंबर कई बार मिलाया गया, लेकिन कॉल नहीं उठी। इसके बाद एफसीआई से कॉल कर एसओ भावनपुर संजय कुमार से बात की गई। बाद में सीओ के हस्तक्षेप के बाद ट्रक को छोड़ा गया।
पुलिस की कार्रवाई की जद में एफसीआई गोदाम के सरकारी कर्मचारी भी आ रहे हैं। आईकार्ड दिखाकर गोदाम तक जाने वाले कर्मचारियों से पुलिस ने अभद्रता करते हुए चालान काट दिए। ऐसे में एफसीआई कर्मियों में रोष बढ़ गया है। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि यदि उन्हें पास उपलब्ध नहीं कराए गए तो गोदाम बंद कर देंगे। आला अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। परतापुर में एफसीआई गोदाम के इंचार्ज विकास शर्मा हैं। विकास शर्मा बुधवार को अपने वाहन से गोदाम जा रहे थे। चेकिंग के दौरान उन्हें पुलिस ने दिल्ली रोड पर रोक लिया। पुलिस टीम को विकास शर्मा ने आईकार्ड दिखाया और बताया कि वह गोदाम जा रहे हैं। बताया कि केंद्र सरकार का निर्देश है कि खाद्य सामग्री और एफसीआई गोदाम लगातार खुलेंगे। बावजूद इसके पुलिसकर्मी नहीं माने और विकास शर्मा का चालान कर दिया। पुलिस ने कह दिया कि बिना वाहन पास आगे जाने नहीं दिया जाएगा। विकास शर्मा जैसे तैसे गोदाम पहुंचे तो पता चला कि दो अन्य कर्मचारियों के भी चालान पुलिस ने किए हैं। कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि उन्हें पास जारी नहीं किए गए तो काम रोक दिया जाएगा। एफसीआई गोदाम से राशन लेकर एक ट्रक परीक्षितगढ़ क्षेत्र गया था। राशन उतारने के बाद ट्रक वापस आ रहा था। अब्दुल्लापुर क्षेत्र में भावनपुर पुलिस ने ट्रक रोक लिया। चालक ने कागजात दिखाया। बावजूद इसके पुलिस ने चालक से गाली गलौज कर दी। चालक की ओर से आईजी मेरठ प्रवीण कुमार का सीयूजी नंबर कई बार मिलाया गया, लेकिन कॉल नहीं उठी। इसके बाद एफसीआई से कॉल कर एसओ भावनपुर संजय कुमार से बात की गई। बाद में सीओ के हस्तक्षेप के बाद ट्रक को छोड़ा गया।
Priyanka Chahar Choudhary उडारियां एक्ट्रेस प्रियंका चाहर चौधरी बिग बॉस 16 खत्म होने के बाद सुर्खियों में हैं। एक्ट्रेस के पास एक से एक शो के लिए ऑफर आ रहे हैं। इस बीच उन्होंने यह बताया है कि वह किसे डेट करना चाहती हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। बिग बॉस 16 की फेमस कंटेस्टेंट रही प्रियंका चाहर चौधरी भले ही नहीं जीत पाईं, लेकिन ऑडियंस का दिल उन्होंने पूरी तरह से जीत लिया। इस रियलिटी शो उनके गेम प्लान के अलावा अंकित गुप्ता के साथ केमिस्ट्री काफी ज्यादा पसंद की गई। एक बार फिर फैंस दोनों को साथ देखना चाहते हैं। एक ओर प्रियंका और अंकित के फैंस उन्हें साथ देखने की इच्छा रखते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रियंका चौधरी यह बताया है कि वह अंकित के अलावा किसे डेट करना चाहेंगी। फैंस को नाम सुनकर 440 वोल्ट का झटका लग सकता है। बिग बॉस रियलिटी शो में अंकित गुप्ता के साथ प्रियंका चौधरी की केमिस्ट्री काफी पसंद की गई थी। लेकिन शायद एक्ट्रेस ऐसा नहीं सोचतीं। इसलिए जब उनसे पूछा गया कि वह किसे डेट पर ले जाना चाहेंगी, तो उन्होंने अब्दु रोजिक का नाम लिया। इसकी वजह साफ है कि सभी की तरह अब्दु उन्हें भी क्यूट लगते हैं। अब्दु के अलावा उन्हें एमसी स्टैन (MC Stan) को भी डेट पर ले जाने में दिक्कत नहीं है। लॉक अप में नजर आएंगी प्रियंका? बिग बॉस 16 खत्म होने के बाद से प्रियंका चाहर चौधरी काफी ज्यादा डिमांड में हैं। ऐसी चर्चा है कि उन्हें 'लॉक अप 2' के लिए अप्रोच किया गया है। लेकिन प्रियंका ने इस शो के लिए हामी नहीं भरी है। बिग बॉस 16 में 135 दिन बिना मोबाइल और बाहरी दुनिया से कोई संपर्क न होने वाला बिताने के बाद एक्ट्रेस फिलहाल किसी और शो का हिस्सा बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाती दिख रही हैं।
Priyanka Chahar Choudhary उडारियां एक्ट्रेस प्रियंका चाहर चौधरी बिग बॉस सोलह खत्म होने के बाद सुर्खियों में हैं। एक्ट्रेस के पास एक से एक शो के लिए ऑफर आ रहे हैं। इस बीच उन्होंने यह बताया है कि वह किसे डेट करना चाहती हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। बिग बॉस सोलह की फेमस कंटेस्टेंट रही प्रियंका चाहर चौधरी भले ही नहीं जीत पाईं, लेकिन ऑडियंस का दिल उन्होंने पूरी तरह से जीत लिया। इस रियलिटी शो उनके गेम प्लान के अलावा अंकित गुप्ता के साथ केमिस्ट्री काफी ज्यादा पसंद की गई। एक बार फिर फैंस दोनों को साथ देखना चाहते हैं। एक ओर प्रियंका और अंकित के फैंस उन्हें साथ देखने की इच्छा रखते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रियंका चौधरी यह बताया है कि वह अंकित के अलावा किसे डेट करना चाहेंगी। फैंस को नाम सुनकर चार सौ चालीस वोल्ट का झटका लग सकता है। बिग बॉस रियलिटी शो में अंकित गुप्ता के साथ प्रियंका चौधरी की केमिस्ट्री काफी पसंद की गई थी। लेकिन शायद एक्ट्रेस ऐसा नहीं सोचतीं। इसलिए जब उनसे पूछा गया कि वह किसे डेट पर ले जाना चाहेंगी, तो उन्होंने अब्दु रोजिक का नाम लिया। इसकी वजह साफ है कि सभी की तरह अब्दु उन्हें भी क्यूट लगते हैं। अब्दु के अलावा उन्हें एमसी स्टैन को भी डेट पर ले जाने में दिक्कत नहीं है। लॉक अप में नजर आएंगी प्रियंका? बिग बॉस सोलह खत्म होने के बाद से प्रियंका चाहर चौधरी काफी ज्यादा डिमांड में हैं। ऐसी चर्चा है कि उन्हें 'लॉक अप दो' के लिए अप्रोच किया गया है। लेकिन प्रियंका ने इस शो के लिए हामी नहीं भरी है। बिग बॉस सोलह में एक सौ पैंतीस दिन बिना मोबाइल और बाहरी दुनिया से कोई संपर्क न होने वाला बिताने के बाद एक्ट्रेस फिलहाल किसी और शो का हिस्सा बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाती दिख रही हैं।
कुछ हासिल करने के लिए लोग किसी भी हद से गुजर जाते हैं। दुनिया हमेशा उन्हें ही याद रखती है, जो लीक से हटकर कुछ करते हैं। फ्रांस में एक शख्स ने ऐसा ही एक नया रिकॉर्ड बनाया है जिसे देखकर लोगों की रूह कांप उठेगी। इस शख्स का नाम जोनाथन वेरो है। इस शख्स का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है जिसमें वो खुद के शरीर में आग लगाकर दौड़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल, 39 वर्षीय इस फांसीसी फायरफाइटर ने बिना ऑक्सीजन के शरीर में आग लगाकर सबसे तेज 100 मीटर की दौड़ पूरी की। सोशल मीडिया पर अब उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को अब तक 1. 7 मिलियन लोग देख चुके हैं। इस वीडियो को देखने के बाद एक बार के लिए आपकी भी सांसे अटक जाएगी। इस वीडियो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर इस शख्स का वीडियो शेयर किया है। उनके मुताबिक जोनाथन वेरो ने बिना ऑक्सीजन के और प्रोटेक्टिव सूट पहनकर आग की लपटों को लेकर 272. 25 मीटर की दौड़ लगाई। इसी के साथ उन्होंने पुराना 204. 23 मीटर का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। इसके साथ ही जोनाथन ने सबसे तेज फुल बॉडी बर्न 100 मीटर स्प्रिंट का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। बता दें कि जोनाथन वेरो ने ऐसा मात्र 17 सेकंड में करके पिछले रिकॉर्ड जो 7. 58 सेकंड में पूरा किया था उसे पीछे छोड़ दिया है। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि जोनाथन के शरीर पर आग लगाई जाती है और जैसे ही वे दौड़ना शुरू करते हैं आग की लपटें उनके पूरे शरीर पर फैल जाती है। रिकॉर्ड तोड़ने के बाद जोनाथन हाथ लहराकर खुशी जाहिर करते हैं, जिसके बाद सुरक्षा से जुड़े लोग आकर आग की लपटों को बुझाते हैं। जोनाथन वेरो से पहले इंग्लैंड के कीथ मैल्कम 14 साल पहले ये रिकॉर्ड अपने नाम किया था। जोनाथन उनकी तुलना में तीन गुना तेज दौड़े हैं। जोनाथन सिर्फ फायरफाइटर ही नहीं, बल्कि एक पेशेवर स्टंटमैन भी हैं। इसके अलावा जोनाथन अपना समय आग बुझाने और फायर शो करने में बिताते हैं, जिसमें वे आग से करतब दिखाना, अपने पूरे शरीर को आग लगाना जैसे काम करते हैं।
कुछ हासिल करने के लिए लोग किसी भी हद से गुजर जाते हैं। दुनिया हमेशा उन्हें ही याद रखती है, जो लीक से हटकर कुछ करते हैं। फ्रांस में एक शख्स ने ऐसा ही एक नया रिकॉर्ड बनाया है जिसे देखकर लोगों की रूह कांप उठेगी। इस शख्स का नाम जोनाथन वेरो है। इस शख्स का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है जिसमें वो खुद के शरीर में आग लगाकर दौड़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल, उनतालीस वर्षीय इस फांसीसी फायरफाइटर ने बिना ऑक्सीजन के शरीर में आग लगाकर सबसे तेज एक सौ मीटर की दौड़ पूरी की। सोशल मीडिया पर अब उनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को अब तक एक. सात मिलियन लोग देख चुके हैं। इस वीडियो को देखने के बाद एक बार के लिए आपकी भी सांसे अटक जाएगी। इस वीडियो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर इस शख्स का वीडियो शेयर किया है। उनके मुताबिक जोनाथन वेरो ने बिना ऑक्सीजन के और प्रोटेक्टिव सूट पहनकर आग की लपटों को लेकर दो सौ बहत्तर. पच्चीस मीटर की दौड़ लगाई। इसी के साथ उन्होंने पुराना दो सौ चार. तेईस मीटर का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। इसके साथ ही जोनाथन ने सबसे तेज फुल बॉडी बर्न एक सौ मीटर स्प्रिंट का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। बता दें कि जोनाथन वेरो ने ऐसा मात्र सत्रह सेकंड में करके पिछले रिकॉर्ड जो सात. अट्ठावन सेकंड में पूरा किया था उसे पीछे छोड़ दिया है। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि जोनाथन के शरीर पर आग लगाई जाती है और जैसे ही वे दौड़ना शुरू करते हैं आग की लपटें उनके पूरे शरीर पर फैल जाती है। रिकॉर्ड तोड़ने के बाद जोनाथन हाथ लहराकर खुशी जाहिर करते हैं, जिसके बाद सुरक्षा से जुड़े लोग आकर आग की लपटों को बुझाते हैं। जोनाथन वेरो से पहले इंग्लैंड के कीथ मैल्कम चौदह साल पहले ये रिकॉर्ड अपने नाम किया था। जोनाथन उनकी तुलना में तीन गुना तेज दौड़े हैं। जोनाथन सिर्फ फायरफाइटर ही नहीं, बल्कि एक पेशेवर स्टंटमैन भी हैं। इसके अलावा जोनाथन अपना समय आग बुझाने और फायर शो करने में बिताते हैं, जिसमें वे आग से करतब दिखाना, अपने पूरे शरीर को आग लगाना जैसे काम करते हैं।
भारत से पहले करीब 61 देश इस समझौते के लिए राजी हो गए थे। माना जाता है कि विकसित देशों में ज्यादा ईंधन और कार्बन का उत्सर्जन होता है। इस समझौते के तहत पिछड़े देशों को भी ईंधन का उपयोग करने से रोका जा रहा है जिससे की कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में समझौते के तहत ये तय किया गया है कि विकसित देश जैसे अमेरिका और अन्य देश विकासशील और पिछड़े देशों को हर साल 100 बिलियन डॉलर भेजते रहें। इस रकम को वक्त और जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ये एक सुझाव के तौर पर है ऐसा करना आवश्यक नहीं है।
भारत से पहले करीब इकसठ देश इस समझौते के लिए राजी हो गए थे। माना जाता है कि विकसित देशों में ज्यादा ईंधन और कार्बन का उत्सर्जन होता है। इस समझौते के तहत पिछड़े देशों को भी ईंधन का उपयोग करने से रोका जा रहा है जिससे की कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में समझौते के तहत ये तय किया गया है कि विकसित देश जैसे अमेरिका और अन्य देश विकासशील और पिछड़े देशों को हर साल एक सौ बिलियन डॉलर भेजते रहें। इस रकम को वक्त और जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ये एक सुझाव के तौर पर है ऐसा करना आवश्यक नहीं है।
एसीएस जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड केमिस्ट्री पर प्रकाशित एक रिपोर्ट (Ref) के अनुसार, अंकुरित लहसुन को फेंके नहीं क्योंकि इसमें ताजा लहसुन की तुलना में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि पांच दिनों तक अंकुरित हुए लहसुन में रोजाना इस्तेमाल होने वाले लहसुन की तुलना में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यही वजह है कि अंकुरित लहसुन खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल, ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और कैंसर से लड़ने में भी मदद कर सकता है। चलिए जानते हैं अंकुरित लहसुन खाने से आपकी सेहत को और क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। अंकुरित लहसुन में एज़ीन की मात्रा ज्यादा होती है। यह ऐसा पदार्थ जो ब्लड क्लॉट बनने से रोकता है। इसमें नाइट्रेट्स भी होते हैं जोकि एक ऐसा रसायन है, जो धमनियों के फैलाव (या चौड़ा) बना सकता है जिससे ब्लड फ्लो में सुधार होता है। लहसुन खाने के फायदे (Health Benefits Of Eating Garlic) लहसुन का रस एंजाइम एक्टिविटी को बढ़ाने का काम करता है। यह धमनियों में फैट और गंदे पदार्थ को जमने से रोकता है जोकि दिल की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। नतीजतन, आपको दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम होती है। लहसुन की कली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और इसके नियमित सेवन न केवल झुर्रियों को रोका जा सकता है बल्कि यह त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। लहसुन के एंटीऑक्सीडेंट गुण समय से पहले आने वाले बुढ़ापे को रोकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं और अंकुरित लहसुन में इसकी मात्रा ज्यादा होती है। एंटीऑक्सिडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर कोशिकाओं को संक्रमित होने से बचाते हैं। लहसुन में फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं, जो कैंसर वाली कोशिकाओं को फैलने से रोकने का काम करते हैं। इसके एंटीऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स से रक्षा करते हैं, जो कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। खून में जमा होने वाला गंदा कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक और स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। अंकुरित लहुसन के गुण इस गंदे पदार्थ को नैचुरली कम करते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। अगर आप हाई बीपी के मरीज हैं, तो आपको अंकुरित लहसुन का सेवन करना चाहिए। इसमें पाए जाने वाले गुण हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके सेवन से आपकी दवाओं पर निर्भरता कम हो सकती है। डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
एसीएस जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड केमिस्ट्री पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अंकुरित लहसुन को फेंके नहीं क्योंकि इसमें ताजा लहसुन की तुलना में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि पांच दिनों तक अंकुरित हुए लहसुन में रोजाना इस्तेमाल होने वाले लहसुन की तुलना में ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यही वजह है कि अंकुरित लहसुन खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल, ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और कैंसर से लड़ने में भी मदद कर सकता है। चलिए जानते हैं अंकुरित लहसुन खाने से आपकी सेहत को और क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। अंकुरित लहसुन में एज़ीन की मात्रा ज्यादा होती है। यह ऐसा पदार्थ जो ब्लड क्लॉट बनने से रोकता है। इसमें नाइट्रेट्स भी होते हैं जोकि एक ऐसा रसायन है, जो धमनियों के फैलाव बना सकता है जिससे ब्लड फ्लो में सुधार होता है। लहसुन खाने के फायदे लहसुन का रस एंजाइम एक्टिविटी को बढ़ाने का काम करता है। यह धमनियों में फैट और गंदे पदार्थ को जमने से रोकता है जोकि दिल की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। नतीजतन, आपको दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम होती है। लहसुन की कली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और इसके नियमित सेवन न केवल झुर्रियों को रोका जा सकता है बल्कि यह त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। लहसुन के एंटीऑक्सीडेंट गुण समय से पहले आने वाले बुढ़ापे को रोकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं और अंकुरित लहसुन में इसकी मात्रा ज्यादा होती है। एंटीऑक्सिडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर कोशिकाओं को संक्रमित होने से बचाते हैं। लहसुन में फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं, जो कैंसर वाली कोशिकाओं को फैलने से रोकने का काम करते हैं। इसके एंटीऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल्स से रक्षा करते हैं, जो कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। खून में जमा होने वाला गंदा कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक और स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। अंकुरित लहुसन के गुण इस गंदे पदार्थ को नैचुरली कम करते हैं और दिल को स्वस्थ रखते हैं। अगर आप हाई बीपी के मरीज हैं, तो आपको अंकुरित लहसुन का सेवन करना चाहिए। इसमें पाए जाने वाले गुण हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके सेवन से आपकी दवाओं पर निर्भरता कम हो सकती है। डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
बिहार की राजनीति में लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस से पढ़ी पुष्पम प्रिया ने एंट्री की है और उनकी सीधी चुनौती बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) हैं. दो साउथ फिल्में हैं MLA का पावर और डैशिंग CM भारत. दोनों ही फिल्मों में एक पढ़ा लिखा नौजवान राजनीति में उतरकर न सिर्फ लोगों की मदद करता है, बल्कि समाज को शिक्षित बनाने, गरीबी हटाने, अपना हक मांगने आदि...आदि की बात करता है. फिल्म तो फिल्म है, सबकुछ फिल्मी अंदाज में होता है, लेकिन जब ऐसा ही करेक्टर रियल लाइफ में मिलता है, तो उसकी बात करना जरूरी हो जाता है. हम जिनकी बात कर रहे हैं, उनका पूरा नाम है पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam priya chaudhary). लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हैं. पिता और दादा पहले से बिहार की सक्रिय राजनीति में रहे हैं, लेकिन पुष्पम इन दोनों से अलग तरह की राजनीति करना चाहती हैं. इस विषय पर और इससे पहले उनका बायोडेटा देख लीजिए ताकि बाकी जानकारी आपको अच्छी तरह समझ में आ जाएं. पुष्पम प्रिया चौधरी राजनीति में आने से पहले लंदन में ही थीं. इस बारे में उन्होंने अपने परिवार को भी नहीं बताया. एक दिन बिहार के अखबारों में एक विज्ञापन छपा, जिसमें लिखा था 'LOVE BIHAR, HATE POLITICS' मने बिहार से प्यार है पर राजनीति से नफरत है. बस इसी के साथ उन्होंने एक पार्टी बनाई और बिहार की राजनीति में बदलाव के लिए कूद पड़ीं. इस समय वह जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं और बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी हैं. यहां तक कि वह खुद को बिहार के मुख्यमंत्री पद का कैंडिडेट बताती हैं. इंस्टा, फेसबुक, ट्विटर से लेकर हर तरह से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और साफ कहती हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उन्हें किसी भी नेता को फॉलो करना पसंद नहीं. मीडिया में दिए गए एक इंटरव्यू के मुताबिक लंदन से उनके वापस लौटने पर उन्होंने अपने परिवार को भी नहीं बताया कि वह राजनीति में एंट्री करने वाली है. यहां तक जब उन्होंने पहली बार अखबार में एक विज्ञापन दिया, उसके बारे में भी इनके पिता को नहीं पता था. इंटरव्यू में पुष्पम ने स्वीकार किया है कि उनके पिता अब भी JDU में हैं और यह बात शुरुआत में ज्यादा लोगों को पता नहीं थी.
बिहार की राजनीति में लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस से पढ़ी पुष्पम प्रिया ने एंट्री की है और उनकी सीधी चुनौती बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. दो साउथ फिल्में हैं MLA का पावर और डैशिंग CM भारत. दोनों ही फिल्मों में एक पढ़ा लिखा नौजवान राजनीति में उतरकर न सिर्फ लोगों की मदद करता है, बल्कि समाज को शिक्षित बनाने, गरीबी हटाने, अपना हक मांगने आदि...आदि की बात करता है. फिल्म तो फिल्म है, सबकुछ फिल्मी अंदाज में होता है, लेकिन जब ऐसा ही करेक्टर रियल लाइफ में मिलता है, तो उसकी बात करना जरूरी हो जाता है. हम जिनकी बात कर रहे हैं, उनका पूरा नाम है पुष्पम प्रिया चौधरी . लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हैं. पिता और दादा पहले से बिहार की सक्रिय राजनीति में रहे हैं, लेकिन पुष्पम इन दोनों से अलग तरह की राजनीति करना चाहती हैं. इस विषय पर और इससे पहले उनका बायोडेटा देख लीजिए ताकि बाकी जानकारी आपको अच्छी तरह समझ में आ जाएं. पुष्पम प्रिया चौधरी राजनीति में आने से पहले लंदन में ही थीं. इस बारे में उन्होंने अपने परिवार को भी नहीं बताया. एक दिन बिहार के अखबारों में एक विज्ञापन छपा, जिसमें लिखा था 'LOVE BIHAR, HATE POLITICS' मने बिहार से प्यार है पर राजनीति से नफरत है. बस इसी के साथ उन्होंने एक पार्टी बनाई और बिहार की राजनीति में बदलाव के लिए कूद पड़ीं. इस समय वह जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं और बिहार की सभी दो सौ तैंतालीस सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी हैं. यहां तक कि वह खुद को बिहार के मुख्यमंत्री पद का कैंडिडेट बताती हैं. इंस्टा, फेसबुक, ट्विटर से लेकर हर तरह से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और साफ कहती हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उन्हें किसी भी नेता को फॉलो करना पसंद नहीं. मीडिया में दिए गए एक इंटरव्यू के मुताबिक लंदन से उनके वापस लौटने पर उन्होंने अपने परिवार को भी नहीं बताया कि वह राजनीति में एंट्री करने वाली है. यहां तक जब उन्होंने पहली बार अखबार में एक विज्ञापन दिया, उसके बारे में भी इनके पिता को नहीं पता था. इंटरव्यू में पुष्पम ने स्वीकार किया है कि उनके पिता अब भी JDU में हैं और यह बात शुरुआत में ज्यादा लोगों को पता नहीं थी.
Bihar BSFC Recruitment 2022: बिहार राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (BSFC) में कई पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. इन पदों पर आवेदन करने का आज अंतिम दिन है. इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए आज ही आवेदन कर सकते हैं. बता दें कि औनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 13 दिसंबर 2022 से प्रारम्भ हो गई थी. खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड ने सहायक प्रबंधक, सहायक लेखा अधिकारी, लेखाकार, गुणवत्ता नियंत्रक और लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के पदों पर भर्ती के लिए 526 रिक्तियों को जारी किया है. औनलाइन आवेदन लिंक आज यानी 02 जनवरी 2023 तक ही एक्टिव रहेगा. बिहार राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 साल और अधिकतम उम्र 37 साल निर्धारित की गई है. यह भर्ती अभियान कुल 526 खाली पदों को भरने के लिए आयोजित किया जा रहा है. - सहायक प्रबंधक (Assistant Manager) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, संस्थान से मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए), पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (पीजीडीबीएम) होना महत्वपूर्ण है. - सहायक लेखा अधिकारी (Assistant Account Officer) चार्टर्ड एकाउंटेंसी के साथ मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बी। कॉम डिग्री. केंद्र गवर्नमेंट / बिहार गवर्नमेंट या केंद्र गवर्नमेंट / सरकारी उद्यम / निगम में सहायक लेखा अधिकारी या समकक्ष पद के रूप में 05 साल का अनुभव. - लेखाकार (Accountant) किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से सीए इंटर डिग्री के साथ बीकॉम पास किया हो. - गुणवत्ता नियंत्रक( Quality Controller) बीएससी (कृषि) या बीटेक या खाद्य विज्ञान / खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी / कृषि इंजीनियरिंग / जैव प्रौद्योगिकी में AICTE द्वारा अनुमोदित किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी / संस्थान से इस भर्ती के लिए पात्र होंगे. - अवर श्रेणी लिपिक (Lower Division Clerk) (LDC) मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक किया हो और कंप्यूटर संचालन में कुशल हो. कंप्यूटर टाइपिंग का ज्ञान रखते हों.
Bihar BSFC Recruitment दो हज़ार बाईस: बिहार राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में कई पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई थी. इन पदों पर आवेदन करने का आज अंतिम दिन है. इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए आज ही आवेदन कर सकते हैं. बता दें कि औनलाइन आवेदन की प्रक्रिया तेरह दिसंबर दो हज़ार बाईस से प्रारम्भ हो गई थी. खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड ने सहायक प्रबंधक, सहायक लेखा अधिकारी, लेखाकार, गुणवत्ता नियंत्रक और लोअर डिवीजन क्लर्क के पदों पर भर्ती के लिए पाँच सौ छब्बीस रिक्तियों को जारी किया है. औनलाइन आवेदन लिंक आज यानी दो जनवरी दो हज़ार तेईस तक ही एक्टिव रहेगा. बिहार राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु इक्कीस साल और अधिकतम उम्र सैंतीस साल निर्धारित की गई है. यह भर्ती अभियान कुल पाँच सौ छब्बीस खाली पदों को भरने के लिए आयोजित किया जा रहा है. - सहायक प्रबंधक किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, संस्थान से मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन , पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट होना महत्वपूर्ण है. - सहायक लेखा अधिकारी चार्टर्ड एकाउंटेंसी के साथ मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बी। कॉम डिग्री. केंद्र गवर्नमेंट / बिहार गवर्नमेंट या केंद्र गवर्नमेंट / सरकारी उद्यम / निगम में सहायक लेखा अधिकारी या समकक्ष पद के रूप में पाँच साल का अनुभव. - लेखाकार किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से सीए इंटर डिग्री के साथ बीकॉम पास किया हो. - गुणवत्ता नियंत्रक बीएससी या बीटेक या खाद्य विज्ञान / खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी / कृषि इंजीनियरिंग / जैव प्रौद्योगिकी में AICTE द्वारा अनुमोदित किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी / संस्थान से इस भर्ती के लिए पात्र होंगे. - अवर श्रेणी लिपिक मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक किया हो और कंप्यूटर संचालन में कुशल हो. कंप्यूटर टाइपिंग का ज्ञान रखते हों.
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद ) ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
- 12 min ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? - 28 min ago 'कौन बनेगा करोड़पति 15' को अलविदा कर गए अमिताभ बच्चन, रुआंसा होकर बोले- 'एक नए भारत का बना गवाह' Don't Miss! - Automobiles इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्ट-अप Creatara ने पेश किए दो शानदार ईवी, जानें खासियत और कीमत? भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री के साल 2020 काफी बुरा साबित होता चला जा रहा है और आए दिन किसी ना किसी की मौत की खबर आती रहती हैं। इस समय खबर आ रही भोजपुरी इंडस्ट्री के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर धनंजय मिश्रा का निधन हो गया है। खबर है कि आज सुबह 7 बजे उनका देहांत हो गया था। गौरतलब है कि उन्होने कई गानों में शानदार म्यूजिक दिया है लेकिन भोजपूरी गाना रिंकिया के पापा से उनको काफी ज्यादा शोहरत मिली थी और आज लोग उनको उस गाने से याद करते हैं। बता दें कि धनंजय यूपी के गाजीपुर के निवासी थे। उनके देहांत के बाद कई लोग घर पर इकट्ठा हैं और मिली जानकारी के मुताबिक मीरा रोड पर उनको अतिंम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि उनकी मौत किस कारण हुई है इस बात को लेकर पूरी तरह से खुलासा नहीं हुआ है लेकिन पता चला था कि उनके नाक और मुंह से खून आने लगा था जिसके बाद उनका देहांत हो गया। ये खबर जैसे ही सोशल मीडिया से वायरल हुई तो भोजपुरी सितारे उनके घर पहुंचे हैं। खबर है कि वहां खेसारी लाल यादव पहुंचे वहीं काजल राघवानी, रवि किशन और धनंजय के करीबी संजय भूषण पटियाला भी मौजूद हैं। धनंजय का नाम आपको कई भोजपुरी गानों के दौरान सुनाई दे जाएगा। ऐसा माना जाता है कि धनंजय को बनाने में मनोज तिवारी काफी बड़ा हाथ रहा है। धनंजय ने बॉलीवुड लेकर भोजपुरी सिनेमा तक कई धमाकेदार गाने गाए हैं और लोगों को अपनी धुन पर नचाया है।
- बारह मिनट ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? - अट्ठाईस मिनट ago 'कौन बनेगा करोड़पति पंद्रह' को अलविदा कर गए अमिताभ बच्चन, रुआंसा होकर बोले- 'एक नए भारत का बना गवाह' Don't Miss! - Automobiles इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्ट-अप Creatara ने पेश किए दो शानदार ईवी, जानें खासियत और कीमत? भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री के साल दो हज़ार बीस काफी बुरा साबित होता चला जा रहा है और आए दिन किसी ना किसी की मौत की खबर आती रहती हैं। इस समय खबर आ रही भोजपुरी इंडस्ट्री के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर धनंजय मिश्रा का निधन हो गया है। खबर है कि आज सुबह सात बजे उनका देहांत हो गया था। गौरतलब है कि उन्होने कई गानों में शानदार म्यूजिक दिया है लेकिन भोजपूरी गाना रिंकिया के पापा से उनको काफी ज्यादा शोहरत मिली थी और आज लोग उनको उस गाने से याद करते हैं। बता दें कि धनंजय यूपी के गाजीपुर के निवासी थे। उनके देहांत के बाद कई लोग घर पर इकट्ठा हैं और मिली जानकारी के मुताबिक मीरा रोड पर उनको अतिंम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि उनकी मौत किस कारण हुई है इस बात को लेकर पूरी तरह से खुलासा नहीं हुआ है लेकिन पता चला था कि उनके नाक और मुंह से खून आने लगा था जिसके बाद उनका देहांत हो गया। ये खबर जैसे ही सोशल मीडिया से वायरल हुई तो भोजपुरी सितारे उनके घर पहुंचे हैं। खबर है कि वहां खेसारी लाल यादव पहुंचे वहीं काजल राघवानी, रवि किशन और धनंजय के करीबी संजय भूषण पटियाला भी मौजूद हैं। धनंजय का नाम आपको कई भोजपुरी गानों के दौरान सुनाई दे जाएगा। ऐसा माना जाता है कि धनंजय को बनाने में मनोज तिवारी काफी बड़ा हाथ रहा है। धनंजय ने बॉलीवुड लेकर भोजपुरी सिनेमा तक कई धमाकेदार गाने गाए हैं और लोगों को अपनी धुन पर नचाया है।
औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में रविवार को आठ लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, संक्रमितों में एक महिला व सात पुरुष शामिल है। इन सभी के बीते शनिवार को सैंपल लिए गए थे जिनकी रिपोर्ट रविवार शाम आई जिसमें इनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई। प्रशासन ने कुछेक संक्रमितों को उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर व कुछेक को होम आइसोलेशन में भेज दिया है। इसके अलावा संक्रमितों की कांटैक्ट टे्रसिंग शुरू करते हुए उनके निवास स्थान व कार्यस्थल को एहतियातन सेनटाइज करवा दिया है। जानकारी के मुताबिक रविवार को बीबीएन में कोरोना के आठ नए मामले सामने आए है । बद्दी स्थित डाइंग उद्योग के क्वारंटाइन सेंटर में क्वारंटाइन 18 वर्षीय युवक की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बरोटीवाला के कुजांहल निवासी 22 व 30 वर्षीय पुरुष, बद्दी के भुड्ड निवासी 24 वर्षीय पुरुष व बद्दी के मढ़ावाला निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना संक्रमित पाए गए है। इसके अलावा बद्दी के गुल्लरवाला निवासी 42 वर्षीय पुरुष, बद्दी स्थित बीबीएनडीए कालोनी में 30 वर्षीय पुरुष के अलावा नालागढ़ की हिमुडा कालोनी में रह रही 55 वर्षीय महिला की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। एसडीएम नालागढ़ महेंद्र पाल गुर्जर ने बताया कि संक्रमितों को उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया है जबकि उनके संपर्क में आए लोगों की टे्रसिंग की जा रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे इस समय होने वाले जुकाम, खांसी, बुखार तथा सांस संबंधी तकलीफ को हल्के में न ले। उन्होंने कोविड से बचाब के लिए सामाजिक दूरी, मास्क पहनना तथा हाथों की स्वच्छता जैसे सभी महत्त्वपूर्ण नियमों के अलावा सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का भी प्राथमिकता से पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खांसी, जुकाम, बुखार, सांस की तकलीफ तथा गले संबंधी किसी भी समस्या के आरंभ में ही व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर अपनी स्वास्थ्य जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा तनाव सहित किसी भी अन्य बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को और भी ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है।
औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में रविवार को आठ लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, संक्रमितों में एक महिला व सात पुरुष शामिल है। इन सभी के बीते शनिवार को सैंपल लिए गए थे जिनकी रिपोर्ट रविवार शाम आई जिसमें इनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई। प्रशासन ने कुछेक संक्रमितों को उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर व कुछेक को होम आइसोलेशन में भेज दिया है। इसके अलावा संक्रमितों की कांटैक्ट टे्रसिंग शुरू करते हुए उनके निवास स्थान व कार्यस्थल को एहतियातन सेनटाइज करवा दिया है। जानकारी के मुताबिक रविवार को बीबीएन में कोरोना के आठ नए मामले सामने आए है । बद्दी स्थित डाइंग उद्योग के क्वारंटाइन सेंटर में क्वारंटाइन अट्ठारह वर्षीय युवक की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बरोटीवाला के कुजांहल निवासी बाईस व तीस वर्षीय पुरुष, बद्दी के भुड्ड निवासी चौबीस वर्षीय पुरुष व बद्दी के मढ़ावाला निवासी सत्तर वर्षीय बुजुर्ग कोरोना संक्रमित पाए गए है। इसके अलावा बद्दी के गुल्लरवाला निवासी बयालीस वर्षीय पुरुष, बद्दी स्थित बीबीएनडीए कालोनी में तीस वर्षीय पुरुष के अलावा नालागढ़ की हिमुडा कालोनी में रह रही पचपन वर्षीय महिला की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। एसडीएम नालागढ़ महेंद्र पाल गुर्जर ने बताया कि संक्रमितों को उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया है जबकि उनके संपर्क में आए लोगों की टे्रसिंग की जा रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे इस समय होने वाले जुकाम, खांसी, बुखार तथा सांस संबंधी तकलीफ को हल्के में न ले। उन्होंने कोविड से बचाब के लिए सामाजिक दूरी, मास्क पहनना तथा हाथों की स्वच्छता जैसे सभी महत्त्वपूर्ण नियमों के अलावा सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का भी प्राथमिकता से पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खांसी, जुकाम, बुखार, सांस की तकलीफ तथा गले संबंधी किसी भी समस्या के आरंभ में ही व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर अपनी स्वास्थ्य जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा तनाव सहित किसी भी अन्य बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को और भी ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है।
Patna High Court : 9 मई को केस के डेट की सुनवाई के लिए सरकार किन बिंदुओं पर तैयारी कर रही है, उसे समझने के लिए 'अमर उजाला' ने विधि विशेषज्ञों से अंतरिम आदेश पर बात की। पाराग्राफ 21 से 31 तक को समझें तो सब साफ है। जानिए, जातीय जन-गणना पर जल्द फैसला क्यों चाह रही नीतीश सरकार। बिहार में जाति आधारित जन-गणना हो रही थी। हाईकोर्ट ने चार मई को इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। एक-दो नहीं, दर्जनभर वजह बताते हुए। स्टे ऑर्डर में अगली सुनवाई की तारीख 03 जुलाई दी गई तो राज्य सरकार ने अगले ही दिन अपील की कि जल्द सुनवाई कर फैसला दे दें। हाईकोर्ट ने अगली तारीख तय करने के लिए 9 मई का डेट दिया। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद सत्ता और विपक्ष का संग्राम भी दिखा। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने तो एलान कर दिया कि 'जातिगत जनगणना' होकर रहेगा। लेकिन, 31 पाराग्राफ में आया हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश तो कुछ और संकेत दे रहा है। कोर्ट का अंतिम आदेश आना बाकी है। 9 मई को केस के डेट की सुनवाई के लिए सरकार किन बिंदुओं पर तैयारी कर रही है, उसे समझने के लिए 'अमर उजाला' ने विधि विशेषज्ञों से अंतरिम आदेश पर बात की। इससे यही समझ बनती है कि नाम, काम, तरीका, सुरक्षा, लक्ष्य, अधिकार- ऐसे दर्जनभर बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट ठहर-सा गया है। पाराग्राफ 21 से 31 तक को समझें तो सब साफ है। राज्य को जन-गणना का अधिकार नहीं 21/22. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के लिस्ट-1 की 69 वीं इंट्री census है। इसमें स्पष्ट है कि इससे संबंधित कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। राज्य को लिस्ट-2 पर नियम या कानून बनाने का अधिकार है। जनगणना कराने का अधिकार भारतीय संसद में निहित है। सरकार कायम रहेगी कि यह सर्वे है, जनगणना नहीं। हालांकि, अंतरिम आदेश में कई जगह जनगणना की स्पष्ट व्याख्या रहने के कारण यह आसान नहीं होगा। फंड गलत, जानकारी का माध्यम-लक्ष्य भी गलत-असुरक्षित 23. बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वे कराने का फैसला लिए जाने की जानकारी दी और बताया है कि सामान्य प्रशासन विभाग राज्य की आकस्मिकता निधि से इस काम को पूरा कराएगा। प्रधान सचिव की ओर से जिले के अधिकारियों को भेजे संदेश में लिखा गया है- 'जाति सूची 2022 के निर्धारण के लिए बिहार में जाति आधारित गणना'। इसमें 17 तरह की जानकारी लेने वाला प्रारूप रखा गया, जिसमें 'जाति' भी एक है। परिवार के सदस्य की जाति और आमदनी की जानकारी परिवार के मुखिया से लेनी है, न कि व्यक्ति विशेष से। यह अपने आप में इस डाटा की सच्चाई को संदेहास्पद बना देता है। यानी, व्यक्ति की स्वैच्छिक जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है। बिहार में नहीं रहे राज्य के लोगों का डाटा फोन से बात कर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सत्यापन कराने की बात कही गई है। कोर्ट का मानना है कि परिवार के मुखिया से प्राप्त डाटा को इस तरह सत्यापित नहीं किया जा सकता और वीडियो कॉन्फ्रेंस पर उपस्थित व्यक्ति का सत्यापन भी अनिवार्य है। अगर यह डाटा सुरक्षित नहीं रह सका तो भविष्य में यह उस व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। इस सर्वे में उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, आय, शैक्षणिक योग्यता की भी जानकारी ली जा रही, जिसका मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति की जाति की पहचान करना है। यह उद्देश्य दिए गए नाम 'जाति आधारित सर्वे' से भी और ज्यादा स्पष्ट हो जा रहा है। सरकार डाटा हासिल करने के नियम में बदलाव का रास्ता निकाल सकती है। हर व्यक्ति से डाटा लेने का प्रावधान कर सकती है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से सत्यापन की प्रक्रिया में और प्रावधान जोड़ सकती है। पक्ष रखेगी कि यह जाति जानने का प्रयास नहीं, जाति के आधार पर लोगों की गणना करने का प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना, सिर्फ जाति जानना उद्देश्य 24/25/26. सरकार ने कोर्ट को बताया कि पब्लिक डोमेन में सारा डाटा पहले से ही उपलब्ध है। लोगों ने नौकरी या समाज कल्याण की योजनाओं को पाने के लिए यह जानकारी पब्लिक डोमेन में दे रखा है। कोर्ट ने सरकार की ही बात को आधार बनाकर कहा कि जब सारी सूचनाएं पहले से ही उपलब्ध हैं तो जनता का इतना का इतना पैसा इस काम में खर्च क्यों किया जा रहा? जहां तक पिछड़ेपन को जांचने का सवाल है तो इसके लिए आयोग है ही, वह इस पर विचार करता। जिस तरह से परिवार के मुखिया, रिश्तेदार या पड़ोसी से जाति की जानकारी ली जा रही है, उसपर कोर्ट का मानना है कि यह प्रक्रिया पिछड़ेपन को चिह्नित करने के लिए नहीं, बल्कि बिहार में रहने वाले लोगों की जाति का पता लगाने के लिए की जा रही है। इसमें यह भी गाइडलाइन है कि बच्चे की जाति निर्धारण के लिए मां से पिता की जाति पूछी जाए। यह भी अनिवार्य किया गया है कि मां किसी अन्य के सामने बच्चे के पिता की यह जानकारी जाहिर करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवमानना कर, सर्वे में निर्देश है कि मां की जाति को संतान की जाति नहीं लिखा जाए। सुप्रीम कोर्ट यह भी स्पष्ट कर चुका है कि बच्चे का लालन-पालन जिन परिस्थितियों में हुआ है, उसके आधार पर उसकी जाति का निर्धारण हो सकता है। सरकार इस बात पर कायम रहने का प्रयास करेगी कि राज्य की जनता की विभिन्न स्तर पर जानकारी ली जाएगी, ताकि उस हिसाब से सम्यक योजना बनाई जा सके। यहां सरकार को प्रावधान लाना पड़ सकता है कि व्यक्ति से ही उसकी व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी। सरकार कायम रहेगी कि उद्देश्य जाति जानना नहीं, जाति के आधार पर स्थिति जानना है। बच्चे की जाति निर्धारण में सुप्रीम कोर्ट का सभी निर्देश मानने के लिए सरकार तैयार होगी और महिला से उसकी संतान के पिता की जाति पूछने की बाध्यता भी समाप्त करेगी। जब सब राजी थे तो कानून क्यों नहीं बनाया 27/28. कोर्ट ने कहा कि विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से सर्वे कराने के संकल्प के बाद अगर कैबिनेट से भी सहमति हो चुकी थी तो यह समझ से बाहर है कि कानून बनाने में सक्षम विधानमंडल ने ऐसा क्यों नहीं किया? सरकार के इस जवाब से भी कोर्ट सहमति नहीं कि यह विलंब से लाया गया वाद है, क्योंकि यह जनता के हित से जुड़ी याचिका है। कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि जिस तरह से सर्वेक्षण किया जा रहा है, वह राज्य के लिए निर्धारित नीति के तहत नहीं है। राज्य सरकार के पास इस सवाल का एकमात्र विकल्प यही हो सकता है कि वह अपनी बात दुहराए कि यह जनगणना नहीं है, इसलिए राज्य की आम आबादी के हित में विधानमंडल और कैबिनेट की स्वीकृति के आधार पर फैसला कर अधिसूचना जारी की गई। अनधिकृत जानकारी जुटाएंगे-बांटेंगे! गलत है, इसलिए तत्काल रोक 29/30/31. उपरोक्त तर्कों के आधार पर कोर्ट इसे जाति आधारित सर्वे के नाम पर की जा रही 'जनगणना' मानता है, जिसका अधिकार जनगणना कानून 1948 के तहत भारतीय संसद में समाहित है। जनगणना कानून के तहत जानकारी लेने के दरम्यान भी सूचनाएं ली जाती हैं, लेकिन वह सूचनाएं सुरक्षित रहती हैं और न तो उन्हें कोई देख सकता है, न ही साक्ष्य के रूप में वह सूचनाएं स्वीकार्य हैं। बिहार के दोनों सदनों ने इसे पास किया, लेकिन इसके लिए हुए विमर्श और इसके उद्देश्यों की जानकारी रिकॉर्ड में नहीं है। इसका 80 फीसदी कार्य पूरा भी हो गया है। डाटा की सत्यता और सुरक्षा के लिए भी सरकार को पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। अतः प्रथम दृष्टया कोर्ट का मानना है कि जिस तरह जनगणना के रूप में जाति आधारित सर्वे किया जा रहा है, वह राज्य के अधिकार में नहीं बल्कि भारतीय संसद के अधिकार क्षेत्र में है। इसके अलावा, यह भी अधिसूचना से यह भी पता चलता है कि सरकार इस डाटा को राज्य विधानसभा, सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के बीच शेयर करेगी, जो चिंता का विषय है। यह निजता के अधिकार पर निश्चित रूप से बड़ा सवाल है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जीवन का अधिकार माना है। इन परिस्थितियों में राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिका पर अंतिम फैसले तक जाति आधारित इस सर्वे को तत्काल प्रभाव से बंद करे, अब तक एकत्रित डाटा को सुरक्षित रखे और किसी से शेयर नहीं करे। एक ही रास्ता दिखाई देता है कि सरकार पटना हाईकोर्ट में अपनी दलीलों के आधार पर फैसले का इंतजार करे और अगर अंतरिम फैसले की लाइन पर ही अंतिम फैसला आता है तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. 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Patna High Court : नौ मई को केस के डेट की सुनवाई के लिए सरकार किन बिंदुओं पर तैयारी कर रही है, उसे समझने के लिए 'अमर उजाला' ने विधि विशेषज्ञों से अंतरिम आदेश पर बात की। पाराग्राफ इक्कीस से इकतीस तक को समझें तो सब साफ है। जानिए, जातीय जन-गणना पर जल्द फैसला क्यों चाह रही नीतीश सरकार। बिहार में जाति आधारित जन-गणना हो रही थी। हाईकोर्ट ने चार मई को इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। एक-दो नहीं, दर्जनभर वजह बताते हुए। स्टे ऑर्डर में अगली सुनवाई की तारीख तीन जुलाई दी गई तो राज्य सरकार ने अगले ही दिन अपील की कि जल्द सुनवाई कर फैसला दे दें। हाईकोर्ट ने अगली तारीख तय करने के लिए नौ मई का डेट दिया। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद सत्ता और विपक्ष का संग्राम भी दिखा। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने तो एलान कर दिया कि 'जातिगत जनगणना' होकर रहेगा। लेकिन, इकतीस पाराग्राफ में आया हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश तो कुछ और संकेत दे रहा है। कोर्ट का अंतिम आदेश आना बाकी है। नौ मई को केस के डेट की सुनवाई के लिए सरकार किन बिंदुओं पर तैयारी कर रही है, उसे समझने के लिए 'अमर उजाला' ने विधि विशेषज्ञों से अंतरिम आदेश पर बात की। इससे यही समझ बनती है कि नाम, काम, तरीका, सुरक्षा, लक्ष्य, अधिकार- ऐसे दर्जनभर बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट ठहर-सा गया है। पाराग्राफ इक्कीस से इकतीस तक को समझें तो सब साफ है। राज्य को जन-गणना का अधिकार नहीं इक्कीस/बाईस. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के लिस्ट-एक की उनहत्तर वीं इंट्री census है। इसमें स्पष्ट है कि इससे संबंधित कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। राज्य को लिस्ट-दो पर नियम या कानून बनाने का अधिकार है। जनगणना कराने का अधिकार भारतीय संसद में निहित है। सरकार कायम रहेगी कि यह सर्वे है, जनगणना नहीं। हालांकि, अंतरिम आदेश में कई जगह जनगणना की स्पष्ट व्याख्या रहने के कारण यह आसान नहीं होगा। फंड गलत, जानकारी का माध्यम-लक्ष्य भी गलत-असुरक्षित तेईस. बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वे कराने का फैसला लिए जाने की जानकारी दी और बताया है कि सामान्य प्रशासन विभाग राज्य की आकस्मिकता निधि से इस काम को पूरा कराएगा। प्रधान सचिव की ओर से जिले के अधिकारियों को भेजे संदेश में लिखा गया है- 'जाति सूची दो हज़ार बाईस के निर्धारण के लिए बिहार में जाति आधारित गणना'। इसमें सत्रह तरह की जानकारी लेने वाला प्रारूप रखा गया, जिसमें 'जाति' भी एक है। परिवार के सदस्य की जाति और आमदनी की जानकारी परिवार के मुखिया से लेनी है, न कि व्यक्ति विशेष से। यह अपने आप में इस डाटा की सच्चाई को संदेहास्पद बना देता है। यानी, व्यक्ति की स्वैच्छिक जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है। बिहार में नहीं रहे राज्य के लोगों का डाटा फोन से बात कर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सत्यापन कराने की बात कही गई है। कोर्ट का मानना है कि परिवार के मुखिया से प्राप्त डाटा को इस तरह सत्यापित नहीं किया जा सकता और वीडियो कॉन्फ्रेंस पर उपस्थित व्यक्ति का सत्यापन भी अनिवार्य है। अगर यह डाटा सुरक्षित नहीं रह सका तो भविष्य में यह उस व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। इस सर्वे में उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, आय, शैक्षणिक योग्यता की भी जानकारी ली जा रही, जिसका मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति की जाति की पहचान करना है। यह उद्देश्य दिए गए नाम 'जाति आधारित सर्वे' से भी और ज्यादा स्पष्ट हो जा रहा है। सरकार डाटा हासिल करने के नियम में बदलाव का रास्ता निकाल सकती है। हर व्यक्ति से डाटा लेने का प्रावधान कर सकती है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से सत्यापन की प्रक्रिया में और प्रावधान जोड़ सकती है। पक्ष रखेगी कि यह जाति जानने का प्रयास नहीं, जाति के आधार पर लोगों की गणना करने का प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना, सिर्फ जाति जानना उद्देश्य चौबीस पच्चीस छब्बीस. सरकार ने कोर्ट को बताया कि पब्लिक डोमेन में सारा डाटा पहले से ही उपलब्ध है। लोगों ने नौकरी या समाज कल्याण की योजनाओं को पाने के लिए यह जानकारी पब्लिक डोमेन में दे रखा है। कोर्ट ने सरकार की ही बात को आधार बनाकर कहा कि जब सारी सूचनाएं पहले से ही उपलब्ध हैं तो जनता का इतना का इतना पैसा इस काम में खर्च क्यों किया जा रहा? जहां तक पिछड़ेपन को जांचने का सवाल है तो इसके लिए आयोग है ही, वह इस पर विचार करता। जिस तरह से परिवार के मुखिया, रिश्तेदार या पड़ोसी से जाति की जानकारी ली जा रही है, उसपर कोर्ट का मानना है कि यह प्रक्रिया पिछड़ेपन को चिह्नित करने के लिए नहीं, बल्कि बिहार में रहने वाले लोगों की जाति का पता लगाने के लिए की जा रही है। इसमें यह भी गाइडलाइन है कि बच्चे की जाति निर्धारण के लिए मां से पिता की जाति पूछी जाए। यह भी अनिवार्य किया गया है कि मां किसी अन्य के सामने बच्चे के पिता की यह जानकारी जाहिर करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवमानना कर, सर्वे में निर्देश है कि मां की जाति को संतान की जाति नहीं लिखा जाए। सुप्रीम कोर्ट यह भी स्पष्ट कर चुका है कि बच्चे का लालन-पालन जिन परिस्थितियों में हुआ है, उसके आधार पर उसकी जाति का निर्धारण हो सकता है। सरकार इस बात पर कायम रहने का प्रयास करेगी कि राज्य की जनता की विभिन्न स्तर पर जानकारी ली जाएगी, ताकि उस हिसाब से सम्यक योजना बनाई जा सके। यहां सरकार को प्रावधान लाना पड़ सकता है कि व्यक्ति से ही उसकी व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी। सरकार कायम रहेगी कि उद्देश्य जाति जानना नहीं, जाति के आधार पर स्थिति जानना है। बच्चे की जाति निर्धारण में सुप्रीम कोर्ट का सभी निर्देश मानने के लिए सरकार तैयार होगी और महिला से उसकी संतान के पिता की जाति पूछने की बाध्यता भी समाप्त करेगी। जब सब राजी थे तो कानून क्यों नहीं बनाया सत्ताईस/अट्ठाईस. कोर्ट ने कहा कि विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से सर्वे कराने के संकल्प के बाद अगर कैबिनेट से भी सहमति हो चुकी थी तो यह समझ से बाहर है कि कानून बनाने में सक्षम विधानमंडल ने ऐसा क्यों नहीं किया? सरकार के इस जवाब से भी कोर्ट सहमति नहीं कि यह विलंब से लाया गया वाद है, क्योंकि यह जनता के हित से जुड़ी याचिका है। कोर्ट ने कहा कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि जिस तरह से सर्वेक्षण किया जा रहा है, वह राज्य के लिए निर्धारित नीति के तहत नहीं है। राज्य सरकार के पास इस सवाल का एकमात्र विकल्प यही हो सकता है कि वह अपनी बात दुहराए कि यह जनगणना नहीं है, इसलिए राज्य की आम आबादी के हित में विधानमंडल और कैबिनेट की स्वीकृति के आधार पर फैसला कर अधिसूचना जारी की गई। अनधिकृत जानकारी जुटाएंगे-बांटेंगे! गलत है, इसलिए तत्काल रोक उनतीस तीस इकतीस. उपरोक्त तर्कों के आधार पर कोर्ट इसे जाति आधारित सर्वे के नाम पर की जा रही 'जनगणना' मानता है, जिसका अधिकार जनगणना कानून एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के तहत भारतीय संसद में समाहित है। जनगणना कानून के तहत जानकारी लेने के दरम्यान भी सूचनाएं ली जाती हैं, लेकिन वह सूचनाएं सुरक्षित रहती हैं और न तो उन्हें कोई देख सकता है, न ही साक्ष्य के रूप में वह सूचनाएं स्वीकार्य हैं। बिहार के दोनों सदनों ने इसे पास किया, लेकिन इसके लिए हुए विमर्श और इसके उद्देश्यों की जानकारी रिकॉर्ड में नहीं है। इसका अस्सी फीसदी कार्य पूरा भी हो गया है। डाटा की सत्यता और सुरक्षा के लिए भी सरकार को पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। अतः प्रथम दृष्टया कोर्ट का मानना है कि जिस तरह जनगणना के रूप में जाति आधारित सर्वे किया जा रहा है, वह राज्य के अधिकार में नहीं बल्कि भारतीय संसद के अधिकार क्षेत्र में है। इसके अलावा, यह भी अधिसूचना से यह भी पता चलता है कि सरकार इस डाटा को राज्य विधानसभा, सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के बीच शेयर करेगी, जो चिंता का विषय है। यह निजता के अधिकार पर निश्चित रूप से बड़ा सवाल है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जीवन का अधिकार माना है। इन परिस्थितियों में राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिका पर अंतिम फैसले तक जाति आधारित इस सर्वे को तत्काल प्रभाव से बंद करे, अब तक एकत्रित डाटा को सुरक्षित रखे और किसी से शेयर नहीं करे। एक ही रास्ता दिखाई देता है कि सरकार पटना हाईकोर्ट में अपनी दलीलों के आधार पर फैसले का इंतजार करे और अगर अंतरिम फैसले की लाइन पर ही अंतिम फैसला आता है तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. 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SRH vs KKR, IPL 2022 result in Hindi: इस जीत के साथ ही सनराइजर्स हैदराबाद ने लगातार तीसरा मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में ऊंची सातवां स्थान हासिल कर लिया है. IPL 2022 में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने जबरदस्त वापसी कर डाली है. केन विलियमसन की कप्तानी वाली इस टीम ने पहले दो मैचों की हार से उबरते हुए जीत की हैट्रिक लगा दी है. शुक्रवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ हुए मुकाबले में हैदराबाद ने 13 गेंदें शेष रहते ही लक्ष्य हासिल करते हुए 7 विकेट से जबरदस्त जीत दर्ज की. पहले उमरान मलिक (2/27) और टी नटराजन (3/37) की बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर हैदराबाद ने कोलकाता को 20 ओवरों में 175 रन पर रोका. फिर केकेआर के ही पूर्व बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी (Rahul Tripathi) और एडन मार्करम की आतिशी अर्धशतकीय पारियों के दम पर 18वें ओवर में ही बेहतरीन अंदाज में जीत हासिल कर ली. ये हैदराबाद की 5 मैचों में तीसरी जीत है और वह पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं. ब्रेबॉर्न स्टेडियम में इस मैच के लिए पिच पर जमकर घास छोड़ी गई थी और ऐसे में तेज गेंदबाजों का असर शुरुआत में काफी दिखा. फिर भी रन भी इस मैदान पर खूब पड़े. पहले केकेआर ने नीतीश राणा और आंद्रे रसेल की दमदार पारियों की मदद से 175 रन का स्कोर खड़ा किया. फिर गेंदबाजी में भी कोलकाता ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन राहुल त्रिपाठी और एडन मार्करम ने 96 रनों की तूफानी साझेदारी कर टीम की जीत की बुनियाद रखी. फिर 18वें ओवर में मार्करम ने पैट कमिंस पर एक चौका और लगातार 2 छक्के जमाकर मैच को खत्म कर दिया. हैदराबाद ने छठें ओवर तक ही अपने दोनों ओपनरों के विकेट गंवा दिए थे. पहले पैट कमिंस ने अभिषेक वर्मा को बोल्ड किया और फिर छठें ओवर में आंद्रे रसेल ने हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन को बोल्ड कर दिया. सिर्फ 39 रन पर ही दो विकेट गिर गए थे और सामने लक्ष्य मुश्किल था. इसके बावजूद दबाव में आने के बजाए राहुल त्रिपाठी और मार्करम ने खुलकर खेलना जारी रखा. खास तौर पर त्रिपाठी. पिछले सीजन तक केकेआर का ही हिस्सा रहे इस बल्लेबाज ने कोलकाता के गेंदबाजों को खेलने के अनुभव का फायदा उठाते हुए जमकर बाउंड्रियां बटोरीं. खास तौर पर वरुण चक्रवर्ती के एक ही ओवर में उन्होंने लगातार 2 छक्के और 1 चौका जमाया और सिर्फ 21 गेंदों में अपना बेहतरीन अर्धशतक ठोक दिया. दूसरी ओर से मार्करम मोर्चा संभाल कर आराम से स्कोर को आगे बढ़ाने में मदद करते रहे. उन दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 54 गेंदों में 94 रन की साझेदारी हुई. 133 के स्कोर पर त्रिपाठी के आउट होने के बाद केकेआर की वापसी की उम्मीद जगी, लेकिन मार्करम ने आक्रामक बल्लेबाजी से वो उम्मीद भी खत्म कर दी. मार्करम सिर्फ 36 गेंदों में नाबाद 68 रन (6 चौके, 4 छक्के) इससे पहले केकेआर की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही थी और पावरप्ले के ओवरों में ही शीर्षक्रम के तीन बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिये. पहले गेंदबाजी के फैसले को सही साबित करते हुए दक्षिण अफ्रीका के जानसेन ने उछाल और स्विंग का पूरा उपयोग करके आरोन फिंच ( सात ) को सस्ते में आउट किया . इसके बाद नटराजन ने पांचवें ओवर में दो विकेट निकाले. उन्होंने पहले वेंकटेश अय्यर (6) को रवाना किया और फिर सुनील नारायण (6) का विकेट लिया. केकेआर का स्कोर इस समय तीन विकेट पर 31 रन था. मलिक ने दसवें ओवर में केकेआर के कप्तान श्रेयस अय्यर (28) का कीमती विकेट लिया और अगले ओवर में शेल्डन जैकसन (7) को भी पवेलियन भेजा. राणा ने दूसरे छोर से रन बनाने का सिलसिला जारी रखते हुए अपनी पारी में छह चौके और दो छक्के लगाये. उन्होंने अय्यर और रसेल दोनों के साथ 39 रन की साझेदारी की. वह 18वें ओवर में नटराजन का शिकार हुए. रसेल (नाबाद 49 रन, 25 गेंद) ने अपनी आकर्षक पारी में चार चौके और चार छक्के जड़े जिसमें आखिरी ओवर में लगाये दो छक्के शामिल है. केकेआर ने आखिरी पांच ओवरों में 55 रन बनाये.
SRH vs KKR, IPL दो हज़ार बाईस result in Hindi: इस जीत के साथ ही सनराइजर्स हैदराबाद ने लगातार तीसरा मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में ऊंची सातवां स्थान हासिल कर लिया है. IPL दो हज़ार बाईस में सनराइजर्स हैदराबाद ने जबरदस्त वापसी कर डाली है. केन विलियमसन की कप्तानी वाली इस टीम ने पहले दो मैचों की हार से उबरते हुए जीत की हैट्रिक लगा दी है. शुक्रवार को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ हुए मुकाबले में हैदराबाद ने तेरह गेंदें शेष रहते ही लक्ष्य हासिल करते हुए सात विकेट से जबरदस्त जीत दर्ज की. पहले उमरान मलिक और टी नटराजन की बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर हैदराबाद ने कोलकाता को बीस ओवरों में एक सौ पचहत्तर रन पर रोका. फिर केकेआर के ही पूर्व बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी और एडन मार्करम की आतिशी अर्धशतकीय पारियों के दम पर अट्ठारहवें ओवर में ही बेहतरीन अंदाज में जीत हासिल कर ली. ये हैदराबाद की पाँच मैचों में तीसरी जीत है और वह पॉइंट्स टेबल में सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं. ब्रेबॉर्न स्टेडियम में इस मैच के लिए पिच पर जमकर घास छोड़ी गई थी और ऐसे में तेज गेंदबाजों का असर शुरुआत में काफी दिखा. फिर भी रन भी इस मैदान पर खूब पड़े. पहले केकेआर ने नीतीश राणा और आंद्रे रसेल की दमदार पारियों की मदद से एक सौ पचहत्तर रन का स्कोर खड़ा किया. फिर गेंदबाजी में भी कोलकाता ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन राहुल त्रिपाठी और एडन मार्करम ने छियानवे रनों की तूफानी साझेदारी कर टीम की जीत की बुनियाद रखी. फिर अट्ठारहवें ओवर में मार्करम ने पैट कमिंस पर एक चौका और लगातार दो छक्के जमाकर मैच को खत्म कर दिया. हैदराबाद ने छठें ओवर तक ही अपने दोनों ओपनरों के विकेट गंवा दिए थे. पहले पैट कमिंस ने अभिषेक वर्मा को बोल्ड किया और फिर छठें ओवर में आंद्रे रसेल ने हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन को बोल्ड कर दिया. सिर्फ उनतालीस रन पर ही दो विकेट गिर गए थे और सामने लक्ष्य मुश्किल था. इसके बावजूद दबाव में आने के बजाए राहुल त्रिपाठी और मार्करम ने खुलकर खेलना जारी रखा. खास तौर पर त्रिपाठी. पिछले सीजन तक केकेआर का ही हिस्सा रहे इस बल्लेबाज ने कोलकाता के गेंदबाजों को खेलने के अनुभव का फायदा उठाते हुए जमकर बाउंड्रियां बटोरीं. खास तौर पर वरुण चक्रवर्ती के एक ही ओवर में उन्होंने लगातार दो छक्के और एक चौका जमाया और सिर्फ इक्कीस गेंदों में अपना बेहतरीन अर्धशतक ठोक दिया. दूसरी ओर से मार्करम मोर्चा संभाल कर आराम से स्कोर को आगे बढ़ाने में मदद करते रहे. उन दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए चौवन गेंदों में चौरानवे रन की साझेदारी हुई. एक सौ तैंतीस के स्कोर पर त्रिपाठी के आउट होने के बाद केकेआर की वापसी की उम्मीद जगी, लेकिन मार्करम ने आक्रामक बल्लेबाजी से वो उम्मीद भी खत्म कर दी. मार्करम सिर्फ छत्तीस गेंदों में नाबाद अड़सठ रन इससे पहले केकेआर की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही थी और पावरप्ले के ओवरों में ही शीर्षक्रम के तीन बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिये. पहले गेंदबाजी के फैसले को सही साबित करते हुए दक्षिण अफ्रीका के जानसेन ने उछाल और स्विंग का पूरा उपयोग करके आरोन फिंच को सस्ते में आउट किया . इसके बाद नटराजन ने पांचवें ओवर में दो विकेट निकाले. उन्होंने पहले वेंकटेश अय्यर को रवाना किया और फिर सुनील नारायण का विकेट लिया. केकेआर का स्कोर इस समय तीन विकेट पर इकतीस रन था. मलिक ने दसवें ओवर में केकेआर के कप्तान श्रेयस अय्यर का कीमती विकेट लिया और अगले ओवर में शेल्डन जैकसन को भी पवेलियन भेजा. राणा ने दूसरे छोर से रन बनाने का सिलसिला जारी रखते हुए अपनी पारी में छह चौके और दो छक्के लगाये. उन्होंने अय्यर और रसेल दोनों के साथ उनतालीस रन की साझेदारी की. वह अट्ठारहवें ओवर में नटराजन का शिकार हुए. रसेल ने अपनी आकर्षक पारी में चार चौके और चार छक्के जड़े जिसमें आखिरी ओवर में लगाये दो छक्के शामिल है. केकेआर ने आखिरी पांच ओवरों में पचपन रन बनाये.
ईरानी फिल्म निर्माता मोहम्मद रसूलोफ को सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा क्रिएट करने वाली फिल्में बनाने को लेकर 1 साल जेल की सजा सुनाई गई है। पिछले दिनों मोहम्मद रसूलोफ ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल का गोल्डन बीयर अवॉर्ड (Berlin Film Festival's Golden Bear) जीता है। मोहम्मद रसूलोफ के वकील का कहना है कि उन्हें एक साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उनके वकील नासिर ज़राफशान ने बुधवार को द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि रसूलोफ़ को उनकी तीन फिल्मों की वजह से सजा मिली है। आरोप है कि ये फिल्में "सिस्टम के खिलाफ प्रचार" करती हैं। ज़राफशान ने कहा कि ईरान में चल रहे कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए वे आदेश की अपील करेंगे। देश में वायरस फैल रहा है। बता दें, रसूलोफ़ ने अपनी फ़िल्म "द इज़ नो ईविल" के लिए बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल का शीर्ष पुरस्कार जीता है। यह फिल्म ईरान में मौत की सजा और अत्याचार के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बनाई गई है। ईरानी अधिकारियों द्वारा रसूलोफ़ पर पाबंदी लगाए जाने के कारण शनिवार को वह पुरस्कार लेने नहीं पहुंच पाए थे। ऐसे में आयोजकों ने रसूलोफ़ के लिए एक खाली कुर्सी छोड़ी थी। जर्मनी की डीपीए समाचार एजेंसी ने बताया कि रसूलोफ की बेटी बारन अपने पिता का अवॉर्ड लेने पहुंचीं थीं।
ईरानी फिल्म निर्माता मोहम्मद रसूलोफ को सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा क्रिएट करने वाली फिल्में बनाने को लेकर एक साल जेल की सजा सुनाई गई है। पिछले दिनों मोहम्मद रसूलोफ ने बर्लिन फिल्म फेस्टिवल का गोल्डन बीयर अवॉर्ड जीता है। मोहम्मद रसूलोफ के वकील का कहना है कि उन्हें एक साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उनके वकील नासिर ज़राफशान ने बुधवार को द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि रसूलोफ़ को उनकी तीन फिल्मों की वजह से सजा मिली है। आरोप है कि ये फिल्में "सिस्टम के खिलाफ प्रचार" करती हैं। ज़राफशान ने कहा कि ईरान में चल रहे कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए वे आदेश की अपील करेंगे। देश में वायरस फैल रहा है। बता दें, रसूलोफ़ ने अपनी फ़िल्म "द इज़ नो ईविल" के लिए बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल का शीर्ष पुरस्कार जीता है। यह फिल्म ईरान में मौत की सजा और अत्याचार के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बनाई गई है। ईरानी अधिकारियों द्वारा रसूलोफ़ पर पाबंदी लगाए जाने के कारण शनिवार को वह पुरस्कार लेने नहीं पहुंच पाए थे। ऐसे में आयोजकों ने रसूलोफ़ के लिए एक खाली कुर्सी छोड़ी थी। जर्मनी की डीपीए समाचार एजेंसी ने बताया कि रसूलोफ की बेटी बारन अपने पिता का अवॉर्ड लेने पहुंचीं थीं।
आप नेता भगवंत मान ने रविवार (12 जून) को कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पंजाब में नशे के खिलाफ विरोध करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि वह और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समस्या का समाधान करने में पहले विफल रहे थे। उन्होंने राहुल पर दागी नेताओं को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में नशे की समस्या को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री ने चुप्पी साधे रखी जबकि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने मुद्दे की तरफ उनका ध्यान खींचा था।
आप नेता भगवंत मान ने रविवार को कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पंजाब में नशे के खिलाफ विरोध करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि वह और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समस्या का समाधान करने में पहले विफल रहे थे। उन्होंने राहुल पर दागी नेताओं को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में नशे की समस्या को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री ने चुप्पी साधे रखी जबकि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने मुद्दे की तरफ उनका ध्यान खींचा था।
पटनाः केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) 11 अक्टूबर को Bihar पहुंच रहे हैं। वह छपरा (Chapra) जिले में किसानों को संबोधित करेंगे। इससे पूर्व अमित शाह 22 सितबंर को पूर्णिया आए थे। यहां उन्होंने महारैली की थी। इस बार अमित शाह संपूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण (Jaiprakash Narayan) की जयंती पर 11 अक्टूबर को छपरा के सिताबदियारा पहुंच रहे हैं। छपरा सांसद राजीव प्रताप रूडी (Rajiv Pratap Rudy) के अनुसार केंद्रीय गृह और सहकारितामंत्री सुबह 10 बजे पटना एयरपोर्ट (Airport) पहुंचेंगे। Patna से 11:15 बजे हेलीकॉप्टर से 12 बजे सिताबदियारा पहुंचेंगे। सिताब दियारा (Sitab Diara) में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद 2:30 बजे अमनौर पहुंचेंगे। यहां छपरा, सीवान और गोपालगंज जिला के सहकारिता से जुड़े किसानों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर सहकारिता से जुड़ी देशव्यापी योजना का सूत्रपात भी सिताबदियारा से होगा।
पटनाः केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ग्यारह अक्टूबर को Bihar पहुंच रहे हैं। वह छपरा जिले में किसानों को संबोधित करेंगे। इससे पूर्व अमित शाह बाईस सितबंर को पूर्णिया आए थे। यहां उन्होंने महारैली की थी। इस बार अमित शाह संपूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण की जयंती पर ग्यारह अक्टूबर को छपरा के सिताबदियारा पहुंच रहे हैं। छपरा सांसद राजीव प्रताप रूडी के अनुसार केंद्रीय गृह और सहकारितामंत्री सुबह दस बजे पटना एयरपोर्ट पहुंचेंगे। Patna से ग्यारह:पंद्रह बजे हेलीकॉप्टर से बारह बजे सिताबदियारा पहुंचेंगे। सिताब दियारा में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद दो:तीस बजे अमनौर पहुंचेंगे। यहां छपरा, सीवान और गोपालगंज जिला के सहकारिता से जुड़े किसानों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर सहकारिता से जुड़ी देशव्यापी योजना का सूत्रपात भी सिताबदियारा से होगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
लगभग एक सप्ताह गुजर चुका था उन्हें इस गाँव में आये। एक दिन संकठा सिंह पड़ोस के गाँव से किसी पंचायत का फैसला करके अपनी साईकिल पर लौट रहे थे। दोपहर के बारह बज रहे होगें। लू और बवंडर उठ रहा था। अपने चेहरे को पूरी तरह गमझे से ढँके हुए थे, फिर भी चेहरे पर ताप लग रही थी। आँखे तक जलने लगीं थी। देखा कि मुन्नर पारिजात के नीचे चबूतरे पर लेटे हुए थे। संकठा सिंह थोड़ी दूर, पगडण्डी से गुजर रहे थे फिर भी इतना वे देख पा रहे थे कि मुन्नर चेहरे को दोनों बाहों के बीच में घुसाकर लू के थपेडों से बचने का अथक प्रयत्न कर रहे थे। घुटने और कुहनियाँ लगभग सट गयी थीं और शरीर दोहरा हो गया था। देखकर उनका मन द्रवित हो उठा। "पता नहीं कहाँ से आया है। इस लू की चपेट में आ गया तो राम नाम सत्य हो जाएगा।" गाँव में घुसे तो राम आधार पांडे के ओसार में ललिता पंडित भी मिल गए। कुछ और लोग भी बैठे थे। वे अपनी साईकिल रोक लिए। "पंचायत की बात तो अभी बताता हूँ, पहले जो देखकर आ रहा हूँ वह सुनो।" फिर ललिता पंडित को संबोधित करके बोले, "पंडित जी, वो तुम्हारे महात्मा को देखा। वहीं पारिजात के नीचे लू में पड़पड़ा रहे हैं...अरे यार कहीं कुछ हो-हवा गया तो एक नीरीह आदमी के मरने का पाप गाँव के माथे चढ़ जाएगा।" "अब हम क्या करें, हमने तो कहा था कि आकर मेरी मड़ई में शरण ले लो, पर वे माने ही नहीं।" ललिता पंडित अपनी जगह ठीक थे, "हम तो उस दिन सुबह से शाम तक लग कर पेड़ के नीचे चबूतरा बना दिए कि कम से कम छाँव तो रहेगा।" "ऐसा क्यों नहीं करते कि वहीं पर एक मड़ई डलवा दो।" संकठा सिंह ने कुछ सोचते हुए कहा। "बाबू साहब, हमारी हैसियत कहाँ है मड़ई डलवाने की" "एक काम करो मेरे बँसवार से दो-चार बाँस कटवा लो और ककटी वाले खेत के पास से सरपत। देखता हूँ कुछ रहेट्ठा और लकडा पड़ा होगा। टटरी बनवाकर चारो तरफ से घिरवा देना।" संकठा सिंह की बात सुनकर ललिता पंडित ऐसे खुश हुए जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी हो। कई बार मन में यह बात उठी तो थी पर माली हालत के कारण उसे मन में ही दबा देना पड़ा था। बाबा इस सेवा से अवश्य खुश हो जायेंगे। वे शाम से ही मड़ई बनवाने की व्यवस्था में जुट गए। दूसरे दिन शाम तक कनेर के झुरमुट के बीच साफ सफाई करके एक झोपड़ी डाल दी गयी। गाँव के बहुत से लोगों ने यथाशक्ति योगदान किया। मुख्य सामान तो संकठा सिंह के यहाँ से मिल ही गया था। बनिया ने बाँधने के लिए बाध मुफ्त में दे दिया। बेचन महतो अपने परिवार और आस पड़ोस के साथ मड़ई बनाने में पूरा श्रमदान दिए। राम आधार पांडे के यहाँ लकडी का एक बोटा पड़ा था, लोहार ने उससे एक तख्त बना दिया। दरी तो पहले से ही थी, वह तख्त पर बिछ गयी। रोज रोज गाँव से खाना आना मुन्नर को अच्छा नहीं लगता था। इसलिए एक दिन उन्होंने ललिता पंडित से स्वयं खाना बनाने की इच्छा प्रकट की। ललिता पंडित ने अन्य लोगों की मदद से खाना पकाने के लिए आवश्यक बर्तन रखवा दिया। मुन्नर स्वयं खाना पकाने लगे। जब मन होता तो दोनों वक़्त बना लेते, नहीं तो एक वक़्त से ही गुजारा कर लेते। गाँव से जो भी मिलने आता, साथ में कुछ आटा, चावल या दाल जो भी जिसकी इच्छा और सामर्थ्य होती, ले आता। अब मुन्नर के खाने, पहनने और रहने की समस्या का स्थायी समाधान हो चुका था। मड़ई बनने के बाद से वहाँ अधिक लोग आने भी लगे थे और ज्यादा देर तक बैठने लगे थे। मुन्नर भी अब खुश रहते थे और बहुत ही मनोयोग से तुलसी रामायण का पाठ और व्याख्या करते जो उन्होंने बाबूजी से सीखा था। यह नयी जीवन शैली उन्हें भाने लगी थी। न तो किसी से दुश्मनी थी और न ही किसी से बैर। भक्तों की कृपा से रामायण के अलावा कुछ एक और धार्मिक ग्रन्थ भी उनकी झोपड़ी में आ चुके थे। जब भी खाली समय रहता उसमें उनका अध्ययन करते। मन का क्लेश मिटने लगा था। किन्तु अपने गाँव घर का मोह कभी-कभी उन्हें आकर घेर लेता। "घर पर लोग कैसे होंगे, उनके आने के बाद क्या हुआ होगा ?" यह विचार कभी कभी मन में फन उठाकर खड़ा हो जाता और वे थोड़े अनमने हो उठते। बहरहाल, जिंदगी ने एक रास्ता पकड़ लिया था। एक निश्चित दिनचर्या में दिन गुजरने लगे थे। धीरे-धीरे वह स्थान "कुटी" के नाम से जाना जाने लगा था और मुन्नर "कुटी वाले बाबा" के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
लगभग एक सप्ताह गुजर चुका था उन्हें इस गाँव में आये। एक दिन संकठा सिंह पड़ोस के गाँव से किसी पंचायत का फैसला करके अपनी साईकिल पर लौट रहे थे। दोपहर के बारह बज रहे होगें। लू और बवंडर उठ रहा था। अपने चेहरे को पूरी तरह गमझे से ढँके हुए थे, फिर भी चेहरे पर ताप लग रही थी। आँखे तक जलने लगीं थी। देखा कि मुन्नर पारिजात के नीचे चबूतरे पर लेटे हुए थे। संकठा सिंह थोड़ी दूर, पगडण्डी से गुजर रहे थे फिर भी इतना वे देख पा रहे थे कि मुन्नर चेहरे को दोनों बाहों के बीच में घुसाकर लू के थपेडों से बचने का अथक प्रयत्न कर रहे थे। घुटने और कुहनियाँ लगभग सट गयी थीं और शरीर दोहरा हो गया था। देखकर उनका मन द्रवित हो उठा। "पता नहीं कहाँ से आया है। इस लू की चपेट में आ गया तो राम नाम सत्य हो जाएगा।" गाँव में घुसे तो राम आधार पांडे के ओसार में ललिता पंडित भी मिल गए। कुछ और लोग भी बैठे थे। वे अपनी साईकिल रोक लिए। "पंचायत की बात तो अभी बताता हूँ, पहले जो देखकर आ रहा हूँ वह सुनो।" फिर ललिता पंडित को संबोधित करके बोले, "पंडित जी, वो तुम्हारे महात्मा को देखा। वहीं पारिजात के नीचे लू में पड़पड़ा रहे हैं...अरे यार कहीं कुछ हो-हवा गया तो एक नीरीह आदमी के मरने का पाप गाँव के माथे चढ़ जाएगा।" "अब हम क्या करें, हमने तो कहा था कि आकर मेरी मड़ई में शरण ले लो, पर वे माने ही नहीं।" ललिता पंडित अपनी जगह ठीक थे, "हम तो उस दिन सुबह से शाम तक लग कर पेड़ के नीचे चबूतरा बना दिए कि कम से कम छाँव तो रहेगा।" "ऐसा क्यों नहीं करते कि वहीं पर एक मड़ई डलवा दो।" संकठा सिंह ने कुछ सोचते हुए कहा। "बाबू साहब, हमारी हैसियत कहाँ है मड़ई डलवाने की" "एक काम करो मेरे बँसवार से दो-चार बाँस कटवा लो और ककटी वाले खेत के पास से सरपत। देखता हूँ कुछ रहेट्ठा और लकडा पड़ा होगा। टटरी बनवाकर चारो तरफ से घिरवा देना।" संकठा सिंह की बात सुनकर ललिता पंडित ऐसे खुश हुए जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी हो। कई बार मन में यह बात उठी तो थी पर माली हालत के कारण उसे मन में ही दबा देना पड़ा था। बाबा इस सेवा से अवश्य खुश हो जायेंगे। वे शाम से ही मड़ई बनवाने की व्यवस्था में जुट गए। दूसरे दिन शाम तक कनेर के झुरमुट के बीच साफ सफाई करके एक झोपड़ी डाल दी गयी। गाँव के बहुत से लोगों ने यथाशक्ति योगदान किया। मुख्य सामान तो संकठा सिंह के यहाँ से मिल ही गया था। बनिया ने बाँधने के लिए बाध मुफ्त में दे दिया। बेचन महतो अपने परिवार और आस पड़ोस के साथ मड़ई बनाने में पूरा श्रमदान दिए। राम आधार पांडे के यहाँ लकडी का एक बोटा पड़ा था, लोहार ने उससे एक तख्त बना दिया। दरी तो पहले से ही थी, वह तख्त पर बिछ गयी। रोज रोज गाँव से खाना आना मुन्नर को अच्छा नहीं लगता था। इसलिए एक दिन उन्होंने ललिता पंडित से स्वयं खाना बनाने की इच्छा प्रकट की। ललिता पंडित ने अन्य लोगों की मदद से खाना पकाने के लिए आवश्यक बर्तन रखवा दिया। मुन्नर स्वयं खाना पकाने लगे। जब मन होता तो दोनों वक़्त बना लेते, नहीं तो एक वक़्त से ही गुजारा कर लेते। गाँव से जो भी मिलने आता, साथ में कुछ आटा, चावल या दाल जो भी जिसकी इच्छा और सामर्थ्य होती, ले आता। अब मुन्नर के खाने, पहनने और रहने की समस्या का स्थायी समाधान हो चुका था। मड़ई बनने के बाद से वहाँ अधिक लोग आने भी लगे थे और ज्यादा देर तक बैठने लगे थे। मुन्नर भी अब खुश रहते थे और बहुत ही मनोयोग से तुलसी रामायण का पाठ और व्याख्या करते जो उन्होंने बाबूजी से सीखा था। यह नयी जीवन शैली उन्हें भाने लगी थी। न तो किसी से दुश्मनी थी और न ही किसी से बैर। भक्तों की कृपा से रामायण के अलावा कुछ एक और धार्मिक ग्रन्थ भी उनकी झोपड़ी में आ चुके थे। जब भी खाली समय रहता उसमें उनका अध्ययन करते। मन का क्लेश मिटने लगा था। किन्तु अपने गाँव घर का मोह कभी-कभी उन्हें आकर घेर लेता। "घर पर लोग कैसे होंगे, उनके आने के बाद क्या हुआ होगा ?" यह विचार कभी कभी मन में फन उठाकर खड़ा हो जाता और वे थोड़े अनमने हो उठते। बहरहाल, जिंदगी ने एक रास्ता पकड़ लिया था। एक निश्चित दिनचर्या में दिन गुजरने लगे थे। धीरे-धीरे वह स्थान "कुटी" के नाम से जाना जाने लगा था और मुन्नर "कुटी वाले बाबा" के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
भुवनेश्वरः केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बालासोर जिले के बहानगा बाजार के लिए 2 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की, जहां 2 जून को हुए दुखद ट्रेन हादसे में 292 लोगों की मौत हो गई और 900 से अधिक घायल हो गए। बहनागा बाजार स्टेशन पर चल रहे जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करने के बाद, मंत्री ने कहा कि बहनागा के परिधीय विकास के लिए उनके एमपी एलएडी फंड से 1 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि बहनगा अस्पताल के नवीनीकरण के लिए भारतीय रेलवे द्वारा 1 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होंने उनमें से कुछ को पीड़ितों को बचाने और कीमती जीवन बचाने के लिए उनके वीरतापूर्ण प्रयासों के लिए सम्मानित किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की कि यहां कौन-कौन से विकास कार्य किए जा सकते हैं। Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.
भुवनेश्वरः केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बालासोर जिले के बहानगा बाजार के लिए दो करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की, जहां दो जून को हुए दुखद ट्रेन हादसे में दो सौ बानवे लोगों की मौत हो गई और नौ सौ से अधिक घायल हो गए। बहनागा बाजार स्टेशन पर चल रहे जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करने के बाद, मंत्री ने कहा कि बहनागा के परिधीय विकास के लिए उनके एमपी एलएडी फंड से एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि बहनगा अस्पताल के नवीनीकरण के लिए भारतीय रेलवे द्वारा एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होंने उनमें से कुछ को पीड़ितों को बचाने और कीमती जीवन बचाने के लिए उनके वीरतापूर्ण प्रयासों के लिए सम्मानित किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की कि यहां कौन-कौन से विकास कार्य किए जा सकते हैं। Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए . पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.
पुणेः पुणे से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एक लड़की जो बालकनी में बाल सुखाने के दौरान गिर गई। गनीमत ये रही कि लड़की के बाल फ्लैट की खिड़की के ग्रिल में फंस गए जिस वजह से वो लटक गई। इसके बाद घरवालों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी और कड़ी मशक्कत के बाद करीब दो घंटे बाद लड़की को बचाया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुणे फायर ब्रिगेड के अधिकारी समय पर मौके पर पहुंचे और लड़की तक पहुंचने के लिए सीढ़ी और रस्सी लगाई और अंततः उसे सुरक्षित बचा लिया गया। किसी ने पास से लड़की का मोबाइल से वीडियो बना लिया। लड़की के परेशान होने पर लोगों ने पुलिस और दमकल अधिकारियों को इसकी सूचना दी। दमकल अधिकारियों ने इमारत से एक लंबी रस्सी फेंकी और लड़की को बचाने के लिए सीढ़ी लगाई। जब अधिकारी लड़की के पास पहुंचे और उसे सुरक्षित नीचे उतारा तो सभी ने राहत की सांस ली।
पुणेः पुणे से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एक लड़की जो बालकनी में बाल सुखाने के दौरान गिर गई। गनीमत ये रही कि लड़की के बाल फ्लैट की खिड़की के ग्रिल में फंस गए जिस वजह से वो लटक गई। इसके बाद घरवालों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी और कड़ी मशक्कत के बाद करीब दो घंटे बाद लड़की को बचाया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुणे फायर ब्रिगेड के अधिकारी समय पर मौके पर पहुंचे और लड़की तक पहुंचने के लिए सीढ़ी और रस्सी लगाई और अंततः उसे सुरक्षित बचा लिया गया। किसी ने पास से लड़की का मोबाइल से वीडियो बना लिया। लड़की के परेशान होने पर लोगों ने पुलिस और दमकल अधिकारियों को इसकी सूचना दी। दमकल अधिकारियों ने इमारत से एक लंबी रस्सी फेंकी और लड़की को बचाने के लिए सीढ़ी लगाई। जब अधिकारी लड़की के पास पहुंचे और उसे सुरक्षित नीचे उतारा तो सभी ने राहत की सांस ली।
Jamshedpur : बिष्टुपुर पार्वती घाट के पास ब्राउन शुगर पी रहे युवक पर स्थानीय युवकों ने ईंट से हमला कर 20 हजार रुपये छीन लिए. घायल युवक को किसी तरह आस-पास के लोगों के सहयोग से इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल लाया गया. घायल सागर सीतारामडेरा के छायानगर का रहने वाला है. वह गली-मुहल्लोx में फेरी लगाकर कपड़े और ऋंगार का सामान बेचने का काम करता है. घायल युवक ने बताया कि उसने बिष्टुपुर पार्वती घाट से सटे बस्ती में रहने वाले अपने दोस्त तूफान के साथ कोलकाता जाने की योजना बना रखी थी. इसे लेकर वह तूफान के घर पहुंचा. वहां उसने पहले अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन किया. उसी बीच किसी ने उसे ब्राउन शुगर दे दिया. वह ब्राउन शुगर का सेवन कर ही रहा था, तभी कुछ स्थानीय युवकों ने उस पर ईंट से हमला कर दिया. इससे पहले कि वह संभल पाता युवकों ने उससे रुपये छीन लिए और फरार हो गए. घटना की सूचना पुलिस को दी गई है. उसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
Jamshedpur : बिष्टुपुर पार्वती घाट के पास ब्राउन शुगर पी रहे युवक पर स्थानीय युवकों ने ईंट से हमला कर बीस हजार रुपये छीन लिए. घायल युवक को किसी तरह आस-पास के लोगों के सहयोग से इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल लाया गया. घायल सागर सीतारामडेरा के छायानगर का रहने वाला है. वह गली-मुहल्लोx में फेरी लगाकर कपड़े और ऋंगार का सामान बेचने का काम करता है. घायल युवक ने बताया कि उसने बिष्टुपुर पार्वती घाट से सटे बस्ती में रहने वाले अपने दोस्त तूफान के साथ कोलकाता जाने की योजना बना रखी थी. इसे लेकर वह तूफान के घर पहुंचा. वहां उसने पहले अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन किया. उसी बीच किसी ने उसे ब्राउन शुगर दे दिया. वह ब्राउन शुगर का सेवन कर ही रहा था, तभी कुछ स्थानीय युवकों ने उस पर ईंट से हमला कर दिया. इससे पहले कि वह संभल पाता युवकों ने उससे रुपये छीन लिए और फरार हो गए. घटना की सूचना पुलिस को दी गई है. उसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
29042019प्रादेशिक समाचार 1945बजे मुख्य समाचार प्रदेश में उन्नीस मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का काम पूरा कुल पचपन प्रत्याशियों ने भरे पर्चे लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर जयराम ठाकुर ने चुराह और वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला में अपनेअपने प्रत्याशियों के पक्ष में की मतदान की अपील प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित साठ दशमलव सात नौ प्रतिशत रहा परिणाम फिर बिगड़ेंगे मौसम के तेवर मौसम विभाग की अगले दो दिनों के दौरान अंधड़ और ओलावृष्टि की चेतावनी नामांकन प्रदेश में उन्नीस मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का काम आज सम्पन्न हो गया नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन आज कुल सोलह प्रत्याशियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय के रूप में पर्चे दाखिल किए इसी के साथ प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या पचपन तक पहुंच गई है इनमें से सर्वाधिक इक्कीस नामांकन पत्र मंडी संसदीय क्षेत्र से दाखिल किए गए जबकि हमीरपुर में चौदह कांगड़ा में बारह और शिमला संसदीय क्षेत्र से आठ नामांकन पत्र भरे गए नामांकन पत्रों की कल तीस अप्रैल को जांच होगी और दो मई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे काजल इस बीच कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल ने आज धर्मशाला में पूरे दलबल के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री और पार्टी के अन्य नेता भी इस दौरान मौजूद रहे नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कांग्रेस ने दाड़ी में एक चुनाव जनसभा का भी आयोजन किया जिसे पार्टी नेताओं ने संबोधित किया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की चारों लोकसभा सीटे जीतने का दावा किया उन्होंने पंडित सुखराम को लेकर दिए अपने ब्यान को विरोधियों द्वारा तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप भी लगाया एक पवन काजल रजनी पाटिल और मुकेश अग्निहोत्री ने जनसभा को संबोधित किया तथा कहा कि भाजपा झूठे वायदे करती है और उसके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है मुख्यमंत्री वरिष्ठ भाजपा नेता व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि यूपीए सरकार के दस सालों के शासनकाल में देश विकास के लिए तरसता रहा क्योंकि उनके पास न तो कुशल नेतृतव था और न ही कोई नीति मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश में शासन के दौरान केवल अपना ही विकास किया मुख्यमंत्री आज चम्बा जिला के चुराह में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता मोदी लहर से घबरा कर चुनाव लड़ने के लिए तैयार ही नहीं हुए उन्होंने चुनाव क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा भी की कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर और स्थानीय विधायक व विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने भी जनसभा को संबोधित किया जयराम इस बीच मुख्यमंत्री ने आज शिमला से जारी एक ब्यान में कांग्रेस पर वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का आरोप लगाया है जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा के लिए देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मोदी सरकार वोट बैंक के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं कर सकती प्रचार लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार लगातार जोर पकड़ रहा है भाजपा व कांग्रेस के अलावा अन्य दल भी रैलियों व जनसंवाद के माध्यम से अपनेअपने प्रत्याशियों के पक्ष में लोगों से समर्थन मांग रहे हैं मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्यशी रामस्वरूप शर्मा ने कुल्लू विधानसभा क्षेत्र की लगबैली और भूईन जबकि शिमला से सुरेश कश्यप ने कसुम्पटी निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर जनसम्पर्क अभियान के माध्यम से वोट मांगे कश्यप ने इस दौरान कहा कि शिमला और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थाई समाधान उनकी प्राथमिकताओं में से एक है हमीरपुर संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर ने आज झंडुता विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर और मंडी संसदीय क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी आश्रय शर्मा और विधायक विक्रमादित्य सिंह ने रामपुर और आनी विधानसभा क्षेत्रों के विभिन्न स्थानों पर चुनाव प्रचार किया परिणाम छः हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने आज दसवी की परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है परिणाम साठ दश्मलव सात नौ प्रतिशत रहा गीतांजलि पब्लिक स्कूल ग्लोल धनेटा के अथर्व ठाकुर सात सौ में से छः सौ इक्यानवे अंक लेकर पहले स्थान पर रहे जबकि सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल मढ़ी के पारस दूसरे और सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल नम्होल के ध्रुव शर्मा व एंग्लो संस्कृत मॉडल स्कूल मंडी की रिद्धि शर्मा संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे पहले दस स्थानों पर रहे कुल उनतालीस विद्यार्थियों में से अट्ठाईस लड़कियां है बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि 10वीं की परीक्षा में एक लाख ग्यारह हजार नौ सौ अस्सी छात्र बैठे इनमें से सरसठ​ हजार तीन सौ उन्नीस विद्यार्थी पास हुए जबकि छः हजार तीन सौ पचानवे विद्यार्थियों की कम्पार्टमेंट आई है सुरेश कुमार सोनी ने कहा कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार अप्रैल महीने में परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है इससे पहले ये परिणाम मई में घोषित होता था राज्यपाल राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज राजभवन शिमला में हिमालयन आइबैक्स पर आधारित लघु वृत्त चित्र फिल्म द हिमालयन आईबैक्स डैन का पोस्टर जारी किया हिमालयन वेलोसिटी द्वारा प्रस्तुत फिल्म निर्माता देवकन्या ठाकुर और पुष्पराज ठाकुर के निर्देशन में तैयार की गई है इस लघु फिल्म में दर्शाया गया है कि स्थानीय महिलाओं ने इस वन्य प्राणी की सुरक्षा तथा संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है राज्यपाल ने फिल्म निर्माताओं के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि इस फिल्म से अन्य लोगों को भी इस विलुप्तप्रायः जानवर की रक्षा के लिए प्रेरणा मिलेगी इस फिल्म को पहले ही देश के कई पर्यावरण और वन्य जीव फिल्म समारोहों में चयनित किया जा चुका है आग ऊना जिला के हरोली उपमंडल के बाथड़ी गांव में आज हुए एक अग्निकांड में प्रवासी मजदूरों की पैंतीस झुग्गियां जलकर राख हो गई इस अग्निकांड में चार वर्षीय एक बालिका जिंदा जल गई मृतका की पहचान बिहार के बेगूसराय निवासी कुंदन दास की पुत्री संध्या के रूप में हुई है आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है माकपा माकपा प्रदेश सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने शिमला पुलिस पर मारपीट के शिकार एक परिवार के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है संजय चौहान ने आज शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि शहर के ढली क्षेत्र में हुई मारपीट की इस घटना में पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला तक दर्ज नहीं किया यहां तक कि पीड़ित परिवार को अस्पताल में सही उपचार नहीं दिया गया उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दोषी पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है महिला कांग्रेस प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल ने भाजपा पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है चंदेल ने आज शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा नेता वोटों की खातिर आए दिन महिलाओं को लेकर अमर्यादित ब्यान दे रहे हैं उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला सुरक्षा आसमान छूती महंगाई और कानून व्यवस्था की खराब हालत मौजूदा चुनाव में कांग्रेस के प्रमुख मुद्दे हैं जैनब चंदेल ने यह भी कहा कि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी है और चारों सीटों पर जीत दर्ज करेगी अनुराग हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी व सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में हार सामने देख कांग्रेस जातिवाद का जहर फैलाकर समाज को तोड़ने का प्रयास कर रही है अनुराग ठाकुर आज सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव का सफर जैसेजैसे आगे बढ़ रहा है विपक्षी खेमे की हताशा और भी बढ़ती जा रही है मौसम चार प्रदेशवासियों को एक बार फिर मौसम के बिगड़े तेवरों का सामना करना पड़ेगा मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों के मुताबिक हिमालय क्षेत्र में ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है इसके प्रभाव से तीस अप्रैल से चार मई तक प्रदेश में वर्षा और बर्फबारी की संभावना है विभाग ने तीस अप्रैल और पहली मई को राज्य के मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले अलगअलग स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की है इस बीच राज्य के निचले इलाकों में लोगों को प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ रहा है ऊना में आज अधिकतम तापमान चालीस दशमलव चार डिग्री सेल्सियस और शिमला में सत्ताईस दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया
दो करोड़ नब्बे लाख बयालीस हज़ार उन्नीसप्रादेशिक समाचार एक हज़ार नौ सौ पैंतालीसबजे मुख्य समाचार प्रदेश में उन्नीस मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का काम पूरा कुल पचपन प्रत्याशियों ने भरे पर्चे लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर जयराम ठाकुर ने चुराह और वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला में अपनेअपने प्रत्याशियों के पक्ष में की मतदान की अपील प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा दसवीं का परीक्षा परिणाम घोषित साठ दशमलव सात नौ प्रतिशत रहा परिणाम फिर बिगड़ेंगे मौसम के तेवर मौसम विभाग की अगले दो दिनों के दौरान अंधड़ और ओलावृष्टि की चेतावनी नामांकन प्रदेश में उन्नीस मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का काम आज सम्पन्न हो गया नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन आज कुल सोलह प्रत्याशियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय के रूप में पर्चे दाखिल किए इसी के साथ प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या पचपन तक पहुंच गई है इनमें से सर्वाधिक इक्कीस नामांकन पत्र मंडी संसदीय क्षेत्र से दाखिल किए गए जबकि हमीरपुर में चौदह कांगड़ा में बारह और शिमला संसदीय क्षेत्र से आठ नामांकन पत्र भरे गए नामांकन पत्रों की कल तीस अप्रैल को जांच होगी और दो मई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे काजल इस बीच कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी पवन काजल ने आज धर्मशाला में पूरे दलबल के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री और पार्टी के अन्य नेता भी इस दौरान मौजूद रहे नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कांग्रेस ने दाड़ी में एक चुनाव जनसभा का भी आयोजन किया जिसे पार्टी नेताओं ने संबोधित किया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की चारों लोकसभा सीटे जीतने का दावा किया उन्होंने पंडित सुखराम को लेकर दिए अपने ब्यान को विरोधियों द्वारा तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप भी लगाया एक पवन काजल रजनी पाटिल और मुकेश अग्निहोत्री ने जनसभा को संबोधित किया तथा कहा कि भाजपा झूठे वायदे करती है और उसके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है मुख्यमंत्री वरिष्ठ भाजपा नेता व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि यूपीए सरकार के दस सालों के शासनकाल में देश विकास के लिए तरसता रहा क्योंकि उनके पास न तो कुशल नेतृतव था और न ही कोई नीति मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश में शासन के दौरान केवल अपना ही विकास किया मुख्यमंत्री आज चम्बा जिला के चुराह में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता मोदी लहर से घबरा कर चुनाव लड़ने के लिए तैयार ही नहीं हुए उन्होंने चुनाव क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा भी की कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर और स्थानीय विधायक व विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने भी जनसभा को संबोधित किया जयराम इस बीच मुख्यमंत्री ने आज शिमला से जारी एक ब्यान में कांग्रेस पर वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का आरोप लगाया है जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा के लिए देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मोदी सरकार वोट बैंक के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं कर सकती प्रचार लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार लगातार जोर पकड़ रहा है भाजपा व कांग्रेस के अलावा अन्य दल भी रैलियों व जनसंवाद के माध्यम से अपनेअपने प्रत्याशियों के पक्ष में लोगों से समर्थन मांग रहे हैं मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्यशी रामस्वरूप शर्मा ने कुल्लू विधानसभा क्षेत्र की लगबैली और भूईन जबकि शिमला से सुरेश कश्यप ने कसुम्पटी निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर जनसम्पर्क अभियान के माध्यम से वोट मांगे कश्यप ने इस दौरान कहा कि शिमला और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थाई समाधान उनकी प्राथमिकताओं में से एक है हमीरपुर संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर ने आज झंडुता विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर और मंडी संसदीय क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी आश्रय शर्मा और विधायक विक्रमादित्य सिंह ने रामपुर और आनी विधानसभा क्षेत्रों के विभिन्न स्थानों पर चुनाव प्रचार किया परिणाम छः हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने आज दसवी की परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है परिणाम साठ दश्मलव सात नौ प्रतिशत रहा गीतांजलि पब्लिक स्कूल ग्लोल धनेटा के अथर्व ठाकुर सात सौ में से छः सौ इक्यानवे अंक लेकर पहले स्थान पर रहे जबकि सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल मढ़ी के पारस दूसरे और सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल नम्होल के ध्रुव शर्मा व एंग्लो संस्कृत मॉडल स्कूल मंडी की रिद्धि शर्मा संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे पहले दस स्थानों पर रहे कुल उनतालीस विद्यार्थियों में से अट्ठाईस लड़कियां है बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि दसवीं की परीक्षा में एक लाख ग्यारह हजार नौ सौ अस्सी छात्र बैठे इनमें से सरसठ​ हजार तीन सौ उन्नीस विद्यार्थी पास हुए जबकि छः हजार तीन सौ पचानवे विद्यार्थियों की कम्पार्टमेंट आई है सुरेश कुमार सोनी ने कहा कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार अप्रैल महीने में परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है इससे पहले ये परिणाम मई में घोषित होता था राज्यपाल राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज राजभवन शिमला में हिमालयन आइबैक्स पर आधारित लघु वृत्त चित्र फिल्म द हिमालयन आईबैक्स डैन का पोस्टर जारी किया हिमालयन वेलोसिटी द्वारा प्रस्तुत फिल्म निर्माता देवकन्या ठाकुर और पुष्पराज ठाकुर के निर्देशन में तैयार की गई है इस लघु फिल्म में दर्शाया गया है कि स्थानीय महिलाओं ने इस वन्य प्राणी की सुरक्षा तथा संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है राज्यपाल ने फिल्म निर्माताओं के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि इस फिल्म से अन्य लोगों को भी इस विलुप्तप्रायः जानवर की रक्षा के लिए प्रेरणा मिलेगी इस फिल्म को पहले ही देश के कई पर्यावरण और वन्य जीव फिल्म समारोहों में चयनित किया जा चुका है आग ऊना जिला के हरोली उपमंडल के बाथड़ी गांव में आज हुए एक अग्निकांड में प्रवासी मजदूरों की पैंतीस झुग्गियां जलकर राख हो गई इस अग्निकांड में चार वर्षीय एक बालिका जिंदा जल गई मृतका की पहचान बिहार के बेगूसराय निवासी कुंदन दास की पुत्री संध्या के रूप में हुई है आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है माकपा माकपा प्रदेश सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने शिमला पुलिस पर मारपीट के शिकार एक परिवार के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है संजय चौहान ने आज शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि शहर के ढली क्षेत्र में हुई मारपीट की इस घटना में पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला तक दर्ज नहीं किया यहां तक कि पीड़ित परिवार को अस्पताल में सही उपचार नहीं दिया गया उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दोषी पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है महिला कांग्रेस प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल ने भाजपा पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है चंदेल ने आज शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा नेता वोटों की खातिर आए दिन महिलाओं को लेकर अमर्यादित ब्यान दे रहे हैं उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला सुरक्षा आसमान छूती महंगाई और कानून व्यवस्था की खराब हालत मौजूदा चुनाव में कांग्रेस के प्रमुख मुद्दे हैं जैनब चंदेल ने यह भी कहा कि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी है और चारों सीटों पर जीत दर्ज करेगी अनुराग हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी व सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में हार सामने देख कांग्रेस जातिवाद का जहर फैलाकर समाज को तोड़ने का प्रयास कर रही है अनुराग ठाकुर आज सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव का सफर जैसेजैसे आगे बढ़ रहा है विपक्षी खेमे की हताशा और भी बढ़ती जा रही है मौसम चार प्रदेशवासियों को एक बार फिर मौसम के बिगड़े तेवरों का सामना करना पड़ेगा मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों के मुताबिक हिमालय क्षेत्र में ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है इसके प्रभाव से तीस अप्रैल से चार मई तक प्रदेश में वर्षा और बर्फबारी की संभावना है विभाग ने तीस अप्रैल और पहली मई को राज्य के मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले अलगअलग स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की है इस बीच राज्य के निचले इलाकों में लोगों को प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ रहा है ऊना में आज अधिकतम तापमान चालीस दशमलव चार डिग्री सेल्सियस और शिमला में सत्ताईस दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया
ज्योतिष के अनुसार, वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला व कुंभ राशि के लोगों के लिए गोमेद पहनना लाभकारी माना जाता है। क्योंकि इन ग्रहों के राशि स्वामियों से राहु ग्रह का मित्रता का भाव है। साथ ही कुंडली में राहु अगर राशि के छठवें और आठवें भाव या लग्न में विराजमान हो तो गोमेद धारण करना शुभ रहता है। कुंडली में राहु कुंडली में शुभ स्थिति में हो और खुद छठवें व आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद पहनने से व्यक्ति काफी सफलता मिलती सकती है। वहीं अगर व्यक्ति पर राहु ग्रह की महादशा चल रही हो और राहु कुंडली में सकारात्मक स्थित हो तो भी गोमेद पहन सकते हैं। लेकिन अगर राहु ग्रह नीच अवस्था में हो तो गोमेद धारण नहीं करें। गोमेद धारण करने से अज्ञात भय खत्म होता है। साथ ही इसको धारण करने से व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा का वास नहीं होता है। वहीं जो लोग शेयर बाजार, सट्टा और लॉटरी में धन का निवेश करते हैं, उनके लिए भी गोमेद धारण करना शुभ हो सकता है। वहीं । साथ ही जो लोग राजनीति में सक्रिय हैं वो लोग भी गोमेद धारण कर सकते हैं। गोमेद रत्न को बाजार से 7 से सवा 8 रत्ती का खरीदना चाहिए। साथ ही अंगूठी को अष्टधातु या चांदी में बनवाना चाहिए। वहीं गोमेद को शनिवार के दिन स्वाती, आर्दा व शतभिषा नक्षत्र में धारण कर सकते हैं। साथ ही पहनने से पहले अंगूठी को गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद ओम रां रावे नमः मंत्र का एक माला जप करें और मध्यमा उंगली में धारण करें।
ज्योतिष के अनुसार, वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला व कुंभ राशि के लोगों के लिए गोमेद पहनना लाभकारी माना जाता है। क्योंकि इन ग्रहों के राशि स्वामियों से राहु ग्रह का मित्रता का भाव है। साथ ही कुंडली में राहु अगर राशि के छठवें और आठवें भाव या लग्न में विराजमान हो तो गोमेद धारण करना शुभ रहता है। कुंडली में राहु कुंडली में शुभ स्थिति में हो और खुद छठवें व आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद पहनने से व्यक्ति काफी सफलता मिलती सकती है। वहीं अगर व्यक्ति पर राहु ग्रह की महादशा चल रही हो और राहु कुंडली में सकारात्मक स्थित हो तो भी गोमेद पहन सकते हैं। लेकिन अगर राहु ग्रह नीच अवस्था में हो तो गोमेद धारण नहीं करें। गोमेद धारण करने से अज्ञात भय खत्म होता है। साथ ही इसको धारण करने से व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा का वास नहीं होता है। वहीं जो लोग शेयर बाजार, सट्टा और लॉटरी में धन का निवेश करते हैं, उनके लिए भी गोमेद धारण करना शुभ हो सकता है। वहीं । साथ ही जो लोग राजनीति में सक्रिय हैं वो लोग भी गोमेद धारण कर सकते हैं। गोमेद रत्न को बाजार से सात से सवा आठ रत्ती का खरीदना चाहिए। साथ ही अंगूठी को अष्टधातु या चांदी में बनवाना चाहिए। वहीं गोमेद को शनिवार के दिन स्वाती, आर्दा व शतभिषा नक्षत्र में धारण कर सकते हैं। साथ ही पहनने से पहले अंगूठी को गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद ओम रां रावे नमः मंत्र का एक माला जप करें और मध्यमा उंगली में धारण करें।
कर्कः- आज कहीं से शुभ समाचार प्राप्त होगा. बीते वक्त में किए गए कुछ फैसलों से आपको अब लाभ प्राप्त होगा. रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे. मानसिक परमानन्द की अनुभूति होगी. आपके पारिवारिक जीवन में तनाव और अप्रियता बढ़ सकती है. पारिवारिक रिश्तों में आई गांठो को सुलझाने पर ध्यान दें. जीवन के कुछ महत्वपूर्ण विषयों में शीघ्र निर्णय लेने से बचें. प्यार और रोमांस के लिए आज का दिन अच्छा नहीं रहेगा. मान सम्मान की प्राप्ति होगी.
कर्कः- आज कहीं से शुभ समाचार प्राप्त होगा. बीते वक्त में किए गए कुछ फैसलों से आपको अब लाभ प्राप्त होगा. रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे. मानसिक परमानन्द की अनुभूति होगी. आपके पारिवारिक जीवन में तनाव और अप्रियता बढ़ सकती है. पारिवारिक रिश्तों में आई गांठो को सुलझाने पर ध्यान दें. जीवन के कुछ महत्वपूर्ण विषयों में शीघ्र निर्णय लेने से बचें. प्यार और रोमांस के लिए आज का दिन अच्छा नहीं रहेगा. मान सम्मान की प्राप्ति होगी.
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेताअक्षय कुमार (Akshay Kumar) लगातार 8 दिन तक कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई है। अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना (Twinkle Khanna) ने सोशल मीडिया के जरिए ये जानकारी दी है। आज ये अभिनेता हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंचे हैं. हालांकि ट्विंकल ने इस गुड न्यूज को काफी अलग अंदाज में शेयर किया है। ट्विंकल खन्ना (Twinkle Khanna) ने सोशल मीडिया पर एक अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ अपना एक कैरिकेचर शेयर किया है। इस कैरिकेचर के साथ कैप्शन में ट्विंकल ने लिखा, 'स्वस्थ और सुरक्षित वापसी, अपने पास पाकर अच्छा लग रहा है।' इसके साथ ही ट्विंकल ने #allizwell का इस्तेमाल किया है। ट्विंकल के पोस्ट पर फैंस को साथ-साथ कई बड़े सितरे भी कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हाल ही में कोविड पॉजिटिव हुईं एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने पोस्ट पर एक दिल वाली इमोजी शेयर कर रिएक्ट किया है। याद दिला दे कि कोविड संक्रमित होने के बाद 5 अप्रैल को अक्षय कुमार अस्पताल में भर्ती हुए थे। अक्षय ने सोशल मीडिया पर लिखा था, 'आपकी दुआओं का असर हो रहा है। मैं ठीक हूं लेकिन मुझे एहतियात के तौर पर हॉस्पिटल में एडमिट होने की सलाह दी गई है। मैं एडमिट हो गया हैं, जल्द वापस आउंगा। आप लोग अपना ध्यान रखें।' बता दें कि अक्षय कुमार (Akshay Kumar) अपनी अगली फिल्म 'राम सेतु' की शूटिंग कर रहे थे। ऐसे में उनकी टीम के अन्य सदस्यों का भी कोरोना टेस्ट किया गया था, जिसमें से करीब 45 जूनियर आर्टिस्ट भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेताअक्षय कुमार लगातार आठ दिन तक कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई है। अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने सोशल मीडिया के जरिए ये जानकारी दी है। आज ये अभिनेता हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंचे हैं. हालांकि ट्विंकल ने इस गुड न्यूज को काफी अलग अंदाज में शेयर किया है। ट्विंकल खन्ना ने सोशल मीडिया पर एक अक्षय कुमार के साथ अपना एक कैरिकेचर शेयर किया है। इस कैरिकेचर के साथ कैप्शन में ट्विंकल ने लिखा, 'स्वस्थ और सुरक्षित वापसी, अपने पास पाकर अच्छा लग रहा है।' इसके साथ ही ट्विंकल ने #allizwell का इस्तेमाल किया है। ट्विंकल के पोस्ट पर फैंस को साथ-साथ कई बड़े सितरे भी कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हाल ही में कोविड पॉजिटिव हुईं एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने पोस्ट पर एक दिल वाली इमोजी शेयर कर रिएक्ट किया है। याद दिला दे कि कोविड संक्रमित होने के बाद पाँच अप्रैल को अक्षय कुमार अस्पताल में भर्ती हुए थे। अक्षय ने सोशल मीडिया पर लिखा था, 'आपकी दुआओं का असर हो रहा है। मैं ठीक हूं लेकिन मुझे एहतियात के तौर पर हॉस्पिटल में एडमिट होने की सलाह दी गई है। मैं एडमिट हो गया हैं, जल्द वापस आउंगा। आप लोग अपना ध्यान रखें।' बता दें कि अक्षय कुमार अपनी अगली फिल्म 'राम सेतु' की शूटिंग कर रहे थे। ऐसे में उनकी टीम के अन्य सदस्यों का भी कोरोना टेस्ट किया गया था, जिसमें से करीब पैंतालीस जूनियर आर्टिस्ट भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।
तुलसी की जीवन-यात्रां हो जाती है कि गोसाईं जी का व्याह नहीं हुआ था, वह बालब्रह्मचारी थे । [ विनय-पत्रिका, सटीक; पृष्ठ ११७ - १८ ] अस्तु । एक ओर कुछ लोगों की धारणा यह है तो पत्नी दूसरी ओर डा० माताप्रसाद गुप्त का पक्ष यह है - ४७, ऐसा प्रतीत होता है कि तुलसीदास ने व्यतीत किया था, क्योंकि यदि वस्तुस्थिति इसके विपरीत होती तो 'दोहावली' में संकलित इस दोहे का कोई अवसर न उपस्थित होता : खरिया खरी कपूर सत्र उचित न पिय तिय त्याग । के खरिया मोहिं मेलि के बिमल विवेक विराग ।।२५५।। और न 'विनय पत्रिका' में तुलसीदास के निम्नलिखित कथन आते : ( क ) चोवन ज्वर जुवती कुपथ्य करि * भयो त्रिदोष भरे मदन वाय ॥ ८३ ।। (ख) सखा न सुसेवक न सुतिय न प्रभु आप माय बाप तुलसी साँची कहत ॥ २५६ ॥ 'वाहुक' के निम्नलिखित छंद से भी कदाचित् इस बात का समर्थन होता है - बाल्यावस्था में राम-सम्मुख होने के उपरान्त कवि के 'लोक रीति' में पढ़ने का अभिप्राय यही ज्ञात होता है : बालपने सूधे मन राम सनमुख गयो राम नाम लेत माँगि खात टूक टाक हौं । पस्यो लोक रीति में पुनीत प्रीति राम राय मोहवस बैठो तोरि तरफ तराक हौं । खोटे खोटे आचरनं आचरंत अपनायो अंजनी कुमार सोध्यो राम पानि पाक हौं ।
तुलसी की जीवन-यात्रां हो जाती है कि गोसाईं जी का व्याह नहीं हुआ था, वह बालब्रह्मचारी थे । [ विनय-पत्रिका, सटीक; पृष्ठ एक सौ सत्रह - अट्ठारह ] अस्तु । एक ओर कुछ लोगों की धारणा यह है तो पत्नी दूसरी ओर डाशून्य माताप्रसाद गुप्त का पक्ष यह है - सैंतालीस, ऐसा प्रतीत होता है कि तुलसीदास ने व्यतीत किया था, क्योंकि यदि वस्तुस्थिति इसके विपरीत होती तो 'दोहावली' में संकलित इस दोहे का कोई अवसर न उपस्थित होता : खरिया खरी कपूर सत्र उचित न पिय तिय त्याग । के खरिया मोहिं मेलि के बिमल विवेक विराग ।।दो सौ पचपन।। और न 'विनय पत्रिका' में तुलसीदास के निम्नलिखित कथन आते : चोवन ज्वर जुवती कुपथ्य करि * भयो त्रिदोष भरे मदन वाय ॥ तिरासी ।। सखा न सुसेवक न सुतिय न प्रभु आप माय बाप तुलसी साँची कहत ॥ दो सौ छप्पन ॥ 'वाहुक' के निम्नलिखित छंद से भी कदाचित् इस बात का समर्थन होता है - बाल्यावस्था में राम-सम्मुख होने के उपरान्त कवि के 'लोक रीति' में पढ़ने का अभिप्राय यही ज्ञात होता है : बालपने सूधे मन राम सनमुख गयो राम नाम लेत माँगि खात टूक टाक हौं । पस्यो लोक रीति में पुनीत प्रीति राम राय मोहवस बैठो तोरि तरफ तराक हौं । खोटे खोटे आचरनं आचरंत अपनायो अंजनी कुमार सोध्यो राम पानि पाक हौं ।
बता दें कि लिंगायत नेता येदियुरप्पा को सुब्रमण्यम स्वामी का समर्थन मिला है। वहीं लिंगायत मठों के कई संतों ने भी मुख्यमंत्री को पद से हटाने की अटकलों के बीच उनका समर्थन करना शुरू कर दिया है। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें कुछ समय से चल रही हैं और इसे पिछले हफ्ते येदियुरप्पा के दिल्ली दौरे के बाद और बल मिला था। येदियुरप्पा ने हालांकि इन अटकलों को निराधार बताते हुए उन्हें सिरे से खारिज कर दिया है।
बता दें कि लिंगायत नेता येदियुरप्पा को सुब्रमण्यम स्वामी का समर्थन मिला है। वहीं लिंगायत मठों के कई संतों ने भी मुख्यमंत्री को पद से हटाने की अटकलों के बीच उनका समर्थन करना शुरू कर दिया है। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें कुछ समय से चल रही हैं और इसे पिछले हफ्ते येदियुरप्पा के दिल्ली दौरे के बाद और बल मिला था। येदियुरप्पा ने हालांकि इन अटकलों को निराधार बताते हुए उन्हें सिरे से खारिज कर दिया है।
है। मै ऐसे मामले भी जानता हूँ जिनमें कई आदमी वापिस लौटा दिये गये है क्योंकि वे परीक्षक अधिकारीको यह तसल्ली नहीं करा सके कि वे शरणार्थी है । इसलिए यदि परवाना कार्यालयके विरुद्ध कोई शिकायत कर सकते है तो वे ब्रिटिश भारतीय ही है । और वे उम जरायमपेशा जातिके नहीं है जिनका जिक्र श्री हॉस्केनने किया है। श्री लवडेने एक बार फिर पीटर्सबर्ग के महापौर द्वारा प्रकाशित आँकड़ोका हवाला दिया है । परन्तु इन आँकड़ोके सम्बन्धमें ब्रिटिश भारतीय सघने पीटर्सवर्ग के महापौरको जो चुनौती दी थी उसे उन्होंने अवतक स्वीकार नहीं किया है, हालाँकि उत्तेजनाकी बात पहले उन्होने की थी । मै उस पत्रमं से कुछ शब्द उद्धृत करनेका साहस करता हूँ जो कि ब्रिटिश भारतीय संघ के अध्यक्षने आपको ९ दिसम्बरको लिखा था । में नहीं मानता कि इस समय पीटर्सबर्ग में ४९ भारतीय व्यापारी है। भारतीय बस्तीसे अलग पीटर्सबर्ग नगरमें भारतीयोंके केवल २८ वस्तु-भण्डार है और इनमें कुछके मालिक एक ही भारतीय है । . युद्धसे पहले नगरके अन्दर कमसे कम २३ भारतीय वस्तुभण्डार थे । इन सब दूकानदारोके नाम उसी पत्रमें दिये हुए है । इस वक्तव्यको मिथ्या कभी भी सिद्ध नही किया गया है। किन्तु श्री लवडे कहते हैं कि एशियाई व्यापारी आयोगने रिपोर्ट दी है कि युद्धसे पहले पीटर्सवर्गमे विना परवानेका केवल एक भारतीय व्यापारी था । यह बात भ्रामक है। मेरे सामने एशियाई व्यापारी आयोगकी पूरी रिपोर्ट मौजूद है। पहले तो यह रिपोर्ट अन्तरिम है। दूसरे आयोगके सदस्य यह दावा नहीं करते कि उन्होंने बिना परवानोके व्यापार करनेवाले भारतीयोकी सख्याका निश्चित पता लगा लिया है। आयोगके सदस्योने अपने सम्मुख प्रस्तुत किये गये दावोका उल्लेखमात्र किया है । उन्होने कहा है कि पीटर्सवर्ग से उन्हें केवल एक ब्रिटिश भारतीयका दावा मिला । कुल मिलाकर उनके सामने केवल २३३ दावे पेश किये गये थे । निश्चय ही इन दावोसे उन एशियाई व्यापारियोकी सूची खतम नही हो जाती जो कि यहाँ युद्धसे पहले मौजूद थे। समाचारपत्रोमे यह जानकारी भी छपी थी कि आयोगके सदस्यों द्वारा अपने अधिकारके सम्बन्धमे निर्णय देनेके बाद ब्रिटिश भारतीयोने अपने सब दावे वापिस ले लिये और आयोगकी कार्रवाईमे भाग लेना बन्द कर दिया । आयोगके सदस्योने यह भी लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालयने उपनिवेशमे ब्रिटिश भारतीयोके स्वतन्त्रतापूर्वक व्यापार करनेके अधिकारके विषयमे, दायर किये गये प्रसिद्ध परीक्षात्मक मुकदमेका जो फैसला दिया, उसके कारण उनका काम बीचमे ही रुक गया । अवश्य ही श्री लवडे आयोगकी रिपोर्टके सम्बन्धमे इन सब तथ्योको जानते होगे। उसके बावजूद यदि उन जैसे जिम्मेवार राजनीतिक नेता ऐसी बात कहे जो कि सत्य सिद्ध नहीं की जा सकती, और जनतामे भ्रम फलानेका प्रयत्न करे तो यह आश्चर्य है । मैं मानता हूँ कि प्रिटोरियाकी वस्तीमे भारतीयोकी आबादी बढ़ गई है । वह शायद पीटर्सवर्ग और पॉचेफस्ट्रममे भी बढी है । परन्तु क्या वे यह तथ्य भी ध्यानमे रखेगे कि जोहानिसबर्गकी वस्ती तो बिलकुल खतम ही हो गई है; पुरानी वस्तीमे जितने ब्रिटिश भारतीय रहते थे उनमें से अब आधे भी नही रहे है; और पिछले तीन महीनोमे कमसे कम ३०० ब्रिटिश भारतीय जोहानिसबर्ग छोड़कर चले गये है ? श्री कनिंघम ग्रीनके सामने प्रस्तुत किये गये आँकड़ोके अनुसार, ट्रान्सवालमे युद्धसे पहले १५,००० भारतीय थे । परवाना विभागने उनको १२,००० से अधिक परवाने नही दिये, और चूंकि उपनिवेश छोड़कर जानेवाले भारतीयोकी संरया उनसे अधिक ह जो कि यहाँ आने दिये जा रहे है, इसलिए मै यह निवेदन करनेका साहस करता हूँ
है। मै ऐसे मामले भी जानता हूँ जिनमें कई आदमी वापिस लौटा दिये गये है क्योंकि वे परीक्षक अधिकारीको यह तसल्ली नहीं करा सके कि वे शरणार्थी है । इसलिए यदि परवाना कार्यालयके विरुद्ध कोई शिकायत कर सकते है तो वे ब्रिटिश भारतीय ही है । और वे उम जरायमपेशा जातिके नहीं है जिनका जिक्र श्री हॉस्केनने किया है। श्री लवडेने एक बार फिर पीटर्सबर्ग के महापौर द्वारा प्रकाशित आँकड़ोका हवाला दिया है । परन्तु इन आँकड़ोके सम्बन्धमें ब्रिटिश भारतीय सघने पीटर्सवर्ग के महापौरको जो चुनौती दी थी उसे उन्होंने अवतक स्वीकार नहीं किया है, हालाँकि उत्तेजनाकी बात पहले उन्होने की थी । मै उस पत्रमं से कुछ शब्द उद्धृत करनेका साहस करता हूँ जो कि ब्रिटिश भारतीय संघ के अध्यक्षने आपको नौ दिसम्बरको लिखा था । में नहीं मानता कि इस समय पीटर्सबर्ग में उनचास भारतीय व्यापारी है। भारतीय बस्तीसे अलग पीटर्सबर्ग नगरमें भारतीयोंके केवल अट्ठाईस वस्तु-भण्डार है और इनमें कुछके मालिक एक ही भारतीय है । . युद्धसे पहले नगरके अन्दर कमसे कम तेईस भारतीय वस्तुभण्डार थे । इन सब दूकानदारोके नाम उसी पत्रमें दिये हुए है । इस वक्तव्यको मिथ्या कभी भी सिद्ध नही किया गया है। किन्तु श्री लवडे कहते हैं कि एशियाई व्यापारी आयोगने रिपोर्ट दी है कि युद्धसे पहले पीटर्सवर्गमे विना परवानेका केवल एक भारतीय व्यापारी था । यह बात भ्रामक है। मेरे सामने एशियाई व्यापारी आयोगकी पूरी रिपोर्ट मौजूद है। पहले तो यह रिपोर्ट अन्तरिम है। दूसरे आयोगके सदस्य यह दावा नहीं करते कि उन्होंने बिना परवानोके व्यापार करनेवाले भारतीयोकी सख्याका निश्चित पता लगा लिया है। आयोगके सदस्योने अपने सम्मुख प्रस्तुत किये गये दावोका उल्लेखमात्र किया है । उन्होने कहा है कि पीटर्सवर्ग से उन्हें केवल एक ब्रिटिश भारतीयका दावा मिला । कुल मिलाकर उनके सामने केवल दो सौ तैंतीस दावे पेश किये गये थे । निश्चय ही इन दावोसे उन एशियाई व्यापारियोकी सूची खतम नही हो जाती जो कि यहाँ युद्धसे पहले मौजूद थे। समाचारपत्रोमे यह जानकारी भी छपी थी कि आयोगके सदस्यों द्वारा अपने अधिकारके सम्बन्धमे निर्णय देनेके बाद ब्रिटिश भारतीयोने अपने सब दावे वापिस ले लिये और आयोगकी कार्रवाईमे भाग लेना बन्द कर दिया । आयोगके सदस्योने यह भी लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालयने उपनिवेशमे ब्रिटिश भारतीयोके स्वतन्त्रतापूर्वक व्यापार करनेके अधिकारके विषयमे, दायर किये गये प्रसिद्ध परीक्षात्मक मुकदमेका जो फैसला दिया, उसके कारण उनका काम बीचमे ही रुक गया । अवश्य ही श्री लवडे आयोगकी रिपोर्टके सम्बन्धमे इन सब तथ्योको जानते होगे। उसके बावजूद यदि उन जैसे जिम्मेवार राजनीतिक नेता ऐसी बात कहे जो कि सत्य सिद्ध नहीं की जा सकती, और जनतामे भ्रम फलानेका प्रयत्न करे तो यह आश्चर्य है । मैं मानता हूँ कि प्रिटोरियाकी वस्तीमे भारतीयोकी आबादी बढ़ गई है । वह शायद पीटर्सवर्ग और पॉचेफस्ट्रममे भी बढी है । परन्तु क्या वे यह तथ्य भी ध्यानमे रखेगे कि जोहानिसबर्गकी वस्ती तो बिलकुल खतम ही हो गई है; पुरानी वस्तीमे जितने ब्रिटिश भारतीय रहते थे उनमें से अब आधे भी नही रहे है; और पिछले तीन महीनोमे कमसे कम तीन सौ ब्रिटिश भारतीय जोहानिसबर्ग छोड़कर चले गये है ? श्री कनिंघम ग्रीनके सामने प्रस्तुत किये गये आँकड़ोके अनुसार, ट्रान्सवालमे युद्धसे पहले पंद्रह,शून्य भारतीय थे । परवाना विभागने उनको बारह,शून्य से अधिक परवाने नही दिये, और चूंकि उपनिवेश छोड़कर जानेवाले भारतीयोकी संरया उनसे अधिक ह जो कि यहाँ आने दिये जा रहे है, इसलिए मै यह निवेदन करनेका साहस करता हूँ
21 मई यानि की कल पृथ्वी पर अब तक का सबसे बड़ा उल्का पिंड गिरने वाला है। जिसको लेकर अब वैज्ञानिकों को भी डर सताने लगा है। गुरुवार को अब तक का सबसे खतरनाक उल्का 1997 BQ आने वाला है। खास बात यह है कि इसे अंतरिक्ष के सबसे बड़े और खतरनाक उल्का पिंडों की कैटिगरी में शामिल किया जाता है। 1997 में खोजा गया। यही वजह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक एक किलोमीटर लंबे किसी भी उल्का के पृथ्वी के टकराने से विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। 1997 BQ एस्टोरॉयड को 136795 के नाम से भी जाना जाता है। यह 11. 6 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। NASA ने 1997 में बताया था कि 1997 BQ एस्टोरॉयड 0. 668 से लेकर 1. 493 चौड़ा है। जिस पर तभी से ही वैज्ञानिकों ने नजर बनाई हुई है। लंबे इंतजार के बाद कल ये उल्का पृथ्वी पर गिर सकता है। हालांकि, इसकी ताजा स्थिति की बात करें तो माना जा रहा है कि यह पृथ्वी से 6. 156 मिलियन किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। ये उल्का भले ही कोई खतरा न हो लेकिन नासा के वैज्ञानिक पूरी सावधानी बरत रहे हैं। क्योंकि यह 97 प्रतिशत दूसरे उल्का पिंड की तुलना में ज्यादा बड़ा है और अगर यह पृथ्वी से टकराता है तो भयानक तबाही लाने में सक्षम है। यहां तक कि अगर यह उल्का बिना पृथ्वी को छुए भी निकला तो भी यह विशाल सुनामी ला सकता है। इसलिए वैज्ञानिक इस उल्का पिंड को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरतना चाहते हैं। तभी तो वैज्ञानिकों ने इस उल्का पर पूरी नजर बनाई हुई है।
इक्कीस मई यानि की कल पृथ्वी पर अब तक का सबसे बड़ा उल्का पिंड गिरने वाला है। जिसको लेकर अब वैज्ञानिकों को भी डर सताने लगा है। गुरुवार को अब तक का सबसे खतरनाक उल्का एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे BQ आने वाला है। खास बात यह है कि इसे अंतरिक्ष के सबसे बड़े और खतरनाक उल्का पिंडों की कैटिगरी में शामिल किया जाता है। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में खोजा गया। यही वजह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक एक किलोमीटर लंबे किसी भी उल्का के पृथ्वी के टकराने से विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे BQ एस्टोरॉयड को एक लाख छत्तीस हज़ार सात सौ पचानवे के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्यारह. छः किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। NASA ने एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में बताया था कि एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे BQ एस्टोरॉयड शून्य. छः सौ अड़सठ से लेकर एक. चार सौ तिरानवे चौड़ा है। जिस पर तभी से ही वैज्ञानिकों ने नजर बनाई हुई है। लंबे इंतजार के बाद कल ये उल्का पृथ्वी पर गिर सकता है। हालांकि, इसकी ताजा स्थिति की बात करें तो माना जा रहा है कि यह पृथ्वी से छः. एक सौ छप्पन मिलियन किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। ये उल्का भले ही कोई खतरा न हो लेकिन नासा के वैज्ञानिक पूरी सावधानी बरत रहे हैं। क्योंकि यह सत्तानवे प्रतिशत दूसरे उल्का पिंड की तुलना में ज्यादा बड़ा है और अगर यह पृथ्वी से टकराता है तो भयानक तबाही लाने में सक्षम है। यहां तक कि अगर यह उल्का बिना पृथ्वी को छुए भी निकला तो भी यह विशाल सुनामी ला सकता है। इसलिए वैज्ञानिक इस उल्का पिंड को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरतना चाहते हैं। तभी तो वैज्ञानिकों ने इस उल्का पर पूरी नजर बनाई हुई है।
विक्षराय नमः नाशरहित परमात्मा को नमस्कार । I salute the one who is Imperishable. विगतः क्षरो नाशो यस्य असौ विक्षरः अर्थात् जिनका क्षर अर्थात् नाश नहीं है, वे भगवान विक्षर है। परमात्मा काल से परे अजन्मा स्वरूप है। जिसका जन्म होता है, उन्हींका नाश होता है। परमात्मा जन्मरहित होने से काल से उत्पन्न कोई भी विकार उन्हें प्रभावित नहीं करते हैं। अतः परमात्मा का नाश नहीं होता है। उन विनाशरहित परमात्मा को सादर नमन ।
विक्षराय नमः नाशरहित परमात्मा को नमस्कार । I salute the one who is Imperishable. विगतः क्षरो नाशो यस्य असौ विक्षरः अर्थात् जिनका क्षर अर्थात् नाश नहीं है, वे भगवान विक्षर है। परमात्मा काल से परे अजन्मा स्वरूप है। जिसका जन्म होता है, उन्हींका नाश होता है। परमात्मा जन्मरहित होने से काल से उत्पन्न कोई भी विकार उन्हें प्रभावित नहीं करते हैं। अतः परमात्मा का नाश नहीं होता है। उन विनाशरहित परमात्मा को सादर नमन ।
बंगाणा - उपमंडल बंगाणा के तहत आते गांव नायली-झिकली के ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी मदद से अपने बलबूते पर ही 100 मीटर पक्की सड़क का निर्माण करके एक मिसाल कायम की है। इस सड़क निर्माण के लिए बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं व बुजुर्गो ने बढ़-चढ़ कर अपना सहयोग किया है। एक सप्ताह में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रविवार को इस सड़क का शुभारंभ उपप्रधान मनोज कुमार की उपस्थिति में स्वतंत्रता सेनानी ऊधोराम, द्रुवी देवी व सीता देवी ने किया। अब इस सड़क के बनने से 15 परिवारों के दर्जनों लोगों को फायदा मिलेगा। ग्राम पंचायत मुच्छाली के तहत आते गांव नायली-झिकली के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए एकजुटता दिखाते हुए बिना कोई सरकारी मदद के इसका निर्माण कार्य पूरा किया। जिसमें गांव के सभी लोगों ने सहयोग किया। सड़क बनने से अब गांव में खुशी का माहौल है। पंचायत उपप्रधान मनोज कुमार ने बताया कि पहले इस गांव के 15 परिवारों को आने-जाने के लिए कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं था। लोग एक पगडंडी से ही आवागमन करते थे। जिसमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वहीं अगर रात कोकोई बीमार पड़ जाए तो उसे मुख्य सड़क तक लाना भी मुश्किल हो जाता था। रास्ता न होने के चलते लोग गांव छोड़कर बाहर बसने लगे थे। गांव को बचाने तथा ग्रामीणों की समस्या का हल करने के लिए ग्रामीणों ने इस सड़क को स्वयं बनाने का फैसला लिया और जिस किसी से जो भी बन पाया इस सड़क को बनाने में दिया। पैसों से लेकर जमीन भी लोगों ने रास्ते के लिए दान की। मनोज कुमार ने कहा कि यदि सरकार को गांव बचाने हैं तो गांव हर घर को सड़क से जोड़ना पड़ेगा, नहीं तो गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। सड़क के शुभारंभ अवसर पर संत राम शर्मा, तीर्थ राम शर्मा, किशन चंद शर्मा, सीएल शर्मा, ज्ञान चंद, राम प्रकाश, मदन लाल, रवि कुमार, महिला मंडल प्रधान निर्मला देवी, उर्वषी र्, सुदर्शना, किरण बाला, रंजना शर्मा, विमला , मनसो, सुषमा, जोगिंद्र, राजेंद्र, अमन, साहिल सहित अन्य उपस्थित थे।
बंगाणा - उपमंडल बंगाणा के तहत आते गांव नायली-झिकली के ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी मदद से अपने बलबूते पर ही एक सौ मीटर पक्की सड़क का निर्माण करके एक मिसाल कायम की है। इस सड़क निर्माण के लिए बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं व बुजुर्गो ने बढ़-चढ़ कर अपना सहयोग किया है। एक सप्ताह में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रविवार को इस सड़क का शुभारंभ उपप्रधान मनोज कुमार की उपस्थिति में स्वतंत्रता सेनानी ऊधोराम, द्रुवी देवी व सीता देवी ने किया। अब इस सड़क के बनने से पंद्रह परिवारों के दर्जनों लोगों को फायदा मिलेगा। ग्राम पंचायत मुच्छाली के तहत आते गांव नायली-झिकली के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए एकजुटता दिखाते हुए बिना कोई सरकारी मदद के इसका निर्माण कार्य पूरा किया। जिसमें गांव के सभी लोगों ने सहयोग किया। सड़क बनने से अब गांव में खुशी का माहौल है। पंचायत उपप्रधान मनोज कुमार ने बताया कि पहले इस गांव के पंद्रह परिवारों को आने-जाने के लिए कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं था। लोग एक पगडंडी से ही आवागमन करते थे। जिसमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वहीं अगर रात कोकोई बीमार पड़ जाए तो उसे मुख्य सड़क तक लाना भी मुश्किल हो जाता था। रास्ता न होने के चलते लोग गांव छोड़कर बाहर बसने लगे थे। गांव को बचाने तथा ग्रामीणों की समस्या का हल करने के लिए ग्रामीणों ने इस सड़क को स्वयं बनाने का फैसला लिया और जिस किसी से जो भी बन पाया इस सड़क को बनाने में दिया। पैसों से लेकर जमीन भी लोगों ने रास्ते के लिए दान की। मनोज कुमार ने कहा कि यदि सरकार को गांव बचाने हैं तो गांव हर घर को सड़क से जोड़ना पड़ेगा, नहीं तो गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। सड़क के शुभारंभ अवसर पर संत राम शर्मा, तीर्थ राम शर्मा, किशन चंद शर्मा, सीएल शर्मा, ज्ञान चंद, राम प्रकाश, मदन लाल, रवि कुमार, महिला मंडल प्रधान निर्मला देवी, उर्वषी र्, सुदर्शना, किरण बाला, रंजना शर्मा, विमला , मनसो, सुषमा, जोगिंद्र, राजेंद्र, अमन, साहिल सहित अन्य उपस्थित थे।
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दायर कर ली गई है। दरअसल जबलपुर निवासी स्टेनली जॉन लुईस व उनकी पत्नी शशि स्टेला लुईस ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दायर की है। भारतीय गरीब पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्टेनली और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष शशि स्टेला लुइस ने याचिका में कहा है कि- 'किसान विरोधी तीनों कानून वापस ले लिए जाएं। साथ ही जिन किसानों ने आंदोलन करते हुए प्राण गंवाए हैं, उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की राहत राशि प्रदान की जाए। शहीद किसान मेमोरियल भी बनाया जाए। याचिका दायर करने वाले दंपति को उच्च स्तरीय सुरक्षा दिए जाने की भी मांग की गई है। ' जानकारी के मुताबिक याचिका पर सुनवाई के दौरान स्टेनली ही कोर्ट में पैरवी करेंगे। याचिका पर जल्द सुनवाई की संभावना जताई जा रही है। बता दें इससे पहले भी स्टेनली इसी तरह की याचिकाएं दायर करने के लिए चर्चित रहे हैं। गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसान आंदोलन को 4 महीने हो गए हैं। इस आन्दोलन में कई किसानों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी है। इसके पहले भारतीय गरीब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्टेनली जॉन लुईस ने मोदी द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान 15-15 लाख रुपए हर नागरिक के खाते में दिए जाने के मुद्दे को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दायर कर ली गई है। दरअसल जबलपुर निवासी स्टेनली जॉन लुईस व उनकी पत्नी शशि स्टेला लुईस ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दायर की है। भारतीय गरीब पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्टेनली और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष शशि स्टेला लुइस ने याचिका में कहा है कि- 'किसान विरोधी तीनों कानून वापस ले लिए जाएं। साथ ही जिन किसानों ने आंदोलन करते हुए प्राण गंवाए हैं, उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की राहत राशि प्रदान की जाए। शहीद किसान मेमोरियल भी बनाया जाए। याचिका दायर करने वाले दंपति को उच्च स्तरीय सुरक्षा दिए जाने की भी मांग की गई है। ' जानकारी के मुताबिक याचिका पर सुनवाई के दौरान स्टेनली ही कोर्ट में पैरवी करेंगे। याचिका पर जल्द सुनवाई की संभावना जताई जा रही है। बता दें इससे पहले भी स्टेनली इसी तरह की याचिकाएं दायर करने के लिए चर्चित रहे हैं। गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसान आंदोलन को चार महीने हो गए हैं। इस आन्दोलन में कई किसानों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी है। इसके पहले भारतीय गरीब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्टेनली जॉन लुईस ने मोदी द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान पंद्रह-पंद्रह लाख रुपए हर नागरिक के खाते में दिए जाने के मुद्दे को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
Delhi : सोमवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के गेट पर महिला और पुरूष ने आत्महत्या करने की कोशिश की. दोनों ने खुद को आग के हवाले कर दिया. जानकारी के मुताबिक महिला और पुरूष ने सुप्रीम कोर्ट के गेट नंबर डी से अंदर जाने की कोशिश की थी. तभी तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हे रोका. सुरक्षा कर्मी ने दोनों से पर्याप्त आईडी के बगैर अंदर जाने नहीं दिया. जिसके बाद दोनों ने खुद को आग लगा ली. जिसके बाद पुलिस ने दोनों की जान बचाते हुए पुलिस वैन से हॉस्पिटल पहुंचाया. फिलहाल दोनों को राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल ले जाया गया है . जहां पर दोनों ने खुद को आग लगायी वहां से पुलिस ने एक बोतल बरामद किया है. आशंका जताया जा रहा है कि बोतल में ही ज्वलनशील चीज साथ लेकर आये थे. और खुद को उसी से आग लगा ली.
Delhi : सोमवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के गेट पर महिला और पुरूष ने आत्महत्या करने की कोशिश की. दोनों ने खुद को आग के हवाले कर दिया. जानकारी के मुताबिक महिला और पुरूष ने सुप्रीम कोर्ट के गेट नंबर डी से अंदर जाने की कोशिश की थी. तभी तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हे रोका. सुरक्षा कर्मी ने दोनों से पर्याप्त आईडी के बगैर अंदर जाने नहीं दिया. जिसके बाद दोनों ने खुद को आग लगा ली. जिसके बाद पुलिस ने दोनों की जान बचाते हुए पुलिस वैन से हॉस्पिटल पहुंचाया. फिलहाल दोनों को राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल ले जाया गया है . जहां पर दोनों ने खुद को आग लगायी वहां से पुलिस ने एक बोतल बरामद किया है. आशंका जताया जा रहा है कि बोतल में ही ज्वलनशील चीज साथ लेकर आये थे. और खुद को उसी से आग लगा ली.
Google: कर्मचारियों की सैलरी काटने के बाद खुद सीईओ सुंदर पिचाई को बीते साल यानी 2022 में 18. 54 अरब रुपये की सैलरी मिली है। डॉलर में मापी जाए तो करीब 226 मिलियन डॉलर। Donald Trump: बीते कई सालों से डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर बैन लगा हुआ था लेकिन अब एक बार फिर ट्रंप की इन सोशल मीडिया साइट्स पर वापसी हो गई है। बीते दिन शुक्रवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फेसबुक और यूट्यूब अकाउंट पर वापस लौटें और अपने लौटने की जानकारी उन्होंने पोस्ट कर दी। Shark Tank India 2: बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया 2 में कई युवा उद्यमियों को लाखों-करोड़ों की फंडिंग मिली, लेकिन उनमें से एक शख्स ऐसा भी था, जिसे एक पैसा भी नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि यूट्यूब पर करीब 1. 5 करोड़ सब्सक्राइबर्स की मदद से बेंगलुरु के अरविंद अरोड़ा मोटी कमाई कर रहे हैं। दरअसल अरोड़ा की ओवर स्मार्टनेस शार्क को रास नहीं आ रही थी। क्योंकि पहले अरविंद अरोड़ा ने अपने ऐप के लिए फंडिंग में शगुन के तौर पर सिर्फ 1 रुपए मांगे थे। Mumbai: वीडियो में देखा जा सकता है कि चांद मोहम्मद और मोहम्मद नकीब युवती के साथ बदसलूकी करते है और उसे छूने की भी कोशिश करते है। हालांकि कोरियन युवती उन्हें ऐसा करने से बार-बार रोकती है। लेकिन वो नहीं मानता है। इतना ही नहीं युवक उसका जबरदस्ती हाथ पकड़कर अपने स्कूटी में बैठने की कोशिश करता है। इसके अलावा वो महिला को किस करने का प्रयास भी करता है। बात फरमानी नाज की करें, तो उसको हर-हर शंभू गाने के बाद सोशल मीडिया पर काफी तारीफ मिली थी। फरमानी ने गीत को खुद का बताया था, लेकिन बाद में झूठ निकला। इस भजन के असली लेखक ने फरमानी के झूठ का खुलासा किया था। पता चला था कि ओडिशा की एक गायिका ने इस भजन को गाया था। Adipurush: Adipurush फिल्म को लेकर Director Om Raut का आया बयान, बोले - उन्हें पता था ये होने वाला है फिल्मकार ओम राउत ने इस पर चुप्पी तोड़ी है और टीज़र को लेकर उनका बयान सामने आया है। ओम राउत ने फिल्म के वीएफ़एक्स को लेकर बयान दिए हैं यहां हम उसी बारे में आपको विस्तार से बताएंगे। Boycott Adipurush: संत सामाज सिखाएगा Adipurush टीम को सबक, देश से ही नहीं विदेश से भी उठी फिल्म को Boycott करने की मांग मध्य प्रदेश, मुंबई और कई अन्य जगहों से फिल्म के खिलाफ शिकायत दर्ज़ की योजना बना ली गई है। ऐसे में संत समाज ने आदिपुरुष टीम को सबक सिखाने का मन बना लिया है यहां हम इसी से जुड़े हुए मामले के बारे में बात करेंगे। Boycott Adipurush: Adipurush टीज़र आने के बाद ही सेट हो गया बड़ा रिकॉर्ड, लेकिन फिर भी हिन्दू संस्कृति पर बनी फिल्म Boycott के निशाने पर आज से करीब 3 महीने बाद आने वाली फिल्म अभी से चर्चा में बन गई है और आने वाले दिनों में ये चर्चा में बनी रहने वाली है। इस फिल्म ने जहां नकारात्मक पब्लिसिटी पाई है वहीं इस फिल्म ने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। KRK: कमाल आर खान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में होना चाहते हैं शामिल, ट्वीटर पर मोहन भागवत से लगाई गुहार अभी कुछ ही दिन पहले हमने देखा था कमाल आर खान ने अपना नाम बदलकर कमाल राशिद कुमार कर लिया था और अब उनकी तरफ से एक ऐसी खबर सामने आ रही हैं जो चौंकाने वाली है। विस्तार से इस खबर के बारे में जानते हैं।
Google: कर्मचारियों की सैलरी काटने के बाद खुद सीईओ सुंदर पिचाई को बीते साल यानी दो हज़ार बाईस में अट्ठारह. चौवन अरब रुपये की सैलरी मिली है। डॉलर में मापी जाए तो करीब दो सौ छब्बीस मिलियन डॉलर। Donald Trump: बीते कई सालों से डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर बैन लगा हुआ था लेकिन अब एक बार फिर ट्रंप की इन सोशल मीडिया साइट्स पर वापसी हो गई है। बीते दिन शुक्रवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फेसबुक और यूट्यूब अकाउंट पर वापस लौटें और अपने लौटने की जानकारी उन्होंने पोस्ट कर दी। Shark Tank India दो: बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया दो में कई युवा उद्यमियों को लाखों-करोड़ों की फंडिंग मिली, लेकिन उनमें से एक शख्स ऐसा भी था, जिसे एक पैसा भी नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि यूट्यूब पर करीब एक. पाँच करोड़ सब्सक्राइबर्स की मदद से बेंगलुरु के अरविंद अरोड़ा मोटी कमाई कर रहे हैं। दरअसल अरोड़ा की ओवर स्मार्टनेस शार्क को रास नहीं आ रही थी। क्योंकि पहले अरविंद अरोड़ा ने अपने ऐप के लिए फंडिंग में शगुन के तौर पर सिर्फ एक रुपयापए मांगे थे। Mumbai: वीडियो में देखा जा सकता है कि चांद मोहम्मद और मोहम्मद नकीब युवती के साथ बदसलूकी करते है और उसे छूने की भी कोशिश करते है। हालांकि कोरियन युवती उन्हें ऐसा करने से बार-बार रोकती है। लेकिन वो नहीं मानता है। इतना ही नहीं युवक उसका जबरदस्ती हाथ पकड़कर अपने स्कूटी में बैठने की कोशिश करता है। इसके अलावा वो महिला को किस करने का प्रयास भी करता है। बात फरमानी नाज की करें, तो उसको हर-हर शंभू गाने के बाद सोशल मीडिया पर काफी तारीफ मिली थी। फरमानी ने गीत को खुद का बताया था, लेकिन बाद में झूठ निकला। इस भजन के असली लेखक ने फरमानी के झूठ का खुलासा किया था। पता चला था कि ओडिशा की एक गायिका ने इस भजन को गाया था। Adipurush: Adipurush फिल्म को लेकर Director Om Raut का आया बयान, बोले - उन्हें पता था ये होने वाला है फिल्मकार ओम राउत ने इस पर चुप्पी तोड़ी है और टीज़र को लेकर उनका बयान सामने आया है। ओम राउत ने फिल्म के वीएफ़एक्स को लेकर बयान दिए हैं यहां हम उसी बारे में आपको विस्तार से बताएंगे। Boycott Adipurush: संत सामाज सिखाएगा Adipurush टीम को सबक, देश से ही नहीं विदेश से भी उठी फिल्म को Boycott करने की मांग मध्य प्रदेश, मुंबई और कई अन्य जगहों से फिल्म के खिलाफ शिकायत दर्ज़ की योजना बना ली गई है। ऐसे में संत समाज ने आदिपुरुष टीम को सबक सिखाने का मन बना लिया है यहां हम इसी से जुड़े हुए मामले के बारे में बात करेंगे। Boycott Adipurush: Adipurush टीज़र आने के बाद ही सेट हो गया बड़ा रिकॉर्ड, लेकिन फिर भी हिन्दू संस्कृति पर बनी फिल्म Boycott के निशाने पर आज से करीब तीन महीने बाद आने वाली फिल्म अभी से चर्चा में बन गई है और आने वाले दिनों में ये चर्चा में बनी रहने वाली है। इस फिल्म ने जहां नकारात्मक पब्लिसिटी पाई है वहीं इस फिल्म ने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। KRK: कमाल आर खान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में होना चाहते हैं शामिल, ट्वीटर पर मोहन भागवत से लगाई गुहार अभी कुछ ही दिन पहले हमने देखा था कमाल आर खान ने अपना नाम बदलकर कमाल राशिद कुमार कर लिया था और अब उनकी तरफ से एक ऐसी खबर सामने आ रही हैं जो चौंकाने वाली है। विस्तार से इस खबर के बारे में जानते हैं।
एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों लगातार अपने हॉट अवतार से इंटरनेट का पारा बढ़ा रही हैं। जाह्नवी के हर लुक को देखकर फैंस की धड़कनें तेज हो जाती हैं। एक बार फिर जाह्नवी अपने सिजलिंग तस्वीरों से सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। इस येलो कलर की वन शोल्डर बॉडीकॉन ड्रेस में जाह्नवी बेहद ग्लैमरस नजर आ रही हैं। बॉडीकॉन ड्रेस का ये वन शोल्डर नेक डिजाइन जाह्नवी के लुक में बोल्डनेस का तड़का लगा रहा है। जाह्नवी इस बॉडी फिटेड ड्रेस में अपना कर्वी फिगर भी जमकर फ्लॉन्ट कर रही हैं। अपने स्टनिंग लुक को जाह्नवी ने स्मोकी मेकअप एंड ओपन हेयरस्टाइल के साथ कम्पलीट किया है।
एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों लगातार अपने हॉट अवतार से इंटरनेट का पारा बढ़ा रही हैं। जाह्नवी के हर लुक को देखकर फैंस की धड़कनें तेज हो जाती हैं। एक बार फिर जाह्नवी अपने सिजलिंग तस्वीरों से सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। इस येलो कलर की वन शोल्डर बॉडीकॉन ड्रेस में जाह्नवी बेहद ग्लैमरस नजर आ रही हैं। बॉडीकॉन ड्रेस का ये वन शोल्डर नेक डिजाइन जाह्नवी के लुक में बोल्डनेस का तड़का लगा रहा है। जाह्नवी इस बॉडी फिटेड ड्रेस में अपना कर्वी फिगर भी जमकर फ्लॉन्ट कर रही हैं। अपने स्टनिंग लुक को जाह्नवी ने स्मोकी मेकअप एंड ओपन हेयरस्टाइल के साथ कम्पलीट किया है।
नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक में भगवान जगन्नाथ के नाम जमा 545 करोड़ रुपये के सावधि पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इस बीच, ओडिशा में विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। विपक्षी पार्टी ने कहा कि कानून मंत्री प्रताप जेना द्वारा दिए गए बयान में मार्च महीने के अंत तक भगवान के पैसे को राष्ट्रीयकृत बैंक में स्थानांतरित करने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस नेता नरसिंह मिश्रा ने पत्रकारों से कहा, "यह मामला चिंता का विषय है क्योंकि पूरे देश के लाखों भक्तों की भावना इससे जुड़ी है, इसलिए मुख्यमंत्री को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मिश्रा ने कहा कि पटनायक ने लोगों को आश्वस्त नहीं किया है कि भगवान का पैसा निजी बैंक में सुरक्षित है। भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय महापात्रा ने भी संकटग्रस्त बैंक से भगवान के पैसे की वापसी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भगवान जगन्नाथ का पैसा एक ही निजी बैंक में रखा गया। महापात्रा ने कहा कि नियमावली के तहत मंदिर का पैसा राष्ट्रीयकृत बैंक की स्थानीय शाखा में जमा कराया जाना चाहिए। इस बीच, पुरी के संगठन श्री जगन्नाथ सेना ने शनिवार को प्रदर्शन किया और सतर्कता विभाग के हस्तक्षेप की मांग की। संगठन ने पुरी के सतर्कता प्रकोष्ठ के उप अधीक्षक के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई।
नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक में भगवान जगन्नाथ के नाम जमा पाँच सौ पैंतालीस करोड़ रुपये के सावधि पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इस बीच, ओडिशा में विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। विपक्षी पार्टी ने कहा कि कानून मंत्री प्रताप जेना द्वारा दिए गए बयान में मार्च महीने के अंत तक भगवान के पैसे को राष्ट्रीयकृत बैंक में स्थानांतरित करने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस नेता नरसिंह मिश्रा ने पत्रकारों से कहा, "यह मामला चिंता का विषय है क्योंकि पूरे देश के लाखों भक्तों की भावना इससे जुड़ी है, इसलिए मुख्यमंत्री को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मिश्रा ने कहा कि पटनायक ने लोगों को आश्वस्त नहीं किया है कि भगवान का पैसा निजी बैंक में सुरक्षित है। भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय महापात्रा ने भी संकटग्रस्त बैंक से भगवान के पैसे की वापसी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भगवान जगन्नाथ का पैसा एक ही निजी बैंक में रखा गया। महापात्रा ने कहा कि नियमावली के तहत मंदिर का पैसा राष्ट्रीयकृत बैंक की स्थानीय शाखा में जमा कराया जाना चाहिए। इस बीच, पुरी के संगठन श्री जगन्नाथ सेना ने शनिवार को प्रदर्शन किया और सतर्कता विभाग के हस्तक्षेप की मांग की। संगठन ने पुरी के सतर्कता प्रकोष्ठ के उप अधीक्षक के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई।
- विश्व की मौजूदा जनसंख्या 7.6 अरब है, जो वर्ष 2030 तक बढ़कर 8.6 अरब और वर्ष 2050 तक 9.8 अरब हो जाएगी तथा शताब्दी के अंत तक इसके 11.2 अरब होने का अनुमान जताया गया है। - वर्ष 1960 के बाद प्रजनन स्तर में धीरे-धीरे कमी होने के बावजूद विश्व में हर साल 8.3 करोड़ आबादी बढ़ रही है और इसके लगातार बढ़ते रहने का अनुमान जताया गया है। हालिया वर्षों में पृथ्वी के लगभग सभी क्षेत्रों में प्रजनन स्तर में कमी हुई है। - वर्ष 2050 तक 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों की वैश्विक जनसंख्या दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी। ऐसे लोगों की संख्या फिलहाल 96.2 करोड़ है जो 2050 में 210 करोड़ और 2100 तक 310 करोड़ हो जाएगी। - 26 अफ्रीकी देशों की कुल आबादी वर्ष 2050 तक दोगुनी हो जाने का अनुमान रिपोर्ट में लगाया गया है। - वर्ष 2050 तक वैश्विक जनसंख्या वृद्धि का आधा हिस्सा केवल 9 देशों - भारत, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान, इथियोपिया, तंजानिया, अमेरिका, युगांडा और इंडोनेशिया में केंद्रित होगा। - 47 अल्प-विकसित देशों में जन्म दर अपेक्षाकृत अधिक रहती है और इनमें वार्षिक जनसंख्या में वृद्धि दर 2.4% है। - कम प्रजनन के स्तर वाले 10 सबसे अधिक आबादी वाले देशों में चीन, अमेरिका, ब्राज़ील, रूस, जापान, वियतनाम, जर्मनी, ईरान, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। - भारत को इस समस्या के सबसे भीषण रूप का सामना करना है। चीन अभी आबादी में हमसे आगे है तो क्षेत्रफल में भी काफी बड़ा है। फिलहाल भारत की जनसंख्या 1.3 अरब और चीन की 1.4 अरब है। - दोनों देशों के क्षेत्रफल में तो कोई बदलाव हो नहीं सकता, पर जनसंख्या के मामले में भारत सात वर्ष बाद चीन को पीछे छोड़ देगा। - पिछले 25 वर्षों में भारतीयों की जीवन प्रत्याशा लगभग 10 साल बढ़ी है और यह 1990-1995 के 59.2 वर्ष से बढ़कर 2015-20 में 69 वर्ष हो गई है। - जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिये भारत सरकार ने देश के सात प्रदेशों में 146 ज़िलों में नई पहल शुरू की है। - ये ज़िले उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम से हैं, जहाँ प्रति महिला जन्मे बच्चों की औसत संख्या (Total Fertility Rate-TFR) 3 या उससे अधिक है। - टीएफआर का सीधा संबंध मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर से है। - भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है, लेकिन यह गति राज्यों में असमान है।
- विश्व की मौजूदा जनसंख्या सात.छः अरब है, जो वर्ष दो हज़ार तीस तक बढ़कर आठ.छः अरब और वर्ष दो हज़ार पचास तक नौ.आठ अरब हो जाएगी तथा शताब्दी के अंत तक इसके ग्यारह.दो अरब होने का अनुमान जताया गया है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ साठ के बाद प्रजनन स्तर में धीरे-धीरे कमी होने के बावजूद विश्व में हर साल आठ.तीन करोड़ आबादी बढ़ रही है और इसके लगातार बढ़ते रहने का अनुमान जताया गया है। हालिया वर्षों में पृथ्वी के लगभग सभी क्षेत्रों में प्रजनन स्तर में कमी हुई है। - वर्ष दो हज़ार पचास तक साठ वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों की वैश्विक जनसंख्या दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी। ऐसे लोगों की संख्या फिलहाल छियानवे.दो करोड़ है जो दो हज़ार पचास में दो सौ दस करोड़ और दो हज़ार एक सौ तक तीन सौ दस करोड़ हो जाएगी। - छब्बीस अफ्रीकी देशों की कुल आबादी वर्ष दो हज़ार पचास तक दोगुनी हो जाने का अनुमान रिपोर्ट में लगाया गया है। - वर्ष दो हज़ार पचास तक वैश्विक जनसंख्या वृद्धि का आधा हिस्सा केवल नौ देशों - भारत, नाइजीरिया, कांगो, पाकिस्तान, इथियोपिया, तंजानिया, अमेरिका, युगांडा और इंडोनेशिया में केंद्रित होगा। - सैंतालीस अल्प-विकसित देशों में जन्म दर अपेक्षाकृत अधिक रहती है और इनमें वार्षिक जनसंख्या में वृद्धि दर दो.चार% है। - कम प्रजनन के स्तर वाले दस सबसे अधिक आबादी वाले देशों में चीन, अमेरिका, ब्राज़ील, रूस, जापान, वियतनाम, जर्मनी, ईरान, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। - भारत को इस समस्या के सबसे भीषण रूप का सामना करना है। चीन अभी आबादी में हमसे आगे है तो क्षेत्रफल में भी काफी बड़ा है। फिलहाल भारत की जनसंख्या एक.तीन अरब और चीन की एक.चार अरब है। - दोनों देशों के क्षेत्रफल में तो कोई बदलाव हो नहीं सकता, पर जनसंख्या के मामले में भारत सात वर्ष बाद चीन को पीछे छोड़ देगा। - पिछले पच्चीस वर्षों में भारतीयों की जीवन प्रत्याशा लगभग दस साल बढ़ी है और यह एक हज़ार नौ सौ नब्बे-एक हज़ार नौ सौ पचानवे के उनसठ.दो वर्ष से बढ़कर दो हज़ार पंद्रह-बीस में उनहत्तर वर्ष हो गई है। - जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिये भारत सरकार ने देश के सात प्रदेशों में एक सौ छियालीस ज़िलों में नई पहल शुरू की है। - ये ज़िले उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम से हैं, जहाँ प्रति महिला जन्मे बच्चों की औसत संख्या तीन या उससे अधिक है। - टीएफआर का सीधा संबंध मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर से है। - भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है, लेकिन यह गति राज्यों में असमान है।
सारण जिला के छपरा में काल्हु अतवार का दिने बिजली विभाग अनेके सरकारी क्वार्टरन पर छापा मरलसि आ बिजली चोरावे के अनेके मामिला दर्ज कइल गइल. एह में दू गो डाक्टर आ डेढ़ दर्जन सरकारी कर्मचारी शामिल बाड़ें. केहू के मीटर जरल रहे, त केहू किहाँ ओवरलोड मिलल. कुछ लोग का घरे त मीटरे ना मिलल. अब एह लोगन पर दू हजार से लेके डेढ़ लाख ले जुर्माना लगावल गइल बा. बिजली विभाग के कहना बा कि एह तरह के छापामारी से विभाग के राजस्व वसूली लगातार बढ़त बा आ छापामारिओ लगातार चलत रही.
सारण जिला के छपरा में काल्हु अतवार का दिने बिजली विभाग अनेके सरकारी क्वार्टरन पर छापा मरलसि आ बिजली चोरावे के अनेके मामिला दर्ज कइल गइल. एह में दू गो डाक्टर आ डेढ़ दर्जन सरकारी कर्मचारी शामिल बाड़ें. केहू के मीटर जरल रहे, त केहू किहाँ ओवरलोड मिलल. कुछ लोग का घरे त मीटरे ना मिलल. अब एह लोगन पर दू हजार से लेके डेढ़ लाख ले जुर्माना लगावल गइल बा. बिजली विभाग के कहना बा कि एह तरह के छापामारी से विभाग के राजस्व वसूली लगातार बढ़त बा आ छापामारिओ लगातार चलत रही.
राज्यपाल ने सभी लोगों का आह्वान किया की प्रदेश व देश के विकास तथा एक स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए एकजुटता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह उत्तरदायित्व है कि देश व समाज की बेहतरी के लिए अपना भरपूर योगदान दे। राज भवन के दरबार हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जगत वर्मा ने देश भक्ति के गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती विद्या स्टोक्स, मुख्य संसदीय सचिव, आरट्रैक शिमला के जी. ओ. सी. -इन-सी लै, जनरल डी. आर सोनी, हि. प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विधायकगण, मुख्य सचिव श्री वी. सी. फारका, पुलिस महानिदेशक श्री संजय कुमार, प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी, स्वतंत्रता सेनानी, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, प्रदेश सरकार और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा शहर के गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
राज्यपाल ने सभी लोगों का आह्वान किया की प्रदेश व देश के विकास तथा एक स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए एकजुटता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह उत्तरदायित्व है कि देश व समाज की बेहतरी के लिए अपना भरपूर योगदान दे। राज भवन के दरबार हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जगत वर्मा ने देश भक्ति के गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती विद्या स्टोक्स, मुख्य संसदीय सचिव, आरट्रैक शिमला के जी. ओ. सी. -इन-सी लै, जनरल डी. आर सोनी, हि. प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विधायकगण, मुख्य सचिव श्री वी. सी. फारका, पुलिस महानिदेशक श्री संजय कुमार, प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी, स्वतंत्रता सेनानी, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, प्रदेश सरकार और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा शहर के गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।