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केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मार्च, 2018 के दौरान 14 एकपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (यूएपीए) और 2 द्विपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (बीएपीए) पर हस्ताक्षर किए। 2 द्विपक्षीय एपीए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किये गये हैं। इन अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (एपीए) पर हस्ताक्षर किये जाने के साथ ही सीबीडीटी द्वारा किये गये एपीए की कुल संख्या बढ़कर 219 हो गई है। इसमें 199 एकपक्षीय एपीए और 20 द्विपक्षीय एपीए शामिल हैं। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान कुल मिलाकर 67 एपीए (9 द्विपक्षीय और 58 एकपक्षीय) पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
मार्च 2018 के दौरान हस्ताक्षरित किये गये 16 एपीए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल, पेय पदार्थ (बीवरेज), व्यापार (ट्रेडिंग), विनिर्माण और बैंकिंग, वित्त एवं बीमा से संबंधित हैं। इन समझौतों के दायरे में आने वाले अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन में रॉयल्टी शुल्क का भुगतान, कारोबार सहायता सेवाओं का प्रावधान, कॉरपोरेट गारंटी का प्रावधान, ठेके पर विनिर्माण, विपणन सहायता सेवाओं का प्रावधान, इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाओं का प्रावधान, इंजीनियरिंग सहायता सेवाओं का प्रावधान, कृषि जिन्सों का वाणिज्यिक व्यापार, कलपुर्जों का आयात/निर्यात, आईटी सेवाओं का प्रावधान, आईटी आधारित सेवाओं का प्रावधान, निवेश परामर्श सेवाओं का प्रावधान, तकनीकी सेवाओं का उपयोग करना इत्यादि शामिल हैं।
अग्रिम मूल्य निर्धारण (एपीए) योजना की अच्छी प्रगति से देश में एक गैर-प्रतिकूल कर व्यवस्था को बढ़ावा देने संबंधी सरकारी संकल्प और सुदृढ़ होता है। भारतीय एपीए कार्यक्रम की सराहना राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर की गई है, क्योंकि यह निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े जटिल मसलों को सुलझाने में सक्षम है।
| Posted On: केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने मार्च, दो हज़ार अट्ठारह के दौरान चौदह एकपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों और दो द्विपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दो द्विपक्षीय एपीए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किये गये हैं। इन अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाने के साथ ही सीबीडीटी द्वारा किये गये एपीए की कुल संख्या बढ़कर दो सौ उन्नीस हो गई है। इसमें एक सौ निन्यानवे एकपक्षीय एपीए और बीस द्विपक्षीय एपीए शामिल हैं। वित्त वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के दौरान कुल मिलाकर सरसठ एपीए पर हस्ताक्षर किये गये हैं। मार्च दो हज़ार अट्ठारह के दौरान हस्ताक्षरित किये गये सोलह एपीए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल, पेय पदार्थ , व्यापार , विनिर्माण और बैंकिंग, वित्त एवं बीमा से संबंधित हैं। इन समझौतों के दायरे में आने वाले अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन में रॉयल्टी शुल्क का भुगतान, कारोबार सहायता सेवाओं का प्रावधान, कॉरपोरेट गारंटी का प्रावधान, ठेके पर विनिर्माण, विपणन सहायता सेवाओं का प्रावधान, इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाओं का प्रावधान, इंजीनियरिंग सहायता सेवाओं का प्रावधान, कृषि जिन्सों का वाणिज्यिक व्यापार, कलपुर्जों का आयात/निर्यात, आईटी सेवाओं का प्रावधान, आईटी आधारित सेवाओं का प्रावधान, निवेश परामर्श सेवाओं का प्रावधान, तकनीकी सेवाओं का उपयोग करना इत्यादि शामिल हैं। अग्रिम मूल्य निर्धारण योजना की अच्छी प्रगति से देश में एक गैर-प्रतिकूल कर व्यवस्था को बढ़ावा देने संबंधी सरकारी संकल्प और सुदृढ़ होता है। भारतीय एपीए कार्यक्रम की सराहना राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर की गई है, क्योंकि यह निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े जटिल मसलों को सुलझाने में सक्षम है। |
दिल्ली में मॉल कल्चर के दस्तक देने से बहुत पहले पालिका बाजार में जाकर शॉपिंग करने का फैशन हुआ करता था। यह भूमिगत और वातानुकूलित था, इसलिए यहां घूमने का दिल्ली मौका नहीं छोड़ती थी। यह 1978 के अंत में बनकर तैयार हुआ था। इसका श्रीगणेश हुआ 1979 के शुरू में। पालिका बाजार ने सस्ते आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडिमेड कपड़ों और फुट वियर की सफल मार्केट के रूप में अपनी तुरंत पहचान बना ली थी। दिल्ली के पुराने लोगों को याद होगा कि देश में 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद कनॉट प्लेस में एक और बाजार खोलने का निर्णय हुआ। इस फैसले से बहुत से लोग नाखुश थे क्योंकि यहां पर पहले से ही कनॉट प्लेस के अलावा जनपथ, मोहन सिंह प्लेस, शंकर मार्केट, सुपर बाजार थे ही। पालिका बाजार का निर्माण नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने किया था।
लालू प्रसाद यादव पहली बार लोकसभा के लिए 1977 में निर्वाचित हुए थे। वह दिल्ली में रहने लगे। कम-से- कम जब संसद का सत्र चलता तो वह दिल्ली में ही रहते। कहते हैं, वह जब यहां से वापस पटना जाते तो अपने मित्रों के साथ पालिका बाजार शॉपिंग के लिए अवश्य पहुंचते। वहां से राबड़ी देवी और बच्चों के लिए कपड़े और घर का दूसरा सामान खरीदते। लालू यादव पालिका बाजार को ठंडी मार्केट कहते थे।
जब पालिका बाजार शुरू हुआ तो यह पूरी तरह से एयर कंडीशंड मार्केट थी। उस समय का भारत बहुत अलग था। देश बिजली की किल्लत झेलता था और बाजार एयर कंडीशंड नहीं होते थे। इस वजह से पालिका बाजार को कुछ लोग ठंडी मार्केट भी कहते थे। यहां सबसे पहले पंचकुइयां रोड के दुकानदारों, जिनकी दुकानें कनॉट प्लेस से सुचेता कृपलानी अस्पताल तक थीं, को स्पेस दिए गए थे। जहां पर पालिका बाजार बना वहां पर थिएटर कम्युनिकेशन बिल्डिंग थी। इसमें बहुत से स्वयंसेवी संस्थाओं के दफ्तर चलते थे। इसके साथ ही कॉफी हाउस भी था।
| दिल्ली में मॉल कल्चर के दस्तक देने से बहुत पहले पालिका बाजार में जाकर शॉपिंग करने का फैशन हुआ करता था। यह भूमिगत और वातानुकूलित था, इसलिए यहां घूमने का दिल्ली मौका नहीं छोड़ती थी। यह एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर के अंत में बनकर तैयार हुआ था। इसका श्रीगणेश हुआ एक हज़ार नौ सौ उन्यासी के शुरू में। पालिका बाजार ने सस्ते आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडिमेड कपड़ों और फुट वियर की सफल मार्केट के रूप में अपनी तुरंत पहचान बना ली थी। दिल्ली के पुराने लोगों को याद होगा कि देश में एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में इमरजेंसी लगने के बाद कनॉट प्लेस में एक और बाजार खोलने का निर्णय हुआ। इस फैसले से बहुत से लोग नाखुश थे क्योंकि यहां पर पहले से ही कनॉट प्लेस के अलावा जनपथ, मोहन सिंह प्लेस, शंकर मार्केट, सुपर बाजार थे ही। पालिका बाजार का निर्माण नई दिल्ली नगर परिषद ने किया था। लालू प्रसाद यादव पहली बार लोकसभा के लिए एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में निर्वाचित हुए थे। वह दिल्ली में रहने लगे। कम-से- कम जब संसद का सत्र चलता तो वह दिल्ली में ही रहते। कहते हैं, वह जब यहां से वापस पटना जाते तो अपने मित्रों के साथ पालिका बाजार शॉपिंग के लिए अवश्य पहुंचते। वहां से राबड़ी देवी और बच्चों के लिए कपड़े और घर का दूसरा सामान खरीदते। लालू यादव पालिका बाजार को ठंडी मार्केट कहते थे। जब पालिका बाजार शुरू हुआ तो यह पूरी तरह से एयर कंडीशंड मार्केट थी। उस समय का भारत बहुत अलग था। देश बिजली की किल्लत झेलता था और बाजार एयर कंडीशंड नहीं होते थे। इस वजह से पालिका बाजार को कुछ लोग ठंडी मार्केट भी कहते थे। यहां सबसे पहले पंचकुइयां रोड के दुकानदारों, जिनकी दुकानें कनॉट प्लेस से सुचेता कृपलानी अस्पताल तक थीं, को स्पेस दिए गए थे। जहां पर पालिका बाजार बना वहां पर थिएटर कम्युनिकेशन बिल्डिंग थी। इसमें बहुत से स्वयंसेवी संस्थाओं के दफ्तर चलते थे। इसके साथ ही कॉफी हाउस भी था। |
लाईट एवं बेन्च निर्माण करते हुए सौन्दर्यीकरण कराने की मांग मैं सदन के माध्यम से सरकार से मांग करती हूं ।
श्री पवन कुमार यादव : माननीय अध्यक्ष महोदय, कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से आर्थिक तंगी झेल रहे बिहार के विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बकाया बिजली बिल में डीपीएस चार्ज को माफ करने की सरकार से मांग करता हूं ।
श्रीमती प्रतिमा कुमारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, पंचायत वार्ड सचिव 2017 से मुख्यमंत्री सात निश्चय के तहत कराये जा रहे कामों का कार्यान्वयन कर रहे हैं लेकिन उन्हें मानदेय नहीं दिया जा रहा है ।
अतः पंचायत वार्ड सचिवों को मानदेय दिये जाने की मांग करती हूं ।
श्री सुदामा प्रसाद : माननीय अध्यक्ष महोदय, गया जिला के खिजरसराय थाने के अकौनी की सुशीला देवी और उमा देवी की चाकू से गोद कर बर्बर हत्या करने वाले अपराधियों की अविलम्ब गिरफ्तारी की मांग करता हूं ।
श्री सुरेन्द्र मेहता : अध्यक्ष महोदय, बेगूसराय जिलान्तर्गत भगवानपुर प्रखण्ड के सी०आई० की आय से अधिक सम्पत्ति की जांच कर कार्यवाही की मांग सरकार से करता हूं ।
श्री विद्या सागर केशरी : माननीय अध्यक्ष महोदय, अररिया जिला के फारबिसगंज प्रखंड के हलहलिया पंचायत में पूर्व से चल रहे मेसर्स अलसमीर, मेसर्स जकारिया, मेसर्स मोहरवा पशुवधशाला के साथ विभिन्न वधशाला विधानसभा क्षेत्र में सरकार की उदासीनता के चलते चोरी छुपे चलाये जा रहे हैं । सदन के माध्यम से उपर्युक्त सभी पशुवधशाला बंद कराने की मांग सदन से करता हूं ।
अध्यक्ष : लिखा हुआ ही पढ़ें ।
श्री प्रफुल्ल कुमार मांझी : अध्यक्ष महोदय, ग्राम - ताजपुर, पंचायत- कैथा, प्रखण्ड - ईस्लामनगर अलीगंज, जिला- जमुई में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछले कई वर्षों से जर्जर सामुदायिक भवन में चल रहा है । इसलिए ग्राम ताजपुर में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन बनाने की मांग सरकार से करता हूं ।
श्री मिथिलेश कुमार : अध्यक्ष महोदय,
अध्यक्ष : क्या है ?
श्री मिथिलेश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मेरा शून्यकाल छूट गया है ।
अध्यक्ष : आपका अमान्य किया गया है । वह अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत है ।
श्री कुमार शैलेन्द्र : अध्यक्ष महोदय, 19 मार्च को होली भी है और शब-ए-बारात भी है और
उसी दिन इग्नू की परीक्षा भी है । महोदय, परीक्षार्थी जब परीक्षा देने जायेंगे तो कोई न कोई रंग-अबीर दे देगा इसलिए चाहते हैं कि वह तिथि आगे बढ़ाई जाय ।
अध्यक्ष : ठीक है ।
अध्यक्ष :
माननीय सदस्यगण, माननीय अटल जी ने कुछ बात, जो उनके द्वारा बात कही गई थी, संविधान और कानून में सबका महत्व है, लेकिन लोकतंत्र एक ढांचा मात्र बनकर रह जाय, एक कर्मकांड में बदल जाय, उसकी प्राण शक्ति घटती जाय तो वहां कठिनाई पैदा हो जाती है । प्राण शक्ति को घटने न देना यह हम सबकी जिम्मेवारी है। हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था का अवमूल्यन और क्षरण नहीं होने देना है । जनप्रतिनिधियों की साख नहीं घटनी चाहिए, जनप्रतिनिधि संस्थाओं की विश्वसनीयता में कमी नहीं आनी चाहिए । हमारे लोकतंत्र का पौधा मजबूत है । लेकिन ऐसा न हो कि वह ऊपर-ऊपर तो बढ़ता जाय पर उसकी जड़ें खोखली होती जायं । यही कर्त्तव्य हमारे सामने है और भारत अमृत महोत्सव के अवसर पर शताब्दी वर्ष जब हम मनाने जा रहे हैं तो अगले 25 वर्ष अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करें । माननीय मुख्यमंत्री जी का भी जो सुझाव आया उसको आसन ने ग्रहण किया है । आप सभी वरीय लोगों से आग्रह है कि आपको लगता है कि आसन संविधान और नियम से थोड़ा इतर हो रहा है तो अपने अमूल्य सुझाव निश्चित तौर पर आकर के मेरे कक्ष में देंगे, हम उसे ग्रहण करेंगे ।
अब ध्यानाकर्षण सूचनाएं ली जायेंगी ।
ध्यानाकर्षण सूचना तथा उसपर सरकारी वक्तव्य
सर्वश्री अरूण शंकर प्रसाद, अनिरूद्ध प्रसाद यादव एवं अन्य तीन सभासदों से प्राप्त ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार (स्वास्थ्य विभाग) की ओर से वक्तव्य ।
माननीय सदस्य, श्री अरूण शंकर प्रसाद की सूचना पढ़ी गई है । माननीय मंत्री, स्वास्थ्य विभाग ।
श्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री : महोदय, वस्तुस्थिति यह है कि सरकार जन-जन तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृत संकल्पित है । इसी क्रम में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, नई दिल्ली, भारत सरकार के द्वारा केन्द्रीय योजना अंतर्गत प्राप्त राशि से राज्य सरकार द्वारा संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला अगमकुआं, पटना अंतर्गत लगभग 5 करोड़ 67 लाख रुपये की राशि से तीन उच्चस्तरीय उपकरणों यथा गैस कोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री, लिक्विड कोमैटोग्राफी-मास स्पेट्रेमेट्री और आइडेंटिकली कपिल प्लाजमा मास स्पेक्ट्रोमेट्री का अधिष्ठापन कराया गया है । शेष राशि लगभग 1 करोड़ 89 लाख मानव बल पर खर्च हेतु एवं लगभग 1 करोड़ 26 लाख उच्च स्तरीय मशीनों के रख-रखाव हेतु उपलब्ध करायी गयी है । यह जी०सी० एम०एस० / एम0एस0 की सहायता से खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाइड व वसा की मात्रा एल0सी0 - एम0एस0-एम0एस0...
श्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री : की सहायता से खाद्य पदार्थों में एंटी-बॉयोटिक, माइक्रो-टॉक्सिन,
रंजक इत्यादि की मात्रा तथा आई०सी०पी०एम०एस० की सहायता से खाद्य पदार्थों में लैड, कैडमियम इत्यादि जैसे भारी धातुओं की जांच की जाती है। राज्य सरकार उक्त उपकरणों के सफल संचालन हेतु आवश्यक कदम उठाती रहती है । उक्त उपकरणों के संचालन हेतु आवश्यकतानुरूप भवन के आधारभूत संरचना में सुधार, भवन का जीर्णोद्धार, प्रयोगशाला परिसर में उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर का अधिष्ठापन आदि कराया गया है । उक्त उपकरणों के संचालन हेतु आवश्यकतानुरूप अनुभव प्राप्त तकनीकी मानव बलों की व्यवस्था भी की जा चुकी है । महोदय, राज्य की संयुक्त खाद्य औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ को एन०ए०बी०एल० यानी नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एण्ड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, शीघ्र ही एन0ए0बी0एल0 से मान्यता प्राप्त हो जायेगी । महोदय, यहां यह भी अवगत कराना चाहते हैं कि यह भी निर्णय लिया गया है कि सभी प्रमंडलीय मुख्यालयों में भी खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच हेतु खाद्य प्रयोगशाला स्थापित किया जायेगा । साथ ही, संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, पटना में माइक्रोबॉयोलाजी लैब की स्थापना का भी प्रयास किया जा रहा है, जिससे खाद्य पदार्थों में जीवाणु एवं कवक जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सूक्ष्मजीवियों का भी पता लगाया जा सके । इस प्रकार राज्य सरकार का यह प्रयास है कि संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, पटना को विश्व स्तरीय खाद्य प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाय एवं राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आधारभूत संरचना सुदृढ़ हो ।
श्री अरूण शंकर प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि एफ०एस०एस०ए०आई० द्वारा 10 करोड़ की राशि इसके अधिष्ठापन के लिए दिया गया, लेकिन तीन छोटी-छोटी मशीन नहीं लगने के कारण अभी तक यह फक्सिनिंग नहीं हुआ और बिहार में दूसरी कोई भी मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच हेतु कोई ऐसा सयंत्र नहीं है जहां हम मिलावट की जांच करें । अभी वर्तमान में जो मिलावटी सैंपल लिए जाते हैं विभागीय अधिकारियों द्वारा, खासकर त्यौहार के उत्सव में अत्यधिक मात्रा में सैंपल कलेक्ट किया जाता है, लेकिन उसकी जांच कहां होती है? यह तो कोलकाता के अलावे नजदीक में कहीं नहीं है और अगर कोलकाता से जांच करायी जाती है, तो वहां से आये हुए सैंपल पर आजतक कितनों पर विभाग द्वारा कार्रवाई की गयी, यह मैं जानना चाहता हूं ।
| लाईट एवं बेन्च निर्माण करते हुए सौन्दर्यीकरण कराने की मांग मैं सदन के माध्यम से सरकार से मांग करती हूं । श्री पवन कुमार यादव : माननीय अध्यक्ष महोदय, कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से आर्थिक तंगी झेल रहे बिहार के विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बकाया बिजली बिल में डीपीएस चार्ज को माफ करने की सरकार से मांग करता हूं । श्रीमती प्रतिमा कुमारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, पंचायत वार्ड सचिव दो हज़ार सत्रह से मुख्यमंत्री सात निश्चय के तहत कराये जा रहे कामों का कार्यान्वयन कर रहे हैं लेकिन उन्हें मानदेय नहीं दिया जा रहा है । अतः पंचायत वार्ड सचिवों को मानदेय दिये जाने की मांग करती हूं । श्री सुदामा प्रसाद : माननीय अध्यक्ष महोदय, गया जिला के खिजरसराय थाने के अकौनी की सुशीला देवी और उमा देवी की चाकू से गोद कर बर्बर हत्या करने वाले अपराधियों की अविलम्ब गिरफ्तारी की मांग करता हूं । श्री सुरेन्द्र मेहता : अध्यक्ष महोदय, बेगूसराय जिलान्तर्गत भगवानपुर प्रखण्ड के सीशून्यआईशून्य की आय से अधिक सम्पत्ति की जांच कर कार्यवाही की मांग सरकार से करता हूं । श्री विद्या सागर केशरी : माननीय अध्यक्ष महोदय, अररिया जिला के फारबिसगंज प्रखंड के हलहलिया पंचायत में पूर्व से चल रहे मेसर्स अलसमीर, मेसर्स जकारिया, मेसर्स मोहरवा पशुवधशाला के साथ विभिन्न वधशाला विधानसभा क्षेत्र में सरकार की उदासीनता के चलते चोरी छुपे चलाये जा रहे हैं । सदन के माध्यम से उपर्युक्त सभी पशुवधशाला बंद कराने की मांग सदन से करता हूं । अध्यक्ष : लिखा हुआ ही पढ़ें । श्री प्रफुल्ल कुमार मांझी : अध्यक्ष महोदय, ग्राम - ताजपुर, पंचायत- कैथा, प्रखण्ड - ईस्लामनगर अलीगंज, जिला- जमुई में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछले कई वर्षों से जर्जर सामुदायिक भवन में चल रहा है । इसलिए ग्राम ताजपुर में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन बनाने की मांग सरकार से करता हूं । श्री मिथिलेश कुमार : अध्यक्ष महोदय, अध्यक्ष : क्या है ? श्री मिथिलेश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मेरा शून्यकाल छूट गया है । अध्यक्ष : आपका अमान्य किया गया है । वह अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत है । श्री कुमार शैलेन्द्र : अध्यक्ष महोदय, उन्नीस मार्च को होली भी है और शब-ए-बारात भी है और उसी दिन इग्नू की परीक्षा भी है । महोदय, परीक्षार्थी जब परीक्षा देने जायेंगे तो कोई न कोई रंग-अबीर दे देगा इसलिए चाहते हैं कि वह तिथि आगे बढ़ाई जाय । अध्यक्ष : ठीक है । अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, माननीय अटल जी ने कुछ बात, जो उनके द्वारा बात कही गई थी, संविधान और कानून में सबका महत्व है, लेकिन लोकतंत्र एक ढांचा मात्र बनकर रह जाय, एक कर्मकांड में बदल जाय, उसकी प्राण शक्ति घटती जाय तो वहां कठिनाई पैदा हो जाती है । प्राण शक्ति को घटने न देना यह हम सबकी जिम्मेवारी है। हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था का अवमूल्यन और क्षरण नहीं होने देना है । जनप्रतिनिधियों की साख नहीं घटनी चाहिए, जनप्रतिनिधि संस्थाओं की विश्वसनीयता में कमी नहीं आनी चाहिए । हमारे लोकतंत्र का पौधा मजबूत है । लेकिन ऐसा न हो कि वह ऊपर-ऊपर तो बढ़ता जाय पर उसकी जड़ें खोखली होती जायं । यही कर्त्तव्य हमारे सामने है और भारत अमृत महोत्सव के अवसर पर शताब्दी वर्ष जब हम मनाने जा रहे हैं तो अगले पच्चीस वर्ष अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करें । माननीय मुख्यमंत्री जी का भी जो सुझाव आया उसको आसन ने ग्रहण किया है । आप सभी वरीय लोगों से आग्रह है कि आपको लगता है कि आसन संविधान और नियम से थोड़ा इतर हो रहा है तो अपने अमूल्य सुझाव निश्चित तौर पर आकर के मेरे कक्ष में देंगे, हम उसे ग्रहण करेंगे । अब ध्यानाकर्षण सूचनाएं ली जायेंगी । ध्यानाकर्षण सूचना तथा उसपर सरकारी वक्तव्य सर्वश्री अरूण शंकर प्रसाद, अनिरूद्ध प्रसाद यादव एवं अन्य तीन सभासदों से प्राप्त ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार की ओर से वक्तव्य । माननीय सदस्य, श्री अरूण शंकर प्रसाद की सूचना पढ़ी गई है । माननीय मंत्री, स्वास्थ्य विभाग । श्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री : महोदय, वस्तुस्थिति यह है कि सरकार जन-जन तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृत संकल्पित है । इसी क्रम में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, नई दिल्ली, भारत सरकार के द्वारा केन्द्रीय योजना अंतर्गत प्राप्त राशि से राज्य सरकार द्वारा संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला अगमकुआं, पटना अंतर्गत लगभग पाँच करोड़ सरसठ लाख रुपये की राशि से तीन उच्चस्तरीय उपकरणों यथा गैस कोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री, लिक्विड कोमैटोग्राफी-मास स्पेट्रेमेट्री और आइडेंटिकली कपिल प्लाजमा मास स्पेक्ट्रोमेट्री का अधिष्ठापन कराया गया है । शेष राशि लगभग एक करोड़ नवासी लाख मानव बल पर खर्च हेतु एवं लगभग एक करोड़ छब्बीस लाख उच्च स्तरीय मशीनों के रख-रखाव हेतु उपलब्ध करायी गयी है । यह जीशून्यसीशून्य एमशून्यएसशून्य / एमशून्यएसशून्य की सहायता से खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाइड व वसा की मात्रा एलशून्यसीशून्य - एमशून्यएसशून्य-एमशून्यएसशून्य... श्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री : की सहायता से खाद्य पदार्थों में एंटी-बॉयोटिक, माइक्रो-टॉक्सिन, रंजक इत्यादि की मात्रा तथा आईशून्यसीशून्यपीशून्यएमशून्यएसशून्य की सहायता से खाद्य पदार्थों में लैड, कैडमियम इत्यादि जैसे भारी धातुओं की जांच की जाती है। राज्य सरकार उक्त उपकरणों के सफल संचालन हेतु आवश्यक कदम उठाती रहती है । उक्त उपकरणों के संचालन हेतु आवश्यकतानुरूप भवन के आधारभूत संरचना में सुधार, भवन का जीर्णोद्धार, प्रयोगशाला परिसर में उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर का अधिष्ठापन आदि कराया गया है । उक्त उपकरणों के संचालन हेतु आवश्यकतानुरूप अनुभव प्राप्त तकनीकी मानव बलों की व्यवस्था भी की जा चुकी है । महोदय, राज्य की संयुक्त खाद्य औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ को एनशून्यएशून्यबीशून्यएलशून्य यानी नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एण्ड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, शीघ्र ही एनशून्यएशून्यबीशून्यएलशून्य से मान्यता प्राप्त हो जायेगी । महोदय, यहां यह भी अवगत कराना चाहते हैं कि यह भी निर्णय लिया गया है कि सभी प्रमंडलीय मुख्यालयों में भी खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच हेतु खाद्य प्रयोगशाला स्थापित किया जायेगा । साथ ही, संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, पटना में माइक्रोबॉयोलाजी लैब की स्थापना का भी प्रयास किया जा रहा है, जिससे खाद्य पदार्थों में जीवाणु एवं कवक जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सूक्ष्मजीवियों का भी पता लगाया जा सके । इस प्रकार राज्य सरकार का यह प्रयास है कि संयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला, अगमकुआँ, पटना को विश्व स्तरीय खाद्य प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाय एवं राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आधारभूत संरचना सुदृढ़ हो । श्री अरूण शंकर प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि एफशून्यएसशून्यएसशून्यएशून्यआईशून्य द्वारा दस करोड़ की राशि इसके अधिष्ठापन के लिए दिया गया, लेकिन तीन छोटी-छोटी मशीन नहीं लगने के कारण अभी तक यह फक्सिनिंग नहीं हुआ और बिहार में दूसरी कोई भी मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच हेतु कोई ऐसा सयंत्र नहीं है जहां हम मिलावट की जांच करें । अभी वर्तमान में जो मिलावटी सैंपल लिए जाते हैं विभागीय अधिकारियों द्वारा, खासकर त्यौहार के उत्सव में अत्यधिक मात्रा में सैंपल कलेक्ट किया जाता है, लेकिन उसकी जांच कहां होती है? यह तो कोलकाता के अलावे नजदीक में कहीं नहीं है और अगर कोलकाता से जांच करायी जाती है, तो वहां से आये हुए सैंपल पर आजतक कितनों पर विभाग द्वारा कार्रवाई की गयी, यह मैं जानना चाहता हूं । |
Constipation Relief Drinks गर्मी के दिनों में होने वाली एक आम समस्या है जिससे कुछ उपायों की मदद से राहत मिल सकती है। इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही ड्रिंक्स के बारे में जानेंगे जिन्हें अगर गर्मी के मौसम में पिया जाए तो कब्ज की समस्या तुरंत राहत मिल सकती है। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में जो गर्मी के मौसम में रामबाण साबित होगी।
नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Constipation Relief Drinks: पूरे उत्तर भारत में गर्मी अपने पूरे चरम पर है और जैसे-जैसे सूरज का तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इनमें से एक कब्ज की समस्या है, जो व्यक्ति को काफी असहज और कमजोर बना देती है। हालांकि, गर्मी के दिनों में होने वाली एक आम समस्या है, जिससे कुछ उपायों की मदद से राहत मिल सकती है। इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही ड्रिंक्स के बारे में जानेंगे, जिन्हें अगर गर्मी के मौसम में पिया जाए, तो कब्ज की समस्या तुरंत राहत मिल सकती है।
कब्ज से राहत पाने के लिए क्या करें?
आम पन्ना हर भारतीय घर में आसानी से पाया जाने वाला एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक है, जो कच्चे आम से तैयार होता है। आम पन्ना न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि फाइबर से भी भरपूर होता है। हरे आम में पेक्टिन होता है, एक घुलनशील फाइबर जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और कब्ज से राहत दिलाता है।
सौंफ में प्राकृतिक पाचन गुण होते हैं और यह कब्ज को दूर करने में मदद कर सकता है। रात भर एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ भिगोकर सुबह पीने से कब्स में आराम मिलता है।
छाछ एक पारंपरिक पेय पदार्थ है, जो सदियों से भारतीय घरों में परोसा जा रहा है। छाछ अपने पाचन लाभों के लिए जाना जाता है। इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंत को स्वस्थ बनाए रखने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
जीरे में कार्मिनेटिव गुण होते हैं, जो पाचन को उत्तेजित करके कब्ज को कम कर सकते हैं। एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा उबालकर, इस मिश्रण को छानकर गर्म करके पीने से कब्ज में आराम मिलता है।
पुदीना पाचन तंत्र पर सकारात्मक और सुखदायक प्रभाव डालता है, जिससे कब्ज से राहत मिलती है। ताजे निचोड़े हुए नींबू के रस में पुदीने की पत्तियां और पानी मिलाकर एक ताज़ा ड्रिंक तैयार करें। इसे पीने से गर्मियों में पाचन से काफी राहत मिलती है।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
| Constipation Relief Drinks गर्मी के दिनों में होने वाली एक आम समस्या है जिससे कुछ उपायों की मदद से राहत मिल सकती है। इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही ड्रिंक्स के बारे में जानेंगे जिन्हें अगर गर्मी के मौसम में पिया जाए तो कब्ज की समस्या तुरंत राहत मिल सकती है। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में जो गर्मी के मौसम में रामबाण साबित होगी। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Constipation Relief Drinks: पूरे उत्तर भारत में गर्मी अपने पूरे चरम पर है और जैसे-जैसे सूरज का तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इनमें से एक कब्ज की समस्या है, जो व्यक्ति को काफी असहज और कमजोर बना देती है। हालांकि, गर्मी के दिनों में होने वाली एक आम समस्या है, जिससे कुछ उपायों की मदद से राहत मिल सकती है। इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे ही ड्रिंक्स के बारे में जानेंगे, जिन्हें अगर गर्मी के मौसम में पिया जाए, तो कब्ज की समस्या तुरंत राहत मिल सकती है। कब्ज से राहत पाने के लिए क्या करें? आम पन्ना हर भारतीय घर में आसानी से पाया जाने वाला एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक है, जो कच्चे आम से तैयार होता है। आम पन्ना न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि फाइबर से भी भरपूर होता है। हरे आम में पेक्टिन होता है, एक घुलनशील फाइबर जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और कब्ज से राहत दिलाता है। सौंफ में प्राकृतिक पाचन गुण होते हैं और यह कब्ज को दूर करने में मदद कर सकता है। रात भर एक गिलास पानी में एक चम्मच सौंफ भिगोकर सुबह पीने से कब्स में आराम मिलता है। छाछ एक पारंपरिक पेय पदार्थ है, जो सदियों से भारतीय घरों में परोसा जा रहा है। छाछ अपने पाचन लाभों के लिए जाना जाता है। इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंत को स्वस्थ बनाए रखने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करते हैं। जीरे में कार्मिनेटिव गुण होते हैं, जो पाचन को उत्तेजित करके कब्ज को कम कर सकते हैं। एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा उबालकर, इस मिश्रण को छानकर गर्म करके पीने से कब्ज में आराम मिलता है। पुदीना पाचन तंत्र पर सकारात्मक और सुखदायक प्रभाव डालता है, जिससे कब्ज से राहत मिलती है। ताजे निचोड़े हुए नींबू के रस में पुदीने की पत्तियां और पानी मिलाकर एक ताज़ा ड्रिंक तैयार करें। इसे पीने से गर्मियों में पाचन से काफी राहत मिलती है। Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें। |
SBI 3-in-1 Account: एसबीआई 3 इन 1 अकाउंट में खाताधारकों को एक बचत खाता, एक डीमैट खाता और एक ट्रेडिंग खाता एक साथ जुड़कर मिलते हैं.
SBI 3-in-1 Account: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है. एसबीआई ने ग्राहकों को 3-in-1 अकाउंट की सुविधा दी है जो बचत खाते (Saving Account), डीमैट खाते (Dmat Account) और ट्रेडिंग खाते (Trading Account) को जोड़ता है. इस अकाउंट से ग्राहकों को पेपरलेस और आसान ट्रेडिंग में मदद मिलेगी. ग्राहकों को ये सारी सुविधा एक ही अकाउंट के साथ मिलती है. एसबीआई ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है.
1. पैन कार्ड या फॉर्म 60 (PAN or Form 60) 2. फोटोग्राफ 3. ऑफिशियल वैलिड डॉक्युमेंट्स (OVD) जैसे- पासपोर्ट (Passport), आधार (Aadhar), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License), वोटर आईडी कार्ड (Voter ID Card), मनरेगा द्वारा जारी जॉब कार्ड (MNREGA Job Card) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर द्वारा जारी पत्र जिसमें नाम और पते का डिटेल हो.
इस संबंध में ट्रेडर्स को ई-मार्जिन सुविधा के बारे में भी पता होना चाहिए. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस सुविधा के तहत, कोई भी कम से कम 25 प्रतिशत मार्जिन के साथ ट्रेड कर सकता है और जरूरी मार्जिन प्राप्त करने के लिए कैश या कोलैटरल का उपयोग करके 30 दिनों तक की स्थिति को आगे बढ़ा सकता है.
कैसे उठाएं लाभ?
Step 1: एसबीआई सिक्योरिटीज वेब प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रेडिंग खाते में लॉग इन करें.
Step 2: ऑर्डर प्लेसमेंट (खरीदें / बेचें) मेनू पर जाएं.
Step 3: ऑर्डर देते समय प्रोडक्ट टाइप को ई-मार्जिन के रूप में चुनें.
अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति SBI की आधिकारिक वेबसाइट bank.sbi पर लॉग इन कर सकते हैं.
SBI ने बड़ा फैसला लेते हुए बेस रेट में 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी की है. बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक ये 0.10 फीसदी बढ़कर 7.55 फीसदी हो गई है. किसी बैंक का बेस रेट वह मिनिमम रेट है जिसके नीचे कोई भी बैंक किसी व्यक्ति या संस्था को लोन नहीं दे सकता. बेस रेट वह दर है जिस दर को बैंक अपने कस्टमर के लिए लागू करता है. कुछ यूं कहें तो बैंक जिस रेट पर कस्टमर को लोन देते हैं, वही बेस रेट है.
| SBI तीन-in-एक Account: एसबीआई तीन इन एक अकाउंट में खाताधारकों को एक बचत खाता, एक डीमैट खाता और एक ट्रेडिंग खाता एक साथ जुड़कर मिलते हैं. SBI तीन-in-एक Account: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है. एसबीआई ने ग्राहकों को तीन-in-एक अकाउंट की सुविधा दी है जो बचत खाते , डीमैट खाते और ट्रेडिंग खाते को जोड़ता है. इस अकाउंट से ग्राहकों को पेपरलेस और आसान ट्रेडिंग में मदद मिलेगी. ग्राहकों को ये सारी सुविधा एक ही अकाउंट के साथ मिलती है. एसबीआई ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है. एक. पैन कार्ड या फॉर्म साठ दो. फोटोग्राफ तीन. ऑफिशियल वैलिड डॉक्युमेंट्स जैसे- पासपोर्ट , आधार , ड्राइविंग लाइसेंस , वोटर आईडी कार्ड , मनरेगा द्वारा जारी जॉब कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर द्वारा जारी पत्र जिसमें नाम और पते का डिटेल हो. इस संबंध में ट्रेडर्स को ई-मार्जिन सुविधा के बारे में भी पता होना चाहिए. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस सुविधा के तहत, कोई भी कम से कम पच्चीस प्रतिशत मार्जिन के साथ ट्रेड कर सकता है और जरूरी मार्जिन प्राप्त करने के लिए कैश या कोलैटरल का उपयोग करके तीस दिनों तक की स्थिति को आगे बढ़ा सकता है. कैसे उठाएं लाभ? Step एक: एसबीआई सिक्योरिटीज वेब प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रेडिंग खाते में लॉग इन करें. Step दो: ऑर्डर प्लेसमेंट मेनू पर जाएं. Step तीन: ऑर्डर देते समय प्रोडक्ट टाइप को ई-मार्जिन के रूप में चुनें. अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति SBI की आधिकारिक वेबसाइट bank.sbi पर लॉग इन कर सकते हैं. SBI ने बड़ा फैसला लेते हुए बेस रेट में शून्य.दस फीसदी की बढ़ोतरी की है. बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक ये शून्य.दस फीसदी बढ़कर सात.पचपन फीसदी हो गई है. किसी बैंक का बेस रेट वह मिनिमम रेट है जिसके नीचे कोई भी बैंक किसी व्यक्ति या संस्था को लोन नहीं दे सकता. बेस रेट वह दर है जिस दर को बैंक अपने कस्टमर के लिए लागू करता है. कुछ यूं कहें तो बैंक जिस रेट पर कस्टमर को लोन देते हैं, वही बेस रेट है. |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
फुटबॉल क्लब स्टेओ बुकुरेस्टी बुखारेस्ट में स्थित एक रोमानियाई पेशेवर फुटबॉल क्लब है।Dida, Alexandru (21-12-2001), Steaua fotbalului românesc, Pro TV Magazin, nr.51/IV, pp.62-63 वे यूरोपीय प्रतियोगिताओं में के रूप में अच्छी तरह रोमानियाई लीग में सबसे सफल रोमानियाई फुटबॉल टीम हैं। वे फाइनल 1986 यूरोपीय कप में विजयी होने के नाते, यूरोपीय कप जीतने वाले पहले पूर्वी यूरोपीय टीम बन गई। स्टेओ 1989 यूरोपीय कप के फाइनल में फिर से खेला। क्लब ऐतिहासिक रोमानियाई आर्मी स्पोर्ट्स क्लब के रूप में जाना जाता है। फुटबॉल विभाग 1998 में, तथापि, अलग. १९९७ यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल 28 मई 1997 को म्यूनिख में ओलंपिया स्टेडियम में एक फुटबॉल मैच था। इटली से जुवेंटस को हराने के बाद जर्मनी की बोरुसिया डॉर्टमुंड ने 3-1 से जीता मैच.
एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी और १९९७ यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी 2 संबंध है और १९९७ यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल 13 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (2 + 13)।
यह लेख एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी और १९९७ यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फुटबॉल क्लब स्टेओ बुकुरेस्टी बुखारेस्ट में स्थित एक रोमानियाई पेशेवर फुटबॉल क्लब है।Dida, Alexandru , Steaua fotbalului românesc, Pro TV Magazin, nr.इक्यावन/IV, pp.बासठ-तिरेसठ वे यूरोपीय प्रतियोगिताओं में के रूप में अच्छी तरह रोमानियाई लीग में सबसे सफल रोमानियाई फुटबॉल टीम हैं। वे फाइनल एक हज़ार नौ सौ छियासी यूरोपीय कप में विजयी होने के नाते, यूरोपीय कप जीतने वाले पहले पूर्वी यूरोपीय टीम बन गई। स्टेओ एक हज़ार नौ सौ नवासी यूरोपीय कप के फाइनल में फिर से खेला। क्लब ऐतिहासिक रोमानियाई आर्मी स्पोर्ट्स क्लब के रूप में जाना जाता है। फुटबॉल विभाग एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में, तथापि, अलग. एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल अट्ठाईस मई एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे को म्यूनिख में ओलंपिया स्टेडियम में एक फुटबॉल मैच था। इटली से जुवेंटस को हराने के बाद जर्मनी की बोरुसिया डॉर्टमुंड ने तीन-एक से जीता मैच. एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी और एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल आम में शून्य बातें हैं । एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी दो संबंध है और एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल तेरह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख एफ सी स्टेओ बुकुरेस्टी और एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
झारखंड में हजारीबाग जिले के चरही चौक के निकट आज एक तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चरही चौक गोलबंर के निकट आज सुबह कुछ लोग खड़े थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने लॉकडाउन का हवाला देकर उन्हें वहां से जाने के लिए कहा लेकिन जवानों के जाते ही सभी फिर से गोलंबर के पास जुट गए और बातचीत करने लगे।
सूत्रों ने बताया कि इसी क्रम में रांची की ओर से एक ट्रक आ रहा था जो घाटो मोड़ की ओर मुड़ा तभी हजारीबाग की ओर से आ रहा एक ट्रेलर इसके सामने आ गया। ट्रेलर की रफ्तार तेज थी। ऐसे में ट्रेलर के ड्राइवर ने ट्रक को बचाने के लिए भीड़ की ओर वाहन मोड़ दिया। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले लोग कुछ समझ पाते सभी ट्रेलर की चपेट में आ गए। शव क्षत-विक्षत हो गए।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह ट्रेलर के नीचे दबे शवों को बाहर निकला। हादसे में मरने वालों की पहचान दिलीप कुमार, जानकी प्रजापति, राजेन्द्र प्रजापति, बैजू ठाकुर उर्फ विजय ठाकु और ओम प्रकाश रजक के रूप में की गई। सूत्रों ने बताया कि घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। घायलों में संजय कुमार सह, देवलाल महतो और ट्रक का चालक शामिल है।
| झारखंड में हजारीबाग जिले के चरही चौक के निकट आज एक तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चरही चौक गोलबंर के निकट आज सुबह कुछ लोग खड़े थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने लॉकडाउन का हवाला देकर उन्हें वहां से जाने के लिए कहा लेकिन जवानों के जाते ही सभी फिर से गोलंबर के पास जुट गए और बातचीत करने लगे। सूत्रों ने बताया कि इसी क्रम में रांची की ओर से एक ट्रक आ रहा था जो घाटो मोड़ की ओर मुड़ा तभी हजारीबाग की ओर से आ रहा एक ट्रेलर इसके सामने आ गया। ट्रेलर की रफ्तार तेज थी। ऐसे में ट्रेलर के ड्राइवर ने ट्रक को बचाने के लिए भीड़ की ओर वाहन मोड़ दिया। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले लोग कुछ समझ पाते सभी ट्रेलर की चपेट में आ गए। शव क्षत-विक्षत हो गए। हादसे की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह ट्रेलर के नीचे दबे शवों को बाहर निकला। हादसे में मरने वालों की पहचान दिलीप कुमार, जानकी प्रजापति, राजेन्द्र प्रजापति, बैजू ठाकुर उर्फ विजय ठाकु और ओम प्रकाश रजक के रूप में की गई। सूत्रों ने बताया कि घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। घायलों में संजय कुमार सह, देवलाल महतो और ट्रक का चालक शामिल है। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
फरीदकोटः थाना सिटी-2 में प्रैसवार्ता के दौरान डी. एस. पी. जसमीत सिंह ने बताया कि पुलिस ने ऐसे झपटमार को काबू किया है जो राहगीरों के मोबाइल छीनता था। डी. एस. पी. ने बताया कि थाना सिटी-2 की पुलिस पार्टी गुरु गोबिंद सिंह मैडिकल अस्पताल के मेन गेट पर मौजूद थी। तभी उन्हें गुप्त सूचना मिली कि रविन्द्र सिंह पुत्र बलजीत सिंह निवासी गांव भाना जो अपने मोटरसाइकिल पर सवार होकर रहागीरों के मोबाइल छीनता है। वह अब मोबाइल बेचने की ताक में घूम रहा है। सूचना के आधार पर चौक में नाकाबंदी कर इस आरोपी को मोटरसाइकिल सहित काबू कर मामला दर्ज करने उपरांत जब पूछताछ की तो उससे 8 अन्य मोबाइल बरामद हुए। इस मौके पर थाना सिटी-2 प्रमुख एस. एच. ओ. गुरमेल सिंह भी उपथित थे।
| फरीदकोटः थाना सिटी-दो में प्रैसवार्ता के दौरान डी. एस. पी. जसमीत सिंह ने बताया कि पुलिस ने ऐसे झपटमार को काबू किया है जो राहगीरों के मोबाइल छीनता था। डी. एस. पी. ने बताया कि थाना सिटी-दो की पुलिस पार्टी गुरु गोबिंद सिंह मैडिकल अस्पताल के मेन गेट पर मौजूद थी। तभी उन्हें गुप्त सूचना मिली कि रविन्द्र सिंह पुत्र बलजीत सिंह निवासी गांव भाना जो अपने मोटरसाइकिल पर सवार होकर रहागीरों के मोबाइल छीनता है। वह अब मोबाइल बेचने की ताक में घूम रहा है। सूचना के आधार पर चौक में नाकाबंदी कर इस आरोपी को मोटरसाइकिल सहित काबू कर मामला दर्ज करने उपरांत जब पूछताछ की तो उससे आठ अन्य मोबाइल बरामद हुए। इस मौके पर थाना सिटी-दो प्रमुख एस. एच. ओ. गुरमेल सिंह भी उपथित थे। |
।प्रबुद्धा (Prabuddha)
कन्या राशि के प्रबुद्धा नाम के लड़के बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। मान्यता है कि कन्या राशि के आराध्य देव कुबेर जी होते हैं। इन प्रबुद्धा नाम के लड़कों का पाचन तंत्र अकसर सही नहीं रहता जिस कारण प्रबुद्धा नाम के लड़कों में पेट से सम्बंधित बीमारियां बनी रहती हैं। इस राशि के प्रबुद्धा नाम के लड़के अगर स्वास्थ्य के साथ असावधानी बरतते हैं और कब्ज और अल्सर जैसे रोगों का शिकार हो सकते हैं। इन प्रबुद्धा नाम के लड़कों को पेट से जुड़े रोग और सेक्शुअल बीमारियां होने का खतरा होता है। प्रबुद्धा नाम के लड़के सन्तोषी, परोपकारी और खुशमिजाज होते हैं। प्रबुद्धा नाम के लड़के दिमाग को आराम नहीं लेने देते। हमेशा कुछ न कुछ सोचते विचारते रहते हैं।
प्रबुद्धा नाम का मतलब जागृत, भगवान बुद्ध होता है। अपने बच्चे को प्रबुद्धा नाम देने से पहले उसका अर्थ जान लेंगे तो इस से आपके शिशु का जीवन संवर सकता है। अपनी संतान को प्रबुद्धा नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। इस वजह से भी बच्चे का नाम प्रबुद्धा रखने से पहले उसका अर्थ पता होना चाहिए। प्रबुद्धा नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। प्रबुद्धा नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी जागृत, भगवान बुद्ध होते हैं। आगे प्रबुद्धा नाम की राशि, प्रबुद्धा का लकी नंबर व इस नाम के जागृत, भगवान बुद्ध के बारे में संक्षेप में बताया है।
प्रबुद्धा नाम का ग्रह स्वामी बुध है और इस नाम का शुभ अंक 5 होता है। स्वभाव से लापरवाह होने के बावजूद प्रबुद्धा नाम के लोग बिना योजना के सफल हो जाते हैं। 5 अंक वाले स्वयं अपना लक्ष्य बनाते हैं और उस पर अमल करते हैं। इन्हें दूसरों की बातें सुनना पसंद नहीं होता है। इस अंक वाले लोगों का स्वभाव बहुत अच्छा होता है और मानसिक रूप से ये काफी तेज होते हैं। लकी नंबर 5 वाले लोग हर जगह से ज्ञान प्राप्त करना पसंद करते हैं। आप हर काम पूरे जोश के साथ करते हैं। किसी नई शुरुआत से आप हिचकिचाते भी नहीं हैं।
जिनका नाम प्रबुद्धा है, उनकी राशि कन्या होती है। इस राशि के लोग बहुत व्यवस्थित होते हैं और उन्हें हर चीज़ सही चाहिए होती है। इनके स्वभाव में दो रूप नज़र आते हैं। करियर के मामलों में प्रबुद्धा नाम के लोग लेखन, संगीत, मीडिया और संचार आदि के क्षेत्रों को पसंद करते हैं। इन लोगों की जो चाह होती है, उसे पाकर ही दम लेते हैं। हालांकि, उन्हें इस प्रक्रिया में समय लगता है। कन्या राशि के लोगों को चटकीले रंग के कपड़े पहनना अच्छा लगता हैं। साथ ही इन्हें नए तरह के कपड़े खूब भाते हैं।
| ।प्रबुद्धा कन्या राशि के प्रबुद्धा नाम के लड़के बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। मान्यता है कि कन्या राशि के आराध्य देव कुबेर जी होते हैं। इन प्रबुद्धा नाम के लड़कों का पाचन तंत्र अकसर सही नहीं रहता जिस कारण प्रबुद्धा नाम के लड़कों में पेट से सम्बंधित बीमारियां बनी रहती हैं। इस राशि के प्रबुद्धा नाम के लड़के अगर स्वास्थ्य के साथ असावधानी बरतते हैं और कब्ज और अल्सर जैसे रोगों का शिकार हो सकते हैं। इन प्रबुद्धा नाम के लड़कों को पेट से जुड़े रोग और सेक्शुअल बीमारियां होने का खतरा होता है। प्रबुद्धा नाम के लड़के सन्तोषी, परोपकारी और खुशमिजाज होते हैं। प्रबुद्धा नाम के लड़के दिमाग को आराम नहीं लेने देते। हमेशा कुछ न कुछ सोचते विचारते रहते हैं। प्रबुद्धा नाम का मतलब जागृत, भगवान बुद्ध होता है। अपने बच्चे को प्रबुद्धा नाम देने से पहले उसका अर्थ जान लेंगे तो इस से आपके शिशु का जीवन संवर सकता है। अपनी संतान को प्रबुद्धा नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। इस वजह से भी बच्चे का नाम प्रबुद्धा रखने से पहले उसका अर्थ पता होना चाहिए। प्रबुद्धा नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। प्रबुद्धा नाम वाले व्यक्ति बिलकुल अपने नाम के मतलब की तरह यानी जागृत, भगवान बुद्ध होते हैं। आगे प्रबुद्धा नाम की राशि, प्रबुद्धा का लकी नंबर व इस नाम के जागृत, भगवान बुद्ध के बारे में संक्षेप में बताया है। प्रबुद्धा नाम का ग्रह स्वामी बुध है और इस नाम का शुभ अंक पाँच होता है। स्वभाव से लापरवाह होने के बावजूद प्रबुद्धा नाम के लोग बिना योजना के सफल हो जाते हैं। पाँच अंक वाले स्वयं अपना लक्ष्य बनाते हैं और उस पर अमल करते हैं। इन्हें दूसरों की बातें सुनना पसंद नहीं होता है। इस अंक वाले लोगों का स्वभाव बहुत अच्छा होता है और मानसिक रूप से ये काफी तेज होते हैं। लकी नंबर पाँच वाले लोग हर जगह से ज्ञान प्राप्त करना पसंद करते हैं। आप हर काम पूरे जोश के साथ करते हैं। किसी नई शुरुआत से आप हिचकिचाते भी नहीं हैं। जिनका नाम प्रबुद्धा है, उनकी राशि कन्या होती है। इस राशि के लोग बहुत व्यवस्थित होते हैं और उन्हें हर चीज़ सही चाहिए होती है। इनके स्वभाव में दो रूप नज़र आते हैं। करियर के मामलों में प्रबुद्धा नाम के लोग लेखन, संगीत, मीडिया और संचार आदि के क्षेत्रों को पसंद करते हैं। इन लोगों की जो चाह होती है, उसे पाकर ही दम लेते हैं। हालांकि, उन्हें इस प्रक्रिया में समय लगता है। कन्या राशि के लोगों को चटकीले रंग के कपड़े पहनना अच्छा लगता हैं। साथ ही इन्हें नए तरह के कपड़े खूब भाते हैं। |
D.G-Min. of
[चौ० मुल्तान सिंह]
चाहिए । हम मे तो ढाई सौ या तीन सौ किसान भाए है। इन के यहा तो ऐसे ऐस लोग मत्री रहे हैं जो कृषि के बारे में कुछ नही जानते थे । यह मै ही नहीं कह रहा हू, चौधरी चरण सिंह ने मथुरा में कहा था, वहा एक मीटिंग हो रही थी, 62-63 मे, मैं भी उस समय एग्रीकल्चर बोर्ड का मेम्बर था, मैं भी वहा था और हमारे माननीय मत्रो भान प्रताप सिंह जी भी वहा मौजूद थे । एक किसान खडा हुआ और उस ने कहा कि ग्राष पशु पालन और एग्रीकल्चर के मनी है, इसमे भी तरक्की क्यों नही हुई ? तो चौधरी साहिब ने जवाब दिया कि इसलिए नही हुई कि हमारी सरकार जो है, जा दिल्ली म बैठी है वह नहीं चाहता किमान की तरक्की । उन्होंने बताया कि मेरा नाम एग्रोक्लचर मिनिस्टर है लेकिन मेरे पास सिवाय पढाने के और कोई भी विभाग नही है । एग्रीकल्चर विभाग चार जगह बाटा गया हैकापरेटिव अलग है, सिंचाई अलग है, एग्रीकन्चर अलग है चोर पैसा देने वाला विभाग अलग है 1 जब तक यह सारे विभाग इक्ट्ठे नही होगे तब तक विमान का भला नही हो सकता है । मेरा सुझाव है कि हर प्रदेश में इन चारी विभागों का एक ही मत्री होना चाहिए। उन्होने बताया कि हमारे देश का कृषि मनी जो है-पता नही सुब्रमण्यम बताया या पाई बताया वह एक ऐसा व्यक्ति है जिनका पडिया और बछिया का पता नही । बछडा प्रौर बछिया तो सामने बैठने वाले कभी पहचान ही नही पायेगे । भूतपूर्व कृषि मती बाजरे और गेहू की बाल मे फर्क नहीं बता सकते । जो और गेहू की बाल तो आप कभी समझ ही नहीं सकते । इस तरह से इन्होंने देश को तबाह कर दिया पर अक्ल नहीं पाई। इन इमानदारो ने 60-70 अरब रुपए का गल्ला बाहर से मगाया । अगर यही रुपया इस देश के किसानो पर लगा देते तो हमारा यह खजाना बाहर ही नही
Agr. & Irrgn.
384जाता बल्कि इतना ही गल्ला हम बाहर भी भेज सकते थे । लेकिन इन्होंने इस बात को नही सोचा ।
मेरा एक सुझाव मत्री जी को यह है कि जिला स्तर विधान सभा स्तर और लोक सभा स्तर पर किसानो का सगठन बनाया जाये और वही किसान की फसल का दाम तय करे जिसे गवर्न मेन्ट को मान लेना चाहिए । यह लोग जो एयरकडीशड कमरो से बैठते है उन्होने कह दिया कि तुम्हारे गेहू का दाम यह हो गया - यह कौन सा इन्साफ है ? क्या ये लोग किसी और चीज का भी बाम तय करते
एक बात की भार मै और आपका ध्यान दिलाना चाहता हू । हमारे पृ० पी० मे एक हिडालको फैक्टरी है जावि एल्यूमिनियम के बर्तन बनाती है । उसके साथ दा पैसे, पोने दा पैसे यनिट पर बिजली मालाई कर ने का एग्रीमेन्ट किया गया था। वह व्यक्ति ता श्राज भी वहता है कि किसानो की बिजली वाट कर हिडालका का बिजली दे दी जाये ।
हिंडालका एल्युमिनियम फैक्टरी, रेनुकोट, मिर्जापुर को सन् 1959 से 25 वर्ष के लिए 55 मेगावाट बिजली करीब दो पैसे प्रति यूनिट 1975 तक दी गई जबकि इस अवधि में बिजली पैदा -रने की लागत करीब 8 पैसा प्रति यूनिट पड़ी ।
[MR. DEPUTY SPEAKER in the Chair]
समय समय पर नये अनुबधो द्वारा 3 से 11 पैसे प्रति यूनिट पर बिजली दी जाती रही। अब सबसे नया एग्रीमेन्ट जून 1975 मे 85 मेगावाट बिजली देने का 11 पैसा प्रति यूनिट पर किया गग्ग है व कोयला अधिभार अलग से
| D.G-Min. of [चौशून्य मुल्तान सिंह] चाहिए । हम मे तो ढाई सौ या तीन सौ किसान भाए है। इन के यहा तो ऐसे ऐस लोग मत्री रहे हैं जो कृषि के बारे में कुछ नही जानते थे । यह मै ही नहीं कह रहा हू, चौधरी चरण सिंह ने मथुरा में कहा था, वहा एक मीटिंग हो रही थी, बासठ-तिरेसठ मे, मैं भी उस समय एग्रीकल्चर बोर्ड का मेम्बर था, मैं भी वहा था और हमारे माननीय मत्रो भान प्रताप सिंह जी भी वहा मौजूद थे । एक किसान खडा हुआ और उस ने कहा कि ग्राष पशु पालन और एग्रीकल्चर के मनी है, इसमे भी तरक्की क्यों नही हुई ? तो चौधरी साहिब ने जवाब दिया कि इसलिए नही हुई कि हमारी सरकार जो है, जा दिल्ली म बैठी है वह नहीं चाहता किमान की तरक्की । उन्होंने बताया कि मेरा नाम एग्रोक्लचर मिनिस्टर है लेकिन मेरे पास सिवाय पढाने के और कोई भी विभाग नही है । एग्रीकल्चर विभाग चार जगह बाटा गया हैकापरेटिव अलग है, सिंचाई अलग है, एग्रीकन्चर अलग है चोर पैसा देने वाला विभाग अलग है एक जब तक यह सारे विभाग इक्ट्ठे नही होगे तब तक विमान का भला नही हो सकता है । मेरा सुझाव है कि हर प्रदेश में इन चारी विभागों का एक ही मत्री होना चाहिए। उन्होने बताया कि हमारे देश का कृषि मनी जो है-पता नही सुब्रमण्यम बताया या पाई बताया वह एक ऐसा व्यक्ति है जिनका पडिया और बछिया का पता नही । बछडा प्रौर बछिया तो सामने बैठने वाले कभी पहचान ही नही पायेगे । भूतपूर्व कृषि मती बाजरे और गेहू की बाल मे फर्क नहीं बता सकते । जो और गेहू की बाल तो आप कभी समझ ही नहीं सकते । इस तरह से इन्होंने देश को तबाह कर दिया पर अक्ल नहीं पाई। इन इमानदारो ने साठ-सत्तर अरब रुपए का गल्ला बाहर से मगाया । अगर यही रुपया इस देश के किसानो पर लगा देते तो हमारा यह खजाना बाहर ही नही Agr. & Irrgn. तीन सौ चौरासीजाता बल्कि इतना ही गल्ला हम बाहर भी भेज सकते थे । लेकिन इन्होंने इस बात को नही सोचा । मेरा एक सुझाव मत्री जी को यह है कि जिला स्तर विधान सभा स्तर और लोक सभा स्तर पर किसानो का सगठन बनाया जाये और वही किसान की फसल का दाम तय करे जिसे गवर्न मेन्ट को मान लेना चाहिए । यह लोग जो एयरकडीशड कमरो से बैठते है उन्होने कह दिया कि तुम्हारे गेहू का दाम यह हो गया - यह कौन सा इन्साफ है ? क्या ये लोग किसी और चीज का भी बाम तय करते एक बात की भार मै और आपका ध्यान दिलाना चाहता हू । हमारे पृशून्य पीशून्य मे एक हिडालको फैक्टरी है जावि एल्यूमिनियम के बर्तन बनाती है । उसके साथ दा पैसे, पोने दा पैसे यनिट पर बिजली मालाई कर ने का एग्रीमेन्ट किया गया था। वह व्यक्ति ता श्राज भी वहता है कि किसानो की बिजली वाट कर हिडालका का बिजली दे दी जाये । हिंडालका एल्युमिनियम फैक्टरी, रेनुकोट, मिर्जापुर को सन् एक हज़ार नौ सौ उनसठ से पच्चीस वर्ष के लिए पचपन मेगावाट बिजली करीब दो पैसे प्रति यूनिट एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर तक दी गई जबकि इस अवधि में बिजली पैदा -रने की लागत करीब आठ पैसा प्रति यूनिट पड़ी । [MR. DEPUTY SPEAKER in the Chair] समय समय पर नये अनुबधो द्वारा तीन से ग्यारह पैसे प्रति यूनिट पर बिजली दी जाती रही। अब सबसे नया एग्रीमेन्ट जून एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर मे पचासी मेगावाट बिजली देने का ग्यारह पैसा प्रति यूनिट पर किया गग्ग है व कोयला अधिभार अलग से |
राजस्थान के अलवर जिले में दो बच्चों की मां ने अपने प्रेमी के साथ कुएं में छलांग लगा दी. जिससे महिला की मौत हो गई. उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. जबकि युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मामला अलवर के नीमराना थाना क्षेत्र का है. जहां खोकर बसई गांव में एक विवाहिता अपने प्रेमी के साथ कुएं में कूद गई. नीमराना थानाधिकारी हितेश शर्मा ने बताया कि गांव की महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में 2 दिन पहले दर्ज हुई थी. पुलिस महिला की तलाश कर रही थी.
बुधवार की सुबह स्थानीय लोगों ने पुलिस सूचना दी कि एक महिला का शव कुएं में पड़ा हुआ है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर जा पहुंची. पुलिस ने कुएं में देखा तो वहां एक नहीं लोग थे. महिला के संग एक युवक भी कुएं में पड़ा था. स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने दोनों को बाहर निकाला.
जांच में महिला मृत निकली लेकिन युवक की सांसें चल रही थी, लिहाजा उसे फौरन बेहड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी.
महिला की पहचान सविता के रूप में हुई है. जिसके दो बच्चे भी हैं. जांच में पता चला कि यह पूरा मामला प्रेम प्रसंग से का है. हालांकि पुलिस हर एंगल से मामले की छानबीन कर रही है.
| राजस्थान के अलवर जिले में दो बच्चों की मां ने अपने प्रेमी के साथ कुएं में छलांग लगा दी. जिससे महिला की मौत हो गई. उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. जबकि युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मामला अलवर के नीमराना थाना क्षेत्र का है. जहां खोकर बसई गांव में एक विवाहिता अपने प्रेमी के साथ कुएं में कूद गई. नीमराना थानाधिकारी हितेश शर्मा ने बताया कि गांव की महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दो दिन पहले दर्ज हुई थी. पुलिस महिला की तलाश कर रही थी. बुधवार की सुबह स्थानीय लोगों ने पुलिस सूचना दी कि एक महिला का शव कुएं में पड़ा हुआ है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर जा पहुंची. पुलिस ने कुएं में देखा तो वहां एक नहीं लोग थे. महिला के संग एक युवक भी कुएं में पड़ा था. स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने दोनों को बाहर निकाला. जांच में महिला मृत निकली लेकिन युवक की सांसें चल रही थी, लिहाजा उसे फौरन बेहड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी. महिला की पहचान सविता के रूप में हुई है. जिसके दो बच्चे भी हैं. जांच में पता चला कि यह पूरा मामला प्रेम प्रसंग से का है. हालांकि पुलिस हर एंगल से मामले की छानबीन कर रही है. |
Ravivar Ke Upay: रविवार के दिन भगवान सूर्यदेव (Lord SuryaDevta) की पूजा होती है। रविवार का व्रत (Ravivar Ka Vrat) रखने से भक्त की समस्या धीरे धीरे जरूर समाप्त होने लगती है।
Ravivar Ke Upay: रविवार के दिन भगवान सूर्यदेव (Lord SuryaDevta) की पूजा होती है। रविवार का व्रत (Ravivar Ka Vrat) रखने से भक्त की समस्या धीरे धीरे जरूर समाप्त होने लगती है। इस दिन कुछ बातों का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। साथ ही अगर रविवार के दिन कुछ आसान और विशेष उपाय किया जाए तो भगवान सूर्यदेव की कृपा भक्त पर जरूर बनती है और सभी मुश्किलें आसान हो जाती है। तो आइए जानते हैं रविवार के दिन कौन सा आसान उपाय करना चाहिएः
रविवार की शाम करें ये आसान उपाय (Do these things on Sunday)
रविवार की शाम या दिन पूजा में सूरज देव की पसंद का लाल फूल, लाल चंदन, गुडहल का फूल, चावल चढ़ाएं। साथ ही गुड़ या गुड़ की मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के बाद माथे पर लाल चंदन भी अवश्य लगाएं।
रविवार के दिन शाम के समय सूर्यास्त होने के बाद भक्त को पीपल के पेड़ (peepal tree) के नीचे चौमुखा दीपक जरूर जलाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को धन-संपत्ति में बरकत प्राप्त होती है। साथ ही मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। बता दें कि रविवार की शाम को भी पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से घर से सुख-शांति और समृद्धि जरूर आती है। ध्यान दें दीपक चौमुखा होना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है और कार्य में भी तरक्की के कई अवसर मिलते हैं।
रविवार की शाम के समय शिव मंदिर में गौरी शंकर रूद्राक्ष जरूर चढ़ाना चाहिए। इससे घर में मां लक्ष्मी जी का आगमन होता है। आर्थिक तंगी की समस्या नहीं होती है।
दरअसल रविवार के दिन भी शनिदेव का पूजन किया जाता है क्योंकि रविवार को शनिदेव का पूजन करने से आपको व्यापार में लाभ की प्राप्ति होगी।
दान करना बहुत ही शुभ होता है और रविवार की शाम को काले तिल, काले कपड़े, काली उड़द या काली मिर्च का दान अवश्य करना चाहिए। इससे जीवन में काफी सुख की प्राप्ति होती है। इन उपायों को करने से भक्त पर सभी देवी देवता की कृपा दृष्टि बनी रहती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
| Ravivar Ke Upay: रविवार के दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा होती है। रविवार का व्रत रखने से भक्त की समस्या धीरे धीरे जरूर समाप्त होने लगती है। Ravivar Ke Upay: रविवार के दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा होती है। रविवार का व्रत रखने से भक्त की समस्या धीरे धीरे जरूर समाप्त होने लगती है। इस दिन कुछ बातों का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। साथ ही अगर रविवार के दिन कुछ आसान और विशेष उपाय किया जाए तो भगवान सूर्यदेव की कृपा भक्त पर जरूर बनती है और सभी मुश्किलें आसान हो जाती है। तो आइए जानते हैं रविवार के दिन कौन सा आसान उपाय करना चाहिएः रविवार की शाम करें ये आसान उपाय रविवार की शाम या दिन पूजा में सूरज देव की पसंद का लाल फूल, लाल चंदन, गुडहल का फूल, चावल चढ़ाएं। साथ ही गुड़ या गुड़ की मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के बाद माथे पर लाल चंदन भी अवश्य लगाएं। रविवार के दिन शाम के समय सूर्यास्त होने के बाद भक्त को पीपल के पेड़ के नीचे चौमुखा दीपक जरूर जलाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को धन-संपत्ति में बरकत प्राप्त होती है। साथ ही मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। बता दें कि रविवार की शाम को भी पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से घर से सुख-शांति और समृद्धि जरूर आती है। ध्यान दें दीपक चौमुखा होना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है और कार्य में भी तरक्की के कई अवसर मिलते हैं। रविवार की शाम के समय शिव मंदिर में गौरी शंकर रूद्राक्ष जरूर चढ़ाना चाहिए। इससे घर में मां लक्ष्मी जी का आगमन होता है। आर्थिक तंगी की समस्या नहीं होती है। दरअसल रविवार के दिन भी शनिदेव का पूजन किया जाता है क्योंकि रविवार को शनिदेव का पूजन करने से आपको व्यापार में लाभ की प्राप्ति होगी। दान करना बहुत ही शुभ होता है और रविवार की शाम को काले तिल, काले कपड़े, काली उड़द या काली मिर्च का दान अवश्य करना चाहिए। इससे जीवन में काफी सुख की प्राप्ति होती है। इन उपायों को करने से भक्त पर सभी देवी देवता की कृपा दृष्टि बनी रहती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। |
कोविड-19 की दूसरी लहर से मची तबाही केवल हेल्थकेयर तक सीमित नहीं रही है. संक्रमण के नए मामलों और महामारी से हो रही मौतों पर लगाम लगाने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों के लागू किए गए लॉकडाउन का असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है.
महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात जैसे कारोबारी लिहाज से बड़े सेंटर्स में काम-धंधों पर बुरा असर पड़ा है और इसके चलते गुजरे एक-डेढ़ महीने में इन राज्यों से प्रवासी मजदूर अपने मूल जिलों की ओर वापस पलायन कर गए हैं.
इन शहरों समेत दूसरी जगहों पर नौकरियों में कमी आई है और बेरोजगारी में भी इससे इजाफा हुआ है. पिछले साल कोविड-19 फैलना शुरू होने के बाद केंद्र ने लॉकडाउन लगाया और उस वक्त भी बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन देखने को मिला था.
तब बेरोजगारी की दर अपने सबसे निचले स्तर पर चली गई थी.
इसके बाद इसमें रिकवरी होना शुरू हुई थी, लेकिन कोविड की दूसरी लहर ने एक बार फिर से हालात बिगाड़ दिए हैं. आंकड़ों में अब ये बात नजर आने लगी है.
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMIE) के हालिया जारी आंकड़ों से देश में फिर से बेरोजगारी बढ़ने का ट्रेंड दिखाई दे रहा है.
CMIE ने अप्रैल 2021 के लिए जारी आंकड़ों में कहा है कि पिछले साल अप्रैल में लेबर पार्टिसिपेशन रेट (LPR) 35. 6 के साथ अपने निचले स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद इसमें कोविड की पाबंदियां हटने के साथ रिकवरी दिखनी शुरू हुई.
लेकिन, इस साल अप्रैल में ये एक बार फिर से गिरावट का शिकार हुआ है और ये 40 के अंक पर पहुंच गया है.
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में LPR रिकवर होकर 41 पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद इसमें फिर से गिरावट आने लगी.
नवंबर 2020 में ये 40. 1 पर आ गया. इसके बाद इसमें फिर से बढ़ोतरी हुई. लेकिन कोविड की दूसरी लहर में इसमें फिर से तेज गिरावट दिखाई दे रही है.
| कोविड-उन्नीस की दूसरी लहर से मची तबाही केवल हेल्थकेयर तक सीमित नहीं रही है. संक्रमण के नए मामलों और महामारी से हो रही मौतों पर लगाम लगाने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों के लागू किए गए लॉकडाउन का असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात जैसे कारोबारी लिहाज से बड़े सेंटर्स में काम-धंधों पर बुरा असर पड़ा है और इसके चलते गुजरे एक-डेढ़ महीने में इन राज्यों से प्रवासी मजदूर अपने मूल जिलों की ओर वापस पलायन कर गए हैं. इन शहरों समेत दूसरी जगहों पर नौकरियों में कमी आई है और बेरोजगारी में भी इससे इजाफा हुआ है. पिछले साल कोविड-उन्नीस फैलना शुरू होने के बाद केंद्र ने लॉकडाउन लगाया और उस वक्त भी बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन देखने को मिला था. तब बेरोजगारी की दर अपने सबसे निचले स्तर पर चली गई थी. इसके बाद इसमें रिकवरी होना शुरू हुई थी, लेकिन कोविड की दूसरी लहर ने एक बार फिर से हालात बिगाड़ दिए हैं. आंकड़ों में अब ये बात नजर आने लगी है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी के हालिया जारी आंकड़ों से देश में फिर से बेरोजगारी बढ़ने का ट्रेंड दिखाई दे रहा है. CMIE ने अप्रैल दो हज़ार इक्कीस के लिए जारी आंकड़ों में कहा है कि पिछले साल अप्रैल में लेबर पार्टिसिपेशन रेट पैंतीस. छः के साथ अपने निचले स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद इसमें कोविड की पाबंदियां हटने के साथ रिकवरी दिखनी शुरू हुई. लेकिन, इस साल अप्रैल में ये एक बार फिर से गिरावट का शिकार हुआ है और ये चालीस के अंक पर पहुंच गया है. गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में LPR रिकवर होकर इकतालीस पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद इसमें फिर से गिरावट आने लगी. नवंबर दो हज़ार बीस में ये चालीस. एक पर आ गया. इसके बाद इसमें फिर से बढ़ोतरी हुई. लेकिन कोविड की दूसरी लहर में इसमें फिर से तेज गिरावट दिखाई दे रही है. |
इंडियन प्रीमियर लीग में वैसे को पाकिस्तान के खिलाड़ियों को खेलने का मौका ना के बराबर मिला है। पाकिस्तान के खिलाड़ी आईपीएल के पहले और दूसरे सीजन में शामिल थे, लेकिन इसके बाद से उन्हें कभी इसमें हिस्सा लेने का मौका हाथ नहीं लगा है। पाकिस्तान के खिलाड़ियों में पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर भी आईपीएल में खेले हैं जो केकेआर का हिस्सा रहे।
शोएब अख्तर ने केकेआर के लिए आईपीएल में केवल 3 मैचों में ही खेलने का मौका पाया। लेकिन इसके बाद भी उनके आईपीएल से जुड़े खास अनुभव शामिल हैं। शोएब अख्तर का भारतीय खिलाड़ियों से भी अच्छा नाता रहा।
भारत के खिलाड़ियों के साथ ही आईपीएल के दौरान बॉलीवुड से भी जुड़ाव रहा। भले ही शोएब अख्तर ज्यादा नहीं खेल सके लेकिन इसके जो अनुभव आईपीएल के दौरान देखने को मिले वो खास हैं जिसे उन्होंने रमीज राजा के साथ साझा किया।
| इंडियन प्रीमियर लीग में वैसे को पाकिस्तान के खिलाड़ियों को खेलने का मौका ना के बराबर मिला है। पाकिस्तान के खिलाड़ी आईपीएल के पहले और दूसरे सीजन में शामिल थे, लेकिन इसके बाद से उन्हें कभी इसमें हिस्सा लेने का मौका हाथ नहीं लगा है। पाकिस्तान के खिलाड़ियों में पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर भी आईपीएल में खेले हैं जो केकेआर का हिस्सा रहे। शोएब अख्तर ने केकेआर के लिए आईपीएल में केवल तीन मैचों में ही खेलने का मौका पाया। लेकिन इसके बाद भी उनके आईपीएल से जुड़े खास अनुभव शामिल हैं। शोएब अख्तर का भारतीय खिलाड़ियों से भी अच्छा नाता रहा। भारत के खिलाड़ियों के साथ ही आईपीएल के दौरान बॉलीवुड से भी जुड़ाव रहा। भले ही शोएब अख्तर ज्यादा नहीं खेल सके लेकिन इसके जो अनुभव आईपीएल के दौरान देखने को मिले वो खास हैं जिसे उन्होंने रमीज राजा के साथ साझा किया। |
अभिनेता से राजनेता बने भाजपा नेता जॉय बनर्जी ने शनिवार को कहा कि वह पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि वह लंबे समय से पार्टी की उपेक्षा झेल रहे हैं। अब वो इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद कई नेताओं का भाजपा से त्याग पत्र देने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में अभिनेता से राजनेता बने भाजपा नेता जॉय बनर्जी ने शनिवार को साफ किया कि वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। रॉय ने 2014 में भाजपा का दामन थामा था। पिछले दो लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुके जॉय बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बता दी है।
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं लोगों की सेवा करना चाहता हूं लेकिन ये संभव नहीं है, जब तक मैं भाजपा छोड़ नहीं देता। " बनर्जी ने कहा, "मुझे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। इसके अलावा केंद्र से मेरी सुरक्षा भी हटा दी गई है। मैं बताना चाहता हूं कि मैं पार्टी में नया नहीं हूं। मैंने 2014 में पार्टी ज्वाइन की थी। मैंने पीएम नरेंद्र मोदी से 2017 में कहा था कि मैं पार्टी के लिए कुछ करना चाहता हूं लेकिन मुझे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब मैं और उपेक्षा नहीं झेल सकता। "
तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन करने के सवालों पर बनर्जी ने कहा कि अभी भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। अभी सिर्फ मैं जनता की सेवा करना चाहता हूं।
| अभिनेता से राजनेता बने भाजपा नेता जॉय बनर्जी ने शनिवार को कहा कि वह पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि वह लंबे समय से पार्टी की उपेक्षा झेल रहे हैं। अब वो इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद कई नेताओं का भाजपा से त्याग पत्र देने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में अभिनेता से राजनेता बने भाजपा नेता जॉय बनर्जी ने शनिवार को साफ किया कि वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। रॉय ने दो हज़ार चौदह में भाजपा का दामन थामा था। पिछले दो लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुके जॉय बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बता दी है। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं लोगों की सेवा करना चाहता हूं लेकिन ये संभव नहीं है, जब तक मैं भाजपा छोड़ नहीं देता। " बनर्जी ने कहा, "मुझे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। इसके अलावा केंद्र से मेरी सुरक्षा भी हटा दी गई है। मैं बताना चाहता हूं कि मैं पार्टी में नया नहीं हूं। मैंने दो हज़ार चौदह में पार्टी ज्वाइन की थी। मैंने पीएम नरेंद्र मोदी से दो हज़ार सत्रह में कहा था कि मैं पार्टी के लिए कुछ करना चाहता हूं लेकिन मुझे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब मैं और उपेक्षा नहीं झेल सकता। " तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन करने के सवालों पर बनर्जी ने कहा कि अभी भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। अभी सिर्फ मैं जनता की सेवा करना चाहता हूं। |
आक्रमण करते हैं ! दीमक और सभी प्रकार के कांसिया की इल्ली (इसको पाँव नहीं होते हैं) बाजरा की जड़ों को खाती हैं । इन पर "गन्ना के शत्रु" शीर्षक के अन्तर्गत लिखा गया है ।
मक्का की फसल के कीड़े
भारत के उत्तरी भाग में मका एक प्रमुख खाद्यान्न है । इस पर आक्रमण करने वाले कीड़ों के सम्बंध में धान, ज्वार, और गन्ना शीर्षकों के अन्तर्गत लिखा गया है।
हरपोक और सांवरदेही के सम्बंध में पहले लिख श्राए हैं । इल्लियाँ पत्तों के कोप में रहती हैं। मिट्टी के तेल में भीगी हुई राख या महीन धूल कोष में डालने से इल्लियाँ मर जाती हैं ।
धान व ज्वार की फसलों पर आक्रमण करने वाले कोड़ों के अलावा दूसरे भी कुछ कीड़े मक्का की फसल को नाम मात्र की क्षति पहुँचाते हैं । अतएव इनपर यहाँ कुछ लिखना उचित नहीं समझा गया है ।
गेहूँ की फसल के कीड़े
इस कीड़े पर लिखा जा चुका है । किन्तु यह गेहूँ का शत्रु नहीं है ।
दीमक - दीमक जमीन के अन्दर उपनिवेश बना कर रहती हैं । दीमक के बिमटा का कुछ भाग जमीन के बाहर भी निकला रहता है । दीमक की कुछ उपजातियाँ ऐसी भी हैं, जिनका बिमटा जमीन के अन्दर ही रहता है। उपनिवेश में रास्ते, गैलरी आदि बने रहते हैं । मादा लगभग एक बालिश्त लम्बी होती है और अण्डे देना ही उसका एक मात्र काम है। शेष सब काम मजदूर दीमक ही करती हैं । मजदूर को पंख नहीं होते हैं । छत्ता बनाना, अण्डे सेना, शिशु-पालन, अन्न-संग्रह का सभी काम मजदूर ही करते हैं । फरनीचर आदि नष्ट करने में मजदूर दीमक का ही हाथ है ।
अ - - नवजात पौधों के कीड़े वूट - बूट और दूसरे कुछ टिड्डबाल-पौधों को खाते हैं, जिससे कभी-कभी बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है । थैली से पकड़ कर मार डालना ही एक मात्र उपाय है।
गोदला - - पूर्णावस्था प्राप्त कीड़ा मट्टी के ढेलों के नीचे छुपा रहता है और पौधे के लगभग एक बालिश्त ऊँचा बढ़ने तक पौधों को काटता रहता है । कहळू या बेल के फलों को चीर कर जगह-जगह खेत में शाम के वक्त रख दिया जाय । रात भर में पूर्णावस्था प्राप्त बहुत से कीड़े इन पर एकत्रित हो जाएँगे। सूर्योदय होने से पहले इन कीड़ों को एक थैली में एकत्रित करके मार डाला जाय ।
लेदा पोका - धान के कीड़ों पर विचार करते हुए
दीमक की कई उप-जातियाँ हैं । इनके रहन-सहन, छत्ते की बनावट, शरीर की रचना, नुकसान करने का तरीका आदि में भी भिन्नता है। भारत में पाई जाने वाली दीमक की उप-जातियों का अध्ययन किया ही नहीं गया है।
यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है, कि किस उपजाति की दीमक, किस फसल को, किस रीति से हानि पहुँचाती है । दीमक की कुछ उप जातियाँ जमीन में छोटेछोटे उपनिवेश बनाकर रहती हैं। छत्ते का कोई भाग जमीन से ऊपर नहीं उठा रहता है। अतएव इन उपजातियों की दीमक को नाम- शेष करना असंभव सा ही है। कारण कि इनके छत्तों का पता ही नहीं चलता है। गहरी जुताई करने से दीमक का कार्य व्यवस्थित हो जाता है, जिससे थोड़े समय के लिए फसल की रक्षा हो जाती है । नवजात पौधों की जड़ों पर ही दीमक आक्रमण करती है।
से पाया गया है कि, भारी जमीन की अपेक्षा हलकी जमीन में बोये गए गेहूँ को दीमक से बहुत अधिक हानि पहुँचती है ।
उपचार - दीमक को नष्ट करना असंभव नहीं, तो कमसे कम अत्यन्त कठिन है। दीमक के छत्तों का
पता लगाकर जमीन खोदकर रानी मादा को मार डालना ही सर्वोत्तम उपाय है किन्तु जिन उपजातियों के छत्ते जमीन से ऊपर नहीं उठे रहते हैं, उनका पता चला लेना त कठिन है ।
( २ ) खेत में फसल के अवशेष और बिना सड़ी या कम सड़ी खाद मौजूद रहने पर दीमक का उपद्रव बढ़ जाता है। अतएव पूरी तरह सड़ी हुई खाद ही खेतों में डाली जाय । करंज, नीम, डी, पोस्ता आदि की खली की खाद देने से दीमक का उपद्रव बहुत ही कम हो जाता है ।
बगीचों तथा छोटे-छोटे खेतों में सिंचाई की नाली में हींग और नमक को कपड़े में बाँधकर डालने या पानी में क्रूड ऑइल इमलशन मिलाने से थोड़े समय के लिए दीमक का उपद्रव कुछ कम हो जाता हैं ।
(३) दीमक के छत्ते में मट्टी का तेल या उबलता हुआ पानी डालने से भी उपद्रव कम हो जाता है ।
कई प्रकार के कीड़े पत्ते और नवजात पौधों पर हमला करते हैं । जिन कीड़ों से फसल को ज्यादा नुकसान पहुँचता है और जो वास्तव में गेहूँ के शत्रु माने जा सकते हैं, उन्हीं के सम्बन्ध में यहाँ कुछ लिखा गया है ।
हरपोक और साँवर देही - दोनों ही गेहूँ के खेत में बहुतायत से पाए जाते हैं। किन्तु ये इस फसल के प्रमुख शुत्रओं में से नहीं हैं ।
मादा पत्ते पर पास-पास डे रखती है इल्ली का सिर हलका पीला और शरीर लाली लिए रहता है । यह तने के अन्दर ही कोशावस्था व्यतीत करता है । पूर्णावस्था प्राप्त प्राणी सूखे हुए घास के रंग का होता है। यह कीड़ा शीतकाल में गेहूँ पर जीवन निर्वाह करता है और गरमी वर्षा में ज्वार, धान, गन्ना आदि पर रहता है ।
उपचार - सूखे हुए पौधों को उखाड़ कर जला देना ही एक मात्र उपाय है किन्तु ऐसा करना व्यावहारिक नहीं है । फसल निकाल लेने पर खेत में खड़े हुए डंठलों पर नए पत्ते निकलते हैं; एफसल निकाल लेने के बाद शीघ्र ही उन्हें जलाकर हल दे देना चाहिए ।
सुधिया और इसी प्रकार के कुछ कीड़े गेहूँ के पौधों का रस चूसते हैं । किन्तु इन्हें फसल का शत्रु नहीं कहा जा सकता है ।
कई टिड्ड क्र गेहूँ की फसल को थोड़ी बहुत हानि प्रतिवर्ष पहुँचाते हैं।
पिहिका - दोनों ही प्रकार के पिहिका गेहूँ के तने में छेद करते हैं । ये भारत के गेहूँ बोए जाने वाले सभी भागों में पाये जाते हैं । फसल निकाल लेने के बाद खेत में खड़े हुए फसल के अवशेषों को जला ही देना चाहिए ।
तने में छेद करने वाला कीड़ा-वक पक्ष का एक कीड़ा धान ज्वार, मक्का, गन्ना, गिनी घास आदि पर जीवन निर्वाह करता है । यह तने में घुस कर उसे खोखला कर देता है, जिससे बालियों में दाना नहीं भरता है ।
चिकटा - गेहूँ के पौधों पर एक प्रकार का चिकटा लगता है । भारत के कुछ भागों में गेहूँ की फसल के बीच-बीच में या आसपास राई-सरसों बोते हैं । इन पर गोधी (coccinellids ) हमला करता है । गोधी चिकटा को खाता है । चिकटा कारण होते ही गोधी उन पर टूट पड़ता है, जिससे फसल, बिना प्रयास ही, बच जाती है।
चींटी - खलिहान में फसल आने और गोदामों में भरी जाने से पहले एक प्रकार की चींटी ([Holcomyrmex Scabriceps ) किसानों का बहुत ज्यादा नुकसान करती हैं। ये खलिहान में से नाज के दाने ले जाकर अपने छत्ते में एकत्रित करती हैं। यह खेत में बोये गए बीजों को भी ले जाती है। अतएव बीज के लिए रखे गये नाज में नेप्थलीन या कोई ऐसा पदार्थ मिला दिया जाना चाहिए, जो चींटी के भक्ष्य को कुस्वादु बना दे । खलिहान में होने वाले नुकसान को रोकने का कोई उपाय ही नहीं है ।
जौ की फसल के कीड़े
भारत में जौ की फसल पर बहुत ही कम कीड़े हमला | आक्रमण करते हैं ! दीमक और सभी प्रकार के कांसिया की इल्ली बाजरा की जड़ों को खाती हैं । इन पर "गन्ना के शत्रु" शीर्षक के अन्तर्गत लिखा गया है । मक्का की फसल के कीड़े भारत के उत्तरी भाग में मका एक प्रमुख खाद्यान्न है । इस पर आक्रमण करने वाले कीड़ों के सम्बंध में धान, ज्वार, और गन्ना शीर्षकों के अन्तर्गत लिखा गया है। हरपोक और सांवरदेही के सम्बंध में पहले लिख श्राए हैं । इल्लियाँ पत्तों के कोप में रहती हैं। मिट्टी के तेल में भीगी हुई राख या महीन धूल कोष में डालने से इल्लियाँ मर जाती हैं । धान व ज्वार की फसलों पर आक्रमण करने वाले कोड़ों के अलावा दूसरे भी कुछ कीड़े मक्का की फसल को नाम मात्र की क्षति पहुँचाते हैं । अतएव इनपर यहाँ कुछ लिखना उचित नहीं समझा गया है । गेहूँ की फसल के कीड़े इस कीड़े पर लिखा जा चुका है । किन्तु यह गेहूँ का शत्रु नहीं है । दीमक - दीमक जमीन के अन्दर उपनिवेश बना कर रहती हैं । दीमक के बिमटा का कुछ भाग जमीन के बाहर भी निकला रहता है । दीमक की कुछ उपजातियाँ ऐसी भी हैं, जिनका बिमटा जमीन के अन्दर ही रहता है। उपनिवेश में रास्ते, गैलरी आदि बने रहते हैं । मादा लगभग एक बालिश्त लम्बी होती है और अण्डे देना ही उसका एक मात्र काम है। शेष सब काम मजदूर दीमक ही करती हैं । मजदूर को पंख नहीं होते हैं । छत्ता बनाना, अण्डे सेना, शिशु-पालन, अन्न-संग्रह का सभी काम मजदूर ही करते हैं । फरनीचर आदि नष्ट करने में मजदूर दीमक का ही हाथ है । अ - - नवजात पौधों के कीड़े वूट - बूट और दूसरे कुछ टिड्डबाल-पौधों को खाते हैं, जिससे कभी-कभी बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है । थैली से पकड़ कर मार डालना ही एक मात्र उपाय है। गोदला - - पूर्णावस्था प्राप्त कीड़ा मट्टी के ढेलों के नीचे छुपा रहता है और पौधे के लगभग एक बालिश्त ऊँचा बढ़ने तक पौधों को काटता रहता है । कहळू या बेल के फलों को चीर कर जगह-जगह खेत में शाम के वक्त रख दिया जाय । रात भर में पूर्णावस्था प्राप्त बहुत से कीड़े इन पर एकत्रित हो जाएँगे। सूर्योदय होने से पहले इन कीड़ों को एक थैली में एकत्रित करके मार डाला जाय । लेदा पोका - धान के कीड़ों पर विचार करते हुए दीमक की कई उप-जातियाँ हैं । इनके रहन-सहन, छत्ते की बनावट, शरीर की रचना, नुकसान करने का तरीका आदि में भी भिन्नता है। भारत में पाई जाने वाली दीमक की उप-जातियों का अध्ययन किया ही नहीं गया है। यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है, कि किस उपजाति की दीमक, किस फसल को, किस रीति से हानि पहुँचाती है । दीमक की कुछ उप जातियाँ जमीन में छोटेछोटे उपनिवेश बनाकर रहती हैं। छत्ते का कोई भाग जमीन से ऊपर नहीं उठा रहता है। अतएव इन उपजातियों की दीमक को नाम- शेष करना असंभव सा ही है। कारण कि इनके छत्तों का पता ही नहीं चलता है। गहरी जुताई करने से दीमक का कार्य व्यवस्थित हो जाता है, जिससे थोड़े समय के लिए फसल की रक्षा हो जाती है । नवजात पौधों की जड़ों पर ही दीमक आक्रमण करती है। से पाया गया है कि, भारी जमीन की अपेक्षा हलकी जमीन में बोये गए गेहूँ को दीमक से बहुत अधिक हानि पहुँचती है । उपचार - दीमक को नष्ट करना असंभव नहीं, तो कमसे कम अत्यन्त कठिन है। दीमक के छत्तों का पता लगाकर जमीन खोदकर रानी मादा को मार डालना ही सर्वोत्तम उपाय है किन्तु जिन उपजातियों के छत्ते जमीन से ऊपर नहीं उठे रहते हैं, उनका पता चला लेना त कठिन है । खेत में फसल के अवशेष और बिना सड़ी या कम सड़ी खाद मौजूद रहने पर दीमक का उपद्रव बढ़ जाता है। अतएव पूरी तरह सड़ी हुई खाद ही खेतों में डाली जाय । करंज, नीम, डी, पोस्ता आदि की खली की खाद देने से दीमक का उपद्रव बहुत ही कम हो जाता है । बगीचों तथा छोटे-छोटे खेतों में सिंचाई की नाली में हींग और नमक को कपड़े में बाँधकर डालने या पानी में क्रूड ऑइल इमलशन मिलाने से थोड़े समय के लिए दीमक का उपद्रव कुछ कम हो जाता हैं । दीमक के छत्ते में मट्टी का तेल या उबलता हुआ पानी डालने से भी उपद्रव कम हो जाता है । कई प्रकार के कीड़े पत्ते और नवजात पौधों पर हमला करते हैं । जिन कीड़ों से फसल को ज्यादा नुकसान पहुँचता है और जो वास्तव में गेहूँ के शत्रु माने जा सकते हैं, उन्हीं के सम्बन्ध में यहाँ कुछ लिखा गया है । हरपोक और साँवर देही - दोनों ही गेहूँ के खेत में बहुतायत से पाए जाते हैं। किन्तु ये इस फसल के प्रमुख शुत्रओं में से नहीं हैं । मादा पत्ते पर पास-पास डे रखती है इल्ली का सिर हलका पीला और शरीर लाली लिए रहता है । यह तने के अन्दर ही कोशावस्था व्यतीत करता है । पूर्णावस्था प्राप्त प्राणी सूखे हुए घास के रंग का होता है। यह कीड़ा शीतकाल में गेहूँ पर जीवन निर्वाह करता है और गरमी वर्षा में ज्वार, धान, गन्ना आदि पर रहता है । उपचार - सूखे हुए पौधों को उखाड़ कर जला देना ही एक मात्र उपाय है किन्तु ऐसा करना व्यावहारिक नहीं है । फसल निकाल लेने पर खेत में खड़े हुए डंठलों पर नए पत्ते निकलते हैं; एफसल निकाल लेने के बाद शीघ्र ही उन्हें जलाकर हल दे देना चाहिए । सुधिया और इसी प्रकार के कुछ कीड़े गेहूँ के पौधों का रस चूसते हैं । किन्तु इन्हें फसल का शत्रु नहीं कहा जा सकता है । कई टिड्ड क्र गेहूँ की फसल को थोड़ी बहुत हानि प्रतिवर्ष पहुँचाते हैं। पिहिका - दोनों ही प्रकार के पिहिका गेहूँ के तने में छेद करते हैं । ये भारत के गेहूँ बोए जाने वाले सभी भागों में पाये जाते हैं । फसल निकाल लेने के बाद खेत में खड़े हुए फसल के अवशेषों को जला ही देना चाहिए । तने में छेद करने वाला कीड़ा-वक पक्ष का एक कीड़ा धान ज्वार, मक्का, गन्ना, गिनी घास आदि पर जीवन निर्वाह करता है । यह तने में घुस कर उसे खोखला कर देता है, जिससे बालियों में दाना नहीं भरता है । चिकटा - गेहूँ के पौधों पर एक प्रकार का चिकटा लगता है । भारत के कुछ भागों में गेहूँ की फसल के बीच-बीच में या आसपास राई-सरसों बोते हैं । इन पर गोधी हमला करता है । गोधी चिकटा को खाता है । चिकटा कारण होते ही गोधी उन पर टूट पड़ता है, जिससे फसल, बिना प्रयास ही, बच जाती है। चींटी - खलिहान में फसल आने और गोदामों में भरी जाने से पहले एक प्रकार की चींटी किसानों का बहुत ज्यादा नुकसान करती हैं। ये खलिहान में से नाज के दाने ले जाकर अपने छत्ते में एकत्रित करती हैं। यह खेत में बोये गए बीजों को भी ले जाती है। अतएव बीज के लिए रखे गये नाज में नेप्थलीन या कोई ऐसा पदार्थ मिला दिया जाना चाहिए, जो चींटी के भक्ष्य को कुस्वादु बना दे । खलिहान में होने वाले नुकसान को रोकने का कोई उपाय ही नहीं है । जौ की फसल के कीड़े भारत में जौ की फसल पर बहुत ही कम कीड़े हमला |
जैसे- जैसे बिग बॉस का ग्यारवाँ सीजन फिनाले की ओर कदम बढ़ा रहा है वैसे वैसे ही सारे प्रतियोगी अपना रुप बदलते हुए नजर आ रहे हैं। जहाँ घरवालों से तंग आकर शिल्पा शिंदे ने फिनाले से कुछ दिन पहले ही फैसला कर लिया कि वह अपने और पुनीश के अलावा किसी के लिए भी खाना नहीं बनाएंगी वहीं आज घर में पूर्व प्रतियोगी अर्शी खान भी आने वाली हैं। बता दें कि अर्शी का इस घर में दोबारा आने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। जी हाँ अर्शी घरवालों को एक टास्क देंगी, जिसके बाद उन्हें इस बात का फैसला लेना है कि इस घर में सबसे स्वार्थी कौन है? इस टास्क के साथ साथ किसी एक शख्स को कैश प्राइज भी मिलने वाला है।
बता दें कि इस समय घर में मात्र पाँच प्रतियोगी शिल्पा शिंदे, विकास गुप्ता, आकाश डडलानी, पुनीश शर्मा और हिना खान ही बचे हैं और उम्मीद की जा रही है कि इस हफ्ते के बीचोंबीच किसी एक कंटेस्टेंट का पत्ता साफ हो जाएगा और इस हफ्ते के खत्म होते ही हमारे सामने इस सीजन का विजेता होगा। वैसे फिनाले से पहले सोशल मीडिया पर इस शो के दर्शक अपने पंसदीदा कंटेस्टेंट को जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। आप इस सीजन के विजेता के रुप में किसे देखते है? कमेंटबॉक्स में अपनी राय जरुर दें।
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| जैसे- जैसे बिग बॉस का ग्यारवाँ सीजन फिनाले की ओर कदम बढ़ा रहा है वैसे वैसे ही सारे प्रतियोगी अपना रुप बदलते हुए नजर आ रहे हैं। जहाँ घरवालों से तंग आकर शिल्पा शिंदे ने फिनाले से कुछ दिन पहले ही फैसला कर लिया कि वह अपने और पुनीश के अलावा किसी के लिए भी खाना नहीं बनाएंगी वहीं आज घर में पूर्व प्रतियोगी अर्शी खान भी आने वाली हैं। बता दें कि अर्शी का इस घर में दोबारा आने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। जी हाँ अर्शी घरवालों को एक टास्क देंगी, जिसके बाद उन्हें इस बात का फैसला लेना है कि इस घर में सबसे स्वार्थी कौन है? इस टास्क के साथ साथ किसी एक शख्स को कैश प्राइज भी मिलने वाला है। बता दें कि इस समय घर में मात्र पाँच प्रतियोगी शिल्पा शिंदे, विकास गुप्ता, आकाश डडलानी, पुनीश शर्मा और हिना खान ही बचे हैं और उम्मीद की जा रही है कि इस हफ्ते के बीचोंबीच किसी एक कंटेस्टेंट का पत्ता साफ हो जाएगा और इस हफ्ते के खत्म होते ही हमारे सामने इस सीजन का विजेता होगा। वैसे फिनाले से पहले सोशल मीडिया पर इस शो के दर्शक अपने पंसदीदा कंटेस्टेंट को जमकर सपोर्ट कर रहे हैं। आप इस सीजन के विजेता के रुप में किसे देखते है? कमेंटबॉक्स में अपनी राय जरुर दें। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें। |
कुसंस्कारों को भी प्रसवश ऋषि निवारण करते हैं । यहां केवल रात्रि का वर्णन है इससे सिद्ध होता है कि किसी रात्रि में प्राणिहिंसा न करे क्योंकि कोई रात्रि ऐसी नहीं होती जिसमें चन्द्र की कोई न कोई कला न हो । एक अमावास्या ही ऐसी है जिसमें चन्द्र अच्छे प्रकार दृश्य नहीं होता जब इसमें भी हिंसानिषेध किया तब तो अन्य रात्रियों में स्वतः हिंसानिषेध सिद्ध है । पुनः बड़े २ जीवों
फौन कहे कीट पतों की भी हत्या निषिद्ध है इस प्रकार कालात्मक चन्द्र का वर्णन फर आगे मनुष्य का वर्णन करते हैं। संस्कृत व्याख्या इसकी नहीं की गई है ॥४॥
यो वै स सम्वत्सरः प्रजापतिः पोडशकलोऽयमेव स योऽयमेवं वित्पुरुषस्तस्य वित्तमेव पञ्चदश कला आत्मैवास्य पोडशी कला स वित्तेनैवाऽऽच पूर्यतेऽप च क्षीयते तदेतन् नभ्यं यदयमात्मा प्रधिर्वित्तं तस्माद्यद्यपि सर्वज्यानिं जीयत आत्मना चेज्जीवति प्रधिनाऽगादित्येवाऽऽहुः ॥ १५ ॥
अनुवाद - सो जो यह सोलह कलाओं से युक्त संवत्सरात्मक प्रजापति है । वह यही पुरुष है जो कोई ऐसा जाननेहारा है। इसका वित्त ही पन्द्रह कलाएं है और आत्मा ही सोलहवीं कला है । सो यह वित्त से ही आपूर्ण और अपक्षीण होता रहता है। जो यह आत्मा है वह ( रथ के ) नाभि के समान है और जो धन है वह प्रधि अर्थात् भर के सदृश है। इस हेतु यद्यपि वह पुरुष राव वित्त से हीन हो जाय किन्तु केवल आत्मवल से ही जीता हुआ रहे तो इसे देख आदमी कहते हैं कि क्या परवाह है केवल इसका धन गया है आत्मा तो विद्यमान है पुनः प्राधेस्थानीय धन से संयुक्त हो जायगा ॥ १५ ॥
पदार्थ - ( यः वे सः संवत्सरः प्रजापतिः पोडशकलः ) निश्चय, सो जो यह कालात्मक प्रजापति है जो सोलहों कलाओं से संयुक्त है इसी के समान ( पुरुषः ) यह पुरुष है ( यः अयम् एवंविद् ) जो कोई इस सब भेद को जानता है ( अयम् एव सः ) यही वह है अर्थात् उस पोडशकलायुक्त चन्द्र के समान यह पुरु
बृहदारण्यकोपनिषद्भाप्यम् ॥ .
षाकार जीवात्मा है (तस्य वित्तम् एव पञ्चदश कलाः ) इसके जो गौ, महिप, भूमि, हिरण्य, राज्य, साम्राज्य आदि धन हैं वे सब पन्द्रह कलाओं के तुल्य हैं परन्तु ( अस्य आत्मा एव पोडशी कला ) इसका आत्मा ही सोलहवीं नित्या, ध्रुवा कला है ( सः ) वह चन्द्रवत् ( वित्तेन आपूर्य्यते च अप क्षीयते च ) वित्त से ही पूर्ण और क्षीण होता । किन्तु ( यद् अयम् आत्मा ) इसका जो नित्य आत्मा है ( तत् एतत् नभ्यम् ) वह रथ के नाभिस्थानीय है । (प्रधिः वित्तम् ) और हिरण्यादिक धन अधि के समान है। अधि=अर । ( तस्माद् ) इस हेतु ( यद्यपि ) यद्यपि ( सर्वज्यानिम् ) इसका सर्वस्व नष्ट हो जाय ( जीयते) और धन से हीन होजाय तौ भी कोई क्षति नहीं ( चेद् आत्मना जीवति ) यदि वह आत्मा से जीता हुआ हो. अर्थात् यदि आत्मबल हो तो भले ही सर्व वित्त नष्ट हो जाय तौ भी कोई हानि नहीं ( प्रधिना अगात् इति एव आहुः ) प्रधिस्थानीय धन से यह क्षीणता को प्राप्त हुआ है ऐसा ही सब कोई कहते हैं । सो यह धन चन्दकलावत् बरावर आता जाता र हता है । भाव यह है कि आत्मबल ही मुख्य है । इसी की गवेषणा करनी चाहिये । भाव विस्पष्ट है इसकी भी संस्कृत व्याख्या नहीं की गई है ।
अथ त्रयो वाव लोका मनुष्यलोकः पितृलोको देवलोक इति सोऽयं मनुष्यलोकः पुत्रेणैव जथ्यो नान्येन कर्म्मरणा कर्म्मणा पितृलोको विद्यया देवलोको देवलोको वै लोकानां श्रेष्ठस्तस्माद्विद्यां प्रशंसन्ति ॥ १६ ॥
अनुवाद - तीन ही लोक हैं। मनुष्यलोक, पितृलोक और देवलोक, सो यह मनुष्यलोक पुत्र से ही जीतने योग्य है अन्य कर्म से नहीं । पितृलोक कर्म्म से और देवलोक विद्या से जीतने योग्य है । निश्चय, सब लोकों में "देवलोक श्रेष्ठ है । इस हेतु विद्या की प्रशंसा करते हैं ॥ १६ ॥
पदार्थ - - ( अथ ) सात अन्नों के वर्णन के पश्चात् मनुष्यादि लोकों के वर्णन का आरम्भ करते हैं ( त्रयः वाव ) तीन ही ( लोकाः ) लोक हैं । वे कौन हैं ( मनुष्यलोकः ) मनुष्यलोक ( पितृलोकः ) पितृलोक और ( देवलोकः ) देवलोक इति ) ( सः अयम् मनुष्यलोकः ) सो यह मनुष्यलोक ( पुत्रेण एव ) पुत्र
सकता है अर्थात् सन्तान की वृद्धि से ही वह प्रसन्न करने योग्य है ( अन्येन कर्म्मणा न ) अन्य कर्म से नहीं (पितृलोकः कर्मणा ) रक्षण आदि और यज्ञादि कर्म्म से ही पितृलोक सन्तुष्ट करने योग्य है ( देवलोकः विद्यया ) ज्ञानद्वारा देवलोक सन्तुष्ट करने योग्य है । ( देवलोकः वै लोकानाम् श्रेष्ठः ) सब लोकों में देवलोक श्रेष्ठ है ( तस्मात् ) इस हेतु ( विद्याम् प्रशंसन्ति ) विद्या की प्रशंसा करते हैं। क्योंकि विद्या से ही देवलोक सन्तुष्ट हो
सकता है ॥ १६ ॥
भाष्यम् - सामान्येन मनुष्यस्त्रिधा । कश्चिन्नाधिकं न न्यूनमपेक्षते यावता जीविका स्यात्तावदेव कामयते । नोपकरोति न चापकरोति । अशितुं पातुं परिधातुं परिरन्तुंचेच्छति । सन्तानञ्च । स इह मनुष्यसंज्ञः । कचित्ततोऽप्यधिकं कामयते । ग्रामे वा देशे वा कपिप्लव उपद्रवो वा मानुपो वा देवो । वोस्थितश्चेत्तं सर्वोपायैः शमयति । अधाम्पिकान् घातयात धार्मिकानुत्साहयति । यथाधर्मनियमास्तथा सर्वांश्चालयितुं सर्वदा भयते । स इह पितृशब्देन उच्यते । कश्चित् सर्वश्रेष्ठ उदारधीः सर्वदा विद्यारतः । नूतनं नूनतं वस्तु लाभाय प्रचारयति । जगत्कल्याणाय विविधानुपायान् जनयाते । सबैलौकिकैर्दोपैर्विनिर्मुक्तो भवति । स इद्द देवशब्देन व्यवयिते । अथ काण्डकार्यः । मनुष्येषु । इमे त्रय एव लोकाः सन्ति । के पुनस्ते १ । मनुष्यलोकः । पितृलोकः । देवलोकः । किमर्थ एतेषामुद्देशः ? सम्मानार्थः । एतेऽपि सम्मान्याः । केनोपायेन ?आह-सोऽयं मनुष्यलोकः । पुत्रेणैव सन्तानवृद्धथैव जय्यो जेतुं शक्यः "क्षय्पजय्यौ श क्यार्थे" इति निपातः । प्रसादयितुं शक्यः । साधारणो मनुष्यो वृद्धावस्थायां निर्वाहाय प्रधानतया पुत्रमेव कामयते । अन्येपामपि पुत्रं जातमीइते । तेनैव स तुष्यति । नान्येन कर्म्मणा पुत्रातिरिक्तन कर्मणा स न तुप्यतीत्यर्थः । पितृलोकः कर्म्मणा । रक्षणादिलक्षणेन यज्ञादिलक्षणेन कर्मणा स पितृलोको जय्यः । विद्यया देवलोको जय्यः । सर्वेषां लोकानां मध्ये देवलोकः श्रेष्ठः । स च देवलोको विद्ययैव जय्योऽस्ति । नान्येन कर्मणा । तस्माद्धेतोः सर्वे प्राचार्या विद्यां प्रशंसन्ति ॥ १६ ॥ | कुसंस्कारों को भी प्रसवश ऋषि निवारण करते हैं । यहां केवल रात्रि का वर्णन है इससे सिद्ध होता है कि किसी रात्रि में प्राणिहिंसा न करे क्योंकि कोई रात्रि ऐसी नहीं होती जिसमें चन्द्र की कोई न कोई कला न हो । एक अमावास्या ही ऐसी है जिसमें चन्द्र अच्छे प्रकार दृश्य नहीं होता जब इसमें भी हिंसानिषेध किया तब तो अन्य रात्रियों में स्वतः हिंसानिषेध सिद्ध है । पुनः बड़े दो जीवों फौन कहे कीट पतों की भी हत्या निषिद्ध है इस प्रकार कालात्मक चन्द्र का वर्णन फर आगे मनुष्य का वर्णन करते हैं। संस्कृत व्याख्या इसकी नहीं की गई है ॥चार॥ यो वै स सम्वत्सरः प्रजापतिः पोडशकलोऽयमेव स योऽयमेवं वित्पुरुषस्तस्य वित्तमेव पञ्चदश कला आत्मैवास्य पोडशी कला स वित्तेनैवाऽऽच पूर्यतेऽप च क्षीयते तदेतन् नभ्यं यदयमात्मा प्रधिर्वित्तं तस्माद्यद्यपि सर्वज्यानिं जीयत आत्मना चेज्जीवति प्रधिनाऽगादित्येवाऽऽहुः ॥ पंद्रह ॥ अनुवाद - सो जो यह सोलह कलाओं से युक्त संवत्सरात्मक प्रजापति है । वह यही पुरुष है जो कोई ऐसा जाननेहारा है। इसका वित्त ही पन्द्रह कलाएं है और आत्मा ही सोलहवीं कला है । सो यह वित्त से ही आपूर्ण और अपक्षीण होता रहता है। जो यह आत्मा है वह नाभि के समान है और जो धन है वह प्रधि अर्थात् भर के सदृश है। इस हेतु यद्यपि वह पुरुष राव वित्त से हीन हो जाय किन्तु केवल आत्मवल से ही जीता हुआ रहे तो इसे देख आदमी कहते हैं कि क्या परवाह है केवल इसका धन गया है आत्मा तो विद्यमान है पुनः प्राधेस्थानीय धन से संयुक्त हो जायगा ॥ पंद्रह ॥ पदार्थ - निश्चय, सो जो यह कालात्मक प्रजापति है जो सोलहों कलाओं से संयुक्त है इसी के समान यह पुरुष है जो कोई इस सब भेद को जानता है यही वह है अर्थात् उस पोडशकलायुक्त चन्द्र के समान यह पुरु बृहदारण्यकोपनिषद्भाप्यम् ॥ . षाकार जीवात्मा है इसके जो गौ, महिप, भूमि, हिरण्य, राज्य, साम्राज्य आदि धन हैं वे सब पन्द्रह कलाओं के तुल्य हैं परन्तु इसका आत्मा ही सोलहवीं नित्या, ध्रुवा कला है वह चन्द्रवत् वित्त से ही पूर्ण और क्षीण होता । किन्तु इसका जो नित्य आत्मा है वह रथ के नाभिस्थानीय है । और हिरण्यादिक धन अधि के समान है। अधि=अर । इस हेतु यद्यपि इसका सर्वस्व नष्ट हो जाय और धन से हीन होजाय तौ भी कोई क्षति नहीं यदि वह आत्मा से जीता हुआ हो. अर्थात् यदि आत्मबल हो तो भले ही सर्व वित्त नष्ट हो जाय तौ भी कोई हानि नहीं प्रधिस्थानीय धन से यह क्षीणता को प्राप्त हुआ है ऐसा ही सब कोई कहते हैं । सो यह धन चन्दकलावत् बरावर आता जाता र हता है । भाव यह है कि आत्मबल ही मुख्य है । इसी की गवेषणा करनी चाहिये । भाव विस्पष्ट है इसकी भी संस्कृत व्याख्या नहीं की गई है । अथ त्रयो वाव लोका मनुष्यलोकः पितृलोको देवलोक इति सोऽयं मनुष्यलोकः पुत्रेणैव जथ्यो नान्येन कर्म्मरणा कर्म्मणा पितृलोको विद्यया देवलोको देवलोको वै लोकानां श्रेष्ठस्तस्माद्विद्यां प्रशंसन्ति ॥ सोलह ॥ अनुवाद - तीन ही लोक हैं। मनुष्यलोक, पितृलोक और देवलोक, सो यह मनुष्यलोक पुत्र से ही जीतने योग्य है अन्य कर्म से नहीं । पितृलोक कर्म्म से और देवलोक विद्या से जीतने योग्य है । निश्चय, सब लोकों में "देवलोक श्रेष्ठ है । इस हेतु विद्या की प्रशंसा करते हैं ॥ सोलह ॥ पदार्थ - - सात अन्नों के वर्णन के पश्चात् मनुष्यादि लोकों के वर्णन का आरम्भ करते हैं तीन ही लोक हैं । वे कौन हैं मनुष्यलोक पितृलोक और देवलोक इति ) सो यह मनुष्यलोक पुत्र सकता है अर्थात् सन्तान की वृद्धि से ही वह प्रसन्न करने योग्य है अन्य कर्म से नहीं रक्षण आदि और यज्ञादि कर्म्म से ही पितृलोक सन्तुष्ट करने योग्य है ज्ञानद्वारा देवलोक सन्तुष्ट करने योग्य है । सब लोकों में देवलोक श्रेष्ठ है इस हेतु विद्या की प्रशंसा करते हैं। क्योंकि विद्या से ही देवलोक सन्तुष्ट हो सकता है ॥ सोलह ॥ भाष्यम् - सामान्येन मनुष्यस्त्रिधा । कश्चिन्नाधिकं न न्यूनमपेक्षते यावता जीविका स्यात्तावदेव कामयते । नोपकरोति न चापकरोति । अशितुं पातुं परिधातुं परिरन्तुंचेच्छति । सन्तानञ्च । स इह मनुष्यसंज्ञः । कचित्ततोऽप्यधिकं कामयते । ग्रामे वा देशे वा कपिप्लव उपद्रवो वा मानुपो वा देवो । वोस्थितश्चेत्तं सर्वोपायैः शमयति । अधाम्पिकान् घातयात धार्मिकानुत्साहयति । यथाधर्मनियमास्तथा सर्वांश्चालयितुं सर्वदा भयते । स इह पितृशब्देन उच्यते । कश्चित् सर्वश्रेष्ठ उदारधीः सर्वदा विद्यारतः । नूतनं नूनतं वस्तु लाभाय प्रचारयति । जगत्कल्याणाय विविधानुपायान् जनयाते । सबैलौकिकैर्दोपैर्विनिर्मुक्तो भवति । स इद्द देवशब्देन व्यवयिते । अथ काण्डकार्यः । मनुष्येषु । इमे त्रय एव लोकाः सन्ति । के पुनस्ते एक । मनुष्यलोकः । पितृलोकः । देवलोकः । किमर्थ एतेषामुद्देशः ? सम्मानार्थः । एतेऽपि सम्मान्याः । केनोपायेन ?आह-सोऽयं मनुष्यलोकः । पुत्रेणैव सन्तानवृद्धथैव जय्यो जेतुं शक्यः "क्षय्पजय्यौ श क्यार्थे" इति निपातः । प्रसादयितुं शक्यः । साधारणो मनुष्यो वृद्धावस्थायां निर्वाहाय प्रधानतया पुत्रमेव कामयते । अन्येपामपि पुत्रं जातमीइते । तेनैव स तुष्यति । नान्येन कर्म्मणा पुत्रातिरिक्तन कर्मणा स न तुप्यतीत्यर्थः । पितृलोकः कर्म्मणा । रक्षणादिलक्षणेन यज्ञादिलक्षणेन कर्मणा स पितृलोको जय्यः । विद्यया देवलोको जय्यः । सर्वेषां लोकानां मध्ये देवलोकः श्रेष्ठः । स च देवलोको विद्ययैव जय्योऽस्ति । नान्येन कर्मणा । तस्माद्धेतोः सर्वे प्राचार्या विद्यां प्रशंसन्ति ॥ सोलह ॥ |
UK Afghanistan War: अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की पूरी तरह वापसी के बाद भी ऐसा लग नहीं रहा कि इस देश में संघर्ष का अंत हो जाएगा. क्योंकि ब्रिटेन ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में ISIS-K के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार है.
Britain on Attack Againsta ISIS-K: ब्रिटेन ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में आतंकी नेटवर्क 'ISIS-K' के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार है. इससे पहले पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय) ने कहा था कि इस देश में आईएसआईएस-खुरासान के 2000 लड़ाके मौजूद हैं. आईएसआईएस-खुरासान वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की अफगानिस्तान में स्थित ब्रांच है. जिसने गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport Attack) पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस आत्मघाती हमले में 169 अफगान नागरिक और 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है.
विग्सटन ने कहा, 'अगर हमें योगदान करने का अवसर मिलेगा, तो मुझे कोई संदेह नहीं है कि हम इसके लिए तैयार होंगे, चाहे फिर वो (आईएसआईएस) कहीं भी हो. चरमपंथी संगठन अपना सिर उठा रहा है और वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटेन और उसके सहयोगियों के लिए खतरा है (ISIS-K in Afghanistan). अफगानिस्तान शायद दुनिया के उन दुर्गम क्षेत्रों में से है और वहां हम काम करने में सक्षम हैं.' अखबार के अनुसार, ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों ने कथित तौर पर हवाई हमलों को लेकर चर्चा की है. जैसे रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) जेट कहां स्थित होंगे, वे कैसे ईंधन भरेंगे और जमीन पर लक्ष्यों की पहचान कैसे की जाएगी.
विग्सटन ने आगे कहा, 'इसका मतलब ये है कि आईएसआईएस को हराने के लिए वैश्विक गठबंधन के अंतर्गत हम अपनी भूमिका निभाने में सक्षम हैं. चाहे फिर बात हवाई हमले की हो, सैनिकों और उपकरणों को किसी भी स्तर पर संबंधित देश में भेजने की हो.' इस बारे में जब ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब (Dominic Raab) से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं जानते. लेकिन उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पास 'आत्मरक्षा' करने का अधिकार है और इसमें 'विदेश से संचालित आतंकवादी समूहों' से निपटना भी शामिल होना चाहिए.
| UK Afghanistan War: अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की पूरी तरह वापसी के बाद भी ऐसा लग नहीं रहा कि इस देश में संघर्ष का अंत हो जाएगा. क्योंकि ब्रिटेन ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में ISIS-K के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार है. Britain on Attack Againsta ISIS-K: ब्रिटेन ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में आतंकी नेटवर्क 'ISIS-K' के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार है. इससे पहले पेंटागन ने कहा था कि इस देश में आईएसआईएस-खुरासान के दो हज़ार लड़ाके मौजूद हैं. आईएसआईएस-खुरासान वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की अफगानिस्तान में स्थित ब्रांच है. जिसने गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस आत्मघाती हमले में एक सौ उनहत्तर अफगान नागरिक और तेरह अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है. विग्सटन ने कहा, 'अगर हमें योगदान करने का अवसर मिलेगा, तो मुझे कोई संदेह नहीं है कि हम इसके लिए तैयार होंगे, चाहे फिर वो कहीं भी हो. चरमपंथी संगठन अपना सिर उठा रहा है और वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटेन और उसके सहयोगियों के लिए खतरा है . अफगानिस्तान शायद दुनिया के उन दुर्गम क्षेत्रों में से है और वहां हम काम करने में सक्षम हैं.' अखबार के अनुसार, ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों ने कथित तौर पर हवाई हमलों को लेकर चर्चा की है. जैसे रॉयल एयर फोर्स जेट कहां स्थित होंगे, वे कैसे ईंधन भरेंगे और जमीन पर लक्ष्यों की पहचान कैसे की जाएगी. विग्सटन ने आगे कहा, 'इसका मतलब ये है कि आईएसआईएस को हराने के लिए वैश्विक गठबंधन के अंतर्गत हम अपनी भूमिका निभाने में सक्षम हैं. चाहे फिर बात हवाई हमले की हो, सैनिकों और उपकरणों को किसी भी स्तर पर संबंधित देश में भेजने की हो.' इस बारे में जब ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं जानते. लेकिन उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पास 'आत्मरक्षा' करने का अधिकार है और इसमें 'विदेश से संचालित आतंकवादी समूहों' से निपटना भी शामिल होना चाहिए. |
आजकल की बदलती लाइफ स्टाइल और केमिकलयुक्त प्रोडक्ट्स के ज्यादा इस्तेमाल से बाल जल्दी डैमेज हो जाते हैं। उम्र से पहली ही बाल सफेद नज़र आने लगते हैं। वैसे तो सब सफेद बालों पर मेंहदी लगता ही हैं। लेकिन अगर आप आंवला रीठा और शिकाकाई का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करेगें तो बाल तो काले होगें ही साथ ही बालों की दूसरी समस्याएं जैसे बाल झड़ने, दो मुंहे बाल, डैंडफ, बेजान और रुखे बालों के लिए रामबाण उपाए है। बस आपको इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका आना चाहिए। तो आईए जानते हैं आंवला, रीठा और शिकाकाई के क्या-क्या फायदे हैं और कैसे करना हैं इसका बाल काले करने के लिए इस्तेमाल।
सफेद बालों को काला करने के लिए आंवला,रीठा, शिकाकाई को मिक्स करके हैयर मास्क तैयार किया जा सकता है। बस यह स्टेप्स फोलो करें।
1. आंवला,रीठा, शिकाकाई इन सब के 5-6 टुकड़े लें और इसे रातभर पानी में भिगोकर रख दें।
2. इस मिश्रण को गैस में अच्छी तरह से उबालें और फिर गैस से नीचे उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें।
3. ठड़ा होने के बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें।
4. अब बालों में इस हेयर मास्क को लगा के, 3-4 घंटे के लिए छोड़ दें। सादे पानी से अपने बालों को धो लें।
5. अगर आप चाहे तो आप इस मिश्रण का शैंपू की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस मिश्रण को बालों में नियमित रूप से लगाने से सफेद बालों की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है। कोशिश करें कि सप्ताह में 3-4 बार इस मिश्रण से बाल जरूर धोएं या बालों में जरूर लगाएं। आपको कुछ ही दिनों में फर्क नजर आने लगेगा।
| आजकल की बदलती लाइफ स्टाइल और केमिकलयुक्त प्रोडक्ट्स के ज्यादा इस्तेमाल से बाल जल्दी डैमेज हो जाते हैं। उम्र से पहली ही बाल सफेद नज़र आने लगते हैं। वैसे तो सब सफेद बालों पर मेंहदी लगता ही हैं। लेकिन अगर आप आंवला रीठा और शिकाकाई का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करेगें तो बाल तो काले होगें ही साथ ही बालों की दूसरी समस्याएं जैसे बाल झड़ने, दो मुंहे बाल, डैंडफ, बेजान और रुखे बालों के लिए रामबाण उपाए है। बस आपको इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका आना चाहिए। तो आईए जानते हैं आंवला, रीठा और शिकाकाई के क्या-क्या फायदे हैं और कैसे करना हैं इसका बाल काले करने के लिए इस्तेमाल। सफेद बालों को काला करने के लिए आंवला,रीठा, शिकाकाई को मिक्स करके हैयर मास्क तैयार किया जा सकता है। बस यह स्टेप्स फोलो करें। एक. आंवला,रीठा, शिकाकाई इन सब के पाँच-छः टुकड़े लें और इसे रातभर पानी में भिगोकर रख दें। दो. इस मिश्रण को गैस में अच्छी तरह से उबालें और फिर गैस से नीचे उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें। तीन. ठड़ा होने के बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। चार. अब बालों में इस हेयर मास्क को लगा के, तीन-चार घंटाटे के लिए छोड़ दें। सादे पानी से अपने बालों को धो लें। पाँच. अगर आप चाहे तो आप इस मिश्रण का शैंपू की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मिश्रण को बालों में नियमित रूप से लगाने से सफेद बालों की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है। कोशिश करें कि सप्ताह में तीन-चार बार इस मिश्रण से बाल जरूर धोएं या बालों में जरूर लगाएं। आपको कुछ ही दिनों में फर्क नजर आने लगेगा। |
नैनीताल न्यूज़ः ज्वेलरी कारोबारी एक महिला ने अपने ही कर्मचारी पर दस लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया है. कार्रवाई को लेकर वह आठ माह से लालकुआं थाने के चक्कर काट रही है. सुनवाई नहीं हुई तो पीड़िता ने एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई है.
पटेल चौक में ज्वेलरी शॉप चलाने वाली प्रिया गुप्ता का कहना है कि दो साल पूर्व उनके पति की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद से कारोबार की जिम्मेदारी उस पर आ गई. धौली रेंज निवासी अनोखे उनकी दुकान में काम करता था. कहना है कि जुलाई 2022 को उनकी बहन ने रुपयों की जरूरत होने की बात कही. इस पर उन्होंने अनोखे को दस लाख रुपये देकर बहन के पास भेज दिया, पर वह वहां नहीं पहुंचा. शिकायत लालकुआं थाने में की गई. पर कार्रवाई नहीं हुई. आरोप है कि बीते आठ माह से वह थाने के चक्कर काट रही हैं. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है.
दुष्कर्म के प्रयास का आरोपी गिरफ्तारः लालकुआं क्षेत्र में युवती से दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी राहुल सक्सेना (28) हाथी खाना लालकुआं का ही रहने वाला है. पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपना जुर्म भी कबूला है.
पुलिस के अनुसार बीते की रात हल्द्वानी से ड्यूटी कर लौट रही युवती के साथ बाइक सवार युवक ने दुष्कर्म की कोशिश की थी. युवती से मारपीट की और उसे धमकी दी गई थी. नोंचने व दांत से काटे जाने से शरीर पर जख्म भी हो गए थे. राहगीरों के आ जाने पर आरोपी फरार हो गया था. इस दौरान आरोपी की चप्पल मौके पर छूट गई थी.
| नैनीताल न्यूज़ः ज्वेलरी कारोबारी एक महिला ने अपने ही कर्मचारी पर दस लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया है. कार्रवाई को लेकर वह आठ माह से लालकुआं थाने के चक्कर काट रही है. सुनवाई नहीं हुई तो पीड़िता ने एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई है. पटेल चौक में ज्वेलरी शॉप चलाने वाली प्रिया गुप्ता का कहना है कि दो साल पूर्व उनके पति की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद से कारोबार की जिम्मेदारी उस पर आ गई. धौली रेंज निवासी अनोखे उनकी दुकान में काम करता था. कहना है कि जुलाई दो हज़ार बाईस को उनकी बहन ने रुपयों की जरूरत होने की बात कही. इस पर उन्होंने अनोखे को दस लाख रुपये देकर बहन के पास भेज दिया, पर वह वहां नहीं पहुंचा. शिकायत लालकुआं थाने में की गई. पर कार्रवाई नहीं हुई. आरोप है कि बीते आठ माह से वह थाने के चक्कर काट रही हैं. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. दुष्कर्म के प्रयास का आरोपी गिरफ्तारः लालकुआं क्षेत्र में युवती से दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी राहुल सक्सेना हाथी खाना लालकुआं का ही रहने वाला है. पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपना जुर्म भी कबूला है. पुलिस के अनुसार बीते की रात हल्द्वानी से ड्यूटी कर लौट रही युवती के साथ बाइक सवार युवक ने दुष्कर्म की कोशिश की थी. युवती से मारपीट की और उसे धमकी दी गई थी. नोंचने व दांत से काटे जाने से शरीर पर जख्म भी हो गए थे. राहगीरों के आ जाने पर आरोपी फरार हो गया था. इस दौरान आरोपी की चप्पल मौके पर छूट गई थी. |
कस्बे में रविवार को रास्ते को लेकर हुए एक विवाद में दो पक्षों में झगड़ा हो गया। इसमें दोनों पक्षों के नौ लोग घायल हो गए। इन्हें श्रीगंगानगर रैफर किया गया है। विवाद जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के गांव 55 एनपी में हुआ। एक पक्ष की ओर दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।
गांव 55 एनपी के जगदीश चंद्र की ओर से दर्ज मामले में कहा गया कि उसके भतीजे प्रेम कुमार, विकास और देवेंद्र रविवार को खेत से घर आ रहे थे। इसी दौरान गांव तेईस एमओडी के रामस्वरूप, श्यामसुंदर, संदीप, देवी, लूणाराम, राजेंद्र, शारदा और दलीप आए तथा देशी राइफल, तलवार आदि हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान आरोपी पक्ष के दलीप ने फायर कर दिया। दोनों पक्षों के बीच देर तक झगड़ा चला। इससे दोनों पक्षों के नौ लोग घायल हो गए।
घटना में एक पक्ष के प्रेम, विकास, देवेंद्र और हेतराम तथा अन्य पक्ष के रामस्वरूप, दलीप, राकेश, विक्रम, सुभाष आदि घायल हो गए। इनका उपचार किया जा रहा है।
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| कस्बे में रविवार को रास्ते को लेकर हुए एक विवाद में दो पक्षों में झगड़ा हो गया। इसमें दोनों पक्षों के नौ लोग घायल हो गए। इन्हें श्रीगंगानगर रैफर किया गया है। विवाद जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के गांव पचपन एनपी में हुआ। एक पक्ष की ओर दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। गांव पचपन एनपी के जगदीश चंद्र की ओर से दर्ज मामले में कहा गया कि उसके भतीजे प्रेम कुमार, विकास और देवेंद्र रविवार को खेत से घर आ रहे थे। इसी दौरान गांव तेईस एमओडी के रामस्वरूप, श्यामसुंदर, संदीप, देवी, लूणाराम, राजेंद्र, शारदा और दलीप आए तथा देशी राइफल, तलवार आदि हथियारों से हमला कर दिया। इस दौरान आरोपी पक्ष के दलीप ने फायर कर दिया। दोनों पक्षों के बीच देर तक झगड़ा चला। इससे दोनों पक्षों के नौ लोग घायल हो गए। घटना में एक पक्ष के प्रेम, विकास, देवेंद्र और हेतराम तथा अन्य पक्ष के रामस्वरूप, दलीप, राकेश, विक्रम, सुभाष आदि घायल हो गए। इनका उपचार किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
८ माघनन्दि सिद्धान्त देव ( उनके शिष्य - प्रभाचन्द्र द्वितीय हुए । )
प्रभाचन्द्र द्वितीय
( इनके सघर्मा ( गुरुभ्राता) अनन्तवीर्य मुनि और मुनिचन्द्र मुनि थे । उनके शिष्य श्रुतकीर्ति हुए । )
१० श्रुतकीति
११ कनकनन्दि त्रैविद्य
१३ बालचन्द्र यतीन्द्र त्रैविद्य १४ अनन्तवीर्य सिद्धान्तदेव १५ मुनिचन्द्र सिद्धान्तदेव'
( अनेक राजाम्रो की राजसभाओ मे इन्हे त्रिभुवन मल्ल वादिराज की उपाधि से अलकृत एव सम्मानित किया गया । इनके सघर्मा - गुरुभ्राता माधवचन्द्र हुए । )
कारगरण यापनीय परम्परा का ही गरण था इस बात की पुष्टि अनेक विद्वानो ने की है । कतिपय शिलालेखो मे भी कारगरगरण को यापनीय सघ का ही गरण बताया गया है । इसके अतिरिक्त इसी शिलालेख मे इस पट्ट परम्परा के सातवे पट्टधर प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव को कारपूर गरण तथा मेष पाषारण गच्छ का आचार्य बताया गया है । मेष पाषारण गच्छ यापनीय सघ का ही गच्छ था । इसे इतिहास के सभी विद्वानो ने एक मत से स्वीकार किया है। इन्ही प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव के शिष्य बुधचन्द्र देव थे । आचार्य बुधचन्द्र देव की विद्यमानता मे प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव के । गृहस्थ शिष्य वर्मं देव और भुजबलगग पेम्र्म्माडिदेव ने मडलि की पहाड़ी पर ध्रुवस्थित उस प्राचीन वसदि का पुननिर्माण करवाया जिसे पूर्व काल मे दडिग् और माधव ने आचार्य सिहनन्दि के निर्देश पर बनवाया था ।
इसी यापनीय परम्परा के आचार्य मुनिचन्द्र ने रट्ट राजवश की सीमाओ का विस्तार कर उसे एक शक्तिशाली राज्य का रूप प्रदान किया। महामण्डलेश्वर रट्टराज लक्ष्मीदेव द्वितीय, जो कि अपनी राजधानी वेणुग्राम ( साम्प्रतकालीन बेलगाव) मे रहकर रट्ट राज्य का सचालन कर रहे थे, द्वारा सौदन्ती से प्राप्त एक शिलालेख मे इन आचार्य मुनिचन्द्र को एक कुशल राजनीतिज्ञ रणनीति निपुरण और रट्ट महाराज्य का संस्थापक बताया गया है ।
जैन शिलालेख संग्रह भाग २ पृष्ठ ४०८ ४२६ लेख संख्या २७७
जे बी आर ए एस वाल्यूम १० पेज २६०, एफ एफ
इस शिलालेख में आचार्य मुनिचन्द्र के एक शिष्य श्राचार्य लक्ष्मीदेव का भी नामोल्लेख किया गया है । इन आचार्य मुनिचन्द्र के नामोल्लेख के सम्बन्ध मे प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता एव इतिहासज्ञ पी बी देसाई ने लिखा है
"Lastly, we may notice one more inscription from Saundattı, which offers interesting details about the Jain teachers The epigraph is dated A D 9335 and refers itself to the reign of the Ratta Chief Maha Mandaleshwar Laxmı Deo II, who was governing the Kingdom from his capital
Venugram ( वेणुग्राम ) or modern Belgaon ( बेलगाव ) The Jam teacher was Munichandra ( मुनिचन्द्र ), who is styled as the royal preceptor of the Ratta House ( रट्ट राजगुरु ) Munichandra's activities were not confined to the sphere of religion alone Besides being a spiritual guide and political adviser of the royal house hold, he appears to have taken a leading part not only in the administrative affairs, but also in connection with the military campaigns of the kingdom ( वर-बाहा बलदिम-विरोधीनिपरम् बेकोगडन) he is stated to have expended the boundaries of the
Ratta territories and established their authority on a firm footing Both Laxmi Deo II and his father Kart Veerya IV (कार्त्त वीर्य चतुर्थ ) were indebted to this divine for his sound advice and political wisdom Munichandra was well versed in sacred lore and proficient in military science "Worthy of respect, most able among ministers, the establishers of Ratta Kings, Munichandra surpassed all others in capacity for administration and in generousity "१
श्री देसाई द्वारा प्रस्तुत उपरिलिखित शिलालेख के साराश से यह एक बडा ही विस्मयकारी तथ्य प्रकाश में आता है कि जिस प्रकार यापनीय सघ के आचार्य सिंहनन्दि ने गग राजवश की स्थापना की और उस राजवश के आदि राजा और भावी राजाओ को युद्धभूमि मे शत्रु के सम्मुख डटे रहने का उपदेश दिया, उसी प्रकार उनके उत्तरवर्ती यापनीय आचार्य मुनिचन्द्र उनसे भी चार कदम आगे बढ गये । उन्होने रट्ट राजा लक्ष्मीदेव को प्रशासन चलाने मे और राज्य विस्तार हेतु सैनिक अभियान प्रारम्भ करने और उन सैनिक अभियानो को सुचारू रूप से चलाने हेतु सक्रिय सहयोग तक दिया। एक पच महाव्रतधारी प्राचार्य को इस शिलालेख मे सर्वश्रेष्ठ सुयोग्य महामन्त्री, कुशल राजनैतिक परामर्शदाता और रणनीति विशारद तक बताया गया है। इससे यही प्रतीत होता है कि उस युग की आवश्यकता को समझकर जैन सघ को एक सशक्त सघ के रूप में बनाये रखने के जैनिज्म इन साउथ इण्डिया एण्ड सम जैन इपिग्राफ्स बाई पी वी देसाई - पेज ११४, ११५ जैन सस्कृति रक्षक सघ, शोलापुर द्वारा १९५७ मे प्रकाशित ।
लिये एव उसके प्रबल प्रचार प्रसार के सदुद्देश्य से राज्याश्रय प्राप्त करके उन यापनीय महान आचार्यों ने श्रमरण धर्म के प्रतिकूल कार्यों को करना भी स्वीकार
जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है न केवल यापनीय परम्परा अपितु अन्य परम्पराओ के आचार्यों ने भी मुनिधर्म के विपरीत मार्ग का अनुसरण करते हुए ग्रामादि का दान स्वीकार करने में किसी प्रकार का सकोच नही किया । ऐसा प्रतीत होता है कि उस समय मे मुनियो की भोजन व्यवस्था के लिये मन्दिरो के निर्माण एव उनकी दैनन्दिन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये आचार्यों द्वारा दान ग्रहरण करना एक व्यापक और सर्वसम्मत कार्य हो चुका था । मन्दिरो का पौरो। हित्य करना, उनकी व्यवस्था करना एव उनका निरीक्षण करना आदि कार्य भी, जो कि वस्तुत एक मुनि के लिये सदोप होने के कारण त्याज्य है, आचार्यों ने समय के प्रभाव से प्रभावित होकर अपने हाथ मे ले लिये थे । कलभावी नामक ग्राम (सम्पगाव तालुक) के रामलिंग मन्दिर के बाहर से प्राप्त हुए शक सम्वत् २६१ के एक शिलालेख मे, जो शोध के पश्चात् ईसा की ग्यारहवी शताब्दी का माना गया है, यह उल्लेख है कि पश्चिमी गगवश के राजा शिवमार ने कुमुदवाड ( कलभावी) मे एक जैन मन्दिर का निर्माण करवाया और उस मन्दिर की व्यवस्था के लिये वह पूरा का पूरा मेलाप अन्वय नामक ग्राम, कारेगरण के आचार्य देवकीत्ति को दान मे दे दिया गया । यह पहले बताया जा चुका है कि कारेगरण यापनीय सघ का एक प्रमुख गण था । इस शिलालेख मे कारेगण के कुछ प्राचार्यों के नाम दिये गये है जो इस प्रकार है
१ शुभकीति, २ जिनचन्द्र, ३ नागचन्द्र, औौर ४ गुणकीत्ति ।
यापनीय संघ के प्राचीन केन्द्र
ईसा की दूसरी शताब्दी के प्रास-पास यापनीय सघ तामिलनाडु प्रदेश मे कन्याकुमारी तक सक्रिय रहा। इस सम्बन्ध मे पहले प्रकाश डाला जा चुका है। किन्तु ईसा की चौथी पाचवी शताब्दी मे और उसके पश्चात् यापनीय सघ वस्तुत करर्णाटक प्रान्त के उत्तरवर्ती भाग मे ही एक सर्वाधिक लोकप्रिय धर्मसघ के रूप मे सक्रिय रहा । करर्णाटक प्रदेश से प्राप्त शिलालेखो से ज्ञात होता है कि पलासिका जो कि आज बेलगाव जिले का हलसी ग्राम है, यापनीय सघ का प्रचार-प्रसार का ईसा की पाचवी व छठी शताब्दी में केन्द्र रहा। इसके पश्चात् ईसा की सातवी शताब्दी मे बीजापुर जिले का ऐहोल ग्राम केन्द्र रहा। इसके अनन्तर ईसा की दसवी शताब्दी मे तुमकुर जिले मे अनेक स्थानो पर यापनीय सघ ने अपने मुनिसघो की वसदियो का निर्मारण कर उनको अपना केन्द्र बनाकर धर्म का प्रचार व प्रसार किया । इस प्रकार ईसा की दसवी शताब्दी मे तुमकुर जिले मे भी यापनीय सघ का पूर्ण
प्रभुत्व स्थापित हो गया। इसके पश्चात् यापनीय राघ धारवाड कोल्हापुर और बेरागाव इन सभी जिलो का प्रमुख एव लोकप्रिय धर्मसघ बन गया। श्रागे चलकर ईसा की ग्यारहवी बारहवी शताब्दी मे यापनीय सघ का धर्मप्रचार क्षेत्र केवल उत्तरी करर्णाटक मे ही सीमित रह गया।
यापनीय सघ के प्राश्रयदाता राजवश
कर्नाटक के गग राजवंश के और पोयसल राजवश के राजा प्रारम्भ से लेकर अन्त तक जैन धर्मावलम्बी रहे । इनके अतिरिक्त कदम्ब वश, राष्ट्रकूट वश, रह वश, चालुक्य वरा, शान्तर वश, कलचुरी वश आदि अनेक राजवशो के राजाओ ने समय-समय पर अपने शासनकाल मे जैनधर्म को सरक्षरण दिया और जैनधर्म के प्रचार प्रसार मे इन राजवशो के राजाओ ने मुक्त हस्त हो सहायता की ।
पोय्सल राज्य के संस्थापक आचार्य सुदत्त किस परम्परा के आचार्य थे इस सम्बन्ध मे प्रमाणाभाव से सुनिश्चित रूपेण कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किन्तु मैसूर- धारवाड सौरभ कुपत्तूर हलसी आदि क्षेत्रो मे ईसा की तीसरी, चौथी शताब्दी से ही यापनीय सघ का पूर्ण वर्चस्व रहा और कई राजवशो की स्थापना के लिये एव 'गग राजवश' जैसे जैन धर्मावलम्बी राजवण की अभिवृद्धि के लिये, जैनाचार्या ने, जो अनुमानत यापनीय संघ के ही हो सकते है, बडी गहरी रुचि ली । जैनाचार्यों का अपने ऊपर वरदहस्त होने के परिणामस्वरूप जैन राजवशो ने जैन धर्म की अभिवृद्धि के लिये अपनी पीढी प्रपीढी तक जो-जो उल्लेसनीय कार्य किये, उनके विवरण दक्षिण के प्राय सभी प्रान्तो से मुख्यत कर्नाटक से प्राप्त हुए अभिलेखो, शिलालेखो एव मूर्ति-लेसो आदि में भरे पडे है जिनका विस्तारपूर्वक वर्णन राजवगो के प्रकरण में यथास्थान किया जायगा। | आठ माघनन्दि सिद्धान्त देव प्रभाचन्द्र द्वितीय अनन्तवीर्य मुनि और मुनिचन्द्र मुनि थे । उनके शिष्य श्रुतकीर्ति हुए । ) दस श्रुतकीति ग्यारह कनकनन्दि त्रैविद्य तेरह बालचन्द्र यतीन्द्र त्रैविद्य चौदह अनन्तवीर्य सिद्धान्तदेव पंद्रह मुनिचन्द्र सिद्धान्तदेव' कारगरण यापनीय परम्परा का ही गरण था इस बात की पुष्टि अनेक विद्वानो ने की है । कतिपय शिलालेखो मे भी कारगरगरण को यापनीय सघ का ही गरण बताया गया है । इसके अतिरिक्त इसी शिलालेख मे इस पट्ट परम्परा के सातवे पट्टधर प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव को कारपूर गरण तथा मेष पाषारण गच्छ का आचार्य बताया गया है । मेष पाषारण गच्छ यापनीय सघ का ही गच्छ था । इसे इतिहास के सभी विद्वानो ने एक मत से स्वीकार किया है। इन्ही प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव के शिष्य बुधचन्द्र देव थे । आचार्य बुधचन्द्र देव की विद्यमानता मे प्रभाचन्द्र सिद्धान्तदेव के । गृहस्थ शिष्य वर्मं देव और भुजबलगग पेम्र्म्माडिदेव ने मडलि की पहाड़ी पर ध्रुवस्थित उस प्राचीन वसदि का पुननिर्माण करवाया जिसे पूर्व काल मे दडिग् और माधव ने आचार्य सिहनन्दि के निर्देश पर बनवाया था । इसी यापनीय परम्परा के आचार्य मुनिचन्द्र ने रट्ट राजवश की सीमाओ का विस्तार कर उसे एक शक्तिशाली राज्य का रूप प्रदान किया। महामण्डलेश्वर रट्टराज लक्ष्मीदेव द्वितीय, जो कि अपनी राजधानी वेणुग्राम मे रहकर रट्ट राज्य का सचालन कर रहे थे, द्वारा सौदन्ती से प्राप्त एक शिलालेख मे इन आचार्य मुनिचन्द्र को एक कुशल राजनीतिज्ञ रणनीति निपुरण और रट्ट महाराज्य का संस्थापक बताया गया है । जैन शिलालेख संग्रह भाग दो पृष्ठ चार सौ आठ चार सौ छब्बीस लेख संख्या दो सौ सतहत्तर जे बी आर ए एस वाल्यूम दस पेज दो सौ साठ, एफ एफ इस शिलालेख में आचार्य मुनिचन्द्र के एक शिष्य श्राचार्य लक्ष्मीदेव का भी नामोल्लेख किया गया है । इन आचार्य मुनिचन्द्र के नामोल्लेख के सम्बन्ध मे प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता एव इतिहासज्ञ पी बी देसाई ने लिखा है "Lastly, we may notice one more inscription from Saundattı, which offers interesting details about the Jain teachers The epigraph is dated A D नौ हज़ार तीन सौ पैंतीस and refers itself to the reign of the Ratta Chief Maha Mandaleshwar Laxmı Deo II, who was governing the Kingdom from his capital Venugram or modern Belgaon The Jam teacher was Munichandra , who is styled as the royal preceptor of the Ratta House Munichandra's activities were not confined to the sphere of religion alone Besides being a spiritual guide and political adviser of the royal house hold, he appears to have taken a leading part not only in the administrative affairs, but also in connection with the military campaigns of the kingdom he is stated to have expended the boundaries of the Ratta territories and established their authority on a firm footing Both Laxmi Deo II and his father Kart Veerya IV were indebted to this divine for his sound advice and political wisdom Munichandra was well versed in sacred lore and proficient in military science "Worthy of respect, most able among ministers, the establishers of Ratta Kings, Munichandra surpassed all others in capacity for administration and in generousity "एक श्री देसाई द्वारा प्रस्तुत उपरिलिखित शिलालेख के साराश से यह एक बडा ही विस्मयकारी तथ्य प्रकाश में आता है कि जिस प्रकार यापनीय सघ के आचार्य सिंहनन्दि ने गग राजवश की स्थापना की और उस राजवश के आदि राजा और भावी राजाओ को युद्धभूमि मे शत्रु के सम्मुख डटे रहने का उपदेश दिया, उसी प्रकार उनके उत्तरवर्ती यापनीय आचार्य मुनिचन्द्र उनसे भी चार कदम आगे बढ गये । उन्होने रट्ट राजा लक्ष्मीदेव को प्रशासन चलाने मे और राज्य विस्तार हेतु सैनिक अभियान प्रारम्भ करने और उन सैनिक अभियानो को सुचारू रूप से चलाने हेतु सक्रिय सहयोग तक दिया। एक पच महाव्रतधारी प्राचार्य को इस शिलालेख मे सर्वश्रेष्ठ सुयोग्य महामन्त्री, कुशल राजनैतिक परामर्शदाता और रणनीति विशारद तक बताया गया है। इससे यही प्रतीत होता है कि उस युग की आवश्यकता को समझकर जैन सघ को एक सशक्त सघ के रूप में बनाये रखने के जैनिज्म इन साउथ इण्डिया एण्ड सम जैन इपिग्राफ्स बाई पी वी देसाई - पेज एक सौ चौदह, एक सौ पंद्रह जैन सस्कृति रक्षक सघ, शोलापुर द्वारा एक हज़ार नौ सौ सत्तावन मे प्रकाशित । लिये एव उसके प्रबल प्रचार प्रसार के सदुद्देश्य से राज्याश्रय प्राप्त करके उन यापनीय महान आचार्यों ने श्रमरण धर्म के प्रतिकूल कार्यों को करना भी स्वीकार जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है न केवल यापनीय परम्परा अपितु अन्य परम्पराओ के आचार्यों ने भी मुनिधर्म के विपरीत मार्ग का अनुसरण करते हुए ग्रामादि का दान स्वीकार करने में किसी प्रकार का सकोच नही किया । ऐसा प्रतीत होता है कि उस समय मे मुनियो की भोजन व्यवस्था के लिये मन्दिरो के निर्माण एव उनकी दैनन्दिन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये आचार्यों द्वारा दान ग्रहरण करना एक व्यापक और सर्वसम्मत कार्य हो चुका था । मन्दिरो का पौरो। हित्य करना, उनकी व्यवस्था करना एव उनका निरीक्षण करना आदि कार्य भी, जो कि वस्तुत एक मुनि के लिये सदोप होने के कारण त्याज्य है, आचार्यों ने समय के प्रभाव से प्रभावित होकर अपने हाथ मे ले लिये थे । कलभावी नामक ग्राम के रामलिंग मन्दिर के बाहर से प्राप्त हुए शक सम्वत् दो सौ इकसठ के एक शिलालेख मे, जो शोध के पश्चात् ईसा की ग्यारहवी शताब्दी का माना गया है, यह उल्लेख है कि पश्चिमी गगवश के राजा शिवमार ने कुमुदवाड मे एक जैन मन्दिर का निर्माण करवाया और उस मन्दिर की व्यवस्था के लिये वह पूरा का पूरा मेलाप अन्वय नामक ग्राम, कारेगरण के आचार्य देवकीत्ति को दान मे दे दिया गया । यह पहले बताया जा चुका है कि कारेगरण यापनीय सघ का एक प्रमुख गण था । इस शिलालेख मे कारेगण के कुछ प्राचार्यों के नाम दिये गये है जो इस प्रकार है एक शुभकीति, दो जिनचन्द्र, तीन नागचन्द्र, औौर चार गुणकीत्ति । यापनीय संघ के प्राचीन केन्द्र ईसा की दूसरी शताब्दी के प्रास-पास यापनीय सघ तामिलनाडु प्रदेश मे कन्याकुमारी तक सक्रिय रहा। इस सम्बन्ध मे पहले प्रकाश डाला जा चुका है। किन्तु ईसा की चौथी पाचवी शताब्दी मे और उसके पश्चात् यापनीय सघ वस्तुत करर्णाटक प्रान्त के उत्तरवर्ती भाग मे ही एक सर्वाधिक लोकप्रिय धर्मसघ के रूप मे सक्रिय रहा । करर्णाटक प्रदेश से प्राप्त शिलालेखो से ज्ञात होता है कि पलासिका जो कि आज बेलगाव जिले का हलसी ग्राम है, यापनीय सघ का प्रचार-प्रसार का ईसा की पाचवी व छठी शताब्दी में केन्द्र रहा। इसके पश्चात् ईसा की सातवी शताब्दी मे बीजापुर जिले का ऐहोल ग्राम केन्द्र रहा। इसके अनन्तर ईसा की दसवी शताब्दी मे तुमकुर जिले मे अनेक स्थानो पर यापनीय सघ ने अपने मुनिसघो की वसदियो का निर्मारण कर उनको अपना केन्द्र बनाकर धर्म का प्रचार व प्रसार किया । इस प्रकार ईसा की दसवी शताब्दी मे तुमकुर जिले मे भी यापनीय सघ का पूर्ण प्रभुत्व स्थापित हो गया। इसके पश्चात् यापनीय राघ धारवाड कोल्हापुर और बेरागाव इन सभी जिलो का प्रमुख एव लोकप्रिय धर्मसघ बन गया। श्रागे चलकर ईसा की ग्यारहवी बारहवी शताब्दी मे यापनीय सघ का धर्मप्रचार क्षेत्र केवल उत्तरी करर्णाटक मे ही सीमित रह गया। यापनीय सघ के प्राश्रयदाता राजवश कर्नाटक के गग राजवंश के और पोयसल राजवश के राजा प्रारम्भ से लेकर अन्त तक जैन धर्मावलम्बी रहे । इनके अतिरिक्त कदम्ब वश, राष्ट्रकूट वश, रह वश, चालुक्य वरा, शान्तर वश, कलचुरी वश आदि अनेक राजवशो के राजाओ ने समय-समय पर अपने शासनकाल मे जैनधर्म को सरक्षरण दिया और जैनधर्म के प्रचार प्रसार मे इन राजवशो के राजाओ ने मुक्त हस्त हो सहायता की । पोय्सल राज्य के संस्थापक आचार्य सुदत्त किस परम्परा के आचार्य थे इस सम्बन्ध मे प्रमाणाभाव से सुनिश्चित रूपेण कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किन्तु मैसूर- धारवाड सौरभ कुपत्तूर हलसी आदि क्षेत्रो मे ईसा की तीसरी, चौथी शताब्दी से ही यापनीय सघ का पूर्ण वर्चस्व रहा और कई राजवशो की स्थापना के लिये एव 'गग राजवश' जैसे जैन धर्मावलम्बी राजवण की अभिवृद्धि के लिये, जैनाचार्या ने, जो अनुमानत यापनीय संघ के ही हो सकते है, बडी गहरी रुचि ली । जैनाचार्यों का अपने ऊपर वरदहस्त होने के परिणामस्वरूप जैन राजवशो ने जैन धर्म की अभिवृद्धि के लिये अपनी पीढी प्रपीढी तक जो-जो उल्लेसनीय कार्य किये, उनके विवरण दक्षिण के प्राय सभी प्रान्तो से मुख्यत कर्नाटक से प्राप्त हुए अभिलेखो, शिलालेखो एव मूर्ति-लेसो आदि में भरे पडे है जिनका विस्तारपूर्वक वर्णन राजवगो के प्रकरण में यथास्थान किया जायगा। |
नई दिल्ली : मुंबई में हिंदुस्तान का पहला एप्पल स्टोर खोलने के बाद कंपनी के सीईओ टिम कुक ने दिल्ली के साकेत में एपल का दूसरा आधिकारिक रिटेल स्टोर खोल दिया है. मुंबई की तरह इस स्टोर के भी कई लाभ हैं. आपको बता दें कि मुंबई और दिल्ली में एप्पल स्टोर का किराया एक समान है, यानी कंपनी को हर महीने 40 लाख रुपये का किराया देना होगा. लेकिन दिल्ली में मुंबई के मुकाबले आधे स्टोर हैं. आइए जानते हैं दिल्ली के साकेत स्थित एप्पल स्टोर साकेत में क्या है खास.
1. Apple BKC की तरह, Apple के दिल्ली आउटलेट ने भी 'भारतीयकरण' करने का कोशिश किया है. दिल्ली के स्टोर के एंट्री गेट को इण्डिया गेट से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है. साथ ही, इसका प्रत्येक द्वार शहर के इतिहास को दर्शाता है.
2. एप्पल साकेत स्टोर में उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए सफेद ओक टेबल के साथ विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया घुमावदार स्टोरफ्रंट है. मुंबई की तरह यह स्टोर भी स्टोर चलाने के लिए 100% रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करता है. साथ ही यह पूरी तरह से कार्बन न्यूट्रल है.
3. एप्पल साकेत के पास 70 लोगों की अत्यधिक कुशल टीम है जो 15 से अधिक भारतीय भाषाएं बोलते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यबल में आधी महिलाएं होंगी. इसके अतिरिक्त इन टीमों का चयन हिंदुस्तान के 18 राज्यों से किया गया है.
4. एपल पॉकेट में एक 'जीनियस बार' भी है, जो ग्राहकों को अपॉइंटमेंट डिवाइस सेट करने, एपल आईडी रिकवर करने, एपलकेयर प्लान चुनने, या सब्सक्रिप्शन में परिवर्तन करने जैसी हर चीज में सहायता करता है. साइट तकनीकी और हार्डवेयर सपोर्ट के लिए आप एक अपार्टमेंट बुक कर सकते हैं.
5. इस स्टोर के ग्राहक नए आईफोन और कंपनी के अन्य उत्पाद खरीद सकते हैं. साथ ही, खरीदार अपने पुराने iPhone, Mac, iPad को नए के लिए एक्सचेंज कर सकते हैं. यह ट्रेड इन प्रोग्राम के अनुसार मौजूद है.
| नई दिल्ली : मुंबई में हिंदुस्तान का पहला एप्पल स्टोर खोलने के बाद कंपनी के सीईओ टिम कुक ने दिल्ली के साकेत में एपल का दूसरा आधिकारिक रिटेल स्टोर खोल दिया है. मुंबई की तरह इस स्टोर के भी कई लाभ हैं. आपको बता दें कि मुंबई और दिल्ली में एप्पल स्टोर का किराया एक समान है, यानी कंपनी को हर महीने चालीस लाख रुपये का किराया देना होगा. लेकिन दिल्ली में मुंबई के मुकाबले आधे स्टोर हैं. आइए जानते हैं दिल्ली के साकेत स्थित एप्पल स्टोर साकेत में क्या है खास. एक. Apple BKC की तरह, Apple के दिल्ली आउटलेट ने भी 'भारतीयकरण' करने का कोशिश किया है. दिल्ली के स्टोर के एंट्री गेट को इण्डिया गेट से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है. साथ ही, इसका प्रत्येक द्वार शहर के इतिहास को दर्शाता है. दो. एप्पल साकेत स्टोर में उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए सफेद ओक टेबल के साथ विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया घुमावदार स्टोरफ्रंट है. मुंबई की तरह यह स्टोर भी स्टोर चलाने के लिए एक सौ% रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करता है. साथ ही यह पूरी तरह से कार्बन न्यूट्रल है. तीन. एप्पल साकेत के पास सत्तर लोगों की अत्यधिक कुशल टीम है जो पंद्रह से अधिक भारतीय भाषाएं बोलते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यबल में आधी महिलाएं होंगी. इसके अतिरिक्त इन टीमों का चयन हिंदुस्तान के अट्ठारह राज्यों से किया गया है. चार. एपल पॉकेट में एक 'जीनियस बार' भी है, जो ग्राहकों को अपॉइंटमेंट डिवाइस सेट करने, एपल आईडी रिकवर करने, एपलकेयर प्लान चुनने, या सब्सक्रिप्शन में परिवर्तन करने जैसी हर चीज में सहायता करता है. साइट तकनीकी और हार्डवेयर सपोर्ट के लिए आप एक अपार्टमेंट बुक कर सकते हैं. पाँच. इस स्टोर के ग्राहक नए आईफोन और कंपनी के अन्य उत्पाद खरीद सकते हैं. साथ ही, खरीदार अपने पुराने iPhone, Mac, iPad को नए के लिए एक्सचेंज कर सकते हैं. यह ट्रेड इन प्रोग्राम के अनुसार मौजूद है. |
जिला महोबा, गांव कमालपुरा बरसात को मौसम कोन को पसंद नइया हर कोऊ को बरसात के मौसम को इन्तजार रत। लेकिन कमालपुरा के आदमी बरसात के आबे से पहले ही डरा रए। इते पिछले साल चार किलो मीटर लम्बे और चौबीस फीट गहरेतालाब को खुदवाओ गओ। जिला महोबा, गांव कमालपुरा बरसात को मौसम कोन को पसंद नइया हर कोऊ को बरसात के मौसम को इन्तजार रत। लेकिन कमालपुरा के आदमी बरसात के आबे से पहले ही डरा रए। इते पिछले साल चार किलो मीटर लम्बे और चौबीस फीट गहरेतालाब को खुदवाओ गओ। तालाब ठीक से न बनबे से टूटबे की हालत पे हे। अगर जा साल बांध की जल्दी से जल्दी मरम्मत नइ भइ तो बरसात की बाढ़ से आदमियन को दिन और रात एक हो सकत। जा तालाब से लगभग पंद्रह गांव की खेती की सिचाई होत। बांध में दरार पिछले साल ही आ गयी और अब बांध टूटबे को डर आदमियन को दिन प्रतिदिन दिन बढ़त जा रओ। गांव के आदमियन को केबो हे के अगर बरसात में बांध टूटो तो कमालपुर, लाडपुर, मुहारी, अतरपठा जैसे गांव बाढ़ में बह जेहे। गांव वालिन को कबो हे के पिछली साल डी एम् और पूर्व मुख्यमंत्री आस्थाई प्लास्टर करवा गये ते अब जा मुसीबत फिर से आ गयी। जा बार भी डी एम् को जन सूचना प्राथनापत्र लिखो गओ लेकिन बाको भी कोनऊ जबाब नइ दओ गओ। केशरानी ने बताई के सुधरने चाहिए तालाब भये हे के अगर टूट जेहे तो सब आदमी बह जेहे। राजकुमार ने बताई बरसात में पानी पाइप लाइन से ऊपर आ जात तो सौ प्रतिशत सम्भावना हे के गांव बह जेहे। और जो आस पास के गांव हे सब बह जेहे। रमेश चन्द्र ने बताई के सब जने नेता और अधिकारियन से डरात हे उनकी सुनी नइ जात बल्कि उनके ऊपर आरोप लगा दओ जात। जा से कोऊ आवाज नइ उठा रओ। भगबे के लाने तैयार हे सब के जिते जैसे गुजारो हुए उते भग चले। ठेकेदार मट्टीडार के चले गये ते बो भी तीन चार फुट धस गयी ती पानी बंद नइ हो रओ तो सो कछू आदमी भग गये ते। और हम जइ प्यास में रए के कोनऊ भी प्रकार से जाको बचाव होबे। अधिकारियन से फ़ोन से संपर्क करो लिखित में मांग करी। जब अगस्त के महीना में गांव भगन लगो तो डी एम् और एस पी आय। बाके बाद बरसात निकर गयी दुबारा बरसात आ गयी लेकिन कछू नइ भओ। इतनी बढ़ी बढ़ी दरारे फट गयी तालाब के भीतर के बे फिर परेशान करन लगी। विश्म्भर सिंह अधिशाषी अभियंता सिचाई विभाग ने बताई के उते के जो प्रधान जी हे पुराने वाले बे खुरापाती हे। पिछली बार भी चार पांच फुट पानी हतो बई में हल्ला मचा दओ तो बांध टूट रओ बांध टूट रओ एसे आदमियन को डरा दओ। आदमी हल्ला मचान लगे जब रात के एक दो बजे गये देखो उते कछू नइ हतो। अगर पानी ऊपर आत भी हे तो दो किलो मीटर दूर हे गांव और बगल में नालो भी हे जासे कोनऊ दिक्कत की बात भी नइया।
| जिला महोबा, गांव कमालपुरा बरसात को मौसम कोन को पसंद नइया हर कोऊ को बरसात के मौसम को इन्तजार रत। लेकिन कमालपुरा के आदमी बरसात के आबे से पहले ही डरा रए। इते पिछले साल चार किलो मीटर लम्बे और चौबीस फीट गहरेतालाब को खुदवाओ गओ। जिला महोबा, गांव कमालपुरा बरसात को मौसम कोन को पसंद नइया हर कोऊ को बरसात के मौसम को इन्तजार रत। लेकिन कमालपुरा के आदमी बरसात के आबे से पहले ही डरा रए। इते पिछले साल चार किलो मीटर लम्बे और चौबीस फीट गहरेतालाब को खुदवाओ गओ। तालाब ठीक से न बनबे से टूटबे की हालत पे हे। अगर जा साल बांध की जल्दी से जल्दी मरम्मत नइ भइ तो बरसात की बाढ़ से आदमियन को दिन और रात एक हो सकत। जा तालाब से लगभग पंद्रह गांव की खेती की सिचाई होत। बांध में दरार पिछले साल ही आ गयी और अब बांध टूटबे को डर आदमियन को दिन प्रतिदिन दिन बढ़त जा रओ। गांव के आदमियन को केबो हे के अगर बरसात में बांध टूटो तो कमालपुर, लाडपुर, मुहारी, अतरपठा जैसे गांव बाढ़ में बह जेहे। गांव वालिन को कबो हे के पिछली साल डी एम् और पूर्व मुख्यमंत्री आस्थाई प्लास्टर करवा गये ते अब जा मुसीबत फिर से आ गयी। जा बार भी डी एम् को जन सूचना प्राथनापत्र लिखो गओ लेकिन बाको भी कोनऊ जबाब नइ दओ गओ। केशरानी ने बताई के सुधरने चाहिए तालाब भये हे के अगर टूट जेहे तो सब आदमी बह जेहे। राजकुमार ने बताई बरसात में पानी पाइप लाइन से ऊपर आ जात तो सौ प्रतिशत सम्भावना हे के गांव बह जेहे। और जो आस पास के गांव हे सब बह जेहे। रमेश चन्द्र ने बताई के सब जने नेता और अधिकारियन से डरात हे उनकी सुनी नइ जात बल्कि उनके ऊपर आरोप लगा दओ जात। जा से कोऊ आवाज नइ उठा रओ। भगबे के लाने तैयार हे सब के जिते जैसे गुजारो हुए उते भग चले। ठेकेदार मट्टीडार के चले गये ते बो भी तीन चार फुट धस गयी ती पानी बंद नइ हो रओ तो सो कछू आदमी भग गये ते। और हम जइ प्यास में रए के कोनऊ भी प्रकार से जाको बचाव होबे। अधिकारियन से फ़ोन से संपर्क करो लिखित में मांग करी। जब अगस्त के महीना में गांव भगन लगो तो डी एम् और एस पी आय। बाके बाद बरसात निकर गयी दुबारा बरसात आ गयी लेकिन कछू नइ भओ। इतनी बढ़ी बढ़ी दरारे फट गयी तालाब के भीतर के बे फिर परेशान करन लगी। विश्म्भर सिंह अधिशाषी अभियंता सिचाई विभाग ने बताई के उते के जो प्रधान जी हे पुराने वाले बे खुरापाती हे। पिछली बार भी चार पांच फुट पानी हतो बई में हल्ला मचा दओ तो बांध टूट रओ बांध टूट रओ एसे आदमियन को डरा दओ। आदमी हल्ला मचान लगे जब रात के एक दो बजे गये देखो उते कछू नइ हतो। अगर पानी ऊपर आत भी हे तो दो किलो मीटर दूर हे गांव और बगल में नालो भी हे जासे कोनऊ दिक्कत की बात भी नइया। |
इंडिया न्यूज़, नई दिल्लीः
Gold Silver Price Today 5 April 2022 उतार चढाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में आज यानि मंगलवार को गिरावट दर्ज की गयी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज यानी मंगलवार को सोना 48 रुपये सस्ता हुआ है। इस गिरावट के साथ सोना आज सुबह 51485 रुपये पर आ चुका है। हालांकि, चांदी की कीमत में आज 5 रुपये की मामूली तेजी दर्ज की गई। आप सभी को हम यह भी बता दें कि इस समय चांदी 66300 पर ट्रेड कर रही है।
ज्वैलरी 24 कैरेट सोने से नहीं बनती है। ज्वैलरी के लिए ज्यादातर 22 कैरेट से लेकर 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है। सभी कैरेट का हॉलमार्क अंक अलग होता। जैसे 24 कैरेट पर 999, 23 कैरेट सोने पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 पर 750 लिखा होता है। इससे सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है।
जानकारी के लिए बता दें कि सोना खरीदते समय उसकी क्वॉलिटी का ध्यान जरूर रखाना चाहिए। ग्राहकों को हॉलमार्क देखकर ही सोने के गहनों की खरीदारी करनी चाहिए। हॉलमार्क सोने की सरकारी गारंटी है और भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) हॉलमार्क का निर्धारण करती है।
| इंडिया न्यूज़, नई दिल्लीः Gold Silver Price Today पाँच अप्रैलil दो हज़ार बाईस उतार चढाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में आज यानि मंगलवार को गिरावट दर्ज की गयी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज यानी मंगलवार को सोना अड़तालीस रुपयापये सस्ता हुआ है। इस गिरावट के साथ सोना आज सुबह इक्यावन हज़ार चार सौ पचासी रुपयापये पर आ चुका है। हालांकि, चांदी की कीमत में आज पाँच रुपयापये की मामूली तेजी दर्ज की गई। आप सभी को हम यह भी बता दें कि इस समय चांदी छयासठ हज़ार तीन सौ पर ट्रेड कर रही है। ज्वैलरी चौबीस कैरेट सोने से नहीं बनती है। ज्वैलरी के लिए ज्यादातर बाईस कैरेट से लेकर अट्ठारह कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है। सभी कैरेट का हॉलमार्क अंक अलग होता। जैसे चौबीस कैरेट पर नौ सौ निन्यानवे, तेईस कैरेट सोने पर नौ सौ अट्ठावन, बाईस कैरेट पर नौ सौ सोलह, इक्कीस कैरेट पर आठ सौ पचहत्तर और अट्ठारह पर सात सौ पचास लिखा होता है। इससे सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। जानकारी के लिए बता दें कि सोना खरीदते समय उसकी क्वॉलिटी का ध्यान जरूर रखाना चाहिए। ग्राहकों को हॉलमार्क देखकर ही सोने के गहनों की खरीदारी करनी चाहिए। हॉलमार्क सोने की सरकारी गारंटी है और भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड हॉलमार्क का निर्धारण करती है। |
फिल्म 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झांसी' के जरिये बॉलीवुड दुनिया में कदम रखने जा रही छोटे परदे की खूबसूरत अदाकारा अंकिता लोखंडे इन दिनों अपनी तस्वीरों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है. हाल ही में अंकिता ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की है जो सोशल मीडिया पर बड़ी ही तेजी से वायरल हो रही है. इन तस्वीरों में अंकिता साड़ी पहने हुई नजर आ रही है जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही है.
हालांकि ये पहली बार नहीं है वह इससे पहले भी कईं बार इंस्टाग्राम पर भी अपने इस लाजवाब देसी रूप में स्टाइलिश तस्वीरें शेयर कर चुकी हैं. बताया जा रहा है कि फिल्म 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झांसी' में अंकिता एक अहम भूमिका में नजर आएगी. वहीं फिल्म में मुख्य भूमिका में अभिनेत्री कंगना रनौत दिखाई देंगी.
गौरतलब है कि अंकिता टीवी दुनिया की एक जानी-मानी अदाकारा है जिन्होंने टीवी के कई शोज में काम किया है. उन्हें सबसे ज्यादा पहचान चर्चित शो 'पवित्र रिश्ता' से मिली जिसमें उनके साथ मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत नजर आये थे. इस दौरान इन दोनों के अफेयर के चर्चे काफी रहे थे. हालांकि अब ये दोनों एक दूसरे से अलग हो गए है. अब देखना ये है कि खुद को छोटे परदे पर एक सफल अभिनेत्री के तौर स्थापित कर चुकी अभिनेत्री अंकिता बड़े परदे पर क्या कमाल करती है.
| फिल्म 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झांसी' के जरिये बॉलीवुड दुनिया में कदम रखने जा रही छोटे परदे की खूबसूरत अदाकारा अंकिता लोखंडे इन दिनों अपनी तस्वीरों को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है. हाल ही में अंकिता ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की है जो सोशल मीडिया पर बड़ी ही तेजी से वायरल हो रही है. इन तस्वीरों में अंकिता साड़ी पहने हुई नजर आ रही है जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही है. हालांकि ये पहली बार नहीं है वह इससे पहले भी कईं बार इंस्टाग्राम पर भी अपने इस लाजवाब देसी रूप में स्टाइलिश तस्वीरें शेयर कर चुकी हैं. बताया जा रहा है कि फिल्म 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झांसी' में अंकिता एक अहम भूमिका में नजर आएगी. वहीं फिल्म में मुख्य भूमिका में अभिनेत्री कंगना रनौत दिखाई देंगी. गौरतलब है कि अंकिता टीवी दुनिया की एक जानी-मानी अदाकारा है जिन्होंने टीवी के कई शोज में काम किया है. उन्हें सबसे ज्यादा पहचान चर्चित शो 'पवित्र रिश्ता' से मिली जिसमें उनके साथ मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत नजर आये थे. इस दौरान इन दोनों के अफेयर के चर्चे काफी रहे थे. हालांकि अब ये दोनों एक दूसरे से अलग हो गए है. अब देखना ये है कि खुद को छोटे परदे पर एक सफल अभिनेत्री के तौर स्थापित कर चुकी अभिनेत्री अंकिता बड़े परदे पर क्या कमाल करती है. |
कषायोपयोग अल्पबहुत्व-निरूपण
संखेज्जा । १३९. जम्हि मायोवजोगा संखेज्जा तम्हि कोहोवजोगा माणोवजोगा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा । १४०. लोमोवजोगा णियमा संखेज्जा । १४१. जत्थ लोभोवजोगा संखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा माणोवजोगा मायोवजोगा भजियव्वा । १४२. जत्थ णिरयभवग्गहणे कोह।वजोगा असंखेज्जा. तत्थ सेसा सिया संखेज्जा, सिया असंखेज्जा । १४३. जत्थ माणोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा णियमा असंखेज्जा । १४४. सेसा भजियव्वा । १४५. जत्थ मायोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा माणोवजोगा णियमा असंखेज्जा । १४६. लोभोवजोगा भजियव्वा । १४७. जत्थ लोहोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोह-माण-मायोवजोगा णियमा असंखेज्जा ।
भवमें क्रोधकपायके उपयोग-बार और मानकपायके उपयोगवार संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं ॥१३८-१३९
विशेषार्थ - इसका कारण यह है कि मायाकपायके उपयोग-बार उत्कृष्ट संख्यात प्रमाण होनेपर तो क्रोध और मानकपायके उपयोग-वार असंख्यात ही पाये जायेंगे । किन्तु उससे संख्यात गुणित-हीन मायाके उपयोग-वार होनेपर क्रोध और मानके उपयोग-वार संख्यात ही पाये जाते हैं ।
चूर्णिसू०-नरकगतिके जिस भवग्रहण में मायाकपायके उपयोग-वार संख्यात होते हैं, उस भवमें लोभकपायके उपयोग-वार नियमसे संख्यात ही होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में लोभकषायके उपयोग-वार संख्यात होते हैं, उस भव में क्रोधके उपयोग-वार, मानके उपयोगके वार और मायाके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं । नारकीके जिस भवग्रहण में क्रोधकपायके उपयोग-वार असंख्यात होते है, उस भवमें शेष कषायों के उपयोग-वार संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मानकषायके उपयोग वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोधकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मानकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें शेष अर्थात् माया और लोभकपायके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मायाकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोधकषाय के उपयोग-वार और मानकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहणमें मायाकषायके उपयोगवार असंख्यात होते हैं, उस भवमें लोभकषायके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी। नारकीके जिस भवग्रहण में लोभकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोध, मान और मायाकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं ॥१४२-१४७॥ | कषायोपयोग अल्पबहुत्व-निरूपण संखेज्जा । एक सौ उनतालीस. जम्हि मायोवजोगा संखेज्जा तम्हि कोहोवजोगा माणोवजोगा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा । एक सौ चालीस. लोमोवजोगा णियमा संखेज्जा । एक सौ इकतालीस. जत्थ लोभोवजोगा संखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा माणोवजोगा मायोवजोगा भजियव्वा । एक सौ बयालीस. जत्थ णिरयभवग्गहणे कोह।वजोगा असंखेज्जा. तत्थ सेसा सिया संखेज्जा, सिया असंखेज्जा । एक सौ तैंतालीस. जत्थ माणोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा णियमा असंखेज्जा । एक सौ चौंतालीस. सेसा भजियव्वा । एक सौ पैंतालीस. जत्थ मायोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोहोवजोगा माणोवजोगा णियमा असंखेज्जा । एक सौ छियालीस. लोभोवजोगा भजियव्वा । एक सौ सैंतालीस. जत्थ लोहोवजोगा असंखेज्जा तत्थ कोह-माण-मायोवजोगा णियमा असंखेज्जा । भवमें क्रोधकपायके उपयोग-बार और मानकपायके उपयोगवार संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं ॥एक सौ अड़तीस-एक सौ उनतालीस विशेषार्थ - इसका कारण यह है कि मायाकपायके उपयोग-बार उत्कृष्ट संख्यात प्रमाण होनेपर तो क्रोध और मानकपायके उपयोग-वार असंख्यात ही पाये जायेंगे । किन्तु उससे संख्यात गुणित-हीन मायाके उपयोग-वार होनेपर क्रोध और मानके उपयोग-वार संख्यात ही पाये जाते हैं । चूर्णिसूशून्य-नरकगतिके जिस भवग्रहण में मायाकपायके उपयोग-वार संख्यात होते हैं, उस भवमें लोभकपायके उपयोग-वार नियमसे संख्यात ही होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में लोभकषायके उपयोग-वार संख्यात होते हैं, उस भव में क्रोधके उपयोग-वार, मानके उपयोगके वार और मायाके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं । नारकीके जिस भवग्रहण में क्रोधकपायके उपयोग-वार असंख्यात होते है, उस भवमें शेष कषायों के उपयोग-वार संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मानकषायके उपयोग वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोधकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मानकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें शेष अर्थात् माया और लोभकपायके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहण में मायाकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोधकषाय के उपयोग-वार और मानकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं। नारकीके जिस भवग्रहणमें मायाकषायके उपयोगवार असंख्यात होते हैं, उस भवमें लोभकषायके उपयोग-वार भाज्य हैं, अर्थात् संख्यात भी होते हैं और असंख्यात भी। नारकीके जिस भवग्रहण में लोभकषायके उपयोग-वार असंख्यात होते हैं, उस भवमें क्रोध, मान और मायाकषायके उपयोग-वार नियमसे असंख्यात होते हैं ॥एक सौ बयालीस-एक सौ सैंतालीस॥ |
घंटों बंद कमरे में अंगीठी के आगे बैठने से स्किन पर भी गहरा असर होता है। असल में, इस तरह आंच के आगे रहने से स्किन में मौजूद नमी सूखने लगती है। ऐसे में रूखापन बढ़ने से स्किन फटने का भी सामना करना पड़ सकता है।
अंगीठी से निकलने वाला धुआं आंखों पर पड़ने से इसे नुकसान पहुंचाने का काम करता है। इससे आंखों में जलन, खुजली व सूखापन बढ़ने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि आंखों को सुरक्षित रखने के लिए अंगीठी से दूरी बनाकर बैठे।
अक्सर लोग लकड़ी या कोयले से अंगीठी जलाकर कमरा बंद कर देते हैं। मगर इससे रूम में से ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है। ऐसे में सांस से जुड़ी दिक्कतें आने लगती है। इसके अलावा कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है। इसका सीधा असर मनुष्य के दिमाग पर पड़ता है। यह व्यक्ति के बेहोश होने का भी कारण बनता है।
अंगीठी को जलाकर कमरा बंद करने से इसमें से कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती है। यह गैस सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचने के बाद खून में मिल जाती है। इसके कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने लगता है। ऐसे में खून की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
- अंगीठी जलाकर कमरा बंद रखने की गलती ना करें। इससे कमरे में इसका धुआं बढ़ने से ऑक्सीडन की कमी हो सकती है। ऐसे में सांस संबंधित दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है।
- अंगीठी में लकड़ी या कोयला का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में उसे जलाने पर हानिकारक कण बाहर आते हैं। यह कण हमारे शरीर पर बुरा असर डालने का काम करते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसे जलाने पर सही मात्रा में दूरी बनाएं रखने की जरूरत है।
- छोटे बच्चों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है। ऐसे में अंगीठी जलाने पर उनकी स्किन खराब हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि इसे जलाने पर बच्चों को खास दूरी पर रखें। साथ ही ज्यादा समय तक अंगीठी के पास ना बैठाएं।
- अंगीठी के अलावा जो लोग ब्लोअर या हीटर इस्तेमाल करते हैं। उन्हें भी इसका इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है। इसके लिए इसे कमरा गर्म होने तक जलाएं। बाद में इन चीजों को बंद कर दें।
| घंटों बंद कमरे में अंगीठी के आगे बैठने से स्किन पर भी गहरा असर होता है। असल में, इस तरह आंच के आगे रहने से स्किन में मौजूद नमी सूखने लगती है। ऐसे में रूखापन बढ़ने से स्किन फटने का भी सामना करना पड़ सकता है। अंगीठी से निकलने वाला धुआं आंखों पर पड़ने से इसे नुकसान पहुंचाने का काम करता है। इससे आंखों में जलन, खुजली व सूखापन बढ़ने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि आंखों को सुरक्षित रखने के लिए अंगीठी से दूरी बनाकर बैठे। अक्सर लोग लकड़ी या कोयले से अंगीठी जलाकर कमरा बंद कर देते हैं। मगर इससे रूम में से ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है। ऐसे में सांस से जुड़ी दिक्कतें आने लगती है। इसके अलावा कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है। इसका सीधा असर मनुष्य के दिमाग पर पड़ता है। यह व्यक्ति के बेहोश होने का भी कारण बनता है। अंगीठी को जलाकर कमरा बंद करने से इसमें से कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती है। यह गैस सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचने के बाद खून में मिल जाती है। इसके कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने लगता है। ऐसे में खून की कमी का सामना करना पड़ सकता है। - अंगीठी जलाकर कमरा बंद रखने की गलती ना करें। इससे कमरे में इसका धुआं बढ़ने से ऑक्सीडन की कमी हो सकती है। ऐसे में सांस संबंधित दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है। - अंगीठी में लकड़ी या कोयला का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में उसे जलाने पर हानिकारक कण बाहर आते हैं। यह कण हमारे शरीर पर बुरा असर डालने का काम करते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसे जलाने पर सही मात्रा में दूरी बनाएं रखने की जरूरत है। - छोटे बच्चों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है। ऐसे में अंगीठी जलाने पर उनकी स्किन खराब हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि इसे जलाने पर बच्चों को खास दूरी पर रखें। साथ ही ज्यादा समय तक अंगीठी के पास ना बैठाएं। - अंगीठी के अलावा जो लोग ब्लोअर या हीटर इस्तेमाल करते हैं। उन्हें भी इसका इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है। इसके लिए इसे कमरा गर्म होने तक जलाएं। बाद में इन चीजों को बंद कर दें। |
जयपुर, 13 नवंबर राजस्थान विधानसभा में रविवार को बाल सत्र का आयोजन बाल दिवस पर किया जा रहा है जिसमें भाग लेने वाले बच्चे विधायक से लेकर अध्यक्ष और मुख्यमंत्री की भूमिका निभाएंगे।
विधानसभाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार राजस्थान विधानसभा में बाल सत्र का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा में होने वाला यह ऐतिहासिक सत्र सदीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेगा और लोकतंत्र को लेकर बच्चों के मन की जिज्ञासाओं को भी हम सभी समझ सकेंगे।
डॉ. जोशी के अनुसार यह बाल सत्र सरकार और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर बच्चों की समझ को बढ़ाने में भी सहायता करेगा।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती के अवसर पर 14 नवंबर बाल दिवस को राजस्थान विधानसभा में पहली बार बाल सत्र का आयोजन किया जाएगा। सत्र के मुख्य अतिथि लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला होंगे। सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्री गण और विधायकगण भी सम्मिलित होंगे। इस बाल सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल का आयोजन होगा। बालसत्र के लिए पन्द्रह राज्यों के पाँच हजार पॉंच सौ बच्चों ने आनलाइन आवेदन किया था। इसमें से दो सौ बच्चों का चयन किया गया है।
राजस्थान विधान सभा में देश की भावी पीढी सदन में बैठकर जनता से जुड़े मुददों पर बहस करेगी। विधायक की भूमिका में बच्चें मंत्रियों से प्रश्न कर जवाब मागेंगे और शून्य काल में अपनी बात भी रखेंगे। राजस्थान विधानसभा देश की ऐसी प्रथम विधानसभा होगी जहां बाल सत्र का आयोजन होगा। इस सत्र में बच्चों दारा विधानसभा सत्र का संचालन किया जायेगा। बच्चे ही विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभायेंगे।
राष्ट्रमण्ड्ल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा के तत्वाधान में विधानसभा में बाल सत्र का संचालन होगा। अध्यक्ष डॉ. जोशी ने कहा कि भावी पीढी को सदन चलाने, प्रश्न पूछने और अनुशासन के साथ अपनी बात रखने का मौका दिया गया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| जयपुर, तेरह नवंबर राजस्थान विधानसभा में रविवार को बाल सत्र का आयोजन बाल दिवस पर किया जा रहा है जिसमें भाग लेने वाले बच्चे विधायक से लेकर अध्यक्ष और मुख्यमंत्री की भूमिका निभाएंगे। विधानसभाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार राजस्थान विधानसभा में बाल सत्र का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चौदह नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा में होने वाला यह ऐतिहासिक सत्र सदीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेगा और लोकतंत्र को लेकर बच्चों के मन की जिज्ञासाओं को भी हम सभी समझ सकेंगे। डॉ. जोशी के अनुसार यह बाल सत्र सरकार और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर बच्चों की समझ को बढ़ाने में भी सहायता करेगा। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती के अवसर पर चौदह नवंबर बाल दिवस को राजस्थान विधानसभा में पहली बार बाल सत्र का आयोजन किया जाएगा। सत्र के मुख्य अतिथि लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला होंगे। सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्री गण और विधायकगण भी सम्मिलित होंगे। इस बाल सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल का आयोजन होगा। बालसत्र के लिए पन्द्रह राज्यों के पाँच हजार पॉंच सौ बच्चों ने आनलाइन आवेदन किया था। इसमें से दो सौ बच्चों का चयन किया गया है। राजस्थान विधान सभा में देश की भावी पीढी सदन में बैठकर जनता से जुड़े मुददों पर बहस करेगी। विधायक की भूमिका में बच्चें मंत्रियों से प्रश्न कर जवाब मागेंगे और शून्य काल में अपनी बात भी रखेंगे। राजस्थान विधानसभा देश की ऐसी प्रथम विधानसभा होगी जहां बाल सत्र का आयोजन होगा। इस सत्र में बच्चों दारा विधानसभा सत्र का संचालन किया जायेगा। बच्चे ही विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभायेंगे। राष्ट्रमण्ड्ल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा के तत्वाधान में विधानसभा में बाल सत्र का संचालन होगा। अध्यक्ष डॉ. जोशी ने कहा कि भावी पीढी को सदन चलाने, प्रश्न पूछने और अनुशासन के साथ अपनी बात रखने का मौका दिया गया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
आजकल सेक्स लाइफ को स्पाइसी बनाने के लिए लोग सेक्स टॉयज तक का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इससे भी उन्हें खास फायदा नहीं होता है। यदि आप अपनी सेक्स लाइफ को तड़का देना चाहते हैं तो आपको उसके लिए कई इधर-उधर जानें की जरूरत नहीं बल्कि आपको कुछ नई पोजीशन ट्राई करनी होगी।
पसंद है ये सैक्स पोसिशन्सः
काउगर्ल रिवर्सः इस पोजीशन में दोनों पार्टनर एंज्वॉय करते हैं। हां इस पोजीशन में काउगर्ल पोजीशन की तरह दोनों पार्टनर्स का चेहरा एक-दूसरे की तरफ ना होकर एक-दूसरे के विपरीत होता है और महिला की पीठ पुरुष के चेहरे की तरफ होती है। इस पोजीशन में पुरुष पीठ के बल लेट जाता है और महिला ठीक पुरुष के ऊपर होती है। महिला का चेहरा पुरुष के पैरों की ओर होता है।
हिच सेक्स पोजीशनः इस पोजीशन में पुरुष डॉग स्टाइल में बैठते हैं और दूसरी तरफ महिला बेड के बल लेटकर अपने पैर ऊपर की और करती है। पुरुष को इस पोजीशन में बहुत धीरे और बैलेंस के साथ इंटरकोर्स करना होता है। महिलाएं इस पोजीशन को बहुत एंज्वॉय करती हैं।
डोगी पोजीशनः इस पोजीशन में महिलाएं डॉग की तरह बैठती हैं और उनका चेहरा आगे की ओर होता है। इस पोजीशन को भी महिलाएं बहुत एंज्वॉय करती हैं और पुरुषों के लिए इंटरकोर्स करना आसान होता है लेकिन इस पोजीशन में महिलाओं को फार्ट (पाद) मारने की पूरी आशंका रहती है।
| आजकल सेक्स लाइफ को स्पाइसी बनाने के लिए लोग सेक्स टॉयज तक का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इससे भी उन्हें खास फायदा नहीं होता है। यदि आप अपनी सेक्स लाइफ को तड़का देना चाहते हैं तो आपको उसके लिए कई इधर-उधर जानें की जरूरत नहीं बल्कि आपको कुछ नई पोजीशन ट्राई करनी होगी। पसंद है ये सैक्स पोसिशन्सः काउगर्ल रिवर्सः इस पोजीशन में दोनों पार्टनर एंज्वॉय करते हैं। हां इस पोजीशन में काउगर्ल पोजीशन की तरह दोनों पार्टनर्स का चेहरा एक-दूसरे की तरफ ना होकर एक-दूसरे के विपरीत होता है और महिला की पीठ पुरुष के चेहरे की तरफ होती है। इस पोजीशन में पुरुष पीठ के बल लेट जाता है और महिला ठीक पुरुष के ऊपर होती है। महिला का चेहरा पुरुष के पैरों की ओर होता है। हिच सेक्स पोजीशनः इस पोजीशन में पुरुष डॉग स्टाइल में बैठते हैं और दूसरी तरफ महिला बेड के बल लेटकर अपने पैर ऊपर की और करती है। पुरुष को इस पोजीशन में बहुत धीरे और बैलेंस के साथ इंटरकोर्स करना होता है। महिलाएं इस पोजीशन को बहुत एंज्वॉय करती हैं। डोगी पोजीशनः इस पोजीशन में महिलाएं डॉग की तरह बैठती हैं और उनका चेहरा आगे की ओर होता है। इस पोजीशन को भी महिलाएं बहुत एंज्वॉय करती हैं और पुरुषों के लिए इंटरकोर्स करना आसान होता है लेकिन इस पोजीशन में महिलाओं को फार्ट मारने की पूरी आशंका रहती है। |
जीवनशैली : कद्दू बहुत पौष्टिक होता है और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। कद्दू विटामिन डी, विटामिन ए और बीटा कैरोटिन का बहुत अच्छा स्रोत है। इसके अलावा कद्दू में कॉपर, आयरन और फास्फोरस होते हैं। साथ ही इसमें विटामिन बी1, बी2, बी6, सी, ई और बीटा केरोटिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।
| जीवनशैली : कद्दू बहुत पौष्टिक होता है और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। कद्दू विटामिन डी, विटामिन ए और बीटा कैरोटिन का बहुत अच्छा स्रोत है। इसके अलावा कद्दू में कॉपर, आयरन और फास्फोरस होते हैं। साथ ही इसमें विटामिन बीएक, बीदो, बीछः, सी, ई और बीटा केरोटिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। |
Oral Answers
one person at a time and I cannot bear all the persons.
SHRI VAYALAR RAVI: I will give you one example. The other day, I put a simple question via, how many agents are there for STC and they said that they are collecting the information. How can they say like that?
MR. SPEAKER: That is a different matter.
PROF. P. G. MAVALANKAR: You are right when you said that the answers come to you only the previous day. But my only point is....
MR. SPEAKER: Please come and discuss the matter with me in the Chamber. I am at your service. What is the point in doing like this ? Question Hour is a very important hour.
श्री हुकम चन्य कछवाय : अध्यक्ष महोदय, इस सवाल का नोटिस 21 दिन पहले दिया गया है } 21 दिन का समय इसीलिए रखा गया है और 21 दिन के बाद भी अगर जानकारी नहीं मिलती है तो बड़े आश्चर्य की बात है.
अध्यक्ष महोदय : आप भी चैम्बर में या कर बात कर लीजिए ।
श्री राज नारायण : श्रीमन् मैं एक निवेदन करना चाहता हूं। सदन के सम्मानित सदस्य जरा कृपा कर के क्वेश्चयन पढ़ें तब जो रूल मावलंकर जी ने पढ़ा है उस को ध्यान में लाएं । वह रूल हम ने भी पड़ा है, कई बार उसे हम कोट कर चुके हैं, मुसीबत है कि अब नहीं कर पाते हैं। क्वेश्चन क्या है यह देखें-MR. SPEAKER: If you are not ready, I will hold ever the question. SHRI RAJ NARAIN: and fully ready.
क्वेश्चन यह है कि"क्या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि मार्च सन
Oral Anaspers
1978 के अन्त तक ऐसे कितने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र थे जिन में डाक्टर नहीं थे ?"
मार्च 1978 तक सवाल में पूछा गया है, 77 नहीं पूछा गया है । अगर सदन 77 तक जानना चाहता है तो वह मैं बता सकता हूं । 77 तक की सूचना मेरे पास भाई है । 78 के मार्च तक की नहीं भाई हैं। मगर 77 तक सम्मानित सदस्य पूछेंगे तो मैं बता दूंगा ।
एक माननीय सदस्य : बता दीजिए ।
श्री राज नारायण : हां, तो ले लें । (व्यवधान)
Just hear me. Don't make noise. I heard you: Now you should hear me.
देखिए, 31 मार्च, सन् 77 तक बिना डाक्टर वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र थे 49 ।
MR. SPEAKER: This question is very difficult to answer because it is about the end of March 1978. That question need not be gone into now. We shall go to Question No. 809. (Interruptions). am holding cver that question because it is about March 1978 and information cannot be collect.. ed.
Cataract Operations
*809. SHRI D. B. CHANDRE GOwDA : Will the Minister of HEALTH AND FAMILY WELFARE be pleas ed to state:
(a) whether it is possible to cure all cataract patients in India if the services of about 3,500 eye surgeons are properly utilised;
(b) whether Government would like to strengthen facilities in eye camps and set up camps throughout the country particularly in villages, as cataract survey does not take much time and one surgeon with proper facilities can perform 100 operations a day; and
(c) if so, the steps Government have taken in this regard?
Oral Answers. CHAITRA 30, 1900 (SAKA)" Oral Answers
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री (भी राज नारायण) : (क) जी हां, सैद्धान्तिक रूप में तो किया जा सकता है किन्तु वित्तीय और भौतिक कठिनाइयों के कारण व्यावहारिक रूप से ऐसा करना सम्भव नहीं हो सकता हैं 1
(ख) मीर (ग). सरकार ने देश भर में नेत्र शिविर बोलने सम्बन्धी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए पहले ही उपाय कर लिए हैं। इस सम्बन्ध में एक विवरण सभा पटल पर रख दिया गया हैं । यद्यपि, एक सर्जन के लिए एक दिन में 100 प्रापरेशन करना सम्भव हो भी सकता है किन्तु यदि उन्हें विज्ञानसम्मत तरीके से किया जाए तो उसे एक दिन में 30-40 ग्रापरेशनों से अधिक करना वांछनीय नहीं है ।
सरकार ने एक "राष्ट्रीय दृष्टि विकार निवारण एवं अंधता नियंत्रण कार्यक्रम प्रारम्भ किया है जिसके अन्तर्गत 5 वर्ष की अवधि के अन्दर 80 गश्ती यूनिटें खोली जानी हैं। उनमें से 15 यूनिट पहले ही खोल दी गयी है और 15 यूनिटें 1978-79 में खोली जाएंगी। शेष 50 यूनिटें 1982 तक खील दी जाएंगी। प्रत्येक गश्ती यूनिट 5.5 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों को सेवाएं प्रदान करेगी । इस प्रकार 80 गश्ती यूनिटें सम्पूर्ण देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान कर सकेंगी । इन गश्ती यूनिटों का उपयोग चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में विशेषकर नेत्र शिवरों में मोतियाबिन्द और ग्लोकोमा का आपरेशन करने में किया जाएगा ।
इन गश्ती यूनिटों के अतिरिक्त सरकार नेत्र शिविरों का प्रायोजन करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को वित्तीय सहायता दे रही है । इसके अलावा विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय एजेन्सियां केवल नेत्र शिविरों को पायोजित करने में ही नहीं लगी हुई हैं बल्कि वे उन स्वेच्छिक संगठनों को भी वित्तीय
सहायता दे रहीं हैं जो नेव शिविरों के लगाने में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं ।
लोगों को तेंव उपचार की विस्तृत सामुदायिक सेवाएं प्रदान करने के लिए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत प्राइमरी हैल्थ सेंटरों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कालेजों को की सुदृढ़ किया जा रहा है ।
SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Sir, in.vlew of the recent conference of World Health Organisation on restoration of sight to the curable blind, this cataract is placed on the list of curable blind. This is one of the major causes for blindness in India which, of course, the hon. Minister ought not to have taken so lightly to say that it is only in theory. In fact, it is being put into practice in India by voluntary organisations to which I come later. I would like to know from the hon. Minister whether this cataract
is placed as curable blind. If so, the
reasons for this, and also what steps the Minister is going to tako to involve voluntary organisations and in what manner voluntary organisations being financed by the Government of India.
श्री राज नारायण : श्रीमन, अपने देश में जितनी वालन्ट्री-प्रार्गेनिजेशेन्ज हैं, शायद ही कोई ऐसी हो जो मेरी दृष्टि में न पहुंची हो और जो सम्मानित सदस्य की दृष्टि में पहुंच गई हो, जिस को सरकार सहायता न देती हो । सरकार सभी स्वयंसेवी संगठनों को सहायता देती है । यदि, प्रध्यक्ष महोदय, अनुमति दें तो मैं पूरा विवरण सदन के सम्मानित सदस्यों के सामने पढ़ कर सुना सकता हूं ।
SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Sir, may I know from the hon. Minister whether he is aware of voluntary organisations run by an eminent personality and internationally famous person like Dr. Modi, who is not only doing operations, but also conducting camps. The hon. Minister in his reply says that it is not advisable for a doctor to perform more than 30 to 40 operations in a day. Does the hon.
Oral Annors
Minister know that in Dr. Modi's camp, an average of 100 operations are per formed by a single man?
MR. SPEAKER: Exceptions prove the rule.
SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Yes, that is the reason why I am bringing it to the notice of the Minister. If one single individual can take up cataract operations internationally also, why can't the 350 eye doctors who are available under the Central Government service take up this issue, and in what way he has failed to recognise this voluntary assistance of Dr. Modi, and what financial assistance he is going to give for the betterment of the nation in so far as the cataract problem is concerned?
श्री राज नारायण : श्रीमन् मैं अपने सम्मानित सदस्य को यह प्राश्वासन दे देना चाहता हूं कि सरकार डा० मोदी को जो भी सहायता से मागेंगें, देने के लिए तैयार है । अभी तक पोजीशन यह है कि जिस संगठन से वे सम्बन्धित हैं, उस से उन को पैसा मिलता है और मोबाइल वैन भी मिली हुई है जोकि एअर कंडिशन्ड है और अनेक प्रकार की दूसरी सुविधाएं उन को मिलती हैं जिस से भारत सरकार से कोई सहायता लेने की उन्हें प्रावश्यकता नहीं पड़ी मगर भारत सरकार, प्रगर उन को आवश्यकता प्रतीत होगी, सर्वदा हाथ जोड़ कर सहायता देने के लिए खड़ी रहेगी ।
मैं माननीय सदस्य को यह जानकारी भी दे कि हमारे राज्य मंत्री उन के केन्द्र पर गये थे और उन को कह भी भाए हैं कि अगर उन्हें किसी भी प्रकार की कमी महसूस हो, तो वे भारत सरकार को लिखे और हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय उनकी सहायता करने के लिए बराबर खड़ा रहेगा ।
-Oral Ans
हम को यहां तक जानकारी मिली है कि डा० मोदी कभी कभी 400, 500 और यहां तक कि 1000 मापरेशन्स एक दिन में करते हैं और उस तक में चले जाते हैं।
बसन्स साडे : एक दिन में ?
श्री राज नारायण : एक दिन में ऐसी खबर हम को मिली है ।
एक दूसरी बात मैं और बता दूं और वह यह है कि हमारे सम्मानित सदस्य ने जो डा० मोदी के आपरेशन्स के फोगर्स यहां दिये है, वे उन के महत्व को कम करते हैं।
में भाप को यह भी बता दूं कि इस बारे हम ने डा० राजेन्द्र प्रसाद सेन्टर फार प्रोपीलमिक साइसेंज के डा० एल० पी० प्रग्रवाल से बात की है कि डा० मोदी किस तरीके से आपरेशन करते हैं क्योंकि एक दिन में वे इतनं सारे आपरेशन कर लेते हैं। उस तरीके का वे पता लगाएं क्योंकि समय का जो एक्सेप्शन इस मामले में है, उस से अगर काम बन सकता है तो वह तरीका अपनाया जाए । हमारा जो स्वास्थ्य मंत्रालय है, वह नेत्र रोग हो या कुष्ठ रोग हो या किसी भी प्रकार का रोग हो, उस के निवारण के लिए वह कोई कोताही नहीं करेगा ।
श्री राम कबार बेरवा : मोतियाबिन्द 50 साल की उम्र वाले जो लोग हैं उन्हें विशेषकर होता है । इसलिए मैं मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि इसके इलाज के लिए मापने कोई और ऐसा उपाय निकाला है जैसे कि चेचक के लिए चेचक का टीका निकाला है और उस के लगाने के बाद वह नहीं होता, तो क्या इस के लिए कोई आप ने ऐसी योजना बनाई हैं जिस के लागू करने से यह न हो सके
ओ राज नारायण : मैंने इसीलिए पहले ही निवेदन किया था कि अभी जो एक सम्मेलन बुलाया गया था और जिस की यहां पर बैठकें हुई थीं, उस का पूरा का पूरा मेमोरेण्डम मेरे पास है और भाप यदि मुझे प्राशा दें, तो मैं उस को पढ़ दूं क्योंकि हमारे सम्मानित सदस्य बार बार हम से पूछते हैं कि यह मेल
| Oral Answers one person at a time and I cannot bear all the persons. SHRI VAYALAR RAVI: I will give you one example. The other day, I put a simple question via, how many agents are there for STC and they said that they are collecting the information. How can they say like that? MR. SPEAKER: That is a different matter. PROF. P. G. MAVALANKAR: You are right when you said that the answers come to you only the previous day. But my only point is.... MR. SPEAKER: Please come and discuss the matter with me in the Chamber. I am at your service. What is the point in doing like this ? Question Hour is a very important hour. श्री हुकम चन्य कछवाय : अध्यक्ष महोदय, इस सवाल का नोटिस इक्कीस दिन पहले दिया गया है } इक्कीस दिन का समय इसीलिए रखा गया है और इक्कीस दिन के बाद भी अगर जानकारी नहीं मिलती है तो बड़े आश्चर्य की बात है. अध्यक्ष महोदय : आप भी चैम्बर में या कर बात कर लीजिए । श्री राज नारायण : श्रीमन् मैं एक निवेदन करना चाहता हूं। सदन के सम्मानित सदस्य जरा कृपा कर के क्वेश्चयन पढ़ें तब जो रूल मावलंकर जी ने पढ़ा है उस को ध्यान में लाएं । वह रूल हम ने भी पड़ा है, कई बार उसे हम कोट कर चुके हैं, मुसीबत है कि अब नहीं कर पाते हैं। क्वेश्चन क्या है यह देखें-MR. SPEAKER: If you are not ready, I will hold ever the question. SHRI RAJ NARAIN: and fully ready. क्वेश्चन यह है कि"क्या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि मार्च सन Oral Anaspers एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर के अन्त तक ऐसे कितने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र थे जिन में डाक्टर नहीं थे ?" मार्च एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर तक सवाल में पूछा गया है, सतहत्तर नहीं पूछा गया है । अगर सदन सतहत्तर तक जानना चाहता है तो वह मैं बता सकता हूं । सतहत्तर तक की सूचना मेरे पास भाई है । अठहत्तर के मार्च तक की नहीं भाई हैं। मगर सतहत्तर तक सम्मानित सदस्य पूछेंगे तो मैं बता दूंगा । एक माननीय सदस्य : बता दीजिए । श्री राज नारायण : हां, तो ले लें । Just hear me. Don't make noise. I heard you: Now you should hear me. देखिए, इकतीस मार्च, सन् सतहत्तर तक बिना डाक्टर वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र थे उनचास । MR. SPEAKER: This question is very difficult to answer because it is about the end of March एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर. That question need not be gone into now. We shall go to Question No. आठ सौ नौ. . am holding cver that question because it is about March एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर and information cannot be collect.. ed. Cataract Operations *आठ सौ नौ. SHRI D. B. CHANDRE GOwDA : Will the Minister of HEALTH AND FAMILY WELFARE be pleas ed to state: whether it is possible to cure all cataract patients in India if the services of about तीन,पाँच सौ eye surgeons are properly utilised; whether Government would like to strengthen facilities in eye camps and set up camps throughout the country particularly in villages, as cataract survey does not take much time and one surgeon with proper facilities can perform एक सौ operations a day; and if so, the steps Government have taken in this regard? Oral Answers. CHAITRA तीस, एक हज़ार नौ सौ " Oral Answers स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री : जी हां, सैद्धान्तिक रूप में तो किया जा सकता है किन्तु वित्तीय और भौतिक कठिनाइयों के कारण व्यावहारिक रूप से ऐसा करना सम्भव नहीं हो सकता हैं एक मीर . सरकार ने देश भर में नेत्र शिविर बोलने सम्बन्धी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए पहले ही उपाय कर लिए हैं। इस सम्बन्ध में एक विवरण सभा पटल पर रख दिया गया हैं । यद्यपि, एक सर्जन के लिए एक दिन में एक सौ प्रापरेशन करना सम्भव हो भी सकता है किन्तु यदि उन्हें विज्ञानसम्मत तरीके से किया जाए तो उसे एक दिन में तीस-चालीस ग्रापरेशनों से अधिक करना वांछनीय नहीं है । सरकार ने एक "राष्ट्रीय दृष्टि विकार निवारण एवं अंधता नियंत्रण कार्यक्रम प्रारम्भ किया है जिसके अन्तर्गत पाँच वर्ष की अवधि के अन्दर अस्सी गश्ती यूनिटें खोली जानी हैं। उनमें से पंद्रह यूनिट पहले ही खोल दी गयी है और पंद्रह यूनिटें एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर-उन्यासी में खोली जाएंगी। शेष पचास यूनिटें एक हज़ार नौ सौ बयासी तक खील दी जाएंगी। प्रत्येक गश्ती यूनिट पाँच.पाँच जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों को सेवाएं प्रदान करेगी । इस प्रकार अस्सी गश्ती यूनिटें सम्पूर्ण देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान कर सकेंगी । इन गश्ती यूनिटों का उपयोग चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में विशेषकर नेत्र शिवरों में मोतियाबिन्द और ग्लोकोमा का आपरेशन करने में किया जाएगा । इन गश्ती यूनिटों के अतिरिक्त सरकार नेत्र शिविरों का प्रायोजन करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को वित्तीय सहायता दे रही है । इसके अलावा विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय एजेन्सियां केवल नेत्र शिविरों को पायोजित करने में ही नहीं लगी हुई हैं बल्कि वे उन स्वेच्छिक संगठनों को भी वित्तीय सहायता दे रहीं हैं जो नेव शिविरों के लगाने में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं । लोगों को तेंव उपचार की विस्तृत सामुदायिक सेवाएं प्रदान करने के लिए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत प्राइमरी हैल्थ सेंटरों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कालेजों को की सुदृढ़ किया जा रहा है । SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Sir, in.vlew of the recent conference of World Health Organisation on restoration of sight to the curable blind, this cataract is placed on the list of curable blind. This is one of the major causes for blindness in India which, of course, the hon. Minister ought not to have taken so lightly to say that it is only in theory. In fact, it is being put into practice in India by voluntary organisations to which I come later. I would like to know from the hon. Minister whether this cataract is placed as curable blind. If so, the reasons for this, and also what steps the Minister is going to tako to involve voluntary organisations and in what manner voluntary organisations being financed by the Government of India. श्री राज नारायण : श्रीमन, अपने देश में जितनी वालन्ट्री-प्रार्गेनिजेशेन्ज हैं, शायद ही कोई ऐसी हो जो मेरी दृष्टि में न पहुंची हो और जो सम्मानित सदस्य की दृष्टि में पहुंच गई हो, जिस को सरकार सहायता न देती हो । सरकार सभी स्वयंसेवी संगठनों को सहायता देती है । यदि, प्रध्यक्ष महोदय, अनुमति दें तो मैं पूरा विवरण सदन के सम्मानित सदस्यों के सामने पढ़ कर सुना सकता हूं । SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Sir, may I know from the hon. Minister whether he is aware of voluntary organisations run by an eminent personality and internationally famous person like Dr. Modi, who is not only doing operations, but also conducting camps. The hon. Minister in his reply says that it is not advisable for a doctor to perform more than तीस to चालीस operations in a day. Does the hon. Oral Annors Minister know that in Dr. Modi's camp, an average of एक सौ operations are per formed by a single man? MR. SPEAKER: Exceptions prove the rule. SHRI D. B. CHANDRE GOWDA: Yes, that is the reason why I am bringing it to the notice of the Minister. If one single individual can take up cataract operations internationally also, why can't the तीन सौ पचास eye doctors who are available under the Central Government service take up this issue, and in what way he has failed to recognise this voluntary assistance of Dr. Modi, and what financial assistance he is going to give for the betterment of the nation in so far as the cataract problem is concerned? श्री राज नारायण : श्रीमन् मैं अपने सम्मानित सदस्य को यह प्राश्वासन दे देना चाहता हूं कि सरकार डाशून्य मोदी को जो भी सहायता से मागेंगें, देने के लिए तैयार है । अभी तक पोजीशन यह है कि जिस संगठन से वे सम्बन्धित हैं, उस से उन को पैसा मिलता है और मोबाइल वैन भी मिली हुई है जोकि एअर कंडिशन्ड है और अनेक प्रकार की दूसरी सुविधाएं उन को मिलती हैं जिस से भारत सरकार से कोई सहायता लेने की उन्हें प्रावश्यकता नहीं पड़ी मगर भारत सरकार, प्रगर उन को आवश्यकता प्रतीत होगी, सर्वदा हाथ जोड़ कर सहायता देने के लिए खड़ी रहेगी । मैं माननीय सदस्य को यह जानकारी भी दे कि हमारे राज्य मंत्री उन के केन्द्र पर गये थे और उन को कह भी भाए हैं कि अगर उन्हें किसी भी प्रकार की कमी महसूस हो, तो वे भारत सरकार को लिखे और हमारा स्वास्थ्य मंत्रालय उनकी सहायता करने के लिए बराबर खड़ा रहेगा । -Oral Ans हम को यहां तक जानकारी मिली है कि डाशून्य मोदी कभी कभी चार सौ, पाँच सौ और यहां तक कि एक हज़ार मापरेशन्स एक दिन में करते हैं और उस तक में चले जाते हैं। बसन्स साडे : एक दिन में ? श्री राज नारायण : एक दिन में ऐसी खबर हम को मिली है । एक दूसरी बात मैं और बता दूं और वह यह है कि हमारे सम्मानित सदस्य ने जो डाशून्य मोदी के आपरेशन्स के फोगर्स यहां दिये है, वे उन के महत्व को कम करते हैं। में भाप को यह भी बता दूं कि इस बारे हम ने डाशून्य राजेन्द्र प्रसाद सेन्टर फार प्रोपीलमिक साइसेंज के डाशून्य एलशून्य पीशून्य प्रग्रवाल से बात की है कि डाशून्य मोदी किस तरीके से आपरेशन करते हैं क्योंकि एक दिन में वे इतनं सारे आपरेशन कर लेते हैं। उस तरीके का वे पता लगाएं क्योंकि समय का जो एक्सेप्शन इस मामले में है, उस से अगर काम बन सकता है तो वह तरीका अपनाया जाए । हमारा जो स्वास्थ्य मंत्रालय है, वह नेत्र रोग हो या कुष्ठ रोग हो या किसी भी प्रकार का रोग हो, उस के निवारण के लिए वह कोई कोताही नहीं करेगा । श्री राम कबार बेरवा : मोतियाबिन्द पचास साल की उम्र वाले जो लोग हैं उन्हें विशेषकर होता है । इसलिए मैं मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि इसके इलाज के लिए मापने कोई और ऐसा उपाय निकाला है जैसे कि चेचक के लिए चेचक का टीका निकाला है और उस के लगाने के बाद वह नहीं होता, तो क्या इस के लिए कोई आप ने ऐसी योजना बनाई हैं जिस के लागू करने से यह न हो सके ओ राज नारायण : मैंने इसीलिए पहले ही निवेदन किया था कि अभी जो एक सम्मेलन बुलाया गया था और जिस की यहां पर बैठकें हुई थीं, उस का पूरा का पूरा मेमोरेण्डम मेरे पास है और भाप यदि मुझे प्राशा दें, तो मैं उस को पढ़ दूं क्योंकि हमारे सम्मानित सदस्य बार बार हम से पूछते हैं कि यह मेल |
नई दिल्ली। विश्व क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार राहुल द्रविड़ अब युवा चेहरों को टीम इंडिया के लिए तैयार करेगें। द्रविड़ को भारत ए और अंडर 19 टीम का मुखिया बनाया गया है। द्रविड़ अपने क्रिकेट कैरियर के बहतरीन अनुभव का इस्तेमाल अब इन युवाओं को संवारने के लिए करेंगे।
इस जिम्मेदारी के सौंपे जाने के बाद द्रविड़ ने कहा कि मैं नयी पीढ़ी के साथ काम करने के लिए काफी उत्सुक हूं। भारत ए और अंडर 19 एक अहम पड़ाव हैं जहां चुनौतियों और दबाव को बेहतर तरीके से संभालना सीखना होता है।
द्रविड ने कहा कि मैं खुद भी उस दौर से निकला हूं, ऐसे में इस पड़ाव की महत्ता को मैं समझता हूं। यह काफी जरूरी है कि इस मकाम पर इन खिलाड़ियों के को बेहतर तरीके से मार्गदर्शन मिले और उन्हें पता होना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं और क्या करना चाहिए।
द्रविड़ ने कहा कि भारत ए और अंडर 19 में बहुत से खिलाड़ियों के अंदर जबरदस्त प्रतिभा है। ऐसे में उन्हें अगले पड़ाव पर ले जाकर भारत की टीम में खाली जगह को भरने के लिए तैयार करने की जरूरत है।
वहीं टीम इंडिया और चयनकर्ताओं के साथ भी मिलकर काम करने की भी द्रविड बात कही। उन्होंने कहा कि निचले स्तर पर खिलाड़ी जो मुश्किलें झेल रहे हैं उनका समाधान निकालने के लिए अपना पूरा प्रयास करेंगे।
| नई दिल्ली। विश्व क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार राहुल द्रविड़ अब युवा चेहरों को टीम इंडिया के लिए तैयार करेगें। द्रविड़ को भारत ए और अंडर उन्नीस टीम का मुखिया बनाया गया है। द्रविड़ अपने क्रिकेट कैरियर के बहतरीन अनुभव का इस्तेमाल अब इन युवाओं को संवारने के लिए करेंगे। इस जिम्मेदारी के सौंपे जाने के बाद द्रविड़ ने कहा कि मैं नयी पीढ़ी के साथ काम करने के लिए काफी उत्सुक हूं। भारत ए और अंडर उन्नीस एक अहम पड़ाव हैं जहां चुनौतियों और दबाव को बेहतर तरीके से संभालना सीखना होता है। द्रविड ने कहा कि मैं खुद भी उस दौर से निकला हूं, ऐसे में इस पड़ाव की महत्ता को मैं समझता हूं। यह काफी जरूरी है कि इस मकाम पर इन खिलाड़ियों के को बेहतर तरीके से मार्गदर्शन मिले और उन्हें पता होना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं और क्या करना चाहिए। द्रविड़ ने कहा कि भारत ए और अंडर उन्नीस में बहुत से खिलाड़ियों के अंदर जबरदस्त प्रतिभा है। ऐसे में उन्हें अगले पड़ाव पर ले जाकर भारत की टीम में खाली जगह को भरने के लिए तैयार करने की जरूरत है। वहीं टीम इंडिया और चयनकर्ताओं के साथ भी मिलकर काम करने की भी द्रविड बात कही। उन्होंने कहा कि निचले स्तर पर खिलाड़ी जो मुश्किलें झेल रहे हैं उनका समाधान निकालने के लिए अपना पूरा प्रयास करेंगे। |
इस पिटाई का पूरा वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. ये पूरा मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक जो बुजुर्ग युवती को मेले में ले गया था वह पेशे से शिक्षक है. पूरे गांव में ये बात कही जा रही है कि उक्त युवती उसकी कथित प्रेमिका है. लेकिन वह युवती कौन है इसकी पुष्टि लल्लूराम डॉट कॉम नहीं करता है.
प्रारंभिक जानकारी जो सामने आई है उसके मुताबिक ये मेला पुसावड़ गांव में लगा था, जो डौंडी थाना क्षेत्र में आता है. शिक्षक वहीं पास के गांव में पदस्थ है. पूरे गांव में इस मारपीट की चर्चा है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि पुलिस को अभी तक ये जानकारी नहीं मिली है कि उनके थाना क्षेत्र में दो महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हुई है और उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.
| इस पिटाई का पूरा वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है. ये पूरा मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक जो बुजुर्ग युवती को मेले में ले गया था वह पेशे से शिक्षक है. पूरे गांव में ये बात कही जा रही है कि उक्त युवती उसकी कथित प्रेमिका है. लेकिन वह युवती कौन है इसकी पुष्टि लल्लूराम डॉट कॉम नहीं करता है. प्रारंभिक जानकारी जो सामने आई है उसके मुताबिक ये मेला पुसावड़ गांव में लगा था, जो डौंडी थाना क्षेत्र में आता है. शिक्षक वहीं पास के गांव में पदस्थ है. पूरे गांव में इस मारपीट की चर्चा है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि पुलिस को अभी तक ये जानकारी नहीं मिली है कि उनके थाना क्षेत्र में दो महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हुई है और उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. |
JAMSHEDPUR : गवर्नमेंट व स्कूल की लड़ाई में अब बचचे पीसने लगे हैं। स्टेट गवर्नमेंट द्वारा प्रेशर देकर राइट टू एजुकेशन एचट तो लागू कराया जा रहा है, लेकिन स्कूल में एडमिशन ले चुके बचचों की फी स्कूल को नहीं दी जा रही है। इस कारचा अब स्कूल मैनेजमेंट भी परेशान हो गए हैं। इसका खामियाजा बीपीएल बचचों व उनकी फैमिली को भुगतना पड़ रहा है। इसी तरह का एक मामला कारमेल जूनियर कॉलेज में सामने आया है। इसके विरोध में मंडे को बीपीएल पेरेंट्स ने जमशेदपुर अभिभावक संचा के नेतृचव में रैली निकाली व डीसी ऑफिस पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सीएम को संबोधित एक मेमोरेंडम भी डीसी को सौंपा गया।
चाटना धतकीडीह स्थित कारमेल जूनियर कॉलेज की है। यहां स्कूल मैनेजमेंट द्वारा बीपीएल बचचों से एक चलास में दूसरे चलास में प्रमोट करने के लिए स्कूल फी की डिमांड की जा रही है। इसके लिए बचचों को नोटिस भी थमा दिया गया है। नोटिस हाथ में आने के बाद बीपीएल पेरेंट्स की परेशानी बढ़ गई है। उनका कहना है रोज काम कर किसी तरह गुजारा चलता है। अब स्कूल फी देने में तो उनकी हालत खराब हो जाएगी।
इस संबंध में जमशेदपुर अभिभावक संचा के प्रेसिडेंट डॉ उमेश कुमार ने बताया कि कारमेल स्कूल मैनेजमेंट द्वारा एलकेजी के बीपीएल बचचों को फी भरने संबंधी नोटिस थमायी गई है। नोटिस के जरिए स्कूल मैनेजमेंट क्8 हजार रुपए भरने को कहा है। इसके तहत पूरी फी एक बार में नहीं दे सकने की स्थिति में म्000 रुपए के हिसाब से तीन किश्त में पैसे देने को कहा गया है।
डॉ उमेश कुमार ने कहा कि गवर्नमेंट को बीपीएल बचचों की फी भरनी है, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है, ऐसे में परेशान ये बचचे हो रहे हैं। आखिर गवर्नमेंट व स्कूल के बीच की लड़ाई में इन बचचों व बीपीएल फैमिली को परेशान करने का कोई औचिचय नहीं है।
किसी छोटे इश्यू पर एनएडेड स्कूल एसोसिएशन कोर्ट जाने की धमकी देता है, लेकिन अनुदान राशि न मिलने पर उनकी चुचपी संदेहास्पद है। इस संबंध में सीएम को मांगपचा भेजकर मामले में कार्रवाई करने व प्राचलम सॉल्व होने तक बचचों की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न हो इसे इंश्योर करने की मांग की गई है।
| JAMSHEDPUR : गवर्नमेंट व स्कूल की लड़ाई में अब बचचे पीसने लगे हैं। स्टेट गवर्नमेंट द्वारा प्रेशर देकर राइट टू एजुकेशन एचट तो लागू कराया जा रहा है, लेकिन स्कूल में एडमिशन ले चुके बचचों की फी स्कूल को नहीं दी जा रही है। इस कारचा अब स्कूल मैनेजमेंट भी परेशान हो गए हैं। इसका खामियाजा बीपीएल बचचों व उनकी फैमिली को भुगतना पड़ रहा है। इसी तरह का एक मामला कारमेल जूनियर कॉलेज में सामने आया है। इसके विरोध में मंडे को बीपीएल पेरेंट्स ने जमशेदपुर अभिभावक संचा के नेतृचव में रैली निकाली व डीसी ऑफिस पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सीएम को संबोधित एक मेमोरेंडम भी डीसी को सौंपा गया। चाटना धतकीडीह स्थित कारमेल जूनियर कॉलेज की है। यहां स्कूल मैनेजमेंट द्वारा बीपीएल बचचों से एक चलास में दूसरे चलास में प्रमोट करने के लिए स्कूल फी की डिमांड की जा रही है। इसके लिए बचचों को नोटिस भी थमा दिया गया है। नोटिस हाथ में आने के बाद बीपीएल पेरेंट्स की परेशानी बढ़ गई है। उनका कहना है रोज काम कर किसी तरह गुजारा चलता है। अब स्कूल फी देने में तो उनकी हालत खराब हो जाएगी। इस संबंध में जमशेदपुर अभिभावक संचा के प्रेसिडेंट डॉ उमेश कुमार ने बताया कि कारमेल स्कूल मैनेजमेंट द्वारा एलकेजी के बीपीएल बचचों को फी भरने संबंधी नोटिस थमायी गई है। नोटिस के जरिए स्कूल मैनेजमेंट क्आठ हजार रुपए भरने को कहा है। इसके तहत पूरी फी एक बार में नहीं दे सकने की स्थिति में म्शून्य रुपयापए के हिसाब से तीन किश्त में पैसे देने को कहा गया है। डॉ उमेश कुमार ने कहा कि गवर्नमेंट को बीपीएल बचचों की फी भरनी है, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है, ऐसे में परेशान ये बचचे हो रहे हैं। आखिर गवर्नमेंट व स्कूल के बीच की लड़ाई में इन बचचों व बीपीएल फैमिली को परेशान करने का कोई औचिचय नहीं है। किसी छोटे इश्यू पर एनएडेड स्कूल एसोसिएशन कोर्ट जाने की धमकी देता है, लेकिन अनुदान राशि न मिलने पर उनकी चुचपी संदेहास्पद है। इस संबंध में सीएम को मांगपचा भेजकर मामले में कार्रवाई करने व प्राचलम सॉल्व होने तक बचचों की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न हो इसे इंश्योर करने की मांग की गई है। |
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उपभोक्ता कार्य विभाग ने अपर सचिव श्रीमती निधि खरे की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य सरकारों के साथ मिलकर निकट समन्वय में आयातकों, मिल मालिकों, जमाकर्ताओं, व्यापारियों आदि जैसी संस्थाओं द्वारा जमा किए गए अरहर दाल के भंडार की निगरानी करेगी। समुचित मात्रा में दलहन आयात की लगातार आवक होने के बावजूद बाजार के भंडार संघों द्वारा स्टॉक जारी नहीं किये जाने की खबरों की वजह से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
भंडार की ताजा स्थिति की निगरानी के लिए इस समिति गठित करने की नवीनतम घोषणा बाजार में जमाखोरों और बेईमान सट्टेबाजों से निपटने के लिए सरकार की मंशा को दर्शाती है। यह निर्णय आने वाले महीनों में अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के सरकार के दृढ़ संकल्प को भी प्रकट करता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार घरेलू बाजार में अन्य दालों के भंडार की स्थिति पर भी बहुत बारीकी से नजर रख रही है ताकि वर्ष के आगामी महीनों के दौरान दालों के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
यहां पर स्मरण रखने योग्य तथ्य यह है कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत तुअर दाल की उपलब्धता के संबंध में भंडार को प्रदर्शित करने की व्यवस्था को लागू करने के उद्देश्य से 12 अगस्त, 2022 को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया था। सरकार ने एक और पहल करते हुए गैर-एलडीसी देशों से अरहर दाल आयात के लिए लागू 10 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया है क्योंकि कोई भी शुल्क इन एलडीसी देशों से शून्य शुल्क आयात के लिए भी कार्यविधि संबंधी समस्याएं उत्पन्न करता है।
| Posted On: उपभोक्ता कार्य विभाग ने अपर सचिव श्रीमती निधि खरे की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य सरकारों के साथ मिलकर निकट समन्वय में आयातकों, मिल मालिकों, जमाकर्ताओं, व्यापारियों आदि जैसी संस्थाओं द्वारा जमा किए गए अरहर दाल के भंडार की निगरानी करेगी। समुचित मात्रा में दलहन आयात की लगातार आवक होने के बावजूद बाजार के भंडार संघों द्वारा स्टॉक जारी नहीं किये जाने की खबरों की वजह से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भंडार की ताजा स्थिति की निगरानी के लिए इस समिति गठित करने की नवीनतम घोषणा बाजार में जमाखोरों और बेईमान सट्टेबाजों से निपटने के लिए सरकार की मंशा को दर्शाती है। यह निर्णय आने वाले महीनों में अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के सरकार के दृढ़ संकल्प को भी प्रकट करता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार घरेलू बाजार में अन्य दालों के भंडार की स्थिति पर भी बहुत बारीकी से नजर रख रही है ताकि वर्ष के आगामी महीनों के दौरान दालों के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। यहां पर स्मरण रखने योग्य तथ्य यह है कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पचपन के अंतर्गत तुअर दाल की उपलब्धता के संबंध में भंडार को प्रदर्शित करने की व्यवस्था को लागू करने के उद्देश्य से बारह अगस्त, दो हज़ार बाईस को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया था। सरकार ने एक और पहल करते हुए गैर-एलडीसी देशों से अरहर दाल आयात के लिए लागू दस प्रतिशत शुल्क को हटा दिया है क्योंकि कोई भी शुल्क इन एलडीसी देशों से शून्य शुल्क आयात के लिए भी कार्यविधि संबंधी समस्याएं उत्पन्न करता है। |
Player Of The Tournament T20 world cup 2022: आईसीसी क्रिकेट टी20 विश्वकप का फाइनल (Final) मेलबर्न में खेला जाएगा। खिताब के साथ अन्य अवार्ड भी दिए जाएंगे, इसमें एक बड़ा अवार्ड होगा प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का। आईसीसी ने इस अवार्ड के लिए 9 खिलाड़ियों को नॉमिनेट किया है, जिसमे विराट कोहली (Virat Kohli), सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) और जोस बटलर (Jos Buttler) भी शामिल हैं।
विराट कोहली सूर्यकुमार यादव समेत 9 खिलाड़ी आईसीसी टी20 विश्वकप 2022 प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट के लिए नॉमिनेट हुए हैं। फैंस के लिए वोटिंग शुरू हो गई है, वह अपने पसंदीदा खिलाड़ी के लिए वोट कर सकते हैं। उम्मीद है कि भारतीय ही इसका विजेता होगा। फैंस बेस और प्रदर्शन के आधार पर देखें तो विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव के बीच टक्कर देखने को मिल रही है।
1: Virat Kohli (India): विराट कोहली इस वर्ल्डकप में शानदार फॉर्म में नजर आए। उन्होंने पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 82 रन बनाए, उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 4 बार अर्धशतकीय पारी खेली। विराट ने टूर्नामेंट में 98. 66 की एवरेज से 296 रन बनाए।
2: Suryakumar Yadav (India): इस पूरे टूर्नामेंट में सूर्यकुमार यादव और उनके शॉट्स की चर्चा सबसे अधिक हुई। सूर्यकुमार ने ग्राउंड के चारों तरफ छक्कों की बरसात की। सूर्यकुमार यादव ने टूर्नामेंट में खेले 6 मैचों में 239 रन बनाए। उनकी स्ट्राइक रेट 189. 68 की रही। उन्होंने नीदरलैंड, ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अर्धशतक जड़े। इस दौरान वह आईसीसी टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग के पहले स्थान पर भी पहुंचे थे।
3: Shadab Khan (Pakistan): शादाब खान पाकिस्तान के स्टार प्लेयर रहे, इस ऑल राउंडर ने बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सिडनी में शानदार प्रदर्शन किया था। शादाब ने इस मैच में अर्धशतकीय पारी खेली थी। अभी तक उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 10 विकेट चटकाए।
4: Shaheen Afridi (Pakistan): शाहीन शाह अफरीदी पाकिस्तान के दसूरे प्लेयर, जो टी20 वर्ल्डकप के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर के लिए नॉमिनेट हुए। उन्होंने टूर्नामेंट में 10 विकेट लिए, जबकि भारत और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था लेकिन बाद में उन्होंने वापसी की।
5: Sam Curran (England): सैम करनः इंग्लैंड क्रिकेट टीम क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में पहुंची, इसमें सैम करन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साइमन करन ने 7. 28 इकॉनमी रेस्ट से 10 विकेट दर्ज किए हैं। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ फाइव विकेट हॉल किया, जो टूर्नामेंट का एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
6: Jos Buttler (England): इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर ने भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में नाबाद 80 रन बनाए, और जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बटलर भी टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर अवार्ड को जीतने के प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने पांच पारियों में 199 रन बनाए हैं। टूर्नामेंट में उनके बल्ले से 2 बार अर्धशतकीय पारी भी आई। बतौर विकेट कीपर उन्होंने 8 डिसमिसेल किए।
7: Alex Hales (England): अलेक्स हेल्स ने 148. 59 की स्ट्राइक रेट से कुल 211 रन बनाए, हेल्स को भारत के खिलाफ खेली पारी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने बटलर के साथ मिलकर 170 की साझेदारी की और 86 रन बनाए।
8: Sikandar Raza (Zimbabwe): ज़िम्बाब्वे के इस ऑलराउंडर का प्रदर्शन शानदार रहा, उन्होंने 219 रन बनाए और पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। सिकंदर रजा ने टूर्नामेंट में कुल 10 विकेट चटकाए।
9: Wanindu Hasaranga (Sri Lanka): श्रीलंका के ऑल राउंडर वणिंदो हसारंगा टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर के लिए नॉमिनेट हुए हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 15 विकेट चटकाए, और अभी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।
टी20 विश्वकप के फाइनल में इंग्लैंड और पाकिस्तान आमने सामने होगी। 13 नवंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर फाइनल मैच खेला जाएगा। भारतीय समयनुसार मैच दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर खेला जाएगा। टॉस 1 बजे होगा।
क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।
| Player Of The Tournament Tबीस world cup दो हज़ार बाईस: आईसीसी क्रिकेट टीबीस विश्वकप का फाइनल मेलबर्न में खेला जाएगा। खिताब के साथ अन्य अवार्ड भी दिए जाएंगे, इसमें एक बड़ा अवार्ड होगा प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का। आईसीसी ने इस अवार्ड के लिए नौ खिलाड़ियों को नॉमिनेट किया है, जिसमे विराट कोहली , सूर्यकुमार यादव और जोस बटलर भी शामिल हैं। विराट कोहली सूर्यकुमार यादव समेत नौ खिलाड़ी आईसीसी टीबीस विश्वकप दो हज़ार बाईस प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट के लिए नॉमिनेट हुए हैं। फैंस के लिए वोटिंग शुरू हो गई है, वह अपने पसंदीदा खिलाड़ी के लिए वोट कर सकते हैं। उम्मीद है कि भारतीय ही इसका विजेता होगा। फैंस बेस और प्रदर्शन के आधार पर देखें तो विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव के बीच टक्कर देखने को मिल रही है। एक: Virat Kohli : विराट कोहली इस वर्ल्डकप में शानदार फॉर्म में नजर आए। उन्होंने पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद बयासी रन बनाए, उन्होंने टूर्नामेंट में कुल चार बार अर्धशतकीय पारी खेली। विराट ने टूर्नामेंट में अट्ठानवे. छयासठ की एवरेज से दो सौ छियानवे रन बनाए। दो: Suryakumar Yadav : इस पूरे टूर्नामेंट में सूर्यकुमार यादव और उनके शॉट्स की चर्चा सबसे अधिक हुई। सूर्यकुमार ने ग्राउंड के चारों तरफ छक्कों की बरसात की। सूर्यकुमार यादव ने टूर्नामेंट में खेले छः मैचों में दो सौ उनतालीस रन बनाए। उनकी स्ट्राइक रेट एक सौ नवासी. अड़सठ की रही। उन्होंने नीदरलैंड, ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अर्धशतक जड़े। इस दौरान वह आईसीसी टीबीस बल्लेबाजी रैंकिंग के पहले स्थान पर भी पहुंचे थे। तीन: Shadab Khan : शादाब खान पाकिस्तान के स्टार प्लेयर रहे, इस ऑल राउंडर ने बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सिडनी में शानदार प्रदर्शन किया था। शादाब ने इस मैच में अर्धशतकीय पारी खेली थी। अभी तक उन्होंने टूर्नामेंट में कुल दस विकेट चटकाए। चार: Shaheen Afridi : शाहीन शाह अफरीदी पाकिस्तान के दसूरे प्लेयर, जो टीबीस वर्ल्डकप के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर के लिए नॉमिनेट हुए। उन्होंने टूर्नामेंट में दस विकेट लिए, जबकि भारत और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था लेकिन बाद में उन्होंने वापसी की। पाँच: Sam Curran : सैम करनः इंग्लैंड क्रिकेट टीम क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में पहुंची, इसमें सैम करन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साइमन करन ने सात. अट्ठाईस इकॉनमी रेस्ट से दस विकेट दर्ज किए हैं। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ फाइव विकेट हॉल किया, जो टूर्नामेंट का एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। छः: Jos Buttler : इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर ने भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में नाबाद अस्सी रन बनाए, और जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बटलर भी टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर अवार्ड को जीतने के प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने पांच पारियों में एक सौ निन्यानवे रन बनाए हैं। टूर्नामेंट में उनके बल्ले से दो बार अर्धशतकीय पारी भी आई। बतौर विकेट कीपर उन्होंने आठ डिसमिसेल किए। सात: Alex Hales : अलेक्स हेल्स ने एक सौ अड़तालीस. उनसठ की स्ट्राइक रेट से कुल दो सौ ग्यारह रन बनाए, हेल्स को भारत के खिलाफ खेली पारी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने बटलर के साथ मिलकर एक सौ सत्तर की साझेदारी की और छियासी रन बनाए। आठ: Sikandar Raza : ज़िम्बाब्वे के इस ऑलराउंडर का प्रदर्शन शानदार रहा, उन्होंने दो सौ उन्नीस रन बनाए और पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। सिकंदर रजा ने टूर्नामेंट में कुल दस विकेट चटकाए। नौ: Wanindu Hasaranga : श्रीलंका के ऑल राउंडर वणिंदो हसारंगा टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर के लिए नॉमिनेट हुए हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल पंद्रह विकेट चटकाए, और अभी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। टीबीस विश्वकप के फाइनल में इंग्लैंड और पाकिस्तान आमने सामने होगी। तेरह नवंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर फाइनल मैच खेला जाएगा। भारतीय समयनुसार मैच दोपहर एक बजकर तीस मिनट पर खेला जाएगा। टॉस एक बजे होगा। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें। |
पाकुड़ः सदर प्रखंड के प्लस टू विद्यालय इलामी के पांच सौ से अधिक छात्र छात्राओं के छात्रवृत्ति आवेदन रद्द कर दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक आशिष श्रीवास्तव के मुताबिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 1150 छात्र छात्राओं ने ऑनलाइन आवेदन दिया था, जिनमें से कुल 504 आवेदनों को जांच में सही पाए जाने पर विद्यालय द्वारा अनुसंशा कर भेजा गया था।
लेकिन कल्याण विभाग ने सभी आवेदनों को अयोग्य बता निरस्त कर दिया है।
विद्यालय की यास्मिन आराम,तुहीना खातून, अकलिमा खातून, नायला तबस्सुम आदि छात्राओं ने बताया कि कई महीने इंतजार करने के बाद जब उनके खाते में पैसे नहीं आए तो उन्होंने कल्याण विभाग के साइट पर जाकर चेक किया तो पाया कि उनके आवेदनों को अयोग्य बता निरस्त कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि जब हमने निर्देशानुसार सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया तब उसे गलत ठहराया जाना समझ से परे है।
बकौल प्रभारी प्रधानाध्यापक इस संबंध में शिक्षा विभाग को लिखित जानकारी दी जाएगी,ताकि विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
जिला कल्याण पदाधिकारी विजन ओराँव ने बताया है कि प्राप्त आवेदनों की भौतिक जांच के लिए टीम बनायी गई थी।
जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में सभी आवेदनों को अयोग्य बताया है।
| पाकुड़ः सदर प्रखंड के प्लस टू विद्यालय इलामी के पांच सौ से अधिक छात्र छात्राओं के छात्रवृत्ति आवेदन रद्द कर दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक आशिष श्रीवास्तव के मुताबिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल एक हज़ार एक सौ पचास छात्र छात्राओं ने ऑनलाइन आवेदन दिया था, जिनमें से कुल पाँच सौ चार आवेदनों को जांच में सही पाए जाने पर विद्यालय द्वारा अनुसंशा कर भेजा गया था। लेकिन कल्याण विभाग ने सभी आवेदनों को अयोग्य बता निरस्त कर दिया है। विद्यालय की यास्मिन आराम,तुहीना खातून, अकलिमा खातून, नायला तबस्सुम आदि छात्राओं ने बताया कि कई महीने इंतजार करने के बाद जब उनके खाते में पैसे नहीं आए तो उन्होंने कल्याण विभाग के साइट पर जाकर चेक किया तो पाया कि उनके आवेदनों को अयोग्य बता निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जब हमने निर्देशानुसार सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया तब उसे गलत ठहराया जाना समझ से परे है। बकौल प्रभारी प्रधानाध्यापक इस संबंध में शिक्षा विभाग को लिखित जानकारी दी जाएगी,ताकि विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जिला कल्याण पदाधिकारी विजन ओराँव ने बताया है कि प्राप्त आवेदनों की भौतिक जांच के लिए टीम बनायी गई थी। जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में सभी आवेदनों को अयोग्य बताया है। |
बजट सत्र के दूसरे चरण के आठवें दिन शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक 2022 को लोकसभा में पेश किया। विधेयक पर चर्चा होने के बाद इसे लोकसभा से ध्वनिमत से पारित कर दिया। जबकि राज्यसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।
बजट सत्र के दूसरे चरण के आठवें दिन शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक 2022 को लोकसभा में पेश किया। विधेयक पर चर्चा होने के बाद इसे लोकसभा से ध्वनिमत से पारित कर दिया। जबकि राज्यसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।
लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी काल में दुनिया के 32 देशों को टैक्स बढ़ाना पड़ा। इसमें रूस, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों ने आयकर, एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ संबंधी टैक्स को बढ़ाया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने पिछले साल कोई टैक्स बढ़ाया और ना ही इस साल टैक्स में कोई इजाफा किया है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि हमने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को प्रोत्साहित करने और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए छाता पर सीमा शुल्क बढ़ाया है। देश में छातों का उत्पादन होने के बावजूद हम एक ही देश से हर साल 2. 5 करोड़ छातों का आयात करते हैं।
उन्होंने कहा कि छातों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से एमएसएमई को फायदा पहुंचेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से अर्थव्यवस्था, सरकार और कंपनियों को मदद मिली है। वित्त वर्ष 2021-22 में अब तक 7. 3 लाख करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर संग्रह हुआ है।
| बजट सत्र के दूसरे चरण के आठवें दिन शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक दो हज़ार बाईस को लोकसभा में पेश किया। विधेयक पर चर्चा होने के बाद इसे लोकसभा से ध्वनिमत से पारित कर दिया। जबकि राज्यसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। बजट सत्र के दूसरे चरण के आठवें दिन शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक दो हज़ार बाईस को लोकसभा में पेश किया। विधेयक पर चर्चा होने के बाद इसे लोकसभा से ध्वनिमत से पारित कर दिया। जबकि राज्यसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी काल में दुनिया के बत्तीस देशों को टैक्स बढ़ाना पड़ा। इसमें रूस, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों ने आयकर, एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ संबंधी टैक्स को बढ़ाया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने पिछले साल कोई टैक्स बढ़ाया और ना ही इस साल टैक्स में कोई इजाफा किया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि हमने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम को प्रोत्साहित करने और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए छाता पर सीमा शुल्क बढ़ाया है। देश में छातों का उत्पादन होने के बावजूद हम एक ही देश से हर साल दो. पाँच करोड़ छातों का आयात करते हैं। उन्होंने कहा कि छातों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से एमएसएमई को फायदा पहुंचेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से अर्थव्यवस्था, सरकार और कंपनियों को मदद मिली है। वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में अब तक सात. तीन लाख करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर संग्रह हुआ है। |
बारिश के मौसम में प्लेट पर रोटी के साथ गर्मा-गर्म चिकन परोसा गया हो तो मानसून का मजा और स्वाद दोनों बढ़ जाता है। आज की रेसिपी नॉनवेज के शौकीन लोगों के लिए है। इस मुगलई डिश का नाम है चिकन अकबरी। यह डिश न सिर्फ खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है बल्कि बनने में भी बेहद आसान है। तो आइए देर किस बात की, जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी डिश।
सबसे पहले अपने चिकन को ताजे पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब एक पैन लें और उसमें घी या तेल डालें। अपने साबुत मसाले जैसे दालचीनी, हरी इलायची और लौंग डालें और इन्हें तेल में 40 सेकंड के लिए भूनने दें। हरी मिर्च, कटा हुआ प्याज डालें, पारदर्शी होने तक भूनें। फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट और बारीक कटे टमाटर डालें। टमाटर को जल्दी पकने के लिए नमक डालें। अब इसमें चिकन डालें और रंग बदलने तक इसे पकने दें।
सभी मसाले डालें, अच्छी तरह मिलाएं और सभी तरफ समान रूप से पकने दें। अब दही डालकर ढक्कन बंद कर दें। इस बीच, काजू को नारियल के गूदे के साथ पीस लें और ग्राइंडर में जरूरत के मुताबिक थोड़ा सा पानी डालकर बारीक पेस्ट बना लें। एक बार जब आप देख लें कि चिकन से तेल अलग होने लगा है, तो इस पेस्ट और 1/2 कप पानी में कटा हरा धनिया डाल दे। ढककर अगले 5 मिनट तक पकाएं। गर्मा-गर्म रोटियों के साथ परोसें।
| बारिश के मौसम में प्लेट पर रोटी के साथ गर्मा-गर्म चिकन परोसा गया हो तो मानसून का मजा और स्वाद दोनों बढ़ जाता है। आज की रेसिपी नॉनवेज के शौकीन लोगों के लिए है। इस मुगलई डिश का नाम है चिकन अकबरी। यह डिश न सिर्फ खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है बल्कि बनने में भी बेहद आसान है। तो आइए देर किस बात की, जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी डिश। सबसे पहले अपने चिकन को ताजे पानी से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब एक पैन लें और उसमें घी या तेल डालें। अपने साबुत मसाले जैसे दालचीनी, हरी इलायची और लौंग डालें और इन्हें तेल में चालीस सेकंड के लिए भूनने दें। हरी मिर्च, कटा हुआ प्याज डालें, पारदर्शी होने तक भूनें। फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट और बारीक कटे टमाटर डालें। टमाटर को जल्दी पकने के लिए नमक डालें। अब इसमें चिकन डालें और रंग बदलने तक इसे पकने दें। सभी मसाले डालें, अच्छी तरह मिलाएं और सभी तरफ समान रूप से पकने दें। अब दही डालकर ढक्कन बंद कर दें। इस बीच, काजू को नारियल के गूदे के साथ पीस लें और ग्राइंडर में जरूरत के मुताबिक थोड़ा सा पानी डालकर बारीक पेस्ट बना लें। एक बार जब आप देख लें कि चिकन से तेल अलग होने लगा है, तो इस पेस्ट और एक/दो कप पानी में कटा हरा धनिया डाल दे। ढककर अगले पाँच मिनट तक पकाएं। गर्मा-गर्म रोटियों के साथ परोसें। |
सोर्श -- हरयाणा के हिस्सार जिले में स्थित यह एक कस्बा है, जिसके समीपस्थ किसी एक टीले से एक अभिलेख प्राप्त हुआ था ( एपि० इं०, XXI, भाग viii) 1
शिविपुर --शोरकोट अभिलेख के अनुसार शोरकोट का प्राचीन नाम शिविपुर या शिवपुर था, जो शिबियों की राजधानी थी ( एपि० इं०, XVI, 1921, पृ० 17; लाहा, ट्राइब्स इन ऐंट इंडिया, पृ० 83 ) । उत्तरापथ में स्थित शिवपुर या शिबियों की नगरी का वर्णन पाणिनि के भाष्यकार ने किया है (द्रष्टव्य, पतञ्जलि, IV. 2, 2 ) । शिव या शिवि-जन इरावती एवं चन्द्रभागा नदियों के मध्य पंजाब में झंग के शोरकोट क्षेत्र में रहते थे और इसलिए इसे उत्तरापथ में संमिलित किया गया है। यह एक अत्यंत प्राचीन जाति प्रतीत होती है, जिसका उल्लेख संभवतः प्रथम बार ऋग्वेद (VII. 18. 7 ) में हुआ है । वे दीर्घकाल तक स्वतंत्र थे, क्योंकि इनका उल्लेख न केवल सिकंदर कालीन यूनानी भूगोलवेत्ता एवं इतिहासकार वरन् पाणिनि ( IV. 2.109) के भाष्यकार भी करते हैं। बाद में वे भारत के सुदूर दक्षिण में चले गये थे ( तु० दशकुमार चरितम्, अध्याय, VI; वृह ( संहिता, अध्याय, XIV. श्लोक, 12 ) । ललितविस्तर ( पृ० 22 ) और महावस्तु में (लाहा, स्टडी ऑव द महावस्तु, पृ० 7) शिविदेश को जम्बुद्वीप के सोलह महाजनपदों में से एक बतलाया गया है। अरिट्ठपुर शिवि जनपद की राजधानी थी ( जातक, IV. पृ० 401 ) । अरिट्ठपुर (संस्कृत, अरिष्टपुर) को संभवतः पंजाब के उत्तर में स्थित टॉलेमी की अरिस्तीबोथ्रा से समीकृत किया जा सकता है, जो संभवतः द्वारावती ही है ( जातक, फासबाल, भाग, VI, पृ० 421; नं० ला० दे, ज्यॉग्रेफिकल डिक्शनरी, पृ० 11, 187 ) । क्षेमेन्द्र की बोधिसत्त्वावदानकल्पलता में शिववती नगरी का वर्णन है, जिसे राजा शिवि द्वारा शिवि देश की राजधानी से समीकृत किया जा सकता है ( 91 वाँ पल्लव) । प्राचीन यूनानी लेखकों ने पंजाब में स्थित सिबोइ ( Siboi ) के प्रदेश का उल्लेख किया है। विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य, बि० च० लाहा, इंडोलॉजिकल स्टडीज़, भाग, I पृ०
शोण - (शोणा) यह गंगा की विज्ञात सबसे बड़ी निचली सहायक नदी है । एरियन की सोन, आधुनिक सोन् नदी, जबलपुर जिले में मैकाल (मेकल ) पर्वत - माला से निकलकर उत्तर पूर्व की ओर बघेलखंड, मिर्जापुर और शाहाबाद जिलों से गुजरती हुई पटना के समीप गंगा में मिलती है । रामायण के अनुसार ( आदिकाण्ड, 32 वाँ सर्ग, श्लोक, 8 - 9 ) यह सुरम्या नदी गिरिव्रज को परिवृत करने वाली दो पहाड़ियों और मगध से होती हुयी प्रवाहित होती है और इस कारण
इसे मागधी कहा जाता था । पद्मपुराण (उत्तरखण्ड, श्लोक, 35-38 ) में इस बड़ी नदी का उल्लेख किया गया है। पुराणों में इसे ऋक्ष पर्वतमाला से निकलने वाली महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक बतलाया गया है । इस नदी को पार करके दधीचि अपने पिता की तपोभूमि में पहुँचे थे ( हर्षचरित, प्रथम उच्छ्वास ) । कालिदास ने अपने रघुवंश ( VII. 36 ) में इसका उल्लेख किया है । मगध में राजगृह होकर बहने वाली इसके प्रवाह को सम्भवतः सुमागधा या सुमागधी कहा जाता था । यह बघेलखंड में पाँच सहायक नदियों, मिर्जापुर जिले में चार, पालामऊ और शाहाबाद जिले प्रत्येक में एक-एक नदी द्वारा आपूरित होती है। यह नदी पटना के पहले ही गंगा में मिलती है ( तु० रघुवंश, VII. 36, भागीरथीशोण इवोत्तरंग ) । विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य बि० च० लाहा, रिवर्स ऑव इंडिया, पृ० 261
सोरों - - इसका प्राचीन नाम सुकरक्षेत्र या सद्कार्यों का क्षेत्र था । यह कस्बा बरेली से मथुरा के राजपथ पर, गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित था ( कनिंघम, एं० ज्यॉ० इं० पू० 418 ) । यह उ० प्र० के इटावा जिले में स्थित था ( इंस्क्रिप्शंस ऑव नर्दर्न इंडिया, दे० रा० भंडारकर द्वारा पुनरावृत, नं० 416, वि० सं० 1245) I
शृंगवेरपुर ( शृंगिवेरपुर ) -- बताया जाता है कि राम ने यहाँ पर गंगा को पार किया था। कनिंघम ने इसे सिंगरौर से समीकृत किया है, जो इलाहाबाद से पश्चिमोत्तर में 22 मील दूर एक बहुत ऊँचे कगार पर स्थित है ( आ० स० रि०, XI. 62, ज० रा० ए० सो० बं०, XV. संख्या, 2, 1949, पृ०131 ) ।
स्रुघ्न - - यह थानेश्वर से 38 या 40 मील दूर पर स्थित था । युवान- च्वाङ् ने इसे सु-लुकिन-ना ( Su-lukin-na ) कहा है। इसकी परिधि 1,000 मील थी । यह पूर्व में गंगा तक तथा उत्तर में एक उच्च पर्वतमाला तक फैला हुआ था जब कि यमुना इसके मध्य से बहती थी । कनिंघम के अनुसार, इसमें अवश्यमेव गिरि तथा गंगा नदियों के बीच में स्थित अंबाला और सहारनपुर जिले के कुछ भागों समेत, गढ़वाल और सिरमौर के पहाड़ी इलाके संमिलित थे । ( कनिंघम, एं० ज्यॉ० इं०, पृ० 395 और आगे ) ।
स्थानेश्वर ( स्थाणीश्वर ) -- यह प्राचीन भारत के प्राचीनतम स्थानों में से एक था । इसका नाम या तो ईश्वर अथवा महादेव का निवास स्थान होने के कारण, स्थान से या स्थाणु एवं ईश्वर के नामों के संयोग से ग्रहण किया गया
। युवान- च्वाङ् ने इसे स-त-नि-शि-फा- लो ( Sa-ta-ni-shi-fa-lo ) कहा है, जिसकी परिधि 1, 100 मील से भी अधिक थी । वाण के हर्षचरित् (तृतीय
उच्छ्वास ) के अनुसार यह श्रीकण्ठजनपद की राजधानी थी। कुरुक्षेत्र नामक प्रसिद्ध रणक्षेत्र थानेश्वर के दक्षिण की ओर, अंबाला से लगभग 30 मील दक्षिण में और पानीपत से 40 मील उत्तर में स्थित है। इस नगर में एक प्राचीन एवं जीर्ण किला था, जो सिरे पर लगभग 1200 फीट का वर्गाकार था, ( कनिंघम, एं०, ज्यॉ० इं०, पृ० 376 और आगे, 701 )। एस० एन० मजूमदार ने (कनिंघम, एं० ज्यॉ० इं०, इंट्रोडक्शन, XLIII ) इसे विनय महावग्ग ( V. 13, 12 ) और दिव्यावदान ( पृ० 22 ) में वर्णित थून (स्थून ) से समीकृत करने का सुझाव रखा है। थून ब्राह्मणों का एक गाँव था ( तु० जातक, VI, 62 ) जो मध्यदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित था ( विनय टेक्स्टस, सै० बु० ई०, XVII. 38-39 ) ।
शुक्तिमती -- महाराजा वैश्रवण के शासनकाल में 107 वर्षाकित कोसम अभिलेख में इस स्थान का उल्लेख प्राप्त होता है जो संभवतः कौशाम्बी के समीप स्थित था । चेतिय जातक ( संख्या, 422 ) में इसे सोत्थिवती नगर कहा गया है ( एपि० इं०, XXIV, भाग, IV ) । यह चेदि-नरेश धृष्टकेतु की राजधानी थी ( महाभारत, III. 22 ) । यह शुक्तिमती नदी के तट पर स्थित था, जो महा भारत के अनुसार (भीष्मपर्व, VI. 9 ) भारतवर्ष की एक नदी थी । सुमेरु -- पद्यपुराण (उत्तरखंड, श्लोक, 35-38 ) तथा कालिकापुराण (अध्याय, 13, 23; अध्याय 19-92) में इसका उल्लेख किया गया है। शिव ने इसका शिखर देखा था (कालिकापुराण, अध्याय, 17. 10 ) । इस पर्वत से जम्बु नदी निकलती है (वही, अध्याय, 19 32 ) । यह सिनेरु या मेरु पर्वत ही ।
सुंसुमारगिरि ( सिशुमार पहाड़ी ) -- यह मर्ग देश में था ( संयुत्त, III, 1 ) । यह मेसकलावन के किसी मृगवन में स्थित था । यह एक नगर था तथा इसकी राजधानी का यह नाम इसलिए था कि इसके निर्माण के प्रथम दिन ही निकटवर्ती एक झील में किसी कच्छप ने शोर मचाया था ( पपंचसूदनी, II, 65; सारत्थत्त्पकासिनी, II, 249 ) । वत्सराज उदयन एवं उसकी रानी वासवदत्ता का पुत्र, राजकुमार बोधि इस पहाड़ी पर रहता था और उसने यहाँ पर कोकनद नामक एक प्रासाद बनवाया था। बौद्ध अनुश्रुतियों के अनुसार यह भर्ग राज्य की राजधानी थी, और इसका प्रयोग एक दुर्ग के रूप में किया जाता था ( मज्झिम, I, 332-338;II, 91-97 ) । कुछ विद्वानों ने इसे वर्तमान चुनार पहाड़ी से समीकृत किया है (घोष, अर्ली हिस्ट्री ऑव कौशाम्बी, पृ० 32 ) । इस पहाड़ी पर निवास करने वाले एक धनी गृहस्थ ने अपनी पुत्री का विवाह अनाथपिण्डिक क़े के पुत्र के साथ किया था ( रा० ला० मित्र, नर्दर्न बुद्धिस्ट लिटरेचर, पृ० 309) 1
सुन्दरिका -- यह प्राचीन भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है । यह • कोशल की एक नदी थी जो अतिसंभवतः अचिरावती या राप्ती की सहायक नदी थी । यह श्रावस्ती से अधिक दूर नहीं थी ( सुत्तनिपात, पृ० 79 ) ।
सुनेत -- इसके भग्नावशेष पंजाब के लुधियाना जिले में स्थित हैं, जो लुधियाना नगर से तीन मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है ( जर्नल ऑव द न्युमिसमेटिक • सोसायटी ऑव इंडिया, जिल्द, IV, भाग, I, पृ० 1-2 ) ।
सुवर्णगुहा - यह चित्रकूट पर्वत पर है जो हिमालय क्षेत्र में स्थित है (जातक, III, 208)।
श्वेतपर्वत ( सेतपब्बत ) - - यह हिमालय में तिब्बत के पूर्व में स्थित है ( संयुत्त, I, 67)।
तक्षशिला -- (चीनी, शी-शी-चेंग Shi-Shi-Cheng ) - यह गन्धार जनपद की राजधानी थी । पाणिनि एवं पतञ्जलि ने क्रमशः अपनी अष्टाध्यायी ( 4, 3, 93) और महाभाष्य ( 1, 3, 1; 4, 3, 93, पृ० 588-89 ) में इसका वर्णन किया है। इसका उल्लेख प्रथम कलिंग शिलालेख में है। अशोक के शासनकाल में तक्षशिला में, जो सदैव एक विद्रोहशील प्रांत था प्रांताधिपति के रूप में एक कुमार की नियुक्ति की गयी थी । शिलालेखों में अशोक के शासनकाल के प्रारंभिक वर्षों का उल्लेख किया गया है, जब तक्षशिला में इस प्रकार की कोई अशांति नहीं थी । एरियन ने इस नगर को विशाल, समृद्ध एवं जनाकीर्ण बतलाया है। स्ट्रेबो ने यहाँ की भूमि की उर्वरता की प्रशंसा की हैं । प्लिनी ने इसे एक प्रसिद्ध नगर बतलाया है, और कहा है कि यह पहाड़ियों की तलहटी में समतल में स्थित था। कहा जाता है कि पहली शती ई० के मध्य यहाँ पर ट्र्याना का अपोलोनियस ( Apollonius of Tyana ) तथा उसका साथी दमिस ( Damis ) आया था, जिन्होंने इसे निनेवा के आकार का बतलाया है, जो पतली किंतु सुव्यवस्थित सड़कों से युक्त किसी यूनानी नगर की भाँति प्राकारयुक्त था । सिकंदर के वंशानुगत होने के लगभग 80 वर्षों के पश्चात् तक्षशिला पर अशोक का आधिपत्य हो गया था।
सातवीं शती ई० में युवान - च्वाङ् इस नगर में आया था, जब यह कश्मीर का एक अधीनस्थ राज्य था। चीनी यात्री के अनुसार तक्षशिला की परिधि 2,000 ली से तथा इसकी राजधानी की परिधि 10 ली से अधिक थी । यहाँ की भूमि उर्वर थी और यहाँ पर प्रवाहशील नदियों के कारण अच्छी पैदावार और प्रचुर वनस्पति
1 एच० एवं एफ० द्वारा अनूदित, III, १० 90.
होती थी । यहाँ की जलवायु स्वास्थ्यवर्धक थी तथा यहाँ के निवासी बौद्ध धर्म के अनुयायी थे । यद्यपि यहाँ पर अनेक विहार थे, किन्तु उनमें कुछ निर्जन हो चुके थे । यहाँ पर कुछ एक विहारों में रहने वाले भिक्षु महायान धर्मावलंबी थे (वाटर्स, ऑन युवान च्वाङ्, I, 240 ) ।
बौद्ध एवं जैन कहानियों में इसका वर्णन प्रमुख रूप से किया गया है । यह प्राचीन भारत में शिक्षा का एक महान केंद्र था। विविध कलाओं एवं शास्त्रों के अध्ययन के लिए भारत के विभिन्न भागों से यहाँ विद्यार्थी आते थे । कोशलनरेश प्रसेनजित् और मगध - नरेश बिम्बसार के विख्यात राजवैद्य जीवक की शिक्षा यहीं पर हुयी थी ( बि० च० लाहा, हिस्टॉरिकल ग्लीनिंग्स, अध्याय, I ) । उस समय के विद्यार्थी जीवन का एक अति सुंदर चित्र एक जातक में प्रस्तुत किया गया है ( जिल्द, II, पृ० 277 ) ।
इस नगर को पश्चिमी पंजाब के रावलपिंडी जिले में स्थित आधुनिक तक्षशिला से समीकृत किया गया है। इस पुर को मद्रशिला भी कहा जाता था और कालांतर में इसका नाम तक्षशिला पड़ा, क्योंकि यहीं पर एक ब्राह्मण-भिक्षुक ने राजा चन्द्रप्रभ का शिरोच्छेद किया था (दिव्यावदान माला, नर्दर्न बुद्धिस्ट लिटरेचर, पृ० 310 ) । भद्रशिला नामक नगर वैभवयुक्त, समृद्ध एवं जनसंकुल था । लंबाई-चौड़ाई में यह नगर 12 योजन था तथा यह चार तोरणों द्वारा सुविभक्त और ऊँचे महराबों एवं गवाक्षों द्वारा सज्जित था । हिमालय के उत्तर में स्थित यह नगर चन्द्रप्रम नामक राजा के शासनांतर्गत था ( बोधिसत्वावदान-कल्पलता, पञ्चम पल्लव ) । इस नगर में एक राजोद्यान था ( दिव्यावदान, पू० 315 ) । बोधिसत्त्वावदान-कल्पलता, ( 59 वाँ पल्लव) के अनुसार जब कुणाल इसे जीतने के लिए भेजा गया था, तव तक्षशिला राजा कुंजरकर्ण के अधीन थी । दिव्यावदान से ऐसा प्रतीत होता है कि तक्षशिला अशोक के पिता मगध-नरेश बिन्दुसार के साम्राज्य में संमिलित थी ।
तक्षशिला, जो गन्धार की प्राचीन राजधानियों में से एक थी, सिन्धु नदी के पूर्व में स्थित थी । कनिंघम के विचार से तक्षशिला शाह-ढेरी के समीप काल-कासराय के ठीक एक मील उत्तर-पूर्व में, किसी दुर्गीकृत नगर के विस्तृत भग्नावशेषों में जिनके परितः कम से कम पचपन स्तूप, अट्ठाइस विहार और नौ मंदिर पाये गये थे, स्थित है। शाह- ढोरी से ओहिंद की दूरी 36 मील और ओहिंद से हश्त - नगर की दूरी 38 मील है । इस प्रकार कुल दूरी 74 मील है, जो प्लिनी द्वारा
1 संप्रति पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित ।
बतलायी गई तक्षशिला और पुष्कलावती ( Peukelaotis ) के बीच की दूरी से 19 मील अधिक है । इस असंगति का समाधान करने के लिए कनिंघम ने 60 मील को 80 मील (LXXX ) पढ़ने का सुझाव रखा है जो 73½ अंग्रेजी मीलों के बराबर है या जो दोनों स्थानों के मध्य की वास्तविक दूरी से केवल आधा मील कम है ( कनिंघम, ऐंश्येंट ज्यॉग्रेफी, पृ० 121 ) । डॉ० भंडारकर का मत है कि (कार्माइकेल लेक्चर्स, 1918, पृ० 54, पा० टि० ) अशोक के शासन काल में तक्षशिला गन्धार की राजधानी नहीं थी, क्योंकि उसके तेरहवें शिलाशासन से यह व्यक्त होता है कि गन्धार उसके खास राज्य में नहीं था, जबकि कलिंग के प्रथम शासन से यह स्पष्ट है कि तक्षशिला प्रत्यक्षतः उसके अधीन था, क्योंकि उसका एक पुत्र वहाँ पर नियुक्त किया गया था। यह तथ्य कि तक्षशिला उस समय गंधार की राजधानी नहीं थी, टॉलेमी के इस कथन से पुष्ट होता है कि गंडराई ( गन्धार ) देश अपने प्रोक्लाइस ( Proklais ) - पुष्करावती नगर समेत सिंधु नदी के पश्चिम में स्थित था ( तु० लेग्गे, ट्रावेल्स ऑव फा- ह्यान, पृ० 31-32; बि० च० लाहा, ट्राइब्स इन ऐंश्येंट इंडिया, पृ० 394-95; वि० च० लाहा, हिस्टॉरिकल ग्लीनिंग्स, अध्याय, I ; वि० च० लाहा, ज्यॉग्रफी ऑव अर्ली बुद्धिज्म, पू० 52-53; जर्नल ऑव द गंगानाथ झा रिसर्च इंस्टीट्यूट, जिल्द, VI. भाग, 4, अगस्त, 1949, पृ० 283-88 ) । तक्षशिला के उत्खननों एवं भग्नावशेषों के लिए द्रष्टव्य, आर्क० स० इं० रि०, II, ( 1871 ), पृ०112 और आगे; V. ( 1875 ), 66 और आगे; XIV ( 1882 ), 8 और आगे; ए० रि० आर्क० स० इं०, 1912-13, (1916) ; आर्क० स० इं० ए० रि०, 1929-30, पृ० 55 और आगे; वही, 1930-34, पृ०149 176, एनुअल रिपोर्ट ऑव द आर्क्लॉजिकल सर्वे ऑव इंडिया, 1936-7 (1940 ) । विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य, जे० मार्शल, गाइड टु तक्षशिला, तृतीय संस्करण ( 1936 ) ; बि० च० लाहा, इंडोलॉजिकल स्टडीज़, भाग I, पृ० 14-17.
तमसा -- महाराज सर्वनाथ के खोह ताम्रपत्र-अभिलेख में इस नदी का वर्णन प्राप्त होता है, जो आधुनिक तमस या टोंस नदी है । यह नागौद के दक्षिण में महियार * से निकलती है और रीवां के उत्तरी भाग से बहती हुयी, इलाहाबाद से दक्षिण-पूर्व में लगभग 18 मील दूर गंगा में मिलती है ( का ० इं० इं० जिल्द, III ) । मार्कण्डेयपुराण (सर्ग, LVII, 22 ) में इस नदी का वर्णन है । पाजिटर के अनुसार यह इलाहाबाद के आगे गंगा में दाहिने तट पर मिलती है । कूर्मपुराण
* मध्यप्रदेश में एक भूतपूर्व रियासत ।
XLVII. 30 ) में इसका एक अन्य नाम तामसी भी बतलाया गया है। कुछ लोगों की मान्यता है कि तमसा या पूर्वी टोंस नदी फैजाबाद से निकलती है। आजमगढ़. से बहती हुयी यह बलिया के पश्चिम में गंगा में मिलती है। यह रामायण-ख्याति की एक ऐतिहासिक नदी मानी जाती है ( रामायण, आदिकाण्ड, द्वितीय सर्ग, श्लोक, 3 ) । राम ने अपना पहला पड़ाव इस नदी के तट पर किया था, जो गंगा से अधिक दूर नहीं थी और इसे पार कर के उन्होंने सड़क पकड़ कर यात्रा की थी और बाद में वह श्रीमती नदी पहुँचे । राम ने इस नदी की प्रशंसा की और इसमें स्नान करने की इच्छा की, क्योंकि यह पंक-हीन थी (रामायण, आदिकाण्ड, द्वितीय सर्ग, श्लोक, 4-6 ) । रघुवंश के अनुसार, दशरथ ने अनेक यज्ञ-यूप बनवा. कर इस नदी के तट को अरंकृत किया था ( IX 20 ) । इस नदी का तट सदैव मुनियों से भरा रहता था ( रघुवंश, IX. 72 ) । दक्षिण टेंस नदी ऋक्ष पर्वत से उत्तर पूर्व की ओर बहती हुयी इलाहाबाद के आगे गंगा में मिलती है। यह बाँई ओर से दो तथा दाहिनी ओर से दो उपनदियों द्वारा आपूरित है।
तामसवन- कनिंघम ने इसे पंजाब में सुल्तानपुर से समीकृत किया है । इसे रघुनाथपुर भी कहा जाता है ( ज० ए० सा० वं०, XVIII, पृ० 206, 479 ) 1 थूण ( स्थूण ) - स्थानेश्वर के अंतर्गत देखियं ।
त्रिगर्त - महाभारत (II, 48, 13 ) में वर्णित यह देश रावी एवं सतलज के मध्य स्थित था और इसकी राजधानी कहीं जालंधर के समीप थी । प्राचीन काल में यह काँकड़ा क्षेत्र का वाचक था ( मोचीचन्द्र, ज्यॉग्रफिकल ऐंड इकॉनॉमिक स्टडीज़ इन द महाभारत, उपायनपर्व, पू० 94 ) । दशकुमारचरितम् में त्रिगर्त्त देश में रहने वाले तीन समृद्ध गृहस्थों से संबंधित एक घटना का वर्णन है जो परस्पर भाई थे। उनके जीवन काल में निरंतर बारह वर्षों तक वर्षा नहीं हुयी; वृक्षों में फल नहीं लगे; वर्षालु बादल दुर्लभ थे; अनेक स्रोत एवं नदियाँ सूख गयीं थी तथा नगर, ग्राम, कस्बे तथा अन्य संनिवेश नष्ट हो गये थे, ( बृ० 150 - 151 ) । विस्तृत विवरण के लिए, द्रप्टव्य लाहा, ट्राइव्स इन ऐंश्येंट इंडिया, अध्याय, 12 ) ।
तृणविन्दु-श्राश्रम- प्रजापति के पुत्र पुलस्त्य यहाँ पर समाधि लगाने के लिए आये थे । यह मेरु पर्वत के किनारे स्थित था । जब वह वैदिक ऋचाओ का पाठ कर रहे थे, तृणविन्दु ऋषि की कन्या उसके समक्ष उपस्थित हुयी । पहले तो वह अभिशप्त हुई किंतु बाद में पुलस्त्य ने उससे विवाह कर लिया ।
तुलम्ब - - यह कस्बा रावी नदी के बाँयें तट पर मुल्तान के उत्तर-पूर्व में 52 मील दूर पर स्थित है (कनिंघम, एं० ज्यॉ० इं०, 1924, पृ० पृ० 257 ) । मूलतः | सोर्श -- हरयाणा के हिस्सार जिले में स्थित यह एक कस्बा है, जिसके समीपस्थ किसी एक टीले से एक अभिलेख प्राप्त हुआ था एक शिविपुर --शोरकोट अभिलेख के अनुसार शोरकोट का प्राचीन नाम शिविपुर या शिवपुर था, जो शिबियों की राजधानी थी । उत्तरापथ में स्थित शिवपुर या शिबियों की नगरी का वर्णन पाणिनि के भाष्यकार ने किया है । शिव या शिवि-जन इरावती एवं चन्द्रभागा नदियों के मध्य पंजाब में झंग के शोरकोट क्षेत्र में रहते थे और इसलिए इसे उत्तरापथ में संमिलित किया गया है। यह एक अत्यंत प्राचीन जाति प्रतीत होती है, जिसका उल्लेख संभवतः प्रथम बार ऋग्वेद में हुआ है । वे दीर्घकाल तक स्वतंत्र थे, क्योंकि इनका उल्लेख न केवल सिकंदर कालीन यूनानी भूगोलवेत्ता एवं इतिहासकार वरन् पाणिनि के भाष्यकार भी करते हैं। बाद में वे भारत के सुदूर दक्षिण में चले गये थे । ललितविस्तर और महावस्तु में शिविदेश को जम्बुद्वीप के सोलह महाजनपदों में से एक बतलाया गया है। अरिट्ठपुर शिवि जनपद की राजधानी थी । अरिट्ठपुर को संभवतः पंजाब के उत्तर में स्थित टॉलेमी की अरिस्तीबोथ्रा से समीकृत किया जा सकता है, जो संभवतः द्वारावती ही है । क्षेमेन्द्र की बोधिसत्त्वावदानकल्पलता में शिववती नगरी का वर्णन है, जिसे राजा शिवि द्वारा शिवि देश की राजधानी से समीकृत किया जा सकता है । प्राचीन यूनानी लेखकों ने पंजाब में स्थित सिबोइ के प्रदेश का उल्लेख किया है। विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य, बिशून्य चशून्य लाहा, इंडोलॉजिकल स्टडीज़, भाग, I पृशून्य शोण - यह गंगा की विज्ञात सबसे बड़ी निचली सहायक नदी है । एरियन की सोन, आधुनिक सोन् नदी, जबलपुर जिले में मैकाल पर्वत - माला से निकलकर उत्तर पूर्व की ओर बघेलखंड, मिर्जापुर और शाहाबाद जिलों से गुजरती हुई पटना के समीप गंगा में मिलती है । रामायण के अनुसार यह सुरम्या नदी गिरिव्रज को परिवृत करने वाली दो पहाड़ियों और मगध से होती हुयी प्रवाहित होती है और इस कारण इसे मागधी कहा जाता था । पद्मपुराण में इस बड़ी नदी का उल्लेख किया गया है। पुराणों में इसे ऋक्ष पर्वतमाला से निकलने वाली महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक बतलाया गया है । इस नदी को पार करके दधीचि अपने पिता की तपोभूमि में पहुँचे थे । कालिदास ने अपने रघुवंश में इसका उल्लेख किया है । मगध में राजगृह होकर बहने वाली इसके प्रवाह को सम्भवतः सुमागधा या सुमागधी कहा जाता था । यह बघेलखंड में पाँच सहायक नदियों, मिर्जापुर जिले में चार, पालामऊ और शाहाबाद जिले प्रत्येक में एक-एक नदी द्वारा आपूरित होती है। यह नदी पटना के पहले ही गंगा में मिलती है । विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य बिशून्य चशून्य लाहा, रिवर्स ऑव इंडिया, पृशून्य दो सौ इकसठ सोरों - - इसका प्राचीन नाम सुकरक्षेत्र या सद्कार्यों का क्षेत्र था । यह कस्बा बरेली से मथुरा के राजपथ पर, गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित था । यह उशून्य प्रशून्य के इटावा जिले में स्थित था I शृंगवेरपुर -- बताया जाता है कि राम ने यहाँ पर गंगा को पार किया था। कनिंघम ने इसे सिंगरौर से समीकृत किया है, जो इलाहाबाद से पश्चिमोत्तर में बाईस मील दूर एक बहुत ऊँचे कगार पर स्थित है । स्रुघ्न - - यह थानेश्वर से अड़तीस या चालीस मील दूर पर स्थित था । युवान- च्वाङ् ने इसे सु-लुकिन-ना कहा है। इसकी परिधि एक,शून्य मील थी । यह पूर्व में गंगा तक तथा उत्तर में एक उच्च पर्वतमाला तक फैला हुआ था जब कि यमुना इसके मध्य से बहती थी । कनिंघम के अनुसार, इसमें अवश्यमेव गिरि तथा गंगा नदियों के बीच में स्थित अंबाला और सहारनपुर जिले के कुछ भागों समेत, गढ़वाल और सिरमौर के पहाड़ी इलाके संमिलित थे । । स्थानेश्वर -- यह प्राचीन भारत के प्राचीनतम स्थानों में से एक था । इसका नाम या तो ईश्वर अथवा महादेव का निवास स्थान होने के कारण, स्थान से या स्थाणु एवं ईश्वर के नामों के संयोग से ग्रहण किया गया । युवान- च्वाङ् ने इसे स-त-नि-शि-फा- लो कहा है, जिसकी परिधि एक, एक सौ मील से भी अधिक थी । वाण के हर्षचरित् के अनुसार यह श्रीकण्ठजनपद की राजधानी थी। कुरुक्षेत्र नामक प्रसिद्ध रणक्षेत्र थानेश्वर के दक्षिण की ओर, अंबाला से लगभग तीस मील दक्षिण में और पानीपत से चालीस मील उत्तर में स्थित है। इस नगर में एक प्राचीन एवं जीर्ण किला था, जो सिरे पर लगभग एक हज़ार दो सौ फीट का वर्गाकार था, । एसशून्य एनशून्य मजूमदार ने इसे विनय महावग्ग और दिव्यावदान में वर्णित थून से समीकृत करने का सुझाव रखा है। थून ब्राह्मणों का एक गाँव था जो मध्यदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित था । शुक्तिमती -- महाराजा वैश्रवण के शासनकाल में एक सौ सात वर्षाकित कोसम अभिलेख में इस स्थान का उल्लेख प्राप्त होता है जो संभवतः कौशाम्बी के समीप स्थित था । चेतिय जातक में इसे सोत्थिवती नगर कहा गया है । यह चेदि-नरेश धृष्टकेतु की राजधानी थी । यह शुक्तिमती नदी के तट पर स्थित था, जो महा भारत के अनुसार भारतवर्ष की एक नदी थी । सुमेरु -- पद्यपुराण तथा कालिकापुराण में इसका उल्लेख किया गया है। शिव ने इसका शिखर देखा था । इस पर्वत से जम्बु नदी निकलती है । यह सिनेरु या मेरु पर्वत ही । सुंसुमारगिरि -- यह मर्ग देश में था । यह मेसकलावन के किसी मृगवन में स्थित था । यह एक नगर था तथा इसकी राजधानी का यह नाम इसलिए था कि इसके निर्माण के प्रथम दिन ही निकटवर्ती एक झील में किसी कच्छप ने शोर मचाया था । वत्सराज उदयन एवं उसकी रानी वासवदत्ता का पुत्र, राजकुमार बोधि इस पहाड़ी पर रहता था और उसने यहाँ पर कोकनद नामक एक प्रासाद बनवाया था। बौद्ध अनुश्रुतियों के अनुसार यह भर्ग राज्य की राजधानी थी, और इसका प्रयोग एक दुर्ग के रूप में किया जाता था । कुछ विद्वानों ने इसे वर्तमान चुनार पहाड़ी से समीकृत किया है । इस पहाड़ी पर निवास करने वाले एक धनी गृहस्थ ने अपनी पुत्री का विवाह अनाथपिण्डिक क़े के पुत्र के साथ किया था एक सुन्दरिका -- यह प्राचीन भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है । यह • कोशल की एक नदी थी जो अतिसंभवतः अचिरावती या राप्ती की सहायक नदी थी । यह श्रावस्ती से अधिक दूर नहीं थी । सुनेत -- इसके भग्नावशेष पंजाब के लुधियाना जिले में स्थित हैं, जो लुधियाना नगर से तीन मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित है । सुवर्णगुहा - यह चित्रकूट पर्वत पर है जो हिमालय क्षेत्र में स्थित है । श्वेतपर्वत - - यह हिमालय में तिब्बत के पूर्व में स्थित है । तक्षशिला -- - यह गन्धार जनपद की राजधानी थी । पाणिनि एवं पतञ्जलि ने क्रमशः अपनी अष्टाध्यायी और महाभाष्य में इसका वर्णन किया है। इसका उल्लेख प्रथम कलिंग शिलालेख में है। अशोक के शासनकाल में तक्षशिला में, जो सदैव एक विद्रोहशील प्रांत था प्रांताधिपति के रूप में एक कुमार की नियुक्ति की गयी थी । शिलालेखों में अशोक के शासनकाल के प्रारंभिक वर्षों का उल्लेख किया गया है, जब तक्षशिला में इस प्रकार की कोई अशांति नहीं थी । एरियन ने इस नगर को विशाल, समृद्ध एवं जनाकीर्ण बतलाया है। स्ट्रेबो ने यहाँ की भूमि की उर्वरता की प्रशंसा की हैं । प्लिनी ने इसे एक प्रसिद्ध नगर बतलाया है, और कहा है कि यह पहाड़ियों की तलहटी में समतल में स्थित था। कहा जाता है कि पहली शती ईशून्य के मध्य यहाँ पर ट्र्याना का अपोलोनियस तथा उसका साथी दमिस आया था, जिन्होंने इसे निनेवा के आकार का बतलाया है, जो पतली किंतु सुव्यवस्थित सड़कों से युक्त किसी यूनानी नगर की भाँति प्राकारयुक्त था । सिकंदर के वंशानुगत होने के लगभग अस्सी वर्षों के पश्चात् तक्षशिला पर अशोक का आधिपत्य हो गया था। सातवीं शती ईशून्य में युवान - च्वाङ् इस नगर में आया था, जब यह कश्मीर का एक अधीनस्थ राज्य था। चीनी यात्री के अनुसार तक्षशिला की परिधि दो,शून्य ली से तथा इसकी राजधानी की परिधि दस ली से अधिक थी । यहाँ की भूमि उर्वर थी और यहाँ पर प्रवाहशील नदियों के कारण अच्छी पैदावार और प्रचुर वनस्पति एक एचशून्य एवं एफशून्य द्वारा अनूदित, III, दस नब्बे. होती थी । यहाँ की जलवायु स्वास्थ्यवर्धक थी तथा यहाँ के निवासी बौद्ध धर्म के अनुयायी थे । यद्यपि यहाँ पर अनेक विहार थे, किन्तु उनमें कुछ निर्जन हो चुके थे । यहाँ पर कुछ एक विहारों में रहने वाले भिक्षु महायान धर्मावलंबी थे । बौद्ध एवं जैन कहानियों में इसका वर्णन प्रमुख रूप से किया गया है । यह प्राचीन भारत में शिक्षा का एक महान केंद्र था। विविध कलाओं एवं शास्त्रों के अध्ययन के लिए भारत के विभिन्न भागों से यहाँ विद्यार्थी आते थे । कोशलनरेश प्रसेनजित् और मगध - नरेश बिम्बसार के विख्यात राजवैद्य जीवक की शिक्षा यहीं पर हुयी थी । उस समय के विद्यार्थी जीवन का एक अति सुंदर चित्र एक जातक में प्रस्तुत किया गया है । इस नगर को पश्चिमी पंजाब के रावलपिंडी जिले में स्थित आधुनिक तक्षशिला से समीकृत किया गया है। इस पुर को मद्रशिला भी कहा जाता था और कालांतर में इसका नाम तक्षशिला पड़ा, क्योंकि यहीं पर एक ब्राह्मण-भिक्षुक ने राजा चन्द्रप्रभ का शिरोच्छेद किया था । भद्रशिला नामक नगर वैभवयुक्त, समृद्ध एवं जनसंकुल था । लंबाई-चौड़ाई में यह नगर बारह योजन था तथा यह चार तोरणों द्वारा सुविभक्त और ऊँचे महराबों एवं गवाक्षों द्वारा सज्जित था । हिमालय के उत्तर में स्थित यह नगर चन्द्रप्रम नामक राजा के शासनांतर्गत था । इस नगर में एक राजोद्यान था । बोधिसत्त्वावदान-कल्पलता, के अनुसार जब कुणाल इसे जीतने के लिए भेजा गया था, तव तक्षशिला राजा कुंजरकर्ण के अधीन थी । दिव्यावदान से ऐसा प्रतीत होता है कि तक्षशिला अशोक के पिता मगध-नरेश बिन्दुसार के साम्राज्य में संमिलित थी । तक्षशिला, जो गन्धार की प्राचीन राजधानियों में से एक थी, सिन्धु नदी के पूर्व में स्थित थी । कनिंघम के विचार से तक्षशिला शाह-ढेरी के समीप काल-कासराय के ठीक एक मील उत्तर-पूर्व में, किसी दुर्गीकृत नगर के विस्तृत भग्नावशेषों में जिनके परितः कम से कम पचपन स्तूप, अट्ठाइस विहार और नौ मंदिर पाये गये थे, स्थित है। शाह- ढोरी से ओहिंद की दूरी छत्तीस मील और ओहिंद से हश्त - नगर की दूरी अड़तीस मील है । इस प्रकार कुल दूरी चौहत्तर मील है, जो प्लिनी द्वारा एक संप्रति पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित । बतलायी गई तक्षशिला और पुष्कलावती के बीच की दूरी से उन्नीस मील अधिक है । इस असंगति का समाधान करने के लिए कनिंघम ने साठ मील को अस्सी मील पढ़ने का सुझाव रखा है जो तिहत्तर½ अंग्रेजी मीलों के बराबर है या जो दोनों स्थानों के मध्य की वास्तविक दूरी से केवल आधा मील कम है । डॉशून्य भंडारकर का मत है कि अशोक के शासन काल में तक्षशिला गन्धार की राजधानी नहीं थी, क्योंकि उसके तेरहवें शिलाशासन से यह व्यक्त होता है कि गन्धार उसके खास राज्य में नहीं था, जबकि कलिंग के प्रथम शासन से यह स्पष्ट है कि तक्षशिला प्रत्यक्षतः उसके अधीन था, क्योंकि उसका एक पुत्र वहाँ पर नियुक्त किया गया था। यह तथ्य कि तक्षशिला उस समय गंधार की राजधानी नहीं थी, टॉलेमी के इस कथन से पुष्ट होता है कि गंडराई देश अपने प्रोक्लाइस - पुष्करावती नगर समेत सिंधु नदी के पश्चिम में स्थित था । तक्षशिला के उत्खननों एवं भग्नावशेषों के लिए द्रष्टव्य, आर्कशून्य सशून्य इंशून्य रिशून्य, II, , पृएक सौ बारह और आगे; V. , छयासठ और आगे; XIV , आठ और आगे; एशून्य रिशून्य आर्कशून्य सशून्य इंशून्य, एक हज़ार नौ सौ बारह-तेरह, ; आर्कशून्य सशून्य इंशून्य एशून्य रिशून्य, एक हज़ार नौ सौ उनतीस-तीस, पृशून्य पचपन और आगे; वही, एक हज़ार नौ सौ तीस-चौंतीस, पृएक सौ उनचास एक सौ छिहत्तर, एनुअल रिपोर्ट ऑव द आर्क्लॉजिकल सर्वे ऑव इंडिया, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस-सात । विस्तृत विवरण के लिए द्रष्टव्य, जेशून्य मार्शल, गाइड टु तक्षशिला, तृतीय संस्करण ; बिशून्य चशून्य लाहा, इंडोलॉजिकल स्टडीज़, भाग I, पृशून्य चौदह-सत्रह. तमसा -- महाराज सर्वनाथ के खोह ताम्रपत्र-अभिलेख में इस नदी का वर्णन प्राप्त होता है, जो आधुनिक तमस या टोंस नदी है । यह नागौद के दक्षिण में महियार * से निकलती है और रीवां के उत्तरी भाग से बहती हुयी, इलाहाबाद से दक्षिण-पूर्व में लगभग अट्ठारह मील दूर गंगा में मिलती है । मार्कण्डेयपुराण में इस नदी का वर्णन है । पाजिटर के अनुसार यह इलाहाबाद के आगे गंगा में दाहिने तट पर मिलती है । कूर्मपुराण * मध्यप्रदेश में एक भूतपूर्व रियासत । XLVII. तीस ) में इसका एक अन्य नाम तामसी भी बतलाया गया है। कुछ लोगों की मान्यता है कि तमसा या पूर्वी टोंस नदी फैजाबाद से निकलती है। आजमगढ़. से बहती हुयी यह बलिया के पश्चिम में गंगा में मिलती है। यह रामायण-ख्याति की एक ऐतिहासिक नदी मानी जाती है । राम ने अपना पहला पड़ाव इस नदी के तट पर किया था, जो गंगा से अधिक दूर नहीं थी और इसे पार कर के उन्होंने सड़क पकड़ कर यात्रा की थी और बाद में वह श्रीमती नदी पहुँचे । राम ने इस नदी की प्रशंसा की और इसमें स्नान करने की इच्छा की, क्योंकि यह पंक-हीन थी । रघुवंश के अनुसार, दशरथ ने अनेक यज्ञ-यूप बनवा. कर इस नदी के तट को अरंकृत किया था । इस नदी का तट सदैव मुनियों से भरा रहता था । दक्षिण टेंस नदी ऋक्ष पर्वत से उत्तर पूर्व की ओर बहती हुयी इलाहाबाद के आगे गंगा में मिलती है। यह बाँई ओर से दो तथा दाहिनी ओर से दो उपनदियों द्वारा आपूरित है। तामसवन- कनिंघम ने इसे पंजाब में सुल्तानपुर से समीकृत किया है । इसे रघुनाथपुर भी कहा जाता है एक थूण - स्थानेश्वर के अंतर्गत देखियं । त्रिगर्त - महाभारत में वर्णित यह देश रावी एवं सतलज के मध्य स्थित था और इसकी राजधानी कहीं जालंधर के समीप थी । प्राचीन काल में यह काँकड़ा क्षेत्र का वाचक था । दशकुमारचरितम् में त्रिगर्त्त देश में रहने वाले तीन समृद्ध गृहस्थों से संबंधित एक घटना का वर्णन है जो परस्पर भाई थे। उनके जीवन काल में निरंतर बारह वर्षों तक वर्षा नहीं हुयी; वृक्षों में फल नहीं लगे; वर्षालु बादल दुर्लभ थे; अनेक स्रोत एवं नदियाँ सूख गयीं थी तथा नगर, ग्राम, कस्बे तथा अन्य संनिवेश नष्ट हो गये थे, । विस्तृत विवरण के लिए, द्रप्टव्य लाहा, ट्राइव्स इन ऐंश्येंट इंडिया, अध्याय, बारह ) । तृणविन्दु-श्राश्रम- प्रजापति के पुत्र पुलस्त्य यहाँ पर समाधि लगाने के लिए आये थे । यह मेरु पर्वत के किनारे स्थित था । जब वह वैदिक ऋचाओ का पाठ कर रहे थे, तृणविन्दु ऋषि की कन्या उसके समक्ष उपस्थित हुयी । पहले तो वह अभिशप्त हुई किंतु बाद में पुलस्त्य ने उससे विवाह कर लिया । तुलम्ब - - यह कस्बा रावी नदी के बाँयें तट पर मुल्तान के उत्तर-पूर्व में बावन मील दूर पर स्थित है । मूलतः |
कट्टर प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कई सालों से कोई भी क्रिकेट सीरीज का आयोजन न तो भारत में हुआ है और न ही पाकिस्तान में। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपने हालिया बयान में भविष्य में भारत को अपनी हिस्सेदारी और उनकी इच्छा को स्पष्ट करने के लिए स्पष्ट किया है। लेकिन बता दें कि भारत में क्रिकेट बोर्ड ऑफ कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) न तोविवाद को भूल रहा है और न ही पड़ोसी देश में खेलने के लिए बिल्कुल स्पष्ट बोल रहा है, जब तक कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में कोई बदलाव नहीं होता है तब तक शायद यही चलता रहेगा।
इसी बीच पीसीबी के अध्यक्ष नजम सेठी ने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया है कि दुनिया भर में सभी टीमें टीम इंडिया के साथ खेल खेलना चाहती हैं क्योंकि इससे उन्हें बेहतर रिटर्न अर्जित करने में मदद मिलती है।
आपको बता दें कि 2018 में होने वाले एशिया कप की मेजबानी के बारे में बीसीसीआई ने कहा है कि, वे टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित करने के बारे में निश्चित नहीं हैं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 2019 में शुरू होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से 201 9 में नहीं रखा हैं। बता दें कि इन दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक संबंध है जिसके कारण भारत और पाकिस्तान के बीच आईसीसी के टूर्नामेंट के अलावा कोई भी मुकाबला नहीं हो पा रहा है।
सेठी ने इस तथ्य का उल्लेख किया है कि इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स भारत से होते हैं, जिससे यह काफी पैसा कमाते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में प्रत्येक आईसीसी सदस्य मौद्रिक कारकों पर ध्यान देकर भारतीय टीम के साथ खेलना चाहते है और खेल के इस स्तर पर प्रतिस्पर्धी आत्माओं के कारण भी होता है।
| कट्टर प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कई सालों से कोई भी क्रिकेट सीरीज का आयोजन न तो भारत में हुआ है और न ही पाकिस्तान में। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने हालिया बयान में भविष्य में भारत को अपनी हिस्सेदारी और उनकी इच्छा को स्पष्ट करने के लिए स्पष्ट किया है। लेकिन बता दें कि भारत में क्रिकेट बोर्ड ऑफ कंट्रोल बोर्ड न तोविवाद को भूल रहा है और न ही पड़ोसी देश में खेलने के लिए बिल्कुल स्पष्ट बोल रहा है, जब तक कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में कोई बदलाव नहीं होता है तब तक शायद यही चलता रहेगा। इसी बीच पीसीबी के अध्यक्ष नजम सेठी ने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया है कि दुनिया भर में सभी टीमें टीम इंडिया के साथ खेल खेलना चाहती हैं क्योंकि इससे उन्हें बेहतर रिटर्न अर्जित करने में मदद मिलती है। आपको बता दें कि दो हज़ार अट्ठारह में होने वाले एशिया कप की मेजबानी के बारे में बीसीसीआई ने कहा है कि, वे टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित करने के बारे में निश्चित नहीं हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने दो हज़ार उन्नीस में शुरू होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से दो सौ एक नौ में नहीं रखा हैं। बता दें कि इन दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक संबंध है जिसके कारण भारत और पाकिस्तान के बीच आईसीसी के टूर्नामेंट के अलावा कोई भी मुकाबला नहीं हो पा रहा है। सेठी ने इस तथ्य का उल्लेख किया है कि इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स भारत से होते हैं, जिससे यह काफी पैसा कमाते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में प्रत्येक आईसीसी सदस्य मौद्रिक कारकों पर ध्यान देकर भारतीय टीम के साथ खेलना चाहते है और खेल के इस स्तर पर प्रतिस्पर्धी आत्माओं के कारण भी होता है। |
Mesh Rashifal 16 March 2022 Aries Horoscope Today : भाग्य के बजाय कर्म पर विश्वास रखें। घर और व्यापार दोनों में उचित सामंजस्य रहेगा। आसपास की यात्रा भी संभव है जो फायदेमंद रहेगी। रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ कुछ समय बिताने से भी रिश्ते मजबूत होंगे। इस समय केवल अपनी दो कमियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। वह क्रोधी और जिद्दी है।
इस समय आमदनी में कमी और ख़र्चों की अधिकता के कारण कभी-कभी मन थोड़ा परेशान रह सकता है। लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए तनाव लेना उचित नहीं है। मौजूदा परिस्थितियों के चलते मंदी का असर आपके कारोबार पर भी पड़ा है। हिम्मत रखें, जल्द ही परिस्थितियां अनुकूल होने वाली हैं।
अपनी कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव करें। नौकरीपेशा लोगों के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। घर में सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में भी मधुरता बढ़ेगी। कभी-कभी मनोबल में कमी और निराशा की भावना रहेगी। प्रकृति के पास कुछ समय बिताएं और ध्यान करें।
| Mesh Rashifal सोलह मार्चch दो हज़ार बाईस Aries Horoscope Today : भाग्य के बजाय कर्म पर विश्वास रखें। घर और व्यापार दोनों में उचित सामंजस्य रहेगा। आसपास की यात्रा भी संभव है जो फायदेमंद रहेगी। रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ कुछ समय बिताने से भी रिश्ते मजबूत होंगे। इस समय केवल अपनी दो कमियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। वह क्रोधी और जिद्दी है। इस समय आमदनी में कमी और ख़र्चों की अधिकता के कारण कभी-कभी मन थोड़ा परेशान रह सकता है। लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए तनाव लेना उचित नहीं है। मौजूदा परिस्थितियों के चलते मंदी का असर आपके कारोबार पर भी पड़ा है। हिम्मत रखें, जल्द ही परिस्थितियां अनुकूल होने वाली हैं। अपनी कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव करें। नौकरीपेशा लोगों के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। घर में सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में भी मधुरता बढ़ेगी। कभी-कभी मनोबल में कमी और निराशा की भावना रहेगी। प्रकृति के पास कुछ समय बिताएं और ध्यान करें। |
4 मई 2022, इंदौर । जबलपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा हुई - मौसम केंद्र , भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 24 घंटों में प्रदेश के जबलपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज़ की गई। शेष संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा। सर्वाधिक तापमान नौगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया। सतना जिले के कई क्षेत्रों में तेज़ आंधी के साथ बारिश होने और कोटर क्षेत्र में ओले गिरने की भी खबर है।
पूर्वी मध्य प्रदेश - नरसिंहपुर (तेंदूखेड़ा - 7. 0), छिंदवाड़ा (चांद - 4. 2, चौराई - ट्रेस ), जबलपुर (सिटी - 1. 2),
सिवनी (सिटी & बरघाट -ट्रेस ) की गई।
| चार मई दो हज़ार बाईस, इंदौर । जबलपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा हुई - मौसम केंद्र , भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले चौबीस घंटाटों में प्रदेश के जबलपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज़ की गई। शेष संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा। सर्वाधिक तापमान नौगांव में चौंतालीस डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया। सतना जिले के कई क्षेत्रों में तेज़ आंधी के साथ बारिश होने और कोटर क्षेत्र में ओले गिरने की भी खबर है। पूर्वी मध्य प्रदेश - नरसिंहपुर , छिंदवाड़ा , जबलपुर , सिवनी की गई। |
भाव र्थ - हे आत्मन् ! तू इतनी आकुलता और सङ्कट में पड़ा हुआ है कि उसके अन्दर तु किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया है । और तेरा जीव हमेशा इतना व्याकुल रहता है कि क्या करना चाहिए बागवा क्या नहीं करना चाहिए इसका तुझे कुछ भी भान नहीं
। मां हे आत्मन् ! तू सोच विचार कि इतनी आकुलता से तुझे क्या मिलेगा । जो कुछ तुझे मिलना है वह तो पूर्व भव के पुराय से मिल जायगा फर व्यर्थ आकुलता करने से क्या लाभ क्योंकि लाभ तो स्व पर कल्याण करने से ही होगा।
इसलिये हमेशाँ उत्तम कर्तव्य को करते रहना चाहिये तबही तेरी आत्मा में निराकुलता रहेगी। इसी प्रकार आत्मन् ! तू साल बन और विश्व में समस्त प्राणियों को निराकुल बनाने का प्रयत्न कर, क्योंकि दुनिया में निराकुलता ही सुख है और आकुलता ही दुःख है इसी तरह सोच विचार कर प्रत्येक प्राणमात्र को शांति धैर्यपूर्वक कार्य करते रहना चाहिए ।
म्यात्मवत्प्राणिमात्राणामुपर्शर न दया कृता ।
मन्ये ऽहं तत्सगं पापं महदन्यः कृतं न कौ ॥ ३४ ॥
संस्कृतार्थ - यथा स्वात्मनि दयाविधानमिप्यते तद्वदेव हि आत्मन् ! यदि त्वया सर्वेषां जीवानमुपरि दया करुणा न कृता तदा त्वत्सर्ग, महत्पापं को लोके अन्यैः न कृतं इत्यहं मन्ये ।
अर्थ - यदि अपने समान ही सच जीवों को तूने दया दृष्टि से नहीं देखा तो हैन ! तेरे समान स दुनिया में किसी ने पार नहीं किया ।
भावार्थी-अपने प्राणों का मूल्य समझते है उसी भांति यदि सबके प्राणों की भी रक्षा का ध्येय रखा जाय तो सर्वत्र गांति ही रहती है। यदि किसीने दूसरों के प्राणों को तुच्छ समझ कर दया रहित प्रवृत्ति की तो वहीं से व्यवस्था भन्न हो जाती है, इसलिए दया रहित क्रूर परिणाम या क्रिया ही सक रापों का आदि स्रोत निकास है। अतएव सम्पूर्ण बुद्धिमान पुरुषों को अपने मन को समझाना चाहिए कि दूसरों के प्रति कठोरता के भाव न रक्खें जिससे विश्व की शांति व्यवस्था स्थिर रहें। बस यही भाव सत्र जीव रक्खें तो संसार में सच्ची बन्धुता प्रगट हो जावे, जिसका कि प्रत्येक मनुष्य को प्राप्त करना प्रधान कर्तव्य है। तथा अपने प्राणों की रक्षा करना और दूसरों के प्राणों की हत्या करना यह पशुओं का आचरण है क्योंकि उनमें [ पशुओं में ] विवेक नहीं है । यदि पशुओं से मनुष्यों में अन्तर है तो केवल विवेकता ही है, और अपने प्राणों के समान विश्व के सम्पूर्णा प्राणियों की हर तरह से रक्षा करना ही विवेक है, और यही मनुष्य-कर्तव्य है। इसके बिना हे आत्मन् ! तू मले ही अपने को मनुष्य व बुद्धिमान समझ किन्तु तू पशु के समान है। इस प्रकार
प्रत्येक मनुष्यको प्रति दिन अपनी आत्मा को समझाना चाहिए ।
येन केनाप्युपायेन स्वात्मा बुद्धो निरञ्जनः । भवेन्मानन्द मूर्तिहि कुरु कार्यन तथा वरम् ॥ २३ ॥
संस्कृत - येन केनापि उपायेन रीत्या स्वम्यात्मा जोवः बुद्धः ज्ञानमयः निरञ्जनः निर्लेपः; स्वस्थानन्दमेव मूर्तिर्गस्य सः एवंभूतः भवेत् तथा तेन प्रकारेण वरं श्रेष्ठ कार्यम् कर्तव्यं कुरु सम्पादेयम् ।।
अर्थ - जिस किसी भी उपाय से अपनी आत्मा ज्ञानमय निर्विकार आनन्दमूर्ति बन जावे, उसी तरह अपने श्रेष्ठ कर्तव्य
का आचरण कर ।
भावार्थ- हे आत्मन् ! आत्माको निर्विकारी निरञ्जन बनाना हो नर जन्म का फल है और शुद्ध आत्मा को बनाने के लिए तु के बड़ी बड़ी आपत्तियां सहन करनी पड़ेंगी। जैसे कि सौ बार तपाया हुआ ही सोना कण्ठ में पहनने लायक हो जाता है इसी तरह से उत्तम मोती, हीरा इत्यादि चीजों को कूट मार से परीक्षा करके ही कण्ठ में पहनाया जाता है और उसकी परीक्षा की जाती है। और मूर्ति जब खूब मार खाती है तभी पूजने योग्य बनती है, इसी तरह से दूध भी खूब मंथन किया जाय तमो उसमें से दो खाने योग्य निकलता है। इसी तरह है
हे आत्मन ! तुझे भी निर्विकार होने के लिए अनेक भव से अभ्यास करना पड़ता है और उसके अन्दर तुझे कोई जहर भी विचएगा तो उनको हर तरह से तुझे अमृत पिलाने का प्रयत्न करना पड़ेगा, तब कहीं तेर आत्मा शुद्ध बुद्ध चिद्रूप परमानन्द मूर्ति निर्विकारी जीवनमुक्त बनेगा न कि विषय कषाय आदि में पड़े रहने से, मौज मजा करने से तेरा आत्मा निर्विकारी वा जीवनमुक्त बनेगा ।
इसलिए तु हर तरह से अपनी आत्मा को शनैः शनैः प्रयत्न करके निर्विकारी सर्व सत्यागी बनाने का प्रयत्न कर । क्योकि यह अनादिकाल का ससगं है अतः एकदम आत्मा शुद्ध नहीं बन सकेंगी जसे एक २ अक्षर पढ़ने वाला विद्यार्थी महान पण्डित जाता है एवं वाल्यकाल से अभ्यास करता हुआ वतास वर्ष तक अभ्यास करेगा तभी व्याकरण, न्याय आदि का ज्ञाता बनता है। और एक एक बूँद पानी मिल कर नाला बनता है और कई नाने मिल कर नदी; क कई नांदयाल कर बड़ा भारी समुद्र बनता है । तथा इसी प्रकार एक एक कण अनाज मिल कर बड़ी भारी धान्यराशि एकत्रित होती है । इसके अनुसार हे आत्मन् ! तू एक एक भन् में एक एक विषय कषाय व मान का त्याग करेगा तो अवश्य ही एक दिन र निर्विकारी सर्व संग परित्यागी नारायण बनेगा। इसमें कोई सन्देह नहीं । अतः तु स्वयं कायरता एवं
निराशता को छोड़ कर
करेगा तो अवश्य अपनी
आत्मा को परमात्मा बना सकेगा। इसी प्रकार प्रत्येक मानव-मात्र को अपनी आत्मा को समझाना चाहिए । यह कार्य में कसे करूंगा कैसे होगा, इस प्रकार निराशतापूर्वक विचार करना मनुष्य का कर्तव्य नहीं ह
मनुष्य का कर्तव्य तो यह है कि आई हुई घोर आपको भी लात मार कर उत्साह पूर्वक कार्य करना चाहिये जिसमें आत्मा परमात्मा बन जायगी और विश्व शांति होगी ।
बुद्धेः सुयुद्धं भवितव्य मेत्र, मिथो नराणां भुवि विश्वशांत्यै । स्वप्नेऽणि नव्या नर नाशकारी, नीर्वायुयानादिक यंत्रकानां । संस्कृ ॥र्थ बुद्धेः मतेः विचारस्य वा, युडे, मननं, चित्तचिन्तनं परस्परं संकापनं भुवि लोके केषां ! नराणां विश्वशां प्राणिमात्राणां शांत्यर्थ न खलु स्वमान स्त्यात्यादि वृद्धयर्थं भवितव्यं अवश्यमेव किन्तु स्वप्नेऽपि स्वप्नावस्थायामपि नर संहारकं नौका चायुयानं धुम्रशकटादिकानां युद्धे कदापि नैव भवितन्यं इतितु मानवजाति मात्रैः चिन्तनीयं यतो नर जन्म सफलं भवेत् तथा च विश्व शांतिः भवेत् ।
अर्थ- मनुष्यों को संसार में विश्व की शांति के लिये परस्पर बुद्ध का युद्ध अर्थात् विचार तर्क आदिद्वारा युद्ध करना चाहिये किन्तु स्वप्न में भी मनुष्यों का नाश करने वाले वायुयान जहाज
बम तोप इत्यादि द्वारा युद्ध नहीं करना चाहिये । बावार्य - विश्व में दो जातियां हैं- एक तो मनुष्य जाति व दूसरी पशु जाति; इन दोनों के चाल चलन, आचार विचार आदि प्रत्येक कियाओं में रात दिन का अंतर
इसलिये पशु में यह बुद्धि नहीं कि प्राणी मात्र का हित करना मेरा कर्तव्य है केवल खाने पीने, व विषयों में ही उनकी बुद्धि दौड़ती है। और उसी विषय की पुष्टो के
खाने पीने आदि के उद्देश से गधा जिस तरह से दूसरे को लात मारता है तथा कुत्ता व्याघ्र आदि अपने दांतों से दूसरों को काटने 6 तथा नाखुनों से दूसरे प्राणियों का संहार करते हैं एवं बलवान बैल आदि दुर्बल प्राणियों को मार कर भगा देते हैं। और आप स्वयं उन्मत्त हो कर फिरते हैं यदि यही वृत्ति मनुष्यों में रहे तो फिर पशुओं में और मनुष्यों में क्या मेद रहा ? मनुष्य जाति मात्र का आपस में लड़ना व लड़ाना धर्म नहीं है । मनुष्य यह कार्य लड़ना झगड़ना पशुओं से सीखता है अथवा पशु सरीखे ही देश में व राष्ट्र में मनुष्य हों उनसे सीखता है। इसलिये यह स्वभाव सिद्ध है कि लड़ना झगड़ना मनुष्यों का लक्षण नहीं है । अतः मानव जाति मात्र का वायुयान, जहाज, दोप टैंक बम इत्यादिक वैज्ञानिक यंत्रों से परस्पर में लड़ना यह अपने ही खन्न से अपना ही गला काटने के बराबर हुआ क्योंकि जितने भी वैज्ञानिक आविष्कार बनाये हैं ये सम्पूर्ण | भाव र्थ - हे आत्मन् ! तू इतनी आकुलता और सङ्कट में पड़ा हुआ है कि उसके अन्दर तु किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया है । और तेरा जीव हमेशा इतना व्याकुल रहता है कि क्या करना चाहिए बागवा क्या नहीं करना चाहिए इसका तुझे कुछ भी भान नहीं । मां हे आत्मन् ! तू सोच विचार कि इतनी आकुलता से तुझे क्या मिलेगा । जो कुछ तुझे मिलना है वह तो पूर्व भव के पुराय से मिल जायगा फर व्यर्थ आकुलता करने से क्या लाभ क्योंकि लाभ तो स्व पर कल्याण करने से ही होगा। इसलिये हमेशाँ उत्तम कर्तव्य को करते रहना चाहिये तबही तेरी आत्मा में निराकुलता रहेगी। इसी प्रकार आत्मन् ! तू साल बन और विश्व में समस्त प्राणियों को निराकुल बनाने का प्रयत्न कर, क्योंकि दुनिया में निराकुलता ही सुख है और आकुलता ही दुःख है इसी तरह सोच विचार कर प्रत्येक प्राणमात्र को शांति धैर्यपूर्वक कार्य करते रहना चाहिए । म्यात्मवत्प्राणिमात्राणामुपर्शर न दया कृता । मन्ये ऽहं तत्सगं पापं महदन्यः कृतं न कौ ॥ चौंतीस ॥ संस्कृतार्थ - यथा स्वात्मनि दयाविधानमिप्यते तद्वदेव हि आत्मन् ! यदि त्वया सर्वेषां जीवानमुपरि दया करुणा न कृता तदा त्वत्सर्ग, महत्पापं को लोके अन्यैः न कृतं इत्यहं मन्ये । अर्थ - यदि अपने समान ही सच जीवों को तूने दया दृष्टि से नहीं देखा तो हैन ! तेरे समान स दुनिया में किसी ने पार नहीं किया । भावार्थी-अपने प्राणों का मूल्य समझते है उसी भांति यदि सबके प्राणों की भी रक्षा का ध्येय रखा जाय तो सर्वत्र गांति ही रहती है। यदि किसीने दूसरों के प्राणों को तुच्छ समझ कर दया रहित प्रवृत्ति की तो वहीं से व्यवस्था भन्न हो जाती है, इसलिए दया रहित क्रूर परिणाम या क्रिया ही सक रापों का आदि स्रोत निकास है। अतएव सम्पूर्ण बुद्धिमान पुरुषों को अपने मन को समझाना चाहिए कि दूसरों के प्रति कठोरता के भाव न रक्खें जिससे विश्व की शांति व्यवस्था स्थिर रहें। बस यही भाव सत्र जीव रक्खें तो संसार में सच्ची बन्धुता प्रगट हो जावे, जिसका कि प्रत्येक मनुष्य को प्राप्त करना प्रधान कर्तव्य है। तथा अपने प्राणों की रक्षा करना और दूसरों के प्राणों की हत्या करना यह पशुओं का आचरण है क्योंकि उनमें [ पशुओं में ] विवेक नहीं है । यदि पशुओं से मनुष्यों में अन्तर है तो केवल विवेकता ही है, और अपने प्राणों के समान विश्व के सम्पूर्णा प्राणियों की हर तरह से रक्षा करना ही विवेक है, और यही मनुष्य-कर्तव्य है। इसके बिना हे आत्मन् ! तू मले ही अपने को मनुष्य व बुद्धिमान समझ किन्तु तू पशु के समान है। इस प्रकार प्रत्येक मनुष्यको प्रति दिन अपनी आत्मा को समझाना चाहिए । येन केनाप्युपायेन स्वात्मा बुद्धो निरञ्जनः । भवेन्मानन्द मूर्तिहि कुरु कार्यन तथा वरम् ॥ तेईस ॥ संस्कृत - येन केनापि उपायेन रीत्या स्वम्यात्मा जोवः बुद्धः ज्ञानमयः निरञ्जनः निर्लेपः; स्वस्थानन्दमेव मूर्तिर्गस्य सः एवंभूतः भवेत् तथा तेन प्रकारेण वरं श्रेष्ठ कार्यम् कर्तव्यं कुरु सम्पादेयम् ।। अर्थ - जिस किसी भी उपाय से अपनी आत्मा ज्ञानमय निर्विकार आनन्दमूर्ति बन जावे, उसी तरह अपने श्रेष्ठ कर्तव्य का आचरण कर । भावार्थ- हे आत्मन् ! आत्माको निर्विकारी निरञ्जन बनाना हो नर जन्म का फल है और शुद्ध आत्मा को बनाने के लिए तु के बड़ी बड़ी आपत्तियां सहन करनी पड़ेंगी। जैसे कि सौ बार तपाया हुआ ही सोना कण्ठ में पहनने लायक हो जाता है इसी तरह से उत्तम मोती, हीरा इत्यादि चीजों को कूट मार से परीक्षा करके ही कण्ठ में पहनाया जाता है और उसकी परीक्षा की जाती है। और मूर्ति जब खूब मार खाती है तभी पूजने योग्य बनती है, इसी तरह से दूध भी खूब मंथन किया जाय तमो उसमें से दो खाने योग्य निकलता है। इसी तरह है हे आत्मन ! तुझे भी निर्विकार होने के लिए अनेक भव से अभ्यास करना पड़ता है और उसके अन्दर तुझे कोई जहर भी विचएगा तो उनको हर तरह से तुझे अमृत पिलाने का प्रयत्न करना पड़ेगा, तब कहीं तेर आत्मा शुद्ध बुद्ध चिद्रूप परमानन्द मूर्ति निर्विकारी जीवनमुक्त बनेगा न कि विषय कषाय आदि में पड़े रहने से, मौज मजा करने से तेरा आत्मा निर्विकारी वा जीवनमुक्त बनेगा । इसलिए तु हर तरह से अपनी आत्मा को शनैः शनैः प्रयत्न करके निर्विकारी सर्व सत्यागी बनाने का प्रयत्न कर । क्योकि यह अनादिकाल का ससगं है अतः एकदम आत्मा शुद्ध नहीं बन सकेंगी जसे एक दो अक्षर पढ़ने वाला विद्यार्थी महान पण्डित जाता है एवं वाल्यकाल से अभ्यास करता हुआ वतास वर्ष तक अभ्यास करेगा तभी व्याकरण, न्याय आदि का ज्ञाता बनता है। और एक एक बूँद पानी मिल कर नाला बनता है और कई नाने मिल कर नदी; क कई नांदयाल कर बड़ा भारी समुद्र बनता है । तथा इसी प्रकार एक एक कण अनाज मिल कर बड़ी भारी धान्यराशि एकत्रित होती है । इसके अनुसार हे आत्मन् ! तू एक एक भन् में एक एक विषय कषाय व मान का त्याग करेगा तो अवश्य ही एक दिन र निर्विकारी सर्व संग परित्यागी नारायण बनेगा। इसमें कोई सन्देह नहीं । अतः तु स्वयं कायरता एवं निराशता को छोड़ कर करेगा तो अवश्य अपनी आत्मा को परमात्मा बना सकेगा। इसी प्रकार प्रत्येक मानव-मात्र को अपनी आत्मा को समझाना चाहिए । यह कार्य में कसे करूंगा कैसे होगा, इस प्रकार निराशतापूर्वक विचार करना मनुष्य का कर्तव्य नहीं ह मनुष्य का कर्तव्य तो यह है कि आई हुई घोर आपको भी लात मार कर उत्साह पूर्वक कार्य करना चाहिये जिसमें आत्मा परमात्मा बन जायगी और विश्व शांति होगी । बुद्धेः सुयुद्धं भवितव्य मेत्र, मिथो नराणां भुवि विश्वशांत्यै । स्वप्नेऽणि नव्या नर नाशकारी, नीर्वायुयानादिक यंत्रकानां । संस्कृ ॥र्थ बुद्धेः मतेः विचारस्य वा, युडे, मननं, चित्तचिन्तनं परस्परं संकापनं भुवि लोके केषां ! नराणां विश्वशां प्राणिमात्राणां शांत्यर्थ न खलु स्वमान स्त्यात्यादि वृद्धयर्थं भवितव्यं अवश्यमेव किन्तु स्वप्नेऽपि स्वप्नावस्थायामपि नर संहारकं नौका चायुयानं धुम्रशकटादिकानां युद्धे कदापि नैव भवितन्यं इतितु मानवजाति मात्रैः चिन्तनीयं यतो नर जन्म सफलं भवेत् तथा च विश्व शांतिः भवेत् । अर्थ- मनुष्यों को संसार में विश्व की शांति के लिये परस्पर बुद्ध का युद्ध अर्थात् विचार तर्क आदिद्वारा युद्ध करना चाहिये किन्तु स्वप्न में भी मनुष्यों का नाश करने वाले वायुयान जहाज बम तोप इत्यादि द्वारा युद्ध नहीं करना चाहिये । बावार्य - विश्व में दो जातियां हैं- एक तो मनुष्य जाति व दूसरी पशु जाति; इन दोनों के चाल चलन, आचार विचार आदि प्रत्येक कियाओं में रात दिन का अंतर इसलिये पशु में यह बुद्धि नहीं कि प्राणी मात्र का हित करना मेरा कर्तव्य है केवल खाने पीने, व विषयों में ही उनकी बुद्धि दौड़ती है। और उसी विषय की पुष्टो के खाने पीने आदि के उद्देश से गधा जिस तरह से दूसरे को लात मारता है तथा कुत्ता व्याघ्र आदि अपने दांतों से दूसरों को काटने छः तथा नाखुनों से दूसरे प्राणियों का संहार करते हैं एवं बलवान बैल आदि दुर्बल प्राणियों को मार कर भगा देते हैं। और आप स्वयं उन्मत्त हो कर फिरते हैं यदि यही वृत्ति मनुष्यों में रहे तो फिर पशुओं में और मनुष्यों में क्या मेद रहा ? मनुष्य जाति मात्र का आपस में लड़ना व लड़ाना धर्म नहीं है । मनुष्य यह कार्य लड़ना झगड़ना पशुओं से सीखता है अथवा पशु सरीखे ही देश में व राष्ट्र में मनुष्य हों उनसे सीखता है। इसलिये यह स्वभाव सिद्ध है कि लड़ना झगड़ना मनुष्यों का लक्षण नहीं है । अतः मानव जाति मात्र का वायुयान, जहाज, दोप टैंक बम इत्यादिक वैज्ञानिक यंत्रों से परस्पर में लड़ना यह अपने ही खन्न से अपना ही गला काटने के बराबर हुआ क्योंकि जितने भी वैज्ञानिक आविष्कार बनाये हैं ये सम्पूर्ण |
वहाँ लेखकों जिनके जीवन कोई अपने काम की तुलना में कम दिलचस्प हैं कर रहे हैं। इस तरह से संबंधित है Dzherom Selindzher, जीवनी घटनाओं से भरा है। इस दार्शनिक खोज ही है, विज्ञान के सेट के अध्ययन, अन्वेषण, घर वापसी और कहानियों के लिए मान्यता में द्वितीय विश्व युद्ध के सेवा और केवल प्रकाशित उपन्यास।
इस पर आपको एक फिल्म बना सकते हैं। केवल यहां लेखक ने इस पुस्तक की फिल्म के रूप में ऐसा करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है, साथ ही। क्यों हुआ, तो आप इस लेख से सीखना होगा।
Dzherom Devid Selindzher न केवल अपने उत्पादों के लिए, लेकिन यह भी जीवन का एक बंद रास्ता है कि कई मिथकों और उसके बारे में अनुमान को जन्म दिया है जाना जाता है। उनकी ख्याति लेखक की ऊंचाई पर अचानक उनकी पुस्तकों को प्रकाशित करने का रहता है। इस लेखन में यह बंद नहीं होता, प्रेस और आलोचकों के साथ के अलावा लगभग पूरी तरह से सीमा संचार। पाठकों और नहीं ऑटोग्राफ के पक्ष में सेलिंगर भी बंद हो जाता है बनाते हैं।
उसका आत्म लगाया तनहाई किंवदंतियों। और अमेरिकी अभिनेता के साथ एक साक्षात्कार में निकोलस Keydzh वह कैसे परीक्षण मेरी प्रेमिका, जिसका पक्ष वह लगे रहे द्वारा इस पर प्रदत्त से एक है, इसके बारे में एक हस्ताक्षर से कहा प्रसिद्ध लेखक। फिल्म स्टार का दावा प्रतिष्ठित हस्ताक्षर सफल प्राप्त किया है। लेकिन कई पाठकों और सेलिंगर के भाग्य के प्रशंसकों मुस्कान नहीं किया।
Dzherom Devid Selindzher पहले यहूदी परिवार में न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में 1919 के दिन पैदा हुआ था। उनके पिता एक व्यापारी था, और परिवार काफी आराम से रहते थे। माँ स्कॉटिश और आयरिश जड़ें था। यहां तक कि एक कम उम्र में लेखक पत्र में अपनी पहली कदम उठाए। उनकी कहानियां संक्षिप्त काफी विशाल थे, लेकिन पहले से ही।
1936 में, सेलिंगर (जिसका जीवनी विवादास्पद क्षणों में से एक बहुत कुछ है) उनके निजी सैन्य स्कूल प्राप्त किया। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने इस संस्था, जो अभी भी आधिकारिक साइट का हिस्सा है के गान के लिए कुछ लाइनें लिखी थी। अगला सेलिंगर यूरोप में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में अध्ययन और अभ्यास इंतजार कर रहे थे।
उनकी वापसी पर वह शामिल हो गए कोलंबिया विश्वविद्यालय, जहां वह गद्य और लघु कथाओं पर व्याख्यान में भाग लिया। लेकिन अध्ययन ऐसी है कि अलग-अलग पाठ्यक्रमों को छोड़कर दिलचस्प डेविड था। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक और एक कैरियर बनाने के लिए असमर्थ था नहीं था। यह उनके पिता ने अपने बेटे के लिए उच्च उम्मीदें थी करने के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है। नतीजतन, एक परिवार के घोटाले के बाद, वे दूर एक दूसरे से हमेशा के लिए बदल गया।
सेलिंगर, जिनकी जीवनी द्वितीय विश्व युद्ध के प्रभाव से छलनी कर रहा है, दूर की घटनाओं से नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि मोर्चे पर कि उसकी जगह का फैसला किया है, और लंबे समय, अवसर वहाँ जाने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य कारणों के लिए अपील पर जारी किया गया था।
1943 में साथ हवलदार लेखक के पद प्रतिरोधक विभाग में आता है। सबसे स्थानों में होने के नाते, सेलिंगर, जिनकी जीवनी अभी तक समय युद्ध की यादों से अटे पड़े होने के लिए नहीं है, अपनी डायरी में लिखा है, और बाद प्रियजनों है के लेखन में सही ढंग से अपने उद्देश्य समझा और इसे यहाँ जगह। उन्होंने कहा कि सटीकता और युद्ध की गर्मी में अपने प्रवास के के मूल्य के बारे में पता था, यातना शिविरों से कैदियों की मुक्ति में भाग लिया, खुफिया में था, लेकिन कभी उसे चोट का अनुभव किया, अन्य बंद कर दिया, और कहा कि बाद में उनके एकांतप्रिय जीवन में हुई।
वापस घर, लेखक सेलिंगर प्रसिद्धि मान्यता प्राप्त उपन्यासकार पाता है। उनकी लघु कहानी "Bananafish के लिए एक बिल्कुल सही दिवस" उसके सारे आलोचकों और साहित्य के प्रेमियों के मुंह में। चालीस के दशक के मध्य में, उनके उपन्यासों और लघु कथाएँ कई पत्रिकाओं में प्रकाशित। अपने काम से विषयों - युद्ध की दर्दनाक यादें, घाव है कि ठीक नहीं करते हैं, वे क्या देखा, कि भूल जाना कभी नहीं होगा।
लेखक की मान्यता उपन्यास के 1951 में प्रकाशन के बाद अपने चरमोत्कर्ष तक पहुँचता है "राई में कैचर। " शैली उत्पाद "उपन्यास शिक्षा" बुलाया जाएगा। 60 से अधिक लाख प्रतियां - यह रचना एक अभूतपूर्व राशि में बाहर बेच दिया गया था।
प्रसिद्धि और मान्यता की ऊंचाई पर सेलिंगर अचानक अपने काम करता है प्रकाशित करने के लिए रहता है और 1965 में दुनिया बंद कर देता है। वह अब साक्षात्कार और ऑटोग्राफ देता है। क्या इस व्यवहार को सही ठहराया अभी भी एक रहस्य और जीवनी, और यहां तक कि लेखक के कई दोस्तों के लिए है।
महान उपन्यासकार न्यू हैम्पशायर में अपने बंद हवेली में 91 साल की उम्र में निधन हो गया।
सेलिंगर रचनात्मकता मुख्य रूप से लघु कथाएँ और novellas के होते हैं। केवल उपन्यास लिखा और लेखक द्वारा प्रकाशित, - "राई में कैचर। "
सेलिंगर कहानियों विषयों, जो लेखक के दृष्टिकोण के साथ अलग अलग की एक काफी विस्तृत श्रृंखला का निर्माण किया। जीवन, टूटे सपने और स्वयं के लिए दार्शनिक खोज के अर्थ - लेकिन मूल विचार से एक है। सबसे उपन्यास के नायकों बच्चों, किशोरों और जीवन के लक्ष्यों की तलाश में लोग हैं। इन छवियों लेखक अधिक ताजा देने के लिए और स्पष्ट रूप से अपने विचारों को प्रकट करते हैं और पाठक अपनी दार्शनिक विचारों की परिणाम दिखाने के लिए।
उल्लेखनीय लेखक के की कहानी है "हंसता मैन। " हंसता मैन - यह एक छात्र है जो बच्चों सिखाया है, जबकि उन्हें महान दस्यु की अद्भुत कहानियों को बताने का कहानी में। जॉन गाय उत्साह के साथ कहते हैं, क्योंकि यह बहुत ही सुंदर और दयालु महिला में मदद करता है, मेरी। ऐसा लगता है कि वह - महान और अमीर माता पिता जो एक साधारण छात्र के साथ उसके रिश्ते के लिए विरोध कर रहे हैं की बेटी। मैरी अभी भी जॉन के साथ हिस्सा करने के लिए मजबूर किया जाता है, वह एक कहानी है, जिसमें अपने चरित्र को हरा दिया है, और जल्द ही खुद को मार डाला बताता है। कहानी सामाजिक असमानता है, जो लोगों के जीवन को बेहतर नष्ट कर देता है की निंदा की।
"राई में कैचर"
इस महान उपन्यास के लगभग तुरंत दुनिया भर के पाठकों का एक बहुत मिल गया। फिर भी, आलोचना उदास इरादों में लेखक आरोप लगाते हुए, उत्पाद के लिए अस्पष्ट रवैया है। एक उज्ज्वल, ठीक अक्षर और क्या उपन्यास उपयोग शपथ ग्रहण कि कुछ राज्यों में प्रतिबंध लगाने के उत्पादन उत्पाद के लिए नेतृत्व में हो रहा है की विशेषताओं के लिए। अब यह दुनिया भर में साहित्य में स्कूल कार्यक्रम का हिस्सा है।
सेलिंगर, जिनके उपन्यास अपने ही के प्रकाशन के लिए बंद कर दिया गया है, अपने काम फिल्म के लिए, जब यह 80-90-ies में एक सवाल था मना किया। मुख्य तर्क था कि घटनाओं का उत्पाद नायक की आत्मा में जगह ले, तो यह दिखाने के रूप में देखा और लेखक द्वारा बनाई गई, लगभग असंभव है।
उपन्यास एक लड़का होल्डन Caulfield के कहता है। कोई भी समझता है, और वह खुद मुश्किल से अपने वातावरण लेता है। वह बढ़ता है, और इस में बढ़ विकराल रुप में जल्दी से अपने सपनों और आदर्शों धूल करने के लिए उखड़ जाती। जब वे खेलने के लिए शुरू किया चट्टान, से ज्यादा बच्चों को पकड़ने के लिए, खतरे में हो सकता है - उपन्यास एक अजीब नाम है क्योंकि उसके दिमाग में Caulfield सपना रहने वाले है। यह काफी प्रतीकात्मक संघ है। सबसे अधिक संभावना, होल्डेन मदद करने के लिए उनके उत्साह और दुनिया है, जहां सपने हमेशा के लिए टूट नहीं की है, खुलापन में बच्चों को उनके बचपन रखने चाहता है। उपन्यास राई में कैचर के रूप में अनुवाद किया है का मूल शीर्षक "राई में कैचर। "
रहस्यमय लेखक हमें न केवल सबसे बड़ा साहित्यिक विरासत, लेकिन यह भी सूत्र का एक बहुत छोड़ दिया है। इसका कारण यह है कि वह कलम सेलिंगर के एक सच्चे गुरु था। उद्धरण हम प्रतिभाशाली और सबसे पहचानने मौजूदः
- "क्योंकि एक आदमी मर गया है, तो आप प्यार नहीं रोक सकता है, लानत है! विशेष रूप से अगर वह किसी को भी किसी और से बेहतर था जिंदा, तुम्हें पता है? " - कहानी "Lyapa-वैली" की नायिका की आवाज लेखक सच है, दर्द और सच्चाई से भरा कहेंगे।
- "और उन पुस्तकों मुझे मन्त्रमुग्ध के रूप में वे अंत करने के लिए पढ़ा है, मैं तुरंत सोचा कि यह अच्छा होगा अगर यह लेखक अपने सबसे अच्छे दोस्त बन गया है, और उसे करने के लिए यह बात करने के लिए संभव हो गया था। " यह होल्डन Kolfild बताता है, और यह उसके साथ सहमत मुश्किल नहीं है।
- "हम, व्यक्ति से बात करने देने की आवश्यकता है क्योंकि वह रोचक और मनोरम बताने के लिए शुरू कर दिया। ऐसा लगता है कि जब एक व्यक्ति को उत्साह से कहते है। यह अच्छा है। " ये शब्द भी Caulfield के हैं।
- "- एक अच्छे काम के के लिए रहने के लिए एक अपरिपक्व व्यक्ति अपने काम के लिए मरने के लिए, और परिपक्व चाहता है। "
पढ़ें या नहीं पढ़ - हर किसी के व्यापार। लेकिन विश्व साहित्य के क्लासिक्स से दूर रहने, आप अपने आप को आनंद की एक पूरी तरह से नई दुनिया में जानने के लिए वंचित। इस प्रकार, कहानियों सेलिंगर - अपने नायकों की एक पूरी तरह से पूरे लघु। खोजों और निराशाओं, जीवन और अपनी आत्मा को आप उदासीन, नहीं छोड़ देंगे भीतर की दुनिया को बेहतर बनाने के होंगे, और आप बेहतर खुद को पता करने में मदद असली तबाही।
| वहाँ लेखकों जिनके जीवन कोई अपने काम की तुलना में कम दिलचस्प हैं कर रहे हैं। इस तरह से संबंधित है Dzherom Selindzher, जीवनी घटनाओं से भरा है। इस दार्शनिक खोज ही है, विज्ञान के सेट के अध्ययन, अन्वेषण, घर वापसी और कहानियों के लिए मान्यता में द्वितीय विश्व युद्ध के सेवा और केवल प्रकाशित उपन्यास। इस पर आपको एक फिल्म बना सकते हैं। केवल यहां लेखक ने इस पुस्तक की फिल्म के रूप में ऐसा करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है, साथ ही। क्यों हुआ, तो आप इस लेख से सीखना होगा। Dzherom Devid Selindzher न केवल अपने उत्पादों के लिए, लेकिन यह भी जीवन का एक बंद रास्ता है कि कई मिथकों और उसके बारे में अनुमान को जन्म दिया है जाना जाता है। उनकी ख्याति लेखक की ऊंचाई पर अचानक उनकी पुस्तकों को प्रकाशित करने का रहता है। इस लेखन में यह बंद नहीं होता, प्रेस और आलोचकों के साथ के अलावा लगभग पूरी तरह से सीमा संचार। पाठकों और नहीं ऑटोग्राफ के पक्ष में सेलिंगर भी बंद हो जाता है बनाते हैं। उसका आत्म लगाया तनहाई किंवदंतियों। और अमेरिकी अभिनेता के साथ एक साक्षात्कार में निकोलस Keydzh वह कैसे परीक्षण मेरी प्रेमिका, जिसका पक्ष वह लगे रहे द्वारा इस पर प्रदत्त से एक है, इसके बारे में एक हस्ताक्षर से कहा प्रसिद्ध लेखक। फिल्म स्टार का दावा प्रतिष्ठित हस्ताक्षर सफल प्राप्त किया है। लेकिन कई पाठकों और सेलिंगर के भाग्य के प्रशंसकों मुस्कान नहीं किया। Dzherom Devid Selindzher पहले यहूदी परिवार में न्यूयॉर्क में एक हज़ार नौ सौ उन्नीस के दिन पैदा हुआ था। उनके पिता एक व्यापारी था, और परिवार काफी आराम से रहते थे। माँ स्कॉटिश और आयरिश जड़ें था। यहां तक कि एक कम उम्र में लेखक पत्र में अपनी पहली कदम उठाए। उनकी कहानियां संक्षिप्त काफी विशाल थे, लेकिन पहले से ही। एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में, सेलिंगर उनके निजी सैन्य स्कूल प्राप्त किया। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने इस संस्था, जो अभी भी आधिकारिक साइट का हिस्सा है के गान के लिए कुछ लाइनें लिखी थी। अगला सेलिंगर यूरोप में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में अध्ययन और अभ्यास इंतजार कर रहे थे। उनकी वापसी पर वह शामिल हो गए कोलंबिया विश्वविद्यालय, जहां वह गद्य और लघु कथाओं पर व्याख्यान में भाग लिया। लेकिन अध्ययन ऐसी है कि अलग-अलग पाठ्यक्रमों को छोड़कर दिलचस्प डेविड था। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक और एक कैरियर बनाने के लिए असमर्थ था नहीं था। यह उनके पिता ने अपने बेटे के लिए उच्च उम्मीदें थी करने के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है। नतीजतन, एक परिवार के घोटाले के बाद, वे दूर एक दूसरे से हमेशा के लिए बदल गया। सेलिंगर, जिनकी जीवनी द्वितीय विश्व युद्ध के प्रभाव से छलनी कर रहा है, दूर की घटनाओं से नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि मोर्चे पर कि उसकी जगह का फैसला किया है, और लंबे समय, अवसर वहाँ जाने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य कारणों के लिए अपील पर जारी किया गया था। एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में साथ हवलदार लेखक के पद प्रतिरोधक विभाग में आता है। सबसे स्थानों में होने के नाते, सेलिंगर, जिनकी जीवनी अभी तक समय युद्ध की यादों से अटे पड़े होने के लिए नहीं है, अपनी डायरी में लिखा है, और बाद प्रियजनों है के लेखन में सही ढंग से अपने उद्देश्य समझा और इसे यहाँ जगह। उन्होंने कहा कि सटीकता और युद्ध की गर्मी में अपने प्रवास के के मूल्य के बारे में पता था, यातना शिविरों से कैदियों की मुक्ति में भाग लिया, खुफिया में था, लेकिन कभी उसे चोट का अनुभव किया, अन्य बंद कर दिया, और कहा कि बाद में उनके एकांतप्रिय जीवन में हुई। वापस घर, लेखक सेलिंगर प्रसिद्धि मान्यता प्राप्त उपन्यासकार पाता है। उनकी लघु कहानी "Bananafish के लिए एक बिल्कुल सही दिवस" उसके सारे आलोचकों और साहित्य के प्रेमियों के मुंह में। चालीस के दशक के मध्य में, उनके उपन्यासों और लघु कथाएँ कई पत्रिकाओं में प्रकाशित। अपने काम से विषयों - युद्ध की दर्दनाक यादें, घाव है कि ठीक नहीं करते हैं, वे क्या देखा, कि भूल जाना कभी नहीं होगा। लेखक की मान्यता उपन्यास के एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में प्रकाशन के बाद अपने चरमोत्कर्ष तक पहुँचता है "राई में कैचर। " शैली उत्पाद "उपन्यास शिक्षा" बुलाया जाएगा। साठ से अधिक लाख प्रतियां - यह रचना एक अभूतपूर्व राशि में बाहर बेच दिया गया था। प्रसिद्धि और मान्यता की ऊंचाई पर सेलिंगर अचानक अपने काम करता है प्रकाशित करने के लिए रहता है और एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में दुनिया बंद कर देता है। वह अब साक्षात्कार और ऑटोग्राफ देता है। क्या इस व्यवहार को सही ठहराया अभी भी एक रहस्य और जीवनी, और यहां तक कि लेखक के कई दोस्तों के लिए है। महान उपन्यासकार न्यू हैम्पशायर में अपने बंद हवेली में इक्यानवे साल की उम्र में निधन हो गया। सेलिंगर रचनात्मकता मुख्य रूप से लघु कथाएँ और novellas के होते हैं। केवल उपन्यास लिखा और लेखक द्वारा प्रकाशित, - "राई में कैचर। " सेलिंगर कहानियों विषयों, जो लेखक के दृष्टिकोण के साथ अलग अलग की एक काफी विस्तृत श्रृंखला का निर्माण किया। जीवन, टूटे सपने और स्वयं के लिए दार्शनिक खोज के अर्थ - लेकिन मूल विचार से एक है। सबसे उपन्यास के नायकों बच्चों, किशोरों और जीवन के लक्ष्यों की तलाश में लोग हैं। इन छवियों लेखक अधिक ताजा देने के लिए और स्पष्ट रूप से अपने विचारों को प्रकट करते हैं और पाठक अपनी दार्शनिक विचारों की परिणाम दिखाने के लिए। उल्लेखनीय लेखक के की कहानी है "हंसता मैन। " हंसता मैन - यह एक छात्र है जो बच्चों सिखाया है, जबकि उन्हें महान दस्यु की अद्भुत कहानियों को बताने का कहानी में। जॉन गाय उत्साह के साथ कहते हैं, क्योंकि यह बहुत ही सुंदर और दयालु महिला में मदद करता है, मेरी। ऐसा लगता है कि वह - महान और अमीर माता पिता जो एक साधारण छात्र के साथ उसके रिश्ते के लिए विरोध कर रहे हैं की बेटी। मैरी अभी भी जॉन के साथ हिस्सा करने के लिए मजबूर किया जाता है, वह एक कहानी है, जिसमें अपने चरित्र को हरा दिया है, और जल्द ही खुद को मार डाला बताता है। कहानी सामाजिक असमानता है, जो लोगों के जीवन को बेहतर नष्ट कर देता है की निंदा की। "राई में कैचर" इस महान उपन्यास के लगभग तुरंत दुनिया भर के पाठकों का एक बहुत मिल गया। फिर भी, आलोचना उदास इरादों में लेखक आरोप लगाते हुए, उत्पाद के लिए अस्पष्ट रवैया है। एक उज्ज्वल, ठीक अक्षर और क्या उपन्यास उपयोग शपथ ग्रहण कि कुछ राज्यों में प्रतिबंध लगाने के उत्पादन उत्पाद के लिए नेतृत्व में हो रहा है की विशेषताओं के लिए। अब यह दुनिया भर में साहित्य में स्कूल कार्यक्रम का हिस्सा है। सेलिंगर, जिनके उपन्यास अपने ही के प्रकाशन के लिए बंद कर दिया गया है, अपने काम फिल्म के लिए, जब यह अस्सी-नब्बे-ies में एक सवाल था मना किया। मुख्य तर्क था कि घटनाओं का उत्पाद नायक की आत्मा में जगह ले, तो यह दिखाने के रूप में देखा और लेखक द्वारा बनाई गई, लगभग असंभव है। उपन्यास एक लड़का होल्डन Caulfield के कहता है। कोई भी समझता है, और वह खुद मुश्किल से अपने वातावरण लेता है। वह बढ़ता है, और इस में बढ़ विकराल रुप में जल्दी से अपने सपनों और आदर्शों धूल करने के लिए उखड़ जाती। जब वे खेलने के लिए शुरू किया चट्टान, से ज्यादा बच्चों को पकड़ने के लिए, खतरे में हो सकता है - उपन्यास एक अजीब नाम है क्योंकि उसके दिमाग में Caulfield सपना रहने वाले है। यह काफी प्रतीकात्मक संघ है। सबसे अधिक संभावना, होल्डेन मदद करने के लिए उनके उत्साह और दुनिया है, जहां सपने हमेशा के लिए टूट नहीं की है, खुलापन में बच्चों को उनके बचपन रखने चाहता है। उपन्यास राई में कैचर के रूप में अनुवाद किया है का मूल शीर्षक "राई में कैचर। " रहस्यमय लेखक हमें न केवल सबसे बड़ा साहित्यिक विरासत, लेकिन यह भी सूत्र का एक बहुत छोड़ दिया है। इसका कारण यह है कि वह कलम सेलिंगर के एक सच्चे गुरु था। उद्धरण हम प्रतिभाशाली और सबसे पहचानने मौजूदः - "क्योंकि एक आदमी मर गया है, तो आप प्यार नहीं रोक सकता है, लानत है! विशेष रूप से अगर वह किसी को भी किसी और से बेहतर था जिंदा, तुम्हें पता है? " - कहानी "Lyapa-वैली" की नायिका की आवाज लेखक सच है, दर्द और सच्चाई से भरा कहेंगे। - "और उन पुस्तकों मुझे मन्त्रमुग्ध के रूप में वे अंत करने के लिए पढ़ा है, मैं तुरंत सोचा कि यह अच्छा होगा अगर यह लेखक अपने सबसे अच्छे दोस्त बन गया है, और उसे करने के लिए यह बात करने के लिए संभव हो गया था। " यह होल्डन Kolfild बताता है, और यह उसके साथ सहमत मुश्किल नहीं है। - "हम, व्यक्ति से बात करने देने की आवश्यकता है क्योंकि वह रोचक और मनोरम बताने के लिए शुरू कर दिया। ऐसा लगता है कि जब एक व्यक्ति को उत्साह से कहते है। यह अच्छा है। " ये शब्द भी Caulfield के हैं। - "- एक अच्छे काम के के लिए रहने के लिए एक अपरिपक्व व्यक्ति अपने काम के लिए मरने के लिए, और परिपक्व चाहता है। " पढ़ें या नहीं पढ़ - हर किसी के व्यापार। लेकिन विश्व साहित्य के क्लासिक्स से दूर रहने, आप अपने आप को आनंद की एक पूरी तरह से नई दुनिया में जानने के लिए वंचित। इस प्रकार, कहानियों सेलिंगर - अपने नायकों की एक पूरी तरह से पूरे लघु। खोजों और निराशाओं, जीवन और अपनी आत्मा को आप उदासीन, नहीं छोड़ देंगे भीतर की दुनिया को बेहतर बनाने के होंगे, और आप बेहतर खुद को पता करने में मदद असली तबाही। |
एक्टर रणवीर सिंह इन दिनों बॉलीवुड के सुपरस्टार माने जाने लगे हैं। जल्द ही उनकी फिल्म गली बॉय भी बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने वाली है। इस फिल्म में ऱणवीर सिंह के साथ आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी। लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले हाल ही में गली बॉय का नया गाना मेरी गली में को मेकर्स ने रिलीज किया है।
इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है, इतना ही नहीं बल्कि गाना रिलीज होते ही नंबर वन पर ट्रेंड करता हुआ नजर आ रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गाने को लोग कितना पसंद कर रहे हैं।
गाने को डिवाइन और रैपर नेजी ने कंपोज किया है जबकि इसे रणवीर सिंह और सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने खुद गाया है। गाने के धमाकेदार बीट, कोरियोग्राफी और इसके बोल काफी पेपी हैं। इससे पहले जब रणवीर की इसी फिल्म का पहला गाना अपना टाइम आएगा रिलीज हुआ था, तो वह देखते ही देखते पॉपुलर हो गया। इसका वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वहीं, इस नए गाने के लिरिक्स काफी जबरदस्त हैं।
गाने के रिलीज होते ही इसे अब तक 144,344 से ज्यादा बार देखा जा चुका है। रैपर डिवाइन के लाइफ पर आधारित फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फिल्म 'गली ब्वॉय' में रणवीर सिंह काफी कुल स्टाइल में रैप करते नजर आ रहे हैं और दर्शक रणवीर सिंह के कुल लुक और रैप को काफी पसंद कर रहे हैं।
फिल्म में रणवीर सिंह गरीब फैमिली से हैं। वहीं, आलिया भट्ट मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। फिल्म में स्ट्रीट रैपर्स के स्ट्रगल को दिखाया गया है। इसके अलावा फिल्म में कल्कि कोचलीन, कुब्रा सेठ भी हैं।
| एक्टर रणवीर सिंह इन दिनों बॉलीवुड के सुपरस्टार माने जाने लगे हैं। जल्द ही उनकी फिल्म गली बॉय भी बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने वाली है। इस फिल्म में ऱणवीर सिंह के साथ आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी। लेकिन फिल्म की रिलीज से पहले हाल ही में गली बॉय का नया गाना मेरी गली में को मेकर्स ने रिलीज किया है। इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है, इतना ही नहीं बल्कि गाना रिलीज होते ही नंबर वन पर ट्रेंड करता हुआ नजर आ रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गाने को लोग कितना पसंद कर रहे हैं। गाने को डिवाइन और रैपर नेजी ने कंपोज किया है जबकि इसे रणवीर सिंह और सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने खुद गाया है। गाने के धमाकेदार बीट, कोरियोग्राफी और इसके बोल काफी पेपी हैं। इससे पहले जब रणवीर की इसी फिल्म का पहला गाना अपना टाइम आएगा रिलीज हुआ था, तो वह देखते ही देखते पॉपुलर हो गया। इसका वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वहीं, इस नए गाने के लिरिक्स काफी जबरदस्त हैं। गाने के रिलीज होते ही इसे अब तक एक सौ चौंतालीस,तीन सौ चौंतालीस से ज्यादा बार देखा जा चुका है। रैपर डिवाइन के लाइफ पर आधारित फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फिल्म 'गली ब्वॉय' में रणवीर सिंह काफी कुल स्टाइल में रैप करते नजर आ रहे हैं और दर्शक रणवीर सिंह के कुल लुक और रैप को काफी पसंद कर रहे हैं। फिल्म में रणवीर सिंह गरीब फैमिली से हैं। वहीं, आलिया भट्ट मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। फिल्म में स्ट्रीट रैपर्स के स्ट्रगल को दिखाया गया है। इसके अलावा फिल्म में कल्कि कोचलीन, कुब्रा सेठ भी हैं। |
नई दिल्ली। राजस्थान के जयपुर एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह SpiceJet के विमान की इमरजेंसी लैंडिग कराई गई है। इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान विमान में 189 यात्री सवार थे। SpiceJet की दुबई-जयपुर एसजी 58 फ्लाइट का एक टायर फट गया था, जिसके बाद सुबह 9 बजकर 03 मिनिट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। गनीमत रही कि सेफ इमरजेंसी लैंडिंग के चलते सभी यात्री सुरक्षित हैं।
जिस वक्त SpiceJet के विमान ने जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग की, उस वक्त का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें विमान के दाईं ओर का टायर फटा हुआ है।
जब प्लेन ने लैंडिंग की तो इस दौरान फटे हुए टायर के चिथड़े उड़ गए।
| नई दिल्ली। राजस्थान के जयपुर एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह SpiceJet के विमान की इमरजेंसी लैंडिग कराई गई है। इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान विमान में एक सौ नवासी यात्री सवार थे। SpiceJet की दुबई-जयपुर एसजी अट्ठावन फ्लाइट का एक टायर फट गया था, जिसके बाद सुबह नौ बजकर तीन मिनिट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। गनीमत रही कि सेफ इमरजेंसी लैंडिंग के चलते सभी यात्री सुरक्षित हैं। जिस वक्त SpiceJet के विमान ने जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग की, उस वक्त का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें विमान के दाईं ओर का टायर फटा हुआ है। जब प्लेन ने लैंडिंग की तो इस दौरान फटे हुए टायर के चिथड़े उड़ गए। |
pant form in odi test suryakumar yadav team india (Photo Credit: Twitter)
नई दिल्लीः
Pant in Team India : न्यूजीलैंड के साथ हुए कल मैच में सभी की नजर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) पर थी. क्योंकि अगर पंत रन बना जाते तो उनके करियर के लिए ठीक रहता. लेकिन वो फेल हो गए. अब उनका प्लेइंग 11 में जगह बनाना बेहद मुश्किल हो गया है. सोशल मीडिया पर भी सूर्यकुमार यादव (SuryakumarYadav) की जगह उनको बार-बार मौके दिए जाने पर चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि आखिरी मुकाबलें में भी पंत सिर्फ 10 रन ही बना सके. उनसे उम्मीद थी की एक बड़ी पारी जरूर पंत अपने बल्ले से निकालेंगे.
सूर्यकुमार यादव की बात करें तो ये खिलाड़ी जबरदस्त फॉर्म में है. टी20 विश्व कप में विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव ने अपना दम दिखाया था. उसके बावजूद अगर इनको टीम में जगह नहीं दी जा रही है तो सवाल तो खड़े होने लाजमी हैं. इसके अलावा बात यह भी है कि पंत को और कितने मौके टीम देगी. लंबे अरसे से उनको मौका दिया जा रहा है लेकिन वह उसको भुना नहीं पा रहे हैं. बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज की बात करें तो इसमें सूर्यकुमार को मौका नहीं दिया है.
यह भी पढ़ें - IPL 2023 : हार्दिक की नजर दूसरी IPL टॉफी पर, मुंबई-चेन्नई को दे पाएंगे मात!
आज आखिरी वनडे में ऋषभ पंत का टेस्ट होना था. अगर वह सफल हो जाते तो फिर एक बार को टीम आगे के लिए उनका नाम प्लेइंग 1 में ले सकती थी. लेकिन अब जब वह फेल हो गए हैं तो इतना पक्का है कि टीम से उनकी जल्दी छुट्टी हो सकती है. भारतीय टीम के पास अब विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर ईशान किशन, संजू सैमसंन जैसे बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं. इसलिए पंत के ऊपर निर्भरता टीम की काफी हद तक खत्म सी हो गई है. पंत फिर से बचकानी हरकत करते हुए अपना विकेट फेंक कर आ गए हैं.
करियर की बात करें तो पंत 30 ODI में 835 रन बनाए हैं. वहीं 31 टेस्ट मैचों में 2123 रन. इसके अलावा 66 टी20 मैचों में 967 रन बल्ले से निकाल चुके हैं. बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज इनके करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है.
| pant form in odi test suryakumar yadav team india नई दिल्लीः Pant in Team India : न्यूजीलैंड के साथ हुए कल मैच में सभी की नजर ऋषभ पंत पर थी. क्योंकि अगर पंत रन बना जाते तो उनके करियर के लिए ठीक रहता. लेकिन वो फेल हो गए. अब उनका प्लेइंग ग्यारह में जगह बनाना बेहद मुश्किल हो गया है. सोशल मीडिया पर भी सूर्यकुमार यादव की जगह उनको बार-बार मौके दिए जाने पर चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि आखिरी मुकाबलें में भी पंत सिर्फ दस रन ही बना सके. उनसे उम्मीद थी की एक बड़ी पारी जरूर पंत अपने बल्ले से निकालेंगे. सूर्यकुमार यादव की बात करें तो ये खिलाड़ी जबरदस्त फॉर्म में है. टीबीस विश्व कप में विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव ने अपना दम दिखाया था. उसके बावजूद अगर इनको टीम में जगह नहीं दी जा रही है तो सवाल तो खड़े होने लाजमी हैं. इसके अलावा बात यह भी है कि पंत को और कितने मौके टीम देगी. लंबे अरसे से उनको मौका दिया जा रहा है लेकिन वह उसको भुना नहीं पा रहे हैं. बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज की बात करें तो इसमें सूर्यकुमार को मौका नहीं दिया है. यह भी पढ़ें - IPL दो हज़ार तेईस : हार्दिक की नजर दूसरी IPL टॉफी पर, मुंबई-चेन्नई को दे पाएंगे मात! आज आखिरी वनडे में ऋषभ पंत का टेस्ट होना था. अगर वह सफल हो जाते तो फिर एक बार को टीम आगे के लिए उनका नाम प्लेइंग एक में ले सकती थी. लेकिन अब जब वह फेल हो गए हैं तो इतना पक्का है कि टीम से उनकी जल्दी छुट्टी हो सकती है. भारतीय टीम के पास अब विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर ईशान किशन, संजू सैमसंन जैसे बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं. इसलिए पंत के ऊपर निर्भरता टीम की काफी हद तक खत्म सी हो गई है. पंत फिर से बचकानी हरकत करते हुए अपना विकेट फेंक कर आ गए हैं. करियर की बात करें तो पंत तीस ODI में आठ सौ पैंतीस रन बनाए हैं. वहीं इकतीस टेस्ट मैचों में दो हज़ार एक सौ तेईस रन. इसके अलावा छयासठ टीबीस मैचों में नौ सौ सरसठ रन बल्ले से निकाल चुके हैं. बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज इनके करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है. |
कहा जाता है कि हथेली पर M का निशान बहुत कम व किस्मत वालों के होता है। यह पुरुषों के दाएं व महिलाओं के बाएं हाथ में दिखाई देता है। अगर कही कोई पुरुष बाएं हाथ से काम करता है तो इसके लिए उसका बायां हाथ देखा जाता है। इसके साथ ही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हाथ में कम रेखाओं का होना शुभ माना जाता है।
माना जाता है कि ऐसा निशान 1 लाख लोगों में से किसी एक को होता है। ऐसे में जिन लोगों की हथेली पर M निशान होता है वे किस्मत वाले होते हैं। इन्हें जिंदगी के हर मोड़ पर किस्मत का साथ मिलता है। ये लोग अपनी मेहनत व लगन से जिंदगी में खूब नाम कमाते हैं। ऐसे में ये लोग आर्थिक तौर पर मजबूत होते हैं। मगर इसके बार आमतौर पर पैसा टिकता नहीं है। ये लोग साहस व आत्मविश्वास से भरे होते हैं। ये किसी की बात मानने की जगह पर खुद पर भरोसा रखते हैं।
- ये लोग अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीना पसंद करते हैं। इन्हें किसी की दखलअंदाजी बिल्कुल भी बर्दाशत नहीं होती है।
- जहां बात दूसरों की मदद करने की आती है। ये लोग कभी साथ नहीं छोड़ते हैं।
- हथेली पर बने M निशान वाले लोग झूठ से नफरत करते हैं। इन्हें बात को इधर-उधर घुमाने की जगह पर सीधे तौर पर कहना सही लगता है।
- ये लोग जिंदगी में घर व परिवार को बेहद अहमियत देते हैं। ये पार्टनर के साथ पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाती है।
- ये लोग साहसी, निडर व आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं। ऐसे में ये चुनौतियों का सामना करने से कतराते नहीं है। इसके साथ अपनी कड़ी मेहनत व लगन से जल्दी ही जीवन में सफलता हासिल करते हैं। ऐसे में इन्हें समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है।
- ये स्वभाव से एकदम शांत व धैर्य वाले होते हैं। ये किसी भी काम में जल्दबाजी करने की जगह पर शांत मन से फैसला लेना सही समझते हैं।
| कहा जाता है कि हथेली पर M का निशान बहुत कम व किस्मत वालों के होता है। यह पुरुषों के दाएं व महिलाओं के बाएं हाथ में दिखाई देता है। अगर कही कोई पुरुष बाएं हाथ से काम करता है तो इसके लिए उसका बायां हाथ देखा जाता है। इसके साथ ही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हाथ में कम रेखाओं का होना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ऐसा निशान एक लाख लोगों में से किसी एक को होता है। ऐसे में जिन लोगों की हथेली पर M निशान होता है वे किस्मत वाले होते हैं। इन्हें जिंदगी के हर मोड़ पर किस्मत का साथ मिलता है। ये लोग अपनी मेहनत व लगन से जिंदगी में खूब नाम कमाते हैं। ऐसे में ये लोग आर्थिक तौर पर मजबूत होते हैं। मगर इसके बार आमतौर पर पैसा टिकता नहीं है। ये लोग साहस व आत्मविश्वास से भरे होते हैं। ये किसी की बात मानने की जगह पर खुद पर भरोसा रखते हैं। - ये लोग अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीना पसंद करते हैं। इन्हें किसी की दखलअंदाजी बिल्कुल भी बर्दाशत नहीं होती है। - जहां बात दूसरों की मदद करने की आती है। ये लोग कभी साथ नहीं छोड़ते हैं। - हथेली पर बने M निशान वाले लोग झूठ से नफरत करते हैं। इन्हें बात को इधर-उधर घुमाने की जगह पर सीधे तौर पर कहना सही लगता है। - ये लोग जिंदगी में घर व परिवार को बेहद अहमियत देते हैं। ये पार्टनर के साथ पूरी ईमानदारी से रिश्ता निभाती है। - ये लोग साहसी, निडर व आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं। ऐसे में ये चुनौतियों का सामना करने से कतराते नहीं है। इसके साथ अपनी कड़ी मेहनत व लगन से जल्दी ही जीवन में सफलता हासिल करते हैं। ऐसे में इन्हें समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है। - ये स्वभाव से एकदम शांत व धैर्य वाले होते हैं। ये किसी भी काम में जल्दबाजी करने की जगह पर शांत मन से फैसला लेना सही समझते हैं। |
पांवटा साहिब-पांवटा साहिब में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्तों ने घरों में बड़े ही धूमधाम से मनाया। हालांकि कोरोना महामारी के चलते नगर के विभिन्न मंदिरों में सूनापन रहा, लेकिन घरों में भक्तों ने श्रीकृष्ण भगवान की पूजा-अर्चना कर उन्हें झूले में झुलाया। इस दौरान भक्तों ने व्रत किया और श्रीकृष्ण भगवान की पूजा- अर्चना की। वैसे तो हर साल पांवटा साहिब के गीता भवन, विश्वकर्मा मंदिर, श्रीराधाकृष्ण यमुना मंदिर, तारुवाला शिव मंदिर, बद्रीपुर शिव मंदिर आदि में इस मौके पर भव्य कार्यक्रम के आयोजन होते थे जिसमें सैकड़ों की तादात में भक्त भाग लेते थे, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते श्री कृष्ण जन्माष्टमी घरों तक सिमट कर रह गई। इस बार न तो झांकियां निकल पाईं और न ही भजन संध्या का आयोजन हुआ, लेकिन फिर भी श्री कृष्ण के भक्तों में उत्साह की कोई कमी नहीं थी। लोग फेसबुक और व्हाट्सऐप पर एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई देते रहे।
| पांवटा साहिब-पांवटा साहिब में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्तों ने घरों में बड़े ही धूमधाम से मनाया। हालांकि कोरोना महामारी के चलते नगर के विभिन्न मंदिरों में सूनापन रहा, लेकिन घरों में भक्तों ने श्रीकृष्ण भगवान की पूजा-अर्चना कर उन्हें झूले में झुलाया। इस दौरान भक्तों ने व्रत किया और श्रीकृष्ण भगवान की पूजा- अर्चना की। वैसे तो हर साल पांवटा साहिब के गीता भवन, विश्वकर्मा मंदिर, श्रीराधाकृष्ण यमुना मंदिर, तारुवाला शिव मंदिर, बद्रीपुर शिव मंदिर आदि में इस मौके पर भव्य कार्यक्रम के आयोजन होते थे जिसमें सैकड़ों की तादात में भक्त भाग लेते थे, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते श्री कृष्ण जन्माष्टमी घरों तक सिमट कर रह गई। इस बार न तो झांकियां निकल पाईं और न ही भजन संध्या का आयोजन हुआ, लेकिन फिर भी श्री कृष्ण के भक्तों में उत्साह की कोई कमी नहीं थी। लोग फेसबुक और व्हाट्सऐप पर एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई देते रहे। |
Ghatshils (Rajesh Chowbey) : आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से शनिवार को घाटशिला अंचल कार्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित कर 18 आश्रितों को 7,96,500 रुपये मुआवजा राशि प्रदान किया गया. इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में विधायक रामदास सोरेन, सांसद प्रतिनिधि सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा राहत कोष से आश्रितों को मुआवजा राशि जल्द से जल्द देने का प्रावधान शुरू किया है. पूर्व में इस राशि के भुगतान में काफी समय लगता था. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार के भीतर काम करने की इच्छा शक्ति है इसलिए आज बीडीओ, सीओ डोर टू डोर जाकर सर्वजन पेंशन योजना के लाभुकों की खोज कर रहे हैं. इतना ही नहीं सरकार की ओर से विधायकों को भी होमवर्क के तहत लोगों को हर सुविधा प्रदान कराने का निर्देश दिया गया है.
उन्होंने सर्पदंश में मृतक के आश्रित राजा सिंह को चार लाख रुपए चेक प्रदान किया, इसके अलावा सड़क दुर्घटना में मारे गए इन लोगों के आश्रित को एक-एक लाख रुपये का चेक सौंपा तथा कोरोना से मृत व्यक्ति के आश्रित रवि कुमार बरुआ को 50 हजार का चेक दिया गया. इसके अलावा 13 लोगों का आंधी तूफान में क्षतिग्रस्त हुए मकान के लिए कुल 46,500 रुपया मुआवजा राशि दिया गया. मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी सत्यवीर रजक, बीडीओ कुमार एस अभिनव, सीओ राजीव कुमार, सांसद प्रतिनिधि दिनेश साव, प्रमुख सुशीला टुडू, जिला परिषद सदस्य करण सिंह, देवयानी मुर्मू, मुखिया पार्वती मुर्मू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं लाभुक उपस्थित थे.
| Ghatshils : आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से शनिवार को घाटशिला अंचल कार्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित कर अट्ठारह आश्रितों को सात,छियानवे,पाँच सौ रुपयापये मुआवजा राशि प्रदान किया गया. इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में विधायक रामदास सोरेन, सांसद प्रतिनिधि सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा राहत कोष से आश्रितों को मुआवजा राशि जल्द से जल्द देने का प्रावधान शुरू किया है. पूर्व में इस राशि के भुगतान में काफी समय लगता था. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार के भीतर काम करने की इच्छा शक्ति है इसलिए आज बीडीओ, सीओ डोर टू डोर जाकर सर्वजन पेंशन योजना के लाभुकों की खोज कर रहे हैं. इतना ही नहीं सरकार की ओर से विधायकों को भी होमवर्क के तहत लोगों को हर सुविधा प्रदान कराने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने सर्पदंश में मृतक के आश्रित राजा सिंह को चार लाख रुपए चेक प्रदान किया, इसके अलावा सड़क दुर्घटना में मारे गए इन लोगों के आश्रित को एक-एक लाख रुपये का चेक सौंपा तथा कोरोना से मृत व्यक्ति के आश्रित रवि कुमार बरुआ को पचास हजार का चेक दिया गया. इसके अलावा तेरह लोगों का आंधी तूफान में क्षतिग्रस्त हुए मकान के लिए कुल छियालीस,पाँच सौ रुपयापया मुआवजा राशि दिया गया. मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी सत्यवीर रजक, बीडीओ कुमार एस अभिनव, सीओ राजीव कुमार, सांसद प्रतिनिधि दिनेश साव, प्रमुख सुशीला टुडू, जिला परिषद सदस्य करण सिंह, देवयानी मुर्मू, मुखिया पार्वती मुर्मू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं लाभुक उपस्थित थे. |
जीने के लिए सबसे अधिक जरूरी क्रियाओं में से एक है खाना। खाना ही हमारे शरीर को जीने की शक्ति प्रदान करता है। समय के साथ-साथ हमारी दिनचर्या में कई बड़े-बड़े परिवर्तन आ गए हैं।
हमारी सभी क्रियाएं और उनका तरीका बदल गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमारा खाना खाने का तरीका भी पूरी तरह प्रभावित हुआ है। आज अधिकांश लोग खाना डायनिंग टेबल पर बैठकर खाते हैं। जबकि पुराने समय में जमीन पर आसन लगाकर खाना खाने की परंपरा थी। प्राचीन काल से ही बैठकर खाना खाने की परंपरा चली आ रही है, इसके कई लाभ हैं।
डायनिंग टेबल पर बैठकर खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां स्वतः ही हमें घेर लेती हैं परंतु जो लोग जमीन पर बैठकर पारंपरिक तरीके से खाने खाते हैं उनसे कई छोटी-छोटी बीमारियां दूर ही रहती है।
जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष योगासन की अवस्था में बैठते हैं, जिसे सुखासन कहा जाता है। सुखासन पद्मासन का एक रूप है। सुखासन से स्वास्थ्य संबंधी वे सभी लाभ प्राप्त होते हैं जो पद्मासन से प्राप्त होते हैं।
बैठकर खाना खाने से हम अच्छे से खाना खा सकते हैं। इस आसन से मन की एकाग्रता बढ़ती है। सुखासन से पूरे शरीर में रक्त-संचार समान रूप से होने लगता है। जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान हो जाता है।
इस आसन से मानसिक तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ता है।
इससे हमारी छाती और पैर मजबूत बनते हैं। सुखासन वीर्य रक्षा में भी मदद करता है। इस तरह खाना खाने से मोटापा, अपच, कब्ज, एसीडीटी आदि पेट संबंधी बीमारियों में भी राहत मिलती है।
आज की भागती-दौड़ती जिंदगी ने हमारे स्वास्थ्य के संबंध में सोचने का समय तक छीन लिया है।
ऐसे में जमीन पर सुखासन अवस्था में बैठकर खाने से वे कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर शरीर को ऊर्जावान और स्फूर्तिवान बना सकते हैं।
| जीने के लिए सबसे अधिक जरूरी क्रियाओं में से एक है खाना। खाना ही हमारे शरीर को जीने की शक्ति प्रदान करता है। समय के साथ-साथ हमारी दिनचर्या में कई बड़े-बड़े परिवर्तन आ गए हैं। हमारी सभी क्रियाएं और उनका तरीका बदल गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमारा खाना खाने का तरीका भी पूरी तरह प्रभावित हुआ है। आज अधिकांश लोग खाना डायनिंग टेबल पर बैठकर खाते हैं। जबकि पुराने समय में जमीन पर आसन लगाकर खाना खाने की परंपरा थी। प्राचीन काल से ही बैठकर खाना खाने की परंपरा चली आ रही है, इसके कई लाभ हैं। डायनिंग टेबल पर बैठकर खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां स्वतः ही हमें घेर लेती हैं परंतु जो लोग जमीन पर बैठकर पारंपरिक तरीके से खाने खाते हैं उनसे कई छोटी-छोटी बीमारियां दूर ही रहती है। जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष योगासन की अवस्था में बैठते हैं, जिसे सुखासन कहा जाता है। सुखासन पद्मासन का एक रूप है। सुखासन से स्वास्थ्य संबंधी वे सभी लाभ प्राप्त होते हैं जो पद्मासन से प्राप्त होते हैं। बैठकर खाना खाने से हम अच्छे से खाना खा सकते हैं। इस आसन से मन की एकाग्रता बढ़ती है। सुखासन से पूरे शरीर में रक्त-संचार समान रूप से होने लगता है। जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान हो जाता है। इस आसन से मानसिक तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ता है। इससे हमारी छाती और पैर मजबूत बनते हैं। सुखासन वीर्य रक्षा में भी मदद करता है। इस तरह खाना खाने से मोटापा, अपच, कब्ज, एसीडीटी आदि पेट संबंधी बीमारियों में भी राहत मिलती है। आज की भागती-दौड़ती जिंदगी ने हमारे स्वास्थ्य के संबंध में सोचने का समय तक छीन लिया है। ऐसे में जमीन पर सुखासन अवस्था में बैठकर खाने से वे कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर शरीर को ऊर्जावान और स्फूर्तिवान बना सकते हैं। |
PATNA : बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर सियासत तेज हो गयी है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है।
राजेश राठौड़ ने कहा है कि सीएम नीतीश कुमार सुनिश्चित करें कि बिहार को विशेष राज्य के दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को कब अल्टीमेटम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए मुहिम चलाने वाले सीएम नीतीश कुमार आज अपने गठबंधन की केंद्र में सरकार होने के बावजूद इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं।
उन्होंने कहा कि जब-जब नीतीश सरकार चमकी बुखार, बाढ़-सुखाड़, बेरोजगारी अथवा कोरोना जैसे महामारी में फंसती है तो बिहार वासियों को गुमराह करने के लिए जदयू के बयान वीर विशेष राज्य के दर्जे का राग अलापना शुरू कर देते है। अब जब नीति आयोग के सूची में भी बिहार नीतीश कुमार के 16 वें साल के शासनकाल में भी सबसे निचले स्थान चला गया है तो फिर जदयू के कुछ बयानवीरों ने फिर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग आरंभ कर दी है ।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार या तो इस मुद्दे पर मुँहाचार नहीं पत्राचार कर केंद्र सरकार को निश्चित तिथि का अल्टीमेटम दे। अन्यथा बिहार के जनता यही समझेगी की विशेष राज्य के दर्जे के मामले में नीतीश सरकार सिर्फ राजनीति कर रहे है।
| PATNA : बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर सियासत तेज हो गयी है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। राजेश राठौड़ ने कहा है कि सीएम नीतीश कुमार सुनिश्चित करें कि बिहार को विशेष राज्य के दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को कब अल्टीमेटम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए मुहिम चलाने वाले सीएम नीतीश कुमार आज अपने गठबंधन की केंद्र में सरकार होने के बावजूद इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब नीतीश सरकार चमकी बुखार, बाढ़-सुखाड़, बेरोजगारी अथवा कोरोना जैसे महामारी में फंसती है तो बिहार वासियों को गुमराह करने के लिए जदयू के बयान वीर विशेष राज्य के दर्जे का राग अलापना शुरू कर देते है। अब जब नीति आयोग के सूची में भी बिहार नीतीश कुमार के सोलह वें साल के शासनकाल में भी सबसे निचले स्थान चला गया है तो फिर जदयू के कुछ बयानवीरों ने फिर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग आरंभ कर दी है । उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार या तो इस मुद्दे पर मुँहाचार नहीं पत्राचार कर केंद्र सरकार को निश्चित तिथि का अल्टीमेटम दे। अन्यथा बिहार के जनता यही समझेगी की विशेष राज्य के दर्जे के मामले में नीतीश सरकार सिर्फ राजनीति कर रहे है। |
रात के दृश्यों में हम अक्सर चीजों का सामना करते हैं।आम। किसी को एक सेट टेबल या कंप्यूटर मॉनीटर पर बार-बार विचार करना पड़ता है; दूसरों को अपने बालों को अपनी नींद में जोड़ना पड़ता है। हर कोई इस तरह के कताई पर ध्यान नहीं देगा। और व्यर्थ में। बाल, एक नियम के रूप में, व्यक्ति के साथ अवचेतन की बातचीत में एक प्रतीकात्मक प्रतीक है। आइए समझें कि सपने में बाल देखने का क्या अर्थ है, और उनका ध्यान क्यों रखें। शुरुआत के साथ, प्रश्न में मानव शरीर (बाल के सिर) के गुप्त अर्थ के बारे में पाठक को प्रबुद्ध करने लायक है।
क्या आपने सोचा है कि एक औरत क्यों नहीं कर सकती हैचर्च के पास जाने के लिए? यह परंपरा अवसर से नहीं उभरी। इसकी जड़ें सदियों की गहराई में खो गई थीं। ऐसा लगता था कि महिलाओं की ब्राइड्स और कर्ल किसी प्रकार के एंटेना हैं। उनके माध्यम से, वह अंतरिक्ष (या दूसरी दुनिया) से गुप्त जानकारी समझती है। चर्च, निश्चित रूप से, इसे सभी पाखंडी और शैतानी ताकतों की machinations कहा जाता है। हालांकि, पवित्र चर्च में जादूगर कार्य को रोकने के लिए, सुंदरियों को उनके बालों को एक रूमाल से ढकने के लिए कहा गया था। यह कहानी हमें केवल उस हिस्से में रूचि देती है जिसे प्राचीन पूर्वजों ने देखा था। हमारे सिर एंटेना से भरे हुए हैं जो पतली दुनिया से मस्तिष्क तक जानकारी प्राप्त करते हैं और संचारित करते हैं। इस तरह के एक सिद्धांत से इंकार करने के लिए, विज्ञान नहीं कर सका (या कोशिश नहीं की)। तो यह पता चला है कि एक सपने में बालों को जोड़ना - मतलब है "उच्च" के साथ संपर्क की आवश्यकता है। एक सरल तरीके से, एंटीना समायोजित करें। इस तरह के एक विचार के आधार पर कई दुभाषियों ने अपनी प्रतिलिपि बनाई। आइए उन्हें बारीकी से देखें।
यह बुद्धिमान लेखक रूट पर सही देखता है। एक सपने में बालों को जोड़ना असामान्य पारस्परिक संबंधों में खींचा जाने का जोखिम है। सहमत हैं, स्वाभाविक रूप से, जब एक व्यक्ति दूसरे को समान मानता है। खासकर जब अंतरंग संचार की बात आती है। और यदि आप एक कंघी या ब्रश में हेरफेर करने का सपना देखते हैं, तो आपको इस बारे में सोचना चाहिए कि वह साथी पास है या नहीं। आखिरकार, एक व्यक्ति के बालों को जोड़कर एक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के पूर्ण अवशोषण के लिए प्रयास करता है, जैसा कि श्री मेनेघेटी का दावा है। वह जो बाल करता है, वह पीड़ित के रूप में कार्य करेगा। सपना संकेत, चेतावनी। विशेष रूप से यह चिंताजनक है कि "हेयरड्रेसर" की पहचान अज्ञात हो गई है। आप को मनोवैज्ञानिक प्रकृति के कपटी नेटवर्क द्वारा घनिष्ठ रूप से देखा जा रहा है। आम तौर पर, लेखक को आश्वस्त है कि एक सपने में बाल देखकर घनिष्ठ क्षेत्र में कुछ घटनाएं होती हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। कर्ल के रूप में, आप उनके अभिविन्यास को निर्धारित कर सकते हैं। अगर वे सुंदर, शानदार, स्वस्थ हो गए, तो इसका मतलब है कि साथी सुंदर होगा, और उसके साथ संचार आत्मा में खुशी पैदा करेगा। हंग, गंदा, निराश, ज़ाहिर है, वास्तविकता में विपरीत घटनाओं की ओर इशारा करते हुए।
यहां हमें एक अलग डिक्रिप्शन योजना का सामना करना पड़ रहा है। निर्देशिका के कंपाइलर मानव स्वास्थ्य के साथ कर्ल के प्रकार के वास्तविक संबंध से आगे बढ़ते हैं। एक सपने में लंबे बाल का मिश्रण - बीमारों के लिए वसूली के लिए। लेकिन इसके विपरीत, रोग के विपरीत, उन्हें देखें। इसके अलावा, यह व्याख्या केवल कर्ल के मालिक से संबंधित है। यही है, अगर आपको परिचित लोगों के किसी के साथ अपने सपने में अपने बालों को बांधने का मौका मिला, तो वह सुरक्षित रूप से दुर्भाग्य से छुटकारा पाने के लिए उसके ऊपर है। जब वे वास्तव में उपस्थित नहीं होते हैं तो किसी के सिर पर लंबे समय तक चलने के लिए एक बीमारी का अग्रदूत होता है। बाल भूरे रंग के होने पर भी बदतर। यह, इस संग्रह के आश्वासन के अनुसार, महान दुख का मतलब है। शायद कोई प्रिय और करीबी सपनों को हमेशा के लिए छोड़ देगा। शोक पहनना है। अपने बालों को धोने के लिएः घर पर - बेहतर के लिए एक बदलाव के लिए, एक दूसरे पर - चिंताओं और परेशानियों के लिए। हमें किसी की देखभाल करना, मदद करना, आंसू मिटा देना और अन्य लोगों की समस्याओं को हल करना होगा। मॉर्फियस देश में किसी के कर्ल को काटने के लिए - इस व्यक्ति के साथ भारी, घातक झगड़ा करने के लिए।
यहां हम इस विषय पर भी आते हैं।रिश्तों। श्री मिलर ने अपने लिंग के अनुसार सपने देखने वालों के लिए व्याख्याओं को विभाजित करने का फैसला किया। तो, एक महिला के लिए दर्पण के सामने एक सपने में बालों को जोड़ना उसका हल्कापन है। एक कपटी seducer द्वारा सेट जाल में गिरने का खतरा है। एक कड़वी भाग्य एक खूबसूरत औरत की प्रतीक्षा करता है, अगर वह दिमाग नहीं लेती है, जो सपने में आने वाले सुराग से निर्देशित होती है। अगर लड़की ने उसके सिर पर काले और हल्के तारों को देखा, तो उसके सामने एक मुश्किल विकल्प होगा। इच्छाओं में केवल ज्ञान और संयम जीवन परिस्थितियों की जटिलताओं को समझने में मदद करेगा। लेकिन सफेद बाल का मतलब असीमित खुशी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसके साथ क्या करते हैं। जब एक औरत ने देखा कि एक आदमी अपने बालों को एक सपने में जोड़ रहा था, तो उसे इस सज्जन से सावधान रहना चाहिए। उनकी भावनाएं अमानवीय हैं। मर्केंटाइल और गणना उनके कार्यों का मार्गदर्शन करती है। साहस उसकी खुशी नहीं लाएगा। एक आदमी अपने तारों को कंघी कर रहा है - सफलता के लिए, अगर वे स्वस्थ और सुंदर दिखते हैं। और विफलता के लिए, जब सिर स्पैस, गंदे या फीका बाल था।
इस लेखक के पास अपना दृष्टिकोण हैअवचेतन के गुप्त संकेतों की मान्यता। उनकी राय में, बाल मादा जननांग का प्रतीक हैं। और उसकी सभी व्याख्याएं इस विवादास्पद तथ्य से ठीक आती हैं। अगर एक औरत ने सपना देखा है कि वह अपने कर्ल को जोड़ रही है, तो उसे मिस्ड अवसरों पर पछतावा करना होगा (पढ़नाः अस्वीकार भागीदारों)। इस तरह की एक साजिश एक आदमी को बताती है कि वह यौन क्षेत्र में नई उपलब्धियों के लिए तैयार है। एक सपने में ग्रे बाल हर किसी को परेशान करना चाहिए। यह नपुंसकता, जुनून की कमी का प्रतीक है।
हर कोई जानता है कि सेलेस्टियल में एक और शासनकालदृष्टिकोण। इसलिए, उनका डिक्रिप्शन यूरोपीय लेखकों द्वारा प्रस्तुत किए गए लोगों के समान नहीं है। इसलिए, एक सपने में भूरे बालों को चीनी द्वारा दीर्घायु और महान खुशी का संकेत माना जाता है। और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तस्वीर का सपना देखा गया है। जीवन से सपना लेने के लिए तैयार हो जाओ। अगर मुझे अपने सिर पर कर्ल को जोड़ना पड़ा, तो सपना किताब पेर्क की सिफारिश करती है। जल्द ही जीवन परिस्थितियों में बेहतर बदलाव आएगा। सभी दुःख एक तेज घोड़े के खुर के नीचे से चिड़ियों की तरह उड़ जाएगा। चिंता व्यर्थ हो जाएगी। आप खुशी से और गर्व से आगे बढ़कर, खुशी से आगे देख सकते हैं। हालांकि, इस अद्भुत स्रोत में बुरे संकेत हैं। यदि किसी आदमी के सपनों में तंग आते हैं, तो आपको बेटे या पोते के नुकसान के कारण पीड़ित होना पड़ेगा। खुले कर्ल के साथ प्रिय पति को देखने के लिए - उसके राजद्रोह के लिए। दुश्मनों की साजिशों का सामना करने के लिए स्वयं को अपने चेहरों को कैसे कवर किया जाता है, यह महसूस करने के लिए खुद को नंगे सिर के रूप में जाना जाता है। हमें मुकदमेबाजी में प्रवेश करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप दुखी होगा।
लेखक की आशावादी देखो व्याख्या। लड़की के लिए कर्ल मुकाबला - शादी के लिए। सहमत हैं, अच्छा। अगर उसने एक सपना देखाः माँ अपने बालों को पकड़ती है, पता है, यह माता-पिता है जो दूल्हे की पसंद को प्रभावित करेगा। ऐसा पूर्वानुमान आधुनिक लड़कियों के लिए काफी सकारात्मक नहीं लग सकता है। उन्हें इस तथ्य पर प्रतिबिंबित होना चाहिए कि एक और खुशहाल जीवन आयोजित करने में अनुभव युवा शौक की तुलना में अधिक उपयोगी है। अगर वे पालन करते हैं, तो मातृ सलाह सुनना उचित है। और नहीं, तो अपने आप को माता-पिता के पते पर करें, आगे के भाग्य पर अपने विचार की व्याख्या करें। वह आपको बताएगी कि सिर में क्या गलत है, सही विचार, उसके अवलोकन और अनुभव साझा करें। उस विवाहित महिला की शादी से डरना चाहिए। जैसा कि सपना किताब कहती है, वह परिवार की समस्याओं से जुड़ी एक दुखी सड़क की भविष्यवाणी करता है। शायद पति / पत्नी के हिस्से पर हमला। पवित्र के साथ बातचीत में सावधानी और सावधानी बरतना आवश्यक है। कौन, जैसा कि वे कहते हैं, forewarned forearmed है। एक आदमी अपने हेजहोग को जोड़कर - मेहमानों के लिए, अच्छा। असहज, हालांकि!
बुद्धिमान सकारात्मक भविष्यवाणियों के इस स्रोत में, हममिलेगा श्री हससे यकीन है कि रात के दृश्यों में बालों को जोड़ना व्यक्ति को काम करने के लिए एक और गंभीर दृष्टिकोण के लिए प्रेरित करना है। आखिरकार, सपने आसन्न असफलताओं, असफलताओं और हानियों की बात करता है। मजबूत लिंग के प्रतिनिधियों को विशेष ध्यान देने की सिफारिश की जाती है। अगर वे खुद को उन्मुख नहीं करते हैं, तो रात के स्वर्गदूतों की अच्छी सलाह खारिज कर दें, वे परिवार के कल्याण को खतरे में डाल देंगे। नुकसान अस्वीकार्य हो सकता है। श्री हससे के अनुसार व्यापारिक लोगों को नवीनतम निर्णयों का विश्लेषण करना चाहिए, परियोजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करना चाहिए। सबसे अधिक संभावना है कि, एक शर्मनाक गलती उनकी पिछली गणनाओं में आ गई, जिसने बीमारियों या साधारण चोरों को खेत में रखने की इजाजत दी। सुरक्षात्मक या सक्रिय उपायों को लेने की तत्काल आवश्यकता है। अन्यथा, दिवालियापन अपरिहार्य है। जो महिलाएं कर्ल के संयोजन को देखते हैं उन्हें भी पूर्व विचार की आवश्यकता होती है। पहने हुए धोखेबाज के पास। अपने पंजे वाले पंजे में न आएं - यह निकट भविष्य के लिए सपने देखने वाला लक्ष्य है।
| रात के दृश्यों में हम अक्सर चीजों का सामना करते हैं।आम। किसी को एक सेट टेबल या कंप्यूटर मॉनीटर पर बार-बार विचार करना पड़ता है; दूसरों को अपने बालों को अपनी नींद में जोड़ना पड़ता है। हर कोई इस तरह के कताई पर ध्यान नहीं देगा। और व्यर्थ में। बाल, एक नियम के रूप में, व्यक्ति के साथ अवचेतन की बातचीत में एक प्रतीकात्मक प्रतीक है। आइए समझें कि सपने में बाल देखने का क्या अर्थ है, और उनका ध्यान क्यों रखें। शुरुआत के साथ, प्रश्न में मानव शरीर के गुप्त अर्थ के बारे में पाठक को प्रबुद्ध करने लायक है। क्या आपने सोचा है कि एक औरत क्यों नहीं कर सकती हैचर्च के पास जाने के लिए? यह परंपरा अवसर से नहीं उभरी। इसकी जड़ें सदियों की गहराई में खो गई थीं। ऐसा लगता था कि महिलाओं की ब्राइड्स और कर्ल किसी प्रकार के एंटेना हैं। उनके माध्यम से, वह अंतरिक्ष से गुप्त जानकारी समझती है। चर्च, निश्चित रूप से, इसे सभी पाखंडी और शैतानी ताकतों की machinations कहा जाता है। हालांकि, पवित्र चर्च में जादूगर कार्य को रोकने के लिए, सुंदरियों को उनके बालों को एक रूमाल से ढकने के लिए कहा गया था। यह कहानी हमें केवल उस हिस्से में रूचि देती है जिसे प्राचीन पूर्वजों ने देखा था। हमारे सिर एंटेना से भरे हुए हैं जो पतली दुनिया से मस्तिष्क तक जानकारी प्राप्त करते हैं और संचारित करते हैं। इस तरह के एक सिद्धांत से इंकार करने के लिए, विज्ञान नहीं कर सका । तो यह पता चला है कि एक सपने में बालों को जोड़ना - मतलब है "उच्च" के साथ संपर्क की आवश्यकता है। एक सरल तरीके से, एंटीना समायोजित करें। इस तरह के एक विचार के आधार पर कई दुभाषियों ने अपनी प्रतिलिपि बनाई। आइए उन्हें बारीकी से देखें। यह बुद्धिमान लेखक रूट पर सही देखता है। एक सपने में बालों को जोड़ना असामान्य पारस्परिक संबंधों में खींचा जाने का जोखिम है। सहमत हैं, स्वाभाविक रूप से, जब एक व्यक्ति दूसरे को समान मानता है। खासकर जब अंतरंग संचार की बात आती है। और यदि आप एक कंघी या ब्रश में हेरफेर करने का सपना देखते हैं, तो आपको इस बारे में सोचना चाहिए कि वह साथी पास है या नहीं। आखिरकार, एक व्यक्ति के बालों को जोड़कर एक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के पूर्ण अवशोषण के लिए प्रयास करता है, जैसा कि श्री मेनेघेटी का दावा है। वह जो बाल करता है, वह पीड़ित के रूप में कार्य करेगा। सपना संकेत, चेतावनी। विशेष रूप से यह चिंताजनक है कि "हेयरड्रेसर" की पहचान अज्ञात हो गई है। आप को मनोवैज्ञानिक प्रकृति के कपटी नेटवर्क द्वारा घनिष्ठ रूप से देखा जा रहा है। आम तौर पर, लेखक को आश्वस्त है कि एक सपने में बाल देखकर घनिष्ठ क्षेत्र में कुछ घटनाएं होती हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। कर्ल के रूप में, आप उनके अभिविन्यास को निर्धारित कर सकते हैं। अगर वे सुंदर, शानदार, स्वस्थ हो गए, तो इसका मतलब है कि साथी सुंदर होगा, और उसके साथ संचार आत्मा में खुशी पैदा करेगा। हंग, गंदा, निराश, ज़ाहिर है, वास्तविकता में विपरीत घटनाओं की ओर इशारा करते हुए। यहां हमें एक अलग डिक्रिप्शन योजना का सामना करना पड़ रहा है। निर्देशिका के कंपाइलर मानव स्वास्थ्य के साथ कर्ल के प्रकार के वास्तविक संबंध से आगे बढ़ते हैं। एक सपने में लंबे बाल का मिश्रण - बीमारों के लिए वसूली के लिए। लेकिन इसके विपरीत, रोग के विपरीत, उन्हें देखें। इसके अलावा, यह व्याख्या केवल कर्ल के मालिक से संबंधित है। यही है, अगर आपको परिचित लोगों के किसी के साथ अपने सपने में अपने बालों को बांधने का मौका मिला, तो वह सुरक्षित रूप से दुर्भाग्य से छुटकारा पाने के लिए उसके ऊपर है। जब वे वास्तव में उपस्थित नहीं होते हैं तो किसी के सिर पर लंबे समय तक चलने के लिए एक बीमारी का अग्रदूत होता है। बाल भूरे रंग के होने पर भी बदतर। यह, इस संग्रह के आश्वासन के अनुसार, महान दुख का मतलब है। शायद कोई प्रिय और करीबी सपनों को हमेशा के लिए छोड़ देगा। शोक पहनना है। अपने बालों को धोने के लिएः घर पर - बेहतर के लिए एक बदलाव के लिए, एक दूसरे पर - चिंताओं और परेशानियों के लिए। हमें किसी की देखभाल करना, मदद करना, आंसू मिटा देना और अन्य लोगों की समस्याओं को हल करना होगा। मॉर्फियस देश में किसी के कर्ल को काटने के लिए - इस व्यक्ति के साथ भारी, घातक झगड़ा करने के लिए। यहां हम इस विषय पर भी आते हैं।रिश्तों। श्री मिलर ने अपने लिंग के अनुसार सपने देखने वालों के लिए व्याख्याओं को विभाजित करने का फैसला किया। तो, एक महिला के लिए दर्पण के सामने एक सपने में बालों को जोड़ना उसका हल्कापन है। एक कपटी seducer द्वारा सेट जाल में गिरने का खतरा है। एक कड़वी भाग्य एक खूबसूरत औरत की प्रतीक्षा करता है, अगर वह दिमाग नहीं लेती है, जो सपने में आने वाले सुराग से निर्देशित होती है। अगर लड़की ने उसके सिर पर काले और हल्के तारों को देखा, तो उसके सामने एक मुश्किल विकल्प होगा। इच्छाओं में केवल ज्ञान और संयम जीवन परिस्थितियों की जटिलताओं को समझने में मदद करेगा। लेकिन सफेद बाल का मतलब असीमित खुशी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसके साथ क्या करते हैं। जब एक औरत ने देखा कि एक आदमी अपने बालों को एक सपने में जोड़ रहा था, तो उसे इस सज्जन से सावधान रहना चाहिए। उनकी भावनाएं अमानवीय हैं। मर्केंटाइल और गणना उनके कार्यों का मार्गदर्शन करती है। साहस उसकी खुशी नहीं लाएगा। एक आदमी अपने तारों को कंघी कर रहा है - सफलता के लिए, अगर वे स्वस्थ और सुंदर दिखते हैं। और विफलता के लिए, जब सिर स्पैस, गंदे या फीका बाल था। इस लेखक के पास अपना दृष्टिकोण हैअवचेतन के गुप्त संकेतों की मान्यता। उनकी राय में, बाल मादा जननांग का प्रतीक हैं। और उसकी सभी व्याख्याएं इस विवादास्पद तथ्य से ठीक आती हैं। अगर एक औरत ने सपना देखा है कि वह अपने कर्ल को जोड़ रही है, तो उसे मिस्ड अवसरों पर पछतावा करना होगा । इस तरह की एक साजिश एक आदमी को बताती है कि वह यौन क्षेत्र में नई उपलब्धियों के लिए तैयार है। एक सपने में ग्रे बाल हर किसी को परेशान करना चाहिए। यह नपुंसकता, जुनून की कमी का प्रतीक है। हर कोई जानता है कि सेलेस्टियल में एक और शासनकालदृष्टिकोण। इसलिए, उनका डिक्रिप्शन यूरोपीय लेखकों द्वारा प्रस्तुत किए गए लोगों के समान नहीं है। इसलिए, एक सपने में भूरे बालों को चीनी द्वारा दीर्घायु और महान खुशी का संकेत माना जाता है। और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तस्वीर का सपना देखा गया है। जीवन से सपना लेने के लिए तैयार हो जाओ। अगर मुझे अपने सिर पर कर्ल को जोड़ना पड़ा, तो सपना किताब पेर्क की सिफारिश करती है। जल्द ही जीवन परिस्थितियों में बेहतर बदलाव आएगा। सभी दुःख एक तेज घोड़े के खुर के नीचे से चिड़ियों की तरह उड़ जाएगा। चिंता व्यर्थ हो जाएगी। आप खुशी से और गर्व से आगे बढ़कर, खुशी से आगे देख सकते हैं। हालांकि, इस अद्भुत स्रोत में बुरे संकेत हैं। यदि किसी आदमी के सपनों में तंग आते हैं, तो आपको बेटे या पोते के नुकसान के कारण पीड़ित होना पड़ेगा। खुले कर्ल के साथ प्रिय पति को देखने के लिए - उसके राजद्रोह के लिए। दुश्मनों की साजिशों का सामना करने के लिए स्वयं को अपने चेहरों को कैसे कवर किया जाता है, यह महसूस करने के लिए खुद को नंगे सिर के रूप में जाना जाता है। हमें मुकदमेबाजी में प्रवेश करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप दुखी होगा। लेखक की आशावादी देखो व्याख्या। लड़की के लिए कर्ल मुकाबला - शादी के लिए। सहमत हैं, अच्छा। अगर उसने एक सपना देखाः माँ अपने बालों को पकड़ती है, पता है, यह माता-पिता है जो दूल्हे की पसंद को प्रभावित करेगा। ऐसा पूर्वानुमान आधुनिक लड़कियों के लिए काफी सकारात्मक नहीं लग सकता है। उन्हें इस तथ्य पर प्रतिबिंबित होना चाहिए कि एक और खुशहाल जीवन आयोजित करने में अनुभव युवा शौक की तुलना में अधिक उपयोगी है। अगर वे पालन करते हैं, तो मातृ सलाह सुनना उचित है। और नहीं, तो अपने आप को माता-पिता के पते पर करें, आगे के भाग्य पर अपने विचार की व्याख्या करें। वह आपको बताएगी कि सिर में क्या गलत है, सही विचार, उसके अवलोकन और अनुभव साझा करें। उस विवाहित महिला की शादी से डरना चाहिए। जैसा कि सपना किताब कहती है, वह परिवार की समस्याओं से जुड़ी एक दुखी सड़क की भविष्यवाणी करता है। शायद पति / पत्नी के हिस्से पर हमला। पवित्र के साथ बातचीत में सावधानी और सावधानी बरतना आवश्यक है। कौन, जैसा कि वे कहते हैं, forewarned forearmed है। एक आदमी अपने हेजहोग को जोड़कर - मेहमानों के लिए, अच्छा। असहज, हालांकि! बुद्धिमान सकारात्मक भविष्यवाणियों के इस स्रोत में, हममिलेगा श्री हससे यकीन है कि रात के दृश्यों में बालों को जोड़ना व्यक्ति को काम करने के लिए एक और गंभीर दृष्टिकोण के लिए प्रेरित करना है। आखिरकार, सपने आसन्न असफलताओं, असफलताओं और हानियों की बात करता है। मजबूत लिंग के प्रतिनिधियों को विशेष ध्यान देने की सिफारिश की जाती है। अगर वे खुद को उन्मुख नहीं करते हैं, तो रात के स्वर्गदूतों की अच्छी सलाह खारिज कर दें, वे परिवार के कल्याण को खतरे में डाल देंगे। नुकसान अस्वीकार्य हो सकता है। श्री हससे के अनुसार व्यापारिक लोगों को नवीनतम निर्णयों का विश्लेषण करना चाहिए, परियोजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करना चाहिए। सबसे अधिक संभावना है कि, एक शर्मनाक गलती उनकी पिछली गणनाओं में आ गई, जिसने बीमारियों या साधारण चोरों को खेत में रखने की इजाजत दी। सुरक्षात्मक या सक्रिय उपायों को लेने की तत्काल आवश्यकता है। अन्यथा, दिवालियापन अपरिहार्य है। जो महिलाएं कर्ल के संयोजन को देखते हैं उन्हें भी पूर्व विचार की आवश्यकता होती है। पहने हुए धोखेबाज के पास। अपने पंजे वाले पंजे में न आएं - यह निकट भविष्य के लिए सपने देखने वाला लक्ष्य है। |
अफ़ग़ानिस्तान में कुख्यात देश, एक के बाद एक इस देश से निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
इतिहास में अफ़ग़ानियों और बूढ़े साम्राज्य के बीच कभी भी अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। ग्यारह सितम्बर की घटना के बाद अमरीका के बाद वाशिंग्टन के सबसे बड़े सहयोगी के रूप में अफ़ग़ानिस्तान पर चढ़ाई करने वाला ब्रिटेन था।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने बयान में अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सैन्य उपस्थिति को ख़त्म करने का एलान किया और इस देश के भविष्य को लेकर चिंता जताई. . . . इस समय अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है और इसको कम आंका नही जा सकता। ब्रिटिश अफ़गानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र विशेषकर हेलमंद प्रांत में ज़्यादातर थे और रात में हमला करने, हवाई हमलों, आम नागरिकों के जनसंहार और जनता की संपत्ति लूटने जैसे अपराधों में अमरीका के बराबर के भागीदार हैं।
अफ़ग़ानियों से ज़बरदस्त पराजय मिलने के बाद ब्रिटेन इस समय अमरीका की सबसे बड़ी जंग अफ़गानिस्तान में अपने 454 सैनिकों को खो चुका है। ब्रिटेन पिछले 20 साल के दौरान पोस्तो की खेती और मादक पदार्थों की पैदावार की रोकथाम के ज़िम्मेदार थे लेकिन उनकी मौजूदगी की वजह से अफ़ग़ानिस्तान में हिरोइन की पैदावार बढ़कर 200 टन से 9000 टन तक पहुंच गयी।
ब्रिटिश एसी स्थिति में अपने साथियो के साथ अफ़ग़ानिस्तान से निकल कर जा रहे हैं कि काबुल उन झड़पों से जूझ रहा है जो इन देशों ने शुरू की थी। पिछले 24 घंटे के दौरान जैसा कि तालेबान ने दावा किया है कि हेरात और ज़ाबुल प्रांतों के बहुत से ज़िलों और शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया है। तालेबान ने इसी तरह अफ़ग़िस्तान के बादग़ीस प्रांत के केन्द्र क़िले नौ पर एक बार फिर हमला किया। यहां पर यह गाड़ी तालेबान ने क़िले नौ में दाख़िल होने के लिए आत्मघाती हमले के तौर पर प्रयोग की है लेकिन सेना ने इसे समय पर ही उड़ा दिया।
सेना का कहना है कि क़िले नौ से तालेबान के सफ़ाए के अभियान के दौरान लगभग 70 तालेबान मारे गये, अफ़ग़ान जनता वर्षों से शांति के प्यासे हैं, तेहरान की मेज़बानी में तालेबान और सरकार के बीच वार्ता ने अफ़ग़ानिस्तान में नई उम्मीद की किरण पैदा कर दी है, अफ़ग़ानिस्तान के विदेशमंत्रालय और पूर्व राष्ट्रपति ने बयान जारी करके इस बैठक के आयोजन की कोशिश की सराहना और इसके परिणामों का स्वागत किया है।
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| अफ़ग़ानिस्तान में कुख्यात देश, एक के बाद एक इस देश से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। इतिहास में अफ़ग़ानियों और बूढ़े साम्राज्य के बीच कभी भी अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। ग्यारह सितम्बर की घटना के बाद अमरीका के बाद वाशिंग्टन के सबसे बड़े सहयोगी के रूप में अफ़ग़ानिस्तान पर चढ़ाई करने वाला ब्रिटेन था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने बयान में अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सैन्य उपस्थिति को ख़त्म करने का एलान किया और इस देश के भविष्य को लेकर चिंता जताई. . . . इस समय अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है और इसको कम आंका नही जा सकता। ब्रिटिश अफ़गानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र विशेषकर हेलमंद प्रांत में ज़्यादातर थे और रात में हमला करने, हवाई हमलों, आम नागरिकों के जनसंहार और जनता की संपत्ति लूटने जैसे अपराधों में अमरीका के बराबर के भागीदार हैं। अफ़ग़ानियों से ज़बरदस्त पराजय मिलने के बाद ब्रिटेन इस समय अमरीका की सबसे बड़ी जंग अफ़गानिस्तान में अपने चार सौ चौवन सैनिकों को खो चुका है। ब्रिटेन पिछले बीस साल के दौरान पोस्तो की खेती और मादक पदार्थों की पैदावार की रोकथाम के ज़िम्मेदार थे लेकिन उनकी मौजूदगी की वजह से अफ़ग़ानिस्तान में हिरोइन की पैदावार बढ़कर दो सौ टन से नौ हज़ार टन तक पहुंच गयी। ब्रिटिश एसी स्थिति में अपने साथियो के साथ अफ़ग़ानिस्तान से निकल कर जा रहे हैं कि काबुल उन झड़पों से जूझ रहा है जो इन देशों ने शुरू की थी। पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान जैसा कि तालेबान ने दावा किया है कि हेरात और ज़ाबुल प्रांतों के बहुत से ज़िलों और शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया है। तालेबान ने इसी तरह अफ़ग़िस्तान के बादग़ीस प्रांत के केन्द्र क़िले नौ पर एक बार फिर हमला किया। यहां पर यह गाड़ी तालेबान ने क़िले नौ में दाख़िल होने के लिए आत्मघाती हमले के तौर पर प्रयोग की है लेकिन सेना ने इसे समय पर ही उड़ा दिया। सेना का कहना है कि क़िले नौ से तालेबान के सफ़ाए के अभियान के दौरान लगभग सत्तर तालेबान मारे गये, अफ़ग़ान जनता वर्षों से शांति के प्यासे हैं, तेहरान की मेज़बानी में तालेबान और सरकार के बीच वार्ता ने अफ़ग़ानिस्तान में नई उम्मीद की किरण पैदा कर दी है, अफ़ग़ानिस्तान के विदेशमंत्रालय और पूर्व राष्ट्रपति ने बयान जारी करके इस बैठक के आयोजन की कोशिश की सराहना और इसके परिणामों का स्वागत किया है। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए! |
ग्वालियर पुलिस को ऑपरेशन मुस्कान के तहत बड़ी सफलता मिली है। सीएम शिवराज सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान में 25 दिन में पुलिस ने 90 लापता लड़कियों को यूपी, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा से बरामद किया है। यह ग्वालियर के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। अभी भी 85 लड़कियां लापता है। पुलिस लगातार इन बच्चियों को तलाशने के लिए अभियान चलाती रहेगी। इन सभी लड़कियों को पुलिस ने काउंसलिंग कर परिवारों के सुपुर्द कर दिया है।
दरअसल मध्य प्रदेश राज्य शासन के निर्देशों पर लापता और गुम हुई लड़कियों को खोजने के लिए 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत ग्वालियर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान के तहत जिले कि सभी थानों की पुलिस टीम को लगाया गया था। साथ ही क्राइम ब्रांच की भी स्पेशल टीमें बनाई गई थीं। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने देश के करीब 8 से 10 राज्यों में दबिश देकर 90 लड़कियां बरामद की हैं। 6 जनवरी से पूरे प्रदेश में चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान के सुखद नतीजे सामने आए हैं।
ग्वालियर में वर्ष 2013 से अभी तक के बीच कुल 150 लड़कियां लापता थीं। इसके साथ ही जनवरी 2021 में 25 नाबालिग लड़कियां और लापता हो गईं। 6 जनवरी से 31 जनवरी तक चलाए गए अभियान को पुलिस ने गंभीरता से लिया और हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से 90 लड़कियां बरामद की हैं। इस ऑपरेशन की सबसे अहम बात यह है की साल 2014, 2015 और 2016 से पहले की गायब हुई लड़कियों को भी पुलिस टीम ने खोज निकाला है। बरामद की गई लड़कियों को अब पुलिस काउंसलिंग के बाद उनके परिजनों को सौंपी जा रही है।
ग्वालियर एसपी अमित सांघी का कहना है कि पुलिस को ऑपरेशन मुस्कान के तहत बड़ी सफलता मिली है। जिले के सभी थाना प्रभारियों की विशेष टीम ने 90 लड़कियां बरामद की है जो काफी सालों से लापता थीं। इनको इनके परिजन के सुपुर्द किया जा रहा है।
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| ग्वालियर पुलिस को ऑपरेशन मुस्कान के तहत बड़ी सफलता मिली है। सीएम शिवराज सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान में पच्चीस दिन में पुलिस ने नब्बे लापता लड़कियों को यूपी, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा से बरामद किया है। यह ग्वालियर के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। अभी भी पचासी लड़कियां लापता है। पुलिस लगातार इन बच्चियों को तलाशने के लिए अभियान चलाती रहेगी। इन सभी लड़कियों को पुलिस ने काउंसलिंग कर परिवारों के सुपुर्द कर दिया है। दरअसल मध्य प्रदेश राज्य शासन के निर्देशों पर लापता और गुम हुई लड़कियों को खोजने के लिए 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत ग्वालियर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान के तहत जिले कि सभी थानों की पुलिस टीम को लगाया गया था। साथ ही क्राइम ब्रांच की भी स्पेशल टीमें बनाई गई थीं। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने देश के करीब आठ से दस राज्यों में दबिश देकर नब्बे लड़कियां बरामद की हैं। छः जनवरी से पूरे प्रदेश में चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान के सुखद नतीजे सामने आए हैं। ग्वालियर में वर्ष दो हज़ार तेरह से अभी तक के बीच कुल एक सौ पचास लड़कियां लापता थीं। इसके साथ ही जनवरी दो हज़ार इक्कीस में पच्चीस नाबालिग लड़कियां और लापता हो गईं। छः जनवरी से इकतीस जनवरी तक चलाए गए अभियान को पुलिस ने गंभीरता से लिया और हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से नब्बे लड़कियां बरामद की हैं। इस ऑपरेशन की सबसे अहम बात यह है की साल दो हज़ार चौदह, दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सोलह से पहले की गायब हुई लड़कियों को भी पुलिस टीम ने खोज निकाला है। बरामद की गई लड़कियों को अब पुलिस काउंसलिंग के बाद उनके परिजनों को सौंपी जा रही है। ग्वालियर एसपी अमित सांघी का कहना है कि पुलिस को ऑपरेशन मुस्कान के तहत बड़ी सफलता मिली है। जिले के सभी थाना प्रभारियों की विशेष टीम ने नब्बे लड़कियां बरामद की है जो काफी सालों से लापता थीं। इनको इनके परिजन के सुपुर्द किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
कोई भी काम छोड़ा या छोटा नहीं होता, बस काम करने की लगन हाेनी चाहिए। खुद के साथ समाज की भलाई सोचने वाले का कभी बुरा नहीं हो सकता। कोरोना संक्रमण के इस दाैर में हम सबको मिलकर लोगों की मदद करनी चाहिए। मानसिक मंदित बीना की यह बातें सुन राजकीय महिला शरणालय प्रशासन स्तब्ध रह गया। अपनी और परिवार की सुध खो चुकी मध्यम प्रदेश की बीना की चली दो महीने की काउंसिलिंग का सुखद परिणाम सभी को सुकून दे रहा था। लॉकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा दो महीने पहले मानसिक विक्ष्रिप्त की दशा में बीना का कोरोना टेस्ट करा कर लाया गया था। लाने के बाद से ही उसकी काउंसिलंग चल रही थी। सबकुछ याद आया तो उसे अब अपनों की याद भी आने लगी है। अकेली बीना ही नहीं झारखंड की केसरी और असम की रानी की भी मनोदशा बदल गई है। लॉकडाउन में सभी के चेहरे पर लौटी मुस्कान ने अपनाें को करीब ला दिया। दूसरों के सहारे रहने वाली ये महिलाएं अब अपना काम कर रही हैं।
मानसिक मंदित इन सभी महिलाओं ने अपना नाम ताे बताया ही है साथ ही घर का पता भी बता दिया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी की ओर से मिली अनुमित के बाद उन्हें उनके घर भेज दिया गयाञ कई साल से अपनों से दूर रहने के बाद उनके मिलने के लिए महिलाएं भी उत्साहित हैं। किसी को पिता की याद आ रही है तो कोई माता-पिता और भाई को याद कर रहा है।
राजकीय शरणालय की अधीक्षिका आरती सिंह ने बताया कि मानसिक मंदित की काउंसिलिंग कर उनकी यादाश्त वापस आने पर खुशी हो रही है। अब सभी को उनके अपनों के पास भेजने की प्रक्रिया चल रही है। पूरे स्टॉप ने मिलकर इन महिलाओं की मदद की और अब सभी ठीक हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की होने की वजह से सरकारी खर्च और सुरक्षा के साथ कुछ को घर भेज दिया गया तो कुछ को भेजने की तैयारी है।
| कोई भी काम छोड़ा या छोटा नहीं होता, बस काम करने की लगन हाेनी चाहिए। खुद के साथ समाज की भलाई सोचने वाले का कभी बुरा नहीं हो सकता। कोरोना संक्रमण के इस दाैर में हम सबको मिलकर लोगों की मदद करनी चाहिए। मानसिक मंदित बीना की यह बातें सुन राजकीय महिला शरणालय प्रशासन स्तब्ध रह गया। अपनी और परिवार की सुध खो चुकी मध्यम प्रदेश की बीना की चली दो महीने की काउंसिलिंग का सुखद परिणाम सभी को सुकून दे रहा था। लॉकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा दो महीने पहले मानसिक विक्ष्रिप्त की दशा में बीना का कोरोना टेस्ट करा कर लाया गया था। लाने के बाद से ही उसकी काउंसिलंग चल रही थी। सबकुछ याद आया तो उसे अब अपनों की याद भी आने लगी है। अकेली बीना ही नहीं झारखंड की केसरी और असम की रानी की भी मनोदशा बदल गई है। लॉकडाउन में सभी के चेहरे पर लौटी मुस्कान ने अपनाें को करीब ला दिया। दूसरों के सहारे रहने वाली ये महिलाएं अब अपना काम कर रही हैं। मानसिक मंदित इन सभी महिलाओं ने अपना नाम ताे बताया ही है साथ ही घर का पता भी बता दिया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी की ओर से मिली अनुमित के बाद उन्हें उनके घर भेज दिया गयाञ कई साल से अपनों से दूर रहने के बाद उनके मिलने के लिए महिलाएं भी उत्साहित हैं। किसी को पिता की याद आ रही है तो कोई माता-पिता और भाई को याद कर रहा है। राजकीय शरणालय की अधीक्षिका आरती सिंह ने बताया कि मानसिक मंदित की काउंसिलिंग कर उनकी यादाश्त वापस आने पर खुशी हो रही है। अब सभी को उनके अपनों के पास भेजने की प्रक्रिया चल रही है। पूरे स्टॉप ने मिलकर इन महिलाओं की मदद की और अब सभी ठीक हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की होने की वजह से सरकारी खर्च और सुरक्षा के साथ कुछ को घर भेज दिया गया तो कुछ को भेजने की तैयारी है। |
नई दिल्ली। प्रतापगढ़ के तत्कालीन कुंडा पुलिस उप अधीक्षक (डीएसपी) जियाउल हक की हत्या में विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका की जांच सीबीआई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें राजा भैया सहित पांच के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच में राजा भैया को क्लीन चिट दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सीबीआई तीन महीने में जांच कर अपनी पूरी रिपोर्ट दे।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने डीएसपी जियाउल की पत्नी परवीन आजाद की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल कर दिया। पीठ ने कहा, जांच के निर्देश देने में मजिस्ट्रेट ने कोई त्रुटि नहीं की है। हाईकोर्ट ने पुनः जांच व आगे की जांच के बीच अति तकनीकी नजरिया अपनाया है। दरअसल हाईकोर्ट ने माना था कि विशेष सीबीआई अदालत का जुलाई 2014 का आदेश 'पुनः जांच' के समान है।
बहुचर्चित डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड राजा भैया की भूमिका की जांच कराने से जुड़ी याचिका में परवीन आजाद ने शीर्ष अदालत के समक्ष याचिका में आरोप लगाया कि सीबीआई ने इस मामले में राजा भैया की भूमिका की ओर इशारा करने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की है। उन्होंने सवाल किया था कि पुलिस टीम ने मौके पर उनके पति को अलग-थलग कैसे छोड़ दिया, क्योंकि किसी अन्य पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके पति रेत खनन और अन्य दंगों के मामलों की जांच संभाल रहे थे। इसमें राजा भैया और उनके सहयोगियों की भी भूमिका थी। यह लोग उनके पति को खत्म करना चाहते थे। उन्होंने सीबीआई की उस चार्जशीट पर भी सवाल उठाए जिसमें उनके पति की हत्या के पीछे मारे गए प्रधान नन्हें यादव के परिवार का नाम लिया गया था।
निचली अदालत के आदेश में सीबीआई को यूपी सरकार में तत्कालीन मंत्री राजा भैया, कुंडा नगर पंचायत के तत्कालीन अध्यक्ष गुलशन यादव सहित पांच लोगों की भूमिका की जांच करने के लिए कहा गया था। घटना के तुरंत बाद मारे गए अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में इन लोगों का नाम लिया था।
जियाउल हक की 2 मार्च, 2013 को ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई थी। प्रतापगढ़ जिला, 2 मार्च 2013, शाम के समय हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हें यादव बलीपुर गांव में एक विवादित जमीन का मसला सुलझाने के लिए कामता पाल के घर पहुंचे थे। तभी बाइक से आए बदमाश प्रधान नन्हें यादव को गोली मारकर फरार हो गए। प्रधान की हत्या की खबर उनके समर्थकों को मिली तो समर्थकों ने कामता पाल के घर में आग लगा दी थी।
नन्हें यादव को अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी। लोगों में बढ़ते आक्रोश और हुजूम के बीच प्रधान का शव बिना पोस्टमॉर्टम ही गांव में पहुंच था। हत्या के मामले में बिना पोस्टमॉर्टम के शव गांव में पहुंचने की ख़बर सीओ जियाउल हक को मिली तो वे अपने लाव लश्कर के साथ गांव वालों से बात करने पहुंचे। लेकिन गांव में हिंसा शुरू हो गई। पथराव होने लगा था।
2 मार्च 2013 को कुंडा के बल्लीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद डिप्टी एसपी जियाउल हक मय फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान शव जैसे ही गांव पहुंचा तो वहां भीड़ इकट्ठा हो गई। इसी बीच एक व्यक्ति ने हक को गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि जिसने गोली मारी वह राजा भैया का करीबी था। जिसके बाद राजा भैया पर हत्या की साजिश का आरोप लगा था। जिस समय यह बहुचर्चित हत्याकांड हुआ उस समय राजा भैया तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री थे और डीएसपी हक ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। इससे राजा भैया नाराज थे।
(वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)
| नई दिल्ली। प्रतापगढ़ के तत्कालीन कुंडा पुलिस उप अधीक्षक जियाउल हक की हत्या में विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका की जांच सीबीआई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें राजा भैया सहित पांच के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच में राजा भैया को क्लीन चिट दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सीबीआई तीन महीने में जांच कर अपनी पूरी रिपोर्ट दे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने डीएसपी जियाउल की पत्नी परवीन आजाद की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल कर दिया। पीठ ने कहा, जांच के निर्देश देने में मजिस्ट्रेट ने कोई त्रुटि नहीं की है। हाईकोर्ट ने पुनः जांच व आगे की जांच के बीच अति तकनीकी नजरिया अपनाया है। दरअसल हाईकोर्ट ने माना था कि विशेष सीबीआई अदालत का जुलाई दो हज़ार चौदह का आदेश 'पुनः जांच' के समान है। बहुचर्चित डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड राजा भैया की भूमिका की जांच कराने से जुड़ी याचिका में परवीन आजाद ने शीर्ष अदालत के समक्ष याचिका में आरोप लगाया कि सीबीआई ने इस मामले में राजा भैया की भूमिका की ओर इशारा करने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की है। उन्होंने सवाल किया था कि पुलिस टीम ने मौके पर उनके पति को अलग-थलग कैसे छोड़ दिया, क्योंकि किसी अन्य पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई। याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके पति रेत खनन और अन्य दंगों के मामलों की जांच संभाल रहे थे। इसमें राजा भैया और उनके सहयोगियों की भी भूमिका थी। यह लोग उनके पति को खत्म करना चाहते थे। उन्होंने सीबीआई की उस चार्जशीट पर भी सवाल उठाए जिसमें उनके पति की हत्या के पीछे मारे गए प्रधान नन्हें यादव के परिवार का नाम लिया गया था। निचली अदालत के आदेश में सीबीआई को यूपी सरकार में तत्कालीन मंत्री राजा भैया, कुंडा नगर पंचायत के तत्कालीन अध्यक्ष गुलशन यादव सहित पांच लोगों की भूमिका की जांच करने के लिए कहा गया था। घटना के तुरंत बाद मारे गए अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में इन लोगों का नाम लिया था। जियाउल हक की दो मार्च, दो हज़ार तेरह को ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई थी। प्रतापगढ़ जिला, दो मार्च दो हज़ार तेरह, शाम के समय हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हें यादव बलीपुर गांव में एक विवादित जमीन का मसला सुलझाने के लिए कामता पाल के घर पहुंचे थे। तभी बाइक से आए बदमाश प्रधान नन्हें यादव को गोली मारकर फरार हो गए। प्रधान की हत्या की खबर उनके समर्थकों को मिली तो समर्थकों ने कामता पाल के घर में आग लगा दी थी। नन्हें यादव को अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी। लोगों में बढ़ते आक्रोश और हुजूम के बीच प्रधान का शव बिना पोस्टमॉर्टम ही गांव में पहुंच था। हत्या के मामले में बिना पोस्टमॉर्टम के शव गांव में पहुंचने की ख़बर सीओ जियाउल हक को मिली तो वे अपने लाव लश्कर के साथ गांव वालों से बात करने पहुंचे। लेकिन गांव में हिंसा शुरू हो गई। पथराव होने लगा था। दो मार्च दो हज़ार तेरह को कुंडा के बल्लीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद डिप्टी एसपी जियाउल हक मय फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान शव जैसे ही गांव पहुंचा तो वहां भीड़ इकट्ठा हो गई। इसी बीच एक व्यक्ति ने हक को गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि जिसने गोली मारी वह राजा भैया का करीबी था। जिसके बाद राजा भैया पर हत्या की साजिश का आरोप लगा था। जिस समय यह बहुचर्चित हत्याकांड हुआ उस समय राजा भैया तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री थे और डीएसपी हक ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। इससे राजा भैया नाराज थे। |
Mujhse Shaadi karoge: पारस छाबड़ा और शहनाज गिल का शो मुझसे शादी करोगे (Mujhse Shaadi karoge) में रोजाना आ रहे टर्न और ट्विस्ट को फैंस काफी एन्जॉय कर रहे हैं। शो में 4 नए कंटेस्टेंट्स की वाइल्ड कार्ड एन्ट्री से माहौल काफी जबरदस्त हो गया है। फिलहाल शो में पारस को लेकर लड़कियों में और शहनाज को लेकर लड़कों में जंग छिड़ी हुई है लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसा होता है जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी।
दरअसल पारस और शहनाज गिल के भाई शहबाज के बीच लड़ाई इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि हाथापाई की नौबत आ जाती है। पारस, शहबाज से कहते हैं कि वो उसे उसकी औकात याद दिला देगा। बदले में, शहनाज गिल के भाई का कहते हैं कि वो पारस को चीर कर रख देगा। पारस शहबाज को उसे नहीं छूने की चेतावनी देता है और गुस्से में उससे पूछता है कि तू है कौन। पारस यहीं नहीं रुकते वो शहबाज पर तंज कसते हुए कहते हैं कि वो अपनी बहन के नाम और शोहरत की खा रहा है। पारस की बात सुन शहबाज अपना आपा खो देता है और कहता है कि वो पारस को घर के बाहर देखेगा। शहबाज ये भी कहता है कि शहनाज कम से कम उसकी बहन है लेकिन पारस आंकाक्षा पुरी के नाम और पैसे पर जीवित है।
| Mujhse Shaadi karoge: पारस छाबड़ा और शहनाज गिल का शो मुझसे शादी करोगे में रोजाना आ रहे टर्न और ट्विस्ट को फैंस काफी एन्जॉय कर रहे हैं। शो में चार नए कंटेस्टेंट्स की वाइल्ड कार्ड एन्ट्री से माहौल काफी जबरदस्त हो गया है। फिलहाल शो में पारस को लेकर लड़कियों में और शहनाज को लेकर लड़कों में जंग छिड़ी हुई है लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसा होता है जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। दरअसल पारस और शहनाज गिल के भाई शहबाज के बीच लड़ाई इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि हाथापाई की नौबत आ जाती है। पारस, शहबाज से कहते हैं कि वो उसे उसकी औकात याद दिला देगा। बदले में, शहनाज गिल के भाई का कहते हैं कि वो पारस को चीर कर रख देगा। पारस शहबाज को उसे नहीं छूने की चेतावनी देता है और गुस्से में उससे पूछता है कि तू है कौन। पारस यहीं नहीं रुकते वो शहबाज पर तंज कसते हुए कहते हैं कि वो अपनी बहन के नाम और शोहरत की खा रहा है। पारस की बात सुन शहबाज अपना आपा खो देता है और कहता है कि वो पारस को घर के बाहर देखेगा। शहबाज ये भी कहता है कि शहनाज कम से कम उसकी बहन है लेकिन पारस आंकाक्षा पुरी के नाम और पैसे पर जीवित है। |
[भाग II -~-खण्ड 3 (ii) ]
खुला सामान्य लाइसेंस सं. 6/86
का. प्रा. 156 ( अ ) -प्रायात तथा निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1917 (1947 का 18 ) के खण्ड 3 द्वारा प्रदन अधिकारों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन दक्षिण अफीका / दक्षिण पश्चिम नफीका संघ को छोड़कर किसी भी देश से आयात एवं निर्यात नीति 1985-88 ( खण्ड - I) के परिशिष्ट 3 मे निहित संबद्ध मदों के सामने उल्लिखित मनोनीत सार्वजनिक क्षेत्र (सरणीवद्ध) छभिकरणों द्वारा उक्त परिशिष्ट में विशिष्टिकृत माल का भारत में यात करने की सामान्य अनुमति देती है :-----
श्रायात इस प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा रिहा की गई विदेशी मुद्रा के मद्दे किए जाएंगे।
( 2 ) आयातित माल का वितरण संबंध सरणीबद्ध अधिकरण द्वारा निर्धारित नीति और क्रियाविधि के अनुसार किया जाएगा ।
किया गया माल दक्षिण अफ्रीका / दक्षिण पश्चिम संघ में तैयार अथवा विनिर्मित्त न किया गया हो । भारत को ऐसे माल का लदान बिना किसी रियायती safa के चाहे जो कुछ भी हो अगले लाइसेंसिंग वर्ष की 30 सितम्बर को या इससे पूर्व परेषण के माध्यम से कर दिए जाते हैं । बशर्ते कि लाइसेंसिंग वर्ष की 31 मार्च को या इससे पहले पक्के आदेश कर दिए गए हैं ।
( 5 ) यह लाइसेंस आयात (नियंत्रण) आदेश, 1955 की मनुसूची 5 में शर्त-1 के भी अधीन होगा ।
( 6 ) इस प्रकार के माल का आयात करते समय लागू कोई भी
निषेध या उसके आयात को प्रभावित करने वाता विनियम इस लाइसेंस के अन्तर्गत किसी भी प्रकार के माल के आयातों को प्रभावित नहीं करेगा ।
( 7 ) यह लाइसेंस ऐसे किसी भी भाभार या ऐसी किसी भी शर्त - का अनुपालन करने से किसी भी समय उन्मुक्ति, रियायत या ढील प्रदान नहीं करता है इस भ्राभार या शर्त के लिए वास्तविक उपयोक्ता (औद्योगिक ) या प्रायातक अन्य कानूनों या विनियमों के अधीन हो । आयातकों को उनसे लागू अन्य सभी कानूनों की शर्तों का पालन करना चाहिए ।
टिप्पणी : - इस प्रादेश के प्रयोजनार्थ "लाइसेसिग वर्ष" और "अगला लाइसेसिंग वर्ष" जहां भी संदर्भ में आता है उसका वही अर्थ है जो 1985-88 को भायात एवं नियति नीति ( खण्ड-I) मे उल्लिखित है ।
OPEN GENERAL LICENCE NO. 6/80
S.O. 156(E).-In exercise of the powers conferred by Section 3 of the Imports and Exports (Controf) Act, 1947 (18 of 1947), the Central Government hereby gives general permission to import into Indla from any country except the Union of South Africa, South West Africa, the goods of the description specified in Appendix 5 of Import and Export Policy, 1985-88 (Vol. I) by designated Public Sector (Canalising) Agencies mentioned against the relevant items in the said Appendix, subject to the following conditions :(1) The imports shall be made against the foreign exchange released by Government for the purpose.
(2) Imported goods shall be distributed by the Canalis. ing agency concerned in accordance with the Policy and Procedure laid down;
(3) The goods so imported have not been produced or manufactured in the Union of South Africa South West Africa;
(4) Such goods are shipped on through consignments to India on or before 30th September of the following licensing vear, without any grace period, whatso-ever, provided firm order is placed on or before 31st March, of the licensing year;
(5) This Licence shail also be subject to condition Nunsber 1, in Schedule V to the Imports (Control) Order, 1955.
(6) Nothing in this licence shall affect the application to any goods of any other prohibition or regulation, affecting the imports thereof in force, at the time when such goods are imported;
(7) The lice ice does not confer any immunity, exemption or lelaxation at any time from an obligation or compliance with any requirement to which the Actual Users (Industrial) or the importer may be subject to under other laws or regulations. The importers should comply with the provisions of all other laws applicable to them.
NOTE.-- For the purposes of this Order. references to "the licensing year" and " the following licensing year", wherever appears in this Order shall have the same meaning as mentioned in Import and Export Policy (Volume I) for 1985-88.
खुला सामान्य लाइसेंस सं0 7 / 86
का. श्री. 157 (3) . - आयात निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947
( 1947 का 18) के खंड 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा जिगों, जूड़ना से, मोल्डस डाइज एवं पैटम (रंगीन रोलर डाईज महिन), मोन्डम (डाया कामिक के लिए मोल्डम सहित ) और प्रेम औनारों [1985-88 की झायात निर्यात नीति (खंड I) के परिशिष्ट- 1 भाग क-2 और 3 भाग क में प्रदर्शित से भिन्न] और उनके पुर्जों के भारत में प्रायात की सामान्य अनुमति दक्षिण अफीका संघ/ दक्षिणी पश्चिमी अफ्रीका को छोड़कर किसी देश से निम्नलिखित शर्तों के अधीन देती है :( 1 ) ग्रह अपने निजी संस्थान में उपयोग के लिए ऐसी मदों की आवश्यकता रखने हुए महानिदेशक, anitat विकास, नई दिल्ली गा सम्बद्ध राज्य के उद्योग निर्देशक या अन्य सम्बद्ध प्रायोजक प्राधिकारी, जो भी हो, के साथ पंजीकृत एक वास्तविक उपयोक्ता (औद्योगिक) हो,
( 2 ) इस प्रकार आयात किया गया माल नए निर्माण का होगा । यदि वे पुरानी या मरम्मत की गई मदें होंगी तो उनके आयात की अनुमति केवल तव दी जायेगी जबकि मशीनरी केवल 7 वर्ष से अधिक पुरानी न हो और शेष जीवन 5 वर्ष से कम न हो और आयातक निकासी के समय सीमा शुल्क प्राधिकारी को उस देश के स्वतंत्र व्यावसायिक सनदी अभियन्ता / इसके समतुल्य संस्थान से एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा जहां से आयात किया जाता है और उसमें निम्नलिखित को दर्शाया जाएगा :--
(ख) विनिर्माण का वर्ष ।
(ग) संयंत्र और मशीनरी की वर्तमान स्थिति और उसका संभावित शेष जीवन ।
( घ) यदि नया खरीदा गया हो, ममनुल्य पूंजीगत माल की लागत बीमा भाड़ा मूल्य,
(ङ) यदि कोई-सुवार / मरम्मत की गई है तो उसका विवरण और वे किस तारीख (खों) को दिए गए थे,
(च) संभरको द्वारा गई कीमत के संबंध में विचार और ऐसे विचारों के लिए दिए गए लाचार । | [भाग II -~-खण्ड तीन ] खुला सामान्य लाइसेंस सं. छः/छियासी का. प्रा. एक सौ छप्पन -प्रायात तथा निर्यात अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्रह के खण्ड तीन द्वारा प्रदन अधिकारों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन दक्षिण अफीका / दक्षिण पश्चिम नफीका संघ को छोड़कर किसी भी देश से आयात एवं निर्यात नीति एक हज़ार नौ सौ पचासी-अठासी के परिशिष्ट तीन मे निहित संबद्ध मदों के सामने उल्लिखित मनोनीत सार्वजनिक क्षेत्र छभिकरणों द्वारा उक्त परिशिष्ट में विशिष्टिकृत माल का भारत में यात करने की सामान्य अनुमति देती है :----- श्रायात इस प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा रिहा की गई विदेशी मुद्रा के मद्दे किए जाएंगे। आयातित माल का वितरण संबंध सरणीबद्ध अधिकरण द्वारा निर्धारित नीति और क्रियाविधि के अनुसार किया जाएगा । किया गया माल दक्षिण अफ्रीका / दक्षिण पश्चिम संघ में तैयार अथवा विनिर्मित्त न किया गया हो । भारत को ऐसे माल का लदान बिना किसी रियायती safa के चाहे जो कुछ भी हो अगले लाइसेंसिंग वर्ष की तीस सितम्बर को या इससे पूर्व परेषण के माध्यम से कर दिए जाते हैं । बशर्ते कि लाइसेंसिंग वर्ष की इकतीस मार्च को या इससे पहले पक्के आदेश कर दिए गए हैं । यह लाइसेंस आयात आदेश, एक हज़ार नौ सौ पचपन की मनुसूची पाँच में शर्त-एक के भी अधीन होगा । इस प्रकार के माल का आयात करते समय लागू कोई भी निषेध या उसके आयात को प्रभावित करने वाता विनियम इस लाइसेंस के अन्तर्गत किसी भी प्रकार के माल के आयातों को प्रभावित नहीं करेगा । यह लाइसेंस ऐसे किसी भी भाभार या ऐसी किसी भी शर्त - का अनुपालन करने से किसी भी समय उन्मुक्ति, रियायत या ढील प्रदान नहीं करता है इस भ्राभार या शर्त के लिए वास्तविक उपयोक्ता या प्रायातक अन्य कानूनों या विनियमों के अधीन हो । आयातकों को उनसे लागू अन्य सभी कानूनों की शर्तों का पालन करना चाहिए । टिप्पणी : - इस प्रादेश के प्रयोजनार्थ "लाइसेसिग वर्ष" और "अगला लाइसेसिंग वर्ष" जहां भी संदर्भ में आता है उसका वही अर्थ है जो एक हज़ार नौ सौ पचासी-अठासी को भायात एवं नियति नीति मे उल्लिखित है । OPEN GENERAL LICENCE NO. छः/अस्सी S.O. एक सौ छप्पन.-In exercise of the powers conferred by Section तीन of the Imports and Exports Act, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस , the Central Government hereby gives general permission to import into Indla from any country except the Union of South Africa, South West Africa, the goods of the description specified in Appendix पाँच of Import and Export Policy, एक हज़ार नौ सौ पचासी-अठासी by designated Public Sector Agencies mentioned against the relevant items in the said Appendix, subject to the following conditions : The imports shall be made against the foreign exchange released by Government for the purpose. Imported goods shall be distributed by the Canalis. ing agency concerned in accordance with the Policy and Procedure laid down; The goods so imported have not been produced or manufactured in the Union of South Africa South West Africa; Such goods are shipped on through consignments to India on or before तीस सितंबरtember of the following licensing vear, without any grace period, whatso-ever, provided firm order is placed on or before इकतीस मार्चch, of the licensing year; This Licence shail also be subject to condition Nunsber एक, in Schedule V to the Imports Order, एक हज़ार नौ सौ पचपन. Nothing in this licence shall affect the application to any goods of any other prohibition or regulation, affecting the imports thereof in force, at the time when such goods are imported; The lice ice does not confer any immunity, exemption or lelaxation at any time from an obligation or compliance with any requirement to which the Actual Users or the importer may be subject to under other laws or regulations. The importers should comply with the provisions of all other laws applicable to them. NOTE.-- For the purposes of this Order. references to "the licensing year" and " the following licensing year", wherever appears in this Order shall have the same meaning as mentioned in Import and Export Policy for एक हज़ार नौ सौ पचासी-अठासी. खुला सामान्य लाइसेंस संशून्य सात / छियासी का. श्री. एक सौ सत्तावन . - आयात निर्यात अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के खंड तीन द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा जिगों, जूड़ना से, मोल्डस डाइज एवं पैटम , मोन्डम और प्रेम औनारों [एक हज़ार नौ सौ पचासी-अठासी की झायात निर्यात नीति के परिशिष्ट- एक भाग क-दो और तीन भाग क में प्रदर्शित से भिन्न] और उनके पुर्जों के भारत में प्रायात की सामान्य अनुमति दक्षिण अफीका संघ/ दक्षिणी पश्चिमी अफ्रीका को छोड़कर किसी देश से निम्नलिखित शर्तों के अधीन देती है : ग्रह अपने निजी संस्थान में उपयोग के लिए ऐसी मदों की आवश्यकता रखने हुए महानिदेशक, anitat विकास, नई दिल्ली गा सम्बद्ध राज्य के उद्योग निर्देशक या अन्य सम्बद्ध प्रायोजक प्राधिकारी, जो भी हो, के साथ पंजीकृत एक वास्तविक उपयोक्ता हो, इस प्रकार आयात किया गया माल नए निर्माण का होगा । यदि वे पुरानी या मरम्मत की गई मदें होंगी तो उनके आयात की अनुमति केवल तव दी जायेगी जबकि मशीनरी केवल सात वर्ष से अधिक पुरानी न हो और शेष जीवन पाँच वर्ष से कम न हो और आयातक निकासी के समय सीमा शुल्क प्राधिकारी को उस देश के स्वतंत्र व्यावसायिक सनदी अभियन्ता / इसके समतुल्य संस्थान से एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा जहां से आयात किया जाता है और उसमें निम्नलिखित को दर्शाया जाएगा :-- विनिर्माण का वर्ष । संयंत्र और मशीनरी की वर्तमान स्थिति और उसका संभावित शेष जीवन । यदि नया खरीदा गया हो, ममनुल्य पूंजीगत माल की लागत बीमा भाड़ा मूल्य, यदि कोई-सुवार / मरम्मत की गई है तो उसका विवरण और वे किस तारीख को दिए गए थे, संभरको द्वारा गई कीमत के संबंध में विचार और ऐसे विचारों के लिए दिए गए लाचार । |
प्रभास और पूजा हेगड़े अभिनीत फिल्म राधे श्याम पैन इंडिया फिल्म है। इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम समेत 5 भाषाओं में प्रदर्शित किया जाना तय है। ऐसे में जरूरी था कि निर्माता फिल्म के टीजर को एक साथ उन्हीं भाषाओं में जारी करते जिनमें फिल्म को प्रदर्शित करने की घोषणा की जा चुकी है। निर्माताओं ने फिल्म के टीजर को क्षेत्रीय भाषाओं के स्थान पर अंग्रेजी में जारी किया है। यह निर्माताओं की सबसे बड़ी भूल है। भारतीय दर्शक अपने यहाँ निर्मित फिल्मों के टीजर व ट्रेलर सिर्फ अपनी भाषा में देखना पसन्द करता है। इसी के चलते इस टीजर को लेकर दर्शकों में वो बज नहीं बन पाया है जिसकी इस फिल्म की सफलता के लिए आवश्यकता है।
बाहुबली के बाद प्रदर्शित हुई प्रभास की दूसरी पैन इंडिया फिल्म साहो में उनकी आवाज पूरी तरह से दब गई थी। इस बात की कमी साहो के टीजर और ट्रेलर से उजागर हो गई थी लेकिन निर्माताओं ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर असफलता मिली। यही गलती अब राधे श्याम के निर्माताओं ने की है। राधे श्याम के टीजर में प्रभास की आवाज साफ नहीं है। अंग्रेजी में रिलीज हुए इस टीजर में प्रभास की आवाज काफी दबी हुई सुनाई दे रही है। अच्छा होता राधे श्याम के निर्माता बाहुबली की तर्ज पर प्रभास की आवाज को डब करवाते।
| प्रभास और पूजा हेगड़े अभिनीत फिल्म राधे श्याम पैन इंडिया फिल्म है। इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम समेत पाँच भाषाओं में प्रदर्शित किया जाना तय है। ऐसे में जरूरी था कि निर्माता फिल्म के टीजर को एक साथ उन्हीं भाषाओं में जारी करते जिनमें फिल्म को प्रदर्शित करने की घोषणा की जा चुकी है। निर्माताओं ने फिल्म के टीजर को क्षेत्रीय भाषाओं के स्थान पर अंग्रेजी में जारी किया है। यह निर्माताओं की सबसे बड़ी भूल है। भारतीय दर्शक अपने यहाँ निर्मित फिल्मों के टीजर व ट्रेलर सिर्फ अपनी भाषा में देखना पसन्द करता है। इसी के चलते इस टीजर को लेकर दर्शकों में वो बज नहीं बन पाया है जिसकी इस फिल्म की सफलता के लिए आवश्यकता है। बाहुबली के बाद प्रदर्शित हुई प्रभास की दूसरी पैन इंडिया फिल्म साहो में उनकी आवाज पूरी तरह से दब गई थी। इस बात की कमी साहो के टीजर और ट्रेलर से उजागर हो गई थी लेकिन निर्माताओं ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर असफलता मिली। यही गलती अब राधे श्याम के निर्माताओं ने की है। राधे श्याम के टीजर में प्रभास की आवाज साफ नहीं है। अंग्रेजी में रिलीज हुए इस टीजर में प्रभास की आवाज काफी दबी हुई सुनाई दे रही है। अच्छा होता राधे श्याम के निर्माता बाहुबली की तर्ज पर प्रभास की आवाज को डब करवाते। |
(ख) अनुमानतः कितने लोग बिना रजिस्ट्री कराये होम्योपैथिक प्रैक्टिस करते हैं ?
स्वास्थ्य मंत्री (राजकुमारी अमृत कौर) (क) तथा (ख). इस सम्बन्ध में भारत सरकार के पास कोई सूचना नहीं है ।
६२४. श्री एम० एल० द्विवेदी : क्या तथा कृषि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :
(क) क्या ट्रैक्टरों द्वारा किये जा सकने वाले कृषि कार्य हाथियों की सहायता से किये जा सकते हैं ,
(ख) क्या इस प्रकार का कोई प्रयोग किसी राज्य में सफलतापूर्वक किया गया है और
(ग) यदि हां, तो क्या ऐसे कार्य ट्रैक्टरों के मुकाबिले में हाथियों के उपयोग द्वारा सस्ते में और सफलतापूर्वक किये जा सकते हैं ?
खाद्य तथा कृषि उपमंत्री (श्री एम० कृष्णप्पा): (क) से (ग). उत्तर प्रवेश में सीमित स्तर पर प्रयोग किये गये और उनके आधार पर यह देखा गया कि जहां पेड़ तथा अन्य उपयुक्त चारा प्रचुर राशि में विद्यमान है वहां हाथी भी कृषि कार्य के लिये अच्छे उपयोगी हैं। आसाम में कुछ जातियां, जिन्हें मीरी कहते हैं, राज्य के उत्तर लखीमपुर इलाके में हाथियों का हलकार्य में उपयोग करती हैं किन्तु राज्य सरकार की राय है कि हाथी अधिक समय तक सूर्य के ताप में काम नहीं कर सकते हैं और इसलिये ट्रैक्टरों की अपेक्षा उन से किया हुआ काम कम होगा । सन् १९५० में उड़ीसा राज्य के एक सरकारी फार्म में मोर्ट हलों को हाथियों द्वारा खींचने का प्रयोग किया गया किन्तु वह असफल हुआ । अन्य किसी प्रान्त में प्रयोग नहीं किये गये ।
उत्तर प्रान्त की सरकार ने जतलाया है कि नयी भूमि अथवा कांस से भरी हुई भूमि को सोड़ने के लिये हाथी अनुपयोगी हैं किन्तु इसका काम कर सकते है ।
चूंकि जो प्रयोग किये गये वे अत्यन्त सीमित स्तर पर थे अतः यह कहना असम्भव है कि जो कृषिकार्य ट्रैक्टरों द्वारा किया जा सकता है वह हाथियों की सहायता से भी किया जा सकता है ।
सहकारिता में प्रशिक्षण
६२५. श्री विभूति मिश्र : क्या लाद्य तथा कृषि मंत्री २ दिसम्बर, १६५४ को दिये गये तारांकित प्रश्न संख्या ६२६ के उत्तर के सम्बन्ध में सभा पटल पर एक विवरण रखने की कृपा करेंगे जिसमें निम्नलिखित बातें दिखाई गई हों
(क) सहकारिता प्रशिक्षण देने के लिये राज्यवार अभी तक कितने प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं और }
(ख) उनमें अभी तक कितने व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है ?
खाद्य तथा कृषि उपमंत्री (श्री एम० बी० कृष्णाप्या): (क) ऊंची श्रेणी के सहकारिता कर्मचारीगण का प्रशिक्षण पूना के अखिल भारतीय बहकारिता महाविद्यालय में हो रहा है । मध्यम श्रेणी के सहकारिता कर्मचारीगण को सहकारिता प्रशिक्षण देने के लिये पांच प्रादेशिक केन्द्र स्थापित करने का विचार किया गया है जिनमें से पश्चिम, दक्षिण तथा पूर्व में स्थित राज्यों के लिये क्रमशः पूना, मद्रास तथा पूसा में तीन केन्द्र स्थापित किये गये हैं। प्रत्येक राज्य में निम्न श्रेणीस्थ कर्मचारी गण के प्रशिक्षण के प्रबन्ध के बारे में भी ध्यान दिया जा रहा है ।
(ख) जानकारी संगृहीत की जा रही है और ज्यों ही वह उपलब्ध होगी, सभा पटल पर रख दी जायेगी ।
626. Shri D. C. Sharma: Will the Minister of Health be pleased to state the names of the Centres in the country where research work on cancer is being carried on?
| अनुमानतः कितने लोग बिना रजिस्ट्री कराये होम्योपैथिक प्रैक्टिस करते हैं ? स्वास्थ्य मंत्री तथा . इस सम्बन्ध में भारत सरकार के पास कोई सूचना नहीं है । छः सौ चौबीस. श्री एमशून्य एलशून्य द्विवेदी : क्या तथा कृषि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या ट्रैक्टरों द्वारा किये जा सकने वाले कृषि कार्य हाथियों की सहायता से किये जा सकते हैं , क्या इस प्रकार का कोई प्रयोग किसी राज्य में सफलतापूर्वक किया गया है और यदि हां, तो क्या ऐसे कार्य ट्रैक्टरों के मुकाबिले में हाथियों के उपयोग द्वारा सस्ते में और सफलतापूर्वक किये जा सकते हैं ? खाद्य तथा कृषि उपमंत्री : से . उत्तर प्रवेश में सीमित स्तर पर प्रयोग किये गये और उनके आधार पर यह देखा गया कि जहां पेड़ तथा अन्य उपयुक्त चारा प्रचुर राशि में विद्यमान है वहां हाथी भी कृषि कार्य के लिये अच्छे उपयोगी हैं। आसाम में कुछ जातियां, जिन्हें मीरी कहते हैं, राज्य के उत्तर लखीमपुर इलाके में हाथियों का हलकार्य में उपयोग करती हैं किन्तु राज्य सरकार की राय है कि हाथी अधिक समय तक सूर्य के ताप में काम नहीं कर सकते हैं और इसलिये ट्रैक्टरों की अपेक्षा उन से किया हुआ काम कम होगा । सन् एक हज़ार नौ सौ पचास में उड़ीसा राज्य के एक सरकारी फार्म में मोर्ट हलों को हाथियों द्वारा खींचने का प्रयोग किया गया किन्तु वह असफल हुआ । अन्य किसी प्रान्त में प्रयोग नहीं किये गये । उत्तर प्रान्त की सरकार ने जतलाया है कि नयी भूमि अथवा कांस से भरी हुई भूमि को सोड़ने के लिये हाथी अनुपयोगी हैं किन्तु इसका काम कर सकते है । चूंकि जो प्रयोग किये गये वे अत्यन्त सीमित स्तर पर थे अतः यह कहना असम्भव है कि जो कृषिकार्य ट्रैक्टरों द्वारा किया जा सकता है वह हाथियों की सहायता से भी किया जा सकता है । सहकारिता में प्रशिक्षण छः सौ पच्चीस. श्री विभूति मिश्र : क्या लाद्य तथा कृषि मंत्री दो दिसम्बर, एक हज़ार छः सौ चौवन को दिये गये तारांकित प्रश्न संख्या छः सौ छब्बीस के उत्तर के सम्बन्ध में सभा पटल पर एक विवरण रखने की कृपा करेंगे जिसमें निम्नलिखित बातें दिखाई गई हों सहकारिता प्रशिक्षण देने के लिये राज्यवार अभी तक कितने प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं और } उनमें अभी तक कितने व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है ? खाद्य तथा कृषि उपमंत्री : ऊंची श्रेणी के सहकारिता कर्मचारीगण का प्रशिक्षण पूना के अखिल भारतीय बहकारिता महाविद्यालय में हो रहा है । मध्यम श्रेणी के सहकारिता कर्मचारीगण को सहकारिता प्रशिक्षण देने के लिये पांच प्रादेशिक केन्द्र स्थापित करने का विचार किया गया है जिनमें से पश्चिम, दक्षिण तथा पूर्व में स्थित राज्यों के लिये क्रमशः पूना, मद्रास तथा पूसा में तीन केन्द्र स्थापित किये गये हैं। प्रत्येक राज्य में निम्न श्रेणीस्थ कर्मचारी गण के प्रशिक्षण के प्रबन्ध के बारे में भी ध्यान दिया जा रहा है । जानकारी संगृहीत की जा रही है और ज्यों ही वह उपलब्ध होगी, सभा पटल पर रख दी जायेगी । छः सौ छब्बीस. Shri D. C. Sharma: Will the Minister of Health be pleased to state the names of the Centres in the country where research work on cancer is being carried on? |
न्यूनतम कीमतें निर्धारित कर सकते हैं, जिनसे कम पर किसी प्रतिभृति या प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय नहीं किया जाएगा। औरया
किसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में आगामी कारोबार का निषेध और साथ हो ऐसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में विद्यमान संविदाओं की क्लोजिंग आउट परिसमापन के कारोबार को अनुमति देना "जोकि इन उपविधियों और विनियमों में निहित प्रावधानों के प्रतिकूल होने के बावजूद बोर्ड द्वारा समयसमय पर निर्धारित प्रतिबन्धों की शर्तों पर होगीः
बाजर को पूर्णतया या कुछ हिस्से को बन्द कर सकते हैं और / या
प्रावधान किया जाता है कि शार्ट सेलिंग के निषेध या न्यूनतम कीमतों के निर्धारण या बाजार बन्द करने या आगामी कारोबार के निषेध से संबंधित सूचना इस प्रकार से भेजी जाती है कि सामान्य तरीके से चैबीस घन्टे के भीतर केन्द्र सरकार को मिल जाएगी, तो केन्द्र सरकार से अनुमोदन लिए बिना ही गवर्निंग बोर्ड पूर्वोक्त उल्लेख के अनुसार केन्द्र सरकार का निर्णय इस एक्सचेंज को प्राप्त होने तक तीन दिन से अधिक की किसी भी अवधि के लिए शार्ट सेलिंग पर निषेध या न्यूनतम कीमत निर्धारण कर सकता है या बाजार बन्द कर सकता है या आगामी कारोबार पर निषेध लगा सकता हैं।
बिकवाली का निलम्बन
(ख) यदि उपखंड (क) में प्रावधानों के अनुसार किसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों के आगामी कारोबार पर निषेध या समग्र अथवा आंशिक रूप से बाजार बन्द रहने की अवधि के दौरान ही सुपुर्दगी और भुगतान की निर्धारित तारीखें भी आ जाती हैं तो उस विचराधीन प्रतिभूति या प्रतिभूतियों की सभी विद्यमान संविदाओं से संबंधित बिकवाली को बाजार फिर से खुलने तक के लिए गवर्निंग बोर्ड द्वारा निलंबित कर दिया जाएगा। हालांकि क्रेता को सुपुर्दगी प्राप्त करने का हक रहेगा। यदि विचराधीन प्रतिभूति या प्रतिभूतियां निर्बाधित प्रतिभूतियों की सूची में शामिल हैं, तो निम्नलिखित अतिरिक्त प्रावधान भी लागू होंगे, अर्थातः
बिकवाली का निलम्बन रहने के दौरान गवर्निंग बोर्ड भुगतान के समय को क्लीयरिंग से क्लीयरिंग तक ब[ा देगा, और यह सुविधा बाजार के पुनः खुलने तक लागू रहेगी और बिकवाली का निलम्बन रहने के दौरान मध्यस्थों की देयताएं यथावत बरकरार रहेंगी। क्रेता सदस्य को इनमें से किसी भी क्लीयरिंग में सुपुर्दगी के प्रत्यावर्तन का हम होगा और इस प्रयोजन के लिए टिकट की प्रक्रिया इन उपविधियों और विनियमों में निर्धारण किए अनुसार या गवर्निंग बोर्ड द्वारा निर्धारित किए अनुसार कोई अन्य प्रक्रिया लागू होगी। यदि सुपुर्दगी के लिए मांग करने के बाद क्रेता सदस्य ऐसी प्रतिभूतियों को | न्यूनतम कीमतें निर्धारित कर सकते हैं, जिनसे कम पर किसी प्रतिभृति या प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय नहीं किया जाएगा। औरया किसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में आगामी कारोबार का निषेध और साथ हो ऐसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में विद्यमान संविदाओं की क्लोजिंग आउट परिसमापन के कारोबार को अनुमति देना "जोकि इन उपविधियों और विनियमों में निहित प्रावधानों के प्रतिकूल होने के बावजूद बोर्ड द्वारा समयसमय पर निर्धारित प्रतिबन्धों की शर्तों पर होगीः बाजर को पूर्णतया या कुछ हिस्से को बन्द कर सकते हैं और / या प्रावधान किया जाता है कि शार्ट सेलिंग के निषेध या न्यूनतम कीमतों के निर्धारण या बाजार बन्द करने या आगामी कारोबार के निषेध से संबंधित सूचना इस प्रकार से भेजी जाती है कि सामान्य तरीके से चैबीस घन्टे के भीतर केन्द्र सरकार को मिल जाएगी, तो केन्द्र सरकार से अनुमोदन लिए बिना ही गवर्निंग बोर्ड पूर्वोक्त उल्लेख के अनुसार केन्द्र सरकार का निर्णय इस एक्सचेंज को प्राप्त होने तक तीन दिन से अधिक की किसी भी अवधि के लिए शार्ट सेलिंग पर निषेध या न्यूनतम कीमत निर्धारण कर सकता है या बाजार बन्द कर सकता है या आगामी कारोबार पर निषेध लगा सकता हैं। बिकवाली का निलम्बन यदि उपखंड में प्रावधानों के अनुसार किसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों के आगामी कारोबार पर निषेध या समग्र अथवा आंशिक रूप से बाजार बन्द रहने की अवधि के दौरान ही सुपुर्दगी और भुगतान की निर्धारित तारीखें भी आ जाती हैं तो उस विचराधीन प्रतिभूति या प्रतिभूतियों की सभी विद्यमान संविदाओं से संबंधित बिकवाली को बाजार फिर से खुलने तक के लिए गवर्निंग बोर्ड द्वारा निलंबित कर दिया जाएगा। हालांकि क्रेता को सुपुर्दगी प्राप्त करने का हक रहेगा। यदि विचराधीन प्रतिभूति या प्रतिभूतियां निर्बाधित प्रतिभूतियों की सूची में शामिल हैं, तो निम्नलिखित अतिरिक्त प्रावधान भी लागू होंगे, अर्थातः बिकवाली का निलम्बन रहने के दौरान गवर्निंग बोर्ड भुगतान के समय को क्लीयरिंग से क्लीयरिंग तक ब[ा देगा, और यह सुविधा बाजार के पुनः खुलने तक लागू रहेगी और बिकवाली का निलम्बन रहने के दौरान मध्यस्थों की देयताएं यथावत बरकरार रहेंगी। क्रेता सदस्य को इनमें से किसी भी क्लीयरिंग में सुपुर्दगी के प्रत्यावर्तन का हम होगा और इस प्रयोजन के लिए टिकट की प्रक्रिया इन उपविधियों और विनियमों में निर्धारण किए अनुसार या गवर्निंग बोर्ड द्वारा निर्धारित किए अनुसार कोई अन्य प्रक्रिया लागू होगी। यदि सुपुर्दगी के लिए मांग करने के बाद क्रेता सदस्य ऐसी प्रतिभूतियों को |
Smile please: यह जीवन केवल अनित्य और क्षणभंगुर ही नहीं, दुख रूप भी है। हम जिधर दृष्टि दौड़ाते हैं, उधर हमें दुख ही दुख नजर आता है। बचपन से लेकर मृत्युपर्यंत दुख का ही एकछत्र साम्राज्य है। जन्मते ही, बल्कि यूं कहे कि माता के गर्भ में आते ही इस जीव को दुख चारों और से आ घेरते हैं। माता के उदर में जब तक यह जीव रहता है तब तक घोर कष्ट का अनुभव करता रहता है। सुखपूर्वक सांस भी नहीं ले पाता। गर्भ से बाहर निकलते समय भी उसे घोर यंत्रणा होती है, वह चेतनाशून्य हो जाता है। उस समय कई बालक तो उस कष्ट को न सह सकने के कारण प्राण त्याग देते हैं।
मृत्यु के समय का दुख भी हम सब लोग देखते ही हैं। उस समय मनुष्य की कैसी असहाय अवस्था हो जाती है। उसके रोम-रोम से निराशा टपकने लगती है। वह कैसे कष्ट से प्राण त्यागता है। जिन घर-जमीन, स्त्री-पुत्र, धन-दौलत को उसने बड़ी ममता से पाला-पोसा था, उन्हें सहसा बाध्य होकर त्यागने में उसे कितने कष्ट का अनुभव होता है-इसे मरने वाला ही जानता है। बुढ़ापे के दुख भी हमसे छिपे नहीं हैं।
वृद्धावस्था में प्रायः मनुष्य की सारी इंद्रियां शिथिल, दृष्टि मंद हो जाती हैं, कानों से ठीक तरह सुनाई नहीं देता, चमड़ी सिकुड़ जाती है, दांत जवाब दे देते हैं, बिना सहारे के चलना कठिन हो जाता है, घर के लोग अनादर करने लगते हैं, बुद्धि भी प्रभावित हो जाती है।
व्याधि का तो किसी न किसी रूप में थोड़ा-बहुत सभी को अनुभव है। प्रायः सभी को न्यूनाधिक रूप में व्याधियों का शिकार होना पड़ता है। बड़े-बड़े महात्माओं और लोकोपकारी व्यक्तियों का भी व्याधियों से पिंड नहीं छूटता।
वियोग तो सबके साथ लगा ही हुआ है जिस वस्तु के समागम से हमें सुख की अनुभूति होती है, वही वियोग होने पर दुख का कारण बन जाती है। धन को ही ले लीजिए। धन के उपार्जन में कष्ट होता है, उसकी रक्षा करने में कष्ट उठाना पड़ता है, उसको बढ़ाने में भी कष्टों का सामना करना पड़ता है, उसे अनिच्छापूर्वक त्यागने में, खर्च करने में भी कष्ट होता है और उसके नाश होने में, चले जाने में तो कष्ट होता ही है।
अब प्रश्र यह उठता है कि इस दुख से बचने का उपाय क्या है ?
धर्मग्रंथ कहते हैं कि स्वैच्छापूर्वक विषयों के त्याग में ही सुख है। हम लोगों ने भ्रम से विषयों में सुख मान रखा है। वास्तव में जिसके पास जितना अधिक विषयों का संग्रह है, वह उतना ही दुखी है। धन की तीन गतियां मानी गई हैं- दान, भोग और नाश। हमारे शास्त्रों ने दान को ही सर्वोत्तम गति माना है। धन की रक्षा का भी सर्वोत्तम उपाय दान ही है। वही धन सुरक्षित है, जिसे हम दूसरों की सेवा में, भगवान की सेवा में लगा देते हैं। धन का नाश एक न एक दिन अवश्यंभावी है-चाहे उसे हम भोगों के निमित्त खर्च करके नष्ट कर दें, चाहे उसे दूसरे हड़प जाएं, सरकार कर के रूप में ले ले अथवा हम ही उसे छोड़कर संसार से चल बसें। धन को अक्षय, स्थायी बनाने का एकमात्र उपाय उसे भगवान की सेवा में, जनता-जनार्दन की सेवा में लगाना ही है।
जो सच्चा सुख चाहते हैं, उन्हें परमात्मा की ही शरण लेनी चाहिए, उन्हीं में मन लगाकर उन्हीं की भक्ति, उन्हीं की सेवा करनी चाहिए। जगत को जनार्दन समझकर जगतकी सेवा करना भी भगवान की ही सेवा है। फिर हमारे लिए सर्वत्र कल्याण ही कल्याण है।
| Smile please: यह जीवन केवल अनित्य और क्षणभंगुर ही नहीं, दुख रूप भी है। हम जिधर दृष्टि दौड़ाते हैं, उधर हमें दुख ही दुख नजर आता है। बचपन से लेकर मृत्युपर्यंत दुख का ही एकछत्र साम्राज्य है। जन्मते ही, बल्कि यूं कहे कि माता के गर्भ में आते ही इस जीव को दुख चारों और से आ घेरते हैं। माता के उदर में जब तक यह जीव रहता है तब तक घोर कष्ट का अनुभव करता रहता है। सुखपूर्वक सांस भी नहीं ले पाता। गर्भ से बाहर निकलते समय भी उसे घोर यंत्रणा होती है, वह चेतनाशून्य हो जाता है। उस समय कई बालक तो उस कष्ट को न सह सकने के कारण प्राण त्याग देते हैं। मृत्यु के समय का दुख भी हम सब लोग देखते ही हैं। उस समय मनुष्य की कैसी असहाय अवस्था हो जाती है। उसके रोम-रोम से निराशा टपकने लगती है। वह कैसे कष्ट से प्राण त्यागता है। जिन घर-जमीन, स्त्री-पुत्र, धन-दौलत को उसने बड़ी ममता से पाला-पोसा था, उन्हें सहसा बाध्य होकर त्यागने में उसे कितने कष्ट का अनुभव होता है-इसे मरने वाला ही जानता है। बुढ़ापे के दुख भी हमसे छिपे नहीं हैं। वृद्धावस्था में प्रायः मनुष्य की सारी इंद्रियां शिथिल, दृष्टि मंद हो जाती हैं, कानों से ठीक तरह सुनाई नहीं देता, चमड़ी सिकुड़ जाती है, दांत जवाब दे देते हैं, बिना सहारे के चलना कठिन हो जाता है, घर के लोग अनादर करने लगते हैं, बुद्धि भी प्रभावित हो जाती है। व्याधि का तो किसी न किसी रूप में थोड़ा-बहुत सभी को अनुभव है। प्रायः सभी को न्यूनाधिक रूप में व्याधियों का शिकार होना पड़ता है। बड़े-बड़े महात्माओं और लोकोपकारी व्यक्तियों का भी व्याधियों से पिंड नहीं छूटता। वियोग तो सबके साथ लगा ही हुआ है जिस वस्तु के समागम से हमें सुख की अनुभूति होती है, वही वियोग होने पर दुख का कारण बन जाती है। धन को ही ले लीजिए। धन के उपार्जन में कष्ट होता है, उसकी रक्षा करने में कष्ट उठाना पड़ता है, उसको बढ़ाने में भी कष्टों का सामना करना पड़ता है, उसे अनिच्छापूर्वक त्यागने में, खर्च करने में भी कष्ट होता है और उसके नाश होने में, चले जाने में तो कष्ट होता ही है। अब प्रश्र यह उठता है कि इस दुख से बचने का उपाय क्या है ? धर्मग्रंथ कहते हैं कि स्वैच्छापूर्वक विषयों के त्याग में ही सुख है। हम लोगों ने भ्रम से विषयों में सुख मान रखा है। वास्तव में जिसके पास जितना अधिक विषयों का संग्रह है, वह उतना ही दुखी है। धन की तीन गतियां मानी गई हैं- दान, भोग और नाश। हमारे शास्त्रों ने दान को ही सर्वोत्तम गति माना है। धन की रक्षा का भी सर्वोत्तम उपाय दान ही है। वही धन सुरक्षित है, जिसे हम दूसरों की सेवा में, भगवान की सेवा में लगा देते हैं। धन का नाश एक न एक दिन अवश्यंभावी है-चाहे उसे हम भोगों के निमित्त खर्च करके नष्ट कर दें, चाहे उसे दूसरे हड़प जाएं, सरकार कर के रूप में ले ले अथवा हम ही उसे छोड़कर संसार से चल बसें। धन को अक्षय, स्थायी बनाने का एकमात्र उपाय उसे भगवान की सेवा में, जनता-जनार्दन की सेवा में लगाना ही है। जो सच्चा सुख चाहते हैं, उन्हें परमात्मा की ही शरण लेनी चाहिए, उन्हीं में मन लगाकर उन्हीं की भक्ति, उन्हीं की सेवा करनी चाहिए। जगत को जनार्दन समझकर जगतकी सेवा करना भी भगवान की ही सेवा है। फिर हमारे लिए सर्वत्र कल्याण ही कल्याण है। |
जयपुर, 21 दिसम्बर । राजस्थान सरकार के दो साल के कार्यकाल में अशोक गहलोत सरकार द्वारा अब तक 20. 55 लाख किसानों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित कर 7726. 90 करोड़ रूपए का फसली ऋण माफ किया गया है।
राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना 2019 में फसली ऋण के साथ साथ केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं भूमि विकास बैंक सहकारी बैंकों के मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन कृषि ऋण सीमान्त एवं लघु श्रेणी के किसानों के माफ किए गए। इसमें 30 नवम्बर, 2018 की स्थिति में अवधि पार खातों के 2लाख रूपए के बकाया ऋणों को माफ कर किसानों को राहत दी गई। इस योजना से अब तक 29,262 किसानों का 336. 49 करोड़ रूपए का ऋण माफ किया गया है। इन किसानों की जमीन पुनः उनके नामे हो चुकी है।
पिछले 2 वर्षों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लगातार किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कोरोना महामारी के बीच, किसानों की आर्थिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करके उनकी समस्याओं को दूर करना राज्य सरकार की प्रमुखता में रहा है।
इसके लिए मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व में, राज्य सरकार के सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं को पारदर्शी तरीके से और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जा रहा है। इसका परिणाम ये है कि किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
किसानों के लिए, उनकी उपज के उचित मूल्य के लिए एक लड़ाई है, जिसे मुक्ति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 550 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और निजी सहकारी बाजार के रूप में खरीद और बिक्री सहकारी समितियों को अधिसूचित किया है ताकि किसानों से जल्द से जल्द खरीद की जा सकें।
अब किसान उपज को अपने खेत और गांव के पास बेच सकता है। इसके अलावा, कृषि उपज मंडियों के अनुसार, खुली नीलामी में कृषि जिंसों की बिक्री से प्रतिस्पर्धी मूल्य की सुविधा मिल रही है। 30 जून तक 19 हजार 243 किसानों को लाभ मिला है तथा उनकी 6 लाख 70 हजार 580 क्विंटल उपज की खरीद हुई है। जिसकी राशि 152. 95 करोड़ रूपए है।
राजस्थान के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि बहुत से किसानों को फसल बुवाई और अन्य कार्यो के लिए पैसे उधार लेना पड़ता है इनके आर्थिक भार को कम कृषि उपकरणों पर खर्च को कम करने के लिए, ग्राम सेवा सहकारी समितियों और खरीद बिक्री सहकारी समितियों को उचित किराए पर आसानी से उपलब्ध उपकरण उपलब्ध कराने के लिए कस्टम हायरिंग केंद्रों के साथ जोड़ा जा रहा है। 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए 8 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने देश में पहली बार सहकारिता के क्षेत्र में सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना 2019 की शुरूआत की है जिससे ऋण वितरण में भेदभाव को समाप्त किया जा सकें।
इसी के चलते, बायोमैट्रिक सत्यापन के आधार पर वास्तविक किसान को लाभ मिल रहा है। इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए, राज्य के 12. 72 लाख नए सदस्य किसानों को फसली ऋण स्कीम से जोड़ा गया है। साथ ही बैंकिंग सुविधा में वित्तीय समावेशन एवं पारदर्शिता लाई जा रही हैं। गहलोत ने 29 जिलों के केन्द्रीय सहकारी बैंकों की सभी शाखाओं को कम्प्यूटरीकृत कर कोर बैंकिंग सोल्यूशन से जोड़ने का निर्णय भी लिया था।
Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
| जयपुर, इक्कीस दिसम्बर । राजस्थान सरकार के दो साल के कार्यकाल में अशोक गहलोत सरकार द्वारा अब तक बीस. पचपन लाख किसानों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित कर सात हज़ार सात सौ छब्बीस. नब्बे करोड़ रूपए का फसली ऋण माफ किया गया है। राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना दो हज़ार उन्नीस में फसली ऋण के साथ साथ केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं भूमि विकास बैंक सहकारी बैंकों के मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन कृषि ऋण सीमान्त एवं लघु श्रेणी के किसानों के माफ किए गए। इसमें तीस नवम्बर, दो हज़ार अट्ठारह की स्थिति में अवधि पार खातों के दोलाख रूपए के बकाया ऋणों को माफ कर किसानों को राहत दी गई। इस योजना से अब तक उनतीस,दो सौ बासठ किसानों का तीन सौ छत्तीस. उनचास करोड़ रूपए का ऋण माफ किया गया है। इन किसानों की जमीन पुनः उनके नामे हो चुकी है। पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लगातार किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कोरोना महामारी के बीच, किसानों की आर्थिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करके उनकी समस्याओं को दूर करना राज्य सरकार की प्रमुखता में रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व में, राज्य सरकार के सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं को पारदर्शी तरीके से और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जा रहा है। इसका परिणाम ये है कि किसान लाभान्वित हो रहे हैं। किसानों के लिए, उनकी उपज के उचित मूल्य के लिए एक लड़ाई है, जिसे मुक्ति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने पाँच सौ पचास ग्राम सेवा सहकारी समितियों और निजी सहकारी बाजार के रूप में खरीद और बिक्री सहकारी समितियों को अधिसूचित किया है ताकि किसानों से जल्द से जल्द खरीद की जा सकें। अब किसान उपज को अपने खेत और गांव के पास बेच सकता है। इसके अलावा, कृषि उपज मंडियों के अनुसार, खुली नीलामी में कृषि जिंसों की बिक्री से प्रतिस्पर्धी मूल्य की सुविधा मिल रही है। तीस जून तक उन्नीस हजार दो सौ तैंतालीस किसानों को लाभ मिला है तथा उनकी छः लाख सत्तर हजार पाँच सौ अस्सी क्विंटल उपज की खरीद हुई है। जिसकी राशि एक सौ बावन. पचानवे करोड़ रूपए है। राजस्थान के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि बहुत से किसानों को फसल बुवाई और अन्य कार्यो के लिए पैसे उधार लेना पड़ता है इनके आर्थिक भार को कम कृषि उपकरणों पर खर्च को कम करने के लिए, ग्राम सेवा सहकारी समितियों और खरीद बिक्री सहकारी समितियों को उचित किराए पर आसानी से उपलब्ध उपकरण उपलब्ध कराने के लिए कस्टम हायरिंग केंद्रों के साथ जोड़ा जा रहा है। एक सौ ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए आठ करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। मुख्यमंत्री गहलोत ने देश में पहली बार सहकारिता के क्षेत्र में सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना दो हज़ार उन्नीस की शुरूआत की है जिससे ऋण वितरण में भेदभाव को समाप्त किया जा सकें। इसी के चलते, बायोमैट्रिक सत्यापन के आधार पर वास्तविक किसान को लाभ मिल रहा है। इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए, राज्य के बारह. बहत्तर लाख नए सदस्य किसानों को फसली ऋण स्कीम से जोड़ा गया है। साथ ही बैंकिंग सुविधा में वित्तीय समावेशन एवं पारदर्शिता लाई जा रही हैं। गहलोत ने उनतीस जिलों के केन्द्रीय सहकारी बैंकों की सभी शाखाओं को कम्प्यूटरीकृत कर कोर बैंकिंग सोल्यूशन से जोड़ने का निर्णय भी लिया था। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service. |
ब्रिसबेन, भाषा, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ ने एशेज शुरू होने से पहले इंग्लैंड को चेतावनी देते हुये आज कहा टीम के मौजूदा तेज गेंदबाज मिशेल जानसन से ज्यादा खतरनाक हैं।
ऑस्ट्रेलिया ने 2013-14 एशेज में जानसन की कातिलाना गेंदबाजी के दम पर श्रृंखला 5-0 से अपने नाम की थी। श्रृंखला में उन्होंने 37 विकेट झटके थे। नेट अभ्यास के दौरान मिशेल स्टार्क और पैट कमिंस की गेंदबाजी का सामना करने वाले स्मिथ ने इंग्लैंड को चेताया कि तेज गेंदबाजों का मदद करने वाली गाबा की पिच पर उनका सामना करना विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिये मुश्किल भरा होगा। उन्होंने कहा, नेट पर उन्हें गेंदबाजी करते देखना काफी रोचक रहा। ये गेंदबाज उतने ही खतरनाक है जितना 2013 में मिशेल जानसन थे। सच कहूं तो, अगर ज्यादा नहीं है तो कम से कम उतना तो हैं ही। स्मिथ ने कहा, मैंने कमिंस और स्टार्क के खिलाफ नेट पर समय बिताया है और वे दोनों खतरनाक है, जो हमारे लिये काफी अच्छा है। दोनों गेंदबाज श्रृंखला में छाप छोड़ने के लिये तैयार है।
| ब्रिसबेन, भाषा, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ ने एशेज शुरू होने से पहले इंग्लैंड को चेतावनी देते हुये आज कहा टीम के मौजूदा तेज गेंदबाज मिशेल जानसन से ज्यादा खतरनाक हैं। ऑस्ट्रेलिया ने दो हज़ार तेरह-चौदह एशेज में जानसन की कातिलाना गेंदबाजी के दम पर श्रृंखला पाँच-शून्य से अपने नाम की थी। श्रृंखला में उन्होंने सैंतीस विकेट झटके थे। नेट अभ्यास के दौरान मिशेल स्टार्क और पैट कमिंस की गेंदबाजी का सामना करने वाले स्मिथ ने इंग्लैंड को चेताया कि तेज गेंदबाजों का मदद करने वाली गाबा की पिच पर उनका सामना करना विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिये मुश्किल भरा होगा। उन्होंने कहा, नेट पर उन्हें गेंदबाजी करते देखना काफी रोचक रहा। ये गेंदबाज उतने ही खतरनाक है जितना दो हज़ार तेरह में मिशेल जानसन थे। सच कहूं तो, अगर ज्यादा नहीं है तो कम से कम उतना तो हैं ही। स्मिथ ने कहा, मैंने कमिंस और स्टार्क के खिलाफ नेट पर समय बिताया है और वे दोनों खतरनाक है, जो हमारे लिये काफी अच्छा है। दोनों गेंदबाज श्रृंखला में छाप छोड़ने के लिये तैयार है। |
नई दिल्ली, । पंजाबी सिंगर व कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मामले में आठ सस्पेक्ट के नाम सामने आए हैं। पंजाब सहित कई राज्यों की पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। इस मामले में तिहाड़ में बंद लारेंस को रिमांड पर लेकर स्पेशल सेल पूछताछ कर रही है। दरअसल, पुलिस को शक है कि लारेंस के बदमाशों ने ही मूसेवाला की हत्या की है। लारेंस को दूसरी बार पांच दिनों के लिए रिमांड पर लिया गया है।
बता दें कि 29 मई को पंजाबी सिंगर शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड को बदमाशों ने मनसा जिले में अंजाम दिया था। सीआइए स्टाफ पुलिस ने रविवार रात हरियाणा के फतेहाबाद से एक और गैंगस्टर को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया गैंगस्टर विश्नोई ग्रुप से संबंधित देवेंद्र उर्फ काला काला बताया जा रहा है। इससे पहले सीआइए स्टाफ पुलिस ने 5 दिन पहले फतेहाबाद से ही बिश्नोई गैंग के गुर्गे पवन बिश्नोई और नसीब खान को गिरफ्तार किया था।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद तिहाड़ में गैंगवार होने की आशंका बढ़ गई है। हत्याकांड में शामिल गिरोह को उसके प्रतिद्वंद्वी गिरोह से बदला लेने की धमकी मिल रही है।
- बता दें कि पंजाबी सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसे वाला की 29 मई को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
- हत्या के कुछ घंटे बाद ही इसकी जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी है गोल्डी बराड़, जो फिलहाल कनाडा में है।
- लॉरेस बिश्नोई की मानें तो गोल्डी बराड़ को पता लगा था कि सिद्धू मूसे वाला उसके मैनेजर की मदद कर रहा था जिसके लिंक पिछले वर्ष अगस्त में हुई अकाली दल नेता विकी मिड्डूखेड़ा की हत्या से थे।
| नई दिल्ली, । पंजाबी सिंगर व कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मामले में आठ सस्पेक्ट के नाम सामने आए हैं। पंजाब सहित कई राज्यों की पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। इस मामले में तिहाड़ में बंद लारेंस को रिमांड पर लेकर स्पेशल सेल पूछताछ कर रही है। दरअसल, पुलिस को शक है कि लारेंस के बदमाशों ने ही मूसेवाला की हत्या की है। लारेंस को दूसरी बार पांच दिनों के लिए रिमांड पर लिया गया है। बता दें कि उनतीस मई को पंजाबी सिंगर शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड को बदमाशों ने मनसा जिले में अंजाम दिया था। सीआइए स्टाफ पुलिस ने रविवार रात हरियाणा के फतेहाबाद से एक और गैंगस्टर को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया गैंगस्टर विश्नोई ग्रुप से संबंधित देवेंद्र उर्फ काला काला बताया जा रहा है। इससे पहले सीआइए स्टाफ पुलिस ने पाँच दिन पहले फतेहाबाद से ही बिश्नोई गैंग के गुर्गे पवन बिश्नोई और नसीब खान को गिरफ्तार किया था। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद तिहाड़ में गैंगवार होने की आशंका बढ़ गई है। हत्याकांड में शामिल गिरोह को उसके प्रतिद्वंद्वी गिरोह से बदला लेने की धमकी मिल रही है। - बता दें कि पंजाबी सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसे वाला की उनतीस मई को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। - हत्या के कुछ घंटे बाद ही इसकी जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी है गोल्डी बराड़, जो फिलहाल कनाडा में है। - लॉरेस बिश्नोई की मानें तो गोल्डी बराड़ को पता लगा था कि सिद्धू मूसे वाला उसके मैनेजर की मदद कर रहा था जिसके लिंक पिछले वर्ष अगस्त में हुई अकाली दल नेता विकी मिड्डूखेड़ा की हत्या से थे। |
Gwalior Energy Minister News:ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने कार्यशैली के लिए तो चर्चित हैं हीसाथ ही उनकी कार्यशैली के वीडियो भी वायरल होते रहते हैं। सोमवार रात को भी ऊर्जा मंत्री का डांस वाला वीडियो इंटरनेट मीडिय. . . madhya pradeshTue, 29 Nov 2022 12:44 PM (IST)
Datia Accident News:पीताम्बरा पीठ के दर्शन करने आए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के काफिल के वाहन की चपेट में आकर एक दंपति घायल हो गई। हालांकि चोट ज्यादा नहीं थी। इसलिए ऊर्जा मंत्री ने मौके पर ही मेडिकल से . . . madhya pradeshSat, 26 Nov 2022 02:42 PM (IST)
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शिविर में 30 वृद्धजनों के ऑपरेशन के बाद उनका रात्रि में ख्याल रखा और उन्हें अपने हाथ से चाय पिलाई और दवाई खिलाई। इस दौरान उन्होंने एक बुजुर्ग महिला के पैर भी दबाये। madhya pradeshTue, 15 Nov 2022 05:33 PM (IST)
सड़क चौड़ीकरण के चलते किला गेट पर रविवार को की गई तुड़ाई की कार्रवाई के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सोमवार को डैमेज कंट्रोल के लिए नाराज लोगों के बीच पहुंचे। तुड़ाई की कार्रवाई से प्रभावित लोग यहां धरना दे रहे . . . madhya pradeshTue, 15 Nov 2022 12:38 PM (IST)
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जिम्मेदारी से सफाई होनी चाहिए। दो अधिकारी मौके पर पहुंचे तो एक दूसरे पर सफाई के मामले को टाल रहे थे। इसकी-उसकी जिम्मेदारी बता रहे थे। madhya pradeshFri, 11 Nov 2022 09:23 PM (IST)
Gwalior Energy Minister News: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने शुक्रवार तड़के करीब चार बजे ग्वालियर विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे और लोगों के दरवाजे खटखटाकर उन्हें जगाया और पूछा कि सड़क की समस्या सहित अन्य कोई . . . madhya pradeshFri, 11 Nov 2022 11:47 AM (IST)
Gwalior Energy Minister News: ग्वालियर शहर की सड़कों की हालत खराब है और अधिकारी बार बार ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के कहने के बाद भी सड़कों की हालत ठीक नहीं कर रहे थे और उनहें बना भी नहीं रहे थे। madhya pradeshSun, 06 Nov 2022 11:13 AM (IST)
सड़कों के निर्माण में देरी के चलते ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की नाराजगी और जूते त्यागने के बाद स्मार्ट सिटी ने गेंडे वाली सड़क व राजपायगा रोड पर काम शुरू करा दिया है, लेकिन इन दोनों ही सड़कों के निर्माण की रफ्तार. . . madhya pradeshSun, 06 Nov 2022 09:46 AM (IST)
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के चप्पल व जूते छोड़ने के 14 दिन बाद स्मार्ट सिटी ने गेंडेवाली सड़क पर शुक्रवार से काम शुरू हो गया है। स्मार्ट सिटी ने ड्राई लीन कंक्रीट को बिछाने का काम शुरू किया है। madhya pradeshSat, 05 Nov 2022 10:52 AM (IST)
मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने पंचनामे को इंटरनेट मीडिया पर भी डाला, 30 जनवरी दी समयसीमा वरना दंडात्मक कार्रवाई। रतलाम में 15 साल पहले गरीबों के आवास न बनने पर तत्कालीन गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने भी त्यागे थे जूते-चप्पल. . . madhya pradeshTue, 01 Nov 2022 08:03 AM (IST)
| Gwalior Energy Minister News:ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने कार्यशैली के लिए तो चर्चित हैं हीसाथ ही उनकी कार्यशैली के वीडियो भी वायरल होते रहते हैं। सोमवार रात को भी ऊर्जा मंत्री का डांस वाला वीडियो इंटरनेट मीडिय. . . madhya pradeshTue, उनतीस नवंबर दो हज़ार बाईस बारह:चौंतालीस PM Datia Accident News:पीताम्बरा पीठ के दर्शन करने आए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के काफिल के वाहन की चपेट में आकर एक दंपति घायल हो गई। हालांकि चोट ज्यादा नहीं थी। इसलिए ऊर्जा मंत्री ने मौके पर ही मेडिकल से . . . madhya pradeshSat, छब्बीस नवंबर दो हज़ार बाईस दो:बयालीस PM ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शिविर में तीस वृद्धजनों के ऑपरेशन के बाद उनका रात्रि में ख्याल रखा और उन्हें अपने हाथ से चाय पिलाई और दवाई खिलाई। इस दौरान उन्होंने एक बुजुर्ग महिला के पैर भी दबाये। madhya pradeshTue, पंद्रह नवंबर दो हज़ार बाईस पाँच:तैंतीस PM सड़क चौड़ीकरण के चलते किला गेट पर रविवार को की गई तुड़ाई की कार्रवाई के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सोमवार को डैमेज कंट्रोल के लिए नाराज लोगों के बीच पहुंचे। तुड़ाई की कार्रवाई से प्रभावित लोग यहां धरना दे रहे . . . madhya pradeshTue, पंद्रह नवंबर दो हज़ार बाईस बारह:अड़तीस PM ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जिम्मेदारी से सफाई होनी चाहिए। दो अधिकारी मौके पर पहुंचे तो एक दूसरे पर सफाई के मामले को टाल रहे थे। इसकी-उसकी जिम्मेदारी बता रहे थे। madhya pradeshFri, ग्यारह नवंबर दो हज़ार बाईस नौ:तेईस PM Gwalior Energy Minister News: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने शुक्रवार तड़के करीब चार बजे ग्वालियर विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे और लोगों के दरवाजे खटखटाकर उन्हें जगाया और पूछा कि सड़क की समस्या सहित अन्य कोई . . . madhya pradeshFri, ग्यारह नवंबर दो हज़ार बाईस ग्यारह:सैंतालीस AM Gwalior Energy Minister News: ग्वालियर शहर की सड़कों की हालत खराब है और अधिकारी बार बार ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के कहने के बाद भी सड़कों की हालत ठीक नहीं कर रहे थे और उनहें बना भी नहीं रहे थे। madhya pradeshSun, छः नवंबर दो हज़ार बाईस ग्यारह:तेरह AM सड़कों के निर्माण में देरी के चलते ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की नाराजगी और जूते त्यागने के बाद स्मार्ट सिटी ने गेंडे वाली सड़क व राजपायगा रोड पर काम शुरू करा दिया है, लेकिन इन दोनों ही सड़कों के निर्माण की रफ्तार. . . madhya pradeshSun, छः नवंबर दो हज़ार बाईस नौ:छियालीस AM ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के चप्पल व जूते छोड़ने के चौदह दिन बाद स्मार्ट सिटी ने गेंडेवाली सड़क पर शुक्रवार से काम शुरू हो गया है। स्मार्ट सिटी ने ड्राई लीन कंक्रीट को बिछाने का काम शुरू किया है। madhya pradeshSat, पाँच नवंबर दो हज़ार बाईस दस:बावन AM मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने पंचनामे को इंटरनेट मीडिया पर भी डाला, तीस जनवरी दी समयसीमा वरना दंडात्मक कार्रवाई। रतलाम में पंद्रह साल पहले गरीबों के आवास न बनने पर तत्कालीन गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने भी त्यागे थे जूते-चप्पल. . . madhya pradeshTue, एक नवंबर दो हज़ार बाईस आठ:तीन AM |
वीडियो में आप देख सकते हैं कि घर में नवजात (Dog and newborn video) के आने की खुशी में डॉगी झूम उठता है. इसके बाद वह जो कुछ भी करता है, वह आपको काफी क्यूट लगेगा. यह वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत रहा है.
जानवरों में कुत्ते (Dog) को उनकी वफादारी के लिए जाना जाता है. अगर मालिक पर कोई आफत आ जाए, तो ये बेजुबान उसे बचाने के लिए अपनी जान पर खेल जाता है. इसलिए कहा जाता है कि जानवरों में कुत्ते इंसानों के सबसे करीब और उनके अच्छे दोस्त होते हैं. ये न केवल आपके घर की रखवाली करते हैं, बल्कि आपके हर सुख-दुख में हिस्सा भी लेते हैं. यही वजह है कि हर घर में लोग पालतू के रूप में कुत्ते को ही पालना ज्यादा पसंद करते हैं. फिलहाल, सोशल मीडिया पर डॉगी का एक बेहद क्यूट वीडियो (Dog cute video) वायरल हो रहा है. जिसमें वह घर में नवजात (Dog and newborn video) के आने की खुशी में झूम उठता है. इसके बाद वह जो कुछ भी करता है, वह आपको काफी क्यूट लगेगा. यह वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत रहा है.
वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि घर में एक नवजात का वेलकम किया जा रहा है. वहीं घर का एक पालतू डॉगी को बच्चे के आगमन पर सबसे ज्यादा खुश होते हुए देखा जा सकता है. वीडियो में देख सकते हैं कि डॉगी बच्चे की एक झलक पाने के लिए कितना बेताब है. इसके बाद जो पल देखने को मिलेगा, वह और भी क्यूट है. डॉगी नवजात से बिल्कुल चिपक कर सोता हुआ नजर आता है. कुल मिलाकर देखा जाए, तो यह वीडियो क्यूटनेस से भरा हुआ है. यकीन मानिए इस वीडियो को देखने के बाद आपके चेहरे पर भी मुस्कान तैर जाएगी.
डॉगी और बच्चे के इस बेहद क्यूट से वीडियो को सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर goldenretrieverunion नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. तीन दिन पहले अपलोड हुए इस वीडियो को अब तक लगभग 8 हजार लोग लाइक कर चुके हैं. यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इसके अलावा ढेरों लोगों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है. यह वीडियो सोशल मीडिया की पब्लिक को काफी पसंद आ रहा है. लोग इसे खूब एन्जॉय कर रहे हैं.
इस वीडियो को देखने के बाद एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, जब दो क्यूटी एक साथ हों, तो अल्टीमेट क्यूटनेस देखने को मिलता है. यहां भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. वहीं, दूसरे यूजर का कहना है, ये डॉगी कितना क्यूट और प्यारा है. जिस तरह से वह बच्चे को देखकर खुश है, इसने मेरा दिन बना दिया है. इसी तरह एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, डॉगी इंसानों के हमेशा से ही अच्छे दोस्त रहे हैं.
| वीडियो में आप देख सकते हैं कि घर में नवजात के आने की खुशी में डॉगी झूम उठता है. इसके बाद वह जो कुछ भी करता है, वह आपको काफी क्यूट लगेगा. यह वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत रहा है. जानवरों में कुत्ते को उनकी वफादारी के लिए जाना जाता है. अगर मालिक पर कोई आफत आ जाए, तो ये बेजुबान उसे बचाने के लिए अपनी जान पर खेल जाता है. इसलिए कहा जाता है कि जानवरों में कुत्ते इंसानों के सबसे करीब और उनके अच्छे दोस्त होते हैं. ये न केवल आपके घर की रखवाली करते हैं, बल्कि आपके हर सुख-दुख में हिस्सा भी लेते हैं. यही वजह है कि हर घर में लोग पालतू के रूप में कुत्ते को ही पालना ज्यादा पसंद करते हैं. फिलहाल, सोशल मीडिया पर डॉगी का एक बेहद क्यूट वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें वह घर में नवजात के आने की खुशी में झूम उठता है. इसके बाद वह जो कुछ भी करता है, वह आपको काफी क्यूट लगेगा. यह वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत रहा है. वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि घर में एक नवजात का वेलकम किया जा रहा है. वहीं घर का एक पालतू डॉगी को बच्चे के आगमन पर सबसे ज्यादा खुश होते हुए देखा जा सकता है. वीडियो में देख सकते हैं कि डॉगी बच्चे की एक झलक पाने के लिए कितना बेताब है. इसके बाद जो पल देखने को मिलेगा, वह और भी क्यूट है. डॉगी नवजात से बिल्कुल चिपक कर सोता हुआ नजर आता है. कुल मिलाकर देखा जाए, तो यह वीडियो क्यूटनेस से भरा हुआ है. यकीन मानिए इस वीडियो को देखने के बाद आपके चेहरे पर भी मुस्कान तैर जाएगी. डॉगी और बच्चे के इस बेहद क्यूट से वीडियो को सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर goldenretrieverunion नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. तीन दिन पहले अपलोड हुए इस वीडियो को अब तक लगभग आठ हजार लोग लाइक कर चुके हैं. यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इसके अलावा ढेरों लोगों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है. यह वीडियो सोशल मीडिया की पब्लिक को काफी पसंद आ रहा है. लोग इसे खूब एन्जॉय कर रहे हैं. इस वीडियो को देखने के बाद एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, जब दो क्यूटी एक साथ हों, तो अल्टीमेट क्यूटनेस देखने को मिलता है. यहां भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. वहीं, दूसरे यूजर का कहना है, ये डॉगी कितना क्यूट और प्यारा है. जिस तरह से वह बच्चे को देखकर खुश है, इसने मेरा दिन बना दिया है. इसी तरह एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, डॉगी इंसानों के हमेशा से ही अच्छे दोस्त रहे हैं. |
पाकिस्तान के बल्लेबाजी कोच यूनिस खान (Younis Khan) ने बाबर आजम (Babar Azam) से अपील करते हुए कहा है कि वह इंग्लैंड के खिलाफ (England vs Pakistan) शुरू हो रही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील करें। पाकिस्तान (Pakistan Tour of England) इस समय इंग्लैंड में है जहां उसे मेजबान टीम के साथ अगस्त के महीने में टेस्ट सीरीज खेलनी है।
आजम वनडे क्रिकेट की तरह टेस्ट में अभी तक ज्यादा शतक नहीं लगा पाएं हैं। अपने देश के लिए खेले 74 वनडे में उनके नाम 11 शतक हैं जबकि 26 टेस्ट मैचों में उनके नाम पांच शतक हैं। टेस्ट में वह कभी भी 150 के पार नहीं गए हैं। उनका टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर 143 है।
पूर्व कप्तान ने कहा कि इंग्लैंड की परिस्थितियों में निचले क्रम के बल्लेबाज भी बड़ा रोल अदा करेंगे। उन्होंने मोहम्मद अब्बास की तरफ इशारा किया जो आने वाली सीरीज में बल्ले से अहम योगदान दे सकते हैं।
दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच पांच अगस्त से मैनचेस्टर में शुरू होगा।
| पाकिस्तान के बल्लेबाजी कोच यूनिस खान ने बाबर आजम से अपील करते हुए कहा है कि वह इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हो रही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील करें। पाकिस्तान इस समय इंग्लैंड में है जहां उसे मेजबान टीम के साथ अगस्त के महीने में टेस्ट सीरीज खेलनी है। आजम वनडे क्रिकेट की तरह टेस्ट में अभी तक ज्यादा शतक नहीं लगा पाएं हैं। अपने देश के लिए खेले चौहत्तर वनडे में उनके नाम ग्यारह शतक हैं जबकि छब्बीस टेस्ट मैचों में उनके नाम पांच शतक हैं। टेस्ट में वह कभी भी एक सौ पचास के पार नहीं गए हैं। उनका टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर एक सौ तैंतालीस है। पूर्व कप्तान ने कहा कि इंग्लैंड की परिस्थितियों में निचले क्रम के बल्लेबाज भी बड़ा रोल अदा करेंगे। उन्होंने मोहम्मद अब्बास की तरफ इशारा किया जो आने वाली सीरीज में बल्ले से अहम योगदान दे सकते हैं। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच पांच अगस्त से मैनचेस्टर में शुरू होगा। |
पूरी दुनिया में इस समय 'Avengers: Endgame' फिल्म का खुमार लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। अब 'Avengers: Endgame'का खुमार राजनीति में भी दिखाई देने लगा है।
लखनऊः पूरी दुनिया में इस समय 'Avengers: Endgame' फिल्म का खुमार लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। अब 'Avengers: Endgame'का खुमार राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस फिल्म के सहारे पीएम मोदी पर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि 'पिछले पांच वर्षों में, भाजपा ने लोकतंत्र को नष्ट कर दिया है लेकिन अब उनका एंडगेम (Endgame) शुरू हो गया है क्योंकि अब महागठबंधन सरकार (Avengers Team) जल्द ही आ रही है। '
साथ ही अखिलेश ने एक पोस्टर भी शेयर किया है, जिसमें लिखा है 'महागठबंधन सरकार' जिसके बैकग्राउंड का रंग मार्बल स्टूडियो की तरह ही है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मताबिक, सुपरहीरो की टीम में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल शामिल है जो लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन करके चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन फिल्म कि तरह उत्तर प्रदेश में सुपरहीरो (अखिलेश यादव) के एंडगेम में हर बीजेपी विरोधी पार्टी उत्तर प्रदेश महागठबंधन का हिस्सा नहीं है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में अब तक 80 में से 26 लोकसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। यहां पर बीजेपी को सपा-बसपा गठबंधन से कड़ी टक्कर मिलती हुई बताई जा रही है।
एवेंजर्स एंडगेम मार्वल स्टूडियो कि एवेंजर्स फ्रैंचाइजी की नई फिल्म है, जिसमें सुपरहीरो की एक टीम को दिखाया गया है, जो कि शक्तिशाली थानोस के खिलाफ एक टीम बना कर उसका सामना करती है, क्योंकि उसने इन्फिनिटी स्टोन्स का उपयोग ब्रह्मांड में जीवन के आधे हिस्से को खत्म करने के लिए किया है।
| पूरी दुनिया में इस समय 'Avengers: Endgame' फिल्म का खुमार लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। अब 'Avengers: Endgame'का खुमार राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। लखनऊः पूरी दुनिया में इस समय 'Avengers: Endgame' फिल्म का खुमार लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। अब 'Avengers: Endgame'का खुमार राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस फिल्म के सहारे पीएम मोदी पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि 'पिछले पांच वर्षों में, भाजपा ने लोकतंत्र को नष्ट कर दिया है लेकिन अब उनका एंडगेम शुरू हो गया है क्योंकि अब महागठबंधन सरकार जल्द ही आ रही है। ' साथ ही अखिलेश ने एक पोस्टर भी शेयर किया है, जिसमें लिखा है 'महागठबंधन सरकार' जिसके बैकग्राउंड का रंग मार्बल स्टूडियो की तरह ही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मताबिक, सुपरहीरो की टीम में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल शामिल है जो लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन करके चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन फिल्म कि तरह उत्तर प्रदेश में सुपरहीरो के एंडगेम में हर बीजेपी विरोधी पार्टी उत्तर प्रदेश महागठबंधन का हिस्सा नहीं है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में अब तक अस्सी में से छब्बीस लोकसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। यहां पर बीजेपी को सपा-बसपा गठबंधन से कड़ी टक्कर मिलती हुई बताई जा रही है। एवेंजर्स एंडगेम मार्वल स्टूडियो कि एवेंजर्स फ्रैंचाइजी की नई फिल्म है, जिसमें सुपरहीरो की एक टीम को दिखाया गया है, जो कि शक्तिशाली थानोस के खिलाफ एक टीम बना कर उसका सामना करती है, क्योंकि उसने इन्फिनिटी स्टोन्स का उपयोग ब्रह्मांड में जीवन के आधे हिस्से को खत्म करने के लिए किया है। |
प्रिज्म एक ठोस ज्यामितीय आकृति (geometric figure) है जिसमें दो समान किनारे (identical ends) और सभी सतहें सपाट होती (flat sides) हैं। प्रिज्म का नाम उसके आधार की शेप के अनुसार रखा गया है, इसलिए त्रिकोणीय आधार (triangular base) वाले प्रिज्म को "त्रिकोणीय प्रिज्म" कहा जाता है। प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, आपको बस उसके आधार के क्षेत्रफल की गणना करनी होगी और उसकी ऊँचाई से गुणा करना होगा - आधार के क्षेत्रफल की गणना करना मुश्किल हिस्सा हो सकता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के प्रिज्मों के आयतन की गणना कैसे की जाती है। आयतन और क्षमता समान हैं, लेकिन यहां प्रिज्म के आयतन की गणना कैसे की जाती है।
1. त्रिकोणीय (Triangular) प्रिज्म के आयतन को निकालने का फॉर्मूला लिखेंः
फॉर्मुला है। हालाँकि, हम इस फॉर्मूला को अलग से इस्तेमाल करने के लिए आगे ले जाने वाले हैं। आप त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने वाले फॉर्मूले में आधार की लम्बाई और चौड़ाई 1/2 को से गुणा करके त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने वाले फॉर्मूले का उपयोग करके आधार का क्षेत्रफल पता कर सकते हैं।
2. आधार की सतह (base face) का क्षेत्रफल पता करेंः
त्रिकोणीय (Triangular) प्रिज्म के आयतन की गणना के लिए, आपको पहले त्रिकोणीय आधार (triangular base) का क्षेत्रफल पता करना होगा। प्रिज्म के आधार के क्षेत्रफल को पता करने के लिए इसकी ऊँचाई को त्रिकोण के आधार के 1/2 गुने से गुणा करें।
उदाहरणः यदि त्रिकोणीय आधार की ऊंचाई 5 सेमी है और त्रिकोणीय प्रिज्म का आधार 4 सेमी है, तो आधार का क्षेत्रफल 1/2 x 5 सेमी x 4 सेमी है, जो 10 सेमी है।
3. ऊँचाई पता करेंः
मान लीजिए कि इस त्रिकोणीय प्रिज्म की ऊँचाई 7 सेमी है।
4. त्रिकोणीय आधार के क्षेत्रफल (area of the base times) को ऊँचाई से गुणा करेंः
आपके आधार और ऊँचाई को गुणा करने के बाद, आपको त्रिकोणीय प्रिज्म का आयतन मिल जाएगा।
5. अपने उत्तर को घन इकाई (cubic units) में लिखेंः
जब आप आयतन निकाल रहे हैं तो आपको हमेशा घन इकाई (cubic units) का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि आप तीन डायमेंशनल आकृतियों पर काम कर रहे हैं। आखिरी उत्तर 70 सेमी है।
6. एक घन (cube) के आयतन को निकालने का फॉर्मूला लिखेंः
फॉर्मूला है। एक घन ऐसा प्रिज्म होता है जिसकी तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं।
7. घन की एक भुजा की लम्बाई पता करेंः
सभी भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए फर्क नहीं पड़ता है कि आप कौन सी भुजा लेते हैं।
उदाहरणः लम्बाई = 3 सेमी।
8. इसका घन करें (Cube it):
एक नम्बर का घन करने के लिए, इसे ख़ुद से दो बार गुणा कर दें। उदाहरण के लिए "a" का घन "a x a x a," है। चूँकि एक घन की सभी भुजाओं की लंबाई बराबर होती हैं, तो आपको आधार का क्षेत्रफल नहीं पता करना है और इसे ऊँचाई और फिर इसे लम्बाई से गुणा नहीं करना है। घन की किसी भी दो भुजाओं को गुणा करने पर आपको आधार का क्षेत्रफल मिलेगा, और कोई भी तीसरी भुजा ऊँचाई बन सकती है। आप फिर भी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई के समान होने पर उनको गुणा करने की सोच सकते हैं।
9. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः
अपने आखिरी उत्तर में घन इकाई लिखना न भूलें। आखिरी उत्तर 27 सेमी है।
10. आयताकार (Rectangular) प्रिज्म के आयतन को पता करने का फॉर्मूला लिखेंः
फॉर्मूला है। एक आयताकार प्रिज्म में आयताकार आधार होता है।
11. लम्बाई पता करेंः
लम्बाई आयताकार प्रिज्म के आयत की ऊपरी या निचली सपाट सतह की सबसे लंबी भुजा होती है।
12. चौड़ाई पता करेंः
आयताकार प्रिज्म की चौड़ाई आयत की ऊपरी या निचली सपाट सतह की सबसे छोटी भुजा होती है।
13. ऊँचाई पता करेंः
आयताकार प्रिज्म का ऊपर जाने वाला हिस्सा ऊँचाई होता है। आप आयताकार प्रिज्म की ऊँचाई की कल्पना उस हिस्से के रूप में कर सकते हैं जो समतल आयत (flat rectangle) को फैलाता है और इसे तीन डायमेंशनल बनाता है।
14. लम्बाई, चौड़ाई, और ऊँचाई को गुणा करेंः
एक जैसा रिजल्ट पाने के लिए आप इन्हें किसी भी ऑर्डर में गुणा कर सकते हैं। इस तरीके को इस्तेमाल करके, आपको आयताकार आधार का क्षेत्रफल ( 10 x 8) मिल गया है और फिर इसे इसकी ऊँचाई 5 से गुणा करना है। लेकिन इस प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, आप भुजाओं को किसी भी ऑर्डर में गुणा कर सकते हैं।
15. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः
आखिरी उत्तर 400 सेमी है।
16. विषम चतुर्भुजीय प्रिज्म के आयतन निकलने के लिए फॉर्मूला लिखेंः
फॉर्मूलाः है। आपको आगे बढ़ने से पहले इस फॉर्मूले के पहले हिस्से को इस्तेमाल करके प्रिज्म के विषम चतुर्भुजीय आधार का क्षेत्रफल पता करना है।
17. विषम चतुर्भुजीय आधार का क्षेत्रफल पता करेंः
ऐसा करने के लिए आपको सिर्फ दो आधारों और विषम चतुर्भुजीय आधार की ऊँचाई को फॉर्मूले में रखना है।
उदाहरणः 1/2 x (6 + 8) x 10 = 1/2 x 14 सेमी x 10 सेमी = 70 सेमी।
18. समलम्बाकार प्रिज्म (trapezoidal prism) की ऊँचाई पता करेंः
मान लीजिए कि समलम्बाकार प्रिज्म की ऊंचाई 12 सेमी है।
19. आधार की सतह के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करेंः
समलम्बाकार प्रिज्म (trapezoidal prism) के आयतन की गणना करने के लिए, सिर्फ आधार की सतह के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करें।
70 सेमी x 12 सेमी = 840 सेमी।
20. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः
आखिरी उत्तर 840 सेमी है।
21. एक रेगुलर पंचकोणीय (Pentagonal) प्रिज्म के आयतन को पता करने के लिए फॉर्मूला लिखेंः
फॉर्मूला है। आप फॉर्मूले के पहले हिस्से का उपयोग पंचकोणीय आधार सतह का क्षेत्रफल पता करने के लिए कर सकते हैं। आप इसे पाँच त्रिभुजों से बने रेगुलर बहुभुज का क्षेत्रफल पता करने जैसा समझ सकते हैं। भुजा एक त्रिभुज की चौड़ाई और अंतःत्रिज्या किसी एक त्रिभुज की ऊँचाई है। आप 1/2 से गुणा करेंगे क्योंकि यह एक त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने और फिर उसे 5 से गुणा करना पंचभुज बनाने का हिस्सा है क्योंकि 5 त्रिभुज पंचकोण बनाते हैं।
यदि अंतःत्रिज्या नहीं दी गयी है तो इसका पता करने के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए, यहाँ देखेँ।
22. पंचकोणीय आधार की सतह (pentagonal base face) का क्षेत्रफल पता करनाः
मान लीजिए कि एक भुजा की लम्बाई 6 सेमी है और अंतःत्रिज्या 7 सेमी है। इन सभी नंबरों को फॉर्मूले में रखेंः
23. ऊँचाई पता करेंः
आकृति की ऊँचाई 10 सेमी है।
24. पंचकोणीय आधार के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करेंः
रेगुलर पंचकोणीय प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, पंचकोणीय आधार के क्षेत्रफल, 105 सेमी को, ऊंचाई 10 सेमी से गुणा करें।
25. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः
आखिरी उत्तर 1050 सेमी है।
| प्रिज्म एक ठोस ज्यामितीय आकृति है जिसमें दो समान किनारे और सभी सतहें सपाट होती हैं। प्रिज्म का नाम उसके आधार की शेप के अनुसार रखा गया है, इसलिए त्रिकोणीय आधार वाले प्रिज्म को "त्रिकोणीय प्रिज्म" कहा जाता है। प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, आपको बस उसके आधार के क्षेत्रफल की गणना करनी होगी और उसकी ऊँचाई से गुणा करना होगा - आधार के क्षेत्रफल की गणना करना मुश्किल हिस्सा हो सकता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के प्रिज्मों के आयतन की गणना कैसे की जाती है। आयतन और क्षमता समान हैं, लेकिन यहां प्रिज्म के आयतन की गणना कैसे की जाती है। एक. त्रिकोणीय प्रिज्म के आयतन को निकालने का फॉर्मूला लिखेंः फॉर्मुला है। हालाँकि, हम इस फॉर्मूला को अलग से इस्तेमाल करने के लिए आगे ले जाने वाले हैं। आप त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने वाले फॉर्मूले में आधार की लम्बाई और चौड़ाई एक/दो को से गुणा करके त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने वाले फॉर्मूले का उपयोग करके आधार का क्षेत्रफल पता कर सकते हैं। दो. आधार की सतह का क्षेत्रफल पता करेंः त्रिकोणीय प्रिज्म के आयतन की गणना के लिए, आपको पहले त्रिकोणीय आधार का क्षेत्रफल पता करना होगा। प्रिज्म के आधार के क्षेत्रफल को पता करने के लिए इसकी ऊँचाई को त्रिकोण के आधार के एक/दो गुने से गुणा करें। उदाहरणः यदि त्रिकोणीय आधार की ऊंचाई पाँच सेमी है और त्रिकोणीय प्रिज्म का आधार चार सेमी है, तो आधार का क्षेत्रफल एक/दो x पाँच सेमी x चार सेमी है, जो दस सेमी है। तीन. ऊँचाई पता करेंः मान लीजिए कि इस त्रिकोणीय प्रिज्म की ऊँचाई सात सेमी है। चार. त्रिकोणीय आधार के क्षेत्रफल को ऊँचाई से गुणा करेंः आपके आधार और ऊँचाई को गुणा करने के बाद, आपको त्रिकोणीय प्रिज्म का आयतन मिल जाएगा। पाँच. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः जब आप आयतन निकाल रहे हैं तो आपको हमेशा घन इकाई का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि आप तीन डायमेंशनल आकृतियों पर काम कर रहे हैं। आखिरी उत्तर सत्तर सेमी है। छः. एक घन के आयतन को निकालने का फॉर्मूला लिखेंः फॉर्मूला है। एक घन ऐसा प्रिज्म होता है जिसकी तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं। सात. घन की एक भुजा की लम्बाई पता करेंः सभी भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए फर्क नहीं पड़ता है कि आप कौन सी भुजा लेते हैं। उदाहरणः लम्बाई = तीन सेमी। आठ. इसका घन करें : एक नम्बर का घन करने के लिए, इसे ख़ुद से दो बार गुणा कर दें। उदाहरण के लिए "a" का घन "a x a x a," है। चूँकि एक घन की सभी भुजाओं की लंबाई बराबर होती हैं, तो आपको आधार का क्षेत्रफल नहीं पता करना है और इसे ऊँचाई और फिर इसे लम्बाई से गुणा नहीं करना है। घन की किसी भी दो भुजाओं को गुणा करने पर आपको आधार का क्षेत्रफल मिलेगा, और कोई भी तीसरी भुजा ऊँचाई बन सकती है। आप फिर भी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई के समान होने पर उनको गुणा करने की सोच सकते हैं। नौ. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः अपने आखिरी उत्तर में घन इकाई लिखना न भूलें। आखिरी उत्तर सत्ताईस सेमी है। दस. आयताकार प्रिज्म के आयतन को पता करने का फॉर्मूला लिखेंः फॉर्मूला है। एक आयताकार प्रिज्म में आयताकार आधार होता है। ग्यारह. लम्बाई पता करेंः लम्बाई आयताकार प्रिज्म के आयत की ऊपरी या निचली सपाट सतह की सबसे लंबी भुजा होती है। बारह. चौड़ाई पता करेंः आयताकार प्रिज्म की चौड़ाई आयत की ऊपरी या निचली सपाट सतह की सबसे छोटी भुजा होती है। तेरह. ऊँचाई पता करेंः आयताकार प्रिज्म का ऊपर जाने वाला हिस्सा ऊँचाई होता है। आप आयताकार प्रिज्म की ऊँचाई की कल्पना उस हिस्से के रूप में कर सकते हैं जो समतल आयत को फैलाता है और इसे तीन डायमेंशनल बनाता है। चौदह. लम्बाई, चौड़ाई, और ऊँचाई को गुणा करेंः एक जैसा रिजल्ट पाने के लिए आप इन्हें किसी भी ऑर्डर में गुणा कर सकते हैं। इस तरीके को इस्तेमाल करके, आपको आयताकार आधार का क्षेत्रफल मिल गया है और फिर इसे इसकी ऊँचाई पाँच से गुणा करना है। लेकिन इस प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, आप भुजाओं को किसी भी ऑर्डर में गुणा कर सकते हैं। पंद्रह. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः आखिरी उत्तर चार सौ सेमी है। सोलह. विषम चतुर्भुजीय प्रिज्म के आयतन निकलने के लिए फॉर्मूला लिखेंः फॉर्मूलाः है। आपको आगे बढ़ने से पहले इस फॉर्मूले के पहले हिस्से को इस्तेमाल करके प्रिज्म के विषम चतुर्भुजीय आधार का क्षेत्रफल पता करना है। सत्रह. विषम चतुर्भुजीय आधार का क्षेत्रफल पता करेंः ऐसा करने के लिए आपको सिर्फ दो आधारों और विषम चतुर्भुजीय आधार की ऊँचाई को फॉर्मूले में रखना है। उदाहरणः एक/दो x x दस = एक/दो x चौदह सेमी x दस सेमी = सत्तर सेमी। अट्ठारह. समलम्बाकार प्रिज्म की ऊँचाई पता करेंः मान लीजिए कि समलम्बाकार प्रिज्म की ऊंचाई बारह सेमी है। उन्नीस. आधार की सतह के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करेंः समलम्बाकार प्रिज्म के आयतन की गणना करने के लिए, सिर्फ आधार की सतह के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करें। सत्तर सेमी x बारह सेमी = आठ सौ चालीस सेमी। बीस. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः आखिरी उत्तर आठ सौ चालीस सेमी है। इक्कीस. एक रेगुलर पंचकोणीय प्रिज्म के आयतन को पता करने के लिए फॉर्मूला लिखेंः फॉर्मूला है। आप फॉर्मूले के पहले हिस्से का उपयोग पंचकोणीय आधार सतह का क्षेत्रफल पता करने के लिए कर सकते हैं। आप इसे पाँच त्रिभुजों से बने रेगुलर बहुभुज का क्षेत्रफल पता करने जैसा समझ सकते हैं। भुजा एक त्रिभुज की चौड़ाई और अंतःत्रिज्या किसी एक त्रिभुज की ऊँचाई है। आप एक/दो से गुणा करेंगे क्योंकि यह एक त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालने और फिर उसे पाँच से गुणा करना पंचभुज बनाने का हिस्सा है क्योंकि पाँच त्रिभुज पंचकोण बनाते हैं। यदि अंतःत्रिज्या नहीं दी गयी है तो इसका पता करने के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए, यहाँ देखेँ। बाईस. पंचकोणीय आधार की सतह का क्षेत्रफल पता करनाः मान लीजिए कि एक भुजा की लम्बाई छः सेमी है और अंतःत्रिज्या सात सेमी है। इन सभी नंबरों को फॉर्मूले में रखेंः तेईस. ऊँचाई पता करेंः आकृति की ऊँचाई दस सेमी है। चौबीस. पंचकोणीय आधार के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करेंः रेगुलर पंचकोणीय प्रिज्म का आयतन पता करने के लिए, पंचकोणीय आधार के क्षेत्रफल, एक सौ पाँच सेमी को, ऊंचाई दस सेमी से गुणा करें। पच्चीस. अपने उत्तर को घन इकाई में लिखेंः आखिरी उत्तर एक हज़ार पचास सेमी है। |
भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अक्सर फैंस के साथ अपनी स्टाइलिश तस्वीरें साझा करती नजर आती हैं. साथ ही वह अपने काम से जुड़ी जानकारियां भी फैंस के साथ शेयर करती हैं. हाल ही में उनकी स्काइब्लू लहंगे में तस्वीर वायरल हो रही है.
इस तस्वीर के साथ रानी चटर्जी ने कैप्शन देते हुए लिखा- चलो कयामत ढहाई जाए. जलने वालों को और जलाया जाए. इसके साथ रानी चटर्जी ने दो इमोजी भी भेजी है.
बता दें कि रानी चटर्जी भोजपुरी की स्टार एक्टर्स में से एक हैं. फैंस उनके किलर पोज के कायल हैं. रानी चटर्जी अपनी हिट फिल्मों के लिए जानी जाती हैं.
बता दें कि रानी चटर्जी अपनी फिटनेस का खासा ख्याल रखती हैं. वे अक्सर ही अपने वर्कआउट के लिए जानी जाती हैं. अपनी वीडियोज को सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं.
वर्कफ्रंट की बात करें तो रानी के पास भी 'भाभी मां', 'बाबुल की गलियां', 'छोटकी ठकुरैन', 'कसम दुर्गा की', 'तेरी मेहरबानियां' और 'हेराफेरी' जैसी कई फिल्में हैं.
| भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अक्सर फैंस के साथ अपनी स्टाइलिश तस्वीरें साझा करती नजर आती हैं. साथ ही वह अपने काम से जुड़ी जानकारियां भी फैंस के साथ शेयर करती हैं. हाल ही में उनकी स्काइब्लू लहंगे में तस्वीर वायरल हो रही है. इस तस्वीर के साथ रानी चटर्जी ने कैप्शन देते हुए लिखा- चलो कयामत ढहाई जाए. जलने वालों को और जलाया जाए. इसके साथ रानी चटर्जी ने दो इमोजी भी भेजी है. बता दें कि रानी चटर्जी भोजपुरी की स्टार एक्टर्स में से एक हैं. फैंस उनके किलर पोज के कायल हैं. रानी चटर्जी अपनी हिट फिल्मों के लिए जानी जाती हैं. बता दें कि रानी चटर्जी अपनी फिटनेस का खासा ख्याल रखती हैं. वे अक्सर ही अपने वर्कआउट के लिए जानी जाती हैं. अपनी वीडियोज को सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. वर्कफ्रंट की बात करें तो रानी के पास भी 'भाभी मां', 'बाबुल की गलियां', 'छोटकी ठकुरैन', 'कसम दुर्गा की', 'तेरी मेहरबानियां' और 'हेराफेरी' जैसी कई फिल्में हैं. |
मारुति कार वालों के लिए बड़ी खबर है। इस कंपनी की 1. 81 लाख कारों में खराबी मिली है। जिसके तहत कंपनी इन्हें रिकॉल किया है। इन गाड़ियों में सेफ्टी-संबंधित खामी मिलने की आशंका है, जिसकी कंपनी जांच करेगी। कंपनी खुद ही ऐसे ग्राहकों को संपर्क करके मारुति सुजुकी वर्कशॉप पर बुलाएगी, जिनके पास प्रभावित मॉडल्स मौजूद हैं। इन मॉडल्स को 2018 से 2020 के बीच बनाया गया था।
एक प्रेस रिलीज में मारुति सुजुकी ने बताया कि जिन गाड़ियों को वापस बुलाया गया है, उनमें पेट्रोल इंजन वाली Ciaz, S-Cross, Vitara Brezza, Ertiga और XL6 शामिल हैं। उन्हीं यूनिट्स में खामी पाई गई है, जो 4 मई 2018 से 27 अक्टूबर 2020 के के बीच मैन्युफैक्चर की गई हैं। मारुति सुजुकी को शक है कि इस अवधि में बनी 181,754 कार में मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट हो सकते हैं। कंपनी इन गाड़ियों की मोटर जेनरेटर यूनिट की जांच करेगी और खामी पाई जाने पर मुफ्त में बदल देगी।
आप खुद भी यह जान सकते हैं कि आपकी गाड़ी को रिकॉल किया गया है या नहीं। इसके लिए अपने मॉडल के हिसाब से मारुति सुजुकी या नेक्सा की वेबसाइट पर लॉगिन करें। यहां आपको अपनी गाड़ी का व्हीकल चेसी नंबर (MA3, इसके बाद 14 अंकों का न्यूमेरिक नंबर) दर्ज करें। इससे पता लग जाएगा कि आपकी गाड़ी की भी जांच की जानी है या नहीं।
प्रभावित मॉडल्स के खराब हुए पार्ट को बदलने की प्रक्रिया नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगी। तब तक, मारुति सुजुकी ने ऊपर बताए गई गाड़ियों को मालिकों को सलाह दी है कि वे अपनी कार पानी से भरे इलाकों में न चलाए। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर सीधे पानी के छिड़काव से भी बचने के लिए कहा गया है।
| मारुति कार वालों के लिए बड़ी खबर है। इस कंपनी की एक. इक्यासी लाख कारों में खराबी मिली है। जिसके तहत कंपनी इन्हें रिकॉल किया है। इन गाड़ियों में सेफ्टी-संबंधित खामी मिलने की आशंका है, जिसकी कंपनी जांच करेगी। कंपनी खुद ही ऐसे ग्राहकों को संपर्क करके मारुति सुजुकी वर्कशॉप पर बुलाएगी, जिनके पास प्रभावित मॉडल्स मौजूद हैं। इन मॉडल्स को दो हज़ार अट्ठारह से दो हज़ार बीस के बीच बनाया गया था। एक प्रेस रिलीज में मारुति सुजुकी ने बताया कि जिन गाड़ियों को वापस बुलाया गया है, उनमें पेट्रोल इंजन वाली Ciaz, S-Cross, Vitara Brezza, Ertiga और XLछः शामिल हैं। उन्हीं यूनिट्स में खामी पाई गई है, जो चार मई दो हज़ार अट्ठारह से सत्ताईस अक्टूबर दो हज़ार बीस के के बीच मैन्युफैक्चर की गई हैं। मारुति सुजुकी को शक है कि इस अवधि में बनी एक सौ इक्यासी,सात सौ चौवन कार में मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट हो सकते हैं। कंपनी इन गाड़ियों की मोटर जेनरेटर यूनिट की जांच करेगी और खामी पाई जाने पर मुफ्त में बदल देगी। आप खुद भी यह जान सकते हैं कि आपकी गाड़ी को रिकॉल किया गया है या नहीं। इसके लिए अपने मॉडल के हिसाब से मारुति सुजुकी या नेक्सा की वेबसाइट पर लॉगिन करें। यहां आपको अपनी गाड़ी का व्हीकल चेसी नंबर दर्ज करें। इससे पता लग जाएगा कि आपकी गाड़ी की भी जांच की जानी है या नहीं। प्रभावित मॉडल्स के खराब हुए पार्ट को बदलने की प्रक्रिया नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगी। तब तक, मारुति सुजुकी ने ऊपर बताए गई गाड़ियों को मालिकों को सलाह दी है कि वे अपनी कार पानी से भरे इलाकों में न चलाए। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर सीधे पानी के छिड़काव से भी बचने के लिए कहा गया है। |
मलाइका अरोड़ा अपनी फिटनेस के लिए काफी जानी जाती हैं। एक्ट्रेस 49 साल की हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और टोन्ड बॉडी हर किसी को हैरान कर देती है।
वेट एक्सरसाइज के अलावा मलाइका योगा, मेडिटेशन आदि भी फॉलो करती हैं। मलाइका ने अब अपने इंस्टाग्राम पर फिर से वर्कआउट चैलेंज वीडियो शेयर किया है।
इस वीडियो में मलाइका अरोड़ा एक छोटे से डंबल के साथ फुल बॉडी टोन करने की एक एक्सरसाइज करती दिख रही हैं।
इस फिटनेस चैलेंज को मलाइका अरोड़ा बखूबी करती दिख रही हैं। उनकी फिटनेस वीडियो में साफ दिख रही है।
वैसे मलाइका के इस फिटनेस चैंलेज को कौन-कौन पूरा कर पाएगा ये देखना होगा। क्या उनकी बेस्ट फ्रेंड करीना कपूर टक्कर देंगी? ये देखना होगा।
मलाइका फिटनेस फ्रीक हैं और खुद को फिट रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। यही नहीं, वो अपनी डाइट और डेली रुटीन को भी कड़ाई से फॉलो करती हैं।
मलाइका वीगन हैं, वह इंटरमिटेंट फास्टिंग भी करती हैं। मलाइका कहती हैं, 'मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग की फैन हूं। मुझे लगता है कि डेली योगा और इंटरमिटेंट फास्टिंग के कॉम्बिनेशन मुझे पूरी तरह से बदल दिया है। '
मलाइका अरोड़ा अपनी बॉडी को टोन्ड रखने के लिए एक्सरसाइज के अलावा वॉकिेंग, योग, रनिंग, स्वीमिंग आदि करती हैं। उनका कहना है कि वे सब कुछ खाती है लेकिन सीमित मात्रा में।
योगा मलाइका के डेली रूटीन का हिस्सा है, वह रोजाना योगा करती हैं। यहां तक एक्ट्रेस अपना खुद का डीवा स्टूडियो नाम से योगा स्टूडियो भी चलाती हैं।
Thanks For Reading!
| मलाइका अरोड़ा अपनी फिटनेस के लिए काफी जानी जाती हैं। एक्ट्रेस उनचास साल की हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और टोन्ड बॉडी हर किसी को हैरान कर देती है। वेट एक्सरसाइज के अलावा मलाइका योगा, मेडिटेशन आदि भी फॉलो करती हैं। मलाइका ने अब अपने इंस्टाग्राम पर फिर से वर्कआउट चैलेंज वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में मलाइका अरोड़ा एक छोटे से डंबल के साथ फुल बॉडी टोन करने की एक एक्सरसाइज करती दिख रही हैं। इस फिटनेस चैलेंज को मलाइका अरोड़ा बखूबी करती दिख रही हैं। उनकी फिटनेस वीडियो में साफ दिख रही है। वैसे मलाइका के इस फिटनेस चैंलेज को कौन-कौन पूरा कर पाएगा ये देखना होगा। क्या उनकी बेस्ट फ्रेंड करीना कपूर टक्कर देंगी? ये देखना होगा। मलाइका फिटनेस फ्रीक हैं और खुद को फिट रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। यही नहीं, वो अपनी डाइट और डेली रुटीन को भी कड़ाई से फॉलो करती हैं। मलाइका वीगन हैं, वह इंटरमिटेंट फास्टिंग भी करती हैं। मलाइका कहती हैं, 'मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग की फैन हूं। मुझे लगता है कि डेली योगा और इंटरमिटेंट फास्टिंग के कॉम्बिनेशन मुझे पूरी तरह से बदल दिया है। ' मलाइका अरोड़ा अपनी बॉडी को टोन्ड रखने के लिए एक्सरसाइज के अलावा वॉकिेंग, योग, रनिंग, स्वीमिंग आदि करती हैं। उनका कहना है कि वे सब कुछ खाती है लेकिन सीमित मात्रा में। योगा मलाइका के डेली रूटीन का हिस्सा है, वह रोजाना योगा करती हैं। यहां तक एक्ट्रेस अपना खुद का डीवा स्टूडियो नाम से योगा स्टूडियो भी चलाती हैं। Thanks For Reading! |
श्री एपीवीएस प्रसाद, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (सेमिलाक) के प्रमुख हैं तथा रक्षा विभाग आरएंडडी, रक्षा मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी के रूप में कार्यरत हैं। वह उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के छात्र रहे हैं और वर्ष 1989 में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने आगे की पढाई की और वर्ष 1997 में आईआईटी खड़गपुर से दूरसंचार में एमटेक की डिग्री प्राप्त किया।
श्री एपीवीएस प्रसाद 1990 में एक वैज्ञानिक के रूप में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (वैमानिकी विकास संस्थान) (एडीई), डीआरडीओ में शामिल हुए और इनका मानव रहित विमानों के लिए एवियोनिक्स सिस्टम्स के रिसर्च और विकास में लगभग 3 दशकों का अनुभव है। इन्होंने रूस्तम - II यूएवी के प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है और आर -II के सफल उड़ान का परीक्षण इनके सक्षम मार्गदर्शन के तहत किया गया है। इनके रुचि के क्षेत्र डेटा लिंक्स, एवियोनिक्स, पेलोड्स, सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर), अल्टीमीटर्स और डॉपलर रडार्स के डिजाइन और विकास हैं।
वह 31 मई 2019 को चीफ एग्जीक्यूटिव (एयरवर्थनेस), सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (सेमिलाक) के रूप में पदभार संभाला। सीई (ऐ), सेमिलाक के रूप में, वह राष्ट्रीय महत्व के सभी विकास कार्यक्रमों यानी मिलिट्री एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, यूएवी, एयरबोर्न स्टोर्स, हथियारों का एकीकरण, अपग्रेड कार्यक्रम, स्वदेशीकरण आदि के एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन की जानकारी दे रहे हैं। पूरे भारत में फैले 18 क्षेत्रीय केंद्रों (आरसीएमए) के प्रमुख के रूप में वह सभी मिलिट्री एयरबोर्न व्हीकल की उड़ान सुरक्षा/राष्ट्र के भंडार सुनिश्चित कर रहे हैं।
श्री एपीवीएस प्रसाद को यूएवी के विकास में उनके काम के लिए कई पुरस्कार दिए गये हैं। उन्हें वर्ष 2016 के लिए डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड, वर्ष 2012 और 2017 के लिए टेक्नोलॉजी ग्रुप अवार्ड, 2009 और 2010 के लिए सीएसीई टीम अवार्ड, 2004 और 2005 के लिए डीआरडीओ टीम अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
वह विभिन्न प्रतिष्ठित व्यावसायिक निकायों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट, एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया, कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया और एएससीआई के सदस्य हैं। वह एआरडीबी सिस्टम इंजीनियरिंग पैनल के लिए पैनल कोऑर्डिनेटर भी हैं।
| श्री एपीवीएस प्रसाद, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन के प्रमुख हैं तथा रक्षा विभाग आरएंडडी, रक्षा मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी के रूप में कार्यरत हैं। वह उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के छात्र रहे हैं और वर्ष एक हज़ार नौ सौ नवासी में इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने आगे की पढाई की और वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आईआईटी खड़गपुर से दूरसंचार में एमटेक की डिग्री प्राप्त किया। श्री एपीवीएस प्रसाद एक हज़ार नौ सौ नब्बे में एक वैज्ञानिक के रूप में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट , डीआरडीओ में शामिल हुए और इनका मानव रहित विमानों के लिए एवियोनिक्स सिस्टम्स के रिसर्च और विकास में लगभग तीन दशकों का अनुभव है। इन्होंने रूस्तम - II यूएवी के प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है और आर -II के सफल उड़ान का परीक्षण इनके सक्षम मार्गदर्शन के तहत किया गया है। इनके रुचि के क्षेत्र डेटा लिंक्स, एवियोनिक्स, पेलोड्स, सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो , अल्टीमीटर्स और डॉपलर रडार्स के डिजाइन और विकास हैं। वह इकतीस मई दो हज़ार उन्नीस को चीफ एग्जीक्यूटिव , सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन के रूप में पदभार संभाला। सीई , सेमिलाक के रूप में, वह राष्ट्रीय महत्व के सभी विकास कार्यक्रमों यानी मिलिट्री एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, यूएवी, एयरबोर्न स्टोर्स, हथियारों का एकीकरण, अपग्रेड कार्यक्रम, स्वदेशीकरण आदि के एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन की जानकारी दे रहे हैं। पूरे भारत में फैले अट्ठारह क्षेत्रीय केंद्रों के प्रमुख के रूप में वह सभी मिलिट्री एयरबोर्न व्हीकल की उड़ान सुरक्षा/राष्ट्र के भंडार सुनिश्चित कर रहे हैं। श्री एपीवीएस प्रसाद को यूएवी के विकास में उनके काम के लिए कई पुरस्कार दिए गये हैं। उन्हें वर्ष दो हज़ार सोलह के लिए डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड, वर्ष दो हज़ार बारह और दो हज़ार सत्रह के लिए टेक्नोलॉजी ग्रुप अवार्ड, दो हज़ार नौ और दो हज़ार दस के लिए सीएसीई टीम अवार्ड, दो हज़ार चार और दो हज़ार पाँच के लिए डीआरडीओ टीम अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वह विभिन्न प्रतिष्ठित व्यावसायिक निकायों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट, एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया, कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया और एएससीआई के सदस्य हैं। वह एआरडीबी सिस्टम इंजीनियरिंग पैनल के लिए पैनल कोऑर्डिनेटर भी हैं। |
हॉलीवुड के मशहूर एक्टर जॉनी डेप लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित होने जा रहे हैं। उन्हें ये पुरस्कार 69 वें सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट में मिलेगा। आपको बता दें कि जॉनी डेप ने अब तक कई ब्लॉकबस्टर फिल्में हॉलीवुड सिनेमा को दी हैं। पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन फिल्म से मशहूर हुए इस अभिनेता को आज हर कोई जानता है। द टूरिस्ट, ट्रांसेंडेंस जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में इस अभिनेता ने बेहतरीन भूमिका निभाई। इस कारण आज देश दुनिया में इनके करोड़ों फैंस हैं। जॉनी डेप को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जाता है। इस अभिनेता के इंस्टाग्राम पर 10 मिलियन से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। जॉनी डेप विश्व के काफी लोकप्रिय एक्टर हैं। हालांकि अपनी पूर्व पत्नी संग विवादों के कारण वे पिछले कई दिनों से सुर्खियों में हैं। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस विवाद के चलते उन्हें कई बड़ी फिल्मों से बाहर निकाल दिया गया है।
अपनी एक्स वाइफ एम्बर हर्ड के साथ चल रहे विवादों के कारण उन्हें कई बड़ी फ्रेंचाइजियों की फिल्मों से हाथ धोना पड़ा है। वार्नर ब्रोज और फैंटास्टिक बीस्ट्स जैसी बड़ी फिल्मों से भी उन्हें निकाल दिया गया है।
वहीं अब स्पेन के सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट ने ये अनाउंस किया है कि वह हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने जा रहा है। ये काफी खास अवार्ड है, जो सिनेमा जगत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है।
स्पेन के सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट ने इस अवार्ड के लिए सोमवार को उनके नाम का अनावरण किया। इस दौरान संस्था ने बताया कि जॉनी आज के आधुनिक सिनेमा में काफी टैलेंटेड एक्टर हैं। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।
58 साल के जॉनी डेप को यह अवार्ड इसी साल 22 सितंबर को मिलने जा रहा है। इस अवार्ड को उन्हें सेन सेबेस्टियन में ही दिया जाएगा। 69 वां सेन सेबेस्टियन फिल्म फेस्टिवल 17 सितंबर से 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान कई और कलाकारों को भी विभिन्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
| हॉलीवुड के मशहूर एक्टर जॉनी डेप लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित होने जा रहे हैं। उन्हें ये पुरस्कार उनहत्तर वें सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट में मिलेगा। आपको बता दें कि जॉनी डेप ने अब तक कई ब्लॉकबस्टर फिल्में हॉलीवुड सिनेमा को दी हैं। पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन फिल्म से मशहूर हुए इस अभिनेता को आज हर कोई जानता है। द टूरिस्ट, ट्रांसेंडेंस जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में इस अभिनेता ने बेहतरीन भूमिका निभाई। इस कारण आज देश दुनिया में इनके करोड़ों फैंस हैं। जॉनी डेप को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जाता है। इस अभिनेता के इंस्टाग्राम पर दस मिलियन से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। जॉनी डेप विश्व के काफी लोकप्रिय एक्टर हैं। हालांकि अपनी पूर्व पत्नी संग विवादों के कारण वे पिछले कई दिनों से सुर्खियों में हैं। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस विवाद के चलते उन्हें कई बड़ी फिल्मों से बाहर निकाल दिया गया है। अपनी एक्स वाइफ एम्बर हर्ड के साथ चल रहे विवादों के कारण उन्हें कई बड़ी फ्रेंचाइजियों की फिल्मों से हाथ धोना पड़ा है। वार्नर ब्रोज और फैंटास्टिक बीस्ट्स जैसी बड़ी फिल्मों से भी उन्हें निकाल दिया गया है। वहीं अब स्पेन के सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट ने ये अनाउंस किया है कि वह हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने जा रहा है। ये काफी खास अवार्ड है, जो सिनेमा जगत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है। स्पेन के सेन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट ने इस अवार्ड के लिए सोमवार को उनके नाम का अनावरण किया। इस दौरान संस्था ने बताया कि जॉनी आज के आधुनिक सिनेमा में काफी टैलेंटेड एक्टर हैं। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। अट्ठावन साल के जॉनी डेप को यह अवार्ड इसी साल बाईस सितंबर को मिलने जा रहा है। इस अवार्ड को उन्हें सेन सेबेस्टियन में ही दिया जाएगा। उनहत्तर वां सेन सेबेस्टियन फिल्म फेस्टिवल सत्रह सितंबर से पच्चीस सितंबर तक चलेगा। इस दौरान कई और कलाकारों को भी विभिन्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा। |
आज के एपिसोड में अभिमन्यु ने अभीर को रोते हुए देखता है. अभिमन्यु, अभीर से चिंता न करने के लिए कहता है क्योंकि वह स्वयं उसकी सर्जरी करेगा. वह अभीर से अक्षरा और अभिनव को बताने के लिए कहता है कि वह घर जा सकता है क्योंकि अगले दो हफ्तों तक कोई सर्जरी नहीं होगी. अभीर, अभिमन्यु से पूछता है कि क्या वह सच कह रहा है.
रूही, आरोही की डेट खराब करने के लिए अभिमन्यु पर गुस्सा होती है. आरोही, रूही को समझाती है कि अभिमन्यु एक चिकित्सक है और वह व्यस्त हो सकता है. आरोही कहती है कि यदि वह सर्जरी में व्यस्त हो जाती है तो अभिमन्यु भी उसका इन्तजार करता है. आरोही, रूही को फ्रिज में रखा केक लाने के लिए कहती है. रूही, आरोही से पूछती है कि क्या वह उदास नहीं है.
अभिमन्यु, अभीर की जांच करता है. अभिमन्यु को आरोही के साथ अपनी डेट के बारे में याद आता है और वह भाग जाता है. अभिनव, अभिमन्यु से डिनर करने के लिए कहता है. अभिनव कहता है कि अभिमन्यु रात का खाना खा सकता था. अक्षरा कहती है जानें दो आरोही का जन्मदिन है, यदि अभिमन्यु को उसके साथ बाहर जाना है तो क्या होगा.
मंजरी, अभिमन्यु से अभीर की वजह से देर होने को लेकर भिड़ जाती है. आरोही अपना हैंड लोशन ढूंढती है. अभिमन्यु देर से आने के लिए आरोही से माफी मांगता है. वह उसे रात के खाने के लिए बाहर ले जाने का वादा करता है. गोयनका अभीर के स्वागत की तैयारी करता है.
आरोही और महिमा जुड़वा बच्चों के मुद्दे पर अभिमन्यु से चर्चा करती हैं. अभिमन्यु को अपने जुड़वां बच्चों को खोने की याद आती है और वह बेचैन हो जाता है. अक्षरा को भी पता चलता है कि अभिमन्यु जुड़वां बच्चों के मुद्दे में व्यस्त है. वह बेचैन हो जाती है. अक्षरा, अभिमन्यु अक्षरा को देखता है. दोनों भावुक हो जाते हैं. संदीप, अभिमन्यु को अक्षरा और अभीर की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताते हैं. अक्षरा-अभिनव, अभीर को वापस घर ले जाते हैं. गोयनका अभीर का स्वागत करते हैं.
Precap: सुहासिनी ने मंजरी को एक साथ गणगौर मनाने के लिए कहा. अभिमन्यु जाने के लिए तैयार हो जाता है. मंजरी ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
| आज के एपिसोड में अभिमन्यु ने अभीर को रोते हुए देखता है. अभिमन्यु, अभीर से चिंता न करने के लिए कहता है क्योंकि वह स्वयं उसकी सर्जरी करेगा. वह अभीर से अक्षरा और अभिनव को बताने के लिए कहता है कि वह घर जा सकता है क्योंकि अगले दो हफ्तों तक कोई सर्जरी नहीं होगी. अभीर, अभिमन्यु से पूछता है कि क्या वह सच कह रहा है. रूही, आरोही की डेट खराब करने के लिए अभिमन्यु पर गुस्सा होती है. आरोही, रूही को समझाती है कि अभिमन्यु एक चिकित्सक है और वह व्यस्त हो सकता है. आरोही कहती है कि यदि वह सर्जरी में व्यस्त हो जाती है तो अभिमन्यु भी उसका इन्तजार करता है. आरोही, रूही को फ्रिज में रखा केक लाने के लिए कहती है. रूही, आरोही से पूछती है कि क्या वह उदास नहीं है. अभिमन्यु, अभीर की जांच करता है. अभिमन्यु को आरोही के साथ अपनी डेट के बारे में याद आता है और वह भाग जाता है. अभिनव, अभिमन्यु से डिनर करने के लिए कहता है. अभिनव कहता है कि अभिमन्यु रात का खाना खा सकता था. अक्षरा कहती है जानें दो आरोही का जन्मदिन है, यदि अभिमन्यु को उसके साथ बाहर जाना है तो क्या होगा. मंजरी, अभिमन्यु से अभीर की वजह से देर होने को लेकर भिड़ जाती है. आरोही अपना हैंड लोशन ढूंढती है. अभिमन्यु देर से आने के लिए आरोही से माफी मांगता है. वह उसे रात के खाने के लिए बाहर ले जाने का वादा करता है. गोयनका अभीर के स्वागत की तैयारी करता है. आरोही और महिमा जुड़वा बच्चों के मुद्दे पर अभिमन्यु से चर्चा करती हैं. अभिमन्यु को अपने जुड़वां बच्चों को खोने की याद आती है और वह बेचैन हो जाता है. अक्षरा को भी पता चलता है कि अभिमन्यु जुड़वां बच्चों के मुद्दे में व्यस्त है. वह बेचैन हो जाती है. अक्षरा, अभिमन्यु अक्षरा को देखता है. दोनों भावुक हो जाते हैं. संदीप, अभिमन्यु को अक्षरा और अभीर की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताते हैं. अक्षरा-अभिनव, अभीर को वापस घर ले जाते हैं. गोयनका अभीर का स्वागत करते हैं. Precap: सुहासिनी ने मंजरी को एक साथ गणगौर मनाने के लिए कहा. अभिमन्यु जाने के लिए तैयार हो जाता है. मंजरी ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. |
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ शनिवार (नवंबर 16, 2019) को शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के प्रतिनिधिमंडल की बैठक अगले नोटिस तक के लिए टल गई है। यह मीटिंग शाम 4. 30 बजे होने वाली थी। हालाँकि, इसके टलने की वजह का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
इससे पहले मीटिंग को लेकर एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा था कि किसानों की समस्याएँ और प्रशासन संबंधित मुद्दे को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने वाले थे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को एक स्थाई और स्थिर प्रशासन प्रदान करना राज्यपाल की जिम्मेदारी है। राज्य में प्रशासन पूरी तरह से ठप हो गया है और सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता के कारण राज्य के लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि राज्यपाल के साथ होने वाली बैठक में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं का तीन-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य को एक मजबूत प्रशासन प्रदान करने के तरीकों पर चर्चा करने वाला था, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले एनसीपी ने दावा किया था कि शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगा।
हालाँकि, भाजपा ने भी महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि बीजेपी के पास 119 विधायकों का समर्थन है और राज्य में बीजेपी ही अगली सरकार बनाएगी। वहीं बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस-शिवसेना-एनसीपी के बीच मसौदा भी तैयार हो गया है। सत्ता के समझौते के कथित मसौदे के मुताबिक शिव सेना को मुख्यमंत्री की कुर्सी और 16 मंत्री पद मिलेंगे, वहीं एनसीपी को 14 और कॉन्ग्रेस को 12 विधायकों को मंत्री बनवाने का मौका मिलेगा।
डील पक्की होने के बावजूद इनके बीच पशोपेश जारी है। एक तरफ जहाँ बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि (17 नवंबर) को सरकार बनाने की बात सामने आ रही है वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि सरकार बनने में अभी वक्त लगेगा। इससे साफ झलक रहा है कि अभी भी इनके बीच विचारों की सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में राज्य की स्थिति पर कुछ भी कहना संभव नहीं होगा।
| महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ शनिवार को शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के प्रतिनिधिमंडल की बैठक अगले नोटिस तक के लिए टल गई है। यह मीटिंग शाम चार. तीस बजे होने वाली थी। हालाँकि, इसके टलने की वजह का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। इससे पहले मीटिंग को लेकर एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा था कि किसानों की समस्याएँ और प्रशासन संबंधित मुद्दे को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने वाले थे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को एक स्थाई और स्थिर प्रशासन प्रदान करना राज्यपाल की जिम्मेदारी है। राज्य में प्रशासन पूरी तरह से ठप हो गया है और सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता के कारण राज्य के लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्यपाल के साथ होने वाली बैठक में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं का तीन-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य को एक मजबूत प्रशासन प्रदान करने के तरीकों पर चर्चा करने वाला था, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले एनसीपी ने दावा किया था कि शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक पाँच साल का कार्यकाल पूरा करेगा। हालाँकि, भाजपा ने भी महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा किया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि बीजेपी के पास एक सौ उन्नीस विधायकों का समर्थन है और राज्य में बीजेपी ही अगली सरकार बनाएगी। वहीं बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस-शिवसेना-एनसीपी के बीच मसौदा भी तैयार हो गया है। सत्ता के समझौते के कथित मसौदे के मुताबिक शिव सेना को मुख्यमंत्री की कुर्सी और सोलह मंत्री पद मिलेंगे, वहीं एनसीपी को चौदह और कॉन्ग्रेस को बारह विधायकों को मंत्री बनवाने का मौका मिलेगा। डील पक्की होने के बावजूद इनके बीच पशोपेश जारी है। एक तरफ जहाँ बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि को सरकार बनाने की बात सामने आ रही है वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि सरकार बनने में अभी वक्त लगेगा। इससे साफ झलक रहा है कि अभी भी इनके बीच विचारों की सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में राज्य की स्थिति पर कुछ भी कहना संभव नहीं होगा। |
Uttar Pradesh Corona: पूरे देश की बात करें तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय(Health Ministry) ने शनिवार को जानकारी दी कि, भारत में लगातार दूसरे दिन कोरोना वायरस(Corona Virus) के सक्रिय मामले 7 लाख से कम हैं।
Jamia Milia Islamia Admissions 2020: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Milia Islamia) ने बीटेक और BArch कोर्स के लिए पहली कट ऑफ लिस्ट (first cut off list 2020) जारी कर दी है। जिसे आप यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा कर देख सकते हैं।
Ghaziabad Durga Pooja: इस बार दुर्गा पूजा पांडाल(Durga Pooja Pandal) की थीम भी कोरोना(Corona) से जोड़कर देखने को मिल रही है। कई जगहों पर पांडाल में मां दुर्गा की मास्क लगी प्रतिमा देखने को मिल रही है।
Honda Bike: होंडा मोटर साइकिल (Honda motorcycle) जल्द ही भारत में कम क्षमता की एडवेंचर बाइक (Adventure Bike) लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ज्यादातर कंपनियों के लाइन-अप में पहले से ही कम क्षमता वाली एडवेंचर बाइक्स मौजूद हैं जिनकी कीमत भी काफी कम है।
Devendra Fadnavis tests positive for Coronavirus: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) कोरोनावायरस (Coronavirus) की चपेट में आ गए है।
Health: महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड-19 एंटीबॉडी (Covid-19 Antibody) का अधिक उत्पादन करते हैं। यह बात पुर्तगाली शोधकर्ताओं ने कही है।
Facebook: यूजर्स की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा (Data Protection) को लेकर गहन जांच का सामना कर रहे फेसबुक (Facebook) ने कहा कि वह नियमित तौर पर अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश करना जारी रखेगा, जिससे प्राइवेसी व सुरक्षित उत्पाद बनाने और डेटा को प्रोसेस करने के नए तरीके विकसित होने में मदद हो सके।
Micromax Phone Launch: घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड माइक्रोमैक्स (Micromax) देश में 3 नवंबर को अपने नए 'इन' रेंज के स्मार्टफोन ('In' Series Smartphone) लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी द्वारा सीरीज में दो फोन लॉन्च करने की उम्मीद जताई जा रही है, जो मीडियाटेक हीलियो जी 35 और मीडियाटेक हीलियो जी 85 प्रोसेसर द्वारा संचालित होगा।
Punjab Rape: वित्त मंत्री(Finance Minister) ने कहा कि, विजय सांपला वहां गए थे। बीजेपी(BJP) यह सुनिश्चित करेगी कि समय रहते न्याय हो। इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर हमला बोला था।
| Uttar Pradesh Corona: पूरे देश की बात करें तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि, भारत में लगातार दूसरे दिन कोरोना वायरस के सक्रिय मामले सात लाख से कम हैं। Jamia Milia Islamia Admissions दो हज़ार बीस: जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने बीटेक और BArch कोर्स के लिए पहली कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी है। जिसे आप यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा कर देख सकते हैं। Ghaziabad Durga Pooja: इस बार दुर्गा पूजा पांडाल की थीम भी कोरोना से जोड़कर देखने को मिल रही है। कई जगहों पर पांडाल में मां दुर्गा की मास्क लगी प्रतिमा देखने को मिल रही है। Honda Bike: होंडा मोटर साइकिल जल्द ही भारत में कम क्षमता की एडवेंचर बाइक लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ज्यादातर कंपनियों के लाइन-अप में पहले से ही कम क्षमता वाली एडवेंचर बाइक्स मौजूद हैं जिनकी कीमत भी काफी कम है। Devendra Fadnavis tests positive for Coronavirus: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस कोरोनावायरस की चपेट में आ गए है। Health: महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड-उन्नीस एंटीबॉडी का अधिक उत्पादन करते हैं। यह बात पुर्तगाली शोधकर्ताओं ने कही है। Facebook: यूजर्स की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर गहन जांच का सामना कर रहे फेसबुक ने कहा कि वह नियमित तौर पर अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश करना जारी रखेगा, जिससे प्राइवेसी व सुरक्षित उत्पाद बनाने और डेटा को प्रोसेस करने के नए तरीके विकसित होने में मदद हो सके। Micromax Phone Launch: घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड माइक्रोमैक्स देश में तीन नवंबर को अपने नए 'इन' रेंज के स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी द्वारा सीरीज में दो फोन लॉन्च करने की उम्मीद जताई जा रही है, जो मीडियाटेक हीलियो जी पैंतीस और मीडियाटेक हीलियो जी पचासी प्रोसेसर द्वारा संचालित होगा। Punjab Rape: वित्त मंत्री ने कहा कि, विजय सांपला वहां गए थे। बीजेपी यह सुनिश्चित करेगी कि समय रहते न्याय हो। इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर हमला बोला था। |
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यक समुदाय हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं।
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यक समुदाय हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं। फेसबुक पर एक पोस्ट से भड़के कट्टरपंथियों ने शुक्रवार शाम नराइल के लोहागरा इलाके में हिंदुओं के घरों पर हमले किया और दिगोलिया गांव में एक हिंदू के घर में आग लगा दी। इसके अलावा एक हिंदू मंदिर में पथराव किया। इस दौरान भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ीं।
पुलिस के मुताबिक, आकाश साहा और उसके पिता पर पैगंबर मोहम्मद को लेकर कथित पोस्ट करने का आरोप है। इन लोगों के घर को भी जलाया गया है। आकाश और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। इलाके में अभी भी तनाव है। कट्टरपंथियों के इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले महीने 18 जून को नराइल के एक कॉलेज में हिंदू प्रिंसिपल पर हमला किया गया था। उन्हें इस दौरान जूतों की माला पहनने को मजबूर किया गया। इससे पहले मार्च में ढाका में इस्कान मंदिर पर हमला किया गया था। यह मंदिर ढाका के वारी में 222 लाल मोहन साहा स्ट्रीट में है। इसे इस्कॉन राधाकांता मंदिर के नाम से जाना जाता है।
हाजी सैफुल्लाह की अगुआई में 200 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने तोड़फोड़ और लूटपाट की थी। पिछले साल अगस्त में खुलना जिले में 50 से ज्यादा हिंदू घरों पर हमला और चार मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी। उस दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था। इस हमले का आरोप कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम पर लगा था। इस संगठन के तार पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हुए हैं।
| भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यक समुदाय हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यक समुदाय हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं। फेसबुक पर एक पोस्ट से भड़के कट्टरपंथियों ने शुक्रवार शाम नराइल के लोहागरा इलाके में हिंदुओं के घरों पर हमले किया और दिगोलिया गांव में एक हिंदू के घर में आग लगा दी। इसके अलावा एक हिंदू मंदिर में पथराव किया। इस दौरान भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। पुलिस के मुताबिक, आकाश साहा और उसके पिता पर पैगंबर मोहम्मद को लेकर कथित पोस्ट करने का आरोप है। इन लोगों के घर को भी जलाया गया है। आकाश और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। इलाके में अभी भी तनाव है। कट्टरपंथियों के इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले महीने अट्ठारह जून को नराइल के एक कॉलेज में हिंदू प्रिंसिपल पर हमला किया गया था। उन्हें इस दौरान जूतों की माला पहनने को मजबूर किया गया। इससे पहले मार्च में ढाका में इस्कान मंदिर पर हमला किया गया था। यह मंदिर ढाका के वारी में दो सौ बाईस लाल मोहन साहा स्ट्रीट में है। इसे इस्कॉन राधाकांता मंदिर के नाम से जाना जाता है। हाजी सैफुल्लाह की अगुआई में दो सौ से ज्यादा लोगों की भीड़ ने तोड़फोड़ और लूटपाट की थी। पिछले साल अगस्त में खुलना जिले में पचास से ज्यादा हिंदू घरों पर हमला और चार मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी। उस दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया था। इस हमले का आरोप कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम पर लगा था। इस संगठन के तार पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हुए हैं। |
इंदौरः रेलवे ने आज रविवार से तीन और ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया है। इन तीन ट्रेनों में महू-इंदौर-यशवंतपुर, इंदौर-गांधीधाम एक्सप्रेस और इंदौर-दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस ट्रेन शामिल हैं जो कि 28 फरवरी से शुरू होगी। इसके अलावा इंदौर-गांधीनगर (शांति एक्सप्रेस) और इंदौर-उज्जैन के बीच स्पेशल ट्रेन रेलवे 1 मार्च से चलाएगा। तो अगर आपको भी इन ट्रेनों से सफर करना है तो इसके प्लान के बारे में जानकारी ले लें....
ये ट्रेन इंदौर से हर रविवार शाम 7.20 बजे चलेगी और अगले दिन दोपहर 12.05 बजे दिल्ली पहुंचेगी। दिल्ली से 1 मार्च से सोमवार दोपहर 3 बजे रवाना होगी। जो कि अगले दिन सुबह 8.30 बजे इंदौर पहुंचेगी।
महू-इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस हर रविवार महू से रात 8 बजे चलेगी जो कि मंगलवार सुबह 11 बजे यशवंतपुर पहुंचेगी। इसके अलावा मंगलवार यशवंतपुर से दोपहर 3.40 बजे चलेगी और गुरुवार को सुबह 7.15 बजे पहुंचेगी।
गांधीधाम एक्सप्रेस हर रविवार रात 11.30 बजे रवाना होगी। जो कि अगले दिन दोपहर 2 बजे गांधीधाम पहुंचेगी। इसके अलावा गांधीधाम से 1 मार्च से प्रति सोमवार शाम 6.15 बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह 8.55 बजे इंदौर आएगी।
इंदौर से ट्रेन 1 मार्च से रात 11 बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह 9.45 बजे गांधीनगर पहुंचेगी। गांधीनगर से 2 मार्च से शाम 6.15 बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह 5.55 बजे इंदौर आएगी।
| इंदौरः रेलवे ने आज रविवार से तीन और ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया है। इन तीन ट्रेनों में महू-इंदौर-यशवंतपुर, इंदौर-गांधीधाम एक्सप्रेस और इंदौर-दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस ट्रेन शामिल हैं जो कि अट्ठाईस फरवरी से शुरू होगी। इसके अलावा इंदौर-गांधीनगर और इंदौर-उज्जैन के बीच स्पेशल ट्रेन रेलवे एक मार्च से चलाएगा। तो अगर आपको भी इन ट्रेनों से सफर करना है तो इसके प्लान के बारे में जानकारी ले लें.... ये ट्रेन इंदौर से हर रविवार शाम सात.बीस बजे चलेगी और अगले दिन दोपहर बारह.पाँच बजे दिल्ली पहुंचेगी। दिल्ली से एक मार्च से सोमवार दोपहर तीन बजे रवाना होगी। जो कि अगले दिन सुबह आठ.तीस बजे इंदौर पहुंचेगी। महू-इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस हर रविवार महू से रात आठ बजे चलेगी जो कि मंगलवार सुबह ग्यारह बजे यशवंतपुर पहुंचेगी। इसके अलावा मंगलवार यशवंतपुर से दोपहर तीन.चालीस बजे चलेगी और गुरुवार को सुबह सात.पंद्रह बजे पहुंचेगी। गांधीधाम एक्सप्रेस हर रविवार रात ग्यारह.तीस बजे रवाना होगी। जो कि अगले दिन दोपहर दो बजे गांधीधाम पहुंचेगी। इसके अलावा गांधीधाम से एक मार्च से प्रति सोमवार शाम छः.पंद्रह बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह आठ.पचपन बजे इंदौर आएगी। इंदौर से ट्रेन एक मार्च से रात ग्यारह बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह नौ.पैंतालीस बजे गांधीनगर पहुंचेगी। गांधीनगर से दो मार्च से शाम छः.पंद्रह बजे रवाना होगी। अगले दिन सुबह पाँच.पचपन बजे इंदौर आएगी। |
कराची, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तान ने कहा है कि उसने शनिवार को उत्तरी अरब सागर में एक सी किंग हेलीकॉप्टर से जहाज भेदी मिसाइल दागने का सफल परीक्षण किया है। नौसेना द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद जकाउल्ला इस मिसाइल परीक्षण के गवाह बने।
जहाज भेदी मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।
नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, जकाउल्ला ने कहा कि सफल परीक्षण पाकिस्तानी नौसेना की युद्धक तैयारी और पेशेवर क्षमता का एक प्रमाण है।
नौसेना प्रमुख ने समुद्र में तैनात नौसेना की इकाइयों का भी दौरा किया और नौसेना के बेड़े से जुड़े अभ्यास देखें।
जकाउल्ला ने कहा,मुझे पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े की युद्धक तैयारी देखकर गर्व है।
| कराची, तेईस सितम्बर । पाकिस्तान ने कहा है कि उसने शनिवार को उत्तरी अरब सागर में एक सी किंग हेलीकॉप्टर से जहाज भेदी मिसाइल दागने का सफल परीक्षण किया है। नौसेना द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद जकाउल्ला इस मिसाइल परीक्षण के गवाह बने। जहाज भेदी मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया। नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, जकाउल्ला ने कहा कि सफल परीक्षण पाकिस्तानी नौसेना की युद्धक तैयारी और पेशेवर क्षमता का एक प्रमाण है। नौसेना प्रमुख ने समुद्र में तैनात नौसेना की इकाइयों का भी दौरा किया और नौसेना के बेड़े से जुड़े अभ्यास देखें। जकाउल्ला ने कहा,मुझे पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े की युद्धक तैयारी देखकर गर्व है। |
बीबीसी हिंदी रोड शो के दौरान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वेबदुनिया डॉट कॉम और नई दुनिया के साथ बीबीसी हिंदी के एक संयुक्त प्रयास का ऐलान हुआ है.
बीबीसी अब दुनिया का सबसे बड़ा फोटो एलबम बनाने जा रहा है और इस विचार को अपने ऑनलाइन यूज़र्स और पाठकों तक पहुँचाने का ज़िम्मा लिया है वेबदुनिया डॉट कॉम और नई दुनिया ने.
बीबीसी हिंदी ऑनलाइन के साथ वेबदुनिया और नई दुनिया पहले से ही कंटेट पार्टनरशिप समझौता कर चुके हैं.
बीबीसी की इस योजना के तहत 200 से ज़्यादा देशों में जो लोग बीबीसी से रेडियो, टेलीविज़न और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े हैं, उनके बारे में बीबीसी पूरी जानकारी प्रकाशित करेगी.
इसमें लोगों की तस्वीरों के साथ-साथ उनके प्रदेश के मुद्दों को भी बीबीसी प्रकाशित करेगी. इसके तहत पाठक अपने फोटोग्राफ अपने प्रोफ़ाइल के साथ ईमेल या डाक के ज़रिए दिल्ली स्थित बीबीसी ऑडियंश रिलेशन टीम या नई दुनिया इंदौर को भेज सकते हैं जो यह जानकारी बीबीसी हिंदी तक पहुँचाएँगे.
पाठक अपने प्रोफ़ाइल में अपना नाम, उम्र, निवास स्थान, व्यवसाय, इच्छाएँ और महत्वाकांक्षाएँ, दिलचस्पी और बीबीसी से जुड़ी अपनी यादें या अनुभव लिखना न भूलें.
| बीबीसी हिंदी रोड शो के दौरान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वेबदुनिया डॉट कॉम और नई दुनिया के साथ बीबीसी हिंदी के एक संयुक्त प्रयास का ऐलान हुआ है. बीबीसी अब दुनिया का सबसे बड़ा फोटो एलबम बनाने जा रहा है और इस विचार को अपने ऑनलाइन यूज़र्स और पाठकों तक पहुँचाने का ज़िम्मा लिया है वेबदुनिया डॉट कॉम और नई दुनिया ने. बीबीसी हिंदी ऑनलाइन के साथ वेबदुनिया और नई दुनिया पहले से ही कंटेट पार्टनरशिप समझौता कर चुके हैं. बीबीसी की इस योजना के तहत दो सौ से ज़्यादा देशों में जो लोग बीबीसी से रेडियो, टेलीविज़न और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े हैं, उनके बारे में बीबीसी पूरी जानकारी प्रकाशित करेगी. इसमें लोगों की तस्वीरों के साथ-साथ उनके प्रदेश के मुद्दों को भी बीबीसी प्रकाशित करेगी. इसके तहत पाठक अपने फोटोग्राफ अपने प्रोफ़ाइल के साथ ईमेल या डाक के ज़रिए दिल्ली स्थित बीबीसी ऑडियंश रिलेशन टीम या नई दुनिया इंदौर को भेज सकते हैं जो यह जानकारी बीबीसी हिंदी तक पहुँचाएँगे. पाठक अपने प्रोफ़ाइल में अपना नाम, उम्र, निवास स्थान, व्यवसाय, इच्छाएँ और महत्वाकांक्षाएँ, दिलचस्पी और बीबीसी से जुड़ी अपनी यादें या अनुभव लिखना न भूलें. |
आईपीएल (IPL) के प्लेइंग इलेवन में पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाने का पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि अगर आईपीएल 10 टीमों का हो जाता है तो फिर पांच विदेशी प्लेयर्स को प्लेइंग इलेवन में खिलाना चाहिए।
आपको बता दें कि आईपीएल में टीमों की संख्या बढ़कर 10 होने वाली है। दो नई फ्रेंचाइज को और जोड़ा जाएगा। इससे इस टूर्नामेंट में टीमों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी और ऐसा 2011 के बाद पहली बार होगा।
ईएसपीएन क्रिकइन्फो पर बातचीत के दौरान संजय मांजरेकर ने पांच विदेशी प्लेयर्स खिलाने की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा "अगर आईपीएल 10 टीमों का हो जाता है तो फिर प्लेइंग इलेवन में आपको पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाना ही होगा। "
मांजरेकर ने आगे कहा " जब आईपीएल, टी20 या फिर 50 ओवरों की क्रिकेट नहीं होती थी तब केवल 13-14 प्लेयर ही 70 और 80 के दशक में हाईएस्ट लेवल पर खेलते थे। आपके पास इंडियन प्लेयर पहले से ही काफी ज्यादा मौजूद हैं और ये काफी शर्म की बात है कि कई सारे क्वालिटी विदेशी प्लेयर्स को बाहर बैठना पड़ता है, क्योंकि एक टीम में चार ही ओवरसीज खिलाड़ियों की परमिशन है। इसलिए अगर हम पांच विदेशी खिलाड़ियों को खिलाते हैं तब भी इंडियन प्लेयर्स को काफी मौके मिलेंगे। "
संजय मांजरेकर से पहले पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि प्लेइंग इलेवन में अगले सीजन से पांच ओवरसीज प्लेयर्स को जगह मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे टीमों की क्वालिटी बढ़ जाएगी।
आकाश चोपड़ा के मुताबिक अगर एक टीम की प्लेइंग इलेवन में पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाया जाता है तो फिर इससे लीग की क्वालिटी और बढ़ जाएगी और टीमों की संख्या बढ़ने से मैचों के रोमांच में कोई कमी नहीं आएगी।
| आईपीएल के प्लेइंग इलेवन में पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाने का पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि अगर आईपीएल दस टीमों का हो जाता है तो फिर पांच विदेशी प्लेयर्स को प्लेइंग इलेवन में खिलाना चाहिए। आपको बता दें कि आईपीएल में टीमों की संख्या बढ़कर दस होने वाली है। दो नई फ्रेंचाइज को और जोड़ा जाएगा। इससे इस टूर्नामेंट में टीमों की संख्या बढ़कर दस हो जाएगी और ऐसा दो हज़ार ग्यारह के बाद पहली बार होगा। ईएसपीएन क्रिकइन्फो पर बातचीत के दौरान संजय मांजरेकर ने पांच विदेशी प्लेयर्स खिलाने की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा "अगर आईपीएल दस टीमों का हो जाता है तो फिर प्लेइंग इलेवन में आपको पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाना ही होगा। " मांजरेकर ने आगे कहा " जब आईपीएल, टीबीस या फिर पचास ओवरों की क्रिकेट नहीं होती थी तब केवल तेरह-चौदह प्लेयर ही सत्तर और अस्सी के दशक में हाईएस्ट लेवल पर खेलते थे। आपके पास इंडियन प्लेयर पहले से ही काफी ज्यादा मौजूद हैं और ये काफी शर्म की बात है कि कई सारे क्वालिटी विदेशी प्लेयर्स को बाहर बैठना पड़ता है, क्योंकि एक टीम में चार ही ओवरसीज खिलाड़ियों की परमिशन है। इसलिए अगर हम पांच विदेशी खिलाड़ियों को खिलाते हैं तब भी इंडियन प्लेयर्स को काफी मौके मिलेंगे। " संजय मांजरेकर से पहले पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि प्लेइंग इलेवन में अगले सीजन से पांच ओवरसीज प्लेयर्स को जगह मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे टीमों की क्वालिटी बढ़ जाएगी। आकाश चोपड़ा के मुताबिक अगर एक टीम की प्लेइंग इलेवन में पांच विदेशी प्लेयर्स को खिलाया जाता है तो फिर इससे लीग की क्वालिटी और बढ़ जाएगी और टीमों की संख्या बढ़ने से मैचों के रोमांच में कोई कमी नहीं आएगी। |
Floating Restaurant: अहमदाबाद में लक्जरी रिवर क्रूज़ को मेक इन इंडिया अभियान के तत्वावधान में भारत में निर्मित पहला यात्री कैटामरन क्रूज़ होने का गौरव प्राप्त है। यह स्वदेशी विनिर्माण और इनोवेशन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
PM Modi MP Visit: इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री लगभग 3. 57 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित करेंगे। यह कार्ड लाभार्थियों को आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे। ये कार्ड प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को उचित चिकित्सा सुविधाओं और निःशुल्क दवाओं का अधिकार प्राप्त होगा। यह कदम न केवल गरीबों को सामरिक चिकित्सा सुविधाओं से लाभान्वित करेगा, बल्कि राज्य के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
PM Modi In USA: पीएम मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की मेजबानी में एक साल के अंदर 27 लाख पर्यटक आए हैं। पिछले नौ वर्षों में भारत ने पर्यटन के इकोसिस्टम के विकास पर विशेष बल दिया है। पीएम ने विश्व पर्यटन के लिए "वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर" की थीम को बढ़ावा देने की बात कही। पीएम मोदी यहां भारत वंशियों से भी मुलाकात करने वाले हैं, उनके भोज कार्यक्रम में 7000 से अधिक अमेरिकी नामचीन हस्तियां भी शामिल होंगी। इसके बाद वो भारतीय मूल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी मुलाकात करेंगे।
Pramod Sawant: दरअसल, 1 मई यानी की श्रमिक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रदेश में होने वाली आपराधिक घटनाओं को जिम्मेदारी बिहारी श्रमिकों को बता दिया था। उन्होंने कहा था कि गोवा में आने वाले सभी मजदूरों पर विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि आमतौर बाहर से आए प्रवासी मजदूर यहां आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देकर चले जाते हैं।
समान नागरिक संहिता UCC का मुद्दा उठाकर बीजेपी ने विपक्षी दलों की सियासी लकीर से बड़ी लकीर खींच दी है। ये मुद्दा बीजेपी के एजेंडे में लगातार रहा है। पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में भी समान नागरिक संहिता को जरूरी बताया था। उन्होंने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला भी दिया था।
खबर ये भी है कि कांग्रेस आलाकमान तक भी उसके विधायकों और पाटिल की मुलाकात की खबर पहुंची है। नतीजे में कांग्रेस के उच्चस्तर पर इन विधायकों के जाने के बाद से बनने वाले हालात पर चर्चा भी हो चुकी है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में गुजरात कांग्रेस के 7 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग भी की थी।
Sonali Phogat Murder Case: बता दें कि 23 अगस्त के गोवा के एक रेस्टोरेंट में टिकटॉक स्टार सोनाली फोगाट की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। पहले उनकी मौत दिल के दौरा पड़ने की वजह से बताई जा रही थी। लेकिन बाद में सोनाली की मौत ड्रग्स और हत्या से साजिश से जुड़ा एंगल सामने आया और आज गोवा सरकार की तरफ से इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला कर दिया गया है।
Sonali Phogat Death Case: Curlies Club को ध्वस्त करने के पीछे की वजह ये थी कि इसी में सोनाली फोगाट को ड्रग्स दिया गया था। बीते दिन शुक्रवार को गोवा प्रशासन तीन-तीन बुलडोजर लेकर इसे गिराने पहुंचा। Club को ढहाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी लेकिन अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को Curlies Club से बड़ी राहत मिली है।
Sonali Phogat Death: बताया जा रहा है कि 4 बजे सभी फ्रैश होने के लिए चले जाते हैं। लेकिन सोनाली फोगाट के मौत मामले की असली कहानी 6 बजे शुरू होती है। शाम को एक ड्रग पेडलर उनके पास पहुंचा है, जिसका नाम रमाकांत बताया जा रहा है वो रिसॉर्ट पहुंचा और उनसे रेस्तरां के एक वेटर को ड्रग्स दिया। ड्रग्स की खरीद परोख्त की शुरुआत हुई।
Who is Michael Lobo, Digambar Kamat: देशभर में अपने सियासी वजूद के लिए जूझ रही कांग्रेस पार्टी को एक और झटका लगा है। महाराष्ट्र में महाविकासअघाड़ी सरकार गिरने के बाद इस गठबंधन का हिस्सा रही कांग्रेस पार्टी अब उसके पड़ोसी राज्य गोवा में भी बगावत की आंधी का सामना कर रही है। कांग्रेस ने खुद बताया कि 11 में से 5 विधायकों से उसका संपर्क नहीं हो पा रहा।
| Floating Restaurant: अहमदाबाद में लक्जरी रिवर क्रूज़ को मेक इन इंडिया अभियान के तत्वावधान में भारत में निर्मित पहला यात्री कैटामरन क्रूज़ होने का गौरव प्राप्त है। यह स्वदेशी विनिर्माण और इनोवेशन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। PM Modi MP Visit: इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री लगभग तीन. सत्तावन करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित करेंगे। यह कार्ड लाभार्थियों को आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे। ये कार्ड प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को उचित चिकित्सा सुविधाओं और निःशुल्क दवाओं का अधिकार प्राप्त होगा। यह कदम न केवल गरीबों को सामरिक चिकित्सा सुविधाओं से लाभान्वित करेगा, बल्कि राज्य के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। PM Modi In USA: पीएम मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की मेजबानी में एक साल के अंदर सत्ताईस लाख पर्यटक आए हैं। पिछले नौ वर्षों में भारत ने पर्यटन के इकोसिस्टम के विकास पर विशेष बल दिया है। पीएम ने विश्व पर्यटन के लिए "वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर" की थीम को बढ़ावा देने की बात कही। पीएम मोदी यहां भारत वंशियों से भी मुलाकात करने वाले हैं, उनके भोज कार्यक्रम में सात हज़ार से अधिक अमेरिकी नामचीन हस्तियां भी शामिल होंगी। इसके बाद वो भारतीय मूल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी मुलाकात करेंगे। Pramod Sawant: दरअसल, एक मई यानी की श्रमिक दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रदेश में होने वाली आपराधिक घटनाओं को जिम्मेदारी बिहारी श्रमिकों को बता दिया था। उन्होंने कहा था कि गोवा में आने वाले सभी मजदूरों पर विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि आमतौर बाहर से आए प्रवासी मजदूर यहां आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देकर चले जाते हैं। समान नागरिक संहिता UCC का मुद्दा उठाकर बीजेपी ने विपक्षी दलों की सियासी लकीर से बड़ी लकीर खींच दी है। ये मुद्दा बीजेपी के एजेंडे में लगातार रहा है। पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में भी समान नागरिक संहिता को जरूरी बताया था। उन्होंने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद चौंतालीस का हवाला भी दिया था। खबर ये भी है कि कांग्रेस आलाकमान तक भी उसके विधायकों और पाटिल की मुलाकात की खबर पहुंची है। नतीजे में कांग्रेस के उच्चस्तर पर इन विधायकों के जाने के बाद से बनने वाले हालात पर चर्चा भी हो चुकी है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में गुजरात कांग्रेस के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग भी की थी। Sonali Phogat Murder Case: बता दें कि तेईस अगस्त के गोवा के एक रेस्टोरेंट में टिकटॉक स्टार सोनाली फोगाट की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। पहले उनकी मौत दिल के दौरा पड़ने की वजह से बताई जा रही थी। लेकिन बाद में सोनाली की मौत ड्रग्स और हत्या से साजिश से जुड़ा एंगल सामने आया और आज गोवा सरकार की तरफ से इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला कर दिया गया है। Sonali Phogat Death Case: Curlies Club को ध्वस्त करने के पीछे की वजह ये थी कि इसी में सोनाली फोगाट को ड्रग्स दिया गया था। बीते दिन शुक्रवार को गोवा प्रशासन तीन-तीन बुलडोजर लेकर इसे गिराने पहुंचा। Club को ढहाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी लेकिन अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को Curlies Club से बड़ी राहत मिली है। Sonali Phogat Death: बताया जा रहा है कि चार बजे सभी फ्रैश होने के लिए चले जाते हैं। लेकिन सोनाली फोगाट के मौत मामले की असली कहानी छः बजे शुरू होती है। शाम को एक ड्रग पेडलर उनके पास पहुंचा है, जिसका नाम रमाकांत बताया जा रहा है वो रिसॉर्ट पहुंचा और उनसे रेस्तरां के एक वेटर को ड्रग्स दिया। ड्रग्स की खरीद परोख्त की शुरुआत हुई। Who is Michael Lobo, Digambar Kamat: देशभर में अपने सियासी वजूद के लिए जूझ रही कांग्रेस पार्टी को एक और झटका लगा है। महाराष्ट्र में महाविकासअघाड़ी सरकार गिरने के बाद इस गठबंधन का हिस्सा रही कांग्रेस पार्टी अब उसके पड़ोसी राज्य गोवा में भी बगावत की आंधी का सामना कर रही है। कांग्रेस ने खुद बताया कि ग्यारह में से पाँच विधायकों से उसका संपर्क नहीं हो पा रहा। |
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार सुबह अपने जन्म दिन के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। साथ ही कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह किसी तरह के आयोजन से बचें।
दरअसल, बृहस्पतिवार सुबह सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आप कार्यकर्ता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जन्म दिन की बधाई देने पहुंचे। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक है।
वहीं, केरल की बाढ़ से आम केरलवासी बेहद मुश्किल में हैं। ऐसे में वह जन्म दिन का कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह ने तो मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाएं और न ही किसी तरह का कार्यक्रम आयोजित न करें।
इसके अलावा केरल की आपदा में मदद देने के लिए आप कार्यकर्ताओं से अपील की। केजरीवाल इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री को देखने सिसोदिया के साथ एम्स पहुंचे। करीब आधे घंटे तक एम्स में रुकने के बाद दोनों वापस लौट गए।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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| मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार सुबह अपने जन्म दिन के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। साथ ही कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह किसी तरह के आयोजन से बचें। दरअसल, बृहस्पतिवार सुबह सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आप कार्यकर्ता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जन्म दिन की बधाई देने पहुंचे। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक है। वहीं, केरल की बाढ़ से आम केरलवासी बेहद मुश्किल में हैं। ऐसे में वह जन्म दिन का कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह ने तो मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाएं और न ही किसी तरह का कार्यक्रम आयोजित न करें। इसके अलावा केरल की आपदा में मदद देने के लिए आप कार्यकर्ताओं से अपील की। केजरीवाल इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री को देखने सिसोदिया के साथ एम्स पहुंचे। करीब आधे घंटे तक एम्स में रुकने के बाद दोनों वापस लौट गए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
Don't Miss!
सलमान खान अभिनित फिल्म दबंग के संगीत निर्देशक साजिद-वाजिद ने स्टार स्क्रीन पुरस्कार के दौरान सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार हासिल किया। इसके अलावा वे अप्सरा अवार्ड्स, जी सिने अवार्डस और फिल्म फेयर अवार्डस में भी पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।
साजिद ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत के दौरान कहा, "यदि हम कड़ी मेहनत करते हैं तो ईश्वर भी उस पर गौर करता है। मैं अपनी सफलता का 100 फीसदी श्रेय सलमान को देना चाहता हूं। सलमान हमारे लिए संरक्षक की तरह हैं।"
वाजिद ने कहा, "हमारी सफलता का 100 फीसदी श्रेय सलमान को ही जाता है। वह हमारे साथ तब भी खड़े थे जब लोग हम पर विश्वास नहीं करते थे। वह हमारे संगीत को पसंद करते हैं। इसलिए आज हम जो कुछ भी हैं उसमें सलमान का बहुत बड़ा रोल है।"
उल्लेखनीय है कि साजिद-वाजिद ने बॉलीवुड में वर्ष 1998 में अभिनेता-निर्देशक-निर्माता सोहेल खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' से अपना करियर शुरू किया था। तब से लेकर अभी तक सलमान की अधिकांश फिल्मों में उन्होंने ही संगीत दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
| Don't Miss! सलमान खान अभिनित फिल्म दबंग के संगीत निर्देशक साजिद-वाजिद ने स्टार स्क्रीन पुरस्कार के दौरान सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार हासिल किया। इसके अलावा वे अप्सरा अवार्ड्स, जी सिने अवार्डस और फिल्म फेयर अवार्डस में भी पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। साजिद ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत के दौरान कहा, "यदि हम कड़ी मेहनत करते हैं तो ईश्वर भी उस पर गौर करता है। मैं अपनी सफलता का एक सौ फीसदी श्रेय सलमान को देना चाहता हूं। सलमान हमारे लिए संरक्षक की तरह हैं।" वाजिद ने कहा, "हमारी सफलता का एक सौ फीसदी श्रेय सलमान को ही जाता है। वह हमारे साथ तब भी खड़े थे जब लोग हम पर विश्वास नहीं करते थे। वह हमारे संगीत को पसंद करते हैं। इसलिए आज हम जो कुछ भी हैं उसमें सलमान का बहुत बड़ा रोल है।" उल्लेखनीय है कि साजिद-वाजिद ने बॉलीवुड में वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में अभिनेता-निर्देशक-निर्माता सोहेल खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' से अपना करियर शुरू किया था। तब से लेकर अभी तक सलमान की अधिकांश फिल्मों में उन्होंने ही संगीत दिया है। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। |
अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर और आमिर खान के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन भी इस साल फरवरी में पुलवामा में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने की लिस्ट में शामिल हुईं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ऐश्वर्या ने इसके लिए एक गाना रिकॉर्ड किया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वीडियो सॉन्ग को 14 स्टार्स के साथ किया जा रहा है. हैप्पी प्रोडक्शन के अभिषेक मिश्रा ने बताया कि दूसरे बॉलीवुड स्टार्स के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी इस सॉन्ग की शूटिंग की और उन्हें गीत 'तू देश मेरा' में शामिल किया जाएगा. यह गीत पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि है.
etc have already shot.
Commendable work has been done by @SrBachchan, @aamir_khan and #RanbirKapoor for the tribute song #TuDeshMera dedicated to the Martyrs of Pulwama.
14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के एक काफिले पर आत्मघाती हमलावर ने हमला किया था, जिसमें 40 सैनिक मारे गए थे. इस घटना की अंतर्राष्ट्रीय निंदा हुई थी.
| अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर और आमिर खान के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन भी इस साल फरवरी में पुलवामा में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने की लिस्ट में शामिल हुईं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ऐश्वर्या ने इसके लिए एक गाना रिकॉर्ड किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वीडियो सॉन्ग को चौदह स्टार्स के साथ किया जा रहा है. हैप्पी प्रोडक्शन के अभिषेक मिश्रा ने बताया कि दूसरे बॉलीवुड स्टार्स के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी इस सॉन्ग की शूटिंग की और उन्हें गीत 'तू देश मेरा' में शामिल किया जाएगा. यह गीत पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि है. etc have already shot. Commendable work has been done by @SrBachchan, @aamir_khan and #RanbirKapoor for the tribute song #TuDeshMera dedicated to the Martyrs of Pulwama. चौदह फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के एक काफिले पर आत्मघाती हमलावर ने हमला किया था, जिसमें चालीस सैनिक मारे गए थे. इस घटना की अंतर्राष्ट्रीय निंदा हुई थी. |
बॉलीवुडः इंडस्ट्री की तेज-तर्रार, मुँहफट एक्ट्रेस कंगना रनौत अपनी फिल्म के बाद विदेश से छुट्टियां मनाकार वापस भारत लौट आईं हैं. जहां इन दिनों कंगना अपनी फिल्म 'मणिकर्णिका को लेकर चर्चा में बनी हुईं हैं. वही कई दिनों से फिल्म को लेकर पहले निर्देशक कृष समेत दूसरे कलाकार भी कंगना पर लगातार आरोप लगा रहे थे. लेकिन कंगना ने भी तमाम आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए सभी को मुंहतोड़ जवाब दिया है.
Also Read: शमा सिकंदर ने अपनी शर्ट के बटन खोलकर दिखाई क्लीवेज, फैंस के उड़े होश!
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| बॉलीवुडः इंडस्ट्री की तेज-तर्रार, मुँहफट एक्ट्रेस कंगना रनौत अपनी फिल्म के बाद विदेश से छुट्टियां मनाकार वापस भारत लौट आईं हैं. जहां इन दिनों कंगना अपनी फिल्म 'मणिकर्णिका को लेकर चर्चा में बनी हुईं हैं. वही कई दिनों से फिल्म को लेकर पहले निर्देशक कृष समेत दूसरे कलाकार भी कंगना पर लगातार आरोप लगा रहे थे. लेकिन कंगना ने भी तमाम आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए सभी को मुंहतोड़ जवाब दिया है. Also Read: शमा सिकंदर ने अपनी शर्ट के बटन खोलकर दिखाई क्लीवेज, फैंस के उड़े होश! |
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में सहभागिता हेतु दक्षिण अफ्रीका के साथ कोई समझौता नहीं किया है। तथापि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन सार्वजनिक क्षेत्र के एक उपक्रम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी) ने दक्षिण अफ्रीका में एसएमई के विकास में भागीदारी के लिए अगस्त, 2006 में दक्षिण अफ्रीका की लघु उद्यम विकास एजेन्सी (एसईडीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता ज्ञापन जुलाई, 2009 तक वैध था।
मंत्री महोदय, ने कहा कि मार्च, 2007 में भारत से भी एक व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल दक्षिण अफ्रीका गया था। एनएसआईसी ने दक्षिण अफ्रीका में विभिन्न्उद्यमियों/संगठनों को कई एमएसएमई परियोजनाओं की आपूर्ति की है, जिसमें सोशनगुएव मैन्युफैक्चरिंग टेक्नॉलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन सेंटर (एसएमटीडीसी) में स्थापित स्टेपल पिंन एवं जेम क्लिप विनिर्माण मशीनें, अल्युमिनियम फॉएल रीवाइंडिंग मशीनें, टॉयलट रोल विनिर्माण प्लांट, पेपर नैपकिन विनिर्माण प्लांट, वायर नेल विनिर्माण मशीन, टॉयलट रोल और बैंड-सॉ प्लांट और प्लास्टिक प्रौद्यागिकी परियोजनाएं शामिल हैं। एनएसआईसी ने भारतीय एमएसएमई की भी भारतीय एमएसएमई द्वारा विनिर्मित कई उत्पादों अर्थात बिल्डर हार्डवेयर, ब्लैक एनटीक हार्डवेयर, गारमेंट्स आदि का दक्षिण अफ्रीका को निर्यात करने में भी मदद की है।
| सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में सहभागिता हेतु दक्षिण अफ्रीका के साथ कोई समझौता नहीं किया है। तथापि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन सार्वजनिक क्षेत्र के एक उपक्रम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड ने दक्षिण अफ्रीका में एसएमई के विकास में भागीदारी के लिए अगस्त, दो हज़ार छः में दक्षिण अफ्रीका की लघु उद्यम विकास एजेन्सी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता ज्ञापन जुलाई, दो हज़ार नौ तक वैध था। मंत्री महोदय, ने कहा कि मार्च, दो हज़ार सात में भारत से भी एक व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल दक्षिण अफ्रीका गया था। एनएसआईसी ने दक्षिण अफ्रीका में विभिन्न्उद्यमियों/संगठनों को कई एमएसएमई परियोजनाओं की आपूर्ति की है, जिसमें सोशनगुएव मैन्युफैक्चरिंग टेक्नॉलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन सेंटर में स्थापित स्टेपल पिंन एवं जेम क्लिप विनिर्माण मशीनें, अल्युमिनियम फॉएल रीवाइंडिंग मशीनें, टॉयलट रोल विनिर्माण प्लांट, पेपर नैपकिन विनिर्माण प्लांट, वायर नेल विनिर्माण मशीन, टॉयलट रोल और बैंड-सॉ प्लांट और प्लास्टिक प्रौद्यागिकी परियोजनाएं शामिल हैं। एनएसआईसी ने भारतीय एमएसएमई की भी भारतीय एमएसएमई द्वारा विनिर्मित कई उत्पादों अर्थात बिल्डर हार्डवेयर, ब्लैक एनटीक हार्डवेयर, गारमेंट्स आदि का दक्षिण अफ्रीका को निर्यात करने में भी मदद की है। |
१०४ / कबीर परम्परा
ली । उन्होंने हिन्दी में संतवारणी की रचना की थी, किन्तु उनकी रचनाओं में से अल्प संख्यक रचनाएं ही प्राप्त होती हैं ।
सन्त लोचनदास के मनेक शिष्य थे । उनमें से अधिकांश निम्न जाति के या पतित थे। उनके शिष्यों में हिमाराम, पंजुदास, अकलंदास, नथ्युदास, नेजादास, तेजुदास, महिपाल तथा दुलारी प्रमुख थे । उन्होंने दया, गरीवी तथा वन्दगी का उपदेश दिया था । १
(२) समर्थदास : --वावा समर्थदास अपनी पूर्वावस्था में सिद्धपुर के एक वरिगक युवक बंकाजी थे । पाटण में बंकाजी एक स्वरूपवान, गुणवान तथा साहसिक सिपाही थे । मुस्लिम अधिकारी की युवान पुत्री हुर्रा उनके ऊपर मासक्त हो गई । उन्होंने एक दिन बँकाजी से कहा कि तुमको देखे बिना मुझे चैन नहीं होता ! २ इस प्रकार के सम्बन्ध को नमकहरामी समझकर बँकाजी ने उनको समझाने के प्रयास किये, किन्तु उन्होंने बात्महत्या करने की धमकी दी । इस उलझन से मुक्ति पाने के लिए पाटण छोड़ कर वे भ्रमण को निकल पड़े। भ्रमण करते हुए वे सूरत आये । संत लोचनदास के दर्शन से उनको शांति मिली 13 संत लोचनदास ने उनकी विरक्ति देखकर दोक्षा दे कर "समर्थदास" नाम दिया । सं० १६२० में उन्होंने जीवन्त समाधि ले ली थी ।
संत माववदास, केशवदास, विमलदास, जुहारीदास तथा पिथ्यलदास उनके प्रमुख शिष्यों में थे। तदुपरान्त अगमदास, अभयदास, किरणदास, सुगमदास, में चतुरदास, नूरतदास, खगदास, ल्हादास, मालवदास, विरहदास तथा छेलादास जैसे अन्य साधारण शिष्य थे । ४ समर्थदास ने संतवारणी की रचना की है, इनमें से दो भूलना छंद यहां उद्धृत हैं ।
देखत हो संग विला गये, गुलशन की मौज को नहीं पाया । अरमान नौके अधूरे रहे, सुहागीन गीत को नहीं गाया ।
१. लोचन कहे पुकारके रखो, साहिब से प्रोत
दया गरीबो वंदगी, जैहो भवजल जीत ॥ २. बँकाजी को देखके, हुर्रा हुई वेचैन ।
चांकी नूरत देखे बिना, कबहु न पार्श्व चैन ।। ३. सूरत नम्र में आप के, पाया परम सोहाग ।
लोचन सदगुरू भेटिया, जगे पूरव के भाग ।। ४. 'संत माघवदास' श्री माणेकलाल राणा, पृ० ३६ । | एक सौ चार / कबीर परम्परा ली । उन्होंने हिन्दी में संतवारणी की रचना की थी, किन्तु उनकी रचनाओं में से अल्प संख्यक रचनाएं ही प्राप्त होती हैं । सन्त लोचनदास के मनेक शिष्य थे । उनमें से अधिकांश निम्न जाति के या पतित थे। उनके शिष्यों में हिमाराम, पंजुदास, अकलंदास, नथ्युदास, नेजादास, तेजुदास, महिपाल तथा दुलारी प्रमुख थे । उन्होंने दया, गरीवी तथा वन्दगी का उपदेश दिया था । एक समर्थदास : --वावा समर्थदास अपनी पूर्वावस्था में सिद्धपुर के एक वरिगक युवक बंकाजी थे । पाटण में बंकाजी एक स्वरूपवान, गुणवान तथा साहसिक सिपाही थे । मुस्लिम अधिकारी की युवान पुत्री हुर्रा उनके ऊपर मासक्त हो गई । उन्होंने एक दिन बँकाजी से कहा कि तुमको देखे बिना मुझे चैन नहीं होता ! दो इस प्रकार के सम्बन्ध को नमकहरामी समझकर बँकाजी ने उनको समझाने के प्रयास किये, किन्तु उन्होंने बात्महत्या करने की धमकी दी । इस उलझन से मुक्ति पाने के लिए पाटण छोड़ कर वे भ्रमण को निकल पड़े। भ्रमण करते हुए वे सूरत आये । संत लोचनदास के दर्शन से उनको शांति मिली तेरह संत लोचनदास ने उनकी विरक्ति देखकर दोक्षा दे कर "समर्थदास" नाम दिया । संशून्य एक हज़ार छः सौ बीस में उन्होंने जीवन्त समाधि ले ली थी । संत माववदास, केशवदास, विमलदास, जुहारीदास तथा पिथ्यलदास उनके प्रमुख शिष्यों में थे। तदुपरान्त अगमदास, अभयदास, किरणदास, सुगमदास, में चतुरदास, नूरतदास, खगदास, ल्हादास, मालवदास, विरहदास तथा छेलादास जैसे अन्य साधारण शिष्य थे । चार समर्थदास ने संतवारणी की रचना की है, इनमें से दो भूलना छंद यहां उद्धृत हैं । देखत हो संग विला गये, गुलशन की मौज को नहीं पाया । अरमान नौके अधूरे रहे, सुहागीन गीत को नहीं गाया । एक. लोचन कहे पुकारके रखो, साहिब से प्रोत दया गरीबो वंदगी, जैहो भवजल जीत ॥ दो. बँकाजी को देखके, हुर्रा हुई वेचैन । चांकी नूरत देखे बिना, कबहु न पार्श्व चैन ।। तीन. सूरत नम्र में आप के, पाया परम सोहाग । लोचन सदगुरू भेटिया, जगे पूरव के भाग ।। चार. 'संत माघवदास' श्री माणेकलाल राणा, पृशून्य छत्तीस । |
निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती महिला की खून चढ़ाते ही हालत बिगड़ गई। तत्काल उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। जहां ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। शव लेकर परिजन वापस नर्सिंग होम पहुंचे और जमकर हंगामा किया। कुछ लोगों के आने से मामले में समझौता हो गया और शव लेकर परिजन वापस गांव चले गए। तभी अस्पताल संचालक ताला लगाकर भाग निकला।
सदर कोतवाली के केशवपुर गांव निवासी छद्दिू की पत्नी लक्ष्मी को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा हुई थी। जिसके बाद परिजनों ने उसे शहर के तांबेश्वर चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचाया था। जहां आपरेशन कर उसकी डिलीवरी की गई और खून की कमी होने की बात कही गई। डाक्टर के कहने पर परिजनों ने दो यूनिट ब्लड का इंतजाम किया। जैसे ही लक्ष्मी को खून चढ़ाया गया तो उसकी तबियत बिगड़ गई। तबियत बिगड़ने पर डाक्टर उसे जीटी रोड स्थित एक अस्पताल ले जाने को कहा लेकिन परिजन भड़क गए और हंगामा करना शुरू किया। सूचना पर पहुंची आबू नगर पुलिस के कहने पर परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए लेकिन उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। परिजन उसे लेकर कानपुर चले गए, जहां ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर राम में ही नर्सिंग होम पहुंचे जहां जमकर हंगामा शुरू कर दिया।
| निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती महिला की खून चढ़ाते ही हालत बिगड़ गई। तत्काल उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। जहां ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। शव लेकर परिजन वापस नर्सिंग होम पहुंचे और जमकर हंगामा किया। कुछ लोगों के आने से मामले में समझौता हो गया और शव लेकर परिजन वापस गांव चले गए। तभी अस्पताल संचालक ताला लगाकर भाग निकला। सदर कोतवाली के केशवपुर गांव निवासी छद्दिू की पत्नी लक्ष्मी को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा हुई थी। जिसके बाद परिजनों ने उसे शहर के तांबेश्वर चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचाया था। जहां आपरेशन कर उसकी डिलीवरी की गई और खून की कमी होने की बात कही गई। डाक्टर के कहने पर परिजनों ने दो यूनिट ब्लड का इंतजाम किया। जैसे ही लक्ष्मी को खून चढ़ाया गया तो उसकी तबियत बिगड़ गई। तबियत बिगड़ने पर डाक्टर उसे जीटी रोड स्थित एक अस्पताल ले जाने को कहा लेकिन परिजन भड़क गए और हंगामा करना शुरू किया। सूचना पर पहुंची आबू नगर पुलिस के कहने पर परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए लेकिन उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। परिजन उसे लेकर कानपुर चले गए, जहां ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर राम में ही नर्सिंग होम पहुंचे जहां जमकर हंगामा शुरू कर दिया। |
हिमालय का रामचकोर (Himalayan Snowcock) (Tetraogallus himalayensis) फ़ैज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है। यह हिमालय पर्वतमाला में व्यापक रूप से और पामीर पर्वतमाला में कुछ जगहों में पाया जाता है। यह वृक्ष रेखा से ऊपर अल्पाइन चारागाह तथा खड़ी ढाल वाली चट्टानों में पाया जाता है जहाँ से ख़तरा होने पर यह नीचे की ओर लुढ़क जाता है। तिब्बती रामचकोर इससे कुछ छोटा होता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह दोनों परस्पर व्याप्त हैं। विभिन्न इलाकों में इनकी रंगत कुछ भिन्न होती है और इस आधार पर इनको चार उपजातियों में विभाजित किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के नेवाडा राज्य में इनको प्रचलित किया गया था जहाँ इन्होंने अपने पैर जमा लिए हैं। .
25 संबंधोंः चीन, ताजिकिस्तान, तिब्बती रामचकोर, तुर्कमेनिस्तान, नेपाल, नेपाली भाषा, नेवाडा, पामीर पर्वतमाला, पाकिस्तान, पक्षी, प्राणी, फ़ारसी भाषा, भारत, रज्जुकी, संयुक्त राज्य, हिमाचल प्रदेश, हिमालय, वृक्ष रेखा, कश्मीरी भाषा, किर्गिज़स्तान, कज़ाख़िस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, अल्पाइन जलवायु, उत्तर प्रदेश, उज़्बेकिस्तान।
---- right चीन विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो एशियाई महाद्वीप के पूर्व में स्थित है। चीन की सभ्यता एवं संस्कृति छठी शताब्दी से भी पुरानी है। चीन की लिखित भाषा प्रणाली विश्व की सबसे पुरानी है जो आज तक उपयोग में लायी जा रही है और जो कई आविष्कारों का स्रोत भी है। ब्रिटिश विद्वान और जीव-रसायन शास्त्री जोसफ नीधम ने प्राचीन चीन के चार महान अविष्कार बताये जो हैंः- कागज़, कम्पास, बारूद और मुद्रण। ऐतिहासिक रूप से चीनी संस्कृति का प्रभाव पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों पर रहा है और चीनी धर्म, रिवाज़ और लेखन प्रणाली को इन देशों में अलग-अलग स्तर तक अपनाया गया है। चीन में प्रथम मानवीय उपस्थिति के प्रमाण झोऊ कोऊ दियन गुफा के समीप मिलते हैं और जो होमो इरेक्टस के प्रथम नमूने भी है जिसे हम 'पेकिंग मानव' के नाम से जानते हैं। अनुमान है कि ये इस क्षेत्र में ३,००,००० से ५,००,००० वर्ष पूर्व यहाँ रहते थे और कुछ शोधों से ये महत्वपूर्ण जानकारी भी मिली है कि पेकिंग मानव आग जलाने की और उसे नियंत्रित करने की कला जानते थे। चीन के गृह युद्ध के कारण इसके दो भाग हो गये - (१) जनवादी गणराज्य चीन जो मुख्य चीनी भूभाग पर स्थापित समाजवादी सरकार द्वारा शासित क्षेत्रों को कहते हैं। इसके अन्तर्गत चीन का बहुतायत भाग आता है। (२) चीनी गणराज्य - जो मुख्य भूमि से हटकर ताईवान सहित कुछ अन्य द्वीपों से बना देश है। इसका मुख्यालय ताइवान है। चीन की आबादी दुनिया में सर्वाधिक है। प्राचीन चीन मानव सभ्यता के सबसे पुरानी शरणस्थलियों में से एक है। वैज्ञानिक कार्बन डेटिंग के अनुसार यहाँ पर मानव २२ लाख से २५ लाख वर्ष पहले आये थे। .
अंतरिक्ष से ताजिकिस्तान का मंज़र ताज़िकिस्तान (ताजिकः Тоҷикистон,, तोजिकिस्तोन) मध्य एशिया मे स्थित एक देश है जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा (स्थलवेष्ठित) है। यह पहले सोवियत संघ का हिस्सा था और उस देश के विघटन के बाद सन् १९९१ में एक स्वतंत्र देश बना। १९९२-९७ के काल में गृहयुद्धों की मार झेल चुके इस देश की कूटनीतिक-भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह उज़बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, किर्गिज़स्तान तथा चीन के मध्य स्थित है। इसके अलावा पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से इसे केवल अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त का पतला-सा वाख़ान गलियारा ही अलग करता है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा को ताजिक कहा जाता है जो फ़ारसी भाषा का एक रूप माना जाता है। इस भाषा को सीरीलिक अक्षरों में लिखा जाता है जिसमें रूसी तथा कुछ अन्य भाषाएँ भी लिखी जाती हैं। .
तिब्बती रामचकोर (Tibetan Snowcock) (Tetraogallus tibetanus) फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है जो पश्चिमी हिमालय तथा तिब्बती पठार के ऊँचाई वाले इलाकों में रहता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह हिमालय के रामचकोर के साथ इलाका बांटता है। .
नेपाल, (आधिकारिक रूप में, संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल) भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित एक दक्षिण एशियाई स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के ८१ प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है। एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित हैं। संसार का सबसे ऊँची १४ हिम श्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सागरमाथा एवरेस्ट (नेपाल और चीन की सीमा पर) भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है। वर्तमान नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा के शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का एक अंश है। अंग्रेज़ों के साथ हुई संधियों में नेपाल को उस समय (१८१४ में) एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े, जो आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गये हैं। बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतांत्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंततः २००८ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडियो फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् २००६ में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था। दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। .
नेपाली भाषा के क्षेत्र नेपाली भाषा या खस कुरा नेपाल की राष्ट्रभाषा था। यह भाषा नेपाल की लगभग ४४% लोगों की मातृभाषा भी है। यह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों (आसाम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय) तथा उत्तराखण्ड के अनेक भारतीय लोगों की मातृभाषा है। भूटान, तिब्बत और म्यानमार के भी अनेक लोग यह भाषा बोलते हैं। .
मानचित्र में स्थिति नेवाडा (Nevada) संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित राज्य है। नेवादा 7वां सबसे व्यापक क्षेत्र वाला और 34वां सबसे अधिक आबादी वाला अमरीकी राज्य है। नेवादा काफी हद तक रेगिस्तान और अर्ध-शुष्क है, जिसमें से अधिकतर इलाका ग्रेट बेसिन (एक बन्द जलसम्भर) के भीतर है। ग्रेट बेसीन के दक्षिण में स्थित क्षेत्र मोहावी मरुस्थल के भीतर हैं। नेवाडा का पता लगाने वाले पहले यूरोपीय लोग स्पैनिश थे। यह क्षेत्र न्यू स्पेन नामक स्पेनी कालोनी का हिस्सा बन गया और 1821 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद मेक्सिको का हिस्सा बन गया। मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध में अपनी जीत के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1848 में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। नेवादा 31 अक्टूबर 1864 को 36वां राज्य बना। 1940 में नेवाडा की आबादी केवल 1,10,000 से थोड़ी ही अधिक थी। हालांकि जुआ वैध होने के कारण नेवादा 20वीं शताब्दी में एक प्रमुख पर्यटन स्थल में बदल गया। 2016 के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या 29,40,058 है। राज्य का सबसा बड़ा शहर लास वेगास है। .
पामीर (अंग्रेजीः Pamir Mountains, फ़ारसी), मध्य एशिया में स्थित एक प्रमुख पठार एवं पर्वत शृंखला है, जिसकी रचना हिमालय, तियन शान, काराकोरम, कुनलुन और हिन्दू कुश शृंखलाओं के संगम से हुआ है। पामीर विश्व के सबसे ऊँचे पहाड़ों में से हैं और १८वीं सदी से इन्हें 'विश्व की छत' कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें इनके चीनी नाम 'कोंगलिंग' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ उगने वाले जंगली प्याज़ के नाम पर इन्हें प्याज़ी पर्वत भी कहा जाता था।, John Navazio, pp.
इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। 20 करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर (तथाकथित आज़ाद कश्मीर) और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1970 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। .
प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' (Animalia) या मेटाज़ोआ (Metazoa) जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण (metamorphosis) की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ 542 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। .
फ़ारसी, एक भाषा है जो ईरान, ताजिकिस्तान, अफ़गानिस्तान और उज़बेकिस्तान में बोली जाती है। यह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान की राजभाषा है और इसे ७.५ करोड़ लोग बोलते हैं। भाषाई परिवार के लिहाज़ से यह हिन्द यूरोपीय परिवार की हिन्द ईरानी (इंडो ईरानियन) शाखा की ईरानी उपशाखा का सदस्य है और हिन्दी की तरह इसमें क्रिया वाक्य के अंत में आती है। फ़ारसी संस्कृत से क़ाफ़ी मिलती-जुलती है और उर्दू (और हिन्दी) में इसके कई शब्द प्रयुक्त होते हैं। ये अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखी जाती है। अंग्रेज़ों के आगमन से पहले भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा का प्रयोग दरबारी कामों तथा लेखन की भाषा के रूप में होता है। दरबार में प्रयुक्त होने के कारण ही अफ़गानिस्तान में इस दारी कहा जाता है। .
भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .
रज्जुकी (संघ कॉर्डेटा) जीवों का एक समूह है जिसमें कशेरुकी (वर्टिब्रेट) और कई निकट रूप से संबंधित अकशेरुकी (इनवर्टिब्रेट) शामिल हैं। इनका इस संघ मे शामित होना इस आधार पर सिद्ध होता है कि यह जीवन चक्र मे कभी न कभी निम्न संरचनाओं को धारण करते हैं जो हैं, एक पृष्ठरज्जु (नोटोकॉर्ड), एक खोखला पृष्ठीय तंत्रिका कॉर्ड, फैरेंजियल स्लिट एक एंडोस्टाइल और एक पोस्ट-एनल पूंछ। संघ कॉर्डेटा तीन उपसंघों मे विभाजित हैः यूरोकॉर्डेटा, जिसका प्रतिनिधित्व ट्युनिकेट्स द्वारा किया जाता है; सेफालोकॉर्डेटा, जिसका प्रतिनिधित्व लैंसलेट्स द्वारा किया जाता है और क्रेनिएटा, जिसमे वर्टिब्रेटा शामिल हैं। हेमीकॉर्डेटा को चौथे उपसंघ के रूप मे प्रस्तुत किया जाता है पर अब इसे आम तौर पर एक अलग संघ के रूप में जाना जाता है। यूरोकॉर्डेट के लार्वा में एक नोटॉकॉर्ड और एक तंत्रिका कॉर्ड पायी जाती है पर वयस्क होने पर यह लुप्त हो जातीं हैं। सेफालोकॉर्डेट एक नोटॉकॉर्ड और एक तंत्रिका कॉर्ड पायी जाती है लेकिन कोई मस्तिष्क या विशेष संवेदना अंग नहीं होता और इनका एक बहुत ही सरल परिसंचरण तंत्र होता है। क्रेनिएट ही वह उपसंघ है जिसके सदस्यों में खोपड़ी मिलती है। इनमे वास्तविक देहगुहा पाई जाती है। इनमे जनन स्तर सदैव त्री स्तरीय पाया जाता है। सामान्यत लैंगिक जनन पाया जाता है। सामान्यत प्रत्यक्ष विकास होता है। इनमे RBC उपस्थित होती है। इनमे द्वीपार्शविय सममिती पाई जाती है। इसके जंतु अधिक विकसित होते है। श्रेणीःजीव विज्ञान *.
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands.
हिमाचल प्रदेश (अंग्रेज़ीः Himachal Pradesh, उच्चारण) उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। यह 21,629 मील² (56019 किमी²) से अधिक क्षेत्र में फ़ैला है तथा उत्तर में जम्मू कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में पंजाब (भारत), दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा हुआ है। हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ "बर्फ़ीले पहाड़ों का प्रांत" है। हिमाचल प्रदेश को "देव भूमि" भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है। आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद, यह ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के हाथ में आ गया। सन 1857 तक यह महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य (पंजाब हिल्स के सीबा राज्य को छोड़कर) का हिस्सा था। सन 1950 मे इसे केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, लेकिन 1971 मे इसे, हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971 के अन्तर्गत इसे 25 january 1971 को भारत का अठारहवाँ राज्य बनाया गया। हिमाचल प्रदेश की प्रतिव्यक्ति आय भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक है । बारहमासी नदियों की बहुतायत के कारण, हिमाचल अन्य राज्यों को पनबिजली बेचता है जिनमे प्रमुख हैं दिल्ली, पंजाब (भारत) और राजस्थान। राज्य की अर्थव्यवस्था तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है जो हैं, पनबिजली, पर्यटन और कृषि। हिंदु राज्य की जनसंख्या का 95% हैं और प्रमुख समुदायों मे ब्राह्मण, राजपूत, घिर्थ (चौधरी), गद्दी, कन्नेत, राठी और कोली शामिल हैं। ट्रान्सपरेन्सी इंटरनैशनल के 2005 के सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश में केरल के बाद दूसरी सबसे कम भ्रष्ट राज्य है। .
हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2400 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 7200 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान 650 लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान 450 लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है (गीताः10.25)। .
मई २००९ में सेंट मॉरिट्ज़, स्विटज़रलैंड के उपर की वृक्ष रेखा।वृक्ष रेखा, पर्यावास की वो सीमा है जहाँ पर वृक्ष उग पाने में सक्षम होते हैं। वृक्ष रेखा के पार, वृक्ष पर्यावरण की विषम परिस्थितियों जैसे कि बहुत कम तापमान, अपर्याप्त वायु दाब और/ या आर्द्रता की कमी के कारण उग पाने में असमर्थ होते हैं। कुछ मत एक अतिरिक्त गहरी काष्टरेखा की भी व्याख्या करते हैं, जहां पेड़ों के तनों का विकास संभव होता है। वृक्ष रेखा के ठीक उपर, वृक्षों का विकास अवरुद्ध रहता है और वृक्ष अक्सर घनी झाड़ियों रूप में ही उगते हैं। अगर यह हवा के कारण होता है, तो इसे क्रमहोल्ज़ के नाम से जाना जाता है, जो एक जर्मन शब्द है और जिसका अर्थ मुड़ी हुई लकड़ी है। दूर से देखने पर वृक्ष रेखा अन्य कई प्राकृतिक रेखाओं (जैसे कि किसी झील के किनारे) के समान बड़ी स्पष्ट दिखाई पड़ती है, पर अधिकतर स्थानों पर निकट से निरीक्षण करने यह संक्रमण क्रमिक होता है। जैसे जैसे हम उपर की ओर बढ़ते हैं जलवायु के विषम होने के साथ वृक्षों की ऊँचाई कम होती जाती है और एक बिन्दु पर आकर वृक्ष उगना बंद कर देते हैं। .
कश्मीरी भाषा एक भारतीय-आर्य भाषा है जो मुख्यतः कश्मीर घाटी तथा चेनाब घाटी में बोली जाती है। वर्ष २००१ की जनगणना के अनुसार भारत में इसके बोलने वालों की संख्या लगभग ५६ लाख है। पाक-अधिकृत कश्मीर में १९९८ की जनगणना के अनुसार लगभग १ लाख कश्मीरी भाषा बोलने वाले हैं। कश्मीर की वितस्ता घाटी के अतिरिक्त उत्तर में ज़ोजीला और बर्ज़ल तक तथा दक्षिण में बानहाल से परे किश्तवाड़ (जम्मू प्रांत) की छोटी उपत्यका तक इस भाषा के बोलने वाले हैं। कश्मीरी, जम्मू प्रांत के बानहाल, रामबन तथा भद्रवाह में भी बोली जाती है। प्रधान उपभाषा किश्तवाड़ की "कश्तवाडी" है। कश्मीर की भाषा कश्मीरी (कोशुर) है ये कश्मीर में वर्तमान समय में बोली जाने वाली भाषा है। कश्मीरी भाषा के लिए विभिन्न लिपियों का उपयोग किया गया है, जिसमें मुख्य लिपियां हैं- शारदा, देवनागरी, रोमन और परशो-अरबी है। कश्मीर वादी के उत्तर और पश्चिम में बोली जाने वाली भाषाएं - दर्ददी, श्रीन्या, कोहवाड़ कश्मीरी भाषा के उलट थीं। यह भाषा इंडो-आर्यन और हिंदुस्तानी-ईरानी भाषा के समान है। भाषाविदों का मानना है कि कश्मीर के पहाड़ों में रहने वाले पूर्व नागावासी जैसे गंधर्व, यक्ष और किन्नर आदि,बहुत पहले ही मूल आर्यन से अलग हो गए। इसी तरह कश्मीरी भाषा को आर्य भाषा जैसा बनने में बहुत समय लगा। नागा भाषा स्वतः ही विकसित हुई है इस सब के बावजूद, कश्मीरी भाषा ने अपनी विशिष्ट स्वर शैली को बनाए रखा और 8 वीं-9 वीं शताब्दी में अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं की तरह, कई चरणों से गुजरना पड़ा। .
किर्ग़िज़स्तान, आधिकारिक तौर पर किर्ग़िज़ गणतंत्र, मध्य एशिया में स्थित एक देश है। चारों तरफ जमीन और पहाड़ियों से घिरे इस देश की सीमा उत्तर में कज़ाख़िस्तान, पश्चिम में उज़्बेकिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ताजिकिस्तान और पूर्व में चीन से मिलती है। "किरगिज़", जिससे देश का नाम पड़ा है, शब्द की उत्पति मूलतः "चालीस लड़कियां" या फिर "चालीस जनजातियां" मानी जाती है। जो संभवतः महानायक मानस की ओर इंगित करती हैं, जिन्होंने किंवदंती के अनुसार, खितान के खिलाफ चालीस जनजातियों को एकजुट किया था। किर्ग़िज़स्तान के झंडे में सूर्य की चालीस किरणें मानस के इन्हीं चालीस जनजातियों का प्रतीक हैं। .
क़ज़ाख़स्तान (क़ज़ाख़ः Қазақстан / Qazaqstan, रूसीःКазахстан / Kazakhstán) यूरेशिया में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल के आधार से ये दुनिया का नवाँ सबसे बड़ा देश है। एशिया में एक बड़े भूभाग में फैला हुआ यह देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के उपरांत इसने सबसे अंत में अपने आपको स्वतंत्र घोषित किया। सोवियत प्रशासन के दौरान यहाँ कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ संपन्न हुईं, जिसमें कई रॉकेटों का प्रक्षेपण से लेकर क्रुश्चेव का वर्ज़िन भूमि परियोजना शामिल हैं। देश की अधिकाँश भूमि स्तेपी घास मैदान, जंगल तथा पहाड़ी क्षेत्रों से ढकी है। यहाँ के मुख्य निवासी क़ज़ाख़ लोग हैं जो तुर्क मूल के हैं। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में कज़ाख़स्तान की भूमि यायावर जातियों के साम्राज्य का हिस्सा रही है। इसकी राजधानी सन १९९८ में अस्ताना को बनाई गई जो सोवियत कालीन राजधानी अल्माती से बदलकर बनाई गई थी। यहां की क़ाज़ाक़ भाषा और रूसी भाषा मुख्य- और राजभाषाएँ हैं। .
अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है। अफ़ग़ानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का8 एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत 3000 से 2,000 ई.पू.
कैलिफोर्निया के व्हाइट पहाड़ों में अल्पाइन जलवायु अल्पाइन जलवायु उस ऊँचाई की जलवायु को कहते हैं जो वृक्ष रेखा के ऊपर हो। किसी जगह की जलवायु अल्पाइन है तभी कहा जा सकता है जब वहाँ किसी भी महीने का औसत तापमान १०° सेल्सियस से ऊपर नहीं होता है। .
आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
एशिया के केन्द्रीय भाग में स्थित एक देश है जो चारो ओर से जमीन से घिरा है। इतना ही नहीं, इसके चहुँदिश के देश की खुद भी समुद्र तक कोई पहुँच नहीं है। इसके उत्तर में कज़ाख़िस्तान, पूरब में ताज़िकिस्तान दक्षिण में तुर्कमेनिस्तान और अफ़गानिस्तान स्थित है। यह 1991 तक सोवियत संघ का एक घटक था। उज़्बेकिस्तान के प्रमुख शहरों में राजधानी ताशकंत के अलावा समरकंद तथा बुख़ारा का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। यहाँ के मूल निवासी मुख्यतः उज़्बेक नस्ल के हैं, जो बोलचाल में उज्बेक भाषा का प्रयोग करते हैं। .
| हिमालय का रामचकोर फ़ैज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है। यह हिमालय पर्वतमाला में व्यापक रूप से और पामीर पर्वतमाला में कुछ जगहों में पाया जाता है। यह वृक्ष रेखा से ऊपर अल्पाइन चारागाह तथा खड़ी ढाल वाली चट्टानों में पाया जाता है जहाँ से ख़तरा होने पर यह नीचे की ओर लुढ़क जाता है। तिब्बती रामचकोर इससे कुछ छोटा होता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह दोनों परस्पर व्याप्त हैं। विभिन्न इलाकों में इनकी रंगत कुछ भिन्न होती है और इस आधार पर इनको चार उपजातियों में विभाजित किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के नेवाडा राज्य में इनको प्रचलित किया गया था जहाँ इन्होंने अपने पैर जमा लिए हैं। . पच्चीस संबंधोंः चीन, ताजिकिस्तान, तिब्बती रामचकोर, तुर्कमेनिस्तान, नेपाल, नेपाली भाषा, नेवाडा, पामीर पर्वतमाला, पाकिस्तान, पक्षी, प्राणी, फ़ारसी भाषा, भारत, रज्जुकी, संयुक्त राज्य, हिमाचल प्रदेश, हिमालय, वृक्ष रेखा, कश्मीरी भाषा, किर्गिज़स्तान, कज़ाख़िस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, अल्पाइन जलवायु, उत्तर प्रदेश, उज़्बेकिस्तान। ---- right चीन विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो एशियाई महाद्वीप के पूर्व में स्थित है। चीन की सभ्यता एवं संस्कृति छठी शताब्दी से भी पुरानी है। चीन की लिखित भाषा प्रणाली विश्व की सबसे पुरानी है जो आज तक उपयोग में लायी जा रही है और जो कई आविष्कारों का स्रोत भी है। ब्रिटिश विद्वान और जीव-रसायन शास्त्री जोसफ नीधम ने प्राचीन चीन के चार महान अविष्कार बताये जो हैंः- कागज़, कम्पास, बारूद और मुद्रण। ऐतिहासिक रूप से चीनी संस्कृति का प्रभाव पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों पर रहा है और चीनी धर्म, रिवाज़ और लेखन प्रणाली को इन देशों में अलग-अलग स्तर तक अपनाया गया है। चीन में प्रथम मानवीय उपस्थिति के प्रमाण झोऊ कोऊ दियन गुफा के समीप मिलते हैं और जो होमो इरेक्टस के प्रथम नमूने भी है जिसे हम 'पेकिंग मानव' के नाम से जानते हैं। अनुमान है कि ये इस क्षेत्र में तीन,शून्य,शून्य से पाँच,शून्य,शून्य वर्ष पूर्व यहाँ रहते थे और कुछ शोधों से ये महत्वपूर्ण जानकारी भी मिली है कि पेकिंग मानव आग जलाने की और उसे नियंत्रित करने की कला जानते थे। चीन के गृह युद्ध के कारण इसके दो भाग हो गये - जनवादी गणराज्य चीन जो मुख्य चीनी भूभाग पर स्थापित समाजवादी सरकार द्वारा शासित क्षेत्रों को कहते हैं। इसके अन्तर्गत चीन का बहुतायत भाग आता है। चीनी गणराज्य - जो मुख्य भूमि से हटकर ताईवान सहित कुछ अन्य द्वीपों से बना देश है। इसका मुख्यालय ताइवान है। चीन की आबादी दुनिया में सर्वाधिक है। प्राचीन चीन मानव सभ्यता के सबसे पुरानी शरणस्थलियों में से एक है। वैज्ञानिक कार्बन डेटिंग के अनुसार यहाँ पर मानव बाईस लाख से पच्चीस लाख वर्ष पहले आये थे। . अंतरिक्ष से ताजिकिस्तान का मंज़र ताज़िकिस्तान मध्य एशिया मे स्थित एक देश है जो चारों ओर से ज़मीन से घिरा है। यह पहले सोवियत संघ का हिस्सा था और उस देश के विघटन के बाद सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में एक स्वतंत्र देश बना। एक हज़ार नौ सौ बानवे-सत्तानवे के काल में गृहयुद्धों की मार झेल चुके इस देश की कूटनीतिक-भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह उज़बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, किर्गिज़स्तान तथा चीन के मध्य स्थित है। इसके अलावा पाकिस्तान के उत्तरी इलाके से इसे केवल अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रान्त का पतला-सा वाख़ान गलियारा ही अलग करता है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा को ताजिक कहा जाता है जो फ़ारसी भाषा का एक रूप माना जाता है। इस भाषा को सीरीलिक अक्षरों में लिखा जाता है जिसमें रूसी तथा कुछ अन्य भाषाएँ भी लिखी जाती हैं। . तिब्बती रामचकोर फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है जो पश्चिमी हिमालय तथा तिब्बती पठार के ऊँचाई वाले इलाकों में रहता है और हिमालय के कुछ इलाकों में यह हिमालय के रामचकोर के साथ इलाका बांटता है। . नेपाल, भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित एक दक्षिण एशियाई स्थलरुद्ध हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वायत्तशासी प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल के इक्यासी प्रतिशत नागरिक हिन्दू धर्मावलम्बी हैं। नेपाल विश्व का प्रतिशत आधार पर सबसे बड़ा हिन्दू धर्मावलम्बी राष्ट्र है। नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है। एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्ण फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित हैं। संसार का सबसे ऊँची चौदह हिम श्रृंखलाओं में से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सागरमाथा एवरेस्ट भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बड़ा नगर काठमांडू है। काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर , भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगंज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगंज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है। वर्तमान नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा के शाह वंशीय राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का एक अंश है। अंग्रेज़ों के साथ हुई संधियों में नेपाल को उस समय एक तिहाई नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े, जो आज भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गये हैं। बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतांत्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए। अंततः दो हज़ार आठ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से यह आन्दोलन समाप्त हुआ। लेकिन सेना अध्यक्ष के निष्कासन को लेकर राष्ट्रपति से हुए मतभेद और टीवी पर सेना में माओवादियों की नियुक्ति को लेकर वीडियो फुटेज के प्रसारण के बाद सरकार से सहयोगी दलों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद प्रचण्ड को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने से पहले सन् दो हज़ार छः में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था। दक्षिण एशिया में नेपाल की सेना पांचवीं सबसे बड़ी सेना है और विशेषकर विश्व युद्धों के दौरान, अपने गोरखा इतिहास के लिए उल्लेखनीय रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है। . नेपाली भाषा के क्षेत्र नेपाली भाषा या खस कुरा नेपाल की राष्ट्रभाषा था। यह भाषा नेपाल की लगभग चौंतालीस% लोगों की मातृभाषा भी है। यह भाषा नेपाल के अतिरिक्त भारत के सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों तथा उत्तराखण्ड के अनेक भारतीय लोगों की मातृभाषा है। भूटान, तिब्बत और म्यानमार के भी अनेक लोग यह भाषा बोलते हैं। . मानचित्र में स्थिति नेवाडा संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित राज्य है। नेवादा सातवां सबसे व्यापक क्षेत्र वाला और चौंतीसवां सबसे अधिक आबादी वाला अमरीकी राज्य है। नेवादा काफी हद तक रेगिस्तान और अर्ध-शुष्क है, जिसमें से अधिकतर इलाका ग्रेट बेसिन के भीतर है। ग्रेट बेसीन के दक्षिण में स्थित क्षेत्र मोहावी मरुस्थल के भीतर हैं। नेवाडा का पता लगाने वाले पहले यूरोपीय लोग स्पैनिश थे। यह क्षेत्र न्यू स्पेन नामक स्पेनी कालोनी का हिस्सा बन गया और एक हज़ार आठ सौ इक्कीस में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद मेक्सिको का हिस्सा बन गया। मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध में अपनी जीत के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। नेवादा इकतीस अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ चौंसठ को छत्तीसवां राज्य बना। एक हज़ार नौ सौ चालीस में नेवाडा की आबादी केवल एक,दस,शून्य से थोड़ी ही अधिक थी। हालांकि जुआ वैध होने के कारण नेवादा बीसवीं शताब्दी में एक प्रमुख पर्यटन स्थल में बदल गया। दो हज़ार सोलह के अनुमान के मुताबिक राज्य की जनसंख्या उनतीस,चालीस,अट्ठावन है। राज्य का सबसा बड़ा शहर लास वेगास है। . पामीर , मध्य एशिया में स्थित एक प्रमुख पठार एवं पर्वत शृंखला है, जिसकी रचना हिमालय, तियन शान, काराकोरम, कुनलुन और हिन्दू कुश शृंखलाओं के संगम से हुआ है। पामीर विश्व के सबसे ऊँचे पहाड़ों में से हैं और अट्ठारहवीं सदी से इन्हें 'विश्व की छत' कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें इनके चीनी नाम 'कोंगलिंग' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ उगने वाले जंगली प्याज़ के नाम पर इन्हें प्याज़ी पर्वत भी कहा जाता था।, John Navazio, pp. इस्लामी जम्हूरिया पाकिस्तान या पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ़ पाकिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। बीस करोड़ की आबादी के साथ ये दुनिया का छठा बड़ी आबादी वाला देश है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर रावलपिंडी हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैंः पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा। क़बाइली इलाक़े और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। इन के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित हैं हालाँकि भारत इन्हें अपना भाग मानता है। पाकिस्तान का जन्म सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् एक हज़ार नौ सौ तीस में कवि मुहम्मद इक़बाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का ज़िक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफ़गान को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् एक हज़ार नौ सौ तैंतीस में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान शब्द का सृजन किया। सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से एक हज़ार नौ सौ सत्तर तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा - पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान पाकिस्तान रह गया। . प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' या मेटाज़ोआ जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं। अधिकतम ज्ञात जंतु संघ पाँच सौ बयालीस करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए। . फ़ारसी, एक भाषा है जो ईरान, ताजिकिस्तान, अफ़गानिस्तान और उज़बेकिस्तान में बोली जाती है। यह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, ताजिकिस्तान की राजभाषा है और इसे सात.पाँच करोड़ लोग बोलते हैं। भाषाई परिवार के लिहाज़ से यह हिन्द यूरोपीय परिवार की हिन्द ईरानी शाखा की ईरानी उपशाखा का सदस्य है और हिन्दी की तरह इसमें क्रिया वाक्य के अंत में आती है। फ़ारसी संस्कृत से क़ाफ़ी मिलती-जुलती है और उर्दू में इसके कई शब्द प्रयुक्त होते हैं। ये अरबी-फ़ारसी लिपि में लिखी जाती है। अंग्रेज़ों के आगमन से पहले भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा का प्रयोग दरबारी कामों तथा लेखन की भाषा के रूप में होता है। दरबार में प्रयुक्त होने के कारण ही अफ़गानिस्तान में इस दारी कहा जाता है। . भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . रज्जुकी जीवों का एक समूह है जिसमें कशेरुकी और कई निकट रूप से संबंधित अकशेरुकी शामिल हैं। इनका इस संघ मे शामित होना इस आधार पर सिद्ध होता है कि यह जीवन चक्र मे कभी न कभी निम्न संरचनाओं को धारण करते हैं जो हैं, एक पृष्ठरज्जु , एक खोखला पृष्ठीय तंत्रिका कॉर्ड, फैरेंजियल स्लिट एक एंडोस्टाइल और एक पोस्ट-एनल पूंछ। संघ कॉर्डेटा तीन उपसंघों मे विभाजित हैः यूरोकॉर्डेटा, जिसका प्रतिनिधित्व ट्युनिकेट्स द्वारा किया जाता है; सेफालोकॉर्डेटा, जिसका प्रतिनिधित्व लैंसलेट्स द्वारा किया जाता है और क्रेनिएटा, जिसमे वर्टिब्रेटा शामिल हैं। हेमीकॉर्डेटा को चौथे उपसंघ के रूप मे प्रस्तुत किया जाता है पर अब इसे आम तौर पर एक अलग संघ के रूप में जाना जाता है। यूरोकॉर्डेट के लार्वा में एक नोटॉकॉर्ड और एक तंत्रिका कॉर्ड पायी जाती है पर वयस्क होने पर यह लुप्त हो जातीं हैं। सेफालोकॉर्डेट एक नोटॉकॉर्ड और एक तंत्रिका कॉर्ड पायी जाती है लेकिन कोई मस्तिष्क या विशेष संवेदना अंग नहीं होता और इनका एक बहुत ही सरल परिसंचरण तंत्र होता है। क्रेनिएट ही वह उपसंघ है जिसके सदस्यों में खोपड़ी मिलती है। इनमे वास्तविक देहगुहा पाई जाती है। इनमे जनन स्तर सदैव त्री स्तरीय पाया जाता है। सामान्यत लैंगिक जनन पाया जाता है। सामान्यत प्रत्यक्ष विकास होता है। इनमे RBC उपस्थित होती है। इनमे द्वीपार्शविय सममिती पाई जाती है। इसके जंतु अधिक विकसित होते है। श्रेणीःजीव विज्ञान *. संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. हिमाचल प्रदेश उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। यह इक्कीस,छः सौ उनतीस मील² से अधिक क्षेत्र में फ़ैला है तथा उत्तर में जम्मू कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में पंजाब , दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा हुआ है। हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ "बर्फ़ीले पहाड़ों का प्रांत" है। हिमाचल प्रदेश को "देव भूमि" भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है। आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद, यह ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के हाथ में आ गया। सन एक हज़ार आठ सौ सत्तावन तक यह महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य का हिस्सा था। सन एक हज़ार नौ सौ पचास मे इसे केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया, लेकिन एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर मे इसे, हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के अन्तर्गत इसे पच्चीस january एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर को भारत का अठारहवाँ राज्य बनाया गया। हिमाचल प्रदेश की प्रतिव्यक्ति आय भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक है । बारहमासी नदियों की बहुतायत के कारण, हिमाचल अन्य राज्यों को पनबिजली बेचता है जिनमे प्रमुख हैं दिल्ली, पंजाब और राजस्थान। राज्य की अर्थव्यवस्था तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है जो हैं, पनबिजली, पर्यटन और कृषि। हिंदु राज्य की जनसंख्या का पचानवे% हैं और प्रमुख समुदायों मे ब्राह्मण, राजपूत, घिर्थ , गद्दी, कन्नेत, राठी और कोली शामिल हैं। ट्रान्सपरेन्सी इंटरनैशनल के दो हज़ार पाँच के सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश में केरल के बाद दूसरी सबसे कम भ्रष्ट राज्य है। . हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियों- महान हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग दो हज़ार चार सौ कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत पाँच देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान और चीन। अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के एक सौ सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में एक सौ से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो सात हज़ार दो सौ मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। हिमालय श्रेणी में पंद्रह हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो बारह हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। बहत्तर किलोग्राममीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। भूनिर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्र प्लेटों के एशियाई प्लेट में टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान छः सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान चार सौ पचास लाख वर्ष पूर्व हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश, कैलाश, मानसरोवर तथा अमरनाथ प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ गीता में भी इसका उल्लेख मिलता है । . मई दो हज़ार नौ में सेंट मॉरिट्ज़, स्विटज़रलैंड के उपर की वृक्ष रेखा।वृक्ष रेखा, पर्यावास की वो सीमा है जहाँ पर वृक्ष उग पाने में सक्षम होते हैं। वृक्ष रेखा के पार, वृक्ष पर्यावरण की विषम परिस्थितियों जैसे कि बहुत कम तापमान, अपर्याप्त वायु दाब और/ या आर्द्रता की कमी के कारण उग पाने में असमर्थ होते हैं। कुछ मत एक अतिरिक्त गहरी काष्टरेखा की भी व्याख्या करते हैं, जहां पेड़ों के तनों का विकास संभव होता है। वृक्ष रेखा के ठीक उपर, वृक्षों का विकास अवरुद्ध रहता है और वृक्ष अक्सर घनी झाड़ियों रूप में ही उगते हैं। अगर यह हवा के कारण होता है, तो इसे क्रमहोल्ज़ के नाम से जाना जाता है, जो एक जर्मन शब्द है और जिसका अर्थ मुड़ी हुई लकड़ी है। दूर से देखने पर वृक्ष रेखा अन्य कई प्राकृतिक रेखाओं के समान बड़ी स्पष्ट दिखाई पड़ती है, पर अधिकतर स्थानों पर निकट से निरीक्षण करने यह संक्रमण क्रमिक होता है। जैसे जैसे हम उपर की ओर बढ़ते हैं जलवायु के विषम होने के साथ वृक्षों की ऊँचाई कम होती जाती है और एक बिन्दु पर आकर वृक्ष उगना बंद कर देते हैं। . कश्मीरी भाषा एक भारतीय-आर्य भाषा है जो मुख्यतः कश्मीर घाटी तथा चेनाब घाटी में बोली जाती है। वर्ष दो हज़ार एक की जनगणना के अनुसार भारत में इसके बोलने वालों की संख्या लगभग छप्पन लाख है। पाक-अधिकृत कश्मीर में एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे की जनगणना के अनुसार लगभग एक लाख कश्मीरी भाषा बोलने वाले हैं। कश्मीर की वितस्ता घाटी के अतिरिक्त उत्तर में ज़ोजीला और बर्ज़ल तक तथा दक्षिण में बानहाल से परे किश्तवाड़ की छोटी उपत्यका तक इस भाषा के बोलने वाले हैं। कश्मीरी, जम्मू प्रांत के बानहाल, रामबन तथा भद्रवाह में भी बोली जाती है। प्रधान उपभाषा किश्तवाड़ की "कश्तवाडी" है। कश्मीर की भाषा कश्मीरी है ये कश्मीर में वर्तमान समय में बोली जाने वाली भाषा है। कश्मीरी भाषा के लिए विभिन्न लिपियों का उपयोग किया गया है, जिसमें मुख्य लिपियां हैं- शारदा, देवनागरी, रोमन और परशो-अरबी है। कश्मीर वादी के उत्तर और पश्चिम में बोली जाने वाली भाषाएं - दर्ददी, श्रीन्या, कोहवाड़ कश्मीरी भाषा के उलट थीं। यह भाषा इंडो-आर्यन और हिंदुस्तानी-ईरानी भाषा के समान है। भाषाविदों का मानना है कि कश्मीर के पहाड़ों में रहने वाले पूर्व नागावासी जैसे गंधर्व, यक्ष और किन्नर आदि,बहुत पहले ही मूल आर्यन से अलग हो गए। इसी तरह कश्मीरी भाषा को आर्य भाषा जैसा बनने में बहुत समय लगा। नागा भाषा स्वतः ही विकसित हुई है इस सब के बावजूद, कश्मीरी भाषा ने अपनी विशिष्ट स्वर शैली को बनाए रखा और आठ वीं-नौ वीं शताब्दी में अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं की तरह, कई चरणों से गुजरना पड़ा। . किर्ग़िज़स्तान, आधिकारिक तौर पर किर्ग़िज़ गणतंत्र, मध्य एशिया में स्थित एक देश है। चारों तरफ जमीन और पहाड़ियों से घिरे इस देश की सीमा उत्तर में कज़ाख़िस्तान, पश्चिम में उज़्बेकिस्तान, दक्षिण पश्चिम में ताजिकिस्तान और पूर्व में चीन से मिलती है। "किरगिज़", जिससे देश का नाम पड़ा है, शब्द की उत्पति मूलतः "चालीस लड़कियां" या फिर "चालीस जनजातियां" मानी जाती है। जो संभवतः महानायक मानस की ओर इंगित करती हैं, जिन्होंने किंवदंती के अनुसार, खितान के खिलाफ चालीस जनजातियों को एकजुट किया था। किर्ग़िज़स्तान के झंडे में सूर्य की चालीस किरणें मानस के इन्हीं चालीस जनजातियों का प्रतीक हैं। . क़ज़ाख़स्तान यूरेशिया में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल के आधार से ये दुनिया का नवाँ सबसे बड़ा देश है। एशिया में एक बड़े भूभाग में फैला हुआ यह देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में सोवियत संघ के विघटन के उपरांत इसने सबसे अंत में अपने आपको स्वतंत्र घोषित किया। सोवियत प्रशासन के दौरान यहाँ कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ संपन्न हुईं, जिसमें कई रॉकेटों का प्रक्षेपण से लेकर क्रुश्चेव का वर्ज़िन भूमि परियोजना शामिल हैं। देश की अधिकाँश भूमि स्तेपी घास मैदान, जंगल तथा पहाड़ी क्षेत्रों से ढकी है। यहाँ के मुख्य निवासी क़ज़ाख़ लोग हैं जो तुर्क मूल के हैं। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में कज़ाख़स्तान की भूमि यायावर जातियों के साम्राज्य का हिस्सा रही है। इसकी राजधानी सन एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में अस्ताना को बनाई गई जो सोवियत कालीन राजधानी अल्माती से बदलकर बनाई गई थी। यहां की क़ाज़ाक़ भाषा और रूसी भाषा मुख्य- और राजभाषाएँ हैं। . अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में अवस्थित देश है, जो चारो ओर से जमीन से घिरा हुआ है। प्रायः इसकी गिनती मध्य एशिया के देशों में होती है पर देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्व तो कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है। अफ़ग़ानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास काआठ एक प्राचीन केन्द्र बिन्दु रहा है। पुरातत्वविदों को मध्य पाषाण काल के मानव बस्ती के साक्ष्य मिले हैं। इस क्षेत्र में नगरीय सभ्यता की शुरुआत तीन हज़ार से दो,शून्य ई.पू. कैलिफोर्निया के व्हाइट पहाड़ों में अल्पाइन जलवायु अल्पाइन जलवायु उस ऊँचाई की जलवायु को कहते हैं जो वृक्ष रेखा के ऊपर हो। किसी जगह की जलवायु अल्पाइन है तभी कहा जा सकता है जब वहाँ किसी भी महीने का औसत तापमान दस° सेल्सियस से ऊपर नहीं होता है। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . एशिया के केन्द्रीय भाग में स्थित एक देश है जो चारो ओर से जमीन से घिरा है। इतना ही नहीं, इसके चहुँदिश के देश की खुद भी समुद्र तक कोई पहुँच नहीं है। इसके उत्तर में कज़ाख़िस्तान, पूरब में ताज़िकिस्तान दक्षिण में तुर्कमेनिस्तान और अफ़गानिस्तान स्थित है। यह एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे तक सोवियत संघ का एक घटक था। उज़्बेकिस्तान के प्रमुख शहरों में राजधानी ताशकंत के अलावा समरकंद तथा बुख़ारा का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। यहाँ के मूल निवासी मुख्यतः उज़्बेक नस्ल के हैं, जो बोलचाल में उज्बेक भाषा का प्रयोग करते हैं। . |
विरुद्धमतिकृत, यथा
सो विरुद्धमतिकृत सुने लगे बिरुद्ध विसेषि । भाल अंबिकारमन के बाल सुधाकर देखि ॥ २८ ॥ पुनः, यथा
काम गरीवनि को करें, जे अकाज के मित्र । जो मॉगिय सो पाइये, ते धनि पुरुष बिचित्र ॥ २६ ॥ स्य तिलक
कहिये, धाकर नीच ब्राह्मन कोँ कहिये ताते बिरुद्धमतिकृत भयो । दूसरे दोहा मो जो जो बाद स्तुति की को है सबमें निंदा प्रगट ही है । २६ अ ॥
इति शब्ददोष
अथ चाक्य दोष (छप्पय )
प्रतिकूलाक्षर जानि मानि हृतवृत्त विसध्यनि । न्यूनाधिक पद कथितसद पुनि पतितप्रकर्पनि । तजि समाप्त पुनरात चरनअंतरगतपद गहि । पुनि अभवन्मतजोग जानि अकथितकथनीयहि । पदप्रस्थानस्थ सॅकीरनो, गर्मित अमतपरारथहि । पुनि प्रक्रमभग प्रसिद्धहत, छ दस वाक्य-दूपन तजहि ।।३०।। प्रतिकूलाचर, यथा - ( दोहा )
अक्षर नहि रसजोग्य सो प्रतिकूलाक्षर ठट्टि । पिय तिय लुट्टत हैं सुरस ठट्ट लपट्टि लपट्टि ॥३१॥ अस्य तिलक
ऐसे अक्षर रुद्ररस में चाहिये सो सिँगार में धो । ३१ अ ।।
[ २८ ] बिसेपि - बिसेषु ( भारत, वेंक०, वेल ० ) । देखि-देख ( बद्दी ) । [ २६ ] को-के ( भारत, वेंक०, बेल० ) । जै-जे ( वही ) । [२६] कहिये० - कहि तु धाकर ( भारत, वेंक ० ) । नीच-नीचे ( वही ) । [ ३० ] छ दस० -छद सवाक्य ( भारत, वेंक०, वेल० ) ।
३१ ] रस० - वद जोग सौं ( भारत, वेफ० वेल ) । ठ-ठट्ट ( वही ) । [३१] सो - X (भारत, वेंक० ) । | विरुद्धमतिकृत, यथा सो विरुद्धमतिकृत सुने लगे बिरुद्ध विसेषि । भाल अंबिकारमन के बाल सुधाकर देखि ॥ अट्ठाईस ॥ पुनः, यथा काम गरीवनि को करें, जे अकाज के मित्र । जो मॉगिय सो पाइये, ते धनि पुरुष बिचित्र ॥ छब्बीस ॥ स्य तिलक कहिये, धाकर नीच ब्राह्मन कोँ कहिये ताते बिरुद्धमतिकृत भयो । दूसरे दोहा मो जो जो बाद स्तुति की को है सबमें निंदा प्रगट ही है । छब्बीस अ ॥ इति शब्ददोष अथ चाक्य दोष प्रतिकूलाक्षर जानि मानि हृतवृत्त विसध्यनि । न्यूनाधिक पद कथितसद पुनि पतितप्रकर्पनि । तजि समाप्त पुनरात चरनअंतरगतपद गहि । पुनि अभवन्मतजोग जानि अकथितकथनीयहि । पदप्रस्थानस्थ सॅकीरनो, गर्मित अमतपरारथहि । पुनि प्रक्रमभग प्रसिद्धहत, छ दस वाक्य-दूपन तजहि ।।तीस।। प्रतिकूलाचर, यथा - अक्षर नहि रसजोग्य सो प्रतिकूलाक्षर ठट्टि । पिय तिय लुट्टत हैं सुरस ठट्ट लपट्टि लपट्टि ॥इकतीस॥ अस्य तिलक ऐसे अक्षर रुद्ररस में चाहिये सो सिँगार में धो । इकतीस अ ।। [ अट्ठाईस ] बिसेपि - बिसेषु । देखि-देख । [ छब्बीस ] को-के । जै-जे । [छब्बीस] कहियेशून्य - कहि तु धाकर । नीच-नीचे । [ तीस ] छ दसशून्य -छद सवाक्य । इकतीस ] रसशून्य - वद जोग सौं । ठ-ठट्ट । [इकतीस] सो - X । |
MicroStrategy के सीईओ माइकल सैलर ने सोलाना और बिनेंस के एथेरियम के खिलाफ आने के लिए एक कठिन भविष्यवाणी की है। उनकी टिप्पणियां एथेरियम समुदाय के लिए एक बुरे समय में आती हैं, उनके कीमती प्लेटफॉर्म के साथ मर्ज में और देरी होती है।
में एक हाल ही का लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट, सायलर को क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के भविष्य पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया था, और उन्होंने कहा,
सोलाना को लॉन्च किया गया और इसे "एथेरियम किलर" के रूप में माना गया। इसने एक प्रतिक्रियावादी ब्लॉकचेन के रूप में लोकप्रियता हासिल की जिसने एथेरियम ब्लॉकचेन में पाए गए अंतराल को भर दिया। सोलाना प्रति सेकंड लगभग 60000 लेनदेन रिकॉर्ड कर सकता है, जिससे यह सबसे तेज परत-एक ब्लॉकचेन में से एक बन जाता है। यह कहीं अधिक कुशल, अत्यधिक स्केलेबल और कम शुल्क वाला ब्लॉकचेन है जो अभी भी अपने विकास में बहुत जल्दी है।
दूसरी ओर, एथेरियम, प्रमुख altcoin है और मार्केट कैप द्वारा दूसरा सबसे बड़ा क्रिप्टोक्यूरेंसी है। यह विकेंद्रीकरण में बाहर खड़ा है और एक बहुत ही कुशल एथेरियम फाउंडेशन द्वारा समर्थित है। यह बहु-श्रृंखला नेटवर्क का समर्थन करता है जो इसकी सुरक्षा से समझौता किए बिना इसकी मापनीयता में काफी सुधार करता है। ब्लॉकचेन इस साल मर्ज नामक अपनी हार्ड-फोर्क लॉन्च करने के लिए तैयार है। इथेरियम समुदाय के कई लोगों को इससे बहुत सारी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
सोलाना की तुलना में एथेरियम का एक बड़ा एनएफटी मार्केटप्लेस भी है। प्रौद्योगिकी में हाल के विकास के बावजूद, सोलाना एथेरियम के एनएफटी ट्रेडिंग वॉल्यूम से काफी पीछे है।
"इसका मतलब है कि सबसे लोकप्रिय चीज वास्तव में एक स्थिर मुद्रा डॉलर होगी। यह स्पष्ट नहीं है कि कोई ऐसा होगा जो जीतेगा, स्थिर डॉलर का वर्ग संभवतः एक से दस ट्रिलियन डॉलर का बाजार आसानी से होगा।
टिप्पणियां स्थिर मुद्रा समुदायों के लिए गर्मजोशी से स्वागत के साथ आती हैं। वर्तमान में लगभग के मार्केट कैप पर $190 बिलियन आज ऐसे सिक्कों में बहुत बड़ा निवेश है। Stablecoins को अक्सर एक्सचेंजों के बीच एक सेतु और Kraken . के मुख्य कानूनी अधिकारी मार्को सैंटोरी के रूप में उपयोग किया जाता है कहते हैं,
उन्होंने कहा, "वे तरल हैं, जो एक अन्य तत्व है जो निवेशकों के लिए स्थिर स्टॉक को आकर्षक बनाता है, और" आपको उन्हें स्थानांतरित करने के लिए एक वित्तीय सेवा कंपनी की आवश्यकता नहीं है।
| MicroStrategy के सीईओ माइकल सैलर ने सोलाना और बिनेंस के एथेरियम के खिलाफ आने के लिए एक कठिन भविष्यवाणी की है। उनकी टिप्पणियां एथेरियम समुदाय के लिए एक बुरे समय में आती हैं, उनके कीमती प्लेटफॉर्म के साथ मर्ज में और देरी होती है। में एक हाल ही का लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट, सायलर को क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के भविष्य पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया था, और उन्होंने कहा, सोलाना को लॉन्च किया गया और इसे "एथेरियम किलर" के रूप में माना गया। इसने एक प्रतिक्रियावादी ब्लॉकचेन के रूप में लोकप्रियता हासिल की जिसने एथेरियम ब्लॉकचेन में पाए गए अंतराल को भर दिया। सोलाना प्रति सेकंड लगभग साठ हज़ार लेनदेन रिकॉर्ड कर सकता है, जिससे यह सबसे तेज परत-एक ब्लॉकचेन में से एक बन जाता है। यह कहीं अधिक कुशल, अत्यधिक स्केलेबल और कम शुल्क वाला ब्लॉकचेन है जो अभी भी अपने विकास में बहुत जल्दी है। दूसरी ओर, एथेरियम, प्रमुख altcoin है और मार्केट कैप द्वारा दूसरा सबसे बड़ा क्रिप्टोक्यूरेंसी है। यह विकेंद्रीकरण में बाहर खड़ा है और एक बहुत ही कुशल एथेरियम फाउंडेशन द्वारा समर्थित है। यह बहु-श्रृंखला नेटवर्क का समर्थन करता है जो इसकी सुरक्षा से समझौता किए बिना इसकी मापनीयता में काफी सुधार करता है। ब्लॉकचेन इस साल मर्ज नामक अपनी हार्ड-फोर्क लॉन्च करने के लिए तैयार है। इथेरियम समुदाय के कई लोगों को इससे बहुत सारी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। सोलाना की तुलना में एथेरियम का एक बड़ा एनएफटी मार्केटप्लेस भी है। प्रौद्योगिकी में हाल के विकास के बावजूद, सोलाना एथेरियम के एनएफटी ट्रेडिंग वॉल्यूम से काफी पीछे है। "इसका मतलब है कि सबसे लोकप्रिय चीज वास्तव में एक स्थिर मुद्रा डॉलर होगी। यह स्पष्ट नहीं है कि कोई ऐसा होगा जो जीतेगा, स्थिर डॉलर का वर्ग संभवतः एक से दस ट्रिलियन डॉलर का बाजार आसानी से होगा। टिप्पणियां स्थिर मुद्रा समुदायों के लिए गर्मजोशी से स्वागत के साथ आती हैं। वर्तमान में लगभग के मार्केट कैप पर एक सौ नब्बे डॉलर बिलियन आज ऐसे सिक्कों में बहुत बड़ा निवेश है। Stablecoins को अक्सर एक्सचेंजों के बीच एक सेतु और Kraken . के मुख्य कानूनी अधिकारी मार्को सैंटोरी के रूप में उपयोग किया जाता है कहते हैं, उन्होंने कहा, "वे तरल हैं, जो एक अन्य तत्व है जो निवेशकों के लिए स्थिर स्टॉक को आकर्षक बनाता है, और" आपको उन्हें स्थानांतरित करने के लिए एक वित्तीय सेवा कंपनी की आवश्यकता नहीं है। |
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