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बिहार विधान परिषद के सदस्य और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के मुस्लिम नेता को पाकिस्तान से धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि फोन करने वाले छोटा शकील का नाम लिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उठने-बैठने पर आपत्ति जाहिर की। पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, धमकी वाले नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, जदयू के मुस्लिम नेता गुलाम रसूल बलियावी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। रविवार दोपहर (6 दिसंबर) करीब एक बजे उनके पास एक कॉल आया। कॉल ने खुद को डॉन छोटा शकील का भाई बताया। उसने गुलाम रसूल बलियावी से पूछा कि तुम बलियावी बोल रहे हो? एमएलसी ने हां में जवाब दिया तो सवाल पूछा गया कि तुम छोटा शकील को जानते हो? कॉलर ने जदयू नेता से कहा कि मैं पाकिस्तान से छोटा शकील का भाई बोल रहा हूं। तुम बहुत जल्दी जान जाओगे कि छोटा शकील कौन है। आजकल संघ के लोगों के साथ बहुत ज्यादा उठना-बैठना हो रहा है। फोन पर पाकिस्तान, छोटा शकील और धमकी आदि से गुलाम रसूल बलियावी बेहद डर गए। उन्होंने पटना के कोतवाली थाने में मामले की शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली थाना प्रभारी ने मामले की पुष्टि की है। साथ ही, मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने संदिग्ध नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया है, लेकिन जिस नंबर से एमएलसी को फोन आया, उसे बताने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि वह नंबर अभी नहीं बताया जा सकता है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बिहार विधान परिषद के सदस्य और जनता दल यूनाइटेड के मुस्लिम नेता को पाकिस्तान से धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि फोन करने वाले छोटा शकील का नाम लिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उठने-बैठने पर आपत्ति जाहिर की। पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, धमकी वाले नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, जदयू के मुस्लिम नेता गुलाम रसूल बलियावी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। रविवार दोपहर करीब एक बजे उनके पास एक कॉल आया। कॉल ने खुद को डॉन छोटा शकील का भाई बताया। उसने गुलाम रसूल बलियावी से पूछा कि तुम बलियावी बोल रहे हो? एमएलसी ने हां में जवाब दिया तो सवाल पूछा गया कि तुम छोटा शकील को जानते हो? कॉलर ने जदयू नेता से कहा कि मैं पाकिस्तान से छोटा शकील का भाई बोल रहा हूं। तुम बहुत जल्दी जान जाओगे कि छोटा शकील कौन है। आजकल संघ के लोगों के साथ बहुत ज्यादा उठना-बैठना हो रहा है। फोन पर पाकिस्तान, छोटा शकील और धमकी आदि से गुलाम रसूल बलियावी बेहद डर गए। उन्होंने पटना के कोतवाली थाने में मामले की शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली थाना प्रभारी ने मामले की पुष्टि की है। साथ ही, मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने संदिग्ध नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया है, लेकिन जिस नंबर से एमएलसी को फोन आया, उसे बताने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि वह नंबर अभी नहीं बताया जा सकता है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Don't Miss! कमबैक का मतलब धमाका..और धमाका मतलब ये स्टार..CLEAR है! इन टीवी स्टार्स की अगर सीरियल में फिर से वापसी होती है तो कमाल हो जाएगा। टेलिवीज़न जगत से आपको खुशखबरी तो मिल ही गई होगी कि लंबे समय से सीरियल से दूर रहने वाले वरुण सोबती एक बार फिर कमबैक करने को तैयार हैं। जी हां..वही वरुण सोबती जिन्हें आप टीवी सीरियल 'इस प्यार को क्या नाम दूं' में अरनव सिंह रायज़ादा के किरदार में देखा करते थे। जब ये सीरियल आता था तब उनकी फैन फॉलोइंग काफी बढ़ गई थी। खुशी कुमार गुप्ता और अरनब सिंह रायज़ादा की जोड़ी को लोगों ने काफी पसंद किया था। अब जैसे ही उनके कमबैक की खबरें सामने आई हैं उनके फैन्स वाकई में काफी खुश हो जाएंगे। अब उनके कमबैक की खबरों से हमारे ज़हन में वो सभी एक्टर आ गए जो अपने सीरियल में काफी हिट हुए लेकिन उसके बाद से कैमरे से कोसो दूर हो गए। अब अगर ये स्टार टीवी पर कमबैक करते हैं तो उन्हें लोग फिर से देखने में काफी दिलचस्पी दिखाएंगे..अाइए डालते हैं एक नज़र.. These Tv actors should come back again in serials.
Don't Miss! कमबैक का मतलब धमाका..और धमाका मतलब ये स्टार..CLEAR है! इन टीवी स्टार्स की अगर सीरियल में फिर से वापसी होती है तो कमाल हो जाएगा। टेलिवीज़न जगत से आपको खुशखबरी तो मिल ही गई होगी कि लंबे समय से सीरियल से दूर रहने वाले वरुण सोबती एक बार फिर कमबैक करने को तैयार हैं। जी हां..वही वरुण सोबती जिन्हें आप टीवी सीरियल 'इस प्यार को क्या नाम दूं' में अरनव सिंह रायज़ादा के किरदार में देखा करते थे। जब ये सीरियल आता था तब उनकी फैन फॉलोइंग काफी बढ़ गई थी। खुशी कुमार गुप्ता और अरनब सिंह रायज़ादा की जोड़ी को लोगों ने काफी पसंद किया था। अब जैसे ही उनके कमबैक की खबरें सामने आई हैं उनके फैन्स वाकई में काफी खुश हो जाएंगे। अब उनके कमबैक की खबरों से हमारे ज़हन में वो सभी एक्टर आ गए जो अपने सीरियल में काफी हिट हुए लेकिन उसके बाद से कैमरे से कोसो दूर हो गए। अब अगर ये स्टार टीवी पर कमबैक करते हैं तो उन्हें लोग फिर से देखने में काफी दिलचस्पी दिखाएंगे..अाइए डालते हैं एक नज़र.. These Tv actors should come back again in serials.
कुल्लू, 24 अगस्त। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज जिला कुल्लू के ढालपुर मैदान में मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना-राज्य स्तरीय लाभार्थी संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर ढालपुर मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना तथा मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 160 करोड़ रुपये व्यय कर 4. 72 लाख निःशुल्क गैस कनैक्शन प्रदान करने के उपरान्त हिमाचल प्रदेश देशभर में पहला ऐसा राज्य बना है जहां हर घर में एलपीजी कनैक्शन उपलब्ध है। जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना और उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत गैस कनैक्शन सहित तीन रीफिल निःशुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इस योजना के लिए 70 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। योजना के अन्तर्गत 2 लाख 51 हजार लाभार्थियों को एक और 40 हजार लाभार्थियों को दो अतिरिक्त निःशुल्क रीफिल प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके कल्याणार्थ अनेक कारगर कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार हर महिला को 60 वर्ष की आयु से बिना किसी आय सीमा के सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। प्रदेश में महिलाओं को हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में किराए में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिवहन निगम की बसों में प्रतिदिन यात्रा करने वाली लगभग एक लाख 25 हजार महिलाओं को इस योजना से लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना पर प्रदेश सरकार लगभग 60 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, आशावर्कर सहित सभी विभागों में कार्य कर रहे पैरा वर्कर के मानदेय में प्रदेश भाजपा सरकार ने 900 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक की बढ़ोतरी की है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी स्वयं सहायता समूहों की दो लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीपीएल परिवार की बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री शगुन योजना के अन्तर्गत 31,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से अभी तक प्रदेश में 6,626 बेटियों की शादी पर लगभग 20. 54 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत ही बेसहारा लड़कियों के विवाह पर दिए जाने वाले अनुदान को वर्तमान प्रदेश सरकार ने 31,000 रुपये से बढ़ाकर 51,000 रुपये किया है। विधवा पुनर्विवाह योजना के अन्तर्गत भी प्रदेश सरकार 65,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं को स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना के अन्तर्गत महिला उद्यमियों को 35 प्रतिशत तक उपदान का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में बेटी है अनमोल योजना के अन्तर्गत 1 लाख 36 हजार 920 लाभार्थियों को 40. 86 करोड़ रुपये की सहायता, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत छः लाख से अधिक लाभार्थियों को लगभग 100 करोड़ रुपये, मदर टेरेसा असहाय मातृ संबल योजना के तहत 96,371 लाभार्थियों को 38. 26 करोड़ रुपये की सहायता तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अन्तर्गत 8,255 लाभार्थियों को 39. 29 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना तथा अटल आशीर्वाद योजना जैसी विभिन्न महत्वकांक्षी योजनाओं से प्रदेश की लाखों महिलाओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति बटन एप तैयार कर हेल्पलाइन नम्बर की शुरूआत की गई है। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार मिशन रिपीट को सफल कर इतिहास बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों को निरंतरता प्रदान करके प्रदेशवासियों की खुशहाली और प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रदेश में डबल इंजन सरकार आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना की लाभार्थी महिलाओं से संवाद किया। बिलासपुर जिला से किन्जल, चम्बा से उषा देवी, हमीरपुर से कृष्णा कुमारी, कांगड़ा से अंजली, किन्नौर से किरण कुमारी, कुल्लू से निर्मला देवी, लाहौल स्पीति से दीपिका, मंडी से माया, शिमला से कमला देवी, सिरमौर से बुशरा, सोलन से वीना शर्मा तथा ऊना जिला से मोनिका सहित अन्य महिला लाभार्थियों ने इस योजना तथा महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आरम्भ की गई अन्य योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के उपरान्त ढालपुर मैदान में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रम पर आधारित विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। शिक्षा, भाषा कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार की लाभकारी योजनाओं से प्रदेशवासियों की खुशहाली सुनिश्चित हुई है और देश में एक आदर्श पहाड़ी राज्य के रूप में हिमाचल की पहचान स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के प्रति अपना समर्थन और विश्वास जताकर मिशन रिपीट को सफल बनाएगी। कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि प्रदेश में उपभोक्ताओं को उचित मूल्य की दुकानों से सस्ता राशन उपलब्ध करवाने के साथ ही खाद्यान्नों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना संकट के समय खाद्यान्नों की कमी नहीं आने दी गई और प्रदेशवासियों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से भी लाभान्वित किया गया। प्रधान सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आर. डी. नज़ीम ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और विभाग की कल्याणकारी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। निदेशक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति के. सी. शर्मा ने मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सभी जिलों से संबंधित मंत्री एवं विधायकों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर कुल्लू में विधायक किशोरी लाल तथा सुरेन्द्र शौरी, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, ब्रिगेडियर खुशाल सिंह ठाकुर, एचपीएमसी के उपाध्यक्ष राम सिंह, जिला परिषद के अध्यक्ष पंकज परमार, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर, हिमाचल प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड के सलाहकार रमेश शर्मा, जिला भाजपा अध्यक्ष भीमसेन शर्मा, उपायुक्त आशुतोष गर्ग, पुलिस अधीक्षक गुरदेव चंद शर्मा, नगर परिषद, नगर पंचायत, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
कुल्लू, चौबीस अगस्त। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज जिला कुल्लू के ढालपुर मैदान में मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना-राज्य स्तरीय लाभार्थी संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर ढालपुर मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना तथा मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत एक सौ साठ करोड़ रुपये व्यय कर चार. बहत्तर लाख निःशुल्क गैस कनैक्शन प्रदान करने के उपरान्त हिमाचल प्रदेश देशभर में पहला ऐसा राज्य बना है जहां हर घर में एलपीजी कनैक्शन उपलब्ध है। जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना और उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत गैस कनैक्शन सहित तीन रीफिल निःशुल्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इस योजना के लिए सत्तर करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। योजना के अन्तर्गत दो लाख इक्यावन हजार लाभार्थियों को एक और चालीस हजार लाभार्थियों को दो अतिरिक्त निःशुल्क रीफिल प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके कल्याणार्थ अनेक कारगर कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार हर महिला को साठ वर्ष की आयु से बिना किसी आय सीमा के सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। प्रदेश में महिलाओं को हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में किराए में पचास फीसदी की छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिवहन निगम की बसों में प्रतिदिन यात्रा करने वाली लगभग एक लाख पच्चीस हजार महिलाओं को इस योजना से लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना पर प्रदेश सरकार लगभग साठ करोड़ रुपये प्रतिवर्ष व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, आशावर्कर सहित सभी विभागों में कार्य कर रहे पैरा वर्कर के मानदेय में प्रदेश भाजपा सरकार ने नौ सौ रुपयापये से लेकर चार हज़ार पाँच सौ रुपयापये तक की बढ़ोतरी की है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी स्वयं सहायता समूहों की दो लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीपीएल परिवार की बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री शगुन योजना के अन्तर्गत इकतीस,शून्य रुपयापये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से अभी तक प्रदेश में छः,छः सौ छब्बीस बेटियों की शादी पर लगभग बीस. चौवन करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत ही बेसहारा लड़कियों के विवाह पर दिए जाने वाले अनुदान को वर्तमान प्रदेश सरकार ने इकतीस,शून्य रुपयापये से बढ़ाकर इक्यावन,शून्य रुपयापये किया है। विधवा पुनर्विवाह योजना के अन्तर्गत भी प्रदेश सरकार पैंसठ,शून्य रुपयापये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं को स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना के अन्तर्गत महिला उद्यमियों को पैंतीस प्रतिशत तक उपदान का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में बेटी है अनमोल योजना के अन्तर्गत एक लाख छत्तीस हजार नौ सौ बीस लाभार्थियों को चालीस. छियासी करोड़ रुपये की सहायता, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत छः लाख से अधिक लाभार्थियों को लगभग एक सौ करोड़ रुपये, मदर टेरेसा असहाय मातृ संबल योजना के तहत छियानवे,तीन सौ इकहत्तर लाभार्थियों को अड़तीस. छब्बीस करोड़ रुपये की सहायता तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अन्तर्गत आठ,दो सौ पचपन लाभार्थियों को उनतालीस. उनतीस करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना तथा अटल आशीर्वाद योजना जैसी विभिन्न महत्वकांक्षी योजनाओं से प्रदेश की लाखों महिलाओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति बटन एप तैयार कर हेल्पलाइन नम्बर की शुरूआत की गई है। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार मिशन रिपीट को सफल कर इतिहास बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों को निरंतरता प्रदान करके प्रदेशवासियों की खुशहाली और प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रदेश में डबल इंजन सरकार आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना की लाभार्थी महिलाओं से संवाद किया। बिलासपुर जिला से किन्जल, चम्बा से उषा देवी, हमीरपुर से कृष्णा कुमारी, कांगड़ा से अंजली, किन्नौर से किरण कुमारी, कुल्लू से निर्मला देवी, लाहौल स्पीति से दीपिका, मंडी से माया, शिमला से कमला देवी, सिरमौर से बुशरा, सोलन से वीना शर्मा तथा ऊना जिला से मोनिका सहित अन्य महिला लाभार्थियों ने इस योजना तथा महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आरम्भ की गई अन्य योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के उपरान्त ढालपुर मैदान में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रम पर आधारित विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। शिक्षा, भाषा कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार की लाभकारी योजनाओं से प्रदेशवासियों की खुशहाली सुनिश्चित हुई है और देश में एक आदर्श पहाड़ी राज्य के रूप में हिमाचल की पहचान स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भी प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के प्रति अपना समर्थन और विश्वास जताकर मिशन रिपीट को सफल बनाएगी। कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि प्रदेश में उपभोक्ताओं को उचित मूल्य की दुकानों से सस्ता राशन उपलब्ध करवाने के साथ ही खाद्यान्नों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना संकट के समय खाद्यान्नों की कमी नहीं आने दी गई और प्रदेशवासियों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से भी लाभान्वित किया गया। प्रधान सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आर. डी. नज़ीम ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और विभाग की कल्याणकारी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। निदेशक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति के. सी. शर्मा ने मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सभी जिलों से संबंधित मंत्री एवं विधायकों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर कुल्लू में विधायक किशोरी लाल तथा सुरेन्द्र शौरी, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, ब्रिगेडियर खुशाल सिंह ठाकुर, एचपीएमसी के उपाध्यक्ष राम सिंह, जिला परिषद के अध्यक्ष पंकज परमार, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर, हिमाचल प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड के सलाहकार रमेश शर्मा, जिला भाजपा अध्यक्ष भीमसेन शर्मा, उपायुक्त आशुतोष गर्ग, पुलिस अधीक्षक गुरदेव चंद शर्मा, नगर परिषद, नगर पंचायत, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
उपजै निपजै निपजि समाई, नॅनन देखत यह जगु जाई । बहुत जतन करि काया पाली, मरती बार अगिनि सँग जाली । चोआ चंदन मरदन अंगा, सो तनु जलै काठ कै संगा । कहै कबीर सुनहु रे गुनियाँ, बिनसैगो रूप देखै सभ दुनियाँ ।। शब्दार्थ - निपजै - बढना, पुष्ट होना । समाई = नष्ट हो जाना, जाना । जाली = जला दिया जाता है । चोआ - सुगधित द्रव पदार्थ । गुनियाँ = गुणवाले, समझदार । व्याख्या - कबीर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि हे मनुष्यो ! तुम धन-सम्पत्ति और घर के ममत्व में पड़े रहते हो और उसे अपना कहते हुए तुम्हे लज्जा नही आती । मरण के समय किसी का कुछ नही रह जाता। ससार के सभी पदार्थों का जीवन क्षणिक है । प्रत्येक पदार्थ उत्पन्न होता है और कुछ काल के लिए वृद्धि पाता है और फिर बढकर अत मे नष्ट हो जाता है । उत्पत्ति, स्थिति और सहार जगत् की लीला है । देखते-देखते संसार की सभी वस्तुएँ नष्ट हो जाती है । नाना प्रकार के प्रयत्न करके मनुष्य इस शरीर का पालन-पोषण करता है । किन्तु मृत्यु के समय वह अग्नि मे जला दिया जाता है । जिस शरीर को चोवा, चदन आदि के द्वारा सुगंधित रखते है, वह अन्ततः लकडी के साथ जलता है । कबीर कहते है कि है समझदार जीवो ! इस तथ्य को अच्छी तरह समझकर अपने मन मे निश्चित कर लो कि जिस रूप पर तुम्हे इतना गर्व है, वह एक दिन विनष्ट हो जाएगा और सारा संसार इसे समाप्त होते देखेगा । राग - सोरठ । लाधा है कछु लाधा है, ताकी पारिष को न लहै । अबरन एक अकल अबिनासी, घटि घटि आप रहे ॥ टेक ।। तोल न मोल माप कछु नाहीं, गिनती ग्यॉन न होई । नॉ सो भारी नॉ सो हलका, ताकी पारिष लषै न कोई ॥ जामै हम सोई हम ही मैं, नीर मिले जल एक हुवा। यौं जान तो कोई न मरिहै, बिन जॉनै तैं बहुत मुवा ॥ दास कबीर प्रेम रस पाया, पीवनहार न पाऊँ । बिधनॉ बचन पिछाँड़त नाहीं, कहु क्या काढ़ि दिखाऊँ । १. ना० प्र०- गिणती । २. ना० प्र०-जाण । ३. ना० प्र० - जॉण। ४. ना० प्र० - पोवणहार ।
उपजै निपजै निपजि समाई, नॅनन देखत यह जगु जाई । बहुत जतन करि काया पाली, मरती बार अगिनि सँग जाली । चोआ चंदन मरदन अंगा, सो तनु जलै काठ कै संगा । कहै कबीर सुनहु रे गुनियाँ, बिनसैगो रूप देखै सभ दुनियाँ ।। शब्दार्थ - निपजै - बढना, पुष्ट होना । समाई = नष्ट हो जाना, जाना । जाली = जला दिया जाता है । चोआ - सुगधित द्रव पदार्थ । गुनियाँ = गुणवाले, समझदार । व्याख्या - कबीर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि हे मनुष्यो ! तुम धन-सम्पत्ति और घर के ममत्व में पड़े रहते हो और उसे अपना कहते हुए तुम्हे लज्जा नही आती । मरण के समय किसी का कुछ नही रह जाता। ससार के सभी पदार्थों का जीवन क्षणिक है । प्रत्येक पदार्थ उत्पन्न होता है और कुछ काल के लिए वृद्धि पाता है और फिर बढकर अत मे नष्ट हो जाता है । उत्पत्ति, स्थिति और सहार जगत् की लीला है । देखते-देखते संसार की सभी वस्तुएँ नष्ट हो जाती है । नाना प्रकार के प्रयत्न करके मनुष्य इस शरीर का पालन-पोषण करता है । किन्तु मृत्यु के समय वह अग्नि मे जला दिया जाता है । जिस शरीर को चोवा, चदन आदि के द्वारा सुगंधित रखते है, वह अन्ततः लकडी के साथ जलता है । कबीर कहते है कि है समझदार जीवो ! इस तथ्य को अच्छी तरह समझकर अपने मन मे निश्चित कर लो कि जिस रूप पर तुम्हे इतना गर्व है, वह एक दिन विनष्ट हो जाएगा और सारा संसार इसे समाप्त होते देखेगा । राग - सोरठ । लाधा है कछु लाधा है, ताकी पारिष को न लहै । अबरन एक अकल अबिनासी, घटि घटि आप रहे ॥ टेक ।। तोल न मोल माप कछु नाहीं, गिनती ग्यॉन न होई । नॉ सो भारी नॉ सो हलका, ताकी पारिष लषै न कोई ॥ जामै हम सोई हम ही मैं, नीर मिले जल एक हुवा। यौं जान तो कोई न मरिहै, बिन जॉनै तैं बहुत मुवा ॥ दास कबीर प्रेम रस पाया, पीवनहार न पाऊँ । बिधनॉ बचन पिछाँड़त नाहीं, कहु क्या काढ़ि दिखाऊँ । एक. नाशून्य प्रशून्य- गिणती । दो. नाशून्य प्रशून्य-जाण । तीन. नाशून्य प्रशून्य - जॉण। चार. नाशून्य प्रशून्य - पोवणहार ।
राजस्थान के जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में बीते शुक्रवार को एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जी दरअसल यहाँ एक युवक पेट में दर्द होने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था। यहाँ डॉक्टरों ने एक्स-रे किया तो युवक के पेट में कुछ मेटल नजर आया। उसके बाद डॉक्टरों ने युवक का ऑपरेशन किया। वहीं ऑपरेशन करते समय युवक के पेट में 63 सिक्के निकले। इनको देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। आप सभी को बता दें कि मथुरादास माथुर अस्पताल में इस युवक का ऑपरेशन डेड घंटे तक चला। जी दरअसल, जोधपुर शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी 36 वर्षीय युवक के पेट में गुरुवार को अचानक दर्द होने लगा। उसके बाद परिजनों ने उसे गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे मथुरा दास माथुर अस्पताल लेकर पहुंचे पेट में ज्यादा दर्द होने पर युवक को एडमिट करा दिया गया। वहीं उसके बाद शुक्रवार को डॉक्टर ने जब एक्स-रे किया तो पेट में कुछ दिखाई दिया मरीज से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह सिक्के निकल गया है। यह सब सुनते ही डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन किया। करीब डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन में पेट से करीब 63 सिक्के निकाले गए। बताया जा रहा है एमडीएम अस्पताल के सुप्रीडेंट डॉ। विकास राजपुरोहित ने बताया कि गैस्ट्रोएनटोलजी डिपार्टमेंट की ओर से एंडोस्कोपी द्वारा यह ऑपरेशन किया गया। वहीं जब दोबारा जांच की गई, तो किसी तरह का सिक्का नहीं मिला। युवक ने यह नहीं बताया की वह कब से सिक्के निगल रहा था। इसके अलावा इस मामले में डॉक्टर ने बताया कि पेट से जब सिक्के निकाले गए तो टेबल पर एक बार सिक्कों का ढेर लग गया। अधिकांश एक-एक रुपए के सिक्के थे।
राजस्थान के जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में बीते शुक्रवार को एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जी दरअसल यहाँ एक युवक पेट में दर्द होने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था। यहाँ डॉक्टरों ने एक्स-रे किया तो युवक के पेट में कुछ मेटल नजर आया। उसके बाद डॉक्टरों ने युवक का ऑपरेशन किया। वहीं ऑपरेशन करते समय युवक के पेट में तिरेसठ सिक्के निकले। इनको देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। आप सभी को बता दें कि मथुरादास माथुर अस्पताल में इस युवक का ऑपरेशन डेड घंटे तक चला। जी दरअसल, जोधपुर शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी छत्तीस वर्षीय युवक के पेट में गुरुवार को अचानक दर्द होने लगा। उसके बाद परिजनों ने उसे गुरुवार शाम करीब चार:शून्य बजे मथुरा दास माथुर अस्पताल लेकर पहुंचे पेट में ज्यादा दर्द होने पर युवक को एडमिट करा दिया गया। वहीं उसके बाद शुक्रवार को डॉक्टर ने जब एक्स-रे किया तो पेट में कुछ दिखाई दिया मरीज से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह सिक्के निकल गया है। यह सब सुनते ही डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन किया। करीब डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन में पेट से करीब तिरेसठ सिक्के निकाले गए। बताया जा रहा है एमडीएम अस्पताल के सुप्रीडेंट डॉ। विकास राजपुरोहित ने बताया कि गैस्ट्रोएनटोलजी डिपार्टमेंट की ओर से एंडोस्कोपी द्वारा यह ऑपरेशन किया गया। वहीं जब दोबारा जांच की गई, तो किसी तरह का सिक्का नहीं मिला। युवक ने यह नहीं बताया की वह कब से सिक्के निगल रहा था। इसके अलावा इस मामले में डॉक्टर ने बताया कि पेट से जब सिक्के निकाले गए तो टेबल पर एक बार सिक्कों का ढेर लग गया। अधिकांश एक-एक रुपए के सिक्के थे।
लखनऊः यूपी का ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कांवड़ यात्रा को लेकर अलर्ट पर है। व्यवस्था पर नजर रखने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित होगा। कांवड़ यात्रा 28 जुलाई से शुरू होकर 09 अगस्त तक चलेगी। कांवड़ यात्रा को देखते हुए डायवर्जन प्वाइन्ट पर चेकिंग स्क्वायड की तैनाती होगी। पैदल चलने वाले कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बस संचालन धीमी गति से करने को कहा गया है। चालकों व परिचालकों को यात्रियों से अच्छा व्यवहार के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान निगम के सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़ व बरेली क्षेत्रों के मार्ग मुख्य रूप से प्रभावित होंगे। हरिद्वार मार्ग पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था होगी। कांवड़ यात्रा अवधि में मेरठ-हरिद्वार, दिल्ली-हरिद्वार, मुरादाबाद-हरिद्वार, बिजनौर-हरिद्वार, सहारनपुर- हरिद्वार, शामली-हरिद्वार और सम्बद्ध मार्गो पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जाएगी। यात्रा अवधि में मेरठ क्षेत्र द्वारा भैसाली स्टेशन के स्थान पर वैकल्पिक अस्थाई बस स्टेशन बागपत, बड़ौत रोड़, सोहराबगेट बस स्टेशन, मवाना बस स्टेशन से संचालित किया जाएगा।
लखनऊः यूपी का ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कांवड़ यात्रा को लेकर अलर्ट पर है। व्यवस्था पर नजर रखने के लिए चौबीस घंटाटे कंट्रोल रूम संचालित होगा। कांवड़ यात्रा अट्ठाईस जुलाई से शुरू होकर नौ अगस्त तक चलेगी। कांवड़ यात्रा को देखते हुए डायवर्जन प्वाइन्ट पर चेकिंग स्क्वायड की तैनाती होगी। पैदल चलने वाले कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बस संचालन धीमी गति से करने को कहा गया है। चालकों व परिचालकों को यात्रियों से अच्छा व्यवहार के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान निगम के सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़ व बरेली क्षेत्रों के मार्ग मुख्य रूप से प्रभावित होंगे। हरिद्वार मार्ग पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था होगी। कांवड़ यात्रा अवधि में मेरठ-हरिद्वार, दिल्ली-हरिद्वार, मुरादाबाद-हरिद्वार, बिजनौर-हरिद्वार, सहारनपुर- हरिद्वार, शामली-हरिद्वार और सम्बद्ध मार्गो पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जाएगी। यात्रा अवधि में मेरठ क्षेत्र द्वारा भैसाली स्टेशन के स्थान पर वैकल्पिक अस्थाई बस स्टेशन बागपत, बड़ौत रोड़, सोहराबगेट बस स्टेशन, मवाना बस स्टेशन से संचालित किया जाएगा।
हनुमानगढ़। टाउन पुलिस (Town Police) ने बुधवार रात हथकढ़ शराब (Liquor) बेचने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई करते हुए कुल 34 लीटर हथकढ़ शराब बरामद कर दो जनों को गिरफ्तार किया। एक महिला पुलिस टीम को देख शराब छोड़ अंधेरे का फायदा उठा भाग गई। टाउन पुलिस थाना (Hanumangarh Town Thana) में इस संबंध में राजस्थान आबकारी अधिनियम के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए हैं। जानकारी के अनुसार हैड कांस्टेबल पुरुषोत्तम पचार के नेतृत्व में गश्त कर रही पुुलिस टीम ने गांव अमरपुरा थेहड़ी (Amarpura Thedi) के पास हथकढ़ शराब बेच रहे एक युवक को गिरफ्तार (Arrest) कर उसके कब्जे से 15 लीटर हथकढ़ शराब बरामद की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजीत देव उर्फ कण्डिया (20) पुत्र जगराज सिंह बावरी निवासी चक 13 एचएमएच अमरपुरा थेहड़ी के रूप में हुई। दूसरी कार्रवाई में एएसआई दरियासिंह के नेतृत्व में गश्त कर रही पुलिस टीम सिकलीगर मोहल्ला में पहुंची तो हथकढ़ शराब बेच रही एक महिला पुलिस (Women Police) टीम को देेख संकरी गलियों में भाग गई। पुलिस ने मौके से चार लीटर हथकढ़ शराब बरामद कर फरार हुई महिला बेबी पत्नी शेरसिंह सिकलीगर निवासी सिकलीगर मोहल्ला, टाउन के रूप में हुई। तीसरी कार्रवाई में लखूवाली चौकी (Lakhuwali Chauki) के हैड कांस्टेबल जसवन्त सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने गांव लखूवाली से फिरोज खान (23) पुत्र सरदार अली निवासी चक 12 आरपी लखूवाली को हथकढ़ शराब बेचते हुए गिरफ्तार किया। मौके से 15 लीटर हथकढ़ शराब बरामद की गई। पुलिस मुकदमे दर्ज कर जांच में जुटी है।
हनुमानगढ़। टाउन पुलिस ने बुधवार रात हथकढ़ शराब बेचने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई करते हुए कुल चौंतीस लीटरटर हथकढ़ शराब बरामद कर दो जनों को गिरफ्तार किया। एक महिला पुलिस टीम को देख शराब छोड़ अंधेरे का फायदा उठा भाग गई। टाउन पुलिस थाना में इस संबंध में राजस्थान आबकारी अधिनियम के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए हैं। जानकारी के अनुसार हैड कांस्टेबल पुरुषोत्तम पचार के नेतृत्व में गश्त कर रही पुुलिस टीम ने गांव अमरपुरा थेहड़ी के पास हथकढ़ शराब बेच रहे एक युवक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से पंद्रह लीटरटर हथकढ़ शराब बरामद की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अजीत देव उर्फ कण्डिया पुत्र जगराज सिंह बावरी निवासी चक तेरह एचएमएच अमरपुरा थेहड़ी के रूप में हुई। दूसरी कार्रवाई में एएसआई दरियासिंह के नेतृत्व में गश्त कर रही पुलिस टीम सिकलीगर मोहल्ला में पहुंची तो हथकढ़ शराब बेच रही एक महिला पुलिस टीम को देेख संकरी गलियों में भाग गई। पुलिस ने मौके से चार लीटर हथकढ़ शराब बरामद कर फरार हुई महिला बेबी पत्नी शेरसिंह सिकलीगर निवासी सिकलीगर मोहल्ला, टाउन के रूप में हुई। तीसरी कार्रवाई में लखूवाली चौकी के हैड कांस्टेबल जसवन्त सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने गांव लखूवाली से फिरोज खान पुत्र सरदार अली निवासी चक बारह आरपी लखूवाली को हथकढ़ शराब बेचते हुए गिरफ्तार किया। मौके से पंद्रह लीटरटर हथकढ़ शराब बरामद की गई। पुलिस मुकदमे दर्ज कर जांच में जुटी है।
विज्ञान - वाटिका X r वायुयानों का भविष्य सार में आशावादियों के साथ हो निराशावादी भी रहते हैं। बहुतसे लोगों को वायुयानों का भविष्य ऊषा-प्रकाश-सा उज्ज्वल प्रतीत होता है किंतु कुछ थोड़े-से लोगों को इसका भविष्य तिमिराच्छन्न आन पड़ता है। पिछले प्रकार के लोगों में Grat Delusionनामक पुस्तक के रचयिता भी हैं। यह पुस्तक ब्रिटेन की हवाईनीति को असफल बतलाते हुए यह बतलाने की चेष्टा करती है कि भविष्य में वायु मार्ग से यातायात का प्रबंध करना वृथा है। इसकी युक्तियों से ब्रिटेन-भर में हलचल मच गई है । पुस्तक में वर्णित बातों का सारांश यों हैसमी वायुयान बेकार हैं। वे कभी विश्वास योग्य, निरापद और व्यावहारिक नहीं हो सकते । न वे युद्ध के काम में लाए जा सकते हैं और व्यापारिक कार्यों ही में । सफर के लिये जो वायुयान व्यवहृत होते हैं या होंगे, उनसे नफ़ा उठाना असंभव है। अन्य किसी प्रकार के यान से वायुयान के सफर में बेचैनी, डर और अविश्वास अधिक रहता है। सफर खर्च की तो बात ही न पूछिए आजकल की मँहगी-से- मँहगी यात्राओं से इनके द्वारा यात्रा मँहगी पड़ती है। वायु-शक्ति की बात उठाना मृगतृष्णा के पीछे दौड़ना है। लड़ाई के लिये वायुयान बनाने या रण-साज से सज्जित करने का अर्थ धन और उन दोनों खोना है। लड़ाई का अनुभव हमें वायुयानों की बेकारी और व्यावहारिकता प्रमाणित करता है । पुस्तक में दिए हुए अनेकों उदाहरणों से हम यहाँ थोड़े-से देते हैं - गत महायुद्ध मे जर्मनी ने ६१ जेपलिनों से काम लिया था जिनमें १७ शत्रुओं द्वारा चालक के साथ नष्ट कर दिए गए : २८ खतरे में पड़कर नष्ट हो गए १६ बेकार प्रमाणित हुए । इतना होने पर भी संसार के बड़ेबड़े राष्ट्र वायुयानों के बनाने में पानी की तरह धन बहा रहे हैं। ब्रिटेन के बड़े बड़े वायुयानों का क्या हाल हुआ, वह भी सुन लीजिए । । ३३ का मस्तूल टूट गया, एकदम नष्ट-भ्रट हो गया, R ३८ अमेरिका के हाथ बेंच दिया गया था जो २४ मनुष्यों के साथ नष्ट हो गया । इंगलैंड की "एयर मिनिस्ट्री" दो राक्षसाकार वायुयान बना रही है। कहा जाता है कि इनमें कई छोटे-छोटे वायुयानों को रखने और आश्रय देने का स्थान रहेगा और इसके अलावा, वे दो सौ मनुष्यों को लेकर उड़ेंगे । भला इस बेवकूफ़ी का भी कोई ठिकाना है। इंगलैंड का प्रत्येक मनुष्य सरकारी घायुयानों के पालनपोषण के लिये काफ़ी कर दिया करता है। वायुयानों से माल ले जाने का किराया बहुत ज्यादा है। रेल से जितने खर्च में आप एक टन माल एक मील से जायेंगे, उतने खर्च में वायुयान सिर्फ एक पौंड वज़न का माल एक मोख पहुँचा सकेगा। कुछ दिन हुए एक वायुयान कैसे से केप और वहाँ से लंदन उड़कर आया। इसमें १,८०० घोड़ों की शक्ति थी । घाठ मनुष्यों ने सवार होकर ११४ दिनों में १४,००० मील की यात्रा है की अर्थात् श्रौसत ५ मील प्रति घंटा । इतनी ही अश्व-शक्ति में दो स्टीमर ४५,००० टन बोझ लादकर उसी दूरी को केवल आधे समय में पूरा करते । अब हमें थोड़ी दूर को यात्रा करनी होती है तभी वायुयान रेल या स्टीमर से तेज़ जाते हैं। अधिक दूर की यात्रा में उन्हें हार खानी पड़ती है । लड़ाई के मैदान में उनसे गोलाबारी करना रुपया बर्बाद करना है, क्योंकि वायुयान से निशाना अमाना असंभव है। मित्र और शत्रु-पक्ष का पहचानना भी कभी-कभी कठिन हो जाता है और इसलिये नुक्सान उठाना पड़ता है। १६१७ के एप्रिल में एक ब्रिटिश-वायुयान- चालक ने ग़लती से एक डच शहर पर गोला बरसा दिया। इसके जुर्माने में ब्रिटेन को १,५०,००० रु० देना पड़ा । लड़ाई के काम में लगे हुए हर वायुयान के लिये ज़मीन पर ६४ मनुष्यों को उस पर लक्ष्य रखना पड़ता । १६९८ में जब जर्मनों ने मित्र-सेनाओं को बे-तरह दबाया था उस समय इंगलैंड के वायुयान मौसिम खराब होने के कारण कुछ भी मदद नहीं दे सके। लड़ाई के समय में एक वायुयान का जीवन-काल सिर्फ एक ही महीना था । जर्मनी के लेफ़्टिनेंट जे० ओ० उलरिच केसलर का कहना है कि अगस्त १९४८ को हम लोगों ने शत्रु के ८३ वायुयानों को नष्ट किया था । जून, १९१२ और जून, १९१६ के बीच जर्मनीवालों के २६२ वायुयान नष्ट हुए। ये सिर्फ गिरकर नष्ट हुए - शत्रुत्रों द्वारा नहीं गिराए गए । ये एक निराशावादी के विचार हैं। उनकी राय है कि वायुयानों का बनाना और उन पर खर्च होनेवाले धन का अपव्यय तुरंत रोक देना चाहिए । वायुयानों का भविष्य अंधकार पूर्ण है । "माधुरी" के पिछले अंकों में उज्ज्वल-दर्शी लोगों के विचार समय-समय पर दिए गए हैं। पाठक ही निर्णय करें, वायुयान का भविष्य कैसा है ? २. कृत्रिम सूर्य पेरिस के प्रो० जीन पेरिन ने एक युगांतरकारी आविष्कार किया है। आपके आविष्कार का अभी आरंभ ही है। भविष्य में आाप १,००,००,००० बोल्ट की शक्तिबाली बिजली पैदा कर पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य का भाविर्भाव कराना चाहते हैं। इतनी शक्ति की बिजली पैदा हो जाने पर हम पृथ्वी पर उस अवस्था को ला सकते हैं जिस अवस्था में सूर्य और उसी के समान अन्य नक्षत्र हैं। इस शक्ति की बिजली तैयार होने पर पदार्थों के आणविक गठन का टुकड़ा किया जा सकेगा और हरएक अ अलग-अलग किए जा सकेंगे। शायद एक अणु के निहारिका ( Nuclens ) को दूसरे अणु में प्रवेश कराकर एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में परिवर्तित भी कर सकेंगे। कहा जाता है कि सूर्य के धरातल में हल्के पदार्थों के अणु निरंतर भारी पदार्थों के अणुओं का रूप ग्रहण कर रहे हैं। आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतानुसार संसार के समी पदार्थ हवा, जमीन, चट्टान, मनुष्य आदि, सूर्य तारे ग्रह नक्षत्र आदि एक समय हाइड्रोजन के अणुओं से बने हुए थे । प्रो० पेरिन का भी यही मत है। प्रायः सभी वैज्ञानिकों कहना है कि अणु धन ( Positive ) और ऋण (Negative ) विद्युत् का समष्टिकरण है। धन निहारिकाएँ और ऋण इलेक्ट्रोन सौर-जगत् की भाँति बराबर चक्कर लगाया करते हैं ये इतने छोटे होते हैं कि ऐसे-ऐसे दस धरक सौर-जगतों को यदि मिला दिया जाय, तो वे हमारे दृष्टिगोचर हो सकते हैं । तब वे एक पिन की नोक के बराबर हो सकेंगे। श्रणु स्वयं इतने छोटे होते हैं कि उनकी कल्पना करना हमारे लिये असंभव है । एक घड़े जल में श्रॉक्सिजन थॉर हाइड्रोजन के इतने अणु विद्यमान हैं जितने बालू के कण योरप के चारों ओर के ५० कोट चोड़े भूभाग में । अणुओं का गठन भी कल्पनातीत है । वैज्ञानिकों का विश्वास है कि यदि एक अणु को पेरिस के बराबर मान लें तो निहारिका एक घर के बराबर और इलेक्ट्रोन दो हज़ार से ६३,००० मील प्रति सेकेंड के हिसाब से चलते हुए एक मोटर के बराबर होगा। दो पदार्थों- जैसे लकड़ी या लोहे - मैं फ़रक़ केवल इतना ही है कि ये दोनों पदार्थ यद्यपि निहारिका और इलेक्ट्रोन के बने हुए हैं किंतु निहारिका के चारों ओर दौड़ लगाने वाले इलेक्ट्रोन की संख्या दोनों में भिन्न-भिन्न है। प्रो० पेरिन का कहना है कि पदार्थ एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में बदलते समय पहले हाइड्रोजन में परिवर्तित होता है और हाइड्रोजन हिलियम में। ऐसा करते समय कुछ बज़न कम हो जाता है जिसे हम शक्ति (energy) के रूप में देख पाते हैं । यह मुक्त शक्ति प्रकाश और गरमी के रूप में सूर्य से पृथ्वी तक आती है और पृथ्वी पर हम लोगों का जोवन संभव बनाती है । परिवर्तन का यह कार्य कैसे आरंभ हुआ ? संभवतः दो या अधिक हाइड्रोजन के अणुओंों के टक्कर लगने से पहली शक्ति पैदा हुई होगी। जिस प्रकार दियासलाई की एक बत्ती सारे जंगल को जला डालती है उसी प्रकार उपर्युक्त टक्कर में सूर्य स्थित भारी-भारी अणुओं को तोड़ना आरंभ कर दिया और फल-स्वरूप सूर्य में अभी तक यह क्रिया जारी है। "एक करोड़ शक्ति की बिजली पैदा कर पृथ्वी पर मैं भी पदार्थों के भारी अणुओं को तोड़कर हल्के अशुओं में परिवर्तित करूंगा थोर इस प्रकार पृथ्वी पर ही कृत्रिम सूर्य पैदा कर दूंगा ।" प्रो० पेरिन की ऐसी धारणा है । कृत्रिम सूर्य पैदा करने की चेष्टा अमेरिका में भी हो रही है। इस कार्य का आरंभ स्वगवामी डॉ० स्टिनमेज ने किया था, अब उनके चेले इस काम में लगे हुए हैं । इससे जान पड़ता है कि संसार में कई ऐसे व्यक्ति है जो पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य को लाना चाहते हैं किंतु इसका अंतिम परिणाम क्या होगा ? पृथ्वी पर भी सूर्य-सी दावानल भड़क उठेगी । यहाँ के प्रत्येक पदार्थ टुकड़े-टुकड़े होने लगेंगे और सभी पदार्थ प्रकाशमय और भीषण ताप युक्त हो जायेंगे । यहाँ न तो मनुष्य रहेंगे, न कोई जानवर और कोई पेड़-पौधे । देखते-देखते सारी पृथ्वी जलकर खाक हो जायगी और यह ग्रह एक अलता हुआ चमकीला पदार्थ बन जायगा। ये बातें जब मो० पेरिन से कही गई, तब उन्होंने जो उत्तर दिया, वह बड़ा मज़ेदार है-"अणुओं के टूटने से प्रलय उपस्थित होना अवश्यंभावी है किंतु सवैज्ञानिकों को प्रत्येक पहजू का अनुमंत्रान करना चाहिए । इसो प्रकार हम लोग सोख सकते हैं। हमें डरना नहीं चाहिए । " अणुओं से शक्ति पैदा करने से हमें क्या-क्या लाभ होगा, इसकी चर्चा 'माधुरी' के किसो पिछले अंक में हो चुकी है, इसलिये उस पर कुछ नहीं लिखा जाता । कृत्रिम सूर्य को पैदा कर हम लोग गरमी, प्रकाश और शक्ति को अपने वश में कर लेंगे । हमारी सभ्यता मेशीनों पर अवलंबित है; इन्हें चलाने के लिये शक्ति की आवश्यकता होती है । शक्ति पैदा करनेवाले पदार्थ कोयला और तेल है, किंतु उनका अंत नज़दीक है। अणुओं के टूटने से जो शक्ति पैदा होगी, वही हमारी सभ्यता को बचाए रख सकती है । अभी से यह नहीं कहा जा सकता कि पेरिन द्वारा पैदा होनेवाली शक्ति इस पृथ्वी को मष्ट कर देगी या उसके लिये न्यामत होगी। प्रो० पेरिन द्वारा उद्भावित कृत्रिम सूर्य ३. पौन घंटा बजनेवाला फोनोग्राफ फ़ोनोग्राक के जन्मदाता अमेरिका के प्रसिद्ध वैज्ञानिक पडिसन साहब है । आप द बहरे हैं किंतु आपको
विज्ञान - वाटिका X r वायुयानों का भविष्य सार में आशावादियों के साथ हो निराशावादी भी रहते हैं। बहुतसे लोगों को वायुयानों का भविष्य ऊषा-प्रकाश-सा उज्ज्वल प्रतीत होता है किंतु कुछ थोड़े-से लोगों को इसका भविष्य तिमिराच्छन्न आन पड़ता है। पिछले प्रकार के लोगों में Grat Delusionनामक पुस्तक के रचयिता भी हैं। यह पुस्तक ब्रिटेन की हवाईनीति को असफल बतलाते हुए यह बतलाने की चेष्टा करती है कि भविष्य में वायु मार्ग से यातायात का प्रबंध करना वृथा है। इसकी युक्तियों से ब्रिटेन-भर में हलचल मच गई है । पुस्तक में वर्णित बातों का सारांश यों हैसमी वायुयान बेकार हैं। वे कभी विश्वास योग्य, निरापद और व्यावहारिक नहीं हो सकते । न वे युद्ध के काम में लाए जा सकते हैं और व्यापारिक कार्यों ही में । सफर के लिये जो वायुयान व्यवहृत होते हैं या होंगे, उनसे नफ़ा उठाना असंभव है। अन्य किसी प्रकार के यान से वायुयान के सफर में बेचैनी, डर और अविश्वास अधिक रहता है। सफर खर्च की तो बात ही न पूछिए आजकल की मँहगी-से- मँहगी यात्राओं से इनके द्वारा यात्रा मँहगी पड़ती है। वायु-शक्ति की बात उठाना मृगतृष्णा के पीछे दौड़ना है। लड़ाई के लिये वायुयान बनाने या रण-साज से सज्जित करने का अर्थ धन और उन दोनों खोना है। लड़ाई का अनुभव हमें वायुयानों की बेकारी और व्यावहारिकता प्रमाणित करता है । पुस्तक में दिए हुए अनेकों उदाहरणों से हम यहाँ थोड़े-से देते हैं - गत महायुद्ध मे जर्मनी ने इकसठ जेपलिनों से काम लिया था जिनमें सत्रह शत्रुओं द्वारा चालक के साथ नष्ट कर दिए गए : अट्ठाईस खतरे में पड़कर नष्ट हो गए सोलह बेकार प्रमाणित हुए । इतना होने पर भी संसार के बड़ेबड़े राष्ट्र वायुयानों के बनाने में पानी की तरह धन बहा रहे हैं। ब्रिटेन के बड़े बड़े वायुयानों का क्या हाल हुआ, वह भी सुन लीजिए । । तैंतीस का मस्तूल टूट गया, एकदम नष्ट-भ्रट हो गया, R अड़तीस अमेरिका के हाथ बेंच दिया गया था जो चौबीस मनुष्यों के साथ नष्ट हो गया । इंगलैंड की "एयर मिनिस्ट्री" दो राक्षसाकार वायुयान बना रही है। कहा जाता है कि इनमें कई छोटे-छोटे वायुयानों को रखने और आश्रय देने का स्थान रहेगा और इसके अलावा, वे दो सौ मनुष्यों को लेकर उड़ेंगे । भला इस बेवकूफ़ी का भी कोई ठिकाना है। इंगलैंड का प्रत्येक मनुष्य सरकारी घायुयानों के पालनपोषण के लिये काफ़ी कर दिया करता है। वायुयानों से माल ले जाने का किराया बहुत ज्यादा है। रेल से जितने खर्च में आप एक टन माल एक मील से जायेंगे, उतने खर्च में वायुयान सिर्फ एक पौंड वज़न का माल एक मोख पहुँचा सकेगा। कुछ दिन हुए एक वायुयान कैसे से केप और वहाँ से लंदन उड़कर आया। इसमें एक,आठ सौ घोड़ों की शक्ति थी । घाठ मनुष्यों ने सवार होकर एक सौ चौदह दिनों में चौदह,शून्य मील की यात्रा है की अर्थात् श्रौसत पाँच मील प्रति घंटा । इतनी ही अश्व-शक्ति में दो स्टीमर पैंतालीस,शून्य टन बोझ लादकर उसी दूरी को केवल आधे समय में पूरा करते । अब हमें थोड़ी दूर को यात्रा करनी होती है तभी वायुयान रेल या स्टीमर से तेज़ जाते हैं। अधिक दूर की यात्रा में उन्हें हार खानी पड़ती है । लड़ाई के मैदान में उनसे गोलाबारी करना रुपया बर्बाद करना है, क्योंकि वायुयान से निशाना अमाना असंभव है। मित्र और शत्रु-पक्ष का पहचानना भी कभी-कभी कठिन हो जाता है और इसलिये नुक्सान उठाना पड़ता है। एक हज़ार छः सौ सत्रह के एप्रिल में एक ब्रिटिश-वायुयान- चालक ने ग़लती से एक डच शहर पर गोला बरसा दिया। इसके जुर्माने में ब्रिटेन को एक,पचास,शून्य रुपयाशून्य देना पड़ा । लड़ाई के काम में लगे हुए हर वायुयान के लिये ज़मीन पर चौंसठ मनुष्यों को उस पर लक्ष्य रखना पड़ता । एक हज़ार छः सौ अट्ठानवे में जब जर्मनों ने मित्र-सेनाओं को बे-तरह दबाया था उस समय इंगलैंड के वायुयान मौसिम खराब होने के कारण कुछ भी मदद नहीं दे सके। लड़ाई के समय में एक वायुयान का जीवन-काल सिर्फ एक ही महीना था । जर्मनी के लेफ़्टिनेंट जेशून्य ओशून्य उलरिच केसलर का कहना है कि अगस्त एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को हम लोगों ने शत्रु के तिरासी वायुयानों को नष्ट किया था । जून, एक हज़ार नौ सौ बारह और जून, एक हज़ार नौ सौ सोलह के बीच जर्मनीवालों के दो सौ बासठ वायुयान नष्ट हुए। ये सिर्फ गिरकर नष्ट हुए - शत्रुत्रों द्वारा नहीं गिराए गए । ये एक निराशावादी के विचार हैं। उनकी राय है कि वायुयानों का बनाना और उन पर खर्च होनेवाले धन का अपव्यय तुरंत रोक देना चाहिए । वायुयानों का भविष्य अंधकार पूर्ण है । "माधुरी" के पिछले अंकों में उज्ज्वल-दर्शी लोगों के विचार समय-समय पर दिए गए हैं। पाठक ही निर्णय करें, वायुयान का भविष्य कैसा है ? दो. कृत्रिम सूर्य पेरिस के प्रोशून्य जीन पेरिन ने एक युगांतरकारी आविष्कार किया है। आपके आविष्कार का अभी आरंभ ही है। भविष्य में आाप एक,शून्य,शून्य,शून्य बोल्ट की शक्तिबाली बिजली पैदा कर पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य का भाविर्भाव कराना चाहते हैं। इतनी शक्ति की बिजली पैदा हो जाने पर हम पृथ्वी पर उस अवस्था को ला सकते हैं जिस अवस्था में सूर्य और उसी के समान अन्य नक्षत्र हैं। इस शक्ति की बिजली तैयार होने पर पदार्थों के आणविक गठन का टुकड़ा किया जा सकेगा और हरएक अ अलग-अलग किए जा सकेंगे। शायद एक अणु के निहारिका को दूसरे अणु में प्रवेश कराकर एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में परिवर्तित भी कर सकेंगे। कहा जाता है कि सूर्य के धरातल में हल्के पदार्थों के अणु निरंतर भारी पदार्थों के अणुओं का रूप ग्रहण कर रहे हैं। आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतानुसार संसार के समी पदार्थ हवा, जमीन, चट्टान, मनुष्य आदि, सूर्य तारे ग्रह नक्षत्र आदि एक समय हाइड्रोजन के अणुओं से बने हुए थे । प्रोशून्य पेरिन का भी यही मत है। प्रायः सभी वैज्ञानिकों कहना है कि अणु धन और ऋण विद्युत् का समष्टिकरण है। धन निहारिकाएँ और ऋण इलेक्ट्रोन सौर-जगत् की भाँति बराबर चक्कर लगाया करते हैं ये इतने छोटे होते हैं कि ऐसे-ऐसे दस धरक सौर-जगतों को यदि मिला दिया जाय, तो वे हमारे दृष्टिगोचर हो सकते हैं । तब वे एक पिन की नोक के बराबर हो सकेंगे। श्रणु स्वयं इतने छोटे होते हैं कि उनकी कल्पना करना हमारे लिये असंभव है । एक घड़े जल में श्रॉक्सिजन थॉर हाइड्रोजन के इतने अणु विद्यमान हैं जितने बालू के कण योरप के चारों ओर के पचास कोट चोड़े भूभाग में । अणुओं का गठन भी कल्पनातीत है । वैज्ञानिकों का विश्वास है कि यदि एक अणु को पेरिस के बराबर मान लें तो निहारिका एक घर के बराबर और इलेक्ट्रोन दो हज़ार से तिरेसठ,शून्य मील प्रति सेकेंड के हिसाब से चलते हुए एक मोटर के बराबर होगा। दो पदार्थों- जैसे लकड़ी या लोहे - मैं फ़रक़ केवल इतना ही है कि ये दोनों पदार्थ यद्यपि निहारिका और इलेक्ट्रोन के बने हुए हैं किंतु निहारिका के चारों ओर दौड़ लगाने वाले इलेक्ट्रोन की संख्या दोनों में भिन्न-भिन्न है। प्रोशून्य पेरिन का कहना है कि पदार्थ एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में बदलते समय पहले हाइड्रोजन में परिवर्तित होता है और हाइड्रोजन हिलियम में। ऐसा करते समय कुछ बज़न कम हो जाता है जिसे हम शक्ति के रूप में देख पाते हैं । यह मुक्त शक्ति प्रकाश और गरमी के रूप में सूर्य से पृथ्वी तक आती है और पृथ्वी पर हम लोगों का जोवन संभव बनाती है । परिवर्तन का यह कार्य कैसे आरंभ हुआ ? संभवतः दो या अधिक हाइड्रोजन के अणुओंों के टक्कर लगने से पहली शक्ति पैदा हुई होगी। जिस प्रकार दियासलाई की एक बत्ती सारे जंगल को जला डालती है उसी प्रकार उपर्युक्त टक्कर में सूर्य स्थित भारी-भारी अणुओं को तोड़ना आरंभ कर दिया और फल-स्वरूप सूर्य में अभी तक यह क्रिया जारी है। "एक करोड़ शक्ति की बिजली पैदा कर पृथ्वी पर मैं भी पदार्थों के भारी अणुओं को तोड़कर हल्के अशुओं में परिवर्तित करूंगा थोर इस प्रकार पृथ्वी पर ही कृत्रिम सूर्य पैदा कर दूंगा ।" प्रोशून्य पेरिन की ऐसी धारणा है । कृत्रिम सूर्य पैदा करने की चेष्टा अमेरिका में भी हो रही है। इस कार्य का आरंभ स्वगवामी डॉशून्य स्टिनमेज ने किया था, अब उनके चेले इस काम में लगे हुए हैं । इससे जान पड़ता है कि संसार में कई ऐसे व्यक्ति है जो पृथ्वी पर कृत्रिम सूर्य को लाना चाहते हैं किंतु इसका अंतिम परिणाम क्या होगा ? पृथ्वी पर भी सूर्य-सी दावानल भड़क उठेगी । यहाँ के प्रत्येक पदार्थ टुकड़े-टुकड़े होने लगेंगे और सभी पदार्थ प्रकाशमय और भीषण ताप युक्त हो जायेंगे । यहाँ न तो मनुष्य रहेंगे, न कोई जानवर और कोई पेड़-पौधे । देखते-देखते सारी पृथ्वी जलकर खाक हो जायगी और यह ग्रह एक अलता हुआ चमकीला पदार्थ बन जायगा। ये बातें जब मोशून्य पेरिन से कही गई, तब उन्होंने जो उत्तर दिया, वह बड़ा मज़ेदार है-"अणुओं के टूटने से प्रलय उपस्थित होना अवश्यंभावी है किंतु सवैज्ञानिकों को प्रत्येक पहजू का अनुमंत्रान करना चाहिए । इसो प्रकार हम लोग सोख सकते हैं। हमें डरना नहीं चाहिए । " अणुओं से शक्ति पैदा करने से हमें क्या-क्या लाभ होगा, इसकी चर्चा 'माधुरी' के किसो पिछले अंक में हो चुकी है, इसलिये उस पर कुछ नहीं लिखा जाता । कृत्रिम सूर्य को पैदा कर हम लोग गरमी, प्रकाश और शक्ति को अपने वश में कर लेंगे । हमारी सभ्यता मेशीनों पर अवलंबित है; इन्हें चलाने के लिये शक्ति की आवश्यकता होती है । शक्ति पैदा करनेवाले पदार्थ कोयला और तेल है, किंतु उनका अंत नज़दीक है। अणुओं के टूटने से जो शक्ति पैदा होगी, वही हमारी सभ्यता को बचाए रख सकती है । अभी से यह नहीं कहा जा सकता कि पेरिन द्वारा पैदा होनेवाली शक्ति इस पृथ्वी को मष्ट कर देगी या उसके लिये न्यामत होगी। प्रोशून्य पेरिन द्वारा उद्भावित कृत्रिम सूर्य तीन. पौन घंटा बजनेवाला फोनोग्राफ फ़ोनोग्राक के जन्मदाता अमेरिका के प्रसिद्ध वैज्ञानिक पडिसन साहब है । आप द बहरे हैं किंतु आपको
को आँखों से ओझल कर असाधारण और अलौकिक पात्रों आदर्शवाद की एक विशेषता है । कभी-कभी यह भावातिरेक रचना को अवास्तविक और अविश्वसनीय भी बना देता है । लेखक वास्तविकता को छोड़कर पात्रों को अपनी कल्पना का रूप देने लगता है । यह प्रवृत्ति पाश्चात्य समीक्षकों को खटकी । उन्होंने इसके दुर्बल पक्ष को पहचाना और विरोध में यथार्थवाद या वैज्ञानिक चित्रण की आवाज उठाई । मनोविज्ञान भी एक विज्ञान ही है; इसलिए मनोवैज्ञानिक चरित्र निर्देश, सूक्ष्म मनोभावों का आघात प्रतिघात यथार्थवादी कला-सृष्टि में अपनाया गया है । इसका यह अर्थ नहीं कि आदर्शवादी कला में मनोविज्ञान का चित्रण होता ही नहीं । वह होता है, पर आदर्शवादी भावुकता को लिए हुए । आदर्शवादी कला के संबंध में डीडेरो नामक फ्रेंच समीक्षक का मत है कि यह कलापद्धति मिट्टी की भित्ति पर बनाए गए मूल्यवान मणियों के जड़ाव के सदृश है । कोई कलाकार या तो यथार्थवादी ही हो सकता है या आदर्शवादी ही । ये दोनों परस्पर विरोधी विचारधाराएं और कलाशैलियाँ हैं। इनका मिश्रण किसी एक रचना में संभव नहीं । साहित्यिक निर्माण में यथार्थोन्मुख आदर्शवाद या आदर्शोन्मुख यथार्थवाद नाम की वस्तु नहीं हो सकती । वास्तव में प्रेमचंदजी अपने विचारों व लेखन में आदर्शवादी आपका चरित्र निर्माण और मनोवैज्ञानिक चित्रण आदर्शवादी है । आदर्शवादी चित्रण से तात्पर्य है मानव की सद्वृत्तियों पर विश्वास रखकर साहित्यनिर्माण करना । उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों को देखकर ही हम ऐसा कहते हैं । इस प्रकार प्रेमचंद के साहित्य का । सांगोपांग अध्ययन करने पर उन्हें आदर्शवादी लेखक ही कहना उचित होगा । कथोपकथन, भाषा की सामान्यता या पात्रानुरूपता, पात्रों की विनोदात्मक बातचीत आदि शैली-संबंधी विशेषताएं यथार्थ को छूती हुई परिलक्षित होती हैं । प्रेमचंदजी के पात्रों की गतिविधि यथार्थ का आभास लिए हुए जान पड़ती है । परंतु केवल भाषा या शैली-संबंधी विशेषताओं को लेकर किसी लेखक को यथार्थवादी नहीं कहा जा सकता । उसका सकता । उसका जीवन-दर्शन, चरित्रचित्रण और कला की मुख्य प्रेरणा से ही उसकी परीक्षा होती है । वृष्टि से प्रेमचंदजी यथार्थवादी नहीं हैं। उन्हें यथार्थोन्मुख आदर्शवादी कहना भी अस्पष्टता को ही बढ़ाना है । यथार्थोन्मुख आदर्शवादिता से क्या तात्पर्य हो सकता है ? साहित्य में यथार्थवादी और आदर्शवादी रचना के दो अलग-अलग विभाग हैं। इन दोनों को मिलानेवाला ( Intermediary ) कोई पृथकवाद नहीं है । यह तर्कसंमत भी प्रतीत नहीं होता, क्योंकि दो परस्पर विरोधी जीवनदर्शनों और कला-परिपाटियों में एकत्व की कल्पना हो कैसे की जा सकती है ! प्रेमचंद के अंतिम उपन्यास 'गोदान' के संबंध में यह प्रश्न उपस्थित होता है कि उसे आदर्शवादी किस आधार पर कहें । गोदान में प्रेमचंदजी ने ग्रामीण जीवन का सर्वतोमुखी चित्रण किया है और किसान की विवशतापूर्ण स्थिति को दिखाकर उपन्यास की समाप्ति को गई है । गोदान में समस्या के निर्णय का कोई प्रयत्न नहीं है, दूसर शब्दों मैं उसमें प्रेमचंदजी की ध्येयवादिता प्रत्यक्ष होकर नहीं आई है। परंतु चरित्रनिर्माण और कथानक के विकास क्रम में प्रेमचंदजी भारतीय किसान के आदर्श स्वरूप को भूले नहीं हैं । उपन्यास का नायक होरी सारी वाधाओं और संकटों के रहते हुए भी अपने मूल आदर्श का विस्मरण नहीं कर सका है । वह अंततः आदर्शवादी है । प्रेमचन्दजी के प्रसिद्ध उपन्यास 'गोदान' के संबंध में तीन प्रश्न प्रायः किये जाते हैं। वे क्रमशः ये हैं :-- ( १ ) 'गोदान' में ग्रामीण कथानक के साथ नागरिक कथा किस उद्देश्य से जोड़ी गई है, और वह कहां तक उपयोगिनी हुई है. ? (२) 'गोदान' को राष्ट्रीय प्रतिनिधि उपन्यास ( Epic Novel ) कहा जा सकता है या नहीं ? और (३) 'गोदान' समाजवादी कृति है या नहीं ? यहां हम इन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर देने की चेष्टा करेंगे । ग्रामीण और नागरिक कथा का समन्वय - Chaisons , "The 1 शास्त्रीय शब्दावली के अनुसार गोदान में आधिकारिक और प्रासंगिक, दो कथायें पाई जाती हैं। ग्रामीण पात्रों से संबंध रखनेवाली कथा आधिकारिक या मुख्य कथा है । नागरिक पात्रों को उपस्थित करने वाली कथा प्रासंगिक या गौण है । गोदान में इन दोनों कथाओं को एक संबंधसूत्र में बांधने का प्रयत्न किया गया है, परन्तु प्रश्न यह है कि यह प्रयत्न कहाँ तक सफल या समीचीन हुआ है । नागरिक और ग्रामीण पात्रों के बीच संबंध स्थापन का कार्य गांव के जमींदार रायसाहब द्वारा पूरा होता है । गांव की रामलीला देखने के लिये रायसाहब के नागरिक मित्र उनके घर आते हैं । यहीं 'मालती-हरण' का एक मनोरंजक और अनोखा दृश्य जाता है । दूसरी ओर ग्रामीण पात्र 'गोवर' कुछ दिनों तक शहर में रहता है और उपन्यास के नागरिक पात्रों के सम्पर्क में आता है। परंतु नागरिक और ग्रामीण पात्रों का यह सम्मिलन इतना घनिष्ठ नहीं होता कि एक-दूसरे के जीवन-क्रम को प्रभावित करे और समस्त कथानक को समन्वित कर एक ही मुख्य कथा का अंग बना ले। पारसी नाटकों में प्रायः मुख्य कथा के साथ हास्य या विनोद-प्रधान एक दूसरी कथा जुड़ी रहती थी, जिसका प्रयोजन होता था मुख्य कथा की गंभीरता को कम कर दर्शकों का मनोरंजन करना । वास्तव में वे दोनों कथायें एक-दूसरे से नितांत भिन्न और स्वतंत्र होती थीं । किसी भी स्थल पर उनके कथा-तंतु जुड़े नहीं होते थे । ऐसी रचनाओं में कथानक की संगति का प्रश्न ही नहीं उठता । 'गोदान' उपन्यास के उक्त दोनों कथानक यद्यपि परस्पर इतने असंबद्ध नहीं हैं, फिर भी उनमें वास्तविक ऐक्य की कमी अवश्य है ।
को आँखों से ओझल कर असाधारण और अलौकिक पात्रों आदर्शवाद की एक विशेषता है । कभी-कभी यह भावातिरेक रचना को अवास्तविक और अविश्वसनीय भी बना देता है । लेखक वास्तविकता को छोड़कर पात्रों को अपनी कल्पना का रूप देने लगता है । यह प्रवृत्ति पाश्चात्य समीक्षकों को खटकी । उन्होंने इसके दुर्बल पक्ष को पहचाना और विरोध में यथार्थवाद या वैज्ञानिक चित्रण की आवाज उठाई । मनोविज्ञान भी एक विज्ञान ही है; इसलिए मनोवैज्ञानिक चरित्र निर्देश, सूक्ष्म मनोभावों का आघात प्रतिघात यथार्थवादी कला-सृष्टि में अपनाया गया है । इसका यह अर्थ नहीं कि आदर्शवादी कला में मनोविज्ञान का चित्रण होता ही नहीं । वह होता है, पर आदर्शवादी भावुकता को लिए हुए । आदर्शवादी कला के संबंध में डीडेरो नामक फ्रेंच समीक्षक का मत है कि यह कलापद्धति मिट्टी की भित्ति पर बनाए गए मूल्यवान मणियों के जड़ाव के सदृश है । कोई कलाकार या तो यथार्थवादी ही हो सकता है या आदर्शवादी ही । ये दोनों परस्पर विरोधी विचारधाराएं और कलाशैलियाँ हैं। इनका मिश्रण किसी एक रचना में संभव नहीं । साहित्यिक निर्माण में यथार्थोन्मुख आदर्शवाद या आदर्शोन्मुख यथार्थवाद नाम की वस्तु नहीं हो सकती । वास्तव में प्रेमचंदजी अपने विचारों व लेखन में आदर्शवादी आपका चरित्र निर्माण और मनोवैज्ञानिक चित्रण आदर्शवादी है । आदर्शवादी चित्रण से तात्पर्य है मानव की सद्वृत्तियों पर विश्वास रखकर साहित्यनिर्माण करना । उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों को देखकर ही हम ऐसा कहते हैं । इस प्रकार प्रेमचंद के साहित्य का । सांगोपांग अध्ययन करने पर उन्हें आदर्शवादी लेखक ही कहना उचित होगा । कथोपकथन, भाषा की सामान्यता या पात्रानुरूपता, पात्रों की विनोदात्मक बातचीत आदि शैली-संबंधी विशेषताएं यथार्थ को छूती हुई परिलक्षित होती हैं । प्रेमचंदजी के पात्रों की गतिविधि यथार्थ का आभास लिए हुए जान पड़ती है । परंतु केवल भाषा या शैली-संबंधी विशेषताओं को लेकर किसी लेखक को यथार्थवादी नहीं कहा जा सकता । उसका सकता । उसका जीवन-दर्शन, चरित्रचित्रण और कला की मुख्य प्रेरणा से ही उसकी परीक्षा होती है । वृष्टि से प्रेमचंदजी यथार्थवादी नहीं हैं। उन्हें यथार्थोन्मुख आदर्शवादी कहना भी अस्पष्टता को ही बढ़ाना है । यथार्थोन्मुख आदर्शवादिता से क्या तात्पर्य हो सकता है ? साहित्य में यथार्थवादी और आदर्शवादी रचना के दो अलग-अलग विभाग हैं। इन दोनों को मिलानेवाला कोई पृथकवाद नहीं है । यह तर्कसंमत भी प्रतीत नहीं होता, क्योंकि दो परस्पर विरोधी जीवनदर्शनों और कला-परिपाटियों में एकत्व की कल्पना हो कैसे की जा सकती है ! प्रेमचंद के अंतिम उपन्यास 'गोदान' के संबंध में यह प्रश्न उपस्थित होता है कि उसे आदर्शवादी किस आधार पर कहें । गोदान में प्रेमचंदजी ने ग्रामीण जीवन का सर्वतोमुखी चित्रण किया है और किसान की विवशतापूर्ण स्थिति को दिखाकर उपन्यास की समाप्ति को गई है । गोदान में समस्या के निर्णय का कोई प्रयत्न नहीं है, दूसर शब्दों मैं उसमें प्रेमचंदजी की ध्येयवादिता प्रत्यक्ष होकर नहीं आई है। परंतु चरित्रनिर्माण और कथानक के विकास क्रम में प्रेमचंदजी भारतीय किसान के आदर्श स्वरूप को भूले नहीं हैं । उपन्यास का नायक होरी सारी वाधाओं और संकटों के रहते हुए भी अपने मूल आदर्श का विस्मरण नहीं कर सका है । वह अंततः आदर्शवादी है । प्रेमचन्दजी के प्रसिद्ध उपन्यास 'गोदान' के संबंध में तीन प्रश्न प्रायः किये जाते हैं। वे क्रमशः ये हैं :-- 'गोदान' में ग्रामीण कथानक के साथ नागरिक कथा किस उद्देश्य से जोड़ी गई है, और वह कहां तक उपयोगिनी हुई है. ? 'गोदान' को राष्ट्रीय प्रतिनिधि उपन्यास कहा जा सकता है या नहीं ? और 'गोदान' समाजवादी कृति है या नहीं ? यहां हम इन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर देने की चेष्टा करेंगे । ग्रामीण और नागरिक कथा का समन्वय - Chaisons , "The एक शास्त्रीय शब्दावली के अनुसार गोदान में आधिकारिक और प्रासंगिक, दो कथायें पाई जाती हैं। ग्रामीण पात्रों से संबंध रखनेवाली कथा आधिकारिक या मुख्य कथा है । नागरिक पात्रों को उपस्थित करने वाली कथा प्रासंगिक या गौण है । गोदान में इन दोनों कथाओं को एक संबंधसूत्र में बांधने का प्रयत्न किया गया है, परन्तु प्रश्न यह है कि यह प्रयत्न कहाँ तक सफल या समीचीन हुआ है । नागरिक और ग्रामीण पात्रों के बीच संबंध स्थापन का कार्य गांव के जमींदार रायसाहब द्वारा पूरा होता है । गांव की रामलीला देखने के लिये रायसाहब के नागरिक मित्र उनके घर आते हैं । यहीं 'मालती-हरण' का एक मनोरंजक और अनोखा दृश्य जाता है । दूसरी ओर ग्रामीण पात्र 'गोवर' कुछ दिनों तक शहर में रहता है और उपन्यास के नागरिक पात्रों के सम्पर्क में आता है। परंतु नागरिक और ग्रामीण पात्रों का यह सम्मिलन इतना घनिष्ठ नहीं होता कि एक-दूसरे के जीवन-क्रम को प्रभावित करे और समस्त कथानक को समन्वित कर एक ही मुख्य कथा का अंग बना ले। पारसी नाटकों में प्रायः मुख्य कथा के साथ हास्य या विनोद-प्रधान एक दूसरी कथा जुड़ी रहती थी, जिसका प्रयोजन होता था मुख्य कथा की गंभीरता को कम कर दर्शकों का मनोरंजन करना । वास्तव में वे दोनों कथायें एक-दूसरे से नितांत भिन्न और स्वतंत्र होती थीं । किसी भी स्थल पर उनके कथा-तंतु जुड़े नहीं होते थे । ऐसी रचनाओं में कथानक की संगति का प्रश्न ही नहीं उठता । 'गोदान' उपन्यास के उक्त दोनों कथानक यद्यपि परस्पर इतने असंबद्ध नहीं हैं, फिर भी उनमें वास्तविक ऐक्य की कमी अवश्य है ।
नई दिल्ली। लोकप्रिय 'वडाली बंधु' के प्यारेलाल वडाली का कहना है कि सूफी संगीत के आध्यात्मिक तथा भक्ति मार्ग ने सदियों तक मानव जाति को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इन दिनों सूफी संगीत शैली को वो लोग नोंच-नोंच कर खा रहे हैं, जिन्हें सूफीवाद की कतई समझ नहीं है। यह पूछे जाने पर कि बॉलीवुड में सूफी संगीत के प्रचलन के बारे में आप क्या सोचते हैं? जवाब में प्यारेलाल ने मुंबई से फोन पर बताया, "फिल्मों में दिखाए गए गाने सूफी नहीं हैं। फिल्मों में कोई भी सूफी संगीत नहीं गाता।" उन्होंने संगीत जगत में 'भेड़चाल' पर दुख जताते हुए कहा, "इन दिनों जिन लोगों को सूफी की कोई समझ नहीं है, वो स्वयं को इस संगीत का कर्ता-धर्ता होने का दावा करते हैं। दर्शक भी यह मान लेते हैं। सूफी गाने और समझने वाले चुनिंदा लोग हैं।" वडाली बंधु ने शनिवार को मुंबई में मिर्ची लाइव के संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। उन्होंने एमटीवी के कोक स्टूडियो के प्रथम संस्करण में भी भाग लिया था और 'तू माने या ना माने दिलदारा' गाने को नए सिरे पेश किया। प्यारेलाल ने कहा, "हमने कोक स्टूडियो में एक कार्यक्रम किया था और 'तू माने या ना माने' गाया। यह मूलरूप से सूफी गीत नहीं था, लेकिन हमने इसे उस अंदाज में पेश किया।" वडाली बंधु अमृतसर के करीब एक छोटे से गांव गुरु की वडाली के रहने वाले हैं। वे 'पिंजर' और 'धूप' जैसी फिल्मों में गा चुके हैं। 'रंगरेज मेरे' उनके सर्वाधिक चर्चित गानों में से एक है, जो कंगना रनौत और आर. माधवन अभिनीत 'तनु वेड्स मनु' फिल्म से है। प्यारेलाल ने बताया कि यह गाना एक रात में रिकॉर्ड किया गया था। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
नई दिल्ली। लोकप्रिय 'वडाली बंधु' के प्यारेलाल वडाली का कहना है कि सूफी संगीत के आध्यात्मिक तथा भक्ति मार्ग ने सदियों तक मानव जाति को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इन दिनों सूफी संगीत शैली को वो लोग नोंच-नोंच कर खा रहे हैं, जिन्हें सूफीवाद की कतई समझ नहीं है। यह पूछे जाने पर कि बॉलीवुड में सूफी संगीत के प्रचलन के बारे में आप क्या सोचते हैं? जवाब में प्यारेलाल ने मुंबई से फोन पर बताया, "फिल्मों में दिखाए गए गाने सूफी नहीं हैं। फिल्मों में कोई भी सूफी संगीत नहीं गाता।" उन्होंने संगीत जगत में 'भेड़चाल' पर दुख जताते हुए कहा, "इन दिनों जिन लोगों को सूफी की कोई समझ नहीं है, वो स्वयं को इस संगीत का कर्ता-धर्ता होने का दावा करते हैं। दर्शक भी यह मान लेते हैं। सूफी गाने और समझने वाले चुनिंदा लोग हैं।" वडाली बंधु ने शनिवार को मुंबई में मिर्ची लाइव के संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। उन्होंने एमटीवी के कोक स्टूडियो के प्रथम संस्करण में भी भाग लिया था और 'तू माने या ना माने दिलदारा' गाने को नए सिरे पेश किया। प्यारेलाल ने कहा, "हमने कोक स्टूडियो में एक कार्यक्रम किया था और 'तू माने या ना माने' गाया। यह मूलरूप से सूफी गीत नहीं था, लेकिन हमने इसे उस अंदाज में पेश किया।" वडाली बंधु अमृतसर के करीब एक छोटे से गांव गुरु की वडाली के रहने वाले हैं। वे 'पिंजर' और 'धूप' जैसी फिल्मों में गा चुके हैं। 'रंगरेज मेरे' उनके सर्वाधिक चर्चित गानों में से एक है, जो कंगना रनौत और आर. माधवन अभिनीत 'तनु वेड्स मनु' फिल्म से है। प्यारेलाल ने बताया कि यह गाना एक रात में रिकॉर्ड किया गया था। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
भारत के 11वें नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक रहे विनोद राय का जन्म 23 मई, 1948 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला के मोहम्मदाबाद गांव में हुआ। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक पद पर वह 7 जनवरी, 2008 से 22 मई, 2013 तक थे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कालेज से अर्थशास्त्र में एमए हैं। हिंदू कालेज दिल्ली की स्थापना सन् 1890 में हुई। इसके अतिरिक्त उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त कर रखी है। 1972 बैच के आईएएस अधिकारी रहे विनोद राय कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। यूपीए सरकार द्वारा किए गए लाखों करोड़ रुपए के टू-जी स्पेक्ट्रम एवं कोयला घोटाले की सनसनीखेज रिपोर्टों के कारण वह चर्चा में आए थे। संप्रति वह संयुक्त राष्ट्र के बाहरी लेखा परीक्षकों के अध्यक्ष हैं। वह तब चर्चा में आए थे, जब प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री वी नारायण सामी ने सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने यह बयान दिया कि सीएजी को सरकारी स्कीमों में हो रहे स्कैमों पर अपनी टिप्पणी देने का कोई अधिकार ही नहीं है, इससे भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगता है, तो विनोद राय को स्वयं इस बारे में कहना पड़ा कि सीएजी का यह मूलभूत और नैतिक दायित्व है कि वह सरकार के कामकाज में दखल न देते हुए भी आर्थिक मामलों में पाई गई अनियमितताएं उसे बताए ताकि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा की जा सके और सरकार पर नियंत्रण बना रहे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह देश की जनता के साथ विश्वासघात होगा। अभी उनकी ईमानदारी को ध्यान में रखते हुए उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के संचालन की कमान पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय के नेतृत्व वाले प्रशासकों की समिति को सौंपी है। यह समिति ही क्रिकेट की इस धनाढ्य संस्था में सुधार के लिए न्यायालय द्वारा मंजूर न्यायमूर्ति आरएम लोढा समिति की सिफारिशें भी लागू करेगी। प्रशासकों की इस समिति के अन्य सदस्यों में क्रिकेट के इतिहासकार रामचंद्र गुहा, आईडीएफसी के प्रबंध निदेशक विक्रम लिमये और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी को शामिल किया गया है। विनोद राय बैंक बोर्ड ब्यूरो के पहले चेयरमैन भी हैं, जिसका काम सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शीर्ष स्तर की नियुक्तियों पर सुझाव देना है। इन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
भारत के ग्यारहवें नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक रहे विनोद राय का जन्म तेईस मई, एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला के मोहम्मदाबाद गांव में हुआ। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक पद पर वह सात जनवरी, दो हज़ार आठ से बाईस मई, दो हज़ार तेरह तक थे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कालेज से अर्थशास्त्र में एमए हैं। हिंदू कालेज दिल्ली की स्थापना सन् एक हज़ार आठ सौ नब्बे में हुई। इसके अतिरिक्त उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त कर रखी है। एक हज़ार नौ सौ बहत्तर बैच के आईएएस अधिकारी रहे विनोद राय कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। यूपीए सरकार द्वारा किए गए लाखों करोड़ रुपए के टू-जी स्पेक्ट्रम एवं कोयला घोटाले की सनसनीखेज रिपोर्टों के कारण वह चर्चा में आए थे। संप्रति वह संयुक्त राष्ट्र के बाहरी लेखा परीक्षकों के अध्यक्ष हैं। वह तब चर्चा में आए थे, जब प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री वी नारायण सामी ने सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने यह बयान दिया कि सीएजी को सरकारी स्कीमों में हो रहे स्कैमों पर अपनी टिप्पणी देने का कोई अधिकार ही नहीं है, इससे भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगता है, तो विनोद राय को स्वयं इस बारे में कहना पड़ा कि सीएजी का यह मूलभूत और नैतिक दायित्व है कि वह सरकार के कामकाज में दखल न देते हुए भी आर्थिक मामलों में पाई गई अनियमितताएं उसे बताए ताकि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा की जा सके और सरकार पर नियंत्रण बना रहे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह देश की जनता के साथ विश्वासघात होगा। अभी उनकी ईमानदारी को ध्यान में रखते हुए उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के संचालन की कमान पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय के नेतृत्व वाले प्रशासकों की समिति को सौंपी है। यह समिति ही क्रिकेट की इस धनाढ्य संस्था में सुधार के लिए न्यायालय द्वारा मंजूर न्यायमूर्ति आरएम लोढा समिति की सिफारिशें भी लागू करेगी। प्रशासकों की इस समिति के अन्य सदस्यों में क्रिकेट के इतिहासकार रामचंद्र गुहा, आईडीएफसी के प्रबंध निदेशक विक्रम लिमये और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी को शामिल किया गया है। विनोद राय बैंक बोर्ड ब्यूरो के पहले चेयरमैन भी हैं, जिसका काम सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शीर्ष स्तर की नियुक्तियों पर सुझाव देना है। इन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
- 52 min ago Year Ender 2023- इस साल दुनिया को अलविदा कह गए ये दिग्गज सितारे.. एक एक नाम कर देगा दुखी! Don't Miss! Bhumi Pednekar- पैपराजी पर भड़कीं भूमि पेडनेकर तो लोगों ने लगाई क्लास, बोले- खुद बुलाकर अब.. भूमि पेडनेकर को लेकर काफी कम ऐसा देखा जाता है कि वो किसी पर नाराज हों या फिर मीडिया के सामने कुछ ऐसा कर दें जो कि आपको देखकर शायद अच्छा ना लगे। लेकिन इस वक्त जो वीडियो सामने आया है वो काफी अलग है और इसमें वो पैपराजी पर गुस्सा करतीं नजर आ रही हैं। दरअसल वो नहीं चाहती थीं कि उनकी तस्वीर क्लिक की जाए या उनका वीडियो लिया जाए। भूमि पेडनेकर इस वीडियो में पहले एक लड़की आती है और वो देखती है कि बाहर मीडिया है तो वो तेजी से वापस भागती है कि कहीं उसकी तस्वीर ना क्लिक कर ली जाए। इसके बाद भूमि पेडनेकर वहां आ जाती हैं वो पैपराजी से फोटो ना लेने के लिए कहती हैँ। जब पैपराजी कैमरा बंद नहीं करते हैं तो वो गुस्से में अपनी कार में जाकर बैठ जाती हैं। ये वीडियो चर्चा में है और लोग इसपर बात भी कर रहे हैं। हालांकि भूमि ने ऐसा क्यों किया इसको लेकर जानकारी नहीं है। एक यूजर ने लिखा है, खुद बुलाके खुद उखाड़ रही है डबल एजेंट। एक का कहना था, "इसको देखना बंद कर दोगे तो इसकी रोटी सब्जी बंद हो जाएगी।" एक ने लिखा, "मुझे लगता है कि वह गुस्सा होने के लायक भी नहीं है।" इस तरह के ढेरों कमेंट्स सामने आ रहे हैं।
- बावन मिनट ago Year Ender दो हज़ार तेईस- इस साल दुनिया को अलविदा कह गए ये दिग्गज सितारे.. एक एक नाम कर देगा दुखी! Don't Miss! Bhumi Pednekar- पैपराजी पर भड़कीं भूमि पेडनेकर तो लोगों ने लगाई क्लास, बोले- खुद बुलाकर अब.. भूमि पेडनेकर को लेकर काफी कम ऐसा देखा जाता है कि वो किसी पर नाराज हों या फिर मीडिया के सामने कुछ ऐसा कर दें जो कि आपको देखकर शायद अच्छा ना लगे। लेकिन इस वक्त जो वीडियो सामने आया है वो काफी अलग है और इसमें वो पैपराजी पर गुस्सा करतीं नजर आ रही हैं। दरअसल वो नहीं चाहती थीं कि उनकी तस्वीर क्लिक की जाए या उनका वीडियो लिया जाए। भूमि पेडनेकर इस वीडियो में पहले एक लड़की आती है और वो देखती है कि बाहर मीडिया है तो वो तेजी से वापस भागती है कि कहीं उसकी तस्वीर ना क्लिक कर ली जाए। इसके बाद भूमि पेडनेकर वहां आ जाती हैं वो पैपराजी से फोटो ना लेने के लिए कहती हैँ। जब पैपराजी कैमरा बंद नहीं करते हैं तो वो गुस्से में अपनी कार में जाकर बैठ जाती हैं। ये वीडियो चर्चा में है और लोग इसपर बात भी कर रहे हैं। हालांकि भूमि ने ऐसा क्यों किया इसको लेकर जानकारी नहीं है। एक यूजर ने लिखा है, खुद बुलाके खुद उखाड़ रही है डबल एजेंट। एक का कहना था, "इसको देखना बंद कर दोगे तो इसकी रोटी सब्जी बंद हो जाएगी।" एक ने लिखा, "मुझे लगता है कि वह गुस्सा होने के लायक भी नहीं है।" इस तरह के ढेरों कमेंट्स सामने आ रहे हैं।
प्रत्येक कंपनी के कर्मचारियों से प्रतिक्रिया की एक किस्म प्राप्त करता है। "Miel" - कोई अपवाद नहीं है। और इसलिए आज हम समझने के लिए कंपनियों के इस समूह करता है की कोशिश करेंगे, यह वास्तव में है? मैं उसे एक नियोक्ता के रूप में भरोसा कर सकते हैं, और बस कुछ सेवाओं की एक जगह के रूप में? या फिर हमारे सामने कुछ बेईमान कंपनी? यह अचल संपत्ति से संबंधित सभी मुद्दों के बाद यह सब समझने के लिए लायक है, यह एक बहुत ही गंभीर विषय है। नाम "Miel" के तहत कंपनियों का एक समूह क्या है? रियल एस्टेट - क्या इसके अभिन्न हिस्सा था। सब के बाद, हमारे सामने यह एक वास्तविक कंपनी है कि यह साथ काम करता है। एजेंसी या, आप चाहें तो। बेशक, यह भी विशेष रूप से अचल संपत्ति से संबंधित गतिविधि है। दरअसल, इसकी बिक्री के साथ। हम हम एक अचल संपत्ति निगम, बल्कि बड़े और लोकप्रिय है कह सकते हैं,। तो अपने कार्यों के लिए कोई शिकायत नहीं एजेंसी "Miel" प्राप्त नहीं होता है। सब कुछ स्पष्ट और सरल है। इस ठहरने और प्रतियोगियों, और ग्राहकों के साथ खुश। और क्या करने के लिए ध्यान देना चाहिए? शुरू करने के लिए, की क्षमता श्रमिकों के नजरिए से हमारी कंपनी के बारे में थोड़ा आज बात करते हैं। वे कंपनियों के इस समूह के बारे में क्या सोचते हैं? मैं उसे रोजगार पर भरोसा कर सकते हैं? काफी ध्यान खुला पदों के लिए निगम को दिया जाता है। और एजेंसी "Miel" इस क्षेत्र में प्रतियोगिता से बहुत अलग नहीं है। इस घटना प्रसन्न और निराश करती है। क्यों? अधिक बार हो रहा नहीं कंपनी Realtors, साथ ही प्रबंधन सलाहकार से। प्रबंधन पदों एक नियम के रूप में, कर रहे हैं, नहीं। दरअसल, वे सब व्यस्त थे। इसका मतलब यह है कि एक विशेष कैरियर की संभावनाओं को नहीं होगा। कारक है कि कई उम्मीदवारों उदास। फिर भी, एक रियल्टर या एक सलाहकार का काम - यह अचल संपत्ति एजेंसी में एक सामान्य घटना है। आप अपने पसंद के हिसाब से एक नौकरी पा सकते हैं। और इस प्रतिक्रिया के लिए "Miel" एक अच्छा कर्मचारी छोड़ देता है। यहाँ आप किसी भी प्रचार और बड़ा वादे उच्च पदों पर सुनाई नहीं देगा। आप अग्रिम क्या इस बात से सहमत करने के लिए पता चल जाएगा। इसलिए जब वहाँ कंपनी पर भरोसा करने के लिए हर कारण है। वैसे भी, आवेदकों द्वारा। खैर, महत्वपूर्ण भूमिका अधिक साक्षात्कार द्वारा निभाई गई। एक संभावित नियोक्ता लोगों के मन और मदद में जमा के साथ ये पहली बैठक किसी भी तरह से एक या एक और संघ चिह्नित करने के लिए। "Miel" Petrovka में (और केवल वहाँ नहीं) इस क्षेत्र में आवेदकों से किसी भी नकारात्मकता नहीं मिलता है। कि एक छोटे से असंतोष है। बात यह है कि साक्षात्कार में ही कंपनी के कार्यालय में आयोजित किया जाएगा है। पूरे अनुकूल स्थिति मेंः यदि आप एक समान स्तर पर संवाद। यह एक काफी दुर्लभ घटना है, जो संभावित आवेदकों पर भारी प्रभाव पड़ता है। हालांकि, वहाँ अपवाद हैं। कभी कभी यह नियोक्ता की ओर से एक निश्चित अहंकार देखी जा सकती है। इस तरह की घटना बहुत जल्दी बंद करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। समीक्षा "Miel" अच्छे कर्मचारियों को। वे बताते हैं कि काम पर रखने प्रबंधकों के साथ संचार बहुत उपयोगी मिलता है। आप अपने परामर्शदाता का चयन किया काम के सभी विवरण पूछ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आप के लिए किसी विशेष गतिविधि की सुविधाओं की व्याख्या करेगा। और जब कोई भी छिपाने नहीं होगा। क्या रिक्तियों और भविष्य काम के बारे में पूरी जानकारी की तुलना में बेहतर हो सकता है? इस तरह ईमानदारी "Miel" Petrovka में, और न केवल इस पते पर, यह हो जाता है आवेदकों की अच्छा विचारों के कारण। केवल यहां यह इस तरह की समीक्षा पर भरोसा करने लायक है? यह वास्तव में सभी के रूप में ऐसा लगता है तो अच्छा है? विशेष ध्यान करने के लिए भुगतान किया जाता है काम की परिस्थितियों रोजगार में। दरअसल, इस पहलू नौकरी चाहने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। कोई भी नीच, बुरा, असहज वातावरण में काम करने के लिए चाहता है। इसलिए, कार्यकर्ताओं अक्सर अपनी राय छोड़ देते हैं, खाते में इस सुविधा लेने। और "Miel" (अचल संपत्ति कार्यालयों नेटवर्क) क्षेत्र में सकारात्मक समीक्षा कमाता है। क्यों? कंपनी न केवल एक अच्छा और अनुकूल परिस्थितियों, लेकिन यह भी एक सुविधा प्रदान करता है। सबसे पहले, आप एक अच्छी तरह से सुसज्जित कार्यालय में समय के सबसे अधिक हो जाएगा। दूसरे, आप गठबंधन करने के लिए सक्षम हो जाएगा अचल संपत्ति की गतिविधियों किसी अन्य के साथ। सभी नौकरियों क्या आप किसी भी कर्मचारी की आवश्यकता हैः एक सुखद उपस्थिति और पूर्ण कार्यक्षमता। यह मुख्य रूप से एक कंप्यूटर या डेस्क संचालित। हाँ, यह ज्यादातर आसीन काम है, लेकिन यह अभी भी खुशी और आवेदकों से ब्याज का कारण बनता है। कई कर्मचारियों को एक आरामदायक कार्यालय और कार्यस्थल का सपना। "Miel" कंपनी इस तरह की स्थितियों प्रदान करेगा। वे आपको खुश करने के लिए यकीन है। वैसे भी, इतने सारे वादों और संभावित कर्मचारियों, और वर्तमान श्रमिकों है, और नियोक्ता खुद को। एक खास जगह किसी भी गतिविधि से आय की चर्चा और एक पूरे के रूप फर्म के लिए आवंटित किया गया है। कोई भी एक प्रतिष्ठित कंपनी में जाने के लिए है, जो एक पैसा का भुगतान करेगा चाहता है। इसलिए, मजदूरी - सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है कि दोनों विकर्षित होते हैं और आकर्षित में से एक। "Miel" Realtors में कहना है कि स्थिति अस्पष्ट है। सैम नियोक्ता उच्च लाभ, लेन-देन, बोनस और प्रीमियम का एक प्रतिशत का वादा किया। लगभग 60 000 प्रति माह - अब एक वास्तविकता है। लेकिन यहाँ, व्यवहार में यह अन्यथा पता चला है। और यह कई आवेदकों से निराशाजनक है। एक चंचल बात - समस्या यह है कि अचल संपत्ति गतिविधि तथ्य में निहित है। और अपने वेतन प्रतिबद्ध लेनदेन आप पर निर्भर करेगा। इस प्रतिक्रिया के लिए "Miel" कर्मचारियों ने एक नकारात्मक चरित्र देख सकते हैं। यह पता चला, कोई निश्चित वेतन नहीं है। एक संभावना है और एक बहुत ही उचित सौदा है, जो आप तेजी से और बड़ा लाभ लाएगा का निष्कर्ष है। लेकिन यह संभव है कि आप कर रहे हैं सामान्य रूप में, है, कुछ भी नहीं किसी भी मिलता है। याद रखें, "Miel" (मास्को और अन्य शहरों) - एक रियल एस्टेट कंपनी। ऐसे संगठनों में, वेतन अपने आप में एक निश्चित राशि में भुगतान नहीं किया है। लेन-देन का केवल एक प्रतिशत। ओह, और बोनस / नियोक्ता के विवेक पर बोनस। लेकिन अभी भी कुछ बिंदुओं कि आवेदकों की ध्यान दिया गया है। यह कहना है कि क्या यह श्रमिकों को शामिल करने के लिए अच्छा है के लिए मुश्किल है, लेकिन स्थिति यहां Realtors के अधिकांश के रूप में एक ही है। निगम "Miel" अलग नागरिकों के लिए संपत्ति बेचता है। और Realtors, कार्यालयों में कर्मचारियों कार्यस्थल में अवसरों की एक बहुत कुछ है। कौन सा? यह कहा गया है कि इस क्षेत्र के संयोजन के लिए एकदम सही है। यही है, आप न केवल "Miel" में, लेकिन यह भी कुछ अन्य जगह पर काम कर सकते हैं। आय के संबंध में एक अधिक स्थिर स्थिति पर। और यह प्रसन्न। इस संबंध में कर्मचारी "Miel" की प्रतिक्रिया वास्तव में सकारात्मक है। सब के बाद, अगर आप एक सौदा समाप्त करने के लिए सक्षम हैं, निगम का काम सिर्फ एक सभ्य अंशकालिक काम किया जाएगा। एक मूल वेतन (जैसे, गतिविधि से एक और कंपनी के लिए), तो आप खो देंगे। इस स्वतंत्रता भी उपलब्ध करने के लिए नकारात्मक पक्ष। प्रारंभ में, आप एक पूर्ण लाभ पैकेज का वादा कर रहे हैं। प्लस औपचारिक, संचार भुगतान और परिवहन सेवाओं। लेकिन व्यवहार में, यह नहीं होगा। आधिकारिक "Miel" काम दुर्लभ है। और बाहर बनाने, एक नियम, केवल सबसे अच्छा के रूप में। तो, सामाजिक पैकेज की गारंटी देता है अब। और संचार और परिवहन के भुगतान के लिए के रूप में हो सकता है, सामान्य रूप में, भूल जाते हैं - सब कुछ जेब से बाहर भुगतान करना होगा के लिए। अप्रिय घटना है, जो निराशाजनक है। इस पद्धति कई निगमों में मनाया जाता है हालांकि। ठीक है, के साथ उम्मीदवारों एक सा हल। सामान्य तौर पर, "Miel" नहीं अपने प्रतियोगियों से बहुत अलग हैः श्रमिकों यह बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं है। आश्चर्य की बात कुछ भी नहीं है, विशेष रूप से गतिविधि से एक स्थिर आय के अभाव को देखते हुए। लेकिन क्या ग्राहकों संगठन के बारे में सोचते? उनकी राय भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इधर, कर्मचारियों के मामले में के रूप में, कोई एक समाधान है। कुछ "Miel" संतुष्ट, दूसरों को नहीं। यह भाग्यशाली के रूप में कहा जा सकता है। दरअसल, किसी भी अचल संपत्ति कार्यालय - खतरा नहीं है। कोई नहीं जानता कि क्या विक्रेता आप गिर जाएगी। शायद तुम और निगम बस धोखा कर रही है! फिर भी, सामान्य रूप में, "Miel" ग्राहकों की प्रतिक्रिया अच्छा हो जाता है। कार्यालयों में आने के बाद छापे सकारात्मक बने हुए हैं। आप जिन कर्मचारियों को अपने काम पता है के साथ संवाद करेंगे। इसके अलावा, सभी कार्यालयों साफ सुथरा लग रहे हो। यह जिसमें जाने के लिए झोंपड़ी, और कुछ अप्रिय बर्बाद नहीं है! तुम हमेशा निगम "Miel" rietorom संपर्क कर सकते हैं और उसे तारीख की जानकारी के लिए उठो। यह अच्छा है। सेवा गुणवत्ता ऊंचाई पर भी है! लेकिन नहीं इतनी अच्छी तरह से के रूप में मैं चाहूँगा। दरअसल, में "Miel" काम अक्सर संदिग्ध है। और स्टाफ हमेशा पैसा बनाने के लिए ग्राहक के लिए "निशान", करने के लिए तैयार नहीं है। कभी-कभी एक स्थिर आय की कमी ही महसूस किया बनाता है। इस Realtors के व्यवहार में परिलक्षित होता है। और एक परिणाम के रूप में - पूरे संगठन पर। उदाहरण के लिए, कुछ ग्राहकों की शिकायत है कि वे एक बेहतर स्वर में उन लोगों के साथ संवाद नहीं है। वहां श्रमिकों जो अशिष्ट हैं और टिप्पणी करने के लिए प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। घटना भी अक्सर नहीं है, लेकिन यह मौजूद है। और कई ग्राहकों बंद। गरीब और असभ्य, अशिष्ट रियल्टर के साथ संवाद - यह भयानक है। एक और नकारात्मक बिंदु - एक धोखाधड़ी है। और विक्रेताओं का हिस्सा है, एक नियम के रूप में। लेकिन कोई भी सभी धक्कों "Miel" के खिलाफ ढेर को दोषी मानते हैं। इसलिए कभी-कभी आप सुन सकते हैं कि इस संगठन इसकी ईमानदारी से प्रतिष्ठित नहीं है। क्योंकि इस तरह की घटना के लेन-देन में से कुछ टूटे हुए हैं। ऐसा लगता है कि हमारे कंपनियों और आवेदकों की वर्तमान समूह को धोखा दे रहा है, और ग्राहकों। एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु - सेवाओं की लागत। उन्होंने यह भी एक भूमिका निभाता है। "Miel" - एक प्रतिष्ठित, अचल संपत्ति कार्यालयों के विशिष्ट समूह में। और उस में, खरीदारों का कहना है कि कीमतों में काफी अधिक हैं। और बहुत संपत्ति पर, और लेनदेन के प्रतिशत के रूप। यह कई repels। हाँ, हम हमेशा काम करते हैं और अच्छा है, प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ सौदा करना चाहते हैं। लेकिन यह भी सेवाओं के लिए वे "तीन खाल ऊपर आंसू। " की जरूरत नहीं है सब कुछ कम मात्रा में अच्छा है। दुर्भाग्य से, "Miel" नहीं है। लेकिन अगर आप सेवाओं की गुणवत्ता, साथ ही एजेंसी की प्रतिष्ठा के बारे में परवाह है, तो आप कोई समस्या नहीं के साथ यहां संपर्क कर सकते हैं। आखिरी बात ग्राहकों देखो, यह अचल संपत्ति विकल्प है। यही कारण है कि सिर्फ वह, उपलब्ध "Miel" में कुछ नकारात्मक क्षणों के साथ प्रस्तुत करने के लिए बनाता है। यह संगठन आवास की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश करता है। इसके साथ, आप आप क्या पसंद बिना किसी समस्या के और कम से कम समय में मिल सकता है। बेशक, सब कुछ के लिए भुगतान करने के लिए। यही कारण है कि कई लोगों का मानना है कि "Miel" में अचल संपत्ति की कीमतों अतिरंजित। सिद्धांत रूप में, यहाँ या नहीं लागू होते हैं, यह आप पर निर्भर है। यह एक मौजूदा कंपनी है जो बाजार में है वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक मजबूत स्थिति ले लिया है। मेरा मानना है कि यह संभव है, लेकिन सावधानी होना होगा। तो इस पहलू पर ध्यान देना। अंतिम निर्णय व्यक्तिगत रूप से आप पर निर्भर है!
प्रत्येक कंपनी के कर्मचारियों से प्रतिक्रिया की एक किस्म प्राप्त करता है। "Miel" - कोई अपवाद नहीं है। और इसलिए आज हम समझने के लिए कंपनियों के इस समूह करता है की कोशिश करेंगे, यह वास्तव में है? मैं उसे एक नियोक्ता के रूप में भरोसा कर सकते हैं, और बस कुछ सेवाओं की एक जगह के रूप में? या फिर हमारे सामने कुछ बेईमान कंपनी? यह अचल संपत्ति से संबंधित सभी मुद्दों के बाद यह सब समझने के लिए लायक है, यह एक बहुत ही गंभीर विषय है। नाम "Miel" के तहत कंपनियों का एक समूह क्या है? रियल एस्टेट - क्या इसके अभिन्न हिस्सा था। सब के बाद, हमारे सामने यह एक वास्तविक कंपनी है कि यह साथ काम करता है। एजेंसी या, आप चाहें तो। बेशक, यह भी विशेष रूप से अचल संपत्ति से संबंधित गतिविधि है। दरअसल, इसकी बिक्री के साथ। हम हम एक अचल संपत्ति निगम, बल्कि बड़े और लोकप्रिय है कह सकते हैं,। तो अपने कार्यों के लिए कोई शिकायत नहीं एजेंसी "Miel" प्राप्त नहीं होता है। सब कुछ स्पष्ट और सरल है। इस ठहरने और प्रतियोगियों, और ग्राहकों के साथ खुश। और क्या करने के लिए ध्यान देना चाहिए? शुरू करने के लिए, की क्षमता श्रमिकों के नजरिए से हमारी कंपनी के बारे में थोड़ा आज बात करते हैं। वे कंपनियों के इस समूह के बारे में क्या सोचते हैं? मैं उसे रोजगार पर भरोसा कर सकते हैं? काफी ध्यान खुला पदों के लिए निगम को दिया जाता है। और एजेंसी "Miel" इस क्षेत्र में प्रतियोगिता से बहुत अलग नहीं है। इस घटना प्रसन्न और निराश करती है। क्यों? अधिक बार हो रहा नहीं कंपनी Realtors, साथ ही प्रबंधन सलाहकार से। प्रबंधन पदों एक नियम के रूप में, कर रहे हैं, नहीं। दरअसल, वे सब व्यस्त थे। इसका मतलब यह है कि एक विशेष कैरियर की संभावनाओं को नहीं होगा। कारक है कि कई उम्मीदवारों उदास। फिर भी, एक रियल्टर या एक सलाहकार का काम - यह अचल संपत्ति एजेंसी में एक सामान्य घटना है। आप अपने पसंद के हिसाब से एक नौकरी पा सकते हैं। और इस प्रतिक्रिया के लिए "Miel" एक अच्छा कर्मचारी छोड़ देता है। यहाँ आप किसी भी प्रचार और बड़ा वादे उच्च पदों पर सुनाई नहीं देगा। आप अग्रिम क्या इस बात से सहमत करने के लिए पता चल जाएगा। इसलिए जब वहाँ कंपनी पर भरोसा करने के लिए हर कारण है। वैसे भी, आवेदकों द्वारा। खैर, महत्वपूर्ण भूमिका अधिक साक्षात्कार द्वारा निभाई गई। एक संभावित नियोक्ता लोगों के मन और मदद में जमा के साथ ये पहली बैठक किसी भी तरह से एक या एक और संघ चिह्नित करने के लिए। "Miel" Petrovka में इस क्षेत्र में आवेदकों से किसी भी नकारात्मकता नहीं मिलता है। कि एक छोटे से असंतोष है। बात यह है कि साक्षात्कार में ही कंपनी के कार्यालय में आयोजित किया जाएगा है। पूरे अनुकूल स्थिति मेंः यदि आप एक समान स्तर पर संवाद। यह एक काफी दुर्लभ घटना है, जो संभावित आवेदकों पर भारी प्रभाव पड़ता है। हालांकि, वहाँ अपवाद हैं। कभी कभी यह नियोक्ता की ओर से एक निश्चित अहंकार देखी जा सकती है। इस तरह की घटना बहुत जल्दी बंद करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। समीक्षा "Miel" अच्छे कर्मचारियों को। वे बताते हैं कि काम पर रखने प्रबंधकों के साथ संचार बहुत उपयोगी मिलता है। आप अपने परामर्शदाता का चयन किया काम के सभी विवरण पूछ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आप के लिए किसी विशेष गतिविधि की सुविधाओं की व्याख्या करेगा। और जब कोई भी छिपाने नहीं होगा। क्या रिक्तियों और भविष्य काम के बारे में पूरी जानकारी की तुलना में बेहतर हो सकता है? इस तरह ईमानदारी "Miel" Petrovka में, और न केवल इस पते पर, यह हो जाता है आवेदकों की अच्छा विचारों के कारण। केवल यहां यह इस तरह की समीक्षा पर भरोसा करने लायक है? यह वास्तव में सभी के रूप में ऐसा लगता है तो अच्छा है? विशेष ध्यान करने के लिए भुगतान किया जाता है काम की परिस्थितियों रोजगार में। दरअसल, इस पहलू नौकरी चाहने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। कोई भी नीच, बुरा, असहज वातावरण में काम करने के लिए चाहता है। इसलिए, कार्यकर्ताओं अक्सर अपनी राय छोड़ देते हैं, खाते में इस सुविधा लेने। और "Miel" क्षेत्र में सकारात्मक समीक्षा कमाता है। क्यों? कंपनी न केवल एक अच्छा और अनुकूल परिस्थितियों, लेकिन यह भी एक सुविधा प्रदान करता है। सबसे पहले, आप एक अच्छी तरह से सुसज्जित कार्यालय में समय के सबसे अधिक हो जाएगा। दूसरे, आप गठबंधन करने के लिए सक्षम हो जाएगा अचल संपत्ति की गतिविधियों किसी अन्य के साथ। सभी नौकरियों क्या आप किसी भी कर्मचारी की आवश्यकता हैः एक सुखद उपस्थिति और पूर्ण कार्यक्षमता। यह मुख्य रूप से एक कंप्यूटर या डेस्क संचालित। हाँ, यह ज्यादातर आसीन काम है, लेकिन यह अभी भी खुशी और आवेदकों से ब्याज का कारण बनता है। कई कर्मचारियों को एक आरामदायक कार्यालय और कार्यस्थल का सपना। "Miel" कंपनी इस तरह की स्थितियों प्रदान करेगा। वे आपको खुश करने के लिए यकीन है। वैसे भी, इतने सारे वादों और संभावित कर्मचारियों, और वर्तमान श्रमिकों है, और नियोक्ता खुद को। एक खास जगह किसी भी गतिविधि से आय की चर्चा और एक पूरे के रूप फर्म के लिए आवंटित किया गया है। कोई भी एक प्रतिष्ठित कंपनी में जाने के लिए है, जो एक पैसा का भुगतान करेगा चाहता है। इसलिए, मजदूरी - सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है कि दोनों विकर्षित होते हैं और आकर्षित में से एक। "Miel" Realtors में कहना है कि स्थिति अस्पष्ट है। सैम नियोक्ता उच्च लाभ, लेन-देन, बोनस और प्रीमियम का एक प्रतिशत का वादा किया। लगभग साठ शून्य प्रति माह - अब एक वास्तविकता है। लेकिन यहाँ, व्यवहार में यह अन्यथा पता चला है। और यह कई आवेदकों से निराशाजनक है। एक चंचल बात - समस्या यह है कि अचल संपत्ति गतिविधि तथ्य में निहित है। और अपने वेतन प्रतिबद्ध लेनदेन आप पर निर्भर करेगा। इस प्रतिक्रिया के लिए "Miel" कर्मचारियों ने एक नकारात्मक चरित्र देख सकते हैं। यह पता चला, कोई निश्चित वेतन नहीं है। एक संभावना है और एक बहुत ही उचित सौदा है, जो आप तेजी से और बड़ा लाभ लाएगा का निष्कर्ष है। लेकिन यह संभव है कि आप कर रहे हैं सामान्य रूप में, है, कुछ भी नहीं किसी भी मिलता है। याद रखें, "Miel" - एक रियल एस्टेट कंपनी। ऐसे संगठनों में, वेतन अपने आप में एक निश्चित राशि में भुगतान नहीं किया है। लेन-देन का केवल एक प्रतिशत। ओह, और बोनस / नियोक्ता के विवेक पर बोनस। लेकिन अभी भी कुछ बिंदुओं कि आवेदकों की ध्यान दिया गया है। यह कहना है कि क्या यह श्रमिकों को शामिल करने के लिए अच्छा है के लिए मुश्किल है, लेकिन स्थिति यहां Realtors के अधिकांश के रूप में एक ही है। निगम "Miel" अलग नागरिकों के लिए संपत्ति बेचता है। और Realtors, कार्यालयों में कर्मचारियों कार्यस्थल में अवसरों की एक बहुत कुछ है। कौन सा? यह कहा गया है कि इस क्षेत्र के संयोजन के लिए एकदम सही है। यही है, आप न केवल "Miel" में, लेकिन यह भी कुछ अन्य जगह पर काम कर सकते हैं। आय के संबंध में एक अधिक स्थिर स्थिति पर। और यह प्रसन्न। इस संबंध में कर्मचारी "Miel" की प्रतिक्रिया वास्तव में सकारात्मक है। सब के बाद, अगर आप एक सौदा समाप्त करने के लिए सक्षम हैं, निगम का काम सिर्फ एक सभ्य अंशकालिक काम किया जाएगा। एक मूल वेतन , तो आप खो देंगे। इस स्वतंत्रता भी उपलब्ध करने के लिए नकारात्मक पक्ष। प्रारंभ में, आप एक पूर्ण लाभ पैकेज का वादा कर रहे हैं। प्लस औपचारिक, संचार भुगतान और परिवहन सेवाओं। लेकिन व्यवहार में, यह नहीं होगा। आधिकारिक "Miel" काम दुर्लभ है। और बाहर बनाने, एक नियम, केवल सबसे अच्छा के रूप में। तो, सामाजिक पैकेज की गारंटी देता है अब। और संचार और परिवहन के भुगतान के लिए के रूप में हो सकता है, सामान्य रूप में, भूल जाते हैं - सब कुछ जेब से बाहर भुगतान करना होगा के लिए। अप्रिय घटना है, जो निराशाजनक है। इस पद्धति कई निगमों में मनाया जाता है हालांकि। ठीक है, के साथ उम्मीदवारों एक सा हल। सामान्य तौर पर, "Miel" नहीं अपने प्रतियोगियों से बहुत अलग हैः श्रमिकों यह बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं है। आश्चर्य की बात कुछ भी नहीं है, विशेष रूप से गतिविधि से एक स्थिर आय के अभाव को देखते हुए। लेकिन क्या ग्राहकों संगठन के बारे में सोचते? उनकी राय भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इधर, कर्मचारियों के मामले में के रूप में, कोई एक समाधान है। कुछ "Miel" संतुष्ट, दूसरों को नहीं। यह भाग्यशाली के रूप में कहा जा सकता है। दरअसल, किसी भी अचल संपत्ति कार्यालय - खतरा नहीं है। कोई नहीं जानता कि क्या विक्रेता आप गिर जाएगी। शायद तुम और निगम बस धोखा कर रही है! फिर भी, सामान्य रूप में, "Miel" ग्राहकों की प्रतिक्रिया अच्छा हो जाता है। कार्यालयों में आने के बाद छापे सकारात्मक बने हुए हैं। आप जिन कर्मचारियों को अपने काम पता है के साथ संवाद करेंगे। इसके अलावा, सभी कार्यालयों साफ सुथरा लग रहे हो। यह जिसमें जाने के लिए झोंपड़ी, और कुछ अप्रिय बर्बाद नहीं है! तुम हमेशा निगम "Miel" rietorom संपर्क कर सकते हैं और उसे तारीख की जानकारी के लिए उठो। यह अच्छा है। सेवा गुणवत्ता ऊंचाई पर भी है! लेकिन नहीं इतनी अच्छी तरह से के रूप में मैं चाहूँगा। दरअसल, में "Miel" काम अक्सर संदिग्ध है। और स्टाफ हमेशा पैसा बनाने के लिए ग्राहक के लिए "निशान", करने के लिए तैयार नहीं है। कभी-कभी एक स्थिर आय की कमी ही महसूस किया बनाता है। इस Realtors के व्यवहार में परिलक्षित होता है। और एक परिणाम के रूप में - पूरे संगठन पर। उदाहरण के लिए, कुछ ग्राहकों की शिकायत है कि वे एक बेहतर स्वर में उन लोगों के साथ संवाद नहीं है। वहां श्रमिकों जो अशिष्ट हैं और टिप्पणी करने के लिए प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। घटना भी अक्सर नहीं है, लेकिन यह मौजूद है। और कई ग्राहकों बंद। गरीब और असभ्य, अशिष्ट रियल्टर के साथ संवाद - यह भयानक है। एक और नकारात्मक बिंदु - एक धोखाधड़ी है। और विक्रेताओं का हिस्सा है, एक नियम के रूप में। लेकिन कोई भी सभी धक्कों "Miel" के खिलाफ ढेर को दोषी मानते हैं। इसलिए कभी-कभी आप सुन सकते हैं कि इस संगठन इसकी ईमानदारी से प्रतिष्ठित नहीं है। क्योंकि इस तरह की घटना के लेन-देन में से कुछ टूटे हुए हैं। ऐसा लगता है कि हमारे कंपनियों और आवेदकों की वर्तमान समूह को धोखा दे रहा है, और ग्राहकों। एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु - सेवाओं की लागत। उन्होंने यह भी एक भूमिका निभाता है। "Miel" - एक प्रतिष्ठित, अचल संपत्ति कार्यालयों के विशिष्ट समूह में। और उस में, खरीदारों का कहना है कि कीमतों में काफी अधिक हैं। और बहुत संपत्ति पर, और लेनदेन के प्रतिशत के रूप। यह कई repels। हाँ, हम हमेशा काम करते हैं और अच्छा है, प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ सौदा करना चाहते हैं। लेकिन यह भी सेवाओं के लिए वे "तीन खाल ऊपर आंसू। " की जरूरत नहीं है सब कुछ कम मात्रा में अच्छा है। दुर्भाग्य से, "Miel" नहीं है। लेकिन अगर आप सेवाओं की गुणवत्ता, साथ ही एजेंसी की प्रतिष्ठा के बारे में परवाह है, तो आप कोई समस्या नहीं के साथ यहां संपर्क कर सकते हैं। आखिरी बात ग्राहकों देखो, यह अचल संपत्ति विकल्प है। यही कारण है कि सिर्फ वह, उपलब्ध "Miel" में कुछ नकारात्मक क्षणों के साथ प्रस्तुत करने के लिए बनाता है। यह संगठन आवास की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश करता है। इसके साथ, आप आप क्या पसंद बिना किसी समस्या के और कम से कम समय में मिल सकता है। बेशक, सब कुछ के लिए भुगतान करने के लिए। यही कारण है कि कई लोगों का मानना है कि "Miel" में अचल संपत्ति की कीमतों अतिरंजित। सिद्धांत रूप में, यहाँ या नहीं लागू होते हैं, यह आप पर निर्भर है। यह एक मौजूदा कंपनी है जो बाजार में है वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक मजबूत स्थिति ले लिया है। मेरा मानना है कि यह संभव है, लेकिन सावधानी होना होगा। तो इस पहलू पर ध्यान देना। अंतिम निर्णय व्यक्तिगत रूप से आप पर निर्भर है!
Ravi Ashwin: नॉन स्ट्राइक एंड पर रन आउट करना सही है या गलत, इसे लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है। आईपीएल में लखनऊ और बैंगलोर के बीच खेले गए मैच में भी यह देखने को मिला। नई दिल्लीः अनुभवी भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंडियन प्रीमियर लीग के 16वें संस्करण में हर्षल पटेल के नॉन-स्ट्राइक एंड पर रन आउट की कोशिश पर खुशी जाहिर की है। 10 अप्रैल की रात रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और लखनऊ सुपरजायंट्स के बीच मैच के दौरान हर्षल पटेल ने नॉन-स्ट्राइक एंड पर रवि बिश्नोई को रन आउट करने की कोशिश की थी, लेकिन वह बेल्स गिराने में नाकाम रहे और मेहमान टीम एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पर एक रन से जीत गई। मैच की आखिरी गेंद पर लखनऊ को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी। हर्षल रन आउट करके मैच टाई करना चाह रहे थे। सीनियर भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने आईपीएल 2019 में कुछ इसी तरह नॉन-स्ट्राइक एंड पर जोस बटलर को रन आउट किया था, तब इसे मांकड़िंग कहा जाता था। उस वक्त भी खूब बवाल बचा था। अब हर्षल पटेल की तारीफ करते हुए उन्होंने अपनी राय रखी है। अश्विन ने कहा, 'एक गेंद और जीत के लिए एक रन की दरकार। नॉन-स्ट्राइकर हमेशा दौड़ने की लिए तैयार रहता है। ऐसे में मैं हर बार रुकूंगा और एक बल्लेबाज को रन आउट करूंगा। मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती। मैं जब मैच देख रहा था तब अपनी पत्नी से भी कहा कि उसे उसे रन आउट करना चाहिए और उसने कर दिखाया। मैं बहुत खुश था कि एक गेंदबाज में ऐसा करने की हिम्मत थी और मैं चाहता हूं कि और गेंदबाज ऐसा करें। मैच की बात करें तो दूसरी पारी के 11वें ओवर तक लखनऊ मुकाबले से बाहत नजर आ रही थी, लेकिन पहले मार्कस स्टोइनिस और फिर निकोलस पूरन के अर्धशतकों के बूते केएल राहुल की टीम ने वापसी की। 213 रन का पीछा करते हुए पूरन ने 15 गेंदों में सीजन का सबसे तेज अर्धशतक बनाया। आयुष 19वें ओवर में आउट हो गए और आखिरी ओवर में मार्क वुड और जयदेव उनादकट भी पवेलियन लौट गए, जिसके बाद जो हुआ वो इतिहास है।
Ravi Ashwin: नॉन स्ट्राइक एंड पर रन आउट करना सही है या गलत, इसे लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है। आईपीएल में लखनऊ और बैंगलोर के बीच खेले गए मैच में भी यह देखने को मिला। नई दिल्लीः अनुभवी भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंडियन प्रीमियर लीग के सोलहवें संस्करण में हर्षल पटेल के नॉन-स्ट्राइक एंड पर रन आउट की कोशिश पर खुशी जाहिर की है। दस अप्रैल की रात रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और लखनऊ सुपरजायंट्स के बीच मैच के दौरान हर्षल पटेल ने नॉन-स्ट्राइक एंड पर रवि बिश्नोई को रन आउट करने की कोशिश की थी, लेकिन वह बेल्स गिराने में नाकाम रहे और मेहमान टीम एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम पर एक रन से जीत गई। मैच की आखिरी गेंद पर लखनऊ को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी। हर्षल रन आउट करके मैच टाई करना चाह रहे थे। सीनियर भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने आईपीएल दो हज़ार उन्नीस में कुछ इसी तरह नॉन-स्ट्राइक एंड पर जोस बटलर को रन आउट किया था, तब इसे मांकड़िंग कहा जाता था। उस वक्त भी खूब बवाल बचा था। अब हर्षल पटेल की तारीफ करते हुए उन्होंने अपनी राय रखी है। अश्विन ने कहा, 'एक गेंद और जीत के लिए एक रन की दरकार। नॉन-स्ट्राइकर हमेशा दौड़ने की लिए तैयार रहता है। ऐसे में मैं हर बार रुकूंगा और एक बल्लेबाज को रन आउट करूंगा। मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती। मैं जब मैच देख रहा था तब अपनी पत्नी से भी कहा कि उसे उसे रन आउट करना चाहिए और उसने कर दिखाया। मैं बहुत खुश था कि एक गेंदबाज में ऐसा करने की हिम्मत थी और मैं चाहता हूं कि और गेंदबाज ऐसा करें। मैच की बात करें तो दूसरी पारी के ग्यारहवें ओवर तक लखनऊ मुकाबले से बाहत नजर आ रही थी, लेकिन पहले मार्कस स्टोइनिस और फिर निकोलस पूरन के अर्धशतकों के बूते केएल राहुल की टीम ने वापसी की। दो सौ तेरह रन का पीछा करते हुए पूरन ने पंद्रह गेंदों में सीजन का सबसे तेज अर्धशतक बनाया। आयुष उन्नीसवें ओवर में आउट हो गए और आखिरी ओवर में मार्क वुड और जयदेव उनादकट भी पवेलियन लौट गए, जिसके बाद जो हुआ वो इतिहास है।
भारतीय क्रिकेट टीम में पिछले कुछ समय से कई ऐसे युवा खिलाड़ियों ने प्रदर्शन किया है कि आने वाले समय में भारतीय चयनकर्ताओं के पसीने छूटने तय दिख रहे हैं। इसी बीच फिर एक युवा खिलाड़ी ने अपने खेल से सभी क्रिकेट फैंस का मन मोह लिया है। दरअसल वह खिलाड़ी है देवदत्त पडिक्कल। बता दें कि टीम इंडिया वर्तमान में वाइट गेंद प्रारूप में 2 प्लेइंग इलेवेन के साथ खेल रही है। एक प्लेइंग इलेवेन शिखर धवन की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका के साथ मुकबला खेल रही है वहीं रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय टीम मौजूदा समय में ऑस्ट्रेलिया पहुंची है जहां उन्हें टी20 विश्व कप खेलना है। आईपीएल में कई विस्फोटक पारियां खेल चुके देवदत्त पडिक्कल ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2022 में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। कर्नाटक के इस सलामी बल्लेबाज ने मंगलवार को मोहाली के आईएस बिंद्रा स्टेडियम में खेले जा रहे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के अपने पहले मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ महज 53 गेंदों में शतक जड़ दिया। उन्होंने अपना शतक पूरा करने के लिए 11 चौके और 5 छक्के लगाए। वह इस सीजन में टूर्नामेंट में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान 62 गेंदों का सामना किया, जिसमें उन्होंने 200 के स्ट्राइक रेट से 124 रन की नाबाद पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 14 चौके और 6 छक्के लगाए। उनकी दमदार पारी के दम पर कर्नाटक ने महाराष्ट्र के खिलाफ 20 ओवर में दो विकेट पर 215 रन बनाए। पडिक्कल के अलावा कप्तान मयंक अग्रवाल ने 28 और मनीष पांडे ने 50 रन का योगदान दिया। पांडे ने 38 गेंदों में एक चौका और चार छक्के लगाए। महाराष्ट्र के लिए ऐस घोष एकमात्र सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने एक विकेट लिया। इसके साथ ही पडिकल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कर्नाटक के लिए सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने महज 24 पारियों में यह आंकड़ा पार किया है। इस मामले में उन्होंने अपने राज्य के रोहन कदम का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिन्होंने 27 पारियों में 1000 रन का आंकड़ा पार किया था। ज्ञात हो कि डोमेस्टिक क्रिकेट में इस तरह के प्रदर्शन से कई युवा भारतीय राष्ट्रिय टीम में चयनित होने की कतार में हैं। ऐसे में पडिक्कल का यह विस्फोटक खेल भारतीय चयनकर्ताओं को भी नई प्लेइंग 11 के बारे में सोंचने पर मजबूर कर देगी।
भारतीय क्रिकेट टीम में पिछले कुछ समय से कई ऐसे युवा खिलाड़ियों ने प्रदर्शन किया है कि आने वाले समय में भारतीय चयनकर्ताओं के पसीने छूटने तय दिख रहे हैं। इसी बीच फिर एक युवा खिलाड़ी ने अपने खेल से सभी क्रिकेट फैंस का मन मोह लिया है। दरअसल वह खिलाड़ी है देवदत्त पडिक्कल। बता दें कि टीम इंडिया वर्तमान में वाइट गेंद प्रारूप में दो प्लेइंग इलेवेन के साथ खेल रही है। एक प्लेइंग इलेवेन शिखर धवन की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका के साथ मुकबला खेल रही है वहीं रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय टीम मौजूदा समय में ऑस्ट्रेलिया पहुंची है जहां उन्हें टीबीस विश्व कप खेलना है। आईपीएल में कई विस्फोटक पारियां खेल चुके देवदत्त पडिक्कल ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी दो हज़ार बाईस में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। कर्नाटक के इस सलामी बल्लेबाज ने मंगलवार को मोहाली के आईएस बिंद्रा स्टेडियम में खेले जा रहे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के अपने पहले मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ महज तिरेपन गेंदों में शतक जड़ दिया। उन्होंने अपना शतक पूरा करने के लिए ग्यारह चौके और पाँच छक्के लगाए। वह इस सीजन में टूर्नामेंट में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान बासठ गेंदों का सामना किया, जिसमें उन्होंने दो सौ के स्ट्राइक रेट से एक सौ चौबीस रन की नाबाद पारी खेली। इस दौरान उन्होंने चौदह चौके और छः छक्के लगाए। उनकी दमदार पारी के दम पर कर्नाटक ने महाराष्ट्र के खिलाफ बीस ओवर में दो विकेट पर दो सौ पंद्रह रन बनाए। पडिक्कल के अलावा कप्तान मयंक अग्रवाल ने अट्ठाईस और मनीष पांडे ने पचास रन का योगदान दिया। पांडे ने अड़तीस गेंदों में एक चौका और चार छक्के लगाए। महाराष्ट्र के लिए ऐस घोष एकमात्र सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने एक विकेट लिया। इसके साथ ही पडिकल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कर्नाटक के लिए सबसे तेज एक हज़ार रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने महज चौबीस पारियों में यह आंकड़ा पार किया है। इस मामले में उन्होंने अपने राज्य के रोहन कदम का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिन्होंने सत्ताईस पारियों में एक हज़ार रन का आंकड़ा पार किया था। ज्ञात हो कि डोमेस्टिक क्रिकेट में इस तरह के प्रदर्शन से कई युवा भारतीय राष्ट्रिय टीम में चयनित होने की कतार में हैं। ऐसे में पडिक्कल का यह विस्फोटक खेल भारतीय चयनकर्ताओं को भी नई प्लेइंग ग्यारह के बारे में सोंचने पर मजबूर कर देगी।
- दिल की सेहत अच्छी रखने के लिए जानिए नाश्ते में क्या खाएं और क्या नहीं, Healthy Heart के लिए खानपान हो ऐसाLifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।मंगलवार मई 16, 2023 10:00 AM ISTHeart Health: स्वस्थ रहने के लिए दिल की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी होता है. आप भी चाहते हैं कि कॉलेस्ट्रोल जैसी दिक्कतें दूर रहें और दिल स्वस्थ रहे तो जानिए कैसा होना चाहिए आपका नाश्ता. - सुबह के नाश्ते में बनाना है कुछ झटपट तो बनाएं सूजी का चीला, 15 मिनट में हो जाएगा तैयार, परिवार के साथ लें इस रेसिपी का मजाFood । Written by: पूनम मिश्रा ।शुक्रवार अप्रैल 21, 2023 10:57 AM ISTSooji Ka Cheela: गर्मी का मौसम है ऐसे में जरूरी है कि नाश्ता पेट को आराम देने वाला और हल्का होना चाहिए. ऐसे में सुबह के नाश्ते में बनाएं सूजी का चीला. इस चटपटे नाश्ते को बनाने का तरीका बेहद आसान है. - Zara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।रविवार अप्रैल 9, 2023 02:18 PM ISTBlack Idli Viral Video: यूं तो इडली को कई तरीके से बनाया जाता है. इडली की सबसे लोकप्रिय किस्में चावल इडली, सूजी इडली और बाजरा इडली हैं, लेकिन क्या आपने कभी काली इडली ट्राई की है? हाल ही में काली इडली का एक वीडियो सामने आ रहा है, जिसका स्वाद लेते हुए बॉलीवुड के फेमस एक्टर आशीष विद्यार्थी अपना रिएक्शन देते हुए वायरल हो रहे हैं. - Lifestyle । Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी ।मंगलवार मार्च 28, 2023 12:52 PM ISTRight way to eat breakfast : सुबह का नाश्ता भरपेट और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए. क्योंकि इससे दिमागी और शारीरिक मेहनत के लिए दिन भर ऊर्जा मिलती है. इसलिए नाश्ते का चुनाव सोच समझकर करना चाहिए. - Food । Written by: पूनम मिश्रा, Edited by: अनिता शर्मा ।गुरुवार मार्च 2, 2023 06:15 PM ISTEasy breakfast: सुबह के नाश्ते में हम वही बनाना पसंद करते है जो हेल्दी, पौष्टिक होने के साथ ही बनने में कम समय लेता हो. यहां हम आपको मिनटों में तैयार होने वाले एग फ्रिटाटा रेसिपी (Egg Frittata recipe) के बारे में बता रहे हैं. - Atta And Matar Dosa: सुबह ब्रेकफास्ट बनाने के लिए समय की है कमी तो इस इंस्टेंट डोसा रेसिपी को करें ट्राईFood । Translated by: Aradhana Singh ।बुधवार जनवरी 25, 2023 10:30 AM ISTAtta And Matar Dosa: साउथ इंडियन डिश अक्सर हमारे ब्रेकफास्ट के मेनू में अपना स्थान बना लेती है. इडली, डोसा, उपमा, वड़ा सांभर- ऑप्शन और बहुत हैं. डोसा सिर्फ साउथ इंडिया में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में ब्रेकफास्ट के लिए सबसे पॉपुलर डिशेज में से एक है. - Healthy Diet: केला, काली किशमिश और बादाम किसे खाना चाहिए? इन्हें खाने का सही समय और तरीका भी जान लीजिएHealth । Translated by: Avdhesh Painuly ।शुक्रवार जनवरी 13, 2023 02:00 PM ISTEmpty Stomach Diet: न्यूट्रिशनिस्ट ऋजुता दिवेकर ने कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को शेयर किया है और वे बताती हैं कि क्यों आपको अपने दिन की शुरुआत में केला, काली किशमिश या बादाम खाना चाहिए. - Lifestyle । Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी ।मंगलवार दिसम्बर 27, 2022 06:37 PM ISThealth tips : आजकल तो लोगों की आदत होती है सुबह उठते ही सोशल मीडिया चेक करने की जो आपके मूड को काफी हद तक प्रभावित करती है. आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे जिसे आप सुबह में अगर अपनाती हैं तो पूरा दिन अच्छा बीतेगा. - Lifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।शनिवार दिसम्बर 17, 2022 10:57 AM ISTBenefits of Eating Sprouts: अंकूरित मूंग सेहत को कई तरह से प्रभावित करती है. जानिए किस-किस तरह से फायदेमंद है सुबह के समय अंकूरित मूंग खाना. - सुबह नाश्ता ना करना सेहत के लिए हो सकता है बुरा, जानिए ब्रेकफास्ट स्किप करने के नुकसानों के बारे मेंLifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।मंगलवार अक्टूबर 25, 2022 07:13 AM ISTSkipping Breakfast: बहुत से लोग सुबह घर से नाश्ता किए बिना ही निकल जाते हैं. लेकिन, सेहत पर इसके विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं.
- दिल की सेहत अच्छी रखने के लिए जानिए नाश्ते में क्या खाएं और क्या नहीं, Healthy Heart के लिए खानपान हो ऐसाLifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।मंगलवार मई सोलह, दो हज़ार तेईस दस:शून्य AM ISTHeart Health: स्वस्थ रहने के लिए दिल की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी होता है. आप भी चाहते हैं कि कॉलेस्ट्रोल जैसी दिक्कतें दूर रहें और दिल स्वस्थ रहे तो जानिए कैसा होना चाहिए आपका नाश्ता. - सुबह के नाश्ते में बनाना है कुछ झटपट तो बनाएं सूजी का चीला, पंद्रह मिनट में हो जाएगा तैयार, परिवार के साथ लें इस रेसिपी का मजाFood । Written by: पूनम मिश्रा ।शुक्रवार अप्रैल इक्कीस, दो हज़ार तेईस दस:सत्तावन AM ISTSooji Ka Cheela: गर्मी का मौसम है ऐसे में जरूरी है कि नाश्ता पेट को आराम देने वाला और हल्का होना चाहिए. ऐसे में सुबह के नाश्ते में बनाएं सूजी का चीला. इस चटपटे नाश्ते को बनाने का तरीका बेहद आसान है. - Zara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।रविवार अप्रैल नौ, दो हज़ार तेईस दो:अट्ठारह PM ISTBlack Idli Viral Video: यूं तो इडली को कई तरीके से बनाया जाता है. इडली की सबसे लोकप्रिय किस्में चावल इडली, सूजी इडली और बाजरा इडली हैं, लेकिन क्या आपने कभी काली इडली ट्राई की है? हाल ही में काली इडली का एक वीडियो सामने आ रहा है, जिसका स्वाद लेते हुए बॉलीवुड के फेमस एक्टर आशीष विद्यार्थी अपना रिएक्शन देते हुए वायरल हो रहे हैं. - Lifestyle । Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी ।मंगलवार मार्च अट्ठाईस, दो हज़ार तेईस बारह:बावन PM ISTRight way to eat breakfast : सुबह का नाश्ता भरपेट और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए. क्योंकि इससे दिमागी और शारीरिक मेहनत के लिए दिन भर ऊर्जा मिलती है. इसलिए नाश्ते का चुनाव सोच समझकर करना चाहिए. - Food । Written by: पूनम मिश्रा, Edited by: अनिता शर्मा ।गुरुवार मार्च दो, दो हज़ार तेईस छः:पंद्रह PM ISTEasy breakfast: सुबह के नाश्ते में हम वही बनाना पसंद करते है जो हेल्दी, पौष्टिक होने के साथ ही बनने में कम समय लेता हो. यहां हम आपको मिनटों में तैयार होने वाले एग फ्रिटाटा रेसिपी के बारे में बता रहे हैं. - Atta And Matar Dosa: सुबह ब्रेकफास्ट बनाने के लिए समय की है कमी तो इस इंस्टेंट डोसा रेसिपी को करें ट्राईFood । Translated by: Aradhana Singh ।बुधवार जनवरी पच्चीस, दो हज़ार तेईस दस:तीस AM ISTAtta And Matar Dosa: साउथ इंडियन डिश अक्सर हमारे ब्रेकफास्ट के मेनू में अपना स्थान बना लेती है. इडली, डोसा, उपमा, वड़ा सांभर- ऑप्शन और बहुत हैं. डोसा सिर्फ साउथ इंडिया में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में ब्रेकफास्ट के लिए सबसे पॉपुलर डिशेज में से एक है. - Healthy Diet: केला, काली किशमिश और बादाम किसे खाना चाहिए? इन्हें खाने का सही समय और तरीका भी जान लीजिएHealth । Translated by: Avdhesh Painuly ।शुक्रवार जनवरी तेरह, दो हज़ार तेईस दो:शून्य PM ISTEmpty Stomach Diet: न्यूट्रिशनिस्ट ऋजुता दिवेकर ने कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को शेयर किया है और वे बताती हैं कि क्यों आपको अपने दिन की शुरुआत में केला, काली किशमिश या बादाम खाना चाहिए. - Lifestyle । Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी ।मंगलवार दिसम्बर सत्ताईस, दो हज़ार बाईस छः:सैंतीस PM ISThealth tips : आजकल तो लोगों की आदत होती है सुबह उठते ही सोशल मीडिया चेक करने की जो आपके मूड को काफी हद तक प्रभावित करती है. आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे जिसे आप सुबह में अगर अपनाती हैं तो पूरा दिन अच्छा बीतेगा. - Lifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।शनिवार दिसम्बर सत्रह, दो हज़ार बाईस दस:सत्तावन AM ISTBenefits of Eating Sprouts: अंकूरित मूंग सेहत को कई तरह से प्रभावित करती है. जानिए किस-किस तरह से फायदेमंद है सुबह के समय अंकूरित मूंग खाना. - सुबह नाश्ता ना करना सेहत के लिए हो सकता है बुरा, जानिए ब्रेकफास्ट स्किप करने के नुकसानों के बारे मेंLifestyle । Written by: सीमा ठाकुर ।मंगलवार अक्टूबर पच्चीस, दो हज़ार बाईस सात:तेरह AM ISTSkipping Breakfast: बहुत से लोग सुबह घर से नाश्ता किए बिना ही निकल जाते हैं. लेकिन, सेहत पर इसके विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं.
दिल्ली की आम आदमी पार्टी को किसी तरह का खतरा नहीं है क्योंकि उसके पास प्रचंड बहुमत है। यह बात अलग है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के यहां सीबीआई की छापेमारी के बाद आप के नेता यह कहना शुरू कर दिए कि सरकार गिराने की साजिश रची जा रही है। मनीष सिसोदिया ने खुद कहा कि उनको पार्टी तोड़ने का ऑफर दिया गया था। उसके बाद बुधवार को संजय सिंह राज्यसभा के सांसद मीडिया के सामने आए और विधायकों के रेट को साझा किया। उन्होंने बताया कि विधायकों को 20 करोड़ का और विधायकों को तोड़कर लाने वाले को 25 करोड़ का। इन सबके बीच गुरुवार को सीएम केजरीवाल के आवास पर विधायकों की बैठक 11 बजे होनी थी। लेकिन जब कुछ विधायकों के संपर्क की खबर नहीं आई तो आप नेता कहने लगे सरकार गिराने की साजिश रची है। हालांकि बैठक में जब 53 विधायक सशरीर और 8 विधायक वर्चुअली मौजूद हुए तो आप का सुर बदला और फिर कहा गया कि ऑपरेशन लोटस एक बार फिर फेल हुआ। बीजेपी ने हमारे 12 विधायकों से संपर्क किया और उन्हें पार्टी तोड़ने को कहा. वे 40 विधायकों को तोड़ना चाहते थे और प्रत्येक को 20 करोड़ रुपये की पेशकश कर रहे थे। आज हुई बैठक में 62 में से 53 विधायक मौजूद थे. स्पीकर देश से बाहर हैं और मनीष सिसोदिया हिमाचल में हैं। सीएम ने अन्य विधायकों से फोन पर बात की और सभी ने कहा कि वे अंतिम सांस तक सीएम केजरीवाल के साथ हैं। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी को किसी तरह का खतरा नहीं है क्योंकि उसके पास प्रचंड बहुमत है। यह बात अलग है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के यहां सीबीआई की छापेमारी के बाद आप के नेता यह कहना शुरू कर दिए कि सरकार गिराने की साजिश रची जा रही है। मनीष सिसोदिया ने खुद कहा कि उनको पार्टी तोड़ने का ऑफर दिया गया था। उसके बाद बुधवार को संजय सिंह राज्यसभा के सांसद मीडिया के सामने आए और विधायकों के रेट को साझा किया। उन्होंने बताया कि विधायकों को बीस करोड़ का और विधायकों को तोड़कर लाने वाले को पच्चीस करोड़ का। इन सबके बीच गुरुवार को सीएम केजरीवाल के आवास पर विधायकों की बैठक ग्यारह बजे होनी थी। लेकिन जब कुछ विधायकों के संपर्क की खबर नहीं आई तो आप नेता कहने लगे सरकार गिराने की साजिश रची है। हालांकि बैठक में जब तिरेपन विधायक सशरीर और आठ विधायक वर्चुअली मौजूद हुए तो आप का सुर बदला और फिर कहा गया कि ऑपरेशन लोटस एक बार फिर फेल हुआ। बीजेपी ने हमारे बारह विधायकों से संपर्क किया और उन्हें पार्टी तोड़ने को कहा. वे चालीस विधायकों को तोड़ना चाहते थे और प्रत्येक को बीस करोड़ रुपये की पेशकश कर रहे थे। आज हुई बैठक में बासठ में से तिरेपन विधायक मौजूद थे. स्पीकर देश से बाहर हैं और मनीष सिसोदिया हिमाचल में हैं। सीएम ने अन्य विधायकों से फोन पर बात की और सभी ने कहा कि वे अंतिम सांस तक सीएम केजरीवाल के साथ हैं। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी की प्रदेश ईकाई को सहयोगी दलों के साथ सीट समझौते से जुड़े सभी पहलुओं पर फैसला लेने की आजादी दे दी है. महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी चुनावों में भाजपा-शिवसेना गठबंधन का मुख्यमंत्री का चेहरा वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ही होंगे. भाजपा आलाकमान ने इस मामले में शिवसेना के आगे किसी भी हाल में नहीं झुकने का फैसला करते हुए शिवसेना और अन्य सहयोगी दलों के सीटों के बंटवारे की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री फडनवीस और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल पर छोड़ दी है. भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी की प्रदेश ईकाई को सहयोगी दलों के साथ सीट समझौते से जुड़े सभी पहलुओं पर फैसला लेने की आजादी दे दी है. एक सूत्र के मुताबिक समझौता 50-50 प्रतिशत के आधार पर नहीं बल्कि मेरिट और जीतने की संभावना के आधार पर होगा. शिवसेना से कोई वादा नहीं पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, "शिवसेना ने हालिया लोकसभा चुनावों में 23 सीटें मांगी थीं और उस पर सहमति बन गई थी. शिवसेना प्रमुख विधानसभा सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा चाहते थे, लेकिन उस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई. " सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने शिवसेना को सीटों की संख्या को लेकर कोई वादा नहीं किया है. स्वीकारी थी सभी मांगें लोकसभा चुनावों में किसी भी तरह की असहमति के सुरों को टालने के लिए भाजपा ने शिवसेना की सभी मांगें मान ली थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में आलाकमान ने सुरक्षित अंतर रखकर उचित फैसला लेने की आजादी प्रदेश ईकाई को सौंपकर खुद को इस कवायद से दूर रखा है. सख्त रुख के संकेत भाजपा आलाकमान के रूख से यह साफ हो रहा है कि वह शिवसेना के आगे झुकने वाली नहीं है. शिवसेना ने मुख्यमंत्री के पद को लेकर तेवर दिखाए तो भाजपा अकेले दम चुनाव लड़ने को तैयार दिखती है. उल्लेखनीय है कि 2014 के विधानसभा चुनावों में 288 सीटों के लिए कोई समझौता नहीं हो पाने के कारण भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. शिवसेना को करारा झटका लगा था जब वह केवल 63 सीट जीत पाई, जबकि भाजपा ने तकरीबन दोगुनी 122 सीटें जीतीं.
भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी की प्रदेश ईकाई को सहयोगी दलों के साथ सीट समझौते से जुड़े सभी पहलुओं पर फैसला लेने की आजादी दे दी है. महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी चुनावों में भाजपा-शिवसेना गठबंधन का मुख्यमंत्री का चेहरा वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ही होंगे. भाजपा आलाकमान ने इस मामले में शिवसेना के आगे किसी भी हाल में नहीं झुकने का फैसला करते हुए शिवसेना और अन्य सहयोगी दलों के सीटों के बंटवारे की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री फडनवीस और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल पर छोड़ दी है. भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी की प्रदेश ईकाई को सहयोगी दलों के साथ सीट समझौते से जुड़े सभी पहलुओं पर फैसला लेने की आजादी दे दी है. एक सूत्र के मुताबिक समझौता पचास-पचास प्रतिशत के आधार पर नहीं बल्कि मेरिट और जीतने की संभावना के आधार पर होगा. शिवसेना से कोई वादा नहीं पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, "शिवसेना ने हालिया लोकसभा चुनावों में तेईस सीटें मांगी थीं और उस पर सहमति बन गई थी. शिवसेना प्रमुख विधानसभा सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा चाहते थे, लेकिन उस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई. " सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने शिवसेना को सीटों की संख्या को लेकर कोई वादा नहीं किया है. स्वीकारी थी सभी मांगें लोकसभा चुनावों में किसी भी तरह की असहमति के सुरों को टालने के लिए भाजपा ने शिवसेना की सभी मांगें मान ली थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में आलाकमान ने सुरक्षित अंतर रखकर उचित फैसला लेने की आजादी प्रदेश ईकाई को सौंपकर खुद को इस कवायद से दूर रखा है. सख्त रुख के संकेत भाजपा आलाकमान के रूख से यह साफ हो रहा है कि वह शिवसेना के आगे झुकने वाली नहीं है. शिवसेना ने मुख्यमंत्री के पद को लेकर तेवर दिखाए तो भाजपा अकेले दम चुनाव लड़ने को तैयार दिखती है. उल्लेखनीय है कि दो हज़ार चौदह के विधानसभा चुनावों में दो सौ अठासी सीटों के लिए कोई समझौता नहीं हो पाने के कारण भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. शिवसेना को करारा झटका लगा था जब वह केवल तिरेसठ सीट जीत पाई, जबकि भाजपा ने तकरीबन दोगुनी एक सौ बाईस सीटें जीतीं.
एमपीएल स्पोटर्स ने ट्वीट कर कहा, "पहली बार टीम इंडिया की जर्सी बुर्ज खलीफा में छाई। अरबों प्रशंसकों से प्रेरित बिलियन चियर्स जर्सी नई ऊंचाईयों पर पहुंच गई। " भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी ट्विटर पर वीडियो शेयर किया और कहा, "प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा पर टीम इंडिया की विश्व कप जर्सी का अनावरण और बड़ा हो गया। इस ऐतिहासिक पल को यहां देखें। " यूएई में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए नई जर्सी का अनावरण किया गया है। लाइट शो के दौरान कप्तान विराट कोहली, उपकप्तान रोहित शर्मा, लोकेश राहुल, ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह की फोटो नजर आई। भारत टी20 विश्व कप में अपने अभियान की शुरूआत सुपर-12 के ग्रुप-2 में 24 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में होने वाले मुकाबले से करेगा। (आईएएनएस)
एमपीएल स्पोटर्स ने ट्वीट कर कहा, "पहली बार टीम इंडिया की जर्सी बुर्ज खलीफा में छाई। अरबों प्रशंसकों से प्रेरित बिलियन चियर्स जर्सी नई ऊंचाईयों पर पहुंच गई। " भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भी ट्विटर पर वीडियो शेयर किया और कहा, "प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा पर टीम इंडिया की विश्व कप जर्सी का अनावरण और बड़ा हो गया। इस ऐतिहासिक पल को यहां देखें। " यूएई में होने वाले टीबीस विश्व कप के लिए नई जर्सी का अनावरण किया गया है। लाइट शो के दौरान कप्तान विराट कोहली, उपकप्तान रोहित शर्मा, लोकेश राहुल, ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह की फोटो नजर आई। भारत टीबीस विश्व कप में अपने अभियान की शुरूआत सुपर-बारह के ग्रुप-दो में चौबीस अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में होने वाले मुकाबले से करेगा।
राकेश दुबे@प्रतिदिन। तकनीकी शिक्षा में परिवर्तनों की सिफारिशों के साथ एम के काव की अध्यक्षता वाली अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, यानी एआईसीटीई समीक्षा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को सौंप दी है। मई, 2014 में एनडीए सरकार के गठन के बाद उच्च शिक्षा की समस्याओं का हल ढूंढ़ने के लिए दो समितियां बनाई गई थीं। इनमें एम के काव कमेटी के अलावा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यानी यूजीसी की समीक्षा के लिए गठित डॉ हरि गौतम कमेटी भी थी। दोनों कमेटियों को यह अध्ययन करना था कि भविष्य में इन दो संस्थाओं का कामकाज कैसे चलेगा? इन्हें इनके मौजूदा स्वरूप में ही बनाए रखा जाए या इनमें कोई ढांचागत परिवर्तन किया जाए? कुछ लोग पश्चिमी देशों का हवाला देते हुए नियामक संस्थाओं को खत्म कर समूची उच्च शिक्षा को बाजार की शक्तियों के हवाले कर देने की बात करते हैं, लेकिन शायद भारत में अभी यह संभव नहीं है। वैसे तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक दर्जन नियामक संस्थाएं काम करती हैं, पर इनमें यूजीसी और एआईसीटीई का विशेष महत्व है, क्योंकि उच्च शिक्षा पाने वाले अधिकांश विद्यार्थी इनके दायरे में आते हैं। एआईसीटीई की स्थापना 30 नवंबर, 1945 को देश में तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए एक नोडल संस्था के रूप में की गई थी। 1947 में देश में कुल 43 तकनीकी संस्थाएं थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 10500 हो गई है। इन 10500 संस्थाओं में 14000 से अधिक कोर्सों के तहत 39 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वर्ष 1995 तक अधिकांश इंजीनिर्यंरग व मैनेजमेंट कॉलेज महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश में थे। एआईसीटीई समीक्षा कमेटी ने विगत सात-आठ महीनों में पिछली तमाम रिपोर्टों का अध्ययन करने और राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा से जुड़े हुए विशिष्ट व्यक्तियों से मिलने के बाद जो रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को सौंपी है, उसमें अनेक सिफारिशें ऐसी हैं, जिनको यदि ईमानदारी से लागू किया जाए, तो तकनीकी शिक्षा की कायापलट हो सकती है। इनमें सबसे प्रमुख सिफारिश है एआईसीटीई को पूरी तरह स्वायत्त संवैधानिक दर्जा देना, ठीक वैसे ही जैसे कि चुनाव आयोग, सेबी, ट्राई, वगैरह को मिला हुआ है। इस संस्था पर इंस्पेक्टर राज चलाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, इसलिए एम के काव कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि इस स्वायत्तशासी संस्था को भविष्य में तकनीकी संस्थाओं में मार्गदर्शन, गुणवत्ता सुधार और विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए, न कि लाइसेंसिंग से जुड़े कार्यों पर। कमेटी का कहना है कि अगले 10 साल में एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी तकनीकी संस्थाओं को स्वायत्त (ऑटोनोमस) बनाकर विश्वविद्यालयों की संबद्धता के शिकंजे से मुक्त करना चाहिए, जिसके लिए इस कमेटी ने रेटिंग और एक्रीडिएशन की पद्धतियों को अपनाने का सुझाव दिया है। अभी तक इस संस्था में यह काम नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड, यानी एनबीए करता था, जिसे अब एक अलग निकाय बना दिया गया है। काव कमेटी ने रेटिंग और एक्रीडिएशन की एक की बजाय, अनेक संस्थाएं स्थापित करने का भी सुझाव दिया है। तकनीकी और उच्च शिक्षा पर पिछले दशकों में अनेक कमेटियां बैठाई गई हैं, जिनमें यशपाल कमेटी, सैम पित्रोदा कमेटी, अंबानी-बिड़ला कमेटी, यूआर राव कमेटी, धरनी सिन्हा कमेटी, ईश्वर दयाल कमेटी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। दुर्भाग्य यह है कि उच्च शिक्षा पर चिंतन-मनन में हम जितने आगे रहे हैं, उसको अमली जामा पहनाने में उतने ही पीछे हैं। श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
राकेश दुबे@प्रतिदिन। तकनीकी शिक्षा में परिवर्तनों की सिफारिशों के साथ एम के काव की अध्यक्षता वाली अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, यानी एआईसीटीई समीक्षा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को सौंप दी है। मई, दो हज़ार चौदह में एनडीए सरकार के गठन के बाद उच्च शिक्षा की समस्याओं का हल ढूंढ़ने के लिए दो समितियां बनाई गई थीं। इनमें एम के काव कमेटी के अलावा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यानी यूजीसी की समीक्षा के लिए गठित डॉ हरि गौतम कमेटी भी थी। दोनों कमेटियों को यह अध्ययन करना था कि भविष्य में इन दो संस्थाओं का कामकाज कैसे चलेगा? इन्हें इनके मौजूदा स्वरूप में ही बनाए रखा जाए या इनमें कोई ढांचागत परिवर्तन किया जाए? कुछ लोग पश्चिमी देशों का हवाला देते हुए नियामक संस्थाओं को खत्म कर समूची उच्च शिक्षा को बाजार की शक्तियों के हवाले कर देने की बात करते हैं, लेकिन शायद भारत में अभी यह संभव नहीं है। वैसे तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक दर्जन नियामक संस्थाएं काम करती हैं, पर इनमें यूजीसी और एआईसीटीई का विशेष महत्व है, क्योंकि उच्च शिक्षा पाने वाले अधिकांश विद्यार्थी इनके दायरे में आते हैं। एआईसीटीई की स्थापना तीस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को देश में तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए एक नोडल संस्था के रूप में की गई थी। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में देश में कुल तैंतालीस तकनीकी संस्थाएं थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर दस हज़ार पाँच सौ हो गई है। इन दस हज़ार पाँच सौ संस्थाओं में चौदह हज़ार से अधिक कोर्सों के तहत उनतालीस लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे तक अधिकांश इंजीनिर्यंरग व मैनेजमेंट कॉलेज महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश में थे। एआईसीटीई समीक्षा कमेटी ने विगत सात-आठ महीनों में पिछली तमाम रिपोर्टों का अध्ययन करने और राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा से जुड़े हुए विशिष्ट व्यक्तियों से मिलने के बाद जो रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को सौंपी है, उसमें अनेक सिफारिशें ऐसी हैं, जिनको यदि ईमानदारी से लागू किया जाए, तो तकनीकी शिक्षा की कायापलट हो सकती है। इनमें सबसे प्रमुख सिफारिश है एआईसीटीई को पूरी तरह स्वायत्त संवैधानिक दर्जा देना, ठीक वैसे ही जैसे कि चुनाव आयोग, सेबी, ट्राई, वगैरह को मिला हुआ है। इस संस्था पर इंस्पेक्टर राज चलाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, इसलिए एम के काव कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि इस स्वायत्तशासी संस्था को भविष्य में तकनीकी संस्थाओं में मार्गदर्शन, गुणवत्ता सुधार और विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए, न कि लाइसेंसिंग से जुड़े कार्यों पर। कमेटी का कहना है कि अगले दस साल में एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी तकनीकी संस्थाओं को स्वायत्त बनाकर विश्वविद्यालयों की संबद्धता के शिकंजे से मुक्त करना चाहिए, जिसके लिए इस कमेटी ने रेटिंग और एक्रीडिएशन की पद्धतियों को अपनाने का सुझाव दिया है। अभी तक इस संस्था में यह काम नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड, यानी एनबीए करता था, जिसे अब एक अलग निकाय बना दिया गया है। काव कमेटी ने रेटिंग और एक्रीडिएशन की एक की बजाय, अनेक संस्थाएं स्थापित करने का भी सुझाव दिया है। तकनीकी और उच्च शिक्षा पर पिछले दशकों में अनेक कमेटियां बैठाई गई हैं, जिनमें यशपाल कमेटी, सैम पित्रोदा कमेटी, अंबानी-बिड़ला कमेटी, यूआर राव कमेटी, धरनी सिन्हा कमेटी, ईश्वर दयाल कमेटी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। दुर्भाग्य यह है कि उच्च शिक्षा पर चिंतन-मनन में हम जितने आगे रहे हैं, उसको अमली जामा पहनाने में उतने ही पीछे हैं। श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
बोकारोः चास थाना क्षेत्र के सुल्तान नगर में देवर ने विधवा भाभी के साथ दुष्कर्म (Rape) का प्रयास किया। शोर मचाने पर आरोपी उसके गले से सोने का चेन छीन कर मौके से फरार हो गया। इस संबंध में पीड़िता की लिखित शिकायत (Written Complaint) पर चास पुलिस ने सोमवार को दुष्कर्म के प्रयास का प्राथमिकी दर्ज किया है। मामले में पीड़िता के देवर को आरोपी बनाया गया है। पीड़िता का कहना है कि उनके पति के मौत (Death) के बाद से ही आरोपी उन पर बुरी नजर रखता था। मौका देखकर वह घर में घुस आया और दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
बोकारोः चास थाना क्षेत्र के सुल्तान नगर में देवर ने विधवा भाभी के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। शोर मचाने पर आरोपी उसके गले से सोने का चेन छीन कर मौके से फरार हो गया। इस संबंध में पीड़िता की लिखित शिकायत पर चास पुलिस ने सोमवार को दुष्कर्म के प्रयास का प्राथमिकी दर्ज किया है। मामले में पीड़िता के देवर को आरोपी बनाया गया है। पीड़िता का कहना है कि उनके पति के मौत के बाद से ही आरोपी उन पर बुरी नजर रखता था। मौका देखकर वह घर में घुस आया और दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
मानते हैं । यमों के स्वरूप तथा संख्या के विषय में विस्तृत विवेचन पीछे टिप्पणी में देखिए । (घ) नासिक्य - कुल आचार्य पूर्ववती हकार तथा परचर्ती अनुनासिक स्पर्श के मध्य एक नासिक्य ध्वनि का आगत मानते हैं, यथा - भाम् । २. उच्चारण (Pronunciation ) ४. उच्चारण - अति प्राचीन काल से वेदों के शुरु उच्चारण को विशेष महत्व दिया गया है । शुद्ध उचारण की अविछिन परम्परा के अक्षुण्ण प्रभाव से सहयों वर्षों तक लेबस किए बिना भी श्रुति की अनुपम रक्षा होती रही है। शत० प्रा० का मत है कि अमुर लोग अशुद्ध उच्चारण के कारण पराभूत हुए थे, इस लिए ब्राह्मण कदापि वाणी को लेच्छित न करे । प्रातिशाग्यो तथा शिक्षाग्रन्थों में वर्षों के शुद्ध उच्चारण की विधि के साथ-साथ उचारण-सम्बन्धी दोपों का विवरण भी दिया गया है। प्रातिगास्य, शिक्षा, व्याकरण तथा शिष्ट वैदिक पण्डितों की परम्परागत पारायण-विधि के द्वारा वैदिक ध्वनियों के शुद्ध उच्चारण को जानने में हमें पर्याप्त सहायता मिलती है। पाश्चात्य सस्कृतशों के मतानुसार, जो संस्कृत शब्द प्राचीन काल में ग्रीक आदि विदेशी भाषाओं में लिये गए थे, वे भी संस्कृत ध्वनियों के पूर्वकालीन उचारण पर कुछ प्रकाश डालते हैं। मैक्डानल का मत है कि वैदिक सहिताओं को भाषा के ध्वनि परिवर्तन सम्वन्धी आभ्यन्तर प्रमाण तथा भाषाविज्ञान से उपलब्ध वाच प्रमाण के आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सहिता-काल में वैदिक ध्वनियों का उन्धारण प्रायेण वैसा ही था जैसा कि पाणिनि के काल में" । प्रातिशाख्य, शिक्षा, व्याकरण, वैदिक परम्परा तथा तुलनात्मक भाषा-विज्ञान के द्वारा वैदिक ध्वनियों के उच्चारण के सम्बन्ध मे जो तथ्य उपलब्ध होते हैं, उन्हें यहा संक्षेपत प्रस्तुत किया गया है । ५. स्वरोच्चारण - प्रत्येक भाषा का स्वरूप उस के स्वरों के उच्चारण पर विशेषत• आधारित होता है। इस लिये स्वरों के उच्चारण का प्रभाव व्यअनों के उच्चारण पर भी कुछ अंश तक अवश्य ही पड़ता है स्वरों के शुद्ध उच्चारण पर ध्यान देना अयत आवश्यक है । आधुनिक भारतीय भाषाओं में कुछ स्वरों का उच्चारण विभिन प्रकार से किया जाता है और वैदिक ध्वनियों का उच्चारण भी कुछ लोग उसी प्रकर करत हूँ। पर ऐसा करना अनुचित है और वैदिन ध्वनियों वा उच्चारण वदिक ध्वनि सिद्धांतों के अनुसार ही करना चाहिए । यहाँ पर प्रत्यक् स्वर के प्रयत्न तथा स्थान आदि पर विचार किया गया है। व्यञ्जनोच्चारण के प्रमग में यक्षों पर विस्तृत विवेचन किया गया है । स्वरों के प्रयत्ना के विषय म टि० १४३७३८ तथा ४१ देखिए । (क) अक्ष का उच्चारण स्थान नि सदेह क्ण्ट है । परन्तु इस के आभ्यतर प्रयत्न का विषय विशयतया विचारणाय है । अ० प्रा० ( १, ३६ ) तथा वा० प्रा० (१ ७२) के अनुसार सका आभ्यन्तर प्रयत्न समृत है । और पाणिनाय सूत्र (४६८) तथा अप्राध्यामा के व्याख्याकार भाइस मत का पुष्टि करते हैं। पासाय विद्वाना का मत है कि सम्मृत दों के ग्रीक चारण ने भी अ के प्राचाननारीन सवृत उच्चारण का समधन होता है? । यद्यनि रिसित ऋ० में ए तथा भो के पश्चात् प्रायण (दे० अनु० ४४) अ का पूर्वरूप हो जाता है तथापि छन्द परिमाण की दृष्टि से ऐसे वरूप के यि बोई औचिय न दास पत्ता । स से प्रतीत होता ह कि ऋचाओं के रचना कार में का आभ्यतर प्रयत्न संभवत मित रहा होगा । ( ख ) आ- आा का उच्चारण स्थान कण्ठ है और आभ्यतर प्रयन्न सका साधारणतया वितृत माना जाता है। पर अप्रा० (१,३५) भा का प्रयन्न विवृततम मानता ह । (ग) इ इ इन दोनों स्वरों का उच्चारण स्थान तालु और आभ्यन्तर प्रयत्न वितृत ह । (घ) उ ऊ - - इन दोना स्वरों का उच्चारण-स्नान ओठ और आयत्तर प्रयत्न विवृत ह। ते वा मत ह कि उवण व उच्चारण में आष्ट उपसहृत (सहो कर आग की ओर निको हुए) होते हैं ।
मानते हैं । यमों के स्वरूप तथा संख्या के विषय में विस्तृत विवेचन पीछे टिप्पणी में देखिए । नासिक्य - कुल आचार्य पूर्ववती हकार तथा परचर्ती अनुनासिक स्पर्श के मध्य एक नासिक्य ध्वनि का आगत मानते हैं, यथा - भाम् । दो. उच्चारण चार. उच्चारण - अति प्राचीन काल से वेदों के शुरु उच्चारण को विशेष महत्व दिया गया है । शुद्ध उचारण की अविछिन परम्परा के अक्षुण्ण प्रभाव से सहयों वर्षों तक लेबस किए बिना भी श्रुति की अनुपम रक्षा होती रही है। शतशून्य प्राशून्य का मत है कि अमुर लोग अशुद्ध उच्चारण के कारण पराभूत हुए थे, इस लिए ब्राह्मण कदापि वाणी को लेच्छित न करे । प्रातिशाग्यो तथा शिक्षाग्रन्थों में वर्षों के शुद्ध उच्चारण की विधि के साथ-साथ उचारण-सम्बन्धी दोपों का विवरण भी दिया गया है। प्रातिगास्य, शिक्षा, व्याकरण तथा शिष्ट वैदिक पण्डितों की परम्परागत पारायण-विधि के द्वारा वैदिक ध्वनियों के शुद्ध उच्चारण को जानने में हमें पर्याप्त सहायता मिलती है। पाश्चात्य सस्कृतशों के मतानुसार, जो संस्कृत शब्द प्राचीन काल में ग्रीक आदि विदेशी भाषाओं में लिये गए थे, वे भी संस्कृत ध्वनियों के पूर्वकालीन उचारण पर कुछ प्रकाश डालते हैं। मैक्डानल का मत है कि वैदिक सहिताओं को भाषा के ध्वनि परिवर्तन सम्वन्धी आभ्यन्तर प्रमाण तथा भाषाविज्ञान से उपलब्ध वाच प्रमाण के आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सहिता-काल में वैदिक ध्वनियों का उन्धारण प्रायेण वैसा ही था जैसा कि पाणिनि के काल में" । प्रातिशाख्य, शिक्षा, व्याकरण, वैदिक परम्परा तथा तुलनात्मक भाषा-विज्ञान के द्वारा वैदिक ध्वनियों के उच्चारण के सम्बन्ध मे जो तथ्य उपलब्ध होते हैं, उन्हें यहा संक्षेपत प्रस्तुत किया गया है । पाँच. स्वरोच्चारण - प्रत्येक भाषा का स्वरूप उस के स्वरों के उच्चारण पर विशेषत• आधारित होता है। इस लिये स्वरों के उच्चारण का प्रभाव व्यअनों के उच्चारण पर भी कुछ अंश तक अवश्य ही पड़ता है स्वरों के शुद्ध उच्चारण पर ध्यान देना अयत आवश्यक है । आधुनिक भारतीय भाषाओं में कुछ स्वरों का उच्चारण विभिन प्रकार से किया जाता है और वैदिक ध्वनियों का उच्चारण भी कुछ लोग उसी प्रकर करत हूँ। पर ऐसा करना अनुचित है और वैदिन ध्वनियों वा उच्चारण वदिक ध्वनि सिद्धांतों के अनुसार ही करना चाहिए । यहाँ पर प्रत्यक् स्वर के प्रयत्न तथा स्थान आदि पर विचार किया गया है। व्यञ्जनोच्चारण के प्रमग में यक्षों पर विस्तृत विवेचन किया गया है । स्वरों के प्रयत्ना के विषय म टिशून्य एक लाख तैंतालीस हज़ार सात सौ अड़तीस तथा इकतालीस देखिए । अक्ष का उच्चारण स्थान नि सदेह क्ण्ट है । परन्तु इस के आभ्यतर प्रयत्न का विषय विशयतया विचारणाय है । अशून्य प्राशून्य तथा वाशून्य प्राशून्य के अनुसार सका आभ्यन्तर प्रयत्न समृत है । और पाणिनाय सूत्र तथा अप्राध्यामा के व्याख्याकार भाइस मत का पुष्टि करते हैं। पासाय विद्वाना का मत है कि सम्मृत दों के ग्रीक चारण ने भी अ के प्राचाननारीन सवृत उच्चारण का समधन होता है? । यद्यनि रिसित ऋशून्य में ए तथा भो के पश्चात् प्रायण अ का पूर्वरूप हो जाता है तथापि छन्द परिमाण की दृष्टि से ऐसे वरूप के यि बोई औचिय न दास पत्ता । स से प्रतीत होता ह कि ऋचाओं के रचना कार में का आभ्यतर प्रयत्न संभवत मित रहा होगा । आ- आा का उच्चारण स्थान कण्ठ है और आभ्यतर प्रयन्न सका साधारणतया वितृत माना जाता है। पर अप्राशून्य भा का प्रयन्न विवृततम मानता ह । इ इ इन दोनों स्वरों का उच्चारण स्थान तालु और आभ्यन्तर प्रयत्न वितृत ह । उ ऊ - - इन दोना स्वरों का उच्चारण-स्नान ओठ और आयत्तर प्रयत्न विवृत ह। ते वा मत ह कि उवण व उच्चारण में आष्ट उपसहृत होते हैं ।
नई दिल्लीःएवेनफील्ड प्रॉपर्टीज मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद गिरफ्तार हुए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज पहली बार अपनी बेटी मरियम नवाज से मुलाकात की है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (पीएमएल-एन) के नेता सीनेटर परवेज रशीद ने कहा कि उन्होंने और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने जेल में आज शरीफ परिवार से मुलाकात की। लंदन में चार लग्जरी फ्लैट के मालिकाना हक को लेकर छह जुलाई को जवाबदेही अदालत ने इन्हे दोषी ठहराया था। दोषी ठहराए जाने के बाद शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद कैप्टन (सेवानिवृत्त) मुहम्मद सफदर को सजा सुनाई गी थी । सभी की सजा क्रमशः दस वर्ष, सात वर्ष और एक वर्ष कैद की सजा भुगत रहे हैं। आपको बता दें कि अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कैदियों द्वारा नारेबाजी के बाद जेल प्रशासन ने नवाज की गतिविधियां सीमित कर दी हैं। शरीफ को अब मस्जिद में नमाज भी नहीं पढ़ने दी जाएगी। इतना ही नहीं सूत्रों की माने तो, जेल प्रशासन शरीफ और उनकी बेटी मरियम को सिहाला रेस्ट हाउस में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है।
नई दिल्लीःएवेनफील्ड प्रॉपर्टीज मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद गिरफ्तार हुए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज पहली बार अपनी बेटी मरियम नवाज से मुलाकात की है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज के नेता सीनेटर परवेज रशीद ने कहा कि उन्होंने और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने जेल में आज शरीफ परिवार से मुलाकात की। लंदन में चार लग्जरी फ्लैट के मालिकाना हक को लेकर छह जुलाई को जवाबदेही अदालत ने इन्हे दोषी ठहराया था। दोषी ठहराए जाने के बाद शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद कैप्टन मुहम्मद सफदर को सजा सुनाई गी थी । सभी की सजा क्रमशः दस वर्ष, सात वर्ष और एक वर्ष कैद की सजा भुगत रहे हैं। आपको बता दें कि अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कैदियों द्वारा नारेबाजी के बाद जेल प्रशासन ने नवाज की गतिविधियां सीमित कर दी हैं। शरीफ को अब मस्जिद में नमाज भी नहीं पढ़ने दी जाएगी। इतना ही नहीं सूत्रों की माने तो, जेल प्रशासन शरीफ और उनकी बेटी मरियम को सिहाला रेस्ट हाउस में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है।
लखीमपुर खीरीः तिकुनिया कांड के साथ ही चर्चा में आए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार उनका एक बयान वायरल हो रहा है. दरअसल मिश्र और उनके बेटे अजय के गांव बनवारीपुर में एक होली मिलन समारोह में पहुंचे. इस समारोह में वह दोनों ही मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. यहां पर उन्होंने जमकर होली खेली, डांस किया और गाना गया. लेकिन इसी बीच उन्होंने जिले के विधायकों को एक बार फिर आड़े हाथ लेते हुए माइक पर ऐसा बयान दे डाला जो अब उनके लिए परेशानी खड़ा करता नजर आ रहा है. इस दौरान अजय मिश्र ने कहा कि पिछले 5 सालों में क्षेत्र के विधायकों ने जो भी कुछ किया उसका खामियाजा तो उन्हीं को धोना था, नहीं तो मेरे ऊपर ही आरोप आ जाता. हालांकि जनता ने उन पर विश्वास जताया व 8 सीटों पर विजय दिलवा कर बता दिया कि उन पर लगे सभी आरोप गलत हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने विरोधियों की पूरी तरह से हवा निकाल दी. इसी के साथ तिकुनिया कांड का जिक्र करते हुए मिश्र ने कहा कि जनता को उन पर भरोसा है और जनता जानती है कि वह और उनका बेटा पूरी तरह से निर्दोष हैं. उन्होंने कहा कि तराई क्षेत्र में हुई भाजपा की शानदार जीत इसका प्रमाण है कि जनता को उन पर विश्वास है. उन्होंने कहा कि उन पर लगातार आरोप लगते रहे लेकिन उनके लोग और क्षेत्र की जनता को उन पर पूरा विश्वास था और वह जानते थे कि हम कहीं भी गलत नहीं हैं. बीजेपी की इस शानदार जीत ने ये साफ कर दिया है कि उन पर लगे आरोप झूठे थे.
लखीमपुर खीरीः तिकुनिया कांड के साथ ही चर्चा में आए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार उनका एक बयान वायरल हो रहा है. दरअसल मिश्र और उनके बेटे अजय के गांव बनवारीपुर में एक होली मिलन समारोह में पहुंचे. इस समारोह में वह दोनों ही मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. यहां पर उन्होंने जमकर होली खेली, डांस किया और गाना गया. लेकिन इसी बीच उन्होंने जिले के विधायकों को एक बार फिर आड़े हाथ लेते हुए माइक पर ऐसा बयान दे डाला जो अब उनके लिए परेशानी खड़ा करता नजर आ रहा है. इस दौरान अजय मिश्र ने कहा कि पिछले पाँच सालों में क्षेत्र के विधायकों ने जो भी कुछ किया उसका खामियाजा तो उन्हीं को धोना था, नहीं तो मेरे ऊपर ही आरोप आ जाता. हालांकि जनता ने उन पर विश्वास जताया व आठ सीटों पर विजय दिलवा कर बता दिया कि उन पर लगे सभी आरोप गलत हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने विरोधियों की पूरी तरह से हवा निकाल दी. इसी के साथ तिकुनिया कांड का जिक्र करते हुए मिश्र ने कहा कि जनता को उन पर भरोसा है और जनता जानती है कि वह और उनका बेटा पूरी तरह से निर्दोष हैं. उन्होंने कहा कि तराई क्षेत्र में हुई भाजपा की शानदार जीत इसका प्रमाण है कि जनता को उन पर विश्वास है. उन्होंने कहा कि उन पर लगातार आरोप लगते रहे लेकिन उनके लोग और क्षेत्र की जनता को उन पर पूरा विश्वास था और वह जानते थे कि हम कहीं भी गलत नहीं हैं. बीजेपी की इस शानदार जीत ने ये साफ कर दिया है कि उन पर लगे आरोप झूठे थे.
कपड़े, कुर्सी, कोच, टेबल वगैरः पर डाले जाते हैं। इसलिए उनमें मैल नहीं दिखाई पड़ता, तो भी उन्हें धुलवा डालना चाहिए । पलँग-पोश, बहुत साफ रखने चाहिए। हमने कई शौकीनों को देखा है कि वे बिछौनों पर सफेद चादर तो रखते हैं, लेकिन उसकी सफ़ाई का ध्यान नहीं रखते, यह गन्दापन है । और खास कर पलँगपोश और तकिये की खोली वगैरः बिलकुल साफ़ रखनी चाहिए । इसी तरह ओढ़ने की सौड़, रजाई, दोहर या चादर को साफ़ रखना भी लाजिमी है। निवारवाले पलंग की निवार भी धुला कर साफ़ रखनी चाहिए । मतलब यह कि बैठने, उठने, सोनें, लेटने की जगह और उस वक्त काम में आने वाले कपड़े बिलकुल साफ सुथरे रखने चाहिएँ । चारपाई पर ही सोना ज्यादा फायदेमन्द है। क्योंकि जो वजनदार होने के कारण पहिले पहिल नीचे की तरफ जाती है और फिर साफ हो कर ऊपर आती है। ज़मीन पर सोनेवाले को बारम्बार वही पड़ी हुई हवा सांस में खींचनी पड़ती है। किन्तु चारपाई पर सोने से छोड़ी हुई हवा नीचे चली जाती है और साफ हवा सांस के साथ मिल जाती है। लेकिन चारपाइयों की सफाई अच्छी तरह रखनी चाहिए । नीवारदार चारपाइयों की सफाई नीवार को धुलाने से हो जाती है, लेकिन सुतली बगैरः से बुनी हुई चारपाइयों की सफाई जरा मुश्किल से होती है। क्योंकि चुनी हुई को उधेड़ कर फिर से चुनने में बहुत समय लगता है, और हर एक आदमी बुनना भी नहीं जानता। इसलिए ऐसी 'चारपाइयों को दिन भर धूप में डाल रखना रखना चाहिए, और वरों की सफाई रात को सोते वक्त काम में लाना चाहिए। ऐसी चारपाइयाँ जो • रात दिन मकानों में बन्द रहती हैं, और कभी धूप या हवा में नहीं रखी जातीं, साफ और अच्छी नहीं हो सकतीं। इसलिए अगर हर रोज न हो सके तो तीसरे चौथे दिन चारपाइयाँ, कोच, - वगैरः धूप में डाल देनी चाहिएँ । जो चारपाइयां हवा और धूप में नहीं डाली जातीं और झाड़ी • नहीं जातीं, उनमें खटमल खूब हो जाते हैं । जो खून में अपना ज़हर छोड़ते और चारपाई पर सोनेवाले को नींद नहीं आने देते हैं । "इससे तन्दुरुस्ती खराब हो जाती है। इसलिए चारपाइयों की सफाई -बहुत ज़रूरी है। हम खटमलों को भगाने के कुछ उपाय इसी पुस्तक के चौथे अध्याय में लिखे गे । घर में वेकाम चीजें नहीं रहने देनी चाहिएँ । कुछ लोगों को सी होती है कि अपने घर निकम्मी चीजें इकठ्ठी करके • मकान को गंदा सा बनाये रखते हैं । बहुत ही जरूरी चीज़ों और सजाने की वस्तुओं के सिवाय सोने बैठने के मकान में ओर कोई चीज़ नहीं रखनी चाहिए । जो मकान निकम्मी चीजों से भरा रहता है, उसको हवां कभी साफ़ नहीं हो सकती। घर के अंदरी हरएक चीज़ खूब अच्छी तरह झाड़ वुहार कर ठीक जगह पर रखी होनी चाहिए । लकड़ी की बनी चीजों पर बरसात के पहले वार्निश कर देना चाहिए। क्योंकि बरसात में लकड़ियों से एक तरह की बदबू निकलती है जो हवा को बिगाड़ती है। यह देखा गया है कि बरसात के पूरी हो जाने पर लोग मकान की लकड़ियों में या लकड़ी की बनी चीजों पर तेल या वार्निश लगाते हैं । लेकिन यह उल्टी बात है, लकड़ी पर तेल या वार्निश बरसात के पहिले लगा देना चाहिए, ताकि बरसात के पानी का लकड़ी पर कुछ भी असर न होने पात्रे । मकान में सब चीजों को ठीक जगह पर अच्छी तरह से रखना ही "सफाई" है । और चाहे जहाँ चाहे जिस हालत में 'पटक देने का नाम ही गन्दगी है। जैसे-पहिनने के कपड़े खूँटी पर टाँगने चाहिएँ, लेकिन उन्हें बुरी तरह एक कोने में डाल दिया । टेवल पर ठीक तरह से किताव, काराजं, ढावात, कलम -वगैरः पढ़ने लिखने का सामान रखने से वह शोभा पाती है और उसी पर रही काग़ज, टोपी, ब्रुश, तेल की शीशी, वूटपालिश, गेलिस, चाय का प्याला, सिगरेट, पान तम्बाकू, छाता, वेत वगैरः 'फैलाए रखना ही मैलापन है । मतलब यह कि घर को साफ़ रखने के लिए सब चीजों का उनकी जगह पर ही रखना ठीक है। इससे घर का इन्तज़ाम अच्छा रह सकता है । 'दावात रखने की जगह जो ठहराई हुई है, उसे वहीं रखना चाहिए। कैंची रखने की जगह पर ही कैंची हो । जहाँ चाकू रक्खा जाता है, उससे काम कर चुकने के बाद भी उसे वहीं रक्खो । दियासलाई की जगह पर दिया-सलाई हो। इस तरह बन्दोबस्त रखने पर दो फ़ायदे होंगे (१) घर में सफाई रहेगी और ( २ ) जरूरत पड़ने पर उस चीज़ के लिए सारा घर न ढूँढना पड़ेगा । मकान की दीवारों में ज्यादा ताक (आले) नहीं रखने चाहिएँ और न जगह-जगह पर दीवार में कीलें या खूँटियाँ ही होनी चाहिएँ । ज्यादा ताकों के होने से मैलापन ज्यादा फैलता है । ताकों को साफ़ रखना चाहिए । मकान में १० ताक रखने के बदले एक आलमारी वनवा लेना अच्छा है। आलमारी की सफ़ाई भी जरूरी है। इसी तरह जगह-जगह खूँटियों के होने से जगह-जगह पर कपड़े टांगे जाते हैं, इससे हवा के आने-जाने और साफ होने में फर्क पड़ जाता है । इसके सिवाय कपड़ों की आड़ में मच्छर, मकड़ी वगैरः छुपे रहते हैं- इसलिए कपड़े लटकाने की एक ही जगह ठहरा लेनी चाहिए । और दीवार पर क़ाग़ज़ या कपड़ा कीलों से ठोक कर वहीं कपड़े रखने चाहिएँ । ऐसा करने से बहुत सहूलियत हो जावेगी । मैले कपड़े घर में नहीं रखने चाहिएँ उन्हें फौरन धुलने दे देना चाहिएँ । सामान को मकान के कोनों में अथवा दीवारों से इस तरह सटा कर न रखे कि, उनकी आड़ में चूहे, मेंढक, सांप, बिच्छू, वर, छिपकली, मच्छर, पिस्सू, मकड़ी, और दूसरे कई बीमारी पैदा करनेवाले जन्तु छुप कर रह सकें । जो भी चीज़ रक्खी जावे उसके आसपास कचरा न रह सके, और अच्छी तरह झाड़ा बुहारा जा सके । गाँवो से क़स्बों के लोग पान तम्बाकू कहीं ज्यादा खाते हैं । पान खाना अच्छा है, लेकिन तभी तक जब तक कि वे ज्यादा न खाये जावें । एक बात और भी ध्यान में रखनी चाहिए कि पान की पीक घर में, दीवारों पर, कोनों में, किवाड़ों के पीछे या घर के दरवाजे पर या ख़िड़कियों में थूकना बहुत बुरा है। पान का पीक अगर थूकना हो तो एकान्त में, ऐसी जगह, जहाँ सूरज की धूप आती हो, थूकना चाहिए । जर्दा खाना या मुश्क़ी तम्बाकू खाना बहुत ही बुरा है। तम्बाकू जहर है, यह बात हम पीछे बतलायें हैं, इसलिए जो इसे खाते हैं वे भूलते हैं । तम्बाकू खाने वाले को थूकना पड़ता ही है - थूकते वक्त उसे अच्छी बुरी जगह का कुछ भी ध्यान नहीं होता और हर कहीं धूंक मारता है। पान की तरह जर्दा खाने वाले के मुँह से भी सुगन्ध नहीं बल्कि एक तरह की बहुत ही बुरी दुर्गन्ध आती है । जिससे न खाने वाले आदमी का जी मिचलाने लगता है; और अगर उल्टी नहीं भी होती तो कम से कम उल्टी होने की सी हालत तो ज़रूर हो जाती है। फिर जहाँ कहीं भी वह शृंकता है, वहाँ दुर्गन्ध आती है। यहाँ सन् १५०३ ई० की वह चात याद आती है - "जब स्पेनवाले पारागुव के किनारे पर उतरे थे, तब वहाँ के रहनेवालों ने ढोल बजा कर इन पर लड़ाई के लिए चढ़ाई कर दी। उन्होंने स्पेनबालों पर हथियार नहीं चलाये; चल्कि वे एक पत्ती चबाते और उसका रस उनपर थूकते थे।" ये पत्तियाँ तम्बाकू की थीं। ऐसा करने में उनका यह मतलब था कि स्पेनवालों की आँखों में यह रस गिर जावे और वे अंधे वन जावें । तमाखू की सूखी पत्तियों को भट्टी में चढ़ा कर जो रस निकाला जाता है, वह निकोटिन नामक जहर होता है। तमाखू के रस से ३०० आदमियों की मौत हो सकती है। निकोटिन का एक बूँद घर में डाल देने भर से घर भर की हवा ज़हरीली हो जाती है। तमाखू खाने से तन्दुरुस्ती तो खराब होता ही है, किन्तु जहाँ तहाँ घर में थूकने से भी घर की सब हवा ज़हरीली हो कर न खाने वालों की तन्दुरुस्ती भी ख़राब कर देती है। इसलिए तम्बाकू खाना और खा कर घर में थूकते फिरना ग़न्दगी की खास निशानी है। घर की सफाई के लिए घर में तम्बाकू खाना और थूकना निहायत बुरा है। जिस तरह तम्बाकू खाना ग़न्दगी का कारण है, उसी तरह पीना भी बुरा है । तमाखू का धुआँ बहुत ही बदबूदार होता है । घर भर की हवा खरात्र हो जाती है । इसके लोग गलियों सड़कों, बागीचों, और ऐसे ही दूसरे आम मुक़ामों तमाखु, पी कर हवा ख़राब करते हैं वे दुनिया के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार करते हैं । तमाखू का बहुत ही हानिकारक है, इसलिए हुक्का चिलम, तमाखू, सिगरेट, बीड़ी न तो घर में खुद पीना चाहिए और न दूसरों ही को पीने देना चाहिए । सड़कों और गलियों की हवा खराब करनेवाले इन पियक्कड़ों के लिए म्यूनीसिपाल्टी को कुद्र तदबीर सोचना चाहिए । लेकिन ऐसी आशा करना लेखक का स्वप्न ही कहा जा सकता है । हिन्दुस्तानियों के घरों में खास कर हिन्दुओं के घरों में, चौके की छूत छात का जितना ध्यान रखा जाता है, उतना सफ़ाई का नहीं रक्खा जाता । रसोई घर की सफाई एक बहुत ज़रूरी बात है । क्योंकि रसोई की शुद्धि से स्वास्थ का बहुत कुछ सम्बन्ध है । गंदी हवा में, गंदे मकान में, गन्दे वर्तनों में और गन्दे आदमियों द्वारा बना हुआ खाना जहर बन जाता है। इसलिए रसोई घर की सफाई बहुत जरूरी है। रसोई घर रोज लीपना चाहिए । वह चूने, का हो तो रोज रसोई वन चुकने के बाद उसे धोकर साफ कर देना चाहिए । रसोई घर में एक कपड़े की छत जरूर बाँधनी चाहिए । चूल्हे में लकड़ियाँ ही जलानी चाहिए । घर में कण्डे ( उपले ) नहीं जलाने चाहिएँ। इनके जलाने से घर की हवा खराब होती है । लकड़ियों की कमी से या ग़रीबी की बढ़ती से यह पशुओं का पाखाना जलाने की रीति हिन्दुस्तान में चल पड़ी है। दूसरे देशों में गोचर महज खाद के ही काम में लाया जाता है, जलाया नहीं जाता। आज से कुछ सदियों पहले भारत में गोवर जलाने के काम में नहीं लाया जाता था । गोवर का कीमती खाद बनता है इसलिए हमें चाहिए कि वरों में हम गोवर न जला कर लकड़ियाँ ही जलावें । पत्थर का कोयला, या मिट्टी का तेल जलानेवाला, स्टोव्ह ( चूल्हा ) भोजन बनाने के काम में भूल कर न लाना चाहिए । इनके धुआँ से घर की हवा तो खराब होती हो है; पर खाने की चीजें भी जहरीली हो जाती हैं । निकलने के लिए मकान की छत में एक छेद रखना चाहिए । यह छेद ठीक चूल्हे के ऊपर होना चाहिए । के बने मकानों में रसोई घर में निकलने के लिए मकान में एक बम्बा बनाया जाता है। रसोई में आनेवाला वर्त्तन बिलकुल साफ़ होना चाहिए । पीतल, तांबा, लोहा आदि के चर्तन जरूरत मुआफिक काम में लाने चाहिए । आजकल जो "ऐल्यूमीनियम " के वर्त्तन बाजार में २१३ पैसा तोले के हिसाब से मिलते हैं, उन्हें भूल कर भी काम में न लाना चाहिए । गांव वालों के मुकाबले में शहरों और कस्बों वाले ऐसे वर्त्तनों को ज्यादह् काम में लाते हैं। ऐसे वर्त्तनों का रखना एक फैशन हो गया है । पर ये थोड़े ही दिनों के बाद खराब हो जाते हैं । इनकी चमक उड़ जाने पर इन्हें साफ करना मुश्किल हो जाता है । । इनमें चेचक की बीमारी की तरह गट्टे पड़ जाते हैं, जिन्हें लाख कोशिश करने पर भी माँज कर या धो कर साफ नहीं किया जा सकता । इसके अलावा इन में भोजन बनाने अथवा खाने से भोजन ज़हरीला हो जाता है । डाक्टर हरबर्टस् ने लिखा है कि - खाने की हरएक चीज़ में किसी न किसी रूप में थोड़ा बहुत नमक जरूर रहता है और ऐल्यूमीनियम में नमक के रखे रहने से "क्लोराइड" नामक ज़हर उत्पन्न हो जाता है। इसलिए ऐल्यूमीनियम के बर्तनों में भोजन बनाने और खाने से बहुत नुक़सान होता है । वर्त्तनों की सफाई के साथ ही साथ भोजन बनाने वाले के हाथ, कपड़े और शरीर की शुद्धि भी बहुत जरूरी है। भोजन बनाते समय जो कपड़ा रसोई में हाथ पोंछने अथवा वर्त्तन पोंछने के काम में आता है उसे भी रोज़ धोना चाहिए । दूसरे तीसरे दिन सोड़ा मिला कर उसे पानी में उबाल कर धो डालना चाहिए । सड़ा अन्न, बहुत दिन का आटा, और ऐसी खाने की चीजें जिनमें वदवू पैदा हो गई हो घर में नहीं रखनी चाहिए। थोड़े से लोभ में पड़ कर तन्दुरुस्ती नहीं खराव करना चाहिए ।। घर में अगर पालतू जानवर घोड़ा, भैंस, चकरी वगैरः हो तो उनके रहने की जगह को साफ़ रखने का खूब नयाल रखना चाहिए । जानवरों के बांधने की जगह उनकी पेशाब, गोबर वगैरःज्यादह देर तक न पड़े रहने पावें । जानवर के सामने की ज़मीन कुछ ऊँची और पीछे की जमीन कुछ ढालू रखनी चाहिए जिससे पेशाब सहज ही में पीछे की ओर वह जावे । गोशाला में गीला-पन रहने से मच्छरों और पिस्तुओं का उपद्रव शुरू हो जाता है । इसलिए जहां तक हो सके उसे गीला न रहने देना चाहिए । मच्छरों का जोर मालूम होते ही वहां पर धुआँ करना चाहिए, इससे मच्छर भाग जावेंगे। पिस्सुओं के हटाने के लिए ढोर चांधने की जगह सूखी घास जला देनी चाहिए। दीवारों के पास कुछ ज्यादह घास जलानी चाहिए, जिससे दीवारों पर ऊँचे बैठे हुए पिस्सू भी न रहने पावें जानवरों को कभी-कभी नहला भी देना चाहिए । घोड़े का तबेला अगर घर से दूर ही रखा जावे तो ठीक हो । घर के दरवाजों पर ऐसे पढ़ें रखने चाहिएँ जिनके अन्दर से हवा तो मकान में वसूची सके, लेकिन मक्खियाँ न घुसने पावें । मनुष्य को चाहिए कि मक्खियों को अपनाजानी दुश्मन समझे । उन्हें मकान में न आने दे। अपनी चीजों पर और खास कर भोजन की चीज़ों पर बिलकुल न बैठने दे । अपने शरीर पर भी मक्खियों को नबैठने देना चाहिए। मक्खी हमारे घरों में हमारे साथ रहती हैं । पर इनको सिंह से ज्यादा खतरनाक और साँप से ज्यादा जहरीली समझना चाहिए । मक्खियाँ हम लोगों में कई तरह के रोग पैदा करती हैं । एक रोग को दूसरे तक पहुँचाने का काम मक्खियाँ ही करती हैं। इसके बराबर कोई गन्दा प्राणी नहीं है । हम भंगियों से छूना इसीलिए बुरा समझते हैं कि वह पाखाना वगैरः साफ़ करने का काम करता है, लेकिन मक्खी तो पाखाने से भरे पंजों और मुंह से हमारे भोजन पर आ बैठती हैं और पाखाना ही नहीं इससे भी बुरी चीज ऐसे खिला देती हैं कि हमें जान ही नहीं पड़ता। मक्खी के पेट की आग बड़ी तेज होती है । वह खाती जाती है और पलपल में पाखाना करती जाती है। भोजन घर बैठते हो मक्खी खाना खाने लगती है और पाखाना भी "घरों की सफाई फिरने लगती है। इसीसे अन्दाज़ कर लीजिए कि वह कितना गन्दा प्राणी है । मान लीजिए कि सड़क पर किसी दमे के या तपैदिक़ के बीमार ने कफ़ डाला है। मक्खी उस पर बैठी और उसे खाने लगी । थोड़ी देर बाद वह उड़ी और एक भोजन करते हुए मनुष्य के भोजन पर जा बैठी । जो दमे या क्षय के कीड़े उसके पंजों में उलझ गये थे उन्हें उसने भोजन पर छोड़ दिया और पाखाना फिर कर इन्हीं रोंगों के जंतुओं को भोजन पर हग दिया। अ विचार कीजिए कि भोजन करनेवाले की क्या दशा होगी । अगर उसके शरीर में इन बीमारी के जन्तुओं के पनपने लायक खून और दूसरी शारीरिक धातु होंगी तो ये रोग फौरन उस पर चढ़ाई कर देंगे । नहीं तो वे जन्तु कमजोर हो कर शरीर में मर जावेंगे अथवा किसी रूप में जीवित रहेंगे और मौका मिलते ही फिर बलवान हो कर उस मनुष्य को बीमार बना देंगे । क़स्बों और शहरों में बीमारों की संख्या इन मक्खियों के कारण ही ज्यादह होती है । और ऐसी-ऐसी बीमारियाँ होती हैं जिन्हें गांवों के लोग सपने में भी नहीं जानते ! ये मक्खियाँ हलवाइयों की दूकानों से बीमारियाँ लोगों में वाँटती हैं। क्योंकि हलवाई की मिठाइयों पर सड़क की बाजारू गन्दी और रोग पैदा करनेवाली मक्खियों चौबीसों घण्टे उड़ा करती हैं। म्यूनीसिपाल्टियाँ हलवाइयों की दूकानों पर थोड़ी बहुत देख भाल तो रखती है; परन्तु इससे भी अधिक सावधानी की जरूरत है। गांवों में हलवाइयों की दुकानें नहीं होतीं, और न लोग इतने चटोरे ही होते हैं, इसलिए वहां शहरों की भांति इतने रोग भी नहीं होते । हैजे के दिनों में मक्खियों की वजह से ही घर-घर हैजा फैलता है। रोगी के दस्त और क़य पर मक्खियाँ बैठ कर दूसरे के भोजन में हैजे के बीज डाल देती हैं। बस, फिर उसे भी हैजा हो जाता है। मतलब यह है कि मक्खी एक भयंकर जीव है। इसे अपना कर दुश्मन मान कर इससे बचते रहना ही अच्छा है । कुछ लोगों का कहना है कि अगर मक्खी न होती तो संसार में बहुत गन्दगी फैल जाती। क्योंकि यह करोड़ों रोग-जंतु लिए किरती है। यदि सब मक्खियाँ इन रोग जन्तुओं को एक साथ लोगों पर छोड़ दें तो देखते-देखते प्रलय हो जाय । यह बिलकुल ठीक है। मक्खियों की रचना प्रकृति ने इसीलिए की है कि वह वायुमण्डल को शुद्ध रक्खें । परन्तु इस लिए नहीं कि वह हमारे भोजन तथा काम की चीजों पर बैठ कर उन्हें गन्दा करती रहें । ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि इसीलिए दी है कि वह अपने भले बुरे का ज्ञान खुद प्राप्त करे। इसलिए हमें अपने इन रात-दिन के साथी दुश्मनों से बचने का अच्छी तरह ध्यान रखना चाहिए । जानकारों ने खूब जाँच पड़ताल कर के यह साबित किया है कि एक मक्खी पर लाखों से लगा कर करोड़ों तक रोग पैदा करने वाले महीन जंतु लदे रहते हैं। इसके पंख, पीठ, पूंछ, पाँव, सिर, कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जिस पर रोग के जन्तु हज़ारों और लाखों की तादाद में न पाये जाते हों। हम इन जंतुओं को अपनी आँखों से नहीं देख सकते । हाँ, खुर्दबीन की मदद से, जिसमें कि मक्खी भेड़ के बरावर दिखाई देती है उसके शरीर पर रोगों के अनगिनत कीड़े दिखाई दे सकते हैं। घरोंकी सफाई मक्खी खा-जाने पर हमें क़य हो जाती है - यही एक ज़बरदस्त सबूत इस बात का है कि मक्खी एक ज़हरीला जानवर है । इसके शरीर पर इतने रोग-जन्तु होते हैं कि उन्हें पेट में हम कर जाना मनुष्य की ताकत के बाहर है । उतने रोग-जंतु नहीं पाये जाते जितने कि क़स्बों की मक्खियों पर और कस्बे की मक्खियों पर उतने रोग पैदा करने वाले जन्तु नहीं होते जितने कि शहरों की मक्खियों पर होते हैं । मक्खियों को हटाने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि मकानों को साफ़ सुथरा रक्खा जाय। उनमें ऐसी चीजें न आने दी जावें, जिनसे मक्खियाँ आवें। बाजारों में दूकानदारों को अपनी सब चीजें, और खास कर खाने की चीजें टँक कर रखनी चाहिए । मिठाइयों पर ही मक्खियाँ बैठती हों सो नहीं - जिन चीज़ों में शकर का हिस्सा अधिक होता है, उन सब पर बैठती हैं । आटा, दाल, गुड़, शक्कर, फल, मेवा, मांस, इत्यादि चीज़ों पर भी मक्खियाँ बहुत बैठती हैं इसलिए इन चीज़ों को ढाँक कर रखना चाहिए या ये चीजें बाजारू नहीं खरीदनी चाहिए । ये चीजें वहीं से लेना चाहिए जहाँ मक्खियाँ न भिनभिनाती हों। मक्खियों को भगाने के हम कई उपाय चौथे अध्याय में बतायेंगे । घर के आँगन में हर शख्स को एक छोटी-सी बगिया ज़रूर लगानी चाहिए । वृक्षों से मकान की हवा साफ़ रहती है । म्यूनोसिपालिटी का कर्ज है कि क़स्बों में या शहरों की सड़कों पर, नीम, पीपल, जामुन आदि के पेड़ ज़रूर बोवें । इनसे शहर की हवा साफ होती रहेगी। गृहस्थ को अपने घर में फुलवारी लगानी चाहिए । यदि इतनी जगह न हो तो कुण्डों में, गमलों में फूतपत्ती ज़रूर लगानी चाहिए । तुलसी और एरण्ड के पौधे घरों में जरूर रखने चाहिए। इनसे रोग-जन्तु मर जाते हैं और मक्खियों का उत्पात नहीं होने पाता । फूल फुलवारी से एक तो मकान की शोभा बढ़ती है; फूल वगैरः मिलते रहते हैं और दूसरे मकान की हवा शुद्ध रहती है । ऐसे "एक पन्थ दो काज " वाले काम को ज़रूर करना चाहिए । अव हमें उन भाइयों से कुछ कहना है जो मांस खाते हैं । यह एक मानी हुई बात है कि शाकपात, अन्न, दूध, दही, फल फूल की भाँति मांस खुशबूदार नहीं होता । ताजा से ताजा गोश्त भी बदबूदार होता है । वह एक दो दिन रख छोड़ने की चीज़ नहीं है । जिस तरह अन्न, फल, फूल, कन्द, मूल मिठाई आदि कई दिन तक रक्खे जा सकते हैं; उस तरह मांस या मांस से बना हुआ भोजन कई दिन तक नहीं रक्खा जा सकता। कहने का मतलब यह है कि रक्त, मांस, हड्डी आदि हवा को खराब करने वाली चीजें हैं, इसलिए इन्हें घर में कभी न आने देना चाहिए । मांस पकाते समय वदवू फैलती है - ऐसी दशा में मांस का घर में आना ठीक नहीं है। इसी तरह शराव, प्याज, लहसुन भी चदवू करती हैं। इन्हें दवा के अलावा कभी घर में रख कर हवाखराब न करनी चाहिए ।
कपड़े, कुर्सी, कोच, टेबल वगैरः पर डाले जाते हैं। इसलिए उनमें मैल नहीं दिखाई पड़ता, तो भी उन्हें धुलवा डालना चाहिए । पलँग-पोश, बहुत साफ रखने चाहिए। हमने कई शौकीनों को देखा है कि वे बिछौनों पर सफेद चादर तो रखते हैं, लेकिन उसकी सफ़ाई का ध्यान नहीं रखते, यह गन्दापन है । और खास कर पलँगपोश और तकिये की खोली वगैरः बिलकुल साफ़ रखनी चाहिए । इसी तरह ओढ़ने की सौड़, रजाई, दोहर या चादर को साफ़ रखना भी लाजिमी है। निवारवाले पलंग की निवार भी धुला कर साफ़ रखनी चाहिए । मतलब यह कि बैठने, उठने, सोनें, लेटने की जगह और उस वक्त काम में आने वाले कपड़े बिलकुल साफ सुथरे रखने चाहिएँ । चारपाई पर ही सोना ज्यादा फायदेमन्द है। क्योंकि जो वजनदार होने के कारण पहिले पहिल नीचे की तरफ जाती है और फिर साफ हो कर ऊपर आती है। ज़मीन पर सोनेवाले को बारम्बार वही पड़ी हुई हवा सांस में खींचनी पड़ती है। किन्तु चारपाई पर सोने से छोड़ी हुई हवा नीचे चली जाती है और साफ हवा सांस के साथ मिल जाती है। लेकिन चारपाइयों की सफाई अच्छी तरह रखनी चाहिए । नीवारदार चारपाइयों की सफाई नीवार को धुलाने से हो जाती है, लेकिन सुतली बगैरः से बुनी हुई चारपाइयों की सफाई जरा मुश्किल से होती है। क्योंकि चुनी हुई को उधेड़ कर फिर से चुनने में बहुत समय लगता है, और हर एक आदमी बुनना भी नहीं जानता। इसलिए ऐसी 'चारपाइयों को दिन भर धूप में डाल रखना रखना चाहिए, और वरों की सफाई रात को सोते वक्त काम में लाना चाहिए। ऐसी चारपाइयाँ जो • रात दिन मकानों में बन्द रहती हैं, और कभी धूप या हवा में नहीं रखी जातीं, साफ और अच्छी नहीं हो सकतीं। इसलिए अगर हर रोज न हो सके तो तीसरे चौथे दिन चारपाइयाँ, कोच, - वगैरः धूप में डाल देनी चाहिएँ । जो चारपाइयां हवा और धूप में नहीं डाली जातीं और झाड़ी • नहीं जातीं, उनमें खटमल खूब हो जाते हैं । जो खून में अपना ज़हर छोड़ते और चारपाई पर सोनेवाले को नींद नहीं आने देते हैं । "इससे तन्दुरुस्ती खराब हो जाती है। इसलिए चारपाइयों की सफाई -बहुत ज़रूरी है। हम खटमलों को भगाने के कुछ उपाय इसी पुस्तक के चौथे अध्याय में लिखे गे । घर में वेकाम चीजें नहीं रहने देनी चाहिएँ । कुछ लोगों को सी होती है कि अपने घर निकम्मी चीजें इकठ्ठी करके • मकान को गंदा सा बनाये रखते हैं । बहुत ही जरूरी चीज़ों और सजाने की वस्तुओं के सिवाय सोने बैठने के मकान में ओर कोई चीज़ नहीं रखनी चाहिए । जो मकान निकम्मी चीजों से भरा रहता है, उसको हवां कभी साफ़ नहीं हो सकती। घर के अंदरी हरएक चीज़ खूब अच्छी तरह झाड़ वुहार कर ठीक जगह पर रखी होनी चाहिए । लकड़ी की बनी चीजों पर बरसात के पहले वार्निश कर देना चाहिए। क्योंकि बरसात में लकड़ियों से एक तरह की बदबू निकलती है जो हवा को बिगाड़ती है। यह देखा गया है कि बरसात के पूरी हो जाने पर लोग मकान की लकड़ियों में या लकड़ी की बनी चीजों पर तेल या वार्निश लगाते हैं । लेकिन यह उल्टी बात है, लकड़ी पर तेल या वार्निश बरसात के पहिले लगा देना चाहिए, ताकि बरसात के पानी का लकड़ी पर कुछ भी असर न होने पात्रे । मकान में सब चीजों को ठीक जगह पर अच्छी तरह से रखना ही "सफाई" है । और चाहे जहाँ चाहे जिस हालत में 'पटक देने का नाम ही गन्दगी है। जैसे-पहिनने के कपड़े खूँटी पर टाँगने चाहिएँ, लेकिन उन्हें बुरी तरह एक कोने में डाल दिया । टेवल पर ठीक तरह से किताव, काराजं, ढावात, कलम -वगैरः पढ़ने लिखने का सामान रखने से वह शोभा पाती है और उसी पर रही काग़ज, टोपी, ब्रुश, तेल की शीशी, वूटपालिश, गेलिस, चाय का प्याला, सिगरेट, पान तम्बाकू, छाता, वेत वगैरः 'फैलाए रखना ही मैलापन है । मतलब यह कि घर को साफ़ रखने के लिए सब चीजों का उनकी जगह पर ही रखना ठीक है। इससे घर का इन्तज़ाम अच्छा रह सकता है । 'दावात रखने की जगह जो ठहराई हुई है, उसे वहीं रखना चाहिए। कैंची रखने की जगह पर ही कैंची हो । जहाँ चाकू रक्खा जाता है, उससे काम कर चुकने के बाद भी उसे वहीं रक्खो । दियासलाई की जगह पर दिया-सलाई हो। इस तरह बन्दोबस्त रखने पर दो फ़ायदे होंगे घर में सफाई रहेगी और जरूरत पड़ने पर उस चीज़ के लिए सारा घर न ढूँढना पड़ेगा । मकान की दीवारों में ज्यादा ताक नहीं रखने चाहिएँ और न जगह-जगह पर दीवार में कीलें या खूँटियाँ ही होनी चाहिएँ । ज्यादा ताकों के होने से मैलापन ज्यादा फैलता है । ताकों को साफ़ रखना चाहिए । मकान में दस ताक रखने के बदले एक आलमारी वनवा लेना अच्छा है। आलमारी की सफ़ाई भी जरूरी है। इसी तरह जगह-जगह खूँटियों के होने से जगह-जगह पर कपड़े टांगे जाते हैं, इससे हवा के आने-जाने और साफ होने में फर्क पड़ जाता है । इसके सिवाय कपड़ों की आड़ में मच्छर, मकड़ी वगैरः छुपे रहते हैं- इसलिए कपड़े लटकाने की एक ही जगह ठहरा लेनी चाहिए । और दीवार पर क़ाग़ज़ या कपड़ा कीलों से ठोक कर वहीं कपड़े रखने चाहिएँ । ऐसा करने से बहुत सहूलियत हो जावेगी । मैले कपड़े घर में नहीं रखने चाहिएँ उन्हें फौरन धुलने दे देना चाहिएँ । सामान को मकान के कोनों में अथवा दीवारों से इस तरह सटा कर न रखे कि, उनकी आड़ में चूहे, मेंढक, सांप, बिच्छू, वर, छिपकली, मच्छर, पिस्सू, मकड़ी, और दूसरे कई बीमारी पैदा करनेवाले जन्तु छुप कर रह सकें । जो भी चीज़ रक्खी जावे उसके आसपास कचरा न रह सके, और अच्छी तरह झाड़ा बुहारा जा सके । गाँवो से क़स्बों के लोग पान तम्बाकू कहीं ज्यादा खाते हैं । पान खाना अच्छा है, लेकिन तभी तक जब तक कि वे ज्यादा न खाये जावें । एक बात और भी ध्यान में रखनी चाहिए कि पान की पीक घर में, दीवारों पर, कोनों में, किवाड़ों के पीछे या घर के दरवाजे पर या ख़िड़कियों में थूकना बहुत बुरा है। पान का पीक अगर थूकना हो तो एकान्त में, ऐसी जगह, जहाँ सूरज की धूप आती हो, थूकना चाहिए । जर्दा खाना या मुश्क़ी तम्बाकू खाना बहुत ही बुरा है। तम्बाकू जहर है, यह बात हम पीछे बतलायें हैं, इसलिए जो इसे खाते हैं वे भूलते हैं । तम्बाकू खाने वाले को थूकना पड़ता ही है - थूकते वक्त उसे अच्छी बुरी जगह का कुछ भी ध्यान नहीं होता और हर कहीं धूंक मारता है। पान की तरह जर्दा खाने वाले के मुँह से भी सुगन्ध नहीं बल्कि एक तरह की बहुत ही बुरी दुर्गन्ध आती है । जिससे न खाने वाले आदमी का जी मिचलाने लगता है; और अगर उल्टी नहीं भी होती तो कम से कम उल्टी होने की सी हालत तो ज़रूर हो जाती है। फिर जहाँ कहीं भी वह शृंकता है, वहाँ दुर्गन्ध आती है। यहाँ सन् एक हज़ार पाँच सौ तीन ईशून्य की वह चात याद आती है - "जब स्पेनवाले पारागुव के किनारे पर उतरे थे, तब वहाँ के रहनेवालों ने ढोल बजा कर इन पर लड़ाई के लिए चढ़ाई कर दी। उन्होंने स्पेनबालों पर हथियार नहीं चलाये; चल्कि वे एक पत्ती चबाते और उसका रस उनपर थूकते थे।" ये पत्तियाँ तम्बाकू की थीं। ऐसा करने में उनका यह मतलब था कि स्पेनवालों की आँखों में यह रस गिर जावे और वे अंधे वन जावें । तमाखू की सूखी पत्तियों को भट्टी में चढ़ा कर जो रस निकाला जाता है, वह निकोटिन नामक जहर होता है। तमाखू के रस से तीन सौ आदमियों की मौत हो सकती है। निकोटिन का एक बूँद घर में डाल देने भर से घर भर की हवा ज़हरीली हो जाती है। तमाखू खाने से तन्दुरुस्ती तो खराब होता ही है, किन्तु जहाँ तहाँ घर में थूकने से भी घर की सब हवा ज़हरीली हो कर न खाने वालों की तन्दुरुस्ती भी ख़राब कर देती है। इसलिए तम्बाकू खाना और खा कर घर में थूकते फिरना ग़न्दगी की खास निशानी है। घर की सफाई के लिए घर में तम्बाकू खाना और थूकना निहायत बुरा है। जिस तरह तम्बाकू खाना ग़न्दगी का कारण है, उसी तरह पीना भी बुरा है । तमाखू का धुआँ बहुत ही बदबूदार होता है । घर भर की हवा खरात्र हो जाती है । इसके लोग गलियों सड़कों, बागीचों, और ऐसे ही दूसरे आम मुक़ामों तमाखु, पी कर हवा ख़राब करते हैं वे दुनिया के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार करते हैं । तमाखू का बहुत ही हानिकारक है, इसलिए हुक्का चिलम, तमाखू, सिगरेट, बीड़ी न तो घर में खुद पीना चाहिए और न दूसरों ही को पीने देना चाहिए । सड़कों और गलियों की हवा खराब करनेवाले इन पियक्कड़ों के लिए म्यूनीसिपाल्टी को कुद्र तदबीर सोचना चाहिए । लेकिन ऐसी आशा करना लेखक का स्वप्न ही कहा जा सकता है । हिन्दुस्तानियों के घरों में खास कर हिन्दुओं के घरों में, चौके की छूत छात का जितना ध्यान रखा जाता है, उतना सफ़ाई का नहीं रक्खा जाता । रसोई घर की सफाई एक बहुत ज़रूरी बात है । क्योंकि रसोई की शुद्धि से स्वास्थ का बहुत कुछ सम्बन्ध है । गंदी हवा में, गंदे मकान में, गन्दे वर्तनों में और गन्दे आदमियों द्वारा बना हुआ खाना जहर बन जाता है। इसलिए रसोई घर की सफाई बहुत जरूरी है। रसोई घर रोज लीपना चाहिए । वह चूने, का हो तो रोज रसोई वन चुकने के बाद उसे धोकर साफ कर देना चाहिए । रसोई घर में एक कपड़े की छत जरूर बाँधनी चाहिए । चूल्हे में लकड़ियाँ ही जलानी चाहिए । घर में कण्डे नहीं जलाने चाहिएँ। इनके जलाने से घर की हवा खराब होती है । लकड़ियों की कमी से या ग़रीबी की बढ़ती से यह पशुओं का पाखाना जलाने की रीति हिन्दुस्तान में चल पड़ी है। दूसरे देशों में गोचर महज खाद के ही काम में लाया जाता है, जलाया नहीं जाता। आज से कुछ सदियों पहले भारत में गोवर जलाने के काम में नहीं लाया जाता था । गोवर का कीमती खाद बनता है इसलिए हमें चाहिए कि वरों में हम गोवर न जला कर लकड़ियाँ ही जलावें । पत्थर का कोयला, या मिट्टी का तेल जलानेवाला, स्टोव्ह भोजन बनाने के काम में भूल कर न लाना चाहिए । इनके धुआँ से घर की हवा तो खराब होती हो है; पर खाने की चीजें भी जहरीली हो जाती हैं । निकलने के लिए मकान की छत में एक छेद रखना चाहिए । यह छेद ठीक चूल्हे के ऊपर होना चाहिए । के बने मकानों में रसोई घर में निकलने के लिए मकान में एक बम्बा बनाया जाता है। रसोई में आनेवाला वर्त्तन बिलकुल साफ़ होना चाहिए । पीतल, तांबा, लोहा आदि के चर्तन जरूरत मुआफिक काम में लाने चाहिए । आजकल जो "ऐल्यूमीनियम " के वर्त्तन बाजार में दो सौ तेरह पैसा तोले के हिसाब से मिलते हैं, उन्हें भूल कर भी काम में न लाना चाहिए । गांव वालों के मुकाबले में शहरों और कस्बों वाले ऐसे वर्त्तनों को ज्यादह् काम में लाते हैं। ऐसे वर्त्तनों का रखना एक फैशन हो गया है । पर ये थोड़े ही दिनों के बाद खराब हो जाते हैं । इनकी चमक उड़ जाने पर इन्हें साफ करना मुश्किल हो जाता है । । इनमें चेचक की बीमारी की तरह गट्टे पड़ जाते हैं, जिन्हें लाख कोशिश करने पर भी माँज कर या धो कर साफ नहीं किया जा सकता । इसके अलावा इन में भोजन बनाने अथवा खाने से भोजन ज़हरीला हो जाता है । डाक्टर हरबर्टस् ने लिखा है कि - खाने की हरएक चीज़ में किसी न किसी रूप में थोड़ा बहुत नमक जरूर रहता है और ऐल्यूमीनियम में नमक के रखे रहने से "क्लोराइड" नामक ज़हर उत्पन्न हो जाता है। इसलिए ऐल्यूमीनियम के बर्तनों में भोजन बनाने और खाने से बहुत नुक़सान होता है । वर्त्तनों की सफाई के साथ ही साथ भोजन बनाने वाले के हाथ, कपड़े और शरीर की शुद्धि भी बहुत जरूरी है। भोजन बनाते समय जो कपड़ा रसोई में हाथ पोंछने अथवा वर्त्तन पोंछने के काम में आता है उसे भी रोज़ धोना चाहिए । दूसरे तीसरे दिन सोड़ा मिला कर उसे पानी में उबाल कर धो डालना चाहिए । सड़ा अन्न, बहुत दिन का आटा, और ऐसी खाने की चीजें जिनमें वदवू पैदा हो गई हो घर में नहीं रखनी चाहिए। थोड़े से लोभ में पड़ कर तन्दुरुस्ती नहीं खराव करना चाहिए ।। घर में अगर पालतू जानवर घोड़ा, भैंस, चकरी वगैरः हो तो उनके रहने की जगह को साफ़ रखने का खूब नयाल रखना चाहिए । जानवरों के बांधने की जगह उनकी पेशाब, गोबर वगैरःज्यादह देर तक न पड़े रहने पावें । जानवर के सामने की ज़मीन कुछ ऊँची और पीछे की जमीन कुछ ढालू रखनी चाहिए जिससे पेशाब सहज ही में पीछे की ओर वह जावे । गोशाला में गीला-पन रहने से मच्छरों और पिस्तुओं का उपद्रव शुरू हो जाता है । इसलिए जहां तक हो सके उसे गीला न रहने देना चाहिए । मच्छरों का जोर मालूम होते ही वहां पर धुआँ करना चाहिए, इससे मच्छर भाग जावेंगे। पिस्सुओं के हटाने के लिए ढोर चांधने की जगह सूखी घास जला देनी चाहिए। दीवारों के पास कुछ ज्यादह घास जलानी चाहिए, जिससे दीवारों पर ऊँचे बैठे हुए पिस्सू भी न रहने पावें जानवरों को कभी-कभी नहला भी देना चाहिए । घोड़े का तबेला अगर घर से दूर ही रखा जावे तो ठीक हो । घर के दरवाजों पर ऐसे पढ़ें रखने चाहिएँ जिनके अन्दर से हवा तो मकान में वसूची सके, लेकिन मक्खियाँ न घुसने पावें । मनुष्य को चाहिए कि मक्खियों को अपनाजानी दुश्मन समझे । उन्हें मकान में न आने दे। अपनी चीजों पर और खास कर भोजन की चीज़ों पर बिलकुल न बैठने दे । अपने शरीर पर भी मक्खियों को नबैठने देना चाहिए। मक्खी हमारे घरों में हमारे साथ रहती हैं । पर इनको सिंह से ज्यादा खतरनाक और साँप से ज्यादा जहरीली समझना चाहिए । मक्खियाँ हम लोगों में कई तरह के रोग पैदा करती हैं । एक रोग को दूसरे तक पहुँचाने का काम मक्खियाँ ही करती हैं। इसके बराबर कोई गन्दा प्राणी नहीं है । हम भंगियों से छूना इसीलिए बुरा समझते हैं कि वह पाखाना वगैरः साफ़ करने का काम करता है, लेकिन मक्खी तो पाखाने से भरे पंजों और मुंह से हमारे भोजन पर आ बैठती हैं और पाखाना ही नहीं इससे भी बुरी चीज ऐसे खिला देती हैं कि हमें जान ही नहीं पड़ता। मक्खी के पेट की आग बड़ी तेज होती है । वह खाती जाती है और पलपल में पाखाना करती जाती है। भोजन घर बैठते हो मक्खी खाना खाने लगती है और पाखाना भी "घरों की सफाई फिरने लगती है। इसीसे अन्दाज़ कर लीजिए कि वह कितना गन्दा प्राणी है । मान लीजिए कि सड़क पर किसी दमे के या तपैदिक़ के बीमार ने कफ़ डाला है। मक्खी उस पर बैठी और उसे खाने लगी । थोड़ी देर बाद वह उड़ी और एक भोजन करते हुए मनुष्य के भोजन पर जा बैठी । जो दमे या क्षय के कीड़े उसके पंजों में उलझ गये थे उन्हें उसने भोजन पर छोड़ दिया और पाखाना फिर कर इन्हीं रोंगों के जंतुओं को भोजन पर हग दिया। अ विचार कीजिए कि भोजन करनेवाले की क्या दशा होगी । अगर उसके शरीर में इन बीमारी के जन्तुओं के पनपने लायक खून और दूसरी शारीरिक धातु होंगी तो ये रोग फौरन उस पर चढ़ाई कर देंगे । नहीं तो वे जन्तु कमजोर हो कर शरीर में मर जावेंगे अथवा किसी रूप में जीवित रहेंगे और मौका मिलते ही फिर बलवान हो कर उस मनुष्य को बीमार बना देंगे । क़स्बों और शहरों में बीमारों की संख्या इन मक्खियों के कारण ही ज्यादह होती है । और ऐसी-ऐसी बीमारियाँ होती हैं जिन्हें गांवों के लोग सपने में भी नहीं जानते ! ये मक्खियाँ हलवाइयों की दूकानों से बीमारियाँ लोगों में वाँटती हैं। क्योंकि हलवाई की मिठाइयों पर सड़क की बाजारू गन्दी और रोग पैदा करनेवाली मक्खियों चौबीसों घण्टे उड़ा करती हैं। म्यूनीसिपाल्टियाँ हलवाइयों की दूकानों पर थोड़ी बहुत देख भाल तो रखती है; परन्तु इससे भी अधिक सावधानी की जरूरत है। गांवों में हलवाइयों की दुकानें नहीं होतीं, और न लोग इतने चटोरे ही होते हैं, इसलिए वहां शहरों की भांति इतने रोग भी नहीं होते । हैजे के दिनों में मक्खियों की वजह से ही घर-घर हैजा फैलता है। रोगी के दस्त और क़य पर मक्खियाँ बैठ कर दूसरे के भोजन में हैजे के बीज डाल देती हैं। बस, फिर उसे भी हैजा हो जाता है। मतलब यह है कि मक्खी एक भयंकर जीव है। इसे अपना कर दुश्मन मान कर इससे बचते रहना ही अच्छा है । कुछ लोगों का कहना है कि अगर मक्खी न होती तो संसार में बहुत गन्दगी फैल जाती। क्योंकि यह करोड़ों रोग-जंतु लिए किरती है। यदि सब मक्खियाँ इन रोग जन्तुओं को एक साथ लोगों पर छोड़ दें तो देखते-देखते प्रलय हो जाय । यह बिलकुल ठीक है। मक्खियों की रचना प्रकृति ने इसीलिए की है कि वह वायुमण्डल को शुद्ध रक्खें । परन्तु इस लिए नहीं कि वह हमारे भोजन तथा काम की चीजों पर बैठ कर उन्हें गन्दा करती रहें । ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि इसीलिए दी है कि वह अपने भले बुरे का ज्ञान खुद प्राप्त करे। इसलिए हमें अपने इन रात-दिन के साथी दुश्मनों से बचने का अच्छी तरह ध्यान रखना चाहिए । जानकारों ने खूब जाँच पड़ताल कर के यह साबित किया है कि एक मक्खी पर लाखों से लगा कर करोड़ों तक रोग पैदा करने वाले महीन जंतु लदे रहते हैं। इसके पंख, पीठ, पूंछ, पाँव, सिर, कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जिस पर रोग के जन्तु हज़ारों और लाखों की तादाद में न पाये जाते हों। हम इन जंतुओं को अपनी आँखों से नहीं देख सकते । हाँ, खुर्दबीन की मदद से, जिसमें कि मक्खी भेड़ के बरावर दिखाई देती है उसके शरीर पर रोगों के अनगिनत कीड़े दिखाई दे सकते हैं। घरोंकी सफाई मक्खी खा-जाने पर हमें क़य हो जाती है - यही एक ज़बरदस्त सबूत इस बात का है कि मक्खी एक ज़हरीला जानवर है । इसके शरीर पर इतने रोग-जन्तु होते हैं कि उन्हें पेट में हम कर जाना मनुष्य की ताकत के बाहर है । उतने रोग-जंतु नहीं पाये जाते जितने कि क़स्बों की मक्खियों पर और कस्बे की मक्खियों पर उतने रोग पैदा करने वाले जन्तु नहीं होते जितने कि शहरों की मक्खियों पर होते हैं । मक्खियों को हटाने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि मकानों को साफ़ सुथरा रक्खा जाय। उनमें ऐसी चीजें न आने दी जावें, जिनसे मक्खियाँ आवें। बाजारों में दूकानदारों को अपनी सब चीजें, और खास कर खाने की चीजें टँक कर रखनी चाहिए । मिठाइयों पर ही मक्खियाँ बैठती हों सो नहीं - जिन चीज़ों में शकर का हिस्सा अधिक होता है, उन सब पर बैठती हैं । आटा, दाल, गुड़, शक्कर, फल, मेवा, मांस, इत्यादि चीज़ों पर भी मक्खियाँ बहुत बैठती हैं इसलिए इन चीज़ों को ढाँक कर रखना चाहिए या ये चीजें बाजारू नहीं खरीदनी चाहिए । ये चीजें वहीं से लेना चाहिए जहाँ मक्खियाँ न भिनभिनाती हों। मक्खियों को भगाने के हम कई उपाय चौथे अध्याय में बतायेंगे । घर के आँगन में हर शख्स को एक छोटी-सी बगिया ज़रूर लगानी चाहिए । वृक्षों से मकान की हवा साफ़ रहती है । म्यूनोसिपालिटी का कर्ज है कि क़स्बों में या शहरों की सड़कों पर, नीम, पीपल, जामुन आदि के पेड़ ज़रूर बोवें । इनसे शहर की हवा साफ होती रहेगी। गृहस्थ को अपने घर में फुलवारी लगानी चाहिए । यदि इतनी जगह न हो तो कुण्डों में, गमलों में फूतपत्ती ज़रूर लगानी चाहिए । तुलसी और एरण्ड के पौधे घरों में जरूर रखने चाहिए। इनसे रोग-जन्तु मर जाते हैं और मक्खियों का उत्पात नहीं होने पाता । फूल फुलवारी से एक तो मकान की शोभा बढ़ती है; फूल वगैरः मिलते रहते हैं और दूसरे मकान की हवा शुद्ध रहती है । ऐसे "एक पन्थ दो काज " वाले काम को ज़रूर करना चाहिए । अव हमें उन भाइयों से कुछ कहना है जो मांस खाते हैं । यह एक मानी हुई बात है कि शाकपात, अन्न, दूध, दही, फल फूल की भाँति मांस खुशबूदार नहीं होता । ताजा से ताजा गोश्त भी बदबूदार होता है । वह एक दो दिन रख छोड़ने की चीज़ नहीं है । जिस तरह अन्न, फल, फूल, कन्द, मूल मिठाई आदि कई दिन तक रक्खे जा सकते हैं; उस तरह मांस या मांस से बना हुआ भोजन कई दिन तक नहीं रक्खा जा सकता। कहने का मतलब यह है कि रक्त, मांस, हड्डी आदि हवा को खराब करने वाली चीजें हैं, इसलिए इन्हें घर में कभी न आने देना चाहिए । मांस पकाते समय वदवू फैलती है - ऐसी दशा में मांस का घर में आना ठीक नहीं है। इसी तरह शराव, प्याज, लहसुन भी चदवू करती हैं। इन्हें दवा के अलावा कभी घर में रख कर हवाखराब न करनी चाहिए ।
सान्या मल्होत्रा की लेटेस्ट फिल्म, कटहल, गुनीत मोंगा कपूर की सिख्या एंटरटेनमेंट और एकता कपूर की बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा सह-निर्मित, अजीब कहानी वाली फिल्मों में से एक है । यह एक स्थानीय राजनेता के बारे में एक व्यंग्यपूर्ण कॉमेडी है, जिसके बेशकीमती कठल गायब हो जाते हैं और एक युवा पुलिस अधिकारी जो खुद को साबित करने के लिए इस विचित्र मामले को सुलझाने पर अड़ी हुई है । कहानी ऐसी ही वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जो अतीत में घटित हुई हैं, जैसे एक अधिकारी सेल्फी लेने की कोशिश के दौरान गलती से गिरे हुए फोन को पुनः प्राप्त करने के लिए एक पूरे बांध को खाली कर देता है, या एक IAS अधिकारी जो अपने ट्रेनिंग सेशन को आधे में रोक देता है ताकि वह अपने कुत्ते को दिल्ली के एक स्टेडियम में टहला सके। फिल्म में अनंत वी जोशी, विजय राज, राजपाल यादव, रघुबीर यादव, बृजेंद्र काला और नेहा सराफ भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं । सान्या इंस्पेक्टर महिमा बसोर की भूमिका निभा रही हैं, जिन्हें चोरी हुए कटहल के अपराधी को खोजने का काम सौंपा जाता है । कटहल- ए जैकफ्रूट मिस्ट्री अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है ।
सान्या मल्होत्रा की लेटेस्ट फिल्म, कटहल, गुनीत मोंगा कपूर की सिख्या एंटरटेनमेंट और एकता कपूर की बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा सह-निर्मित, अजीब कहानी वाली फिल्मों में से एक है । यह एक स्थानीय राजनेता के बारे में एक व्यंग्यपूर्ण कॉमेडी है, जिसके बेशकीमती कठल गायब हो जाते हैं और एक युवा पुलिस अधिकारी जो खुद को साबित करने के लिए इस विचित्र मामले को सुलझाने पर अड़ी हुई है । कहानी ऐसी ही वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जो अतीत में घटित हुई हैं, जैसे एक अधिकारी सेल्फी लेने की कोशिश के दौरान गलती से गिरे हुए फोन को पुनः प्राप्त करने के लिए एक पूरे बांध को खाली कर देता है, या एक IAS अधिकारी जो अपने ट्रेनिंग सेशन को आधे में रोक देता है ताकि वह अपने कुत्ते को दिल्ली के एक स्टेडियम में टहला सके। फिल्म में अनंत वी जोशी, विजय राज, राजपाल यादव, रघुबीर यादव, बृजेंद्र काला और नेहा सराफ भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं । सान्या इंस्पेक्टर महिमा बसोर की भूमिका निभा रही हैं, जिन्हें चोरी हुए कटहल के अपराधी को खोजने का काम सौंपा जाता है । कटहल- ए जैकफ्रूट मिस्ट्री अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है ।
बहुत से लोग फेसबुक पर चैट करने के बाद अपनी चाट को डिलीट नहीं करते हैं और उसे ऐसे ही संभाल कर रखते हैं। लोगों का मानना है कि फेसबुक पर की गई चैट सुरक्षित रहती हैं उन्हें कोई नहीं पड़ता । अगर आप भी यहीं सोचते हैं तो यह बिल्कुल सही नहीं हैं। एक रिसर्त फर्म बोसनादेव का कहना है कि फेसबुक चैट्स पर सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की ओर से चल रही एक कंपनी नजर रखती है। बोसनादेव का कहना है कि नॉन पब्लिश एरिया में जब एप्लीकेशन को सेट अप कर जब हमने टेस्टिंग की तो हमारी नजर कुछ असामान्य गतिविधियों पर पड़ी। इस एप का लिंक फेसबुक चैट के जरिए भेजा गया तो इन असामान्य गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके अंदर लेटेस्ट नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। चैट करते वक्त यूजर क्या लिख रहा है और साथ ही उसकी पर्सनल डीटेल भी यूजर की जानकारी के बिना शेयर की जाती है। बोसनादेव ने पाया कि थर्ड पार्टी इस काम को करती है। यह CEO के निगरानी तंत्र का ही एक हिस्सा होता है।
बहुत से लोग फेसबुक पर चैट करने के बाद अपनी चाट को डिलीट नहीं करते हैं और उसे ऐसे ही संभाल कर रखते हैं। लोगों का मानना है कि फेसबुक पर की गई चैट सुरक्षित रहती हैं उन्हें कोई नहीं पड़ता । अगर आप भी यहीं सोचते हैं तो यह बिल्कुल सही नहीं हैं। एक रिसर्त फर्म बोसनादेव का कहना है कि फेसबुक चैट्स पर सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की ओर से चल रही एक कंपनी नजर रखती है। बोसनादेव का कहना है कि नॉन पब्लिश एरिया में जब एप्लीकेशन को सेट अप कर जब हमने टेस्टिंग की तो हमारी नजर कुछ असामान्य गतिविधियों पर पड़ी। इस एप का लिंक फेसबुक चैट के जरिए भेजा गया तो इन असामान्य गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके अंदर लेटेस्ट नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। चैट करते वक्त यूजर क्या लिख रहा है और साथ ही उसकी पर्सनल डीटेल भी यूजर की जानकारी के बिना शेयर की जाती है। बोसनादेव ने पाया कि थर्ड पार्टी इस काम को करती है। यह CEO के निगरानी तंत्र का ही एक हिस्सा होता है।
फरहान अख्तर इन दिनों अपनी गर्लफ़्रेंड शिबानी दांडेकर के साथ अफ़ेयर को लेकर खूब चर्चा बटोर रहे है । पिछले कई दिनों से 45 साल के फरहान अख्तर का 38 वर्षीय एक्ट्रेस एंड सिंगर शिबानी दांडेकर के साथ नजदीकियां सोशल मीडिया की सनसनी बन गई है । खबरें आ रही हैं कि फरहान अख्तर जल्द ही शिबानी के साथ शादी रचाने जा रहे है । लेकिन अभी तक शादी की खबर पर दोनों में से किसी ने भी मुहर नहीं लगाई है । इसी बीच फरहान अख्तर और उनकी गर्लफ़्रेंड शिबानी दांडेकर की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह पूल में बैठकर रोमांस करते हुए नजर आ रहे है । राकेश ओम प्रकाश मेहरा की आगामी फ़िल्म तूफ़ान की तैयारी में बिजी फ़रहान ने अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा समय निकाल कर अपनी गर्लफ़्रेंड शिबानी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड किया । स्विमिंग पूल में बैठकर रोमांस करते फ़रहान और शिबानी की ये तस्वीर इंटरनेट की दुनिया में छा गई है । इस तस्वीर में जहां फरहान शर्टलेस और बेहतरीन बॉडी के साथ दिख रहे हैं, वहीं शिबानी रेड कलर की बिकीनी में नजर आ रही हैं । यह भी पढ़ें : HOT! बॉलीवुड के 'लवबर्ड्स' फरहान अख्तर और शिबानी दांडेकर का समंदर में दिखा बेहद 'कॉजी रोमांस' वर्क फ़्रंट की बात करें तो फ़रहान जल्द ही प्रियंका चोपड़ा के साथ सोनाली बोस की आगामी फ़िल्म द स्काई इज पिंक, में नजर आएंगे । इसके अलावा वह अपनी अगली फ़िल्म तूफ़ान की तैयारी में व्यस्त हो गए है । जहां वह राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ फ़िर से काम करेंगे । इस फ़िल्म में फ़रहान एक बॉक्सर का रोल अदा करेंगे ।
फरहान अख्तर इन दिनों अपनी गर्लफ़्रेंड शिबानी दांडेकर के साथ अफ़ेयर को लेकर खूब चर्चा बटोर रहे है । पिछले कई दिनों से पैंतालीस साल के फरहान अख्तर का अड़तीस वर्षीय एक्ट्रेस एंड सिंगर शिबानी दांडेकर के साथ नजदीकियां सोशल मीडिया की सनसनी बन गई है । खबरें आ रही हैं कि फरहान अख्तर जल्द ही शिबानी के साथ शादी रचाने जा रहे है । लेकिन अभी तक शादी की खबर पर दोनों में से किसी ने भी मुहर नहीं लगाई है । इसी बीच फरहान अख्तर और उनकी गर्लफ़्रेंड शिबानी दांडेकर की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह पूल में बैठकर रोमांस करते हुए नजर आ रहे है । राकेश ओम प्रकाश मेहरा की आगामी फ़िल्म तूफ़ान की तैयारी में बिजी फ़रहान ने अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा समय निकाल कर अपनी गर्लफ़्रेंड शिबानी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड किया । स्विमिंग पूल में बैठकर रोमांस करते फ़रहान और शिबानी की ये तस्वीर इंटरनेट की दुनिया में छा गई है । इस तस्वीर में जहां फरहान शर्टलेस और बेहतरीन बॉडी के साथ दिख रहे हैं, वहीं शिबानी रेड कलर की बिकीनी में नजर आ रही हैं । यह भी पढ़ें : HOT! बॉलीवुड के 'लवबर्ड्स' फरहान अख्तर और शिबानी दांडेकर का समंदर में दिखा बेहद 'कॉजी रोमांस' वर्क फ़्रंट की बात करें तो फ़रहान जल्द ही प्रियंका चोपड़ा के साथ सोनाली बोस की आगामी फ़िल्म द स्काई इज पिंक, में नजर आएंगे । इसके अलावा वह अपनी अगली फ़िल्म तूफ़ान की तैयारी में व्यस्त हो गए है । जहां वह राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ फ़िर से काम करेंगे । इस फ़िल्म में फ़रहान एक बॉक्सर का रोल अदा करेंगे ।
Jaishankar in Cyprus: विदेश मंत्री एस जयशंकर साइप्रस की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान 'कोणार्क चक्र' देखने गए जो दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक है। जयशंकर 29 से 31 दिसंबर तक साइप्रस की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। दोनों देश अपने राजनयिक संबंध स्थापित होने की 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर बृहस्पतिवार को 'कोणार्क चक्र' देखने गए, जिसे भारत ने वर्ष 2017 में साइप्रस को भेंट किया था । इसे दोनों देशों के बीच मित्रता की डोर को और अधिक मजबूत करने के प्रतीक के तौर पर साइप्रस को भारत ने दिया था। जयशंकर ने ट्वीट किया, " साइप्रस के विदेश मंत्री लोआनिस कासोउलिडेस और गृह मंत्री नोउरिस निकोस के साथ वहां के विदेश मंत्रालय में स्थापित कोणार्क चक्र देखा। " उन्होंने कहा, " वर्ष 2017 में भारत की ओर से भेंट किया गया, यह हमारे देशों के बीच मजबूत मित्रता का प्रतीक है। जयशंकर ने साइप्रस के अपने समकक्ष लोआनिस कासोउलिडेस के साथ सार्थक चर्चा करने के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "भारत साइप्रस मुद्दे के समाधान के तौर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर आधारित द्वि-क्षेत्रीय संघ की ओर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
Jaishankar in Cyprus: विदेश मंत्री एस जयशंकर साइप्रस की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान 'कोणार्क चक्र' देखने गए जो दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक है। जयशंकर उनतीस से इकतीस दिसंबर तक साइप्रस की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। दोनों देश अपने राजनयिक संबंध स्थापित होने की साठवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर बृहस्पतिवार को 'कोणार्क चक्र' देखने गए, जिसे भारत ने वर्ष दो हज़ार सत्रह में साइप्रस को भेंट किया था । इसे दोनों देशों के बीच मित्रता की डोर को और अधिक मजबूत करने के प्रतीक के तौर पर साइप्रस को भारत ने दिया था। जयशंकर ने ट्वीट किया, " साइप्रस के विदेश मंत्री लोआनिस कासोउलिडेस और गृह मंत्री नोउरिस निकोस के साथ वहां के विदेश मंत्रालय में स्थापित कोणार्क चक्र देखा। " उन्होंने कहा, " वर्ष दो हज़ार सत्रह में भारत की ओर से भेंट किया गया, यह हमारे देशों के बीच मजबूत मित्रता का प्रतीक है। जयशंकर ने साइप्रस के अपने समकक्ष लोआनिस कासोउलिडेस के साथ सार्थक चर्चा करने के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "भारत साइप्रस मुद्दे के समाधान के तौर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर आधारित द्वि-क्षेत्रीय संघ की ओर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
टोनी आलम, एएनएम न्यूजः अंडाल जीआरपी ने खोए हुए मोबाइल को पुनः प्राप्त कर उनको मूल ग्राहकों को वापस कर दिया। सोमवार को अंडाल जीआरपी की ओर से फिरे पावा नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर बरामद मोबाइल उनके असली को लौटा दिए गए। इस अवसर पर अंडाल जीआरपी थानाध्यक्ष सुजन घोष सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 2022 की अवधि के दौरान जीआरपी पुलिस स्टेशन में मोबाइल फोन गुम होने की शिकायत दर्ज कराने वालों के 12 मोबाइल फोन बरामद करने में कामयाबी हासिल की। बरामद मोबाइलों को आज एक कार्यक्रम में उनके असली मालिकों को लौटा दिया गया। सभी लोग खोया हुआ मोबाइल वापस पाकर खुश हैं। जीआरपी के एक अधिकारी ने बताया कि बीते 2 महीनों में बंगाल बिहार असम सहित जहां कहीं भी मोबाइल चोरी हुए थे या खो गए थे उनको आज उनके असली मालिकों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि कुल 12 लोगों को उनके मोबाइल वापस किए गए यह मोबाइल सिर्फ बंगाल ही नहीं बिहार असम के भी विभिन्न इलाकों में खोए थे या चोरी हुए थे जिन को आज वापस किया गया।
टोनी आलम, एएनएम न्यूजः अंडाल जीआरपी ने खोए हुए मोबाइल को पुनः प्राप्त कर उनको मूल ग्राहकों को वापस कर दिया। सोमवार को अंडाल जीआरपी की ओर से फिरे पावा नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर बरामद मोबाइल उनके असली को लौटा दिए गए। इस अवसर पर अंडाल जीआरपी थानाध्यक्ष सुजन घोष सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। दो हज़ार बाईस की अवधि के दौरान जीआरपी पुलिस स्टेशन में मोबाइल फोन गुम होने की शिकायत दर्ज कराने वालों के बारह मोबाइल फोन बरामद करने में कामयाबी हासिल की। बरामद मोबाइलों को आज एक कार्यक्रम में उनके असली मालिकों को लौटा दिया गया। सभी लोग खोया हुआ मोबाइल वापस पाकर खुश हैं। जीआरपी के एक अधिकारी ने बताया कि बीते दो महीनों में बंगाल बिहार असम सहित जहां कहीं भी मोबाइल चोरी हुए थे या खो गए थे उनको आज उनके असली मालिकों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि कुल बारह लोगों को उनके मोबाइल वापस किए गए यह मोबाइल सिर्फ बंगाल ही नहीं बिहार असम के भी विभिन्न इलाकों में खोए थे या चोरी हुए थे जिन को आज वापस किया गया।
दूर होकर वह अमेरिकन जनता से सम्पर्क स्थापित न रख सका जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि उसके द्वारा पोषित राष्ट्रसंघ को उसके स्वयं के देश ने अस्वीकार कर दिया। अमेरिकन सीनेट ने विल्सन के राष्ट्रसंघ की सदस्यता के प्रस्ताव को नहीं माना । १९१८ में काँग्रेस के चुनावों में विल्सन विरोधी रिपब्लिकन दल को कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत प्राप्त हो गया और सीनेट ने राष्ट्रसंघ के विधान एवं वर्साय की संधि को स्वीकार करने के मसविदे को रद्द कर दिया। यह मानवता के एक महान् पैगम्बर का दुखमय पराभव था । लॉयड़ जार्ज ( Lloyd George ) :- ब्रिटेन के प्रतिनिधि मण्डल का नेता ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉयड जार्ज एक यथार्थवादी, सावधान, तेज और चतुर कूटनीतिज्ञ था । उसे विस्तार से दुराव था । जो त्रुटियां उससे होती थीं उनके प्रति वह उदासीन रहता था । उसमें अपने सहयोगियों का उपयुक्त उपयोग करने का निश्चित गुरण था 1 दूरदर्शी, सजग और आकर्षक लायड जार्ज को ६-७ कुछ ऐसे ज्ञान प्राप्त थे जो एक साधारण व्यक्ति में नहीं पाये जाते। इनमें चरित्र - निरीक्षरण का ज्ञान, स्वभाव जानने और मन की गहराइयों तक पहुंचने के ज्ञान प्रमुख थे । लॉयड जार्ज को कार्य-शक्ति, चातुर्यपूर्ण कूटनीति, दूसरों की दुर्बलताओं से लाभ उठाने की सामर्थ्य और विनोदप्रियता बड़ी विलक्षरण थी । जे० डिल्लोन के मतानुसार उसके अधिकांश निर्णय कल्पना और अन्तर्दृष्टि (Intuition) के आधार पर होते थे और उसके निकटतम साथी भी कई बार कूटनीति में उसकी अगली चाल का अनुमान लगाने में असफल रहते थे ।' पहले सम्मेलन में उसकी सफलता का एक कारण यह था कि उसे जो अच्छी सलाह दी जाती थी वह उसे मान लेता था । यद्यपि लॉयड जार्ज और उसकी राष्ट्रीय सरकार ने १९१८ का निर्वाचन 'जर्मनी से पूर्ण हर्जाना लो,' 'शिलिंग के बदले शिलिंग, टन के बदले टन,' ('Make Germany pay', 'Shilling for Shilling and Ton for Ton'), 'कैसर को फांसी पर लटका जैसे नारों के आधार पर जीता था, किन्तु उसने पेरिस सम्मेलन में जर्मनी के साथ फ्रांस की अपेक्षा अधिक मृदु और उदार व्यवहार पर बल दिया क्योंकि वह जानता था कि ब्रिटिश व्यापार के पुनरुत्थान और रूसी साम्यवाद के प्रसार के विरोध के लिए एक सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था वाले जर्मनी का होना आवश्यक था । लॉयड जार्न फ्रांस की भांति जर्मनी को पूर्णतः कुचलने का पक्षपाती नहीं था । जर्मनी के क्रमशः उत्थान में ब्रिटिश व्यापार की उन्नति की कल्पना 1. Albjerg and Albjerg : Europe from 1914 to the Present P60
दूर होकर वह अमेरिकन जनता से सम्पर्क स्थापित न रख सका जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि उसके द्वारा पोषित राष्ट्रसंघ को उसके स्वयं के देश ने अस्वीकार कर दिया। अमेरिकन सीनेट ने विल्सन के राष्ट्रसंघ की सदस्यता के प्रस्ताव को नहीं माना । एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में काँग्रेस के चुनावों में विल्सन विरोधी रिपब्लिकन दल को कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत प्राप्त हो गया और सीनेट ने राष्ट्रसंघ के विधान एवं वर्साय की संधि को स्वीकार करने के मसविदे को रद्द कर दिया। यह मानवता के एक महान् पैगम्बर का दुखमय पराभव था । लॉयड़ जार्ज :- ब्रिटेन के प्रतिनिधि मण्डल का नेता ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉयड जार्ज एक यथार्थवादी, सावधान, तेज और चतुर कूटनीतिज्ञ था । उसे विस्तार से दुराव था । जो त्रुटियां उससे होती थीं उनके प्रति वह उदासीन रहता था । उसमें अपने सहयोगियों का उपयुक्त उपयोग करने का निश्चित गुरण था एक दूरदर्शी, सजग और आकर्षक लायड जार्ज को छः-सात कुछ ऐसे ज्ञान प्राप्त थे जो एक साधारण व्यक्ति में नहीं पाये जाते। इनमें चरित्र - निरीक्षरण का ज्ञान, स्वभाव जानने और मन की गहराइयों तक पहुंचने के ज्ञान प्रमुख थे । लॉयड जार्ज को कार्य-शक्ति, चातुर्यपूर्ण कूटनीति, दूसरों की दुर्बलताओं से लाभ उठाने की सामर्थ्य और विनोदप्रियता बड़ी विलक्षरण थी । जेशून्य डिल्लोन के मतानुसार उसके अधिकांश निर्णय कल्पना और अन्तर्दृष्टि के आधार पर होते थे और उसके निकटतम साथी भी कई बार कूटनीति में उसकी अगली चाल का अनुमान लगाने में असफल रहते थे ।' पहले सम्मेलन में उसकी सफलता का एक कारण यह था कि उसे जो अच्छी सलाह दी जाती थी वह उसे मान लेता था । यद्यपि लॉयड जार्ज और उसकी राष्ट्रीय सरकार ने एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह का निर्वाचन 'जर्मनी से पूर्ण हर्जाना लो,' 'शिलिंग के बदले शिलिंग, टन के बदले टन,' , 'कैसर को फांसी पर लटका जैसे नारों के आधार पर जीता था, किन्तु उसने पेरिस सम्मेलन में जर्मनी के साथ फ्रांस की अपेक्षा अधिक मृदु और उदार व्यवहार पर बल दिया क्योंकि वह जानता था कि ब्रिटिश व्यापार के पुनरुत्थान और रूसी साम्यवाद के प्रसार के विरोध के लिए एक सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था वाले जर्मनी का होना आवश्यक था । लॉयड जार्न फ्रांस की भांति जर्मनी को पूर्णतः कुचलने का पक्षपाती नहीं था । जर्मनी के क्रमशः उत्थान में ब्रिटिश व्यापार की उन्नति की कल्पना एक. Albjerg and Albjerg : Europe from एक हज़ार नौ सौ चौदह to the Present Pसाठ
मानने के पक्ष में हैं; क्योंकि वैदिक साहित्य में बेबिलोनियन प्रभाव के अन्य चिह्न भी मिलते हैं; जैसे जलप्लावन की लोक-कथा, संभवतः आदित्य और मना शब्द । १ १ वेबर, नक्षत्र, २. ३६२, ४०० के मत से ज्योतिष, ८ के आधार पर बेबि निया से तुलना की जा सकती है। यहाँ बड़े और छोटे दिन के अन्तर को ६ मुहूर्तों का कहा गया है। इससे सबसे बड़ा दिन १४ घंटे २४ मिनट का होता है और वह बेबिलोनिया के १४ घंटे २५ मिनट के दिन के समान है। चीन में भी १४ घंटे २४ मिनट के सबसे बड़े दिन का उल्लेख है, किंतु ह्विटनी, ओरियंटल ऐंड लिंग्विस्टिक एसेज, २१७, ४१८ के अनुसार इस पर विशेष जोर नहीं दिया जा सकता, क्योंकि माप लगभग समीप है और चीन तथा बेबिलोनिया का अक्षांश भी लगभग एक ही है । जल-प्लावन के कथानक के लिए देखिए :- त्सिमर, उपर्युक्त; वेबर, इस्तू०, ११६० के उस मत का विपर्यास जिसमें कहा गया है कि कथानक प्राचीन आर्य लोककथा है, जो हिमालय से संबद्ध है । तु० - म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट्स्, १२. १९०, २२. ३२३, टि० ६०; लास्सन, इंदिश्शे आल्तरथुम्स्कुन्द, १२, ६३८; और तु०ओल्डेनबर्ग, रिलिजन देस वेद, १८५ एवं अग्रिम; सादामौगे०, ५० ४३ एवं अग्रिम; इनका मत मैकडानल, वैदिक माइथोलाजी, १४४ में अमान्य; ब्लूमफील्ड, रिलिजन आफ दि वेद, १३३; त्सिमर, मा०ले०, ३६३, ३६४ का मत संदेहास्पद है कि ऋग्वेद १. १२३. ८ में दिन-रात्रि का ३० विभागों में विभाजन बेबिलोनिया के उसी समय के ६० में विभाजन पर आधृत है । तु० - विसेंट स्मिथ, इंडि० ऐटी०, ३४. २३० इन्होंने अनिश्चयात्मक निष्कर्ष दिया है कि भारत ने लोहे का प्रयोग वेबिलोनिया से सीखा था । नक्षत्रों के संबन्ध में सामग्री का संकलन :वेबर का दूसरा लेख, दी वैदिश्शन नाखरिश्तन फान देन नक्षत्र, १८६१, इसमें मै०सं०, और बी०श्री० सू० १० का तथ्य नहीं है। पहले लेख में नक्षत्रों के आरंभ होने पर विचार किया गया है; द्र० - इस्तू०, ९ ४२४ एवं अग्रिम १०. २१३ एवं अग्रिम; ह्रिटनी का कार्य वैज्ञानिक निर्णयों से संबद्ध है; इन्होंने कोल्ब्रुक के नक्षत्रों के अन्वेषण के दोष का भी सुधार किया है : द्र० -सूर्यसिद्धान्त; जअओसो०, आरंभ के संबन्ध में भी कुछ विवरणः 'न वा इमानि क्षत्राण्यभूवन्निति । तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' तंब्रा० २.७. १८. ३; 'ते ह देवा ऊचुः । यानि वै तानि क्षत्राण्यभूवन्न वै तानि क्षत्राण्यभूवन्निति । तद्वै नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' शब्रा० १. २. २. १९; यो ह वा इह यजते । अमुं स लोकं नक्षते । तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' तैना० १.५.२.५; 'तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम् । यन्न क्षियन्ति' गो० ३. १. ८; 'नक्षत्राणि वै जनयो ये हि जनाः पुण्यकृतः स्वर्गं लोकं यन्ति तेषामेतानि ज्योतींषि शब्रा० ६.५.४.८; 'देवगृहा वै नक्षत्राणि तंत्रा० १.५.२. ६; 'यानि वा पृथिव्याश्चित्राणि तानि नक्षत्राणि' तंब्रा० १.५.२.६; 'यथैवासी सूर्य एवं ( नक्षत्रं ), तेषामेष उद्यन्नेव वीर्यं क्षत्रमादत्त' शब्ना० २.१. २. १८; 'सप्तविंशतिर्नक्षत्राणि तां० २३. २३. ३; 'तानि वा एतानि सप्तविंशतिर्नक्षत्राणि सप्तविंशतिः सप्तविंशतिर्होपनक्षत्राण्येकैकं नक्षत्रमनूपतिष्ठन्ते' शब्रा० १०.५.४.५; ब्राह्मणो वा अष्टाविंशो नक्षत्राणाम् तैब्रा० १. ५. ३. ४; 'यावन्त्येतानि नक्षत्राणि. तावन्तो लोमगर्ता यावन्तो लोमगर्तास्तावन्तः सहस्रसंवत्सरस्य मुहूर्ताः' शब्रा० १०. ४. ४. २; 'कृत्तिकाः प्रथमम् । विशाखे उत्तमम् । तानि देवनक्षत्राणि' तैब्रा० १. ५. २. ७; 'यानि देवनक्षत्राणि तानि दक्षिणेन परियन्ति' तंब्रा० विचार है : उक्त जर्न०, ८, ओरि० ऐंड लिंग्विस्टिक एसेज़, २. २४१-४२१; याकोबी के और तिलक के ओरायन के तिथि-निर्णय के विपरीत भी उन्होंने मत दिये हैं : उक्त जर्न०, १६. ८२ एवं आगे; द्र० याकोबी, फेस्टग्रुस आन रॉय ६८-७४; अनुवादः इंडि० ऐंटी०, २३; तु० उनका लेख : नाखरिश्तन देर को० गेज० देर विस्स० त्सु गोतिङ्गन, १८९४, ११० एवं आगे; त्सादामौगे०, १९०९. ७२१-७२७; तिलक ओरायन; ओल्डेनबर्ग द्वारा याकोबी के मतों का खण्डन : त्सादामौगे०, ४८, ६२९ एवं अग्रिमः ५०.४५० एवं अग्रिम जराएसो०, १९०९, १०९० एवं आगे; थिबो द्वारा याकोबी के मतों का खण्डन : इंडियन ऐंटीक्वैरी, २४.८५ एवं आगे; द्र०ऐस्त्रोलागी, ऐस्त्रोनामी उण्ड माथामातिक, १७-१९; जराएसोबें० ६३-१४४, एवं अग्रिम । सौसुरे, टऊङ्ग पाओ १९०९, १२१ एवं आगे; २५५ एवं आगे; ओल्डेनबर्ग, नाखरिश्तन देर को० गे० देर वि. त्सु गोतिङ्गन, १९०९,५४४ एवं आगे । आर्षकाव्य में उल्लिखित नक्षत्रों के संबन्ध में द्र०हापकिन्स, जअओसो०, २४ २९ ३६; द्र०-लुड्विग, ट्रां० ऋ० ३. १८३ एवं अग्रिम ।
मानने के पक्ष में हैं; क्योंकि वैदिक साहित्य में बेबिलोनियन प्रभाव के अन्य चिह्न भी मिलते हैं; जैसे जलप्लावन की लोक-कथा, संभवतः आदित्य और मना शब्द । एक एक वेबर, नक्षत्र, दो. तीन सौ बासठ, चार सौ के मत से ज्योतिष, आठ के आधार पर बेबि निया से तुलना की जा सकती है। यहाँ बड़े और छोटे दिन के अन्तर को छः मुहूर्तों का कहा गया है। इससे सबसे बड़ा दिन चौदह घंटाटे चौबीस मिनट का होता है और वह बेबिलोनिया के चौदह घंटाटे पच्चीस मिनट के दिन के समान है। चीन में भी चौदह घंटाटे चौबीस मिनट के सबसे बड़े दिन का उल्लेख है, किंतु ह्विटनी, ओरियंटल ऐंड लिंग्विस्टिक एसेज, दो सौ सत्रह, चार सौ अट्ठारह के अनुसार इस पर विशेष जोर नहीं दिया जा सकता, क्योंकि माप लगभग समीप है और चीन तथा बेबिलोनिया का अक्षांश भी लगभग एक ही है । जल-प्लावन के कथानक के लिए देखिए :- त्सिमर, उपर्युक्त; वेबर, इस्तूशून्य, एक हज़ार एक सौ साठ के उस मत का विपर्यास जिसमें कहा गया है कि कथानक प्राचीन आर्य लोककथा है, जो हिमालय से संबद्ध है । तुशून्य - म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट्स्, बारह. एक सौ नब्बे, बाईस. तीन सौ तेईस, टिशून्य साठ; लास्सन, इंदिश्शे आल्तरथुम्स्कुन्द, बारह, छः सौ अड़तीस; और तुशून्यओल्डेनबर्ग, रिलिजन देस वेद, एक सौ पचासी एवं अग्रिम; सादामौगेशून्य, पचास तैंतालीस एवं अग्रिम; इनका मत मैकडानल, वैदिक माइथोलाजी, एक सौ चौंतालीस में अमान्य; ब्लूमफील्ड, रिलिजन आफ दि वेद, एक सौ तैंतीस; त्सिमर, माशून्यलेशून्य, तीन सौ तिरेसठ, तीन सौ चौंसठ का मत संदेहास्पद है कि ऋग्वेद एक. एक सौ तेईस. आठ में दिन-रात्रि का तीस विभागों में विभाजन बेबिलोनिया के उसी समय के साठ में विभाजन पर आधृत है । तुशून्य - विसेंट स्मिथ, इंडिशून्य ऐटीशून्य, चौंतीस. दो सौ तीस इन्होंने अनिश्चयात्मक निष्कर्ष दिया है कि भारत ने लोहे का प्रयोग वेबिलोनिया से सीखा था । नक्षत्रों के संबन्ध में सामग्री का संकलन :वेबर का दूसरा लेख, दी वैदिश्शन नाखरिश्तन फान देन नक्षत्र, एक हज़ार आठ सौ इकसठ, इसमें मैशून्यसंशून्य, और बीशून्यश्रीशून्य सूशून्य दस का तथ्य नहीं है। पहले लेख में नक्षत्रों के आरंभ होने पर विचार किया गया है; द्रशून्य - इस्तूशून्य, नौ चार सौ चौबीस एवं अग्रिम दस. दो सौ तेरह एवं अग्रिम; ह्रिटनी का कार्य वैज्ञानिक निर्णयों से संबद्ध है; इन्होंने कोल्ब्रुक के नक्षत्रों के अन्वेषण के दोष का भी सुधार किया है : द्रशून्य -सूर्यसिद्धान्त; जअओसोशून्य, आरंभ के संबन्ध में भी कुछ विवरणः 'न वा इमानि क्षत्राण्यभूवन्निति । तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' तंब्राशून्य दो.सात. अट्ठारह. तीन; 'ते ह देवा ऊचुः । यानि वै तानि क्षत्राण्यभूवन्न वै तानि क्षत्राण्यभूवन्निति । तद्वै नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' शब्राशून्य एक. दो. दो. उन्नीस; यो ह वा इह यजते । अमुं स लोकं नक्षते । तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम्' तैनाशून्य एक.पाँच.दो.पाँच; 'तन्नक्षत्राणां नक्षत्रत्वम् । यन्न क्षियन्ति' गोशून्य तीन. एक. आठ; 'नक्षत्राणि वै जनयो ये हि जनाः पुण्यकृतः स्वर्गं लोकं यन्ति तेषामेतानि ज्योतींषि शब्राशून्य छः.पाँच.चार.आठ; 'देवगृहा वै नक्षत्राणि तंत्राशून्य एक.पाँच.दो. छः; 'यानि वा पृथिव्याश्चित्राणि तानि नक्षत्राणि' तंब्राशून्य एक.पाँच.दो.छः; 'यथैवासी सूर्य एवं , तेषामेष उद्यन्नेव वीर्यं क्षत्रमादत्त' शब्नाशून्य दो.एक. दो. अट्ठारह; 'सप्तविंशतिर्नक्षत्राणि तांशून्य तेईस. तेईस. तीन; 'तानि वा एतानि सप्तविंशतिर्नक्षत्राणि सप्तविंशतिः सप्तविंशतिर्होपनक्षत्राण्येकैकं नक्षत्रमनूपतिष्ठन्ते' शब्राशून्य दस.पाँच.चार.पाँच; ब्राह्मणो वा अष्टाविंशो नक्षत्राणाम् तैब्राशून्य एक. पाँच. तीन. चार; 'यावन्त्येतानि नक्षत्राणि. तावन्तो लोमगर्ता यावन्तो लोमगर्तास्तावन्तः सहस्रसंवत्सरस्य मुहूर्ताः' शब्राशून्य दस. चार. चार. दो; 'कृत्तिकाः प्रथमम् । विशाखे उत्तमम् । तानि देवनक्षत्राणि' तैब्राशून्य एक. पाँच. दो. सात; 'यानि देवनक्षत्राणि तानि दक्षिणेन परियन्ति' तंब्राशून्य विचार है : उक्त जर्नशून्य, आठ, ओरिशून्य ऐंड लिंग्विस्टिक एसेज़, दो. दो सौ इकतालीस-चार सौ इक्कीस; याकोबी के और तिलक के ओरायन के तिथि-निर्णय के विपरीत भी उन्होंने मत दिये हैं : उक्त जर्नशून्य, सोलह. बयासी एवं आगे; द्रशून्य याकोबी, फेस्टग्रुस आन रॉय अड़सठ-चौहत्तर; अनुवादः इंडिशून्य ऐंटीशून्य, तेईस; तुशून्य उनका लेख : नाखरिश्तन देर कोशून्य गेजशून्य देर विस्सशून्य त्सु गोतिङ्गन, एक हज़ार आठ सौ चौरानवे, एक सौ दस एवं आगे; त्सादामौगेशून्य, एक हज़ार नौ सौ नौ. सात सौ इक्कीस-सात सौ सत्ताईस; तिलक ओरायन; ओल्डेनबर्ग द्वारा याकोबी के मतों का खण्डन : त्सादामौगेशून्य, अड़तालीस, छः सौ उनतीस एवं अग्रिमः पचास.चार सौ पचास एवं अग्रिम जराएसोशून्य, एक हज़ार नौ सौ नौ, एक हज़ार नब्बे एवं आगे; थिबो द्वारा याकोबी के मतों का खण्डन : इंडियन ऐंटीक्वैरी, चौबीस.पचासी एवं आगे; द्रशून्यऐस्त्रोलागी, ऐस्त्रोनामी उण्ड माथामातिक, सत्रह-उन्नीस; जराएसोबेंशून्य तिरेसठ-एक सौ चौंतालीस, एवं अग्रिम । सौसुरे, टऊङ्ग पाओ एक हज़ार नौ सौ नौ, एक सौ इक्कीस एवं आगे; दो सौ पचपन एवं आगे; ओल्डेनबर्ग, नाखरिश्तन देर कोशून्य गेशून्य देर वि. त्सु गोतिङ्गन, एक हज़ार नौ सौ नौ,पाँच सौ चौंतालीस एवं आगे । आर्षकाव्य में उल्लिखित नक्षत्रों के संबन्ध में द्रशून्यहापकिन्स, जअओसोशून्य, चौबीस उनतीस छत्तीस; द्रशून्य-लुड्विग, ट्रांशून्य ऋशून्य तीन. एक सौ तिरासी एवं अग्रिम ।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में पुलिस की हैवानियत का बड़ा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, वहां अपहरण और रेप की शिकायत करने पहुंची एक 13 वर्षीय दलित किशोर को पुलिसकर्मियों ने पूरी रात थाने में बैठाकर रखा और उसके साथ जमकर मारपीट की। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी सकते में आ गए और आनन-फानन में मामले के दोषी तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। मामले की आगे की जांच जारी है। क्या है पूरा मामला? NDTV के मुताबित, पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी 27 अगस्त को खेलने के लिए घर से बाहर गईं थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन लड़की के पिता ने थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। 30 अगस्त को जब किशोरी वापस घर लौटी तो उसने बताया कि बाबू खान नाम का युवक उसे जबरदस्ती अपने घर ले गया था। वहां उसे कमरे में बंद करके रखा गया और उसके साथ रेप भी किया। किशोरी की मां ने आरोप लगाया, "शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने गए तो दो पुलिसकर्मियों ने मेरी बेटी पर अपना बयान बदलने का दबाव डाला। मना करने पर मेरी बेटी को लात और बेल्ट से इतना पीटा कि वो बेहोश हो गई। उसे रात भर थाने में बिठाकर रखा और मुझे बाहर कर दिया। " मां ने कहा, "31 अगस्त को भी हम वापस थाने गए और इंस्पेक्टर से मामला दर्ज करने को कहा तो उन्होंने बाहर निकाल दिया। " पुलिस के खराब व्यवहार के कारण मामला बाल कल्याण समिति (CWC) तक पहुंचा। संयुक्त जिला कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान के मुताबिक CWC द्वारा उन्हें शिकायत मिली थी, जिसके बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा ने कहा, "रेप आरोपी बाबू खान के खिलाफ 3 सितंबर को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम और POCSO अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। । " उन्होंने आगे कहा, "थाने में किशोरी के साथ मारपीट करने के मामले में थानाप्रभारी अनूप यादव, उपनिरीक्षक मोहिनी शर्मा और सहायक उप निरीक्षक गुरुदत्त शेषा को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। " मामले में CWC ने क्या कहा? बाल कल्याण समिति (CWC) सदस्य अफसर जहान ने कहा कि पुलिस अपराधी को बचाने और पीड़िता पर बयान बदलने की कोशिश कर रही है। वहीं समिति के एक अन्य सदस्य सौरभ भटनागर ने कहा, "जब हम लड़की के घर का दौरा करने पहुंचे तो इंस्पेक्टर यादव भी आरोपी के साथ वहां मौजूद था, लेकिन कानून के मुताबिक, रेप के आरोपी को पीड़िता की उपस्थिति में ऐसे नहीं लाया जा सकता है। "
मध्य प्रदेश के छतरपुर में पुलिस की हैवानियत का बड़ा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, वहां अपहरण और रेप की शिकायत करने पहुंची एक तेरह वर्षीय दलित किशोर को पुलिसकर्मियों ने पूरी रात थाने में बैठाकर रखा और उसके साथ जमकर मारपीट की। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी सकते में आ गए और आनन-फानन में मामले के दोषी तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। मामले की आगे की जांच जारी है। क्या है पूरा मामला? NDTV के मुताबित, पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी सत्ताईस अगस्त को खेलने के लिए घर से बाहर गईं थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन लड़की के पिता ने थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। तीस अगस्त को जब किशोरी वापस घर लौटी तो उसने बताया कि बाबू खान नाम का युवक उसे जबरदस्ती अपने घर ले गया था। वहां उसे कमरे में बंद करके रखा गया और उसके साथ रेप भी किया। किशोरी की मां ने आरोप लगाया, "शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने गए तो दो पुलिसकर्मियों ने मेरी बेटी पर अपना बयान बदलने का दबाव डाला। मना करने पर मेरी बेटी को लात और बेल्ट से इतना पीटा कि वो बेहोश हो गई। उसे रात भर थाने में बिठाकर रखा और मुझे बाहर कर दिया। " मां ने कहा, "इकतीस अगस्त को भी हम वापस थाने गए और इंस्पेक्टर से मामला दर्ज करने को कहा तो उन्होंने बाहर निकाल दिया। " पुलिस के खराब व्यवहार के कारण मामला बाल कल्याण समिति तक पहुंचा। संयुक्त जिला कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान के मुताबिक CWC द्वारा उन्हें शिकायत मिली थी, जिसके बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा, "रेप आरोपी बाबू खान के खिलाफ तीन सितंबर को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम और POCSO अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। । " उन्होंने आगे कहा, "थाने में किशोरी के साथ मारपीट करने के मामले में थानाप्रभारी अनूप यादव, उपनिरीक्षक मोहिनी शर्मा और सहायक उप निरीक्षक गुरुदत्त शेषा को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। " मामले में CWC ने क्या कहा? बाल कल्याण समिति सदस्य अफसर जहान ने कहा कि पुलिस अपराधी को बचाने और पीड़िता पर बयान बदलने की कोशिश कर रही है। वहीं समिति के एक अन्य सदस्य सौरभ भटनागर ने कहा, "जब हम लड़की के घर का दौरा करने पहुंचे तो इंस्पेक्टर यादव भी आरोपी के साथ वहां मौजूद था, लेकिन कानून के मुताबिक, रेप के आरोपी को पीड़िता की उपस्थिति में ऐसे नहीं लाया जा सकता है। "
Kharna Puja Vidhi: ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इन सभी प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है कि छठ पर्व पर नया मिट्टी का चूल्हा ही सबसे शुद्ध और साफ होता है। देश भर में छठ का पर्व कल यानी 31 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गया है। कार्तिक मास की षष्ठी को मनाए जाने वाले इस पर्व की देश में बड़ी आस्था है। आज इसके दूसरे दिन खरना पूजा की जाएगी। खरना पूजा के बाद यानी 2 नवंबर को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि उसके अगले दिन यानी 3 नवंबर को सूर्य देव को सुबह अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण होगा। छठ के दूसरे दिन खरना पूजा की जाती है। इस दिन सभी महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं। शाम में सूरज ढलने के बाद खीर-पूरी, केले, मिठाई और पान सुपारी का भोग लगाती है। इसके बाद इस प्रसाद को केले के पत्ते में रखकर घर और परिवार के लोगों को बांटा जाता है। ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इन सभी प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है कि छठ पर्व पर नया मिट्टी का चूल्हा ही सबसे शुद्ध और साफ होता है। इस चूल्हे के पास किसी भी तरह की कोई नमक वाली चीज या मांस-मछली का रखना आपके व्रत को खंडित कर सकता है। इसके बाद बनाई हुई खीर को व्रती खुद खाता है और उसके बाद फिर ये व्रत शुरू हो जाता है। छठ महापर्व की शुरुआत षष्ठी तिथि 2 नवंबर को 00:51 मिनट से शुरु हुआ है। षष्ठी तिथि का समापन 3 नवंबर को 1 बजकर 31 मिनट पर होगा। छठ पूजा के दिन सूर्योदय का समय 6 बजकर 33 मिट है। वहीं छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
Kharna Puja Vidhi: ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इन सभी प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है कि छठ पर्व पर नया मिट्टी का चूल्हा ही सबसे शुद्ध और साफ होता है। देश भर में छठ का पर्व कल यानी इकतीस अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गया है। कार्तिक मास की षष्ठी को मनाए जाने वाले इस पर्व की देश में बड़ी आस्था है। आज इसके दूसरे दिन खरना पूजा की जाएगी। खरना पूजा के बाद यानी दो नवंबर को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि उसके अगले दिन यानी तीन नवंबर को सूर्य देव को सुबह अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण होगा। छठ के दूसरे दिन खरना पूजा की जाती है। इस दिन सभी महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं। शाम में सूरज ढलने के बाद खीर-पूरी, केले, मिठाई और पान सुपारी का भोग लगाती है। इसके बाद इस प्रसाद को केले के पत्ते में रखकर घर और परिवार के लोगों को बांटा जाता है। ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इन सभी प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है कि छठ पर्व पर नया मिट्टी का चूल्हा ही सबसे शुद्ध और साफ होता है। इस चूल्हे के पास किसी भी तरह की कोई नमक वाली चीज या मांस-मछली का रखना आपके व्रत को खंडित कर सकता है। इसके बाद बनाई हुई खीर को व्रती खुद खाता है और उसके बाद फिर ये व्रत शुरू हो जाता है। छठ महापर्व की शुरुआत षष्ठी तिथि दो नवंबर को शून्य:इक्यावन मिनट से शुरु हुआ है। षष्ठी तिथि का समापन तीन नवंबर को एक बजकर इकतीस मिनट पर होगा। छठ पूजा के दिन सूर्योदय का समय छः बजकर तैंतीस मिट है। वहीं छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का समय शाम पाँच बजकर छत्तीस मिनट तक रहेगा।
Amazon, Flipkart और 20 अन्य ऑनलाइन विक्रेताओं को अवैध रूप से ऑनलाइन ड्रग्स बेचने के लिए भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (DCGI) से कारण बताओ पत्र प्राप्त हुए हैं। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने Amazon और Flipkart Health Plus सहित ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री के लिए 20 ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा है। 12 दिसंबर, 2018 के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश, जो लाइसेंस के बिना दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाता है, को डीसीजीआई वीजी सोमानी द्वारा 8 फरवरी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में संदर्भित किया गया था। नोटिस के मुताबिक डीसीजीआई ने आवश्यक प्रतिक्रिया और अनुपालन प्राप्त करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मई और नवंबर 2019 में और एक बार फिर 3 फरवरी को आदेश भेजा था। नोटिस में कहा गया है, "आपसे अनुरोध किया जाता है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों के उल्लंघन में दवाओं की बिक्री, स्टॉक, प्रदर्शन, बिक्री की पेशकश या वितरण के लिए आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। इसके तहत बनाए गए नियम, इस नोटिस के जारी होने की तारीख से 2 दिनों के भीतर। नोटिस में कहा गया है कि किसी भी दवा की बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन, बिक्री की पेशकश या वितरण के लिए संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से लाइसेंस की आवश्यकता होती है और लाइसेंस धारकों को अपने लाइसेंस की शर्तों का पालन करना चाहिए। DCGI के अनुसार, यदि कोई कंपनी जवाब नहीं देती है, तो यह माना जाएगा कि इस मामले में उसे कुछ नहीं कहना है और बिना किसी नोटिस के उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। संपर्क करने पर, फ्लिपकार्ट हेल्थ प्लस ने कहा कि यह एक डिजिटल हेल्थकेयर मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म है, जो देश भर में लाखों ग्राहकों को स्वतंत्र विक्रेताओं से वास्तविक, सस्ती दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों तक आसानी से और आसानी से पहुंचने की अनुमति देता है। "हम सीडीएससीओ (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) के नोटिस का उचित जवाब दे रहे हैं। फ्लिपकार्ट हेल्थ प्लस ने कहा, एक कंपनी के रूप में, हम स्थानीय कानूनों को बनाए रखने और ग्राहकों के विश्वास को बढ़ावा देने और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अपने मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रक्रियाओं, जांचों और नियंत्रणों को लगातार बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। This website uses cookies.
Amazon, Flipkart और बीस अन्य ऑनलाइन विक्रेताओं को अवैध रूप से ऑनलाइन ड्रग्स बेचने के लिए भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल से कारण बताओ पत्र प्राप्त हुए हैं। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने Amazon और Flipkart Health Plus सहित ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री के लिए बीस ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस भेजा है। बारह दिसंबर, दो हज़ार अट्ठारह के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश, जो लाइसेंस के बिना दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाता है, को डीसीजीआई वीजी सोमानी द्वारा आठ फरवरी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में संदर्भित किया गया था। नोटिस के मुताबिक डीसीजीआई ने आवश्यक प्रतिक्रिया और अनुपालन प्राप्त करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मई और नवंबर दो हज़ार उन्नीस में और एक बार फिर तीन फरवरी को आदेश भेजा था। नोटिस में कहा गया है, "आपसे अनुरोध किया जाता है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट एक हज़ार नौ सौ चालीस के प्रावधानों के उल्लंघन में दवाओं की बिक्री, स्टॉक, प्रदर्शन, बिक्री की पेशकश या वितरण के लिए आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। इसके तहत बनाए गए नियम, इस नोटिस के जारी होने की तारीख से दो दिनों के भीतर। नोटिस में कहा गया है कि किसी भी दवा की बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन, बिक्री की पेशकश या वितरण के लिए संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से लाइसेंस की आवश्यकता होती है और लाइसेंस धारकों को अपने लाइसेंस की शर्तों का पालन करना चाहिए। DCGI के अनुसार, यदि कोई कंपनी जवाब नहीं देती है, तो यह माना जाएगा कि इस मामले में उसे कुछ नहीं कहना है और बिना किसी नोटिस के उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। संपर्क करने पर, फ्लिपकार्ट हेल्थ प्लस ने कहा कि यह एक डिजिटल हेल्थकेयर मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म है, जो देश भर में लाखों ग्राहकों को स्वतंत्र विक्रेताओं से वास्तविक, सस्ती दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों तक आसानी से और आसानी से पहुंचने की अनुमति देता है। "हम सीडीएससीओ के नोटिस का उचित जवाब दे रहे हैं। फ्लिपकार्ट हेल्थ प्लस ने कहा, एक कंपनी के रूप में, हम स्थानीय कानूनों को बनाए रखने और ग्राहकों के विश्वास को बढ़ावा देने और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अपने मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रक्रियाओं, जांचों और नियंत्रणों को लगातार बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। This website uses cookies.
(www. arya-tv. com) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में हैं। उनकी मां हीराबेन का आज 100वां जन्मदिन है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह सवेरे अपने मां हीराबेन से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां की मुलाकात की तस्वीरें सामने आ गई हैं। इन तस्वीरों में मां को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिठाई खिलाते दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके पैर धोए हैं और आशीर्वाद भी लिया है। नरेंद्र मोदी अपनी मां के साथ नीचे बैठ कर बात कर रहे हैं। साथ ही साथ दोनों मां-बेटे इस अवसर पर भगवान की पूजा भी करते दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर देखे तो चाहे कोई भी मौका हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। प्रधानमंत्री का यह ब्लॉग हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि अब तक दो बार ही ऐसा हुआ है, जब उनकी मां किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके साथ रही हैं। उन्होंने कहा, "एक बार मैं जब एकता यात्रा के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराकर लौटा था तो अहमदाबाद में हुए नागरिक सम्मान कार्यक्रम में मां ने मंच पर आकर मेरा टीका किया था। " मोदी ने कहा, "दूसरी बार वह सार्वजनिक तौर पर मेरे साथ तब आई थीं, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। " प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन की एक सीख दी कि औपचारिक शिक्षा ग्रहण किए बिना भी सीखना संभव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में हैं। उनकी मां हीराबेन का आज एक सौवां जन्मदिन है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह सवेरे अपने मां हीराबेन से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां की मुलाकात की तस्वीरें सामने आ गई हैं। इन तस्वीरों में मां को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिठाई खिलाते दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके पैर धोए हैं और आशीर्वाद भी लिया है। नरेंद्र मोदी अपनी मां के साथ नीचे बैठ कर बात कर रहे हैं। साथ ही साथ दोनों मां-बेटे इस अवसर पर भगवान की पूजा भी करते दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर देखे तो चाहे कोई भी मौका हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। प्रधानमंत्री का यह ब्लॉग हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि अब तक दो बार ही ऐसा हुआ है, जब उनकी मां किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके साथ रही हैं। उन्होंने कहा, "एक बार मैं जब एकता यात्रा के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराकर लौटा था तो अहमदाबाद में हुए नागरिक सम्मान कार्यक्रम में मां ने मंच पर आकर मेरा टीका किया था। " मोदी ने कहा, "दूसरी बार वह सार्वजनिक तौर पर मेरे साथ तब आई थीं, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। " प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन की एक सीख दी कि औपचारिक शिक्षा ग्रहण किए बिना भी सीखना संभव है।
बांग्ला फिल्म जगत की अभिनेत्री और तृणमूल सांसद मिमी चक्रवर्ती ने अमीरात फ्लाइट के खाने में बाल होने की शिकायत की है। बताया जा रहा है कि चक्रवर्ती ने मंगलवार रात को ट्विटर पर एक तस्वीर डाली जिसमें उनके खाने की प्लेट में बाल पड़ा हुआ था। इसके बाद उन्होंने मैसेज लिखा है कि डियर अमीरात आप हमारी केयर करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपके खाने में बाल मिले।
बांग्ला फिल्म जगत की अभिनेत्री और तृणमूल सांसद मिमी चक्रवर्ती ने अमीरात फ्लाइट के खाने में बाल होने की शिकायत की है। बताया जा रहा है कि चक्रवर्ती ने मंगलवार रात को ट्विटर पर एक तस्वीर डाली जिसमें उनके खाने की प्लेट में बाल पड़ा हुआ था। इसके बाद उन्होंने मैसेज लिखा है कि डियर अमीरात आप हमारी केयर करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपके खाने में बाल मिले।
देश की ज्यादातर आबादी आज भी खुले में शौच करती है. जहां भी सार्वजनिक शौचालय मौजूद भी हैं उनकी हालत भी खराब है. इन शौचालयों में शौचालय सीट गंदगी से भरी हुई होती हैं और फ्लश में पानी नहीं आता. पर सवाल ये है कि क्या सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिये ठीक होते हैं? तो जवाब है नहीं, सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिए बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते, क्योंकि ये पूरी तरह से संक्रमण से भरे हुए होते हैं. इनका प्रयोग करने से आपको तमाम तरह की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं. जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालयों के प्रयोग के बाद आप अपने हाथ अच्छे से धो लें. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने से आपको कौन सी बीमारियां हो सकती हैं. - सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल से कई यौन बीनारियों के होने का खतरा होता है. गंदे शौचालय को यदि कोई एस टी डी का रोगी प्रयोग कर ले तो यह रोग फैलने के चांस बढ जाते हैं. यदि आपको इस रोग से बचना है तो शौचालय प्रयोग करने के बाद अपने हाथों को धोना बिल्कुल ना भूलें. इसके अलावा शौचालय की चीजों को केवल शौचालय पेपर से ही छूएं. सार्वजनिक शौचालय में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की वजह से पेट में दर्द और खूनी डायरिया हो सकता है. यदि पबलिक शौचालय को कोई संक्रमित व्यक्ति प्रयोग करे, तो आंत का संक्रमण होने की संभावना हो सकती है. असके अलावा इसके प्रयोग से आपको गले और त्वचा का संक्रमण भी लग सकता है.
देश की ज्यादातर आबादी आज भी खुले में शौच करती है. जहां भी सार्वजनिक शौचालय मौजूद भी हैं उनकी हालत भी खराब है. इन शौचालयों में शौचालय सीट गंदगी से भरी हुई होती हैं और फ्लश में पानी नहीं आता. पर सवाल ये है कि क्या सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिये ठीक होते हैं? तो जवाब है नहीं, सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिए बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते, क्योंकि ये पूरी तरह से संक्रमण से भरे हुए होते हैं. इनका प्रयोग करने से आपको तमाम तरह की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं. जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालयों के प्रयोग के बाद आप अपने हाथ अच्छे से धो लें. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने से आपको कौन सी बीमारियां हो सकती हैं. - सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल से कई यौन बीनारियों के होने का खतरा होता है. गंदे शौचालय को यदि कोई एस टी डी का रोगी प्रयोग कर ले तो यह रोग फैलने के चांस बढ जाते हैं. यदि आपको इस रोग से बचना है तो शौचालय प्रयोग करने के बाद अपने हाथों को धोना बिल्कुल ना भूलें. इसके अलावा शौचालय की चीजों को केवल शौचालय पेपर से ही छूएं. सार्वजनिक शौचालय में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की वजह से पेट में दर्द और खूनी डायरिया हो सकता है. यदि पबलिक शौचालय को कोई संक्रमित व्यक्ति प्रयोग करे, तो आंत का संक्रमण होने की संभावना हो सकती है. असके अलावा इसके प्रयोग से आपको गले और त्वचा का संक्रमण भी लग सकता है.
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग आजकल ट्वीटर पर बेहद सक्रिय है और समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते रहते हैं. पूर्व महान क्रिकेटर सहवाग मौजूदा समय में ट्वीटर पर पूर्व क्रिकेटर्स को अलग-अलग अंदाज़ से बर्थडे विश करने के बेहद चर्चित हैं. शुक्रवार को वीरू ने अपने साथी खिलाड़ी पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज़ ज़हीर खान को ट्वीट द्वारा बर्थडे विश किया. वीरू ने ज़हीर को उनके बर्थडे पर एक अलग नाम 'ज्ञान बाबा' दिया. आज पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज़ ज़हीर खान अपना 37वाँ जन्मदिन माना रहे हैं. ज़हीर खान अपने दौर से सबसे महानतम तेज गेंदबाजो में शुमार रहे. ज़हीर ने भारत के 92 टेस्ट और 200 एकदिवसीय मैचो में क्रमशः 311 और 282 विकेट हासिल किये. अक्टूबर 2015 में ज़हीर ने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा किया. ज़हीर खान भारतीय क्रिकेट टेस्ट इतिहास के दुसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज़ हैं. भारत की ओर से कपिल देव (तेज गेंदबाज़ के रूप में) के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट हैं. अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से पूर्व सलामी बल्लेबाज़ सहवाग ट्वीटर पर अपने सेंस ऑफ़ ह्यूमर की वजह से बेहद चर्चित हो गए हैं, जिसके कारण उन्हें हम ट्वीटर किंग के नाम से पुकार सकते हैं. Happy Birthday Gyan Baba. Most popular love story- Ranjha & Heer, The cleverest bowler ever @ImZaheer .
पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग आजकल ट्वीटर पर बेहद सक्रिय है और समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते रहते हैं. पूर्व महान क्रिकेटर सहवाग मौजूदा समय में ट्वीटर पर पूर्व क्रिकेटर्स को अलग-अलग अंदाज़ से बर्थडे विश करने के बेहद चर्चित हैं. शुक्रवार को वीरू ने अपने साथी खिलाड़ी पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज़ ज़हीर खान को ट्वीट द्वारा बर्थडे विश किया. वीरू ने ज़हीर को उनके बर्थडे पर एक अलग नाम 'ज्ञान बाबा' दिया. आज पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज़ ज़हीर खान अपना सैंतीसवाँ जन्मदिन माना रहे हैं. ज़हीर खान अपने दौर से सबसे महानतम तेज गेंदबाजो में शुमार रहे. ज़हीर ने भारत के बानवे टेस्ट और दो सौ एकदिवसीय मैचो में क्रमशः तीन सौ ग्यारह और दो सौ बयासी विकेट हासिल किये. अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह में ज़हीर ने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा किया. ज़हीर खान भारतीय क्रिकेट टेस्ट इतिहास के दुसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज़ हैं. भारत की ओर से कपिल देव के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट हैं. अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से पूर्व सलामी बल्लेबाज़ सहवाग ट्वीटर पर अपने सेंस ऑफ़ ह्यूमर की वजह से बेहद चर्चित हो गए हैं, जिसके कारण उन्हें हम ट्वीटर किंग के नाम से पुकार सकते हैं. Happy Birthday Gyan Baba. Most popular love story- Ranjha & Heer, The cleverest bowler ever @ImZaheer .
APN News Live Updates: हरदोई में बंद पड़े गोदाम में शार्ट सर्किट से आग लग गई। मौके पर दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं और आग पर काबू पाया गया। इलके अलावा बीते दिनों गौतमबुद्ध नगर के तुगलपुर गांव के एक बाजार में भीषण आग लगने की खबर सामने आई थी। आग लगने से कई दुकानें जलकर खाक हो गई। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चला है, लेकिन बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जानकारी अनुसार फायर टेंडर और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया। APN News Live Updates: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ महाराष्ट्र के अकोला के पातुर से 'भारत जोड़ो यात्रा' की शुरुआत की। वहीं बता दें कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मध्य प्रदेश के शेड्यूल में बदलाव हुआ है। अब राहुल की यात्रा 23 नवंबर को प्रारंभ होगी। राहुल गांधी अब महाराष्ट्र से सीधे गुजरात चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। इसके पहले रविवार को यात्रा को एक दिन के लिए विराम दिया गया था। आज यात्रा 67वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा में राहुल गांधी 20 से 25 किलोमीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस दोबारा से पार्टी में मजबूती के लिए और लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा निकाली गई है। 3,570 किलोमीटर की यह यात्रा 150 दिनों तक चलने वाली है। बता दें कि राहुल गांधी को भारी जनसमर्थन मिल रहा है।
APN News Live Updates: हरदोई में बंद पड़े गोदाम में शार्ट सर्किट से आग लग गई। मौके पर दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं और आग पर काबू पाया गया। इलके अलावा बीते दिनों गौतमबुद्ध नगर के तुगलपुर गांव के एक बाजार में भीषण आग लगने की खबर सामने आई थी। आग लगने से कई दुकानें जलकर खाक हो गई। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चला है, लेकिन बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जानकारी अनुसार फायर टेंडर और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया। APN News Live Updates: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ महाराष्ट्र के अकोला के पातुर से 'भारत जोड़ो यात्रा' की शुरुआत की। वहीं बता दें कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मध्य प्रदेश के शेड्यूल में बदलाव हुआ है। अब राहुल की यात्रा तेईस नवंबर को प्रारंभ होगी। राहुल गांधी अब महाराष्ट्र से सीधे गुजरात चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। इसके पहले रविवार को यात्रा को एक दिन के लिए विराम दिया गया था। आज यात्रा सरसठवें दिन में प्रवेश कर चुकी है। सात सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा में राहुल गांधी बीस से पच्चीस किलोग्राममीटर की रोजाना यात्रा कर रहे हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौबीस से पहले कांग्रेस दोबारा से पार्टी में मजबूती के लिए और लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा निकाली गई है। तीन,पाँच सौ सत्तर किलोग्राममीटर की यह यात्रा एक सौ पचास दिनों तक चलने वाली है। बता दें कि राहुल गांधी को भारी जनसमर्थन मिल रहा है।
चंडीगढ़, पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा अपने पंजाब मॉडल की घोषणा के ठीक एक दिन बाद, आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को अपने 10 सूत्री पंजाब मॉडल की घोषणा करने के लिए मोहाली आए। अब इसे इत्तेफाक कहें या सिर्फ मौका, यह देखना काफी सुसंगत रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू और केजरीवाल के पास पंजाब के लिए समान विचार और योजनाएं हैं और संयोग से वे एक-दूसरे के सार्वजनिक बयानों के बाद ही घोषणा करते रहे हैं। इस अंतिम वर्ष में ही, केजरीवाल ने सिद्धू की तारीफ में कईं शब्द कहे थे। 23 नवंबर, 2021 को, केजरीवाल ने सिद्धू की प्रशंसा की और कहा, " कैप्टन अमरिंदर और पंजाब के सीएम चन्नी दोनों ने सिद्धू को दबाने की कोशिश की"। सिद्धू ने पंजाब की लड़कियों/महिलाओं को 1000 रुपये की पेशकश पर केजरीवाल का मजाक उड़ाया था, लेकिन बाद में सिद्धू ने महिला सशक्तिकरण के नाम पर पंजाब की महिलाओं को 2000 रुपये की पेशकश की। दूसरा बिंदु नशीली दवाओं का खतरा है। गांवों में खुलेआम नशा बांटा जा रहा है। कांग्रेस ड्रग्स की बिक्री को रोकने में विफल रही। हम पूरे ड्रग सिंडिकेट और माफिया को खत्म कर देंगे। " तीसरा बिंदु कानून और व्यवस्था है। "पंजाब में बेअदबी की बहुत सारी घटनाएं हुई हैं, लेकिन एक भी मामले में सजा नहीं दी गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि साजिश में बड़े लोग शामिल थे और ये पार्टियां शामिल थीं। बेअदबी की घटनाओं से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। हम ऐसे प्रत्येक मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगे चाहे वह कोई भी हो। हमारी किसी के साथ कोई सेटिंग नहीं है, "उन्होंने कहा। केजरीवाल ने 'भ्रष्टाचार मुक्त पंजाब', बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, 24X7 मुफ्त बिजली आपूर्ति, महिलाओं के लिए 1,000 रुपये प्रति माह भत्ता, और आय और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कृषि, व्यापार और उद्योग में सुधार का भी वादा किया। यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने सिद्धू द्वारा कही गई लगभग समान बातों की घोषणा की। AAP के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, 2017 में विधानसभा चुनाव के समय, नवजोत सिद्धू और केजरीवाल ने लंबी बातचीत की और केजरीवाल ने उन्हें डिप्टी सीएम पद की पेशकश की। सिद्धू ने तब सीएम का चेहरा जानने के लिए अड़े हुए थे, उन्होंने आप पार्टी से डिप्टी सीएम की पेशकश लेने से इनकार कर दिया।
चंडीगढ़, पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा अपने पंजाब मॉडल की घोषणा के ठीक एक दिन बाद, आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को अपने दस सूत्री पंजाब मॉडल की घोषणा करने के लिए मोहाली आए। अब इसे इत्तेफाक कहें या सिर्फ मौका, यह देखना काफी सुसंगत रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू और केजरीवाल के पास पंजाब के लिए समान विचार और योजनाएं हैं और संयोग से वे एक-दूसरे के सार्वजनिक बयानों के बाद ही घोषणा करते रहे हैं। इस अंतिम वर्ष में ही, केजरीवाल ने सिद्धू की तारीफ में कईं शब्द कहे थे। तेईस नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को, केजरीवाल ने सिद्धू की प्रशंसा की और कहा, " कैप्टन अमरिंदर और पंजाब के सीएम चन्नी दोनों ने सिद्धू को दबाने की कोशिश की"। सिद्धू ने पंजाब की लड़कियों/महिलाओं को एक हज़ार रुपयापये की पेशकश पर केजरीवाल का मजाक उड़ाया था, लेकिन बाद में सिद्धू ने महिला सशक्तिकरण के नाम पर पंजाब की महिलाओं को दो हज़ार रुपयापये की पेशकश की। दूसरा बिंदु नशीली दवाओं का खतरा है। गांवों में खुलेआम नशा बांटा जा रहा है। कांग्रेस ड्रग्स की बिक्री को रोकने में विफल रही। हम पूरे ड्रग सिंडिकेट और माफिया को खत्म कर देंगे। " तीसरा बिंदु कानून और व्यवस्था है। "पंजाब में बेअदबी की बहुत सारी घटनाएं हुई हैं, लेकिन एक भी मामले में सजा नहीं दी गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि साजिश में बड़े लोग शामिल थे और ये पार्टियां शामिल थीं। बेअदबी की घटनाओं से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। हम ऐसे प्रत्येक मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगे चाहे वह कोई भी हो। हमारी किसी के साथ कोई सेटिंग नहीं है, "उन्होंने कहा। केजरीवाल ने 'भ्रष्टाचार मुक्त पंजाब', बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, चौबीसXसात मुफ्त बिजली आपूर्ति, महिलाओं के लिए एक,शून्य रुपयापये प्रति माह भत्ता, और आय और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कृषि, व्यापार और उद्योग में सुधार का भी वादा किया। यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने सिद्धू द्वारा कही गई लगभग समान बातों की घोषणा की। AAP के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, दो हज़ार सत्रह में विधानसभा चुनाव के समय, नवजोत सिद्धू और केजरीवाल ने लंबी बातचीत की और केजरीवाल ने उन्हें डिप्टी सीएम पद की पेशकश की। सिद्धू ने तब सीएम का चेहरा जानने के लिए अड़े हुए थे, उन्होंने आप पार्टी से डिप्टी सीएम की पेशकश लेने से इनकार कर दिया।
नई दिल्ली॥ हिंदुस्तान हर तरफ से कोविड-19 से जंग जीतता नजर आ रहा है। चाहे मेडिसिन हो या कोरोना वरिओर्स हिंदुस्तान में सब मौजूद है जो कोविड-19 को हारने में काम आ रही है। कुछ दिनों पाहे ही विश्व की सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका ने दवा के लिए हिंदुस्तान के सामने हाथ पसारे थे। अब दवा के बाद विश्व हिंदुस्तान से कोविड-19 वॉरियर्स भी मांग रही है। आपको बता दें कि कोविड-19 संक्रमितों के उपचार के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने मोदी सरकार से हिंदुस्तानी डॉक्टर और नर्स भेजने की मांग की है। केंद्र सरकार के एक दिग्गज अफसर ने मंगलवार को ये सूचना दी। 1 करोड़ से कम जनसंख्या वाले यूएई में 11 हजार कोविड-19 संक्रमित मिल चुके हैं और हर दिन औसतन 500 नए मरीज मिल रहे हैं। यूएई विदेशों में पढ़े डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ पर निर्भर करता है, जिसमें हिंदुस्तानी भी शामिल हैं। उनमें से कई छुट्टी पर थे जब दिल्ली और अबु धाबी ने कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए यात्री विमान सेवा पर रोक लगा दी थी।
नई दिल्ली॥ हिंदुस्तान हर तरफ से कोविड-उन्नीस से जंग जीतता नजर आ रहा है। चाहे मेडिसिन हो या कोरोना वरिओर्स हिंदुस्तान में सब मौजूद है जो कोविड-उन्नीस को हारने में काम आ रही है। कुछ दिनों पाहे ही विश्व की सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका ने दवा के लिए हिंदुस्तान के सामने हाथ पसारे थे। अब दवा के बाद विश्व हिंदुस्तान से कोविड-उन्नीस वॉरियर्स भी मांग रही है। आपको बता दें कि कोविड-उन्नीस संक्रमितों के उपचार के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने मोदी सरकार से हिंदुस्तानी डॉक्टर और नर्स भेजने की मांग की है। केंद्र सरकार के एक दिग्गज अफसर ने मंगलवार को ये सूचना दी। एक करोड़ से कम जनसंख्या वाले यूएई में ग्यारह हजार कोविड-उन्नीस संक्रमित मिल चुके हैं और हर दिन औसतन पाँच सौ नए मरीज मिल रहे हैं। यूएई विदेशों में पढ़े डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ पर निर्भर करता है, जिसमें हिंदुस्तानी भी शामिल हैं। उनमें से कई छुट्टी पर थे जब दिल्ली और अबु धाबी ने कोविड-उन्नीस महामारी को रोकने के लिए यात्री विमान सेवा पर रोक लगा दी थी।
PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने उर्दू अनुवादक व अन्य उर्दू कर्मियों को नियुक्ति- पत्र दिया। संवाद में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय चौधरी समेत अन्य मंत्री व अधिकारी शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में लाखों भाईयों के चेहरे पर मुस्कान लायेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम ने नवनियुक्त उर्दू अनुवादकों को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ईने वाले दिनों में लाखों भाइयों के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे. हमारे मुख्यमंत्री यह काम कर रहे हैं. देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. नौजवानों को काम नहीं मिल रहा है. बेरोजगारी देश का दुश्मन है. बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम लोगों का प्रयास है कि जितने भी विभाग हैं, उनमें जो रिक्त पद हैं उनको जल्द से जल्द भरा जाए. रिक्त पद जब भरी जाती हैं उससे विभाग और मजबूत होता है, उसको बल मिलता है . इस काम में हम लोग लगे हुए हैं. नियुक्ति पत्र वितरण हर डिपार्टमेंट में किया जा रहा है. इसकी शुरुआत हो गई है. इतना हम जरूर कहेंगे कि नीतीश जी और महागठबंधन सरकार के रहते हुए भाईचारा, अमन चैन और शांति कायम रहेगा.
PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने उर्दू अनुवादक व अन्य उर्दू कर्मियों को नियुक्ति- पत्र दिया। संवाद में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय चौधरी समेत अन्य मंत्री व अधिकारी शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में लाखों भाईयों के चेहरे पर मुस्कान लायेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम ने नवनियुक्त उर्दू अनुवादकों को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ईने वाले दिनों में लाखों भाइयों के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे. हमारे मुख्यमंत्री यह काम कर रहे हैं. देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. नौजवानों को काम नहीं मिल रहा है. बेरोजगारी देश का दुश्मन है. बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम लोगों का प्रयास है कि जितने भी विभाग हैं, उनमें जो रिक्त पद हैं उनको जल्द से जल्द भरा जाए. रिक्त पद जब भरी जाती हैं उससे विभाग और मजबूत होता है, उसको बल मिलता है . इस काम में हम लोग लगे हुए हैं. नियुक्ति पत्र वितरण हर डिपार्टमेंट में किया जा रहा है. इसकी शुरुआत हो गई है. इतना हम जरूर कहेंगे कि नीतीश जी और महागठबंधन सरकार के रहते हुए भाईचारा, अमन चैन और शांति कायम रहेगा.
चित्रकूट में पिता ने इंस्टाग्राम पर बेटी की उसके ब्वाय फ्रेंड के साथ एक रील देख ली। इसी से गुस्सा होकर लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चला दी। बेटी को बचाने पत्नी बचाने आई तो उसे भी गोली मार दी। चित्रकूट में सोमवार दोपहर एक व्यक्ति ने लाइसेंसी बंदूक से बेटी और पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जाता है कि पिता ने इंस्टाग्राम पर बेटी की उसके ब्वाय फ्रेंड के साथ एक रील देख ली थी। इसी से गुस्सा होकर लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चलाई थी। पत्नी बचाने आई तो उसे भी गोली मार दी। फायरिंग की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो पिता बंदूक व मोबाइल मौके पर ही छोड़कर भाग निकला। सूचना पर एएसपी फोर्स के साथ गांव पहुंचे। दोनों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार सेमरदहा निवासी नंदकिशोर त्रिपाठी की बेटी खुशी (16) ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती थी। दो दिन पहले ही पिता उसे गांव लाया था। पता चला कि उसकी एक लड़के से दोस्ती है। इसे लेकर पिता नाखुश था। इसी बीच लड़के साथ बेटी की रील पिता ने देख ली तो आग बबूला हो गया। गुस्से में आए नंदकिशोर ने लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चला दी। बेटी को बचाने के लिए मां प्रमिला (37) बीच में आ गई। गोली मां को ली और वह जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद उसने दूसरी गोली बेटी को मारी। इससे वह भी लहुलूहान होकर गिर पड़ी। गोली की आवाज सुनकर परिजन व पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो प्रमिला की मौत हो चुकी थी, घायल खुशी को इलाज के लिए अस्पताल लेकर भागे लेकिन रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया। घटना की सूचना पर गांव पहुंचे एएसपी चक्रपाणि त्रिपाठी ने पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि खुशी अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। दो दिन पहले ही पिता उसे गांव लाया था। उसकी किसी युवक से दोस्ती की जानकारी से पिता नाखुश था। इसी को लेकर मां-बेटी से बहस हुई थी। एएसपी के अनुसार, किसी युवक को लेकर हुए विवाद के दौरान गोली मारी गई। बंदूक व नंदकिशोर का मोबाइल कब्जे में ले लिया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है।
चित्रकूट में पिता ने इंस्टाग्राम पर बेटी की उसके ब्वाय फ्रेंड के साथ एक रील देख ली। इसी से गुस्सा होकर लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चला दी। बेटी को बचाने पत्नी बचाने आई तो उसे भी गोली मार दी। चित्रकूट में सोमवार दोपहर एक व्यक्ति ने लाइसेंसी बंदूक से बेटी और पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जाता है कि पिता ने इंस्टाग्राम पर बेटी की उसके ब्वाय फ्रेंड के साथ एक रील देख ली थी। इसी से गुस्सा होकर लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चलाई थी। पत्नी बचाने आई तो उसे भी गोली मार दी। फायरिंग की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो पिता बंदूक व मोबाइल मौके पर ही छोड़कर भाग निकला। सूचना पर एएसपी फोर्स के साथ गांव पहुंचे। दोनों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार सेमरदहा निवासी नंदकिशोर त्रिपाठी की बेटी खुशी ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती थी। दो दिन पहले ही पिता उसे गांव लाया था। पता चला कि उसकी एक लड़के से दोस्ती है। इसे लेकर पिता नाखुश था। इसी बीच लड़के साथ बेटी की रील पिता ने देख ली तो आग बबूला हो गया। गुस्से में आए नंदकिशोर ने लाइसेंसी बंदूक से बेटी पर गोली चला दी। बेटी को बचाने के लिए मां प्रमिला बीच में आ गई। गोली मां को ली और वह जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद उसने दूसरी गोली बेटी को मारी। इससे वह भी लहुलूहान होकर गिर पड़ी। गोली की आवाज सुनकर परिजन व पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो प्रमिला की मौत हो चुकी थी, घायल खुशी को इलाज के लिए अस्पताल लेकर भागे लेकिन रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया। घटना की सूचना पर गांव पहुंचे एएसपी चक्रपाणि त्रिपाठी ने पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि खुशी अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। दो दिन पहले ही पिता उसे गांव लाया था। उसकी किसी युवक से दोस्ती की जानकारी से पिता नाखुश था। इसी को लेकर मां-बेटी से बहस हुई थी। एएसपी के अनुसार, किसी युवक को लेकर हुए विवाद के दौरान गोली मारी गई। बंदूक व नंदकिशोर का मोबाइल कब्जे में ले लिया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है।
लखनऊ सहित 25 ज़िलों में मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भीषड़ गर्मी और लू से लोगों को राहत मिली है। जाकारी के मुताबिक़ कई इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। कई दिनों की चिलचिलाती गर्मी के बाद लोगों को आज कुछ राहत मिली है। आसमान में छाए बादल और तेज हवाओं ने तापमान को नीचे लाने में मदद की। अगले कुछ दिनों में राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ में ओलावृष्टि, तूफान और बारिश के लिए अलर्ट जारी किया गया है। पिछले कुछ दिन लोगों के लिए गर्मी की वजह से मुश्किल भरे रहे। तापमान के 42 डिग्री तक पहुँच जाने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। 24 और 25 मई को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी/तेज हवा चलने की संभावना है। 24 और 25 मई को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी/तेज हवा चलने की संभावना है।
लखनऊ सहित पच्चीस ज़िलों में मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भीषड़ गर्मी और लू से लोगों को राहत मिली है। जाकारी के मुताबिक़ कई इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। कई दिनों की चिलचिलाती गर्मी के बाद लोगों को आज कुछ राहत मिली है। आसमान में छाए बादल और तेज हवाओं ने तापमान को नीचे लाने में मदद की। अगले कुछ दिनों में राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ में ओलावृष्टि, तूफान और बारिश के लिए अलर्ट जारी किया गया है। पिछले कुछ दिन लोगों के लिए गर्मी की वजह से मुश्किल भरे रहे। तापमान के बयालीस डिग्री तक पहुँच जाने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। चौबीस और पच्चीस मई को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर पचास-साठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी/तेज हवा चलने की संभावना है। चौबीस और पच्चीस मई को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर पचास-साठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी/तेज हवा चलने की संभावना है।
आधिकारिक सूत्रों ने यह दावा किया है कि आमंत्रित उद्यमियों में उप्र के शहरों को ट्रांसपोर्ट सेवाओं के जरिए जोड़ने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने और वेस्ट टू एनर्जी, हॉस्पिटल, पर्यटन आदि में निवेश की रूचि दिखायी। बर्जर पेंट्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) अभिजीत रॉय ने कहा कि मार्केट, इंफ्रास्ट्रक्चर, लैंड, टैक्स और इज ऑफ डूइंग के लिहाज से उत्तर प्रदेश पहले से काफी बेहतर हुआ है। उत्तर प्रदेश के नियम और अनुशासन की तारीफ करते हुये उन्होंने कहा कि इस वजह से वहां सभी कार्यों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया जाता है। ब्याज दर की बात की जाए तो इसमें भी मुनाफे की आकर्षित योजनाएं तैयार होती हैं। इन सभी चीज़ों को पर्याप्त समाधानों से ही व्यवसाय की इच्छा हर एक व्यवसायक को प्रेरित करती हैं। ग्रीन टेक एनवायरन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रमाकांत बर्मन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चार से पांच वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाना चाहते हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर आदि शहरों में इसकी काफी संभावना है। काशी में पहले से काम कर रहा हैं। योगी सरकार ने हमें सुरक्षा दी, इसलिए हम यहां निवेश करना चाहते है। सरकार ने बिजली, सड़क और पानी की समुचित व्यवस्था की है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
आधिकारिक सूत्रों ने यह दावा किया है कि आमंत्रित उद्यमियों में उप्र के शहरों को ट्रांसपोर्ट सेवाओं के जरिए जोड़ने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने और वेस्ट टू एनर्जी, हॉस्पिटल, पर्यटन आदि में निवेश की रूचि दिखायी। बर्जर पेंट्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिजीत रॉय ने कहा कि मार्केट, इंफ्रास्ट्रक्चर, लैंड, टैक्स और इज ऑफ डूइंग के लिहाज से उत्तर प्रदेश पहले से काफी बेहतर हुआ है। उत्तर प्रदेश के नियम और अनुशासन की तारीफ करते हुये उन्होंने कहा कि इस वजह से वहां सभी कार्यों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया जाता है। ब्याज दर की बात की जाए तो इसमें भी मुनाफे की आकर्षित योजनाएं तैयार होती हैं। इन सभी चीज़ों को पर्याप्त समाधानों से ही व्यवसाय की इच्छा हर एक व्यवसायक को प्रेरित करती हैं। ग्रीन टेक एनवायरन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रमाकांत बर्मन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चार से पांच वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाना चाहते हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर आदि शहरों में इसकी काफी संभावना है। काशी में पहले से काम कर रहा हैं। योगी सरकार ने हमें सुरक्षा दी, इसलिए हम यहां निवेश करना चाहते है। सरकार ने बिजली, सड़क और पानी की समुचित व्यवस्था की है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
मंगलवार को इंडोनेशियाई सैन्य एयरबेस पर मृत पाए गए तीन रूसी इंजीनियरों को एक अज्ञात दवा से मार दिया गया था। यह इंडोनेशियाई पुलिस के आधिकारिक प्रतिनिधि इस्कंदर हसन ने कहा था। हसन ने कहा, "सर्गेई वोरोनिन, अलेक्जेंडर पोलटोरक और विक्टर सफोनोव एयरबेस के छात्रावास में पाए गए थे। संभवतः, उन्होंने कुछ अज्ञात दवा ली थी। " एक अन्य संस्करण के अनुसार, जिसे इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रेस सचिव ऐ वयान मिड्यो द्वारा आवाज दी गई थी, इंजीनियरों को वोदका द्वारा जहर दिया जा सकता है। ब्रिगेडियर जनरल मिडियट ने कहा, "अगर वे रूस में बहुत सारा वोदका पीते हैं तो कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह वहां ठंडा है, लेकिन मकासर में बहुत गर्म है। " हालांकि, जकार्ता में रूसी दूतावास के प्रतिनिधि, व्लादिमीर प्रोनिन ने इस संस्करण को अस्वीकार कर दिया। "वे वोदका से नहीं मरते हैं," रूसी राजनयिक ने कहा। जैसा कि व्यापारिक समाचार पत्र वेजग्लाद याद दिलाता है, मंगलवार को सुबह इंडोनेशिया से तीन रूसी लोगों की मौत की खबर आई। बाद में, उनकी मौत की पुष्टि इंडोनेशिया में रूस के महावाणिज्य दूत ने की थी। इंजीनियरों के लिए मृत्यु का एक प्रारंभिक कारण कार्डियक अरेस्ट है। इसके कारण वर्तमान में स्थानीय पुलिस और रूसी विशेषज्ञों के एक जटिल आयोग द्वारा स्थापित किए जा रहे हैं। Komsomolsk-on-Amur में, मृतकों के काम के मुख्य स्थान पर, एविएशन प्रोडक्शन एसोसिएशन (KnAAPO) को अभी तक उनकी मृत्यु का सही कारण नहीं पता है। "मौत का कारण अभी तक स्थापित नहीं किया गया है। एक चिकित्सा परीक्षण किया जा रहा है," इंटरफैक्स ने सर्गेई मेशचेरीकोव को पकड़े हुए सुखोई के आधिकारिक प्रतिनिधि के शब्दों का हवाला दिया। उन्होंने कुछ मीडिया में दिखाई देने वाली जानकारी पर टिप्पणी की कि इंडोनेशिया के एक अस्पताल में KnAAPO के दो और कर्मचारियों को जहर दिया जा रहा है। "हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है," मेस्चेरीकोव ने कहा। सभी मृतक सुखोई डिजाइन ब्यूरो के इंजीनियर थे और इंडोनेशिया से रूस से इस देश द्वारा हासिल किए गए लड़ाकू विमानों की सेवा के लिए आए थे। मकसर में इंडोनेशियाई एयरबेस "सुल्तान हसनुद्दीन" पर काम किया गया था।
मंगलवार को इंडोनेशियाई सैन्य एयरबेस पर मृत पाए गए तीन रूसी इंजीनियरों को एक अज्ञात दवा से मार दिया गया था। यह इंडोनेशियाई पुलिस के आधिकारिक प्रतिनिधि इस्कंदर हसन ने कहा था। हसन ने कहा, "सर्गेई वोरोनिन, अलेक्जेंडर पोलटोरक और विक्टर सफोनोव एयरबेस के छात्रावास में पाए गए थे। संभवतः, उन्होंने कुछ अज्ञात दवा ली थी। " एक अन्य संस्करण के अनुसार, जिसे इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रेस सचिव ऐ वयान मिड्यो द्वारा आवाज दी गई थी, इंजीनियरों को वोदका द्वारा जहर दिया जा सकता है। ब्रिगेडियर जनरल मिडियट ने कहा, "अगर वे रूस में बहुत सारा वोदका पीते हैं तो कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह वहां ठंडा है, लेकिन मकासर में बहुत गर्म है। " हालांकि, जकार्ता में रूसी दूतावास के प्रतिनिधि, व्लादिमीर प्रोनिन ने इस संस्करण को अस्वीकार कर दिया। "वे वोदका से नहीं मरते हैं," रूसी राजनयिक ने कहा। जैसा कि व्यापारिक समाचार पत्र वेजग्लाद याद दिलाता है, मंगलवार को सुबह इंडोनेशिया से तीन रूसी लोगों की मौत की खबर आई। बाद में, उनकी मौत की पुष्टि इंडोनेशिया में रूस के महावाणिज्य दूत ने की थी। इंजीनियरों के लिए मृत्यु का एक प्रारंभिक कारण कार्डियक अरेस्ट है। इसके कारण वर्तमान में स्थानीय पुलिस और रूसी विशेषज्ञों के एक जटिल आयोग द्वारा स्थापित किए जा रहे हैं। Komsomolsk-on-Amur में, मृतकों के काम के मुख्य स्थान पर, एविएशन प्रोडक्शन एसोसिएशन को अभी तक उनकी मृत्यु का सही कारण नहीं पता है। "मौत का कारण अभी तक स्थापित नहीं किया गया है। एक चिकित्सा परीक्षण किया जा रहा है," इंटरफैक्स ने सर्गेई मेशचेरीकोव को पकड़े हुए सुखोई के आधिकारिक प्रतिनिधि के शब्दों का हवाला दिया। उन्होंने कुछ मीडिया में दिखाई देने वाली जानकारी पर टिप्पणी की कि इंडोनेशिया के एक अस्पताल में KnAAPO के दो और कर्मचारियों को जहर दिया जा रहा है। "हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है," मेस्चेरीकोव ने कहा। सभी मृतक सुखोई डिजाइन ब्यूरो के इंजीनियर थे और इंडोनेशिया से रूस से इस देश द्वारा हासिल किए गए लड़ाकू विमानों की सेवा के लिए आए थे। मकसर में इंडोनेशियाई एयरबेस "सुल्तान हसनुद्दीन" पर काम किया गया था।
नागरिकता संशोधन कानून (NRC) पर विरोध तो जारी है ही लेकिन National Population Register (NPR) पर भी घमासान मचा है. भले ही कल गृहमंत्री अमित शाह ने देश को आश्वस्त किया हो लेकिन आज असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह के दावों पर सबूत के साथ सवाल उठा दिए. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार कोई खुदा या भगवान नहीं है. विरोध करना मेरा अधिकार है. देखें वीडियो. AIMIM chief MP Asaduddin Owaisi slammed BJP government for NPR. Owaisi raised several questions regarding the connection between NRC and NPR. While replying to Aajtak questions, Asaduddin Owaisi said that he is not afraid of the government. Government is not God. Constitution gives the right to protest. For more details, watch this video.
नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध तो जारी है ही लेकिन National Population Register पर भी घमासान मचा है. भले ही कल गृहमंत्री अमित शाह ने देश को आश्वस्त किया हो लेकिन आज असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह के दावों पर सबूत के साथ सवाल उठा दिए. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार कोई खुदा या भगवान नहीं है. विरोध करना मेरा अधिकार है. देखें वीडियो. AIMIM chief MP Asaduddin Owaisi slammed BJP government for NPR. Owaisi raised several questions regarding the connection between NRC and NPR. While replying to Aajtak questions, Asaduddin Owaisi said that he is not afraid of the government. Government is not God. Constitution gives the right to protest. For more details, watch this video.
JAMSHEDPUR: भोजपुरिया क्रिकेट लीग 2021 के विनर और रनर-अप का फैसला संडे को हो गया। पिछले एक सप्ताह से गोलमुरी के केबल क्रिकेट ग्राउंड पर चल रहे नॉकआउट लीग मुकाबले का सेमीफाइनल और फाइनल मैच संडे को खेला गया। अपने लीग मुकाबले और क्वार्टर फाइनल मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह पक्की करने वाली रॉयल11, एवरग्रीन, एसएस एंटरप्राइजेज और राही बॉयज की टीमें फाइनल में जगह सुनिश्चित करने को लेकर निर्णायक सेमीफाइनल मुकाबले में उतरीं। अपने-अपने मैच जीतकर एसएस इंटरप्राइजेज और रॉयल एलेवेंस की टीमें फाइनल में पहुंचीं, वहीं हार के साथ ही एवरग्रीन और राही बॉयज की उम्मीदों पर पानी फिर गया। विनर टीम को 51 हजार रुपये का कैश प्राइज और ट्रॉफी तथा रनर अप टीम को ट्रॉफी सहित 25 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज प्रिंस को मैन ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार मिला। उन्हें कैश प्राइज सहित ट्रॉफी और एक बैट सम्मान के रूप में दिया गया। सर्वाधिक विकेट झटकने और किफायती गेंदबाजी के कारण बॉलर मुन्ना को ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। वहीं फाइनल मुकाबले में ताबड़तोड़ बैटिंग कर अपनी टीम को एकतरफा मैच जिताने वाले स्टार बल्लेबाज केशव को मैन ऑफ द मैच पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ताबड़तोड़ 8 छक्कों के लिए उन्हें 1001 रुपये की नकद राशि भी सम्मान स्वरूप भेंट की गई। विनर और रनर अप टीमों को चीफ गेस्ट्स ने पुरस्कृत कर उत्साहवर्धन किया। इससे पूर्व फाइनल मुकाबले में टॉस जीतकर रॉयल एलेवेंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित आठ ओवरों में 91 रनों का लक्ष्य दिया। टारगेट का पीछा करने उतरी एसएस इंटरप्राइजेज की टीम ने महज छह ओवर्स में ही तीन विकेट खोकर लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। फाइनल मैच से पहले पूर्व विधायक सह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने खिलाडि़यों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बैटिंग में हाथ भी आजमाये और कुछ कलात्मक शॉट्स भी लगाए। पुरस्कार वितरण के दौरान चीफ गेस्ट फॉर्मर एमएलए कुणाल षाड़ंगी, डॉ। आर। कुमार, आजसू नेता कमलेश दूबे, भाजपा नेता अंकित आनंद, हिंदू जागरण मंच के नेता बलबीर मंडल मौजूद रहे। लगातार सात दिनों तक चली भोजपुरिया क्रिकेट लीग के भव्य और सफल आयोजन में मुख्य रूप से अप्पू तिवारी, जेपी सिंह, आयुष सिंह, अजय बेहरा, उमाशंकर सिंह, अभिनव सिंह, अविनाश सिंह, ऋषभ सिंह, चितरंजन सिंह, बलबीर मंडल, चाणक्य शाह, सौरभ सिंह, राहुल कुमार, रौशन सिंह, आनंद मिश्रा, नितेश कुमार शाही, राजा शिवा समेत अन्य की सक्रिय भूमिका रही।
JAMSHEDPUR: भोजपुरिया क्रिकेट लीग दो हज़ार इक्कीस के विनर और रनर-अप का फैसला संडे को हो गया। पिछले एक सप्ताह से गोलमुरी के केबल क्रिकेट ग्राउंड पर चल रहे नॉकआउट लीग मुकाबले का सेमीफाइनल और फाइनल मैच संडे को खेला गया। अपने लीग मुकाबले और क्वार्टर फाइनल मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह पक्की करने वाली रॉयलग्यारह, एवरग्रीन, एसएस एंटरप्राइजेज और राही बॉयज की टीमें फाइनल में जगह सुनिश्चित करने को लेकर निर्णायक सेमीफाइनल मुकाबले में उतरीं। अपने-अपने मैच जीतकर एसएस इंटरप्राइजेज और रॉयल एलेवेंस की टीमें फाइनल में पहुंचीं, वहीं हार के साथ ही एवरग्रीन और राही बॉयज की उम्मीदों पर पानी फिर गया। विनर टीम को इक्यावन हजार रुपये का कैश प्राइज और ट्रॉफी तथा रनर अप टीम को ट्रॉफी सहित पच्चीस हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज प्रिंस को मैन ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार मिला। उन्हें कैश प्राइज सहित ट्रॉफी और एक बैट सम्मान के रूप में दिया गया। सर्वाधिक विकेट झटकने और किफायती गेंदबाजी के कारण बॉलर मुन्ना को ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। वहीं फाइनल मुकाबले में ताबड़तोड़ बैटिंग कर अपनी टीम को एकतरफा मैच जिताने वाले स्टार बल्लेबाज केशव को मैन ऑफ द मैच पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ताबड़तोड़ आठ छक्कों के लिए उन्हें एक हज़ार एक रुपयापये की नकद राशि भी सम्मान स्वरूप भेंट की गई। विनर और रनर अप टीमों को चीफ गेस्ट्स ने पुरस्कृत कर उत्साहवर्धन किया। इससे पूर्व फाइनल मुकाबले में टॉस जीतकर रॉयल एलेवेंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित आठ ओवरों में इक्यानवे रनों का लक्ष्य दिया। टारगेट का पीछा करने उतरी एसएस इंटरप्राइजेज की टीम ने महज छह ओवर्स में ही तीन विकेट खोकर लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। फाइनल मैच से पहले पूर्व विधायक सह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने खिलाडि़यों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बैटिंग में हाथ भी आजमाये और कुछ कलात्मक शॉट्स भी लगाए। पुरस्कार वितरण के दौरान चीफ गेस्ट फॉर्मर एमएलए कुणाल षाड़ंगी, डॉ। आर। कुमार, आजसू नेता कमलेश दूबे, भाजपा नेता अंकित आनंद, हिंदू जागरण मंच के नेता बलबीर मंडल मौजूद रहे। लगातार सात दिनों तक चली भोजपुरिया क्रिकेट लीग के भव्य और सफल आयोजन में मुख्य रूप से अप्पू तिवारी, जेपी सिंह, आयुष सिंह, अजय बेहरा, उमाशंकर सिंह, अभिनव सिंह, अविनाश सिंह, ऋषभ सिंह, चितरंजन सिंह, बलबीर मंडल, चाणक्य शाह, सौरभ सिंह, राहुल कुमार, रौशन सिंह, आनंद मिश्रा, नितेश कुमार शाही, राजा शिवा समेत अन्य की सक्रिय भूमिका रही।
महोदय, अक्सर ऐसा देखने में आ रहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अपनी बैठकों/कार्यक्रमों के बैनर/पोस्टर एवं अतिथि नाम पट केवल अंग्रेजी में तैयार करता है जबकि भारत अब अंग्रेजों का गुलाम नहीं हैं और राजभाषा कानून भी स्पष्ट है. हर साल कई लोग इस सम्बन्ध में शिकायतें भी करते हैं पर स्थिति में कोई सुधार नहीं है. शायद अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कानून का ज्ञान ही नहीं है इसलिए प्रशिक्षण देकर जागरुकता लाने की महती आवश्यकता है. राजभाषा अधिनियम कहता है भारत सरकार के हर कार्यालय /निकाय के लिए यह अनिवार्य है कि 'क' क्षेत्र में होने वाले सभी कार्यक्रमों/बैठकों (राष्ट्रिय /अंतरराष्ट्रीय) के बैनर/पोस्टर/आमंत्रण -पत्र/ अतिथि नामपट अनिवार्य रूप से द्विभाषी (हिन्दी-अंग्रेजी में एकसाथ) बनाए/छपवाए जाएँ और 'ख'/" ग' क्षेत्र में त्रिभाषी रूप में (प्रांतीय भाषा /हिन्दी /अंग्रेजी एकसाथ) हाल ही आयोजित निम्न कार्यक्रमों के लिए के बैनर/पोस्टर एवं अतिथि नाम पट केवल अंग्रेजी में छपवाए गए गए, चित्र भी इसी क्रम में संलग्न हैंः Inauguration of the Public Information Campaign, at Domkal, Murshidabad district, West Bengal on December 23, 2014 (हिन्दी का प्रयोग नहीं) 17 दिसंबर 2014 को नई दिल्ली में भारत सरकार का कैलेंडर जारी करने का अवसर (डिजिटल स्क्रीन बैनर अंग्रेजी में) 3 दिसम्बर, 2014 को चैन्नई में पसूका और डब्ल्यूसीसी द्वारा संयुक्त रूप से "भारत की एकता और अखण्डता के लिए सरदार बल्लभभाई पटेल की भूमिका" विषय पर लेख प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र का समारोह (तमिल -हिन्दी का प्रयोग नहीं) First ever Regional Community Sammelan held at Puducherry from 28th to 30th September 2014. श्री प्रकाश जावडेकर द्वारा 26 अगस्त, 2014 नई दिल्ली में 'ताना बाना जीवन का' नामक पुस्तक का विमोचन। प्रसार भारती और जर्मनी के सरकारी प्रसारक दायचे वैले के बीच 05 अगस्त, 2014 को नई दिल्ली में आपसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कार्यक्रम। कृपया राष्ट्रपति जी के आदेशों एवं राजभाषा कानून का पालन करवाएँ। भवदीय, ए -103, आदीश्वर सोसाइटी, श्री दिगंबर जैन मंदिर के पीछे,
महोदय, अक्सर ऐसा देखने में आ रहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अपनी बैठकों/कार्यक्रमों के बैनर/पोस्टर एवं अतिथि नाम पट केवल अंग्रेजी में तैयार करता है जबकि भारत अब अंग्रेजों का गुलाम नहीं हैं और राजभाषा कानून भी स्पष्ट है. हर साल कई लोग इस सम्बन्ध में शिकायतें भी करते हैं पर स्थिति में कोई सुधार नहीं है. शायद अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कानून का ज्ञान ही नहीं है इसलिए प्रशिक्षण देकर जागरुकता लाने की महती आवश्यकता है. राजभाषा अधिनियम कहता है भारत सरकार के हर कार्यालय /निकाय के लिए यह अनिवार्य है कि 'क' क्षेत्र में होने वाले सभी कार्यक्रमों/बैठकों के बैनर/पोस्टर/आमंत्रण -पत्र/ अतिथि नामपट अनिवार्य रूप से द्विभाषी बनाए/छपवाए जाएँ और 'ख'/" ग' क्षेत्र में त्रिभाषी रूप में हाल ही आयोजित निम्न कार्यक्रमों के लिए के बैनर/पोस्टर एवं अतिथि नाम पट केवल अंग्रेजी में छपवाए गए गए, चित्र भी इसी क्रम में संलग्न हैंः Inauguration of the Public Information Campaign, at Domkal, Murshidabad district, West Bengal on December तेईस, दो हज़ार चौदह सत्रह दिसंबर दो हज़ार चौदह को नई दिल्ली में भारत सरकार का कैलेंडर जारी करने का अवसर तीन दिसम्बर, दो हज़ार चौदह को चैन्नई में पसूका और डब्ल्यूसीसी द्वारा संयुक्त रूप से "भारत की एकता और अखण्डता के लिए सरदार बल्लभभाई पटेल की भूमिका" विषय पर लेख प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र का समारोह First ever Regional Community Sammelan held at Puducherry from अट्ठाईसth to तीस सितंबरtember दो हज़ार चौदह. श्री प्रकाश जावडेकर द्वारा छब्बीस अगस्त, दो हज़ार चौदह नई दिल्ली में 'ताना बाना जीवन का' नामक पुस्तक का विमोचन। प्रसार भारती और जर्मनी के सरकारी प्रसारक दायचे वैले के बीच पाँच अगस्त, दो हज़ार चौदह को नई दिल्ली में आपसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कार्यक्रम। कृपया राष्ट्रपति जी के आदेशों एवं राजभाषा कानून का पालन करवाएँ। भवदीय, ए -एक सौ तीन, आदीश्वर सोसाइटी, श्री दिगंबर जैन मंदिर के पीछे,
SpiderMan Pavitr Prabhakars Power स्पाइडर-मैन एक्रॉस द स्पाइडर-वर्स 2018 में आयी फिल्म का सीक्वल है। इस बार स्पाइडर-मैन मिगेल दूसरे यूनिवर्स के स्पाइडर लोगों को बचाने के मिशन पर जाएगा। फिल्म भारत में 10 भाषाओं में रिलीज होगी जिनमें हिंदी और अंग्रेजी भी शामिल हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। Spider-Man: Across The Spider-Verse Pavitr Prabhakar: स्पाइडर-मैन फिल्मों के चाहने वालों के मुरीद दुनियाभर में हैं। भारत में भी चाहने वालों की संख्या कम नहीं है। अब तक फैंस उसी स्पाइडर-मैन से मिलते रहे हैं, जो हॉलीवुड फिल्मों में नजर आता रहा है। मगर, यह पहली बार है, जबकि देसी स्पाइडर-मैन पर्दे पर नजर आएगा, जो विशुद्ध रूप से भारतीय है। मारवल की आने वाली एनिमेटेड फिल्म 'स्पाइडर-मैनः एक्रॉस द स्पाइडरवर्स' से भारतीय स्पाइडर-मैन पवित्र प्रभाकर डेब्यू कर रहा है, जो पीटर पारकर की तर्ज पर ही है। फिल्म के हिंदी और अंग्रेजी वर्जन में इस किरदार की आवाज क्रिकेटर शुभमन गिल बने हैं। क्या पहले भी बना है भारतीय स्पाइडरमैन? स्पाइडर-मैन का भारतीय अवतार 2005 में भी नजर आ चुका है, जिसे स्पाइडर-मैनः इंडिया कॉमिक बुक में शरद देवराजन, सुरेश सीतारमन और जीवन जे कांग ने इंट्रोड्यूस करवाया था। हालांकि, बड़े पर्दे पर भारतीय स्पाइडर-मैन पहली बार आ रहा है। पवित्र की ताकत जादू से आती है। इसलिए, वो उन स्पाइडर लोगों से काफी अलग है, जिन्हें रेडियोएक्टिव स्पाइडर्स ने काटा है। पवित्र को उसकी ताकत एक रहस्मयी तांत्रिक से मिलती है। दूसरे स्पाइडर लोगों की तरह उसे भी दर्द का सामना करना पड़ा है। पवित्र ने अपने अंकल को खोया है। इसके बावजूद फिल्म का वो सबसे ज्यादा सकारात्मक किरदार है। वो सिर्फ आधा भरा गिलास देखता है। वो माइल्स का दौर का है और माइल्स के मुकाबले ज्यादा खुश और सकारात्मक है। क्या है इस स्पाइडर-मैन की कहानी? 'स्पाइडर-मैन एक्रॉस द स्पाइडर वर्स' की कहानी 2018 में आयी इनटू द स्पाइडर-वर्स के एक साल बाद की घटनाओं को दिखाती है। माइल्स मोरालेस की गर्लफ्रेंड ग्वेन स्टेसी उसके पास स्पाइडर लोगों के हर यूनिवर्स को स्पॉट से बचाने का मिशन लेकर आती है। स्पॉट बेहद ताकतवर है और उसकी जीत के परिणाम भयंकर हो सकते हैं। माइल्स इस चुनौती को स्वीकार कर लेता है। इसके बाद दोनों अलग-अलग यूनिवर्स में प्रोटेक्टर्स से मिलते हैं। प्रोटेक्टर्स, स्पाइडर लोगों का समूह है, जिसे स्पाइडर-सोसाइटी कहा जाता है। इसका मुखिया मिगेल ओहारा है। हालांकि, माइल्स और मिगेल एक मंच पर नहीं आ पाते कि इस नई मुसीबत का मुकाबला कैसे करें। 'स्पाइडर-मैन' को किन भाषाओं में देख सकते हैं? इस फिल्म को भारत में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट कम्पनी रिलीज कर रही है। फिल्म अंग्रेजी और हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी और बंगाली भाषाओं में पहली जून को रिलीज होगी।
SpiderMan Pavitr Prabhakars Power स्पाइडर-मैन एक्रॉस द स्पाइडर-वर्स दो हज़ार अट्ठारह में आयी फिल्म का सीक्वल है। इस बार स्पाइडर-मैन मिगेल दूसरे यूनिवर्स के स्पाइडर लोगों को बचाने के मिशन पर जाएगा। फिल्म भारत में दस भाषाओं में रिलीज होगी जिनमें हिंदी और अंग्रेजी भी शामिल हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। Spider-Man: Across The Spider-Verse Pavitr Prabhakar: स्पाइडर-मैन फिल्मों के चाहने वालों के मुरीद दुनियाभर में हैं। भारत में भी चाहने वालों की संख्या कम नहीं है। अब तक फैंस उसी स्पाइडर-मैन से मिलते रहे हैं, जो हॉलीवुड फिल्मों में नजर आता रहा है। मगर, यह पहली बार है, जबकि देसी स्पाइडर-मैन पर्दे पर नजर आएगा, जो विशुद्ध रूप से भारतीय है। मारवल की आने वाली एनिमेटेड फिल्म 'स्पाइडर-मैनः एक्रॉस द स्पाइडरवर्स' से भारतीय स्पाइडर-मैन पवित्र प्रभाकर डेब्यू कर रहा है, जो पीटर पारकर की तर्ज पर ही है। फिल्म के हिंदी और अंग्रेजी वर्जन में इस किरदार की आवाज क्रिकेटर शुभमन गिल बने हैं। क्या पहले भी बना है भारतीय स्पाइडरमैन? स्पाइडर-मैन का भारतीय अवतार दो हज़ार पाँच में भी नजर आ चुका है, जिसे स्पाइडर-मैनः इंडिया कॉमिक बुक में शरद देवराजन, सुरेश सीतारमन और जीवन जे कांग ने इंट्रोड्यूस करवाया था। हालांकि, बड़े पर्दे पर भारतीय स्पाइडर-मैन पहली बार आ रहा है। पवित्र की ताकत जादू से आती है। इसलिए, वो उन स्पाइडर लोगों से काफी अलग है, जिन्हें रेडियोएक्टिव स्पाइडर्स ने काटा है। पवित्र को उसकी ताकत एक रहस्मयी तांत्रिक से मिलती है। दूसरे स्पाइडर लोगों की तरह उसे भी दर्द का सामना करना पड़ा है। पवित्र ने अपने अंकल को खोया है। इसके बावजूद फिल्म का वो सबसे ज्यादा सकारात्मक किरदार है। वो सिर्फ आधा भरा गिलास देखता है। वो माइल्स का दौर का है और माइल्स के मुकाबले ज्यादा खुश और सकारात्मक है। क्या है इस स्पाइडर-मैन की कहानी? 'स्पाइडर-मैन एक्रॉस द स्पाइडर वर्स' की कहानी दो हज़ार अट्ठारह में आयी इनटू द स्पाइडर-वर्स के एक साल बाद की घटनाओं को दिखाती है। माइल्स मोरालेस की गर्लफ्रेंड ग्वेन स्टेसी उसके पास स्पाइडर लोगों के हर यूनिवर्स को स्पॉट से बचाने का मिशन लेकर आती है। स्पॉट बेहद ताकतवर है और उसकी जीत के परिणाम भयंकर हो सकते हैं। माइल्स इस चुनौती को स्वीकार कर लेता है। इसके बाद दोनों अलग-अलग यूनिवर्स में प्रोटेक्टर्स से मिलते हैं। प्रोटेक्टर्स, स्पाइडर लोगों का समूह है, जिसे स्पाइडर-सोसाइटी कहा जाता है। इसका मुखिया मिगेल ओहारा है। हालांकि, माइल्स और मिगेल एक मंच पर नहीं आ पाते कि इस नई मुसीबत का मुकाबला कैसे करें। 'स्पाइडर-मैन' को किन भाषाओं में देख सकते हैं? इस फिल्म को भारत में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट कम्पनी रिलीज कर रही है। फिल्म अंग्रेजी और हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी और बंगाली भाषाओं में पहली जून को रिलीज होगी।
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाने में अगर कोई देश सबसे आगे है तो वह है भारत. भारत दुनिया भर में अपनी फॉर्मेसी क्षमता के लिए जाना जाता है. कोरोना वैक्सीन का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन भी भारत में ही हो रहा है. इसी बात से भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है. इसका दूसरा कारण यह है कि इस बात को लेकर भारत की तारीफ़ WHO ने भी की है. वहीं अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी भारत के इस कदम की सराहना की है. आपको बता दें कि भारत पिछले कुछ दिन में अपने यहां बने कोविड-19 टीकों की खेप म्यांमार, मॉरीशस, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल और सेशेल्स को मदद के रूप में भेज चुका है. इन देशों के अलावा दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब,ब्राजील और मोरक्को को ये टीके व्यावसायिक आपूर्ति के रूप में भेजे जा रहे हैं. आपको ज्ञात हो कि चीन के साथ साथ नेपाल से भी सीमा को लेकर भारत का विवाद चल रहा है. नेपाल भारत की जमीं को अपना बता रहा है. जिसके चलते भारत और नेपाल के रिश्ते में भी खट्टास आई थी. अब भारत नेपाल से कोरोना वैक्सीन के जरिये एक बार फिर अपने रिश्ते सुधार रहा है. एशिया के अन्य देश भी चीन की चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान होकर भारत की तरफ ही बढ़ रहे है. एशिया में भारत के इसी प्रभुत्व को बढ़ता देख चीन बोखला गया है. भारत ने कोरोना काल में अपने पड़ोसी देशों की हर संभव मदद की है. भारत ने एशिया में नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में कोरोना वैक्सीन की डोज़ भेज दी है. इन देशों को देने के बाद , अफगानिस्तान को भी वैक्सीन देने की तैयारी है. वहीं नापाक-पाकिस्तान ने भी कोविशील्ड के इस्तेमाल की मंजूरी तो दे दी है लेकिन भारत सरकार की तरफ से अभी वहां वैक्सीन भेजने पर कोई फैसला नहीं किया गया है. कोरोना महामारी पूरी दुनिया में चीन के हुबेई प्रांत के वुहान से फैली थी. कई बार चीन ने इस वायरस पर काबू पाने का दावा तो किया है लेकिन दुनिया अभी भी उस पर भरोसा नहीं कर पा रही है. इसक साथ ही चीन ने कहा था कि उसने इस वायरस के लिए वैक्सीन बना ली है. अभी तक उसकी वैक्सीन को नेपाल ने लगाने तक की मंजूरी नहीं दी है. वहीं नेपाल भारत की कोरोना वैक्सीन का स्वागत के चुका है. बांग्लादेश से भी चीन का विवाद वैक्सीन को लेकर चल रहा है, बांग्लादेश भी भारत से वैक्सीन की मांग कर रहा है. पाकिस्तान इस वक़्त भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. उसकी महंगाई ने वहां के आम आदमियों की कमर तोड़ रखी है. चीन ने भी पाकिस्तान को सिर्फ 5 लाख कोरोना वैक्सीन दी है. ऐसे में पाक के हाल देख कर चीन की मदद नहीं करना सभी को थोड़ा खल तो रहा है. कोविशील्ड लगाने को उसने मंजूरी तो दे दी है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से उसे वैक्सीन भेजने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाने में अगर कोई देश सबसे आगे है तो वह है भारत. भारत दुनिया भर में अपनी फॉर्मेसी क्षमता के लिए जाना जाता है. कोरोना वैक्सीन का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन भी भारत में ही हो रहा है. इसी बात से भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है. इसका दूसरा कारण यह है कि इस बात को लेकर भारत की तारीफ़ WHO ने भी की है. वहीं अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी भारत के इस कदम की सराहना की है. आपको बता दें कि भारत पिछले कुछ दिन में अपने यहां बने कोविड-उन्नीस टीकों की खेप म्यांमार, मॉरीशस, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल और सेशेल्स को मदद के रूप में भेज चुका है. इन देशों के अलावा दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब,ब्राजील और मोरक्को को ये टीके व्यावसायिक आपूर्ति के रूप में भेजे जा रहे हैं. आपको ज्ञात हो कि चीन के साथ साथ नेपाल से भी सीमा को लेकर भारत का विवाद चल रहा है. नेपाल भारत की जमीं को अपना बता रहा है. जिसके चलते भारत और नेपाल के रिश्ते में भी खट्टास आई थी. अब भारत नेपाल से कोरोना वैक्सीन के जरिये एक बार फिर अपने रिश्ते सुधार रहा है. एशिया के अन्य देश भी चीन की चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान होकर भारत की तरफ ही बढ़ रहे है. एशिया में भारत के इसी प्रभुत्व को बढ़ता देख चीन बोखला गया है. भारत ने कोरोना काल में अपने पड़ोसी देशों की हर संभव मदद की है. भारत ने एशिया में नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में कोरोना वैक्सीन की डोज़ भेज दी है. इन देशों को देने के बाद , अफगानिस्तान को भी वैक्सीन देने की तैयारी है. वहीं नापाक-पाकिस्तान ने भी कोविशील्ड के इस्तेमाल की मंजूरी तो दे दी है लेकिन भारत सरकार की तरफ से अभी वहां वैक्सीन भेजने पर कोई फैसला नहीं किया गया है. कोरोना महामारी पूरी दुनिया में चीन के हुबेई प्रांत के वुहान से फैली थी. कई बार चीन ने इस वायरस पर काबू पाने का दावा तो किया है लेकिन दुनिया अभी भी उस पर भरोसा नहीं कर पा रही है. इसक साथ ही चीन ने कहा था कि उसने इस वायरस के लिए वैक्सीन बना ली है. अभी तक उसकी वैक्सीन को नेपाल ने लगाने तक की मंजूरी नहीं दी है. वहीं नेपाल भारत की कोरोना वैक्सीन का स्वागत के चुका है. बांग्लादेश से भी चीन का विवाद वैक्सीन को लेकर चल रहा है, बांग्लादेश भी भारत से वैक्सीन की मांग कर रहा है. पाकिस्तान इस वक़्त भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. उसकी महंगाई ने वहां के आम आदमियों की कमर तोड़ रखी है. चीन ने भी पाकिस्तान को सिर्फ पाँच लाख कोरोना वैक्सीन दी है. ऐसे में पाक के हाल देख कर चीन की मदद नहीं करना सभी को थोड़ा खल तो रहा है. कोविशील्ड लगाने को उसने मंजूरी तो दे दी है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से उसे वैक्सीन भेजने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है.
Jamshedpur (Rohit Kumar) : पूर्वी सिंहभूम एसएसपी प्रभात कुमार ने मंगलवार को पुलिस पदाधिकारियों के साथ क्राइम मीटिंग की. इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के डीएसपी और थाना प्रभारियों को पुराने लंबित कांडों और वारंट को जल्द से जल्द निष्पादित करने का निर्देश दिया. वहीं शहरी क्षेत्र के डीएसपी और थानेदारों को भी कई आवश्यक निर्देश दिए. एसएसपी ने शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे छिनतई के मामलों में सभी थाना क्षेत्रों में गश्ती बढ़ाने के निर्देश दिए. शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्थल चिन्हित करने को कहा जहां ये स्नैचर्स ज्यादा घटना को अंजाम देते है. वहीं रात में भी गश्ती बढ़ाने को कहा.
Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम एसएसपी प्रभात कुमार ने मंगलवार को पुलिस पदाधिकारियों के साथ क्राइम मीटिंग की. इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के डीएसपी और थाना प्रभारियों को पुराने लंबित कांडों और वारंट को जल्द से जल्द निष्पादित करने का निर्देश दिया. वहीं शहरी क्षेत्र के डीएसपी और थानेदारों को भी कई आवश्यक निर्देश दिए. एसएसपी ने शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे छिनतई के मामलों में सभी थाना क्षेत्रों में गश्ती बढ़ाने के निर्देश दिए. शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्थल चिन्हित करने को कहा जहां ये स्नैचर्स ज्यादा घटना को अंजाम देते है. वहीं रात में भी गश्ती बढ़ाने को कहा.
रांची। कोरोना वैक्सीनेशन के प्रथम चरण में 25 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को कोराना से बचाव का वैक्सीन लगेगा। रांची वैक्सीनेशन के लिए पूरी तरह तैयार है। शुक्रवार को जिले में ड्राइ रन पूरी तरह सफल रहा है। निजी अस्पतालों को भी ड्राई रन आयोजित करने के लिए कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां वैक्सीनेशन साइट बनाया जाए तो किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। यह जानकारी रांची के सिविल सर्जन डॉ बीवी प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि रांची में लगभग 180 टीका केंद्र बनाए गए हैं। सभी सरकारी अस्पताल, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा शहरी क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में भी टीका केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। साथ ही निजी अस्पतालों में भी वैक्सीनेशन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई गाइडलाइन फिलहाल नहीं आया है कि किस व्यक्ति को टीका नहीं लगाना है। टीका सभी व्यक्ति को लगाया जाएगा। अगर कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति है तो उन्हें भी टीका लगाया जाएगा। फिलहाल इसके साइड इफेक्ट की भी जानकारी कहीं से नहीं दी गई है।सदर अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी में वैक्सीन रखने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि यहां कोल्ड चेन मेंटेन करने के लिए 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान की व्यवस्था की गई है। वैक्सीनेशन वैन के माध्यम से इन्हें टीका केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। वैक्सीन कैरियर के माध्यम से एंबुलेंस इसे टीका केंद्र तक पहुंचाएगा। ये सारा काम जिला प्रशासन की देखरेख में होगा।
रांची। कोरोना वैक्सीनेशन के प्रथम चरण में पच्चीस हजार स्वास्थ्यकर्मियों को कोराना से बचाव का वैक्सीन लगेगा। रांची वैक्सीनेशन के लिए पूरी तरह तैयार है। शुक्रवार को जिले में ड्राइ रन पूरी तरह सफल रहा है। निजी अस्पतालों को भी ड्राई रन आयोजित करने के लिए कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां वैक्सीनेशन साइट बनाया जाए तो किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। यह जानकारी रांची के सिविल सर्जन डॉ बीवी प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि रांची में लगभग एक सौ अस्सी टीका केंद्र बनाए गए हैं। सभी सरकारी अस्पताल, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा शहरी क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में भी टीका केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। साथ ही निजी अस्पतालों में भी वैक्सीनेशन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई गाइडलाइन फिलहाल नहीं आया है कि किस व्यक्ति को टीका नहीं लगाना है। टीका सभी व्यक्ति को लगाया जाएगा। अगर कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति है तो उन्हें भी टीका लगाया जाएगा। फिलहाल इसके साइड इफेक्ट की भी जानकारी कहीं से नहीं दी गई है।सदर अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी में वैक्सीन रखने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि यहां कोल्ड चेन मेंटेन करने के लिए दो-आठ डिग्री सेल्सियस तापमान की व्यवस्था की गई है। वैक्सीनेशन वैन के माध्यम से इन्हें टीका केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। वैक्सीन कैरियर के माध्यम से एंबुलेंस इसे टीका केंद्र तक पहुंचाएगा। ये सारा काम जिला प्रशासन की देखरेख में होगा।
पेनकिलर का अधिक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ब्लड सेल्स में यह पेनकिलर घुलकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करती है। पीरियड्स के दौरान पेट या कमर में दर्द होना साधारण बात है। मगर कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि दवा लिए बिना आराम नहीं मिलता है। कुछ महिलाएं तो हर महीने पीरियड्स के दौरान पेनकिलर का सेवन करती हैं। इनमें से कुछ ऐसी भी हैं जो पीरियड्स चलने के हर दिन दवा लेती हैं। इसके बिना इन्हें दर्द से राहत नहीं मिलती। मगर इतनी पेनकिलर लेना भी स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। डॉक्टर्स की मानें तो पेनकिलर का अधिक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ब्लड सेल्स में यह पेनकिलर घुलकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करती है। इसके अलावा त्वचा पर भी पेनकिलर के लंबे समय तक बुरे प्रभाव हो सकते हैं। ये सब आपके साथ ना हो इसलिए पीरियड्स में पेनकिलर लेने से बचें। और दर्द को कम करने के लिए अन्य घरेलू नुस्खों को ट्राई करें। जो एकदम सुरक्षित और असरदार हैं।
पेनकिलर का अधिक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ब्लड सेल्स में यह पेनकिलर घुलकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करती है। पीरियड्स के दौरान पेट या कमर में दर्द होना साधारण बात है। मगर कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि दवा लिए बिना आराम नहीं मिलता है। कुछ महिलाएं तो हर महीने पीरियड्स के दौरान पेनकिलर का सेवन करती हैं। इनमें से कुछ ऐसी भी हैं जो पीरियड्स चलने के हर दिन दवा लेती हैं। इसके बिना इन्हें दर्द से राहत नहीं मिलती। मगर इतनी पेनकिलर लेना भी स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। डॉक्टर्स की मानें तो पेनकिलर का अधिक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ब्लड सेल्स में यह पेनकिलर घुलकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करती है। इसके अलावा त्वचा पर भी पेनकिलर के लंबे समय तक बुरे प्रभाव हो सकते हैं। ये सब आपके साथ ना हो इसलिए पीरियड्स में पेनकिलर लेने से बचें। और दर्द को कम करने के लिए अन्य घरेलू नुस्खों को ट्राई करें। जो एकदम सुरक्षित और असरदार हैं।
सात जुलाई को जिस समय पहला धमाका हुआ मैं घटनास्थल से थोड़ी ही दूर बेकर स्ट्रीट अंडरग्राउंड स्टेशन पर थी. यह स्टेशन एजवेयर रोड के बहुत क़रीब है जहाँ पहला बम धमाका हुआ था. स्टेशन पर पहुँची ही थी कि उसे बंद कर दिया गया और सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए थे. ज़मीन के अंदर से चींटियों की तरह लंदन की सड़कों पर अंडरग्राउंड स्टेशनों से लोग निकल रहे थे. कोई धक्कामुक्की, शोर शराबा नहीं चुपचाप लेकिन परेशान, हक्के बक्के. ख़बर थी कि कुछ हुआ है लेकिन क्या, यह पता नहीं. अन्य लोगों की तरह मैं भी दफ़्तर पहुँचने के लिए बस में चढ़ गई जो धीमी रफ़्तार से चल रही थी. यह बस, बुश हाउस के क़रीब, ठीक उस चौराहे से भी गुज़री जहाँ आखिरी बम धमाका हुआ था एक बस में. यूँ कहिए, कि मेरी बस के पीछे आने वाली ही एक बस में वो धमाका हुआ टैविस्टोक स्केव्यर पर. मुझे पता तब चला जब दफ़्तर की इमारत बुश हाउस में दाख़िल होते हुए पीछे एक बदहवास सहयोगी से मुलाक़ात हुई. उन्होंने कहा कि उनके ठीक पीछे वाली बस में धमाका हुआ है और उसकी छत उड़ गई. अपने दफ़्तर वाले माले पर पहुँचने के कुछ देर बाद यह ख़बर पक्की हो गई कि ऐसे कुल चार घमाके हुए हैं. लंदन के उस एक काले घंटे ने पूरी दुनिया को हिला दिया लेकिन धन्य हैं लंदनवासी कि उन्होंने हिम्मत और संयम का वो आदर्श क़ायम किया जो शायद ही कहीं देखने को मिले और मैं इस बात की गवाह हूँ.
सात जुलाई को जिस समय पहला धमाका हुआ मैं घटनास्थल से थोड़ी ही दूर बेकर स्ट्रीट अंडरग्राउंड स्टेशन पर थी. यह स्टेशन एजवेयर रोड के बहुत क़रीब है जहाँ पहला बम धमाका हुआ था. स्टेशन पर पहुँची ही थी कि उसे बंद कर दिया गया और सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए थे. ज़मीन के अंदर से चींटियों की तरह लंदन की सड़कों पर अंडरग्राउंड स्टेशनों से लोग निकल रहे थे. कोई धक्कामुक्की, शोर शराबा नहीं चुपचाप लेकिन परेशान, हक्के बक्के. ख़बर थी कि कुछ हुआ है लेकिन क्या, यह पता नहीं. अन्य लोगों की तरह मैं भी दफ़्तर पहुँचने के लिए बस में चढ़ गई जो धीमी रफ़्तार से चल रही थी. यह बस, बुश हाउस के क़रीब, ठीक उस चौराहे से भी गुज़री जहाँ आखिरी बम धमाका हुआ था एक बस में. यूँ कहिए, कि मेरी बस के पीछे आने वाली ही एक बस में वो धमाका हुआ टैविस्टोक स्केव्यर पर. मुझे पता तब चला जब दफ़्तर की इमारत बुश हाउस में दाख़िल होते हुए पीछे एक बदहवास सहयोगी से मुलाक़ात हुई. उन्होंने कहा कि उनके ठीक पीछे वाली बस में धमाका हुआ है और उसकी छत उड़ गई. अपने दफ़्तर वाले माले पर पहुँचने के कुछ देर बाद यह ख़बर पक्की हो गई कि ऐसे कुल चार घमाके हुए हैं. लंदन के उस एक काले घंटे ने पूरी दुनिया को हिला दिया लेकिन धन्य हैं लंदनवासी कि उन्होंने हिम्मत और संयम का वो आदर्श क़ायम किया जो शायद ही कहीं देखने को मिले और मैं इस बात की गवाह हूँ.
बॉलिवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस में धीरे-धीरे बहुत सी बातों का खुलासा हो रहा है। इस केस की दिशा तब पलट गई जब केस के एक गवाह प्रभाकर सैल ने कई सनसनीखेज बातें कहीं। प्रभाकर सैल के शपथ पत्र में एक सैम डिसूजा नाम के व्यक्ति का जिक्र किया गया है। सैम डिसूजा ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी ने आर्यन को गिरफ्तारी से बचाने के लिए मोटी रकम ऑफर की थी। आर्यन खान के लिए पर्सनल बॉडीगार्ड खोज रहे हैं शाहरुख और गौरी खान? 'केपी गोसावी को दिए गए थे 50 लाख'सैम का दावा है कि पूजा ने जब यह मोटी रकम दी थी तो सोचा था कि वह आर्यन को बचा लेंगी मगर जब ऐसा संभव नहीं दिखा तो यह रकम उन्हें वापस लौटा दी गई थी। पेशे से बिजनसमैन सैम डिसूजा का दावा है कि पूजा ददलानी ने केस के गवाह केपी गोसावी को 50 लाख रुपये की रकम दी थी। सैम ने बताया कि जब उसे पता चला कि गोसावी एक धोखेबाज है तो यह रकम वापस पूजा को लौटा दी गई। जेल से लौटने के बाद आर्यन खान का शाहरुख और गौरी संग हुआ 'इमोशनल रीयूनियन"25 करोड़ मांग रहा था गोसावी, नहीं लौटाए पूरे 50 लाख'प्रभाकर सैल ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि 3 अक्टूबर की सुबह केपी गोसावी, पूजा ददलानी और सैम डिसूजा की मुलाकात हुई थी। एक व्यक्ति कार में आया और उसने प्रभाकर सैल को 2 बैग दिए जिन्हें वह सैम डिसूजा के पास ट्राइडेंट होटल में लेकर गया। इसके बाद डिसूजा ने उन बैगों में रखे पैसों को गिना तो वह केवल 38 लाख रुपये थे। प्रभाकर ने यह भी दावा किया है कि उसने गोसावी की बातचीत सुनी थी जिसमें वह 25 करोड़ रुपये मांग रहा था और इनमे से 8 करोड़ रुपये एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को दिए जाने थे। आर्यन को दिवाली बाद 'मन्नत' से शिफ्ट कर देंगे शाहरुख खान? जानें कहां हो सकता है नया ठिकाना'धोखेबाज आदमी है गोसावी'सैम डिसूजा ने अपने टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, 'काफी गाली-गलौज और दवाब बनाने के बाद हम लोगों को गोसावी से 38 लाख रुपये मिल गए। बाकी की रकम हम लोगों ने मिलाई और पूजा ददलानी को वापस कर दी क्योंकि हमें पता चल चुका था कि केपी गोसावी एक धोखेबाज आदमी है। 'नहीं मानी ये 13 शर्तें तो रद्द हो जाएगी आर्यन खान की जमानत, हर शुक्रवार NCB दफ्तर में लगेगी हाजिरीशाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी के फोन को हैक करने का था प्लान, दिखाए गए थे आर्यन के वॉट्सऐप चैट!
बॉलिवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस में धीरे-धीरे बहुत सी बातों का खुलासा हो रहा है। इस केस की दिशा तब पलट गई जब केस के एक गवाह प्रभाकर सैल ने कई सनसनीखेज बातें कहीं। प्रभाकर सैल के शपथ पत्र में एक सैम डिसूजा नाम के व्यक्ति का जिक्र किया गया है। सैम डिसूजा ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी ने आर्यन को गिरफ्तारी से बचाने के लिए मोटी रकम ऑफर की थी। आर्यन खान के लिए पर्सनल बॉडीगार्ड खोज रहे हैं शाहरुख और गौरी खान? 'केपी गोसावी को दिए गए थे पचास लाख'सैम का दावा है कि पूजा ने जब यह मोटी रकम दी थी तो सोचा था कि वह आर्यन को बचा लेंगी मगर जब ऐसा संभव नहीं दिखा तो यह रकम उन्हें वापस लौटा दी गई थी। पेशे से बिजनसमैन सैम डिसूजा का दावा है कि पूजा ददलानी ने केस के गवाह केपी गोसावी को पचास लाख रुपये की रकम दी थी। सैम ने बताया कि जब उसे पता चला कि गोसावी एक धोखेबाज है तो यह रकम वापस पूजा को लौटा दी गई। जेल से लौटने के बाद आर्यन खान का शाहरुख और गौरी संग हुआ 'इमोशनल रीयूनियन"पच्चीस करोड़ मांग रहा था गोसावी, नहीं लौटाए पूरे पचास लाख'प्रभाकर सैल ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि तीन अक्टूबर की सुबह केपी गोसावी, पूजा ददलानी और सैम डिसूजा की मुलाकात हुई थी। एक व्यक्ति कार में आया और उसने प्रभाकर सैल को दो बैग दिए जिन्हें वह सैम डिसूजा के पास ट्राइडेंट होटल में लेकर गया। इसके बाद डिसूजा ने उन बैगों में रखे पैसों को गिना तो वह केवल अड़तीस लाख रुपये थे। प्रभाकर ने यह भी दावा किया है कि उसने गोसावी की बातचीत सुनी थी जिसमें वह पच्चीस करोड़ रुपये मांग रहा था और इनमे से आठ करोड़ रुपये एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को दिए जाने थे। आर्यन को दिवाली बाद 'मन्नत' से शिफ्ट कर देंगे शाहरुख खान? जानें कहां हो सकता है नया ठिकाना'धोखेबाज आदमी है गोसावी'सैम डिसूजा ने अपने टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, 'काफी गाली-गलौज और दवाब बनाने के बाद हम लोगों को गोसावी से अड़तीस लाख रुपये मिल गए। बाकी की रकम हम लोगों ने मिलाई और पूजा ददलानी को वापस कर दी क्योंकि हमें पता चल चुका था कि केपी गोसावी एक धोखेबाज आदमी है। 'नहीं मानी ये तेरह शर्तें तो रद्द हो जाएगी आर्यन खान की जमानत, हर शुक्रवार NCB दफ्तर में लगेगी हाजिरीशाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी के फोन को हैक करने का था प्लान, दिखाए गए थे आर्यन के वॉट्सऐप चैट!
टोटकों से अच्छी सेहत और स्वास्थ्य पाया जा सकता है। हमेशा हैल्दी बने रहने के लिए रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पीकर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है। हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें। जिन लोगों को 1-2 बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, 7 साबुत (डंठल सहित) लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें। लगाना शुभ फल देने वाला है। रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दुःस्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है। चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। से मुक्ति मिलती है। रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं। श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है। सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है। पीपल के वृक्ष को प्रातः 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।
टोटकों से अच्छी सेहत और स्वास्थ्य पाया जा सकता है। हमेशा हैल्दी बने रहने के लिए रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पीकर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है। हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर "ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें। जिन लोगों को एक-दो बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, सात साबुत लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से इक्कीस बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें। लगाना शुभ फल देने वाला है। रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दुःस्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है। चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। से मुक्ति मिलती है। रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं। श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है। सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है। पीपल के वृक्ष को प्रातः बारह बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके सात दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।
वैसे तो आए दिन कोई ना कोई एक्ट्रेस अपने हुस्न के जलवे बिखेरकर सभी को हैरान कर देती हैं लेकिन इन दिनों अगर किसी की खूबसूरती की सबसे ज्यादा तारीफें हो रही हैं तो वो है दिशा पटानी. दिशा पिछले कुछ दिनों से लगातार अपने फोटोज शेयर कर चर्चाओं में आ रही हैं लेकिन इस बार दिशा किसी और कारण से चर्चा का विषय बनी हैं. हाल ही में दिशा ने सलमान खान के बारे में कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद हर कही बस उन्ही के बारे में बाते चल रही हैं. दिशा जल्द ही सलमान के साथ फिल्म भारत में नजर आने वाली हैं. जब मीडिया ने दिशा से सलमान के बारे में सवाल किया तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि 'सलमान सर एक बेहतरीन सह-कलाकार हैं. सलमान ने शूटिंग में दिशा को बहुत मदद की. वो बहुत ज्यादा मेहनती भी हैं और दिशा ने इस दौरान सलमान से बहुत कुछ सीखा हैं. वह पूरे समर्पण के साथ शूटिंग करते हैं और हर शॉट में अपने बेस्ट परफॉरमेंस देते हैं. ' हाल ही में दिशा की कुछ फोटोज सामने आई थी जिसमे वो रेड कलर के लहंगे में बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी. दरअसल दिशा ने बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक 2018 में भाग लिया जिसमे वह काल्की के वेडिंग कलेक्शन 'एथेना' की शोस्टॉपर बनीं. इसके अलावा दिशा अपने और टाइगर के अफेयर कारण भी चर्चाओं में अक्सर बनी ही रहती हैं.
वैसे तो आए दिन कोई ना कोई एक्ट्रेस अपने हुस्न के जलवे बिखेरकर सभी को हैरान कर देती हैं लेकिन इन दिनों अगर किसी की खूबसूरती की सबसे ज्यादा तारीफें हो रही हैं तो वो है दिशा पटानी. दिशा पिछले कुछ दिनों से लगातार अपने फोटोज शेयर कर चर्चाओं में आ रही हैं लेकिन इस बार दिशा किसी और कारण से चर्चा का विषय बनी हैं. हाल ही में दिशा ने सलमान खान के बारे में कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद हर कही बस उन्ही के बारे में बाते चल रही हैं. दिशा जल्द ही सलमान के साथ फिल्म भारत में नजर आने वाली हैं. जब मीडिया ने दिशा से सलमान के बारे में सवाल किया तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि 'सलमान सर एक बेहतरीन सह-कलाकार हैं. सलमान ने शूटिंग में दिशा को बहुत मदद की. वो बहुत ज्यादा मेहनती भी हैं और दिशा ने इस दौरान सलमान से बहुत कुछ सीखा हैं. वह पूरे समर्पण के साथ शूटिंग करते हैं और हर शॉट में अपने बेस्ट परफॉरमेंस देते हैं. ' हाल ही में दिशा की कुछ फोटोज सामने आई थी जिसमे वो रेड कलर के लहंगे में बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी. दरअसल दिशा ने बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक दो हज़ार अट्ठारह में भाग लिया जिसमे वह काल्की के वेडिंग कलेक्शन 'एथेना' की शोस्टॉपर बनीं. इसके अलावा दिशा अपने और टाइगर के अफेयर कारण भी चर्चाओं में अक्सर बनी ही रहती हैं.
उन्हें मंजूर करना पड़ा। कवि भूषणजी की यह श्राज्ञा हुई कि गो-मांस, वृष-मांस, शूकर मांस मकान के अन्दर न जाने पावे । यह बात भी कबूल हुई। एक कमरा पंडितजी को कपड़े पहनने के लिए दिया गया। उसके भी रोज धोये जाने की योजना हुई। पंडित महाशय ने दो जोड़े कपड़े रखे । उनमें से एक जोड़ा इस कमरे में रक्खा गया । रोज प्रातःकाल जिस कपड़े को पहन कर साहब के यहाँ 'थे उसे इस कमरे में रख देते थे और कमरे में रक्खा हुआ जोड़ा पहन कर आप पढ़ाते थे । चलते समय फिर उसे बदलकर घर वाला जोड़ा पहन लेते थे । इतने महाभारत के बाद सर विलियम ने "रामः, रामौ, रामांः " शुरू किया। नसर विलियम संस्कृत जानें, न कविभूषण महाशय अँगरेजी । पाठ कैसे चले ? खैर इतनी थी कि साहब थोड़ी सी टूटीफूटी हिन्दी बोल लेते थे। उसी की मदद से पाठारम्भ हुआ। दोनों ने उसी की शरण ली । सौभाग्य से अध्यापक और अध्येता दोनों पुद्धिमान थे । नहीं तो उतनी थोड़ी हिन्दी में कभी न काम चलता । सर विलियम ने बड़ी मिहनत की । एक ही वर्ष में वह सरल संस्कृत में अपना प्रकट कर लेने लगे । संस्कृत में लिंगभेद और क्रियाओं में रूप बड़े मुश्किल है। बहुत सम्भव है, पहले पहल सर विलियम ने बहुत सी संज्ञाओं और क्रियाओं के रूप कागज पर लिख लिये होंगे । उनकी तालिकायें बना ली होंगी। उन्हीं की मदद से उन्होंने का काम निकाला हो । किस तरह उन्होंने पंडित रामलोचन से संस्कृत सीखी, कहीं लिखा हुआ नहीं मिलता। यदि उनकी पाठग्रहण प्रणाली मालूम हो जाती तो उसे जानकर जरूर कुतूहल होता । एक दिन सर विलियम जोन्स पंडित महाशय से बातचीत कर रहे थे। बातों-बातों में नाटक का जिक्र ाया। आपको मालूम हुआ कि संस्कृत में भी नाटक के ग्रन्थ है। उस समय भी कलकत्ते में अमीर सर विलियम जोन्स ने कैसे संस्कृत सीखी आदमियों के यहाँ नाटक खेले जाते थे । गरेजों को यह बात मालूम थी । पं० रामलोचन ने कहा कि पुराने जमाने में भी राजों और दमियों के यहाँ ऐसे ही नाटक हुआ करते थे। यह सुनकर सर विलियम को आश्चर्य हुआ और पडित रामलोचन से आप शकुन्तला पढ़ने लगे । उस पर आप इतने मुग्ध हुये कि, उस पर गद्य पद्यमय ग्र गरेजी अनुवाद कर डाला । यद्यनि अनुवाद अच्छा नहीं बना, तथानि योरपवालों की आँखें खोल दी। उसे पढ़ कर लोगों ने पहले पहल जाना कि संस्कृत का साहित्य खूच उन्नत है। जर्मनी का गैटी नामक कवि तो सर विलियम के अनुवाद को पढ़ कर अलौकिक आनन्द से विभोर हो उठा। उसने उसी ममता की दशा में शकुन्तला की स्तुति में एक कविता तक बना डाली । सुनते हैं, सर विलियम जोन्स के संकृत शिक्षक बड़े तेज मिजाज थे। जो बात सर विलियम की समझ में नाती थी उसे गुरु जी से पूछना पड़ता था । गुरु महाशय टीक तौर पढ़ाना जानते न थे । वे सर विलियम को भी उसी रास्ते ले जाते थे जिस रास्ते टोल (पाठशालाओं के विद्यार्थी जाते हैं। इससे सर विलियम का कभी-कभी कोई बात दो-दो, तीन-तीन दफे पूछनी पड़ती थी। एक दफे बताने से वह उनके ध्यान द्दी में न आती थी। ऐसे मौकों पर गुरुदेव महाशय का मिजाज गरम हो उठता था । कट कद्द बैठते थे - "यह विषय बड़ा ही क्लिष्ट है, गौ-माँस-भोजी लोगों के लिए इसका ठीक-ठीक समझना प्रायः सम्भव है ।" पर सर विलियम जोन्स पंडित महाशय को इतना त्याग करते थे और उन्हें इतना मान देते थे कि उनकी इस तरह की मलामतों का हँसकर टाल दिया करते थे । पंडित रामलोचन कविभूषण १८१२ ईसवी तक जीवित थे । वे विद्वान्थे । काव्य, नाटक, अलंकार और व्यकरण में वे खूब प्रवीण थे । पर धर्मशास्त्र और दर्शन में उनकी विशेष गति न थी । थे। इसलिए व्याकरण और काव्य का यथेष्ट अभ्यास कर चुकने पर, जब सर बिलियम ने धर्मशास्त्र का अध्ययन शुरू किया तब उन्हें एक और पंडित रखना पड़ा । यवनों को संस्कृत सिखाना पहले घोर पाप समझा जाता था, पर इस तरह का रुगल कुछ ढीला पड़ गया। इससे सर विलियम को धर्मशास्त्री पंडित ढूँढ़ने में विशेष कष्ट नहीं उठाना सर विलियम जोन्स, १७८३ ईसवी में, जज होकर कलकत्ताये और १७६४ में वहीं मरे । हिन्दुस्तान आने के पहले फर्ड में उन्होने फारसी और सीखी थी। उनका बनाया हुआ फारसी का व्याकरण उत्तम ग्रन्थ है । वह अब नहीं मिलता। बङ्गाल की एशियाटिक सोसायटी उन्हीं की कायम की हुई है । उसे चाहिये कि इस व्याकरण को वह फिर से प्रकाशित करे, जिसमें सादी की मनोमोहक भाषा सीखने की जिन्हें इच्छा हो वे उससे फायदा उठा सकें । हिन्दुस्तान की सिविल सर्विस के मेम्बरों के लिए वह बहुत उपयोगी होगा । (४)- पुराने अँगरेज के संस्कृत पढ़ने का फल इँगलिस्तान के व्यापारी तो बहुत पहले से भारत में व्यापार करते थे; पर उन सब का काम अलग अलग होता था, एक में न होता था । इससे काम काज में सुमीता कम था और मुनाफा भी कम होता था । इस त्रुटि को दूर करने के लिये १२५ मियों ने मिलकर, साढ़े दस लाख रुपये की पूँजी से, एक कम्पनी बनाई । इंगलैंड को रानी एलिजवंध ने ३१ दिसम्बर, १६०० को इस कम्पनी की दस्तावेज़ पर दस्तखत करके इङ्गलेंड और भारत के बीच व्यापार करने की ज्ञा दी। . ईस्ट इंडिया कम्पनी की जड़ यहीं से जमी, अथवा यों कहिये कि अगरेजी राज्य का सूत्रपात यहीं से जमी, अथवा यों कहिये कि अगरेजी राज्य का सूत्रात यहीं से हुआ । इसी १२५ व्यापारियों की कम्पनी ने कुछ दिनों में, राजसी ठाट जमा लिया और अपने देश इगलिस्तान का अपेक्षा जिस देश की आबादी दस गुनी अधिक है उस पर व्यापार करते-करते राजसत्ता भी चलने लगी । इस कम्पनी के साझीदार अपने देश में तो अपने बादशह की रियाया थे, पर भारत में खुद ही बादशाह बनकर हुकूमन करते थे; फौजें रखते थे, बड़ेबड़े रात्रों, महाराजों और शाहंशाहों की बराबरी करते थे; लड़ाइयाँ लड़ते थे; सन्धि-स्थापना करते थे और भी न मालूम कितने सत्तासूचक काम करते थे । ऐसा दृश्य इस भूमण्डल में बहुत कम देखा गया होगा । यह हमारा निज का कथन नहीं, किन्तु लन्दन की टी० फिशर नविन कम्पनी के लिए ए० रगोजिन साहब ने जो भारतवर्ष का एक प्राचीन इतिहास लिखा है उसके एक अंश का अवतरण मात्र है । भारत में व्यापार करने वाले योरप के गोरे व्यापारियों की यह पहली ही कम्पनी न थी। पोचुग़ोज लोग यहाँ बहुत पहले से - जब से वास्कोडिगामा ने १४६८ ईसवी में इस देश की भूमि पर कदम रखा - व्यापार में लगे थे। विदेशी व्यापारियों में ये अकेले ही थे और खूब माल-माल हो रहे थे । अँगरेज ब्यापारियों ने देखा कि ये लोग करोड़ों रुपये अपने देश ढोये लिये जा रहे हैं; चलो हम भी इन्हीं की तरह भारत में व्यापार करें और जो मुनाफा इन लोगों को हो रहा है उसका कुछ अंश हम भी लें । पोर्चुगीजों का व्यापार कोई सौ वर्ष तक बिना किसी विघ्न बाधा के भारत में जारी रहा । इसमें कुछ सन्देह नहीं कि वे लोग एक प्रान्त के बाद दूसरे प्रान्त को अपनी जमींदारी में शामिल करके पूरे मुल्क को अपने कब्जे में कर लेने का इरादा रखते थे । वे लोग अपने इस इरादे का कार्य में परिणत कर रहे थे कि. ईन्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में पदार्पण किया। गरेज व्यापारी पोर्चुगीज लोगों से किसी बात में कम न थे । उन्होंने बड़ी दृढ़ता से पोचुगीजों का सामना किया। उनके साथ चढ़ा ऊपरी करने में अँगरेजों ने बड़ी सरगमी दिखाई । फल यह हुआ कि पोचुगीज लोगों का प्रभुत्व धीरे-धीरे कम हो चला । उनकी श्रमदनी के द्वार क्रम क्रम से बन्द होने लगे ! यहाँ तक कि १६६१ ईसवी में उन लोगों ने बच्ची चचाई एकमात्र जमींदारी इंगलिस्तान के राजा को दे डाली। उस समय केवल बम्बई और उसके आस पास का भूभाग उन लोगों के कब्जे में था । पूर्वोक्त सन् में पोर्चुगल की राजकुमारी कैथराइन का विवाह इंगलैंड के राजा दूसरे चार्ल्स के साथ हुआ । तब बम्बई की जमींदारी को अपने काम की न समझकर पोर्चुगल के राजा ने कैथराइन के दहेज में दे डाला। परन्तु गरेज राज ने इस दहेज को तुच्छ समझकर १५० रुपये सालाना मालगुजारी देने का इकरार नामा लेकर ईस्ट इंडिया कम्पनी को दे डाला । बम्बई और उसके आस-पास के प्रदेश की कीमत उस समय साढ़े बारह रुपये महीने से नहीं समझी गई !!! व्यापार व्यवसाय और जमींदारी आदि बढ़ाने में पोचुगीज लोगों की प्रतियोगिता यद्यपि जाती रही तथा गरेजों को भारत में सत्ताविस्तार करते देख यौरप के और लोगों के मुँह से भी लार टपकने लगी फ्रांस, डेनमार्क और हालैंड में भी ईस्ट इंडिया नाम की कम्पनियाँ खड़ी हुईं । उन्होंने भी भारत में व्यापार प्रारम्भ करके अगरेज कम्पनी के मुनाफे को घटाना आरम्भ कर दिया। यही नहीं, किन्तु जर्मनी और स्वीडन में भी इस तरह की कम्पनियाँ बनीं। उन्होंने भी भारत में अपनी-अपनी कोठियाँ खोलीं। परन्तु डेनमार्क, जर्मनी और स्वीडन की कम्पनियों से हमारी अगरेजी, ईस्ट इंडिया कम्पनी का कुछ भी नहीं बिगड़ा । इन तीन कम्पनियों का महत्व इतना कम था कि अगरेजी कम्पनी के साथ ये नाम लेने योग्य चढ़ा ऊपरी नहीं कर सकीं। परन्तु डच और कम्पनियों के विषय में यह बात नहीं कहीं जा सकती । उनके कारण गरेज कम्पनी का मुनाफा और प्रभुत्व जरूर कम हो गया । डच लोग उस समय सामुद्रिक बल में अपना सानी न रखते थे। इससे उन लोगों ने हर तरह से अगरेजी ईस्टइंडिया कम्पनी के साथ चढ़ा ऊपरी प्रारम्भ कर दी - यहाँ तक कि बल प्रयोग करके भी अपना मतलब निकालने में उच लोगों ने कसर नहीं की। भारत ही में अपना प्रभुत्व विस्तार करके डच लोग चुप नहीं रहे। उन्होंने बड़ी फुरती से लंका, सुमात्रा, जावा और मलाका आदि द्वीपों का भी अधिकांश अपने कब्जे में कर लिया। इस डच कम्पनी ने अँगरेज व्यापारियों की कंपनी के साथ जी-जान होकर. प्रतियोगिता की। इस कारण दोनों में विषम शत्र भाव पैदा हो गया । एक दूसरी को नीचा दिखाने की सदा ही कोशिश करती रही । यहाँ तक कि कभी-कभी मारकाट तक की मी नौबत आई । बड़ी-बड़ी कठिनाइयाँ भेजने के बाद की प्रतियोगिता से फुरसत मिली ! कोई सौ वर्ष तक उनके तरह-तरह के दाँव-पैंच खेले गये । अन्त में डच लोगों ने से अपना सरोकार छोड़ दिया ! कम्पनी का सामना गरेजों को करना पड़ा। इस फ्रेंच कम्पनी का भीरिक अभिप्राय भारत को धीरे-धीरे मुट्ठी में कर लेने का था । और गरेज भी इसी इरादे से पैर फैला रहे थे । एक बिल में दो साँप कैसे रहें ? इससे दोनों में घोर कलह उपस्थित हो गया। एक ने दूसरे को अपदस्थ करने की कोशिश आरम्भ कर दी । कूटनीति से काम लिया जाने लगा। जब उससे कामयाबी न हुई तब लड़ाइयाँ तक लड़ी गई । एक कम्पनी दूसरी के पीछे ही पड़ी रही । होते होते गरेजों का प्रभुत्व बढ़ा ? उसने फ्रांस वालों के बल को नष्ट-प्राय कर दिया । पांडीचरी, करीकाल और चन्द्रनगर की जमींदारियों को छोड़कर फ्रेंच लोगों का भारत में कुछ बाकी न रहा । पोचुगीजों के कब्जे में भी समुद्र के किनारे-किनारे सिर्फ दसपाँच मील जमीन रद्द गई । गरेजों ने कहा, "कुछ दर्ज नहीं। इन लोगों के पास इतनी जमींदारी बनी रहने दो ! इससे हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता ।' अब अगरेजों को अपना बल विक्रम और प्रभाव बढ़ाने में रोकने वाला कोई न रहा - फ्रेंच, पोर्चुगीज, डच सब ने उनके लिए रास्ता साफ कर दिया। रेजों की महिमा बढ़ने लगी । व्यापार वृद्धि के साथ साथ राज्य वृद्धि भी होने लगी। एक के बाद दूसरा प्रान्त उनका वारन हेस्टिंग्ज ईस्ट इंडिया कम्पनी के पहले गवर्नर जनरल हुये। उन्होंने सब से पहले भारत वासियों की रीति, रस्म और स्वभाव आदि का ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश की । उस समय भारतवासी बोझा ढोने वाले पशुओं के समान समझे जाते थे। उनके देश में कदम रखना सिर्फ रुपया कमाने के लिये ही जरूरी समझा जाता था । खैर । वारन हेस्टिंग्ज ने कहा कि जिन लोगों से और जिन लोगो के देश से हमें इतना लाभ है उन पर, जहाँ तक हमें कोई हानि न पहुॅचे, अच्छी तरह शासन करना चाहिये । परन्तु सुशासन की योग्यता के लिये भारतवासियों के इतिहास, विश्वास, धर्म, साहित्य आदि का ज्ञान होना जरूरी समझा गया। अतएव वारन हेस्टिंग्ज ने अपने प्रधान कर्मचारियो का ध्यान इस ओर दिलाया और विलियम ज़ोन्स ने पहले पहल संस्कृत सीखना आरम्भ किया । सर विलियम बंगाल की 'सुप्रीम कोर्ट के जज थे। उन्होने १७८४ ईसची में बगाल की एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की और इम लोगों के धर्म-शास्त्र का अध्ययन ग्रारम्भ किया । क्योंकि बिना धर्म-शास्त्र के ज्ञान के भारतवासियों के मुकद्दमो का फैसला करने में गरेज जजों का बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ता था और दत्तक आदि लेने का विषय उपस्थित होने पर वारन वेस्टिंग्ज का पण्डितों की शरण लनी पड़ती थी। सर विलियम जोन्स ने किस तरह संस्कृत सीखी, इस पर एक लेख पहले ही लिखा जा चुका है। इस काम में उन्हें संकड़ों विघ्न बाधायें हुई । पर सच को पार करके सर विलियम ने मतलच भर के लिये संस्कृत का ज्ञान प्राप्त ही कर लिया । फारसी तो वे इंग्लैंड ही से पढ़कर आये थे। संस्कृत उन्होंने यहाँ पढ़ी। पूर्वी देशों की भाषाओं में से यही तीन भाषायें, साहित्य के नाते, उच्च और बड़े काम की समझी जाती हैं । सर विलियम ने पहले मनुस्मृति का अनुवाद किया । यह अनुवाद १७६० ईसवी में छपा । इससे बड़ा काम निकला । अगरेज जजों का भारतीय पण्डितों की जो पद-पद पर सहायता दरकार होती थी उसकी जरूरत बहुत कम रह गई । भारतवासियों को अपने धर्मशास्त्र के अनु सार न्याय कराने में तब सुभीता हो गया । इसके बाद संस्कृत नाटकों का नाम सुनकर सर विलियम जोन्स ने नाटकों का पता लगाना आरम्भ किया और शकुन्तला नाटक का पढ़कर उसका अनुवाद गरेजी में किया। इस नाटक ने योरप के विद्यारसिक जनों की आँखें खोल दीं । तब तक योरप वाले भारतवासियों को, जैसा ऊपर कहा जा चुका है निरे जंगली समझते थे। उनका ख्याल था कि भारत में कुछ भी साहित्य नहीं है और जो कुछ है भी वह किसी काम का नहीं । तब तक योरप वालों की दृष्टि में भारतवासी अत्यन्त ही घृणा की दृष्टि से देखे जाते थे । घृणा की दृष्टि से तो वे अब भी देखे जाते हैं, पर औरत में बहुत अन्तर है । तब हम लोगों की गिनती कुछ-कुछ की छाटेनटार, पुशभ्यन और जूलू आदि महासभ्य जातियों में थी और भारत की कुछ कदर यदि की जाती थी तो सिर्फ इसलिए कि उसकी बदौल करोड़ों रुपये विलायत ले जाने को मिलते थे। पर शकुन्तला को पढ़कर उन लोगों का यह भाव एकदम तिरोहित हो गया । शकुन्तला की कविता, उसके पात्रों का चरित्र, उसकी भाव प्रवणता आदि देख । वे लोग मुग्ध हो गये । शकुन्तला के गरेजी अनुवाद के भी अनु. बाद जर्मन और फ्रेंच भाषाओं में हो गये, जिन्हें पढ़कर तत्तद्द शवासियों ने भी उसकी श्रेष्ठता एक स्वर से कबूल की । शकुन्तला वह चीज है जिसकी कृपा से भारतवासी हैवान से इसान समझे जाने लगे-पशु से मनुष्य माने जाने लगे । अतएव भगवान् कालिदास के हम लोग हृदय से ऋणी हैं। शकुन्तला से योरप बालों को मालूम हो गया कि नाट्यविद्या में हिन्दू-सन्तान उन लोगों से यदि बढ़ी हुई नहीं है तो कम भी किसी तरह नहीं । वे यह भी जान गये कि जिस ग्रीक भाषा के साहित्य की श्रेष्ठता के वे लोग इतने कायल हैं, संस्कृत का साहित्य उससे भी किसी-किसी अंश में आगे बढ़ा हुआ है । प्राचीनता में तो संस्कृत साहित्य की बराबरी किसी भी भाषा का साहित्य नहीं कर सकता । शकुन्तला रचना - कौशल को देखकर योरपवालों को जितना कौतूहल हुआ उसके कथानक का विचार करके उससे भी अधिक हुआ । उसके कथानक का सादृश्य उन्हें एक ग्रीक कहानी में मिल गया। और जब उन लोगों ने विक्रमोर्वशी देखी तब उनके कथानक की भी सदृशता उन्हें ग्रीक भाषा की एक कहानी में मिली । इस पर उन लोगों के आश्चर्य की सीमा न रही । वे सोचने लगे कि क्या बात है जो इन अथवा सभ्य भारतवासियों की बातें उन पूज्यतम ग्रीक लोगो की बातों से मिलती हैं। कही दोनों के पुरुषों का किसी समय एकत्र वास तो नहीं रहा ? यह तो साधारण आदमियों की बात हुई । भाषा-शास्त्र के जानने वालों को पुरातत्व वेत्ताओं को तथा पुरानी कथा-कहानियों का ज्ञान रखनेवालों को तो विश्वास - सा हो गया कि इस साम्य का जरूर कोई बहुत बड़ा कारण है । शकुन्तला के पाठ और बंगाले की एशियाटिक सोसायटी की स्थापना से सर विलियम जोन्स के सिवा चार्ल्स विलकिन्स और हेनरी टामस कोलक आदि और भी कई विद्वानों को संस्कृताध्ययन की ओर रुचि हुई। नईनई खोज होने लगी; नई-नई पुस्तकें बनने लगीं । फल यह हुआ कि इन गौरांग पण्डितों को संस्कृत के सैकड़ों शब्द ग्रीक आदि योरप की प्राचीन भाषाओं से प्रायः तद्वत् अथवा कुछ फेरफार के साथ मिल गये । इससे इन लोगों के आश्चर्य, कौतूहल और एक प्रकार के श्रातङ्क का ठिकाना न रहा। अरे इन बहशी हिन्दुस्तानियों की प्राचीन भाषा क्या किसी समय हमारे भी पूर्व पुरुषों की भाषा थी । बस फिर क्या था योरप के कितने ही पण्डित काव्य, नाटक, इतिहास, धर्मशास्त्र आदि का अध्ययन जी लगाकर करने लगे। जर्मनी के वान शेलीजल और वान हम्बौल आदि प्रकाण्ड पण्डितों ने बड़ी ही सरगरमी से संस्कृत सीखना शुरू किया। जब इन लोगों को वेद पढ़ने और समझने की शक्ति हो गई तब इन्होंने अपना अधिक समय वैदिक ग्रन्थों ही के परिशीलन में लगाना आरम्भ किया। इससे उनकी गई । संस्कृत शिक्षा का प्रचार इंगलिस्तान और जर्मनी के सिवा फ्रांस, हालैंड, अमेरिका और रूस तक में होने लगा । वैदिक प्रन्थों को इन विद्वानों ने एक स्वर से दुनिया के सब ग्रन्थों से पुराना माना और उसके सम्बन्ध में नाना प्रकार की चर्चा श्रारम्भ हो गई । तब से आज तक योरप में कितने ही विद्वान् ऐसे हो गये हैं और कितने ही होते जा रहे हैं जिनकी कृपा से संस्कृत साहित्य के नयेनये रत्न हम लोगो को प्राप्त हुए हैं और प्राप्त होते जाते हैं। अंगरेज अधिकारियों ने संस्कृत सीखने की ओर ध्यान तो अपने स्वार्थसाधन के लिए दिया था - उन्होंने तो इसलिए पहले-पहल संस्कृत सीखने की जरूरत समझी थी जिससे हम लोगों की रीति-रस्में आदि जानकर भारत पर बिना बिघ्न-बाधा के शासन कर सकें - पर संस्कृत साहित्य की श्रेष्ठता ने उन लोगों को भी उसका अध्ययन करने के लिए लाचार किया जिनका शासन से क्या, इस देश से भी, कुछ सम्बन्ध न था । यदि योरपवाले संस्कृत की कदर न करते तो हज़ारों नमोल ग्रन्थ यहीं कीड़ों की खुराक हो जाते । जर्मनी, फ्रांस, इंगलैंड आदि के पुस्तकालयों में क्यों वे पहुंचते और क्यों प्रतिवर्ष नये-नये ग्रन्थों का पता लगाया जाता ? ग्राज तक प्योरप के विद्वानों ने जो लभ्य ग्रन्थ प्रकाशित किये हैं, अनेकानेक वैदिक रहस्यों का उद्घाटन किया है, हमारे और अपने पूर्वजों के किसी समय एकत्र एक ही जगह रहने और एक भाषा बोलने के विषय में जो प्रमाणपूर्ण पुस्तकें लिखी है उसके लिए भारतवासी उनके बहुत कृतज्ञ हैं । यदि इमारी देववाणी संस्कृत की महिमा से आकृष्ट होकर योरप के विद्या व्यसनी जन उसका परिशीलन न करते तो भारत में राजा और प्रजा के बीच इस समन जैसा भाव है, शायद वैसा कभी न होता । बहुत सम्भव है, पूर्ववत् हम लोग पशु ही की तरह लाठी से झाँके जाते। अतएव हम लोग अँगरेज कर्मचारी योरप के विद्वान् संस्कृत भाषा र महाकवि कालिदास के बहुत ऋणी हैं। विशेष कर कालिदास ही की बढौलत हमारी सभ्यता और विद्वता का हाल योरप वालों को मालूम हुआ । हमारा धर्म है कि हम कालिदास की पूजा करें और प्रेमपूर्वक संस्कृत सीखे । ६ - योरप में विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि हिन्दुस्तान में हजारो लोग ऐसे हैं जिन्होंने अंगरेजी जैसी क्लिष्ट और विदेशी भाषा में बड़े-बड़े गहन ग्रन्थ लिखे हैं, जो अगरेजी के प्रतिष्ठित पत्रों और सामयिक पुस्तकों का बड़ी ही योग्यता से सम्पादन करते हैं, जो अगरेजी में धारा प्रवाह वक्तृता देते हैं और जिन्हें अगरेजी भाषा मातृ भाषा ही सी हो रही है । कितने ही भारतवासियों की लिखी हुई अगरेजी पुस्तकें विलायत तक के पुस्तक प्रकाशक बड़े ही और उत्साह से प्रकाशित करते और लेखकों के हज़ारों रुपया पुरस्कार भी देते हैं । इस देश के कितने ही वक्ताओं की मनोमानी और अविश्रान्त वाग्धारा के प्रवाह ठेठ विलायत की भूमि पर भी सैकड़ों-हज़ारों दफे बहे और भी, समय समय पर, बहा करते हैं। हम लोगों की अगरेज़ी को "बाचू इगलिश" कह कर वृरणा प्रकाशित करने वालो की आँखों के सामने ही ये सब दृश्य हुआ करते हैं । परन्तु आज तक इंग लिस्तान वालों में से ऐसे कितने विद्वान् हुये हैं जिन्होंने हमारी हिन्दी या संस्कृत भाषा में पुस्तकें लिखी हो, अथवा इन भाषाओं में कभी वैसी वक्तृता दी हो जैसी कि बाचु सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी या पंडित मदनमोहन मालवीय देते हैं । ढूँढने से शायद दो ही चार विद्वान ऐसे वाले चाहे संस्कृत में कितने ही व्युत्पन्न क्यों न हों योरप के विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि ५५ जाँय, पर, यदि उसके विषय में भी कुछ कहेंगे तो अपनी ही भाषा में लिखेंगे तो अपनी ही भाषा में, व्याख्यान देंगे तो भी अपनी ही भाषा में । संस्कृत पढ़कर ये लोग अधिकतर भाषा विज्ञान और संस्कृत शास्त्रों के सम्बन्ध ही में लेख और पुस्तकें लिखते हैं। कोई प्राचीन पुस्तकों के अनुवाद करते हैं, कोई वैदिक- साहित्य-सागर में गोता लगा कर नये नये तत्वरत्न ढूँढ निकालते हैं; कोई साहित्य की अन्य शाखाका अध्ययन करके उसकी तुलनामूलक समालोचना करते हैं। परंतुीही मातृभाषा में करते हैं। उन्हें संस्कृत साहित्य से सम्बन्ध रखनेवाली बातें संस्कृत ही में लिखने की आवश्यकता भी नहीं । संस्कृत में लिखने में कितने आदमी उनके लेख और पुस्तकें पढ़ सकें ? बहुत ही कम । और जो पढ़ भी सकें उनमें से भी बहुत ही कम भारतवासी पंडित ऐसी पुस्तकें मोल ले सकें । शायद इसी में योरप के संस्कृतज्ञ संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में अपने विचार प्रकट करने का नहीं करते। यदि कोई यह कहे कि उनमें संस्कृत लिखने का मादा ही नहीं तो उसकी यह बात न मानी जायगी । अभ्यास से क्या नहीं हो सकता ? योरपवाले सैकड़ों काम ऐसे करते हैं जिन्हें देखकर अथवा जिनका वर्णन पढ़कर हम लोगों को करने से अच्छी संस्कृत लिख लेना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं । वह उनके लिये सर्वथा साध्य है । जो लोग भारत आते हैं और यहाँ कुछ समय तक रहते हैं उनके लिए तो यह बात और भी सहल है। इस पर भी कई विद्वान् योरप में ऐसे हो गये हैं और अब भी कई मौजूद है, जिनकी लिखी संस्कृत भाषा देखकर मालूम होता है कि वह उन्हें करतलगत श्रामलकवत् हो रही है। डाक्टर बूलर और निटर्स बिना रुके संस्कृत में बातचीत कर सकते थे । कुछ समय हुआ रूस के एक विद्वान् भारत आये थे वे भी संस्कृत बोल लेते थे। विदेशियों की बोली में यदि कोई विलक्षणता होती है तो उस उच्चारण सम्बन्धनी है। परन्तु इस प्रकार की विलक्षणता स्वाभाविक है । हम लोगों की गरजी भी तो विलक्षणता से खाली नहीं । कोई साठ वर्ष हुए जैम्स रा बालेंटाइन नामक एक विद्वान् बनारस के गवर्नमेंट कालेज में प्रधान अध्यापक थे, वे संस्कृत के थेवी पारसी में भी उनकी गति थी ! संस्कृत व बोल भी सकते थे और लिख भी सकते । संस्कृत भाषा और देवनागिरी लिपि के वे बड़े भारी पक्षपाती थे । वे चाहते थे कि अगरेजी में जो ज्ञान-समृद्ध है उससे भारतवासी लाभ उठावें और संस्कृत में जो कुछ ज्ञेय है उससे श्र गरेजी जाननेवाले लाभ उठाव । इसी से उन्होंने बनारस कालेज के संस्कृत विभाग में पढ़नेवाली को अगरेजी भाषा सीखने का भी प्रबन्ध किया था। अपनी उद्देश्य सिद्धि के लिए उन्होने गवर्नमेंट की आज्ञा से, कुछ उपयोगी पुस्तकें भी प्रकाशित की थीं। उनमें से एक पुस्तक का नाम है- Synopsis of Science उसमें योग्प और भारत के शास्त्रों का सारांश रेज़ी और संस्कृतभाषा में है। चार्लेटाइन साइब की यह पुस्तक देखने लायक है । इस पुस्तक को छपे और प्रकाशित हुये पचास वर्ष से अधिक समय हुआ । इसका दूसरा सस्करण जो हमारे सामने है, मिर्ज़ापुर के आफ्न-स्कूल-प्रस का छपा हुआ है। न्याय, सांख्य, वेदांत, ज्यामिति, रेखागणित बीजगणित, प्राणिशास्त्र, रसायनशास्त्र, समाजशास्त्र, बनस्पतिशास्त्र, कीटपतङ्गशास्त्र, भूगोल विद्या, भूस्तरविद्या, राजनीतिविज्ञान, यहाँ तक कि सम्पत्ति शास्त्र तक के सिद्धान्तों का इसमें वर्णन है । पुस्तक दो भागों में विभक्त है। प्रथमाद्ध में पूर्वोक्त शास्त्रों का सारांश, अगरेज़ी में दिया गया है, और उत्तरार्द्ध में संस्कृत । गौतमीय न्यायशास्त्र के आधार पर साध्य की सिद्धि की गई है योरप के विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि ५७ योरप और भारत के शास्त्रीय सिद्धांतों में जहाँ-जहाँ विरोध है वहाँवहाँ योग्यतापूर्वक वह विरोध स्पष्ट करके दिखलाया गया है। परन्तु किसी के मत सिद्धान्त या विवेचन पर कटाक्ष नहीं किया गया। एक उदाहरण लीजिये । गौतम-सूत्रों के आधार पर बालेंटाइन साहब ने एक जगह पवर्ग, अर्थात् मोक्ष की व्याख्या कर के यह लिखापुनदुःखात्पत्तिर्यथा न स्यात् विमोक्षो विध्वंसः तथा च पुनदुखोत्पत्तिप्रतिबन्धको दुखध्वंसः परमपुरुपार्थस्तत्वज्ञानेन प्राप्तव्य इति गौतममतम ।" इसकेगेही पर्थात् के तत्वज्ञानियों के मत का इस प्रकार निदर्शन किया"अम्मन्मतं तु नैवंविधदुःखध्वसमात्र परमपुरुषार्थः । तस्याभावरूपतया तुच्छत्वेन स्वतो मनोहरत्वाभावात् । किन्तु परमपुरुषार्थे दुःखध्वसादन्यत् किमपि स्पृहणीयमस्ति । यद्वा तद्वा तदस्तु, तत् सर्वथा सर्वज्ञस्य परमदयालोः परमेश्वरस्यैव प्रसादेन तद्भक्तः प्राप्यमस्तीति । इसी तरह बरावर ग्राप जहाँ जहाँ आवश्यकता थी, अपना मत देते गये हैं। पर कहीं भी अनुचित प्रक्षेप किसी धर्म्म, मत या सिद्धान्त पर नहीं किया । बालेंटाइन साइब की पूर्वोक्त पुस्तक के आरम्भ में जो उपोद्घात, अँगरेज़ी में है उसमें कितनी ही ज्ञातव्य बात का समावेश किया है । उसमें आपके उदारतापूर्ण विचारों की बड़ी ही भरमार है। तत्वज्ञान को सब ज्ञानों से श्रेष्ठ समझ कर पहले उसी का विचार किया है । पुस्तक के उत्तरार्द्ध के आरम्भ में आपकी लिखी हुई एक छोटी सी भूमिका, संस्कृत में भी है। उससे भी आपके हृदय के औदार्य का सोता सा बह रहा है। उसका कुछ अंश हम नीचे उद्धृत करते हैं.
उन्हें मंजूर करना पड़ा। कवि भूषणजी की यह श्राज्ञा हुई कि गो-मांस, वृष-मांस, शूकर मांस मकान के अन्दर न जाने पावे । यह बात भी कबूल हुई। एक कमरा पंडितजी को कपड़े पहनने के लिए दिया गया। उसके भी रोज धोये जाने की योजना हुई। पंडित महाशय ने दो जोड़े कपड़े रखे । उनमें से एक जोड़ा इस कमरे में रक्खा गया । रोज प्रातःकाल जिस कपड़े को पहन कर साहब के यहाँ 'थे उसे इस कमरे में रख देते थे और कमरे में रक्खा हुआ जोड़ा पहन कर आप पढ़ाते थे । चलते समय फिर उसे बदलकर घर वाला जोड़ा पहन लेते थे । इतने महाभारत के बाद सर विलियम ने "रामः, रामौ, रामांः " शुरू किया। नसर विलियम संस्कृत जानें, न कविभूषण महाशय अँगरेजी । पाठ कैसे चले ? खैर इतनी थी कि साहब थोड़ी सी टूटीफूटी हिन्दी बोल लेते थे। उसी की मदद से पाठारम्भ हुआ। दोनों ने उसी की शरण ली । सौभाग्य से अध्यापक और अध्येता दोनों पुद्धिमान थे । नहीं तो उतनी थोड़ी हिन्दी में कभी न काम चलता । सर विलियम ने बड़ी मिहनत की । एक ही वर्ष में वह सरल संस्कृत में अपना प्रकट कर लेने लगे । संस्कृत में लिंगभेद और क्रियाओं में रूप बड़े मुश्किल है। बहुत सम्भव है, पहले पहल सर विलियम ने बहुत सी संज्ञाओं और क्रियाओं के रूप कागज पर लिख लिये होंगे । उनकी तालिकायें बना ली होंगी। उन्हीं की मदद से उन्होंने का काम निकाला हो । किस तरह उन्होंने पंडित रामलोचन से संस्कृत सीखी, कहीं लिखा हुआ नहीं मिलता। यदि उनकी पाठग्रहण प्रणाली मालूम हो जाती तो उसे जानकर जरूर कुतूहल होता । एक दिन सर विलियम जोन्स पंडित महाशय से बातचीत कर रहे थे। बातों-बातों में नाटक का जिक्र ाया। आपको मालूम हुआ कि संस्कृत में भी नाटक के ग्रन्थ है। उस समय भी कलकत्ते में अमीर सर विलियम जोन्स ने कैसे संस्कृत सीखी आदमियों के यहाँ नाटक खेले जाते थे । गरेजों को यह बात मालूम थी । पंशून्य रामलोचन ने कहा कि पुराने जमाने में भी राजों और दमियों के यहाँ ऐसे ही नाटक हुआ करते थे। यह सुनकर सर विलियम को आश्चर्य हुआ और पडित रामलोचन से आप शकुन्तला पढ़ने लगे । उस पर आप इतने मुग्ध हुये कि, उस पर गद्य पद्यमय ग्र गरेजी अनुवाद कर डाला । यद्यनि अनुवाद अच्छा नहीं बना, तथानि योरपवालों की आँखें खोल दी। उसे पढ़ कर लोगों ने पहले पहल जाना कि संस्कृत का साहित्य खूच उन्नत है। जर्मनी का गैटी नामक कवि तो सर विलियम के अनुवाद को पढ़ कर अलौकिक आनन्द से विभोर हो उठा। उसने उसी ममता की दशा में शकुन्तला की स्तुति में एक कविता तक बना डाली । सुनते हैं, सर विलियम जोन्स के संकृत शिक्षक बड़े तेज मिजाज थे। जो बात सर विलियम की समझ में नाती थी उसे गुरु जी से पूछना पड़ता था । गुरु महाशय टीक तौर पढ़ाना जानते न थे । वे सर विलियम को भी उसी रास्ते ले जाते थे जिस रास्ते टोल - पुराने अँगरेज के संस्कृत पढ़ने का फल इँगलिस्तान के व्यापारी तो बहुत पहले से भारत में व्यापार करते थे; पर उन सब का काम अलग अलग होता था, एक में न होता था । इससे काम काज में सुमीता कम था और मुनाफा भी कम होता था । इस त्रुटि को दूर करने के लिये एक सौ पच्चीस मियों ने मिलकर, साढ़े दस लाख रुपये की पूँजी से, एक कम्पनी बनाई । इंगलैंड को रानी एलिजवंध ने इकतीस दिसम्बर, एक हज़ार छः सौ को इस कम्पनी की दस्तावेज़ पर दस्तखत करके इङ्गलेंड और भारत के बीच व्यापार करने की ज्ञा दी। . ईस्ट इंडिया कम्पनी की जड़ यहीं से जमी, अथवा यों कहिये कि अगरेजी राज्य का सूत्रपात यहीं से जमी, अथवा यों कहिये कि अगरेजी राज्य का सूत्रात यहीं से हुआ । इसी एक सौ पच्चीस व्यापारियों की कम्पनी ने कुछ दिनों में, राजसी ठाट जमा लिया और अपने देश इगलिस्तान का अपेक्षा जिस देश की आबादी दस गुनी अधिक है उस पर व्यापार करते-करते राजसत्ता भी चलने लगी । इस कम्पनी के साझीदार अपने देश में तो अपने बादशह की रियाया थे, पर भारत में खुद ही बादशाह बनकर हुकूमन करते थे; फौजें रखते थे, बड़ेबड़े रात्रों, महाराजों और शाहंशाहों की बराबरी करते थे; लड़ाइयाँ लड़ते थे; सन्धि-स्थापना करते थे और भी न मालूम कितने सत्तासूचक काम करते थे । ऐसा दृश्य इस भूमण्डल में बहुत कम देखा गया होगा । यह हमारा निज का कथन नहीं, किन्तु लन्दन की टीशून्य फिशर नविन कम्पनी के लिए एशून्य रगोजिन साहब ने जो भारतवर्ष का एक प्राचीन इतिहास लिखा है उसके एक अंश का अवतरण मात्र है । भारत में व्यापार करने वाले योरप के गोरे व्यापारियों की यह पहली ही कम्पनी न थी। पोचुग़ोज लोग यहाँ बहुत पहले से - जब से वास्कोडिगामा ने एक हज़ार चार सौ अड़सठ ईसवी में इस देश की भूमि पर कदम रखा - व्यापार में लगे थे। विदेशी व्यापारियों में ये अकेले ही थे और खूब माल-माल हो रहे थे । अँगरेज ब्यापारियों ने देखा कि ये लोग करोड़ों रुपये अपने देश ढोये लिये जा रहे हैं; चलो हम भी इन्हीं की तरह भारत में व्यापार करें और जो मुनाफा इन लोगों को हो रहा है उसका कुछ अंश हम भी लें । पोर्चुगीजों का व्यापार कोई सौ वर्ष तक बिना किसी विघ्न बाधा के भारत में जारी रहा । इसमें कुछ सन्देह नहीं कि वे लोग एक प्रान्त के बाद दूसरे प्रान्त को अपनी जमींदारी में शामिल करके पूरे मुल्क को अपने कब्जे में कर लेने का इरादा रखते थे । वे लोग अपने इस इरादे का कार्य में परिणत कर रहे थे कि. ईन्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में पदार्पण किया। गरेज व्यापारी पोर्चुगीज लोगों से किसी बात में कम न थे । उन्होंने बड़ी दृढ़ता से पोचुगीजों का सामना किया। उनके साथ चढ़ा ऊपरी करने में अँगरेजों ने बड़ी सरगमी दिखाई । फल यह हुआ कि पोचुगीज लोगों का प्रभुत्व धीरे-धीरे कम हो चला । उनकी श्रमदनी के द्वार क्रम क्रम से बन्द होने लगे ! यहाँ तक कि एक हज़ार छः सौ इकसठ ईसवी में उन लोगों ने बच्ची चचाई एकमात्र जमींदारी इंगलिस्तान के राजा को दे डाली। उस समय केवल बम्बई और उसके आस पास का भूभाग उन लोगों के कब्जे में था । पूर्वोक्त सन् में पोर्चुगल की राजकुमारी कैथराइन का विवाह इंगलैंड के राजा दूसरे चार्ल्स के साथ हुआ । तब बम्बई की जमींदारी को अपने काम की न समझकर पोर्चुगल के राजा ने कैथराइन के दहेज में दे डाला। परन्तु गरेज राज ने इस दहेज को तुच्छ समझकर एक सौ पचास रुपयापये सालाना मालगुजारी देने का इकरार नामा लेकर ईस्ट इंडिया कम्पनी को दे डाला । बम्बई और उसके आस-पास के प्रदेश की कीमत उस समय साढ़े बारह रुपये महीने से नहीं समझी गई !!! व्यापार व्यवसाय और जमींदारी आदि बढ़ाने में पोचुगीज लोगों की प्रतियोगिता यद्यपि जाती रही तथा गरेजों को भारत में सत्ताविस्तार करते देख यौरप के और लोगों के मुँह से भी लार टपकने लगी फ्रांस, डेनमार्क और हालैंड में भी ईस्ट इंडिया नाम की कम्पनियाँ खड़ी हुईं । उन्होंने भी भारत में व्यापार प्रारम्भ करके अगरेज कम्पनी के मुनाफे को घटाना आरम्भ कर दिया। यही नहीं, किन्तु जर्मनी और स्वीडन में भी इस तरह की कम्पनियाँ बनीं। उन्होंने भी भारत में अपनी-अपनी कोठियाँ खोलीं। परन्तु डेनमार्क, जर्मनी और स्वीडन की कम्पनियों से हमारी अगरेजी, ईस्ट इंडिया कम्पनी का कुछ भी नहीं बिगड़ा । इन तीन कम्पनियों का महत्व इतना कम था कि अगरेजी कम्पनी के साथ ये नाम लेने योग्य चढ़ा ऊपरी नहीं कर सकीं। परन्तु डच और कम्पनियों के विषय में यह बात नहीं कहीं जा सकती । उनके कारण गरेज कम्पनी का मुनाफा और प्रभुत्व जरूर कम हो गया । डच लोग उस समय सामुद्रिक बल में अपना सानी न रखते थे। इससे उन लोगों ने हर तरह से अगरेजी ईस्टइंडिया कम्पनी के साथ चढ़ा ऊपरी प्रारम्भ कर दी - यहाँ तक कि बल प्रयोग करके भी अपना मतलब निकालने में उच लोगों ने कसर नहीं की। भारत ही में अपना प्रभुत्व विस्तार करके डच लोग चुप नहीं रहे। उन्होंने बड़ी फुरती से लंका, सुमात्रा, जावा और मलाका आदि द्वीपों का भी अधिकांश अपने कब्जे में कर लिया। इस डच कम्पनी ने अँगरेज व्यापारियों की कंपनी के साथ जी-जान होकर. प्रतियोगिता की। इस कारण दोनों में विषम शत्र भाव पैदा हो गया । एक दूसरी को नीचा दिखाने की सदा ही कोशिश करती रही । यहाँ तक कि कभी-कभी मारकाट तक की मी नौबत आई । बड़ी-बड़ी कठिनाइयाँ भेजने के बाद की प्रतियोगिता से फुरसत मिली ! कोई सौ वर्ष तक उनके तरह-तरह के दाँव-पैंच खेले गये । अन्त में डच लोगों ने से अपना सरोकार छोड़ दिया ! कम्पनी का सामना गरेजों को करना पड़ा। इस फ्रेंच कम्पनी का भीरिक अभिप्राय भारत को धीरे-धीरे मुट्ठी में कर लेने का था । और गरेज भी इसी इरादे से पैर फैला रहे थे । एक बिल में दो साँप कैसे रहें ? इससे दोनों में घोर कलह उपस्थित हो गया। एक ने दूसरे को अपदस्थ करने की कोशिश आरम्भ कर दी । कूटनीति से काम लिया जाने लगा। जब उससे कामयाबी न हुई तब लड़ाइयाँ तक लड़ी गई । एक कम्पनी दूसरी के पीछे ही पड़ी रही । होते होते गरेजों का प्रभुत्व बढ़ा ? उसने फ्रांस वालों के बल को नष्ट-प्राय कर दिया । पांडीचरी, करीकाल और चन्द्रनगर की जमींदारियों को छोड़कर फ्रेंच लोगों का भारत में कुछ बाकी न रहा । पोचुगीजों के कब्जे में भी समुद्र के किनारे-किनारे सिर्फ दसपाँच मील जमीन रद्द गई । गरेजों ने कहा, "कुछ दर्ज नहीं। इन लोगों के पास इतनी जमींदारी बनी रहने दो ! इससे हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता ।' अब अगरेजों को अपना बल विक्रम और प्रभाव बढ़ाने में रोकने वाला कोई न रहा - फ्रेंच, पोर्चुगीज, डच सब ने उनके लिए रास्ता साफ कर दिया। रेजों की महिमा बढ़ने लगी । व्यापार वृद्धि के साथ साथ राज्य वृद्धि भी होने लगी। एक के बाद दूसरा प्रान्त उनका वारन हेस्टिंग्ज ईस्ट इंडिया कम्पनी के पहले गवर्नर जनरल हुये। उन्होंने सब से पहले भारत वासियों की रीति, रस्म और स्वभाव आदि का ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश की । उस समय भारतवासी बोझा ढोने वाले पशुओं के समान समझे जाते थे। उनके देश में कदम रखना सिर्फ रुपया कमाने के लिये ही जरूरी समझा जाता था । खैर । वारन हेस्टिंग्ज ने कहा कि जिन लोगों से और जिन लोगो के देश से हमें इतना लाभ है उन पर, जहाँ तक हमें कोई हानि न पहुॅचे, अच्छी तरह शासन करना चाहिये । परन्तु सुशासन की योग्यता के लिये भारतवासियों के इतिहास, विश्वास, धर्म, साहित्य आदि का ज्ञान होना जरूरी समझा गया। अतएव वारन हेस्टिंग्ज ने अपने प्रधान कर्मचारियो का ध्यान इस ओर दिलाया और विलियम ज़ोन्स ने पहले पहल संस्कृत सीखना आरम्भ किया । सर विलियम बंगाल की 'सुप्रीम कोर्ट के जज थे। उन्होने एक हज़ार सात सौ चौरासी ईसची में बगाल की एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की और इम लोगों के धर्म-शास्त्र का अध्ययन ग्रारम्भ किया । क्योंकि बिना धर्म-शास्त्र के ज्ञान के भारतवासियों के मुकद्दमो का फैसला करने में गरेज जजों का बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ता था और दत्तक आदि लेने का विषय उपस्थित होने पर वारन वेस्टिंग्ज का पण्डितों की शरण लनी पड़ती थी। सर विलियम जोन्स ने किस तरह संस्कृत सीखी, इस पर एक लेख पहले ही लिखा जा चुका है। इस काम में उन्हें संकड़ों विघ्न बाधायें हुई । पर सच को पार करके सर विलियम ने मतलच भर के लिये संस्कृत का ज्ञान प्राप्त ही कर लिया । फारसी तो वे इंग्लैंड ही से पढ़कर आये थे। संस्कृत उन्होंने यहाँ पढ़ी। पूर्वी देशों की भाषाओं में से यही तीन भाषायें, साहित्य के नाते, उच्च और बड़े काम की समझी जाती हैं । सर विलियम ने पहले मनुस्मृति का अनुवाद किया । यह अनुवाद एक हज़ार सात सौ साठ ईसवी में छपा । इससे बड़ा काम निकला । अगरेज जजों का भारतीय पण्डितों की जो पद-पद पर सहायता दरकार होती थी उसकी जरूरत बहुत कम रह गई । भारतवासियों को अपने धर्मशास्त्र के अनु सार न्याय कराने में तब सुभीता हो गया । इसके बाद संस्कृत नाटकों का नाम सुनकर सर विलियम जोन्स ने नाटकों का पता लगाना आरम्भ किया और शकुन्तला नाटक का पढ़कर उसका अनुवाद गरेजी में किया। इस नाटक ने योरप के विद्यारसिक जनों की आँखें खोल दीं । तब तक योरप वाले भारतवासियों को, जैसा ऊपर कहा जा चुका है निरे जंगली समझते थे। उनका ख्याल था कि भारत में कुछ भी साहित्य नहीं है और जो कुछ है भी वह किसी काम का नहीं । तब तक योरप वालों की दृष्टि में भारतवासी अत्यन्त ही घृणा की दृष्टि से देखे जाते थे । घृणा की दृष्टि से तो वे अब भी देखे जाते हैं, पर औरत में बहुत अन्तर है । तब हम लोगों की गिनती कुछ-कुछ की छाटेनटार, पुशभ्यन और जूलू आदि महासभ्य जातियों में थी और भारत की कुछ कदर यदि की जाती थी तो सिर्फ इसलिए कि उसकी बदौल करोड़ों रुपये विलायत ले जाने को मिलते थे। पर शकुन्तला को पढ़कर उन लोगों का यह भाव एकदम तिरोहित हो गया । शकुन्तला की कविता, उसके पात्रों का चरित्र, उसकी भाव प्रवणता आदि देख । वे लोग मुग्ध हो गये । शकुन्तला के गरेजी अनुवाद के भी अनु. बाद जर्मन और फ्रेंच भाषाओं में हो गये, जिन्हें पढ़कर तत्तद्द शवासियों ने भी उसकी श्रेष्ठता एक स्वर से कबूल की । शकुन्तला वह चीज है जिसकी कृपा से भारतवासी हैवान से इसान समझे जाने लगे-पशु से मनुष्य माने जाने लगे । अतएव भगवान् कालिदास के हम लोग हृदय से ऋणी हैं। शकुन्तला से योरप बालों को मालूम हो गया कि नाट्यविद्या में हिन्दू-सन्तान उन लोगों से यदि बढ़ी हुई नहीं है तो कम भी किसी तरह नहीं । वे यह भी जान गये कि जिस ग्रीक भाषा के साहित्य की श्रेष्ठता के वे लोग इतने कायल हैं, संस्कृत का साहित्य उससे भी किसी-किसी अंश में आगे बढ़ा हुआ है । प्राचीनता में तो संस्कृत साहित्य की बराबरी किसी भी भाषा का साहित्य नहीं कर सकता । शकुन्तला रचना - कौशल को देखकर योरपवालों को जितना कौतूहल हुआ उसके कथानक का विचार करके उससे भी अधिक हुआ । उसके कथानक का सादृश्य उन्हें एक ग्रीक कहानी में मिल गया। और जब उन लोगों ने विक्रमोर्वशी देखी तब उनके कथानक की भी सदृशता उन्हें ग्रीक भाषा की एक कहानी में मिली । इस पर उन लोगों के आश्चर्य की सीमा न रही । वे सोचने लगे कि क्या बात है जो इन अथवा सभ्य भारतवासियों की बातें उन पूज्यतम ग्रीक लोगो की बातों से मिलती हैं। कही दोनों के पुरुषों का किसी समय एकत्र वास तो नहीं रहा ? यह तो साधारण आदमियों की बात हुई । भाषा-शास्त्र के जानने वालों को पुरातत्व वेत्ताओं को तथा पुरानी कथा-कहानियों का ज्ञान रखनेवालों को तो विश्वास - सा हो गया कि इस साम्य का जरूर कोई बहुत बड़ा कारण है । शकुन्तला के पाठ और बंगाले की एशियाटिक सोसायटी की स्थापना से सर विलियम जोन्स के सिवा चार्ल्स विलकिन्स और हेनरी टामस कोलक आदि और भी कई विद्वानों को संस्कृताध्ययन की ओर रुचि हुई। नईनई खोज होने लगी; नई-नई पुस्तकें बनने लगीं । फल यह हुआ कि इन गौरांग पण्डितों को संस्कृत के सैकड़ों शब्द ग्रीक आदि योरप की प्राचीन भाषाओं से प्रायः तद्वत् अथवा कुछ फेरफार के साथ मिल गये । इससे इन लोगों के आश्चर्य, कौतूहल और एक प्रकार के श्रातङ्क का ठिकाना न रहा। अरे इन बहशी हिन्दुस्तानियों की प्राचीन भाषा क्या किसी समय हमारे भी पूर्व पुरुषों की भाषा थी । बस फिर क्या था योरप के कितने ही पण्डित काव्य, नाटक, इतिहास, धर्मशास्त्र आदि का अध्ययन जी लगाकर करने लगे। जर्मनी के वान शेलीजल और वान हम्बौल आदि प्रकाण्ड पण्डितों ने बड़ी ही सरगरमी से संस्कृत सीखना शुरू किया। जब इन लोगों को वेद पढ़ने और समझने की शक्ति हो गई तब इन्होंने अपना अधिक समय वैदिक ग्रन्थों ही के परिशीलन में लगाना आरम्भ किया। इससे उनकी गई । संस्कृत शिक्षा का प्रचार इंगलिस्तान और जर्मनी के सिवा फ्रांस, हालैंड, अमेरिका और रूस तक में होने लगा । वैदिक प्रन्थों को इन विद्वानों ने एक स्वर से दुनिया के सब ग्रन्थों से पुराना माना और उसके सम्बन्ध में नाना प्रकार की चर्चा श्रारम्भ हो गई । तब से आज तक योरप में कितने ही विद्वान् ऐसे हो गये हैं और कितने ही होते जा रहे हैं जिनकी कृपा से संस्कृत साहित्य के नयेनये रत्न हम लोगो को प्राप्त हुए हैं और प्राप्त होते जाते हैं। अंगरेज अधिकारियों ने संस्कृत सीखने की ओर ध्यान तो अपने स्वार्थसाधन के लिए दिया था - उन्होंने तो इसलिए पहले-पहल संस्कृत सीखने की जरूरत समझी थी जिससे हम लोगों की रीति-रस्में आदि जानकर भारत पर बिना बिघ्न-बाधा के शासन कर सकें - पर संस्कृत साहित्य की श्रेष्ठता ने उन लोगों को भी उसका अध्ययन करने के लिए लाचार किया जिनका शासन से क्या, इस देश से भी, कुछ सम्बन्ध न था । यदि योरपवाले संस्कृत की कदर न करते तो हज़ारों नमोल ग्रन्थ यहीं कीड़ों की खुराक हो जाते । जर्मनी, फ्रांस, इंगलैंड आदि के पुस्तकालयों में क्यों वे पहुंचते और क्यों प्रतिवर्ष नये-नये ग्रन्थों का पता लगाया जाता ? ग्राज तक प्योरप के विद्वानों ने जो लभ्य ग्रन्थ प्रकाशित किये हैं, अनेकानेक वैदिक रहस्यों का उद्घाटन किया है, हमारे और अपने पूर्वजों के किसी समय एकत्र एक ही जगह रहने और एक भाषा बोलने के विषय में जो प्रमाणपूर्ण पुस्तकें लिखी है उसके लिए भारतवासी उनके बहुत कृतज्ञ हैं । यदि इमारी देववाणी संस्कृत की महिमा से आकृष्ट होकर योरप के विद्या व्यसनी जन उसका परिशीलन न करते तो भारत में राजा और प्रजा के बीच इस समन जैसा भाव है, शायद वैसा कभी न होता । बहुत सम्भव है, पूर्ववत् हम लोग पशु ही की तरह लाठी से झाँके जाते। अतएव हम लोग अँगरेज कर्मचारी योरप के विद्वान् संस्कृत भाषा र महाकवि कालिदास के बहुत ऋणी हैं। विशेष कर कालिदास ही की बढौलत हमारी सभ्यता और विद्वता का हाल योरप वालों को मालूम हुआ । हमारा धर्म है कि हम कालिदास की पूजा करें और प्रेमपूर्वक संस्कृत सीखे । छः - योरप में विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि हिन्दुस्तान में हजारो लोग ऐसे हैं जिन्होंने अंगरेजी जैसी क्लिष्ट और विदेशी भाषा में बड़े-बड़े गहन ग्रन्थ लिखे हैं, जो अगरेजी के प्रतिष्ठित पत्रों और सामयिक पुस्तकों का बड़ी ही योग्यता से सम्पादन करते हैं, जो अगरेजी में धारा प्रवाह वक्तृता देते हैं और जिन्हें अगरेजी भाषा मातृ भाषा ही सी हो रही है । कितने ही भारतवासियों की लिखी हुई अगरेजी पुस्तकें विलायत तक के पुस्तक प्रकाशक बड़े ही और उत्साह से प्रकाशित करते और लेखकों के हज़ारों रुपया पुरस्कार भी देते हैं । इस देश के कितने ही वक्ताओं की मनोमानी और अविश्रान्त वाग्धारा के प्रवाह ठेठ विलायत की भूमि पर भी सैकड़ों-हज़ारों दफे बहे और भी, समय समय पर, बहा करते हैं। हम लोगों की अगरेज़ी को "बाचू इगलिश" कह कर वृरणा प्रकाशित करने वालो की आँखों के सामने ही ये सब दृश्य हुआ करते हैं । परन्तु आज तक इंग लिस्तान वालों में से ऐसे कितने विद्वान् हुये हैं जिन्होंने हमारी हिन्दी या संस्कृत भाषा में पुस्तकें लिखी हो, अथवा इन भाषाओं में कभी वैसी वक्तृता दी हो जैसी कि बाचु सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी या पंडित मदनमोहन मालवीय देते हैं । ढूँढने से शायद दो ही चार विद्वान ऐसे वाले चाहे संस्कृत में कितने ही व्युत्पन्न क्यों न हों योरप के विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि पचपन जाँय, पर, यदि उसके विषय में भी कुछ कहेंगे तो अपनी ही भाषा में लिखेंगे तो अपनी ही भाषा में, व्याख्यान देंगे तो भी अपनी ही भाषा में । संस्कृत पढ़कर ये लोग अधिकतर भाषा विज्ञान और संस्कृत शास्त्रों के सम्बन्ध ही में लेख और पुस्तकें लिखते हैं। कोई प्राचीन पुस्तकों के अनुवाद करते हैं, कोई वैदिक- साहित्य-सागर में गोता लगा कर नये नये तत्वरत्न ढूँढ निकालते हैं; कोई साहित्य की अन्य शाखाका अध्ययन करके उसकी तुलनामूलक समालोचना करते हैं। परंतुीही मातृभाषा में करते हैं। उन्हें संस्कृत साहित्य से सम्बन्ध रखनेवाली बातें संस्कृत ही में लिखने की आवश्यकता भी नहीं । संस्कृत में लिखने में कितने आदमी उनके लेख और पुस्तकें पढ़ सकें ? बहुत ही कम । और जो पढ़ भी सकें उनमें से भी बहुत ही कम भारतवासी पंडित ऐसी पुस्तकें मोल ले सकें । शायद इसी में योरप के संस्कृतज्ञ संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में अपने विचार प्रकट करने का नहीं करते। यदि कोई यह कहे कि उनमें संस्कृत लिखने का मादा ही नहीं तो उसकी यह बात न मानी जायगी । अभ्यास से क्या नहीं हो सकता ? योरपवाले सैकड़ों काम ऐसे करते हैं जिन्हें देखकर अथवा जिनका वर्णन पढ़कर हम लोगों को करने से अच्छी संस्कृत लिख लेना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं । वह उनके लिये सर्वथा साध्य है । जो लोग भारत आते हैं और यहाँ कुछ समय तक रहते हैं उनके लिए तो यह बात और भी सहल है। इस पर भी कई विद्वान् योरप में ऐसे हो गये हैं और अब भी कई मौजूद है, जिनकी लिखी संस्कृत भाषा देखकर मालूम होता है कि वह उन्हें करतलगत श्रामलकवत् हो रही है। डाक्टर बूलर और निटर्स बिना रुके संस्कृत में बातचीत कर सकते थे । कुछ समय हुआ रूस के एक विद्वान् भारत आये थे वे भी संस्कृत बोल लेते थे। विदेशियों की बोली में यदि कोई विलक्षणता होती है तो उस उच्चारण सम्बन्धनी है। परन्तु इस प्रकार की विलक्षणता स्वाभाविक है । हम लोगों की गरजी भी तो विलक्षणता से खाली नहीं । कोई साठ वर्ष हुए जैम्स रा बालेंटाइन नामक एक विद्वान् बनारस के गवर्नमेंट कालेज में प्रधान अध्यापक थे, वे संस्कृत के थेवी पारसी में भी उनकी गति थी ! संस्कृत व बोल भी सकते थे और लिख भी सकते । संस्कृत भाषा और देवनागिरी लिपि के वे बड़े भारी पक्षपाती थे । वे चाहते थे कि अगरेजी में जो ज्ञान-समृद्ध है उससे भारतवासी लाभ उठावें और संस्कृत में जो कुछ ज्ञेय है उससे श्र गरेजी जाननेवाले लाभ उठाव । इसी से उन्होंने बनारस कालेज के संस्कृत विभाग में पढ़नेवाली को अगरेजी भाषा सीखने का भी प्रबन्ध किया था। अपनी उद्देश्य सिद्धि के लिए उन्होने गवर्नमेंट की आज्ञा से, कुछ उपयोगी पुस्तकें भी प्रकाशित की थीं। उनमें से एक पुस्तक का नाम है- Synopsis of Science उसमें योग्प और भारत के शास्त्रों का सारांश रेज़ी और संस्कृतभाषा में है। चार्लेटाइन साइब की यह पुस्तक देखने लायक है । इस पुस्तक को छपे और प्रकाशित हुये पचास वर्ष से अधिक समय हुआ । इसका दूसरा सस्करण जो हमारे सामने है, मिर्ज़ापुर के आफ्न-स्कूल-प्रस का छपा हुआ है। न्याय, सांख्य, वेदांत, ज्यामिति, रेखागणित बीजगणित, प्राणिशास्त्र, रसायनशास्त्र, समाजशास्त्र, बनस्पतिशास्त्र, कीटपतङ्गशास्त्र, भूगोल विद्या, भूस्तरविद्या, राजनीतिविज्ञान, यहाँ तक कि सम्पत्ति शास्त्र तक के सिद्धान्तों का इसमें वर्णन है । पुस्तक दो भागों में विभक्त है। प्रथमाद्ध में पूर्वोक्त शास्त्रों का सारांश, अगरेज़ी में दिया गया है, और उत्तरार्द्ध में संस्कृत । गौतमीय न्यायशास्त्र के आधार पर साध्य की सिद्धि की गई है योरप के विद्वानों के संस्कृत लेख और देव-नागरी लिपि सत्तावन योरप और भारत के शास्त्रीय सिद्धांतों में जहाँ-जहाँ विरोध है वहाँवहाँ योग्यतापूर्वक वह विरोध स्पष्ट करके दिखलाया गया है। परन्तु किसी के मत सिद्धान्त या विवेचन पर कटाक्ष नहीं किया गया। एक उदाहरण लीजिये । गौतम-सूत्रों के आधार पर बालेंटाइन साहब ने एक जगह पवर्ग, अर्थात् मोक्ष की व्याख्या कर के यह लिखापुनदुःखात्पत्तिर्यथा न स्यात् विमोक्षो विध्वंसः तथा च पुनदुखोत्पत्तिप्रतिबन्धको दुखध्वंसः परमपुरुपार्थस्तत्वज्ञानेन प्राप्तव्य इति गौतममतम ।" इसकेगेही पर्थात् के तत्वज्ञानियों के मत का इस प्रकार निदर्शन किया"अम्मन्मतं तु नैवंविधदुःखध्वसमात्र परमपुरुषार्थः । तस्याभावरूपतया तुच्छत्वेन स्वतो मनोहरत्वाभावात् । किन्तु परमपुरुषार्थे दुःखध्वसादन्यत् किमपि स्पृहणीयमस्ति । यद्वा तद्वा तदस्तु, तत् सर्वथा सर्वज्ञस्य परमदयालोः परमेश्वरस्यैव प्रसादेन तद्भक्तः प्राप्यमस्तीति । इसी तरह बरावर ग्राप जहाँ जहाँ आवश्यकता थी, अपना मत देते गये हैं। पर कहीं भी अनुचित प्रक्षेप किसी धर्म्म, मत या सिद्धान्त पर नहीं किया । बालेंटाइन साइब की पूर्वोक्त पुस्तक के आरम्भ में जो उपोद्घात, अँगरेज़ी में है उसमें कितनी ही ज्ञातव्य बात का समावेश किया है । उसमें आपके उदारतापूर्ण विचारों की बड़ी ही भरमार है। तत्वज्ञान को सब ज्ञानों से श्रेष्ठ समझ कर पहले उसी का विचार किया है । पुस्तक के उत्तरार्द्ध के आरम्भ में आपकी लिखी हुई एक छोटी सी भूमिका, संस्कृत में भी है। उससे भी आपके हृदय के औदार्य का सोता सा बह रहा है। उसका कुछ अंश हम नीचे उद्धृत करते हैं.
बिहार और नेपाल के बोर्डर पर एक शहर बसा है रक्सौल। यह बिहार में पड़ता है। वहीं से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल आने वाली ट्रेन 14007, सद्भावना एक्सप्रेस आज पांच घंटे से भी ज्यादा देरी से चल रही है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा से आसनसोल, मधुपुर, जसीडीह, किउल, मोकामा, पटना, बक्सर, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली 12303, पूर्वा एक्सप्रेस आज करीब ढाई घंटे की देरी से चल रही है। छत्तीसढ़ के रायगढ़ से चांपा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, नागपुर, इटारसी, भोपाल, विदिशा, बीना, ललितपुर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा होते हुए हजरत निजामुद्दीन आने वाली 12409, गोंडवाना एक्सप्रेस, आज करीब चार घंटे 50 मिनट की देरी से चल रही है। इसी तरह बरौनी से चल कर नई दिल्ली आने वाली 02563, क्लोन स्पेशल आज 3. 25 घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच रही है। यह जानकारी सुबह साढ़े सात बजे तक की है। यदि कोहरे की स्थिति में बदलाव हुआ तो ट्रेन के लेट होने का समय घट-बढ़ भी सकता है। बिहार के गया से सासाराम, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन या मुगलसराय होते हुए नई दिल्ली आने वाली 12397 महाबोधि एक्सप्रेस आज 3. 10 घंटे की देरी से चल रही है। बिहार के दरभंगा से समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा, गोरखपुर, ऐशबाग, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली 02569 क्लोन स्पेशल एक्सप्रेस आज 3. 10 घंटे की देरी से गंतव्य तक पहुंची है। बनारस से नई दिल्ली आने वाली 15127 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस आज 2. 32 घंटे की देरी से चल रही है। उत्तर प्रदेश में अयोध्या कैंट से बाराबंकी, लखनऊ, सहारनपुर होते हुए दिल्ली आने वाली 14205 एक्सप्रेस आज सिर्फ 1. 20 घंट की देरी से दिल्ली पहुंच रही है। बिहार के भागलपुर से जमालपुर, किउल, मोकामा, पटना, आरा, बक्सर, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली 12367, विक्रमशिला एक्सप्रेस आज राइट टाइम आनंद विहार टर्मिनल इन कर गई है। बिहार के राजगीर से वहां की राजधानी पटना से वाराणसी, लखनऊ होते हुए नई दिल्ली आने वाली 12391, श्रमजीवि एक्सप्रेस आज तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन आने वाली 22181, जबलपुर निजामुद्दीन एक्सप्रेस आज 4. 12 घंटे लेट चल रही है। इसी तरह ओडिशा के पुरी से भुवनेश्वर, टाटानगर, गोमो, गया, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली 12801, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस आज दो घंटे की देरी से चल रही है। पश्चिम बंगाल के मालदह टाउन से साहेबगंज, भागलपुर, जमालपुर, पटना, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, वाराणसी, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली आने वाली 13483, फरक्का एक्सप्रेस आज महज 53 मिनट की देरी से दिल्ली पहुंच गई। असम के कमाख्या से न्यू जलपाईगुड़ी, किशनगंज, माल्दा टाउन, साहेबगंज, भागलपुर, जमालपुर, पटना, मुगलसराय, कानपुर होते हुए दिल्ली आने वाली ब्रह्मपुत्र मेल आज 3. 10 घंटे की देरी से चलने की सूचना है। विशाखापत्तनम से नई दिल्ली आने वाली 20805 आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस 01. 07 घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच गई है। बेगलुरु से हजरत निजामुद्दीन आने वाली 22691 राजधानी एक्सप्रेस दो घंटे की देरी से चल रही है। गाजीपुर सिटी से आनंद विहार टर्मिनल आने वाली 22433, सुहेलदेव एक्सप्रेस आज डेढ़ घंटे देरी से चल रही है।
बिहार और नेपाल के बोर्डर पर एक शहर बसा है रक्सौल। यह बिहार में पड़ता है। वहीं से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल आने वाली ट्रेन चौदह हज़ार सात, सद्भावना एक्सप्रेस आज पांच घंटे से भी ज्यादा देरी से चल रही है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा से आसनसोल, मधुपुर, जसीडीह, किउल, मोकामा, पटना, बक्सर, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली बारह हज़ार तीन सौ तीन, पूर्वा एक्सप्रेस आज करीब ढाई घंटे की देरी से चल रही है। छत्तीसढ़ के रायगढ़ से चांपा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, नागपुर, इटारसी, भोपाल, विदिशा, बीना, ललितपुर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा होते हुए हजरत निजामुद्दीन आने वाली बारह हज़ार चार सौ नौ, गोंडवाना एक्सप्रेस, आज करीब चार घंटे पचास मिनट की देरी से चल रही है। इसी तरह बरौनी से चल कर नई दिल्ली आने वाली दो हज़ार पाँच सौ तिरेसठ, क्लोन स्पेशल आज तीन. पच्चीस घंटाटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच रही है। यह जानकारी सुबह साढ़े सात बजे तक की है। यदि कोहरे की स्थिति में बदलाव हुआ तो ट्रेन के लेट होने का समय घट-बढ़ भी सकता है। बिहार के गया से सासाराम, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन या मुगलसराय होते हुए नई दिल्ली आने वाली बारह हज़ार तीन सौ सत्तानवे महाबोधि एक्सप्रेस आज तीन. दस घंटाटे की देरी से चल रही है। बिहार के दरभंगा से समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा, गोरखपुर, ऐशबाग, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली दो हज़ार पाँच सौ उनहत्तर क्लोन स्पेशल एक्सप्रेस आज तीन. दस घंटाटे की देरी से गंतव्य तक पहुंची है। बनारस से नई दिल्ली आने वाली पंद्रह हज़ार एक सौ सत्ताईस काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस आज दो. बत्तीस घंटाटे की देरी से चल रही है। उत्तर प्रदेश में अयोध्या कैंट से बाराबंकी, लखनऊ, सहारनपुर होते हुए दिल्ली आने वाली चौदह हज़ार दो सौ पाँच एक्सप्रेस आज सिर्फ एक. बीस घंटाट की देरी से दिल्ली पहुंच रही है। बिहार के भागलपुर से जमालपुर, किउल, मोकामा, पटना, आरा, बक्सर, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली बारह हज़ार तीन सौ सरसठ, विक्रमशिला एक्सप्रेस आज राइट टाइम आनंद विहार टर्मिनल इन कर गई है। बिहार के राजगीर से वहां की राजधानी पटना से वाराणसी, लखनऊ होते हुए नई दिल्ली आने वाली बारह हज़ार तीन सौ इक्यानवे, श्रमजीवि एक्सप्रेस आज तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन आने वाली बाईस हज़ार एक सौ इक्यासी, जबलपुर निजामुद्दीन एक्सप्रेस आज चार. बारह घंटाटे लेट चल रही है। इसी तरह ओडिशा के पुरी से भुवनेश्वर, टाटानगर, गोमो, गया, मुगलसराय, कानपुर होते हुए नई दिल्ली आने वाली बारह हज़ार आठ सौ एक, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस आज दो घंटे की देरी से चल रही है। पश्चिम बंगाल के मालदह टाउन से साहेबगंज, भागलपुर, जमालपुर, पटना, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, वाराणसी, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली आने वाली तेरह हज़ार चार सौ तिरासी, फरक्का एक्सप्रेस आज महज तिरेपन मिनट की देरी से दिल्ली पहुंच गई। असम के कमाख्या से न्यू जलपाईगुड़ी, किशनगंज, माल्दा टाउन, साहेबगंज, भागलपुर, जमालपुर, पटना, मुगलसराय, कानपुर होते हुए दिल्ली आने वाली ब्रह्मपुत्र मेल आज तीन. दस घंटाटे की देरी से चलने की सूचना है। विशाखापत्तनम से नई दिल्ली आने वाली बीस हज़ार आठ सौ पाँच आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस एक. सात घंटाटे की देरी से नई दिल्ली पहुंच गई है। बेगलुरु से हजरत निजामुद्दीन आने वाली बाईस हज़ार छः सौ इक्यानवे राजधानी एक्सप्रेस दो घंटे की देरी से चल रही है। गाजीपुर सिटी से आनंद विहार टर्मिनल आने वाली बाईस हज़ार चार सौ तैंतीस, सुहेलदेव एक्सप्रेस आज डेढ़ घंटे देरी से चल रही है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Pure and Impure Spices : खाने में स्वाद का तड़का लगाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के मसालों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं कुछ मसालों का उपयोग रोजमर्रा की कुकिंग में कॉमन होता है. मगर क्या आप जानते हैं कि असली मसालों के नाम पर मार्केट में नकली मसाले (Impure masale) भी बेचे जाते हैं. ऐसे में कहीं आप मसालों की शक्ल में रेत और भूसा तो नहीं खा रहे हैं. हालांकि कुछ आसान तरीकों से आप असली और नकली मसालों की पहचान कर सकते हैं. मार्केट में मसालों की बढ़ती डिमांड के चलते इनमें भी मिलावट होने लगी है. ऐसे में कई लोग मसालों के नाम पर ग्राहकों को डाई, बुरादा, चोकर और भूसे जैसी चीजें मिक्स करके बेचने लगे हैं. इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं रोजमर्रा के कुछ मसालों को पहचानने के टिप्स, जिसकी मदद से आप मिनटों में मसाले की शुद्धता परख सकते हैं. लाल मिर्च पाउडर में कई लोग डाई कलर, पिसी लाल ईंट और कबेलू को बारीक पीसकर मिला देते हैं. जिसे खाने से आपके पेट में पथरी जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. लाल मिर्च का प्योरिटी टेस्ट करने के लिए इसे पानी में डाल दें. ऐसे में असली लाल मिर्च पानी पर तैरने लगेगी. तो वहीं नकली लाल मिर्च तुरंत डूब जाएगी. औषधीय तत्वों से भरपूर हल्दी का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. मगर कुछ लोग हल्दी में मेटानिल येलो कैमिकल मिला देते हैं. ऐसे में हल्दी की शुद्धता का पता लगाने के लिए हल्दी पाउडर में हल्का सा हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिक्स करें. अब इस मिक्सचर को पानी में डाल दें. ऐसे में नकली हल्दी का रंग गुलाबी, नीला और बैंगनी हो जाएगा. धनिया पाउडर में ज्यादातर व्यापारी आटे की भूसी, पशुओं का भूसा और खरपतवार पीसकर मिला देते हैं. ऐसे में आप धनिया को सूंघ कर असली और नकली का पता लगा सकते हैं. असली धनिया की महक काफी तेज होती है. तो वहीं नकली धनिया से जंगली पौधों की खुशबू आने लगती है. मार्केट में कई लोग दालचीनी की जगह पर अमरूद के पेड़ की छाल बेच देते हैं. ऐसे में दालचीनी को हाथ पर रगड़कर आप असली दालचीनी का पता लगा सकते हैं. असली दालचीनी रगड़ने से हाथ पर लाल या भूरे रंग का निशान बन जाएगा. वहीं नकली दालचीनी से त्वचा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. काली मिर्च को पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है. मगर कुछ लोग काली मिर्च की जगह पर पपीते के बीज सुखाकर बेच देते हैं. ऐसे में आप पानी की मदद से काली मिर्च की शुद्धता जांच सकते हैं. पानी में डालने पर जहां असली काली मिर्च डूब जाती है तो वहीं नकली काली मिर्च पानी पर तैरने लगती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें. ) .
Pure and Impure Spices : खाने में स्वाद का तड़का लगाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के मसालों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं कुछ मसालों का उपयोग रोजमर्रा की कुकिंग में कॉमन होता है. मगर क्या आप जानते हैं कि असली मसालों के नाम पर मार्केट में नकली मसाले भी बेचे जाते हैं. ऐसे में कहीं आप मसालों की शक्ल में रेत और भूसा तो नहीं खा रहे हैं. हालांकि कुछ आसान तरीकों से आप असली और नकली मसालों की पहचान कर सकते हैं. मार्केट में मसालों की बढ़ती डिमांड के चलते इनमें भी मिलावट होने लगी है. ऐसे में कई लोग मसालों के नाम पर ग्राहकों को डाई, बुरादा, चोकर और भूसे जैसी चीजें मिक्स करके बेचने लगे हैं. इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं रोजमर्रा के कुछ मसालों को पहचानने के टिप्स, जिसकी मदद से आप मिनटों में मसाले की शुद्धता परख सकते हैं. लाल मिर्च पाउडर में कई लोग डाई कलर, पिसी लाल ईंट और कबेलू को बारीक पीसकर मिला देते हैं. जिसे खाने से आपके पेट में पथरी जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. लाल मिर्च का प्योरिटी टेस्ट करने के लिए इसे पानी में डाल दें. ऐसे में असली लाल मिर्च पानी पर तैरने लगेगी. तो वहीं नकली लाल मिर्च तुरंत डूब जाएगी. औषधीय तत्वों से भरपूर हल्दी का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. मगर कुछ लोग हल्दी में मेटानिल येलो कैमिकल मिला देते हैं. ऐसे में हल्दी की शुद्धता का पता लगाने के लिए हल्दी पाउडर में हल्का सा हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिक्स करें. अब इस मिक्सचर को पानी में डाल दें. ऐसे में नकली हल्दी का रंग गुलाबी, नीला और बैंगनी हो जाएगा. धनिया पाउडर में ज्यादातर व्यापारी आटे की भूसी, पशुओं का भूसा और खरपतवार पीसकर मिला देते हैं. ऐसे में आप धनिया को सूंघ कर असली और नकली का पता लगा सकते हैं. असली धनिया की महक काफी तेज होती है. तो वहीं नकली धनिया से जंगली पौधों की खुशबू आने लगती है. मार्केट में कई लोग दालचीनी की जगह पर अमरूद के पेड़ की छाल बेच देते हैं. ऐसे में दालचीनी को हाथ पर रगड़कर आप असली दालचीनी का पता लगा सकते हैं. असली दालचीनी रगड़ने से हाथ पर लाल या भूरे रंग का निशान बन जाएगा. वहीं नकली दालचीनी से त्वचा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. काली मिर्च को पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है. मगर कुछ लोग काली मिर्च की जगह पर पपीते के बीज सुखाकर बेच देते हैं. ऐसे में आप पानी की मदद से काली मिर्च की शुद्धता जांच सकते हैं. पानी में डालने पर जहां असली काली मिर्च डूब जाती है तो वहीं नकली काली मिर्च पानी पर तैरने लगती है. .
Rajasthan Highcourt News: राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि जुलाई, 2017 में जीएसटी लागू कर दिया गया तो अब तक जोधपुर और जयपुर में जीएसटी अधिकरण का गठन क्यों नहीं किया गया है. Rajasthan Highcourt News: राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि जुलाई, 2017 में जीएसटी लागू कर दिया गया तो अब तक जोधपुर और जयपुर में जीएसटी अधिकरण का गठन क्यों नहीं किया गया है. इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार के एएसजी आरडी रस्तोगी से यह बताने को कहा है कि अधिकरण में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कब तक पूरी कर ली जाएगी. सीजे एजी मसीह और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश मैसर्स श्री कृष्णा रोलिंग मिल्स की याचिका पर दिए. याचिका में बताया गया कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया, लेकिन प्रदेश में अब तक केंद्र व राज्य सरकार की ओर से जीएसटी अधिकरण स्थापित नहीं किया गया है. इसके चलते याचिकाकर्ता जीएसटी से जुडे मामलों में अपील दायर नहीं कर पा रहे हैं. इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने जोधपुर व जयपुर में जीएसटी अधिकरण के गठन का प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है और उसके अनुसार ही अधिकरण गठित होगा. वहीं एएसजी की ओर से अदालत को बताया कि जीएसटी काउंसिल की मीटिंग 11 जुलाई 2023 को हुई थी और उसमें निर्णय लिया था कि भारत सरकार 1 अगस्त 2023 को अधिकरण के गठन के संबंध में नोटिफिकेशन जारी करेगी. वहीं केन्द्र सरकार की ओर से मामले में शपथ पत्र पेश करने के लिए समय मांगा गया। जिस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 7 अगस्त को तय की है.
Rajasthan Highcourt News: राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि जुलाई, दो हज़ार सत्रह में जीएसटी लागू कर दिया गया तो अब तक जोधपुर और जयपुर में जीएसटी अधिकरण का गठन क्यों नहीं किया गया है. Rajasthan Highcourt News: राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि जुलाई, दो हज़ार सत्रह में जीएसटी लागू कर दिया गया तो अब तक जोधपुर और जयपुर में जीएसटी अधिकरण का गठन क्यों नहीं किया गया है. इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार के एएसजी आरडी रस्तोगी से यह बताने को कहा है कि अधिकरण में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कब तक पूरी कर ली जाएगी. सीजे एजी मसीह और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश मैसर्स श्री कृष्णा रोलिंग मिल्स की याचिका पर दिए. याचिका में बताया गया कि एक जुलाई दो हज़ार सत्रह को जीएसटी लागू किया गया, लेकिन प्रदेश में अब तक केंद्र व राज्य सरकार की ओर से जीएसटी अधिकरण स्थापित नहीं किया गया है. इसके चलते याचिकाकर्ता जीएसटी से जुडे मामलों में अपील दायर नहीं कर पा रहे हैं. इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने जोधपुर व जयपुर में जीएसटी अधिकरण के गठन का प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा जा चुका है और उसके अनुसार ही अधिकरण गठित होगा. वहीं एएसजी की ओर से अदालत को बताया कि जीएसटी काउंसिल की मीटिंग ग्यारह जुलाई दो हज़ार तेईस को हुई थी और उसमें निर्णय लिया था कि भारत सरकार एक अगस्त दो हज़ार तेईस को अधिकरण के गठन के संबंध में नोटिफिकेशन जारी करेगी. वहीं केन्द्र सरकार की ओर से मामले में शपथ पत्र पेश करने के लिए समय मांगा गया। जिस पर अदालत ने मामले की सुनवाई सात अगस्त को तय की है.
हिमाचल प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में शुक्रवार को पुरानी पेंशन योजना को बहाल किए जाने के फैसले की खुशी में एनपीएस कर्मचारी संगठन निरमंड खंड ने निरमंड बस स्टैंड पर ओपीएस जिंदाबाद के नारे लगाते हुए लोगों के मध्य लड्डू बांट कर अपनी खुशी का इज़हार करते हुए हिमाचल प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार का आभार जताया। इस अवसर पर एनपीएस कर्मचारी एसोसिएशन खंड निरमंड के अध्यक्ष कुलदीप राजपूत ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने 20 वर्षों के बाद कर्मचारियों के बुढ़ापे के स्वाभिमान को वापिस दिलाकर प्रदेश सरकार के कर्मचारी हितेषी होने का प्रमाण दिया है। इस अवसर पर एनपीएस कर्मचारी संघ निरमंड खंड इकाई के उपाध्यक्ष तरुण कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष भगत आज़ाद, जि़ला मुख्य सलाहकार दिनेश शर्मा, सह सचिव विजेश जोशी, उपाध्यक्ष नंदलाल, पवन शर्मा कुलदीप वर्मा, मंगत राम, महेंद्र पाल, नवल किशोर (सहायक अभियंता) जल शक्ति विभाग, डोला राम शर्मा, अरुण विमल, करण विमल, मनमोहन ठाकुर, चिंतामणि शर्मा, नील राठौर, दौलत राम सहित विभिन्न विभागों के अन्य दर्जनों कर्मचारी उपस्थित रहे जिन्होंने एक स्वर से प्रदेश सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार का आभार व्यक्त किया। टीम, आनी-रामपुर। समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही सेवा भारती की जिला ईकाई रामपुर टीम ने रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा की अध्यक्षता में आनी खंड की तलूणा पंचायत के गांव ओलवा का दौरा किया और यहां क्षेत्र के 25 गरीब परिवारों को सेवा भारती संस्था की ओर से नकद राशि के साथ कंबल, शाल व पट्टू भेंट किए। संस्था ने इस मौके पर ओलवा गांव के तलिनिधार में अग्निकांड से बेघर हुए श्याम दास के परिवार को भी दस हजार रुपए की आर्थिक सहायता के साथ कंबल, शाल और पट्टू भेंट किए। सेवा भारती के रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा ने आगजनी की घटना पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए अग्निकांड प्रभावित श्याम दास के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा के साथ सेवा भारती जिला रामपुर ईकाई अध्यक्ष उमा दत्त भारद्वाज, उपाध्यक्ष राज चौधरी, सरोज शर्मा, महासचिव यशपाल शर्मा और संगठन सचिव त्रिलोक शामिल हुए। आनी। युवा सेवा एवं खेल विभाग जिला कुल्लू के तत्वधान में विकासखंड निरमंड की ग्राम पंचायत जुआगी के नेहरू युवा मंडल धाराबाग में राष्ट्रीय युवा दिवस एवं युवा सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उपलक्ष पर स्वामी विवेकानंद जी को माला अर्पण और उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान लोकगीत और लोकनृत्य प्रतियोगिता करवाई गई। सभी प्रतिभागियों को विभाग के माध्यम से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर वार्ड सदस्य संतोष कुमार, युवा मंडल सचिव राजकुमार, कोषाध्यक्ष संजीव उपस्थित रहे। खेल युवा स्वयंसेवी लता मेहरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सभी प्रतिभागियों को विभाग की योजनाओं के बारे में बताया।
हिमाचल प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में शुक्रवार को पुरानी पेंशन योजना को बहाल किए जाने के फैसले की खुशी में एनपीएस कर्मचारी संगठन निरमंड खंड ने निरमंड बस स्टैंड पर ओपीएस जिंदाबाद के नारे लगाते हुए लोगों के मध्य लड्डू बांट कर अपनी खुशी का इज़हार करते हुए हिमाचल प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार का आभार जताया। इस अवसर पर एनपीएस कर्मचारी एसोसिएशन खंड निरमंड के अध्यक्ष कुलदीप राजपूत ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बीस वर्षों के बाद कर्मचारियों के बुढ़ापे के स्वाभिमान को वापिस दिलाकर प्रदेश सरकार के कर्मचारी हितेषी होने का प्रमाण दिया है। इस अवसर पर एनपीएस कर्मचारी संघ निरमंड खंड इकाई के उपाध्यक्ष तरुण कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष भगत आज़ाद, जि़ला मुख्य सलाहकार दिनेश शर्मा, सह सचिव विजेश जोशी, उपाध्यक्ष नंदलाल, पवन शर्मा कुलदीप वर्मा, मंगत राम, महेंद्र पाल, नवल किशोर जल शक्ति विभाग, डोला राम शर्मा, अरुण विमल, करण विमल, मनमोहन ठाकुर, चिंतामणि शर्मा, नील राठौर, दौलत राम सहित विभिन्न विभागों के अन्य दर्जनों कर्मचारी उपस्थित रहे जिन्होंने एक स्वर से प्रदेश सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए प्रदेश की नव गठित कांग्रेस सरकार का आभार व्यक्त किया। टीम, आनी-रामपुर। समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही सेवा भारती की जिला ईकाई रामपुर टीम ने रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा की अध्यक्षता में आनी खंड की तलूणा पंचायत के गांव ओलवा का दौरा किया और यहां क्षेत्र के पच्चीस गरीब परिवारों को सेवा भारती संस्था की ओर से नकद राशि के साथ कंबल, शाल व पट्टू भेंट किए। संस्था ने इस मौके पर ओलवा गांव के तलिनिधार में अग्निकांड से बेघर हुए श्याम दास के परिवार को भी दस हजार रुपए की आर्थिक सहायता के साथ कंबल, शाल और पट्टू भेंट किए। सेवा भारती के रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा ने आगजनी की घटना पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए अग्निकांड प्रभावित श्याम दास के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर रामपुर विभाग प्रमुख एवं शिक्षा आयाम प्रांत प्रमुख डा. मुकेश शर्मा के साथ सेवा भारती जिला रामपुर ईकाई अध्यक्ष उमा दत्त भारद्वाज, उपाध्यक्ष राज चौधरी, सरोज शर्मा, महासचिव यशपाल शर्मा और संगठन सचिव त्रिलोक शामिल हुए। आनी। युवा सेवा एवं खेल विभाग जिला कुल्लू के तत्वधान में विकासखंड निरमंड की ग्राम पंचायत जुआगी के नेहरू युवा मंडल धाराबाग में राष्ट्रीय युवा दिवस एवं युवा सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उपलक्ष पर स्वामी विवेकानंद जी को माला अर्पण और उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान लोकगीत और लोकनृत्य प्रतियोगिता करवाई गई। सभी प्रतिभागियों को विभाग के माध्यम से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर वार्ड सदस्य संतोष कुमार, युवा मंडल सचिव राजकुमार, कोषाध्यक्ष संजीव उपस्थित रहे। खेल युवा स्वयंसेवी लता मेहरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सभी प्रतिभागियों को विभाग की योजनाओं के बारे में बताया।
डोनाल्ड ट्रंप ने जब से अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभाला है तब से उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिसने पूरे विश्व को चौंका दिया है। ऐसा ही एक और निर्णय लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से सुर्खियां बटोरी है। इस बार उन्होंने अपना व्यक्तिगत फोन नंबर दुनिया के अनेक नेताओं से साझा किया है और उनसे कहा है कि वे सीधे उनसे बात कर सकते हैं। हालांकि सुनने में यह एक आम सी बात लगती है क्योंकि दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं का आपस में फोन पर बात करना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन किसी बड़े देश के राष्ट्रपति का ऐसे खुलेआम अपना मोबाइल नंबर बांटना राजनयिक प्रोटोकाल का उल्लंघन है। ट्रंप के इस कदम से अमेरिका के कमांडर इन चीफ के मन में सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं पैदा हो रही हैं। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा और विदेशी नेताओं के साथ बातचीत की गोपनीयता को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों ने बताया है कि अभी तक ट्रंप के इस ऑफर का लाभ कनाडा के प्रधानमंत्री ने ही उठाया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो ने ट्रंप की इस पेशकश का लाभ उठाया है और प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे कॉल किया है। ट्रंप ने कनाडा के अलावा मैक्सिको और फ्रांस के नए और युवा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मोबाइल नंबर की अदला-बदली की है। हालांकि इमैनुएल मैक्रों से ट्रंप ने एक महीने पहले ही अपना नंबर साझा कर लिया था। इमैनुएल के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी, तभी दोनों ने एक-दूसरे का मोबाइल नंबर लिया। हालांकि अभी तक ट्रंप के इस कदम पर इमैनुएल का रुख साफ नहीं हो पाया है कि वो ट्रंप से प्रोटोकॉल तोड़कर फोन पर बात करने के इच्छुक हैं या नहीं?
डोनाल्ड ट्रंप ने जब से अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभाला है तब से उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिसने पूरे विश्व को चौंका दिया है। ऐसा ही एक और निर्णय लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से सुर्खियां बटोरी है। इस बार उन्होंने अपना व्यक्तिगत फोन नंबर दुनिया के अनेक नेताओं से साझा किया है और उनसे कहा है कि वे सीधे उनसे बात कर सकते हैं। हालांकि सुनने में यह एक आम सी बात लगती है क्योंकि दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं का आपस में फोन पर बात करना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन किसी बड़े देश के राष्ट्रपति का ऐसे खुलेआम अपना मोबाइल नंबर बांटना राजनयिक प्रोटोकाल का उल्लंघन है। ट्रंप के इस कदम से अमेरिका के कमांडर इन चीफ के मन में सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं पैदा हो रही हैं। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा और विदेशी नेताओं के साथ बातचीत की गोपनीयता को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों ने बताया है कि अभी तक ट्रंप के इस ऑफर का लाभ कनाडा के प्रधानमंत्री ने ही उठाया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो ने ट्रंप की इस पेशकश का लाभ उठाया है और प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे कॉल किया है। ट्रंप ने कनाडा के अलावा मैक्सिको और फ्रांस के नए और युवा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मोबाइल नंबर की अदला-बदली की है। हालांकि इमैनुएल मैक्रों से ट्रंप ने एक महीने पहले ही अपना नंबर साझा कर लिया था। इमैनुएल के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी, तभी दोनों ने एक-दूसरे का मोबाइल नंबर लिया। हालांकि अभी तक ट्रंप के इस कदम पर इमैनुएल का रुख साफ नहीं हो पाया है कि वो ट्रंप से प्रोटोकॉल तोड़कर फोन पर बात करने के इच्छुक हैं या नहीं?
मंडी अटेली,4जून,2020: अटेली नगरपलिका प्रधान व उप प्रधान के चुनाव में गुरूवार को मीडिया कर्मियों को कवरेज करने से रोक दिया गया। जिससे नाराज मिडिया कर्मी नगरपालिका परिसर के सामने धरना दें दिया। मौके पर पहुंचे एडीसी मुनेश नागपाल ने मीडिया कर्मियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मीडिया कमी जिला उपायुक्त को बुलाने की बात कहीं। पत्रकारों ने एसडीएम का तबादला की मांग रखी। जिला उपायुक्त जगदीश शर्मा मौके पर पहुंचकर कहा कि जो आज मिडिया कर्मियों को रोका गया है इसकी जिम्मेवारी वे स्वयं पर लेते है। गलती का सुधार किया जाएगा। आगे से इस प्रकार की गलती न हो इसको ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद मीडिया कर्मियों ने धरना समाप्त किया। धरने में नारनौल रामचंद्र सैनी, सतीश सैनी, हिमांशू, अशोक कौशिक, मनोज गोस्वामी कनीना से विजय दीक्षित, रामपाल फौजी, गुलशन, अशोक यादव, सुभाष दूदरर्शी, आंनद शर्मा, पंकज, जितेन्द्र सोलंकी, विनोद शर्मा, अनिल जांगिड़ मनोज आदि पत्रकार उपस्थित रहे। ( बी. एल. वर्मा ):
मंडी अटेली,चारजून,दो हज़ार बीस: अटेली नगरपलिका प्रधान व उप प्रधान के चुनाव में गुरूवार को मीडिया कर्मियों को कवरेज करने से रोक दिया गया। जिससे नाराज मिडिया कर्मी नगरपालिका परिसर के सामने धरना दें दिया। मौके पर पहुंचे एडीसी मुनेश नागपाल ने मीडिया कर्मियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मीडिया कमी जिला उपायुक्त को बुलाने की बात कहीं। पत्रकारों ने एसडीएम का तबादला की मांग रखी। जिला उपायुक्त जगदीश शर्मा मौके पर पहुंचकर कहा कि जो आज मिडिया कर्मियों को रोका गया है इसकी जिम्मेवारी वे स्वयं पर लेते है। गलती का सुधार किया जाएगा। आगे से इस प्रकार की गलती न हो इसको ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद मीडिया कर्मियों ने धरना समाप्त किया। धरने में नारनौल रामचंद्र सैनी, सतीश सैनी, हिमांशू, अशोक कौशिक, मनोज गोस्वामी कनीना से विजय दीक्षित, रामपाल फौजी, गुलशन, अशोक यादव, सुभाष दूदरर्शी, आंनद शर्मा, पंकज, जितेन्द्र सोलंकी, विनोद शर्मा, अनिल जांगिड़ मनोज आदि पत्रकार उपस्थित रहे। :
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को तमिलनाडु के तंजावुर में तीन स्थानों पर छापे मार कार्रवाई की। NIA ने अब्दुल खादर के आवासों पर तलाशी ली। अब्दुल खादर के सुरागों के आधार पर एक दोपहिया मैकेनिक अहमद और 2021 में कथित तौर पर खिलाफत आंदोलन का हिस्सा होने के लिए गिरफ्तार मन्नई बाबा के घर तलाशी ली गई। तलाशी कम से कम पांच घंटे तक चली। फिलहाल आगे की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, अब्दुल खादर और मन्नई बाबा दोनों पर सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए की छापेमारी के तुरंत बाद खादर और अहमद के आवास के बाहर एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और शीर्ष एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस कथित तौर पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानों पर पहुंच गई थी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दोनों आरोपियों के आधार कार्ड और मोबाइल फोन एनआईए ने जब्त कर लिए हैं। विशेष रूप से, सितंबर 2021 को, NIA ने भारत में इस्लामिक स्टेट या खिलाफत आंदोलन की स्थापना के लिए कट्टरपंथी संगठन 'हिज़्ब-उत-तहरीर' के नाम पर साजिश के आरोप में मदुरै के मोहम्मद इकबाल और अन्य लोगों के साथ मदुरै के मन्नई बाबा को गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने देश की संप्रभुता के खिलाफ जाने वाले पोस्ट फैलाकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई प्रोफाइल बनाकर साजिश रची थी। कथित तौर पर बंद दरवाजे की बैठक तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की गई जिसमें इरोड, सलेम, मदुरै और तंजावुर जैसे जिले शामिल हैं। खिलाफत आंदोलन क्या है' मूल खिलाफत आंदोलन 1919 में ब्रिटिश राज के दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय के बीच एकता के प्रतीक के रूप में तुर्क खलीफा को उबारने के प्रयास में उभरा। आंदोलन के नेताओं ने खिलाफत आंदोलन के लिए समर्थन प्राप्त करने के बदले में भारतीय स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के साथ हाथ मिलाया था। हालांकि, 1924 में खिलाफत के उन्मूलन के बाद आंदोलन टूट गया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शनिवार को तमिलनाडु के तंजावुर में तीन स्थानों पर छापे मार कार्रवाई की। NIA ने अब्दुल खादर के आवासों पर तलाशी ली। अब्दुल खादर के सुरागों के आधार पर एक दोपहिया मैकेनिक अहमद और दो हज़ार इक्कीस में कथित तौर पर खिलाफत आंदोलन का हिस्सा होने के लिए गिरफ्तार मन्नई बाबा के घर तलाशी ली गई। तलाशी कम से कम पांच घंटे तक चली। फिलहाल आगे की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, अब्दुल खादर और मन्नई बाबा दोनों पर सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए की छापेमारी के तुरंत बाद खादर और अहमद के आवास के बाहर एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और शीर्ष एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस कथित तौर पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानों पर पहुंच गई थी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दोनों आरोपियों के आधार कार्ड और मोबाइल फोन एनआईए ने जब्त कर लिए हैं। विशेष रूप से, सितंबर दो हज़ार इक्कीस को, NIA ने भारत में इस्लामिक स्टेट या खिलाफत आंदोलन की स्थापना के लिए कट्टरपंथी संगठन 'हिज़्ब-उत-तहरीर' के नाम पर साजिश के आरोप में मदुरै के मोहम्मद इकबाल और अन्य लोगों के साथ मदुरै के मन्नई बाबा को गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने देश की संप्रभुता के खिलाफ जाने वाले पोस्ट फैलाकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई प्रोफाइल बनाकर साजिश रची थी। कथित तौर पर बंद दरवाजे की बैठक तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की गई जिसमें इरोड, सलेम, मदुरै और तंजावुर जैसे जिले शामिल हैं। खिलाफत आंदोलन क्या है' मूल खिलाफत आंदोलन एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में ब्रिटिश राज के दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय के बीच एकता के प्रतीक के रूप में तुर्क खलीफा को उबारने के प्रयास में उभरा। आंदोलन के नेताओं ने खिलाफत आंदोलन के लिए समर्थन प्राप्त करने के बदले में भारतीय स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के साथ हाथ मिलाया था। हालांकि, एक हज़ार नौ सौ चौबीस में खिलाफत के उन्मूलन के बाद आंदोलन टूट गया।
DD S भारतीय इतिहास में दानवीर कर्ण की भाँति अपना सर्वस्व दान कर, अक्षय कीर्ति प्राप्त करने वाले स्वर्गीय राणेश शंकर विद्यार्थी देव-पुरुष थे। उन्होंने अपने दिव्य गुणों से मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए साहित्य, राजनीति और समाज की नवीन के परिभाषाएं देकर एक क्रान्तिकारी क्षेत्र मण्डल का निर्माण किया था। जिस प्रकार एक सुरभित सुमन अपने विकास की पूर्णता प्राप्त किए बिना ही देवता के श्री चरणों मे समर्पित हो जाता है, उसी प्रकार श्री विद्यार्थी जी अपनी समस्त विभूतियों को राष्ट्रीयता की अंजुली में सजाकर मातृभूमि की बलि वेदी पर असमय ही समर्पित हो गये । यह उनका सौभाग्य या, किन्तु हमारा और देश का दुर्भाग्य था । भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की परम्परा में श्री विद्यार्थी जी ने हिन्दी को जनता के मनोविज्ञान के समानान्तर बनाते हुए, पत्रकारिता का जो आदर्श स्थापित किया था, वह अपने समय के साहित्यिक प्रतिमानों से बहुत ऊँचा था । यदि उनके द्वारा प्रवर्तित वह हिन्दो-शैली शास्त्रीयता के आधातों से कुंठित न होती, तो उसे जन-जन की भाषा बनाने में तथा साहित्य को समुन्नत करने में जो सुविधा प्राप्त होती, उसकी कल्पना नही की जा सकती । पत्रकारिता की परिधि में उन्होंने देश की प्रत्येक समस्या का - दलित व्यक्तियों की पीड़ा का, अन्याय से शोषित मानवता का, शक्ति और साहस की ओजस्विनी कर्तव्यनिष्ठा का, जो शंख-घोष किया था, वह इस सम्पूर्ण देश में गूंजता रहा। देश ही नहीं, संसार के कोने-कोने में कभी आशंका से, कभी भय से, कभी उत्साह से और कभी आवेश के साथ यह शंखनाद सुना गया। वह पत्रकारिता का साबर मन्त्र था क्योंकि उसके उद्घोषक गणेश शंकर थे । श्री गणेश शंकर विद्यार्थी ने राष्ट्रीयता और साहित्य में जिन नवीन क्षेत्रों को उद्घाटित किया उन पर अभी तक सही परिप्रेक्ष्य में विचार ही नहीं किया गया । यदि यह कहा जाये कि उनकी प्रतिभा का वास्तविक मूल्यांकन राष्ट्रीयता और साहित्य के विकास में नहीं हो पाया है तो यह असंगत नहीं होगा। जिस सीमा तक उन्होंने पत्रकारिता तथा राष्ट्रीयता के आदर्श को पहुँचा दिया था, उस सीमा तक उसको परीक्षा तक नहीं हो सकी। यह स्थिति साहित्य और राष्ट्रीयता के लिए एक चुनौती बनी रही कि उसके द्वारा विद्यार्थी जी की प्रतिभा और योगदान का यथावत् मूल्यांकन किया जाय । डॉ० गगानारायण त्रिपाठी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में हिंदी विभाग में न केवल एक सफल प्राध्यापक हैं किन्तु जागरूक साहित्यकार भी हैं । उन्होंने श्री विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व का अनुशीलन न केवल उनके ग्रन्थों से वरन उनकी पत्रकारिता के सभी रूपों से प्राप्त किया है। विद्यार्थी जी की पत्रकारिता के माध्यम से डॉ० त्रिपाठी ने उनके मनोविज्ञान की गहराई तक पहुँचने की चेष्टा की है जिससे उनकी राष्ट्रीयता और वैचारिकता के स्रोतों और उत्सों से परिचय प्राप्त किया जा सके । इन्हीं के द्वारा विद्यार्थी जी की सहानुभूति न केवल इस देश की पराधीन जनता के प्रति अभिव्यक्त हुई, संघर्षशील रही वरम् उन भारतीयों के प्रति भी निरन्तर प्रकट होती रही, जो प्रवासी होकर नृशंस अत्याचारों से दंशित और पीड़ित होते रहे । निःसन्देह यह कहा जा सकता है कि श्री विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व और साहित्यिक कृतित्व को उनकी पत्रकारिता के माध्यम से समझ कर प्रस्तुत करने का जैसा प्रयास डॉ० त्रिपाठी ने किया है वैसा अभी तक हिन्दी क्षेत्र में नहीं हो सका था। मैं उनकी इस कृति का स्वागत करता हूँ और हिन्दी जगत् में उचित आदर प्राप्त करने के लिए अनुशंसित करता हूँ। उनके द्वारा इसी प्रकार की मूल्यवान सामग्री हिन्दी साहित्य को प्राप्त होती रहे, यही मेरी आकांक्षा और आशीर्वाद है। डॉ० रामकुमार वर्मा अनुशंसा काल विजित एवं कालजयी पुरुष काल पर विजय प्राप्त करने की आकांक्षा बडो पुरानी है। भारतीय सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और धर्म में ऐसे प्रयासों, आकांक्षाओं विचारों का प्रतिबिम्ब है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति ने समुद्र मंथन से कालजयी अमृत-घट निकाल लिया । ययाति ने काल चक्र को उल्टा घुमाने का प्रयास किया । वृद्धावस्था से यौवन में वापस आने का प्रयास किया। असंख्य लोककथाओं में मृत व्यक्ति के फिर से जी जाने का उल्लेख मिलता है। सभी बड़े साधु-सन्तों के चमत्कारों में मृतक को पुनर्जीवित करना जोडा जाता है। संजीवनी बूटा की खोज में न जाने कितने लोग भटकते रहे । अमरत्व की तलाश के इस तरह के कई उदाहरण हैं, जो नये सुबह की सभ्यता और संस्कृति में मिल सकते हैं । आधुनिक विज्ञान ने भी इस खोज को बरकरार रखा है। वैज्ञानिक खोजों और विकसित किये जा रहे नये तकनीकों के मूल में जिन्दगी और मौत दोनों से जुड़ी हुई कोशिश की सफल झलक है । इन सब सपनों, आकांक्षाओं, गाथाओं और वैज्ञानिक प्रयासों के बावजूद काल अविजित है। मानव काल द्वारा विजित है. इस कठोर सत्य के परिप्रेक्ष्य में हम किसो महापुरुष की महानता की नाप करने के लिए उसे कालजयी कहते हैं । डॉ० त्रिपाठी जी ने इसी तरह से अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को कालजयी कहा है। उनके लिए यह विशेषण मुझे बड़ा अच्छा लगा और उपयुक्त भी । पुस्तक के इस नाम या विद्यार्थी जी के इस विशेषण को सामने रखकर मैंने त्रिपाठी जी के इस रोचक एवं अत्यन्त उपयोगी पुस्तक को पांडुलिपि पढ़ना प्रारंभ किया। पढ़ते समय मैंने यह आकलन करने की कोशिश की कि विद्यार्थी जी को कालजयी कहना कहाँ तक समीचीन है। मेरा सीधा सा निष्कर्ष है कि विद्यार्थी जी कालजयी नहीं काल विजित हैं। इसे मेरी धृष्टता न समझी जाय । प्रश्न केवल परिभाषा का ही नहीं है, असल मुद्दा संभवतः दृष्टि का है। आप क्या देख रहे हैं ? कहाँ से देख रहे हैं ? इस पर दृष्टिकोण में अंतर आना स्वाभाविक है। मुझे लगता है महानता को नाप कालजयों होने में नही काल से विजित होने में है। यह कहना कि समय और युग की सीमाओं को तोड़
DD S भारतीय इतिहास में दानवीर कर्ण की भाँति अपना सर्वस्व दान कर, अक्षय कीर्ति प्राप्त करने वाले स्वर्गीय राणेश शंकर विद्यार्थी देव-पुरुष थे। उन्होंने अपने दिव्य गुणों से मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए साहित्य, राजनीति और समाज की नवीन के परिभाषाएं देकर एक क्रान्तिकारी क्षेत्र मण्डल का निर्माण किया था। जिस प्रकार एक सुरभित सुमन अपने विकास की पूर्णता प्राप्त किए बिना ही देवता के श्री चरणों मे समर्पित हो जाता है, उसी प्रकार श्री विद्यार्थी जी अपनी समस्त विभूतियों को राष्ट्रीयता की अंजुली में सजाकर मातृभूमि की बलि वेदी पर असमय ही समर्पित हो गये । यह उनका सौभाग्य या, किन्तु हमारा और देश का दुर्भाग्य था । भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की परम्परा में श्री विद्यार्थी जी ने हिन्दी को जनता के मनोविज्ञान के समानान्तर बनाते हुए, पत्रकारिता का जो आदर्श स्थापित किया था, वह अपने समय के साहित्यिक प्रतिमानों से बहुत ऊँचा था । यदि उनके द्वारा प्रवर्तित वह हिन्दो-शैली शास्त्रीयता के आधातों से कुंठित न होती, तो उसे जन-जन की भाषा बनाने में तथा साहित्य को समुन्नत करने में जो सुविधा प्राप्त होती, उसकी कल्पना नही की जा सकती । पत्रकारिता की परिधि में उन्होंने देश की प्रत्येक समस्या का - दलित व्यक्तियों की पीड़ा का, अन्याय से शोषित मानवता का, शक्ति और साहस की ओजस्विनी कर्तव्यनिष्ठा का, जो शंख-घोष किया था, वह इस सम्पूर्ण देश में गूंजता रहा। देश ही नहीं, संसार के कोने-कोने में कभी आशंका से, कभी भय से, कभी उत्साह से और कभी आवेश के साथ यह शंखनाद सुना गया। वह पत्रकारिता का साबर मन्त्र था क्योंकि उसके उद्घोषक गणेश शंकर थे । श्री गणेश शंकर विद्यार्थी ने राष्ट्रीयता और साहित्य में जिन नवीन क्षेत्रों को उद्घाटित किया उन पर अभी तक सही परिप्रेक्ष्य में विचार ही नहीं किया गया । यदि यह कहा जाये कि उनकी प्रतिभा का वास्तविक मूल्यांकन राष्ट्रीयता और साहित्य के विकास में नहीं हो पाया है तो यह असंगत नहीं होगा। जिस सीमा तक उन्होंने पत्रकारिता तथा राष्ट्रीयता के आदर्श को पहुँचा दिया था, उस सीमा तक उसको परीक्षा तक नहीं हो सकी। यह स्थिति साहित्य और राष्ट्रीयता के लिए एक चुनौती बनी रही कि उसके द्वारा विद्यार्थी जी की प्रतिभा और योगदान का यथावत् मूल्यांकन किया जाय । डॉशून्य गगानारायण त्रिपाठी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में हिंदी विभाग में न केवल एक सफल प्राध्यापक हैं किन्तु जागरूक साहित्यकार भी हैं । उन्होंने श्री विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व का अनुशीलन न केवल उनके ग्रन्थों से वरन उनकी पत्रकारिता के सभी रूपों से प्राप्त किया है। विद्यार्थी जी की पत्रकारिता के माध्यम से डॉशून्य त्रिपाठी ने उनके मनोविज्ञान की गहराई तक पहुँचने की चेष्टा की है जिससे उनकी राष्ट्रीयता और वैचारिकता के स्रोतों और उत्सों से परिचय प्राप्त किया जा सके । इन्हीं के द्वारा विद्यार्थी जी की सहानुभूति न केवल इस देश की पराधीन जनता के प्रति अभिव्यक्त हुई, संघर्षशील रही वरम् उन भारतीयों के प्रति भी निरन्तर प्रकट होती रही, जो प्रवासी होकर नृशंस अत्याचारों से दंशित और पीड़ित होते रहे । निःसन्देह यह कहा जा सकता है कि श्री विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व और साहित्यिक कृतित्व को उनकी पत्रकारिता के माध्यम से समझ कर प्रस्तुत करने का जैसा प्रयास डॉशून्य त्रिपाठी ने किया है वैसा अभी तक हिन्दी क्षेत्र में नहीं हो सका था। मैं उनकी इस कृति का स्वागत करता हूँ और हिन्दी जगत् में उचित आदर प्राप्त करने के लिए अनुशंसित करता हूँ। उनके द्वारा इसी प्रकार की मूल्यवान सामग्री हिन्दी साहित्य को प्राप्त होती रहे, यही मेरी आकांक्षा और आशीर्वाद है। डॉशून्य रामकुमार वर्मा अनुशंसा काल विजित एवं कालजयी पुरुष काल पर विजय प्राप्त करने की आकांक्षा बडो पुरानी है। भारतीय सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और धर्म में ऐसे प्रयासों, आकांक्षाओं विचारों का प्रतिबिम्ब है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति ने समुद्र मंथन से कालजयी अमृत-घट निकाल लिया । ययाति ने काल चक्र को उल्टा घुमाने का प्रयास किया । वृद्धावस्था से यौवन में वापस आने का प्रयास किया। असंख्य लोककथाओं में मृत व्यक्ति के फिर से जी जाने का उल्लेख मिलता है। सभी बड़े साधु-सन्तों के चमत्कारों में मृतक को पुनर्जीवित करना जोडा जाता है। संजीवनी बूटा की खोज में न जाने कितने लोग भटकते रहे । अमरत्व की तलाश के इस तरह के कई उदाहरण हैं, जो नये सुबह की सभ्यता और संस्कृति में मिल सकते हैं । आधुनिक विज्ञान ने भी इस खोज को बरकरार रखा है। वैज्ञानिक खोजों और विकसित किये जा रहे नये तकनीकों के मूल में जिन्दगी और मौत दोनों से जुड़ी हुई कोशिश की सफल झलक है । इन सब सपनों, आकांक्षाओं, गाथाओं और वैज्ञानिक प्रयासों के बावजूद काल अविजित है। मानव काल द्वारा विजित है. इस कठोर सत्य के परिप्रेक्ष्य में हम किसो महापुरुष की महानता की नाप करने के लिए उसे कालजयी कहते हैं । डॉशून्य त्रिपाठी जी ने इसी तरह से अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को कालजयी कहा है। उनके लिए यह विशेषण मुझे बड़ा अच्छा लगा और उपयुक्त भी । पुस्तक के इस नाम या विद्यार्थी जी के इस विशेषण को सामने रखकर मैंने त्रिपाठी जी के इस रोचक एवं अत्यन्त उपयोगी पुस्तक को पांडुलिपि पढ़ना प्रारंभ किया। पढ़ते समय मैंने यह आकलन करने की कोशिश की कि विद्यार्थी जी को कालजयी कहना कहाँ तक समीचीन है। मेरा सीधा सा निष्कर्ष है कि विद्यार्थी जी कालजयी नहीं काल विजित हैं। इसे मेरी धृष्टता न समझी जाय । प्रश्न केवल परिभाषा का ही नहीं है, असल मुद्दा संभवतः दृष्टि का है। आप क्या देख रहे हैं ? कहाँ से देख रहे हैं ? इस पर दृष्टिकोण में अंतर आना स्वाभाविक है। मुझे लगता है महानता को नाप कालजयों होने में नही काल से विजित होने में है। यह कहना कि समय और युग की सीमाओं को तोड़
मीनापुर समेत मुजफ्फरपुर जिले के सभी बेघर लोगों को एक वर्ष के भीतर पक्का मकान उपलब्ध करा दिया जाएगा। ये बातें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सोमवार को वर्चुअल रैली के माध्यम से मीनापुर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहीं। प्रदेश अध्यक्ष ने मुजफ्फरपुर के बाइपास का जिक्र करते हुए कहा कि पटना-मुजफ्फरपुर मार्ग पर सफर करने वालों को शीघ्र ही जाम से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने कोरोना से निपटने में सरकार की तारीफ करते हुए जरुरतमंदों को तीन महीने का फ्री राशन, उज्जवला योजना, बिहार को पर्याप्त मिल रही बिजली की बात भी कार्यकर्ताओं को बतायी। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के शौर्य का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को आंख दिखाना अब किसी के लिए मुमकिन नहीं है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से लोकल उत्पाद की खरीद करने और आत्मनिर्भर भारत बनाने में सहयोग करने की अपील की। इससे पहले वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में मीनापुर से बीजेपी के उम्मीदवार रह चुके अजय कुमार ने विगत पांच वर्षों के भीतर संगठन के विस्तार और कार्यक्रम से प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया। इस वर्चुअल रैली को जिला अध्यक्ष रंजन कुमार, जिला प्रभारी रमेश श्रीवास्तव, विधानसभा प्रभारी राकेश यादव, मीनापुर के अजय कुमार के अतिरिक्त हिमांशु गुप्ता, करण वर्मा ने संबोधित किया। वहीं पटना के बीजेपी कार्यालय से प्रदेश अध्यक्ष के अतिरिक्त प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश वर्मा ने संबोधित किया। सोशल साइट पर इस वर्चुअल रैली को कार्यकर्ताओं ने अपने घर बैठे देखा और सुना।
मीनापुर समेत मुजफ्फरपुर जिले के सभी बेघर लोगों को एक वर्ष के भीतर पक्का मकान उपलब्ध करा दिया जाएगा। ये बातें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सोमवार को वर्चुअल रैली के माध्यम से मीनापुर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहीं। प्रदेश अध्यक्ष ने मुजफ्फरपुर के बाइपास का जिक्र करते हुए कहा कि पटना-मुजफ्फरपुर मार्ग पर सफर करने वालों को शीघ्र ही जाम से मुक्ति मिल जाएगी। उन्होंने कोरोना से निपटने में सरकार की तारीफ करते हुए जरुरतमंदों को तीन महीने का फ्री राशन, उज्जवला योजना, बिहार को पर्याप्त मिल रही बिजली की बात भी कार्यकर्ताओं को बतायी। गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के शौर्य का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को आंख दिखाना अब किसी के लिए मुमकिन नहीं है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से लोकल उत्पाद की खरीद करने और आत्मनिर्भर भारत बनाने में सहयोग करने की अपील की। इससे पहले वर्ष दो हज़ार पंद्रह के विधानसभा चुनाव में मीनापुर से बीजेपी के उम्मीदवार रह चुके अजय कुमार ने विगत पांच वर्षों के भीतर संगठन के विस्तार और कार्यक्रम से प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया। इस वर्चुअल रैली को जिला अध्यक्ष रंजन कुमार, जिला प्रभारी रमेश श्रीवास्तव, विधानसभा प्रभारी राकेश यादव, मीनापुर के अजय कुमार के अतिरिक्त हिमांशु गुप्ता, करण वर्मा ने संबोधित किया। वहीं पटना के बीजेपी कार्यालय से प्रदेश अध्यक्ष के अतिरिक्त प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश वर्मा ने संबोधित किया। सोशल साइट पर इस वर्चुअल रैली को कार्यकर्ताओं ने अपने घर बैठे देखा और सुना।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
राज्यलक्ष्मी होती है, तो क्या योगिजनों के मन मे ज्ञान, ध्यान और प्रथम से उत्पन्न अन्तरग लक्ष्मी नहीं होनी ? अवश्य होती है । तथा जैसे इस संसार मे वाह्य स्त्रिय हैं, इसी प्रकार योगियों के मानन मे स्थित आत्मरति (आत्मा के प्रति प्रीति) क्या स्त्रीरूप में नहीं रहती ? है ही । अतः कौन विद्वान् इस स्वाधीन मुख को छोड़ कर पराधीन मुख की वांछा करेगा ? इस संसार मे देवो और मनुष्यों मे हाथी घोडा, गाय बैल आदि के संग्रह से राज्यलक्ष्मी वनती देखने-सुनने में आती है, वैसे ही वाह राजलक्ष्मी के त्यागी सयमी साधुओं के पास शास्त्राम्यासस्पी करिगर्जनावली, तथा धर्म-शुक्लध्यान और वारह अनुप्रेक्षारूपी अश्वो तरग से उछलती, एव प्रशम से उत्पन्न हुई शान्ति और स्थिरता से मुन्दर गति करने वाली गायो और साम्ययुक्त बैलो मे मुशोभित लक्ष्मी नहीं है ? अवश्य है। मनुष्यादि वाह्य राज्य में स्पादि-अभिमानयुक्त सुन्दर प्रियाएँ होती है, तो क्या शुद्ध, आत्मरति (आत्मा के प्रति प्रीति) वाली प्रियाएँ योगियों के मन मे नही होती ? अवश्य होती है । इस आत्मरति प्रिया को छोड कर अस्थिर, अभिमानी, अशुचिमय एव दुखरूप बाह्य प्रिया से कौन प्रीति करेगा ? आत्मसुख स्वाधीन, स्थिर एव हपंप्रदायक है, जबकि परवस्तु का सुख परावीन, अस्थिर एव दु खदायक है, तब भला कौन ऐसा मूर्ख होगा, जो पराधीन सुख चाहेगा ? पराधीनं राम क्षयि विषयकांक्षौघमलितं, भवे भीतिस्थानं तदपि कुमतिस्तत्र रमते ॥ વ્રુધાસ્તુ સ્વાધીને ક્ષાિરા રોડ્યુયરહિતે 1 નિત્નીનાપ્તિત્તિ પ્રત્તિતમયાધ્યાત્મિળનુલે રા ससार मे जितना भी सुख है, वह सब पराधीन, विनाशी, क्षणिक एव विषयाकाक्षाओ से मलिन और भयदायक है, फिर भी कुबुद्धि व्यक्ति उसमे आनन्द मानता है। परन्तु विद्वान्, तो स्वाधीन, अक्षय, ઇન્દ્રિયો ની અપેક્ષા યાત્સુતા સે તિવ મર્યાવજ્ઞોન અધ્યાત્મसुख में मग्न रहते हैं ।
राज्यलक्ष्मी होती है, तो क्या योगिजनों के मन मे ज्ञान, ध्यान और प्रथम से उत्पन्न अन्तरग लक्ष्मी नहीं होनी ? अवश्य होती है । तथा जैसे इस संसार मे वाह्य स्त्रिय हैं, इसी प्रकार योगियों के मानन मे स्थित आत्मरति क्या स्त्रीरूप में नहीं रहती ? है ही । अतः कौन विद्वान् इस स्वाधीन मुख को छोड़ कर पराधीन मुख की वांछा करेगा ? इस संसार मे देवो और मनुष्यों मे हाथी घोडा, गाय बैल आदि के संग्रह से राज्यलक्ष्मी वनती देखने-सुनने में आती है, वैसे ही वाह राजलक्ष्मी के त्यागी सयमी साधुओं के पास शास्त्राम्यासस्पी करिगर्जनावली, तथा धर्म-शुक्लध्यान और वारह अनुप्रेक्षारूपी अश्वो तरग से उछलती, एव प्रशम से उत्पन्न हुई शान्ति और स्थिरता से मुन्दर गति करने वाली गायो और साम्ययुक्त बैलो मे मुशोभित लक्ष्मी नहीं है ? अवश्य है। मनुष्यादि वाह्य राज्य में स्पादि-अभिमानयुक्त सुन्दर प्रियाएँ होती है, तो क्या शुद्ध, आत्मरति वाली प्रियाएँ योगियों के मन मे नही होती ? अवश्य होती है । इस आत्मरति प्रिया को छोड कर अस्थिर, अभिमानी, अशुचिमय एव दुखरूप बाह्य प्रिया से कौन प्रीति करेगा ? आत्मसुख स्वाधीन, स्थिर एव हपंप्रदायक है, जबकि परवस्तु का सुख परावीन, अस्थिर एव दु खदायक है, तब भला कौन ऐसा मूर्ख होगा, जो पराधीन सुख चाहेगा ? पराधीनं राम क्षयि विषयकांक्षौघमलितं, भवे भीतिस्थानं तदपि कुमतिस्तत्र रमते ॥ વ્રુધાસ્તુ સ્વાધીને ક્ષાિરા રોડ્યુયરહિતે एक નિત્નીનાપ્તિત્તિ પ્રત્તિતમયાધ્યાત્મિળનુલે રા ससार मे जितना भी सुख है, वह सब पराधीन, विनाशी, क्षणिक एव विषयाकाक्षाओ से मलिन और भयदायक है, फिर भी कुबुद्धि व्यक्ति उसमे आनन्द मानता है। परन्तु विद्वान्, तो स्वाधीन, अक्षय, ઇન્દ્રિયો ની અપેક્ષા યાત્સુતા સે તિવ મર્યાવજ્ઞોન અધ્યાત્મसुख में मग्न रहते हैं ।
दीपों की झिलमिलाहट से आसमान के तारे भी मानो शरमाते नजर आए। विद्युत झालरों और दीपों की सजावट देखने के लिए तटों पर लोगों की भीड़ उमड़ी और यहां मेला लगा। । गंगा की लहरों पर नावों-बजड़ों के झुंड इस कदर चले कि जल मार्ग पर भी ट्रैफिक जाम होने लगा। जल परी वाला सुसज्जित बजड़ा हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सैकड़ों नावों को गेंदा, गुलाब के फूलों से सजाकर उतारा गया। विदेशी पर्यटकों ने देव दीपावली के इस नजारे को कैमरे में खूब कैद किया। विदेशियों के समूह नावों-बजरों पर सवार होकर अस्सी से राजघाट तक की सैर करते दिखे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दीपों की झिलमिलाहट से आसमान के तारे भी मानो शरमाते नजर आए। विद्युत झालरों और दीपों की सजावट देखने के लिए तटों पर लोगों की भीड़ उमड़ी और यहां मेला लगा। । गंगा की लहरों पर नावों-बजड़ों के झुंड इस कदर चले कि जल मार्ग पर भी ट्रैफिक जाम होने लगा। जल परी वाला सुसज्जित बजड़ा हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सैकड़ों नावों को गेंदा, गुलाब के फूलों से सजाकर उतारा गया। विदेशी पर्यटकों ने देव दीपावली के इस नजारे को कैमरे में खूब कैद किया। विदेशियों के समूह नावों-बजरों पर सवार होकर अस्सी से राजघाट तक की सैर करते दिखे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस अब बिना कानून की इजाजत के किसी भी व्यक्ति को पुलिस स्टेशन नहीं बुला सकती है। किसी भी व्यक्ति को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के उपद्रवी घोषित नहीं किया जा सकता है। दरअसल, हाई कोर्ट में कई लोगों ने याचिका दायर की थी कि राज्य पुलिस ने बिना कानूनी प्रक्रियाएं पूरी किए उनके खिलाफ राउडी शीट खोली है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवीएसएस सोमयाजुलु की बेंच ने फैसला सुनाया है। पांच साल में जिन बदमाशों पर 3 या इससे ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनकी लिस्ट को राउडी शीट कहते हैं। इस लिस्ट में नाम आने वाले बदमाशों पर नजर रखी जाती है। उनके फिंगर -प्रिंट, फोटो, फुट-प्रिंट, प्रॉपर्टी की डिटेल ,इनकम सोर्स इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इलाके के हर थाने में बदमाशों के फोटो सहित ये रिकॉर्ड चस्पा किया जाता है। थाने के एक सिपाही को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाती है कि वह आरोपी की दिनचर्या पर नजर रखे। जस्टिस सोमयाजुलु ने कहा कि पुलिस अपनी मर्जी से किसी भी व्यक्ति पर नजर नहीं रख सकती, किसी व्यक्ति को उपद्रवी नहीं मान सकती है, उनकी तस्वीरें प्रदर्शित नहीं कर सकती है और न ही उनके फुट-प्रिंट, प्रॉपर्टी की डिटेल सार्वजनिक कर सकती है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'निजता के अधिकार' (राइट टू प्राइवेसी) का उल्लंघन है। त्योहार या चुनाव के दौरान आरोपी या संदिग्धों को पुलिस स्टेशन या कहीं और नहीं बुलाया जा सकता है। उन्हें किसी भी कारण से पुलिस थानों में इंतजार करने या इलाका छोड़ने के लिए नहीं कहा जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस अब बिना कानून की इजाजत के किसी भी व्यक्ति को पुलिस स्टेशन नहीं बुला सकती है। किसी भी व्यक्ति को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के उपद्रवी घोषित नहीं किया जा सकता है। दरअसल, हाई कोर्ट में कई लोगों ने याचिका दायर की थी कि राज्य पुलिस ने बिना कानूनी प्रक्रियाएं पूरी किए उनके खिलाफ राउडी शीट खोली है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवीएसएस सोमयाजुलु की बेंच ने फैसला सुनाया है। पांच साल में जिन बदमाशों पर तीन या इससे ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनकी लिस्ट को राउडी शीट कहते हैं। इस लिस्ट में नाम आने वाले बदमाशों पर नजर रखी जाती है। उनके फिंगर -प्रिंट, फोटो, फुट-प्रिंट, प्रॉपर्टी की डिटेल ,इनकम सोर्स इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इलाके के हर थाने में बदमाशों के फोटो सहित ये रिकॉर्ड चस्पा किया जाता है। थाने के एक सिपाही को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाती है कि वह आरोपी की दिनचर्या पर नजर रखे। जस्टिस सोमयाजुलु ने कहा कि पुलिस अपनी मर्जी से किसी भी व्यक्ति पर नजर नहीं रख सकती, किसी व्यक्ति को उपद्रवी नहीं मान सकती है, उनकी तस्वीरें प्रदर्शित नहीं कर सकती है और न ही उनके फुट-प्रिंट, प्रॉपर्टी की डिटेल सार्वजनिक कर सकती है। यह संविधान के अनुच्छेद इक्कीस के तहत 'निजता के अधिकार' का उल्लंघन है। त्योहार या चुनाव के दौरान आरोपी या संदिग्धों को पुलिस स्टेशन या कहीं और नहीं बुलाया जा सकता है। उन्हें किसी भी कारण से पुलिस थानों में इंतजार करने या इलाका छोड़ने के लिए नहीं कहा जा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इंद्रजीत सिंह, मुंबईः मुंबई की धड़कन कही जाने वाली मुंबई की लोकल ट्रेन में शाम के वक्त एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए ट्रेन में बहुत भीड़ होती है। इसी दौरान सीट पकड़ने के लिए लोगो को काफी मशक्कत भी करनी पड़ती है। इसी कड़ी में कभी-कभी लोगों के बीच झड़प भी हो जाती है। कुछ ऐसा वाकया बीती शाम 7. 45 बजे हुआ। जहां सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत आने वाले ठाणे और पनवेल के बीच जा रही लोकल ट्रेन कुछ महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हो गई। जानकारी के अनुसार महिला डिब्बे में एक सीट को लेकर तीन महिलाओं के बीच कहासुनी हो गई। इस बीच महिलाएं आपस में बुरी तरह भिड़ गईं। मामला बढ़ता देख कुछ अन्य महिलाओं ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद इस मामले में नेरुल से विवाद सुलझाने आई एक महिला पुलिसकर्मी मारपीट में घायल हो गई, वह अस्पताल में एडमिट है और उसका इलाज चल रहा है। इस संबंध में वाशी की जीआरपी पुलिस ने 2 महिलाओं पर आईपीसी 353, 332, 504 के तहत मामला दर्ज किया है और आगे की जांच चल रही है।
इंद्रजीत सिंह, मुंबईः मुंबई की धड़कन कही जाने वाली मुंबई की लोकल ट्रेन में शाम के वक्त एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए ट्रेन में बहुत भीड़ होती है। इसी दौरान सीट पकड़ने के लिए लोगो को काफी मशक्कत भी करनी पड़ती है। इसी कड़ी में कभी-कभी लोगों के बीच झड़प भी हो जाती है। कुछ ऐसा वाकया बीती शाम सात. पैंतालीस बजे हुआ। जहां सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत आने वाले ठाणे और पनवेल के बीच जा रही लोकल ट्रेन कुछ महिलाओं के बीच जमकर मारपीट हो गई। जानकारी के अनुसार महिला डिब्बे में एक सीट को लेकर तीन महिलाओं के बीच कहासुनी हो गई। इस बीच महिलाएं आपस में बुरी तरह भिड़ गईं। मामला बढ़ता देख कुछ अन्य महिलाओं ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद इस मामले में नेरुल से विवाद सुलझाने आई एक महिला पुलिसकर्मी मारपीट में घायल हो गई, वह अस्पताल में एडमिट है और उसका इलाज चल रहा है। इस संबंध में वाशी की जीआरपी पुलिस ने दो महिलाओं पर आईपीसी तीन सौ तिरेपन, तीन सौ बत्तीस, पाँच सौ चार के तहत मामला दर्ज किया है और आगे की जांच चल रही है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान के मुख्यमंत्री संभालने के दूसरे ही दिन शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पूर्व विधायक के तौर पर मिलने वाली पेंशन छोड़ने का ऐलान कर दिया। 5 बार पंजाब के सीएम रह चुके प्रकाश सिंह बादल को पेंशन के तौर पर हर महीने तकरीबन 5 लाख रुपए मिलने की बात कही जाती रही है। हालांकि खुद बादल परिवार या पंजाब विधानसभा ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की। 10 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके बादल इस बार लंबी विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट गुरमीत सिंह खुडियां से हार गए थे। प्रकाश सिंह बादल के हवाले से अकाली दल ने ट्वीट करके उनके पेंशन छोड़ने की जानकारी दी। इस ट्वीट में कहा गया कि प्रकाश सिंह बादल पंजाब सरकार और विधानसभा स्पीकर से गुजारिश करते हैं कि उन्हें पूर्व विधायक के तौर पर जो भी पेंशन या भत्ते मिलते हैं, वह न दिए जाएं। इस रकम का इस्तेमाल पंजाब के हित में किया जाए। ट्वीट में यह भी कहा गया कि प्रकाश सिंह बादल इस बारे में औपचारिक पत्र भी सरकार को भेज रहे हैं। पंजाब की पिछली कांग्रेस सरकार में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का इनकम टैक्स राज्य सरकार द्वारा भरे जाने का मुद्दा उठा था। एक RTI के अनुसार प्रकाश सिंह बादल और नवजोत सिद्धू समेत 93 विधायकों का इनकम टैक्स पंजाब सरकार भर रही है। उसी वक्त यह मुद्दा उठा था कि सिर्फ इनकम टैक्स ही नहीं बल्कि कई नेता पेंशन के रूप में भी एक से ज्यादा पेंशन ले रहे हैं। इनमें पहला नाम प्रकाश सिंह बादल का था। यह मामला उठने के बाद पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा स्पीकर से मिले थे। आप नेताओं ने मांग की थी कि एक विधायक को एक ही पेंशन मिलनी चाहिए चाहे वह कितनी ही बार चुना क्यों न गया हो। उन्होंने तत्कालीन स्पीकर राणा केपी को इसका पत्र भी सौंपा था। अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इसलिए यह भी चर्चा हो रही है कि CM भगवंत मान इस बार में कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान के मुख्यमंत्री संभालने के दूसरे ही दिन शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पूर्व विधायक के तौर पर मिलने वाली पेंशन छोड़ने का ऐलान कर दिया। पाँच बार पंजाब के सीएम रह चुके प्रकाश सिंह बादल को पेंशन के तौर पर हर महीने तकरीबन पाँच लाख रुपए मिलने की बात कही जाती रही है। हालांकि खुद बादल परिवार या पंजाब विधानसभा ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की। दस बार विधानसभा चुनाव जीत चुके बादल इस बार लंबी विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट गुरमीत सिंह खुडियां से हार गए थे। प्रकाश सिंह बादल के हवाले से अकाली दल ने ट्वीट करके उनके पेंशन छोड़ने की जानकारी दी। इस ट्वीट में कहा गया कि प्रकाश सिंह बादल पंजाब सरकार और विधानसभा स्पीकर से गुजारिश करते हैं कि उन्हें पूर्व विधायक के तौर पर जो भी पेंशन या भत्ते मिलते हैं, वह न दिए जाएं। इस रकम का इस्तेमाल पंजाब के हित में किया जाए। ट्वीट में यह भी कहा गया कि प्रकाश सिंह बादल इस बारे में औपचारिक पत्र भी सरकार को भेज रहे हैं। पंजाब की पिछली कांग्रेस सरकार में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का इनकम टैक्स राज्य सरकार द्वारा भरे जाने का मुद्दा उठा था। एक RTI के अनुसार प्रकाश सिंह बादल और नवजोत सिद्धू समेत तिरानवे विधायकों का इनकम टैक्स पंजाब सरकार भर रही है। उसी वक्त यह मुद्दा उठा था कि सिर्फ इनकम टैक्स ही नहीं बल्कि कई नेता पेंशन के रूप में भी एक से ज्यादा पेंशन ले रहे हैं। इनमें पहला नाम प्रकाश सिंह बादल का था। यह मामला उठने के बाद पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा स्पीकर से मिले थे। आप नेताओं ने मांग की थी कि एक विधायक को एक ही पेंशन मिलनी चाहिए चाहे वह कितनी ही बार चुना क्यों न गया हो। उन्होंने तत्कालीन स्पीकर राणा केपी को इसका पत्र भी सौंपा था। अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इसलिए यह भी चर्चा हो रही है कि CM भगवंत मान इस बार में कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में गजनेर पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है और उन्होंने डीजल चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से काफी मात्रा में टैंकरों से चुराया गया डीजल व कारतूस सहित अवैध असलहा बरामद हुए हैं। मुखबिर की सूचना पर थाना गजनेर पुलिस ने जालौन को एचपीसीएल डिपो से निकलने वाले टैंकरो से ररूआ गांव को जाने वाली सड़क से डीजल चोरी करते समय सचिन सिंह सचान, संदीप कुमार ,विवेक कुमार ,बबलू उर्फ दीपू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से एक पिकअप वैन मे लदी हुई 30 कैने,जिसमें 11 कैनों में 215 लीटर डीजल व दो टुकड़े पाईप तथा 19 कैन खाली बरामद किया है। वही आरोपियों की तलाशी के दौरान आरोपी सचिन सिंह सचान के पास से एक तमंचा 315 बोर व 2 जिन्दा कारतूस व संदीप कुमार के कब्जे से 12 बोर नाजायज तमंचा व 2 जिन्दा कारतूस व विवेक कुमार के कब्जे से एक सब्बल के साथ-साथ डीजल चोरी करने के औजार बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया है कि डीजल चुराने के बाद यह सभी लोग चोरी किया हुआ डीजल बंजारी ताला निवासी कल्लू को 43 रूपये प्रति लीटर की दर से बेचते थे। डीजल की बिक्री के बाद उससे होने वाली आय को बराबर बराबर में बांट लेते थे और इस पैसे का इस्तेमाल अपने परिवार का भरण पोषण व महंगी सामान खरीद कर शौक को पूरा करते थे। अपर पुलिस अधीक्षक कानपुर देहात घनश्याम चौरसिया ने बताया कि गजनेर पुलिस को लंबे समय से मुखबिर तंत्र से जानकारी मिल रही थी एचपीसीएल डिपो से निकलने वाले टैंकरों से बीच रास्ते में डीजल की चोरी की जाती है जिसके चलते गजनेर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया था और वह टीम लगातार आरोपियों की तलाश कर रहे थे मुखबिर की सटीक सूचना पर आज गजनेर पुलिस ने चार आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है और विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए सभी को जेल भेजा है।
कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में गजनेर पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है और उन्होंने डीजल चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से काफी मात्रा में टैंकरों से चुराया गया डीजल व कारतूस सहित अवैध असलहा बरामद हुए हैं। मुखबिर की सूचना पर थाना गजनेर पुलिस ने जालौन को एचपीसीएल डिपो से निकलने वाले टैंकरो से ररूआ गांव को जाने वाली सड़क से डीजल चोरी करते समय सचिन सिंह सचान, संदीप कुमार ,विवेक कुमार ,बबलू उर्फ दीपू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से एक पिकअप वैन मे लदी हुई तीस कैने,जिसमें ग्यारह कैनों में दो सौ पंद्रह लीटरटर डीजल व दो टुकड़े पाईप तथा उन्नीस कैन खाली बरामद किया है। वही आरोपियों की तलाशी के दौरान आरोपी सचिन सिंह सचान के पास से एक तमंचा तीन सौ पंद्रह बोर व दो जिन्दा कारतूस व संदीप कुमार के कब्जे से बारह बोर नाजायज तमंचा व दो जिन्दा कारतूस व विवेक कुमार के कब्जे से एक सब्बल के साथ-साथ डीजल चोरी करने के औजार बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया है कि डीजल चुराने के बाद यह सभी लोग चोरी किया हुआ डीजल बंजारी ताला निवासी कल्लू को तैंतालीस रूपये प्रति लीटर की दर से बेचते थे। डीजल की बिक्री के बाद उससे होने वाली आय को बराबर बराबर में बांट लेते थे और इस पैसे का इस्तेमाल अपने परिवार का भरण पोषण व महंगी सामान खरीद कर शौक को पूरा करते थे। अपर पुलिस अधीक्षक कानपुर देहात घनश्याम चौरसिया ने बताया कि गजनेर पुलिस को लंबे समय से मुखबिर तंत्र से जानकारी मिल रही थी एचपीसीएल डिपो से निकलने वाले टैंकरों से बीच रास्ते में डीजल की चोरी की जाती है जिसके चलते गजनेर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया था और वह टीम लगातार आरोपियों की तलाश कर रहे थे मुखबिर की सटीक सूचना पर आज गजनेर पुलिस ने चार आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है और विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए सभी को जेल भेजा है।
गुण हैं । इन सोलह विशेष गुणोंमें जीवके छः छः गुण हैं, पुद्गलके भी छः छः गुण हैं, और अन्य धर्मादि चारों द्रव्योंमें प्रत्येकके तीन तीन गुण हैं । अंत चेतनत्व आदि चार गुण अपनी जातिकी अपेक्षासे सामान्य गुण हैं और परजातिकी अपेक्षासे विशेष गुण हैं । इस प्रकार गुणोंका अधिकार है ॥ २७ ॥ इति श्रीआचार्योपाधिधारक - पं० ठाकुरप्रसादप्रणीत-भापाटीकासमलंकृतायां द्रव्यानुयोगतर्कणाव्याख्यायामेकादशोऽध्यायः ॥ ११ ॥ अथ स्वभावाध्यायं व्याचिख्यासुराह । अब इस द्वादश ( बारहवें) अध्याय में स्वभावोंका निरूपण करनेकी इच्छासे यह श्लोक कहते हैं । सूत्रम् । चैतन्यं चेतना ख्याता त्वचैतन्यमचेतना । चेतनत्वं विना जन्तोः कर्माभावो भवेब्रुवम् ॥ १ ॥ सूत्रभावार्थःचैतन्य चेतनाका नाम है और अचैतन्य अचेतनाका नाम है । इस चैतन्य नामक गुणके विना जीवके निश्चय करके कर्मोंका अभाव हो जावे ॥ १ ॥ व्याख्या । चिती संज्ञाने चेतति चेतयते वा चेतनस्तस्य भावश्चैतन्यं चेतनाव्यवहारचेतनस्वभावः १ तद्विपरीतमचैतन्यमचेतनस्वभावः २ चेतनत्वं विना जन्तोर्जीवस्य कर्माभावो भवेदिति रागद्वेपरूपं कारणं चेतना ज्ञानावरणादिकर्मणोऽभावः । यतः "स्नेहाभ्यक्तशरीरस्य रेणुनालिष्यते यथा गात्रम् । रागद्वेपक्किन्नस्य कर्मवन्धो भवत्येवम् । १ ।" एवं यदि जीवस्य सर्वथा अचेतनस्वभावः कर्माभाव एवेति ॥ १ ॥ व्याख्यार्थः - 'चिती' धातुका संज्ञान अर्थात् जानना अर्थ है । जो स्वयं चेतै वा दूसरोंको चितावै उसको चेतन कहते हैं । उस चेतनका जो भाव ( धर्म ) है उसको चैतन्य कहते हैं । और चेतनाका जो व्यवहार है सोही चेतनस्वभाव है । १ । तथा चेतनस्वभावसे जो विपरीत है वह अचैतन्य वा अचेतन स्वभाव है । २ । इनमें चेतन स्वभावके विना अर्थात् चेतनस्वभाव न माननेपर जीवके कर्मोंका अभाव होगा, क्योंकि कर्मबन्धमें जो राग तथा द्वेपरूप कारण है वह चेतना अर्थात् ज्ञानावरणादि कर्मोंका अभाव है अर्थात् चेतनासे हो कर्मोंका वन्ध होता है । क्योंकि जैसे तैल आदिसे लिप्त शरीरवाले जीवका शरीर धूलसे लिप्त हो जाता है, ऐसेही राग तथा द्वेषसे आर्द्रीभूत (गीले हुए ) जीवके ही कमोंका बन्धन होता है । इस कथनके अनुसार यदि जीवके चेतन स्वभाव न मानकर, सर्वथा अचेतन स्वभावही मानें तो कर्मोका अभावही होगा ॥ १ ॥
गुण हैं । इन सोलह विशेष गुणोंमें जीवके छः छः गुण हैं, पुद्गलके भी छः छः गुण हैं, और अन्य धर्मादि चारों द्रव्योंमें प्रत्येकके तीन तीन गुण हैं । अंत चेतनत्व आदि चार गुण अपनी जातिकी अपेक्षासे सामान्य गुण हैं और परजातिकी अपेक्षासे विशेष गुण हैं । इस प्रकार गुणोंका अधिकार है ॥ सत्ताईस ॥ इति श्रीआचार्योपाधिधारक - पंशून्य ठाकुरप्रसादप्रणीत-भापाटीकासमलंकृतायां द्रव्यानुयोगतर्कणाव्याख्यायामेकादशोऽध्यायः ॥ ग्यारह ॥ अथ स्वभावाध्यायं व्याचिख्यासुराह । अब इस द्वादश अध्याय में स्वभावोंका निरूपण करनेकी इच्छासे यह श्लोक कहते हैं । सूत्रम् । चैतन्यं चेतना ख्याता त्वचैतन्यमचेतना । चेतनत्वं विना जन्तोः कर्माभावो भवेब्रुवम् ॥ एक ॥ सूत्रभावार्थःचैतन्य चेतनाका नाम है और अचैतन्य अचेतनाका नाम है । इस चैतन्य नामक गुणके विना जीवके निश्चय करके कर्मोंका अभाव हो जावे ॥ एक ॥ व्याख्या । चिती संज्ञाने चेतति चेतयते वा चेतनस्तस्य भावश्चैतन्यं चेतनाव्यवहारचेतनस्वभावः एक तद्विपरीतमचैतन्यमचेतनस्वभावः दो चेतनत्वं विना जन्तोर्जीवस्य कर्माभावो भवेदिति रागद्वेपरूपं कारणं चेतना ज्ञानावरणादिकर्मणोऽभावः । यतः "स्नेहाभ्यक्तशरीरस्य रेणुनालिष्यते यथा गात्रम् । रागद्वेपक्किन्नस्य कर्मवन्धो भवत्येवम् । एक ।" एवं यदि जीवस्य सर्वथा अचेतनस्वभावः कर्माभाव एवेति ॥ एक ॥ व्याख्यार्थः - 'चिती' धातुका संज्ञान अर्थात् जानना अर्थ है । जो स्वयं चेतै वा दूसरोंको चितावै उसको चेतन कहते हैं । उस चेतनका जो भाव है उसको चैतन्य कहते हैं । और चेतनाका जो व्यवहार है सोही चेतनस्वभाव है । एक । तथा चेतनस्वभावसे जो विपरीत है वह अचैतन्य वा अचेतन स्वभाव है । दो । इनमें चेतन स्वभावके विना अर्थात् चेतनस्वभाव न माननेपर जीवके कर्मोंका अभाव होगा, क्योंकि कर्मबन्धमें जो राग तथा द्वेपरूप कारण है वह चेतना अर्थात् ज्ञानावरणादि कर्मोंका अभाव है अर्थात् चेतनासे हो कर्मोंका वन्ध होता है । क्योंकि जैसे तैल आदिसे लिप्त शरीरवाले जीवका शरीर धूलसे लिप्त हो जाता है, ऐसेही राग तथा द्वेषसे आर्द्रीभूत जीवके ही कमोंका बन्धन होता है । इस कथनके अनुसार यदि जीवके चेतन स्वभाव न मानकर, सर्वथा अचेतन स्वभावही मानें तो कर्मोका अभावही होगा ॥ एक ॥
Welcome! Forgot your password? A password will be e-mailed to you. . Akanksha Dubey Suicide: आकांक्षा के साथ कौन था ये लड़का, सुसाइड से पहले रात कुछ मिनटों में ऐसा क्या हुआ? The Kerala Story Tax Free: मध्य प्रदेश के बाद अब यूपी में भी टैक्स फ्री 'The Kerala Story', पढ़ें CM योगी कब देखेंगे फिल्म? Pradeep Sarkar Death: नहीं रहे 'परिणीता' के निर्देशक प्रदीप सरकार, जानें क्या रही वजह? Artificial Intelligence: शिक्षा में AI का उपयोग और भविष्य का एक्सपोजर. . , .
Welcome! Forgot your password? A password will be e-mailed to you. . Akanksha Dubey Suicide: आकांक्षा के साथ कौन था ये लड़का, सुसाइड से पहले रात कुछ मिनटों में ऐसा क्या हुआ? The Kerala Story Tax Free: मध्य प्रदेश के बाद अब यूपी में भी टैक्स फ्री 'The Kerala Story', पढ़ें CM योगी कब देखेंगे फिल्म? Pradeep Sarkar Death: नहीं रहे 'परिणीता' के निर्देशक प्रदीप सरकार, जानें क्या रही वजह? Artificial Intelligence: शिक्षा में AI का उपयोग और भविष्य का एक्सपोजर. . , .
धुलिया. धुलिया में चोर मचाए शोर एक ही दिन में तीन स्थानों पर अज्ञात बदमाशों ने चोरी की वारदात को अंजाम देकर लाखों रुपए की नकदी समेत हजारों रुपये के आभूषणों की चोरी की है। इसमें सब से बड़ी चोरी हिरे मेडिकल कॉलेज (Hire Medical College) की डीन (Dean) पल्लवी सापले (Pallavi Saple) के आवास में हुई है। दूसरी ओर चालीसगांव रोड स्थित अंबिका नगर के बंद आवास से एक लाख रुपये और तीसरी चोरी की घटना शिवाजी नगर कल्याणी बंगले के पीछे सेवानिवृत्त आदिवासी प्रकल्प अधिकारी विभाग के अधिकारी के बंद घर से पांच ग्राम सोने के जेवरात समेत हजारों की नकदी अज्ञात चोर ले उड़े। एक तरह अज्ञात बदमाशों ने धुलिया पुलिस के सामने पकड़ने की चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर धुलिया जिला पिछले तीन दिनों से कोरोना मुक्त हुआ था। जिसके चलते धुलिया शहर निवासियों ने राहत की सांसें ली थी।
धुलिया. धुलिया में चोर मचाए शोर एक ही दिन में तीन स्थानों पर अज्ञात बदमाशों ने चोरी की वारदात को अंजाम देकर लाखों रुपए की नकदी समेत हजारों रुपये के आभूषणों की चोरी की है। इसमें सब से बड़ी चोरी हिरे मेडिकल कॉलेज की डीन पल्लवी सापले के आवास में हुई है। दूसरी ओर चालीसगांव रोड स्थित अंबिका नगर के बंद आवास से एक लाख रुपये और तीसरी चोरी की घटना शिवाजी नगर कल्याणी बंगले के पीछे सेवानिवृत्त आदिवासी प्रकल्प अधिकारी विभाग के अधिकारी के बंद घर से पांच ग्राम सोने के जेवरात समेत हजारों की नकदी अज्ञात चोर ले उड़े। एक तरह अज्ञात बदमाशों ने धुलिया पुलिस के सामने पकड़ने की चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर धुलिया जिला पिछले तीन दिनों से कोरोना मुक्त हुआ था। जिसके चलते धुलिया शहर निवासियों ने राहत की सांसें ली थी।
अमेरिका से एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर सामने आई है जहां कैलिफोर्निया के फ्रेस्नो में एक सड़क हादसे में एक वकील और उनके डॉक्टर बेटे की मौत हो गई. वहीं, वकील की पत्नी को गंभीर चोटें आई हैं। मृतकों की पहचान पिता कुलविंदर सिंह और पुत्र सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है। वह भुलठ के बोपराई गांव के रहने वाले थे। इस संबंध में मृतक कुलविंदर सिंह के भाई ने बताया कि वह व उसका परिवार पिछले 15 साल से अमेरिका में रह रहा था. वह अपनी पत्नी बलवीर कौर के साथ अपने बेटे सुखविंदर सिंह की मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने का जश्न मनाने के लिए दौरे पर जा रहे थे, तभी रास्ते में एक वाहन का टायर वाहन से अलग हो गया और उनके वाहन के सामने आ गया। जिससे उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में सुखविंदर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुलविंदर सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. सुखविंदर सिंह अभी तक अविवाहित थे और केवल 30 वर्ष के थे। अमेरिका में हुए इस सड़क हादसे में पिता-पुत्र की मौत से गांव में शोक की लहर है.
अमेरिका से एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर सामने आई है जहां कैलिफोर्निया के फ्रेस्नो में एक सड़क हादसे में एक वकील और उनके डॉक्टर बेटे की मौत हो गई. वहीं, वकील की पत्नी को गंभीर चोटें आई हैं। मृतकों की पहचान पिता कुलविंदर सिंह और पुत्र सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है। वह भुलठ के बोपराई गांव के रहने वाले थे। इस संबंध में मृतक कुलविंदर सिंह के भाई ने बताया कि वह व उसका परिवार पिछले पंद्रह साल से अमेरिका में रह रहा था. वह अपनी पत्नी बलवीर कौर के साथ अपने बेटे सुखविंदर सिंह की मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने का जश्न मनाने के लिए दौरे पर जा रहे थे, तभी रास्ते में एक वाहन का टायर वाहन से अलग हो गया और उनके वाहन के सामने आ गया। जिससे उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में सुखविंदर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुलविंदर सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. सुखविंदर सिंह अभी तक अविवाहित थे और केवल तीस वर्ष के थे। अमेरिका में हुए इस सड़क हादसे में पिता-पुत्र की मौत से गांव में शोक की लहर है.
स्पोर्ट्स डेस्कः भारतीय टीम और रॉयल्स चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टार बल्लेाज विराट कोहली ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2023 में शानदार शुरूआत की है। वह आईपीएल के इस सीजन में रॉयल्स चैलेंजर्स बैंगलोर की ओर से खेलते हुए दो मैचों में कुल 103 रन बना चुके हैं। आईपीएल 2023 में जहां फैंस को कोहली की धमाकेदार बल्लेबाजी देखने का मौका मिला रहा, वहीं फैंस आरसीबी पॉडकास्ट में कोहली के किस्से सुनकर भी बेहद खुश हैं। स्टार भारतीय बल्लेबाज ने अब आरसीबी पॉडकास्ट में एक और खुलासा किया है, जब साल 2014 में उनको फ्लाइट में एक फैन मिला था। कोहली ने आरसीबी पॉडकास्ट में एक प्रशंसक के साथ मजेदार बातचीत का खुलासा किया जब वह भारतीय टीम के साथ दिल्ली से कोच्चि की उड़ान पर थे। कोहली ने याद किया कि उस फैन ने उनसे अगले मैच में शतक लगाने को कहा था। कोहली ने कहा, "यह घटना 2014 के आसपास की थी जब मैं ज्यादा रन नहीं बना रहा था और मैं कुछ वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में सस्ते में आउट हो गया था। हम कोच्चि से दिल्ली की उड़ान पर थे और टीम को आगे की सीटें दी गई थीं। एक आदमी मेरे पास चला आया, जो एमएस धोनी का बहुत बड़ा प्रशंसक था और चेन्नई से था। इसलिए जैसे ही मैं अपनी सीट से उठा, उस आदमी ने मुझे देखा और कहा 'कोहली, क्या चल रहा है? मैं आपसे अगले मैच में शतक की उम्मीद कर रहा हूं। " कोहली ने कहा कि वह उस समय युवा खिलाड़ी थे, इसलिए उन्होंने तीखी, लेकिन व्यावहारिक प्रतिक्रिया दी। कौहली ने कहा, "मैं युवा था इसलिए मैंने प्रतिक्रिया दी। मैंने कहा चलो बात करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि वह किस कंपनी के लिए काम करते हैं और उनकी कंपनी में कौनसी पॉजिशिन पर काम करते हैंऔर उनसे कहा कि उन्हें अगले तीन महीनों में कंपनी का चेयरमैन बनना चाहिए। जब उन्होंने कहा यह कैसे संभव था, मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि मैं भी बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन यह वीडियो गेम नहीं है। " कोहली ने कहा कि प्रशंसक ने एमएस धोनी को कप्तानी के टिप्स देने की भी कोशिश की और खिलाड़ियों ने प्रशंसक को कहा कि आप हमारे कोच बन जाइए तो प्रशंसक के साथ सभी हंसने लगे। उन्होंने कहा, "वह एमएस से मिले और जाहिर तौर पर उत्साहित थे, लेकिन फिर उन्होंने टीम संयोजन और कप्तानी के बारे में बात करना शुरू कर दिया और टिप्स देना शुरू कर दिया। धोनी काफी धैर्यवान थे और अच्छी तरह से सुन रहे थे। तब तक पूरी टीम चिल्लाने लगी, 'कोच! कोच! ' जैसा कि वह सभी को प्रशिक्षित करने की कोशिश कर रहा था और तभी वह हँसा और वापस अपनी सीट पर चला गया। यह एक मज़ेदार क्षण था। "
स्पोर्ट्स डेस्कः भारतीय टीम और रॉयल्स चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टार बल्लेाज विराट कोहली ने इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में शानदार शुरूआत की है। वह आईपीएल के इस सीजन में रॉयल्स चैलेंजर्स बैंगलोर की ओर से खेलते हुए दो मैचों में कुल एक सौ तीन रन बना चुके हैं। आईपीएल दो हज़ार तेईस में जहां फैंस को कोहली की धमाकेदार बल्लेबाजी देखने का मौका मिला रहा, वहीं फैंस आरसीबी पॉडकास्ट में कोहली के किस्से सुनकर भी बेहद खुश हैं। स्टार भारतीय बल्लेबाज ने अब आरसीबी पॉडकास्ट में एक और खुलासा किया है, जब साल दो हज़ार चौदह में उनको फ्लाइट में एक फैन मिला था। कोहली ने आरसीबी पॉडकास्ट में एक प्रशंसक के साथ मजेदार बातचीत का खुलासा किया जब वह भारतीय टीम के साथ दिल्ली से कोच्चि की उड़ान पर थे। कोहली ने याद किया कि उस फैन ने उनसे अगले मैच में शतक लगाने को कहा था। कोहली ने कहा, "यह घटना दो हज़ार चौदह के आसपास की थी जब मैं ज्यादा रन नहीं बना रहा था और मैं कुछ वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में सस्ते में आउट हो गया था। हम कोच्चि से दिल्ली की उड़ान पर थे और टीम को आगे की सीटें दी गई थीं। एक आदमी मेरे पास चला आया, जो एमएस धोनी का बहुत बड़ा प्रशंसक था और चेन्नई से था। इसलिए जैसे ही मैं अपनी सीट से उठा, उस आदमी ने मुझे देखा और कहा 'कोहली, क्या चल रहा है? मैं आपसे अगले मैच में शतक की उम्मीद कर रहा हूं। " कोहली ने कहा कि वह उस समय युवा खिलाड़ी थे, इसलिए उन्होंने तीखी, लेकिन व्यावहारिक प्रतिक्रिया दी। कौहली ने कहा, "मैं युवा था इसलिए मैंने प्रतिक्रिया दी। मैंने कहा चलो बात करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि वह किस कंपनी के लिए काम करते हैं और उनकी कंपनी में कौनसी पॉजिशिन पर काम करते हैंऔर उनसे कहा कि उन्हें अगले तीन महीनों में कंपनी का चेयरमैन बनना चाहिए। जब उन्होंने कहा यह कैसे संभव था, मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि मैं भी बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन यह वीडियो गेम नहीं है। " कोहली ने कहा कि प्रशंसक ने एमएस धोनी को कप्तानी के टिप्स देने की भी कोशिश की और खिलाड़ियों ने प्रशंसक को कहा कि आप हमारे कोच बन जाइए तो प्रशंसक के साथ सभी हंसने लगे। उन्होंने कहा, "वह एमएस से मिले और जाहिर तौर पर उत्साहित थे, लेकिन फिर उन्होंने टीम संयोजन और कप्तानी के बारे में बात करना शुरू कर दिया और टिप्स देना शुरू कर दिया। धोनी काफी धैर्यवान थे और अच्छी तरह से सुन रहे थे। तब तक पूरी टीम चिल्लाने लगी, 'कोच! कोच! ' जैसा कि वह सभी को प्रशिक्षित करने की कोशिश कर रहा था और तभी वह हँसा और वापस अपनी सीट पर चला गया। यह एक मज़ेदार क्षण था। "
Sharad Pawar Karnataka चुनाव में कांग्रेस को मिली सियासी कामयाबी के बाद विपक्षी दलों की एकजुटता की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस को मिली सफलता बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस की ताकत दिखाती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार भी महाराष्ट्र में बतौर मुख्यमंत्री सियासी पारी खेल चुके हैं। इसके अलावा वे केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में भी दिल्ली की सियासत का अनुभव भी रखते हैं। पवार की पावर और सियासत को समझने वाले उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का पितामह मानते हैं। शरद पवार कर्नाटक के सीमावर्ती प्रदेश महाराष्ट्र में अच्छी पकड़ रखते हैं, इसकी मिसाल गत दिनों NCP की अध्यक्षता वाले प्रकरण में दिखी। विपक्षी एकजुटता के मद्देनजर भी पवार को शिवसेना और तमाम पार्टियां अहम बता चुकी हैं। ऐसे में समान विचारधारा वाली पार्टियों की एकजुटता का आह्वान बेहद अहम है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) अलग-अलग दलों के गठबंधन की मिसाल है। पवार ने कर्नाटक के चुनावी परिणाम पर पहली प्रतिक्रिया में कहा, हमें कर्नाटक से एक संदेश मिला है। राज्य ने विपक्ष को राह दिखाई है। समान विचारधारा वाले दलों को एक साथ आना चाहिए और बीजेपी को हराना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस जैसी अकेली पार्टी बीजेपी के खिलाफ अपनी शक्ति दिखा सकती है तो अन्य राज्यों में भी विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा को हरा सकते हैं।
Sharad Pawar Karnataka चुनाव में कांग्रेस को मिली सियासी कामयाबी के बाद विपक्षी दलों की एकजुटता की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस को मिली सफलता बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस की ताकत दिखाती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार भी महाराष्ट्र में बतौर मुख्यमंत्री सियासी पारी खेल चुके हैं। इसके अलावा वे केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में भी दिल्ली की सियासत का अनुभव भी रखते हैं। पवार की पावर और सियासत को समझने वाले उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का पितामह मानते हैं। शरद पवार कर्नाटक के सीमावर्ती प्रदेश महाराष्ट्र में अच्छी पकड़ रखते हैं, इसकी मिसाल गत दिनों NCP की अध्यक्षता वाले प्रकरण में दिखी। विपक्षी एकजुटता के मद्देनजर भी पवार को शिवसेना और तमाम पार्टियां अहम बता चुकी हैं। ऐसे में समान विचारधारा वाली पार्टियों की एकजुटता का आह्वान बेहद अहम है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी अलग-अलग दलों के गठबंधन की मिसाल है। पवार ने कर्नाटक के चुनावी परिणाम पर पहली प्रतिक्रिया में कहा, हमें कर्नाटक से एक संदेश मिला है। राज्य ने विपक्ष को राह दिखाई है। समान विचारधारा वाले दलों को एक साथ आना चाहिए और बीजेपी को हराना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस जैसी अकेली पार्टी बीजेपी के खिलाफ अपनी शक्ति दिखा सकती है तो अन्य राज्यों में भी विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा को हरा सकते हैं।
कोरोना के कहर के कारण लंबे समय से सिनेमाघरों में कोई भी फिल्म रिलीज नहीं हुई है। ऐसे में मेकर्स ने अब ओटीटी प्लेटफॉर्म का रूख कर लिया है। हॉटस्टार पर एक से एक बेहतरीन फिल्में रिलीज होने के बाद अब नंबर अमेजन प्राइम का है। अमेजन फैंस को त्योहार का तोहफा देने जा रहा है। अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) ने 9 फिल्मों का ऐलान किया है जो सीधी स्ट्रीमिंग सर्विस पर प्रीमियर होंग। . 5 भारतीय भाषाओं की फिल्में फैंस का मनोरंजन करने वाली हैं। जकारिया मोहम्मद निर्देशित मलयालम कॉमेडी फिल्म है, जिसमें इंद्रजीत सुकुमारन, जोजू जॉर्ज, शराफ यू धीन, ग्रेस एंटोनी और शौबिन साहिर तथा पार्वती थिरूवोथू दिखेंगे। ये फिल्म 15 अक्टूबर को रिलीज की जाएगी। भीमासेनानाला महाराजा एक कन्नड़ फिल्म है। फिल्म 29 अक्टूबर को पेश की जाएगी। फैमिली एंटरटेनर है, जिसका निर्देशन कार्तिक सारागुर ने किया है. इसमें अरविंद अय्यर, आरोही नारायण, प्रियंका थिम्मेश, अच्युत कुमार और आद्या की मुख्य भूमिकाएं हैं। सूराराई पोटरू तमिल फिल्म है। एक्शन/ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन सुधा कोनगारा ने किया है. इसमें सूर्या लीड रोल में हैं। ये 30 अक्टूबर को प्राइम पर आएगी। छलांग प्रेरक सोशल कॉमेडी है, जिसमें राजकुमार राव और नुशरत भरूचा की मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका निर्देशन हंसल मेहता ने किया है। फिल्म को 13 नंबवर को पेश किया जाएगा। कन्नड़ फिल्म मन्ने नंबर हॉरर थ्रिलर है, जिसका निर्देशन विवी काथिरेसन ने किया है. इस फिल्म में वर्षा बोलाम्मा, ऐश्वर्या गोवडा, प्रवीण प्रेम, चेतन गंधर्व, रमना और संजीवन हैं। 10 नंबर को फिल्म ओटीटी पर रिलीज होगी। तेलुगू फिल्म मिडल क्लास मेलोडीज आनंद देवराकोंडा और वर्षा बोलाम्मा की यह कॉमेडी फिल्म है, जो एक गांव के मध्यम वर्ग का सुखद जीवन चित्रित करती है, जहां एक नौजवान एक शहर में होटल का मालिक बनने का सपना देखता है। फिल्म 20 नंवबर को पेश की जाएगी। तमिल फिल्म मारा एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन धिलिप कुमार ने किया है। 17 को रिलीज होने वाली इस फिल्म में माधवन और श्रद्धा श्रीनाथ हैं। कुली नंबर 1 फैमिली कॉमेडी है, जो पूजा एंटरटेनमेन्ट की लोकप्रिय फ्रैंचाइजी पर आधारित है। इसको 25 दिसंबर को रिलीज किया जाएगा। इसका निर्देशन कॉमेडी के किंग डेविड धवन ने किया है. इसमें वरुण धवन, सारा अली खान, परेश रावल, जावेद जाफरी, जॉनी लीवर, राजपाल यादव लीड रोल में हैं।
कोरोना के कहर के कारण लंबे समय से सिनेमाघरों में कोई भी फिल्म रिलीज नहीं हुई है। ऐसे में मेकर्स ने अब ओटीटी प्लेटफॉर्म का रूख कर लिया है। हॉटस्टार पर एक से एक बेहतरीन फिल्में रिलीज होने के बाद अब नंबर अमेजन प्राइम का है। अमेजन फैंस को त्योहार का तोहफा देने जा रहा है। अमेजन प्राइम वीडियो ने नौ फिल्मों का ऐलान किया है जो सीधी स्ट्रीमिंग सर्विस पर प्रीमियर होंग। . पाँच भारतीय भाषाओं की फिल्में फैंस का मनोरंजन करने वाली हैं। जकारिया मोहम्मद निर्देशित मलयालम कॉमेडी फिल्म है, जिसमें इंद्रजीत सुकुमारन, जोजू जॉर्ज, शराफ यू धीन, ग्रेस एंटोनी और शौबिन साहिर तथा पार्वती थिरूवोथू दिखेंगे। ये फिल्म पंद्रह अक्टूबर को रिलीज की जाएगी। भीमासेनानाला महाराजा एक कन्नड़ फिल्म है। फिल्म उनतीस अक्टूबर को पेश की जाएगी। फैमिली एंटरटेनर है, जिसका निर्देशन कार्तिक सारागुर ने किया है. इसमें अरविंद अय्यर, आरोही नारायण, प्रियंका थिम्मेश, अच्युत कुमार और आद्या की मुख्य भूमिकाएं हैं। सूराराई पोटरू तमिल फिल्म है। एक्शन/ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन सुधा कोनगारा ने किया है. इसमें सूर्या लीड रोल में हैं। ये तीस अक्टूबर को प्राइम पर आएगी। छलांग प्रेरक सोशल कॉमेडी है, जिसमें राजकुमार राव और नुशरत भरूचा की मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका निर्देशन हंसल मेहता ने किया है। फिल्म को तेरह नंबवर को पेश किया जाएगा। कन्नड़ फिल्म मन्ने नंबर हॉरर थ्रिलर है, जिसका निर्देशन विवी काथिरेसन ने किया है. इस फिल्म में वर्षा बोलाम्मा, ऐश्वर्या गोवडा, प्रवीण प्रेम, चेतन गंधर्व, रमना और संजीवन हैं। दस नंबर को फिल्म ओटीटी पर रिलीज होगी। तेलुगू फिल्म मिडल क्लास मेलोडीज आनंद देवराकोंडा और वर्षा बोलाम्मा की यह कॉमेडी फिल्म है, जो एक गांव के मध्यम वर्ग का सुखद जीवन चित्रित करती है, जहां एक नौजवान एक शहर में होटल का मालिक बनने का सपना देखता है। फिल्म बीस नंवबर को पेश की जाएगी। तमिल फिल्म मारा एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन धिलिप कुमार ने किया है। सत्रह को रिलीज होने वाली इस फिल्म में माधवन और श्रद्धा श्रीनाथ हैं। कुली नंबर एक फैमिली कॉमेडी है, जो पूजा एंटरटेनमेन्ट की लोकप्रिय फ्रैंचाइजी पर आधारित है। इसको पच्चीस दिसंबर को रिलीज किया जाएगा। इसका निर्देशन कॉमेडी के किंग डेविड धवन ने किया है. इसमें वरुण धवन, सारा अली खान, परेश रावल, जावेद जाफरी, जॉनी लीवर, राजपाल यादव लीड रोल में हैं।
BBC News, अफ़ग़ान तालिबानः 'आत्मघाती हमलावर हमारे हीरो, दुनिया चाहे कुछ भी कहे हमें, परवाह नहीं' तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान को लेकर भारत के रुख़ में बदलाव क्यों? पुतिन का तालिबान पर यह बयान क्या भारत के लिए झटका है? वीडियो, रूस में तालिबान के साथ मीटिंग से भारत को क्या उम्मीदें हैं? वीडियो, अफ़ग़ानिस्तान पर फिर से सक्रिय हुआ रूस, क्या तालिबान के लिए ख़ुशख़बरी है ? वीडियो, वीडियो,
BBC News, अफ़ग़ान तालिबानः 'आत्मघाती हमलावर हमारे हीरो, दुनिया चाहे कुछ भी कहे हमें, परवाह नहीं' तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान को लेकर भारत के रुख़ में बदलाव क्यों? पुतिन का तालिबान पर यह बयान क्या भारत के लिए झटका है? वीडियो, रूस में तालिबान के साथ मीटिंग से भारत को क्या उम्मीदें हैं? वीडियो, अफ़ग़ानिस्तान पर फिर से सक्रिय हुआ रूस, क्या तालिबान के लिए ख़ुशख़बरी है ? वीडियो, वीडियो,
Bihar Assembly: लगता है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने पिछले सत्र से काफी सबक लिया है.... यही वजह है कि बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र (Bihar Monsoon Session) में उनका दूसरा रूप नजर आ रहा है.... . तेजस्वी हंगामा नहीं कर रहे बल्कि सवालों के हथियार से सरकार पर हमला कर रहे हैं...... . 23 मार्च के कुकृत्य के बाद बिहार विधानसभा कभी पहले जैसा नहीं रहेगा! वह प्रकरण ना भुलाया जा सकता है! ना भुलाया जाएगा! स्वाभाविक है कि इसके अप्रिय नतीजे होंगे! यही नहीं तेजस्वी यादव ने विधानसभा से बाहर सड़क पर छात्रों से भी बातचीत की .... .
Bihar Assembly: लगता है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पिछले सत्र से काफी सबक लिया है.... यही वजह है कि बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में उनका दूसरा रूप नजर आ रहा है.... . तेजस्वी हंगामा नहीं कर रहे बल्कि सवालों के हथियार से सरकार पर हमला कर रहे हैं...... . तेईस मार्च के कुकृत्य के बाद बिहार विधानसभा कभी पहले जैसा नहीं रहेगा! वह प्रकरण ना भुलाया जा सकता है! ना भुलाया जाएगा! स्वाभाविक है कि इसके अप्रिय नतीजे होंगे! यही नहीं तेजस्वी यादव ने विधानसभा से बाहर सड़क पर छात्रों से भी बातचीत की .... .
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बरेली के जोगी नवादा में विवाद के बाद भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है. जगह-जगह ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से हालात को लेकर चौकसी बरती जा रही है. कांवड़ यात्रा में कोई हंगामा ना हो, इसके लिए पुलिस बाहरी तत्वों पर कड़ी नजर रख रही है. उत्तर प्रदेश के बरेली के थाना बारादरी क्षेत्र के जोगी नवादा में आज कांवड़ यात्रा नहीं निकलेगी. पिछले दिनों यहां कांवड़ यात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद आज विवादित रूट से कांवड़ यात्रा नहीं निकालने का फैसला किया गया है. दरअसल पुलिस प्रशासन ने इस रूट पर कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं दी थी. विवाद की आशंका को देखते हुए जोगी नवादा में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है. पूरे मोहल्ले को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया है जोगी नवादा में पुलिस प्रशासन की पूरी तैयार है. मुख्य रास्तों से लगी गलियों को बंद कर दिया गया है. इलाके में ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है. गली, मोहल्ले में 50 से अधिक कैमरे लगाए गए हैं. ताकि उपद्रवियों पर नजर रखी जा सके. पुलिस यहां किसी तरीके की चूक नहीं चाहती. सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन ने जोगी नवादा मोहल्ले को 2 सेक्टर में बांटा है. तीस जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है. यहां हर आने, जाने वालों पर पुलिस की कड़ी नजर है. सभी से पूछताछ की जा रही है. घरों में रहने वाले हर शख्स का डाटा लिया जा रहा है. पुलिस उनके आधार कार्ड चेक कर रही है. यहां एक प्रकार से अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति है. घरों की छतों पर फोर्स को तैनात किया गया है. चार कंपनी पीएसी और एक कंपनी आर ए एफ मुस्तैद है. कई थानों की फोर्स और सीनियर पुलिस अधिकारी हालात को लेकर अलर्ट हैं. आस-पास के मोहल्लों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है. करीब 800 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस ने जोगी नवादा में बाहर से आने वाले दोनों पक्षों के करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. उन्हें थाने में लाकर पूछताछ की जा रही है. उनके आधार कार्ड की भी जांच हो रही है.
बरेली के जोगी नवादा में विवाद के बाद भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है. जगह-जगह ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से हालात को लेकर चौकसी बरती जा रही है. कांवड़ यात्रा में कोई हंगामा ना हो, इसके लिए पुलिस बाहरी तत्वों पर कड़ी नजर रख रही है. उत्तर प्रदेश के बरेली के थाना बारादरी क्षेत्र के जोगी नवादा में आज कांवड़ यात्रा नहीं निकलेगी. पिछले दिनों यहां कांवड़ यात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद आज विवादित रूट से कांवड़ यात्रा नहीं निकालने का फैसला किया गया है. दरअसल पुलिस प्रशासन ने इस रूट पर कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं दी थी. विवाद की आशंका को देखते हुए जोगी नवादा में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है. पूरे मोहल्ले को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया है जोगी नवादा में पुलिस प्रशासन की पूरी तैयार है. मुख्य रास्तों से लगी गलियों को बंद कर दिया गया है. इलाके में ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है. गली, मोहल्ले में पचास से अधिक कैमरे लगाए गए हैं. ताकि उपद्रवियों पर नजर रखी जा सके. पुलिस यहां किसी तरीके की चूक नहीं चाहती. सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन ने जोगी नवादा मोहल्ले को दो सेक्टर में बांटा है. तीस जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है. यहां हर आने, जाने वालों पर पुलिस की कड़ी नजर है. सभी से पूछताछ की जा रही है. घरों में रहने वाले हर शख्स का डाटा लिया जा रहा है. पुलिस उनके आधार कार्ड चेक कर रही है. यहां एक प्रकार से अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति है. घरों की छतों पर फोर्स को तैनात किया गया है. चार कंपनी पीएसी और एक कंपनी आर ए एफ मुस्तैद है. कई थानों की फोर्स और सीनियर पुलिस अधिकारी हालात को लेकर अलर्ट हैं. आस-पास के मोहल्लों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है. करीब आठ सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस ने जोगी नवादा में बाहर से आने वाले दोनों पक्षों के करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. उन्हें थाने में लाकर पूछताछ की जा रही है. उनके आधार कार्ड की भी जांच हो रही है.
BAREILLY: शहर में चोरों का कहर जारी है। संडे को चोरों ने दिनदहाड़े फाईक एंक्लेव में लॉक मकान में घुसकर हाथ साफ कर दिया। घर के सदस्य बेटी की शादी में गए थे। इस घर से चोर 5 लाख रुपए नकद समेत लाखों के जेवरात समेट कर ले गए। वहीं, सैटरडे की रात चोरों ने प्रेमनगर में एक घर को निशाना बनाया था। मिर्जा वसीर बेग, पेशे से एडवोकेट हैं। वह फाईक एंक्लेव में रहते हैं। संडे को उनकी बेटी सायनारा की शादी थी। शादी में शामिल होने के लिए परिवार के सभी लोग घर में ताला लगाकर पीलीभीत रोड स्थित ताज पैलेस चले गए। शादी समारोह खत्म होने के बाद जब वह घर पहुंचे तो देखा कि घर का सारा सामान बिखरा हुआ था। चोर उनके घर में पड़ोस के निर्माणाधीन मकान से घुसे हैं। उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस पहुंची और जांच की। एसआई अजब सिंह यादव ने बताया कि चोरी की वारदात हुई है। शादी समारोह होने के चलते अभी कोई एफआईआर लिखाने नहीं पहुंचा है। तहरीर मिलने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रेमनगर में चोरों ने घर को निशाना बनाया। भूड़ प्रेमनगर निवासी गंगाराम रक्षाबंधन पर पटे की बजरिया में अपने दूसरे मकान पर गए हुए थे। संडे सुबह उन्हें पड़ोसी ने सूचना दी कि उनके घर के ताले टूटे हुए हैं। जैसे ही वह घर पहुंचे तो देखा कि अंदर अलमारियां भी टूटी हुई थीं। चोर घर से 25 हजार रुपए नकद, ज्वेलरी समेत करीब 3 लाख रुपए का माल ले गए हैं। हार्टमन कॉलेज के सामने ब्रिज ऑफ होप एनजीओ का आफिस है। एनजीओ की प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर प्रियंका के अनुसार 24 अगस्त की रात में उनके आफिस के मेन गेट व अंदर के गेट का ताला तोड़कर चोर बैट्री व इनवर्टर चोरी करके ले गए। 29अगस्त को शिकायत करने पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
BAREILLY: शहर में चोरों का कहर जारी है। संडे को चोरों ने दिनदहाड़े फाईक एंक्लेव में लॉक मकान में घुसकर हाथ साफ कर दिया। घर के सदस्य बेटी की शादी में गए थे। इस घर से चोर पाँच लाख रुपए नकद समेत लाखों के जेवरात समेट कर ले गए। वहीं, सैटरडे की रात चोरों ने प्रेमनगर में एक घर को निशाना बनाया था। मिर्जा वसीर बेग, पेशे से एडवोकेट हैं। वह फाईक एंक्लेव में रहते हैं। संडे को उनकी बेटी सायनारा की शादी थी। शादी में शामिल होने के लिए परिवार के सभी लोग घर में ताला लगाकर पीलीभीत रोड स्थित ताज पैलेस चले गए। शादी समारोह खत्म होने के बाद जब वह घर पहुंचे तो देखा कि घर का सारा सामान बिखरा हुआ था। चोर उनके घर में पड़ोस के निर्माणाधीन मकान से घुसे हैं। उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस पहुंची और जांच की। एसआई अजब सिंह यादव ने बताया कि चोरी की वारदात हुई है। शादी समारोह होने के चलते अभी कोई एफआईआर लिखाने नहीं पहुंचा है। तहरीर मिलने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रेमनगर में चोरों ने घर को निशाना बनाया। भूड़ प्रेमनगर निवासी गंगाराम रक्षाबंधन पर पटे की बजरिया में अपने दूसरे मकान पर गए हुए थे। संडे सुबह उन्हें पड़ोसी ने सूचना दी कि उनके घर के ताले टूटे हुए हैं। जैसे ही वह घर पहुंचे तो देखा कि अंदर अलमारियां भी टूटी हुई थीं। चोर घर से पच्चीस हजार रुपए नकद, ज्वेलरी समेत करीब तीन लाख रुपए का माल ले गए हैं। हार्टमन कॉलेज के सामने ब्रिज ऑफ होप एनजीओ का आफिस है। एनजीओ की प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर प्रियंका के अनुसार चौबीस अगस्त की रात में उनके आफिस के मेन गेट व अंदर के गेट का ताला तोड़कर चोर बैट्री व इनवर्टर चोरी करके ले गए। उनतीसअगस्त को शिकायत करने पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
मऊरानीपुर। झांसी के सकरार थाना क्षेत्र के ग्राम खिसनी बुजुर्ग में जुआ खेलते समय जुआरियों द्वारा आपस में झगड़ते हुए गोली चला दी गई। जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची सकरार पुलिस ने शव को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया गया है कि सकरार थाना क्षेत्र के ग्राम खिसनी बुजुर्ग के भरदा खिरक पर कुछ लोग जुए में जीत हार की बाजी लगा रहे थे । इसी दौरान पैसे के लेनदेन को लेकर आपस में कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी बढ़ गई कि तमंचा से गोली तक चला दी। जिसमें मध्य प्रदेश के निवाड़ी निवासी राजू नाम के एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई । मौके से सभी जुआरी फरार बताए जा रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मऊरानीपुर। झांसी के सकरार थाना क्षेत्र के ग्राम खिसनी बुजुर्ग में जुआ खेलते समय जुआरियों द्वारा आपस में झगड़ते हुए गोली चला दी गई। जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची सकरार पुलिस ने शव को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया गया है कि सकरार थाना क्षेत्र के ग्राम खिसनी बुजुर्ग के भरदा खिरक पर कुछ लोग जुए में जीत हार की बाजी लगा रहे थे । इसी दौरान पैसे के लेनदेन को लेकर आपस में कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी बढ़ गई कि तमंचा से गोली तक चला दी। जिसमें मध्य प्रदेश के निवाड़ी निवासी राजू नाम के एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई । मौके से सभी जुआरी फरार बताए जा रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हमीरपुर - हमीरपुर में बच्चों का बचपन भी धुंधला होने लगा है। बुढ़ापे में होने वाली मोतियाबिंद की बीमारी छोटी उम्र में ही हावी होने लगी है। आलम यह है कि क्षेत्रीय अस्पताल में मोतियाबिंद के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बड़ों के साथ-साथ बच्चों में आंख की पुतली सफेद होने की शिकायत भी बढ़ गई है। क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर के नेत्र विशेषज्ञ डा. शशि दत्त ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पांच साल की कम उम्र के बच्चों में भी यह शिकायत देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस रोग में जरा भी लापरवाही बरतने पर बच्चों का जीवन अंधकार में जा सकता है। डा. शशि ने बताया अस्पताल में हर साल मोतियाबिंद के 1100 से 1200 आपरेशन किए जाते हैं। बीते साल की बात करें तो अप्रैल, 2015 से मार्च, 2016 तक 1036 मोतियाबिंद के सफल आपरेशन किए गए हैं। वहीं, इस साल अभी तक 700 के करीब मोतियाबिंद के आपरेशन किए जा चुके हैं। इसके अलावा बच्चों में मोतियाबिंद की बात करें तो हर साल औसतन दो से तीन बच्चों के मोतियाबिंद के आपरेशन किए जाते हैं। नेत्र विशेषज्ञ डा. शशि दत्त के अनुसार इनमें कुछ बच्चे गर्वस्था से ही इसकी चपेट में आते हैं, तो कुछ में देरी से पता लगता है। जिला अस्पताल की आई ओपीडी में रोजाना सौ से डेढ़ सौ मरीज आंखों का चैकअप करवाने आते हैं। डा. शशि ने बताया कि इनमें से कुछ बच्चे आंखों में रिफलेक्टिव एरर के चलते धुंधला देखते हैं, जिन्हें नजरों का चश्मा लगाया जाता है। डा. शशि ने बताया कि इस तरह के कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को ही दिखाएं।
हमीरपुर - हमीरपुर में बच्चों का बचपन भी धुंधला होने लगा है। बुढ़ापे में होने वाली मोतियाबिंद की बीमारी छोटी उम्र में ही हावी होने लगी है। आलम यह है कि क्षेत्रीय अस्पताल में मोतियाबिंद के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बड़ों के साथ-साथ बच्चों में आंख की पुतली सफेद होने की शिकायत भी बढ़ गई है। क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर के नेत्र विशेषज्ञ डा. शशि दत्त ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पांच साल की कम उम्र के बच्चों में भी यह शिकायत देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस रोग में जरा भी लापरवाही बरतने पर बच्चों का जीवन अंधकार में जा सकता है। डा. शशि ने बताया अस्पताल में हर साल मोतियाबिंद के एक हज़ार एक सौ से एक हज़ार दो सौ आपरेशन किए जाते हैं। बीते साल की बात करें तो अप्रैल, दो हज़ार पंद्रह से मार्च, दो हज़ार सोलह तक एक हज़ार छत्तीस मोतियाबिंद के सफल आपरेशन किए गए हैं। वहीं, इस साल अभी तक सात सौ के करीब मोतियाबिंद के आपरेशन किए जा चुके हैं। इसके अलावा बच्चों में मोतियाबिंद की बात करें तो हर साल औसतन दो से तीन बच्चों के मोतियाबिंद के आपरेशन किए जाते हैं। नेत्र विशेषज्ञ डा. शशि दत्त के अनुसार इनमें कुछ बच्चे गर्वस्था से ही इसकी चपेट में आते हैं, तो कुछ में देरी से पता लगता है। जिला अस्पताल की आई ओपीडी में रोजाना सौ से डेढ़ सौ मरीज आंखों का चैकअप करवाने आते हैं। डा. शशि ने बताया कि इनमें से कुछ बच्चे आंखों में रिफलेक्टिव एरर के चलते धुंधला देखते हैं, जिन्हें नजरों का चश्मा लगाया जाता है। डा. शशि ने बताया कि इस तरह के कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को ही दिखाएं।
६५० मुनि श्रीहजारीमल स्मृति ग्रन्थ : तृतीय अध्याय जैन और वौद्ध साहित्य में पूर्व के कुछ गणराज्यों के विषय में विस्तृत सूचना मिलती है. शेष सारे भारत में फैले हुए गणराज्यों और उनके कार्यों के प्रति भारतीय साहित्य मौन है. केवल कहीं-कहीं उनके नाम मात्र मिल जाते हैं. महाभाष्य में एक स्थान पर क्षुद्रकों की महत्त्वपूर्ण विजय की ओर महर्षि पतंजलि ने संकेत किया है. संभवतः यह विजय क्षुद्रकमालवों की संयुक्त सेना ने सिकन्दर पर प्राप्त की हो जिसका उल्लेख कुछ इतिहासकारों ने किया है. आरट्ट ( वाहीक ), क्षुद्रक, मालव, वाटधान, आभीर, अपरीती (अफरीदी), चर्मखण्डिक ( समरकन्द ), कठ, गान्धार, सिन्धु, सौवीर, ब्राह्मण - राज्य, मद्र. तुपार, दर्द, पक्थ, हारहूण, शक, केकय, दशमानिक ( दशनामी), काम्बोज, दशेरक, उलूत, तोमर, हंसमार्ग, शिवि, वसाति, उरसा, अम्बष्ठ, यौधेय, मल्ल, शाक्य, लिच्छिवि आदि उत्तरी भारत के प्राचीन गणराज्यों के नाम हैं. वर्द्धमान महावीर और गौतम बुद्ध के समय इनमें से कई गणराज्य बड़े ही प्रवल थे, परन्तु सामान्यतया यह काल गणराज्यों के ह्रास का था. जनपदों में राजतन्त्र शक्तिमान् हो रहे थे. मगध के राज्य से आतंकित होकर उसके सीमावर्ती कई गणराज्यों ने मिल कर वज्जिसंघ की स्थापना की थी जिसकी राजधानी वैशाली थी. इस संघ की प्रवलता का प्रमाण यह है कि तत्कालीन राजा संघ के विभिन्न गणों में विवाह करके उनकी मित्रता के आकांक्षी थे. वत्सराज उदयन वैदेहिपुत्र कहा गया है. विम्बसार की रानी वासवी भी विदेहकुमारी थी. शाक्य शुद्धोदन की माया और महामाया नामक स्त्रियाँ लिच्छिवि थीं. कोशलराज प्रसेनजित की पत्नी शाक्य कन्या थी. महात्मा बुद्ध ने लिच्छिवियों के चरित्रवल, पारस्परिक सम्मानभाव, भ्रातृत्व, शालीनता, शक्तिमत्ता, धर्मपरिपालन, निर्विलासिता, निरलसता आदि गुणों की प्रभूत प्रशंसा की है. परन्तु सारे गण ऐसे नहीं थे, उनमें गणसदस्यों में मिथ्याभिमान, जातीयगुरुता की भावना, विलासिता, आलस्य, चरित्रहीनता आदि दुर्गुण समाविष्ट हो रहे थे. यही कारण था कि एक एक करके समस्त गणराज्य समाप्त हो रहे थे. महात्मा बुद्ध व महावीर स्वामी ने जिन नैतिक आन्दोलनों का समारम्भ किया, वे मानवमाव के लिये थे. अतएव उनके लिये गणजीवन ही उत्तम माना जा सकता था. इन दोनों ही महापुरुषों ने एक ओर तो गणों के दुर्गुणों की निन्दा की है और दूसरी ओर अपने संघों की स्थापना करके आध्यात्मिक गणराज्य-परम्परा की नींव डाली है. आध्यात्मिक गणराज्यपरम्परा के प्रवर्तक के रूप में बुद्ध व महावीर का योगदान मौलिक व युगान्तरकारी रहा है. वर्द्धमान महावीर कश्यप गोत्रीय ज्ञातृक क्षत्रिय कुल के थे. 3 उन्हें 'सर्वोच्चजिन महावीर ज्ञातृपुत्र" कहा गया है. ज्ञातृक वज्जिसंघ के अष्टकुलों (अट्ठकुल) में प्रमुख गिने जाते थे. इनकी माता लिच्छिवि वंश की थी. महावीर को संघपरम्परा का ज्ञान अपने परिवार में ही हो गया होगा. अतः कठोर तपस्या के बाद अर्हत्त्व प्राप्त करके उन्होंने अपने अनुयायियों को 'संघ' के रूप से प्रबोधित किया. अतएव उनको बुद्ध के समय में ही संघी, गणी, गणाचार्य आदि नामों से अभिहित किया जाता था. ५ कदाचित् प्रारम्भ में ऐसे धर्मसंघों का विरोध हुआ हो, धम्मपद से इस प्रकार की सूचना मिलती है. शासनं यस्तु र्याणां धर्मजोविनाम्, प्रतिक्रोशति दुर्मेधाः दृष्टिं निश्चित्य पापिकाम् । १ वैदिक समाज की नींव श्रम यज्ञ पर आधारित है, जिसका रूप आश्रम व्यवस्था के रूप में प्रतिष्ठित हुआ. श्रम को १. एकाकिभिः क्षुद्रकैर्जितम् अष्टाध्यायी सूत्र ५।३।५२ पर पातंजलमहाभाष्य. २. डा० राधाकुमुद मुकर्जी - हिन्दुसभ्यता पृ० २८४-८५. ३. प्राचीन पुस्तक माला २२/२६६. ४. सूत्रकृतांग सूत्र १११। ११२७. ५. डा० राधाकुमुद मुकर्जी - हिन्दू सभ्यता २३२,
छः सौ पचास मुनि श्रीहजारीमल स्मृति ग्रन्थ : तृतीय अध्याय जैन और वौद्ध साहित्य में पूर्व के कुछ गणराज्यों के विषय में विस्तृत सूचना मिलती है. शेष सारे भारत में फैले हुए गणराज्यों और उनके कार्यों के प्रति भारतीय साहित्य मौन है. केवल कहीं-कहीं उनके नाम मात्र मिल जाते हैं. महाभाष्य में एक स्थान पर क्षुद्रकों की महत्त्वपूर्ण विजय की ओर महर्षि पतंजलि ने संकेत किया है. संभवतः यह विजय क्षुद्रकमालवों की संयुक्त सेना ने सिकन्दर पर प्राप्त की हो जिसका उल्लेख कुछ इतिहासकारों ने किया है. आरट्ट , क्षुद्रक, मालव, वाटधान, आभीर, अपरीती , चर्मखण्डिक , कठ, गान्धार, सिन्धु, सौवीर, ब्राह्मण - राज्य, मद्र. तुपार, दर्द, पक्थ, हारहूण, शक, केकय, दशमानिक , काम्बोज, दशेरक, उलूत, तोमर, हंसमार्ग, शिवि, वसाति, उरसा, अम्बष्ठ, यौधेय, मल्ल, शाक्य, लिच्छिवि आदि उत्तरी भारत के प्राचीन गणराज्यों के नाम हैं. वर्द्धमान महावीर और गौतम बुद्ध के समय इनमें से कई गणराज्य बड़े ही प्रवल थे, परन्तु सामान्यतया यह काल गणराज्यों के ह्रास का था. जनपदों में राजतन्त्र शक्तिमान् हो रहे थे. मगध के राज्य से आतंकित होकर उसके सीमावर्ती कई गणराज्यों ने मिल कर वज्जिसंघ की स्थापना की थी जिसकी राजधानी वैशाली थी. इस संघ की प्रवलता का प्रमाण यह है कि तत्कालीन राजा संघ के विभिन्न गणों में विवाह करके उनकी मित्रता के आकांक्षी थे. वत्सराज उदयन वैदेहिपुत्र कहा गया है. विम्बसार की रानी वासवी भी विदेहकुमारी थी. शाक्य शुद्धोदन की माया और महामाया नामक स्त्रियाँ लिच्छिवि थीं. कोशलराज प्रसेनजित की पत्नी शाक्य कन्या थी. महात्मा बुद्ध ने लिच्छिवियों के चरित्रवल, पारस्परिक सम्मानभाव, भ्रातृत्व, शालीनता, शक्तिमत्ता, धर्मपरिपालन, निर्विलासिता, निरलसता आदि गुणों की प्रभूत प्रशंसा की है. परन्तु सारे गण ऐसे नहीं थे, उनमें गणसदस्यों में मिथ्याभिमान, जातीयगुरुता की भावना, विलासिता, आलस्य, चरित्रहीनता आदि दुर्गुण समाविष्ट हो रहे थे. यही कारण था कि एक एक करके समस्त गणराज्य समाप्त हो रहे थे. महात्मा बुद्ध व महावीर स्वामी ने जिन नैतिक आन्दोलनों का समारम्भ किया, वे मानवमाव के लिये थे. अतएव उनके लिये गणजीवन ही उत्तम माना जा सकता था. इन दोनों ही महापुरुषों ने एक ओर तो गणों के दुर्गुणों की निन्दा की है और दूसरी ओर अपने संघों की स्थापना करके आध्यात्मिक गणराज्य-परम्परा की नींव डाली है. आध्यात्मिक गणराज्यपरम्परा के प्रवर्तक के रूप में बुद्ध व महावीर का योगदान मौलिक व युगान्तरकारी रहा है. वर्द्धमान महावीर कश्यप गोत्रीय ज्ञातृक क्षत्रिय कुल के थे. तीन उन्हें 'सर्वोच्चजिन महावीर ज्ञातृपुत्र" कहा गया है. ज्ञातृक वज्जिसंघ के अष्टकुलों में प्रमुख गिने जाते थे. इनकी माता लिच्छिवि वंश की थी. महावीर को संघपरम्परा का ज्ञान अपने परिवार में ही हो गया होगा. अतः कठोर तपस्या के बाद अर्हत्त्व प्राप्त करके उन्होंने अपने अनुयायियों को 'संघ' के रूप से प्रबोधित किया. अतएव उनको बुद्ध के समय में ही संघी, गणी, गणाचार्य आदि नामों से अभिहित किया जाता था. पाँच कदाचित् प्रारम्भ में ऐसे धर्मसंघों का विरोध हुआ हो, धम्मपद से इस प्रकार की सूचना मिलती है. शासनं यस्तु र्याणां धर्मजोविनाम्, प्रतिक्रोशति दुर्मेधाः दृष्टिं निश्चित्य पापिकाम् । एक वैदिक समाज की नींव श्रम यज्ञ पर आधारित है, जिसका रूप आश्रम व्यवस्था के रूप में प्रतिष्ठित हुआ. श्रम को एक. एकाकिभिः क्षुद्रकैर्जितम् अष्टाध्यायी सूत्र पाँच।तीन।बावन पर पातंजलमहाभाष्य. दो. डाशून्य राधाकुमुद मुकर्जी - हिन्दुसभ्यता पृशून्य दो सौ चौरासी-पचासी. तीन. प्राचीन पुस्तक माला बाईस/दो सौ छयासठ. चार. सूत्रकृतांग सूत्र एक सौ ग्यारह। एक हज़ार एक सौ सत्ताईस. पाँच. डाशून्य राधाकुमुद मुकर्जी - हिन्दू सभ्यता दो सौ बत्तीस,
Sonbhadra News: बभनी थाना क्षेत्र के एक गांव में एक महिला के साथ चार साल तक शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी शौच के बहाने उसके मायके से भाग खड़ा हुआ। आरोप है कि अब वह चोरी छुपे दूसरी जगह शादी रचाने में लगा हुआ है। एसपी से लगाई गई गुहार में पीड़िता ने जानकारी दी है कि वह चोरी-छिपे रविवार की रात शादी करने वाला है। पेट में आरोपी के संयोग से तीन माह का गर्भ पलने का हवाला देते हुए शादी रोकवाने और झांसा देकर कथित दुष्कर्म किए जाने के मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। एडीजी जोन वाराणसी और डीआईजी मिर्जापुर की तरफ से सोनभद्र पुलिस को प्रकरण संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता की तरफ से एसपी सहित अन्य को अवगत कराया गया है कि बभनी थाना क्षेत्र के ही एक 27 वर्षीय युवक ने, शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार चार वर्ष तक दुष्कर्म किया। आरोप है, कि कई बार वह उसके मायके में आकर उसके साथ संबंध बनाया। जब उसने विधि विधान से शादी या कोर्ट मैरिज करने के लिए दबाव बनाया तो वह उसके मायके से शौच जाने की बात कह कर गायब हो गया। रविवार को एसपी, डीआईजी और एडीजी को ट्वीट के जरिए दी गई जानकारी में बताया गया है कि रविवार की दोपहर उसे पता चला कि वह इलाके की एक युवती से चोरी छुपे शादी रचाने की तैयारी में लगा हुआ है।
Sonbhadra News: बभनी थाना क्षेत्र के एक गांव में एक महिला के साथ चार साल तक शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी शौच के बहाने उसके मायके से भाग खड़ा हुआ। आरोप है कि अब वह चोरी छुपे दूसरी जगह शादी रचाने में लगा हुआ है। एसपी से लगाई गई गुहार में पीड़िता ने जानकारी दी है कि वह चोरी-छिपे रविवार की रात शादी करने वाला है। पेट में आरोपी के संयोग से तीन माह का गर्भ पलने का हवाला देते हुए शादी रोकवाने और झांसा देकर कथित दुष्कर्म किए जाने के मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। एडीजी जोन वाराणसी और डीआईजी मिर्जापुर की तरफ से सोनभद्र पुलिस को प्रकरण संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता की तरफ से एसपी सहित अन्य को अवगत कराया गया है कि बभनी थाना क्षेत्र के ही एक सत्ताईस वर्षीय युवक ने, शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार चार वर्ष तक दुष्कर्म किया। आरोप है, कि कई बार वह उसके मायके में आकर उसके साथ संबंध बनाया। जब उसने विधि विधान से शादी या कोर्ट मैरिज करने के लिए दबाव बनाया तो वह उसके मायके से शौच जाने की बात कह कर गायब हो गया। रविवार को एसपी, डीआईजी और एडीजी को ट्वीट के जरिए दी गई जानकारी में बताया गया है कि रविवार की दोपहर उसे पता चला कि वह इलाके की एक युवती से चोरी छुपे शादी रचाने की तैयारी में लगा हुआ है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
कटक. अखिल भारतीय अग्रवाल महिला सम्मेलन द्वारा सप्ताहव्यापी पौधा रोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसकी जानकारी देते हुए ओडिशा अग्रवाल सम्मेलन की प्रादेशिक अध्यक्ष सम्पत्ति मोड़ा ने कहा पौधरोपण का महत्व स्पष्ट है. आज की परिस्थितियों में भी ये समझ मे आने लगा है बिना पेड़ों के हम लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकेंगे. ऑक्सीजन लेने और कार्बन डायोक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को भी शोषित करते हैं, जिससे वायु शुद्ध और ताजा बनती है. जितने हरे भरे पेड़ होंगे, उतना आक्सीजन का उत्पादन होगा. अभी ये सही समय है जब हमें पौधरोपण के महत्व को पहचाना चाहिए एवं इस ओर अपना ध्यान देते हुए अधिक पौधे लगाने चाहिए. पेड़ के महत्व को देखते हुए आज प्रादेशिक अध्यक्ष संपत्ति मोडा ने राष्ट्रीय कार्यक्रम में बढ़कर हिस्सा लेते हुए सभी को प्रेरित करते हुए "51 इक्यावन गुड लक पौधे लगाकर पड़ोसियो एवं मित्रों को भेंट देते हुए पौधे लगाने का संदेश दिया. उनके द्वारा किए गए इस कार्य की सभी ने सराहना की. वृक्ष हमें फल, सब्जी और वायु ही नहीं देते, बल्कि वह छोटे-छोटे पक्षियों का भी आशियाना है. पौधरोपण के साथ-साथ महिला इकाई ने पक्षियों के लिए भी विशेष रूप से देश भर में 670 जगहों पर भूख-प्यास बुझाने की व्यवस्था की. इसी सब को ध्यान में रखते हुए एवं मौजूदा हालातों को समझते हुए कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए तथा पर्यावरण की रक्षा करने के लिए अखिल भारतीय महिला अग्रवाल सम्मेलन के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग की प्रेरणा से एवं राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा विनीता खेतावत के नेतृत्व में पर्यावरण सप्ताह के उपलक्ष्य में देश भर में विभिन्न-विभिन्न स्थानों पर 1100 महिलाओं द्वारा 5000 से अधिक पौधरोपण करके पर्यावरण संरक्षण के प्रति अभूतपूर्व सफ़लता संदेश दिया.
कटक. अखिल भारतीय अग्रवाल महिला सम्मेलन द्वारा सप्ताहव्यापी पौधा रोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसकी जानकारी देते हुए ओडिशा अग्रवाल सम्मेलन की प्रादेशिक अध्यक्ष सम्पत्ति मोड़ा ने कहा पौधरोपण का महत्व स्पष्ट है. आज की परिस्थितियों में भी ये समझ मे आने लगा है बिना पेड़ों के हम लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकेंगे. ऑक्सीजन लेने और कार्बन डायोक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को भी शोषित करते हैं, जिससे वायु शुद्ध और ताजा बनती है. जितने हरे भरे पेड़ होंगे, उतना आक्सीजन का उत्पादन होगा. अभी ये सही समय है जब हमें पौधरोपण के महत्व को पहचाना चाहिए एवं इस ओर अपना ध्यान देते हुए अधिक पौधे लगाने चाहिए. पेड़ के महत्व को देखते हुए आज प्रादेशिक अध्यक्ष संपत्ति मोडा ने राष्ट्रीय कार्यक्रम में बढ़कर हिस्सा लेते हुए सभी को प्रेरित करते हुए "इक्यावन इक्यावन गुड लक पौधे लगाकर पड़ोसियो एवं मित्रों को भेंट देते हुए पौधे लगाने का संदेश दिया. उनके द्वारा किए गए इस कार्य की सभी ने सराहना की. वृक्ष हमें फल, सब्जी और वायु ही नहीं देते, बल्कि वह छोटे-छोटे पक्षियों का भी आशियाना है. पौधरोपण के साथ-साथ महिला इकाई ने पक्षियों के लिए भी विशेष रूप से देश भर में छः सौ सत्तर जगहों पर भूख-प्यास बुझाने की व्यवस्था की. इसी सब को ध्यान में रखते हुए एवं मौजूदा हालातों को समझते हुए कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए तथा पर्यावरण की रक्षा करने के लिए अखिल भारतीय महिला अग्रवाल सम्मेलन के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग की प्रेरणा से एवं राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा विनीता खेतावत के नेतृत्व में पर्यावरण सप्ताह के उपलक्ष्य में देश भर में विभिन्न-विभिन्न स्थानों पर एक हज़ार एक सौ महिलाओं द्वारा पाँच हज़ार से अधिक पौधरोपण करके पर्यावरण संरक्षण के प्रति अभूतपूर्व सफ़लता संदेश दिया.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जेनिफ़र श्रेडर लॉरेंस (जन्मः अगस्त 15, 1990) अमेरिकी अभिनेत्री हैं। लॉरेंस का जन्म और पालन पोषण लुईविल, केन्टकी, में हुआ जहाँ इन्होंने 14 वर्ष की उम्र तक रंगमंच में अभिनय शुरू कर दिया। नाटक और अभिनय के लिए कभी औपचारिक शिक्षा न प्राप्त करने वाली लॉरेंस ने टेलिविज़न पर सबसे पहले कदम टीबीएस चैनल पर 2007 से 2009 तक प्रसारित हुए द बिल एंगवॅल शो सिटकॉम से रखा। इस कार्यक्रम में अपने अभिनय के लिए इन्हें यंग आर्टिस्ट अवॉर्ड फॉर आउटस्टैंडिंग यंग परफ़ोरम इन अ टीवी सीरीज़ (हिन्दीः टीवी शृंखला में उत्कृष्ट युवा कलाकार के लिए यंग आर्टिस्ट अवॉर्ड) मिला। इसके पश्चात इन्होंने कई टेलिविज़न शृंखलाओं में अतिथि कलाकार की भूमिका निभाई। इन्होंने बड़े पर्दे पर कदम द बर्निंग प्लेन (2008) से रखा, जिसमें इनके अभिनय को काफ़ी सराहना मिली। मुख्य किरदार के रूप में इनकी सबसे पहली फ़िल्म द पोकर हाउस थी। फिर क्रिस प्रैट के साथ पैसेंजर्स फ़िल्म। लॉरेंस की विंटर्स बोन (2010) में उनकी मुख्य भूमिका समान्यतः उनका ब्रेकआउट प्रदर्शन माना जाता है। इसके लिए इन्हें अकेडमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सैटेलाइट पुरस्कार, इंडीपेंडेंट स्पिरिट पुरस्कार और स्क्रीन ऍक्टर्स गिल्ड पुरस्कार समारोहों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में नामांकित किया गया। 20 वर्ष की उम्र में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अकेडमी पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली लॉरेंस दूसरी सबसे कम उम्र की अभिनेत्री थीं। 22 वर्ष की उम्र में रोमेंटिक कॉमेडी सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक (2012) में अपनी भूमिका के लिए इन्हें अन्य पुरस्कारों के आलावा अकेडमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सैटेलाइट पुरस्कार, इंडीपेंडेंट स्पिरिट पुरस्कार और स्क्रीन ऍक्टर्स गिल्ड पुरस्कार प्राप्त हुए, जिस से ये सबसे कम उम्र में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अकेडमी पुरस्कार के लिए दो बार नामांकन प्राप्त करने वाली पहली और जीतने वाली दूसरी सबसे युवा अभिनेत्री बन गईं। . मैथ्यू स्टेटन "मैट" बोमर (Matthew Staton "Matt" Bomer; जन्मः अक्टूबर 11, 1977) अमेरिकी फ़िल्म, रंगमंच और टेलिविज़न अभिनेता हैं। टॅक्सस में जन्मे और पले-बढ़े बोमर को छोटी उम्र में ही अभिनय से लगाव हो गया था और अपने इसी लगाव के कारण इन्होंने विद्यालय में पढ़ते समय ही रंगमंच पर अभिनय शुरू कर दिया। उच्च शिक्षा भी इन्होंने कारनेग मेलन यूनिवर्सिटी के ललित कला कार्यक्रम में प्राप्त की व 2001 में स्नातक हुए। इसके पश्चात ये न्यू यॉर्क शहर चले गए जहाँ से इन्होंने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की। बोमर ने कई टीवी शृंखलाओं में अभिनय किया है परन्तु ये अपने व्हाइट कॉलर के नील कैफ्री के किरदार के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, जो कुशल जालसाज और चोर है लेकिन एफबीआई के लिए सलाहकार की तरह काम करता है। इन्होंने टेलिविज़न जगत में अपने कैरियर की शुरुआत गाइडिंग लाईट से 2001 में की। बोमर को अपनी एनबीसी टेलिविज़न शृंखला चक में निभाई गई ब्रायस लार्किन की आवर्ती भूमिका के लिए सराहना मिली। इन्होंने सहायक अभिनेता के तौर पर फ्लाइटप्लान (2005), इन टाइम (2011) और मैजिक माइक (2012) जैसी फ़िल्मों में काम किया है। बोमर डस्टिन लांस ब्लैक के ब्रॉडवे पर आयोजित हुए 8 नाटक में भी काम कर चुके हैं। बोमर वर्तमान में कई फ़िल्म परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं जो 2014 या 2015 में रिलीज़ होने के लिए निर्धारित की गई हैं। इन्हें अपनी सुंदरता व समाज कार्य के लिए कई खिताब प्राप्त हुए हैं तथा 2013 में मैजिक माइक में अपनी भूमिका के लिए साझा तौर पर ये एमटीवी मूवी पुरस्कार के लिए भी नामांकित हुए थे। . जेनिफ़र लॉरेंस और मैट बोमर आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): संयुक्त राज्य। संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जेनिफ़र लॉरेंस 7 संबंध है और मैट बोमर 42 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.04% है = 1 / (7 + 42)। यह लेख जेनिफ़र लॉरेंस और मैट बोमर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जेनिफ़र श्रेडर लॉरेंस अमेरिकी अभिनेत्री हैं। लॉरेंस का जन्म और पालन पोषण लुईविल, केन्टकी, में हुआ जहाँ इन्होंने चौदह वर्ष की उम्र तक रंगमंच में अभिनय शुरू कर दिया। नाटक और अभिनय के लिए कभी औपचारिक शिक्षा न प्राप्त करने वाली लॉरेंस ने टेलिविज़न पर सबसे पहले कदम टीबीएस चैनल पर दो हज़ार सात से दो हज़ार नौ तक प्रसारित हुए द बिल एंगवॅल शो सिटकॉम से रखा। इस कार्यक्रम में अपने अभिनय के लिए इन्हें यंग आर्टिस्ट अवॉर्ड फॉर आउटस्टैंडिंग यंग परफ़ोरम इन अ टीवी सीरीज़ मिला। इसके पश्चात इन्होंने कई टेलिविज़न शृंखलाओं में अतिथि कलाकार की भूमिका निभाई। इन्होंने बड़े पर्दे पर कदम द बर्निंग प्लेन से रखा, जिसमें इनके अभिनय को काफ़ी सराहना मिली। मुख्य किरदार के रूप में इनकी सबसे पहली फ़िल्म द पोकर हाउस थी। फिर क्रिस प्रैट के साथ पैसेंजर्स फ़िल्म। लॉरेंस की विंटर्स बोन में उनकी मुख्य भूमिका समान्यतः उनका ब्रेकआउट प्रदर्शन माना जाता है। इसके लिए इन्हें अकेडमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सैटेलाइट पुरस्कार, इंडीपेंडेंट स्पिरिट पुरस्कार और स्क्रीन ऍक्टर्स गिल्ड पुरस्कार समारोहों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में नामांकित किया गया। बीस वर्ष की उम्र में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अकेडमी पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली लॉरेंस दूसरी सबसे कम उम्र की अभिनेत्री थीं। बाईस वर्ष की उम्र में रोमेंटिक कॉमेडी सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक में अपनी भूमिका के लिए इन्हें अन्य पुरस्कारों के आलावा अकेडमी पुरस्कार, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सैटेलाइट पुरस्कार, इंडीपेंडेंट स्पिरिट पुरस्कार और स्क्रीन ऍक्टर्स गिल्ड पुरस्कार प्राप्त हुए, जिस से ये सबसे कम उम्र में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अकेडमी पुरस्कार के लिए दो बार नामांकन प्राप्त करने वाली पहली और जीतने वाली दूसरी सबसे युवा अभिनेत्री बन गईं। . मैथ्यू स्टेटन "मैट" बोमर अमेरिकी फ़िल्म, रंगमंच और टेलिविज़न अभिनेता हैं। टॅक्सस में जन्मे और पले-बढ़े बोमर को छोटी उम्र में ही अभिनय से लगाव हो गया था और अपने इसी लगाव के कारण इन्होंने विद्यालय में पढ़ते समय ही रंगमंच पर अभिनय शुरू कर दिया। उच्च शिक्षा भी इन्होंने कारनेग मेलन यूनिवर्सिटी के ललित कला कार्यक्रम में प्राप्त की व दो हज़ार एक में स्नातक हुए। इसके पश्चात ये न्यू यॉर्क शहर चले गए जहाँ से इन्होंने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की। बोमर ने कई टीवी शृंखलाओं में अभिनय किया है परन्तु ये अपने व्हाइट कॉलर के नील कैफ्री के किरदार के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, जो कुशल जालसाज और चोर है लेकिन एफबीआई के लिए सलाहकार की तरह काम करता है। इन्होंने टेलिविज़न जगत में अपने कैरियर की शुरुआत गाइडिंग लाईट से दो हज़ार एक में की। बोमर को अपनी एनबीसी टेलिविज़न शृंखला चक में निभाई गई ब्रायस लार्किन की आवर्ती भूमिका के लिए सराहना मिली। इन्होंने सहायक अभिनेता के तौर पर फ्लाइटप्लान , इन टाइम और मैजिक माइक जैसी फ़िल्मों में काम किया है। बोमर डस्टिन लांस ब्लैक के ब्रॉडवे पर आयोजित हुए आठ नाटक में भी काम कर चुके हैं। बोमर वर्तमान में कई फ़िल्म परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं जो दो हज़ार चौदह या दो हज़ार पंद्रह में रिलीज़ होने के लिए निर्धारित की गई हैं। इन्हें अपनी सुंदरता व समाज कार्य के लिए कई खिताब प्राप्त हुए हैं तथा दो हज़ार तेरह में मैजिक माइक में अपनी भूमिका के लिए साझा तौर पर ये एमटीवी मूवी पुरस्कार के लिए भी नामांकित हुए थे। . जेनिफ़र लॉरेंस और मैट बोमर आम में एक बात है : संयुक्त राज्य। संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. जेनिफ़र लॉरेंस सात संबंध है और मैट बोमर बयालीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.चार% है = एक / । यह लेख जेनिफ़र लॉरेंस और मैट बोमर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
रांची : लावारिस लाशों को मुकाम मिल जाए ये अपने आप में बड़ी बात है । मुकाम को अंजाम तक पहुंचाने वाले हम उस शख्स की कहानी बताएंगे जिसे शुरू - शुरू में तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे - धीरे लोगो ने भी इस काम के लिए साथ दिया । रांची के प्रावीन लोहिया पेशे से कपड़ा व्यवसायी है जिन्होंने ठाना है की वो लावारिस मुर्दों का ही साथी बन कर उनके अंतिम संस्कार करेंगे और इसी मुहिम में अपने जीवन का सारा समय लगा लेंगे । प्रावीन लोहिया बताते है की इसके प्रेरणा उन्हें हज़ारीबाग के मोहम्मद खालिद से मिली जो वर्षा से बिना किसी मोह के लावारिश शवो का अंतिम संस्कार करते आ रहे है । तो क्यों ना इस 25 लाख आबादी वाले रांची शहर के लावारिश शवों के अंतिम संस्कार का जिम्मा लिया जाए , जिसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने मुक्ति संस्था के नाम से एक संस्था की इसकी शुरुआत की हालांकि शुरुवाती दिनों में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा , कई लोगो ने इसकी आलोचना भी की लेकिन प्रावीन ने सभी अड़चनों को पार करते हुए लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया । धीरे धीरे संस्था से लोग जुड़ने लगे और आज इस संस्था में सभी धर्मों से कुल 150 लोग जुड़ चुके है । वर्ष 2015 से अब तक इनकी संस्था द्वारा 799 लावारिश शवो का अंतिम संस्कार हो चुका है । काफी सटीक बैठती हैं ये पंक्तियाँ प्रावीन लोहिया पर की मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर लोग आते गए और कारवां बनता गया ।
रांची : लावारिस लाशों को मुकाम मिल जाए ये अपने आप में बड़ी बात है । मुकाम को अंजाम तक पहुंचाने वाले हम उस शख्स की कहानी बताएंगे जिसे शुरू - शुरू में तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे - धीरे लोगो ने भी इस काम के लिए साथ दिया । रांची के प्रावीन लोहिया पेशे से कपड़ा व्यवसायी है जिन्होंने ठाना है की वो लावारिस मुर्दों का ही साथी बन कर उनके अंतिम संस्कार करेंगे और इसी मुहिम में अपने जीवन का सारा समय लगा लेंगे । प्रावीन लोहिया बताते है की इसके प्रेरणा उन्हें हज़ारीबाग के मोहम्मद खालिद से मिली जो वर्षा से बिना किसी मोह के लावारिश शवो का अंतिम संस्कार करते आ रहे है । तो क्यों ना इस पच्चीस लाख आबादी वाले रांची शहर के लावारिश शवों के अंतिम संस्कार का जिम्मा लिया जाए , जिसके बाद वर्ष दो हज़ार पंद्रह में उन्होंने मुक्ति संस्था के नाम से एक संस्था की इसकी शुरुआत की हालांकि शुरुवाती दिनों में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा , कई लोगो ने इसकी आलोचना भी की लेकिन प्रावीन ने सभी अड़चनों को पार करते हुए लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया । धीरे धीरे संस्था से लोग जुड़ने लगे और आज इस संस्था में सभी धर्मों से कुल एक सौ पचास लोग जुड़ चुके है । वर्ष दो हज़ार पंद्रह से अब तक इनकी संस्था द्वारा सात सौ निन्यानवे लावारिश शवो का अंतिम संस्कार हो चुका है । काफी सटीक बैठती हैं ये पंक्तियाँ प्रावीन लोहिया पर की मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर लोग आते गए और कारवां बनता गया ।
(आज समाचार सेवा) पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों की नियमित नियुक्ति की प्रकिया को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि वाक-इन-इंटरव्यु प्रकिया के माध्यमसे हर जिले में आवश्यकतानुसार चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों पर अस्थायी नियुक्ति भी की जाये। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गयी, जिसमें निर्णय लिया गया कि चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जायेगी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार के अलावा स्वास्थ्य विभाग सह आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, बिहार तकनीकी सेव आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार चौधरी, एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार सहित कई संबंधित अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि राज्य में सामान्य चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों के चार हजार से अधिक पद तथा पारा मेडिकल स्टाफ के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन पदों पर आयोग के माध्यम से नियमित नियुक्ति की भी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसके बावजूद खाली पदों को भरने के लिए तेजी से नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य से संबंधित आधारभूत संरचना को सुदृढ करने के लिए हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम निर्णय लिये गये हैं।
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों की नियमित नियुक्ति की प्रकिया को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि वाक-इन-इंटरव्यु प्रकिया के माध्यमसे हर जिले में आवश्यकतानुसार चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों पर अस्थायी नियुक्ति भी की जाये। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गयी, जिसमें निर्णय लिया गया कि चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जायेगी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार के अलावा स्वास्थ्य विभाग सह आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, बिहार तकनीकी सेव आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार चौधरी, एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार सहित कई संबंधित अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि राज्य में सामान्य चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों के चार हजार से अधिक पद तथा पारा मेडिकल स्टाफ के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन पदों पर आयोग के माध्यम से नियमित नियुक्ति की भी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसके बावजूद खाली पदों को भरने के लिए तेजी से नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य से संबंधित आधारभूत संरचना को सुदृढ करने के लिए हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम निर्णय लिये गये हैं।
राजनीतिक तनाव के बीच रविवार को तुर्की में संसद की 550 सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रजप तैयप अर्दोआन ने वादा किया है कि चुनाव में उनकी पार्टी एकेपी को बहुमत मिला तो वो स्थाई सरकार देंगे. जस्टिस एंड डेवेलपमेंट पार्टी (एकेपी) को पिछले चुनावों में हार मिली थी. प्रमुख विपक्षी पार्टी कुर्दों की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचडीपी) के नेता सेलाहातिन दिमित्रास ने आरोप लगाया है कि यदि रजप तैयप अर्दोगान को स्पष्ट बहुमत मिला तो वे और भी ज़्यादा दबंग हो जाएंगे. नहीं मिला था और सरकार बनाने के लिए गठबंधन की कोशिश भी असफल रही थीं. इसके बाद नए सिरे से चुनाव कराने का फ़ैसला लिया गया. तुर्की में सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा है. वहां हाल के दिनों में लगातार हो रहे चरमपंथी हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है.
राजनीतिक तनाव के बीच रविवार को तुर्की में संसद की पाँच सौ पचास सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रजप तैयप अर्दोआन ने वादा किया है कि चुनाव में उनकी पार्टी एकेपी को बहुमत मिला तो वो स्थाई सरकार देंगे. जस्टिस एंड डेवेलपमेंट पार्टी को पिछले चुनावों में हार मिली थी. प्रमुख विपक्षी पार्टी कुर्दों की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता सेलाहातिन दिमित्रास ने आरोप लगाया है कि यदि रजप तैयप अर्दोगान को स्पष्ट बहुमत मिला तो वे और भी ज़्यादा दबंग हो जाएंगे. नहीं मिला था और सरकार बनाने के लिए गठबंधन की कोशिश भी असफल रही थीं. इसके बाद नए सिरे से चुनाव कराने का फ़ैसला लिया गया. तुर्की में सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा है. वहां हाल के दिनों में लगातार हो रहे चरमपंथी हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है.