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हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव सुमित शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों का विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचना ही ऐतिहासिक था, जबकि अब उन्होंने ट्राफी पर कब्जा जमा कर प्रदेश को 1983 का वर्ल्ड कप जीतने जैसा एहसास करवाया है।
एचपीसीए के निदेशक अरुण धूमल को मिठाई खिलाते सचिव सुमित शर्मा।
पांच बार की चैंपियन तमिलनाडु को विजय हजारे ट्राफी में हराकर ट्राफी पर कब्जा जमाना हिमाचल के लिए 1983 के वर्ल्ड कप जीतने जैसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंडी में होने वाली रैली के बाद खिलाड़ियों के लिए एचपीसीए कुछ अच्छा और बड़ा करेगा। ट्रॉफी जीत कर एचपीसीए के खिलाड़ियों ने केंद्रीय खेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के सपने को पूरा किया है। यह बात हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव सुमित शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर मंडी में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद एचपीसीए विजेता खिलाड़ियों को खास सम्मान देगी।
इसके लिए एचपीसीए के पूर्व अध्यक्ष और बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल से बात की जाएगी और उनके निर्देशों के बाद खिलाड़ियों के लिए एचपीसीए सम्मान समारोह करवाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों का विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचना ही ऐतिहासिक था, जबकि अब उन्होंने ट्राफी पर कब्जा जमा कर प्रदेश को 1983 का वर्ल्ड कप जीतने जैसा एहसास करवाया है। 1983 के बाद भारतीय टीम ने जिस तरह अच्छा करना शुरू किया था, वैसे ही अब एचपीसीए के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और वह इससे भी अच्छा करने का प्रयास करेगी।
वहीं पहली बार विजय हजारे ट्राफी पर कब्जा जमाने वाली एचपीसीए टीम को सोशल मीडिया पर बधाइयां देने का सिलसिला जारी हो गया है। इस दौरान सोशल मीडिया पर लोगों ने जहां अपना स्टेट्स डाला है, वहीं सोशल मीडिया पर टीम को बधाइयां देने का तांता लगा है।
केंद्रीय खेल, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने विजय हजारे ट्राफी में हिमाचल की जीत पर टवीट् कर बधाई दी है। उन्होंनें टवीट् में कहा कि लगन-ललक-लगाव और जीत की भूख ही इतिहास बनाती है। विजय हजारे ट्राफ़ी में जीत के साथ हिमाचल के क्रिकेट इतिहास में पहली बार डोमेस्टिक टाइटल जीतने पर पूरी टीम को हार्दिक बधाई और असीम शुभकामनाएं।
बीसीसीआई कोषाध्यक्ष और एचपीसीए के निदेशक अरुण धूमल ने टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की टीम ने इतिहास रचते हुए हिमाचल को एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने कहा मोदी की रैली के बाद विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
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| हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव सुमित शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों का विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचना ही ऐतिहासिक था, जबकि अब उन्होंने ट्राफी पर कब्जा जमा कर प्रदेश को एक हज़ार नौ सौ तिरासी का वर्ल्ड कप जीतने जैसा एहसास करवाया है। एचपीसीए के निदेशक अरुण धूमल को मिठाई खिलाते सचिव सुमित शर्मा। पांच बार की चैंपियन तमिलनाडु को विजय हजारे ट्राफी में हराकर ट्राफी पर कब्जा जमाना हिमाचल के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरासी के वर्ल्ड कप जीतने जैसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंडी में होने वाली रैली के बाद खिलाड़ियों के लिए एचपीसीए कुछ अच्छा और बड़ा करेगा। ट्रॉफी जीत कर एचपीसीए के खिलाड़ियों ने केंद्रीय खेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के सपने को पूरा किया है। यह बात हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव सुमित शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर मंडी में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद एचपीसीए विजेता खिलाड़ियों को खास सम्मान देगी। इसके लिए एचपीसीए के पूर्व अध्यक्ष और बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल से बात की जाएगी और उनके निर्देशों के बाद खिलाड़ियों के लिए एचपीसीए सम्मान समारोह करवाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों का विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचना ही ऐतिहासिक था, जबकि अब उन्होंने ट्राफी पर कब्जा जमा कर प्रदेश को एक हज़ार नौ सौ तिरासी का वर्ल्ड कप जीतने जैसा एहसास करवाया है। एक हज़ार नौ सौ तिरासी के बाद भारतीय टीम ने जिस तरह अच्छा करना शुरू किया था, वैसे ही अब एचपीसीए के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और वह इससे भी अच्छा करने का प्रयास करेगी। वहीं पहली बार विजय हजारे ट्राफी पर कब्जा जमाने वाली एचपीसीए टीम को सोशल मीडिया पर बधाइयां देने का सिलसिला जारी हो गया है। इस दौरान सोशल मीडिया पर लोगों ने जहां अपना स्टेट्स डाला है, वहीं सोशल मीडिया पर टीम को बधाइयां देने का तांता लगा है। केंद्रीय खेल, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने विजय हजारे ट्राफी में हिमाचल की जीत पर टवीट् कर बधाई दी है। उन्होंनें टवीट् में कहा कि लगन-ललक-लगाव और जीत की भूख ही इतिहास बनाती है। विजय हजारे ट्राफ़ी में जीत के साथ हिमाचल के क्रिकेट इतिहास में पहली बार डोमेस्टिक टाइटल जीतने पर पूरी टीम को हार्दिक बधाई और असीम शुभकामनाएं। बीसीसीआई कोषाध्यक्ष और एचपीसीए के निदेशक अरुण धूमल ने टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की टीम ने इतिहास रचते हुए हिमाचल को एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने कहा मोदी की रैली के बाद विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
इस फोटो में ईशा और मैनुअल मैचिंग के कपड़ों में नजर आ रहे हैं। अभी तक इस पोस्ट को डेढ़ लाख से भी ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं।
बता दें, ईशा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर बहुत ही प्राइवेट हैं। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ फोटो शेयर की है। इससे पहले ईशा ने मैनुअल के साथ अगस्त 2019 में भी तस्वीर शेयर की थी। इस वक्त ईशा माबेल ग्रीन कप में हिस्सा लेने के लिए गई थीं।
आजमाई। ईशा 'जन्नत 2' से बॉलीवुड करने के बाद 'राज 3डी', 'रुस्तम', 'बेबी', 'बादशाहो' जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। खबर है कि वह फिल्म 'हेरा-फेरी 3' में नजर आएंगी।
| इस फोटो में ईशा और मैनुअल मैचिंग के कपड़ों में नजर आ रहे हैं। अभी तक इस पोस्ट को डेढ़ लाख से भी ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। बता दें, ईशा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर बहुत ही प्राइवेट हैं। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ फोटो शेयर की है। इससे पहले ईशा ने मैनुअल के साथ अगस्त दो हज़ार उन्नीस में भी तस्वीर शेयर की थी। इस वक्त ईशा माबेल ग्रीन कप में हिस्सा लेने के लिए गई थीं। आजमाई। ईशा 'जन्नत दो' से बॉलीवुड करने के बाद 'राज तीनडी', 'रुस्तम', 'बेबी', 'बादशाहो' जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। खबर है कि वह फिल्म 'हेरा-फेरी तीन' में नजर आएंगी। |
लंदनः शुक्रवार को, डॉलर यूरो के मुकाबले दो सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गया, मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले जो संभवतः फेडरल रिजर्व की नीति को कसने के पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाएगा, और यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने घोषणा की कि इसका दर-लंबी पैदल यात्रा अभियान अगले महीने शुरू होगा।
वैश्विक दिन में बाद में डेटा से यह सुझाव देने की उम्मीद है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में मुख्य उपभोक्ता मूल्य वृद्धि थोड़ी धीमी हो जाएगी। जो लोग उम्मीद कर रहे थे कि मार्च में दशकों की उच्च मुद्रास्फीति चरम पर पहुंच गई थी और अप्रैल की गिरावट एक बार नहीं थी, उन्हें इस तरह के परिणाम से आश्वस्त किया जाएगा। यह फेड को वर्ष में बाद में दरों को धीरे-धीरे बढ़ाने की अनुमति दे सकता है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था को मंदी में भेजे बिना मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने का प्रयास करता है।
बाजार ों को उम्मीद है कि फेड अगले सप्ताह लगातार तीन 50-आधार-बिंदु ब्याज दर वृद्धि में से दूसरे की घोषणा करेगा, जिसने हाल के महीनों में डॉलर को मजबूत किया है। अर्थशास्त्रियों के एक रॉयटर्स सर्वेक्षण में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल दो-तिहाई लोगों ने सितंबर में एक और 25 आधार बिंदु को बढ़ावा देने की भविष्यवाणी की थी। एशिया में, यूरो दिन की शुरुआत में $ 1. 0611 के निचले स्तर को छूने के बाद 0. 23 प्रतिशत बढ़ गया, जो 23 मई के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। एक अशांत ईसीबी-संचालित दिन के बाद, यह रातोंरात डॉलर के मुकाबले 0. 92 प्रतिशत खो गया।
डॉलर इंडेक्स, जो छह अन्य मुद्राओं के लिए ग्रीनबैक की तुलना करता है, 0. 27 प्रतिशत गिरकर 103. 1 पर आ गया, लेकिन सप्ताह के लिए अभी भी 0. 94 प्रतिशत ऊपर था। यह अप्रैल के पिछले सप्ताह के बाद से सबसे अधिक प्रतिशत लाभ होगा। सूचकांक संख्याओं का एक सेट है जो प्रतिनिधित्व करता है "सापेक्ष आसानी से, ऐसा लगता है कि उसने अधिक निर्धारित और हॉकिश ईसीबी पर बातचीत की है। जुलाई और सितंबर में दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि करने के उनके प्रस्ताव, साथ ही साथ संभावित रूप से उच्च वृद्धि पर विचार करने के लिए, स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की तुलना में अधिक हॉकिश नहीं थे "वेस्टपैक विश्लेषकों ने राय दी।
| लंदनः शुक्रवार को, डॉलर यूरो के मुकाबले दो सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गया, मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले जो संभवतः फेडरल रिजर्व की नीति को कसने के पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाएगा, और यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने घोषणा की कि इसका दर-लंबी पैदल यात्रा अभियान अगले महीने शुरू होगा। वैश्विक दिन में बाद में डेटा से यह सुझाव देने की उम्मीद है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में मुख्य उपभोक्ता मूल्य वृद्धि थोड़ी धीमी हो जाएगी। जो लोग उम्मीद कर रहे थे कि मार्च में दशकों की उच्च मुद्रास्फीति चरम पर पहुंच गई थी और अप्रैल की गिरावट एक बार नहीं थी, उन्हें इस तरह के परिणाम से आश्वस्त किया जाएगा। यह फेड को वर्ष में बाद में दरों को धीरे-धीरे बढ़ाने की अनुमति दे सकता है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था को मंदी में भेजे बिना मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने का प्रयास करता है। बाजार ों को उम्मीद है कि फेड अगले सप्ताह लगातार तीन पचास-आधार-बिंदु ब्याज दर वृद्धि में से दूसरे की घोषणा करेगा, जिसने हाल के महीनों में डॉलर को मजबूत किया है। अर्थशास्त्रियों के एक रॉयटर्स सर्वेक्षण में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल दो-तिहाई लोगों ने सितंबर में एक और पच्चीस आधार बिंदु को बढ़ावा देने की भविष्यवाणी की थी। एशिया में, यूरो दिन की शुरुआत में एक डॉलर. छः सौ ग्यारह के निचले स्तर को छूने के बाद शून्य. तेईस प्रतिशत बढ़ गया, जो तेईस मई के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। एक अशांत ईसीबी-संचालित दिन के बाद, यह रातोंरात डॉलर के मुकाबले शून्य. बानवे प्रतिशत खो गया। डॉलर इंडेक्स, जो छह अन्य मुद्राओं के लिए ग्रीनबैक की तुलना करता है, शून्य. सत्ताईस प्रतिशत गिरकर एक सौ तीन. एक पर आ गया, लेकिन सप्ताह के लिए अभी भी शून्य. चौरानवे प्रतिशत ऊपर था। यह अप्रैल के पिछले सप्ताह के बाद से सबसे अधिक प्रतिशत लाभ होगा। सूचकांक संख्याओं का एक सेट है जो प्रतिनिधित्व करता है "सापेक्ष आसानी से, ऐसा लगता है कि उसने अधिक निर्धारित और हॉकिश ईसीबी पर बातचीत की है। जुलाई और सितंबर में दरों में पच्चीस आधार अंकों की वृद्धि करने के उनके प्रस्ताव, साथ ही साथ संभावित रूप से उच्च वृद्धि पर विचार करने के लिए, स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की तुलना में अधिक हॉकिश नहीं थे "वेस्टपैक विश्लेषकों ने राय दी। |
लेटेस्ट फोटोशूट में रिद्धिमा पंडित (Riddhima Pandit) कैमरे के सामने एक से बढ़कर एक किलर लुक देती नजर आईं। रिद्धिमा ने इन फोटोज में इतनी बोल्डनेस डाली है कि उनके फैंस इन तस्वीरों को देखकर खुद पर काबू नहीं रख पा रहे हैं.
इस फोटो में रिद्धिमा अपना कोट खोलकर कैमरे के सामने अपनी ब्रालेट फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं. जिसमें एक्ट्रेस की हर बात कैमरे में कैद हो रही है.
कभी जमीन पर बैठी रिद्धिमा कैमरे के सामने किलर लुक दिखाती नजर आईं तो कभी खड़े होकर कैमरे के सामने हॉट लुक। लेकिन गौरतलब है कि इन सभी फोटोज में रिद्धिमा बोल्ड कपड़ों में अपनी बॉडी फ्लॉन्ट करती नजर आ रही थीं.
अपने लुक को पूरा करने के लिए रिद्धिमा पंडित ने अपने बालों को ढीला छोड़ दिया है और कानों में बड़े-बड़े गोल्डन राउंड ईयररिंग्स पहन रखे हैं। इसके साथ उन्होंने अपने लुक को सटल मेकअप से पूरा किया।
आपको बता दें कि रिद्धिमा पंडित 'बिग बॉस ओटीटी' में नजर आ चुकी हैं। रिद्धिमा को भले ही इस सीजन में ज्यादा समय नहीं देखा गया हो लेकिन उन्होंने अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जरूर जीत लिया। रिद्धिमा टीवी सीरियल्स के अलावा सोशल मीडिया पर भी फैंस के साथ जुड़ी हुई हैं।
| लेटेस्ट फोटोशूट में रिद्धिमा पंडित कैमरे के सामने एक से बढ़कर एक किलर लुक देती नजर आईं। रिद्धिमा ने इन फोटोज में इतनी बोल्डनेस डाली है कि उनके फैंस इन तस्वीरों को देखकर खुद पर काबू नहीं रख पा रहे हैं. इस फोटो में रिद्धिमा अपना कोट खोलकर कैमरे के सामने अपनी ब्रालेट फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं. जिसमें एक्ट्रेस की हर बात कैमरे में कैद हो रही है. कभी जमीन पर बैठी रिद्धिमा कैमरे के सामने किलर लुक दिखाती नजर आईं तो कभी खड़े होकर कैमरे के सामने हॉट लुक। लेकिन गौरतलब है कि इन सभी फोटोज में रिद्धिमा बोल्ड कपड़ों में अपनी बॉडी फ्लॉन्ट करती नजर आ रही थीं. अपने लुक को पूरा करने के लिए रिद्धिमा पंडित ने अपने बालों को ढीला छोड़ दिया है और कानों में बड़े-बड़े गोल्डन राउंड ईयररिंग्स पहन रखे हैं। इसके साथ उन्होंने अपने लुक को सटल मेकअप से पूरा किया। आपको बता दें कि रिद्धिमा पंडित 'बिग बॉस ओटीटी' में नजर आ चुकी हैं। रिद्धिमा को भले ही इस सीजन में ज्यादा समय नहीं देखा गया हो लेकिन उन्होंने अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जरूर जीत लिया। रिद्धिमा टीवी सीरियल्स के अलावा सोशल मीडिया पर भी फैंस के साथ जुड़ी हुई हैं। |
सोलन - जिला मुख्यालय के बड़े सरकारी कार्यालय, बिजली बोर्ड के रहमोकरम पर चल रहे हैं। आलम यह है कि सरकारी कार्यालयों में बोर्ड के लाखों रुपए के बिजली बिल फंसे हुए हैं। न तो सरकारी कार्यालय इन बिलों की राशि को जमा करवाने में कोई दिलचस्पी दिखा रहा है और न तो बोर्ड इन कार्यालयों की बिजली काटने की हिम्मत जुटा पा रहा है, जहां बोर्ड की इस दरियादिली के कारण इन कार्यालयों की मौज लगी हुई है, वहीं इससे बोर्ड को लाखों रुपए का चूना लग रहा है। जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय सोलन के अलावा डीसी आफिस एवं एसडीएम कार्यालय ने बिजली बिल जमा नहीं करवाए हैं। तीनों कार्यालय में बोर्ड के 20 लाख, 84 हजार, 925 रुपए फंसे है। तहसील कार्यालय सोलन ने तो पिछले अढ़ाई वर्ष से बिजली का बिल ही जमा नहीं किया है। बोर्ड के अनुसार मई माह तक तहसील कार्यालय सोलन के मीटर नंबर 1121202552 का बिल 15 लाख, 35 हजार, 17 रुपए पेंडिंग है। इसके अलावा डीसी आफिस सोलन के मीटर नंबर 1121214738 का बिल चार लाख 99 हजार, 360 एवं एसडीएम कार्यालय सोलन का मीटर नंबर 1121214740 का बिल 50 हजार 548 रुपए देय नहीं हुए है। हैरत की बात है कि यदि किसी आम उपभोक्ता का बिल दो माह से जमा न हुआ हो तो बोर्ड की ओर से बिना नोटिस दिए ही बिजली काट दी जाती है, लेकिन सरकारी विभाग वर्षों से बिजली बिल जमा न करें तो बोर्ड की ओर से सिर्फ नोटिस भेजकर पला झाड़ दिया जाता है। ऐसे में बोर्ड की ओर से अपनाए जा रहे दोगलेपन के प्रति शहरवासियों में खासा रोष है। कोई कार्रवाई न होने से सरकारी कार्यालय भी सुस्त दिख रहे हैं।
| सोलन - जिला मुख्यालय के बड़े सरकारी कार्यालय, बिजली बोर्ड के रहमोकरम पर चल रहे हैं। आलम यह है कि सरकारी कार्यालयों में बोर्ड के लाखों रुपए के बिजली बिल फंसे हुए हैं। न तो सरकारी कार्यालय इन बिलों की राशि को जमा करवाने में कोई दिलचस्पी दिखा रहा है और न तो बोर्ड इन कार्यालयों की बिजली काटने की हिम्मत जुटा पा रहा है, जहां बोर्ड की इस दरियादिली के कारण इन कार्यालयों की मौज लगी हुई है, वहीं इससे बोर्ड को लाखों रुपए का चूना लग रहा है। जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय सोलन के अलावा डीसी आफिस एवं एसडीएम कार्यालय ने बिजली बिल जमा नहीं करवाए हैं। तीनों कार्यालय में बोर्ड के बीस लाख, चौरासी हजार, नौ सौ पच्चीस रुपयापए फंसे है। तहसील कार्यालय सोलन ने तो पिछले अढ़ाई वर्ष से बिजली का बिल ही जमा नहीं किया है। बोर्ड के अनुसार मई माह तक तहसील कार्यालय सोलन के मीटर नंबर एक एक दो एक दो शून्य दो पाँच पाँच दो का बिल पंद्रह लाख, पैंतीस हजार, सत्रह रुपयापए पेंडिंग है। इसके अलावा डीसी आफिस सोलन के मीटर नंबर एक एक दो एक दो एक चार सात तीन आठ का बिल चार लाख निन्यानवे हजार, तीन सौ साठ एवं एसडीएम कार्यालय सोलन का मीटर नंबर एक एक दो एक दो एक चार सात चार शून्य का बिल पचास हजार पाँच सौ अड़तालीस रुपयापए देय नहीं हुए है। हैरत की बात है कि यदि किसी आम उपभोक्ता का बिल दो माह से जमा न हुआ हो तो बोर्ड की ओर से बिना नोटिस दिए ही बिजली काट दी जाती है, लेकिन सरकारी विभाग वर्षों से बिजली बिल जमा न करें तो बोर्ड की ओर से सिर्फ नोटिस भेजकर पला झाड़ दिया जाता है। ऐसे में बोर्ड की ओर से अपनाए जा रहे दोगलेपन के प्रति शहरवासियों में खासा रोष है। कोई कार्रवाई न होने से सरकारी कार्यालय भी सुस्त दिख रहे हैं। |
Shardiya Navratri 2022 नवरात्र में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिरों में तैयारियां पूरी की जा रही हैं तो कुछ मंदिरों न्यास ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। चामुंडा नंदिकेश्वर धाम मां बज्रेश्वरी नगरकोट व मां ज्वालाजी में मंदिर न्यास प्रबंधन ने बैठक करके तैयारियों को अंतिम रूप दिया है।
धर्मशाला, जागरण संवाददाता। Shardiya Navratri 2022, नवरात्र में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिरों में तैयारियां पूरी की जा रही हैं तो कुछ मंदिरों न्यास ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। चामुंडा नंदिकेश्वर धाम, मां बज्रेश्वरी नगरकोट व मां ज्वालाजी में मंदिर न्यास प्रबंधन ने बैठक करके तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा से लेकर सुरक्षा व साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाने के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा मंदिरों में सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी। जिला प्रशासन मंदिर में व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए सुरक्षा के लिए अतिरिक्त जवान तैनात करवा रहा है।
वहीं अतिरिक्त सफाई कर्मचारी मंदिरों में तैनात होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधा भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाई जाएगी। अश्विन नवरात्र मेलों का आयोजन 26 सितंबर से चार अक्टूबर तक किया जा रहा है। ऐसे में मंदिरों के आस पास के क्षेत्र में 25 सितंबर से 5 अक्टूबर तक हर प्रकार के हथियार और विस्फोटक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
एसडीएम ज्वालामुखी मनोज कुमार ने बताया ज्वालाजी में यात्रियों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। नवरात्र सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से बीतें, इसके लिए हर प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। क्षेत्रवासियों एवं आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि किसी भी प्रकार के हथियार और असला बारूद को साथ न रखें। प्रशासन की ओर से इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन किया जाएगा।
एसडीएम धर्मशाला शिल्पी बेक्टा ने कहा नवरात्र के सफल आयोजन के लिए बैठक आयोजित की गई है और जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। चामुंडा माता मंदिर में भव्य साज सज्जा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
| Shardiya Navratri दो हज़ार बाईस नवरात्र में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिरों में तैयारियां पूरी की जा रही हैं तो कुछ मंदिरों न्यास ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। चामुंडा नंदिकेश्वर धाम मां बज्रेश्वरी नगरकोट व मां ज्वालाजी में मंदिर न्यास प्रबंधन ने बैठक करके तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। धर्मशाला, जागरण संवाददाता। Shardiya Navratri दो हज़ार बाईस, नवरात्र में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिरों में तैयारियां पूरी की जा रही हैं तो कुछ मंदिरों न्यास ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। चामुंडा नंदिकेश्वर धाम, मां बज्रेश्वरी नगरकोट व मां ज्वालाजी में मंदिर न्यास प्रबंधन ने बैठक करके तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा से लेकर सुरक्षा व साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाने के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा मंदिरों में सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी। जिला प्रशासन मंदिर में व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए सुरक्षा के लिए अतिरिक्त जवान तैनात करवा रहा है। वहीं अतिरिक्त सफाई कर्मचारी मंदिरों में तैनात होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधा भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाई जाएगी। अश्विन नवरात्र मेलों का आयोजन छब्बीस सितंबर से चार अक्टूबर तक किया जा रहा है। ऐसे में मंदिरों के आस पास के क्षेत्र में पच्चीस सितंबर से पाँच अक्टूबर तक हर प्रकार के हथियार और विस्फोटक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। एसडीएम ज्वालामुखी मनोज कुमार ने बताया ज्वालाजी में यात्रियों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। नवरात्र सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से बीतें, इसके लिए हर प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। क्षेत्रवासियों एवं आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि किसी भी प्रकार के हथियार और असला बारूद को साथ न रखें। प्रशासन की ओर से इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन किया जाएगा। एसडीएम धर्मशाला शिल्पी बेक्टा ने कहा नवरात्र के सफल आयोजन के लिए बैठक आयोजित की गई है और जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। चामुंडा माता मंदिर में भव्य साज सज्जा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। |
Explained: कोयला संकट के बीच जानें बिजली की डिमांड, प्रॉडक्शन और सप्लाई का हिसाब-किताब... कैसे दूर होगी परेशानी?
पाकिस्तान में सड़कों पर उतर आए लोग, जानिए क्यों गुस्से में है वहां की आवाम?
पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात?
| Explained: कोयला संकट के बीच जानें बिजली की डिमांड, प्रॉडक्शन और सप्लाई का हिसाब-किताब... कैसे दूर होगी परेशानी? पाकिस्तान में सड़कों पर उतर आए लोग, जानिए क्यों गुस्से में है वहां की आवाम? पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात? |
मुंबई। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद नागपुर में १९ दिसंबर से शीतकालीन सत्र (winter session) शुरू होने जा रहा है. इस अधिवेशन में शामिल होने वाले लोकप्रतिनिधी, सरकारी अधिकारी और मीडिया से जुड़े प्रतिनिधियों के ठहरने को लेकर आवास की कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। इसलिए प्रतिनिधियों को रहने के लिए आवास की उचित व्यवस्था की जाएं। मंगलवार को नागपुर में शीतकालीन सत्र को लेकर लोक निर्माण सहित अन्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी. जिसमे उपस्थित राज्य के लोक निर्माण मंत्री रविंद्र चव्हाण (Ravindra Chavan) ने अधिकारियों को ऐसा निर्देश दिया है. चव्हाण ने कहा कि एक मोबाइल ऐप बनाया जाए ताकि शीतकालीन सत्र के दौरान की गई सभी व्यवस्थाओं की जानकारी एक क्लिक पर मिल सके. चव्हाण ने कहा कि सत्र दो साल के अंतराल के बाद हो रहा है. इसलिए आवास व्यवस्था के साथ-साथ अन्य सभी व्यवस्थाओं को अद्यतन किया जाना चाहिए और सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे अच्छी स्थिति में हैं। जहां आवश्यक हो वहां मरम्मत करें। बिजली, पानी, साफ-सफाई आदि सुविधाएं तत्काल उपलब्ध हों, इसके लिए योजना बनाई जानी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ नियुक्त किया जाए। त्वरित प्रतिक्रिया बल भी सक्रिय किया जाए। आवास व्यवस्था की योजना बनाते समय नवीनतम तकनीक की सहायता लें। मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों आदि के वाहनों व चालकों की व्यवस्था तथा जहां आवश्यक हो वहां सीसीटीवी सिस्टम लागू किया जाए। फ्रंट बोर्ड पर सफाई के लिए तैनात कर्मियों की जानकारी चस्पा की जाए। मंत्री चव्हाण ने अधिकारियों से कहा कि ऐसा मोबाइल ऐप बनाया जाए जिसमें शीतकालीन सत्र में दी जाने वाली सभी सुविधाओं और सुविधाओं की संयुक्त जानकारी हो। उस ऐप पर सारी जानकारी उपलब्ध हो सके. इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव सुजाता सैनिक, सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव सो. बागुल, मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के संयुक्त सचिव सुभाष गावडे, लोक निर्माण विभाग के अभियंता दिनेश बंदनवार, कार्यपालन यंत्री अभिजीत कुचेसर उपस्थित थे.
| मुंबई। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद नागपुर में उन्नीस दिसंबर से शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है. इस अधिवेशन में शामिल होने वाले लोकप्रतिनिधी, सरकारी अधिकारी और मीडिया से जुड़े प्रतिनिधियों के ठहरने को लेकर आवास की कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। इसलिए प्रतिनिधियों को रहने के लिए आवास की उचित व्यवस्था की जाएं। मंगलवार को नागपुर में शीतकालीन सत्र को लेकर लोक निर्माण सहित अन्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी. जिसमे उपस्थित राज्य के लोक निर्माण मंत्री रविंद्र चव्हाण ने अधिकारियों को ऐसा निर्देश दिया है. चव्हाण ने कहा कि एक मोबाइल ऐप बनाया जाए ताकि शीतकालीन सत्र के दौरान की गई सभी व्यवस्थाओं की जानकारी एक क्लिक पर मिल सके. चव्हाण ने कहा कि सत्र दो साल के अंतराल के बाद हो रहा है. इसलिए आवास व्यवस्था के साथ-साथ अन्य सभी व्यवस्थाओं को अद्यतन किया जाना चाहिए और सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे अच्छी स्थिति में हैं। जहां आवश्यक हो वहां मरम्मत करें। बिजली, पानी, साफ-सफाई आदि सुविधाएं तत्काल उपलब्ध हों, इसके लिए योजना बनाई जानी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ नियुक्त किया जाए। त्वरित प्रतिक्रिया बल भी सक्रिय किया जाए। आवास व्यवस्था की योजना बनाते समय नवीनतम तकनीक की सहायता लें। मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों आदि के वाहनों व चालकों की व्यवस्था तथा जहां आवश्यक हो वहां सीसीटीवी सिस्टम लागू किया जाए। फ्रंट बोर्ड पर सफाई के लिए तैनात कर्मियों की जानकारी चस्पा की जाए। मंत्री चव्हाण ने अधिकारियों से कहा कि ऐसा मोबाइल ऐप बनाया जाए जिसमें शीतकालीन सत्र में दी जाने वाली सभी सुविधाओं और सुविधाओं की संयुक्त जानकारी हो। उस ऐप पर सारी जानकारी उपलब्ध हो सके. इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव सुजाता सैनिक, सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव सो. बागुल, मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के संयुक्त सचिव सुभाष गावडे, लोक निर्माण विभाग के अभियंता दिनेश बंदनवार, कार्यपालन यंत्री अभिजीत कुचेसर उपस्थित थे. |
सरकारी टेलिकॉम कंपनी (BSNL) अक्सर अपने ग्राहकों का आकर्षण बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया लाती रहती है। अब बीएसएनएल ने अपने 2,399 रुपये वाले प्लान की वैलिडिटी को 72 दिन के लिए और बढ़ा दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि ये प्रमोशनल ऑफर (Promotional Offer) सिर्फ 31 मई तक ही वैलिड है। बता दें कि इससे पहले ये प्लान 31 जनवरी तक ही वैद्य था। आइए आपको बताते हैं BSNL के 2,399 रुपये वाले प्लान के साथ मिलने वाले फायदों के बारे मेंः
बीएसएनएल के इस प्लान के साथ 365 दिन की वैलिडिटी मिलती है। अब इस प्लान के साथ 72 दिनों की अतिरिक्त वैधता (Additional Validity) मिल रही है। यानी अब ग्राहक कुल 437 दिनों के लिए इस रिचार्ज प्लान का फायदा ले सकते हैं।
इस प्लान के साथ किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग (Unlimited Calling) की सुविधा मिलती है वो भी बिना एफयूपी लिमिट के। याद करा दें कि इससे पहले यह प्लान प्रतिदिन 250 मिनट्स ही ऑफर करता था। इस प्लान के साथ प्रतिदिन 3 जीबी डेटा मिलता है। इसके साथ ही 100 एसएमएस भी इस रिचार्ज पैक में मुफ्त ऑफर किए जाते हैं। इस प्लान में फ्री बीएसएनएल ट्यून्स, दो महीनों के लिए Lokdhun कॉन्टेन्ट और 1 साल के लिए Eros Now का मुफ्त सब्सक्रिप्शन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
| सरकारी टेलिकॉम कंपनी अक्सर अपने ग्राहकों का आकर्षण बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया लाती रहती है। अब बीएसएनएल ने अपने दो,तीन सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान की वैलिडिटी को बहत्तर दिन के लिए और बढ़ा दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि ये प्रमोशनल ऑफर सिर्फ इकतीस मई तक ही वैलिड है। बता दें कि इससे पहले ये प्लान इकतीस जनवरी तक ही वैद्य था। आइए आपको बताते हैं BSNL के दो,तीन सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान के साथ मिलने वाले फायदों के बारे मेंः बीएसएनएल के इस प्लान के साथ तीन सौ पैंसठ दिन की वैलिडिटी मिलती है। अब इस प्लान के साथ बहत्तर दिनों की अतिरिक्त वैधता मिल रही है। यानी अब ग्राहक कुल चार सौ सैंतीस दिनों के लिए इस रिचार्ज प्लान का फायदा ले सकते हैं। इस प्लान के साथ किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है वो भी बिना एफयूपी लिमिट के। याद करा दें कि इससे पहले यह प्लान प्रतिदिन दो सौ पचास मिनट्स ही ऑफर करता था। इस प्लान के साथ प्रतिदिन तीन जीबी डेटा मिलता है। इसके साथ ही एक सौ एसएमएस भी इस रिचार्ज पैक में मुफ्त ऑफर किए जाते हैं। इस प्लान में फ्री बीएसएनएल ट्यून्स, दो महीनों के लिए Lokdhun कॉन्टेन्ट और एक साल के लिए Eros Now का मुफ्त सब्सक्रिप्शन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। |
Syed Mushtaq Ali Trophy: इस गेंदबाज ने कहर ढा रखा है. ये वही गेंदबाज है, जिसने बिशन सिंह बेदी का 46 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था.
इंडियन प्रीमियर लीग के 14वें सीजन के लिए नीलामी की तारीख 18 फरवरी तय की गई है. ऐसे में नीलामी में अधिक से अधिक कीमत हासिल करने का भारतीय खिलाडि़यों के पास एक सुनहरा मौका है. मौका है सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (Syed Mushtaq Ali Trophy) के नॉकआउट मुकाबले, जो 26 जनवरी से शुरू हो रहे हैं. मगर इससे पहले बात लीग चरण की होनी चाहिए, जिसमें कई युवा खिलाडि़यों ने अपने जोरदार प्रदर्शन से छाप छोड़ी है. इस कड़ी में गेंदबाजी की सूची में बिहार के 34 साल के ऐसे खिलाड़ी का नाम सबसे आगे है, जिसने इशांत शर्मा और युजवेंद्र चहल जैसे गेंदबाजों को भी पीछे छोड़ दिया है. बिहार के आशुतोष अमन (Ashutosh Aman) ने लीग चरण के 5 मैचों में सबसे अधिक 14 विकेट लेने का कमाल किया है.
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लीग चरण के टॉप 10 गेंदबाजों की बात करें तो इसमें टीम इंडिया के दिग्गज इशांत शर्मा और युजवेंद्र चहल जगह नहीं बना सके हैं. आशुतोष अमन के बाद इस लिस्ट में दूसरा नाम अवेश खान का है, जिन्होंने 5 मैचों में 14 विकेट ही हासिल किए हैं. 5 मैचों में 13 विकेट के साथ इशान पोरेल तीसरे, 5 मैचों में 12 विकेट के साथ चेतन सकारिया चौथे और 5 मैचों में 11 विकेट के साथ एल. मेरीवाला पांचवें स्थान पर कायम हैं. टॉप 10 के अन्य गेंदबाजों में राहुल चाहर, नालकंडे, सिद्धार्थ कौल, जलज सक्सेना और प्रीतम दास शामिल हैं.
आशुतोष अमन ने बिहार की रणजी टीम और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए साल 2018 में 32 साल की उम्र में डेब्यू किया था. इसके बाद से उन्होंने अपने प्रदर्शन से लगातार ध्यान खींचा. 19 मई 1986 को बिहार के गया में जन्मे अमन दिसंबर 2018 में रणजी ट्रॉफी सीजन में 50 विकेट लेने वाले पहले सीजन के पहले गेंदबाज बने. उस सीजन में उनके खाते में 68 विकेट दर्ज हुए. इस तरह उन्होंने 1974 में बिशन सिंह बेदी के 64 विकेट का रिकॉर्ड तोड़ डाला. आशुतोष अमन ने 17 प्रथम श्रेणी मैचों में 117 विकेट हासिल किए हैं, जबकि 19 लिस्ट ए मैचों में उनके नाम 21 विकेट दर्ज हैं. इसके अलावा उन्होंने 17 टी20 मैचों में 21 शिकार किए हैं.
| Syed Mushtaq Ali Trophy: इस गेंदबाज ने कहर ढा रखा है. ये वही गेंदबाज है, जिसने बिशन सिंह बेदी का छियालीस साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था. इंडियन प्रीमियर लीग के चौदहवें सीजन के लिए नीलामी की तारीख अट्ठारह फरवरी तय की गई है. ऐसे में नीलामी में अधिक से अधिक कीमत हासिल करने का भारतीय खिलाडि़यों के पास एक सुनहरा मौका है. मौका है सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबले, जो छब्बीस जनवरी से शुरू हो रहे हैं. मगर इससे पहले बात लीग चरण की होनी चाहिए, जिसमें कई युवा खिलाडि़यों ने अपने जोरदार प्रदर्शन से छाप छोड़ी है. इस कड़ी में गेंदबाजी की सूची में बिहार के चौंतीस साल के ऐसे खिलाड़ी का नाम सबसे आगे है, जिसने इशांत शर्मा और युजवेंद्र चहल जैसे गेंदबाजों को भी पीछे छोड़ दिया है. बिहार के आशुतोष अमन ने लीग चरण के पाँच मैचों में सबसे अधिक चौदह विकेट लेने का कमाल किया है. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लीग चरण के टॉप दस गेंदबाजों की बात करें तो इसमें टीम इंडिया के दिग्गज इशांत शर्मा और युजवेंद्र चहल जगह नहीं बना सके हैं. आशुतोष अमन के बाद इस लिस्ट में दूसरा नाम अवेश खान का है, जिन्होंने पाँच मैचों में चौदह विकेट ही हासिल किए हैं. पाँच मैचों में तेरह विकेट के साथ इशान पोरेल तीसरे, पाँच मैचों में बारह विकेट के साथ चेतन सकारिया चौथे और पाँच मैचों में ग्यारह विकेट के साथ एल. मेरीवाला पांचवें स्थान पर कायम हैं. टॉप दस के अन्य गेंदबाजों में राहुल चाहर, नालकंडे, सिद्धार्थ कौल, जलज सक्सेना और प्रीतम दास शामिल हैं. आशुतोष अमन ने बिहार की रणजी टीम और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए साल दो हज़ार अट्ठारह में बत्तीस साल की उम्र में डेब्यू किया था. इसके बाद से उन्होंने अपने प्रदर्शन से लगातार ध्यान खींचा. उन्नीस मई एक हज़ार नौ सौ छियासी को बिहार के गया में जन्मे अमन दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में रणजी ट्रॉफी सीजन में पचास विकेट लेने वाले पहले सीजन के पहले गेंदबाज बने. उस सीजन में उनके खाते में अड़सठ विकेट दर्ज हुए. इस तरह उन्होंने एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में बिशन सिंह बेदी के चौंसठ विकेट का रिकॉर्ड तोड़ डाला. आशुतोष अमन ने सत्रह प्रथम श्रेणी मैचों में एक सौ सत्रह विकेट हासिल किए हैं, जबकि उन्नीस लिस्ट ए मैचों में उनके नाम इक्कीस विकेट दर्ज हैं. इसके अलावा उन्होंने सत्रह टीबीस मैचों में इक्कीस शिकार किए हैं. |
अगर यहाँ पर इत्र की शीशी पडी हो तो वह सबको अपनी ओर खीच लेती है । लेकिन यदि उसमे इत्र के बजाय पानी भरा हो तो क्या कोई उसके पास जाने को राजी होगा ? इसी तरह मानव के हृदय मे भी यदि सद्गुरण रूपी इत्र भरा हुआ हो तो सब उसके पास जाते है, लेकिन दुर्गुरण हो तो कोई नही आना चाहता ।
हर एक मनुष्य सम्मान और प्रेम चाहता है । लेकिन जब तक उसके शरीर रूपी शीशी मे सद्व्यवहार रूपी इत्र न हो, तब तक वह दूसरो का प्रेम पात्र नहीं बन सकता है । अत सद्व्यवहार का इत्र सब मे होना चाहिये ।
जब तक मनुष्य अपने स्वार्थ की ही चिन्ता करता है, तब तक उसे कोई नही चाहता है । लेकिन जब वह इससे कुछ आगे बढ़ता है और अपने कुटुम्ब की भलाई करता है, तो वह अपने कुटुम्ब का प्रेम भाजन वन जाता है। लेकिन जब वह इससे भी आगे विकास करता है और समाज तथा राष्ट्र का भला सोचता है तो सवका प्रेम भाजन वन जाता है । और वही पुरुष धर्मात्मा भी कहा जाता है । क्योकि धर्मात्मा | अगर यहाँ पर इत्र की शीशी पडी हो तो वह सबको अपनी ओर खीच लेती है । लेकिन यदि उसमे इत्र के बजाय पानी भरा हो तो क्या कोई उसके पास जाने को राजी होगा ? इसी तरह मानव के हृदय मे भी यदि सद्गुरण रूपी इत्र भरा हुआ हो तो सब उसके पास जाते है, लेकिन दुर्गुरण हो तो कोई नही आना चाहता । हर एक मनुष्य सम्मान और प्रेम चाहता है । लेकिन जब तक उसके शरीर रूपी शीशी मे सद्व्यवहार रूपी इत्र न हो, तब तक वह दूसरो का प्रेम पात्र नहीं बन सकता है । अत सद्व्यवहार का इत्र सब मे होना चाहिये । जब तक मनुष्य अपने स्वार्थ की ही चिन्ता करता है, तब तक उसे कोई नही चाहता है । लेकिन जब वह इससे कुछ आगे बढ़ता है और अपने कुटुम्ब की भलाई करता है, तो वह अपने कुटुम्ब का प्रेम भाजन वन जाता है। लेकिन जब वह इससे भी आगे विकास करता है और समाज तथा राष्ट्र का भला सोचता है तो सवका प्रेम भाजन वन जाता है । और वही पुरुष धर्मात्मा भी कहा जाता है । क्योकि धर्मात्मा |
घर की डीप क्लीनिंग में वैक्यूम क्लीनर का काफी महत्वपूर्ण रोल होता है। ऐसे में वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर एक बहुमुखी क्लीनिंग टूल है। जो न केवल डस्ट को हटाता है बल्कि नम गंदगी, पानी और अन्य गीले मैल जैसे अन्य जिद्दी दागों से छुटकारा पाने में भी मदद करता है। यह आपके घर में सभी सतहों से हर तरह की गन्दगी को साफ करके एक साफ-सुथरा वातावरण देने में समर्थ होते हैं। इनमें से ज्यादातर वैक्यूम क्लीनर के साथ बैग नहीं आते हैं। लेकिन इसमें गीली और सूखी दोनों तरह की गन्दगी के लिए दो अलग उपकरणों का उपयोग किया जाता है। अगर आप भी ऐसा वैक्यूम क्लीनर लेना चाहते हैं जो आपकी सभी सफाई संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके तो हमारी यह रिपोर्ट आपको एक अच्छा वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर चुनने में मददगार साबित हो सकती हैं।
बेस्ट वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर अंडर 5000 :
| घर की डीप क्लीनिंग में वैक्यूम क्लीनर का काफी महत्वपूर्ण रोल होता है। ऐसे में वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर एक बहुमुखी क्लीनिंग टूल है। जो न केवल डस्ट को हटाता है बल्कि नम गंदगी, पानी और अन्य गीले मैल जैसे अन्य जिद्दी दागों से छुटकारा पाने में भी मदद करता है। यह आपके घर में सभी सतहों से हर तरह की गन्दगी को साफ करके एक साफ-सुथरा वातावरण देने में समर्थ होते हैं। इनमें से ज्यादातर वैक्यूम क्लीनर के साथ बैग नहीं आते हैं। लेकिन इसमें गीली और सूखी दोनों तरह की गन्दगी के लिए दो अलग उपकरणों का उपयोग किया जाता है। अगर आप भी ऐसा वैक्यूम क्लीनर लेना चाहते हैं जो आपकी सभी सफाई संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके तो हमारी यह रिपोर्ट आपको एक अच्छा वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर चुनने में मददगार साबित हो सकती हैं। बेस्ट वैट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर अंडर पाँच हज़ार : |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
मिडिया संगुटिका (media conglomerate) या 'मिडिया समूह' उस कम्पनी को कहते हैं जो विभिन्न जन संचार माध्यमों (समाचार पत्र, टीवी, रेडियो, चलचित्र आदि) की बहुत सी कम्पनियों की स्वामी हो। मिडिया समूह सरकारों से ऐसी नीतियाँ चाहते हैं जो देश-विदेश के मिडिया बाजार पर उनका नियंत्रण पक्का करने में सहायक हो। 2013 के फॉर्चून 500 सूची के अनुसार वाल्ट डिजनी कम्पनी राजस्व के अनुसार अमेरिका की सबसे बड़ी मिडिया समूह है। . सूचना साक्षरता किसी व्यक्ति की वह योग्यता है जिसके द्वारा वह जान जाता है कि उसे किस सूचना की जरूरत है तथा वह सूचना कहाँ मिलेगी। इसके अतिरिक्त सूचना साक्षर व्यक्ति में उस सूचना का मूल्यांकन करने तथा उस सूचना का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की योग्यता भी होती है। आज का युग सूचना का युग है। हर तरफ से सूचना का बिस्फोट हो रहा है। ऐसे में सही सूचना कम से कम समय में प्राप्त कर लेना एक महती योग्यता है। .
मिडिया संगुटिका और सूचना साक्षरता आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
मिडिया संगुटिका 2 संबंध है और सूचना साक्षरता 3 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (2 + 3)।
यह लेख मिडिया संगुटिका और सूचना साक्षरता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मिडिया संगुटिका या 'मिडिया समूह' उस कम्पनी को कहते हैं जो विभिन्न जन संचार माध्यमों की बहुत सी कम्पनियों की स्वामी हो। मिडिया समूह सरकारों से ऐसी नीतियाँ चाहते हैं जो देश-विदेश के मिडिया बाजार पर उनका नियंत्रण पक्का करने में सहायक हो। दो हज़ार तेरह के फॉर्चून पाँच सौ सूची के अनुसार वाल्ट डिजनी कम्पनी राजस्व के अनुसार अमेरिका की सबसे बड़ी मिडिया समूह है। . सूचना साक्षरता किसी व्यक्ति की वह योग्यता है जिसके द्वारा वह जान जाता है कि उसे किस सूचना की जरूरत है तथा वह सूचना कहाँ मिलेगी। इसके अतिरिक्त सूचना साक्षर व्यक्ति में उस सूचना का मूल्यांकन करने तथा उस सूचना का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की योग्यता भी होती है। आज का युग सूचना का युग है। हर तरफ से सूचना का बिस्फोट हो रहा है। ऐसे में सही सूचना कम से कम समय में प्राप्त कर लेना एक महती योग्यता है। . मिडिया संगुटिका और सूचना साक्षरता आम में शून्य बातें हैं । मिडिया संगुटिका दो संबंध है और सूचना साक्षरता तीन है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख मिडिया संगुटिका और सूचना साक्षरता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
दुमकाः राज्यपाल रमेश बैस (Ramesh Bais) के प्रस्तावित बासुकीनाथ धाम दौरे को लेकर DDC कर्ण सत्यार्थी ने जिले के अधिकारी के साथ बैठक कर गुरूवार को आवश्यक कार्यों को ससमय पूर्ण करने के दिए निर्देश।
बैठक में DDC ने कहा कि राज्यपाल के बासुकीनाथ दौरे के दौरान सभी अधिकारियों की प्रतिनियुक्त किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
10 जून को राज्यपाल के प्रस्तावित कार्यक्रम में बासुकीनाथ धाम में पूजा करेंगे। इसके लिए फॉरेस्ट गेस्ट हाउस (Forest Guest House) में सभी व्यवस्था सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल (Governor) के दौरे के दौरान मंदिर में आम नागरिकों लिए रोक रहेगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से जगह-जगह पर फोर्स एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
DDC ने निर्देश दिया कि राज्यपाल के स्वागत के लिए जगह-जगह पर फ्लैक्स होडिंग (Flax hoarding) लगाया जाए।
इस दौरान DDC एवं DFO ने संयुक्त रूप से पूरे बासुकीनाथ मंदिर परिसर का निरीक्षण कर साफ- सफाई को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
| दुमकाः राज्यपाल रमेश बैस के प्रस्तावित बासुकीनाथ धाम दौरे को लेकर DDC कर्ण सत्यार्थी ने जिले के अधिकारी के साथ बैठक कर गुरूवार को आवश्यक कार्यों को ससमय पूर्ण करने के दिए निर्देश। बैठक में DDC ने कहा कि राज्यपाल के बासुकीनाथ दौरे के दौरान सभी अधिकारियों की प्रतिनियुक्त किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दस जून को राज्यपाल के प्रस्तावित कार्यक्रम में बासुकीनाथ धाम में पूजा करेंगे। इसके लिए फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में सभी व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के दौरे के दौरान मंदिर में आम नागरिकों लिए रोक रहेगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से जगह-जगह पर फोर्स एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहेंगे। DDC ने निर्देश दिया कि राज्यपाल के स्वागत के लिए जगह-जगह पर फ्लैक्स होडिंग लगाया जाए। इस दौरान DDC एवं DFO ने संयुक्त रूप से पूरे बासुकीनाथ मंदिर परिसर का निरीक्षण कर साफ- सफाई को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। |
१. खूब ठंडा पानी अथवा ठंडा पदार्थ खाकर गरम पानी अथवा गरम पदार्थ खाया जाय तो दाँत जल्दी गिरते हैं ।
२. अकेला ठंडा पानी और ठंडे पदार्थ तथा अकेले गरम पदार्थ तथा गरम पानी के सेवन से भी दाँत के रोग होते हैं । इससे ऐसे सेवन से बचना चाहिए ।
३. भोजन करने के बाद दाँत साफ करके कुल्ले करना चाहिए । अन्न के कण दाँत में फँस तो नहीं गये इसका ध्यान रखना चाहिए ।
लाभः अग्निसार क्रिया से पाचन सुचारु रूप से चलता है। साधना में अधिक देर तक बैठने के बाद भी अजीर्ण नहीं होता और पेट के अनेक विकार दूर हो जाते हैं जैसे कब्ज (कोष्ठबद्धता) अल्सर, गैसेस, डकारें आदि की शिकायतें बंद हो जाती हैं। पेशाब में जलन कम हो जाती है। बार-बार पेशाब का आना या बहुमूत्र का होना इस क्रिया से बंद हो जाता है । भूख अच्छी लगती है । अधिक देर बैठकर साधना करनेवालों को अजीर्ण आदि नहीं होता है ।
४. महीने में एकाध बार रात्रि को सोने से पूर्व नमक एवं सरसों का तेल मिलाकर, उससे दाँत घिसकर, कुल्ले करके सो जाना चाहिए । ऐसा करने से वृद्धावस्था में भी दाँत मजबूत रहेंगे ।
५. सप्ताह में एक बार तिल का तेल दाँतों में घिसकर तिल के तेल के कुल्ले करने से भी दाँत वृद्धावस्था तक मजबूत रहेंगे ।
६. आईसक्रीम, बिस्कीट, चॉकलेट, ठंडा पानी, फ्रीज के ठंडे और बासी पदार्थ, चाय, कॉफी आदि के सेवन से बचने से भी दाँतों की सुरक्षा होती है । सुपारी जैसे अत्यंत कठोर पदार्थों से खास बचना चाहिए ।
अग्निसार क्रिया
अग्नाशय को प्रभावित करनेवाली यह योग की प्राचीन क्रिया लुप्त हो गयी थी । घेरण्ड ऋषि पाचन प्रणालि को सक्रिय रखने के लिए यह क्रिया करते थे । इस क्रिया से अनेक लाभ साधक को बैठे-बैठे मिल जाते हैं ।
करीब २० से ४० बार पेट को अंदर बाहर करें, फिर पेट चलाना बंद करें और लंबी गहरी श्वास लेना छोड़ना शुरू करें । चार पाँच बार लंबी गहरी श्वास लेने छोड़ने के बाद फिर से श्वास बाहर छोड़ कर पेट को चलाने की इस क्रिया को ४-५ बार दोहरायें ।
विधि : वज्रासन में बैठ कर हाथों को घुटनों पर रखें । सामने देखें । श्वास बाहर निकाल कर पेट को आगे पीछे चलायें । पेट को चलाते वक्त श्वास बाहर ही रोक रखें। जब आप पेट चलाते हैं तब कन्धों को न हिलायें । एक बार जब तक श्वास बाहर रोकी रहती है तब तक पेट चलाते रहें। एक बार श्वास छोड़ कर
'मूकं करोति वाचालं...
मैं विजयनगर, लक्ष्मीपुरा, बड़ौदा में रहता हूँ। मेरी पत्नी को पू. बापू की कृपा से अद्भुत चमत्कार हुआ है।
मेरी सासुजी गुरुपूर्णिमा के दिन बड़ौदा से पू. बापू के दर्शन करने अहमदाबाद आयी थीं । घर पर मेरी पत्नी दस साल से गूंगी हो गई थी । बोलती नहीं थी, घर के कार्य में ध्यान नहीं देती थी, स्नान भी नहीं करती थी, मेरे साथ लड़ती थी, मुझे मारती भी थी। मेरे भोजन
में पानी डाल देती थी । उसके दिमाग का कोई ठिकाना नहीं था । वह अपने बच्चों को भी पहचान नहीं सकती थी और उन्हें भी मारती थी ।
परन्तु जब मेरी सासुजी अहमदाबाद आयी तब उन्होंने बड़दादा की प्रदक्षिणा की और बड़दादा की मिट्टी लेकर मन में संकल्प किया कि मेरी बेटी यदि ठीक हो जायेगी और बोलेगी तो मैं उसे पू. बापू के दर्शन करने अहमदाबाद लाऊँगी । यह संकल्प उन्होंने अहमदाबाद में किया और घर पर मेरी पत्नी को चमत्कार हो गया। मेरी पत्नी अचानक 'हरि ॐ' बोलने लगी और जोर से बापू का नाम पुकारने लगी कि मुझे तो मेरे बापू ने अच्छी कर दी। रास्ते में जो मिलता था उसे हरि ॐ कहती थी ।
हमने अहमदाबाद जाकर मनौती पूरी की। अब सपरिवार प्रत्येक शनिवार को विडियो सत्संग का लाभ लेते हैं और रविवार को प्रभातफेरी में भी जाते हैं । मेरे प्यारे गुरुदेव को हम हजार बार प्रणाम करते
गणपतसिंह ईश्वरसिंह विजयनगर, गोरवा, बड़ौदा ।
पू. बापू की मंत्रदीक्षा का अद्भुत प्रभाव
शिविर में आने का निश्चित होते ही मेरा मन-मयूर नाचने लगा, जिसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं । भावनगर से रात्रि की बस में सुरत जाने के के लिए निकले तब बस में ही सुबह सुबह भव्य स्वप्न आया और श्री सांईबाबा (शिरड़ीवाले ) के दर्शन हुए।
हम सुरत पहुँचे और पूज्य गुरुदेव का सत्संग सुना। इतना आनंद आया कि जिसका वर्णन करना संभव नहीं है। सुबह सुबह रामकृष्ण परमहंस के दर्शन हुए। दूसरे दिन प्रातःकाल लगभग ३ से ४ बजे के बीच रमण महर्षि के दर्शन हुए । उसके बाद के दिन भी सुबह
सुबह मेरे पूर्व के गुरुदेव पू. राम शर्मा (गायत्री के उपासक) के दर्शन हुए ।
हम पति-पत्नी दोनों ने साथ में ही मंत्रदीक्षा ली तब कोई जादुई चमत्कार हुआ और मेरा व्यक्तित्व ही कुछ अलग हो गया और हर प्रकार से मेरा विकास हुआ। शिविर पूरा करके जब वापस लौटे तब की मस्ती कुछ और ही थी ।
शिवालय में दर्शन करने जाऊँ तब पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू ही दिखें। ध्यान या पूजा में 'ॐ ॐ ॐ....' की ध्वनि सुनाई दे । कभी कभी स्वप्न में पूज्य गुरुदेव श्री आसारामजी बापू दिखें। अब श्री आसारामजी बापू के पास से शक्तिपात साधना की दीक्षा लेने के बाद तो मानो अनुभवों का सागर लहराने लगा है । जो भी प्रश्न पूहूँ उसका उत्तर मिल जाता है और चाहे जैसे मुश्किल कार्य हों, परन्तु आसानी से हो जाते हैं ।
धन्य है इन योगेश्वर की आत्मयोग की दीक्षा ! सभी पुष्पों का सार होता है शहद वैसे ही सभी जपों का सार, मानो सद्गुरु श्री आसारामजी बापू आध्यात्मिक शहद का छत्ता न दे देते हों ! ऐसे मेरे जैसे तो हजारों गुरुभाई और बहनें हैं जिन्होंने पहले अलग अलग जगह साधनाएँ करके अंत में इन अलरव के औलिया का आश्रय लिया है। वाणी आगे जाती नहीं है । धन्य भागी हैं वे लोग, जिन्होंने आसारामजी बापू के दर्शन किये हैं, उनके पास से साधना की दीक्षा ली है उन मेरे तमाम गुरुभाइयों को मेरे हजार हजार वंदन....!
गुरुदीक्षा लेने के बाद मेरे जीवन में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले मैं कदम-कदम पर बहुत डरती थी। नौकरी में भी कोई ऐसा कहेगा, कोई वैसा कहेगा, धमकी देगा, ऐसा डर बात-बात में लगता था । परंतु पूज्यपाद गुरुदेव के पास से, सुरत में मंत्रदीक्षा लेने के बाद तो के सिंह जैसा बल और हिम्मत आ गयी है ।
चंद्रिका बहन | एक. खूब ठंडा पानी अथवा ठंडा पदार्थ खाकर गरम पानी अथवा गरम पदार्थ खाया जाय तो दाँत जल्दी गिरते हैं । दो. अकेला ठंडा पानी और ठंडे पदार्थ तथा अकेले गरम पदार्थ तथा गरम पानी के सेवन से भी दाँत के रोग होते हैं । इससे ऐसे सेवन से बचना चाहिए । तीन. भोजन करने के बाद दाँत साफ करके कुल्ले करना चाहिए । अन्न के कण दाँत में फँस तो नहीं गये इसका ध्यान रखना चाहिए । लाभः अग्निसार क्रिया से पाचन सुचारु रूप से चलता है। साधना में अधिक देर तक बैठने के बाद भी अजीर्ण नहीं होता और पेट के अनेक विकार दूर हो जाते हैं जैसे कब्ज अल्सर, गैसेस, डकारें आदि की शिकायतें बंद हो जाती हैं। पेशाब में जलन कम हो जाती है। बार-बार पेशाब का आना या बहुमूत्र का होना इस क्रिया से बंद हो जाता है । भूख अच्छी लगती है । अधिक देर बैठकर साधना करनेवालों को अजीर्ण आदि नहीं होता है । चार. महीने में एकाध बार रात्रि को सोने से पूर्व नमक एवं सरसों का तेल मिलाकर, उससे दाँत घिसकर, कुल्ले करके सो जाना चाहिए । ऐसा करने से वृद्धावस्था में भी दाँत मजबूत रहेंगे । पाँच. सप्ताह में एक बार तिल का तेल दाँतों में घिसकर तिल के तेल के कुल्ले करने से भी दाँत वृद्धावस्था तक मजबूत रहेंगे । छः. आईसक्रीम, बिस्कीट, चॉकलेट, ठंडा पानी, फ्रीज के ठंडे और बासी पदार्थ, चाय, कॉफी आदि के सेवन से बचने से भी दाँतों की सुरक्षा होती है । सुपारी जैसे अत्यंत कठोर पदार्थों से खास बचना चाहिए । अग्निसार क्रिया अग्नाशय को प्रभावित करनेवाली यह योग की प्राचीन क्रिया लुप्त हो गयी थी । घेरण्ड ऋषि पाचन प्रणालि को सक्रिय रखने के लिए यह क्रिया करते थे । इस क्रिया से अनेक लाभ साधक को बैठे-बैठे मिल जाते हैं । करीब बीस से चालीस बार पेट को अंदर बाहर करें, फिर पेट चलाना बंद करें और लंबी गहरी श्वास लेना छोड़ना शुरू करें । चार पाँच बार लंबी गहरी श्वास लेने छोड़ने के बाद फिर से श्वास बाहर छोड़ कर पेट को चलाने की इस क्रिया को चार-पाँच बार दोहरायें । विधि : वज्रासन में बैठ कर हाथों को घुटनों पर रखें । सामने देखें । श्वास बाहर निकाल कर पेट को आगे पीछे चलायें । पेट को चलाते वक्त श्वास बाहर ही रोक रखें। जब आप पेट चलाते हैं तब कन्धों को न हिलायें । एक बार जब तक श्वास बाहर रोकी रहती है तब तक पेट चलाते रहें। एक बार श्वास छोड़ कर 'मूकं करोति वाचालं... मैं विजयनगर, लक्ष्मीपुरा, बड़ौदा में रहता हूँ। मेरी पत्नी को पू. बापू की कृपा से अद्भुत चमत्कार हुआ है। मेरी सासुजी गुरुपूर्णिमा के दिन बड़ौदा से पू. बापू के दर्शन करने अहमदाबाद आयी थीं । घर पर मेरी पत्नी दस साल से गूंगी हो गई थी । बोलती नहीं थी, घर के कार्य में ध्यान नहीं देती थी, स्नान भी नहीं करती थी, मेरे साथ लड़ती थी, मुझे मारती भी थी। मेरे भोजन में पानी डाल देती थी । उसके दिमाग का कोई ठिकाना नहीं था । वह अपने बच्चों को भी पहचान नहीं सकती थी और उन्हें भी मारती थी । परन्तु जब मेरी सासुजी अहमदाबाद आयी तब उन्होंने बड़दादा की प्रदक्षिणा की और बड़दादा की मिट्टी लेकर मन में संकल्प किया कि मेरी बेटी यदि ठीक हो जायेगी और बोलेगी तो मैं उसे पू. बापू के दर्शन करने अहमदाबाद लाऊँगी । यह संकल्प उन्होंने अहमदाबाद में किया और घर पर मेरी पत्नी को चमत्कार हो गया। मेरी पत्नी अचानक 'हरि ॐ' बोलने लगी और जोर से बापू का नाम पुकारने लगी कि मुझे तो मेरे बापू ने अच्छी कर दी। रास्ते में जो मिलता था उसे हरि ॐ कहती थी । हमने अहमदाबाद जाकर मनौती पूरी की। अब सपरिवार प्रत्येक शनिवार को विडियो सत्संग का लाभ लेते हैं और रविवार को प्रभातफेरी में भी जाते हैं । मेरे प्यारे गुरुदेव को हम हजार बार प्रणाम करते गणपतसिंह ईश्वरसिंह विजयनगर, गोरवा, बड़ौदा । पू. बापू की मंत्रदीक्षा का अद्भुत प्रभाव शिविर में आने का निश्चित होते ही मेरा मन-मयूर नाचने लगा, जिसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं । भावनगर से रात्रि की बस में सुरत जाने के के लिए निकले तब बस में ही सुबह सुबह भव्य स्वप्न आया और श्री सांईबाबा के दर्शन हुए। हम सुरत पहुँचे और पूज्य गुरुदेव का सत्संग सुना। इतना आनंद आया कि जिसका वर्णन करना संभव नहीं है। सुबह सुबह रामकृष्ण परमहंस के दर्शन हुए। दूसरे दिन प्रातःकाल लगभग तीन से चार बजे के बीच रमण महर्षि के दर्शन हुए । उसके बाद के दिन भी सुबह सुबह मेरे पूर्व के गुरुदेव पू. राम शर्मा के दर्शन हुए । हम पति-पत्नी दोनों ने साथ में ही मंत्रदीक्षा ली तब कोई जादुई चमत्कार हुआ और मेरा व्यक्तित्व ही कुछ अलग हो गया और हर प्रकार से मेरा विकास हुआ। शिविर पूरा करके जब वापस लौटे तब की मस्ती कुछ और ही थी । शिवालय में दर्शन करने जाऊँ तब पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू ही दिखें। ध्यान या पूजा में 'ॐ ॐ ॐ....' की ध्वनि सुनाई दे । कभी कभी स्वप्न में पूज्य गुरुदेव श्री आसारामजी बापू दिखें। अब श्री आसारामजी बापू के पास से शक्तिपात साधना की दीक्षा लेने के बाद तो मानो अनुभवों का सागर लहराने लगा है । जो भी प्रश्न पूहूँ उसका उत्तर मिल जाता है और चाहे जैसे मुश्किल कार्य हों, परन्तु आसानी से हो जाते हैं । धन्य है इन योगेश्वर की आत्मयोग की दीक्षा ! सभी पुष्पों का सार होता है शहद वैसे ही सभी जपों का सार, मानो सद्गुरु श्री आसारामजी बापू आध्यात्मिक शहद का छत्ता न दे देते हों ! ऐसे मेरे जैसे तो हजारों गुरुभाई और बहनें हैं जिन्होंने पहले अलग अलग जगह साधनाएँ करके अंत में इन अलरव के औलिया का आश्रय लिया है। वाणी आगे जाती नहीं है । धन्य भागी हैं वे लोग, जिन्होंने आसारामजी बापू के दर्शन किये हैं, उनके पास से साधना की दीक्षा ली है उन मेरे तमाम गुरुभाइयों को मेरे हजार हजार वंदन....! गुरुदीक्षा लेने के बाद मेरे जीवन में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले मैं कदम-कदम पर बहुत डरती थी। नौकरी में भी कोई ऐसा कहेगा, कोई वैसा कहेगा, धमकी देगा, ऐसा डर बात-बात में लगता था । परंतु पूज्यपाद गुरुदेव के पास से, सुरत में मंत्रदीक्षा लेने के बाद तो के सिंह जैसा बल और हिम्मत आ गयी है । चंद्रिका बहन |
सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें कुछ तो हंसाने वाले होते हैं, तो कुछ को देखकर हैरानी होती है। वहीं, कुछ वीडियो ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इसी कड़ी में एक ऐसा वीडियो शेयर किया गया है, जिसे देखकर आपको हैरानी भी होगी और हंसी भी आएगी। अब यह वीडियो वायरल हो गया है और लोग इस पर जमकर चटकारे भी ले रहे हैं।
वीडियो देखकर आप भी समझ गए होंगे कि लड़की की क्या हालत हुई होगी? लेकिन, यह पूरा मामला कैमरे में कैद हो गया और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया। ट्विटर पर इस वीडियो को '@DoctorAjayita' नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। इस वीडियो को 21 हजार से ज्यादा लोग अब तक देख चुके हैं। वहीं, वायरल वीडियो पर यूजर्स जमकर मजे लेते हुए कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ' बच्ची अपना भविष्य भी नहीं जान सकती है क्या? ' एक अन्य यूजर ने लिखा, ' इंस्टा के हिसाब से उसको 28 तक ऐसे ही पिटना है'। एक ने लिखा, ' ये होती है भारतीय मां'।
| सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें कुछ तो हंसाने वाले होते हैं, तो कुछ को देखकर हैरानी होती है। वहीं, कुछ वीडियो ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इसी कड़ी में एक ऐसा वीडियो शेयर किया गया है, जिसे देखकर आपको हैरानी भी होगी और हंसी भी आएगी। अब यह वीडियो वायरल हो गया है और लोग इस पर जमकर चटकारे भी ले रहे हैं। वीडियो देखकर आप भी समझ गए होंगे कि लड़की की क्या हालत हुई होगी? लेकिन, यह पूरा मामला कैमरे में कैद हो गया और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया। ट्विटर पर इस वीडियो को '@DoctorAjayita' नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। इस वीडियो को इक्कीस हजार से ज्यादा लोग अब तक देख चुके हैं। वहीं, वायरल वीडियो पर यूजर्स जमकर मजे लेते हुए कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ' बच्ची अपना भविष्य भी नहीं जान सकती है क्या? ' एक अन्य यूजर ने लिखा, ' इंस्टा के हिसाब से उसको अट्ठाईस तक ऐसे ही पिटना है'। एक ने लिखा, ' ये होती है भारतीय मां'। |
ओसाका (जापान): तेल की कीमतों में पिछले कुछ समय से दिख रही तेजी के बीच वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि भारत तेल मूल्यों के मौजूदा स्तर से निपट सकता है लेकिन इसके और महंगा होने से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और मुद्रास्फीति का दबाव बनेगा। कच्चा तेल सात महीने के उच्च स्तर 50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है।
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल एक डॉलर की वृद्धि पर देश का आयात खर्च 9,126 करोड़ रुपए (1. 36 अरब डॉलर) बढ़ जाता है। साथ ही इससे सामान्य महंगाई का दबाव भी बढ़ता है। जेटली ने कहा, निश्चित रूप से कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। अगर यह दायरे में रही, जिस दायरे में यह अभी है, तो इससे निपटा जा सकता है। लेकिन अगर यह दायरे से बाहर जाता है, तब निश्चित रूप से मुश्किल पैदा होगी।
पेट्रोल कीमतों में मार्च से अबतक पांच बार वृद्धि की जा चुकी है। कुल मिलाकर 8. 99 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 9. 79 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अक्तूबर 2015 के बाद से बढ़कर पहली बार 50 डॉलर प्रति बैरल हो गई। पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर एक रुपए की वृद्धि से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में 0. 02 प्रतिशत तथा डीजल के भाव में इतनी ही बढ़ोतरी से 0. 07 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है।
अरूण जेटली ने कहा, भारत शुद्ध रूप से कच्चे तेल का खरीदार रहा है और पिछले एक साल से अधिक समय से कम कीमत से लाभान्वित हुआ और अगर कीमत मौजूदा दायरे में रहती है तो हम उसे झेल सकते है। हालांकि अगर कीमतों में अनुचित वृद्धि होती है तो उसका प्रभाव मुद्रास्फीति तथा बचत दोनों पर होगा जिसे महसूस किया जाएगा। जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए निश्चित रूप से वैश्विक माहौल मददगार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक माहौल मददगार हो तो अर्थव्यवस्था का 8 से 9 प्रतिशत वृद्धि हासिल करना संभव है लेकिन वैश्विक माहौल प्रतिकूल हो तो इसे 7. 6 प्रतिशत पर भी बनाए रखना अत्यंत कठिन होगा।
सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों को मार्च की तिमाही में 15,000 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा होने के बीच वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैंकों को अधिक वित्तीय समर्थन का वादा किया है और चेताया है कि बैंकरों को परेशानी में डालने वाले चूककर्ताओं (डिफाल्टरों) को चैन की नींद सोने की छूट नहीं दी जा सकती। जेटली ने इसके साथ ही इन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि सार्वजनिक बैंकों का भारी घाटा कंकाल निकलने के समान है। उन्होंने कहा कि इन बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) कुछ क्षेत्रों में व्यापार संबंधी घाटे के कारण है न कि घपलों के कारण। उन्होंने कहा कि एनपीए या फंसा हुआ कर्ज हमेशा से ही रहा है। उन्होंने कहा, या तो आप इसे ढके रहेंगे या फिर इसे बैलेंस शीट में दिखाएंगे। मेरी राय में पारदर्शी बैलेंस शीट कारोबार करने का श्रेष्ठ तरीका है और बैंक अब वही कर रहे हैं।
| ओसाका : तेल की कीमतों में पिछले कुछ समय से दिख रही तेजी के बीच वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि भारत तेल मूल्यों के मौजूदा स्तर से निपट सकता है लेकिन इसके और महंगा होने से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और मुद्रास्फीति का दबाव बनेगा। कच्चा तेल सात महीने के उच्च स्तर पचास डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है। भारत अपनी जरूरत का अस्सी प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल एक डॉलर की वृद्धि पर देश का आयात खर्च नौ,एक सौ छब्बीस करोड़ रुपए बढ़ जाता है। साथ ही इससे सामान्य महंगाई का दबाव भी बढ़ता है। जेटली ने कहा, निश्चित रूप से कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। अगर यह दायरे में रही, जिस दायरे में यह अभी है, तो इससे निपटा जा सकता है। लेकिन अगर यह दायरे से बाहर जाता है, तब निश्चित रूप से मुश्किल पैदा होगी। पेट्रोल कीमतों में मार्च से अबतक पांच बार वृद्धि की जा चुकी है। कुल मिलाकर आठ. निन्यानवे रुपयापए प्रति लीटर और डीजल में नौ. उन्यासी रुपयापए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अक्तूबर दो हज़ार पंद्रह के बाद से बढ़कर पहली बार पचास डॉलर प्रति बैरल हो गई। पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर एक रुपए की वृद्धि से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में शून्य. दो प्रतिशत तथा डीजल के भाव में इतनी ही बढ़ोतरी से शून्य. सात प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। अरूण जेटली ने कहा, भारत शुद्ध रूप से कच्चे तेल का खरीदार रहा है और पिछले एक साल से अधिक समय से कम कीमत से लाभान्वित हुआ और अगर कीमत मौजूदा दायरे में रहती है तो हम उसे झेल सकते है। हालांकि अगर कीमतों में अनुचित वृद्धि होती है तो उसका प्रभाव मुद्रास्फीति तथा बचत दोनों पर होगा जिसे महसूस किया जाएगा। जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए निश्चित रूप से वैश्विक माहौल मददगार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक माहौल मददगार हो तो अर्थव्यवस्था का आठ से नौ प्रतिशत वृद्धि हासिल करना संभव है लेकिन वैश्विक माहौल प्रतिकूल हो तो इसे सात. छः प्रतिशत पर भी बनाए रखना अत्यंत कठिन होगा। सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों को मार्च की तिमाही में पंद्रह,शून्य करोड़ रुपए से अधिक का घाटा होने के बीच वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैंकों को अधिक वित्तीय समर्थन का वादा किया है और चेताया है कि बैंकरों को परेशानी में डालने वाले चूककर्ताओं को चैन की नींद सोने की छूट नहीं दी जा सकती। जेटली ने इसके साथ ही इन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि सार्वजनिक बैंकों का भारी घाटा कंकाल निकलने के समान है। उन्होंने कहा कि इन बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां कुछ क्षेत्रों में व्यापार संबंधी घाटे के कारण है न कि घपलों के कारण। उन्होंने कहा कि एनपीए या फंसा हुआ कर्ज हमेशा से ही रहा है। उन्होंने कहा, या तो आप इसे ढके रहेंगे या फिर इसे बैलेंस शीट में दिखाएंगे। मेरी राय में पारदर्शी बैलेंस शीट कारोबार करने का श्रेष्ठ तरीका है और बैंक अब वही कर रहे हैं। |
काबुल 02 नवंबर (वार्ता)। अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल के पुलिस जिला 5 में बुधवार को सरकारी कर्मचारियों की एक मिनी बस को निशाना बनाकर किये गये बम विस्फोट (detonate the bombs) में आठ लोग घायल हो गये । काबुल पुलिस के प्रवक्ता खालिद जादरान ने बताया, "बुधवार सुबह पुलिस जिले 5 में ग्रामीण पुनर्वास एवं विकास मंत्रालय के कर्मचारियों की एक मिनी बस को सड़क किनारे लगाये गये बम से निशाना बनाया और इस बम विस्फोट में आठ लोग घायल हुए है। " उन्होंने बताया कि सभी घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। किसी भी समूह या व्यक्ति ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है।
| काबुल दो नवंबर । अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पुलिस जिला पाँच में बुधवार को सरकारी कर्मचारियों की एक मिनी बस को निशाना बनाकर किये गये बम विस्फोट में आठ लोग घायल हो गये । काबुल पुलिस के प्रवक्ता खालिद जादरान ने बताया, "बुधवार सुबह पुलिस जिले पाँच में ग्रामीण पुनर्वास एवं विकास मंत्रालय के कर्मचारियों की एक मिनी बस को सड़क किनारे लगाये गये बम से निशाना बनाया और इस बम विस्फोट में आठ लोग घायल हुए है। " उन्होंने बताया कि सभी घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। किसी भी समूह या व्यक्ति ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है। |
पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (BJP) के मुख्य रणनीतिकार और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (himanta biswa sarma) ने कहा कि सत्तारूढ़ दल मणिपुर (Manipur Assembly Elections) में अपने दम पर अगली सरकार बनाने के लिए आश्वस्त है और उसे किसी सहयोगी के समर्थन की आवश्यकता नहीं है।
आपको बता दें कि भाजपा ने मेघालय में कॉनराड संगमा (Conrad Sangma) के नेतृत्व वाली एनपीपी (NPP) के साथ गठबंधन कर रखा है, लेकिन मणिपुर में यही पार्टी भाजपा के सामने मुख्य प्रति प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आ रही है। हिमंता बिस्वा सरमा (himanta biswa sarma) ने कहा कि भाजपा ने मेघालय में एनपीपी के साथ जरूर गठबंधन किया है, लेकिन जहां तक मणिपुर का सवाल है, भाजपा अपने दम पर सरकार बनाएगी। भाजपा का प्राथमिक ध्यान अब पार्टी के भविष्य की स्थिति को देखने के बजाय एक ठोस बहुमत प्राप्त करने पर है। सरमा ने इंफाल में एक बैठक को संबोधित करते हुए ये बातें कही। सरमा भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) (NEDA) के संयोजक भी हैं।
गौरतलब है कि मणिपुर विधानसभा चुनाव के पहले चरण (Manipur election First Phase) के लिए कुल 176 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इंफाल पश्चिम जिले में कुल 56 उम्मीदवारों (Manipur candidates) ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जिनमें से आठ उम्मीदवार सेकमाई निर्वाचन क्षेत्र से, पांच-पांच कीशमथोंग, लमसांग, कोंगथौजम और लंगटाबल से, चार-चार उरीपोक, सिंगजामेई, पटसोई और नौरिया पखांगलक्पा से और सगोलबंद, वांगोई और सगोलबंद, वांगोई और मायांग इंफाल सगोलबंद, वांगोई और मायांग इंफालमा से तीन-तीन हैं। इंफाल पूर्व में, 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 45 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। -खुरई से सात, खुंद्रकपम से छह, याइकुल, केशत्रीगांव और लामलाई से पांच-पांच, वांगखेई और एंड्रो से चार-चार, थोंगजू से तीन और हेंगांग से दो उम्मीदवार शामिल हैं। बिष्णुपुर में 22 उम्मीदवार हैं, जिनमें से सात उम्मीदवार ओइनम से हैं। खुंबी से पांच, बिष्णुपुर और मोइरंग से तीन-तीन और नंबोल और थंगा विधानसभा क्षेत्र से दो-दो।
| पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सत्तारूढ़ दल मणिपुर में अपने दम पर अगली सरकार बनाने के लिए आश्वस्त है और उसे किसी सहयोगी के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। आपको बता दें कि भाजपा ने मेघालय में कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी के साथ गठबंधन कर रखा है, लेकिन मणिपुर में यही पार्टी भाजपा के सामने मुख्य प्रति प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आ रही है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि भाजपा ने मेघालय में एनपीपी के साथ जरूर गठबंधन किया है, लेकिन जहां तक मणिपुर का सवाल है, भाजपा अपने दम पर सरकार बनाएगी। भाजपा का प्राथमिक ध्यान अब पार्टी के भविष्य की स्थिति को देखने के बजाय एक ठोस बहुमत प्राप्त करने पर है। सरमा ने इंफाल में एक बैठक को संबोधित करते हुए ये बातें कही। सरमा भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के संयोजक भी हैं। गौरतलब है कि मणिपुर विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए कुल एक सौ छिहत्तर उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इंफाल पश्चिम जिले में कुल छप्पन उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जिनमें से आठ उम्मीदवार सेकमाई निर्वाचन क्षेत्र से, पांच-पांच कीशमथोंग, लमसांग, कोंगथौजम और लंगटाबल से, चार-चार उरीपोक, सिंगजामेई, पटसोई और नौरिया पखांगलक्पा से और सगोलबंद, वांगोई और सगोलबंद, वांगोई और मायांग इंफाल सगोलबंद, वांगोई और मायांग इंफालमा से तीन-तीन हैं। इंफाल पूर्व में, दस विधानसभा क्षेत्रों में कुल पैंतालीस उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। -खुरई से सात, खुंद्रकपम से छह, याइकुल, केशत्रीगांव और लामलाई से पांच-पांच, वांगखेई और एंड्रो से चार-चार, थोंगजू से तीन और हेंगांग से दो उम्मीदवार शामिल हैं। बिष्णुपुर में बाईस उम्मीदवार हैं, जिनमें से सात उम्मीदवार ओइनम से हैं। खुंबी से पांच, बिष्णुपुर और मोइरंग से तीन-तीन और नंबोल और थंगा विधानसभा क्षेत्र से दो-दो। |
कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को हाल ही में दिल का दौरा पड़ने के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया है। उनके भतीजे कुशल श्रीवास्तव ने अपने चाचा की हेल्थ अपडेट दी और बताया कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने अपने हाथ-पैर भी हिलाए।
एंटरटेनमेंट डेस्क. कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Srivastava), जिन्हें 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट करते समय दिल का दौरा पड़ा था और उन्हें नई दिल्ली में एम्स में भर्ती कराया गया था, अब उनकी सेहत में सुधार दिखा रहा हैं, उनके भतीजे कुशल श्रीवास्तव ने बात की पुष्टि की है। कॉमेडियन के भतीजे ने ईटाइम्स से बात की और बताया कि उनके चाचा ने अपना हाथ हिलाया और अब धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधर रहा हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान ने कहा- मैं लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करने की अपील करता हूं। राजू जी की हालत धीर-धीरे बेहतर हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उनमें पॉजिटिव संकेत देखने को मिल रहे है। उनकी रिपोर्ट्स में किसी भी तरह की कोई निगेटिव बात सामने नहीं आई है। उन्होंने अपने हाथ-पैर हिलाए, जिसकी जानकारी डॉक्टरों ने दी है। वे एक फाइटर है और जल्द ही ठीक होकर हम सबके पास वापस आएंगे। मैं सभी से रिक्वेस्ट करता हूं कि सभी उनके जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना करें।
राजू श्रीवास्तव के भतीजे कुशल ने बताया- चाचा की सेहत को लेकर लगातात निगेटिव खबरें सामने आ रही है और उनकी फैमिली सभी से यहीं कह रही है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा- हम इन नकारात्मक खबरों को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे है। राजू जी वैसे ही अपनी लड़ाई लड़ रहे है और इस तरह की अफवाहें घरवालों को परेशान कर रही है। हमने उनके इंस्टाग्राम से एक पोस्ट शेयर की फिर भी लोग संदेश भेज रहे है और गलत जानकारी फऐला रहे है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- जिस दिन उनको दिल का दौरा पड़ा था, उस दिन भी यह बात फैलाई गई कि उन्होंने बहुत ज्यादा वर्कआउट किया था, जो कि गलत है। वे हमेशा ट्रेड मील पर दौड़ते हैं और उन्होंने कभी भी भारी वजन नहीं उठाया। वे सिर्फ अपना रूटीन वर्कआउट कर रहे थे। बता दें कि 58 साल के राजू श्रीस्वातव को 10 अगस्त को दिल दौरा पड़ने के बाद एम्स में एडमिट किया गया था। उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी भी हुई थी।
आपको बता दें कि राजू श्रीवास्तव ने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाकर की थी। इसके बाद वे टीवी शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में नजर आए। वे टीवी के कई कॉमेडी शोज में नजर आ चुके है। राजू, सलमान खान के विवादित शो बिग बॉस 3 में नजर आ चुके है।
| कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को हाल ही में दिल का दौरा पड़ने के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया है। उनके भतीजे कुशल श्रीवास्तव ने अपने चाचा की हेल्थ अपडेट दी और बताया कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने अपने हाथ-पैर भी हिलाए। एंटरटेनमेंट डेस्क. कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव , जिन्हें दस अगस्त को जिम में वर्कआउट करते समय दिल का दौरा पड़ा था और उन्हें नई दिल्ली में एम्स में भर्ती कराया गया था, अब उनकी सेहत में सुधार दिखा रहा हैं, उनके भतीजे कुशल श्रीवास्तव ने बात की पुष्टि की है। कॉमेडियन के भतीजे ने ईटाइम्स से बात की और बताया कि उनके चाचा ने अपना हाथ हिलाया और अब धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधर रहा हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान ने कहा- मैं लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करने की अपील करता हूं। राजू जी की हालत धीर-धीरे बेहतर हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उनमें पॉजिटिव संकेत देखने को मिल रहे है। उनकी रिपोर्ट्स में किसी भी तरह की कोई निगेटिव बात सामने नहीं आई है। उन्होंने अपने हाथ-पैर हिलाए, जिसकी जानकारी डॉक्टरों ने दी है। वे एक फाइटर है और जल्द ही ठीक होकर हम सबके पास वापस आएंगे। मैं सभी से रिक्वेस्ट करता हूं कि सभी उनके जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना करें। राजू श्रीवास्तव के भतीजे कुशल ने बताया- चाचा की सेहत को लेकर लगातात निगेटिव खबरें सामने आ रही है और उनकी फैमिली सभी से यहीं कह रही है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा- हम इन नकारात्मक खबरों को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे है। राजू जी वैसे ही अपनी लड़ाई लड़ रहे है और इस तरह की अफवाहें घरवालों को परेशान कर रही है। हमने उनके इंस्टाग्राम से एक पोस्ट शेयर की फिर भी लोग संदेश भेज रहे है और गलत जानकारी फऐला रहे है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- जिस दिन उनको दिल का दौरा पड़ा था, उस दिन भी यह बात फैलाई गई कि उन्होंने बहुत ज्यादा वर्कआउट किया था, जो कि गलत है। वे हमेशा ट्रेड मील पर दौड़ते हैं और उन्होंने कभी भी भारी वजन नहीं उठाया। वे सिर्फ अपना रूटीन वर्कआउट कर रहे थे। बता दें कि अट्ठावन साल के राजू श्रीस्वातव को दस अगस्त को दिल दौरा पड़ने के बाद एम्स में एडमिट किया गया था। उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी भी हुई थी। आपको बता दें कि राजू श्रीवास्तव ने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाकर की थी। इसके बाद वे टीवी शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में नजर आए। वे टीवी के कई कॉमेडी शोज में नजर आ चुके है। राजू, सलमान खान के विवादित शो बिग बॉस तीन में नजर आ चुके है। |
परियोजना की अनुमानित पूर्ण लागत 8575 करोड़ रु है और इस काम को पूरा होने का लक्ष्य दिसंबर 2021 रखा गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोलकाता ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर परियोजना के निर्माण के लिए अनुमानित संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है।
कार्यान्वयन रणनीतियां और लक्ष्यः
जो रेल मंत्रालय के अंतर्गत एक सीपीएसई है।
• परियोजना की अनुमानित पूर्ण लागत है 8575 करोड़ रुपये है। इसमें से रेल मंत्रालय ने 3268.27 करोड़ रुपया, आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने 1148.31 करोड़ रुपया शेयर किया है और जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) ने 4158.40 करोड़ रुपये का ऋण दिया है।
• 5.3 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर पहले ही 14.02.2020 से चालू है।
• आगे के 1.67 किमी पर 05.10.2020 को काम शुरू किया गया है।
• संपूर्ण परियोजना के पूरा होने की निर्धारित तिथि दिसंबर 2021 है।
गहरा प्रभाव :
मेगा परियोजना कोलकाता के व्यापारिक जिले के बीच पश्चिम में हावड़ा के औद्योगिक शहर और पूर्व में साल्ट लेक सिटी के बीच एक सुरक्षित, सुलभ और आरामदायक परिवहन प्रणाली के माध्यम से कुशल पारगमन संपर्क का निर्माण करेगी। परियोजना से यातायात में आसानी होगी और शहरवासियों के लिए एक सुरक्षित परिवहन साधन उपलब्ध होगा। यह कोलकाता शहर को एक आर्थिक, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल पारगमन सुविधा प्रदान करेगा। यह कोलकाता क्षेत्र की बड़े पैमाने पर परिवहन समस्या को दूर करेगा जिससे परिवहन में कम समय लगेगा और उत्पादकता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इस इंटरचेंज हब का निर्माण करके मेट्रो, उप-नगरीय रेलवे, नौकायान और बस परिवहन जैसे परिवहन के कई तरीकों को एकीकृत हो सकेगा। यह लाखों दैनिक यात्रियों के लिए परिवहन के सुचारू और निर्बाध प्रणाली सुनिश्चित करेगा।
परियोजना के लाभः
• एक सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली प्रदान कर लोगों को लाभान्वित करना।
• परिवहन के समय में कमी।
• ईंधन की कम खपत।
• सड़क बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत खर्च में कमी।
• प्रदूषण और दुर्घटना में कमी।
• ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) को बढ़ाना।
• गलियारे में भूमि बैंक के मूल्य में वृद्धि और अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करना।
• नौकरियों का सृजन।
• "आत्मनिर्भर भारत" और "लोकल फॉर वोकल" की भावना को शामिल करना।
कोलकाता ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर परियोजना कोलकाता शहर और आसपास के शहरी इलाके के लाखों दैनिक यात्रियों के सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। यह रेल-आधारित जन रैपिड ट्रांजिट प्रणाली के माध्यम से कोलकाता, हावड़ा और साल्ट लेक में निर्बाध संपर्क प्रदान करेगा। यह कुशल और निर्बाध परिवहन इंटरचेंज हब का निर्माण करके मेट्रो, रेलवे और बस परिवहन जैसे परिवहन के अन्य सभी साधनों को भी एकीकृत करेगा। इस परियोजना में हुगली नदी के नीचे सुरंग सहित 16.6 किलोमीटर लंबे मेट्रो रेलवे कॉरिडोर के निर्माण की परिकल्पना की गई है जो कि हावड़ा स्टेशन के साथ साथ किसी प्रमुख नदी के नीचे भारत में पहला परिवहन टनल है जो भारत में सबसे गहरा मेट्रो स्टेशनों में से एक है।
| परियोजना की अनुमानित पूर्ण लागत आठ हज़ार पाँच सौ पचहत्तर करोड़ रु है और इस काम को पूरा होने का लक्ष्य दिसंबर दो हज़ार इक्कीस रखा गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोलकाता ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर परियोजना के निर्माण के लिए अनुमानित संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। कार्यान्वयन रणनीतियां और लक्ष्यः जो रेल मंत्रालय के अंतर्गत एक सीपीएसई है। • परियोजना की अनुमानित पूर्ण लागत है आठ हज़ार पाँच सौ पचहत्तर करोड़ रुपये है। इसमें से रेल मंत्रालय ने तीन हज़ार दो सौ अड़सठ.सत्ताईस करोड़ रुपया, आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने एक हज़ार एक सौ अड़तालीस.इकतीस करोड़ रुपया शेयर किया है और जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी ने चार हज़ार एक सौ अट्ठावन.चालीस करोड़ रुपये का ऋण दिया है। • पाँच.तीन किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर पहले ही चौदह.दो.दो हज़ार बीस से चालू है। • आगे के एक.सरसठ किमी पर पाँच.दस.दो हज़ार बीस को काम शुरू किया गया है। • संपूर्ण परियोजना के पूरा होने की निर्धारित तिथि दिसंबर दो हज़ार इक्कीस है। गहरा प्रभाव : मेगा परियोजना कोलकाता के व्यापारिक जिले के बीच पश्चिम में हावड़ा के औद्योगिक शहर और पूर्व में साल्ट लेक सिटी के बीच एक सुरक्षित, सुलभ और आरामदायक परिवहन प्रणाली के माध्यम से कुशल पारगमन संपर्क का निर्माण करेगी। परियोजना से यातायात में आसानी होगी और शहरवासियों के लिए एक सुरक्षित परिवहन साधन उपलब्ध होगा। यह कोलकाता शहर को एक आर्थिक, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल पारगमन सुविधा प्रदान करेगा। यह कोलकाता क्षेत्र की बड़े पैमाने पर परिवहन समस्या को दूर करेगा जिससे परिवहन में कम समय लगेगा और उत्पादकता और विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस इंटरचेंज हब का निर्माण करके मेट्रो, उप-नगरीय रेलवे, नौकायान और बस परिवहन जैसे परिवहन के कई तरीकों को एकीकृत हो सकेगा। यह लाखों दैनिक यात्रियों के लिए परिवहन के सुचारू और निर्बाध प्रणाली सुनिश्चित करेगा। परियोजना के लाभः • एक सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली प्रदान कर लोगों को लाभान्वित करना। • परिवहन के समय में कमी। • ईंधन की कम खपत। • सड़क बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत खर्च में कमी। • प्रदूषण और दुर्घटना में कमी। • ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ाना। • गलियारे में भूमि बैंक के मूल्य में वृद्धि और अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करना। • नौकरियों का सृजन। • "आत्मनिर्भर भारत" और "लोकल फॉर वोकल" की भावना को शामिल करना। कोलकाता ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर परियोजना कोलकाता शहर और आसपास के शहरी इलाके के लाखों दैनिक यात्रियों के सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है। यह रेल-आधारित जन रैपिड ट्रांजिट प्रणाली के माध्यम से कोलकाता, हावड़ा और साल्ट लेक में निर्बाध संपर्क प्रदान करेगा। यह कुशल और निर्बाध परिवहन इंटरचेंज हब का निर्माण करके मेट्रो, रेलवे और बस परिवहन जैसे परिवहन के अन्य सभी साधनों को भी एकीकृत करेगा। इस परियोजना में हुगली नदी के नीचे सुरंग सहित सोलह दशमलव छः किलोग्राममीटर लंबे मेट्रो रेलवे कॉरिडोर के निर्माण की परिकल्पना की गई है जो कि हावड़ा स्टेशन के साथ साथ किसी प्रमुख नदी के नीचे भारत में पहला परिवहन टनल है जो भारत में सबसे गहरा मेट्रो स्टेशनों में से एक है। |
- 7 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
- 7 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . "
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साहिल खान ने बॉलीवुड के खान सुपरस्टार पर लगाया गंभीर आरोप- 'मुझे फिल्मों से निकलवा दिया था'
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद लगातार बॉलीवुड में नोपोटिज्म और आउटसाइडर्स को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। लोग की आरोप लगा रहे हैं तो कई सितारे भी इस लिस्ट में अपना अपना दर्द बयां कर रहे हैं। अब स्टाइल और एक्सक्यूज मी जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले एक्टर साहिल खान का भी एक पोस्ट सामने आया है जो कि तेजी से वायरल हो रहा है।
बता दें कि वो फिल्मों को अलविदा कह चुके हैं और इस समय बॉडी बिल्डिंग में अपना करियर बना रहे हैं। हाल ही में उन्होने भी बॉलीवुड के एक बड़े खान पर बिना नाम लिए काफी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आउटसाइडर होने के कारण उनको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दरअसल साहिल खान ने एक पोस्ट किया था जिसमें एक एंटरटेनमेंट मैगजीन में उनकी तस्वीर छपी थी और साथ में सलमान खान और शाहरुख खान भी नजर आ रहे थे।
बाबू,
करना'
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(सूबेदार मेजर (से. नि. ) केसी शर्मा, गगल)
भावी पीढि़यों के लिए भी पर्यावरण स्वच्छ रहे, इसके लिए हमें आज जल, जंगल और जमीन की संभाल करनी होगी। हैरानी यह कि आज हम इन तीनों की बेकद्री पर उतारू हैं। पीने के स्वच्छ जल के नाम पर लंबे अरसे से बाजार में पानी बोतलों में बिकता देखा जाता रहा है। अब तो यह बोतलबंद पानी एक फैशन सा बन चुका है, जिसे स्वच्छ जल की गारंटी भी माना जाता है। इससे पहले हम सदियों से पेयजल के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर आश्रित रहे हैं और यह पानी पीने के लिए हर लिहाज से स्वच्छ होता था। दुखद यह कि हमने अब तक अधिकतर प्राकृतिक जल स्रोतों का अस्तित्व मिट्टी में मिला दिया है। यही वजह है कि हमें अब पेयजल के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, आज वाटर प्योरिफायर्स का एक बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है। ये हालात इसलिए बने, क्योंकि हमने अपने जल स्रोतों को सलीके से इस्तेमाल नहीं किया। दूसरी ओर कई देशों में अब हवा में भी इतना जहर घुल चुका है कि यहां लोगों को स्वच्छ वायु भी पैसों से खरीदनी पड़ रही है। मानवीय लालच की जो मार जंगलों पर पड़ी है, वह भी किसी से छिपी नहीं है। जमीन को भी इनसान ने अपने लाभ के लिए हर तरह के रसायनों से भर दिया है। अतः जीवन की मूल आवश्यकताओं यानी जल, जंगल और जमीन तीनों की पवित्रता प्रभावित हुई है। अगर हम अपनी आने वाली पीढि़यों के बारे में जरा भी संजीदा हैं, तो हमें जल, जंगल और जमीन से हो रही इन ज्यादतियों पर विराम लगाना होगा।
| केसी शर्मा, गगल) भावी पीढि़यों के लिए भी पर्यावरण स्वच्छ रहे, इसके लिए हमें आज जल, जंगल और जमीन की संभाल करनी होगी। हैरानी यह कि आज हम इन तीनों की बेकद्री पर उतारू हैं। पीने के स्वच्छ जल के नाम पर लंबे अरसे से बाजार में पानी बोतलों में बिकता देखा जाता रहा है। अब तो यह बोतलबंद पानी एक फैशन सा बन चुका है, जिसे स्वच्छ जल की गारंटी भी माना जाता है। इससे पहले हम सदियों से पेयजल के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर आश्रित रहे हैं और यह पानी पीने के लिए हर लिहाज से स्वच्छ होता था। दुखद यह कि हमने अब तक अधिकतर प्राकृतिक जल स्रोतों का अस्तित्व मिट्टी में मिला दिया है। यही वजह है कि हमें अब पेयजल के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, आज वाटर प्योरिफायर्स का एक बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है। ये हालात इसलिए बने, क्योंकि हमने अपने जल स्रोतों को सलीके से इस्तेमाल नहीं किया। दूसरी ओर कई देशों में अब हवा में भी इतना जहर घुल चुका है कि यहां लोगों को स्वच्छ वायु भी पैसों से खरीदनी पड़ रही है। मानवीय लालच की जो मार जंगलों पर पड़ी है, वह भी किसी से छिपी नहीं है। जमीन को भी इनसान ने अपने लाभ के लिए हर तरह के रसायनों से भर दिया है। अतः जीवन की मूल आवश्यकताओं यानी जल, जंगल और जमीन तीनों की पवित्रता प्रभावित हुई है। अगर हम अपनी आने वाली पीढि़यों के बारे में जरा भी संजीदा हैं, तो हमें जल, जंगल और जमीन से हो रही इन ज्यादतियों पर विराम लगाना होगा। |
Jharkhand Farming. ई-नाम का सफल संचालन एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को ई-नाम से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गइ है। परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति में पणन सचिव संजय कच्छप की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।
जमशेदपुर, जासं। परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति में पणन सचिव संजय कच्छप की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ई-नाम का सफल संचालन एवं एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन)को ई-नाम से जोड़ने के संबंध में गहन विचार- विमर्श किया गया। बैठक में पणन सचिव, किसान प्रतिनिधि व संस्था के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए कई सुझाव दिए।
इनमें प्रमुख था अधिक से अधिक किसानों एवं एफपीओ को ई-नाम पोर्टल से जोड़ना, किसानों की उपज को बाजार उपलब्ध कराना, किसानों के उपज को बाजार तक कैसे लाया जाए एवं मार्केटिंग को बढ़ाने, ई-नाम से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने, वैसी फसल जिसकी यहां स्थानीय स्तर पर अधिक मात्रा में उपज होती है, उसे ई-नाम पोर्टल से जोड़ना, मंडी में आउटलेट-पूछताछ केंद्र खुले ताकि किसानों का शिकायत को दर्ज किया जा सके शामिल है।
बैठक के बाद जानकारी देते हुए बाजार समिति के सचिव संजय कच्छप ने बताया कि किसानों एवं एफपीओ को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए जिला स्तरीय पदाधिकारी से संपर्क कर अगली बैठक 11 फरवरी को बुलाने का निर्णय लिया गया ताकि उपरोक्त प्रस्ताव को अंतिम रुप दिया जा सके। बैठक में पणन सचिव, एलेन सुरेन, पुरनेंदु दास, अकाली टुडू, विश्वजीत हलधर, टिकाराम टुडू आदि ने भाग लिया।
| Jharkhand Farming. ई-नाम का सफल संचालन एवं एफपीओ को ई-नाम से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गइ है। परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति में पणन सचिव संजय कच्छप की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। जमशेदपुर, जासं। परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति में पणन सचिव संजय कच्छप की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ई-नाम का सफल संचालन एवं एफपीओ को ई-नाम से जोड़ने के संबंध में गहन विचार- विमर्श किया गया। बैठक में पणन सचिव, किसान प्रतिनिधि व संस्था के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए कई सुझाव दिए। इनमें प्रमुख था अधिक से अधिक किसानों एवं एफपीओ को ई-नाम पोर्टल से जोड़ना, किसानों की उपज को बाजार उपलब्ध कराना, किसानों के उपज को बाजार तक कैसे लाया जाए एवं मार्केटिंग को बढ़ाने, ई-नाम से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने, वैसी फसल जिसकी यहां स्थानीय स्तर पर अधिक मात्रा में उपज होती है, उसे ई-नाम पोर्टल से जोड़ना, मंडी में आउटलेट-पूछताछ केंद्र खुले ताकि किसानों का शिकायत को दर्ज किया जा सके शामिल है। बैठक के बाद जानकारी देते हुए बाजार समिति के सचिव संजय कच्छप ने बताया कि किसानों एवं एफपीओ को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए जिला स्तरीय पदाधिकारी से संपर्क कर अगली बैठक ग्यारह फरवरी को बुलाने का निर्णय लिया गया ताकि उपरोक्त प्रस्ताव को अंतिम रुप दिया जा सके। बैठक में पणन सचिव, एलेन सुरेन, पुरनेंदु दास, अकाली टुडू, विश्वजीत हलधर, टिकाराम टुडू आदि ने भाग लिया। |
फतेहगंज पश्चिमी। कस्बा निवासी भाजपा नेता एवं अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के युवा जिलाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने आय, जाति, चरित्र व हैसियत प्रमाण पत्र निर्धारित समय में जारी न होने का आरोप लगाकर मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। भाजपा नेता ने शिकायत में कहा है राजस्व कर्मी ऑन लाइन आवेदनों पर पर समय पर रिपोर्ट न लगाकर उनको लंबित रखते हैं। जिससे आवेदकों को प्रमाण पत्र निर्धारित समय पर नहीं मिल रहे हैं।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
| फतेहगंज पश्चिमी। कस्बा निवासी भाजपा नेता एवं अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के युवा जिलाध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने आय, जाति, चरित्र व हैसियत प्रमाण पत्र निर्धारित समय में जारी न होने का आरोप लगाकर मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। भाजपा नेता ने शिकायत में कहा है राजस्व कर्मी ऑन लाइन आवेदनों पर पर समय पर रिपोर्ट न लगाकर उनको लंबित रखते हैं। जिससे आवेदकों को प्रमाण पत्र निर्धारित समय पर नहीं मिल रहे हैं। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है। |
कर्कः
के जातक काफी भाग्यशाली माने जाते हैं। इन्हें किस्मत से सबकुछ हासिल होता है। ये मेहनत करके लाइफ में अपना एक अलग मुकाम बना लेते हैं। ये जो भी काम करते हैं उसमें इन्हें सफलता मिलने की प्रबल संभावना रहती है। पैसों के मामले में भी ये काफी लकी साबित होते हैं। ये जो भी काम करते हैं उसमें अपना शत प्रतिशत देते हैं।
| कर्कः के जातक काफी भाग्यशाली माने जाते हैं। इन्हें किस्मत से सबकुछ हासिल होता है। ये मेहनत करके लाइफ में अपना एक अलग मुकाम बना लेते हैं। ये जो भी काम करते हैं उसमें इन्हें सफलता मिलने की प्रबल संभावना रहती है। पैसों के मामले में भी ये काफी लकी साबित होते हैं। ये जो भी काम करते हैं उसमें अपना शत प्रतिशत देते हैं। |
अजमेर। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर में आयोजित रिज्म 2018 का शुक्रवार को औपचारिक फ्लैग हैंडिंग ओवर सैरेमनी के साथ समारोह पूर्वक समापन हो गया।
इससे पहले सुबह खेले गए फ़ुटबॉल के सेमीफ़ाइनल में भुवनेश्वर ने मैसूर को टाईब्रेकर में 2-1 से हराकर फ़ाइनल में भोपाल से खेलने की पात्रता प्राप्त की परंतु फ़ाइनल में भोपाल से टाई ब्रेकर में 4-3 से हार बैठा।
पुरुष वर्ग के टेनिस का फ़ाइनल मुक़ाबला भी भोपाल और भुवनेश्वर के बीच हुआ जिसमें भुवनेश्वर ने भोपाल को दो शून्य से हराया। कमोबेश बैडमिंटन के फ़ाइनल में भी परिस्थितियां यही रहीं जब भुवनेश्वर ने भोपाल को दो शून्य से पराजित किया।
ट्रैक एंड फ़ील्ड के मुक़ाबलों में 4×100 मीटर मिक्स रिले में भुवनेश्वर प्रथम मैसूर द्वितीय तथा अजमेर तृतीय रहा। ड्रॉईंग व पेंटिंग मुक़ाबलों में भोपाल की श्रुति दसौंधी प्रथम व गौरी मालवीय तृतीय रहीं द्वितीय स्थान पर मैसूर की मेखना वेनु रही।
साहित्यिक प्रतियोगिता की जनरल चैंपियनशिप पर अजमेर ने 12 अंकों के साथ क़ब्ज़ा किया दूसरे स्थान पर मैसूर 9 अंकों के साथ रहा। गेम्स की जनरल चैंपियनशिप पर भी अजमेर ने 23 अंकों के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। भुवनेश्वर 16 अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर रहा।
प्रतियोगिता की अंतिम स्पर्धा 4×100 मिक्स रिले से पहले मैसूर, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर विविध अंकों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने हुए थे। मिक्स रिले के परिणामों के उपरांत स्थिति बहुत ही रोचक हो गई जब मैसूर अजमेर भुवनेश्वर सत्रह सत्रह अंकों के साथ टाई कर गई।
ट्रैक एंड फ़ील्ड की जनरल चैम्पियनशिप तीनों संस्थानों के प्राचार्यों को संयुक्त रूप से दी गई। साहित्यिक, ट्रैक एंड फ़ील्ड व खेल कूद स्पर्धाओं के संयुक्त अंकों के बाद भुवनेश्वर ने जहां 40 अंक प्राप्त किए वहीं 52 अंकों के साथ अजमेर ने ओवरऑल चैंपियनशिप सत्र 2018 पर क़ब्ज़ा कर लिया।
एनसीईआरटी के विविध अधिष्ठातागण प्राचार्य, अजमेर प्रौ विश्वनाथप्पा,भुबनेश्वर प्रौ पीसी अग्रवाल, शिलॉन्ग प्रौ बी बरठाकुर, भोपाल प्रौ प्रधान, मैसूर प्रौ श्रीकांत की उपस्थिति में विजेताओं को पारितोषिक प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर आयुष्मान गोस्वामी ने किया।
| अजमेर। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर में आयोजित रिज्म दो हज़ार अट्ठारह का शुक्रवार को औपचारिक फ्लैग हैंडिंग ओवर सैरेमनी के साथ समारोह पूर्वक समापन हो गया। इससे पहले सुबह खेले गए फ़ुटबॉल के सेमीफ़ाइनल में भुवनेश्वर ने मैसूर को टाईब्रेकर में दो-एक से हराकर फ़ाइनल में भोपाल से खेलने की पात्रता प्राप्त की परंतु फ़ाइनल में भोपाल से टाई ब्रेकर में चार-तीन से हार बैठा। पुरुष वर्ग के टेनिस का फ़ाइनल मुक़ाबला भी भोपाल और भुवनेश्वर के बीच हुआ जिसमें भुवनेश्वर ने भोपाल को दो शून्य से हराया। कमोबेश बैडमिंटन के फ़ाइनल में भी परिस्थितियां यही रहीं जब भुवनेश्वर ने भोपाल को दो शून्य से पराजित किया। ट्रैक एंड फ़ील्ड के मुक़ाबलों में चार×एक सौ मीटर मिक्स रिले में भुवनेश्वर प्रथम मैसूर द्वितीय तथा अजमेर तृतीय रहा। ड्रॉईंग व पेंटिंग मुक़ाबलों में भोपाल की श्रुति दसौंधी प्रथम व गौरी मालवीय तृतीय रहीं द्वितीय स्थान पर मैसूर की मेखना वेनु रही। साहित्यिक प्रतियोगिता की जनरल चैंपियनशिप पर अजमेर ने बारह अंकों के साथ क़ब्ज़ा किया दूसरे स्थान पर मैसूर नौ अंकों के साथ रहा। गेम्स की जनरल चैंपियनशिप पर भी अजमेर ने तेईस अंकों के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। भुवनेश्वर सोलह अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर रहा। प्रतियोगिता की अंतिम स्पर्धा चार×एक सौ मिक्स रिले से पहले मैसूर, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर विविध अंकों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने हुए थे। मिक्स रिले के परिणामों के उपरांत स्थिति बहुत ही रोचक हो गई जब मैसूर अजमेर भुवनेश्वर सत्रह सत्रह अंकों के साथ टाई कर गई। ट्रैक एंड फ़ील्ड की जनरल चैम्पियनशिप तीनों संस्थानों के प्राचार्यों को संयुक्त रूप से दी गई। साहित्यिक, ट्रैक एंड फ़ील्ड व खेल कूद स्पर्धाओं के संयुक्त अंकों के बाद भुवनेश्वर ने जहां चालीस अंक प्राप्त किए वहीं बावन अंकों के साथ अजमेर ने ओवरऑल चैंपियनशिप सत्र दो हज़ार अट्ठारह पर क़ब्ज़ा कर लिया। एनसीईआरटी के विविध अधिष्ठातागण प्राचार्य, अजमेर प्रौ विश्वनाथप्पा,भुबनेश्वर प्रौ पीसी अग्रवाल, शिलॉन्ग प्रौ बी बरठाकुर, भोपाल प्रौ प्रधान, मैसूर प्रौ श्रीकांत की उपस्थिति में विजेताओं को पारितोषिक प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर आयुष्मान गोस्वामी ने किया। |
श्रीमद् कुलभद्राचार्य विरचित्
सार-समुच्चय टीका
मङ्गलाचरण । दोहा ।
श्री परमातम सकलको, नमहुँ ध्यान चित धार । जा प्रसाद शिव-मार्गको, लखा भविक भवतार ॥१॥ वर्तमान युग भरतमें, ॠपभादिक महावीर । तीर्थकर चौबीसको, नमहुँ कर्म क्षय वीर ॥ २॥ निकल सिद्ध परमातमा सहजानन्द स्वभाव । शुद्ध बुद्ध अकलंक थिर, नमहुँ द्रव्य अर भाव ॥३॥ ग्रन्थ रहित आतमरमी, दीक्षा शिक्षा देत । आचारज मुनिराजको, नमहुँ ज्ञान सुख हेत ॥४॥ शास्त्ररमी बहु ज्ञानघर, उपाध्याय मुनिराज । दाता आतम ज्ञानके, नहुँ निजातम काज ॥५॥ साधत शिवपथ प्रेमसे, बढ़े जात अध्यात्म । मूळोत्तर गुण पाटते, नमहुँ साधु युद्धात्म ।।६।।
x मारम्भ ता० २६-६-१९३५ वीर सं० २४६१ आषाढ वदी ११ बुधवार धाराशिव में
जिनवाणी उपकारिणी, शिव मारग दरशात । पतितोद्धारक वर धरे, नमहुँ नाय निज गात ॥७॥ सार समुच्चय ग्रन्थके, कर्ता श्री कुलभद्र । नमहुँ परम आचार्यको, लिखूँ सार भविभद्र ॥८॥
देवदेवं जिनं नत्वा भवोद्भवविनाशनम् । वक्ष्येऽहं देशनां कांचिम्मतिहीनोऽपि भक्तितः ॥१॥ अन्वयार्थ - (अहं) मैं कुलभद्र आचार्य (भवोद्भव विनाशनम् ) -संसारके जन्मको नाश करनेवाले ( देवदेवं जिन ) देवोंके देव महादेव श्री जिनेन्द्रको ( भक्तितः ) भक्तिपूर्वक (नत्वा ) नमस्कार करके बुद्धि में अरुप होनेपर भी ( कांचित् ) कुछ ( देशनां ) उपदेशको ( वक्ष्ये ) कहूँगा ।
भावार्थ - पूजनेयोग्य देव वही है जिसने आत्माके रागद्वेषादि -च अज्ञानादि शत्रुओंको जीत लिया हो और अरहंत तथा सिद्धपद प्राप्त कर लिया हो । जिसका आत्मा कर्मकलंक रहित शुद्ध होगया हो उनकी भक्ति उनको प्रसन्न करनेके लिये नहीं की जाती है किंतु उच्च आदर्शके स्मरणसे भक्तजनके भाव निर्मल होजाते हैं, - संसार त्यागने योग्य व मोक्ष ग्रहण करनेयोग्य भासने लगता है, इसलिये भक्ति की जाती है। श्रीकुलभद्र आचार्यने ग्रन्थकी आदिमें निर्विघ्न ग्रन्थ समाप्तिके हेतु व परोपकारी, तत्वके विवेचन में लवलीन रहे, इस हेतु मङ्गलाचरण करके धर्मो देश लिखनेकी प्रतिज्ञा की है ।' | श्रीमद् कुलभद्राचार्य विरचित् सार-समुच्चय टीका मङ्गलाचरण । दोहा । श्री परमातम सकलको, नमहुँ ध्यान चित धार । जा प्रसाद शिव-मार्गको, लखा भविक भवतार ॥एक॥ वर्तमान युग भरतमें, ॠपभादिक महावीर । तीर्थकर चौबीसको, नमहुँ कर्म क्षय वीर ॥ दो॥ निकल सिद्ध परमातमा सहजानन्द स्वभाव । शुद्ध बुद्ध अकलंक थिर, नमहुँ द्रव्य अर भाव ॥तीन॥ ग्रन्थ रहित आतमरमी, दीक्षा शिक्षा देत । आचारज मुनिराजको, नमहुँ ज्ञान सुख हेत ॥चार॥ शास्त्ररमी बहु ज्ञानघर, उपाध्याय मुनिराज । दाता आतम ज्ञानके, नहुँ निजातम काज ॥पाँच॥ साधत शिवपथ प्रेमसे, बढ़े जात अध्यात्म । मूळोत्तर गुण पाटते, नमहुँ साधु युद्धात्म ।।छः।। x मारम्भ ताशून्य छब्बीस जून एक हज़ार नौ सौ पैंतीस वीर संशून्य दो हज़ार चार सौ इकसठ आषाढ वदी ग्यारह बुधवार धाराशिव में जिनवाणी उपकारिणी, शिव मारग दरशात । पतितोद्धारक वर धरे, नमहुँ नाय निज गात ॥सात॥ सार समुच्चय ग्रन्थके, कर्ता श्री कुलभद्र । नमहुँ परम आचार्यको, लिखूँ सार भविभद्र ॥आठ॥ देवदेवं जिनं नत्वा भवोद्भवविनाशनम् । वक्ष्येऽहं देशनां कांचिम्मतिहीनोऽपि भक्तितः ॥एक॥ अन्वयार्थ - मैं कुलभद्र आचार्य -संसारके जन्मको नाश करनेवाले देवोंके देव महादेव श्री जिनेन्द्रको भक्तिपूर्वक नमस्कार करके बुद्धि में अरुप होनेपर भी कुछ उपदेशको कहूँगा । भावार्थ - पूजनेयोग्य देव वही है जिसने आत्माके रागद्वेषादि -च अज्ञानादि शत्रुओंको जीत लिया हो और अरहंत तथा सिद्धपद प्राप्त कर लिया हो । जिसका आत्मा कर्मकलंक रहित शुद्ध होगया हो उनकी भक्ति उनको प्रसन्न करनेके लिये नहीं की जाती है किंतु उच्च आदर्शके स्मरणसे भक्तजनके भाव निर्मल होजाते हैं, - संसार त्यागने योग्य व मोक्ष ग्रहण करनेयोग्य भासने लगता है, इसलिये भक्ति की जाती है। श्रीकुलभद्र आचार्यने ग्रन्थकी आदिमें निर्विघ्न ग्रन्थ समाप्तिके हेतु व परोपकारी, तत्वके विवेचन में लवलीन रहे, इस हेतु मङ्गलाचरण करके धर्मो देश लिखनेकी प्रतिज्ञा की है ।' |
प्रमाद युग । २८३
नये - पुराने कपडे एकत्र कर भूकप- पीड़ितों के लिये भेजे । सन् १९३५ मे देवदत्त मिश्र परिषद् के सभापति चुने गये, किन्तु कुछ रंगारंग कार्यक्रमों के अतिरिक्त प्रसाद युग के अन्त तक कुछ न हो सका । परिषद् अपने नाटक सामान्यतः मिनर्वा, अफेड तथा नाट्यमंदिर के रंगालयों में प्रदर्शित किया करती थी और रग-सज्जा, रंगदीपन आदि के सभी तत्कालीन साधनों का उपयोग किया करती थो । सभी वस्त्राभरण, रंगोपकरण बी० दास एण्ड कं० मे किराये पर मंगाए जाते थे।
परिषद् ने पारसी-हिन्दी रंगमच के नाटकों और नाट्य-पद्धति से विद्रोह कर एक साफ-सुथरा, परिष्कृत, कलापूर्ण एवं राष्ट्रीय हिन्दी रगमच खड़ा करने का प्रयास अवश्य किया, किन्तु अपनी परिसीमाओं के भीतर याबद्ध होने के कारण 'महात्मा ईसा' जैसे गंभीर नाटक को छोड़कर उसने इस युग की प्रसाद-धारा के अन्य नाटकों को नहीं अपनाया । अभिनय की कृत्रिमता दूर करने, मच पर पारसी रगमच को अनावश्यक तडव - भडक से यथानभव दूर रहकर सादगी और वस्तुवादिता लाने और रंगमंच को राष्ट्रोत्थान के पुरस्करणार्थ प्रस्तुत करने मे परिषद् का योगदान अविस्मरणीय है।
कलकत्ते की बजरंग परिषद् से पृथक् होकर कुछ कलाकारों ने सन् १९१९-२० मे श्रीकृष्ण परिषद् को स्थापना की । इस संस्था ने कुछ नाटक नाटककार कन्हैयाल 'कातिल' के निर्देशन में प्रस्तुत किये और हिन्दी नाट्य परिषद् की भाँति अपनो आय का बहुत बडा अंश राष्ट्र हित में लगाया । यह परिषद् अब विशेष सत्रिय नहीं है ।
उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि हिन्दी के इस अव्यावसायिक रंगमच पर, एकाध अपवादो को छोड़ कर, रंग-सज्जा के लिये अधिकाशत रंगे हुए परदो, फ्लाटो आदि से ही काम चला लिया जाता था और पारसी मच के अन्य वाह्याडंबरी का प्रदर्शन उनकी आर्थिक क्षमता के बाहर की बात हुआ करती थी । इस रगमच का लक्ष्य रंगसज्जा, वेश-भूषा आदि की तडक भडक दिखलाना न होकर प्रायः नये प्रयोग करना, अभिनय को कृत्रिमता को दूर करना और रंग-शिल्प को वस्तुवादी, सरल तथा अल्प-व्यय-साध्य बनाना या । फिर भी कानपुर को कैलाश क्लब जैसी कुछ नाट्य-संस्थाएँ इस युग मे भी नये प्रयोगों से दूर बनी रही । कुल मिला कर प्रसाद युग का रंगमंच भारतेन्द्र युग और बेताब युग की रूढियो और परम्पराओ से आगे न बढ सका । यह मंच प्रसाद के विशिष्ट शैली के नाटको की आवश्यकताओं को पूर्ति के लिये अपर्याप्त एवं अक्षम था। फिर भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि व्यावसायिक एवं अव्यावसायिक, दोनों प्रकार के मचो ने प्रसाद की नाट्य-चेतना को बहुत दूर तक प्रभावित किया और वे अनेक प्रयोगों के बाद ही अपनी नाट्य-पद्धति और रंग-शिल्प को एक निश्चित रूप दे सके। (२) हिन्दीतर भारतीय रंगमंचः स्थिति तथा समकालीन युग
प्रसाद युग में हिन्दी की ही भांति बेंगला और गुजराती में भी कुछ सीमा तक प्रयोगनिष्ठ नाटक रगमंच से दूर जा पडा, किन्तु फिर भी सभी आलोच्य हिन्दीतर भारतीय भाषाओं में नाटकों और उनके लेखकों का संबंध किसी-न-किसी रूप मे व्यावसायिक नाटक मडलियों के साथ बना रहा । मराठी को छोड, जिसमे नाटक व्यावसायिक रगमंच के साथ एकप्राण बना रहा, शेष सभी भाषाओं में उनके युगद्रष्टा जिन नाटककारी ने इस युग का नेतृत्व किया, उनकी कृतियों से अव्यावसायिक रगमंच को प्रेरणा मिली, क्योकि व्यावसायिक मच को परपरागत आवश्यकताओं की पूर्ति न कर पाने, रगमच पर नई परम्पराओं एवं कला-विधान को स्थापना करने, भाषा के संस्कार एवं अलकृति के कारण उनके प्रयोगों के लिये एक ऐसे मंच की आवश्यकता प्रतीत हुई, जो व्यवसाय-दृष्टि को दूर रख कर कुछ दूर तक चल सके। यह प्रयोगनिष्ठ अव्यावसायिक मंच हिन्दी, बंगला और गुजराती में व्यावसायिक मन के साथ-साथ एक-दूसरे का पूरक और कही एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी बन कर चलता रहा।
सन् १९१२ ई० मे नाट्याचार्य गिरीशचन्द्र घोष और मिनर्वा के परिचालक महेन्द्र मित्र के निधन और
२८४ । भारतीय रगमच का विवेचनात्मक इतिहास
सन् १९१६ मे स्टार के परिचालक, नट एव नाटककार अमरेन्द्रनाथ दत्त के महाप्रयाण से बंगला के दो प्रमुख रगालयो-मिनर्वा और स्टार की गति कुछ काल के लिये कुठिन हो गई। कुछ कलाकारो के अवकाश-ग्रहण या वय वृद्धि के साथ उनकी कला के अस्तगत होने के कारण बेंगला रंगमच पर कुशल कलाकारों का दैन्य उपस्थित हो गया। गिरीश बाबू के सुपुत्र सुरेन्द्रनाथ घोष ( दानी बाबू) इस दैन्य को दूर करने के लिये अपनी अद्भुत क्षमता एव कला-दाक्षिण्य का परिचय देते रहे, तभी सन् १९२१ मे कलकत्ता के विश्वविद्यालय संस्थान में चाणक्य की भूमिका कर ( १९१२ ई० ) प्रसिद्धि पाने वाले प्राध्यापक शिशिरकुमार भादुडी ने अध्यापको छोड़कर व्यावसायिक मच जगत् मे प्रवेश किया और अपने अध्यवसाय और नाट्य-कौगल के बल पर बंगला रगमच को एक नवीन दिशा दी। उन्होंने सर्वप्रथम बँगला मच पर पाश्चात्य भावाभिनय-पद्धति की अवतारणा की, किन्तु वे गिरीश की भाँति सर्वगतः तप कर अपने युग का नेतृत्व न कर सके। यह नये प्रयोगो का युग था, जिसकी सूचना कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर अपने नवीन शैली के नाटको- 'शारदोत्सव' (१९०८ ई० ), 'राजा' (१९१० ई० ) और 'डाकघर' ( १९१२ ई० ) द्वारा दे चुके थे। प्राकृतिक अथवा मानवीय प्रतीको को लेकर जिन लौकिक एवं पारलौकिक तत्त्वो की अवतारणा की गई है, वे हैं सत्य और आनंद की उपलब्धि, आत्मा का अज्ञान के घोर सम को भेद कर परमात्मा से साविध्य अथवा उसमे विलय रवीन्द्र के नाटकों में निहित प्रसगनिष्ठ तत्त्व-निरूपण सामान्य । सामाजिक के लिये ग्राह्य नहीं है, अत उनके नाटकों के लिये सर्वसाधारण के मच की हो नही, असाधारण तत्त्वज्ञान सम्पन्न सामाजिकों के मच की आवश्यकता थी, जिसकी स्थापना के लिये रवीन्द्र को स्वय प्रयत्नशील होना पडा । शान्तिनिकेतन की बालक-बालिकाओं को लेकर रवीन्द्र ने अपने इन नवीन नाटको के सफल प्रयोग कर इस नवीन मच की स्थापना को। बाद में उनके कुछ लोकप्रिय नाटक अथवा नाट्यरूपान्तर व्यावसायिक रंगमच द्वारा भी किये गये । आर्ट थियेटर द्वारा रवीन्द्र के 'चिरकुमार सभा, नाट्य मंदिर द्वारा उनके 'विसर्जन', प्रस्तुत 'शेषरक्षा' और 'तपती', नवनाट्य मंदिर द्वारा 'योगायोग' (रवीन्द्र के उसी नाम के उपन्यास का नाट्य रूपातर ) अभिनीत किये गये ।
रवीन्द्र न केवल नाटककार थे, वरन् वे एक कुशल नट एव प्रयोक्ता भी थे । शातिनिकेतन द्वारा अभिनीत नाटको मे वे स्वयं भी भूमिकाएं करते थे और नाट्य-शिक्षा का कार्य भी करते थे। रवीन्द्र ने नाट्याचार्य शिशिर के साथ भी अनेक भूमिकाएँ की थी। शिशिर केवल नट, नाट्य-शिक्षक एवं परिचालक थे, जबकि रवीन्द्र इसके अतिरिक्त नाटककार एव कवि भी थे, अत. प्रसाद के समकालीन होने के कारण बंगला मे इस युग को रवीन्द्र युग' के नाम से अभिषिक्त करना समीचीन होगा ।
रवीन्द्र युग अनिवार्यत विशिष्ट अव्यावसायिक मच का युग होते हुए भी व्यावसायिक दृष्टि से गिरीश युग मे किसी प्रकार कम महत्त्वपूर्ण नही । इस युग मे कोहिनूर स्टार और मिनर्वा जैसे पुराने रगालय किमी-न-किसी प्रकार अपने अस्तित्व का परिचय देते रहे, तो दूसरी ओर मनमोहन थियेटर, आर्ट थियेटर, नाट्य मंदिर, नव-नाट्य मंदिर, थोरगम्, नाट्य-निकेतन, कलकत्ता थियेटर लि०, रगमहल आदि कई नये रमालयो अथवा नाट्य-संस्थाओं की स्थापना हुई। इनमें से नाट्य मंदिर आदि नई संस्थाओं की स्थापना के पीछे शिशिर कुमार भादुडी के गत्यात्मक व्यक्तित्व का हाथ रहा है ।
मराठी में यह युग रगभूमि का उत्कर्ष काल रहा है, क्योंकि सन् १९१४ मे प्रथम महायुद्ध के प्रारंभ हो जाने के कारण प्राय, सभी मराठी नाटक मठलियो ने भरपूर धनोपार्जन किया, और युद्धोत्तर-काल मे रगभूमि का अपकर्ष आसन्न दिखाई पडने लगने पर मामा वरेरकर नवीन शैली के अपने नाटको को लेकर सामने आये और एक नये युग का सूत्रपात किया । यद्यपि मामा का कृतित्व उनके महत्त्वाकांक्षी दावो और नाटको की सामयिकता एव प्रचारात्मकता के कारण विवाद का विषय बन गया है, किन्तु इसमे कोई सन्देह नहीं कि उन्होंने नाटकों के | प्रमाद युग । दो सौ तिरासी नये - पुराने कपडे एकत्र कर भूकप- पीड़ितों के लिये भेजे । सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस मे देवदत्त मिश्र परिषद् के सभापति चुने गये, किन्तु कुछ रंगारंग कार्यक्रमों के अतिरिक्त प्रसाद युग के अन्त तक कुछ न हो सका । परिषद् अपने नाटक सामान्यतः मिनर्वा, अफेड तथा नाट्यमंदिर के रंगालयों में प्रदर्शित किया करती थी और रग-सज्जा, रंगदीपन आदि के सभी तत्कालीन साधनों का उपयोग किया करती थो । सभी वस्त्राभरण, रंगोपकरण बीशून्य दास एण्ड कंशून्य मे किराये पर मंगाए जाते थे। परिषद् ने पारसी-हिन्दी रंगमच के नाटकों और नाट्य-पद्धति से विद्रोह कर एक साफ-सुथरा, परिष्कृत, कलापूर्ण एवं राष्ट्रीय हिन्दी रगमच खड़ा करने का प्रयास अवश्य किया, किन्तु अपनी परिसीमाओं के भीतर याबद्ध होने के कारण 'महात्मा ईसा' जैसे गंभीर नाटक को छोड़कर उसने इस युग की प्रसाद-धारा के अन्य नाटकों को नहीं अपनाया । अभिनय की कृत्रिमता दूर करने, मच पर पारसी रगमच को अनावश्यक तडव - भडक से यथानभव दूर रहकर सादगी और वस्तुवादिता लाने और रंगमंच को राष्ट्रोत्थान के पुरस्करणार्थ प्रस्तुत करने मे परिषद् का योगदान अविस्मरणीय है। कलकत्ते की बजरंग परिषद् से पृथक् होकर कुछ कलाकारों ने सन् एक हज़ार नौ सौ उन्नीस-बीस मे श्रीकृष्ण परिषद् को स्थापना की । इस संस्था ने कुछ नाटक नाटककार कन्हैयाल 'कातिल' के निर्देशन में प्रस्तुत किये और हिन्दी नाट्य परिषद् की भाँति अपनो आय का बहुत बडा अंश राष्ट्र हित में लगाया । यह परिषद् अब विशेष सत्रिय नहीं है । उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि हिन्दी के इस अव्यावसायिक रंगमच पर, एकाध अपवादो को छोड़ कर, रंग-सज्जा के लिये अधिकाशत रंगे हुए परदो, फ्लाटो आदि से ही काम चला लिया जाता था और पारसी मच के अन्य वाह्याडंबरी का प्रदर्शन उनकी आर्थिक क्षमता के बाहर की बात हुआ करती थी । इस रगमच का लक्ष्य रंगसज्जा, वेश-भूषा आदि की तडक भडक दिखलाना न होकर प्रायः नये प्रयोग करना, अभिनय को कृत्रिमता को दूर करना और रंग-शिल्प को वस्तुवादी, सरल तथा अल्प-व्यय-साध्य बनाना या । फिर भी कानपुर को कैलाश क्लब जैसी कुछ नाट्य-संस्थाएँ इस युग मे भी नये प्रयोगों से दूर बनी रही । कुल मिला कर प्रसाद युग का रंगमंच भारतेन्द्र युग और बेताब युग की रूढियो और परम्पराओ से आगे न बढ सका । यह मंच प्रसाद के विशिष्ट शैली के नाटको की आवश्यकताओं को पूर्ति के लिये अपर्याप्त एवं अक्षम था। फिर भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि व्यावसायिक एवं अव्यावसायिक, दोनों प्रकार के मचो ने प्रसाद की नाट्य-चेतना को बहुत दूर तक प्रभावित किया और वे अनेक प्रयोगों के बाद ही अपनी नाट्य-पद्धति और रंग-शिल्प को एक निश्चित रूप दे सके। हिन्दीतर भारतीय रंगमंचः स्थिति तथा समकालीन युग प्रसाद युग में हिन्दी की ही भांति बेंगला और गुजराती में भी कुछ सीमा तक प्रयोगनिष्ठ नाटक रगमंच से दूर जा पडा, किन्तु फिर भी सभी आलोच्य हिन्दीतर भारतीय भाषाओं में नाटकों और उनके लेखकों का संबंध किसी-न-किसी रूप मे व्यावसायिक नाटक मडलियों के साथ बना रहा । मराठी को छोड, जिसमे नाटक व्यावसायिक रगमंच के साथ एकप्राण बना रहा, शेष सभी भाषाओं में उनके युगद्रष्टा जिन नाटककारी ने इस युग का नेतृत्व किया, उनकी कृतियों से अव्यावसायिक रगमंच को प्रेरणा मिली, क्योकि व्यावसायिक मच को परपरागत आवश्यकताओं की पूर्ति न कर पाने, रगमच पर नई परम्पराओं एवं कला-विधान को स्थापना करने, भाषा के संस्कार एवं अलकृति के कारण उनके प्रयोगों के लिये एक ऐसे मंच की आवश्यकता प्रतीत हुई, जो व्यवसाय-दृष्टि को दूर रख कर कुछ दूर तक चल सके। यह प्रयोगनिष्ठ अव्यावसायिक मंच हिन्दी, बंगला और गुजराती में व्यावसायिक मन के साथ-साथ एक-दूसरे का पूरक और कही एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी बन कर चलता रहा। सन् एक हज़ार नौ सौ बारह ईशून्य मे नाट्याचार्य गिरीशचन्द्र घोष और मिनर्वा के परिचालक महेन्द्र मित्र के निधन और दो सौ चौरासी । भारतीय रगमच का विवेचनात्मक इतिहास सन् एक हज़ार नौ सौ सोलह मे स्टार के परिचालक, नट एव नाटककार अमरेन्द्रनाथ दत्त के महाप्रयाण से बंगला के दो प्रमुख रगालयो-मिनर्वा और स्टार की गति कुछ काल के लिये कुठिन हो गई। कुछ कलाकारो के अवकाश-ग्रहण या वय वृद्धि के साथ उनकी कला के अस्तगत होने के कारण बेंगला रंगमच पर कुशल कलाकारों का दैन्य उपस्थित हो गया। गिरीश बाबू के सुपुत्र सुरेन्द्रनाथ घोष इस दैन्य को दूर करने के लिये अपनी अद्भुत क्षमता एव कला-दाक्षिण्य का परिचय देते रहे, तभी सन् एक हज़ार नौ सौ इक्कीस मे कलकत्ता के विश्वविद्यालय संस्थान में चाणक्य की भूमिका कर प्रसिद्धि पाने वाले प्राध्यापक शिशिरकुमार भादुडी ने अध्यापको छोड़कर व्यावसायिक मच जगत् मे प्रवेश किया और अपने अध्यवसाय और नाट्य-कौगल के बल पर बंगला रगमच को एक नवीन दिशा दी। उन्होंने सर्वप्रथम बँगला मच पर पाश्चात्य भावाभिनय-पद्धति की अवतारणा की, किन्तु वे गिरीश की भाँति सर्वगतः तप कर अपने युग का नेतृत्व न कर सके। यह नये प्रयोगो का युग था, जिसकी सूचना कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ ठाकुर अपने नवीन शैली के नाटको- 'शारदोत्सव' , 'राजा' और 'डाकघर' द्वारा दे चुके थे। प्राकृतिक अथवा मानवीय प्रतीको को लेकर जिन लौकिक एवं पारलौकिक तत्त्वो की अवतारणा की गई है, वे हैं सत्य और आनंद की उपलब्धि, आत्मा का अज्ञान के घोर सम को भेद कर परमात्मा से साविध्य अथवा उसमे विलय रवीन्द्र के नाटकों में निहित प्रसगनिष्ठ तत्त्व-निरूपण सामान्य । सामाजिक के लिये ग्राह्य नहीं है, अत उनके नाटकों के लिये सर्वसाधारण के मच की हो नही, असाधारण तत्त्वज्ञान सम्पन्न सामाजिकों के मच की आवश्यकता थी, जिसकी स्थापना के लिये रवीन्द्र को स्वय प्रयत्नशील होना पडा । शान्तिनिकेतन की बालक-बालिकाओं को लेकर रवीन्द्र ने अपने इन नवीन नाटको के सफल प्रयोग कर इस नवीन मच की स्थापना को। बाद में उनके कुछ लोकप्रिय नाटक अथवा नाट्यरूपान्तर व्यावसायिक रंगमच द्वारा भी किये गये । आर्ट थियेटर द्वारा रवीन्द्र के 'चिरकुमार सभा, नाट्य मंदिर द्वारा उनके 'विसर्जन', प्रस्तुत 'शेषरक्षा' और 'तपती', नवनाट्य मंदिर द्वारा 'योगायोग' अभिनीत किये गये । रवीन्द्र न केवल नाटककार थे, वरन् वे एक कुशल नट एव प्रयोक्ता भी थे । शातिनिकेतन द्वारा अभिनीत नाटको मे वे स्वयं भी भूमिकाएं करते थे और नाट्य-शिक्षा का कार्य भी करते थे। रवीन्द्र ने नाट्याचार्य शिशिर के साथ भी अनेक भूमिकाएँ की थी। शिशिर केवल नट, नाट्य-शिक्षक एवं परिचालक थे, जबकि रवीन्द्र इसके अतिरिक्त नाटककार एव कवि भी थे, अत. प्रसाद के समकालीन होने के कारण बंगला मे इस युग को रवीन्द्र युग' के नाम से अभिषिक्त करना समीचीन होगा । रवीन्द्र युग अनिवार्यत विशिष्ट अव्यावसायिक मच का युग होते हुए भी व्यावसायिक दृष्टि से गिरीश युग मे किसी प्रकार कम महत्त्वपूर्ण नही । इस युग मे कोहिनूर स्टार और मिनर्वा जैसे पुराने रगालय किमी-न-किसी प्रकार अपने अस्तित्व का परिचय देते रहे, तो दूसरी ओर मनमोहन थियेटर, आर्ट थियेटर, नाट्य मंदिर, नव-नाट्य मंदिर, थोरगम्, नाट्य-निकेतन, कलकत्ता थियेटर लिशून्य, रगमहल आदि कई नये रमालयो अथवा नाट्य-संस्थाओं की स्थापना हुई। इनमें से नाट्य मंदिर आदि नई संस्थाओं की स्थापना के पीछे शिशिर कुमार भादुडी के गत्यात्मक व्यक्तित्व का हाथ रहा है । मराठी में यह युग रगभूमि का उत्कर्ष काल रहा है, क्योंकि सन् एक हज़ार नौ सौ चौदह मे प्रथम महायुद्ध के प्रारंभ हो जाने के कारण प्राय, सभी मराठी नाटक मठलियो ने भरपूर धनोपार्जन किया, और युद्धोत्तर-काल मे रगभूमि का अपकर्ष आसन्न दिखाई पडने लगने पर मामा वरेरकर नवीन शैली के अपने नाटको को लेकर सामने आये और एक नये युग का सूत्रपात किया । यद्यपि मामा का कृतित्व उनके महत्त्वाकांक्षी दावो और नाटको की सामयिकता एव प्रचारात्मकता के कारण विवाद का विषय बन गया है, किन्तु इसमे कोई सन्देह नहीं कि उन्होंने नाटकों के |
अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के बोर्ड ने पूरी तरह से सब्सक्राइब किए गए 20,000 करोड़ के फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (FPO) को बुधवार रात को वापस ले लिया है। कंपनी ने इसके साथ आगे न बढ़ने का फैसला किया है। ऐसे में अब तक FPO को सब्सक्राइब करने वाले लोगों को उनका पूरा पैसा वापस किया जाएगा। कंपनी ने यह निर्णय शेयरों में आज आई 30 प्रतिशत की गिरावट और निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए किया है।
आखिर क्या होता है FPO?
अगर कोई पहले से शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी फंड जुटाना चाहती है तो वो निवेशकों के लिए नए शेयर ऑफर करती है, उस स्थिति में FPO का इस्तेमाल होता है। यह शेयर बाजार में पहले से मौजूद कंपनी के शेयरों से अलग होते हैं। ये शेयर ज्यादातर प्रोमोटर्स जारी करते हैं और अपने हिस्से के शेयरों को बाजार में उतारते हैं। इन सबसे पहले बाजार में शेयर उतारने के लिए कंपनी को IPO लाना होता है।
कंपनी ने क्या दिया है बयान?
AEL की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी के निदेशक मंडल ने आज हुई बैठक में अपने अंशधारकों के हित में 20,000 करोड़ रुपये तक के इक्विटी शेयरों का FPO आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा कि अभूतपूर्व स्थिति और मौजूदा बाजार की अस्थिरता को देखते हुए कंपनी का लक्ष्य FPO आय वापस करके और पूर्ण किए गए लेनदेन को वापस लेकर निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
AEL के चेयरमैन ने क्या दिया बयान?
AEL के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा, "इस अवसर पर हमारे FPO के लिए आपके समर्थन और प्रतिबद्धता के लिए बोर्ड सभी निवेशकों को धन्यवाद देता है। FPO के लिए सब्सक्रिप्शन कल सफलतापूर्वक बंद हो गया था। पिछले सप्ताह के दौरान स्टॉक में अस्थिरता के बावजूद कंपनी के व्यवसाय और इसके प्रबंधन में आपका विश्वास बेहद आश्वस्त और विनम्र रहा है। ऐसे में कंपनी अपने सभी निवेशकों का दिल से आभार जताती है। "
अडाणी ने कहा, "आज बाजार अभूतपूर्व रहा है और दिन में हमारे शेयरों की कीमत में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इन असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी के बोर्ड को लगा कि इस मामले पर फिलहाल आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा। " उन्होंने कहा, "निवेशकों का हित सर्वोपरि है और इसलिए उन्हें किसी भी संभावित वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए बोर्ड ने FPO के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है। "
| अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के बोर्ड ने पूरी तरह से सब्सक्राइब किए गए बीस,शून्य करोड़ के फॉलोऑन पब्लिक ऑफर को बुधवार रात को वापस ले लिया है। कंपनी ने इसके साथ आगे न बढ़ने का फैसला किया है। ऐसे में अब तक FPO को सब्सक्राइब करने वाले लोगों को उनका पूरा पैसा वापस किया जाएगा। कंपनी ने यह निर्णय शेयरों में आज आई तीस प्रतिशत की गिरावट और निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए किया है। आखिर क्या होता है FPO? अगर कोई पहले से शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी फंड जुटाना चाहती है तो वो निवेशकों के लिए नए शेयर ऑफर करती है, उस स्थिति में FPO का इस्तेमाल होता है। यह शेयर बाजार में पहले से मौजूद कंपनी के शेयरों से अलग होते हैं। ये शेयर ज्यादातर प्रोमोटर्स जारी करते हैं और अपने हिस्से के शेयरों को बाजार में उतारते हैं। इन सबसे पहले बाजार में शेयर उतारने के लिए कंपनी को IPO लाना होता है। कंपनी ने क्या दिया है बयान? AEL की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी के निदेशक मंडल ने आज हुई बैठक में अपने अंशधारकों के हित में बीस,शून्य करोड़ रुपये तक के इक्विटी शेयरों का FPO आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा कि अभूतपूर्व स्थिति और मौजूदा बाजार की अस्थिरता को देखते हुए कंपनी का लक्ष्य FPO आय वापस करके और पूर्ण किए गए लेनदेन को वापस लेकर निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। AEL के चेयरमैन ने क्या दिया बयान? AEL के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा, "इस अवसर पर हमारे FPO के लिए आपके समर्थन और प्रतिबद्धता के लिए बोर्ड सभी निवेशकों को धन्यवाद देता है। FPO के लिए सब्सक्रिप्शन कल सफलतापूर्वक बंद हो गया था। पिछले सप्ताह के दौरान स्टॉक में अस्थिरता के बावजूद कंपनी के व्यवसाय और इसके प्रबंधन में आपका विश्वास बेहद आश्वस्त और विनम्र रहा है। ऐसे में कंपनी अपने सभी निवेशकों का दिल से आभार जताती है। " अडाणी ने कहा, "आज बाजार अभूतपूर्व रहा है और दिन में हमारे शेयरों की कीमत में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इन असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी के बोर्ड को लगा कि इस मामले पर फिलहाल आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा। " उन्होंने कहा, "निवेशकों का हित सर्वोपरि है और इसलिए उन्हें किसी भी संभावित वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए बोर्ड ने FPO के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है। " |
आईपीएल का आज चौथा मैच खेला जाएगा। IPL 2021 के अखाड़े में आज जब पूर्व चैंपियन राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) और पंजाब किंग्स (Punjab Kings) आमने सामने होंगे। दोनों टीम जीत के साथ टूर्नामेंट में आगे जाने चाहेगी। ऐसे में यह मुकाबला जोरदार होने की उम्मीद है। दोनों टीम के कप्तान खास है और दोनों विकेटकीपर हैं। पंजाब के कप्तान केएल राहुल (KL Rahul) के लिए तो कप्तानी कोई नई बात नहीं है। पर, राजस्थान के युवा कप्तान संजू सैमसन ( Sanju Samson) के लिए ये अपने तरीके का पहला मौका होगा।
राजस्थान हो या पंजाब, दोनों में मैच का नवाब बनने की पूरी ताकत है। दोनों टीमों में पावर हिटर्स की भरमार है। और, सबसे बड़ी बात मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर है, जहां रन बनते नहीं, बरसते हैं। मतलब आज रनों की सुनामी दिख सकती है। राजस्थान के पास बेन स्टोक्स, जोस बटलर, खुद कप्तान संजू सैमसन और लिविंगस्टोन जैसे बल्ला घुमाने वाले बेजोड़ नाम हैं। तो IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी क्रिस मॉरिस भी हैं, जो गेंद और बल्ले दोनों से कमाल करने का दम रखते हैं। राजस्थान को गेंदबाजी के मोर्चे पर जोफ्रा आर्चर की कमी खल सकती है, जो पहले 4 मैच से बाहर हैं। रही बात पंजाब की तो वो भी कुछ कम नहीं है। कप्तान केएल राहुल तो हैं ही। इनके अलावा क्रिस गेल, मयंक अग्रवाल, मोजेज हेनरिक्स, निकोलस पूरन और भई अब तो प्रीति जिंटा के पंजाब में शाहरुख खान भी हैं।
आमने सामने की फाइट में दोनों टीमों के आंकड़े देखें तो आज का मैच जरा टाइट दिखता है। ऐसा उनके कप्तानों की बदौलत है। दोनों टीमों के मौजूदा कप्तान एक दूसरे के खिलाफ मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है। और, न सिर्फ रन बनाने में बल्कि कैच पकड़ने में भी वे दोनों अपनी अपनी टीमों में नंबर वन है। यानी, आज लड़ेंगी दो टीमें, रन बनाते और विकेट चटकाते दिखेंगे दो टीमों के बल्लेबाज और गेंदबाज, पर आखिर में फैसला करते दिखेंगे दो विकेटकीपर कप्तान।
| आईपीएल का आज चौथा मैच खेला जाएगा। IPL दो हज़ार इक्कीस के अखाड़े में आज जब पूर्व चैंपियन राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स आमने सामने होंगे। दोनों टीम जीत के साथ टूर्नामेंट में आगे जाने चाहेगी। ऐसे में यह मुकाबला जोरदार होने की उम्मीद है। दोनों टीम के कप्तान खास है और दोनों विकेटकीपर हैं। पंजाब के कप्तान केएल राहुल के लिए तो कप्तानी कोई नई बात नहीं है। पर, राजस्थान के युवा कप्तान संजू सैमसन के लिए ये अपने तरीके का पहला मौका होगा। राजस्थान हो या पंजाब, दोनों में मैच का नवाब बनने की पूरी ताकत है। दोनों टीमों में पावर हिटर्स की भरमार है। और, सबसे बड़ी बात मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर है, जहां रन बनते नहीं, बरसते हैं। मतलब आज रनों की सुनामी दिख सकती है। राजस्थान के पास बेन स्टोक्स, जोस बटलर, खुद कप्तान संजू सैमसन और लिविंगस्टोन जैसे बल्ला घुमाने वाले बेजोड़ नाम हैं। तो IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी क्रिस मॉरिस भी हैं, जो गेंद और बल्ले दोनों से कमाल करने का दम रखते हैं। राजस्थान को गेंदबाजी के मोर्चे पर जोफ्रा आर्चर की कमी खल सकती है, जो पहले चार मैच से बाहर हैं। रही बात पंजाब की तो वो भी कुछ कम नहीं है। कप्तान केएल राहुल तो हैं ही। इनके अलावा क्रिस गेल, मयंक अग्रवाल, मोजेज हेनरिक्स, निकोलस पूरन और भई अब तो प्रीति जिंटा के पंजाब में शाहरुख खान भी हैं। आमने सामने की फाइट में दोनों टीमों के आंकड़े देखें तो आज का मैच जरा टाइट दिखता है। ऐसा उनके कप्तानों की बदौलत है। दोनों टीमों के मौजूदा कप्तान एक दूसरे के खिलाफ मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है। और, न सिर्फ रन बनाने में बल्कि कैच पकड़ने में भी वे दोनों अपनी अपनी टीमों में नंबर वन है। यानी, आज लड़ेंगी दो टीमें, रन बनाते और विकेट चटकाते दिखेंगे दो टीमों के बल्लेबाज और गेंदबाज, पर आखिर में फैसला करते दिखेंगे दो विकेटकीपर कप्तान। |
बासेटेरे। कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) के चौथे संस्करण में गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने पहले क्वालिफाइंग फाइनल में जमैका तलावास को चार विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना लिया।
जमैका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट पर 146 रन बनाए। कप्तान क्रिस गेल ने 36 गेंदों पर सर्वाधिक 33 रन बनाए। जवाब में गुयाना ने 19. 4 ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य पा लिया। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज क्रिस लिन ने 47 गेंदों पर एक चौके व तीन छक्कों की मदद से 49 रन ठोके।
इससे पहले गुयाना के कप्तान रेयाड एमरित ने टॉस जीतकर जमैका को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। जमैका ने निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट पर 146 रन बनाए। विस्फोटक बल्लेबाज कप्तान क्रिस गेल ने 36 गेंदों पर सर्वाधिक 33 रन बनाए।
उन्होंने पहले विकेट के लिए चाडविक वाल्टन (16) के साथ 33 रन की साझेदारी की। गेल के बाद रोवमैन पॉवेल (23) दूसरे टॉप स्कोरर रहे। श्रीलंकाई विकेटकीपर कुमार संगकारा ने 20 गेंदों पर 20 रन की पारी खेली।
आंद्रे रसैल ने 11 और टिमरॉय एलन ने 10 रन का योगदान दिया। शाकिब अल हसन दो रन ही बना सके। एमरित ने तीन, पाकिस्तानी तेज गेंदबाज सोहैल तनवीर ने दो और एडम जम्पा, वीरासैमी परमॉल व क्रिस बार्नवैल ने 1-1 विकेट लिया।
जवाब में गुयाना ने 19. 4 ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य पा लिया। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज क्रिस लिन ने 47 गेंदों पर एक चौके व तीन छक्कों की मदद से 49 रन ठोके।
तनवीर ने आखिर में 13 गेंदों पर दो छक्कों की मदद से तेज तर्रार 21 रन बनाकर जीत में अहम योगदान दिया। तनवीर को मैन ऑफ द मैच चुना गया। ड्वेन स्मिथ ने 16, निक मैडिसन ने 14, जेसन मोहम्मद ने 13 और एमरित ने नाबाद 11 रन का योगदान दिया।
जमैका की ओर से केसरिक विलियम्स ने चार ओवर में 37 रन देकर चार विकेट झटके। रसैल और गैरी मथुरिन को 1-1 विकेट मिला। इमाद वसीम, शाकिब व पॉवेल के हाथ एक भी सफलता नहीं लगी।
हालांकि हार के बावजूद जमैका को फाइनल में पहुंचने के लिए क्वालिफायर 2 में खेलने का मौका मिलेगा, जहां उसकी भिड़ंत सेंट लूसिया जोकस व ट्रिनिडाड एंड टोबेगो रेड स्टील के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगी।
| बासेटेरे। कैरेबियन प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण में गुयाना अमेजन वॉरियर्स ने पहले क्वालिफाइंग फाइनल में जमैका तलावास को चार विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना लिया। जमैका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ छियालीस रन बनाए। कप्तान क्रिस गेल ने छत्तीस गेंदों पर सर्वाधिक तैंतीस रन बनाए। जवाब में गुयाना ने उन्नीस. चार ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य पा लिया। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज क्रिस लिन ने सैंतालीस गेंदों पर एक चौके व तीन छक्कों की मदद से उनचास रन ठोके। इससे पहले गुयाना के कप्तान रेयाड एमरित ने टॉस जीतकर जमैका को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। जमैका ने निर्धारित बीस ओवर में आठ विकेट पर एक सौ छियालीस रन बनाए। विस्फोटक बल्लेबाज कप्तान क्रिस गेल ने छत्तीस गेंदों पर सर्वाधिक तैंतीस रन बनाए। उन्होंने पहले विकेट के लिए चाडविक वाल्टन के साथ तैंतीस रन की साझेदारी की। गेल के बाद रोवमैन पॉवेल दूसरे टॉप स्कोरर रहे। श्रीलंकाई विकेटकीपर कुमार संगकारा ने बीस गेंदों पर बीस रन की पारी खेली। आंद्रे रसैल ने ग्यारह और टिमरॉय एलन ने दस रन का योगदान दिया। शाकिब अल हसन दो रन ही बना सके। एमरित ने तीन, पाकिस्तानी तेज गेंदबाज सोहैल तनवीर ने दो और एडम जम्पा, वीरासैमी परमॉल व क्रिस बार्नवैल ने एक-एक विकेट लिया। जवाब में गुयाना ने उन्नीस. चार ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य पा लिया। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज क्रिस लिन ने सैंतालीस गेंदों पर एक चौके व तीन छक्कों की मदद से उनचास रन ठोके। तनवीर ने आखिर में तेरह गेंदों पर दो छक्कों की मदद से तेज तर्रार इक्कीस रन बनाकर जीत में अहम योगदान दिया। तनवीर को मैन ऑफ द मैच चुना गया। ड्वेन स्मिथ ने सोलह, निक मैडिसन ने चौदह, जेसन मोहम्मद ने तेरह और एमरित ने नाबाद ग्यारह रन का योगदान दिया। जमैका की ओर से केसरिक विलियम्स ने चार ओवर में सैंतीस रन देकर चार विकेट झटके। रसैल और गैरी मथुरिन को एक-एक विकेट मिला। इमाद वसीम, शाकिब व पॉवेल के हाथ एक भी सफलता नहीं लगी। हालांकि हार के बावजूद जमैका को फाइनल में पहुंचने के लिए क्वालिफायर दो में खेलने का मौका मिलेगा, जहां उसकी भिड़ंत सेंट लूसिया जोकस व ट्रिनिडाड एंड टोबेगो रेड स्टील के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगी। |
अनिल कपूर और आदित्य रॉय कपूर वेब सीरीज द नाइट मैनेजर के लिए एक साथ आ रहे हैं। इससे पहले दोनों मलंग में साथ काम कर चुके हैं। फर्स्ट-लुक पोस्टर शेयर करने के बाद, आदित्य ने अपडेट के साथ नया मोशन पोस्टर शेयर किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वेब सीरीज़ का ट्रेलर 20 जनवरी को रिलीज़ किया जाएगा।
निर्माताओं और आदित्य ने इंस्टाग्राम पर द नाइट मैनेजर का मोशन पोस्टर वीडियो जारी किया। उन्होंने पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन दिया, 'अलग नाम, एक मकसद'. नाइट मैनेजर कभी ड्यूटी से बाहर नहीं होता है। ट्रेलर 20 जनवरी को रिलीज होगा। पोस्टर में आदित्य रॉय कपूर ब्लैक सूट में डैशिंग नजर आ रहे हैं और किसी चीज को बड़ी ही शिद्दत से देख रहे हैं। उन्हें यह कहते हुए सुना जाता है कि कभी-कभी अंधेरे से भागते हुए अंधेरा आपको ढूंढ लेता है।
पोस्टर को प्रशंसकों का भरपूर प्यार मिला, प्रशंसकों ने पोस्टर पर कमेंट्स की झड़ी लगा दी। एक ने लिखा, आपका कातिलाना लुक वगैरह। एक अन्य ने लिखा, अब बेहतर महसूस कर रहा हूं। इंतजार नहीं कर सकता," दूसरे ने लाल दिल वाले इमोजी के साथ लिखा। कई अन्य लोगों ने फायर इमोजी और हार्ट इमोजी शेयर किए। इससे पहले अभिनेता आदित्य रॉय कपूर ने अपना मोशन पोस्टर शेयर किया था।
मोशन पोस्टर को इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए आदित्य ने लिखा, दुनिया के सबसे खतरनाक आर्म्स डीलर को रोकने का एक ही हथियार है- होटल नाइट मैनेजर। द नाइट मैनेजर डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज होगी। वेब श्रृंखला हिट अंग्रेजी जासूसी नाटक द नाइट मैनेजर पर आधारित है, जो टॉम हिडलेस्टन और ह्यूग लॉरी अभिनीत जॉन ले कैरोल उपन्यास का एक रूपांतरण है। नाइट मैनेजर एक स्पाई थ्रिलर है जहां एक गुप्त एजेंट और एक अंडरकवर आर्म्स डीलर बिल्ली और चूहे के खेल में संलग्न हैं। इसके अलावा आदित्य रॉय कपूर के पास थाधम का रीमेक भी है, जबकि अनिल कपूर ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म फाइटर में नजर आएंगे।
| अनिल कपूर और आदित्य रॉय कपूर वेब सीरीज द नाइट मैनेजर के लिए एक साथ आ रहे हैं। इससे पहले दोनों मलंग में साथ काम कर चुके हैं। फर्स्ट-लुक पोस्टर शेयर करने के बाद, आदित्य ने अपडेट के साथ नया मोशन पोस्टर शेयर किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वेब सीरीज़ का ट्रेलर बीस जनवरी को रिलीज़ किया जाएगा। निर्माताओं और आदित्य ने इंस्टाग्राम पर द नाइट मैनेजर का मोशन पोस्टर वीडियो जारी किया। उन्होंने पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन दिया, 'अलग नाम, एक मकसद'. नाइट मैनेजर कभी ड्यूटी से बाहर नहीं होता है। ट्रेलर बीस जनवरी को रिलीज होगा। पोस्टर में आदित्य रॉय कपूर ब्लैक सूट में डैशिंग नजर आ रहे हैं और किसी चीज को बड़ी ही शिद्दत से देख रहे हैं। उन्हें यह कहते हुए सुना जाता है कि कभी-कभी अंधेरे से भागते हुए अंधेरा आपको ढूंढ लेता है। पोस्टर को प्रशंसकों का भरपूर प्यार मिला, प्रशंसकों ने पोस्टर पर कमेंट्स की झड़ी लगा दी। एक ने लिखा, आपका कातिलाना लुक वगैरह। एक अन्य ने लिखा, अब बेहतर महसूस कर रहा हूं। इंतजार नहीं कर सकता," दूसरे ने लाल दिल वाले इमोजी के साथ लिखा। कई अन्य लोगों ने फायर इमोजी और हार्ट इमोजी शेयर किए। इससे पहले अभिनेता आदित्य रॉय कपूर ने अपना मोशन पोस्टर शेयर किया था। मोशन पोस्टर को इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए आदित्य ने लिखा, दुनिया के सबसे खतरनाक आर्म्स डीलर को रोकने का एक ही हथियार है- होटल नाइट मैनेजर। द नाइट मैनेजर डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज होगी। वेब श्रृंखला हिट अंग्रेजी जासूसी नाटक द नाइट मैनेजर पर आधारित है, जो टॉम हिडलेस्टन और ह्यूग लॉरी अभिनीत जॉन ले कैरोल उपन्यास का एक रूपांतरण है। नाइट मैनेजर एक स्पाई थ्रिलर है जहां एक गुप्त एजेंट और एक अंडरकवर आर्म्स डीलर बिल्ली और चूहे के खेल में संलग्न हैं। इसके अलावा आदित्य रॉय कपूर के पास थाधम का रीमेक भी है, जबकि अनिल कपूर ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म फाइटर में नजर आएंगे। |
तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार अजीत अभिनीत फ़िल्म नेर कोंडा पारवाई का पहला पोस्टर जारी किया है जो बेहद दिलचस्प और एक बेहतरीन फ़िल्म होने की संभावनाओं से परिपूर्ण नज़र आ रहा है.
नेर कोंडा पारवाई सुपरहिट हिंदी फ़िल्म पिंक की रीमेक है जिसे जाने-माने निर्माता बोनी कपूर प्रोड्यूस करेंगे तो वहीं इस फ़िल्म का निर्देशन करेंगे एच. विनोद. इस फ़िल्म में श्रद्धा श्रीनाथ पिंक में तापसी पन्नू द्वारा निभाए गए किरदार को निभाएंगी तो वहीं अभिरामी वेंकटचलम तमिल रीमेक में कीर्ति कुल्हारी के रोल में दिखेंगी. पिंक की तरह ही आंद्रिया इस तमिल रीमेक में भी अपना ही किरदार निभाएंगी.
उल्लेखनीय है विद्या इस फ़िल्म में अजीत के अपोज़िट एक कैमियो करती दिखेंगी. ग़ौरतलब है कि इस फ़िल्म के ज़रिए बोनी कपूर तमिल सिनेमा के निर्माण की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं.
ये फ़िल्म इस मायने में भी बेहद ख़ास है क्योंकि दिवगंत श्रीदेवी की ख़्वाहिश थी कि कभी न कभी अजीत उनके पति बोनी कपूर के साथ काम करें.
श्रीदेवी ने इंग्लिश विंग्लिश के तमिल वर्ज़न की शूटिंग के दौरान अपनी ख़्वाहिश जताते हुए कहा था कि वो चाहती हैं कि अजीत बोनी कपूर द्वारा बनायी जानेवाली किसी फ़िल्म में काम करें. ग़ौरतलब है कि इंग्लिश विंग्लिश के तमिल वर्ज़न में अजीत स्पेशल एपीरियंस में नज़र आए थे.
नेर कोंडा पारवाई का निर्माण बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी के बैनर तले किया जा रहा है.
| तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार अजीत अभिनीत फ़िल्म नेर कोंडा पारवाई का पहला पोस्टर जारी किया है जो बेहद दिलचस्प और एक बेहतरीन फ़िल्म होने की संभावनाओं से परिपूर्ण नज़र आ रहा है. नेर कोंडा पारवाई सुपरहिट हिंदी फ़िल्म पिंक की रीमेक है जिसे जाने-माने निर्माता बोनी कपूर प्रोड्यूस करेंगे तो वहीं इस फ़िल्म का निर्देशन करेंगे एच. विनोद. इस फ़िल्म में श्रद्धा श्रीनाथ पिंक में तापसी पन्नू द्वारा निभाए गए किरदार को निभाएंगी तो वहीं अभिरामी वेंकटचलम तमिल रीमेक में कीर्ति कुल्हारी के रोल में दिखेंगी. पिंक की तरह ही आंद्रिया इस तमिल रीमेक में भी अपना ही किरदार निभाएंगी. उल्लेखनीय है विद्या इस फ़िल्म में अजीत के अपोज़िट एक कैमियो करती दिखेंगी. ग़ौरतलब है कि इस फ़िल्म के ज़रिए बोनी कपूर तमिल सिनेमा के निर्माण की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं. ये फ़िल्म इस मायने में भी बेहद ख़ास है क्योंकि दिवगंत श्रीदेवी की ख़्वाहिश थी कि कभी न कभी अजीत उनके पति बोनी कपूर के साथ काम करें. श्रीदेवी ने इंग्लिश विंग्लिश के तमिल वर्ज़न की शूटिंग के दौरान अपनी ख़्वाहिश जताते हुए कहा था कि वो चाहती हैं कि अजीत बोनी कपूर द्वारा बनायी जानेवाली किसी फ़िल्म में काम करें. ग़ौरतलब है कि इंग्लिश विंग्लिश के तमिल वर्ज़न में अजीत स्पेशल एपीरियंस में नज़र आए थे. नेर कोंडा पारवाई का निर्माण बेव्यू प्रोजेक्ट्स एलएलपी के बैनर तले किया जा रहा है. |
कोरोनावायरस के कारण ईपीएल मार्च के मध्य में ही रोक दी गई थी। 100 दिन के बाद वह 17 जून को वापसी करेगी। पहले मैच में एस्टन विला का सामना शेफील्ड यूनाइटेड से होगा और इसी दिन शाम को मैनचेस्टर सिटी का सामना आर्सेनल से होगा।
यूईएफए द्वारा लगाए गए दो साल के बैन का मैनचस्टर सिटी पर किसी तरह का असर नहीं दिखा और टीम ने इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) के मैच में वेस्ट हैम युनाइटेड को 2-0 से हरा दिया।
| कोरोनावायरस के कारण ईपीएल मार्च के मध्य में ही रोक दी गई थी। एक सौ दिन के बाद वह सत्रह जून को वापसी करेगी। पहले मैच में एस्टन विला का सामना शेफील्ड यूनाइटेड से होगा और इसी दिन शाम को मैनचेस्टर सिटी का सामना आर्सेनल से होगा। यूईएफए द्वारा लगाए गए दो साल के बैन का मैनचस्टर सिटी पर किसी तरह का असर नहीं दिखा और टीम ने इंग्लिश प्रीमियर लीग के मैच में वेस्ट हैम युनाइटेड को दो-शून्य से हरा दिया। |
सोमवार की रात को बीसीसीआई ने एशिया कप 2022 (Asia Cup 2022) के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड की घोषणा कर दी। इस टूर्नामेंट के जरिए विराट कोहली और केएल राहुल वापसी कर रहे हैं। टीम की कमान रोहित शर्मा के हाथों में रहने वाली है। भारत अपना पहला मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ 28 अगस्त को खेलेगा। टीम इंडिया के स्क्वाड में कई स्टार खिलाड़ियों को जगह दी गई है लेकिन चयनकर्ताओं ने एक ऐसे खिलाड़ी को 15 सदस्यीय टीम में जगह नहीं दी है जिसने इस साल भारत के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए हैं।
चयनकर्ताओं ने जिस खिलाड़ी के साथ नाइंसाफ़ी की है, उसका नाम है श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) जिन्हें एशिया कप 2022 (Asia Cup 2022) के रिज़र्व स्क्वाड में जगह मिली है। दरअसल, साल 2022 में अय्यर ने भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन इसके बावजूद भी चयनकर्ताओं ने इस खिलाड़ी को नजरअंदाज किया। उन्होंने इस साल टी20 फॉर्मेट में कमाल का प्रदर्शन किया है। एशियाई दशों के खिलाफ इस खिलाड़ी का रिकॉर्ड शानदार है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ बैकअप के तौर पर ही शामिल किया। ऐसा ही कुछ टी20 विश्व कप 2021 के दौरान देखने को मिला था।
गौरतलब है कि श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) के लिए साल 2022 में बेहद ही शानदार रहा है और खासकर टी20 फॉर्मेट में अय्यर ने जमकर रन कूटे हैं। इस साल उन्होंने कुल 14 टी20 मुकाबले खेले हैं और 449 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 142 से ज्यादा का रहा है। वहीं, ईशान किशन ने भी इस साल शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें भी नजरअंदाज किया। ईशान को तो चयनकर्ताओं ने रिजर्व खिलाड़ी के लायक भी नहीं समझा। शानदार प्रदर्शन के बावजूद भी इन खिलाड़ियों का एशिया कप 2022 (Asia Cup 2022) में चयन ना किया जाना समझ से परे है।
आपको बता दें कि अभी हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ 5 मैचों की टी20 सीरीज खेली गई है जहाँ श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) का प्रदर्शन ख़राब रहा था लेकिन आखिरी टी20 मैच में उन्होंने अर्धशतक जड़कर फॉर्म में वापसी के संकेत दिए थे। उन्होंने अंतिम टी20 मैच में 64 रन बनाए थे, और टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आखिरी 6 टी20 मैचों में 0, 28, 0, 10, 24, 64 रन बनाए हैं। शायद उनके इसी प्रदर्शन को देखकर चयनकर्ताओं ने अय्यर को टीम से बाहर किया है।
| सोमवार की रात को बीसीसीआई ने एशिया कप दो हज़ार बाईस के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड की घोषणा कर दी। इस टूर्नामेंट के जरिए विराट कोहली और केएल राहुल वापसी कर रहे हैं। टीम की कमान रोहित शर्मा के हाथों में रहने वाली है। भारत अपना पहला मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ अट्ठाईस अगस्त को खेलेगा। टीम इंडिया के स्क्वाड में कई स्टार खिलाड़ियों को जगह दी गई है लेकिन चयनकर्ताओं ने एक ऐसे खिलाड़ी को पंद्रह सदस्यीय टीम में जगह नहीं दी है जिसने इस साल भारत के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए हैं। चयनकर्ताओं ने जिस खिलाड़ी के साथ नाइंसाफ़ी की है, उसका नाम है श्रेयस अय्यर जिन्हें एशिया कप दो हज़ार बाईस के रिज़र्व स्क्वाड में जगह मिली है। दरअसल, साल दो हज़ार बाईस में अय्यर ने भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन इसके बावजूद भी चयनकर्ताओं ने इस खिलाड़ी को नजरअंदाज किया। उन्होंने इस साल टीबीस फॉर्मेट में कमाल का प्रदर्शन किया है। एशियाई दशों के खिलाफ इस खिलाड़ी का रिकॉर्ड शानदार है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ बैकअप के तौर पर ही शामिल किया। ऐसा ही कुछ टीबीस विश्व कप दो हज़ार इक्कीस के दौरान देखने को मिला था। गौरतलब है कि श्रेयस अय्यर के लिए साल दो हज़ार बाईस में बेहद ही शानदार रहा है और खासकर टीबीस फॉर्मेट में अय्यर ने जमकर रन कूटे हैं। इस साल उन्होंने कुल चौदह टीबीस मुकाबले खेले हैं और चार सौ उनचास रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी एक सौ बयालीस से ज्यादा का रहा है। वहीं, ईशान किशन ने भी इस साल शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें भी नजरअंदाज किया। ईशान को तो चयनकर्ताओं ने रिजर्व खिलाड़ी के लायक भी नहीं समझा। शानदार प्रदर्शन के बावजूद भी इन खिलाड़ियों का एशिया कप दो हज़ार बाईस में चयन ना किया जाना समझ से परे है। आपको बता दें कि अभी हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ पाँच मैचों की टीबीस सीरीज खेली गई है जहाँ श्रेयस अय्यर का प्रदर्शन ख़राब रहा था लेकिन आखिरी टीबीस मैच में उन्होंने अर्धशतक जड़कर फॉर्म में वापसी के संकेत दिए थे। उन्होंने अंतिम टीबीस मैच में चौंसठ रन बनाए थे, और टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आखिरी छः टीबीस मैचों में शून्य, अट्ठाईस, शून्य, दस, चौबीस, चौंसठ रन बनाए हैं। शायद उनके इसी प्रदर्शन को देखकर चयनकर्ताओं ने अय्यर को टीम से बाहर किया है। |
कितनी बार मंजिल में असमता अनदेखी आधुनिक अपार्टमेंट के किरायेदारों! हर अब और फिर फर्नीचर के पैरों के नीचे आप एक स्तर पर डाल दिया लिनोलियम पर bulges और दरारें प्रकट करने के लिए में कुछ संलग्न करने की जरूरत है। इसलिए, भले साथ कॉस्मेटिक मरम्मत यह जरूरी है कि मंजिल स्तर। हालांकि, इस तरह के एक मामले में क्या करने के लिए, एक ठोस भूमि का टुकड़ा प्रौद्योगिकी के अनुपालन में संभव नहीं है। हाँ, और यह कुछ कौशल की आवश्यकता है। एक स्वयं के माध्यम से अच्छा nonprofessionals समतल फर्श हैं स्वयं समतल मिश्रण। वे अपने हाथ जल्दी और आसानी से जोड़ों के बिना एक फ्लैट और चिकनी फर्श की सतह को प्राप्त करने के लिए अनुमति देते हैं। इसके अलावा, उनकी स्पष्ट लाभ उन लोगों के साथ है कि असमता मंजिल में कुछ सेंटीमीटर है कि सभी स्वयं समतल pourable मिश्रण अस्पष्ट हो सकती है, और यह भी, लेकिन क्योंकि वे आसानी से subfloor पर लागू होने वाली है। लेकिन वहाँ भी असमर्थता उन्हें क्षेत्रों में उपयोग करने के लिए जहाँ आप (गेराज, सौना, शॉवर) के निकास के लिए एक ढलान कारोबार की वजह से एक टाई बनाने की जरूरत सहित नुकसान के एक नंबर, है। इसके अलावा, फर्श के लिए स्वयं समतल यौगिकों असमान क्षेत्रों पर एक बहुत ही उच्च खपत है।
एक अंतिम निर्णय बनाने के लिए और इस तरह के मिश्रण का उपयोग कर समतल फर्श करने के लिए, यह सुनिश्चित करें कि फर्श पर त्रुटियों और अनियमितताओं की ऊंचाई अंतर दो सेंटीमीटर से अधिक नहीं है बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। सतह दरारें से मुक्त होना चाहिए, या जरूरत पहले से मरम्मत करने के लिए। सीधे से पहले सावधानी से भरने के लिए जरूरत पूरी सतह दुरुस्त गठबंधन किया जाना। यह भी बंपर बनाने के लिए, सभी दरारें और छेद के माध्यम से जो स्वयं को समतल मिश्रण अन्य कमरे में प्रवाह कर सकते हैं समाप्त करने के लिए आवश्यक है।
पहले यह निर्देश पढ़ बिना एक मिश्रण के साथ संचालित न करें। यह विस्तार से लिखा है के रूप में आप पानी, 1 मीटर 2 का एक मिश्रण प्रवाह की दर, आदि की जरूरत है अक्सर, 1 मिमी की एक परत मोटाई पर रचना प्रवाह 1 मीटर 2 प्रति 1. 5 किलोग्राम है। की तुलना में पैकेज पर संकेत दिया कुछ स्वयं समतल मिश्रण पानी की एक बड़ी राशि के आवेदन की अनुमति नहीं देता। इसलिए, पहल बचा जाना चाहिए। एक तरल समाधान के साथ अनिवार्य रूप से आसान नहीं काम करेंगे। इसके विपरीत, यह केवल सब कुछ खराब कर सकते हैं। इसके अलावा, में एक अनिवार्य कदम मंजिल भरने primed सतह है। स्क्रैपी के साथ इस कास्टिंग मजबूत टाई के साथ। इसके अलावा विशेष प्राइमर मोल्ड और फफूंदी की उपस्थिति से मंजिल सुरक्षा करता है। यदि हाथ में मिट्टी की संरचना मौजूद नहीं है, और कमरे के शुष्क और बहुत बड़ी नहीं है, आप सतह तैयार करने के लिए एक बहुत ही पतला पानी स्व समतल उपयोग कर सकते हैं।
पूरे कास्टिंग प्रक्रिया 40 मिनट से अधिक नहीं लेता है। एक बैच बनाने के लिए समय है करने के लिए आवंटित आवश्यक समय के दौरान, सतह पर डाल, उसे संरेखित और अपने बालीदार रोलर बुलबुले से "निष्कासित" में मदद करेगा। स्व समतल फर्श मिश्रण एक लेपनी या एक लंबी संभाल पर एक रोलर के साथ सतह पर समान रूप से फैल जाना चाहिए। तो यह कार्य करने के लिए आवश्यक है, और धीरे धीरे पूरे फर्श प्रत्येक मिश्रण और समाधान के डालने के बाद तैयार है। आम तौर पर एक बैच कोर्स में से एक बैग लेता है, लेकिन, यह सब बैग और बाल्टी मात्रा के वजन पर निर्भर करता है। इसके अलावा, क्षेत्र, एक भी बैच में एम्बेडेड है, यह मंजिल से निर्भर करता है और राहत मोटाई भरता है। उदाहरण के लिए, नहीं अधिक से अधिक 5 मिमी चाहिए 4 आटा की एक potting मोटाई के साथ 18 मीटर 2 के एक कमरे के लिए (वजन बैग 25 किग्रा)।
| कितनी बार मंजिल में असमता अनदेखी आधुनिक अपार्टमेंट के किरायेदारों! हर अब और फिर फर्नीचर के पैरों के नीचे आप एक स्तर पर डाल दिया लिनोलियम पर bulges और दरारें प्रकट करने के लिए में कुछ संलग्न करने की जरूरत है। इसलिए, भले साथ कॉस्मेटिक मरम्मत यह जरूरी है कि मंजिल स्तर। हालांकि, इस तरह के एक मामले में क्या करने के लिए, एक ठोस भूमि का टुकड़ा प्रौद्योगिकी के अनुपालन में संभव नहीं है। हाँ, और यह कुछ कौशल की आवश्यकता है। एक स्वयं के माध्यम से अच्छा nonprofessionals समतल फर्श हैं स्वयं समतल मिश्रण। वे अपने हाथ जल्दी और आसानी से जोड़ों के बिना एक फ्लैट और चिकनी फर्श की सतह को प्राप्त करने के लिए अनुमति देते हैं। इसके अलावा, उनकी स्पष्ट लाभ उन लोगों के साथ है कि असमता मंजिल में कुछ सेंटीमीटर है कि सभी स्वयं समतल pourable मिश्रण अस्पष्ट हो सकती है, और यह भी, लेकिन क्योंकि वे आसानी से subfloor पर लागू होने वाली है। लेकिन वहाँ भी असमर्थता उन्हें क्षेत्रों में उपयोग करने के लिए जहाँ आप के निकास के लिए एक ढलान कारोबार की वजह से एक टाई बनाने की जरूरत सहित नुकसान के एक नंबर, है। इसके अलावा, फर्श के लिए स्वयं समतल यौगिकों असमान क्षेत्रों पर एक बहुत ही उच्च खपत है। एक अंतिम निर्णय बनाने के लिए और इस तरह के मिश्रण का उपयोग कर समतल फर्श करने के लिए, यह सुनिश्चित करें कि फर्श पर त्रुटियों और अनियमितताओं की ऊंचाई अंतर दो सेंटीमीटर से अधिक नहीं है बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। सतह दरारें से मुक्त होना चाहिए, या जरूरत पहले से मरम्मत करने के लिए। सीधे से पहले सावधानी से भरने के लिए जरूरत पूरी सतह दुरुस्त गठबंधन किया जाना। यह भी बंपर बनाने के लिए, सभी दरारें और छेद के माध्यम से जो स्वयं को समतल मिश्रण अन्य कमरे में प्रवाह कर सकते हैं समाप्त करने के लिए आवश्यक है। पहले यह निर्देश पढ़ बिना एक मिश्रण के साथ संचालित न करें। यह विस्तार से लिखा है के रूप में आप पानी, एक मीटर दो का एक मिश्रण प्रवाह की दर, आदि की जरूरत है अक्सर, एक मिमी की एक परत मोटाई पर रचना प्रवाह एक मीटर दो प्रति एक. पाँच किलोग्रामग्राम है। की तुलना में पैकेज पर संकेत दिया कुछ स्वयं समतल मिश्रण पानी की एक बड़ी राशि के आवेदन की अनुमति नहीं देता। इसलिए, पहल बचा जाना चाहिए। एक तरल समाधान के साथ अनिवार्य रूप से आसान नहीं काम करेंगे। इसके विपरीत, यह केवल सब कुछ खराब कर सकते हैं। इसके अलावा, में एक अनिवार्य कदम मंजिल भरने primed सतह है। स्क्रैपी के साथ इस कास्टिंग मजबूत टाई के साथ। इसके अलावा विशेष प्राइमर मोल्ड और फफूंदी की उपस्थिति से मंजिल सुरक्षा करता है। यदि हाथ में मिट्टी की संरचना मौजूद नहीं है, और कमरे के शुष्क और बहुत बड़ी नहीं है, आप सतह तैयार करने के लिए एक बहुत ही पतला पानी स्व समतल उपयोग कर सकते हैं। पूरे कास्टिंग प्रक्रिया चालीस मिनट से अधिक नहीं लेता है। एक बैच बनाने के लिए समय है करने के लिए आवंटित आवश्यक समय के दौरान, सतह पर डाल, उसे संरेखित और अपने बालीदार रोलर बुलबुले से "निष्कासित" में मदद करेगा। स्व समतल फर्श मिश्रण एक लेपनी या एक लंबी संभाल पर एक रोलर के साथ सतह पर समान रूप से फैल जाना चाहिए। तो यह कार्य करने के लिए आवश्यक है, और धीरे धीरे पूरे फर्श प्रत्येक मिश्रण और समाधान के डालने के बाद तैयार है। आम तौर पर एक बैच कोर्स में से एक बैग लेता है, लेकिन, यह सब बैग और बाल्टी मात्रा के वजन पर निर्भर करता है। इसके अलावा, क्षेत्र, एक भी बैच में एम्बेडेड है, यह मंजिल से निर्भर करता है और राहत मोटाई भरता है। उदाहरण के लिए, नहीं अधिक से अधिक पाँच मिमी चाहिए चार आटा की एक potting मोटाई के साथ अट्ठारह मीटर दो के एक कमरे के लिए । |
भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का पांचवा और आखिरी मैच आज यानि शुक्रवार से ओवल ग्राउंड पर शुरु हो गया. साउथहैम्पटन में खेले गए चौथे मैच में इंग्लैंड ने जीत दर्ज कर सीरीज 3-1 से अपने नाम करली थी.
भारतीय टीम नॉटिंघम में खेले गए तीसरे मैच में ही सिर्फ जीत दर्ज कर पायी. वहीं इस पूरी सीरीज के दौरान तीन भारतीय खिलाड़ियों को एक भी मैच खेलना का मौका नहीं मिला और वह सिर्फ स्क्वैड का हिस्सा बन कर रह गए.
26 वर्षीय तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर पूरी टेस्ट सीरीज में बेंच पर बैठे रहे. ठाकुर को अपना पहला टेस्ट मैच खेलना का मौका नहीं मिल पाया. शार्दुल भारत के लिए 4 वनडे और 7 टी-20 मैच खेल चुके हैं. जबकि टेस्ट में डेब्यू के लिए उन्हें अभी और इंतजार करना होगा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शार्दुल ने शानदार गेंदबाजी की है. वह 55 फर्स्ट क्लास मैचों में 188 विकेट निकाल चुके हैं.
सीरीज के अंतिम दो टेस्ट मैचों के लिए टीम में युवा पृथ्वी शॉ और हनुमा विहारी को शामिल किया गया. मगर पृथ्वी दोनों मैचों में प्लेयिंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए. जबकि हनुमा विहारी पांचवे टेस्ट में हार्दिक पंड्या की जगह डेब्यू करने में कामयाब रहे. कयास लगाए जा रहे थे कि अभी तक सीरीज में फेल रहे केएल राहुल की जगह पृथ्वी शॉ को पांचवे टेस्ट में मौका दिया जा सकता है. पर ऐसा हुआ नहीं.
ऐसा लग रहा है कप्तान विराट कोहली की नज़रें करुण नायर पर गयी ही नहीं. करुण पूरी सीरीज में सिर्फ टीम का हिस्सा बनकर रह गए वह एक भी मैच में प्लेयिंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए.
करुण ने इंग्लैंड के खिलाफ ही 2016 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. अभी तक वह 6 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. जिसमें उन्होंने 374 रन बनाए हैं. इसमें करुण की नाबाद 303 रनों की विशाल पारी शामिल है.
| भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का पांचवा और आखिरी मैच आज यानि शुक्रवार से ओवल ग्राउंड पर शुरु हो गया. साउथहैम्पटन में खेले गए चौथे मैच में इंग्लैंड ने जीत दर्ज कर सीरीज तीन-एक से अपने नाम करली थी. भारतीय टीम नॉटिंघम में खेले गए तीसरे मैच में ही सिर्फ जीत दर्ज कर पायी. वहीं इस पूरी सीरीज के दौरान तीन भारतीय खिलाड़ियों को एक भी मैच खेलना का मौका नहीं मिला और वह सिर्फ स्क्वैड का हिस्सा बन कर रह गए. छब्बीस वर्षीय तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर पूरी टेस्ट सीरीज में बेंच पर बैठे रहे. ठाकुर को अपना पहला टेस्ट मैच खेलना का मौका नहीं मिल पाया. शार्दुल भारत के लिए चार वनडे और सात टी-बीस मैच खेल चुके हैं. जबकि टेस्ट में डेब्यू के लिए उन्हें अभी और इंतजार करना होगा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शार्दुल ने शानदार गेंदबाजी की है. वह पचपन फर्स्ट क्लास मैचों में एक सौ अठासी विकेट निकाल चुके हैं. सीरीज के अंतिम दो टेस्ट मैचों के लिए टीम में युवा पृथ्वी शॉ और हनुमा विहारी को शामिल किया गया. मगर पृथ्वी दोनों मैचों में प्लेयिंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए. जबकि हनुमा विहारी पांचवे टेस्ट में हार्दिक पंड्या की जगह डेब्यू करने में कामयाब रहे. कयास लगाए जा रहे थे कि अभी तक सीरीज में फेल रहे केएल राहुल की जगह पृथ्वी शॉ को पांचवे टेस्ट में मौका दिया जा सकता है. पर ऐसा हुआ नहीं. ऐसा लग रहा है कप्तान विराट कोहली की नज़रें करुण नायर पर गयी ही नहीं. करुण पूरी सीरीज में सिर्फ टीम का हिस्सा बनकर रह गए वह एक भी मैच में प्लेयिंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए. करुण ने इंग्लैंड के खिलाफ ही दो हज़ार सोलह में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. अभी तक वह छः टेस्ट मैच खेल चुके हैं. जिसमें उन्होंने तीन सौ चौहत्तर रन बनाए हैं. इसमें करुण की नाबाद तीन सौ तीन रनों की विशाल पारी शामिल है. |
डबलिन। Kevin O'Brien Retirement सभी देशों के क्रिकेट खिलाड़ी इस वक्त T20 वर्ड कप की तैयारियों में जुट गए हैं और टाइटल जीतने के लिए कड़ी मेहनत करना शुरू कर दिए हैं। वही क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक हैरान कर देना वाला खबर सामने आया हैं। दरअसल आयरलैंड के दिग्गज ऑलराउंडर केविन ओ ब्रायन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। केविन ओ ब्रायन ने 2011 आईसीसी वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ 50 गेंदों में तूफानी शतक जमाया था। जिसके दम पर बड़ा उलटफेर करते हुए इंग्लैंड को मात दी थी।
उन्होंने 2006 में आयरलैंड के लिए पहला मैच खेला था और अपने 16 साल के करियर में कई बेहतरीन पारियां खेली। उन्होंने दो बार इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगाया और आयरलैंड के लिए पहला टेस्ट शतक लगाने का गौरव भी हासिल किया। आयरलैंड को एसोसिएट देश से टेस्ट खेलने वाले देश का दर्जा दिलाने में केविन ओ ब्रायन का भी अहम योगदान है।
उनके नाम कई खास रिकॉर्ड दर्ज हैं। केविन ओ ब्रायन ने 3 टेस्ट, 153 वनडे और 110 टी20 इंटरनेशनल मैचों में आयरलैंड का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने 5850 इंटरनेशनल रन और 172 विकेट लिए। केविन ओ ब्रायन ने अपने आधिकारिक ट्विटर पोस्ट पर एक लंबा पोस्ट शेयर करते हुए संन्यास की घोषणा की।
| डबलिन। Kevin O'Brien Retirement सभी देशों के क्रिकेट खिलाड़ी इस वक्त Tबीस वर्ड कप की तैयारियों में जुट गए हैं और टाइटल जीतने के लिए कड़ी मेहनत करना शुरू कर दिए हैं। वही क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक हैरान कर देना वाला खबर सामने आया हैं। दरअसल आयरलैंड के दिग्गज ऑलराउंडर केविन ओ ब्रायन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। केविन ओ ब्रायन ने दो हज़ार ग्यारह आईसीसी वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ पचास गेंदों में तूफानी शतक जमाया था। जिसके दम पर बड़ा उलटफेर करते हुए इंग्लैंड को मात दी थी। उन्होंने दो हज़ार छः में आयरलैंड के लिए पहला मैच खेला था और अपने सोलह साल के करियर में कई बेहतरीन पारियां खेली। उन्होंने दो बार इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगाया और आयरलैंड के लिए पहला टेस्ट शतक लगाने का गौरव भी हासिल किया। आयरलैंड को एसोसिएट देश से टेस्ट खेलने वाले देश का दर्जा दिलाने में केविन ओ ब्रायन का भी अहम योगदान है। उनके नाम कई खास रिकॉर्ड दर्ज हैं। केविन ओ ब्रायन ने तीन टेस्ट, एक सौ तिरेपन वनडे और एक सौ दस टीबीस इंटरनेशनल मैचों में आयरलैंड का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने पाँच हज़ार आठ सौ पचास इंटरनेशनल रन और एक सौ बहत्तर विकेट लिए। केविन ओ ब्रायन ने अपने आधिकारिक ट्विटर पोस्ट पर एक लंबा पोस्ट शेयर करते हुए संन्यास की घोषणा की। |
अत्रि ]
[ अथर्वन्
उसे धोखा दिया गया और परिणामस्वरूप उसने ( वासिष्ठ ने) मित्रतपन शुष्मिण शैन्य के हार्थो अंत्यराति को परास्त करो कर उसका वध कराया ।
ऐतरेय ब्राह्मण ८.२३ तु० की० वेवर : इन्डिशे स्टूडियन १,२१४ ।
अत्रि - अनि न तो स्वयं और न अन्यादि ही किसी ऐतिहासिक वास्तविकता' के अधिकारी हैं। इनका इस तथ्य से अधिक संबंध नहीं कि ऋग्वेद का पञ्चम मण्डल वास्तव में अनि परिवार से सम्बन्धित है । एक परिवार के रूप में अत्रिगण सम्भवतः प्रिय मेघों और करवों तथा साथ ही साथ गोतमों" और काक्षिवतों से निकट रूप से सम्बन्धित थे। पञ्चम मण्डल के एक ही सूक्त में परुपणी और यमुना दोनों का उल्लेख यह सिद्ध करता प्रतीत होता है कि यह परिवार एक विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ था ।
की० : लुडविग : ऋग्वेद का अनुवाद ३.१२८, १४२; वर्गेनः रिलोजन वैदिक २.४६९; औल्डेनवर्गः त्सी० गे० ४२.२१२-२१५; हिलेब्रान्ट : वैदिशे माइथोलोजी ३.३१० ।
ऋग्वेद में अत्रि के लिये देखिये : मैकडोनेल : वैदिक माईथोलोजी और तु० की० अथर्ववेद २३२, ३, ४.२९, ३; मंत्र ब्राह्मण २.७, १; तैत्तिरीय आरण्यक ४.३६ आदि; बृहदारण्यक उपनिषद् २.२, ४
तु० की० : ऋग्वेद ५.३९, ५, ६७, ५; कौषीतकि ब्राह्मण २४.३; ऐतरेय आरण्यक २.२, १।
अथरी- -- यह शब्द केवल ऋग्वेद' में आता है और इसका आशय संदिग्ध है । रौथ', जिनका अनेक विश्लेषकों ने अनुकरण किया है, इसका अनुवाद 'तोमर या भाले की नोक' करते हैं; परन्तु पिशल के विचार से इसका अर्थ 'गज' (हाथी ) है ।
वैदिशे स्टूडियन १.९९ ।
सेन्ट पीटर्स वर्ग कोश, व० स्था०
अथर्वन्-एकवचन रूप में यह नाम अर्ध-दैविक पौराणिक पुरोहितों' के प्रधान का द्योतक है जिनके सम्बन्ध में कुछ भी ऐतिहासिक नहीं कहा जा सकता । बहुवचन में यह सम्पूर्ण परिवार के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है । कुछ ६ देखिये मैकडौनेल : वैदिक माध्यौलोजी 1 के वंश में अर्थवन् दैव, पात्र के रूप में \ १४१; बृहदारण्यक उपनिषद् (२.६, ३) "मृत्यु " का शिष्य बताया गया है। | अत्रि ] [ अथर्वन् उसे धोखा दिया गया और परिणामस्वरूप उसने मित्रतपन शुष्मिण शैन्य के हार्थो अंत्यराति को परास्त करो कर उसका वध कराया । ऐतरेय ब्राह्मण आठ.तेईस तुशून्य कीशून्य वेवर : इन्डिशे स्टूडियन एक,दो सौ चौदह । अत्रि - अनि न तो स्वयं और न अन्यादि ही किसी ऐतिहासिक वास्तविकता' के अधिकारी हैं। इनका इस तथ्य से अधिक संबंध नहीं कि ऋग्वेद का पञ्चम मण्डल वास्तव में अनि परिवार से सम्बन्धित है । एक परिवार के रूप में अत्रिगण सम्भवतः प्रिय मेघों और करवों तथा साथ ही साथ गोतमों" और काक्षिवतों से निकट रूप से सम्बन्धित थे। पञ्चम मण्डल के एक ही सूक्त में परुपणी और यमुना दोनों का उल्लेख यह सिद्ध करता प्रतीत होता है कि यह परिवार एक विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ था । कीशून्य : लुडविग : ऋग्वेद का अनुवाद तीन.एक सौ अट्ठाईस, एक सौ बयालीस; वर्गेनः रिलोजन वैदिक दो.चार सौ उनहत्तर; औल्डेनवर्गः त्सीशून्य गेशून्य बयालीस.दो सौ बारह-दो सौ पंद्रह; हिलेब्रान्ट : वैदिशे माइथोलोजी तीन.तीन सौ दस । ऋग्वेद में अत्रि के लिये देखिये : मैकडोनेल : वैदिक माईथोलोजी और तुशून्य कीशून्य अथर्ववेद दो सौ बत्तीस, तीन, चार.उनतीस, तीन; मंत्र ब्राह्मण दो.सात, एक; तैत्तिरीय आरण्यक चार.छत्तीस आदि; बृहदारण्यक उपनिषद् दो.दो, चार तुशून्य कीशून्य : ऋग्वेद पाँच.उनतालीस, पाँच, सरसठ, पाँच; कौषीतकि ब्राह्मण चौबीस.तीन; ऐतरेय आरण्यक दो.दो, एक। अथरी- -- यह शब्द केवल ऋग्वेद' में आता है और इसका आशय संदिग्ध है । रौथ', जिनका अनेक विश्लेषकों ने अनुकरण किया है, इसका अनुवाद 'तोमर या भाले की नोक' करते हैं; परन्तु पिशल के विचार से इसका अर्थ 'गज' है । वैदिशे स्टूडियन एक.निन्यानवे । सेन्ट पीटर्स वर्ग कोश, वशून्य स्थाशून्य अथर्वन्-एकवचन रूप में यह नाम अर्ध-दैविक पौराणिक पुरोहितों' के प्रधान का द्योतक है जिनके सम्बन्ध में कुछ भी ऐतिहासिक नहीं कहा जा सकता । बहुवचन में यह सम्पूर्ण परिवार के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है । कुछ छः देखिये मैकडौनेल : वैदिक माध्यौलोजी एक के वंश में अर्थवन् दैव, पात्र के रूप में \ एक सौ इकतालीस; बृहदारण्यक उपनिषद् "मृत्यु " का शिष्य बताया गया है। |
यह एडिटोरियल 21/03/2023 को 'द हिंदू' में प्रकाशित "The wide disparities in human development" लेख पर आधारित है। इसमें मानव विकास में बढ़ती असमानताओं के मुद्दों और इसे दूर करने के तरीकों के बारे में चर्चा की गई है।
मानव विकास (Human development) केवल आर्थिक विकास की तलाश और अर्थव्यवस्था में समृद्धि को अधिकतम करने पर केंद्रित नहीं है। इसके बजाय, यह मानवता के विचार के आसपास केंद्रित है, जिसमें स्वतंत्रता का विस्तार करना, क्षमताओं में सुधार करना, समान अवसरों को बढ़ावा देना और एक समृद्ध, स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन को सुनिश्चित करना शामिल है।
- भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हालाँकि इस विकास के परिणामस्वरूप इसके मानव विकास सूचकांक (Human Development Index- HDI) में समान रूप से वृद्धि नहीं हुई है। वर्ष 2021-22 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, भारत 191 देशों की सूची में बांग्लादेश और श्रीलंका से भी नीचे 132वें स्थान पर है।
- भारत के विशाल आकार और बड़ी आबादी को देखते हुए, मानव विकास में उप-राष्ट्रीय या राज्य-वार असमानताओं को दूर करना महत्त्वपूर्ण है, जो फिर भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश को साकार कर सकने में मदद करेगा।
HDI क्या है?
- HDI संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme- UNDP) द्वारा दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में मानव विकास के स्तर का मूल्यांकन और तुलना करने के लिये सृजित एक समग्र सांख्यिकीय मापक है।
- इसे वर्ष 1990 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) जैसे पारंपरिक आर्थिक मापकों - जो मानव विकास के व्यापक पहलुओं पर विचार नहीं करते है, के एक विकल्प के रूप में पेश किया गया था।
- HDI तीन पहलुओं में किसी देश की औसत उपलब्धि का आकलन करता हैः सुदीर्घ एवं स्वस्थ जीवन, ज्ञान और जीवन का एक सभ्य स्तर।
- उप-राष्ट्रीय HDI दर्शाता है कि जहाँ कुछ राज्यों ने व्यापक प्रगति की है, वहीं अन्य अभी भी संघर्ष कर रहे हैं।
- सूचकांक में दिल्ली शीर्ष स्थान पर है, जबकि बिहार सबसे नीचे है।
- यद्यपि यह उल्लेखनीय है कि पिछली HDI रिपोर्ट के विपरीत बिहार अब निम्न मानव विकास वाला राज्य नहीं रह गया है।
- आर्थिक विकास का असमान वितरणः
- मानव विकास की प्राप्ति में बाधा का एक प्रमुख कारण यह है कि आर्थिक विकास का वितरण असमान रूप से हुआ है।
- भारतीय आबादी के शीर्ष 10% के पास 77% से अधिक संपत्ति है।
- इसके परिणामस्वरूप बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक पहुँच में उल्लेखनीय असमानताएँ उत्पन्न हुई हैं।
- मानव विकास की प्राप्ति में बाधा का एक प्रमुख कारण यह है कि आर्थिक विकास का वितरण असमान रूप से हुआ है।
- सेवाओं की निम्न गुणवत्ताः
- जबकि भारत ने गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है, ऐसी सेवाओं की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है।
- उदाहरण के लिये, जबकि देश ने प्राथमिक शिक्षा में लगभग सार्वभौमिक नामांकन की स्थिति प्राप्त कर ली है, शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर निम्न बना हुआ है।
- जबकि भारत ने गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है, ऐसी सेवाओं की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है।
- प्रभावी शैक्षिक अवसंरचना का अभावः
- भारत अपने नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। कई स्कूलों में पर्याप्त कक्षाओं, स्वच्छ जल और प्रशिक्षित शिक्षकों जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
- उचित पोषण की कमीः
- भारत में कुपोषण और अल्पपोषण विशेष रूप से बच्चों में व्याप्त प्रमुख समस्याएँ हैं। इसका उनके स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक विकास और समग्र सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
- वर्ष 2020 तक की स्थिति के अनुसार भारत की 70% से अधिक आबादी स्वस्थ आहार पा सकने में अक्षम है, इस तथ्य के बावजूद कि अन्य देशों की तुलना में भारत में भोजन की लागत अपेक्षाकृत कम है।
- 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता वर्ष 2015-16 में 53% (NFHS- 4) से बढ़कर वर्ष 2019-21 में 57% (NFHS-5) हो गया है।
- भारत में कुपोषण और अल्पपोषण विशेष रूप से बच्चों में व्याप्त प्रमुख समस्याएँ हैं। इसका उनके स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक विकास और समग्र सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
- सामाजिक सुरक्षा का अभावः
- भारत अपने नागरिकों, विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिये भी संघर्षरत है। कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या स्वास्थ्य देखभाल, सेवानिवृत्ति पेंशन और नौकरी की सुरक्षा जैसे बुनियादी लाभों तक पहुँच नहीं रखती।
- लैंगिक असमानताः
- हाल के वर्षों की प्रगति के बावजूद, लैंगिक असमानता भारत में मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा बनी हुई है। महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, रोज़गार एवं स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वे प्रायः हिंसा एवं दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं।
- स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों (Expected Years of Schooling- EYS) के लिये पुरुष-महिला अनुपात वर्ष 1990 में 1.43 से घटकर वर्ष 2021 में 0.989 हो गया, जबकि स्कूली शिक्षा के औसत वर्षों (Mean Years of Schooling- MYS) के लिये यह 1.26 से घटकर 1.06 हो गया।
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2022' के अनुसार, महिलाएँ AI कार्यबल में केवल 22% हिस्सेदारी रखती हैं।
- हाल के वर्षों की प्रगति के बावजूद, लैंगिक असमानता भारत में मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा बनी हुई है। महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, रोज़गार एवं स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वे प्रायः हिंसा एवं दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं।
- आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करनाः
- आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करने के लिये एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें नीतिगत परिवर्तन और सांस्कृतिक बदलाव दोनों शामिल हैं। यहाँ कुछ संभावित उपाय सुझाए गए हैंः
- समान वेतन, शिक्षा एवं कौशल विकास, वहनीय बाल देखभाल, महिलाओं के लिये सशक्तिकरण कार्यक्रम आदि सहायक हो सकते हैं।
- सरकार इन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैः बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), महिला ई-हाट आदि योजनाओं के प्रोत्साहन पर सरकार ध्यान दे सकती है।
- आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करने के लिये एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें नीतिगत परिवर्तन और सांस्कृतिक बदलाव दोनों शामिल हैं। यहाँ कुछ संभावित उपाय सुझाए गए हैंः
- शिक्षा में निवेश करनाः
- शिक्षा मानव विकास का एक मूलभूत पहलू है। सरकारें स्कूलों के निर्माण, शिक्षकों की भर्ती, छात्रवृत्ति प्रदान करने और वंचित समुदायों के लिये शिक्षा तक पहुँच में सुधार आदि के रूप में शिक्षा में निवेश कर सकती हैं।
- स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करनाः
- स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच मानव विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटक है। सरकारें यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि सभी नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्राप्त हो, जिसमें निवारक देखभाल, रोग उपचार और मानसिक स्वास्थ्य सहायता आदि शामिल हैं।
- सरकार को इन योजनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता हैः प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY), प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY), राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM), मिशन इंद्रधनुष।
- गरीबी को संबोधित करनाः
- गरीबी मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा है। सरकारें बेरोज़गारी लाभ, खाद्य सहायता और आवास सब्सिडी जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को लागू करके गरीबी को दूर कर सकती हैं।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देनाः
- मानव विकास के लिये लैंगिक समानता आवश्यक है। सरकारें ऐसी नीतियों को लागू कर लैंगिक समानता को बढ़ावा दे सकती हैं जो महिलाओं एवं बालिकाओं के लिये समान अवसर सुनिश्चित करें, जैसे कि रोज़गार एवं शिक्षा में लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध कानून का निर्माण करना।
- मानवाधिकारों की रक्षा करनाः
- मानवाधिकार मानव विकास के लिये मूलभूत हैं। सरकारें यह सुनिश्चित कर मानवाधिकारों की रक्षा कर सकती हैं कि नागरिकों के लिये स्वतंत्र भाषण, धर्म की स्वतंत्रता और भेदभाव से स्वतंत्रता के अधिकार उपलब्ध हों।
- अवसंरचना का निर्माणः
- आर्थिक विकास और मानव विकास के लिये सड़क, पुल एवं बिजली जैसी अवसंरचनाएँ महत्त्वपूर्ण हैं। सरकारें ऐसी अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं जो स्वच्छ जल एवं बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में सुधार करें और रोज़गार के अवसर उत्पन्न करें।
- नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देनाः
- नवाचार और उद्यमिता आर्थिक विकास को गति दे सकती हैं तथा मानव विकास में सुधार कर सकती हैं। सरकारें ऐसी नीतियाँ बना सकती हैं जो नवाचार और उद्यमिता का समर्थन करें, जैसे छोटे व्यवसायों के लिये कर प्रोत्साहन और वैज्ञानिकों एवं आविष्कारकों के लिये अनुसंधान अनुदान प्रदान करना।
अभ्यास प्रश्नः मानव विकास प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति की राह में प्रमुख बाधाएँ कौन-सी हैं और इन बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है?
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्र. यूएनडीपी के समर्थन से ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव द्वारा विकसित बहु-आयामी गरीबी सूचकांक निम्नलिखित में से किसे कवर करता है? (वर्ष 2012)
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः
उत्तरः (A)
प्र. लगातार उच्च विकास के बावजूद मानव विकास सूचकांक में भारत अभी भी सबसे कम अंकों के साथ है। उन मुद्दों की पहचान करें जो संतुलित और समावेशी विकास को सुनिश्चित करते हैं। (वर्ष 2016)
| यह एडिटोरियल इक्कीस मार्च दो हज़ार तेईस को 'द हिंदू' में प्रकाशित "The wide disparities in human development" लेख पर आधारित है। इसमें मानव विकास में बढ़ती असमानताओं के मुद्दों और इसे दूर करने के तरीकों के बारे में चर्चा की गई है। मानव विकास केवल आर्थिक विकास की तलाश और अर्थव्यवस्था में समृद्धि को अधिकतम करने पर केंद्रित नहीं है। इसके बजाय, यह मानवता के विचार के आसपास केंद्रित है, जिसमें स्वतंत्रता का विस्तार करना, क्षमताओं में सुधार करना, समान अवसरों को बढ़ावा देना और एक समृद्ध, स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन को सुनिश्चित करना शामिल है। - भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हालाँकि इस विकास के परिणामस्वरूप इसके मानव विकास सूचकांक में समान रूप से वृद्धि नहीं हुई है। वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, भारत एक सौ इक्यानवे देशों की सूची में बांग्लादेश और श्रीलंका से भी नीचे एक सौ बत्तीसवें स्थान पर है। - भारत के विशाल आकार और बड़ी आबादी को देखते हुए, मानव विकास में उप-राष्ट्रीय या राज्य-वार असमानताओं को दूर करना महत्त्वपूर्ण है, जो फिर भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश को साकार कर सकने में मदद करेगा। HDI क्या है? - HDI संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में मानव विकास के स्तर का मूल्यांकन और तुलना करने के लिये सृजित एक समग्र सांख्यिकीय मापक है। - इसे वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे में सकल घरेलू उत्पाद जैसे पारंपरिक आर्थिक मापकों - जो मानव विकास के व्यापक पहलुओं पर विचार नहीं करते है, के एक विकल्प के रूप में पेश किया गया था। - HDI तीन पहलुओं में किसी देश की औसत उपलब्धि का आकलन करता हैः सुदीर्घ एवं स्वस्थ जीवन, ज्ञान और जीवन का एक सभ्य स्तर। - उप-राष्ट्रीय HDI दर्शाता है कि जहाँ कुछ राज्यों ने व्यापक प्रगति की है, वहीं अन्य अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। - सूचकांक में दिल्ली शीर्ष स्थान पर है, जबकि बिहार सबसे नीचे है। - यद्यपि यह उल्लेखनीय है कि पिछली HDI रिपोर्ट के विपरीत बिहार अब निम्न मानव विकास वाला राज्य नहीं रह गया है। - आर्थिक विकास का असमान वितरणः - मानव विकास की प्राप्ति में बाधा का एक प्रमुख कारण यह है कि आर्थिक विकास का वितरण असमान रूप से हुआ है। - भारतीय आबादी के शीर्ष दस% के पास सतहत्तर% से अधिक संपत्ति है। - इसके परिणामस्वरूप बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक पहुँच में उल्लेखनीय असमानताएँ उत्पन्न हुई हैं। - मानव विकास की प्राप्ति में बाधा का एक प्रमुख कारण यह है कि आर्थिक विकास का वितरण असमान रूप से हुआ है। - सेवाओं की निम्न गुणवत्ताः - जबकि भारत ने गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है, ऐसी सेवाओं की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। - उदाहरण के लिये, जबकि देश ने प्राथमिक शिक्षा में लगभग सार्वभौमिक नामांकन की स्थिति प्राप्त कर ली है, शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर निम्न बना हुआ है। - जबकि भारत ने गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है, ऐसी सेवाओं की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। - प्रभावी शैक्षिक अवसंरचना का अभावः - भारत अपने नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। कई स्कूलों में पर्याप्त कक्षाओं, स्वच्छ जल और प्रशिक्षित शिक्षकों जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। - उचित पोषण की कमीः - भारत में कुपोषण और अल्पपोषण विशेष रूप से बच्चों में व्याप्त प्रमुख समस्याएँ हैं। इसका उनके स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक विकास और समग्र सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। - वर्ष दो हज़ार बीस तक की स्थिति के अनुसार भारत की सत्तर% से अधिक आबादी स्वस्थ आहार पा सकने में अक्षम है, इस तथ्य के बावजूद कि अन्य देशों की तुलना में भारत में भोजन की लागत अपेक्षाकृत कम है। - पंद्रह-उनचास आयु वर्ग की महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में तिरेपन% से बढ़कर वर्ष दो हज़ार उन्नीस-इक्कीस में सत्तावन% हो गया है। - भारत में कुपोषण और अल्पपोषण विशेष रूप से बच्चों में व्याप्त प्रमुख समस्याएँ हैं। इसका उनके स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक विकास और समग्र सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। - सामाजिक सुरक्षा का अभावः - भारत अपने नागरिकों, विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिये भी संघर्षरत है। कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या स्वास्थ्य देखभाल, सेवानिवृत्ति पेंशन और नौकरी की सुरक्षा जैसे बुनियादी लाभों तक पहुँच नहीं रखती। - लैंगिक असमानताः - हाल के वर्षों की प्रगति के बावजूद, लैंगिक असमानता भारत में मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा बनी हुई है। महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, रोज़गार एवं स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वे प्रायः हिंसा एवं दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं। - स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्षों के लिये पुरुष-महिला अनुपात वर्ष एक हज़ार नौ सौ नब्बे में एक.तैंतालीस से घटकर वर्ष दो हज़ार इक्कीस में शून्य.नौ सौ नवासी हो गया, जबकि स्कूली शिक्षा के औसत वर्षों के लिये यह एक.छब्बीस से घटकर एक.छः हो गया। - विश्व आर्थिक मंच की 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट दो हज़ार बाईस' के अनुसार, महिलाएँ AI कार्यबल में केवल बाईस% हिस्सेदारी रखती हैं। - हाल के वर्षों की प्रगति के बावजूद, लैंगिक असमानता भारत में मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा बनी हुई है। महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, रोज़गार एवं स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वे प्रायः हिंसा एवं दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं। - आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करनाः - आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करने के लिये एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें नीतिगत परिवर्तन और सांस्कृतिक बदलाव दोनों शामिल हैं। यहाँ कुछ संभावित उपाय सुझाए गए हैंः - समान वेतन, शिक्षा एवं कौशल विकास, वहनीय बाल देखभाल, महिलाओं के लिये सशक्तिकरण कार्यक्रम आदि सहायक हो सकते हैं। - सरकार इन योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैः बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, एकीकृत बाल विकास सेवा , महिला ई-हाट आदि योजनाओं के प्रोत्साहन पर सरकार ध्यान दे सकती है। - आय असमानता और लैंगिक असमानता को संबोधित करने के लिये एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें नीतिगत परिवर्तन और सांस्कृतिक बदलाव दोनों शामिल हैं। यहाँ कुछ संभावित उपाय सुझाए गए हैंः - शिक्षा में निवेश करनाः - शिक्षा मानव विकास का एक मूलभूत पहलू है। सरकारें स्कूलों के निर्माण, शिक्षकों की भर्ती, छात्रवृत्ति प्रदान करने और वंचित समुदायों के लिये शिक्षा तक पहुँच में सुधार आदि के रूप में शिक्षा में निवेश कर सकती हैं। - स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करनाः - स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच मानव विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटक है। सरकारें यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि सभी नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्राप्त हो, जिसमें निवारक देखभाल, रोग उपचार और मानसिक स्वास्थ्य सहायता आदि शामिल हैं। - सरकार को इन योजनाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता हैः प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना , प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना , राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन , मिशन इंद्रधनुष। - गरीबी को संबोधित करनाः - गरीबी मानव विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाधा है। सरकारें बेरोज़गारी लाभ, खाद्य सहायता और आवास सब्सिडी जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को लागू करके गरीबी को दूर कर सकती हैं। - लैंगिक समानता को बढ़ावा देनाः - मानव विकास के लिये लैंगिक समानता आवश्यक है। सरकारें ऐसी नीतियों को लागू कर लैंगिक समानता को बढ़ावा दे सकती हैं जो महिलाओं एवं बालिकाओं के लिये समान अवसर सुनिश्चित करें, जैसे कि रोज़गार एवं शिक्षा में लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध कानून का निर्माण करना। - मानवाधिकारों की रक्षा करनाः - मानवाधिकार मानव विकास के लिये मूलभूत हैं। सरकारें यह सुनिश्चित कर मानवाधिकारों की रक्षा कर सकती हैं कि नागरिकों के लिये स्वतंत्र भाषण, धर्म की स्वतंत्रता और भेदभाव से स्वतंत्रता के अधिकार उपलब्ध हों। - अवसंरचना का निर्माणः - आर्थिक विकास और मानव विकास के लिये सड़क, पुल एवं बिजली जैसी अवसंरचनाएँ महत्त्वपूर्ण हैं। सरकारें ऐसी अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं जो स्वच्छ जल एवं बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में सुधार करें और रोज़गार के अवसर उत्पन्न करें। - नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देनाः - नवाचार और उद्यमिता आर्थिक विकास को गति दे सकती हैं तथा मानव विकास में सुधार कर सकती हैं। सरकारें ऐसी नीतियाँ बना सकती हैं जो नवाचार और उद्यमिता का समर्थन करें, जैसे छोटे व्यवसायों के लिये कर प्रोत्साहन और वैज्ञानिकों एवं आविष्कारकों के लिये अनुसंधान अनुदान प्रदान करना। अभ्यास प्रश्नः मानव विकास प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति की राह में प्रमुख बाधाएँ कौन-सी हैं और इन बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है? यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न प्र. यूएनडीपी के समर्थन से ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव द्वारा विकसित बहु-आयामी गरीबी सूचकांक निम्नलिखित में से किसे कवर करता है? नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः उत्तरः प्र. लगातार उच्च विकास के बावजूद मानव विकास सूचकांक में भारत अभी भी सबसे कम अंकों के साथ है। उन मुद्दों की पहचान करें जो संतुलित और समावेशी विकास को सुनिश्चित करते हैं। |
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
नैमिषारण्यमें सूतजीका आगमन, पुराणका आरम्भ तथा सृष्टिका वर्णन
वानप्रस्थ और संन्यासी - सभी जुटे हुए थे । झुंडकी-झुंड गौएँ उस वनकी शोभा बढ़ा रही थीं। नैमिषारण्यवासी मुनियोंका द्वादशवार्षिक (बारह ॥ वर्षोंतक चालू रहनेवाला ) यज्ञ आरम्भ था । जौ, गेहूँ, चना, उड़द, मूँग और तिल आदि पवित्र अन्नोंसे यज्ञमण्डप सुशोभित था । वहाँ होमकुण्डमें अग्निदेव प्रज्वलित थे और आहुतियाँ डाली जा रही थीं। उस महायज्ञमें सम्मिलित होनेके लिये बहुत से मुनि और ब्राह्मण अन्य स्थानोंसे आये। स्थानीय महर्षियोंने उन सबका यथायोग्य सत्कार किया। ऋत्विजोंसहित वे सब लोग जब आरामसे बैठ गये, तब परम बुद्धिमान् लोमहर्षण सूतजी वहाँ पधारे। उन्हें देखकर मुनिवरोंको बड़ी प्रसन्नता हुई, उन सबने उनका यथावत् सत्कार किया। सूतजी भी उनके प्रति आदरका भाव प्रकट करके एक श्रेष्ठ आसनपर विराजमान हुए। उस समय सब ब्राह्मण सूतजीके साथ वार्तालाप करने लगे। बातचीतके अन्तमें सबने व्यास-शिष्य लोमहर्षणजीसे अपना संदेह पूछा ।
यस्मात्सर्वमिदं प्रपञ्चरचितं मायाजगज्जायते यसिंमस्तिष्ठति याति चान्तसमये कल्पानुकल्पे पुनः । यं ध्यात्वा मुनयः प्रपञ्चरहितं विन्दन्ति मोक्षं ध्रुवं तं वन्दे पुरुषोत्तमाख्यममलं नित्यं विभुं निश्चलम् यं ध्यायन्ति बुधाः समाधिसमये शुद्धं वियत्संनिभं नित्यानन्दमयं प्रसन्नममलं सर्वेश्वरं निर्गुणम् । व्यक्ताव्यक्तपरं प्रपञ्चरहितं ध्यानैकगम्यं विभुं तं संसारविनाशहेतुमजरं वन्दे हरिं मुक्तिदम् ॥ *
पूर्वकालकी बात है, परम पुण्यमय पवित्र नैमिषारण्यक्षेत्र बड़ा मनोहर जान पड़ता था । वहाँ बहुत से मुनि एकत्रित हुए थे, भाँति-भाँतिके पुष्प उस स्थानकी शोभा बढ़ा रहे थे। पीपल, पारिजात, चन्दन, अगर, गुलाब तथा चम्पा आदि अन्य बहुत से वृक्ष उसकी शोभा- वृद्धिमें सहायक - हो रहे थे। भाँति-भाँतिके पक्षी, नाना प्रकारके मृगोंका झुंड, अनेक पवित्र जलाशय तथा बहुतसी बावलियाँ उस वनको विभूषित कर रही थीं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र तथा अन्य जातिके लोग भी वहाँ उपस्थित थे । ब्रह्मचारी, गृहस्थ,
* प्रत्येक कल्प और अनुकल्पमें विस्तारपूर्वक रचा हुआ यह समस्त मायामय जगत् जिनसे प्रकट होता, जिनमें स्थित रहता और अन्तकालमें जिनके भीतर पुनः लीन हो जाता है, जो इस दृश्य - प्रपञ्चसे सर्वथा पृथक् हैं, जिनका ध्यान करके मुनिजन सनातन मोक्षपद प्राप्त कर लेते हैं, उन नित्य, निर्मल, निश्चल तथा व्यापक भगवान् पुरुषोत्तम (जगन्नाथजी) को मैं प्रणाम करता हूँ। जो शुद्ध, आकाशके समान निर्लेप, नित्यानन्दमय, सदा प्रसन्न, निर्मल, सबके स्वामी, निर्गुण, व्यक्त और अव्यक्तसे परे, प्रपञ्चसे रहित, एकमात्र ध्यानमें ही अनुभव करनेयोग्य तथा व्यापक हैं, समाधिकालमें विद्वान् पुरुष इसी रूपमें जिनका ध्यान करते हैं, जो संसारकी उत्पत्ति और विनाशके एकमात्र कारण हैं, जरा अवस्था जिनका स्पर्श भी नहीं कर सकती तथा जो मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं, उन भगवान् श्रीहरिकी मैं वन्दना करता हूँ। | ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ नैमिषारण्यमें सूतजीका आगमन, पुराणका आरम्भ तथा सृष्टिका वर्णन वानप्रस्थ और संन्यासी - सभी जुटे हुए थे । झुंडकी-झुंड गौएँ उस वनकी शोभा बढ़ा रही थीं। नैमिषारण्यवासी मुनियोंका द्वादशवार्षिक यज्ञ आरम्भ था । जौ, गेहूँ, चना, उड़द, मूँग और तिल आदि पवित्र अन्नोंसे यज्ञमण्डप सुशोभित था । वहाँ होमकुण्डमें अग्निदेव प्रज्वलित थे और आहुतियाँ डाली जा रही थीं। उस महायज्ञमें सम्मिलित होनेके लिये बहुत से मुनि और ब्राह्मण अन्य स्थानोंसे आये। स्थानीय महर्षियोंने उन सबका यथायोग्य सत्कार किया। ऋत्विजोंसहित वे सब लोग जब आरामसे बैठ गये, तब परम बुद्धिमान् लोमहर्षण सूतजी वहाँ पधारे। उन्हें देखकर मुनिवरोंको बड़ी प्रसन्नता हुई, उन सबने उनका यथावत् सत्कार किया। सूतजी भी उनके प्रति आदरका भाव प्रकट करके एक श्रेष्ठ आसनपर विराजमान हुए। उस समय सब ब्राह्मण सूतजीके साथ वार्तालाप करने लगे। बातचीतके अन्तमें सबने व्यास-शिष्य लोमहर्षणजीसे अपना संदेह पूछा । यस्मात्सर्वमिदं प्रपञ्चरचितं मायाजगज्जायते यसिंमस्तिष्ठति याति चान्तसमये कल्पानुकल्पे पुनः । यं ध्यात्वा मुनयः प्रपञ्चरहितं विन्दन्ति मोक्षं ध्रुवं तं वन्दे पुरुषोत्तमाख्यममलं नित्यं विभुं निश्चलम् यं ध्यायन्ति बुधाः समाधिसमये शुद्धं वियत्संनिभं नित्यानन्दमयं प्रसन्नममलं सर्वेश्वरं निर्गुणम् । व्यक्ताव्यक्तपरं प्रपञ्चरहितं ध्यानैकगम्यं विभुं तं संसारविनाशहेतुमजरं वन्दे हरिं मुक्तिदम् ॥ * पूर्वकालकी बात है, परम पुण्यमय पवित्र नैमिषारण्यक्षेत्र बड़ा मनोहर जान पड़ता था । वहाँ बहुत से मुनि एकत्रित हुए थे, भाँति-भाँतिके पुष्प उस स्थानकी शोभा बढ़ा रहे थे। पीपल, पारिजात, चन्दन, अगर, गुलाब तथा चम्पा आदि अन्य बहुत से वृक्ष उसकी शोभा- वृद्धिमें सहायक - हो रहे थे। भाँति-भाँतिके पक्षी, नाना प्रकारके मृगोंका झुंड, अनेक पवित्र जलाशय तथा बहुतसी बावलियाँ उस वनको विभूषित कर रही थीं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र तथा अन्य जातिके लोग भी वहाँ उपस्थित थे । ब्रह्मचारी, गृहस्थ, * प्रत्येक कल्प और अनुकल्पमें विस्तारपूर्वक रचा हुआ यह समस्त मायामय जगत् जिनसे प्रकट होता, जिनमें स्थित रहता और अन्तकालमें जिनके भीतर पुनः लीन हो जाता है, जो इस दृश्य - प्रपञ्चसे सर्वथा पृथक् हैं, जिनका ध्यान करके मुनिजन सनातन मोक्षपद प्राप्त कर लेते हैं, उन नित्य, निर्मल, निश्चल तथा व्यापक भगवान् पुरुषोत्तम को मैं प्रणाम करता हूँ। जो शुद्ध, आकाशके समान निर्लेप, नित्यानन्दमय, सदा प्रसन्न, निर्मल, सबके स्वामी, निर्गुण, व्यक्त और अव्यक्तसे परे, प्रपञ्चसे रहित, एकमात्र ध्यानमें ही अनुभव करनेयोग्य तथा व्यापक हैं, समाधिकालमें विद्वान् पुरुष इसी रूपमें जिनका ध्यान करते हैं, जो संसारकी उत्पत्ति और विनाशके एकमात्र कारण हैं, जरा अवस्था जिनका स्पर्श भी नहीं कर सकती तथा जो मोक्ष प्रदान करनेवाले हैं, उन भगवान् श्रीहरिकी मैं वन्दना करता हूँ। |
राजनीति केमेस्ट्री नहीं है बल्कि समाज को बदलने और प्रगति के नए मूल्यों को स्थापित करने का वैचारिक संघर्ष है. हालांकि आज के दोर में राजनीति मात्र चुनावी कामयाबी का ही आधार बन कर रह गया है. अमित शाह चुनावी कामयाबी के अनुभवों के आधार पर भले ही कहें कि राजनीति फिजिक्स नहीं कमेस्ट्री है. लेकिन समस्याओं से निपटने की सकारात्मक पहल के बजाय केवल परसेप्सन की राजनीति एक अंधी खाई भर बन कर रह जाती है. दुनिया के किसी भी देश में चुनाव केवल सामाजिक केमेस्ट्री के आधार पर चुनावी कामयाबी का मंत्र नहीं माना जाता है. 2014 के बाद अनेक राज्यों की कामयाबियों में सामाजिक इंजीनियरिंग और जातियों की गोलबंदी ने भले ही भाजपा के धार्मिक सांप्रदायिक राष्ट्रवाद के घालमेल को कामयाब बना दिया हो, लेकिन इससे न तो आर्थिक मसले हल हुए और न ही सामाजिक विषमता को कम करने की दिशा में सार्थक सफलता हासिल की जा सकी. उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब सहित दो अन्य राज्यों के चुनाव को ध्यान मे रख कर अमित शाह ने एक बार फिर राजनीतिक कमेस्ट्री के सहारे कामयाबी का सूत्र भारतीय जनता पार्टी को दिया है. इसका मतलब है कि 2014 की तरह के प्रयोग को दुहराने का सूत्र. लेकिन 2014 और 2019 की बड़ी सफलताओं के बावजूद किसानों के आंदोलन ने भारतीय राजनीति में प्रतिरोध और नैतिक जीत का एक ऐसा सूत्र पेश कर दिया है जिससे किसी भी सामाजिक गठबंधन को बड़ी चुनौती हासिल हो रही है.
चुनावों को देखते हुए ही तीन कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद किसानों के डटे रहने से केंद्र सरकार हतप्रभ है. एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग से केंद्र की सरकार दुविधा में है. एमएसपी केवल पंजाब,पश्चिमी उत्तर प्रदेश ओर हरियाण की ही मांग नहीं है बल्कि देश के अधिकांश किसान एमएसपी की मांग करते रहे हैं. नीतीश कुमार ने 2008 में बिहार से पंजबा की तरह सरकारी खरीद की प्रणाली को खत्म कर खेती को बाजार पर निर्भर कर दिया था. इसकी कीमत बिहार के किसान चुकाते रहे हैं. बिहार के किसान पंजाब के व्यापाररियों को अपनी उपज बेचते रहे हैं. यही उपज पंजाब में एमएसपी की मंडियों में ऊंचे कीमतों पर बेचा जाता रहा है. लेकिन बावजूद इसके नीतीश भाजपा गठबंधन बिहार की राजनीतिक कमेस्ट्री के बतौर कामयाब रहा. जिन राज्यों में किसानों के हालात बिहार जैसे हैं उनके लिए भले ही तीन कृषि कानूनों को ले कर थोड़ी उदासीनता दिखी हो, लेकिन एमएसपी का सवाल उनके लिए भी महत्वूपर्ण है.
चुनावी केमेस्ट्री की बात करने वालों के लिए किसानों की यही मांग उनके सोशल इंजीनिरिंग के सांप्रदायिक घालमेल की राह में दिक्कतें खड़ी कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का आजमाया हुआ फार्मूला है कि चुनावी राज्यों में वे न खूब दौरा करते हैं बल्कि शिलान्यासों और योजनाओें की बाढ़ ला देते हैं. इसी साल मार्च,अप्रैल और मई में उन्होंने सबसे ज्यादा दौरा बंगाल,केरल और तमिलनाडु का किया. बंगाल फतह की महत्वकांक्षा में तो वे ताजियों के गठबंधन और विदेशी नागरिकता के सवाल को जोरशोर से खड़ा किया. लेकिन चुनावी नतीजें ठीक इसके विपरीत आए. केरल और तमिलनाडु में उनके प्रयोग को भी झटका लगा. लेकिन पुंडुचेरी में उन्हें गठबंधन सरकार बनावाने में कामयाबी मिली.
भाजपा की चुनावी कमेस्ट्री इस तरह के प्रयोग से उनकी सबसे महत्वकांक्षी बंगाल फतह की परियोजना को आधात पहुंचाया. अमित शाह के आक्रामक दौरों के बावजूद भाजपा के मकसद अधूरे ही रह गए. अमित शाह ने बंगाल की सामाजिक संरचना को बंगाल की चुनावी कमेस्ट्री में बदलने का जो प्रयोग किया उसकी नाकामयाबी के बाद मीडिया में ही खबर छपी की मोदी शाह की अपराजेय रहने की छवि को बंगाल ने करारी झटका दिया है.
उत्तर प्रदेश में भाजपा के 2014 से बने समाजिक समीकरण में बदलाव साफ दिख रहा है. अखिलेश यादव ने जिस तरह छोटे दलों, जिनका जातिगत आधार मजबूत है, का एक बड़ा अंबरेला तैयार किया है. भाजपा समाजवादी पार्टी के इस राजनीति के काट के बतौर किसानों के भीतर से आधार तैयार करने के लिए बेचैन हैं. हरियाण में हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा ने जिस तरह किसान आंदोलन को केवल जाटो का आंदोलन बना कर अन्य जातियों को एकजुट करने का प्रयास किया वह विफल हो चुका है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में वह हरियाण के इस प्रयोग को आजमाने से कतरा रही है. अमित शाह की राजनीतिक कमेस्ट्री का ही हिस्स है किसान नेताओं से बात करने का उनका प्रयास है. लेकिन किसान नेताओं ने भाजपा के राजनीतिक लुभावने माया में फंसने के बजाय एजेंडे पर ही टिके रहने का अभी तक हौसला दिखा कर चुनावी कमेस्ट्री के शाह प्रयोग के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे हालात में अमित शाह की सबसे बड़ी परीक्षा यूपी के मैदानों में राजनीतिक कमेस्ट्री के नए सूत्र की तलाश की होगी. राजनीति तो प्रगति और बदलाव का अपना मकसद खो चुकी है.
| राजनीति केमेस्ट्री नहीं है बल्कि समाज को बदलने और प्रगति के नए मूल्यों को स्थापित करने का वैचारिक संघर्ष है. हालांकि आज के दोर में राजनीति मात्र चुनावी कामयाबी का ही आधार बन कर रह गया है. अमित शाह चुनावी कामयाबी के अनुभवों के आधार पर भले ही कहें कि राजनीति फिजिक्स नहीं कमेस्ट्री है. लेकिन समस्याओं से निपटने की सकारात्मक पहल के बजाय केवल परसेप्सन की राजनीति एक अंधी खाई भर बन कर रह जाती है. दुनिया के किसी भी देश में चुनाव केवल सामाजिक केमेस्ट्री के आधार पर चुनावी कामयाबी का मंत्र नहीं माना जाता है. दो हज़ार चौदह के बाद अनेक राज्यों की कामयाबियों में सामाजिक इंजीनियरिंग और जातियों की गोलबंदी ने भले ही भाजपा के धार्मिक सांप्रदायिक राष्ट्रवाद के घालमेल को कामयाब बना दिया हो, लेकिन इससे न तो आर्थिक मसले हल हुए और न ही सामाजिक विषमता को कम करने की दिशा में सार्थक सफलता हासिल की जा सकी. उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब सहित दो अन्य राज्यों के चुनाव को ध्यान मे रख कर अमित शाह ने एक बार फिर राजनीतिक कमेस्ट्री के सहारे कामयाबी का सूत्र भारतीय जनता पार्टी को दिया है. इसका मतलब है कि दो हज़ार चौदह की तरह के प्रयोग को दुहराने का सूत्र. लेकिन दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस की बड़ी सफलताओं के बावजूद किसानों के आंदोलन ने भारतीय राजनीति में प्रतिरोध और नैतिक जीत का एक ऐसा सूत्र पेश कर दिया है जिससे किसी भी सामाजिक गठबंधन को बड़ी चुनौती हासिल हो रही है. चुनावों को देखते हुए ही तीन कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद किसानों के डटे रहने से केंद्र सरकार हतप्रभ है. एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग से केंद्र की सरकार दुविधा में है. एमएसपी केवल पंजाब,पश्चिमी उत्तर प्रदेश ओर हरियाण की ही मांग नहीं है बल्कि देश के अधिकांश किसान एमएसपी की मांग करते रहे हैं. नीतीश कुमार ने दो हज़ार आठ में बिहार से पंजबा की तरह सरकारी खरीद की प्रणाली को खत्म कर खेती को बाजार पर निर्भर कर दिया था. इसकी कीमत बिहार के किसान चुकाते रहे हैं. बिहार के किसान पंजाब के व्यापाररियों को अपनी उपज बेचते रहे हैं. यही उपज पंजाब में एमएसपी की मंडियों में ऊंचे कीमतों पर बेचा जाता रहा है. लेकिन बावजूद इसके नीतीश भाजपा गठबंधन बिहार की राजनीतिक कमेस्ट्री के बतौर कामयाब रहा. जिन राज्यों में किसानों के हालात बिहार जैसे हैं उनके लिए भले ही तीन कृषि कानूनों को ले कर थोड़ी उदासीनता दिखी हो, लेकिन एमएसपी का सवाल उनके लिए भी महत्वूपर्ण है. चुनावी केमेस्ट्री की बात करने वालों के लिए किसानों की यही मांग उनके सोशल इंजीनिरिंग के सांप्रदायिक घालमेल की राह में दिक्कतें खड़ी कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का आजमाया हुआ फार्मूला है कि चुनावी राज्यों में वे न खूब दौरा करते हैं बल्कि शिलान्यासों और योजनाओें की बाढ़ ला देते हैं. इसी साल मार्च,अप्रैल और मई में उन्होंने सबसे ज्यादा दौरा बंगाल,केरल और तमिलनाडु का किया. बंगाल फतह की महत्वकांक्षा में तो वे ताजियों के गठबंधन और विदेशी नागरिकता के सवाल को जोरशोर से खड़ा किया. लेकिन चुनावी नतीजें ठीक इसके विपरीत आए. केरल और तमिलनाडु में उनके प्रयोग को भी झटका लगा. लेकिन पुंडुचेरी में उन्हें गठबंधन सरकार बनावाने में कामयाबी मिली. भाजपा की चुनावी कमेस्ट्री इस तरह के प्रयोग से उनकी सबसे महत्वकांक्षी बंगाल फतह की परियोजना को आधात पहुंचाया. अमित शाह के आक्रामक दौरों के बावजूद भाजपा के मकसद अधूरे ही रह गए. अमित शाह ने बंगाल की सामाजिक संरचना को बंगाल की चुनावी कमेस्ट्री में बदलने का जो प्रयोग किया उसकी नाकामयाबी के बाद मीडिया में ही खबर छपी की मोदी शाह की अपराजेय रहने की छवि को बंगाल ने करारी झटका दिया है. उत्तर प्रदेश में भाजपा के दो हज़ार चौदह से बने समाजिक समीकरण में बदलाव साफ दिख रहा है. अखिलेश यादव ने जिस तरह छोटे दलों, जिनका जातिगत आधार मजबूत है, का एक बड़ा अंबरेला तैयार किया है. भाजपा समाजवादी पार्टी के इस राजनीति के काट के बतौर किसानों के भीतर से आधार तैयार करने के लिए बेचैन हैं. हरियाण में हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा ने जिस तरह किसान आंदोलन को केवल जाटो का आंदोलन बना कर अन्य जातियों को एकजुट करने का प्रयास किया वह विफल हो चुका है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में वह हरियाण के इस प्रयोग को आजमाने से कतरा रही है. अमित शाह की राजनीतिक कमेस्ट्री का ही हिस्स है किसान नेताओं से बात करने का उनका प्रयास है. लेकिन किसान नेताओं ने भाजपा के राजनीतिक लुभावने माया में फंसने के बजाय एजेंडे पर ही टिके रहने का अभी तक हौसला दिखा कर चुनावी कमेस्ट्री के शाह प्रयोग के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे हालात में अमित शाह की सबसे बड़ी परीक्षा यूपी के मैदानों में राजनीतिक कमेस्ट्री के नए सूत्र की तलाश की होगी. राजनीति तो प्रगति और बदलाव का अपना मकसद खो चुकी है. |
न्यूयॉर्क : क्या कोई महिला एक बच्चे को जन्म देने के दौरान मेकअप करने के बारे में सोच सकती है और वो भी अस्पताल के बिस्तर पर। दुनिया की हर महिला प्रसव पीड़ा के डर से तड़प उठती है, लेकिन न्यूयॉर्क की एक प्रोफेशनल मेकअप ऑर्टिस्ट ने अपने बच्चे को जन्म देने से पहले खुद का मेकअप किया।
महिला ने लेबर रुम में अपना मेकअप किया, तो सभी चौंक गए। 27 साल की अलहा मजीद का ख्वाब था कि वो ग्लैमरस अंदाज में अपने बच्चे को जन्म दे। उसने 15 फरवरी को अपनी बेटी सोफिया को जन्म दिया। मेकअप करने के बाद और बच्चे को जन्म देने से पहले मजीद ने अपने कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की।
फोटो के साथ कैप्शन में मजीद ने लिखा कि तीन सप्ताह पहले मैं अपनी प्रिंसेस को दुनिया में लाने के लिए तैयार हो रही थीष हाँ मैं जब लेबर रुम में थी, तो अपना मेकअप कर रही थी। उन्होने बताया कि जब मुझे तेज दर्द होता था, तब मैं रुक जाती थी, लेकिन जैसे ही दर्द थोड़ा कम होता था, मैं फिर से मेकअप करने लगती थी।
मैं हॉस्पिटल बैग में केवल अपने पसंदीदा मेकअप प्रोडक्ट लेकर आई थी। अलहा ने हॉस्पिटल आने से पहले अपने बैग में मिंक आइलैशेस, काउंटरिंग किट, लिक्विड लिपस्टिक, ब्रो पोमेड और कई मेकअप ब्रेशेस रखे थे। एक अन्य तस्वीर में ये सारे मेकअप के सामान हॉस्पिटल बेड पर लेट हुई अलहा के आसपास नजर आ रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में उनके पति मेकअप ब्रश पकड़े नजर आ रहे हैं जब अलहा को तेज दर्द हुआ। वे मानती हैं कि वह अपनी बेटी का स्वागत अपने 'ग्लैम' अवतार में करना चाहती थी।
| न्यूयॉर्क : क्या कोई महिला एक बच्चे को जन्म देने के दौरान मेकअप करने के बारे में सोच सकती है और वो भी अस्पताल के बिस्तर पर। दुनिया की हर महिला प्रसव पीड़ा के डर से तड़प उठती है, लेकिन न्यूयॉर्क की एक प्रोफेशनल मेकअप ऑर्टिस्ट ने अपने बच्चे को जन्म देने से पहले खुद का मेकअप किया। महिला ने लेबर रुम में अपना मेकअप किया, तो सभी चौंक गए। सत्ताईस साल की अलहा मजीद का ख्वाब था कि वो ग्लैमरस अंदाज में अपने बच्चे को जन्म दे। उसने पंद्रह फरवरी को अपनी बेटी सोफिया को जन्म दिया। मेकअप करने के बाद और बच्चे को जन्म देने से पहले मजीद ने अपने कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की। फोटो के साथ कैप्शन में मजीद ने लिखा कि तीन सप्ताह पहले मैं अपनी प्रिंसेस को दुनिया में लाने के लिए तैयार हो रही थीष हाँ मैं जब लेबर रुम में थी, तो अपना मेकअप कर रही थी। उन्होने बताया कि जब मुझे तेज दर्द होता था, तब मैं रुक जाती थी, लेकिन जैसे ही दर्द थोड़ा कम होता था, मैं फिर से मेकअप करने लगती थी। मैं हॉस्पिटल बैग में केवल अपने पसंदीदा मेकअप प्रोडक्ट लेकर आई थी। अलहा ने हॉस्पिटल आने से पहले अपने बैग में मिंक आइलैशेस, काउंटरिंग किट, लिक्विड लिपस्टिक, ब्रो पोमेड और कई मेकअप ब्रेशेस रखे थे। एक अन्य तस्वीर में ये सारे मेकअप के सामान हॉस्पिटल बेड पर लेट हुई अलहा के आसपास नजर आ रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में उनके पति मेकअप ब्रश पकड़े नजर आ रहे हैं जब अलहा को तेज दर्द हुआ। वे मानती हैं कि वह अपनी बेटी का स्वागत अपने 'ग्लैम' अवतार में करना चाहती थी। |
जीन प्रति कसेल (फोटो पेज पर दिखाए जाते हैं) - एक लोकप्रिय फ्रांसीसी अभिनेता निर्देशक और पटकथा लेखक। पेरिस थियेटर और फिल्म कला में सबसे अधिक सम्मान मंत्रियों में से एक। यह व्यापक रूप से इस तरह के पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण "ओरिएंट एक्सप्रेस हत्या," "" "यंग इंडियाना जोन्स के एडवेंचर्स," के रूप में फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है "Fantagiro, या गोल्डन रोज़ की गुफा। "
अभिनेता पेरिस में सितम्बर 27, 1932 जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि टेलीविजन में अपनी कलात्मक कैरियर शुरू किया, छोटे-छोटे किरदारों में अभिनय। जीन प्रति कसेल - एक बहुमुखी अभिनेता है, लेकिन वह एक लंबे समय के फ्रेंच सिनेमा के बड़े परदे में तोड़ने में असफल रहा था। यह एक प्रसिद्ध निर्देशक Filippom डी ब्रोका, जो उनकी फिल्म "Candide", वॉल्टेयर की क्लासिक काम करता है के फिल्म रूपांतरण में मुख्य भूमिका के लिए अट्ठाईस अभिनेता के लिए आमंत्रित किया के साथ एक बैठक करने के लिए मदद की।
1958 में जारी किया गया चित्र के बाद, जीन प्रति कसेल जाना जाने लगा, और अपने कैरियर उड़ान भरी। जब वह फ्रेंच राजा खेला यूरोपीय दर्शकों अभिनेता सीखा लुईस तेरहवें में "तीन Musketeers," रिचर्ड लेस्टर द्वारा निर्देशित। जीन प्रति कसेल भी फिल्म द्वारा निर्देशित "पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण" कहा जाता है की वजह से लोकप्रिय हो गया है लुईसा Bunyuelya। यह नाटकीय मकसद के साथ एक कॉमेडी भूमिका थी।
धीरे धीरे, जीन प्रति कसेल, जिनमें से तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है भागीदारी के साथ फिल्मों, यह तेजी से नायक-प्रेमी की भूमिका निभाते हैं बन गया है। यह थोड़ा अजीब लग रहा था, क्योंकि अभिनेता कम था, और ऑपरेटरों, एक निश्चित परिप्रेक्ष्य में दृश्यों को फिल्माना किसी भी तरह एक अभिनेत्री के एक चरित्र मालकिन खेलने के साथ यह समानता थी।
फिर भी, महिला साथियों, जीन पियरे जैसे जाने-माने फिल्म स्टार थे Bridzhit बारदो, Dzhin Siberg, कैटरीन डेनेव और मारी Dyubua। आमतौर पर, फिल्मों, जिसमें जीन प्रति कसेल खेला प्रेमी, संगीत शैली या संगीतमय कॉमेडी में मंचन किया, और यह कुछ हद तक अपने छोटे कद का आभास कम है, और कभी कभी भी चरित्र हास्य जोड़ें।
अभिनेता अच्छी तरह से नृत्य की कला जानता था, और उसकी भागीदारी के साथ सबसे संगीत में, जीन पियरे नृत्य पार्टी का प्रदर्शन किया। उनकी मूर्ति और रोल मॉडल दिग्गज अमेरिकी नर्तकी और अभिनेता फ्रेड एस्टर था।
अपने कैरियर के दौरान, Cassel से अधिक साठ फीचर फिल्मों, जिनमें से कई फ्रेंच सिनेमा का स्वर्ण निधि में प्रवेश में दिखाई दिया है। नीचे अपनी भागीदारी के साथ फिल्मों का एक नमूना सूची हैः
- "बीसवीं सदी में Candide" (1960), एक चरित्र कैंडिडा।
- "फिगारो के विवाह" (1961), ली फिगारो।
- "आर्सेन Lyupen बनाम Arsena Lyupena" (1962), ल्यूपिन की भूमिका।
- "Cyrano और डी 'Artagnan" (1964), चरित्र डी' Artagnan।
- "उनकी उड़ान मशीनों में वे शानदार पुरुषों" (1965), पियरे डूबायोस की भूमिका।
- "प्यार का पर्व" (1965), कॉर्पोरल Zholikera की भूमिका।
- "पेरिस जलन है? " (1966), चरित्र लेफ्टिनेंट हेनरी काशनर।
- "कंजूस" (1966), Cleanthes की भूमिका।
- "अक्टूबर क्रांति" (1967), बयान का चरित्र।
- "ब्रेक" (1970), पोल तोमा।
- "गुड़िया और भालू" (1970), गैस्पर की भूमिका।
- "पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण" (1973), हेनरी सेनेसचल की भूमिका।
- (1974), प्रति Mishel एक चरित्र गाइड "ओरिएंट एक्सप्रेस मर्डर"।
- "अन्ना तिथि" (1978), डेनियल की भूमिका।
- "वारबर्ग, प्रभाव का एक आदमी" (1992), चरित्र जॉर्ज Wartburg पुराने।
- "उच्च फैशन" (1994), ओलिवर डे ला फॉनटेन की भूमिका।
- "क्रिमसन नदियों" (2000), चरित्र डॉ बर्नार्ड Cherneze।
- "मिशेल वालायान" (2003), Anri Valyana की भूमिका।
- "डाइविंग बेल और तितली" (2007), एक चरित्र लुसियन।
जीन पियरे के पहले ही उल्लेख फिल्मों के अलावा कई प्रस्तुतियों, फिल्म रूपांतरण, टीवी शो में अभिनय किया, छोटी भूमिकाएं है, जो, हालांकि, आभारी दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ी खेल रहा है। ये इस तरह के "कम भरोसा" "समारोह" के रूप में अलग-अलग वर्षों की फिल्मों, थे, "Manzhklu", "ऐलिस", "जीवन चलता रहता है," "छाया की सेना", "कोमल लेडी", "पार्टनर", "उच्च बेवफाई", " औरत ब्रह्मस की तरह चला गया "," थोड़ा सोचा "," क्या आप? "" नेपोलियन द्वितीय "," हँसी, "" प्यार का खेल "," धर्ममाता चार्ली "," रात और अराजकता, "" थक "," चांद पर चलना और एक घोड़ा "," आकस्मिक दुर्भाग्य "," यह तुम्हारी बहन? "" पवित्र युवा, "" पैदल, कार से घोड़े की पीठ पर है, "," त्वचा भालू "" हैप्पी जर्नी। "
जीन प्रति कसेल अपने जीवन भर पत्रिकाएँ, और काफी सम्मानजनक प्रकाशनों के रूप में संवाददाताओं का ध्यान आकर्षित किया। उसके कारनामों की विविधता अद्भुत है। अच्छा, महिला सेक्स के लिए अपने उदासीनता का एक शानदार उदाहरण फ्रेंच पायलट कॉमेडी फिल्म "उनके उड़ान मशीनों में वे शानदार पुरुषों", जहां वह एक खूबसूरत औरत याद करते हैं कभी नहीं में पियरे डूबायोस की भूमिका के रूप में काम कर सकते हैं, और वे सदा ही बदले में उसे करने के लिए जवाब।
जीन प्रति कसेल, जिनकी निजी जिंदगी प्रसिद्ध फिल्म में के रूप में एक ही तरह से लगभग खड़े है, हमेशा प्यार में किया गया है, जुनून और कुछ कामुक योजनाओं का पूरा। अभिनेता आधिकारिक तौर पर एक बार शादी की है, और कितने पत्नियों वह वास्तव में था, इतिहास खामोश है।
जीन पियरे, तीन बच्चे हैं कुछ के लिए जाना जाता है। ज्येष्ठ पुत्र, विन्सेन्ट अपने पिता का पालन किया और एक प्रसिद्ध अभिनेता बन गए। यह भी निष्पक्ष सेक्स के प्रति उदासीन है। सुंदर लड़का विन्सेंट प्रसिद्ध इतालवी अभिनेत्री और मॉडल मोनिका बेलुची से शादी की थी, लेकिन 2013 में शादी के चौदह वर्ष के बाद, कुछ टूट गया।
Kasselya मटीस के बीच पुत्र मामूली विपरीत, वह था सब में, पटकथाओं लिखते हैं और सक्रिय रूप से हटा दिया जाता है व्यवहार करता है। सेसिल की बेटी भी जनता की राय हलचल करने की कोशिश कर रहा है, वह नाटकीय अभिनेत्री का एक रास्ता चुना है।
फ्रांसीसी सिनेमा के सबसे प्रमुख और करिश्माई अभिनेताओं में से एक, चौहत्तर वर्ष अप्रैल 20, 2007 की उम्र में पेरिस में मौत हो चुकी है। वह पेरिस के एक उपनगर में दफनाया गया था।
| जीन प्रति कसेल - एक लोकप्रिय फ्रांसीसी अभिनेता निर्देशक और पटकथा लेखक। पेरिस थियेटर और फिल्म कला में सबसे अधिक सम्मान मंत्रियों में से एक। यह व्यापक रूप से इस तरह के पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण "ओरिएंट एक्सप्रेस हत्या," "" "यंग इंडियाना जोन्स के एडवेंचर्स," के रूप में फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है "Fantagiro, या गोल्डन रोज़ की गुफा। " अभिनेता पेरिस में सितम्बर सत्ताईस, एक हज़ार नौ सौ बत्तीस जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि टेलीविजन में अपनी कलात्मक कैरियर शुरू किया, छोटे-छोटे किरदारों में अभिनय। जीन प्रति कसेल - एक बहुमुखी अभिनेता है, लेकिन वह एक लंबे समय के फ्रेंच सिनेमा के बड़े परदे में तोड़ने में असफल रहा था। यह एक प्रसिद्ध निर्देशक Filippom डी ब्रोका, जो उनकी फिल्म "Candide", वॉल्टेयर की क्लासिक काम करता है के फिल्म रूपांतरण में मुख्य भूमिका के लिए अट्ठाईस अभिनेता के लिए आमंत्रित किया के साथ एक बैठक करने के लिए मदद की। एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में जारी किया गया चित्र के बाद, जीन प्रति कसेल जाना जाने लगा, और अपने कैरियर उड़ान भरी। जब वह फ्रेंच राजा खेला यूरोपीय दर्शकों अभिनेता सीखा लुईस तेरहवें में "तीन Musketeers," रिचर्ड लेस्टर द्वारा निर्देशित। जीन प्रति कसेल भी फिल्म द्वारा निर्देशित "पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण" कहा जाता है की वजह से लोकप्रिय हो गया है लुईसा Bunyuelya। यह नाटकीय मकसद के साथ एक कॉमेडी भूमिका थी। धीरे धीरे, जीन प्रति कसेल, जिनमें से तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है भागीदारी के साथ फिल्मों, यह तेजी से नायक-प्रेमी की भूमिका निभाते हैं बन गया है। यह थोड़ा अजीब लग रहा था, क्योंकि अभिनेता कम था, और ऑपरेटरों, एक निश्चित परिप्रेक्ष्य में दृश्यों को फिल्माना किसी भी तरह एक अभिनेत्री के एक चरित्र मालकिन खेलने के साथ यह समानता थी। फिर भी, महिला साथियों, जीन पियरे जैसे जाने-माने फिल्म स्टार थे Bridzhit बारदो, Dzhin Siberg, कैटरीन डेनेव और मारी Dyubua। आमतौर पर, फिल्मों, जिसमें जीन प्रति कसेल खेला प्रेमी, संगीत शैली या संगीतमय कॉमेडी में मंचन किया, और यह कुछ हद तक अपने छोटे कद का आभास कम है, और कभी कभी भी चरित्र हास्य जोड़ें। अभिनेता अच्छी तरह से नृत्य की कला जानता था, और उसकी भागीदारी के साथ सबसे संगीत में, जीन पियरे नृत्य पार्टी का प्रदर्शन किया। उनकी मूर्ति और रोल मॉडल दिग्गज अमेरिकी नर्तकी और अभिनेता फ्रेड एस्टर था। अपने कैरियर के दौरान, Cassel से अधिक साठ फीचर फिल्मों, जिनमें से कई फ्रेंच सिनेमा का स्वर्ण निधि में प्रवेश में दिखाई दिया है। नीचे अपनी भागीदारी के साथ फिल्मों का एक नमूना सूची हैः - "बीसवीं सदी में Candide" , एक चरित्र कैंडिडा। - "फिगारो के विवाह" , ली फिगारो। - "आर्सेन Lyupen बनाम Arsena Lyupena" , ल्यूपिन की भूमिका। - "Cyrano और डी 'Artagnan" , चरित्र डी' Artagnan। - "उनकी उड़ान मशीनों में वे शानदार पुरुषों" , पियरे डूबायोस की भूमिका। - "प्यार का पर्व" , कॉर्पोरल Zholikera की भूमिका। - "पेरिस जलन है? " , चरित्र लेफ्टिनेंट हेनरी काशनर। - "कंजूस" , Cleanthes की भूमिका। - "अक्टूबर क्रांति" , बयान का चरित्र। - "ब्रेक" , पोल तोमा। - "गुड़िया और भालू" , गैस्पर की भूमिका। - "पूंजीपति वर्ग के विचारशील आकर्षण" , हेनरी सेनेसचल की भूमिका। - , प्रति Mishel एक चरित्र गाइड "ओरिएंट एक्सप्रेस मर्डर"। - "अन्ना तिथि" , डेनियल की भूमिका। - "वारबर्ग, प्रभाव का एक आदमी" , चरित्र जॉर्ज Wartburg पुराने। - "उच्च फैशन" , ओलिवर डे ला फॉनटेन की भूमिका। - "क्रिमसन नदियों" , चरित्र डॉ बर्नार्ड Cherneze। - "मिशेल वालायान" , Anri Valyana की भूमिका। - "डाइविंग बेल और तितली" , एक चरित्र लुसियन। जीन पियरे के पहले ही उल्लेख फिल्मों के अलावा कई प्रस्तुतियों, फिल्म रूपांतरण, टीवी शो में अभिनय किया, छोटी भूमिकाएं है, जो, हालांकि, आभारी दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ी खेल रहा है। ये इस तरह के "कम भरोसा" "समारोह" के रूप में अलग-अलग वर्षों की फिल्मों, थे, "Manzhklu", "ऐलिस", "जीवन चलता रहता है," "छाया की सेना", "कोमल लेडी", "पार्टनर", "उच्च बेवफाई", " औरत ब्रह्मस की तरह चला गया "," थोड़ा सोचा "," क्या आप? "" नेपोलियन द्वितीय "," हँसी, "" प्यार का खेल "," धर्ममाता चार्ली "," रात और अराजकता, "" थक "," चांद पर चलना और एक घोड़ा "," आकस्मिक दुर्भाग्य "," यह तुम्हारी बहन? "" पवित्र युवा, "" पैदल, कार से घोड़े की पीठ पर है, "," त्वचा भालू "" हैप्पी जर्नी। " जीन प्रति कसेल अपने जीवन भर पत्रिकाएँ, और काफी सम्मानजनक प्रकाशनों के रूप में संवाददाताओं का ध्यान आकर्षित किया। उसके कारनामों की विविधता अद्भुत है। अच्छा, महिला सेक्स के लिए अपने उदासीनता का एक शानदार उदाहरण फ्रेंच पायलट कॉमेडी फिल्म "उनके उड़ान मशीनों में वे शानदार पुरुषों", जहां वह एक खूबसूरत औरत याद करते हैं कभी नहीं में पियरे डूबायोस की भूमिका के रूप में काम कर सकते हैं, और वे सदा ही बदले में उसे करने के लिए जवाब। जीन प्रति कसेल, जिनकी निजी जिंदगी प्रसिद्ध फिल्म में के रूप में एक ही तरह से लगभग खड़े है, हमेशा प्यार में किया गया है, जुनून और कुछ कामुक योजनाओं का पूरा। अभिनेता आधिकारिक तौर पर एक बार शादी की है, और कितने पत्नियों वह वास्तव में था, इतिहास खामोश है। जीन पियरे, तीन बच्चे हैं कुछ के लिए जाना जाता है। ज्येष्ठ पुत्र, विन्सेन्ट अपने पिता का पालन किया और एक प्रसिद्ध अभिनेता बन गए। यह भी निष्पक्ष सेक्स के प्रति उदासीन है। सुंदर लड़का विन्सेंट प्रसिद्ध इतालवी अभिनेत्री और मॉडल मोनिका बेलुची से शादी की थी, लेकिन दो हज़ार तेरह में शादी के चौदह वर्ष के बाद, कुछ टूट गया। Kasselya मटीस के बीच पुत्र मामूली विपरीत, वह था सब में, पटकथाओं लिखते हैं और सक्रिय रूप से हटा दिया जाता है व्यवहार करता है। सेसिल की बेटी भी जनता की राय हलचल करने की कोशिश कर रहा है, वह नाटकीय अभिनेत्री का एक रास्ता चुना है। फ्रांसीसी सिनेमा के सबसे प्रमुख और करिश्माई अभिनेताओं में से एक, चौहत्तर वर्ष अप्रैल बीस, दो हज़ार सात की उम्र में पेरिस में मौत हो चुकी है। वह पेरिस के एक उपनगर में दफनाया गया था। |
कपूर खानदान की इस पीढ़ी के रणधीर कपूर और उनकी रीमा जैन जिंदा हैं। दोनों ने राजीव कपूर की प्रॉपर्टी पर अपने हक के लिए हाईकोर्ट में पीटिशन फाइल की है।
रणबीर कपूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिससे उनके फैंस की चिंता बढ़ सकती है।
बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता राजीव कपूर ने मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से 58 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुन कर बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ उठी है। बॉलीवुड के दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर अभिनेता के प्रति शोक जताया।
दिल का दौरा पड़ने पर रणधीर कपूर छोटे भाई राजीव कपूर को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टर्स ने वहां उनको मृत घोषित कर दिया। रणधीर कपूर ने भी छोटे भाई के निधन की खबर की पुष्टि की है।
| कपूर खानदान की इस पीढ़ी के रणधीर कपूर और उनकी रीमा जैन जिंदा हैं। दोनों ने राजीव कपूर की प्रॉपर्टी पर अपने हक के लिए हाईकोर्ट में पीटिशन फाइल की है। रणबीर कपूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिससे उनके फैंस की चिंता बढ़ सकती है। बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता राजीव कपूर ने मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से अट्ठावन वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुन कर बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ उठी है। बॉलीवुड के दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर अभिनेता के प्रति शोक जताया। दिल का दौरा पड़ने पर रणधीर कपूर छोटे भाई राजीव कपूर को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टर्स ने वहां उनको मृत घोषित कर दिया। रणधीर कपूर ने भी छोटे भाई के निधन की खबर की पुष्टि की है। |
इटावा (एजेंसी)। सैफई विश्वविद्यालय की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनको देख कर सभी लोग हैरान हैं। एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के करीब 150 छात्रों का सर मुंडवा दिया गया है और उन्हें सीनियर छात्रों को झुक कर सलाम करना पड़ता है। यही नहीं सभी लोगों को हॉस्टल से लाइन में कॉलेज तक जाना होता है और इसी तरह वापस भी आना होता है।
इटावा के सैफई में है ऑयुर्विज्ञान विष्वविद्यालय जिसे मिनी पीजीआई भी कहा जाता है। यहां पर एसबीबीएस की पढ़ाई होती है। नया सत्र शुरु हुआ है और इसी के साथ रैगिंग का सिलसिला भी शुरु हो गया है। फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेने वाले सभी 150 छात्रों को गंजा करा दिया गया है।
इन सभी लोगों को सड़क पर चलते हुए अगर कोई सीनियर मिल जाता है तो झुक कर सलाम करना पड़ता है। इन्हें हॉस्टल से कॉलेज तक लाइन में जाना होता है और ऐसे ही वापस आना होता है। अगर लाइन टूट जाए तो सीनियर की गालियां मिलती हैं।
इस बारे में जब सैफई विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉक्टर राजकुमार से बात की गई तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कैंपस में किसी तरह की कोई रैगिंग नहीं है। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय में रैगिंग ना हो इसके लिए तमाम इंतजाम किए गए हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि कुछ संस्कार लोगों को सिखाए जा सकते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं रैगिंग का पक्षधर नहीं हूं लेकिन कुछ चीजों में कोई बुराई नहीं होती।
| इटावा । सैफई विश्वविद्यालय की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनको देख कर सभी लोग हैरान हैं। एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के करीब एक सौ पचास छात्रों का सर मुंडवा दिया गया है और उन्हें सीनियर छात्रों को झुक कर सलाम करना पड़ता है। यही नहीं सभी लोगों को हॉस्टल से लाइन में कॉलेज तक जाना होता है और इसी तरह वापस भी आना होता है। इटावा के सैफई में है ऑयुर्विज्ञान विष्वविद्यालय जिसे मिनी पीजीआई भी कहा जाता है। यहां पर एसबीबीएस की पढ़ाई होती है। नया सत्र शुरु हुआ है और इसी के साथ रैगिंग का सिलसिला भी शुरु हो गया है। फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेने वाले सभी एक सौ पचास छात्रों को गंजा करा दिया गया है। इन सभी लोगों को सड़क पर चलते हुए अगर कोई सीनियर मिल जाता है तो झुक कर सलाम करना पड़ता है। इन्हें हॉस्टल से कॉलेज तक लाइन में जाना होता है और ऐसे ही वापस आना होता है। अगर लाइन टूट जाए तो सीनियर की गालियां मिलती हैं। इस बारे में जब सैफई विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉक्टर राजकुमार से बात की गई तो उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कैंपस में किसी तरह की कोई रैगिंग नहीं है। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय में रैगिंग ना हो इसके लिए तमाम इंतजाम किए गए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि कुछ संस्कार लोगों को सिखाए जा सकते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं रैगिंग का पक्षधर नहीं हूं लेकिन कुछ चीजों में कोई बुराई नहीं होती। |
नई दिल्ली। भारत के संतुलित रुख ने जी-20 के बाली घोषणापत्र को अंतिम रूप देने में योगदान दिया और उसने पिछले सप्ताह बेंगलुरु में हुई वित्तमंत्रियों की बैठक में इसी तरह की सहमति को प्रदर्शित करने का प्रयास किया। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सरकार ने वित्तमंत्रियों की बैठक के बयान में पक्षपातपूर्ण टिप्पणियों को खारिज कर दिया है।
उन्होंने जी-20 वित्तमंत्रियों की अध्यक्षता के संक्षिप्त विवरण और निष्कर्ष दस्तावेज पर राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और प्रेरित टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया। शनिवार को वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की जी-20 बैठक यूक्रेन में युद्ध के संदर्भ में रूस और चीन की आपत्तियों के बाद एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी करने में असमर्थ रही।
इसके बजाय वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर की 2 दिवसीय बैठक के बाद जी-20 अध्यक्ष का संक्षिप्त विवरण और निष्कर्ष दस्तावेज जारी किया गया। इसमें युद्ध पर 2 पैराग्राफ थे, लेकिन यह भी जोड़ा गया कि इस पर रूस और चीन की सहमति नहीं थी।
किसी विशिष्ट टिप्पणी का उल्लेख किए बिना एक सूत्र ने कहा कि हमने जी-20 वित्तमंत्रियों के अध्यक्ष के सारांश और निष्कर्ष दस्तावेज पर राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और प्रेरित टिप्पणियों को देखा है। तथ्य यह है कि यह भारत का सुविचारित और संतुलित रुख है जिसने बाली घोषणापत्र को तैयार करने में योगदान दिया।
सूत्र ने कहा कि विशेष रूप से प्रधानमंत्री का यह कथन कि 'यह युद्ध का युग नहीं है', बहुत प्रतिध्वनित हुआ। हमारा प्रयास जी-20 के वित्तमंत्रियों की बैठक में बाली की सहमति को प्रदर्शित करना था। यह अध्यक्ष के सारांश और परिणाम दस्तावेज में व्यक्त किया गया था।
कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने मीडिया को एक साक्षात्कार में यूक्रेन पर भारत की प्रारंभिक स्थिति की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि यह असंगत है और विशेष रूप से भारत द्वारा, रूस द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन की निंदा नहीं करने का उल्लेख किया गया।
जब जी-20 के वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक में संयुक्त विज्ञप्ति जारी करने में विफल रहने के बारे में पूछा गया तो थरूर ने यूक्रेन पर भारत की स्थिति में विरोधाभास का संकेत दिया। नवंबर में बाली में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन ने यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा था कि 'आज का युग युद्ध का नहीं है। ' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यही संदेश दिया था। । (भाषा)
| नई दिल्ली। भारत के संतुलित रुख ने जी-बीस के बाली घोषणापत्र को अंतिम रूप देने में योगदान दिया और उसने पिछले सप्ताह बेंगलुरु में हुई वित्तमंत्रियों की बैठक में इसी तरह की सहमति को प्रदर्शित करने का प्रयास किया। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सरकार ने वित्तमंत्रियों की बैठक के बयान में पक्षपातपूर्ण टिप्पणियों को खारिज कर दिया है। उन्होंने जी-बीस वित्तमंत्रियों की अध्यक्षता के संक्षिप्त विवरण और निष्कर्ष दस्तावेज पर राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और प्रेरित टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया। शनिवार को वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की जी-बीस बैठक यूक्रेन में युद्ध के संदर्भ में रूस और चीन की आपत्तियों के बाद एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी करने में असमर्थ रही। इसके बजाय वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर की दो दिवसीय बैठक के बाद जी-बीस अध्यक्ष का संक्षिप्त विवरण और निष्कर्ष दस्तावेज जारी किया गया। इसमें युद्ध पर दो पैराग्राफ थे, लेकिन यह भी जोड़ा गया कि इस पर रूस और चीन की सहमति नहीं थी। किसी विशिष्ट टिप्पणी का उल्लेख किए बिना एक सूत्र ने कहा कि हमने जी-बीस वित्तमंत्रियों के अध्यक्ष के सारांश और निष्कर्ष दस्तावेज पर राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और प्रेरित टिप्पणियों को देखा है। तथ्य यह है कि यह भारत का सुविचारित और संतुलित रुख है जिसने बाली घोषणापत्र को तैयार करने में योगदान दिया। सूत्र ने कहा कि विशेष रूप से प्रधानमंत्री का यह कथन कि 'यह युद्ध का युग नहीं है', बहुत प्रतिध्वनित हुआ। हमारा प्रयास जी-बीस के वित्तमंत्रियों की बैठक में बाली की सहमति को प्रदर्शित करना था। यह अध्यक्ष के सारांश और परिणाम दस्तावेज में व्यक्त किया गया था। कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने मीडिया को एक साक्षात्कार में यूक्रेन पर भारत की प्रारंभिक स्थिति की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि यह असंगत है और विशेष रूप से भारत द्वारा, रूस द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन की निंदा नहीं करने का उल्लेख किया गया। जब जी-बीस के वित्तमंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक में संयुक्त विज्ञप्ति जारी करने में विफल रहने के बारे में पूछा गया तो थरूर ने यूक्रेन पर भारत की स्थिति में विरोधाभास का संकेत दिया। नवंबर में बाली में जी-बीस नेताओं के शिखर सम्मेलन ने यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा था कि 'आज का युग युद्ध का नहीं है। ' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यही संदेश दिया था। । |
Loksabha Election 2019 में पंजाब कांग्रेस के मिशन 13 को नाराज नेता झटका दे सकते हैं। पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। कांग्रेस के 'मिशन-13' की राह में अड़चनें आना शुरू हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस बठिंडा, फिरोजपुर, संगरूर, खडूर साहिब जैसी सीटों पर अपने प्रत्याशी का चयन नहीं कर पा रही है, वहीं जालंधर, होशियारपुर और पटियाला में वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी भी सामने आने लगी है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष चौधरी खुल कर पार्टी व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ आ गई हैं। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व मंत्री व सांसद मोहिंदर सिंह केपी के तेवर भी बदल गए हैं।
एक तरफ छह सीटों पर टिकट की घोषणा के साथ ही पार्टी में सीनियर नेताओं की नाराजगी उभरने लगी है। दूसरी तरफ कांग्रेस को अभी सात सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करना बाकी है। वहीं, पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि पटियाला में परनीत कौर को टिकट देने के बाद नाराजगी के स्वर उठे हैं। अमलोह से विधायक रणदीप सिंह नाभा ने पटियाला से टिकट की मांग की थी।
चार बार के विधायक रहे नाभा मंत्री न बनाए जाने के कारण पहले से ही काफी नाराज चल रहे थे। परनीत कौर को टिकट मिलने के बाद यह नाराजगी और बढ़ गई है। 2002 और 2007 में नाभा से विधायक रहे रणदीप सिंह ने नाभा में परनीत कौर का प्रचार करने से मना कर दिया है। क्योंकि, उनका हलका अमलोह फतेहगढ़ साहिब लोकसभा हलके में आता है, जहां से कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत हैं।
होशियारपुर में टिकट कटने के बाद पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष चौधरी ने सीधे-सीधे कैप्टन अमङ्क्षरदर सिंह पर ही आरोप लगा दिए हैं कि उनकी वजह से उनकी टिकट कटी है। जालंधर से टिकट मांग रहे मोहिंदर सिंह केपी भी काफी नाराज हैं। अहम पहलू यह है कि कांग्रेस में नाराज नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन पार्टी के पास नेताओं की नाराजगी दूर करने की फुर्सत नहीं है। पार्टी अभी टिकट बंटवारे में व्यस्त है। ऐसे में कांग्रेस की मिशन-१३ की राह आसान नहीं होगी।
| Loksabha Election दो हज़ार उन्नीस में पंजाब कांग्रेस के मिशन तेरह को नाराज नेता झटका दे सकते हैं। पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। कांग्रेस के 'मिशन-तेरह' की राह में अड़चनें आना शुरू हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस बठिंडा, फिरोजपुर, संगरूर, खडूर साहिब जैसी सीटों पर अपने प्रत्याशी का चयन नहीं कर पा रही है, वहीं जालंधर, होशियारपुर और पटियाला में वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी भी सामने आने लगी है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष चौधरी खुल कर पार्टी व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ आ गई हैं। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व मंत्री व सांसद मोहिंदर सिंह केपी के तेवर भी बदल गए हैं। एक तरफ छह सीटों पर टिकट की घोषणा के साथ ही पार्टी में सीनियर नेताओं की नाराजगी उभरने लगी है। दूसरी तरफ कांग्रेस को अभी सात सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करना बाकी है। वहीं, पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि पटियाला में परनीत कौर को टिकट देने के बाद नाराजगी के स्वर उठे हैं। अमलोह से विधायक रणदीप सिंह नाभा ने पटियाला से टिकट की मांग की थी। चार बार के विधायक रहे नाभा मंत्री न बनाए जाने के कारण पहले से ही काफी नाराज चल रहे थे। परनीत कौर को टिकट मिलने के बाद यह नाराजगी और बढ़ गई है। दो हज़ार दो और दो हज़ार सात में नाभा से विधायक रहे रणदीप सिंह ने नाभा में परनीत कौर का प्रचार करने से मना कर दिया है। क्योंकि, उनका हलका अमलोह फतेहगढ़ साहिब लोकसभा हलके में आता है, जहां से कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत हैं। होशियारपुर में टिकट कटने के बाद पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष चौधरी ने सीधे-सीधे कैप्टन अमङ्क्षरदर सिंह पर ही आरोप लगा दिए हैं कि उनकी वजह से उनकी टिकट कटी है। जालंधर से टिकट मांग रहे मोहिंदर सिंह केपी भी काफी नाराज हैं। अहम पहलू यह है कि कांग्रेस में नाराज नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन पार्टी के पास नेताओं की नाराजगी दूर करने की फुर्सत नहीं है। पार्टी अभी टिकट बंटवारे में व्यस्त है। ऐसे में कांग्रेस की मिशन-तेरह की राह आसान नहीं होगी। |
आाठव माल मे हो यज्ञोपवीत संस्कार कर दिया गया था। अब तक वेदोपनिषद् का अधिकांश भाग उसे कंठस्य हो गया होगा ! संस्कृत का अध्ययन भी ठीक तरह से चलता होगा ! मैं भी पड़ती तो अब तक गीता-उपनिषदो को कटस्थ कर सकती थी। लेकिन उस और आकर्षण नहीं था। चीनी की बुद्धि परिपक्व होने के पूर्व ही उसके दादा ने उसे पढाया है। शायद वह हाईस्कूल में जाने लगा होगा ! रोज कम-से-कम एक बार उसे चीनी को याद ती माने एकाकी भावों को, पुत्र के कल्पित चिन के साथ लीन हो कुछ समय के लिए अपने आपको भुला बैठनो ।
पुन उनमे माँ बनने के चिन्ह दिखाई पड़ने लगे। रात्र सुन हो उठा। विवाहित जीवन के दो साल बाद वह पिता बनने वाला था, किन्तु थानाम बदल गई थी। दूसरी बार भी असफलता पत्नी पुन माँ बनने वाली है। दोपत्नी का हाथ पकड़कर बोला -"चली, लेडी डॉक्टर के पास चलें। इन बार हर सप्ताह जाँच करानी चाहिए और काफी सतर्कता बरतना चाहिए ।"
लेडी डॉक्टर ने हायती को जांच की, कैल्शियम तेन की सलाह दी। कुछ गोनियो पौरानिको के नाम लिम्व दिये। अधिवन अधिक दूध, फल लेने की मनाह दी। साथ ही महीने में एक बार रक्त परीक्षा और मून परीक्षा नया नजाह में एक वार जांच के निमित्ताने को कहा। कात्यायनी इन सलादो के अनुसार चलने लगी। चार माह वा गर्भ हो गया था । शारीरिक निर्बलता एवं प्रातस्य छोड़ दें तो वह
थी। अगले दो महीनो में उसका शरीर और नमक उठा । लाललान ग्रामी से लद प्राम्र- वृक्ष की तरह नजण थे। प्रश्चित की लहूलहाती फसल कार्तिक में जिस तरह फलों से लदकर भारी हो जाती है, उमी तरह कात्यायनी भारी कदमी में चलती थी। चलती तो तलवो में रक्त फूट पडने का अदेशा होता । जीव-विज्ञान का चैतन्य उभर भाया था। राज ने एक बार गौर से देना तो याद आया कि पहली बार भी यह ऐसी हो यी । उसे प्राईने के सामने सडा करके पूछा- "देना ?" का अपने प्रापको देखा । उमडे आनन्द में एक मय था । वह भरने उस विकसित हो रहे रूप को निरासक्त भाव से स्वयं देख न | आाठव माल मे हो यज्ञोपवीत संस्कार कर दिया गया था। अब तक वेदोपनिषद् का अधिकांश भाग उसे कंठस्य हो गया होगा ! संस्कृत का अध्ययन भी ठीक तरह से चलता होगा ! मैं भी पड़ती तो अब तक गीता-उपनिषदो को कटस्थ कर सकती थी। लेकिन उस और आकर्षण नहीं था। चीनी की बुद्धि परिपक्व होने के पूर्व ही उसके दादा ने उसे पढाया है। शायद वह हाईस्कूल में जाने लगा होगा ! रोज कम-से-कम एक बार उसे चीनी को याद ती माने एकाकी भावों को, पुत्र के कल्पित चिन के साथ लीन हो कुछ समय के लिए अपने आपको भुला बैठनो । पुन उनमे माँ बनने के चिन्ह दिखाई पड़ने लगे। रात्र सुन हो उठा। विवाहित जीवन के दो साल बाद वह पिता बनने वाला था, किन्तु थानाम बदल गई थी। दूसरी बार भी असफलता पत्नी पुन माँ बनने वाली है। दोपत्नी का हाथ पकड़कर बोला -"चली, लेडी डॉक्टर के पास चलें। इन बार हर सप्ताह जाँच करानी चाहिए और काफी सतर्कता बरतना चाहिए ।" लेडी डॉक्टर ने हायती को जांच की, कैल्शियम तेन की सलाह दी। कुछ गोनियो पौरानिको के नाम लिम्व दिये। अधिवन अधिक दूध, फल लेने की मनाह दी। साथ ही महीने में एक बार रक्त परीक्षा और मून परीक्षा नया नजाह में एक वार जांच के निमित्ताने को कहा। कात्यायनी इन सलादो के अनुसार चलने लगी। चार माह वा गर्भ हो गया था । शारीरिक निर्बलता एवं प्रातस्य छोड़ दें तो वह थी। अगले दो महीनो में उसका शरीर और नमक उठा । लाललान ग्रामी से लद प्राम्र- वृक्ष की तरह नजण थे। प्रश्चित की लहूलहाती फसल कार्तिक में जिस तरह फलों से लदकर भारी हो जाती है, उमी तरह कात्यायनी भारी कदमी में चलती थी। चलती तो तलवो में रक्त फूट पडने का अदेशा होता । जीव-विज्ञान का चैतन्य उभर भाया था। राज ने एक बार गौर से देना तो याद आया कि पहली बार भी यह ऐसी हो यी । उसे प्राईने के सामने सडा करके पूछा- "देना ?" का अपने प्रापको देखा । उमडे आनन्द में एक मय था । वह भरने उस विकसित हो रहे रूप को निरासक्त भाव से स्वयं देख न |
नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज केंद्र सरकार के ऊपर जमकर निशाना साधा है और कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने उनके पुलिस अफसरों के मेडल छीना तो वह उन अफसरों को राज्य सरकार का सर्वोच्च मेडल देंगीं।
क्या है मामला ?
हम बता दें कि सारदा चिटफंड मामले में सीबीआइ की टीम ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी जिसके लिए सीबीआई ने राजीव कुमार को 4 बार समन भी भेजा था पर राजीव कुमार सीबीआई के पास नही पहोचे वही सीबीआई की 40 सदस्यों की 2 टीम राजीव कुमार के घर पहोंची जहाँ कोलकाता पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस मामले के बाद कोलकाता पुलिस ने सीबीआई की टीम को हिरासत में भी लिया। वहीं सीबीआई द्वारा किए गए इस करवाई को केंद्र सरकार का षड़यंत्र बताकर मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी कोलकाता के धर्मतल्ला में धरने पे बैठ गई और करीब 3 दिनों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला।
वही सीबीआई मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई जहाँ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने अपना धरना तोड़ा। जिसके बाद से केंद्र और राज्य सरकार में ठनी हुई है। ममता बनर्जी सीबीआई की इस कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठ गयी थीं। उस वक्त एक तस्वीर सामने आयी थी, जिसमें राज्य के पांच आईपीएस अफसर सादा कपड़ों में ममता बनर्जी के धरना मंच पर बैठे हुए नजर आये थे। इनमें राज्य पुलिस के डीजीपी वीरेंद्र भी शामिल हैं।
यह तस्वीर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने पांचों आईपीएस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र इन पांच अफसरों को दिये गये मेडल छीनने की तैयारी कर रहा है। साथ ही राज्य सरकार को भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
केंद्र के इस कदम पर ममता बनर्जी बिफर उठी हैं। शुक्रवार को उन्होंने कहा, "अगर केंद्र उन अफसरों से मेडल वापस लेता है तो मैं इन पांच आईपीएस अफसरों को बंगाल का सबसे बड़ा सम्मान 'बांग्लाविभूषण' दुंगीं। " साथ ही कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार को पत्र भेजा, तो मैं कड़े शब्दों में जवाब दुंगीं। मुख्यमंत्री ने पांचों आईपीएस अफसरों को उनके धरने में शामिल होने के केंद्र के आरोप का खंडन करते हुए कहा कि वो सभी अधिकारी सुरक्षा को देखने के लिए धरनास्थल पर मौजूद थे।
केंद्र सरकार जिन पांच आईपीएस अफसरों पर कार्रवाई करने जा रहा है, उनमें बंगाल पुलिस के डीजीपी वीरेंद्र, एडीजी (सुरक्षा) विनीत कुमार गोयल, एडीजी (कानून और व्यवस्था) अनुज शर्मा, पुलिस कमिश्नर (बिधान नगर) ज्ञानवंत सिंह और कोलकाता पुलिस के एडिश्नल सीपी सुप्रतिम सरकार शामिल हैं।
| नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज केंद्र सरकार के ऊपर जमकर निशाना साधा है और कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने उनके पुलिस अफसरों के मेडल छीना तो वह उन अफसरों को राज्य सरकार का सर्वोच्च मेडल देंगीं। क्या है मामला ? हम बता दें कि सारदा चिटफंड मामले में सीबीआइ की टीम ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी जिसके लिए सीबीआई ने राजीव कुमार को चार बार समन भी भेजा था पर राजीव कुमार सीबीआई के पास नही पहोचे वही सीबीआई की चालीस सदस्यों की दो टीम राजीव कुमार के घर पहोंची जहाँ कोलकाता पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस मामले के बाद कोलकाता पुलिस ने सीबीआई की टीम को हिरासत में भी लिया। वहीं सीबीआई द्वारा किए गए इस करवाई को केंद्र सरकार का षड़यंत्र बताकर मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी कोलकाता के धर्मतल्ला में धरने पे बैठ गई और करीब तीन दिनों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला। वही सीबीआई मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई जहाँ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने अपना धरना तोड़ा। जिसके बाद से केंद्र और राज्य सरकार में ठनी हुई है। ममता बनर्जी सीबीआई की इस कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठ गयी थीं। उस वक्त एक तस्वीर सामने आयी थी, जिसमें राज्य के पांच आईपीएस अफसर सादा कपड़ों में ममता बनर्जी के धरना मंच पर बैठे हुए नजर आये थे। इनमें राज्य पुलिस के डीजीपी वीरेंद्र भी शामिल हैं। यह तस्वीर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने पांचों आईपीएस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र इन पांच अफसरों को दिये गये मेडल छीनने की तैयारी कर रहा है। साथ ही राज्य सरकार को भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। केंद्र के इस कदम पर ममता बनर्जी बिफर उठी हैं। शुक्रवार को उन्होंने कहा, "अगर केंद्र उन अफसरों से मेडल वापस लेता है तो मैं इन पांच आईपीएस अफसरों को बंगाल का सबसे बड़ा सम्मान 'बांग्लाविभूषण' दुंगीं। " साथ ही कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार को पत्र भेजा, तो मैं कड़े शब्दों में जवाब दुंगीं। मुख्यमंत्री ने पांचों आईपीएस अफसरों को उनके धरने में शामिल होने के केंद्र के आरोप का खंडन करते हुए कहा कि वो सभी अधिकारी सुरक्षा को देखने के लिए धरनास्थल पर मौजूद थे। केंद्र सरकार जिन पांच आईपीएस अफसरों पर कार्रवाई करने जा रहा है, उनमें बंगाल पुलिस के डीजीपी वीरेंद्र, एडीजी विनीत कुमार गोयल, एडीजी अनुज शर्मा, पुलिस कमिश्नर ज्ञानवंत सिंह और कोलकाता पुलिस के एडिश्नल सीपी सुप्रतिम सरकार शामिल हैं। |
फ़िट होने के बावजूद क्यों बाहर भुवनेश्वर?
मेरठ के 30 वर्षीय सीनियर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक 21 टेस्ट, 114 वन-डे और 43 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 63 टेस्ट विकेट, 132 वन-डे अंतरराष्ट्रीय विकेट और 41 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए हैं. पिछले कुछ समय से भुवनेश्वर आईपीएल में लगी चोट की वजह से क्रिकेट से दूर थे.
लेकिन 10 जनवरी से शुरु हुई सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में भुवनेश्वर ने वापसी करते हुए शानदार गेंदबाजी की. घरेलू टी20 टूर्नामेंट में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने काफ़ी किफ़ायती गेंदबाज़ी की और कई महत्वपूर्ण विकेट भी लिए. लेकिन इतनी अहम घरेलू टेस्ट सीरीज़ से पहले एक सीनियर और अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ को टीम से बाहर बिठाने का फ़ैसला किसी भी पैमाने पर सही नहीं ठहराया जा सकता.
| फ़िट होने के बावजूद क्यों बाहर भुवनेश्वर? मेरठ के तीस वर्षीय सीनियर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक इक्कीस टेस्ट, एक सौ चौदह वन-डे और तैंतालीस टीबीस अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने तिरेसठ टेस्ट विकेट, एक सौ बत्तीस वन-डे अंतरराष्ट्रीय विकेट और इकतालीस टीबीस अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए हैं. पिछले कुछ समय से भुवनेश्वर आईपीएल में लगी चोट की वजह से क्रिकेट से दूर थे. लेकिन दस जनवरी से शुरु हुई सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में भुवनेश्वर ने वापसी करते हुए शानदार गेंदबाजी की. घरेलू टीबीस टूर्नामेंट में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने काफ़ी किफ़ायती गेंदबाज़ी की और कई महत्वपूर्ण विकेट भी लिए. लेकिन इतनी अहम घरेलू टेस्ट सीरीज़ से पहले एक सीनियर और अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ को टीम से बाहर बिठाने का फ़ैसला किसी भी पैमाने पर सही नहीं ठहराया जा सकता. |
शिमला - राजधानी में दर्दनाक घटना में एक 13 वर्षीय लड़की ने आत्महत्या कर दी। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की अपने घर में फंदे पर झूलती हुई मिली। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने पर पड़ोसी महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। राजधानी शिमला में आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर दी। यह दर्दनाक घटना बालूगंज क्षेत्र के घोड़ा चौकी में शनिवार देर शाम को पेश आई। मृतिका के पिता दीपक नेपाली मूल के हैं और परिवार समेत घोड़ा चौकी में एक भवन में किराए के मकान में रहते है। बताया जा रहा है कि दीपक व इसकी पत्नी घौड़ा चौकी में ही एक प्रिटिंग प्रेस में काम करते हैं और शनिवार को भी वे घर से बाहर थे। वहीं एक बेटा खेल रहा था और दूसरा किसी काम से कहीं बाहर गया हुआ था। इस बीच शाम को जब मृतका की मां और पिता घर पहुंचे तो उन्होंने बेटी को कमरे में फंदे पर लटका पाया। इस पर उन्होंने तत्काल फंदे से बेटी को निकाला और इसकी सूचना सूचना पुलिस को दी। बताया जा रहा है कि इस बीच परिवार ने बेटी को आईजीएमसी पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। बालूगंज पुलिस की एक टीम मृतिका के घर और दूसरी टीम आईजीएमसी पहुंची। पुलिस ने छात्रा के शव के पास से ही एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। बताया जा रहा है कि उक्त महिला की करीब 1100 रुपए की राशि घर से गायब हो गई थी। इस बीच महिला ने नाबालिग लड़की पर पैसे चुराने का शक जताया और उससे गायब हुए पैसे देने को कहा। बताया जाता है कि नाबालिग ने पूरी रकम उस महिला को लौटा दी थी, लेकिन चोरी के आरोप लगने से नाबालिग तनाव में थी और बदनामी के डर से उसने फांसी लगाकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। छात्रा ने पैसे लौटाने की बात सुसाइड नोट में लिखी है। पुलिस ने आरोपी महिला को पूछताछ के लिए तलब किया है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।
| शिमला - राजधानी में दर्दनाक घटना में एक तेरह वर्षीय लड़की ने आत्महत्या कर दी। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की अपने घर में फंदे पर झूलती हुई मिली। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने पर पड़ोसी महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। राजधानी शिमला में आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर दी। यह दर्दनाक घटना बालूगंज क्षेत्र के घोड़ा चौकी में शनिवार देर शाम को पेश आई। मृतिका के पिता दीपक नेपाली मूल के हैं और परिवार समेत घोड़ा चौकी में एक भवन में किराए के मकान में रहते है। बताया जा रहा है कि दीपक व इसकी पत्नी घौड़ा चौकी में ही एक प्रिटिंग प्रेस में काम करते हैं और शनिवार को भी वे घर से बाहर थे। वहीं एक बेटा खेल रहा था और दूसरा किसी काम से कहीं बाहर गया हुआ था। इस बीच शाम को जब मृतका की मां और पिता घर पहुंचे तो उन्होंने बेटी को कमरे में फंदे पर लटका पाया। इस पर उन्होंने तत्काल फंदे से बेटी को निकाला और इसकी सूचना सूचना पुलिस को दी। बताया जा रहा है कि इस बीच परिवार ने बेटी को आईजीएमसी पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। बालूगंज पुलिस की एक टीम मृतिका के घर और दूसरी टीम आईजीएमसी पहुंची। पुलिस ने छात्रा के शव के पास से ही एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है। बताया जा रहा है कि उक्त महिला की करीब एक हज़ार एक सौ रुपयापए की राशि घर से गायब हो गई थी। इस बीच महिला ने नाबालिग लड़की पर पैसे चुराने का शक जताया और उससे गायब हुए पैसे देने को कहा। बताया जाता है कि नाबालिग ने पूरी रकम उस महिला को लौटा दी थी, लेकिन चोरी के आरोप लगने से नाबालिग तनाव में थी और बदनामी के डर से उसने फांसी लगाकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। छात्रा ने पैसे लौटाने की बात सुसाइड नोट में लिखी है। पुलिस ने आरोपी महिला को पूछताछ के लिए तलब किया है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी। |
बताया जा रहा है कि इनमें से एक युवती शादीशुदा, जबकि दूसरी कुवांरी है। ये दोनों युवतियां एक दूसरे से शादी करने के सोमवार को अपने-सपने घर फरार हो गईं। विवाहित युवती घर से जेवर भी साथ लेकर ले गई। काफी देर तक खोजबीन के बाद जब दोनों नहीं मिली तो उनके परिजन थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों की लोकेशन पता की और फर्रुखाबाद बॉर्डर से एक जैसी ड्रेस में पकड़ लिया। (Girls Love Story)
पुलिस को दोनों युवतियों द्वारा लिखा गया पांच पन्ने एक पत्र भी बरामद हुआ है। इस पत्र में दोनों ने लिखा है कि वह एक-दूसरे से बेहद प्रेम (Girls Love Story) करती हैं और एक साथ जिंदगी बिताना चाहती हैं। वे दोनों एक दूसरे के साथ शादी करना चाहती हैं। परिजनों के मुताबिक ये दोनों लड़कियां एक साथ पढ़ती थीं और कुछ दूरी पर ही इनके घर भी हैं। उनका एक-दूसरे के घर हर दिन का आना-जाना था। कुछ दिन पूर्व ही इनमें से एक की शादी हुई है। फिलहाल दोनों युवतियां एक दूसरे के साथ शादी करने और एक-दूसरे के साथ रहने की जिद पर अड़ी हैं। परिजनों द्वारा कई घंटे समझाने-बुझाने पर वे मान गईं और उनके साथ घर चली गईं। (Girls Love Story)
| बताया जा रहा है कि इनमें से एक युवती शादीशुदा, जबकि दूसरी कुवांरी है। ये दोनों युवतियां एक दूसरे से शादी करने के सोमवार को अपने-सपने घर फरार हो गईं। विवाहित युवती घर से जेवर भी साथ लेकर ले गई। काफी देर तक खोजबीन के बाद जब दोनों नहीं मिली तो उनके परिजन थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों की लोकेशन पता की और फर्रुखाबाद बॉर्डर से एक जैसी ड्रेस में पकड़ लिया। पुलिस को दोनों युवतियों द्वारा लिखा गया पांच पन्ने एक पत्र भी बरामद हुआ है। इस पत्र में दोनों ने लिखा है कि वह एक-दूसरे से बेहद प्रेम करती हैं और एक साथ जिंदगी बिताना चाहती हैं। वे दोनों एक दूसरे के साथ शादी करना चाहती हैं। परिजनों के मुताबिक ये दोनों लड़कियां एक साथ पढ़ती थीं और कुछ दूरी पर ही इनके घर भी हैं। उनका एक-दूसरे के घर हर दिन का आना-जाना था। कुछ दिन पूर्व ही इनमें से एक की शादी हुई है। फिलहाल दोनों युवतियां एक दूसरे के साथ शादी करने और एक-दूसरे के साथ रहने की जिद पर अड़ी हैं। परिजनों द्वारा कई घंटे समझाने-बुझाने पर वे मान गईं और उनके साथ घर चली गईं। |
मिरज मेडिकल कॉलेज की 8 छात्राएं सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं. उनके संपर्क में आई अन्य छात्राओं की भी टेस्टिंग करवाई गई. इनमें से 23 स्टूडेंट्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इस तरह सांगली जिले के इस मेडिकल कॉलेज में कुल 31 मेडिकल स्टूडेंट्स कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं.
महाराष्ट्र के सांगली जिले के मिरज मेडिकल कॉलेज में 31 छात्राएं कोरोना पॉजिटिव (31 students found corona positive in miraj medical college) पाई गई हैं. इस घटना ने ना सिर्फ जिले में बल्कि राज्य भर में खलबली मचा दी है. महाराष्ट्र के स्कूल-कॉलेजों में लगातार कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं. कॉलेज प्रशासन इन छात्राओं के अलग-अलग तरह के टेस्ट करवा रहा है. छात्राओं में सौम्य लक्षण दिखाई देने के बावजूद ओमिक्रॉन के खतरों की वजह से अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है. एक साथ इतनी छात्राओं में कोरोना का संक्रमण होने की वजह से मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स होस्टल को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है.
मिरज मेडिकल कॉलेज की 8 छात्राएं सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं. उनके संपर्क में आई अन्य छात्राओं की भी टेस्टिंग करवाई गई. इनमें से 23 स्टूडेंट्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इस तरह सांगली जिले के इस मेडिकल कॉलेज में कुल 31 मेडिकल स्टूडेंट्स कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं.
इन सभी मेडिकल स्टूडेंट्स में कोरोना के सौम्य लक्षण पाए गए हैं. ये सभी छात्राएं जिन-जिन लोगों के संपर्क में आई हैं, जहां-जहां गई हैं, उसका ध्यान रखते हुए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. बड़ी तादाद में एक साथ इतनी छात्राओं के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की वजह से आस-पास के इलाकों में दहशत का माहौल है. लेकिन सभी छात्राओं में सौम्य लक्षण पाए जाने की वजह से यह गंभीर चिंता की वजह नहीं है. प्रशासन सतर्क और सावधान है, ऐसा मिरज मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है.
इससे पहले अहमदनगर के नवोदय विद्यालय में सोमवार को फिर 20 विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. रविवार को 31 विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. इस तरह से यहां कोरोना पॉजिटिव विद्यार्थियों की संख्या 70 तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.इस नवोदय विद्यालय में 400 से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं. कोरोना पॉजिटिव पाए गए विद्यार्थियों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं. इसी तरह सोमवार को पुणे के एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी शिक्षण संस्थान में भी इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के 13 विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. लेकिन इनमें से एक भी ओमिक्रॉन संक्रमित नहीं पाया गया. इन कोरोना संक्रमित विद्यार्थियों का उपचार शुरू है.
| मिरज मेडिकल कॉलेज की आठ छात्राएं सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं. उनके संपर्क में आई अन्य छात्राओं की भी टेस्टिंग करवाई गई. इनमें से तेईस स्टूडेंट्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इस तरह सांगली जिले के इस मेडिकल कॉलेज में कुल इकतीस मेडिकल स्टूडेंट्स कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं. महाराष्ट्र के सांगली जिले के मिरज मेडिकल कॉलेज में इकतीस छात्राएं कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं. इस घटना ने ना सिर्फ जिले में बल्कि राज्य भर में खलबली मचा दी है. महाराष्ट्र के स्कूल-कॉलेजों में लगातार कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं. कॉलेज प्रशासन इन छात्राओं के अलग-अलग तरह के टेस्ट करवा रहा है. छात्राओं में सौम्य लक्षण दिखाई देने के बावजूद ओमिक्रॉन के खतरों की वजह से अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है. एक साथ इतनी छात्राओं में कोरोना का संक्रमण होने की वजह से मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स होस्टल को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है. मिरज मेडिकल कॉलेज की आठ छात्राएं सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं. उनके संपर्क में आई अन्य छात्राओं की भी टेस्टिंग करवाई गई. इनमें से तेईस स्टूडेंट्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इस तरह सांगली जिले के इस मेडिकल कॉलेज में कुल इकतीस मेडिकल स्टूडेंट्स कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं. इन सभी मेडिकल स्टूडेंट्स में कोरोना के सौम्य लक्षण पाए गए हैं. ये सभी छात्राएं जिन-जिन लोगों के संपर्क में आई हैं, जहां-जहां गई हैं, उसका ध्यान रखते हुए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. बड़ी तादाद में एक साथ इतनी छात्राओं के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की वजह से आस-पास के इलाकों में दहशत का माहौल है. लेकिन सभी छात्राओं में सौम्य लक्षण पाए जाने की वजह से यह गंभीर चिंता की वजह नहीं है. प्रशासन सतर्क और सावधान है, ऐसा मिरज मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है. इससे पहले अहमदनगर के नवोदय विद्यालय में सोमवार को फिर बीस विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. रविवार को इकतीस विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. इस तरह से यहां कोरोना पॉजिटिव विद्यार्थियों की संख्या सत्तर तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.इस नवोदय विद्यालय में चार सौ से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं. कोरोना पॉजिटिव पाए गए विद्यार्थियों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं. इसी तरह सोमवार को पुणे के एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी शिक्षण संस्थान में भी इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के तेरह विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. लेकिन इनमें से एक भी ओमिक्रॉन संक्रमित नहीं पाया गया. इन कोरोना संक्रमित विद्यार्थियों का उपचार शुरू है. |
पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के फरमानों को लेकर बागपत के किस्से जगजाहिर हैं। घूंघट और बंदिशों के दौर में चंद्रो तोमर महिलाओं और बेटियों के लिए उम्मीद का सवेरा बनकर घर से बाहर निकली थी। देशखाप के गढ़ बड़ौत के निकट अंगदपुर जौहड़ी गांव में 1998 में शूटिंग रेंज की शुरुआत हुई थी। मासूम पोती शेफाली अकेले शूटिंग सीखने के लिए नहीं जाना चाहती थी। पोती ने दादी को साथ चलने के लिए मनाया, यहीं से शुरू हुआ बुजुर्ग चंद्रो तोमर के शूटर दादी बनने का सिलसिला। तीन दिन बाद खेल-खेल में साधा गया निशाना दस पर लगा तो कोच डॉ. राजपाल सिंह और फारूख पठान ने दादी को निशानेबाजी के लिए मना लिया।
इसके 15 दिन बाद उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर भी बेटियों को लेकर निशानेबाजी करने पहुंच गई। निशानेबाजी सीख रही लड़कियों को दादी का सहारा और प्रेरणा मिली। दादी की निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ तो 23 साल तक चला। खाप पंचायतों के जिस क्षेत्र में महिलाओं को घूंघट तक खोलने की इजाजत नहीं थी, उसी क्षेत्र में शूटर दादी महिला सशक्तीकरण की झंडाबरदार रही। सिर्फ जौहड़ी की ही नहीं, बल्कि शूटर दादी ने दुनिया में पश्चिम उत्तर प्रदेश की पहचान को पुख्ता किया। देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि चंद्रो तोमर ने पूरे क्षेत्र को पहचान दिलाई। बेटियों और महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए वह प्रेरणास्रोत रहीं।
बच्चों जैसे निर्मल मन वाली शूटर दादी बुजुर्गों के लिए हमेशा प्रेरणा रहीं। उनके बेटे विनोद कुमार ने बताया कि मां ने 66 साल की उम्र में निशानेबाजी शुरू की थी। घर पर आने वाली बुजुर्ग महिलाओं को अपनी दिनचर्या संयमित रखने, योग करने की सलाह देती थीं। कहती थीं- 'तन बुड्ढ़ा होता है, मन नहीं'। उनका जीवन सकारात्मक उर्जा से भरा हुआ रहा। मुश्किल समय में वह हमेशा हिम्मत दिखाती थी।
वयोवृद्ध निशानेबाज चंद्रा तोमर को कई नाम मिले। उन्हें रिवाल्वर दादी और शूटर दादी के नाम से जाना गया। सोशल मीडिया पर सक्रिय रही। पौत्र दामाद सुमित राठी के सहयोग से ट्विटर पर बेहद सक्रिय रही। यू-ट्यब पर अपना चैनल बनाया। दादी के प्रशंसक उन्हें ट्विटर दादी के नाम से भी पुकारने लगे थे।
| पश्चिम उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के फरमानों को लेकर बागपत के किस्से जगजाहिर हैं। घूंघट और बंदिशों के दौर में चंद्रो तोमर महिलाओं और बेटियों के लिए उम्मीद का सवेरा बनकर घर से बाहर निकली थी। देशखाप के गढ़ बड़ौत के निकट अंगदपुर जौहड़ी गांव में एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में शूटिंग रेंज की शुरुआत हुई थी। मासूम पोती शेफाली अकेले शूटिंग सीखने के लिए नहीं जाना चाहती थी। पोती ने दादी को साथ चलने के लिए मनाया, यहीं से शुरू हुआ बुजुर्ग चंद्रो तोमर के शूटर दादी बनने का सिलसिला। तीन दिन बाद खेल-खेल में साधा गया निशाना दस पर लगा तो कोच डॉ. राजपाल सिंह और फारूख पठान ने दादी को निशानेबाजी के लिए मना लिया। इसके पंद्रह दिन बाद उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर भी बेटियों को लेकर निशानेबाजी करने पहुंच गई। निशानेबाजी सीख रही लड़कियों को दादी का सहारा और प्रेरणा मिली। दादी की निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ तो तेईस साल तक चला। खाप पंचायतों के जिस क्षेत्र में महिलाओं को घूंघट तक खोलने की इजाजत नहीं थी, उसी क्षेत्र में शूटर दादी महिला सशक्तीकरण की झंडाबरदार रही। सिर्फ जौहड़ी की ही नहीं, बल्कि शूटर दादी ने दुनिया में पश्चिम उत्तर प्रदेश की पहचान को पुख्ता किया। देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि चंद्रो तोमर ने पूरे क्षेत्र को पहचान दिलाई। बेटियों और महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए वह प्रेरणास्रोत रहीं। बच्चों जैसे निर्मल मन वाली शूटर दादी बुजुर्गों के लिए हमेशा प्रेरणा रहीं। उनके बेटे विनोद कुमार ने बताया कि मां ने छयासठ साल की उम्र में निशानेबाजी शुरू की थी। घर पर आने वाली बुजुर्ग महिलाओं को अपनी दिनचर्या संयमित रखने, योग करने की सलाह देती थीं। कहती थीं- 'तन बुड्ढ़ा होता है, मन नहीं'। उनका जीवन सकारात्मक उर्जा से भरा हुआ रहा। मुश्किल समय में वह हमेशा हिम्मत दिखाती थी। वयोवृद्ध निशानेबाज चंद्रा तोमर को कई नाम मिले। उन्हें रिवाल्वर दादी और शूटर दादी के नाम से जाना गया। सोशल मीडिया पर सक्रिय रही। पौत्र दामाद सुमित राठी के सहयोग से ट्विटर पर बेहद सक्रिय रही। यू-ट्यब पर अपना चैनल बनाया। दादी के प्रशंसक उन्हें ट्विटर दादी के नाम से भी पुकारने लगे थे। |
मेरठः थाना टीपीनगर पुलिस और एसओजी टीम ने एक शातिर बदमाश को मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से घायल हो गया। आरोपी के पास से बाइक और मोबाइल आदि बरामद हुआ है। घायल बदमाश को इलाज के लिये अस्पताल में भेजा गया है। अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत क्षेत्राधिकारी ब्रहमपुरी के निर्देशन में थाना टीपीनगर पुलिस व एसओजी टीम द्वारा वेदव्यासपुरी पर चेकिंग की जा रही थी,
चेकिंग के दौरान दो व्यक्ति बाइक पर आते हुए दिखाई दिये तो पुलिस टीम ने रुकने का इशारा किया,। बाइक सवार बदमाशों के द्वारा पुलिस टीम पर जाने से मारने की नियत से फायर किया गया। पुलिस टीम द्वारा भी फायरिंग की गयी। फायरिंग में एक अभियुक्त पैर में गोली लगने से घायल हो गया हैं व एक अभियुक्त मौके से फरार हो गया है। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया ह।
घायल अभियुक्त ने अपना नाम समीर पुत्र बफाती निवासी मकबरा डिग्गी थाना रेलवे रोड बताया है। घायल अभियुक्त शातिर किस्म का अपराधी है, अभियुक्त ने जनपद मेरठ के विभिन्न थानों में अपराध करने की स्वीकारोक्ति की है। घायल अभियुक्त के विरुद्ध थाना टीपीनगर पर विधिक कार्रवाई की गयी है। एसपी सिटी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि गोली लगने से घायल बदमाश के अपराधिक हिस्ट्री खंगाली जा रही है।
| मेरठः थाना टीपीनगर पुलिस और एसओजी टीम ने एक शातिर बदमाश को मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से घायल हो गया। आरोपी के पास से बाइक और मोबाइल आदि बरामद हुआ है। घायल बदमाश को इलाज के लिये अस्पताल में भेजा गया है। अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत क्षेत्राधिकारी ब्रहमपुरी के निर्देशन में थाना टीपीनगर पुलिस व एसओजी टीम द्वारा वेदव्यासपुरी पर चेकिंग की जा रही थी, चेकिंग के दौरान दो व्यक्ति बाइक पर आते हुए दिखाई दिये तो पुलिस टीम ने रुकने का इशारा किया,। बाइक सवार बदमाशों के द्वारा पुलिस टीम पर जाने से मारने की नियत से फायर किया गया। पुलिस टीम द्वारा भी फायरिंग की गयी। फायरिंग में एक अभियुक्त पैर में गोली लगने से घायल हो गया हैं व एक अभियुक्त मौके से फरार हो गया है। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया ह। घायल अभियुक्त ने अपना नाम समीर पुत्र बफाती निवासी मकबरा डिग्गी थाना रेलवे रोड बताया है। घायल अभियुक्त शातिर किस्म का अपराधी है, अभियुक्त ने जनपद मेरठ के विभिन्न थानों में अपराध करने की स्वीकारोक्ति की है। घायल अभियुक्त के विरुद्ध थाना टीपीनगर पर विधिक कार्रवाई की गयी है। एसपी सिटी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि गोली लगने से घायल बदमाश के अपराधिक हिस्ट्री खंगाली जा रही है। |
Adityapur (Sanjeev Mehta) : आदित्यपुर के चर्चित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ वासन का सोमवार को 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे वार्ड संख्या 31 के रोड नंबर 14 में रहते थे. उनके निधन से क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है. पिछले कई वर्षों से वह क्षेत्र के अनगिनत लोगों को र अपनी होम्योपैथिक दवाओं से ठीक किया था. वह गरीबों की सेवा में सदैव तत्पर रहते थे.
उनके निधन पर भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी व वार्ड 31 के निवासी निरंजन मिश्रा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा के उनका निधन क्षेत्र वसियों के लिए अपूरणीय क्षति है. इनकी कमी हमेशा खलेगी. इनका यू चला जाना क्षेत्रवासियों के लिए अपूर्णिया क्षति है. आज इनका अंतिम संस्कार पार्वती घाट पर संपन्न हुआ. इनका एक पुत्र एवं एक पुत्री है जो बाहर रहते है. मुखाग्नि देने उनके पुत्र शेखर कुमार को बुलाया गया था. उन्होंने अंतिम क्रियाकर्म वैदिक रिवाजों से किया.
| Adityapur : आदित्यपुर के चर्चित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ वासन का सोमवार को बयासी वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे वार्ड संख्या इकतीस के रोड नंबर चौदह में रहते थे. उनके निधन से क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है. पिछले कई वर्षों से वह क्षेत्र के अनगिनत लोगों को र अपनी होम्योपैथिक दवाओं से ठीक किया था. वह गरीबों की सेवा में सदैव तत्पर रहते थे. उनके निधन पर भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी व वार्ड इकतीस के निवासी निरंजन मिश्रा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा के उनका निधन क्षेत्र वसियों के लिए अपूरणीय क्षति है. इनकी कमी हमेशा खलेगी. इनका यू चला जाना क्षेत्रवासियों के लिए अपूर्णिया क्षति है. आज इनका अंतिम संस्कार पार्वती घाट पर संपन्न हुआ. इनका एक पुत्र एवं एक पुत्री है जो बाहर रहते है. मुखाग्नि देने उनके पुत्र शेखर कुमार को बुलाया गया था. उन्होंने अंतिम क्रियाकर्म वैदिक रिवाजों से किया. |
नई दिल्ली, 2 सितम्बर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने जम्मू एवं कश्मीर के अपने दौरे पर एक हलफनामा सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया। वह अपने पार्टी के साथी मोहम्मद यूसुफ तारिगामी से मिलने राज्य के दौरे पर गए थे।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने 28 अगस्त को येचुरी को इजाजत दी थी कि वह राज्य में जाकर तारिगामी से मुलाकात कर सकते हैं।
हालांकि न्यायालय ने उन्हें किसी अन्य गतिविधि में शामिल नहीं होने के लिए कहा था।
येचुरी ने तारिगामी के हिरासत को चुनौती देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, जिसपर न्यायालय ने यह आदेश दिया था। तारिगामी को पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 निष्क्रिय किए जाने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था।
याचिका में यह भी कहा गया था कि तारिगामी की सेहत ठीक नहीं है और येचुरी उनसे मिलना चाहते हैं।
| नई दिल्ली, दो सितम्बर । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने जम्मू एवं कश्मीर के अपने दौरे पर एक हलफनामा सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया। वह अपने पार्टी के साथी मोहम्मद यूसुफ तारिगामी से मिलने राज्य के दौरे पर गए थे। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने अट्ठाईस अगस्त को येचुरी को इजाजत दी थी कि वह राज्य में जाकर तारिगामी से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि न्यायालय ने उन्हें किसी अन्य गतिविधि में शामिल नहीं होने के लिए कहा था। येचुरी ने तारिगामी के हिरासत को चुनौती देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, जिसपर न्यायालय ने यह आदेश दिया था। तारिगामी को पांच अगस्त को अनुच्छेद तीन सौ सत्तर निष्क्रिय किए जाने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि तारिगामी की सेहत ठीक नहीं है और येचुरी उनसे मिलना चाहते हैं। |
वेव ग्रुप के मालिक दिवंगत पोंटी चड्ढा के भतीजे ने सोमवार को चाणक्यपुरी में अपनी बेंटले कार से एक ऑटो को टक्कर मार दी। इससे ऑटो में बैठी तुर्कमेनिस्तान की महिला की मौत हो गई, जबकि उसकी एक महिला व पुरुष साथी और ऑटो चालक घायल हैं।
पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर आशीष सिंह चड्ढा को गिरफ्तार कर लिया। नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि हादसा दोपहर करीब 1:45 बजे चाणक्यपुरी के विनय मार्ग पर हुआ।
गुलशत अलीजानोवा (51) व अल्मा गुल अतायेबा (33) अपने पुरुष साथी गुलिया वाइयाम (55) के साथ ऑटो से जा रही थीं। तभी पीछे से आ रहे 19 वर्षीय आशीष ने अपनी बेंटले कार से ऑटो में टक्कर मार दी। घायल ऑटो चालक रघुबीर सिंह सहित तीनों विदेशी नागरिकों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
| वेव ग्रुप के मालिक दिवंगत पोंटी चड्ढा के भतीजे ने सोमवार को चाणक्यपुरी में अपनी बेंटले कार से एक ऑटो को टक्कर मार दी। इससे ऑटो में बैठी तुर्कमेनिस्तान की महिला की मौत हो गई, जबकि उसकी एक महिला व पुरुष साथी और ऑटो चालक घायल हैं। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर आशीष सिंह चड्ढा को गिरफ्तार कर लिया। नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि हादसा दोपहर करीब एक:पैंतालीस बजे चाणक्यपुरी के विनय मार्ग पर हुआ। गुलशत अलीजानोवा व अल्मा गुल अतायेबा अपने पुरुष साथी गुलिया वाइयाम के साथ ऑटो से जा रही थीं। तभी पीछे से आ रहे उन्नीस वर्षीय आशीष ने अपनी बेंटले कार से ऑटो में टक्कर मार दी। घायल ऑटो चालक रघुबीर सिंह सहित तीनों विदेशी नागरिकों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। |
Chhattisgarh Crime News : छत्तीसगढ़ से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां जादू टोना के शक में एक युवक ने घर में घुसकर एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर डंडे से जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में परिवार के सभी सदस्यों को चोटें आई हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुलिस का कहना है कि घटना की रिपोर्ट परिवार की 24 वर्षीय युवती ने कोतबा चौकी में दर्ज कराई है। युवती ने पुलिस को बताया है कि बुधवार-गुरुवार की रात को उसके घर में उसके साथ माता - पिता और भाई - बहन थे। करीब 1:30 बजे गांव के ही एक युवक आनंद माझी ने दरवाजे पर लात मारी, जिससे दरवाजा टूट गया। दरवाजा टूटते ही वह आरोपी घर के अंदर घुस गया और कहने लगा कि तुम लोग जादू टोना करते हो और मैं आज सबको खत्म कर दूंगा।
आरोपी ने सबसे पहले शिकायतकर्ता की बड़ी बहन पर डंडे से सिर पर वार किया, जिससे वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ी। यह देख उसके मां-बाप और बड़ा भाई आरोपी को रोकने के लिए उसकी ओर बड़े तो आरोपी ने उन तीनों के सिर पर भी डंडे से वार कर दिया। इस दौरान रिपोर्ट दर्ज करवाने वाली 24 वर्षीय युवती छुप गई थी। परिवार के 4 सदस्यों पर डंडे से जानलेवा हमला करने के बाद आरोपी वहां से भाग निकला।
इस पूरी घटना के बाद युवती ने आसपास के लोगों को बुलाकर अपने मां-बाप बड़ी बहन और भाई को अस्पताल पहुंचाया। कोतबा अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है। युवती की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धमकी, गाली गलौज और जानलेवा हमला करने की कोशिश के मामले में अपराध दर्ज कर उसकी जांच शुरू कर दी है। बता दें कि आरोपी आनंद माझी की उम्र 23 साल है और वह कोकियाखार का निवासी है। रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
| Chhattisgarh Crime News : छत्तीसगढ़ से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां जादू टोना के शक में एक युवक ने घर में घुसकर एक ही परिवार के पांच सदस्यों पर डंडे से जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में परिवार के सभी सदस्यों को चोटें आई हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि घटना की रिपोर्ट परिवार की चौबीस वर्षीय युवती ने कोतबा चौकी में दर्ज कराई है। युवती ने पुलिस को बताया है कि बुधवार-गुरुवार की रात को उसके घर में उसके साथ माता - पिता और भाई - बहन थे। करीब एक:तीस बजे गांव के ही एक युवक आनंद माझी ने दरवाजे पर लात मारी, जिससे दरवाजा टूट गया। दरवाजा टूटते ही वह आरोपी घर के अंदर घुस गया और कहने लगा कि तुम लोग जादू टोना करते हो और मैं आज सबको खत्म कर दूंगा। आरोपी ने सबसे पहले शिकायतकर्ता की बड़ी बहन पर डंडे से सिर पर वार किया, जिससे वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ी। यह देख उसके मां-बाप और बड़ा भाई आरोपी को रोकने के लिए उसकी ओर बड़े तो आरोपी ने उन तीनों के सिर पर भी डंडे से वार कर दिया। इस दौरान रिपोर्ट दर्ज करवाने वाली चौबीस वर्षीय युवती छुप गई थी। परिवार के चार सदस्यों पर डंडे से जानलेवा हमला करने के बाद आरोपी वहां से भाग निकला। इस पूरी घटना के बाद युवती ने आसपास के लोगों को बुलाकर अपने मां-बाप बड़ी बहन और भाई को अस्पताल पहुंचाया। कोतबा अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है। युवती की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धमकी, गाली गलौज और जानलेवा हमला करने की कोशिश के मामले में अपराध दर्ज कर उसकी जांच शुरू कर दी है। बता दें कि आरोपी आनंद माझी की उम्र तेईस साल है और वह कोकियाखार का निवासी है। रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। |
पुलिस के अनुसार, जिले के रामदुर्ग तालुक में हुल्कुंद गांव से कुछ लोग सावदत्ती स्थित रेणुका यल्लम्मा मंदिर जा रहे थे, तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गया.
कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिंचनूर में बृहस्पतिवार को तड़के तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही एक गाड़ी पेड़ से टकरा गई, जिससे तीन महिलाओं समेत कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और छठे व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस के अनुसार, जिले के रामदुर्ग तालुक में हुल्कुंद गांव से कुछ लोग सावदत्ती स्थित रेणुका यल्लम्मा मंदिर जा रहे थे, तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गया.
कर्नाटक के सिंचाई मंत्री गोविंद कारजोल ने प्रत्येक मृतक के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में घायल हुए कुल 16 लोगों का फिलहाल इलाज चल रहा है. हुलकुंडा गांव के करीब 23 श्रद्धालु मंदिर जा रहे थे. घायलों का गोकक और रामदुर्गा के अस्पतालों में इलाज चल रहा है. मृतकों की पहचान हनुमप्पा (25), दीपा (31), कुमारी सविता (11), मारुति (42) और इंद्र (24) के रूप में हुई है. वे कर्नाटक के बेलगावी जिले के हुलकुंडा गांव के रहने वाले थे.
मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. अधिकारियों को घायलों के लिए उचित उपाय करने का निर्देश दिया गया है. इस घटना के बारे में बात करते हुए सीएम बोम्मई ने कहा, "6 लोगों की मौत हो गई है. मैं इस संबंध में अधिकारियों के संपर्क में हूं. मैंने आज सुबह भी बात की. सरकार इलाज का ध्यान रखेगी. मामले में एक जांच भी शुरू की गई है." एसपी संजीव पाटिल के मुताबिक रामदुर्गा जिले के कड़ाकोल थाने में मामला दर्ज किया गया है.
(भाषा इनपुट)
| पुलिस के अनुसार, जिले के रामदुर्ग तालुक में हुल्कुंद गांव से कुछ लोग सावदत्ती स्थित रेणुका यल्लम्मा मंदिर जा रहे थे, तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गया. कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिंचनूर में बृहस्पतिवार को तड़के तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही एक गाड़ी पेड़ से टकरा गई, जिससे तीन महिलाओं समेत कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और छठे व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस के अनुसार, जिले के रामदुर्ग तालुक में हुल्कुंद गांव से कुछ लोग सावदत्ती स्थित रेणुका यल्लम्मा मंदिर जा रहे थे, तभी चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गया. कर्नाटक के सिंचाई मंत्री गोविंद कारजोल ने प्रत्येक मृतक के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में घायल हुए कुल सोलह लोगों का फिलहाल इलाज चल रहा है. हुलकुंडा गांव के करीब तेईस श्रद्धालु मंदिर जा रहे थे. घायलों का गोकक और रामदुर्गा के अस्पतालों में इलाज चल रहा है. मृतकों की पहचान हनुमप्पा , दीपा , कुमारी सविता , मारुति और इंद्र के रूप में हुई है. वे कर्नाटक के बेलगावी जिले के हुलकुंडा गांव के रहने वाले थे. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से पाँच-पाँच लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. अधिकारियों को घायलों के लिए उचित उपाय करने का निर्देश दिया गया है. इस घटना के बारे में बात करते हुए सीएम बोम्मई ने कहा, "छः लोगों की मौत हो गई है. मैं इस संबंध में अधिकारियों के संपर्क में हूं. मैंने आज सुबह भी बात की. सरकार इलाज का ध्यान रखेगी. मामले में एक जांच भी शुरू की गई है." एसपी संजीव पाटिल के मुताबिक रामदुर्गा जिले के कड़ाकोल थाने में मामला दर्ज किया गया है. |
( ग्ह )
ऐसी पाप और रिश्वत की कमाई - 'आभूषणों' पर व्यय हातो पाँच रुपये मासिक जिसकी तन्खाइ हो, वह भी 'घूस' के बदौलत छः सौ रुपये का पत्नी को चन्द्रहार दे सकता है, बेटी के विवाह में एक हजार तिलक देने का साहस कर सकता है ।
रमानाथ के पिता महाशय दयानाथ कचहरी में नौकर थे। इनकी प्रकृति हो दूसरी थी । अत्यंत सजन एवं सहृदय व्यक्ति थे । वह बहुत ऊँचे आदर्श के आदमी न थे, लेकिन फिर भी रिश्वत को हराम समझते थे। उन्होंने आँखों इसका दुष्परिणाम देखा था । किसी को जेल जाते, किसी को संतान से हाथ धोते और किसी की कुव्यसनों के पंजे में फँसते देखा था । उनका दृढ़ विश्वास था कि हराम की कमाई हराम में जाती है ।
उपन्यास के प्रारम्भ में ही दो विपरीत विश्वासों एवं आचरण वाले व्यक्तियों लेखक ने कुशलतापूर्वक नाटकीय ढंग से हमारे समक्ष उपस्थित किया है । सौभाग्य से इन दोनों का आपस में सम्बन्ध होता है । रमानाथ और जालपा का विवाह होता है । मुंशी दीनदयाल ने एक हजार रुपये तिलक में देकर दयानाथ के धैर्य को विचलित कर दिया। दीनदयाल की सहृदयता ने उनका संयम तोड़ दिया । और - 'वे सारे टीमटाम, नाच-तमाशे जिनकी कल्पना का गला उन्होंने घोंट दिया था, वृहद् रूप धारण कुरके सामने आ गये । बँधा हुआ घोडा थान से खुल गया, उसे कौन रोक सकता । धूमधाम से विवाह करने की ठन गयी ।' १
सराफ से तीन हजार के गहने बनवा डाले । हजार रुपये पेशगी में दिया, हजार के लिये एक सप्ताह का वायदा किया। बाकी धीरे-धीरे चुक जायेंगे । लेकिन इतने से ही उन्हें सन्तोष न हुआ । एक हजार के जड़ाऊ चन्द्रहार के लिये भी जी ललचाया । लेकिन व्यावहारिक बुद्धि सम्पन्न-पत्नी ने रोक दिया ।
बारात का यह नाटक 'पास' हो गया। लेकिन 'चन्द्रहार' का प्रभाव कन्या पक्ष वालों को खटका । जिनके नाक सिकोड़ने के भय से महाशय दयानाथ ने चादर से बाहर पाँच फैलाया, उन्हें वे सारी टीम टाम के बावजूद भी आलोचना से न रोक सके । फलस्त्ररूप जितनी उमंगों से ब्याह करने गये थे, उतना ही हतोत्साह होकर दयानाथ लौटे । अपनी भूल पर पछता रहे थे। लेकिन अब पछताये क्या होत है, जब चिड़िया गई खेत !
सराफ के तकाज से वह परेशान हो उठे । बड़े धर्म-संकट में पड़े । बहु करना वे आवश्यक न समझते थे। लेकिन रमानाथ या उसकी माता जागेश्वरी (!) इतने ओल्ले न थे । वे 'भ्रम' के पर्दे को आवश्यक मानते थे । बहू से गहने माँगना, एक टेढ़ी ग्वीर थी । जालपा ने गहने सन्दूक में बन्द कर रख दिये थे । उसने प्रतिज्ञा की, जनतक 'चन्द्रहार' न बनकर आ जायेगा, कोई गहना न पहनूँगी !
१. गबन - पृष्ठ ९ | ऐसी पाप और रिश्वत की कमाई - 'आभूषणों' पर व्यय हातो पाँच रुपये मासिक जिसकी तन्खाइ हो, वह भी 'घूस' के बदौलत छः सौ रुपये का पत्नी को चन्द्रहार दे सकता है, बेटी के विवाह में एक हजार तिलक देने का साहस कर सकता है । रमानाथ के पिता महाशय दयानाथ कचहरी में नौकर थे। इनकी प्रकृति हो दूसरी थी । अत्यंत सजन एवं सहृदय व्यक्ति थे । वह बहुत ऊँचे आदर्श के आदमी न थे, लेकिन फिर भी रिश्वत को हराम समझते थे। उन्होंने आँखों इसका दुष्परिणाम देखा था । किसी को जेल जाते, किसी को संतान से हाथ धोते और किसी की कुव्यसनों के पंजे में फँसते देखा था । उनका दृढ़ विश्वास था कि हराम की कमाई हराम में जाती है । उपन्यास के प्रारम्भ में ही दो विपरीत विश्वासों एवं आचरण वाले व्यक्तियों लेखक ने कुशलतापूर्वक नाटकीय ढंग से हमारे समक्ष उपस्थित किया है । सौभाग्य से इन दोनों का आपस में सम्बन्ध होता है । रमानाथ और जालपा का विवाह होता है । मुंशी दीनदयाल ने एक हजार रुपये तिलक में देकर दयानाथ के धैर्य को विचलित कर दिया। दीनदयाल की सहृदयता ने उनका संयम तोड़ दिया । और - 'वे सारे टीमटाम, नाच-तमाशे जिनकी कल्पना का गला उन्होंने घोंट दिया था, वृहद् रूप धारण कुरके सामने आ गये । बँधा हुआ घोडा थान से खुल गया, उसे कौन रोक सकता । धूमधाम से विवाह करने की ठन गयी ।' एक सराफ से तीन हजार के गहने बनवा डाले । हजार रुपये पेशगी में दिया, हजार के लिये एक सप्ताह का वायदा किया। बाकी धीरे-धीरे चुक जायेंगे । लेकिन इतने से ही उन्हें सन्तोष न हुआ । एक हजार के जड़ाऊ चन्द्रहार के लिये भी जी ललचाया । लेकिन व्यावहारिक बुद्धि सम्पन्न-पत्नी ने रोक दिया । बारात का यह नाटक 'पास' हो गया। लेकिन 'चन्द्रहार' का प्रभाव कन्या पक्ष वालों को खटका । जिनके नाक सिकोड़ने के भय से महाशय दयानाथ ने चादर से बाहर पाँच फैलाया, उन्हें वे सारी टीम टाम के बावजूद भी आलोचना से न रोक सके । फलस्त्ररूप जितनी उमंगों से ब्याह करने गये थे, उतना ही हतोत्साह होकर दयानाथ लौटे । अपनी भूल पर पछता रहे थे। लेकिन अब पछताये क्या होत है, जब चिड़िया गई खेत ! सराफ के तकाज से वह परेशान हो उठे । बड़े धर्म-संकट में पड़े । बहु करना वे आवश्यक न समझते थे। लेकिन रमानाथ या उसकी माता जागेश्वरी इतने ओल्ले न थे । वे 'भ्रम' के पर्दे को आवश्यक मानते थे । बहू से गहने माँगना, एक टेढ़ी ग्वीर थी । जालपा ने गहने सन्दूक में बन्द कर रख दिये थे । उसने प्रतिज्ञा की, जनतक 'चन्द्रहार' न बनकर आ जायेगा, कोई गहना न पहनूँगी ! एक. गबन - पृष्ठ नौ |
दस्तक टाइम्स एजेंसी/ नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को लिकर किंग विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई की शिकायत के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय विजय माल्या से उन पैसों के बारे में जानना चाहती है जो उन्होंने बैंक से कर्ज के रूप में लिया था। गौर हो कि काफी समय से बंद पड़ी किंगफिशर एयरलाइंस कर्ज में डूबी हुई है।
एसबीआई ने माल्या को डियाजिओ कंपनी से मिलने वाले 75 मिलियन डॉलर यानि करीब 500 करोड़ की रकम को उधार देने वाले बैंकों को देने की अपील की है। डीआरटी ने 4 मार्च को इस मामले में दोनों पक्षों की याचिकाएं सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एसबीआई ने बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में माल्या की गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्त करने की मांग भी की है। इसके तहत एसबीआई ने तीन याचिकाएं भी दाखिल की हैं। डीआरटी ने याचिकाओं पर उनकी वरीयता के क्रम में सुनवाई करने का फैसला किया है। एसबीआई समेत 17 अन्य बैंक माल्या से किंगफिशर एयरलाइन को दिए गए करीब 7000 करोड़ रुपये के बकाए कर्ज की रिकवरी की मांग कर रहे हैं।
गौर हो कि पिछले दिनों डियाजिओ ग्रुप ने विजय माल्या को यूबी ग्रुप प्रमोटर पद से बाहर होने के लिए 500 करोड़ रुपये देने की डील की थी। माल्या ने यूनाइटेड ब्रेवरिज को डियाजिओ ग्रुप को बेच दिया था।
| दस्तक टाइम्स एजेंसी/ नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को लिकर किंग विजय माल्या के खिलाफ सीबीआई की शिकायत के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय विजय माल्या से उन पैसों के बारे में जानना चाहती है जो उन्होंने बैंक से कर्ज के रूप में लिया था। गौर हो कि काफी समय से बंद पड़ी किंगफिशर एयरलाइंस कर्ज में डूबी हुई है। एसबीआई ने माल्या को डियाजिओ कंपनी से मिलने वाले पचहत्तर मिलियन डॉलर यानि करीब पाँच सौ करोड़ की रकम को उधार देने वाले बैंकों को देने की अपील की है। डीआरटी ने चार मार्च को इस मामले में दोनों पक्षों की याचिकाएं सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। एसबीआई ने बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने के मामले में माल्या की गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्त करने की मांग भी की है। इसके तहत एसबीआई ने तीन याचिकाएं भी दाखिल की हैं। डीआरटी ने याचिकाओं पर उनकी वरीयता के क्रम में सुनवाई करने का फैसला किया है। एसबीआई समेत सत्रह अन्य बैंक माल्या से किंगफिशर एयरलाइन को दिए गए करीब सात हज़ार करोड़ रुपये के बकाए कर्ज की रिकवरी की मांग कर रहे हैं। गौर हो कि पिछले दिनों डियाजिओ ग्रुप ने विजय माल्या को यूबी ग्रुप प्रमोटर पद से बाहर होने के लिए पाँच सौ करोड़ रुपये देने की डील की थी। माल्या ने यूनाइटेड ब्रेवरिज को डियाजिओ ग्रुप को बेच दिया था। |
विधायकों को मुफ्त घर का निर्णय रद्द होगा?
मुंबई/दि. 31- अर्थसंकल्पीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 300 विधायकों को निःशुल्क घर देने की घोषणा की थी, लेकिन इस निर्णय से सरकार पर चारों तरफ से टिप्पणी हुई. जिसके चलते यदि किसी निर्णय से विवाद निर्माण होता हो तो उसे रोका भी जा सकता है. यह घर मुफ्त नहीं दिए जाएंगे, ऐसा कहते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने निर्णय रद्द करने बाबत स्पष्ट संकेत दिए.
महाविकास आघाड़ी सरकार की आज मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने निर्बंध हटाने व राज्य की राजनीतिक हलचल पर चर्चा की.
अजित पवार ने स्पष्ट किया कि विधायकों को निःशुल्क घर देने बाबत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घोषणा की, लेकिन गृहनिर्माण मंत्री की ओर से पूरी तरह खुलासा नहीं किया गया. इसलिए विधायकों को मुफ्त में घर मिलेंगे ऐसा समझा गया. किसी भी विधायक को निःशुल्क घर नहीं मिलेंग. उन्होंने कहा कि म्हाडा के घर देते समय सर्वसामान्य नागरिकों को लकी ड्रा निकालकर निर्णय दिया जाता था. मुख्यमंत्री को म्हाडा के घर देने बाबत अधिकार है, जिनमें पत्रकार, कलाकार, राजनीतिक लोक प्रतिनिधि का समावेश है. यह निर्णय कोर्ट में गया और वह बंद हो गया. लेकिन अब म्हाडा को कुछ अधिकार है, लेकिन एक निर्णय के विरोध में सोशल मीडिया में काफी चर्चा हुई.
मंत्री अजित पवार ने कहा कि मैंने उस समय कहा था कि 31 मार्च तक जो घटनाएं घटी है. एसटी कर्मचारियों की हड़ताल पीछे लेने के लिए आवाहन किया गया था,लेकिन एसटी कर्मचारियों ने अब तक हड़ताल पीछे नहीं ली, आज आखिरी दिन है. कल से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कल यदि समय मिला तो जिन कर्मचारियों को बाजू में किया गया है, उनकी जगह पर नई भर्ती की जाएगी. ऐसी चेतावनी अजित पवार ने एसटी के हड़ताली कर्मचारियों को दी.
| विधायकों को मुफ्त घर का निर्णय रद्द होगा? मुंबई/दि. इकतीस- अर्थसंकल्पीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने तीन सौ विधायकों को निःशुल्क घर देने की घोषणा की थी, लेकिन इस निर्णय से सरकार पर चारों तरफ से टिप्पणी हुई. जिसके चलते यदि किसी निर्णय से विवाद निर्माण होता हो तो उसे रोका भी जा सकता है. यह घर मुफ्त नहीं दिए जाएंगे, ऐसा कहते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने निर्णय रद्द करने बाबत स्पष्ट संकेत दिए. महाविकास आघाड़ी सरकार की आज मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने निर्बंध हटाने व राज्य की राजनीतिक हलचल पर चर्चा की. अजित पवार ने स्पष्ट किया कि विधायकों को निःशुल्क घर देने बाबत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घोषणा की, लेकिन गृहनिर्माण मंत्री की ओर से पूरी तरह खुलासा नहीं किया गया. इसलिए विधायकों को मुफ्त में घर मिलेंगे ऐसा समझा गया. किसी भी विधायक को निःशुल्क घर नहीं मिलेंग. उन्होंने कहा कि म्हाडा के घर देते समय सर्वसामान्य नागरिकों को लकी ड्रा निकालकर निर्णय दिया जाता था. मुख्यमंत्री को म्हाडा के घर देने बाबत अधिकार है, जिनमें पत्रकार, कलाकार, राजनीतिक लोक प्रतिनिधि का समावेश है. यह निर्णय कोर्ट में गया और वह बंद हो गया. लेकिन अब म्हाडा को कुछ अधिकार है, लेकिन एक निर्णय के विरोध में सोशल मीडिया में काफी चर्चा हुई. मंत्री अजित पवार ने कहा कि मैंने उस समय कहा था कि इकतीस मार्च तक जो घटनाएं घटी है. एसटी कर्मचारियों की हड़ताल पीछे लेने के लिए आवाहन किया गया था,लेकिन एसटी कर्मचारियों ने अब तक हड़ताल पीछे नहीं ली, आज आखिरी दिन है. कल से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कल यदि समय मिला तो जिन कर्मचारियों को बाजू में किया गया है, उनकी जगह पर नई भर्ती की जाएगी. ऐसी चेतावनी अजित पवार ने एसटी के हड़ताली कर्मचारियों को दी. |
नई दिल्लीः शाम के समय अक्सर लोग चाय के साथ बिस्कुट,नमकीन,समोसा आदि खाना पसंद करते है। लेकिन आप कुछ अलग खाना चाहते है तो चिली चीज़ टोस्ट की रेसिपी बेस्ट ऑप्शन है। जिसे बच्चे हो या बड़े बड़े चाव से खाते है इसे बनाना बहुत असान है। तो आइए जानें इसकी सिंपल रेसिपी।
- सबसे पहले शिमला मिर्च, हरी मिर्च, हरा धनिया और लहसुन को लेकर अच्छे से छोटाृ छोटा कर के काट लें।
- फिर एक बाउल में बटर चीज़ डाल दें। इसमें फिर हरी मिर्च, लहसुन, हरा धनिया और शिमला मिर्च को डालकर अच्छे से मिक्स करें।
- अब इस मिश्रण में स्वादानुसार पमेसान चीज़ मिलाएं। फिर एक नॉनस्टिक पैन/तवा लेकर उसमें ब्रेड के स्लाइस रखकर धीमी आंच पर एक तरफ से सेंक करें।
- जब ब्रेड स्लाइस सिंक जाएं तो ब्रेड के ऊपर तैयार किया गया मिश्रण लगाएं। ध्यान रहे यह मिश्रण जिस तरफ से ब्रेड को सेंका है उसके ऊपर लगाना है।
- फिर एक पैन में हल्का बटर डालकर धीमी आंच पर ब्रेड स्लाइस को कुरकुरी होने तक सेंक करें। इसके बाद ब्रेड को पैन से बाहर निकालकर काट लें।
- लीजिए तैयार है आपकी स्वादिष्ट चिली चीज़ ब्रेड टोस्ट। इसे आप हरी चटनी या टोमेटो सॉस के साथ सर्व कर सकते हैं।
| नई दिल्लीः शाम के समय अक्सर लोग चाय के साथ बिस्कुट,नमकीन,समोसा आदि खाना पसंद करते है। लेकिन आप कुछ अलग खाना चाहते है तो चिली चीज़ टोस्ट की रेसिपी बेस्ट ऑप्शन है। जिसे बच्चे हो या बड़े बड़े चाव से खाते है इसे बनाना बहुत असान है। तो आइए जानें इसकी सिंपल रेसिपी। - सबसे पहले शिमला मिर्च, हरी मिर्च, हरा धनिया और लहसुन को लेकर अच्छे से छोटाृ छोटा कर के काट लें। - फिर एक बाउल में बटर चीज़ डाल दें। इसमें फिर हरी मिर्च, लहसुन, हरा धनिया और शिमला मिर्च को डालकर अच्छे से मिक्स करें। - अब इस मिश्रण में स्वादानुसार पमेसान चीज़ मिलाएं। फिर एक नॉनस्टिक पैन/तवा लेकर उसमें ब्रेड के स्लाइस रखकर धीमी आंच पर एक तरफ से सेंक करें। - जब ब्रेड स्लाइस सिंक जाएं तो ब्रेड के ऊपर तैयार किया गया मिश्रण लगाएं। ध्यान रहे यह मिश्रण जिस तरफ से ब्रेड को सेंका है उसके ऊपर लगाना है। - फिर एक पैन में हल्का बटर डालकर धीमी आंच पर ब्रेड स्लाइस को कुरकुरी होने तक सेंक करें। इसके बाद ब्रेड को पैन से बाहर निकालकर काट लें। - लीजिए तैयार है आपकी स्वादिष्ट चिली चीज़ ब्रेड टोस्ट। इसे आप हरी चटनी या टोमेटो सॉस के साथ सर्व कर सकते हैं। |
जो उसने सावधानी से पोछ लिया किन्तु प्राचार्यपत्नी की आँखों से यह नहीं छिप सका । उनकी आँखों में पानी छलका ।
उन्होंने कहा : पुत्र ! अधीर न हो !
कहा तो, परन्तु फिर उन्होंने अपने नेत्र पोंछ लिये ।
'राजा पृषत् मेरे मित्र थे,' अग्निवेश्य ने कहा, 'परमज़ानी थे । किन्तु वृद्धावस्था सदैव ही दुखदायी होती है। कोई नहीं होता पुत्र । परमवीर महादानी इन्द्र के से शीर्यवान भी इस संसार से एक दिन चले जाते हैं। मांधाता, रघुकुल के राम, भगीरथ, सुदास, ययाति, कोई भी नहीं रह सका ।'
कहते-कहते उनका गला जैसे रुँध गया किन्तु को छिपाने के लिये वे खाँसने लगे । सुस्थिर होने पर फिर कहाः धनुर्वेद समाप्त कर चुके । अब जीवन के क्षेत्र में उतरो । तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल हो ।
द्रुपद ने उठ कर आचार्य श्री के चरणों को छुआ । के आशीर्वाद समाप्त भी न हो सके थे कि ठीक उसी समय कुटीर बाहर कुछ लोगों के आने-जाने का शब्द हुआ । पाञ्चाल के आमन्त्रण के भेजे हुए श्येनजित् और चित्रवाहन नामक आयुक्त और मातार आचार्य के यादव का शिष्य हृदिक और चुलुका दासी के साथ द्वार पर उपस्थित थे। उनके पीछे अनेक काले रंग के मूतित्र दास ने सिर पर कथालों में फल, उत्तर आदि वस्तु लिए खड़े थे।
द्रोण ने उठ कर देखा और कहा : गुरुदेव ! पाञ्चाल के श्रमुक्त
उपहार लेकर उपस्थित हैं।
द्रुपद ने विनीत होकर कहा : गुरुदेव ! उसने और कुछ नहीं कहा। | जो उसने सावधानी से पोछ लिया किन्तु प्राचार्यपत्नी की आँखों से यह नहीं छिप सका । उनकी आँखों में पानी छलका । उन्होंने कहा : पुत्र ! अधीर न हो ! कहा तो, परन्तु फिर उन्होंने अपने नेत्र पोंछ लिये । 'राजा पृषत् मेरे मित्र थे,' अग्निवेश्य ने कहा, 'परमज़ानी थे । किन्तु वृद्धावस्था सदैव ही दुखदायी होती है। कोई नहीं होता पुत्र । परमवीर महादानी इन्द्र के से शीर्यवान भी इस संसार से एक दिन चले जाते हैं। मांधाता, रघुकुल के राम, भगीरथ, सुदास, ययाति, कोई भी नहीं रह सका ।' कहते-कहते उनका गला जैसे रुँध गया किन्तु को छिपाने के लिये वे खाँसने लगे । सुस्थिर होने पर फिर कहाः धनुर्वेद समाप्त कर चुके । अब जीवन के क्षेत्र में उतरो । तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल हो । द्रुपद ने उठ कर आचार्य श्री के चरणों को छुआ । के आशीर्वाद समाप्त भी न हो सके थे कि ठीक उसी समय कुटीर बाहर कुछ लोगों के आने-जाने का शब्द हुआ । पाञ्चाल के आमन्त्रण के भेजे हुए श्येनजित् और चित्रवाहन नामक आयुक्त और मातार आचार्य के यादव का शिष्य हृदिक और चुलुका दासी के साथ द्वार पर उपस्थित थे। उनके पीछे अनेक काले रंग के मूतित्र दास ने सिर पर कथालों में फल, उत्तर आदि वस्तु लिए खड़े थे। द्रोण ने उठ कर देखा और कहा : गुरुदेव ! पाञ्चाल के श्रमुक्त उपहार लेकर उपस्थित हैं। द्रुपद ने विनीत होकर कहा : गुरुदेव ! उसने और कुछ नहीं कहा। |
राजस्थान से बिहार और झारखंड जा रहे प्रवासियों के ट्रक और खड़ी डीसीएम में टक्कर हो गई। गंभीर रूप से घायल 15 मजदूरों को सैफई के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औरैया सड़क हादसे में कड़ी कर्रवाई की है। इस मामले में बॉर्डर के दो थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उक्त क्षेत्राधिकारियों को कड़ी चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मथुरा एवं आगरा से मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा एडीजी और आइजी आगरा से भी घटना में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
इसके अलावा दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक मालिकों व चालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करने और वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रमिकों व कामगारों को भोजन पानी देकर बसों से सुरक्षित भिजवाने के लिए कहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा सभी बॉर्डर क्षेत्रों में इस निर्देश पर फिर से बल दिया गया है कि ट्रक आदि असुरक्षित साधनों से कोई भी व्यक्ति न चले। मुख्यमंत्री द्वारा बॉर्डर के हर जिले में 200 बस जिलाधिकारी के निवर्तन पर रखने का आदेश पहले ही दे रखा है। साथ ही श्रमिकों को बस से भेजने के लिए धनराशि भी स्वीत की है।
मुख्यमंत्री ने सभी डीएम को फिर से निर्देश दिया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाए। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक मजदूरों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों के उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।
गौरतलब हो कि कोरोनावायरस से दिनों दिन बढ़ते संक्रमण के बीच में सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा होता जा रहा है। लॉकडाउन में भी सरकारों के प्रवासी कामगार-श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के तमाम इंतजाम के बीच भी लोग पैदल या फिर खतरा मोल लेकर घरों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे ही लोगों से भरे ट्राला को शनिवार को औरैया में डीसीएम ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे 24 लोगों की मौत हो गई, जबकि 36 लोग घायल हैं।
राजस्थान से बिहार और झारखंड जा रहे प्रवासियों के ट्रक और खड़ी डीसीएम में टक्कर हो गई। गंभीर रूप से घायल 15 मजदूरों को सैफई के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। जबकि अन्य घायल जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
| राजस्थान से बिहार और झारखंड जा रहे प्रवासियों के ट्रक और खड़ी डीसीएम में टक्कर हो गई। गंभीर रूप से घायल पंद्रह मजदूरों को सैफई के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औरैया सड़क हादसे में कड़ी कर्रवाई की है। इस मामले में बॉर्डर के दो थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उक्त क्षेत्राधिकारियों को कड़ी चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मथुरा एवं आगरा से मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा एडीजी और आइजी आगरा से भी घटना में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इसके अलावा दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक मालिकों व चालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करने और वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रमिकों व कामगारों को भोजन पानी देकर बसों से सुरक्षित भिजवाने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री द्वारा सभी बॉर्डर क्षेत्रों में इस निर्देश पर फिर से बल दिया गया है कि ट्रक आदि असुरक्षित साधनों से कोई भी व्यक्ति न चले। मुख्यमंत्री द्वारा बॉर्डर के हर जिले में दो सौ बस जिलाधिकारी के निवर्तन पर रखने का आदेश पहले ही दे रखा है। साथ ही श्रमिकों को बस से भेजने के लिए धनराशि भी स्वीत की है। मुख्यमंत्री ने सभी डीएम को फिर से निर्देश दिया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाए। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक मजदूरों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों के उपचार के लिए पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। गौरतलब हो कि कोरोनावायरस से दिनों दिन बढ़ते संक्रमण के बीच में सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा होता जा रहा है। लॉकडाउन में भी सरकारों के प्रवासी कामगार-श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के तमाम इंतजाम के बीच भी लोग पैदल या फिर खतरा मोल लेकर घरों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे ही लोगों से भरे ट्राला को शनिवार को औरैया में डीसीएम ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे चौबीस लोगों की मौत हो गई, जबकि छत्तीस लोग घायल हैं। राजस्थान से बिहार और झारखंड जा रहे प्रवासियों के ट्रक और खड़ी डीसीएम में टक्कर हो गई। गंभीर रूप से घायल पंद्रह मजदूरों को सैफई के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। जबकि अन्य घायल जिला अस्पताल में भर्ती हैं। |
हो तो रातमें एक बार भोजन किया जा सकता । ही प्राणी उत्पन्न होते हैं, अन्नसे ही संसार संचालित है। भारत ! अब आप सभी पर्वतदानोंकी विधि, हो रहा है, इसलिये अन्न ही लक्ष्मी है, अन्न ही मन्त्र और उनके फल सुनें । दान देते समय । भगवान जनार्दन हैं, अतः धान्यशैलके रूपमें आप धान्यशैलसे इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिये मेरी रक्षा करें।' अन्नं ब्रह्म यतः प्रोक्तमन्ने प्राणाः प्रतिष्ठिताः । अन्नाद् भवन्ति भूतानि जगदन्नेन वर्धते ॥ अन्नमेव यतो लक्ष्मीरन्नमेव जनार्दनः । धान्यपर्वतरूपेण पाहि तस्मान्नगोत्तम ॥ (उत्तरपर्व १९५ । ४३-४४) 'पर्वतश्रेष्ठ! चूँकि अन्नको ही ब्रह्म कहा जाता है और उसीमें प्राणियोंके प्राण प्रतिष्ठित हैं। अन्नसे
लवणाचलदान-विधि तथा गुडपर्वतकी
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं- राजन् ! अब मैं श्रेष्ठ लवणाचलके दानकी विधि बतला रहा हूँ, जिससे मनुष्य शिवलोकको प्राप्त करता है। सोलह द्रोण नमकसे लवणाचल बनाना चाहिये, क्योंकि यही उत्तम है। उसके आधे आठ द्रोणसे मध्यम और चार द्रोणसे बना हुआ लवणाचल अधम माना गया है। निर्धन मनुष्यको अपनी शक्तिके अनुसार आधा या एक द्रोणका बनवाना चाहिये । इसके अतिरिक्त (पर्वत-परिमाणके) चौथाई द्रोणसे पृथक्-पृथक् (चार) विष्कम्भ (सहायक) - पर्वतोंका निर्माण कराना चाहिये। ब्रह्मा आदि देवताओंके पूजनका विधान सदा पूर्ववत् होना चाहिये। उसी प्रकार सभी स्वर्णमय वृक्ष एवं लोकपालोंके भी स्थापनका विधान है। पहलेकी तरह इसमें भी कामदेव आदि देवों और सरोवरोंका निर्माण कराना चाहिये तथा रातमें जागरण भी करना चाहिये । अब दान- मन्त्रोंको सुनियेसौभाग्यरससम्भूतो यतोऽयं लवणो रसः । दानात्मकत्वेन च मां पाहि पापान्नगोत्तम ॥
महिमाके प्रसंगमें सुलभाका आख्यान तस्मादन्नरसाः सर्वे नोत्कृष्टा लवणं विना । प्रियं च शिवयोर्नित्यं तस्माच्छान्तिप्रदो भव ॥ विष्णुदेहसमुद्भूतं यस्मादारोग्यवर्धनम्। तस्मात् पर्वतरूपेण पाहि संसारसागरात् ॥ (उत्तरपर्व १९६ । ६-८ ) 'पर्वतश्रेष्ठ! चूँकि यह नमकरूप रस सौभाग्यसरोवरसे प्रादुर्भूत हुआ है, इसलिये इसके दानसे तुम मेरी रक्षा करो। चूँकि सभी प्रकारके अन्न एवं रस नमकके बिना उत्कृष्ट नहीं होते अर्थात् स्वादिष्ट नहीं लगते तथा तुम शिव और पार्वतीको सदा परम प्रिय हो, अतः मुझे शान्ति प्रदान करो । चूँकि तुम भगवान् विष्णुके शरीरसे उत्पन्न हुए हो और आरोग्यकी वृद्धि करनेवाले हो, इसलिये तुम पर्वतरूपसे मेरा संसार-सागरसे उद्धार करो।' जो मनुष्य उपर्युक्त विधिसे लवणपर्वतका दान करता है, वह एक कल्पतक पार्वतीलोकमें निवास करता है और अन्तमें परमगति - मोक्षको प्राप्त हो जाता है।
भगवान् श्रीकृष्ण पुनः बोलेमहाराज ! अब मैं उत्तम गुडपर्वतके दानकी विधि बतला रहा हूँ, | हो तो रातमें एक बार भोजन किया जा सकता । ही प्राणी उत्पन्न होते हैं, अन्नसे ही संसार संचालित है। भारत ! अब आप सभी पर्वतदानोंकी विधि, हो रहा है, इसलिये अन्न ही लक्ष्मी है, अन्न ही मन्त्र और उनके फल सुनें । दान देते समय । भगवान जनार्दन हैं, अतः धान्यशैलके रूपमें आप धान्यशैलसे इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिये मेरी रक्षा करें।' अन्नं ब्रह्म यतः प्रोक्तमन्ने प्राणाः प्रतिष्ठिताः । अन्नाद् भवन्ति भूतानि जगदन्नेन वर्धते ॥ अन्नमेव यतो लक्ष्मीरन्नमेव जनार्दनः । धान्यपर्वतरूपेण पाहि तस्मान्नगोत्तम ॥ 'पर्वतश्रेष्ठ! चूँकि अन्नको ही ब्रह्म कहा जाता है और उसीमें प्राणियोंके प्राण प्रतिष्ठित हैं। अन्नसे लवणाचलदान-विधि तथा गुडपर्वतकी भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं- राजन् ! अब मैं श्रेष्ठ लवणाचलके दानकी विधि बतला रहा हूँ, जिससे मनुष्य शिवलोकको प्राप्त करता है। सोलह द्रोण नमकसे लवणाचल बनाना चाहिये, क्योंकि यही उत्तम है। उसके आधे आठ द्रोणसे मध्यम और चार द्रोणसे बना हुआ लवणाचल अधम माना गया है। निर्धन मनुष्यको अपनी शक्तिके अनुसार आधा या एक द्रोणका बनवाना चाहिये । इसके अतिरिक्त चौथाई द्रोणसे पृथक्-पृथक् विष्कम्भ - पर्वतोंका निर्माण कराना चाहिये। ब्रह्मा आदि देवताओंके पूजनका विधान सदा पूर्ववत् होना चाहिये। उसी प्रकार सभी स्वर्णमय वृक्ष एवं लोकपालोंके भी स्थापनका विधान है। पहलेकी तरह इसमें भी कामदेव आदि देवों और सरोवरोंका निर्माण कराना चाहिये तथा रातमें जागरण भी करना चाहिये । अब दान- मन्त्रोंको सुनियेसौभाग्यरससम्भूतो यतोऽयं लवणो रसः । दानात्मकत्वेन च मां पाहि पापान्नगोत्तम ॥ महिमाके प्रसंगमें सुलभाका आख्यान तस्मादन्नरसाः सर्वे नोत्कृष्टा लवणं विना । प्रियं च शिवयोर्नित्यं तस्माच्छान्तिप्रदो भव ॥ विष्णुदेहसमुद्भूतं यस्मादारोग्यवर्धनम्। तस्मात् पर्वतरूपेण पाहि संसारसागरात् ॥ 'पर्वतश्रेष्ठ! चूँकि यह नमकरूप रस सौभाग्यसरोवरसे प्रादुर्भूत हुआ है, इसलिये इसके दानसे तुम मेरी रक्षा करो। चूँकि सभी प्रकारके अन्न एवं रस नमकके बिना उत्कृष्ट नहीं होते अर्थात् स्वादिष्ट नहीं लगते तथा तुम शिव और पार्वतीको सदा परम प्रिय हो, अतः मुझे शान्ति प्रदान करो । चूँकि तुम भगवान् विष्णुके शरीरसे उत्पन्न हुए हो और आरोग्यकी वृद्धि करनेवाले हो, इसलिये तुम पर्वतरूपसे मेरा संसार-सागरसे उद्धार करो।' जो मनुष्य उपर्युक्त विधिसे लवणपर्वतका दान करता है, वह एक कल्पतक पार्वतीलोकमें निवास करता है और अन्तमें परमगति - मोक्षको प्राप्त हो जाता है। भगवान् श्रीकृष्ण पुनः बोलेमहाराज ! अब मैं उत्तम गुडपर्वतके दानकी विधि बतला रहा हूँ, |
इस सप्ताह किस्मत साथ देगी, आपकी तत्परता व योग्यता अधिकारों में वृद्धि दिलाएगी, कार्यक्षेत्र में लाभ व सम्मान बढ़ेगा, अपने आर्थिक एवं कैरियर संबन्धित जीवन के लिए कुछ योजनाओं को मूर्तरूप देंगे। कोई रुका हुआ पैसा या खोई वस्तु आपको वापस मिल सकती है। विद्यार्थियों के पास उनके अध्ययनों को पूरा करने के लिए एक उच्च रूप से अनुशासित और व्यवस्थित तरीका होगा। लव लाइफ के लिहाज से यह सप्ताह अच्छा नहीं रहेगा, वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव हो सकता है। पुरानी बीमारी इस सप्ताह आपको परेशान कर सकती है।
सप्ताह हो अच्छा बनाने के उपायः
- हनुमान जी को मंगलवार को लड्डू का भोग लगावें ।
- भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करें और उन्हें दूर्वा एवं मोदक चढ़ाएँ।
- श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्त्रोत का पाठ करें।
- काले कपड़े में धतूरे की जड़ बांधकर गले या हाथ में शनिवार के दिन बाँधें।
- मंगलवार एवं शनिवार को चमड़े, लकड़ी की वस्तुएं व किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए, दाढ़ी व बाल नहीं कटवाने चाहिएं।
- किसी दुःखी व्यक्ति के आंसू अपने हाथों से पोंछने चाहिएं।
- पीपल के पेड़ में तिल्ली के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
- नौकरों, वृद्धों एवं गरीबों का सम्मान करना चाहिए।
- बंदरों की सेवा और केले के पेड़ में दूध देना चाइये।
- कुत्तों की सेवा करनी चाइये।
- गाय व बैल को दूध-चावल खिलाना चाइये।
- अंधजनों को भोजन करना चाहिए और शराब से दूर रहना चाहिए।
- कुष्ठ रोगियों की सेवा करनी चाहिए।
- शाम को खाने के बाद कुत्ते को रोटी देन और सुबह की शुरूआत मां के चरण स्पर्श करके करे।
| इस सप्ताह किस्मत साथ देगी, आपकी तत्परता व योग्यता अधिकारों में वृद्धि दिलाएगी, कार्यक्षेत्र में लाभ व सम्मान बढ़ेगा, अपने आर्थिक एवं कैरियर संबन्धित जीवन के लिए कुछ योजनाओं को मूर्तरूप देंगे। कोई रुका हुआ पैसा या खोई वस्तु आपको वापस मिल सकती है। विद्यार्थियों के पास उनके अध्ययनों को पूरा करने के लिए एक उच्च रूप से अनुशासित और व्यवस्थित तरीका होगा। लव लाइफ के लिहाज से यह सप्ताह अच्छा नहीं रहेगा, वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव हो सकता है। पुरानी बीमारी इस सप्ताह आपको परेशान कर सकती है। सप्ताह हो अच्छा बनाने के उपायः - हनुमान जी को मंगलवार को लड्डू का भोग लगावें । - भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करें और उन्हें दूर्वा एवं मोदक चढ़ाएँ। - श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्त्रोत का पाठ करें। - काले कपड़े में धतूरे की जड़ बांधकर गले या हाथ में शनिवार के दिन बाँधें। - मंगलवार एवं शनिवार को चमड़े, लकड़ी की वस्तुएं व किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए, दाढ़ी व बाल नहीं कटवाने चाहिएं। - किसी दुःखी व्यक्ति के आंसू अपने हाथों से पोंछने चाहिएं। - पीपल के पेड़ में तिल्ली के तेल का दीपक जलाना चाहिए। - नौकरों, वृद्धों एवं गरीबों का सम्मान करना चाहिए। - बंदरों की सेवा और केले के पेड़ में दूध देना चाइये। - कुत्तों की सेवा करनी चाइये। - गाय व बैल को दूध-चावल खिलाना चाइये। - अंधजनों को भोजन करना चाहिए और शराब से दूर रहना चाहिए। - कुष्ठ रोगियों की सेवा करनी चाहिए। - शाम को खाने के बाद कुत्ते को रोटी देन और सुबह की शुरूआत मां के चरण स्पर्श करके करे। |
तीसरे अंपायर को प्रत्येक बॉल के बाद यह देखना होगा कि गेंदबाज का अगला पैर क्रीज के अंदर था या बाहर।
दुबई, प्रेट्र। ऑस्ट्रेलिया में इस महीने शुरू हो रहे आइसीसी महिला टी-20 विश्व कप के दौरान अगले पैर की नो बॉल की निगरानी तीसरा अंपायर करेगा। आइसीसी की तरफ से बताया गया कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच हुई सीरीज में सफल परीक्षण के बाद इस सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू करने का फैसला किया गया है, जिसके तहत तीसरा अंपायर फ्रंट फुट नो बॉल की निगरानी करेगा।
तीसरे अंपायर को प्रत्येक बॉल के बाद यह देखना होगा कि गेंदबाज का अगला पैर क्रीज के अंदर था या बाहर। वह हर गेंद के बाद मैदानी अंपायर को सही और गलत की जानकारी देगा। मैदानी अंपायरों से कहा गया है कि जब तक तीसरा अंपायर न कहे, वे फ्रंट फुट नो बॉल को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय न दें। मैदानी अंपायरों के पास खेल के दौरान अन्य प्रकार के नो बॉल का फैसला लेने का अधिकार रहेगा। इस तकनीक का इस्तेमाल हाल ही में 12 मैचों के दौरान किया गया। इस दौरान 4717 गेंदें फेंकी गईं और 13 नो बॉल नोटिस किए गए। सभी नो बॉल को लेकर बिल्कुल सटीक फैसला किया गया।
आइसीसी के महाप्रबंधक (क्रिकेट) ज्यौफ एलरडाइस ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह तकनीक आइसीसी महिला टी-20 विश्व कप में फ्रंट फुट नो बॉल में होने वाली गलतियों को कम कर देगी। नो बॉल की पहचान करने में मैदानी अंपायरों को दिक्कत होती है और इस तकनीक से ऐसा नहीं होगा। साथ ही इस तकनीक से खेल की गति पर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जब से हमने पहली बार 2016 में खेली गई इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान सीरीज में इसका उपयोग किया है। हमने देखा है कि इस तकनीक से नो बॉल में होने वाली गलतियों में सुधार हुआ हे। साथ ही खेल की गति पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा है। आइसीसी महिला टी-20 विश्व कप का आयोजन 21 फरवरी से होगा और उद्घाटन मुकाबले में मौजूदा चैंपियन व मेजबान ऑस्ट्रेलिया का सामना भारत से होगा।
| तीसरे अंपायर को प्रत्येक बॉल के बाद यह देखना होगा कि गेंदबाज का अगला पैर क्रीज के अंदर था या बाहर। दुबई, प्रेट्र। ऑस्ट्रेलिया में इस महीने शुरू हो रहे आइसीसी महिला टी-बीस विश्व कप के दौरान अगले पैर की नो बॉल की निगरानी तीसरा अंपायर करेगा। आइसीसी की तरफ से बताया गया कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच हुई सीरीज में सफल परीक्षण के बाद इस सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू करने का फैसला किया गया है, जिसके तहत तीसरा अंपायर फ्रंट फुट नो बॉल की निगरानी करेगा। तीसरे अंपायर को प्रत्येक बॉल के बाद यह देखना होगा कि गेंदबाज का अगला पैर क्रीज के अंदर था या बाहर। वह हर गेंद के बाद मैदानी अंपायर को सही और गलत की जानकारी देगा। मैदानी अंपायरों से कहा गया है कि जब तक तीसरा अंपायर न कहे, वे फ्रंट फुट नो बॉल को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय न दें। मैदानी अंपायरों के पास खेल के दौरान अन्य प्रकार के नो बॉल का फैसला लेने का अधिकार रहेगा। इस तकनीक का इस्तेमाल हाल ही में बारह मैचों के दौरान किया गया। इस दौरान चार हज़ार सात सौ सत्रह गेंदें फेंकी गईं और तेरह नो बॉल नोटिस किए गए। सभी नो बॉल को लेकर बिल्कुल सटीक फैसला किया गया। आइसीसी के महाप्रबंधक ज्यौफ एलरडाइस ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह तकनीक आइसीसी महिला टी-बीस विश्व कप में फ्रंट फुट नो बॉल में होने वाली गलतियों को कम कर देगी। नो बॉल की पहचान करने में मैदानी अंपायरों को दिक्कत होती है और इस तकनीक से ऐसा नहीं होगा। साथ ही इस तकनीक से खेल की गति पर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब से हमने पहली बार दो हज़ार सोलह में खेली गई इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान सीरीज में इसका उपयोग किया है। हमने देखा है कि इस तकनीक से नो बॉल में होने वाली गलतियों में सुधार हुआ हे। साथ ही खेल की गति पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा है। आइसीसी महिला टी-बीस विश्व कप का आयोजन इक्कीस फरवरी से होगा और उद्घाटन मुकाबले में मौजूदा चैंपियन व मेजबान ऑस्ट्रेलिया का सामना भारत से होगा। |
राजस्थान के पाली में आर्मी क्षेत्र में रेकी करते पकड़ाए जावरा के युवक अजहरुद्दीन और जावरा हुसैन टेकरी क्षेत्र की बस्तियों में संचालित संदिग्ध गतिविधियों की जांच की मांग को लेकर विहिप और बजरंग दल ने रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में हिंदू संगठनों ने मांग की है कि रतलाम जिले में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों की जांच की जाए। वहीं, अन्य राज्यों से आए लोगों की नागरिकता का सत्यापन भी किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि राजस्थान के पाली जिले में आर्मी क्षेत्र की रेकी करते पकड़ाया युवक अजहरुद्दीन जावरा का ही रहने वाला है। एवं उसके भाई के द्वारा हुसैन टेकरी क्षेत्र में संचालित किए जा रहे लॉज में बीते दिनों ही एक संगठन की बैठक आयोजित की गई थी। जिसके बाद हिंदू संगठनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
दरअसल राजस्थान के पाली स्थित आर्मी एरिया में भारतीय जवानों ने एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया था। जिस के कमरे की तलाशी में पुलिस को देश विरोधी दस्तावेज और नक्शों के साथ देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित अन्य लोगों के नाम उर्दू में लिखे हुए मिले थे। पूछताछ में पकड़े गए युवक ने अपने आपको रतलाम के जावरा का रहने वाला बताया था। जिसके बाद रतलाम पुलिस ने भी आरोपी के घर की सर्चिंग के साथ पिता और भाइयों से पूछताछ की है।
विहिप एवं बजरंग दल ने इससे पूर्व भी जावरा के हुसैन टेकरी और उसके आसपास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों की जांच कराए जाने की मांग की थी। इसके बाद राजस्थान के पाली में पकड़े गए युवक का जावरा कनेक्शन सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने एक बार फिर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
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| राजस्थान के पाली में आर्मी क्षेत्र में रेकी करते पकड़ाए जावरा के युवक अजहरुद्दीन और जावरा हुसैन टेकरी क्षेत्र की बस्तियों में संचालित संदिग्ध गतिविधियों की जांच की मांग को लेकर विहिप और बजरंग दल ने रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में हिंदू संगठनों ने मांग की है कि रतलाम जिले में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों की जांच की जाए। वहीं, अन्य राज्यों से आए लोगों की नागरिकता का सत्यापन भी किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि राजस्थान के पाली जिले में आर्मी क्षेत्र की रेकी करते पकड़ाया युवक अजहरुद्दीन जावरा का ही रहने वाला है। एवं उसके भाई के द्वारा हुसैन टेकरी क्षेत्र में संचालित किए जा रहे लॉज में बीते दिनों ही एक संगठन की बैठक आयोजित की गई थी। जिसके बाद हिंदू संगठनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। दरअसल राजस्थान के पाली स्थित आर्मी एरिया में भारतीय जवानों ने एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया था। जिस के कमरे की तलाशी में पुलिस को देश विरोधी दस्तावेज और नक्शों के साथ देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित अन्य लोगों के नाम उर्दू में लिखे हुए मिले थे। पूछताछ में पकड़े गए युवक ने अपने आपको रतलाम के जावरा का रहने वाला बताया था। जिसके बाद रतलाम पुलिस ने भी आरोपी के घर की सर्चिंग के साथ पिता और भाइयों से पूछताछ की है। विहिप एवं बजरंग दल ने इससे पूर्व भी जावरा के हुसैन टेकरी और उसके आसपास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों की जांच कराए जाने की मांग की थी। इसके बाद राजस्थान के पाली में पकड़े गए युवक का जावरा कनेक्शन सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने एक बार फिर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
राम जन्मभूमि अयोध्या में अब एक भव्य मंदिर बनने जा रहा है। इसकी नींव बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ रखी जाएगी। इसी बीच इस्लामी कट्टरपंथी आतंकियों द्वारा अयोध्या में हमले की साजिश रचने की भी ख़ुफिया सूचना आई है। इसे देखते हुए कई राज्यों को अलर्ट कर दिया गया। क्या आपको याद है कि 5 जुलाई 2005 को भगवान राम की नगरी में आतंकियों ने कत्लेआम मचाया था?
जैसा कि हमने कई बार देखा है, कपटवेश में आकर अपने खूनी इरादों को अंजाम देना आतंकियों की पुरानी चाल रही है। कभी वो सेना की वर्दी में आते हैं तो कभी आम नागरिक बन कर छलावा देते हैं। इन आतंकियों ने अयोध्या में भी उस दिन यही किया था। उन्होंने श्रद्धालुओं की वेशभूषा में वहाँ पहुँचने में कामयाबी पाई थी। वो रजिस्ट्रेशन वाली एक जीप में बैठ कर आए थे, जिसमें लगा झंडा किसी राजनीतिक दल का प्रतीत होता था।
सुरक्षा के नाम पर वहाँ लोहे की फेंसिंग भर की हुई थी। चूँकि धर्मस्थानों में पहले और जल्दी दर्शन के लिए श्रद्धालु उतावले रहते हैं, इसीलिए पहली नज़र में सभी को यही लगा कि ये श्रद्धालुओं की ही गाड़ी है जो थोड़ी जल्दी में हैं। लेकिन, इससे पहले कि महिंद्रा मार्शल जीप में बैठे आतंकियों को रोका जाता, वो उससे उतर गए। बम से लैस उस जीप को राख होने में पल भर का भी समय नहीं लगा। चारों और अफरातफरी मच गई।
पाँच आतंकियों ने इसके बाद हमले की पोजीशन बना कर सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया। साथ ही वो एके-47 से लगातार फायरिंग भी कर रहे थे। लगभग डेढ़ घंटे तक फायरिंग चलते रही और उसके बाद पाँचों आतंकी मार गिराए गए। लेकिन, उससे पहले उन्होंने तबाही का मंजर दिखाते हुए वो डर पैदा किया, जिसने जनता को एहसास दिलाया कि अब भारत में शायद ही कोई जगह सुरक्षित हो।
ये जुलाई 5, 2005 की सुबह थी, जिसने पूरे भारत में भय का माहौल पैदा कर दिया था। आतंकियों ने सोच-समझ कर अयोध्या को निशाना बनाया था, क्योंकि उन्हें पता था कि ये वो जगह है, जहाँ से दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था तो जुड़ी ही हुई है, साथ ही यहाँ एक पत्ता भी खड़के तो ये पूरे देश मे बड़ी ख़बर बनती है। शायद ये हमला एक चेतावनी था, इससे भी बड़ी आतंकी कार्रवाई का।
यही बात तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कही थी। दूरदर्शी नेता ने कहा था कि आयोध्या हमला एक चेतावनी है, इसीलिए सरकार को सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखनी चाहिए। तब नए प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा था कि आतंकवाद पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। मनमोहन को यही राग पुणे, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और गया मे होने वाले आतंकी हमलों में भी अलापना था।
तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे 1990 में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह यादव, जिन्होंने तो सुरक्षा-व्यवस्था में चूक की सारी बातें ही नकार दी थी। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने इसे स्पष्ट रूप से सुरक्षा-व्यवस्था में चूक का मामला मानते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। ये हमला तब टेंट मे विराजमान रामलला के 50 मीटर की दूरी पर ही हुआ था। सारे आतंकी युवा थे। आखिर वो वहाँ घुस कैसे गए? तब रामलला की सुरक्षा-व्यवस्था की बात करें तो 1400 की संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान गश्त लगाते रहते थे।
13 वाच टॉवर्स को 2 टायर सिक्योरिटी के हिसाब से बनाया गया था। 'इंडिया टुडे' की खबर की मानें तो अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था देखने में ऐसी ही लगती थी, जैसी किसी विमान में चढ़ते समय एयरपोर्ट्स पर होती है। मुलायम सिंह के शब्दों में तो वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, लेकिन इतनी सुरक्षा के बावजूद RDX लदी जीप के साथ हथियारबंद आतंकी मंदिर परिसर में घुसने में कामयाब हो गए थे।
2 स्थानीय लोगों की जान चली गई थी और सीआरपीएफ के 7 जवान घायल हो गए थे। 2005 में प्रयागराज की एक स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में 4 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उन सभी पर 2. 4 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। दोषी आतंकियों में डॉक्टर इरफ़ान, शकील अहमद, आसिफ इकबाल और मोहम्मद नसीम शामिल थे। वहीं मोहम्मद अजीज के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, वो बच निकला।
इस मामले में उस जीप के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसने उन आतंकियों को मंदिर तक पहुँचाया था। ड्राइवर रेहान आलम कुछ दूर पहले ही जीप से उतर गया था। उसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि आतंकियों ने कहा था कि वो श्रद्धालु हैं और रामलला के दर्शन करना चाहते हैं। दरअसल, वहाँ आतंकी दो गाड़ियों से पहुँचे थे, जिनमें से एक में आत्मघाती हमलावर सवार था। उसने ही गाड़ी को ब्लास्ट किया था।
इस मामले में स्पेशल कोर्ट को फैसला सुनाने में 14 साल लग गए थे। कुल 371 सुनवाइयों के दौरान 63 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब जाकर इस मामले में सज़ा मिली। जहाँ इरफ़ान यूपी के ही सहारनपुर का था, बाकी आरोपित जम्मू-कश्मीर के पूँछ के रहने वाले थे। इनके तार खूँखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। आज जब राम मंदिर का सपना साकार होने जा रहा है, हमें इस घटना को याद करने की ज़रूरत है।
| राम जन्मभूमि अयोध्या में अब एक भव्य मंदिर बनने जा रहा है। इसकी नींव बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ रखी जाएगी। इसी बीच इस्लामी कट्टरपंथी आतंकियों द्वारा अयोध्या में हमले की साजिश रचने की भी ख़ुफिया सूचना आई है। इसे देखते हुए कई राज्यों को अलर्ट कर दिया गया। क्या आपको याद है कि पाँच जुलाई दो हज़ार पाँच को भगवान राम की नगरी में आतंकियों ने कत्लेआम मचाया था? जैसा कि हमने कई बार देखा है, कपटवेश में आकर अपने खूनी इरादों को अंजाम देना आतंकियों की पुरानी चाल रही है। कभी वो सेना की वर्दी में आते हैं तो कभी आम नागरिक बन कर छलावा देते हैं। इन आतंकियों ने अयोध्या में भी उस दिन यही किया था। उन्होंने श्रद्धालुओं की वेशभूषा में वहाँ पहुँचने में कामयाबी पाई थी। वो रजिस्ट्रेशन वाली एक जीप में बैठ कर आए थे, जिसमें लगा झंडा किसी राजनीतिक दल का प्रतीत होता था। सुरक्षा के नाम पर वहाँ लोहे की फेंसिंग भर की हुई थी। चूँकि धर्मस्थानों में पहले और जल्दी दर्शन के लिए श्रद्धालु उतावले रहते हैं, इसीलिए पहली नज़र में सभी को यही लगा कि ये श्रद्धालुओं की ही गाड़ी है जो थोड़ी जल्दी में हैं। लेकिन, इससे पहले कि महिंद्रा मार्शल जीप में बैठे आतंकियों को रोका जाता, वो उससे उतर गए। बम से लैस उस जीप को राख होने में पल भर का भी समय नहीं लगा। चारों और अफरातफरी मच गई। पाँच आतंकियों ने इसके बाद हमले की पोजीशन बना कर सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया। साथ ही वो एके-सैंतालीस से लगातार फायरिंग भी कर रहे थे। लगभग डेढ़ घंटे तक फायरिंग चलते रही और उसके बाद पाँचों आतंकी मार गिराए गए। लेकिन, उससे पहले उन्होंने तबाही का मंजर दिखाते हुए वो डर पैदा किया, जिसने जनता को एहसास दिलाया कि अब भारत में शायद ही कोई जगह सुरक्षित हो। ये जुलाई पाँच, दो हज़ार पाँच की सुबह थी, जिसने पूरे भारत में भय का माहौल पैदा कर दिया था। आतंकियों ने सोच-समझ कर अयोध्या को निशाना बनाया था, क्योंकि उन्हें पता था कि ये वो जगह है, जहाँ से दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था तो जुड़ी ही हुई है, साथ ही यहाँ एक पत्ता भी खड़के तो ये पूरे देश मे बड़ी ख़बर बनती है। शायद ये हमला एक चेतावनी था, इससे भी बड़ी आतंकी कार्रवाई का। यही बात तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कही थी। दूरदर्शी नेता ने कहा था कि आयोध्या हमला एक चेतावनी है, इसीलिए सरकार को सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखनी चाहिए। तब नए प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा था कि आतंकवाद पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। मनमोहन को यही राग पुणे, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और गया मे होने वाले आतंकी हमलों में भी अलापना था। तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे एक हज़ार नौ सौ नब्बे में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह यादव, जिन्होंने तो सुरक्षा-व्यवस्था में चूक की सारी बातें ही नकार दी थी। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने इसे स्पष्ट रूप से सुरक्षा-व्यवस्था में चूक का मामला मानते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। ये हमला तब टेंट मे विराजमान रामलला के पचास मीटर की दूरी पर ही हुआ था। सारे आतंकी युवा थे। आखिर वो वहाँ घुस कैसे गए? तब रामलला की सुरक्षा-व्यवस्था की बात करें तो एक हज़ार चार सौ की संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान गश्त लगाते रहते थे। तेरह वाच टॉवर्स को दो टायर सिक्योरिटी के हिसाब से बनाया गया था। 'इंडिया टुडे' की खबर की मानें तो अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था देखने में ऐसी ही लगती थी, जैसी किसी विमान में चढ़ते समय एयरपोर्ट्स पर होती है। मुलायम सिंह के शब्दों में तो वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, लेकिन इतनी सुरक्षा के बावजूद RDX लदी जीप के साथ हथियारबंद आतंकी मंदिर परिसर में घुसने में कामयाब हो गए थे। दो स्थानीय लोगों की जान चली गई थी और सीआरपीएफ के सात जवान घायल हो गए थे। दो हज़ार पाँच में प्रयागराज की एक स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उन सभी पर दो. चार लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। दोषी आतंकियों में डॉक्टर इरफ़ान, शकील अहमद, आसिफ इकबाल और मोहम्मद नसीम शामिल थे। वहीं मोहम्मद अजीज के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, वो बच निकला। इस मामले में उस जीप के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसने उन आतंकियों को मंदिर तक पहुँचाया था। ड्राइवर रेहान आलम कुछ दूर पहले ही जीप से उतर गया था। उसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि आतंकियों ने कहा था कि वो श्रद्धालु हैं और रामलला के दर्शन करना चाहते हैं। दरअसल, वहाँ आतंकी दो गाड़ियों से पहुँचे थे, जिनमें से एक में आत्मघाती हमलावर सवार था। उसने ही गाड़ी को ब्लास्ट किया था। इस मामले में स्पेशल कोर्ट को फैसला सुनाने में चौदह साल लग गए थे। कुल तीन सौ इकहत्तर सुनवाइयों के दौरान तिरेसठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब जाकर इस मामले में सज़ा मिली। जहाँ इरफ़ान यूपी के ही सहारनपुर का था, बाकी आरोपित जम्मू-कश्मीर के पूँछ के रहने वाले थे। इनके तार खूँखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। आज जब राम मंदिर का सपना साकार होने जा रहा है, हमें इस घटना को याद करने की ज़रूरत है। |
लाइव हिंदी समाचार (हेल्थ कार्नर) :- हर कोई आदमी यही चाहता है कि उसका पेट कम हो जाए और पेट बाहर ना निकले. क्योंकि बढ़ी हुई तोंद कोई भी अपने पास नहीं रखना चाहता है चाहे वह पुरुष हो या फिर कोई भी महिला.
- बढ़ी हुई तोंद कम करने के लिए हर पुरुष जुगाड़ लगाकर बहुत प्रयास करता है कि उसकी तोंद कम हो जाए परंतु ऐसा वह कर नहीं पाता है. इसीलिए आज हम आपको बताएंगे कि नींबू पानी में गुड़ को मिलाकर इतनी सरलता से मोटापा कम किया जा सकता है.
- भारत में नींबू पानी पीने का बड़े जोर शोर से प्रचलन है. यहां पर नींबू पानी स्वयं भी पीते हैं और दूसरों को भी पिलाया जाता है. नींबू पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और शरीर हल्का फुल्का महसूस होने लगता है.
- नींबू में एसेटिक कंटेन पाया जाता है जो कैलोरी को जलाता है. इस तरह से नींबू और गुड़ को एक साथ पीने से कितना लाभ होता है आइए जानते हैं.
- नींबू पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन नहीं होता है. शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेट रखने के लिए पानी की बहुत आवश्यकता होती है. ऐसे में आप ढेर सारा पानी पी सकते हैं और यदि पानी में नींबू मिला दिया जाए तो इसका स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है. इसमें 'विटामिन सी' पाया जाता है जो दिल के लिए स्वास्थ्यकर होता है और साथ में स्ट्रोक के खतरे को भी टालता है.
- शरीर के ब्लड प्रेशर को नियंत्रण रखता है. इस पानी को पीने से हमारा शरीर ठंड से बचा रहता है. रूखी त्वचा को ठीक करता है और त्वचा की झुर्रीयों को ठीक करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी त्वचा जितनी अधिक हाइड्रेट रहेगी उतनी अधिक ग्लो करेगी. मेटाबॉलिज्म को ठीक करता है जिसकी वजह से वेट लॉस होने लगता है. पाचन क्रिया को ठीक करता है. ये सांसों की बदबू को भी ठीक करता है क्योंकि ये मुंह की लार को बढ़ाता है जिसकी वजह से गला सूख नहीं पाता है. नींबू किडनी स्टोन को बनने से रोकता है.
अब दोस्तों हम बताते हैं कि नींबू पानी और गुड़ से वेट लॉस कैसे होता है.
- नींबू पानी को जब गुड़ से मिलाया जाता है तो यह वेट लॉस की प्रक्रिया को तेज कर देता है. इसको बनाने के लिए एक गिलास गर्म पानी लें, उसमें एक नींबू निचोड़ दें और उसके बाद एक टेबलस्पून गुड उसमें मिला दें. इस ड्रिंक को रोज सुबह खाली पेट पीयें. इससे मेटाबॉलिज्म तेज होगा जिसकी वजह से वेट बहुत शीघ्र कम होने लगेगा.
| लाइव हिंदी समाचार :- हर कोई आदमी यही चाहता है कि उसका पेट कम हो जाए और पेट बाहर ना निकले. क्योंकि बढ़ी हुई तोंद कोई भी अपने पास नहीं रखना चाहता है चाहे वह पुरुष हो या फिर कोई भी महिला. - बढ़ी हुई तोंद कम करने के लिए हर पुरुष जुगाड़ लगाकर बहुत प्रयास करता है कि उसकी तोंद कम हो जाए परंतु ऐसा वह कर नहीं पाता है. इसीलिए आज हम आपको बताएंगे कि नींबू पानी में गुड़ को मिलाकर इतनी सरलता से मोटापा कम किया जा सकता है. - भारत में नींबू पानी पीने का बड़े जोर शोर से प्रचलन है. यहां पर नींबू पानी स्वयं भी पीते हैं और दूसरों को भी पिलाया जाता है. नींबू पानी पीने से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और शरीर हल्का फुल्का महसूस होने लगता है. - नींबू में एसेटिक कंटेन पाया जाता है जो कैलोरी को जलाता है. इस तरह से नींबू और गुड़ को एक साथ पीने से कितना लाभ होता है आइए जानते हैं. - नींबू पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन नहीं होता है. शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेट रखने के लिए पानी की बहुत आवश्यकता होती है. ऐसे में आप ढेर सारा पानी पी सकते हैं और यदि पानी में नींबू मिला दिया जाए तो इसका स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है. इसमें 'विटामिन सी' पाया जाता है जो दिल के लिए स्वास्थ्यकर होता है और साथ में स्ट्रोक के खतरे को भी टालता है. - शरीर के ब्लड प्रेशर को नियंत्रण रखता है. इस पानी को पीने से हमारा शरीर ठंड से बचा रहता है. रूखी त्वचा को ठीक करता है और त्वचा की झुर्रीयों को ठीक करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी त्वचा जितनी अधिक हाइड्रेट रहेगी उतनी अधिक ग्लो करेगी. मेटाबॉलिज्म को ठीक करता है जिसकी वजह से वेट लॉस होने लगता है. पाचन क्रिया को ठीक करता है. ये सांसों की बदबू को भी ठीक करता है क्योंकि ये मुंह की लार को बढ़ाता है जिसकी वजह से गला सूख नहीं पाता है. नींबू किडनी स्टोन को बनने से रोकता है. अब दोस्तों हम बताते हैं कि नींबू पानी और गुड़ से वेट लॉस कैसे होता है. - नींबू पानी को जब गुड़ से मिलाया जाता है तो यह वेट लॉस की प्रक्रिया को तेज कर देता है. इसको बनाने के लिए एक गिलास गर्म पानी लें, उसमें एक नींबू निचोड़ दें और उसके बाद एक टेबलस्पून गुड उसमें मिला दें. इस ड्रिंक को रोज सुबह खाली पेट पीयें. इससे मेटाबॉलिज्म तेज होगा जिसकी वजह से वेट बहुत शीघ्र कम होने लगेगा. |
Micrhogam UF डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से गर्भावस्था में आरएच संवेदनशीलता का इलाज करने के लिए किया जाता है। Micrhogam UF का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
Micrhogam UF की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है।
इन दुष्परिणामों के अलावा Micrhogam UF के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Micrhogam UF के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
इसके अलावा Micrhogam UF को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव अज्ञात होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव अज्ञात है। इसके अतिरिक्त Micrhogam UF का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Micrhogam UF से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है।
यदि किसी व्यक्ति को एगम्माग्लोबुलिनीमिया, एनीमिया जैसी कोई समस्या है, तो उसे Micrhogam UF दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Micrhogam UF को न लें।
साथ ही, Micrhogam UF को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। नीचे ऐसी दवाओं की पूरी लिस्ट दी गई है।
ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Micrhogam UF लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Micrhogam UF की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Micrhogam UF की खुराक अलग हो सकती है।
।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष)
।बच्चे(2 से 12 वर्ष)
क्या Micrhogam UF का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
प्रेग्नेंट महिला पर Micrhogam UF के अच्छे या बुरे प्रभाव के बारे में चिकित्सा जगत में कोई रिसर्च न हो पाने के चलते पूरी जानकारी मौजूद नहीं हैं। इसको जब भी लें डॉक्टर से पूछने के बाद ही लें।
क्या Micrhogam UF का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर Micrhogam UF के क्या प्रभाव होंगे। इस बारे में शोध कार्य न हो पान के चलते कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल इसको लेने से पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है।
Micrhogam UF का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Micrhogam UF का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं।
Micrhogam UF का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Micrhogam UF खाने से आपके लीवर पर किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।
क्या ह्रदय पर Micrhogam UF का प्रभाव पड़ता है?
Micrhogam UF हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।
क्या Micrhogam UF आदत या लत बन सकती है?
नहीं, लेकिन फिर भी आप Micrhogam UF को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।
क्या Micrhogam UF को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Micrhogam UF लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी।
क्या Micrhogam UF को लेना सुरखित है?
हां, परंतु इसको लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Micrhogam UF इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, मस्तिष्क विकार में Micrhogam UF का उपयोग कारगर नहीं है।
क्या Micrhogam UF को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
Micrhogam UF को खाने के साथ लेना सुरक्षित है।
जब Micrhogam UF ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Micrhogam UF से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा।
| Micrhogam UF डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से गर्भावस्था में आरएच संवेदनशीलता का इलाज करने के लिए किया जाता है। Micrhogam UF का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। Micrhogam UF की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। यह दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए यह इस आधार पर भी निर्भर करता है कि मरीज की मूल समस्या क्या है और दवा को किस रूप में दिया जा रहा है। नीचे दिए गए खुराक के खंड में इस बारे में पूरी जानकारी के साथ बताया गया है। इन दुष्परिणामों के अलावा Micrhogam UF के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Micrhogam UF के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा Micrhogam UF को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव अज्ञात होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव अज्ञात है। इसके अतिरिक्त Micrhogam UF का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Micrhogam UF से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। यदि किसी व्यक्ति को एगम्माग्लोबुलिनीमिया, एनीमिया जैसी कोई समस्या है, तो उसे Micrhogam UF दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Micrhogam UF को न लें। साथ ही, Micrhogam UF को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। नीचे ऐसी दवाओं की पूरी लिस्ट दी गई है। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Micrhogam UF लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Micrhogam UF की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Micrhogam UF की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था ।बच्चे क्या Micrhogam UF का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? प्रेग्नेंट महिला पर Micrhogam UF के अच्छे या बुरे प्रभाव के बारे में चिकित्सा जगत में कोई रिसर्च न हो पाने के चलते पूरी जानकारी मौजूद नहीं हैं। इसको जब भी लें डॉक्टर से पूछने के बाद ही लें। क्या Micrhogam UF का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर Micrhogam UF के क्या प्रभाव होंगे। इस बारे में शोध कार्य न हो पान के चलते कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल इसको लेने से पहले डॉक्टर से पूछना जरूरी है। Micrhogam UF का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Micrhogam UF का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Micrhogam UF का जिगर पर क्या असर होता है? Micrhogam UF खाने से आपके लीवर पर किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा। क्या ह्रदय पर Micrhogam UF का प्रभाव पड़ता है? Micrhogam UF हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। क्या Micrhogam UF आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Micrhogam UF को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Micrhogam UF को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहीं, आप ऐसा कोई भी काम न करें, जिसमें दिमाग के सक्रिय होने की आवश्यकता होती हो। Micrhogam UF लेने के बाद किसी मशीन पर काम करने या वाहन चलाने से आपको दूरी बनानी होगी। क्या Micrhogam UF को लेना सुरखित है? हां, परंतु इसको लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Micrhogam UF इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, मस्तिष्क विकार में Micrhogam UF का उपयोग कारगर नहीं है। क्या Micrhogam UF को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Micrhogam UF को खाने के साथ लेना सुरक्षित है। जब Micrhogam UF ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? रिसर्च न होने की वजह से पूरी जानकारी के आभाव में Micrhogam UF से दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसको लेना लाभकर होगा। |
असल में यह सवाल साधारणतः पॉर्न देखने के कारण मन में आता है. लेकिन सच तो यह है कि सामान्य रूप से प्रेम संबंध पूर्ण रूप से स्थापित करने में 30 मिनट का समय लगता है, लेकिन यह सबके लिए समान नहीं भी हो सकता है, थोड़ा-सा समय का अतिक्रम भी हो सकता है. यदि आप प्रेम-संबंध स्थापित करते वक्त 3 मिनट से ज़्यादा समय तक उत्तेजित नहीं रह पाते हैं तो इसका मतलब है आपको कोई शारीरिक या सेक्स संबंधी समस्या है. इन समस्याओं से राहत पाने के लिए आप इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं, जो आपको लंबे समय तक सेक्स क्रिया करने में सहायता करेगा.
1. ज़्यादा मात्रा में फल और सब्ज़ियों का सेवन- अध्ययन यह बताता है कि मांसाहारी सेवन करने वाले पुरूषों की तुलना में शाकाहारी सेवन करने वाले पुरूष लंबे समय तक सेक्स क्रिया का आनंद उठा पाते हैं. क्योंकि फल और सब्ज़ियों का सेवन करने से जो पौष्टकता उन्हें मिलती है वह सेक्स क्रिया को करने में ताकत और ऊर्जा प्रदान करने में सहायता करते हैं.
2. प्रेम संबंध स्थापित करने के पहले केला खाने से आप सेक्स का आनंद ज़्यादा देर तक उठा पायेंगे. क्योंकि केले में जो पोटाशियम और ग्लूकोज़ होता है वह सेक्स का पूरा आनंद उठाने में मदद करता है.
3. आंवला रस का नियमित रूप से सेवन करने से इसमें जो जिन्क और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है वह वीर्य (sperm) की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सेक्स का आनंद उठाने में मदद करता है.
4. स्क्वीज़ तकनीक (squeeze technique) का इस्तेमाल करें- जब आप सेक्स के चरम अवस्था में हो तब इस तकनीक के द्वारा सेक्स क्रिया का आनंद लंबे समय तक उठा पायेंगे.
5. फोरप्ले पर ध्यान दें- इससे आप अपने सहयोगी को भी खुश कर पायेंगे और चरम अवस्था का आनंद लंबे समय ले पायेंगे.
6. पर्याप्त मात्रा में नींद- शिकागो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकारियों के अनुसंधान के अनुसार जो पुरूष सात से आठ घंटा नहीं सोते हैं उनमें टेस्टास्टरोन का स्तर घट जाता है. अतः यौन क्रिया का पूरा आनंद उठाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सोना ज़रूरी होता है.
7. योगासन का अभ्यास- भूजंगासन और पश्चिमात्तोसन का अभ्यास करने से जननांग में रक्त का प्रवाह अच्छी तरह से हो पाता है जिससे आप सेक्स क्रिया में अच्छी तरह से आनंद उठा पाते हैं.
| असल में यह सवाल साधारणतः पॉर्न देखने के कारण मन में आता है. लेकिन सच तो यह है कि सामान्य रूप से प्रेम संबंध पूर्ण रूप से स्थापित करने में तीस मिनट का समय लगता है, लेकिन यह सबके लिए समान नहीं भी हो सकता है, थोड़ा-सा समय का अतिक्रम भी हो सकता है. यदि आप प्रेम-संबंध स्थापित करते वक्त तीन मिनट से ज़्यादा समय तक उत्तेजित नहीं रह पाते हैं तो इसका मतलब है आपको कोई शारीरिक या सेक्स संबंधी समस्या है. इन समस्याओं से राहत पाने के लिए आप इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं, जो आपको लंबे समय तक सेक्स क्रिया करने में सहायता करेगा. एक. ज़्यादा मात्रा में फल और सब्ज़ियों का सेवन- अध्ययन यह बताता है कि मांसाहारी सेवन करने वाले पुरूषों की तुलना में शाकाहारी सेवन करने वाले पुरूष लंबे समय तक सेक्स क्रिया का आनंद उठा पाते हैं. क्योंकि फल और सब्ज़ियों का सेवन करने से जो पौष्टकता उन्हें मिलती है वह सेक्स क्रिया को करने में ताकत और ऊर्जा प्रदान करने में सहायता करते हैं. दो. प्रेम संबंध स्थापित करने के पहले केला खाने से आप सेक्स का आनंद ज़्यादा देर तक उठा पायेंगे. क्योंकि केले में जो पोटाशियम और ग्लूकोज़ होता है वह सेक्स का पूरा आनंद उठाने में मदद करता है. तीन. आंवला रस का नियमित रूप से सेवन करने से इसमें जो जिन्क और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है वह वीर्य की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सेक्स का आनंद उठाने में मदद करता है. चार. स्क्वीज़ तकनीक का इस्तेमाल करें- जब आप सेक्स के चरम अवस्था में हो तब इस तकनीक के द्वारा सेक्स क्रिया का आनंद लंबे समय तक उठा पायेंगे. पाँच. फोरप्ले पर ध्यान दें- इससे आप अपने सहयोगी को भी खुश कर पायेंगे और चरम अवस्था का आनंद लंबे समय ले पायेंगे. छः. पर्याप्त मात्रा में नींद- शिकागो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकारियों के अनुसंधान के अनुसार जो पुरूष सात से आठ घंटा नहीं सोते हैं उनमें टेस्टास्टरोन का स्तर घट जाता है. अतः यौन क्रिया का पूरा आनंद उठाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सोना ज़रूरी होता है. सात. योगासन का अभ्यास- भूजंगासन और पश्चिमात्तोसन का अभ्यास करने से जननांग में रक्त का प्रवाह अच्छी तरह से हो पाता है जिससे आप सेक्स क्रिया में अच्छी तरह से आनंद उठा पाते हैं. |
17वीं लोकसभा के लिए लगभग सभी पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाले कई बड़े सितारे इस बार अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
भारतीय राजनीति में फिल्मी सितारों को लाने की शुरुआत कांग्रेस पार्टी द्वारा की गयी थी। इसके बाद देश की तमाम पार्टियां और राजनितिक दल इस ट्रेंड के पीछे चल दिए। अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, वैयजंती माला, विनोद खन्ना और परेश रावल जैसी बड़ी फिल्मी हस्तियों के राजनीति में आने के बाद, देश के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव आया। 17 वीं लोकसभा के लिए चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में देश की सभी पार्टियां जोर शोर के साथ फिल्मी सितारों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे रही हैं। आइये जानते हैं कि इस बार किस-किस पार्टी ने कौन-कौन से फिल्मी सितारों को मैदान में उतारा है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटि के अध्यक्ष राज बब्बर ने साल 1989 में जनता दल के जरिये राजनीति में कदम रखने के बाद समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थी। समाजवादी पार्टी में तीन बार लोकसभा सांसद रहने के बाद साल 2006 में इंहोने समाजवादी पार्टी छोड़ दी और 2008 में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। 2009 में हुए लोकसभा इलेक्शन में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए मुलायम सिंह यादव की बहु डिंपल यादव को हरा कर फिर से सांसद बने। आगामी लोकसभा चुनाव में राज बब्बर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
बिहार की पटना साहिब सीट पर 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बनने वाले शत्रु बीजेपी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। लंबे समय से पार्टी और उनके विचारों में मतभेद होने के कारण इस बार बीजेपी ने शत्रु का टिकट काट दिया है। सूत्रों के मुताबिक शत्रु जल्द ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं और बिहार की पटना साहिब सीट से ही चुनाव लड़ सकते हैं।
साल 1994 में टीडीपी से अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत करने के बाद जयाप्रदा ने बाद में समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थीं। दो बार लोकसभा सांसद रहने के बाद जया ने साल 2014 में आरएलडी के टिकट पर बिजनौर सीट से लोकसभा का इलेक्शन लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हाल ही में जयाप्रदा ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थमा है और वे उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से आजम खान के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं।
भारतीय जनता पार्टी हेमा मालिनी को राजनीति में लेकर आई थी। साल 2003 से 2009 तक राज्य सभा सांसद रहने के बाद हेमा को पार्टी ने साल 2011 में बीजेपी का जनरल सेक्रेटरी बनाया था। साल 2014 में बीजेपी की मथुरा सीट से इलेक्शन लड़ने के बाद आरएलडी के जयंत चौधरी को हराया था। फिलहाल मथुरा सीट से ही हेमा एक बार फिर से चुनाव लड़ने जा रही हैं।
हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के लोकसभा में चुनाव लाड़े जाने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन बीजेपी की प्रत्याशियों की सूची में गंभीर का नाम नहीं है। हालांकि पार्टी में शामिल होने के बाद गौतम गंभीर के नयी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने के कयास लगाये जा रहे थे।
साल 2014 में कांग्रेस के टिकट से उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के बाद रवि किशन ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। इस बार रवि किशन ने जौनपुर से ही चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि पार्टी की तरफ से इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है।
बॉलीवुड की 'रंगीली गर्ल' उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में उर्मिला ने पार्टी का दामन थाम लिया है। हालांकि उनके चुनाव लड़ने को लेकर अभी पार्टी ने कोई घोषणा नहीं की है।
दिनेश लाल यादव (निरहुआ)
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। हालांकि रवि किशन की ही तरह अभी निरहुआ को टिकट दिए जाने को लेकर किसी भी तरह की कोई खबर सामने नहीं आई है।
| सत्रहवीं लोकसभा के लिए लगभग सभी पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाले कई बड़े सितारे इस बार अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। भारतीय राजनीति में फिल्मी सितारों को लाने की शुरुआत कांग्रेस पार्टी द्वारा की गयी थी। इसके बाद देश की तमाम पार्टियां और राजनितिक दल इस ट्रेंड के पीछे चल दिए। अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, वैयजंती माला, विनोद खन्ना और परेश रावल जैसी बड़ी फिल्मी हस्तियों के राजनीति में आने के बाद, देश के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव आया। सत्रह वीं लोकसभा के लिए चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में देश की सभी पार्टियां जोर शोर के साथ फिल्मी सितारों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे रही हैं। आइये जानते हैं कि इस बार किस-किस पार्टी ने कौन-कौन से फिल्मी सितारों को मैदान में उतारा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटि के अध्यक्ष राज बब्बर ने साल एक हज़ार नौ सौ नवासी में जनता दल के जरिये राजनीति में कदम रखने के बाद समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थी। समाजवादी पार्टी में तीन बार लोकसभा सांसद रहने के बाद साल दो हज़ार छः में इंहोने समाजवादी पार्टी छोड़ दी और दो हज़ार आठ में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। दो हज़ार नौ में हुए लोकसभा इलेक्शन में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए मुलायम सिंह यादव की बहु डिंपल यादव को हरा कर फिर से सांसद बने। आगामी लोकसभा चुनाव में राज बब्बर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। बिहार की पटना साहिब सीट पर दो हज़ार नौ और दो हज़ार चौदह में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बनने वाले शत्रु बीजेपी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। लंबे समय से पार्टी और उनके विचारों में मतभेद होने के कारण इस बार बीजेपी ने शत्रु का टिकट काट दिया है। सूत्रों के मुताबिक शत्रु जल्द ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं और बिहार की पटना साहिब सीट से ही चुनाव लड़ सकते हैं। साल एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में टीडीपी से अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत करने के बाद जयाप्रदा ने बाद में समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थीं। दो बार लोकसभा सांसद रहने के बाद जया ने साल दो हज़ार चौदह में आरएलडी के टिकट पर बिजनौर सीट से लोकसभा का इलेक्शन लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हाल ही में जयाप्रदा ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थमा है और वे उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से आजम खान के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। भारतीय जनता पार्टी हेमा मालिनी को राजनीति में लेकर आई थी। साल दो हज़ार तीन से दो हज़ार नौ तक राज्य सभा सांसद रहने के बाद हेमा को पार्टी ने साल दो हज़ार ग्यारह में बीजेपी का जनरल सेक्रेटरी बनाया था। साल दो हज़ार चौदह में बीजेपी की मथुरा सीट से इलेक्शन लड़ने के बाद आरएलडी के जयंत चौधरी को हराया था। फिलहाल मथुरा सीट से ही हेमा एक बार फिर से चुनाव लड़ने जा रही हैं। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के लोकसभा में चुनाव लाड़े जाने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन बीजेपी की प्रत्याशियों की सूची में गंभीर का नाम नहीं है। हालांकि पार्टी में शामिल होने के बाद गौतम गंभीर के नयी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने के कयास लगाये जा रहे थे। साल दो हज़ार चौदह में कांग्रेस के टिकट से उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के बाद रवि किशन ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। इस बार रवि किशन ने जौनपुर से ही चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि पार्टी की तरफ से इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। बॉलीवुड की 'रंगीली गर्ल' उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में उर्मिला ने पार्टी का दामन थाम लिया है। हालांकि उनके चुनाव लड़ने को लेकर अभी पार्टी ने कोई घोषणा नहीं की है। दिनेश लाल यादव भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। हालांकि रवि किशन की ही तरह अभी निरहुआ को टिकट दिए जाने को लेकर किसी भी तरह की कोई खबर सामने नहीं आई है। |
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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी का चुनावी शंखनाद करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देश की सुरक्षा, घुसपैठियों की समस्या और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों पर कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर शनिवार को जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी सरकार के कार्यों के बारे में सवाल करने के बजाय सत्ता के शीर्ष पर रहीं अपनी चार पीढ़ियों के काम-काज का हिसाब दें.
शाह ने यहां दशहरा मैदान में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा, 'राहुल आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के गांव-गांव में घूमकर प्रधानमंत्री से सवाल कर रहे हैं कि उनकी सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में क्या किया है? हमें आपको जवाब देने की जरूरत नहीं है बल्कि देश की जनता आपसे आपकी चार पीढ़ियों का हिसाब मांग रही है. '
बीजेपी अध्यक्ष शाह ने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारें 'वन रैंक, वन पेंशन योजना' लागू करने की सैनिकों की 40 साल पुरानी मांग को पूरा नहीं कर सकी. लेकिन मोदी सरकार ने इस योजना को अमली जामा पहनाते हुए सैनिकों को 10,000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया. बीते सालों में बड़े किसान आंदोलनों के गवाह रहे मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी के चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए शाह ने किसानों के मुद्दे पर भी बात की.
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल पूछते हुए कहा कि आपकी सरकारों ने अन्नदाताओं को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं दिया, जबकि वे पिछले 70 साल से इसकी मांग कर रहे थे. लेकिन मोदी सरकार ने रबी और खरीफ फसलों के लिये खेती की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर किसानों की यह मांग पूरी की. बीजेपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के लिये देश की सुरक्षा को ताक पर रख दिया.
शाह ने आगे कहा कि 1990 के दशक में पाकिस्तान के भेजे हुए आतंकवादी बॉर्डर पार करके जम्मू-कश्मीर में घुसते थे और हमारे जवानों के सिर काटकर ले जाते थे. लेकिन मोदी ने हमारी सेना के बहादुरों को सरहद पार भेजा जिन्होंने 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर हमारे जवानों की मौत का बदला लिया. उन्होंने कहा कि राहुल ने बयान दिया था कि प्रधानमंत्री सैनिकों के खून की दलाली कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को शहादत का मोल पता नहीं है. वरना वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करते.
बीजेपी अध्यक्ष ने अपने कांग्रेसी समकक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल सर्जिकल स्ट्राइक की अहमियत देखने में इसलिए असमर्थ हैं, क्योंकि उनकी आंखों पर इतालवी चश्मा चढ़ा है. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के राज में घुसपैठ के लिये सरहदें खुली छोड़ देने के चलते देश में करोड़ों घुसपैठिये दाखिल हो गये और इन्हें देश से बाहर निकालने के लिये कदम नहीं उठाये गये.
उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) बनाकर 40 लाख घुसपैठियों की पहचान की और ऐसा करने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी जैसे दल इस तरह हाय-तौबा मचाने लगे जैसे इनकी नानी मर गयी हो. शाह ने मांग की कि राहुल मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में जनता से कांग्रेस के लिये वोट मांगने से पहले घुसपैठियों की समस्या पर अपना रुख साफ करें. उन्होंने आगामी चुनावों में मध्य प्रदेश और देश में बीजेपी को दोबारा विजयी बनाने की मतदाताओं से अपील की और कहा, 'हम वोट बैंक की राजनीति नहीं करते और हमारे लिये देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि हम घुसपैठियों को चुन-चुन कर पूरे देश से बाहर निकालेंगे. '
इसके अलावा अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार की मुखिया ममता बनर्जी पर घुसपैठियों के मामले में निशाना साधते हुए कहा कि वह गिरगिट की तरह रंग बदलती हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'पहले ममता घुसपैठियों के खिलाफ आवाज उठाती थीं, लेकिन अब चूंकि घुसपैठिये उनकी पार्टी को वोट देते हैं. इसलिये वह कह रही हैं कि घुसपैठियों को देश में ही रहने दिया जाये. '
आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीख की घोषणा कर दी है. मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होगा जबकि मतगणना 11 दिसंबर को होगी.
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| बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी का चुनावी शंखनाद करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देश की सुरक्षा, घुसपैठियों की समस्या और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों पर कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर शनिवार को जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी सरकार के कार्यों के बारे में सवाल करने के बजाय सत्ता के शीर्ष पर रहीं अपनी चार पीढ़ियों के काम-काज का हिसाब दें. शाह ने यहां दशहरा मैदान में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा, 'राहुल आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के गांव-गांव में घूमकर प्रधानमंत्री से सवाल कर रहे हैं कि उनकी सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में क्या किया है? हमें आपको जवाब देने की जरूरत नहीं है बल्कि देश की जनता आपसे आपकी चार पीढ़ियों का हिसाब मांग रही है. ' बीजेपी अध्यक्ष शाह ने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारें 'वन रैंक, वन पेंशन योजना' लागू करने की सैनिकों की चालीस साल पुरानी मांग को पूरा नहीं कर सकी. लेकिन मोदी सरकार ने इस योजना को अमली जामा पहनाते हुए सैनिकों को दस,शून्य करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया. बीते सालों में बड़े किसान आंदोलनों के गवाह रहे मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी के चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए शाह ने किसानों के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने राहुल गांधी से सवाल पूछते हुए कहा कि आपकी सरकारों ने अन्नदाताओं को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं दिया, जबकि वे पिछले सत्तर साल से इसकी मांग कर रहे थे. लेकिन मोदी सरकार ने रबी और खरीफ फसलों के लिये खेती की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर किसानों की यह मांग पूरी की. बीजेपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के लिये देश की सुरक्षा को ताक पर रख दिया. शाह ने आगे कहा कि एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में पाकिस्तान के भेजे हुए आतंकवादी बॉर्डर पार करके जम्मू-कश्मीर में घुसते थे और हमारे जवानों के सिर काटकर ले जाते थे. लेकिन मोदी ने हमारी सेना के बहादुरों को सरहद पार भेजा जिन्होंने 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर हमारे जवानों की मौत का बदला लिया. उन्होंने कहा कि राहुल ने बयान दिया था कि प्रधानमंत्री सैनिकों के खून की दलाली कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को शहादत का मोल पता नहीं है. वरना वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करते. बीजेपी अध्यक्ष ने अपने कांग्रेसी समकक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल सर्जिकल स्ट्राइक की अहमियत देखने में इसलिए असमर्थ हैं, क्योंकि उनकी आंखों पर इतालवी चश्मा चढ़ा है. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के राज में घुसपैठ के लिये सरहदें खुली छोड़ देने के चलते देश में करोड़ों घुसपैठिये दाखिल हो गये और इन्हें देश से बाहर निकालने के लिये कदम नहीं उठाये गये. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर बनाकर चालीस लाख घुसपैठियों की पहचान की और ऐसा करने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी जैसे दल इस तरह हाय-तौबा मचाने लगे जैसे इनकी नानी मर गयी हो. शाह ने मांग की कि राहुल मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में जनता से कांग्रेस के लिये वोट मांगने से पहले घुसपैठियों की समस्या पर अपना रुख साफ करें. उन्होंने आगामी चुनावों में मध्य प्रदेश और देश में बीजेपी को दोबारा विजयी बनाने की मतदाताओं से अपील की और कहा, 'हम वोट बैंक की राजनीति नहीं करते और हमारे लिये देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि हम घुसपैठियों को चुन-चुन कर पूरे देश से बाहर निकालेंगे. ' इसके अलावा अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार की मुखिया ममता बनर्जी पर घुसपैठियों के मामले में निशाना साधते हुए कहा कि वह गिरगिट की तरह रंग बदलती हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'पहले ममता घुसपैठियों के खिलाफ आवाज उठाती थीं, लेकिन अब चूंकि घुसपैठिये उनकी पार्टी को वोट देते हैं. इसलिये वह कह रही हैं कि घुसपैठियों को देश में ही रहने दिया जाये. ' आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीख की घोषणा कर दी है. मध्यप्रदेश में अट्ठाईस नवंबर को मतदान होगा जबकि मतगणना ग्यारह दिसंबर को होगी. . |
मास्को, (भाषा)। रूस ने आज कहा कि उसका नया मिग-35 युद्धक विमान त्रिस्तरीय मूल्यांकन मानदंडों पर खरा उतरता है और 126 मध्यम बहुद्देश्यीय युद्धक विमानों (एमएमआरसीए) के लिए 10 अरब डालर की नई दिल्ली की निविदा के बिल्कुल अनरूप है। रोसोबोरोनएक्सपोर्ट स्टेट कार्पोरेशन के एक वरिष्" अधिकारी सर्जेइ कोरनियेव ने कहा , निविदा की अपेक्षाएं बहुत क"ाsर हैं लेकिन हम पहले ही त्रिस्तरीय मूल्यांकन परीक्षण पर खरा उतर चुके हैं और हमें विश्वास है कि हमने ऐसे विमान की पेशकश की है जो निविदा से संबंधित सभी अपेक्षाओं को पूरा करता है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब माना जा रहा है कि भारत बोली लगाने वाली कंपनियों को शार्टलिस्ट कर रहा है। फेंच डसाल्ट एविएशन अपने राफेल युद्धक विमान, अमेरिकी कंपनी लाकहीड मार्टिन अपने एफ-16 फाल्कन और बोइंग एफ-18 सुपर हार्नेट और स्वीडन सैब अपने उन्नत ग्रिपेन युद्धक और यूरोफाइटर के साथ निविदा की दौड़ में मिग-35 फक्रम -एफ के साथ हैं। सर्जेइ ने कहा, बिल्कुल खरीदार ही अंतिम निर्णय करेंगे। संवाद समिति रिया नोवोस्ती ने सर्जेइ के हवाले से कहा है , हमें भरोसा है कि निविदा की इस दौड़ में हम अंतिम समय तक बने रहेंगे और हमें आशा है कि यह बोली हम ही जितेंगे। मिग-35 फक्रम-एफ त्रस्ट वेक्टर इंजन युक्त एक सीट वाला युद्धक विमान है जो युद्धकौशल में काफी उन्नत श्रेणी का है। यह मिग-29 एम ओवीटी ःफक्रम एफः का एक निर्यात संस्करण है। इस युद्धक विमान का प्रदर्शन बेंगलूर में सबसे पहले एयरो इंडिया 2007 हवाई प्रदर्शनी में किया गया था।
| मास्को, । रूस ने आज कहा कि उसका नया मिग-पैंतीस युद्धक विमान त्रिस्तरीय मूल्यांकन मानदंडों पर खरा उतरता है और एक सौ छब्बीस मध्यम बहुद्देश्यीय युद्धक विमानों के लिए दस अरब डालर की नई दिल्ली की निविदा के बिल्कुल अनरूप है। रोसोबोरोनएक्सपोर्ट स्टेट कार्पोरेशन के एक वरिष्" अधिकारी सर्जेइ कोरनियेव ने कहा , निविदा की अपेक्षाएं बहुत क"ाsर हैं लेकिन हम पहले ही त्रिस्तरीय मूल्यांकन परीक्षण पर खरा उतर चुके हैं और हमें विश्वास है कि हमने ऐसे विमान की पेशकश की है जो निविदा से संबंधित सभी अपेक्षाओं को पूरा करता है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब माना जा रहा है कि भारत बोली लगाने वाली कंपनियों को शार्टलिस्ट कर रहा है। फेंच डसाल्ट एविएशन अपने राफेल युद्धक विमान, अमेरिकी कंपनी लाकहीड मार्टिन अपने एफ-सोलह फाल्कन और बोइंग एफ-अट्ठारह सुपर हार्नेट और स्वीडन सैब अपने उन्नत ग्रिपेन युद्धक और यूरोफाइटर के साथ निविदा की दौड़ में मिग-पैंतीस फक्रम -एफ के साथ हैं। सर्जेइ ने कहा, बिल्कुल खरीदार ही अंतिम निर्णय करेंगे। संवाद समिति रिया नोवोस्ती ने सर्जेइ के हवाले से कहा है , हमें भरोसा है कि निविदा की इस दौड़ में हम अंतिम समय तक बने रहेंगे और हमें आशा है कि यह बोली हम ही जितेंगे। मिग-पैंतीस फक्रम-एफ त्रस्ट वेक्टर इंजन युक्त एक सीट वाला युद्धक विमान है जो युद्धकौशल में काफी उन्नत श्रेणी का है। यह मिग-उनतीस एम ओवीटी ःफक्रम एफः का एक निर्यात संस्करण है। इस युद्धक विमान का प्रदर्शन बेंगलूर में सबसे पहले एयरो इंडिया दो हज़ार सात हवाई प्रदर्शनी में किया गया था। |
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))
नई दिल्लीः
रूसी कच्चे तेल के खिलाफ यूरोपीय संघ, जी7 और ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की गई 60 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा के प्रतिशोध में रूस ने मंगलवार को प्राइस कैप का पालन करने वाले देशों और कंपनियों को तेल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फरमान जारी किया, मीडिया रिपोटरें से यह जानकारी सामने आई है।
राष्ट्रपति के फरमान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, विदेशी कानूनी संस्थाओं और व्यक्तियों को रूसी तेल और तेल उत्पादों की आपूर्ति प्रतिबंधित है, अगर इन आपूर्ति के अनुबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राइस कैप का पालन कर रहे हैं।
रूसी क्रूड पर प्राइस कैप इस महीने की शुरूआत में लागू हुआ था। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के जवाब में लगाया गया था। रिपोटरें के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष निर्णय के आधार पर व्यक्तिगत मामलों में प्रतिबंध हटाया जा सकता है।
यह आदेश 1 फरवरी 2023 से 1 जुलाई 2023 तक प्रभावी रहेगा।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| ) नई दिल्लीः रूसी कच्चे तेल के खिलाफ यूरोपीय संघ, जीसात और ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की गई साठ डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा के प्रतिशोध में रूस ने मंगलवार को प्राइस कैप का पालन करने वाले देशों और कंपनियों को तेल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फरमान जारी किया, मीडिया रिपोटरें से यह जानकारी सामने आई है। राष्ट्रपति के फरमान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, विदेशी कानूनी संस्थाओं और व्यक्तियों को रूसी तेल और तेल उत्पादों की आपूर्ति प्रतिबंधित है, अगर इन आपूर्ति के अनुबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राइस कैप का पालन कर रहे हैं। रूसी क्रूड पर प्राइस कैप इस महीने की शुरूआत में लागू हुआ था। यह फरवरी दो हज़ार बाईस में यूक्रेन पर रूस के हमले के जवाब में लगाया गया था। रिपोटरें के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष निर्णय के आधार पर व्यक्तिगत मामलों में प्रतिबंध हटाया जा सकता है। यह आदेश एक फरवरी दो हज़ार तेईस से एक जुलाई दो हज़ार तेईस तक प्रभावी रहेगा। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
किसी भी समस्या के समाधान के लिए उसके पीछे छिपे कारण को ढूंढना अनिवार्य होता हैं. समस्या की जड़ का पता चले बिना रिश्तों की टूटी डोर को जोड़ना संभव नहीं हैं. ये समस्या की जड़ आप के भूतकाल में छिपी हो सकती हैं या फिर आप के वर्तमान से भी जुडी हो सकती हैं. आखिर आप से किस मोड़ पर गलती हुई? क्यों हुई? अपने प्रेम सम्बन्ध का शुरुवात से अंत तक तक विष्लेषण करिए. एक बार सही समस्या का पता चलने पर उसे सुलझाना काफी आसान हो जाता हैं.
एक बार आप पता लगा ले की सम्बन्धो में गलती कहाँ हुई हैं? और किस से हुई हैं? तो दूसरा कदम होता हैं उन गलतियों को सुधारने का. और इसका सब से अच्छा तरीका हैं अपनी गलती को स्वीकार कर माफ़ी मांगना. विश्वास कीजिए यदि माफ़ी दिल से मांगी जाये तो वो कठोर से कठोर पत्थर को भी पिघला देती हैं. यदि गलती आप के प्रेमी की हैं तो उसे माफ़ कर अपने प्रेम सम्बन्धो को पनपने का एक और मौका दीजिये.
प्रेम सम्बन्धो की गाड़ी पटरी पर फिर से आते ही उसमे वादों का ईंधन डाले. आप अपने प्रेमी से जो भी वादा करे उस पर पूरी तरह से कायम रहे. कई लोग वादा करने के बाद जल्द ही उन्हें भूल जाते हैं. जो आगे चल कर एक और ब्रेकअप का कारण बन सकता हैं. इसलिए अपने किए गए वादों को नोट कर के रखना और उन्हें समय समय पर ध्यान में लाते रहना एक अच्छी आदत होगी.
| किसी भी समस्या के समाधान के लिए उसके पीछे छिपे कारण को ढूंढना अनिवार्य होता हैं. समस्या की जड़ का पता चले बिना रिश्तों की टूटी डोर को जोड़ना संभव नहीं हैं. ये समस्या की जड़ आप के भूतकाल में छिपी हो सकती हैं या फिर आप के वर्तमान से भी जुडी हो सकती हैं. आखिर आप से किस मोड़ पर गलती हुई? क्यों हुई? अपने प्रेम सम्बन्ध का शुरुवात से अंत तक तक विष्लेषण करिए. एक बार सही समस्या का पता चलने पर उसे सुलझाना काफी आसान हो जाता हैं. एक बार आप पता लगा ले की सम्बन्धो में गलती कहाँ हुई हैं? और किस से हुई हैं? तो दूसरा कदम होता हैं उन गलतियों को सुधारने का. और इसका सब से अच्छा तरीका हैं अपनी गलती को स्वीकार कर माफ़ी मांगना. विश्वास कीजिए यदि माफ़ी दिल से मांगी जाये तो वो कठोर से कठोर पत्थर को भी पिघला देती हैं. यदि गलती आप के प्रेमी की हैं तो उसे माफ़ कर अपने प्रेम सम्बन्धो को पनपने का एक और मौका दीजिये. प्रेम सम्बन्धो की गाड़ी पटरी पर फिर से आते ही उसमे वादों का ईंधन डाले. आप अपने प्रेमी से जो भी वादा करे उस पर पूरी तरह से कायम रहे. कई लोग वादा करने के बाद जल्द ही उन्हें भूल जाते हैं. जो आगे चल कर एक और ब्रेकअप का कारण बन सकता हैं. इसलिए अपने किए गए वादों को नोट कर के रखना और उन्हें समय समय पर ध्यान में लाते रहना एक अच्छी आदत होगी. |
आध घंटे मे हम दतिया पहॅुच गये। बस स्टेंड से एक रास्ता दतिया नगर के लिए तथा दुसरा रास्ता करणसागर तालाब के लिए जाता था। मैंने जीप को करण सागर की ओर मुड़वा दिया। यहॉं से आधा किलोमीटर दूर ही यह तालाब है । राजा शुभकरण बदेला ने सन 1737 ई. मे यह तालाब बनवाया था। तालाब किनारे से होकर यह रोड निकलती थी जिस पर हम बढ रह थे। यही रोड दतिया जिले की तहसील सेंवडा और भंाडेर को जाती थी। तालाब देखकर हम प्रसन्न हो उठे।
यघपी इस मंदिर की सुरक्षा बडे़ ही ज्यादा अच्छी व्यवस्था नही है। पर ज्यादा सुरक्षित कर देने से शायद ये मूर्तियां हरेक को देखने को नहीं मिली ।
इस मंदिर मे आगे जाकर तपस्वी घाट है। जहॉं कुछ बडे़ पुराने और विषाल वृक्षों के नीचे मदिर तथा एक समाधि बनी हुई है। यहॉं बैठकर बडा अच्छा लगाा।
यहॉं हमने सामने देख तो चित्त प्रसन्न हो गया। तालाब के उस पार छोटी बड़ी कई समाधियंा दिखाई दे रही थी। ठीक वैसी ही सुंदर और कलात्मक समाधियां जैसी कि हमको ओरछा में देखने को मिली थी। ओरछा की समाधियां एक जैसे आकार की हेै लेकिन दतिया की ये समाधियां संख्या मे ज्यादा है और अलग अलग आकार की है । हर समाधि के उपर शिखर और गुंबद बनी हुई्र है।
हम लोग उठे और समाधियों के पास आगये। समाधियों को एक बांउडी वाल से घेर कर सुरक्षा प्रदान की गयी है। हम अंदर पहुंचे तो देखा कि हर समाधि के बीच में एक बरामदा नुमा चारों ओर से खुला कमरा हे और उसके चारेा और खुला हुआ छोटा बरामदा जैसा है। पत्थर की बनी हुई हाथी, घोडा और पक्षियों की मूर्तियां इन समाधियांे की छत ,खिडकी और दरवाजेें मे लगी हुई हेै। कुछ समाधियां चारो ओर तो बाउन्ड्री दीवार बनी हुई है। हमने एक बडी समाधि के भीतर जाकर देखा तो उपर छत पर लाल, नीले व हरे रंग से बने दीवार के चित्रों में श्रीकृष्ण, बलि राजा, वामन अवतार, राम अवतार, दशहरे का जुलूस, शिकार करते हुएऔर सिंहास पर बैठा राजा, मंत्री , सामंत, सेनापति, हाथी-घोूड़ा, दुल्हा दुल्हन और सामुदायिक काम करते मजूरों आदि के कई चित्र बने दिखें जिनमें कुछ पोस्ट कार्ड साइज के थे तो कुछ तीन फिटतक के। इन समाधियों क पास मे एक समाधि िबल्कुल सामान्य थी। इस समाधि का सीधा शिखर और सादा चिकनी दीवारे है । सजावट देखकर लगता है कि ये तो ठीक वैसी ही लगती है इग्लेंड मे चर्च की मीनारे या सूने स्थानों पर बनी शिकारगाह।
साडे तीन बज चुके थे हम लोग तालाब के इसी पार बने परशुराम के हुनमान मंदिर पर बने घाट की ओर बढ गये। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर उछलते कूदते बन्दरों की मूर्तियां बनी थी, जिन्हे देखकर बच्चे बडे़ ख्ुाश हुए। हरियाली के बीच पत्थर से बने सुन्दर रास्ते से चलते मदिर की इमारत ओर उसके पार बने तालाब के घाट तक जा पहुंचे।
इसे करणसागर का परशुराम घाट कहते है । यहॉं का पानी साफ स्वच्छ है । तालब मे छोटी छोटी मछलिया तैर रही थी। जिन्हे देखकर बच्चे ताली बजाते हुए खुशी से कूदने लगे।
चार बजे हम लोग वहॉ से निकल पडे़। सुना था कि दतिया मे पीताबंरा देवी का प्रसिद्व मंदिर है, जो कि विश्व में सिर्फ चार पांच जगह है। यहॉ पर बडे़ -बडे़ मंत्री अधिकारी आकर माथा नवाते हैं । हम लोग सीध्ेा पीतांबंरा मदिर जा पहुुचे । देखा कि मंदिर के सामने खूब सारी जगह थी जहॅा गाड़ी वगैरह पार्क की जा सकती थी । जीप वहीं खड़ी करके हमने सबसे पहले पास में बने एक भोजनालय में भोजन किया और तृप्ति की डकारें लेते हुए मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर के भीतरी दरवाजे के पास में बांयी और पीताबंरा देवी का मंदिर है, इन्हे बगलामुखी भी कहा जाता है। बगल में मुंह करने के कारण इन्हे ऐसा कहा जाता है। पीले कपडे़ वाली पींतांबरा की साधना लेाग अपने शत्रु को परास्त करने के लिए करते है।
अब पीताबंरा कई मंदिरों को मिलाकर बनायागया पूजा स्थल बन गया है । कहा जाता हेै कि आरंभ मे इस जगह केवल शिव मदिर स्थित था। यह शिवमंदिर महाभारत के समय जंगलो मे धूम रहे पांचों पांडवों ने बनाय था, बताते हैं कि बाद पांडवो के गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा यहॉं आकर पूजा करते थे।
आंगन में पीताबंरा मदिर के ठीक सामने एक बड़ा सुदर हॉल बनाया गया है । इसे स्वामी ध्यान मंदिरम नाम दिया गया है। इस हॉल में स्वामी जी नाम के महात्मा जी की एक प्रतिमा स्थापित है । ये स्वामी जी पता नही कहॉं के रहने वाले थे और घूमते घूमते अचानक दतिया आ पहॅुचे थे । दतिया में स्वामी जी को पांडव कालीन शिव मंदिर अच्छा लगा और वे यहीं झोपडी बनाकर रहने लगे। धीरे -धीरे यही पर बडे़ सुंदर मंदिरों का निर्माण होता चला गया। स्वामी जी ने कुछ नन्ही उम्र के छात्रों को संस्कृत पढाना शुरू किया जिनमें से ललिता प्रसाद शास्त्री, ओमनारायण शास्त्री जी का नाम अग्रगणय है ।
ध्यान मंदिर के ठीक पीके सफेद संगमरमर का बना हुआ हरिद्रा कुड अभी अभी बनाय गया है। यह कुंड एक चौकोर कुड है , जिसमें बाहर से पानी डाला जाता है। और कुछ दिन बाद निकाल दिया जाता है। कुंड के किनारों पर टहलने के लिए संगमरमर के बना बढियंा रास्ता है । बच्चे इस सुन्दर कुंड के किनारे की दीवार पर टहलते हुए बडे़ खुश हुए।
हरिद्रा कुंड के पस मे व्यायाम शाला बनी थी। यहॉं कुछ लोग शाम केा आकर व्यायाम करते थे। व्यायाम शाला के पास मे यज्ञशाला तथा धूमावती देवी का मंदिर, पुस्तकालय और परशुराम जी का छोटा सा मदिर है । इसके पीछे गेस्ट हाउस है । इस गेस्ट हॉउस मे वे लोग ठहरते है जो बाहर से आकर मंदिर पर पूजा अर्चना करते है । यज्ञशाला मे लगा हुआ पांडवों के जमाने का शिव मंदिर है , इसमे शिवलिंग के साथ चार और र्मूिर्तंया रखी हुई है। इसी के पास भैरव जी की मूर्ति स्थापित है।
शाम के पंाच बजकर पन्द्रह मिनट हो गये थे। दिन भर घूमने के कारण हम लोग थक गये थे, इस कारण पीताबंरा पीठ के केपंस से बाहर आकर हम लोग ठहरने का स्थान खोजने लगे । पता लगा कि दतिया में केवल एक लॉज है । हम उसी लॉज की तलाश में निकल पडे लॉज मे तीन कमरे बुक कराके हम सब आराम करने लगे। शाम को झांसी रोड पर बने एक ढाबा में हमने खाना खाया और सो गये ।
दतिया- दतिया मध्यप्रदेश का सबसे छोटा जिला कहा जाता है। इसकी केवल देा तहसील थीं दतिया और सेंवड़ा । जिला पुनर्गठन के समय ग्वालियर जिले की भाण्डेर तहसील के दतिया में मिल जाने से अब इसमें 3 तहसील हो गयी हैं।
क्या देखने योग्य- दतिया में पंद्रहवीं से अठारवीं सदी तक के बीच बनायी गयी इमारतों में दतिया का सतखण्डा महल, दतिया का किला, करण सागर, चंदेवा की बावड़ी, राजगड़ महल, दतिया संग्रहालय, पीताम्बरा पीठ और दतिया जिले का सोनागिरि नामक पहाड़ी क्षेत्रों में बने सैकड़ो साल पुराने मंदिर व भौगोलिक क्षेत्र का विंहंगम दृश्य तथा दतिया जिले की सेंवड़ा नामक तहसील का मुख्यालय है जहां सिंध नदी का सनकुंआ कुण्ड और पानी की बरसात से पहाड़ी व निर्जन स्थानों पर हर साल बनते विगड़ते भू दृश्य है जिनहे बीहड़ कहा जाता है और डाकू लोग जिनमें छिपे रहते थे।
साधन- दतिया पहुंचने के लिए दिल्ली से मुम्बई रेलवे लाइन पर ग्वालियर व झांसी के बीच दतिया स्टेशन हैं अतएव रेलवे से भी यहां पहुंचा जा सकता है। झांसी से 30 ग्वालियर से 75 किलोमीटर और शिवपुरी से 98 किलोमीटर के सड़क मार्ग से बस से भी दतिया पहुंचा जा सकता है।
| आध घंटे मे हम दतिया पहॅुच गये। बस स्टेंड से एक रास्ता दतिया नगर के लिए तथा दुसरा रास्ता करणसागर तालाब के लिए जाता था। मैंने जीप को करण सागर की ओर मुड़वा दिया। यहॉं से आधा किलोमीटर दूर ही यह तालाब है । राजा शुभकरण बदेला ने सन एक हज़ार सात सौ सैंतीस ई. मे यह तालाब बनवाया था। तालाब किनारे से होकर यह रोड निकलती थी जिस पर हम बढ रह थे। यही रोड दतिया जिले की तहसील सेंवडा और भंाडेर को जाती थी। तालाब देखकर हम प्रसन्न हो उठे। यघपी इस मंदिर की सुरक्षा बडे़ ही ज्यादा अच्छी व्यवस्था नही है। पर ज्यादा सुरक्षित कर देने से शायद ये मूर्तियां हरेक को देखने को नहीं मिली । इस मंदिर मे आगे जाकर तपस्वी घाट है। जहॉं कुछ बडे़ पुराने और विषाल वृक्षों के नीचे मदिर तथा एक समाधि बनी हुई है। यहॉं बैठकर बडा अच्छा लगाा। यहॉं हमने सामने देख तो चित्त प्रसन्न हो गया। तालाब के उस पार छोटी बड़ी कई समाधियंा दिखाई दे रही थी। ठीक वैसी ही सुंदर और कलात्मक समाधियां जैसी कि हमको ओरछा में देखने को मिली थी। ओरछा की समाधियां एक जैसे आकार की हेै लेकिन दतिया की ये समाधियां संख्या मे ज्यादा है और अलग अलग आकार की है । हर समाधि के उपर शिखर और गुंबद बनी हुई्र है। हम लोग उठे और समाधियों के पास आगये। समाधियों को एक बांउडी वाल से घेर कर सुरक्षा प्रदान की गयी है। हम अंदर पहुंचे तो देखा कि हर समाधि के बीच में एक बरामदा नुमा चारों ओर से खुला कमरा हे और उसके चारेा और खुला हुआ छोटा बरामदा जैसा है। पत्थर की बनी हुई हाथी, घोडा और पक्षियों की मूर्तियां इन समाधियांे की छत ,खिडकी और दरवाजेें मे लगी हुई हेै। कुछ समाधियां चारो ओर तो बाउन्ड्री दीवार बनी हुई है। हमने एक बडी समाधि के भीतर जाकर देखा तो उपर छत पर लाल, नीले व हरे रंग से बने दीवार के चित्रों में श्रीकृष्ण, बलि राजा, वामन अवतार, राम अवतार, दशहरे का जुलूस, शिकार करते हुएऔर सिंहास पर बैठा राजा, मंत्री , सामंत, सेनापति, हाथी-घोूड़ा, दुल्हा दुल्हन और सामुदायिक काम करते मजूरों आदि के कई चित्र बने दिखें जिनमें कुछ पोस्ट कार्ड साइज के थे तो कुछ तीन फिटतक के। इन समाधियों क पास मे एक समाधि िबल्कुल सामान्य थी। इस समाधि का सीधा शिखर और सादा चिकनी दीवारे है । सजावट देखकर लगता है कि ये तो ठीक वैसी ही लगती है इग्लेंड मे चर्च की मीनारे या सूने स्थानों पर बनी शिकारगाह। साडे तीन बज चुके थे हम लोग तालाब के इसी पार बने परशुराम के हुनमान मंदिर पर बने घाट की ओर बढ गये। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर उछलते कूदते बन्दरों की मूर्तियां बनी थी, जिन्हे देखकर बच्चे बडे़ ख्ुाश हुए। हरियाली के बीच पत्थर से बने सुन्दर रास्ते से चलते मदिर की इमारत ओर उसके पार बने तालाब के घाट तक जा पहुंचे। इसे करणसागर का परशुराम घाट कहते है । यहॉं का पानी साफ स्वच्छ है । तालब मे छोटी छोटी मछलिया तैर रही थी। जिन्हे देखकर बच्चे ताली बजाते हुए खुशी से कूदने लगे। चार बजे हम लोग वहॉ से निकल पडे़। सुना था कि दतिया मे पीताबंरा देवी का प्रसिद्व मंदिर है, जो कि विश्व में सिर्फ चार पांच जगह है। यहॉ पर बडे़ -बडे़ मंत्री अधिकारी आकर माथा नवाते हैं । हम लोग सीध्ेा पीतांबंरा मदिर जा पहुुचे । देखा कि मंदिर के सामने खूब सारी जगह थी जहॅा गाड़ी वगैरह पार्क की जा सकती थी । जीप वहीं खड़ी करके हमने सबसे पहले पास में बने एक भोजनालय में भोजन किया और तृप्ति की डकारें लेते हुए मंदिर में प्रवेश किया। मंदिर के भीतरी दरवाजे के पास में बांयी और पीताबंरा देवी का मंदिर है, इन्हे बगलामुखी भी कहा जाता है। बगल में मुंह करने के कारण इन्हे ऐसा कहा जाता है। पीले कपडे़ वाली पींतांबरा की साधना लेाग अपने शत्रु को परास्त करने के लिए करते है। अब पीताबंरा कई मंदिरों को मिलाकर बनायागया पूजा स्थल बन गया है । कहा जाता हेै कि आरंभ मे इस जगह केवल शिव मदिर स्थित था। यह शिवमंदिर महाभारत के समय जंगलो मे धूम रहे पांचों पांडवों ने बनाय था, बताते हैं कि बाद पांडवो के गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा यहॉं आकर पूजा करते थे। आंगन में पीताबंरा मदिर के ठीक सामने एक बड़ा सुदर हॉल बनाया गया है । इसे स्वामी ध्यान मंदिरम नाम दिया गया है। इस हॉल में स्वामी जी नाम के महात्मा जी की एक प्रतिमा स्थापित है । ये स्वामी जी पता नही कहॉं के रहने वाले थे और घूमते घूमते अचानक दतिया आ पहॅुचे थे । दतिया में स्वामी जी को पांडव कालीन शिव मंदिर अच्छा लगा और वे यहीं झोपडी बनाकर रहने लगे। धीरे -धीरे यही पर बडे़ सुंदर मंदिरों का निर्माण होता चला गया। स्वामी जी ने कुछ नन्ही उम्र के छात्रों को संस्कृत पढाना शुरू किया जिनमें से ललिता प्रसाद शास्त्री, ओमनारायण शास्त्री जी का नाम अग्रगणय है । ध्यान मंदिर के ठीक पीके सफेद संगमरमर का बना हुआ हरिद्रा कुड अभी अभी बनाय गया है। यह कुंड एक चौकोर कुड है , जिसमें बाहर से पानी डाला जाता है। और कुछ दिन बाद निकाल दिया जाता है। कुंड के किनारों पर टहलने के लिए संगमरमर के बना बढियंा रास्ता है । बच्चे इस सुन्दर कुंड के किनारे की दीवार पर टहलते हुए बडे़ खुश हुए। हरिद्रा कुंड के पस मे व्यायाम शाला बनी थी। यहॉं कुछ लोग शाम केा आकर व्यायाम करते थे। व्यायाम शाला के पास मे यज्ञशाला तथा धूमावती देवी का मंदिर, पुस्तकालय और परशुराम जी का छोटा सा मदिर है । इसके पीछे गेस्ट हाउस है । इस गेस्ट हॉउस मे वे लोग ठहरते है जो बाहर से आकर मंदिर पर पूजा अर्चना करते है । यज्ञशाला मे लगा हुआ पांडवों के जमाने का शिव मंदिर है , इसमे शिवलिंग के साथ चार और र्मूिर्तंया रखी हुई है। इसी के पास भैरव जी की मूर्ति स्थापित है। शाम के पंाच बजकर पन्द्रह मिनट हो गये थे। दिन भर घूमने के कारण हम लोग थक गये थे, इस कारण पीताबंरा पीठ के केपंस से बाहर आकर हम लोग ठहरने का स्थान खोजने लगे । पता लगा कि दतिया में केवल एक लॉज है । हम उसी लॉज की तलाश में निकल पडे लॉज मे तीन कमरे बुक कराके हम सब आराम करने लगे। शाम को झांसी रोड पर बने एक ढाबा में हमने खाना खाया और सो गये । दतिया- दतिया मध्यप्रदेश का सबसे छोटा जिला कहा जाता है। इसकी केवल देा तहसील थीं दतिया और सेंवड़ा । जिला पुनर्गठन के समय ग्वालियर जिले की भाण्डेर तहसील के दतिया में मिल जाने से अब इसमें तीन तहसील हो गयी हैं। क्या देखने योग्य- दतिया में पंद्रहवीं से अठारवीं सदी तक के बीच बनायी गयी इमारतों में दतिया का सतखण्डा महल, दतिया का किला, करण सागर, चंदेवा की बावड़ी, राजगड़ महल, दतिया संग्रहालय, पीताम्बरा पीठ और दतिया जिले का सोनागिरि नामक पहाड़ी क्षेत्रों में बने सैकड़ो साल पुराने मंदिर व भौगोलिक क्षेत्र का विंहंगम दृश्य तथा दतिया जिले की सेंवड़ा नामक तहसील का मुख्यालय है जहां सिंध नदी का सनकुंआ कुण्ड और पानी की बरसात से पहाड़ी व निर्जन स्थानों पर हर साल बनते विगड़ते भू दृश्य है जिनहे बीहड़ कहा जाता है और डाकू लोग जिनमें छिपे रहते थे। साधन- दतिया पहुंचने के लिए दिल्ली से मुम्बई रेलवे लाइन पर ग्वालियर व झांसी के बीच दतिया स्टेशन हैं अतएव रेलवे से भी यहां पहुंचा जा सकता है। झांसी से तीस ग्वालियर से पचहत्तर किलोग्राममीटर और शिवपुरी से अट्ठानवे किलोग्राममीटर के सड़क मार्ग से बस से भी दतिया पहुंचा जा सकता है। |
फतेहाबाद, 5 जुलाई . विदेश भेजने के नाम पर एक युवक से लाखों रुपये की ठगी होने का समाचार है. पीड़ित युवक की शिकायत पर Wednesday को Police ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. Police को दी शिकायत में गांव रत्ताखेड़ा निवासी जसबीर सिंह ने कहा है कि उसके पास शिवदीप निवासी बुर्ज मानसा जिला बठिण्डा आया था. उसने Punjab के फरीदकोट जिले के रहने वाले लवप्रीत सिंह के बारे में बताया.
शिवदीप व उसकी बहन जसप्रीत कौर ने कहा कि वे तथा उसकी बहन अमृतपाल कौर व उसकी दोस्त पूजा रानी सभी लोगों को विदेश भेजने का का करते हैं और कई लडक़े-लड़कियों को उन्होंने विदेश भेजा भी है. इन लोगों ने उसस कहा कि वे उसे एक महीने में 9 लाख रुपये दे दे. पैसे देने के एक महीने बाद वे उसे पुर्तगाल भेजेंगे और उसके बाद वहां से जर्मनी भेज देंगे. इसी दौरान उसका पड़ोसी उमेश भी वहां आ गया. इन लोगों ने यही बातें उमेश को भी बताई और उसे भी विदेश जाने के लिए तैयार कर लिया. उसने अपने रिश्तेदारों के अलावा अपनी मां के सोने के आभूषण व पशु बेचकर पैसे इकट्ठे किए और इन लोगों को दे दिए. इसके बाद उक्त आरोपी उसे दिल्ली ले गए.
वहां कुछ रखने के बाद आरोपी उसे इंडोनेशिया और बाद में थाइलैंड ले गए. जब उसने पूछा कि उसे पुर्तगाल कब भेजोगे तो आरोपियों ने कहा कि उसे वापस दिल्ली वापस जाना पड़ेगा. इसके बाद उसे वापस दिल्ली भेज दिया. इसके बाद आरोपी उसे लुधियाना ले आए और उसे वहां छोडक़र भाग निकले. जसवीर ने आरोप लगाया कि उक्त लोगों ने विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करते हुए उससे 9 लाख ऐंठे है. इस पर उसने इस बारे Police को शिकायत दर्ज करवाई. Police ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
| फतेहाबाद, पाँच जुलाई . विदेश भेजने के नाम पर एक युवक से लाखों रुपये की ठगी होने का समाचार है. पीड़ित युवक की शिकायत पर Wednesday को Police ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. Police को दी शिकायत में गांव रत्ताखेड़ा निवासी जसबीर सिंह ने कहा है कि उसके पास शिवदीप निवासी बुर्ज मानसा जिला बठिण्डा आया था. उसने Punjab के फरीदकोट जिले के रहने वाले लवप्रीत सिंह के बारे में बताया. शिवदीप व उसकी बहन जसप्रीत कौर ने कहा कि वे तथा उसकी बहन अमृतपाल कौर व उसकी दोस्त पूजा रानी सभी लोगों को विदेश भेजने का का करते हैं और कई लडक़े-लड़कियों को उन्होंने विदेश भेजा भी है. इन लोगों ने उसस कहा कि वे उसे एक महीने में नौ लाख रुपये दे दे. पैसे देने के एक महीने बाद वे उसे पुर्तगाल भेजेंगे और उसके बाद वहां से जर्मनी भेज देंगे. इसी दौरान उसका पड़ोसी उमेश भी वहां आ गया. इन लोगों ने यही बातें उमेश को भी बताई और उसे भी विदेश जाने के लिए तैयार कर लिया. उसने अपने रिश्तेदारों के अलावा अपनी मां के सोने के आभूषण व पशु बेचकर पैसे इकट्ठे किए और इन लोगों को दे दिए. इसके बाद उक्त आरोपी उसे दिल्ली ले गए. वहां कुछ रखने के बाद आरोपी उसे इंडोनेशिया और बाद में थाइलैंड ले गए. जब उसने पूछा कि उसे पुर्तगाल कब भेजोगे तो आरोपियों ने कहा कि उसे वापस दिल्ली वापस जाना पड़ेगा. इसके बाद उसे वापस दिल्ली भेज दिया. इसके बाद आरोपी उसे लुधियाना ले आए और उसे वहां छोडक़र भाग निकले. जसवीर ने आरोप लगाया कि उक्त लोगों ने विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करते हुए उससे नौ लाख ऐंठे है. इस पर उसने इस बारे Police को शिकायत दर्ज करवाई. Police ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. |
राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस ने मिलकर एमपी की सीमा के पास गोवंश से भरी पिकअप को जब्त कर तस्कर को गिरफ्तार किया। इस दौरान तस्करों ने करीब 100 किलोमीटर तक गाड़ी को भगाया और पुलिस की दो नाकाबंदी भी तोड़ दी।
पिकअप में तस्करों ने गोवंश को जुगाड़ करके रखा था। जिसमें ऊपर से पिकअप खाली दिखाई दे रही थी और नीचे पैर बांधकर गोवंश डाले हुए थे।
धोलापानी पुलिस थाना द्वारा नाकेबंदी की गई लेकिन गौ तस्कर धोलापानी पुलिस थाने की नाकेबंदी तोड़कर पिकअप को भगाकर धमोतर की ओर आए। जहां पर धमोतर पुलिस द्वारा नाकेबंदी की जा रही थी। इस नाकेबंदी को भी तोड़ कर गौ तस्कर पिकअप को भगाकर बोरी गांव की तरफ भगाने लगे।
जिस पर कंट्रोल रूम प्रतापगढ़ को सूचना दी गई। इसके रठांजना थाना प्रभारी देवीलाल पुलिस जाब्ते के साथ गादोला गांव पहुंचे। जहां पर पिकअप चालक पिकअप को आगे भगा कर ले जाने लगा। पुलिस ने पीछा किया गया तो गौ तस्कर पिकअप को पीलू गांव होते हुए नोगामा मध्यप्रदेश की ओर भगाने लगे।
जिस पर मध्य प्रदेश पुलिस को सूचना दी गई। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के पशु कल्याण अधिकारी प्रवीण मित्तल, गौ रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह सिसोदिया एवं मंदसौर के विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री कन्हैयालाल धनगर को सूचना दी। मुल्तानपुरा चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर रितेश डामोर पुलिस जाब्ते के साथ नौगामा की और रवाना हुए।
इस दौरान पिकअप पत्थरों से टकरा गई तो गौ तस्कर पिकअप छोड़कर मौके से भागने लगे। पुलिस ने घेराबंदी कर एक गौ तस्कर मोहसिन जुपड़ी निवासी मुल्तानपुरा थाना वायडी नगर को गिरफ्तार किया। वहीं एक गौ तस्कर भाग गया। जो जाफर सोडा निवासी मुल्तानपुरा है।
पिकअप को गौ तस्करों ने विशेष प्रकार से गौ तस्करी के लिए बना रखा था। पिकअप के डाले से आधा फीट नीचे गोवंश को पैरों में रसिया बांधकर नीचे डाल रखा था। उनके ऊपर लकड़ी के पट्टे लगा रखे थे।
पिकअप को देखने से ऐसा लगता था कि पिकअप खाली है लेकिन इस पिकअप के पटिया हटा कर देखे तो अंदर 9 गाय के बछड़ों को बर्बरता से पैरों में रसिया बांधकर भर रखे थे।
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| राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस ने मिलकर एमपी की सीमा के पास गोवंश से भरी पिकअप को जब्त कर तस्कर को गिरफ्तार किया। इस दौरान तस्करों ने करीब एक सौ किलोग्राममीटर तक गाड़ी को भगाया और पुलिस की दो नाकाबंदी भी तोड़ दी। पिकअप में तस्करों ने गोवंश को जुगाड़ करके रखा था। जिसमें ऊपर से पिकअप खाली दिखाई दे रही थी और नीचे पैर बांधकर गोवंश डाले हुए थे। धोलापानी पुलिस थाना द्वारा नाकेबंदी की गई लेकिन गौ तस्कर धोलापानी पुलिस थाने की नाकेबंदी तोड़कर पिकअप को भगाकर धमोतर की ओर आए। जहां पर धमोतर पुलिस द्वारा नाकेबंदी की जा रही थी। इस नाकेबंदी को भी तोड़ कर गौ तस्कर पिकअप को भगाकर बोरी गांव की तरफ भगाने लगे। जिस पर कंट्रोल रूम प्रतापगढ़ को सूचना दी गई। इसके रठांजना थाना प्रभारी देवीलाल पुलिस जाब्ते के साथ गादोला गांव पहुंचे। जहां पर पिकअप चालक पिकअप को आगे भगा कर ले जाने लगा। पुलिस ने पीछा किया गया तो गौ तस्कर पिकअप को पीलू गांव होते हुए नोगामा मध्यप्रदेश की ओर भगाने लगे। जिस पर मध्य प्रदेश पुलिस को सूचना दी गई। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के पशु कल्याण अधिकारी प्रवीण मित्तल, गौ रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह सिसोदिया एवं मंदसौर के विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री कन्हैयालाल धनगर को सूचना दी। मुल्तानपुरा चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर रितेश डामोर पुलिस जाब्ते के साथ नौगामा की और रवाना हुए। इस दौरान पिकअप पत्थरों से टकरा गई तो गौ तस्कर पिकअप छोड़कर मौके से भागने लगे। पुलिस ने घेराबंदी कर एक गौ तस्कर मोहसिन जुपड़ी निवासी मुल्तानपुरा थाना वायडी नगर को गिरफ्तार किया। वहीं एक गौ तस्कर भाग गया। जो जाफर सोडा निवासी मुल्तानपुरा है। पिकअप को गौ तस्करों ने विशेष प्रकार से गौ तस्करी के लिए बना रखा था। पिकअप के डाले से आधा फीट नीचे गोवंश को पैरों में रसिया बांधकर नीचे डाल रखा था। उनके ऊपर लकड़ी के पट्टे लगा रखे थे। पिकअप को देखने से ऐसा लगता था कि पिकअप खाली है लेकिन इस पिकअप के पटिया हटा कर देखे तो अंदर नौ गाय के बछड़ों को बर्बरता से पैरों में रसिया बांधकर भर रखे थे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
आमतौर पर औषिधीय गुणों से भरपूर तुलसी का उपयोग कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके इस्तेमाल से जुओं की समस्या से राहत मिल सकती है। अब सवाल यह है कि कैसे करें तुलसी का इस्तेमाल ?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आप जूं से परेशान हैं, तो अपने सिर को तुलसी के पानी से धोएं। ऐसा करने से जूं की समस्या से राहत मिल सकती है।
जूं को दूर करने के लिए आप नारियल के तेल में बदाम के तेल को मिलाएं और उसमें तुलसी का पानी मिक्स करें अब बने हुए मिश्रण को अपने सिर पर 10 से 15 मिनट के लिए लगाएं। ऐसा करने से जूं की समस्या से राहत मिल सकती है।
आप चाहें तो तुलसी के पेस्ट में सेब के सिरके को मिलाकर अपने सिर पर लगाएं। ऐसा करने से जुओं की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, आप 15 से 20 मिनट के लिए तुलसी के पत्तों का लेप सिर पर लगाएं. ऐसा करने से जूं से छुटकारा मिल सकता है।
आप नारियल के तेल को गर्म करके तुलसी के पत्तों को उबालें और बने तेल को प्रभावित स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से भी जुएं से राहत मिल सकती है।
| आमतौर पर औषिधीय गुणों से भरपूर तुलसी का उपयोग कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके इस्तेमाल से जुओं की समस्या से राहत मिल सकती है। अब सवाल यह है कि कैसे करें तुलसी का इस्तेमाल ? एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आप जूं से परेशान हैं, तो अपने सिर को तुलसी के पानी से धोएं। ऐसा करने से जूं की समस्या से राहत मिल सकती है। जूं को दूर करने के लिए आप नारियल के तेल में बदाम के तेल को मिलाएं और उसमें तुलसी का पानी मिक्स करें अब बने हुए मिश्रण को अपने सिर पर दस से पंद्रह मिनट के लिए लगाएं। ऐसा करने से जूं की समस्या से राहत मिल सकती है। आप चाहें तो तुलसी के पेस्ट में सेब के सिरके को मिलाकर अपने सिर पर लगाएं। ऐसा करने से जुओं की समस्या से राहत मिल सकती है। इसके अलावा, आप पंद्रह से बीस मिनट के लिए तुलसी के पत्तों का लेप सिर पर लगाएं. ऐसा करने से जूं से छुटकारा मिल सकता है। आप नारियल के तेल को गर्म करके तुलसी के पत्तों को उबालें और बने तेल को प्रभावित स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से भी जुएं से राहत मिल सकती है। |
अदालत ने दुराचार के एक मामले में दोषी राजेश को 20 वर्ष कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 10 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
Kaithal : अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालय पोक्सो एक्ट तथा क्राइम अगेंस्ट वुमेन डाॅ. गगनदीप कौर सिंह की अदालत ने दुराचार के एक मामले में दोषी राजेश को 20 वर्ष कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 10 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पीड़ित को चार लाख रुपये की रकम जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के मार्फत देने के आदेश न्यायालय ने दिए। दोषी से जुर्माना वसूल होने पर पीड़ित को 40 हजार रुपये भी मिलेंगे।
शिकायत पक्ष की ओर से केस लड़ रहे डीडीए जेबी गोयल ने बताया कि शिकायतकर्ता का तीन साल का बेटा अपने घर के पास गली में खेल रहा था कि उसका पड़ोसी राजेश उसको अपने साथ उसके मकान में ले गया। कुछ देर बाद शिकायतकर्ता का बेटा जब रोता हुआ घर आया तो उसने बताया कि राजेश ने उसके साथ गलत काम किया है। इस शिकायत पर पुलिस ने राजेश के खिलाफ थाना शहर में 19 नवंबर 2021 को 6 पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया तथा आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बच्चे को इलाका मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया। पुलिस ने चालान तैयार करके अदालत में पेश किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सबूतों और गवाहों के आधार पर एडीजे डाॅ. गगनदीप कौर ने राजेश काे दुराचार का दोषी करार दिया और अपने 27 पेज के फैसले में दोषी को 20 साल कारावास तथा 50 हजार रुपये जुर्माने जुमार्ने की सजा सुनाई। दोषी जमानत न मिलने के कारण पहले से ही जेल में बंद है।
| अदालत ने दुराचार के एक मामले में दोषी राजेश को बीस वर्ष कैद और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दस माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। Kaithal : अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालय पोक्सो एक्ट तथा क्राइम अगेंस्ट वुमेन डाॅ. गगनदीप कौर सिंह की अदालत ने दुराचार के एक मामले में दोषी राजेश को बीस वर्ष कैद और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दस माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पीड़ित को चार लाख रुपये की रकम जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के मार्फत देने के आदेश न्यायालय ने दिए। दोषी से जुर्माना वसूल होने पर पीड़ित को चालीस हजार रुपये भी मिलेंगे। शिकायत पक्ष की ओर से केस लड़ रहे डीडीए जेबी गोयल ने बताया कि शिकायतकर्ता का तीन साल का बेटा अपने घर के पास गली में खेल रहा था कि उसका पड़ोसी राजेश उसको अपने साथ उसके मकान में ले गया। कुछ देर बाद शिकायतकर्ता का बेटा जब रोता हुआ घर आया तो उसने बताया कि राजेश ने उसके साथ गलत काम किया है। इस शिकायत पर पुलिस ने राजेश के खिलाफ थाना शहर में उन्नीस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को छः पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया तथा आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बच्चे को इलाका मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया। पुलिस ने चालान तैयार करके अदालत में पेश किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल तेरह गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सबूतों और गवाहों के आधार पर एडीजे डाॅ. गगनदीप कौर ने राजेश काे दुराचार का दोषी करार दिया और अपने सत्ताईस पेज के फैसले में दोषी को बीस साल कारावास तथा पचास हजार रुपये जुर्माने जुमार्ने की सजा सुनाई। दोषी जमानत न मिलने के कारण पहले से ही जेल में बंद है। |
बीजिंग, 27 जनवरी । चीन में मंगलवार को कोविड-19 के 75 नए मामले दर्ज हुए, जिनमें से 55 मामले स्थानीय स्तर पर प्रसारित और 20 मामले बाहर से आए हैं। यह जानकारी नेशनल हेल्थ कमीशन ने बुधवार को दी।
कमीशन ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में कहा कि, स्थानीय रूप से प्रसारित मामलों में से 29, हेइलोंगजियांग में, जीलिन में 14, हेबेई में सात, बीजिंग में चार और शंघाई में एक मामला दर्ज किया गया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शान्शी में एक संदिग्ध मामला सामने आया था। इस बीमारी से संबंधित कोई भी मौत मंगलवार को नहीं हुई।
| बीजिंग, सत्ताईस जनवरी । चीन में मंगलवार को कोविड-उन्नीस के पचहत्तर नए मामले दर्ज हुए, जिनमें से पचपन मामले स्थानीय स्तर पर प्रसारित और बीस मामले बाहर से आए हैं। यह जानकारी नेशनल हेल्थ कमीशन ने बुधवार को दी। कमीशन ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में कहा कि, स्थानीय रूप से प्रसारित मामलों में से उनतीस, हेइलोंगजियांग में, जीलिन में चौदह, हेबेई में सात, बीजिंग में चार और शंघाई में एक मामला दर्ज किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शान्शी में एक संदिग्ध मामला सामने आया था। इस बीमारी से संबंधित कोई भी मौत मंगलवार को नहीं हुई। |
बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बसु को ना केवल अपने अभिनय के लिए बल्कि अपनी फिटनेस के लिए भी जाना जाता है। उनके वर्कआउट विडियो कई लोगो के लिए बड़ी मदद साबित हो चुके हैं। अलोन अभिनेत्री ने कुछ सालों पहले कहा था कि वह महिलाओं के लिए आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहेंगी।
और अब लग रहा है कि अभिनेत्री अपने शब्दों पर अड़ी रही। वह ना केवल मुंबई में बल्कि दिल्ली और कोलकाता में भी आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बना रही हैं। बिपाशा का लक्ष्य इस साल के अंत तक केंद्रों को चलाना है और वह यह सुनिश्चित करने में व्यस्त हैं कि उन्हें समय पर लॉन्च किया जाए।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र मिश्रित मार्शल आर्ट और कराटे पर ध्यान केंद्रित करेंगे और हर कोर्स के अंत में बिपाशा का भी एक विशेष सत्र होगा। अभिनेत्री ने भी पुष्टि की थी कि वह केन्द्रों को खोलने वाली हैं और ये विचार फिटनेस को लेकर उनके प्यार से जन्मा है।
उन्होंने कहा था कि महिलाओं के लिए आत्म-रक्षा सीखना बहुत जरुरी है क्योंकि शहर में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। बिपाशा ने कहा कि आज की कामकाजी महिलाओं को न केवल नियमित रूप से व्यायाम करके अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए बल्कि ऐसे कुछ आत्म-रक्षा तकनीक भी सीखने चाहिए जो उनके मुसीबत के समय पर काम आ सकें। उन्होंने अंत में कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि महिलाएं उनके आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र से कुछ फायदा उठाएंगी।
फिल्मो की बात की जाये तो, बिपाशा जल्द फिल्म 'आदत' में अपने पति करण सिंह ग्रोवर के साथ नज़र आएँगी। भूषण पटेल द्वारा निर्देशित फिल्म का निर्माण मशहूर गायक मिका सिंह कर रहे हैं।
| बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बसु को ना केवल अपने अभिनय के लिए बल्कि अपनी फिटनेस के लिए भी जाना जाता है। उनके वर्कआउट विडियो कई लोगो के लिए बड़ी मदद साबित हो चुके हैं। अलोन अभिनेत्री ने कुछ सालों पहले कहा था कि वह महिलाओं के लिए आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहेंगी। और अब लग रहा है कि अभिनेत्री अपने शब्दों पर अड़ी रही। वह ना केवल मुंबई में बल्कि दिल्ली और कोलकाता में भी आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बना रही हैं। बिपाशा का लक्ष्य इस साल के अंत तक केंद्रों को चलाना है और वह यह सुनिश्चित करने में व्यस्त हैं कि उन्हें समय पर लॉन्च किया जाए। सूत्रों का कहना है कि केंद्र मिश्रित मार्शल आर्ट और कराटे पर ध्यान केंद्रित करेंगे और हर कोर्स के अंत में बिपाशा का भी एक विशेष सत्र होगा। अभिनेत्री ने भी पुष्टि की थी कि वह केन्द्रों को खोलने वाली हैं और ये विचार फिटनेस को लेकर उनके प्यार से जन्मा है। उन्होंने कहा था कि महिलाओं के लिए आत्म-रक्षा सीखना बहुत जरुरी है क्योंकि शहर में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। बिपाशा ने कहा कि आज की कामकाजी महिलाओं को न केवल नियमित रूप से व्यायाम करके अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए बल्कि ऐसे कुछ आत्म-रक्षा तकनीक भी सीखने चाहिए जो उनके मुसीबत के समय पर काम आ सकें। उन्होंने अंत में कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि महिलाएं उनके आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केंद्र से कुछ फायदा उठाएंगी। फिल्मो की बात की जाये तो, बिपाशा जल्द फिल्म 'आदत' में अपने पति करण सिंह ग्रोवर के साथ नज़र आएँगी। भूषण पटेल द्वारा निर्देशित फिल्म का निर्माण मशहूर गायक मिका सिंह कर रहे हैं। |
बिहार के सारण ज़िले के नवादा ग्राम पंचायत में डोम समुदाय के लोग रहते हैं। ये परिवार बांस से घरेलू सामान जैसे सूपा, पंखा, इत्यादि बनाने का काम करते हैं। इन लोगों का कहना है कि ये सालों से इसी काम को करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। तो देखिये ये स्टोरी और जानिए कि किस तरह होता है इनका ये व्यवसाय।
| बिहार के सारण ज़िले के नवादा ग्राम पंचायत में डोम समुदाय के लोग रहते हैं। ये परिवार बांस से घरेलू सामान जैसे सूपा, पंखा, इत्यादि बनाने का काम करते हैं। इन लोगों का कहना है कि ये सालों से इसी काम को करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। तो देखिये ये स्टोरी और जानिए कि किस तरह होता है इनका ये व्यवसाय। |
हरियाणा के पानीपत जिले के SP शशांक कुमार सावन ने शनिवार को समालखा थाने में विजिट किया। जहां उन्होंने क्राइम कंट्रोल के संबध में समालखा DSP कार्यालय में जोन के पर्यवेक्षण अधिकारी व थाना प्रबंधकों के साथ क्राइम मीटिंग कर सभी को आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने जिला में आगामी होने वाले सरपंच, जिला परिषद व पंच के चुनावों को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण, स्वतंत्र व भयमुक्त वातावरण में संपन्न करवाने के लिए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी को सुनिश्चित समझें।
क्षेत्र में घोषित सवेंदनशील व अति संवेदनशील गांव में भ्रमण कर लोगों से बातचीत करें और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न करवाने की दिशा में जो भी महत्वपूर्ण कदम हो, उसे समय रहते पूरा करें।
मीटिंग में DSP ओमप्रकाश, थाना समालखा प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील, थाना बापौली प्रभारी इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह व थाना सनौली प्रभारी SI अतर सिंह व थानों के मुंशी व मालखाना मोहर्र उपस्थित रहें।
मीटिंग में सर्वप्रथम पर्यवेक्षण अधिकारी व थाना प्रबंधक से कानून एवं व्यवस्था व दर्ज मुकदमों में की जा रही कार्रवाई की समीक्षा ली। आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए समय रहते उचित कदम उठाएं।
महिला के खिलाफ अपराध, अवैध हथियार व मादक पदार्थों की तस्करी, जुआरियों, सट्टेबाजों और अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ सचेत होकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाए। लंबित मामलों के निस्तारण के लिए आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश करें। अनुशासन में रहकर ईमानदारी से कार्य करते हुए आमजन के साथ अच्छा व्यवहार बनाकर रखें।
उन्होंने सख्त आदेश दिए की थाना में शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की अच्छे से सुनवाई कर तय समय के दौरान उचित कार्रवाई करें। किसी के साथ अभद्र व्यवहार न करें। दर्ज किसी भी मुकदमे की जांच बेवजह लंबे समय तक पेंडिंग न रखें एवं तय समय सीमा में जांच पूरी कर उसका कोर्ट में चालान पेश करें।
क्षेत्र में आमजन के साथ अच्छा तालमेल बना निरंतर गश्त कर शरारती व आपराधिक किस्म के व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाए। निरंतर गश्त कर संदिग्ध वाहनों व व्यक्तियों की गहनता से चेकिंग करें। PO, बेल जंपर अपराधियों को काबू करें।
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| हरियाणा के पानीपत जिले के SP शशांक कुमार सावन ने शनिवार को समालखा थाने में विजिट किया। जहां उन्होंने क्राइम कंट्रोल के संबध में समालखा DSP कार्यालय में जोन के पर्यवेक्षण अधिकारी व थाना प्रबंधकों के साथ क्राइम मीटिंग कर सभी को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जिला में आगामी होने वाले सरपंच, जिला परिषद व पंच के चुनावों को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण, स्वतंत्र व भयमुक्त वातावरण में संपन्न करवाने के लिए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी को सुनिश्चित समझें। क्षेत्र में घोषित सवेंदनशील व अति संवेदनशील गांव में भ्रमण कर लोगों से बातचीत करें और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न करवाने की दिशा में जो भी महत्वपूर्ण कदम हो, उसे समय रहते पूरा करें। मीटिंग में DSP ओमप्रकाश, थाना समालखा प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील, थाना बापौली प्रभारी इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह व थाना सनौली प्रभारी SI अतर सिंह व थानों के मुंशी व मालखाना मोहर्र उपस्थित रहें। मीटिंग में सर्वप्रथम पर्यवेक्षण अधिकारी व थाना प्रबंधक से कानून एवं व्यवस्था व दर्ज मुकदमों में की जा रही कार्रवाई की समीक्षा ली। आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए समय रहते उचित कदम उठाएं। महिला के खिलाफ अपराध, अवैध हथियार व मादक पदार्थों की तस्करी, जुआरियों, सट्टेबाजों और अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ सचेत होकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाए। लंबित मामलों के निस्तारण के लिए आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश करें। अनुशासन में रहकर ईमानदारी से कार्य करते हुए आमजन के साथ अच्छा व्यवहार बनाकर रखें। उन्होंने सख्त आदेश दिए की थाना में शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की अच्छे से सुनवाई कर तय समय के दौरान उचित कार्रवाई करें। किसी के साथ अभद्र व्यवहार न करें। दर्ज किसी भी मुकदमे की जांच बेवजह लंबे समय तक पेंडिंग न रखें एवं तय समय सीमा में जांच पूरी कर उसका कोर्ट में चालान पेश करें। क्षेत्र में आमजन के साथ अच्छा तालमेल बना निरंतर गश्त कर शरारती व आपराधिक किस्म के व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाए। निरंतर गश्त कर संदिग्ध वाहनों व व्यक्तियों की गहनता से चेकिंग करें। PO, बेल जंपर अपराधियों को काबू करें। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
हरियाणा : कोरोना महामारी लगातार तेजी से बढ़ते ही जा रहे है। आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वही हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता की कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है. जिससे लोंगो में हड़कंप मच गया। बता दे कि हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 26 अगस्त से शुरू होने वाला है। अध्यक्ष गुप्ता की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवार विधानसभा की कार्यवाही को देखेंगे।
शुक्रवार से ज्ञान चंद गुप्ता की तबीयत खराब चल रही थी जिसको लेकर उन्होंने कोरोना का टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉज़िटिव पाया गया। रविवार को विधानसभा के छह स्टाफ मेंमर्स संक्रमित पाए गए थे। इनमें गुप्ता के करीबी सहयोगी और उनके भतीजे भी शामिल हैं।
मानसून सत्र को देखते हुए इससे पहले 22 अगस्त को हरियाणा विधानसभा के 300 कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट कराया गया था। विधानसभा परिसर में एंट्री के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं। विधायकों समेत सभी कर्मचारियों को परिसर में आने की इजाजत तभी मिलेगी जब उनके पास कोविड-19 निगेटिव रिपोर्ट होगी। यह रिपोर्ट तीन दिनों से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।
| हरियाणा : कोरोना महामारी लगातार तेजी से बढ़ते ही जा रहे है। आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वही हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता की कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है. जिससे लोंगो में हड़कंप मच गया। बता दे कि हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र छब्बीस अगस्त से शुरू होने वाला है। अध्यक्ष गुप्ता की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवार विधानसभा की कार्यवाही को देखेंगे। शुक्रवार से ज्ञान चंद गुप्ता की तबीयत खराब चल रही थी जिसको लेकर उन्होंने कोरोना का टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉज़िटिव पाया गया। रविवार को विधानसभा के छह स्टाफ मेंमर्स संक्रमित पाए गए थे। इनमें गुप्ता के करीबी सहयोगी और उनके भतीजे भी शामिल हैं। मानसून सत्र को देखते हुए इससे पहले बाईस अगस्त को हरियाणा विधानसभा के तीन सौ कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट कराया गया था। विधानसभा परिसर में एंट्री के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं। विधायकों समेत सभी कर्मचारियों को परिसर में आने की इजाजत तभी मिलेगी जब उनके पास कोविड-उन्नीस निगेटिव रिपोर्ट होगी। यह रिपोर्ट तीन दिनों से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
यह सूची भारतीय क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के बीच खेली गई श्रृंखलाओं की है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच १९४७ को खेला गया था जबकि पहला वनडे मैच १९८० और पहला टी२० २००७ में खेला गया था। . 2015 कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज़ ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट था। यह ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत के बीच एक त्रि-राष्ट्र श्रृंखला थी। ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में इंग्लैंड को 112 रन से हराकर अपने 20 वां ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला का खिताब जीता। पिछले ऑस्ट्रेलियाई तिरंगी एकदिवसीय श्रृंखला के विपरीत, प्रत्येक टीम ने राउंड-रॉबिन चरण (चार बार आम तौर पर नहीं) के दौरान केवल दो बार खेल लिया था, और फाइनल को तीन-तीन सर्वश्रेष्ठ के बजाय एक एकल मैच के तौर पर खेला गया था, 2015 के क्रिकेट विश्व कप को समायोजित करने के लिए, जो श्रृंखला के तुरंत बाद का पालन किया। क्रिकेट विश्व कप के दौरान फरवरी 2015 में, भारत के टीम के निदेशक रवि शास्त्री ने त्रिकोणीय सीरीज की समय-सारणी की आलोचना करते हुए कहा कि यह समय और ऊर्जा का "अपशिष्ट" था। .
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज 2014-15 आम में 6 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): एरॉन फिंच, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय, नाबाद, रोहित शर्मा, ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला, कॉमनवेल्थ बैंक श्रृंखला 2011-12।
एरॉन फिंच ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी हैं। .
ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई (ODI) मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ओडीआई (ODI)) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम 50 ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल (एलओआई (LOI))" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते.
क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद (not out) कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली.
रोहित गुरूनाथ शर्मा (Rohit Sharma) (जन्मः ३० अप्रैल १९८७) एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है। इनका जन्म नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ था। रोहित मुख्य रूप से सलामी बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं। रोहित टेस्ट क्रिकेट, वनडे और ट्वेन्टी-ट्वेन्टी के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग में भी खेलते है इसके अतिरिक्त मुम्बई इंडियन्स टीम के कप्तान भी है। वर्तमान में वे भारतीय वनडे टीम के उप कप्तान भी है। उन्होंने अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाफ ०९ नवम्बर २०१३ को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेलकर की थी उस मैच में रोहित ने १७७ रनों की पारी खेली थी, उन्होंने १०८ वनडे मैचों के बाद टेस्ट मैच खेला था। जबकि एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत २३ जून २००७ को आयरलैण्ड क्रिकेट टीम के खिलाफ की थी। इनके अलावा रोहित ने अपने ट्वेन्टी-ट्वेन्टी में अपना पहला मैच १९ सितम्बर २००७ को इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था। १३ नवम्बर २०१४ को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर श्रीलंकाई टीम के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए २६४ रनों की पारी खेलकर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक मैच में सबसे ज्यादा रन अर्थात सर्वोच्च स्कोर बनाकर नया कीर्तिमान कायम किया है। रोहित शर्मा एक दिवसीय क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा दोहरे शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी है। इन्होंने वनडे में तीन दोहरे शतक लगाये है जो अभी तक किसी बल्लेबाज ने नहीं लगाए है। फ़ोर्ब्स इंडिया २०१५ के भारत के १०० शीर्ष प्रसिद्ध व्यक्तियों में शर्मा को ८वाँ स्थान मिला। महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर के बाद अपनी टीम को आईपीएल खिताब दिलाने वाले तीसरे कप्तान हैं। .
ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) क्रिकेट टूर्नामेंट का उल्लेख करती है, और ऑस्ट्रेलिया और दो पर्यटन टीमों द्वारा लड़ी हुई है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी के गर्मियों के महीनों में, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट सीज़न की ऊंचाई के दौरान श्रृंखला खेला जाता है। ऑस्ट्रेलिया में एकदिवसीय क्रिकेट के अधिकांश इतिहास में यह श्रृंखला अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट का मुख्य स्वरूप है। त्रिकोणीय श्रृंखला पहले 1979-80 में आयोजित हुई थी और 2007-08 तक हर सीजन में चुनाव लड़ा था। इसके बाद से 2011-12 के सत्र में और दोबारा विश्व कप के पहले 2014-15 सत्र में दो बार आयोजित किया गया था। .
राष्ट्रमंडल बैंक सीरीज़ का 2011-12 का संस्करण ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट था। यह ऑस्ट्रेलिया, भारत और श्रीलंका के बीच एक त्रि-राष्ट्र श्रृंखला थी। यह पहली बार था जब ऑस्ट्रेलिया ने 2007-08 के बाद से त्रिकोणीय श्रृंखला की मेजबानी की थी। .
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे 114 संबंध है और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज 2014-15 34 है। वे आम 6 में है, समानता सूचकांक 4.05% है = 6 / (114 + 34)।
यह लेख ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज 2014-15 के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। यह सूची भारतीय क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के बीच खेली गई श्रृंखलाओं की है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को खेला गया था जबकि पहला वनडे मैच एक हज़ार नौ सौ अस्सी और पहला टीबीस दो हज़ार सात में खेला गया था। . दो हज़ार पंद्रह कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज़ ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट था। यह ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत के बीच एक त्रि-राष्ट्र श्रृंखला थी। ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में इंग्लैंड को एक सौ बारह रन से हराकर अपने बीस वां ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला का खिताब जीता। पिछले ऑस्ट्रेलियाई तिरंगी एकदिवसीय श्रृंखला के विपरीत, प्रत्येक टीम ने राउंड-रॉबिन चरण के दौरान केवल दो बार खेल लिया था, और फाइनल को तीन-तीन सर्वश्रेष्ठ के बजाय एक एकल मैच के तौर पर खेला गया था, दो हज़ार पंद्रह के क्रिकेट विश्व कप को समायोजित करने के लिए, जो श्रृंखला के तुरंत बाद का पालन किया। क्रिकेट विश्व कप के दौरान फरवरी दो हज़ार पंद्रह में, भारत के टीम के निदेशक रवि शास्त्री ने त्रिकोणीय सीरीज की समय-सारणी की आलोचना करते हुए कहा कि यह समय और ऊर्जा का "अपशिष्ट" था। . ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज दो हज़ार चौदह-पंद्रह आम में छः बातें हैं : एरॉन फिंच, एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय, नाबाद, रोहित शर्मा, ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला, कॉमनवेल्थ बैंक श्रृंखला दो हज़ार ग्यारह-बारह। एरॉन फिंच ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी हैं। . ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड ने ओडीआई मैच होस्ट किया। पीले कपड़ों में बल्लेबाज हैं जो ऑस्ट्रेलियाई है जबकि नीले कपड़ों में भारतीय क्षेत्ररक्षण टीम हैं। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ) क्रिकेट की एक शैली है, जिसमें दो राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के बीच प्रति टीम पचास ओवर खेले जाते हैं। क्रिकेट विश्व कप इसी प्रारूप के अनुसार खेला जाता है। एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों को "लिमिटेड ओवर इंटरनेशनल )" भी कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रीय टीमों के बीच सीमित ओवर के क्रिकेट मैच खेले जाते हैं और यदि मौसम की वजह से व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे हमेशा एक दिन में समाप्त नहीं होते. क्रिकेट में एक बल्लेबाज नाबाद कहलाता है यदि वह पारी की समाप्ति तक बल्लेबाज़ी करता है। श्रेणीःक्रिकेट शब्दावली. रोहित गुरूनाथ शर्मा एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है। इनका जन्म नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ था। रोहित मुख्य रूप से सलामी बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं। रोहित टेस्ट क्रिकेट, वनडे और ट्वेन्टी-ट्वेन्टी के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग में भी खेलते है इसके अतिरिक्त मुम्बई इंडियन्स टीम के कप्तान भी है। वर्तमान में वे भारतीय वनडे टीम के उप कप्तान भी है। उन्होंने अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाफ नौ नवम्बर दो हज़ार तेरह को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेलकर की थी उस मैच में रोहित ने एक सौ सतहत्तर रनों की पारी खेली थी, उन्होंने एक सौ आठ वनडे मैचों के बाद टेस्ट मैच खेला था। जबकि एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत तेईस जून दो हज़ार सात को आयरलैण्ड क्रिकेट टीम के खिलाफ की थी। इनके अलावा रोहित ने अपने ट्वेन्टी-ट्वेन्टी में अपना पहला मैच उन्नीस सितम्बर दो हज़ार सात को इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था। तेरह नवम्बर दो हज़ार चौदह को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर श्रीलंकाई टीम के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए दो सौ चौंसठ रनों की पारी खेलकर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक मैच में सबसे ज्यादा रन अर्थात सर्वोच्च स्कोर बनाकर नया कीर्तिमान कायम किया है। रोहित शर्मा एक दिवसीय क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा दोहरे शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी है। इन्होंने वनडे में तीन दोहरे शतक लगाये है जो अभी तक किसी बल्लेबाज ने नहीं लगाए है। फ़ोर्ब्स इंडिया दो हज़ार पंद्रह के भारत के एक सौ शीर्ष प्रसिद्ध व्यक्तियों में शर्मा को आठवाँ स्थान मिला। महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर के बाद अपनी टीम को आईपीएल खिताब दिलाने वाले तीसरे कप्तान हैं। . ऑस्ट्रेलियाई त्रिकोणीय श्रृंखला ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट का उल्लेख करती है, और ऑस्ट्रेलिया और दो पर्यटन टीमों द्वारा लड़ी हुई है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी के गर्मियों के महीनों में, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट सीज़न की ऊंचाई के दौरान श्रृंखला खेला जाता है। ऑस्ट्रेलिया में एकदिवसीय क्रिकेट के अधिकांश इतिहास में यह श्रृंखला अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट का मुख्य स्वरूप है। त्रिकोणीय श्रृंखला पहले एक हज़ार नौ सौ उन्यासी-अस्सी में आयोजित हुई थी और दो हज़ार सात-आठ तक हर सीजन में चुनाव लड़ा था। इसके बाद से दो हज़ार ग्यारह-बारह के सत्र में और दोबारा विश्व कप के पहले दो हज़ार चौदह-पंद्रह सत्र में दो बार आयोजित किया गया था। . राष्ट्रमंडल बैंक सीरीज़ का दो हज़ार ग्यारह-बारह का संस्करण ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट था। यह ऑस्ट्रेलिया, भारत और श्रीलंका के बीच एक त्रि-राष्ट्र श्रृंखला थी। यह पहली बार था जब ऑस्ट्रेलिया ने दो हज़ार सात-आठ के बाद से त्रिकोणीय श्रृंखला की मेजबानी की थी। . ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे एक सौ चौदह संबंध है और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज दो हज़ार चौदह-पंद्रह चौंतीस है। वे आम छः में है, समानता सूचकांक चार.पाँच% है = छः / । यह लेख ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के भारत दौरे और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज दो हज़ार चौदह-पंद्रह के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने बुधवार को राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) और कांग्रेस (Congress) पार्टी के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस सिर्फ ट्वीट तक सिमट गई है। देश इनकी राजनीति को समझ चुका है इसलिए पार्टी का यह हश्र हो रहा है'। साथ ही, उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पर भी ट्विटर के जरिए सियासी रोटियां सेंकने का आरोप लगाया है।
नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह ये आरोप लगाते सुने जा सकते हैं। दरअसल, वह मीडियो से बातचीत कर रहे थे जब उनसे राज्य सरकार पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में पूछा गया। गौरतलब है कि कांग्रेस ने कहा था कि अगर शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) की सरकार 17 नवंबर को राज्य में कोरोना के प्रतिबंध नहीं हटाती तो आज ये स्थिति नहीं होती।
साथ ही, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि मध्य प्रदेश में नियुक्त होमगार्ड और SDERF के जवानों को अब ड्यूटी के दौरान निशुल्क नाश्ता और भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि मानवीय आधार पर लिए गए इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए बजट में 25-25 लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया जा रहा है।
| Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस सिर्फ ट्वीट तक सिमट गई है। देश इनकी राजनीति को समझ चुका है इसलिए पार्टी का यह हश्र हो रहा है'। साथ ही, उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पर भी ट्विटर के जरिए सियासी रोटियां सेंकने का आरोप लगाया है। नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह ये आरोप लगाते सुने जा सकते हैं। दरअसल, वह मीडियो से बातचीत कर रहे थे जब उनसे राज्य सरकार पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों के बारे में पूछा गया। गौरतलब है कि कांग्रेस ने कहा था कि अगर शिवराज सिंह चौहान की सरकार सत्रह नवंबर को राज्य में कोरोना के प्रतिबंध नहीं हटाती तो आज ये स्थिति नहीं होती। साथ ही, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि मध्य प्रदेश में नियुक्त होमगार्ड और SDERF के जवानों को अब ड्यूटी के दौरान निशुल्क नाश्ता और भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि मानवीय आधार पर लिए गए इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए बजट में पच्चीस-पच्चीस लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया जा रहा है। |
किसी भी कलाकृति की रचना में, जुड़ाव तत्वों को एक तरफ रखता है, इसे कनेक्शन स्थापित करने और अर्थ को खोजने या लागू करने के लिए पाठक को छोड़ देता है । इन तत्वों (शब्दों, खंड, या वाक्य, लिखित संरचना में) विभिन्न स्रोतों से खींचे जा सकते हैं और एक साहित्यिक कोलाज बनाने के लिए जुड़ा हुआ हो सकता है। लेखक द्वारा सावधानीपूर्वक योजना बनाने और शिल्प को चुनने के लिए कौन से तत्वों को जोड़ना है, अर्थ की परतें, वर्तमान विडंबना, या बहुत सारे विवरण और गहराई के साथ एक दृश्य पेंट कर सकते हैं, जिससे पाठक को इसके बीच में सही लगाया जा सकता है।
"आयोवा में अकेले रेलरोड क्रॉसिंग पर वॉचमेन, उम्मीद करते हैं कि वे यूनाइटेड ब्रदरैन के प्रचारक को सुनने के लिए निकल पाएंगे . . . मेट्रो में टिकट-विक्रेता, अपने गैसीय रूप में पसीना सांस ले रहे हैं . . . किसान बाँझ के मैदानों को पीछे छोड़ रहे हैं दुखद ध्यान देने वाले घोड़े, दोनों कीड़े के काटने से पीड़ित . . . किराने-क्लर्क साबुन नौकर लड़कियों के साथ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं . . . महिला नौवीं या दसवीं बार के लिए सीमित है, जो असहाय रूप से सोच रही है कि यह सब क्या है। "
(एचएल मेनकेन, "परिश्रम। " "ए मेनकेन चेस्टोमैथी," 1 9 4 9)
"हम रहते हैं और सीखते हैं, यह एक सच्ची कहानियां थी। इसके अलावा, उसके दांत और जबड़े स्वर्ग में थे, प्रत्येक पीनाश पर फंसे हुए टोस्ट के स्प्लिंटर्स। यह गिलास खाने जैसा था। उसका मुंह जल गया और शोषण से पीड़ित था। फिर खुफिया जानकारी को आगे बढ़ाया गया था, ओलिवर द्वारा प्रतिद्वंद्वी द्वारा काउंटर में एक कम दुखद आवाज़ में प्रसारित किया गया था, कि मालाहाइड हत्यारे की आधा भूमि पर हस्ताक्षर किए जाने की याचिका, खारिज कर दी गई, आदमी को माउंटजो में सुबह में स्विंग करना चाहिए और कुछ भी उसे बचा सकता है।
एलिस लटकाने वाला अब भी अपने रास्ते पर था। Belacqua, सैंडविच पर फाड़ और बहुमूल्य स्टउट swilling, अपने सेल में McCabe पर चिल्लाया। "
(सैमुअल बेकेट, "दांते और लॉबस्टर। " "सैमुअल बेकेटः कविताएं, लघु कथा, और आलोचना," पॉल ऑस्टर द्वारा। ग्रोव प्रेस, 2006)
जुड़ाव सिर्फ समान की तुलना के लिए नहीं बल्कि असमानता के विपरीत भी है, जो लेखक के संदेश पर जोर देने या अवधारणा को चित्रित करने के लिए प्रभावी हो सकता है।
" पुरानी जुड़ाव यह है कि क्या होता है जब दो अलग-अलग चीजें एक तरफ रखी जाती हैं, प्रत्येक पर दूसरी टिप्पणी होती है . . . ओलिविया जुडसन, एक विज्ञान लेखक, इस तकनीक का उपयोग करते हैं जो कि हमारे विषय में एक रूचिपूर्ण विषय हो सकता है, मादा हरी चम्मच कीड़ाः
"हरे चम्मच कीड़े में पुरुष और मादा के बीच मौजूद सबसे चरम आकार के मतभेदों में से एक है, पुरुष अपने साथी से 200,000 गुना छोटा है। उसकी उम्र दो साल है। उसका केवल कुछ महीनों है-और वह खर्च करता है अपने प्रजनन पथ के अंदर उसका छोटा जीवन, उसके मुंह के माध्यम से शुक्राणु को अपने अंडे को उर्वरित करने के लिए पुनर्जन्म देता है। जब भी उसे पहली बार खोजा गया था, तब भी वह अधिक अपमानजनक था, उसे एक बुरा परजीवी उपद्रव माना जाता था।
( बीज पत्रिका से)
"लेखक का दृष्टिकोण एक बेवकूफ विंक है, जो कि कमजोर पुरुष समुद्री जीव का अपमान है, जो अपने कच्चे और तेजी से अल्पसंख्यक मानव समकक्ष के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। जुड़ाव कृमि लिंग और मानव यौन संबंध के बीच है। " (रॉय पीटर क्लार्क, "लेखन उपकरणः प्रत्येक लेखक के लिए 50 आवश्यक रणनीतियां। " लिटिल, ब्राउन एंड कंपनी, 2006)
बेशक, तकनीक गद्य तक ही सीमित नहीं है। 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में जापानी हिकू जैसे पाठक को चित्रित करने, अर्थ को चित्रित करने या यहां तक कि आश्चर्यचकित करने या पहेली को समझने के लिए एक दूसरे के बगल में छवियों को प्रस्तुत करने के लिए, कविता का सबसे अच्छा उपयोग भी हो सकता है।
शरदचंद्रः
पाइन पेड़ छाया।
लकड़ी का गेट।
मजबूती से बोल्ड लॉकः
". . . प्रत्येक मामले में, कोलन के दोनों तरफ तत्वों के बीच केवल एक अंतर्निहित संबंध होता है । हालांकि फसल चंद्रमा और पाइन पेड़ की छाया के बीच एक मौलिक संबंध देखना संभव है, स्पष्ट कनेक्शन की कमी पाठक को मजबूर करती है एक कल्पनाशील छलांग लगाने के लिए। लॉक किए गए लकड़ी के द्वार और शीतकालीन चंद्रमा के बीच का कनेक्शन एक और अधिक कल्पनाशील प्रयास की मांग करता है। प्रत्येक कविता में, प्राकृतिक छवि और मानव-एक फसल चंद्रमा और एक बांस की चटाई के बीच एक मूल मिश्रण होता है, एक बोल्ट गेट और एक शीतकालीन चंद्रमा - जो पहले और दूसरे भाग के बीच तनाव पैदा करता है। "
(मार्टिन मोंटगोमेरी एट अल। , "वेज ऑफ रीडिंगः इंग्लिश लिटरेचर के छात्रों के लिए उन्नत पठन कौशल," दूसरा संस्करण।
रूटलेज, 2000)
लेकिन जुड़ाव साहित्य तक ही सीमित नहीं है। यह पेंटिंग्स में हो सकता है, जैसे कि अतियथार्थवादियों या अन्य अमूर्त कलाकारों के कार्यों मेंः "अतियथार्थवादी परंपरा . . . परंपरागत अर्थों को नष्ट करने के विचार से, और कट्टरपंथी जुड़ाव ('कोलाज' के माध्यम से नए अर्थ या काउंटर-अर्थ बनाने के विचार से एकजुट है। सिद्धांत ')। सौंदर्य, लौट्रीमोंट के शब्दों में,' एक सिलाई मशीन का एक सौहार्दपूर्ण मुठभेड़ है और एक विच्छेदन तालिका पर छतरी है। '। अवास्तविक संवेदनशीलता का उद्देश्य कट्टरपंथी जुड़ाव की अपनी तकनीक के माध्यम से सदमे करना है। " (सुसान सोंटाग, "हैप्पनिंग्सः ए आर्ट ऑफ़ रेडिकल जुक्सापोजिशन। " "व्याख्या के खिलाफ, और अन्य निबंध। " फरार, स्ट्रॉस और गिरौक्स, 1 9 66)
यह पॉप संस्कृति में दिखाई दे सकता है, जैसे फिल्में और वीडियोः "इसकी सीमाओं पर दबाया गया, कलात्मक जुड़ाव जिसे कभी-कभी पेस्टिच कहा जाता है । इस रणनीति का लक्ष्य, जो उच्च संस्कृति और पॉप-संस्कृति दोनों संदर्भों में नियोजित किया गया है ( उदाहरण के लिए, एमटीवी वीडियो), दर्शकों को असंगत, यहां तक कि उन छवियों को छेड़छाड़ करने के लिए बाधित करना है जो किसी भी उद्देश्य के अर्थ में किसी भी तरह से सवाल करते हैं। " (स्टेनली जेम्स ग्रेन्ज़, "पोस्टमोडर्निज़्म पर एक प्राइमर। " डब्ल्यूएम बी। एर्डमैन, 1 99 6)
और जुड़ाव संगीत का एक हिस्सा भी हो सकता हैः "इस तरह के काम के लिए एक और मॉडल, और विभिन्न प्रकार के विचारों और ग्रंथों को अंतःस्थापित करने की क्षमता के कारण हाइपरटेक्स्ट से संबंधित, डीजे नमूने हैं जिनमें हिप-हॉप का एक बड़ा सौदा शामिल है। " (जेफ आर चावल, "द रेटोरिक ऑफ़ कूलः कंपोज़िशन स्टडीज एंड न्यू मीडिया। " दक्षिणी इलिनोइस यूनिवर्सिटी प्रेस, 2007)
| किसी भी कलाकृति की रचना में, जुड़ाव तत्वों को एक तरफ रखता है, इसे कनेक्शन स्थापित करने और अर्थ को खोजने या लागू करने के लिए पाठक को छोड़ देता है । इन तत्वों विभिन्न स्रोतों से खींचे जा सकते हैं और एक साहित्यिक कोलाज बनाने के लिए जुड़ा हुआ हो सकता है। लेखक द्वारा सावधानीपूर्वक योजना बनाने और शिल्प को चुनने के लिए कौन से तत्वों को जोड़ना है, अर्थ की परतें, वर्तमान विडंबना, या बहुत सारे विवरण और गहराई के साथ एक दृश्य पेंट कर सकते हैं, जिससे पाठक को इसके बीच में सही लगाया जा सकता है। "आयोवा में अकेले रेलरोड क्रॉसिंग पर वॉचमेन, उम्मीद करते हैं कि वे यूनाइटेड ब्रदरैन के प्रचारक को सुनने के लिए निकल पाएंगे . . . मेट्रो में टिकट-विक्रेता, अपने गैसीय रूप में पसीना सांस ले रहे हैं . . . किसान बाँझ के मैदानों को पीछे छोड़ रहे हैं दुखद ध्यान देने वाले घोड़े, दोनों कीड़े के काटने से पीड़ित . . . किराने-क्लर्क साबुन नौकर लड़कियों के साथ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं . . . महिला नौवीं या दसवीं बार के लिए सीमित है, जो असहाय रूप से सोच रही है कि यह सब क्या है। " "हम रहते हैं और सीखते हैं, यह एक सच्ची कहानियां थी। इसके अलावा, उसके दांत और जबड़े स्वर्ग में थे, प्रत्येक पीनाश पर फंसे हुए टोस्ट के स्प्लिंटर्स। यह गिलास खाने जैसा था। उसका मुंह जल गया और शोषण से पीड़ित था। फिर खुफिया जानकारी को आगे बढ़ाया गया था, ओलिवर द्वारा प्रतिद्वंद्वी द्वारा काउंटर में एक कम दुखद आवाज़ में प्रसारित किया गया था, कि मालाहाइड हत्यारे की आधा भूमि पर हस्ताक्षर किए जाने की याचिका, खारिज कर दी गई, आदमी को माउंटजो में सुबह में स्विंग करना चाहिए और कुछ भी उसे बचा सकता है। एलिस लटकाने वाला अब भी अपने रास्ते पर था। Belacqua, सैंडविच पर फाड़ और बहुमूल्य स्टउट swilling, अपने सेल में McCabe पर चिल्लाया। " जुड़ाव सिर्फ समान की तुलना के लिए नहीं बल्कि असमानता के विपरीत भी है, जो लेखक के संदेश पर जोर देने या अवधारणा को चित्रित करने के लिए प्रभावी हो सकता है। " पुरानी जुड़ाव यह है कि क्या होता है जब दो अलग-अलग चीजें एक तरफ रखी जाती हैं, प्रत्येक पर दूसरी टिप्पणी होती है . . . ओलिविया जुडसन, एक विज्ञान लेखक, इस तकनीक का उपयोग करते हैं जो कि हमारे विषय में एक रूचिपूर्ण विषय हो सकता है, मादा हरी चम्मच कीड़ाः "हरे चम्मच कीड़े में पुरुष और मादा के बीच मौजूद सबसे चरम आकार के मतभेदों में से एक है, पुरुष अपने साथी से दो सौ,शून्य गुना छोटा है। उसकी उम्र दो साल है। उसका केवल कुछ महीनों है-और वह खर्च करता है अपने प्रजनन पथ के अंदर उसका छोटा जीवन, उसके मुंह के माध्यम से शुक्राणु को अपने अंडे को उर्वरित करने के लिए पुनर्जन्म देता है। जब भी उसे पहली बार खोजा गया था, तब भी वह अधिक अपमानजनक था, उसे एक बुरा परजीवी उपद्रव माना जाता था। "लेखक का दृष्टिकोण एक बेवकूफ विंक है, जो कि कमजोर पुरुष समुद्री जीव का अपमान है, जो अपने कच्चे और तेजी से अल्पसंख्यक मानव समकक्ष के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। जुड़ाव कृमि लिंग और मानव यौन संबंध के बीच है। " बेशक, तकनीक गद्य तक ही सीमित नहीं है। सत्रह वीं और अट्ठारह वीं शताब्दी में जापानी हिकू जैसे पाठक को चित्रित करने, अर्थ को चित्रित करने या यहां तक कि आश्चर्यचकित करने या पहेली को समझने के लिए एक दूसरे के बगल में छवियों को प्रस्तुत करने के लिए, कविता का सबसे अच्छा उपयोग भी हो सकता है। शरदचंद्रः पाइन पेड़ छाया। लकड़ी का गेट। मजबूती से बोल्ड लॉकः ". . . प्रत्येक मामले में, कोलन के दोनों तरफ तत्वों के बीच केवल एक अंतर्निहित संबंध होता है । हालांकि फसल चंद्रमा और पाइन पेड़ की छाया के बीच एक मौलिक संबंध देखना संभव है, स्पष्ट कनेक्शन की कमी पाठक को मजबूर करती है एक कल्पनाशील छलांग लगाने के लिए। लॉक किए गए लकड़ी के द्वार और शीतकालीन चंद्रमा के बीच का कनेक्शन एक और अधिक कल्पनाशील प्रयास की मांग करता है। प्रत्येक कविता में, प्राकृतिक छवि और मानव-एक फसल चंद्रमा और एक बांस की चटाई के बीच एक मूल मिश्रण होता है, एक बोल्ट गेट और एक शीतकालीन चंद्रमा - जो पहले और दूसरे भाग के बीच तनाव पैदा करता है। " लेकिन जुड़ाव साहित्य तक ही सीमित नहीं है। यह पेंटिंग्स में हो सकता है, जैसे कि अतियथार्थवादियों या अन्य अमूर्त कलाकारों के कार्यों मेंः "अतियथार्थवादी परंपरा . . . परंपरागत अर्थों को नष्ट करने के विचार से, और कट्टरपंथी जुड़ाव । सौंदर्य, लौट्रीमोंट के शब्दों में,' एक सिलाई मशीन का एक सौहार्दपूर्ण मुठभेड़ है और एक विच्छेदन तालिका पर छतरी है। '। अवास्तविक संवेदनशीलता का उद्देश्य कट्टरपंथी जुड़ाव की अपनी तकनीक के माध्यम से सदमे करना है। " यह पॉप संस्कृति में दिखाई दे सकता है, जैसे फिल्में और वीडियोः "इसकी सीमाओं पर दबाया गया, कलात्मक जुड़ाव जिसे कभी-कभी पेस्टिच कहा जाता है । इस रणनीति का लक्ष्य, जो उच्च संस्कृति और पॉप-संस्कृति दोनों संदर्भों में नियोजित किया गया है , दर्शकों को असंगत, यहां तक कि उन छवियों को छेड़छाड़ करने के लिए बाधित करना है जो किसी भी उद्देश्य के अर्थ में किसी भी तरह से सवाल करते हैं। " और जुड़ाव संगीत का एक हिस्सा भी हो सकता हैः "इस तरह के काम के लिए एक और मॉडल, और विभिन्न प्रकार के विचारों और ग्रंथों को अंतःस्थापित करने की क्षमता के कारण हाइपरटेक्स्ट से संबंधित, डीजे नमूने हैं जिनमें हिप-हॉप का एक बड़ा सौदा शामिल है। " |
डिप्लट करनेकले प्रतिनिधि व्यापार करनेवाले सदस्य के विरुद्ध दावा
विफाल्टर समिति, एक्स्वेज के उपनियम, नियम तथा नियंत्रणों के तहत तथा एक्स्चेंज पर अनुमत्य बर्ताव से उत्पन्न बाध्यताओं को पूर्ति करने के लिए ऐसे विफलटर से प्रस्तावित संघटकों की असफलता के कारण से उत्पन्न हानि के संबंध में विफोस्टर के विरुद्ध व्यापार करने सदस्य की स्वीकृत करेगा बसरों कि डिफाल्टर को ऐसेलेनदार सदस्य के साथ कार्य करनेवाले प्रतिनिधि व्यापार करनेवाले सदस्य के रूप में पंजीकृत किया गया
डिफलटर समिति की मॉग
एक डिफाल्टर का दावा, जिनके एस्टेट अन्य डिफाल्टर के विरुद्ध डिफाल्टर समिति द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है उसको अन्य लेनदार सदस्य के दावाओं से अधिमान नहीं दिया जाएगी. पर अन्य दावाओं के साथ रैंक किया जाएगा।
डिफल्टर के एस्टेअ पर दाक का असैनमेंट
एक व्यापार करनेवाले सदस्य, डिफाल्टर के लेनदार होते हुए संगत प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त किये बिना ऐसे डिफाल्टर के एस्टेट पर अपने दावा को बिकी नहीं करेगा, अभैर हनीं करेगा या गिरवी नहीं रखेगा
डिफाल्टर के नाम से या विरुद्ध कार्यवाही
डिफाल्टर समिति को निम्न अधिकार प्राप्त है अ. एक्स्चेंज के नाम से न्यायालय में कार्यवाही शुरू कर सकता है या डिफाल्टर के नाम से, डिफाल्टर को प्राप्तव्य रकम कोपुनः प्राप्ति करने के लिए किसी व्यक्ति पर आ. एक्स्चेंज के नाम से न्यायालय में कार्यवाही शुरू কর सकता है या डिफाल्टर के लेनदार के नाम से जो. एक्स्चेंज के उपनियम, नियम तथा नियंत्रणों के तहत निष्पादित कारोबारों के परिणामस्वरूप डिफलटर के लेनदार बने) डिफाल्टर के विरुद्ध डिफाल्टर को प्राप्तव्य रकम वसूलने के कार्यवाही के लिए ऐसे कार्यवाही लेने हेतु डिफाल्टर तथा डिफाल्टर के लेनदार ने एक्स्चेंज को अपने विधिक्त अटानी नियुक्त किया माना जाएगा।
फिल्टर समिति द्वारा भुगतान
अगर किसी व्यापार करनेवाले सदस्य किफाल्टर के विरुद्ध न्यायालय में किसी कार्यवाही, उनकी डिफाल्ट की अवधि के दौरान लेता है या उन्हें सिफास्टर घोषित करने के पहले एक्स्चेंजके उपनियम, नियम व नियंत्रणों के तहत मार्केट में किये गये कारोबार या बर्ताव से उत्पन्न डिफाल्टर के एस्टेट के विरुद्ध किसी दावा करने अपने पुनः प्रवेश के बाद कार्यवाही लेता है तथा डिग्री प्राप्त करता है और किसीरकम को पुनः वसूल करताहै तो ऐसे रकम या उसके भाग ऐसे डिफलटर के विरुद्धदावा रखनेवाले ऐसे लेनदार सदस्यों के खाते व लाभार्थ डिफालट नमिमि में जैसे संगत प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा जमा करेगा।
इस अध्याय के लिए डिफाल्टर समिति, समय समय पर निदेशक बोर्ड द्वारा संगठित समिति रहेगा। किसी भी समय डिफाल्टर समितिसे सदस्यों में साठ के क्रम प्रतिशतवाले व्यक्ति गैर व्यापार करनेवाले सदस्य होंगे, जिन्हें सेक्यूरिटी तथा एक्स्चेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व स्वीकृति के साथ एक्स्चेंज द्वारा नामित किया जाएगा
इस अध्याय में उपलब्ध विषयों के अलावा, जहाँ किसी सेक्यूरिटीयों को डिफाल्टर के विरुद्ध अन्यथा हस्ताक्षर भिन्नता के कारण कंपनी प्रतिबंधको ठीक करने के पेश किया जाता है. एक्स्चेंज तथा क्लियरिंग सेल प्राप्ति करनेवाले सदस्य / प्राप्ति करनेवाले के ग्राहक के बोनोफाइरु को पुष्टि करने के बाद प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के ग्राहक के सामार्थ अपने नाम से सेक्यूरिटीयों को प्राप्त करेंग जैसे निर्धारित किया जाता है, वैसे प्रभारों के भुगतान करेन पर एक्स्चेंज / बीएसई क्लियरिंग हाउस ऐसे प्राप्त सेक्यूरिटियोंको बेचेगा या प्राप्त करनेवाले / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लयन्ट के नाम पर, द वाया के पूर्ण संतुष्टि हेतु अंतरण करेगा, बशर्ते कि एक्स्चेंज / बीएसई वियरिंग हाउस को प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लयन्ट ऐसे पूर्व उदाहरण शर्त के अधीन निर्धारित रूप तथा तरीके से एक्स्चेंज़ और वीएसई क्लियरिंग हाउस को क्षतिपूर्ति करेगा। बशर्ते कि ऐसे प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लायन्ट को बिकी प्रोसीड या सेक्यूरिटियों का अंतरण पूर्ण रूप से दास को पूर्ति करेगा और आगे कोई दावा जो सी हो, डिफास्टर के खाते में नहीं रहेगा।
अध्याय X निवेशक सुरक्षा निधि
ऐसे एक्स्चेंज के मार्केट सेग्मेंट के संबंध में जैसे एक्स्चेंज द्वारा निर्धारित किया जाएगा, वडोदरा स्टॉक एक्स्चेंज निवेशक सुरक्षा निधि ट्रस्ट (ट्रस्ट) द्वारा ट्रस्ट में एक निवेशक सुरक्षा निधि (आईपीएफ) का रखरखाव किया जाएगा ताकि अध्याय 11 के अधीन एक्स्चेंज द्वारा एक व्यापार कस्नेवाले सदस्य को डिफाल्टर घोचित किये जाने पर व्यापार करनेवाले सदस्य के संघटक जिनको हानि पहुँचता है उनसे समर्पित क्षतिपूर्ति की दावाओं को पूर्ति करने के लिए उपयोग किया जाएगा। दावा करनेवाले का किसी भी दावा जो एक्स्चेंज के व्यापार करनेवाले सदस्य है या व्यापार करनेवाले सदस्य के असोसियेट है आईपीएफ से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार नहीं होंगे बशर्ते कि वह एक्स्चेंज से अनुमस्य विस्तार तक उक्त व्यापार सदस्य के सघटक के रूप में कार्य किया हो।
इस भाग के तहत, स्कम जिसे दावा करनेवाले क्षतिपूर्ति के रूप में माँग कर सकता है वह उनसे वहन किये गये वास्तविक हानि होगी, जिसमें से हानि को कम करने हेतु किसी श्रोत से प्राप्त किये गये या प्राप्तव्य रकम का मूल्य घटाकर आनेवाले राशि होगी।
दावा करनेवाले को इस भाग के अधीन भुगतान किये आनेवाले रकम समय समय पर ट्रस्ट द्वारा निर्धारित रकम से अधिक नहीं होगी। दांवा करनेवाले को क्षतिपूर्ति जब डिफाल्टर के विरुद्ध निश्चित किया जाएगा और डिफाल्टर समिति के सिफारिश अगर कुछ डो के सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट द्वारा वितरित किया जाएगा और ऐसे क्षतिपूर्ति एक दावा में निश्चित अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी। | डिप्लट करनेकले प्रतिनिधि व्यापार करनेवाले सदस्य के विरुद्ध दावा विफाल्टर समिति, एक्स्वेज के उपनियम, नियम तथा नियंत्रणों के तहत तथा एक्स्चेंज पर अनुमत्य बर्ताव से उत्पन्न बाध्यताओं को पूर्ति करने के लिए ऐसे विफलटर से प्रस्तावित संघटकों की असफलता के कारण से उत्पन्न हानि के संबंध में विफोस्टर के विरुद्ध व्यापार करने सदस्य की स्वीकृत करेगा बसरों कि डिफाल्टर को ऐसेलेनदार सदस्य के साथ कार्य करनेवाले प्रतिनिधि व्यापार करनेवाले सदस्य के रूप में पंजीकृत किया गया डिफलटर समिति की मॉग एक डिफाल्टर का दावा, जिनके एस्टेट अन्य डिफाल्टर के विरुद्ध डिफाल्टर समिति द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है उसको अन्य लेनदार सदस्य के दावाओं से अधिमान नहीं दिया जाएगी. पर अन्य दावाओं के साथ रैंक किया जाएगा। डिफल्टर के एस्टेअ पर दाक का असैनमेंट एक व्यापार करनेवाले सदस्य, डिफाल्टर के लेनदार होते हुए संगत प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त किये बिना ऐसे डिफाल्टर के एस्टेट पर अपने दावा को बिकी नहीं करेगा, अभैर हनीं करेगा या गिरवी नहीं रखेगा डिफाल्टर के नाम से या विरुद्ध कार्यवाही डिफाल्टर समिति को निम्न अधिकार प्राप्त है अ. एक्स्चेंज के नाम से न्यायालय में कार्यवाही शुरू कर सकता है या डिफाल्टर के नाम से, डिफाल्टर को प्राप्तव्य रकम कोपुनः प्राप्ति करने के लिए किसी व्यक्ति पर आ. एक्स्चेंज के नाम से न्यायालय में कार्यवाही शुरू কর सकता है या डिफाल्टर के लेनदार के नाम से जो. एक्स्चेंज के उपनियम, नियम तथा नियंत्रणों के तहत निष्पादित कारोबारों के परिणामस्वरूप डिफलटर के लेनदार बने) डिफाल्टर के विरुद्ध डिफाल्टर को प्राप्तव्य रकम वसूलने के कार्यवाही के लिए ऐसे कार्यवाही लेने हेतु डिफाल्टर तथा डिफाल्टर के लेनदार ने एक्स्चेंज को अपने विधिक्त अटानी नियुक्त किया माना जाएगा। फिल्टर समिति द्वारा भुगतान अगर किसी व्यापार करनेवाले सदस्य किफाल्टर के विरुद्ध न्यायालय में किसी कार्यवाही, उनकी डिफाल्ट की अवधि के दौरान लेता है या उन्हें सिफास्टर घोषित करने के पहले एक्स्चेंजके उपनियम, नियम व नियंत्रणों के तहत मार्केट में किये गये कारोबार या बर्ताव से उत्पन्न डिफाल्टर के एस्टेट के विरुद्ध किसी दावा करने अपने पुनः प्रवेश के बाद कार्यवाही लेता है तथा डिग्री प्राप्त करता है और किसीरकम को पुनः वसूल करताहै तो ऐसे रकम या उसके भाग ऐसे डिफलटर के विरुद्धदावा रखनेवाले ऐसे लेनदार सदस्यों के खाते व लाभार्थ डिफालट नमिमि में जैसे संगत प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा जमा करेगा। इस अध्याय के लिए डिफाल्टर समिति, समय समय पर निदेशक बोर्ड द्वारा संगठित समिति रहेगा। किसी भी समय डिफाल्टर समितिसे सदस्यों में साठ के क्रम प्रतिशतवाले व्यक्ति गैर व्यापार करनेवाले सदस्य होंगे, जिन्हें सेक्यूरिटी तथा एक्स्चेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व स्वीकृति के साथ एक्स्चेंज द्वारा नामित किया जाएगा इस अध्याय में उपलब्ध विषयों के अलावा, जहाँ किसी सेक्यूरिटीयों को डिफाल्टर के विरुद्ध अन्यथा हस्ताक्षर भिन्नता के कारण कंपनी प्रतिबंधको ठीक करने के पेश किया जाता है. एक्स्चेंज तथा क्लियरिंग सेल प्राप्ति करनेवाले सदस्य / प्राप्ति करनेवाले के ग्राहक के बोनोफाइरु को पुष्टि करने के बाद प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के ग्राहक के सामार्थ अपने नाम से सेक्यूरिटीयों को प्राप्त करेंग जैसे निर्धारित किया जाता है, वैसे प्रभारों के भुगतान करेन पर एक्स्चेंज / बीएसई क्लियरिंग हाउस ऐसे प्राप्त सेक्यूरिटियोंको बेचेगा या प्राप्त करनेवाले / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लयन्ट के नाम पर, द वाया के पूर्ण संतुष्टि हेतु अंतरण करेगा, बशर्ते कि एक्स्चेंज / बीएसई वियरिंग हाउस को प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लयन्ट ऐसे पूर्व उदाहरण शर्त के अधीन निर्धारित रूप तथा तरीके से एक्स्चेंज़ और वीएसई क्लियरिंग हाउस को क्षतिपूर्ति करेगा। बशर्ते कि ऐसे प्राप्त करनेवाले सदस्य / प्राप्त करनेवाले सदस्य के क्लायन्ट को बिकी प्रोसीड या सेक्यूरिटियों का अंतरण पूर्ण रूप से दास को पूर्ति करेगा और आगे कोई दावा जो सी हो, डिफास्टर के खाते में नहीं रहेगा। अध्याय X निवेशक सुरक्षा निधि ऐसे एक्स्चेंज के मार्केट सेग्मेंट के संबंध में जैसे एक्स्चेंज द्वारा निर्धारित किया जाएगा, वडोदरा स्टॉक एक्स्चेंज निवेशक सुरक्षा निधि ट्रस्ट द्वारा ट्रस्ट में एक निवेशक सुरक्षा निधि का रखरखाव किया जाएगा ताकि अध्याय ग्यारह के अधीन एक्स्चेंज द्वारा एक व्यापार कस्नेवाले सदस्य को डिफाल्टर घोचित किये जाने पर व्यापार करनेवाले सदस्य के संघटक जिनको हानि पहुँचता है उनसे समर्पित क्षतिपूर्ति की दावाओं को पूर्ति करने के लिए उपयोग किया जाएगा। दावा करनेवाले का किसी भी दावा जो एक्स्चेंज के व्यापार करनेवाले सदस्य है या व्यापार करनेवाले सदस्य के असोसियेट है आईपीएफ से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार नहीं होंगे बशर्ते कि वह एक्स्चेंज से अनुमस्य विस्तार तक उक्त व्यापार सदस्य के सघटक के रूप में कार्य किया हो। इस भाग के तहत, स्कम जिसे दावा करनेवाले क्षतिपूर्ति के रूप में माँग कर सकता है वह उनसे वहन किये गये वास्तविक हानि होगी, जिसमें से हानि को कम करने हेतु किसी श्रोत से प्राप्त किये गये या प्राप्तव्य रकम का मूल्य घटाकर आनेवाले राशि होगी। दावा करनेवाले को इस भाग के अधीन भुगतान किये आनेवाले रकम समय समय पर ट्रस्ट द्वारा निर्धारित रकम से अधिक नहीं होगी। दांवा करनेवाले को क्षतिपूर्ति जब डिफाल्टर के विरुद्ध निश्चित किया जाएगा और डिफाल्टर समिति के सिफारिश अगर कुछ डो के सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट द्वारा वितरित किया जाएगा और ऐसे क्षतिपूर्ति एक दावा में निश्चित अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी। |
पद्धति के अनुसार 'गोत्र' रखा या 'कुल' -रेखा कहते हैं। दोनों का
अर्थ है वंश वृद्धि । इस नाम से यह प्रकट होता है कि जिसकी जीवन-रेखा सुन्दर और बलवान होगी तथा जीवन-रेखा से घिरा हुआ भाग गुणयुक्त होगा उसी का 'कुल' चलेगा - उसी की 'गोत्र' वृद्धि होगी। पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आदि एक के बाद दूसरे की सन्तान स्वस्थ होती चली जावे तभी कुल या गोत्र की वृद्धि संभव है। इसीलिये हमारे भारतीय महर्षियों ने कुल-वृद्धि या गोत्र वृद्धि का अर्थ केवल 'पुत्र' तक ही सीमित नहीं रखा। यदि कदाचित् किसी की निर्बल अवस्था में निर्बल पुत्र हो गया और आगे उसकी वंश वृद्धि नहीं हुई तो 'गोत्र' -वृद्धि नहीं मानी जावेगी । पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों की सन्तानोत्पादन शक्ति, शुक्र-क्षेत्र तथा जीवनरेखा पर बहुत अधिक मात्रा में अवलंबित है। इसी कारण अँगुष्ठ के नीचे के भाग पर-करपृष्ठ की ओर निकली हुई रेखाओं से सन्तान का विचार किया जाता है । ( देखिये चित्र नं० १०७)
'भविष्य पुराण' में लिखा हैअंगुष्ठ मूलं रेखाः पुत्राः स्युर्दारिकाः सूक्ष्मा । 'प्रयोग पारिजात' में भी लिखा हैमूलेऽङ्ग ष्ठस्य नृणां स्थूला रेखा भवन्ति यावत्यः । तावन्तः पुत्राः स्युः सूक्ष्माभिः पुत्रिकास्ताभिः ।।
अर्थात् अँगूठे के मूल में जो स्थूल रेखा हों उन्हें पुत्र -रेखा तथा जो सूक्ष्म-रेखा हों उन्हें कन्या-रेखा समझना चाहिये ।
स्त्रियों के हाथ में भी इन्हीं रेखाओं को सन्तान-रेखा माना है । 'गरुड़ पुराण' का वचन है कि | पद्धति के अनुसार 'गोत्र' रखा या 'कुल' -रेखा कहते हैं। दोनों का अर्थ है वंश वृद्धि । इस नाम से यह प्रकट होता है कि जिसकी जीवन-रेखा सुन्दर और बलवान होगी तथा जीवन-रेखा से घिरा हुआ भाग गुणयुक्त होगा उसी का 'कुल' चलेगा - उसी की 'गोत्र' वृद्धि होगी। पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आदि एक के बाद दूसरे की सन्तान स्वस्थ होती चली जावे तभी कुल या गोत्र की वृद्धि संभव है। इसीलिये हमारे भारतीय महर्षियों ने कुल-वृद्धि या गोत्र वृद्धि का अर्थ केवल 'पुत्र' तक ही सीमित नहीं रखा। यदि कदाचित् किसी की निर्बल अवस्था में निर्बल पुत्र हो गया और आगे उसकी वंश वृद्धि नहीं हुई तो 'गोत्र' -वृद्धि नहीं मानी जावेगी । पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों की सन्तानोत्पादन शक्ति, शुक्र-क्षेत्र तथा जीवनरेखा पर बहुत अधिक मात्रा में अवलंबित है। इसी कारण अँगुष्ठ के नीचे के भाग पर-करपृष्ठ की ओर निकली हुई रेखाओं से सन्तान का विचार किया जाता है । 'भविष्य पुराण' में लिखा हैअंगुष्ठ मूलं रेखाः पुत्राः स्युर्दारिकाः सूक्ष्मा । 'प्रयोग पारिजात' में भी लिखा हैमूलेऽङ्ग ष्ठस्य नृणां स्थूला रेखा भवन्ति यावत्यः । तावन्तः पुत्राः स्युः सूक्ष्माभिः पुत्रिकास्ताभिः ।। अर्थात् अँगूठे के मूल में जो स्थूल रेखा हों उन्हें पुत्र -रेखा तथा जो सूक्ष्म-रेखा हों उन्हें कन्या-रेखा समझना चाहिये । स्त्रियों के हाथ में भी इन्हीं रेखाओं को सन्तान-रेखा माना है । 'गरुड़ पुराण' का वचन है कि |
प्राक्कथनप्रस्तुत पुस्तक 'राजस्थान-एक विस्तृत अध्ययन, जहाँ एक ओर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों की उस कमी की पूर्ति करेगी जिसे एक लम्बी अवधि से प्रमाणिक पुस्तक न होने के कारण अनुभव कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में रूचि रखने वाले सभी पाठकों को भी एक सन्दर्भ पुस्तक के रूप में सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवा कर उन्हें सन्तुष्टि प्रदान करेगी, ऐसी
प्रस्तुत पुस्तक चूंकि राजस्थान के विषय में जानकारी प्राप्त करने वाले इच्छुक पाठकों को दृष्टिगत रखते हुए लिखी गई है, इसलिये राजस्थान राज्य से सम्बन्धित भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक विकास तथा अन्य तथ्यों की जानकारी को विवेचनात्मक व विश्लेषणात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है । साथ ही राजस्थान की नवीनतम घटनाओं, सामग्री एवं का समावेश कर पुस्तक को और अधिक उपगोगी बनाने की चेष्टा की गई है । पुस्तक लेखन में प्रमाणिक शब्दों एवं बोधगम्य भाषा का प्रयोग भी किया गया है । की जाती है कि पाठकगण इसे पसन्द करेगें ।
पुस्तक की रचना में जिन ग्रन्थों, लेखों व अन्य प्रकाशित विषय सामग्री से जो सहयोग लिया गया है, लेखक उनके प्रति हृदय से भारी है ।
लेखक कुलदीप पब्लिकेशन्स् के प्रति भी प्रभारी है जिनके अथक प्रयासों व प्रेरणा से यह पुस्तक आपके हाथों में है ।
अन्त में परीक्षार्थियों व अन्य पाठकों से अनुरोध है कि वे इस पुस्तक के वारे में अपने उपयोगी व वहुमूल्य सुझाव भेजकर आगामी संस्करण को और अधिक उपयोगी बनाने में सहयोग प्रदान करेंगे, ऐसी अपेक्षा है।
एल. आर. भल्ला | प्राक्कथनप्रस्तुत पुस्तक 'राजस्थान-एक विस्तृत अध्ययन, जहाँ एक ओर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों की उस कमी की पूर्ति करेगी जिसे एक लम्बी अवधि से प्रमाणिक पुस्तक न होने के कारण अनुभव कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में रूचि रखने वाले सभी पाठकों को भी एक सन्दर्भ पुस्तक के रूप में सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवा कर उन्हें सन्तुष्टि प्रदान करेगी, ऐसी प्रस्तुत पुस्तक चूंकि राजस्थान के विषय में जानकारी प्राप्त करने वाले इच्छुक पाठकों को दृष्टिगत रखते हुए लिखी गई है, इसलिये राजस्थान राज्य से सम्बन्धित भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक विकास तथा अन्य तथ्यों की जानकारी को विवेचनात्मक व विश्लेषणात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है । साथ ही राजस्थान की नवीनतम घटनाओं, सामग्री एवं का समावेश कर पुस्तक को और अधिक उपगोगी बनाने की चेष्टा की गई है । पुस्तक लेखन में प्रमाणिक शब्दों एवं बोधगम्य भाषा का प्रयोग भी किया गया है । की जाती है कि पाठकगण इसे पसन्द करेगें । पुस्तक की रचना में जिन ग्रन्थों, लेखों व अन्य प्रकाशित विषय सामग्री से जो सहयोग लिया गया है, लेखक उनके प्रति हृदय से भारी है । लेखक कुलदीप पब्लिकेशन्स् के प्रति भी प्रभारी है जिनके अथक प्रयासों व प्रेरणा से यह पुस्तक आपके हाथों में है । अन्त में परीक्षार्थियों व अन्य पाठकों से अनुरोध है कि वे इस पुस्तक के वारे में अपने उपयोगी व वहुमूल्य सुझाव भेजकर आगामी संस्करण को और अधिक उपयोगी बनाने में सहयोग प्रदान करेंगे, ऐसी अपेक्षा है। एल. आर. भल्ला |
चेचन गणराज्य का नेतृत्व शब्दों से कार्यों की ओर बढ़ता दिख रहा है। विवादित क्षेत्र के भाग्य पर असफल वार्ता की एक पूरी श्रृंखला के बाद, रूसी गार्ड की चेचन इकाइयों को गणतंत्र के दक्षिण में भेजा गया था।
उनकी एकाग्रता का क्षेत्र चेचन्या और इंगुशेतिया की सीमा पर स्थित है और ओसेशिया की सीमा के बहुत करीब है।
"लेकिन ये स्वतंत्र राज्य नहीं हैं, बल्कि रूस के भीतर संघीय संरचनाएं हैं! - कई रूसी "वकील" एक स्वर में चिल्लाए। वे किसके झंडे तले अभियान पर निकले थे? चेचन गणराज्य के झंडे के नीचे?
नक्काशी क्या हो सकती है? !
और सामान्य तौर पर - वे किस तरह के सशस्त्र रूप हैं?
आंतरिक सेवा का चार्टर, सैन्य विनियम भी हैं। यह वे हैं जो सैनिकों की आवाजाही को नियंत्रित करते हैं। और रूस के पहचान चिह्नों के बिना एक सैन्य स्तंभ की आवाजाही नियमों का सीधा उल्लंघन है।
यदि ये अभ्यास हैं, तो इन्हें कार्मिक प्रशिक्षण योजना में शामिल किया जाना चाहिए। यदि वे अनियोजित हैं, तो उन्हें मास्को के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से घबराया हुआ था कि इससे पहले कादिरोव के दाहिने हाथ - चेचन संसद के अध्यक्ष, मैगोमेड दाउदोव ने इंगुशेटिया की परिषद की परिषद के प्रतिनिधियों के लिए एक "शूटर" नियुक्त किया था।
Этот бывший боевик, а ныне - авторитетный депутат, предложил решить вопрос по шариату не где-нибудь, а на берегу реки Фортанги. И тут же всплеснули руками правдорубы: «А как же Конституционный суд? » А потом провели более чем спорную историческую параллель:
लेकिन क्या होगा अगर कल वोरोनिश क्षेत्र के प्रमुख को याद आए कि भूमि का हिस्सा लिपेत्स्क क्षेत्र के पक्ष में क्षेत्र से काट दिया गया था? और वोरोनिश ग्रोज़्नी से भी बदतर क्यों है? वापसी!
देखेंः आईए "ग्रोज़्नी-सूचित"
"रमज़ान अखमतोविच के दाखिल होने के साथ, मध्य युग की हैवानियत में स्लाइड शुरू हो जाएगी," - न्यायविदों और सत्य-बताने वालों के इस तरह के फिर से शुरू से यह बस कड़वा हो जाता है। - और भविष्य में, पूरे देश का विशिष्ट रियासतों में विभाजन, जो एक समय में एक का गला घोंटना बहुत आसान होगा। विदेशी "भागीदारों" का सपना!
सबसे दिलचस्प बात यह है कि औपचारिक रूप से ये सभी न्यायविद सही हैं। वास्तव में, वे पूर्ण भू-राजनीतिक आम आदमी की तरह व्यवहार करते हैं। कम से कम घरेलू राजनीति में। और वे या तो आज की आंतरिक रूसी वास्तविकताओं को नहीं समझते हैं, या रूस के सबसे अधिक समस्याग्रस्त क्षेत्रों में से एक - उत्तरी काकेशस की बारीकियों को नहीं समझते हैं।
इसलिए वकीलों-न्यायशास्त्रियों और प्रचारकों-सच बोलने वालों के लिए एक संक्षिप्त शैक्षिक कार्यक्रम की आवश्यकता है।
जैसा कि आप जानते हैं, राजनीति संभव की कला है। नोट - कानूनी या अवैध कला नहीं, बल्कि संभव है। और इस मामले में सब कुछ संभव है - कॉन्ट्रैक्ट किलिंग से लेकर युद्ध तक। या स्थानीय शत्रुता का संचालन करना, जिसमें उनके अपने क्षेत्र भी शामिल हैं। दुनिया भर में अभ्यास, वैसे।
बस यह मत सोचो कि लेखक, किसी भी तरह से शांतिवादी, दोनों को सही ठहराने के लिए तैयार नहीं है। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारी विदेशी खुफिया सेवा का आदर्श वाक्य है "महिमा के अधिकार के बिना - राज्य की महिमा के लिए! " और न केवल गोपनीयता के कारणों के लिए उनके पास "प्रसिद्धि का अधिकार" नहीं है। और इसलिए भी कि कभी-कभी आपको गंदी चीजें करनी पड़ती हैं।
अपनी मातृभूमि की भलाई के लिए, बिल्कुल। और यहाँ किसी प्रकार की वैधता के बारे में बात करना कम से कम मूर्खतापूर्ण है, और सबसे खतरनाक है। और यह देश के पतन से भरा है (जो, वैसे, हमारे पूर्वजों ने सदियों से और बहुत सारे खून के साथ एकत्र किया था)।
अब - काकेशस के संबंध में ही। यह क्षेत्र अत्यंत विषम है - दोनों जातीय संरचना में, और विभिन्न जातीय समूहों के स्वीकारोक्ति में, और इस या उस जातीय समूह के वैचारिक सिद्धांतों में। रूसी अधिकारियों और सामान्य रूप से रूस के प्रति एक मानार्थ दृष्टिकोण वाले क्षेत्र हैं।
इस "सकारात्मक सूची" के नेता चेचन्या और ओसेशिया हैं। ओसेशिया पारंपरिक रूप से रूस का एक विश्वसनीय सहयोगी रहा है (हालांकि कभी-कभी स्थानीय अधिकारियों और क्रेमलिन के बीच संबंधों में, यह "विफल" होता है)। लंबे और थकाऊ रूसी-कोकेशियान युद्ध के दौरान, ओस्सेटियन एकमात्र ऐसे लोग थे जो "गज़ावत" में शामिल नहीं हुए थे जो पूरे काकेशस में धधक रहा था।
ओस्सेटियन के लिए रूसी सेना में सेवा करना हमेशा एक सैन्य कर्तव्य और एक सम्मानजनक कर्तव्य माना गया है। दोनों चेचन अभियानों के दौरान, गणतंत्र के नेतृत्व ने रूसी सैनिकों के "जंप बेस" के लिए मोजदोक के क्षेत्र में विद्रोही क्षेत्र के साथ अपनी सीमा प्रदान की। जिसके लिए वही इंगुश आतंकवादियों ने उन्हें व्लादिकाव्काज़ में विस्फोटों की एक श्रृंखला और बेसलान में एक आतंकवादी हमले के साथ "धन्यवाद" दिया।
दागेस्तान में चेचन आतंकवादियों के आक्रमण के बाद, गैर-मान्यता प्राप्त गणराज्य के नेताओं में से एक, अखमत कादिरोव ने भी पूरी दुनिया को "संभव की कला" का प्रदर्शन किया, जानबूझकर देश में बाढ़ लाने वाले आतंकवादियों के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया और उनका पक्ष लिया। संघीय सैनिक। पिता की हत्या के बाद उसका बेटा रमजान भी उसी रास्ते पर चला।
कोई नहीं जानता (और कभी नहीं जान पाएगा) कि अखमत कादिरोव और उनके बेटे रमजान ने पुतिन को व्यक्तिगत रूप से क्या बताया। लेकिन नतीजा साफ है। ग्रोज़नी को बहाल कर दिया गया है। और काकेशस में, पैदल सैनिकों की एक पूरी सेना दिखाई दी, जो ग्रह के विभिन्न हिस्सों में रूस के हितों की रक्षा के लिए तैयार थी। और उन्होंने इसे कर्मों से सिद्ध किया - डोनबास और सीरिया दोनों में।
इंगुशेतिया और दागिस्तान पूरी तरह से अलग मामला है। केंद्र सरकार की तारीफ का कोई निशान नहीं है. दोनों चेचन अभियानों के दौरान हजारों इंगुश और दागेस्तानियों ने उग्रवादियों की ओर से लड़ाई लड़ी। इसके पूर्व नेता रुस्लान औशेव ने इंगुशेतिया को पड़ोसी क्षेत्र के हजारों डाकुओं के आराम और पुनर्वास के स्थान में बदल दिया। यह इंगुश था जिसने बेसलान में स्कूली बच्चों पर हमला करने वाले गिरोह की रीढ़ बनाई थी। सीमाओं की क़ानून के बिना इस अपराध को ओसेशिया में कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।
दागिस्तान में, वहाबवाद अभी भी खिलता है और रसीले महकता है। एक सप्ताह भी ऐसा नहीं बीता जब सुरक्षा बलों ने स्थानीय जंगलों में एक और वहाबी सेल को निशाना बनाया हो। और स्थानीय ठग, पहाड़ों से रूस की ओर उतरते हुए, नियमित रूप से पूरे रूसी समाज को अपने नैतिक पतन की तह तक प्रदर्शित करते हैं - वे कैडेटों पर हमला करेंगे, या वे वेट्रेस को लात मारेंगे।
पड़ोसी इंगुशेतिया में, कोई भी रूसी समर्थक उम्मीदवार दुश्मनी से मिलता है और अंततः स्थानीय कुलों द्वारा खाया जाता है। और आपस में वे दस्यु संरक्षक रुस्लान औशेव जैसे विशेष रूप से घृणित व्यक्तित्वों को सौंपने के लिए तैयार हैं। लेकिन एक के बाद एक, रूस के दो नायकों को ध्वस्त कर दिया गया - ज़ाज़िकोव और येवकुरोव।
समाज और क्षेत्रीय अभिजात वर्ग की अपरिपक्वता न केवल (और इतनी ही नहीं) है, बल्कि रूस के प्रति उन दोनों की खुली दुश्मनी भी है।
मैं पूछना चाहता हूंः सज्जनों, आप इस सब के बाद क्या चाहते थे?
रूस के लिए अपने वफादार पैदल सेना से मुंह मोड़ने और संभावित शत्रुतापूर्ण आबादी को विवादित क्षेत्रों को छोड़ने के लिए?
भू-राजनीति का आधुनिक कानून, राजनीतिक वैज्ञानिक अलेक्जेंडर डुगिन द्वारा निकाला गया, पढ़ता हैः "जो कोई रूस के साथ लड़ने की हिम्मत करेगा, वह अपने क्षेत्र के साथ इसके लिए भुगतान करेगा। " अबकाज़िया और दक्षिण ओसेशिया को खोने के बाद, जॉर्जिया द्वारा इस भुगतान का पूरा भुगतान किया जा चुका है। हाल ही में - आर्मेनिया, अधिकांश कराबाख के साथ भाग लिया।
इंगुशेतिया ने एक समय में प्रिगोरोडनी जिला भी खो दिया था। लेकिन ऐसा लगता है कि न तो स्थानीय अभिजात वर्ग, न ही स्थानीय आबादी, न ही स्थानीय बुजुर्गों ने कुछ समझा और सीखा। और कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इसलिए, इंगुशेतिया के आधुनिक "छोटे लेकिन गर्वित गणराज्य" के इतिहास में फोर्टंगा नदी के क्षेत्र में भूमि अंतिम नुकसान नहीं है। उनके पास अभी भी बहुत कुछ खोना है। हमारे लिए बहुत खेद है।
| चेचन गणराज्य का नेतृत्व शब्दों से कार्यों की ओर बढ़ता दिख रहा है। विवादित क्षेत्र के भाग्य पर असफल वार्ता की एक पूरी श्रृंखला के बाद, रूसी गार्ड की चेचन इकाइयों को गणतंत्र के दक्षिण में भेजा गया था। उनकी एकाग्रता का क्षेत्र चेचन्या और इंगुशेतिया की सीमा पर स्थित है और ओसेशिया की सीमा के बहुत करीब है। "लेकिन ये स्वतंत्र राज्य नहीं हैं, बल्कि रूस के भीतर संघीय संरचनाएं हैं! - कई रूसी "वकील" एक स्वर में चिल्लाए। वे किसके झंडे तले अभियान पर निकले थे? चेचन गणराज्य के झंडे के नीचे? नक्काशी क्या हो सकती है? ! और सामान्य तौर पर - वे किस तरह के सशस्त्र रूप हैं? आंतरिक सेवा का चार्टर, सैन्य विनियम भी हैं। यह वे हैं जो सैनिकों की आवाजाही को नियंत्रित करते हैं। और रूस के पहचान चिह्नों के बिना एक सैन्य स्तंभ की आवाजाही नियमों का सीधा उल्लंघन है। यदि ये अभ्यास हैं, तो इन्हें कार्मिक प्रशिक्षण योजना में शामिल किया जाना चाहिए। यदि वे अनियोजित हैं, तो उन्हें मास्को के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से घबराया हुआ था कि इससे पहले कादिरोव के दाहिने हाथ - चेचन संसद के अध्यक्ष, मैगोमेड दाउदोव ने इंगुशेटिया की परिषद की परिषद के प्रतिनिधियों के लिए एक "शूटर" नियुक्त किया था। Этот бывший боевик, а ныне - авторитетный депутат, предложил решить вопрос по шариату не где-нибудь, а на берегу реки Фортанги. И тут же всплеснули руками правдорубы: «А как же Конституционный суд? » А потом провели более чем спорную историческую параллель: लेकिन क्या होगा अगर कल वोरोनिश क्षेत्र के प्रमुख को याद आए कि भूमि का हिस्सा लिपेत्स्क क्षेत्र के पक्ष में क्षेत्र से काट दिया गया था? और वोरोनिश ग्रोज़्नी से भी बदतर क्यों है? वापसी! देखेंः आईए "ग्रोज़्नी-सूचित" "रमज़ान अखमतोविच के दाखिल होने के साथ, मध्य युग की हैवानियत में स्लाइड शुरू हो जाएगी," - न्यायविदों और सत्य-बताने वालों के इस तरह के फिर से शुरू से यह बस कड़वा हो जाता है। - और भविष्य में, पूरे देश का विशिष्ट रियासतों में विभाजन, जो एक समय में एक का गला घोंटना बहुत आसान होगा। विदेशी "भागीदारों" का सपना! सबसे दिलचस्प बात यह है कि औपचारिक रूप से ये सभी न्यायविद सही हैं। वास्तव में, वे पूर्ण भू-राजनीतिक आम आदमी की तरह व्यवहार करते हैं। कम से कम घरेलू राजनीति में। और वे या तो आज की आंतरिक रूसी वास्तविकताओं को नहीं समझते हैं, या रूस के सबसे अधिक समस्याग्रस्त क्षेत्रों में से एक - उत्तरी काकेशस की बारीकियों को नहीं समझते हैं। इसलिए वकीलों-न्यायशास्त्रियों और प्रचारकों-सच बोलने वालों के लिए एक संक्षिप्त शैक्षिक कार्यक्रम की आवश्यकता है। जैसा कि आप जानते हैं, राजनीति संभव की कला है। नोट - कानूनी या अवैध कला नहीं, बल्कि संभव है। और इस मामले में सब कुछ संभव है - कॉन्ट्रैक्ट किलिंग से लेकर युद्ध तक। या स्थानीय शत्रुता का संचालन करना, जिसमें उनके अपने क्षेत्र भी शामिल हैं। दुनिया भर में अभ्यास, वैसे। बस यह मत सोचो कि लेखक, किसी भी तरह से शांतिवादी, दोनों को सही ठहराने के लिए तैयार नहीं है। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारी विदेशी खुफिया सेवा का आदर्श वाक्य है "महिमा के अधिकार के बिना - राज्य की महिमा के लिए! " और न केवल गोपनीयता के कारणों के लिए उनके पास "प्रसिद्धि का अधिकार" नहीं है। और इसलिए भी कि कभी-कभी आपको गंदी चीजें करनी पड़ती हैं। अपनी मातृभूमि की भलाई के लिए, बिल्कुल। और यहाँ किसी प्रकार की वैधता के बारे में बात करना कम से कम मूर्खतापूर्ण है, और सबसे खतरनाक है। और यह देश के पतन से भरा है । अब - काकेशस के संबंध में ही। यह क्षेत्र अत्यंत विषम है - दोनों जातीय संरचना में, और विभिन्न जातीय समूहों के स्वीकारोक्ति में, और इस या उस जातीय समूह के वैचारिक सिद्धांतों में। रूसी अधिकारियों और सामान्य रूप से रूस के प्रति एक मानार्थ दृष्टिकोण वाले क्षेत्र हैं। इस "सकारात्मक सूची" के नेता चेचन्या और ओसेशिया हैं। ओसेशिया पारंपरिक रूप से रूस का एक विश्वसनीय सहयोगी रहा है । लंबे और थकाऊ रूसी-कोकेशियान युद्ध के दौरान, ओस्सेटियन एकमात्र ऐसे लोग थे जो "गज़ावत" में शामिल नहीं हुए थे जो पूरे काकेशस में धधक रहा था। ओस्सेटियन के लिए रूसी सेना में सेवा करना हमेशा एक सैन्य कर्तव्य और एक सम्मानजनक कर्तव्य माना गया है। दोनों चेचन अभियानों के दौरान, गणतंत्र के नेतृत्व ने रूसी सैनिकों के "जंप बेस" के लिए मोजदोक के क्षेत्र में विद्रोही क्षेत्र के साथ अपनी सीमा प्रदान की। जिसके लिए वही इंगुश आतंकवादियों ने उन्हें व्लादिकाव्काज़ में विस्फोटों की एक श्रृंखला और बेसलान में एक आतंकवादी हमले के साथ "धन्यवाद" दिया। दागेस्तान में चेचन आतंकवादियों के आक्रमण के बाद, गैर-मान्यता प्राप्त गणराज्य के नेताओं में से एक, अखमत कादिरोव ने भी पूरी दुनिया को "संभव की कला" का प्रदर्शन किया, जानबूझकर देश में बाढ़ लाने वाले आतंकवादियों के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया और उनका पक्ष लिया। संघीय सैनिक। पिता की हत्या के बाद उसका बेटा रमजान भी उसी रास्ते पर चला। कोई नहीं जानता कि अखमत कादिरोव और उनके बेटे रमजान ने पुतिन को व्यक्तिगत रूप से क्या बताया। लेकिन नतीजा साफ है। ग्रोज़नी को बहाल कर दिया गया है। और काकेशस में, पैदल सैनिकों की एक पूरी सेना दिखाई दी, जो ग्रह के विभिन्न हिस्सों में रूस के हितों की रक्षा के लिए तैयार थी। और उन्होंने इसे कर्मों से सिद्ध किया - डोनबास और सीरिया दोनों में। इंगुशेतिया और दागिस्तान पूरी तरह से अलग मामला है। केंद्र सरकार की तारीफ का कोई निशान नहीं है. दोनों चेचन अभियानों के दौरान हजारों इंगुश और दागेस्तानियों ने उग्रवादियों की ओर से लड़ाई लड़ी। इसके पूर्व नेता रुस्लान औशेव ने इंगुशेतिया को पड़ोसी क्षेत्र के हजारों डाकुओं के आराम और पुनर्वास के स्थान में बदल दिया। यह इंगुश था जिसने बेसलान में स्कूली बच्चों पर हमला करने वाले गिरोह की रीढ़ बनाई थी। सीमाओं की क़ानून के बिना इस अपराध को ओसेशिया में कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। दागिस्तान में, वहाबवाद अभी भी खिलता है और रसीले महकता है। एक सप्ताह भी ऐसा नहीं बीता जब सुरक्षा बलों ने स्थानीय जंगलों में एक और वहाबी सेल को निशाना बनाया हो। और स्थानीय ठग, पहाड़ों से रूस की ओर उतरते हुए, नियमित रूप से पूरे रूसी समाज को अपने नैतिक पतन की तह तक प्रदर्शित करते हैं - वे कैडेटों पर हमला करेंगे, या वे वेट्रेस को लात मारेंगे। पड़ोसी इंगुशेतिया में, कोई भी रूसी समर्थक उम्मीदवार दुश्मनी से मिलता है और अंततः स्थानीय कुलों द्वारा खाया जाता है। और आपस में वे दस्यु संरक्षक रुस्लान औशेव जैसे विशेष रूप से घृणित व्यक्तित्वों को सौंपने के लिए तैयार हैं। लेकिन एक के बाद एक, रूस के दो नायकों को ध्वस्त कर दिया गया - ज़ाज़िकोव और येवकुरोव। समाज और क्षेत्रीय अभिजात वर्ग की अपरिपक्वता न केवल है, बल्कि रूस के प्रति उन दोनों की खुली दुश्मनी भी है। मैं पूछना चाहता हूंः सज्जनों, आप इस सब के बाद क्या चाहते थे? रूस के लिए अपने वफादार पैदल सेना से मुंह मोड़ने और संभावित शत्रुतापूर्ण आबादी को विवादित क्षेत्रों को छोड़ने के लिए? भू-राजनीति का आधुनिक कानून, राजनीतिक वैज्ञानिक अलेक्जेंडर डुगिन द्वारा निकाला गया, पढ़ता हैः "जो कोई रूस के साथ लड़ने की हिम्मत करेगा, वह अपने क्षेत्र के साथ इसके लिए भुगतान करेगा। " अबकाज़िया और दक्षिण ओसेशिया को खोने के बाद, जॉर्जिया द्वारा इस भुगतान का पूरा भुगतान किया जा चुका है। हाल ही में - आर्मेनिया, अधिकांश कराबाख के साथ भाग लिया। इंगुशेतिया ने एक समय में प्रिगोरोडनी जिला भी खो दिया था। लेकिन ऐसा लगता है कि न तो स्थानीय अभिजात वर्ग, न ही स्थानीय आबादी, न ही स्थानीय बुजुर्गों ने कुछ समझा और सीखा। और कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इसलिए, इंगुशेतिया के आधुनिक "छोटे लेकिन गर्वित गणराज्य" के इतिहास में फोर्टंगा नदी के क्षेत्र में भूमि अंतिम नुकसान नहीं है। उनके पास अभी भी बहुत कुछ खोना है। हमारे लिए बहुत खेद है। |
The Nun Overall Box Office Collection : हॉलीवुड हॉरर फिल्म "द नन" दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही है. 'द नन' कंज्यूरिंग फ्रेंचाइजी की 5वीं फिल्म है. हॉरर जॉनर लवर्स को, फिल्म की कहानी काफी पसंद आ रही है. फिल्म ने वीकेंड में ही अपनी कुल लागत से 6 गुना ज्यादा कमाई कर कई रिकॉर्ड बना लिए हैं.
फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक 158. 4 करोड़ के बजट में बनी The Nun ने पहले वीकेंड में वर्ल्डवाइड 943. 2 करोड़ रुपये कमा चुकी है. ओपनिंग वीकेंड में 385. 2 करोड़ कलेक्शन था. जाहिर सी बात है ये फिल्म भारतीय बाजार में भी धूम मचा रही है. इस हफ्ते बॉक्स ऑफिस का जो ट्रेंड रहा उसके आधार पर साफ़ नजर आ रहा है कि दर्शकों ने तीन नई हिंदी फिल्मों की रिलीज के बावजूद The Nun को तरजीह दी.
भारतीय बाजार में फिल्म ने ओपनिंग डे पर ही 8 करोड़ रुपये की कमाई की थी. इसके साथ रिलीज हुई बॉलीवुड की तीन फिल्में पलटन, लैला मजनू और गली गुलियां काफी पीछे छूट गई हैं. The Nun भारत में 'कंज्यूरिंग सीरीज' की सबसे बड़ी और बेस्ट ओपनर साबित हुई है.
ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, भारतीय बाजार में द नन ने ओपनिंग वीकेंड में कुल 28. 50 करोड़ की नेट कमाई की है. हालांकि रविवार को मूवी का कलेक्शन उतना नहीं रहा, जितने की उम्मीद लगाई जा रही थी. गुरुवार को रखे गए प्रिव्यू शोज से फिल्म ने 30 लाख कमाए थे. द नन ने शुक्रवार को- 8 करोड़, शनिवार- 10. 20 करोड़, रविवार-10 करोड़ की कमाई की. इसे भारत में 1603 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को फिल्म की कमाई 3 करोड़ रुपये रही. इस तरह देखें तो The Nun ने चार दिन के अंदर भारत में 30 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है.
#TheNun emerges the franchise's best opener... Biz went slightly down on Sun [vis-à-vis Sat], but has packed a strong total in its opening weekend... Thu previews 30 lakhs, Fri 8 cr, Sat 10. 20 cr, Sun 10 cr. Total: ₹ 28. 50 cr Nett BOC [1603 screens]. India biz. All versions.
मूवी द नन हॉरर से भरपूर है. इसमें शैतान और चर्च के बीच में जंग दिखाई गई है. जहां चर्च की तरफ शैतान से लड़ने का जिम्मा पादरी ने नहीं बल्कि नन ने उठाया है. मूवी के कई बेहद डरावने सीन्स हैं. हॉरर कंटेंट को पसंद करने वालों के लिए ये मूवी ट्रीट है.
| The Nun Overall Box Office Collection : हॉलीवुड हॉरर फिल्म "द नन" दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही है. 'द नन' कंज्यूरिंग फ्रेंचाइजी की पाँचवीं फिल्म है. हॉरर जॉनर लवर्स को, फिल्म की कहानी काफी पसंद आ रही है. फिल्म ने वीकेंड में ही अपनी कुल लागत से छः गुना ज्यादा कमाई कर कई रिकॉर्ड बना लिए हैं. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक सौ अट्ठावन. चार करोड़ के बजट में बनी The Nun ने पहले वीकेंड में वर्ल्डवाइड नौ सौ तैंतालीस. दो करोड़ रुपये कमा चुकी है. ओपनिंग वीकेंड में तीन सौ पचासी. दो करोड़ कलेक्शन था. जाहिर सी बात है ये फिल्म भारतीय बाजार में भी धूम मचा रही है. इस हफ्ते बॉक्स ऑफिस का जो ट्रेंड रहा उसके आधार पर साफ़ नजर आ रहा है कि दर्शकों ने तीन नई हिंदी फिल्मों की रिलीज के बावजूद The Nun को तरजीह दी. भारतीय बाजार में फिल्म ने ओपनिंग डे पर ही आठ करोड़ रुपये की कमाई की थी. इसके साथ रिलीज हुई बॉलीवुड की तीन फिल्में पलटन, लैला मजनू और गली गुलियां काफी पीछे छूट गई हैं. The Nun भारत में 'कंज्यूरिंग सीरीज' की सबसे बड़ी और बेस्ट ओपनर साबित हुई है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, भारतीय बाजार में द नन ने ओपनिंग वीकेंड में कुल अट्ठाईस. पचास करोड़ की नेट कमाई की है. हालांकि रविवार को मूवी का कलेक्शन उतना नहीं रहा, जितने की उम्मीद लगाई जा रही थी. गुरुवार को रखे गए प्रिव्यू शोज से फिल्म ने तीस लाख कमाए थे. द नन ने शुक्रवार को- आठ करोड़, शनिवार- दस. बीस करोड़, रविवार-दस करोड़ की कमाई की. इसे भारत में एक हज़ार छः सौ तीन स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को फिल्म की कमाई तीन करोड़ रुपये रही. इस तरह देखें तो The Nun ने चार दिन के अंदर भारत में तीस करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है. #TheNun emerges the franchise's best opener... Biz went slightly down on Sun [vis-à-vis Sat], but has packed a strong total in its opening weekend... Thu previews तीस lakhs, Fri आठ cr, Sat दस. बीस cr, Sun दस cr. Total: अट्ठाईस रुपया. पचास cr Nett BOC [एक हज़ार छः सौ तीन screens]. India biz. All versions. मूवी द नन हॉरर से भरपूर है. इसमें शैतान और चर्च के बीच में जंग दिखाई गई है. जहां चर्च की तरफ शैतान से लड़ने का जिम्मा पादरी ने नहीं बल्कि नन ने उठाया है. मूवी के कई बेहद डरावने सीन्स हैं. हॉरर कंटेंट को पसंद करने वालों के लिए ये मूवी ट्रीट है. |
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