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रकी थिरता, परिणामकी उज्ज्वलता नियंत काल तक रहना संभष हो, उसी आसन से क्षेत्रका प्रमाण करके इन्द्रियों के व्या पार वा विषयों से विरक्त होते हुए, केश, बसादिको अच्छी तरह बांधकर (जिसमें उन के हिलने से चित्तमें क्षोभ न हो ) हस्तांजली जोड़, स्थिर चित्त करके सामायिक, वन्दनादि पाठोंका, पंच परमेष्ठीका अथवा अपने स्वरूप का चितवन करे और उसमें लीन हो । योग्य विनय-सामायिक के आरंभ में पृथ्वीको कोमल वस्त्र या पूंजणी (अमाड़ी की कोमल बुहारी) से बुहार ( प्रतिलेखन) कर ईर्यापथ-शुद्धि पूर्वक खड़ा होने, क्षेत्र काल का प्रमाण करे तथा ९ वार णमोकार मंत्र पढ़ हाथ जोड़ पृथ्वीपर मस्तक लगाकर नमस्कार करे । पश्चात् चारों दिशाओं में नव २ णमोकार मंत्र कहकर तीन २ आवर्ति (दोनों हाथकी अंजुली जोड़ दहिने हाथकी ओरसे तीन बार फिराना ) और एक २ शिरोनति (दोनों हाथ जोड़ नमस्कार) करे, तिस पीछे खड़ेही या बैठकर योग्य आसनपूर्वक णमोकार मंत्र का जाप्य करे, पंच परमेष्ठी के स्वरूपका चितवन करे, सामायिक पाठ पढ़े, अनित्यादि द्वादश - अनुप्रेक्षाओं का चितवन करे तथा आत्मस्वरूप के चितवनपूर्वक ध्यान लगावे और अपना धन्य भाग समझे ।। सामायिकपाठ के ६ अंग हैं । ( १ ) प्रतिक्रमण अर्थात् जिनेन्द्र देवके सन्मुख अपने द्वारा हुए पापों की क्षमा प्रार्थना करना । (२) प्रत्याख्यान - आगामि पाप त्याग की भावना करना । (३) सामायिक कर्म-सामायिक के काल तक सब में ममताभाव त्याग, समताभाव धरना । ( ४ ) स्तुति - * संस्कृत प्राकृत पाठ यदि अपनी समझ में न आता हो, तो भाषा पाठही समझ २ कर, मनन करता हुआ पड़े, जिससे भावों में विशुद्धि उत्पन्न हो । चौबीसों तीर्थकरों का सवन करना । (५) वंदना- किसी एक तीर्थकरका स्ववन करना । ( ६ ) कायोत्सर्ग-काम से ममत्व छोड़ आत्मस्वरूप में लवलीन होना ।। इसमकार समभाव पूर्वक चितवन करते हुए अब काल पूरा होजाय, तब आरंभ की तरह आवर्ति, शिरोनति तथा नमस्कार पूर्वक सामायिक पूर्ण करे । ( ६ ) मनःशुद्धि - मनको शुभ तथा शुद्ध विचारों की तरफ झुकावे, आर्त रौद्र ध्यान में दौड़ने से रोककर धर्मध्यान में लगावे । जहांतक संभव हो पंच परमेष्ठी का जाप्य वा अन्य कोई भी पाठ, वचन के बदले मन से स्मरण करावे, ऐसा करने से मन इधर उधर चलायमान नहीं होता । ( ७ ) वचनशुद्धि - हुंकारादि शब्द न करे, बहुत धीरे २ वा जल्दी २ पाठ न पढ़े, जिस प्रकार अच्छी तरह समझ में आवे, उसी प्रकार समानवृत्ति एवं मधुरस्वर से शुद्ध पाठ पढ़े, धर्मपाठ सिवाय कोई और वचन न बोले । (८) कायशुद्धि-सामायिक करने के पेश्तर स्नान करने, अंग अंगौछने, हाथ-पांव धोने आदिसे जिस प्रकार योग्य हो, यत्वाचार पूर्वक शरीर पवित्र करके, पवित्र वस्त्र पहिन सामायिक में बैठे और सामायिक के समय शिरकंप, हस्तकंप अथवा शरीर के अन्य अंगों को न हिलाबे-डुलावे, निबल अंग रक्खे । कदाचित् कर्मयोग से सामायिक के समय चेतन- अचेतन कृत उपसर्ग आजाय, तौभी मन-वचन-काय को चलायमान नहीं करता हुआ सहन करे ।। यहां कोई प्रश्न करे कि सामायिक के समय अचानक लघुशंका- दीर्घशंका की तीव्र बाधा आजाय, तो क्या करना चाहिये १ तिसका उत्तर यह है कि प्रथम तो व्रती पुरुषों का खा१५२ नपान नियमित होने से उनको इसप्रकार की अचानक बाधा होना संभव नहीं, कदाचित् कर्मयोग से ऐसा ही कोई कारण आजाय, तो उसका रोकना या सहना असंभव होने से उस काम से निपटकर, प्रायश्चित्त ले, पुनः सामायिक स्थापन करे ।। सामायिक के पंच अतीचार ॥ ( १ - २ - ३ ) मन, वचन, काय को अशुभ प्रवर्ताना* ।। ४) सामायिक करने में अनादर करना ।। (५) सामायिक का समय वा पाठ भूल जाना ॥ अतीचार लगने से सामायिक दूषित होती है, अतएव ऐसी सावधानी रखना चाहिये, जिस से अतीचार दोष न लगें ॥ लाभ-सामायिक के समय क्षेत्र तथा काल का परिमाण करके गृहव्यापार आदि सर्व- पाप योगों का त्याग कर देने से सामायिक करनेवाले गृहस्थके सर्व प्रकार पापात्रव रुककर सातिशय - पुण्यका बंध होता है। उस समय वह उपसर्ग में ओढ़े हुए कपड़ों युक्त मुनि के समान होता है। विशेष क्या कहा जाय, अभव्य भी द्रव्य सामायिक के प्रभाव से नवम-ग्रैवेयिक पर्यंत जाकर अहमिन्द्र होसक्ता है । सामायिक को भावपूर्वक धारण करने से शान्ति-सुख की प्राप्ति होती है, यह आत्म-तत्वकी प्राप्ति अर्थात् परमात्मा होने के लिये मूल कारण है, इसकी पू र्णता ही जीवको निष्कर्म अवस्था प्राप्त कराती है ॥ * असावधानी से मनकी प्रवृत्ति कोध, मान, माया, लोभ, द्रोह, ईर्षा, इन्द्रिय-विषय रूप होना। वचन की प्रवृत्ति अस्पष्ट उच्चारण, बहुत ठहर २ कर वा अतिशीघ्रता पूर्वक पाठ पढ़ना । कायकी प्रवृत्ति हस्तपादादि शरीर के अंगों का निश्चल न रखना ॥ ३ प्रोषधोपवास - शिक्षात्रत ॥ अष्टमी- चतुदशी के दिन सर्वकाल धर्मसाधन की सुवांछा से सम्पूर्ण पापारंभों से रहित हो, चार प्रकार आहार का त्याग करना सो प्रोषधोपवास कहाता है। इसकी निरुक्ति इस प्रकार है कि प्रोषध कहिये एकवार आहार अर्थात् धारणे *और पारणे* के दिन एक बार भोजन करना तथा उपवास कहिये अष्टमी - चतुर्दशी पर्वको निराहार रहना - भोजन का त्याग करना इसप्रकार एक पक्ष में अष्टमी- चतुर्दशी दोनों पर्वों में चार प्रकार आहार त्याग, धर्मध्यान करना सो प्रोषधोपवास कहता है । श्री राजवार्तिकजी में प्रोषध नाम पर्वका कहा है तदनुसार पर्व में इन्द्रियोंके विषयों से विरक्त रहकर चार प्रकार आहार त्याग करना सो ही प्रोषधोपवास है । प्रतिदिन अंगीकार किये हुए सामायिक संस्कार को स्थिर करके सप्तमी एवं त्रयोदशी के दोपहर ( भोजन उपरान्त ) से समस्त आरंभ - परिग्रह से ममत्व छोड़ देव गुरु-शास्त्रकी साक्षीपूर्वक प्रोषधोपवास की प्रतिज्ञा लेय, निर्जन वस्तिका (कुटी, धर्मशालादि ) को प्राप्त होवे और सम्पूर्ण सावद्ययोग त्याग, इन्द्रियों के विषयों से विरक्त होता हुआ, मन-वचन-कायकी गुसि सहित, नियतकाल तक व्रतविधान की शुभेच्छा से चार प्रकार आहार का त्याग करे । * धारणा - उपवासकी प्रतिज्ञा धारण करने का दिन अर्थात् पूर्वदिन । पारणाउपवास पूर्ण करके भोजन करनेका दिन अर्थात् अगला दिन । * सामान्य गृहस्थों को दिन में दोवार भोजन करने का अधिकार है। प्रोष धोपवास में धारणे-पारणे के दिन एक २ वार और उपवास के दिन दोबार का भोजन त्यागने से इसे चतुर्थ संज्ञा भी है ।
रकी थिरता, परिणामकी उज्ज्वलता नियंत काल तक रहना संभष हो, उसी आसन से क्षेत्रका प्रमाण करके इन्द्रियों के व्या पार वा विषयों से विरक्त होते हुए, केश, बसादिको अच्छी तरह बांधकर हस्तांजली जोड़, स्थिर चित्त करके सामायिक, वन्दनादि पाठोंका, पंच परमेष्ठीका अथवा अपने स्वरूप का चितवन करे और उसमें लीन हो । योग्य विनय-सामायिक के आरंभ में पृथ्वीको कोमल वस्त्र या पूंजणी से बुहार कर ईर्यापथ-शुद्धि पूर्वक खड़ा होने, क्षेत्र काल का प्रमाण करे तथा नौ वार णमोकार मंत्र पढ़ हाथ जोड़ पृथ्वीपर मस्तक लगाकर नमस्कार करे । पश्चात् चारों दिशाओं में नव दो णमोकार मंत्र कहकर तीन दो आवर्ति और एक दो शिरोनति करे, तिस पीछे खड़ेही या बैठकर योग्य आसनपूर्वक णमोकार मंत्र का जाप्य करे, पंच परमेष्ठी के स्वरूपका चितवन करे, सामायिक पाठ पढ़े, अनित्यादि द्वादश - अनुप्रेक्षाओं का चितवन करे तथा आत्मस्वरूप के चितवनपूर्वक ध्यान लगावे और अपना धन्य भाग समझे ।। सामायिकपाठ के छः अंग हैं । प्रतिक्रमण अर्थात् जिनेन्द्र देवके सन्मुख अपने द्वारा हुए पापों की क्षमा प्रार्थना करना । प्रत्याख्यान - आगामि पाप त्याग की भावना करना । सामायिक कर्म-सामायिक के काल तक सब में ममताभाव त्याग, समताभाव धरना । स्तुति - * संस्कृत प्राकृत पाठ यदि अपनी समझ में न आता हो, तो भाषा पाठही समझ दो कर, मनन करता हुआ पड़े, जिससे भावों में विशुद्धि उत्पन्न हो । चौबीसों तीर्थकरों का सवन करना । वंदना- किसी एक तीर्थकरका स्ववन करना । कायोत्सर्ग-काम से ममत्व छोड़ आत्मस्वरूप में लवलीन होना ।। इसमकार समभाव पूर्वक चितवन करते हुए अब काल पूरा होजाय, तब आरंभ की तरह आवर्ति, शिरोनति तथा नमस्कार पूर्वक सामायिक पूर्ण करे । मनःशुद्धि - मनको शुभ तथा शुद्ध विचारों की तरफ झुकावे, आर्त रौद्र ध्यान में दौड़ने से रोककर धर्मध्यान में लगावे । जहांतक संभव हो पंच परमेष्ठी का जाप्य वा अन्य कोई भी पाठ, वचन के बदले मन से स्मरण करावे, ऐसा करने से मन इधर उधर चलायमान नहीं होता । वचनशुद्धि - हुंकारादि शब्द न करे, बहुत धीरे दो वा जल्दी दो पाठ न पढ़े, जिस प्रकार अच्छी तरह समझ में आवे, उसी प्रकार समानवृत्ति एवं मधुरस्वर से शुद्ध पाठ पढ़े, धर्मपाठ सिवाय कोई और वचन न बोले । कायशुद्धि-सामायिक करने के पेश्तर स्नान करने, अंग अंगौछने, हाथ-पांव धोने आदिसे जिस प्रकार योग्य हो, यत्वाचार पूर्वक शरीर पवित्र करके, पवित्र वस्त्र पहिन सामायिक में बैठे और सामायिक के समय शिरकंप, हस्तकंप अथवा शरीर के अन्य अंगों को न हिलाबे-डुलावे, निबल अंग रक्खे । कदाचित् कर्मयोग से सामायिक के समय चेतन- अचेतन कृत उपसर्ग आजाय, तौभी मन-वचन-काय को चलायमान नहीं करता हुआ सहन करे ।। यहां कोई प्रश्न करे कि सामायिक के समय अचानक लघुशंका- दीर्घशंका की तीव्र बाधा आजाय, तो क्या करना चाहिये एक तिसका उत्तर यह है कि प्रथम तो व्रती पुरुषों का खाएक सौ बावन नपान नियमित होने से उनको इसप्रकार की अचानक बाधा होना संभव नहीं, कदाचित् कर्मयोग से ऐसा ही कोई कारण आजाय, तो उसका रोकना या सहना असंभव होने से उस काम से निपटकर, प्रायश्चित्त ले, पुनः सामायिक स्थापन करे ।। सामायिक के पंच अतीचार ॥ मन, वचन, काय को अशुभ प्रवर्ताना* ।। चार) सामायिक करने में अनादर करना ।। सामायिक का समय वा पाठ भूल जाना ॥ अतीचार लगने से सामायिक दूषित होती है, अतएव ऐसी सावधानी रखना चाहिये, जिस से अतीचार दोष न लगें ॥ लाभ-सामायिक के समय क्षेत्र तथा काल का परिमाण करके गृहव्यापार आदि सर्व- पाप योगों का त्याग कर देने से सामायिक करनेवाले गृहस्थके सर्व प्रकार पापात्रव रुककर सातिशय - पुण्यका बंध होता है। उस समय वह उपसर्ग में ओढ़े हुए कपड़ों युक्त मुनि के समान होता है। विशेष क्या कहा जाय, अभव्य भी द्रव्य सामायिक के प्रभाव से नवम-ग्रैवेयिक पर्यंत जाकर अहमिन्द्र होसक्ता है । सामायिक को भावपूर्वक धारण करने से शान्ति-सुख की प्राप्ति होती है, यह आत्म-तत्वकी प्राप्ति अर्थात् परमात्मा होने के लिये मूल कारण है, इसकी पू र्णता ही जीवको निष्कर्म अवस्था प्राप्त कराती है ॥ * असावधानी से मनकी प्रवृत्ति कोध, मान, माया, लोभ, द्रोह, ईर्षा, इन्द्रिय-विषय रूप होना। वचन की प्रवृत्ति अस्पष्ट उच्चारण, बहुत ठहर दो कर वा अतिशीघ्रता पूर्वक पाठ पढ़ना । कायकी प्रवृत्ति हस्तपादादि शरीर के अंगों का निश्चल न रखना ॥ तीन प्रोषधोपवास - शिक्षात्रत ॥ अष्टमी- चतुदशी के दिन सर्वकाल धर्मसाधन की सुवांछा से सम्पूर्ण पापारंभों से रहित हो, चार प्रकार आहार का त्याग करना सो प्रोषधोपवास कहाता है। इसकी निरुक्ति इस प्रकार है कि प्रोषध कहिये एकवार आहार अर्थात् धारणे *और पारणे* के दिन एक बार भोजन करना तथा उपवास कहिये अष्टमी - चतुर्दशी पर्वको निराहार रहना - भोजन का त्याग करना इसप्रकार एक पक्ष में अष्टमी- चतुर्दशी दोनों पर्वों में चार प्रकार आहार त्याग, धर्मध्यान करना सो प्रोषधोपवास कहता है । श्री राजवार्तिकजी में प्रोषध नाम पर्वका कहा है तदनुसार पर्व में इन्द्रियोंके विषयों से विरक्त रहकर चार प्रकार आहार त्याग करना सो ही प्रोषधोपवास है । प्रतिदिन अंगीकार किये हुए सामायिक संस्कार को स्थिर करके सप्तमी एवं त्रयोदशी के दोपहर से समस्त आरंभ - परिग्रह से ममत्व छोड़ देव गुरु-शास्त्रकी साक्षीपूर्वक प्रोषधोपवास की प्रतिज्ञा लेय, निर्जन वस्तिका को प्राप्त होवे और सम्पूर्ण सावद्ययोग त्याग, इन्द्रियों के विषयों से विरक्त होता हुआ, मन-वचन-कायकी गुसि सहित, नियतकाल तक व्रतविधान की शुभेच्छा से चार प्रकार आहार का त्याग करे । * धारणा - उपवासकी प्रतिज्ञा धारण करने का दिन अर्थात् पूर्वदिन । पारणाउपवास पूर्ण करके भोजन करनेका दिन अर्थात् अगला दिन । * सामान्य गृहस्थों को दिन में दोवार भोजन करने का अधिकार है। प्रोष धोपवास में धारणे-पारणे के दिन एक दो वार और उपवास के दिन दोबार का भोजन त्यागने से इसे चतुर्थ संज्ञा भी है ।
पटरोग्लिओक ब्रोकेड परिवार से उत्पन्न होता हैश्रृंखला मेलर्स यह मछली मछलीघर में रखने के लिए महान हैः यह ध्यान में सरल है, भोजन में शांत, शांत, और इसकी सजावट प्रशंसा से परे है। मुख्य आवश्यकता कम से कम 150 लीटर पानी प्रति हैअलग-अलग। इन कैटफ़िश को शक्तिशाली वातन की आवश्यकता है। वे एक तापमान शासन की भी मांग कर रहे हैं, हालांकि वे 22 से 30 डिग्री से कोई भी झिझक नहीं करेंगे, लेकिन इन सीमाओं के पार एक विचलन हानिकारक हो सकता है। फ़िल्टरिंग की भी आवश्यकता है, अन्यथा आपको साप्ताहिक पानी बदलना होगा। कैटफ़िश पटरोग्लिओच ब्रोकेड रात में और में सक्रिय हैगोधूलि का समय, लेकिन दिन में आश्रयों में छिपाना पसंद है अपने पालतू जानवर को खुश करने के लिए, आप एक बिर्च या एस्पेन से एक्वारियम में कुछ सिरेमिक और प्राकृतिक (उबला हुआ) बहाव डाल सकते हैं। फिर भी इन मछलियों को मैदान में चारों ओर प्रहार करना पसंद है। इससे पौधों को नुकसान हो सकता है, इसलिए कवि ने अपनी जड़ें जड़ें या उन्हें वजन पर बांध दिया। शांतिपूर्ण पड़ोसी इन कैटफ़िश केवल छोटी मछली के साथ ही हो सकते हैं, लेकिन बड़े शो आक्रामकता के साथ, वे लड़ते हैं। एक ही टैंक में रखने के लिए दो पुरुष भी अवांछनीय हैं - वे लगातार लड़ेंगे। पेटीगो-फ्लक्स में एक आहार की आवश्यकता होती हैपौधे के भोजन और आंशिक रूप से पशु प्रोटीन से। इसे पौधों से खिलाया जा सकता हैः डंडेलियन, सलाद, हरी मटर, नेटटल, गोभी, पालक। भोजन और पशुधन के लिए उपयुक्तः रक्तचाप, grated जमे हुए स्क्विड, कुचल झींगा। कभी-कभी आप जमे हुए मछली और यहां तक कि चिकन के छोटे टुकड़े भी दे सकते हैं। कोरीगी आहार में एक भूमिका निभाते हैं - कैटफ़िशपोषक तत्वों को चूसने, obblladyvayut। इसे खिलाने के लिए याद रखना जरूरी है, कि आलसी पड़ोसियों द्वारा आलसी लोगों को भोजन से वंचित किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि भोजन सभी को मिला है और पटरोग्लिच ब्रोकैड भूखा नहीं था।
पटरोग्लिओक ब्रोकेड परिवार से उत्पन्न होता हैश्रृंखला मेलर्स यह मछली मछलीघर में रखने के लिए महान हैः यह ध्यान में सरल है, भोजन में शांत, शांत, और इसकी सजावट प्रशंसा से परे है। मुख्य आवश्यकता कम से कम एक सौ पचास लीटरटर पानी प्रति हैअलग-अलग। इन कैटफ़िश को शक्तिशाली वातन की आवश्यकता है। वे एक तापमान शासन की भी मांग कर रहे हैं, हालांकि वे बाईस से तीस डिग्री से कोई भी झिझक नहीं करेंगे, लेकिन इन सीमाओं के पार एक विचलन हानिकारक हो सकता है। फ़िल्टरिंग की भी आवश्यकता है, अन्यथा आपको साप्ताहिक पानी बदलना होगा। कैटफ़िश पटरोग्लिओच ब्रोकेड रात में और में सक्रिय हैगोधूलि का समय, लेकिन दिन में आश्रयों में छिपाना पसंद है अपने पालतू जानवर को खुश करने के लिए, आप एक बिर्च या एस्पेन से एक्वारियम में कुछ सिरेमिक और प्राकृतिक बहाव डाल सकते हैं। फिर भी इन मछलियों को मैदान में चारों ओर प्रहार करना पसंद है। इससे पौधों को नुकसान हो सकता है, इसलिए कवि ने अपनी जड़ें जड़ें या उन्हें वजन पर बांध दिया। शांतिपूर्ण पड़ोसी इन कैटफ़िश केवल छोटी मछली के साथ ही हो सकते हैं, लेकिन बड़े शो आक्रामकता के साथ, वे लड़ते हैं। एक ही टैंक में रखने के लिए दो पुरुष भी अवांछनीय हैं - वे लगातार लड़ेंगे। पेटीगो-फ्लक्स में एक आहार की आवश्यकता होती हैपौधे के भोजन और आंशिक रूप से पशु प्रोटीन से। इसे पौधों से खिलाया जा सकता हैः डंडेलियन, सलाद, हरी मटर, नेटटल, गोभी, पालक। भोजन और पशुधन के लिए उपयुक्तः रक्तचाप, grated जमे हुए स्क्विड, कुचल झींगा। कभी-कभी आप जमे हुए मछली और यहां तक कि चिकन के छोटे टुकड़े भी दे सकते हैं। कोरीगी आहार में एक भूमिका निभाते हैं - कैटफ़िशपोषक तत्वों को चूसने, obblladyvayut। इसे खिलाने के लिए याद रखना जरूरी है, कि आलसी पड़ोसियों द्वारा आलसी लोगों को भोजन से वंचित किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि भोजन सभी को मिला है और पटरोग्लिच ब्रोकैड भूखा नहीं था।
ऐपल अपने आगामी मिक्स्ड रियलिटी (MR) हेडसेट पर कंटेंट उपलब्धता के लिए तेजी से काम कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, ऐपल इंक ने अपने MR हेडसेट के लिए वर्चुअल रियलिटी (VR) कंटेंट विकसित करने के लिए वॉल्ट डिज्नी समेत कई अन्य मीडिया पार्टनर के साथ बातचीत कर रही है। ऐपल आगामी MR हेडसेट के साथ काम करने के लिए अपने ऐपल टीवी कंटेंट को भी अपडेट कर रही है। ऐपल का आगामी मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट ऑग्मेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी का मिश्रण होगा। यह हेडसेट पहनने वाले को आभासी दुनिया की प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने के लिए वास्तविक दुनिया की वस्तु का उपयोग करने की अनुमति दे सकता है। हेडसेट में VR पहलुओं को संभालने के लिए दो अल्ट्रा-हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और पास-थ्रू मोड के लिए 10 से अधिक कैमरे हो सकते हैं। विजुअल को ठीक तरह संभालने के लिए हेडसेट मैक-ग्रेड M2 चिपसेट द्वारा संचालित हो सकता है।
ऐपल अपने आगामी मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट पर कंटेंट उपलब्धता के लिए तेजी से काम कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, ऐपल इंक ने अपने MR हेडसेट के लिए वर्चुअल रियलिटी कंटेंट विकसित करने के लिए वॉल्ट डिज्नी समेत कई अन्य मीडिया पार्टनर के साथ बातचीत कर रही है। ऐपल आगामी MR हेडसेट के साथ काम करने के लिए अपने ऐपल टीवी कंटेंट को भी अपडेट कर रही है। ऐपल का आगामी मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट ऑग्मेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी का मिश्रण होगा। यह हेडसेट पहनने वाले को आभासी दुनिया की प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने के लिए वास्तविक दुनिया की वस्तु का उपयोग करने की अनुमति दे सकता है। हेडसेट में VR पहलुओं को संभालने के लिए दो अल्ट्रा-हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और पास-थ्रू मोड के लिए दस से अधिक कैमरे हो सकते हैं। विजुअल को ठीक तरह संभालने के लिए हेडसेट मैक-ग्रेड Mदो चिपसेट द्वारा संचालित हो सकता है।
गोड्डाः गोड्डा कॉलेज, गोड्डा के राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को एक समारोह आयोजित कर नए विभागाध्यक्ष एवं नवागंतुक छात्रों का स्वागत किया गया। मालूम हो कि राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉक्टर इंदिरा तिवारी को कॉलेज का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है। उनके प्रभारी प्राचार्य बन जाने से राजनीति विज्ञान विभाग का विभागाध्यक्ष डॉ सरफराज इस्लाम को बनाया गया है। मंगलवार को राजनीति विज्ञान विभाग में नए छात्र-छात्राओं का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। साथ ही नवनियुक्त विभागाध्यक्ष डॉ सरफराज इस्लाम का भी स्वागत किया गया। इस स्वागत समारोह की अध्यक्षता भूतपूर्व विभागाध्यक्षा एवं वर्तमान में महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ इन्दिरा तिवारी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ सरफराज इस्लाम के नेतृत्व में राजनीति विज्ञान विभाग को निरंतर समृद्ध होने की शुभकामना दी। साथ ही शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए छात्र-छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को एक नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विभाग के अन्य शिक्षक डॉ सुबोध प्रसाद रजक एवं प्रो ज्योत्सना कुमारी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। छात्रों की तरफ से मो इब्राहिम एवं छात्राओं की ओर से कोमल कुमारी ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किये। मंच संचालन छात्र मो मौसीन ने किया। इस समारोह का आयोजन यूजी सेमेस्टर 5 के छात्र-छात्राओं के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सन्नी, गुलशन कुमार, विनय, आशीष आदि शामिल थे।
गोड्डाः गोड्डा कॉलेज, गोड्डा के राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को एक समारोह आयोजित कर नए विभागाध्यक्ष एवं नवागंतुक छात्रों का स्वागत किया गया। मालूम हो कि राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉक्टर इंदिरा तिवारी को कॉलेज का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है। उनके प्रभारी प्राचार्य बन जाने से राजनीति विज्ञान विभाग का विभागाध्यक्ष डॉ सरफराज इस्लाम को बनाया गया है। मंगलवार को राजनीति विज्ञान विभाग में नए छात्र-छात्राओं का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। साथ ही नवनियुक्त विभागाध्यक्ष डॉ सरफराज इस्लाम का भी स्वागत किया गया। इस स्वागत समारोह की अध्यक्षता भूतपूर्व विभागाध्यक्षा एवं वर्तमान में महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ इन्दिरा तिवारी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ सरफराज इस्लाम के नेतृत्व में राजनीति विज्ञान विभाग को निरंतर समृद्ध होने की शुभकामना दी। साथ ही शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए छात्र-छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को एक नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विभाग के अन्य शिक्षक डॉ सुबोध प्रसाद रजक एवं प्रो ज्योत्सना कुमारी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। छात्रों की तरफ से मो इब्राहिम एवं छात्राओं की ओर से कोमल कुमारी ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किये। मंच संचालन छात्र मो मौसीन ने किया। इस समारोह का आयोजन यूजी सेमेस्टर पाँच के छात्र-छात्राओं के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सन्नी, गुलशन कुमार, विनय, आशीष आदि शामिल थे।
ओके जानू के फेमस रीमेक सॉन्ग हम्मा-हम्मा के सिंगर जुबिन नॉटियाल ने 16 फरवरी को ओशिवारा पुलिस स्टेशन में कम्पलेंट फाइल की है। जुबिन ने यह शिकायत उनका गाना हाय दिल रिलीज से पहले ही ऑनलाइन लीक हो जाने के चलते कराई। पुलिस ने जुबिन को दोषी के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई लिए जाने का भरोसा दिलाया है। एक वेबसाइट से बातचीत में जुबिन ने बताया कि मेरा वीडियो आज रिलीज हो रहा है, इसलिए मैं बिल्कुल भी हताश नहीं होना चाहता हूं, लेकिन इस मामले में मैं अपनी टीम और लॉयर से बात कर रहा हूं, ताकि जल्द से जल्द चीजें ठीक हो सकें। जब उनसे लीक्ड ऑडियो रिमूव करने के लिए पूछा गया तो जुबिन ने इसके लिए साफ तौर से मना कर दिया। अथॉरिटी का कहना है कि ऑडियो इंटरनेट पर अभी सभी जगह अवेलेबल है, पर कलप्रिट को जल्दी ही ट्रेस कर लिया जाएगा। बॉलीवुड स्टार आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म ओके जानू के रीमेक गाने हम्मा-हम्मा को जहां लोग काफी पसंद कर रहे हैं, वहीं इसके ऑरिजनल नंबर के मेकर्स की ओर से लगातार इसकी निंदा किए जाने की खबरें आ रही हैं। हाल ही मशहूर सिंगर-म्यूजिक कंपोजर ए आर रहमान ने हफिंगटन पोस्ट से इंटरव्यू में कहा- मैंने पूर्ण रूप से इसकी मनाही की थी। मैंने साफ-तौर पर से इसके लिए मना किया था जब करण जौहर और शाद अली मेरे पास आए थे। मैंने कहा था कि इसके बारे में मत सोचिए यह एक अच्छा विचार नहीं है। ऐसा नहीं करते हैं। हालांकि इस सबके बावजूद करण और शाद को ऐसा लगता था कि बादशाह गाने में कुछ ताजा जान डाल सकते हैं जो कि युवा ऑडियंस को आकर्षित करेंगी। तनिष्क ने कहा- हमें मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और बहुत से लोगों ने इसे स्वीकार भी किया है। जब मुझसे इस गाने के लिए संपर्क किया गया तो मैं बहुत एक्साइटेड हुआ। जब मैं छोटा था तो मैं हमेशा इस गाने पर डांस करता था। लेकिन, मैंने मेकर्स से सवाल किया कि हम इस खूबसूरत गाने को मिक्स क्यों कर रहे हैं? रहमान सर हमेशा से मेरे लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहे हैं। यह मेरे लिए उनके साथ काम करने का मौका था। उन्होंने मश्वरा दिया कि गाने के लिए मुझे और बादशाह को मिल कर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें लगता था कि हम मिलकर कुछ बेहतर तैयार कर सकते हैं।
ओके जानू के फेमस रीमेक सॉन्ग हम्मा-हम्मा के सिंगर जुबिन नॉटियाल ने सोलह फरवरी को ओशिवारा पुलिस स्टेशन में कम्पलेंट फाइल की है। जुबिन ने यह शिकायत उनका गाना हाय दिल रिलीज से पहले ही ऑनलाइन लीक हो जाने के चलते कराई। पुलिस ने जुबिन को दोषी के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई लिए जाने का भरोसा दिलाया है। एक वेबसाइट से बातचीत में जुबिन ने बताया कि मेरा वीडियो आज रिलीज हो रहा है, इसलिए मैं बिल्कुल भी हताश नहीं होना चाहता हूं, लेकिन इस मामले में मैं अपनी टीम और लॉयर से बात कर रहा हूं, ताकि जल्द से जल्द चीजें ठीक हो सकें। जब उनसे लीक्ड ऑडियो रिमूव करने के लिए पूछा गया तो जुबिन ने इसके लिए साफ तौर से मना कर दिया। अथॉरिटी का कहना है कि ऑडियो इंटरनेट पर अभी सभी जगह अवेलेबल है, पर कलप्रिट को जल्दी ही ट्रेस कर लिया जाएगा। बॉलीवुड स्टार आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म ओके जानू के रीमेक गाने हम्मा-हम्मा को जहां लोग काफी पसंद कर रहे हैं, वहीं इसके ऑरिजनल नंबर के मेकर्स की ओर से लगातार इसकी निंदा किए जाने की खबरें आ रही हैं। हाल ही मशहूर सिंगर-म्यूजिक कंपोजर ए आर रहमान ने हफिंगटन पोस्ट से इंटरव्यू में कहा- मैंने पूर्ण रूप से इसकी मनाही की थी। मैंने साफ-तौर पर से इसके लिए मना किया था जब करण जौहर और शाद अली मेरे पास आए थे। मैंने कहा था कि इसके बारे में मत सोचिए यह एक अच्छा विचार नहीं है। ऐसा नहीं करते हैं। हालांकि इस सबके बावजूद करण और शाद को ऐसा लगता था कि बादशाह गाने में कुछ ताजा जान डाल सकते हैं जो कि युवा ऑडियंस को आकर्षित करेंगी। तनिष्क ने कहा- हमें मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और बहुत से लोगों ने इसे स्वीकार भी किया है। जब मुझसे इस गाने के लिए संपर्क किया गया तो मैं बहुत एक्साइटेड हुआ। जब मैं छोटा था तो मैं हमेशा इस गाने पर डांस करता था। लेकिन, मैंने मेकर्स से सवाल किया कि हम इस खूबसूरत गाने को मिक्स क्यों कर रहे हैं? रहमान सर हमेशा से मेरे लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहे हैं। यह मेरे लिए उनके साथ काम करने का मौका था। उन्होंने मश्वरा दिया कि गाने के लिए मुझे और बादशाह को मिल कर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें लगता था कि हम मिलकर कुछ बेहतर तैयार कर सकते हैं।
Don't Miss! पद्मावत को आखिरकार 25 को रिलीज़ होने का मौका मिल चुका है। वहीं सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुकी है कि फिल्म हर राज्य में रिलीज़ होगी और इस पर कोई बैन नहीं लगा सकता। ऐसे में अब राज्य सरकारों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल है कानून व्यवस्था बनाए रखना। अब कर्णी सेना ने फिल्म की रिलीज़ के दिन यानि कि 25 तारीख को राष्ट्रव्यापी बंद का एलान किया है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पांच कट के साथ पास किया है। वहीं कर्णी सेना के आपत्ति जताने पर घूमर गाने से दीपिका की दिख रही कमर भी गायब कर दी गई है। अब दिक्कत क्या है ये किसी को नहीं पता है।
Don't Miss! पद्मावत को आखिरकार पच्चीस को रिलीज़ होने का मौका मिल चुका है। वहीं सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुकी है कि फिल्म हर राज्य में रिलीज़ होगी और इस पर कोई बैन नहीं लगा सकता। ऐसे में अब राज्य सरकारों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल है कानून व्यवस्था बनाए रखना। अब कर्णी सेना ने फिल्म की रिलीज़ के दिन यानि कि पच्चीस तारीख को राष्ट्रव्यापी बंद का एलान किया है। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पांच कट के साथ पास किया है। वहीं कर्णी सेना के आपत्ति जताने पर घूमर गाने से दीपिका की दिख रही कमर भी गायब कर दी गई है। अब दिक्कत क्या है ये किसी को नहीं पता है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा तिथियों की घोषणा कर दी है. परीक्षा कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही विद्यार्थियों के दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं, और वे तनाव में हैं. उनकी तनाव की वजह परीक्षा का थोड़ा पहले होना भी है. लेकिन आप तनाव को दूर रखकर हंसते-खेलते पढ़ाई करके परीक्षा के इस दिक्कत को पार कर सकते हैं. पहले आपको बता दें कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के कारण इस बार परीक्षा थोड़ा पहले हो रही है. सीबीएसई की तरफ से 23 दिसंबर को जारी डेटशीट के अनुसार, 12वीं की परीक्षा 15 फरवरी से शुरू होकर तीन अप्रैल तक चलेगी. वहीं 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी से लेकर 29 मार्च तक होगी, 12वीं की परीक्षा के लिए 13 लाख विद्यार्थियों ने नामांकन किया है. विद्यार्थियों का कहना है कि महत्वपूर्ण विषयों के प्रश्नपत्र लगातार होने से उसकी तैयारी के लिए समय नहीं मिल रहा है. बिंदापुर स्थित सैनिक पब्लिक स्कूल की शिक्षिका मीनाक्षी ने बताया कि बच्चों का सिलेबस पूरा हो चुका है. रिविजन चल रहा है. उन्हें सारी चीजें दोबारा समझा रहे हैं, जिस बच्चे को जो समस्या है, वे उसे पूछ रहे हैं और पढ़ाई में जुटे हुए हैं. प्रीबोर्ड से उन्हें काफी लाभ मिलता है, इससे उन्हें आइडिया लग जाता है कि पेपर कैसे आता है. बच्चे कैसे तनावमुक्त होकर तैयारी करें?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा तिथियों की घोषणा कर दी है. परीक्षा कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही विद्यार्थियों के दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं, और वे तनाव में हैं. उनकी तनाव की वजह परीक्षा का थोड़ा पहले होना भी है. लेकिन आप तनाव को दूर रखकर हंसते-खेलते पढ़ाई करके परीक्षा के इस दिक्कत को पार कर सकते हैं. पहले आपको बता दें कि दो हज़ार उन्नीस में होने वाले लोकसभा चुनाव के कारण इस बार परीक्षा थोड़ा पहले हो रही है. सीबीएसई की तरफ से तेईस दिसंबर को जारी डेटशीट के अनुसार, बारहवीं की परीक्षा पंद्रह फरवरी से शुरू होकर तीन अप्रैल तक चलेगी. वहीं दसवीं की परीक्षा इक्कीस फरवरी से लेकर उनतीस मार्च तक होगी, बारहवीं की परीक्षा के लिए तेरह लाख विद्यार्थियों ने नामांकन किया है. विद्यार्थियों का कहना है कि महत्वपूर्ण विषयों के प्रश्नपत्र लगातार होने से उसकी तैयारी के लिए समय नहीं मिल रहा है. बिंदापुर स्थित सैनिक पब्लिक स्कूल की शिक्षिका मीनाक्षी ने बताया कि बच्चों का सिलेबस पूरा हो चुका है. रिविजन चल रहा है. उन्हें सारी चीजें दोबारा समझा रहे हैं, जिस बच्चे को जो समस्या है, वे उसे पूछ रहे हैं और पढ़ाई में जुटे हुए हैं. प्रीबोर्ड से उन्हें काफी लाभ मिलता है, इससे उन्हें आइडिया लग जाता है कि पेपर कैसे आता है. बच्चे कैसे तनावमुक्त होकर तैयारी करें?
Indian Navy BTech Entry Scheme Jan 2021: आवेदित उम्मीदवारों का चयन एसएसबी इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. Indian Navy BTech Entry Scheme Jan 2021: जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन किए जाएंगे. इच्छुक उम्मीदवार भारतीय नौसेना की वेबसाइट www. joinindiannavy. gov. in पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. Indian Navy BTech Entry Scheme Jan 2021: आवेदन करने के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमैटिक्स में न्यूनतम 70% अंकों के साथ 12वीं और 10वीं/12वीं में अंग्रेजी में न्यूनतम 50% अंक होने के साथ जेईई (मेंस) में शामिल हुआ हो. हैं. असम पुलिस ने स्टेनोग्राफर (अंग्रेजी), ग्रेड- III, टेक्निकल असिस्टेंट (HQ), स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट (इम्प्लॉयमेंट विंग), फार्मासिस्ट (आईटीआई), इंस्ट्रक्टर- स्टेनोग्राफी (अंग्रेजी), जूनियर इंस्ट्रक्टर, जूनियर असिस्टेंट समेत कई पदों पर वैकेंसी जारी की है. पूरी जानकारी के लिए यहां क्लिक कर आधिकारिक नोटिफिकेशन का अवलोकन करें. IBPS Recruitment 2020: आवेदकों का चयन प्रिलिमिनरी और मेन एग्जाम के आधार पर किया जाएगा. आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. IBPS Recruitment 2020: इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (IBPS) ने क्लर्क के पदों पर भर्ती के लिए 4 हजार से ज्यादा रिक्तियां जारी की है. इन पर ग्रेजुएट उम्मीदवार ही आवेदन के पात्र होंगे. AIIMS Rishikesh Recruitment 2020 के तहत जारी पदों पर आवेदित उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. AIIMS Rishikesh Recruitment: जारी पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों एम्स ऋषिकेश aiimsrishikesh. edu. in/aiims की वेबसाइट पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार 17 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. की योग्यताएं अलग-अलग निर्धारित की गई है. MPHC Civil Judge Recruitment 2020: जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन आमंत्रित किए गए हैं. इच्छुक उम्मीदवार एमपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mphc. gov. in पर जाकर या नीचे दिए गए लिंक पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. MPHC Civil Judge Recruitment 2020: सिविल जज के पदों पर भर्ती के लिए समान्य वर्ग एवं दूसरे राज्य के उम्मीदवारों को 1122. 16 रुपये जमा करने होंगे, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्ग को 722. 16 रुपये जमा करने होंगे. आवेदन शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग या कियोस्क से किया जा सकता है. MPHC Civil Judge Recruitment 2020: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MPHC) ने सिविल जज के पदों पर नियुक्ति के लिए 250 से ज्यादा वैकेंसी जारी की हैं. इन पदों पर लॉ में ग्रेजुएट उम्मीदवार आवेदन के पात्र होंगे. जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन भरे जाएंगे.
Indian Navy BTech Entry Scheme Jan दो हज़ार इक्कीस: आवेदित उम्मीदवारों का चयन एसएसबी इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. Indian Navy BTech Entry Scheme Jan दो हज़ार इक्कीस: जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन किए जाएंगे. इच्छुक उम्मीदवार भारतीय नौसेना की वेबसाइट www. joinindiannavy. gov. in पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. Indian Navy BTech Entry Scheme Jan दो हज़ार इक्कीस: आवेदन करने के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमैटिक्स में न्यूनतम सत्तर% अंकों के साथ बारहवीं और दसवीं/बारहवीं में अंग्रेजी में न्यूनतम पचास% अंक होने के साथ जेईई में शामिल हुआ हो. हैं. असम पुलिस ने स्टेनोग्राफर , ग्रेड- III, टेक्निकल असिस्टेंट , स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट , फार्मासिस्ट , इंस्ट्रक्टर- स्टेनोग्राफी , जूनियर इंस्ट्रक्टर, जूनियर असिस्टेंट समेत कई पदों पर वैकेंसी जारी की है. पूरी जानकारी के लिए यहां क्लिक कर आधिकारिक नोटिफिकेशन का अवलोकन करें. IBPS Recruitment दो हज़ार बीस: आवेदकों का चयन प्रिलिमिनरी और मेन एग्जाम के आधार पर किया जाएगा. आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. IBPS Recruitment दो हज़ार बीस: इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन ने क्लर्क के पदों पर भर्ती के लिए चार हजार से ज्यादा रिक्तियां जारी की है. इन पर ग्रेजुएट उम्मीदवार ही आवेदन के पात्र होंगे. AIIMS Rishikesh Recruitment दो हज़ार बीस के तहत जारी पदों पर आवेदित उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. AIIMS Rishikesh Recruitment: जारी पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों एम्स ऋषिकेश aiimsrishikesh. edu. in/aiims की वेबसाइट पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार सत्रह अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. की योग्यताएं अलग-अलग निर्धारित की गई है. MPHC Civil Judge Recruitment दो हज़ार बीस: जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन आमंत्रित किए गए हैं. इच्छुक उम्मीदवार एमपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mphc. gov. in पर जाकर या नीचे दिए गए लिंक पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. MPHC Civil Judge Recruitment दो हज़ार बीस: सिविल जज के पदों पर भर्ती के लिए समान्य वर्ग एवं दूसरे राज्य के उम्मीदवारों को एक हज़ार एक सौ बाईस. सोलह रुपयापये जमा करने होंगे, जबकि मध्य प्रदेश के आरक्षित वर्ग को सात सौ बाईस. सोलह रुपयापये जमा करने होंगे. आवेदन शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग या कियोस्क से किया जा सकता है. MPHC Civil Judge Recruitment दो हज़ार बीस: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज के पदों पर नियुक्ति के लिए दो सौ पचास से ज्यादा वैकेंसी जारी की हैं. इन पदों पर लॉ में ग्रेजुएट उम्मीदवार आवेदन के पात्र होंगे. जारी पदों पर आवेदन ऑनलाइन भरे जाएंगे.
बोस्निया के मुस्लमानों के लिए उस दौर की हर याद आज भी रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। इस लड़ाई को दुसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे जघन्य और दर्दनाक लड़ाई कहा जाता है। लोग इस युद्ध को नस्लीय नरसंहार भी कहते है, जिसमें करीब 8000 मुस्लिम आदमियों और बच्चों को मौत के घाट सुलाया गया था। आज से करीब 22 साल पहले यानि साल 1995 में 'रैट्को म्लाडिच' नामक एक व्यक्ति ने युरोप के सार्बिया में मुस्लमानों का नरसंहार किया था। 'रैट्को म्लाडिच' एक आर्मी जनरल थे जिन्हें दुनिया 'बोस्निया का कसाई' और 'बोस्निया का कसाब' के नाम से बुलाती है। बोस्निया के इतिहास में दर्ज 1995 की लड़ाई के दौरान इन्होंने हैवानियत और बर्बर अभियान चलाया था। इतिहास के पन्नों में दर्ज बोस्निया के युद्ध की कहानी के मुताबिक 1992 में बोस्नियाई मुस्लमानों और क्रोएशियाई लोगों ने आजादी के लिए कराये गए जनमत संग्रह के पक्ष में वोट दिया था, जबकि सर्बिया के लोगों ने इसका बहिष्कार किया। इस विरोध के बाद पूरे यूरोप के तीनों समाजों में लड़ाई की आग भड़क गई और सब एक दूसरें पर जंगी वार प्रतिवार का खेल खेलने लगे। इस लड़ाई में बोस्नियाई मुस्लमानों और क्रोएट्स लोग एक तरफ हो गए और बोस्निया सर्ब। इस लड़ाई को लेकर दर्ज आकड़ों के मुताबिक इसमें जहां एक ओर करीब 1 लाख लोगों ने अपनी जान गवाई, तो वहीं दूसरी ओर 22 लाख लोग बेघर भी हो गए थे। रिपोर्टस के मुताबिक इस नस्लीय नरसंहार के दौरान महिलाओं और बच्चियों को वहां से बचकर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता दे दिया गया था, लेकिन लड़को और आदमियों पर बेरहमी और बर्बरता दिखाते हुए उन्हें वहीं मौत के नींद सुला दिया गया। हेग स्थित 'यूनाइटेड नेशन ट्राइब्यूनल' ने 'रैक्को म्लाडिच' पर लगाए 11 आरोपों में से 10 के लिए उन्हे कसूरवार ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिस वक्त उन्हें सजा सुनाई गई उस दौरान वह कोर्ट में मौजूद नहीं थे। क्योकि कोर्ट ने उन्हें कोर्ट परिसर में खड़े होकर चिलाने के लिए सजा सुनाते हुए कोर्ट से बाहर निकाल दिया था। युरोप में स्थित सार्बिया की राजधानी कहे जाने वाले बेलग्रेड की उत्तरी दिशा में बसे अलसाता का लैज़ारेवो गांव एकाएक चुस्त और चौकना दिखाई देने लगा। वहां रहने वाले कई व्यक्तियों ने काले कपड़े और मुंह पर काला नकाब पहना हुआ था। साथ ही उन सभी ने मिलकर एक पीली ईंटों से बने घर को चारों तरफ से घेर रखा था। एकाएक वो घर के घरवाजों को धड़धड़ाते हुए अंदर घुस गए और गार्डन में टहलते हुए एक बुजुर्ग को गिरफ्तार कर लिया। यहां बेहद चौका देने वाली बात तो ये थी कि वो बुजुर्ग बिना किसी जोर जबरदस्ती के उन लोगों के साथ जाने के ले तैयार भी हो गया। ये था छह साल, पांच महीने और छब्बीस दिन से पुलिस की गिरफ़्त से भाग रहा 'बोस्निया का कसाई' यानि रैट्को म्लाडिच। कहते है बोस्निया का कसाई कहा जाने वाले रैट्को म्लाडिच को मुसल्मानों से नफरत थी और इसकी दो बड़ी वज़हे थी, जिसमें पहली वज़ह उनके बचपन से जुड़ी थी। साल 1945 में जब रैट्को म्लाडिच 2 साल के थे उस दौरान उनके पिता नाज़ी समर्थक फौज से लड़ते हुए मारे गए थे। इसके अलावा दूसरी वजह यह रही कि साल 1995 में उनकी 23 साल की बेटी अन्ना को बेलग्रेड में गोली मार दी गई। इन दोनों घटनाओं ने उनके दिमाग में बोस्निया के मुस्लिमानों के लिए नफरत पैदा कर दी थी। साल 1995 में 8000 मुस्लमानों को मौत की नींद सुलाने के बाद भी वह कई सालों तक छुपते-छुपाते बचते रहे। लेकिन साल 2011 तक में वे सार्बिया में पकड़ लिए गए, जिसके बाद 'यूनाइटेड नेशन ट्राइब्यूनल' ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
बोस्निया के मुस्लमानों के लिए उस दौर की हर याद आज भी रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। इस लड़ाई को दुसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे जघन्य और दर्दनाक लड़ाई कहा जाता है। लोग इस युद्ध को नस्लीय नरसंहार भी कहते है, जिसमें करीब आठ हज़ार मुस्लिम आदमियों और बच्चों को मौत के घाट सुलाया गया था। आज से करीब बाईस साल पहले यानि साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में 'रैट्को म्लाडिच' नामक एक व्यक्ति ने युरोप के सार्बिया में मुस्लमानों का नरसंहार किया था। 'रैट्को म्लाडिच' एक आर्मी जनरल थे जिन्हें दुनिया 'बोस्निया का कसाई' और 'बोस्निया का कसाब' के नाम से बुलाती है। बोस्निया के इतिहास में दर्ज एक हज़ार नौ सौ पचानवे की लड़ाई के दौरान इन्होंने हैवानियत और बर्बर अभियान चलाया था। इतिहास के पन्नों में दर्ज बोस्निया के युद्ध की कहानी के मुताबिक एक हज़ार नौ सौ बानवे में बोस्नियाई मुस्लमानों और क्रोएशियाई लोगों ने आजादी के लिए कराये गए जनमत संग्रह के पक्ष में वोट दिया था, जबकि सर्बिया के लोगों ने इसका बहिष्कार किया। इस विरोध के बाद पूरे यूरोप के तीनों समाजों में लड़ाई की आग भड़क गई और सब एक दूसरें पर जंगी वार प्रतिवार का खेल खेलने लगे। इस लड़ाई में बोस्नियाई मुस्लमानों और क्रोएट्स लोग एक तरफ हो गए और बोस्निया सर्ब। इस लड़ाई को लेकर दर्ज आकड़ों के मुताबिक इसमें जहां एक ओर करीब एक लाख लोगों ने अपनी जान गवाई, तो वहीं दूसरी ओर बाईस लाख लोग बेघर भी हो गए थे। रिपोर्टस के मुताबिक इस नस्लीय नरसंहार के दौरान महिलाओं और बच्चियों को वहां से बचकर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता दे दिया गया था, लेकिन लड़को और आदमियों पर बेरहमी और बर्बरता दिखाते हुए उन्हें वहीं मौत के नींद सुला दिया गया। हेग स्थित 'यूनाइटेड नेशन ट्राइब्यूनल' ने 'रैक्को म्लाडिच' पर लगाए ग्यारह आरोपों में से दस के लिए उन्हे कसूरवार ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जिस वक्त उन्हें सजा सुनाई गई उस दौरान वह कोर्ट में मौजूद नहीं थे। क्योकि कोर्ट ने उन्हें कोर्ट परिसर में खड़े होकर चिलाने के लिए सजा सुनाते हुए कोर्ट से बाहर निकाल दिया था। युरोप में स्थित सार्बिया की राजधानी कहे जाने वाले बेलग्रेड की उत्तरी दिशा में बसे अलसाता का लैज़ारेवो गांव एकाएक चुस्त और चौकना दिखाई देने लगा। वहां रहने वाले कई व्यक्तियों ने काले कपड़े और मुंह पर काला नकाब पहना हुआ था। साथ ही उन सभी ने मिलकर एक पीली ईंटों से बने घर को चारों तरफ से घेर रखा था। एकाएक वो घर के घरवाजों को धड़धड़ाते हुए अंदर घुस गए और गार्डन में टहलते हुए एक बुजुर्ग को गिरफ्तार कर लिया। यहां बेहद चौका देने वाली बात तो ये थी कि वो बुजुर्ग बिना किसी जोर जबरदस्ती के उन लोगों के साथ जाने के ले तैयार भी हो गया। ये था छह साल, पांच महीने और छब्बीस दिन से पुलिस की गिरफ़्त से भाग रहा 'बोस्निया का कसाई' यानि रैट्को म्लाडिच। कहते है बोस्निया का कसाई कहा जाने वाले रैट्को म्लाडिच को मुसल्मानों से नफरत थी और इसकी दो बड़ी वज़हे थी, जिसमें पहली वज़ह उनके बचपन से जुड़ी थी। साल एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में जब रैट्को म्लाडिच दो साल के थे उस दौरान उनके पिता नाज़ी समर्थक फौज से लड़ते हुए मारे गए थे। इसके अलावा दूसरी वजह यह रही कि साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में उनकी तेईस साल की बेटी अन्ना को बेलग्रेड में गोली मार दी गई। इन दोनों घटनाओं ने उनके दिमाग में बोस्निया के मुस्लिमानों के लिए नफरत पैदा कर दी थी। साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में आठ हज़ार मुस्लमानों को मौत की नींद सुलाने के बाद भी वह कई सालों तक छुपते-छुपाते बचते रहे। लेकिन साल दो हज़ार ग्यारह तक में वे सार्बिया में पकड़ लिए गए, जिसके बाद 'यूनाइटेड नेशन ट्राइब्यूनल' ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
गोंडा। कदम चूम लेती है खुद आके मंजिल मुसाफिर अगर तूं हिम्मत न हारे इन पंक्तियों को सिद्ध कर दिखाने के लिए संगीत दुनिया की आत्मा समझे जाने वाले सात सुरों के बेताज बेताज बादशाह मोहम्मद रफ़ी साहब व सोनू निगम को अपना आदर्श मानने वाले सुरीली आवाज़ के मालिक 17 वर्षीय आकाश मौर्य फ़िल्म संगीत जगत में प्ले बैक सिंगर बनकर अपनी अलग पहचान बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इनके कर्णप्रिय आवाज़ का जादू इन दिनों श्रोताओं के दिलों में मधुर रस घोल रहा है। जनपद के वज़ीरगंज क्षेत्र के ग्राम भगोहर के निवासी 17 वर्षीय आकाश मौर्य सुर सम्राट मोहम्मद रफ़ी के आवाज़ से प्रभावित आकाश मौर्य को बचपन से ही गाने का शौक था और उन्ही से प्रेरित होकर इन्होंने प्ले बैक सिंगर बनने की राह चुनी। संगीत जगत में मुकाम बनाकर श्रोताओं के दिलों पर राज करना ही इनके जीवन का मकसद बन चुका है। आकाश मौर्य के पिता पेशे से डाक्टर है जो अपने इस इकलौते बेटे को भी डॉक्टर बनाना चाहते थे मगर शायद ईश्वर का कुछ अलग ही फैसला था। बेटे के मधुर आवाज़ के आगे उनके सारे फैसले बदल गए और संगीत के समुद्र में उतर कर अपनी प्रतिभा निखारने हेतु बेटे को मुक्कम्मल फैसला सुना दिया। आकाश की मेहनत ने यह सिद्ध कर के दिखाया है कि अगर इंसान हिम्मत न हारे तो उसे एक न एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी इसी आशय को सार्थक करने के लिए आकाश दिन में काफी समय तक संगीत का रियाज़ करते हैं। बताते चलें कि अभी हाल फिल्हाल लखनऊ में हुए आडिशन मैजिकल वॉयस ऑफ़ इंडिया में इन्हें बेस्ट सिंगर के प्रमाण पत्र से भी नवाज़ा गया है। ज्ञातत्व हो कि हिंन्दी गीतों से ही इनका विशेष लगाव है। अपनी प्रतिभा निखारने के लिए इन दिनों फिलहाल ये मोहमद रफ़ी व सोनू निगम के कवर गीतों को अपनी आवाज़ देकर श्रोताओं के दिलों में अपना स्थान महफूज करने में लगे हुए हैं। इनके द्वारा गाये मधुर गीत आप नेट पर भी आकाश मौर्य सिंगर लिखकर सर्च कर सकते हैं व सुन सकते हैं। आकाश मौर्य से हुई बातचीत के कुछ अंश. . सवाल--गाने की इच्छा कैसे जगी आकाश--मुझे बचपन से ही गाने का शौक था स्वर्गीय मोहम्मद रफ़ी साहब से प्रेरित होकर मां सरस्वती जी के अनुकम्पा से मैं अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर हूं। सवाल--गुरु के बारे में कुछ बताएं आकाश--किसी एक को बताना मुश्किल होगा सर्वप्रथम मैंने गुरु बृजेश द्विवेदी से संगीत की बारीकियों को परखा फिर आर एस श्रीवास्तव से और अब जाने माने संगीतज्ञ मुकेश सिंह जी से शिक्षा ग्रहण कर रहा हूं। सवाल-- श्रोताओं के लिए सन्देश आकाश --श्रोता ही सिंगर की पहचान हैं इनके प्यार व हौंसला अफजाई के बिना सफलता नहीं मिल सकती इनका प्यार मेरे लिए सर्वाेपरि है। श्रोताओं को जानकर हर्ष होगा कि शीघ्र ही आने वाले समय मे एक जानी मानी ऑडियो कंपनी के बैनर तले प्राइवेट हिंदी एल्बम का गीत मेरी आवाज़ में सुनने को मिलेगा, जिसकी तैयारी चल रही है।
गोंडा। कदम चूम लेती है खुद आके मंजिल मुसाफिर अगर तूं हिम्मत न हारे इन पंक्तियों को सिद्ध कर दिखाने के लिए संगीत दुनिया की आत्मा समझे जाने वाले सात सुरों के बेताज बेताज बादशाह मोहम्मद रफ़ी साहब व सोनू निगम को अपना आदर्श मानने वाले सुरीली आवाज़ के मालिक सत्रह वर्षीय आकाश मौर्य फ़िल्म संगीत जगत में प्ले बैक सिंगर बनकर अपनी अलग पहचान बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इनके कर्णप्रिय आवाज़ का जादू इन दिनों श्रोताओं के दिलों में मधुर रस घोल रहा है। जनपद के वज़ीरगंज क्षेत्र के ग्राम भगोहर के निवासी सत्रह वर्षीय आकाश मौर्य सुर सम्राट मोहम्मद रफ़ी के आवाज़ से प्रभावित आकाश मौर्य को बचपन से ही गाने का शौक था और उन्ही से प्रेरित होकर इन्होंने प्ले बैक सिंगर बनने की राह चुनी। संगीत जगत में मुकाम बनाकर श्रोताओं के दिलों पर राज करना ही इनके जीवन का मकसद बन चुका है। आकाश मौर्य के पिता पेशे से डाक्टर है जो अपने इस इकलौते बेटे को भी डॉक्टर बनाना चाहते थे मगर शायद ईश्वर का कुछ अलग ही फैसला था। बेटे के मधुर आवाज़ के आगे उनके सारे फैसले बदल गए और संगीत के समुद्र में उतर कर अपनी प्रतिभा निखारने हेतु बेटे को मुक्कम्मल फैसला सुना दिया। आकाश की मेहनत ने यह सिद्ध कर के दिखाया है कि अगर इंसान हिम्मत न हारे तो उसे एक न एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी इसी आशय को सार्थक करने के लिए आकाश दिन में काफी समय तक संगीत का रियाज़ करते हैं। बताते चलें कि अभी हाल फिल्हाल लखनऊ में हुए आडिशन मैजिकल वॉयस ऑफ़ इंडिया में इन्हें बेस्ट सिंगर के प्रमाण पत्र से भी नवाज़ा गया है। ज्ञातत्व हो कि हिंन्दी गीतों से ही इनका विशेष लगाव है। अपनी प्रतिभा निखारने के लिए इन दिनों फिलहाल ये मोहमद रफ़ी व सोनू निगम के कवर गीतों को अपनी आवाज़ देकर श्रोताओं के दिलों में अपना स्थान महफूज करने में लगे हुए हैं। इनके द्वारा गाये मधुर गीत आप नेट पर भी आकाश मौर्य सिंगर लिखकर सर्च कर सकते हैं व सुन सकते हैं। आकाश मौर्य से हुई बातचीत के कुछ अंश. . सवाल--गाने की इच्छा कैसे जगी आकाश--मुझे बचपन से ही गाने का शौक था स्वर्गीय मोहम्मद रफ़ी साहब से प्रेरित होकर मां सरस्वती जी के अनुकम्पा से मैं अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर हूं। सवाल--गुरु के बारे में कुछ बताएं आकाश--किसी एक को बताना मुश्किल होगा सर्वप्रथम मैंने गुरु बृजेश द्विवेदी से संगीत की बारीकियों को परखा फिर आर एस श्रीवास्तव से और अब जाने माने संगीतज्ञ मुकेश सिंह जी से शिक्षा ग्रहण कर रहा हूं। सवाल-- श्रोताओं के लिए सन्देश आकाश --श्रोता ही सिंगर की पहचान हैं इनके प्यार व हौंसला अफजाई के बिना सफलता नहीं मिल सकती इनका प्यार मेरे लिए सर्वाेपरि है। श्रोताओं को जानकर हर्ष होगा कि शीघ्र ही आने वाले समय मे एक जानी मानी ऑडियो कंपनी के बैनर तले प्राइवेट हिंदी एल्बम का गीत मेरी आवाज़ में सुनने को मिलेगा, जिसकी तैयारी चल रही है।
हमारे देश में कई तरह एक मंदिर है जहां पर लोग अपनी कई तरह की मन्नते मांगने जाते है। और आज हम एक ऐसे मंदिर एक बारे में बात करने जा रहे है जहाँ पर पूजा करने के लिए हिन्दू परिवार को 20 साल तक इंतज़ार करना होता है। जी हाँ हम बात कर रहें है पाकिस्तान में स्थित ऐबटाबाद जिले के शिव मंदिर की जहाँ पर पाकिस्तान की अदालत के अनुसार हर 20 साल बाद ही हिन्दू परिवार पूजा कर सकता है। दरअसल में यह मंदिर जहाँ बना हुआ है वहां की संपत्ति विवादों की वजह से यहाँ पर धार्मिक कार्य नहीं होते है। ओस इस मंदिर की देखभाल भी एक एनजीओ करता है। इस मंदिर को लेकर 2013 में एक याचिका दायर की गई थी जो एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर हुई थी। इस संगठन का कहना था की उन्होंने यह संपत्ति क़ानूनी मालिक से खरीदी है इसके बाद कई दलीले की गई और मंदिर का बटवारां हुआ और इसकी देखभाल की जिम्मेदारी एनजीओ को दे दी गई।
हमारे देश में कई तरह एक मंदिर है जहां पर लोग अपनी कई तरह की मन्नते मांगने जाते है। और आज हम एक ऐसे मंदिर एक बारे में बात करने जा रहे है जहाँ पर पूजा करने के लिए हिन्दू परिवार को बीस साल तक इंतज़ार करना होता है। जी हाँ हम बात कर रहें है पाकिस्तान में स्थित ऐबटाबाद जिले के शिव मंदिर की जहाँ पर पाकिस्तान की अदालत के अनुसार हर बीस साल बाद ही हिन्दू परिवार पूजा कर सकता है। दरअसल में यह मंदिर जहाँ बना हुआ है वहां की संपत्ति विवादों की वजह से यहाँ पर धार्मिक कार्य नहीं होते है। ओस इस मंदिर की देखभाल भी एक एनजीओ करता है। इस मंदिर को लेकर दो हज़ार तेरह में एक याचिका दायर की गई थी जो एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर हुई थी। इस संगठन का कहना था की उन्होंने यह संपत्ति क़ानूनी मालिक से खरीदी है इसके बाद कई दलीले की गई और मंदिर का बटवारां हुआ और इसकी देखभाल की जिम्मेदारी एनजीओ को दे दी गई।
समाचार (Muzaffarnagar News) मुजफ्फरनगर। अलग अलग स्थानों से कई वांछितों/वारंटियों को गिरफ्तार किया। थाना को0नगर पर नियुक्त उ0नि0 जोगेन्द्रपाल सिंह द्वारा गैगिस्टर एक्ट वारण्टी अभि0 इन्तजार पुत्र अख्तर निवासी न्याजूपुरा थाना कोतवालीनगर मु0नगर को अभि0 के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा थाना कोतवालीनगर पर नियुक्त उ0नि0 अखिल चौधरी द्वारां वांछित अभियुक्त हारुन पुत्र असरफ नि0 ग्राम बहेडी थाना को0नगर मु0नगर को बहेडी कट से गिरफ्तार किया। वहीं थाना भोपा पर नियुक्त उ0नि0 सुनील कुमार हूण द्वारा वारण्टी अभियुक्त रूपेश उर्फ छोटा पुत्र कूडा नि0 बारूकी थाना भोपा मु0नगर को अभि0 के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। मुजफ्फरनगर। अलग अलग स्थानों से कई को अवैध शस्त्र सहित गिरफ्तार किया। थाना सिखेडा पर नियुक्त उ0नि0 बीबी शर्मा द्वारा अभियुक्त नसीम पुत्र बाबू नि0 दाहे खेडी थाना सिखेडा मु0नगर को जौली रोड से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त के कब्जे से 01 मो0सा0 स्पलेण्डर यूपी 12 डीएल 1268 व 01 नाजायज छुरी को बरामद किया गया। इसके अलावा थाना कोतवालीनगर पर नियुक्त उ0नि0 रविन्द्र सिंह द्वारा वांछित अभियुक्त आजाद पुत्र अलीहसन, . शादाब पुत्र मौ0 आलम नि0 उपरोक्त किदवईनगर थाना को0नगर मु0नगर को मछली बाजार गेट से गिरफ्तार किया गया। जिनके कब्जे से 01-01 नाजायज छुरे बरामद किये गये । मुजफ्फरनगर। साइबर ठग ने थाना जी. आर. पी. मे तैनात है० कान्सटेबल को उसका रिस्तेदार बताकर ४५००० का चुना लगा दिया। जिसके बाद है० कान्सटेबल ने साइबर हेल्प सेन्टर से अपनी धनराशी को वापस दिलाने की गुहार लगाई। साइबर हेल्प सेन्टर ने तत्काल कार्यावाही करते हुए उसकी सम्पूर्ण धनराशी को आवेदक के खाते मे वापस करा दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना जी०आर०पी० मुजफ्फरनगर मे तैनात है०्का० ५०२ नरेश कुमार ने साइबर हेल्प सेन्टर को प्रार्थना देकर बताया कि अज्ञात व्यक्ति साइबर ठग द्वारा रिश्तेदार बनकर लिंक के माध्यम से ४५ हजार रुपये की धोखाधड़ी की गयी है। जिसके बाद साइबर हेल्प सेन्टर द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए फ्लिपकार्ट कम्पनी को फ्रॉड से अवगत कराया गया तथा ४५ हजार रूपये मे से १५ हजार रूपये पहले वापस कराये गये। जिसके बाद शेष सम्पूर्ण धनराशि ३०००० रु को आवेदक के खाते में वापस कराया गया। आवेदक द्वारा साईबर हेल्प सेन्टर द्वारा की गयी तत्काल कार्यवाही के लिए धन्यवाद दिया गया। मुजफ्फरनगर। जीआरपी में तैनात हेड कांस्टेबल नरेश कुमार से रिश्तेदार बनकर साइबर ठग ने ४५ हजार रुपये ठग लिए। नरेश ने साइबर सेल में जानकारी दी। कॉल करने वाले ने खुद को नरेश का रिश्तेदार बताया था और मोबाइल पर उनसे लिंक ओपन करा लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ४५ हजार रुपये साइबर ठग से वापस करा दिए। शाहपुर। पशु चोरी की घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जिनके कब्जे से ५२ हजार रूपये व अवैध शस्त्र बरामद किये। जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र शाहपुर में अज्ञात बदमाशों द्वारा पशु चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसके सम्बन्ध में थाना शाहपुर पर सुसंगत धारा में अभियोग पंजीकृत किया गया था। थाना शाहपुर पुलिस द्वारा दौराने पुलिस कार्यवाही बरवाला वाले रास्ते पर सरकारी ट्यूबैल के पास से ०३ शातिर चोर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों ने पुलिस पूछताछ में नदीम पुत्र नफीस पहलवान निवासी मौ० फिरदौसनगर खालापार थाना कोतवालीनगर, मुजफ्फरनगर, सद्दाम पुत्र छोटा उर्फ नईम निवासी मौ० फिरदौसनगर खालापार थाना कोतवालीनगर, मुजफ्फरनगर, साजिद पुत्र सरमुल्ला निवासी धर्मकांटे के पास मिमलाना रोड़ थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर बताया जिनके कब्जे से ०२ तमन्चा मय ०२ जिन्दा व ०२ खोखा कारतूस ३१५ बोर, ०१ छुरी नाजायज, ५२ हजार रूपये नगद बरामद किया। पुलिस पूछताछ अभियुक्तगण द्वारा बताया गया कि उन्होंने 17-18 की रात्रि को ग्राम बरवाला के ०१ मकान से ०१ भैसा व ०१ भैस चोरी कर लिये थे, जिनहें ५२,००० रूपये में ०१ व्यापारी को बेच दिया था। अभियुक्तगण शातिर किस्म के चोर प्रवर्ति के अपराधी हैं तथा आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। मुजफ्फरनगर। बदमाशों ने दिन निकलते ही पुलिस को चुनौती देते हुए गुड़ कारोबारी से लाखों रुपए की नगदी लूट ली। हथियारों की नोंक पर लूटी गई नकदी को लेकर बदमाश आराम के साथ फरार हो गए। दिनदहाड़े सरेआम लाखों रुपए की लूट की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस फोर्स के साथ कोतवाल मौके पर पहुंचे। उधर जिला मुख्यालय पर पहुंची लूट की घटना की जानकारी के बाद एसपी क्राइम ने भी नगर में पहुंचकर लूट का शिकार हुए कारोबारी से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की। बुधवार को नगर के मोहल्ला कांशीराम निवासी गुड कारोबारी मुकेश जैन पुत्र रोशनलाल जैन तकरीबन एक लाख ५० हजार रुपए की नगदी लेकर बैंक में जमा कराने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में बाइक पर सवार होकर आए बदमाशों ने गुड कारोबारी को हथियारों के निशाने पर ले लिया और उससे नकदी भरा थैला लूटने लगे। गुड कारोबारी ने जब विरोध जताया तो बदमाशों ने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद हथियार बंद बदमाश गुड कारोबारी से लूटे गए रुपयों को लेकर आराम के साथ बाइक पर बैठकर फरार हो गये। हालांकि शोर-शराबा करते हुए गुड कारोबारी ने आसपास के लोगों से मदद भी मांगी। लेकिन जब तक आसपास के लोग गुड कारोबारी की मदद के लिये मौके पर पहुंचते, उस समय तक लुटेरे नगदी को समेटकर फरार होने में कामयाब हो चुके थे। दिन निकलते ही सरेआम लाखों रुपए की लूट की घटना हो जाने की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस फोर्स के साथ कोतवाल मौके पर पहुंचे और पीड़ित गुड कारोबारी से बदमाशों के हुलिए आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की। बदमाशों की तलाश के लिए पुलिस ने नाकेबंदी भी की। मगर वह पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहे। उधर लूट की जानकारी जब जिला मुख्यालय पर पहुंची तो एसपी क्राइम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल करते हुए पुलिस को मामले के खुलासे के निर्देश दिए। गौरतलब है कि पुलिस को बदमाश लगातार चुनौती दे रहे हैं। पिछले दिनों भी जानसठ रोड पर स्थित मदरसे में मौलाना को बंधक बनाते हुए बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इसके अलावा ग्राम खोखनी में सर्राफ को गोली मारने समेत लूट की कई अन्य घटनाएं भी हो चुकी है। हालांकि आला अधिकारियों के दबाव के चलते कई लूट को खोलने में पुलिस कामयाब भी हुई है, मगर जिस तरह से लगातार घटनाएं हो रही है, उसे पता चल रहा है कि बदमाशों को पुलिस का खौफ नहीं रहा है। मुजफ्फरनगर। मीरांपुर क्षेत्र में कैथोडा के निकट आज सवेरे बारात की बस एक ट्राले से टकरा जाने से बस चालक की मौत हो गयी जबकि दर्जनों बाराती गम्भीर रूप से घायल हो गये। आठ घायलों को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल में भिजवाया और मृतकं के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जानकारी के अनुसार दिल्ली-पौढ़ी राजमार्ग पर गांव किठौड़ा के पास स्टेयरिंग फेल हो जाने से बरात की बस गन्ने के खाली ट्रॉले से टकरा गई। हादसे में बस में सवार करीब ४० बराती घायल हुए है। ं पुलिस ने घायलों को जानसठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। भोपा निवासी गगन की शादी रामराज से तय हुई थी। बस में बरात भोपा से दिल्ली-पौढ़ी हाईवे होते हुए जा रही थी। किठौड़ा गांव के पास बस का स्टेयरिंग फेल हो गया। टिकौला चीनी मिल में गन्ना उतारकर आ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉले में बस की टक्कर हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। ट्रॉला करीब छह फीट तक बस में धंस गया। घायलों को जानसठ अस्पताल में ले जाया गया। बस चालक की मौत हो गयी। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आठ गम्भीर घायलों में सोनू, जितेंद्र, आत्माराम, शिवकुमार, कामेश, विजय, महेंद्र व जोगेंद्र को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी द्वारा जनता दर्शन में जन समस्याओं का निस्तारण किया गया। कलैक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यलय में जिलाधिकारी महोदय चंद्र भूषण सिंह के द्वारा अपने कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई के अंतर्गत फरयादियों की समस्याओं को सुना गया। जनता दरबार में मुख्य रूप से भूमि विवाद, कृषि,राशन, जलभराव आदि से सम्बंधित शिकायते प्राप्त हुई। जिनके निस्तारण हेतु जिलाधिकारी द्वारा सम्बन्धित अधिकारीयों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गये। जिलाधिकारी द्वारा उपस्थित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये गये कि सम्बन्धित शिकायतो का निस्तारण त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुजफ्फरनगर। कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी मन्दिर,अग्रोहा के तत्वाधान में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज मिनाक्षी चौक स्थित कोल्ड स्टोरेज से अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन द्वारा श्री अग्रोहा धाम से भ्रमण करते हुए श्री महालक्ष्मी जी की प्रतिमा नगर मे पहुंची। जहां संस्था के पदाधिकारियों एवं वैश्य समाज के गणमान्य लोगो के द्वारा कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी जी की प्रतिमा का पूजन किया गया। कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी मन्दिर अग्रोहा प्रतिमा की भारत यात्रा का आज इस कार्यक्रम के माध्यम से विधिवत शुभारम्भ हुआ। समाजसेवी सुरेन्द्र अग्रवाल के मिनाक्षी चौक स्थित कोल्ड स्टोरेज पर आयोजित महालक्ष्मी जी की प्रतिमा के पूजन के दौरान मुख्य अतिथि के रूप मे पधारे मंत्री कपिलदेव अग्रवाल,तथा कार्यक्रम मे विशिष्ठ अतिथि के रूप मे उपस्थित रहे पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, उद्यमी राकेश बिन्दल,उद्यमी सतीश गोयल, प्रमुख समाजसेवी भीमसैन कंसल,सौरभ स्वरूप, दिनेश गर्ग,भाजपा नेता श्री मोहन तायल ने महालक्ष्मी पूजन किया। इस दौरान अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री प्रमोद मित्तल,जिला अध्यक्ष विनोद संगल, जिला महामंत्री अंकुर गर्ग आदि संस्था के पदाधिकारीगण एवं वैश्य समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। खतौली। मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण २०२२ के अंतर्गत उप जिलाधिकारी खतौली द्वारा विधानसभा खतौली १५ के ग्राम पंचायत दौलतपुर एवं अभिपुरा के बूथों का निरीक्षण किया गया। भारत निर्वाचन आयोगों के निर्देशों के क्रम में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण २०२२ के तहत आज दिनांक ०१. १२. २०२१ को उप जिलाधिकारी खतौली श्री जीत सिंह राय के द्वारा विधानसभा खतौली १५ के ग्राम पंचायत दौलतपुर एवं अभिपुरा के बूथों का निरीक्षण किया गया। जिसके अंतर्गत बूथ स्थल पर सफाई एवं पानी आदि की भी व्यवस्था जांची गयी। मुजफ्फरनगर। आलोक यादव, मुख्य विकास अधिकारी एवं डा0 एम0एस0 फौजदार मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में जन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारम्भ टाऊन हॉल मैदान से श्री आलोक यादव, आईएएस, मुख्य विकास अधिकारी एवं डा0 एम0एस0 फौजदार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से हरी झण्डी दिखाकर किया गया। रैली में छात्र-छात्राए एड्स स्लोगन जैसे एड्स का ज्ञान, बचाये जान। एक को समझाए एक, एड्स से बच पाये अनेक। हम सब ने यह ठाना, भारत से एड्स रोग भगाना है, आदि स्लोगन वाली तख्तिया लिये तथा रेड रिबन लगाकर बच्चो ने रैली में प्रतिभाग किया तथा रैली टाऊन हॉल परिसर से प्रारम्भ होकर शिव चौक होते हुए जिला चिकित्सालय परिसर में समाप्त हुई। जिसमें जनपद के विद्यालय से सर छोटू राम इन्टर कालेज मुजफ्फरनगर, एस0डी0 इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, एम0एम0 इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, दीपचन्द ग्रीन चैम्बर इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, जैन इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर राजकीय इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, के बच्चों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जिनके द्वारा एड्स विषय पर छात्र-छात्राओं की संगोष्ठी की गई। संगोष्ठी के आयोजन में डा0 लोकेश चन्द्र गुप्ता, जिला क्षय रोग अधिकारी मुजफ्फरनगर ने सभी को एड्स रोग के लक्षण तथा उनसे बचाव की जानकारी के साथ -साथ यह भी बताया कि एचआईवी का कोई उपचार नही है परन्तु एन्टी- रेट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) कहलाने वाली दवाइयां ज़रूर उपलबध है। ये दवाइयां व्यक्ति की प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को मजबूत रखने में सहायता करती है, इस तरह रोगी बीमारी से लड़ना जारी रख सकते है और एड्स की षुरूआत को टाल सकते है। डा0 अरविन्द पंवार अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा संगोष्ठी में बताया कि एड्स रोग की कोई वैक्सीन अभी तक नही बनी है तथा कोई कारगर उपचार भी नही है अतः एड्स रोग के बारे में समाज को जानकारी देकर ही इस रोग से बचाव सम्भव है। अतः उन्होने नारा दिया कि एड्स का ज्ञान बचाये जान। डा0 एम0एस0 फौजदार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि एड्स से बचाव के लिए सबसे कारगर कदम एड्स रोग के प्रति जागरूकता एवं जानकारी ही है। एड्स रोग मुख्यतः असुरक्षित यौन सम्बन्ध, सक्रमित खून के चढ़ाने से तथा एक ही सुई द्वारा नशे के इन्जेक्शन लेने से एवं संक्रमित मॉ से बच्चे मे आने से फैलता है। एड्स रोग छूने से, गले लगाने से, रोगी के कपडे पहने से, रोगी की समस्त वस्तुए इस्तेमाल करने से, संयुक्त शौचालय इस्तेमाल करने से, टेलीफोन प्रयोग करने से तथा मच्छर के काटने से नही फैलता है। उपरोक्त समस्त विद्यालयों के छात्रों एवं अध्यापकों, यूपीएनपी प्लस से ममता एनजीओ, टीआई एनजीओ, स्वास्थ्य विभाग से डा0 गीताजंली वर्मा, एआरटी स्टाफ, सहबान उल हक, विप्रा, प्रवीन कुमार, अतुल शर्मा, हेमन्त यादव, अभिषेक गर्ग, सुनील सिंह, विपिन कुमार एवं संजीव शर्मा द्वारा रैली में प्रतिभाग किया गया। मुजफ्फरनगर। एस०डी० कॉलेज ऑफ मैनेजमेन्ट स्टडीज में बी०बी०ए०/बी०सी०ए० विभाग के सभागार में च्च्विश्व एड्स दिवसष् के उपलक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कॉलेज प्राचार्य डा० संदीप मित्तल व बी०बी०ए०/बी०सी०ए० विभागाध्यक्ष डा० संजीव तायल व राजीव पाल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन प्रवक्ता डा० संगीता गुप्ता ने किया। जिसमें छात्र/छात्राओं को एड्स के लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे मे जानकारी दी गयी। सर्वप्रथम इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डा० संदीप मित्तल ने सभी छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको को अपने विचार प्रस्तुत करते हुये बताया कि विश्व एड्स दिवस १९८८ के बाद से १ दिसम्बर को हर साल मनाया जाता है। जिसका उददेश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह से एड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना है। सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी, गैर सरकारी संगठन व दुनिया भर में लोग इस दिन एड्स की रोकथाम व नियन्त्रण के लिये निरीक्षण करते है व जगह-जगह कैम्प लगाकर लोगो को इस विषय मे सुझाव देते है। कई अभियान चलाए जाते है जिससे इस महामारी को जड़ से खत्म करने के प्रयास किये जा सकें। प्रवक्ता दीपक गर्ग ने अपने शब्दो मे समझाया एड्स का पूरा नाम श्एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोमश् है और यह एक तरह का विषाणु है, जिसका नाम एच०आई०वी० है। विश्व एड्स दिवस का मुख्य उददेश्य एच०आई०वी० एड्स से ग्रसित लोगों की मदद् करने के लिये धन जुटाना, लोगो में एड्स से जुडें मिथ को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करना है। इसी क्रम में बी०बी०ए० विभागाध्यक्ष श्री राजीव पाल सिंह ने आगे बोलते हुए कहा कि एड्स एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को जीते-जीम रने पर विवश कर देती है, आज एड्स दुनियाभर में सबसे घातक बीमारी के रूप में उभरकर सामने आया है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नही है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस बीमारी से बचा ही नही जा सकता, इस बीमारी का एकमात्र इलाज है बचाव । बी०सी०ए० विभागाध्यक्ष डा० संजीव तायल ने बताया कि आजकल की भागदौंड भरी जिंदगी और अनैतिक संबंधो की बाढ़ में यह बीमारी ओर भी तेजी से फैल रही है, सिर्फ असुरक्षित यौन संबंधो से ही नही यह बीमारी संक्रमित खून या संक्रमित इंजेक्शन की वजह से भी फैलती है। आज यह बीमारी पूरे विश्व के लिए एक सिरदर्द बन चुकी है और यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र भी इस बीमारी को बेहद गंभीरता से लेता है और हर साल विश्व एड्स दिवस के रूप मे मनाता है। डा० आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि इस अवसर पर महाविद्यालय के बी०बी०ए० एवं बी०सी०ए० विभाग के अक्षय जैन, प्राची गर्ग, सोनिका, वैभव वत्स, रोबिन गर्ग, नवनीत चौहान, चॉदना दीक्षित, तरूण शर्मा, मोहित गोयल, राहुल शर्मा, रोबिन मलिक, अनुज गोयल, उमेश मलिक, प्रशान्त गुप्ता, विनिता चौधरी, शशांक भारद्वाज व सतीश आदि शिक्षकगण व स्टॉफ एवं सभी छात्र/छात्रायें उपस्थित रहें। मुजफ्फरनगर। सचिव सहकारी गन्ना समिति सुभाष चंद्र यादव द्वारा क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का औचक निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह के निर्देशानुसार कृषकों की शिकायत पर एवं ज़िला गन्ना अधिकारी के निर्देश के अनुपालन में सचिव सहकारी गन्ना समिति सुभाष चंद्र यादव द्वारा क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का औचक निरीक्षण किया गया। क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का किसानों की सुविधाओं हेतु उदाहरणतः प्रकाश सफ़ाई, मिल यार्ड प्रत्येक काँटे पर मानक बाँट की उपलब्धता, किसानों को पीने के पानी की व्यवस्था आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत कृषको ने संतोष व्यक्त किया। मुजफ्फरनगर। प्रदेश एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिले के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदाकर्मियों ने मांगे पूरी न होने पर बुधवार को हड़ताल कर दी है। जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाई सहित कोविड टीकाकरण व स्वास्थ्य सेवाओं (आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़कर) का बहिष्कार कर स्वास्थ्य कर्मी सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना देकर बैठ गए। प्रदर्शन करते हुए मांगे पूरी न होने तक हड़ताल समाप्त न करने की घोषणा की। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ मुजफ्फरनगर उपाध्यक्ष डा. सचिन जैन ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुपालन में २५ नवम्बर २०२१ को काला फीता बांधकर स्वास्थ्य कर्मियों ने विरोध प्रकट किया था। उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों पर कोई विचार-विमर्श नहीं किया। जिसके दृष्टिगत प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के आह्वान पर एक दिसंबर से कामबंद हड़ताल शुरू कर दी गई। बताया कि प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के आह्वान पर जनपद में कोविड टीकाकरण सहित सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी गई हैं। सीएमओ कार्यालय धरना प्रदर्शन कर रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। काफी दिनों से संगठन अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीकों से प्रदर्शन करता आ रहा है। लेकिन उच्चाधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। कहा कि प्रदेश में समस्त संविदाकर्मी अपनी जान पर खेलकर कोविड-१९ जैसी महामारी से निपटने में दिन- रात ड्यूटी में लगे हुए हैं। जनपद में कोविड-१९ जैसी महामारी में भी एनएचएम संविदा कर्मचरियों ने आपदा मेंअपनी जान जोखिम में डालकर जनसमुदाय की सेवा की और प्रदेश का गौरव बढाया। फिर भी उक्त महामारी में शहीद चिकित्सक, पैरामेडिकल अथवा अन्य कर्मचरियों को घोषित धनराशि का ही सहारा है। अन्य कोई बीमा या अन्य लाभ मिशन निदेशक स्तर से संविदा कर्मियों को नहीं दिया जा रहा। डॉ इफ्तिखार, डॉ शमशेर आलम, एहतेशाम खां, इंजी मोहित जौहरी, हसरत अली, अश्वनी कुमार, रवि कुमार, जुनैद अंसारी आदि हड़ताल में शामिल रहे। मुजफ्फरनगर। सपा जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन ने जानकारी देते हुए बताया कि सपा कार्यालय मुजफ्फरनगर आगमन पर समाजवादी अल्पसंख्यक सभा प्रदेश अध्यक्ष शकील नदवी का सपा अल्पसंख्यक सभा जिलाध्यक्ष डा नूर हसन सलमानी महानगर अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा सलीम अंसारी व उनकी कार्यकारिणी द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट की अध्यक्षता व सपा जिला उपाध्यक्ष असद पाशा के संचालन में डॉ नूरहसन सलमानी व महानगर अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा सलीम अंसारी द्वारा आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट ने कहा कि समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ है, अल्पसंख्यकों में चाहे मुस्लिम हो या सिख समाज उन पर किसी भी उत्पीड़न व भेदभाव को समाजवादी पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा शकील नदवी ने कहा कि योगी मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की आड़ में महत्वपूर्ण व जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहरीले बोल की आड में किसान मजदूर नौजवान का उत्पीड़न व आरक्षण तथा देश के संसाधन बेचने व छीनने के एजेंडे पर काम कर रही है। योगी सरकार में अल्पसंख्यकों के साथ ही दलित पिछड़ों का जातिगत भेदभाव के साथ खुला उत्पीड़न किया जा रहा है। शकील नदवी ने वोट बांटने की साजिश से धर्म जाति की आड़ में राजनीति करने वालों को सबक सिखाने का आह्वान किया। उन्होंने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बताया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार देवेंद्र सिंह खालसा ने कहा कि योगी मोदी सरकार सिख समाज के उत्पीड़न को लेकर गफलत की राजनीति में है, सिख समाज ने ५०० साल के इतिहास में भी कभी किसी जालिम तानाशाह के आगे हार नहीं मानी किसानों के मुद्दे पर सिख समाज ने अपनी ताकत का एहसास करा भी दिया है। सपा महानगर अध्यक्ष अलीम सिद्दीकी सपा जिला महासचिव जिया चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी जालिम तानाशाह सरकार हो सपा कार्यकर्ता उसके गुरुर को तोड़ना जानते हैं। सपा जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन व पूर्व महानगर अध्यक्ष अंसार आढती ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के उत्पीड़न की आड़ में बहुसंख्यक समाज को गुमराह करने का काम किया है। अल्पसंख्यको के उत्पीड़न की आड में नौजवानों की नौकरी किसानों की फसल का उचित दाम मजदूरों की मजदूरी दलित पिछड़ों आरक्षण छीन लिया गया है। अल्पसंख्यक सभा प्रदेश अध्यक्ष शकील नदवी का वरिष्ठ सपा नेता सरदार देवेंद्र सिंह खालसा के नेतृत्व में सरदार जसविंदर सिंह, गुरमेल सिंह ,गुरमीत सिंह, हरविंद्र सिंह, जगतार सिंह,सुखविंदर सिंह, कंवलजीत सिंह, शमशेर सिंह द्वारा स्वर्ण मंदिर की आकर्षक कृति देकर व मुकीम कासमी,प्रधान दिलशाद राणा,अब्दुल्ला प्रधान, अहसान अली पूर्व प्रधान, मौलाना अहमद हसन, आस मोहम्मद कासमी, जावेद अली, सद्दाम हुसैन, रिसालत अली द्वारा माल्यर्पण कर स्वागत किया गया। प्रोग्राम में मुख्यरुप से सपा जिला उपाध्यक्ष विनय पाल ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लोहिया वाहिनी हारून अली राष्ट्रीय सचिव लोहिया वाहिनी शौकत अंसारी रोहन त्यागी प्रदेश सचिव यूथ ब्रिगेड शमशेर मलिक लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव डॉ इसरार अल्वी सलीम मलिक,जुनेद रउफ,शमशाद अहमद मौलाना नज़र, यूथ ब्रिगेड जिलाध्यक्ष राशिद मलिक ,छात्र सभा जिलाध्यक्ष यूसुफ गौर युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष रागिब कुरैशी, नवेद रँगरेज,आमिर डीलर, काज़ी खुर्रम फ़राज़ अंसारी अनिल जैन फ़राज अंसारी आफाक पठान,काज़ी फसीह अख्तर,ईशान अग्रवाल,आसिफ अली,गुलसनववर, तनवीर प्रधान दिलशाद कुरैशी सुमित पँवार बारी अकरम अली अन्नू कुरैशी सभासद, शाहिद राजा सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर। सहकारी गन्ना विकास समिति तितावी के सचिव द्वारा जनसुनवाई के अतंर्गत गन्ना किसानों की समस्याएं सुनी। जिलाधिकारी महोदय चंद्रभूषण सिंह के निर्देशानुसार ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक तितावी सतीश कुमार के द्वारा जनसुनवाई के अंतर्गत सहकारी गन्ना विकास समिति तितावी के ग्राम पंचायत छपार के गन्ना कृषक नफीस, अजमेर एवं राजेन्द्र, सुदेश वीर आदि की गन्ने से सम्बन्धित समस्याएं सुनी गई एवं सम्बन्धित पटल पर उक्त समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। मुजफ्फरनगर। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि आयुक्त खाद्य तथा रसद विभाग, उ0प्र0 जवाहर भवन, लखनऊ के कार्यालय पत्रांक 4045/आ0पू0रा0-कोरोना-विविध निर्देश/2020 दिनांक 30 नवम्बर, 2021 द्वारा अवगत कराया गया है कि माह नवम्बर, 2021 में दिनांक 20. 11. 2021 से 30. 11. 2021 तक खाद्यान्न (गेहूँ व चावल) का वितरण कराने हेतु पूर्व में निर्देश दिये गये थे। उक्त पत्र में यह भी उल्लिखित किया गया है कि कतिपय जनपदों के जिलाधिकारियों द्वारा यह अवगत कराया है कि उचित दर विक्रेताओं को विपणन केन्द्रों से खाद्यान्न का निर्गमन न होने के कारण समस्त लाभार्थियों को खाद्यान्न का वितरण 30. 11. 2021 तक कराया जाना सम्भव नहीं हो पा रहा है तथा वितरण तिथि बढाने हेतु अनुरोध किया गया है। जिसके दृष्टिगत खाद्यायुक्त द्वारा राष्ट्रीय खा़द्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अन्तर्गत माह नवम्बर, 2021 में द्वितीय चक्र में खाद्यान्न वितरण हेतु अवशेष लाभार्थियों को नियमित खाद्यान्न की वितरण तिथि दिनांक 03. 12. 2021 एवं 04. 12. 2021 (02 दिवस) निर्धारित की गयी है। उक्त अवधि में ई-पॉस के माध्यम से आधार आधारित वितरण किया जायेगा। उक्त दो वितरण दिवसो में कार्डधारको को पोर्टेबिलिटी से खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस हेतु विक्रेता अपने स्टॉक में अवशेष खाद्यान्न की उपलब्धता की सीमा तक पोर्टेबिलिटी के अन्तर्गत खाद्यान्न वितरित कर सकेंगे। उपरोक्त के क्रम में सभी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अन्तर्गत अन्त्योदय एवं पात्र गृहस्थी कार्डधारकों) से अनुरोध है कि जिन लाभार्थियों ने माह नवम्बर, 2021 के द्वितीय चक्र (दिनांक 20. 11. 2021 से 30. 11. 2021) में अपना खाद्यान्न प्राप्त नहीं किया है, ऐसे लाभार्थी अपना खाद्यान्न दिनांक 03. 12. 2021 एवं 04. 12. 2021 (दो दिवस) में सम्बन्धित उचित दर विक्रेता से ई-पॉस मशीन के माध्यम से नियमानुसार प्राप्त कर लें। इस सम्बन्ध में सभी उचित दर विक्रेताओं एवं उचित दर दुकानों पर नियुक्त नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोक्तानुसार निर्धारित तिथियों में सम्बन्धित उचित दर विक्रेताओं की दुकानो पर उपस्थित रहकर खाद्यान्न प्राप्त करने से अवशेष रहे कार्डधारको में नियमानुसार ई-पॉस मशीन के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण कराना सुनिश्चित करेंगे तथा खाद्यान्न वितरण के समय कोरोना संक्रमण के बचाव हेतु सोशल डिस्टेन्सिंग का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये। मुजफ्फरनगर। गली में तेजी के साथ गुजर रहे स्कूटर की टक्कर से बुजुर्ग व्यक्ति घायल हो गया। जिसे उसके परिजनो ने उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। मिली जानकारी के अनुसार नई मन्डी के पटेलनगर संजय मार्ग निवासी करीब 70 वर्षीय बैजनाथ गोयल आज दोपहर के वक्त अपने घर के बाहर गली मे बैठे अखबार पढ रहे थे कि इसी बीच गली मे तेजी के साथ पहुंचे स्कूटर की चपेट मे आ जाने से बुजुर्ग व्यक्ति घायल हो गया। बताया जाता है कि इस हादसे के बाद आरोपी स्कूटर चालक अपने स्कूटर सहित मौके से फरार हो गया। बुजुर्ग के चीखने की आवाज सुनकर उनके परिजन तथा पडौसी मौके पर पहुंचे। तथा आनन-फानन मे घायल बैजनाथ को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन ने जिला कार्यकारिणी एवम तहसील व ब्लॉक स्तर तक विस्तार करते हुए अध्यक्षों की नियुक्ति की है। भाकियू के जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रताप सिंह को तुगलपुर,ब्लॉक पुरकाजी का अध्यक्ष बनाया गया है। अनिल चौधरी को खतौली तहसील अध्यक्ष, सरदार अमीर सिह को मोरना ब्लॉक अध्यक्ष,अनुज बालियान को बुढाना तहसील अध्यक्ष बनाया गया है। ठा. कुशलवीर सिंह को सचिव तहसील सदर, राजेन्द्र सैनी को सचिव सदर तहसील,विपिन बालियान को सचिव तहसील बुढाना,विदेश मोतला को उपाध्यक्ष तहसील खतौली की जिम्मेदारी सौपी गई है। जिलाप कार्यकारिणी मे विकास शर्मा को उपाध्यक्ष,बिटटू को उपाध्यक्ष,सर्वेन्द्र राठी को उपाध्यक्ष,अशोक घटायन को उपाध्यक्ष तथा राजीव उर्फ नीटू दुल्हैरा को प्रवक्ता,सुबोध काकरान को महासचिव, सतेन्द्र पुण्डीर को महासचिव, रोशन दीक्षित को महासचिव,विपुल निर्वाल को संगठन मंत्री,राकेश चौधरी के संगठन मंत्री,शक्ति सिह को मीडिया प्रभारी, कुलदीप सिरोही को महामंत्री,अंशु त्यागी को महामंत्री,मांगेराम त्यागी को सचिव,अहसान त्यागी को सचिव पद पर नियुक्त किया गया है। इमरान ,भरतवीर आर्य, विपिन मंहदीयान,हरिओम त्यागी,रविन्द्र पंवार,योगेश बालियान, मोहसीन रजा,मनीष अहलावत सभी को सचिव एवं सरदार पलविन्दर व बब्लू सहरावत को मंत्री बनाया गया है। इनके अलावा देव अहलावत को सदर ब्लॉक अध्यक्ष,विकास चौधरी को मोरना ब्लाक अध्यक्ष,कुलदीप त्यागी को चरथावल ब्लॉक अध्यक्ष, सतेन्द्र चौहान को खतौली ब्लॉक अध्यक्ष,संजय त्यागी को पुरकाजी ब्लॉक अध्यक्ष, जोगिन्द्र पहलवान को जानसठ ब्लाक अध्यक्ष अमरजीत तोमर को बघरा ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौपी गई है। संजीव पंवार को बुढाना ब्लॉक अध्यक्ष,बिजेन्द्र बालियान को शाहपुर ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। मुजफ्फरनगर। एक युवक ने गांव के ही युवक पर उसकी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाते हुए एसएसपी से कार्यवाही की गुहार लगाई है। एसएसपी के नाम दिये गये प्रार्थना पत्र में भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव जैतपुर गढी निवासी युवक ने आरोप लगाया कि गांव का ही युवक उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता था जिसके चलते वह पंजाब भट्टे पर अपनी पत्नी के साथ जाकर रहने लगा था। आरोप है कि उक्त युवक ने पंजाब भट्टे से उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया। उसने भागदौड़ कर आरोपी युवक के रिश्तेदार के घर से अपनी पत्नी को बरामद कर लिया और गांव में आकर रहने लगा। पीडित ने आरोप लगाया कि २५ नवम्बर को आरोपी युवक गांव से उसकी पत्नी का अपहरण कर ले गया है। पीडित ने एसएसपी से कार्यवाही की गुहार लगाई है। मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिला मुजफ्फरनगर के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदाकर्मियों ने अपनी मांगे पूरी न होने पर हड़ताल करने का आह्वान कर दिया है, जिसके क्रम में जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाई सहित कोविड टीकाकरण व स्वास्थ्य सेवाएं (आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर) बंद कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में धरना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ मुजफ्फरनगर षाखा के उपाध्यक्ष डा. सचिन जैन ने बताया कि अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों ने आज काम बंद हड़ताल षुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि जब तक प्रदेष सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करेंगे हम हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि जनपद में लगभग एक हजार संविदाकर्मचारी है, जो कि बेहद कम वेतन पर अपनी सेवाएं स्वास्थ्य विभाग में दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनपद सहित अन्य जिलों में यह कार्य बहिश्कार हड़ताल चल रही है। आज के धरने को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिशद के अध्यक्ष डॉ0 संजीव लाम्बा, डिप्लोमा फार्मेसी संरक्षक श्री के. सी. राय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठन के महामंत्री षारदा मिश्रा, लैब टैक्नीषियन संघ के अध्यक्ष षोराज सिंह ने अपना समर्थन दिया है। जनपद में कोविड-19 जैसी महामारी में भी एन0एच0एम0 संविदा कर्मचरियों द्वारा अपनी अग्रणी भूमिका को निभाते हुए आपदा में अपनी जान जोखिम में डालकर जनसमुदाय की सेवा और प्रदेष का गौरव बढाया है। फिर भी उक्त महामारी में शहीद हमारे चिकित्सक/पैरामेडिकल अथवा अन्य कर्मचरियों को आप द्वारा घोशित राषि का ही सहारा है अन्य कोई इन्ष्योरेन्स या लाभ मिषन निदेषक स्तर से हम संविदा कर्मियों को प्राप्त नही है। जिसके कारण कर्मचारियों में रोश व्याप्त है और संवेदनहीनता की भावना प्रचुर होती जा रही है कि कम वेतन व कम सुविधाओं के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाहन किस प्रकार किया जाये। आज के धरने में डॉ. सचिन जैन, विपिन कुमार, अनुज सक्सैना, डा. संजीव सैनी, डा. राहुल, डा. अनिल कौशिक, डा देवेन्द्र, डा. सुदेश, एहतेषाम, कमल कुमार, अश्वनी कुमार, निर्मला आशा, रेणु आशा, ममता आषा, सपना आषा, मीनाक्षी आषा, रूबी आषा, मोहित, रवि कुमार, तरूण शर्मा, देवेन्द्र कुमार, सलीम अहमद, शशांक त्यागी, मणीकान्त त्यागी, मोनिका एएनएम, प्रियंका सहित समस्त एएनएम, समस्त आषा, समस्त फार्मासिस्ट, समस्त वार्डब्वाय, समस्त कम्पयूटर आपरेटर आदि षामिल रहे।
समाचार मुजफ्फरनगर। अलग अलग स्थानों से कई वांछितों/वारंटियों को गिरफ्तार किया। थाना कोशून्यनगर पर नियुक्त उशून्यनिशून्य जोगेन्द्रपाल सिंह द्वारा गैगिस्टर एक्ट वारण्टी अभिशून्य इन्तजार पुत्र अख्तर निवासी न्याजूपुरा थाना कोतवालीनगर मुशून्यनगर को अभिशून्य के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा थाना कोतवालीनगर पर नियुक्त उशून्यनिशून्य अखिल चौधरी द्वारां वांछित अभियुक्त हारुन पुत्र असरफ निशून्य ग्राम बहेडी थाना कोशून्यनगर मुशून्यनगर को बहेडी कट से गिरफ्तार किया। वहीं थाना भोपा पर नियुक्त उशून्यनिशून्य सुनील कुमार हूण द्वारा वारण्टी अभियुक्त रूपेश उर्फ छोटा पुत्र कूडा निशून्य बारूकी थाना भोपा मुशून्यनगर को अभिशून्य के मस्कन से गिरफ्तार किया गया। मुजफ्फरनगर। अलग अलग स्थानों से कई को अवैध शस्त्र सहित गिरफ्तार किया। थाना सिखेडा पर नियुक्त उशून्यनिशून्य बीबी शर्मा द्वारा अभियुक्त नसीम पुत्र बाबू निशून्य दाहे खेडी थाना सिखेडा मुशून्यनगर को जौली रोड से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त के कब्जे से एक मोशून्यसाशून्य स्पलेण्डर यूपी बारह डीएल एक हज़ार दो सौ अड़सठ व एक नाजायज छुरी को बरामद किया गया। इसके अलावा थाना कोतवालीनगर पर नियुक्त उशून्यनिशून्य रविन्द्र सिंह द्वारा वांछित अभियुक्त आजाद पुत्र अलीहसन, . शादाब पुत्र मौशून्य आलम निशून्य उपरोक्त किदवईनगर थाना कोशून्यनगर मुशून्यनगर को मछली बाजार गेट से गिरफ्तार किया गया। जिनके कब्जे से एक-एक नाजायज छुरे बरामद किये गये । मुजफ्फरनगर। साइबर ठग ने थाना जी. आर. पी. मे तैनात हैशून्य कान्सटेबल को उसका रिस्तेदार बताकर पैंतालीस हज़ार का चुना लगा दिया। जिसके बाद हैशून्य कान्सटेबल ने साइबर हेल्प सेन्टर से अपनी धनराशी को वापस दिलाने की गुहार लगाई। साइबर हेल्प सेन्टर ने तत्काल कार्यावाही करते हुए उसकी सम्पूर्ण धनराशी को आवेदक के खाते मे वापस करा दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना जीशून्यआरशून्यपीशून्य मुजफ्फरनगर मे तैनात हैशून्य्काशून्य पाँच सौ दो नरेश कुमार ने साइबर हेल्प सेन्टर को प्रार्थना देकर बताया कि अज्ञात व्यक्ति साइबर ठग द्वारा रिश्तेदार बनकर लिंक के माध्यम से पैंतालीस हजार रुपये की धोखाधड़ी की गयी है। जिसके बाद साइबर हेल्प सेन्टर द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए फ्लिपकार्ट कम्पनी को फ्रॉड से अवगत कराया गया तथा पैंतालीस हजार रूपये मे से पंद्रह हजार रूपये पहले वापस कराये गये। जिसके बाद शेष सम्पूर्ण धनराशि तीस हज़ार रुपया को आवेदक के खाते में वापस कराया गया। आवेदक द्वारा साईबर हेल्प सेन्टर द्वारा की गयी तत्काल कार्यवाही के लिए धन्यवाद दिया गया। मुजफ्फरनगर। जीआरपी में तैनात हेड कांस्टेबल नरेश कुमार से रिश्तेदार बनकर साइबर ठग ने पैंतालीस हजार रुपये ठग लिए। नरेश ने साइबर सेल में जानकारी दी। कॉल करने वाले ने खुद को नरेश का रिश्तेदार बताया था और मोबाइल पर उनसे लिंक ओपन करा लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पैंतालीस हजार रुपये साइबर ठग से वापस करा दिए। शाहपुर। पशु चोरी की घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जिनके कब्जे से बावन हजार रूपये व अवैध शस्त्र बरामद किये। जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र शाहपुर में अज्ञात बदमाशों द्वारा पशु चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसके सम्बन्ध में थाना शाहपुर पर सुसंगत धारा में अभियोग पंजीकृत किया गया था। थाना शाहपुर पुलिस द्वारा दौराने पुलिस कार्यवाही बरवाला वाले रास्ते पर सरकारी ट्यूबैल के पास से तीन शातिर चोर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों ने पुलिस पूछताछ में नदीम पुत्र नफीस पहलवान निवासी मौशून्य फिरदौसनगर खालापार थाना कोतवालीनगर, मुजफ्फरनगर, सद्दाम पुत्र छोटा उर्फ नईम निवासी मौशून्य फिरदौसनगर खालापार थाना कोतवालीनगर, मुजफ्फरनगर, साजिद पुत्र सरमुल्ला निवासी धर्मकांटे के पास मिमलाना रोड़ थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर बताया जिनके कब्जे से दो तमन्चा मय दो जिन्दा व दो खोखा कारतूस तीन सौ पंद्रह बोर, एक छुरी नाजायज, बावन हजार रूपये नगद बरामद किया। पुलिस पूछताछ अभियुक्तगण द्वारा बताया गया कि उन्होंने सत्रह-अट्ठारह की रात्रि को ग्राम बरवाला के एक मकान से एक भैसा व एक भैस चोरी कर लिये थे, जिनहें बावन,शून्य रूपये में एक व्यापारी को बेच दिया था। अभियुक्तगण शातिर किस्म के चोर प्रवर्ति के अपराधी हैं तथा आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है। मुजफ्फरनगर। बदमाशों ने दिन निकलते ही पुलिस को चुनौती देते हुए गुड़ कारोबारी से लाखों रुपए की नगदी लूट ली। हथियारों की नोंक पर लूटी गई नकदी को लेकर बदमाश आराम के साथ फरार हो गए। दिनदहाड़े सरेआम लाखों रुपए की लूट की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस फोर्स के साथ कोतवाल मौके पर पहुंचे। उधर जिला मुख्यालय पर पहुंची लूट की घटना की जानकारी के बाद एसपी क्राइम ने भी नगर में पहुंचकर लूट का शिकार हुए कारोबारी से घटना के संबंध में जानकारी हासिल की। बुधवार को नगर के मोहल्ला कांशीराम निवासी गुड कारोबारी मुकेश जैन पुत्र रोशनलाल जैन तकरीबन एक लाख पचास हजार रुपए की नगदी लेकर बैंक में जमा कराने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में बाइक पर सवार होकर आए बदमाशों ने गुड कारोबारी को हथियारों के निशाने पर ले लिया और उससे नकदी भरा थैला लूटने लगे। गुड कारोबारी ने जब विरोध जताया तो बदमाशों ने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद हथियार बंद बदमाश गुड कारोबारी से लूटे गए रुपयों को लेकर आराम के साथ बाइक पर बैठकर फरार हो गये। हालांकि शोर-शराबा करते हुए गुड कारोबारी ने आसपास के लोगों से मदद भी मांगी। लेकिन जब तक आसपास के लोग गुड कारोबारी की मदद के लिये मौके पर पहुंचते, उस समय तक लुटेरे नगदी को समेटकर फरार होने में कामयाब हो चुके थे। दिन निकलते ही सरेआम लाखों रुपए की लूट की घटना हो जाने की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस फोर्स के साथ कोतवाल मौके पर पहुंचे और पीड़ित गुड कारोबारी से बदमाशों के हुलिए आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की। बदमाशों की तलाश के लिए पुलिस ने नाकेबंदी भी की। मगर वह पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहे। उधर लूट की जानकारी जब जिला मुख्यालय पर पहुंची तो एसपी क्राइम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल करते हुए पुलिस को मामले के खुलासे के निर्देश दिए। गौरतलब है कि पुलिस को बदमाश लगातार चुनौती दे रहे हैं। पिछले दिनों भी जानसठ रोड पर स्थित मदरसे में मौलाना को बंधक बनाते हुए बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इसके अलावा ग्राम खोखनी में सर्राफ को गोली मारने समेत लूट की कई अन्य घटनाएं भी हो चुकी है। हालांकि आला अधिकारियों के दबाव के चलते कई लूट को खोलने में पुलिस कामयाब भी हुई है, मगर जिस तरह से लगातार घटनाएं हो रही है, उसे पता चल रहा है कि बदमाशों को पुलिस का खौफ नहीं रहा है। मुजफ्फरनगर। मीरांपुर क्षेत्र में कैथोडा के निकट आज सवेरे बारात की बस एक ट्राले से टकरा जाने से बस चालक की मौत हो गयी जबकि दर्जनों बाराती गम्भीर रूप से घायल हो गये। आठ घायलों को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल में भिजवाया और मृतकं के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जानकारी के अनुसार दिल्ली-पौढ़ी राजमार्ग पर गांव किठौड़ा के पास स्टेयरिंग फेल हो जाने से बरात की बस गन्ने के खाली ट्रॉले से टकरा गई। हादसे में बस में सवार करीब चालीस बराती घायल हुए है। ं पुलिस ने घायलों को जानसठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। भोपा निवासी गगन की शादी रामराज से तय हुई थी। बस में बरात भोपा से दिल्ली-पौढ़ी हाईवे होते हुए जा रही थी। किठौड़ा गांव के पास बस का स्टेयरिंग फेल हो गया। टिकौला चीनी मिल में गन्ना उतारकर आ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉले में बस की टक्कर हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। ट्रॉला करीब छह फीट तक बस में धंस गया। घायलों को जानसठ अस्पताल में ले जाया गया। बस चालक की मौत हो गयी। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आठ गम्भीर घायलों में सोनू, जितेंद्र, आत्माराम, शिवकुमार, कामेश, विजय, महेंद्र व जोगेंद्र को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी द्वारा जनता दर्शन में जन समस्याओं का निस्तारण किया गया। कलैक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यलय में जिलाधिकारी महोदय चंद्र भूषण सिंह के द्वारा अपने कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई के अंतर्गत फरयादियों की समस्याओं को सुना गया। जनता दरबार में मुख्य रूप से भूमि विवाद, कृषि,राशन, जलभराव आदि से सम्बंधित शिकायते प्राप्त हुई। जिनके निस्तारण हेतु जिलाधिकारी द्वारा सम्बन्धित अधिकारीयों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गये। जिलाधिकारी द्वारा उपस्थित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये गये कि सम्बन्धित शिकायतो का निस्तारण त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुजफ्फरनगर। कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी मन्दिर,अग्रोहा के तत्वाधान में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज मिनाक्षी चौक स्थित कोल्ड स्टोरेज से अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन द्वारा श्री अग्रोहा धाम से भ्रमण करते हुए श्री महालक्ष्मी जी की प्रतिमा नगर मे पहुंची। जहां संस्था के पदाधिकारियों एवं वैश्य समाज के गणमान्य लोगो के द्वारा कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी जी की प्रतिमा का पूजन किया गया। कुलदेवी आद्य महालक्ष्मी मन्दिर अग्रोहा प्रतिमा की भारत यात्रा का आज इस कार्यक्रम के माध्यम से विधिवत शुभारम्भ हुआ। समाजसेवी सुरेन्द्र अग्रवाल के मिनाक्षी चौक स्थित कोल्ड स्टोरेज पर आयोजित महालक्ष्मी जी की प्रतिमा के पूजन के दौरान मुख्य अतिथि के रूप मे पधारे मंत्री कपिलदेव अग्रवाल,तथा कार्यक्रम मे विशिष्ठ अतिथि के रूप मे उपस्थित रहे पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, उद्यमी राकेश बिन्दल,उद्यमी सतीश गोयल, प्रमुख समाजसेवी भीमसैन कंसल,सौरभ स्वरूप, दिनेश गर्ग,भाजपा नेता श्री मोहन तायल ने महालक्ष्मी पूजन किया। इस दौरान अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री प्रमोद मित्तल,जिला अध्यक्ष विनोद संगल, जिला महामंत्री अंकुर गर्ग आदि संस्था के पदाधिकारीगण एवं वैश्य समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। खतौली। मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण दो हज़ार बाईस के अंतर्गत उप जिलाधिकारी खतौली द्वारा विधानसभा खतौली पंद्रह के ग्राम पंचायत दौलतपुर एवं अभिपुरा के बूथों का निरीक्षण किया गया। भारत निर्वाचन आयोगों के निर्देशों के क्रम में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण दो हज़ार बाईस के तहत आज दिनांक एक. बारह. दो हज़ार इक्कीस को उप जिलाधिकारी खतौली श्री जीत सिंह राय के द्वारा विधानसभा खतौली पंद्रह के ग्राम पंचायत दौलतपुर एवं अभिपुरा के बूथों का निरीक्षण किया गया। जिसके अंतर्गत बूथ स्थल पर सफाई एवं पानी आदि की भी व्यवस्था जांची गयी। मुजफ्फरनगर। आलोक यादव, मुख्य विकास अधिकारी एवं डाशून्य एमशून्यएसशून्य फौजदार मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में जन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारम्भ टाऊन हॉल मैदान से श्री आलोक यादव, आईएएस, मुख्य विकास अधिकारी एवं डाशून्य एमशून्यएसशून्य फौजदार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से हरी झण्डी दिखाकर किया गया। रैली में छात्र-छात्राए एड्स स्लोगन जैसे एड्स का ज्ञान, बचाये जान। एक को समझाए एक, एड्स से बच पाये अनेक। हम सब ने यह ठाना, भारत से एड्स रोग भगाना है, आदि स्लोगन वाली तख्तिया लिये तथा रेड रिबन लगाकर बच्चो ने रैली में प्रतिभाग किया तथा रैली टाऊन हॉल परिसर से प्रारम्भ होकर शिव चौक होते हुए जिला चिकित्सालय परिसर में समाप्त हुई। जिसमें जनपद के विद्यालय से सर छोटू राम इन्टर कालेज मुजफ्फरनगर, एसशून्यडीशून्य इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, एमशून्यएमशून्य इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, दीपचन्द ग्रीन चैम्बर इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, जैन इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर राजकीय इण्टर कालेज मुजफ्फरनगर, के बच्चों द्वारा प्रतिभाग किया गया। जिनके द्वारा एड्स विषय पर छात्र-छात्राओं की संगोष्ठी की गई। संगोष्ठी के आयोजन में डाशून्य लोकेश चन्द्र गुप्ता, जिला क्षय रोग अधिकारी मुजफ्फरनगर ने सभी को एड्स रोग के लक्षण तथा उनसे बचाव की जानकारी के साथ -साथ यह भी बताया कि एचआईवी का कोई उपचार नही है परन्तु एन्टी- रेट्रोवायरल थैरेपी कहलाने वाली दवाइयां ज़रूर उपलबध है। ये दवाइयां व्यक्ति की प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत रखने में सहायता करती है, इस तरह रोगी बीमारी से लड़ना जारी रख सकते है और एड्स की षुरूआत को टाल सकते है। डाशून्य अरविन्द पंवार अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा संगोष्ठी में बताया कि एड्स रोग की कोई वैक्सीन अभी तक नही बनी है तथा कोई कारगर उपचार भी नही है अतः एड्स रोग के बारे में समाज को जानकारी देकर ही इस रोग से बचाव सम्भव है। अतः उन्होने नारा दिया कि एड्स का ज्ञान बचाये जान। डाशून्य एमशून्यएसशून्य फौजदार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि एड्स से बचाव के लिए सबसे कारगर कदम एड्स रोग के प्रति जागरूकता एवं जानकारी ही है। एड्स रोग मुख्यतः असुरक्षित यौन सम्बन्ध, सक्रमित खून के चढ़ाने से तथा एक ही सुई द्वारा नशे के इन्जेक्शन लेने से एवं संक्रमित मॉ से बच्चे मे आने से फैलता है। एड्स रोग छूने से, गले लगाने से, रोगी के कपडे पहने से, रोगी की समस्त वस्तुए इस्तेमाल करने से, संयुक्त शौचालय इस्तेमाल करने से, टेलीफोन प्रयोग करने से तथा मच्छर के काटने से नही फैलता है। उपरोक्त समस्त विद्यालयों के छात्रों एवं अध्यापकों, यूपीएनपी प्लस से ममता एनजीओ, टीआई एनजीओ, स्वास्थ्य विभाग से डाशून्य गीताजंली वर्मा, एआरटी स्टाफ, सहबान उल हक, विप्रा, प्रवीन कुमार, अतुल शर्मा, हेमन्त यादव, अभिषेक गर्ग, सुनील सिंह, विपिन कुमार एवं संजीव शर्मा द्वारा रैली में प्रतिभाग किया गया। मुजफ्फरनगर। एसशून्यडीशून्य कॉलेज ऑफ मैनेजमेन्ट स्टडीज में बीशून्यबीशून्यएशून्य/बीशून्यसीशून्यएशून्य विभाग के सभागार में च्च्विश्व एड्स दिवसष् के उपलक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कॉलेज प्राचार्य डाशून्य संदीप मित्तल व बीशून्यबीशून्यएशून्य/बीशून्यसीशून्यएशून्य विभागाध्यक्ष डाशून्य संजीव तायल व राजीव पाल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन प्रवक्ता डाशून्य संगीता गुप्ता ने किया। जिसमें छात्र/छात्राओं को एड्स के लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे मे जानकारी दी गयी। सर्वप्रथम इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डाशून्य संदीप मित्तल ने सभी छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको को अपने विचार प्रस्तुत करते हुये बताया कि विश्व एड्स दिवस एक हज़ार नौ सौ अठासी के बाद से एक दिसम्बर को हर साल मनाया जाता है। जिसका उददेश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह से एड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना है। सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी, गैर सरकारी संगठन व दुनिया भर में लोग इस दिन एड्स की रोकथाम व नियन्त्रण के लिये निरीक्षण करते है व जगह-जगह कैम्प लगाकर लोगो को इस विषय मे सुझाव देते है। कई अभियान चलाए जाते है जिससे इस महामारी को जड़ से खत्म करने के प्रयास किये जा सकें। प्रवक्ता दीपक गर्ग ने अपने शब्दो मे समझाया एड्स का पूरा नाम श्एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोमश् है और यह एक तरह का विषाणु है, जिसका नाम एचशून्यआईशून्यवीशून्य है। विश्व एड्स दिवस का मुख्य उददेश्य एचशून्यआईशून्यवीशून्य एड्स से ग्रसित लोगों की मदद् करने के लिये धन जुटाना, लोगो में एड्स से जुडें मिथ को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करना है। इसी क्रम में बीशून्यबीशून्यएशून्य विभागाध्यक्ष श्री राजीव पाल सिंह ने आगे बोलते हुए कहा कि एड्स एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को जीते-जीम रने पर विवश कर देती है, आज एड्स दुनियाभर में सबसे घातक बीमारी के रूप में उभरकर सामने आया है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नही है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस बीमारी से बचा ही नही जा सकता, इस बीमारी का एकमात्र इलाज है बचाव । बीशून्यसीशून्यएशून्य विभागाध्यक्ष डाशून्य संजीव तायल ने बताया कि आजकल की भागदौंड भरी जिंदगी और अनैतिक संबंधो की बाढ़ में यह बीमारी ओर भी तेजी से फैल रही है, सिर्फ असुरक्षित यौन संबंधो से ही नही यह बीमारी संक्रमित खून या संक्रमित इंजेक्शन की वजह से भी फैलती है। आज यह बीमारी पूरे विश्व के लिए एक सिरदर्द बन चुकी है और यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र भी इस बीमारी को बेहद गंभीरता से लेता है और हर साल विश्व एड्स दिवस के रूप मे मनाता है। डाशून्य आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि इस अवसर पर महाविद्यालय के बीशून्यबीशून्यएशून्य एवं बीशून्यसीशून्यएशून्य विभाग के अक्षय जैन, प्राची गर्ग, सोनिका, वैभव वत्स, रोबिन गर्ग, नवनीत चौहान, चॉदना दीक्षित, तरूण शर्मा, मोहित गोयल, राहुल शर्मा, रोबिन मलिक, अनुज गोयल, उमेश मलिक, प्रशान्त गुप्ता, विनिता चौधरी, शशांक भारद्वाज व सतीश आदि शिक्षकगण व स्टॉफ एवं सभी छात्र/छात्रायें उपस्थित रहें। मुजफ्फरनगर। सचिव सहकारी गन्ना समिति सुभाष चंद्र यादव द्वारा क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का औचक निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह के निर्देशानुसार कृषकों की शिकायत पर एवं ज़िला गन्ना अधिकारी के निर्देश के अनुपालन में सचिव सहकारी गन्ना समिति सुभाष चंद्र यादव द्वारा क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का औचक निरीक्षण किया गया। क्रय केंद्र मखियाली प्रथम का किसानों की सुविधाओं हेतु उदाहरणतः प्रकाश सफ़ाई, मिल यार्ड प्रत्येक काँटे पर मानक बाँट की उपलब्धता, किसानों को पीने के पानी की व्यवस्था आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत कृषको ने संतोष व्यक्त किया। मुजफ्फरनगर। प्रदेश एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिले के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदाकर्मियों ने मांगे पूरी न होने पर बुधवार को हड़ताल कर दी है। जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाई सहित कोविड टीकाकरण व स्वास्थ्य सेवाओं का बहिष्कार कर स्वास्थ्य कर्मी सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना देकर बैठ गए। प्रदर्शन करते हुए मांगे पूरी न होने तक हड़ताल समाप्त न करने की घोषणा की। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ मुजफ्फरनगर उपाध्यक्ष डा. सचिन जैन ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुपालन में पच्चीस नवम्बर दो हज़ार इक्कीस को काला फीता बांधकर स्वास्थ्य कर्मियों ने विरोध प्रकट किया था। उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों पर कोई विचार-विमर्श नहीं किया। जिसके दृष्टिगत प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के आह्वान पर एक दिसंबर से कामबंद हड़ताल शुरू कर दी गई। बताया कि प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के आह्वान पर जनपद में कोविड टीकाकरण सहित सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी गई हैं। सीएमओ कार्यालय धरना प्रदर्शन कर रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। काफी दिनों से संगठन अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीकों से प्रदर्शन करता आ रहा है। लेकिन उच्चाधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। कहा कि प्रदेश में समस्त संविदाकर्मी अपनी जान पर खेलकर कोविड-उन्नीस जैसी महामारी से निपटने में दिन- रात ड्यूटी में लगे हुए हैं। जनपद में कोविड-उन्नीस जैसी महामारी में भी एनएचएम संविदा कर्मचरियों ने आपदा मेंअपनी जान जोखिम में डालकर जनसमुदाय की सेवा की और प्रदेश का गौरव बढाया। फिर भी उक्त महामारी में शहीद चिकित्सक, पैरामेडिकल अथवा अन्य कर्मचरियों को घोषित धनराशि का ही सहारा है। अन्य कोई बीमा या अन्य लाभ मिशन निदेशक स्तर से संविदा कर्मियों को नहीं दिया जा रहा। डॉ इफ्तिखार, डॉ शमशेर आलम, एहतेशाम खां, इंजी मोहित जौहरी, हसरत अली, अश्वनी कुमार, रवि कुमार, जुनैद अंसारी आदि हड़ताल में शामिल रहे। मुजफ्फरनगर। सपा जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन ने जानकारी देते हुए बताया कि सपा कार्यालय मुजफ्फरनगर आगमन पर समाजवादी अल्पसंख्यक सभा प्रदेश अध्यक्ष शकील नदवी का सपा अल्पसंख्यक सभा जिलाध्यक्ष डा नूर हसन सलमानी महानगर अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा सलीम अंसारी व उनकी कार्यकारिणी द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट की अध्यक्षता व सपा जिला उपाध्यक्ष असद पाशा के संचालन में डॉ नूरहसन सलमानी व महानगर अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा सलीम अंसारी द्वारा आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट ने कहा कि समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ है, अल्पसंख्यकों में चाहे मुस्लिम हो या सिख समाज उन पर किसी भी उत्पीड़न व भेदभाव को समाजवादी पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा शकील नदवी ने कहा कि योगी मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की आड़ में महत्वपूर्ण व जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहरीले बोल की आड में किसान मजदूर नौजवान का उत्पीड़न व आरक्षण तथा देश के संसाधन बेचने व छीनने के एजेंडे पर काम कर रही है। योगी सरकार में अल्पसंख्यकों के साथ ही दलित पिछड़ों का जातिगत भेदभाव के साथ खुला उत्पीड़न किया जा रहा है। शकील नदवी ने वोट बांटने की साजिश से धर्म जाति की आड़ में राजनीति करने वालों को सबक सिखाने का आह्वान किया। उन्होंने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बताया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सरदार देवेंद्र सिंह खालसा ने कहा कि योगी मोदी सरकार सिख समाज के उत्पीड़न को लेकर गफलत की राजनीति में है, सिख समाज ने पाँच सौ साल के इतिहास में भी कभी किसी जालिम तानाशाह के आगे हार नहीं मानी किसानों के मुद्दे पर सिख समाज ने अपनी ताकत का एहसास करा भी दिया है। सपा महानगर अध्यक्ष अलीम सिद्दीकी सपा जिला महासचिव जिया चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी जालिम तानाशाह सरकार हो सपा कार्यकर्ता उसके गुरुर को तोड़ना जानते हैं। सपा जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन व पूर्व महानगर अध्यक्ष अंसार आढती ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के उत्पीड़न की आड़ में बहुसंख्यक समाज को गुमराह करने का काम किया है। अल्पसंख्यको के उत्पीड़न की आड में नौजवानों की नौकरी किसानों की फसल का उचित दाम मजदूरों की मजदूरी दलित पिछड़ों आरक्षण छीन लिया गया है। अल्पसंख्यक सभा प्रदेश अध्यक्ष शकील नदवी का वरिष्ठ सपा नेता सरदार देवेंद्र सिंह खालसा के नेतृत्व में सरदार जसविंदर सिंह, गुरमेल सिंह ,गुरमीत सिंह, हरविंद्र सिंह, जगतार सिंह,सुखविंदर सिंह, कंवलजीत सिंह, शमशेर सिंह द्वारा स्वर्ण मंदिर की आकर्षक कृति देकर व मुकीम कासमी,प्रधान दिलशाद राणा,अब्दुल्ला प्रधान, अहसान अली पूर्व प्रधान, मौलाना अहमद हसन, आस मोहम्मद कासमी, जावेद अली, सद्दाम हुसैन, रिसालत अली द्वारा माल्यर्पण कर स्वागत किया गया। प्रोग्राम में मुख्यरुप से सपा जिला उपाध्यक्ष विनय पाल ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लोहिया वाहिनी हारून अली राष्ट्रीय सचिव लोहिया वाहिनी शौकत अंसारी रोहन त्यागी प्रदेश सचिव यूथ ब्रिगेड शमशेर मलिक लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव डॉ इसरार अल्वी सलीम मलिक,जुनेद रउफ,शमशाद अहमद मौलाना नज़र, यूथ ब्रिगेड जिलाध्यक्ष राशिद मलिक ,छात्र सभा जिलाध्यक्ष यूसुफ गौर युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष रागिब कुरैशी, नवेद रँगरेज,आमिर डीलर, काज़ी खुर्रम फ़राज़ अंसारी अनिल जैन फ़राज अंसारी आफाक पठान,काज़ी फसीह अख्तर,ईशान अग्रवाल,आसिफ अली,गुलसनववर, तनवीर प्रधान दिलशाद कुरैशी सुमित पँवार बारी अकरम अली अन्नू कुरैशी सभासद, शाहिद राजा सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुजफ्फरनगर। सहकारी गन्ना विकास समिति तितावी के सचिव द्वारा जनसुनवाई के अतंर्गत गन्ना किसानों की समस्याएं सुनी। जिलाधिकारी महोदय चंद्रभूषण सिंह के निर्देशानुसार ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक तितावी सतीश कुमार के द्वारा जनसुनवाई के अंतर्गत सहकारी गन्ना विकास समिति तितावी के ग्राम पंचायत छपार के गन्ना कृषक नफीस, अजमेर एवं राजेन्द्र, सुदेश वीर आदि की गन्ने से सम्बन्धित समस्याएं सुनी गई एवं सम्बन्धित पटल पर उक्त समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। मुजफ्फरनगर। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि आयुक्त खाद्य तथा रसद विभाग, उशून्यप्रशून्य जवाहर भवन, लखनऊ के कार्यालय पत्रांक चार हज़ार पैंतालीस/आशून्यपूशून्यराशून्य-कोरोना-विविध निर्देश/दो हज़ार बीस दिनांक तीस नवम्बर, दो हज़ार इक्कीस द्वारा अवगत कराया गया है कि माह नवम्बर, दो हज़ार इक्कीस में दिनांक बीस. ग्यारह. दो हज़ार इक्कीस से तीस. ग्यारह. दो हज़ार इक्कीस तक खाद्यान्न का वितरण कराने हेतु पूर्व में निर्देश दिये गये थे। उक्त पत्र में यह भी उल्लिखित किया गया है कि कतिपय जनपदों के जिलाधिकारियों द्वारा यह अवगत कराया है कि उचित दर विक्रेताओं को विपणन केन्द्रों से खाद्यान्न का निर्गमन न होने के कारण समस्त लाभार्थियों को खाद्यान्न का वितरण तीस. ग्यारह. दो हज़ार इक्कीस तक कराया जाना सम्भव नहीं हो पा रहा है तथा वितरण तिथि बढाने हेतु अनुरोध किया गया है। जिसके दृष्टिगत खाद्यायुक्त द्वारा राष्ट्रीय खा़द्य सुरक्षा अधिनियम-दो हज़ार तेरह के अन्तर्गत माह नवम्बर, दो हज़ार इक्कीस में द्वितीय चक्र में खाद्यान्न वितरण हेतु अवशेष लाभार्थियों को नियमित खाद्यान्न की वितरण तिथि दिनांक तीन. बारह. दो हज़ार इक्कीस एवं चार. बारह. दो हज़ार इक्कीस निर्धारित की गयी है। उक्त अवधि में ई-पॉस के माध्यम से आधार आधारित वितरण किया जायेगा। उक्त दो वितरण दिवसो में कार्डधारको को पोर्टेबिलिटी से खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस हेतु विक्रेता अपने स्टॉक में अवशेष खाद्यान्न की उपलब्धता की सीमा तक पोर्टेबिलिटी के अन्तर्गत खाद्यान्न वितरित कर सकेंगे। उपरोक्त के क्रम में सभी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-दो हज़ार तेरह के अन्तर्गत अन्त्योदय एवं पात्र गृहस्थी कार्डधारकों) से अनुरोध है कि जिन लाभार्थियों ने माह नवम्बर, दो हज़ार इक्कीस के द्वितीय चक्र में अपना खाद्यान्न प्राप्त नहीं किया है, ऐसे लाभार्थी अपना खाद्यान्न दिनांक तीन. बारह. दो हज़ार इक्कीस एवं चार. बारह. दो हज़ार इक्कीस में सम्बन्धित उचित दर विक्रेता से ई-पॉस मशीन के माध्यम से नियमानुसार प्राप्त कर लें। इस सम्बन्ध में सभी उचित दर विक्रेताओं एवं उचित दर दुकानों पर नियुक्त नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोक्तानुसार निर्धारित तिथियों में सम्बन्धित उचित दर विक्रेताओं की दुकानो पर उपस्थित रहकर खाद्यान्न प्राप्त करने से अवशेष रहे कार्डधारको में नियमानुसार ई-पॉस मशीन के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण कराना सुनिश्चित करेंगे तथा खाद्यान्न वितरण के समय कोरोना संक्रमण के बचाव हेतु सोशल डिस्टेन्सिंग का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये। मुजफ्फरनगर। गली में तेजी के साथ गुजर रहे स्कूटर की टक्कर से बुजुर्ग व्यक्ति घायल हो गया। जिसे उसके परिजनो ने उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। मिली जानकारी के अनुसार नई मन्डी के पटेलनगर संजय मार्ग निवासी करीब सत्तर वर्षीय बैजनाथ गोयल आज दोपहर के वक्त अपने घर के बाहर गली मे बैठे अखबार पढ रहे थे कि इसी बीच गली मे तेजी के साथ पहुंचे स्कूटर की चपेट मे आ जाने से बुजुर्ग व्यक्ति घायल हो गया। बताया जाता है कि इस हादसे के बाद आरोपी स्कूटर चालक अपने स्कूटर सहित मौके से फरार हो गया। बुजुर्ग के चीखने की आवाज सुनकर उनके परिजन तथा पडौसी मौके पर पहुंचे। तथा आनन-फानन मे घायल बैजनाथ को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन ने जिला कार्यकारिणी एवम तहसील व ब्लॉक स्तर तक विस्तार करते हुए अध्यक्षों की नियुक्ति की है। भाकियू के जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रताप सिंह को तुगलपुर,ब्लॉक पुरकाजी का अध्यक्ष बनाया गया है। अनिल चौधरी को खतौली तहसील अध्यक्ष, सरदार अमीर सिह को मोरना ब्लॉक अध्यक्ष,अनुज बालियान को बुढाना तहसील अध्यक्ष बनाया गया है। ठा. कुशलवीर सिंह को सचिव तहसील सदर, राजेन्द्र सैनी को सचिव सदर तहसील,विपिन बालियान को सचिव तहसील बुढाना,विदेश मोतला को उपाध्यक्ष तहसील खतौली की जिम्मेदारी सौपी गई है। जिलाप कार्यकारिणी मे विकास शर्मा को उपाध्यक्ष,बिटटू को उपाध्यक्ष,सर्वेन्द्र राठी को उपाध्यक्ष,अशोक घटायन को उपाध्यक्ष तथा राजीव उर्फ नीटू दुल्हैरा को प्रवक्ता,सुबोध काकरान को महासचिव, सतेन्द्र पुण्डीर को महासचिव, रोशन दीक्षित को महासचिव,विपुल निर्वाल को संगठन मंत्री,राकेश चौधरी के संगठन मंत्री,शक्ति सिह को मीडिया प्रभारी, कुलदीप सिरोही को महामंत्री,अंशु त्यागी को महामंत्री,मांगेराम त्यागी को सचिव,अहसान त्यागी को सचिव पद पर नियुक्त किया गया है। इमरान ,भरतवीर आर्य, विपिन मंहदीयान,हरिओम त्यागी,रविन्द्र पंवार,योगेश बालियान, मोहसीन रजा,मनीष अहलावत सभी को सचिव एवं सरदार पलविन्दर व बब्लू सहरावत को मंत्री बनाया गया है। इनके अलावा देव अहलावत को सदर ब्लॉक अध्यक्ष,विकास चौधरी को मोरना ब्लाक अध्यक्ष,कुलदीप त्यागी को चरथावल ब्लॉक अध्यक्ष, सतेन्द्र चौहान को खतौली ब्लॉक अध्यक्ष,संजय त्यागी को पुरकाजी ब्लॉक अध्यक्ष, जोगिन्द्र पहलवान को जानसठ ब्लाक अध्यक्ष अमरजीत तोमर को बघरा ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौपी गई है। संजीव पंवार को बुढाना ब्लॉक अध्यक्ष,बिजेन्द्र बालियान को शाहपुर ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। मुजफ्फरनगर। एक युवक ने गांव के ही युवक पर उसकी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाते हुए एसएसपी से कार्यवाही की गुहार लगाई है। एसएसपी के नाम दिये गये प्रार्थना पत्र में भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव जैतपुर गढी निवासी युवक ने आरोप लगाया कि गांव का ही युवक उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता था जिसके चलते वह पंजाब भट्टे पर अपनी पत्नी के साथ जाकर रहने लगा था। आरोप है कि उक्त युवक ने पंजाब भट्टे से उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया। उसने भागदौड़ कर आरोपी युवक के रिश्तेदार के घर से अपनी पत्नी को बरामद कर लिया और गांव में आकर रहने लगा। पीडित ने आरोप लगाया कि पच्चीस नवम्बर को आरोपी युवक गांव से उसकी पत्नी का अपहरण कर ले गया है। पीडित ने एसएसपी से कार्यवाही की गुहार लगाई है। मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिला मुजफ्फरनगर के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदाकर्मियों ने अपनी मांगे पूरी न होने पर हड़ताल करने का आह्वान कर दिया है, जिसके क्रम में जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाई सहित कोविड टीकाकरण व स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में धरना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेष राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ मुजफ्फरनगर षाखा के उपाध्यक्ष डा. सचिन जैन ने बताया कि अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों ने आज काम बंद हड़ताल षुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि जब तक प्रदेष सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करेंगे हम हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि जनपद में लगभग एक हजार संविदाकर्मचारी है, जो कि बेहद कम वेतन पर अपनी सेवाएं स्वास्थ्य विभाग में दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनपद सहित अन्य जिलों में यह कार्य बहिश्कार हड़ताल चल रही है। आज के धरने को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिशद के अध्यक्ष डॉशून्य संजीव लाम्बा, डिप्लोमा फार्मेसी संरक्षक श्री के. सी. राय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठन के महामंत्री षारदा मिश्रा, लैब टैक्नीषियन संघ के अध्यक्ष षोराज सिंह ने अपना समर्थन दिया है। जनपद में कोविड-उन्नीस जैसी महामारी में भी एनशून्यएचशून्यएमशून्य संविदा कर्मचरियों द्वारा अपनी अग्रणी भूमिका को निभाते हुए आपदा में अपनी जान जोखिम में डालकर जनसमुदाय की सेवा और प्रदेष का गौरव बढाया है। फिर भी उक्त महामारी में शहीद हमारे चिकित्सक/पैरामेडिकल अथवा अन्य कर्मचरियों को आप द्वारा घोशित राषि का ही सहारा है अन्य कोई इन्ष्योरेन्स या लाभ मिषन निदेषक स्तर से हम संविदा कर्मियों को प्राप्त नही है। जिसके कारण कर्मचारियों में रोश व्याप्त है और संवेदनहीनता की भावना प्रचुर होती जा रही है कि कम वेतन व कम सुविधाओं के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाहन किस प्रकार किया जाये। आज के धरने में डॉ. सचिन जैन, विपिन कुमार, अनुज सक्सैना, डा. संजीव सैनी, डा. राहुल, डा. अनिल कौशिक, डा देवेन्द्र, डा. सुदेश, एहतेषाम, कमल कुमार, अश्वनी कुमार, निर्मला आशा, रेणु आशा, ममता आषा, सपना आषा, मीनाक्षी आषा, रूबी आषा, मोहित, रवि कुमार, तरूण शर्मा, देवेन्द्र कुमार, सलीम अहमद, शशांक त्यागी, मणीकान्त त्यागी, मोनिका एएनएम, प्रियंका सहित समस्त एएनएम, समस्त आषा, समस्त फार्मासिस्ट, समस्त वार्डब्वाय, समस्त कम्पयूटर आपरेटर आदि षामिल रहे।
जालौन, 2 जुलाई . जालौन में खाकी वर्दी का बल्ले बल्ले डांस सोशल Media में जमकर वायरल हो रहा है. वर्दी पहनकर डीजे की धुन पर डांस करते हुए वीडियो जैसे ही सोशल Media पर वायरल हुआ तो Police महकमे में हड़कंप मच गया. वही अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, जांच की जाएगी. उक्त मामला जालौन कोतवाली परिसर का है. यहां पर कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक शिव भूषण वर्मा 30 जून को Police विभाग से सेवानिवृत्त हो गए थे. उनके सेवा निवृत्त होने के मौके पर Policeकर्मियों ने कोतवाली में पार्टी रखी और इस रिटायरमेंट पार्टी में Police के आला अधिकारी भी मौजूद रहे. पार्टी में डीजे की धुन की शुरुआत हुई तो Policeकर्मी अपने पैर नहीं रोक सके और कोतवाली परिसर में जमकर डीजे की धुन पर नाच गाना हुआ. रिटायरमेंट पार्टी के दौरान क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार गौतम व कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक के साथ अन्य स्टाफ भी मौजूद रहे. आला अधिकारियों ने उपनिरीक्षक के रिटायरमेंट होने पर बधाई दी और उनके कार्यों की सराहना भी की. कार्यक्रम के समापन के बाद Police कर्मियों के द्वारा डीजे की धुन पर डांस शुरू हुआ जिसमें कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक समीर कुमार सहित अन्य Policeकर्मी वर्दी में फिल्मी गानों की धुन पर डांस करते हुए नजर आए. Policeकर्मियों का डांस करते हुए वीडियो सोशल Media पर जमकर वायरल हुआ जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच करने की बात कही है.
जालौन, दो जुलाई . जालौन में खाकी वर्दी का बल्ले बल्ले डांस सोशल Media में जमकर वायरल हो रहा है. वर्दी पहनकर डीजे की धुन पर डांस करते हुए वीडियो जैसे ही सोशल Media पर वायरल हुआ तो Police महकमे में हड़कंप मच गया. वही अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, जांच की जाएगी. उक्त मामला जालौन कोतवाली परिसर का है. यहां पर कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक शिव भूषण वर्मा तीस जून को Police विभाग से सेवानिवृत्त हो गए थे. उनके सेवा निवृत्त होने के मौके पर Policeकर्मियों ने कोतवाली में पार्टी रखी और इस रिटायरमेंट पार्टी में Police के आला अधिकारी भी मौजूद रहे. पार्टी में डीजे की धुन की शुरुआत हुई तो Policeकर्मी अपने पैर नहीं रोक सके और कोतवाली परिसर में जमकर डीजे की धुन पर नाच गाना हुआ. रिटायरमेंट पार्टी के दौरान क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार गौतम व कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक के साथ अन्य स्टाफ भी मौजूद रहे. आला अधिकारियों ने उपनिरीक्षक के रिटायरमेंट होने पर बधाई दी और उनके कार्यों की सराहना भी की. कार्यक्रम के समापन के बाद Police कर्मियों के द्वारा डीजे की धुन पर डांस शुरू हुआ जिसमें कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक समीर कुमार सहित अन्य Policeकर्मी वर्दी में फिल्मी गानों की धुन पर डांस करते हुए नजर आए. Policeकर्मियों का डांस करते हुए वीडियो सोशल Media पर जमकर वायरल हुआ जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच करने की बात कही है.
चर्चा में क्यों? 8 जुलाई, 2022 को एनएचएआई के परियोजना निदेशक नुसरतुल्लाह ने बताया कि एफिल टॉवर की तर्ज पर प्रयागराज में गंगा किनारे निर्माणाधीन सिक्स लेन पुल के टॉवर पर रिवर आर्ट गैलरी बनाई जाएगी। इसका प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेज दिया गया है। - यह देश की इकलौती ऐसी रिवर गैलरी होगी, जहां कुंभ और प्रयागराज की संस्कृति की छटा से देश-दुनिया के सैलानी सीधा साक्षात्कार कर सकेंगे। इस रिवर गैलरी में प्रयागराज के अतिरित्त नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में लगने वाले कुंभ की छटा को भी दिखाया जाएगा। - प्रयागराज में प्रवेश करने से पूर्व ही सैलानी इस गैलरी में आकर आध्यात्मिक नगरी की संस्कृति और विरासत के साथ ही कला की झलक ले सकेंगे। शंकराचार्यों और अखाड़ों के नागा संन्यासियों की पेंटिंग और उनकी भत्ति-भावना और ध्यान-तप आदि से भी पर्यटक यहाँ परिचित हो सकेंगे। - फाफामऊ में दो हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 10 किमी. लंबे सिक्स लेन सेतु का निर्माण कार्य वर्ष 2025 में आयोजित होने वाले महाकुंभ से पूर्व ही पूरा कर लिया जाएगा। - इस रिवर आर्ट गैलरी में पहुंचने के लिए दोनों तरफ कैप्सूल लिफ्ट लगाया जाएगा। गैलरी के दूसरी तरफ एक रिवाल्विंग रेस्तरां बनाने का भी प्रस्ताव है।
चर्चा में क्यों? आठ जुलाई, दो हज़ार बाईस को एनएचएआई के परियोजना निदेशक नुसरतुल्लाह ने बताया कि एफिल टॉवर की तर्ज पर प्रयागराज में गंगा किनारे निर्माणाधीन सिक्स लेन पुल के टॉवर पर रिवर आर्ट गैलरी बनाई जाएगी। इसका प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेज दिया गया है। - यह देश की इकलौती ऐसी रिवर गैलरी होगी, जहां कुंभ और प्रयागराज की संस्कृति की छटा से देश-दुनिया के सैलानी सीधा साक्षात्कार कर सकेंगे। इस रिवर गैलरी में प्रयागराज के अतिरित्त नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में लगने वाले कुंभ की छटा को भी दिखाया जाएगा। - प्रयागराज में प्रवेश करने से पूर्व ही सैलानी इस गैलरी में आकर आध्यात्मिक नगरी की संस्कृति और विरासत के साथ ही कला की झलक ले सकेंगे। शंकराचार्यों और अखाड़ों के नागा संन्यासियों की पेंटिंग और उनकी भत्ति-भावना और ध्यान-तप आदि से भी पर्यटक यहाँ परिचित हो सकेंगे। - फाफामऊ में दो हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन दस किमी. लंबे सिक्स लेन सेतु का निर्माण कार्य वर्ष दो हज़ार पच्चीस में आयोजित होने वाले महाकुंभ से पूर्व ही पूरा कर लिया जाएगा। - इस रिवर आर्ट गैलरी में पहुंचने के लिए दोनों तरफ कैप्सूल लिफ्ट लगाया जाएगा। गैलरी के दूसरी तरफ एक रिवाल्विंग रेस्तरां बनाने का भी प्रस्ताव है।
- 3 min ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - 24 min ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! सन्नी का दावा. . . हर हालत में बॉलीवुड क्वीन बन कर रहूंगी. . जब इस बारे में सन्नी लियोन से पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि वह बॉलीवुड में अपनी धाक जमाने आई हैं। इसलिए वो अपनी फिल्मों में और मेहनत कर रही है साथ ही वो हिंदी सीखने की भी कोशिश कर रही हैं। अपने करियर में आये इतने बड़े जंप के बार में सन्नी ने कहा कि मेरे लिए यह उछाल से परे है। यह जो कुछ हो रहा है, एक उन्माद है। जो कुछ चल रहा है, उससे मैं अविश्वसनीय रूप से खुश हूं। काम करके और लोगों से इतना सहयोग मिलता देखकर खुश हूं। अपने आयटम नंबरों के बारे में सन्नी लियोन ने कहा कि वो कभी किसी चीज से परहेज नहीं करती। . . टी-सीरीज के साथ उनका एक अच्छा संबंध है और जब उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने उनके साथ मेरे संबंध के आधार पर 'हां' कहा और गाना भी कातिलाना था। सन्नी ने यह बात आज रिलीज हो रही 'हेटस्टोरी 2' के हिट आयटम नंबर पिंक लिप्स के के कारण कही। फिलहाल सन्नी इन दिनों बॉलीवुड और टॉलीवुड के नामी-गिरामी लोगों के साथ काम कर रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत और कोशिश उन्हें कामयाबी के शिखर पर लाकर ही दम लेगी। इसलिए उन्होंने कहा कि एक दिन मैं भी बॉलीवुड क्वीन बनकर ही रहूंगी। Ankita Lokhande की बला से खूबसूरत तस्वीरें वायरल, फैंस बोले- 'संजय लीला भंसाली के फिल्म की हीरोईन लग रही हैं'
- तीन मिनट ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - चौबीस मिनट ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! सन्नी का दावा. . . हर हालत में बॉलीवुड क्वीन बन कर रहूंगी. . जब इस बारे में सन्नी लियोन से पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि वह बॉलीवुड में अपनी धाक जमाने आई हैं। इसलिए वो अपनी फिल्मों में और मेहनत कर रही है साथ ही वो हिंदी सीखने की भी कोशिश कर रही हैं। अपने करियर में आये इतने बड़े जंप के बार में सन्नी ने कहा कि मेरे लिए यह उछाल से परे है। यह जो कुछ हो रहा है, एक उन्माद है। जो कुछ चल रहा है, उससे मैं अविश्वसनीय रूप से खुश हूं। काम करके और लोगों से इतना सहयोग मिलता देखकर खुश हूं। अपने आयटम नंबरों के बारे में सन्नी लियोन ने कहा कि वो कभी किसी चीज से परहेज नहीं करती। . . टी-सीरीज के साथ उनका एक अच्छा संबंध है और जब उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने उनके साथ मेरे संबंध के आधार पर 'हां' कहा और गाना भी कातिलाना था। सन्नी ने यह बात आज रिलीज हो रही 'हेटस्टोरी दो' के हिट आयटम नंबर पिंक लिप्स के के कारण कही। फिलहाल सन्नी इन दिनों बॉलीवुड और टॉलीवुड के नामी-गिरामी लोगों के साथ काम कर रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत और कोशिश उन्हें कामयाबी के शिखर पर लाकर ही दम लेगी। इसलिए उन्होंने कहा कि एक दिन मैं भी बॉलीवुड क्वीन बनकर ही रहूंगी। Ankita Lokhande की बला से खूबसूरत तस्वीरें वायरल, फैंस बोले- 'संजय लीला भंसाली के फिल्म की हीरोईन लग रही हैं'
भारतीय कुप्रथाओं में एक बहुत बड़ी और प्रचलित कुप्रथा दहेज प्रथा (Dowry System) है. आजादी से आज तक हम कई कुप्रथाओं से लड़े हैं और इन कुप्रथाओं को हमारे समाज से पूरी तरह हटाने में कामयाब भी रहे हैं. पर दहेज प्रथा (Dowry System) एक ऐसी प्रथा है जो आज भी हमारे समाज में बहुलता से प्रचलित है. आलम यह है कि आज यह अपने आधुनिक रूप में समाज को डस रही है. इसे हटाने के भारतीय कानून में इसके बदले हुए स्वरूप के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. परिणामतः यह धड़ल्ले से एक संक्रमित करने वाले रोग की तरह बड़ी तेजी से फैल रही है. हालांकि दहेज प्रथा (Dowry System) को लड़कियों, महिलाओं के शोषण के रूप में देखा जाता है, वस्तुतः हकीकत यह है कि यह महिलाओं से ज्यादा पुरुषों का शोषण है. 1947 में आजादी के बाद भारत की कमजोर अर्थव्यवस्था को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती थी. गरीबी, अशिक्षा बहुतायत थी पर उससे बड़ी समस्या थी तमाम तरह के अंधविश्वासों और कुप्रथाओं की गिरफ्त से देश को उबारना. इसके बिना विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. सबसे बड़ी बात थी कि इन कुप्रथाओं के केंद्र में महिलाएं थीं. सती प्रथा, दहेज प्रथा (Dowry System), बहुवविवाह के अलावे बाल विवाह में यूं तो दोनों पक्षों का शोषण था पर महिलाओं को इसका ज्यादा भुगतान करना पड़ता था. मुश्किल हुई पर साम-दाम-दंड-भेद किसी भी प्रकार इससे देश ने अधिकांशः मुक्ति पा ली. देश सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त हो गया पर दहेज प्रथा (Dowry System) आज भी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है. इसे हटाने के सरकारी प्रयासों के तहत 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 बनाया गया. इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी (304B) तथा 498ए(498A) के अंतर्गत दंड का भी प्रावधान किया गया है. कुछ समय के लिए इसमें कमी भी आई लेकिन अब वापस अपना स्वरूप बदलकर यह बड़ी सामाजिक समस्या बनकर उभर रही है. शादी के वक्त लड़की को उपहार स्वरूप नगद रुपए, गहने, उसके ससुराल पक्ष की पसंदानुसार अन्य वस्तुएं देना दहेज के अंतर्गत आता है. हालांकि इसके साथ उपहार शब्द जुड़ा है तथापि इसमें उपहार जैसा कुछ होता नहीं. उपहार के रूप में जबरदस्ती चीजें देने के लिए लड़की पक्ष को बाध्य किया जाता है. भले ही वे इसके लिए अक्षम ही क्यों न हों पर लड़की के सुखद भविष्य के लिए वे लड़के पक्ष की हर मांग पूरी करते है. यही स्थिति उपहार को दहेज की श्रेणी में रखती है. पहले वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष से शादी के लिए खुले आम दहेज की मांग की जाती थी. नगद रुपयों, वर एवं उसके घरवालों के लिए महंगे कपड़े, गहने आदि के अलावे गाडियां, वर पक्ष के रिश्तेदारों के लिए महंगे उपहार आदि का चलन आम था. दहेज निरोधी कानून के बाद जब यह दंडात्मक अपराध की श्रेणी में आने लगा तो कुछ समय के लिए दहेज प्रथा (Dowry System) में कमी आई. पर आधुनिक समाज में दहेज प्रथा (Dowry System) नए स्वरूप में खुलेआम चल रही है. पढ़े-लिखे सभ्य समाज में जितने ऊंचे पद पर लड़का होता है, उतने अधिक दहेज का चलन है. हालांकि अब यह दहेज के रूप में न मांगकर उपहार के रूप में ही अप्रत्यक्ष मांग का हिस्सा होता है. लड़की वालों से तो कई बार यहां तक कहा जाता है कि उन्हें दहेज नहीं चाहिए, बस शादी का खर्च उठा लें. इसके अलावे बातों-बातों में बिना कोई मांग किए वे इतनी अपेक्षाएं गिना देते हैं कि आज की तारीख में लड़की वालों के लिए लाखों का खर्च हो जाता है. वे कहने को तो बिना किसी मांग के अपनी खुशी से लड़की को उपहार स्वरूप उसके पति को गाड़ी, घर आदि दे रहे होते हैं पर वास्तव में यह लड़के वालों की अप्रत्यक्ष मांग होती है. इस प्रकार इस नए रंग-रूप में दहेज तेजी से फल-फूल रहा है. आज भी लड़कियों को पूरी तरह खुले रूप समाज स्वीकार नहीं कर पाया है. लड़कों की तुलना में लड़कियों की कम संख्या इस बात का सबूत है. हालांकि पढ़े-लिखे उच्च आय वाले परिवारों में स्थिति बदल रही है पर निम्न और मध्यम वर्ग में स्थिति बहुत हद तक वहीं है. कन्या-भ्रूण हत्या भी पूरी तरह बंद नहीं हुई है. जिन परिवारों में कन्या भ्रूण हत्या नहीं भी होती है वहां भी लड़कियों के जन्म पर लड़कों की भांति खुश होने वाले परिवारों की संख्या बहुत कम है. इसकी मूल वजह दहेज प्रथा (Dowry System) है. लड़की के जन्म के साथ ही उसकी शादी की चिंता परिवार को सताने लगती है. अब तो स्थिति यह है कि लड़का भी पढ़ी-लिखी लड़की ढूंढ़ता है तो उसे पढ़ाने का खर्च भी है. इस तरह समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने में दहेज प्रथा (Dowry System) बहुत बुरा प्रभाव डाल रही है. ऐसा माना जाता है कि दहेज प्रथा (Dowry System) महिलाओं पर अत्याचार है. एक तो लड़की शादी कर लड़के के घर जाती है, उस पर भी उसके बदले दहेज की मांग की जाती है. पर यह एक तरफा सोच है. हकीकत में देखें तो दहेज पुरुषों के लिए महिलाओं से ज्यादा अत्याचारी है. दहेज की मांग लड़की लेने के बदले नहीं, अपने बेटे की कमाई, उसकी उच्च स्थिति के आधार पर की जाती है. एक प्रकार से लड़कों को शादी में लड़की वालों को बेच दिया जाता है. सही मायनों में देखें तो लड़कों को दहेज के रूप में बिक्री का सामान बना दिया जाता है, 'जो ज्यादा पैसा देगा, लड़का उसी का होगा'. अब या तो लड़के इस बात को समझ नहीं पाते या शायद पैसों की चाह में बिक जाते हैं. दहेज प्रथा (Dowry System), प्रथा के नाम पर एक बहुत क्रूर उपहार संरचना है. इसने शादी जैसे पवित्र रिश्ते को तो खरीद-फरोख्त की जगह बना दी है. लड़कियों की स्थिति को दोयम दर्जा देने में भी इसका बड़ा हाथ है. दहेज के नाम पर कई शादियां टिक नहीं पातीं. ऐसे में यह शादी की संस्था में विश्वसनीयता को कम करने का कारक रहा है. इस पर समाज को फिर से सोचना होगा. हालांकि आज के लड़के-लड़कियां इसके लिए जागरुक हैं. कई लड़कियां दहेज मांगने वाले परिवार में शादी करने से मना कर देती हैं. कई लड़के दहेज के खिलाफ रहते हैं पर परिवार के सामने झुक जाते हैं. इस जगह नई पीढ़ी के लड़के-लड़कियों को ज्यादा मजबूती से काम करने की आवश्यकता है. साथ ही लड़की पक्ष भी अगर लड़कियों की केवल शादी की बजाय उनेके सुखद भविष्य की सोचें और ऐसे रिश्तों से इनकार कर दें तो निश्चय ही परिवर्तन आएगा. Read:
भारतीय कुप्रथाओं में एक बहुत बड़ी और प्रचलित कुप्रथा दहेज प्रथा है. आजादी से आज तक हम कई कुप्रथाओं से लड़े हैं और इन कुप्रथाओं को हमारे समाज से पूरी तरह हटाने में कामयाब भी रहे हैं. पर दहेज प्रथा एक ऐसी प्रथा है जो आज भी हमारे समाज में बहुलता से प्रचलित है. आलम यह है कि आज यह अपने आधुनिक रूप में समाज को डस रही है. इसे हटाने के भारतीय कानून में इसके बदले हुए स्वरूप के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. परिणामतः यह धड़ल्ले से एक संक्रमित करने वाले रोग की तरह बड़ी तेजी से फैल रही है. हालांकि दहेज प्रथा को लड़कियों, महिलाओं के शोषण के रूप में देखा जाता है, वस्तुतः हकीकत यह है कि यह महिलाओं से ज्यादा पुरुषों का शोषण है. एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आजादी के बाद भारत की कमजोर अर्थव्यवस्था को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती थी. गरीबी, अशिक्षा बहुतायत थी पर उससे बड़ी समस्या थी तमाम तरह के अंधविश्वासों और कुप्रथाओं की गिरफ्त से देश को उबारना. इसके बिना विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. सबसे बड़ी बात थी कि इन कुप्रथाओं के केंद्र में महिलाएं थीं. सती प्रथा, दहेज प्रथा , बहुवविवाह के अलावे बाल विवाह में यूं तो दोनों पक्षों का शोषण था पर महिलाओं को इसका ज्यादा भुगतान करना पड़ता था. मुश्किल हुई पर साम-दाम-दंड-भेद किसी भी प्रकार इससे देश ने अधिकांशः मुक्ति पा ली. देश सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त हो गया पर दहेज प्रथा आज भी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है. इसे हटाने के सरकारी प्रयासों के तहत एक हज़ार नौ सौ इकसठ में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ बनाया गया. इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ चारबी तथा चार सौ अट्ठानवेए के अंतर्गत दंड का भी प्रावधान किया गया है. कुछ समय के लिए इसमें कमी भी आई लेकिन अब वापस अपना स्वरूप बदलकर यह बड़ी सामाजिक समस्या बनकर उभर रही है. शादी के वक्त लड़की को उपहार स्वरूप नगद रुपए, गहने, उसके ससुराल पक्ष की पसंदानुसार अन्य वस्तुएं देना दहेज के अंतर्गत आता है. हालांकि इसके साथ उपहार शब्द जुड़ा है तथापि इसमें उपहार जैसा कुछ होता नहीं. उपहार के रूप में जबरदस्ती चीजें देने के लिए लड़की पक्ष को बाध्य किया जाता है. भले ही वे इसके लिए अक्षम ही क्यों न हों पर लड़की के सुखद भविष्य के लिए वे लड़के पक्ष की हर मांग पूरी करते है. यही स्थिति उपहार को दहेज की श्रेणी में रखती है. पहले वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष से शादी के लिए खुले आम दहेज की मांग की जाती थी. नगद रुपयों, वर एवं उसके घरवालों के लिए महंगे कपड़े, गहने आदि के अलावे गाडियां, वर पक्ष के रिश्तेदारों के लिए महंगे उपहार आदि का चलन आम था. दहेज निरोधी कानून के बाद जब यह दंडात्मक अपराध की श्रेणी में आने लगा तो कुछ समय के लिए दहेज प्रथा में कमी आई. पर आधुनिक समाज में दहेज प्रथा नए स्वरूप में खुलेआम चल रही है. पढ़े-लिखे सभ्य समाज में जितने ऊंचे पद पर लड़का होता है, उतने अधिक दहेज का चलन है. हालांकि अब यह दहेज के रूप में न मांगकर उपहार के रूप में ही अप्रत्यक्ष मांग का हिस्सा होता है. लड़की वालों से तो कई बार यहां तक कहा जाता है कि उन्हें दहेज नहीं चाहिए, बस शादी का खर्च उठा लें. इसके अलावे बातों-बातों में बिना कोई मांग किए वे इतनी अपेक्षाएं गिना देते हैं कि आज की तारीख में लड़की वालों के लिए लाखों का खर्च हो जाता है. वे कहने को तो बिना किसी मांग के अपनी खुशी से लड़की को उपहार स्वरूप उसके पति को गाड़ी, घर आदि दे रहे होते हैं पर वास्तव में यह लड़के वालों की अप्रत्यक्ष मांग होती है. इस प्रकार इस नए रंग-रूप में दहेज तेजी से फल-फूल रहा है. आज भी लड़कियों को पूरी तरह खुले रूप समाज स्वीकार नहीं कर पाया है. लड़कों की तुलना में लड़कियों की कम संख्या इस बात का सबूत है. हालांकि पढ़े-लिखे उच्च आय वाले परिवारों में स्थिति बदल रही है पर निम्न और मध्यम वर्ग में स्थिति बहुत हद तक वहीं है. कन्या-भ्रूण हत्या भी पूरी तरह बंद नहीं हुई है. जिन परिवारों में कन्या भ्रूण हत्या नहीं भी होती है वहां भी लड़कियों के जन्म पर लड़कों की भांति खुश होने वाले परिवारों की संख्या बहुत कम है. इसकी मूल वजह दहेज प्रथा है. लड़की के जन्म के साथ ही उसकी शादी की चिंता परिवार को सताने लगती है. अब तो स्थिति यह है कि लड़का भी पढ़ी-लिखी लड़की ढूंढ़ता है तो उसे पढ़ाने का खर्च भी है. इस तरह समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने में दहेज प्रथा बहुत बुरा प्रभाव डाल रही है. ऐसा माना जाता है कि दहेज प्रथा महिलाओं पर अत्याचार है. एक तो लड़की शादी कर लड़के के घर जाती है, उस पर भी उसके बदले दहेज की मांग की जाती है. पर यह एक तरफा सोच है. हकीकत में देखें तो दहेज पुरुषों के लिए महिलाओं से ज्यादा अत्याचारी है. दहेज की मांग लड़की लेने के बदले नहीं, अपने बेटे की कमाई, उसकी उच्च स्थिति के आधार पर की जाती है. एक प्रकार से लड़कों को शादी में लड़की वालों को बेच दिया जाता है. सही मायनों में देखें तो लड़कों को दहेज के रूप में बिक्री का सामान बना दिया जाता है, 'जो ज्यादा पैसा देगा, लड़का उसी का होगा'. अब या तो लड़के इस बात को समझ नहीं पाते या शायद पैसों की चाह में बिक जाते हैं. दहेज प्रथा , प्रथा के नाम पर एक बहुत क्रूर उपहार संरचना है. इसने शादी जैसे पवित्र रिश्ते को तो खरीद-फरोख्त की जगह बना दी है. लड़कियों की स्थिति को दोयम दर्जा देने में भी इसका बड़ा हाथ है. दहेज के नाम पर कई शादियां टिक नहीं पातीं. ऐसे में यह शादी की संस्था में विश्वसनीयता को कम करने का कारक रहा है. इस पर समाज को फिर से सोचना होगा. हालांकि आज के लड़के-लड़कियां इसके लिए जागरुक हैं. कई लड़कियां दहेज मांगने वाले परिवार में शादी करने से मना कर देती हैं. कई लड़के दहेज के खिलाफ रहते हैं पर परिवार के सामने झुक जाते हैं. इस जगह नई पीढ़ी के लड़के-लड़कियों को ज्यादा मजबूती से काम करने की आवश्यकता है. साथ ही लड़की पक्ष भी अगर लड़कियों की केवल शादी की बजाय उनेके सुखद भविष्य की सोचें और ऐसे रिश्तों से इनकार कर दें तो निश्चय ही परिवर्तन आएगा. 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कर्मणो (१।३।१३) से आत्मनेपद, चिण्भावकर्मणो (३१११६६) से चिणू, स्यसिसी० (६२४१६२) से चिण्वद्भाव इन चारों प्रयोजनोवाले उदाहरण ऊपर सस्कृतभाग में दिखा दिये है ।। सूत्र मे 'कर्मणा' शब्द कर्मस्थनिया का वाचक है । इसी से जाना जाता हूं कि धातुयें चार प्रकार की होती है - (१) कमस्थ कियक, (२) कर्मस्यभावक, (३) तुस्थक्रिपक, (४) तूं स्थभावक । जिन धातुओं को किया (घ्यापार) कर्म में हो स्थित रहे, वह कर्मस्यक्रियक हैं। जैसे- 'देवदस लकडी फाडता है, यहाँ फटनारूपी व्यापार लकडी- रुर्म मे हो रहा है, न कि कर्ता देवदत्त मे । सो फाडना ( भिनत्ति ) किया कर्मस्य है। जिनका धारवयं कर्म मे हो, वह कर्मस्थभावक हैं । यथा - 'अग्नि घट पचति' (प्रग्नि घट को पकाता है) । यहाँ पकनारूपी धात्वर्थं कर्म घट मे है, सत पकता क्रिया कर्मस्यभावक है। इसी प्रकार जिन धातुओं का व्यापार कर्ता मे स्थित हो, वह कर्त स्थायिक है। यथा- 'देवदत्त गांव को जाता है, ' यहाँ जानारूपो व्यापार कर्ता मे हूँ, न कि कर्म मे 4 इसी प्रकार कर्ता में स्थित घात्वर्थे को कतु स्वभावक कहते है। यथा - 'देवदत्त प्रास्ते - देवदत्त बैठता है। यहाँ बैठना रूपो धात्वर्य देववत्त में है ।। सामान्यरूप में किया एवं भाव में इतना हो प्रप्तर माना गया है कि- "अपरिस्प दनसाधनसाध्यो धात्वर्थो भाव "प्रर्थात जिसमें हिलना जुलना= चेष्टा न हो, ऐसे साधनों से सिद्ध करने योग्य धात्वयं भाव है। तया ' सपरिस्पन्दनसाधनसाध्यस्तु किया" अर्थात् जिसमे चेष्टा हिलना जुलना पाया जावे, ऐसे साधनो से सिद्ध करने योग्य धात्वय का नाम किया है । इस प्रकार जहाँ कुछ क्रियाकृत विशेष हो, वह कमस्यकिक और कस्यक्रियक, जहाँ न हो वह कर्मस्वभावक और तुंभावक है, जैसा कि उदाहरणों से स्पष्ट है। इस तरह सूत्र भे 'कर्मणा' शब्द 'कमस्यक्रिया का वाचक होने से यह निष्कर्ष निकला कि कर्मवद्भाव कर्मस्य क्रियक एव फर्मस्थभावक को हो होता है तूंस्थयिक एव पतूंस्यभावक को नहीं होता । यहाँ 'तुल्यत्रिय' मे तुल्य शब्द सादृश्य प्रयं का वाचक है, न कि साधारण प्रर्य का । सो सून का प्रये हुआ - जिस कर्म के कर्ता बन जाने पर भी (अर्याईत उदाहरण मे काष्ठ पहले कम था उसके कर्ता बन जाने पर भो) किया तद्वत लक्षित हो, जैसी कि कर्मावस्या मेथी, ऐसे सुल्यक्रियावाले कर्ता को कमंवद्भाव = कर्म के सदृश कार्य होता है। उदाहरण मे जो भेदनक्रिया काठ को कर्मावस्था मे थी, वही भेदनक्रिया काष्ठ के कर्ता बन जाने पर भी हैं, मत तुल्यक्रियत्व है हो । तदारसम्बन्धी कार्यों में ही यह कर्मवद्भाव होता है । अत फर्मवाच्य में कहे हुए लकारसम्बधी चार कार्य कमकर्ता में भी हो जाते हैं यहो कर्मवद्भाव का प्रयोजन है । यहां से 'कर्मवत्' को अनुवृत्ति ३।१।२० तक जायेगो ॥ तपस्तव कर्मकस्यैव ।।३।११८८।। पादः ] तप ६॥१॥ तप कर्मकस्य ६॥ ११॥ एव अ० ॥ स० -तप कर्म यस्य स तप. वर्मक, तस्य, बहुव्रीहि । प्रनु० - कर्मवत् ॥ अर्थ -'तप सन्तापे' अस्य घातो. कर्त्ता कर्मवद्भवति, स च तप कर्मकस्यैव नान्यकर्मकस्य ।। तुल्यक्रियाभावात्पूर्वेणाऽप्राप्त वर्मंवद्भावो विधीयते ।। उदा० - तप्यते तपस्तापस ऋतप्त तपस्तापस ।। भापार्थ - [ तप ] 'तप सत्तापे' धातु के कर्ता को कर्मवद्भाव हो जाता है, यदि वह तप धातु [ तप कर्मकस्य ] तप कर्मवाली [एव ] हो हो, श्रय किसो कर्मवाली न हो । यदि सम्मक धातुओं को कमबदभाव हो, तो तप को हो हो, ऐसा द्वितीय नियम भी महाभाष्य में इस सूत्र के योग विभाग से निकाला है । सत्याचरणादि तप कर्म हैं । तपासि तापस तपन्ति ( तपस्वी को सदाचारादि व्रत के पालनरूपी तपकर्म दुख दे रहे है) । यहाँ तप धातु का तपाँसि कर्त्ता, तथा तापसम् कर्म है। यही तापसम् कर्म जब पूर्वोक्त रीति से कर्ता बन जाता है, तो तप्यते तपस्तापस ( तपस्वी स्वयमेव स्वर्गादि कामना के लिये तप को प्राप्त करता है) यहाँ कमवद्भाव हो जाता है । कर्मावस्या मे "तपत्ति' का अर्थ "दुख देना" है, तथा कर्मकर्ता बन जाने पर प्राप्त होता है। अत तुल्यक्रियत्व सक्रियत्व न होने से = पूर्व सूत्र से कर्मवदभाव प्राप्त नहीं था, यह प्रप्राप्त विधान है । 'तप्यते' मे कर्मबद्भाव होने से पूर्ववत् यक और आत्मनेपद हो गये हैं । तथा 'अतप्त' में चिण भादक्रमण ( ३१११६६ ) से प्राप्त चिणु का तपोऽनुतापेच (३१११६५ ) से निषेध हो जाने से सिच ही हो जाता है, जिसका भयो भलि (८२२६) से लोप हो जाता है। शेष सिद्धियां पूर्ववत् ही हैं । न दुहस्तुनमा यविचणौ ।।३।१।८९॥ २ न प्र० ।। दुहस्नुनमाम् ६।३।। पत्रिचणी ११२३॥ स०-दुहदच स्नुश्च नम् च दुहस्नुनम तेषा, इतरेतरयोगद्वन्द्व यक च चिश् च यक्विणो, इतरेतरयोगद्वन्द्व ।। अनु० - वमवत् ॥ अयं - दुह स्नु नम इत्येतेया घातूना कमंतरि कर्मवद्भावावदिष्टौ यक्षिणी न भवत ।। दुहेरनेन यक प्रतिषिध्यते, चिण् तु दुहश्च (३१११६३ ) इत्यनेन पूवमेव विभाषित ॥ उदा० - दुग्धे गौ स्वयमेव, धदुग्ध गौ. स्वयमेव, अदोहि गौ स्वयमेव । प्रस्तुते शोणित स्वयमेव प्रास्नोष्ट शोणित स्वयमेव । नमते दण्ड स्वयमेव, अनस्त दण्ड स्वयमेव ।। भाषार्थ - [ दुहस्नुनमाम ] दुह, स्नु, नम इन धातुप्रो को कर्मवद्भाव मे कहे हुये कार्य [यविचणी] यक् और चिण् [न] नहीं होते हैं ।। कर्मवदमाव = कर्मकर्ता में यक चिणू, भात्मनेपद, चिण्वदभाव यह चार कार्य होते है । उनमें से कु और चित्र का प्रकृत सूत्र से प्रतिषेध हो जाने से यहां प्रात्मनेपद और चिण्वदभाव ही होता है । चिण्वद्भाव भी प्रजत (६२४१६२ हो) धद्ध को हो वहा है। प्रत दुह और नम् के भजन्त भद्भ न होने से इनको चिण्वभाव नहीं होता। केवल जो कि भजन है, उसे पक्ष मे चिनद्भाव होकर लुङ, लकार में 'प्रास्ताविष्ट" रूप भी बनता है " 'या दोग्धि पय' यहाँ गो कर्म है । जब गो स्वयमेव दोहन किया कराने को इच्छा से खड़ी हो जाती है, तब सौर्यातिशय विवक्षा में गां कर्म कर्ता बन जाता है । उस अवस्था में कर्म कर्मणा० (३१८७) से फर्मववभाव होकर सब कार्य प्राप्त थे, उन्हें निषेध कर दिया है। इसी प्रकार औरों में भी समझें ॥ दुह धातु को वर्मक्तों में केवल यक का निषेध हो इस सूत्र से होता है चिण तो दुहश्च (३॥१॥६३) से विकल्प करके प्राप्त हो है । यक का निषेध होने पर यथाप्राप्त शव हो जाता है, तथा चिण् का निषेध होने पर सिच हो जाता हूँ ॥ कुषिरजो प्राचा श्यम्परस्मैपद च ।।३।१।२०।। कुपिरजो ६।२५ प्राचाम ६३॥ श्यन १॥१॥ परस्मैपदम् १॥१॥ च १० ।। - कुपिश्च रज च कुपिरजो, तयो कुपिरजो इतरेतरयोगद्वन्द्व ॥ प्रनु - कर्मवत्, घातो. प्रत्यय परश्च ॥ धर्म कुप निष्क', 'रज रागे अनयोर्घाखो कर्म क्तंरि व्यन् प्रत्ययो भवति, परस्मैपद च प्राचामाचार्याणा मतेन ॥ कर्मवदमावेन यवप्राप्त तस्यापवाद इयन्, एवमात्मनेपदस्थापबाद परस्मैपदम प्राचा ग्रहण विकल्पार्थम् अन्येषा मते यगात्मनेपदे भवन एव । उदात्रु यति पाद स्वयमेव । राज्य वस्त्र स्वयमेव । श्रयेषा मते - कुष्यते, रज्यते ॥ भाषाय - [कुषिरजो ] बुध और रञ्ज पातु को कर्मववभाव में[ दयन् ] श्यन प्रत्यय [च] और [परस्मैपदम् ] परस्मपद होता है [प्राचाम] प्राचीन भाषाय के मत हो ॥ कर्मवत्कर्मणा तुल्यक्रिय (३०१२८७) से कर्मवद्भाव होकर कर्मकर्ता में यकू और मात्मनेपद प्राप्त था, उसका प्रपवाद यह इयत् और परस्मैपद का विधान हूँ ।। 'भाचाम् ' ग्रहण यहाँ विकल्पार्थ है, अर्थात् प्राचीन साधायों के मन में इयन और परस्मैपद होगा भयों के मत में यकू एवं आत्मनेपद ही होगा ।। उदा० - कुष्पति पाद स्वयमेव (पर स्वम खिचता है)। रज्यति वस्त्र स्वयमेव ( कपड़ा स्वय रेंगा जा रहा ) है। पक्ष में कुष्यते, रज्यते । सिद्धियों में कुछ भी विशेष नहीं ।। घातो ५॥१॥ धर्मश्रा तृतीयाध्यायपरिसमाप्ते (३१४१११७) घातोरित्ययमधिकारो वेदितव्य ।। तव्यत्तव्थानीयर (३१११६६) इत्यादीनि वक्ष्यति तानि धातोरेव विधास्यन्ते ।। भाषायें - यहाँ से [घातो ] धातो का अधिकार तृतीयाध्याय को समाप्तिपर्यन्त जायेगा, ऐसा जानना चाहिये ।। प्रत तृतोपाध्याय को समाप्तिपर्यन्त तथ्यत् सव्य नीयर् थावि जो प्रत्यय कहेंगे, वे धातु से ही होंगे । तत्रोपपद सप्तमीस्थम् ।।३।१।२।। तत्र ग्र० ३। उपपदम १॥१॥ सप्तमीस्थम् ११॥ समीपोच्चारित पदम् उपपदम् । स० - सप्तम्या विभक्तो तिष्ठतीति सप्तमीस्थम्, तत्पुरुष । अनु०घाँतो ॥ स - = एतस्मिन् धात्वधिकारे सप्तमीस्थम् = सप्तमीनिर्दिष्ट यस्पद तदुपपदसज्ञ भवति ॥ उदा० - कुम्भकार नगरकार ॥ भाषायें - [तत्र] इस धातु के अधिकार मे जो [ सप्तमीस्थम् ] सप्तमो विभक्ति से निर्दिष्ट पद हैं, उनको [उपपदम् ] उपपदसज्ञा होती है । कर्मण्यण् ( शरा१ ) से 'कर्मणि' सप्तमीनिदिष्ट पद है, तो इसको उपपद सज्ञा होने से 'कर्म उपपद रहते ऐसा सूत्र का अर्थ बनकर, उपपदमतिङ् (२१२११६) से समास हो गया है ।। सप्तमोनिदिष्ट पद कहीं उपपदसशक, तथा कहीं अर्थवाचक भी हैं, सो यह भेव तत्तत् सूत्र मे ही विदित होगा । सिद्धियाँ २।२।११ सूत्र मे देखें । यहां से 'त' को अनुवृत्ति ३॥ १॥६४ तक जायेगो । कृतिङ् ।।३।१।६३॥ कृत् १॥ १॥ प्रतिङ् १।१।। स० - न तिङ् घतिड, नञ्तत्पुरुष ॥ मनु० - तत्र, घातो, प्रत्यय ॥ धर्म - मस्मिन् घावधिकारे तिङ भिन्ना प्रत्ययः कृत्सज्ञका भवन्ति ॥ उदा० --कर्ता, कारक । कर्त्तव्यम् ॥ भापार्य इस धातु के अधिकार मे [अतिङ ] तिङ् भिन्न जो प्रत्यय उनकी [कृत्] कृत्सना होती है ॥ कृत सज्ञा होने से कृत्तद्धित समासाश्च ( ११२१४६ ) से कृत् प्रत्ययात शब्दों को प्रातिपदिक सत्ता हो जाती है, जो कि अर्थवदधातु (१॥२॥ ४५ ) में 'अप्रत्यय ' निषेध करने से प्राप्त नहीं थी । एव कर्ता कारक में ण्वुलु तथा तृच् प्रत्यय भो कृत् सज्ञक होने से कतरि वृतू ( ३०४१६७ ) से कर्ता में हो जाते है ।। कर्ता, कारक की सिद्धि परि० २१११११,२ में देखें, तथा कर्त्तव्यम् को सिद्धि परि० ३।१।३ में देखें । बासरूपोऽस्त्रियाम् ॥ ३१ ६४।। वा प्र० ।। ग्रसरूपः १॥१॥ स्त्रियाम् ७ । १।। स० -- समान रूप यस्य स सरूप, बहुव्रीहि । न सरूप प्रसरूप नन्तपुर । नत्री, तस्या, नत्र - तस्पुरुष ।। प्रनु० -तत्र घातो प्रत्यय ॥ श्रयं श्रमियावधिवारे मसरूप -- असमानरूपोऽयवाद प्रत्ययो विकल्पेन बाघको भवति त्र्यधिकारविहितप्रत्यय वर्ज यित्वा ।। सर्वत्र अपवादैनित्यम् उत्सर्गा वाध्यन्ते इति नियम । तत्र योगवाद प्रत्यय स विकल्पेन बांधत्र स्यात् नतु नित्यम, एतदर्थं सूत्रमिदमारम्यते ॥ उदा०प्वुल्तू चौ (३। १॥१३३)उत्सगं सूत्रम् - "विशेषक, विक्षेप्ता", तस्य इगुपपत्ताप्रोकिर क ( ३ । १ । १३५) इत्ययमपवाद स विकल्सेन वाघको भवति - विक्षिप ॥ भाषायें इस धातु के अधिकार में [ असरूप ] ग्रसमानरूपवाले 'अपवाद प्रत्यय [वा] विकल्प से बाधक होते हैं [प्रस्त्रियाम् ] 'स्त्रो' अधिकार में विहित प्रत्ययो को छोड़कर ।। अपवादसूत्र उत्सर्गसूत्रों को नित्य हो बाधकर हो जाते हैं । श्रत विकल्प से बाधक हों, पक्ष मे प्रौत्सर्गिक प्रत्यय भी हो जायें, इसीलिये यह सूत्र बनाया है ।। डुल्चौ ( ३ । १ । १३३ ) यह उत्सर्गसूत्र है, तथा इगुपवज्ञा० ( ३११११३५ ) यह उसका अपवाद है । सो इगुपथ क्षिप धातु से क. प्रत्यक्ष भी हुआ, तथा ब्लुलू तूच् भी विकरूप से हो गये, क्योंकि ये परस्पर असरूप थे ॥ यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि अनुवधों को हटाकर परस्पर प्रत्ययो को प्रसरूपता देखनो होतो 'क' प्रत्यय धनुव परहित 'अ' है, तथा और तूच, वृ तथा तू हैं । सो पे परस्पर प्रसरूप = समानरूपवाले नहीं हैं । उदा० - दि. पक, विशेषना विक्षिप (विघ्न डालनेवाला) । वृत्या ११३।। धनु० - प्रत्यय ।। मयं - प्रधिकारोयम् । तुचौ (३११११३३) इनि यावत् ये प्रत्यया विधारूयते, ते कृत्यज्ञा भविष्यन्तीति वेदितव्यम् ॥ उदा० - गन्तब्यो ग्रामो देवदत्तस्य देवदत्र्त्तन वा ॥ भाषायें - यहाँ से प्राये नुचौ' (३।१।११३) सूत्र तक जो भी प्रत्यय कर्हेनें ये [कृत्या ]कृत्यसज्ञक होंगे, ऐसा अधिकार जानना चाहिये । गब्लू धासु से तथ्यय प्रत्यय हुआ है, जिसकी कृत्य सत्ता है। प्रत वृाना कतरि वा (२॥३॥ ७१ ) से देवदत्त में विकल्प
कर्मणो से आत्मनेपद, चिण्भावकर्मणो से चिणू, स्यसिसीशून्य से चिण्वद्भाव इन चारों प्रयोजनोवाले उदाहरण ऊपर सस्कृतभाग में दिखा दिये है ।। सूत्र मे 'कर्मणा' शब्द कर्मस्थनिया का वाचक है । इसी से जाना जाता हूं कि धातुयें चार प्रकार की होती है - कमस्थ कियक, कर्मस्यभावक, तुस्थक्रिपक, तूं स्थभावक । जिन धातुओं को किया कर्म में हो स्थित रहे, वह कर्मस्यक्रियक हैं। जैसे- 'देवदस लकडी फाडता है, यहाँ फटनारूपी व्यापार लकडी- रुर्म मे हो रहा है, न कि कर्ता देवदत्त मे । सो फाडना किया कर्मस्य है। जिनका धारवयं कर्म मे हो, वह कर्मस्थभावक हैं । यथा - 'अग्नि घट पचति' । यहाँ पकनारूपी धात्वर्थं कर्म घट मे है, सत पकता क्रिया कर्मस्यभावक है। इसी प्रकार जिन धातुओं का व्यापार कर्ता मे स्थित हो, वह कर्त स्थायिक है। यथा- 'देवदत्त गांव को जाता है, ' यहाँ जानारूपो व्यापार कर्ता मे हूँ, न कि कर्म मे चार इसी प्रकार कर्ता में स्थित घात्वर्थे को कतु स्वभावक कहते है। यथा - 'देवदत्त प्रास्ते - देवदत्त बैठता है। यहाँ बैठना रूपो धात्वर्य देववत्त में है ।। सामान्यरूप में किया एवं भाव में इतना हो प्रप्तर माना गया है कि- "अपरिस्प दनसाधनसाध्यो धात्वर्थो भाव "प्रर्थात जिसमें हिलना जुलना= चेष्टा न हो, ऐसे साधनों से सिद्ध करने योग्य धात्वयं भाव है। तया ' सपरिस्पन्दनसाधनसाध्यस्तु किया" अर्थात् जिसमे चेष्टा हिलना जुलना पाया जावे, ऐसे साधनो से सिद्ध करने योग्य धात्वय का नाम किया है । इस प्रकार जहाँ कुछ क्रियाकृत विशेष हो, वह कमस्यकिक और कस्यक्रियक, जहाँ न हो वह कर्मस्वभावक और तुंभावक है, जैसा कि उदाहरणों से स्पष्ट है। इस तरह सूत्र भे 'कर्मणा' शब्द 'कमस्यक्रिया का वाचक होने से यह निष्कर्ष निकला कि कर्मवद्भाव कर्मस्य क्रियक एव फर्मस्थभावक को हो होता है तूंस्थयिक एव पतूंस्यभावक को नहीं होता । यहाँ 'तुल्यत्रिय' मे तुल्य शब्द सादृश्य प्रयं का वाचक है, न कि साधारण प्रर्य का । सो सून का प्रये हुआ - जिस कर्म के कर्ता बन जाने पर भी किया तद्वत लक्षित हो, जैसी कि कर्मावस्या मेथी, ऐसे सुल्यक्रियावाले कर्ता को कमंवद्भाव = कर्म के सदृश कार्य होता है। उदाहरण मे जो भेदनक्रिया काठ को कर्मावस्था मे थी, वही भेदनक्रिया काष्ठ के कर्ता बन जाने पर भी हैं, मत तुल्यक्रियत्व है हो । तदारसम्बन्धी कार्यों में ही यह कर्मवद्भाव होता है । अत फर्मवाच्य में कहे हुए लकारसम्बधी चार कार्य कमकर्ता में भी हो जाते हैं यहो कर्मवद्भाव का प्रयोजन है । यहां से 'कर्मवत्' को अनुवृत्ति तीन।एक।बीस तक जायेगो ॥ तपस्तव कर्मकस्यैव ।।तीन।एक हज़ार एक सौ अठासी।। पादः ] तप छः॥एक॥ तप कर्मकस्य छः॥ ग्यारह॥ एव अशून्य ॥ सशून्य -तप कर्म यस्य स तप. वर्मक, तस्य, बहुव्रीहि । प्रनुशून्य - कर्मवत् ॥ अर्थ -'तप सन्तापे' अस्य घातो. कर्त्ता कर्मवद्भवति, स च तप कर्मकस्यैव नान्यकर्मकस्य ।। तुल्यक्रियाभावात्पूर्वेणाऽप्राप्त वर्मंवद्भावो विधीयते ।। उदाशून्य - तप्यते तपस्तापस ऋतप्त तपस्तापस ।। भापार्थ - [ तप ] 'तप सत्तापे' धातु के कर्ता को कर्मवद्भाव हो जाता है, यदि वह तप धातु [ तप कर्मकस्य ] तप कर्मवाली [एव ] हो हो, श्रय किसो कर्मवाली न हो । यदि सम्मक धातुओं को कमबदभाव हो, तो तप को हो हो, ऐसा द्वितीय नियम भी महाभाष्य में इस सूत्र के योग विभाग से निकाला है । सत्याचरणादि तप कर्म हैं । तपासि तापस तपन्ति । यहाँ तप धातु का तपाँसि कर्त्ता, तथा तापसम् कर्म है। यही तापसम् कर्म जब पूर्वोक्त रीति से कर्ता बन जाता है, तो तप्यते तपस्तापस यहाँ कमवद्भाव हो जाता है । कर्मावस्या मे "तपत्ति' का अर्थ "दुख देना" है, तथा कर्मकर्ता बन जाने पर प्राप्त होता है। अत तुल्यक्रियत्व सक्रियत्व न होने से = पूर्व सूत्र से कर्मवदभाव प्राप्त नहीं था, यह प्रप्राप्त विधान है । 'तप्यते' मे कर्मबद्भाव होने से पूर्ववत् यक और आत्मनेपद हो गये हैं । तथा 'अतप्त' में चिण भादक्रमण से प्राप्त चिणु का तपोऽनुतापेच से निषेध हो जाने से सिच ही हो जाता है, जिसका भयो भलि से लोप हो जाता है। शेष सिद्धियां पूर्ववत् ही हैं । न दुहस्तुनमा यविचणौ ।।तीन।एक।नवासी॥ दो न प्रशून्य ।। दुहस्नुनमाम् छः।तीन।। पत्रिचणी एक हज़ार एक सौ तेईस॥ सशून्य-दुहदच स्नुश्च नम् च दुहस्नुनम तेषा, इतरेतरयोगद्वन्द्व यक च चिश् च यक्विणो, इतरेतरयोगद्वन्द्व ।। अनुशून्य - वमवत् ॥ अयं - दुह स्नु नम इत्येतेया घातूना कमंतरि कर्मवद्भावावदिष्टौ यक्षिणी न भवत ।। दुहेरनेन यक प्रतिषिध्यते, चिण् तु दुहश्च इत्यनेन पूवमेव विभाषित ॥ उदाशून्य - दुग्धे गौ स्वयमेव, धदुग्ध गौ. स्वयमेव, अदोहि गौ स्वयमेव । प्रस्तुते शोणित स्वयमेव प्रास्नोष्ट शोणित स्वयमेव । नमते दण्ड स्वयमेव, अनस्त दण्ड स्वयमेव ।। भाषार्थ - [ दुहस्नुनमाम ] दुह, स्नु, नम इन धातुप्रो को कर्मवद्भाव मे कहे हुये कार्य [यविचणी] यक् और चिण् [न] नहीं होते हैं ।। कर्मवदमाव = कर्मकर्ता में यक चिणू, भात्मनेपद, चिण्वदभाव यह चार कार्य होते है । उनमें से कु और चित्र का प्रकृत सूत्र से प्रतिषेध हो जाने से यहां प्रात्मनेपद और चिण्वदभाव ही होता है । चिण्वद्भाव भी प्रजत धद्ध को हो वहा है। प्रत दुह और नम् के भजन्त भद्भ न होने से इनको चिण्वभाव नहीं होता। केवल जो कि भजन है, उसे पक्ष मे चिनद्भाव होकर लुङ, लकार में 'प्रास्ताविष्ट" रूप भी बनता है " 'या दोग्धि पय' यहाँ गो कर्म है । जब गो स्वयमेव दोहन किया कराने को इच्छा से खड़ी हो जाती है, तब सौर्यातिशय विवक्षा में गां कर्म कर्ता बन जाता है । उस अवस्था में कर्म कर्मणाशून्य से फर्मववभाव होकर सब कार्य प्राप्त थे, उन्हें निषेध कर दिया है। इसी प्रकार औरों में भी समझें ॥ दुह धातु को वर्मक्तों में केवल यक का निषेध हो इस सूत्र से होता है चिण तो दुहश्च से विकल्प करके प्राप्त हो है । यक का निषेध होने पर यथाप्राप्त शव हो जाता है, तथा चिण् का निषेध होने पर सिच हो जाता हूँ ॥ कुषिरजो प्राचा श्यम्परस्मैपद च ।।तीन।एक।बीस।। कुपिरजो छः।पच्चीस प्राचाम तिरेसठ॥ श्यन एक॥एक॥ परस्मैपदम् एक॥एक॥ च दस ।। - कुपिश्च रज च कुपिरजो, तयो कुपिरजो इतरेतरयोगद्वन्द्व ॥ प्रनु - कर्मवत्, घातो. प्रत्यय परश्च ॥ धर्म कुप निष्क', 'रज रागे अनयोर्घाखो कर्म क्तंरि व्यन् प्रत्ययो भवति, परस्मैपद च प्राचामाचार्याणा मतेन ॥ कर्मवदमावेन यवप्राप्त तस्यापवाद इयन्, एवमात्मनेपदस्थापबाद परस्मैपदम प्राचा ग्रहण विकल्पार्थम् अन्येषा मते यगात्मनेपदे भवन एव । उदात्रु यति पाद स्वयमेव । राज्य वस्त्र स्वयमेव । श्रयेषा मते - कुष्यते, रज्यते ॥ भाषाय - [कुषिरजो ] बुध और रञ्ज पातु को कर्मववभाव में[ दयन् ] श्यन प्रत्यय [च] और [परस्मैपदम् ] परस्मपद होता है [प्राचाम] प्राचीन भाषाय के मत हो ॥ कर्मवत्कर्मणा तुल्यक्रिय से कर्मवद्भाव होकर कर्मकर्ता में यकू और मात्मनेपद प्राप्त था, उसका प्रपवाद यह इयत् और परस्मैपद का विधान हूँ ।। 'भाचाम् ' ग्रहण यहाँ विकल्पार्थ है, अर्थात् प्राचीन साधायों के मन में इयन और परस्मैपद होगा भयों के मत में यकू एवं आत्मनेपद ही होगा ।। उदाशून्य - कुष्पति पाद स्वयमेव । रज्यति वस्त्र स्वयमेव है। पक्ष में कुष्यते, रज्यते । सिद्धियों में कुछ भी विशेष नहीं ।। घातो पाँच॥एक॥ धर्मश्रा तृतीयाध्यायपरिसमाप्ते घातोरित्ययमधिकारो वेदितव्य ।। तव्यत्तव्थानीयर इत्यादीनि वक्ष्यति तानि धातोरेव विधास्यन्ते ।। भाषायें - यहाँ से [घातो ] धातो का अधिकार तृतीयाध्याय को समाप्तिपर्यन्त जायेगा, ऐसा जानना चाहिये ।। प्रत तृतोपाध्याय को समाप्तिपर्यन्त तथ्यत् सव्य नीयर् थावि जो प्रत्यय कहेंगे, वे धातु से ही होंगे । तत्रोपपद सप्तमीस्थम् ।।तीन।एक।दो।। तत्र ग्रशून्य तीन। उपपदम एक॥एक॥ सप्तमीस्थम् ग्यारह॥ समीपोच्चारित पदम् उपपदम् । सशून्य - सप्तम्या विभक्तो तिष्ठतीति सप्तमीस्थम्, तत्पुरुष । अनुशून्यघाँतो ॥ स - = एतस्मिन् धात्वधिकारे सप्तमीस्थम् = सप्तमीनिर्दिष्ट यस्पद तदुपपदसज्ञ भवति ॥ उदाशून्य - कुम्भकार नगरकार ॥ भाषायें - [तत्र] इस धातु के अधिकार मे जो [ सप्तमीस्थम् ] सप्तमो विभक्ति से निर्दिष्ट पद हैं, उनको [उपपदम् ] उपपदसज्ञा होती है । कर्मण्यण् से 'कर्मणि' सप्तमीनिदिष्ट पद है, तो इसको उपपद सज्ञा होने से 'कर्म उपपद रहते ऐसा सूत्र का अर्थ बनकर, उपपदमतिङ् से समास हो गया है ।। सप्तमोनिदिष्ट पद कहीं उपपदसशक, तथा कहीं अर्थवाचक भी हैं, सो यह भेव तत्तत् सूत्र मे ही विदित होगा । सिद्धियाँ दो।दो।ग्यारह सूत्र मे देखें । यहां से 'त' को अनुवृत्ति तीन॥ एक॥चौंसठ तक जायेगो । कृतिङ् ।।तीन।एक।तिरेसठ॥ कृत् एक॥ एक॥ प्रतिङ् एक।एक।। सशून्य - न तिङ् घतिड, नञ्तत्पुरुष ॥ मनुशून्य - तत्र, घातो, प्रत्यय ॥ धर्म - मस्मिन् घावधिकारे तिङ भिन्ना प्रत्ययः कृत्सज्ञका भवन्ति ॥ उदाशून्य --कर्ता, कारक । कर्त्तव्यम् ॥ भापार्य इस धातु के अधिकार मे [अतिङ ] तिङ् भिन्न जो प्रत्यय उनकी [कृत्] कृत्सना होती है ॥ कृत सज्ञा होने से कृत्तद्धित समासाश्च से कृत् प्रत्ययात शब्दों को प्रातिपदिक सत्ता हो जाती है, जो कि अर्थवदधातु में 'अप्रत्यय ' निषेध करने से प्राप्त नहीं थी । एव कर्ता कारक में ण्वुलु तथा तृच् प्रत्यय भो कृत् सज्ञक होने से कतरि वृतू से कर्ता में हो जाते है ।। कर्ता, कारक की सिद्धि परिशून्य दो लाख ग्यारह हज़ार एक सौ ग्यारह,दो में देखें, तथा कर्त्तव्यम् को सिद्धि परिशून्य तीन।एक।तीन में देखें । बासरूपोऽस्त्रियाम् ॥ इकतीस चौंसठ।। वा प्रशून्य ।। ग्रसरूपः एक॥एक॥ स्त्रियाम् सात । एक।। सशून्य -- समान रूप यस्य स सरूप, बहुव्रीहि । न सरूप प्रसरूप नन्तपुर । नत्री, तस्या, नत्र - तस्पुरुष ।। प्रनुशून्य -तत्र घातो प्रत्यय ॥ श्रयं श्रमियावधिवारे मसरूप -- असमानरूपोऽयवाद प्रत्ययो विकल्पेन बाघको भवति त्र्यधिकारविहितप्रत्यय वर्ज यित्वा ।। सर्वत्र अपवादैनित्यम् उत्सर्गा वाध्यन्ते इति नियम । तत्र योगवाद प्रत्यय स विकल्पेन बांधत्र स्यात् नतु नित्यम, एतदर्थं सूत्रमिदमारम्यते ॥ उदाशून्यप्वुल्तू चौ उत्सगं सूत्रम् - "विशेषक, विक्षेप्ता", तस्य इगुपपत्ताप्रोकिर क इत्ययमपवाद स विकल्सेन वाघको भवति - विक्षिप ॥ भाषायें इस धातु के अधिकार में [ असरूप ] ग्रसमानरूपवाले 'अपवाद प्रत्यय [वा] विकल्प से बाधक होते हैं [प्रस्त्रियाम् ] 'स्त्रो' अधिकार में विहित प्रत्ययो को छोड़कर ।। अपवादसूत्र उत्सर्गसूत्रों को नित्य हो बाधकर हो जाते हैं । श्रत विकल्प से बाधक हों, पक्ष मे प्रौत्सर्गिक प्रत्यय भी हो जायें, इसीलिये यह सूत्र बनाया है ।। डुल्चौ यह उत्सर्गसूत्र है, तथा इगुपवज्ञाशून्य यह उसका अपवाद है । सो इगुपथ क्षिप धातु से क. प्रत्यक्ष भी हुआ, तथा ब्लुलू तूच् भी विकरूप से हो गये, क्योंकि ये परस्पर असरूप थे ॥ यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि अनुवधों को हटाकर परस्पर प्रत्ययो को प्रसरूपता देखनो होतो 'क' प्रत्यय धनुव परहित 'अ' है, तथा और तूच, वृ तथा तू हैं । सो पे परस्पर प्रसरूप = समानरूपवाले नहीं हैं । उदाशून्य - दि. पक, विशेषना विक्षिप । वृत्या एक सौ तेरह।। धनुशून्य - प्रत्यय ।। मयं - प्रधिकारोयम् । तुचौ इनि यावत् ये प्रत्यया विधारूयते, ते कृत्यज्ञा भविष्यन्तीति वेदितव्यम् ॥ उदाशून्य - गन्तब्यो ग्रामो देवदत्तस्य देवदत्र्त्तन वा ॥ भाषायें - यहाँ से प्राये नुचौ' सूत्र तक जो भी प्रत्यय कर्हेनें ये [कृत्या ]कृत्यसज्ञक होंगे, ऐसा अधिकार जानना चाहिये । गब्लू धासु से तथ्यय प्रत्यय हुआ है, जिसकी कृत्य सत्ता है। प्रत वृाना कतरि वा से देवदत्त में विकल्प
उन्होंने दुर्ग बना रखगे थे। कुछ किले पत्थर के और काफी बड़े थे । उनके राज्य में लगभग एक सौ पुर थे । दामों में से फुटकर व्यक्तियों के तो नाम भी मिलते हैं - - जैसे इलीविग, धुनी, चुमुरी, पिप्रु, वचन, गम्बर -- किन्तु उनकी जातियों में सम्भवतः गिम्यु, कीकट, अजम, यक्ष और शिशु का ही संकेत मिलता है । आर्यों के समय जिस सभ्यता का हमारे देश में प्रारम्भ हुआ, वह कुछ काट-छांट के साथ आज तक चली आ रही है । इसी कारण यह कहा जाता है कि हमारे देश के इतिहास और सभ्यता का स्रोत वैदिककाल मे हो चला है । यद्यपि बहुत ग्रंग में यह बात ठीक मानी जा सकती है, किन्तु फिर भी एक कठिनाई यह है कि बुद्ध भगवान् के पूर्व के इतिहास का कानक्रम और गमयगणना अनिश्चित और संदिग्ध है । पाश्चात्य विद्वानों द्वारा काल- क्रमबद्ध इतिहास का आरम्भ बुद्ध भगवान् के समय में होना माना गया है. इसी से उनके द्वारा बुद्ध से पूर्व का युग 'प्रागैतिहासिक और बाद का ऐतिहासिक' माना जाता है । 'प्रागैतिहासिक काल का अविच्छिन्न इतिहास आायों से आरंभ होता है। आर्य कौन थे ? भाषाविज्ञान और सभ्यता के अनुसन्धान करनेवाली की धारणा है कि पुगतनकाल में 'आर्य जानि किमी एक स्थान में बसती थी । अनेक कारणों से वह अपने मूलस्थान से निकलकर योरप और एशिया में फैल गई । आर्य भाषा का प्रचार आयरलैण्ड, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, ग्रीस, रोम, स्लाव प्रदेशो, प्राचीन ईरान और भारतवर्ष में हुआ। उससे अनुमान किया जाता है कि किसी समय आर्य जाति बड़ी प्रवल, उद्योगशील और परानी थी। उसने अपने मूलस्थान से निकलकर संसार की सभ्यता पर अपना अमिट मिक्का मदा के लिए जमा दिया। आर्यों के मूलस्थान के सम्बन्ध में बहुत मतभेद है। कुछ लोग उत्तरी ध्रुव के प्रदेश, कुछ मध्य एशिया, और कुछ दक्षिण-पश्चिमी योरप को उनका मूलस्थान मानते है। कुछ लोगों का यह विश्वास भी है कि आर्य लोगों का मूलस्थान भारत ही के उत्तरी प्रदेशों ही में कही पर था। किन्तु मनाधिक्य इस समय श्रार्यो का मूलस्थान उस प्रदेश में मानता है, जो अरल समुद्र से टैन्यूव नदी तक फैला हुआ है। सच बात तो यह है कि उपर्युक्त धाग्याएँ केवल अनुमान पर अवलम्बित है और उनमें से एक भी ऐसी नहीं, जो सर्वथा निश्चित अथवा सर्वमान्य कही जा सके। इसलिए इस विषय पर अधिक विवेचन करने का प्रयत्न अनुपयुक्त एवं व्यर्थना है । तथापि यह मानने में कोई विशेष पनि नहीं कि आर्यो का विस्तार योग्य एवं ( बाई और ) सिन्धुतटवासियों का एक अनूठा खिलौना () उनकी एक मुद्रा पाच हजार वर्ष पूर्व के इस अनुटे खिलाने की विशेषता यह है कि जब इसकी हम सीची जानी है तो डोरी से बधा हमका सिर नीचे की र भुक्त जाता है । एशिया में हुआ और वैदिक आर्यों के इतिहास की प्रारम्भिक रंगभूमि भारत के पश्चिमोत्तर प्रान्तो में पाई जाती है । उत्तर-पश्चिम की ओर से ही बढकर वे भारत के अन्यान्य प्रान्ती में फैले और अपनी सभ्यता और आधिपत्य बढाते चले गए । कालान्तर में मारे देश में उन्हीं की विभूति फैल गई, जो आज तक जीवित और प्रगतिशील है। प्रागैतिहानिक समय का शृंखलाबद्ध इतिहास मिलना दुसाध्य है । वैदिक काल के ग्रन्थों में एवं महाभारत और रामायण तथा पुराणों में कुछ संकेत, प्रनुश्रुतियाँ और
उन्होंने दुर्ग बना रखगे थे। कुछ किले पत्थर के और काफी बड़े थे । उनके राज्य में लगभग एक सौ पुर थे । दामों में से फुटकर व्यक्तियों के तो नाम भी मिलते हैं - - जैसे इलीविग, धुनी, चुमुरी, पिप्रु, वचन, गम्बर -- किन्तु उनकी जातियों में सम्भवतः गिम्यु, कीकट, अजम, यक्ष और शिशु का ही संकेत मिलता है । आर्यों के समय जिस सभ्यता का हमारे देश में प्रारम्भ हुआ, वह कुछ काट-छांट के साथ आज तक चली आ रही है । इसी कारण यह कहा जाता है कि हमारे देश के इतिहास और सभ्यता का स्रोत वैदिककाल मे हो चला है । यद्यपि बहुत ग्रंग में यह बात ठीक मानी जा सकती है, किन्तु फिर भी एक कठिनाई यह है कि बुद्ध भगवान् के पूर्व के इतिहास का कानक्रम और गमयगणना अनिश्चित और संदिग्ध है । पाश्चात्य विद्वानों द्वारा काल- क्रमबद्ध इतिहास का आरम्भ बुद्ध भगवान् के समय में होना माना गया है. इसी से उनके द्वारा बुद्ध से पूर्व का युग 'प्रागैतिहासिक और बाद का ऐतिहासिक' माना जाता है । 'प्रागैतिहासिक काल का अविच्छिन्न इतिहास आायों से आरंभ होता है। आर्य कौन थे ? भाषाविज्ञान और सभ्यता के अनुसन्धान करनेवाली की धारणा है कि पुगतनकाल में 'आर्य जानि किमी एक स्थान में बसती थी । अनेक कारणों से वह अपने मूलस्थान से निकलकर योरप और एशिया में फैल गई । आर्य भाषा का प्रचार आयरलैण्ड, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, ग्रीस, रोम, स्लाव प्रदेशो, प्राचीन ईरान और भारतवर्ष में हुआ। उससे अनुमान किया जाता है कि किसी समय आर्य जाति बड़ी प्रवल, उद्योगशील और परानी थी। उसने अपने मूलस्थान से निकलकर संसार की सभ्यता पर अपना अमिट मिक्का मदा के लिए जमा दिया। आर्यों के मूलस्थान के सम्बन्ध में बहुत मतभेद है। कुछ लोग उत्तरी ध्रुव के प्रदेश, कुछ मध्य एशिया, और कुछ दक्षिण-पश्चिमी योरप को उनका मूलस्थान मानते है। कुछ लोगों का यह विश्वास भी है कि आर्य लोगों का मूलस्थान भारत ही के उत्तरी प्रदेशों ही में कही पर था। किन्तु मनाधिक्य इस समय श्रार्यो का मूलस्थान उस प्रदेश में मानता है, जो अरल समुद्र से टैन्यूव नदी तक फैला हुआ है। सच बात तो यह है कि उपर्युक्त धाग्याएँ केवल अनुमान पर अवलम्बित है और उनमें से एक भी ऐसी नहीं, जो सर्वथा निश्चित अथवा सर्वमान्य कही जा सके। इसलिए इस विषय पर अधिक विवेचन करने का प्रयत्न अनुपयुक्त एवं व्यर्थना है । तथापि यह मानने में कोई विशेष पनि नहीं कि आर्यो का विस्तार योग्य एवं सिन्धुतटवासियों का एक अनूठा खिलौना उनकी एक मुद्रा पाच हजार वर्ष पूर्व के इस अनुटे खिलाने की विशेषता यह है कि जब इसकी हम सीची जानी है तो डोरी से बधा हमका सिर नीचे की र भुक्त जाता है । एशिया में हुआ और वैदिक आर्यों के इतिहास की प्रारम्भिक रंगभूमि भारत के पश्चिमोत्तर प्रान्तो में पाई जाती है । उत्तर-पश्चिम की ओर से ही बढकर वे भारत के अन्यान्य प्रान्ती में फैले और अपनी सभ्यता और आधिपत्य बढाते चले गए । कालान्तर में मारे देश में उन्हीं की विभूति फैल गई, जो आज तक जीवित और प्रगतिशील है। प्रागैतिहानिक समय का शृंखलाबद्ध इतिहास मिलना दुसाध्य है । वैदिक काल के ग्रन्थों में एवं महाभारत और रामायण तथा पुराणों में कुछ संकेत, प्रनुश्रुतियाँ और
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में स्टेडियम में मौजूद फैंस के एक ग्रुप से पूर्व कप्तान रिकी पोंटिग और ट्रेविस हेड ने अपनी नाराजगी जताई है. दरअसल मैच के तीसरे दिन भारतीय कप्तान विराट कोहली बल्लेबाजी के लिए मैदान में जा रहे थे तभी वहां मौजूद फैंस के एक ग्रुप ने उनकी हूटिंग शुरू कर दी. दूसरी पारी में कोहली लोकेश राहुल के आउट होने के बाद बल्लेबाजी के लिये उतरे थे. कोहली को पहली पारी के दौरान भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा. इस हूटिंग के बाद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ट्रेविस हेड और पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने फैंस के इस हरकत की कड़ी आलोचना की. तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ऐसी चीजों को नजरअंदाज करना चाहती है. कोहली के साथ हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है. 2011-12 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी उन्हें सिडनी के मैदान में दर्शकों की हूटिंग का सामना करना पड़ा था. इस साल इंग्लैंड दौरे पर एजबेस्टन में पहले टेस्ट मैच में दर्शकों के ऐसे व्यवहार का सामना करना पड़ा था. आईपीएल में मुंबई इंडियन्स के खिलाफ मैच वानखेडे स्टेडियम में भारतीय दर्शकों ने रॉयल चैलेंजर बेंगलूर के इस कप्तान की हूटिंग की थी.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में स्टेडियम में मौजूद फैंस के एक ग्रुप से पूर्व कप्तान रिकी पोंटिग और ट्रेविस हेड ने अपनी नाराजगी जताई है. दरअसल मैच के तीसरे दिन भारतीय कप्तान विराट कोहली बल्लेबाजी के लिए मैदान में जा रहे थे तभी वहां मौजूद फैंस के एक ग्रुप ने उनकी हूटिंग शुरू कर दी. दूसरी पारी में कोहली लोकेश राहुल के आउट होने के बाद बल्लेबाजी के लिये उतरे थे. कोहली को पहली पारी के दौरान भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा. इस हूटिंग के बाद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ट्रेविस हेड और पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने फैंस के इस हरकत की कड़ी आलोचना की. तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ऐसी चीजों को नजरअंदाज करना चाहती है. कोहली के साथ हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है. दो हज़ार ग्यारह-बारह के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी उन्हें सिडनी के मैदान में दर्शकों की हूटिंग का सामना करना पड़ा था. इस साल इंग्लैंड दौरे पर एजबेस्टन में पहले टेस्ट मैच में दर्शकों के ऐसे व्यवहार का सामना करना पड़ा था. आईपीएल में मुंबई इंडियन्स के खिलाफ मैच वानखेडे स्टेडियम में भारतीय दर्शकों ने रॉयल चैलेंजर बेंगलूर के इस कप्तान की हूटिंग की थी.
मोहाली के मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) में मुख्य उद्घाटन समारोह में लोग पहुंच गए हैं। कार्यक्रम स्थल में लोगों को बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। पंडाल खच्चाखच भर गया है। पंडाल में 5000 लोगों की बैठने की व्यवस्था है लेकिन यहां लोग ज्यादा पहुंच गए हैं। जागरण संवाददाता, मोहाली। PM Modi Visit Mohali: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुछ देर में मोहाली के मुल्लांपुर स्थित होमी भाभा कैंसर हास्पिटल का उद्घाटन करने पहुंच रहे हैं। अभी पीएम ने हरियाणा के फरीदाबाद में अमृता अस्पताल का उद्घाटन किया है। वहां से वह सीधा मोहाली आएंगे। मोहाली के मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) में मुख्य उद्घाटन समारोह में लोग पहुंच गए हैं। कार्यक्रम स्थल में लोगों को बैठने के लिए विशेष तौर पंडाल तैयार किया गया है। पंडाल खच्चाखच भर गया है। पंडाल में 5000 लोगों की बैठने की व्यवस्था है, लेकिन यहां लोग ज्यादा पहुंच गए हैं। लोगों को पंडाल में बैठने की जगह नहीं मिल रही है। इस वजह से लोगों की पुलिस मुलाजिमों से बहस भी हुई है। बता दें कि पंडाल में बैठने के लिए पहले वीआइपी पास जारी किए गए थे। बावजूद लोगों ने वीआइपी पास दिखाने पर भी बैठने के लिए जगह नहीं मिली। लोगों ने पंडाल में मौजूद पुलिस वालों से बैठने का प्रबंध करने को कहा जिस पर बहस के बाद गुस्साए लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों ने कहा कि अगर बैठने की जगह कम थी तो उसी हिसाब से प्रशासन को पास जारी करने चाहिए थे। पीएम मोदी के आने से पहले भाजपा समर्थक समारोह पंडाल में पहुंच चुके हैं। सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त किया गया है। तीन लेयर में सिक्योरिटी चेकपोस्ट बनाए गए हैं। पहली लेयर में पंजाब पुलिस के कमांडो, दूसरी लेयर में अर्धसैनिक बल और आयोजन स्थल के पास तीसरी लेयर में एसपीजी के जवान चेकिंग कर रहे हैं। हर आने जाने वाले की बारीकी से चेकिंग की जा रही है। वहीं, कवरेज के लिए आ रहे मीडिया कर्मियों के कैमरे व आइकार्ड की भी पंडाल में बारीकी से जांच की जा रही है। सुनील जाखड़, राणा गुरमीत सोढ़ी, बलबीर सिद्धू, राज कुमार वेरका भी कार्यक्रम स्थल में पहुंच गए हैं। पंजाब सरकार की ओर से समरोह स्थल तक लोगों को लाने के लिए रोडवेज की सरकारी लगाई गई थी, जिनसे लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाया गया है। इसके साथ ही वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। समारोह स्थल में जैमर लगाए गए हैं, जिस वजह से इंटरनेट स्लो चल रहा है। इसके अलावा आसमान से हेलीकाप्टर से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा पीएम के कार्यक्रम में किसी तरह का खलल न पड़े इसके लिए कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए कई तरह की हिदायतें दी गई हैं। कई चीजों को साथ लाने पर एंट्री नहीं दी जा रही है। पैन, पेंसिल, नेल कट्टर, लाइटर, माचिस, लेडिज मेकअप का सामान, कैंच, चाकू समेत अन्य ऐसा सामान जिससे किसी पर हमला किया जा सकता है, इस पर पाबंदी लगाई गई है। एंट्री गेट पर महिला कांस्टेबल व पुरुष मुलाजिम लोगों की पूरी तरह से तलाशी लेकर ही उन्हें पंडाल में जाने की अनुमति दे रहे हैं।
मोहाली के मुल्लांपुर में मुख्य उद्घाटन समारोह में लोग पहुंच गए हैं। कार्यक्रम स्थल में लोगों को बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। पंडाल खच्चाखच भर गया है। पंडाल में पाँच हज़ार लोगों की बैठने की व्यवस्था है लेकिन यहां लोग ज्यादा पहुंच गए हैं। जागरण संवाददाता, मोहाली। PM Modi Visit Mohali: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुछ देर में मोहाली के मुल्लांपुर स्थित होमी भाभा कैंसर हास्पिटल का उद्घाटन करने पहुंच रहे हैं। अभी पीएम ने हरियाणा के फरीदाबाद में अमृता अस्पताल का उद्घाटन किया है। वहां से वह सीधा मोहाली आएंगे। मोहाली के मुल्लांपुर में मुख्य उद्घाटन समारोह में लोग पहुंच गए हैं। कार्यक्रम स्थल में लोगों को बैठने के लिए विशेष तौर पंडाल तैयार किया गया है। पंडाल खच्चाखच भर गया है। पंडाल में पाँच हज़ार लोगों की बैठने की व्यवस्था है, लेकिन यहां लोग ज्यादा पहुंच गए हैं। लोगों को पंडाल में बैठने की जगह नहीं मिल रही है। इस वजह से लोगों की पुलिस मुलाजिमों से बहस भी हुई है। बता दें कि पंडाल में बैठने के लिए पहले वीआइपी पास जारी किए गए थे। बावजूद लोगों ने वीआइपी पास दिखाने पर भी बैठने के लिए जगह नहीं मिली। लोगों ने पंडाल में मौजूद पुलिस वालों से बैठने का प्रबंध करने को कहा जिस पर बहस के बाद गुस्साए लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों ने कहा कि अगर बैठने की जगह कम थी तो उसी हिसाब से प्रशासन को पास जारी करने चाहिए थे। पीएम मोदी के आने से पहले भाजपा समर्थक समारोह पंडाल में पहुंच चुके हैं। सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त किया गया है। तीन लेयर में सिक्योरिटी चेकपोस्ट बनाए गए हैं। पहली लेयर में पंजाब पुलिस के कमांडो, दूसरी लेयर में अर्धसैनिक बल और आयोजन स्थल के पास तीसरी लेयर में एसपीजी के जवान चेकिंग कर रहे हैं। हर आने जाने वाले की बारीकी से चेकिंग की जा रही है। वहीं, कवरेज के लिए आ रहे मीडिया कर्मियों के कैमरे व आइकार्ड की भी पंडाल में बारीकी से जांच की जा रही है। सुनील जाखड़, राणा गुरमीत सोढ़ी, बलबीर सिद्धू, राज कुमार वेरका भी कार्यक्रम स्थल में पहुंच गए हैं। पंजाब सरकार की ओर से समरोह स्थल तक लोगों को लाने के लिए रोडवेज की सरकारी लगाई गई थी, जिनसे लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाया गया है। इसके साथ ही वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। समारोह स्थल में जैमर लगाए गए हैं, जिस वजह से इंटरनेट स्लो चल रहा है। इसके अलावा आसमान से हेलीकाप्टर से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा पीएम के कार्यक्रम में किसी तरह का खलल न पड़े इसके लिए कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए कई तरह की हिदायतें दी गई हैं। कई चीजों को साथ लाने पर एंट्री नहीं दी जा रही है। पैन, पेंसिल, नेल कट्टर, लाइटर, माचिस, लेडिज मेकअप का सामान, कैंच, चाकू समेत अन्य ऐसा सामान जिससे किसी पर हमला किया जा सकता है, इस पर पाबंदी लगाई गई है। एंट्री गेट पर महिला कांस्टेबल व पुरुष मुलाजिम लोगों की पूरी तरह से तलाशी लेकर ही उन्हें पंडाल में जाने की अनुमति दे रहे हैं।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः कोलकाता में कुछ अच्छे कोकून पार्क हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। अनवर शाह रोड पर स्थित यह इंद्राणी पार्क उन्हीं में से एक है। एक पार्क जैव विविधता के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है। लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण यह पैटर्न बर्बाद होता जा रहा है। इस पार्क के एक घाट में पिछले 4 साल से एक गहरा गड्ढा दिखाई दे रहा है और अगर इसकी पहले से मरम्मत नहीं की गई तो पार्क को नुकसान हो सकता है। पार्क ने पिछले चार वर्षों से कोलकाता कृषि सोसायटी के फ्लावर शो से सर्वश्रेष्ठ उद्यान का पुरस्कार जीता है। अधिकारियों की पूरी उदासीनता समझ में नहीं आती है। मरम्मत के लिए इस ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करना चाहिए। शहर को पार्क चाहिए। अधिक समाचार :
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः कोलकाता में कुछ अच्छे कोकून पार्क हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। अनवर शाह रोड पर स्थित यह इंद्राणी पार्क उन्हीं में से एक है। एक पार्क जैव विविधता के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है। लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण यह पैटर्न बर्बाद होता जा रहा है। इस पार्क के एक घाट में पिछले चार साल से एक गहरा गड्ढा दिखाई दे रहा है और अगर इसकी पहले से मरम्मत नहीं की गई तो पार्क को नुकसान हो सकता है। पार्क ने पिछले चार वर्षों से कोलकाता कृषि सोसायटी के फ्लावर शो से सर्वश्रेष्ठ उद्यान का पुरस्कार जीता है। अधिकारियों की पूरी उदासीनता समझ में नहीं आती है। मरम्मत के लिए इस ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करना चाहिए। शहर को पार्क चाहिए। अधिक समाचार :
चिंकी मिंकी ट्विन सिस्टर लेटेस्ट तस्वीर में काफी प्रिटी दिख रही हैं। चिंकी मिंकी पोज देने में माहिर मानी जाती हैं। चिंकी मिंकी को इस तस्वीर में चार्मिंग पोज देती नजर आ रही हैं। चिंकी मिंकी ग्लैमरस के मामले में किसी एक्ट्रेस से कम नहीं हैं। ट्विन सिस्टर सोशल मीडिया पर चिंकी मिंकी से पॉपुलर हैं लेकिन इनका का रियल नाम सुरभि मेहरा और समृद्धि मेहरा हैं। दोनों बहनो को ड्रेसिंग सेंस बेहद ही कमाल का हैं। चिंकी मिंकी दोनों ही सेम ड्रेस को कैरी करती हैं। चिंकी मिंकी सोशल मीडिया पर बेहद ही पॉपुलर हैं। इनके इंस्टाग्राम पर 11 मिलियन फॉलोअर्स हैं।
चिंकी मिंकी ट्विन सिस्टर लेटेस्ट तस्वीर में काफी प्रिटी दिख रही हैं। चिंकी मिंकी पोज देने में माहिर मानी जाती हैं। चिंकी मिंकी को इस तस्वीर में चार्मिंग पोज देती नजर आ रही हैं। चिंकी मिंकी ग्लैमरस के मामले में किसी एक्ट्रेस से कम नहीं हैं। ट्विन सिस्टर सोशल मीडिया पर चिंकी मिंकी से पॉपुलर हैं लेकिन इनका का रियल नाम सुरभि मेहरा और समृद्धि मेहरा हैं। दोनों बहनो को ड्रेसिंग सेंस बेहद ही कमाल का हैं। चिंकी मिंकी दोनों ही सेम ड्रेस को कैरी करती हैं। चिंकी मिंकी सोशल मीडिया पर बेहद ही पॉपुलर हैं। इनके इंस्टाग्राम पर ग्यारह मिलियन फॉलोअर्स हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोगों को WWF जैसी फाइट देखने को मिली है। इस फाइट में पुरुष पहलवानों के अलावा महिला पहलवान भी रिंग में उतरीं। यहां भारतीय पहलवानों ने एक-एक कर विदेशी फाइटर्स को धूल चटा दिया। मैच के दौरान जमकर लात-घूंसे चले। इसके अलावा कुछ रेसलर को तो सिर भी फट गया। वहीं महिला रेसलर्स एक दूसरे को पटक-पटकर मारते नजर आईं। राजधानी के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में रविवार को फ्रीक फाइटर व्रेस्लिंग( FFW) का आयोजन किया गया था। इस व्रेस्लिंग में भाग लेने नेपाल, अमेरिका और दसरे देशों के खिलाड़ी भी पहुंचे थे। रविवार के दिन कुल 8 से ज्यादा मुकाबले यहां खेले गए। शुरुआती मुकाबला भारत के प्रिंस और अमेरिकी फाइटर के बीच हुआ। इस दौरान दोनों ने लोगों को खूब रोमांचित किया। आखिरकार इस मैच को प्रिंस ने जीत लिया। मगर मुकाबले के दौरान प्रिंस का सिर फट गया। प्रिंस के अलावा भारत के प्रतीक ने नेपाल के खिलाड़ी अमित से मुकाबला किया। दोनों ने एक दूसरे पर जमकर मुक्के बरसाए। इस मुकाबले को प्रतीक ने जीत लिया। इसके बाद महिला रेसलर भी रिंग में उतरीं। तब लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यहां भारत की किरा और नेपाल की फाइटर जुलेली के बीच ये मुकाबला खेला गया। दोनों ने जबरदस्त फाइटिंग की। भारत की फाइटर किरा ने नेपाल की फाइटर जुलेली के ऊपर लात धुसों की बरसात कर दी। मगर कुछ समय बाद जुलेली अपनी फार्म में वापस लौटीं और उन्होंने किरा को मारना शुरू कर दिया। इस बीच किरा के फाइटर दोस्त मैडी रिंग में ही उतर गए और बीच बचाव करने लग गए। आखिरकार इस मुकाबले को नेपाल की जुलेली ने जीत लिया। इन दो महिला खिलाड़ियों के अलावा और भी महिला रेसलर्स ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था। बताया गया कि पूरे दिन 8 से ज्यादा मुकाबले हुए। जिसे थंडर,बाबा,सम्राट,टार्जन, मैडी जैसे पहलवानों ने जीता। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रायपुर उत्तर से कांग्रेस विधायक कुलदीज जुनेजा और रायपुर महापौर एजाज ढेबर थे। जिन्हों विजेताओं का इनाम दिया। राजधानी में इस रेसलिंग के आयोजक शोयब ढेबर और कुलजीत भल्ला थे। FFW के संस्थापक सचिन ने बताया कि इस तरह के मुकाबले के लिए उनकी टीम फाइटर तैयार करती है। उन्हें प्रोफेशनल रेसलर्स की तरफ से ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें WWF जैसे वर्ल्ड फ्री व्रेस्लिंग चैंपियनशिप जैसे मुकाबलों के लिए तैयार किया जाता है। जिससे भारत का नाम रोशन हो। मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपील की है कि इस तरह की फाइट को कोई घर में ट्राई न करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोगों को WWF जैसी फाइट देखने को मिली है। इस फाइट में पुरुष पहलवानों के अलावा महिला पहलवान भी रिंग में उतरीं। यहां भारतीय पहलवानों ने एक-एक कर विदेशी फाइटर्स को धूल चटा दिया। मैच के दौरान जमकर लात-घूंसे चले। इसके अलावा कुछ रेसलर को तो सिर भी फट गया। वहीं महिला रेसलर्स एक दूसरे को पटक-पटकर मारते नजर आईं। राजधानी के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में रविवार को फ्रीक फाइटर व्रेस्लिंग का आयोजन किया गया था। इस व्रेस्लिंग में भाग लेने नेपाल, अमेरिका और दसरे देशों के खिलाड़ी भी पहुंचे थे। रविवार के दिन कुल आठ से ज्यादा मुकाबले यहां खेले गए। शुरुआती मुकाबला भारत के प्रिंस और अमेरिकी फाइटर के बीच हुआ। इस दौरान दोनों ने लोगों को खूब रोमांचित किया। आखिरकार इस मैच को प्रिंस ने जीत लिया। मगर मुकाबले के दौरान प्रिंस का सिर फट गया। प्रिंस के अलावा भारत के प्रतीक ने नेपाल के खिलाड़ी अमित से मुकाबला किया। दोनों ने एक दूसरे पर जमकर मुक्के बरसाए। इस मुकाबले को प्रतीक ने जीत लिया। इसके बाद महिला रेसलर भी रिंग में उतरीं। तब लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यहां भारत की किरा और नेपाल की फाइटर जुलेली के बीच ये मुकाबला खेला गया। दोनों ने जबरदस्त फाइटिंग की। भारत की फाइटर किरा ने नेपाल की फाइटर जुलेली के ऊपर लात धुसों की बरसात कर दी। मगर कुछ समय बाद जुलेली अपनी फार्म में वापस लौटीं और उन्होंने किरा को मारना शुरू कर दिया। इस बीच किरा के फाइटर दोस्त मैडी रिंग में ही उतर गए और बीच बचाव करने लग गए। आखिरकार इस मुकाबले को नेपाल की जुलेली ने जीत लिया। इन दो महिला खिलाड़ियों के अलावा और भी महिला रेसलर्स ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था। बताया गया कि पूरे दिन आठ से ज्यादा मुकाबले हुए। जिसे थंडर,बाबा,सम्राट,टार्जन, मैडी जैसे पहलवानों ने जीता। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रायपुर उत्तर से कांग्रेस विधायक कुलदीज जुनेजा और रायपुर महापौर एजाज ढेबर थे। जिन्हों विजेताओं का इनाम दिया। राजधानी में इस रेसलिंग के आयोजक शोयब ढेबर और कुलजीत भल्ला थे। FFW के संस्थापक सचिन ने बताया कि इस तरह के मुकाबले के लिए उनकी टीम फाइटर तैयार करती है। उन्हें प्रोफेशनल रेसलर्स की तरफ से ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें WWF जैसे वर्ल्ड फ्री व्रेस्लिंग चैंपियनशिप जैसे मुकाबलों के लिए तैयार किया जाता है। जिससे भारत का नाम रोशन हो। मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपील की है कि इस तरह की फाइट को कोई घर में ट्राई न करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
२०८ ] के लिये एक प्रोटोकल पर हस्ताक्षर किये गये और २० मई सन् १९५० से यह किया गया। भारत ने इन दोना सम्मेलन में भाग कर विभिन्न देशो मे व्यापा समझौने किय और उनके अनुसार रियायते दो और प्राप्त की। त पश्चात् अप्रल सन् १९५१ म टोरके (इमलंड ) मे तृतीय सम्मेलन हुआ । २८ देशो ने भाग लिया था और १२७ द्विपक्षीय समझौते हुये । भारत ने भी सम्मेलन में भाग लिया। पुराने देशों के अतिरिक्त ६ नये देश भी इस सम्मेलन सम्मिलित हुये। पुरान समझौतो (जेनेवा और एनेकी) की अवधि वढा वर सन् १६ तक कर दी गई। कुछ पुरानी रियायतें वापस कर ली गई तथा कुछ नवीन रिया वे विषय में समझौते हुए । भारत और जी० ए० टी० टो०जी० ए० टी०टी० के अन्तर्गत भारत को प्रशुल्क सम्बन्धी जो रियायत है उनकी भारतीय प्रशुल्क मण्डल ने पूर्ण रूप से जाँच कर ली है। इस मण्डल के अनु यह निश्चित रूप में नहीं कहा जा सकता है कि उन रियायतो का भारत के व्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? मण्डल ने इतना अवश्य निश्चय के साथ कह दिया है अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक संघ ( I. J. ( ) ) वा भविष्य जब तक स्पष्ट ज्ञात न हो भारत को जी० ए० टी० टी० के विरुद्ध न जाना चाहिये । प्रशुल्क मण्डल ने यह कहा है कि प्रत्येक व्यवहार में भारत निम्नलिखित सिद्धान्तो का ध्यान रखे (१) निम्नलिखित वस्तुमा पर रिवायत पाने की चेष्टा करनी चाहिये । ( प्र ) कच्चे माल की अपेक्षा निर्मित माल पर, (आ) उन वस्तुग्रो पर जो विश्व की वैमी ही वस्तुओं से प्रतिद्वन्दिता क ( इ ) इन वस्तुश्रा के सम्बन्ध में जो विश्व में उनकी स्थानापन्न वस्तुप्र प्रतिद्वन्द्विता करे । (२) निम्नलिखित वस्तुमा पर ही रियायत देनी चाहिय :(अ) उत्पादक माल । (ब) अन्य मशीनरी तथा साजसामान । (स) प्रमुख कच्चा माल । प्रशुल्क मण्डल ने निम्नलिखित सुझाव और दिय ( १ ) व्यापारिक समझौते करते समय भारत को इस बात का ध्यान र चाहिये कि कुटीर तथा छोटी मात्रा के उद्योगों को उन्नति परमावश्यक है । अध् उनके विषय में अधिक से अधिक रियायते पाने का प्रयत्न करना चाहिये । (२) जिन वस्तुप्रा के सम्बन्ध में व्यापारिक समझौता (जी० ए० टी० टो अन्नगा) हुना था, उनके प्रायात व निवात पर विशेष निग्रह रवनी चाहे ये प्रति ६ माह के पश्व तु उनमन्वलितडे भी छापने चाहिए । भारत को जी० ए० टी० टी० के अन्तगत निम्नलिखित वस्तुप्रो पर कर को छूट मिली-सूती कपडा, चमडा, नारियल की चटाइयाँ, मसाले, छूट का सामान, अभ्रक, कालीन काजू आदि । भारत ने निम्न देशो के साथ इसी समझौते के अनुसार व्यापारिक सन्धियाँ की है- चीन, कनाडा, स० रा० अमेरिका जॅकोस्लोवानिया, लेवनान, सीरिया, क्यूबा, न्यूजीलैण्ड, इटली, स्वीडन, फिनलैण्ड, डेन्माक इत्यादि । भारत में निम्न लखित वस्तुप्रो के आयात पर इसी समझौते के अनुसार छूट मिली है। ताबा, पैट्रोल, रागा अगूर, पत्थर शक्कर बनाने की मशीन, ट्रॅक्टर, तेल पेरने की मशीन हल, मोटर हवाई जहाज, चावल, घडियाँ प्रादि । भारत को जी० ए० टी० टी० के सदस्य बनने से काफी लाभ प्राप्त हुआ है और भविष्य में अधिक लाभ मिलने की आशा है । In what respects does the new policy of developmental protection of the Fiscal Commission of 1949-50 differ from old policy of Discriminating Protection ? 2 Carefully examine the present Tariff Policy of the Govt of India. Is it conformity with the interests of the country? 3riefly examine the functions and working of the Tariff Commission 1952, and comment upon the future of Protection Write an essay on the "Present Tariff and Commercial Policy" of the Govt of India Write a full note on G A T. T अध्याय २१ करारोपण एवं उद्योग ( Taxation and Industry ) प्रारम्भिककिसी अर्द्ध विकसित देश की सरकार द्वारा औद्योगीकरण के कार्यक्रम को पूरा करने के लिए अपनाए गय माथिक एवं वित्तीय साधनो मे प्राशुल्किक प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। कर प्रणाली ऐसी होनी चाहिये जो कि विकास में सहायक हो। इस प्रकार की कर प्रणाली के मुख्य उद्देश्य निम्बू होने चाहिए - ( 1 ) सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टो के लिए पर्याप्त धन जुटाना, ( 11 ) नये व पुराने दोनो ही उद्योगो मे विनियोग की वृद्धि कराना ( 111 ) द्वितीयात्मक उद्योगो (Secondary industries ) मे लगे हुए उत्पत्ति के विभिन्न साधनो की उत्पत्ति में वृद्धि करना, ( 19 ) आन्तरिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्राथिक स्थिरता को कायम रखना, (v) अनुत्पादक कार्यों मे सटे के व्यवहारो को निरुत्साहित करना, और (71) प्राइवेट सेक्टर को चालू एवं विनियोग दोनो प्रकार की वस्तुग्रो के उत्पादन बढ़ाने में सहायता देना । ये उद्देश्य तब ही पूरे हो सकते हैं जबकि कर सम्बन्धी कानून वैज्ञानिक ढंग पर बनाए जाये । इसके लिए पर्याप्त साख्यिकी नियोजन की आवश्यकता पड़ती है। द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् विशेषत अर्द्धविकसित देशो मे औद्योगीकरण को प्रोत्साहन देने के दृष्टिकोण से प्राशुल्कक प्रेरणाओ (Fiscal incentives) का महत्त्व बहुत घढ गया । प्रस्तुत अध्याय में उद्योग और कर प्रणाली के सम्बन्ध की विस्तृत व्याख्या की गई है । के रूप ( Forms of Tax Incentives )-- कर-प्रेरणाओ के अनेक रूप हो सकते है । कौन सी वर प्रेरणा दी जाय, इसका निश्चय कई बातो पर निर्भर होता है, जैसे कर सरधना म कर का स्थान, बजट स्थिति, देश की आर्थिक परिस्थितियाँ आदि । कर- रियायतो से सरकारी आय पर प्रभाव तो पड़ता ही है, विकास योजनाये भी अप्रभावित नहीं रहती है ।
दो सौ आठ ] के लिये एक प्रोटोकल पर हस्ताक्षर किये गये और बीस मई सन् एक हज़ार नौ सौ पचास से यह किया गया। भारत ने इन दोना सम्मेलन में भाग कर विभिन्न देशो मे व्यापा समझौने किय और उनके अनुसार रियायते दो और प्राप्त की। त पश्चात् अप्रल सन् एक हज़ार नौ सौ इक्यावन म टोरके मे तृतीय सम्मेलन हुआ । अट्ठाईस देशो ने भाग लिया था और एक सौ सत्ताईस द्विपक्षीय समझौते हुये । भारत ने भी सम्मेलन में भाग लिया। पुराने देशों के अतिरिक्त छः नये देश भी इस सम्मेलन सम्मिलित हुये। पुरान समझौतो की अवधि वढा वर सन् सोलह तक कर दी गई। कुछ पुरानी रियायतें वापस कर ली गई तथा कुछ नवीन रिया वे विषय में समझौते हुए । भारत और जीशून्य एशून्य टीशून्य टोशून्यजीशून्य एशून्य टीशून्यटीशून्य के अन्तर्गत भारत को प्रशुल्क सम्बन्धी जो रियायत है उनकी भारतीय प्रशुल्क मण्डल ने पूर्ण रूप से जाँच कर ली है। इस मण्डल के अनु यह निश्चित रूप में नहीं कहा जा सकता है कि उन रियायतो का भारत के व्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? मण्डल ने इतना अवश्य निश्चय के साथ कह दिया है अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक संघ ) वा भविष्य जब तक स्पष्ट ज्ञात न हो भारत को जीशून्य एशून्य टीशून्य टीशून्य के विरुद्ध न जाना चाहिये । प्रशुल्क मण्डल ने यह कहा है कि प्रत्येक व्यवहार में भारत निम्नलिखित सिद्धान्तो का ध्यान रखे निम्नलिखित वस्तुमा पर रिवायत पाने की चेष्टा करनी चाहिये । कच्चे माल की अपेक्षा निर्मित माल पर, उन वस्तुग्रो पर जो विश्व की वैमी ही वस्तुओं से प्रतिद्वन्दिता क इन वस्तुश्रा के सम्बन्ध में जो विश्व में उनकी स्थानापन्न वस्तुप्र प्रतिद्वन्द्विता करे । निम्नलिखित वस्तुमा पर ही रियायत देनी चाहिय : उत्पादक माल । अन्य मशीनरी तथा साजसामान । प्रमुख कच्चा माल । प्रशुल्क मण्डल ने निम्नलिखित सुझाव और दिय व्यापारिक समझौते करते समय भारत को इस बात का ध्यान र चाहिये कि कुटीर तथा छोटी मात्रा के उद्योगों को उन्नति परमावश्यक है । अध् उनके विषय में अधिक से अधिक रियायते पाने का प्रयत्न करना चाहिये । जिन वस्तुप्रा के सम्बन्ध में व्यापारिक समझौता हुना था, उनके प्रायात व निवात पर विशेष निग्रह रवनी चाहे ये प्रति छः माह के पश्व तु उनमन्वलितडे भी छापने चाहिए । भारत को जीशून्य एशून्य टीशून्य टीशून्य के अन्तगत निम्नलिखित वस्तुप्रो पर कर को छूट मिली-सूती कपडा, चमडा, नारियल की चटाइयाँ, मसाले, छूट का सामान, अभ्रक, कालीन काजू आदि । भारत ने निम्न देशो के साथ इसी समझौते के अनुसार व्यापारिक सन्धियाँ की है- चीन, कनाडा, सशून्य राशून्य अमेरिका जॅकोस्लोवानिया, लेवनान, सीरिया, क्यूबा, न्यूजीलैण्ड, इटली, स्वीडन, फिनलैण्ड, डेन्माक इत्यादि । भारत में निम्न लखित वस्तुप्रो के आयात पर इसी समझौते के अनुसार छूट मिली है। ताबा, पैट्रोल, रागा अगूर, पत्थर शक्कर बनाने की मशीन, ट्रॅक्टर, तेल पेरने की मशीन हल, मोटर हवाई जहाज, चावल, घडियाँ प्रादि । भारत को जीशून्य एशून्य टीशून्य टीशून्य के सदस्य बनने से काफी लाभ प्राप्त हुआ है और भविष्य में अधिक लाभ मिलने की आशा है । In what respects does the new policy of developmental protection of the Fiscal Commission of एक हज़ार नौ सौ उनचास-पचास differ from old policy of Discriminating Protection ? दो Carefully examine the present Tariff Policy of the Govt of India. Is it conformity with the interests of the country? तीनriefly examine the functions and working of the Tariff Commission एक हज़ार नौ सौ बावन, and comment upon the future of Protection Write an essay on the "Present Tariff and Commercial Policy" of the Govt of India Write a full note on G A T. T अध्याय इक्कीस करारोपण एवं उद्योग प्रारम्भिककिसी अर्द्ध विकसित देश की सरकार द्वारा औद्योगीकरण के कार्यक्रम को पूरा करने के लिए अपनाए गय माथिक एवं वित्तीय साधनो मे प्राशुल्किक प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। कर प्रणाली ऐसी होनी चाहिये जो कि विकास में सहायक हो। इस प्रकार की कर प्रणाली के मुख्य उद्देश्य निम्बू होने चाहिए - सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टो के लिए पर्याप्त धन जुटाना, नये व पुराने दोनो ही उद्योगो मे विनियोग की वृद्धि कराना द्वितीयात्मक उद्योगो मे लगे हुए उत्पत्ति के विभिन्न साधनो की उत्पत्ति में वृद्धि करना, आन्तरिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्राथिक स्थिरता को कायम रखना, अनुत्पादक कार्यों मे सटे के व्यवहारो को निरुत्साहित करना, और प्राइवेट सेक्टर को चालू एवं विनियोग दोनो प्रकार की वस्तुग्रो के उत्पादन बढ़ाने में सहायता देना । ये उद्देश्य तब ही पूरे हो सकते हैं जबकि कर सम्बन्धी कानून वैज्ञानिक ढंग पर बनाए जाये । इसके लिए पर्याप्त साख्यिकी नियोजन की आवश्यकता पड़ती है। द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् विशेषत अर्द्धविकसित देशो मे औद्योगीकरण को प्रोत्साहन देने के दृष्टिकोण से प्राशुल्कक प्रेरणाओ का महत्त्व बहुत घढ गया । प्रस्तुत अध्याय में उद्योग और कर प्रणाली के सम्बन्ध की विस्तृत व्याख्या की गई है । के रूप -- कर-प्रेरणाओ के अनेक रूप हो सकते है । कौन सी वर प्रेरणा दी जाय, इसका निश्चय कई बातो पर निर्भर होता है, जैसे कर सरधना म कर का स्थान, बजट स्थिति, देश की आर्थिक परिस्थितियाँ आदि । कर- रियायतो से सरकारी आय पर प्रभाव तो पड़ता ही है, विकास योजनाये भी अप्रभावित नहीं रहती है ।
Crime Against Women : हरियाणा के पलवल (Palwal) से लेकर झांसी (Jhansi) और में महिलाओं के साथ नित नई हो रही घटनाएं माथे पर शिकन पैदा करती है। शिकन इसलिये क्योंकि मौजूदा सरकार और उनके तमाम मंत्री, सांसद और विधायक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के लिए परेशान घूम रहे हैं। शिकन इसलिए क्योंकि देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार है, तब जब उनकी पुलिस है, उनका सिस्टम है, बुलडोजर (Buldozer) है। नतीजतन, रेप, गला घोंटने, लटका कर मार देने, छेड़खानी और अपहरण जैसी घटनाएं आम हैं। हरियाणा के पलवल में क्या हुआ? पलवल स्थित हथिनी में विवाहिता क़ो कोल्ड ड्रिंक (Cold Drink) में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसके अश्लील फोटो सोशल मीडिया वायरल कर दिए गये। परिजनों को पता चलने के बाद इसकी शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना प्रभारी रमेशचंद के अनुसार, पीड़ित के पिता ने दी शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी ससुराल से घर आई हुई थी। जब बेटी घर पर अकेली थी तो इरफान मौका देखकर घर पहुंच गया और बेटी को कोल्ड ड्रिंक (Cold Drink) में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म कर अश्लील फोटो खींच लिए। कुछ दिन बाद फोटो वायरल करने के धमकी देकर आरोपी ने पीड़िता को अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए कहा। पीड़ित ने मना किया फिर भी उसने अपने दोस्त कासीम और रिजवान को घर बुला लिया। तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। फोटो डिलीट करने के नाम पर पीड़िता से पांच हजार रुपए लिए। चार अक्तूबर को आरोपियों ने बेटी के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल दिए। थाना प्रभारी कैंप अनिल कुमार ने बताया, अलीगढ़ (Aligarh) के एक गांव एक विवाहिता ने दी शिकायत में कहा है कि वह अपने पति और दो बेटों के साथ दिल्ली (Delhi) में किराए पर रहती हैं। उनकी मम्मी का फोन आया कि उसके बाबा की तबीयत खराब है। पीड़िता बाबा से मिलने के लिए गांव जा रही थी, लेकिन पलवल रेलवे रोड पर पहुंची तो उनके परिचित रामनंगला निवासी शिव कुमार व महादोरा के विजेंद्र मिले। बातचीत के दौरान विजेंद्र कोल्ड ड्रिंक (Cold Drink) ऑफर की। उसे पीने के बाद वह अचेत हो गई, जिसके बाद आरोपी उसे गाड़ी में डालकर एक कमरे में ले गए। पीड़िता ने शोर मचाने का प्रयास किया तो विजेंद्र ने मुंह दबा दिया। चार दिन तक कमरे में बंद रखा और दुष्कर्म करते रहे। वह किसी तरह भाग निकलीं और लोगों से जगह के बारे में पूछा तो बताया कि यह धारूहेड़ा है। जैसे-तैसे घर पहुंची और परिजनों को इस बारे में बताया। बहरहाल, पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। झांसी की इस नदी में तैरते 3 शव किसके हैं? उत्तर प्रदेश में झांसी (Jhansi) जिले के मऊरानीपुर में कुरेचा बांध में एक 25 वर्षीय अज्ञात युवती का शव (Dead body) शाम लगभग 4 बजे मिला, जिसको पुलिस ने कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। उसके बाद देर शाम पुलिस को सूचना मिली की बांध में दो शव और उतरा रहे है, इस पर भवानीपुर कोतवाली पुलिस और पुलिस क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे। मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सपरार बांध पर एक के बाद एक तीन लड़कियों के शव से मऊरानीपुर (Mauranipur) कोतवाली क्षेत्र में सनसनी फैल गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को बाहर निकाला। अब तक 3 लड़कियों के बांध में शव मिलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है की लड़कियों की हत्या है या आत्महत्या। 2021 में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,28,278 मामले दर्ज हुए। 2020 के मुकाबले महिला अपराध में 15.3 फीसदी का इजाफा हुआ। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में सबसे ज्यादा 31.8% मामले पति या रिश्तेदार की क्रूरता के थे। राज्यों की बात करें तो महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा 56,083 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए। 2020 के मुकाबले राज्य में इस तरह के अपराध में 13.5% का इजाफा हुआ। उत्तर प्रदेश के बाद महिला अपराध के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दर्ज हुए।
Crime Against Women : हरियाणा के पलवल से लेकर झांसी और में महिलाओं के साथ नित नई हो रही घटनाएं माथे पर शिकन पैदा करती है। शिकन इसलिये क्योंकि मौजूदा सरकार और उनके तमाम मंत्री, सांसद और विधायक बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के लिए परेशान घूम रहे हैं। शिकन इसलिए क्योंकि देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार है, तब जब उनकी पुलिस है, उनका सिस्टम है, बुलडोजर है। नतीजतन, रेप, गला घोंटने, लटका कर मार देने, छेड़खानी और अपहरण जैसी घटनाएं आम हैं। हरियाणा के पलवल में क्या हुआ? पलवल स्थित हथिनी में विवाहिता क़ो कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसके अश्लील फोटो सोशल मीडिया वायरल कर दिए गये। परिजनों को पता चलने के बाद इसकी शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना प्रभारी रमेशचंद के अनुसार, पीड़ित के पिता ने दी शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी ससुराल से घर आई हुई थी। जब बेटी घर पर अकेली थी तो इरफान मौका देखकर घर पहुंच गया और बेटी को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म कर अश्लील फोटो खींच लिए। कुछ दिन बाद फोटो वायरल करने के धमकी देकर आरोपी ने पीड़िता को अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए कहा। पीड़ित ने मना किया फिर भी उसने अपने दोस्त कासीम और रिजवान को घर बुला लिया। तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। फोटो डिलीट करने के नाम पर पीड़िता से पांच हजार रुपए लिए। चार अक्तूबर को आरोपियों ने बेटी के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल दिए। थाना प्रभारी कैंप अनिल कुमार ने बताया, अलीगढ़ के एक गांव एक विवाहिता ने दी शिकायत में कहा है कि वह अपने पति और दो बेटों के साथ दिल्ली में किराए पर रहती हैं। उनकी मम्मी का फोन आया कि उसके बाबा की तबीयत खराब है। पीड़िता बाबा से मिलने के लिए गांव जा रही थी, लेकिन पलवल रेलवे रोड पर पहुंची तो उनके परिचित रामनंगला निवासी शिव कुमार व महादोरा के विजेंद्र मिले। बातचीत के दौरान विजेंद्र कोल्ड ड्रिंक ऑफर की। उसे पीने के बाद वह अचेत हो गई, जिसके बाद आरोपी उसे गाड़ी में डालकर एक कमरे में ले गए। पीड़िता ने शोर मचाने का प्रयास किया तो विजेंद्र ने मुंह दबा दिया। चार दिन तक कमरे में बंद रखा और दुष्कर्म करते रहे। वह किसी तरह भाग निकलीं और लोगों से जगह के बारे में पूछा तो बताया कि यह धारूहेड़ा है। जैसे-तैसे घर पहुंची और परिजनों को इस बारे में बताया। बहरहाल, पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। झांसी की इस नदी में तैरते तीन शव किसके हैं? उत्तर प्रदेश में झांसी जिले के मऊरानीपुर में कुरेचा बांध में एक पच्चीस वर्षीय अज्ञात युवती का शव शाम लगभग चार बजे मिला, जिसको पुलिस ने कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। उसके बाद देर शाम पुलिस को सूचना मिली की बांध में दो शव और उतरा रहे है, इस पर भवानीपुर कोतवाली पुलिस और पुलिस क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे। मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सपरार बांध पर एक के बाद एक तीन लड़कियों के शव से मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र में सनसनी फैल गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को बाहर निकाला। अब तक तीन लड़कियों के बांध में शव मिलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है की लड़कियों की हत्या है या आत्महत्या। दो हज़ार इक्कीस में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के चार,अट्ठाईस,दो सौ अठहत्तर मामले दर्ज हुए। दो हज़ार बीस के मुकाबले महिला अपराध में पंद्रह.तीन फीसदी का इजाफा हुआ। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में सबसे ज्यादा इकतीस.आठ% मामले पति या रिश्तेदार की क्रूरता के थे। राज्यों की बात करें तो महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा छप्पन,तिरासी मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए। दो हज़ार बीस के मुकाबले राज्य में इस तरह के अपराध में तेरह.पाँच% का इजाफा हुआ। उत्तर प्रदेश के बाद महिला अपराध के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दर्ज हुए।
नयी दिल्ली, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने पूर्व राष्ट्रपति भारत-रत्न डॉ. ए. पी. जे अब्दुल कलाम की चौथी पुण्यतिथि पर शनिवार को उन्हें याद किया और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 'मिसाइलमैन' को श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देने वालों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी शामिल थे।
नयी दिल्ली, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने पूर्व राष्ट्रपति भारत-रत्न डॉ. ए. पी. जे अब्दुल कलाम की चौथी पुण्यतिथि पर शनिवार को उन्हें याद किया और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 'मिसाइलमैन' को श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देने वालों में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी शामिल थे।
बैंक ने बताया कि जोखिम सहभागिता के तहत उसने एक्सिस बैंक से कुछ 'बायर्स क्रेडिट' (आयातक को विदेशी बैंक से प्राप्त अल्पकालिक उधार की सुविधा) भी खरीदी थी। इस तरह के सौदों के जरिए आयातक एक बैंक की ओर से जारी वचनबद्धता पत्र के आधार पर विदेश में देश के दूसरे बैंक की साखाओं से कर्ज हासिल करते रहते हैं। बैंक ने कहा कि इस मामले (पीएनबी धोखाधड़ी) में उसका भी 30 करोड़ डॉलर फंसा है। लेकिन बैंक का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि उसके पास दावे के लिए पूरे दस्तावेज हैं। बैंक को इस राशि के वापस मिल जाने का पूर्ण विश्वास है। दूसरी तरफ, पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि नीरव मोदी द्वारा 11,394. 02 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी सामने आने के चार दिन बाद ही उसने भारतीय रिजर्व बैंक तथा सीबीआई को धोखाधड़ी की पहली सूचना दी। बैंक ने इस बारे में नियामकी खुलासा दस दिन बाद किया। उल्लेखनीय है कि शेयर बाजारों ने इस धोखाधड़ी मामले में बारे में बैंक से स्पष्टीकरण मांगा था। बैंक ने गुरुवार देर रात सारे घटनाक्रम का ब्यौरा दिया और बताया कि मोदी व उससे सम्बद्ध कंपनियों ने 1. 77 अरब डालर मूल्य की फर्जी बैंक गारंटियों का इस्तेमाल भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से कर्ज लेने के लिए किया।
बैंक ने बताया कि जोखिम सहभागिता के तहत उसने एक्सिस बैंक से कुछ 'बायर्स क्रेडिट' भी खरीदी थी। इस तरह के सौदों के जरिए आयातक एक बैंक की ओर से जारी वचनबद्धता पत्र के आधार पर विदेश में देश के दूसरे बैंक की साखाओं से कर्ज हासिल करते रहते हैं। बैंक ने कहा कि इस मामले में उसका भी तीस करोड़ डॉलर फंसा है। लेकिन बैंक का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि उसके पास दावे के लिए पूरे दस्तावेज हैं। बैंक को इस राशि के वापस मिल जाने का पूर्ण विश्वास है। दूसरी तरफ, पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि नीरव मोदी द्वारा ग्यारह,तीन सौ चौरानवे. दो करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी सामने आने के चार दिन बाद ही उसने भारतीय रिजर्व बैंक तथा सीबीआई को धोखाधड़ी की पहली सूचना दी। बैंक ने इस बारे में नियामकी खुलासा दस दिन बाद किया। उल्लेखनीय है कि शेयर बाजारों ने इस धोखाधड़ी मामले में बारे में बैंक से स्पष्टीकरण मांगा था। बैंक ने गुरुवार देर रात सारे घटनाक्रम का ब्यौरा दिया और बताया कि मोदी व उससे सम्बद्ध कंपनियों ने एक. सतहत्तर अरब डालर मूल्य की फर्जी बैंक गारंटियों का इस्तेमाल भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से कर्ज लेने के लिए किया।
'माँ बन जाओगी तो सब ठीक हो जाएगा। ' 'छोटा-सा परिवार हो जाएगा तो तुम्हें कोई ख़राब नहीं कर पाएगा। ' मोहित ने नेहा को समझाते हुए कहा। शादी के दो महीने बाद से ही मोहित नेहा पर गर्भधारण के लिए दबाव बनाने लगा। कभी प्यार की निशानी तो वंश चलाने की दुहाई के नामपर। आख़िरकार न चाहते हुए भी नेहा को माँ बनाना पड़ा, जिसकी वजह से उसकी नौकरी छूट गयी और नेहा पूरी तरह मोहित पर आश्रित हो गयी। हमें बचपन से ही 'माँ' का महिमामंडित चेहरा दिखाया जाता है, जो त्याग का पर्याय होता है। त्याग - अपनी इच्छाओं, अभिव्यक्ति, विचारों और आत्मसम्मान का। आज के आधुनिक युग में हम चाहे कितनी भी आधुनिक और तथाकथित प्रगतिशील बातें कर लें, लेकिन जब युवाओं का शादी के नामपर वही पितृसत्ताधारी सोच का स्वरूप दिखता है तो ऐसी आधुनिकता बेहद संकुचित और सड़ी हुई लगती है, जिसकी कोई बुनियाद नहीं है। जैसा कि हम जानते है, महिला और पुरुष के बीच प्रकृति ने बस एक प्रमुख अंतर दिया है, वो ये कि एक महिला का शरीर अपने जैसे बच्चे पैदा कर उन्हें दूध पिला सकता है और एक पुरुष का शरीर उस बच्चे के लिए बीज तैयार कर सकता है। लेकिन हमारे समाज ने प्रकृति के इस भेद को अपने भाव में बदल लिया और इस अंतर को 'सत्ता' का प्रमुख आधार चुन लिया। इसी आधार पर पितृसत्ता सदियों से राज करती आ रही है। हमारे समाज में असली मर्द की परिभाषा का अहम बिंदु है अपने से संबंधित महिला पर अपना वर्चस्व बनाए रखना इसलिए अक्सर महिला को गर्भवती करना पुरुष को अपने वर्चस्व के एक चिन्ह के रूप में दिखाया-बताया जाता है। महिला बच्चे को जन्म दे सकती है उसकी इस खूबी को समाज ने पितृसत्ता की विचारधारा के प्रमुख केंद्र में रखा, जिससे महिला की ज़िंदगी और उसके अस्तित्व को ये जैसे चाहे वैसे मोड़ता है। इसी आधार पर समाज 'रक्त की शुद्ध' बनाए रखने का बोझ महिलाओं के माथे इज़्ज़त और पवित्रता के नामपर मढ़ता है, तो वहीं इसे महिलाओं की यौनिकता पर अपना शिकंजा कसने में भी इस्तेमाल करता है। बच्चे को जन्म देते ही महिला की भूमिकाओं में काफ़ी तब्दीली आती है और इसका पहला वार होता है महिला की गतिशीलता पर, जिसके चलते वो कहीं भी आने-जाने में ख़ुद को असहज पाती है या यों कहें कि बना दी जाती है। इसके साथ ही, चूँकि हमारे समाज में असली मर्द की परिभाषा का अहम बिंदु है अपने से संबंधित महिला पर अपना वर्चस्व बनाए रखना इसलिए अक्सर महिला को गर्भवती करना पुरुष को अपने वर्चस्व के एक चिन्ह के रूप में दिखाया-बताया जाता है। इसी सोच चलते, शादी के बाद जल्द से जल्द बच्चे पैदा करने की बात की जाती है, जिससे महिला का ध्यान और उसका जीवन आसानी से बच्चे पर केंद्रित किया जा सके। बस बच्चे के जन्म की देरी है, उसके बाद समाज अपनी पितृसत्ता की सत्ता को तुरंत महिला पर क़ायम करने में जुट जाती है, कभी अच्छी माँ के तमग़े से तो कभी अच्छे चरित्र के तमग़े से। असल मायने में माँ बनाना या नहीं बनाना महिला का अपना निर्णय है, जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, ज़रूरी है कि हम माँ बनने के दबाव के पीछे समाज की उस पितृसत्तात्मक सोच को समझे वो महिला की यौनिकता पर शिकंजा कसने का काम करती है।
'माँ बन जाओगी तो सब ठीक हो जाएगा। ' 'छोटा-सा परिवार हो जाएगा तो तुम्हें कोई ख़राब नहीं कर पाएगा। ' मोहित ने नेहा को समझाते हुए कहा। शादी के दो महीने बाद से ही मोहित नेहा पर गर्भधारण के लिए दबाव बनाने लगा। कभी प्यार की निशानी तो वंश चलाने की दुहाई के नामपर। आख़िरकार न चाहते हुए भी नेहा को माँ बनाना पड़ा, जिसकी वजह से उसकी नौकरी छूट गयी और नेहा पूरी तरह मोहित पर आश्रित हो गयी। हमें बचपन से ही 'माँ' का महिमामंडित चेहरा दिखाया जाता है, जो त्याग का पर्याय होता है। त्याग - अपनी इच्छाओं, अभिव्यक्ति, विचारों और आत्मसम्मान का। आज के आधुनिक युग में हम चाहे कितनी भी आधुनिक और तथाकथित प्रगतिशील बातें कर लें, लेकिन जब युवाओं का शादी के नामपर वही पितृसत्ताधारी सोच का स्वरूप दिखता है तो ऐसी आधुनिकता बेहद संकुचित और सड़ी हुई लगती है, जिसकी कोई बुनियाद नहीं है। जैसा कि हम जानते है, महिला और पुरुष के बीच प्रकृति ने बस एक प्रमुख अंतर दिया है, वो ये कि एक महिला का शरीर अपने जैसे बच्चे पैदा कर उन्हें दूध पिला सकता है और एक पुरुष का शरीर उस बच्चे के लिए बीज तैयार कर सकता है। लेकिन हमारे समाज ने प्रकृति के इस भेद को अपने भाव में बदल लिया और इस अंतर को 'सत्ता' का प्रमुख आधार चुन लिया। इसी आधार पर पितृसत्ता सदियों से राज करती आ रही है। हमारे समाज में असली मर्द की परिभाषा का अहम बिंदु है अपने से संबंधित महिला पर अपना वर्चस्व बनाए रखना इसलिए अक्सर महिला को गर्भवती करना पुरुष को अपने वर्चस्व के एक चिन्ह के रूप में दिखाया-बताया जाता है। महिला बच्चे को जन्म दे सकती है उसकी इस खूबी को समाज ने पितृसत्ता की विचारधारा के प्रमुख केंद्र में रखा, जिससे महिला की ज़िंदगी और उसके अस्तित्व को ये जैसे चाहे वैसे मोड़ता है। इसी आधार पर समाज 'रक्त की शुद्ध' बनाए रखने का बोझ महिलाओं के माथे इज़्ज़त और पवित्रता के नामपर मढ़ता है, तो वहीं इसे महिलाओं की यौनिकता पर अपना शिकंजा कसने में भी इस्तेमाल करता है। बच्चे को जन्म देते ही महिला की भूमिकाओं में काफ़ी तब्दीली आती है और इसका पहला वार होता है महिला की गतिशीलता पर, जिसके चलते वो कहीं भी आने-जाने में ख़ुद को असहज पाती है या यों कहें कि बना दी जाती है। इसके साथ ही, चूँकि हमारे समाज में असली मर्द की परिभाषा का अहम बिंदु है अपने से संबंधित महिला पर अपना वर्चस्व बनाए रखना इसलिए अक्सर महिला को गर्भवती करना पुरुष को अपने वर्चस्व के एक चिन्ह के रूप में दिखाया-बताया जाता है। इसी सोच चलते, शादी के बाद जल्द से जल्द बच्चे पैदा करने की बात की जाती है, जिससे महिला का ध्यान और उसका जीवन आसानी से बच्चे पर केंद्रित किया जा सके। बस बच्चे के जन्म की देरी है, उसके बाद समाज अपनी पितृसत्ता की सत्ता को तुरंत महिला पर क़ायम करने में जुट जाती है, कभी अच्छी माँ के तमग़े से तो कभी अच्छे चरित्र के तमग़े से। असल मायने में माँ बनाना या नहीं बनाना महिला का अपना निर्णय है, जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, ज़रूरी है कि हम माँ बनने के दबाव के पीछे समाज की उस पितृसत्तात्मक सोच को समझे वो महिला की यौनिकता पर शिकंजा कसने का काम करती है।
GORAKHPUR: शहर में कार चलाते समय अचानक कोई हाथ देकर रोकने की कोशिश करे तो सजग रहने की जरूरत है। कार सवारों को तेल चूने का झांसा देकर शातिर बदमाश लूटपाट का शिकार बना सकते हैं। चार दिन पूर्व इंजीनियरिंग कॉलेज एरिया में एक कार सवार को हाथ देकर रोकने के बाद लूटपाट की कोशिश हुई। सूझबूझ का परिचय देते हुए कार सवारों ने खुद को बचा लिया। उनकी सूचना पर पुलिस जांच में जुटी है। पहले भी शहर में तेल चूने की बात कहकर शातिरों ने कार सवारों को शिकार बनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में लूटपाट और जालसाजी करने वाले बदमाशों की तलाश में पुलिस जुटी है। देवरिया बाईपास पर चार दिन पूर्व एक कार सवार लुटने से बच गए। रात में वह देवरिया बाईपास होते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज की तरफ जा रहे थे। तभी अलग जगहों पर तीन संदिग्ध युवक मिले। तीनों ने उनको हाथ देकर बताया कि कार से तेल चू रहा है। दो जगहों पर कार सवार ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज के पास कार पहुंची तो एक युवक ने हाथ दिया। उन्होंने अपनी कार रोक दी। कार से ही वह नीचे देखने लगे। तभी उनके पाए आए संदिग्ध ने पीछे का फाटक खोलकर सामान उठाने की कोशिश की। हालांकि वह लूटपाट में सफल नहीं हो पाया। फिर इसकी सूचना कार सवार ने कैंट पुलिस को दी। कैंट पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। शहर में कार से तेल चूने की बात कहकर शातिरों ने कई बार लूटपाट की है। लॉकडाउन के बाद घटनाओं में कमी आई थी। लेकिन दोबारा गैंग के सक्रिय होने की सूचना से पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई। पुलिस ने शातिरों के गैंग की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि मौसम बदलने पर ऐसे शातिर सक्रिय होते हैं। इसलिए ऐसे संदिग्धों की तलाश शुरू करा दी गई है। जल्द उनको पकड़ ि1लया जाएगा। 28 जनवरी 2021 को बलिया, बैरिया के रहने वाले ठेकेदार विनोद कुमार अपने परिचित से मिलने जिला अस्पताल गए थे। दोपहर में साढ़े 12 बजे टप्पेबाजों ने उनकी कार से बैग उड़ा दिया। बैग में 10 हजार रुपए नकद, ड्राइविंग लाइसेंस, रिवाल्वर, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज थे। 23 नवंबर 2018 को शिवपुर सहबाजगंज मोहल्ला निवासी राधाकृष्ण के बेटे रविकांत को तेल चूने का झांसा देकर शातिरों ने लूटपाट का शिकार बनाया। वह किसी काम से गोलघर जा रहे थे। रेल म्यूजियम के पास बदमाशों ने उनको इशारे से बताया कि कार के इंजन से आयल लीक कर रहा है। वह रुककर इंजन की जांच करने लगे। तभी मौका देखकर टप्पेबाज कार में रखा बैग लेकर फरार हो गए। बैग में 30 हजार रुपए नकदी, पासबुक, चेकबुक और लैपटॉप था। उनकी सूचना पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखी। लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। घर से कार लेकर निकलते समय पूरी तरह से चेक कर लें। रास्ते में कोई हाथ देकर रोके तो उसकी बातों में अचानक न आएं। कार से तेल, मोबिल या कूलेंट के रिसाव की जानकारी मिलने पर हड़बड़ी न दिखाएं। यदि किसी तरह का संदेह हो तो आसपास किसी सुरक्षित स्थान पर कार रोकें। रात होने पर पूरी सावधानी बरतें। झांसा देकर शातिर लूटपाट का शिकार बना सकते हैं। कार की पिछली सीट पर आवश्यक और कीमती सामान न रखें। गाड़ी रोकने पर सतकर्1 रहें। शहर के भीतर किसी भी तरह की वारदात से निपटने के लिए पुलिस को एक्टिव किया गया है। हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। संदिग्धों की चेकिंग कराई जा रही है।
GORAKHPUR: शहर में कार चलाते समय अचानक कोई हाथ देकर रोकने की कोशिश करे तो सजग रहने की जरूरत है। कार सवारों को तेल चूने का झांसा देकर शातिर बदमाश लूटपाट का शिकार बना सकते हैं। चार दिन पूर्व इंजीनियरिंग कॉलेज एरिया में एक कार सवार को हाथ देकर रोकने के बाद लूटपाट की कोशिश हुई। सूझबूझ का परिचय देते हुए कार सवारों ने खुद को बचा लिया। उनकी सूचना पर पुलिस जांच में जुटी है। पहले भी शहर में तेल चूने की बात कहकर शातिरों ने कार सवारों को शिकार बनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में लूटपाट और जालसाजी करने वाले बदमाशों की तलाश में पुलिस जुटी है। देवरिया बाईपास पर चार दिन पूर्व एक कार सवार लुटने से बच गए। रात में वह देवरिया बाईपास होते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज की तरफ जा रहे थे। तभी अलग जगहों पर तीन संदिग्ध युवक मिले। तीनों ने उनको हाथ देकर बताया कि कार से तेल चू रहा है। दो जगहों पर कार सवार ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज के पास कार पहुंची तो एक युवक ने हाथ दिया। उन्होंने अपनी कार रोक दी। कार से ही वह नीचे देखने लगे। तभी उनके पाए आए संदिग्ध ने पीछे का फाटक खोलकर सामान उठाने की कोशिश की। हालांकि वह लूटपाट में सफल नहीं हो पाया। फिर इसकी सूचना कार सवार ने कैंट पुलिस को दी। कैंट पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। शहर में कार से तेल चूने की बात कहकर शातिरों ने कई बार लूटपाट की है। लॉकडाउन के बाद घटनाओं में कमी आई थी। लेकिन दोबारा गैंग के सक्रिय होने की सूचना से पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई। पुलिस ने शातिरों के गैंग की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि मौसम बदलने पर ऐसे शातिर सक्रिय होते हैं। इसलिए ऐसे संदिग्धों की तलाश शुरू करा दी गई है। जल्द उनको पकड़ िएकलया जाएगा। अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को बलिया, बैरिया के रहने वाले ठेकेदार विनोद कुमार अपने परिचित से मिलने जिला अस्पताल गए थे। दोपहर में साढ़े बारह बजे टप्पेबाजों ने उनकी कार से बैग उड़ा दिया। बैग में दस हजार रुपए नकद, ड्राइविंग लाइसेंस, रिवाल्वर, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज थे। तेईस नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को शिवपुर सहबाजगंज मोहल्ला निवासी राधाकृष्ण के बेटे रविकांत को तेल चूने का झांसा देकर शातिरों ने लूटपाट का शिकार बनाया। वह किसी काम से गोलघर जा रहे थे। रेल म्यूजियम के पास बदमाशों ने उनको इशारे से बताया कि कार के इंजन से आयल लीक कर रहा है। वह रुककर इंजन की जांच करने लगे। तभी मौका देखकर टप्पेबाज कार में रखा बैग लेकर फरार हो गए। बैग में तीस हजार रुपए नकदी, पासबुक, चेकबुक और लैपटॉप था। उनकी सूचना पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखी। लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। घर से कार लेकर निकलते समय पूरी तरह से चेक कर लें। रास्ते में कोई हाथ देकर रोके तो उसकी बातों में अचानक न आएं। कार से तेल, मोबिल या कूलेंट के रिसाव की जानकारी मिलने पर हड़बड़ी न दिखाएं। यदि किसी तरह का संदेह हो तो आसपास किसी सुरक्षित स्थान पर कार रोकें। रात होने पर पूरी सावधानी बरतें। झांसा देकर शातिर लूटपाट का शिकार बना सकते हैं। कार की पिछली सीट पर आवश्यक और कीमती सामान न रखें। गाड़ी रोकने पर सतकर्एक रहें। शहर के भीतर किसी भी तरह की वारदात से निपटने के लिए पुलिस को एक्टिव किया गया है। हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। संदिग्धों की चेकिंग कराई जा रही है।
Born on 14 Mar 1949 (Age 74) *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
Born on चौदह मार्च एक हज़ार नौ सौ उनचास *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
से रावण घनरा गया, और खड्ग को त्याग बरछी ले रामचन्द्रजी पर धावा करना चाहा परन्तु इतने अवसर में रामचन्द्रजी के सारथी ने घोड़ों की बाग ऐसी सावधानी से फेरी कि रथ तात्काल पछि हट गया और रावण की वार व्यर्थ गई, और इसके उतर में रामचन्द्रजी ने एक माय धनुष से ऐसा छोड़ा जो रावण के हृदय को बेषता हुमा पार हो गया और वह दीन रथ से नीचे गिर पड़ा ।। चौपाई । गिरा भुमि पर जब दस कन्धर, महा परतापी वीर धुरन्धर । राक्षस सारे भए दुखारी, सुरादिक सर्व भए सुखारी ।। डा ! देखिये ! रावण भूमि पर तड़प रहा है, और शेष सेना जो उसी मैदान की विस्त्रित भूमि में उतर की ओर डटी थी अभी तक युद्ध कर रही है और इधर विजय पताका अकाश में उड़ने लगा, महाराज रामचंद्र जी के जय २ कार की ध्वनि प्रकाश तक पहुंच गई, प्रसन्नता द्योतक हर्ष जनक शब्द सब ओर से आने लगा और शत्रु दल ने शस्त्र फेंक श्री रामचंद्र जी की मांगी ।। पाठक महाशय ! रावण की भूमि पर तड़फते विभषिय को भ्रातृप्रेम ने घेरा, शीघ्रता से रथ को चला उस के निकट जा पहुंचा, परंतु खेद कि इतने में वह परलोक यात्रा कर चुका था और मृत्यू ने उस के शरीर को ठण्डा कर दिया था, अव रावण हाथ पांव फैलाये मृत्यु शय्या पर पड़ा है, शरीर रुधिरा कांत है परंतु मृग के समान नेत्र वैसे ही खुले हैं, जैसे कि पाहिले थे । विभविण को भाई की यह दशा देखते ही उस की विद्वत्ता के कथन, वीरता के व्याख्यान और वव युक्त साहसमय पूर्वोक्त कथन स्मरण प्रागये, उधर वंश के विनाश और अपने एक मात्र रह जाने और सव के वियोग ने इस के आतुर हृदय को और भी विदग्ध कर दिया, सब ज्ञान के वचन इस समय भस्मीभूत हो धूम्र रुप धारण कर के मस्तिष्क को चढ़ गये और वेसुध हो भूमी पर गिर पड़ा जब तनिक सुघ आई तो उठ कर बैठ गया ।। अब देखिये दोनों हाथ भुमि पर टेके रावण के मुख को देखता हुआ हाय भ्राता हाय भ्राता ! कह कर कैसे विलपि कर रहा है और बहुत से बीर सर्दार इसकी चारों ओर बैठे रो रहे हैं । वह तो मंदादरी भी इस की मृत्यु का समाचार सुन रथारूढ़ हो रोती चिल्लाती भारही है, छा ! जैसे यह उस मृतक शरीर के निकट पहुंची और अपने स्वामी को रुघिरा कांत हाथ पांव फैलाये भूमि पर पड़े देखा वेसुध हो गिर पड़ी, जय आई तो रो रो कर कहने लगी " हा ! पति वेरी यह दश। क्योंकर हुई तुम से तो इन्द्र, यम, कुवेर आदि डरते थे आज तुम्हारी वह वीरता कहाँ गई जो इस प्रकार बेसुध पड़े हो ! हाथ मेरे कथन का उत्तर क्यों नहीं देते ? स्वामिन् ! आप के सिवा मुझ अधीर को कोई धैर्य देने वाला दीख नहीं पड़ता, हा ! मिया पुल पहिले ही सिधार गये, पौल मपौल भी दीख नहीं पड़ते । इा ! बीर कुंभकरण सरीखा देवर भी इस युद्ध की भेटा हुआहा ! विधाता अब मैं किधर जाऊं क्या करूं स्वामिन् ! आप को बहुतेरा समझाया लाखों यत्न किये कि आप इस छठ को छोड़ दें परंतु खेद कि आप ने एक न मानी' पाठकगण ! मंदोदरी इस प्रकार विलप कर ही रही थी कि महाराज रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी वहां पर आगये और कहने लगे, मंदोदरी तू आप बुद्धिमति है तनिक नयाय पूर्वक आप ही कहो कि जो दशा तेरे पुत्र या पौत्रों की हुई उस में किस का अपराध है देवी ! जब तू स्वयं दूर दर्शिनी और नयाकारिणी है तो धर्म से न्याय कर कि तेरा स्वामी जो अतीवाभिमानी प्रात्मश्लाघा और किसी की बात को न सुनने वाला था, उस की यह गत होनी चाहिये थी या नहीं ? तुम ने स्वयं बहुतेरा समझाया और हमने भी सहसो यत्न किये परंतु इस ने तनिक ध्यान न दिया अब कहिये इस को यह दिन भी देखना या या नहीं ? रानी संतोष कर कर्मरेख द्वारे नही दरती इस में किसी
से रावण घनरा गया, और खड्ग को त्याग बरछी ले रामचन्द्रजी पर धावा करना चाहा परन्तु इतने अवसर में रामचन्द्रजी के सारथी ने घोड़ों की बाग ऐसी सावधानी से फेरी कि रथ तात्काल पछि हट गया और रावण की वार व्यर्थ गई, और इसके उतर में रामचन्द्रजी ने एक माय धनुष से ऐसा छोड़ा जो रावण के हृदय को बेषता हुमा पार हो गया और वह दीन रथ से नीचे गिर पड़ा ।। चौपाई । गिरा भुमि पर जब दस कन्धर, महा परतापी वीर धुरन्धर । राक्षस सारे भए दुखारी, सुरादिक सर्व भए सुखारी ।। डा ! देखिये ! रावण भूमि पर तड़प रहा है, और शेष सेना जो उसी मैदान की विस्त्रित भूमि में उतर की ओर डटी थी अभी तक युद्ध कर रही है और इधर विजय पताका अकाश में उड़ने लगा, महाराज रामचंद्र जी के जय दो कार की ध्वनि प्रकाश तक पहुंच गई, प्रसन्नता द्योतक हर्ष जनक शब्द सब ओर से आने लगा और शत्रु दल ने शस्त्र फेंक श्री रामचंद्र जी की मांगी ।। पाठक महाशय ! रावण की भूमि पर तड़फते विभषिय को भ्रातृप्रेम ने घेरा, शीघ्रता से रथ को चला उस के निकट जा पहुंचा, परंतु खेद कि इतने में वह परलोक यात्रा कर चुका था और मृत्यू ने उस के शरीर को ठण्डा कर दिया था, अव रावण हाथ पांव फैलाये मृत्यु शय्या पर पड़ा है, शरीर रुधिरा कांत है परंतु मृग के समान नेत्र वैसे ही खुले हैं, जैसे कि पाहिले थे । विभविण को भाई की यह दशा देखते ही उस की विद्वत्ता के कथन, वीरता के व्याख्यान और वव युक्त साहसमय पूर्वोक्त कथन स्मरण प्रागये, उधर वंश के विनाश और अपने एक मात्र रह जाने और सव के वियोग ने इस के आतुर हृदय को और भी विदग्ध कर दिया, सब ज्ञान के वचन इस समय भस्मीभूत हो धूम्र रुप धारण कर के मस्तिष्क को चढ़ गये और वेसुध हो भूमी पर गिर पड़ा जब तनिक सुघ आई तो उठ कर बैठ गया ।। अब देखिये दोनों हाथ भुमि पर टेके रावण के मुख को देखता हुआ हाय भ्राता हाय भ्राता ! कह कर कैसे विलपि कर रहा है और बहुत से बीर सर्दार इसकी चारों ओर बैठे रो रहे हैं । वह तो मंदादरी भी इस की मृत्यु का समाचार सुन रथारूढ़ हो रोती चिल्लाती भारही है, छा ! जैसे यह उस मृतक शरीर के निकट पहुंची और अपने स्वामी को रुघिरा कांत हाथ पांव फैलाये भूमि पर पड़े देखा वेसुध हो गिर पड़ी, जय आई तो रो रो कर कहने लगी " हा ! पति वेरी यह दश। क्योंकर हुई तुम से तो इन्द्र, यम, कुवेर आदि डरते थे आज तुम्हारी वह वीरता कहाँ गई जो इस प्रकार बेसुध पड़े हो ! हाथ मेरे कथन का उत्तर क्यों नहीं देते ? स्वामिन् ! आप के सिवा मुझ अधीर को कोई धैर्य देने वाला दीख नहीं पड़ता, हा ! मिया पुल पहिले ही सिधार गये, पौल मपौल भी दीख नहीं पड़ते । इा ! बीर कुंभकरण सरीखा देवर भी इस युद्ध की भेटा हुआहा ! विधाता अब मैं किधर जाऊं क्या करूं स्वामिन् ! आप को बहुतेरा समझाया लाखों यत्न किये कि आप इस छठ को छोड़ दें परंतु खेद कि आप ने एक न मानी' पाठकगण ! मंदोदरी इस प्रकार विलप कर ही रही थी कि महाराज रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी वहां पर आगये और कहने लगे, मंदोदरी तू आप बुद्धिमति है तनिक नयाय पूर्वक आप ही कहो कि जो दशा तेरे पुत्र या पौत्रों की हुई उस में किस का अपराध है देवी ! जब तू स्वयं दूर दर्शिनी और नयाकारिणी है तो धर्म से न्याय कर कि तेरा स्वामी जो अतीवाभिमानी प्रात्मश्लाघा और किसी की बात को न सुनने वाला था, उस की यह गत होनी चाहिये थी या नहीं ? तुम ने स्वयं बहुतेरा समझाया और हमने भी सहसो यत्न किये परंतु इस ने तनिक ध्यान न दिया अब कहिये इस को यह दिन भी देखना या या नहीं ? रानी संतोष कर कर्मरेख द्वारे नही दरती इस में किसी
काट रहे हैं। आप शायद जानते हों कि सबसे ऊँची कांग्रेस कार्यसमिति के वह मेम्बर हैं। वह सरहद के ही नहीं, बल्कि के • तमाम हिन्दुस्तान के सबसे लोकप्रिय आदमियों में से एक हैं। उनके नाम से महसूस करेंगे कि वह मुसलमान हैं; हिन्दू नहीं । वह हिन्दुस्तान की जनता के सबसे बड़े मुसलमान नेताओं में से एक हैं। कांग्रे सान्दोलन में ऊँची-से ऊँची जगहों में उनका स्थान है। आपको यह याद रखना चाहिए कि कांग्रेस आन्दोलन के पीछे, हालांकि उसमें अनिवार्य रूप मुख्यतः हिन्दू है, मुसलमानों की बड़ी ताकत है । इसलिए अब्दुलगफ्फार खाँ और गाँधीजी सरहद में जाते तो मेरी राय में उनका बहुत शानदार स्वागत किया जाता और वहा वे दूसरी और बातो के साथ सरहदी समस्या पर भी गौर कर सकते। मैं नहीं सोचता कि उस समस्या को सुलझाना मुश्किल होगा। मेरे कहने का यह मतलब नहीं है कि उनके जाने से वहा की सारी मुसीबतों का खात्मा हो जायगा। ऐसा कहना तो फिजूल होगा। कुछ मुसीबतें तो बार बार उठती ही रहेंगी, लेकिन पायेदारी की नींव डाली जा सकती थी। कुछ आर्थिक उपाय भी काम में लाये जाते तो मैं समझता हूँ कि बार-बार आने वाली मुसीबत का निश्चय ही खात्मा हो जाता । बंगाल के बारे मे यह है कि वहां पर आतंकवाद को जितने कि वह लायक है उससे कहीं अधिक नाम और विज्ञापन दिया गया है । इससे तो इनकार नहीं किया जा सकता कि आतंकवाद बंगाल में रहा है और भी है; लेकिन सोचिए कि अगर हिन्दुस्तान जैसे मुल्क में या बंगाल जैसे बड़े सूबे में दो-तीन साल में एक दो श्रातक के मामले हो भी गये तो क्या ? (पिछले दो सालों में, मैं समझता हूँ; एक भी मामला नहीं हुआ । तीसरे साल में शायद एक या दो हुए है ।) तंकवाद की ऐसी दीन हालत है और वह उतना खतरनाक भी नहीं है । इस मामले में हमें अपनी को नहीं खोना चाहिए। यह पहली चीज है जिसे मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ। दूसरे जहा तक मैं जानता हूँ ( स्पष्ट रूप से सीधी और तुरंत की मुझे कोई खबर नहीं है; क्योंकि मैं दो-तीन साल से जेल में ही रहा हूँ) वहाँ कोई भी संगठित तकवादी आदोलन अब नहीं है। पहले था; लेकिन शायद बंगाल या कहीं भी हिन्दुस्तान में अब कोई आदोलन नहीं है। मेरा मतलब इससे यह नहीं है कि बंगाल या और कहीं के हिसात्मक तरीकों में विश्वास ही नही रखते । ऐसे आदमी बहुत से हैं जो हिंसात्मक तरीकों में और क्राति में विश्वास करते है, लेकिन मेरा ख्याल है कि वे आदमी भी जो पहले आतंकवादी कामो में विश्वास करते थे, अब वैसा नहीं करते, यानी, पुराने आतंकवादी या उनमे से बहुत से अब भी सोचते है कि सभी भावनाओं में शासक सत्ता से लड़ने के लिए सशस्त्र बल प्रयोग की जरूरत हो सकती हे; लेकिन वैसा वे बलवा, बल प्रयोग या किसी तरह के संगठित विद्रोह की परिभाषा में सोचते है । वे बम फेंकने यादमियो को गोली मार देने की बात नहीं सोचते है। मेरे ख्याल से बहुत से तो गांधी जी के आन्दोलन की वजह से आतंकवादी आन्दोलन से एकदम दूर हट गये है । जो रहे, वे भी निरे आतंकवादी स्खयाल के नहीं रहे, जो कि जैसा आप जानते है, राजनीतिक आन्दोलन मे एक बड़ा बच्चों का-सा खयाल है । जब राष्ट्रीय आन्दोलन शुरू होता है तो उसकी जड़ में जोश, बेबसी और मायूसी होती है, जो भड़के हुए जवानों को आतंकवादी काम करने के लिए मजबूर कर देती है; लेकिन ज्यो-ज्यों आन्दोलन बढ़ता जाता है, और मजबूत होता जाता है, त्यों-त्यो आदमियों की ताकत एक संगठित काम करने में सामूहिक - आन्दोलन चलाने वगैरा में, लगती है। ऐसा हिन्दुस्तान में हुआ है, और फलस्वरूप आतंकवादी आन्दोलन करीब-करीब खत्म होगया हे । लेकिन बंगाल में जो खौफनाक । सख्तिया की जा रही हैं उन्होने जरूर ही पुराने आतंकवादियों के दल की खें बदला लेने के लिए खोल दी हैं। मिसाल के तौर पर, एक शख्स जब अपने दोस्तों पर अपने ही शहर में बड़ी खौफनाक बातें होते देखता है, तो उसका खून खौलने लग जाता है। संभव है उन्हीं अत्याचारों का वह
काट रहे हैं। आप शायद जानते हों कि सबसे ऊँची कांग्रेस कार्यसमिति के वह मेम्बर हैं। वह सरहद के ही नहीं, बल्कि के • तमाम हिन्दुस्तान के सबसे लोकप्रिय आदमियों में से एक हैं। उनके नाम से महसूस करेंगे कि वह मुसलमान हैं; हिन्दू नहीं । वह हिन्दुस्तान की जनता के सबसे बड़े मुसलमान नेताओं में से एक हैं। कांग्रे सान्दोलन में ऊँची-से ऊँची जगहों में उनका स्थान है। आपको यह याद रखना चाहिए कि कांग्रेस आन्दोलन के पीछे, हालांकि उसमें अनिवार्य रूप मुख्यतः हिन्दू है, मुसलमानों की बड़ी ताकत है । इसलिए अब्दुलगफ्फार खाँ और गाँधीजी सरहद में जाते तो मेरी राय में उनका बहुत शानदार स्वागत किया जाता और वहा वे दूसरी और बातो के साथ सरहदी समस्या पर भी गौर कर सकते। मैं नहीं सोचता कि उस समस्या को सुलझाना मुश्किल होगा। मेरे कहने का यह मतलब नहीं है कि उनके जाने से वहा की सारी मुसीबतों का खात्मा हो जायगा। ऐसा कहना तो फिजूल होगा। कुछ मुसीबतें तो बार बार उठती ही रहेंगी, लेकिन पायेदारी की नींव डाली जा सकती थी। कुछ आर्थिक उपाय भी काम में लाये जाते तो मैं समझता हूँ कि बार-बार आने वाली मुसीबत का निश्चय ही खात्मा हो जाता । बंगाल के बारे मे यह है कि वहां पर आतंकवाद को जितने कि वह लायक है उससे कहीं अधिक नाम और विज्ञापन दिया गया है । इससे तो इनकार नहीं किया जा सकता कि आतंकवाद बंगाल में रहा है और भी है; लेकिन सोचिए कि अगर हिन्दुस्तान जैसे मुल्क में या बंगाल जैसे बड़े सूबे में दो-तीन साल में एक दो श्रातक के मामले हो भी गये तो क्या ? तंकवाद की ऐसी दीन हालत है और वह उतना खतरनाक भी नहीं है । इस मामले में हमें अपनी को नहीं खोना चाहिए। यह पहली चीज है जिसे मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ। दूसरे जहा तक मैं जानता हूँ वहाँ कोई भी संगठित तकवादी आदोलन अब नहीं है। पहले था; लेकिन शायद बंगाल या कहीं भी हिन्दुस्तान में अब कोई आदोलन नहीं है। मेरा मतलब इससे यह नहीं है कि बंगाल या और कहीं के हिसात्मक तरीकों में विश्वास ही नही रखते । ऐसे आदमी बहुत से हैं जो हिंसात्मक तरीकों में और क्राति में विश्वास करते है, लेकिन मेरा ख्याल है कि वे आदमी भी जो पहले आतंकवादी कामो में विश्वास करते थे, अब वैसा नहीं करते, यानी, पुराने आतंकवादी या उनमे से बहुत से अब भी सोचते है कि सभी भावनाओं में शासक सत्ता से लड़ने के लिए सशस्त्र बल प्रयोग की जरूरत हो सकती हे; लेकिन वैसा वे बलवा, बल प्रयोग या किसी तरह के संगठित विद्रोह की परिभाषा में सोचते है । वे बम फेंकने यादमियो को गोली मार देने की बात नहीं सोचते है। मेरे ख्याल से बहुत से तो गांधी जी के आन्दोलन की वजह से आतंकवादी आन्दोलन से एकदम दूर हट गये है । जो रहे, वे भी निरे आतंकवादी स्खयाल के नहीं रहे, जो कि जैसा आप जानते है, राजनीतिक आन्दोलन मे एक बड़ा बच्चों का-सा खयाल है । जब राष्ट्रीय आन्दोलन शुरू होता है तो उसकी जड़ में जोश, बेबसी और मायूसी होती है, जो भड़के हुए जवानों को आतंकवादी काम करने के लिए मजबूर कर देती है; लेकिन ज्यो-ज्यों आन्दोलन बढ़ता जाता है, और मजबूत होता जाता है, त्यों-त्यो आदमियों की ताकत एक संगठित काम करने में सामूहिक - आन्दोलन चलाने वगैरा में, लगती है। ऐसा हिन्दुस्तान में हुआ है, और फलस्वरूप आतंकवादी आन्दोलन करीब-करीब खत्म होगया हे । लेकिन बंगाल में जो खौफनाक । सख्तिया की जा रही हैं उन्होने जरूर ही पुराने आतंकवादियों के दल की खें बदला लेने के लिए खोल दी हैं। मिसाल के तौर पर, एक शख्स जब अपने दोस्तों पर अपने ही शहर में बड़ी खौफनाक बातें होते देखता है, तो उसका खून खौलने लग जाता है। संभव है उन्हीं अत्याचारों का वह
नंप दोषः । नैवं विज्ञायते लोपे प्रत्ययलक्षणं भवति प्रत्ययस्य प्रादुर्भाव इति । कथं तर्हि प्रत्ययो लक्षणं यस्य कार्यस्य तत् लुप्तेपि भवति । इदं तर्हि प्रयोजनम् । सति प्रत्यये यत् प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणं यथा स्यात् । लोपोत्तरकालं यत् प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणं मा भूदिति । किं प्रयोजनम् ? ग्रामणिकुलं सेनानि कुलम् इत्यत्रौत्तरपदिके ह्रस्वत्वे कृते ह्रस्वस्य पिति कृति तुमिति तु प्राप्नोति स मा भूदिति । यदि तर्हि यत् सति प्रत्यये प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणेन भवति, यह कोई दोष नहीं । प्रत्ययलक्षण का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्यय का लक्षण दर्शन अथवा प्रादुर्भाव होना । बल्कि प्रत्यय है लक्षण निमित्त जिस कार्य का वह कार्य प्रत्ययलक्षण कहाता है। लोप होने पर प्रत्ययनिमित्तक कार्य का होना ही प्रत्ययलक्षण है। सौरथी वैहती में प्रत्यय को निमित्त मान कर कोई कार्य नहीं करना है इस लिये मकार नकार का लोप होने पर भी प्रत्ययलक्षण नहीं होगा । अन्ठा तो प्रत्ययग्रहण का यह प्रयोजन है कि प्रत्यय के रहते जो कार्य प्राप्त हो वह उस प्रत्यय के लोप होने पर भी प्रत्ययलक्षण अर्थात् प्रत्यय को निमित्त मान कर हो जाने । प्रत्यय का लोप होने पर जो कार्य प्राप्त हो वह प्रत्ययलक्षण मे न होवे मणिकुलम सेनानिफुल्लम् ( ग्रासण्य सेनान्यः कुलम् ) यहां पप्टी समास में उशब्द उत्तरपद परे रहने किप् प्रत्ययान्त ग्रामणी सेनानी शब्द को होगालवस्य से हन्त्र करने पर हम्वस्य पिति कृति से तुक् प्राप्त होता है वहन होवे। क्योकि दिप् प्रत्यय के रहते तुक प्राप्त नहीं था वह विप् होने पर भी प्रत्ययदक्षण से नहीं होगा । यदि प्रत्यय के परे रहते जो कार्य प्राप्त हो वही ( प्रत्ययशेप होने पर ) 1. प्रत्यचलोष प्रत्ययलक्षणम्-को प्रत्ययलोपे में प्रत्यय शब्द से सहमी हमान छन् प्रत्यये सवितऐगा वाक्यार्थ समझा जाता है ।
नंप दोषः । नैवं विज्ञायते लोपे प्रत्ययलक्षणं भवति प्रत्ययस्य प्रादुर्भाव इति । कथं तर्हि प्रत्ययो लक्षणं यस्य कार्यस्य तत् लुप्तेपि भवति । इदं तर्हि प्रयोजनम् । सति प्रत्यये यत् प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणं यथा स्यात् । लोपोत्तरकालं यत् प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणं मा भूदिति । किं प्रयोजनम् ? ग्रामणिकुलं सेनानि कुलम् इत्यत्रौत्तरपदिके ह्रस्वत्वे कृते ह्रस्वस्य पिति कृति तुमिति तु प्राप्नोति स मा भूदिति । यदि तर्हि यत् सति प्रत्यये प्राप्नोति तत् प्रत्ययलक्षणेन भवति, यह कोई दोष नहीं । प्रत्ययलक्षण का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्यय का लक्षण दर्शन अथवा प्रादुर्भाव होना । बल्कि प्रत्यय है लक्षण निमित्त जिस कार्य का वह कार्य प्रत्ययलक्षण कहाता है। लोप होने पर प्रत्ययनिमित्तक कार्य का होना ही प्रत्ययलक्षण है। सौरथी वैहती में प्रत्यय को निमित्त मान कर कोई कार्य नहीं करना है इस लिये मकार नकार का लोप होने पर भी प्रत्ययलक्षण नहीं होगा । अन्ठा तो प्रत्ययग्रहण का यह प्रयोजन है कि प्रत्यय के रहते जो कार्य प्राप्त हो वह उस प्रत्यय के लोप होने पर भी प्रत्ययलक्षण अर्थात् प्रत्यय को निमित्त मान कर हो जाने । प्रत्यय का लोप होने पर जो कार्य प्राप्त हो वह प्रत्ययलक्षण मे न होवे मणिकुलम सेनानिफुल्लम् यहां पप्टी समास में उशब्द उत्तरपद परे रहने किप् प्रत्ययान्त ग्रामणी सेनानी शब्द को होगालवस्य से हन्त्र करने पर हम्वस्य पिति कृति से तुक् प्राप्त होता है वहन होवे। क्योकि दिप् प्रत्यय के रहते तुक प्राप्त नहीं था वह विप् होने पर भी प्रत्ययदक्षण से नहीं होगा । यदि प्रत्यय के परे रहते जो कार्य प्राप्त हो वही एक. प्रत्यचलोष प्रत्ययलक्षणम्-को प्रत्ययलोपे में प्रत्यय शब्द से सहमी हमान छन् प्रत्यये सवितऐगा वाक्यार्थ समझा जाता है ।
देश में कोरोना वायरस की रफ्तार बेकाबू हो गई है। फिलहाल इसमें कमी के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है। संक्रमण के नए मामले बेहद तेज गति से तो बढ़ ही रहे हैं, इसके साथ ही मरने वालों की संख्या में भी बेहिसाब इजाफा देखने को मिल रहा है। बीते एक दिन में कोरोना संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 2. 95 लाख से अधिक नए मामले आए हैं और इस दौरान 2 हजार से अधिक लोगों की जान गई है। ज्यादातर नए मामले 10 राज्यों में ही पाए गए हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। सबसे ज्यादा इन्हीं राज्यों में नए मामले पाए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण से रिकॉर्ड 2023 लोगों की मौत हुई है और 2 लाख 95 हजार से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद देश में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,56,16,130 हो गई है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 21,57,538 है और कुल ठीक हुए मरीजों की संख्या 1,32,76,039 पहुंच गई है। कोरोना महामारी के चलते अब तक 1,82,553 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, रिकॉर्ड मौतों के बावजूद मृत्युदर में लगातार गिरावट आ रही है और वर्तमान में यह 1. 17 फीसद पर है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर संक्रामक ज्यादा घातक कम है यानी इसमें संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है, लेकिन उनके अनुपात में मौतें कम हो रही हैं। कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए देश में युद्ध स्तर पर लोगों की जांच की जा रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए देश में मंगलवार को 16 लाख 39 हजार 357 नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक देश में कुल 27 करोड़ 10 लाख 53 हजार 392 नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।
देश में कोरोना वायरस की रफ्तार बेकाबू हो गई है। फिलहाल इसमें कमी के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है। संक्रमण के नए मामले बेहद तेज गति से तो बढ़ ही रहे हैं, इसके साथ ही मरने वालों की संख्या में भी बेहिसाब इजाफा देखने को मिल रहा है। बीते एक दिन में कोरोना संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक दो. पचानवे लाख से अधिक नए मामले आए हैं और इस दौरान दो हजार से अधिक लोगों की जान गई है। ज्यादातर नए मामले दस राज्यों में ही पाए गए हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। सबसे ज्यादा इन्हीं राज्यों में नए मामले पाए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना संक्रमण से रिकॉर्ड दो हज़ार तेईस लोगों की मौत हुई है और दो लाख पचानवे हजार से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद देश में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या एक,छप्पन,सोलह,एक सौ तीस हो गई है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या इक्कीस,सत्तावन,पाँच सौ अड़तीस है और कुल ठीक हुए मरीजों की संख्या एक,बत्तीस,छिहत्तर,उनतालीस पहुंच गई है। कोरोना महामारी के चलते अब तक एक,बयासी,पाँच सौ तिरेपन लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, रिकॉर्ड मौतों के बावजूद मृत्युदर में लगातार गिरावट आ रही है और वर्तमान में यह एक. सत्रह फीसद पर है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर संक्रामक ज्यादा घातक कम है यानी इसमें संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है, लेकिन उनके अनुपात में मौतें कम हो रही हैं। कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए देश में युद्ध स्तर पर लोगों की जांच की जा रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मुताबिक कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए देश में मंगलवार को सोलह लाख उनतालीस हजार तीन सौ सत्तावन नमूनों की जांच की गई। इनको मिलाकर अब तक देश में कुल सत्ताईस करोड़ दस लाख तिरेपन हजार तीन सौ बानवे नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।
पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने शराब तस्करी में बजरंग दल के पूर्व नेता और उसके कर्मचारी को कच्ची शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस को आरोपी के घर के अंदर वॉशिंग मशीन से तीन बोरियों में 700 पाउच और गारमेंट दुकान से एक बोरी में 200 पाउच कच्ची शराब बरामद की है। आरोपी बरामद शराब शहर में अवैध ढंग से खपाने की योजना बना रहे थे। रविवार को एसएसआई कश्मीर सिंह और आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी की अगुवाई वाली टीम ने गुप्त सूचना पर गूलरघट्टी निवासी राजीव शर्मा के घर छापा मारा। यहां वाशिंग मशीन में तीन बोरियों में छुपाई करीब 700 पाउच कच्ची शराब मिली। इसके बाद टीम ने आरोपी की गारमेंट्स शॉप में चेकिंग की, जहां एक बोरी से 200 पाउच शराब मिली। कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी चंपत हो गया। पूछताछ के लिए पुलिस आरोपी की पत्नी को कोतवाली ले आई। इसके बाद राजीव और उसके कर्मचारी चंद्रपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी ने बताया कि आरोपी लंबे समय से शराब तस्करी में शामिल है। आरोपी राजीव और कर्मचारी चंद्रपाल से कुल 900 पाउच कच्ची शराब मिली है। चालान के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पत्नी को पूछताछ के बाद जाने दिया गया। थारी से मंगायी गयी शराबरामनगर। आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी ने बताया आरोपी राजीव शर्मा ने थारी गांव से बड़ी मात्रा में कच्ची शराब मंगायी। शनिवार रात शराब घर लाई गई। मुखबिर की सूचना पर आरोपी को दबोचा गया। आरोपी पर पहले से दर्ज हैं 5 मुकदमेरामनगर। आरोपी राजीव शर्मा पर गुंडा एक्ट समेत पांच मुकदमे दर्ज हैं। एसएसआई कश्मीर सिंह ने बताया कि पूर्व में भी वह शराब तस्करी में गिरफ्तार हो चुका है। राजीव शर्मा के खिलाफ लंबे समय से शराब तस्करी की शिकायत थी। मुखबिर की सूचना पर उसे शराब संग पकड़ा गया। एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। पीसी जोशी, आबकारी निरीक्षक। राजीव शर्मा को संगठन विरोधी गतिविधियों के चलते पूर्व में ही निष्कासित किया गया है। उसका संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। - यशपाल राजन, जिला मंत्री बजरंग दल।
पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने शराब तस्करी में बजरंग दल के पूर्व नेता और उसके कर्मचारी को कच्ची शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस को आरोपी के घर के अंदर वॉशिंग मशीन से तीन बोरियों में सात सौ पाउच और गारमेंट दुकान से एक बोरी में दो सौ पाउच कच्ची शराब बरामद की है। आरोपी बरामद शराब शहर में अवैध ढंग से खपाने की योजना बना रहे थे। रविवार को एसएसआई कश्मीर सिंह और आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी की अगुवाई वाली टीम ने गुप्त सूचना पर गूलरघट्टी निवासी राजीव शर्मा के घर छापा मारा। यहां वाशिंग मशीन में तीन बोरियों में छुपाई करीब सात सौ पाउच कच्ची शराब मिली। इसके बाद टीम ने आरोपी की गारमेंट्स शॉप में चेकिंग की, जहां एक बोरी से दो सौ पाउच शराब मिली। कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी चंपत हो गया। पूछताछ के लिए पुलिस आरोपी की पत्नी को कोतवाली ले आई। इसके बाद राजीव और उसके कर्मचारी चंद्रपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी ने बताया कि आरोपी लंबे समय से शराब तस्करी में शामिल है। आरोपी राजीव और कर्मचारी चंद्रपाल से कुल नौ सौ पाउच कच्ची शराब मिली है। चालान के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पत्नी को पूछताछ के बाद जाने दिया गया। थारी से मंगायी गयी शराबरामनगर। आबकारी निरीक्षक पीसी जोशी ने बताया आरोपी राजीव शर्मा ने थारी गांव से बड़ी मात्रा में कच्ची शराब मंगायी। शनिवार रात शराब घर लाई गई। मुखबिर की सूचना पर आरोपी को दबोचा गया। आरोपी पर पहले से दर्ज हैं पाँच मुकदमेरामनगर। आरोपी राजीव शर्मा पर गुंडा एक्ट समेत पांच मुकदमे दर्ज हैं। एसएसआई कश्मीर सिंह ने बताया कि पूर्व में भी वह शराब तस्करी में गिरफ्तार हो चुका है। राजीव शर्मा के खिलाफ लंबे समय से शराब तस्करी की शिकायत थी। मुखबिर की सूचना पर उसे शराब संग पकड़ा गया। एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। पीसी जोशी, आबकारी निरीक्षक। राजीव शर्मा को संगठन विरोधी गतिविधियों के चलते पूर्व में ही निष्कासित किया गया है। उसका संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। - यशपाल राजन, जिला मंत्री बजरंग दल।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के कार्यक्रम में कहा कि उनका उद्देश्य प्रत्येक शहर के केंद्र से 150 किलोमीटर के भीतर कम से कम एक ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग सुविधा विकसित करना है। उन्होंने कहा देश की सड़कों से पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने और चरणबद्ध रूप से नए कम प्रदूषण वाले वाहनों को पेश करने में सक्षम होगा। ऑटो डेस्क. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका उद्देश्य प्रत्येक शहर के केंद्र से 150 किलोमीटर के भीतर कम से कम एक ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग सुविधा विकसित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का एक वाहन स्क्रैपिंग हब बनने की क्षमता है, यह कहते हुए कि भारत बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका से बड़ी संख्या में पुराने वाहनों को यहां स्क्रैप करने के लिए आयात कर सकता है। मंत्री मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार द्वारा विकसित राष्ट्रीय वाहन कबाड़ नीति ((National Automobile Scrappage Policy) भारतीय परिवहन और स्थिरता क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है, यह कहते हुए कि यह देश की सड़कों से पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने और चरणबद्ध रूप से नए कम प्रदूषण वाले वाहनों को पेश करने में सक्षम होगा। मंत्री ने आगे कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन स्क्रैपिंग नीति को इस तरह से डिजाइन किया है जिससे सभी प्रकार और आकार के निवेशक आगे आ सकें और वाहन स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा, "हम एक शहर में वाहन स्क्रैपिंग इकाइयों के कई अधिकृत संग्रह केंद्र भी विकसित कर सकते हैं, जिनके पास वाहन का पंजीकरण रद्द करने और जमा प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार होगा। " राष्ट्रीय वाहन कबाड़ नीति ((National Automobile Scrappage Policy) पिछले साल अगस्त में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की सड़कों से अनुपयुक्त और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और एक परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके अलावा, सामग्री पुनर्चक्रण क्षेत्र चार करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है और यह संख्या 2025 तक पांच करोड़ तक जाने की उम्मीद है। 1 अप्रैल, 2022 से प्रभावी नई नीति के तहत, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के बाद खरीदे जाने वाले वाहनों के लिए रोड टैक्स पर 25 प्रतिशत तक कर छूट प्रदान करेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में कहा कि उनका उद्देश्य प्रत्येक शहर के केंद्र से एक सौ पचास किलोग्राममीटर के भीतर कम से कम एक ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग सुविधा विकसित करना है। उन्होंने कहा देश की सड़कों से पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने और चरणबद्ध रूप से नए कम प्रदूषण वाले वाहनों को पेश करने में सक्षम होगा। ऑटो डेस्क. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका उद्देश्य प्रत्येक शहर के केंद्र से एक सौ पचास किलोग्राममीटर के भीतर कम से कम एक ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग सुविधा विकसित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का एक वाहन स्क्रैपिंग हब बनने की क्षमता है, यह कहते हुए कि भारत बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका से बड़ी संख्या में पुराने वाहनों को यहां स्क्रैप करने के लिए आयात कर सकता है। मंत्री मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार द्वारा विकसित राष्ट्रीय वाहन कबाड़ नीति भारतीय परिवहन और स्थिरता क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है, यह कहते हुए कि यह देश की सड़कों से पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने और चरणबद्ध रूप से नए कम प्रदूषण वाले वाहनों को पेश करने में सक्षम होगा। मंत्री ने आगे कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन स्क्रैपिंग नीति को इस तरह से डिजाइन किया है जिससे सभी प्रकार और आकार के निवेशक आगे आ सकें और वाहन स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा, "हम एक शहर में वाहन स्क्रैपिंग इकाइयों के कई अधिकृत संग्रह केंद्र भी विकसित कर सकते हैं, जिनके पास वाहन का पंजीकरण रद्द करने और जमा प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार होगा। " राष्ट्रीय वाहन कबाड़ नीति पिछले साल अगस्त में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की सड़कों से अनुपयुक्त और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और एक परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके अलावा, सामग्री पुनर्चक्रण क्षेत्र चार करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है और यह संख्या दो हज़ार पच्चीस तक पांच करोड़ तक जाने की उम्मीद है। एक अप्रैल, दो हज़ार बाईस से प्रभावी नई नीति के तहत, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के बाद खरीदे जाने वाले वाहनों के लिए रोड टैक्स पर पच्चीस प्रतिशत तक कर छूट प्रदान करेंगे।
क्यूआर कोड भेजने पर स्कॅन न करें! अमरावती/प्रतिनिधि दि. १० - क्यूआर कोड स्कॅन किये जाने पर धोखाधड़ी होकर अपने खाते से पूरे पैसे निकाल लिये जा सकते हैं. शहर व जिले में ऐसे धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं. जिसके चलते किसी के व्दारा क्यूआर कोड भेजने पर बिल्कुल स्कॅन न करें. ऐसा आवाहन साइबर पुलिस ने किया है. क्यू आर कोड यानि क्विक रिस्पॉन्स कोड. यह इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में तेज गति से काम करने का एक सुकर मार्ग है. इस कोड को हम पढ़ नहीं सकते. पढ़ने के लिए एक विशेष डिव्हाईस आवश्यक है या तो कोड डिव्हाईस में स्थापित स्कॅनर की सहायता से पढ़ सकते हैं. क्यूआर को पहले ऑटोमोटिव्ह उद्योग में दाखल किया जाता था. लेकिन आज उसकी व्याप्ति विस्तृत है. ऐसे कोई भी क्षेत्र शेष नहीं कि जहां पर उसका उपयोग नहीं होता. मात्र, उसके अत्यधिक इस्तेमाल से धोखाधड़ी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. - क्यूआर कोड मोबाईल पेमेंट्स ऑफ पॉईंट ऑफ सेल (पीओएस) के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. कोरोना कालावधि में दूध की खरीदी करने से ल ेकर रेशनिंग तक और ऑटो रिक्शा किराया देने तक लोग क्यूआर कोड स्कॅन इस्तेमाल करते हैं. अमरावीत के एक युवक की क्यूआर कोड स्कॅन कर धोखाधड़ी की गई. -क्यूआर कोड स्कॅन होते ही वॉलेट या बैंक अॅप से पैसे काटे जाते हैं. इसी तरीके के अवलंबन कर धोखाधड़री की गई. लॉटरी लगने का आमिष दिखाया गया. कोड स्कॅन करते ही बैंक खाते से रकम काटी गई. -एक संकेत स्थल से पुरानी दुपहिया का व्यवहार किया गया. ऑनलाईन पैसे भेजने की सूचना की. क्यूआर कोड भेजकर पहले 10 रुपए भेजने के लिये कहा गया. पश्चात दूसरा क्यूआर कोड भेजा गया. ठहराई गई रकम के दोगुना पैसों की कटौती हुई. क्यूआर कोड स्कॅन कर व्यवहार करते समय एरर आने पर व्यवहार न करें. स्कॅन करते समय सामने के यूजर का यूआरएल न दिये जाने पर सावधान रहे. कोड स्कॅन करने के बाद दूकान अथवा व्यक्ति की बजाय दूसरा नाम हो तो सावधानी बरते. क्यूआर कोड स्कॅन करने वाले मोबाइल में रिअल टाईम प्रोटक्शन ले. अपरिचित व्यक्ति से आये क्यूआर कोड स्कॅन न करें. पैसे लेने के लिये क्यूआर कोड स्कॅन करे की आवश्यकता नहीं. इस बात का ध्यान रखे.
क्यूआर कोड भेजने पर स्कॅन न करें! अमरावती/प्रतिनिधि दि. दस - क्यूआर कोड स्कॅन किये जाने पर धोखाधड़ी होकर अपने खाते से पूरे पैसे निकाल लिये जा सकते हैं. शहर व जिले में ऐसे धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं. जिसके चलते किसी के व्दारा क्यूआर कोड भेजने पर बिल्कुल स्कॅन न करें. ऐसा आवाहन साइबर पुलिस ने किया है. क्यू आर कोड यानि क्विक रिस्पॉन्स कोड. यह इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में तेज गति से काम करने का एक सुकर मार्ग है. इस कोड को हम पढ़ नहीं सकते. पढ़ने के लिए एक विशेष डिव्हाईस आवश्यक है या तो कोड डिव्हाईस में स्थापित स्कॅनर की सहायता से पढ़ सकते हैं. क्यूआर को पहले ऑटोमोटिव्ह उद्योग में दाखल किया जाता था. लेकिन आज उसकी व्याप्ति विस्तृत है. ऐसे कोई भी क्षेत्र शेष नहीं कि जहां पर उसका उपयोग नहीं होता. मात्र, उसके अत्यधिक इस्तेमाल से धोखाधड़ी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. - क्यूआर कोड मोबाईल पेमेंट्स ऑफ पॉईंट ऑफ सेल के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. कोरोना कालावधि में दूध की खरीदी करने से ल ेकर रेशनिंग तक और ऑटो रिक्शा किराया देने तक लोग क्यूआर कोड स्कॅन इस्तेमाल करते हैं. अमरावीत के एक युवक की क्यूआर कोड स्कॅन कर धोखाधड़ी की गई. -क्यूआर कोड स्कॅन होते ही वॉलेट या बैंक अॅप से पैसे काटे जाते हैं. इसी तरीके के अवलंबन कर धोखाधड़री की गई. लॉटरी लगने का आमिष दिखाया गया. कोड स्कॅन करते ही बैंक खाते से रकम काटी गई. -एक संकेत स्थल से पुरानी दुपहिया का व्यवहार किया गया. ऑनलाईन पैसे भेजने की सूचना की. क्यूआर कोड भेजकर पहले दस रुपयापए भेजने के लिये कहा गया. पश्चात दूसरा क्यूआर कोड भेजा गया. ठहराई गई रकम के दोगुना पैसों की कटौती हुई. क्यूआर कोड स्कॅन कर व्यवहार करते समय एरर आने पर व्यवहार न करें. स्कॅन करते समय सामने के यूजर का यूआरएल न दिये जाने पर सावधान रहे. कोड स्कॅन करने के बाद दूकान अथवा व्यक्ति की बजाय दूसरा नाम हो तो सावधानी बरते. क्यूआर कोड स्कॅन करने वाले मोबाइल में रिअल टाईम प्रोटक्शन ले. अपरिचित व्यक्ति से आये क्यूआर कोड स्कॅन न करें. पैसे लेने के लिये क्यूआर कोड स्कॅन करे की आवश्यकता नहीं. इस बात का ध्यान रखे.
ग्रीस में बार और रेस्टोरेंट खोले गए हैं वहीं स्पेन के कुछ शहरों में भी प्रतिबंधों में छूट दी गई है. नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में भारत (India) भी अब टॉप-10 में शामिल हो गया है, भारत ने केस संख्या में ईरान (Iran) को पीछे छोड़ दिया है. उधर दुनिया भर में लगातार चौथे दिन रविवार को संक्रमण (Covid-19) के करीब 1 लाख नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब 54,94,400 से भी ज्यादा हो गए हैं. बीते 24 घंटे में दुनिया भर में संक्रमण से 2800 से ज्यादा मौतें भी हुईं हैं और कुल मौतों की संख्या बढ़कर अब 3,46,400 से ज्यादा हो गयी है. करीब 45 दिन बाद ऐसा हुआ है कि अमेरिका (US) को किसी देश ने संक्रमण से हो रही दौनिक मौतों की संख्या में पीछे छोड़ दिया है. रविवार को ब्राजील (Brazil) में अमेरिका के मुकाबले ज्यादा मौतें दर्ज की गयी हैं. अगले हफ्ते से ब्रिटेन के स्कूल खुल जाएंगे. ब्रिटेन में बड़ी संख्या में स्कूलों को खोलने की तैयारी चल रही है. स्कूलों में कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेष एहतियाती उपाय किए जाएंगे. स्कूल में टीचर और छात्र दोनों ही प्रोटेक्टिव बब्बल्स में होंगे. ब्रिटेन के शिक्षामंत्री ने ये जानकारी दी है. विपक्ष के विरोध के बावजूद गैविन विलियमसन ने कहा है कि अगले हफ्ते से बड़ी संख्या में छात्र अपने स्कूल जा पाएंगे. विलियमसन ने वादा किया है कि छात्रों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाएगा. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के टॉप के सहयोगी डोमिनिक कमिंग्स पर लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर अपने घर जाने के आरोप हैं. इसको लेकर खूब आलोचना हो रही है. उनसे इस्तीफे की मांग तक की जा रही है. डोमिनिक कमिंग्स पर आरोप हैं कि उन्होंने तीन बार लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर 260 मील दूर अपने घर गए. इस तरह की रिपोर्ट सामने आई है कि कमिंग्स ने डरहम की यात्रा की है. जहां मार्च से उनका परिवार रह रहा है. इसके बाद आरोप लगे हैं कि कमिंग्स ने अप्रैल महीने में लंदन से डरहम की दो बार यात्रा की. हालांकि यात्रा के लिए सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी. ग्रीस ने सामान्य जीवन बहाली की तरफ कदम बढ़ा दिया है. ग्रीस में रेस्टोरेंट्स, कैफे और बार को दोबारा से खोला गया है. ग्रीस में टूरिज्म इंडस्ट्री को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी चल रही है. 15 जून से वहां के होटल भी खुल जाएंगे. कोरोना वायरस की वजह से वहां तीन महीने से प्रतिबंध लगे थे. इसी तरह से स्पेन ने अपने कुछ शहरों में प्रतिबंधों में छूट दी है. मैड्रिड में पार्क और टेरेस कैफे को खोला गया है. बार्सिलोना में भी इसी तरह की छूट मिली है. वहां 10 लोग एकजगह जा सकते हैं. लेकिन उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा. स्पेन में बाहर से आने वाले लोगों के लिए क्वारंटाइन के नियम भी 1 जुलाई से हटा लिए जाएंगे. फिलहाल विदेशों से आने वाले नागरिकों के लिए यहां 14 दिन क्वारंटाइन रहने का नियम है. यूएई में कोरोना वायरस की चपेट में आकर 50 साल के भारतीय टीचर की मौत हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की जानकारी दी गई है. अनिल कुमार नाम के हिंदी टीचर अबू धाबी के सनराइज स्कूल में पढ़ाते थे. गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को उनकी कोरोना के संक्रमण की वजह से मौत हो गई. अनिल कुमार 7 मई को कोरोना की चपेट में आए थे. कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के चलते करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल गई. लेकिन इस दौरान ब्रिटेन की महारानी की जिंदगी नहीं बदली. वो पहले की तरह अपने शौक पूरी करती रहीं. लॉकडाउन के दौरान ब्रिटेन की महारानी ने अपनी घुड़सवारी का शौक भी जारी रखा. और अपनी आलीशान गाड़ी से पार्क तक जाकर एक्सरसाइज करने की नियमित आदत भी बनाए रखी. इस दौरान 22 सेवादारों की फौज उनकी दिनरात सेवा करती रही है. महारानी ने विंडसर के महल में खुद और राजकुमार फिलीप को आइसोलेट कर रखा है. हालांकि इस दौरान उनकी नियमित दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया. डायबिटीज के मरीजों को लॉकडाउन हटने के बाद भी घरों के अंदर रहना पड़ सकता है. डायबिटीज की वजह से वो कोरोना संक्रमण के हाई रिस्क वाले लोगों में आते हैं. रिसर्चर ने बताया है कि डायबिटीज के मरीजों को कोरोना का संक्रमण होने पर उनके मरने का खतरा ज्यादा है. साइंटिस्ट इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या डायबिटीज के रोगियों पर कोरोना वायरस की महामारी को लेकर और ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि डायबिटीज के टाइप 1 से ग्रसित मरीजों में कोरोना के संक्रमण की वजह से मौत का खतरा बाकी मरीजों की तुलना में साढ़े तीन गुना ज्यादा होता है. इसी तरह से टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग ज्यादातर मोटे होते हैं. उनमें कोरोना की वजह से मौत का खतरा दोगुना होता है. जापान में कोरोना वायरस के चलते लगाई गई इमरजेंसी हटा ली गई है. इस बारे में प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने ऐलान किया है. शिंजो आबे ने पूरे देश में लगी स्टेट ऑफ इमरजेंसी हटा ली है. इसके बाद उन इलाकों में लगे प्रतिबंध भी खत्म हो गए, जहां इमरजेंसी की वजह से कामकाज ठप पड़ा था. एक टेलीविजन इंटरव्यू में शिंजो आबे ने कहा है कि हमने इमरजेंसी हटाने के लिए काफी कड़े पैमाने तय कर रखे थे. अब जाकर हमने उन पैमानों को छुआ है. जिसके बाद इमरजेंसी हटाने का फैसला लिया गया है. रॉबर्ट कोच इंस्टिट्यूट के अनुसार जर्मनी में कोरोना वायरस से संक्रमण के 289 नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही जर्मनी में संक्रमितों की कुल संख्या 178,570 हो गई है. जर्मनी में कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या भी 8,257 हो गई है. चीन के वुहान में रविवार को एक दिन में 10 लाख से अधिक लोगों का कोरोना टेस्ट (न्युक्लिक ऐसिट टेस्ट) किया गया. बता दें कि वुहान से ही कोरोना वायरस शुरू हुआ और दुनियाभर में फैला. इसके ठीक एक दिन पहले यहां 14 लाख लोगों का टेस्ट हुआ था. अमेरिका में रविवार को नए केस और संक्रमण से हो रही मौतों में कमी आई है. यहां 19,600 से ज्यादा नए केस सामने आए जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब 16,86,000 से भी ज्यादा हो गए हैं. यहां बीते 24 घंटे में 617 लोगों की संक्रमण से मौत भी हो गयी जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा अब 1 लाख के करीब पहुंच गया है. ब्राजील में रविवार को भी कोरोना का कहर जारी रहा और संक्रमण के 16,220 ने केस सामने आए जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब 3,63,618 हो गए हैं. यहां बीते 24 घंटे में 703 लोगों की संक्रमण से मौत ही जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर अब 22,700 से भी ज्यादा हो गया है. रूस में एक दिन में कोरोना वायरस से सबसे अधिक लोगों की मौत हुई लेकिन तीन सप्ताह में संक्रमण के नये मामले सबसे कम सामने आये है. राष्ट्रीय कोरोना वायरस कार्यबल ने रविवार को बताया कि वायरस से 153 और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 3,541 पर पहुंच गई है. देश में इससे पहले एक दिन में सबसे अधिक 150 लोगों की मौत हुई थी. संक्रमण के 8,599 नए मामले सामने आये हैं. मई में कई दिनों तक प्रतिदिन संक्रमण के मामलों की संख्या 11,000 से अधिक रही. रूस में कुल मिलाकर संक्रमण के 3,44,481 मामले सामने आये है. रूस में कम मृत्यु दर को लेकर पश्चिमी देश अपनी आशंका जता चुके हैं, कुछ का कहना है कि संभव है कि सरकार वायरस से हो रही मौतों की खबरों को दबा रही है और आंकड़ों में हेरफेर कर रही है. रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों से इंकार किया है. उनका कहना है कि कम संख्या वायरस पर नियंत्रण को लेकर उठाए गए प्रभावी कदमों की वजह से है. पाकिस्तान में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण से 36 लोगों की मौत हो गई, जिससे देश में संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 1,133 हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी. इसके अलावा देश में संक्रमण के कुल मामलों का आंकड़ा 54,601 पहुंच गया है. अब तक सिंध में 21,645 मामले, पंजाब में 19,557, खैबर-पख्तूनख्वा में 7,685, बलूचिस्तान में 3,306, इस्लामाबाद में 1,592, गिलगित-बाल्तिस्तान में 619 और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 197 मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुल 17,198 मरीज अब तक स्वस्थ हो चुके हैं और अब तक कुल 4,73,607 लोगों की जांच की गई हैं. सरकार ने ईद की नमाज अदा करते समय सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने के लिए सख्त निर्देश भी दिए हैं और लोगों से रिश्तेदारों के यहां और समारोहों में जाने से बचने के लिए कहा. अमेरिका में पास्ता बनाने वाली एक कंपनी ने स्पोकेन शहर में स्थित अपनी फैक्टरी में कोरोना वायरस फैलने की घोषणा की है. यह खबर ऐसे समय में सामने आयी है जब अमेरिकी सरकार अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने की तैयारी कर रही है. अखबार 'द स्पोक्समैन-रिव्यू' की खबर के मुताबिक फिलाडेल्फिया मैक्रोनी कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि उसके 72 कर्मचारियों की कोविड-19 के लिए जांच की गई और 24 कर्मी संक्रमित पाए गए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि स्पोकेन काउंटी में बृहस्पतिवार और शुक्रवार के बीच 31 नए मामले आने के साथ ही संक्रमण के मामलों की वृद्धि हुई है. कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी के सभी कर्मचारियों की जांच की गई है और फैक्टरी को संक्रमण मुक्त किया गया है. कंपनी संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए स्पोकेन रिजनल हेल्थ डिस्ट्रिक्ट के साथ मिलकर काम कर रही है. दक्षिण कोरिया में 24 घंटे में कोरोना वायरस के 25 नए मामले सामने आए हैं. कोरियाई रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा कि रविवार को जारी नए आंकड़ों के साथ देश में रोगियों की कुल संख्या 11,190 हो गयी है जिनमें 266 की मृत्यु हो चुकी है. एजेंसी ने कहा कि इनमें से 10,213 लोग सही हो चुके हैं और उन्हें पृथक-वास केंद्रों से छुट्टी दे दी गयी है. उसने कहा कि नए 25 मामलों में से 17 लोग स्थानीय रूप से संक्रमित हुए और बाकी आठ मामले दूसरे देशों से आए लोगों के संक्रमण के हैं. नेपाल में रविवार को कोरोना वायरस के 19 नए मामले सामने आए, जिससे देश में संक्रमितों की कुल संख्या 603 हो गयी. स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, संक्रमित सभी नए लोग पुरुष हैं। परसा जिले में तीन लोगों को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया. बारा, मोरंग और रौतहट जिलों से एक-एक मामला सामने आया है. इसी तरह, रूपनदेही में छह लोगों को संक्रमित पाया गया है, जबकि कपिलवस्तु में तीन व्यक्तियों और काठमांडू, नुवाकोट और गुलमी में एक-एक व्यक्ति को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया है. मंत्रालय ने बताया कि कोरोना वायरस के 17 और रोगियों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है, जिससे देश में अब ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या 87 हो गई है. कोरोना वायरस से अब तक नेपाल में तीन लोगों की जान जा चुकी है. वर्तमान में, नेपाल में अभी 513 मरीजों का इलाज चल रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्वीट किया कि देश में कोविड-19 संक्रमण के मामले और इससे होने वाली मौतों की संख्या में गिरावट आ रही है. ट्रंप का ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का आंकड़ा एक लाख पहुंचने वाला है. ट्रंप ने ट्वीट किया, "देश भर में मामले, संख्या और मौतों में गिरावट आ रही है। " इससे कुछ दिन पहले व्हाइट हाउस की अधिकारी डॉ डेबोराह बर्क्स ने कहा था कि अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है. चीन ने रविवार को अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह कोरोना वायरस के बारे में 'झूठ' फैलाकर द्विपक्षीय संबंधों को 'नए शीत युद्ध' की कगार पर ले जा रहा है. चीन ने कहा कि वह घातक वायरस की उत्पत्ति के स्रोत का पता लगाने के वैश्विक प्रयासों के साथ रहेगा. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि कोविड-19 को लेकर चीन के खिलाफ कोई भी मुकदमा कानून या अंतरराष्ट्रीय दृष्टांत में तथ्यहीन आधार वाला होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका में चीन के खिलाफ कोविड-19 के लिए मुआवजे की मांग करने वाला मुकदमा काल्पनिक सबूतों के साथ एक पीड़ित को धमकी देने की कोशिश करने जैसा है. कोरोना वायरस के बारे में समय पर जानकारी देने में विफल रहने और वायरस की उत्पत्ति के स्थान को लेकर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो चीन पर हमलावर हैं. ऐसे में वांग ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में चीन का पक्ष रखते हुए अमेरिका के खिलाफ जमकर निशाना साधा. उन्होंने अमेरिकी नेताओं पर चीन को बदनाम करने के लिए ' राजनीतिक वायरस' फैलाने का आरोप लगाया. कोरोना वायरस संक्रमण में धीरे-धीरे कमी के मद्देनजर फ्रांस ने सीमा प्रतिबंधों में ढील की प्रक्रिया शुरू की है. इसके तहत यूरोप के अन्य देशों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों और परिजनों से मिलने आने वाले लोगों को इजाजत दी जाएगी, लेकिन ब्रिटेन और स्पेन से आने वाले लोगों के लिए पृथक-वास जरूरी होगा. एक सरकारी बयान के अनुसार, फ्रांस मार्च में सीमा पर लगाई गई रोक को सोमवार से हटा रहा है. फ्रांस प्रवासी श्रमिकों और पारिवारिक कारणों से आने वाले लोगों को शामिल करने के लिए यूरोप के सीमा-मुक्त यात्रा क्षेत्र में अन्य देशों से अनुमति प्राप्त लोगों की श्रेणियों को भी व्यापक बना रहा है. हालांकि, ब्रिटेन और स्पेन से आने वालों को पृथक-वास में रहना होगा. यह 14 दिनों का स्वैच्छिक पृथक-वास होगा. कोविड-19 संकट पर अमेरिका और चीन के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का अधिनायकवादी और दुनियाभर में आधिपत्य जमाने की आकांक्षा का चरित्र उजागर हो चुका है. पोम्पिओ ने स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया से कहा, "इस कोरोना वायरस के कारण मुझे लगता है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का चरित्र उजागर हो चुका है. हममें से जो भी यह देख रहा है वह दुनिया में इसके खतरे के बारे में बात कर रहा है. हमें अधिनायकवादी सत्ता का चरित्र मालूम है. हम जानते हैं कि जब पत्रकारों को बोलने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती तब क्या होता है. " उन्होंने कहा, "हमने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की दुनियाभर में आधिपत्य जमाने की आकांक्षा को भी देखा है. यह बेल्ट एन्ड रोड परियोजना के जरिये किया जा रहा हो या सरकार द्वारा प्रायोजित अन्य कामों के जरिये किया जा रहा हो. " पोम्पिओ ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिसंबर से लेकर इस साल फरवरी तक कोरोना वायरस के बारे में दुनिया से जानकारी छिपाने का काम किया है. ये भी पढ़ेंः .
ग्रीस में बार और रेस्टोरेंट खोले गए हैं वहीं स्पेन के कुछ शहरों में भी प्रतिबंधों में छूट दी गई है. नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में भारत भी अब टॉप-दस में शामिल हो गया है, भारत ने केस संख्या में ईरान को पीछे छोड़ दिया है. उधर दुनिया भर में लगातार चौथे दिन रविवार को संक्रमण के करीब एक लाख नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब चौवन,चौरानवे,चार सौ से भी ज्यादा हो गए हैं. बीते चौबीस घंटाटे में दुनिया भर में संक्रमण से दो हज़ार आठ सौ से ज्यादा मौतें भी हुईं हैं और कुल मौतों की संख्या बढ़कर अब तीन,छियालीस,चार सौ से ज्यादा हो गयी है. करीब पैंतालीस दिन बाद ऐसा हुआ है कि अमेरिका को किसी देश ने संक्रमण से हो रही दौनिक मौतों की संख्या में पीछे छोड़ दिया है. रविवार को ब्राजील में अमेरिका के मुकाबले ज्यादा मौतें दर्ज की गयी हैं. अगले हफ्ते से ब्रिटेन के स्कूल खुल जाएंगे. ब्रिटेन में बड़ी संख्या में स्कूलों को खोलने की तैयारी चल रही है. स्कूलों में कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेष एहतियाती उपाय किए जाएंगे. स्कूल में टीचर और छात्र दोनों ही प्रोटेक्टिव बब्बल्स में होंगे. ब्रिटेन के शिक्षामंत्री ने ये जानकारी दी है. विपक्ष के विरोध के बावजूद गैविन विलियमसन ने कहा है कि अगले हफ्ते से बड़ी संख्या में छात्र अपने स्कूल जा पाएंगे. विलियमसन ने वादा किया है कि छात्रों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाएगा. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के टॉप के सहयोगी डोमिनिक कमिंग्स पर लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर अपने घर जाने के आरोप हैं. इसको लेकर खूब आलोचना हो रही है. उनसे इस्तीफे की मांग तक की जा रही है. डोमिनिक कमिंग्स पर आरोप हैं कि उन्होंने तीन बार लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर दो सौ साठ मील दूर अपने घर गए. इस तरह की रिपोर्ट सामने आई है कि कमिंग्स ने डरहम की यात्रा की है. जहां मार्च से उनका परिवार रह रहा है. इसके बाद आरोप लगे हैं कि कमिंग्स ने अप्रैल महीने में लंदन से डरहम की दो बार यात्रा की. हालांकि यात्रा के लिए सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी. ग्रीस ने सामान्य जीवन बहाली की तरफ कदम बढ़ा दिया है. ग्रीस में रेस्टोरेंट्स, कैफे और बार को दोबारा से खोला गया है. ग्रीस में टूरिज्म इंडस्ट्री को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी चल रही है. पंद्रह जून से वहां के होटल भी खुल जाएंगे. कोरोना वायरस की वजह से वहां तीन महीने से प्रतिबंध लगे थे. इसी तरह से स्पेन ने अपने कुछ शहरों में प्रतिबंधों में छूट दी है. मैड्रिड में पार्क और टेरेस कैफे को खोला गया है. बार्सिलोना में भी इसी तरह की छूट मिली है. वहां दस लोग एकजगह जा सकते हैं. लेकिन उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा. स्पेन में बाहर से आने वाले लोगों के लिए क्वारंटाइन के नियम भी एक जुलाई से हटा लिए जाएंगे. फिलहाल विदेशों से आने वाले नागरिकों के लिए यहां चौदह दिन क्वारंटाइन रहने का नियम है. यूएई में कोरोना वायरस की चपेट में आकर पचास साल के भारतीय टीचर की मौत हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की जानकारी दी गई है. अनिल कुमार नाम के हिंदी टीचर अबू धाबी के सनराइज स्कूल में पढ़ाते थे. गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को उनकी कोरोना के संक्रमण की वजह से मौत हो गई. अनिल कुमार सात मई को कोरोना की चपेट में आए थे. कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के चलते करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल गई. लेकिन इस दौरान ब्रिटेन की महारानी की जिंदगी नहीं बदली. वो पहले की तरह अपने शौक पूरी करती रहीं. लॉकडाउन के दौरान ब्रिटेन की महारानी ने अपनी घुड़सवारी का शौक भी जारी रखा. और अपनी आलीशान गाड़ी से पार्क तक जाकर एक्सरसाइज करने की नियमित आदत भी बनाए रखी. इस दौरान बाईस सेवादारों की फौज उनकी दिनरात सेवा करती रही है. महारानी ने विंडसर के महल में खुद और राजकुमार फिलीप को आइसोलेट कर रखा है. हालांकि इस दौरान उनकी नियमित दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया. डायबिटीज के मरीजों को लॉकडाउन हटने के बाद भी घरों के अंदर रहना पड़ सकता है. डायबिटीज की वजह से वो कोरोना संक्रमण के हाई रिस्क वाले लोगों में आते हैं. रिसर्चर ने बताया है कि डायबिटीज के मरीजों को कोरोना का संक्रमण होने पर उनके मरने का खतरा ज्यादा है. साइंटिस्ट इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या डायबिटीज के रोगियों पर कोरोना वायरस की महामारी को लेकर और ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि डायबिटीज के टाइप एक से ग्रसित मरीजों में कोरोना के संक्रमण की वजह से मौत का खतरा बाकी मरीजों की तुलना में साढ़े तीन गुना ज्यादा होता है. इसी तरह से टाइप दो डायबिटीज वाले लोग ज्यादातर मोटे होते हैं. उनमें कोरोना की वजह से मौत का खतरा दोगुना होता है. जापान में कोरोना वायरस के चलते लगाई गई इमरजेंसी हटा ली गई है. इस बारे में प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने ऐलान किया है. शिंजो आबे ने पूरे देश में लगी स्टेट ऑफ इमरजेंसी हटा ली है. इसके बाद उन इलाकों में लगे प्रतिबंध भी खत्म हो गए, जहां इमरजेंसी की वजह से कामकाज ठप पड़ा था. एक टेलीविजन इंटरव्यू में शिंजो आबे ने कहा है कि हमने इमरजेंसी हटाने के लिए काफी कड़े पैमाने तय कर रखे थे. अब जाकर हमने उन पैमानों को छुआ है. जिसके बाद इमरजेंसी हटाने का फैसला लिया गया है. रॉबर्ट कोच इंस्टिट्यूट के अनुसार जर्मनी में कोरोना वायरस से संक्रमण के दो सौ नवासी नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही जर्मनी में संक्रमितों की कुल संख्या एक सौ अठहत्तर,पाँच सौ सत्तर हो गई है. जर्मनी में कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या भी आठ,दो सौ सत्तावन हो गई है. चीन के वुहान में रविवार को एक दिन में दस लाख से अधिक लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया. बता दें कि वुहान से ही कोरोना वायरस शुरू हुआ और दुनियाभर में फैला. इसके ठीक एक दिन पहले यहां चौदह लाख लोगों का टेस्ट हुआ था. अमेरिका में रविवार को नए केस और संक्रमण से हो रही मौतों में कमी आई है. यहां उन्नीस,छः सौ से ज्यादा नए केस सामने आए जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब सोलह,छियासी,शून्य से भी ज्यादा हो गए हैं. यहां बीते चौबीस घंटाटे में छः सौ सत्रह लोगों की संक्रमण से मौत भी हो गयी जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा अब एक लाख के करीब पहुंच गया है. ब्राजील में रविवार को भी कोरोना का कहर जारी रहा और संक्रमण के सोलह,दो सौ बीस ने केस सामने आए जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब तीन,तिरेसठ,छः सौ अट्ठारह हो गए हैं. यहां बीते चौबीस घंटाटे में सात सौ तीन लोगों की संक्रमण से मौत ही जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर अब बाईस,सात सौ से भी ज्यादा हो गया है. रूस में एक दिन में कोरोना वायरस से सबसे अधिक लोगों की मौत हुई लेकिन तीन सप्ताह में संक्रमण के नये मामले सबसे कम सामने आये है. राष्ट्रीय कोरोना वायरस कार्यबल ने रविवार को बताया कि वायरस से एक सौ तिरेपन और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या तीन,पाँच सौ इकतालीस पर पहुंच गई है. देश में इससे पहले एक दिन में सबसे अधिक एक सौ पचास लोगों की मौत हुई थी. संक्रमण के आठ,पाँच सौ निन्यानवे नए मामले सामने आये हैं. मई में कई दिनों तक प्रतिदिन संक्रमण के मामलों की संख्या ग्यारह,शून्य से अधिक रही. रूस में कुल मिलाकर संक्रमण के तीन,चौंतालीस,चार सौ इक्यासी मामले सामने आये है. रूस में कम मृत्यु दर को लेकर पश्चिमी देश अपनी आशंका जता चुके हैं, कुछ का कहना है कि संभव है कि सरकार वायरस से हो रही मौतों की खबरों को दबा रही है और आंकड़ों में हेरफेर कर रही है. रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों से इंकार किया है. उनका कहना है कि कम संख्या वायरस पर नियंत्रण को लेकर उठाए गए प्रभावी कदमों की वजह से है. पाकिस्तान में पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोना वायरस संक्रमण से छत्तीस लोगों की मौत हो गई, जिससे देश में संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या एक,एक सौ तैंतीस हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी. इसके अलावा देश में संक्रमण के कुल मामलों का आंकड़ा चौवन,छः सौ एक पहुंच गया है. अब तक सिंध में इक्कीस,छः सौ पैंतालीस मामले, पंजाब में उन्नीस,पाँच सौ सत्तावन, खैबर-पख्तूनख्वा में सात,छः सौ पचासी, बलूचिस्तान में तीन,तीन सौ छः, इस्लामाबाद में एक,पाँच सौ बानवे, गिलगित-बाल्तिस्तान में छः सौ उन्नीस और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक सौ सत्तानवे मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुल सत्रह,एक सौ अट्ठानवे मरीज अब तक स्वस्थ हो चुके हैं और अब तक कुल चार,तिहत्तर,छः सौ सात लोगों की जांच की गई हैं. सरकार ने ईद की नमाज अदा करते समय सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने के लिए सख्त निर्देश भी दिए हैं और लोगों से रिश्तेदारों के यहां और समारोहों में जाने से बचने के लिए कहा. अमेरिका में पास्ता बनाने वाली एक कंपनी ने स्पोकेन शहर में स्थित अपनी फैक्टरी में कोरोना वायरस फैलने की घोषणा की है. यह खबर ऐसे समय में सामने आयी है जब अमेरिकी सरकार अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने की तैयारी कर रही है. अखबार 'द स्पोक्समैन-रिव्यू' की खबर के मुताबिक फिलाडेल्फिया मैक्रोनी कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि उसके बहत्तर कर्मचारियों की कोविड-उन्नीस के लिए जांच की गई और चौबीस कर्मी संक्रमित पाए गए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि स्पोकेन काउंटी में बृहस्पतिवार और शुक्रवार के बीच इकतीस नए मामले आने के साथ ही संक्रमण के मामलों की वृद्धि हुई है. कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी के सभी कर्मचारियों की जांच की गई है और फैक्टरी को संक्रमण मुक्त किया गया है. कंपनी संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए स्पोकेन रिजनल हेल्थ डिस्ट्रिक्ट के साथ मिलकर काम कर रही है. दक्षिण कोरिया में चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस के पच्चीस नए मामले सामने आए हैं. कोरियाई रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा कि रविवार को जारी नए आंकड़ों के साथ देश में रोगियों की कुल संख्या ग्यारह,एक सौ नब्बे हो गयी है जिनमें दो सौ छयासठ की मृत्यु हो चुकी है. एजेंसी ने कहा कि इनमें से दस,दो सौ तेरह लोग सही हो चुके हैं और उन्हें पृथक-वास केंद्रों से छुट्टी दे दी गयी है. उसने कहा कि नए पच्चीस मामलों में से सत्रह लोग स्थानीय रूप से संक्रमित हुए और बाकी आठ मामले दूसरे देशों से आए लोगों के संक्रमण के हैं. नेपाल में रविवार को कोरोना वायरस के उन्नीस नए मामले सामने आए, जिससे देश में संक्रमितों की कुल संख्या छः सौ तीन हो गयी. स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, संक्रमित सभी नए लोग पुरुष हैं। परसा जिले में तीन लोगों को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाया गया. बारा, मोरंग और रौतहट जिलों से एक-एक मामला सामने आया है. इसी तरह, रूपनदेही में छह लोगों को संक्रमित पाया गया है, जबकि कपिलवस्तु में तीन व्यक्तियों और काठमांडू, नुवाकोट और गुलमी में एक-एक व्यक्ति को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाया गया है. मंत्रालय ने बताया कि कोरोना वायरस के सत्रह और रोगियों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है, जिससे देश में अब ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या सत्तासी हो गई है. कोरोना वायरस से अब तक नेपाल में तीन लोगों की जान जा चुकी है. वर्तमान में, नेपाल में अभी पाँच सौ तेरह मरीजों का इलाज चल रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्वीट किया कि देश में कोविड-उन्नीस संक्रमण के मामले और इससे होने वाली मौतों की संख्या में गिरावट आ रही है. ट्रंप का ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का आंकड़ा एक लाख पहुंचने वाला है. ट्रंप ने ट्वीट किया, "देश भर में मामले, संख्या और मौतों में गिरावट आ रही है। " इससे कुछ दिन पहले व्हाइट हाउस की अधिकारी डॉ डेबोराह बर्क्स ने कहा था कि अस्पताल में कोविड-उन्नीस के मरीजों की संख्या में पचास प्रतिशत की गिरावट आई है. चीन ने रविवार को अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह कोरोना वायरस के बारे में 'झूठ' फैलाकर द्विपक्षीय संबंधों को 'नए शीत युद्ध' की कगार पर ले जा रहा है. चीन ने कहा कि वह घातक वायरस की उत्पत्ति के स्रोत का पता लगाने के वैश्विक प्रयासों के साथ रहेगा. चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि कोविड-उन्नीस को लेकर चीन के खिलाफ कोई भी मुकदमा कानून या अंतरराष्ट्रीय दृष्टांत में तथ्यहीन आधार वाला होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका में चीन के खिलाफ कोविड-उन्नीस के लिए मुआवजे की मांग करने वाला मुकदमा काल्पनिक सबूतों के साथ एक पीड़ित को धमकी देने की कोशिश करने जैसा है. कोरोना वायरस के बारे में समय पर जानकारी देने में विफल रहने और वायरस की उत्पत्ति के स्थान को लेकर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो चीन पर हमलावर हैं. ऐसे में वांग ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में चीन का पक्ष रखते हुए अमेरिका के खिलाफ जमकर निशाना साधा. उन्होंने अमेरिकी नेताओं पर चीन को बदनाम करने के लिए ' राजनीतिक वायरस' फैलाने का आरोप लगाया. कोरोना वायरस संक्रमण में धीरे-धीरे कमी के मद्देनजर फ्रांस ने सीमा प्रतिबंधों में ढील की प्रक्रिया शुरू की है. इसके तहत यूरोप के अन्य देशों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों और परिजनों से मिलने आने वाले लोगों को इजाजत दी जाएगी, लेकिन ब्रिटेन और स्पेन से आने वाले लोगों के लिए पृथक-वास जरूरी होगा. एक सरकारी बयान के अनुसार, फ्रांस मार्च में सीमा पर लगाई गई रोक को सोमवार से हटा रहा है. फ्रांस प्रवासी श्रमिकों और पारिवारिक कारणों से आने वाले लोगों को शामिल करने के लिए यूरोप के सीमा-मुक्त यात्रा क्षेत्र में अन्य देशों से अनुमति प्राप्त लोगों की श्रेणियों को भी व्यापक बना रहा है. हालांकि, ब्रिटेन और स्पेन से आने वालों को पृथक-वास में रहना होगा. यह चौदह दिनों का स्वैच्छिक पृथक-वास होगा. कोविड-उन्नीस संकट पर अमेरिका और चीन के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का अधिनायकवादी और दुनियाभर में आधिपत्य जमाने की आकांक्षा का चरित्र उजागर हो चुका है. पोम्पिओ ने स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया से कहा, "इस कोरोना वायरस के कारण मुझे लगता है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का चरित्र उजागर हो चुका है. हममें से जो भी यह देख रहा है वह दुनिया में इसके खतरे के बारे में बात कर रहा है. हमें अधिनायकवादी सत्ता का चरित्र मालूम है. हम जानते हैं कि जब पत्रकारों को बोलने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती तब क्या होता है. " उन्होंने कहा, "हमने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की दुनियाभर में आधिपत्य जमाने की आकांक्षा को भी देखा है. यह बेल्ट एन्ड रोड परियोजना के जरिये किया जा रहा हो या सरकार द्वारा प्रायोजित अन्य कामों के जरिये किया जा रहा हो. " पोम्पिओ ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिसंबर से लेकर इस साल फरवरी तक कोरोना वायरस के बारे में दुनिया से जानकारी छिपाने का काम किया है. ये भी पढ़ेंः .
पहले सुने थे पति-पत्नी और वो, अब जानिए पति-पत्नी के बीच पत्नी का 'वो'.... क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे ज्यादा शिक्षित देश कौन है,पढ़िए यह रिपोर्ट. . क्या केंद्रीय बजट शिक्षा क्षेत्र की अपेक्षाओं को पूरा करता है ?
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लिखित प्रस्तुत उपनिषद का हिन्दी में सर्व लाभार्थ प्रस्तुत करना - जनता की भाषा में हंसनाद उपनिषद को प्रस्तुत करने का लक्ष्य यह है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र सभी इस जन सुलभ और बोधगम्य भाषा का आनन्द ले सकते हैं। यह जग और उसकी सत्ता मृगतृष्णा के जल के समान है - निकट जाने पर किसी प्रकार पिपासा नहीं शांत होती है -- जल के निकट जाने पर और भी पिपासा में अभिवृद्धि होती है मनुष्य ज्ञान सुधा का परित्याग करके माया जल का - पान करता है, जो हृदय में शांति का बीजारोपण करता है - ज्ञान नीर पीकर भक्तों को तृप्ति होती है-इसके विरुद्ध संसारी सदैव अतृप्त और बुधात रहते हैं-संस्कृत के कूप से निःसृत यह कल्याणकारी जल सर्वथा ग्रहणीय और पेय है । वेदोक्त उपनिषद के विषय को भाषा में व्यक्त करने का प्रयत्न - इसके श्रवण वा अध्ययन तथा तद्नुकूल याचरण करने से भव एवं आवागमन का विनाश होता है - पाठक मुक्ति प्राप्त करके कृतकृत्य होता है - द्वैत की भ्रामक भावना छूट जाती है - द्वंद्व और भ्रम के विनष्ट हो जाने पर निर्मल ज्ञान एवं ग्रानन्द का विकास - हरि की सर्वव्यापकता । हंसनाम हंसनाम अथर्ववेद का गौतम ऋषीश्वर के पास ब्रह्म- ज्ञान प्रातार्थ गमन -- संसार से मुक्त होने के लिए उपदेश ग्रहण ऋषीश्वर का प्रसन्न होकर श्री शिव एवं शक्ति की चर्चा का वर्णन - जो उपनिपद महादेव जी ने श्री शक्ति को सुनाया था उसकी चर्चा - गुप्त उपनिषद् है - इसके अधिकारी मूर्ख एवं यह अत्यन्त - जड़ व्यक्ति नहीं है - सतसंगी सत्यवादी और यती इसके वास्तविक अधिकारी है मानव शरीरस्थ श्वास ही हंस है - इसी के आवागमन क्रम को जीवन कहा है - इसका भेद सतगुरु प्राप्त होने पर ज्ञात होता है - इसकी उत्पति होने पर ऋद्धि- सिद्धि सभी प्राप्त हो जाती है - अंततोगत्वा मुक्ति का अधिकारी हो जाता हैसमस्त संशय विनष्ट हो जाते है - हंस और परमहंस के समझने से साधक ब्रह्मानन्द स्वरूप हो जाता है - हँस मंत्र का जप करता हु को हंस ही अनुभव करे -- हंस मंत्र श्रेष्ठ जप है - इसका जप करने वाला स्वयं परहंस स्वरूप हो जाता है - यह - मंत्र सब के शरीरस्थ है परन्तु जानने वाला कोई कोई बिरला भाग्यवान होता है - जैसे काष्ट में अग्नि है और तिल में तेलं, उसी प्रकार यह सब घंटों में है जिस प्रकार दूध से घृत प्रयत्न पूर्वक निकाला जाता है उसी प्रकार यत्न पूर्वक यह मंत्र शरीर से निकाला जाता है - बिना मंथन यथा दूध से घृत नहीं निकलता है उसी प्रकार यह भी बिना यत्न नहीं निकल पाता है। इसे जानने के लिए सर्वप्रथम मूलाधार चक्र को पहिचाना चाहिए-फिर पैरों
लिखित प्रस्तुत उपनिषद का हिन्दी में सर्व लाभार्थ प्रस्तुत करना - जनता की भाषा में हंसनाद उपनिषद को प्रस्तुत करने का लक्ष्य यह है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र सभी इस जन सुलभ और बोधगम्य भाषा का आनन्द ले सकते हैं। यह जग और उसकी सत्ता मृगतृष्णा के जल के समान है - निकट जाने पर किसी प्रकार पिपासा नहीं शांत होती है -- जल के निकट जाने पर और भी पिपासा में अभिवृद्धि होती है मनुष्य ज्ञान सुधा का परित्याग करके माया जल का - पान करता है, जो हृदय में शांति का बीजारोपण करता है - ज्ञान नीर पीकर भक्तों को तृप्ति होती है-इसके विरुद्ध संसारी सदैव अतृप्त और बुधात रहते हैं-संस्कृत के कूप से निःसृत यह कल्याणकारी जल सर्वथा ग्रहणीय और पेय है । वेदोक्त उपनिषद के विषय को भाषा में व्यक्त करने का प्रयत्न - इसके श्रवण वा अध्ययन तथा तद्नुकूल याचरण करने से भव एवं आवागमन का विनाश होता है - पाठक मुक्ति प्राप्त करके कृतकृत्य होता है - द्वैत की भ्रामक भावना छूट जाती है - द्वंद्व और भ्रम के विनष्ट हो जाने पर निर्मल ज्ञान एवं ग्रानन्द का विकास - हरि की सर्वव्यापकता । हंसनाम हंसनाम अथर्ववेद का गौतम ऋषीश्वर के पास ब्रह्म- ज्ञान प्रातार्थ गमन -- संसार से मुक्त होने के लिए उपदेश ग्रहण ऋषीश्वर का प्रसन्न होकर श्री शिव एवं शक्ति की चर्चा का वर्णन - जो उपनिपद महादेव जी ने श्री शक्ति को सुनाया था उसकी चर्चा - गुप्त उपनिषद् है - इसके अधिकारी मूर्ख एवं यह अत्यन्त - जड़ व्यक्ति नहीं है - सतसंगी सत्यवादी और यती इसके वास्तविक अधिकारी है मानव शरीरस्थ श्वास ही हंस है - इसी के आवागमन क्रम को जीवन कहा है - इसका भेद सतगुरु प्राप्त होने पर ज्ञात होता है - इसकी उत्पति होने पर ऋद्धि- सिद्धि सभी प्राप्त हो जाती है - अंततोगत्वा मुक्ति का अधिकारी हो जाता हैसमस्त संशय विनष्ट हो जाते है - हंस और परमहंस के समझने से साधक ब्रह्मानन्द स्वरूप हो जाता है - हँस मंत्र का जप करता हु को हंस ही अनुभव करे -- हंस मंत्र श्रेष्ठ जप है - इसका जप करने वाला स्वयं परहंस स्वरूप हो जाता है - यह - मंत्र सब के शरीरस्थ है परन्तु जानने वाला कोई कोई बिरला भाग्यवान होता है - जैसे काष्ट में अग्नि है और तिल में तेलं, उसी प्रकार यह सब घंटों में है जिस प्रकार दूध से घृत प्रयत्न पूर्वक निकाला जाता है उसी प्रकार यत्न पूर्वक यह मंत्र शरीर से निकाला जाता है - बिना मंथन यथा दूध से घृत नहीं निकलता है उसी प्रकार यह भी बिना यत्न नहीं निकल पाता है। इसे जानने के लिए सर्वप्रथम मूलाधार चक्र को पहिचाना चाहिए-फिर पैरों
मुंबई। वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत देते हुए सशर्त जमानत दे दी है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत देते हुए उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए। हांलांकि इस मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत नहीं मिली। गौरतलब है कि मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए की एक स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा तो सशर्त जमानत दे दी। कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, इस मामले को 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद कमजोर किया गया और गंभीरता के साथ नहीं लिया गया है, यह अब खुलकर सामने आ गया है। जब रोहिणी सलियन सरकारी अभियोजक थीं तो उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) साक्ष्यों के रिकॉर्ड को कमजोर करने के लिए बहुत ज्यादा दबाव बना रही है। उन्होंने कहा, यह उन परिवारों के साथ धोखा है, जो न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। क्या सरकार ने उन सवालों पर कार्रवाई की, जिस पर रोहिणी सलियन ने सवाल उठाए थे और क्या इसे गंभीरता से लिया गया? क्या है मामलाः
मुंबई। वर्ष दो हज़ार आठ के मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत देते हुए सशर्त जमानत दे दी है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत देते हुए उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए। हांलांकि इस मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत नहीं मिली। गौरतलब है कि मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए की एक स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा तो सशर्त जमानत दे दी। कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, इस मामले को दो हज़ार चौदह में भाजपा के सत्ता में आने के बाद कमजोर किया गया और गंभीरता के साथ नहीं लिया गया है, यह अब खुलकर सामने आ गया है। जब रोहिणी सलियन सरकारी अभियोजक थीं तो उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी साक्ष्यों के रिकॉर्ड को कमजोर करने के लिए बहुत ज्यादा दबाव बना रही है। उन्होंने कहा, यह उन परिवारों के साथ धोखा है, जो न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। क्या सरकार ने उन सवालों पर कार्रवाई की, जिस पर रोहिणी सलियन ने सवाल उठाए थे और क्या इसे गंभीरता से लिया गया? क्या है मामलाः
मोनू और रवि कुमार के शानदार प्रदर्शन के दम पर पुनेरी पल्टन ने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के छठे सीजन के 24वें मैच में शुक्रवार को जयपुर पिंक पैंथर्स को 29-25 से हरा दिया। पुनेरी की जोन-ए में छह मैचों में यह तीसरी जीत है और वह 20 अंकों के साथ तालिका में शीर्ष पर पहुंच गया है। वहीं जयपुर की तीन मैचों में यह दूसरी हार है और वह तालिका में सबसे नीचे हैं। मेजबान पुनेरी की टीम यहां श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेले गए इस मुकाबले के पहले हाफ में 13-12 से आगे थीं और दूसरे हाफ में भी उसने अपनी बढ़त को कायम रखते हुए 29-25 से मैच जीत लिया। पुनेरी के लिए मोनू ने सात, रवि ने छह और संदीप नरवाल तथा अक्षय जाधव ने तीन-तीन अंक लिए। वहीं टीम ने रैड से नौ टैकल से 18 और दो अतिरिक्त अंक हासिल किए। जयपुर के लिए दीपक हुड्डा ने आठ, मोहित छिल्लर और संदीप ध्रुल ने चार-चार अंक जुटाए। टीम ने रैड से नौ, टैकल से 14 और ऑलआउट से दो अंक अर्जित किए। तेलुगू टाइटंस ने पटना पाइरेट्स को पटकाः पहले हाफ में पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में शानदार वापसी करते हुए तेलुगू टाइटंस ने पटना पाइरेट्स को 35-31 से हरा दिया। तेलुगू टाइटंस की जोन-बी में चार मैचों में यह तीसरी जीत है वहीं पटना को चार मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा है। पटना की टीम यहां श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेले गए इस मुकाबले के पहले हाफ में पटना की टीम 17-14 से आगे थीं, लेकिन दूसरे हाफ में वह अपने इस बढ़त को कायम नहीं रख पाई और तेलुगू टाइटंस ने 35-34 से मैच जीत लिया। टाइटंस के लिए राहुल चौधरी ने सात, विशाल भारद्वाज ने छह और निलेश शालुंके तथा अबोजार मिगनानी ने पांच-पांच अंक लिए। टीम ने रैड से 15, टैकल से 15, ऑलआउट से दो और दो अतिरिक्त अंक लिए। पटना के लिए मंजीत ने आठ, प्रदीप नरवाल ने पांच और जयदीप ने तीन अंक जुटाए। टीम ने रैड से 19, टैकल से आठ, ऑलआउट से दो और दो अतिरिक्त अंक लिए।
मोनू और रवि कुमार के शानदार प्रदर्शन के दम पर पुनेरी पल्टन ने प्रो कबड्डी लीग के छठे सीजन के चौबीसवें मैच में शुक्रवार को जयपुर पिंक पैंथर्स को उनतीस-पच्चीस से हरा दिया। पुनेरी की जोन-ए में छह मैचों में यह तीसरी जीत है और वह बीस अंकों के साथ तालिका में शीर्ष पर पहुंच गया है। वहीं जयपुर की तीन मैचों में यह दूसरी हार है और वह तालिका में सबसे नीचे हैं। मेजबान पुनेरी की टीम यहां श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेले गए इस मुकाबले के पहले हाफ में तेरह-बारह से आगे थीं और दूसरे हाफ में भी उसने अपनी बढ़त को कायम रखते हुए उनतीस-पच्चीस से मैच जीत लिया। पुनेरी के लिए मोनू ने सात, रवि ने छह और संदीप नरवाल तथा अक्षय जाधव ने तीन-तीन अंक लिए। वहीं टीम ने रैड से नौ टैकल से अट्ठारह और दो अतिरिक्त अंक हासिल किए। जयपुर के लिए दीपक हुड्डा ने आठ, मोहित छिल्लर और संदीप ध्रुल ने चार-चार अंक जुटाए। टीम ने रैड से नौ, टैकल से चौदह और ऑलआउट से दो अंक अर्जित किए। तेलुगू टाइटंस ने पटना पाइरेट्स को पटकाः पहले हाफ में पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में शानदार वापसी करते हुए तेलुगू टाइटंस ने पटना पाइरेट्स को पैंतीस-इकतीस से हरा दिया। तेलुगू टाइटंस की जोन-बी में चार मैचों में यह तीसरी जीत है वहीं पटना को चार मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा है। पटना की टीम यहां श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेले गए इस मुकाबले के पहले हाफ में पटना की टीम सत्रह-चौदह से आगे थीं, लेकिन दूसरे हाफ में वह अपने इस बढ़त को कायम नहीं रख पाई और तेलुगू टाइटंस ने पैंतीस-चौंतीस से मैच जीत लिया। टाइटंस के लिए राहुल चौधरी ने सात, विशाल भारद्वाज ने छह और निलेश शालुंके तथा अबोजार मिगनानी ने पांच-पांच अंक लिए। टीम ने रैड से पंद्रह, टैकल से पंद्रह, ऑलआउट से दो और दो अतिरिक्त अंक लिए। पटना के लिए मंजीत ने आठ, प्रदीप नरवाल ने पांच और जयदीप ने तीन अंक जुटाए। टीम ने रैड से उन्नीस, टैकल से आठ, ऑलआउट से दो और दो अतिरिक्त अंक लिए।
प्ररूप आई० टी० एन० एस० कर अधिनियम, 1961 ( 1961 का 43 ) की 269-घ ( 1 ) के अधीन सूचना अर्जन क्षेत्र, भोपाल भोपाल, दिनांक 11 जनवरी 1980 निर्देश सं० आई०ए० सी० / एक्वी / भोपाल - 79-80/1437प्रतः मुझे कृ० कां० राय आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43 ) (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'उमत अधिनियम' कहा गया है), की धारा 269-ख के प्रधीन सक्षम प्राधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर सम्पत्ति, जिसका उचित बाजार मूल्य 25,000/रुपए से अधिक है और जिसकी सं० मकान (भाग ) है, तथा जो भोपाल में स्थित है ( और इससे उपाबद्ध अनुसूची में और पूर्ण के रूप से वर्णित है ), रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय, भोपाल में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16 ) के अधीन 30-5-1979 को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए अन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृष्यमान प्रतिफल का पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है और अन्तरक (अन्तरकों) और अन्तरित (अन्तरितियों) के बीच ऐसे अन्तरण के लिए तय पाया गया प्रतिफल, निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त अन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नहीं किया गया है ( क ) अन्तरण से हुई किसी श्राय की बाबत उक्त अधि नियम के अधीन कर देने के अन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; और / या ( ख ) ऐसी किसी प्राय या किसी धन या अन्य श्रास्तियों को, जिन्हें भारतीय प्रायकर अधिनियम, 1922 ( 1922 का 11 ) या उक्त अधिनियम, या धनकर अधिनियम, 1957 (1957 का 27 ) के प्रयोजनार्थ अन्तरिती द्वारा प्रकट नहीं किया गया था या किया जाना चाहिए था छिपाने में सुविधा के लिए; प्रतः, श्रम, उक्त अधिनियम की धारा 269-ग के अनुसरण में, मैं, उक्त अधिनियम की धारा 269-घ की उपधारा ( 1 ) के अधीन निम्नलिखित व्यक्तियों, अर्थात :[ भाग III --खण्ड 1 ( 1 ) श्री मनोहर दास उर्फ मनोहर कुमार पुत्र श्री देवी दास द्वारा श्री मुरली धर पुत्र श्री देवी दास चन्दीरमानी, ईदगाह हिल्स, भोपाल । ( 2 ) 1. श्री नूर मोहम्मद पुत्र श्री हुसैन बक्श, 2. श्रीमती जुबेदा बी पत्नी श्री नूर मोहम्मद इद्वाहिमपुरा, भोपाल । (अन्तरिती) को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के अर्जन के लिए कार्यवाहियां करता हूं । उक्त सम्पत्ति के प्रर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेपः( क ) इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन की अवधि या तत्संबंधी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से 30 दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति द्वारा ; ( ख ) इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन के भीतर उकास्थावर सम्पत्ति से हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरी के पास लिखित में किए जा सकेंगे । स्पष्टीकरण :-- इसमें प्रयुक्त शब्दों और पदों का, जो उक्त अधि नियम के 20 रु में परिभाषित हैं, वही अर्थ होगा, जो उस में दिया गया है मकान का पूर्वी भाग स्थित टोल वाली मस्जिद के पास, हाथी खाना, भोपाल । कृ० कां० राय सक्षम प्राधिकारी (निरीक्षी सहायक प्रायकर आयुक्त ) अर्जन रेंज, भोपाल दिनांक : 11 जनवरी 1980 मोहर :
प्ररूप आईशून्य टीशून्य एनशून्य एसशून्य कर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की दो सौ उनहत्तर-घ के अधीन सूचना अर्जन क्षेत्र, भोपाल भोपाल, दिनांक ग्यारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ अस्सी निर्देश संशून्य आईशून्यएशून्य सीशून्य / एक्वी / भोपाल - उन्यासी अस्सी एक हज़ार चार सौ सैंतीसप्रतः मुझे कृशून्य कांशून्य राय आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ , की धारा दो सौ उनहत्तर-ख के प्रधीन सक्षम प्राधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर सम्पत्ति, जिसका उचित बाजार मूल्य पच्चीस,शून्य/रुपए से अधिक है और जिसकी संशून्य मकान है, तथा जो भोपाल में स्थित है , रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय, भोपाल में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ आठ के अधीन तीस मई एक हज़ार नौ सौ उन्यासी को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए अन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृष्यमान प्रतिफल का पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है और अन्तरक और अन्तरित के बीच ऐसे अन्तरण के लिए तय पाया गया प्रतिफल, निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त अन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नहीं किया गया है अन्तरण से हुई किसी श्राय की बाबत उक्त अधि नियम के अधीन कर देने के अन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; और / या ऐसी किसी प्राय या किसी धन या अन्य श्रास्तियों को, जिन्हें भारतीय प्रायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बाईस या उक्त अधिनियम, या धनकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के प्रयोजनार्थ अन्तरिती द्वारा प्रकट नहीं किया गया था या किया जाना चाहिए था छिपाने में सुविधा के लिए; प्रतः, श्रम, उक्त अधिनियम की धारा दो सौ उनहत्तर-ग के अनुसरण में, मैं, उक्त अधिनियम की धारा दो सौ उनहत्तर-घ की उपधारा के अधीन निम्नलिखित व्यक्तियों, अर्थात :[ भाग III --खण्ड एक श्री मनोहर दास उर्फ मनोहर कुमार पुत्र श्री देवी दास द्वारा श्री मुरली धर पुत्र श्री देवी दास चन्दीरमानी, ईदगाह हिल्स, भोपाल । एक. श्री नूर मोहम्मद पुत्र श्री हुसैन बक्श, दो. श्रीमती जुबेदा बी पत्नी श्री नूर मोहम्मद इद्वाहिमपुरा, भोपाल । को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के अर्जन के लिए कार्यवाहियां करता हूं । उक्त सम्पत्ति के प्रर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेपः इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन की अवधि या तत्संबंधी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से तीस दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति द्वारा ; इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर उकास्थावर सम्पत्ति से हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरी के पास लिखित में किए जा सकेंगे । स्पष्टीकरण :-- इसमें प्रयुक्त शब्दों और पदों का, जो उक्त अधि नियम के बीस रुपया में परिभाषित हैं, वही अर्थ होगा, जो उस में दिया गया है मकान का पूर्वी भाग स्थित टोल वाली मस्जिद के पास, हाथी खाना, भोपाल । कृशून्य कांशून्य राय सक्षम प्राधिकारी अर्जन रेंज, भोपाल दिनांक : ग्यारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ अस्सी मोहर :
उसका फाम केवल देखना और जानना मात्र है । और देखना जानना भी क्या है ? वह चीज जैसी है वैसी ही है। लोग अपनेको फर्मों पर छोड़ देते हैं। वे कहते हैं क्या करें हमारे फर्ममें ही ऐसा लिखा था- कितनी अज्ञानता और कायरता है। जैसा कि अन्यमती कहते हैं, क्या करें भगवानको ऐसा ही मंजूर था वैसे ही ये लोग भी कर्मोके मध्ये सारा दोष मढ़ते हैं । पुरूषार्थ पर किंचित् भी ध्यान नहीं देते। जिस आगम में पुरुषार्थ का इतना विशद वर्णन हो उसको ये लोग भूल जाते हैं। अरे, फर्मोको दोष देनेसे क्या होगा ? जो जन्मार्जित कर्म है उसका तो फल उदय में आएगा ही। भगवानको ही देखो । मोह नष्ट हो चुका, अर्हत पढमें विराजमान हैं। पर फिर भी दृढ कपाट करो । दंडाकार हो कपाट रूप हो प्रतर करो और लोकपूरण करो। यह सब क्या है ? वही जन्मार्जित कर्म ही तो उदय में आकर खिर रहे हैं तो कर्मोंके सहारे रहना ठीक नहीं है। पुरुषार्थ भी कोई चीज है । जिस पुरुषार्थ से केवलज्ञान की प्राप्ति होय उस पुरुषाथकी ओर ध्यान न दो तो यह अज्ञानता ही है । समयसार में लिखा शुद्धद्रव्यनिरूपण ।र्पितमतस्तत्वं समुत्पश्यतो । ' नैकं द्रव्यगतं चकास्ति किमपि द्रव्यांतरं जातुचित् ॥ ज्ञानं ज्ञयमवैति यत्तु तदर्थं शुद्धस्वभावोदयः । कि व्यान्तर घुम्बनाकुलंधियस्तत्त्वाञ्च्यवन्ते जनाः ॥ २२ ॥ अर्थ- आचार्य कहते है कि जिसने शुद्धद्रव्यके निरूपण में बुद्धि लगाई है और जो तत्त्वको अनुभवता है ऐसे पुरुषके एक द्रव्यमे प्राप्त हुआ अन्य द्रव्य कुछ भी कदाचित् नहीं प्रतिभासता तथा ज्ञान अन्य ज्ञेय पदार्थों को जानता है सो यह ज्ञानके शुद्ध स्वभावका उदय है । ये लोक है ये अन्य द्रव्यके ग्रहणमे आकुल बुद्धि वाले हुए शुद्धस्वरूपसे क्यों चिगते हैं ? तो उस स्वरूपकी ओर ध्यान दो। परन्तु मोह ? तेरी महिमा अचिन्त्य है, अपार है जो संसार मात्रको अपना बनाना चाहता है । नारकी की तरह मिलनेको तो करण भी नहीं, परन्तु इच्छा ससार भरके अनाज खानेकी होती है । अब देखिए, इस शरीर पर तुम यह कपड़ा पहिनते हो तो क्या यह कपड़ा तुम्हारे अन्दर प्रवेश करता है ? पर मोही जीव उसे अपना मान बैठते है। और चोट्टापन क्या है ? दूसरी चीज को अपनी मान लेना यही तो चोट्टापन है इस दुपट्टको हमने अपना मान लिया जभी तो चोर हो गये' नहीं तो समझते पराया है । पर मोह मदिरामे ऐसा ही होता है। तुमने उसकी सी बात कही और उसने उसकी सी। इस तरह उस शुद्धस्वरूपकी ओर ध्यान ही नहीं देते। देखिए यह घड़ी हमने ले ली । इससे हम अपना काम भी निकाल रहे है । पर अन्तरंगसे यही समझते हैं कि अरे, यह तो पराई है। उसी तरह रागादिकोंसे यदि जरूरत पड़े तो काम भी निकाल लो पर अन्तरगसे यही जानो कि अरे तो पराई है। और जब तक भइया पर को पर और अपने को अपना नहीं समझा तब तक कल्याण भी कैसे होयगा ? यदि रागादिकोंको अपनाते रहोगे तो कैसे बंधनसे छूटना होगा बतलाइए । अत. रागादिकोंको हटाने की आवश्यकता है। कैसी भी आपत्ति जाय, समझो यह भी कर्मों का कर्जा है। समभाव से उसे सहन करलो । हां, उसमें हर्ष-विषाद मत करो। यह तुम्हारे हाथ की बात है। और भइया । रागादिक नहीं हटे तो मनुष्यजन्म पानेका फल ही क्या हुआ ? संसार और कोई नहीं, रागादिक परिणति ही ससार है और उसका अभावही समयसार ४ । स्वामी समन्तभद्राचार्य युक्त्यनुशासन के अन्त मे लिखते है कि 'हे प्रभो ! में आपकी स्तुति रागसे नहीं करता हू, क्योंकि गुणी के गुणोंमें अनुरागका होना यही भक्ति कहलाती है। तो आपका गुण तो वीतराग है। इसलिए मैं उस वीतरागताका उपासक हॅू न कि रागका। और भी आगे उन्होंने लिखा कि मैं अन्य मतका १. न रागात्र स्तोत्र' भवति भवपाशच्छिदि मुनौ । न चान्येषु द्वेषादपगुणकथा यासखलता । किमु न्यायान्यायप्रकृतगुणदोषज्ञमनसां । हितान्वेषोपायस्तव गुणकथासङ्गदितः ॥ ६४ ॥ क्यों खंडन करता हूँ ? इसीका यह मतलब नहीं कि मैं उनसे किसी प्रकारका द्वेष करता हूँ बल्कि इसलिये कि मैं न्याय और अन्याय मार्गको बतलाना चाहता था कि यह न्याय मार्ग है और यह अन्य मार्ग है। मेरा केवल इतना ही उद्देश्य था । तुम चाहे तो न्याय मार्गको अपना लो चाहे अन्याय मार्गको । यह तुम्हारे हाथकी बात है । • अतः मनुष्यको अभिप्राय निर्मल रखनेकी चेष्टा करनी चाहिए। उसी की सारी महिमा है । श्रोणिक राजाको ही देखिए जब वह मुनिराजके गलेमें मरा हुआ सर्प डाल आए तो रानीसे जाकर सर्व हाल कह दिया । रानीने कहा अरे तुमने यह क्या किया ? राजा बोला वह तो गलेसे उतारकर फेंक देगा, रानीने कहा, नहीं, यदि वे सच्चे हमारे मुनि होंगे तो नहीं फेंक सकते, नहीं फेंक सकते । यदि फेंक दिया होगा तो वह नंगा होते हुए भी हमारा मुनि नहीं । वहाँ दोनों जाकर पहुंचे तो देखा कि उनके गले मे सर्पके कारण तमाम चीटियां चिपक गई हैं। दूरसे देखते ही राजाके हृदय में वह साम्यभावेकी मुद्रा अङ्कित हो गई। उसने मनमे सोचा कि मुनि है तो सचमुच यही है । रानीने उसी समय मुनिके समीप पहुँचकर खांड द्वारा उन चीटियोंको दूर किया । तो मतलब यही कि महिमा तो उसको तभी हुई जब उसके हृदय में साम्यभाव जाग्रत हुआ । और शास्त्रमे भी क्या लिखा है ? मनुष्य के अभिप्रायको निर्मल बनाने की चेष्टा ही तो है । प्रथमानु[ १२६ ] योग में वही पाप पुण्यकी कथनी है और चरणानुयोगमें भी यही सनुष्य चारित्रका वर्णन है। गुणस्थान क्या है ? मनुष्यके परिणामकी ही परिणति तो हैं । पहिले गुणस्थान मिथ्यात्वसे लेकर चौदहवें गुणस्थान अयोगी पर्यंत मनुष्यमे ही तो समाते है। देवोंमें ज्यादासे ज्यादा चौथा गुणस्थान है। तिर्यचोंमे पांचवें तक और नारकियों में ज्यादा से ज्यादा चौथा है । तो मनुष्य यदि चाहे तो ससारको संततिको निर्मल कर सकता है। कोई वड़ी बात नहीं। एक ने कहा रामायण तो सब गप सब कपोल कल्पित कल्पनाएं भर रही हैं। दूसरा बोला यदि उसमें कल्पनाए है । तो यह तो मानोगे कि रावणने खोटा फाम किया तो लोक-निंदाका पात्र हुआ और रामने लोकप्रिय कार्य किया तो सुयशका अर्जन किया। वह बोला हां इसमें कोई आपत्ति नहीं। तो शास्त्र वाचनेका फल हो यह हुआ कि अपने को सुधारने की पेष्टा करे । भगवानकी मूर्तिसे भी यही शिक्षा मिलती है कि अपनेको उसीके अनुसार बनाए। उन्होंने रागद्वेष हटाया, मध्यस्थ रहे तुम भी वैसा ही करो । मध्यस्थ बननेका यत्न करो । गुरू और क्यों पुज जाते हैं ? उन्होंने वही समता भाव धारण किया । लिखा भी है} अरि मित्र महल-मसान- कंचन- कांच - निन्दन धुविकरण । अर्घावतारण-असि-प्रहारणमे सदा समता धरण ।। मनुष्यको परिणामोंमे समता धारण करना चाहिए । तुम्हारे दिलमे यदि प्रसन्नता हुई तो कह दिया कि भगवान् आज तो प्रसन्न मुद्रामे है । वैसे देखा जाय तो भगवान् न तो प्रसन्न है और न रुष्ट । अपने हृदयकी प्रसन्नता को तुमने भगवान् पर आरोप कर दिया कि आज तो हमें मूर्ति प्रसन्नमना दिखाई देती है। पर देखो तो वह जैसेकी तैसी ही है अतः मनुष्य यदि अपने परिणामों पर दृष्टिपात करे तो सुसार बंधनसे छूटना कोई बड़ी बात नहीं है । हम ही लोग अपनी शान्तिके बाधक है । जितने भी पदार्थ संसारसे है उनमे से एक भी पदार्थ शान्त स्वभावका बाधक नहीं । वर्तनमे रक्खी हुई मदिरा अथवा डिब्वेमे रक्खा हुआ पान पुरुषमे विकृतिका कारण नहीं । पदार्थ हमे बलात्कार से विकारी नहीं करता, हम स्वयं विकल्पोंसे उसमे इष्टानिष्ट कल्पना कर सुखी और दुःखी होते हैं । कोई भी पदार्थ न तो सुख देता है और न दुःख देता है, इसलिए जहा तक बने भ्यन्तर परिणामोंकी विशुद्धता पर सदैव ध्यान रहना चाहिए । आगे कहते हैं कि ब्रह्मचर्यव्रत ही सर्व व्रतमे उत्तम है। इसके समान और कोई दूसरा व्रत नहीं है । जिसने इस व्रत को पाल लिया उसके अन्य व्रत अनायास ही सध जाते हैं। पर इस व्रतका पालन करना कोई सामान्य बात नहीं है। स्त्री विषयके राग का जीतना बड़ा कठिन है । पहिले पार्सी, थिएटर चलते थे । थियेटर में एक पार्सी था; उसकी स्त्री बड़ी खूबसूरत थी। वे दोनों स्टेज पर अपना खेल जनताको बतलाते थे। एक दिन वह त्री स्टेज पर अपनापार्ट कर रही थी। एक मनुष्यने एक कागज पर कुछ लिखकर स्टेज पर फेंक दिया। उस स्त्रीने उस कागज को उठाकर बाचा बॉचकर उस कागजको दियासलाईसे जलाकर अपने पैरोंसे कुचल दिया। इधर तो उसने कागजको कुचल दिया और उधर उस मनुष्यने कटारसे अपना गला काट लिया। तो स्त्री संबन्धी राग बड़ा दुखदायी होता है। एक पुस्तकमें लिखा है. - सुसारमें शूरवीर कौन है ? उत्तरमें बतलाया - जो तरुण स्त्रियोंके कटाक्ष वाणोंसे बीघा जाने पर विकार भावको प्राप्त नहीं हुआ । वास्तवमें शूरवीर तो वही है । और स्त्रीसंबन्धी भोग भी क्या है ? उसमें कितनी देरका सुख है । अन्तमें तो इससे वैराग्य होता ही है। आपके सुदर्शन सेठको कथा तो आगममें ही लिखी है। भर्तृहरिको ही देखिए । उनकी स्त्रीका नाम पिंगला था। एक बार अपनी प्रियतमा स्त्राका दुष्टचरित देखकर वे संसारसे विरक्त होकर योगी हो गए थे । स्त्री के विषय में उस समय उन्होंने यह श्लोक कहा थाः"या चिन्तयामि सततं मयि सा विरक्ता । साप्यन्यमिच्छति जनं स जनोऽन्यंसक्त' ।। अस्मत्कृते च परितुष्यति काचिदन्या । धिक् ता त च सदनं च इमां च मां च ॥ " अर्थात् जिसका मैं निरन्तर चिन्तवन किया करता हूँ वह मेरी स्त्री मुझसे विरक्त है। इतना ही नहीं किन्तु दूसरे पुरुष पर है और वह पुरुष किसी दूसरी स्त्री पर आसक्त है तथा वह दूसरी स्त्री मुझपर प्रसन्न है । अतएव उस स्त्रीको उस पुरुष को उस कामदेवको इस ( मेरी स्त्रीको ) को और मुझको भी विक्कार है। कार्तिकेयमुनिने कार्तिकेयानुप्रेक्षाके अन्त में पांच बाल ब्रह्मचारियों को ही नमस्कार किया है । तो इस रागसे विरक्त होना अत्यन्त कष्टसाध्य है । और जिसको विरक्ति हो जाती है उसके लिए भोगोंका छोड़ना कोई बड़ी बात भी नहीं होती। पंडित ठाकुरप्रसाद जी थे । वे दो विषयों के आचार्य थे। उनकी दूसरी स्त्री बड़ी खूबसूरत थी । पडित जी उस पर पूर्ण थे। उस समय उनकी आय ५०) रु० माहवार थी तो उस ५० ) १० में से वे १०) रु० मासिक को देते थे । जब उनकी तरक्की १०० ) रु० मासिक हुई तो वे २०) रु० उसको देने लगे । और वह स्त्री सब रुपया गरीबोंको बांट दिया करती थी। जब उनके ५००) माहवार हुए तो १०० ) रु० उसे देने लग गए । उन रुपयों को भी वह दानमें दे दिया करती । एक दिन पंडितजी ने कहा - 'देखो पैसा बहुत कठिनतासे कमाया जाता है। तुम दानमें व्यर्थ ही इतना रुपया दे दिया करती हो । वह बोली- पडितजी कौन आपसे रुपया हम मागने जाती हैं। तुम्हारी खुशी होती है तो तुम स्वयंही देते हो ।' दिन की बात है। स्त्रीने पेंडितजी को बुलाकर यहा- देखो आज तक हमने आपके साथ इतने दिनों तक भोग भोगे पर हमे विषयोंमें कुछ भी मजा नहीं आया। ये आापक दो बाल बच्चे है। संभालिए । आज तुम हमारे भाई हुए और हम तुम्हारी महिन हुई । पडितजी ऐसे वचनको सुनकर अन्तमें, वह उससे बोले 'बहिन तुमने मुझे आज चेतावनी देकर संभात लिया नहीं तो में भोगोंमे आसक्त होकर न जाने कौनसी दुर्गतिका पात्र होता । तो भांगोंसे विरक्त रहने ही में मनुष्यको शोभा हूँ । स्त्री सम्बन्धी रागका घटना ही सर्वस्त्र है। जब इस सथन्धी गग घट गया तब अन्य परिप्रहसे तो सुतरा अनुराग भट जाता है । संसार वृद्धिका मूल कारण स्त्रोका समागम ही है । स्त्री समागम होते ही पाच इन्द्रियोंके विषय स्वयमेव पुष्ट होने लगते है। प्रथम तो उसके रूपको देखकर निरन्तर देखनेकी अभिलाषा रहती है, वह सुन्दर रूपवाली निरन्तर बनी रहे, इसके लिए अनेक प्रकारके टवटन तेल आदि पदार्थों के संग्रह में व्यस्त रहता है । सका शरीर पसेव आदि से दुर्गन्धितं न होजाय' अत' निरन्तर चंदन, तेल इत्र आदि बहुमूल्य वस्तुओं का मह कर एस पुतलीकी सम्भालमें संलग्न रहता है। उसके केश निरन्तर लंगायमान रहे अतः उनके अर्थ नानाप्रकारके गुत्ताब, चमेली, केवड़ा आदि तेर्लोका उपयोग करता है। तथा उसके सरसं कोमल
उसका फाम केवल देखना और जानना मात्र है । और देखना जानना भी क्या है ? वह चीज जैसी है वैसी ही है। लोग अपनेको फर्मों पर छोड़ देते हैं। वे कहते हैं क्या करें हमारे फर्ममें ही ऐसा लिखा था- कितनी अज्ञानता और कायरता है। जैसा कि अन्यमती कहते हैं, क्या करें भगवानको ऐसा ही मंजूर था वैसे ही ये लोग भी कर्मोके मध्ये सारा दोष मढ़ते हैं । पुरूषार्थ पर किंचित् भी ध्यान नहीं देते। जिस आगम में पुरुषार्थ का इतना विशद वर्णन हो उसको ये लोग भूल जाते हैं। अरे, फर्मोको दोष देनेसे क्या होगा ? जो जन्मार्जित कर्म है उसका तो फल उदय में आएगा ही। भगवानको ही देखो । मोह नष्ट हो चुका, अर्हत पढमें विराजमान हैं। पर फिर भी दृढ कपाट करो । दंडाकार हो कपाट रूप हो प्रतर करो और लोकपूरण करो। यह सब क्या है ? वही जन्मार्जित कर्म ही तो उदय में आकर खिर रहे हैं तो कर्मोंके सहारे रहना ठीक नहीं है। पुरुषार्थ भी कोई चीज है । जिस पुरुषार्थ से केवलज्ञान की प्राप्ति होय उस पुरुषाथकी ओर ध्यान न दो तो यह अज्ञानता ही है । समयसार में लिखा शुद्धद्रव्यनिरूपण ।र्पितमतस्तत्वं समुत्पश्यतो । ' नैकं द्रव्यगतं चकास्ति किमपि द्रव्यांतरं जातुचित् ॥ ज्ञानं ज्ञयमवैति यत्तु तदर्थं शुद्धस्वभावोदयः । कि व्यान्तर घुम्बनाकुलंधियस्तत्त्वाञ्च्यवन्ते जनाः ॥ बाईस ॥ अर्थ- आचार्य कहते है कि जिसने शुद्धद्रव्यके निरूपण में बुद्धि लगाई है और जो तत्त्वको अनुभवता है ऐसे पुरुषके एक द्रव्यमे प्राप्त हुआ अन्य द्रव्य कुछ भी कदाचित् नहीं प्रतिभासता तथा ज्ञान अन्य ज्ञेय पदार्थों को जानता है सो यह ज्ञानके शुद्ध स्वभावका उदय है । ये लोक है ये अन्य द्रव्यके ग्रहणमे आकुल बुद्धि वाले हुए शुद्धस्वरूपसे क्यों चिगते हैं ? तो उस स्वरूपकी ओर ध्यान दो। परन्तु मोह ? तेरी महिमा अचिन्त्य है, अपार है जो संसार मात्रको अपना बनाना चाहता है । नारकी की तरह मिलनेको तो करण भी नहीं, परन्तु इच्छा ससार भरके अनाज खानेकी होती है । अब देखिए, इस शरीर पर तुम यह कपड़ा पहिनते हो तो क्या यह कपड़ा तुम्हारे अन्दर प्रवेश करता है ? पर मोही जीव उसे अपना मान बैठते है। और चोट्टापन क्या है ? दूसरी चीज को अपनी मान लेना यही तो चोट्टापन है इस दुपट्टको हमने अपना मान लिया जभी तो चोर हो गये' नहीं तो समझते पराया है । पर मोह मदिरामे ऐसा ही होता है। तुमने उसकी सी बात कही और उसने उसकी सी। इस तरह उस शुद्धस्वरूपकी ओर ध्यान ही नहीं देते। देखिए यह घड़ी हमने ले ली । इससे हम अपना काम भी निकाल रहे है । पर अन्तरंगसे यही समझते हैं कि अरे, यह तो पराई है। उसी तरह रागादिकोंसे यदि जरूरत पड़े तो काम भी निकाल लो पर अन्तरगसे यही जानो कि अरे तो पराई है। और जब तक भइया पर को पर और अपने को अपना नहीं समझा तब तक कल्याण भी कैसे होयगा ? यदि रागादिकोंको अपनाते रहोगे तो कैसे बंधनसे छूटना होगा बतलाइए । अत. रागादिकोंको हटाने की आवश्यकता है। कैसी भी आपत्ति जाय, समझो यह भी कर्मों का कर्जा है। समभाव से उसे सहन करलो । हां, उसमें हर्ष-विषाद मत करो। यह तुम्हारे हाथ की बात है। और भइया । रागादिक नहीं हटे तो मनुष्यजन्म पानेका फल ही क्या हुआ ? संसार और कोई नहीं, रागादिक परिणति ही ससार है और उसका अभावही समयसार चार । स्वामी समन्तभद्राचार्य युक्त्यनुशासन के अन्त मे लिखते है कि 'हे प्रभो ! में आपकी स्तुति रागसे नहीं करता हू, क्योंकि गुणी के गुणोंमें अनुरागका होना यही भक्ति कहलाती है। तो आपका गुण तो वीतराग है। इसलिए मैं उस वीतरागताका उपासक हॅू न कि रागका। और भी आगे उन्होंने लिखा कि मैं अन्य मतका एक. न रागात्र स्तोत्र' भवति भवपाशच्छिदि मुनौ । न चान्येषु द्वेषादपगुणकथा यासखलता । किमु न्यायान्यायप्रकृतगुणदोषज्ञमनसां । हितान्वेषोपायस्तव गुणकथासङ्गदितः ॥ चौंसठ ॥ क्यों खंडन करता हूँ ? इसीका यह मतलब नहीं कि मैं उनसे किसी प्रकारका द्वेष करता हूँ बल्कि इसलिये कि मैं न्याय और अन्याय मार्गको बतलाना चाहता था कि यह न्याय मार्ग है और यह अन्य मार्ग है। मेरा केवल इतना ही उद्देश्य था । तुम चाहे तो न्याय मार्गको अपना लो चाहे अन्याय मार्गको । यह तुम्हारे हाथकी बात है । • अतः मनुष्यको अभिप्राय निर्मल रखनेकी चेष्टा करनी चाहिए। उसी की सारी महिमा है । श्रोणिक राजाको ही देखिए जब वह मुनिराजके गलेमें मरा हुआ सर्प डाल आए तो रानीसे जाकर सर्व हाल कह दिया । रानीने कहा अरे तुमने यह क्या किया ? राजा बोला वह तो गलेसे उतारकर फेंक देगा, रानीने कहा, नहीं, यदि वे सच्चे हमारे मुनि होंगे तो नहीं फेंक सकते, नहीं फेंक सकते । यदि फेंक दिया होगा तो वह नंगा होते हुए भी हमारा मुनि नहीं । वहाँ दोनों जाकर पहुंचे तो देखा कि उनके गले मे सर्पके कारण तमाम चीटियां चिपक गई हैं। दूरसे देखते ही राजाके हृदय में वह साम्यभावेकी मुद्रा अङ्कित हो गई। उसने मनमे सोचा कि मुनि है तो सचमुच यही है । रानीने उसी समय मुनिके समीप पहुँचकर खांड द्वारा उन चीटियोंको दूर किया । तो मतलब यही कि महिमा तो उसको तभी हुई जब उसके हृदय में साम्यभाव जाग्रत हुआ । और शास्त्रमे भी क्या लिखा है ? मनुष्य के अभिप्रायको निर्मल बनाने की चेष्टा ही तो है । प्रथमानु[ एक सौ छब्बीस ] योग में वही पाप पुण्यकी कथनी है और चरणानुयोगमें भी यही सनुष्य चारित्रका वर्णन है। गुणस्थान क्या है ? मनुष्यके परिणामकी ही परिणति तो हैं । पहिले गुणस्थान मिथ्यात्वसे लेकर चौदहवें गुणस्थान अयोगी पर्यंत मनुष्यमे ही तो समाते है। देवोंमें ज्यादासे ज्यादा चौथा गुणस्थान है। तिर्यचोंमे पांचवें तक और नारकियों में ज्यादा से ज्यादा चौथा है । तो मनुष्य यदि चाहे तो ससारको संततिको निर्मल कर सकता है। कोई वड़ी बात नहीं। एक ने कहा रामायण तो सब गप सब कपोल कल्पित कल्पनाएं भर रही हैं। दूसरा बोला यदि उसमें कल्पनाए है । तो यह तो मानोगे कि रावणने खोटा फाम किया तो लोक-निंदाका पात्र हुआ और रामने लोकप्रिय कार्य किया तो सुयशका अर्जन किया। वह बोला हां इसमें कोई आपत्ति नहीं। तो शास्त्र वाचनेका फल हो यह हुआ कि अपने को सुधारने की पेष्टा करे । भगवानकी मूर्तिसे भी यही शिक्षा मिलती है कि अपनेको उसीके अनुसार बनाए। उन्होंने रागद्वेष हटाया, मध्यस्थ रहे तुम भी वैसा ही करो । मध्यस्थ बननेका यत्न करो । गुरू और क्यों पुज जाते हैं ? उन्होंने वही समता भाव धारण किया । लिखा भी है} अरि मित्र महल-मसान- कंचन- कांच - निन्दन धुविकरण । अर्घावतारण-असि-प्रहारणमे सदा समता धरण ।। मनुष्यको परिणामोंमे समता धारण करना चाहिए । तुम्हारे दिलमे यदि प्रसन्नता हुई तो कह दिया कि भगवान् आज तो प्रसन्न मुद्रामे है । वैसे देखा जाय तो भगवान् न तो प्रसन्न है और न रुष्ट । अपने हृदयकी प्रसन्नता को तुमने भगवान् पर आरोप कर दिया कि आज तो हमें मूर्ति प्रसन्नमना दिखाई देती है। पर देखो तो वह जैसेकी तैसी ही है अतः मनुष्य यदि अपने परिणामों पर दृष्टिपात करे तो सुसार बंधनसे छूटना कोई बड़ी बात नहीं है । हम ही लोग अपनी शान्तिके बाधक है । जितने भी पदार्थ संसारसे है उनमे से एक भी पदार्थ शान्त स्वभावका बाधक नहीं । वर्तनमे रक्खी हुई मदिरा अथवा डिब्वेमे रक्खा हुआ पान पुरुषमे विकृतिका कारण नहीं । पदार्थ हमे बलात्कार से विकारी नहीं करता, हम स्वयं विकल्पोंसे उसमे इष्टानिष्ट कल्पना कर सुखी और दुःखी होते हैं । कोई भी पदार्थ न तो सुख देता है और न दुःख देता है, इसलिए जहा तक बने भ्यन्तर परिणामोंकी विशुद्धता पर सदैव ध्यान रहना चाहिए । आगे कहते हैं कि ब्रह्मचर्यव्रत ही सर्व व्रतमे उत्तम है। इसके समान और कोई दूसरा व्रत नहीं है । जिसने इस व्रत को पाल लिया उसके अन्य व्रत अनायास ही सध जाते हैं। पर इस व्रतका पालन करना कोई सामान्य बात नहीं है। स्त्री विषयके राग का जीतना बड़ा कठिन है । पहिले पार्सी, थिएटर चलते थे । थियेटर में एक पार्सी था; उसकी स्त्री बड़ी खूबसूरत थी। वे दोनों स्टेज पर अपना खेल जनताको बतलाते थे। एक दिन वह त्री स्टेज पर अपनापार्ट कर रही थी। एक मनुष्यने एक कागज पर कुछ लिखकर स्टेज पर फेंक दिया। उस स्त्रीने उस कागज को उठाकर बाचा बॉचकर उस कागजको दियासलाईसे जलाकर अपने पैरोंसे कुचल दिया। इधर तो उसने कागजको कुचल दिया और उधर उस मनुष्यने कटारसे अपना गला काट लिया। तो स्त्री संबन्धी राग बड़ा दुखदायी होता है। एक पुस्तकमें लिखा है. - सुसारमें शूरवीर कौन है ? उत्तरमें बतलाया - जो तरुण स्त्रियोंके कटाक्ष वाणोंसे बीघा जाने पर विकार भावको प्राप्त नहीं हुआ । वास्तवमें शूरवीर तो वही है । और स्त्रीसंबन्धी भोग भी क्या है ? उसमें कितनी देरका सुख है । अन्तमें तो इससे वैराग्य होता ही है। आपके सुदर्शन सेठको कथा तो आगममें ही लिखी है। भर्तृहरिको ही देखिए । उनकी स्त्रीका नाम पिंगला था। एक बार अपनी प्रियतमा स्त्राका दुष्टचरित देखकर वे संसारसे विरक्त होकर योगी हो गए थे । स्त्री के विषय में उस समय उन्होंने यह श्लोक कहा थाः"या चिन्तयामि सततं मयि सा विरक्ता । साप्यन्यमिच्छति जनं स जनोऽन्यंसक्त' ।। अस्मत्कृते च परितुष्यति काचिदन्या । धिक् ता त च सदनं च इमां च मां च ॥ " अर्थात् जिसका मैं निरन्तर चिन्तवन किया करता हूँ वह मेरी स्त्री मुझसे विरक्त है। इतना ही नहीं किन्तु दूसरे पुरुष पर है और वह पुरुष किसी दूसरी स्त्री पर आसक्त है तथा वह दूसरी स्त्री मुझपर प्रसन्न है । अतएव उस स्त्रीको उस पुरुष को उस कामदेवको इस को और मुझको भी विक्कार है। कार्तिकेयमुनिने कार्तिकेयानुप्रेक्षाके अन्त में पांच बाल ब्रह्मचारियों को ही नमस्कार किया है । तो इस रागसे विरक्त होना अत्यन्त कष्टसाध्य है । और जिसको विरक्ति हो जाती है उसके लिए भोगोंका छोड़ना कोई बड़ी बात भी नहीं होती। पंडित ठाकुरप्रसाद जी थे । वे दो विषयों के आचार्य थे। उनकी दूसरी स्त्री बड़ी खूबसूरत थी । पडित जी उस पर पूर्ण थे। उस समय उनकी आय पचास) शून्य रुपया माहवार थी तो उस पचास ) दस में से वे दस) शून्य रुपया मासिक को देते थे । जब उनकी तरक्की एक सौ ) शून्य रुपया मासिक हुई तो वे बीस) शून्य रुपया उसको देने लगे । और वह स्त्री सब रुपया गरीबोंको बांट दिया करती थी। जब उनके पाँच सौ) माहवार हुए तो एक सौ ) शून्य रुपया उसे देने लग गए । उन रुपयों को भी वह दानमें दे दिया करती । एक दिन पंडितजी ने कहा - 'देखो पैसा बहुत कठिनतासे कमाया जाता है। तुम दानमें व्यर्थ ही इतना रुपया दे दिया करती हो । वह बोली- पडितजी कौन आपसे रुपया हम मागने जाती हैं। तुम्हारी खुशी होती है तो तुम स्वयंही देते हो ।' दिन की बात है। स्त्रीने पेंडितजी को बुलाकर यहा- देखो आज तक हमने आपके साथ इतने दिनों तक भोग भोगे पर हमे विषयोंमें कुछ भी मजा नहीं आया। ये आापक दो बाल बच्चे है। संभालिए । आज तुम हमारे भाई हुए और हम तुम्हारी महिन हुई । पडितजी ऐसे वचनको सुनकर अन्तमें, वह उससे बोले 'बहिन तुमने मुझे आज चेतावनी देकर संभात लिया नहीं तो में भोगोंमे आसक्त होकर न जाने कौनसी दुर्गतिका पात्र होता । तो भांगोंसे विरक्त रहने ही में मनुष्यको शोभा हूँ । स्त्री सम्बन्धी रागका घटना ही सर्वस्त्र है। जब इस सथन्धी गग घट गया तब अन्य परिप्रहसे तो सुतरा अनुराग भट जाता है । संसार वृद्धिका मूल कारण स्त्रोका समागम ही है । स्त्री समागम होते ही पाच इन्द्रियोंके विषय स्वयमेव पुष्ट होने लगते है। प्रथम तो उसके रूपको देखकर निरन्तर देखनेकी अभिलाषा रहती है, वह सुन्दर रूपवाली निरन्तर बनी रहे, इसके लिए अनेक प्रकारके टवटन तेल आदि पदार्थों के संग्रह में व्यस्त रहता है । सका शरीर पसेव आदि से दुर्गन्धितं न होजाय' अत' निरन्तर चंदन, तेल इत्र आदि बहुमूल्य वस्तुओं का मह कर एस पुतलीकी सम्भालमें संलग्न रहता है। उसके केश निरन्तर लंगायमान रहे अतः उनके अर्थ नानाप्रकारके गुत्ताब, चमेली, केवड़ा आदि तेर्लोका उपयोग करता है। तथा उसके सरसं कोमल
बंगाल में पीड़ितों की सहायता का आर्यसमाज का कार्य विज्ञप्ति न० २ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से कार्य प्रतिनिधिसभा बगाल आसाम के प्रबन्ध में २३ - ७ - ५२ से सुन्दरबन "बगाल के भयकर - दुर्मिस मस्त में कुमीरमारी कन्द्र से पड़ितों की सहायता का कार्य हो रहा है। अनेक सुयोग्य कार्यकर्त्ता स्वयसेवक और चिकित्सक मनोयोग पूर्वक काम में जुटे हुए हैं । २३ जलाई से ३१ जलाई तक २००० वस्त्रहोन नर नारियों व बच्चों में पहनने के कपड़े वितीर्ण किए हैं। ८०० दरिद्र व्यक्तियों को सरकारी सस्ती दूकान से चावल क्रय करने में आर्थिक सहायता दी गई। सरकार की ओर से वहा इन दिनों सवा छ भाने सेर के अत्यन्त सस्ते ) भाव पर पीड़ितों को चावल बेचा खाता है। निरन्तर वर्षा, कीचड़ आदि की कठिनाइयों के होते हुए भी हमारे चिकित्सकों द्वारा रोगियों को उनके घर पर औषधि पहुॅचाई व चिकित्सा की जाती है। हर्ष का विषय है कि जैन समाज के कई उत्साही नवयुवक आर्य समाज के काम में हाथ बटा रहे हैं और हर प्रकार की सहायता दे रहे हैं। सार्वदेशिक समा ने प्रारम्भिक सहायता के रूप में २००० रुपया आाय प्रतिनिधि ग्रमा वगाल को भेज दिया है। वर्तमान अनुमान के अनुसार इस कार्य में १०००० रुपया "इस सहल" के व्वय की सभावना है। कुमीरमारी सुन्दरबन का अन्तिम ग्राम है। इसकी जन सख्या लगभग ३०००० है । ६ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण यहा भयंकर दुर्मिंच पड़ गया है। इस ग्राम के चहुँ ओर नदी और नदी के दूसरे पार पर सुन्दरवन गहन का बन है जहा बगाल रोयल टाइगर, हरिण, सूअर सर्प आदि बहुत सख्या में पाए जाते हैं। नदी में बड़े भयकर मगर भरे हुए हैं। इस समय वहा के लिये धन के साथ २ वस्त्रों की अत्यन्त आवश्यकता है। जो भी स्थानीय समाज में जमा करा के इस सभा को सज्जन नए वा पुराने वस्त्र भेजना चाहे, वे सूचना देवें । जो सज्जन अपने घन का इस पुण्य कार्य में सदुपयोग करना चाहें वे सावदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा भद्धानन्द बाजार देहली के पते पर भेज सकते हैं। जो सब्जन सेवा कार्य के लिये वहां जाने के लिये उत्सुक हों वे भी सभा को लिख सकते हैं। कविराज हरनामदास बी० ए० मंत्रीसार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, बलिदान भवन देहली।
बंगाल में पीड़ितों की सहायता का आर्यसमाज का कार्य विज्ञप्ति नशून्य दो सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से कार्य प्रतिनिधिसभा बगाल आसाम के प्रबन्ध में तेईस - सात - बावन से सुन्दरबन "बगाल के भयकर - दुर्मिस मस्त में कुमीरमारी कन्द्र से पड़ितों की सहायता का कार्य हो रहा है। अनेक सुयोग्य कार्यकर्त्ता स्वयसेवक और चिकित्सक मनोयोग पूर्वक काम में जुटे हुए हैं । तेईस जलाई से इकतीस जलाई तक दो हज़ार वस्त्रहोन नर नारियों व बच्चों में पहनने के कपड़े वितीर्ण किए हैं। आठ सौ दरिद्र व्यक्तियों को सरकारी सस्ती दूकान से चावल क्रय करने में आर्थिक सहायता दी गई। सरकार की ओर से वहा इन दिनों सवा छ भाने सेर के अत्यन्त सस्ते ) भाव पर पीड़ितों को चावल बेचा खाता है। निरन्तर वर्षा, कीचड़ आदि की कठिनाइयों के होते हुए भी हमारे चिकित्सकों द्वारा रोगियों को उनके घर पर औषधि पहुॅचाई व चिकित्सा की जाती है। हर्ष का विषय है कि जैन समाज के कई उत्साही नवयुवक आर्य समाज के काम में हाथ बटा रहे हैं और हर प्रकार की सहायता दे रहे हैं। सार्वदेशिक समा ने प्रारम्भिक सहायता के रूप में दो हज़ार रुपयापया आाय प्रतिनिधि ग्रमा वगाल को भेज दिया है। वर्तमान अनुमान के अनुसार इस कार्य में दस हज़ार रुपयापया "इस सहल" के व्वय की सभावना है। कुमीरमारी सुन्दरबन का अन्तिम ग्राम है। इसकी जन सख्या लगभग तीस हज़ार है । छः वर्ष तक वर्षा न होने के कारण यहा भयंकर दुर्मिंच पड़ गया है। इस ग्राम के चहुँ ओर नदी और नदी के दूसरे पार पर सुन्दरवन गहन का बन है जहा बगाल रोयल टाइगर, हरिण, सूअर सर्प आदि बहुत सख्या में पाए जाते हैं। नदी में बड़े भयकर मगर भरे हुए हैं। इस समय वहा के लिये धन के साथ दो वस्त्रों की अत्यन्त आवश्यकता है। जो भी स्थानीय समाज में जमा करा के इस सभा को सज्जन नए वा पुराने वस्त्र भेजना चाहे, वे सूचना देवें । जो सज्जन अपने घन का इस पुण्य कार्य में सदुपयोग करना चाहें वे सावदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा भद्धानन्द बाजार देहली के पते पर भेज सकते हैं। जो सब्जन सेवा कार्य के लिये वहां जाने के लिये उत्सुक हों वे भी सभा को लिख सकते हैं। कविराज हरनामदास बीशून्य एशून्य मंत्रीसार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, बलिदान भवन देहली।
आप सभी ने यह गाना तो सुना ही होगा ये गलियाँ ये चौबारा। यह एक ऐसा गाना रहा जो ब्लॉकबस्टर साबित हुआ था और अब इसी गाने को दोबारा बनाया गया है। जी हाँ, इस गाने को एक बार फिर से दिग्गज अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे (Padmini Kolhapure) द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह गाना बचपन से लेकर युवा लड़की की शादी के दिन तक आदर्श माँ-बेटी के बंधन को दर्शाती है। आप सभी को याद दिला दें कि ये गलियां ये चौबारा गाना पद्मिनी कोल्हापुरे की फिल्म प्रेम रोग का गाना है जिसे लता मंगेशकर ने गाया था। इस फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ ऋषि कपूर अहम किरदार निभाते दिखाई दिए थे और यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। गाने को रीक्रिएट करने पर पद्मिनी ने कहा, 'एक माँ जब अपनी बेटी की शादी करती है, तो यह सब कुछ ऐसा है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। खुशी से लेकर दुःख और खालीपन की भावना तक, एक ही समय में बहुत-सी चीजें महसूस होती हैं। 'ये गलियाँ ये चौबारा' उन सभी भावनाओं का बेहद खूबसूरती से बखान करता है। इसे गाना एक भावनात्मक सैलाब की तरह था और जिस तरह से इसे आकार दिया गया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है। इस सॉन्ग के लिए अपनी आवाज देने में सक्षम होने से बड़ा सम्मान कुछ भी नहीं है, क्योंकि इस सॉन्ग को लता जी ने गाया था। मैं यह देखने के लिए उत्साहित हूँ कि दर्शक वीडियो पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। ' आप सभी को बता दें कि ये गलियां ये चौबारा गाने को पद्मिनी कोल्हापुरे के बेटे प्रियांक शर्मा की कंपनी धमाका लेबल के तले रिक्रिएट किया गया है। ये गलियां ये चौबारा गाने का रिक्रिएट वर्जन 6 दिसंबर को रिलीज किया जाने वाला है। सलमान खान ने इस बड़े प्रोजेक्ट से किया कैटरीना का पत्ता साफ, क्या विक्की कौशल है वजह?
आप सभी ने यह गाना तो सुना ही होगा ये गलियाँ ये चौबारा। यह एक ऐसा गाना रहा जो ब्लॉकबस्टर साबित हुआ था और अब इसी गाने को दोबारा बनाया गया है। जी हाँ, इस गाने को एक बार फिर से दिग्गज अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह गाना बचपन से लेकर युवा लड़की की शादी के दिन तक आदर्श माँ-बेटी के बंधन को दर्शाती है। आप सभी को याद दिला दें कि ये गलियां ये चौबारा गाना पद्मिनी कोल्हापुरे की फिल्म प्रेम रोग का गाना है जिसे लता मंगेशकर ने गाया था। इस फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ ऋषि कपूर अहम किरदार निभाते दिखाई दिए थे और यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। गाने को रीक्रिएट करने पर पद्मिनी ने कहा, 'एक माँ जब अपनी बेटी की शादी करती है, तो यह सब कुछ ऐसा है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। खुशी से लेकर दुःख और खालीपन की भावना तक, एक ही समय में बहुत-सी चीजें महसूस होती हैं। 'ये गलियाँ ये चौबारा' उन सभी भावनाओं का बेहद खूबसूरती से बखान करता है। इसे गाना एक भावनात्मक सैलाब की तरह था और जिस तरह से इसे आकार दिया गया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है। इस सॉन्ग के लिए अपनी आवाज देने में सक्षम होने से बड़ा सम्मान कुछ भी नहीं है, क्योंकि इस सॉन्ग को लता जी ने गाया था। मैं यह देखने के लिए उत्साहित हूँ कि दर्शक वीडियो पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। ' आप सभी को बता दें कि ये गलियां ये चौबारा गाने को पद्मिनी कोल्हापुरे के बेटे प्रियांक शर्मा की कंपनी धमाका लेबल के तले रिक्रिएट किया गया है। ये गलियां ये चौबारा गाने का रिक्रिएट वर्जन छः दिसंबर को रिलीज किया जाने वाला है। सलमान खान ने इस बड़े प्रोजेक्ट से किया कैटरीना का पत्ता साफ, क्या विक्की कौशल है वजह?
आमिर खान की फ्लॉप फिल्म लाल सिंह चड्ढा को लेकर एक खबर सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि इस फिल्म का प्रीमियर क्रिसमस के मौके पर यानी 25 दिसंबर को टीवी पर किया जाएगा। बता दें कि करीना कपूर लीड रोल में हैं। एंटरटेनमेंट डेस्क. आमिर खान (Aamir Khan) ने करीब 4 साल बाद फिल्म लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) से सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक किया था। हालांकि, उनकी वापसी सुपरफ्लॉप साबित हुई। फिल्म लाल सिंह चड्ढा का इतना जबरदस्त बायकॉट किया गया कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। फिल्म की हालत इतनी खराब रही कि ये अपनी लागत तक वसूल नहीं कर पाई। इसके बाद फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज किया गया, हालांकि, यहां भी फिल्म ने दम नहीं दिखाया। अब सामने आ रही रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि फिल्म का प्रीमियर टीवी पर किया जाएगा। ये फिल्म क्रिसमस के मौके पर यानी 25 दिसंबर को टीवी पर रिलीज की जा रही है। इतना ही नहीं यह फिल्म 8 जनवरी को रात 8 बजे कलर्स सिनेप्लेक्स पर भी प्रसारित होगी। अद्वैत चंदन द्वारा निर्देशित लाल सिंह चड्ढा एक साधारण आदमी लाल (आमिर खान) की असाधारण जर्नी को बताती है, क्योंकि वह अनजाने में खुद को भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं के बीच में पाता है, जो उनके परिमाण से बेखबर है। आपको बता दें कि ऑस्कर अवॉर्डी फिल्म फॉरेस्ट गम्प की आधिकारिक रीमेक लाल सिंह चड्ढा में करीना कपूर लीड रोल में है। इनके अलावा नागा चैतन्य और मोना सिंह भी फिल्म में हैं। लाल सिंह चड्ढा 11 अगस्त को एक लंबे वीकेंड के दौरान रिलीज हुई। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने में सफल नहीं रही। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के बाद इसे खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। आपको बता दें कि लाल सिंह चड्ढा से आमिर खान को काफी उम्मीदें थी। उन्होंने फिल्म रिलीज से पहले इसका जमकर प्रमोशन भी किया था, लेकिन इस दौरान उनके कुछ ऐसे बयान और वीडियोज सामने आए जो देश के विरोध में थे। और इसी वजह से लोगों ने सोशल मीडिया पर फिल्म को बायकॉट करने का कैम्पेन चलाया। रिलीज से पहले ही बायकॉट का शिकार हुई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी कमाल नहीं दिखा पाई और फ्लॉप हो गई। फिल्म के फ्लॉप होने के आमिर ने घोषणा की कि वह एक्टिंग से ब्रेक लेकर अपनी फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी अपकमिंग फिल्म जो स्पोर्ट्स पर बेस्ड हैं, उसमें पर्दे के पीछे रहकर काम करेंगे।
आमिर खान की फ्लॉप फिल्म लाल सिंह चड्ढा को लेकर एक खबर सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि इस फिल्म का प्रीमियर क्रिसमस के मौके पर यानी पच्चीस दिसंबर को टीवी पर किया जाएगा। बता दें कि करीना कपूर लीड रोल में हैं। एंटरटेनमेंट डेस्क. आमिर खान ने करीब चार साल बाद फिल्म लाल सिंह चड्ढा से सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक किया था। हालांकि, उनकी वापसी सुपरफ्लॉप साबित हुई। फिल्म लाल सिंह चड्ढा का इतना जबरदस्त बायकॉट किया गया कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। फिल्म की हालत इतनी खराब रही कि ये अपनी लागत तक वसूल नहीं कर पाई। इसके बाद फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज किया गया, हालांकि, यहां भी फिल्म ने दम नहीं दिखाया। अब सामने आ रही रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि फिल्म का प्रीमियर टीवी पर किया जाएगा। ये फिल्म क्रिसमस के मौके पर यानी पच्चीस दिसंबर को टीवी पर रिलीज की जा रही है। इतना ही नहीं यह फिल्म आठ जनवरी को रात आठ बजे कलर्स सिनेप्लेक्स पर भी प्रसारित होगी। अद्वैत चंदन द्वारा निर्देशित लाल सिंह चड्ढा एक साधारण आदमी लाल की असाधारण जर्नी को बताती है, क्योंकि वह अनजाने में खुद को भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं के बीच में पाता है, जो उनके परिमाण से बेखबर है। आपको बता दें कि ऑस्कर अवॉर्डी फिल्म फॉरेस्ट गम्प की आधिकारिक रीमेक लाल सिंह चड्ढा में करीना कपूर लीड रोल में है। इनके अलावा नागा चैतन्य और मोना सिंह भी फिल्म में हैं। लाल सिंह चड्ढा ग्यारह अगस्त को एक लंबे वीकेंड के दौरान रिलीज हुई। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने में सफल नहीं रही। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के बाद इसे खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। आपको बता दें कि लाल सिंह चड्ढा से आमिर खान को काफी उम्मीदें थी। उन्होंने फिल्म रिलीज से पहले इसका जमकर प्रमोशन भी किया था, लेकिन इस दौरान उनके कुछ ऐसे बयान और वीडियोज सामने आए जो देश के विरोध में थे। और इसी वजह से लोगों ने सोशल मीडिया पर फिल्म को बायकॉट करने का कैम्पेन चलाया। रिलीज से पहले ही बायकॉट का शिकार हुई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी कमाल नहीं दिखा पाई और फ्लॉप हो गई। फिल्म के फ्लॉप होने के आमिर ने घोषणा की कि वह एक्टिंग से ब्रेक लेकर अपनी फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी अपकमिंग फिल्म जो स्पोर्ट्स पर बेस्ड हैं, उसमें पर्दे के पीछे रहकर काम करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद या आईसीसी ने इंग्लैंड के बल्लेबाज़ मोईन अली पर मैच के दौरान गज़ा के समर्थन में रिस्ट बैंड पहनने पर रोक लगा दी है. आईसीसी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि मैच रैफ़री (डेविड बून) ने मोईन को बताया है कि वह 'फ़्री फ़लस्तीन' और 'सेव ग़ज़ा' वाले रिस्ट बैंड तीसरे टेस्ट के बाकी समय नहीं पहन सकते. पाकिस्तानी मूल के मोईन ने फ़लस्तीन पर इसराइली हमले से प्रभावित लोगों के लिए धन जुटाने में धर्मार्थ संगठनों की मदद भी की थी. बयान में कहा गया है, "मोईन अली को मैच रैफ़री ने बता दिया है कि वह ऐसे मुद्दे पर क्रिकेट के मैदान से बाहर अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उन्हें चेतावनी दी गई है कि आगे से किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच में वह खेल के दौरान मैदान में रिस्ट बैंड न पहनें. " इससे पहले इंग्लैंड ने भारत के साथ तीसरे टेस्ट मैच के दौरान मोईन के गज़ा का समर्थन करते रिस्ट बैंड पहनने के लिए उनका बचाव किया था. आईसीसी के नियमों के अनुसार किसी देश के खिलाड़ियों को 'राजनीतिक, धार्मिक या जातीय गतिविधियों' से संबंधित कोई चीज़ नहीं पहननी चाहिए. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद या आईसीसी ने इंग्लैंड के बल्लेबाज़ मोईन अली पर मैच के दौरान गज़ा के समर्थन में रिस्ट बैंड पहनने पर रोक लगा दी है. आईसीसी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि मैच रैफ़री ने मोईन को बताया है कि वह 'फ़्री फ़लस्तीन' और 'सेव ग़ज़ा' वाले रिस्ट बैंड तीसरे टेस्ट के बाकी समय नहीं पहन सकते. पाकिस्तानी मूल के मोईन ने फ़लस्तीन पर इसराइली हमले से प्रभावित लोगों के लिए धन जुटाने में धर्मार्थ संगठनों की मदद भी की थी. बयान में कहा गया है, "मोईन अली को मैच रैफ़री ने बता दिया है कि वह ऐसे मुद्दे पर क्रिकेट के मैदान से बाहर अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उन्हें चेतावनी दी गई है कि आगे से किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच में वह खेल के दौरान मैदान में रिस्ट बैंड न पहनें. " इससे पहले इंग्लैंड ने भारत के साथ तीसरे टेस्ट मैच के दौरान मोईन के गज़ा का समर्थन करते रिस्ट बैंड पहनने के लिए उनका बचाव किया था. आईसीसी के नियमों के अनुसार किसी देश के खिलाड़ियों को 'राजनीतिक, धार्मिक या जातीय गतिविधियों' से संबंधित कोई चीज़ नहीं पहननी चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को ब्रिक्स देशों का सम्मेलन हुआ। वर्चुअल तरीके से हुए इस सम्मेलन में आतंकवाद पर चर्चा की गई है। ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा पत्र को मंजूर किया है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ जंग पर सहमति भी बनी है। कुछ मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाया। 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। ब्रिक्स सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अफगानिस्तान से अमरीका के जाने से नया संकट पैदा हो गया है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के सामने सुरक्षा की चुनौतियां हैं। आतंक और नशे के कारोबार पर नियंत्रण जरूरी हो गया है। आतंकवाद पर नियंत्रण जरुरी है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी का स्रोत के रूप में अपने पड़ोसी देशों के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र दी ने काउंटर टेररिज्म एक्शन प्लान का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि यह पहली बार हुआ है, जब ब्रिक्स ने मल्टीलिटरल सिस्टम की मजबूती और सुधार पर एक पोजिशन लिया है। पीएम ने कहा कि ब्रिक्स ने काउंटर टेररिज्म एक्शन प्लान को अडॉप्ट किया है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज हम विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज है। विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी यह मंच उपयोगी रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले 15 वर्षों में और परिणामदायी हो। पीएम ने आगे कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जो थीम चुना है, वह यही प्राथमिकता दर्शाता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और 2022 में समूह के 14वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शी ने कहा कि चीन सभी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने, आम चुनौतियों का सामना करने के वास्ते अधिक परिणाम-उन्मुखी साझेदारी बनाने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए ब्रिक्स भागीदारों के साथ काम करने को तत्पर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को ब्रिक्स देशों का सम्मेलन हुआ। वर्चुअल तरीके से हुए इस सम्मेलन में आतंकवाद पर चर्चा की गई है। ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा पत्र को मंजूर किया है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ जंग पर सहमति भी बनी है। कुछ मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाया। तेरहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। ब्रिक्स सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अफगानिस्तान से अमरीका के जाने से नया संकट पैदा हो गया है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के सामने सुरक्षा की चुनौतियां हैं। आतंक और नशे के कारोबार पर नियंत्रण जरूरी हो गया है। आतंकवाद पर नियंत्रण जरुरी है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी का स्रोत के रूप में अपने पड़ोसी देशों के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र दी ने काउंटर टेररिज्म एक्शन प्लान का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि यह पहली बार हुआ है, जब ब्रिक्स ने मल्टीलिटरल सिस्टम की मजबूती और सुधार पर एक पोजिशन लिया है। पीएम ने कहा कि ब्रिक्स ने काउंटर टेररिज्म एक्शन प्लान को अडॉप्ट किया है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज हम विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज है। विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी यह मंच उपयोगी रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले पंद्रह वर्षों में और परिणामदायी हो। पीएम ने आगे कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जो थीम चुना है, वह यही प्राथमिकता दर्शाता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और दो हज़ार बाईस में समूह के चौदहवें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शी ने कहा कि चीन सभी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने, आम चुनौतियों का सामना करने के वास्ते अधिक परिणाम-उन्मुखी साझेदारी बनाने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए ब्रिक्स भागीदारों के साथ काम करने को तत्पर है।
गरिफ्तारी के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के प्रशासन ने मौलाना को उसके पद से हटा दिया है। परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अहमद ने बच्ची को डरा धमकाकर उसके साथ छेड़खानी की है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक 9 साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। छेड़छाड़ करने के आरोप में अलीगढ़ पुलिस ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के मस्जिद के मौज्जिन (अजान देने वाला) मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार किया है। अलीगढ़ के एएसपी ने बताया कि बच्ची की मां ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ मोहम्मद अहमद ने छेड़छाड़ की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गरिफ्तारी के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के प्रशासन ने मौलाना को उसके पद से हटा दिया है। मोहम्मद अहमद एएमयू के प्रोफेसर की 9 वर्षीय नवासी को घर पढ़ाने के लिए जाता था। परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अहमद ने बच्ची को डरा धमकाकर उसके साथ छेड़खानी की है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोपी के खिलाफ छेड़खानी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है।
गरिफ्तारी के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने मौलाना को उसके पद से हटा दिया है। परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अहमद ने बच्ची को डरा धमकाकर उसके साथ छेड़खानी की है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक नौ साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। छेड़छाड़ करने के आरोप में अलीगढ़ पुलिस ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मस्जिद के मौज्जिन मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार किया है। अलीगढ़ के एएसपी ने बताया कि बच्ची की मां ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ मोहम्मद अहमद ने छेड़छाड़ की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गरिफ्तारी के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने मौलाना को उसके पद से हटा दिया है। मोहम्मद अहमद एएमयू के प्रोफेसर की नौ वर्षीय नवासी को घर पढ़ाने के लिए जाता था। परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अहमद ने बच्ची को डरा धमकाकर उसके साथ छेड़खानी की है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोपी के खिलाफ छेड़खानी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रत्येक व्यक्ति चाहता है उसका अपना मकान हो और वह अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक उस मकान में निवास कर सके। अक्सर लोग जब भी घर खरीदने का विचार करते हैं तो वास्तुशास्त्र का भी ध्यान रखते हैं। आज कल वास्तु को लेकर लोगो में इतनी जागरूकता है कि हर व्यक्ति चाहता है कि उसका भवन वास्तु अनुरूप हो जो उसके लिए कल्याणकारी रहे। वास्तु में एक आम धारणा है कि पूर्व दिशा का भवन अत्यंत शुभ रहता है, लेकिन कई बार यही पूर्व दिशा का भवन आपको हानि पहुंचाना आरंभ करता है। कई बार लोगों के जीवन में अचानक धन हानि या कोई दुर्घटना या घर के वरिष्ठ व्यक्ति की तबियत खराब रहने लगती है। कई बार पूर्व दिशा का मकान होते हुए भी आपके व्यापार में हानि होना आरंभ हो जाती है, यहां तक कि पति-पत्नी का अनबन या संबंध विच्छेद तक हो जाता है। कारण यह है कि अगर आपकी कुंडली पूर्व दिशा के अनुसार नहीं है तो आपको कभी भी पूर्व दिशा का भवन फलित नहीं होगा। Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
प्रत्येक व्यक्ति चाहता है उसका अपना मकान हो और वह अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक उस मकान में निवास कर सके। अक्सर लोग जब भी घर खरीदने का विचार करते हैं तो वास्तुशास्त्र का भी ध्यान रखते हैं। आज कल वास्तु को लेकर लोगो में इतनी जागरूकता है कि हर व्यक्ति चाहता है कि उसका भवन वास्तु अनुरूप हो जो उसके लिए कल्याणकारी रहे। वास्तु में एक आम धारणा है कि पूर्व दिशा का भवन अत्यंत शुभ रहता है, लेकिन कई बार यही पूर्व दिशा का भवन आपको हानि पहुंचाना आरंभ करता है। कई बार लोगों के जीवन में अचानक धन हानि या कोई दुर्घटना या घर के वरिष्ठ व्यक्ति की तबियत खराब रहने लगती है। कई बार पूर्व दिशा का मकान होते हुए भी आपके व्यापार में हानि होना आरंभ हो जाती है, यहां तक कि पति-पत्नी का अनबन या संबंध विच्छेद तक हो जाता है। कारण यह है कि अगर आपकी कुंडली पूर्व दिशा के अनुसार नहीं है तो आपको कभी भी पूर्व दिशा का भवन फलित नहीं होगा। Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
- 1 hr ago मारुति सुजुकी इन्विक्टो रिव्यूः एमपीवी सेगमेंट को मिलेगा नया किंग? Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? क्या आप हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के बारें में जानतें है? क्या आप हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के बारें में जानतें हैं? आखिर क्या है हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट? हाल ही में देश में एक नया कानून बना है कि देश की सड़कों पर फर्राटा भर रही वाहनों में अब आम रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं बल्कि हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगायें जायेंगे। हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट का नाम सुनकर इतना तो आपको अंदाजा हो ही गया होगा कि इस नये तरह नंबर प्लेट को आपकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर लगाया जा रहा है। लेकिन इस नये हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट में इतना ही नहीं है यह बेहद ही शानदार पहल है तो आइयें आज हम आपको अपने इस लेख में हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट से जुड़ी सारी बातों के बारें में पूणतयाः जानकारी देतें है। क्या है हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटः जैसा कि आपको इसके नाम से ही पता चल गया होगा कि यह नया नंबर प्लेट पहले के मुकाबले बेहतर और सुरक्षित होगा। आपको बता दें कि, हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एल्यूमिनीयम का बना हुआ एक प्लेट होगा। इस नंबर प्लेट पर एक होलोग्राम लगा होगा जिसपर एक चक्र बना होगा। यह होलोग्राम एक ऐसा स्टीकर होगा जिसपर वाहन के इंजन और चेसिस नंबर इंगित होगा। सबसे खास बात यह है कि यह होलोग्राम जल्द नष्ट होने वाली नहीं होगा। इसके अलावा हर प्लेट पर 7 अंकों का एक यूनीक लेजर कोड होगा जो कि हर वाहन के नंबर प्लेट पर अलग-अलग होगा। इस नंबर प्लेट पर आपके वाहन का जो रजिस्टेशन नंबर होगा वो सबसे खास होगा। जिसे हटाने या फिर मिटाने में पसीने छूट जायेंगे। इस नंबर प्लेट पर आपके वाहन का जो रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा गया होगा वो किसी पेंट या फिर स्टीकर आदि से नहीं लिखा होगा। नंबर को आपके प्लेट पर प्रेसर मशीन से लिखा गया होगा जो कि प्लेट पर उभरा हुआ दिखेगा। यह कार्य आरटीओ द्वारा किया जायेगा इस वजह से जो अंक और अक्षर उभरेगा उस पर भी आईएनडी दिखेगा। इस कार्य में कोई जालसाजी नहीं हो सकती है क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने मन से न तो इन नंबरों में कोई फेर बदल कर सकता है और न ही उन्हे मिटा सकता है। आखिर हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट आपकी कैसे मदद करेगा और इसके लिए आपको कितना पैसा खर्च करना होगा जानने के लिए नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें।
- एक hr ago मारुति सुजुकी इन्विक्टो रिव्यूः एमपीवी सेगमेंट को मिलेगा नया किंग? Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? क्या आप हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के बारें में जानतें है? क्या आप हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के बारें में जानतें हैं? आखिर क्या है हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट? हाल ही में देश में एक नया कानून बना है कि देश की सड़कों पर फर्राटा भर रही वाहनों में अब आम रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं बल्कि हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगायें जायेंगे। हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट का नाम सुनकर इतना तो आपको अंदाजा हो ही गया होगा कि इस नये तरह नंबर प्लेट को आपकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर लगाया जा रहा है। लेकिन इस नये हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट में इतना ही नहीं है यह बेहद ही शानदार पहल है तो आइयें आज हम आपको अपने इस लेख में हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट से जुड़ी सारी बातों के बारें में पूणतयाः जानकारी देतें है। क्या है हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटः जैसा कि आपको इसके नाम से ही पता चल गया होगा कि यह नया नंबर प्लेट पहले के मुकाबले बेहतर और सुरक्षित होगा। आपको बता दें कि, हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एल्यूमिनीयम का बना हुआ एक प्लेट होगा। इस नंबर प्लेट पर एक होलोग्राम लगा होगा जिसपर एक चक्र बना होगा। यह होलोग्राम एक ऐसा स्टीकर होगा जिसपर वाहन के इंजन और चेसिस नंबर इंगित होगा। सबसे खास बात यह है कि यह होलोग्राम जल्द नष्ट होने वाली नहीं होगा। इसके अलावा हर प्लेट पर सात अंकों का एक यूनीक लेजर कोड होगा जो कि हर वाहन के नंबर प्लेट पर अलग-अलग होगा। इस नंबर प्लेट पर आपके वाहन का जो रजिस्टेशन नंबर होगा वो सबसे खास होगा। जिसे हटाने या फिर मिटाने में पसीने छूट जायेंगे। इस नंबर प्लेट पर आपके वाहन का जो रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा गया होगा वो किसी पेंट या फिर स्टीकर आदि से नहीं लिखा होगा। नंबर को आपके प्लेट पर प्रेसर मशीन से लिखा गया होगा जो कि प्लेट पर उभरा हुआ दिखेगा। यह कार्य आरटीओ द्वारा किया जायेगा इस वजह से जो अंक और अक्षर उभरेगा उस पर भी आईएनडी दिखेगा। इस कार्य में कोई जालसाजी नहीं हो सकती है क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने मन से न तो इन नंबरों में कोई फेर बदल कर सकता है और न ही उन्हे मिटा सकता है। आखिर हाई सिक्यूरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट आपकी कैसे मदद करेगा और इसके लिए आपको कितना पैसा खर्च करना होगा जानने के लिए नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें।
अहमदाबाद (ब्यूरो)। भुज में स्थित अदाणी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज के ट्रेनी डॉक्टरों ने 3 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। इन 80 ट्रेनी डॉक्टरों की इस हड़ताल के कारण मरीजों की हालत विकट बनी हुई है। सुविधाओं के अभाव एवं स्टाइपेंड में कमी के कारण ये हड़ताल की जा रही है। ट्रेनी डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें हर महीने कैंटीन के लिए 3333 रुपये और हॉस्टल के लिए 3000 रुपए अदा करना पड़ता है। उन्हें अस्पताल के स्टाइपेंड के तौर पर केवल चार हजार रुपए दिए जाते हैं। वे कहते हैं कि सरकारी और अर्द्धसरकारी मेडिकल कॉलेज में हर महीने 13 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है। वहीं पब्लिक प्राइवेट कॉलेज करमसद मेडिकल कॉलेज में प्रतिमाह 5,000 रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है। यहां इस अस्पताल में हॉस्टल खर्च नहीं लिया जाता। वहीं जीसीएस कॉलेज अहमदाबाद में 10 हजार रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड फ्री हॉस्टल के साथ मिलता है। राज्य के सुरेन्द्रनगर के जीयू शाह मेडिकल कॉलेज में मेस और हॉस्टल खर्च नहीं लिया जाता। इन ट्रेनी डॉक्टरों बताया कि अन्य कॉलेज में हॉस्टल खर्च 1200 रुपए लिया जाता है। एक कमरे में दो लोगों को रखा जाता है। यहां तीन हजार रुपए महीने होस्टेल खर्च वसूल कर तीन लोगों को रहने के लिए मजबूर किया जाता है। डेढ़ महीने पहले कॉलेज मैनेजमेंट के साथ स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की गई। लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया। इसलिए ट्रेनी डॉक्टरों ने 13 हजार रुपए स्टाइपेंड की मांग के समर्थन में अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
अहमदाबाद । भुज में स्थित अदाणी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज के ट्रेनी डॉक्टरों ने तीन जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। इन अस्सी ट्रेनी डॉक्टरों की इस हड़ताल के कारण मरीजों की हालत विकट बनी हुई है। सुविधाओं के अभाव एवं स्टाइपेंड में कमी के कारण ये हड़ताल की जा रही है। ट्रेनी डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें हर महीने कैंटीन के लिए तीन हज़ार तीन सौ तैंतीस रुपयापये और हॉस्टल के लिए तीन हज़ार रुपयापए अदा करना पड़ता है। उन्हें अस्पताल के स्टाइपेंड के तौर पर केवल चार हजार रुपए दिए जाते हैं। वे कहते हैं कि सरकारी और अर्द्धसरकारी मेडिकल कॉलेज में हर महीने तेरह हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है। वहीं पब्लिक प्राइवेट कॉलेज करमसद मेडिकल कॉलेज में प्रतिमाह पाँच,शून्य रुपयापए स्टाइपेंड दिया जाता है। यहां इस अस्पताल में हॉस्टल खर्च नहीं लिया जाता। वहीं जीसीएस कॉलेज अहमदाबाद में दस हजार रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड फ्री हॉस्टल के साथ मिलता है। राज्य के सुरेन्द्रनगर के जीयू शाह मेडिकल कॉलेज में मेस और हॉस्टल खर्च नहीं लिया जाता। इन ट्रेनी डॉक्टरों बताया कि अन्य कॉलेज में हॉस्टल खर्च एक हज़ार दो सौ रुपयापए लिया जाता है। एक कमरे में दो लोगों को रखा जाता है। यहां तीन हजार रुपए महीने होस्टेल खर्च वसूल कर तीन लोगों को रहने के लिए मजबूर किया जाता है। डेढ़ महीने पहले कॉलेज मैनेजमेंट के साथ स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की गई। लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया। इसलिए ट्रेनी डॉक्टरों ने तेरह हजार रुपए स्टाइपेंड की मांग के समर्थन में अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
सुशांत सिंह राजपूत के जाने के बाद से ही उनके फैंस काफी ज्यादा निराश हो गए हैं. एक तरफ सोशल मीडिया पर सुशांत को इंसाफ दिलाने की मांग की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर सुशांत के घर की तस्वीरें बहुत तेजी से वायरल हो रही हैं. सुशांत के फैंस सुशांत के पुराने वीडियोज के साथ साथ अब उनकी घर की तस्वीरें भी शेयर कर रहे हैं. उनमें सुशांत सिंह राजपूत के फार्म हाउस का वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं. बताया जाता है कि सुशांत सिंह राजपूत अकसर अपने फार्म हाउस पर रिलैक्स करने के लिए जाते थे. सुशांत सिंह राजपूत का यह फार्म हाउस देखने में काफी सुंदर है और यह झील के किनारे बना हुआ है. अपने करीबी दोस्तों के साथ वो अकसर यहां आते थे. Every deep thinker is more afraid of being understood than of being misunderstood. बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत के घर का वीडियो उनके फ्लैटमेट सैम्युल ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में सुशांत के फार्म हाउस की खूबसूरती देखते ही बन रही है. बताया जाता है कि सुशांत सिंह राजपूत ने इस फार्म हाउस को किराए पर लिया हुआ था और इसका नाम हैंग आउट विला रखा था. वहीं, सुशांत सिंह राजपूत केस की बात करें तो सीबीआई इसकी जांच कर रही है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसी की एक टीम 20 अगस्त को मुंबई पहुंची थी. 21 अगस्त को जांच एजेंसी ने कई लोगों से पूछताछ की. शनिवार को सीबीआई टीम दिवंगत एक्टर के बांद्रा स्थित फ्लैट पर भी गई थी. जानकारी हो की ऐसा कहा गया था कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने अपने ही घर में फांसी लगा कर अपनी जान दे दी थी. जिसके बाद पहले तो इसे आत्महत्या करार किया जा रहा था लेकिन अब इस केस में इतने खुलासे हो गए है जिससे अब लोगों को ये यकीन नहीं हो रहा है कि सुशांत ने आत्महत्या की है. अब सीबीआई इस केस की जांच करने में लगी हैं. बता दें कि सीबीआई इस केस को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रही है. सुशांत सिंह राजपूत के करियर की बात करें तो उन्होंने सीरियल किस देश में है मेरा दिल से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद वह जीटीवी के मशहूर सीरियल पवित्र रिश्ता में भी दिखाई दिए थे. सुशांत सिंह राजपूत ने फिल्म 'काय पो चे' से बॉलीवुड में एंट्री की और इसके बाद वह 'शुद्ध देसी रोमांस', 'एमएस धोनी', 'छिछोरे' और कई जबरदस्त फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाते दिखाई दिए.
सुशांत सिंह राजपूत के जाने के बाद से ही उनके फैंस काफी ज्यादा निराश हो गए हैं. एक तरफ सोशल मीडिया पर सुशांत को इंसाफ दिलाने की मांग की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर सुशांत के घर की तस्वीरें बहुत तेजी से वायरल हो रही हैं. सुशांत के फैंस सुशांत के पुराने वीडियोज के साथ साथ अब उनकी घर की तस्वीरें भी शेयर कर रहे हैं. उनमें सुशांत सिंह राजपूत के फार्म हाउस का वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं. बताया जाता है कि सुशांत सिंह राजपूत अकसर अपने फार्म हाउस पर रिलैक्स करने के लिए जाते थे. सुशांत सिंह राजपूत का यह फार्म हाउस देखने में काफी सुंदर है और यह झील के किनारे बना हुआ है. अपने करीबी दोस्तों के साथ वो अकसर यहां आते थे. Every deep thinker is more afraid of being understood than of being misunderstood. बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत के घर का वीडियो उनके फ्लैटमेट सैम्युल ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में सुशांत के फार्म हाउस की खूबसूरती देखते ही बन रही है. बताया जाता है कि सुशांत सिंह राजपूत ने इस फार्म हाउस को किराए पर लिया हुआ था और इसका नाम हैंग आउट विला रखा था. वहीं, सुशांत सिंह राजपूत केस की बात करें तो सीबीआई इसकी जांच कर रही है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसी की एक टीम बीस अगस्त को मुंबई पहुंची थी. इक्कीस अगस्त को जांच एजेंसी ने कई लोगों से पूछताछ की. शनिवार को सीबीआई टीम दिवंगत एक्टर के बांद्रा स्थित फ्लैट पर भी गई थी. जानकारी हो की ऐसा कहा गया था कि चौदह जून को सुशांत सिंह राजपूत ने अपने ही घर में फांसी लगा कर अपनी जान दे दी थी. जिसके बाद पहले तो इसे आत्महत्या करार किया जा रहा था लेकिन अब इस केस में इतने खुलासे हो गए है जिससे अब लोगों को ये यकीन नहीं हो रहा है कि सुशांत ने आत्महत्या की है. अब सीबीआई इस केस की जांच करने में लगी हैं. बता दें कि सीबीआई इस केस को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रही है. सुशांत सिंह राजपूत के करियर की बात करें तो उन्होंने सीरियल किस देश में है मेरा दिल से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद वह जीटीवी के मशहूर सीरियल पवित्र रिश्ता में भी दिखाई दिए थे. सुशांत सिंह राजपूत ने फिल्म 'काय पो चे' से बॉलीवुड में एंट्री की और इसके बाद वह 'शुद्ध देसी रोमांस', 'एमएस धोनी', 'छिछोरे' और कई जबरदस्त फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाते दिखाई दिए.
अध्यात्मबल का संपादन सरल है। उसके लिए आत्मशोधन एवं लोकमंगल के क्रियाकलापों को जीवनचर्या का अंग बना लेने भर से काम चल जाता है। व्यक्तित्व में पैनापन और प्रखरता का समावेश इन्हीं दो आधारों पर बन पड़ता है। यह बन पड़े तो दैवी अनुग्रह अनायास बरसता है और आत्मबल अपने भीतर से ही प्रचुर परिमाण में उभर पड़ता है। केवट, शबरी, गिलहरी, रीछ-वानर, ग्वाल-बाल जैसों की भौतिक सामर्थ्य स्वल्प थी, पर वे अपने में देवत्व की मात्रा बढ़ा लेने पर ही इतने मनस्वी बन सके, जिनकी चर्चा इतिहासकार आए दिन करते रहते हैं। सुग्रीव की विजय के पीछे उसकी निज की बलिष्ठता मात्र ही कारण नहीं हुई थी। नरसी मेहता ने अभीष्ट धन अपने व्यवसाय से नहीं कमाया था। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर किसी एक धनवान की कृति नहीं है। इनके पीछे देवत्व का अदृश्य सहयोग भी सम्मिलित रहा है। ध्रुव को ब्रह्मांड के केंद्र बनने का श्रेय उसके तपोबल के सहारे ही संभव हुआ था। अगस्त्य का समुद्रपान भी तपबल का ही प्रभाव था। सतयुग,ऋषियुग का ही प्रकट रूप है। असुरता की अभिवृद्धि होते ही कलहयुग-कलियुग आ धमकता है। उच्चस्तरीय प्रतिभाओं का पौरुष जब कार्यक्षेत्र में उतरता है तो न केवल कुछ व्यक्तियों व कुछ प्रतिभाओं को वरन समूचे वातावरण को ही उलट-पुलट कर रख देता है। धोबी की भट्ठी पर चढ़ने से मैले कपड़ों को सफाई से चमचमाते देखा गया है। भट्ठी में तपने के बाद मिट्टी मिला बेकार लोहा फौलाद स्तर का बनता और उसके द्वारा कुछ न कुछ कर दिखाने वाले यंत्र उपकरण बनते हैं। आत्मशक्ति की प्रखरता को इसी स्तर का बताया और पाया गया है। इक्कीसवीं सदी से प्रारंभ होने वाला युग-अभियान संपन्न तो प्रतिभावान मनुष्यों द्वारा ही होगा, पर उनके पीछे निश्चित रूप से ऐसी दिव्य चेतना जुड़ी हुई होगी, जैसी की फ्रांस की एक कुमारी जोन ऑफ आर्क ने रणकौशल से अपरिचित होते हुए भी अपने देश को पराधीनता के पाश से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की थी। महात्मा गांधी और संत विनोबा जी जो कर सके, वह उस स्थिति में कदाचित ही बन पड़ता जो वे बैरिस्टर, मिनिस्टर, नेता, अभिनेता आदि बनकर कर सके होते। चंद्रगुप्त जब विश्वविजय की योजना सुनकर सकपकाने लगा तो चाणक्य ने कहा कि चाणक्य के वरद पुत्र जैसी भूमिका निभाओ। विजय प्राप्त कराने की जिम्मेदारी तुम्हारी नहीं, मेरी है। शिवाजी जब अपने सैन्यबल को देखते हुए असमंजस में थे कि इतनी बड़ी लड़ाई कैसे लड़ी जा सकेगी, तो समर्थ रामदास ने उन्हें भवानी के हाथों अक्षय तलवार दिलाई थी और कहा था- तुम छत्रपति हो गए, पराजय की बात ही मत सोचो। राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के बहाने बला और अतिबला का कौशल सिखाने ले गये थे; ताकि वे युद्ध लड़ सकें-असुरता का समापन और रामराज्य के रूप में 'सतयुग की वापसी' संभव कर सके। महाभारत लड़ने का निश्चय सुनकर अर्जुन सकपका गया था और कहने लगा कि मैं अपने गुजारे के लिए तो कुछ भी कर लूंगा, फिर हे केशव! आप इस घोर युद्ध में मुझे नियोजित क्यों कर रहे हैं? इसके उत्तर में भगवान ने एक ही बात कही थी कि इन कौरवों को तो मैंने पहले ही मारकर रख दिया है। तुझे यदि श्रेय लेना है तो आगे आ अन्यथा तेरे सहयोग के बिना भी वह सब हो जाएगा, जो होने वाला है। घाटे में तू ही रहेगा। श्रेय गंवा बैठेगा और उस गौरव से भी वंचित रहेगा जो विजेता और राज्य सिंहासन के रूप में मिला करता है। अर्जुन ने वस्तुस्थिति समझी और कहने लगा- 'करिष्ये वचनं तव' अर्थात् आपका आदेश मानूंगा। ऐसी ही हिचकिचाहट हनुमान, अंगद नल-नील आदि की रही होती तो वे अपनी निजी शक्ति के बल पर किसी प्रकार जीवित तो रहते, पर उस अक्षय कीर्ति से वंचित ही बने रहते, जो उन्हें अनंतकाल तक मिलने वाली है। युग सृजन में श्रेय किन्हीं को भी मिले, पर उसके पीछे वास्तविक शक्ति उस ईश्वरीय सत्ता की ही होगी,जिसने नई सृष्टि रचने जैसे स्तर की अभिनव योजना बनाई है और उसके लिए आवश्यक साधनों एवं अवसर विनिर्मित करने का साधन जुटाने वाला संकल्प किया है।
अध्यात्मबल का संपादन सरल है। उसके लिए आत्मशोधन एवं लोकमंगल के क्रियाकलापों को जीवनचर्या का अंग बना लेने भर से काम चल जाता है। व्यक्तित्व में पैनापन और प्रखरता का समावेश इन्हीं दो आधारों पर बन पड़ता है। यह बन पड़े तो दैवी अनुग्रह अनायास बरसता है और आत्मबल अपने भीतर से ही प्रचुर परिमाण में उभर पड़ता है। केवट, शबरी, गिलहरी, रीछ-वानर, ग्वाल-बाल जैसों की भौतिक सामर्थ्य स्वल्प थी, पर वे अपने में देवत्व की मात्रा बढ़ा लेने पर ही इतने मनस्वी बन सके, जिनकी चर्चा इतिहासकार आए दिन करते रहते हैं। सुग्रीव की विजय के पीछे उसकी निज की बलिष्ठता मात्र ही कारण नहीं हुई थी। नरसी मेहता ने अभीष्ट धन अपने व्यवसाय से नहीं कमाया था। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर किसी एक धनवान की कृति नहीं है। इनके पीछे देवत्व का अदृश्य सहयोग भी सम्मिलित रहा है। ध्रुव को ब्रह्मांड के केंद्र बनने का श्रेय उसके तपोबल के सहारे ही संभव हुआ था। अगस्त्य का समुद्रपान भी तपबल का ही प्रभाव था। सतयुग,ऋषियुग का ही प्रकट रूप है। असुरता की अभिवृद्धि होते ही कलहयुग-कलियुग आ धमकता है। उच्चस्तरीय प्रतिभाओं का पौरुष जब कार्यक्षेत्र में उतरता है तो न केवल कुछ व्यक्तियों व कुछ प्रतिभाओं को वरन समूचे वातावरण को ही उलट-पुलट कर रख देता है। धोबी की भट्ठी पर चढ़ने से मैले कपड़ों को सफाई से चमचमाते देखा गया है। भट्ठी में तपने के बाद मिट्टी मिला बेकार लोहा फौलाद स्तर का बनता और उसके द्वारा कुछ न कुछ कर दिखाने वाले यंत्र उपकरण बनते हैं। आत्मशक्ति की प्रखरता को इसी स्तर का बताया और पाया गया है। इक्कीसवीं सदी से प्रारंभ होने वाला युग-अभियान संपन्न तो प्रतिभावान मनुष्यों द्वारा ही होगा, पर उनके पीछे निश्चित रूप से ऐसी दिव्य चेतना जुड़ी हुई होगी, जैसी की फ्रांस की एक कुमारी जोन ऑफ आर्क ने रणकौशल से अपरिचित होते हुए भी अपने देश को पराधीनता के पाश से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की थी। महात्मा गांधी और संत विनोबा जी जो कर सके, वह उस स्थिति में कदाचित ही बन पड़ता जो वे बैरिस्टर, मिनिस्टर, नेता, अभिनेता आदि बनकर कर सके होते। चंद्रगुप्त जब विश्वविजय की योजना सुनकर सकपकाने लगा तो चाणक्य ने कहा कि चाणक्य के वरद पुत्र जैसी भूमिका निभाओ। विजय प्राप्त कराने की जिम्मेदारी तुम्हारी नहीं, मेरी है। शिवाजी जब अपने सैन्यबल को देखते हुए असमंजस में थे कि इतनी बड़ी लड़ाई कैसे लड़ी जा सकेगी, तो समर्थ रामदास ने उन्हें भवानी के हाथों अक्षय तलवार दिलाई थी और कहा था- तुम छत्रपति हो गए, पराजय की बात ही मत सोचो। राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के बहाने बला और अतिबला का कौशल सिखाने ले गये थे; ताकि वे युद्ध लड़ सकें-असुरता का समापन और रामराज्य के रूप में 'सतयुग की वापसी' संभव कर सके। महाभारत लड़ने का निश्चय सुनकर अर्जुन सकपका गया था और कहने लगा कि मैं अपने गुजारे के लिए तो कुछ भी कर लूंगा, फिर हे केशव! आप इस घोर युद्ध में मुझे नियोजित क्यों कर रहे हैं? इसके उत्तर में भगवान ने एक ही बात कही थी कि इन कौरवों को तो मैंने पहले ही मारकर रख दिया है। तुझे यदि श्रेय लेना है तो आगे आ अन्यथा तेरे सहयोग के बिना भी वह सब हो जाएगा, जो होने वाला है। घाटे में तू ही रहेगा। श्रेय गंवा बैठेगा और उस गौरव से भी वंचित रहेगा जो विजेता और राज्य सिंहासन के रूप में मिला करता है। अर्जुन ने वस्तुस्थिति समझी और कहने लगा- 'करिष्ये वचनं तव' अर्थात् आपका आदेश मानूंगा। ऐसी ही हिचकिचाहट हनुमान, अंगद नल-नील आदि की रही होती तो वे अपनी निजी शक्ति के बल पर किसी प्रकार जीवित तो रहते, पर उस अक्षय कीर्ति से वंचित ही बने रहते, जो उन्हें अनंतकाल तक मिलने वाली है। युग सृजन में श्रेय किन्हीं को भी मिले, पर उसके पीछे वास्तविक शक्ति उस ईश्वरीय सत्ता की ही होगी,जिसने नई सृष्टि रचने जैसे स्तर की अभिनव योजना बनाई है और उसके लिए आवश्यक साधनों एवं अवसर विनिर्मित करने का साधन जुटाने वाला संकल्प किया है।
आईपीएल 2022 में युवा प्रतिभाओं ने काफी प्रभावित किया, लेकिन कई खिलाड़ी मौके की कमी में अपना हुनर नहीं दिखा सके। आईपीएल 2022 में बहुत से युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करके क्रिकेट फैंस का दिल जीता, लेकिन कुछ टैलेंटेड खिलाड़ी ऐसे भी थे जिन्हें पूरे सीज़न ज्यादा मौके नहीं मिल सके। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे उन 3 खिलाड़ियों के नाम जिन्हें अगर उनकी टीम आईपीएल 2023 से पहले रिलीज करती हैं तो ऑक्शन में वह मालामाल हो सकते है। शाहरुख खान (Shahrukh Khan) शाहरुख खान एक हार्ड हीटिंग बल्लेबाज़ हैं। आईपीएल 2021 में उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से सभी को काफी प्रभावित किया था, लेकिन आईपीएल 2022 उनके लिए कुछ खास नहीं रहा। इस साल शाहरुख ने 16.71 की औसत से 117 रन बनाए, जिसके दौरान उनका स्ट्राइक रेट महज 108.33 का रहा। पूरे सीजन में उन्हें 8 मुकाबले खेलने को मिले। लेकिन वह अपने चित परिचित अंदाज में प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके बावजूद सभी टीमों की निगाहें उन पर रहेंगी क्योंकि सभी टीम्स एक भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज को अपने मिडिल ऑर्डर में रखना चाहती हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर उन्हे रिलीज किया जाता है तो वह मालामाल हो सकते हैं। अब्दुल समद (Abdul Samad) अब्दुल समद को ऑरेंज आर्मी ने मेगा ऑक्शन से पहले 4 करोड़ रुपये में रिटेन किया था। समद अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाते है। आईपीएल 2020 में उन्होंने अपने डेब्यू सीज़न में सनराइजर्स के मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए 170.76 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे। हालांकि इस सीज़न रिटेन किए जाने के बावजूद उन्हें सिर्फ 2 ही मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में शामिल होने का मौका मिला। समद एक यंग टैलेंट है और ऐसे में अगर अब सनराइजर्स की टीम उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है तो दूसरी फ्रेंचाइज़ी उनके नाम पर बोली लगाती जरूरी नज़र आएंगी। कार्तिक त्यागी (Kartik Tyagi) आईपीएल 2022 में कार्तिक त्यागी को सनराइजर्स हैदराबाद ने 4 करोड़ में रुपये में खरीदा था, हालांकि इसके बावजूद उन्हें सीज़न में सिर्फ 2 ही मुकाबले खेलने को मिले। कार्तिक त्यागी अंडर19 वर्ल्ड कप 2020 में भारतीय टीम के स्टार गेंदबाज़ रहे थे। इस दाएं हाथ के सीम बॉलर ने टूर्नामेंट में 11 विकेट हासिल किए थे, जिसके बाद राजस्थान ने आईपीएल 2020 में उन्हें 1.30 करोड़ में खरीदा था। इस सीज़न सनराइजर्स की प्लेइंग इलेवन में उन्हें सिर्फ 2 ही मुकाबलों में शामिल किया गया, जिसमें वह सिर्फ एक ही सफलता हासिल कर सके। हालांकि इसके बावजूद अगर उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है तो बाकि फ्रेंचाइज़ी इस युवा स्टार पर बोली लगाकर उन्हें माला माल कर सकती है।
आईपीएल दो हज़ार बाईस में युवा प्रतिभाओं ने काफी प्रभावित किया, लेकिन कई खिलाड़ी मौके की कमी में अपना हुनर नहीं दिखा सके। आईपीएल दो हज़ार बाईस में बहुत से युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करके क्रिकेट फैंस का दिल जीता, लेकिन कुछ टैलेंटेड खिलाड़ी ऐसे भी थे जिन्हें पूरे सीज़न ज्यादा मौके नहीं मिल सके। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे उन तीन खिलाड़ियों के नाम जिन्हें अगर उनकी टीम आईपीएल दो हज़ार तेईस से पहले रिलीज करती हैं तो ऑक्शन में वह मालामाल हो सकते है। शाहरुख खान शाहरुख खान एक हार्ड हीटिंग बल्लेबाज़ हैं। आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से सभी को काफी प्रभावित किया था, लेकिन आईपीएल दो हज़ार बाईस उनके लिए कुछ खास नहीं रहा। इस साल शाहरुख ने सोलह.इकहत्तर की औसत से एक सौ सत्रह रन बनाए, जिसके दौरान उनका स्ट्राइक रेट महज एक सौ आठ.तैंतीस का रहा। पूरे सीजन में उन्हें आठ मुकाबले खेलने को मिले। लेकिन वह अपने चित परिचित अंदाज में प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके बावजूद सभी टीमों की निगाहें उन पर रहेंगी क्योंकि सभी टीम्स एक भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज को अपने मिडिल ऑर्डर में रखना चाहती हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर उन्हे रिलीज किया जाता है तो वह मालामाल हो सकते हैं। अब्दुल समद अब्दुल समद को ऑरेंज आर्मी ने मेगा ऑक्शन से पहले चार करोड़ रुपये में रिटेन किया था। समद अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी के लिए जाने जाते है। आईपीएल दो हज़ार बीस में उन्होंने अपने डेब्यू सीज़न में सनराइजर्स के मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते हुए एक सौ सत्तर.छिहत्तर की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे। हालांकि इस सीज़न रिटेन किए जाने के बावजूद उन्हें सिर्फ दो ही मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में शामिल होने का मौका मिला। समद एक यंग टैलेंट है और ऐसे में अगर अब सनराइजर्स की टीम उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है तो दूसरी फ्रेंचाइज़ी उनके नाम पर बोली लगाती जरूरी नज़र आएंगी। कार्तिक त्यागी आईपीएल दो हज़ार बाईस में कार्तिक त्यागी को सनराइजर्स हैदराबाद ने चार करोड़ में रुपये में खरीदा था, हालांकि इसके बावजूद उन्हें सीज़न में सिर्फ दो ही मुकाबले खेलने को मिले। कार्तिक त्यागी अंडरउन्नीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बीस में भारतीय टीम के स्टार गेंदबाज़ रहे थे। इस दाएं हाथ के सीम बॉलर ने टूर्नामेंट में ग्यारह विकेट हासिल किए थे, जिसके बाद राजस्थान ने आईपीएल दो हज़ार बीस में उन्हें एक.तीस करोड़ में खरीदा था। इस सीज़न सनराइजर्स की प्लेइंग इलेवन में उन्हें सिर्फ दो ही मुकाबलों में शामिल किया गया, जिसमें वह सिर्फ एक ही सफलता हासिल कर सके। हालांकि इसके बावजूद अगर उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है तो बाकि फ्रेंचाइज़ी इस युवा स्टार पर बोली लगाकर उन्हें माला माल कर सकती है।
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। आजादी के अमृत महोत्सव के बीच ग्वालियर (Gwalior) जिले में स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ हर्षोल्लास, धूमधाम एवं गरिमामय रूप से मनाई गई। एसएएफ मैदान पर आयोजित हुए जिले के मुख्य समारोह में कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह (Gwalior Collector Kaushlendra Vikram Singh) ने ध्वजारोहण कर संयुक्त परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) के संदेश का वाचन किया। स्वतंत्रता दिवस (Independence day) के मुख्य समारोह के मुख्य अतिथि कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ध्वजारोहण के पश्चात एक खुले वाहन में सवार होकर संयुक्त परेड का निरीक्षण किया। मुख्य अतिथि के साथ प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभिनव चौकसे खुले वाहन पर सवार थे। परेड में शामिल जवानों ने तीन बार हर्ष फायर कर "स्वतंत्रता दिवस अमर रहे" के जयकारे लगाए। कलेक्टर श्री सिंह ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए खुले आसमान में रंग बिरंगे गुब्बारे छोड़े। कलेक्टर द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं कारगिल शहीदों के परिजनों को शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा मनोहारी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। हर घर तिरंगा अभियान की वजह से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर इस बार अलग ही छटा बिखरी। पूरा ग्वालियर (Gwalior) शहर तिरंगामय नजर आया। वहीं इस बार के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में बहुत बड़ी संख्या में शहरवासी जश्न-ए-आजादी में शामिल होने पहुँचे। मुख्य समारोह में सीमा सुरक्षा बल एवं एसएएफ द्वितीय वाहिनी के बैण्ड की मधुर धुन के साथ निकली संयुक्त परेड सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। संयुक्त परेड में बीएसएफ टेकनपुर, सीआरपीएफ, द्वितीय वाहिनी एसएएफ, 13वीं व 14वीं वाहिनी एसएएफ, जिला पुलिस बल, होमगार्ड, एनसीसी सीनियर बालक एवं बालिका, एनसीसी जूनियर बालिका एवं नगर सेना की टुकडियां शामिल हुई। संयुक्त परेड में सीनियर वर्ग में सीमा सुरक्षा बल टेकनपुर को प्रथम, एसएफ द्वितीय वाहिनी को दूसरे एवं 13वीं बटालियन एसएएफ को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। इसी प्रकार जूनियर वर्ग में एनसीसी सीनियर बालिका को प्रथम, एनसीसी जूलियर बालिका को द्वितीय एवं एनसीसी सीनियर बालक की टुकड़ी को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। अपने कार्यों को उत्कृष्ट ढंग से अंजाम देने वाले शासकीय सेवकों को भी मुख्य अतिथि द्वारा इस अवसर पर प्रमाण-पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चुनी हुई शिक्षण संस्थाओं के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। राष्ट्र भक्ति एवं भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत इन प्रस्तुतियों ने समारोह में खूब समां बांधा। सांस्कृतिक कार्यकमों में सीएम राईज स्कूल शासकीय पद्मा कन्या उ. मा. विद्यालय को प्रथम, सीएम राईज स्कूल शासकीय कन्या उ. मा. विद्यालय किलागेट को दूसरे एवं रेडिएंट स्कूल को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। कार्यक्रम में इनके अलावा ईसीएस बैगलेस स्कूल, शासकीय उत्कृष्ट उ. मा. विद्यालय क्र. -1 मुरार और सेंट्रल एकेडमी स्कूल के बच्चों द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। जिसका शहरवासियों ने तालिया बजाकर अभिनन्दन किया। समारोह में सीमा सुरक्षा बल के श्वान दस्ते द्वारा किए गए हैरतअंगेज करतबों ने सभी को भीतर तक प्रभावित किया। अपराधियों से निपटना हो अथवा फिर तस्करों की पहचान या फिर कठिन बाधाओं के बीच से होकर गुजरना हो, राष्ट्रीय श्वान दस्ते ने सभी बाधाओं को फतह करने का जीवंत प्रदर्शन करके दिखाया। साथ ही स्वच्छता अभियान पर केन्द्रित प्रेरणादायी करतबों का प्रदर्शन श्वान दस्ते ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद गणमान्य नागरिकों व बच्चों की श्वान दस्ते को खूब वाहवाही मिली। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित हुए मुख्य समारोह के मुख्य अतिथि कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत आयोजित हुए विशेष भोज में शामिल हुए। उन्होंने शासकीय टकसाल स्कूल कम्पू के बच्चों के साथ बैठकर सुरूचिपूर्ण भोज का आनंद लिया। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत टकसाल स्कूल में आयोजित हुए सुरूचिपूर्ण भोज में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी, प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभिनव चौकसे, अपर कलेक्टर इच्छित गढ़पाले व एच बी शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए। जिले के अन्य शासकीय स्कूलों में भी स्वतंत्रता दिवस पर मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत विशेष भोज का आयोजन हुआ।
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। आजादी के अमृत महोत्सव के बीच ग्वालियर जिले में स्वाधीनता की पचहत्तरवीं वर्षगांठ हर्षोल्लास, धूमधाम एवं गरिमामय रूप से मनाई गई। एसएएफ मैदान पर आयोजित हुए जिले के मुख्य समारोह में कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ध्वजारोहण कर संयुक्त परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संदेश का वाचन किया। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के मुख्य अतिथि कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ध्वजारोहण के पश्चात एक खुले वाहन में सवार होकर संयुक्त परेड का निरीक्षण किया। मुख्य अतिथि के साथ प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभिनव चौकसे खुले वाहन पर सवार थे। परेड में शामिल जवानों ने तीन बार हर्ष फायर कर "स्वतंत्रता दिवस अमर रहे" के जयकारे लगाए। कलेक्टर श्री सिंह ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए खुले आसमान में रंग बिरंगे गुब्बारे छोड़े। कलेक्टर द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं कारगिल शहीदों के परिजनों को शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा मनोहारी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। हर घर तिरंगा अभियान की वजह से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर इस बार अलग ही छटा बिखरी। पूरा ग्वालियर शहर तिरंगामय नजर आया। वहीं इस बार के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में बहुत बड़ी संख्या में शहरवासी जश्न-ए-आजादी में शामिल होने पहुँचे। मुख्य समारोह में सीमा सुरक्षा बल एवं एसएएफ द्वितीय वाहिनी के बैण्ड की मधुर धुन के साथ निकली संयुक्त परेड सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। संयुक्त परेड में बीएसएफ टेकनपुर, सीआरपीएफ, द्वितीय वाहिनी एसएएफ, तेरहवीं व चौदहवीं वाहिनी एसएएफ, जिला पुलिस बल, होमगार्ड, एनसीसी सीनियर बालक एवं बालिका, एनसीसी जूनियर बालिका एवं नगर सेना की टुकडियां शामिल हुई। संयुक्त परेड में सीनियर वर्ग में सीमा सुरक्षा बल टेकनपुर को प्रथम, एसएफ द्वितीय वाहिनी को दूसरे एवं तेरहवीं बटालियन एसएएफ को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। इसी प्रकार जूनियर वर्ग में एनसीसी सीनियर बालिका को प्रथम, एनसीसी जूलियर बालिका को द्वितीय एवं एनसीसी सीनियर बालक की टुकड़ी को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। अपने कार्यों को उत्कृष्ट ढंग से अंजाम देने वाले शासकीय सेवकों को भी मुख्य अतिथि द्वारा इस अवसर पर प्रमाण-पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चुनी हुई शिक्षण संस्थाओं के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। राष्ट्र भक्ति एवं भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत इन प्रस्तुतियों ने समारोह में खूब समां बांधा। सांस्कृतिक कार्यकमों में सीएम राईज स्कूल शासकीय पद्मा कन्या उ. मा. विद्यालय को प्रथम, सीएम राईज स्कूल शासकीय कन्या उ. मा. विद्यालय किलागेट को दूसरे एवं रेडिएंट स्कूल को तृतीय स्थान की शील्ड प्रदान की गई। कार्यक्रम में इनके अलावा ईसीएस बैगलेस स्कूल, शासकीय उत्कृष्ट उ. मा. विद्यालय क्र. -एक मुरार और सेंट्रल एकेडमी स्कूल के बच्चों द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। जिसका शहरवासियों ने तालिया बजाकर अभिनन्दन किया। समारोह में सीमा सुरक्षा बल के श्वान दस्ते द्वारा किए गए हैरतअंगेज करतबों ने सभी को भीतर तक प्रभावित किया। अपराधियों से निपटना हो अथवा फिर तस्करों की पहचान या फिर कठिन बाधाओं के बीच से होकर गुजरना हो, राष्ट्रीय श्वान दस्ते ने सभी बाधाओं को फतह करने का जीवंत प्रदर्शन करके दिखाया। साथ ही स्वच्छता अभियान पर केन्द्रित प्रेरणादायी करतबों का प्रदर्शन श्वान दस्ते ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद गणमान्य नागरिकों व बच्चों की श्वान दस्ते को खूब वाहवाही मिली। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित हुए मुख्य समारोह के मुख्य अतिथि कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत आयोजित हुए विशेष भोज में शामिल हुए। उन्होंने शासकीय टकसाल स्कूल कम्पू के बच्चों के साथ बैठकर सुरूचिपूर्ण भोज का आनंद लिया। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत टकसाल स्कूल में आयोजित हुए सुरूचिपूर्ण भोज में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी, प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभिनव चौकसे, अपर कलेक्टर इच्छित गढ़पाले व एच बी शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए। जिले के अन्य शासकीय स्कूलों में भी स्वतंत्रता दिवस पर मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत विशेष भोज का आयोजन हुआ।
के 10 सेंट कम होने से माँग की मात्रा मे 100 बुशल की वृद्धि होती है तो माँग वक्र के उस हिस्से वा ढाल - 10/100 या - 1/10 होगा। लेकिन यदि हम मांग वक्र को पुन खीचते है और कीमत सेंट मे न लेवर डालर मे लेते है तो माँग वक्र के उसी हिस्से का ढाल ( 1 / 10 ) / 100 या - 1/1000 हो जाता है । यीमत का माप सेंट से डालर में बदल देने से माँग वक्र वे नीचे की ओर होने वाले ढाल म तीव्र गिरावट श्रा जाती है, हालाकि स्वय मांग-वत्र मे कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ है । यदि हम मांग वक्र पुन सोचते हैं और इस बार भी कीमत डालरो में और मांग की मात्रा पैको ( Pecks ) * मे मापते हैं तो मांग वक्र के उसी हिम्मे वा ढाल ( 1 / 10 ) / 400 अथवा - 1/4000 हो जायगा । माँग वक्र का ढाल वीमत के परिवर्तनों से मांग की माना की प्रतिक्रिया को जानने का एक बहुत ही अविश्वसनीय सूचक होता है । मांग वत्रो के तुलनात्मक ढाल भी कीमतो म परिवर्तनों के फलस्वरूप माँग वी मात्राओ की तुलनात्मक प्रतित्रियात्मकता के माप के रूप मे निरर्थक होते हैं । मान लीजिए गेहूँ के मांग-वक की तुलना गाडियो के मांग-वक से करने मे हम यह जानना चाहते हैं कि इनमें से किसके लिए कीमत के परिवर्तन से मांग की मात्रा अधिक प्रतिक्रिया दिखलाएगी। दोनो माँग वो के तुलनात्मक ढाल हमे इस सम्बन्ध मे कुछ भी नही बतलाते। गेहूँ की कीमत मे एवं डालर की कमी मांग की मात्रा मे प्रति माह बीस मिलियन वुशल की वृद्धि कर सकती है । गाडियो की कीमत मे एव डालर की कमी प्रति माह माँग को मात्रा मे पाँच गाडियो की वृद्धि कर सकती है । लेकिन इसका आशय यह नहीं है कि गेहूँ की मांग को मात्रा इसकी कीमतों के परिवर्तनों के परिणामस्वरप अधिक प्रतिक्रिया दिसलाती है, बनिस्चत गाडियो को वोमतो वे परिवर्तनो ये फलस्वरूप गाडियो की मांग की मात्रा के । गेहूँ की कीमत मे एक डालर का परिवर्तन काफी बडा सापेक्ष परिवर्तन माना जाता है । गाडी की कीमत मे एक डालर का परिवर्तन कोई महत्व नहीं रखता। इसके अलावा गेहूँ की एक इकाई और गाडी की एक इकाई एक दूसरे से पूर्णतया भिन धारणाएँ मानी जाती है और इनकी परस्पर तुलना करने के लिए कोई आधार नही हैं । महान आग्ल अर्थशास्त्री एल्फोड मार्शल ने इस कठिनाई का समाधान लोच को इस तरह से परिभाषित करके निकाला है कीमत के मामूली परिवर्तन की स्थिति मे से यह मांग की माना के प्रतिशत परिवर्तन मे कीमत के प्रतिशत परिवर्तन का भाग देने से प्राप्त होती है। बीजगरिंगत के रूप मे, लोच की परिभाषा इस प्रकार दो एक पैक दो गॅलन के बराबर होता है । 9 एल्फ्रेड मार्शल, Principles of Economics (आठवाँ संस्करण, लदन मैक्मिलन एण्ड कम्पनी लिमिटेड, 1920) पुस्तक III, अध्याय IV.
के दस सेंट कम होने से माँग की मात्रा मे एक सौ बुशल की वृद्धि होती है तो माँग वक्र के उस हिस्से वा ढाल - दस/एक सौ या - एक/दस होगा। लेकिन यदि हम मांग वक्र को पुन खीचते है और कीमत सेंट मे न लेवर डालर मे लेते है तो माँग वक्र के उसी हिस्से का ढाल / एक सौ या - एक/एक हज़ार हो जाता है । यीमत का माप सेंट से डालर में बदल देने से माँग वक्र वे नीचे की ओर होने वाले ढाल म तीव्र गिरावट श्रा जाती है, हालाकि स्वय मांग-वत्र मे कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ है । यदि हम मांग वक्र पुन सोचते हैं और इस बार भी कीमत डालरो में और मांग की मात्रा पैको * मे मापते हैं तो मांग वक्र के उसी हिम्मे वा ढाल / चार सौ अथवा - एक/चार हज़ार हो जायगा । माँग वक्र का ढाल वीमत के परिवर्तनों से मांग की माना की प्रतिक्रिया को जानने का एक बहुत ही अविश्वसनीय सूचक होता है । मांग वत्रो के तुलनात्मक ढाल भी कीमतो म परिवर्तनों के फलस्वरूप माँग वी मात्राओ की तुलनात्मक प्रतित्रियात्मकता के माप के रूप मे निरर्थक होते हैं । मान लीजिए गेहूँ के मांग-वक की तुलना गाडियो के मांग-वक से करने मे हम यह जानना चाहते हैं कि इनमें से किसके लिए कीमत के परिवर्तन से मांग की मात्रा अधिक प्रतिक्रिया दिखलाएगी। दोनो माँग वो के तुलनात्मक ढाल हमे इस सम्बन्ध मे कुछ भी नही बतलाते। गेहूँ की कीमत मे एवं डालर की कमी मांग की मात्रा मे प्रति माह बीस मिलियन वुशल की वृद्धि कर सकती है । गाडियो की कीमत मे एव डालर की कमी प्रति माह माँग को मात्रा मे पाँच गाडियो की वृद्धि कर सकती है । लेकिन इसका आशय यह नहीं है कि गेहूँ की मांग को मात्रा इसकी कीमतों के परिवर्तनों के परिणामस्वरप अधिक प्रतिक्रिया दिसलाती है, बनिस्चत गाडियो को वोमतो वे परिवर्तनो ये फलस्वरूप गाडियो की मांग की मात्रा के । गेहूँ की कीमत मे एक डालर का परिवर्तन काफी बडा सापेक्ष परिवर्तन माना जाता है । गाडी की कीमत मे एक डालर का परिवर्तन कोई महत्व नहीं रखता। इसके अलावा गेहूँ की एक इकाई और गाडी की एक इकाई एक दूसरे से पूर्णतया भिन धारणाएँ मानी जाती है और इनकी परस्पर तुलना करने के लिए कोई आधार नही हैं । महान आग्ल अर्थशास्त्री एल्फोड मार्शल ने इस कठिनाई का समाधान लोच को इस तरह से परिभाषित करके निकाला है कीमत के मामूली परिवर्तन की स्थिति मे से यह मांग की माना के प्रतिशत परिवर्तन मे कीमत के प्रतिशत परिवर्तन का भाग देने से प्राप्त होती है। बीजगरिंगत के रूप मे, लोच की परिभाषा इस प्रकार दो एक पैक दो गॅलन के बराबर होता है । नौ एल्फ्रेड मार्शल, Principles of Economics पुस्तक III, अध्याय IV.
समय और दूरी सम्बन्धी प्रश्न । जितनी देर में खरगोश (४×१३) गज़ वा ६ गज़ दौड़ता है उतनी देर में इता ( ३४२३३ ) गज़ वा ७३ गज़ दौड़ता है, इस कारण खरगोश के ६ गज़दौड़ने में कुत्ता उससे १३ गज़ अधिक दौड़ता है, •• इष्ट दूरी १२० गज़ है। ३ उदाहरणक, प से फ स्थान को जो ५११ मील दूर है, ३० मील प्रतिघण्टा की चाल से चला, १ घण्टे पीछे ख, फ से प को ४२ मील प्रतिघण्टा की चाल से चला; तो बताओ क, ख को कब और कहाँ मिलेगा । जब क ३० मील चल चुका तब ख चला । शेष ४८ मील में से ३५ मील क और ४२ मील ख १ घण्टे में चलता है, अर्थात् दोनों मिलकर (३+४१) वा ८ मील १ घण्टे में चलते हैं। इस कारण ४८ मील हवा ६ घण्टे में चले, इस कारण ख के चलने से ६ घण्टे पीछे क, ख से मिला, इस कारण बे फ से ४२ ×६ वा २५३ मील की दूरी पर मिले । ४ उदाहरण - दो रेलगाड़ी ७७ गज़ और ६६ गज़ लम्बी क्रम से २५ २० मील प्रतिघण्टे की चाल से दो समानान्तर पटरियों पर विपरीत दिशाओं को जाती हैं, तो उनको एक दूसरी के पार करने में कितना समय लगेगा ? यदि वे एक ही दिशा में जातीं, तो पार करने में कितना समय लगता ? एक मनुष्य को, जो पहली गाड़ी में बैठा हुआ है, दूसरी गाड़ी के पार करने में कितनी देर लगेगी ? ( १ ) दोनों गाड़ियों को जब विरुद्ध दिशाओं में चलती हैं एक दूसरी हैं के पार करने में उतना समय लगता है जितना (७७+६६) वा १७६ गज़ को (२५+२०) वा ४५ मील प्रतिघण्टे की चाल से चलने में लगता जब, ४५ मील १ घण्टे में चलती है, अर्थात् ४५×१७६० गज़ १ घण्टे..... १७६ गज़ ४० घण्टे........; इष्ट समय= घण्टे बा ८ सेकण्ड । (२) जब गाड़ी एक हो दिशा को जातीं, तो उनको एक दूसरी के पार करने में उतना समय लगता जितना (७७+६६) वा १७६ गज़ को (२२ - २० ) वा ५ मोल प्रतिघण्टे की चाल से चलने में लगता, इस प्रकार इष्ट समय २७२ सेकण्ड होगा ।
समय और दूरी सम्बन्धी प्रश्न । जितनी देर में खरगोश गज़ वा छः गज़ दौड़ता है उतनी देर में इता गज़ वा तिहत्तर गज़ दौड़ता है, इस कारण खरगोश के छः गज़दौड़ने में कुत्ता उससे तेरह गज़ अधिक दौड़ता है, •• इष्ट दूरी एक सौ बीस गज़ है। तीन उदाहरणक, प से फ स्थान को जो पाँच सौ ग्यारह मील दूर है, तीस मील प्रतिघण्टा की चाल से चला, एक घण्टे पीछे ख, फ से प को बयालीस मील प्रतिघण्टा की चाल से चला; तो बताओ क, ख को कब और कहाँ मिलेगा । जब क तीस मील चल चुका तब ख चला । शेष अड़तालीस मील में से पैंतीस मील क और बयालीस मील ख एक घण्टे में चलता है, अर्थात् दोनों मिलकर वा आठ मील एक घण्टे में चलते हैं। इस कारण अड़तालीस मील हवा छः घण्टे में चले, इस कारण ख के चलने से छः घण्टे पीछे क, ख से मिला, इस कारण बे फ से बयालीस ×छः वा दो सौ तिरेपन मील की दूरी पर मिले । चार उदाहरण - दो रेलगाड़ी सतहत्तर गज़ और छयासठ गज़ लम्बी क्रम से पच्चीस बीस मील प्रतिघण्टे की चाल से दो समानान्तर पटरियों पर विपरीत दिशाओं को जाती हैं, तो उनको एक दूसरी के पार करने में कितना समय लगेगा ? यदि वे एक ही दिशा में जातीं, तो पार करने में कितना समय लगता ? एक मनुष्य को, जो पहली गाड़ी में बैठा हुआ है, दूसरी गाड़ी के पार करने में कितनी देर लगेगी ? दोनों गाड़ियों को जब विरुद्ध दिशाओं में चलती हैं एक दूसरी हैं के पार करने में उतना समय लगता है जितना वा एक सौ छिहत्तर गज़ को वा पैंतालीस मील प्रतिघण्टे की चाल से चलने में लगता जब, पैंतालीस मील एक घण्टे में चलती है, अर्थात् पैंतालीस×एक हज़ार सात सौ साठ गज़ एक घण्टे..... एक सौ छिहत्तर गज़ चालीस घण्टे........; इष्ट समय= घण्टे बा आठ सेकण्ड । जब गाड़ी एक हो दिशा को जातीं, तो उनको एक दूसरी के पार करने में उतना समय लगता जितना वा एक सौ छिहत्तर गज़ को वा पाँच मोल प्रतिघण्टे की चाल से चलने में लगता, इस प्रकार इष्ट समय दो सौ बहत्तर सेकण्ड होगा ।
'इंडियन प्रीमियर लीग' (IPL) के 13वें सीजन के लिए नए टाइटल स्पॉन्सर (IPL Sponsor) का ऐलान आज यानी 18 अगस्त को हो गया है। एक्सप्रेस ग्रुप के माने तो यह डील इस साल की शुरुआत में ही हो चुकी थी, लेकिन इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) की ओर से मंजूरी मिलने का इंतजार था, जोकि अब मिल चुकी है। वह भारत में व्यावसायिक इकाइयों के विकास के लिए कंपनी के को-फाउंडर अभयानंद सिंह और इंडिया पार्टनर पीयूष सिंह को सलाह देने का काम करेंगे। Editorji के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने एक ट्वीट में कहा कि वह मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत रहेंगे, जबकि एयरटेल/एचटी इसमें इनवेस्टर्स बने रहेंगे। प्रकाशक कंपनी के मुताबिक कंपनी लगभग 550 कर्मचारियों की छंटनी करेगा, जोकि इसके कर्मचारियों की संख्या का करीब 12 प्रतिशत है। इस नियुक्ति से पहले धवन नेटवर्क18 में 'सीएनएन न्यूज18', 'सीएनबीसी टीवी18', 'सीएनबीसी आवाज' और 'सीएनबीसी बाजार' चैनल्स का नेतृत्व कर रहे थे। महीनों के लॉकडाउन के बाद, देश की कई मीडिया कंपनियों और एजेंसियों के कार्यालयों में सतर्कता के साथ फिर काम शुरू हो गया है। 'सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट' (Sony Pictures Entertainment) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस (Reliance Jio) में भी 9. 99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। यह मीडिया कंपनी लगभग 100 मीडियाकर्मियों की छंटनी कर रही है। इसके अलावा 100 अन्य मीडियाकर्मियों को बिना भुगतान के छुट्टी (Unpaid Leave) पर भेज रही है। नंदन श्रीनाथ इससे पहले बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) में डायरेक्टर (Respons) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बिजनेस में द क्विंट की हिंदी और अंग्रेजी वेबसाइट शामिल होगी, लेकिन BloombergQuint शामिल नहीं होगी।
'इंडियन प्रीमियर लीग' के तेरहवें सीजन के लिए नए टाइटल स्पॉन्सर का ऐलान आज यानी अट्ठारह अगस्त को हो गया है। एक्सप्रेस ग्रुप के माने तो यह डील इस साल की शुरुआत में ही हो चुकी थी, लेकिन इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से मंजूरी मिलने का इंतजार था, जोकि अब मिल चुकी है। वह भारत में व्यावसायिक इकाइयों के विकास के लिए कंपनी के को-फाउंडर अभयानंद सिंह और इंडिया पार्टनर पीयूष सिंह को सलाह देने का काम करेंगे। Editorji के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने एक ट्वीट में कहा कि वह मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत रहेंगे, जबकि एयरटेल/एचटी इसमें इनवेस्टर्स बने रहेंगे। प्रकाशक कंपनी के मुताबिक कंपनी लगभग पाँच सौ पचास कर्मचारियों की छंटनी करेगा, जोकि इसके कर्मचारियों की संख्या का करीब बारह प्रतिशत है। इस नियुक्ति से पहले धवन नेटवर्कअट्ठारह में 'सीएनएन न्यूजअट्ठारह', 'सीएनबीसी टीवीअट्ठारह', 'सीएनबीसी आवाज' और 'सीएनबीसी बाजार' चैनल्स का नेतृत्व कर रहे थे। महीनों के लॉकडाउन के बाद, देश की कई मीडिया कंपनियों और एजेंसियों के कार्यालयों में सतर्कता के साथ फिर काम शुरू हो गया है। 'सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट' से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस में भी नौ. निन्यानवे फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। यह मीडिया कंपनी लगभग एक सौ मीडियाकर्मियों की छंटनी कर रही है। इसके अलावा एक सौ अन्य मीडियाकर्मियों को बिना भुगतान के छुट्टी पर भेज रही है। नंदन श्रीनाथ इससे पहले बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड में डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बिजनेस में द क्विंट की हिंदी और अंग्रेजी वेबसाइट शामिल होगी, लेकिन BloombergQuint शामिल नहीं होगी।
राखी सावंत ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम (Rakhi Sawant Instagram) अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें वह कह रही हैं, 'मुझे नहीं पता कि क्या सच है और क्या झूठ। कौन किसे फंसा रहा है, पता नहीं। मैं तो एक बात कहना चाहती हूं कि अगर आप लोग शेर हो तो शेर से लड़ो, गीदड़ बनकर बच्चे का शिकार मत करो। ' राखी आगे कह रही हैं, 'मुझे यह कहते हुए बहुत दुख होता है कि बहुत से शहरों में कचरे के डिब्बे में बहुत सारे बच्चे ड्रग्स लेकर मर जाते हैं, पड़े रहते हैं। वहां पर जाकर कोई किसी को पकड़ता नहीं है। मां-बाप के बच्चे छिन जाते हैं। कचरों के डिब्बों में लाशें मिलती हैं। वहां जाकर कोई ड्रग एडिक्ट को नहीं पकड़ता। और आर्यन तो सिर्फ शिप में गया था घूमने-फिरने के लिए। ' बता दें कि आर्यन खान फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत पर सुनवाई चल रही है। आर्यन को एनसीबी ने मुंबई क्रूज पर रेव पार्टी पर मारे छापे के बाद 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। 7 अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आर्यन खान का केस मशहूर वकील सतीश मानशिंदे लड़ रहे हैं। वह अब तक सलमान खान से लेकर संजय दत्त, राखी सावंत और रिया चक्रवर्ती समेत कई हाई-प्रोफाइल केस लड़ चुके हैं।
राखी सावंत ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें वह कह रही हैं, 'मुझे नहीं पता कि क्या सच है और क्या झूठ। कौन किसे फंसा रहा है, पता नहीं। मैं तो एक बात कहना चाहती हूं कि अगर आप लोग शेर हो तो शेर से लड़ो, गीदड़ बनकर बच्चे का शिकार मत करो। ' राखी आगे कह रही हैं, 'मुझे यह कहते हुए बहुत दुख होता है कि बहुत से शहरों में कचरे के डिब्बे में बहुत सारे बच्चे ड्रग्स लेकर मर जाते हैं, पड़े रहते हैं। वहां पर जाकर कोई किसी को पकड़ता नहीं है। मां-बाप के बच्चे छिन जाते हैं। कचरों के डिब्बों में लाशें मिलती हैं। वहां जाकर कोई ड्रग एडिक्ट को नहीं पकड़ता। और आर्यन तो सिर्फ शिप में गया था घूमने-फिरने के लिए। ' बता दें कि आर्यन खान फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत पर सुनवाई चल रही है। आर्यन को एनसीबी ने मुंबई क्रूज पर रेव पार्टी पर मारे छापे के बाद तीन अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। सात अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आर्यन खान का केस मशहूर वकील सतीश मानशिंदे लड़ रहे हैं। वह अब तक सलमान खान से लेकर संजय दत्त, राखी सावंत और रिया चक्रवर्ती समेत कई हाई-प्रोफाइल केस लड़ चुके हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन का आगाज आज से UAE में होने जा रहा है जिसके पहले मैच में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स आमने-सामने हैं। इस मैच के साथ ही लंबे समय से ठप्प पड़े भारतीय क्रिकेट की वापसी हो जाएगी। वैसे तो आईपीएल का आयोजन भारत के बाहर पहले भी हो चुका है लेकिन ये दूसरे बार है जब आईपीएल यूएई में खेला जा रहा है। साल 2014 में भारत में आम चुनावों के कारण टूर्नामेंट के शुरुआती 20 मुकाबले यूएई में खेले गए थे जिसमें जबरदस्त खेल का रोमांच देखने को मिला था। यूएई में 2014 में हुए आईपीएल में जहां किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सभी 5 मैचों में जीत दर्ज की थी जबकि 4 बार आईपीएल का खिताब अपने नाम कर चुकी मुंबई इंडियंस 5 मैचों में जीत का खाता भी नहीं खोल पाई थी। यूएई में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड किंग्स इलेवन पंजाब के ग्लेन मैक्सवेल के नाम हैं जिन्होंने 2014 आईपीएल में कुल 300 रन बनाए जिसमें 3 अर्धशतक शामिल थे। इस दौरान उन्होंने दो बार 95 रन की पारी खेली थी। UAE की धरती पर IPL में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी मैक्सवेल के नाम दर्ज है। मैक्सवेल ने 5 मैचों में कुल 17 छक्के लगाए थे। यही नही, SRH के खिलाफ एक मैच में उन्होंने कुल 9 छक्के जड़े थे। UAE में खेले गए IPL में सबसे ज्यादा विकेट सुनील नरेन ने अपने नाम किए। नरेन ने कोलकाता की ओर से खेलते हुए 5 मैचों में करीब 12 की औसत से 9 विकेट चटकाए। इस दौरान 20 रन देकर 4 विकेट नरेन का UAE में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन रहा। इस दौरान उन्होंने 2 बार 3-3 विकेट अपने नाम किए।
इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें सीजन का आगाज आज से UAE में होने जा रहा है जिसके पहले मैच में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स आमने-सामने हैं। इस मैच के साथ ही लंबे समय से ठप्प पड़े भारतीय क्रिकेट की वापसी हो जाएगी। वैसे तो आईपीएल का आयोजन भारत के बाहर पहले भी हो चुका है लेकिन ये दूसरे बार है जब आईपीएल यूएई में खेला जा रहा है। साल दो हज़ार चौदह में भारत में आम चुनावों के कारण टूर्नामेंट के शुरुआती बीस मुकाबले यूएई में खेले गए थे जिसमें जबरदस्त खेल का रोमांच देखने को मिला था। यूएई में दो हज़ार चौदह में हुए आईपीएल में जहां किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सभी पाँच मैचों में जीत दर्ज की थी जबकि चार बार आईपीएल का खिताब अपने नाम कर चुकी मुंबई इंडियंस पाँच मैचों में जीत का खाता भी नहीं खोल पाई थी। यूएई में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड किंग्स इलेवन पंजाब के ग्लेन मैक्सवेल के नाम हैं जिन्होंने दो हज़ार चौदह आईपीएल में कुल तीन सौ रन बनाए जिसमें तीन अर्धशतक शामिल थे। इस दौरान उन्होंने दो बार पचानवे रन की पारी खेली थी। UAE की धरती पर IPL में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी मैक्सवेल के नाम दर्ज है। मैक्सवेल ने पाँच मैचों में कुल सत्रह छक्के लगाए थे। यही नही, SRH के खिलाफ एक मैच में उन्होंने कुल नौ छक्के जड़े थे। UAE में खेले गए IPL में सबसे ज्यादा विकेट सुनील नरेन ने अपने नाम किए। नरेन ने कोलकाता की ओर से खेलते हुए पाँच मैचों में करीब बारह की औसत से नौ विकेट चटकाए। इस दौरान बीस रन देकर चार विकेट नरेन का UAE में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन रहा। इस दौरान उन्होंने दो बार तीन-तीन विकेट अपने नाम किए।
औगाडौगौः बुर्किना फासो की सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में हुए जिस हमले में 130 से ज्यादा लोग मारे गए थे, उसे 12 से 14 साल के बच्चों ने अंजाम दिया था। इस हमले में कई याघा के सोल्हान गांव के कई निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया था और कई घरों को आग लगा दी गई थी। बुर्किना फासो में 4 जून को हुए इस हमले में जिहादियों ने हमलावरों के तौर पर बच्चों का इस्तेमाल किया था। देश में हुए अब तक के इस सबसे बड़े नरसंहार को अंजाम देने के लिए हमलावरों ने रात में हमला किया था। इसमें नाइजर की सीमा से लगे याघा प्रांत के सोल्हान गांव के निवासी मारे गए थे। सरकार ने अपने बयान में कहा था कि हमलावरों ने गांव के घरों और बाजार को भी जला दिया था। सरकार के प्रवक्ता ओसेनी तंबौरा ने कहा कि हमलावरों में अधिकांश बच्चे थे। वहीं संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी यूनिसेफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, 'हम ऐसे सशस्त्र समूहों द्वारा बच्चों और किशोरों को भर्ती करने की कड़ी निंदा करते हैं. यह उनके मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ' संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र बलों के हस्तक्षेप के बावजूद, पड़ोसी माली और नाइजर समेत पश्चिम अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में इस्लामी चरमपंथियों के हमले लगातार जारी हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जिहादी संगठन पिछले एक साल से बच्चों के जरिए हमले करा रहे हैं, लेकिन इस महीने हुआ हमला अब तक का सबसे बड़ा हमला था। बुर्किना फासो में हो रही हिंसा के कारण केवल 2 सालों में 11. 4 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। ह्यूमन राइट्स वॉच के पश्चिम अफ्रीका के निदेशक कोरिन दुफ्का के अनुसार, इस नए हमले के बाद साहेल क्षेत्र में जनवरी से अब तक हुए हमले में 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
औगाडौगौः बुर्किना फासो की सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में हुए जिस हमले में एक सौ तीस से ज्यादा लोग मारे गए थे, उसे बारह से चौदह साल के बच्चों ने अंजाम दिया था। इस हमले में कई याघा के सोल्हान गांव के कई निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया था और कई घरों को आग लगा दी गई थी। बुर्किना फासो में चार जून को हुए इस हमले में जिहादियों ने हमलावरों के तौर पर बच्चों का इस्तेमाल किया था। देश में हुए अब तक के इस सबसे बड़े नरसंहार को अंजाम देने के लिए हमलावरों ने रात में हमला किया था। इसमें नाइजर की सीमा से लगे याघा प्रांत के सोल्हान गांव के निवासी मारे गए थे। सरकार ने अपने बयान में कहा था कि हमलावरों ने गांव के घरों और बाजार को भी जला दिया था। सरकार के प्रवक्ता ओसेनी तंबौरा ने कहा कि हमलावरों में अधिकांश बच्चे थे। वहीं संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी यूनिसेफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, 'हम ऐसे सशस्त्र समूहों द्वारा बच्चों और किशोरों को भर्ती करने की कड़ी निंदा करते हैं. यह उनके मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। ' संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र बलों के हस्तक्षेप के बावजूद, पड़ोसी माली और नाइजर समेत पश्चिम अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में इस्लामी चरमपंथियों के हमले लगातार जारी हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जिहादी संगठन पिछले एक साल से बच्चों के जरिए हमले करा रहे हैं, लेकिन इस महीने हुआ हमला अब तक का सबसे बड़ा हमला था। बुर्किना फासो में हो रही हिंसा के कारण केवल दो सालों में ग्यारह. चार लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। ह्यूमन राइट्स वॉच के पश्चिम अफ्रीका के निदेशक कोरिन दुफ्का के अनुसार, इस नए हमले के बाद साहेल क्षेत्र में जनवरी से अब तक हुए हमले में पाँच सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) सीरिया-ईराक के ISIS से बहुत प्रभावित था। जिहाद में इस्लामिक स्टेट का साथ देने के लिए इसके कार्यकर्ता वहाँ गए। देश के लोगों द्वारा लंबे समय से जिस चीज की माँग की जा रही थी, अंततः केंद्र की मोदी सरकार ने PFI पर प्रतिबंध लगाकर उसे पूरा कर दिया। PFI पर बैन का स्वागत करते हुए मेजर जनरल SP सिन्हा (रिटायर्ड) ने ऑपइंडिया को बताया कि ये संगठन भारतीय सेना के समांतर अपनी फ़ौज खड़ी कर रहा था। असदुद्दीन ओवैसी के लिए UAPA 'काला कानून' है। लालू यादव ने RSS को 'PFI सभी बदतर' कह दिया। कॉन्ग्रेसी कोडिकुन्नील सुरेश ने RSS को बैन करने की माँग की। PFI 'मिशन 2047' की तैयारी में था, अर्थात स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक इस्लामी मुल्क में तब्दील कर देना, जहाँ शरिया चले। देश विरोधी गतिविधियों के कारण सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बावजूद ट्विटर कर्नाटक PFI के हैंडल को वैरिफाइड बनाए रखा है। PFI पर बैन लगने के बाद सोशल मीडिया में टॉप ट्रेंड बन गया #PFIBan. यूजर्स मीम्स शेयर कर के कह रहे हैं अपनी बात। मोदी सरकार की हो रही तारीफ़।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया सीरिया-ईराक के ISIS से बहुत प्रभावित था। जिहाद में इस्लामिक स्टेट का साथ देने के लिए इसके कार्यकर्ता वहाँ गए। देश के लोगों द्वारा लंबे समय से जिस चीज की माँग की जा रही थी, अंततः केंद्र की मोदी सरकार ने PFI पर प्रतिबंध लगाकर उसे पूरा कर दिया। PFI पर बैन का स्वागत करते हुए मेजर जनरल SP सिन्हा ने ऑपइंडिया को बताया कि ये संगठन भारतीय सेना के समांतर अपनी फ़ौज खड़ी कर रहा था। असदुद्दीन ओवैसी के लिए UAPA 'काला कानून' है। लालू यादव ने RSS को 'PFI सभी बदतर' कह दिया। कॉन्ग्रेसी कोडिकुन्नील सुरेश ने RSS को बैन करने की माँग की। PFI 'मिशन दो हज़ार सैंतालीस' की तैयारी में था, अर्थात स्वतंत्रता के एक सौ वर्ष पूरे होने तक भारत को एक इस्लामी मुल्क में तब्दील कर देना, जहाँ शरिया चले। देश विरोधी गतिविधियों के कारण सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बावजूद ट्विटर कर्नाटक PFI के हैंडल को वैरिफाइड बनाए रखा है। PFI पर बैन लगने के बाद सोशल मीडिया में टॉप ट्रेंड बन गया #PFIBan. यूजर्स मीम्स शेयर कर के कह रहे हैं अपनी बात। मोदी सरकार की हो रही तारीफ़।
कियारा आडवाणी ने खुलासा किया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था जब उन्होंने पहली बार पति सिद्धार्थ मल्होत्रा को उनकी शादी में पहली बार देखा था। शनिवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में कियारा ने याद किया कि वह कितनी नर्वस थीं और सिद्धार्थ ने उन्हें गले भी लगाया। जब होस्ट मनीष पॉल ने कियारा से उस पल के बारे में पूछा जो उन्होंने शादी से सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ साझा किए गए वीडियो में दिखाया था। इसमें कियारा को पहले अपने भाई के साथ फूलों की छतरी के नीचे गलियारे में चलते हुए दिखाया गया था और फिर खुद ही डांस करते हुए। गलियारे के दूसरी तरफ सिद्धार्थ मजाक में अपनी घड़ी देख रहा था मानो उसे जल्दी करने के लिए कह रहा हो। कियारा ने कहा, मैं बहुत इमोशनल थी लेकिन जैसे ही दरवाजे खुले (दरवाजे खुलने पर मैं बहुत इमोशनल हो गई थी), और मैंने उसे देखा, अंदर से मैं ऐसी थी, 'याय! मेरी शादी हो रही है। और वो फीलिंग लेके मैं आगे चली। और हां अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करते हैं जिससे आप प्यार करते हैं तो आप ऐसा ही महसूस करेंगे ना? इस पर, मनीष ने सिद्धार्थ को अपनी घड़ी देखने के लिए चिढ़ाया, जबकि कियारा गलियारे में चली गई। फिर उन्होंने सिद्धार्थ से शादी के बाद अपना पहला पुरस्कार जीतने के लिए अपनी पत्नी को गले लगाने के लिए कहा। सिद्धार्थ मंच पर गए और कियारा को गले लगा लिया क्योंकि मंच के नीचे आतिशबाजी चल रही थी। फैंस ने कमेंट में कियारा को मिसेज मल्होत्रा और 'क्यूटेस्ट' कहा। श्रीमती मल्होत्रा बनने के बाद, कियारा सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ एक भव्य शादी के बाद शनिवार को काम पर लौट आई। इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कियारा ने एक वैनिटी वैन से एक बूमरैंग वीडियो साझा किया, साथ ही कैप्शन दिया, "बैक एट वर्क। " वीडियो में वह अपने बालों को ठीक करते हुए हाथ में आईने से आंख मारते हुए देखी जा सकती हैं। सिद्धार्थ और कियारा 7 फरवरी को राजस्थान के सूर्यगढ़ पैलेस में एक अंतरंग समारोह में शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने अपने करीबी दोस्तों के लिए दिल्ली में और बाद में 12 फरवरी को मुंबई में एक रिसेप्शन की मेजबानी की। शेरशाह की शूटिंग के दौरान दोनों को जाहिर तौर पर प्यार हो गया, जो 2021 में रिलीज़ हुई थी।
कियारा आडवाणी ने खुलासा किया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था जब उन्होंने पहली बार पति सिद्धार्थ मल्होत्रा को उनकी शादी में पहली बार देखा था। शनिवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में कियारा ने याद किया कि वह कितनी नर्वस थीं और सिद्धार्थ ने उन्हें गले भी लगाया। जब होस्ट मनीष पॉल ने कियारा से उस पल के बारे में पूछा जो उन्होंने शादी से सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ साझा किए गए वीडियो में दिखाया था। इसमें कियारा को पहले अपने भाई के साथ फूलों की छतरी के नीचे गलियारे में चलते हुए दिखाया गया था और फिर खुद ही डांस करते हुए। गलियारे के दूसरी तरफ सिद्धार्थ मजाक में अपनी घड़ी देख रहा था मानो उसे जल्दी करने के लिए कह रहा हो। कियारा ने कहा, मैं बहुत इमोशनल थी लेकिन जैसे ही दरवाजे खुले , और मैंने उसे देखा, अंदर से मैं ऐसी थी, 'याय! मेरी शादी हो रही है। और वो फीलिंग लेके मैं आगे चली। और हां अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करते हैं जिससे आप प्यार करते हैं तो आप ऐसा ही महसूस करेंगे ना? इस पर, मनीष ने सिद्धार्थ को अपनी घड़ी देखने के लिए चिढ़ाया, जबकि कियारा गलियारे में चली गई। फिर उन्होंने सिद्धार्थ से शादी के बाद अपना पहला पुरस्कार जीतने के लिए अपनी पत्नी को गले लगाने के लिए कहा। सिद्धार्थ मंच पर गए और कियारा को गले लगा लिया क्योंकि मंच के नीचे आतिशबाजी चल रही थी। फैंस ने कमेंट में कियारा को मिसेज मल्होत्रा और 'क्यूटेस्ट' कहा। श्रीमती मल्होत्रा बनने के बाद, कियारा सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ एक भव्य शादी के बाद शनिवार को काम पर लौट आई। इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कियारा ने एक वैनिटी वैन से एक बूमरैंग वीडियो साझा किया, साथ ही कैप्शन दिया, "बैक एट वर्क। " वीडियो में वह अपने बालों को ठीक करते हुए हाथ में आईने से आंख मारते हुए देखी जा सकती हैं। सिद्धार्थ और कियारा सात फरवरी को राजस्थान के सूर्यगढ़ पैलेस में एक अंतरंग समारोह में शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने अपने करीबी दोस्तों के लिए दिल्ली में और बाद में बारह फरवरी को मुंबई में एक रिसेप्शन की मेजबानी की। शेरशाह की शूटिंग के दौरान दोनों को जाहिर तौर पर प्यार हो गया, जो दो हज़ार इक्कीस में रिलीज़ हुई थी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सोहागी थाने के प्रभारी ओपी तिवारी ने बताया कि यह हादसा शनिवार को हुआ। स्कॉर्पियो में सवार छह लोग मैहर में दर्शन कर रीवा होकर प्रयागराज जा रहे थे। इसी दौरान झिरिया टोल प्लाजा के डिवाइडर से स्कार्पियो टकरा गई। इस हादसे में वाहन मालिक गजराज यादव (55) और चालक कैलाश यादव की मौत हो गई। वहीं चार लोग घायल हुए हैं। सीसीटीवी का जो फुटेज सामने आया है, वह उसकी हकीकत बयां कर रहा है, उसमें तेज रफ्तार से आ रही कार डिवाइडर से टकराने के बाद काफी उंची उछली और उसके बाद वह दूसरी लेन के डिवाइडर पर जा पहुंची।
सोहागी थाने के प्रभारी ओपी तिवारी ने बताया कि यह हादसा शनिवार को हुआ। स्कॉर्पियो में सवार छह लोग मैहर में दर्शन कर रीवा होकर प्रयागराज जा रहे थे। इसी दौरान झिरिया टोल प्लाजा के डिवाइडर से स्कार्पियो टकरा गई। इस हादसे में वाहन मालिक गजराज यादव और चालक कैलाश यादव की मौत हो गई। वहीं चार लोग घायल हुए हैं। सीसीटीवी का जो फुटेज सामने आया है, वह उसकी हकीकत बयां कर रहा है, उसमें तेज रफ्तार से आ रही कार डिवाइडर से टकराने के बाद काफी उंची उछली और उसके बाद वह दूसरी लेन के डिवाइडर पर जा पहुंची।
श्रम और रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि श्रम कानूनों की समीक्षा/संशोधन एक सतत प्रक्रिया है और श्रम कानूनों में संशोधन अन्य बातों के साथ-साथ श्रमिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर किए जाते हैं। हाल ही में किए गए संशोधनों में मजदूरी संदाय अधिनियम-1936, बोनस संदाय अधिनियम-1965, प्रशिक्षु अधिनियम-1961, उपदान संदाय अधिनियम-1972, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम-1948, औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947, बागान श्रम अधिनियम-1951 तथा कर्मकार प्रतिकार अधिनियम-1923 में किए गए संशोधन शामिल हैं। असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम-2008 नामक एक नया अधिनियम भी अधिनियमित किया गया है। ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम-1970 के अंतर्गत ठेका कामगार के नियमितीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। बड़ी कंपनियां अनुषंगी इकाइयां स्थापित करने, आऊटसोर्सिंग, अलग-अलग जगहों पर उत्पादन नेटवर्क जैसी विभिन्न रणनीतियां अपना रही हैं, परंतु यह सुझाने का कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं है कि यह रणनीति छोटी कंपनियों को प्राप्त लचीलेपन का लाभ उठाने के लिए अपनाई जा रही है।
श्रम और रोजगार मंत्री श्री मल्लिकार्जुन खरगे ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि श्रम कानूनों की समीक्षा/संशोधन एक सतत प्रक्रिया है और श्रम कानूनों में संशोधन अन्य बातों के साथ-साथ श्रमिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर किए जाते हैं। हाल ही में किए गए संशोधनों में मजदूरी संदाय अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ छत्तीस, बोनस संदाय अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ पैंसठ, प्रशिक्षु अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ इकसठ, उपदान संदाय अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ बहत्तर, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस, औद्योगिक विवाद अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस, बागान श्रम अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ इक्यावन तथा कर्मकार प्रतिकार अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ तेईस में किए गए संशोधन शामिल हैं। असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम-दो हज़ार आठ नामक एक नया अधिनियम भी अधिनियमित किया गया है। ठेका श्रम अधिनियम-एक हज़ार नौ सौ सत्तर के अंतर्गत ठेका कामगार के नियमितीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। बड़ी कंपनियां अनुषंगी इकाइयां स्थापित करने, आऊटसोर्सिंग, अलग-अलग जगहों पर उत्पादन नेटवर्क जैसी विभिन्न रणनीतियां अपना रही हैं, परंतु यह सुझाने का कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं है कि यह रणनीति छोटी कंपनियों को प्राप्त लचीलेपन का लाभ उठाने के लिए अपनाई जा रही है।
अदालतोंके अतिरिक्त सिन्धके उडीशल कमिश्नरको भी दिवालियेके अधिकारोंका प्रयोग करने वाली अदालत मानना चाहिये चूँकि एक्ट ९ सन् १९२६ ई० के अनुसार वराची (Karachi ) टाउन ( Town ) में भी इस एक्ट अयान् प्रेसीडेन्सी टाउन्स इन्साल्वेंमी एक्टः। प्रयोग प्रारम्भ हो गया है इस कारण सिन्धको अदालत आल (Highest Tribunal) को भी बढ़ी अधिकार प्राप्त हो गये हैं जो पेंश्तर मिर्फ इस दफार्मे बनलाई हुई अदालतोंको प्राप्त थे । दफा ४ अकेला एकहाँ जज इस एक्ट के अधिकारों को वस्त सकता है इस एक्टके अनुसार मामलों को सुनने या तय करनेका जो अधिकार दिया गया है उसका प्रयोग ऊपर बसलाई हुई अदालतों का कोई एक जज कर सकता है और चीफ जस्टिस या चीफ जज समय समय पर किसी एक जजको इस एक्ट के अनुसार कार्य करनक लिये नियुक्त करेगा । व्याख्याइस दफाके अनुसार दिवालिये या अधिकार रखने वाले हाईकोर्टाचीचीफ जस्टिस चाफ जन का यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी अदालत के किसी एक जजको दिवालिया सम्बधी मामसुनकलिये नियत कर देने और ऐसे नियत किये हुए जजको अकेले ही दिवालिया सम्बधी को सुनने तथा उनको तय करने का आहार प्राप्त होगा । दफा ५ कमरेमें जजोंका काम करना इस एक्टकी बात तथा उसके लिये बनाये हुए नियमोंका ध्यान रखते हुए अदालत के जजको अधिकार है कि वह दिवा सम्बन्धी मामलेकी सब बातें या उनमेंसे कुछको कमरमें सुन सकता है अर्थात् वह अपने विवालिया सम्बन्धी अधिकारोंका प्रयोग कमर में बैठे हुए कर सकता है । व्याख्याइस दफा के अनुसार दिवालिया सम्बन्धी अधिकारीको प्रयोग करने वाला जज उन अधिकारों अपने बैठे हुए भी प्रयोग कर सकता है अर्थात् उनके लिये वह सुली अदालत में सुननक लिये वाध्य नहीं है पर तुइमा तात्पर्य यह न समझना चाहिये कि वह दिवालिया सम्बधा सब कामाका कमरेके अन्दर ही करेगा। आवश्यकतानुसार वह दिवालिया सम्बन्धी सब बातोंको या उनमेंसे कुछ कमरे बैठे हुए भी सुन सकता है साथ ही साथ उसका इस एक्टव बाता व इस एक्ट के सम्बन्धम् बनाते हुए नियमोंकी भी अवहेलना न करना चाहिये अर्थात् यदि बातो खुली अदालत में सुन्न या तय चरनेकेलिये एक्ट या नियममें बतलाया गया हो तो उसे खुला अदालतम हो सुनना चाहिये इसी प्रकार यदि कोई और बात कमरे में किसी मामले के सुने जाने के विरुद्ध पड़ती हो तो उसका ध्यान रखना चाहिये । दफा ६ अदालतके अफसरोंको अधिकार प्रदान करना ( १ ) चीफ़ जस्टिस या बीफ जजको अधिकार है कि वह समय समय पर अदालत किसी अफसरको जिसे उसने स्वयं इसीलिये नियत किया हो, इस दफार्म बतलाये हुए सब या उनमें से कुछ अधिकारों के प्रयोग करनेका अधिकार दे देवे और यह अधिकार उन्हीं घातोंके सम्बन्ध में दिये जायेंगे जिनके लिये इस एक्टके अनुसार अदालतको अधिकार प्राप्त हैं। इस प्रकार नियत किया हुआ अफ़सर ऊपर वतलाये हुए अधिकारोंका प्रयोग करते हुए जो हुक्म देगा या काम करेगा वह हुक्म या काम भदालत ही का हुक्म या काम समझा जायेगा । मेसीडेन्सी टाइम्स कानून डिवालिया [पहिला एक ए ( २ ) उपदफ़ा ( १ ) में जिन अधिकारोंका उल्लेख किया गया है वह अधिकार निम्न लिखित हैं.( प ) फर्जदारों द्वारा दिये जाने वाली दिवालियेकी यातका सुरना तथा उन पर दिवालिया करार दिये जानेका हुक्म देना (बी) दिवालियेका सरेश्राममें बयान लेना ( To hold public examination ) (सी) जिन अधिकारोंका प्रयोग किया जाना कमरमें बैठे हुए उचित निर्धारित किया गया है उनका प्रयोग करते हुए किसी हुक्मका देना या उनका प्रयोग करना (डी) किसी ऐसी दरख्वास्त, जिसका विरोध न किया जारहा हो या जो एक ( Exparto ) होवे उसका सुनना तथा उसका निश्चित करना ( ई ) अदालत द्वारा दफ़ा ३६ के अनुसार तलब किये हुए व्यक्तिका चयान लेना ( ३ ) इस दफाके अनुसार नियुक्त किये हुए अफसरको अदालतकी तौहीनी (Contempi of Court ) के लिये मामला चालू करनेका अधिकार नहीं होगा व्याख्याकार्यलये सदश उपदश ( १ ) के अनगर चैनसिया चौक जजको यह अधिकार दिया गया है कि वह अदालतक किसी असरको बुद्ध लॉ सुनने या अधिकार दे सके जिन मोंके सुनने या जय चरनका अधिकार इस के अनुसार नियुक्त विग हुए उपसका दिया जा सकता है उन्दा र उपर्दा ( + ) में किया गया है । इस बातका ध्यान रहना चाहिये कि चाफ्जस्टिस या चौक जन उन्हीं मामलेक सम्बधमे एस अधिकार दे सकते है को उनका अदालतका अनिरिक्त वह अयम अधिक नहीं दे सकते हैं। उपक्षपा ( २ ) में जन अधिकारी है वह सनक सन एक साथ ही दिये जान चाइज या चाफ्जास्टस आवश्यकतानुसार समय समय पर उनमेस बुद्ध अधिकारोंगे म उचित होने पर स अधिकारों से सरत हैं। चाफजस्टिस या चीफजज ग्वय है। इस काम लिय शिमा को नियुक्त आर ऐम नियुक्त विष हुए अक्षा जा आधार मान जायेंगे उनके प्राय वरनक लिये वह अकमर पूर्ण रूप से अधिकारी होगा। उन अधिकाराका प्रयास करल हुए वह अफसर जा हुवम देगा या जा कार्य करावह अदान्तीका काम या हुक्म समझा जावना । उपदफा ( ३ ) के अनुसार इस दशमे नियुक्त किये हुए अकोलाहीन अदालतका मामला चालू अ अधिकार प्राप्त नहीं दागा। याद दा ( ६ ) अनुर रजिस्ट्रार अधिकार दे दिये जायें तो दफा ३ क अनुसार स अदालत समझना चाहिय अयान् राजस्ट्रारको इस दफाके अनुसार अधिकार दिय जासकते हैं. A. I. R 1928 Cal 786 दफा ७ दिवालियेके सम्बन्ध में पैदा हुए सब प्रश्नोंको तय करनेके अधिकार इस एक्ट में दी हुई बातका ध्यान रखते हुए अदालतको पूरी अधिकार है कि वह उन सब प्रश्नोको तय करें जो फजौकी पेश्वर अदायगीके सम्बन्धमे पैदा हो और भी हर प्रकारके प्रश्नो को तय करे चाहे वह कानूनी होवें या वाक्याती होघे जो कि श्रद्दालतके सामने उपस्थित किसी दिवालियके मुकदमें पैदा होवें या जिनको श्रदालत पूर्ण न्याय करनेके लिये उचित या श्रावश्यक समझे अथवा जिनको वह किसी मामले में जायदादको पूर्ण रूपसे वांटनेके लिये उचित या यावश्यक समझे ।
अदालतोंके अतिरिक्त सिन्धके उडीशल कमिश्नरको भी दिवालियेके अधिकारोंका प्रयोग करने वाली अदालत मानना चाहिये चूँकि एक्ट नौ सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस ईशून्य के अनुसार वराची टाउन में भी इस एक्ट अयान् प्रेसीडेन्सी टाउन्स इन्साल्वेंमी एक्टः। प्रयोग प्रारम्भ हो गया है इस कारण सिन्धको अदालत आल को भी बढ़ी अधिकार प्राप्त हो गये हैं जो पेंश्तर मिर्फ इस दफार्मे बनलाई हुई अदालतोंको प्राप्त थे । दफा चार अकेला एकहाँ जज इस एक्ट के अधिकारों को वस्त सकता है इस एक्टके अनुसार मामलों को सुनने या तय करनेका जो अधिकार दिया गया है उसका प्रयोग ऊपर बसलाई हुई अदालतों का कोई एक जज कर सकता है और चीफ जस्टिस या चीफ जज समय समय पर किसी एक जजको इस एक्ट के अनुसार कार्य करनक लिये नियुक्त करेगा । व्याख्याइस दफाके अनुसार दिवालिये या अधिकार रखने वाले हाईकोर्टाचीचीफ जस्टिस चाफ जन का यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी अदालत के किसी एक जजको दिवालिया सम्बधी मामसुनकलिये नियत कर देने और ऐसे नियत किये हुए जजको अकेले ही दिवालिया सम्बधी को सुनने तथा उनको तय करने का आहार प्राप्त होगा । दफा पाँच कमरेमें जजोंका काम करना इस एक्टकी बात तथा उसके लिये बनाये हुए नियमोंका ध्यान रखते हुए अदालत के जजको अधिकार है कि वह दिवा सम्बन्धी मामलेकी सब बातें या उनमेंसे कुछको कमरमें सुन सकता है अर्थात् वह अपने विवालिया सम्बन्धी अधिकारोंका प्रयोग कमर में बैठे हुए कर सकता है । व्याख्याइस दफा के अनुसार दिवालिया सम्बन्धी अधिकारीको प्रयोग करने वाला जज उन अधिकारों अपने बैठे हुए भी प्रयोग कर सकता है अर्थात् उनके लिये वह सुली अदालत में सुननक लिये वाध्य नहीं है पर तुइमा तात्पर्य यह न समझना चाहिये कि वह दिवालिया सम्बधा सब कामाका कमरेके अन्दर ही करेगा। आवश्यकतानुसार वह दिवालिया सम्बन्धी सब बातोंको या उनमेंसे कुछ कमरे बैठे हुए भी सुन सकता है साथ ही साथ उसका इस एक्टव बाता व इस एक्ट के सम्बन्धम् बनाते हुए नियमोंकी भी अवहेलना न करना चाहिये अर्थात् यदि बातो खुली अदालत में सुन्न या तय चरनेकेलिये एक्ट या नियममें बतलाया गया हो तो उसे खुला अदालतम हो सुनना चाहिये इसी प्रकार यदि कोई और बात कमरे में किसी मामले के सुने जाने के विरुद्ध पड़ती हो तो उसका ध्यान रखना चाहिये । दफा छः अदालतके अफसरोंको अधिकार प्रदान करना चीफ़ जस्टिस या बीफ जजको अधिकार है कि वह समय समय पर अदालत किसी अफसरको जिसे उसने स्वयं इसीलिये नियत किया हो, इस दफार्म बतलाये हुए सब या उनमें से कुछ अधिकारों के प्रयोग करनेका अधिकार दे देवे और यह अधिकार उन्हीं घातोंके सम्बन्ध में दिये जायेंगे जिनके लिये इस एक्टके अनुसार अदालतको अधिकार प्राप्त हैं। इस प्रकार नियत किया हुआ अफ़सर ऊपर वतलाये हुए अधिकारोंका प्रयोग करते हुए जो हुक्म देगा या काम करेगा वह हुक्म या काम भदालत ही का हुक्म या काम समझा जायेगा । मेसीडेन्सी टाइम्स कानून डिवालिया [पहिला एक ए उपदफ़ा में जिन अधिकारोंका उल्लेख किया गया है वह अधिकार निम्न लिखित हैं. फर्जदारों द्वारा दिये जाने वाली दिवालियेकी यातका सुरना तथा उन पर दिवालिया करार दिये जानेका हुक्म देना दिवालियेका सरेश्राममें बयान लेना जिन अधिकारोंका प्रयोग किया जाना कमरमें बैठे हुए उचित निर्धारित किया गया है उनका प्रयोग करते हुए किसी हुक्मका देना या उनका प्रयोग करना किसी ऐसी दरख्वास्त, जिसका विरोध न किया जारहा हो या जो एक होवे उसका सुनना तथा उसका निश्चित करना अदालत द्वारा दफ़ा छत्तीस के अनुसार तलब किये हुए व्यक्तिका चयान लेना इस दफाके अनुसार नियुक्त किये हुए अफसरको अदालतकी तौहीनी के लिये मामला चालू करनेका अधिकार नहीं होगा व्याख्याकार्यलये सदश उपदश के अनगर चैनसिया चौक जजको यह अधिकार दिया गया है कि वह अदालतक किसी असरको बुद्ध लॉ सुनने या अधिकार दे सके जिन मोंके सुनने या जय चरनका अधिकार इस के अनुसार नियुक्त विग हुए उपसका दिया जा सकता है उन्दा र उपर्दा में किया गया है । इस बातका ध्यान रहना चाहिये कि चाफ्जस्टिस या चौक जन उन्हीं मामलेक सम्बधमे एस अधिकार दे सकते है को उनका अदालतका अनिरिक्त वह अयम अधिक नहीं दे सकते हैं। उपक्षपा में जन अधिकारी है वह सनक सन एक साथ ही दिये जान चाइज या चाफ्जास्टस आवश्यकतानुसार समय समय पर उनमेस बुद्ध अधिकारोंगे म उचित होने पर स अधिकारों से सरत हैं। चाफजस्टिस या चीफजज ग्वय है। इस काम लिय शिमा को नियुक्त आर ऐम नियुक्त विष हुए अक्षा जा आधार मान जायेंगे उनके प्राय वरनक लिये वह अकमर पूर्ण रूप से अधिकारी होगा। उन अधिकाराका प्रयास करल हुए वह अफसर जा हुवम देगा या जा कार्य करावह अदान्तीका काम या हुक्म समझा जावना । उपदफा के अनुसार इस दशमे नियुक्त किये हुए अकोलाहीन अदालतका मामला चालू अ अधिकार प्राप्त नहीं दागा। याद दा अनुर रजिस्ट्रार अधिकार दे दिये जायें तो दफा तीन क अनुसार स अदालत समझना चाहिय अयान् राजस्ट्रारको इस दफाके अनुसार अधिकार दिय जासकते हैं. A. I. R एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस Cal सात सौ छियासी दफा सात दिवालियेके सम्बन्ध में पैदा हुए सब प्रश्नोंको तय करनेके अधिकार इस एक्ट में दी हुई बातका ध्यान रखते हुए अदालतको पूरी अधिकार है कि वह उन सब प्रश्नोको तय करें जो फजौकी पेश्वर अदायगीके सम्बन्धमे पैदा हो और भी हर प्रकारके प्रश्नो को तय करे चाहे वह कानूनी होवें या वाक्याती होघे जो कि श्रद्दालतके सामने उपस्थित किसी दिवालियके मुकदमें पैदा होवें या जिनको श्रदालत पूर्ण न्याय करनेके लिये उचित या श्रावश्यक समझे अथवा जिनको वह किसी मामले में जायदादको पूर्ण रूपसे वांटनेके लिये उचित या यावश्यक समझे ।
तमन्ना भाटिया, साउथ और बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की काफी फेमस एक्ट्रेस हैं. तमन्ना भाटिया अपनी एक्टिंग के साथ-साथ फिटनेस के लिए भी काफी फेमस हैं. तमन्ना भाटिया अपने आपको फिट रखने के लिए स्ट्रिक्ट फिटनेस रूटीन और डाइट फॉलो करती हैं. तमन्ना भाटिया जब भी मुंबई में होती हैं वह सेलेब्रिटी कोच योगेश भाटेजा (𝐘𝐨𝐠𝐞𝐬𝐡 𝐁𝐡𝐚𝐭𝐞𝐣𝐚) से ट्रेनिंग लेती हैं. सोनू सूद के पर्सनल ट्रेनर और सेलेब्रिटी कोच योगेश भाटेजा ने Aajtak. in से बात करते हुए तमन्ना के फिटनेस रूटीन और डाइट के बारे में बताया. तो आइए तमन्ना भाटिया का फिटनेस रूटीन भी जान लीजिए. योगेश भाटेजा बताते हैं 'तमन्ना मीडियम वेट से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं, जिससे उन्हें मसल्स मेंटेन रखने में मदद मिलती है. ' योगेश ने आगे बताया, 'तमन्ना फंक्शनल ट्रेनिंग अधिक करती हैं. 20 मिनिट का कार्डियो और स्ट्रेचिंग उनके फिटनेस रूटीन का हिस्सा है. ' तमन्ना भाटिया फ्लेग्जिबिलिटी के लिए योग करना भी पसंद करती हैं. योगेश ने आगे बताया, ' लॉकडाउन में तमन्ना होम वर्कआउट और योग करती थीं. ' तमन्ना डांस की प्रैक्टिस करती हैं जिससे काफी कैलोरी बर्न होती है. योगेश ने आगे बताया, 'तमन्ना की डाइट काफी सिंपल रहती है. वह घर का खाना पसंद करती हैं. ' तमन्ना ब्रेकफास्ट में स्मूदी लेती हैं जिसमें ग्रेनोला, बादाम मिल्क, बेरीज होती हैं. साथ में अंडे और सब्जियां लेती हैं. तमन्ना भाटिया लंच में दाल, चावल, सब्जी के साथ सलाद लेती हैं. तमन्ना भाटिया शाम को स्नैक्स में नट्स लेती हैं. तमन्ना डिनर में प्रोटीन रिच फूड लेती हैं. जैसे अंडे या चिकन और हरी सब्जियां लेना पसंद करती हैं. तमन्ना हर 10 दिन में चीट मील लेती हैं जिसमें वह अपनी पसंद से पिज्जा, नूडल्स, आइसक्रीम या डोनट्स लेना पसंद करती हैं. तमन्ना अपनी पर्याप्त मात्रा में पानी पीती हैं जिससे स्किन सही रहती है और डाइजेशन भी सही रहता है. तमन्ना कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लेती हैं.
तमन्ना भाटिया, साउथ और बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की काफी फेमस एक्ट्रेस हैं. तमन्ना भाटिया अपनी एक्टिंग के साथ-साथ फिटनेस के लिए भी काफी फेमस हैं. तमन्ना भाटिया अपने आपको फिट रखने के लिए स्ट्रिक्ट फिटनेस रूटीन और डाइट फॉलो करती हैं. तमन्ना भाटिया जब भी मुंबई में होती हैं वह सेलेब्रिटी कोच योगेश भाटेजा से ट्रेनिंग लेती हैं. सोनू सूद के पर्सनल ट्रेनर और सेलेब्रिटी कोच योगेश भाटेजा ने Aajtak. in से बात करते हुए तमन्ना के फिटनेस रूटीन और डाइट के बारे में बताया. तो आइए तमन्ना भाटिया का फिटनेस रूटीन भी जान लीजिए. योगेश भाटेजा बताते हैं 'तमन्ना मीडियम वेट से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं, जिससे उन्हें मसल्स मेंटेन रखने में मदद मिलती है. ' योगेश ने आगे बताया, 'तमन्ना फंक्शनल ट्रेनिंग अधिक करती हैं. बीस मिनिट का कार्डियो और स्ट्रेचिंग उनके फिटनेस रूटीन का हिस्सा है. ' तमन्ना भाटिया फ्लेग्जिबिलिटी के लिए योग करना भी पसंद करती हैं. योगेश ने आगे बताया, ' लॉकडाउन में तमन्ना होम वर्कआउट और योग करती थीं. ' तमन्ना डांस की प्रैक्टिस करती हैं जिससे काफी कैलोरी बर्न होती है. योगेश ने आगे बताया, 'तमन्ना की डाइट काफी सिंपल रहती है. वह घर का खाना पसंद करती हैं. ' तमन्ना ब्रेकफास्ट में स्मूदी लेती हैं जिसमें ग्रेनोला, बादाम मिल्क, बेरीज होती हैं. साथ में अंडे और सब्जियां लेती हैं. तमन्ना भाटिया लंच में दाल, चावल, सब्जी के साथ सलाद लेती हैं. तमन्ना भाटिया शाम को स्नैक्स में नट्स लेती हैं. तमन्ना डिनर में प्रोटीन रिच फूड लेती हैं. जैसे अंडे या चिकन और हरी सब्जियां लेना पसंद करती हैं. तमन्ना हर दस दिन में चीट मील लेती हैं जिसमें वह अपनी पसंद से पिज्जा, नूडल्स, आइसक्रीम या डोनट्स लेना पसंद करती हैं. तमन्ना अपनी पर्याप्त मात्रा में पानी पीती हैं जिससे स्किन सही रहती है और डाइजेशन भी सही रहता है. तमन्ना कम से कम सात-आठ घंटाटे की नींद जरूर लेती हैं.
रुद्रप्रयाग। हिमालय सदियों से ऋषि-मुनियों तथा देवताओं की तपस्थली रहा है। महान विभूतियों ने यहां तपस्या कर आध्यात्मिक शक्ति अर्जित की और विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में चारधाम के नाम से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री प्रसिद्ध है। ये तीर्थ स्थल देश के चमकते हुए बहुमूल्य रत्न हैं। इनमें से बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थाें के दर्शन का विषेश महत्व है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ का मंदिर जिले में स्थित है। यहां की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मंदिर मई से अक्टूबर माह के मध्य ही दर्शनें के लिए खुलता है। कत्यूरी शैली में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडव वंश के जन्मेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णाेद्धार करवाया था। जून 2013 में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ धाम सबसे अधिक प्रभावित हुआ। मंदिर की दीवारें गिर कर बाढ़ में बह गई। इस ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहा। लेकिन मंदिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया। उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों प्रधान तीर्थ हैं। दोनों के दर्शन का बड़ा ही महात्म्य है। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल मानी जाती है और केदारनाथ सहित नर-नारायण मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों का नाश कर जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। इस मंदिर की आयु के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार ये 12-13वीं शताब्दी का है। एक मान्यतानुसार वर्तमान मंदिर आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया। जो पांडवों द्वारा द्वापर काल में बनाये गये पहले के मंदिर के बगल में है। मंदिर के बड़े धूसर रंग की सीढि़यों पर पाली या ब्राह्मी लिपि में कुछ खुदा है। जिसे स्पष्ट जानना मुश्किल है। फिर भी इतिहासकारों के मुताबिक शैव लोग आदि शंकराचार्य से पहले से ही केदारनाथ जाते रहे हैं। 1882 के इतिहास के अनुसार अग्रभाग के साथ मंदिर एक भव्य भवन था, जिसके दोनों ओर पूजन मुद्रा में मूर्तियां हैं। पीछे भूरे पत्थर से निर्मित एक टाॅवर है। इसके गर्भगृह की अटारी पर सोने का मुलम्मा चढ़ा है। यह मंदिर एक छह फीट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर पदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान है। मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन ऐसा भी कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदि गुरू शंकराचार्य ने की थी। मंदिर की पूजा कुछ इस तरह की जाती है कि प्रातः काल में शिव-पिंड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। उसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती-उतारी जाती है। इस दौरान यात्रीगण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं, लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का इतिहास संक्षेप में यह है कि हिमालय के केदार श्रंृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया। यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित है। पंचकेदार की कथा ऐसी मानी जाती है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव गौत्र हत्या के पाप से मुक्ती पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। भगवान शंकर के दर्शन के लिए पांडव काशी गए, पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देता चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान होकर केदार में जा बसे। दूसरी ओर पांडव भी लगन के पक्के थे। वे उनका पीछा करते-करते पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य प्शुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। अतः भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाड़ों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए। पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतध्र्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देखकर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं। जब भगवान शंकर बैल के रूप अंतध्र्यान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है। यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं। केदारनाथ की पूजा के बारे में कुछ जानकारियांः केदारनाथ मंदिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रातः सात बजे खुलता है। दोपहर एक से दो बजे तक विषेश पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है। पुनः शाम पांच बजे भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर खोला जाता है। पांच मुखी वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके साढ़े सात बजे से साढ़े आठ बजे तक नियमित आरती होती है। रात्रि साढ़े आठ बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर बंद कर दिया जाता है। शीतकाल में केदारघाटी बर्फ से ढक जाती है। यद्यपि केदारनाथ मंदिर के खोलने और बंद करने का मुहुर्त निकाला जाता है, लेकिन यह सामान्यतः नवम्बर माह की 15 तारीख से पूर्व (वृश्चिक संक्रांति से दो दिन पूर्व) बंद होता जाता है और छह माह बाद अर्थात बैसाखी के बाद कपाट खुलते हैं। ऐसी स्थिति में केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ऊखीमठ स्थित पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में लाया जाता है। इसी प्रतिमा की पूजा यहां भी रावल करते हैं। केदारनाथ में भक्त शुल्क जमा कराकर रसीद प्राप्त करते हैं और उसके अनुसार ही वह मंदिर की पूजा-आरती कराते हैं या फिर भोग-प्रसाद ग्रहण करते हैं। भगवान की पूजाओं के क्रम में प्रातःकालीन पूजा, महाभिषेक पूजा, अभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षौडशोपचार पूजन, अष्टोपचार पूजन, सम्पूर्ण आरती, पांडव पूजा, गणेश पूजा, श्री भैरव पूजा, पार्वती जी की पूजा, शिव सहस्त्रनाम आदि प्रमुख है। मंदिर समिति द्वारा केदारनाथ मंदिर में पूजा कराने के लिए भक्तों से जो दक्षिणा ली जाती है, उसमें समिति समय-समय पर परिवर्तन भी करती है। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
रुद्रप्रयाग। हिमालय सदियों से ऋषि-मुनियों तथा देवताओं की तपस्थली रहा है। महान विभूतियों ने यहां तपस्या कर आध्यात्मिक शक्ति अर्जित की और विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में चारधाम के नाम से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री प्रसिद्ध है। ये तीर्थ स्थल देश के चमकते हुए बहुमूल्य रत्न हैं। इनमें से बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थाें के दर्शन का विषेश महत्व है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ का मंदिर जिले में स्थित है। यहां की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मंदिर मई से अक्टूबर माह के मध्य ही दर्शनें के लिए खुलता है। कत्यूरी शैली में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडव वंश के जन्मेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णाेद्धार करवाया था। जून दो हज़ार तेरह में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ धाम सबसे अधिक प्रभावित हुआ। मंदिर की दीवारें गिर कर बाढ़ में बह गई। इस ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहा। लेकिन मंदिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया। उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों प्रधान तीर्थ हैं। दोनों के दर्शन का बड़ा ही महात्म्य है। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल मानी जाती है और केदारनाथ सहित नर-नारायण मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों का नाश कर जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। इस मंदिर की आयु के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार ये बारह-तेरहवीं शताब्दी का है। एक मान्यतानुसार वर्तमान मंदिर आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया। जो पांडवों द्वारा द्वापर काल में बनाये गये पहले के मंदिर के बगल में है। मंदिर के बड़े धूसर रंग की सीढि़यों पर पाली या ब्राह्मी लिपि में कुछ खुदा है। जिसे स्पष्ट जानना मुश्किल है। फिर भी इतिहासकारों के मुताबिक शैव लोग आदि शंकराचार्य से पहले से ही केदारनाथ जाते रहे हैं। एक हज़ार आठ सौ बयासी के इतिहास के अनुसार अग्रभाग के साथ मंदिर एक भव्य भवन था, जिसके दोनों ओर पूजन मुद्रा में मूर्तियां हैं। पीछे भूरे पत्थर से निर्मित एक टाॅवर है। इसके गर्भगृह की अटारी पर सोने का मुलम्मा चढ़ा है। यह मंदिर एक छह फीट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर पदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान है। मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन ऐसा भी कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदि गुरू शंकराचार्य ने की थी। मंदिर की पूजा कुछ इस तरह की जाती है कि प्रातः काल में शिव-पिंड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। उसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती-उतारी जाती है। इस दौरान यात्रीगण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं, लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का इतिहास संक्षेप में यह है कि हिमालय के केदार श्रंृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया। यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित है। पंचकेदार की कथा ऐसी मानी जाती है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव गौत्र हत्या के पाप से मुक्ती पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। भगवान शंकर के दर्शन के लिए पांडव काशी गए, पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देता चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान होकर केदार में जा बसे। दूसरी ओर पांडव भी लगन के पक्के थे। वे उनका पीछा करते-करते पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य प्शुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। अतः भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाड़ों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए। पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतध्र्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देखकर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं। जब भगवान शंकर बैल के रूप अंतध्र्यान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है। यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं। केदारनाथ की पूजा के बारे में कुछ जानकारियांः केदारनाथ मंदिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रातः सात बजे खुलता है। दोपहर एक से दो बजे तक विषेश पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है। पुनः शाम पांच बजे भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर खोला जाता है। पांच मुखी वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके साढ़े सात बजे से साढ़े आठ बजे तक नियमित आरती होती है। रात्रि साढ़े आठ बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर बंद कर दिया जाता है। शीतकाल में केदारघाटी बर्फ से ढक जाती है। यद्यपि केदारनाथ मंदिर के खोलने और बंद करने का मुहुर्त निकाला जाता है, लेकिन यह सामान्यतः नवम्बर माह की पंद्रह तारीख से पूर्व बंद होता जाता है और छह माह बाद अर्थात बैसाखी के बाद कपाट खुलते हैं। ऐसी स्थिति में केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ऊखीमठ स्थित पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में लाया जाता है। इसी प्रतिमा की पूजा यहां भी रावल करते हैं। केदारनाथ में भक्त शुल्क जमा कराकर रसीद प्राप्त करते हैं और उसके अनुसार ही वह मंदिर की पूजा-आरती कराते हैं या फिर भोग-प्रसाद ग्रहण करते हैं। भगवान की पूजाओं के क्रम में प्रातःकालीन पूजा, महाभिषेक पूजा, अभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षौडशोपचार पूजन, अष्टोपचार पूजन, सम्पूर्ण आरती, पांडव पूजा, गणेश पूजा, श्री भैरव पूजा, पार्वती जी की पूजा, शिव सहस्त्रनाम आदि प्रमुख है। मंदिर समिति द्वारा केदारनाथ मंदिर में पूजा कराने के लिए भक्तों से जो दक्षिणा ली जाती है, उसमें समिति समय-समय पर परिवर्तन भी करती है। नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाईपेंड दिलाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके बाद राज्य सरकार से अपील की है कि वह जूनियर अधिवक्ताओं के लिए फंड जारी करने पर विचार करे और बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड को इस मद में एकमुश्त धनराशि देने के बारे में विचार करे। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव अधिवक्ता कमलेश तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जूनियर अधिवक्ता जिनकी वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड दिलाया जाए क्योंकि वकालत के शुरुआती दौर में जूनियर अधिवक्ताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जनहित याचिका में कहा कि उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एक्ट में यह प्रावधान है कि जिन अधिवक्ताओ की वकालत पांच साल से कम है, उन्हें स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। कई राज्यों ने अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर फंड की व्यवस्था की है जिनमें केरल और पुडुचेरी मुख्य हैं।
एयरएशिया इंडिया सीमित समय की प्रमोशनल स्कीम के तहत 999 रुपये में फ्लाइट टिकट दे रही है। एयरएशिया वेबसाइट के मुताबिक '7 डेज ऑफ मैड डील्स' के तहत यात्रियों को 21 अगस्त से 27 अगस्त तक लो कॉस्ट टिकट बुक करने का ऑफर मिल रहा है। इस प्रमोशनल योजना के तहत अगले साल 26 फरवरी से 28 अगस्त की यात्राओं के लिए टिकट बुक किए जा सकेंगे। इन टिकटों की बुकिंग एयरएशिया की वेबसाइट या एयरएशिया मोबाइल ऐप के माध्यम से की जा सकेगी। इस ऑफर के तहत लोगों को अडवांस बुकिंग करानी होगी। इस योजना के तहत दी गई सीटों की कुल संख्या का खुलासा किए बिना एयरएशिया इंडिया ने कहा, 'सीटें सीमित हैं और सभी उड़ानों पर उपलब्ध नहीं हो सकती हैं। यह ऑफर केवल नई बुकिंग्स के लिए है। ' एयरएशिया इंडिया के बुकिंग पोर्टल के मुताबिक इस ऑफर के तहत सबसे सस्ता टिकट (999 रुपये) कोलकाता और बागडोगरा के बीच था। प्रमोशनल स्कीम के तहत एयरलाइन भुवनेश्वर-कोलकाता, गोवा-बेंगलुरु, गुवाहाटी-इंफाल, हैदराबाद-बेंगलुरु और कोच्चि-बेंगलुरु रूट पर 1099 रुपये में टिकट दिया जा रहा था। इसके अलावा पुणे-बेंगलुरु और विशाखापत्तनम-बेंगलुरु रूटों पर 1499 रुपये में टिकट उपलब्ध कराया जा रहा था।
एयरएशिया इंडिया सीमित समय की प्रमोशनल स्कीम के तहत नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में फ्लाइट टिकट दे रही है। एयरएशिया वेबसाइट के मुताबिक 'सात डेज ऑफ मैड डील्स' के तहत यात्रियों को इक्कीस अगस्त से सत्ताईस अगस्त तक लो कॉस्ट टिकट बुक करने का ऑफर मिल रहा है। इस प्रमोशनल योजना के तहत अगले साल छब्बीस फरवरी से अट्ठाईस अगस्त की यात्राओं के लिए टिकट बुक किए जा सकेंगे। इन टिकटों की बुकिंग एयरएशिया की वेबसाइट या एयरएशिया मोबाइल ऐप के माध्यम से की जा सकेगी। इस ऑफर के तहत लोगों को अडवांस बुकिंग करानी होगी। इस योजना के तहत दी गई सीटों की कुल संख्या का खुलासा किए बिना एयरएशिया इंडिया ने कहा, 'सीटें सीमित हैं और सभी उड़ानों पर उपलब्ध नहीं हो सकती हैं। यह ऑफर केवल नई बुकिंग्स के लिए है। ' एयरएशिया इंडिया के बुकिंग पोर्टल के मुताबिक इस ऑफर के तहत सबसे सस्ता टिकट कोलकाता और बागडोगरा के बीच था। प्रमोशनल स्कीम के तहत एयरलाइन भुवनेश्वर-कोलकाता, गोवा-बेंगलुरु, गुवाहाटी-इंफाल, हैदराबाद-बेंगलुरु और कोच्चि-बेंगलुरु रूट पर एक हज़ार निन्यानवे रुपयापये में टिकट दिया जा रहा था। इसके अलावा पुणे-बेंगलुरु और विशाखापत्तनम-बेंगलुरु रूटों पर एक हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये में टिकट उपलब्ध कराया जा रहा था।
दूध सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें प्रोटीन, कैलशियम, विटामिन डी समेत अन्य पोषक तत्व होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं दूध के साथ कुछ चीजों का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. दूध एक पौष्टिक आहार है जिसमें प्रोटीन, कैलशियम, मिनरल्स और विटामिन डी समेत अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं. दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती है, साथ ही स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. दूध बच्चों के ग्रोथ में बहुत महत्वपूर्ण होता है. कई लोग सादा दूध पीना पसंद नहीं करते हैं तो उसमे चॉकलेट, शहद ,बादाम आदि चीजों को मिलाते हैं. कई लोग दूध के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं और हेल्दी स्नैक्स बनाने के चक्कर में हानिकारक कॉम्बिनेशन को मिलाते हैं. दूध का तासीर ठंडा होता है. अगर इसे किसी गर्मी चीज के साथ मिलाया जाए तो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसके अलावा पाचन तंत्र को भी कमजोर कर सकता है. इन कॉम्बिनेशन को साथ में पीने से एलर्जी और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. आइए जानते हैं दूध के साथ किन चीजों को नहीं खाना चाहिए. हम में से कई लोग स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, चेरी आदि को मिलाकर मिल्क शेक के रूप में सेवन करते हैं. ये हमारे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है. कई बार फूड एलर्जी का कारण भी बनता है. हमेशा दूध पीने के दो घंटे बाद बैरिज का सेवन करें. दूध के साथ खट्टे फलों का सेवन करना हानिकारक होता है. संतरा, नींबू, अनानास आदि का सेवन करना हमारे लिए नुकसानदायक होता है. खट्टे फलों में विटामिन सी और सिट्रिक एसिड होता है जो सेहत के लिए हानिकाराक होता है. इन चीजों को साथ में खाने से पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ता है. दूध और दही को साथ मे नहीं खाना चाहिए. इन दोनों चीजों को साथ में खाने से पाचन क्रिया को नुकसान पहुंचता है. इसकी वजह से गैस, पेट में दर्द आदि की समस्या होती है. कई लोग दूध पीने के तुरंत बाद नमकीन चीजों का खाना पसंद करते हैं. इन चीजों को साथ में खाने से डाइजेशन की समस्या हो सकती है. इसके अलावा पेट दर्द की समस्या रहती है. कई लोग मीट खाने के बाद रात में दूध का सेवन करते हैं. इन दोनों चीजों में प्रोटीन को खाने से पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है. कई बार दोनों चीजे खाने से एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है.
दूध सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें प्रोटीन, कैलशियम, विटामिन डी समेत अन्य पोषक तत्व होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं दूध के साथ कुछ चीजों का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. दूध एक पौष्टिक आहार है जिसमें प्रोटीन, कैलशियम, मिनरल्स और विटामिन डी समेत अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं. दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती है, साथ ही स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. दूध बच्चों के ग्रोथ में बहुत महत्वपूर्ण होता है. कई लोग सादा दूध पीना पसंद नहीं करते हैं तो उसमे चॉकलेट, शहद ,बादाम आदि चीजों को मिलाते हैं. कई लोग दूध के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं और हेल्दी स्नैक्स बनाने के चक्कर में हानिकारक कॉम्बिनेशन को मिलाते हैं. दूध का तासीर ठंडा होता है. अगर इसे किसी गर्मी चीज के साथ मिलाया जाए तो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसके अलावा पाचन तंत्र को भी कमजोर कर सकता है. इन कॉम्बिनेशन को साथ में पीने से एलर्जी और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. आइए जानते हैं दूध के साथ किन चीजों को नहीं खाना चाहिए. हम में से कई लोग स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, चेरी आदि को मिलाकर मिल्क शेक के रूप में सेवन करते हैं. ये हमारे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है. कई बार फूड एलर्जी का कारण भी बनता है. हमेशा दूध पीने के दो घंटे बाद बैरिज का सेवन करें. दूध के साथ खट्टे फलों का सेवन करना हानिकारक होता है. संतरा, नींबू, अनानास आदि का सेवन करना हमारे लिए नुकसानदायक होता है. खट्टे फलों में विटामिन सी और सिट्रिक एसिड होता है जो सेहत के लिए हानिकाराक होता है. इन चीजों को साथ में खाने से पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ता है. दूध और दही को साथ मे नहीं खाना चाहिए. इन दोनों चीजों को साथ में खाने से पाचन क्रिया को नुकसान पहुंचता है. इसकी वजह से गैस, पेट में दर्द आदि की समस्या होती है. कई लोग दूध पीने के तुरंत बाद नमकीन चीजों का खाना पसंद करते हैं. इन चीजों को साथ में खाने से डाइजेशन की समस्या हो सकती है. इसके अलावा पेट दर्द की समस्या रहती है. कई लोग मीट खाने के बाद रात में दूध का सेवन करते हैं. इन दोनों चीजों में प्रोटीन को खाने से पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है. कई बार दोनों चीजे खाने से एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है.
यूपी के कानपुर में बीते दिनों हुए हादसे के बाद 26 लोगों की मौत का जिम्मेदार राजू निषाद गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी। राजू ने पुलिस से बचने के लिए मां और बेटी के अंतिम संस्कार से भी दूरी बनाई थी। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तबीयत में अभी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। 5वें दिन भी वह वेंटिलेटर पर ही हैं। इस बीच यूरिन इंफेक्शन पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान पहुंचे। सीएम ने दोनों शावकों का नाम चंडी और भवानी रखा। इस बीच तेंदुए के बच्चे को उन्होंने दूध पिलाया जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की हालत अभी भी गंभीर स्थिति में बनी हुई है। उनकE ताजा हेल्थ अपडेट सामने आया है। सपा द्वारा ट्वीट कर बताया गया कि मुलायम सिंह यादव की हालत अभी भी क्रिटिकल है। यूपी के दिग्गज नेता और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का सोमवार सुबह गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। बीते कुछ सालों से वह लगातार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। राजनीति में 55 साल के सफर में उन्होंने हर धूप-छांव देखी थी। यूपी के पीलीभीत में देवर को अपनी भाभी की फोटो पर 'I Miss You' जान लिखना भारी पड़ गया। भाई की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सोशल मीडिया से युवक द्वारा अपलोड की गई फोटो भी हटा दी गई है। यूपी के झांसी जिले में पैसों के लेन-देन और अवैध संबंधों के चलते एक युवक की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने 24 घंटे के अंदर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में से एक की महिला मित्र को श्रीकांत ने ब्याज पर पैसे दिये थे। यूपी के सीतापुर जिले में एक युवक की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया गया। मंगलवार रात गश्त पर निकली पुलिस को खून से लथपथ युवक का शव बरामद हुआ। पुलिस को आशंका है कि महिला से प्रेम-प्रसंग के चलते युवक की हत्या की गई है। यूपी के मेरठ में भैंसाली मैदान में हर साल रावण का दहन होता है। रावण के पुतले को खड़े करने से पहले उस पर शराब के छीटे लगाए जाते हैं। मैदान में पुतले को खड़ा करने से पहले विधि-विधान से पूजा होती है। कानपुर औऱ लखनऊ समेत कई जगहों पर बारिश के बाद रावण के पुतले के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। इस बीच आयोजन को संपन्न कराने के लिए अब फिर से तैयारी जारी है।
यूपी के कानपुर में बीते दिनों हुए हादसे के बाद छब्बीस लोगों की मौत का जिम्मेदार राजू निषाद गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी। राजू ने पुलिस से बचने के लिए मां और बेटी के अंतिम संस्कार से भी दूरी बनाई थी। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की तबीयत में अभी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पाँचवें दिन भी वह वेंटिलेटर पर ही हैं। इस बीच यूरिन इंफेक्शन पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान पहुंचे। सीएम ने दोनों शावकों का नाम चंडी और भवानी रखा। इस बीच तेंदुए के बच्चे को उन्होंने दूध पिलाया जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की हालत अभी भी गंभीर स्थिति में बनी हुई है। उनकE ताजा हेल्थ अपडेट सामने आया है। सपा द्वारा ट्वीट कर बताया गया कि मुलायम सिंह यादव की हालत अभी भी क्रिटिकल है। यूपी के दिग्गज नेता और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का सोमवार सुबह गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। बीते कुछ सालों से वह लगातार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। राजनीति में पचपन साल के सफर में उन्होंने हर धूप-छांव देखी थी। यूपी के पीलीभीत में देवर को अपनी भाभी की फोटो पर 'I Miss You' जान लिखना भारी पड़ गया। भाई की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सोशल मीडिया से युवक द्वारा अपलोड की गई फोटो भी हटा दी गई है। यूपी के झांसी जिले में पैसों के लेन-देन और अवैध संबंधों के चलते एक युवक की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने चौबीस घंटाटे के अंदर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में से एक की महिला मित्र को श्रीकांत ने ब्याज पर पैसे दिये थे। यूपी के सीतापुर जिले में एक युवक की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया गया। मंगलवार रात गश्त पर निकली पुलिस को खून से लथपथ युवक का शव बरामद हुआ। पुलिस को आशंका है कि महिला से प्रेम-प्रसंग के चलते युवक की हत्या की गई है। यूपी के मेरठ में भैंसाली मैदान में हर साल रावण का दहन होता है। रावण के पुतले को खड़े करने से पहले उस पर शराब के छीटे लगाए जाते हैं। मैदान में पुतले को खड़ा करने से पहले विधि-विधान से पूजा होती है। कानपुर औऱ लखनऊ समेत कई जगहों पर बारिश के बाद रावण के पुतले के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। इस बीच आयोजन को संपन्न कराने के लिए अब फिर से तैयारी जारी है।
राखी सावंत को इंडस्ट्री में उनके अलग अंदाज के लिए जाना जाता है। ड्रामा क्वीन राखी अक्सर अपने अतरंगी स्टाइल और लुक के लिए सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। अपने गजब के फैशन स्टाइल से वो सभी को अपनी ओर आकर्षित करती रहती हैं। साथ ही उन्हें बेबाकी से मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए भी देखा जाता है। वहीं एक बार फिर राखी सावंत अजीबोगरीब स्टाइल में नजर आई हैं, उनका कहना है कि वो इस बार किम कर्दाशियां बनी हैं। राखी सावंत हमेशा ही सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं, वो लाइमलाइट में आने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। इसी बीच उनका एक वीडियो वायरल भयानी नाम के एक इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि राखी सावंत ने अजीबोगरीब कपड़े पहने हुए है। राखी अपने इन कपड़ों की वजह से सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं। बता दें, राखी सावंत को आलिया भट्ट की आने वाली फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के लिए एडवांस टिकट बुक करवाते समय मीडिया द्वारा स्पॉट किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि राखी सावंत ने फूशिया पिंक कलर की रफ्ल्ड ड्रेस पहनी हुई है। ड्रेस के फ्रंट पर बड़ा सा फूल बना हुआ है। राखी ने इसके साथ सेम कलर के अंडरपैंट्स कैरी किए हैं। साथ ही उन्होंने फ्लावर प्रिंट थाई हाई बूट्स भी पहने हुए हैं। वहीं गले में स्वरोस्की का नेकपीस की केरी किया है। इसी के साथ उन्हें खुले बालों में लहराते हुए गॉगल्स लगा कर स्वैग दिखाते हुए देखा जा सकता है। उनका ये अतरंगी अवतार देख पैपराजी ने जमकर उनकी तारीफ की है। पैपराजी ने वीडियो में राखी सावंत से कहा 'आज आप बिलकुल गंगूबाई लग रहीं हैं' तो राखी सावंत जवाब देते हुए कहती हैं 'आज मैं गंगूबाई नहीं बल्कि किम कार्दशियां बनी हूं'। वहीं अब उनके इस जवाब से वो सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल होने लगी। यूजर्स उनके इस जावब पर अलग-अलग तरह के कमैंट्स कर रहे हैं। वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा 'ये बंदी पूरी पागल हो चुकी है'। तो दूसरे यूजर ने लिखा 'मतलब कुछ भी'। वहीं एक यूजर ने मजाकियां अंदाज में लिखा है 'ये किम कार्दशियन का मोटा अवतार है'। इसी बीच किसी ने कहा 'भगवान भला करें'।
राखी सावंत को इंडस्ट्री में उनके अलग अंदाज के लिए जाना जाता है। ड्रामा क्वीन राखी अक्सर अपने अतरंगी स्टाइल और लुक के लिए सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। अपने गजब के फैशन स्टाइल से वो सभी को अपनी ओर आकर्षित करती रहती हैं। साथ ही उन्हें बेबाकी से मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए भी देखा जाता है। वहीं एक बार फिर राखी सावंत अजीबोगरीब स्टाइल में नजर आई हैं, उनका कहना है कि वो इस बार किम कर्दाशियां बनी हैं। राखी सावंत हमेशा ही सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं, वो लाइमलाइट में आने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। इसी बीच उनका एक वीडियो वायरल भयानी नाम के एक इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि राखी सावंत ने अजीबोगरीब कपड़े पहने हुए है। राखी अपने इन कपड़ों की वजह से सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं। बता दें, राखी सावंत को आलिया भट्ट की आने वाली फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के लिए एडवांस टिकट बुक करवाते समय मीडिया द्वारा स्पॉट किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि राखी सावंत ने फूशिया पिंक कलर की रफ्ल्ड ड्रेस पहनी हुई है। ड्रेस के फ्रंट पर बड़ा सा फूल बना हुआ है। राखी ने इसके साथ सेम कलर के अंडरपैंट्स कैरी किए हैं। साथ ही उन्होंने फ्लावर प्रिंट थाई हाई बूट्स भी पहने हुए हैं। वहीं गले में स्वरोस्की का नेकपीस की केरी किया है। इसी के साथ उन्हें खुले बालों में लहराते हुए गॉगल्स लगा कर स्वैग दिखाते हुए देखा जा सकता है। उनका ये अतरंगी अवतार देख पैपराजी ने जमकर उनकी तारीफ की है। पैपराजी ने वीडियो में राखी सावंत से कहा 'आज आप बिलकुल गंगूबाई लग रहीं हैं' तो राखी सावंत जवाब देते हुए कहती हैं 'आज मैं गंगूबाई नहीं बल्कि किम कार्दशियां बनी हूं'। वहीं अब उनके इस जवाब से वो सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल होने लगी। यूजर्स उनके इस जावब पर अलग-अलग तरह के कमैंट्स कर रहे हैं। वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा 'ये बंदी पूरी पागल हो चुकी है'। तो दूसरे यूजर ने लिखा 'मतलब कुछ भी'। वहीं एक यूजर ने मजाकियां अंदाज में लिखा है 'ये किम कार्दशियन का मोटा अवतार है'। इसी बीच किसी ने कहा 'भगवान भला करें'।
कोरोना काल में रिजर्व बैंक ने बड़ी राहत दी है. रेपो रेट 0. 4 फीसदी घटाकर 4 फीसदी कर दिया है. आरबीआई के इस फैसले से कर्ज सस्ता होगा साथ ही महंगाई कम होने की उम्मीद जताई गई है. कोर इंडस्ट्रीज के आउटपुट में 6. 5% की कमी हुई है और मैन्युफेक्चरिंग में 21 फीसदी की गिरावट हुई है. मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 17% की कमी दर्ज की गई है. मांग और उत्पादन में कमी आई है. अप्रैल महीने में निर्यात में 60. 3 % की कमी आई है. शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट 4. 4% से घटकर 4% हुआ. रिवर्स रेपो रेट घटकर 3. 35% हुई. कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हुआ है. MPC ने रेपो रेट में कटौती करने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर कोरोना संकट से देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए किए गए उपायों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे.
कोरोना काल में रिजर्व बैंक ने बड़ी राहत दी है. रेपो रेट शून्य. चार फीसदी घटाकर चार फीसदी कर दिया है. आरबीआई के इस फैसले से कर्ज सस्ता होगा साथ ही महंगाई कम होने की उम्मीद जताई गई है. कोर इंडस्ट्रीज के आउटपुट में छः. पाँच% की कमी हुई है और मैन्युफेक्चरिंग में इक्कीस फीसदी की गिरावट हुई है. मार्च में औद्योगिक उत्पादन में सत्रह% की कमी दर्ज की गई है. मांग और उत्पादन में कमी आई है. अप्रैल महीने में निर्यात में साठ. तीन % की कमी आई है. शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट चार. चार% से घटकर चार% हुआ. रिवर्स रेपो रेट घटकर तीन. पैंतीस% हुई. कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हुआ है. MPC ने रेपो रेट में कटौती करने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर कोरोना संकट से देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए किए गए उपायों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे.
vii) वर्णन ( परिचित वस्तुओं, स्थानों और घटनाओं का ) viii) भाषण और वाद-विवाद ix) अभिनय x) कवि दरबार xi) बाल-सभा उपर्युक्त सूची किसी भी तरह संपूर्ण नहीं है। आप कुछ अन्य क्रियाओं का प्रयोग भी कर सकते हैं जिन्हें आपने अपने अनुभव से उपयोगी पाया हो। आगे के पृष्ठों में हमने यह समझाने का प्रयास किया है कि उपर्युक्त क्रियाओं में से प्रत्येक को किस प्रकार आयोजित और संचालित किया जा सकता है। 7. 4.1 सुवाचन (बालगीत, क्रियात्मक गीत और कविताएँ ) बालगीतों, क्रियात्मक गीतों, कविताओं इत्यादि का सुवाचन सुनने और बोलने के कौशलों के विकास (विशेषकर प्रारंभिक प्राथमिक स्तर पर) में महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकता है। इस क्रिया का महत्त्व यह है कि शिक्षार्थी आसानी से बालगीतों और क्रियात्मक गीतों को अपनी स्मृति में अंकित कर सकते हैं। शिक्षार्थियों को कविताएँ आदि याद करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता नहीं होती, अपितु उन्हें याद करने में उन्हें मजा आता है। कविताओं को बार-बार सुनने और वाचन से वे शिक्षार्थियों का स्थायी अंग बन जाती हैं। परवर्ती प्राथमिक स्तर पर, ऐसी क्रियाओं में भाग लेने के लिए शिक्षार्थियों को पुस्तकों और पत्रिकाओं से वाचन सामग्री एकत्र करनी होगी। इस प्रकार, उन्हें पढ़ने के कौशल के विकास के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्रारंभिक चरणों (कक्षाओं 1 से 3) के लिए आप इन कक्षाओं के लिए उपर्युक्त कुछ बालगीतों, क्रियात्मक गीतों और कविताओं का संग्रह कर सकते हैं । क्रियाकलाप 1 श्यामपट्ट पर कोई एक बालगीत लिखिए और कक्षा में बच्चों के साथ उसका हाव-भाव सहित निदर्शन कीजिए । इस क्रिया को सामूहिक क्रिया तथा व्यक्तिगत क्रिया दोनों ही रूपों में आयोजित किया जा सकता है; सामूहिक क्रियाएँ शिक्षार्थियों में स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करती है । कक्षा को दो या दो से अधिक समूहों में बांटा जा सकता है। इन समूहों की रचना इस प्रकार की होनी चाहिए कि वे ज्ञान और योग्यताओं की दृष्टि से यथासंभव समान हों। फिर, कक्षा के बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि प्रत्येक समूह के सदस्य एक साथ बैठें। मान लीजिए कि यह क्रिया कक्षा । और ॥ के बच्चों के साथ की जा रही है। इस आयुवर्ग के लिए कोई उपर्युक्त कविता चुनें । कक्षा को दो समूहों 'क' और 'ख' में बांटें । आप उचित लय, आरोह-अवरोह, गति और यति के साथ पूरी कविता का वाचन करें। मान लीजिए कि कविता 10 -12 पंक्तियों की है। पूरी कविता को एक बार वाचन के बाद अब आप कविता की एक- दो पंक्तियों का वाचन करें और शिक्षार्थियों को अपने साथ-साथ उन पंक्तियों का वाचन करने के लिए कहें। बाद में आप चार अन्य पंक्तियों को वाचन के लिए ले सकते हैं। शिक्षार्थियों को अपने साथ इन पंक्तियों का वाचन करने दें। जब इस तरीके से पूरी कविता का वाचन हो जाए तो आप प्रत्येक समूह से स्वतंत्र रूप से कविता वाचन के लिए कहें। सबसे पहले, समूह 'क' का एक शिक्षार्थी कविता की पहली पंक्ति का वाचन करेगा। यदि वह सही बाचन करता है तो अगली पंक्ति समूह 'ख' के शिक्षार्थी द्वारा सुनाई जाएगी और इस प्रकार यह क्रम तब तक चलता रहता है जब तक पूरी कविता का वाचन नहीं कर लिया जाता । यदि कोई शिक्षार्थी गलती करता है या पूरी पंक्ति सुना पाने में असफल रहता है तब विपक्षी समूह से जिस सदस्य की बारी हो, उसे अवसर मिलेगा। यदि वह सफल होता है तो उसके समूह को एक अंक मिलता है। यदि वह नहीं सुना पाता तो दूसरे समूह को अवसर दिया जाता है। जिस समूह के शिक्षार्थी सही वाचन कर पाते हैं उस समूह को अंक प्राप्त होता है। चॉक बोर्ड पर अंक लिखे जा सकते हैं और वाचन के अंत में उनका योग किया जा सकता है। जो शिक्षार्थी पंक्ति का सही वाचन नहीं कर पाते, उनसे दूसरे समूह के बच्चे द्वारा शुद्ध रूप में बोली गई पंक्ति को दुहरवाएँ । पूरी कविता का सही वाचन हो जाने के बाद आप कविता की विषय-वस्तु के बोध के परीक्षण के लिए प्रश्न पूछ सकते हैं। इसकी प्रक्रिया भी वाचन प्रक्रिया के समान हो सकती है। अब समूह 'क' और 'ख' के सदस्यों से कविता की पंक्तियों के वाचन के स्थान पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। कक्षा IV व V में यह क्रिया निम्नलिखित प्रकार से करवाई जा सकती है : कक्षा आपकी सहायता से अथवा स्वतंत्र रूप से सुवाचन प्रतियोगिता के लिए पाँच या छह कविताओं का चयन करें। एक समूह के तीन या चार छात्रों का एक उपसमूह बनाया जाए और प्रत्येक समूह को चयनित कविताओं में से एक कविता याद करने के लिए दी जाए। प्रत्येक उपसमूह के पास अलग-अलग कविताएँ होंगी। अगले दिन, वाचन प्रतियोगिता कराएँ जिसमें प्रत्येक उपसमूह के छात्र अपनी-अपनी कविता सुनाएँ । छात्रों के निष्पादन का निर्णय उचित लय, आरोह-अवरोह और भावानुकूलता के आधार पर किया जाए और तदनुसार उनका श्रेणी निर्धारण किया जाए । अपने उपसमूहों के निष्पादन के आधार पर उच्चतर अंक पाने वाले समूह को विजयी घोषित किया जाए। कविता की विषय-वस्तु के बोध के परीक्षण के लिए समूह 'क' को समूह 'ख' से प्रश्न पूछने के लिए कहा जा सकता है, जिससे उन प्रश्नों के उत्तर देने की अपेक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया को उलट कर भी करा सकते हैं। अब समूह 'ख' चुनी हुई अन्य कविता लेगा और समूह 'क' से प्रश्न पूछेगा। अधिक अंक पाने वाले समूह को विजयी घोषित किया जाएगा। आप शब्द निर्माण, भाषण, वर्णन और वाद-विवाद आदि के लिए भी इस प्रकार की प्रतियोगिता का प्रयोग कर सकते हैं । ऐसी सब क्रियाएँ सुनने और बोलने के कौशलों का रुचिकर और आनंददायक तरीके से विकास करने में योगदान करेंगी। 7.4.2 वार्तालाप (परिचित विषय ) घर के समारोह, विद्यालय की घटना, आस-पास की घटना, राष्ट्रीय दिवस आयोजन, मेले, त्योहार, पिकनिक, शैक्षिक भ्रमण, बस यात्रा, क्षेत्र भ्रमण, रेल यात्रा, प्राकृतिक दृश्यों के वर्णन आदि को वार्तालाप संबंधी क्रियाकलापों के आयोजन के लिए लिया जा सकता है। इस क्रियाकलाप को व्यक्तिगत या सामूहिक आधार पर आयोजित किया जा सकता है। 7.4.3 कहानी - कथन हम सब जानते हैं कि बच्चों को कहानियाँ बहुत अच्छी लगती हैं। उन्हें कहानियाँ सुनना पसंद पाठ्यचर्या सहगामी क्रियाओं के माध्यम से भाषा विकास होता है और वे कहानियाँ बनाने और उन्हें सुनाने में रुचि लेते हैं। आप कक्षा 1 से ।।। के लिए निम्नलिखित तरीके से कहानी रचना की क्रिया को संचालित कर सकते हैं : चित्र 7.1 : पिकनिक का दृश्य कक्षा को पाच-छह शिक्षार्थियों के समूहों में बाँटिए। अब इन समूहों से कहें कि वे बाहर जाकर पत्थर, कंकड़, पत्ते, लकड़ी के टुकड़े, टहनियाँ और शाखाएँ जैसी वस्तुएँ संकलित करें। संकलन कर लेने के बाद उनसे कहें कि वे विद्यालय में किसी स्थान पर समूहवार बैठकर अपने द्वारा संकलित वस्तुओं के आकार, रंग आदि के बारे में आपस में बातचीत करें । लगभग पंद्रह मिनट के बाद समूहों से कक्षा में लौटने के लिए कहें। अब प्रत्येक समूह से उनके द्वारा संकलित वस्तुओं पर एक कहानी विकसित करने के लिए कहें। यह क्रिया शिक्षार्थियों को कठिन प्रतीत हो सकती है। किंतु हमारा उद्देश्य ऐसी कहानी की आकांक्षा करना नहीं है जो किन्हीं साहित्यिक अपेक्षाओं पर खरी उतरती हों। हमारा लक्ष्य मात्र यह है कि बच्चे उन्मुक्त कल्पना की उड़ान भर सकें । चौथी-पाँचवीं कक्षा के साथ इस क्रिया को कुछ अलग प्रकार से किया जा सकता है। शिक्षार्थियों को एक कहानी सुनाने के लिए कहें। समूह का प्रत्येक सदस्य एक वाक्य या अनेक वाक्यों को जोड़कर कहानी को आगे बढ़ाए। आप कहानी को "कुछ समय पहले जंगल में एक महात्मा रहता था" जैसे वाक्य से प्रारंभ कर सकते हैं । इस प्रक्रिया के दौरान कुछ शिक्षार्थी अटपटे वाक्य भी बना सकते हैं। आप शिक्षार्थियों को हतोत्साह किए बिना ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाएँ। आप अशुद्ध भाषा की ओर भी ध्यान दें और कहानी के आगे बढ़ने के साथ-साथ ऐसी अशुद्धियों को शुद्ध करें । आप कुछ रुचिकर संवादों का चयन अथवा लेखन कर सकते और अपने शिक्षार्थियों को उन्हें उपर्युक्त उतार-चढ़ाव और हाव-भाव के साथ पढ़ने के लिए कह सकते हैं। इस प्रकार के क्रियाकलाप से आप विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों के साथ अन्तःक्रिया करने की योग्यता विकसित करने में अपने शिक्षार्थियों की मदद कर सकते हैं। यह अन्तःक्रिया बाज़ार में, सड़क
vii) वर्णन viii) भाषण और वाद-विवाद ix) अभिनय x) कवि दरबार xi) बाल-सभा उपर्युक्त सूची किसी भी तरह संपूर्ण नहीं है। आप कुछ अन्य क्रियाओं का प्रयोग भी कर सकते हैं जिन्हें आपने अपने अनुभव से उपयोगी पाया हो। आगे के पृष्ठों में हमने यह समझाने का प्रयास किया है कि उपर्युक्त क्रियाओं में से प्रत्येक को किस प्रकार आयोजित और संचालित किया जा सकता है। सात. चार.एक सुवाचन बालगीतों, क्रियात्मक गीतों, कविताओं इत्यादि का सुवाचन सुनने और बोलने के कौशलों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकता है। इस क्रिया का महत्त्व यह है कि शिक्षार्थी आसानी से बालगीतों और क्रियात्मक गीतों को अपनी स्मृति में अंकित कर सकते हैं। शिक्षार्थियों को कविताएँ आदि याद करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता नहीं होती, अपितु उन्हें याद करने में उन्हें मजा आता है। कविताओं को बार-बार सुनने और वाचन से वे शिक्षार्थियों का स्थायी अंग बन जाती हैं। परवर्ती प्राथमिक स्तर पर, ऐसी क्रियाओं में भाग लेने के लिए शिक्षार्थियों को पुस्तकों और पत्रिकाओं से वाचन सामग्री एकत्र करनी होगी। इस प्रकार, उन्हें पढ़ने के कौशल के विकास के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्रारंभिक चरणों के लिए आप इन कक्षाओं के लिए उपर्युक्त कुछ बालगीतों, क्रियात्मक गीतों और कविताओं का संग्रह कर सकते हैं । क्रियाकलाप एक श्यामपट्ट पर कोई एक बालगीत लिखिए और कक्षा में बच्चों के साथ उसका हाव-भाव सहित निदर्शन कीजिए । इस क्रिया को सामूहिक क्रिया तथा व्यक्तिगत क्रिया दोनों ही रूपों में आयोजित किया जा सकता है; सामूहिक क्रियाएँ शिक्षार्थियों में स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करती है । कक्षा को दो या दो से अधिक समूहों में बांटा जा सकता है। इन समूहों की रचना इस प्रकार की होनी चाहिए कि वे ज्ञान और योग्यताओं की दृष्टि से यथासंभव समान हों। फिर, कक्षा के बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि प्रत्येक समूह के सदस्य एक साथ बैठें। मान लीजिए कि यह क्रिया कक्षा । और ॥ के बच्चों के साथ की जा रही है। इस आयुवर्ग के लिए कोई उपर्युक्त कविता चुनें । कक्षा को दो समूहों 'क' और 'ख' में बांटें । आप उचित लय, आरोह-अवरोह, गति और यति के साथ पूरी कविता का वाचन करें। मान लीजिए कि कविता दस -बारह पंक्तियों की है। पूरी कविता को एक बार वाचन के बाद अब आप कविता की एक- दो पंक्तियों का वाचन करें और शिक्षार्थियों को अपने साथ-साथ उन पंक्तियों का वाचन करने के लिए कहें। बाद में आप चार अन्य पंक्तियों को वाचन के लिए ले सकते हैं। शिक्षार्थियों को अपने साथ इन पंक्तियों का वाचन करने दें। जब इस तरीके से पूरी कविता का वाचन हो जाए तो आप प्रत्येक समूह से स्वतंत्र रूप से कविता वाचन के लिए कहें। सबसे पहले, समूह 'क' का एक शिक्षार्थी कविता की पहली पंक्ति का वाचन करेगा। यदि वह सही बाचन करता है तो अगली पंक्ति समूह 'ख' के शिक्षार्थी द्वारा सुनाई जाएगी और इस प्रकार यह क्रम तब तक चलता रहता है जब तक पूरी कविता का वाचन नहीं कर लिया जाता । यदि कोई शिक्षार्थी गलती करता है या पूरी पंक्ति सुना पाने में असफल रहता है तब विपक्षी समूह से जिस सदस्य की बारी हो, उसे अवसर मिलेगा। यदि वह सफल होता है तो उसके समूह को एक अंक मिलता है। यदि वह नहीं सुना पाता तो दूसरे समूह को अवसर दिया जाता है। जिस समूह के शिक्षार्थी सही वाचन कर पाते हैं उस समूह को अंक प्राप्त होता है। चॉक बोर्ड पर अंक लिखे जा सकते हैं और वाचन के अंत में उनका योग किया जा सकता है। जो शिक्षार्थी पंक्ति का सही वाचन नहीं कर पाते, उनसे दूसरे समूह के बच्चे द्वारा शुद्ध रूप में बोली गई पंक्ति को दुहरवाएँ । पूरी कविता का सही वाचन हो जाने के बाद आप कविता की विषय-वस्तु के बोध के परीक्षण के लिए प्रश्न पूछ सकते हैं। इसकी प्रक्रिया भी वाचन प्रक्रिया के समान हो सकती है। अब समूह 'क' और 'ख' के सदस्यों से कविता की पंक्तियों के वाचन के स्थान पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। कक्षा IV व V में यह क्रिया निम्नलिखित प्रकार से करवाई जा सकती है : कक्षा आपकी सहायता से अथवा स्वतंत्र रूप से सुवाचन प्रतियोगिता के लिए पाँच या छह कविताओं का चयन करें। एक समूह के तीन या चार छात्रों का एक उपसमूह बनाया जाए और प्रत्येक समूह को चयनित कविताओं में से एक कविता याद करने के लिए दी जाए। प्रत्येक उपसमूह के पास अलग-अलग कविताएँ होंगी। अगले दिन, वाचन प्रतियोगिता कराएँ जिसमें प्रत्येक उपसमूह के छात्र अपनी-अपनी कविता सुनाएँ । छात्रों के निष्पादन का निर्णय उचित लय, आरोह-अवरोह और भावानुकूलता के आधार पर किया जाए और तदनुसार उनका श्रेणी निर्धारण किया जाए । अपने उपसमूहों के निष्पादन के आधार पर उच्चतर अंक पाने वाले समूह को विजयी घोषित किया जाए। कविता की विषय-वस्तु के बोध के परीक्षण के लिए समूह 'क' को समूह 'ख' से प्रश्न पूछने के लिए कहा जा सकता है, जिससे उन प्रश्नों के उत्तर देने की अपेक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया को उलट कर भी करा सकते हैं। अब समूह 'ख' चुनी हुई अन्य कविता लेगा और समूह 'क' से प्रश्न पूछेगा। अधिक अंक पाने वाले समूह को विजयी घोषित किया जाएगा। आप शब्द निर्माण, भाषण, वर्णन और वाद-विवाद आदि के लिए भी इस प्रकार की प्रतियोगिता का प्रयोग कर सकते हैं । ऐसी सब क्रियाएँ सुनने और बोलने के कौशलों का रुचिकर और आनंददायक तरीके से विकास करने में योगदान करेंगी। सात.चार.दो वार्तालाप घर के समारोह, विद्यालय की घटना, आस-पास की घटना, राष्ट्रीय दिवस आयोजन, मेले, त्योहार, पिकनिक, शैक्षिक भ्रमण, बस यात्रा, क्षेत्र भ्रमण, रेल यात्रा, प्राकृतिक दृश्यों के वर्णन आदि को वार्तालाप संबंधी क्रियाकलापों के आयोजन के लिए लिया जा सकता है। इस क्रियाकलाप को व्यक्तिगत या सामूहिक आधार पर आयोजित किया जा सकता है। सात.चार.तीन कहानी - कथन हम सब जानते हैं कि बच्चों को कहानियाँ बहुत अच्छी लगती हैं। उन्हें कहानियाँ सुनना पसंद पाठ्यचर्या सहगामी क्रियाओं के माध्यम से भाषा विकास होता है और वे कहानियाँ बनाने और उन्हें सुनाने में रुचि लेते हैं। आप कक्षा एक से ।।। के लिए निम्नलिखित तरीके से कहानी रचना की क्रिया को संचालित कर सकते हैं : चित्र सात.एक : पिकनिक का दृश्य कक्षा को पाच-छह शिक्षार्थियों के समूहों में बाँटिए। अब इन समूहों से कहें कि वे बाहर जाकर पत्थर, कंकड़, पत्ते, लकड़ी के टुकड़े, टहनियाँ और शाखाएँ जैसी वस्तुएँ संकलित करें। संकलन कर लेने के बाद उनसे कहें कि वे विद्यालय में किसी स्थान पर समूहवार बैठकर अपने द्वारा संकलित वस्तुओं के आकार, रंग आदि के बारे में आपस में बातचीत करें । लगभग पंद्रह मिनट के बाद समूहों से कक्षा में लौटने के लिए कहें। अब प्रत्येक समूह से उनके द्वारा संकलित वस्तुओं पर एक कहानी विकसित करने के लिए कहें। यह क्रिया शिक्षार्थियों को कठिन प्रतीत हो सकती है। किंतु हमारा उद्देश्य ऐसी कहानी की आकांक्षा करना नहीं है जो किन्हीं साहित्यिक अपेक्षाओं पर खरी उतरती हों। हमारा लक्ष्य मात्र यह है कि बच्चे उन्मुक्त कल्पना की उड़ान भर सकें । चौथी-पाँचवीं कक्षा के साथ इस क्रिया को कुछ अलग प्रकार से किया जा सकता है। शिक्षार्थियों को एक कहानी सुनाने के लिए कहें। समूह का प्रत्येक सदस्य एक वाक्य या अनेक वाक्यों को जोड़कर कहानी को आगे बढ़ाए। आप कहानी को "कुछ समय पहले जंगल में एक महात्मा रहता था" जैसे वाक्य से प्रारंभ कर सकते हैं । इस प्रक्रिया के दौरान कुछ शिक्षार्थी अटपटे वाक्य भी बना सकते हैं। आप शिक्षार्थियों को हतोत्साह किए बिना ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाएँ। आप अशुद्ध भाषा की ओर भी ध्यान दें और कहानी के आगे बढ़ने के साथ-साथ ऐसी अशुद्धियों को शुद्ध करें । आप कुछ रुचिकर संवादों का चयन अथवा लेखन कर सकते और अपने शिक्षार्थियों को उन्हें उपर्युक्त उतार-चढ़ाव और हाव-भाव के साथ पढ़ने के लिए कह सकते हैं। इस प्रकार के क्रियाकलाप से आप विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों के साथ अन्तःक्रिया करने की योग्यता विकसित करने में अपने शिक्षार्थियों की मदद कर सकते हैं। यह अन्तःक्रिया बाज़ार में, सड़क
जम्मू. रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के तहत असम (Assam) के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के बल्लेबाज शुभम खजूरिया के बाद अब अब्दुल समद (Abdul Samad) ने भी विस्फोटक शतक जड़ दिया है. खजूरिया ने जहां मैच के दूसरे दिन 138 रन बनाए थे, वहीं समद ने तीसरे दिन महज 72 गेंदों पर 103 रन ठोक डाले. इस आक्रामक पारी में उन्होंने 7 चौके और 8 छक्के भी लगाए. अब्दुल समद को इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) के अगले साल होने वाले 13वें सीजन के लिए खिलाड़ियों की नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने बेस प्राइस 20 लाख रुपये में खरीदा था. रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के इस मुकाबले में असम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. असम के लिए ओपनर सूर्यांश रैना ने 73 रन बनाए. उनके बाद शुभम खजूरिया ने 180 गेंदों पर 138 रन की बेहतरीन पारी खेली. इस पारी में उन्होंने 21 चौके और 1 छक्का लगाया. इसके बाद पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे अब्दुल समद (Abdul Samad) ने धूम मचा दी. 7 चौकों और 8 छक्कों से सजी अपनी आक्रामक पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए. इस पारी की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी 5 विकेट खोकर 460 रनों पर घोषित कर दी. जवाब में असम ने बिना विकेट खोए 8 रन बना लिए हैं. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के प्रतिभाशाली मध्यक्रम के बल्लेबाज अब्दुल समद (Abdul Samad) फिजिकल एजुकेशन टीचर मोहम्मद फारूख के बेटे हैं. फारूख खुद भी क्लब क्रिकेटर और वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं. 18 साल के समद का जन्म 28 अक्टूबर 2001 में हुआ था. अब्दुल समद को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (Syed Mushtaq Ali Trophy) और विजय हजारे ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन का पुरस्कार मिला है. अब्दुल समद का कहना है कि वह खुद को मिले मौके को हाथ से नहीं जाने देंगे और जम्मू-कश्मीर को गौरवान्वित करेंगे. जम्मू-कश्मीर टीम के मेंटर इरफान पठान हैं. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के 18 वर्षीय खिलाड़ी अब्दुल समद (Abdul Samad) ने असम के खिलाफ मुकाबले से पहले 2 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं. इसमें उन्होंने 34. 75 की औसत से 139 रन बनाए हैं. इसके अलावा समद ने 8 लिस्ट ए मैचों में 29. 62 की औसत से 237 रन व 11 टी20 मैचों में 40. 00 की औसत से 240 रन बनाए हैं. इतना ही नहीं, समद ने रन बनाने के साथ विकेट भी हासिल किए हैं. प्रथम श्रेणी मैच में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन लिस्ट ए मैचों में उन्होंने 2 और टी20 मैचों में 1 विकेट हासिल किया है. .
जम्मू. रणजी ट्रॉफी के तहत असम के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में जम्मू-कश्मीर के बल्लेबाज शुभम खजूरिया के बाद अब अब्दुल समद ने भी विस्फोटक शतक जड़ दिया है. खजूरिया ने जहां मैच के दूसरे दिन एक सौ अड़तीस रन बनाए थे, वहीं समद ने तीसरे दिन महज बहत्तर गेंदों पर एक सौ तीन रन ठोक डाले. इस आक्रामक पारी में उन्होंने सात चौके और आठ छक्के भी लगाए. अब्दुल समद को इंडियन प्रीमियर लीग के अगले साल होने वाले तेरहवें सीजन के लिए खिलाड़ियों की नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने बेस प्राइस बीस लाख रुपये में खरीदा था. रणजी ट्रॉफी के इस मुकाबले में असम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. असम के लिए ओपनर सूर्यांश रैना ने तिहत्तर रन बनाए. उनके बाद शुभम खजूरिया ने एक सौ अस्सी गेंदों पर एक सौ अड़तीस रन की बेहतरीन पारी खेली. इस पारी में उन्होंने इक्कीस चौके और एक छक्का लगाया. इसके बाद पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे अब्दुल समद ने धूम मचा दी. सात चौकों और आठ छक्कों से सजी अपनी आक्रामक पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए. इस पारी की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी पाँच विकेट खोकर चार सौ साठ रनों पर घोषित कर दी. जवाब में असम ने बिना विकेट खोए आठ रन बना लिए हैं. जम्मू-कश्मीर के प्रतिभाशाली मध्यक्रम के बल्लेबाज अब्दुल समद फिजिकल एजुकेशन टीचर मोहम्मद फारूख के बेटे हैं. फारूख खुद भी क्लब क्रिकेटर और वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं. अट्ठारह साल के समद का जन्म अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार एक में हुआ था. अब्दुल समद को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन का पुरस्कार मिला है. अब्दुल समद का कहना है कि वह खुद को मिले मौके को हाथ से नहीं जाने देंगे और जम्मू-कश्मीर को गौरवान्वित करेंगे. जम्मू-कश्मीर टीम के मेंटर इरफान पठान हैं. जम्मू-कश्मीर के अट्ठारह वर्षीय खिलाड़ी अब्दुल समद ने असम के खिलाफ मुकाबले से पहले दो प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं. इसमें उन्होंने चौंतीस. पचहत्तर की औसत से एक सौ उनतालीस रन बनाए हैं. इसके अलावा समद ने आठ लिस्ट ए मैचों में उनतीस. बासठ की औसत से दो सौ सैंतीस रन व ग्यारह टीबीस मैचों में चालीस. शून्य की औसत से दो सौ चालीस रन बनाए हैं. इतना ही नहीं, समद ने रन बनाने के साथ विकेट भी हासिल किए हैं. प्रथम श्रेणी मैच में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन लिस्ट ए मैचों में उन्होंने दो और टीबीस मैचों में एक विकेट हासिल किया है. .
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए साल की शुरूआत पर प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने पूजा पाठ, साधू-संतों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, रियल हीरोज के आशीर्वाद लेकर की। उन्होने रैन बसेरे जाकर जहां गरीब, बेघरों के दर्द को महसूस किया वहीं भरोसा दिलाया कि वह उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री से इन रैन बसेरों खाने में सुधार की मांग रखेंगै। वीरेंद्र सचदेवा विवेक विहार गुरूद्वारा में पद्मश्री सरदार जितेन्द्र सिंह शंटी के साथ श्री गुरू गोबिंद सिंह के गुरूपुरब समारोह में सम्मिलित हुए और सुबह श्री गुरू रवि दास मन्दिर, करोल बाग दर्शन के बाद रैगड़पुरा में संत अजय भाई के साथ सुन्दर कांड में शामिल हुए। पूर्व महापौर योगेंद्र चंदौलिया, प्रदेश प्रवक्ता मोहनलाल गिहारा उनके साथ रहे। वीरेंद्र सचदेवा ने दिल्ली में पूर्व अध्यक्षों केदार नाथ साहनी, मदनलाल खुराना एवं प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा आदि नेताओं के साथ भाजपा को दिल्ली में घर-घर पहुंचाने वाले नेताओं रामभज, ओपी बब्बर, मूलचंद चावला, योगध्यान आहूजा, पीके चांदला, डा. वेदव्यास महाजन, नंदकिशोर गर्ग, गौरी शंकर भारद्वाज, देवेन्द्र शौकिन व राधेश्याम शर्मा का आशीर्वाद लिया। इन नेताओं को भाजपा के रियल हीरो बताते हुए उन्होने संगठन विस्तार में मार्गदर्शन का अनुरोध भी किया। पूर्व मेयर जेपी, प्रवक्ता विनीत गोयन्का के साथ मोरीगेट, मोतियाखान रैन बसरों में रहने वालेां से मुलाकात के बाद उन्होने कहा मोतिया खान रैनबसेरे के बाहर एक महिला को पांच दिन के बच्चे के साथ सोते देख बहुत मन व्यथित हुआ। उन्होने कहा कि हम जल्द मुख्यमंत्री एवं उपराज्यपाल दोनों से बेघरों के लिए रैनबसेरों एवं भोजन की व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग करेगी। इसके बाद उन्होने झंडेवालान मंदिर में पूजा अर्चना कर आर्शीवाद लिया।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए साल की शुरूआत पर प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने पूजा पाठ, साधू-संतों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, रियल हीरोज के आशीर्वाद लेकर की। उन्होने रैन बसेरे जाकर जहां गरीब, बेघरों के दर्द को महसूस किया वहीं भरोसा दिलाया कि वह उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री से इन रैन बसेरों खाने में सुधार की मांग रखेंगै। वीरेंद्र सचदेवा विवेक विहार गुरूद्वारा में पद्मश्री सरदार जितेन्द्र सिंह शंटी के साथ श्री गुरू गोबिंद सिंह के गुरूपुरब समारोह में सम्मिलित हुए और सुबह श्री गुरू रवि दास मन्दिर, करोल बाग दर्शन के बाद रैगड़पुरा में संत अजय भाई के साथ सुन्दर कांड में शामिल हुए। पूर्व महापौर योगेंद्र चंदौलिया, प्रदेश प्रवक्ता मोहनलाल गिहारा उनके साथ रहे। वीरेंद्र सचदेवा ने दिल्ली में पूर्व अध्यक्षों केदार नाथ साहनी, मदनलाल खुराना एवं प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा आदि नेताओं के साथ भाजपा को दिल्ली में घर-घर पहुंचाने वाले नेताओं रामभज, ओपी बब्बर, मूलचंद चावला, योगध्यान आहूजा, पीके चांदला, डा. वेदव्यास महाजन, नंदकिशोर गर्ग, गौरी शंकर भारद्वाज, देवेन्द्र शौकिन व राधेश्याम शर्मा का आशीर्वाद लिया। इन नेताओं को भाजपा के रियल हीरो बताते हुए उन्होने संगठन विस्तार में मार्गदर्शन का अनुरोध भी किया। पूर्व मेयर जेपी, प्रवक्ता विनीत गोयन्का के साथ मोरीगेट, मोतियाखान रैन बसरों में रहने वालेां से मुलाकात के बाद उन्होने कहा मोतिया खान रैनबसेरे के बाहर एक महिला को पांच दिन के बच्चे के साथ सोते देख बहुत मन व्यथित हुआ। उन्होने कहा कि हम जल्द मुख्यमंत्री एवं उपराज्यपाल दोनों से बेघरों के लिए रैनबसेरों एवं भोजन की व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग करेगी। इसके बाद उन्होने झंडेवालान मंदिर में पूजा अर्चना कर आर्शीवाद लिया।
काफी दिनों से विराट कोहली BCCI से दादागिरी कर रहे थे, उनकी इस मनमानी को देख भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव जय शाह ने उन पर बड़ी कार्रावाई की। दरअसल, कोहली को जबरन कप्तानी से हटा दिया गया। हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये फैसला सभी BCCI सदस्यों की सहमति से लिया गया। आपको बता दें कि BCCI ने कोहली को 2 दिन का अल्टीमेटम देकर, उनके न चाहते हुए भी, कप्तानी से हटा दिया। उन्होंने इस्तीफा भी नहीं दिया था। उनकी जगह रोहित शर्मा को वनडे की कप्तानी सौंपी गई है। तो वहीं ये भी दावा किया जा रहा है। विराट 2023 में इंडिया में होने वाले वनडे विश्वकप में कप्तानी की इच्छा पाले हुए थे। विराट ने अपनी मर्जी से टी-20 की कप्तानी छोड़ी थी। BCCI वनडे फॉर्मेट के लिए भी उनसे यही उम्मीद कर रहा था। विराट की कप्तानी में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बढ़िया रहा है। टीम ने 95 वनडे मुकाबले खेले, जिसमें से 65 जीते और 27 हारे। तीन टाई रहे या नतीजा नहीं निकल सका। टीम का जीत का ग्राफ 68 फीसद रहा। हालांकि, वे टीम को कोई ICC ट्रॉफी दिलाने में असफल रहे।
काफी दिनों से विराट कोहली BCCI से दादागिरी कर रहे थे, उनकी इस मनमानी को देख भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव जय शाह ने उन पर बड़ी कार्रावाई की। दरअसल, कोहली को जबरन कप्तानी से हटा दिया गया। हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये फैसला सभी BCCI सदस्यों की सहमति से लिया गया। आपको बता दें कि BCCI ने कोहली को दो दिन का अल्टीमेटम देकर, उनके न चाहते हुए भी, कप्तानी से हटा दिया। उन्होंने इस्तीफा भी नहीं दिया था। उनकी जगह रोहित शर्मा को वनडे की कप्तानी सौंपी गई है। तो वहीं ये भी दावा किया जा रहा है। विराट दो हज़ार तेईस में इंडिया में होने वाले वनडे विश्वकप में कप्तानी की इच्छा पाले हुए थे। विराट ने अपनी मर्जी से टी-बीस की कप्तानी छोड़ी थी। BCCI वनडे फॉर्मेट के लिए भी उनसे यही उम्मीद कर रहा था। विराट की कप्तानी में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बढ़िया रहा है। टीम ने पचानवे वनडे मुकाबले खेले, जिसमें से पैंसठ जीते और सत्ताईस हारे। तीन टाई रहे या नतीजा नहीं निकल सका। टीम का जीत का ग्राफ अड़सठ फीसद रहा। हालांकि, वे टीम को कोई ICC ट्रॉफी दिलाने में असफल रहे।
रोहतक। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 23 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कृषि यंत्र निर्माता स्कीम में मशीनों की आपूर्ति हेतु पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत सहकारी समिति, एफपीओ तथा पंचायत द्वारा किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर 80 प्रतिशत अनुदान तथा व्यक्तिगत श्रेणी में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। लाभार्थियों का चयन उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा। चयन उपरांत किसान सूचीबद्ध निर्माताओं से मोल-भाव कर अपनी पसंद के निर्माता से कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृषि उपनिदेशक एवं सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय अथवा टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
रोहतक। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए तेईस जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कृषि यंत्र निर्माता स्कीम में मशीनों की आपूर्ति हेतु पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत सहकारी समिति, एफपीओ तथा पंचायत द्वारा किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर अस्सी प्रतिशत अनुदान तथा व्यक्तिगत श्रेणी में पचास प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। लाभार्थियों का चयन उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा। चयन उपरांत किसान सूचीबद्ध निर्माताओं से मोल-भाव कर अपनी पसंद के निर्माता से कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृषि उपनिदेशक एवं सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय अथवा टोल फ्री नंबर एक हज़ार आठ सौ-एक सौ अस्सी-दो हज़ार एक सौ सत्रह पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
जीरकपुर, 24 सितंबर (निस) कृषि अध्यादेशों के विरोध में बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी ने स्वीटी शर्मा, नवजोत सैनी व स्वर्णजीत कौर के नेतृत्व में मैट्रो शॉपिंग मॉल से पटियाला चौक तक रोष मार्च किया। इस मौके पर स्वीटी शर्मा ने किसान अध्यादेश पर विरोध कर रही कांग्रेस व अकाली दल ने सत्ता में रहते हुए कभी किसानों के हक में फैसला नही किया और आज किसानों पर राजनीति कर रहे हैं। युवा नेता नवजोत सिंह सैनी ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर सच्चे किसान हितैषी हैं तो सभी मंत्रियों ओर विधायकों को लेकर दिल्ली तक मार्च करें और प्रधानमंत्री पर अध्यादेश वापसी का दबाव बनाएं। इस अवसर पर आप नेता गुरप्रीत सिंह, विकास सैनी, सविता पुरी, डीके बंसल समेत कई नेता मौजूद थे।
जीरकपुर, चौबीस सितंबर कृषि अध्यादेशों के विरोध में बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी ने स्वीटी शर्मा, नवजोत सैनी व स्वर्णजीत कौर के नेतृत्व में मैट्रो शॉपिंग मॉल से पटियाला चौक तक रोष मार्च किया। इस मौके पर स्वीटी शर्मा ने किसान अध्यादेश पर विरोध कर रही कांग्रेस व अकाली दल ने सत्ता में रहते हुए कभी किसानों के हक में फैसला नही किया और आज किसानों पर राजनीति कर रहे हैं। युवा नेता नवजोत सिंह सैनी ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अगर सच्चे किसान हितैषी हैं तो सभी मंत्रियों ओर विधायकों को लेकर दिल्ली तक मार्च करें और प्रधानमंत्री पर अध्यादेश वापसी का दबाव बनाएं। इस अवसर पर आप नेता गुरप्रीत सिंह, विकास सैनी, सविता पुरी, डीके बंसल समेत कई नेता मौजूद थे।
लखनऊ। लुआक्टा का प्रतिनिधिमंडल लुआक्टा (Luacta) अध्यक्ष डा मनोज पांडेय एवं महामंत्री डा अंशु केडिया के नेतृत्व में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय से उनके आवास पर मिला एवं शिक्षक समस्यायों, निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं निदेशालय को प्रयागराज से स्थानांतरित कर लखनऊ में किये जाने, वित्तीय वर्ष के अवसान की और अग्रसर होने एवं एरियर की ग्रांट अवमुक्त न होने सहित कई विन्दुओं पर वार्ता की तथा ज्ञापन सौंपा। मर्द और औरत बराबर, फिर औरत कमज़ोर कैसे? उच्च मंत्री ने वार्ता के सभी बिंदुओं को ध्यान से सुना एवं सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया,एवं शिक्षक संगठन के साथ शीघ्र ही बैठक बुलाये जाने की बात कही। प्रतिनिधि मंडल में लुआक्टा अध्यक्ष एवं महामंत्री के अतिरिक्त उपाध्यक्ष डा तिर्मल सिह, कोषाध्यक्ष डा कीर्ति प्रकाश तिवारी, संयुक्त सचिव डा मोहिसिन रजा, कला प्रतिनिधि डा हबीब, डा रामजी पाठक, डा ताज मोहहमद, डा सन्तोष सिह, डा सन्निवेश मिश्रा, आदि लोग शामिल रहे।
लखनऊ। लुआक्टा का प्रतिनिधिमंडल लुआक्टा अध्यक्ष डा मनोज पांडेय एवं महामंत्री डा अंशु केडिया के नेतृत्व में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय से उनके आवास पर मिला एवं शिक्षक समस्यायों, निदेशालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं निदेशालय को प्रयागराज से स्थानांतरित कर लखनऊ में किये जाने, वित्तीय वर्ष के अवसान की और अग्रसर होने एवं एरियर की ग्रांट अवमुक्त न होने सहित कई विन्दुओं पर वार्ता की तथा ज्ञापन सौंपा। मर्द और औरत बराबर, फिर औरत कमज़ोर कैसे? उच्च मंत्री ने वार्ता के सभी बिंदुओं को ध्यान से सुना एवं सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया,एवं शिक्षक संगठन के साथ शीघ्र ही बैठक बुलाये जाने की बात कही। प्रतिनिधि मंडल में लुआक्टा अध्यक्ष एवं महामंत्री के अतिरिक्त उपाध्यक्ष डा तिर्मल सिह, कोषाध्यक्ष डा कीर्ति प्रकाश तिवारी, संयुक्त सचिव डा मोहिसिन रजा, कला प्रतिनिधि डा हबीब, डा रामजी पाठक, डा ताज मोहहमद, डा सन्तोष सिह, डा सन्निवेश मिश्रा, आदि लोग शामिल रहे।
रेलवे यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठक की जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि वे निजीकरण और निगमीकरण का पूरी तरह से विरोध करते हैं। लखनऊ रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण के विरोध में उसी के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। रेलवे यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठक की जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि वे निजीकरण और निगमीकरण का पूरी तरह से विरोध करते हैं। उनका आरोप है कि मोदी सरकार रेलवे को टुकड़े-टुकड़े में बेच रही है। वे किसी भी कीमत पर भारतीय रेल को अडानी-अंबानी की रेल नहीं बनने देंगे। इसके लिए वे मरते दम तक आंदोलन करते रहेंगे। रेलवे से जुड़े सभी संगठनों ने निजीकरण के विरोध में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रेलवे से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान किया है। ये आंदोलन 19 सितम्बर तक जारी रहेगा। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के कार्यकारी अध्यक्ष ब्रजेश भट्ट ने आज कविता के माध्यम से अपने परिवार का दर्द सरकार के सामने प्रकट किया है। ब्रजेश ने बताया कि किस तरह कर्मचारियों के घरों के लोग पूछ रहे हैं कि उनके पिता और उनके पति छंटनी में जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अब रेलवे का निजीकरण हो जाएगा, तो पेंशन बंद हो जाएगी। पढ़े -लिखे युवाओं को रोजगार के नाम पर कम वेतन पर काम करना पड़ेगा। इसलिए न केवल उनका बल्कि पूरे समाज का भारी नुकसान होगा। यही वजह है कि रेलवे के सभी कर्मचारी आंदोलन करने को विवश हैं। ट्रेन की फोटो (सोशल मीडिया) एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के संयुक्त मंत्री नवीन कुमार मिश्रा ने कहा कि कि प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि वे रेलवे को बिकने नहीं देंगे। आज वो बेच रहे हैं। ट्रेन और स्टेशन के साथ रेलवे को टुकड़े-टुकड़े में बेच रहे हैं। आज रेलवे कर्मचारियों की बहुत सी समस्याएं हैं। युवाओं की न्यूे पेंशन स्कीम की बातें हैं। सरकार सांसद-विधायकों का पेंशन ले लेगी। हमारी पेंशन नहीं देगी। इसलिए लोग रेल को बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। रेल रहेगी, तभी देश रहेगा। इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे उसे उठाया जाएगा। पीएम नरेन्द्र मोदी की फोटो(सोशल मीडिया) दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
रेलवे यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठक की जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि वे निजीकरण और निगमीकरण का पूरी तरह से विरोध करते हैं। लखनऊ रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण के विरोध में उसी के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। रेलवे यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठक की जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि वे निजीकरण और निगमीकरण का पूरी तरह से विरोध करते हैं। उनका आरोप है कि मोदी सरकार रेलवे को टुकड़े-टुकड़े में बेच रही है। वे किसी भी कीमत पर भारतीय रेल को अडानी-अंबानी की रेल नहीं बनने देंगे। इसके लिए वे मरते दम तक आंदोलन करते रहेंगे। रेलवे से जुड़े सभी संगठनों ने निजीकरण के विरोध में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रेलवे से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान किया है। ये आंदोलन उन्नीस सितम्बर तक जारी रहेगा। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष ब्रजेश भट्ट ने आज कविता के माध्यम से अपने परिवार का दर्द सरकार के सामने प्रकट किया है। ब्रजेश ने बताया कि किस तरह कर्मचारियों के घरों के लोग पूछ रहे हैं कि उनके पिता और उनके पति छंटनी में जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अब रेलवे का निजीकरण हो जाएगा, तो पेंशन बंद हो जाएगी। पढ़े -लिखे युवाओं को रोजगार के नाम पर कम वेतन पर काम करना पड़ेगा। इसलिए न केवल उनका बल्कि पूरे समाज का भारी नुकसान होगा। यही वजह है कि रेलवे के सभी कर्मचारी आंदोलन करने को विवश हैं। ट्रेन की फोटो एनई रेलवे मजदूर यूनियन के संयुक्त मंत्री नवीन कुमार मिश्रा ने कहा कि कि प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि वे रेलवे को बिकने नहीं देंगे। आज वो बेच रहे हैं। ट्रेन और स्टेशन के साथ रेलवे को टुकड़े-टुकड़े में बेच रहे हैं। आज रेलवे कर्मचारियों की बहुत सी समस्याएं हैं। युवाओं की न्यूे पेंशन स्कीम की बातें हैं। सरकार सांसद-विधायकों का पेंशन ले लेगी। हमारी पेंशन नहीं देगी। इसलिए लोग रेल को बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। रेल रहेगी, तभी देश रहेगा। इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे उसे उठाया जाएगा। पीएम नरेन्द्र मोदी की फोटो दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
चंडीगढ़ - लोकसभा सीट के लिए चंडीगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार पवन कुमार बंसल ने सेक्टर-36 की मेन मार्किट में अपना डोर टू डोर प्रचार पद यात्रा की और यहां की बूथ मार्किट व एससीओ के दुकानदारों से कांग्रेस के पक्ष में वोट देने की अपील की। इस दौरान उन्होंने यहां के दुकानदारों से उनकी समस्याओं को सुना। यहां से संबधित समस्या से पवन बंसल को अवगत करवाते मार्किट वेलफयर एसोसियेशन के चेयरमैन आर के चौधरी ने सबसे बड़ी समस्या मार्किट में पार्किंग की बताई, यहां पर रोजाना भारी संख्या में वाहन पार्क किए जाते है, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यहां गर्ल्स कालेज भी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कम है। इस पर पवन कुमार बंसल ने उन्हें आश्वस्त किया कि सांसद बन जाने के बाद इन बड़ी समस्याओं से निजात दिलवाएंगे। इस दौरान वे यहां पहली मर्तबा मतदान करने वालों से भी मिले।
चंडीगढ़ - लोकसभा सीट के लिए चंडीगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार पवन कुमार बंसल ने सेक्टर-छत्तीस की मेन मार्किट में अपना डोर टू डोर प्रचार पद यात्रा की और यहां की बूथ मार्किट व एससीओ के दुकानदारों से कांग्रेस के पक्ष में वोट देने की अपील की। इस दौरान उन्होंने यहां के दुकानदारों से उनकी समस्याओं को सुना। यहां से संबधित समस्या से पवन बंसल को अवगत करवाते मार्किट वेलफयर एसोसियेशन के चेयरमैन आर के चौधरी ने सबसे बड़ी समस्या मार्किट में पार्किंग की बताई, यहां पर रोजाना भारी संख्या में वाहन पार्क किए जाते है, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यहां गर्ल्स कालेज भी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कम है। इस पर पवन कुमार बंसल ने उन्हें आश्वस्त किया कि सांसद बन जाने के बाद इन बड़ी समस्याओं से निजात दिलवाएंगे। इस दौरान वे यहां पहली मर्तबा मतदान करने वालों से भी मिले।
स्वरा भास्कर और फिल्ममेकर अशोक पंडित के बीच ट्विटर पर विवाद गहराता जा रहा है। दोनों एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। एक ओर जहां स्वरा भास्कर ने अशोक पंडित को अंकल कहा तो पलट कर अशोक पंडित ने स्वरा भास्कर को आंटी बता दिया। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
स्वरा भास्कर और फिल्ममेकर अशोक पंडित के बीच ट्विटर पर विवाद गहराता जा रहा है। दोनों एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। एक ओर जहां स्वरा भास्कर ने अशोक पंडित को अंकल कहा तो पलट कर अशोक पंडित ने स्वरा भास्कर को आंटी बता दिया। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
एसजेएम (SJM) ने रूसी टीके, स्पुतनिक वी (Sputnik V) के स्थानीय उत्पादन को शुरू करने के लिए विनियामक मंजूरी प्रदान करने की मांग की. कोरोना से लड़ने के लिए एक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम की मांग के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने शुक्रवार को सरकार से सभी संभावित निर्माताओं को व्यापार रहस्य सहित टीकों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करने का मांग की. उन्होंने कहा कि दोनों टीकों - कोवाक्सिन और कोविशिल्ड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे, जो वर्तमान में भारत में उत्पादित किए जा रहे हैं. एसजेएम (SJM) ने रूसी टीके, स्पुतनिक वी के स्थानीय उत्पादन को शुरू करने के लिए विनियामक मंजूरी प्रदान करने की भी मांग की और सरकार से कोविड -19 दवाओं और टीकों की कीमतों पर एक सीलिंग लगाने का आग्रह किया, जो उत्पादन-आधारित सूत्र की लागत को ध्यान में रखते हैं. उनका कहना है कि यूनिवर्सल कवरेज तभी हो सकता है जब सरकार रॉयल्टी दिए बिना टीके की खरीद करती है. "एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक, अश्वनी महाजन ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की हालिया टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, "ऐसे समय में जब बड़ी आबादी की सुरक्षा के लिए टीकाकरण को एकमात्र विकल्प माना जाता है, ऐसे में टीकों और दवाओं तक समान पहुंच को अवरुद्ध करने का प्रयास करना मानवता के खिलाफ है. "हालांकि विकसित देश, जो (पहले) भी कोविड -19 टीकों और दवाओं के लिए आईपीआर छूट को रोकने की कोशिश कर रहे थे, अब उन्होंने अपने रुख में संशोधन किया और डब्ल्यूटीओ में भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की है. उन्होंने एक बार फिर रेमेडिसिविर, टोसीलिज़ुमाब जैसी दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 'सरकारी उपयोग लाइसेंस' या 'अनिवार्य लाइसेंस' जारी करने की बात कही गई, जिसका इस्तेमाल कोविड -19 रोगियों के इलाज के लिए किया जा रहा है.
एसजेएम ने रूसी टीके, स्पुतनिक वी के स्थानीय उत्पादन को शुरू करने के लिए विनियामक मंजूरी प्रदान करने की मांग की. कोरोना से लड़ने के लिए एक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम की मांग के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोगी स्वदेशी जागरण मंच ने शुक्रवार को सरकार से सभी संभावित निर्माताओं को व्यापार रहस्य सहित टीकों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करने का मांग की. उन्होंने कहा कि दोनों टीकों - कोवाक्सिन और कोविशिल्ड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे, जो वर्तमान में भारत में उत्पादित किए जा रहे हैं. एसजेएम ने रूसी टीके, स्पुतनिक वी के स्थानीय उत्पादन को शुरू करने के लिए विनियामक मंजूरी प्रदान करने की भी मांग की और सरकार से कोविड -उन्नीस दवाओं और टीकों की कीमतों पर एक सीलिंग लगाने का आग्रह किया, जो उत्पादन-आधारित सूत्र की लागत को ध्यान में रखते हैं. उनका कहना है कि यूनिवर्सल कवरेज तभी हो सकता है जब सरकार रॉयल्टी दिए बिना टीके की खरीद करती है. "एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक, अश्वनी महाजन ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की हालिया टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, "ऐसे समय में जब बड़ी आबादी की सुरक्षा के लिए टीकाकरण को एकमात्र विकल्प माना जाता है, ऐसे में टीकों और दवाओं तक समान पहुंच को अवरुद्ध करने का प्रयास करना मानवता के खिलाफ है. "हालांकि विकसित देश, जो भी कोविड -उन्नीस टीकों और दवाओं के लिए आईपीआर छूट को रोकने की कोशिश कर रहे थे, अब उन्होंने अपने रुख में संशोधन किया और डब्ल्यूटीओ में भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की है. उन्होंने एक बार फिर रेमेडिसिविर, टोसीलिज़ुमाब जैसी दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 'सरकारी उपयोग लाइसेंस' या 'अनिवार्य लाइसेंस' जारी करने की बात कही गई, जिसका इस्तेमाल कोविड -उन्नीस रोगियों के इलाज के लिए किया जा रहा है.
वाणिज्य संवाददाता नई दिल्ली। प्रिंट वीक के अंतर्राष्ट्रीय पब्लिशर्स, हेयमार्पिट मीडिया द्वारा आयोजित प्रिंट वीक 2010 पुरस्कार के लिए वर्ष की प्रिंट वीक कंपनी के रूप में इंटरनेशनल प्रिंट-ओ-पैक लिमिटेड (आईपीपी) को चुना गया। इस समारोह में कोमार्ट, गोपसन्स, मनीपाल, प्रगति, रेपलिका, सिल्वरप्वाइंट, स्पेंटा, पार्पसन्स और थामसन प्रेस जैसी जानी-मानी प्रेस और प्रिंट कंपनियों ने भाग लिया था। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित किया गया। आईपीपी ग्लोबल एफएमसीजी और पब्लिशिंग कंपनियों के लिए बेहतरीन पेपर बोर्ड पैकेजिंग और प्रिंटिंग समाधान उपलब्ध कराता है। आईपीपी के कार्यपालक निदेशक ऋषभ सिंघवी ने कहा कि हमें बेहद खुशी है कि हमने वर्ष की प्रिंट वीक कंपनी का पुरस्कार प्राप्त किया है और हम अपने पिछले कार्यनिष्पादन को निरंतर बेहतर बनाने का प्रयास करने रहेंगे। हम अपनी सेवाओं में और अधिक सुधार लाने, ग्राहकों को संतुष्ट करने और वर्ष-दर-वर्ष पर्याप्त विकास करने के लिए अभिनव, नई तकनीक और मानव संसाधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। आईपीपी ने वित्त वर्ष 2010 में 210 करोड़ रुपये की बिक्री की है। कंपनी का प्रबंधन अब एक समर्पित व्यावसायिक दल के हाथ में है जिन्हें संबंधित तकनीक की पृष्ठभूमि और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त है।
वाणिज्य संवाददाता नई दिल्ली। प्रिंट वीक के अंतर्राष्ट्रीय पब्लिशर्स, हेयमार्पिट मीडिया द्वारा आयोजित प्रिंट वीक दो हज़ार दस पुरस्कार के लिए वर्ष की प्रिंट वीक कंपनी के रूप में इंटरनेशनल प्रिंट-ओ-पैक लिमिटेड को चुना गया। इस समारोह में कोमार्ट, गोपसन्स, मनीपाल, प्रगति, रेपलिका, सिल्वरप्वाइंट, स्पेंटा, पार्पसन्स और थामसन प्रेस जैसी जानी-मानी प्रेस और प्रिंट कंपनियों ने भाग लिया था। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित किया गया। आईपीपी ग्लोबल एफएमसीजी और पब्लिशिंग कंपनियों के लिए बेहतरीन पेपर बोर्ड पैकेजिंग और प्रिंटिंग समाधान उपलब्ध कराता है। आईपीपी के कार्यपालक निदेशक ऋषभ सिंघवी ने कहा कि हमें बेहद खुशी है कि हमने वर्ष की प्रिंट वीक कंपनी का पुरस्कार प्राप्त किया है और हम अपने पिछले कार्यनिष्पादन को निरंतर बेहतर बनाने का प्रयास करने रहेंगे। हम अपनी सेवाओं में और अधिक सुधार लाने, ग्राहकों को संतुष्ट करने और वर्ष-दर-वर्ष पर्याप्त विकास करने के लिए अभिनव, नई तकनीक और मानव संसाधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। आईपीपी ने वित्त वर्ष दो हज़ार दस में दो सौ दस करोड़ रुपये की बिक्री की है। कंपनी का प्रबंधन अब एक समर्पित व्यावसायिक दल के हाथ में है जिन्हें संबंधित तकनीक की पृष्ठभूमि और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त है।
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह ने 2008 में हुए चयन विवाद पर पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का साथ देते हुए कहा कि धोनी जो भी है, वह अपने निष्पक्ष विचारों के कारण है। इस चयन विवाद में आरपी सिंह की जगह टीम में हरफनमौला इरफान पठान को शामिल किया गया था। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि 2008 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के लिए धोनी चाहते थे कि टीम में आर. पी. सिंह का चयन हो लेकिन चयनकर्ताओं ने पठान को तरजीह दी। भारतीय कप्तान ने तब कहा था कि चयन बैठक की बात बाहर आना 'अपमानजनक' है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है धोनी ने ऐसे खिलाड़ियों का साथ दिया जिसके बारे में वह समझते थे कि उनकी योजना को मैदान में बेहतर तरीके से उतार सकता है' उन्होंने कहा, 'धोनी आज धोनी इस लिए है क्योंकि वह अपने फैसले को लेकर निष्पक्ष थे। उनके विचार और फैसले पक्षपातरहित थे। मैं जितना खेलना चाहिए था, उतना नहीं खेल सका क्योंकि शायद मेरी रफ्तार कम हो गई और स्विंग भी नहीं रही। बाकी सब गौण है। उस समय सुधार कर लेता तो और खेल पाता। मैने हालांकि जो कुछ हासिल किया, मैं उससे खुश हूं। ' (भाषा)
नई दिल्ली। भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह ने दो हज़ार आठ में हुए चयन विवाद पर पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का साथ देते हुए कहा कि धोनी जो भी है, वह अपने निष्पक्ष विचारों के कारण है। इस चयन विवाद में आरपी सिंह की जगह टीम में हरफनमौला इरफान पठान को शामिल किया गया था। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि दो हज़ार आठ में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के लिए धोनी चाहते थे कि टीम में आर. पी. सिंह का चयन हो लेकिन चयनकर्ताओं ने पठान को तरजीह दी। भारतीय कप्तान ने तब कहा था कि चयन बैठक की बात बाहर आना 'अपमानजनक' है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है धोनी ने ऐसे खिलाड़ियों का साथ दिया जिसके बारे में वह समझते थे कि उनकी योजना को मैदान में बेहतर तरीके से उतार सकता है' उन्होंने कहा, 'धोनी आज धोनी इस लिए है क्योंकि वह अपने फैसले को लेकर निष्पक्ष थे। उनके विचार और फैसले पक्षपातरहित थे। मैं जितना खेलना चाहिए था, उतना नहीं खेल सका क्योंकि शायद मेरी रफ्तार कम हो गई और स्विंग भी नहीं रही। बाकी सब गौण है। उस समय सुधार कर लेता तो और खेल पाता। मैने हालांकि जो कुछ हासिल किया, मैं उससे खुश हूं। '
भारत और श्रीलंका (IND vs SL) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबला ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम, तिरुवनंतपुरम में खेला जा रहा है। इस मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने उपकप्तान कप्तान हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) को ही प्लेइंग 11 से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ऐसे में आइये जानते हैं कि आखिर क्यों हार्दिक प्लेइंग 11 से ड्रॉप किये गए हैं। बता दें कि इस मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। दरअसल, भारत-श्रीलंका के बीच (IND vs SL) तीन मैचों की वनडे सीरीज का अंतिम और तीसरा मैच तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। सीरीज के पहले दो मुकाबले को टीम इंडिया ने जीतकर 2-0 की बढ़त बना रखी है। ऐसे में ये मुकाबला मात्र औचारिक है। बस श्रीलंका क्लीन स्वीप होने से बचना चाहेगी। वहीं, तीसरे मुकाबले में कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) को प्लेइंग-XI से बाहर कर दिया है। टॉस के दौरान हिटमैन ने कहा कि हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) को आराम दिया गया है और उनकी जगह सूर्यकुमार यादव को टीम में शामिल किया गया है। यही कारण है कि हार्दिक को बाहर होना पड़ा है। बता दें कि दो मैचों में हार्दिक कुछ कमाल भी नहीं कर पाए थे। उन्होंने दो मैचों में 1 विकेट लेने के साथ मात्र 50 रन ही बनाए। गौरतलब है कि भारत-श्रीलंका के बीच (IND vs SL) खेले जा रहे तीसरे वनडे मैच में टीम इंडिया दो बदलाव के साथ खेल रही है। हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) को आराम दिया गया है और उनकी जगह सूर्यकुमार यादव को टीम में शामिल किया गया है। साथ ही टॉस के दौरान हिटमैन ने ये भी बताया कि आज के मैच के लिए उमरान मलिक (Umran Malik) को भी आराम दिया गया है और उनकी जगह टीम में वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया है।
भारत और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबला ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम, तिरुवनंतपुरम में खेला जा रहा है। इस मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने उपकप्तान कप्तान हार्दिक पांड्या को ही प्लेइंग ग्यारह से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ऐसे में आइये जानते हैं कि आखिर क्यों हार्दिक प्लेइंग ग्यारह से ड्रॉप किये गए हैं। बता दें कि इस मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। दरअसल, भारत-श्रीलंका के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का अंतिम और तीसरा मैच तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। सीरीज के पहले दो मुकाबले को टीम इंडिया ने जीतकर दो-शून्य की बढ़त बना रखी है। ऐसे में ये मुकाबला मात्र औचारिक है। बस श्रीलंका क्लीन स्वीप होने से बचना चाहेगी। वहीं, तीसरे मुकाबले में कप्तान रोहित शर्मा ने हार्दिक पांड्या को प्लेइंग-XI से बाहर कर दिया है। टॉस के दौरान हिटमैन ने कहा कि हार्दिक पांड्या को आराम दिया गया है और उनकी जगह सूर्यकुमार यादव को टीम में शामिल किया गया है। यही कारण है कि हार्दिक को बाहर होना पड़ा है। बता दें कि दो मैचों में हार्दिक कुछ कमाल भी नहीं कर पाए थे। उन्होंने दो मैचों में एक विकेट लेने के साथ मात्र पचास रन ही बनाए। गौरतलब है कि भारत-श्रीलंका के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे मैच में टीम इंडिया दो बदलाव के साथ खेल रही है। हार्दिक पांड्या को आराम दिया गया है और उनकी जगह सूर्यकुमार यादव को टीम में शामिल किया गया है। साथ ही टॉस के दौरान हिटमैन ने ये भी बताया कि आज के मैच के लिए उमरान मलिक को भी आराम दिया गया है और उनकी जगह टीम में वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया है।
22 फरवरी, (CRICKETNMORE)। श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली टी20 ट्राई सीरीज के लिए एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली सिलेक्शन कमेटी इस सप्ताह के अंत में भारतीय टीम का एलान करेगी। इस सीरीज में कप्तान विराट कोहली समेत कई खिलाड़ियों को आराम दिया जा सकता है। यह ट्राई सीरीज श्रीलंका की मेजबानी में 6 मार्च से शुरु होगी और इसका फाइनल मुकाबला 18 फरवरी को खेला जाएगा। साउथ अफ्रीका के दौरे पर सभी मुकाबले खेलने वाले कोहली को इस ट्राई सीरीज में आराम दिया जा सकता है। लेकिन वह छुट्टी लेंगे या नहीं ये फैसला उन्हें ही करना होगा। कोहली के अलावा सिलेक्टर्स तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार औऱ जसप्रीत बुमराह को इस सीरीज में आराम देने पर फैसला ले सकते हैं। बता दें ये दोनों खिलाड़ी भी साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीनों फॉर्मेट मे टीम इंडिया का हिस्सा थे।
बाईस फरवरी, । श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली टीबीस ट्राई सीरीज के लिए एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली सिलेक्शन कमेटी इस सप्ताह के अंत में भारतीय टीम का एलान करेगी। इस सीरीज में कप्तान विराट कोहली समेत कई खिलाड़ियों को आराम दिया जा सकता है। यह ट्राई सीरीज श्रीलंका की मेजबानी में छः मार्च से शुरु होगी और इसका फाइनल मुकाबला अट्ठारह फरवरी को खेला जाएगा। साउथ अफ्रीका के दौरे पर सभी मुकाबले खेलने वाले कोहली को इस ट्राई सीरीज में आराम दिया जा सकता है। लेकिन वह छुट्टी लेंगे या नहीं ये फैसला उन्हें ही करना होगा। कोहली के अलावा सिलेक्टर्स तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार औऱ जसप्रीत बुमराह को इस सीरीज में आराम देने पर फैसला ले सकते हैं। बता दें ये दोनों खिलाड़ी भी साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीनों फॉर्मेट मे टीम इंडिया का हिस्सा थे।
आज (14मार्च 2022) से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है. इस चरण के दौरान बजटीय प्रस्तावों के लिए संसद की मंजूरी लेना और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए बजट पेश करना सरकार के एजेंडा में शीर्ष पर हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जम्मू-कश्मीर के लिए याज यानी सोमवार को बजट पेश करेंगी और सदन में इस पर दोपहर के भोजन के बाद चर्चा की जा सकती है. बजट सत्र का दूसरा चरण भी हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है. इस चरण में विपक्ष बेरोजगारी और कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर में कटौती जैसे मुद्दों को लेकर भी संसद में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकते है. Dear Readers, As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
आज से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है. इस चरण के दौरान बजटीय प्रस्तावों के लिए संसद की मंजूरी लेना और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए बजट पेश करना सरकार के एजेंडा में शीर्ष पर हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जम्मू-कश्मीर के लिए याज यानी सोमवार को बजट पेश करेंगी और सदन में इस पर दोपहर के भोजन के बाद चर्चा की जा सकती है. बजट सत्र का दूसरा चरण भी हंगामेदार होने की संभावना जताई जा रही है. इस चरण में विपक्ष बेरोजगारी और कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर में कटौती जैसे मुद्दों को लेकर भी संसद में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकते है. Dear Readers, As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
रांची, झारखंड में पूर्वी सिंहभूम के पोटका के पूर्व विधायक सनातन मांझी का आज निधन हो गया है। श्री मांझी का कोलकाता मेडिकल रिसर्च इन्स्टिट्यूट में इलाज चल रहा था। वह कोरोना वायरस से पीड़ित थे और आज अचानक उनका इलाज के दौरान निधन हो गया। इस बीच मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पोटका के पूर्व विधायक श्री मांझी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है । उन्होंने कहा कि उनके निधन से झारखंड ने एक कुशल और अच्छे राजनीतिज्ञ को खो दिया है । उनका व्यक्तित्व और विचार राज्य वासियों के लिए प्रेरणा का काम करता था । वे समाज के बेहतर मार्गदर्शक थे । मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति देने की कामना ईश्वर से की है । केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान ने भी श्री मांझी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
रांची, झारखंड में पूर्वी सिंहभूम के पोटका के पूर्व विधायक सनातन मांझी का आज निधन हो गया है। श्री मांझी का कोलकाता मेडिकल रिसर्च इन्स्टिट्यूट में इलाज चल रहा था। वह कोरोना वायरस से पीड़ित थे और आज अचानक उनका इलाज के दौरान निधन हो गया। इस बीच मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पोटका के पूर्व विधायक श्री मांझी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है । उन्होंने कहा कि उनके निधन से झारखंड ने एक कुशल और अच्छे राजनीतिज्ञ को खो दिया है । उनका व्यक्तित्व और विचार राज्य वासियों के लिए प्रेरणा का काम करता था । वे समाज के बेहतर मार्गदर्शक थे । मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति देने की कामना ईश्वर से की है । केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान ने भी श्री मांझी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
Latehar: छिपादोहर थाना क्षेत्र के लात गांव में बीती रात्रि पूर्व नक्सली कमांडर जीतन सिंह खरवार की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. सुदूरवर्ती इलाके में घटना होने के कारण तत्काल इसकी सूचना पुलिस को नहीं मिल पाई. शुक्रवार को सूचना मिलने पर छिपादोहर थाना पुलिस मौके पर रवाना हो गई है. हालांकि, फिलहाल पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि मृतक खरवार ही है. पुलिस का कहना है कि छानबीन के बाद ही पुष्टि की जा सकती है. हालांकि, ग्रामीण बता रहे हैं कि मृतक जीतन सिंह खरवार ही है. घटना के बाद से गांव में सनसनी है. घटना सामने आने पर ग्रामीणों ने किसी तरह इसकी सूचना छिपादोहर थाना पुलिस को दी.
Latehar: छिपादोहर थाना क्षेत्र के लात गांव में बीती रात्रि पूर्व नक्सली कमांडर जीतन सिंह खरवार की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. सुदूरवर्ती इलाके में घटना होने के कारण तत्काल इसकी सूचना पुलिस को नहीं मिल पाई. शुक्रवार को सूचना मिलने पर छिपादोहर थाना पुलिस मौके पर रवाना हो गई है. हालांकि, फिलहाल पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि मृतक खरवार ही है. पुलिस का कहना है कि छानबीन के बाद ही पुष्टि की जा सकती है. हालांकि, ग्रामीण बता रहे हैं कि मृतक जीतन सिंह खरवार ही है. घटना के बाद से गांव में सनसनी है. घटना सामने आने पर ग्रामीणों ने किसी तरह इसकी सूचना छिपादोहर थाना पुलिस को दी.
मखाना में पोटैशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप में फायदेमंद साबित होता है। जानकारों की मानें तो पोटेशियम उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने में सहयोग करता है। इसके लिए उक्त रक्तचाप के मरीजों को रोजाना मखाने का सेवन करना चाहिए। मखाना में पोटैशियम पाया जाता है, जो उच्च रक्तचाप में फायदेमंद साबित होता है। जानकारों की मानें तो पोटेशियम उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने में सहयोग करता है। इसके लिए उक्त रक्तचाप के मरीजों को रोजाना मखाने का सेवन करना चाहिए। आप स्नैक्स के रूप में मखाने का सेवन कर सकते हैं। अगर आप मोटापा से परेशान हैं और बढ़ते वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो रोजाना मखाना को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। बॉलीवुड अदाकारा करीना कपूर भी वेट लॉस के लिए मखाना का सेवन करती हैं। इस बारे में उनका कहना है कि जब कभी उन्हें भूख लगती है, तो भी मखाना का सेवन करते हैं। शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आप अपनी डाइट में मखानों का सेवन कर सकते हैं। इसमें anti-diabetic के गुण पाए जाते हैं, चीन से शुगर कंट्रोल में रहता है।
मखाना में पोटैशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप में फायदेमंद साबित होता है। जानकारों की मानें तो पोटेशियम उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने में सहयोग करता है। इसके लिए उक्त रक्तचाप के मरीजों को रोजाना मखाने का सेवन करना चाहिए। मखाना में पोटैशियम पाया जाता है, जो उच्च रक्तचाप में फायदेमंद साबित होता है। जानकारों की मानें तो पोटेशियम उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने में सहयोग करता है। इसके लिए उक्त रक्तचाप के मरीजों को रोजाना मखाने का सेवन करना चाहिए। आप स्नैक्स के रूप में मखाने का सेवन कर सकते हैं। अगर आप मोटापा से परेशान हैं और बढ़ते वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो रोजाना मखाना को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। बॉलीवुड अदाकारा करीना कपूर भी वेट लॉस के लिए मखाना का सेवन करती हैं। इस बारे में उनका कहना है कि जब कभी उन्हें भूख लगती है, तो भी मखाना का सेवन करते हैं। शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आप अपनी डाइट में मखानों का सेवन कर सकते हैं। इसमें anti-diabetic के गुण पाए जाते हैं, चीन से शुगर कंट्रोल में रहता है।
आप सभी जानते ही हैं कि इन दिनों कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर लगातार सुर्ख़ियों में चल रहे हैं और दोनों के बीच के मतभेद को तो सभी जानते ही हैं. दोनों के झगड़े के बारे में सभी को बहुत अच्छे से पता है लेकिन अब दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो गई है. जी हाँ, ऐसा ही नजर आ रहा है. आप सभी को बता दें कि हाल ही में सुनील ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा कर दिया जिसके बाद अफवाहों के गलियारों में बात तेजी से फैल गई कि जल्द ही इम दोनों के बीच की दुश्मनी खत्म हो सकती है. जी हाँ, अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो हम ऐसा कह रहे हैं. जी दरअसल, हाल ही में कपिल ने अपने ट्विटर एकाउंट पर एक पोस्ट की थी जिसमें उन्होंने अपनी मां को उनके जन्मदिन की बधाई दी थी और उनकी इस पोस्ट के शेयर होते ही लोगों की बधाईयों और लाइक्स का दौर शुरू हो गया. वहीं कपिल की मां को कीकू शारदा से लेकर पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा तक ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दी और इस दौरान कपिल की इस पोस्ट पर सुनील ग्रोवर ने भी उनकी मां को विश कर दिया. जी हाँ, अब उनकी विश के बाद यह कयास लगाए जा रहा है कि अब सुनील भी इस लड़ाई को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहते हैं. जी हाँ, दोनों के बीच अब सब कुछ ठीक होता जा रहा है और जल्द ही दोनों साथ नजर आ सकते हैं.
आप सभी जानते ही हैं कि इन दिनों कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर लगातार सुर्ख़ियों में चल रहे हैं और दोनों के बीच के मतभेद को तो सभी जानते ही हैं. दोनों के झगड़े के बारे में सभी को बहुत अच्छे से पता है लेकिन अब दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो गई है. जी हाँ, ऐसा ही नजर आ रहा है. आप सभी को बता दें कि हाल ही में सुनील ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा कर दिया जिसके बाद अफवाहों के गलियारों में बात तेजी से फैल गई कि जल्द ही इम दोनों के बीच की दुश्मनी खत्म हो सकती है. जी हाँ, अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो हम ऐसा कह रहे हैं. जी दरअसल, हाल ही में कपिल ने अपने ट्विटर एकाउंट पर एक पोस्ट की थी जिसमें उन्होंने अपनी मां को उनके जन्मदिन की बधाई दी थी और उनकी इस पोस्ट के शेयर होते ही लोगों की बधाईयों और लाइक्स का दौर शुरू हो गया. वहीं कपिल की मां को कीकू शारदा से लेकर पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा तक ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दी और इस दौरान कपिल की इस पोस्ट पर सुनील ग्रोवर ने भी उनकी मां को विश कर दिया. जी हाँ, अब उनकी विश के बाद यह कयास लगाए जा रहा है कि अब सुनील भी इस लड़ाई को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहते हैं. जी हाँ, दोनों के बीच अब सब कुछ ठीक होता जा रहा है और जल्द ही दोनों साथ नजर आ सकते हैं.
अमेरिका में गैरी हार्मन (31) नाम के व्यक्ति की डॉलर से भरे बाथटब में बैठने की तस्वीर सामने आने के बाद हुई जांच में पता चला कि उसने सरकार की डिवाइस से 713 बिटकॉइन चुराए थे। इनकी कीमत अब करीब 165 करोड़ रुपये है। ये बिटकॉइन एक हार्डवेयर वॉलेट में सबूत के लिए रखे थे। मामले में गैरी को जनवरी में दोषी ठहराने के बाद वाशिंगटन डीसी में जिला न्यायाधीश ने गुरुवार को 4 साल की सजा सुनाई है। क्या है बाथटब का मामला? गैरी ने अप्रैल, 2020 में एक आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) साक्ष्य लॉकर में एक डिवाइस में रखे बिटकॉइन वॉलेट को लेने के लिए अपने भाई लैरी हार्मन की साख का उपयोग किया और 713 बिटकॉइन चुराए, जिसकी कीमत तब लगभग 40 करोड़ रुपये थी। IRS के उपकरण से बिटकॉइन के गायब होने के बाद एजेंट्स को गैरी के फोन पर एक तस्वीर मिली, जिसमें वह एक नाइट क्लब में नकदी से भरे टब में मुस्कराते हुए दिखाई दिया था।
अमेरिका में गैरी हार्मन नाम के व्यक्ति की डॉलर से भरे बाथटब में बैठने की तस्वीर सामने आने के बाद हुई जांच में पता चला कि उसने सरकार की डिवाइस से सात सौ तेरह बिटकॉइन चुराए थे। इनकी कीमत अब करीब एक सौ पैंसठ करोड़ रुपये है। ये बिटकॉइन एक हार्डवेयर वॉलेट में सबूत के लिए रखे थे। मामले में गैरी को जनवरी में दोषी ठहराने के बाद वाशिंगटन डीसी में जिला न्यायाधीश ने गुरुवार को चार साल की सजा सुनाई है। क्या है बाथटब का मामला? गैरी ने अप्रैल, दो हज़ार बीस में एक आंतरिक राजस्व सेवा साक्ष्य लॉकर में एक डिवाइस में रखे बिटकॉइन वॉलेट को लेने के लिए अपने भाई लैरी हार्मन की साख का उपयोग किया और सात सौ तेरह बिटकॉइन चुराए, जिसकी कीमत तब लगभग चालीस करोड़ रुपये थी। IRS के उपकरण से बिटकॉइन के गायब होने के बाद एजेंट्स को गैरी के फोन पर एक तस्वीर मिली, जिसमें वह एक नाइट क्लब में नकदी से भरे टब में मुस्कराते हुए दिखाई दिया था।
बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में सिपाही को बोनट पर रखकर काफी दूर तक घसीटते ले गए। थोडी दूर चलकर उन्होंने सिपाही को बोनट से उतारकर सडक पर फेंक दिया और यमुना एक्सप्रेसवे की ओर भाग लिए। अलीगढ़ । टप्पल क्षेत्र में बदमाशों ने चैंकिग कर रहे सिपाही को चलती गाड़ी में बोनट पर बैठाने के बाद दूर तक घसीटा और इसके बादर उसे सडक पर छोड़कर भाग गए। सूत्रों ने बताया कि टप्पल पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्विफ्ट गाड़ी हामिदपुर तिराहे पर करीब 2 घंटे से खड़ी है। इसमें संदिग्ध स्थिति में दो लोग व एक महिला मौजूद है। महिला तो कुछ देर बाद उतर कर गाड़ी टेंपो में बैठ गई है और स्विफ्ट गाड़ी टेंपो के पीछे चल रही है। सूचना पर पुलिस ने गाड़ी को टप्पल थाने के सामने रोकना चाहा। इस पर बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में सिपाही को बोनट पर रखकर काफी दूर तक घसीटते ले गए। थोडी दूर चलकर उन्होंने सिपाही को बोनट से उतारकर सडक पर फेंक दिया और यमुना एक्सप्रेसवे की ओर भाग लिए। मामले की सूचना पर पुलिस ने बदमाशों का बहुत दूर तक पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं लगे।
बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में सिपाही को बोनट पर रखकर काफी दूर तक घसीटते ले गए। थोडी दूर चलकर उन्होंने सिपाही को बोनट से उतारकर सडक पर फेंक दिया और यमुना एक्सप्रेसवे की ओर भाग लिए। अलीगढ़ । टप्पल क्षेत्र में बदमाशों ने चैंकिग कर रहे सिपाही को चलती गाड़ी में बोनट पर बैठाने के बाद दूर तक घसीटा और इसके बादर उसे सडक पर छोड़कर भाग गए। सूत्रों ने बताया कि टप्पल पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्विफ्ट गाड़ी हामिदपुर तिराहे पर करीब दो घंटाटे से खड़ी है। इसमें संदिग्ध स्थिति में दो लोग व एक महिला मौजूद है। महिला तो कुछ देर बाद उतर कर गाड़ी टेंपो में बैठ गई है और स्विफ्ट गाड़ी टेंपो के पीछे चल रही है। सूचना पर पुलिस ने गाड़ी को टप्पल थाने के सामने रोकना चाहा। इस पर बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में सिपाही को बोनट पर रखकर काफी दूर तक घसीटते ले गए। थोडी दूर चलकर उन्होंने सिपाही को बोनट से उतारकर सडक पर फेंक दिया और यमुना एक्सप्रेसवे की ओर भाग लिए। मामले की सूचना पर पुलिस ने बदमाशों का बहुत दूर तक पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं लगे।
जम्मू। बाबा अमरनाथ यात्रा के संपन्न होने में अब मात्र एक सप्ताह शेष रह गए हैं। इस कारण श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आने लगी है। यात्रा के आधार शिविर यात्री निवास से शनिवार की सुबह 293 श्रद्धालुओं का जत्था पहलगाम व बालटाल के लिए रवाना हुआ। रवाना हुए जत्थे में 155 पुरुष, 46 महिलाएं, एक बच्चा और 91 साधु शामिल थे, जो आठ वाहनों पर सवार होकर यात्रा पर गए। यात्रा दस अगस्त को रक्षाबंधन वाले दिन संपन्न हो रही है। अब तक करीब तीन लाख साठ हजार यात्री पवित्र गुफा में शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। इस बार यात्रा का आंकड़ा चार लाख पार करने की संभावना नहीं है।
जम्मू। बाबा अमरनाथ यात्रा के संपन्न होने में अब मात्र एक सप्ताह शेष रह गए हैं। इस कारण श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आने लगी है। यात्रा के आधार शिविर यात्री निवास से शनिवार की सुबह दो सौ तिरानवे श्रद्धालुओं का जत्था पहलगाम व बालटाल के लिए रवाना हुआ। रवाना हुए जत्थे में एक सौ पचपन पुरुष, छियालीस महिलाएं, एक बच्चा और इक्यानवे साधु शामिल थे, जो आठ वाहनों पर सवार होकर यात्रा पर गए। यात्रा दस अगस्त को रक्षाबंधन वाले दिन संपन्न हो रही है। अब तक करीब तीन लाख साठ हजार यात्री पवित्र गुफा में शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। इस बार यात्रा का आंकड़ा चार लाख पार करने की संभावना नहीं है।
ऊँचे कहे जाने वाले लोगों का बोझ नीचे के लोगों को कुचल रहा है। आज ज़रूरत इस बात की है कि ऊपर के लोग नीचे दबाने वाले लोगों की पीठ से उतर जाएँ। -महात्मा गाँधी (30 जून, 1944 ई. ) आज जब हम आज़ादी के 75वें वर्ष का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तब भारत के सम्बन्ध में ऑक्सफैम इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट यह बता रही है कि भारत की 90 फ़ीसदी आबादी को 10 फ़ीसदी अमीरों का बोझ कुचल रहा है। भारत के मात्र 21 सबसे बड़े अरबपतियों के पास देश के 70 करोड़ लोगों की सम्पत्ति से भी ज़्यादा दौलत है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक लाओस में 16 जनवरी, 2023 को सम्पन्न हुई, जिसमें ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने 'सर्वाइवल ऑफ द रिचेस्ट : द इंडिया स्टोरी' शीर्षक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। क्या है ऑक्सफैम इंटरनेशनल? ऑक्सफैम इंटरनेशनल लगभग 21 स्वतंत्र ग़ैर-सरकारी संगठनों का एक समूह है, जिसका गठन वर्ष 1942 में हुआ था। ऑक्सफैम भारत में आर्थिक और सामाजिक असमानता विषय पर 70 वर्षों से काम कर रही है। ऑक्सफैम का पूरा नाम ऑक्सफैम कमिटी फॉर फेमिन रिलीफ (अकाल राहत के लिए ऑक्सफोर्ड समिति) है। यह लगभग 70 देशों में काम कर रही है। ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में भारत में आर्थिक और सामाजिक स्तर पर असमानता की लगातार बढ़ती खाई को विस्तृत ढंग से रेखांकित किया है, जिसके लिए सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। ऑक्सफैम का कहना है कि रिपोर्ट में उल्लेखित आँकड़ों और तथ्यों की पुष्टि अध्येताओं और सरकारी निकायों ने भी की है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की 60 फ़ीसदी से ज़्यादा सम्पत्ति देश के केवल पाँच फ़ीसदी अमीर लोगों के पास है, वहीं निचले 50 फ़ीसदी लोगों के पास देश की केवल तीन फ़ीसदी सम्पत्ति है। पिछले दो वर्षों में भारत में 64 अरबपतियों का इज़ाफ़ा हुआ है और अरबपतियों की संख्या 102 से बढक़र 166 हो गयी। भारत के 100 अरबपतियों की सम्पत्ति 54. 12 लाख करोड़ रुपये हो गयी है, जिससे लगभग डेढ़ साल तक देश के केंद्रीय बजट की पूर्ति की जा सकती है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में पिछले 10 वर्षों में देश में पैदा हुई सम्पत्ति के ग़ैर-बराबर बँटवारे को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सन् 2012 से सन् 2021 के बीच भारत में जितनी भी सम्पत्ति अस्तित्व में आयी, उसका 40 फ़ीसदी हिस्सा देश के सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोगों के हाथ में गया, जबकि 50 फ़ीसदी जनता के हाथ में केवल तीन फ़ीसदी सम्पत्ति ही आयी। ऑक्सफैम का मानना है कि आर्थिक असमानता तेज़ी से बढऩे के लिए प्रतिगामी कर प्रणाली मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है। इस कर प्रणाली में ग़रीब आदमी अधिक टैक्स दे रहा है, जबकि अमीरों से कम टैक्स लिया जा रहा है। 2021-22 में जीएसटी से भारत सरकार ने 14. 83 लाख करोड़ रुपये अर्जित किये हैं, जिसमें 64 फ़ीसदी हिस्सा 50 फ़ीसदी सबसे ग़रीब लोगों का है, जबकि मात्र तीन फ़ीसदी हिस्सा 10 फ़ीसदी सबसे अमीर लोगों का है। सरकार द्वारा उद्योगों को कॉरपोरेट कर के रूप में लगभग 1. 5 लाख करोड़ रुपये से 2,00,000 करोड़ रुपये छूट मिलने के पश्चात् उद्योगों ने लोगों को रोज़गार देने के बजाय इस छूट की राशि को आसानी से अपनी जेब में ले लिया, नतीजतन प्रत्यक्ष करों में 5 फ़ीसदी की गिरावट आयी और राजकीय ख़र्च की निर्भरता कॉरपोरेट्स से आयकरदाताओं पर और अप्रत्यक्ष करों पर आ गया। अप्रत्यक्ष कर जैसे जीएसटी और ईंधन कर की बढ़ोतरी से हाशिये के लोगों पर अधिक बोझ पड़ा और ग़रीबों को जीवित रहने के लिए अपनी ज़रूरी खपत को कम करने को मजबूर होना पड़ा, जिससे वे भुखमरी, बेरोज़गारी, महँगाई और स्वास्थ्य आपदाओं का सामना कर रहे हैं। पिछले वर्ष 2021-22 में कॉरपोरेट्स ने रिकॉर्ड 70 फ़ीसदी मुनाफ़ा दर्ज किया, जबकि 84 फ़ीसदी परिवारों की आय में गिरावट आयी। वर्ष 1971 के बाद से ही विश्व के अधिकतर देशों में राष्ट्रीय आय में मज़दूरों का योगदान लगातार घटा है, जबकि इसी दौरान मज़दूरों की उत्पादक क्षमता से अमीरों की आय तेज़ी से बढ़ी है। अमीर-ग़रीब असमानता का यह प्रमुख कारण है। लेकिन भारत में इस असमानता के पीछे पूँजीवाद के साथ-साथ भारतीय सामाज का सदियों से शास्त्रगत धार्मिक ढाँचे में रहना भी एक प्रमुख कारण है, जिसके कारण बड़ी आबादी को जातिभेद और अस्पृश्यता का दंश झेलना पड़ा तथा व्यापार करने, शिक्षा ग्रहण करने के अधिकार से वंचित होना पड़ा। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अभी भी दुनिया के सबसे ज़्यादा 22. 89 करोड़ ग़रीब हैं। विरासती सम्पत्ति प्राप्त तथा विशेषाधिकार प्राप्त जातियों से आने वाले सबसे धनी अभिजात वर्ग का नीति निर्माण, शक्ति के केंद्रों और राजनीति पर अनुचित प्रभाव है, जो उन्हें और भी अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। जबकि ऐतिहासिक रूप अस्पृश्य और हाशिये पर धकेले गये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी ग़रीबी में फँसे हुए हैं। भौतिक दूरस्थता से पीडि़त अनुसूचित जनजाति वर्ग सबसे ज़्यादा ग़रीब है। भारत में अमीर और ग़रीब के बीच स्पष्ट वर्ग अंतर से परे, लिंग, जाति और भौगोलिक स्तरों पर पर्याप्त आय असमानता बनी हुई है। नतीजतन महिला श्रम को पुरुष श्रम से 37 फ़ीसदी कम वेतन मिलता है, उसी तरह दलित श्रमिक को सवर्ण श्रमिक से 45 फ़ीसदी कम वेतन मिलता है। लैंगिक हाशियाकरण की शिकार महिलाओं एवं थर्ड जेंडरों को समाज में भूमिका स्थापित करने के लिए दोहरी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। थर्ड जेंडर और घुमंतू जातियों / जनजातियों को काम नहीं मिलता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम जैसे क़ानून के बावजूद आज भी अधिकतर महिलाओं को विरासत की सम्पत्ति से वंचित रखा जाता है। ग़रीब महिलाओं, विशेष रूप से हाशिये की जातियों को अक्सर ऐसे काम में लगाया जाता है, जिसमें सम्मान की कमी होती है और जो अमानवीय है। उदाहरण के लिए मैला ढोने के अपमानजनक व्यवसाय में धकेले जाने वाले लोगों में दलित महिलाओं की एक बड़ी संख्या है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की हाल की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में कुल बेरोज़गारों की संख्या पाँच करोड़ पार कर चुकी है। एनसीआरबी की सन् 2021 रिपोर्ट के अनुसार भारत में 115 दिहाड़ी मज़दूर प्रति दिन आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। साल भर में 41,975 दिहाड़ी मज़दूर अपने उन हाथों से अपना ही गला घोटने पर मजबूर कर दिये गये जिन्हें अपने हाथों से इस दुनिया को ख़ूबसूरत बनाना था। भारत किसानों की आत्महत्या के मामले में अच्छा-ख़ासा नाम कमा चुका है। भारत बढ़ती ग़रीबी और एक सम्पन्न अभिजात वर्ग के साथ दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक है। इस दुष्चक्र को तोड़े बिना आर्थिक असमानता को ख़त्म करना मुश्किल होगा। सरकार ने आर्थिक-सामाजिक असमानता दूर करने वाले संवैधानिक प्रावधानों को धता बताकर उचित शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचा प्रणाली तथा सामाजिक न्याय के उद्देश्यों से जुड़ी योजनाओं के बजटीय आवंटन में कठोरतापूर्वक लगातार कटौती की है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों की शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन को देखें, तो यह 2017-18 के 3. 30 फ़ीसदी से घटकर 2022-23 के बजट अनुमान में 2. 35 फ़ीसदी हो गया है। 2021-22 में कक्षा 1 से 8 तक जाने वाले छोटे बच्चों की ड्रॉपआउट दर लगभग दोगुनी हो गयी है और हाशिये के तब$के के बच्चों के लिए दर अधिक है, ख़ासकर माध्यमिक शिक्षा स्तर पर। बस्ती के 5 किलोमीटर के दायरे में माध्यमिक विद्यालयों की अनुपलब्धता के कारण लड़कियों के लिए विद्यालय जाना वास्तव में कठिन हो जाता है। हाल के एक भाषण में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 15 करोड़ बच्चें स्कूली शिक्षा हासिल करने से वंचित हैं। ड्रॉपआउट की उच्च दर और स्कूली बच्चों की भारी संख्या के बावजूद, पिछले 10 वर्षों में माध्यमिक शिक्षा पर सरकारी व्यय बिना किसी बढ़ोतरी के सकल घरेलू उत्पाद के एक फ़ीसदी पर स्थिर है। देश में स्कूलों में कुल 19 फ़ीसदी शिक्षकों के पद ख़ाली हैं। इनमें से 69 फ़ीसदी रिक्तियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। प्राथमिक विद्यालय में ही 837592 पद रिक्त हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मार्च 2022 की रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, स्वास्थ्य पर उच्च ओओपी व्यय (लोगों के जेब से ख़र्च) हर साल लगभग 5. 5 करोड़ भारतीयों को ग़रीब बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों ने ओओपी व्यय के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर 2,87,573 करोड़ रुपये ख़र्च किये, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का एक बड़ा हिस्सा है और सरकार के स्वास्थ्य बजट से लगभग 45,000 करोड़ रुपये अधिक है। भारतीय अपने चिकित्सा व्यय का 63 फ़ीसदी ओओपी देते हैं, जो विश्व में सबसे अधिक माना जाता है। ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार, भारत सबसे कम सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ख़र्च वाले देशों में शामिल है। 2020-21 के अनुमानों से पता चलता है कि जीडीपी के फ़ीसदी के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय 2. 1 फ़ीसदी है, जो नीतिगत बेंचमार्क 2. 5 फ़ीसदी और वैश्विक औसत 6 फ़ीसदी से बहुत कम है। यह कम बजट व्यय न केवल भारत में समग्र स्वास्थ्य की निम्न स्थिति में बल्कि विभिन्न आर्थिक और सामाजिक समूहों में स्वास्थ्य सम्बन्धी असमानताओं को प्रकट करता है। हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि जाति और जीवन प्रत्याशा भी गहन रूप से जुड़े हुए हैं। उच्च जाति की महिला की तुलना में औसत दलित महिला की मृत्यु 14. 6 वर्ष पहले हो जाती है। भारत में आदिवासियों की जीवन प्रत्याशा भी ग़ैर-आदिवासी आबादी की तुलना में लगभग तीन वर्ष कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की 75 फ़ीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है; लेकिन 31. 5 फ़ीसदी अस्पताल ही वहाँ उपलब्ध हैं, और वहाँ के सिर्फ़ 16 फ़ीसदी अस्पतालों में बिस्तर है। ग्रामीण क्षेत्रों के 21. 8 फ़ीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं हैं, जबकि 67. 96 फ़ीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवा में कम बजट आवंटन का विभिन्न स्तरों पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए भारत में बाल कुपोषण का एक बड़ा बोझ है। भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के लिए कुपोषण को प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है। यह निराशाजनक है कि देश में लगभग 42 फ़ीसदी जनजातीय बच्चे कुपोषित हैं। भारत में जनजातीय स्वास्थ्य पर सरकार की समिति के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रति व्यक्ति व्यय को बढ़ाकर 2447 रुपये किया जाना चाहिए। नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने पुष्टि की है कि भारत में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें 17. 7 लाख गम्भीर रूप से कुपोषित हैं। हालाँकि ग़ैर-सरकारी संगठनों का अनुमान सरकारी अनुमान से बहुत अधिक है। अनियंत्रित महँगाई के कारण भारत में ग़रीब अपने आवश्यक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, अक्टूबर 2021 में पेट्रोल की क़ीमत में 54 फ़ीसदी टैक्स था, जबकि डीजल में 49 फ़ीसदी, जिससे आवश्यक वस्तुएँ असमान रूप से महँगी हो गयीं, जो ग़रीबों और वंचितों के लिए अभिशाप बन गया। ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार, महँगाई बढऩे से अमीरों की तुलना में ग़रीबों पर अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय बोझ होता है, जिसके परिणामस्वरूप समाज का ध्रुवीकरण होता है, अमीर अधिक अमीर हो जाते हैं और ग़रीब अधिक शक्तिहीन हो जाते हैं। धन की कमी के कारण 70 फ़ीसदी भारतीय संतुलित आहार नहीं ले पाते, पोषण-रहित आहार लेने से बीमार होने के कारण हर साल 17 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। देश का औसत वेतन केवल बुनियादी जीविका प्रदान करने के लिए पर्याप्त है और एक सप्ताह की आय खोने से अधिकतर आबादी भुखमरी की कगार पर चली जाती है। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश की सहरिया जनजाति, जो पहले से ही गम्भीर कुपोषण से ग्रस्त है; वस्तुओं की क़ीमतों में लगातार वृद्धि के कारण बेहद कमज़ोर हो गयी है। आर्थिक असमानता से कैसे लड़ें? हमारे राष्ट्र निर्माता आंबेडकर, गाँधी, नेहरू देश की ग़रीबी के प्रति सचेत थे। आज़ादी के समय से ही वे जानते थे कि अगर देश में ग़रीबी अपनी जड़ें जमाये रही, तो भारत एक ख़ुशहाल देश कभी नहीं बन पाएगा और इस तरह आज़ादी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इसीलिए उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के ज़रिये आर्थिक-सामाजिक असमानता दूर करने के उपाय किये। आंबेडकर मानते थे कि ग़रीबी ईश्वरीय प्रकोप नहीं है, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों द्वारा ग़रीबी का अन्त सम्भव है। गुन्नार मिर्डल, अमत्र्य सेन और अभिजीत बनर्जी जैसे अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि राजकीय प्रयासों से ग़रीबी हटाया जा सकता है। ऑक्सफैम का मानना है कि यदि सरकार आर्थिक असमानता को कम करना चाहती है तो प्रतिगामी कर प्रणाली को बदलना होगा। सबसे अमीर एक फ़ीसदी की सम्पत्ति पर अधिक कर लगाना होगा, क्योंकि सबसे धनी अभिजात वर्ग का नीति निर्माण और राजनीति पर अनुचित प्रभाव है, जो उन्हें और भी अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दुष्चक्र को तोडऩे के लिए सबसे अमीर एक फ़ीसदी अमीरों की शुद्ध सम्पत्ति पर अलग से कर लगाने से देश के शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण जैसे कार्यक्रमों को निर्बाध रूप से संचालित किया जा सकता है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं एवं ईंधन पर जीएसटी और वैट जैसे अप्रत्यक्ष करों को कम करना होगा, ताकि ग़रीबों और वंचितों पर कर का बोझ कम हो सके। ऑक्सफैम के अनुसार, भारत सरकार को स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सार्वभौमिक बनाने के लिए जीडीपी का 3. 8 फ़ीसदी (5. 5 लाख करोड़ रुपये) ख़र्च करने की आवश्यकता है। शीर्ष 100 भारतीय अरबपतियों पर 10 फ़ीसदी कर लगाने से यह राशि पूरी हो जाएगी। भारत के शीर्ष 10 अरबपतियों पर 5 फ़ीसदी कर लगाने से पाँच वर्षों के लिए जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल की पूरी लागत को कवर करने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2022-23 में समग्र शिक्षा के लिए फंड 2021-22 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा माँगी गयी राशि (58,585 करोड़ रुपये) की तुलना में बहुत कम (37,383 करोड़ रुपये) था। सबसे धनी 10 अरबपतियों पर एक फ़ीसदी कर लगाना इस कमी को 1. 3 वर्षों के लिए पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा। केवल एक अरबपति, गौतम अडानी पर 2017-2021 के बीच एकमुश्त कर लगाकर 1. 79 लाख करोड़ रुपये जुटाया जा सकता था, जो प्राथमिक विद्यालयों के 50 लाख से अधिक शिक्षकों को एक वर्ष के लिए तनख़्वाह देने के लिए पर्याप्त था। इधर हिंडनबर्ग ने एक ट्वीट में लिखा है कि अडानी ने हमारे द्वारा उठाये गये एक भी मुद्दे को सम्बोधित नहीं किया है, हमने उनसे 88 सवाल पूछे थे, जिसमें से एक का भी जवाब अडानी ग्रुप ने नहीं दिया है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद भारत में अडानी की सात सूचीबद्ध समूह कम्पनियों के निवेशकों का दो ही दिन में लाखों करोड़ का नुक़सान हुआ, जो लगातार हो रहा है। लेकिन फिर भी अडानी ग्रुप कह रहा है कि अमेरिकी निवेश फर्म की रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा ग़लत जानकारी पेश कर रही है। इस बयान पर हिंडलबर्ग ने अडानी ग्रुप को यूएस कोर्ट में आने की चुनौती दी है। अतीत में आर्थिक असमानता और बेरोज़गारी को दूर करने के लिए अमेरिका में ऐसा क़दम उठाया जा चुका है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने पूँजीपतियों के शुद्ध आय पर कुल 94 फ़ीसदी का कर लगा दिया। और इस राशि से बेरोज़गारों को रोज़गार देने तथा असमानता ख़त्म करने वाले कार्यक्रम चलाने में ख़र्च किया गया, जिसका आगे चलकर सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। (लेखक सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। )
ऊँचे कहे जाने वाले लोगों का बोझ नीचे के लोगों को कुचल रहा है। आज ज़रूरत इस बात की है कि ऊपर के लोग नीचे दबाने वाले लोगों की पीठ से उतर जाएँ। -महात्मा गाँधी आज जब हम आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तब भारत के सम्बन्ध में ऑक्सफैम इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट यह बता रही है कि भारत की नब्बे फ़ीसदी आबादी को दस फ़ीसदी अमीरों का बोझ कुचल रहा है। भारत के मात्र इक्कीस सबसे बड़े अरबपतियों के पास देश के सत्तर करोड़ लोगों की सम्पत्ति से भी ज़्यादा दौलत है। विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक लाओस में सोलह जनवरी, दो हज़ार तेईस को सम्पन्न हुई, जिसमें ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने 'सर्वाइवल ऑफ द रिचेस्ट : द इंडिया स्टोरी' शीर्षक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। क्या है ऑक्सफैम इंटरनेशनल? ऑक्सफैम इंटरनेशनल लगभग इक्कीस स्वतंत्र ग़ैर-सरकारी संगठनों का एक समूह है, जिसका गठन वर्ष एक हज़ार नौ सौ बयालीस में हुआ था। ऑक्सफैम भारत में आर्थिक और सामाजिक असमानता विषय पर सत्तर वर्षों से काम कर रही है। ऑक्सफैम का पूरा नाम ऑक्सफैम कमिटी फॉर फेमिन रिलीफ है। यह लगभग सत्तर देशों में काम कर रही है। ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में भारत में आर्थिक और सामाजिक स्तर पर असमानता की लगातार बढ़ती खाई को विस्तृत ढंग से रेखांकित किया है, जिसके लिए सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। ऑक्सफैम का कहना है कि रिपोर्ट में उल्लेखित आँकड़ों और तथ्यों की पुष्टि अध्येताओं और सरकारी निकायों ने भी की है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की साठ फ़ीसदी से ज़्यादा सम्पत्ति देश के केवल पाँच फ़ीसदी अमीर लोगों के पास है, वहीं निचले पचास फ़ीसदी लोगों के पास देश की केवल तीन फ़ीसदी सम्पत्ति है। पिछले दो वर्षों में भारत में चौंसठ अरबपतियों का इज़ाफ़ा हुआ है और अरबपतियों की संख्या एक सौ दो से बढक़र एक सौ छयासठ हो गयी। भारत के एक सौ अरबपतियों की सम्पत्ति चौवन. बारह लाख करोड़ रुपये हो गयी है, जिससे लगभग डेढ़ साल तक देश के केंद्रीय बजट की पूर्ति की जा सकती है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में पिछले दस वर्षों में देश में पैदा हुई सम्पत्ति के ग़ैर-बराबर बँटवारे को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सन् दो हज़ार बारह से सन् दो हज़ार इक्कीस के बीच भारत में जितनी भी सम्पत्ति अस्तित्व में आयी, उसका चालीस फ़ीसदी हिस्सा देश के सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोगों के हाथ में गया, जबकि पचास फ़ीसदी जनता के हाथ में केवल तीन फ़ीसदी सम्पत्ति ही आयी। ऑक्सफैम का मानना है कि आर्थिक असमानता तेज़ी से बढऩे के लिए प्रतिगामी कर प्रणाली मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है। इस कर प्रणाली में ग़रीब आदमी अधिक टैक्स दे रहा है, जबकि अमीरों से कम टैक्स लिया जा रहा है। दो हज़ार इक्कीस-बाईस में जीएसटी से भारत सरकार ने चौदह. तिरासी लाख करोड़ रुपये अर्जित किये हैं, जिसमें चौंसठ फ़ीसदी हिस्सा पचास फ़ीसदी सबसे ग़रीब लोगों का है, जबकि मात्र तीन फ़ीसदी हिस्सा दस फ़ीसदी सबसे अमीर लोगों का है। सरकार द्वारा उद्योगों को कॉरपोरेट कर के रूप में लगभग एक. पाँच लाख करोड़ रुपये से दो,शून्य,शून्य करोड़ रुपये छूट मिलने के पश्चात् उद्योगों ने लोगों को रोज़गार देने के बजाय इस छूट की राशि को आसानी से अपनी जेब में ले लिया, नतीजतन प्रत्यक्ष करों में पाँच फ़ीसदी की गिरावट आयी और राजकीय ख़र्च की निर्भरता कॉरपोरेट्स से आयकरदाताओं पर और अप्रत्यक्ष करों पर आ गया। अप्रत्यक्ष कर जैसे जीएसटी और ईंधन कर की बढ़ोतरी से हाशिये के लोगों पर अधिक बोझ पड़ा और ग़रीबों को जीवित रहने के लिए अपनी ज़रूरी खपत को कम करने को मजबूर होना पड़ा, जिससे वे भुखमरी, बेरोज़गारी, महँगाई और स्वास्थ्य आपदाओं का सामना कर रहे हैं। पिछले वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में कॉरपोरेट्स ने रिकॉर्ड सत्तर फ़ीसदी मुनाफ़ा दर्ज किया, जबकि चौरासी फ़ीसदी परिवारों की आय में गिरावट आयी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के बाद से ही विश्व के अधिकतर देशों में राष्ट्रीय आय में मज़दूरों का योगदान लगातार घटा है, जबकि इसी दौरान मज़दूरों की उत्पादक क्षमता से अमीरों की आय तेज़ी से बढ़ी है। अमीर-ग़रीब असमानता का यह प्रमुख कारण है। लेकिन भारत में इस असमानता के पीछे पूँजीवाद के साथ-साथ भारतीय सामाज का सदियों से शास्त्रगत धार्मिक ढाँचे में रहना भी एक प्रमुख कारण है, जिसके कारण बड़ी आबादी को जातिभेद और अस्पृश्यता का दंश झेलना पड़ा तथा व्यापार करने, शिक्षा ग्रहण करने के अधिकार से वंचित होना पड़ा। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अभी भी दुनिया के सबसे ज़्यादा बाईस. नवासी करोड़ ग़रीब हैं। विरासती सम्पत्ति प्राप्त तथा विशेषाधिकार प्राप्त जातियों से आने वाले सबसे धनी अभिजात वर्ग का नीति निर्माण, शक्ति के केंद्रों और राजनीति पर अनुचित प्रभाव है, जो उन्हें और भी अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। जबकि ऐतिहासिक रूप अस्पृश्य और हाशिये पर धकेले गये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी ग़रीबी में फँसे हुए हैं। भौतिक दूरस्थता से पीडि़त अनुसूचित जनजाति वर्ग सबसे ज़्यादा ग़रीब है। भारत में अमीर और ग़रीब के बीच स्पष्ट वर्ग अंतर से परे, लिंग, जाति और भौगोलिक स्तरों पर पर्याप्त आय असमानता बनी हुई है। नतीजतन महिला श्रम को पुरुष श्रम से सैंतीस फ़ीसदी कम वेतन मिलता है, उसी तरह दलित श्रमिक को सवर्ण श्रमिक से पैंतालीस फ़ीसदी कम वेतन मिलता है। लैंगिक हाशियाकरण की शिकार महिलाओं एवं थर्ड जेंडरों को समाज में भूमिका स्थापित करने के लिए दोहरी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। थर्ड जेंडर और घुमंतू जातियों / जनजातियों को काम नहीं मिलता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम जैसे क़ानून के बावजूद आज भी अधिकतर महिलाओं को विरासत की सम्पत्ति से वंचित रखा जाता है। ग़रीब महिलाओं, विशेष रूप से हाशिये की जातियों को अक्सर ऐसे काम में लगाया जाता है, जिसमें सम्मान की कमी होती है और जो अमानवीय है। उदाहरण के लिए मैला ढोने के अपमानजनक व्यवसाय में धकेले जाने वाले लोगों में दलित महिलाओं की एक बड़ी संख्या है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की हाल की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में कुल बेरोज़गारों की संख्या पाँच करोड़ पार कर चुकी है। एनसीआरबी की सन् दो हज़ार इक्कीस रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक सौ पंद्रह दिहाड़ी मज़दूर प्रति दिन आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। साल भर में इकतालीस,नौ सौ पचहत्तर दिहाड़ी मज़दूर अपने उन हाथों से अपना ही गला घोटने पर मजबूर कर दिये गये जिन्हें अपने हाथों से इस दुनिया को ख़ूबसूरत बनाना था। भारत किसानों की आत्महत्या के मामले में अच्छा-ख़ासा नाम कमा चुका है। भारत बढ़ती ग़रीबी और एक सम्पन्न अभिजात वर्ग के साथ दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक है। इस दुष्चक्र को तोड़े बिना आर्थिक असमानता को ख़त्म करना मुश्किल होगा। सरकार ने आर्थिक-सामाजिक असमानता दूर करने वाले संवैधानिक प्रावधानों को धता बताकर उचित शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचा प्रणाली तथा सामाजिक न्याय के उद्देश्यों से जुड़ी योजनाओं के बजटीय आवंटन में कठोरतापूर्वक लगातार कटौती की है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों की शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन को देखें, तो यह दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के तीन. तीस फ़ीसदी से घटकर दो हज़ार बाईस-तेईस के बजट अनुमान में दो. पैंतीस फ़ीसदी हो गया है। दो हज़ार इक्कीस-बाईस में कक्षा एक से आठ तक जाने वाले छोटे बच्चों की ड्रॉपआउट दर लगभग दोगुनी हो गयी है और हाशिये के तब$के के बच्चों के लिए दर अधिक है, ख़ासकर माध्यमिक शिक्षा स्तर पर। बस्ती के पाँच किलोग्राममीटर के दायरे में माध्यमिक विद्यालयों की अनुपलब्धता के कारण लड़कियों के लिए विद्यालय जाना वास्तव में कठिन हो जाता है। हाल के एक भाषण में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पंद्रह करोड़ बच्चें स्कूली शिक्षा हासिल करने से वंचित हैं। ड्रॉपआउट की उच्च दर और स्कूली बच्चों की भारी संख्या के बावजूद, पिछले दस वर्षों में माध्यमिक शिक्षा पर सरकारी व्यय बिना किसी बढ़ोतरी के सकल घरेलू उत्पाद के एक फ़ीसदी पर स्थिर है। देश में स्कूलों में कुल उन्नीस फ़ीसदी शिक्षकों के पद ख़ाली हैं। इनमें से उनहत्तर फ़ीसदी रिक्तियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। प्राथमिक विद्यालय में ही आठ लाख सैंतीस हज़ार पाँच सौ बानवे पद रिक्त हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मार्च दो हज़ार बाईस की रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, स्वास्थ्य पर उच्च ओओपी व्यय हर साल लगभग पाँच. पाँच करोड़ भारतीयों को ग़रीब बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों ने ओओपी व्यय के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर दो,सत्तासी,पाँच सौ तिहत्तर करोड़ रुपये ख़र्च किये, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का एक बड़ा हिस्सा है और सरकार के स्वास्थ्य बजट से लगभग पैंतालीस,शून्य करोड़ रुपये अधिक है। भारतीय अपने चिकित्सा व्यय का तिरेसठ फ़ीसदी ओओपी देते हैं, जो विश्व में सबसे अधिक माना जाता है। ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार, भारत सबसे कम सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ख़र्च वाले देशों में शामिल है। दो हज़ार बीस-इक्कीस के अनुमानों से पता चलता है कि जीडीपी के फ़ीसदी के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय दो. एक फ़ीसदी है, जो नीतिगत बेंचमार्क दो. पाँच फ़ीसदी और वैश्विक औसत छः फ़ीसदी से बहुत कम है। यह कम बजट व्यय न केवल भारत में समग्र स्वास्थ्य की निम्न स्थिति में बल्कि विभिन्न आर्थिक और सामाजिक समूहों में स्वास्थ्य सम्बन्धी असमानताओं को प्रकट करता है। हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि जाति और जीवन प्रत्याशा भी गहन रूप से जुड़े हुए हैं। उच्च जाति की महिला की तुलना में औसत दलित महिला की मृत्यु चौदह. छः वर्ष पहले हो जाती है। भारत में आदिवासियों की जीवन प्रत्याशा भी ग़ैर-आदिवासी आबादी की तुलना में लगभग तीन वर्ष कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की पचहत्तर फ़ीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है; लेकिन इकतीस. पाँच फ़ीसदी अस्पताल ही वहाँ उपलब्ध हैं, और वहाँ के सिर्फ़ सोलह फ़ीसदी अस्पतालों में बिस्तर है। ग्रामीण क्षेत्रों के इक्कीस. आठ फ़ीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं हैं, जबकि सरसठ. छियानवे फ़ीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवा में कम बजट आवंटन का विभिन्न स्तरों पर प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए भारत में बाल कुपोषण का एक बड़ा बोझ है। भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के लिए कुपोषण को प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है। यह निराशाजनक है कि देश में लगभग बयालीस फ़ीसदी जनजातीय बच्चे कुपोषित हैं। भारत में जनजातीय स्वास्थ्य पर सरकार की समिति के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रति व्यक्ति व्यय को बढ़ाकर दो हज़ार चार सौ सैंतालीस रुपयापये किया जाना चाहिए। नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने पुष्टि की है कि भारत में तैंतीस लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें सत्रह. सात लाख गम्भीर रूप से कुपोषित हैं। हालाँकि ग़ैर-सरकारी संगठनों का अनुमान सरकारी अनुमान से बहुत अधिक है। अनियंत्रित महँगाई के कारण भारत में ग़रीब अपने आवश्यक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस में पेट्रोल की क़ीमत में चौवन फ़ीसदी टैक्स था, जबकि डीजल में उनचास फ़ीसदी, जिससे आवश्यक वस्तुएँ असमान रूप से महँगी हो गयीं, जो ग़रीबों और वंचितों के लिए अभिशाप बन गया। ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार, महँगाई बढऩे से अमीरों की तुलना में ग़रीबों पर अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय बोझ होता है, जिसके परिणामस्वरूप समाज का ध्रुवीकरण होता है, अमीर अधिक अमीर हो जाते हैं और ग़रीब अधिक शक्तिहीन हो जाते हैं। धन की कमी के कारण सत्तर फ़ीसदी भारतीय संतुलित आहार नहीं ले पाते, पोषण-रहित आहार लेने से बीमार होने के कारण हर साल सत्रह लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। देश का औसत वेतन केवल बुनियादी जीविका प्रदान करने के लिए पर्याप्त है और एक सप्ताह की आय खोने से अधिकतर आबादी भुखमरी की कगार पर चली जाती है। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश की सहरिया जनजाति, जो पहले से ही गम्भीर कुपोषण से ग्रस्त है; वस्तुओं की क़ीमतों में लगातार वृद्धि के कारण बेहद कमज़ोर हो गयी है। आर्थिक असमानता से कैसे लड़ें? हमारे राष्ट्र निर्माता आंबेडकर, गाँधी, नेहरू देश की ग़रीबी के प्रति सचेत थे। आज़ादी के समय से ही वे जानते थे कि अगर देश में ग़रीबी अपनी जड़ें जमाये रही, तो भारत एक ख़ुशहाल देश कभी नहीं बन पाएगा और इस तरह आज़ादी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इसीलिए उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के ज़रिये आर्थिक-सामाजिक असमानता दूर करने के उपाय किये। आंबेडकर मानते थे कि ग़रीबी ईश्वरीय प्रकोप नहीं है, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों द्वारा ग़रीबी का अन्त सम्भव है। गुन्नार मिर्डल, अमत्र्य सेन और अभिजीत बनर्जी जैसे अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि राजकीय प्रयासों से ग़रीबी हटाया जा सकता है। ऑक्सफैम का मानना है कि यदि सरकार आर्थिक असमानता को कम करना चाहती है तो प्रतिगामी कर प्रणाली को बदलना होगा। सबसे अमीर एक फ़ीसदी की सम्पत्ति पर अधिक कर लगाना होगा, क्योंकि सबसे धनी अभिजात वर्ग का नीति निर्माण और राजनीति पर अनुचित प्रभाव है, जो उन्हें और भी अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दुष्चक्र को तोडऩे के लिए सबसे अमीर एक फ़ीसदी अमीरों की शुद्ध सम्पत्ति पर अलग से कर लगाने से देश के शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण जैसे कार्यक्रमों को निर्बाध रूप से संचालित किया जा सकता है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं एवं ईंधन पर जीएसटी और वैट जैसे अप्रत्यक्ष करों को कम करना होगा, ताकि ग़रीबों और वंचितों पर कर का बोझ कम हो सके। ऑक्सफैम के अनुसार, भारत सरकार को स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सार्वभौमिक बनाने के लिए जीडीपी का तीन. आठ फ़ीसदी ख़र्च करने की आवश्यकता है। शीर्ष एक सौ भारतीय अरबपतियों पर दस फ़ीसदी कर लगाने से यह राशि पूरी हो जाएगी। भारत के शीर्ष दस अरबपतियों पर पाँच फ़ीसदी कर लगाने से पाँच वर्षों के लिए जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल की पूरी लागत को कवर करने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में समग्र शिक्षा के लिए फंड दो हज़ार इक्कीस-बाईस में शिक्षा मंत्रालय द्वारा माँगी गयी राशि की तुलना में बहुत कम था। सबसे धनी दस अरबपतियों पर एक फ़ीसदी कर लगाना इस कमी को एक. तीन वर्षों के लिए पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा। केवल एक अरबपति, गौतम अडानी पर दो हज़ार सत्रह-दो हज़ार इक्कीस के बीच एकमुश्त कर लगाकर एक. उन्यासी लाख करोड़ रुपये जुटाया जा सकता था, जो प्राथमिक विद्यालयों के पचास लाख से अधिक शिक्षकों को एक वर्ष के लिए तनख़्वाह देने के लिए पर्याप्त था। इधर हिंडनबर्ग ने एक ट्वीट में लिखा है कि अडानी ने हमारे द्वारा उठाये गये एक भी मुद्दे को सम्बोधित नहीं किया है, हमने उनसे अठासी सवाल पूछे थे, जिसमें से एक का भी जवाब अडानी ग्रुप ने नहीं दिया है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद भारत में अडानी की सात सूचीबद्ध समूह कम्पनियों के निवेशकों का दो ही दिन में लाखों करोड़ का नुक़सान हुआ, जो लगातार हो रहा है। लेकिन फिर भी अडानी ग्रुप कह रहा है कि अमेरिकी निवेश फर्म की रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा ग़लत जानकारी पेश कर रही है। इस बयान पर हिंडलबर्ग ने अडानी ग्रुप को यूएस कोर्ट में आने की चुनौती दी है। अतीत में आर्थिक असमानता और बेरोज़गारी को दूर करने के लिए अमेरिका में ऐसा क़दम उठाया जा चुका है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने पूँजीपतियों के शुद्ध आय पर कुल चौरानवे फ़ीसदी का कर लगा दिया। और इस राशि से बेरोज़गारों को रोज़गार देने तथा असमानता ख़त्म करने वाले कार्यक्रम चलाने में ख़र्च किया गया, जिसका आगे चलकर सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।