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राजकुमार कुशवाहा, पाकुड़ः सिविल सर्जन ने सोमवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़ में झारखंड मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण माह का संकेतिक शुभारंभ किया. इस दौरान नौ माह से पांच वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने की शुरुआत की गई. साथ ही एक से पांच वर्ष तक के बच्चों को कृमिनाशक दवा भी दी गई. सदर अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान, आरसीएच पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम की शुरुआत हुई. डॉ. रामदेव पासवान ने बताया कि करीब दो दर्जन बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी गई. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इस मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर उपस्थित चिकित्सक ने बताया कि विटामिन ए से आंख, सांस से संबंधित बीमारियों, बार-बार होने वाले डायरिया से बचाव के साथ-साथ रोग रोधी क्षमता भी बढ़ती है। शहरी इलाके से शुरू होकर यह अभियान जिले के ग्रामीण इलाकों तक चलेगा. राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर इस अभियान की शुरुआत की गई. अभियान के तहत महिलाओं एवं किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड की खुराक दी जाएगी तथा बच्चों के पोषण की जांच भी होगी.
राजकुमार कुशवाहा, पाकुड़ः सिविल सर्जन ने सोमवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़ में झारखंड मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण माह का संकेतिक शुभारंभ किया. इस दौरान नौ माह से पांच वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने की शुरुआत की गई. साथ ही एक से पांच वर्ष तक के बच्चों को कृमिनाशक दवा भी दी गई. सदर अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान, आरसीएच पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम की शुरुआत हुई. डॉ. रामदेव पासवान ने बताया कि करीब दो दर्जन बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी गई. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इस मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर उपस्थित चिकित्सक ने बताया कि विटामिन ए से आंख, सांस से संबंधित बीमारियों, बार-बार होने वाले डायरिया से बचाव के साथ-साथ रोग रोधी क्षमता भी बढ़ती है। शहरी इलाके से शुरू होकर यह अभियान जिले के ग्रामीण इलाकों तक चलेगा. राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर इस अभियान की शुरुआत की गई. अभियान के तहत महिलाओं एवं किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड की खुराक दी जाएगी तथा बच्चों के पोषण की जांच भी होगी.
क्या हाई बीपी और चक्कर आने के बीच है कोई संबंध? हाई बीपी होने पर शरीर में कमजोरी महसूस होती है जो चक्कर का कारण बन सकती है. चक्कर आना कई स्थितियों के कारण हो सकता है जैसे वर्टिगो, हाइपोटेंशन, गर्भावस्था, स्ट्रोक, सीने में दर्द या कमजोरी. चक्कर आना लो ब्लड प्रेशर का एक सामान्य लक्षण हो सकता है. ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाओं या हार्ट अटैक के दुष्प्रभाव के रूप में भी चक्कर आ सकते हैं. आराम करें. दवाईयों की मात्रा को चिकित्सक की सलाह द्वारा कम या ज्यादा किया जा सकता है. बीपी की दवाईयों को सुबह की जगह रात में ले सकते हैं ताकि चक्कर की स्थिति से बचा जा सके. सकता है. अधिक चक्कर आने पर डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है.
क्या हाई बीपी और चक्कर आने के बीच है कोई संबंध? हाई बीपी होने पर शरीर में कमजोरी महसूस होती है जो चक्कर का कारण बन सकती है. चक्कर आना कई स्थितियों के कारण हो सकता है जैसे वर्टिगो, हाइपोटेंशन, गर्भावस्था, स्ट्रोक, सीने में दर्द या कमजोरी. चक्कर आना लो ब्लड प्रेशर का एक सामान्य लक्षण हो सकता है. ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाओं या हार्ट अटैक के दुष्प्रभाव के रूप में भी चक्कर आ सकते हैं. आराम करें. दवाईयों की मात्रा को चिकित्सक की सलाह द्वारा कम या ज्यादा किया जा सकता है. बीपी की दवाईयों को सुबह की जगह रात में ले सकते हैं ताकि चक्कर की स्थिति से बचा जा सके. सकता है. अधिक चक्कर आने पर डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है.
गोपेश्वर। दो दिवसीय दत्तात्रेय मां सती अनसूया मेला इस वर्ष 28 व 29 दिसम्बर को होगा। शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार चन्याल ने मंदिर समिति के सदस्यों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ इंतजामों पर बैठक में चर्चा की। कोविड के दृष्टिगत इस वर्ष सीमित संख्या में ही तीर्थ यात्रियों को जाने के अनुमति रहेगी। साथ ही हर वर्ष की भांति मंदिर में निसंतान दंपतियों को संतान की कामना के लिए वरदान के लिए बैठने की अनुमति नहीं होगी। बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों एवं सभी पक्षों के सुझाव और सहमति के आधार पर यह निर्णय लिया गया। इस बार मंडल में देव डोलियों के मिलन के दौरान मेले के उद्घाटन की रस्म अदायगी नहीं होगी और न ही मंडल में हाट बाजार लगेगा। प्रत्येक देव डोली के साथ 12 लोगों को ही अनसूया मंदिर तक जाने की अनुमति दी जाएगी। सभी तीर्थयात्रियों का संगूड पुल पर थर्मल स्क्रीनिंग एवं कोविड टेस्ट किया जाएगा। भण्डारे पर प्रतिबंध रहेगा। केवल मंदिर समिति के माध्यम से देव डोली के साथ चलने वाले लोगों को भण्डारे की व्यवस्था कराई जाएगी। सभी लोगों को मास्क पहनना व शारीरिक दूरी का पूरी तरह से पालन करना आवश्यक होगा। मंदिर परिसर को सेनेटाइज्ड किया जाएगा। इस बार मेले में महिला एवं युवक मंगल दलों तथा स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। अपर जिलाधिकारी ने मेले से पूर्व पैदल मार्ग व मन्दिर परिसर से अत्री मुनि आश्रम तक मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश लोनिवि को दिए।
गोपेश्वर। दो दिवसीय दत्तात्रेय मां सती अनसूया मेला इस वर्ष अट्ठाईस व उनतीस दिसम्बर को होगा। शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार चन्याल ने मंदिर समिति के सदस्यों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ इंतजामों पर बैठक में चर्चा की। कोविड के दृष्टिगत इस वर्ष सीमित संख्या में ही तीर्थ यात्रियों को जाने के अनुमति रहेगी। साथ ही हर वर्ष की भांति मंदिर में निसंतान दंपतियों को संतान की कामना के लिए वरदान के लिए बैठने की अनुमति नहीं होगी। बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों एवं सभी पक्षों के सुझाव और सहमति के आधार पर यह निर्णय लिया गया। इस बार मंडल में देव डोलियों के मिलन के दौरान मेले के उद्घाटन की रस्म अदायगी नहीं होगी और न ही मंडल में हाट बाजार लगेगा। प्रत्येक देव डोली के साथ बारह लोगों को ही अनसूया मंदिर तक जाने की अनुमति दी जाएगी। सभी तीर्थयात्रियों का संगूड पुल पर थर्मल स्क्रीनिंग एवं कोविड टेस्ट किया जाएगा। भण्डारे पर प्रतिबंध रहेगा। केवल मंदिर समिति के माध्यम से देव डोली के साथ चलने वाले लोगों को भण्डारे की व्यवस्था कराई जाएगी। सभी लोगों को मास्क पहनना व शारीरिक दूरी का पूरी तरह से पालन करना आवश्यक होगा। मंदिर परिसर को सेनेटाइज्ड किया जाएगा। इस बार मेले में महिला एवं युवक मंगल दलों तथा स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। अपर जिलाधिकारी ने मेले से पूर्व पैदल मार्ग व मन्दिर परिसर से अत्री मुनि आश्रम तक मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश लोनिवि को दिए।
नोकिया ने HMD Global की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से एक माइक्रोसाइट बनाकर एंड्राइड अपडेट दिए जाने की पूरी प्रोसेस को सभी के लिए साझा किया है। आपको बता देते हैं कि कुछ इन्फोग्राफ़िक्स के माध्यम से नोकिया ने इस पूरी प्रोसेस पर प्रकाश डाला है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे एक फोन को मिलता है एंड्राइड अपडेट। नोकिया के फोंस अपने क्लीन, क्लटर फ्री एंड्राइड एक्सपीरियंस और समय के साथ अपडेट मिलने आदि के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि अभी तक कोई भी इस बारे में नहीं जानता है कि आखिर एक अपडेट के मिलने के पीछे एक लम्बी प्रक्रिया पर चलना पड़ता है और इसके बाद जाकर एक फोन को एक अपडेट मिलता है। नोकिया ने HMD Global की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से एक माइक्रोसाइट बनाकर एंड्राइड अपडेट दिए जाने की पूरी प्रोसेस को सभी के लिए साझा किया है। आपको बता देते हैं कि कुछ इन्फोग्राफ़िक्स के माध्यम से नोकिया ने इस पूरी प्रोसेस पर प्रकाश डाला है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे एक फोन को मिलता है एंड्राइड अपडेट। आपको बता देते हैं कि गूगल का लेटेस्ट मोबाइल OS वर्जन अपनी यात्रा की शुरुआत एक चिपसेट वेंडर से करता है, ताकि वह इसके लिए जरुरी ड्राइवर्स का निर्माण कर सकें। इसके बदले में एक चिपमेकर को एक स्मार्टफोन निर्माता को एक HAL यानी (Hardware Abstraction Layer) भेजनी होती है। जिसके बाद एक OS निर्माण को शुरू कर देते हैं, ताकि वह उनके डिवाइस में काम कर सके। इसके अलावा आपको बता देते हैं कि एक चिपसेट के वेंडर ही इस बात का भी निर्णय लेते हैं कि आखिर किस प्रोसेसर को इस नए OS का सपोर्ट मिलेगा और किस नहीं। हालाँकि अगला प्रोसेस ज्यादा समय नहीं लेता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि नोकिया के फोंस प्योर एंड्राइड वर्जन पर चलते हैं, इसका मतलब है कि नोकिया की ओर से इन्हें किसी भी तरह की कोई स्किन या लेयर नहीं दी जाती है। इसके बाद नोकिया सॉफ्टवेयर को इंटरनल टेस्टिंग के लिए भेज देता है, अब यहाँ यह भी देखा जाता है कि क्या यह सही तरह से काम कर रहा है या नहीं। अगले चरण में नोकिया कम्युनिटी आती है - दुनिया भर में आधिकारिक तौर पर सभी यूनिट्स में लाने से पहले बीटा वर्जन को बहुत से डिवाइस पर चलाया जाता है, और टेस्टिंग की जाती है। इसके बाद जो चरण बचते हैं, उनमें बहुत से अन्य स्टैण्डर्ड टेस्ट जैसे ब्लूटूथ और वाई-फाई आदि की टेस्टिंग की जाती है। इसके बाद क्वालिटी चेक और अतिरिक्त ऑपरेटर्स टेस्ट जो जरुरी हैं उन्हें बाद में किया जाता है। इसके बाद एक फाइनल OTA अपडेट को एलिजिबल डिवाइसों के लिए रोल आउट कर दिया जाता है।
नोकिया ने HMD Global की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से एक माइक्रोसाइट बनाकर एंड्राइड अपडेट दिए जाने की पूरी प्रोसेस को सभी के लिए साझा किया है। आपको बता देते हैं कि कुछ इन्फोग्राफ़िक्स के माध्यम से नोकिया ने इस पूरी प्रोसेस पर प्रकाश डाला है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे एक फोन को मिलता है एंड्राइड अपडेट। नोकिया के फोंस अपने क्लीन, क्लटर फ्री एंड्राइड एक्सपीरियंस और समय के साथ अपडेट मिलने आदि के लिए जाने जाते हैं। हालाँकि अभी तक कोई भी इस बारे में नहीं जानता है कि आखिर एक अपडेट के मिलने के पीछे एक लम्बी प्रक्रिया पर चलना पड़ता है और इसके बाद जाकर एक फोन को एक अपडेट मिलता है। नोकिया ने HMD Global की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से एक माइक्रोसाइट बनाकर एंड्राइड अपडेट दिए जाने की पूरी प्रोसेस को सभी के लिए साझा किया है। आपको बता देते हैं कि कुछ इन्फोग्राफ़िक्स के माध्यम से नोकिया ने इस पूरी प्रोसेस पर प्रकाश डाला है। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे एक फोन को मिलता है एंड्राइड अपडेट। आपको बता देते हैं कि गूगल का लेटेस्ट मोबाइल OS वर्जन अपनी यात्रा की शुरुआत एक चिपसेट वेंडर से करता है, ताकि वह इसके लिए जरुरी ड्राइवर्स का निर्माण कर सकें। इसके बदले में एक चिपमेकर को एक स्मार्टफोन निर्माता को एक HAL यानी भेजनी होती है। जिसके बाद एक OS निर्माण को शुरू कर देते हैं, ताकि वह उनके डिवाइस में काम कर सके। इसके अलावा आपको बता देते हैं कि एक चिपसेट के वेंडर ही इस बात का भी निर्णय लेते हैं कि आखिर किस प्रोसेसर को इस नए OS का सपोर्ट मिलेगा और किस नहीं। हालाँकि अगला प्रोसेस ज्यादा समय नहीं लेता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि नोकिया के फोंस प्योर एंड्राइड वर्जन पर चलते हैं, इसका मतलब है कि नोकिया की ओर से इन्हें किसी भी तरह की कोई स्किन या लेयर नहीं दी जाती है। इसके बाद नोकिया सॉफ्टवेयर को इंटरनल टेस्टिंग के लिए भेज देता है, अब यहाँ यह भी देखा जाता है कि क्या यह सही तरह से काम कर रहा है या नहीं। अगले चरण में नोकिया कम्युनिटी आती है - दुनिया भर में आधिकारिक तौर पर सभी यूनिट्स में लाने से पहले बीटा वर्जन को बहुत से डिवाइस पर चलाया जाता है, और टेस्टिंग की जाती है। इसके बाद जो चरण बचते हैं, उनमें बहुत से अन्य स्टैण्डर्ड टेस्ट जैसे ब्लूटूथ और वाई-फाई आदि की टेस्टिंग की जाती है। इसके बाद क्वालिटी चेक और अतिरिक्त ऑपरेटर्स टेस्ट जो जरुरी हैं उन्हें बाद में किया जाता है। इसके बाद एक फाइनल OTA अपडेट को एलिजिबल डिवाइसों के लिए रोल आउट कर दिया जाता है।
मोतिहारी में स्वर्ण कारोबारी की गोली मारकर हत्या (प्रतीकात्मक फोटो) देवरिया. यूपी के देवरिया जिले (Deoria) के बनकटा थाना क्षेत्र के ताली मठिया में यूपी-बिहार बार्डर पर स्थित देसी शराब (Wine Shop) की दुकान के मुनीम की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी. घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई. मौके पर एसपी डा. श्रीपति मिश्र समेत अन्य अधिकारी पहुंचे और घटना की जानकारी ली. इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है. पुलिस घटना के पीछे रंजिश बता रही है. बता दें कि गोरखपुर जिले के परसा निवासी (48) वर्षीय राजेश यादव ताली मठिया स्थित रामप्रवेश राय के देसी शराब की दुकान पर मुनीम थे. जानकारी के मुताबिक बाइक पर सवार 4-5 बदमाश पहुंचे और किसी बात को लेकर राजेश से नोंकझोंक के बाद बदमाशों ने उनके सीने में गोली मार दी. गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग आए, लेकिन तब तक बदमाश यूपी बार्डर पार कर बिहार में फरार हो गए. लोगों ने राजेश को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने कारतूस व अन्य सामान भी मौके से बरामद किया. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे देवरिया के एसपी डा. श्रीपति मिश्र ने बताया कि अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगी है. जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. ये भी पढे़ंः .
मोतिहारी में स्वर्ण कारोबारी की गोली मारकर हत्या देवरिया. यूपी के देवरिया जिले के बनकटा थाना क्षेत्र के ताली मठिया में यूपी-बिहार बार्डर पर स्थित देसी शराब की दुकान के मुनीम की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी. घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई. मौके पर एसपी डा. श्रीपति मिश्र समेत अन्य अधिकारी पहुंचे और घटना की जानकारी ली. इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है. पुलिस घटना के पीछे रंजिश बता रही है. बता दें कि गोरखपुर जिले के परसा निवासी वर्षीय राजेश यादव ताली मठिया स्थित रामप्रवेश राय के देसी शराब की दुकान पर मुनीम थे. जानकारी के मुताबिक बाइक पर सवार चार-पाँच बदमाश पहुंचे और किसी बात को लेकर राजेश से नोंकझोंक के बाद बदमाशों ने उनके सीने में गोली मार दी. गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग आए, लेकिन तब तक बदमाश यूपी बार्डर पार कर बिहार में फरार हो गए. लोगों ने राजेश को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने कारतूस व अन्य सामान भी मौके से बरामद किया. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे देवरिया के एसपी डा. श्रीपति मिश्र ने बताया कि अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगी है. जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. ये भी पढे़ंः .
लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी के उत्तरप्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह यादव की बेटी से उत्तरप्रदेश राज्य के राज्यपाल आज भेंट करेंगे। दरअसल दयाशंकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद एक बड़ा राजनीतिक बवाल मच गया थ। दरअसल शनिवार को एक कार्यक्रम में भागीदारी करने पहुंचे राज्यपाल राम नाईक ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व उपाध्यक्ष दयाशंकर की बेटी ने उन्हें फोन किया और उनसे भेंट करने की मांग भी की। उन्होंने इस मामले में दयाशंकर सिंह के परिवार की बात सुनने के लिए उन्हें राजभवन बुलाया है।
लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी के उत्तरप्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह यादव की बेटी से उत्तरप्रदेश राज्य के राज्यपाल आज भेंट करेंगे। दरअसल दयाशंकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद एक बड़ा राजनीतिक बवाल मच गया थ। दरअसल शनिवार को एक कार्यक्रम में भागीदारी करने पहुंचे राज्यपाल राम नाईक ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व उपाध्यक्ष दयाशंकर की बेटी ने उन्हें फोन किया और उनसे भेंट करने की मांग भी की। उन्होंने इस मामले में दयाशंकर सिंह के परिवार की बात सुनने के लिए उन्हें राजभवन बुलाया है।
जमशेदपुर, झारखंड. यह तस्वीर मदर्स-डे पर सामने आई है। जब सारी दुनिया मां का गुणगान कर रही थी, अंधेरे में यह बच्चा झाड़ियों में मरने के लिए फेंक दिया गया। गनीमत रही कि उसकी रोने की आवाज ने वहां से गुजर रहे एक साइकिलवाले का ध्यान आकर्षित किया और उसकी जान बच गई। मामला सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत राजनगर रोड पर स्थित तितिरबिला गांव का है। रविवार रात करीब 8 बजे तितिरबिला गांव का एक युवक अपनी साइकिल से गुजर रहा था। तभी उसे झाड़ियों से बच्चे के रोने की आवाज आई। युवक ने इसकी जानकारी गांववालों को दी। गांववालों ने फौरान सरायकेला पुलिस को सूचित किया। लॉकडाउन की वजह से बंद हुए काम-धंधों के चलते पलायन कर रहे मजदूरों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं कोई सड़के हादसे का शिकार हो रहा है तो कहीं कोई भूखा ही अपने प्राण गंवा रहा है। एक ऐसा दर्दनाक मामला झारखंड में सामने आया है, जहां 4 मजदूरों की सड़क हादसे में मौत हो गई। 10 मई को यानी आज पूरी दुनिया में मदर्स डे मनाया जा रहा है। मां अपनी जान पर खेलकर भी अपने बच्चों की जिंदगी बचाती हैं। लेकिन, झारखंड में आज के दिन ममता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामना आया है। जहां एक कलयुगी मां ने अपने बेटे की हत्या कर दी। लॉकडाउन के चलते अब देश कई हिस्सों से रोज अपराध की खबरें आने लगी हैं। ऐसी ही एक मानवता को शर्मसार कर देने वाली घिनौनी घटना झारखंड से सामने आई है। जहां एक अधेड़ हैवान ने एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार किया। 27 वर्षीय इस महिला के साहस के आगे खूंखार नक्सलियों के भी हाथ-पैर फूल गए। नक्सली उसके घर में घुसकर धमकाने आए थे। अपने परिवार को खतरे में देखकर महिला ने काली का रूप धरा और अकेले की नक्सलियों पर टूट पड़ी। उसने नक्सली कमांडर को मार गिराया। इसके बाद बाकी नक्सली डरके मारे जंगलों में भाग निकले। पुलिस ने महिला की हिम्मत को सराहा है। महिला ने कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करती, तो नक्सली उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते थे। लॉकडाउन के चलते दो बार शादी कैंसल होने पर दूल्हे को सनक चढ़ी। प्रशासन ने उसे अनुमति नहीं दी थी। इस बार उसने ठान लिया कि किसी को कानों-कान खबर नहीं होने देगा और चुपचाप 7 फेरे ले लेगा। मंदिर में शादी चल रही थी, लेकिन घरवालों के अलावा बहुत सारे बिन बुलाए मेहमान भी आ टपके। भीड़ बढ़ी, तो किसी ने पुलिस से मुखबिरी कर दी। बस फिर क्या था, जैसे ही पुलिस शादी समारोह में पहुंची. . भगदड़ मच गई। पुलिस ने दूल्हा-दुल्हन के 10, जबकि 40 अज्ञात मेहमानों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। गिरिडीह (झारखंड). एक ओर जहां लोग धर्म के नाम पर आए दिन एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति दूसरे धर्म के व्यक्ति की जान बचाने के लिए अपना खून दान करें तो इससे बढ़कर इंसानियत और कुछ नहीं हो सकती। ऐसी ही मानवता की मिसाल पेश की है, झारखंड के सलीम अंसारी ने, जिसने अपना रोजा तोड़कर एक हिंदू बच्चे को खून देकर उसकी जिंदगी बचाई। रिश्तों में आई कड़वाहट कितनी खतरनाक साबित होती है, यह घटना इसी का उदाहरण है। यहां एक 8 साल के बच्चे की बुरी तरह हत्या कर दी गई। उसका सिर पत्थर से कुचल दिया गया। लाश जंगल में छोड़ दी, ताकि कोई जंगली जानवर आकर उसे खा जाए। मां तक कपड़े देखकर ही अपने मासूम बेटे को पहचान पाई। महिला इस हत्या का इल्जाम अपने ही पति पर लगा रही है। यह शॉकिंग मामला झारखंड के चाईबासा के एक गांव का है। यह आशिक मिजाज आदमी गांव में किराये से रहता है। इसका कहना है कि घर में टॉयलेट नहीं होने से वो तालाब पर जाता था, लेकिन महिलाओं का तर्क है कि वो झाड़ियों में छुपकर उन्हें नहाते देखता था। हालांकि, पुलिस ने इस शख्स की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ मारपीट की FIR दर्ज की है। अब गांववाले इसके खिलाफ केस दर्ज कराने जा रहे हैं। लवमैरिज के बाद भी किसी और के प्यार में पड़कर एक आदमी ने अपने ही मासूम बेटे की जान ले ली। घटना झारखंड के गुमला की है। यह आरोपी बच्चे की मां ने लगाया है। बताते हैं कि 2 साल पहले लवमैरिज के कुछ समय बाद ही शख्स काम के सिलसिले में हिमाच प्रदेश चला गया था। फरवरी में वो होली मनाने घर आया था। इसी बीच दोनों के बीच अनबन हो गई थी। इसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे थे।
जमशेदपुर, झारखंड. यह तस्वीर मदर्स-डे पर सामने आई है। जब सारी दुनिया मां का गुणगान कर रही थी, अंधेरे में यह बच्चा झाड़ियों में मरने के लिए फेंक दिया गया। गनीमत रही कि उसकी रोने की आवाज ने वहां से गुजर रहे एक साइकिलवाले का ध्यान आकर्षित किया और उसकी जान बच गई। मामला सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत राजनगर रोड पर स्थित तितिरबिला गांव का है। रविवार रात करीब आठ बजे तितिरबिला गांव का एक युवक अपनी साइकिल से गुजर रहा था। तभी उसे झाड़ियों से बच्चे के रोने की आवाज आई। युवक ने इसकी जानकारी गांववालों को दी। गांववालों ने फौरान सरायकेला पुलिस को सूचित किया। लॉकडाउन की वजह से बंद हुए काम-धंधों के चलते पलायन कर रहे मजदूरों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं कोई सड़के हादसे का शिकार हो रहा है तो कहीं कोई भूखा ही अपने प्राण गंवा रहा है। एक ऐसा दर्दनाक मामला झारखंड में सामने आया है, जहां चार मजदूरों की सड़क हादसे में मौत हो गई। दस मई को यानी आज पूरी दुनिया में मदर्स डे मनाया जा रहा है। मां अपनी जान पर खेलकर भी अपने बच्चों की जिंदगी बचाती हैं। लेकिन, झारखंड में आज के दिन ममता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामना आया है। जहां एक कलयुगी मां ने अपने बेटे की हत्या कर दी। लॉकडाउन के चलते अब देश कई हिस्सों से रोज अपराध की खबरें आने लगी हैं। ऐसी ही एक मानवता को शर्मसार कर देने वाली घिनौनी घटना झारखंड से सामने आई है। जहां एक अधेड़ हैवान ने एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार किया। सत्ताईस वर्षीय इस महिला के साहस के आगे खूंखार नक्सलियों के भी हाथ-पैर फूल गए। नक्सली उसके घर में घुसकर धमकाने आए थे। अपने परिवार को खतरे में देखकर महिला ने काली का रूप धरा और अकेले की नक्सलियों पर टूट पड़ी। उसने नक्सली कमांडर को मार गिराया। इसके बाद बाकी नक्सली डरके मारे जंगलों में भाग निकले। पुलिस ने महिला की हिम्मत को सराहा है। महिला ने कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करती, तो नक्सली उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते थे। लॉकडाउन के चलते दो बार शादी कैंसल होने पर दूल्हे को सनक चढ़ी। प्रशासन ने उसे अनुमति नहीं दी थी। इस बार उसने ठान लिया कि किसी को कानों-कान खबर नहीं होने देगा और चुपचाप सात फेरे ले लेगा। मंदिर में शादी चल रही थी, लेकिन घरवालों के अलावा बहुत सारे बिन बुलाए मेहमान भी आ टपके। भीड़ बढ़ी, तो किसी ने पुलिस से मुखबिरी कर दी। बस फिर क्या था, जैसे ही पुलिस शादी समारोह में पहुंची. . भगदड़ मच गई। पुलिस ने दूल्हा-दुल्हन के दस, जबकि चालीस अज्ञात मेहमानों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। गिरिडीह . एक ओर जहां लोग धर्म के नाम पर आए दिन एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति दूसरे धर्म के व्यक्ति की जान बचाने के लिए अपना खून दान करें तो इससे बढ़कर इंसानियत और कुछ नहीं हो सकती। ऐसी ही मानवता की मिसाल पेश की है, झारखंड के सलीम अंसारी ने, जिसने अपना रोजा तोड़कर एक हिंदू बच्चे को खून देकर उसकी जिंदगी बचाई। रिश्तों में आई कड़वाहट कितनी खतरनाक साबित होती है, यह घटना इसी का उदाहरण है। यहां एक आठ साल के बच्चे की बुरी तरह हत्या कर दी गई। उसका सिर पत्थर से कुचल दिया गया। लाश जंगल में छोड़ दी, ताकि कोई जंगली जानवर आकर उसे खा जाए। मां तक कपड़े देखकर ही अपने मासूम बेटे को पहचान पाई। महिला इस हत्या का इल्जाम अपने ही पति पर लगा रही है। यह शॉकिंग मामला झारखंड के चाईबासा के एक गांव का है। यह आशिक मिजाज आदमी गांव में किराये से रहता है। इसका कहना है कि घर में टॉयलेट नहीं होने से वो तालाब पर जाता था, लेकिन महिलाओं का तर्क है कि वो झाड़ियों में छुपकर उन्हें नहाते देखता था। हालांकि, पुलिस ने इस शख्स की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ मारपीट की FIR दर्ज की है। अब गांववाले इसके खिलाफ केस दर्ज कराने जा रहे हैं। लवमैरिज के बाद भी किसी और के प्यार में पड़कर एक आदमी ने अपने ही मासूम बेटे की जान ले ली। घटना झारखंड के गुमला की है। यह आरोपी बच्चे की मां ने लगाया है। बताते हैं कि दो साल पहले लवमैरिज के कुछ समय बाद ही शख्स काम के सिलसिले में हिमाच प्रदेश चला गया था। फरवरी में वो होली मनाने घर आया था। इसी बीच दोनों के बीच अनबन हो गई थी। इसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे थे।
गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल मई महीने तक 119 माओवादियों को मारा जा चुका है। जबकि पिछले साल 136 माओवादियों को मार गिराया गया था। मरने वालों की इतनी बड़ी संख्या की तुलना इसी बात से की जा सकती है कि पिछले साल 30 अप्रैल तक सुरक्षाबलों ने केवल 48 माओवादियों का मारा था। वहीं इस साल 22 और 23 अप्रैल को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 40 माओवादियों को सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में मार दिया था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल मई महीने तक एक सौ उन्नीस माओवादियों को मारा जा चुका है। जबकि पिछले साल एक सौ छत्तीस माओवादियों को मार गिराया गया था। मरने वालों की इतनी बड़ी संख्या की तुलना इसी बात से की जा सकती है कि पिछले साल तीस अप्रैल तक सुरक्षाबलों ने केवल अड़तालीस माओवादियों का मारा था। वहीं इस साल बाईस और तेईस अप्रैल को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में चालीस माओवादियों को सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में मार दिया था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
सानुवाद - अध्यात्मज्योत्स्नाविवृत्तिसमलङ्कृतम् मन्त्र० ३२ तामाशुतोषां वाग्देवतां प्रसाद्य स्वाभीष्टार्थ । किये गये संस्तवन से उस आशुतोप-याग्देवता को सिद्धये प्रार्थनां प्रकुर्वते हे अम्ब != मातः ! । प्रसन्न करके अपने अभीष्ट-अर्थ की सिद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं - हे अम्ब ! मातः, हम विद्या बलअप्रशस्ता विद्यावलधनांद्य भीष्टपदार्थाभाधन आदि अमीष्ट पदार्थों के अभाव से अप्रशस्तवात्, असमृद्धाः - दैन्यदारियादिसमुपेतां असमृद्ध अर्थात् दीनता दरिद्रता आदि से संयुक्त ही इव एव, वयं मसि = भवामः । अतो है हैं । इसलिए हे सरखति ! हम जो तेरे हैं, उनके लिए = प्रशस्ति यानी विद्या की समृद्धि, धन की समृद्धि, धर्म सरस्वति ! नः- असभ्यं तावकेभ्यः प्रशकी समृद्धि एवं बल की समृद्धि कर, अर्थात् कृपया स्ति - विद्या समृद्धिं - धनसमृद्धिं-धर्मसमृद्धिं - उन समृद्धियों को प्रदान कर । तेरी-प्रसन्नता से क्या वलसमृद्धिश्च कृषि = कुरु; कृपया प्रयच्छे- क्या सिद्ध नहीं होता ? अपितु समस्त इष्ट समुदाय त्यर्थः । त्वत्प्रसादाकि किं न सिद्धं भव - सिद्ध होता है, यह भाव है। इस प्रकार जगदत्यपि तु सर्वमिष्टजातं सिद्र्यतीति भावः ।। भक्तों के ऊपर प्रसन्न हुई वह देवी, उनको शीघ्र म्बिका, भगवती सरस्वती का आह्वान करने वाले - एवं जगदम्बिकां भगवतीं सरस्वतीमाह्वय - ( ही इष्टफल का दान करती है, ऐसा अन्ये वेदमन्त्र इयो भक्तेभ्यः प्रसन्ना सा देवी तेभ्यः । मी कहता है- 'देव के अपरोक्ष-दर्शन की कामना सद्य इष्टं फलं ददातीत्यन्योऽपि निगमः । वाले भक्तगण सरखतीदेवी का आह्वान करते हैं। हिसारहित - अध्वर-यज्ञ - जो बहु प्रकार से विस्तृतग्राह- 'सरस्वतीं देवयन्तो हवन्ते सरस्वतीरूप से किया जाता है उसमें भी संरखती का मध्वरे तायमाने । सरस्वतीं सुकृतो अह्व- पूजन करते हैं। पुण्यकर्म वाले मनुष्य, अभीप्सितयन्त सरस्वती दाशुपे वार्य दात् ॥' (ऋ. फल के लिए सरस्वती का आवाहन करते हैं । १०११७१७) इति । अयमर्थः-देवयन्तः= । सरस्वती के उद्देश से हवि आदि देने वाले यजदेवं-सर्वान्तर्यामिणं सच्चित्सुखात्मानमपरो- है।' इति । यह अर्थ है-देवयन्तः यानी सर्वाक्षयितुं कामयमानाः, सरस्वतीं- ब्रह्मविद्या- न्तर्यामी- सच्चित्सुखरूप-देव को अपरोक्ष करने की स्वरूपिणीं वागधिदेवतां पारमेश्वरी शक्ति कामना करने वाले-यजन करने के स्वभाव वाले - यजनशीला भक्ताः हवन्ते आह्वयन्ति, परमेश्वर की शक्तिरूप-सरस्वती का आह्वान करते तथा अध्वरे-यज्ञे-हिंसारहिते वैदिके शुभ- हैं। तथा अप्चर यानी हिंसारहित-वेदप्रतिपाद्य-शुभकर्मणि, 'अध्वर इति यज्ञनाम' ध्वरतिहिंसा- कर्मरूप-यज्ञ । 'अध्वर यह यज्ञ का नाम है, ध्वरति कर्मा तत्प्रतिषेधः ।। (११८) इति निरुक्त- धातु हिंसारूप कर्म वाली है, उसका प्रतिषेध अध्वर है।' ऐसा निरुक्त ग्रन्थ में भी स्मरण किया गया है। स्मरणात् । तायमाने चहुभिर्बहुप्रकारैर्वा तायमान यानी बहुतों से या बहु प्रकारों से विस्तार विस्तार्यमाणे तसिन् भक्ताः सरस्वतीं देवीं से जो किया जाता है, उसमें भक्तलोग सरस्वती।
सानुवाद - अध्यात्मज्योत्स्नाविवृत्तिसमलङ्कृतम् मन्त्रशून्य बत्तीस तामाशुतोषां वाग्देवतां प्रसाद्य स्वाभीष्टार्थ । किये गये संस्तवन से उस आशुतोप-याग्देवता को सिद्धये प्रार्थनां प्रकुर्वते हे अम्ब != मातः ! । प्रसन्न करके अपने अभीष्ट-अर्थ की सिद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं - हे अम्ब ! मातः, हम विद्या बलअप्रशस्ता विद्यावलधनांद्य भीष्टपदार्थाभाधन आदि अमीष्ट पदार्थों के अभाव से अप्रशस्तवात्, असमृद्धाः - दैन्यदारियादिसमुपेतां असमृद्ध अर्थात् दीनता दरिद्रता आदि से संयुक्त ही इव एव, वयं मसि = भवामः । अतो है हैं । इसलिए हे सरखति ! हम जो तेरे हैं, उनके लिए = प्रशस्ति यानी विद्या की समृद्धि, धन की समृद्धि, धर्म सरस्वति ! नः- असभ्यं तावकेभ्यः प्रशकी समृद्धि एवं बल की समृद्धि कर, अर्थात् कृपया स्ति - विद्या समृद्धिं - धनसमृद्धिं-धर्मसमृद्धिं - उन समृद्धियों को प्रदान कर । तेरी-प्रसन्नता से क्या वलसमृद्धिश्च कृषि = कुरु; कृपया प्रयच्छे- क्या सिद्ध नहीं होता ? अपितु समस्त इष्ट समुदाय त्यर्थः । त्वत्प्रसादाकि किं न सिद्धं भव - सिद्ध होता है, यह भाव है। इस प्रकार जगदत्यपि तु सर्वमिष्टजातं सिद्र्यतीति भावः ।। भक्तों के ऊपर प्रसन्न हुई वह देवी, उनको शीघ्र म्बिका, भगवती सरस्वती का आह्वान करने वाले - एवं जगदम्बिकां भगवतीं सरस्वतीमाह्वय - इति । अयमर्थः-देवयन्तः= । सरस्वती के उद्देश से हवि आदि देने वाले यजदेवं-सर्वान्तर्यामिणं सच्चित्सुखात्मानमपरो- है।' इति । यह अर्थ है-देवयन्तः यानी सर्वाक्षयितुं कामयमानाः, सरस्वतीं- ब्रह्मविद्या- न्तर्यामी- सच्चित्सुखरूप-देव को अपरोक्ष करने की स्वरूपिणीं वागधिदेवतां पारमेश्वरी शक्ति कामना करने वाले-यजन करने के स्वभाव वाले - यजनशीला भक्ताः हवन्ते आह्वयन्ति, परमेश्वर की शक्तिरूप-सरस्वती का आह्वान करते तथा अध्वरे-यज्ञे-हिंसारहिते वैदिके शुभ- हैं। तथा अप्चर यानी हिंसारहित-वेदप्रतिपाद्य-शुभकर्मणि, 'अध्वर इति यज्ञनाम' ध्वरतिहिंसा- कर्मरूप-यज्ञ । 'अध्वर यह यज्ञ का नाम है, ध्वरति कर्मा तत्प्रतिषेधः ।। इति निरुक्त- धातु हिंसारूप कर्म वाली है, उसका प्रतिषेध अध्वर है।' ऐसा निरुक्त ग्रन्थ में भी स्मरण किया गया है। स्मरणात् । तायमाने चहुभिर्बहुप्रकारैर्वा तायमान यानी बहुतों से या बहु प्रकारों से विस्तार विस्तार्यमाणे तसिन् भक्ताः सरस्वतीं देवीं से जो किया जाता है, उसमें भक्तलोग सरस्वती।
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या कर दी गई है और उनकी हत्या से पूरा मनोरंजन जगत सदमे में है। अब फैंस से लेकर बड़े-बड़े सेलेब्स तक शोक जता रहे हैं। आप सभी को बता दें कि बीते दिन रविवार 29 मई को पंजाब के मानसा के एक गांव में सिंगर सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जबकि हमले के दौरान उनके साथ मौजूद उनके दो अन्य साथी हमले में घायल पाए गए। वहीं अब सिद्धू मूसेवाला के निधन (Sidhu Moosewala demise) की खबर सुनकर बॉलीवुड, टीवी जगत और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सेलेब्स श्रद्धांजलि (Celebs Condolences) दे रहे हैं। पंजाबी स्टार सिद्धू मूसेवाला के निधन पर बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने भारी दिल से एक पोस्ट किया है। आप देख सकते हैं रणवीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सिद्धू की फोटो पोस्ट की है। इसी के साथ ही एक्टर ने कैप्शन में एक टूटे दिल वाले इमोजी के साथ लिखा है कि 'दिल दा नई मादा'... वहीं उनके अलावा बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने भी पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने सिद्धू के लिए एक इमोशनल नोट पोस्ट करते हुए लिखा है कि, 'एक और मां का बेटा चला गया। ' इसी के साथ ही, सिद्धू मूसेवाला और उनकी मां की एक प्यारी सी तस्वीर भी साझा की है। इसी के साथ अभिनेता अजय देवगन ने लिखा है कि, 'सिद्धू मूसेवाला के निधन से सदमे मे हूं। वाहे गुरु उनके परिवार और करीबियों को इस दुख की घड़ी में ताकत दें। ' आगे उन्होंने लिखा वो अभी भी इस खबर से अपने मन को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा ने लिखा कि, 'वो अबतक सदमे में हैं और आशा करती हैं कि यह खबर सच ना हो। आप हमेशा हमारे दिल में रहोगे। ' वहीं एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने लिखा है कि, 'ये खबर बहुत भयानक है। ' इस तरह कई सेलेब्स ने दुःख जताया है।
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई है और उनकी हत्या से पूरा मनोरंजन जगत सदमे में है। अब फैंस से लेकर बड़े-बड़े सेलेब्स तक शोक जता रहे हैं। आप सभी को बता दें कि बीते दिन रविवार उनतीस मई को पंजाब के मानसा के एक गांव में सिंगर सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जबकि हमले के दौरान उनके साथ मौजूद उनके दो अन्य साथी हमले में घायल पाए गए। वहीं अब सिद्धू मूसेवाला के निधन की खबर सुनकर बॉलीवुड, टीवी जगत और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के सेलेब्स श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पंजाबी स्टार सिद्धू मूसेवाला के निधन पर बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने भारी दिल से एक पोस्ट किया है। आप देख सकते हैं रणवीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सिद्धू की फोटो पोस्ट की है। इसी के साथ ही एक्टर ने कैप्शन में एक टूटे दिल वाले इमोजी के साथ लिखा है कि 'दिल दा नई मादा'... वहीं उनके अलावा बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने भी पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने सिद्धू के लिए एक इमोशनल नोट पोस्ट करते हुए लिखा है कि, 'एक और मां का बेटा चला गया। ' इसी के साथ ही, सिद्धू मूसेवाला और उनकी मां की एक प्यारी सी तस्वीर भी साझा की है। इसी के साथ अभिनेता अजय देवगन ने लिखा है कि, 'सिद्धू मूसेवाला के निधन से सदमे मे हूं। वाहे गुरु उनके परिवार और करीबियों को इस दुख की घड़ी में ताकत दें। ' आगे उन्होंने लिखा वो अभी भी इस खबर से अपने मन को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा ने लिखा कि, 'वो अबतक सदमे में हैं और आशा करती हैं कि यह खबर सच ना हो। आप हमेशा हमारे दिल में रहोगे। ' वहीं एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने लिखा है कि, 'ये खबर बहुत भयानक है। ' इस तरह कई सेलेब्स ने दुःख जताया है।
-विजेता टीम को 25 हजार एवं उपविजेता टीम को 15 हजार रुपये इनाम जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : क्रकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड ऑफ बंगाल (सीएबीबी) के सहयोग से 'उत्तरेर दिशारी' नामक सामाजिक संस्था की ओर से गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां दृष्टि दिव्यांगों का क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया है। यह एक दिवसीय नॉक-आउट क्रिकेट टूर्नामेंट फॉर द ब्लाइंड 'विजन-1 चैलेंजर्स कप-2022-सीजन-2' आगामी शनिवार 28 मई को यहां 23 नंबर वार्ड अंतर्गत सूर्यनगर मैदान में आयोजित होने जा रहा है। 'उत्तरेर दिशारी' के कार्यकारी अध्यक्ष देबायन नंदी ने बुधवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट्स क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। बताया कि टी-20 फॉर्मेट के तहत इस क्रिकेट टूर्नामेंट में सीएबीबी द्वारा पूरे पश्चिम बंगाल से चयनित खिलाड़ी कुल चार टीमों के रूप में भाग लेंगे। वे टीमें सिलीगुड़ी राइजर्स, हेलेन केल्लर दार्जिलिंग, दुर्गापुर चैलेंजर्स व कोलकाता लायंस हैं। इसमें विजेता टीम को नकद 25 हजार रुपये एवं उपविजेता टीम को नकद 15 हजार रुपये राशि के पुरस्कार दिए जाएंगे। सिलीगुड़ी के जाने-माने समाजसेवी चिकित्सक डॉ. संदीप सेनगुप्त व डॉ. कल्याण खान ने भी इस दिन उपरोक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। कहा कि, यह क्रिकेट अन्य तमाम क्रिकेट व खेलों से अनोखा है। क्योंकि, अन्य खेलों में खिलाड़ी सब कुछ देखने वाले होते हैं। मगर, इसमें वे सारे खिलाड़ी ही भाग ले रहे हैं जो देख नहीं सकते। यह अपने आप में बड़ा रोमांचक व सबके लिए प्रेरणादायक आयोजन है। हर किसी को इसका पूरा-पूरा आनंद उठाना चाहिए। आयोजकों की ओर से उन्होंने सभी से इस आयोजन में बढ़-चढ़ कर सम्मिलित होने की अपील की है। इस दिन सीएबीबी के अध्यक्ष चिन्मय मंडल ने भी कोलकाता से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये उक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर यहां संवाददाता सम्मेलन में 'उत्तरेर दिशारी' के सचिव सुभातु घटक भी मौजूद रहे।
-विजेता टीम को पच्चीस हजार एवं उपविजेता टीम को पंद्रह हजार रुपये इनाम जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : क्रकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड ऑफ बंगाल के सहयोग से 'उत्तरेर दिशारी' नामक सामाजिक संस्था की ओर से गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां दृष्टि दिव्यांगों का क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया है। यह एक दिवसीय नॉक-आउट क्रिकेट टूर्नामेंट फॉर द ब्लाइंड 'विजन-एक चैलेंजर्स कप-दो हज़ार बाईस-सीजन-दो' आगामी शनिवार अट्ठाईस मई को यहां तेईस नंबर वार्ड अंतर्गत सूर्यनगर मैदान में आयोजित होने जा रहा है। 'उत्तरेर दिशारी' के कार्यकारी अध्यक्ष देबायन नंदी ने बुधवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट्स क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। बताया कि टी-बीस फॉर्मेट के तहत इस क्रिकेट टूर्नामेंट में सीएबीबी द्वारा पूरे पश्चिम बंगाल से चयनित खिलाड़ी कुल चार टीमों के रूप में भाग लेंगे। वे टीमें सिलीगुड़ी राइजर्स, हेलेन केल्लर दार्जिलिंग, दुर्गापुर चैलेंजर्स व कोलकाता लायंस हैं। इसमें विजेता टीम को नकद पच्चीस हजार रुपये एवं उपविजेता टीम को नकद पंद्रह हजार रुपये राशि के पुरस्कार दिए जाएंगे। सिलीगुड़ी के जाने-माने समाजसेवी चिकित्सक डॉ. संदीप सेनगुप्त व डॉ. कल्याण खान ने भी इस दिन उपरोक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। कहा कि, यह क्रिकेट अन्य तमाम क्रिकेट व खेलों से अनोखा है। क्योंकि, अन्य खेलों में खिलाड़ी सब कुछ देखने वाले होते हैं। मगर, इसमें वे सारे खिलाड़ी ही भाग ले रहे हैं जो देख नहीं सकते। यह अपने आप में बड़ा रोमांचक व सबके लिए प्रेरणादायक आयोजन है। हर किसी को इसका पूरा-पूरा आनंद उठाना चाहिए। आयोजकों की ओर से उन्होंने सभी से इस आयोजन में बढ़-चढ़ कर सम्मिलित होने की अपील की है। इस दिन सीएबीबी के अध्यक्ष चिन्मय मंडल ने भी कोलकाता से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये उक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर यहां संवाददाता सम्मेलन में 'उत्तरेर दिशारी' के सचिव सुभातु घटक भी मौजूद रहे।
DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 मैच डिटेल्सः DUR vs NOR के बीच टूर्नामेंट का 53 मुकाबला 6 जून को Seat Unique Riverside, Chester-le-Street में खेला जाएगा। यह मैच 10:00 PM बजे शुरू होगा। इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा। DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 मैच प्रीव्यूः DUR टीम ने अभी तक इस टूर्नामेंट में 5 में से 3 मुकाबले जीते हैं और वह 6 अंकों के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर बनी हुई है। एलेक्स लीस, ओली रॉबिन्सन, नाथन सॉटर ने DUR टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर NOR टीम ने अभी तक खेले गए 6 मुकाबलों में से 3 मुकाबला जीते हैं और वह 6 अंकों के साथ अंकतालिका में 7वें स्थान पर है। क्रिस लिन,एंड्रयू टाय, रिकार्डो वास्कोनसेलोस NOR के लिए अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है। दोनों टीमों के बीच अभी तक 9 मुकाबले खेले गए हैं जिसमें NOR टीम 5 मुकाबले जीतने में कामयाब रही है वह इस मैच में भी अपने दबदबे को बरकरार रखना चाहेगी। मौसम रिपोर्टः आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान 12-14 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। पिच रिपोर्टः यह पिच बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के अनुकूल है इस पिच पर औसत स्कोर 139 रन के आसपास रहा है। पिछले खेले गए 5 टी-20 मुकाबलों में तेज गेंदबाजों ने 71 में से 36 विकेट लिए हैं। पहली पारी का औसत स्कोरः इस पिच पर पहली पारी का औसत स्कोर 139 रन है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः इस पिच पर दूसरी पारी का औसत स्कोर 147 रन रहा है। संभावित एकादश NOR: संभावित एकादश DUR: DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 ड्रीम टीम टॉप पिक्सः ओली रॉबिन्सन; DUR टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज अभी तक इस टूर्नामेंट में 4 पारियों में 111 की औसत से 222 रन बना चुके हैं यह अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है। एलेक्स लीस; DUR टीम के कप्तान एलेक्स लीस अभी तक अपनी टीम के लिए 5 मैचों में 177 रन बना चुके हैं। इस दौरान इनका सर्वाधिक स्कोर 90 रन रहा है इस मैच में भी यह बड़ा स्कोर कर सकते हैं। ग्राहम क्लार्क; यह अभी तक खेले गए 5 मुकाबलों में 167 रन बना चुके हैं जिसमें एक 102 रन की शानदार पारी शामिल है इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। नाथन सॉटर;यह अभी तक अपनी टीम के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज हैं इन्होंने अपनी टीम के लिए 9 विकेट लिए हैं इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। टॉम टेलर; NOR टीम के तरफ से ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए अभी तक 51 रन बना चुके हैं और 6 विकेट लिए हैं। इस मैच में भी ड्रीम टीम के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकते है। एंड्रयू टाय; अनुभवी तेज गेंदबाज एंड्रयू टाय अभी तक इस टूर्नामेंट में 6 मैचों में 9 विकेट ले चुके है 30/3 इनका सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है इस मैच में भी इन्हे नजरंदाज नही किया जा सकता। डेविड विली; NOR टीम के कप्तान डेविड विली अभी तक अपनी टीम के लिए 141 रन बनाए हैं और 5 विकेट लिए है। इस मैच में ड्रीम टीम में बतौर उप कप्तान एक अच्छा विकल्प रहेंगे। क्रिस लिन; यह काफी अनुभवी सलामी बल्लेबाज है अभी तक इस टूर्नामेंट में 185 रन बना चुके हैं इस मैच में भी ड्रीम टीम के लिए एक अच्छा विकल्प है। रिकार्डो वास्कोनसेलोस; NOR टीम के लिए इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं इन्होंने 5 मैचों में 198 रन बनाए हैं। DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 कप्तान/उपकप्तान विकल्पः ड्रीम 11 टीम 1: ड्रीम 11 टीम 2: DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 विशेषज्ञ सलाहः इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिलती है ऐसे में 4 ऑलराउंडर के साथ जाना सही निर्णय रहेगा। DUR vs NOR Vitality Blast, 2023 संभावित विजेताः DUR टीम के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। यह टीम ज्यादा संतुलित और बेहतर नजर आ रही है।
DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस मैच डिटेल्सः DUR vs NOR के बीच टूर्नामेंट का तिरेपन मुकाबला छः जून को Seat Unique Riverside, Chester-le-Street में खेला जाएगा। यह मैच दस:शून्य PM बजे शुरू होगा। इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा। DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस मैच प्रीव्यूः DUR टीम ने अभी तक इस टूर्नामेंट में पाँच में से तीन मुकाबले जीते हैं और वह छः अंकों के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर बनी हुई है। एलेक्स लीस, ओली रॉबिन्सन, नाथन सॉटर ने DUR टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर NOR टीम ने अभी तक खेले गए छः मुकाबलों में से तीन मुकाबला जीते हैं और वह छः अंकों के साथ अंकतालिका में सातवें स्थान पर है। क्रिस लिन,एंड्रयू टाय, रिकार्डो वास्कोनसेलोस NOR के लिए अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है। दोनों टीमों के बीच अभी तक नौ मुकाबले खेले गए हैं जिसमें NOR टीम पाँच मुकाबले जीतने में कामयाब रही है वह इस मैच में भी अपने दबदबे को बरकरार रखना चाहेगी। मौसम रिपोर्टः आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान बारह-चौदह डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। पिच रिपोर्टः यह पिच बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के अनुकूल है इस पिच पर औसत स्कोर एक सौ उनतालीस रन के आसपास रहा है। पिछले खेले गए पाँच टी-बीस मुकाबलों में तेज गेंदबाजों ने इकहत्तर में से छत्तीस विकेट लिए हैं। पहली पारी का औसत स्कोरः इस पिच पर पहली पारी का औसत स्कोर एक सौ उनतालीस रन है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः इस पिच पर दूसरी पारी का औसत स्कोर एक सौ सैंतालीस रन रहा है। संभावित एकादश NOR: संभावित एकादश DUR: DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस ड्रीम टीम टॉप पिक्सः ओली रॉबिन्सन; DUR टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज अभी तक इस टूर्नामेंट में चार पारियों में एक सौ ग्यारह की औसत से दो सौ बाईस रन बना चुके हैं यह अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है। एलेक्स लीस; DUR टीम के कप्तान एलेक्स लीस अभी तक अपनी टीम के लिए पाँच मैचों में एक सौ सतहत्तर रन बना चुके हैं। इस दौरान इनका सर्वाधिक स्कोर नब्बे रन रहा है इस मैच में भी यह बड़ा स्कोर कर सकते हैं। ग्राहम क्लार्क; यह अभी तक खेले गए पाँच मुकाबलों में एक सौ सरसठ रन बना चुके हैं जिसमें एक एक सौ दो रन की शानदार पारी शामिल है इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। नाथन सॉटर;यह अभी तक अपनी टीम के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज हैं इन्होंने अपनी टीम के लिए नौ विकेट लिए हैं इस मैच में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। टॉम टेलर; NOR टीम के तरफ से ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए अभी तक इक्यावन रन बना चुके हैं और छः विकेट लिए हैं। इस मैच में भी ड्रीम टीम के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकते है। एंड्रयू टाय; अनुभवी तेज गेंदबाज एंड्रयू टाय अभी तक इस टूर्नामेंट में छः मैचों में नौ विकेट ले चुके है तीस/तीन इनका सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है इस मैच में भी इन्हे नजरंदाज नही किया जा सकता। डेविड विली; NOR टीम के कप्तान डेविड विली अभी तक अपनी टीम के लिए एक सौ इकतालीस रन बनाए हैं और पाँच विकेट लिए है। इस मैच में ड्रीम टीम में बतौर उप कप्तान एक अच्छा विकल्प रहेंगे। क्रिस लिन; यह काफी अनुभवी सलामी बल्लेबाज है अभी तक इस टूर्नामेंट में एक सौ पचासी रन बना चुके हैं इस मैच में भी ड्रीम टीम के लिए एक अच्छा विकल्प है। रिकार्डो वास्कोनसेलोस; NOR टीम के लिए इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं इन्होंने पाँच मैचों में एक सौ अट्ठानवे रन बनाए हैं। DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस कप्तान/उपकप्तान विकल्पः ड्रीम ग्यारह टीम एक: ड्रीम ग्यारह टीम दो: DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस विशेषज्ञ सलाहः इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिलती है ऐसे में चार ऑलराउंडर के साथ जाना सही निर्णय रहेगा। DUR vs NOR Vitality Blast, दो हज़ार तेईस संभावित विजेताः DUR टीम के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। यह टीम ज्यादा संतुलित और बेहतर नजर आ रही है।
पहले कैराना उपचुनाव में जयंत चौधरी को यहां उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, मगर तीन दिन चली गहरी चर्चा के बाद सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाना तय हुआ। कैराना से 84 किमी दूर मीरापुर के जाटों वाले मोहल्ले में हुक्का गुड़गुड़ाते हुए कुछ जाट सड़क के किनारे चारपाई पर बैठकर कैराना चुनाव की चर्चा में मशगूल है। कैराना की बेचैनी को इनके चेहरे पर पढ़ा जा सकता है। कैराना में वे वोट नही कर सकते, मगर कैराना पर इनकी पल-पल की नजर है। इसकी अपनी वजह है। यहां बैठे 81 साल के चौधरी मल्लू सिंह की इसका खुलासा करते हैं। वे कहते हैं, "जाटों का नेता खत्म हो जाएगा। इन बीजेपी वालों ने तो उसका घर भी छीन लिया और अब हमारा वजूद भी छीनना चाहते हैं। उन्हें जाटों की राजनीति से जलन हो रही है। जयंत हमारा बच्चा है, उसमें अपने दादा वाली बात है। यह चुनाव तब्बसुम हसन नही लड़ रही हैं, जाट लड़ रहे हैं। यह जाटों के मान-सम्मान की बात है। रालोद हमारी पार्टी है। किसानों की बात करती है। बीजेपी तो पूंजीपतियों का दल है। " इस चुनाव को चौधरी अजित सिंह ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इससे पहले कभी उन्होंने इतनी मेहनत नही की है। वे बुधवार को जलालाबाद के आरएलडी नेता अशरफ अली खान के घर पहुंचे। उन्होंने कहा, "अब मेरी जिंदगी का एक ही मक़सद है। जाटों और मुसलमानों में पहले जैसी मोहब्बत पैदा करना। " अशरफ अली खान के पिता गय्यूर अली खान कैराना से सांसद रहे हैं और वे अजित सिंह के पिता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के करीबी मित्र के तौर पर जाने जाते थे। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यहां जाटों और मुसलमानों के बीच गहरी खाई पैदा हो गई थी। आरएलडी सुप्रीमो पिछले तीन महीने से यहां दंगा प्रभावित इलाकों में घूमकर दिलों को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले कैराना उपचुनाव में जयंत चौधरी को यहां उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, मगर तीन दिन चली गहरी चर्चा के बाद सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाना तय हुआ। सहारनपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे सपा नेता इरशाद चौधरी कहते हैं कि सेकुलर दलो में बेहतरीन समन्वय के लिए यह एक सुलझा हुआ फैसला है। कैराना लोकसभा में लगभग डेढ़ लाख जाट हैं, जबकि मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 14 लाख है। इनमें 5 लाख सिर्फ मुसलमान हैं, मगर फिर भी चर्चा के केंद्र में सिर्फ जाट आ गए हैं क्योंकि उनकी स्थिति निर्णायक बन गई है। 2013 के दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित गांव लांक, बहावड़ी और लिसाढ़ भी इसी क्षेत्र में आते हैं। बीजेपी कैराना परिणाम का मतलब अच्छी तरह समझ रही है, इसलिए इन्हीं जाट बहुल जगहों का 28 मंत्री लगातार दौरा कर रहे हैं और घर-घर जा रहे हैं। यह अलग बात है कि जाटों को वे लुभा नही पा रहे हैं। जाट इस चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरएलडी सुप्रीमो अजित सिंह आपसी मतभेद भुलाकर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर पहुंचे तो उनके परिवार ने उनका जोरदार स्वागत किया। दिवंगत महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र नरेश टिकैत ने अपने पिता के बाद उन्हें अपना संरक्षक बताया। चौधरी अजित सिंह ने टिकैत परिवार के साथ घंटो बात की और वहां कैराना चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
पहले कैराना उपचुनाव में जयंत चौधरी को यहां उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, मगर तीन दिन चली गहरी चर्चा के बाद सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाना तय हुआ। कैराना से चौरासी किमी दूर मीरापुर के जाटों वाले मोहल्ले में हुक्का गुड़गुड़ाते हुए कुछ जाट सड़क के किनारे चारपाई पर बैठकर कैराना चुनाव की चर्चा में मशगूल है। कैराना की बेचैनी को इनके चेहरे पर पढ़ा जा सकता है। कैराना में वे वोट नही कर सकते, मगर कैराना पर इनकी पल-पल की नजर है। इसकी अपनी वजह है। यहां बैठे इक्यासी साल के चौधरी मल्लू सिंह की इसका खुलासा करते हैं। वे कहते हैं, "जाटों का नेता खत्म हो जाएगा। इन बीजेपी वालों ने तो उसका घर भी छीन लिया और अब हमारा वजूद भी छीनना चाहते हैं। उन्हें जाटों की राजनीति से जलन हो रही है। जयंत हमारा बच्चा है, उसमें अपने दादा वाली बात है। यह चुनाव तब्बसुम हसन नही लड़ रही हैं, जाट लड़ रहे हैं। यह जाटों के मान-सम्मान की बात है। रालोद हमारी पार्टी है। किसानों की बात करती है। बीजेपी तो पूंजीपतियों का दल है। " इस चुनाव को चौधरी अजित सिंह ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इससे पहले कभी उन्होंने इतनी मेहनत नही की है। वे बुधवार को जलालाबाद के आरएलडी नेता अशरफ अली खान के घर पहुंचे। उन्होंने कहा, "अब मेरी जिंदगी का एक ही मक़सद है। जाटों और मुसलमानों में पहले जैसी मोहब्बत पैदा करना। " अशरफ अली खान के पिता गय्यूर अली खान कैराना से सांसद रहे हैं और वे अजित सिंह के पिता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के करीबी मित्र के तौर पर जाने जाते थे। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यहां जाटों और मुसलमानों के बीच गहरी खाई पैदा हो गई थी। आरएलडी सुप्रीमो पिछले तीन महीने से यहां दंगा प्रभावित इलाकों में घूमकर दिलों को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले कैराना उपचुनाव में जयंत चौधरी को यहां उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, मगर तीन दिन चली गहरी चर्चा के बाद सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाना तय हुआ। सहारनपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे सपा नेता इरशाद चौधरी कहते हैं कि सेकुलर दलो में बेहतरीन समन्वय के लिए यह एक सुलझा हुआ फैसला है। कैराना लोकसभा में लगभग डेढ़ लाख जाट हैं, जबकि मतदाताओं की कुल संख्या लगभग चौदह लाख है। इनमें पाँच लाख सिर्फ मुसलमान हैं, मगर फिर भी चर्चा के केंद्र में सिर्फ जाट आ गए हैं क्योंकि उनकी स्थिति निर्णायक बन गई है। दो हज़ार तेरह के दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित गांव लांक, बहावड़ी और लिसाढ़ भी इसी क्षेत्र में आते हैं। बीजेपी कैराना परिणाम का मतलब अच्छी तरह समझ रही है, इसलिए इन्हीं जाट बहुल जगहों का अट्ठाईस मंत्री लगातार दौरा कर रहे हैं और घर-घर जा रहे हैं। यह अलग बात है कि जाटों को वे लुभा नही पा रहे हैं। जाट इस चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरएलडी सुप्रीमो अजित सिंह आपसी मतभेद भुलाकर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर पहुंचे तो उनके परिवार ने उनका जोरदार स्वागत किया। दिवंगत महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र नरेश टिकैत ने अपने पिता के बाद उन्हें अपना संरक्षक बताया। चौधरी अजित सिंह ने टिकैत परिवार के साथ घंटो बात की और वहां कैराना चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
Oppo के इन स्मार्टफोन पर 5जी नेटवर्क शुरू, मिलेगा Jio True 5G का सपोर्ट! OPPO का किफायती स्मार्टफोन लॉन्च, जबरदस्त लुक और कई फीचर्स शामिल! OPPO ने अचानक की इन 3 स्मार्टफोन की कीमत में कटौती, नए दाम जानकर कहेंगे- अरे वाह! Oppo Reno 8 Pro 5G: सस्ते में मिल रहा है ये 50 से ज्यादा कीमत का फोन, यहां से उठाएं ऑफर का लाभ! B. A. G Convergence Pvt. Ltd. 2022 : All Rights Reserved.
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ताइवान वायु सेना ने कहा कि PLAAF जेट्स ने जानबूझकर घुसपैठ और ताइवान जल क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को किया है। वायु सेना ने जोर दिया कि वह ताइवान जल क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रीय समुद्र और हवाई क्षेत्र की गतिशीलता के बारे में पूरी तरह से अवगत थी और मातृभूमि की सुरक्षा बनाए रखने के लिए दुश्मन के स्वभाव में बदलाव का उचित जवाब दे सकती है। बहुसंख्यक कम्युनिस्ट युद्धक विमानों ने मध्य रेखा के पश्चिम में उड़ान भरी, लेकिन एक बैच ने पूर्व की ओर उड़ान भरी और उस पर पार हो गया। ताइवान के विमानों ने तेजी से PLAAF विमानों को रोक दिया और उन्हें ताइवान के हवाई क्षेत्र से निकाल दिया जबकि शेष चीनी जेटों ने पश्चिम में अपना अभ्यास जारी रखा। लिबर्टी टाइम्स ने सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि 20 से अधिक चीनी युद्धक विमान मध्य रेखा के उत्तरी और दक्षिणी-पश्चिमी छोर पर युद्धाभ्यास में लगे हुए थे। उन्होंने कथित तौर पर फ़ुज़ियान प्रांत के झांगझू, वुइशान और शुइमेन में PLAAF ठिकानों से उड़ान भरी। अमेरिका और ताइवान की दोस्ती से बौखलाया चीन अब पड़ोसी द्वीप को युद्ध के तरीके से कब्जे में करने की तैयारी कर रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, चीनी लड़ाकू जेट विमानों के ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा को पार करने की सूचना मिली थी। खबरें सामने आई हैं कि ताइवान के एफ-16 ने 20 से अधिक युद्धक विमानों ने उड़ान भरी।
ताइवान वायु सेना ने कहा कि PLAAF जेट्स ने जानबूझकर घुसपैठ और ताइवान जल क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को किया है। वायु सेना ने जोर दिया कि वह ताइवान जल क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रीय समुद्र और हवाई क्षेत्र की गतिशीलता के बारे में पूरी तरह से अवगत थी और मातृभूमि की सुरक्षा बनाए रखने के लिए दुश्मन के स्वभाव में बदलाव का उचित जवाब दे सकती है। बहुसंख्यक कम्युनिस्ट युद्धक विमानों ने मध्य रेखा के पश्चिम में उड़ान भरी, लेकिन एक बैच ने पूर्व की ओर उड़ान भरी और उस पर पार हो गया। ताइवान के विमानों ने तेजी से PLAAF विमानों को रोक दिया और उन्हें ताइवान के हवाई क्षेत्र से निकाल दिया जबकि शेष चीनी जेटों ने पश्चिम में अपना अभ्यास जारी रखा। लिबर्टी टाइम्स ने सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि बीस से अधिक चीनी युद्धक विमान मध्य रेखा के उत्तरी और दक्षिणी-पश्चिमी छोर पर युद्धाभ्यास में लगे हुए थे। उन्होंने कथित तौर पर फ़ुज़ियान प्रांत के झांगझू, वुइशान और शुइमेन में PLAAF ठिकानों से उड़ान भरी। अमेरिका और ताइवान की दोस्ती से बौखलाया चीन अब पड़ोसी द्वीप को युद्ध के तरीके से कब्जे में करने की तैयारी कर रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, चीनी लड़ाकू जेट विमानों के ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा को पार करने की सूचना मिली थी। खबरें सामने आई हैं कि ताइवान के एफ-सोलह ने बीस से अधिक युद्धक विमानों ने उड़ान भरी।
पुणेः कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के बाद इस बार का गणेशोत्सव (Ganeshotsav) प्रतिबंध मुक्त (Restriction Free) होगा। गणेश मंडलों को जुलूस के दौरान ढोल ताशा पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं होगा। पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता (Police Commissioner Amitabh Gupta) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है। गणेशोत्सव के दस दिन पुणेकरों की सेवा के लिए सीपी से कांस्टेबल तक तैयार हो गए हैं। इस बार शहर में 3 हजार 566 सार्वजनिक मंडलों द्वारा गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इसमें 4 लाख 54 हजार 686 घरेलू मूर्तियां होंगी। गणेशोत्सव में साढ़े 7 हजार पुलिसकर्मी और अधिकारियों का बंदोबस्त होगा, लेकिन डीजे की आवाज पर मर्यादा होगी। आवाज की सीमा लांघने पर कार्रवाई होगी। पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस दिनों की योजना और बंदोबस्त की जानकारी दी। इस दौरान अपर पुलिस कमिश्नर नामदेव चव्हाण, राजेंद्र डहाले, डीसीपी प्रियंका नारनवरे, ट्रैफिक विभाग के डीसीपी राहुल श्रीरामे, स्पेशल ब्रांच के डीसीपी ए राजा उपस्थित थे। पुलिस के 7 हजार फौज के साथ बीडीडीडी टीम, क्यूआरटी के अधिकारी, एसआरपीएफ की दो कंपनी बंदोबस्त में शामिल है। पुणे शहर में गणेशोत्सव के दौरान कानून और व्यवस्था बनी रहे इसके लिए कई लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पुणे पुलिस ने ढोल ताशा टीम की संख्या एक मंडल में कितनी हो इसका प्रतिबंध हटा लिया है। अब तक इसके लिए पुलिस नियम लगाई जाती थी। इसके अनुसार एक मंडल के पास तीन या इससे कम टीमें होती थी। ऐसे में इस बार निकलनी वाली जुलूस काफी लंबी हो सकती है। इस बार शहर के ट्रैफिक में बड़ा बदलाव किया गया है। पुणेकरों का परेशानी न हो इसका ध्यान रखा गया है। इसके अनुसार इस अवधि में ट्रैफिक विभाग के पुलिस अधिकारी और अमलदार तैनात रहेंगे। साथ ही बीडीडीडी टीम, क्यूआरटी के अधिकारी और अमलदार तैनात होंगे। 3 से 4 सितंबर और 6 से 7 सितंबर और 9 सितंबर सुबह छह से रात 12 बजे तक ढोल ताशे बजेंगे। जिलाधिकारी ने मंडलों को ध्वनिक्षेपक इस्तेमाल करने की परमिशन दी है, लेकिन कोर्ट के नियमानुसार आवाज की मर्यादा तय की गई है। सीमा लांघने पर कार्रवाई होगी। शहर के मुख्य भागों में ट्रैफिक का पालन कराने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। दगडूसेठ हलवाई गणपति, मान के गणपति, ऐतिहासिक परंपरा वाले मंडलों की जगह की ट्रैफिक पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में पार्किंग की व्यवस्था, नो पार्किंग जोन, नो व्हीकल जोन, आरक्षित कर्मचारी अधिकारी तैनात रहेंगे।
पुणेः कोरोना महामारी के बाद इस बार का गणेशोत्सव प्रतिबंध मुक्त होगा। गणेश मंडलों को जुलूस के दौरान ढोल ताशा पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं होगा। पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है। गणेशोत्सव के दस दिन पुणेकरों की सेवा के लिए सीपी से कांस्टेबल तक तैयार हो गए हैं। इस बार शहर में तीन हजार पाँच सौ छयासठ सार्वजनिक मंडलों द्वारा गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इसमें चार लाख चौवन हजार छः सौ छियासी घरेलू मूर्तियां होंगी। गणेशोत्सव में साढ़े सात हजार पुलिसकर्मी और अधिकारियों का बंदोबस्त होगा, लेकिन डीजे की आवाज पर मर्यादा होगी। आवाज की सीमा लांघने पर कार्रवाई होगी। पुलिस कमिश्नर अमिताभ गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस दिनों की योजना और बंदोबस्त की जानकारी दी। इस दौरान अपर पुलिस कमिश्नर नामदेव चव्हाण, राजेंद्र डहाले, डीसीपी प्रियंका नारनवरे, ट्रैफिक विभाग के डीसीपी राहुल श्रीरामे, स्पेशल ब्रांच के डीसीपी ए राजा उपस्थित थे। पुलिस के सात हजार फौज के साथ बीडीडीडी टीम, क्यूआरटी के अधिकारी, एसआरपीएफ की दो कंपनी बंदोबस्त में शामिल है। पुणे शहर में गणेशोत्सव के दौरान कानून और व्यवस्था बनी रहे इसके लिए कई लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पुणे पुलिस ने ढोल ताशा टीम की संख्या एक मंडल में कितनी हो इसका प्रतिबंध हटा लिया है। अब तक इसके लिए पुलिस नियम लगाई जाती थी। इसके अनुसार एक मंडल के पास तीन या इससे कम टीमें होती थी। ऐसे में इस बार निकलनी वाली जुलूस काफी लंबी हो सकती है। इस बार शहर के ट्रैफिक में बड़ा बदलाव किया गया है। पुणेकरों का परेशानी न हो इसका ध्यान रखा गया है। इसके अनुसार इस अवधि में ट्रैफिक विभाग के पुलिस अधिकारी और अमलदार तैनात रहेंगे। साथ ही बीडीडीडी टीम, क्यूआरटी के अधिकारी और अमलदार तैनात होंगे। तीन से चार सितंबर और छः से सात सितंबर और नौ सितंबर सुबह छह से रात बारह बजे तक ढोल ताशे बजेंगे। जिलाधिकारी ने मंडलों को ध्वनिक्षेपक इस्तेमाल करने की परमिशन दी है, लेकिन कोर्ट के नियमानुसार आवाज की मर्यादा तय की गई है। सीमा लांघने पर कार्रवाई होगी। शहर के मुख्य भागों में ट्रैफिक का पालन कराने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। दगडूसेठ हलवाई गणपति, मान के गणपति, ऐतिहासिक परंपरा वाले मंडलों की जगह की ट्रैफिक पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में पार्किंग की व्यवस्था, नो पार्किंग जोन, नो व्हीकल जोन, आरक्षित कर्मचारी अधिकारी तैनात रहेंगे।
How To Remove Body Warts मस्सा (wart) शरीर पर कहीं कहीं काले रंग का उभरा हुआ मांस का छोटा दाना जो चिकित्साविज्ञान के अनुसार एक प्रकार का चर्मरोग माना जाता है। यह प्रायः सरसों अथवा मूँग के आकार से लेकर बेर तक के आकार का होता है। यह प्रायः हाथों और पैर पर होता है किन्तु शरीर के अन्य अंगों पर भी हो सकता है। मस्से विषाणु संक्रमण से पैदा होते हैं। प्रायः 'मानव पेपिल्लोमैविरस' नामक विषाणु की कोई प्रजाति इसका कारण होती है। लगभग दस प्रकार के मस्से होते हैं। मस्से संक्रमण (छुआछूत) से हो सकते हैं और शरीर में वहाँ प्रवेश करते हैं जहाँ त्वचा कटी-फटी हो। प्रायः ये कुछ माह में स्वयं समाप्त हो जाते हैं किन्तु कभी-कभी वर्षों तक बने रह सकते हैं या पुनः हो सकते हैं । मस्से को ऐसे हटाएँ (How To Remove Body Warts) ● एक रुपये का चूना पान वाले से ले ! ● थोडा सा कपडे धोने का सोडा ले! ● मस्से की साईज के हिसाब से सम मात्रा मे चुना व सोडे को मिलाए, ● यदि सूखा रहे तो एक दो बुंद पानी मिला कर गीला करे जिससे मस्से के उपर लग सके ! ● माचिश की तिल्ली की सहायता से लगाये ! (How To Remove Body Warts) ● ये ध्यान रहे की चूना मस्से के उपर ही लगे,चमडी पर जरा भी ना लगे। ● चूना सूखने के बाद स्वतः निकल जायेगा ! ● मस्सा चाहे गाल पर हो या नाक या आख पर एक बार के उपयोग मात्र से निकल जायेगा। ● यदि नही निकले तो दोबारा दो तीन दिन बाद दोहराये! ● इसको लगाना बहुत ध्यानपूर्वक हैं। ● इस से त्वचा को नुक्सान भी हो सकता हैं। (How To Remove Body Warts)
How To Remove Body Warts मस्सा शरीर पर कहीं कहीं काले रंग का उभरा हुआ मांस का छोटा दाना जो चिकित्साविज्ञान के अनुसार एक प्रकार का चर्मरोग माना जाता है। यह प्रायः सरसों अथवा मूँग के आकार से लेकर बेर तक के आकार का होता है। यह प्रायः हाथों और पैर पर होता है किन्तु शरीर के अन्य अंगों पर भी हो सकता है। मस्से विषाणु संक्रमण से पैदा होते हैं। प्रायः 'मानव पेपिल्लोमैविरस' नामक विषाणु की कोई प्रजाति इसका कारण होती है। लगभग दस प्रकार के मस्से होते हैं। मस्से संक्रमण से हो सकते हैं और शरीर में वहाँ प्रवेश करते हैं जहाँ त्वचा कटी-फटी हो। प्रायः ये कुछ माह में स्वयं समाप्त हो जाते हैं किन्तु कभी-कभी वर्षों तक बने रह सकते हैं या पुनः हो सकते हैं । मस्से को ऐसे हटाएँ ● एक रुपये का चूना पान वाले से ले ! ● थोडा सा कपडे धोने का सोडा ले! ● मस्से की साईज के हिसाब से सम मात्रा मे चुना व सोडे को मिलाए, ● यदि सूखा रहे तो एक दो बुंद पानी मिला कर गीला करे जिससे मस्से के उपर लग सके ! ● माचिश की तिल्ली की सहायता से लगाये ! ● ये ध्यान रहे की चूना मस्से के उपर ही लगे,चमडी पर जरा भी ना लगे। ● चूना सूखने के बाद स्वतः निकल जायेगा ! ● मस्सा चाहे गाल पर हो या नाक या आख पर एक बार के उपयोग मात्र से निकल जायेगा। ● यदि नही निकले तो दोबारा दो तीन दिन बाद दोहराये! ● इसको लगाना बहुत ध्यानपूर्वक हैं। ● इस से त्वचा को नुक्सान भी हो सकता हैं।
करैरा। जिले के करैरा के ग्राम वड़ोरा में घर पर हुए प्रसव के बाद प्रसूता बबीता पत्नि सोनू रजक उम्र 22 वर्ष को अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण करैरा अस्पताल में लाया गया। जहां से डॉक्टरों ने उसे शिवपुरी रैफर कर दिया। जिसे शिवपुरी लाते समय अमोला के पास बबीता ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार बबीता रजक को प्रसव पीड़ा के साथ ही कल घर पर ही प्रसव हो गया और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के साथ ही बबीता के यहां अत्यधिक रक्त स्त्राव होने लगा। जिसे उसके परिजन दोपहर के समय करैरा अस्पताल लेकर आए। जहां से शिवपुरी लाते समय बबीता की मौत हो गई।
करैरा। जिले के करैरा के ग्राम वड़ोरा में घर पर हुए प्रसव के बाद प्रसूता बबीता पत्नि सोनू रजक उम्र बाईस वर्ष को अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण करैरा अस्पताल में लाया गया। जहां से डॉक्टरों ने उसे शिवपुरी रैफर कर दिया। जिसे शिवपुरी लाते समय अमोला के पास बबीता ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार बबीता रजक को प्रसव पीड़ा के साथ ही कल घर पर ही प्रसव हो गया और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के साथ ही बबीता के यहां अत्यधिक रक्त स्त्राव होने लगा। जिसे उसके परिजन दोपहर के समय करैरा अस्पताल लेकर आए। जहां से शिवपुरी लाते समय बबीता की मौत हो गई।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिले में गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति के सदस्यों ने जीजीआई का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान विद्यालय में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद छात्राओं के साथ चर्चा की। उनसे नियमित मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के निर्देश दिए। समिति की सदस्य व जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव सीनियर डिविजन की जज त्रिचा रावत, अपर जिलाधिकारी हेमंत वर्मा बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित जीजीआईसी में पहुंचे। कॉलेज में आने वाली छात्राओं एवं स्टॉफ के लिए कोरोना संक्रमसण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए की जाने वाले व्यवस्था की जानकारी ली। रावत ने प्रधानाचार्य शोभा को निर्देश दिए कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का कडार्इ से अनुपालन करें। विद्यालय में आने वाली छात्राओं एवं स्टॉफ की अनिवार्य रूप से थर्मल स्क्रींनिंग हो। सभी छात्राओं का नियमित डाटा तैयार किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय में आने वाली छात्राओं को बैठने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने को कहा। सभी छात्राओं से मॉस्क का अनिवार्य रूप से उपयोग कराने तथा विद्यालय के सभी कक्षों को प्रतिदिन सैनेटार्इजेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जए, इसमें किसी प्रकार की कोर्इ लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने विद्यालय में बेहतर साफ-सफार्इ व्यवस्था बनायें रखने, कॉलेज परिसर के सभी तलों में सेनेटार्इजर मशीन लगाने को कहा, तांकि सभी छात्रायें कक्षा में प्रवेश करने से पूर्व अपने हाथों को अच्छी तरह से सैनेटार्इज कर सकें। इस अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल, जिला सूचना अधिकारी रती लाल साह आदि मौजूद रहे।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिले में गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति के सदस्यों ने जीजीआई का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान विद्यालय में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद छात्राओं के साथ चर्चा की। उनसे नियमित मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के निर्देश दिए। समिति की सदस्य व जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव सीनियर डिविजन की जज त्रिचा रावत, अपर जिलाधिकारी हेमंत वर्मा बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित जीजीआईसी में पहुंचे। कॉलेज में आने वाली छात्राओं एवं स्टॉफ के लिए कोरोना संक्रमसण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए की जाने वाले व्यवस्था की जानकारी ली। रावत ने प्रधानाचार्य शोभा को निर्देश दिए कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का कडार्इ से अनुपालन करें। विद्यालय में आने वाली छात्राओं एवं स्टॉफ की अनिवार्य रूप से थर्मल स्क्रींनिंग हो। सभी छात्राओं का नियमित डाटा तैयार किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय में आने वाली छात्राओं को बैठने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने को कहा। सभी छात्राओं से मॉस्क का अनिवार्य रूप से उपयोग कराने तथा विद्यालय के सभी कक्षों को प्रतिदिन सैनेटार्इजेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जए, इसमें किसी प्रकार की कोर्इ लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने विद्यालय में बेहतर साफ-सफार्इ व्यवस्था बनायें रखने, कॉलेज परिसर के सभी तलों में सेनेटार्इजर मशीन लगाने को कहा, तांकि सभी छात्रायें कक्षा में प्रवेश करने से पूर्व अपने हाथों को अच्छी तरह से सैनेटार्इज कर सकें। इस अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल, जिला सूचना अधिकारी रती लाल साह आदि मौजूद रहे।
Tokyo Paralympic Team 2020: भारतीय पैरालंपिक पदक विजेताओं का देश लौटने पर भव्य स्वागत, केंद्रीय खेल मंत्री से की मुलाकात.. नई दिल्ली। स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल सहित चार Tokyo Paralympic Team 2020 भारतीय पैरा खिलाड़ी शुक्रवार को स्वदेश लौटे और उनका इतना जोरदार स्वागत हुआ कि उनके समर्थकों और मीडिया में यहां हवाईअड्डे पर उनकी एक झलक लेने के लिये धक्का-मुक्की भी हो गयी। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ऐसा अराजक दृश्य देखने को मिला जिसमें खेल प्रेमियों और मीडियाकर्मियों ने इन चार पैरा खिलाड़ियों विशेषकर सुमित को देखने और बात करने के लिये Tokyo Paralympic Team 2020 कोविड-19 प्रोटोकॉल की अवहेलना की। सुमित के अलावा तीन बार के पैरालंपिक पदक विजेता Tokyo Paralympic Team 2020 भाला फेंक एथलीट देवेंद्र झाझरिया, चक्का फेंक एथलीट योगेश कथूनिया और ऊंची कूद एथलीट शरद कुमार का भी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। झाझरिया ने इस बार रजत पदक जीता है। कथूनिया ने भी रजत और शरद ने कांस्य पदक जीता है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने ट्वीट में लिखा, "हमारे चैम्पियन स्वदेश लौट आये हैं और पहुंचने पर बहुत खुश हैं। सुमित, झाझरिया, कथूनिया और शरद के लिये शुभकामनाओं की बारिश हो Tokyo Paralympic Team 2020 रही है।" साइ अधिकारियों ने चारों खिलाड़ियों का पहुंचने पर फूल माला पहनाकर और फूलों का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया। खिलाड़ियों ने अपने पदकों के साथ हवाईअड्डे के अंदर फोटो भी खिंचवाई और उनके प्रशंसक तिरंगा लहरा रहे थे जिनमें से कुछ ढोल भी बजा रहे थे। हालांकि, इनमें से ज्यादातर मास्क के बिना थे और वे इन चारों को फूल माला पहनाने के लिये एक दूसरे से धक्का-मुक्की कर रहे थे। वहीं हवाईअड्डे से बाहर निकलते ही Tokyo Paralympic Team 2020 मीडियाकर्मी भी उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिये जूझ रहे थे। सुमित (23) ने एफ64 क्लास में Tokyo Paralympic Team 2020 पांच बार अपने ही विश्व रिकॉर्ड को तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि दो बार के स्वर्ण पदक विजेता झाझरिया ने एफ46 वर्ग में रजत पदक जीता। कथूनिया ने चक्का फेंक एफ56 क्लास में रजत और शरद ने टी42 ऊंची कूद में कांस्य पदक जीता। भारत ने दो स्वर्ण सहित अभी तक कुल 12 पदक जीत लिये हैं। यह पहली बार है जब पैरालंपिक में देश के खिलाड़ियों ने पदकों में दोहरे अंक को पार किया।
Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस: भारतीय पैरालंपिक पदक विजेताओं का देश लौटने पर भव्य स्वागत, केंद्रीय खेल मंत्री से की मुलाकात.. नई दिल्ली। स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल सहित चार Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस भारतीय पैरा खिलाड़ी शुक्रवार को स्वदेश लौटे और उनका इतना जोरदार स्वागत हुआ कि उनके समर्थकों और मीडिया में यहां हवाईअड्डे पर उनकी एक झलक लेने के लिये धक्का-मुक्की भी हो गयी। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ऐसा अराजक दृश्य देखने को मिला जिसमें खेल प्रेमियों और मीडियाकर्मियों ने इन चार पैरा खिलाड़ियों विशेषकर सुमित को देखने और बात करने के लिये Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल की अवहेलना की। सुमित के अलावा तीन बार के पैरालंपिक पदक विजेता Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस भाला फेंक एथलीट देवेंद्र झाझरिया, चक्का फेंक एथलीट योगेश कथूनिया और ऊंची कूद एथलीट शरद कुमार का भी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। झाझरिया ने इस बार रजत पदक जीता है। कथूनिया ने भी रजत और शरद ने कांस्य पदक जीता है। भारतीय खेल प्राधिकरण ने ट्वीट में लिखा, "हमारे चैम्पियन स्वदेश लौट आये हैं और पहुंचने पर बहुत खुश हैं। सुमित, झाझरिया, कथूनिया और शरद के लिये शुभकामनाओं की बारिश हो Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस रही है।" साइ अधिकारियों ने चारों खिलाड़ियों का पहुंचने पर फूल माला पहनाकर और फूलों का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया। खिलाड़ियों ने अपने पदकों के साथ हवाईअड्डे के अंदर फोटो भी खिंचवाई और उनके प्रशंसक तिरंगा लहरा रहे थे जिनमें से कुछ ढोल भी बजा रहे थे। हालांकि, इनमें से ज्यादातर मास्क के बिना थे और वे इन चारों को फूल माला पहनाने के लिये एक दूसरे से धक्का-मुक्की कर रहे थे। वहीं हवाईअड्डे से बाहर निकलते ही Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस मीडियाकर्मी भी उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिये जूझ रहे थे। सुमित ने एफचौंसठ क्लास में Tokyo Paralympic Team दो हज़ार बीस पांच बार अपने ही विश्व रिकॉर्ड को तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि दो बार के स्वर्ण पदक विजेता झाझरिया ने एफछियालीस वर्ग में रजत पदक जीता। कथूनिया ने चक्का फेंक एफछप्पन क्लास में रजत और शरद ने टीबयालीस ऊंची कूद में कांस्य पदक जीता। भारत ने दो स्वर्ण सहित अभी तक कुल बारह पदक जीत लिये हैं। यह पहली बार है जब पैरालंपिक में देश के खिलाड़ियों ने पदकों में दोहरे अंक को पार किया।
बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन इन दिनों सबा आजाद को डेट कर रहे हैं. दोनों को अक्सर हाथ में हाथ डाले देखा जाता है। इतना ही नहीं लोग ऋतिक और सबा की शादी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कम ही लोग जानते हैं कि सबा और ऋतिक की लव स्टोरी की शुरुआत कैसे और कहां से हुई! बता दें कि दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत ट्विटर से हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऋतिक रोशन को सबा आजाद का एक वीडियो पसंद आया, जिसे अभिनेता ने बाद में अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया. उस वीडियो में सबा आजाद एक इंटरनेशनल रैपर के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं. इसके बाद सबा ने ऋतिक को मैसेज किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबा और ऋतिक ने उसी साल ट्विटर पर चैटिंग शुरू की और बातचीत दोस्ती में बदल गई. फिर साल 2021 में इनकी डेटिंग की खबरें आईं। दोनों को कई बार डिनर डेट पर भी देखा जा चुका है। जबकि कल यानी 22 जनवरी को ऋतिक रोशन की बहन सुनैना का बर्थडे था. इस कार्यक्रम में सबा आजाद भी शामिल हुईं. बर्थडे पार्टी की कई तस्वीरें ऋतिक की मां पिंकी रोशन ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। सबा ऋतिक के परिवार के साथ काफी खुश नजर आईं. आपको बता दें कि ऋतिक रोशन ने अपने करियर की शुरुआत में सुजैन खान से शादी की थी। दोनों ने साल 2000 में इसे सात बार लिया। इसके बाद वे दो बेटों के माता-पिता बने। लेकिन शादी के 13 साल बाद सुजैन और ऋतिक का रिश्ता खत्म हो गया। साल 2013 में दोनों का तलाक हो गया। हालांकि, तलाक के बाद भी ऋतिक और सुजैन अक्सर अपने बच्चों की खातिर साथ वेकेशन पर जाते रहते हैं। खैर, अब ऋतिक को सबा में अपना प्यार मिल गया है और फैंस उनकी शादी का इंतजार कर रहे हैं।
बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन इन दिनों सबा आजाद को डेट कर रहे हैं. दोनों को अक्सर हाथ में हाथ डाले देखा जाता है। इतना ही नहीं लोग ऋतिक और सबा की शादी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कम ही लोग जानते हैं कि सबा और ऋतिक की लव स्टोरी की शुरुआत कैसे और कहां से हुई! बता दें कि दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत ट्विटर से हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऋतिक रोशन को सबा आजाद का एक वीडियो पसंद आया, जिसे अभिनेता ने बाद में अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया. उस वीडियो में सबा आजाद एक इंटरनेशनल रैपर के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं. इसके बाद सबा ने ऋतिक को मैसेज किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबा और ऋतिक ने उसी साल ट्विटर पर चैटिंग शुरू की और बातचीत दोस्ती में बदल गई. फिर साल दो हज़ार इक्कीस में इनकी डेटिंग की खबरें आईं। दोनों को कई बार डिनर डेट पर भी देखा जा चुका है। जबकि कल यानी बाईस जनवरी को ऋतिक रोशन की बहन सुनैना का बर्थडे था. इस कार्यक्रम में सबा आजाद भी शामिल हुईं. बर्थडे पार्टी की कई तस्वीरें ऋतिक की मां पिंकी रोशन ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। सबा ऋतिक के परिवार के साथ काफी खुश नजर आईं. आपको बता दें कि ऋतिक रोशन ने अपने करियर की शुरुआत में सुजैन खान से शादी की थी। दोनों ने साल दो हज़ार में इसे सात बार लिया। इसके बाद वे दो बेटों के माता-पिता बने। लेकिन शादी के तेरह साल बाद सुजैन और ऋतिक का रिश्ता खत्म हो गया। साल दो हज़ार तेरह में दोनों का तलाक हो गया। हालांकि, तलाक के बाद भी ऋतिक और सुजैन अक्सर अपने बच्चों की खातिर साथ वेकेशन पर जाते रहते हैं। खैर, अब ऋतिक को सबा में अपना प्यार मिल गया है और फैंस उनकी शादी का इंतजार कर रहे हैं।
सादर वन्दे, विषय - "नयन" (फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो शनिवार ७ जुलाई लगते ही खोल दिया जायेगा ) धर्मेन्द्र शर्मा (धरम) (सदस्य कार्यकारिणी) Replies are closed for this discussion. के साथ मै आप सभी का स्वागत करता हूँ जय हो ओ.बी.ओ. आपका स्वागत है मित्रवर ! बहुत ही अच्छे दोहों की रचना। महोत्सव की शुरुआत सुप्रसिद्ध छन्द दोहा से हुई। सभी दोहों मे नयनों की सम्यक उपस्थिति अति सुखदाई है। अति सुन्दर दोहे रचे, धन्यवाद श्रीमंत. गूढ़ ज्ञान इनमें भरा, पुलकित सारे संत.. अति सुन्दर दोहे रचे, धन्यवाद श्रीमंत. गूढ़ ज्ञान इनमें भरा, पुलकित सारे संत.. पुलकित सारे संत, खड़े हैं आँख बिछाये. करो कलम से छेड़, अचंभित नयन दबाये. अम्बरीष यह रूप सभी के मन को मोहे. मन भाये हैं तात, आज अति सुन्दर दोहे..
सादर वन्दे, विषय - "नयन" धर्मेन्द्र शर्मा Replies are closed for this discussion. के साथ मै आप सभी का स्वागत करता हूँ जय हो ओ.बी.ओ. आपका स्वागत है मित्रवर ! बहुत ही अच्छे दोहों की रचना। महोत्सव की शुरुआत सुप्रसिद्ध छन्द दोहा से हुई। सभी दोहों मे नयनों की सम्यक उपस्थिति अति सुखदाई है। अति सुन्दर दोहे रचे, धन्यवाद श्रीमंत. गूढ़ ज्ञान इनमें भरा, पुलकित सारे संत.. अति सुन्दर दोहे रचे, धन्यवाद श्रीमंत. गूढ़ ज्ञान इनमें भरा, पुलकित सारे संत.. पुलकित सारे संत, खड़े हैं आँख बिछाये. करो कलम से छेड़, अचंभित नयन दबाये. अम्बरीष यह रूप सभी के मन को मोहे. मन भाये हैं तात, आज अति सुन्दर दोहे..
भावार्थ - कृष्ण की मन को मोहित कर देने वाली मूर्ति की गति बड़ी अद्भुत है, क्योंकि वह रहती तो शुद्ध हृदय के अन्दर है, फिर भी वह बाहर सारे ससार में प्रतिबिम्बित सी दिखाई देती है । भाव यह कि भगवान् भक्तों के हृदय में रहते हुए भी सृष्टि के करण-करण में समाये कोऊ कोटिक सग्रहौ, कोऊ लाख हजार । मो सपति जदुपति सदा, बिपति बिदारनहार ।।५।। शब्दार्थ - संग्रहौ = सग्रह करे । श्रीकृष्ण । विपति- विदारनहार = दुखों कीजै मेरे कोटिक = करोडों । यदुपति = को दूर करने वाले । भावार्थ - कवि कहता है कि कोई करोड़ों रुपयों का संग्रह करे और कोई हज़ारों-लाखों का, किन्तु मेरी सम्पत्ति तो विपत्ति को नष्ट करने वाले श्रीकृष्ण ही हैं । इसलिए मुझे किसी दूसरे धन की आवश्यकता नही । चित सोई तरे, जिहि पतितनु के साथ । गुन-श्रौगुन-गननु, गनो न गोपीनाथ ॥६॥ शब्दार्थ - पतितनु - पापियों । गुनगुण । चौगुन= श्रवगुण । गननु = समूह । गनो= समझो । गोपीनाथ = श्रीकृष्ण । भावार्थ - हे भगवन् ! अपने हृदय में मेरे प्रति ऐसा ही विचार कीजिए कि जैसा विचार और पापियों का उद्धार करते समय किया था । हे गोपीनाथ ! मेरे गुण गुणों के समूह की ओर ध्यान न दीजिए और मेरा उद्धार कर दीजिए । भाव यह कि जिस प्रकार ने दूसरे पापियों के गुण-दोपों की ओर ध्यान दिये बिना उनका उद्धार कर दिया उसी प्रकार मेरा भी कर दीजिए । हरि, कीजति बिनती यहै, तुमसों बार हजार। जि॑िहि-तिर्हि भाँति डरयौ रह्यौ, पर यौ रहौं दरवार ।।१०।।
भावार्थ - कृष्ण की मन को मोहित कर देने वाली मूर्ति की गति बड़ी अद्भुत है, क्योंकि वह रहती तो शुद्ध हृदय के अन्दर है, फिर भी वह बाहर सारे ससार में प्रतिबिम्बित सी दिखाई देती है । भाव यह कि भगवान् भक्तों के हृदय में रहते हुए भी सृष्टि के करण-करण में समाये कोऊ कोटिक सग्रहौ, कोऊ लाख हजार । मो सपति जदुपति सदा, बिपति बिदारनहार ।।पाँच।। शब्दार्थ - संग्रहौ = सग्रह करे । श्रीकृष्ण । विपति- विदारनहार = दुखों कीजै मेरे कोटिक = करोडों । यदुपति = को दूर करने वाले । भावार्थ - कवि कहता है कि कोई करोड़ों रुपयों का संग्रह करे और कोई हज़ारों-लाखों का, किन्तु मेरी सम्पत्ति तो विपत्ति को नष्ट करने वाले श्रीकृष्ण ही हैं । इसलिए मुझे किसी दूसरे धन की आवश्यकता नही । चित सोई तरे, जिहि पतितनु के साथ । गुन-श्रौगुन-गननु, गनो न गोपीनाथ ॥छः॥ शब्दार्थ - पतितनु - पापियों । गुनगुण । चौगुन= श्रवगुण । गननु = समूह । गनो= समझो । गोपीनाथ = श्रीकृष्ण । भावार्थ - हे भगवन् ! अपने हृदय में मेरे प्रति ऐसा ही विचार कीजिए कि जैसा विचार और पापियों का उद्धार करते समय किया था । हे गोपीनाथ ! मेरे गुण गुणों के समूह की ओर ध्यान न दीजिए और मेरा उद्धार कर दीजिए । भाव यह कि जिस प्रकार ने दूसरे पापियों के गुण-दोपों की ओर ध्यान दिये बिना उनका उद्धार कर दिया उसी प्रकार मेरा भी कर दीजिए । हरि, कीजति बिनती यहै, तुमसों बार हजार। जि॑िहि-तिर्हि भाँति डरयौ रह्यौ, पर यौ रहौं दरवार ।।दस।।
इंडिया न्यूज, लखनऊ (Uttar Pradesh)। रोगियों को घर के नजदीक उपचार उपलब्ध कराने की सरकार की मुहीम धीरे-धीरे रंग ला रही है। एक साल में करीब 99 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में मरीजों को इलाज मिलने की राह आसान हुई है। सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अस्पतालों में ओपीडी में रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसकी बड़ी वजह अस्पतालों में संसाधनों का बढ़ाया जाना है। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक की संख्या में वृद्धि हुई है। आधुनिक मशीनों अस्पतालों में स्थापित की जा रही हैं। टेलीमेडिसिन व टेली रेडियोलॉजी से अस्पतालों को जोड़ा जा रहा है। वहीं नए अस्पतालों का निर्माण कार्य भी तेज हुआ है। 2017 से लेकर अब तक बड़ी संख्या में नगरीय क्षेत्र के अस्पतालों में वृद्धि की गई है। मौजूदा समय में 603 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हो रहे हैं। 508 नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचवीएस) में मरीजों का इलाज मिल रहा है। इनमें लगातार रोगी इलाज का लाभ ले रहे हैं। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि नगरीय अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त डॉक्टर की सलाह से लेकर जाँच तक की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दवाएं भी फ्री दी जा रही है। मरीजों को घर के नजदीक इलाज मिलने से काफी सहूलियत हो रही है। वहीं बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम रहा है। इससे गंभीर मरीजों को और बेहतर इलाज मिलने की राह आसान हो रही है।
इंडिया न्यूज, लखनऊ । रोगियों को घर के नजदीक उपचार उपलब्ध कराने की सरकार की मुहीम धीरे-धीरे रंग ला रही है। एक साल में करीब निन्यानवे नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में मरीजों को इलाज मिलने की राह आसान हुई है। सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अस्पतालों में ओपीडी में रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसकी बड़ी वजह अस्पतालों में संसाधनों का बढ़ाया जाना है। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक की संख्या में वृद्धि हुई है। आधुनिक मशीनों अस्पतालों में स्थापित की जा रही हैं। टेलीमेडिसिन व टेली रेडियोलॉजी से अस्पतालों को जोड़ा जा रहा है। वहीं नए अस्पतालों का निर्माण कार्य भी तेज हुआ है। दो हज़ार सत्रह से लेकर अब तक बड़ी संख्या में नगरीय क्षेत्र के अस्पतालों में वृद्धि की गई है। मौजूदा समय में छः सौ तीन नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। पाँच सौ आठ नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में मरीजों का इलाज मिल रहा है। इनमें लगातार रोगी इलाज का लाभ ले रहे हैं। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि नगरीय अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त डॉक्टर की सलाह से लेकर जाँच तक की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दवाएं भी फ्री दी जा रही है। मरीजों को घर के नजदीक इलाज मिलने से काफी सहूलियत हो रही है। वहीं बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम रहा है। इससे गंभीर मरीजों को और बेहतर इलाज मिलने की राह आसान हो रही है।
Eng vs SA इंग्लैंड के कोच ने संकेत दिए हैं कि दूसरे टेस्ट मैच से एंडरसन या फिर ब्रॉड दोनों में से किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है। केपटाउन, आइएएनएस। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कोच क्रिस सिल्वरवुड ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच में स्पिनर की जगह बनाने के लिए अनुभवी तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड में से किसी एक को बाहर बैठा सकते हैं। इंग्लैंड अपने खिलाडि़यों की बीमारी से भी परेशान है। उसकी टीम के 10 खिलाड़ी बीमार पड़े हुए हैं। इस सूची में हाल ही में सलामी बल्लेबाज डॉम सिबले का नाम शामिल हुआ है। स्पिनर जैक लीच अब ठीक हो चुके हैं और कोच ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी को टीम कड़ा फैसला भी ले सकती है। पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने सभी तेज गेंदबाज खिलाए थे। सिल्वरवुड ने कहा कि एंडरसन और ब्रॉड के रूप में हमारे पास बहुत अनुभव है और हम अगर उसे हर मैच में न ले जाएं तो हमारी गलती होगी, लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपके युवा सामने आएं तो और अगर हमें स्पिनर के लिए जगह बनानी पड़ी तो हमें देखना होगा कि कौन सा तेज गेंदबाज पिच के मुताबिक ठीक रहेगा। अगर बड़ा फैसला लेने की जरूरत पड़ी तो हम पीछे नहीं हटेंगे। अगला मैच न्यूलैंड्स में होना है और यहां कि पिच स्पिनरों की मददगार मानी जाती है। कोच ने कहा कि हमें न्यूलैंडस में स्पिनर खिलाने के बारे में सोचना होगा। आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड की टीम को चार टेस्ट मैचों की सीरीज के पहली ही मैच में यानी बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच में 107 रन से हरा दिया था। इस मैच में टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाजी जेम्स एंडरसन ने दोनों पारियों में सिर्फ दो विकेट ही लिए थे। वहीं स्टुअर्ट ब्रॉड की बात करें तो उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर कुल 5 विकेट लिए थे। एंडरसन ने दोनों पारियों में एक-एक विकेट लिए जबकि ब्रॉड ने पहली पारी में चार और दूसरी पारी में एक विकेट लिए।
Eng vs SA इंग्लैंड के कोच ने संकेत दिए हैं कि दूसरे टेस्ट मैच से एंडरसन या फिर ब्रॉड दोनों में से किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है। केपटाउन, आइएएनएस। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के कोच क्रिस सिल्वरवुड ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच में स्पिनर की जगह बनाने के लिए अनुभवी तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड में से किसी एक को बाहर बैठा सकते हैं। इंग्लैंड अपने खिलाडि़यों की बीमारी से भी परेशान है। उसकी टीम के दस खिलाड़ी बीमार पड़े हुए हैं। इस सूची में हाल ही में सलामी बल्लेबाज डॉम सिबले का नाम शामिल हुआ है। स्पिनर जैक लीच अब ठीक हो चुके हैं और कोच ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी को टीम कड़ा फैसला भी ले सकती है। पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने सभी तेज गेंदबाज खिलाए थे। सिल्वरवुड ने कहा कि एंडरसन और ब्रॉड के रूप में हमारे पास बहुत अनुभव है और हम अगर उसे हर मैच में न ले जाएं तो हमारी गलती होगी, लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपके युवा सामने आएं तो और अगर हमें स्पिनर के लिए जगह बनानी पड़ी तो हमें देखना होगा कि कौन सा तेज गेंदबाज पिच के मुताबिक ठीक रहेगा। अगर बड़ा फैसला लेने की जरूरत पड़ी तो हम पीछे नहीं हटेंगे। अगला मैच न्यूलैंड्स में होना है और यहां कि पिच स्पिनरों की मददगार मानी जाती है। कोच ने कहा कि हमें न्यूलैंडस में स्पिनर खिलाने के बारे में सोचना होगा। आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड की टीम को चार टेस्ट मैचों की सीरीज के पहली ही मैच में यानी बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच में एक सौ सात रन से हरा दिया था। इस मैच में टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाजी जेम्स एंडरसन ने दोनों पारियों में सिर्फ दो विकेट ही लिए थे। वहीं स्टुअर्ट ब्रॉड की बात करें तो उन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर कुल पाँच विकेट लिए थे। एंडरसन ने दोनों पारियों में एक-एक विकेट लिए जबकि ब्रॉड ने पहली पारी में चार और दूसरी पारी में एक विकेट लिए।
UP Election 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 7वें चरण के मतदान से पूर्व शनिवार को मयंक जोशी ने सपा का दामन थाम लिया है। UP Election 2022: उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से सात चरणों में वोटिंग हो रही है। तीन चरणों के मतदान राज्य में संपन्न हो चुके हैं। Assembly Election 2022: दो राज्यों में आज विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। पंजाब में 117 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है। UP Election 2022: Uttar Pradesh में तीसरे चरण का मतदान चल रहा है। 59 सीटों के 16 जिलों में सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। Hathras News: आम तौर पर एक वोट की ताकत को लोग कम समझते हैं। अक्सर यह कहते सुना जाता हैं कि एक वोट से क्या होगा। UP Election 2022: समय खत्म हुआ और यूपी में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है। चुनावी प्रचार का शोर खत्म हो गया है। Congress नेता Ajay Rai के खिलाफ शनिवार को Varanasi के फूलपुर थाने में राजद्रोह का केस दर्ज किया गया। UP Election 2022: मंगलवार को BJP छोड़कर आने वाले पूर्व मंत्री Swami Prasad Maurya शुक्रवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। Uttar Pradesh Vidhan Mandal में आज 8 हजार 479 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया गया। वहीं, 1. 69 लाख करोड़ का लेखानुदान विधानसभा के पटल पर रखा गया।
UP Election दो हज़ार बाईस: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सातवें चरण के मतदान से पूर्व शनिवार को मयंक जोशी ने सपा का दामन थाम लिया है। UP Election दो हज़ार बाईस: उत्तर प्रदेश में दस फरवरी से सात चरणों में वोटिंग हो रही है। तीन चरणों के मतदान राज्य में संपन्न हो चुके हैं। Assembly Election दो हज़ार बाईस: दो राज्यों में आज विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। पंजाब में एक सौ सत्रह विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है। UP Election दो हज़ार बाईस: Uttar Pradesh में तीसरे चरण का मतदान चल रहा है। उनसठ सीटों के सोलह जिलों में सुबह सात बजे से मतदान जारी है। Hathras News: आम तौर पर एक वोट की ताकत को लोग कम समझते हैं। अक्सर यह कहते सुना जाता हैं कि एक वोट से क्या होगा। UP Election दो हज़ार बाईस: समय खत्म हुआ और यूपी में दस फरवरी को पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है। चुनावी प्रचार का शोर खत्म हो गया है। Congress नेता Ajay Rai के खिलाफ शनिवार को Varanasi के फूलपुर थाने में राजद्रोह का केस दर्ज किया गया। UP Election दो हज़ार बाईस: मंगलवार को BJP छोड़कर आने वाले पूर्व मंत्री Swami Prasad Maurya शुक्रवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। Uttar Pradesh Vidhan Mandal में आज आठ हजार चार सौ उन्यासी करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया गया। वहीं, एक. उनहत्तर लाख करोड़ का लेखानुदान विधानसभा के पटल पर रखा गया।
विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को नागरिकता संशोधन कानून लागू करने के लिए धन्यवाद पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टकार्ड लिखने का अभियान भी शुरु कर दिया। नगर के मुहल्ला कोट पूर्वी में स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। कार्यकर्ताओं ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर अमल में लाना शुरू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद दिया। कहा कि ऐसा साहस पिछले 70 वर्षों में कोई भी सरकार नहीं कर पाई। इससे सिद्ध होता है कि आज हमारा देश सुरक्षित हाथों में है। देश की चिंता करने वालों के हाथों में है। विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भारतीयों के लिए नहीं है। यह कानून उन घुसपैठियों के लिए है जो किसी भी देश से आकर भारत को धर्मशाला समझकर आ घुसते हैं। यहां के नागरिक बनकर या लावारिस घूम कर देश की अस्मिता, सम्मान, संस्कृति, परंपराओं से खिलवाड़ करने का दुस्साहस करते हैं। इसलिए भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को प्रत्येक भारतीय हृदय से आभार व्यक्त करता है। नगर मंत्री उमेश श्रीमाली ने कहा कि देश के लिए विश्व गुरु बनाने की ओर कदम बढ़ रहे हैं। इस बीच विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, मातृशक्ति के सौ से अधिक सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नागरिकता संशोधन कानून अमल में लाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पोस्टकार्ड लिखे। इस दौरान ममता राधू, शक्ति गंभीर, अमिता गांधी, पूनम मदान, सुदेश, नरूला, रमा अरोड़ा, विनीत श्रीमाली, सचिन पाराशर, सत्येंद्र सैनी, अजीत सैनी, सुभाष चंद्र शर्मा, सुभाष चंद्र मोंगिया आदि रहे। संचालन विहिप के नगर अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा एवं कार्य अध्यक्ष सुधीर श्रोत्रीय ने किया।
विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को नागरिकता संशोधन कानून लागू करने के लिए धन्यवाद पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टकार्ड लिखने का अभियान भी शुरु कर दिया। नगर के मुहल्ला कोट पूर्वी में स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। कार्यकर्ताओं ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर अमल में लाना शुरू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद दिया। कहा कि ऐसा साहस पिछले सत्तर वर्षों में कोई भी सरकार नहीं कर पाई। इससे सिद्ध होता है कि आज हमारा देश सुरक्षित हाथों में है। देश की चिंता करने वालों के हाथों में है। विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भारतीयों के लिए नहीं है। यह कानून उन घुसपैठियों के लिए है जो किसी भी देश से आकर भारत को धर्मशाला समझकर आ घुसते हैं। यहां के नागरिक बनकर या लावारिस घूम कर देश की अस्मिता, सम्मान, संस्कृति, परंपराओं से खिलवाड़ करने का दुस्साहस करते हैं। इसलिए भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को प्रत्येक भारतीय हृदय से आभार व्यक्त करता है। नगर मंत्री उमेश श्रीमाली ने कहा कि देश के लिए विश्व गुरु बनाने की ओर कदम बढ़ रहे हैं। इस बीच विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, मातृशक्ति के सौ से अधिक सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नागरिकता संशोधन कानून अमल में लाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पोस्टकार्ड लिखे। इस दौरान ममता राधू, शक्ति गंभीर, अमिता गांधी, पूनम मदान, सुदेश, नरूला, रमा अरोड़ा, विनीत श्रीमाली, सचिन पाराशर, सत्येंद्र सैनी, अजीत सैनी, सुभाष चंद्र शर्मा, सुभाष चंद्र मोंगिया आदि रहे। संचालन विहिप के नगर अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा एवं कार्य अध्यक्ष सुधीर श्रोत्रीय ने किया।
"हाँ, एक बात खटकनेवाली जरूर है । डाक्टर ग्रियर्सन ने जो ये बड़ी-बड़ी इतनी जिल्दें लिखकर भारतीय भाषाओं का फल प्रकाशित किया है उसके कम से कम एक अध्याय में उन्हें हिंदी या हिंदुस्तानी भाषा की व्यापकता पर जुदा विचार करना चाहिए था। उन्हें यह दिखाना चाहिए था कि यद्यपि इस देश में सैकड़ों बोलियाँ या भाषाएँ प्रचलित हैं और यद्यपि उत्पत्ति तथा विकास की दृष्टि से उसके कई भेद हैं तथापि यही भाषा ऐसी है जिसके बोलनेवाले सबसे अधिक हैं और जिसे भिन्न-भिन्न भाषा-भाषी प्रांतों के निवासी भी, किसी हद तक, समझ सकते हैं । इस दशा में राजकार्यनिर्वाह और पारस्परिक व्यवहार के लिए यदि भारत की प्रधान भाषा यही मान ली जाय तो इसमे देश को अनेक लाभ पहुँच सकते हैं । " द्विवेदी जी के इस कथन से दो बातें स्पष्ट होती हैं। एक तो यह कि हिंदी भाषा को सरलतम रूप देकर हिंदुस्तानी सा बना देने के वे पक्ष में थे क्योंकि उसे किसी सीमा तक समझनेवाले भारत के प्रायः सभी प्रांतों में रहते हैं। दूसरे, यदि एक भाषा का देश में प्रचार हो जायगा तो देश में एक राष्ट्रीयता या एक जातीयता की भावना की उत्पत्ति सरलता से हो सकेगी। उनका तीसरा उद्देश्य यह था कि हिंदी भाषा में गंभीर से गंभीर और गढ़ से गूढ़ विषय को सरल भाषा में व्यक्त करने की क्षमता आ जायगी । वे हिंदी-संसार को यह सुझा देना चाहते थे कि हिंदी भाषा की अभिव्यंजन शक्ति किसी स्वतंत्र भाषा से कम नहीं है और उसमें जो कमी है भी, वह प्रचलित शब्द ग्रहण करने से शीघ्र ही दूर की जा सकती है। अपने इस अंतिम उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए 'हिंदी भाषा की ग्राहका-शक्ति' के विषय में उन्होंने लिखा था
"हाँ, एक बात खटकनेवाली जरूर है । डाक्टर ग्रियर्सन ने जो ये बड़ी-बड़ी इतनी जिल्दें लिखकर भारतीय भाषाओं का फल प्रकाशित किया है उसके कम से कम एक अध्याय में उन्हें हिंदी या हिंदुस्तानी भाषा की व्यापकता पर जुदा विचार करना चाहिए था। उन्हें यह दिखाना चाहिए था कि यद्यपि इस देश में सैकड़ों बोलियाँ या भाषाएँ प्रचलित हैं और यद्यपि उत्पत्ति तथा विकास की दृष्टि से उसके कई भेद हैं तथापि यही भाषा ऐसी है जिसके बोलनेवाले सबसे अधिक हैं और जिसे भिन्न-भिन्न भाषा-भाषी प्रांतों के निवासी भी, किसी हद तक, समझ सकते हैं । इस दशा में राजकार्यनिर्वाह और पारस्परिक व्यवहार के लिए यदि भारत की प्रधान भाषा यही मान ली जाय तो इसमे देश को अनेक लाभ पहुँच सकते हैं । " द्विवेदी जी के इस कथन से दो बातें स्पष्ट होती हैं। एक तो यह कि हिंदी भाषा को सरलतम रूप देकर हिंदुस्तानी सा बना देने के वे पक्ष में थे क्योंकि उसे किसी सीमा तक समझनेवाले भारत के प्रायः सभी प्रांतों में रहते हैं। दूसरे, यदि एक भाषा का देश में प्रचार हो जायगा तो देश में एक राष्ट्रीयता या एक जातीयता की भावना की उत्पत्ति सरलता से हो सकेगी। उनका तीसरा उद्देश्य यह था कि हिंदी भाषा में गंभीर से गंभीर और गढ़ से गूढ़ विषय को सरल भाषा में व्यक्त करने की क्षमता आ जायगी । वे हिंदी-संसार को यह सुझा देना चाहते थे कि हिंदी भाषा की अभिव्यंजन शक्ति किसी स्वतंत्र भाषा से कम नहीं है और उसमें जो कमी है भी, वह प्रचलित शब्द ग्रहण करने से शीघ्र ही दूर की जा सकती है। अपने इस अंतिम उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए 'हिंदी भाषा की ग्राहका-शक्ति' के विषय में उन्होंने लिखा था
अयोध्या में राममंदिर का भूमिपूजन होते ही काशी जश्न में डूब गई। एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर मुंह मिठा कराया गया। कई मंदिरों और मठों में भूमि पूजन शुरू होते ही भजन कीर्तन भी शुरू कर दिया गया। भाजपा ने भी कई कार्यक्रम आयोजित किये। इस दौरान सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई। विश्वनाथ मंदिर के साथ ही संकटमोचन मंदिर और दुर्गामंदिर पर भी पुलिस की तैनाती रही। गीता मंदिर पर भाजपा कार्यकर्ता राम आरती में जुटे रहे। अस्सी स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने रुद्राभिषेक किया। नरहरपुरा स्थित पतालपुरी मठ में महंत बालकदास ने साधु संतों के साथ हवन पूजन व भजन कीर्तन किया। सोनारपुरा में राममंदिर पर भी पूजन होता रहा। सोनारपुरा चौराहे पर राम भक्तों ने जश्न मनाया और कई किलो लड्डू चढ़ाया। संघ कार्यालय सिगरा में भी भूमि पूजन का कार्यक्रम आरएसएस के पदाधिकारियों ने देखा। गुरुधाम स्थित राम जानकी मंदिर में भारत विकास परिषद शिवा की ओर से जश्न मनाया गया। वहीं, पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते पर गोदौलिया से ज्ञानवापी तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। हर आने जाने वाले की चेकिंग होती रही। चौक से दशाश्वमेध घाट तक एसएसपी ने खुद सुरक्षा का जायजा लिया। भूमि पूजन के मद्देनजर काशी में भी पहले से ही हाई अलर्ट है। शरारती तत्वों पर निगरानी के लिए ड्रोन लगाया गया है। भ्रामक व भड़काऊ पोस्ट रोकने के लिए सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर भी नजर रखी जा रही है। जिले की सीमाओं से लेकर शहर के अलग-अलग चौराहों पर चेकिंग होती रही। संवेदनशील स्थलों पर सादे वेश में भी पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। जिले में प्रवेश करने वालों की गहन छानबीन की जाती रही। सुरक्षा के मद्देनजर मैदागिन से गोदौलिया के बीच चार पहिया वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। चौक से बांसफाटक तक तो दो पहिया वाहन भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। सिर्फ पुलिस वाहनों व एंबुलेंस को छूट है। यह प्रतिबंध अयोध्या में भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न होने तक लागू रहेगा। इस क्रम में डेढ़सी पुल से विश्वनाथ गली मार्ग पर बिना जांच के कोई दोपहिया वाहन भी नहीं जाएगा। अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर ही काशी राममय हो गई। साज-सज्जा के बाद शहर के प्रमुख चौराहे दीपों और झालरों की रोशनी में आलोकित हो उठे। मठों, आश्रमों और देवालयों में सुंदरकांड का पाठ शुरू हुआ। शहर से लेकर गांव-गांव तक भगवा लहराने लगा। बुधवार को अयोध्या में भूमि पूजन के साथ जिले के भी सैकड़ों स्थानों पर विविध धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। साधु-संतों के साथ ही साथ काशी के कलाकार भी इस ऐतिहासिक रामयज्ञ में अपनी विधाओं के माध्यम से आहुति देने के लिए तत्पर हैं। भाजपा सहित कई राजनीतिक संगठनों ने मंगलवार को पूरे दिन शहर में मिट्टी के दीयों का वितरण किया।
अयोध्या में राममंदिर का भूमिपूजन होते ही काशी जश्न में डूब गई। एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर मुंह मिठा कराया गया। कई मंदिरों और मठों में भूमि पूजन शुरू होते ही भजन कीर्तन भी शुरू कर दिया गया। भाजपा ने भी कई कार्यक्रम आयोजित किये। इस दौरान सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई। विश्वनाथ मंदिर के साथ ही संकटमोचन मंदिर और दुर्गामंदिर पर भी पुलिस की तैनाती रही। गीता मंदिर पर भाजपा कार्यकर्ता राम आरती में जुटे रहे। अस्सी स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने रुद्राभिषेक किया। नरहरपुरा स्थित पतालपुरी मठ में महंत बालकदास ने साधु संतों के साथ हवन पूजन व भजन कीर्तन किया। सोनारपुरा में राममंदिर पर भी पूजन होता रहा। सोनारपुरा चौराहे पर राम भक्तों ने जश्न मनाया और कई किलो लड्डू चढ़ाया। संघ कार्यालय सिगरा में भी भूमि पूजन का कार्यक्रम आरएसएस के पदाधिकारियों ने देखा। गुरुधाम स्थित राम जानकी मंदिर में भारत विकास परिषद शिवा की ओर से जश्न मनाया गया। वहीं, पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते पर गोदौलिया से ज्ञानवापी तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। हर आने जाने वाले की चेकिंग होती रही। चौक से दशाश्वमेध घाट तक एसएसपी ने खुद सुरक्षा का जायजा लिया। भूमि पूजन के मद्देनजर काशी में भी पहले से ही हाई अलर्ट है। शरारती तत्वों पर निगरानी के लिए ड्रोन लगाया गया है। भ्रामक व भड़काऊ पोस्ट रोकने के लिए सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर भी नजर रखी जा रही है। जिले की सीमाओं से लेकर शहर के अलग-अलग चौराहों पर चेकिंग होती रही। संवेदनशील स्थलों पर सादे वेश में भी पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। जिले में प्रवेश करने वालों की गहन छानबीन की जाती रही। सुरक्षा के मद्देनजर मैदागिन से गोदौलिया के बीच चार पहिया वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। चौक से बांसफाटक तक तो दो पहिया वाहन भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। सिर्फ पुलिस वाहनों व एंबुलेंस को छूट है। यह प्रतिबंध अयोध्या में भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न होने तक लागू रहेगा। इस क्रम में डेढ़सी पुल से विश्वनाथ गली मार्ग पर बिना जांच के कोई दोपहिया वाहन भी नहीं जाएगा। अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर ही काशी राममय हो गई। साज-सज्जा के बाद शहर के प्रमुख चौराहे दीपों और झालरों की रोशनी में आलोकित हो उठे। मठों, आश्रमों और देवालयों में सुंदरकांड का पाठ शुरू हुआ। शहर से लेकर गांव-गांव तक भगवा लहराने लगा। बुधवार को अयोध्या में भूमि पूजन के साथ जिले के भी सैकड़ों स्थानों पर विविध धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। साधु-संतों के साथ ही साथ काशी के कलाकार भी इस ऐतिहासिक रामयज्ञ में अपनी विधाओं के माध्यम से आहुति देने के लिए तत्पर हैं। भाजपा सहित कई राजनीतिक संगठनों ने मंगलवार को पूरे दिन शहर में मिट्टी के दीयों का वितरण किया।
दुबई, (भाषा)। भारतीय स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को आज अगले साल उपमहाद्वीप में होने वाले विश्व कप का आधिकारिक दूत नियुक्त किया गया। तेंदुलकर इस टूर्नामेंट में उतरने के साथ ही दूसरे ऐसे खिलाड़ी बन जाएंगे जिन्होंने छह विश्व कप में भाग लिया। आईसीसी के बयान के अनुसार तेंदुलकर को 19 फरवरी से दो अप्रैल के बीच भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में होने वाले टूर्नामेंट के लिये आईसीसी के विभिन्न कार्यक्रमों को समर्थन और बढ़ावा देने के लिये कहा जाएगा। पाकिस्तान के जावेद मियादाद के बाद छह विश्व कप में भाग लेने वाले दूसरे क्रिकेटर बनने की कगार पर खड़े तेंदुलकर ने कहा, विश्व कप में केवल 100 दिन शेष हैं और मैं अगला क्रिकेट विश्व कप खेलने को लेकर उत्साहित हूं। उन्होंने कहा, जहां तक सीमित ओवरों के क्रिकेट की बात है तो आईसीसी क्रिकेट विश्व कप सर्वोच्च स्तर का टूर्नामेंट होता है जिसमें आप खेल सकते हो इसलिए इस तरह के महत्वपूर्ण टूर्नामेंट का हिस्सा बनना हमेशा रोमांचक होता है। तेंदुलकर ने कहा, अगले साल विश्व कप उपमहाद्वीप में आयोजित किया जाएगा और इसलिए यह मेरे लिये अधिक विशेष बन गया है और मैं चाहता हूं कि हम इसमें अच्छा प्रदर्शन करें। एक टीम के तौर पर हम अपनी घरेलू सरजमीं पर विश्व कप जीतने के लिये कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। आईसीसी मुख्य कार्यकारी हारून लोर्गट ने कहा कि खेलों की सर्वोच्च संस्था भाग्यशाली है जो उसे तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ी का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा, हम भाग्यशाली हैं जो हमें सचिन जैसे खिलाड़ी का समर्थन मिल रहा है। मुझे नहीं लगता कि उनके जितना कोई अन्य खिलाड़ी किसी देश को प्रेरित कर सकता है। उन्हें जितना सम्मान और दुलार मिल रहा है, भारत में उसकी कोई सीमाएं नहीं हैं। उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं और क्रिकेट के लिये जो कुछ किया है उससे दुनिया भर के कई अन्य खिलाड़ी और खेल प्रशंसक भी प्रेरणा लेते हैं। तेंदुलकर 1989 में 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद लगातार खेल रहे हैं। उन्होंने अब तक 172 टेस्ट मैच में 14,292 रन और 442 एकदिवसीय मैच में 17,598 रन बनाये हैं।
दुबई, । भारतीय स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को आज अगले साल उपमहाद्वीप में होने वाले विश्व कप का आधिकारिक दूत नियुक्त किया गया। तेंदुलकर इस टूर्नामेंट में उतरने के साथ ही दूसरे ऐसे खिलाड़ी बन जाएंगे जिन्होंने छह विश्व कप में भाग लिया। आईसीसी के बयान के अनुसार तेंदुलकर को उन्नीस फरवरी से दो अप्रैल के बीच भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में होने वाले टूर्नामेंट के लिये आईसीसी के विभिन्न कार्यक्रमों को समर्थन और बढ़ावा देने के लिये कहा जाएगा। पाकिस्तान के जावेद मियादाद के बाद छह विश्व कप में भाग लेने वाले दूसरे क्रिकेटर बनने की कगार पर खड़े तेंदुलकर ने कहा, विश्व कप में केवल एक सौ दिन शेष हैं और मैं अगला क्रिकेट विश्व कप खेलने को लेकर उत्साहित हूं। उन्होंने कहा, जहां तक सीमित ओवरों के क्रिकेट की बात है तो आईसीसी क्रिकेट विश्व कप सर्वोच्च स्तर का टूर्नामेंट होता है जिसमें आप खेल सकते हो इसलिए इस तरह के महत्वपूर्ण टूर्नामेंट का हिस्सा बनना हमेशा रोमांचक होता है। तेंदुलकर ने कहा, अगले साल विश्व कप उपमहाद्वीप में आयोजित किया जाएगा और इसलिए यह मेरे लिये अधिक विशेष बन गया है और मैं चाहता हूं कि हम इसमें अच्छा प्रदर्शन करें। एक टीम के तौर पर हम अपनी घरेलू सरजमीं पर विश्व कप जीतने के लिये कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। आईसीसी मुख्य कार्यकारी हारून लोर्गट ने कहा कि खेलों की सर्वोच्च संस्था भाग्यशाली है जो उसे तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ी का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा, हम भाग्यशाली हैं जो हमें सचिन जैसे खिलाड़ी का समर्थन मिल रहा है। मुझे नहीं लगता कि उनके जितना कोई अन्य खिलाड़ी किसी देश को प्रेरित कर सकता है। उन्हें जितना सम्मान और दुलार मिल रहा है, भारत में उसकी कोई सीमाएं नहीं हैं। उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं और क्रिकेट के लिये जो कुछ किया है उससे दुनिया भर के कई अन्य खिलाड़ी और खेल प्रशंसक भी प्रेरणा लेते हैं। तेंदुलकर एक हज़ार नौ सौ नवासी में सोलह साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद लगातार खेल रहे हैं। उन्होंने अब तक एक सौ बहत्तर टेस्ट मैच में चौदह,दो सौ बानवे रन और चार सौ बयालीस एकदिवसीय मैच में सत्रह,पाँच सौ अट्ठानवे रन बनाये हैं।
PSEB Class 10th Result 2022 Release Date: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के कक्षा 10वीं के नतीजे इस हफ्ते जारी नहीं होंगे। पंजाब बोर्ड के एग्जाम कंट्रोलर जनक राज महरोक ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कक्षा 10वीं का रिजल्ट इस हफ्ते जारी नहीं किए जाएंगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह कयास लगाए जा रहे थे कि रिजल्ट आज 30 जून, 2022 को जारी हो सकते हैं। हालांकि अब छात्रों को इस हफ्ते रिजल्ट की घोषणा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पंजाब बोर्ड कक्षा 10वीं के परिणाम अगले हफ्ते सोमवार 4 जुलाई, 2022 को जारी हो सकते हैं। हालांकि छात्र कृपया ध्यान दें कि रिजल्ट की डेट को लेकर फिलहाल बोर्ड ने कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। एक बार रिजल्ट जारी हो जाने के बाद सभी छात्र पंजाब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट-pseb. ac. in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। पंजाब बोर्ड ने कक्षा 10वी व 12वीं की बोर्ड परीक्षा 22 अप्रैल 2022 से 23 मई 2022 तक आयोजित की थी। केवल कक्षा 10वीं की परीक्षा के लिए ही 4 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण किया था। छात्र कृपया ध्यान दें कि उन्हें प्रत्येक विषय में 33 से अधिक अंक प्राप्त करते हैं तो आपको पीएसईबी 10वीं टर्म 2 परिणाम 2022 में उत्तीर्ण माने जाएगा। हालांकि किसी भी विषय में अगर आप न्यूनतम अंक प्राप्त करने में नाकामयाब होते हैं तो आप पंजाब बोर्ड की सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठना होगा। बता दें कि उम्मीदवार रिजल्ट पोर्टल से पीडीएफ के रूप में अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं और मूल मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के करीब एक महीने बाद वितरित की जाएगी।
PSEB Class दसth Result दो हज़ार बाईस Release Date: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के कक्षा दसवीं के नतीजे इस हफ्ते जारी नहीं होंगे। पंजाब बोर्ड के एग्जाम कंट्रोलर जनक राज महरोक ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कक्षा दसवीं का रिजल्ट इस हफ्ते जारी नहीं किए जाएंगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह कयास लगाए जा रहे थे कि रिजल्ट आज तीस जून, दो हज़ार बाईस को जारी हो सकते हैं। हालांकि अब छात्रों को इस हफ्ते रिजल्ट की घोषणा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पंजाब बोर्ड कक्षा दसवीं के परिणाम अगले हफ्ते सोमवार चार जुलाई, दो हज़ार बाईस को जारी हो सकते हैं। हालांकि छात्र कृपया ध्यान दें कि रिजल्ट की डेट को लेकर फिलहाल बोर्ड ने कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। एक बार रिजल्ट जारी हो जाने के बाद सभी छात्र पंजाब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट-pseb. ac. in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। पंजाब बोर्ड ने कक्षा दसवी व बारहवीं की बोर्ड परीक्षा बाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस से तेईस मई दो हज़ार बाईस तक आयोजित की थी। केवल कक्षा दसवीं की परीक्षा के लिए ही चार लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण किया था। छात्र कृपया ध्यान दें कि उन्हें प्रत्येक विषय में तैंतीस से अधिक अंक प्राप्त करते हैं तो आपको पीएसईबी दसवीं टर्म दो परिणाम दो हज़ार बाईस में उत्तीर्ण माने जाएगा। हालांकि किसी भी विषय में अगर आप न्यूनतम अंक प्राप्त करने में नाकामयाब होते हैं तो आप पंजाब बोर्ड की सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठना होगा। बता दें कि उम्मीदवार रिजल्ट पोर्टल से पीडीएफ के रूप में अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं और मूल मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के करीब एक महीने बाद वितरित की जाएगी।
कम्पनीकी ही। चाहे जो हो, अब तो इस बहुमूल्य निर्णयको पाकर उनका आत्मप्रेम अवश्य ही सन्तुष्ट हो चुका होगा । । लेकिन अनिवार्य 'लिक्विडेशन' ( दीवाले ) की जो अपील की गई है, उससे पता चलता है कि इस अभियोगका हेतु वादीकी क्षतिपूर्ति कराना नहीं, बल्कि प्रतिवादीका सत्यानाश करना था । अगर वे इसी में सन्तुष्ट हैं, तो भले ही रहें । उन्हें यही मुबारक हो । इसमें शक नहीं कि उनकी यह उड़ान पतनकी निशानी है । जिस 'फॉरवर्ड' को इतनी बेदर्दीके साथ कुचला गया है, वह लोगोंके जीवनमें प्रतिफलित होकर जीवित रहेगा । उसके हाथों सुलगी हुई आग उन हजारों दिलोंमें दूने जोशके साथ भभक उठेगी, जो अब अपने प्रिय पत्रके स्तम्भों द्वारा अपने विचार प्रकट करनेका वैध साधन खो चुके हैं। आन्ध्रके देहातोंकी यात्रा कर रहा होनेके कारण इन घटनाओंका सिलसिलेसे अनुशीलन नहीं कर सका हूँ, फिर भी मैं देखता हूँ कि नवजात 'न्यू फॉरवर्ड' के प्रकाशनको रोकनेके लिए भी कुत्सित प्रयत्न किये जा रहे हैं। सम्भव है कि कई विषम कठिनाइयोंके रहते हुए भी जो साधन-सम्पन्न कानूनदाँ लोग बंगालके राष्ट्रीय आन्दोलनको जीवित रखे हुए हैं, वे इस मामले में भी सरकारको पीछे छोड़ दें । लेकिन अगर वे सरकारको प्राप्त और उसके द्वारा मनमाने ढंगसे प्रयुक्त कानूनी और विशेष कानूनी अधिकारोंका सफलतापूर्वक मुकाबला न भी कर सकें तो भी सरकारके साथ वीरता और निडरतापूर्वक बराबरीसे लड़नेके लिए देश उनका आभारी होगा । देशमें एक ऐसी भावना जाग्रत हो चुकी है, जिसे दुनियाकी कोई ताकत कुचल नहीं सकती। 'फॉरवर्ड' मर चुका है, 'फॉरवर्ड' दीर्घायु हो । अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ९-५-१९२९ ३४१. आन्ध्र देशमें [४] यात्रा - कार्यक्रम और विभिन्न स्थानोंपर एकत्र किये गये चन्देके विवरणसे देखा जा सकता है कि कार्यका दबाव बना हुआ है, हालाँकि विभिन्न गाँवोंमें जो विविध अनुभव हो रहे हैं और लोगोंमें जो जोश और उत्साह दिखाई पड़ता है उससे मेरा ज्ञान भी बढ़ा है और मेरी आस्था भी दृढ़ हुई है । चन्देकी कुल रकम जो 'यंग इंडिया' में पहले ही छापी जा चुकी है, १, ११, - ६५३ रु० ९ आ० ७३ पा० है । मुझे यह भी कहना चाहिए कि साथी कार्यकर्ताओं में प्रत्येक कार्यको निश्चित समय पर कर डालनेकी प्रवृत्तिमें बहुत तेजी आई है और उनमें निर्धारित समय क्रमका पालन करनेकी तो मानों एक सुखद होड़ ही चल रही है । फलतः इस समय हम १. इसके बाद पश्चिमी गोदावरी जिलेके विभिन्न गाँवोंमें प्राप्त चन्देका ब्योरा दिया गया था। चन्देकी कुल रकम १,५४,९३१ रु० १५ मा००३ पा० थी। आन्ध्र देशमें [४] एक्सप्रेस रेलगाडीकी नियमबद्ध गतिसे यात्रा कर रहे हैं और सभाओं आदिके कार्यक्रम निपटा रहे हैं। सुबह या शाम एक गाँवसे दूसरे गाँवको रवाना होनेके निश्चित समय पर देशभक्त कोंडा वेंकटप्पैया और अन्य स्थानीय मित्र हँसते हुए मेरे पास उपस्थित हो जाते हैं । समय-पालनकी इस नियमितता और पहलेकी तुलनामें सभाओंकी अपेक्षा - कृत सुव्यवस्थितताके फलस्वरूप हमारा दौरा ग्रीष्मऋतु की इस गरमीमें भी न केवल सह्य बल्कि सुखद भी हो गया है। पुरुष और स्त्रियाँ जिस उत्साहसे अपने रुपये और पैसे देनेके लिए आती हैं उसे देखकर मन आशा और आनन्दसे भर उठता है । मैं ये पंक्तियाँ तुनी नामक एक गाँवमें स्त्रियोंको एक सभा करनेके तुरन्त बाद लिख रहा हूँ । एक बूढ़ी स्त्री, जो स्पष्टतः गरीब थी और जिसकी उमर लगभग ७५ वर्ष रही होगी, जिसका शरीर तो वर्षोके बोझसे झुक गया था किन्तु जिसके चेहरे और आँखों में आनन्दकी चमक थी, मेरे पास आई और उसने मेरे हाथमें चार आने रख दिये। पैसा देते समय उसको आँखोंमें, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकता, किसी प्रकारका दोनताका भाव नहीं था । उसके तुरन्त बाद एक खादीधारिणी प्रौढ़-सी महिलाने मेरे हाथमें ५ रुपये और एक पैसा रखा । मैंने उससे सीधा सवाल किया, " किसका दान ज्यादा बड़ा है, तुम्हारा या इस वृद्ध बहनका ? " उसने बिना किसी झिझकके निर्णयके स्वरमें उत्तर दिया, " दोनों बराबर हैं । " मुझे बेहद खुशी हुई । इस उत्तरने मुझे निरुत्तर कर दिया, लेकिन मैं प्रसन्न हुआ। मैं इस बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण और गहराईमें जाकर सत्यको छू लेनेवाले उत्तरके लिए तैयार नहीं था । उसने आगे कहा, "मैं राष्ट्रीय आन्दोलनमें कई वर्षोंसे रुचि लेती रही हूँ और उसमें अपनी शक्तिके अनुसार मुझसे जितना अधिक बना है सदा दिया है। खादी में मेरा विश्वास है और मैं हमेशा खादी ही पहनती हूँ । " इस दौरेकी अवधिमें मुझे जो अनेक सुखद अनुभव हुए हैं उनके अक्षय संग्रह से लिया गया यह केवल एक ही उदाहरण है। ऐसे अनेक उदाहरण मेरे पास हैं, लेकिन अब मुझे अन्य विषयोंकी चर्चा करनी चाहिए । कार्यकर्ताओंकी सभा तनकू और जगहोंकी तरह कार्यकर्त्ताओंकी एक सभा हुई । ऐसी सभा मैं खासकर हरेक जिलेके दौरेकी समाप्ति पर करता हूँ, और उसका समय शामको ३ और ४ के बीचका होता है । इस सभा कोई १०० कार्यकर्त्ता थे । उसमें हर तरहके सवालोंकी चर्चा हुई । यह एक सवाल तो हर जगह पूछा ही जाता है कि कांग्रेसियोंके ताल्लुका या जिला बोर्डों, नगरपालिकाओं और विधान परिषदों आदिके चुनावोंमें भाग लेनेसे क्या खादी और दूसरे रचनात्मक कार्यों में बाधा नहीं पड़ेगी । इस सभामें यही सवाल और भी ज्यादा आग्रहके साथ पूछा गया । मेरा अनुभव यह है कि इन संस्थाओंसे हमें जितना लाभ हो सका है उसकी तुलनामें उनपर हमारे अच्छे कार्यकर्ताओंकी शक्तिका व्यय कहीं अधिक होता है । यह देखा गया है कि हमारे कुछ १. २ मईको । उत्तम कार्यकर्ताओंको ज्यादा ठोस काम करनेकी इच्छासे नगरपालिकाओं आदिको छोड़ कर बाहर आना पड़ा। इसके सिवाय, इन संस्थाओं में बहुत सारा राग-द्वेष, लड़ाईझगड़ा, अपनी मनचाही चीज करानेके लिए पर्देकी आड़में की जानेवाली बहुत सारी खींचतान होती है; अपने स्वार्थीको सिद्धिके लिए इतनी ज्यादा कोशिश की जाती है कि ईमानदार कार्यकर्त्ता उनमें बहुत ज्यादा दिनतक नहीं रह सकते । कांग्रेसी लोग इन संस्थाओं में दिलचस्पी लें, इसके पक्षमें एक कांग्रेसी भाईने उसका एक लाभ यह बताया था कि उनमें कांग्रेसियोंकी उपस्थिति से हुकूमतके आगे दीनतापूर्वक झुक जानेकी मनोवृत्तिके बदले उसके खिलाफ लड़नेकी स्वस्थ मनोवृत्तिको बल मिलता है। किन्तु कुल मिलाकर मुझे ऐसा लगता है कि यदि लड़नेकी मनोवृत्तिको हम रचनात्मक कार्यका बलिदान करके पैदा कर रहे हैं तो कहना होगा कि हम उसकी बहुत ज्यादा कीमत चुका रहे हैं । इसलिए तनकूकी सभा मैंने कार्यकर्ताओंको सुझाया कि अगर उन्हें यह निश्चय हो गया हो कि चुनावमें भाग लेनेसे या इन संस्थाओंमें दिलचस्पी लेनेसे कोई प्रभावकारी सेवा नहीं की जा सकती तो उन्हें अपने दिमागसे इन संस्थाओंकी बात निकाल देनी चाहिए । यदि कांग्रेसी इन चुनावों में कोई हिस्सा न ले रहे होते तो जिस तरह वे इन संस्थाओंकी बात न सोचते उसी तरह उक्त परिस्थिति में भी उन्हें उनका खयाल अपने मनसे निकाल देना चाहिए। यदि इन संस्थाओंमें जाकर काम करने और रचनात्मक कार्य करनेके बीचमें चुनाव करना ही हो तो इसमें कोई सन्देह ही नहीं है कि रचनात्मक कार्य ज्यादा बड़ी चीज है। आखिर हमारे पास कांग्रेसके कार्यकर्त्ता हजारोंकी तादादमें हैं जबकि इन तथाकथित निर्वाचित संस्थाओं में हरेक जिलेसे कुछ इने - गिने लोग ही प्रवेश कर सकते हैं । जो लोग उनमें विश्वास करते हैं वे भले उनमें प्रवेश करें, लेकिन जो उनमें विश्वास नहीं करते वे प्रवेश करनेवालोंके प्रति न किसी तरहकी ईर्ष्याका भाव रखें और न किसी तरहकी नाराजी दिखायें । इस सभा एक सुझाव यह भी पेश किया गया था कि जिन जिलों में सूत काफी प्रमाणमें काता जाता है वहाँसे वह उन जिलोंमें लाया जाये, जहाँ बहुत ज्यादा गरीबी न होनेके कारण सूत कातने के लिए तो कोई तैयार नहीं होता किन्तु जहाँ ऐसे बुनकर जरूर हैं जिन्हें अगर हाथ-कता सूत दिया जाये तो वे उसकी खादी सहर्ष बुन देंगे। इस सुझावसे मैंने जोरदार असहमति जाहिर की । मैंने कहा, जो जिला सूतका उत्पादन करता है वह जबतक उसका उपयोग कर सकता हो तबतक वहाँसे सूत लाना गलत होता है । सफल हाथकताईका रहस्य ही इस बातमें है कि सारा सूत वहीं बुना जाये जहाँ वह काता जाये । जहाँ स्थानिक बुनकर विदेशी सूत या मिलका सूत बनते हैं वहाँ उनसे उनका यह धन्धा छुड़वानेमें तबतक कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए जबतक कि उसी जगह या उस जिलेमें हाथकते सूतका उत्पादन न होने लगे । अलबत्ता अपनी शक्तिके अनुसार हम हाथकताई करने या यज्ञार्थ सूत कातनेका प्रचार करनेकी पूरी कोशिश अवश्य करें। यदि ऐसा सूत पर्याप्त मात्रा में काता जाने लगे तो उससे किसी भी जिलेके बुनकरोंको काफी काम मिल जायेगा । आन्ध्र देशमें [[४] एक आदर्श सहकारी संस्था विजयानगरममें मैने एक सहकारी खादी संस्था देखी जो अपना काम बहुत सफलतापूर्वक कर रही है और जो अपने क्षेत्रमें मेरे खयालसे सारे भारतवर्ष में अद्वितीय है । मैं नीचे इस संस्था द्वारा दिये गये अभिनन्दनपत्रमें से निस्संकोच एक अंश उद्धृत करता हूँ : ? हमारे इस भण्डारमें जो भी कपड़ा है वह सारा हमारे द्वारा खरीदे हुए कपाससे बनाया गया है। बाहरसे हमने कुछ भी नहीं मँगाया है। हमने दूसरे प्रान्तोंसे, यहाँ तक कि अपने ही प्रान्तके दूसरे जिलोंसे खादी न मँगानेका संकल्प किया है क्योंकि हमारा विश्वास है कि खादीके ऐसे आयातसे खादीकी प्रगतिकी उसी तरह हानि होगी जिस तरह कि विदेशी कपड़ेके आयातसे होगी । हमारा यह भी विश्वास है कि खादी आन्दोलनका उद्देश्य यह है कि जगह-जगह कताई और बुनाईका ज्यादा से ज्यादा व्यापक प्रसार किया जाये, और उस जिलेके लोगोंको ज्यादा से ज्यादा बड़ी संख्या में रोजगार मुहैया किया जाये। ऐसा किया जाये तो ही खादीका सही विकास होगा । हमारे अमुक कपड़ोंकी कीमतें अखिल भारतीय चरखा संघकी कीमतोंसे छः पाई प्रति गज अधिक हैं। हम आपको अत्यन्त विनयपूर्वक एक पैंट और एक २३ गज चौड़ा तथा ३ गज लम्बा कम्बल दे रहे हैं। ये दोनों चीजें पप्पू जगन्नायाकुलुकी बनाई हुई हैं। यह भाई बुनकर हैं और हमारी संस्थाके संचालक हैं। हम नम्रतापूर्वक प्रार्थना करते हैं कि ये दोनों वस्तुएँ आश्रमके संग्रहालयमें रखी जायें । पप्पू जगन्नायाकुलुकी ये दोनों कृतियाँ आश्रमके संग्रहालय में अवश्य रखी जायेंगी । दोनों अपने ढंगकी बेजोड़ वस्तुएँ हैं। मुझे विजगापट्टममें अपने मेजबान श्री बानोजीरावसे महीन खादीके दो टुकड़े भी भेंटमें मिले हैं। श्री बानोजीराव जमींदार हैं और यह खादी उनकी जमींदारीके एक गाँव बोंटलकोडुरुकी बनी हुई है । ये कपड़े क्रमशः ५३ और ६६ वर्ष पुराने हैं। मुझे इस आदर्श सहकारी संस्थाके उपनियम प्राप्त हो गये हैं। ये नियम जिस उद्देश्यसे बनाये गये हैं उसे सिद्ध करनेमें समर्थ हैं। उनके अनुसार कातनेवाले और बुनाई करनेवाले लोग संस्थाके सदस्य बन सकते हैं । सदस्योंके लिए संस्थाके द्वारा पैदा की गई खादी खरीदना जरूरी है; इसी प्रकार सदस्य जो सूत कातें या जो खादी तैयार करें उसको उन्हें संस्थाको बेचना चाहिए । इन उपनियमोंमें से 'व्यापार' शीर्षकके अन्तर्गत दिया गया यह अंश मैं यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ । १. यहाँ केवल कुछ अंश ही दिये गये हैं। २. यहाँ नहीं दिया गया है।
कम्पनीकी ही। चाहे जो हो, अब तो इस बहुमूल्य निर्णयको पाकर उनका आत्मप्रेम अवश्य ही सन्तुष्ट हो चुका होगा । । लेकिन अनिवार्य 'लिक्विडेशन' की जो अपील की गई है, उससे पता चलता है कि इस अभियोगका हेतु वादीकी क्षतिपूर्ति कराना नहीं, बल्कि प्रतिवादीका सत्यानाश करना था । अगर वे इसी में सन्तुष्ट हैं, तो भले ही रहें । उन्हें यही मुबारक हो । इसमें शक नहीं कि उनकी यह उड़ान पतनकी निशानी है । जिस 'फॉरवर्ड' को इतनी बेदर्दीके साथ कुचला गया है, वह लोगोंके जीवनमें प्रतिफलित होकर जीवित रहेगा । उसके हाथों सुलगी हुई आग उन हजारों दिलोंमें दूने जोशके साथ भभक उठेगी, जो अब अपने प्रिय पत्रके स्तम्भों द्वारा अपने विचार प्रकट करनेका वैध साधन खो चुके हैं। आन्ध्रके देहातोंकी यात्रा कर रहा होनेके कारण इन घटनाओंका सिलसिलेसे अनुशीलन नहीं कर सका हूँ, फिर भी मैं देखता हूँ कि नवजात 'न्यू फॉरवर्ड' के प्रकाशनको रोकनेके लिए भी कुत्सित प्रयत्न किये जा रहे हैं। सम्भव है कि कई विषम कठिनाइयोंके रहते हुए भी जो साधन-सम्पन्न कानूनदाँ लोग बंगालके राष्ट्रीय आन्दोलनको जीवित रखे हुए हैं, वे इस मामले में भी सरकारको पीछे छोड़ दें । लेकिन अगर वे सरकारको प्राप्त और उसके द्वारा मनमाने ढंगसे प्रयुक्त कानूनी और विशेष कानूनी अधिकारोंका सफलतापूर्वक मुकाबला न भी कर सकें तो भी सरकारके साथ वीरता और निडरतापूर्वक बराबरीसे लड़नेके लिए देश उनका आभारी होगा । देशमें एक ऐसी भावना जाग्रत हो चुकी है, जिसे दुनियाकी कोई ताकत कुचल नहीं सकती। 'फॉरवर्ड' मर चुका है, 'फॉरवर्ड' दीर्घायु हो । अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, नौ मई एक हज़ार नौ सौ उनतीस तीन सौ इकतालीस. आन्ध्र देशमें [चार] यात्रा - कार्यक्रम और विभिन्न स्थानोंपर एकत्र किये गये चन्देके विवरणसे देखा जा सकता है कि कार्यका दबाव बना हुआ है, हालाँकि विभिन्न गाँवोंमें जो विविध अनुभव हो रहे हैं और लोगोंमें जो जोश और उत्साह दिखाई पड़ता है उससे मेरा ज्ञान भी बढ़ा है और मेरी आस्था भी दृढ़ हुई है । चन्देकी कुल रकम जो 'यंग इंडिया' में पहले ही छापी जा चुकी है, एक, ग्यारह, - छः सौ तिरेपन रुपयाशून्य नौ आशून्य तिहत्तर पाशून्य है । मुझे यह भी कहना चाहिए कि साथी कार्यकर्ताओं में प्रत्येक कार्यको निश्चित समय पर कर डालनेकी प्रवृत्तिमें बहुत तेजी आई है और उनमें निर्धारित समय क्रमका पालन करनेकी तो मानों एक सुखद होड़ ही चल रही है । फलतः इस समय हम एक. इसके बाद पश्चिमी गोदावरी जिलेके विभिन्न गाँवोंमें प्राप्त चन्देका ब्योरा दिया गया था। चन्देकी कुल रकम एक,चौवन,नौ सौ इकतीस रुपयाशून्य पंद्रह मातीन पाशून्य थी। आन्ध्र देशमें [चार] एक्सप्रेस रेलगाडीकी नियमबद्ध गतिसे यात्रा कर रहे हैं और सभाओं आदिके कार्यक्रम निपटा रहे हैं। सुबह या शाम एक गाँवसे दूसरे गाँवको रवाना होनेके निश्चित समय पर देशभक्त कोंडा वेंकटप्पैया और अन्य स्थानीय मित्र हँसते हुए मेरे पास उपस्थित हो जाते हैं । समय-पालनकी इस नियमितता और पहलेकी तुलनामें सभाओंकी अपेक्षा - कृत सुव्यवस्थितताके फलस्वरूप हमारा दौरा ग्रीष्मऋतु की इस गरमीमें भी न केवल सह्य बल्कि सुखद भी हो गया है। पुरुष और स्त्रियाँ जिस उत्साहसे अपने रुपये और पैसे देनेके लिए आती हैं उसे देखकर मन आशा और आनन्दसे भर उठता है । मैं ये पंक्तियाँ तुनी नामक एक गाँवमें स्त्रियोंको एक सभा करनेके तुरन्त बाद लिख रहा हूँ । एक बूढ़ी स्त्री, जो स्पष्टतः गरीब थी और जिसकी उमर लगभग पचहत्तर वर्ष रही होगी, जिसका शरीर तो वर्षोके बोझसे झुक गया था किन्तु जिसके चेहरे और आँखों में आनन्दकी चमक थी, मेरे पास आई और उसने मेरे हाथमें चार आने रख दिये। पैसा देते समय उसको आँखोंमें, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकता, किसी प्रकारका दोनताका भाव नहीं था । उसके तुरन्त बाद एक खादीधारिणी प्रौढ़-सी महिलाने मेरे हाथमें पाँच रुपयापये और एक पैसा रखा । मैंने उससे सीधा सवाल किया, " किसका दान ज्यादा बड़ा है, तुम्हारा या इस वृद्ध बहनका ? " उसने बिना किसी झिझकके निर्णयके स्वरमें उत्तर दिया, " दोनों बराबर हैं । " मुझे बेहद खुशी हुई । इस उत्तरने मुझे निरुत्तर कर दिया, लेकिन मैं प्रसन्न हुआ। मैं इस बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण और गहराईमें जाकर सत्यको छू लेनेवाले उत्तरके लिए तैयार नहीं था । उसने आगे कहा, "मैं राष्ट्रीय आन्दोलनमें कई वर्षोंसे रुचि लेती रही हूँ और उसमें अपनी शक्तिके अनुसार मुझसे जितना अधिक बना है सदा दिया है। खादी में मेरा विश्वास है और मैं हमेशा खादी ही पहनती हूँ । " इस दौरेकी अवधिमें मुझे जो अनेक सुखद अनुभव हुए हैं उनके अक्षय संग्रह से लिया गया यह केवल एक ही उदाहरण है। ऐसे अनेक उदाहरण मेरे पास हैं, लेकिन अब मुझे अन्य विषयोंकी चर्चा करनी चाहिए । कार्यकर्ताओंकी सभा तनकू और जगहोंकी तरह कार्यकर्त्ताओंकी एक सभा हुई । ऐसी सभा मैं खासकर हरेक जिलेके दौरेकी समाप्ति पर करता हूँ, और उसका समय शामको तीन और चार के बीचका होता है । इस सभा कोई एक सौ कार्यकर्त्ता थे । उसमें हर तरहके सवालोंकी चर्चा हुई । यह एक सवाल तो हर जगह पूछा ही जाता है कि कांग्रेसियोंके ताल्लुका या जिला बोर्डों, नगरपालिकाओं और विधान परिषदों आदिके चुनावोंमें भाग लेनेसे क्या खादी और दूसरे रचनात्मक कार्यों में बाधा नहीं पड़ेगी । इस सभामें यही सवाल और भी ज्यादा आग्रहके साथ पूछा गया । मेरा अनुभव यह है कि इन संस्थाओंसे हमें जितना लाभ हो सका है उसकी तुलनामें उनपर हमारे अच्छे कार्यकर्ताओंकी शक्तिका व्यय कहीं अधिक होता है । यह देखा गया है कि हमारे कुछ एक. दो मईको । उत्तम कार्यकर्ताओंको ज्यादा ठोस काम करनेकी इच्छासे नगरपालिकाओं आदिको छोड़ कर बाहर आना पड़ा। इसके सिवाय, इन संस्थाओं में बहुत सारा राग-द्वेष, लड़ाईझगड़ा, अपनी मनचाही चीज करानेके लिए पर्देकी आड़में की जानेवाली बहुत सारी खींचतान होती है; अपने स्वार्थीको सिद्धिके लिए इतनी ज्यादा कोशिश की जाती है कि ईमानदार कार्यकर्त्ता उनमें बहुत ज्यादा दिनतक नहीं रह सकते । कांग्रेसी लोग इन संस्थाओं में दिलचस्पी लें, इसके पक्षमें एक कांग्रेसी भाईने उसका एक लाभ यह बताया था कि उनमें कांग्रेसियोंकी उपस्थिति से हुकूमतके आगे दीनतापूर्वक झुक जानेकी मनोवृत्तिके बदले उसके खिलाफ लड़नेकी स्वस्थ मनोवृत्तिको बल मिलता है। किन्तु कुल मिलाकर मुझे ऐसा लगता है कि यदि लड़नेकी मनोवृत्तिको हम रचनात्मक कार्यका बलिदान करके पैदा कर रहे हैं तो कहना होगा कि हम उसकी बहुत ज्यादा कीमत चुका रहे हैं । इसलिए तनकूकी सभा मैंने कार्यकर्ताओंको सुझाया कि अगर उन्हें यह निश्चय हो गया हो कि चुनावमें भाग लेनेसे या इन संस्थाओंमें दिलचस्पी लेनेसे कोई प्रभावकारी सेवा नहीं की जा सकती तो उन्हें अपने दिमागसे इन संस्थाओंकी बात निकाल देनी चाहिए । यदि कांग्रेसी इन चुनावों में कोई हिस्सा न ले रहे होते तो जिस तरह वे इन संस्थाओंकी बात न सोचते उसी तरह उक्त परिस्थिति में भी उन्हें उनका खयाल अपने मनसे निकाल देना चाहिए। यदि इन संस्थाओंमें जाकर काम करने और रचनात्मक कार्य करनेके बीचमें चुनाव करना ही हो तो इसमें कोई सन्देह ही नहीं है कि रचनात्मक कार्य ज्यादा बड़ी चीज है। आखिर हमारे पास कांग्रेसके कार्यकर्त्ता हजारोंकी तादादमें हैं जबकि इन तथाकथित निर्वाचित संस्थाओं में हरेक जिलेसे कुछ इने - गिने लोग ही प्रवेश कर सकते हैं । जो लोग उनमें विश्वास करते हैं वे भले उनमें प्रवेश करें, लेकिन जो उनमें विश्वास नहीं करते वे प्रवेश करनेवालोंके प्रति न किसी तरहकी ईर्ष्याका भाव रखें और न किसी तरहकी नाराजी दिखायें । इस सभा एक सुझाव यह भी पेश किया गया था कि जिन जिलों में सूत काफी प्रमाणमें काता जाता है वहाँसे वह उन जिलोंमें लाया जाये, जहाँ बहुत ज्यादा गरीबी न होनेके कारण सूत कातने के लिए तो कोई तैयार नहीं होता किन्तु जहाँ ऐसे बुनकर जरूर हैं जिन्हें अगर हाथ-कता सूत दिया जाये तो वे उसकी खादी सहर्ष बुन देंगे। इस सुझावसे मैंने जोरदार असहमति जाहिर की । मैंने कहा, जो जिला सूतका उत्पादन करता है वह जबतक उसका उपयोग कर सकता हो तबतक वहाँसे सूत लाना गलत होता है । सफल हाथकताईका रहस्य ही इस बातमें है कि सारा सूत वहीं बुना जाये जहाँ वह काता जाये । जहाँ स्थानिक बुनकर विदेशी सूत या मिलका सूत बनते हैं वहाँ उनसे उनका यह धन्धा छुड़वानेमें तबतक कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए जबतक कि उसी जगह या उस जिलेमें हाथकते सूतका उत्पादन न होने लगे । अलबत्ता अपनी शक्तिके अनुसार हम हाथकताई करने या यज्ञार्थ सूत कातनेका प्रचार करनेकी पूरी कोशिश अवश्य करें। यदि ऐसा सूत पर्याप्त मात्रा में काता जाने लगे तो उससे किसी भी जिलेके बुनकरोंको काफी काम मिल जायेगा । आन्ध्र देशमें [[चार] एक आदर्श सहकारी संस्था विजयानगरममें मैने एक सहकारी खादी संस्था देखी जो अपना काम बहुत सफलतापूर्वक कर रही है और जो अपने क्षेत्रमें मेरे खयालसे सारे भारतवर्ष में अद्वितीय है । मैं नीचे इस संस्था द्वारा दिये गये अभिनन्दनपत्रमें से निस्संकोच एक अंश उद्धृत करता हूँ : ? हमारे इस भण्डारमें जो भी कपड़ा है वह सारा हमारे द्वारा खरीदे हुए कपाससे बनाया गया है। बाहरसे हमने कुछ भी नहीं मँगाया है। हमने दूसरे प्रान्तोंसे, यहाँ तक कि अपने ही प्रान्तके दूसरे जिलोंसे खादी न मँगानेका संकल्प किया है क्योंकि हमारा विश्वास है कि खादीके ऐसे आयातसे खादीकी प्रगतिकी उसी तरह हानि होगी जिस तरह कि विदेशी कपड़ेके आयातसे होगी । हमारा यह भी विश्वास है कि खादी आन्दोलनका उद्देश्य यह है कि जगह-जगह कताई और बुनाईका ज्यादा से ज्यादा व्यापक प्रसार किया जाये, और उस जिलेके लोगोंको ज्यादा से ज्यादा बड़ी संख्या में रोजगार मुहैया किया जाये। ऐसा किया जाये तो ही खादीका सही विकास होगा । हमारे अमुक कपड़ोंकी कीमतें अखिल भारतीय चरखा संघकी कीमतोंसे छः पाई प्रति गज अधिक हैं। हम आपको अत्यन्त विनयपूर्वक एक पैंट और एक तेईस गज चौड़ा तथा तीन गज लम्बा कम्बल दे रहे हैं। ये दोनों चीजें पप्पू जगन्नायाकुलुकी बनाई हुई हैं। यह भाई बुनकर हैं और हमारी संस्थाके संचालक हैं। हम नम्रतापूर्वक प्रार्थना करते हैं कि ये दोनों वस्तुएँ आश्रमके संग्रहालयमें रखी जायें । पप्पू जगन्नायाकुलुकी ये दोनों कृतियाँ आश्रमके संग्रहालय में अवश्य रखी जायेंगी । दोनों अपने ढंगकी बेजोड़ वस्तुएँ हैं। मुझे विजगापट्टममें अपने मेजबान श्री बानोजीरावसे महीन खादीके दो टुकड़े भी भेंटमें मिले हैं। श्री बानोजीराव जमींदार हैं और यह खादी उनकी जमींदारीके एक गाँव बोंटलकोडुरुकी बनी हुई है । ये कपड़े क्रमशः तिरेपन और छयासठ वर्ष पुराने हैं। मुझे इस आदर्श सहकारी संस्थाके उपनियम प्राप्त हो गये हैं। ये नियम जिस उद्देश्यसे बनाये गये हैं उसे सिद्ध करनेमें समर्थ हैं। उनके अनुसार कातनेवाले और बुनाई करनेवाले लोग संस्थाके सदस्य बन सकते हैं । सदस्योंके लिए संस्थाके द्वारा पैदा की गई खादी खरीदना जरूरी है; इसी प्रकार सदस्य जो सूत कातें या जो खादी तैयार करें उसको उन्हें संस्थाको बेचना चाहिए । इन उपनियमोंमें से 'व्यापार' शीर्षकके अन्तर्गत दिया गया यह अंश मैं यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ । एक. यहाँ केवल कुछ अंश ही दिये गये हैं। दो. यहाँ नहीं दिया गया है।
शुजाउद्दौला (१९ जनवरी१७३२, दारा शिकोह के महल में, दिल्ली - १७७५) अवध के नवाब थे। उन्हें वज़ीर उल ममालिक ए हिंदुस्तान, शुजा उद् दौला, नवाब मिर्ज़ा जलाल उद् दीन हैदर खान बहादुर, अवध के नवाब वज़ीर आदि नामों से भी जाना जाता था। अवध का साम्राज्य उस समय औरंगज़ेब की मौत की वजह से मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद एक छोटी रियासत बन गया था। एक छोटे शासक होने के बावजूद वे भारत के इतिहास के दो प्रमुख युद्धों में भाग लेने के लिए जाने जाते हैं - पानीपत की तीसरी लड़ाई, जिसने भारत में मराठों का वर्चस्व समाप्त किया और बक्सर की लड़ाई, जिसने अंग्रेज़ों की हुकूमत स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। . 17 संबंधोंः दारा शूकोह, दिल्ली, नवाब, पठान, पानीपत का तृतीय युद्ध, बक्सर का युद्ध, मुग़ल साम्राज्य, शाह आलम द्वितीय, सफ़दरजंग, हिंदुस्तान, औरंगज़ेब, आसफ़ुद्दौला, अहमद शाह अब्दाली, अवध, अवध के नवाब, १७३२, १९ जनवरी। दारा शूकोह (जन्म 20 मार्च 1615 - हत्या 10 सितंबर 1659) मुमताज़ महल के गर्भ से उत्पन्न मुग़ल सम्राट शाहजहाँ का ज्येष्ठ पुत्र तथा औरंगज़ेब का बड़ा भाई। . दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ीः National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। . नवाब यह सम्मान की उपाधि मुग़ल शासकों द्वारा उपयोग किया जाता था। भारत में मुग़ल शासन के अधीन यह उपाधि बाद में बंगाल, अवध तथा ऑर्काट के स्वतंत्र शासकों द्वारा अपनाई गई थी। इंग्लैंड में नवाब नाम उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में काम करते हुए बहुत पैसा कमाया तथा घर लौटकर संसद की सीटें ख़रीदीं। अतः नवाब शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिसके पास अकूत संपदा या असामान्य विशिष्टता हो। . पानीपत का तृतीय युद्ध अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच हुआ। पानीपत की तीसरी लड़ाई (95.5 किमी) उत्तर में मराठा साम्राज्य और अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली, दो भारतीय मुस्लिम राजा Rohilla अफगान दोआब और अवध के नवाब Shuja-उद-Daula (दिल्ली के सहयोगी दलों) के एक गठबंधन के साथ अहमद शाह अब्दाली के एक उत्तरी अभियान बल के बीच पर 14 जनवरी 1761, पानीपत, के बारे में 60 मील की दूरी पर हुआ। लड़ाई018 वीं सदी में सबसे बड़े, लड़ाई में से एक माना जाता है और एक ही दिन में एक क्लासिक गठन दो सेनाओं के बीच लड़ाई की रिपोर्ट में मौत की शायद सबसे बड़ी संख्या है। मुग़ल राज का अंत (१६८०-१७७०) में शुरु हो गया था, जब मुगलों के ज्यादातर भू भागों पर मराठाओं का अाधिपत्य हो गया था। गुजरात और मालवा के बाद बाजी राव ने १७३७ में दिल्ली पर मुगलों को हराकर अपने अधीन कर लिया था और दक्षिण दिल्ली के ज्यादातर भागों पर अपने मराठाओं का राज था। बाजी राव के पुत्र बाला जी बाजी राव ने बाद में पंजाब को भी जीतकर अपने अधीन करके मराठाओं की विजय पताका उत्तर भारत में फैला दी थी। पंजाब विजय ने १७५८ में अफगानिस्तान के दुर्रानी शासकों से टकराव को अनिवार्य कर दिया था। १७५९ में दुर्रानी शासक अहमद शाह अब्दाली ने कुछ पसतून कबीलो के सरदारों और भारत में अवध के नवाबों से मिलकर गंगा के दोआब क्षेत्र में मराठाओं से युद्ध के लिए सेना एकत्रित की। इसमें रोहलिआ अफगान ने भी उसकी सहायता की। पानीपत का तीसरा युद्ध इस तरह सम्मिलित इस्लामिक सेना और मराठाओं के बीच लड़ा गया। अवध के नवाब ने इसे इस्लामिक सेना का नाम दिया और बाकी मुसल्मानों को भी इस्लाम के नाम पर इकट्ठा किया। जबकि मराठा सेना ने अन्य हिन्दू राजाओं से सहायता की उम्मीद की १४ जनवरी १७६१ को हुए इस युद्ध में भूखे ही युद्ध में पहुँचे मराठाओं को सुरवती विजय के बाद हार का मुख देखना पड़ा. बक्सर का युद्ध २२ अक्टूबर १७६४ में बक्सर नगर के आसपास ईस्ट इंडिया कंपनी के हैक्टर मुनरो और मुगल तथा नबाबों की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना अंग्रेज कंपनी से लड़ रही थी। लड़ाई में अंग्रेजों की जीत हुई और इसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा और बांग्लादेश का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कंपनी के हाथ चला गया। . मुग़ल साम्राज्य (फ़ारसीः, मुग़ल सलतनत-ए-हिंद; तुर्कीः बाबर इम्परातोरलुग़ु), एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। 1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। . The Mughal Emperor Shah Alam II, negotiates territorial changes with a member of the British East India Company शाह आलम द्वितीय (१७२८-१८०६), जिसे अली गौहर भी कहा गया है, भारत का मुगल सम्राट रहा। इसे गद्दी अपने पिता, आलमगीर द्वितीय से १७६१ में मिली। १४ सितंबर १८०३ को इसका राज्य ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आ गया और ये मात्र कठपुतली बनकर रह गया। १८०५ में इसकी मृत्यु हुई। इसकी कब्र १३ शताब्दी के संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की महरौली में दरगाह के निकट एक संगमर्मर के परिसर में बहादुर शाह प्रथम (जिसे शाह आलम प्रथम भी कहा जाता है) एवं अकबर द्वितीय के साथ बनी है। . सफ़दरजंग अवध पर शासन करने वाला, अवध वंश का दूसरा नवाब था। उसने १७०८ से ५ अक्टूबर १७५४ तक शासन किया। श्रेणीःलखनऊ के नवाब en:Safdarjung. कोई विवरण नहीं। अबुल मुज़फ़्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर (3 नवम्बर १६१८ - ३ मार्च १७०७) जिसे आमतौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर (प्रजा द्वारा दिया हुआ शाही नाम जिसका अर्थ होता है विश्व विजेता) के नाम से जाना जाता था भारत पर राज्य करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन १६५८ से लेकर १७०७ में उसकी मृत्यु होने तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक राज्य किया। वो अकबर के बाद सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था। अपने जीवनकाल में उसने दक्षिणी भारत में मुग़ल साम्राज्य का विस्तार करने का भरसक प्रयास किया पर उसकी मृत्यु के पश्चात मुग़ल साम्राज्य सिकुड़ने लगा। औरंगज़ेब के शासन में मुग़ल साम्राज्य अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा। वो अपने समय का शायद सबसे धनी और शातिशाली व्यक्ति था जिसने अपने जीवनकाल में दक्षिण भारत में प्राप्त विजयों के जरिये मुग़ल साम्राज्य को साढ़े बारह लाख वर्ग मील में फैलाया और १५ करोड़ लोगों पर शासन किया जो की दुनिया की आबादी का १/४ था। औरंगज़ेब ने पूरे साम्राज्य पर फ़तवा-ए-आलमगीरी (शरियत या इस्लामी क़ानून पर आधारित) लागू किया और कुछ समय के लिए ग़ैर-मुस्लिमों पर अतिरिक्त कर भी लगाया। ग़ैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था। मुग़ल शासनकाल में उनके शासन काल में उसके दरबारियों में सबसे ज्यादा हिन्दु थे। और सिखों के गुरु तेग़ बहादुर को दाराशिकोह के साथ मिलकर बग़ावत के जुर्म में मृत्युदंड दिया गया था। . आसफ़ुद्दौला (२३ सितंबर १७४८-२१ सितंबर १७९७) १७७५ से १७९७ के बीच अवध के नवाब वज़ीर और शुजाउद्दौला के बेटे थे, उनकी माँ और दादी अवध की बेग़में थी। अवध की लूट ही वारेन हेस्टिंग्स के खिलाफ़ इल्ज़ामों में से प्रमुख था। . अहमद शाह अब्दाली अहमद शाह अब्दाली, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहा जाता है, सन 1748 में नादिरशाह की मौत के बाद अफ़ग़ानिस्तान का शासक और दुर्रानी साम्राज्य का संस्थापक बना। उसने भारत पर सन 1748 से सन 1758 तक कई बार चढ़ाई की। उसने अपना सबसे बड़ा हमला सन 1757 में जनवरी माह में दिल्ली पर किया। अहमदशाह एक माह तक दिल्ली में ठहर कर लूटमार करता रहा। वहाँ की लूट में उसे करोड़ों की संपदा हाथ लगी थी।, Library of Congress Country Studies on Afghanistan, 1997, Accessed 2010-08-25 . अवध अवध वर्तमान उत्तर प्रदेश के एक भाग का नाम है जो प्राचीन काल में कोशल कहलाता था। इसकी राजधानी अयोध्या थी। अवध शब्द अयोध्या से ही निकला है। अवध की राजधानी प्रांरभ में फैजाबाद थी किंतु बाद को लखनऊ उठ आई थी। अवध पर नवाबों का आधिपत्य था जो प्रायः स्वतंत्र थे, क्योंकि अवध के नवाब शिया मुसलमान थे अतः अवध में इसलाम के इस संप्रदाय को विशेष संरक्षण मिला। लखनऊ उर्दू कविता का भी प्रसिद्ध केंद्र रहा। दिल्ली केंद्र के नष्ट होने पर बहुत से दिल्ली के भी प्रसिद्ध उर्दू कवि लखनऊ वापस चले आए थे। अवध की पारम्परिक राजधानी लखनऊ है। भौगोलिक रूप से अवध की आधुनिक परिभाषा - लखनऊ, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, भदोही, इलाहाबाद, बाराबंकी, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, हरदोई, लखीमपुर खीरी, कौशाम्बी, सीतापुर, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, खलीलाबाद, उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर, (जौनपुर, और मिर्जापुर के पश्चिमी हिस्सों), कन्नौज, पीलीभीत, शाहजहांपुर से बनती है। . भारत के अवध के १८वीं तथा १९वीं सदी में शासकों को अवध के नवाब कहते हैं। अवध के नवाब, इरान के निशापुर के कारागोयुन्लु वंश के थे। नवाब सआदत खान प्रथम नवाब थे। . 1732 ग्रेगोरी कैलंडर का एक अधिवर्ष है। . 19 जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 19वॉ दिन है। साल मे अभी और 346 दिन बाकी है (लीप वर्ष मे 347)। .
शुजाउद्दौला अवध के नवाब थे। उन्हें वज़ीर उल ममालिक ए हिंदुस्तान, शुजा उद् दौला, नवाब मिर्ज़ा जलाल उद् दीन हैदर खान बहादुर, अवध के नवाब वज़ीर आदि नामों से भी जाना जाता था। अवध का साम्राज्य उस समय औरंगज़ेब की मौत की वजह से मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद एक छोटी रियासत बन गया था। एक छोटे शासक होने के बावजूद वे भारत के इतिहास के दो प्रमुख युद्धों में भाग लेने के लिए जाने जाते हैं - पानीपत की तीसरी लड़ाई, जिसने भारत में मराठों का वर्चस्व समाप्त किया और बक्सर की लड़ाई, जिसने अंग्रेज़ों की हुकूमत स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। . सत्रह संबंधोंः दारा शूकोह, दिल्ली, नवाब, पठान, पानीपत का तृतीय युद्ध, बक्सर का युद्ध, मुग़ल साम्राज्य, शाह आलम द्वितीय, सफ़दरजंग, हिंदुस्तान, औरंगज़ेब, आसफ़ुद्दौला, अहमद शाह अब्दाली, अवध, अवध के नवाब, एक हज़ार सात सौ बत्तीस, उन्नीस जनवरी। दारा शूकोह मुमताज़ महल के गर्भ से उत्पन्न मुग़ल सम्राट शाहजहाँ का ज्येष्ठ पुत्र तथा औरंगज़ेब का बड़ा भाई। . दिल्ली , आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं एक हज़ार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग एक करोड़ सत्तर लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। एक हज़ार छः सौ उनतालीस में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो एक हज़ार छः सौ उन्यासी से एक हज़ार आठ सौ सत्तावन तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। अट्ठारहवीं एवं उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। . नवाब यह सम्मान की उपाधि मुग़ल शासकों द्वारा उपयोग किया जाता था। भारत में मुग़ल शासन के अधीन यह उपाधि बाद में बंगाल, अवध तथा ऑर्काट के स्वतंत्र शासकों द्वारा अपनाई गई थी। इंग्लैंड में नवाब नाम उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में काम करते हुए बहुत पैसा कमाया तथा घर लौटकर संसद की सीटें ख़रीदीं। अतः नवाब शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है, जिसके पास अकूत संपदा या असामान्य विशिष्टता हो। . पानीपत का तृतीय युद्ध अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच हुआ। पानीपत की तीसरी लड़ाई उत्तर में मराठा साम्राज्य और अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली, दो भारतीय मुस्लिम राजा Rohilla अफगान दोआब और अवध के नवाब Shuja-उद-Daula के एक गठबंधन के साथ अहमद शाह अब्दाली के एक उत्तरी अभियान बल के बीच पर चौदह जनवरी एक हज़ार सात सौ इकसठ, पानीपत, के बारे में साठ मील की दूरी पर हुआ। लड़ाईअट्ठारह वीं सदी में सबसे बड़े, लड़ाई में से एक माना जाता है और एक ही दिन में एक क्लासिक गठन दो सेनाओं के बीच लड़ाई की रिपोर्ट में मौत की शायद सबसे बड़ी संख्या है। मुग़ल राज का अंत में शुरु हो गया था, जब मुगलों के ज्यादातर भू भागों पर मराठाओं का अाधिपत्य हो गया था। गुजरात और मालवा के बाद बाजी राव ने एक हज़ार सात सौ सैंतीस में दिल्ली पर मुगलों को हराकर अपने अधीन कर लिया था और दक्षिण दिल्ली के ज्यादातर भागों पर अपने मराठाओं का राज था। बाजी राव के पुत्र बाला जी बाजी राव ने बाद में पंजाब को भी जीतकर अपने अधीन करके मराठाओं की विजय पताका उत्तर भारत में फैला दी थी। पंजाब विजय ने एक हज़ार सात सौ अट्ठावन में अफगानिस्तान के दुर्रानी शासकों से टकराव को अनिवार्य कर दिया था। एक हज़ार सात सौ उनसठ में दुर्रानी शासक अहमद शाह अब्दाली ने कुछ पसतून कबीलो के सरदारों और भारत में अवध के नवाबों से मिलकर गंगा के दोआब क्षेत्र में मराठाओं से युद्ध के लिए सेना एकत्रित की। इसमें रोहलिआ अफगान ने भी उसकी सहायता की। पानीपत का तीसरा युद्ध इस तरह सम्मिलित इस्लामिक सेना और मराठाओं के बीच लड़ा गया। अवध के नवाब ने इसे इस्लामिक सेना का नाम दिया और बाकी मुसल्मानों को भी इस्लाम के नाम पर इकट्ठा किया। जबकि मराठा सेना ने अन्य हिन्दू राजाओं से सहायता की उम्मीद की चौदह जनवरी एक हज़ार सात सौ इकसठ को हुए इस युद्ध में भूखे ही युद्ध में पहुँचे मराठाओं को सुरवती विजय के बाद हार का मुख देखना पड़ा. बक्सर का युद्ध बाईस अक्टूबर एक हज़ार सात सौ चौंसठ में बक्सर नगर के आसपास ईस्ट इंडिया कंपनी के हैक्टर मुनरो और मुगल तथा नबाबों की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना अंग्रेज कंपनी से लड़ रही थी। लड़ाई में अंग्रेजों की जीत हुई और इसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा और बांग्लादेश का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कंपनी के हाथ चला गया। . मुग़ल साम्राज्य , एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में शुरू हुआ, जिसने सत्रह वीं शताब्दी के आखिर में और अट्ठारह वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और उन्नीस वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। एक हज़ार सात सौ के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया - इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय चालीस लाख किमी² के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान ग्यारह और तेरह करोड़ के बीच लगाया गया था। एक हज़ार सात सौ पच्चीस के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया। एक हज़ार पाँच सौ छप्पन में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और एक सौ पचास साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं। . The Mughal Emperor Shah Alam II, negotiates territorial changes with a member of the British East India Company शाह आलम द्वितीय , जिसे अली गौहर भी कहा गया है, भारत का मुगल सम्राट रहा। इसे गद्दी अपने पिता, आलमगीर द्वितीय से एक हज़ार सात सौ इकसठ में मिली। चौदह सितंबर एक हज़ार आठ सौ तीन को इसका राज्य ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आ गया और ये मात्र कठपुतली बनकर रह गया। एक हज़ार आठ सौ पाँच में इसकी मृत्यु हुई। इसकी कब्र तेरह शताब्दी के संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की महरौली में दरगाह के निकट एक संगमर्मर के परिसर में बहादुर शाह प्रथम एवं अकबर द्वितीय के साथ बनी है। . सफ़दरजंग अवध पर शासन करने वाला, अवध वंश का दूसरा नवाब था। उसने एक हज़ार सात सौ आठ से पाँच अक्टूबर एक हज़ार सात सौ चौवन तक शासन किया। श्रेणीःलखनऊ के नवाब en:Safdarjung. कोई विवरण नहीं। अबुल मुज़फ़्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर जिसे आमतौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था भारत पर राज्य करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन एक हज़ार छः सौ अट्ठावन से लेकर एक हज़ार सात सौ सात में उसकी मृत्यु होने तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक राज्य किया। वो अकबर के बाद सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था। अपने जीवनकाल में उसने दक्षिणी भारत में मुग़ल साम्राज्य का विस्तार करने का भरसक प्रयास किया पर उसकी मृत्यु के पश्चात मुग़ल साम्राज्य सिकुड़ने लगा। औरंगज़ेब के शासन में मुग़ल साम्राज्य अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा। वो अपने समय का शायद सबसे धनी और शातिशाली व्यक्ति था जिसने अपने जीवनकाल में दक्षिण भारत में प्राप्त विजयों के जरिये मुग़ल साम्राज्य को साढ़े बारह लाख वर्ग मील में फैलाया और पंद्रह करोड़ लोगों पर शासन किया जो की दुनिया की आबादी का एक/चार था। औरंगज़ेब ने पूरे साम्राज्य पर फ़तवा-ए-आलमगीरी लागू किया और कुछ समय के लिए ग़ैर-मुस्लिमों पर अतिरिक्त कर भी लगाया। ग़ैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था। मुग़ल शासनकाल में उनके शासन काल में उसके दरबारियों में सबसे ज्यादा हिन्दु थे। और सिखों के गुरु तेग़ बहादुर को दाराशिकोह के साथ मिलकर बग़ावत के जुर्म में मृत्युदंड दिया गया था। . आसफ़ुद्दौला एक हज़ार सात सौ पचहत्तर से एक हज़ार सात सौ सत्तानवे के बीच अवध के नवाब वज़ीर और शुजाउद्दौला के बेटे थे, उनकी माँ और दादी अवध की बेग़में थी। अवध की लूट ही वारेन हेस्टिंग्स के खिलाफ़ इल्ज़ामों में से प्रमुख था। . अहमद शाह अब्दाली अहमद शाह अब्दाली, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहा जाता है, सन एक हज़ार सात सौ अड़तालीस में नादिरशाह की मौत के बाद अफ़ग़ानिस्तान का शासक और दुर्रानी साम्राज्य का संस्थापक बना। उसने भारत पर सन एक हज़ार सात सौ अड़तालीस से सन एक हज़ार सात सौ अट्ठावन तक कई बार चढ़ाई की। उसने अपना सबसे बड़ा हमला सन एक हज़ार सात सौ सत्तावन में जनवरी माह में दिल्ली पर किया। अहमदशाह एक माह तक दिल्ली में ठहर कर लूटमार करता रहा। वहाँ की लूट में उसे करोड़ों की संपदा हाथ लगी थी।, Library of Congress Country Studies on Afghanistan, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे, Accessed पच्चीस अगस्त दो हज़ार दस . अवध अवध वर्तमान उत्तर प्रदेश के एक भाग का नाम है जो प्राचीन काल में कोशल कहलाता था। इसकी राजधानी अयोध्या थी। अवध शब्द अयोध्या से ही निकला है। अवध की राजधानी प्रांरभ में फैजाबाद थी किंतु बाद को लखनऊ उठ आई थी। अवध पर नवाबों का आधिपत्य था जो प्रायः स्वतंत्र थे, क्योंकि अवध के नवाब शिया मुसलमान थे अतः अवध में इसलाम के इस संप्रदाय को विशेष संरक्षण मिला। लखनऊ उर्दू कविता का भी प्रसिद्ध केंद्र रहा। दिल्ली केंद्र के नष्ट होने पर बहुत से दिल्ली के भी प्रसिद्ध उर्दू कवि लखनऊ वापस चले आए थे। अवध की पारम्परिक राजधानी लखनऊ है। भौगोलिक रूप से अवध की आधुनिक परिभाषा - लखनऊ, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, भदोही, इलाहाबाद, बाराबंकी, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, हरदोई, लखीमपुर खीरी, कौशाम्बी, सीतापुर, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, खलीलाबाद, उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर, , कन्नौज, पीलीभीत, शाहजहांपुर से बनती है। . भारत के अवध के अट्ठारहवीं तथा उन्नीसवीं सदी में शासकों को अवध के नवाब कहते हैं। अवध के नवाब, इरान के निशापुर के कारागोयुन्लु वंश के थे। नवाब सआदत खान प्रथम नवाब थे। . एक हज़ार सात सौ बत्तीस ग्रेगोरी कैलंडर का एक अधिवर्ष है। . उन्नीस जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का उन्नीसवॉ दिन है। साल मे अभी और तीन सौ छियालीस दिन बाकी है । .
2005 में सीनियर जर्नलिस्ट निशांत ए भूसे ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो उनकी मुलाकात पंडित साहू से हुई. निशांत ने पंडित के सामने एक फिंगरप्रिंट्स की कॉपी रख कहा कि ये एक जानकार की उंगलियों के निशान हैं और ये परेशानी से जूझ रहे हैं इनके बारे में बताइए. पंडित साहू ने उसी वक्त बता दिया था अबू को उम्र कैद होगी. इसके जेल जाने की वजह ग्लैमर वर्ल्ड की महिलाओं से संबंध और बॉलीवुड की चकाचौंध है. उन्होंने फिंगरप्रिंट्स देख यहां तक बता दिया था 1993 ब्लास्ट में इस शख्स का हाथ नहीं है पर इसे फंसाया गया है. इसके साथ ही उन्होंंने उस वक्त बता दिया था कि इस शख्स पर दो बार जेल में हमला होगा. जेल से रिहा होकर होगा अबू का 'पुर्नजन्म' आज सजा सुनाने के बाद पंडित साहू ने भविष्यवाणी कर डाली है कि जब जेल से बाहर निकलेंगे तो एक साफ सुथरी छवि के साथ बाहर आएंगे. उनका गैंगस्टर से कोई ताल्लुक नहीं रहेगा. जेल से रिहा होने के बाद एक नया जीवन बिताते नजर आएंगे. अबू सलेम के मामले में प्रत्यर्पण संधि के तहत फांसी की सज़ा नहीं मांगी जा सकती, इसलिए उसे उम्र कैद की सज़ा दी गई है. सलेम के मामले में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए समझौते और प्रत्यर्पण संधि की अहम भूमिका रही है. इसकी कहानी आज से करीब 12 साल पहले शुरू हुई थी. भारत ने तीन साल जारी रही कानूनी लड़ाई के बाद अबू सलेम और मोनिका बेदी को लिस्बन से भारत लाने में कामयाबी हासिल की थी. लिस्बन पुलिस ने सितंबर 2002 में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों पर सफ़र करने की वजह से सलेम और मोनिका बेदी को गिरफ़्तार कर लिया था. लेकिन भारत और पुर्तगाल के बीच उस वक़्त कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं थी, इस वजह से भारत को सलेम को लाने के लिए नवंबर 2005 तक का इंतज़ार करना पड़ा. सलेम और मोनिका को भेजने के वक़्त पुर्तगाल ने ये शर्त रखी कि जिस व्यक्ति को वहां से भारत भेजा जाएगा, उसे सज़ा-ए-मौत या फिर 25 साल से ज़्यादा कैद की सज़ा नहीं सुनाई जा सकती. मोनिका और सलेम की प्रेम कहानी की शुरुआत फोन पर हुई थी. तब मोनिका को ये भी नहीं पता था कि अबू सलेम कौन है. वो सिर्फ दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के नाम जानती थी. सलेम ने उन्हें दुबई में एक स्टेज शो करने के लिए फोन किया था. फोन पर सलेम ने खुद का नाम नहीं बताया था. खुद को बिजनेसमैन बताते हुए उसने मोनिका से बात की थी. इस इनविटेशन के बाद इसी शो के सिलसिले में लगातार कुछ दिनों तक दोनों की बात होती रही. मोनिका के मुताबिक़ सलेम का बात करने का अंदाज उसे बहुत अच्छा लगता था और वो बिना उससे मिले ही उसे पसंद करने लगी थी. अबु सलेम की पहली शादी समीरा जुमानी से हुई थी. इससे दो बच्चे होने के बाद में अबु सलेम का तलाक हो गया. इस समय समीरा अमेरिका के जोर्जिया में रह रही हैं. बाद में मोनिका को देखने के साथ ही अबु सलेम उस पर फिदा हो गया. फिल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी के प्यार में पागल सलेम उसे साथ ले विदेश फरार हो गया था. 20 सितंबर, 2002 को इंटरपोल की मदद से पुर्तगाल में उसे मोनिका बेदी के साथ गिरफ्तार किया गया था. सलेम ने दावा किया था कि साल 2000 में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में मोनिका बेदी के साथ उसकी निकाह हो चुकी है. हालांकि मोनिका ने इससे इन्कार करते हुए कहा था कि मैं सलेम के साथ रही हूं लेकिन हमारा निकाह नहीं हुआ. सलेम का जन्म 1960 के दशक में यूपी के आजमगढ़ जिले में सराय मीर नामक गांव में हुआ था. उसका पूरा नाम अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी है.
दो हज़ार पाँच में सीनियर जर्नलिस्ट निशांत ए भूसे ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो उनकी मुलाकात पंडित साहू से हुई. निशांत ने पंडित के सामने एक फिंगरप्रिंट्स की कॉपी रख कहा कि ये एक जानकार की उंगलियों के निशान हैं और ये परेशानी से जूझ रहे हैं इनके बारे में बताइए. पंडित साहू ने उसी वक्त बता दिया था अबू को उम्र कैद होगी. इसके जेल जाने की वजह ग्लैमर वर्ल्ड की महिलाओं से संबंध और बॉलीवुड की चकाचौंध है. उन्होंने फिंगरप्रिंट्स देख यहां तक बता दिया था एक हज़ार नौ सौ तिरानवे ब्लास्ट में इस शख्स का हाथ नहीं है पर इसे फंसाया गया है. इसके साथ ही उन्होंंने उस वक्त बता दिया था कि इस शख्स पर दो बार जेल में हमला होगा. जेल से रिहा होकर होगा अबू का 'पुर्नजन्म' आज सजा सुनाने के बाद पंडित साहू ने भविष्यवाणी कर डाली है कि जब जेल से बाहर निकलेंगे तो एक साफ सुथरी छवि के साथ बाहर आएंगे. उनका गैंगस्टर से कोई ताल्लुक नहीं रहेगा. जेल से रिहा होने के बाद एक नया जीवन बिताते नजर आएंगे. अबू सलेम के मामले में प्रत्यर्पण संधि के तहत फांसी की सज़ा नहीं मांगी जा सकती, इसलिए उसे उम्र कैद की सज़ा दी गई है. सलेम के मामले में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए समझौते और प्रत्यर्पण संधि की अहम भूमिका रही है. इसकी कहानी आज से करीब बारह साल पहले शुरू हुई थी. भारत ने तीन साल जारी रही कानूनी लड़ाई के बाद अबू सलेम और मोनिका बेदी को लिस्बन से भारत लाने में कामयाबी हासिल की थी. लिस्बन पुलिस ने सितंबर दो हज़ार दो में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों पर सफ़र करने की वजह से सलेम और मोनिका बेदी को गिरफ़्तार कर लिया था. लेकिन भारत और पुर्तगाल के बीच उस वक़्त कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं थी, इस वजह से भारत को सलेम को लाने के लिए नवंबर दो हज़ार पाँच तक का इंतज़ार करना पड़ा. सलेम और मोनिका को भेजने के वक़्त पुर्तगाल ने ये शर्त रखी कि जिस व्यक्ति को वहां से भारत भेजा जाएगा, उसे सज़ा-ए-मौत या फिर पच्चीस साल से ज़्यादा कैद की सज़ा नहीं सुनाई जा सकती. मोनिका और सलेम की प्रेम कहानी की शुरुआत फोन पर हुई थी. तब मोनिका को ये भी नहीं पता था कि अबू सलेम कौन है. वो सिर्फ दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के नाम जानती थी. सलेम ने उन्हें दुबई में एक स्टेज शो करने के लिए फोन किया था. फोन पर सलेम ने खुद का नाम नहीं बताया था. खुद को बिजनेसमैन बताते हुए उसने मोनिका से बात की थी. इस इनविटेशन के बाद इसी शो के सिलसिले में लगातार कुछ दिनों तक दोनों की बात होती रही. मोनिका के मुताबिक़ सलेम का बात करने का अंदाज उसे बहुत अच्छा लगता था और वो बिना उससे मिले ही उसे पसंद करने लगी थी. अबु सलेम की पहली शादी समीरा जुमानी से हुई थी. इससे दो बच्चे होने के बाद में अबु सलेम का तलाक हो गया. इस समय समीरा अमेरिका के जोर्जिया में रह रही हैं. बाद में मोनिका को देखने के साथ ही अबु सलेम उस पर फिदा हो गया. फिल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी के प्यार में पागल सलेम उसे साथ ले विदेश फरार हो गया था. बीस सितंबर, दो हज़ार दो को इंटरपोल की मदद से पुर्तगाल में उसे मोनिका बेदी के साथ गिरफ्तार किया गया था. सलेम ने दावा किया था कि साल दो हज़ार में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में मोनिका बेदी के साथ उसकी निकाह हो चुकी है. हालांकि मोनिका ने इससे इन्कार करते हुए कहा था कि मैं सलेम के साथ रही हूं लेकिन हमारा निकाह नहीं हुआ. सलेम का जन्म एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में यूपी के आजमगढ़ जिले में सराय मीर नामक गांव में हुआ था. उसका पूरा नाम अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी है.
PATNA : टिड्डी दलों पर सूबे के 10 जिलों में हाई अलर्ट : बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि टिड्डी दल के प्रकोप की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश से सटे बिहार के 10 जिलों में हाई अलर्ट जारी करते हुए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, गया, औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण जिलों की लगभग सभी पंचायतों में टिड्डी दल के संभावित आक्रमण से संबंधित चेतावनी और एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य से सटे बिहार के जिलों की 24 पंचायतों में मॉक ड्रिल भी कराई गई है। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रण समिति की बैठक प्रत्येक गुरुवार और प्रखंड, पंचायत स्तर पर प्रत्येक मंगलवार को कराई जा रही है। संभावित क्षेत्रों के लिए कृषि रक्षा रसायनों, स्प्रेयर्स व ट्रैक्टर्स की व्यवस्था कर ली गई है। सघन सर्वेक्षण द्वारा टिड्डियों के संभावित आश्रय स्थल को भी चिह्नित किया जा रहा है। ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर्स, अग्निशमन विभाग की गाड़ियों व मानव संसाधन की उपलब्धि संबंधी सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में अग्निशमन विभाग की भूमिका अधिक उपयोगी है। जैसलमेर। पाकिस्तान से टिड्डियों के भारतीय सीमा में घुसने का प्रवेश द्वार बन चुके जैसलमेर एवं बाड़मेर में टिड्डियों से खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं, वायुसेना एयरबेस पर गाइडलाइन जारी कर एहतियातन कई कदम उठाए गए हैं।
PATNA : टिड्डी दलों पर सूबे के दस जिलों में हाई अलर्ट : बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि टिड्डी दल के प्रकोप की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश से सटे बिहार के दस जिलों में हाई अलर्ट जारी करते हुए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, गया, औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण जिलों की लगभग सभी पंचायतों में टिड्डी दल के संभावित आक्रमण से संबंधित चेतावनी और एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य से सटे बिहार के जिलों की चौबीस पंचायतों में मॉक ड्रिल भी कराई गई है। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रण समिति की बैठक प्रत्येक गुरुवार और प्रखंड, पंचायत स्तर पर प्रत्येक मंगलवार को कराई जा रही है। संभावित क्षेत्रों के लिए कृषि रक्षा रसायनों, स्प्रेयर्स व ट्रैक्टर्स की व्यवस्था कर ली गई है। सघन सर्वेक्षण द्वारा टिड्डियों के संभावित आश्रय स्थल को भी चिह्नित किया जा रहा है। ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर्स, अग्निशमन विभाग की गाड़ियों व मानव संसाधन की उपलब्धि संबंधी सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में अग्निशमन विभाग की भूमिका अधिक उपयोगी है। जैसलमेर। पाकिस्तान से टिड्डियों के भारतीय सीमा में घुसने का प्रवेश द्वार बन चुके जैसलमेर एवं बाड़मेर में टिड्डियों से खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं, वायुसेना एयरबेस पर गाइडलाइन जारी कर एहतियातन कई कदम उठाए गए हैं।
छूने के लिए तैयार नहीं थी । जैसा कि गांधी जी ने कहा है, चिकित्साधिकारी ने 'हमारे पहुंचने को उन बेगुनाह लोगों के लिए ईश्वरीय वरदान समझा, और उसने हमें पट्टियों, कीटाणु मारने की दवाओं आदि से लैस किया, और हमें कामचलाऊ अस्पताल में ले गया। जुलू हमें देखकर खुश हुए। गोरे सिपाही उन जंगलों से झांका करते थे जो हमारे और उनके बीच थे, और हमें घायलों की तीमारदारी से दूर रखने की कोशिश करते थे । और जब हम उनकी बात पर ध्यान नहीं देते तो वे क्रोधित हो उठते और जुलू लोगों को अकथनीय गालियां देने लगते ।' एक दुर्गम इलाके से कभी कभी एक दिन में चालीस मील चलना, स्ट्रेचर ढोना और घुड़सवारों के पीछे पीछे भागना और अंत में देखना कि शांतिपूर्ण बस्तियों पर हमले हुए हैं, बेगुनाह लोगों को घसीटा, लातों से मारा और कोड़ों से पीटा गया है - यह सब एक भयानक और कचोटनेवाला अनुभव था । लेकिन मैंने इस कड़वे घूंट को पी लिया, खासकर इसलिए कि मेरे कार्ल्स का काम केवल घायल जुलूओं की तीमारदारी करना था।' इंसान के साथ इंसान की दरिंदगी का यह रोजमर्रा का दृश्य, कठिन अभियान और तनहाई के लंबे दौरों ने गांधी जी के अपने मन में संकट पैदा कर दिया । वे पिछले कई सालों से जीवन के अर्थ और उद्देश्य पर तथा समाज में मनुष्य के कर्तव्य पर मनन करते आए थे और धीरे धीरे अपने साथियों की सेवा के आदर्श के मुताबिक अपनी जीवन शैली को ढाल चुके थे। अब इंसान की बदहाली के इन दुखद और विविधापूर्ण अनुभवों के बीच, पहले जो कुछ अंदर ही अंदर धीरे धीरे पक रहा था वह अनिर्णय का खोल फाड़कर बाहर आ गया और एक दृढ़ संकल्प बन गया । पहले जो एहसास बहुत धुंधला था वह अब एक चकाचौंध के साथ स्पष्ट हो गया कि 'मैं शरीर और आत्मा, दोनों का ध्यान नहीं रख सकता था । अगर उनका जीवन संगी मनुष्यों की सेवा के लिए समर्पित है और अगर आध्यात्मिक बोध उनके प्रयासों का लक्ष्य है तो उन्हें शरीर सुख को हमेशा के लिए त्याग देना होगा और कठोरता के साथ संयम का पालन करना होगा जिसे हिंदू धर्मग्रंथों ने ब्रह्मचर्य का नाम दिया है। ऐसा सोचते हुए मैं आखिरी संकल्प लेने के लिए थोड़ा-बहुत बेचैन हो उठा । इस संकल्प की संभावना ने मुझे एक प्रकार का आनंद दिया।' जैसे ही 'विद्रोह' कुचल दिया गया और कार्प्स को भंग कर दिया गया, गांधी जी देर लगाए बिना फोनिक्स बस्ती की ओर चल पड़े जहां रहने के लिए पहले जुलू विद्रोह और उसके बाद वे अपनी पत्नी और बच्चों को भेज आए थे। जो मुसीबतें उन्होंने उठाई थीं उनके बारे में उन्होंने कस्तूरबाई और अपने प्रमुख सहयोगियों को जानकारी दी और उनको अपना फैसला सुनाया जो उन्होंने किया था। इस प्रकार उनको विश्वास में लेने और अपनी समझ में उनकी सहर्ष अनुमति प्राप्त करने के बाद उन्होंने 'आखिरी फैसला' किया जिसे उन्होंने 'जीवन भर ब्रह्मचर्य के पालन का व्रत' कहा है ।
छूने के लिए तैयार नहीं थी । जैसा कि गांधी जी ने कहा है, चिकित्साधिकारी ने 'हमारे पहुंचने को उन बेगुनाह लोगों के लिए ईश्वरीय वरदान समझा, और उसने हमें पट्टियों, कीटाणु मारने की दवाओं आदि से लैस किया, और हमें कामचलाऊ अस्पताल में ले गया। जुलू हमें देखकर खुश हुए। गोरे सिपाही उन जंगलों से झांका करते थे जो हमारे और उनके बीच थे, और हमें घायलों की तीमारदारी से दूर रखने की कोशिश करते थे । और जब हम उनकी बात पर ध्यान नहीं देते तो वे क्रोधित हो उठते और जुलू लोगों को अकथनीय गालियां देने लगते ।' एक दुर्गम इलाके से कभी कभी एक दिन में चालीस मील चलना, स्ट्रेचर ढोना और घुड़सवारों के पीछे पीछे भागना और अंत में देखना कि शांतिपूर्ण बस्तियों पर हमले हुए हैं, बेगुनाह लोगों को घसीटा, लातों से मारा और कोड़ों से पीटा गया है - यह सब एक भयानक और कचोटनेवाला अनुभव था । लेकिन मैंने इस कड़वे घूंट को पी लिया, खासकर इसलिए कि मेरे कार्ल्स का काम केवल घायल जुलूओं की तीमारदारी करना था।' इंसान के साथ इंसान की दरिंदगी का यह रोजमर्रा का दृश्य, कठिन अभियान और तनहाई के लंबे दौरों ने गांधी जी के अपने मन में संकट पैदा कर दिया । वे पिछले कई सालों से जीवन के अर्थ और उद्देश्य पर तथा समाज में मनुष्य के कर्तव्य पर मनन करते आए थे और धीरे धीरे अपने साथियों की सेवा के आदर्श के मुताबिक अपनी जीवन शैली को ढाल चुके थे। अब इंसान की बदहाली के इन दुखद और विविधापूर्ण अनुभवों के बीच, पहले जो कुछ अंदर ही अंदर धीरे धीरे पक रहा था वह अनिर्णय का खोल फाड़कर बाहर आ गया और एक दृढ़ संकल्प बन गया । पहले जो एहसास बहुत धुंधला था वह अब एक चकाचौंध के साथ स्पष्ट हो गया कि 'मैं शरीर और आत्मा, दोनों का ध्यान नहीं रख सकता था । अगर उनका जीवन संगी मनुष्यों की सेवा के लिए समर्पित है और अगर आध्यात्मिक बोध उनके प्रयासों का लक्ष्य है तो उन्हें शरीर सुख को हमेशा के लिए त्याग देना होगा और कठोरता के साथ संयम का पालन करना होगा जिसे हिंदू धर्मग्रंथों ने ब्रह्मचर्य का नाम दिया है। ऐसा सोचते हुए मैं आखिरी संकल्प लेने के लिए थोड़ा-बहुत बेचैन हो उठा । इस संकल्प की संभावना ने मुझे एक प्रकार का आनंद दिया।' जैसे ही 'विद्रोह' कुचल दिया गया और कार्प्स को भंग कर दिया गया, गांधी जी देर लगाए बिना फोनिक्स बस्ती की ओर चल पड़े जहां रहने के लिए पहले जुलू विद्रोह और उसके बाद वे अपनी पत्नी और बच्चों को भेज आए थे। जो मुसीबतें उन्होंने उठाई थीं उनके बारे में उन्होंने कस्तूरबाई और अपने प्रमुख सहयोगियों को जानकारी दी और उनको अपना फैसला सुनाया जो उन्होंने किया था। इस प्रकार उनको विश्वास में लेने और अपनी समझ में उनकी सहर्ष अनुमति प्राप्त करने के बाद उन्होंने 'आखिरी फैसला' किया जिसे उन्होंने 'जीवन भर ब्रह्मचर्य के पालन का व्रत' कहा है ।
Yamaha RX100: यामाहा जल्द ही अपनी नई RX100 के साथ मार्केट में वापसी करने वाली है। अभी यामाहा की कोई भी नई बाइक बाजार में बिक नहीं रही। ऐसे में अपनी पुरानी लिगेसी को वापस लाने में कंपनी जोर जोर से लगी हुई है। लोगों को भी इस बाइक का बेसब्री से इंतजार है। सभी जल्द से जल्द यामाहा आरएक्स 100 को खरीदना चाहते हैं। कंपनी में भी इसके डेवलपमेंट की घोषणा कर दी है। लेकिन अभी तक इसके लॉन्च की घोषणा नहीं की है। आपको बता दें कि इस बार इसे 100 सीसी सेगमेंट में लॉन्च नहीं किया जाएगा बल्कि कंपनी का प्लान है कि इसे अपडेट कर 225 से 250 सीसी सेगमेंट में लॉन्च किया जाए। कंपनी के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान टीवीएस को होने वाला है। इसके साथ ही इस सेगमेंट में आने वाली सभी बाइक के सेल्स पर काफी गहरा असर होगा। इस सेगमेंट में लॉन्च होने के बाद इसका सीधा मुकाबला टीवीएस की नई Ronin 225 से होगा। इसी हाल ही में लॉन्च किया गया है। टीवीएस को अपनी इस नई बाइक से काफी अनुमान है। फिलहाल बाजार में इसे मिला जुला रिस्पांस मिल रहा है क्योंकि इसी सेगमेंट में आने वाली रॉयल इनफील्ड की हंटर 350 इससे काफी अच्छी है। दोनों बाइक्स के कीमतों में कुछ ही पैसों का अंतर है। अगर यामहा इस सेगमेंट में अपनी बाइक को लांच कर देता है तो जो भी लोग TVS Ronin की तरफ जा रहे हैं वह नई Yamaha RX100 खरीदेंगे। 80 के दशक में जब टू व्हीलर का मार्केट भारत में बढ़ रहा था, तभी यामाहा ने अपनी नई आरएक्स 100 को लॉन्च किया था। इस बाइक की खासियत थी कि यह सेकंड में ही रफ्तार पकड़ लेती थी। उस समय रफ्तार प्रेमी युवाओं के लिए यह एक वरदान था। जहां हीरो होंडा अपनी सीडी 100 के साथ बाजार में बनी हुई थी वही यामाहा की इस बाइक ने अपने डिजाइन और रफ्तार से युवाओं को काफी आकर्षित किया। लेकिन समय के साथ बदलते नियमों ने इस बाइक को बंद होने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद भी यामहा ने अपनी आरएक्स सीरीज की नई बाइक को लॉन्च किया। लेकिन उन्हें आरएक्स100 जैसी पॉपुलैरिटी नहीं मिली। अब कंपनी फिर से नई आरएक्स सीरीज को लांच करने जा रही है।
Yamaha RXएक सौ: यामाहा जल्द ही अपनी नई RXएक सौ के साथ मार्केट में वापसी करने वाली है। अभी यामाहा की कोई भी नई बाइक बाजार में बिक नहीं रही। ऐसे में अपनी पुरानी लिगेसी को वापस लाने में कंपनी जोर जोर से लगी हुई है। लोगों को भी इस बाइक का बेसब्री से इंतजार है। सभी जल्द से जल्द यामाहा आरएक्स एक सौ को खरीदना चाहते हैं। कंपनी में भी इसके डेवलपमेंट की घोषणा कर दी है। लेकिन अभी तक इसके लॉन्च की घोषणा नहीं की है। आपको बता दें कि इस बार इसे एक सौ सीसी सेगमेंट में लॉन्च नहीं किया जाएगा बल्कि कंपनी का प्लान है कि इसे अपडेट कर दो सौ पच्चीस से दो सौ पचास सीसी सेगमेंट में लॉन्च किया जाए। कंपनी के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान टीवीएस को होने वाला है। इसके साथ ही इस सेगमेंट में आने वाली सभी बाइक के सेल्स पर काफी गहरा असर होगा। इस सेगमेंट में लॉन्च होने के बाद इसका सीधा मुकाबला टीवीएस की नई Ronin दो सौ पच्चीस से होगा। इसी हाल ही में लॉन्च किया गया है। टीवीएस को अपनी इस नई बाइक से काफी अनुमान है। फिलहाल बाजार में इसे मिला जुला रिस्पांस मिल रहा है क्योंकि इसी सेगमेंट में आने वाली रॉयल इनफील्ड की हंटर तीन सौ पचास इससे काफी अच्छी है। दोनों बाइक्स के कीमतों में कुछ ही पैसों का अंतर है। अगर यामहा इस सेगमेंट में अपनी बाइक को लांच कर देता है तो जो भी लोग TVS Ronin की तरफ जा रहे हैं वह नई Yamaha RXएक सौ खरीदेंगे। अस्सी के दशक में जब टू व्हीलर का मार्केट भारत में बढ़ रहा था, तभी यामाहा ने अपनी नई आरएक्स एक सौ को लॉन्च किया था। इस बाइक की खासियत थी कि यह सेकंड में ही रफ्तार पकड़ लेती थी। उस समय रफ्तार प्रेमी युवाओं के लिए यह एक वरदान था। जहां हीरो होंडा अपनी सीडी एक सौ के साथ बाजार में बनी हुई थी वही यामाहा की इस बाइक ने अपने डिजाइन और रफ्तार से युवाओं को काफी आकर्षित किया। लेकिन समय के साथ बदलते नियमों ने इस बाइक को बंद होने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद भी यामहा ने अपनी आरएक्स सीरीज की नई बाइक को लॉन्च किया। लेकिन उन्हें आरएक्सएक सौ जैसी पॉपुलैरिटी नहीं मिली। अब कंपनी फिर से नई आरएक्स सीरीज को लांच करने जा रही है।
चर्चा में क्यों? 9 मार्च, 2022 को राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने विधानसभा में बताया कि मिलावटी पदार्थों की जाँच हेतु इस वित्तीय वर्ष के दौरान प्रत्येक ज़िले में खाद्य प्रयोगशालाओं का गठन कर दिया जाएगा। - स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चुरू और जालौर ज़िले को छोड़कर सभी ज़िलों में प्रयोगशाला गठित करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। - खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत चुरू और जालौर में लैब के लिये प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलने पर ही इन दोनों ज़िलों में लैब का संचालन शुरू किया जा सकेगा। - चिकित्सा मंत्री ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 29(1) के प्रावधानानुसार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यस्तरीय राजस्थान खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण का गठन शासकीय आदेश दिनांक 22 जून, 2020 के द्वारा किया गया है। - उल्लेखनीय है कि लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री मिले, इसके लिये मुख्यमंत्री ने इस बजट घोषणा में प्रत्येक ज़िले में भी खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के गठन की घोषणा की है। - मिलावटी पदार्थों की जाँच हेतु राज्य के 11 ज़िलों- जयपुर, जोधपुर, अलवर, बाँसवाड़ा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, चुरू एवं जालौर में खाद्य प्रयोगशालाएँ संचालित है। इसके अतिरित्त राज्य में संभागीय स्तर पर 9 चल खाद्य प्रयोगशालाएँ भी संचालित हैं। - बजट घोषणा की पालना में सीकर, बाराँ, भीलवाड़ा, बाड़मेर, धौलपुर, नागौर एवं गंगानगर ज़िलों में खाद्य प्रयोगशाला स्थापित किये जाने हेतु बजट में प्रावधान किये जाने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। चर्चा में क्यों? 8 मार्च, 2022 को राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) एवं इसकी बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी लिमिटेड को 'राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार'(खनन) से सम्मानित किया गया। - केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विजेता खदानों के प्रतिनिधियों को प्रदान किये गए। - राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक तुलसी राम अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के ये पुरस्कार पिछले चार वर्षों के दौरान खदानों द्वारा उत्कृष्ट सुरक्षा प्रदर्शन को देखते हुए दिये गए हैं। - आरएसएमएमएल को वर्ष 2019 व 2020 एवं बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी लिमिटेड को वर्ष 2017 एवं 2018 के लिये 'राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार'से नवाज़ा गया है। - समारोह में आरएसएमएमएल की ओर से समूह के महाप्रबंधक (लाइमस्टोन) पीआर प्रजापत, समूह के महाप्रबंधक (परियोजना) ओम पटेल तथा ब्लास्टर्स आशीष गिलबर्ट ने वर्ष 2019 एवं 2020 के लिये यह पुरस्कार प्राप्त किये। - उल्लेखनीय है कि केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा खदानों के सुरक्षा मापदंडों के बीच स्वास्थ्य प्रतिस्पर्द्धा को विकसित करने के लिये राष्ट्रीय स्तर का यह पुरस्कार कोयला, धातु और तेल के खदानों को प्रतिवर्ष दो श्रेणियों में प्रदान किये जाते हैं। - इन पुरस्कारों के अंतर्गत कड़े सुरक्षा मापदंडों, जैसे- लगातार तीन वर्षों तक शून्य दुर्घटना दर, खदान में कार्य करने वाले कामगारों की पूर्ण सुरक्षा व नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसे आँकड़ों को दृष्टिगत रखा जाता है।
चर्चा में क्यों? नौ मार्च, दो हज़ार बाईस को राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने विधानसभा में बताया कि मिलावटी पदार्थों की जाँच हेतु इस वित्तीय वर्ष के दौरान प्रत्येक ज़िले में खाद्य प्रयोगशालाओं का गठन कर दिया जाएगा। - स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चुरू और जालौर ज़िले को छोड़कर सभी ज़िलों में प्रयोगशाला गठित करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। - खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, दो हज़ार छः के तहत चुरू और जालौर में लैब के लिये प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलने पर ही इन दोनों ज़िलों में लैब का संचालन शुरू किया जा सकेगा। - चिकित्सा मंत्री ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, दो हज़ार छः की धारा उनतीस के प्रावधानानुसार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यस्तरीय राजस्थान खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण का गठन शासकीय आदेश दिनांक बाईस जून, दो हज़ार बीस के द्वारा किया गया है। - उल्लेखनीय है कि लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री मिले, इसके लिये मुख्यमंत्री ने इस बजट घोषणा में प्रत्येक ज़िले में भी खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के गठन की घोषणा की है। - मिलावटी पदार्थों की जाँच हेतु राज्य के ग्यारह ज़िलों- जयपुर, जोधपुर, अलवर, बाँसवाड़ा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, चुरू एवं जालौर में खाद्य प्रयोगशालाएँ संचालित है। इसके अतिरित्त राज्य में संभागीय स्तर पर नौ चल खाद्य प्रयोगशालाएँ भी संचालित हैं। - बजट घोषणा की पालना में सीकर, बाराँ, भीलवाड़ा, बाड़मेर, धौलपुर, नागौर एवं गंगानगर ज़िलों में खाद्य प्रयोगशाला स्थापित किये जाने हेतु बजट में प्रावधान किये जाने की स्वीकृति जारी कर दी गई है। चर्चा में क्यों? आठ मार्च, दो हज़ार बाईस को राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड एवं इसकी बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी लिमिटेड को 'राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। - केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विजेता खदानों के प्रतिनिधियों को प्रदान किये गए। - राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक तुलसी राम अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के ये पुरस्कार पिछले चार वर्षों के दौरान खदानों द्वारा उत्कृष्ट सुरक्षा प्रदर्शन को देखते हुए दिये गए हैं। - आरएसएमएमएल को वर्ष दो हज़ार उन्नीस व दो हज़ार बीस एवं बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी लिमिटेड को वर्ष दो हज़ार सत्रह एवं दो हज़ार अट्ठारह के लिये 'राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार'से नवाज़ा गया है। - समारोह में आरएसएमएमएल की ओर से समूह के महाप्रबंधक पीआर प्रजापत, समूह के महाप्रबंधक ओम पटेल तथा ब्लास्टर्स आशीष गिलबर्ट ने वर्ष दो हज़ार उन्नीस एवं दो हज़ार बीस के लिये यह पुरस्कार प्राप्त किये। - उल्लेखनीय है कि केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा खदानों के सुरक्षा मापदंडों के बीच स्वास्थ्य प्रतिस्पर्द्धा को विकसित करने के लिये राष्ट्रीय स्तर का यह पुरस्कार कोयला, धातु और तेल के खदानों को प्रतिवर्ष दो श्रेणियों में प्रदान किये जाते हैं। - इन पुरस्कारों के अंतर्गत कड़े सुरक्षा मापदंडों, जैसे- लगातार तीन वर्षों तक शून्य दुर्घटना दर, खदान में कार्य करने वाले कामगारों की पूर्ण सुरक्षा व नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसे आँकड़ों को दृष्टिगत रखा जाता है।
जैसा कि आप जानते हैं आज बिग बॉस के घर से एक विजेता चुना जाएगा और हम आज आपके लिए लेकर आए हैं बिग बॉस के घर से एक ऐसी एक्सक्लूसिव खबर, जो आपने इससे पहले नहीं सुनी होगी. कॉमनर पुनीश शर्मा बिग बॉस के घर से बाहर हो चुके हैं, क्योंकि उन्हें कम वोट मिले हैं. इस दौरान बिग बॉस के घर में वोटिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके होस्ट सलमान खान हैं. इसके अलावा हम आपको एक और बात बताने जा रहे हैं. घर के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले विकास गुप्ता भी घर से बाहर हो चुके हैं. जी हां, आपने सही सुना. वह अपने साथ बिग बॉस के घर से छह लाख रुपए की राशि जीतकर जा रहे हैं और अब शो में सिर्फ हिना खान और शिल्पा शिंदे रह गए हैं. जैसा कि आप जानते हैं, लोगों के बीच उनकी पॉपुलैरिटी बहुत ज्यादा है और इस वजह से वोटिंग प्रक्रिया के दौरान कौन बाहर निकलेगा यह पता चलेगा. सोर्सेस के माने तो बिग बॉस के फाइनल विनर का नाम 8:00 बजे जारी किया जाएगा। जैसा की खबर है कि शो के दौरान लाइव वोटिंग की प्रक्रिया शुरू है, लेकिन यह बात सच नहीं है. क्योंकि सारी वोटिंग पहले ही हो चुकी है और अब काउंटिंग के जरिए यह पता चलेगा कि बिग बॉस का ताज किसके सिर सजेगा.
जैसा कि आप जानते हैं आज बिग बॉस के घर से एक विजेता चुना जाएगा और हम आज आपके लिए लेकर आए हैं बिग बॉस के घर से एक ऐसी एक्सक्लूसिव खबर, जो आपने इससे पहले नहीं सुनी होगी. कॉमनर पुनीश शर्मा बिग बॉस के घर से बाहर हो चुके हैं, क्योंकि उन्हें कम वोट मिले हैं. इस दौरान बिग बॉस के घर में वोटिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके होस्ट सलमान खान हैं. इसके अलावा हम आपको एक और बात बताने जा रहे हैं. घर के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले विकास गुप्ता भी घर से बाहर हो चुके हैं. जी हां, आपने सही सुना. वह अपने साथ बिग बॉस के घर से छह लाख रुपए की राशि जीतकर जा रहे हैं और अब शो में सिर्फ हिना खान और शिल्पा शिंदे रह गए हैं. जैसा कि आप जानते हैं, लोगों के बीच उनकी पॉपुलैरिटी बहुत ज्यादा है और इस वजह से वोटिंग प्रक्रिया के दौरान कौन बाहर निकलेगा यह पता चलेगा. सोर्सेस के माने तो बिग बॉस के फाइनल विनर का नाम आठ:शून्य बजे जारी किया जाएगा। जैसा की खबर है कि शो के दौरान लाइव वोटिंग की प्रक्रिया शुरू है, लेकिन यह बात सच नहीं है. क्योंकि सारी वोटिंग पहले ही हो चुकी है और अब काउंटिंग के जरिए यह पता चलेगा कि बिग बॉस का ताज किसके सिर सजेगा.
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट, अंडरग्रेजुएट या नीट यूजी काउंसलिंग 2021 शेड्यूल जारी होने के तुरंत बाद शुरू होने की संभावना है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, एमसीसी ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसके माध्यम से उसने स्टूडेंट्स को फर्जी एजेंटों और सीट आवंटन के खिलाफ आगाह किया है। अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट mcc. nic. in पर उपलब्ध है। उम्मीदवारों को यह भी सूचित किया गया है कि एमसीसी ऊपर दी गई वेबसाइट के अलावा किसी अन्य वेबसाइट को होस्ट नहीं करता है। इसलिए, उन्हें किसी भी अन्य फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहना चाहिए जो गलत सूचना प्रसारित कर सकती हैं। हालांकि, यदि किसी उम्मीदवार का सामना किसी ऐसी वेबसाइट या एजेंट से होता है जो धोखाधड़ी/फर्जी हो सकती है, तो उन्हें तुरंत इसकी सूचना एमसीसी को देनी चाहिए। एमसीसी ने कहा है कि सीट आवंटन पूरी तरह से योग्यता के आधार पर और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से उम्मीदवारों द्वारा भरे गए विकल्पों के आधार पर किया जाता है। यह आगे सूचित करता है कि नामांकन के आधार पर सीटों का आवंटन नहीं किया जाता है। एमसीसी ने कहा कि उम्मीदवारों को अपना काउंसलिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। नीट एआईक्यू काउंसलिंग के लिए Mcc. nic. in एकमात्र वेबसाइट है और उम्मीदवारों को फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहना चाहिए। एमसीसी ने अभी तक नीट 2021 काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं की है। आधिकारिक अधिसूचना और सूचना बुलेटिन जारी होने पर आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। एमसीसी की एडवाइजरी चेक करने का डायरेक्ट लिंक ये mcc. nic. in/WebinfoUG/File/ViewFile? FileId=3&LangId=P है।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट, अंडरग्रेजुएट या नीट यूजी काउंसलिंग दो हज़ार इक्कीस शेड्यूल जारी होने के तुरंत बाद शुरू होने की संभावना है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, एमसीसी ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसके माध्यम से उसने स्टूडेंट्स को फर्जी एजेंटों और सीट आवंटन के खिलाफ आगाह किया है। अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट mcc. nic. in पर उपलब्ध है। उम्मीदवारों को यह भी सूचित किया गया है कि एमसीसी ऊपर दी गई वेबसाइट के अलावा किसी अन्य वेबसाइट को होस्ट नहीं करता है। इसलिए, उन्हें किसी भी अन्य फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहना चाहिए जो गलत सूचना प्रसारित कर सकती हैं। हालांकि, यदि किसी उम्मीदवार का सामना किसी ऐसी वेबसाइट या एजेंट से होता है जो धोखाधड़ी/फर्जी हो सकती है, तो उन्हें तुरंत इसकी सूचना एमसीसी को देनी चाहिए। एमसीसी ने कहा है कि सीट आवंटन पूरी तरह से योग्यता के आधार पर और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से उम्मीदवारों द्वारा भरे गए विकल्पों के आधार पर किया जाता है। यह आगे सूचित करता है कि नामांकन के आधार पर सीटों का आवंटन नहीं किया जाता है। एमसीसी ने कहा कि उम्मीदवारों को अपना काउंसलिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। नीट एआईक्यू काउंसलिंग के लिए Mcc. nic. in एकमात्र वेबसाइट है और उम्मीदवारों को फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहना चाहिए। एमसीसी ने अभी तक नीट दो हज़ार इक्कीस काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं की है। आधिकारिक अधिसूचना और सूचना बुलेटिन जारी होने पर आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। एमसीसी की एडवाइजरी चेक करने का डायरेक्ट लिंक ये mcc. nic. in/WebinfoUG/File/ViewFile? FileId=तीन&LangId=P है।
इस आर्टिकल में हम BGMI (Battlegrounds Mobile India) में Galaxy Crate सेक्शन में जाकर आइटम प्राप्त कर सकते हैं। नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। BGMI : यूजर्स को इन-गेम "Galaxy Crate" सेक्शन में गन स्किन, ऑउटफिट और अन्य इनाम मिल रहे हैं, जानें कलेक्शन में जोड़ने की प्रकिया क्या है? BGMI में गेम के भीतर यूजर्स को Galaxy Crate सेक्शन में अद्भुद इनाम मिल रहे हैं। गेमर्स 14 दिन के अंदर कलेक्शन में मस्त इनाम जोड़ सकते है। इसमें क्रेट ओपन करने पर इनाम मिलेंगे। 12 UC में क्रेट ओपन कर सकते हैं। 10 क्रेट को 540 में ओपन कर सकते हैं। गेमर्स यहां पर दी गई डिटेल्स को फॉलो करके इनाम प्राप्त कर सकते हैंः 1: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करना होगा। इसके बाद में ऊपर सेक्शन में जाकर Galaxy Crate को ओपन करना होगा।
इस आर्टिकल में हम BGMI में Galaxy Crate सेक्शन में जाकर आइटम प्राप्त कर सकते हैं। नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। BGMI : यूजर्स को इन-गेम "Galaxy Crate" सेक्शन में गन स्किन, ऑउटफिट और अन्य इनाम मिल रहे हैं, जानें कलेक्शन में जोड़ने की प्रकिया क्या है? BGMI में गेम के भीतर यूजर्स को Galaxy Crate सेक्शन में अद्भुद इनाम मिल रहे हैं। गेमर्स चौदह दिन के अंदर कलेक्शन में मस्त इनाम जोड़ सकते है। इसमें क्रेट ओपन करने पर इनाम मिलेंगे। बारह UC में क्रेट ओपन कर सकते हैं। दस क्रेट को पाँच सौ चालीस में ओपन कर सकते हैं। गेमर्स यहां पर दी गई डिटेल्स को फॉलो करके इनाम प्राप्त कर सकते हैंः एक: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करना होगा। इसके बाद में ऊपर सेक्शन में जाकर Galaxy Crate को ओपन करना होगा।
५२ सराहन देवीन मान्दर (पृष्ट-३११ ५.३. स इलाकी रुपमा (पृट-२८७) । वन, यह उच्चभूमिक हिमालयका कल्पवृक्ष है। हर साल हजारो पशु प्राण यही बचाता है। यहाँके ग्रहस्थ वानका नाम बड़े सम्मान से लेते हैं । मैने शर्माज के सहगामीने पूछापत्तोमें किनारेपर काटे है, पशु उन्हें कैसे खाते हैं ? उत्तर मिला -- वडी खुशीसे, उनके लिये हरा पत्ता हलवा है, सूखेको नहीं खा सकते । हम लोग पेटभर पत्ते नहीं दे पाते, दाज करके देते हैं, जिसमें बर्फ पिचलनेके समय तक पत्ते चल जाये । कोठी पहुँचते-पहुॅचचूली के वृक्ष फलोसे खाली दीखते थे, व वह छतोपर पड़े सूख रहे थे । ग्राखिर हम को गाँव पहुँच गये । उस समय मुझे यह भी ख्याल नही आया था, कि कोटी इतना प्राचीन, इतना ऐतिहासिक महत्त्वका स्थान होगा । पानीकी कूल पारकर आगे बढ़े । वार एक मंदिर दिखाई दिया । शम, जीके सहगानी वनपालने कहा--यह भैरवका मंदिर है, और वह है नीचे देवीका मदिर । मैने हल्के दिलसे कहा - चलो पहिले भैरवसे ही निवट ले । मन्दिर वाहरसे भी उपेक्षित था और भीतर तो और भी । बाहरी वराडेसे दो पोरसा नीचे पत्थर विछे ग्रांगन के बीच एक चार-पांच हाथ गहरा नातिलघु पाषाणवद्ध कुण्ड था । वराडेसे भीतर मदिरमे घुसिये, तो एक परिक्रमा सी थी, जिसके भीतर छोटीसी कोठरी गर्भमंदिर था । वहाँ दशभुज तथा दो हाथ लम्बी भैरवजीकी मूर्ति थी, गर्भगृहके बाहरका प्राय तीन हाथ चौडा छ हाथ लंबा अँधेरा-सा स्थान सरायका काम दे रहां था । सर्वसाधारण यात्री यहां टिकनेकी हिम्मत नहीं कर सकते; यहाँ आकर टिकते हैं भूल-भटककर यहाँ पहुॅचे हमारे नीचेके सन्तजन । दो धूनियाँ कुछ ही समय पूर्व वहाँ जली थी, जिनकी लकड़ी और कोयला भी वहां मौजूद थे। सन्तजन धूनी लगाकर यहां बैठ जाते, और फिर चिलमपर चिलम गाजा या कंकड़ "लेना हो शकर, गाजाना कंकड़, " "कैलाशके राजा, दम लगावे तो आजा" कहते चलने लगता । मै गाजा-कंकड़का विरोध नहीं करता `देवी के चरणों मे बनाने के लिये पतती लकड़ी चाहिये । और साथ ही घरसे ना तेदूर होना चाहिये । वन वह कुल्हाड़ा चला रहा था । सामाजिक दायित्व जाये चूहे भाइने । समाजक प्रति दायित्वहीनताका उपदेश हमको इन प्रशिक्षित किन्नका दे, जब कि हमारे शिक्षित करोड़पते सेठ कपड़े, अनाजने कट्रोन हटतेही समाजके गले पर निष्ठुरतापूर्वक छुरा चलाने लगे । हाँ, त. देवराक्षत वनपड़ सचतुच पूर्णतया सुरक्षित था, किसकी शामत आई थी कि देवी चडिहाके द्वारा रक्षिा वनपर कुल्हाड़ा चलाये । यहाँक ही बात भी न थे । १६१० ई में जमुनोत्तरी और केदारनायके रास्त में वानका मैंने देखा था, तब हिनालाकी सभी यात्रा स्वतोपर इस वृनको देखता था, किन्तु यह नही यहाकाया है, जिसे हमारे यहाँ वान कहा जाता है। शर्मानाने तर भूरे दाना परिचय कराया, पत्तेके निम्न लगा यह नामद है। युरोपका विशाल वृक्ष होता है, इनार दिनालका उतना बड़ा होता है, न इसकी तकी उतना अच्छी होता । ईवाई व प्रचार पत्रक एरोबी था । उनके पुराता देवता इसीके नीचे रहा फरत के विजनवादीमाचा एक गुल ये। यु 7 से की डिश है निउ उनके देखा नहीं करते। वह ओ हुनकानें दीन देशी देवदार को मीनावान नहीं बना। तेरिन के प्रत हिनाचनीनोका प्रगाव नहीं है । माटु) है। जापत किनारकाटे लिये गगाढि विनाकिटे हते हैं। यह जाना हरे तथा नी टहनियर टटव पूर्वक खड़े हो । हिमपातीय जगहों पशुओं का होती है, जब कि चारों ओर भूमि हिनादित हो जज है। बले देवदार, फैल, न्योजा हे पत्ते शनी दात रहते हैं, किन्तु यह पशुओंकेतसे
बावन सराहन देवीन मान्दर । वन, यह उच्चभूमिक हिमालयका कल्पवृक्ष है। हर साल हजारो पशु प्राण यही बचाता है। यहाँके ग्रहस्थ वानका नाम बड़े सम्मान से लेते हैं । मैने शर्माज के सहगामीने पूछापत्तोमें किनारेपर काटे है, पशु उन्हें कैसे खाते हैं ? उत्तर मिला -- वडी खुशीसे, उनके लिये हरा पत्ता हलवा है, सूखेको नहीं खा सकते । हम लोग पेटभर पत्ते नहीं दे पाते, दाज करके देते हैं, जिसमें बर्फ पिचलनेके समय तक पत्ते चल जाये । कोठी पहुँचते-पहुॅचचूली के वृक्ष फलोसे खाली दीखते थे, व वह छतोपर पड़े सूख रहे थे । ग्राखिर हम को गाँव पहुँच गये । उस समय मुझे यह भी ख्याल नही आया था, कि कोटी इतना प्राचीन, इतना ऐतिहासिक महत्त्वका स्थान होगा । पानीकी कूल पारकर आगे बढ़े । वार एक मंदिर दिखाई दिया । शम, जीके सहगानी वनपालने कहा--यह भैरवका मंदिर है, और वह है नीचे देवीका मदिर । मैने हल्के दिलसे कहा - चलो पहिले भैरवसे ही निवट ले । मन्दिर वाहरसे भी उपेक्षित था और भीतर तो और भी । बाहरी वराडेसे दो पोरसा नीचे पत्थर विछे ग्रांगन के बीच एक चार-पांच हाथ गहरा नातिलघु पाषाणवद्ध कुण्ड था । वराडेसे भीतर मदिरमे घुसिये, तो एक परिक्रमा सी थी, जिसके भीतर छोटीसी कोठरी गर्भमंदिर था । वहाँ दशभुज तथा दो हाथ लम्बी भैरवजीकी मूर्ति थी, गर्भगृहके बाहरका प्राय तीन हाथ चौडा छ हाथ लंबा अँधेरा-सा स्थान सरायका काम दे रहां था । सर्वसाधारण यात्री यहां टिकनेकी हिम्मत नहीं कर सकते; यहाँ आकर टिकते हैं भूल-भटककर यहाँ पहुॅचे हमारे नीचेके सन्तजन । दो धूनियाँ कुछ ही समय पूर्व वहाँ जली थी, जिनकी लकड़ी और कोयला भी वहां मौजूद थे। सन्तजन धूनी लगाकर यहां बैठ जाते, और फिर चिलमपर चिलम गाजा या कंकड़ "लेना हो शकर, गाजाना कंकड़, " "कैलाशके राजा, दम लगावे तो आजा" कहते चलने लगता । मै गाजा-कंकड़का विरोध नहीं करता `देवी के चरणों मे बनाने के लिये पतती लकड़ी चाहिये । और साथ ही घरसे ना तेदूर होना चाहिये । वन वह कुल्हाड़ा चला रहा था । सामाजिक दायित्व जाये चूहे भाइने । समाजक प्रति दायित्वहीनताका उपदेश हमको इन प्रशिक्षित किन्नका दे, जब कि हमारे शिक्षित करोड़पते सेठ कपड़े, अनाजने कट्रोन हटतेही समाजके गले पर निष्ठुरतापूर्वक छुरा चलाने लगे । हाँ, त. देवराक्षत वनपड़ सचतुच पूर्णतया सुरक्षित था, किसकी शामत आई थी कि देवी चडिहाके द्वारा रक्षिा वनपर कुल्हाड़ा चलाये । यहाँक ही बात भी न थे । एक हज़ार छः सौ दस ई में जमुनोत्तरी और केदारनायके रास्त में वानका मैंने देखा था, तब हिनालाकी सभी यात्रा स्वतोपर इस वृनको देखता था, किन्तु यह नही यहाकाया है, जिसे हमारे यहाँ वान कहा जाता है। शर्मानाने तर भूरे दाना परिचय कराया, पत्तेके निम्न लगा यह नामद है। युरोपका विशाल वृक्ष होता है, इनार दिनालका उतना बड़ा होता है, न इसकी तकी उतना अच्छी होता । ईवाई व प्रचार पत्रक एरोबी था । उनके पुराता देवता इसीके नीचे रहा फरत के विजनवादीमाचा एक गुल ये। यु सात से की डिश है निउ उनके देखा नहीं करते। वह ओ हुनकानें दीन देशी देवदार को मीनावान नहीं बना। तेरिन के प्रत हिनाचनीनोका प्रगाव नहीं है । माटु) है। जापत किनारकाटे लिये गगाढि विनाकिटे हते हैं। यह जाना हरे तथा नी टहनियर टटव पूर्वक खड़े हो । हिमपातीय जगहों पशुओं का होती है, जब कि चारों ओर भूमि हिनादित हो जज है। बले देवदार, फैल, न्योजा हे पत्ते शनी दात रहते हैं, किन्तु यह पशुओंकेतसे
दानन्द दिनेश वहा । ऐसे महाप्रभु की शपथ लवर अपनी रुचि कहते हैं । जो जाग्रत अवस्था मे तो सदा वनी हो रहती है। स्वप्न भी जाग्रत ये सस्कार के अनुरूप हो होता है। अत स्वप्न मे भी यही रुचि सस्वार रूप से रहती है । घोर निद्रा के समय मे भी वह वीज रूप से रहती है। गुरुजी ने सरकार को मेरी रुचि रखने को कहा। सरवार भी उसके रखने के लिए सब तरह से तैयार हैं। अत में उसे वहे देता हूँ । सहज सनेह स्वामि सेवकाई । स्वारथ छल फल चारि विहाई ॥ अग्या सम न सुसाहिब सेवा । सो प्रसादु जन पावइ देवा ॥२॥ अर्थ स्वामी की सेवा मे स्नेह हो । चारो फल सम्बन्धी स्वार्थ रूपी छल छोडकर हो । अच्छे स्वामी की सबसे बडी सेवा आशा पालन है। वही प्रसाद आपका दास चाहता है । व्याख्या सच्ची सेवा मे स्वार्थ ही छल है और जितने स्वार्थ है वे अर्थ धर्म काम और मोक्ष के अन्तर्गत हैं । अत इनसे रहित स्वामी को सेवा मे सहज स्नेह चाहता हूँ । क्पट प्रीति या कृत्रिम प्रीति नहीं चाहता। सेवा मे भी सबसे वडो स्वामी की आज्ञा है। अत आप कृपा करके आज्ञा दें। उसी का में पालन क्रूं । आपकी आज्ञा से जो कुछ मे करूँगा। वही सरकार को सेवा हो जायेगी । अत अब मे यही प्रसाद चाहता हूँ कि मुझे आज्ञा हो कि भरत । तू यह कर । वस इतना ही मेरा अभीष्ट है । अस कहि प्रेम विवस भए भारी । पुलक सरीर बिलोचन वारी ।। प्रभु पद कमल गहे अकुलाई । समउ सनेहु न सो कहि जाई ।।३।। अर्थ ऐसा कहकर भारी प्रेम के वश हुए। उनके शरीर मे पुलक हो आया । आँखें डबडवा आयो । सरकार के चरण को व्याकुल होकर पकड़ लिया। उस समय का वह स्नेह वहा नही जाता । व्यारया पहिल स्नेह सँभाला था । बढत बिन्ध्य जिमि घटज निवारा । परन्तु इस बात के निवेदन करने मे वह स्नेह नही सँभल सका । फूट चला । अत एकदम प्रेम के विवश हो गये। उन्हे सात्त्विक भाव हो गया । प्रेम मे डूबने लगे । आधार की भाँति चरण को व्याकुल होकर पकड़ लिया । भरतजो को सब दुख स्वीकार है। पर सरकार असामञ्जस्य म न रहे । कृपासिंधु सनमानि सुवानी । बैठाये समीप गहि पानी ॥ भरत विनय सुनि देखि सुभाऊ । सिथिल सनेह सभा रघुराऊ ॥४॥ अर्थ कृपासिन्धु ने सुन्दर वाणी से सम्मान करके हाथ पकडकर बैठाया । भरतजी का विनय सुनकर और स्वभान देखकर सारी सभा और स्वयं रामजी स्नेह से शिथिल हो गये ।
दानन्द दिनेश वहा । ऐसे महाप्रभु की शपथ लवर अपनी रुचि कहते हैं । जो जाग्रत अवस्था मे तो सदा वनी हो रहती है। स्वप्न भी जाग्रत ये सस्कार के अनुरूप हो होता है। अत स्वप्न मे भी यही रुचि सस्वार रूप से रहती है । घोर निद्रा के समय मे भी वह वीज रूप से रहती है। गुरुजी ने सरकार को मेरी रुचि रखने को कहा। सरवार भी उसके रखने के लिए सब तरह से तैयार हैं। अत में उसे वहे देता हूँ । सहज सनेह स्वामि सेवकाई । स्वारथ छल फल चारि विहाई ॥ अग्या सम न सुसाहिब सेवा । सो प्रसादु जन पावइ देवा ॥दो॥ अर्थ स्वामी की सेवा मे स्नेह हो । चारो फल सम्बन्धी स्वार्थ रूपी छल छोडकर हो । अच्छे स्वामी की सबसे बडी सेवा आशा पालन है। वही प्रसाद आपका दास चाहता है । व्याख्या सच्ची सेवा मे स्वार्थ ही छल है और जितने स्वार्थ है वे अर्थ धर्म काम और मोक्ष के अन्तर्गत हैं । अत इनसे रहित स्वामी को सेवा मे सहज स्नेह चाहता हूँ । क्पट प्रीति या कृत्रिम प्रीति नहीं चाहता। सेवा मे भी सबसे वडो स्वामी की आज्ञा है। अत आप कृपा करके आज्ञा दें। उसी का में पालन क्रूं । आपकी आज्ञा से जो कुछ मे करूँगा। वही सरकार को सेवा हो जायेगी । अत अब मे यही प्रसाद चाहता हूँ कि मुझे आज्ञा हो कि भरत । तू यह कर । वस इतना ही मेरा अभीष्ट है । अस कहि प्रेम विवस भए भारी । पुलक सरीर बिलोचन वारी ।। प्रभु पद कमल गहे अकुलाई । समउ सनेहु न सो कहि जाई ।।तीन।। अर्थ ऐसा कहकर भारी प्रेम के वश हुए। उनके शरीर मे पुलक हो आया । आँखें डबडवा आयो । सरकार के चरण को व्याकुल होकर पकड़ लिया। उस समय का वह स्नेह वहा नही जाता । व्यारया पहिल स्नेह सँभाला था । बढत बिन्ध्य जिमि घटज निवारा । परन्तु इस बात के निवेदन करने मे वह स्नेह नही सँभल सका । फूट चला । अत एकदम प्रेम के विवश हो गये। उन्हे सात्त्विक भाव हो गया । प्रेम मे डूबने लगे । आधार की भाँति चरण को व्याकुल होकर पकड़ लिया । भरतजो को सब दुख स्वीकार है। पर सरकार असामञ्जस्य म न रहे । कृपासिंधु सनमानि सुवानी । बैठाये समीप गहि पानी ॥ भरत विनय सुनि देखि सुभाऊ । सिथिल सनेह सभा रघुराऊ ॥चार॥ अर्थ कृपासिन्धु ने सुन्दर वाणी से सम्मान करके हाथ पकडकर बैठाया । भरतजी का विनय सुनकर और स्वभान देखकर सारी सभा और स्वयं रामजी स्नेह से शिथिल हो गये ।
टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने पहली बार पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों का खुलकर जवाब दिया है। पिछले महीने ही पत्नी हसीन जहां ने कोलकाता पुलिस में शमी पर कई आरोपों के तहत गैर-जमानती केस दर्ज करवाया था। इसका जवाब देते हुए मोहम्मद शमी ने कहा कि वह किसी भी परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन क्रिकेट को छोड़कर, वह अभी कुछ और नहीं सोच रहे हैं। शमी ने कहा, 'मैं खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता हूं और बगैर परिणाम की चिंता किए अपने क्रिकेट करियर पर ध्यान देना चाहता हूं। मुझे उम्मीद है ये सब जल्द ही खत्म हो जाएगा। मेरे लिए सबकुछ क्रिकेट ही है। मैं खुद पर लगने वाले आरोपों पर ध्यान नहीं देता हूं। इस समय मेरा एक ही लक्ष्य है वो है किंग्स इलेवन पंजाब को आईपीएल का खिताब जिताना और उसके बाद मेरा पूरा ध्यान भारत के लिए वर्ल्ड कप में अच्छा प्रद्रर्शन करने पर होगा। ' गौरतलब है कि पिछले महीने ही टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के घर एक बार फिर मुश्किलों ने दस्तक दे दी थी। पत्नी की शिकायत पर शमी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। उन पर आईपीसी की धारा 498A के तहत दहेज प्रताड़ना और 354A के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया था। शमी पर उनकी पत्नी हसीन जहां ने पिछले साल दहेज उत्पीड़न, शारीरिक उत्पीड़न, मैच फिक्सिंग जैसे कई संगीन आरोप लगाए थे। हालांकि, बीसीसीआई (BCCI) ने जांच के बाद फिक्सिंग के आरोपों से उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। आज कोलकाता पुलिस ने उनके खिलाफ अलीपुर में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में हसीन जहां ने शमी को बड़े भाई को भी घसीटा था। हसीन जहां ने बताया था कि जब पिछले साल मैं अपने सास-ससुर के घर पर गई तो शमी के बड़े भाई ने मेरे साथ बलात्कार किया। हसीन जहां के वकील जाकिर हुसैन ने कहा था कि पुलिस ने मोहम्मद शमी के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने पहली बार पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों का खुलकर जवाब दिया है। पिछले महीने ही पत्नी हसीन जहां ने कोलकाता पुलिस में शमी पर कई आरोपों के तहत गैर-जमानती केस दर्ज करवाया था। इसका जवाब देते हुए मोहम्मद शमी ने कहा कि वह किसी भी परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन क्रिकेट को छोड़कर, वह अभी कुछ और नहीं सोच रहे हैं। शमी ने कहा, 'मैं खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता हूं और बगैर परिणाम की चिंता किए अपने क्रिकेट करियर पर ध्यान देना चाहता हूं। मुझे उम्मीद है ये सब जल्द ही खत्म हो जाएगा। मेरे लिए सबकुछ क्रिकेट ही है। मैं खुद पर लगने वाले आरोपों पर ध्यान नहीं देता हूं। इस समय मेरा एक ही लक्ष्य है वो है किंग्स इलेवन पंजाब को आईपीएल का खिताब जिताना और उसके बाद मेरा पूरा ध्यान भारत के लिए वर्ल्ड कप में अच्छा प्रद्रर्शन करने पर होगा। ' गौरतलब है कि पिछले महीने ही टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के घर एक बार फिर मुश्किलों ने दस्तक दे दी थी। पत्नी की शिकायत पर शमी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। उन पर आईपीसी की धारा चार सौ अट्ठानवे एम्पीयर के तहत दहेज प्रताड़ना और तीन सौ चौवन एम्पीयर के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया था। शमी पर उनकी पत्नी हसीन जहां ने पिछले साल दहेज उत्पीड़न, शारीरिक उत्पीड़न, मैच फिक्सिंग जैसे कई संगीन आरोप लगाए थे। हालांकि, बीसीसीआई ने जांच के बाद फिक्सिंग के आरोपों से उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। आज कोलकाता पुलिस ने उनके खिलाफ अलीपुर में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में हसीन जहां ने शमी को बड़े भाई को भी घसीटा था। हसीन जहां ने बताया था कि जब पिछले साल मैं अपने सास-ससुर के घर पर गई तो शमी के बड़े भाई ने मेरे साथ बलात्कार किया। हसीन जहां के वकील जाकिर हुसैन ने कहा था कि पुलिस ने मोहम्मद शमी के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
अंबिकापुर। वर्तमान भौतिकवादी युग में परिवार प्रबंधन बेहद जरूरी है। परिवार, समाज और राष्ट्र हित में परिवार प्रबंधन के महत्व को देखते हुए हम सभी ने पंडित विजय शंकर मेहता का कार्यक्रम अंबिकापुर में प्रस्तावित किया है। यह कार्यक्रम एक अप्रैल 2023 शनिवार की शाम 5:30 बजे से अंबिकापुर के कला केंद्र मैदान में होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यात प्राप्त पंडित विजय शंकर मेहता इस कार्यक्रम में हनुमान चालीसा और परिवार प्रबंधन पर अपना दिव्य व्याख्यान देंगे। राज्यसभा के पूर्व सदस्य व छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने उक्त बातें अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं। नेताम ने कहा कि उत्तर छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि सभी को पंडित विजय शंकर मेहता के व्याख्यान का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन शहर के विभिन्ना समाज प्रमुखों को समाहित करते हुए आयोजित किया जा रहा है। सभी समाज, संगठन और राजनीतिक दलों के लोगों को समाहित कर आयोजन समिति बनाई गई है जिसमें 450 लोगों को शामिल किया गया है, जो पिछले 20 दिनों से तैयारियों में लगे हुए हैं। उन्होंने सभी से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहां की शहर में हुए जनसंपर्क एवं प्रचार-प्रसार की दृष्टि से हम यह कह सकते हैं कि अंबिकापुर में अब तक के इतिहास में यह आयोजन गैर राजनीतिक रूप से सबसे बड़ा होगा। व्याख्यान में विषय की महत्ता से स्पष्ट है कि यह आयोजन पूर्ण रूप से पारिवारिक होगा। उन्होंने सभी से सपरिवार पहुंचकर व्याख्यान का श्रवण करने आग्रह किया है। नेताम ने बताया कि विजय शंकर मेहता एक अप्रैल की सुबह दुर्ग ट्रेन से अंबिकापुर पहुंचेंगे। रेलवे स्टेशन पर समाज के सभी वर्ग के लोगों द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया जाएगा। दिनभर अंबिकापुर में विश्राम करने के बाद शाम को वे हनुमान चालीसा व परिवार प्रबंधन विषय पर व्याख्यान देंगे। उसी दिन दुर्ग ट्रेन से रात को उनके वापस लौटने का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोजन को लेकर शहर में उत्साह है। लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। बेहतर बैठक व्यवस्था के साथ कार्यक्रम संपन्ना होगा। शहरवासियों का सहयोग बता रहा है कि विजय शंकर मेहता अच्छा अनुभव लेकर अंबिकापुर शहर से जाएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सभी वर्ग को जोड़ने का भी प्रयास किया गया है।
अंबिकापुर। वर्तमान भौतिकवादी युग में परिवार प्रबंधन बेहद जरूरी है। परिवार, समाज और राष्ट्र हित में परिवार प्रबंधन के महत्व को देखते हुए हम सभी ने पंडित विजय शंकर मेहता का कार्यक्रम अंबिकापुर में प्रस्तावित किया है। यह कार्यक्रम एक अप्रैल दो हज़ार तेईस शनिवार की शाम पाँच:तीस बजे से अंबिकापुर के कला केंद्र मैदान में होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यात प्राप्त पंडित विजय शंकर मेहता इस कार्यक्रम में हनुमान चालीसा और परिवार प्रबंधन पर अपना दिव्य व्याख्यान देंगे। राज्यसभा के पूर्व सदस्य व छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने उक्त बातें अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं। नेताम ने कहा कि उत्तर छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि सभी को पंडित विजय शंकर मेहता के व्याख्यान का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन शहर के विभिन्ना समाज प्रमुखों को समाहित करते हुए आयोजित किया जा रहा है। सभी समाज, संगठन और राजनीतिक दलों के लोगों को समाहित कर आयोजन समिति बनाई गई है जिसमें चार सौ पचास लोगों को शामिल किया गया है, जो पिछले बीस दिनों से तैयारियों में लगे हुए हैं। उन्होंने सभी से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहां की शहर में हुए जनसंपर्क एवं प्रचार-प्रसार की दृष्टि से हम यह कह सकते हैं कि अंबिकापुर में अब तक के इतिहास में यह आयोजन गैर राजनीतिक रूप से सबसे बड़ा होगा। व्याख्यान में विषय की महत्ता से स्पष्ट है कि यह आयोजन पूर्ण रूप से पारिवारिक होगा। उन्होंने सभी से सपरिवार पहुंचकर व्याख्यान का श्रवण करने आग्रह किया है। नेताम ने बताया कि विजय शंकर मेहता एक अप्रैल की सुबह दुर्ग ट्रेन से अंबिकापुर पहुंचेंगे। रेलवे स्टेशन पर समाज के सभी वर्ग के लोगों द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया जाएगा। दिनभर अंबिकापुर में विश्राम करने के बाद शाम को वे हनुमान चालीसा व परिवार प्रबंधन विषय पर व्याख्यान देंगे। उसी दिन दुर्ग ट्रेन से रात को उनके वापस लौटने का कार्यक्रम तय किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोजन को लेकर शहर में उत्साह है। लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। बेहतर बैठक व्यवस्था के साथ कार्यक्रम संपन्ना होगा। शहरवासियों का सहयोग बता रहा है कि विजय शंकर मेहता अच्छा अनुभव लेकर अंबिकापुर शहर से जाएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सभी वर्ग को जोड़ने का भी प्रयास किया गया है।
के सामने दीक्षा रतलाम मे हो ऐमी विनती रखी थी तो श्राचाय ने हमारी विनता शीघ्र ही मजूर करली । प्राचार्य श्री का हृदय कितना विशाल है कि दा व्यक्ति विनती लेकर गये औौर मजूरी प्रदान कर दी रतलाम नगर मे दीक्षा का भग प्रायोजन हुआ। उसमे २५ दीक्षा का भव्य वरघोडा निकाला गया था जो ऐति हासिक रहा । बिना बुलाए बोहरा समाज का वंड दीक्षा जुलूस में शामिल हुआ जो वडे मुल्ला सा के सिवाय किसी के यहा भी नहीं जाता है । यह एक लि का कार्य हुआ । यह सब प्राचाय श्री के अतिशय का ही प्रताप है कि आचार श्री विहार कर जहा - जहा पधारते हैं वहा मेला-सा दृश्य दिखाई देने लगता है। मुझे आचार्य श्री जवाहरलाल जी म सा श्राचाय श्री गणेशीलालजो म सा, प्राचाय श्री नानालाल जी म सा, तीनो श्राचार्यों के दशनो का सौभाग्य प्राप्त हुआ लेकिन जो शासन व्यवस्था दीक्षा शिक्षा, नियम-मर्यादा ग्रादि आपधो के शासन में चल रही है वह अद्वितीय है । भने साधु-साध्वी को भापश्री न दीक्षित किया, यह एक चामत्कारिक बात है । आचार्य श्री नानेश का रत्नपुरी वर्षावास इतिहास मे स्वर क्षिरो में लिखा जायगा । २५ वप पश्चात् यह सम्पन्न हुआ । इस चातुर्मास मे अनेक प्रकार वा तपस्याए हुई जिसमे ६३ मासखमरण ने सारे रेकाड तोड दिये और अनेक प्रकार के शीलव्रत, प्रत्यारयान, भठ्ठाई, सामूहिक प्रायविल व्रत, सामायिक साधना भादि अनेक प्रकार के त्याग-प्र यारयान हुए । इस चातुर्मास मे आचाय श्री की प्रेरणा से ५६ विक्लागोको निशुल्क पैर लगवाकर मानवता की सेवा का महान्याय किया गया । - नौलाईपुरा, रतलाम (म प्र ) • भोजन की आवश्यक्ता से भो अनावश्यक ( प्रतिक्रमण ) की आवश्यकता ऊपर है । • प्रवचन मूल रूप मे आगमो / शास्त्रो के ज्ञान प्रकाश म अपनी आत्म साधना के धरातल पर निसृत श्रेष्ठ एव विशिष्ठ वचन होता है । • कैसा ही पापी, हिंसक या क्रूरतम व्यक्ति क्यो न हो यदि उसके हृदय में वात्सल्य भावना उडेली जाय तो वह अपना श्रेष्ठ प्रभाव अवश्य ही दिखाती है ।
के सामने दीक्षा रतलाम मे हो ऐमी विनती रखी थी तो श्राचाय ने हमारी विनता शीघ्र ही मजूर करली । प्राचार्य श्री का हृदय कितना विशाल है कि दा व्यक्ति विनती लेकर गये औौर मजूरी प्रदान कर दी रतलाम नगर मे दीक्षा का भग प्रायोजन हुआ। उसमे पच्चीस दीक्षा का भव्य वरघोडा निकाला गया था जो ऐति हासिक रहा । बिना बुलाए बोहरा समाज का वंड दीक्षा जुलूस में शामिल हुआ जो वडे मुल्ला सा के सिवाय किसी के यहा भी नहीं जाता है । यह एक लि का कार्य हुआ । यह सब प्राचाय श्री के अतिशय का ही प्रताप है कि आचार श्री विहार कर जहा - जहा पधारते हैं वहा मेला-सा दृश्य दिखाई देने लगता है। मुझे आचार्य श्री जवाहरलाल जी म सा श्राचाय श्री गणेशीलालजो म सा, प्राचाय श्री नानालाल जी म सा, तीनो श्राचार्यों के दशनो का सौभाग्य प्राप्त हुआ लेकिन जो शासन व्यवस्था दीक्षा शिक्षा, नियम-मर्यादा ग्रादि आपधो के शासन में चल रही है वह अद्वितीय है । भने साधु-साध्वी को भापश्री न दीक्षित किया, यह एक चामत्कारिक बात है । आचार्य श्री नानेश का रत्नपुरी वर्षावास इतिहास मे स्वर क्षिरो में लिखा जायगा । पच्चीस वप पश्चात् यह सम्पन्न हुआ । इस चातुर्मास मे अनेक प्रकार वा तपस्याए हुई जिसमे तिरेसठ मासखमरण ने सारे रेकाड तोड दिये और अनेक प्रकार के शीलव्रत, प्रत्यारयान, भठ्ठाई, सामूहिक प्रायविल व्रत, सामायिक साधना भादि अनेक प्रकार के त्याग-प्र यारयान हुए । इस चातुर्मास मे आचाय श्री की प्रेरणा से छप्पन विक्लागोको निशुल्क पैर लगवाकर मानवता की सेवा का महान्याय किया गया । - नौलाईपुरा, रतलाम • भोजन की आवश्यक्ता से भो अनावश्यक की आवश्यकता ऊपर है । • प्रवचन मूल रूप मे आगमो / शास्त्रो के ज्ञान प्रकाश म अपनी आत्म साधना के धरातल पर निसृत श्रेष्ठ एव विशिष्ठ वचन होता है । • कैसा ही पापी, हिंसक या क्रूरतम व्यक्ति क्यो न हो यदि उसके हृदय में वात्सल्य भावना उडेली जाय तो वह अपना श्रेष्ठ प्रभाव अवश्य ही दिखाती है ।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से जनता के हित में काम कराए जा रहे हैं। जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण सुविधाओं का सृजन, आईटीआई भवनों का निर्माण, पेयजल परियोजनाओं की स्थापना, नवीन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही यूनानी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के कार्य कराये जाने की व्यवस्था की गयी है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से अब तक प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 47 इंटर कॉलेजों का निर्माण कार्य कराया जा चुका है। इन सभी कॉलेजों में फर्नीचर इत्यादि की व्यवस्था की कार्यवाही की जा रही है। इसी प्रकार कौशल विकास हेतु 13 नवीन आईटीआई भवनों का निर्माण कराया गया। इनके अतिरिक्त 12 आईटीआई का संचालन भी प्रारंभ कर दिया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 64 पेयजल परियोजनाओं की स्थापना करके पेयजल सुविधाओं का सृजन किया गया। मार्च 2017 से नवंबर 2020 तक की अवधि में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा 1950 करोड़ रुपए की नवीन परियोजनाएं स्वीकृत कराकर उन पर कार्य प्रारंभ किया गया। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों को गति देने के लिए तीन राजकीय पॉलिटेक्निक, 52 राजकीय इंटर कॉलेज, 9 जूनियर हाई स्कूल, 20 अपर प्राइमरी स्कूल, 136 प्राइमरी स्कूल, 18 राजकीय आईटीआई की मंजूरी प्रदान की है। इसके अलावा 01 राजकीय नर्सिंग कॉलेज, 09 राजकीय डिग्री कॉलेज, 2433 स्मार्ट क्लास, 02 इंटर कॉलेजों में परीक्षा हॉल, 09 छात्रावास, 31 सद्भाव मंडप, 160 आंगनवाड़ी केंद्र, 02 वर्किंग विमेन हॉस्टल, 01 मार्केटिंग शेड, 3 साइंस लैब, 187 पाइप पेयजल योजना, 747 पोर्टेबल वॉटर सप्लाई, 01 सीवर योजना, 47 टॉयलेट ब्लॉक, 27 कॉमन सर्विसेज सेंटर तथा 01 यूनानी मेडिकल कॉलेज सहित कुल लगभग 3400 नई इकाइयों की स्थापना के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन नवीन परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए 769 करोड़ रुपए के प्रस्ताव भारत सरकार को उपलब्ध कराए जाने की कार्यवाही अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की तरफ से किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से जनता के हित में काम कराए जा रहे हैं। जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण सुविधाओं का सृजन, आईटीआई भवनों का निर्माण, पेयजल परियोजनाओं की स्थापना, नवीन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही यूनानी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के कार्य कराये जाने की व्यवस्था की गयी है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से अब तक प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में सैंतालीस इंटर कॉलेजों का निर्माण कार्य कराया जा चुका है। इन सभी कॉलेजों में फर्नीचर इत्यादि की व्यवस्था की कार्यवाही की जा रही है। इसी प्रकार कौशल विकास हेतु तेरह नवीन आईटीआई भवनों का निर्माण कराया गया। इनके अतिरिक्त बारह आईटीआई का संचालन भी प्रारंभ कर दिया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने चौंसठ पेयजल परियोजनाओं की स्थापना करके पेयजल सुविधाओं का सृजन किया गया। मार्च दो हज़ार सत्रह से नवंबर दो हज़ार बीस तक की अवधि में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा एक हज़ार नौ सौ पचास करोड़ रुपए की नवीन परियोजनाएं स्वीकृत कराकर उन पर कार्य प्रारंभ किया गया। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों को गति देने के लिए तीन राजकीय पॉलिटेक्निक, बावन राजकीय इंटर कॉलेज, नौ जूनियर हाई स्कूल, बीस अपर प्राइमरी स्कूल, एक सौ छत्तीस प्राइमरी स्कूल, अट्ठारह राजकीय आईटीआई की मंजूरी प्रदान की है। इसके अलावा एक राजकीय नर्सिंग कॉलेज, नौ राजकीय डिग्री कॉलेज, दो हज़ार चार सौ तैंतीस स्मार्ट क्लास, दो इंटर कॉलेजों में परीक्षा हॉल, नौ छात्रावास, इकतीस सद्भाव मंडप, एक सौ साठ आंगनवाड़ी केंद्र, दो वर्किंग विमेन हॉस्टल, एक मार्केटिंग शेड, तीन साइंस लैब, एक सौ सत्तासी पाइप पेयजल योजना, सात सौ सैंतालीस पोर्टेबल वॉटर सप्लाई, एक सीवर योजना, सैंतालीस टॉयलेट ब्लॉक, सत्ताईस कॉमन सर्विसेज सेंटर तथा एक यूनानी मेडिकल कॉलेज सहित कुल लगभग तीन हज़ार चार सौ नई इकाइयों की स्थापना के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन नवीन परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए सात सौ उनहत्तर करोड़ रुपए के प्रस्ताव भारत सरकार को उपलब्ध कराए जाने की कार्यवाही अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की तरफ से किया जा रहा है।
यहां आर्मी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्चपैड्स को निशाते हुए हमला कर दिया। इस दौरान सीमा के उस पार बने आतंकी ठिकाने तबाह हो गए है। इस शेलिंग में कुपवाड़ा जिले के छह नागरिक घाायल हुए थे। सेना ने जवाबी कार्रवाई में पीओके के लॉन्चिंग पैड्स को निशाना बनाया। इस हमले के बाद पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, लेपाघाटी में एक महिला की मौत हो गयी है और चार लोग घायल हो गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आज सुबह तड़के भी पाकिस्तान ने मोर्टार और मीडियम रेंज आर्टिलरी से अटैक किया। वहीं बीते दिन नौगाम और तंगधार सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था। इसमें पाकिस्तान और आतंकी संगठन को काफी नुकसान हुआ है। पाकिस्तानी मीडिया जो वीडियो दिखा रही है, उसके मुताबिक कई इमारतें नष्ट हो गयीं और बड़े स्तर पर नुकसान हुआ। भारतीय सेना ने आतंकियों और उनके पनाहगार पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। पाक अधिकृत कश्मीर में बसे आतंकी ठिकानों को आर्मी ने शुक्रवार को गोलाबारी में तबाह कर दिया है।
यहां आर्मी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्चपैड्स को निशाते हुए हमला कर दिया। इस दौरान सीमा के उस पार बने आतंकी ठिकाने तबाह हो गए है। इस शेलिंग में कुपवाड़ा जिले के छह नागरिक घाायल हुए थे। सेना ने जवाबी कार्रवाई में पीओके के लॉन्चिंग पैड्स को निशाना बनाया। इस हमले के बाद पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, लेपाघाटी में एक महिला की मौत हो गयी है और चार लोग घायल हो गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आज सुबह तड़के भी पाकिस्तान ने मोर्टार और मीडियम रेंज आर्टिलरी से अटैक किया। वहीं बीते दिन नौगाम और तंगधार सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था। इसमें पाकिस्तान और आतंकी संगठन को काफी नुकसान हुआ है। पाकिस्तानी मीडिया जो वीडियो दिखा रही है, उसके मुताबिक कई इमारतें नष्ट हो गयीं और बड़े स्तर पर नुकसान हुआ। भारतीय सेना ने आतंकियों और उनके पनाहगार पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। पाक अधिकृत कश्मीर में बसे आतंकी ठिकानों को आर्मी ने शुक्रवार को गोलाबारी में तबाह कर दिया है।
चक्रधरपुर। ऑल इंडिया मूलनिवासी बहुजन समाज सेंट्रल संघ (एम्बस) ने बुधवार को चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत गुलकेड़ा पंचायत में रिटायर्ड आईएएस महेश्वर पात्रा की पत्नी भाजपा नेत्री सीमा पात्रा द्वारा एक आदिवासी महिला के खिलाफ हुए जुल्म/ प्रताड़ना के खिलाफ सीमा पात्रा का पुतला दहन करके विरोध प्रदर्शन किया। ज्ञात हो कि भाजपा नेत्री सीमा पात्रा ने आदिवासी महिला सुनीता खाखा को 8 साल तक अपने घर में कैद कर सूरज भी नहीं देखने दिया। सुनीता से जीभ से फर्श साफ करवाया। पेशाब चटाया। रॉड से दांत तोड़ डाले। गर्म तबे से चेहरा जला डाला। इससे आदिवासी/ मूलवासी समाज काफी आक्रोश में है। उक्त अवसर पर वासिल हेंब्रम, बसंत महतो, सुखलाल सामड, लक्ष्मण खंडाईत, शिव कुमार बोदरा, राजू जमुदा, मानसिंह जमुदा, शंकर जमुदा, राम सिंह जमुदा आदि उपस्थित थे।
चक्रधरपुर। ऑल इंडिया मूलनिवासी बहुजन समाज सेंट्रल संघ ने बुधवार को चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत गुलकेड़ा पंचायत में रिटायर्ड आईएएस महेश्वर पात्रा की पत्नी भाजपा नेत्री सीमा पात्रा द्वारा एक आदिवासी महिला के खिलाफ हुए जुल्म/ प्रताड़ना के खिलाफ सीमा पात्रा का पुतला दहन करके विरोध प्रदर्शन किया। ज्ञात हो कि भाजपा नेत्री सीमा पात्रा ने आदिवासी महिला सुनीता खाखा को आठ साल तक अपने घर में कैद कर सूरज भी नहीं देखने दिया। सुनीता से जीभ से फर्श साफ करवाया। पेशाब चटाया। रॉड से दांत तोड़ डाले। गर्म तबे से चेहरा जला डाला। इससे आदिवासी/ मूलवासी समाज काफी आक्रोश में है। उक्त अवसर पर वासिल हेंब्रम, बसंत महतो, सुखलाल सामड, लक्ष्मण खंडाईत, शिव कुमार बोदरा, राजू जमुदा, मानसिंह जमुदा, शंकर जमुदा, राम सिंह जमुदा आदि उपस्थित थे।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रशासन ने समस्तीपुर जिले के मथुरापुर घाट स्थित जेपी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव एवं केंद्राधीक्षक के विरुद्ध प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में मंगलवार को विश्वविद्यालय थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगातार प्रश्नपत्र वायरल होने के मद्देनजर चौकसी बरतने के लिए कुछ लोगों को खासतौर पर सतर्क कर दिया था। गुप्त सूचना मिली कि जेपी बीएड कॉलेज परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र आउट हो रहा है। मंगलवार को जब विश्वविद्यालय का प्रतिनिधि परीक्षा केंद्र पर पहुंचा और प्रश्नपत्र का पैकेट मांगा तो कहा गया कि पैकेट आठ बजे सुबह ही खोल दिये गये थे। पैकेटों की जांच से पता चला कि एक पैकेट में 20 के बजाए 18 प्रश्नपत्र ही उपलब्ध थे और दो गायब थे। परीक्षा सुबह नौ बजे से शुरू होनी थी, इसलिए इतना पहले पैकेट खोलना नियम विरुद्ध था। इसी को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है। कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कुलपति के आदेश से सचिव से शोकॉज किया गया है। उनसे पूछा गया है कि उनके कॉलेज का संबंधन क्यों नहीं रद्द कर दिया जाए और इसी सत्र से नामांकन पर रोक क्यों नहीं लगा दी जाए। कुलसचिव ने बताया कि कुछ और लोग इस कृत्य में संलग्न हैं, जिनकी पहचान की जा रही है। शीघ्र ही उनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रशासन ने समस्तीपुर जिले के मथुरापुर घाट स्थित जेपी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सचिव एवं केंद्राधीक्षक के विरुद्ध प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में मंगलवार को विश्वविद्यालय थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगातार प्रश्नपत्र वायरल होने के मद्देनजर चौकसी बरतने के लिए कुछ लोगों को खासतौर पर सतर्क कर दिया था। गुप्त सूचना मिली कि जेपी बीएड कॉलेज परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र आउट हो रहा है। मंगलवार को जब विश्वविद्यालय का प्रतिनिधि परीक्षा केंद्र पर पहुंचा और प्रश्नपत्र का पैकेट मांगा तो कहा गया कि पैकेट आठ बजे सुबह ही खोल दिये गये थे। पैकेटों की जांच से पता चला कि एक पैकेट में बीस के बजाए अट्ठारह प्रश्नपत्र ही उपलब्ध थे और दो गायब थे। परीक्षा सुबह नौ बजे से शुरू होनी थी, इसलिए इतना पहले पैकेट खोलना नियम विरुद्ध था। इसी को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है। कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कुलपति के आदेश से सचिव से शोकॉज किया गया है। उनसे पूछा गया है कि उनके कॉलेज का संबंधन क्यों नहीं रद्द कर दिया जाए और इसी सत्र से नामांकन पर रोक क्यों नहीं लगा दी जाए। कुलसचिव ने बताया कि कुछ और लोग इस कृत्य में संलग्न हैं, जिनकी पहचान की जा रही है। शीघ्र ही उनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यूपी चुनाव में हार के बाद से ही ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहीं बसपा प्रमुख ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने यहां अंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वो लोकतंत्र बचाने के लिए किसी भी भाजपा विरोधी पार्टी से हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 403 सीटों में से 250 सीटों पर ईवीएम से छेड़छाड़ की है। यह वो सीटें थीं जहां भाजपा काफी कमजोर थी। हम ईवीएम को लेकर विरोध जारी रखेंगे और हमारी इस लड़ाई में कोई और भाजपा विरोधी पार्टी हमारे साथ आना चाहती है तो हम उससे हाथ मिलाने को तैयार हैं। इस दौरान उन्होंने कहा की जब बसपा की सरकार थी तब यूपी को पाकिस्तान नहीं बनने दिया गया और आगे भी जब बसपा की सरकार होगी तब भी नहीं बनने देंगे। मायावती ने कार्यक्रम में अपने भाई को पार्टी का उपाध्यक्ष घोषित करते हुए कहा कि मैंने वादा लिया है कि वो कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी को आगे ले जाने के लिए काम करेंगे।
यूपी चुनाव में हार के बाद से ही ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहीं बसपा प्रमुख ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने यहां अंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वो लोकतंत्र बचाने के लिए किसी भी भाजपा विरोधी पार्टी से हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चार सौ तीन सीटों में से दो सौ पचास सीटों पर ईवीएम से छेड़छाड़ की है। यह वो सीटें थीं जहां भाजपा काफी कमजोर थी। हम ईवीएम को लेकर विरोध जारी रखेंगे और हमारी इस लड़ाई में कोई और भाजपा विरोधी पार्टी हमारे साथ आना चाहती है तो हम उससे हाथ मिलाने को तैयार हैं। इस दौरान उन्होंने कहा की जब बसपा की सरकार थी तब यूपी को पाकिस्तान नहीं बनने दिया गया और आगे भी जब बसपा की सरकार होगी तब भी नहीं बनने देंगे। मायावती ने कार्यक्रम में अपने भाई को पार्टी का उपाध्यक्ष घोषित करते हुए कहा कि मैंने वादा लिया है कि वो कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे और पार्टी को आगे ले जाने के लिए काम करेंगे।
अठारहवीं शताब्दी कई बकाया द्वारा गौरवशाली हैरूसी संगीत संस्कृति के प्रतिनिधियों। बोर्टेनियास्की दिमित्री स्टेपानोविच भी उनके हैं। वह एक दुर्लभ आकर्षण के साथ एक प्रतिभाशाली संगीतकार है। दिमित्री Bortnyansky एक साथ एक कंडक्टर और एक गायक था। वह एक नए प्रकार के कोरल कंसर्टो के निर्माता बन गए। दिमित्री बोर्तनिंस्की, जिनकी जीवनी में वर्णित हैयह आलेख अक्टूबर, 1751 के बीस आठवें स्थान पर पैदा हुआ था। उनके पिता, स्टीफन शकुराट, कोसाक थे, जो हेटमैन रज़ुमोव्स्की के अधीन थे। विवाह से पहले और अपने बेटे के जन्म से पहले, सैनिक ग्खुखोव शहर आए, जहां वह जीने के लिए रुक गए। उन्होंने अपना नाम बदलकर बोर्तिनिंस्की कर दिया, क्योंकि उनके मूल गांव को बुलाया गया था। कुछ समय बाद उन्होंने एक विधवा-कोसाक, टॉल्स्टॉय मरीना दिमित्रीवना से शादी की। और जल्द ही जोड़े के बेटे दिमित्री का जन्म हुआ। जब लड़का छह साल का था, तो माता-पिता ने देखाउसके पास एक स्पष्ट प्रतिभा है। दिमित्री की एक सुंदर साफ आवाज, उत्कृष्ट सुनवाई थी। लड़का सही ढंग से गाया, कभी फिक्र नहीं किया। मक्खी पर पकड़ा गया कोई भी संगीत, उसके यादगार दिमित्री को पुनरावृत्ति की आवश्यकता नहीं थी। माता-पिता, अपने बेटे की प्रतिभा को देखते हुए, इसे ग्लुखोव के सिंगिंग स्कूल में दर्ज किया। दिमित्री को आसानी से सीखना था, और वह खुदसंगीत में बहुत रुचि दिखाई। लड़के ने बहुत खुशी के साथ गाया, और यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि बच्चों के लिए यह निर्धारित किया गया था कि स्थायी सेवा प्रशिक्षण के सिर पर है। थोड़े समय के बाद, शिक्षकों ने एकल कलाकार के रूप में दिमित्री मंचन करना शुरू किया। जब युवा प्रतिभा स्कूल गई, तो लड़के ने तुरंत सीखना शुरू किया कि संगीत वाद्ययंत्र कैसे खेलें। Bortnyansky एक अद्भुत ट्रेबल द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। कोरस के लिए इसकी शुद्धता बहुत महत्वपूर्ण थी। और शिक्षकों द्वारा दिमित्री की अत्यधिक सराहना की गई। 1758 में गायकों को चैपल में सेंट पीटर्सबर्ग भेजा गया था। मरीना दिमित्रीवना ने अपने बेटे को पार किया, मुझे उपहार और एक छोटा आइकन के साथ एक बंडल दिया। बोर्टेनियास्की दिमित्री ने अपने मूल शहर को छोड़ दिया और उनके माता-पिता ने कभी नहीं देखा। उन दिनों में, फैशन इतालवी दिशा में थासंगीत। अदालत में कई विदेशी उस्ताद उचित तकनीक और कार्यों के निष्पादन किया गया। 1763 में, जब मैं एलिजाबेथ के लिए शोक समाप्त होने पर, नई महारानी वेनिस कंडक्टर Galuppi Buronelli की सेवा ले लिया। इस निर्णय से युवा दिमित्री बोर्टनियनस्की के भाग्य पर काफी प्रभाव पड़ा है। उस समय वह एरिया गाए जाने में खुश थाविभिन्न ओपेरा। गलुपपी ने अपने शिष्यों को खोजने का फैसला किया, उनमें से एक दिमित्री बन गया। प्रसिद्ध कपेलमेस्टर ने किशोरी की अन्य प्रतिभाओं को देखा। गलुपपी ने इस बात पर ध्यान दिया कि कैसे दिमित्री सचमुच फ्लाई पर सबसे कठिन मार्ग, आदर्श और पूरे एरिया को संगीतकार खेल रहा था। यह भी महत्वपूर्ण था कि किशोरी की नई चीजें सीखने की उत्सुक इच्छा। नतीजतन, गैलुपपी, जब वह इटली वापस जा रहा था, तो उसने दिमित्री को उसके साथ ले लिया। प्रशिक्षण के कई महीने बाद। दिमित्री ने अंग और harpsichord पर खेलने के लिए सीखा, काउंटरपॉइंट में लगी हुई थी। युवा व्यक्ति वेनिस सिनेमाघरों का नियमित आगंतुक बन गया और एक भी महत्वपूर्ण प्रीमियर को याद नहीं किया। युवा संगीतकार का काम अधिक स्वतंत्र, अधिक पेशेवर बन गया। हालांकि, दिमित्री के तैयार कार्यों के साथ बात करना अभी भी बहुत जल्दी था। थोड़े समय के लिए वह सुखद और बादलहीन अध्ययनों में खुश था। उस समय एक युद्ध था, और इसमें भाग लेने से दिमित्री की नियति बच गई नहीं। गिनती ऑर्लोव अप्रत्याशित रूप से वेनिस पहुंचे और कंसुल मारुतिउस से मुलाकात की। प्रभावशाली लोगों के बीच एक लंबी बातचीत हुई, और सुबह की सुबह दिमित्री उन्हें पहले ही लाया गया था। गिनती ने उन्हें एक दुभाषिया की स्थिति की पेशकश कीरूसी सेना एक दिन बाद, दिमित्री स्टेपानोविच पहले से ही विद्रोही विद्रोहियों के लिए ओरलोव के पुनरुत्थान में यात्रा कर रहा था। वार्ता सफल रही, और थोड़ी देर के बाद युवा संगीतकार फिर से अपने पसंदीदा संगीत में लौट आया। 1776 में सैन बेनेडेटो के पोस्टर ने रूसी रूसी संगीतकार बोर्टेनियास्की द्वारा रचित ओपेरा क्रेओन की यात्रा करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आमंत्रित किया। काम असफल नहीं हुआ, लेकिन यह भी ज्यादा सफलता हासिल नहीं किया। युवा संगीतकार के लिए अगला काम "अल्काइड्स" निकला है और अधिक परिपक्व है। दिमित्री स्टेपानोविच पात्रों के चरित्र के प्रति बहुत चौकस था, संगीत अधिक आराम से, अधिक विविध हो गया। संगीतकार ने नायक, उसकी सतर्कता, संदेह और अनिश्चितता के मनोदशा को व्यक्त करने की कोशिश की। वेनिस में अल्काइड्स का प्रीमियर आयोजित किया गया था। काम एक शानदार सफलता थी। अगले ओपेरा "क्विंटस फैबियस" की शुरुआत में आयोजित किया गया थामोडेना। दिमित्री स्टेपानोविच को स्थानीय प्रेस से अच्छी समीक्षा मिली। आलोचकों ने सरलता, निष्पादन की कृपा और साजिश रेखा के कुशल निर्माण को देखा है। नतीजतन, प्रदर्शन को अदालत की मंजूरी और दर्शकों की तूफानी प्रशंसा भी मिली। 1779 में दिमित्री स्टेपानोविच रूस लौट आया। पहले Bortnyansky एक अदालत बन गयाKapellmeister। 1784 में इतालवी मास्टरो डी। पैसिलो को इटली के लिए तत्काल घर छोड़ना पड़ा। मारिया फ्योदोरोवना की छोटी अदालत के साथ इसे बदलने के लिए बोर्तिनिंस्की को पेश किया गया था। उसी समय, राजकुमारी के प्रशिक्षण में उनके कर्तव्यों को संगीत अंतराल भरना था। दिमित्री स्टेपानोविच ने नाटकों के लिए एक एल्बम तैयार कियाक्लावविर्ड, पियानो और harpsichord पर प्रदर्शन। राजकुमारी को वर्तमान पसंद आया, और अप्रैल 1785 में बोर्टेनिंस्की कम रैंक के बावजूद अपने पहले के आधिकारिक मालिक बन गए। दिमित्री स्टेपानोविच को कॉलेजिएट निर्धारक का पद मिला। सेना सेवा की तुलना में, वह प्रमुख के पद के साथ समान था। 1786 में काम "Seigneur का उत्सव" (Bortnyansky) दिखाई दिया। राजकुमारी मारिया Feodorovna ओपेरा को और अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए कहा। नतीजतन, दिमित्री स्टेपानोविच ने एक नए libretto के लिए संगीत लिखा। ओपेरा को "फाल्कन" कहा जाता था, कई आकृतियां "अल्काइड्स" से ली गई थीं। नए काम का प्रीमियर अक्टूबर 1786 में था। बोर्टेनियास्की ओपेरा सोकोल एक बड़ी सफलता थी। यह Maestro की virtuosity और निपुणता को दर्शाता है। वह व्यक्तिगत एरिया और बैले आवेषण का संयोजन ढूंढने में सक्षम था, जो सामंजस्यपूर्ण रूप से उन्हें जोड़ता था, संगीत गर्मी, मुक्ति और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ मिलकर संचारित करता था। काम "फाल्कन" पाठ्यपुस्तकों में से एक बन गया। पहले ओपेरा गैचिना थिएटर में किया गया था, फिर इसे पावलोवस्क में ले जाया गया। फिर उत्पाद ने लगभग सभी छोटे दृश्यों को मारा। एक साल बाद, बोर्टेनियास्की की नई कृति"एक बेटा प्रतिद्वंद्वी है, या एक नया स्ट्रैटोनिक है।" काम सबसे अच्छा बन गया। फिर दिमित्री स्टेपानोविच ने कोरल संगीत कार्यक्रम लिखना शुरू किया। उस समय यह एक परिचित शैली थी। काम मुख्य रूप से विशेष चर्च सेवाओं में किया गया था। हालांकि, महत्वपूर्ण समारोहों के दौरान, समारोह समारोह अक्सर कोर्ट समारोहों में आयोजित किया जाता था। बोर्टेनियास्की दिमित्री कोरल कार्यों को इतना बदलने में सक्षम था कि वे संगीत में एक नई प्रवृत्ति बन गए। उन्होंने कई दशकों तक लिखा50 से अधिक संगीत कार्यक्रम। उनमें से प्रत्येक में लोक गीतों के तत्व हैं। प्रशंसा के साथ यूरोपीय संगीत के connoisseurs Bortnyansky के कार्यों के बारे में बात की। गाना बजानेवालों के पास अद्भुत सुन्दर रंग थे, पूर्ण उग्र सामंजस्य थे और आवाजों की मुफ्त व्यवस्था से प्रतिष्ठित थे। 17 9 6 से दिमित्री स्टेपानोविच ने अदालत चैपल चलाया। गायकों की सेवा आसान नहीं थी, और बोर्टेनिंस्की को यह पहले से पता था। वह चैपल में धीरे-धीरे बहुत कुछ बदल सकता था। Bortnyansky गायकों का एक अलग गढ़ बनाने का फैसला किया जो वाद्य संगतता के बिना काम करता है और प्रदर्शन में भाग लेने से नए सामूहिक को बचाने के लिए। नतीजतन, कोरल कला का सबसे अच्छा स्कूल बनाया गया था। गायक नाटकीय प्रस्तुतियों में अधिक हिस्सा नहीं लेते थे। 1800 में, चैपल एक स्वतंत्र संगीत विभाग बन गया। 1801 में दिमित्री स्टेपानोविच निदेशक नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में चैपल बढ़ गया और बहुत लोकप्रिय हो गया। एक शिक्षक के रूप में बोर्टेनियास्की दिमित्री बहुत मांग में थी और एक निर्विवाद संगीत प्राधिकरण बन गया। उनके स्कूल को प्रथम श्रेणी माना जाने लगा, उन्होंने कई पेशेवर कोरिस्टर्स और बैंडमास्टर्स को प्रशिक्षित किया। इसके साथ ही, दिमित्री स्टेपानोविच व्यस्त था औरअपनी कला, कभी भी अधिक आकर्षक रोमांस, वाद्य संगीत, कक्ष कार्य और सोनाटास बनाना। नई शताब्दी Bortnyansky उसकी प्रसिद्धि की ऊंचाई पर मुलाकात की। काम "सोन-प्रतिद्वंद्वी, या न्यू स्ट्रैटोनिका" कैपेला के उदय के साथ जुड़ा हुआ था। फ्रांसीसी ग्रंथों पर बनाए गए सभी से संगीतकार का यह सबसे महत्वपूर्ण संगीत टुकड़ा है। दिमित्री स्टेपानोविच बोर्टेनियास्की (1751-1825 वर्ष।) एक बहुमुखी व्यक्ति था। समकालीन लोगों ने उन्हें प्यारा, सख्त सेवा और लोगों के प्रति अनुग्रहित कहा। अपने पूरे जीवन में, दिमित्री स्टेपानोविच कला के लिए समर्पित थी, न केवल संगीत के लिए। उन्होंने साहित्यिक शाम को भाग लिया, थाललित कला और पेंटिंग की एक महान पारखी। चित्रों का संग्रह दिमित्री Stepanovich इटली में रुचि हो गया। वहाँ भी यूरोपीय कला के इतिहास का अध्ययन करने का समय है। यह इटली में था, Bortniansky चित्रों, जो बाद में कला के पारखियों प्रशंसा की थी का एक संग्रह इकट्ठा करने के लिए शुरू कर दिया। सभी एकत्रित कैनवास दिमित्री स्टेपानोविच लायाघर। वह अपने मेहमानों को संग्रह दिखाने के लिए पसंद आया। बोर्टेनियास्की को गैचिना और पावलोवस्क में महलों के डिजाइन में भाग लेना पड़ा। वह वास्तुकला और चित्रकला के क्षेत्र में स्थायी परामर्शदाता थे। इसलिए, इमारतों का डिजाइन - कुछ हद तक, और इसकी योग्यता। बोर्ननिस्की दिमित्री ने पावलोव्स्की पैलेस के लिए चित्रों को चुना और खरीदा। 1804 में संगीतकार मानद शिक्षाविदों के पदों में स्वीकार किया गया था। 90 के दशक से। उन्होंने आध्यात्मिक संगीत, विशेष रूप से कोरल संगीत कार्यक्रमों के निर्माण में खुद को विसर्जित कर दिया। उनमें वह अक्सर सख्त चर्च सीमाओं से परे चला गया। रचनाओं में बोर्टेनियास्की ने ओपेरा, मार्चिंग और लय नृत्य करने का प्रभाव महसूस किया। कभी-कभी कामों के धीमे हिस्से शहर रोमांस जैसा दिखते हैं। दिमित्री Stepanovich कभी मेसोनिक में थालॉज। हालांकि, उनके कुछ भजन गुप्त समाजों के लिए प्राथमिकता माना जाता था। रूसी संस्कृति के इतिहास में बोर्टेनियास्की के "रूसी सैनिकों के शिविर में गायक" भी शामिल था। इस कृति में, दिमित्री स्टेपानोविच ने खुद को भी पार कर लिया, क्योंकि यह एक कोरल गायन गीत बन गया। यह एकल संस्करण में हो सकता है। दिमित्री Bortnyansky की रचनात्मकता असंभव हैकेवल एक संग्रह में फिट। संगीतकार ने विभिन्न प्रकार के संगीत लिखे। अदालत चैपल के लिए - आध्यात्मिक, छोटी अदालत के लिए - धर्मनिरपेक्ष रचनाएं। कई कोरल संगीत कार्यक्रम शास्त्रीय शैली के स्पष्ट संकेतों के साथ लिखे गए हैं। उत्पाद अधिकतर 3 या 4 निजी चक्र होते हैं, जो विषयगत रूप से संबंधित नहीं होते हैं। ओपेरा के सबसे प्रसिद्ध हैं वे हैंजो Bortnyansky इटली में बनाया गया। इन पहले कार्यों को अभी भी "सुनहरा संग्रह" माना जाता है। उपकरण संग्रह दिमित्री स्टेपानोविच द्वारा पहले ही 80 के दशक में लिखे गए थे। दुर्भाग्य से, बहुत कम बच गए हैं।इस दिशा के काम करता है। इनमें से अधिकांश संगीत कृतियों एक टुकड़ा हैं। वाद्ययंत्र कार्यों में, कई connoisseurs ध्यान दें कि राष्ट्रीय यूक्रेनी सुविधाओं ध्यान देने योग्य हैं। दिमित्री स्टेपानोविच बोर्तिनिंस्की की पत्नी थींमामूली, शांत अन्ना Ivanovna। उनके एक बेटे थे, जिन्हें उन्होंने अलेक्जेंडर नाम दिया था। जब वह बड़ा हुआ - गार्ड में एक लेफ्टिनेंट के रूप में सेवा दी। समय के साथ, सिकंदर ने शादी कर ली, और उसके दो दादा - एक बेटी, मरिया और एक बेटे थे, जिसका नाम उनके दादा के नाम पर रखा गया था। पोतेन बोर्तनिंस्की ने अपने कदमों का पालन कियाप्रसिद्ध रिश्तेदार लड़के की एक अद्भुत आवाज थी, और दिमित्री स्टेपानोविच ने कैपेला में गाना बजानेवालों के लिए अपने पोते को नामांकित किया। बोर्तनिंस्की का परिवार ओक नक्काशीदार दरवाजे से सजाए गए एक बड़े दो मंजिला घर में रहता था। दिमित्री स्टेपानोविच का अपना कार्यालय था जिसमें वह विचारों में शाम को समय बिताना पसंद करता था। निकटतम लोगों में से एक को रैंक किया गया था औरअलेक्जेंड्रा मिखाइलोवना, 27 वर्षीय लड़की। कोई भी, वह खुद भी, अपने माता-पिता के बारे में कुछ नहीं जानती थी। दिमित्री स्टेपानोविच और उनकी पत्नी ने युवा अलेक्जेंड्रा को आश्रय दिया, और तब से लड़की को परिवार का सदस्य माना गया। Bortnyansky उसे अपनी बेटी के रूप में लाया। अदालत गाना बजानेवालों ने अपने जीवन के आखिरी सालों तक दिमित्री स्टेपानोविच के "बच्चे" बने रहे। इन वर्षों के दौरान उन्होंने अपने गायन को अधिकतम तक प्रकट करने की कोशिश करते हुए, और अधिक सावधानी के साथ वार्डों के साथ पढ़ाया और काम किया। बोर्तिनिंस्की के सभी दिन क्षमता से भरे हुए थे। वह मोइका तटबंध के साथ पैर पर घर चला गया, सीनेट स्क्वायर पार कर गया और मिलियनया स्ट्रीट के कोने पर दाएं मुड़ गए। जब वह घर पहुंचा, तो वह अपने कार्यालय गया, और कभी-कभी विचार में लंबे समय तक बैठ गया। हाल ही के वर्षों में बुढ़ापे ने अपने टोल, दिमित्री स्टेपानोविच को बहुत थका दिया। उन्होंने अपने पूर्ण संस्करण पर बहुत कुछ कियाकाम करता है। उन्होंने किताबों में अपना बहुत पैसा लगाया, लेकिन उन्होंने कभी कई नहीं देखा। दिमित्री स्टेपानोविच ने अपने युवाओं में लिखे गए कोरल संगीत कार्यक्रमों का केवल एक हिस्सा प्रकाशित करने में कामयाब रहे। दस खंडों से उनके कार्यों का पूरा संग्रह केवल 1882 में दिखाई दिया, जिसे त्चैकोव्स्की द्वारा संपादित किया गया। संगीतकार दिमित्री बर्त्यान्स्की का निधन1825 में पीटर्सबर्ग, 27 सितंबर (नई गणना के अनुसार 10 अक्टूबर)। इस दिन उन्होंने कैपेला के गायक मंडल को बुलाया। संगीतकार ने अपने एक संगीत कार्यक्रम को करने के लिए कहा, और संगीत की अपनी प्रिय ध्वनियों के लिए चुपचाप मर गया। दिमित्री Stepanovich को Vasilyevsky पर दफनाया गया थाद्वीप, स्मोलेंस्क कब्रिस्तान। प्रसिद्ध रूसी संगीतकार की कब्र पर एक ओबिलिस्क और एक स्मारक बनाया गया था। फिर बर्बरता का एक अधिनियम का पालन किया गया, और 1953 में दफन को अलेक्जेंडर नेवस्की मठ में स्थानांतरित कर दिया गया, जो सांस्कृतिक हस्तियों के पैनथियन है। नामित महान रूसी संगीतकार की याद मेंBortnyansky को सुमी में स्कूल ऑफ आर्ट्स का नाम दिया गया, चेर्निहाइव चैंबर चोइर और लविव में सड़क। 90 के दशक में ग्लूखोव में दिमित्री स्टेपानोविच की मातृभूमि में मूर्तिकार कोलोमीएट्स आई। ए। द्वारा एक स्मारक बनाया गया था। यूक्रेनी कलाकार नतालिया स्विरिडेंको ने बोर्त्यान्स्की तिकड़ी (सोप्रानो, बांसुरी और हार्पसीकोर्ड) बनाई। अपने पति की मृत्यु के बाद, अन्ना इवानोव्ना ने चैपल को दे दिया।रचनाओं और उत्कीर्ण संगीत मंडलों की पांडुलिपियों को जमा किया। हालाँकि, उनके कोरल संगीत कार्यक्रम तेजी से प्रदर्शन किए गए, और वाद्य और ओपेरा कार्यों के रूप में धर्मनिरपेक्ष रचनाओं को धीरे-धीरे भुला दिया गया। हमें दिमित्री स्टेपानोविच का यह संगीत याद आयासंगीतकार के जन्म की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर, केवल 1901 में, कई वर्षों के बाद बोर्नटैनस्की। प्रारंभिक कार्य गलती से चैपल में पाए गए थे, उनकी प्रदर्शनी की व्यवस्था की गई थी। उनमें से "अल्केड", "फाल्कन", क्विंट और अन्य जैसे प्रसिद्ध कार्य थे। क्लैवियर संग्रह, जो राजकुमारी मारिया फोडोरोव्ना को समर्पित था, को भी संरक्षित किया गया था।
अठारहवीं शताब्दी कई बकाया द्वारा गौरवशाली हैरूसी संगीत संस्कृति के प्रतिनिधियों। बोर्टेनियास्की दिमित्री स्टेपानोविच भी उनके हैं। वह एक दुर्लभ आकर्षण के साथ एक प्रतिभाशाली संगीतकार है। दिमित्री Bortnyansky एक साथ एक कंडक्टर और एक गायक था। वह एक नए प्रकार के कोरल कंसर्टो के निर्माता बन गए। दिमित्री बोर्तनिंस्की, जिनकी जीवनी में वर्णित हैयह आलेख अक्टूबर, एक हज़ार सात सौ इक्यावन के बीस आठवें स्थान पर पैदा हुआ था। उनके पिता, स्टीफन शकुराट, कोसाक थे, जो हेटमैन रज़ुमोव्स्की के अधीन थे। विवाह से पहले और अपने बेटे के जन्म से पहले, सैनिक ग्खुखोव शहर आए, जहां वह जीने के लिए रुक गए। उन्होंने अपना नाम बदलकर बोर्तिनिंस्की कर दिया, क्योंकि उनके मूल गांव को बुलाया गया था। कुछ समय बाद उन्होंने एक विधवा-कोसाक, टॉल्स्टॉय मरीना दिमित्रीवना से शादी की। और जल्द ही जोड़े के बेटे दिमित्री का जन्म हुआ। जब लड़का छह साल का था, तो माता-पिता ने देखाउसके पास एक स्पष्ट प्रतिभा है। दिमित्री की एक सुंदर साफ आवाज, उत्कृष्ट सुनवाई थी। लड़का सही ढंग से गाया, कभी फिक्र नहीं किया। मक्खी पर पकड़ा गया कोई भी संगीत, उसके यादगार दिमित्री को पुनरावृत्ति की आवश्यकता नहीं थी। माता-पिता, अपने बेटे की प्रतिभा को देखते हुए, इसे ग्लुखोव के सिंगिंग स्कूल में दर्ज किया। दिमित्री को आसानी से सीखना था, और वह खुदसंगीत में बहुत रुचि दिखाई। लड़के ने बहुत खुशी के साथ गाया, और यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि बच्चों के लिए यह निर्धारित किया गया था कि स्थायी सेवा प्रशिक्षण के सिर पर है। थोड़े समय के बाद, शिक्षकों ने एकल कलाकार के रूप में दिमित्री मंचन करना शुरू किया। जब युवा प्रतिभा स्कूल गई, तो लड़के ने तुरंत सीखना शुरू किया कि संगीत वाद्ययंत्र कैसे खेलें। Bortnyansky एक अद्भुत ट्रेबल द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। कोरस के लिए इसकी शुद्धता बहुत महत्वपूर्ण थी। और शिक्षकों द्वारा दिमित्री की अत्यधिक सराहना की गई। एक हज़ार सात सौ अट्ठावन में गायकों को चैपल में सेंट पीटर्सबर्ग भेजा गया था। मरीना दिमित्रीवना ने अपने बेटे को पार किया, मुझे उपहार और एक छोटा आइकन के साथ एक बंडल दिया। बोर्टेनियास्की दिमित्री ने अपने मूल शहर को छोड़ दिया और उनके माता-पिता ने कभी नहीं देखा। उन दिनों में, फैशन इतालवी दिशा में थासंगीत। अदालत में कई विदेशी उस्ताद उचित तकनीक और कार्यों के निष्पादन किया गया। एक हज़ार सात सौ तिरेसठ में, जब मैं एलिजाबेथ के लिए शोक समाप्त होने पर, नई महारानी वेनिस कंडक्टर Galuppi Buronelli की सेवा ले लिया। इस निर्णय से युवा दिमित्री बोर्टनियनस्की के भाग्य पर काफी प्रभाव पड़ा है। उस समय वह एरिया गाए जाने में खुश थाविभिन्न ओपेरा। गलुपपी ने अपने शिष्यों को खोजने का फैसला किया, उनमें से एक दिमित्री बन गया। प्रसिद्ध कपेलमेस्टर ने किशोरी की अन्य प्रतिभाओं को देखा। गलुपपी ने इस बात पर ध्यान दिया कि कैसे दिमित्री सचमुच फ्लाई पर सबसे कठिन मार्ग, आदर्श और पूरे एरिया को संगीतकार खेल रहा था। यह भी महत्वपूर्ण था कि किशोरी की नई चीजें सीखने की उत्सुक इच्छा। नतीजतन, गैलुपपी, जब वह इटली वापस जा रहा था, तो उसने दिमित्री को उसके साथ ले लिया। प्रशिक्षण के कई महीने बाद। दिमित्री ने अंग और harpsichord पर खेलने के लिए सीखा, काउंटरपॉइंट में लगी हुई थी। युवा व्यक्ति वेनिस सिनेमाघरों का नियमित आगंतुक बन गया और एक भी महत्वपूर्ण प्रीमियर को याद नहीं किया। युवा संगीतकार का काम अधिक स्वतंत्र, अधिक पेशेवर बन गया। हालांकि, दिमित्री के तैयार कार्यों के साथ बात करना अभी भी बहुत जल्दी था। थोड़े समय के लिए वह सुखद और बादलहीन अध्ययनों में खुश था। उस समय एक युद्ध था, और इसमें भाग लेने से दिमित्री की नियति बच गई नहीं। गिनती ऑर्लोव अप्रत्याशित रूप से वेनिस पहुंचे और कंसुल मारुतिउस से मुलाकात की। प्रभावशाली लोगों के बीच एक लंबी बातचीत हुई, और सुबह की सुबह दिमित्री उन्हें पहले ही लाया गया था। गिनती ने उन्हें एक दुभाषिया की स्थिति की पेशकश कीरूसी सेना एक दिन बाद, दिमित्री स्टेपानोविच पहले से ही विद्रोही विद्रोहियों के लिए ओरलोव के पुनरुत्थान में यात्रा कर रहा था। वार्ता सफल रही, और थोड़ी देर के बाद युवा संगीतकार फिर से अपने पसंदीदा संगीत में लौट आया। एक हज़ार सात सौ छिहत्तर में सैन बेनेडेटो के पोस्टर ने रूसी रूसी संगीतकार बोर्टेनियास्की द्वारा रचित ओपेरा क्रेओन की यात्रा करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आमंत्रित किया। काम असफल नहीं हुआ, लेकिन यह भी ज्यादा सफलता हासिल नहीं किया। युवा संगीतकार के लिए अगला काम "अल्काइड्स" निकला है और अधिक परिपक्व है। दिमित्री स्टेपानोविच पात्रों के चरित्र के प्रति बहुत चौकस था, संगीत अधिक आराम से, अधिक विविध हो गया। संगीतकार ने नायक, उसकी सतर्कता, संदेह और अनिश्चितता के मनोदशा को व्यक्त करने की कोशिश की। वेनिस में अल्काइड्स का प्रीमियर आयोजित किया गया था। काम एक शानदार सफलता थी। अगले ओपेरा "क्विंटस फैबियस" की शुरुआत में आयोजित किया गया थामोडेना। दिमित्री स्टेपानोविच को स्थानीय प्रेस से अच्छी समीक्षा मिली। आलोचकों ने सरलता, निष्पादन की कृपा और साजिश रेखा के कुशल निर्माण को देखा है। नतीजतन, प्रदर्शन को अदालत की मंजूरी और दर्शकों की तूफानी प्रशंसा भी मिली। एक हज़ार सात सौ उन्यासी में दिमित्री स्टेपानोविच रूस लौट आया। पहले Bortnyansky एक अदालत बन गयाKapellmeister। एक हज़ार सात सौ चौरासी में इतालवी मास्टरो डी। पैसिलो को इटली के लिए तत्काल घर छोड़ना पड़ा। मारिया फ्योदोरोवना की छोटी अदालत के साथ इसे बदलने के लिए बोर्तिनिंस्की को पेश किया गया था। उसी समय, राजकुमारी के प्रशिक्षण में उनके कर्तव्यों को संगीत अंतराल भरना था। दिमित्री स्टेपानोविच ने नाटकों के लिए एक एल्बम तैयार कियाक्लावविर्ड, पियानो और harpsichord पर प्रदर्शन। राजकुमारी को वर्तमान पसंद आया, और अप्रैल एक हज़ार सात सौ पचासी में बोर्टेनिंस्की कम रैंक के बावजूद अपने पहले के आधिकारिक मालिक बन गए। दिमित्री स्टेपानोविच को कॉलेजिएट निर्धारक का पद मिला। सेना सेवा की तुलना में, वह प्रमुख के पद के साथ समान था। एक हज़ार सात सौ छियासी में काम "Seigneur का उत्सव" दिखाई दिया। राजकुमारी मारिया Feodorovna ओपेरा को और अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए कहा। नतीजतन, दिमित्री स्टेपानोविच ने एक नए libretto के लिए संगीत लिखा। ओपेरा को "फाल्कन" कहा जाता था, कई आकृतियां "अल्काइड्स" से ली गई थीं। नए काम का प्रीमियर अक्टूबर एक हज़ार सात सौ छियासी में था। बोर्टेनियास्की ओपेरा सोकोल एक बड़ी सफलता थी। यह Maestro की virtuosity और निपुणता को दर्शाता है। वह व्यक्तिगत एरिया और बैले आवेषण का संयोजन ढूंढने में सक्षम था, जो सामंजस्यपूर्ण रूप से उन्हें जोड़ता था, संगीत गर्मी, मुक्ति और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ मिलकर संचारित करता था। काम "फाल्कन" पाठ्यपुस्तकों में से एक बन गया। पहले ओपेरा गैचिना थिएटर में किया गया था, फिर इसे पावलोवस्क में ले जाया गया। फिर उत्पाद ने लगभग सभी छोटे दृश्यों को मारा। एक साल बाद, बोर्टेनियास्की की नई कृति"एक बेटा प्रतिद्वंद्वी है, या एक नया स्ट्रैटोनिक है।" काम सबसे अच्छा बन गया। फिर दिमित्री स्टेपानोविच ने कोरल संगीत कार्यक्रम लिखना शुरू किया। उस समय यह एक परिचित शैली थी। काम मुख्य रूप से विशेष चर्च सेवाओं में किया गया था। हालांकि, महत्वपूर्ण समारोहों के दौरान, समारोह समारोह अक्सर कोर्ट समारोहों में आयोजित किया जाता था। बोर्टेनियास्की दिमित्री कोरल कार्यों को इतना बदलने में सक्षम था कि वे संगीत में एक नई प्रवृत्ति बन गए। उन्होंने कई दशकों तक लिखापचास से अधिक संगीत कार्यक्रम। उनमें से प्रत्येक में लोक गीतों के तत्व हैं। प्रशंसा के साथ यूरोपीय संगीत के connoisseurs Bortnyansky के कार्यों के बारे में बात की। गाना बजानेवालों के पास अद्भुत सुन्दर रंग थे, पूर्ण उग्र सामंजस्य थे और आवाजों की मुफ्त व्यवस्था से प्रतिष्ठित थे। सत्रह नौ छः से दिमित्री स्टेपानोविच ने अदालत चैपल चलाया। गायकों की सेवा आसान नहीं थी, और बोर्टेनिंस्की को यह पहले से पता था। वह चैपल में धीरे-धीरे बहुत कुछ बदल सकता था। Bortnyansky गायकों का एक अलग गढ़ बनाने का फैसला किया जो वाद्य संगतता के बिना काम करता है और प्रदर्शन में भाग लेने से नए सामूहिक को बचाने के लिए। नतीजतन, कोरल कला का सबसे अच्छा स्कूल बनाया गया था। गायक नाटकीय प्रस्तुतियों में अधिक हिस्सा नहीं लेते थे। एक हज़ार आठ सौ में, चैपल एक स्वतंत्र संगीत विभाग बन गया। एक हज़ार आठ सौ एक में दिमित्री स्टेपानोविच निदेशक नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में चैपल बढ़ गया और बहुत लोकप्रिय हो गया। एक शिक्षक के रूप में बोर्टेनियास्की दिमित्री बहुत मांग में थी और एक निर्विवाद संगीत प्राधिकरण बन गया। उनके स्कूल को प्रथम श्रेणी माना जाने लगा, उन्होंने कई पेशेवर कोरिस्टर्स और बैंडमास्टर्स को प्रशिक्षित किया। इसके साथ ही, दिमित्री स्टेपानोविच व्यस्त था औरअपनी कला, कभी भी अधिक आकर्षक रोमांस, वाद्य संगीत, कक्ष कार्य और सोनाटास बनाना। नई शताब्दी Bortnyansky उसकी प्रसिद्धि की ऊंचाई पर मुलाकात की। काम "सोन-प्रतिद्वंद्वी, या न्यू स्ट्रैटोनिका" कैपेला के उदय के साथ जुड़ा हुआ था। फ्रांसीसी ग्रंथों पर बनाए गए सभी से संगीतकार का यह सबसे महत्वपूर्ण संगीत टुकड़ा है। दिमित्री स्टेपानोविच बोर्टेनियास्की एक बहुमुखी व्यक्ति था। समकालीन लोगों ने उन्हें प्यारा, सख्त सेवा और लोगों के प्रति अनुग्रहित कहा। अपने पूरे जीवन में, दिमित्री स्टेपानोविच कला के लिए समर्पित थी, न केवल संगीत के लिए। उन्होंने साहित्यिक शाम को भाग लिया, थाललित कला और पेंटिंग की एक महान पारखी। चित्रों का संग्रह दिमित्री Stepanovich इटली में रुचि हो गया। वहाँ भी यूरोपीय कला के इतिहास का अध्ययन करने का समय है। यह इटली में था, Bortniansky चित्रों, जो बाद में कला के पारखियों प्रशंसा की थी का एक संग्रह इकट्ठा करने के लिए शुरू कर दिया। सभी एकत्रित कैनवास दिमित्री स्टेपानोविच लायाघर। वह अपने मेहमानों को संग्रह दिखाने के लिए पसंद आया। बोर्टेनियास्की को गैचिना और पावलोवस्क में महलों के डिजाइन में भाग लेना पड़ा। वह वास्तुकला और चित्रकला के क्षेत्र में स्थायी परामर्शदाता थे। इसलिए, इमारतों का डिजाइन - कुछ हद तक, और इसकी योग्यता। बोर्ननिस्की दिमित्री ने पावलोव्स्की पैलेस के लिए चित्रों को चुना और खरीदा। एक हज़ार आठ सौ चार में संगीतकार मानद शिक्षाविदों के पदों में स्वीकार किया गया था। नब्बे के दशक से। उन्होंने आध्यात्मिक संगीत, विशेष रूप से कोरल संगीत कार्यक्रमों के निर्माण में खुद को विसर्जित कर दिया। उनमें वह अक्सर सख्त चर्च सीमाओं से परे चला गया। रचनाओं में बोर्टेनियास्की ने ओपेरा, मार्चिंग और लय नृत्य करने का प्रभाव महसूस किया। कभी-कभी कामों के धीमे हिस्से शहर रोमांस जैसा दिखते हैं। दिमित्री Stepanovich कभी मेसोनिक में थालॉज। हालांकि, उनके कुछ भजन गुप्त समाजों के लिए प्राथमिकता माना जाता था। रूसी संस्कृति के इतिहास में बोर्टेनियास्की के "रूसी सैनिकों के शिविर में गायक" भी शामिल था। इस कृति में, दिमित्री स्टेपानोविच ने खुद को भी पार कर लिया, क्योंकि यह एक कोरल गायन गीत बन गया। यह एकल संस्करण में हो सकता है। दिमित्री Bortnyansky की रचनात्मकता असंभव हैकेवल एक संग्रह में फिट। संगीतकार ने विभिन्न प्रकार के संगीत लिखे। अदालत चैपल के लिए - आध्यात्मिक, छोटी अदालत के लिए - धर्मनिरपेक्ष रचनाएं। कई कोरल संगीत कार्यक्रम शास्त्रीय शैली के स्पष्ट संकेतों के साथ लिखे गए हैं। उत्पाद अधिकतर तीन या चार निजी चक्र होते हैं, जो विषयगत रूप से संबंधित नहीं होते हैं। ओपेरा के सबसे प्रसिद्ध हैं वे हैंजो Bortnyansky इटली में बनाया गया। इन पहले कार्यों को अभी भी "सुनहरा संग्रह" माना जाता है। उपकरण संग्रह दिमित्री स्टेपानोविच द्वारा पहले ही अस्सी के दशक में लिखे गए थे। दुर्भाग्य से, बहुत कम बच गए हैं।इस दिशा के काम करता है। इनमें से अधिकांश संगीत कृतियों एक टुकड़ा हैं। वाद्ययंत्र कार्यों में, कई connoisseurs ध्यान दें कि राष्ट्रीय यूक्रेनी सुविधाओं ध्यान देने योग्य हैं। दिमित्री स्टेपानोविच बोर्तिनिंस्की की पत्नी थींमामूली, शांत अन्ना Ivanovna। उनके एक बेटे थे, जिन्हें उन्होंने अलेक्जेंडर नाम दिया था। जब वह बड़ा हुआ - गार्ड में एक लेफ्टिनेंट के रूप में सेवा दी। समय के साथ, सिकंदर ने शादी कर ली, और उसके दो दादा - एक बेटी, मरिया और एक बेटे थे, जिसका नाम उनके दादा के नाम पर रखा गया था। पोतेन बोर्तनिंस्की ने अपने कदमों का पालन कियाप्रसिद्ध रिश्तेदार लड़के की एक अद्भुत आवाज थी, और दिमित्री स्टेपानोविच ने कैपेला में गाना बजानेवालों के लिए अपने पोते को नामांकित किया। बोर्तनिंस्की का परिवार ओक नक्काशीदार दरवाजे से सजाए गए एक बड़े दो मंजिला घर में रहता था। दिमित्री स्टेपानोविच का अपना कार्यालय था जिसमें वह विचारों में शाम को समय बिताना पसंद करता था। निकटतम लोगों में से एक को रैंक किया गया था औरअलेक्जेंड्रा मिखाइलोवना, सत्ताईस वर्षीय लड़की। कोई भी, वह खुद भी, अपने माता-पिता के बारे में कुछ नहीं जानती थी। दिमित्री स्टेपानोविच और उनकी पत्नी ने युवा अलेक्जेंड्रा को आश्रय दिया, और तब से लड़की को परिवार का सदस्य माना गया। Bortnyansky उसे अपनी बेटी के रूप में लाया। अदालत गाना बजानेवालों ने अपने जीवन के आखिरी सालों तक दिमित्री स्टेपानोविच के "बच्चे" बने रहे। इन वर्षों के दौरान उन्होंने अपने गायन को अधिकतम तक प्रकट करने की कोशिश करते हुए, और अधिक सावधानी के साथ वार्डों के साथ पढ़ाया और काम किया। बोर्तिनिंस्की के सभी दिन क्षमता से भरे हुए थे। वह मोइका तटबंध के साथ पैर पर घर चला गया, सीनेट स्क्वायर पार कर गया और मिलियनया स्ट्रीट के कोने पर दाएं मुड़ गए। जब वह घर पहुंचा, तो वह अपने कार्यालय गया, और कभी-कभी विचार में लंबे समय तक बैठ गया। हाल ही के वर्षों में बुढ़ापे ने अपने टोल, दिमित्री स्टेपानोविच को बहुत थका दिया। उन्होंने अपने पूर्ण संस्करण पर बहुत कुछ कियाकाम करता है। उन्होंने किताबों में अपना बहुत पैसा लगाया, लेकिन उन्होंने कभी कई नहीं देखा। दिमित्री स्टेपानोविच ने अपने युवाओं में लिखे गए कोरल संगीत कार्यक्रमों का केवल एक हिस्सा प्रकाशित करने में कामयाब रहे। दस खंडों से उनके कार्यों का पूरा संग्रह केवल एक हज़ार आठ सौ बयासी में दिखाई दिया, जिसे त्चैकोव्स्की द्वारा संपादित किया गया। संगीतकार दिमित्री बर्त्यान्स्की का निधनएक हज़ार आठ सौ पच्चीस में पीटर्सबर्ग, सत्ताईस सितंबर । इस दिन उन्होंने कैपेला के गायक मंडल को बुलाया। संगीतकार ने अपने एक संगीत कार्यक्रम को करने के लिए कहा, और संगीत की अपनी प्रिय ध्वनियों के लिए चुपचाप मर गया। दिमित्री Stepanovich को Vasilyevsky पर दफनाया गया थाद्वीप, स्मोलेंस्क कब्रिस्तान। प्रसिद्ध रूसी संगीतकार की कब्र पर एक ओबिलिस्क और एक स्मारक बनाया गया था। फिर बर्बरता का एक अधिनियम का पालन किया गया, और एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में दफन को अलेक्जेंडर नेवस्की मठ में स्थानांतरित कर दिया गया, जो सांस्कृतिक हस्तियों के पैनथियन है। नामित महान रूसी संगीतकार की याद मेंBortnyansky को सुमी में स्कूल ऑफ आर्ट्स का नाम दिया गया, चेर्निहाइव चैंबर चोइर और लविव में सड़क। नब्बे के दशक में ग्लूखोव में दिमित्री स्टेपानोविच की मातृभूमि में मूर्तिकार कोलोमीएट्स आई। ए। द्वारा एक स्मारक बनाया गया था। यूक्रेनी कलाकार नतालिया स्विरिडेंको ने बोर्त्यान्स्की तिकड़ी बनाई। अपने पति की मृत्यु के बाद, अन्ना इवानोव्ना ने चैपल को दे दिया।रचनाओं और उत्कीर्ण संगीत मंडलों की पांडुलिपियों को जमा किया। हालाँकि, उनके कोरल संगीत कार्यक्रम तेजी से प्रदर्शन किए गए, और वाद्य और ओपेरा कार्यों के रूप में धर्मनिरपेक्ष रचनाओं को धीरे-धीरे भुला दिया गया। हमें दिमित्री स्टेपानोविच का यह संगीत याद आयासंगीतकार के जन्म की एक सौ पचास वीं वर्षगांठ के अवसर पर, केवल एक हज़ार नौ सौ एक में, कई वर्षों के बाद बोर्नटैनस्की। प्रारंभिक कार्य गलती से चैपल में पाए गए थे, उनकी प्रदर्शनी की व्यवस्था की गई थी। उनमें से "अल्केड", "फाल्कन", क्विंट और अन्य जैसे प्रसिद्ध कार्य थे। क्लैवियर संग्रह, जो राजकुमारी मारिया फोडोरोव्ना को समर्पित था, को भी संरक्षित किया गया था।
सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक और उसके मैसेंजर ऐप के कारण एंड्रॉयड स्मार्टफोन 15 फीसदी धीमे पड़ जा रहे हैं। इसके अलावा ज्यादा बैटरी की भी खपत हो रही है। ऐसा दावा एक मीडिया रिपोर्ट में कई यूज़र के हवाले से किया गया है। जारी की। इसमें बताया गया कि बेहद ही लोक्रपिय ऐप उस वक्त विवाद का हिस्सा बन गए जब यूज़र रिपोर्ट से पता चला कि ये ऐप फोन को धीमा करने के साथ ज्यादा बैटरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह ब्लॉग फोरम रेडिट पर फेसबुक के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय भी बना। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक यूज़र ने एक चार्ट भी साझा किया जिसमें इन ऐप द्वारा बैटरी के अत्याधिक इस्तेमाल का ज़िक्र था। इसका पता एक टेस्ट के दौरान पता चला जब एक के बाद एक 15 लोकप्रिय ऐप खोले गए। फेसबुक ऐप स्मार्टफोन पर नहीं इंस्टॉल होने की परिस्थिति में बाकी ऐप ज्यादा तेजी अपलोड हो रहे थे। एक रेडिट यूज़र ने लिखा, "मेरे लिए स्थिति स्पष्ट है। मैं ब्राउज़र ऐप कैंप ज्वाइन करने वाला हूं। मैसेंजर का हाल तो फेसबुक से भी बुरा है। टेस्ट से पता चला है कि दोनों ही ऐप अलग-अलग से फोन को 5 फीसदी तक धीमा कर रहे हैं" एक अन्य यूज़र ने लिखा, "फेसबुक कई फ़ीचर के कारण बहुत वज़नदार हो गया है। लोग चाहते हैं कि डेस्कटॉप वाले फ़ीचर मोबाइल ऐप पर भी हों। अब जब एंड्रॉयड बैकग्राउंड में इस ऐप को चलने देता है तो असर दिखेगा ही। " गौर करने वाली बात है कि पिछले साल कुछ आईफोन यूज़र ने भी इस तरह की ही शिकायत की थी। इन यूज़र का दावा था कि ऐप फोन की 40 फीसदी बैटरी की खपत कर रहा है।
सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक और उसके मैसेंजर ऐप के कारण एंड्रॉयड स्मार्टफोन पंद्रह फीसदी धीमे पड़ जा रहे हैं। इसके अलावा ज्यादा बैटरी की भी खपत हो रही है। ऐसा दावा एक मीडिया रिपोर्ट में कई यूज़र के हवाले से किया गया है। जारी की। इसमें बताया गया कि बेहद ही लोक्रपिय ऐप उस वक्त विवाद का हिस्सा बन गए जब यूज़र रिपोर्ट से पता चला कि ये ऐप फोन को धीमा करने के साथ ज्यादा बैटरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह ब्लॉग फोरम रेडिट पर फेसबुक के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय भी बना। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक यूज़र ने एक चार्ट भी साझा किया जिसमें इन ऐप द्वारा बैटरी के अत्याधिक इस्तेमाल का ज़िक्र था। इसका पता एक टेस्ट के दौरान पता चला जब एक के बाद एक पंद्रह लोकप्रिय ऐप खोले गए। फेसबुक ऐप स्मार्टफोन पर नहीं इंस्टॉल होने की परिस्थिति में बाकी ऐप ज्यादा तेजी अपलोड हो रहे थे। एक रेडिट यूज़र ने लिखा, "मेरे लिए स्थिति स्पष्ट है। मैं ब्राउज़र ऐप कैंप ज्वाइन करने वाला हूं। मैसेंजर का हाल तो फेसबुक से भी बुरा है। टेस्ट से पता चला है कि दोनों ही ऐप अलग-अलग से फोन को पाँच फीसदी तक धीमा कर रहे हैं" एक अन्य यूज़र ने लिखा, "फेसबुक कई फ़ीचर के कारण बहुत वज़नदार हो गया है। लोग चाहते हैं कि डेस्कटॉप वाले फ़ीचर मोबाइल ऐप पर भी हों। अब जब एंड्रॉयड बैकग्राउंड में इस ऐप को चलने देता है तो असर दिखेगा ही। " गौर करने वाली बात है कि पिछले साल कुछ आईफोन यूज़र ने भी इस तरह की ही शिकायत की थी। इन यूज़र का दावा था कि ऐप फोन की चालीस फीसदी बैटरी की खपत कर रहा है।
DESK : भारत और इंग्लैंड के लिए आज का दिन बेहद ख़ास है। टी20 वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल तक पहुंचने के लिए दोनों टीमों को आज अग्निपरीक्षा से गुजरना है। इंडिया और इंग्लैंड के बीच आज सेमी फाइनल मैच खेला जाएगा। इस मैच को जीतने वाली टीम सीधा फाइनल में पहुंच जाएगी, जहां उसका मुकाबला पाकिस्तान से होगा। आज की होने वाली मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1. 30 बजे शुरू होगी। आपको बता दें, इंडिया और इंग्लैंड के बीच महामुकाबला एडिलेड ओवल में खेला जाएगा। रोहित के सिपाहियों की टीम अपने ग्रुप में टॉप रहकर अंतिम चार में पहुंची है तो वहीं इंग्लैंड ने ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहकर सेमीफाइनल में जगह बनाया है। दोनों ही टीमों के लिए आज डु और डाई वाला मैच खेला जाएगा। इस मैच को जीतने वाली टीम की फाइनल में एंट्री होगी और फिर 13 नवंबर को पाकिस्तान के साथ फाइनल मैच खेला जाएगा। दरअसल, कल यानी बुधवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2022 का सेमी फाइनल मैच खेला गया, जिसमें पाकिस्तानी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को सात विकेट से हरा दिया। इसके बाद टीम पाकिस्तान सीधा फाइनल में पहुंच गया। अब सबकी नज़रें आज इंडिया और इंग्लैंड के बीच होने वाले सेमीफाइनल पर टिकी हुई है।
DESK : भारत और इंग्लैंड के लिए आज का दिन बेहद ख़ास है। टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस के फाइनल तक पहुंचने के लिए दोनों टीमों को आज अग्निपरीक्षा से गुजरना है। इंडिया और इंग्लैंड के बीच आज सेमी फाइनल मैच खेला जाएगा। इस मैच को जीतने वाली टीम सीधा फाइनल में पहुंच जाएगी, जहां उसका मुकाबला पाकिस्तान से होगा। आज की होने वाली मैच भारतीय समयानुसार दोपहर एक. तीस बजे शुरू होगी। आपको बता दें, इंडिया और इंग्लैंड के बीच महामुकाबला एडिलेड ओवल में खेला जाएगा। रोहित के सिपाहियों की टीम अपने ग्रुप में टॉप रहकर अंतिम चार में पहुंची है तो वहीं इंग्लैंड ने ग्रुप-एक में दूसरे स्थान पर रहकर सेमीफाइनल में जगह बनाया है। दोनों ही टीमों के लिए आज डु और डाई वाला मैच खेला जाएगा। इस मैच को जीतने वाली टीम की फाइनल में एंट्री होगी और फिर तेरह नवंबर को पाकिस्तान के साथ फाइनल मैच खेला जाएगा। दरअसल, कल यानी बुधवार को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस का सेमी फाइनल मैच खेला गया, जिसमें पाकिस्तानी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को सात विकेट से हरा दिया। इसके बाद टीम पाकिस्तान सीधा फाइनल में पहुंच गया। अब सबकी नज़रें आज इंडिया और इंग्लैंड के बीच होने वाले सेमीफाइनल पर टिकी हुई है।
कल्याण / पालघर। एमएसईडीसीएल के पालघर मंडल के तहत विद्युत लाइनों के नुतनीकरण और बिजली वितरण प्रणाली के क्षमता निर्माण से विक्रमगढ़, जव्हार, मोखाड़ा और खोडाला क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना ने डहाणू और गंजाद के बीच साढ़े आठ किलोमीटर की 33 केवी हाई वोल्टेज बिजली लाइन का नवीनीकरण कर उसकी क्षमता बढ़ा दी है। डहाणू तालुका में 33 केवी गंजाद, 33 केवी सूर्यनगर और जवाहर तालुका में 33 केवी जव्हार और 33 केवी मोखाड़ा, मोखदा तालुका में 33 केवी खोडाला और उपरोक्त सभी 60 हजार। ग्राहकों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। 33 केवी हाई वोल्टेज बिजली लाइन मुख्य रूप से सवता नाका डहाणू से चेतक फार्म गंजाद तक पहाड़ियों और जंगलों से गुजर रही थी, जिससे बिजली गुल होने की शिकायतें बढ़ रही थीं। साथ ही, डहाणू गांव से गंजाद तक सभी जर्जर बिजली के खंभे, चैनल, अन्य फैब्रिकेशन और बिजली लाइन (100 वर्ग मीटर के बजाय 200 वर्ग मीटर) को बदल दिया गया है। जंगल से गुजरने वाली बिजली लाइन के विकल्प के रूप में नवनिर्मित साढ़े आठ किलोमीटर लंबी बिजली लाइन सड़क के किनारे बिछाई जाएगी, जिससे जल्द ही फाॅल्ट का पता लगाकर उन्हें जल्द ठीक किया जा सकेगा। लगभग 60,000 ग्राहकों को निर्बाध और उचित बिजली आपूर्ति प्रदान करने में मदद करेगा। इससे पहले, विक्रमगढ़ तालुका में बिजली उपभोक्ताओं को पालघर में महापरेशन के 132 केवी हाई प्रेशर सबस्टेशन से 33 केवी मैनर पावर लाइन के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जा रही थी। 50 किमी लंबी लाइन व जागीर क्षेत्र के पहाड़ी व वन क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की शिकायत थी। नवनिर्मित 20. 5 किमी लंबी 33 केवी बिजली लाइन का निर्माण बोईसर एमआईडीसी से नागजारी, चारी, चिल्हर फाटा, नंदगांव, जव्हार फाटा वाया मनोर तक सड़क के किनारे किया गया है। इसलिए विक्रमगढ़ में ग्राहकों को उचित दबाव पर बिजली की आपूर्ति की जाएगी और बिजली गुल होने की दर भी कम होगी। एक विकल्प के रूप में मैनर पावर सबस्टेशन पर ग्राहकों के लिए ट्रांसमिशन लाइन भी महत्वपूर्ण होगी।
कल्याण / पालघर। एमएसईडीसीएल के पालघर मंडल के तहत विद्युत लाइनों के नुतनीकरण और बिजली वितरण प्रणाली के क्षमता निर्माण से विक्रमगढ़, जव्हार, मोखाड़ा और खोडाला क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना ने डहाणू और गंजाद के बीच साढ़े आठ किलोमीटर की तैंतीस केवी हाई वोल्टेज बिजली लाइन का नवीनीकरण कर उसकी क्षमता बढ़ा दी है। डहाणू तालुका में तैंतीस केवी गंजाद, तैंतीस केवी सूर्यनगर और जवाहर तालुका में तैंतीस केवी जव्हार और तैंतीस केवी मोखाड़ा, मोखदा तालुका में तैंतीस केवी खोडाला और उपरोक्त सभी साठ हजार। ग्राहकों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। तैंतीस केवी हाई वोल्टेज बिजली लाइन मुख्य रूप से सवता नाका डहाणू से चेतक फार्म गंजाद तक पहाड़ियों और जंगलों से गुजर रही थी, जिससे बिजली गुल होने की शिकायतें बढ़ रही थीं। साथ ही, डहाणू गांव से गंजाद तक सभी जर्जर बिजली के खंभे, चैनल, अन्य फैब्रिकेशन और बिजली लाइन को बदल दिया गया है। जंगल से गुजरने वाली बिजली लाइन के विकल्प के रूप में नवनिर्मित साढ़े आठ किलोमीटर लंबी बिजली लाइन सड़क के किनारे बिछाई जाएगी, जिससे जल्द ही फाॅल्ट का पता लगाकर उन्हें जल्द ठीक किया जा सकेगा। लगभग साठ,शून्य ग्राहकों को निर्बाध और उचित बिजली आपूर्ति प्रदान करने में मदद करेगा। इससे पहले, विक्रमगढ़ तालुका में बिजली उपभोक्ताओं को पालघर में महापरेशन के एक सौ बत्तीस केवी हाई प्रेशर सबस्टेशन से तैंतीस केवी मैनर पावर लाइन के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जा रही थी। पचास किमी लंबी लाइन व जागीर क्षेत्र के पहाड़ी व वन क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की शिकायत थी। नवनिर्मित बीस. पाँच किमी लंबी तैंतीस केवी बिजली लाइन का निर्माण बोईसर एमआईडीसी से नागजारी, चारी, चिल्हर फाटा, नंदगांव, जव्हार फाटा वाया मनोर तक सड़क के किनारे किया गया है। इसलिए विक्रमगढ़ में ग्राहकों को उचित दबाव पर बिजली की आपूर्ति की जाएगी और बिजली गुल होने की दर भी कम होगी। एक विकल्प के रूप में मैनर पावर सबस्टेशन पर ग्राहकों के लिए ट्रांसमिशन लाइन भी महत्वपूर्ण होगी।
RANCHI :राजधानी में एक अगस्त से जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री फीस में हो रही वृद्धि पर झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विरोध जताया है। चैंबर अध्यक्ष दीपक मारु ने मुख्य सचिव और उपायुक्त को लेटर लिख इस पर फिर से विचार करने को कहा है। दीपक मारु ने बताया कि जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री फीस में सात से दस फीसदी की बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव जमीन-फ्लैट खरीदारों पर पडेगा। खरीदारों को प्रापर्टी की रजिस्ट्री के लिए अधिक स्टांप शुल्क व कोर्ट फीस चुकानी पड़ेगी। वृद्धि दर प्रस्ताव के लागू होने के बाद डोरंडा, हिनू क्षेत्र में जमीन-फ्लैट का रेट सबसे अधिक हो जायेगा क्योंकि यहां पर कमर्शियल सरकारी जमीन का प्रेजेंट रेट 17. 92 लाख रुपए प्रति डिसमिल है। वहीं थडपखना, एमजी रोड सहित आसपास के क्षेत्रों में जमीन का सरकारी रेट 16 लाख रुपए प्रति डिसमिल है। इसी प्रकार कचहरी रोड में फ्लैट के रेट में सबसे अधिक बढ़ोतरी की संभावना है क्योंकि यहां का प्रेजेंट रेट 5221 रुपए स्क्वॉयर फीट है। ऐसे में रजिस्ट्री फीस में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने से 500 रुपए प्रति वर्ग फीट कीमत में इजाफा हो जायेगा।
RANCHI :राजधानी में एक अगस्त से जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री फीस में हो रही वृद्धि पर झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने विरोध जताया है। चैंबर अध्यक्ष दीपक मारु ने मुख्य सचिव और उपायुक्त को लेटर लिख इस पर फिर से विचार करने को कहा है। दीपक मारु ने बताया कि जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री फीस में सात से दस फीसदी की बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव जमीन-फ्लैट खरीदारों पर पडेगा। खरीदारों को प्रापर्टी की रजिस्ट्री के लिए अधिक स्टांप शुल्क व कोर्ट फीस चुकानी पड़ेगी। वृद्धि दर प्रस्ताव के लागू होने के बाद डोरंडा, हिनू क्षेत्र में जमीन-फ्लैट का रेट सबसे अधिक हो जायेगा क्योंकि यहां पर कमर्शियल सरकारी जमीन का प्रेजेंट रेट सत्रह. बानवे लाख रुपए प्रति डिसमिल है। वहीं थडपखना, एमजी रोड सहित आसपास के क्षेत्रों में जमीन का सरकारी रेट सोलह लाख रुपए प्रति डिसमिल है। इसी प्रकार कचहरी रोड में फ्लैट के रेट में सबसे अधिक बढ़ोतरी की संभावना है क्योंकि यहां का प्रेजेंट रेट पाँच हज़ार दो सौ इक्कीस रुपयापए स्क्वॉयर फीट है। ऐसे में रजिस्ट्री फीस में दस फीसदी की बढ़ोतरी होने से पाँच सौ रुपयापए प्रति वर्ग फीट कीमत में इजाफा हो जायेगा।
मुंबई। अजय देवगन और काजोल की बेटी न्यासा हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चा में रहती हैं। अक्सर न्यासा की दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए तस्वीरें वायरल होती हैं। कुछ दिन पहले भी ऐसी ही एक फोटो वायरल हुई थी और उसके बाद वेदांत महाजन का नाम चर्चा में आया। वेदांत महाजन को न्यासा देवगन का बॉयफ्रेंड बताया जा रहा है। दोनों ने अभी तक इस पर कोई कमेंट नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्षीय उद्यमी वेदांत महाजन अपने दोस्तों माणक ढींगरा और मोहित रावल के साथ इवेंट मैनेजमेंट कंपनी एमवीएम एंटरटेनमेंट के सह-मालिक हैं। तीनों मुंबई, दिल्ली और लंदन में भव्य क्लब पार्टियों का आयोजन करते हैं , जिसमें जान्हवी कपूर, अहान शेट्टी, महिका रामपाल, आर्यन खान और न्यासा देवगन सहित स्टार किड्स शामिल होते हैं। वेदांता और उनके दो दोस्तों ने अपने स्कूल के दोस्तों के लिए 2014 से 2016 तक लगातार तीन साल तक अपनी टैरेस पर नए साल की पार्टियों का आयोजन किया। उनकी पार्टी में 500 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। उसके बाद मुंबई में नाइट क्लबों और होटलों द्वारा पार्टियों के आयोजन के लिए उनसे संपर्क किया गया। तब से वह बड़ी बजट पार्टियों की मेजबानी कर रहे हैं। वेदांत अब तक कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के साथ तस्वीरें शेयर कर चुके है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर न्यासा के साथ उनकी कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। हाल ही में हुई एक पार्टी की तस्वीरों के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि न्यासा और वेदांत एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। 2019 में, वेदांत उद्यमिता में मास्टर्स करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन गए और वहां दक्षिण एशियाई छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया। लेकिन कोरोना में सबकुछ रुक गया, जिसके बाद उन्होंने लंदन में नाइट क्लबों के लिए पार्टियां आयोजित करना शुरू कर दिया। रणवीर सिंह, कनिका कपूर, इमरान खान, डिवाइन, तेशर, ऋत्विज, गैरी संधू और रेमन रोचेस्टर जैसी कई हस्तियों ने उनके कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है।
मुंबई। अजय देवगन और काजोल की बेटी न्यासा हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चा में रहती हैं। अक्सर न्यासा की दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए तस्वीरें वायरल होती हैं। कुछ दिन पहले भी ऐसी ही एक फोटो वायरल हुई थी और उसके बाद वेदांत महाजन का नाम चर्चा में आया। वेदांत महाजन को न्यासा देवगन का बॉयफ्रेंड बताया जा रहा है। दोनों ने अभी तक इस पर कोई कमेंट नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पच्चीस वर्षीय उद्यमी वेदांत महाजन अपने दोस्तों माणक ढींगरा और मोहित रावल के साथ इवेंट मैनेजमेंट कंपनी एमवीएम एंटरटेनमेंट के सह-मालिक हैं। तीनों मुंबई, दिल्ली और लंदन में भव्य क्लब पार्टियों का आयोजन करते हैं , जिसमें जान्हवी कपूर, अहान शेट्टी, महिका रामपाल, आर्यन खान और न्यासा देवगन सहित स्टार किड्स शामिल होते हैं। वेदांता और उनके दो दोस्तों ने अपने स्कूल के दोस्तों के लिए दो हज़ार चौदह से दो हज़ार सोलह तक लगातार तीन साल तक अपनी टैरेस पर नए साल की पार्टियों का आयोजन किया। उनकी पार्टी में पाँच सौ से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। उसके बाद मुंबई में नाइट क्लबों और होटलों द्वारा पार्टियों के आयोजन के लिए उनसे संपर्क किया गया। तब से वह बड़ी बजट पार्टियों की मेजबानी कर रहे हैं। वेदांत अब तक कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के साथ तस्वीरें शेयर कर चुके है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर न्यासा के साथ उनकी कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। हाल ही में हुई एक पार्टी की तस्वीरों के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि न्यासा और वेदांत एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। दो हज़ार उन्नीस में, वेदांत उद्यमिता में मास्टर्स करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन गए और वहां दक्षिण एशियाई छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया। लेकिन कोरोना में सबकुछ रुक गया, जिसके बाद उन्होंने लंदन में नाइट क्लबों के लिए पार्टियां आयोजित करना शुरू कर दिया। रणवीर सिंह, कनिका कपूर, इमरान खान, डिवाइन, तेशर, ऋत्विज, गैरी संधू और रेमन रोचेस्टर जैसी कई हस्तियों ने उनके कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
दायें हाथ के युवा तेज गेंदबाज रसिक सलाम इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले जम्मू-कश्मीर के दूसरे क्रिकेटर बने. सत्रह साल के सलाम ने रविवार को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियन्स की ओर से पदार्पण किया. उन्होंने मेजबान टीम के लिए गेंदबाजी का आगाज भी किया. सलाम को भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान ने कैप सौंपी. वह मुंबई इंडियन्स के लिए पदार्पण करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं. कुलगाम जिले के रहने वाले सलाम को मुंबई इंडियन्स ने 20 लाख रुपये के उनके आधार मूल्य पर खरीदा था. ऑफ स्पिन ऑलराउंडर परवेज रसूल इस लुभावने टूर्नामेंट में खेलने वाले जम्मू-कश्मीर के पहले क्रिकेटर हैं. वह पुणे वारियर्स और सनराइजर्स हैदराबाद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. पिछले साल किंग्स इलेवन पंजाब ने जम्मू-कश्मीर के मंजूर दार को चुना था लेकिन उन्हें कोई मैच खेलने का मौका नहीं मिला. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर का यह युवा खिलाड़ी अभी करीब 17 साल है. इन्होंने घरेलू मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है. रसिक ने फर्स्ट क्लास मैचों की 3 पारियों में 7 विकेट झटके हैं. जबकि लिस्ट ए की 2 पारियों में 3 विकेट लिए हैं. इसके अलावा घरेलू टी-20 मैचों में 4 विकेट लिए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस खिलाड़ी अंडर 19 में प्रभावी प्रदर्शन किया. लिहाजा अगर रसिक मुंबई इंडियन्स के लिए आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करें तो वो मिसाल बन सकते हैं.
दायें हाथ के युवा तेज गेंदबाज रसिक सलाम इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले जम्मू-कश्मीर के दूसरे क्रिकेटर बने. सत्रह साल के सलाम ने रविवार को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियन्स की ओर से पदार्पण किया. उन्होंने मेजबान टीम के लिए गेंदबाजी का आगाज भी किया. सलाम को भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान ने कैप सौंपी. वह मुंबई इंडियन्स के लिए पदार्पण करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं. कुलगाम जिले के रहने वाले सलाम को मुंबई इंडियन्स ने बीस लाख रुपये के उनके आधार मूल्य पर खरीदा था. ऑफ स्पिन ऑलराउंडर परवेज रसूल इस लुभावने टूर्नामेंट में खेलने वाले जम्मू-कश्मीर के पहले क्रिकेटर हैं. वह पुणे वारियर्स और सनराइजर्स हैदराबाद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. पिछले साल किंग्स इलेवन पंजाब ने जम्मू-कश्मीर के मंजूर दार को चुना था लेकिन उन्हें कोई मैच खेलने का मौका नहीं मिला. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर का यह युवा खिलाड़ी अभी करीब सत्रह साल है. इन्होंने घरेलू मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है. रसिक ने फर्स्ट क्लास मैचों की तीन पारियों में सात विकेट झटके हैं. जबकि लिस्ट ए की दो पारियों में तीन विकेट लिए हैं. इसके अलावा घरेलू टी-बीस मैचों में चार विकेट लिए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस खिलाड़ी अंडर उन्नीस में प्रभावी प्रदर्शन किया. लिहाजा अगर रसिक मुंबई इंडियन्स के लिए आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करें तो वो मिसाल बन सकते हैं.
BAREILLY: बरेली जिले की नौ विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी व बसपा के सीटिंग एमएलए को सपा-कांग्रेस गठबंधन से कड़ी टक्कर मिल सकती है। हालांकि, इन पांच सीटों पर बीजेपी व बसपा के लड़ रहे सीटिंग एमएलए का अपने-अपने क्षेत्र में पब्लिक के बीच काफी प्रभाव है। बावजूद इसके गठंबधन की गुणा-गणित में महारथियों को जीत के लिए मशक्कत करनी पड़ सकती है। क्योंकि, पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस को मिले वोट के आधार पर देखें तो इस चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। बीजेपी से कैंट से राजेश अग्रवाल और शहर से डॉ। अरुण कुमार को टिकट मिल चुका है। गठबंधन की बात के चलते सपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा इन दोनों सीट से होनी बाकी है। सपा ने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी थी, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन होने के चक्कर में सपा घोषित उम्मीदवारों के टिकट को कैंसिल कर दिया। अब इन दोनों सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार के उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। खैर, उम्मीदवार चाहे जो हो, लेकिन बीजेपी के कैंट उम्मीदवार राजेश अग्रवाल और शहर उम्मीदवार अरुण कुमार को चुनौती मिलना तय माना जा रहा है। साल 2012 में कैंट से चुनाव जीतने वाले बीजेपी उम्मीदवार राजेश अग्रवाल को 51893 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर सपा के फहीम साबीर अंसारी को 32944 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस की उम्मीदवार सुप्रिया ऐरन को 16310 वोट मिले थे। सपा और कांग्रेस के मिले वोट को जोड़ दे तो टोटल वोट 48554 है। जो बीजेपी उम्मीदवार से करीब 3 हजार वोट कम है। कुछ ऐसा ही हाल शहर विधानसभा क्षेत्र का भी है। शहर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार रहे डॉ। अरुण कुमार को 68983 वोट मिले थे। जबकि, सपा के डॉ। अनिल शर्मा को 41,921 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के मुजाहिद हसन खान को 8016 वोट मिले थे। सपा और कांग्रेस के वोट को मिला दे तो यह संख्या 49937 पर पहुंच जाएंगी। वहीं आंवला, बिथरी और मीरगंज विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी और बसपा के सीटिंग एमएलए के लिए भी गठबंधन के उम्मीदवार चुनौती दे सकते हैं। आंवला के विधायक धर्मपाल ने 50,782 वोट पिछले चुनाव में हासिल किए थे। जबकि, सपा के महिपाल सिंह यादव को 46,374 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार अनुपमा मौर्या को 15715 वोट मिले थे। इस हिसाब से देखा जाए तो धर्मपाल को इस चुनाव में जीतना इतना आसान नहीं होगा। वहीं बिथरी चैनपुर से बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह और मीरगंज के विधायक सुल्तान बेग को भी जीत हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। बिथरी से वीरेंद्र सिंह ने पिछले चुनाव में 55972 वोट हासिल किए थे। जबकि सपा के धर्मेद्र कुमार 52557 वोट और कांग्रेस के अलाउद्दीन खान 2833 वोट हासिल किए थे। जबकि मीरगंज विधानसभा सीट से बसपा के सुल्तान बेग ने 57446 वोट पाकर जीत हासिल की थी। वहीं सपा के जाहिद हुसैन को 35299 और कांग्रेस के हुसली राम को 3910 वोट मिले थे। ऐसे में देखा जाए तो वोट का अंतर बहुत ही कम हो जा रहा है। गठबंधन से सपा-कांग्रेस मजबूत हुई है, लेकिन जिस तरह विपक्षी उम्मीदवारों के सिर जीत का सेहरा बंधा है कुछ कहा नहीं जा सकता। सपा व कांग्रेस एक होकर बीजेपी, बसपा उम्मीदवारों को टक्कर तो दे सकते है, लेकिन मात दे पाना इतना आसान नहीं होगा।
BAREILLY: बरेली जिले की नौ विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी व बसपा के सीटिंग एमएलए को सपा-कांग्रेस गठबंधन से कड़ी टक्कर मिल सकती है। हालांकि, इन पांच सीटों पर बीजेपी व बसपा के लड़ रहे सीटिंग एमएलए का अपने-अपने क्षेत्र में पब्लिक के बीच काफी प्रभाव है। बावजूद इसके गठंबधन की गुणा-गणित में महारथियों को जीत के लिए मशक्कत करनी पड़ सकती है। क्योंकि, पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस को मिले वोट के आधार पर देखें तो इस चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। बीजेपी से कैंट से राजेश अग्रवाल और शहर से डॉ। अरुण कुमार को टिकट मिल चुका है। गठबंधन की बात के चलते सपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा इन दोनों सीट से होनी बाकी है। सपा ने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी थी, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन होने के चक्कर में सपा घोषित उम्मीदवारों के टिकट को कैंसिल कर दिया। अब इन दोनों सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार के उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। खैर, उम्मीदवार चाहे जो हो, लेकिन बीजेपी के कैंट उम्मीदवार राजेश अग्रवाल और शहर उम्मीदवार अरुण कुमार को चुनौती मिलना तय माना जा रहा है। साल दो हज़ार बारह में कैंट से चुनाव जीतने वाले बीजेपी उम्मीदवार राजेश अग्रवाल को इक्यावन हज़ार आठ सौ तिरानवे वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर सपा के फहीम साबीर अंसारी को बत्तीस हज़ार नौ सौ चौंतालीस वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस की उम्मीदवार सुप्रिया ऐरन को सोलह हज़ार तीन सौ दस वोट मिले थे। सपा और कांग्रेस के मिले वोट को जोड़ दे तो टोटल वोट अड़तालीस हज़ार पाँच सौ चौवन है। जो बीजेपी उम्मीदवार से करीब तीन हजार वोट कम है। कुछ ऐसा ही हाल शहर विधानसभा क्षेत्र का भी है। शहर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार रहे डॉ। अरुण कुमार को अड़सठ हज़ार नौ सौ तिरासी वोट मिले थे। जबकि, सपा के डॉ। अनिल शर्मा को इकतालीस,नौ सौ इक्कीस वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के मुजाहिद हसन खान को आठ हज़ार सोलह वोट मिले थे। सपा और कांग्रेस के वोट को मिला दे तो यह संख्या उनचास हज़ार नौ सौ सैंतीस पर पहुंच जाएंगी। वहीं आंवला, बिथरी और मीरगंज विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी और बसपा के सीटिंग एमएलए के लिए भी गठबंधन के उम्मीदवार चुनौती दे सकते हैं। आंवला के विधायक धर्मपाल ने पचास,सात सौ बयासी वोट पिछले चुनाव में हासिल किए थे। जबकि, सपा के महिपाल सिंह यादव को छियालीस,तीन सौ चौहत्तर वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार अनुपमा मौर्या को पंद्रह हज़ार सात सौ पंद्रह वोट मिले थे। इस हिसाब से देखा जाए तो धर्मपाल को इस चुनाव में जीतना इतना आसान नहीं होगा। वहीं बिथरी चैनपुर से बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह और मीरगंज के विधायक सुल्तान बेग को भी जीत हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। बिथरी से वीरेंद्र सिंह ने पिछले चुनाव में पचपन हज़ार नौ सौ बहत्तर वोट हासिल किए थे। जबकि सपा के धर्मेद्र कुमार बावन हज़ार पाँच सौ सत्तावन वोट और कांग्रेस के अलाउद्दीन खान दो हज़ार आठ सौ तैंतीस वोट हासिल किए थे। जबकि मीरगंज विधानसभा सीट से बसपा के सुल्तान बेग ने सत्तावन हज़ार चार सौ छियालीस वोट पाकर जीत हासिल की थी। वहीं सपा के जाहिद हुसैन को पैंतीस हज़ार दो सौ निन्यानवे और कांग्रेस के हुसली राम को तीन हज़ार नौ सौ दस वोट मिले थे। ऐसे में देखा जाए तो वोट का अंतर बहुत ही कम हो जा रहा है। गठबंधन से सपा-कांग्रेस मजबूत हुई है, लेकिन जिस तरह विपक्षी उम्मीदवारों के सिर जीत का सेहरा बंधा है कुछ कहा नहीं जा सकता। सपा व कांग्रेस एक होकर बीजेपी, बसपा उम्मीदवारों को टक्कर तो दे सकते है, लेकिन मात दे पाना इतना आसान नहीं होगा।
मुंबई, 16 फरवरी (आईएएनएस)। दिवंगत फिल्मकार राज कपूर के बेटे अभिनेता ऋषि कपूर का कहना है कि आज की पीढ़ी अभी भी उनके पिता के बारे में बात करती है और यही वजह है कि वह दर्शकों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। ऋषि कपूर अपने भाइयों रणधीर कपूर और राजीव कपूर के साथ बुधवार को राज कपूर के सम्मान में आयोजित 'द राज कपूर अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन एंटरटेनमेंट' कार्यक्रम में शामिल हुए। ऋषि ने कहा, मेरे पिता को गुजरे हुए 30 साल हो चुके हैं और हाल ही में मैं जॉर्जिया और ताशकन्द गया। आज की पीढ़ी किसी भी खान की फिल्म देख सकती है। वे करीना कपूर या करिश्मा कपूर या रणबीर कपूर की फिल्म भी देख सकते हैं, लेकिन क्यों वे अभी भी राज कपूर की फिल्मों पर प्रतिक्रिया देते हैं? मैं भी यह बात समझ नहीं पाता। उन्होंने कहा, वे अभी भी उनकी फिल्मों और उनकी फिल्मों के संगीत के बारे में बात करते हैं, तो मुझे लगता है कि राज कपूर अभी भी आज के दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं, जो अद्भुत है। 'द राज कपूर अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन एंटरटेनमेंट' कार्यक्रम में आर. बाल्की, रमेश सिप्पी और उमेश शुक्ला जैसे दिग्गज फिल्मकारों को सम्मानित किया गया।
मुंबई, सोलह फरवरी । दिवंगत फिल्मकार राज कपूर के बेटे अभिनेता ऋषि कपूर का कहना है कि आज की पीढ़ी अभी भी उनके पिता के बारे में बात करती है और यही वजह है कि वह दर्शकों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। ऋषि कपूर अपने भाइयों रणधीर कपूर और राजीव कपूर के साथ बुधवार को राज कपूर के सम्मान में आयोजित 'द राज कपूर अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन एंटरटेनमेंट' कार्यक्रम में शामिल हुए। ऋषि ने कहा, मेरे पिता को गुजरे हुए तीस साल हो चुके हैं और हाल ही में मैं जॉर्जिया और ताशकन्द गया। आज की पीढ़ी किसी भी खान की फिल्म देख सकती है। वे करीना कपूर या करिश्मा कपूर या रणबीर कपूर की फिल्म भी देख सकते हैं, लेकिन क्यों वे अभी भी राज कपूर की फिल्मों पर प्रतिक्रिया देते हैं? मैं भी यह बात समझ नहीं पाता। उन्होंने कहा, वे अभी भी उनकी फिल्मों और उनकी फिल्मों के संगीत के बारे में बात करते हैं, तो मुझे लगता है कि राज कपूर अभी भी आज के दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं, जो अद्भुत है। 'द राज कपूर अवार्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन एंटरटेनमेंट' कार्यक्रम में आर. बाल्की, रमेश सिप्पी और उमेश शुक्ला जैसे दिग्गज फिल्मकारों को सम्मानित किया गया।
कारणपूर्ण क्रियाएं एक क्रिया को व्यक्त करती हैं जो होने वाली होती है। दूसरे शब्दों में, जब मैंने मेरे लिए कुछ किया है तो मैं ऐसा करता हूं। दूसरे शब्दों में, मैं वास्तव में कुछ भी नहीं करता, लेकिन किसी और से मेरे लिए ऐसा करने के लिए कहता हूं। यह कारक क्रियाओं की भावना है। इंटरमीडिएट से उन्नत स्तर तक अंग्रेजी शिक्षार्थियों को निष्क्रिय आवाज़ के विकल्प के रूप में कारक क्रिया का अध्ययन करना चाहिए। जैक ने अपना घर भूरा और भूरा रंग दिया था। मां ने अपने व्यवहार के कारण अपने बेटे को अतिरिक्त काम किया। उसने टॉम को सप्ताह के अंत तक एक रिपोर्ट लिखनी थी। पहला वाक्य अर्थ में समान हैः किसी ने जैक के घर को चित्रित किया। या जैक का घर किसी के द्वारा चित्रित किया गया था। दूसरी वाक्य इंगित करती है कि मां ने लड़के को कार्रवाई करने का कारण बताया। तीसरे में, किसी ने किसी को कुछ करने के लिए कहा। कारणपूर्ण क्रियाएं किसी के बारे में कुछ व्यक्त करने का विचार व्यक्त करती हैं। परिणामी क्रियाएं निष्क्रिय क्रियाओं के अर्थ में समान हो सकती हैं। आपकी तुलना के लिए यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं। मेरे बाल काटा गया था। (निष्क्रिय) मैंने अपने बाल कटवाये। (प्रेरणा का) इस उदाहरण में, अर्थ वही है। क्योंकि अपने बालों को काटना मुश्किल है, यह समझा जाता है कि किसी और ने आपके बालों को काट दिया है। कार धोया गया था। (निष्क्रिय) मुझे कार धोया गया। (प्रेरणा का) इन दो वाक्यों में अर्थ में थोड़ा अंतर है। सबसे पहले, यह संभव है कि स्पीकर ने कार धोया। दूसरे में, यह स्पष्ट है कि स्पीकर ने कार धोने के लिए किसी को भुगतान किया। आम तौर पर बोलते हुए, निष्क्रिय आवाज़ का उपयोग किए गए कार्यों पर जोर देने के लिए किया जाता है। कारण इस तथ्य पर तनाव डालते हैं कि कोई ऐसा होने का कारण बनता है। अंग्रेजी में तीन कारक क्रियाएं हैंः मेक, है और प्राप्त करें। यहां प्रत्येक क्रिया और आगे के रूपों के बारे में और स्पष्टीकरण दिए गए हैं। एक कारक क्रिया के रूप में 'मेक' इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कुछ करने की आवश्यकता होती है। पीटर ने उसे अपना होमवर्क किया। शिक्षक ने कक्षा के बाद छात्रों को बना दिया। पर्यवेक्षक ने समय सीमा को पूरा करने के लिए श्रमिकों को काम करना जारी रखा। एक कारक क्रिया के रूप में 'है' इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति उनके लिए कुछ करना चाहता है। विभिन्न सेवाओं के बारे में बोलते समय इस कारक क्रिया का प्रयोग अक्सर किया जाता है। कारक क्रिया के दो रूप हैं 'है'। यह फॉर्म इंगित करता है कि कोई अन्य व्यक्ति को कार्रवाई करने का कारण बनता है। किसी को ऐसा कुछ करने के लिए अक्सर प्रबंधन और काम संबंधों के लिए उपयोग किया जाता है। वे जॉन जल्दी पहुंचे थे। उसने अपने बच्चों को उसके लिए रात का खाना पकाना था। मैंने पीटर को शाम का अख़बार उठाया था। इस फॉर्म का उपयोग उन सेवाओं के साथ किया जाता है जिन्हें आम तौर पर कार धोने, घर चित्रकला, कुत्ते के सौंदर्य आदि जैसे भुगतान किया जाता है। पिछले शनिवार को मेरे बाल कट गए थे। उसने सप्ताहांत में कार धोया था। मैरी स्थानीय पालतू जानवरों की दुकान में तैयार कुत्ता था। नोटः यह फ़ॉर्म निष्क्रिय के अर्थ में समान है। 'गेट' का उपयोग एक कारक क्रिया के रूप में किया जाता है जैसे कि 'है' का उपयोग प्रतिभागियों के साथ किया जाता है। यह इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति उनके लिए कुछ करना चाहता है। कारक क्रिया का प्रयोग अक्सर 'है' की तुलना में अधिक मूर्खतापूर्ण तरीके से किया जाता है। उन्होंने पिछले हफ्ते अपना घर पेंट किया। टॉम ने कल अपनी कार धोया। एलिसन ने एक कला डीलर द्वारा चित्रित चित्रकला प्राप्त की। इस फ़ॉर्म का उपयोग उन कठिन कार्यों के लिए भी किया जाता है जिन्हें हम पूरा करना चाहते हैं। इस मामले में, कोई कारक अर्थ नहीं है। मुझे रिपोर्ट कल रात खत्म हो गई। आखिरकार उसने अपने करों को कल कर लिया। मुझे रात के खाने से पहले लॉन मिला। किया है और किया गया है वही अर्थ है जब अतीत में भुगतान सेवाओं का उल्लेख किया जाता है। मैंने अपनी कार धोया था। = मुझे मेरी कार धोया गया। उसने अपनी कालीन साफ कर दी थी। = उसने अपनी कालीन साफ कर ली।
कारणपूर्ण क्रियाएं एक क्रिया को व्यक्त करती हैं जो होने वाली होती है। दूसरे शब्दों में, जब मैंने मेरे लिए कुछ किया है तो मैं ऐसा करता हूं। दूसरे शब्दों में, मैं वास्तव में कुछ भी नहीं करता, लेकिन किसी और से मेरे लिए ऐसा करने के लिए कहता हूं। यह कारक क्रियाओं की भावना है। इंटरमीडिएट से उन्नत स्तर तक अंग्रेजी शिक्षार्थियों को निष्क्रिय आवाज़ के विकल्प के रूप में कारक क्रिया का अध्ययन करना चाहिए। जैक ने अपना घर भूरा और भूरा रंग दिया था। मां ने अपने व्यवहार के कारण अपने बेटे को अतिरिक्त काम किया। उसने टॉम को सप्ताह के अंत तक एक रिपोर्ट लिखनी थी। पहला वाक्य अर्थ में समान हैः किसी ने जैक के घर को चित्रित किया। या जैक का घर किसी के द्वारा चित्रित किया गया था। दूसरी वाक्य इंगित करती है कि मां ने लड़के को कार्रवाई करने का कारण बताया। तीसरे में, किसी ने किसी को कुछ करने के लिए कहा। कारणपूर्ण क्रियाएं किसी के बारे में कुछ व्यक्त करने का विचार व्यक्त करती हैं। परिणामी क्रियाएं निष्क्रिय क्रियाओं के अर्थ में समान हो सकती हैं। आपकी तुलना के लिए यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं। मेरे बाल काटा गया था। मैंने अपने बाल कटवाये। इस उदाहरण में, अर्थ वही है। क्योंकि अपने बालों को काटना मुश्किल है, यह समझा जाता है कि किसी और ने आपके बालों को काट दिया है। कार धोया गया था। मुझे कार धोया गया। इन दो वाक्यों में अर्थ में थोड़ा अंतर है। सबसे पहले, यह संभव है कि स्पीकर ने कार धोया। दूसरे में, यह स्पष्ट है कि स्पीकर ने कार धोने के लिए किसी को भुगतान किया। आम तौर पर बोलते हुए, निष्क्रिय आवाज़ का उपयोग किए गए कार्यों पर जोर देने के लिए किया जाता है। कारण इस तथ्य पर तनाव डालते हैं कि कोई ऐसा होने का कारण बनता है। अंग्रेजी में तीन कारक क्रियाएं हैंः मेक, है और प्राप्त करें। यहां प्रत्येक क्रिया और आगे के रूपों के बारे में और स्पष्टीकरण दिए गए हैं। एक कारक क्रिया के रूप में 'मेक' इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को कुछ करने की आवश्यकता होती है। पीटर ने उसे अपना होमवर्क किया। शिक्षक ने कक्षा के बाद छात्रों को बना दिया। पर्यवेक्षक ने समय सीमा को पूरा करने के लिए श्रमिकों को काम करना जारी रखा। एक कारक क्रिया के रूप में 'है' इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति उनके लिए कुछ करना चाहता है। विभिन्न सेवाओं के बारे में बोलते समय इस कारक क्रिया का प्रयोग अक्सर किया जाता है। कारक क्रिया के दो रूप हैं 'है'। यह फॉर्म इंगित करता है कि कोई अन्य व्यक्ति को कार्रवाई करने का कारण बनता है। किसी को ऐसा कुछ करने के लिए अक्सर प्रबंधन और काम संबंधों के लिए उपयोग किया जाता है। वे जॉन जल्दी पहुंचे थे। उसने अपने बच्चों को उसके लिए रात का खाना पकाना था। मैंने पीटर को शाम का अख़बार उठाया था। इस फॉर्म का उपयोग उन सेवाओं के साथ किया जाता है जिन्हें आम तौर पर कार धोने, घर चित्रकला, कुत्ते के सौंदर्य आदि जैसे भुगतान किया जाता है। पिछले शनिवार को मेरे बाल कट गए थे। उसने सप्ताहांत में कार धोया था। मैरी स्थानीय पालतू जानवरों की दुकान में तैयार कुत्ता था। नोटः यह फ़ॉर्म निष्क्रिय के अर्थ में समान है। 'गेट' का उपयोग एक कारक क्रिया के रूप में किया जाता है जैसे कि 'है' का उपयोग प्रतिभागियों के साथ किया जाता है। यह इस विचार को व्यक्त करता है कि व्यक्ति उनके लिए कुछ करना चाहता है। कारक क्रिया का प्रयोग अक्सर 'है' की तुलना में अधिक मूर्खतापूर्ण तरीके से किया जाता है। उन्होंने पिछले हफ्ते अपना घर पेंट किया। टॉम ने कल अपनी कार धोया। एलिसन ने एक कला डीलर द्वारा चित्रित चित्रकला प्राप्त की। इस फ़ॉर्म का उपयोग उन कठिन कार्यों के लिए भी किया जाता है जिन्हें हम पूरा करना चाहते हैं। इस मामले में, कोई कारक अर्थ नहीं है। मुझे रिपोर्ट कल रात खत्म हो गई। आखिरकार उसने अपने करों को कल कर लिया। मुझे रात के खाने से पहले लॉन मिला। किया है और किया गया है वही अर्थ है जब अतीत में भुगतान सेवाओं का उल्लेख किया जाता है। मैंने अपनी कार धोया था। = मुझे मेरी कार धोया गया। उसने अपनी कालीन साफ कर दी थी। = उसने अपनी कालीन साफ कर ली।
की हयाते ज़ाहिरी के साथ मुक़ैयद नहीं किया जा सकता और अगर • बिल-फ़र्ज़ उसको हुज़ूरे अकरम की हयाते ज़ाहिरी के साथ मुकैयद किया। तो उसका मतलब यह होगा कि सहाबा किराम जो पहले ही हुज़ूरे अनवर की तबियत और फैज़े सोहबत से मामूर थे। उनकी बख़्शिश के लिए तो एक सूरत मुक़र्रर कर दी और बाद के लोग जो हुज़ूर की तालीम व तर्बियत, फैज़ाने नज़र और शर्फे सोहबत सब से महरूम थे और जो बुअद ज़माना की वजह से गुनाहों में ज़्यादा मुस्तग़रक और बख़्शिश के ज़राए के ज्यादा मुस्तहिक थे। उनकी मग्फिरत के लिए अल्लाह तआला ने उम्मीद का कोई सहारा नहीं छोड़ा और यह अल्लाह तआला के फ़ज़्ले अमीम और उसकी वसीअ रहमत से इंतिहाई मुस्तबअद है, फिर जब कुरआन के तमाम अहकाम तक्लीफीया और सहाबा से लेकर क्यामत तक के तमाम मुसलमानों के लिए आम हैं, तो इस हुक्म को सिर्फ सहाबा के साथ क्यों ख़ास किया जाता है, क्या वहाबिया की इस पख़्सीस से एक आम जहन यह नहीं सोचेगा। अहकामे तक्लीफिया की मशक़्क़त में तो हम को सहाबा के साथ रखा और जब हुसूले शफाअत के इंआम की बारी आई, तो हम को सहाबा किराम से काट कर रख दिया। उस नुक्ता आफ़रीनी से लोग इस्लाम के क़रीब होंगे या इस्लाम से दूर! मुस्तनद मुफ़स्सेरीन ने इस आयत को अपने उमूम पर ही रखा है, चुनांच अल्लामा नस्फी इस आयत की तफ़सीर में लिखते हैं : (हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वेसाल के बाद एक आराबी हुज़ूरे अकरम की क़बरे अनवर पर आया और आपकी क़बर से लिपट गया और ख़ाक सर पर बिखेर कर कहने लगा जिस वक्त कुरआने करीम नाज़िल हुआ हम ने सुना आपने फरमायाः वलौ अन्नहुम इज़ ज़लमू अल-आयह में गुनाह करके अपनी जान पर जुल्म कर चुका हूँ और आपकी बारगाह में आ कर अल्लाह तआला से मुआफ़ी माँगता हूँ, हुज़ूर आप मेरे लिए अल्लाह तआला से शफाअत कीजिए, उसके बाद क़ब्र से आवाज़ आई, जाओ तुम को बख़्श दिया गया ।) और हाफ़िज़ इब्ने कसीर इसी आयत के तहत लिखते हैं : ولو انهم اذ ظلموا أنفسهم (نساء:۲۴) इस आयत में अल्लाह तआला ने तमाम ख़ताकारों और गुनाहगारों
की हयाते ज़ाहिरी के साथ मुक़ैयद नहीं किया जा सकता और अगर • बिल-फ़र्ज़ उसको हुज़ूरे अकरम की हयाते ज़ाहिरी के साथ मुकैयद किया। तो उसका मतलब यह होगा कि सहाबा किराम जो पहले ही हुज़ूरे अनवर की तबियत और फैज़े सोहबत से मामूर थे। उनकी बख़्शिश के लिए तो एक सूरत मुक़र्रर कर दी और बाद के लोग जो हुज़ूर की तालीम व तर्बियत, फैज़ाने नज़र और शर्फे सोहबत सब से महरूम थे और जो बुअद ज़माना की वजह से गुनाहों में ज़्यादा मुस्तग़रक और बख़्शिश के ज़राए के ज्यादा मुस्तहिक थे। उनकी मग्फिरत के लिए अल्लाह तआला ने उम्मीद का कोई सहारा नहीं छोड़ा और यह अल्लाह तआला के फ़ज़्ले अमीम और उसकी वसीअ रहमत से इंतिहाई मुस्तबअद है, फिर जब कुरआन के तमाम अहकाम तक्लीफीया और सहाबा से लेकर क्यामत तक के तमाम मुसलमानों के लिए आम हैं, तो इस हुक्म को सिर्फ सहाबा के साथ क्यों ख़ास किया जाता है, क्या वहाबिया की इस पख़्सीस से एक आम जहन यह नहीं सोचेगा। अहकामे तक्लीफिया की मशक़्क़त में तो हम को सहाबा के साथ रखा और जब हुसूले शफाअत के इंआम की बारी आई, तो हम को सहाबा किराम से काट कर रख दिया। उस नुक्ता आफ़रीनी से लोग इस्लाम के क़रीब होंगे या इस्लाम से दूर! मुस्तनद मुफ़स्सेरीन ने इस आयत को अपने उमूम पर ही रखा है, चुनांच अल्लामा नस्फी इस आयत की तफ़सीर में लिखते हैं : और हाफ़िज़ इब्ने कसीर इसी आयत के तहत लिखते हैं : ولو انهم اذ ظلموا أنفسهم इस आयत में अल्लाह तआला ने तमाम ख़ताकारों और गुनाहगारों
सैन जुआन अथवा सान जुआन स्पेनी शब्द है संत जॉन के लिये। इस नाम के कई शहर और प्रांत स्पेनी उपनिवेशों में स्थापित हैं। . 1 संबंधः सैन जुआन प्रान्त, अर्जेन्टीना। SUBPAGENAME का ध्वज SUBPAGENAME, अर्जेन्टीना का एक प्रान्त है। इसकी राजधानी सैन जुआन नगर है। .
सैन जुआन अथवा सान जुआन स्पेनी शब्द है संत जॉन के लिये। इस नाम के कई शहर और प्रांत स्पेनी उपनिवेशों में स्थापित हैं। . एक संबंधः सैन जुआन प्रान्त, अर्जेन्टीना। SUBPAGENAME का ध्वज SUBPAGENAME, अर्जेन्टीना का एक प्रान्त है। इसकी राजधानी सैन जुआन नगर है। .
अयोध्या जिले के गोशाईगंज कोतवाली थाना क्षेत्र के दिलासीगंज माझा में अवैध बालू माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस और खनन विभाग ने फ़िल्मी स्टाइल में खनन माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए 63 ट्रक समेत 2 पोकलैंड और 2 जेसीबी को सीज कर ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। आज एसडीएम सदर विशाल कुमार खनन अधिकारी डॉ दीपक नायब तहसीलदार जीएस बर्मा सीओ सदर संदीप सिंह एसएचओ गोसाईगंज संतोष सिंह एसएचओ महाराजगंज अनुपम मिश्रा ने दिलासीगज घाट में बालू के अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया गया। जिसमें कुल 67 वाहन जब्त करते हुए ठेकेदार साहब दीन यादव के खिलाफ दर्ज हुआ है ठेकेदार मौके से फरार हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अयोध्या जिले के गोशाईगंज कोतवाली थाना क्षेत्र के दिलासीगंज माझा में अवैध बालू माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस और खनन विभाग ने फ़िल्मी स्टाइल में खनन माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए तिरेसठ ट्रक समेत दो पोकलैंड और दो जेसीबी को सीज कर ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। आज एसडीएम सदर विशाल कुमार खनन अधिकारी डॉ दीपक नायब तहसीलदार जीएस बर्मा सीओ सदर संदीप सिंह एसएचओ गोसाईगंज संतोष सिंह एसएचओ महाराजगंज अनुपम मिश्रा ने दिलासीगज घाट में बालू के अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया गया। जिसमें कुल सरसठ वाहन जब्त करते हुए ठेकेदार साहब दीन यादव के खिलाफ दर्ज हुआ है ठेकेदार मौके से फरार हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
GST के जरिए महंगाई रोकने की कोशिश करेगी मोदी सरकार! मोदी सरकार अपने महत्वाकांक्षी जीएसटी बिल को लेकर बेहद ही सतर्क है। सरकार बिल को लेकर एक परिषद का गठन कर चुकी है और समय-समय पर मीटिंग करके जीएसटी बिल में सुधार और सिफारिशों पर चर्चा करती रहती है। फिलहाल सरकार की सबसे बड़ी चिंता ये कि कहीं जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई न बढ़ जाए। सरकार प्रस्तावित जीएसटी के तहत कीमतों पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इस बड़े आर्थिक सुधार के लाभ मिल सके और कीमतों में बेवजह इजाफा ना हो। राज्य यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जीएसटी के असर से मांग को बढ़ावा मिले। इसी हफ्ते जीएसटी काउंसिल की बैठक भी होनी है, जिसमें टैक्स रेट, छूट आदि समेत कई प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाना है। सरकार 1 अप्रैल 2017 से जीएसटी लागू करना चाहती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीएसटी लागू होने से जीडीपी ग्रोथ रेट में दो फीसदी का इजाफा हो सकता है। जीएसटी से कंपनियों की लॉजिस्टिक्स और टैक्स लागत में कमी आएगी। सरकार जीएसटी लागू होने की स्थिति में टैक्स पर इनपुट क्रेडिट की सुविधा पाने वाली कंपनियों की मुनाफाखोरी पर नकेल कसे रखना चाहती है। इस मुद्दे पर जीएसटी काउंसिल के सदस्य चिंता जाहिर कर चुके हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम को कानूनी मजबूती नहीं दी गई तो इसका ठीक से क्रियान्वयन मुश्किल है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जीएसटी रेट ज्यादा न हो और क्रेडिट सिस्टम अच्छी तरह काम करे। कुछ देशों में जीएसटी लागू होने पर महंगाई बढ़ी थी। सरकार, भारत में ऐसी स्थिति नहीं बनने देना चाहती है और वह कम टैक्स रेट से शुरुआत करना चाहती है। अरविंद सुब्रमण्यन कमेटी ने ज्यादातर गुड्स के लिए 18 फीसदी स्टैंडर्ड जीएसटी रेट की सिफारिश की है। उसने रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 15-15. 5 फीसदी होने का अनुमान लगाया है।
GST के जरिए महंगाई रोकने की कोशिश करेगी मोदी सरकार! मोदी सरकार अपने महत्वाकांक्षी जीएसटी बिल को लेकर बेहद ही सतर्क है। सरकार बिल को लेकर एक परिषद का गठन कर चुकी है और समय-समय पर मीटिंग करके जीएसटी बिल में सुधार और सिफारिशों पर चर्चा करती रहती है। फिलहाल सरकार की सबसे बड़ी चिंता ये कि कहीं जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई न बढ़ जाए। सरकार प्रस्तावित जीएसटी के तहत कीमतों पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इस बड़े आर्थिक सुधार के लाभ मिल सके और कीमतों में बेवजह इजाफा ना हो। राज्य यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जीएसटी के असर से मांग को बढ़ावा मिले। इसी हफ्ते जीएसटी काउंसिल की बैठक भी होनी है, जिसमें टैक्स रेट, छूट आदि समेत कई प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाना है। सरकार एक अप्रैल दो हज़ार सत्रह से जीएसटी लागू करना चाहती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीएसटी लागू होने से जीडीपी ग्रोथ रेट में दो फीसदी का इजाफा हो सकता है। जीएसटी से कंपनियों की लॉजिस्टिक्स और टैक्स लागत में कमी आएगी। सरकार जीएसटी लागू होने की स्थिति में टैक्स पर इनपुट क्रेडिट की सुविधा पाने वाली कंपनियों की मुनाफाखोरी पर नकेल कसे रखना चाहती है। इस मुद्दे पर जीएसटी काउंसिल के सदस्य चिंता जाहिर कर चुके हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम को कानूनी मजबूती नहीं दी गई तो इसका ठीक से क्रियान्वयन मुश्किल है। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जीएसटी रेट ज्यादा न हो और क्रेडिट सिस्टम अच्छी तरह काम करे। कुछ देशों में जीएसटी लागू होने पर महंगाई बढ़ी थी। सरकार, भारत में ऐसी स्थिति नहीं बनने देना चाहती है और वह कम टैक्स रेट से शुरुआत करना चाहती है। अरविंद सुब्रमण्यन कमेटी ने ज्यादातर गुड्स के लिए अट्ठारह फीसदी स्टैंडर्ड जीएसटी रेट की सिफारिश की है। उसने रेवेन्यू न्यूट्रल रेट पंद्रह-पंद्रह. पाँच फीसदी होने का अनुमान लगाया है।
बूंदी जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर स्थित भीमलत का झरना मार्च महीने में भी पूरे वेग से बह रहा है। 150 फीट ऊपर से गिरते पानी को देखकर दूधिया फॉल का अहसास होता है। बारिश में तो यह विराट रूप ले लेता है, पर खास बात यह है कि बिन बारिश और भरपूर गर्मी में भी यह बहता रहता है। अप्रैल से जून तक इसका फॉल कम हो जाता है। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वीसिंह राजावत बताते हैं कि भीमलत झरने के सालभर बहने की वजह इसके पीछे भीमलत डैम का होना है। इस डैम से सहायक डैम अभयपुरा का लेवल मेंटेन रखने के लिए पानी छोड़ा जाता है। झरना दोनों डैम के बीच है। भीमलत डैम से छोड़ा गया पानी झरने के रूप में 150 फीट नीचे गिरता है और 'एस' आकार की भीमलत वैली में बहते हुए अभयपुरा डैम में समा जाता है। अभयपुरा डैम से नहरें निकलती हैं, जो नकई हजार बीघा जमीन की सिंचाई करती है। पिछले मानसून में अच्छी बारिश और सर्दी में भी बरसात से इस बार भीमलत डैम में भरपूर पानी है। भीमलत डैम मेवाड़-हाड़ौती के संगम पर है। डैम का कैचमेंट एरिया भीलवाड़ा में पड़ता है, पर डैम से सिंचाई बूंदी जिले में होती है। भीलवाड़ा में ऊपर माल का पठार से बूंदी के मैदानी इलाकों में पानी गिरता है। ऐसा बताया जाता है कि वनवास के दौरान पांचों भाई पांडव यहां आए थे। इस स्थल पर बने शिवालय में महादेव का अभिषेक प्रकृति करती है। पहाड़ से बारह माह निकलनेवाले पानी से महादेव का जलाभिषेक होता है। मानसून में सैलानियों का जमघट लगा रहता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बूंदी जिला मुख्यालय से तीस किमी दूर स्थित भीमलत का झरना मार्च महीने में भी पूरे वेग से बह रहा है। एक सौ पचास फीट ऊपर से गिरते पानी को देखकर दूधिया फॉल का अहसास होता है। बारिश में तो यह विराट रूप ले लेता है, पर खास बात यह है कि बिन बारिश और भरपूर गर्मी में भी यह बहता रहता है। अप्रैल से जून तक इसका फॉल कम हो जाता है। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वीसिंह राजावत बताते हैं कि भीमलत झरने के सालभर बहने की वजह इसके पीछे भीमलत डैम का होना है। इस डैम से सहायक डैम अभयपुरा का लेवल मेंटेन रखने के लिए पानी छोड़ा जाता है। झरना दोनों डैम के बीच है। भीमलत डैम से छोड़ा गया पानी झरने के रूप में एक सौ पचास फीट नीचे गिरता है और 'एस' आकार की भीमलत वैली में बहते हुए अभयपुरा डैम में समा जाता है। अभयपुरा डैम से नहरें निकलती हैं, जो नकई हजार बीघा जमीन की सिंचाई करती है। पिछले मानसून में अच्छी बारिश और सर्दी में भी बरसात से इस बार भीमलत डैम में भरपूर पानी है। भीमलत डैम मेवाड़-हाड़ौती के संगम पर है। डैम का कैचमेंट एरिया भीलवाड़ा में पड़ता है, पर डैम से सिंचाई बूंदी जिले में होती है। भीलवाड़ा में ऊपर माल का पठार से बूंदी के मैदानी इलाकों में पानी गिरता है। ऐसा बताया जाता है कि वनवास के दौरान पांचों भाई पांडव यहां आए थे। इस स्थल पर बने शिवालय में महादेव का अभिषेक प्रकृति करती है। पहाड़ से बारह माह निकलनेवाले पानी से महादेव का जलाभिषेक होता है। मानसून में सैलानियों का जमघट लगा रहता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जानी-मानी न्यूज एजेंसी 'एशियन न्यूज इंटरनेशनल' (ANI) में तमाम पदों पर वैकेंसी है। इसके लिए योग्य व इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यदि आप पत्रकार हैं और नई नौकरी की तलाश में हैं अथवा पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो 'पंजाब केसरी' समूह के हिंदी अखबार 'नवोदय टाइम्स' से जुड़ने का आपके लिए काफी अच्छा मौका है। इस कंपनी के साथ वर्ष 2011 से जुड़े हुए हैं देवराज सान्याल। इससे पहले वह 'Percept Sports & Entertainment' में ग्रुप सीईओ के तौर पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। यहां उन्होंने करीब 13 महीने पहले ही बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर जॉइन किया था और ईवनिंग शिफ्ट इंचार्ज के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। अभी तक बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर 'आजतक' (डिजिटल) की कमान संभाल रहे पाणिनि आनंद ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पाणिनि आनंद का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में पता नहीं चल सका है। इससे पहले हिमांशु शेखर 'जी डिजिटल' में कार्यरत थे। वह इस समूह की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' (india. com) में करीब ढाई साल से बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लगभग 71 वर्षीय टोनी जेसुदासन का सोमवार को निधन हो गया था। दिल्ली के बरार स्क्वायर स्थित यूआरआई एंक्लेव के श्मशान घाट पर मंगलवार की अपराह्न करीब तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुनील कुमार सीरीज इससे पहले 'जी डिजिटल' की हिंदी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' (india. com) में बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से पिछले दिनों उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जेसुदासन धीरूभाई अंबानी के छोटे बेटे अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी थे और करीब तीन दशक से रिलायंस समूह से जुड़े हुए थे। इस मीडिया नेटवर्क को अपनी डिजिटल टीम (हिंदी व अंग्रेजी) के लिए पॉलिटिकल व बिजनेस बीट पर सब एडिटर-सीनियर सब एडिटर की तलाश है। दो दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय इस्माइल जफर खान इससे पहले उर्दू अखबार 'रोजनामचा राष्ट्रीय सहारा' और उर्दू न्यूज चैनल 'आलमी सहारा टीवी' में बतौर ग्रुप एडिटर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। 'यूट्यूब' (YouTube) की चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर सुसान वोज्स्की (Susan Wojcicki) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि अब वह परिवार, स्वास्थ्य और निजी प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा फोकस करेंगी। वह 'जी डिजिटल' (Zee Digital) की हिंदी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' (india. com) में करीब पांच साल से कार्यरत थे और बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। कंपनी ने 'बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज' (BSE) को सूचित किया है कि उन्होंने इस संबंध में पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय के समक्ष आवश्यक आवेदन दाखिल करने की प्रबंधन को सलाह दी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में लिखा, अडानी महामेगा घोटाले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी ने हमें 'हम अडानी के हैं कौन' श्रृंखला शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया है।
जानी-मानी न्यूज एजेंसी 'एशियन न्यूज इंटरनेशनल' में तमाम पदों पर वैकेंसी है। इसके लिए योग्य व इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यदि आप पत्रकार हैं और नई नौकरी की तलाश में हैं अथवा पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो 'पंजाब केसरी' समूह के हिंदी अखबार 'नवोदय टाइम्स' से जुड़ने का आपके लिए काफी अच्छा मौका है। इस कंपनी के साथ वर्ष दो हज़ार ग्यारह से जुड़े हुए हैं देवराज सान्याल। इससे पहले वह 'Percept Sports & Entertainment' में ग्रुप सीईओ के तौर पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। यहां उन्होंने करीब तेरह महीने पहले ही बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर जॉइन किया था और ईवनिंग शिफ्ट इंचार्ज के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। अभी तक बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर 'आजतक' की कमान संभाल रहे पाणिनि आनंद ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पाणिनि आनंद का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में पता नहीं चल सका है। इससे पहले हिमांशु शेखर 'जी डिजिटल' में कार्यरत थे। वह इस समूह की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' में करीब ढाई साल से बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लगभग इकहत्तर वर्षीय टोनी जेसुदासन का सोमवार को निधन हो गया था। दिल्ली के बरार स्क्वायर स्थित यूआरआई एंक्लेव के श्मशान घाट पर मंगलवार की अपराह्न करीब तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुनील कुमार सीरीज इससे पहले 'जी डिजिटल' की हिंदी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' में बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से पिछले दिनों उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जेसुदासन धीरूभाई अंबानी के छोटे बेटे अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी थे और करीब तीन दशक से रिलायंस समूह से जुड़े हुए थे। इस मीडिया नेटवर्क को अपनी डिजिटल टीम के लिए पॉलिटिकल व बिजनेस बीट पर सब एडिटर-सीनियर सब एडिटर की तलाश है। दो दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय इस्माइल जफर खान इससे पहले उर्दू अखबार 'रोजनामचा राष्ट्रीय सहारा' और उर्दू न्यूज चैनल 'आलमी सहारा टीवी' में बतौर ग्रुप एडिटर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। 'यूट्यूब' की चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर सुसान वोज्स्की ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा है कि अब वह परिवार, स्वास्थ्य और निजी प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा फोकस करेंगी। वह 'जी डिजिटल' की हिंदी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया. कॉम' में करीब पांच साल से कार्यरत थे और बतौर एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। कंपनी ने 'बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज' को सूचित किया है कि उन्होंने इस संबंध में पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय के समक्ष आवश्यक आवेदन दाखिल करने की प्रबंधन को सलाह दी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में लिखा, अडानी महामेगा घोटाले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी ने हमें 'हम अडानी के हैं कौन' श्रृंखला शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया है।
जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एके पार्टी) के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने रेलवे के बारे में बयान दिया, जो समय-समय पर एग्री में एजेंडे में आता है। एग्री डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष उमर येल्डिज़ ने सोशल मीडिया पर दिए एक बयान में कहा कि गैर-सरकारी संगठनों के प्रभारी एके पार्टी के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने उनके द्वारा बताई गई समस्याओं का जवाब दिया। यह कहते हुए कि उन्होंने तूतक रोड और रेलवे के बारे में सवाल पूछे, जहां काम चल रहा है, येल्डिज़ ने कहा, "श्रीमान राष्ट्रपति ने हमारे सवालों का जवाब दिया। एक अच्छा और एक बुरा परिणाम हुआ. मुझे उम्मीद है कि Ağrı की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो जाएगा और हम इन मुद्दों पर नज़र रखना जारी रखेंगे।" यिल्डिज़ ने अक पार्टी के अध्यक्ष हारुन कराका द्वारा दिए गए निम्नलिखित शब्दों को साझा कियाः "अक पार्टी के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने हमारे सवालों का जवाब निम्नलिखित तरीके से दिया। हमारे देश में रेलवे का निर्माण कॉरिडोर दृष्टिकोण से होता है। गलियारों का निर्धारण देश के रेलवे नेटवर्क की अखंडता, कार्गो और यात्रियों की क्षमता, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ उनके कनेक्शन और स्थलाकृति की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाता है। इस संदर्भ में भविष्य में हमारे दर्द प्रांत की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। 2017 के अंत तक, एरी-हमूर-तुतक-पटनोस (डीएपी) निवेश कार्यक्रम के दायरे में हमूर-तुतक-पटनोस के बीच 64 किमी विभाजित सड़कें बनाई गईं। 11 किमी सेक्शन पर काम जारी है। नवंबर 2018 में काम पूरा होने की उम्मीद है।
जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने रेलवे के बारे में बयान दिया, जो समय-समय पर एग्री में एजेंडे में आता है। एग्री डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष उमर येल्डिज़ ने सोशल मीडिया पर दिए एक बयान में कहा कि गैर-सरकारी संगठनों के प्रभारी एके पार्टी के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने उनके द्वारा बताई गई समस्याओं का जवाब दिया। यह कहते हुए कि उन्होंने तूतक रोड और रेलवे के बारे में सवाल पूछे, जहां काम चल रहा है, येल्डिज़ ने कहा, "श्रीमान राष्ट्रपति ने हमारे सवालों का जवाब दिया। एक अच्छा और एक बुरा परिणाम हुआ. मुझे उम्मीद है कि Ağrı की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो जाएगा और हम इन मुद्दों पर नज़र रखना जारी रखेंगे।" यिल्डिज़ ने अक पार्टी के अध्यक्ष हारुन कराका द्वारा दिए गए निम्नलिखित शब्दों को साझा कियाः "अक पार्टी के उपाध्यक्ष हारुन कराका ने हमारे सवालों का जवाब निम्नलिखित तरीके से दिया। हमारे देश में रेलवे का निर्माण कॉरिडोर दृष्टिकोण से होता है। गलियारों का निर्धारण देश के रेलवे नेटवर्क की अखंडता, कार्गो और यात्रियों की क्षमता, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ उनके कनेक्शन और स्थलाकृति की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाता है। इस संदर्भ में भविष्य में हमारे दर्द प्रांत की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। दो हज़ार सत्रह के अंत तक, एरी-हमूर-तुतक-पटनोस निवेश कार्यक्रम के दायरे में हमूर-तुतक-पटनोस के बीच चौंसठ किमी विभाजित सड़कें बनाई गईं। ग्यारह किमी सेक्शन पर काम जारी है। नवंबर दो हज़ार अट्ठारह में काम पूरा होने की उम्मीद है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मीडिया कर्मियों और पुलिस के लोगों ने बचाया। जानकारी के मुताबिक मनोज पिछले कई दिनों से पुलिस आफिस और थाने के चक्कर काट रहा है। इंचौली थाने के निवासी मनोज के साथ मारपीट की गयी थी और कई हजार रूपये से उसके साथ ठगी की गयी थी। केस दर्ज होने के वावजूद पुलिस इस मामले में हीलाहवाली कर रही है और आरोपियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी है। पुलिस की चौखट से निराश मनोज की आज जब एसएसपी से मुलाकात न हो सकी तो उसने खुद को खत्म करने की कोशिश की । एसएसपी ने बताया कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है। लेकिन इस कार्रवाई में कितना और वक्त लगेगा. . . कप्तान साहब यह नहीं बता सके।
मीडिया कर्मियों और पुलिस के लोगों ने बचाया। जानकारी के मुताबिक मनोज पिछले कई दिनों से पुलिस आफिस और थाने के चक्कर काट रहा है। इंचौली थाने के निवासी मनोज के साथ मारपीट की गयी थी और कई हजार रूपये से उसके साथ ठगी की गयी थी। केस दर्ज होने के वावजूद पुलिस इस मामले में हीलाहवाली कर रही है और आरोपियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी है। पुलिस की चौखट से निराश मनोज की आज जब एसएसपी से मुलाकात न हो सकी तो उसने खुद को खत्म करने की कोशिश की । एसएसपी ने बताया कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है। लेकिन इस कार्रवाई में कितना और वक्त लगेगा. . . कप्तान साहब यह नहीं बता सके।
TV Serials Update 22 November 2022: आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि अभिमन्यु और अक्षरा दोनों आरोही और नील से बात करने के लिए जाते हैं। नील अभिमन्यु की बात समझ जाता है लेकिन आरोही अक्षरा से बदसलूकी करती है जिसके बाद माहौल को ठंडा करने के लिए अभि और अक्षरा आइसक्रीम खाने जाते हैं। नई दिल्ली। छोटे पर्दे के पॉपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है और कुंडली भाग्य में रोजाना ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये रिश्ता क्या कहलाता है के बीते एपिसोड में आपने देखा कि अक्षरा कहती है कि उन्हें किसी ने बताया नहीं कि घर में पूजा रखी गई है। । नील इस बात पर भड़क उठता है और कहता है कि आपको सिर्फ आरोही को गलत साबित करना होता है। अपकमिंग एपिसोड में अस्पताल के डिसीजन को लेकर नील और अभिमन्यु आपस में भिड़ जाते हैं। वहीं कुंडली भाग्य में अंजलि शराब ऑफर करके ऋषभ का फायदा उठाने की कोशिश करती है। ऋषभ अपनी जान छुड़ाकर वहां से भाग आता है लेकिन वो परेशान होता है कि आखिर अंजलि ने ऐसा क्यों किया। आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि अभिमन्यु और अक्षरा दोनों आरोही और नील से बात करने के लिए जाते हैं। नील अभिमन्यु की बात समझ जाता है लेकिन आरोही अक्षरा से बदसलूकी करती है जिसके बाद माहौल को ठंडा करने के लिए अभि और अक्षरा आइसक्रीम खाने जाते हैं। अगली सुबह आरोही महिमा से बात करती है और कहती है कि वो भी जल्द बिरला अस्पताल ज्वाइन करेगी। तभी महिमा बताती है कि वो अस्पताल की एमडी बनना चाहती है लेकिन ये मौका अभिमन्यु को दिया गया। जिसके बाद अस्पताल में एक शख्स हंगामा करता है कि लिस्ट में उसके भाई का नाम पहले था लेकिन किडनी किसी और दी गई। अस्पताल वालों ने घूस ली है। अभिमन्यु ये सुनकर हैरान हो जाता है और पूछता है कि किसने परमिशन दी। जिसके बाद नील कहता है कि वो उसका फैसला था। अब दोनों भाई आमने-सामने हैं। वहीं कुंडली भाग्य में ऋषभ घर पहुंचता है जहां प्रीता और राखी उसका इंतजार कर होती है। दोनों ऋषभ को देखकर सब बता देती हैं कि घर में क्या क्या हुआ। ऋषभ दोनों को परेशान देखकर कुछ नहीं बताता। वहीं प्रीता पूजा का सामान लेने के लिए जाती है जहां कुछ गुंडे उसका बैग लेकर भागने की कोशिश करते है लेकिन अर्जुन गुंडों की पिटाई कर देता है। अर्जुन भावनाओं में बहकर प्रीता को अपनी पत्नी कहता है। ये सुनकर प्रीता को गुस्सा आता है और वो अर्जुन से पूछती है कि ऐसा कहने की हिम्मत कैसे हुई। अर्जुन बहाना बनाकर टाल देता है और कहता है कि तुम करण की पत्नी हो। प्रीता रोने लगती है।
TV Serials Update बाईस नवंबरember दो हज़ार बाईस: आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि अभिमन्यु और अक्षरा दोनों आरोही और नील से बात करने के लिए जाते हैं। नील अभिमन्यु की बात समझ जाता है लेकिन आरोही अक्षरा से बदसलूकी करती है जिसके बाद माहौल को ठंडा करने के लिए अभि और अक्षरा आइसक्रीम खाने जाते हैं। नई दिल्ली। छोटे पर्दे के पॉपुलर सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है और कुंडली भाग्य में रोजाना ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये रिश्ता क्या कहलाता है के बीते एपिसोड में आपने देखा कि अक्षरा कहती है कि उन्हें किसी ने बताया नहीं कि घर में पूजा रखी गई है। । नील इस बात पर भड़क उठता है और कहता है कि आपको सिर्फ आरोही को गलत साबित करना होता है। अपकमिंग एपिसोड में अस्पताल के डिसीजन को लेकर नील और अभिमन्यु आपस में भिड़ जाते हैं। वहीं कुंडली भाग्य में अंजलि शराब ऑफर करके ऋषभ का फायदा उठाने की कोशिश करती है। ऋषभ अपनी जान छुड़ाकर वहां से भाग आता है लेकिन वो परेशान होता है कि आखिर अंजलि ने ऐसा क्यों किया। आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि अभिमन्यु और अक्षरा दोनों आरोही और नील से बात करने के लिए जाते हैं। नील अभिमन्यु की बात समझ जाता है लेकिन आरोही अक्षरा से बदसलूकी करती है जिसके बाद माहौल को ठंडा करने के लिए अभि और अक्षरा आइसक्रीम खाने जाते हैं। अगली सुबह आरोही महिमा से बात करती है और कहती है कि वो भी जल्द बिरला अस्पताल ज्वाइन करेगी। तभी महिमा बताती है कि वो अस्पताल की एमडी बनना चाहती है लेकिन ये मौका अभिमन्यु को दिया गया। जिसके बाद अस्पताल में एक शख्स हंगामा करता है कि लिस्ट में उसके भाई का नाम पहले था लेकिन किडनी किसी और दी गई। अस्पताल वालों ने घूस ली है। अभिमन्यु ये सुनकर हैरान हो जाता है और पूछता है कि किसने परमिशन दी। जिसके बाद नील कहता है कि वो उसका फैसला था। अब दोनों भाई आमने-सामने हैं। वहीं कुंडली भाग्य में ऋषभ घर पहुंचता है जहां प्रीता और राखी उसका इंतजार कर होती है। दोनों ऋषभ को देखकर सब बता देती हैं कि घर में क्या क्या हुआ। ऋषभ दोनों को परेशान देखकर कुछ नहीं बताता। वहीं प्रीता पूजा का सामान लेने के लिए जाती है जहां कुछ गुंडे उसका बैग लेकर भागने की कोशिश करते है लेकिन अर्जुन गुंडों की पिटाई कर देता है। अर्जुन भावनाओं में बहकर प्रीता को अपनी पत्नी कहता है। ये सुनकर प्रीता को गुस्सा आता है और वो अर्जुन से पूछती है कि ऐसा कहने की हिम्मत कैसे हुई। अर्जुन बहाना बनाकर टाल देता है और कहता है कि तुम करण की पत्नी हो। प्रीता रोने लगती है।
मुंबई : शीना मर्डर मिस्ट्री में अब रिश्तों में भी दरार आने लगी है. पुलिस पूछताछ के दौरान स्टार इंडिया के पूर्व CEO पीटर मुखर्जी ने पुलिस से कहा कि उनका अब इंद्राणी मुखर्जी से रिश्ता खत्म हो चुका है. इस दौरान मुखर्जी के साथ उनका CA भी पुलिस स्टेशन आया था. इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों- इंद्राणी मुखर्जी, संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय को शनिवार को बांद्रा मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने इन तीनों की पुलिस कस्टडी 7 सितंबर तक बढ़ा दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार पीटर ने पुलिस पूछताछ के दौरान कहा कि 'जहां तक मेरा सवाल है, मेरा अब इंद्राणी से कोई रिश्ता नहीं रहा. मैं ऐसी पत्नी से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता जिसने मर्डर की बात कबूल कर ली हो. ' पूछताछ के दौरान पुलिस ने जब पीटर को यह बताया कि इंद्राणी के कुछ सीक्रेट बैंक अकाउंट्स थे, तो पीटर हैरान रह गए. पीटर ने कहा कि उन्हें इन अकाउंट्स के बारे में जानकारी नहीं है. पुलिस के मुताबिक इंद्राणी के सीक्रेट अकाउंट्स दिल्ली, मुंबई के अलावा ब्रिटेन, सिंगापुर, स्पेन और लग्जमबर्ग में भी हैं. दिल्ली और मुंबई के जिन बैंकों में इंद्राणी के सीक्रेट अकाउंट्स पाए गए हैं, उन्हीं बैंकों में दोनों के ज्वाइंट अकाउंट भी हैं.
मुंबई : शीना मर्डर मिस्ट्री में अब रिश्तों में भी दरार आने लगी है. पुलिस पूछताछ के दौरान स्टार इंडिया के पूर्व CEO पीटर मुखर्जी ने पुलिस से कहा कि उनका अब इंद्राणी मुखर्जी से रिश्ता खत्म हो चुका है. इस दौरान मुखर्जी के साथ उनका CA भी पुलिस स्टेशन आया था. इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों- इंद्राणी मुखर्जी, संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय को शनिवार को बांद्रा मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने इन तीनों की पुलिस कस्टडी सात सितंबर तक बढ़ा दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार पीटर ने पुलिस पूछताछ के दौरान कहा कि 'जहां तक मेरा सवाल है, मेरा अब इंद्राणी से कोई रिश्ता नहीं रहा. मैं ऐसी पत्नी से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता जिसने मर्डर की बात कबूल कर ली हो. ' पूछताछ के दौरान पुलिस ने जब पीटर को यह बताया कि इंद्राणी के कुछ सीक्रेट बैंक अकाउंट्स थे, तो पीटर हैरान रह गए. पीटर ने कहा कि उन्हें इन अकाउंट्स के बारे में जानकारी नहीं है. पुलिस के मुताबिक इंद्राणी के सीक्रेट अकाउंट्स दिल्ली, मुंबई के अलावा ब्रिटेन, सिंगापुर, स्पेन और लग्जमबर्ग में भी हैं. दिल्ली और मुंबई के जिन बैंकों में इंद्राणी के सीक्रेट अकाउंट्स पाए गए हैं, उन्हीं बैंकों में दोनों के ज्वाइंट अकाउंट भी हैं.
नई दिल्ली। इंफोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने से शिक्षण संबंधी गतिविधियों के लिये ऑनलाइन माध्यम अपनाया जाना अल्पकालिक समाधान है। स्कूलों को बाधाओं से पार पाते हुये काम करने में सक्षम बनाना होगा। उन्होंने अशोक यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित आभासी संगोष्ठी 'स्कूलों का भविष्यः कोविड-19 की चुनौतियों एवं अन्य से उबरना' को संबोधित करते हुए कहा, हमें स्कूलों के बारे में इस तरह से सोचने की जरूरत है कि वे किसी भी मुसीबत में निर्बाध तरीके से काम कर सकें।
नई दिल्ली। इंफोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने से शिक्षण संबंधी गतिविधियों के लिये ऑनलाइन माध्यम अपनाया जाना अल्पकालिक समाधान है। स्कूलों को बाधाओं से पार पाते हुये काम करने में सक्षम बनाना होगा। उन्होंने अशोक यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित आभासी संगोष्ठी 'स्कूलों का भविष्यः कोविड-उन्नीस की चुनौतियों एवं अन्य से उबरना' को संबोधित करते हुए कहा, हमें स्कूलों के बारे में इस तरह से सोचने की जरूरत है कि वे किसी भी मुसीबत में निर्बाध तरीके से काम कर सकें।
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS)) इस्लामाबादः इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और सड़क जाम के बीच नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) अल-कादिर ट्रस्ट मामले में पूछताछ के लिए पूर्व प्रधानमंत्री की 14 दिन की न्यायिक हिरासत मांगने की तैयारी में है। लेटेस्ट रिपोटरें के अनुसार, इमरान खान को वर्तमान में इस्लामाबाद में पुलिस लाइंस गेस्ट हाउस में रखा गया है। इस गेस्ट हाउस को उप-जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व पीएम इमरान खान को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों की एक टीम उनकी चिकित्सा जांच पूरी और फिर उन्हें गेस्ट हाउस ले जाया गया। इसके अलावा, सरकार ने वन-टाइम व्यवस्था के रूप में एक अधिसूचना भी जारी की है, जिसमें उसी पुलिस लाइन गेस्ट हाउस को एनएबी मामले की सुनवाई और बुधवार को तोशखाना सुनवाई के लिए घोषित किया है। इमरान खान को तोशखाना मामले में आरोपित किया जाएगा, जबकि उन्हें अल-कादिर ट्रस्ट मामले में एनएबी के सामने भी लाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, एनएबी पहले ही अल-कादिर ट्रस्ट मामले और खान के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर चुकी है। एनएबी और रेंजर्स के अधिकारियों ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री को इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) के बाहर से गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। पीटीआई समर्थकों और नेताओं द्वारा अवैध रूप से की गई गिरफ्तारी की आलोचना को भी उस समय झटका लगा जब आईएचसी ने इसे कानूनी और कानून के अनुसार घोषित किया। बुधवार को दो महत्वपूर्ण सुनवाई के परिणाम देश में अशांति और विरोध की स्थिति का निर्धारण करेंगे। हालांकि, पाकिस्तान में समग्र स्थिति बेहद कमजोर हो गई है क्योंकि जनता के बीच खान का व्यापक समर्थन, सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बेकाबू चुनौती में बदल सकता है, जो निश्चित रूप से देश को गृह युद्ध जैसी स्थिति की ओर धकेल सकता है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
) इस्लामाबादः इमरान खान की गिरफ्तारी के खिलाफ पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और सड़क जाम के बीच नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो अल-कादिर ट्रस्ट मामले में पूछताछ के लिए पूर्व प्रधानमंत्री की चौदह दिन की न्यायिक हिरासत मांगने की तैयारी में है। लेटेस्ट रिपोटरें के अनुसार, इमरान खान को वर्तमान में इस्लामाबाद में पुलिस लाइंस गेस्ट हाउस में रखा गया है। इस गेस्ट हाउस को उप-जेल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व पीएम इमरान खान को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों की एक टीम उनकी चिकित्सा जांच पूरी और फिर उन्हें गेस्ट हाउस ले जाया गया। इसके अलावा, सरकार ने वन-टाइम व्यवस्था के रूप में एक अधिसूचना भी जारी की है, जिसमें उसी पुलिस लाइन गेस्ट हाउस को एनएबी मामले की सुनवाई और बुधवार को तोशखाना सुनवाई के लिए घोषित किया है। इमरान खान को तोशखाना मामले में आरोपित किया जाएगा, जबकि उन्हें अल-कादिर ट्रस्ट मामले में एनएबी के सामने भी लाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, एनएबी पहले ही अल-कादिर ट्रस्ट मामले और खान के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर चुकी है। एनएबी और रेंजर्स के अधिकारियों ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर से गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। पीटीआई समर्थकों और नेताओं द्वारा अवैध रूप से की गई गिरफ्तारी की आलोचना को भी उस समय झटका लगा जब आईएचसी ने इसे कानूनी और कानून के अनुसार घोषित किया। बुधवार को दो महत्वपूर्ण सुनवाई के परिणाम देश में अशांति और विरोध की स्थिति का निर्धारण करेंगे। हालांकि, पाकिस्तान में समग्र स्थिति बेहद कमजोर हो गई है क्योंकि जनता के बीच खान का व्यापक समर्थन, सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बेकाबू चुनौती में बदल सकता है, जो निश्चित रूप से देश को गृह युद्ध जैसी स्थिति की ओर धकेल सकता है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मिस इंडिया रह चुकी बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अपनी डेब्यू फिल्म 'आशिक बनाया आपने' में जबरदस्त बोल्ड सीन देकर लोगों का दिल जीत लिया था। हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं जिन्हें लेकर वह पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्होंने #metoo कैम्पेन के तहत कई दिग्गज सेलेब्रिटीज पर यौन शोषण का आरोप लगाया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर इस टॉपिक पर बहस छेड़ दी है। तनुश्री की ये तस्वीर साल 2004 की है जब उन्होंने मिस इंडिया यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने मिस यूनिवर्स 2004 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें वह टॉप 10 में जगह बना पाई थीं। इसके बाद साल 2005 में तनुश्री ने फिल्म 'आशिक बनाया आपने' से डेब्यू किया था। पहली फिल्म में ही उनकी बोल्डनेस और खूबसूरती का हर कोई कायल हो गया था, लेकिन आज वह इतना बदल गई हैं कि अगर आप उनकी लेटेस्ट तस्वीरों को ध्यान से देखेंगे तो शायद आप उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे। तनुश्री के पहले के और अब के लुक में जमीन आसमान का फर्क है। इस बात का अंदाजा आप खुद उनकी इन लेटेस्ट तस्वीरों को देखकर लगा सकते हैं। पहले के मुकाबले वह काफी बदल गई हैं और उनका वजन भी काफी बढ़ गया है। हॉट तनुश्री अब पूरे कपड़ों में नजर आने लगी हैं। उनके चेहरे पर भी काफी फैट जमा हो गया है जिस वजह से उनको पहचान पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। शुरुआत में जब तनुश्री का यह लुक सामने आया तो उनके फैंस के लिए ये काफी हैरान करने वाला था।
मिस इंडिया रह चुकी बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अपनी डेब्यू फिल्म 'आशिक बनाया आपने' में जबरदस्त बोल्ड सीन देकर लोगों का दिल जीत लिया था। हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं जिन्हें लेकर वह पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्होंने #metoo कैम्पेन के तहत कई दिग्गज सेलेब्रिटीज पर यौन शोषण का आरोप लगाया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर इस टॉपिक पर बहस छेड़ दी है। तनुश्री की ये तस्वीर साल दो हज़ार चार की है जब उन्होंने मिस इंडिया यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने मिस यूनिवर्स दो हज़ार चार में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें वह टॉप दस में जगह बना पाई थीं। इसके बाद साल दो हज़ार पाँच में तनुश्री ने फिल्म 'आशिक बनाया आपने' से डेब्यू किया था। पहली फिल्म में ही उनकी बोल्डनेस और खूबसूरती का हर कोई कायल हो गया था, लेकिन आज वह इतना बदल गई हैं कि अगर आप उनकी लेटेस्ट तस्वीरों को ध्यान से देखेंगे तो शायद आप उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे। तनुश्री के पहले के और अब के लुक में जमीन आसमान का फर्क है। इस बात का अंदाजा आप खुद उनकी इन लेटेस्ट तस्वीरों को देखकर लगा सकते हैं। पहले के मुकाबले वह काफी बदल गई हैं और उनका वजन भी काफी बढ़ गया है। हॉट तनुश्री अब पूरे कपड़ों में नजर आने लगी हैं। उनके चेहरे पर भी काफी फैट जमा हो गया है जिस वजह से उनको पहचान पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। शुरुआत में जब तनुश्री का यह लुक सामने आया तो उनके फैंस के लिए ये काफी हैरान करने वाला था।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की ओर से कोरोना प्रबंधन पर अपनी सरकार की विफलता को लेकर मीडिया को दी गयी खुली चेतावनी के बाद अब तक राज्य में सात पत्रकारों को असामाजिक तत्व अपना निशाना बना चुके हैं। उत्तरी त्रिपुरा के फातीक्रोय में निर्माण माफियाओं और गिरोह में शामिल अभियन्ता ने स्थानीय दैनिक में काम करने वाले सातवें पत्रकार तपन बानिक को निशाना बनाते हुए उस पर हमला किया। तपन को एक स्कूल की लेबोरेट्री के नवनिर्मित छत गिरने संबंधी खबर को लेकर यह गिरोह पिछले दो दिनों से धमकी दे रहा था। त्रिपुरा श्रमजीवी पत्रकार संघ ने तपन पर हुए हमले में शामिल सभी लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक तपन तीन दिन पहले अभियन्ता शांतनु भौमिक से इस निर्माण के बारे में जानकारी मांगने गये थे, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी खुलासा करने से इंकार कर दिया। इसके चंद मिनटों के बाद आरोपी ठेकेदार आकाश कार का फोन तपन को आया, जिसमें उसे मामले को आगे नहीं बढ़ाने की धमकी दी तथा कथित रूप से देब की ओर से 11 सितंबर को सार्वजनिक समारोह के दौरान मीडिया को दी गयी चेतावनी की याद दिलायी। तपन यह खबर प्रकाशित नहीं कर पाये, लेकिन यह खबर किसी दूसरे समाचारपत्र में प्रकाशित हो गयी जिसमें इस हादसे के लिए शांतनु और आकाश को जिम्मेदार ठहराया गया। इस मामले में तपन को जिम्मेदार मानते हुए उसे फिर से गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गयी। तपन ने इस मामले की पुलिस को जानकारी दी, लेकिन कोई शिकायत नहीं दर्ज करायी क्योंकि उसके माता-पिता के कोरोना से संक्रमित होने के बाद परिवार के सभी सदस्य क्वारंटीन में हैं।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की ओर से कोरोना प्रबंधन पर अपनी सरकार की विफलता को लेकर मीडिया को दी गयी खुली चेतावनी के बाद अब तक राज्य में सात पत्रकारों को असामाजिक तत्व अपना निशाना बना चुके हैं। उत्तरी त्रिपुरा के फातीक्रोय में निर्माण माफियाओं और गिरोह में शामिल अभियन्ता ने स्थानीय दैनिक में काम करने वाले सातवें पत्रकार तपन बानिक को निशाना बनाते हुए उस पर हमला किया। तपन को एक स्कूल की लेबोरेट्री के नवनिर्मित छत गिरने संबंधी खबर को लेकर यह गिरोह पिछले दो दिनों से धमकी दे रहा था। त्रिपुरा श्रमजीवी पत्रकार संघ ने तपन पर हुए हमले में शामिल सभी लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक तपन तीन दिन पहले अभियन्ता शांतनु भौमिक से इस निर्माण के बारे में जानकारी मांगने गये थे, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी खुलासा करने से इंकार कर दिया। इसके चंद मिनटों के बाद आरोपी ठेकेदार आकाश कार का फोन तपन को आया, जिसमें उसे मामले को आगे नहीं बढ़ाने की धमकी दी तथा कथित रूप से देब की ओर से ग्यारह सितंबर को सार्वजनिक समारोह के दौरान मीडिया को दी गयी चेतावनी की याद दिलायी। तपन यह खबर प्रकाशित नहीं कर पाये, लेकिन यह खबर किसी दूसरे समाचारपत्र में प्रकाशित हो गयी जिसमें इस हादसे के लिए शांतनु और आकाश को जिम्मेदार ठहराया गया। इस मामले में तपन को जिम्मेदार मानते हुए उसे फिर से गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गयी। तपन ने इस मामले की पुलिस को जानकारी दी, लेकिन कोई शिकायत नहीं दर्ज करायी क्योंकि उसके माता-पिता के कोरोना से संक्रमित होने के बाद परिवार के सभी सदस्य क्वारंटीन में हैं।
श्री सांवलिया धाम आश्रम मुंगना में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष में रविवार को सुबह संतो का जुलूस निकाला गया। वही शाम को भजन संध्या और रात्रि जागरण कार्यक्रम होगा। कल सुबह से दिनभर गुरु चरण पूजा होगी। मुंगाना आश्रम में मेवाड़ महा मंडलेश्वर और आश्रम के महंत श्री चेतन दास जी महाराज के सानिध्य में आश्रम में परंपरा अनुसार गुरु पूर्णिमा महोत्सव गुरुवार से ही मनाया जा रहा है। जिसमें प्रदेश सहित कई प्रांतों के सैकड़ों साधु संत यहां पहुंचे हैं। महोत्सव के अंतर्गत आज सुबह आश्रम में पहुंचे सैकड़ों साधु संतों का वहां जुलूस निकाला गया। गाजे बाजे और ठाकुर जी के बेवाण के साथ जुलूस आश्रम से शुरू हुआ। जो पूरे गांव का भ्रमण कर पुनः आश्रम पंहुचा। गांव में जगह-जगह साधु-संतों की अगवानी की गई। इसके बाद आश्रम में संत सेवा के साथ इन्हें भोजन करवाया गया। आश्रम की परंपरानुसार आश्रम की ओर से इन साधु संतो को सिख देकर विदा किया जा रहा हैं। आश्रम पर गुरु महिमा आधारित भजन संध्या आयोजित की जाएगी। जिसमें कई प्रसिद्ध भजन गायक भजन प्रस्तुत करेंगे। प्रवचन और रात्रि जागरण भी होगा। भजन संध्या के लिए आश्रम में बड़ी साइज का वाटरप्रूफ डॉग लगवाया गया है। सोमवार को सुबह 4 बजे से आश्रम परिसर में यज्ञ हवन शुरू होगा। महंत श्री अपने ब्रह्मलीन गुरु संत श्री बिहारी दास जी महाराज की प्रतिमा की पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद सुबह 7 बजे महंत श्री गादी पर विराजित होंगे। जहां इनके शिष्य और भक्त अपने गुरु की चरण पूजा कर उनसे कंठी धारण कर आशीर्वाद लेंगे। यह गुरु चरण पूजा का कार्यक्रम दिनभर जारी रहेगा। साथ ही यहां आने वाले हजारों की संख्या में शिष्य और भक्तों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। लगभग 30 बोरी शकर की प्रसादी तैयार की जा रही हैं। जिसमें हलवाइयों के साथ सो व्यक्तियों का दल इस कार्य में लगा हुआ हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
श्री सांवलिया धाम आश्रम मुंगना में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष में रविवार को सुबह संतो का जुलूस निकाला गया। वही शाम को भजन संध्या और रात्रि जागरण कार्यक्रम होगा। कल सुबह से दिनभर गुरु चरण पूजा होगी। मुंगाना आश्रम में मेवाड़ महा मंडलेश्वर और आश्रम के महंत श्री चेतन दास जी महाराज के सानिध्य में आश्रम में परंपरा अनुसार गुरु पूर्णिमा महोत्सव गुरुवार से ही मनाया जा रहा है। जिसमें प्रदेश सहित कई प्रांतों के सैकड़ों साधु संत यहां पहुंचे हैं। महोत्सव के अंतर्गत आज सुबह आश्रम में पहुंचे सैकड़ों साधु संतों का वहां जुलूस निकाला गया। गाजे बाजे और ठाकुर जी के बेवाण के साथ जुलूस आश्रम से शुरू हुआ। जो पूरे गांव का भ्रमण कर पुनः आश्रम पंहुचा। गांव में जगह-जगह साधु-संतों की अगवानी की गई। इसके बाद आश्रम में संत सेवा के साथ इन्हें भोजन करवाया गया। आश्रम की परंपरानुसार आश्रम की ओर से इन साधु संतो को सिख देकर विदा किया जा रहा हैं। आश्रम पर गुरु महिमा आधारित भजन संध्या आयोजित की जाएगी। जिसमें कई प्रसिद्ध भजन गायक भजन प्रस्तुत करेंगे। प्रवचन और रात्रि जागरण भी होगा। भजन संध्या के लिए आश्रम में बड़ी साइज का वाटरप्रूफ डॉग लगवाया गया है। सोमवार को सुबह चार बजे से आश्रम परिसर में यज्ञ हवन शुरू होगा। महंत श्री अपने ब्रह्मलीन गुरु संत श्री बिहारी दास जी महाराज की प्रतिमा की पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद सुबह सात बजे महंत श्री गादी पर विराजित होंगे। जहां इनके शिष्य और भक्त अपने गुरु की चरण पूजा कर उनसे कंठी धारण कर आशीर्वाद लेंगे। यह गुरु चरण पूजा का कार्यक्रम दिनभर जारी रहेगा। साथ ही यहां आने वाले हजारों की संख्या में शिष्य और भक्तों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। लगभग तीस बोरी शकर की प्रसादी तैयार की जा रही हैं। जिसमें हलवाइयों के साथ सो व्यक्तियों का दल इस कार्य में लगा हुआ हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शेयर बाजार आजकल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। दिन पे दिन शेयर बाजार के भारी गिरावत देखने को मिल रही है। शेयर बाजार में शुक्रवार के दिन रिकॉर्ड तोड़ गिरावट देखने को मिली। सिर्फ एक घंटे में ही दोपहर करीब करीब 1 बजे के बाद यह अंक गिरकर 11000 के पास तक पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे की वजह को गुरुवार के दिन मुहर्रम की छुट्टी का बताया जा रहा है। सिर्फ सेंसेक्स हीं नहीं बल्कि निफ्टी ने भी शुक्रवार दोपहर ठंडा होता नजर आया। इसका अंक भी करीब 11000 के आस-पास ही नजर आया। बता दें कि गुरुवार को मुहर्रम के मौके पर बंद रहने के बाद शुक्रवार को बाजार ने रफ्तार भरी थी। सेंसेक्स जहां 172 अंक मजबूत होकर खुला था। वहीं, निफ्टी भी 69 अंक बढ़ा था। लेकिन दोपहर आते-आते सेंसेक्स ने गोते खाने शुरू कर दिए और 1000 अंकों तक गिर गया। दोपहर जब शेयर बाजार में अचानक से सेंसक्स में इतनी भारी गिरावट आ गई थी तब V चार्ट की स्थिति बन गई थी। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब सेंसक्स 1000 अंक तक लुढ़क जाता है। लेकिन बाद में धीरे-धीरे इसमें सुधार होता भी नजर आया। अब यह आंकड़ा 300 अंक पहुंच चुका है।
शेयर बाजार आजकल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। दिन पे दिन शेयर बाजार के भारी गिरावत देखने को मिल रही है। शेयर बाजार में शुक्रवार के दिन रिकॉर्ड तोड़ गिरावट देखने को मिली। सिर्फ एक घंटे में ही दोपहर करीब करीब एक बजे के बाद यह अंक गिरकर ग्यारह हज़ार के पास तक पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे की वजह को गुरुवार के दिन मुहर्रम की छुट्टी का बताया जा रहा है। सिर्फ सेंसेक्स हीं नहीं बल्कि निफ्टी ने भी शुक्रवार दोपहर ठंडा होता नजर आया। इसका अंक भी करीब ग्यारह हज़ार के आस-पास ही नजर आया। बता दें कि गुरुवार को मुहर्रम के मौके पर बंद रहने के बाद शुक्रवार को बाजार ने रफ्तार भरी थी। सेंसेक्स जहां एक सौ बहत्तर अंक मजबूत होकर खुला था। वहीं, निफ्टी भी उनहत्तर अंक बढ़ा था। लेकिन दोपहर आते-आते सेंसेक्स ने गोते खाने शुरू कर दिए और एक हज़ार अंकों तक गिर गया। दोपहर जब शेयर बाजार में अचानक से सेंसक्स में इतनी भारी गिरावट आ गई थी तब V चार्ट की स्थिति बन गई थी। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब सेंसक्स एक हज़ार अंक तक लुढ़क जाता है। लेकिन बाद में धीरे-धीरे इसमें सुधार होता भी नजर आया। अब यह आंकड़ा तीन सौ अंक पहुंच चुका है।
अनुपम खेर (Anupam Kher) जब अपने बेटे सिकंदर खेर के साथ मीडिया इण्डिया के कॉन्फ्रेंस News18 Showreel के मंच पर पधारे, तो वह एक ऐतिहासिक लम्हा था, क्योंकि पिता-पुत्र की जोड़ी पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर एक-साथ मौजूद थी। अनुपम खेर की तरह उनके बेटे सिकंदर खेर भी एक बेहतरीन अभिनेता हैं। अनुपम खेर ने भी मंच पर उनकी अभिनय की प्रशंसा की। सिकंदर से जब पूछा गया कि उम्दा कलाकारों के बेटे होने की वजह से कभी उन पर दबाव तो नहीं आया, तो अभिनेता ने कहा- 'कभी नहीं'। इस पर अनुपम ने अपनी बात रखते हुए बोला कि दबाव में वह आता है जो अच्छा अभिनेता नहीं होता है। उन्होंने बेटे को राष्ट्र के सबसे अच्छे अभिनेताओं में से एक बताया।
अनुपम खेर जब अपने बेटे सिकंदर खेर के साथ मीडिया इण्डिया के कॉन्फ्रेंस Newsअट्ठारह Showreel के मंच पर पधारे, तो वह एक ऐतिहासिक लम्हा था, क्योंकि पिता-पुत्र की जोड़ी पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर एक-साथ मौजूद थी। अनुपम खेर की तरह उनके बेटे सिकंदर खेर भी एक बेहतरीन अभिनेता हैं। अनुपम खेर ने भी मंच पर उनकी अभिनय की प्रशंसा की। सिकंदर से जब पूछा गया कि उम्दा कलाकारों के बेटे होने की वजह से कभी उन पर दबाव तो नहीं आया, तो अभिनेता ने कहा- 'कभी नहीं'। इस पर अनुपम ने अपनी बात रखते हुए बोला कि दबाव में वह आता है जो अच्छा अभिनेता नहीं होता है। उन्होंने बेटे को राष्ट्र के सबसे अच्छे अभिनेताओं में से एक बताया।
इंडोनेशिया एयर एशिया उड़ान 8501 (QZ8501/AWQ8501) एक इंडोनेशियाई अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ान थी जो २८ दिसंबर २०१४ को इंडोनेशिया से सिंगापुर जाते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गई। विमान में १५५ यात्री सहित ७ चालक दलके सदस्य थे। मलबे से विमान और मानव अवशेष दुर्घटना के दो दिन बाद पाये गए। . 0 संबंधों।
इंडोनेशिया एयर एशिया उड़ान आठ हज़ार पाँच सौ एक एक इंडोनेशियाई अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ान थी जो अट्ठाईस दिसंबर दो हज़ार चौदह को इंडोनेशिया से सिंगापुर जाते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गई। विमान में एक सौ पचपन यात्री सहित सात चालक दलके सदस्य थे। मलबे से विमान और मानव अवशेष दुर्घटना के दो दिन बाद पाये गए। . शून्य संबंधों।
नितिन गुड्डू, हरिद्वार (ग्रामीण): पथरी क्षेत्र में गांव की महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में मोबाइल में कैद हुए भाजपा नेता अक्षय चौधरी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला ने तहरीर में आरोप लगाया है कि भाजपा नेता अक्षय चौधरी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ शर्मनाक हरकत की। दूसरी तरफ पुलिस ने वीडियो बनाकर वायरल करने और भाजपा नेता के कार्यालय पर हंगामा कर तोड़फोड़ करने वाले अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भी दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। इन मुकदमों में 60 से 70 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है। वीडियो फुटेज के आधार पर इन लोगों की पहचान करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। दूसरी तरफ इस मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि अक्षय चौधरी क्षेत्र के बड़े भाजपा नेता का खास आदमी है। यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि इससे पहले भी वह कई महिलाओं के साथ ऐसी हरकत कर चुका है। इसलिए आरोपी को जेल भेजा जाना चाहिए। पथरी क्षेत्र के गांव गाड़ोवाली निवासी भाजपा नेता अक्षय चौधरी गांव की एक महिला के घर में बनी दुकान में पहुंचा और उसके साथ शर्मनाक हरकत की। उसी दौरान गांव के कुछ युवकों ने अपने मोबाइल से उसकी वीडियो बना ली। मोबाइल में वीडियो बनती देख भाजपा नेता ने पिटाई के डर से दौड़ लगाकर अपनी जान बचाई। यह वीडियो शाम तक लोगों के मोबाइल में वायरल होने के बाद ग्रामीणों में गुस्सा भड़क गया और भाजपा नेता के कार्यालय पहुंचकर उन्होंने हंगामा भी किया। लॉ एन्ड ऑर्डर की स्थिति पैदा होने पर पुलिस को मुश्किल स्थिति संभालने पड़ी थी। फिलहाल एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने इस मामले में पहला मुकदमा महिला की तरफ से भाजपा नेता आपसे चौधरी के खिलाफ दर्ज किया गया है। दूसरा मुकदमा पुलिस की ओर से वीडियो वायरल करने और तीसरा मुकदमा भी पुलिस की तरफ से भाजपा नेता के कार्यालय पर हंगामा कर शांति व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर पथरी रमेश तनवार ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है। हरिद्वारः इस मामले में अंदरूनी तौर पर समझौते के प्रयास की चालू हो गए हैं। कई नेता भी सक्रिय हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि महिला और उसका पति इसी के चलते कार्रवाई से भी हाथ खींचने की तैयारी में है। लेकिन मुस्लिम समुदाय और आम लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी बनी हुई है। वहीं, क्षेत्र में कानून व शांति व्यवस्था के मद्देनजर एसएसपी अजय सिंह ने पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
नितिन गुड्डू, हरिद्वार : पथरी क्षेत्र में गांव की महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में मोबाइल में कैद हुए भाजपा नेता अक्षय चौधरी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला ने तहरीर में आरोप लगाया है कि भाजपा नेता अक्षय चौधरी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ शर्मनाक हरकत की। दूसरी तरफ पुलिस ने वीडियो बनाकर वायरल करने और भाजपा नेता के कार्यालय पर हंगामा कर तोड़फोड़ करने वाले अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भी दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। इन मुकदमों में साठ से सत्तर अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है। वीडियो फुटेज के आधार पर इन लोगों की पहचान करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। दूसरी तरफ इस मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि अक्षय चौधरी क्षेत्र के बड़े भाजपा नेता का खास आदमी है। यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि इससे पहले भी वह कई महिलाओं के साथ ऐसी हरकत कर चुका है। इसलिए आरोपी को जेल भेजा जाना चाहिए। पथरी क्षेत्र के गांव गाड़ोवाली निवासी भाजपा नेता अक्षय चौधरी गांव की एक महिला के घर में बनी दुकान में पहुंचा और उसके साथ शर्मनाक हरकत की। उसी दौरान गांव के कुछ युवकों ने अपने मोबाइल से उसकी वीडियो बना ली। मोबाइल में वीडियो बनती देख भाजपा नेता ने पिटाई के डर से दौड़ लगाकर अपनी जान बचाई। यह वीडियो शाम तक लोगों के मोबाइल में वायरल होने के बाद ग्रामीणों में गुस्सा भड़क गया और भाजपा नेता के कार्यालय पहुंचकर उन्होंने हंगामा भी किया। लॉ एन्ड ऑर्डर की स्थिति पैदा होने पर पुलिस को मुश्किल स्थिति संभालने पड़ी थी। फिलहाल एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने इस मामले में पहला मुकदमा महिला की तरफ से भाजपा नेता आपसे चौधरी के खिलाफ दर्ज किया गया है। दूसरा मुकदमा पुलिस की ओर से वीडियो वायरल करने और तीसरा मुकदमा भी पुलिस की तरफ से भाजपा नेता के कार्यालय पर हंगामा कर शांति व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर पथरी रमेश तनवार ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है। हरिद्वारः इस मामले में अंदरूनी तौर पर समझौते के प्रयास की चालू हो गए हैं। कई नेता भी सक्रिय हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि महिला और उसका पति इसी के चलते कार्रवाई से भी हाथ खींचने की तैयारी में है। लेकिन मुस्लिम समुदाय और आम लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी बनी हुई है। वहीं, क्षेत्र में कानून व शांति व्यवस्था के मद्देनजर एसएसपी अजय सिंह ने पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
IPL 2021 का 28वां मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है जिसमें राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद आमने-सामने हैं। इस मुकाबले में हैदराबाद के नए कप्तान केन विलियम्सन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। इस मैच में SRH की टीम में नबी, समद और भुवनेश्वर कुमार की वापसी हुई है जबकि सुचित, सिद्धार्थ कौल और डेविड वॉर्नर बाहर कर दिए गए हैं। राजस्थान की टीम में दो बदलाव हैं। शिवम दुबे और जयदेव उनादकट की जगह अनुज रावत और कार्तिक त्यागी को लिया गया है।
IPL दो हज़ार इक्कीस का अट्ठाईसवां मुकाबला दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है जिसमें राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद आमने-सामने हैं। इस मुकाबले में हैदराबाद के नए कप्तान केन विलियम्सन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। इस मैच में SRH की टीम में नबी, समद और भुवनेश्वर कुमार की वापसी हुई है जबकि सुचित, सिद्धार्थ कौल और डेविड वॉर्नर बाहर कर दिए गए हैं। राजस्थान की टीम में दो बदलाव हैं। शिवम दुबे और जयदेव उनादकट की जगह अनुज रावत और कार्तिक त्यागी को लिया गया है।
इशिता दत्ता टीवी की मशहूर एक्ट्रेस हैं। एक्ट्रेस बेहद कमाल के ट्रेडिशनल ऑउटफिट कैरी करती हैं। इशिता की सुंदर गुलाबी साड़ी दिवाली के लिए बेस्ट है। एक्ट्रेस की इस साड़ी का शेड बेहद खूबसूरत है। इशिता की तरह वॉइलेट साड़ी के साथ गोल्डन ज्वेलरी भी कैरी कर सकती हैं। एक्ट्रेस का ये पिंक सूट भी दिवाली सेलिब्रेशन में चार चांद लगा देगा। इशिता की वाइट साड़ी कमाल का लुक दे रही है। एक्ट्रेस का ये ऑउटफिट भी बेहद शानदार है। इशिता दत्ता ट्रेडिशनल ऑउटफिट के साथ अपने बालों में गजरा लगाना पसंद करती हैं। आप भी इशिता की तरह बालों में गजरा लगाकर अपने लुक को बेहतर कर सकती हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
इशिता दत्ता टीवी की मशहूर एक्ट्रेस हैं। एक्ट्रेस बेहद कमाल के ट्रेडिशनल ऑउटफिट कैरी करती हैं। इशिता की सुंदर गुलाबी साड़ी दिवाली के लिए बेस्ट है। एक्ट्रेस की इस साड़ी का शेड बेहद खूबसूरत है। इशिता की तरह वॉइलेट साड़ी के साथ गोल्डन ज्वेलरी भी कैरी कर सकती हैं। एक्ट्रेस का ये पिंक सूट भी दिवाली सेलिब्रेशन में चार चांद लगा देगा। इशिता की वाइट साड़ी कमाल का लुक दे रही है। एक्ट्रेस का ये ऑउटफिट भी बेहद शानदार है। इशिता दत्ता ट्रेडिशनल ऑउटफिट के साथ अपने बालों में गजरा लगाना पसंद करती हैं। आप भी इशिता की तरह बालों में गजरा लगाकर अपने लुक को बेहतर कर सकती हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ककड़ी (वैज्ञानिक नामः कुकुमिस मेलो वैराइटी यूटिलिसिमय / Cucumis melo var. utilissimus) ज़ायद की एक प्रमुख फसल है। इसको संस्कृत में 'कर्कटी' तथा मारवाडी भाषा में वालम काकरी कहा जाता है। यह "कुकुरबिटेसी" (Cucurbitaceae) वंश के अंतर्गत आती है। विश्वास किया जाता है कि ककड़ी की उत्पत्ति भारत से हुई। इसकी खेती की रीति बिलकुल तरोई के समान है, केवल उसके बोने के समय में अंतर है। यदि भूमि पूर्वी जिलों में हो, जहाँ शीत ऋतु अधिक कड़ी नहीं होती, तो अक्टूबर के मध्य में बीज बोए जा सकते हैं, नहीं तो इसे जनवरी में बोना चाहिए। ऐसे स्थानों में जहाँ सर्दी अधिक पड़ती हैं, इसे फरवरी और मार्च के महीनों में लगाना चाहिए। इसकी फसल बलुई दुमट भूमियों से अच्छी होती है। इस फसल की सिंचाई सप्ताह में दो बार करनी चाहिए। ककड़ी में सबसे अच्छी सुगंध गरम शुष्क जलवायु में आती है। इसमें दो मुख्य जातियाँ होती हैं - एक में हलके हरे रंग के फल होते हैं तथा दूसरी में गहरे हरे रंग के। इनमें पहली को ही लोग पसंद करते हैं। ग्राहकों की पसंद के अनुसार फलों की चुनाई तरुणावस्था में अथवा इसके बाद करनी चाहिए। इसकी माध्य उपज लगभग ७५ मन प्रति एकड़ है। . कार्ल लीनियस ने सबसे पहले इस दो नामों की नामकरण प्रणाली को उपयोग करने के लिए चुना था। जीव विज्ञान में, द्विपद नामकरण प्रजातियों के नामकरण की एक औपचारिक प्रणाली है। कार्ल लीनियस नामक एक स्वीडिश जीव वैज्ञानिक ने सबसे पहले इस दो नामों की नामकरण प्रणाली को उपयोग करने के लिए चुना था। उन्होंने इसके लिए पहला नाम वंश (जीनस) का और दूसरा प्रजाति विशेष का विशिष्ट नाम को चुना था। उदाहरण के लिए, मानव का वंश होमो है जबकि उसका विशिष्ट नाम सेपियंस है, तो इस प्रकार मानव का द्विपद या वैज्ञानिक नाम होमो साप्येन्स् (Homo sapiens) है। रोमन लिपि मे लिखते समय दोनो नामों मे से वंश के नाम का पहला अक्षर बड़ा (कैपिटल) होता है जबकि विशिष्ठ नाम का पहला अक्षर छोटा (स्माल) ही होता है। . ककड़ी और द्विपद नामपद्धति आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। ककड़ी 10 संबंध है और द्विपद नामपद्धति 6 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (10 + 6)। यह लेख ककड़ी और द्विपद नामपद्धति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ककड़ी ज़ायद की एक प्रमुख फसल है। इसको संस्कृत में 'कर्कटी' तथा मारवाडी भाषा में वालम काकरी कहा जाता है। यह "कुकुरबिटेसी" वंश के अंतर्गत आती है। विश्वास किया जाता है कि ककड़ी की उत्पत्ति भारत से हुई। इसकी खेती की रीति बिलकुल तरोई के समान है, केवल उसके बोने के समय में अंतर है। यदि भूमि पूर्वी जिलों में हो, जहाँ शीत ऋतु अधिक कड़ी नहीं होती, तो अक्टूबर के मध्य में बीज बोए जा सकते हैं, नहीं तो इसे जनवरी में बोना चाहिए। ऐसे स्थानों में जहाँ सर्दी अधिक पड़ती हैं, इसे फरवरी और मार्च के महीनों में लगाना चाहिए। इसकी फसल बलुई दुमट भूमियों से अच्छी होती है। इस फसल की सिंचाई सप्ताह में दो बार करनी चाहिए। ककड़ी में सबसे अच्छी सुगंध गरम शुष्क जलवायु में आती है। इसमें दो मुख्य जातियाँ होती हैं - एक में हलके हरे रंग के फल होते हैं तथा दूसरी में गहरे हरे रंग के। इनमें पहली को ही लोग पसंद करते हैं। ग्राहकों की पसंद के अनुसार फलों की चुनाई तरुणावस्था में अथवा इसके बाद करनी चाहिए। इसकी माध्य उपज लगभग पचहत्तर मन प्रति एकड़ है। . कार्ल लीनियस ने सबसे पहले इस दो नामों की नामकरण प्रणाली को उपयोग करने के लिए चुना था। जीव विज्ञान में, द्विपद नामकरण प्रजातियों के नामकरण की एक औपचारिक प्रणाली है। कार्ल लीनियस नामक एक स्वीडिश जीव वैज्ञानिक ने सबसे पहले इस दो नामों की नामकरण प्रणाली को उपयोग करने के लिए चुना था। उन्होंने इसके लिए पहला नाम वंश का और दूसरा प्रजाति विशेष का विशिष्ट नाम को चुना था। उदाहरण के लिए, मानव का वंश होमो है जबकि उसका विशिष्ट नाम सेपियंस है, तो इस प्रकार मानव का द्विपद या वैज्ञानिक नाम होमो साप्येन्स् है। रोमन लिपि मे लिखते समय दोनो नामों मे से वंश के नाम का पहला अक्षर बड़ा होता है जबकि विशिष्ठ नाम का पहला अक्षर छोटा ही होता है। . ककड़ी और द्विपद नामपद्धति आम में शून्य बातें हैं । ककड़ी दस संबंध है और द्विपद नामपद्धति छः है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख ककड़ी और द्विपद नामपद्धति के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
"जगत प्रकास्य प्रकासक रामू : मायाधीम, ज्ञान-गुन-धामू । संभु, विरंचि, विष्णु भगवाना; उपजहिं जासुसते नाना । " सो प्रभु सेवक मई; भगत-हेतु लीला - तनु गहुई ।" " सुनि सेवक सुर-तम्-सुर-धेनू; विधि-हरि-हर- बंदित - नद- रेनू ।" " सारद कोटि अमित चतुराई; विधि सत-कोटिनिपुनाई । विष्णु कोटि सम पालन करना; केंद्र कोटि-सत सम संहरता । निरवधि, निरूपम राम सम नहिं आन निगमागम कहें ; जिमि काटि-सत खद्योत रवि कहूँ कहत अति लघुता लहैं।" रामचंद्र विषयक इनके बहुत ऊँचे विचार थे ही, सो जब उनके विषय में यह कोई साधारण मनुष्यों के समान घटना का वर्णन करते थे, तब दो एक सिफ्रान्शिी बातें अवश्य लिख देते थे । ऐसे छंद रामायण में स्थान-स्थान पर भरे पड़े हैं} " जाकी सहज म्वास स्रु तिचारी; सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी । " "लव निर्माप महँ भुवन- निकाया; रचइ जासु अनुसासन माया । • भगत- हेतु सांइ दीनदयाला चितवत चकित धनुप-मख-साला ।" " जासु त्राम डर कहूँ डर होई; भजन प्रभाव देखावत सोई ।" " सुमिरत जाहि मिटइ, भव-भारू; तेहि सम यह लौकिक व्यवहारू ।" "निगम नेति सिव ध्यान न पावा; माया-मृग पीछे सोइ धावा ।' ने यहाँ अवतार का विचार बहुत पीछे उठा है । ऋग्वेद में शक्ति केवल ईश्वर में है। अन्य देवतों में नहीं। यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में शिव ईश्वर हैं। उपनिषदों में भी ऐसा ही है, किंतु कहीं-कहीं विष्णु के रूप नारायण ईश्वर के पुत्र या ईश्वर है। उपनिषत् निर्गुण ब्रह्म को ठीक तथा सगुण को श्रशुद्ध गानते हैं। अनंतर चार्वाक, कपिल, जेमिनी और मौतम बुद्ध की शिक्षा से निर्गुण के साथ ही ईश्वरवाद भी लुप्त होने लगा । तब भगवान बादरायण व्यास ने भगवद्गीता द्वारा प्रतीकोपासना के सहारे पहले पहल सगुणवाद तथा वैष्णव अवतार का प्रतिपादन त्रिया । सक्षिप्त हिंदी-नवरल गीता के पूर्व शतपथ ब्राह्मण मे प्रजापति मत्स्य, कच्छ और वराह थे । यही कथन विष्णु पुराण का है। तैत्तिरीय संहिता और तेत्तिरीय ब्राह्मण में प्रजापति वराह थे। शतपथ ब्राहाण और मनु में ब्रह्मा नारायगा है । वाल्मोकीय रामायण और लिंग-पुराण में ब्रहा। वराह हैं । विष्णु भाग्वेद में इद्र से कम हैं। यजुवंद तथा अथर्ववेद में शिव की उन्नति हुई, किंतु विष्णु की विशेष नहीं । उपनिपदो में विष्णु देवतां में तो सर्वोच्च हुए, किंतु पूर्णतया ईश्वर नहीं । शतपथ ब्राह्मण म वामन लेटे-लेटे सारी पृथ्वी पर फैलकर उसे जीतते हैं, डगों से नहीं । मंत्रेय उपनिषत् में भोजन विष्णु का रूप है । कठोपनिषत् में मानुप उन्नति का चरमोत्कर्ष विष्णु का परमपद पाना है। परमपद विष्णु का ऋग्वेद में भी है। शतपथ में नारायण परमात्मा से उत्पन्न हैं। तैत्तिरीय आय में नारायण परमात्मा है। महाभारत में वे पंचरात्र का मत निकालते हैं, जिसमें वासुदेव की अवतार-सी महिमा है। बौद्ध-प्रसार के पीछे हमारे यहाँ गीता में पहलेपहल श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार कहे गए । यह प्रायः पाँचवीं शताब्दी संवत् पूर्व की बात है। इससे प्रायः सौ वर्ष पहले या पीछे पाणिनि वासुदेव को पूज्य देवता मानते हैं। श्रनंतर पौराणिक ग्रंथों में राम, कृष्ण आदि अवतार हुए। अवतार का विचार सबसे पहले कृष्ण मे चला, और उन्हीं का पूजन हुआ । वाल्मीकीय रामायण के प्राचीन भाग में रामचंद्र ध्रुवतारी नहीं है, किंतु नवीन में हैं, जहाँ लक्ष्मणादि भी अवतार हैं। यह व्यूह-पूजन है, जिसका सबसे पुराना कथन चौथी शताब्दी संवत् पूर्व के बौद्ध ग्रंग निद्देश में है । इसके पीछे श्रीकृष्ण-पूजन के तो अनेक ऐतिहासिक प्रमाण गिलते हैं, किंतु अनिश्चित कालवाले कथनों से इतर राम का पूजन नहीं मिलता। कोष तथा पतंजलि में भी राम-नाम नहीं है। उधर श्रीकर सं० १०७० का जैन ग्रंथ धर्म-परीक्षा राम तथा गौतम बुद्ध की अवतार कहता है। आगे चलकर माधवाचार्य ने सीताराम की मूर्ति का पूजन किया, ऐसा लिखा है। यह सं० १३२१ की घटना है। कालिदास चौथी - पाँचवीं शताब्दी के समझे जाते हैं। आपने राम को अवतार माना है। तेरहवीं शताब्दी के दाक्षिणात्य मंत्री हेमाद्रि ने व्रत-खंड में रामनवमी का व्रत लिखा है। हरवंश, महाभारत, श्रीभागवत, वायु-पुराण आदि में राम श्रवतार है, किंतु पौराणिक ग्रंथ गुप्त काल में नवसंपादन के साथ पूर्ण किए गए, जिससे उनका कोई विशेष कथन गुप्त काल से पुराना नहीं माना जाता है। इनमें भी उनका पूजन नहीं है । इलोरा की मूर्तियाँ तीसरी से नवीं शताब्दी तक की हैं। उनमें रावण के चित्र हैं। खजराहो और जगन्नाथजी के मंदिरों में भी राम तथा दशावतार की पापाणमूर्तियाँ हैं। इनका समय दसवीं से बारहवीं शताब्दी तक का है। वाल्मी कीय रामायण पाँचवी शताब्दी संवत् पूर्व का ग्रंथ सबसे पुराना राम का कथन करता है। बौद्ध जातकों में तीन रामां के वर्णन हैं। ऋग्वेद में एक यज्ञकर्ता राम लिखे है, किंतु रावणारि नहीं। अतः प्रकट है कि श्रीकृष्ण पाँचवीं शताब्दी संवत् पूर्व से अवतार माने गए तथा राम संवत् की चौथी-पाँचव शताब्दी से । ज्ञान, भक्ति । गोस्वामीजी ने भक्ति का दर्जा सबसे ऊँचा रखा है। इस विषय पर रामायण-भर में अपने जगह-जगह पर बहुत कुछ लिखा है और उत्तर-कांडों में तो अपना मत साफ़-साफ़ प्रकट रूप से कहा है । यह महापुरुप अनन्य भक्त थे । भगवान् व्यास ने श्रीमद्भगवद्गीता में ज्ञान-भक्ति के विषय में बहुत कुछ कहा है । गीता में राम शस्त्रभृत् का कथन भी है। यह वर्णन परशुराम, रामचंद्र या बलराम में से किसी एक का होने से निश्चय-पूर्वक राम से संबद्ध नहीं माना जा सकता । व्यासदेव एवं हिंदू-दर्शन-शास्त्रों का मत है कि मोक्षपद विना ज्ञान के नहीं मिल सकता, और भक्ति ज्ञान दृढ़ करने का एक भारी साधन है। गोस्वामीजी ने इस मत को पूर्ण रूप से खुले खुले नहीं ग्रहण किया, यद्यपि वास्तव में इसे माना अवश्य है। यह कहते हैं, ज्ञान से केवल मोक्ष-पदवी प्राप्त हो सकती है, पर
"जगत प्रकास्य प्रकासक रामू : मायाधीम, ज्ञान-गुन-धामू । संभु, विरंचि, विष्णु भगवाना; उपजहिं जासुसते नाना । " सो प्रभु सेवक मई; भगत-हेतु लीला - तनु गहुई ।" " सुनि सेवक सुर-तम्-सुर-धेनू; विधि-हरि-हर- बंदित - नद- रेनू ।" " सारद कोटि अमित चतुराई; विधि सत-कोटिनिपुनाई । विष्णु कोटि सम पालन करना; केंद्र कोटि-सत सम संहरता । निरवधि, निरूपम राम सम नहिं आन निगमागम कहें ; जिमि काटि-सत खद्योत रवि कहूँ कहत अति लघुता लहैं।" रामचंद्र विषयक इनके बहुत ऊँचे विचार थे ही, सो जब उनके विषय में यह कोई साधारण मनुष्यों के समान घटना का वर्णन करते थे, तब दो एक सिफ्रान्शिी बातें अवश्य लिख देते थे । ऐसे छंद रामायण में स्थान-स्थान पर भरे पड़े हैं} " जाकी सहज म्वास स्रु तिचारी; सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी । " "लव निर्माप महँ भुवन- निकाया; रचइ जासु अनुसासन माया । • भगत- हेतु सांइ दीनदयाला चितवत चकित धनुप-मख-साला ।" " जासु त्राम डर कहूँ डर होई; भजन प्रभाव देखावत सोई ।" " सुमिरत जाहि मिटइ, भव-भारू; तेहि सम यह लौकिक व्यवहारू ।" "निगम नेति सिव ध्यान न पावा; माया-मृग पीछे सोइ धावा ।' ने यहाँ अवतार का विचार बहुत पीछे उठा है । ऋग्वेद में शक्ति केवल ईश्वर में है। अन्य देवतों में नहीं। यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में शिव ईश्वर हैं। उपनिषदों में भी ऐसा ही है, किंतु कहीं-कहीं विष्णु के रूप नारायण ईश्वर के पुत्र या ईश्वर है। उपनिषत् निर्गुण ब्रह्म को ठीक तथा सगुण को श्रशुद्ध गानते हैं। अनंतर चार्वाक, कपिल, जेमिनी और मौतम बुद्ध की शिक्षा से निर्गुण के साथ ही ईश्वरवाद भी लुप्त होने लगा । तब भगवान बादरायण व्यास ने भगवद्गीता द्वारा प्रतीकोपासना के सहारे पहले पहल सगुणवाद तथा वैष्णव अवतार का प्रतिपादन त्रिया । सक्षिप्त हिंदी-नवरल गीता के पूर्व शतपथ ब्राह्मण मे प्रजापति मत्स्य, कच्छ और वराह थे । यही कथन विष्णु पुराण का है। तैत्तिरीय संहिता और तेत्तिरीय ब्राह्मण में प्रजापति वराह थे। शतपथ ब्राहाण और मनु में ब्रह्मा नारायगा है । वाल्मोकीय रामायण और लिंग-पुराण में ब्रहा। वराह हैं । विष्णु भाग्वेद में इद्र से कम हैं। यजुवंद तथा अथर्ववेद में शिव की उन्नति हुई, किंतु विष्णु की विशेष नहीं । उपनिपदो में विष्णु देवतां में तो सर्वोच्च हुए, किंतु पूर्णतया ईश्वर नहीं । शतपथ ब्राह्मण म वामन लेटे-लेटे सारी पृथ्वी पर फैलकर उसे जीतते हैं, डगों से नहीं । मंत्रेय उपनिषत् में भोजन विष्णु का रूप है । कठोपनिषत् में मानुप उन्नति का चरमोत्कर्ष विष्णु का परमपद पाना है। परमपद विष्णु का ऋग्वेद में भी है। शतपथ में नारायण परमात्मा से उत्पन्न हैं। तैत्तिरीय आय में नारायण परमात्मा है। महाभारत में वे पंचरात्र का मत निकालते हैं, जिसमें वासुदेव की अवतार-सी महिमा है। बौद्ध-प्रसार के पीछे हमारे यहाँ गीता में पहलेपहल श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार कहे गए । यह प्रायः पाँचवीं शताब्दी संवत् पूर्व की बात है। इससे प्रायः सौ वर्ष पहले या पीछे पाणिनि वासुदेव को पूज्य देवता मानते हैं। श्रनंतर पौराणिक ग्रंथों में राम, कृष्ण आदि अवतार हुए। अवतार का विचार सबसे पहले कृष्ण मे चला, और उन्हीं का पूजन हुआ । वाल्मीकीय रामायण के प्राचीन भाग में रामचंद्र ध्रुवतारी नहीं है, किंतु नवीन में हैं, जहाँ लक्ष्मणादि भी अवतार हैं। यह व्यूह-पूजन है, जिसका सबसे पुराना कथन चौथी शताब्दी संवत् पूर्व के बौद्ध ग्रंग निद्देश में है । इसके पीछे श्रीकृष्ण-पूजन के तो अनेक ऐतिहासिक प्रमाण गिलते हैं, किंतु अनिश्चित कालवाले कथनों से इतर राम का पूजन नहीं मिलता। कोष तथा पतंजलि में भी राम-नाम नहीं है। उधर श्रीकर संशून्य एक हज़ार सत्तर का जैन ग्रंथ धर्म-परीक्षा राम तथा गौतम बुद्ध की अवतार कहता है। आगे चलकर माधवाचार्य ने सीताराम की मूर्ति का पूजन किया, ऐसा लिखा है। यह संशून्य एक हज़ार तीन सौ इक्कीस की घटना है। कालिदास चौथी - पाँचवीं शताब्दी के समझे जाते हैं। आपने राम को अवतार माना है। तेरहवीं शताब्दी के दाक्षिणात्य मंत्री हेमाद्रि ने व्रत-खंड में रामनवमी का व्रत लिखा है। हरवंश, महाभारत, श्रीभागवत, वायु-पुराण आदि में राम श्रवतार है, किंतु पौराणिक ग्रंथ गुप्त काल में नवसंपादन के साथ पूर्ण किए गए, जिससे उनका कोई विशेष कथन गुप्त काल से पुराना नहीं माना जाता है। इनमें भी उनका पूजन नहीं है । इलोरा की मूर्तियाँ तीसरी से नवीं शताब्दी तक की हैं। उनमें रावण के चित्र हैं। खजराहो और जगन्नाथजी के मंदिरों में भी राम तथा दशावतार की पापाणमूर्तियाँ हैं। इनका समय दसवीं से बारहवीं शताब्दी तक का है। वाल्मी कीय रामायण पाँचवी शताब्दी संवत् पूर्व का ग्रंथ सबसे पुराना राम का कथन करता है। बौद्ध जातकों में तीन रामां के वर्णन हैं। ऋग्वेद में एक यज्ञकर्ता राम लिखे है, किंतु रावणारि नहीं। अतः प्रकट है कि श्रीकृष्ण पाँचवीं शताब्दी संवत् पूर्व से अवतार माने गए तथा राम संवत् की चौथी-पाँचव शताब्दी से । ज्ञान, भक्ति । गोस्वामीजी ने भक्ति का दर्जा सबसे ऊँचा रखा है। इस विषय पर रामायण-भर में अपने जगह-जगह पर बहुत कुछ लिखा है और उत्तर-कांडों में तो अपना मत साफ़-साफ़ प्रकट रूप से कहा है । यह महापुरुप अनन्य भक्त थे । भगवान् व्यास ने श्रीमद्भगवद्गीता में ज्ञान-भक्ति के विषय में बहुत कुछ कहा है । गीता में राम शस्त्रभृत् का कथन भी है। यह वर्णन परशुराम, रामचंद्र या बलराम में से किसी एक का होने से निश्चय-पूर्वक राम से संबद्ध नहीं माना जा सकता । व्यासदेव एवं हिंदू-दर्शन-शास्त्रों का मत है कि मोक्षपद विना ज्ञान के नहीं मिल सकता, और भक्ति ज्ञान दृढ़ करने का एक भारी साधन है। गोस्वामीजी ने इस मत को पूर्ण रूप से खुले खुले नहीं ग्रहण किया, यद्यपि वास्तव में इसे माना अवश्य है। यह कहते हैं, ज्ञान से केवल मोक्ष-पदवी प्राप्त हो सकती है, पर
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टैंड इन कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टैंड इन कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। विराट कोहली ने आईपीएल के इतिहास में 101 कैच पकड़ लिए है और वह लीग में यह उपलब्धि हासिल करने वाले सिर्फ तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। आपको बता दे कि आरसीबी ने राजस्थान को इस मैच में 7 रन से हरा दिया था। 12वां ओवर करने आये डेविड विली की गेंद पर देवदत्त पडिक्कल का एक अहम कैच लिया था। और पडिक्कल और यशस्वी जायसवाल के बीच 98(66) रन की साझेदारी को तोडा था। इसके बाद विराट ने हर्षल पटेल की गेंद पर लॉन्ग ऑन पर यशस्वी जायसवाल (47) का शानदार कैच लिया और आईपीएल में अपना 101वां कैच दर्ज किया। पूर्व आईपीएल बल्लेबाजों सुरेश रैना (109 कैच) और कीरोन पोलार्ड (103 कैच) के बाद विराट कोहली आईपीएल में 100 से अधिक कैच लेने की उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे क्रिकेटर बन गए हैं। चौको और 2 छक्कों की मदद से 62 रन की अर्धशतकीय पारी खेली। राजस्थान की तरफ से सबसे ज्यादा 2-2 विकेट ट्रेंट बोल्ट और संदीप शर्मा ने लिए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान की टीम 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 182 रन ही बना पायी। टीम की तरफ से सबसे ज्यादा रन देवदत्त पडिक्कल ने बनाये। उन्होंने 34 गेंद में 7 चौके और एक छक्के की मदद से 52 रन की अर्धशतकीय पारी खेली। आरसीबी की तरफ से सबसे ज्यादा 3 विकेट हर्षल पटेल ने लिए। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की प्लेइंग इलेवनः विराट कोहली (कप्तान), फाफ डु प्लेसिस, महिपाल लोमरोर, ग्लेन मैक्सवेल, शाहबाज़ अहमद, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), सुयश प्रभुदेसाई, डेविड विली, वानिंदु हसरंगा, मोहम्मद सिराज, विजयकुमार वैशाक। राजस्थान रॉयल्स की प्लेइंग इलेवनः जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, संजू सैमसन (कप्तान और विकेटकीपर), देवदत्त पडिक्कल, शिमरोन हेटमायर, ध्रुव जुरेल, रविचंद्रन अश्विन, जेसन होल्डर, ट्रेंट बोल्ट, संदीप शर्मा, युजवेंद्र चहल।
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टैंड इन कप्तान विराट कोहली ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टैंड इन कप्तान विराट कोहली ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। विराट कोहली ने आईपीएल के इतिहास में एक सौ एक कैच पकड़ लिए है और वह लीग में यह उपलब्धि हासिल करने वाले सिर्फ तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। आपको बता दे कि आरसीबी ने राजस्थान को इस मैच में सात रन से हरा दिया था। बारहवां ओवर करने आये डेविड विली की गेंद पर देवदत्त पडिक्कल का एक अहम कैच लिया था। और पडिक्कल और यशस्वी जायसवाल के बीच अट्ठानवे रन की साझेदारी को तोडा था। इसके बाद विराट ने हर्षल पटेल की गेंद पर लॉन्ग ऑन पर यशस्वी जायसवाल का शानदार कैच लिया और आईपीएल में अपना एक सौ एकवां कैच दर्ज किया। पूर्व आईपीएल बल्लेबाजों सुरेश रैना और कीरोन पोलार्ड के बाद विराट कोहली आईपीएल में एक सौ से अधिक कैच लेने की उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे क्रिकेटर बन गए हैं। चौको और दो छक्कों की मदद से बासठ रन की अर्धशतकीय पारी खेली। राजस्थान की तरफ से सबसे ज्यादा दो-दो विकेट ट्रेंट बोल्ट और संदीप शर्मा ने लिए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान की टीम बीस ओवरों में छः विकेट खोकर एक सौ बयासी रन ही बना पायी। टीम की तरफ से सबसे ज्यादा रन देवदत्त पडिक्कल ने बनाये। उन्होंने चौंतीस गेंद में सात चौके और एक छक्के की मदद से बावन रन की अर्धशतकीय पारी खेली। आरसीबी की तरफ से सबसे ज्यादा तीन विकेट हर्षल पटेल ने लिए। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की प्लेइंग इलेवनः विराट कोहली , फाफ डु प्लेसिस, महिपाल लोमरोर, ग्लेन मैक्सवेल, शाहबाज़ अहमद, दिनेश कार्तिक , सुयश प्रभुदेसाई, डेविड विली, वानिंदु हसरंगा, मोहम्मद सिराज, विजयकुमार वैशाक। राजस्थान रॉयल्स की प्लेइंग इलेवनः जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, संजू सैमसन , देवदत्त पडिक्कल, शिमरोन हेटमायर, ध्रुव जुरेल, रविचंद्रन अश्विन, जेसन होल्डर, ट्रेंट बोल्ट, संदीप शर्मा, युजवेंद्र चहल।
पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने बुधवार को 27 जनवरी से सभी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की। पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने बुधवार को 27 जनवरी से सभी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की। इस महीने की शुरुआत में राज्य सरकार ने कक्षा 5 से 12 के लिए स्कूलों को फिर से खोल दिया था। शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने यहां एक बयान में कहा कि माता-पिता की लगातार मांग के बाद राज्य सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं के लिए 27 जनवरी से सभी स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। मंत्री ने कहा कि निर्णय के अनुसार कक्षा 3 और 4 के छात्रों को 27 जनवरी से स्कूल में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी। 1 फरवरी से, कक्षा 1 और 2 को सभी स्कूल में फिर से शुरू किया जाएगा। समय सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक रहेगा और अभिभावकों को स्कूलों में अपने वार्ड भेजने से पहले लिखित सहमति देनी होगी। सिंगला ने अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को परिसर की उचित सफाई सुनिश्चित करने और कोविड-19 सुरक्षा मानदंडों का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जो सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को प्रसारित किए जाएंगे।
पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने बुधवार को सत्ताईस जनवरी से सभी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की। पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने बुधवार को सत्ताईस जनवरी से सभी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की। इस महीने की शुरुआत में राज्य सरकार ने कक्षा पाँच से बारह के लिए स्कूलों को फिर से खोल दिया था। शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने यहां एक बयान में कहा कि माता-पिता की लगातार मांग के बाद राज्य सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं के लिए सत्ताईस जनवरी से सभी स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। मंत्री ने कहा कि निर्णय के अनुसार कक्षा तीन और चार के छात्रों को सत्ताईस जनवरी से स्कूल में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी। एक फरवरी से, कक्षा एक और दो को सभी स्कूल में फिर से शुरू किया जाएगा। समय सुबह दस से दोपहर तीन बजे तक रहेगा और अभिभावकों को स्कूलों में अपने वार्ड भेजने से पहले लिखित सहमति देनी होगी। सिंगला ने अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को परिसर की उचित सफाई सुनिश्चित करने और कोविड-उन्नीस सुरक्षा मानदंडों का पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जो सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को प्रसारित किए जाएंगे।
आज यानि 27 सितंबर से वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड की स्ट्रीमिंग शुरू होने जा रही है. जिसमें बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी ने अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा है. शाहरुख खान की रेड चिलीज प्रोडक्शन के बैनर तले बनी वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड को लेकर काउंटडाउन शुरू हो गया है. लोगों के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता देखी जा सकती है. बार्ड ऑफ ब्लड का निर्देशन रिभु दासगुप्ता ने किया है. इमरान हाशमी की वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड की कहानी बिलाल सिद्दीकी की किताब पर आधारित हैं. अगर आप भी बार्ड ऑफ ब्लड देखने का मूड बना रहे हैं. तो हम आपकों इसका रिव्यु देने वाले है. अभी केवल 7 एपिसोड में वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड को दिखाया जाने वाला है. वहीं कहानी की बात करें तो बार्ड ऑफ ब्लड में चार भारतीयों को तालिबान में बंधक बनाया जाता है, जिनके रेस्क्यू के लिए भारत से एक जासूस को भेजा जाता है और भारत का ये जासूस होता है एडोनिस. एडोनिस और कोई नहीं बल्कि खुद इमरान हाशमी हैं. बार्ड ऑफ ब्लड में इमरान हाशमी बार्ड ऑफ ब्लड में एक ऐसे इंडियन जासूस के रोल में दिख रहे हैं, जिसे नौकरी से निकाले जाने के बाद फिर से काम करने के लिए याद किया जाता है. अगर बात करें इसकी कहानी की तो शो में सभी लोग इमरान को एडोनस के नाम से जानते हैं, लेकिन उनका असली नाम कबीर आनंद होता है. कबीर आनंद अपने अतीत को सबसे छिपा कर रखता है. लेकिन क्यों कबीर एडोनस बनता है और उसकी जिंदगी के इतिहास के पन्नों में क्या-क्या चीजें दबी हुई हैं और वो किस तरह उन चार भारतीयों को बचा पाता है ये देखना दिलचस्प होगा. बार्ड ऑफ ब्लड में इमरान हाशमी दमदार अभिनय के साथ-साथ ताबड़तोड़ एक्शन भी नजर आने वाला है. एक जैसी टी शर्ट में स्पॉट हुए कार्तिक और तारा, फैंस बोले- अब सारा अली खान का क्या होगा ?
आज यानि सत्ताईस सितंबर से वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड की स्ट्रीमिंग शुरू होने जा रही है. जिसमें बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी ने अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा है. शाहरुख खान की रेड चिलीज प्रोडक्शन के बैनर तले बनी वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड को लेकर काउंटडाउन शुरू हो गया है. लोगों के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता देखी जा सकती है. बार्ड ऑफ ब्लड का निर्देशन रिभु दासगुप्ता ने किया है. इमरान हाशमी की वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड की कहानी बिलाल सिद्दीकी की किताब पर आधारित हैं. अगर आप भी बार्ड ऑफ ब्लड देखने का मूड बना रहे हैं. तो हम आपकों इसका रिव्यु देने वाले है. अभी केवल सात एपिसोड में वेब सीरिज बार्ड ऑफ ब्लड को दिखाया जाने वाला है. वहीं कहानी की बात करें तो बार्ड ऑफ ब्लड में चार भारतीयों को तालिबान में बंधक बनाया जाता है, जिनके रेस्क्यू के लिए भारत से एक जासूस को भेजा जाता है और भारत का ये जासूस होता है एडोनिस. एडोनिस और कोई नहीं बल्कि खुद इमरान हाशमी हैं. बार्ड ऑफ ब्लड में इमरान हाशमी बार्ड ऑफ ब्लड में एक ऐसे इंडियन जासूस के रोल में दिख रहे हैं, जिसे नौकरी से निकाले जाने के बाद फिर से काम करने के लिए याद किया जाता है. अगर बात करें इसकी कहानी की तो शो में सभी लोग इमरान को एडोनस के नाम से जानते हैं, लेकिन उनका असली नाम कबीर आनंद होता है. कबीर आनंद अपने अतीत को सबसे छिपा कर रखता है. लेकिन क्यों कबीर एडोनस बनता है और उसकी जिंदगी के इतिहास के पन्नों में क्या-क्या चीजें दबी हुई हैं और वो किस तरह उन चार भारतीयों को बचा पाता है ये देखना दिलचस्प होगा. बार्ड ऑफ ब्लड में इमरान हाशमी दमदार अभिनय के साथ-साथ ताबड़तोड़ एक्शन भी नजर आने वाला है. एक जैसी टी शर्ट में स्पॉट हुए कार्तिक और तारा, फैंस बोले- अब सारा अली खान का क्या होगा ?
घर के बाहर खड़ी पिकअप चुराने के मामले में पुलिस ने शातिर वाहन चोर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी की पिकअप बरामद की है। आरोपी के खिलाफ विभिन्न थानों में 23 मामले दर्ज है। जिनमें से 19 वाहन चोरी के है। जैतारण sho दिनेश कुमावत ने बताया की 26 दिसंबर को जैतारण के नया गांव निवासी अब्दुल हमीद पुत्र अमीर कुरेशी ने रिपोर्ट दी की हमेशा की तरह उसने 25 दिसंबर की शाम को घर के बाहर अपनी पिकअप खड़ी की थी। 26 दिसंबर की सुबह देखा तो पिकअप गायब मिली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की मदद से मामले में बगड़ी नगर थाने के खोडिया गजनई निवासी 23 साल के विजयसिंह उर्फ रणजीत सिंह पुत्र रामसिंह रावत को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। जिनसे पिकअप चोरी करना कबूला। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की पिकअप बरामद की और उसे गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया की आरोपी आला दर्जे का वाहन चोर है। जिसके खिलाफ 23 मामले विभिन्न थानों में दर्ज है। जिनमें से 19 वाहन चोरी के है। पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया की आरोपी वाहन चोरी कर उसे कम दाम पर बेच देता था। जिसे तस्करी के दौरान उपयोग किया जाता था। आरोपी ने इससे पहले किन-किन को वाहन बेचे इसको लेकर रिमांड के दौरान पूछताछ की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
घर के बाहर खड़ी पिकअप चुराने के मामले में पुलिस ने शातिर वाहन चोर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी की पिकअप बरामद की है। आरोपी के खिलाफ विभिन्न थानों में तेईस मामले दर्ज है। जिनमें से उन्नीस वाहन चोरी के है। जैतारण sho दिनेश कुमावत ने बताया की छब्बीस दिसंबर को जैतारण के नया गांव निवासी अब्दुल हमीद पुत्र अमीर कुरेशी ने रिपोर्ट दी की हमेशा की तरह उसने पच्चीस दिसंबर की शाम को घर के बाहर अपनी पिकअप खड़ी की थी। छब्बीस दिसंबर की सुबह देखा तो पिकअप गायब मिली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की मदद से मामले में बगड़ी नगर थाने के खोडिया गजनई निवासी तेईस साल के विजयसिंह उर्फ रणजीत सिंह पुत्र रामसिंह रावत को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। जिनसे पिकअप चोरी करना कबूला। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की पिकअप बरामद की और उसे गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया की आरोपी आला दर्जे का वाहन चोर है। जिसके खिलाफ तेईस मामले विभिन्न थानों में दर्ज है। जिनमें से उन्नीस वाहन चोरी के है। पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया की आरोपी वाहन चोरी कर उसे कम दाम पर बेच देता था। जिसे तस्करी के दौरान उपयोग किया जाता था। आरोपी ने इससे पहले किन-किन को वाहन बेचे इसको लेकर रिमांड के दौरान पूछताछ की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ब्रिटेन के शाही इतिहास के 100 वर्षों में पहली बार, प्रिंस हैरी गवाही देने के लिए उच्च न्यायालय में उपस्थित हुए। ब्रिटिश अखबार डेली मिरर के खिलाफ मामले में गवाही देने के लिए प्रिंस हैरी सोमवार को लंदन हाई कोर्ट पहुंचे। डेली मिरर के पत्रकारों पर फोन हैकिंग समेत कई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है. ससेक्स के राजकुमार अमेरिका में अपनी पत्नी मेघन मार्कल और दो बच्चों के साथ रहते हैं जो अब शाही परिवार के साथ नहीं हैं। एमजीएन की जासूसी और विश्वासघात ने उनके निजी जीवन पर असर डाला। MGN ने डेली मिरर, संडे मिरर और संडे अपील पर फोन हैकिंग और धोखाधड़ी में लिप्त होने का आरोप लगाया है। 1996 से 2010 तक, MGNA निजी जासूसी कर रहा था और निजी जीवन के बारे में जानकारी एकत्र कर रहा था। एमजीएन ने इन विवादों के बारे में कहा कि मामले को अदालत में लाने में देरी हुई है। आरोपी पक्ष के वकील प्रिंस हैरी से मामले में पूछताछ कर सकते हैं। राजकुमार के वकील ने कहा कि पत्रकारों ने सुनवाई शुरू होते ही राजकुमार हैरी की मां दिवंगत राजकुमारी डायना की आवाज सुनी। गौरतलब है कि प्रिंस हैरी ने ब्रिटेन के शाही परिवार से नाता तोड़कर अपनी सारी शाही उपाधियां और अधिकार छोड़ दिए हैं। हाल ही में प्रकाशित अपनी किताब में उन्होंने ब्रिटिश शाही परिवार और खासकर बड़े भाई प्रिंस विलियम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मिरर ग्रुप के अखबारों ने हैरी के बारे में क्या कहा? प्रिंस हैरी ने कहा कि एमजीएन द्वारा प्रकाशित 140 कहानियां फोन-हैकिंग या अन्य अवैध कार्यों का परिणाम थीं। उनके वकीलों ने कहा कि हस्तक्षेप के कारण उनकी लंबे समय से प्रेमिका, चेल्सी डेवी के साथ उनका रिश्ता टूट गया। प्रिंस हैरी ने अखबारों के खिलाफ उच्च न्यायालय में चार मामले किए हैं, जिनमें यह मामला भी शामिल है। वे मर्डोक के एनजीएन पर भी मुकदमा कर रहे हैं। उन्होंने एनजीएन के सन टैबलॉयड पर कथित फोन-हैकिंग और अन्य अवैध कार्यों का आरोप लगाया। प्रिंस हैरी ने कहा कि यह सिर्फ फोन हैकिंग की बात नहीं है। बल्कि यह सत्ता की जिम्मेदारी का मामला है। अपराधियों को पत्रकार के रूप में फंसाने में प्रेस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी।
ब्रिटेन के शाही इतिहास के एक सौ वर्षों में पहली बार, प्रिंस हैरी गवाही देने के लिए उच्च न्यायालय में उपस्थित हुए। ब्रिटिश अखबार डेली मिरर के खिलाफ मामले में गवाही देने के लिए प्रिंस हैरी सोमवार को लंदन हाई कोर्ट पहुंचे। डेली मिरर के पत्रकारों पर फोन हैकिंग समेत कई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है. ससेक्स के राजकुमार अमेरिका में अपनी पत्नी मेघन मार्कल और दो बच्चों के साथ रहते हैं जो अब शाही परिवार के साथ नहीं हैं। एमजीएन की जासूसी और विश्वासघात ने उनके निजी जीवन पर असर डाला। MGN ने डेली मिरर, संडे मिरर और संडे अपील पर फोन हैकिंग और धोखाधड़ी में लिप्त होने का आरोप लगाया है। एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार दस तक, MGNA निजी जासूसी कर रहा था और निजी जीवन के बारे में जानकारी एकत्र कर रहा था। एमजीएन ने इन विवादों के बारे में कहा कि मामले को अदालत में लाने में देरी हुई है। आरोपी पक्ष के वकील प्रिंस हैरी से मामले में पूछताछ कर सकते हैं। राजकुमार के वकील ने कहा कि पत्रकारों ने सुनवाई शुरू होते ही राजकुमार हैरी की मां दिवंगत राजकुमारी डायना की आवाज सुनी। गौरतलब है कि प्रिंस हैरी ने ब्रिटेन के शाही परिवार से नाता तोड़कर अपनी सारी शाही उपाधियां और अधिकार छोड़ दिए हैं। हाल ही में प्रकाशित अपनी किताब में उन्होंने ब्रिटिश शाही परिवार और खासकर बड़े भाई प्रिंस विलियम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मिरर ग्रुप के अखबारों ने हैरी के बारे में क्या कहा? प्रिंस हैरी ने कहा कि एमजीएन द्वारा प्रकाशित एक सौ चालीस कहानियां फोन-हैकिंग या अन्य अवैध कार्यों का परिणाम थीं। उनके वकीलों ने कहा कि हस्तक्षेप के कारण उनकी लंबे समय से प्रेमिका, चेल्सी डेवी के साथ उनका रिश्ता टूट गया। प्रिंस हैरी ने अखबारों के खिलाफ उच्च न्यायालय में चार मामले किए हैं, जिनमें यह मामला भी शामिल है। वे मर्डोक के एनजीएन पर भी मुकदमा कर रहे हैं। उन्होंने एनजीएन के सन टैबलॉयड पर कथित फोन-हैकिंग और अन्य अवैध कार्यों का आरोप लगाया। प्रिंस हैरी ने कहा कि यह सिर्फ फोन हैकिंग की बात नहीं है। बल्कि यह सत्ता की जिम्मेदारी का मामला है। अपराधियों को पत्रकार के रूप में फंसाने में प्रेस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी।
शिमला. नवंबर 2022 में प्रस्तावित हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी कमर कस ली है. प्रदेश सरकार लोक-लुभावन योजनाओं, घोषणाओं के साथ अब गांवों पर भी विशेष फोकस कर दिया है. गांवों में फ्री पानी देने के बाद 20 हजार सोलर लाइटें लगाने का उद्देश्य रखा है. इसके साथ ही 11 लाख उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है और सरकार ने 125 यूनिट तक बिजली के बिल माफ कर दिए हैं. प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई जाने वाली इन सोलर लाइटों के लिए प्र देश सरकार 75 फीसदी सब्सिडी देगी, वहीं 25 फीसदी ग्रामीणों को देना होगा. सरकार के अनुसार गांवों में सात, नौ, 12, 15 और 18 वॉट की बीस हजार लाइटें लगाने का उद्देश्य रखा गया है. सोलर स्ट्रीट लाइटों के लिए हिम ऊर्जा विभाग ने कंपनियों से आवेदन मांग लिए हैं. जैसे ही कंपनियों का चयन होगा तो 15 अगस्त से लाइटें लगाने का काम भी शुरू हो जाएगा. एक लाइट की कीमत कुल 11,000 रुपए होगी. लाइटों के दाम क्या होंगे यह सब कंपनियों का चयन होने के बाद ही तय किए जाएंगे. लाइटों को लगवाने के लिए ग्रामीणों को पंचायतों में आवेदन करना होगा. पंचायतें ही इन आवेदनों को हिम ऊर्जा के पास भेजेगा. जब आवेदन मंजूर हो जाएगा तो संबंधित जिला उपायुक्त लाइटों की 75 फीसदी राशि का भुगतान करेंगे. वहीं हिम ऊर्जा विभाग के मुख्य अधिकारियों के अनुसार अगले महीने से लाइटें लगनी शुरू हो जाएंगी. इन सोलर स्ट्रीट लाइटों की खासियत यह होगी कि इनकी ड्राई बैटरी (Dry Battery) होगी. इसमें पुरानी बैटरी की तरह पानी डालने की जरूरत नहीं होगी.
शिमला. नवंबर दो हज़ार बाईस में प्रस्तावित हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी कमर कस ली है. प्रदेश सरकार लोक-लुभावन योजनाओं, घोषणाओं के साथ अब गांवों पर भी विशेष फोकस कर दिया है. गांवों में फ्री पानी देने के बाद बीस हजार सोलर लाइटें लगाने का उद्देश्य रखा है. इसके साथ ही ग्यारह लाख उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है और सरकार ने एक सौ पच्चीस यूनिट तक बिजली के बिल माफ कर दिए हैं. प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई जाने वाली इन सोलर लाइटों के लिए प्र देश सरकार पचहत्तर फीसदी सब्सिडी देगी, वहीं पच्चीस फीसदी ग्रामीणों को देना होगा. सरकार के अनुसार गांवों में सात, नौ, बारह, पंद्रह और अट्ठारह वॉट की बीस हजार लाइटें लगाने का उद्देश्य रखा गया है. सोलर स्ट्रीट लाइटों के लिए हिम ऊर्जा विभाग ने कंपनियों से आवेदन मांग लिए हैं. जैसे ही कंपनियों का चयन होगा तो पंद्रह अगस्त से लाइटें लगाने का काम भी शुरू हो जाएगा. एक लाइट की कीमत कुल ग्यारह,शून्य रुपयापए होगी. लाइटों के दाम क्या होंगे यह सब कंपनियों का चयन होने के बाद ही तय किए जाएंगे. लाइटों को लगवाने के लिए ग्रामीणों को पंचायतों में आवेदन करना होगा. पंचायतें ही इन आवेदनों को हिम ऊर्जा के पास भेजेगा. जब आवेदन मंजूर हो जाएगा तो संबंधित जिला उपायुक्त लाइटों की पचहत्तर फीसदी राशि का भुगतान करेंगे. वहीं हिम ऊर्जा विभाग के मुख्य अधिकारियों के अनुसार अगले महीने से लाइटें लगनी शुरू हो जाएंगी. इन सोलर स्ट्रीट लाइटों की खासियत यह होगी कि इनकी ड्राई बैटरी होगी. इसमें पुरानी बैटरी की तरह पानी डालने की जरूरत नहीं होगी.
प्रिया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट लिखा है कि उनके लिए दूसरों की राय मायने नहीं रखती। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उनके पति मालव और बेटे अरदास का नाम घसीटने की जरूरत नहीं है। क्योंकि वे जो करना चाहती हैं, उसके लिए पूरी तरह आजाद हैं। प्रिया ने लिखा है, "बताना चाहती हूं कि मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं। कई लोगों ने मालव का नाम कमेंट में मेंशन किया है, यह कह कर कि मैं कैसी पत्नी हूं और उन्होंने मुझे इस तरह के कपड़े पहनने की इजाजत कैसे दी। " बकौल प्रिया, "आपमें से कुछ लोगों ने मेरे बेटे अरदास के बारे में कुछ बातें कही थीं कि वह मां के तौर पर मेरे बारे में क्या सोचेगा या मां के तौर पर मैं उसे क्या सिखा रही हूं। इसलिए यह तय करना मालव और अरदास पर ही छोड़ दिए कि मैं कैसी पत्नी या मां हूं? " प्रिया ने इस दौरान यह भी लिखा है कि उन्हें अपने पहनावे को लेकर किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा है, "और देखिए मैं साफ़ कर देना चाहती हूं कि मुझे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं, इसके लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। एक इंसान के तौर पर यह तय करने का मुझे अधिकार है कि क्या पहनना है और कैसी जिंदगी जीनी हैं। " प्रिया ने आगे लिखा है, "शुक्रिया, लेकिन आपके द्वारा दिए गए सजेशन और सलाह के लिए नो थैंक यू। एक इंसान या मालव राजदा की फैमिली होने के नाते हमें इसकी जरूरत नहीं है। " 'तारक मेहता. . . ' की रीटा रिपोर्टर से ज्यादा प्रिया आहूजा सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी के कारण चर्चा में रहती हैं। वे यहां अक्सर अपनी फैमिली फोटोज और बोल्ड तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उन्हें 4 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करती हैं।
प्रिया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट लिखा है कि उनके लिए दूसरों की राय मायने नहीं रखती। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उनके पति मालव और बेटे अरदास का नाम घसीटने की जरूरत नहीं है। क्योंकि वे जो करना चाहती हैं, उसके लिए पूरी तरह आजाद हैं। प्रिया ने लिखा है, "बताना चाहती हूं कि मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं। कई लोगों ने मालव का नाम कमेंट में मेंशन किया है, यह कह कर कि मैं कैसी पत्नी हूं और उन्होंने मुझे इस तरह के कपड़े पहनने की इजाजत कैसे दी। " बकौल प्रिया, "आपमें से कुछ लोगों ने मेरे बेटे अरदास के बारे में कुछ बातें कही थीं कि वह मां के तौर पर मेरे बारे में क्या सोचेगा या मां के तौर पर मैं उसे क्या सिखा रही हूं। इसलिए यह तय करना मालव और अरदास पर ही छोड़ दिए कि मैं कैसी पत्नी या मां हूं? " प्रिया ने इस दौरान यह भी लिखा है कि उन्हें अपने पहनावे को लेकर किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा है, "और देखिए मैं साफ़ कर देना चाहती हूं कि मुझे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं, इसके लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। एक इंसान के तौर पर यह तय करने का मुझे अधिकार है कि क्या पहनना है और कैसी जिंदगी जीनी हैं। " प्रिया ने आगे लिखा है, "शुक्रिया, लेकिन आपके द्वारा दिए गए सजेशन और सलाह के लिए नो थैंक यू। एक इंसान या मालव राजदा की फैमिली होने के नाते हमें इसकी जरूरत नहीं है। " 'तारक मेहता. . . ' की रीटा रिपोर्टर से ज्यादा प्रिया आहूजा सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी के कारण चर्चा में रहती हैं। वे यहां अक्सर अपनी फैमिली फोटोज और बोल्ड तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उन्हें चार लाख से ज्यादा लोग फॉलो करती हैं।
नयी दिल्ली (एजेंसी/वार्ता): उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, केरल से रोज़गार के लिए सऊदी अरब जाने की इच्छा रखने वालों के लिए खुशखबरी है कि सऊदी अरब सरकार उनके वीसा आवेदन के साथ अब पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र (पीसीसी) नहीं मांगेगी। भारत में सऊदी अरब के दूतावास ने यह जानकारी दी है। दूतावास के अनुसार भारत एवं सऊदी अरब के बीच सशक्त संबंधों एवं रणनीतिक साझीदारी के मद्देनज़र शाही सरकार ने रोज़गार के लिए आने वाले भारतीय नागरिकों को वीसा देने के लिए पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र (पीसीसी) देने से छूट देने का निर्णय लिया है। अब किसी भी नागरिक को सऊदी अरब आने के लिए पीसीसी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूतावास ने कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के संबंध और मजबूत करने के लिए लिया गया है। दूतावास ने सऊदी अरब में शांति पूर्ण ढंग से रहने वाले 20 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों के योगदान की सराहना की है।
नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, केरल से रोज़गार के लिए सऊदी अरब जाने की इच्छा रखने वालों के लिए खुशखबरी है कि सऊदी अरब सरकार उनके वीसा आवेदन के साथ अब पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र नहीं मांगेगी। भारत में सऊदी अरब के दूतावास ने यह जानकारी दी है। दूतावास के अनुसार भारत एवं सऊदी अरब के बीच सशक्त संबंधों एवं रणनीतिक साझीदारी के मद्देनज़र शाही सरकार ने रोज़गार के लिए आने वाले भारतीय नागरिकों को वीसा देने के लिए पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र देने से छूट देने का निर्णय लिया है। अब किसी भी नागरिक को सऊदी अरब आने के लिए पीसीसी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूतावास ने कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के संबंध और मजबूत करने के लिए लिया गया है। दूतावास ने सऊदी अरब में शांति पूर्ण ढंग से रहने वाले बीस लाख से अधिक भारतीय नागरिकों के योगदान की सराहना की है।
प्रिलिम्स के लियेः तमिलनाडु में वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय, संविधान की नौवीं अनुसूची। मेन्स के लियेः सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय के लिये 10.5 प्रतिशत आंतरिक आरक्षण को रद्द कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा? - सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय को 10.5% आंतरिक आरक्षण समानता, गैर-भेदभाव और तमिलनाडु में 115 अन्य अति पिछड़े समुदायों (MBCs) तथा विमुक्त समुदायों (DNCs) के समान अवसर के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। - राज्य में अति पिछड़ा वर्ग (MBC) के कुल 20% के कोटे के भीतर एक समुदाय को 10.5 फीसदी आरक्षण का आवंटन और इस श्रेणी में अन्य 115 अन्य समुदायों को केवल 9.5% कोटा देने का कोई विशिष्ट एवं पर्याप्त आधार नहीं है। - इसके अलावा न्यायालय ने कहा कि इस दावे का समर्थन करने के लिये वर्ष 2021 के अधिनियम से पहले कोई मूल्यांकन या विश्लेषण नहीं किया गया था कि वन्नियाकुला क्षत्रिय अन्य MBCs और DNCs की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े थे। - न्यायालय ने रेखांकित किया कि जाति आंतरिक आरक्षण के लिये शुरुआती बिंदु हो सकती है, लेकिन यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह निर्णय की तर्कसंगतता को सही ठहराए। - हालाँकि न्यायालय ने वर्ष 2021 के अधिनियम और इसके आरक्षण के प्रतिशत को असंवैधानिक ठहराया, लेकिन इसने राज्य की विधायी क्षमता को चिह्नित पिछड़े वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण एवं इस प्रतिशत को विभाजित करने के लिये कानून बनाने हेतु एक सक्षम प्राधिकरण के रूप में मान्यता दी है। वन्नियाकुला क्षत्रिय आरक्षण क्या है? - संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत संरक्षण प्राप्त वर्ष 1994 के अधिनियम के तहत तमिलनाडु में 69% आरक्षण लागू है। - 69% में से ईसाई और मुसलमानों सहित पिछड़े वर्गों को 30% MBCs को 20%; अनुसूचित जाति को 18% और अनुसूचित जनजाति के लिये 1% आरक्षण की व्यवस्था है। - यह आरक्षण राज्य में अति पिछड़ा वर्ग और विमुक्त समुदाय अधिनियम, 2021 के तहत प्रदान किया गया था। - इसमें वन्नियाकुला क्षत्रिय (वन्नियार, वनिया, वन्निया गौंडर, गौंडर या कंदर, पडायाची, पल्ली और अग्निकुल क्षत्रिय सहित) समुदाय को शामिल किया गया था। - वर्ष 1983 में दूसरे तमिलनाडु पिछड़ा आयोग ने माना कि वन्नियाकुला क्षत्रियों की आबादी राज्य की कुल आबादी का 13.01% है। - इसलिये 13.01% की आबादी वाले समुदाय को 10.5% आरक्षण के प्रावधान को अनुपातहीन नहीं कहा जा सकता है। भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूचीः - नौवीं अनुसूची को भारतीय संविधान में पहले संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। - इसे 10 मई, 1951 को जवाहरलाल नेहरू सरकार द्वारा भूमि सुधार कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती दिये जाने से बचाने के लिये पेश किया गया था। - इसे नए अनुच्छेद 31B द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया था। - अनुच्छेद 31B का एक पूर्वव्यापी (Retrospective) संचालन भी है, अर्थात् न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित होने के बाद भी यदि किसी कानून को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाता है तो वह उस तारीख से संवैधानिक रूप से वैध माना जाएगा। - जबकि अनुसूची के तहत संरक्षित अधिकांश कानून कृषि/भूमि के मुद्दों से संबंधित हैं, इसके साथ ही सूची में अन्य विषय भी शामिल हैं। - हालाँकि अनुच्छेद 31B न्यायिक समीक्षा से परे है, जबकि बाद में शीर्ष अदालत द्वारा कहा गया कि नौवीं अनुसूची के तहत कानून भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएंगे यदि वे मौलिक अधिकारों या संविधान के मूल ढाँचे का उल्लंघन करते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs): प्रश्न. भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची को भारत के संविधान में निम्नलिखित में से किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान पेश किया गया था? (2019) उत्तरः (a)
प्रिलिम्स के लियेः तमिलनाडु में वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय, संविधान की नौवीं अनुसूची। मेन्स के लियेः सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप। चर्चा में क्यों? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय के लिये दस.पाँच प्रतिशत आंतरिक आरक्षण को रद्द कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा? - सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय को दस.पाँच% आंतरिक आरक्षण समानता, गैर-भेदभाव और तमिलनाडु में एक सौ पंद्रह अन्य अति पिछड़े समुदायों तथा विमुक्त समुदायों के समान अवसर के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। - राज्य में अति पिछड़ा वर्ग के कुल बीस% के कोटे के भीतर एक समुदाय को दस.पाँच फीसदी आरक्षण का आवंटन और इस श्रेणी में अन्य एक सौ पंद्रह अन्य समुदायों को केवल नौ.पाँच% कोटा देने का कोई विशिष्ट एवं पर्याप्त आधार नहीं है। - इसके अलावा न्यायालय ने कहा कि इस दावे का समर्थन करने के लिये वर्ष दो हज़ार इक्कीस के अधिनियम से पहले कोई मूल्यांकन या विश्लेषण नहीं किया गया था कि वन्नियाकुला क्षत्रिय अन्य MBCs और DNCs की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े थे। - न्यायालय ने रेखांकित किया कि जाति आंतरिक आरक्षण के लिये शुरुआती बिंदु हो सकती है, लेकिन यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह निर्णय की तर्कसंगतता को सही ठहराए। - हालाँकि न्यायालय ने वर्ष दो हज़ार इक्कीस के अधिनियम और इसके आरक्षण के प्रतिशत को असंवैधानिक ठहराया, लेकिन इसने राज्य की विधायी क्षमता को चिह्नित पिछड़े वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण एवं इस प्रतिशत को विभाजित करने के लिये कानून बनाने हेतु एक सक्षम प्राधिकरण के रूप में मान्यता दी है। वन्नियाकुला क्षत्रिय आरक्षण क्या है? - संविधान की नौवीं अनुसूची के तहत संरक्षण प्राप्त वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के अधिनियम के तहत तमिलनाडु में उनहत्तर% आरक्षण लागू है। - उनहत्तर% में से ईसाई और मुसलमानों सहित पिछड़े वर्गों को तीस% MBCs को बीस%; अनुसूचित जाति को अट्ठारह% और अनुसूचित जनजाति के लिये एक% आरक्षण की व्यवस्था है। - यह आरक्षण राज्य में अति पिछड़ा वर्ग और विमुक्त समुदाय अधिनियम, दो हज़ार इक्कीस के तहत प्रदान किया गया था। - इसमें वन्नियाकुला क्षत्रिय समुदाय को शामिल किया गया था। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरासी में दूसरे तमिलनाडु पिछड़ा आयोग ने माना कि वन्नियाकुला क्षत्रियों की आबादी राज्य की कुल आबादी का तेरह.एक% है। - इसलिये तेरह.एक% की आबादी वाले समुदाय को दस.पाँच% आरक्षण के प्रावधान को अनुपातहीन नहीं कहा जा सकता है। भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूचीः - नौवीं अनुसूची को भारतीय संविधान में पहले संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। - इसे दस मई, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को जवाहरलाल नेहरू सरकार द्वारा भूमि सुधार कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती दिये जाने से बचाने के लिये पेश किया गया था। - इसे नए अनुच्छेद इकतीसB द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया था। - अनुच्छेद इकतीसB का एक पूर्वव्यापी संचालन भी है, अर्थात् न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित होने के बाद भी यदि किसी कानून को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाता है तो वह उस तारीख से संवैधानिक रूप से वैध माना जाएगा। - जबकि अनुसूची के तहत संरक्षित अधिकांश कानून कृषि/भूमि के मुद्दों से संबंधित हैं, इसके साथ ही सूची में अन्य विषय भी शामिल हैं। - हालाँकि अनुच्छेद इकतीसB न्यायिक समीक्षा से परे है, जबकि बाद में शीर्ष अदालत द्वारा कहा गया कि नौवीं अनुसूची के तहत कानून भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएंगे यदि वे मौलिक अधिकारों या संविधान के मूल ढाँचे का उल्लंघन करते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न : प्रश्न. भारतीय संविधान की नौवीं अनुसूची को भारत के संविधान में निम्नलिखित में से किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान पेश किया गया था? उत्तरः
शिमला - शिमला के कोटखाई छात्रा गैंगरेप और मर्डर मामले में सीबीआई ने कोटखाई में दबिश दी है। यहां सीबीआई ने कई लोगों से पूछताछ की है। सीबीआई टीम के इलाके में पहुंचने से एक बार फिर इलाके में चर्चाएं शुरु हो गई है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच एजेंसी कुछ और लोगों को पकड़ सकती है। सीबीआई एक बार फिर सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई की एक टीम ने कोटखाई के हलाइला में कई लोगों से पूछताछ की है। संदिग्धों से भी पूछताछ करने की सूचना है। एक टीम सुबह ही इलाके में गई थी। सीबीआई कुछ और जानकारी इलाके से जुटा रही है और इसके आधार पर वह अगली कार्रवाई करने की तैयारी में है। इस बीच कोटखाई थाने में हिरासत के दौरान हुई आरोपी की हत्या के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को अदालत में पेश गया, जहां से उनको 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तार आईजी जहूर जैदी, डीएसपी सहित आठ पुलिस कर्मियों को गुरुवार को दोपहर बाद सीजेएम रणजीत सिंह ठाकुर की अदालत में पेश किया गया। सीबीआई द्वारा अदालत से सभी आरोपियों का रिमांड बढ़ाने का आग्रह किया गया। जांच एजेंसी का तर्क था कि पुलिस अफसरों और कर्मचारियों से अभी और पूछताछ करनी है, इसलिए रिमांड बढ़ाया जाए। इसका पुलिस अफसरों व कर्मचारियों के वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई बहाने बना रही है। ऐसे में रिमांड की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आठों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले सभी आरोपियों मेडिकल चैकअप करवाया गया। आईजीएमसी से वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश चंद और एक चिकित्सक ने बालूगंज थाना जाकर सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का मेडिकल चैकअप किया। आशीष चौहान के अलावा राजेंद्र उर्फ राजू, दीपक, सुभाष बिष्ट, लोकजन को लेकर सीबीआई की टीम शिमला से गुजरात के गांधीनगर रवाना हुई है, जहां इनका टेस्ट करवाया जाएगा। इनको छात्रा गैंगरेप व मर्डर मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
शिमला - शिमला के कोटखाई छात्रा गैंगरेप और मर्डर मामले में सीबीआई ने कोटखाई में दबिश दी है। यहां सीबीआई ने कई लोगों से पूछताछ की है। सीबीआई टीम के इलाके में पहुंचने से एक बार फिर इलाके में चर्चाएं शुरु हो गई है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच एजेंसी कुछ और लोगों को पकड़ सकती है। सीबीआई एक बार फिर सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई की एक टीम ने कोटखाई के हलाइला में कई लोगों से पूछताछ की है। संदिग्धों से भी पूछताछ करने की सूचना है। एक टीम सुबह ही इलाके में गई थी। सीबीआई कुछ और जानकारी इलाके से जुटा रही है और इसके आधार पर वह अगली कार्रवाई करने की तैयारी में है। इस बीच कोटखाई थाने में हिरासत के दौरान हुई आरोपी की हत्या के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को अदालत में पेश गया, जहां से उनको चौदह दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तार आईजी जहूर जैदी, डीएसपी सहित आठ पुलिस कर्मियों को गुरुवार को दोपहर बाद सीजेएम रणजीत सिंह ठाकुर की अदालत में पेश किया गया। सीबीआई द्वारा अदालत से सभी आरोपियों का रिमांड बढ़ाने का आग्रह किया गया। जांच एजेंसी का तर्क था कि पुलिस अफसरों और कर्मचारियों से अभी और पूछताछ करनी है, इसलिए रिमांड बढ़ाया जाए। इसका पुलिस अफसरों व कर्मचारियों के वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई बहाने बना रही है। ऐसे में रिमांड की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आठों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले सभी आरोपियों मेडिकल चैकअप करवाया गया। आईजीएमसी से वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश चंद और एक चिकित्सक ने बालूगंज थाना जाकर सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का मेडिकल चैकअप किया। आशीष चौहान के अलावा राजेंद्र उर्फ राजू, दीपक, सुभाष बिष्ट, लोकजन को लेकर सीबीआई की टीम शिमला से गुजरात के गांधीनगर रवाना हुई है, जहां इनका टेस्ट करवाया जाएगा। इनको छात्रा गैंगरेप व मर्डर मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के फैंस के लिए बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाले ऋषभ का नाम अब पूरे देश में चर्चा में है। इसी कड़ी में खबर ये भी सामने आई है कि उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन की धाक का असर इतना हुआ कि उन्हें उत्तराखंड सरकार ने अपने राज्य का ब्रैंड एम्बेसडर बनाया है। आपको बता दें कि ये जानकारी ट्वीट करके उत्तराखंड के सीएम ने दी है। उत्तराखंड के सीएम पुष्कार सिंह धामी ने ट्वीट किया, उसमें लिखा कि 'प्रदेश सरकार ने देवभूमि के सपूत एवं भारतीय क्रिकेट टीम के प्रतिभावान खिलाड़ी ऋषभ पंत को उत्तराखंड के युवाओं को खेलकूद एवं जन स्वास्थ्य के प्रति प्रोत्साहित किए जाने के उद्देश्य से "राज्य ब्रांड एम्बेसडर" नियुक्त करने का निर्णय लिया है। आपको हार्दिक शुभकामनाएं! ' बता दें कि पंत हरिद्वार जिले के रुड़की के रहने वाले हैं। मिली जानकारी के हिसाब से पंत ने टेस्ट में 31 मैच खेलते हुए 5 शतक की मदद से 2123 रन बनाए हैं, जबकि 27 वनडे में एक शतक की मदद से 840 रन बनाए हैं। टी-20 इंटरनेशनल में उनके नाम 54 मैच में 883 रन दर्ज हैं। वह IPL में दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान भी रह चुके हैं। This website uses cookies.
भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के फैंस के लिए बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाले ऋषभ का नाम अब पूरे देश में चर्चा में है। इसी कड़ी में खबर ये भी सामने आई है कि उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन की धाक का असर इतना हुआ कि उन्हें उत्तराखंड सरकार ने अपने राज्य का ब्रैंड एम्बेसडर बनाया है। आपको बता दें कि ये जानकारी ट्वीट करके उत्तराखंड के सीएम ने दी है। उत्तराखंड के सीएम पुष्कार सिंह धामी ने ट्वीट किया, उसमें लिखा कि 'प्रदेश सरकार ने देवभूमि के सपूत एवं भारतीय क्रिकेट टीम के प्रतिभावान खिलाड़ी ऋषभ पंत को उत्तराखंड के युवाओं को खेलकूद एवं जन स्वास्थ्य के प्रति प्रोत्साहित किए जाने के उद्देश्य से "राज्य ब्रांड एम्बेसडर" नियुक्त करने का निर्णय लिया है। आपको हार्दिक शुभकामनाएं! ' बता दें कि पंत हरिद्वार जिले के रुड़की के रहने वाले हैं। मिली जानकारी के हिसाब से पंत ने टेस्ट में इकतीस मैच खेलते हुए पाँच शतक की मदद से दो हज़ार एक सौ तेईस रन बनाए हैं, जबकि सत्ताईस वनडे में एक शतक की मदद से आठ सौ चालीस रन बनाए हैं। टी-बीस इंटरनेशनल में उनके नाम चौवन मैच में आठ सौ तिरासी रन दर्ज हैं। वह IPL में दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान भी रह चुके हैं। This website uses cookies.
वाशिंगटन. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका, अफगानिस्तान में पाकिस्तान के कदमों पर करीबी नजर रख रहे हैं। श्रृंगला ने कहा कि भारत की तालिबान के साथ सीमित बातचीत रही है, अफगानिस्तान के नए शासकों ने संकेत दिया है कि वे भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।विदेश सचिव ने वाशिंगटन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा समाप्त होने पर भारतीय पत्रकारों के एक समूह से कहा, "जाहिर तौर पर हमारी तरह वे भी करीब से नजर रख रहे हैं और हमें बारीकी से पाकिस्तान के कदमों पर नजर रखनी होगी।"उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में किस प्रकार के हालात बनते हैं, इस संदर्भ में अमेरिका इंतजार करो और देखो की नीति अपनाएगा। भारत की भी यही नीति है। उन्होंने कहा, "इसका यह मतलब नहीं है कि आप कुछ नहीं करो। इसका मतलब है कि आपको करना होगा जमीन पर हालात बहुत नाजुक है और आपको देखना होगा कि यह कैसे बदलते हैं। आपको यह देखना होगा कि सार्वजनिक रूप से दिए गए आश्वासनों पर वाकई में अमल हुआ अथवा नहीं, और चीजें किस प्रकार से काम कर रही हैं।"विदेश सचिव ने कहा, "उनके साथ (तालिबान) हमारी बातचीत बहुत सीमित रही है। ऐसा नहीं है कि हमारी कोई ठोस बातचीत हुई है। लेकिन अभी तक जो भी बातचीत हुई है उसमें कम से कम तालिबान यह संकेत देते दिखाई दिया है कि वे इससे निपटने में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।"वह कतर में भारत के राजदूत की तालिबान के एक वरिष्ठ नेता के साथ हाल में हुई बैठक के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, "हमने उन्हें बताया कि हम चाहते हैं कि उनके क्षेत्र से हमारे या अन्य देशों के खिलाफ कोई आतंकवादी खतरा पैदा न हो, हम चाहते हैं कि वे महिलाओं, अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशील रहे। मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी तरफ से आश्वस्त किया है।"उन्होंने अफगानिस्तान में स्थिति के तेजी से बदलने का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका दोनों उस पर करीबी नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, "15 अगस्त को देखिए कि ऐसी स्थिति थी जिसमें अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी अचानक देश से चले गए। तालिबान आ गया। हालात इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि इस समय किसी भी चीज पर टिप्पणी करना मुश्किल है।"श्रृंगला ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिति पर अमेरिका करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, "वे जाहिर तौर पर देखेंगे कि अफगानिस्तान के हालात में अलग-अलग तत्व क्या भूमिका निभाते हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान का पड़ोसी है। उन्होंने तालिबान का समर्थन किया और उसे संरक्षण दिया। वहां कई ऐसे तत्व हैं जिनका पाकिस्तान समर्थन करता है।"साथ ही उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता के दौरान अफगानिस्तान पर पारित प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा समेत प्रतिबंधित संगठनों का जिक्र किया गया। अफगानिस्तान में इन दो आतंकवादी समूहों के आसानी से घुसने, उनकी भूमिका के बारे में हमें चिंता है और हम सावधानीपूर्वक इस पर नजर रखेंगे। इस संदर्भ में पाकिस्तान की भूमिका देखनी होगी।एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिकियों ने हमेशा कहा है कि तालिबान ने उनसे वादा किया है कि वे किसी भी तरीके से अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाने में नहीं करने देंगे। अमेरिका ने तालिबान को स्पष्ट कर दिया है कि अगर अफगानिस्तान से कोई भी आतंकवादी गतिविधि होती है तो वे उसे जवाबदेह ठहराएंगे।
वाशिंगटन. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका, अफगानिस्तान में पाकिस्तान के कदमों पर करीबी नजर रख रहे हैं। श्रृंगला ने कहा कि भारत की तालिबान के साथ सीमित बातचीत रही है, अफगानिस्तान के नए शासकों ने संकेत दिया है कि वे भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।विदेश सचिव ने वाशिंगटन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा समाप्त होने पर भारतीय पत्रकारों के एक समूह से कहा, "जाहिर तौर पर हमारी तरह वे भी करीब से नजर रख रहे हैं और हमें बारीकी से पाकिस्तान के कदमों पर नजर रखनी होगी।"उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में किस प्रकार के हालात बनते हैं, इस संदर्भ में अमेरिका इंतजार करो और देखो की नीति अपनाएगा। भारत की भी यही नीति है। उन्होंने कहा, "इसका यह मतलब नहीं है कि आप कुछ नहीं करो। इसका मतलब है कि आपको करना होगा जमीन पर हालात बहुत नाजुक है और आपको देखना होगा कि यह कैसे बदलते हैं। आपको यह देखना होगा कि सार्वजनिक रूप से दिए गए आश्वासनों पर वाकई में अमल हुआ अथवा नहीं, और चीजें किस प्रकार से काम कर रही हैं।"विदेश सचिव ने कहा, "उनके साथ हमारी बातचीत बहुत सीमित रही है। ऐसा नहीं है कि हमारी कोई ठोस बातचीत हुई है। लेकिन अभी तक जो भी बातचीत हुई है उसमें कम से कम तालिबान यह संकेत देते दिखाई दिया है कि वे इससे निपटने में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।"वह कतर में भारत के राजदूत की तालिबान के एक वरिष्ठ नेता के साथ हाल में हुई बैठक के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, "हमने उन्हें बताया कि हम चाहते हैं कि उनके क्षेत्र से हमारे या अन्य देशों के खिलाफ कोई आतंकवादी खतरा पैदा न हो, हम चाहते हैं कि वे महिलाओं, अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशील रहे। मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी तरफ से आश्वस्त किया है।"उन्होंने अफगानिस्तान में स्थिति के तेजी से बदलने का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका दोनों उस पर करीबी नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, "पंद्रह अगस्त को देखिए कि ऐसी स्थिति थी जिसमें अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी अचानक देश से चले गए। तालिबान आ गया। हालात इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि इस समय किसी भी चीज पर टिप्पणी करना मुश्किल है।"श्रृंगला ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिति पर अमेरिका करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, "वे जाहिर तौर पर देखेंगे कि अफगानिस्तान के हालात में अलग-अलग तत्व क्या भूमिका निभाते हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान का पड़ोसी है। उन्होंने तालिबान का समर्थन किया और उसे संरक्षण दिया। वहां कई ऐसे तत्व हैं जिनका पाकिस्तान समर्थन करता है।"साथ ही उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता के दौरान अफगानिस्तान पर पारित प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा समेत प्रतिबंधित संगठनों का जिक्र किया गया। अफगानिस्तान में इन दो आतंकवादी समूहों के आसानी से घुसने, उनकी भूमिका के बारे में हमें चिंता है और हम सावधानीपूर्वक इस पर नजर रखेंगे। इस संदर्भ में पाकिस्तान की भूमिका देखनी होगी।एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिकियों ने हमेशा कहा है कि तालिबान ने उनसे वादा किया है कि वे किसी भी तरीके से अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाने में नहीं करने देंगे। अमेरिका ने तालिबान को स्पष्ट कर दिया है कि अगर अफगानिस्तान से कोई भी आतंकवादी गतिविधि होती है तो वे उसे जवाबदेह ठहराएंगे।
Desk : कोरोना काल में लॉकडाउन और सोशल डिसटेनसिंग का पालन करते हुए जब ज्यादा से ज्यादा काम को डिजिटली निपटाने की कोशिश हो रही है. ऑनलाइन क्लास करना हो या ऑफिस की माटिंग सब कुछ वर्चुअल हो रहा है. इस मौके का फायदा उठाते हुए जियो ने हाल ही में जियोमीट लांच किया था. जियो को टक्कर देने के लिए अब भारती एयरटेल ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सर्विस शुरू की है. एयरटेल ने इसका नाम 'एयरटेल ब्लूजींस' रखा है. अमेरिका की दिग्गज दूरसंचार कंपनी वेरिजॉन के साथ पार्टनरशिप में इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया गया है. इस मौके पर भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा कि "एयरटेल ब्लूजींस एक सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉल्यूशन है. हम यूजरों की प्राइवेसी के लिए प्रतिबद्ध हैं. " एयरटेल की यह सुविधा शुरुआत में केवल एंटरप्राइज़ ग्राहकों के लिए ही उपलब्ध होगी. जबकि जियो मीट एंटरप्राइज़ेस और ग्राहक दोनों के लिए उपलब्ध है. एयरटेल ब्लूजींस की यह सुविधा शुरुआती तीन महीने के लिए मुफ्त में उपलब्ध होगी लेकिन बाद में इस सुविधा के लिए मार्केट रेट ग्राहकों को देना होगा. ट्रायल को एक्टिवेट कराने के लिए ग्राहक एयरटेल की वेब साइट पर जाकर अपनी डिटेल्स भरकर रजिस्टर करना होगा. इसके बाद 24 घंटे के अंदर मुफ्त ट्रायल सेवा एक्टिवेट हो जाएगी.
Desk : कोरोना काल में लॉकडाउन और सोशल डिसटेनसिंग का पालन करते हुए जब ज्यादा से ज्यादा काम को डिजिटली निपटाने की कोशिश हो रही है. ऑनलाइन क्लास करना हो या ऑफिस की माटिंग सब कुछ वर्चुअल हो रहा है. इस मौके का फायदा उठाते हुए जियो ने हाल ही में जियोमीट लांच किया था. जियो को टक्कर देने के लिए अब भारती एयरटेल ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सर्विस शुरू की है. एयरटेल ने इसका नाम 'एयरटेल ब्लूजींस' रखा है. अमेरिका की दिग्गज दूरसंचार कंपनी वेरिजॉन के साथ पार्टनरशिप में इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया गया है. इस मौके पर भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा कि "एयरटेल ब्लूजींस एक सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉल्यूशन है. हम यूजरों की प्राइवेसी के लिए प्रतिबद्ध हैं. " एयरटेल की यह सुविधा शुरुआत में केवल एंटरप्राइज़ ग्राहकों के लिए ही उपलब्ध होगी. जबकि जियो मीट एंटरप्राइज़ेस और ग्राहक दोनों के लिए उपलब्ध है. एयरटेल ब्लूजींस की यह सुविधा शुरुआती तीन महीने के लिए मुफ्त में उपलब्ध होगी लेकिन बाद में इस सुविधा के लिए मार्केट रेट ग्राहकों को देना होगा. ट्रायल को एक्टिवेट कराने के लिए ग्राहक एयरटेल की वेब साइट पर जाकर अपनी डिटेल्स भरकर रजिस्टर करना होगा. इसके बाद चौबीस घंटाटे के अंदर मुफ्त ट्रायल सेवा एक्टिवेट हो जाएगी.
सेनेटरी इंस्टालेशन वर्कर्स यूनियन चंडीगढ़ की गेट मीटिंग सेक्टर 38 मेंटेनेंस बूथ पर हुई और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले होने वाले कर्म वार प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। पहला प्रदर्शन 15 मार्च को हॉर्टिकल्चर ऑफिस सेक्टर 23 में होगा। कर्मचारियों को संबोधन करते हुए ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर अश्वनी कुमार, यूनियन के प्रधान कुलदीप सिंह, चेयरमैन महीपाल और जनरल सेक्रेटरी नछतर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन और एमसी कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रहा है और मांगों को पूरा नहीं कर रहा, जिस कारण कर्मचारियों में रोष है। उन्होने प्रशासन से मांग की कि प्रशासन आउटसोर्स वर्कर्स के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाए, समान काम समान वेतन दे, वर्कर्स को सात तारीख से पहले वेतन का भुगतान किया जाए, पहली अप्रैल, 2022 के बाद सेवामुक्त हुए कर्मचारियों को पेंशन और पेंशन लाभ दिए जाएं। 2016 के बाद रेगुलर हुए कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दें। खाली पदों को भरा जाए, डेलीवेज कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए। केंद्रीय वेतन मान दिए जाए, दिसंबर 1996 के बाद एमसी में भर्ती हुए डेलीवेज कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा बनाई पॉलिसी में कवर कर रेगुलर किया जाए। कर्मचारियों को बरसाती दी जाए, छठे वेतन आयोग का लाभ डेलीवेज कर्मचारियों को दिया जाए और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों का 2023-2024 का डीसी रेट सभी का 21 फीसदी बढ़ाया जाए। अश्वनी ने चेतावनी दी अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो प्रशासन और एमसी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सेनेटरी इंस्टालेशन वर्कर्स यूनियन चंडीगढ़ की गेट मीटिंग सेक्टर अड़तीस मेंटेनेंस बूथ पर हुई और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले होने वाले कर्म वार प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। पहला प्रदर्शन पंद्रह मार्च को हॉर्टिकल्चर ऑफिस सेक्टर तेईस में होगा। कर्मचारियों को संबोधन करते हुए ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर अश्वनी कुमार, यूनियन के प्रधान कुलदीप सिंह, चेयरमैन महीपाल और जनरल सेक्रेटरी नछतर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन और एमसी कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रहा है और मांगों को पूरा नहीं कर रहा, जिस कारण कर्मचारियों में रोष है। उन्होने प्रशासन से मांग की कि प्रशासन आउटसोर्स वर्कर्स के लिए सुरक्षित पॉलिसी बनाए, समान काम समान वेतन दे, वर्कर्स को सात तारीख से पहले वेतन का भुगतान किया जाए, पहली अप्रैल, दो हज़ार बाईस के बाद सेवामुक्त हुए कर्मचारियों को पेंशन और पेंशन लाभ दिए जाएं। दो हज़ार सोलह के बाद रेगुलर हुए कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दें। खाली पदों को भरा जाए, डेलीवेज कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए। केंद्रीय वेतन मान दिए जाए, दिसंबर एक हज़ार नौ सौ छियानवे के बाद एमसी में भर्ती हुए डेलीवेज कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा बनाई पॉलिसी में कवर कर रेगुलर किया जाए। कर्मचारियों को बरसाती दी जाए, छठे वेतन आयोग का लाभ डेलीवेज कर्मचारियों को दिया जाए और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों का दो हज़ार तेईस-दो हज़ार चौबीस का डीसी रेट सभी का इक्कीस फीसदी बढ़ाया जाए। अश्वनी ने चेतावनी दी अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो प्रशासन और एमसी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।