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तकनीकी सहायता - संघ के अन्य विशेष संगठनों की भाँति यह प्राविधिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत अपने विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न प्रदेशों को उपयुक्त परामर्शों द्वारा लाभ पहुँचाता है।
स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी कार्य
अन्तर्राष्ट्रीय अणु शक्ति एजेंसी - इस अन्तर्राष्ट्रीय अणु शक्ति एजेंसी ( International Atomic Agency ) की स्थापना २६ जुलाई, १९५६ को हुई । संयुक्त राष्ट्रसघ के प्रधान कार्या लय, न्यूयार्क में हुए एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में २६ अक्टूबर, १९५६ को उसकी नियमावली स्वीकार की गयी थी और वह तब लागू हुई जब कि कम-से-कम आठ हस्ताक्षरकर्ता राज्यों ने, जिनमें कनाडा, फ्रांस, सोवियत रूस, ब्रिटेन और अमेरिका भी थे, अपने स्वीकृति पत्र जमा कर दिये । एजेंसी का संयुक्त राष्ट्रसंघ के साथ कार्य सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा द्वारा नवम्बर, १९५६ तथा एजेंसी की जेनरल कान्फ्रेंस के द्वारा अक्टूबर, १९९७ में स्वीकार किया गया ।
उद्देश्य - संसार भर में शान्ति, व्यवस्था तथा सम्पन्नता में अणु-शक्ति के योग को बढ़ावा देना तथा विस्तृत करना और यह सुनिश्चित करना कि उसके द्वारा की जाने वाली सहायता का नैतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नही किया जायगा ।
संगठन - नियमावली में एक साधारण सभा सम्मेलन, एक गवर्नर बोर्ड, एक कर्मचारी भण्डल जिसका मुखिया एक महानिर्देशक होता है, की व्यवस्था है । साधारण सभा में एजेंसी के समस्त सदस्य होते हैं। इसके नियमित वार्षिक अधिवेशन होते हैं तथा आवश्यकतानुसार विशेष अधिवेशन भी बुलाये जा सकते हैं । सभी अन्य बातो के अलावा गवर्नर बोर्ड के सदस्यों को निर्वाचित करती है, बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट पर विचार करती है, एजेंसी के बजट स्वीकार करती है और संयुक्त राष्ट्र को पेश करने के लिए रिपोर्ट स्वीकार करती है। साधारण सभा नियमावली के क्षेत्र के अन्तर्गत किसी भी विषय पर विचार कर सकती है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (W. H. Ox)
विश्त्र-व्यापी पैमाने पर स्वास्थ्य की समस्या के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत एक विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation ) की स्थापना गयी है । सामाजिक और आर्थिक परिषद् ने एक अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन करके इसका संविधान बनवाया और ७ अप्रिल, १६४८५८ को इस संगठन की स्थापना कर
दो गयी ।
इस संगठन के तीन अंग है : (१) सब सदस्य राज्यों के प्रतिनिधियों की असेम्बली ( २ ) असेम्बली द्वारा चुने गये अट्ठारह व्यक्तियों द्वारा नियत होने वाले चिकित्सा आदि का विशेष ज्ञान रखने वाले अट्ठारह व्यक्तियों का कार्यवाहक (Executive) बोर्ड तथा (३) सचिवालय अफ्रिका, अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, यूरोप, पूर्वी भूमध्यसागर और पश्चिमी प्रशान्त महासागर के क्षेत्रों के लिए इसके प्रादेशिक संगठन है। इसका मुख्य कार्यालय जेनेवा
विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य संसार को बीमारी से मुक्त करना है। इसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए संगठन निम्न कार्यों को करता है-- (१) अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य के कार्यों का संचालन तथा सम्वन्ध (२) महामारियों तथा बीमारियों के उन्मूलन के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना, (३) स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसन्धान, (४) आकस्मिक लोटों को रोकने का यत्न करना, (५) मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करना, (६) terft के अन्तर्राष्ट्रीय नामों के निदान सम्बन्धी कार्यों में एकरूपता स्थापित करना, (७) लोगों के वातावरणीय स्वास्थ्य की तथा आहार, पोषण, सफाई, निवासगृह तथा काम करने को दशाओं को उन्नत करना, (८) बाद्यपदार्थो, दवाइयों तथा अन्य ऐसी वस्तुओं के सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय मापक निश्चित करना, (६) स्वास्थ्य के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा इसके विशेष संगठनों तथा अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी संस्थाओं में सहयोग स्थापित करना, तथा (१०) स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशासनात्मक और सामाजिक प्राविधियों
का अध्ययन करना ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं और इन कार्यों का अनु मान निम्नलिखित तथ्यों से लगाया जा सकता है :-- इसने यूनान में मलेरिया निरोध के लिए बड़े पैमाने पर सहायता की और वहाँ इस बीमारी के उन्मूलन में संगठन को पर्याप्त सफलता मिली। भारत में इसने क्षय रोग के निवारण के लिए बी० सी० जी० वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में दी। ईथियोदिया की सरकार के लिए चिकित्सा के शिक्षण की एक विस्तृत योजना बनायी तथा इटriter सरकार को बन्दरगाहों में स्वास्थ्य की परिस्थितियाँ उत्कृष्ट बनाने में सहायता दी । इसने विभिन्न देशों को आवश्यक दवाइयाँ तथा डाक्टरी का बहुमूल्य सामान उपलब्ध कराया तथा अल्पविकसित देशों को सरकारों द्वारा सुझाये गये सरकारी अफसरों के सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सम्बन्धी उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्तियाँ प्रदान की है। मलेरिया निरोध के लिए विभिन्न देशों को डी० डी०टी० तथा अन्य बीमारियों को रोकने के लिए पेन्सिलीन आदि दवाइयाँ बहुत बड़ी मात्रा में प्रदान की है।
अन्तर्राष्ट्रीय बाल-पातकालीन कोष
art के स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान देने के लिए संघ के अन्तर्गत साधारण सभा ने ११ सितम्बर १६४६ को अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष की स्थापना की । यह संस्था आर्थिक और सामाजिक परिषद् की देख-रेख में काम करती है । १६५० में संयुक्त राष्ट्रसंघ को साधारण सभा ने इसके कार्य क्षेत्र को बढ़ाकर संसार भर के fareer afrefer देशों के बालकों को हर तरह की आवश्यकता की पूर्ति की व्यवस्था को । १९५३ में यह कोप स्थायी बना दिया गया। इन दिनों इसका कार्य संसार के प्रायः सभी देशों में हो रहा है। इसके द्वारा मलेरिया, यक्ष्मा आदि कठिन रोगों का निवारण, प्रसूतिकागृहों एवं शिशु कल्याण केन्द्रों की स्थापना, धातृविद्या प्रशिक्षण, शिशु आहार की व्यवस्था, दुग्ध संरक्षण और वितरण आदि कार्य किये जाते हैं। इन कार्यों के अतिरिक्त भूकम्प, बाढ़ आदि के समय यह विभाग प्रसूतिकाओं एवं शिशुओ की अपेक्षित सहायता करता है ।
इस संस्था की अधिक प्रशिक्षण केन्द्र
सहायता के भारत के विभिन्न स्थानों में अस्पतालों और स्कूलों में सौ से स्थापित हो चुके हैं; जहाँ परिचारिकाओं को धातृविद्या की शिक्षा
व्यन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धं
जाती है। मातृमंगल एवं शिशु कल्याण के लिए यह संस्था विशेष रूप से कार्य कर रही है । १६६२ में इस संस्था के कार्यों का बहुत विस्तार किया गया । इस समय एक सौ एवं क्षेत्रों में इसकी पाँच सौ परियोजनाएँ चल रही है ।
विश्व - शरणार्थी संगठन (U.N.H.C.R. )
इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा द्वारा १ जनवरी, १९५१ को हुई थी । प्रारम्भ में इसका कार्य काल १९५८ तक ही रखा गया था, किन्तु पुनः इसकी अवधि वृद्धि १९६६ तक के लिए की गयी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शरणार्थियों को अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षण देना है। यह संस्था शरणार्थियों को स्वदेश लौटाकर अथवा उनका एक नवीन समुदाय स्थापित कर उनकी समस्याओं का स्थायी रूप से समाधान करने का प्रयत्न करती है। शरणार्थियों के लिए काम-धन्धे, न्याय, शिक्षा, धार्मिक स्वतन्त्रता, साहाय्य आदि प्राप्त करने के अधिकार इस संस्था द्वारा स्वीकार किये गये हैं। शरणार्थियों को विभिन्न देशो में यात्रा करने के लिए रिपोर्ट भी दी जाती है ।
जो शरणार्थी बसाये नहीं जा सके थे, उनकी संख्या १९६२ के आरम्भ में अस्सी हजार ( १९६१ ) से घटकर अट्ठावन हजार हो गयी है । उसी प्रकार उक्त काल में कैम्प में रहनेवालों फेलिक्स की संख्या पन्द्रह हजार से घटकर नौ हजार रह गयी। इस संस्था के वर्त्तमान उच्चायुक्त इनीडर ( स्विट्जरलैंड ) है ।
संघ के गैर राजनीतिक कार्यो का मूल्यांकन
पुराने राष्ट्रसंघ की तरह संयुक्त राष्ट्रसंघ को गैर-राजनीतिक कार्यों में सराहनीय सफलता मिली है। आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा ऐसे ही अन्य कार्यों में संयुक्त राष्ट्रसंघ की विभिन्न संस्थाओं संगठनों से संसार के लोगों को अत्यधिक लाभ पहुँचा है। इसके श्रम संगठन ने मजदूरों की दशा को उन्नत किया है तथा खाद्य एवं कृषि संगठन ने अन्न का उत्पादन बढ़ा कर अकालों को नियन्त्रित करने का प्रयास किया है। विश्व स्वस्थ्य संगठन ने बीमारियों के प्रतिरोध में बड़ी सहायता पहुँचायी है और यूनेस्को ने मनुष्य के सांस्कृतिक विकास के लिए बड़े प्रशंसनीय कार्य किये है। एक समालोचक ने ठीक ही कहा है कि 'निरस्त्रीकरण और राजनीतिक कार्यों का खरगोश तो अभी झपकी ले रहा, किन्तु संघ की विशेष संस्थाओं को प्राविधिक सहायता और सहयोग का कछुआ बहुत आगे बढ़ गया है।" वस्तुतः संयुक्त राष्ट्रसंघ के कल्याणकारी कार्य उसके राजनीतिक कार्यों की अपेक्षा बहुत अधिक सफल रहे हैं ।
संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल्यांकन
महान प्रयोग की असफलता युद्धों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शान्ति समाधान तथा अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की वृद्धि के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना मानव-इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना थी । अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की दिशा में इतने विशाल पैमाने कभी प्रयोग नहीं हुआ था। चार्टर में अन्तर्राष्ट्रीय संगठन को उन बुराइयों को दूर यल किया गया जिनके कारण पुराना राष्ट्रसंघ असफल हो गया था और संयुक्त राष्ट्रसंघ को पहने की अपेक्षा एक उत्कृष्ट और शक्तिशाली संगठन बनाया गया था। इसका संगठन और कार्यसंयक्त राष्ट्रसंघ
पद्धति का सिलसिला उन्नीसवी शताब्दी के किसी भी व्यक्ति को महान् आश्चर्य में डाल दे सकता है। यदि उस युग का कोई यादमी जी उठे और संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रधान कार्यालय न्यूयार्क में पहुँच जाय तो वह इस प्रयोग को देखकर दंग हो जा सकता है। इतने पवित्र और महान् प्रयोग के लिए वह द्वितीय विश्व युद्धकालीन राजनेताओं को धन्यवाद दिये बिना नहीं रह सकता जिन्होंने संघ की मशीन का निर्माण किया। लेकिन कुछ दिनों के अध्ययन के बाद उसको पता चल जायगा कि संघ की मशीन त्रुटियों से परिपूर्ण है और इसके भाग दूसरे से किसी प्रकार सम्बद्ध नहीं है। अपने २४-२५ वर्ष के जीवन में संयुक्त राष्ट्रसंघ को प्रत्येक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्य में प्रायः विफलता का सामना ही करना पड़ा है। इसकी विफलताएँ निम्नलिखित तथ्यों से प्रकट हो जाती है :
१. संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक उद्देश्य राष्ट्रों के बीच हथियारबन्दी की होड़ को रोकना था। लेकिन संघ अभी तक निरसीकरण के सम्बन्ध में विभिन्न देशो के बीच समझौता नहीं करा सका है।
२. दक्षिण अफ्रिका को श्वेत सरकार ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर और उद्देश्यों का अतिक्रमण किया है। वह भारतीय तथा अश्वेत जातियों के साथ प्रजातीय दुर्व्यवहार करके संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा उद्घोषित मौलिक मानवीय अधिकारों का उल्लंघन करती रही है। इसके अतिरिक्त अभी तक संयुक्त राष्ट्रसंघ इस सरकार से राष्ट्रसंघ के संरक्षित प्रदेश दक्षिण-पश्चिमी अफ्रिका को वापस नहीं ले सका है।
३. संयुक्त राष्ट्रसंघ का उद्देश्य संसार के एक ऐसे सहयोग का वातावरण कायम करना था रद्ध की सम्भावनाएँ कम हों। लेकिन पूर्व और पश्चिम के मतभेदों तथा महाशक्तियों के वैमनस्य और विरोध को मिटाने में यह पूर्णतया असफल रहा है ।
४. सदस्यता के सम्बन्ध में भी संयुक्त राष्ट्रसंघ असफल रहा है। इसके अन्दर आपसी मतभेद इतना अधिक है कि अभी तक चीन, जर्मनी, कोरिया आदि देश इसके सदस्य नहीं बन पाये है। संघ में इन राज्यों का अभी तक न शामिल होना इसकी त्रुटियों का योतक है ।
५. महत्त्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में संयुक्त राष्ट्रसंघ बहुत यसफल रहा है। इसके समक्ष कश्मीर का प्रश्न १६४७ से ही पड़ा हुआ है, लेकिन संघ इस समस्या को नहीं सुलझा पाया है जिसके कारण १९६५ में पाकिस्तान और भारत के बीच तीन सप्ताह तक भयंकर युद्ध हुआ । संसार में संकट पैदा करने वाले अभी तीन स्थल है- जर्मनी, कोरिया और वियतनाम और संयुक्त राष्ट्रसंघ में इन समस्याओं को सुलझाने का कोई यत्न नहीं हुआ है ।
इतने विशाल अन्तर्राष्ट्रीय प्रयोग की महान विफलता इतनी अल्प व्यवधि में क्यों और कैसे हो गयी ? इसका एक हो उत्तर है-अमरीकी और सोवियत गुट का मतभेद । संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल आधार महान शक्तियों में सहयोग था। चार्टर के जन्मदाताओं ने सामूहिक सुरक्षा के सिद्धान्त को स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्रसंघ का जन्म दिया था और इस सिद्धान्त के मूल में यह बात थी कि शान्तिप्रिय राज्य मिल-जुलकर काम करेंगे और शान्ति भंग करनेवाले के विरुद्ध संगठित होकर कार्रवाई करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने जन्म के | तकनीकी सहायता - संघ के अन्य विशेष संगठनों की भाँति यह प्राविधिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत अपने विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न प्रदेशों को उपयुक्त परामर्शों द्वारा लाभ पहुँचाता है। स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी कार्य अन्तर्राष्ट्रीय अणु शक्ति एजेंसी - इस अन्तर्राष्ट्रीय अणु शक्ति एजेंसी की स्थापना छब्बीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ छप्पन को हुई । संयुक्त राष्ट्रसघ के प्रधान कार्या लय, न्यूयार्क में हुए एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में छब्बीस अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ छप्पन को उसकी नियमावली स्वीकार की गयी थी और वह तब लागू हुई जब कि कम-से-कम आठ हस्ताक्षरकर्ता राज्यों ने, जिनमें कनाडा, फ्रांस, सोवियत रूस, ब्रिटेन और अमेरिका भी थे, अपने स्वीकृति पत्र जमा कर दिये । एजेंसी का संयुक्त राष्ट्रसंघ के साथ कार्य सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा द्वारा नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ छप्पन तथा एजेंसी की जेनरल कान्फ्रेंस के द्वारा अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में स्वीकार किया गया । उद्देश्य - संसार भर में शान्ति, व्यवस्था तथा सम्पन्नता में अणु-शक्ति के योग को बढ़ावा देना तथा विस्तृत करना और यह सुनिश्चित करना कि उसके द्वारा की जाने वाली सहायता का नैतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नही किया जायगा । संगठन - नियमावली में एक साधारण सभा सम्मेलन, एक गवर्नर बोर्ड, एक कर्मचारी भण्डल जिसका मुखिया एक महानिर्देशक होता है, की व्यवस्था है । साधारण सभा में एजेंसी के समस्त सदस्य होते हैं। इसके नियमित वार्षिक अधिवेशन होते हैं तथा आवश्यकतानुसार विशेष अधिवेशन भी बुलाये जा सकते हैं । सभी अन्य बातो के अलावा गवर्नर बोर्ड के सदस्यों को निर्वाचित करती है, बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट पर विचार करती है, एजेंसी के बजट स्वीकार करती है और संयुक्त राष्ट्र को पेश करने के लिए रिपोर्ट स्वीकार करती है। साधारण सभा नियमावली के क्षेत्र के अन्तर्गत किसी भी विषय पर विचार कर सकती है । विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्त्र-व्यापी पैमाने पर स्वास्थ्य की समस्या के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के अन्तर्गत एक विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना गयी है । सामाजिक और आर्थिक परिषद् ने एक अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन करके इसका संविधान बनवाया और सात अप्रिल, एक लाख चौंसठ हज़ार आठ सौ अट्ठावन को इस संगठन की स्थापना कर दो गयी । इस संगठन के तीन अंग है : सब सदस्य राज्यों के प्रतिनिधियों की असेम्बली असेम्बली द्वारा चुने गये अट्ठारह व्यक्तियों द्वारा नियत होने वाले चिकित्सा आदि का विशेष ज्ञान रखने वाले अट्ठारह व्यक्तियों का कार्यवाहक बोर्ड तथा सचिवालय अफ्रिका, अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, यूरोप, पूर्वी भूमध्यसागर और पश्चिमी प्रशान्त महासागर के क्षेत्रों के लिए इसके प्रादेशिक संगठन है। इसका मुख्य कार्यालय जेनेवा विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य संसार को बीमारी से मुक्त करना है। इसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए संगठन निम्न कार्यों को करता है-- अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य के कार्यों का संचालन तथा सम्वन्ध महामारियों तथा बीमारियों के उन्मूलन के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसन्धान, आकस्मिक लोटों को रोकने का यत्न करना, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करना, terft के अन्तर्राष्ट्रीय नामों के निदान सम्बन्धी कार्यों में एकरूपता स्थापित करना, लोगों के वातावरणीय स्वास्थ्य की तथा आहार, पोषण, सफाई, निवासगृह तथा काम करने को दशाओं को उन्नत करना, बाद्यपदार्थो, दवाइयों तथा अन्य ऐसी वस्तुओं के सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय मापक निश्चित करना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा इसके विशेष संगठनों तथा अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी संस्थाओं में सहयोग स्थापित करना, तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशासनात्मक और सामाजिक प्राविधियों का अध्ययन करना । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं और इन कार्यों का अनु मान निम्नलिखित तथ्यों से लगाया जा सकता है :-- इसने यूनान में मलेरिया निरोध के लिए बड़े पैमाने पर सहायता की और वहाँ इस बीमारी के उन्मूलन में संगठन को पर्याप्त सफलता मिली। भारत में इसने क्षय रोग के निवारण के लिए बीशून्य सीशून्य जीशून्य वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में दी। ईथियोदिया की सरकार के लिए चिकित्सा के शिक्षण की एक विस्तृत योजना बनायी तथा इटriter सरकार को बन्दरगाहों में स्वास्थ्य की परिस्थितियाँ उत्कृष्ट बनाने में सहायता दी । इसने विभिन्न देशों को आवश्यक दवाइयाँ तथा डाक्टरी का बहुमूल्य सामान उपलब्ध कराया तथा अल्पविकसित देशों को सरकारों द्वारा सुझाये गये सरकारी अफसरों के सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सम्बन्धी उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्तियाँ प्रदान की है। मलेरिया निरोध के लिए विभिन्न देशों को डीशून्य डीशून्यटीशून्य तथा अन्य बीमारियों को रोकने के लिए पेन्सिलीन आदि दवाइयाँ बहुत बड़ी मात्रा में प्रदान की है। अन्तर्राष्ट्रीय बाल-पातकालीन कोष art के स्वास्थ्य पर विशेष रूप से ध्यान देने के लिए संघ के अन्तर्गत साधारण सभा ने ग्यारह सितम्बर एक हज़ार छः सौ छियालीस को अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष की स्थापना की । यह संस्था आर्थिक और सामाजिक परिषद् की देख-रेख में काम करती है । एक हज़ार छः सौ पचास में संयुक्त राष्ट्रसंघ को साधारण सभा ने इसके कार्य क्षेत्र को बढ़ाकर संसार भर के fareer afrefer देशों के बालकों को हर तरह की आवश्यकता की पूर्ति की व्यवस्था को । एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में यह कोप स्थायी बना दिया गया। इन दिनों इसका कार्य संसार के प्रायः सभी देशों में हो रहा है। इसके द्वारा मलेरिया, यक्ष्मा आदि कठिन रोगों का निवारण, प्रसूतिकागृहों एवं शिशु कल्याण केन्द्रों की स्थापना, धातृविद्या प्रशिक्षण, शिशु आहार की व्यवस्था, दुग्ध संरक्षण और वितरण आदि कार्य किये जाते हैं। इन कार्यों के अतिरिक्त भूकम्प, बाढ़ आदि के समय यह विभाग प्रसूतिकाओं एवं शिशुओ की अपेक्षित सहायता करता है । इस संस्था की अधिक प्रशिक्षण केन्द्र सहायता के भारत के विभिन्न स्थानों में अस्पतालों और स्कूलों में सौ से स्थापित हो चुके हैं; जहाँ परिचारिकाओं को धातृविद्या की शिक्षा व्यन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धं जाती है। मातृमंगल एवं शिशु कल्याण के लिए यह संस्था विशेष रूप से कार्य कर रही है । एक हज़ार छः सौ बासठ में इस संस्था के कार्यों का बहुत विस्तार किया गया । इस समय एक सौ एवं क्षेत्रों में इसकी पाँच सौ परियोजनाएँ चल रही है । विश्व - शरणार्थी संगठन इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा द्वारा एक जनवरी, एक हज़ार नौ सौ इक्यावन को हुई थी । प्रारम्भ में इसका कार्य काल एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन तक ही रखा गया था, किन्तु पुनः इसकी अवधि वृद्धि एक हज़ार नौ सौ छयासठ तक के लिए की गयी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शरणार्थियों को अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षण देना है। यह संस्था शरणार्थियों को स्वदेश लौटाकर अथवा उनका एक नवीन समुदाय स्थापित कर उनकी समस्याओं का स्थायी रूप से समाधान करने का प्रयत्न करती है। शरणार्थियों के लिए काम-धन्धे, न्याय, शिक्षा, धार्मिक स्वतन्त्रता, साहाय्य आदि प्राप्त करने के अधिकार इस संस्था द्वारा स्वीकार किये गये हैं। शरणार्थियों को विभिन्न देशो में यात्रा करने के लिए रिपोर्ट भी दी जाती है । जो शरणार्थी बसाये नहीं जा सके थे, उनकी संख्या एक हज़ार नौ सौ बासठ के आरम्भ में अस्सी हजार से घटकर अट्ठावन हजार हो गयी है । उसी प्रकार उक्त काल में कैम्प में रहनेवालों फेलिक्स की संख्या पन्द्रह हजार से घटकर नौ हजार रह गयी। इस संस्था के वर्त्तमान उच्चायुक्त इनीडर है । संघ के गैर राजनीतिक कार्यो का मूल्यांकन पुराने राष्ट्रसंघ की तरह संयुक्त राष्ट्रसंघ को गैर-राजनीतिक कार्यों में सराहनीय सफलता मिली है। आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा ऐसे ही अन्य कार्यों में संयुक्त राष्ट्रसंघ की विभिन्न संस्थाओं संगठनों से संसार के लोगों को अत्यधिक लाभ पहुँचा है। इसके श्रम संगठन ने मजदूरों की दशा को उन्नत किया है तथा खाद्य एवं कृषि संगठन ने अन्न का उत्पादन बढ़ा कर अकालों को नियन्त्रित करने का प्रयास किया है। विश्व स्वस्थ्य संगठन ने बीमारियों के प्रतिरोध में बड़ी सहायता पहुँचायी है और यूनेस्को ने मनुष्य के सांस्कृतिक विकास के लिए बड़े प्रशंसनीय कार्य किये है। एक समालोचक ने ठीक ही कहा है कि 'निरस्त्रीकरण और राजनीतिक कार्यों का खरगोश तो अभी झपकी ले रहा, किन्तु संघ की विशेष संस्थाओं को प्राविधिक सहायता और सहयोग का कछुआ बहुत आगे बढ़ गया है।" वस्तुतः संयुक्त राष्ट्रसंघ के कल्याणकारी कार्य उसके राजनीतिक कार्यों की अपेक्षा बहुत अधिक सफल रहे हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल्यांकन महान प्रयोग की असफलता युद्धों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शान्ति समाधान तथा अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की वृद्धि के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना मानव-इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना थी । अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की दिशा में इतने विशाल पैमाने कभी प्रयोग नहीं हुआ था। चार्टर में अन्तर्राष्ट्रीय संगठन को उन बुराइयों को दूर यल किया गया जिनके कारण पुराना राष्ट्रसंघ असफल हो गया था और संयुक्त राष्ट्रसंघ को पहने की अपेक्षा एक उत्कृष्ट और शक्तिशाली संगठन बनाया गया था। इसका संगठन और कार्यसंयक्त राष्ट्रसंघ पद्धति का सिलसिला उन्नीसवी शताब्दी के किसी भी व्यक्ति को महान् आश्चर्य में डाल दे सकता है। यदि उस युग का कोई यादमी जी उठे और संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रधान कार्यालय न्यूयार्क में पहुँच जाय तो वह इस प्रयोग को देखकर दंग हो जा सकता है। इतने पवित्र और महान् प्रयोग के लिए वह द्वितीय विश्व युद्धकालीन राजनेताओं को धन्यवाद दिये बिना नहीं रह सकता जिन्होंने संघ की मशीन का निर्माण किया। लेकिन कुछ दिनों के अध्ययन के बाद उसको पता चल जायगा कि संघ की मशीन त्रुटियों से परिपूर्ण है और इसके भाग दूसरे से किसी प्रकार सम्बद्ध नहीं है। अपने चौबीस-पच्चीस वर्ष के जीवन में संयुक्त राष्ट्रसंघ को प्रत्येक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्य में प्रायः विफलता का सामना ही करना पड़ा है। इसकी विफलताएँ निम्नलिखित तथ्यों से प्रकट हो जाती है : एक. संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक उद्देश्य राष्ट्रों के बीच हथियारबन्दी की होड़ को रोकना था। लेकिन संघ अभी तक निरसीकरण के सम्बन्ध में विभिन्न देशो के बीच समझौता नहीं करा सका है। दो. दक्षिण अफ्रिका को श्वेत सरकार ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के चार्टर और उद्देश्यों का अतिक्रमण किया है। वह भारतीय तथा अश्वेत जातियों के साथ प्रजातीय दुर्व्यवहार करके संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा उद्घोषित मौलिक मानवीय अधिकारों का उल्लंघन करती रही है। इसके अतिरिक्त अभी तक संयुक्त राष्ट्रसंघ इस सरकार से राष्ट्रसंघ के संरक्षित प्रदेश दक्षिण-पश्चिमी अफ्रिका को वापस नहीं ले सका है। तीन. संयुक्त राष्ट्रसंघ का उद्देश्य संसार के एक ऐसे सहयोग का वातावरण कायम करना था रद्ध की सम्भावनाएँ कम हों। लेकिन पूर्व और पश्चिम के मतभेदों तथा महाशक्तियों के वैमनस्य और विरोध को मिटाने में यह पूर्णतया असफल रहा है । चार. सदस्यता के सम्बन्ध में भी संयुक्त राष्ट्रसंघ असफल रहा है। इसके अन्दर आपसी मतभेद इतना अधिक है कि अभी तक चीन, जर्मनी, कोरिया आदि देश इसके सदस्य नहीं बन पाये है। संघ में इन राज्यों का अभी तक न शामिल होना इसकी त्रुटियों का योतक है । पाँच. महत्त्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में संयुक्त राष्ट्रसंघ बहुत यसफल रहा है। इसके समक्ष कश्मीर का प्रश्न एक हज़ार छः सौ सैंतालीस से ही पड़ा हुआ है, लेकिन संघ इस समस्या को नहीं सुलझा पाया है जिसके कारण एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में पाकिस्तान और भारत के बीच तीन सप्ताह तक भयंकर युद्ध हुआ । संसार में संकट पैदा करने वाले अभी तीन स्थल है- जर्मनी, कोरिया और वियतनाम और संयुक्त राष्ट्रसंघ में इन समस्याओं को सुलझाने का कोई यत्न नहीं हुआ है । इतने विशाल अन्तर्राष्ट्रीय प्रयोग की महान विफलता इतनी अल्प व्यवधि में क्यों और कैसे हो गयी ? इसका एक हो उत्तर है-अमरीकी और सोवियत गुट का मतभेद । संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल आधार महान शक्तियों में सहयोग था। चार्टर के जन्मदाताओं ने सामूहिक सुरक्षा के सिद्धान्त को स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्रसंघ का जन्म दिया था और इस सिद्धान्त के मूल में यह बात थी कि शान्तिप्रिय राज्य मिल-जुलकर काम करेंगे और शान्ति भंग करनेवाले के विरुद्ध संगठित होकर कार्रवाई करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने जन्म के |
विभूतिपुर थाना क्षेत्र के चकहबीब वार्ड आठ टोला तुर्की में आपसी विवाद को लेकर दो गुटों में मंगलवार को मारपीट की घटना में एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष पर ईट से हमला कर दिया। जिसमें एक पांच वर्षीय बालक गंभीर रूप से जख्मी हो गया। आनन-फानन में स्वजनों ने उसे विभूतिपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से इलाज उपरांत चिकित्सकों ने उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। इलाज के दौरान बालक की मौत बुधवार की अल सुबह हो गई।
उजियारपुर थाना क्षेत्र के शाहबाजपुर कोयला डिपो के समीप एक बाइक सवार युवक को किसी अज्ञात वाहन ने ठोकर मार दी। जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान घटहो थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर घटहो गांव निवासी विनोद राय के पुत्र रवि कुमार राय (35) के रूप में हुई है। इस संबंध में मृतक के चाचा मनोज राय ने थाना में आवेदन देकर कहा है कि उसका भतीजा (मृतक) 11 जुलाई को करीब 3 बजे दिन में अपने होंडा साइन बाइक पर सवार होकर अपने ससुराल सरायरंजन थाना क्षेत्र के भोजपुर गांव जा रहा था। इसी बीच शाहबाजपुर कोयला डिपो के समीप एक तेज गति से सामने से आ रही वाहन ने रवि की बाइक में ठोकर मार दी। जिससे उसके भतीजे की मौत हो गई। वही ठोकर मारकर वाहन पुरब दिशा की तरफ तेजी से भाग गया। थानाध्यक्ष ने मामला दर्ज कर घटना की छानबीन शुरू कर दी गई है।
| विभूतिपुर थाना क्षेत्र के चकहबीब वार्ड आठ टोला तुर्की में आपसी विवाद को लेकर दो गुटों में मंगलवार को मारपीट की घटना में एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष पर ईट से हमला कर दिया। जिसमें एक पांच वर्षीय बालक गंभीर रूप से जख्मी हो गया। आनन-फानन में स्वजनों ने उसे विभूतिपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से इलाज उपरांत चिकित्सकों ने उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। इलाज के दौरान बालक की मौत बुधवार की अल सुबह हो गई। उजियारपुर थाना क्षेत्र के शाहबाजपुर कोयला डिपो के समीप एक बाइक सवार युवक को किसी अज्ञात वाहन ने ठोकर मार दी। जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान घटहो थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर घटहो गांव निवासी विनोद राय के पुत्र रवि कुमार राय के रूप में हुई है। इस संबंध में मृतक के चाचा मनोज राय ने थाना में आवेदन देकर कहा है कि उसका भतीजा ग्यारह जुलाई को करीब तीन बजे दिन में अपने होंडा साइन बाइक पर सवार होकर अपने ससुराल सरायरंजन थाना क्षेत्र के भोजपुर गांव जा रहा था। इसी बीच शाहबाजपुर कोयला डिपो के समीप एक तेज गति से सामने से आ रही वाहन ने रवि की बाइक में ठोकर मार दी। जिससे उसके भतीजे की मौत हो गई। वही ठोकर मारकर वाहन पुरब दिशा की तरफ तेजी से भाग गया। थानाध्यक्ष ने मामला दर्ज कर घटना की छानबीन शुरू कर दी गई है। |
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर समाज के प्रति काफी संवेदनशील हैं और साथ ही सोशल मीडिया आदि के माध्यम से हमेशा ही फैंस के साथ जुड़े रहते हैं। हाल ही में उन्होंने देसी माइक्रोब्लॉगिंग ऐप, कू के माध्यम से एक ऐसी बात कही, जो हमारी आँखें खोल देने के लिए काफी है। जी हाँ, कई लोग एक साल बाद भी भारत सरकार की बनाई वैक्सीन पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं, यहाँ तक कि इस एक वर्ष में वैक्सीन के विरोध में कई तरह के सवाल सरकार पर दागे गए हैं। लेकिन आज अनुपम खेर ने उन सभी लोगों को इस पर विश्वास करने के लिए ऐसा संदेश दिया है, जो हमारे जीवन की बहुत बड़ी सच्चाई है।?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1484394117392367617%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.hindustantimes.com%2Fentertainment%2Fbollywood%2Fanupam-kher-on-why-he-is-vaccinated-i-don-t-want-to-die-on-a-hospital-bed-unable-to-hug-my-loved-ones-101642749393751.html हम हजारों काम ऐसे करते हैं, जिनके पीछे के कारण हम असल में जानते ही नहीं हैं। बात पेन किलर की हो रोजमर्रा में उपयोग किए जाने वाले साबुन की, हमें नहीं पता कि इन चीजों में अंदर क्या है, लेकिन फिर भी हम अपने भले के लिए इनका उपयोग करते हैं। फिर हम वैक्सीन पर विश्वास क्यों नहीं कर पा रहे हैं? इस सवाल के साथ ही अनुमप ने कहा हैः'मैंने अपने लिए वैक्सीन लगवाई है और आपके लिए मास्क पहनता हूँ!!! नहीं, मुझे नहीं पता वैक्सीन में क्या है!! न ही मैं बचपन में मुझे लगाई गई वैक्सीन के बारे में कुछ पता है कि उनमें अंदर क्या था। लेकिन हमने विज्ञान पर भरोसा किया! ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो मुझे नहीं पता है। इस संदेश को साझा करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें! यह हम सबकी मदद कर सकता है! #MaskUp @EduMinOfIndia'इस पोस्ट के साथ साझा की गई वीडियो में अनुपम को कहते हुए सुना जा सकता है कि मैं पूरी तरह वैक्सीनेटेड हूँ। उम्मीद है कि हमें जल्द ही बूस्टर डोज़ भी मिल ही जाएँगे। मैं नहीं जानता कि इस वैक्सीन में आखिरकार क्या है, और न ही उस वैक्सीन में जो बचपन में मुझे लगी थी। मैं तो यह भी नहीं जानता कि कॉम्बिफ्लेम आदि पेन किलर्स में क्या है, मैं सिर्फ इतना जानता हूँ कि ये मेरे दर्द को कम करती हैं। मैं नहीं जानता कि मेरे द्वारा दैनिक आधार पर उपयोग की जाने वाली वस्तुओं, जैसे- साबुन, डियो आदि में क्या है। मुझे नहीं पता कि लम्बे समय तक मोबाइल का उपयोग करने के क्या परिणाम हो सकते हैं। जिस रेस्तरां में मैंने खाना खाया, वह वास्तव में साफ है या नहीं, वहाँ के कर्मचारियों ने हाथ धोकर खाना बनाया होगा, मैं कैसे जान सकता हूँ? ऐसी तमाम बातें हैं, जिन्हें मैं नहीं जानता। लेकिन मैं यह जानता हूँ कि जिंदगी बहुत छोटी है और मैं इसे खुलकर जीना चाहता हूँ, मैं निडर होकर लोगों को गले लगाना चाहता हूँ, घूमना चाहता हूँ। मैं उस जिंदगी को महसूस करना चाहता हूँ, जो महामारी से पहले जीता था।हमने कई तरह की वैक्सीन लगवाई हैं, जैसे कि चिकन पॉक्स, पोलियो, हेपेटाइटस आदि। इस दौरान हमने विज्ञान पर विश्वास किया, और आज हम सलामत हैं। मैंने अन्य लोगों को इसे लगाता हुआ देख या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई है, मैंने अपने लिए, अपने जीवन के लिए वैक्सीन लगवाई है। मैं किसी हॉस्पिटल के बेड पर कोरोना से पीड़ित होकर नहीं मरना चाहता। अपनों को गले लगाए, घूमे-फिरे बिना और डर-डर कर जीकर मैं खुश ही नहीं रह पाऊँगा। इसलिए मैं गर्व से कहता हूँ कि मैंने अपने लिए वैक्सीन लगवाई है और आपके लिए मास्क पहनता हूँ।
| बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर समाज के प्रति काफी संवेदनशील हैं और साथ ही सोशल मीडिया आदि के माध्यम से हमेशा ही फैंस के साथ जुड़े रहते हैं। हाल ही में उन्होंने देसी माइक्रोब्लॉगिंग ऐप, कू के माध्यम से एक ऐसी बात कही, जो हमारी आँखें खोल देने के लिए काफी है। जी हाँ, कई लोग एक साल बाद भी भारत सरकार की बनाई वैक्सीन पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं, यहाँ तक कि इस एक वर्ष में वैक्सीन के विरोध में कई तरह के सवाल सरकार पर दागे गए हैं। लेकिन आज अनुपम खेर ने उन सभी लोगों को इस पर विश्वास करने के लिए ऐसा संदेश दिया है, जो हमारे जीवन की बहुत बड़ी सच्चाई है।?ref_src=twsrc%पाँचEtfw%सातCtwcamp%पाँचEtweetembed%सातCtwterm%पाँचE एक चार आठ चार तीन नौ चार एक एक सात तीन नौ दो तीन छः सात छः एक सात%सातCtwgr%पाँचE%सातCtwcon%पाँचEsएक_&ref_url=https%तीन एम्पीयर%दोF%दोFwww.hindustantimes.com%दोFentertainment%दोFbollywood%दोFanupam-kher-on-why-he-is-vaccinated-i-don-t-want-to-die-on-a-hospital-bed-unable-to-hug-my-loved-ones- एक शून्य एक छः चार दो सात चार नौ तीन नौ तीन सात पाँच एक.html हम हजारों काम ऐसे करते हैं, जिनके पीछे के कारण हम असल में जानते ही नहीं हैं। बात पेन किलर की हो रोजमर्रा में उपयोग किए जाने वाले साबुन की, हमें नहीं पता कि इन चीजों में अंदर क्या है, लेकिन फिर भी हम अपने भले के लिए इनका उपयोग करते हैं। फिर हम वैक्सीन पर विश्वास क्यों नहीं कर पा रहे हैं? इस सवाल के साथ ही अनुमप ने कहा हैः'मैंने अपने लिए वैक्सीन लगवाई है और आपके लिए मास्क पहनता हूँ!!! नहीं, मुझे नहीं पता वैक्सीन में क्या है!! न ही मैं बचपन में मुझे लगाई गई वैक्सीन के बारे में कुछ पता है कि उनमें अंदर क्या था। लेकिन हमने विज्ञान पर भरोसा किया! ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो मुझे नहीं पता है। इस संदेश को साझा करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें! यह हम सबकी मदद कर सकता है! #MaskUp @EduMinOfIndia'इस पोस्ट के साथ साझा की गई वीडियो में अनुपम को कहते हुए सुना जा सकता है कि मैं पूरी तरह वैक्सीनेटेड हूँ। उम्मीद है कि हमें जल्द ही बूस्टर डोज़ भी मिल ही जाएँगे। मैं नहीं जानता कि इस वैक्सीन में आखिरकार क्या है, और न ही उस वैक्सीन में जो बचपन में मुझे लगी थी। मैं तो यह भी नहीं जानता कि कॉम्बिफ्लेम आदि पेन किलर्स में क्या है, मैं सिर्फ इतना जानता हूँ कि ये मेरे दर्द को कम करती हैं। मैं नहीं जानता कि मेरे द्वारा दैनिक आधार पर उपयोग की जाने वाली वस्तुओं, जैसे- साबुन, डियो आदि में क्या है। मुझे नहीं पता कि लम्बे समय तक मोबाइल का उपयोग करने के क्या परिणाम हो सकते हैं। जिस रेस्तरां में मैंने खाना खाया, वह वास्तव में साफ है या नहीं, वहाँ के कर्मचारियों ने हाथ धोकर खाना बनाया होगा, मैं कैसे जान सकता हूँ? ऐसी तमाम बातें हैं, जिन्हें मैं नहीं जानता। लेकिन मैं यह जानता हूँ कि जिंदगी बहुत छोटी है और मैं इसे खुलकर जीना चाहता हूँ, मैं निडर होकर लोगों को गले लगाना चाहता हूँ, घूमना चाहता हूँ। मैं उस जिंदगी को महसूस करना चाहता हूँ, जो महामारी से पहले जीता था।हमने कई तरह की वैक्सीन लगवाई हैं, जैसे कि चिकन पॉक्स, पोलियो, हेपेटाइटस आदि। इस दौरान हमने विज्ञान पर विश्वास किया, और आज हम सलामत हैं। मैंने अन्य लोगों को इसे लगाता हुआ देख या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई है, मैंने अपने लिए, अपने जीवन के लिए वैक्सीन लगवाई है। मैं किसी हॉस्पिटल के बेड पर कोरोना से पीड़ित होकर नहीं मरना चाहता। अपनों को गले लगाए, घूमे-फिरे बिना और डर-डर कर जीकर मैं खुश ही नहीं रह पाऊँगा। इसलिए मैं गर्व से कहता हूँ कि मैंने अपने लिए वैक्सीन लगवाई है और आपके लिए मास्क पहनता हूँ। |
हमेशा सोशल मीडिया पर उनके नजरअंदाज किये जाने के बाद उनके फैंस अपना रोस दिखाते है यहाँ तक कि फीफा मैच के दौरान उनके समर्थन में बैनर दिखाए गए. ऐसे में अब इस बेहतरीन खिलाड़ी के लिए यूरोपियन देश आयरलैंड से खेलने का ऑफर आया है. वास्तव में, आयरिश क्रिकेट बोर्ड को नए और उम्दा खिलाड़ियों की तलाश है जो उनके क्रिकेट टीम का नेतृत्व करते हुए टीम को आगे लेकर जाये. लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकड़ा दिया है.
एक रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड क्रिकेट बोर्ड ने संजू सैमसन को कहा था कि अगर वे चाहे तो आयरलैंड से क्रिकेट खेल सकते है और उनको हार मैच में खेलने का मौका मिलेगा. लेकिन उन्होंने आयरिश क्रिकेट बोर्ड के प्रस्ताव को जबाब देते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के अलावा किसी देश से खेलने के बारे में सोच भी नहीं सकते है. क्योंकि वे केवल भारतीय टीम के लिए खेलना चाहते है.
| हमेशा सोशल मीडिया पर उनके नजरअंदाज किये जाने के बाद उनके फैंस अपना रोस दिखाते है यहाँ तक कि फीफा मैच के दौरान उनके समर्थन में बैनर दिखाए गए. ऐसे में अब इस बेहतरीन खिलाड़ी के लिए यूरोपियन देश आयरलैंड से खेलने का ऑफर आया है. वास्तव में, आयरिश क्रिकेट बोर्ड को नए और उम्दा खिलाड़ियों की तलाश है जो उनके क्रिकेट टीम का नेतृत्व करते हुए टीम को आगे लेकर जाये. लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकड़ा दिया है. एक रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड क्रिकेट बोर्ड ने संजू सैमसन को कहा था कि अगर वे चाहे तो आयरलैंड से क्रिकेट खेल सकते है और उनको हार मैच में खेलने का मौका मिलेगा. लेकिन उन्होंने आयरिश क्रिकेट बोर्ड के प्रस्ताव को जबाब देते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के अलावा किसी देश से खेलने के बारे में सोच भी नहीं सकते है. क्योंकि वे केवल भारतीय टीम के लिए खेलना चाहते है. |
जशपुरनगर, नईदुनिया न्यूज। मेडिकल स्टोर व संचालक के घर में छापा मारकर पुलिस व ड्रग विभाग ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवा जब्त किया है। जब्त दवा की कीमत 1 लाख बताई जा रही हैं। संचालक द्वारा नशे के आदी लोगों को इन दवा बेचे जाने की सूचना पर कार्रवाई की गई है। मामला जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र की है।
जानकारी के मुताबिक कांसाबेल के बगीचा रोड में स्थित दिनेश मेडिकल स्टोर के संचालक दिनेश कुमार द्वारा बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं का संग्रह कर इसे नशे के लिए बेचे जाने की सूचना पुलिस और ड्रग विभाग को मिली थी।
सूचना पर कार्रवाई करते हुए ड्रग विभाग के अधिकारी व कांसाबेल पुलिस ने दिनेश मेडिकल स्टोर्स और इसके संचालक के घर दबिश दी। दुकान व घर की तलाशी के दौरान पुलिस व ड्रग विभाग की टीम ने 660 नग कोरेक्स कफ सिरप की बोतल ओैर 765 पत्ता प्रतिबंधित टेबलेट एस्पास्मो जब्त किया है।
जानकारी के मुताबिक ड्रग कन्ट्रोल विभाग ने इन दिनों ही दवाओं पर प्रतिबंध लगा रखा है। कोरक्स सिरप खांसी के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है,वहीं एस्पास्मों टेबलेट का प्रयोग पेट दर्द की बीमारी में किया जाता है। इन दोनों ही दवाओं में नशीले रासायनों की मात्रा अधिक होने के कारण इन्हे प्रतिबंधित किया गया है। प्रतिबंधित के बावजूद कुछ मेडिकल स्टोर्स में दवाओं को बेचा जाता है। इन दवाओं का प्रयोग मरीजों से अधिक नशेड़ियों द्वारा किया जाता है।
| जशपुरनगर, नईदुनिया न्यूज। मेडिकल स्टोर व संचालक के घर में छापा मारकर पुलिस व ड्रग विभाग ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवा जब्त किया है। जब्त दवा की कीमत एक लाख बताई जा रही हैं। संचालक द्वारा नशे के आदी लोगों को इन दवा बेचे जाने की सूचना पर कार्रवाई की गई है। मामला जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक कांसाबेल के बगीचा रोड में स्थित दिनेश मेडिकल स्टोर के संचालक दिनेश कुमार द्वारा बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं का संग्रह कर इसे नशे के लिए बेचे जाने की सूचना पुलिस और ड्रग विभाग को मिली थी। सूचना पर कार्रवाई करते हुए ड्रग विभाग के अधिकारी व कांसाबेल पुलिस ने दिनेश मेडिकल स्टोर्स और इसके संचालक के घर दबिश दी। दुकान व घर की तलाशी के दौरान पुलिस व ड्रग विभाग की टीम ने छः सौ साठ नग कोरेक्स कफ सिरप की बोतल ओैर सात सौ पैंसठ पत्ता प्रतिबंधित टेबलेट एस्पास्मो जब्त किया है। जानकारी के मुताबिक ड्रग कन्ट्रोल विभाग ने इन दिनों ही दवाओं पर प्रतिबंध लगा रखा है। कोरक्स सिरप खांसी के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है,वहीं एस्पास्मों टेबलेट का प्रयोग पेट दर्द की बीमारी में किया जाता है। इन दोनों ही दवाओं में नशीले रासायनों की मात्रा अधिक होने के कारण इन्हे प्रतिबंधित किया गया है। प्रतिबंधित के बावजूद कुछ मेडिकल स्टोर्स में दवाओं को बेचा जाता है। इन दवाओं का प्रयोग मरीजों से अधिक नशेड़ियों द्वारा किया जाता है। |
अमिताभ बच्चन को अस्पताल से बाहर आते हुए स्पॉट किया. इस दौरान वह व्हाइट कुर्ता-पजामा पहने नजर आए.
बिग बी इस दौरान काफी सीरियस नजर आ रहे थे. उनका पूरा ध्यान सिर्फ सोशल मीडिया पर था.
अमिताभ के साथ इस दौरान उनके बॉड़ीगार्ड्स भी नजर आए.
हालांकि श्वेता गाड़ी में बैठे ही नजर आईं. वह पिता के साथ भाई को देखने आई थीं.
अमिताभ बच्चन और बेटी श्वेता रविवार रात को मुंबई के एक अस्पताल में नजर आए.
| अमिताभ बच्चन को अस्पताल से बाहर आते हुए स्पॉट किया. इस दौरान वह व्हाइट कुर्ता-पजामा पहने नजर आए. बिग बी इस दौरान काफी सीरियस नजर आ रहे थे. उनका पूरा ध्यान सिर्फ सोशल मीडिया पर था. अमिताभ के साथ इस दौरान उनके बॉड़ीगार्ड्स भी नजर आए. हालांकि श्वेता गाड़ी में बैठे ही नजर आईं. वह पिता के साथ भाई को देखने आई थीं. अमिताभ बच्चन और बेटी श्वेता रविवार रात को मुंबई के एक अस्पताल में नजर आए. |
चंडीगढ़।
जांच को लेकर कांग्रेस के विधायकों में भी बैचेनी है। वो किसी तरह जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे है। इसके लिए उन्होंने दबाव की राजनीति का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। विधायकों का कहना है कि लिस्ट को अंतिम रूप देने से पहले क्षेत्रीय विधायक को विश्वास में जरूर लिया जाए।
बताया जाता है कि नीले कार्ड को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विधायकों में हैं। नए बने विधायकों की प्रशासन में पकड़ न होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क करना पड़ रहा है।
| चंडीगढ़। जांच को लेकर कांग्रेस के विधायकों में भी बैचेनी है। वो किसी तरह जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे है। इसके लिए उन्होंने दबाव की राजनीति का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। विधायकों का कहना है कि लिस्ट को अंतिम रूप देने से पहले क्षेत्रीय विधायक को विश्वास में जरूर लिया जाए। बताया जाता है कि नीले कार्ड को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विधायकों में हैं। नए बने विधायकों की प्रशासन में पकड़ न होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क करना पड़ रहा है। |
- G-7 समिट में शामिल होने के लिए जापान जाएंगे PM मोदी, पापुआ न्यू गिनी का भी करेंगे दौरा; जानें शेड्यूलIndia । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।बुधवार मई 17, 2023 08:28 PM ISTPM Narendra Modi Japan Visit: पीएम मोदी G-7 समिट में शिरकत करने के लिए 19 से 21 मई तक जापान के दौरे पर होंगे. G-7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत उन गिने चुने देशों में शामिल है जो परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं है.
- India । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।सोमवार अप्रैल 24, 2023 08:22 PM ISTपीएम मोदी रोड शो के बाद कोच्चि में 'युवा कार्यक्रम-युवम 2023' में शामिल हुए और जोरदार भाषण दिया. बीजेपी को उम्मीद है कि ये कार्यक्रम केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा.
- India । Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: तिलकराज ।सोमवार फ़रवरी 13, 2023 02:33 PM ISTRajasthan Budget 2023: गहलोत का कहना है कि मेरी बजट स्पीच में हुई गलती का पीएम मोदी राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं. मैंने सिर्फ़ 34 सेकेंड का पुराना बजट पढ़ा था.
- India । Edited by: विजय शंकर पांडेय ।शुक्रवार फ़रवरी 10, 2023 01:20 PM ISTग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर आज सरकार रिकॉर्ड खर्च कर रही है और हर वर्ष इसको हम बढ़ा रहे हैं. इसलिए आपके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के नए मौके बन रहे हैं.
- India । Reported by: ANI, Translated by: विजय शंकर पांडेय ।शुक्रवार फ़रवरी 10, 2023 09:50 AM ISTराष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब के दौरान पीएम मोदी ने नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पढ़ा है कि 600 से अधिक योजनाओं का नाम इस परिवार के नाम पर रखा गया था.
- India । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।गुरुवार फ़रवरी 9, 2023 04:34 PM ISTप्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मुझे ये समझ नहीं आता कि अगर नेहरू महान थे, तो उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम क्यों नहीं रखता? क्या शर्मिंदगी है नेहरू सरनेम रखने में. इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको और आपके परिवार को मंजूर नहीं है. . . और आप हमारा हिसाब मांगते हो. '
- "उनके पास कीचड़ था, मेरे पास गुलाल. . . जिसके पास जो था, उछाल दिया. . . " : विपक्ष पर कटाक्ष करते बोले PM नरेंद्र मोदीIndia । Reported by: ख़बर न्यूज़ डेस्क, Edited by: विजय शंकर पांडेय ।गुरुवार फ़रवरी 9, 2023 03:13 PM ISTप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. इससे पहले उन्होंने बुधवार को लोकसभा में चर्चा का जवाब दिया था. पीएम मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस की जमकर खिंचाई की थी.
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर दो बजे राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगेIndia । Edited by: विजय शंकर पांडेय ।गुरुवार फ़रवरी 9, 2023 11:29 AM ISTकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की सराहना की और कहा कि इसने युवाओं में नयी उम्मीद जगाई तथा गरीबों, आदिवासियों और वंचितों के बीच उनके द्वारा बनाए गए भरोसे को पुनर्जीवित किया.
- "थैंक यू शशि जी" : लोकसभा में थरूर को देख PM मोदी ने कहा, BJP सांसद बोले- "हो गया कांग्रेस में बंटवारा"India । Reported by: राजीव रंजन, Edited by: अंजलि कर्मकार ।बुधवार फ़रवरी 8, 2023 08:28 PM ISTPM Narendra Modi Parliament Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन विपक्ष पर जमकर हमला बोला. हालांकि, पीएम मोदी ने लोकसभा में 85 मिनट के भाषण में राहुल गांधी के पूछे गए किसी सवाल का जवाब नहीं दिया.
| - G-सात समिट में शामिल होने के लिए जापान जाएंगे PM मोदी, पापुआ न्यू गिनी का भी करेंगे दौरा; जानें शेड्यूलIndia । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।बुधवार मई सत्रह, दो हज़ार तेईस आठ:अट्ठाईस PM ISTPM Narendra Modi Japan Visit: पीएम मोदी G-सात समिट में शिरकत करने के लिए उन्नीस से इक्कीस मई तक जापान के दौरे पर होंगे. G-सात समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत उन गिने चुने देशों में शामिल है जो परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं है. - India । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।सोमवार अप्रैल चौबीस, दो हज़ार तेईस आठ:बाईस PM ISTपीएम मोदी रोड शो के बाद कोच्चि में 'युवा कार्यक्रम-युवम दो हज़ार तेईस' में शामिल हुए और जोरदार भाषण दिया. बीजेपी को उम्मीद है कि ये कार्यक्रम केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा. - India । Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: तिलकराज ।सोमवार फ़रवरी तेरह, दो हज़ार तेईस दो:तैंतीस PM ISTRajasthan Budget दो हज़ार तेईस: गहलोत का कहना है कि मेरी बजट स्पीच में हुई गलती का पीएम मोदी राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं. मैंने सिर्फ़ चौंतीस सेकेंड का पुराना बजट पढ़ा था. - India । Edited by: विजय शंकर पांडेय ।शुक्रवार फ़रवरी दस, दो हज़ार तेईस एक:बीस PM ISTग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर आज सरकार रिकॉर्ड खर्च कर रही है और हर वर्ष इसको हम बढ़ा रहे हैं. इसलिए आपके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के नए मौके बन रहे हैं. - India । Reported by: ANI, Translated by: विजय शंकर पांडेय ।शुक्रवार फ़रवरी दस, दो हज़ार तेईस नौ:पचास AM ISTराष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब के दौरान पीएम मोदी ने नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पढ़ा है कि छः सौ से अधिक योजनाओं का नाम इस परिवार के नाम पर रखा गया था. - India । Reported by: NDTV इंडिया, Translated by: अंजलि कर्मकार ।गुरुवार फ़रवरी नौ, दो हज़ार तेईस चार:चौंतीस PM ISTप्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मुझे ये समझ नहीं आता कि अगर नेहरू महान थे, तो उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम क्यों नहीं रखता? क्या शर्मिंदगी है नेहरू सरनेम रखने में. इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको और आपके परिवार को मंजूर नहीं है. . . और आप हमारा हिसाब मांगते हो. ' - "उनके पास कीचड़ था, मेरे पास गुलाल. . . जिसके पास जो था, उछाल दिया. . . " : विपक्ष पर कटाक्ष करते बोले PM नरेंद्र मोदीIndia । Reported by: ख़बर न्यूज़ डेस्क, Edited by: विजय शंकर पांडेय ।गुरुवार फ़रवरी नौ, दो हज़ार तेईस तीन:तेरह PM ISTप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. इससे पहले उन्होंने बुधवार को लोकसभा में चर्चा का जवाब दिया था. पीएम मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस की जमकर खिंचाई की थी. - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर दो बजे राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगेIndia । Edited by: विजय शंकर पांडेय ।गुरुवार फ़रवरी नौ, दो हज़ार तेईस ग्यारह:उनतीस AM ISTकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की सराहना की और कहा कि इसने युवाओं में नयी उम्मीद जगाई तथा गरीबों, आदिवासियों और वंचितों के बीच उनके द्वारा बनाए गए भरोसे को पुनर्जीवित किया. - "थैंक यू शशि जी" : लोकसभा में थरूर को देख PM मोदी ने कहा, BJP सांसद बोले- "हो गया कांग्रेस में बंटवारा"India । Reported by: राजीव रंजन, Edited by: अंजलि कर्मकार ।बुधवार फ़रवरी आठ, दो हज़ार तेईस आठ:अट्ठाईस PM ISTPM Narendra Modi Parliament Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन विपक्ष पर जमकर हमला बोला. हालांकि, पीएम मोदी ने लोकसभा में पचासी मिनट के भाषण में राहुल गांधी के पूछे गए किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. |
लोकसभा में बीजेपी सांसद रमा देवी उस समय अखिलेश यादव पर भड़क गईं, जब वह आजम खान के माफी मांगने के बाद वह बोल रहीं थी। उसी वक्त अखिलेश यादव कुछ बोलने लगे। जिसके बाद रमा देवी ने अखिलेश यादव को कहा- अखिलेश जी उनके मुंह में जुबान है, आप क्यों बोल रहे हैं।
उत्तरप्रदेश के रामपुर से सपा सांसद आजम खान ने सोमवार को लोकसभा में बीजेपी की सांसद रमा देवी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने पर माफी मांग ली है। उन्होंने रमा देवी को अपनी बहन बताया। आजम खान ने 25 जुलाई को पीठासीन रमा देवी के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सरकार ने विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। येदियुरप्पा ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। जिसमें उन्होंने कहा- सदन को उनके नेतृत्व वाली सरकार में भरोसा है। वह 'प्रतिशोध की राजनीत' में लिप्त नहीं होंगे और वह भूलने एवं माफ करने के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। प्रशासनिक तंत्र पटरी से उतर चुका है। उनकी प्राथमिकता इसे वापस पटरी पर लाने की है।
सपा नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ 13 मुकदमों पर चार्जशीट फाइल की है। उनके अलावा पूर्व सांसद जयाप्रदा पर कानूनी शिकंजा कसा है। उनपर छ मामलों में चार्जशीट लगाई गई है।
आजम खान ने ट्रिपल तलाक बिल पर चर्चा के दौरान संसद में अमर्यादित बयान दिया था। उस वक्त स्पीकर की कुर्सी पर बीजेपी सांसद रमा देवी बैठी थीं।
भारतीय मौसम विभाग ने अपनी ताजा बुलेटिन में 30 जुलाई तक भारत के कुछ राज्यों में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में तेज बारिश के कारण एक्शन लेने की जरुरत भी पड़ सकती है।
अगर आपको याद हो, तो ये टीचर पिछले साल जून में तब खबरों में आई थीं, जब इन्होने सीएम के जनता दरबार में अपना ट्रांसफर करवाने की बात कही थी। टीचर का नाम उत्तरा बहुगुणा पंत है। ट्रांसफर की मांग करने के बाद इन्हें सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन एक बार फिर से ये टीचर चर्चा में हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी रविवार 28 जुलाई को 11 बजे मन की बात की।
दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में कारगिल विजय दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे।
मोदी ने कहा- "गहरे समंदर से लेकर असीम अंतरिक्ष तक जहां-जहां भी भारत के सुरक्षा हितों की जरूरत होगी, भारत अपने सामर्थ्य का भरपूर उपयोग करेगा। आने वाले समय में हमारी सेना को दुनिया का आधुनिकतम साजो-सामान मिलने वाला है। "
| लोकसभा में बीजेपी सांसद रमा देवी उस समय अखिलेश यादव पर भड़क गईं, जब वह आजम खान के माफी मांगने के बाद वह बोल रहीं थी। उसी वक्त अखिलेश यादव कुछ बोलने लगे। जिसके बाद रमा देवी ने अखिलेश यादव को कहा- अखिलेश जी उनके मुंह में जुबान है, आप क्यों बोल रहे हैं। उत्तरप्रदेश के रामपुर से सपा सांसद आजम खान ने सोमवार को लोकसभा में बीजेपी की सांसद रमा देवी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने पर माफी मांग ली है। उन्होंने रमा देवी को अपनी बहन बताया। आजम खान ने पच्चीस जुलाई को पीठासीन रमा देवी के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सरकार ने विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। येदियुरप्पा ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। जिसमें उन्होंने कहा- सदन को उनके नेतृत्व वाली सरकार में भरोसा है। वह 'प्रतिशोध की राजनीत' में लिप्त नहीं होंगे और वह भूलने एवं माफ करने के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। प्रशासनिक तंत्र पटरी से उतर चुका है। उनकी प्राथमिकता इसे वापस पटरी पर लाने की है। सपा नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ तेरह मुकदमों पर चार्जशीट फाइल की है। उनके अलावा पूर्व सांसद जयाप्रदा पर कानूनी शिकंजा कसा है। उनपर छ मामलों में चार्जशीट लगाई गई है। आजम खान ने ट्रिपल तलाक बिल पर चर्चा के दौरान संसद में अमर्यादित बयान दिया था। उस वक्त स्पीकर की कुर्सी पर बीजेपी सांसद रमा देवी बैठी थीं। भारतीय मौसम विभाग ने अपनी ताजा बुलेटिन में तीस जुलाई तक भारत के कुछ राज्यों में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में तेज बारिश के कारण एक्शन लेने की जरुरत भी पड़ सकती है। अगर आपको याद हो, तो ये टीचर पिछले साल जून में तब खबरों में आई थीं, जब इन्होने सीएम के जनता दरबार में अपना ट्रांसफर करवाने की बात कही थी। टीचर का नाम उत्तरा बहुगुणा पंत है। ट्रांसफर की मांग करने के बाद इन्हें सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन एक बार फिर से ये टीचर चर्चा में हैं। पीएम नरेंद्र मोदी रविवार अट्ठाईस जुलाई को ग्यारह बजे मन की बात की। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में कारगिल विजय दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। मोदी ने कहा- "गहरे समंदर से लेकर असीम अंतरिक्ष तक जहां-जहां भी भारत के सुरक्षा हितों की जरूरत होगी, भारत अपने सामर्थ्य का भरपूर उपयोग करेगा। आने वाले समय में हमारी सेना को दुनिया का आधुनिकतम साजो-सामान मिलने वाला है। " |
सॉफॉक्लीज़ और शेक्सपियर अथवा कैलड्रोन और मोलियर के नाटक जो पहली बार मंच पर प्रस्तुत किये गए तो नाट्शालाएं भर गईं । इन महान् कृतियों को देखने वाले दर्शकों ने भले ही यह न समझा हो कि वे कितनी महान् हैं, उन्हें कदाचित् वे गुरग भी उनमें न दीख पड़े हों जो ग्राज का विद्यार्थी देखता है; परन्तु उन नाटकों से उसे वह आनन्द मिलता था जिसकी वह नाटक में अपेक्षा करता था, और इसी से वह बारबार, जब भी वे नाटक खेले जाते थे, उन्हें देखने जाता था ।
हम इससे आगे जाकर यह भी कह सकते हैं कि इस प्रकार की व्यापक स्वीकृति थोड़े-से आलोचकों की प्रशंसा की अपेक्षा चिरंतन गुरग के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण हो सकती है । जब भी किसी नाटक के विषय में विशिष्ट वर्गों और जनसमूह के बीच मत की भिन्नता रही है तो आगे चलकर यही पता लगा है कि जनसमूह का निर्णय विशिष्ट वर्ग से अधिक सही था । जब शेक्सपियर एक तरुण लेखक ही थे तभी सिडनी ने अपनी पुस्तक डिफेन्स ऑफ पोयसी में उस समय अंग्रेज़ी रंगमंच पर शेक्सपियर के लोकप्रिय नाटकों का बड़ा उपहास किया, और नाटककारों से यह प्रार्थना की थी कि वे यूनान और रोम के नाटकों का अनुकरण कर नाटक लिखें । परन्तु लन्दन का दर्शक समाज इस प्रकार के निष्प्राण नाटकों को स्वीकार नहीं करना चाहता था, औौर उसने एलिजाबेथयुग के भावों के अनुकूल लिखे हुए शेक्सपियर के विशाल और मुक्त नाटकों का हार्दिक स्वागत किया। फ्रांस में रिशेलू की प्रार्थना पर फ्रांसीसी अकादमी ने तथाकथित नाटक के नियमों के उलंघन के लिए कार्नाइ की सिड की बहुत निन्दा की थी। परन्तु पेरिस के दर्शकों को अपनी रुचि का ज्ञान था और अकादमी के सदस्यों की निन्दा के बावजूद जब भी सिड का प्रदर्शन होता था तो नाट्य-गृह भर जाते थे । सच्चा नाटककार अपने नाटकों में बहुत सी ऐसी चीजें रख सकता है जिसको सम्पूर्ण जनता न पसन्द कर सके। परन्तु वह अपनी नाटकों की रचना सदैव सम्पूर्ण जनता के लिए ही करता है । | सॉफॉक्लीज़ और शेक्सपियर अथवा कैलड्रोन और मोलियर के नाटक जो पहली बार मंच पर प्रस्तुत किये गए तो नाट्शालाएं भर गईं । इन महान् कृतियों को देखने वाले दर्शकों ने भले ही यह न समझा हो कि वे कितनी महान् हैं, उन्हें कदाचित् वे गुरग भी उनमें न दीख पड़े हों जो ग्राज का विद्यार्थी देखता है; परन्तु उन नाटकों से उसे वह आनन्द मिलता था जिसकी वह नाटक में अपेक्षा करता था, और इसी से वह बारबार, जब भी वे नाटक खेले जाते थे, उन्हें देखने जाता था । हम इससे आगे जाकर यह भी कह सकते हैं कि इस प्रकार की व्यापक स्वीकृति थोड़े-से आलोचकों की प्रशंसा की अपेक्षा चिरंतन गुरग के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण हो सकती है । जब भी किसी नाटक के विषय में विशिष्ट वर्गों और जनसमूह के बीच मत की भिन्नता रही है तो आगे चलकर यही पता लगा है कि जनसमूह का निर्णय विशिष्ट वर्ग से अधिक सही था । जब शेक्सपियर एक तरुण लेखक ही थे तभी सिडनी ने अपनी पुस्तक डिफेन्स ऑफ पोयसी में उस समय अंग्रेज़ी रंगमंच पर शेक्सपियर के लोकप्रिय नाटकों का बड़ा उपहास किया, और नाटककारों से यह प्रार्थना की थी कि वे यूनान और रोम के नाटकों का अनुकरण कर नाटक लिखें । परन्तु लन्दन का दर्शक समाज इस प्रकार के निष्प्राण नाटकों को स्वीकार नहीं करना चाहता था, औौर उसने एलिजाबेथयुग के भावों के अनुकूल लिखे हुए शेक्सपियर के विशाल और मुक्त नाटकों का हार्दिक स्वागत किया। फ्रांस में रिशेलू की प्रार्थना पर फ्रांसीसी अकादमी ने तथाकथित नाटक के नियमों के उलंघन के लिए कार्नाइ की सिड की बहुत निन्दा की थी। परन्तु पेरिस के दर्शकों को अपनी रुचि का ज्ञान था और अकादमी के सदस्यों की निन्दा के बावजूद जब भी सिड का प्रदर्शन होता था तो नाट्य-गृह भर जाते थे । सच्चा नाटककार अपने नाटकों में बहुत सी ऐसी चीजें रख सकता है जिसको सम्पूर्ण जनता न पसन्द कर सके। परन्तु वह अपनी नाटकों की रचना सदैव सम्पूर्ण जनता के लिए ही करता है । |
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
बेंगलुरु (आईएएनएस)। बेंगलुरु में शुक्रवार को बेंगलुरु मेट्रो ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (बीएमटीसी) की एक बस में आग लग गई, जिसके चलते अंदर सो रहा कंडक्टर जिंदा जल गया। मृतक कंडक्टर की पहचान बल्लारी के रहने वाले 45 वर्षीय मुथैया स्वामी के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर और ड्राइवर ने गुरुवार की रात ड्यूटी पूरी करने के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर केए 57 एफ 2069 वाली बस को लिंगधीरनहल्ली बस स्टॉप के परिसर में खड़ा कर दिया।
आग लगने के समय मृतक कंडक्टर बस में सो रहा था। मृतक के शव को विक्टोरिया अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है।
बीएमटीसी ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि ड्राइवर प्रकाश ने अपने बयान में दावा किया कि बस स्टॉप पर आराम करने की जगह उपलब्ध होने के बावजूद मृतक कंडक्टर बस में सोना चाहता था।
प्रकाश ने आगे बताया कि आग या धुएं की सूचना नहीं थी। गश्त कर रही बीट पुलिस ने बस में आग लगी देखी और दमकल और आपातकालीन कर्मियों को सूचित किया।
हालांकि उन्होंने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई, लेकिन कंडक्टर को नहीं बचाया जा सका। बीएमटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का दौरा किया।
क्षेत्राधिकारी ब्यादरहल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
| पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बेंगलुरु । बेंगलुरु में शुक्रवार को बेंगलुरु मेट्रो ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की एक बस में आग लग गई, जिसके चलते अंदर सो रहा कंडक्टर जिंदा जल गया। मृतक कंडक्टर की पहचान बल्लारी के रहने वाले पैंतालीस वर्षीय मुथैया स्वामी के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर और ड्राइवर ने गुरुवार की रात ड्यूटी पूरी करने के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर केए सत्तावन एफ दो हज़ार उनहत्तर वाली बस को लिंगधीरनहल्ली बस स्टॉप के परिसर में खड़ा कर दिया। आग लगने के समय मृतक कंडक्टर बस में सो रहा था। मृतक के शव को विक्टोरिया अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। बीएमटीसी ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि ड्राइवर प्रकाश ने अपने बयान में दावा किया कि बस स्टॉप पर आराम करने की जगह उपलब्ध होने के बावजूद मृतक कंडक्टर बस में सोना चाहता था। प्रकाश ने आगे बताया कि आग या धुएं की सूचना नहीं थी। गश्त कर रही बीट पुलिस ने बस में आग लगी देखी और दमकल और आपातकालीन कर्मियों को सूचित किया। हालांकि उन्होंने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई, लेकिन कंडक्टर को नहीं बचाया जा सका। बीएमटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का दौरा किया। क्षेत्राधिकारी ब्यादरहल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। |
नई दिल्ली, संसद के मॉनसून सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी है. हंगामे के चलते राज्यसभा के 19 सांसदों को सदन से एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया है. इससे पहले सोमवार को कांग्रेस के चार सांसदों को निलंबित किया गया था.
राज्यसभा में हंगामे को लेकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उपसभापति ने 19 सांसदों को निलंबित कर दिया, बता दें इन सांसदों में तृणमूल सांसद सुष्मिता देव, डॉ शांतनु सेन और डोला सेन, शांता छेत्री, एए रहीम, कनिमोझी, एल यादव और वी वी. शिवादासन, मोहम्मद अब्दुल्ला,अबीर रंजन विश्वास और नदीमुल हक शामिल हैं. संसद में विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है, जबकि सरकार का आरोप है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है. वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है.
बता दें बीते दिन भी सदन में विपक्ष ने हंगामा किया था, जिसपर लोकसभा में चेयर पर बैठे राजेन्द्र अग्रवाल ने लोकसभा में हंगामा कर रहे सदस्यों पर कार्यवाही की थी, उन्होंने नियम 374 के तहत, हठपूर्वक और जानबूझकर लगातार सभा के कार्य में बाधा डालकर, अध्यक्षपीठ के प्राधिकार की उपेक्षा करने और सभा के नियमों का दुरुपयोग करने के लिए कुछ विपक्षी सांसदों का नाम निलंबन के लिए दिया, जिसमें कांग्रेस मणिक्कम टेगोर, टीएन प्रथप्पन, ज्योतिमणी, रम्या हरिदास के नाम शामिल थे, उन्होंने इन सदस्यों के निलंबन का प्रस्ताव दिया, जिसके बाद सर्व सम्मति से चारों सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया.
| नई दिल्ली, संसद के मॉनसून सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी है. हंगामे के चलते राज्यसभा के उन्नीस सांसदों को सदन से एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया है. इससे पहले सोमवार को कांग्रेस के चार सांसदों को निलंबित किया गया था. राज्यसभा में हंगामे को लेकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उपसभापति ने उन्नीस सांसदों को निलंबित कर दिया, बता दें इन सांसदों में तृणमूल सांसद सुष्मिता देव, डॉ शांतनु सेन और डोला सेन, शांता छेत्री, एए रहीम, कनिमोझी, एल यादव और वी वी. शिवादासन, मोहम्मद अब्दुल्ला,अबीर रंजन विश्वास और नदीमुल हक शामिल हैं. संसद में विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है, जबकि सरकार का आरोप है कि विपक्ष संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है. वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है. बता दें बीते दिन भी सदन में विपक्ष ने हंगामा किया था, जिसपर लोकसभा में चेयर पर बैठे राजेन्द्र अग्रवाल ने लोकसभा में हंगामा कर रहे सदस्यों पर कार्यवाही की थी, उन्होंने नियम तीन सौ चौहत्तर के तहत, हठपूर्वक और जानबूझकर लगातार सभा के कार्य में बाधा डालकर, अध्यक्षपीठ के प्राधिकार की उपेक्षा करने और सभा के नियमों का दुरुपयोग करने के लिए कुछ विपक्षी सांसदों का नाम निलंबन के लिए दिया, जिसमें कांग्रेस मणिक्कम टेगोर, टीएन प्रथप्पन, ज्योतिमणी, रम्या हरिदास के नाम शामिल थे, उन्होंने इन सदस्यों के निलंबन का प्रस्ताव दिया, जिसके बाद सर्व सम्मति से चारों सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. |
दिलबर गर्ल नोरा फतेही एक बार फिर सुर्खियों में आ गयी हैं। लेकिन इस बार किसी गीत या फिल्म के लिए नहीं, बल्कि इंटरनेट पर अपनी गैर-जिम्मेदारी दिखाने के कारण। आपने भी दिल्ली की उस आंटी की वीडियो जरूर देखी होगी जिसमे वह कुछ लड़कियों को छोटे कपड़े पहनने के लिए सुना रही हैं और वहां मौजूद सभी पुरुषों से उनके साथ बलात्कार करने के लिए कह रही हैं।
जैसी उन्होंने टिपण्णी की, लोगो ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया जिन्होंने आंटी की नीच सोच पर सवाल उठाने के वजाय, उनकी अंग्रेजी पर कटाक्ष करना बेहतर समझा। कुछ ने ये भी लिखा कि उन्हें इंसानों को उनकी भाषा के लिए जज नहीं करना चाहिए जबकि वह खुद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद ठीक से हिंदी नहीं बोल पाती।
फिल्मो की बात की जाये तो, नोरा जल्द अली अब्बास ज़फर निर्देशित फिल्म 'भारत' में नज़र आएँगी। 5 जून को रिलीज़ होने वाली फिल्म में सलमान खान, कैटरीना कैफ, दिशा पटानी, जैकी श्रॉफ, सुनील ग्रोवर और तब्बू भी अहम किरदार में दिखाई देंगे।
इसके बाद, वह रेमो डीसूज़ा की फिल्म 'स्ट्रीट डांसर' में दिखाई देंगी। फिल्म में प्रभुदेवा, वरुण धवन और श्रद्धा कपूर भी मुख्य किरदार निभा रहे हैं।
| दिलबर गर्ल नोरा फतेही एक बार फिर सुर्खियों में आ गयी हैं। लेकिन इस बार किसी गीत या फिल्म के लिए नहीं, बल्कि इंटरनेट पर अपनी गैर-जिम्मेदारी दिखाने के कारण। आपने भी दिल्ली की उस आंटी की वीडियो जरूर देखी होगी जिसमे वह कुछ लड़कियों को छोटे कपड़े पहनने के लिए सुना रही हैं और वहां मौजूद सभी पुरुषों से उनके साथ बलात्कार करने के लिए कह रही हैं। जैसी उन्होंने टिपण्णी की, लोगो ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया जिन्होंने आंटी की नीच सोच पर सवाल उठाने के वजाय, उनकी अंग्रेजी पर कटाक्ष करना बेहतर समझा। कुछ ने ये भी लिखा कि उन्हें इंसानों को उनकी भाषा के लिए जज नहीं करना चाहिए जबकि वह खुद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद ठीक से हिंदी नहीं बोल पाती। फिल्मो की बात की जाये तो, नोरा जल्द अली अब्बास ज़फर निर्देशित फिल्म 'भारत' में नज़र आएँगी। पाँच जून को रिलीज़ होने वाली फिल्म में सलमान खान, कैटरीना कैफ, दिशा पटानी, जैकी श्रॉफ, सुनील ग्रोवर और तब्बू भी अहम किरदार में दिखाई देंगे। इसके बाद, वह रेमो डीसूज़ा की फिल्म 'स्ट्रीट डांसर' में दिखाई देंगी। फिल्म में प्रभुदेवा, वरुण धवन और श्रद्धा कपूर भी मुख्य किरदार निभा रहे हैं। |
कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि के बाद अपनी मां को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चक्कर काटने वाले एक व्यक्ति की वीडियो क्लिप का हाईं कोर्ट ने बुधवार को संज्ञान लिया। कोर्ट ने केन्द्र और आम आदमी पाटा (आप) सरकार को ऐसे मरीजों के लिए की गईं व्यवस्था का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बैंच ने वीडियो कांप्रोंसिंग के जरिये मामले की सुनवाईं की। बैंच ने कहा कि मौजूदा हालात में यह वीडियो क्लिप कईं गंभीर सवालों को जन्म देती है।
बैंच ने कोरोना के लिए कारगर हैल्पलाइन बनाने और मरीजों को लाने के लिए एम्बुलैंस मुहैया कराने सहित कईं निर्देश जारी किए हैं। बैंच ने वेंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे उन हैल्पलाइन के नम्बरों का विवरण पेश करें जो एक्टिव हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने वीडियो क्लिप में उठाए गए मुद्दों पर गौर करने के लिए न्याय मित्र भी नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा कि न्याय मित्र हैल्पलाइन नम्बरों पर फोन भी करेंगे और फोन करने वालों की मदद में इनके प्राभावी होने के बारे में अपनी रिपोर्ट देंगे। यह मामला तीन जून को चीफ जस्टिस के सामने सुनवाईं के लिए रखा जाएगा क्योंकि उनकी बैंच ही जनहित याचिकाओं पर विचार कर रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस व्यक्ति के वीडियो के मुताबिक उसने 19 मईं को अपनी मां को एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया था। वहां 21 मईं को उनके कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुईं। इसके बाद निजी अस्पताल ने किसी अन्य अस्पताल में वेंटिलेटर और बैड का बंदोबस्त करने के लिए उससे कहा। उसने कईं अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन कोईं नतीजा नहीं निकला। वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि हैल्पलाइन नम्बरों पर भी कोईं जवाब नहीं मिला। उधर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वेंद्र सरकार से कहा कि उन निजी अस्पतालों की पहचान की जाए, जहां कोविड-19 मरीजों का मुफ्त या कम से कम खर्च में इलाज किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि जिन अस्पतालों को मुफ्त या कौिड़यों के भाव में जमीनें दी गईं हैं, वहां इनका इलाज नाममात्र दरों पर क्यों नहीं होना चाहिए? चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस त्रषिकेश रॉय की पीठ वकील सचिन जैन की उस याचिका पर सुनवाईं कर रही है जिसमें निजी या कारपोरेट अस्पतालों में इलाज के लिए लागत संबंधी नियमों की मांग की गईं है। कोर्ट ने मामले में सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है।
याचिका में न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर निजी अस्पतालों पर भारी-भरकम बिल वसूलने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि जब देश महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है, तब निजी अस्पतालों जो सार्वजनिक जमीन पर चल रहे हैं और धर्मार्थ संस्थानों की श्रेणी में हैं, उन्हें इन मरीजों का मुफ्त इलाज करने के लिए कहा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि अन्य निजी अस्पतालों की दरों को भी सरकार द्वारा निश्चित लागत के आधार पर विनियमित किया जाना चाहिए। यह बहुत अच्छी बात है कि अदालतों ने कोरोना मरीजों को आ रही दिक्कतों का संज्ञान लेते हुए इन्हें हल करने में दिलचस्पी दिखाईं है। जो काम सरकारों को करना चाहिए वह अदालतें कर रही हैं।
| कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि के बाद अपनी मां को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए चक्कर काटने वाले एक व्यक्ति की वीडियो क्लिप का हाईं कोर्ट ने बुधवार को संज्ञान लिया। कोर्ट ने केन्द्र और आम आदमी पाटा सरकार को ऐसे मरीजों के लिए की गईं व्यवस्था का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बैंच ने वीडियो कांप्रोंसिंग के जरिये मामले की सुनवाईं की। बैंच ने कहा कि मौजूदा हालात में यह वीडियो क्लिप कईं गंभीर सवालों को जन्म देती है। बैंच ने कोरोना के लिए कारगर हैल्पलाइन बनाने और मरीजों को लाने के लिए एम्बुलैंस मुहैया कराने सहित कईं निर्देश जारी किए हैं। बैंच ने वेंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे उन हैल्पलाइन के नम्बरों का विवरण पेश करें जो एक्टिव हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने वीडियो क्लिप में उठाए गए मुद्दों पर गौर करने के लिए न्याय मित्र भी नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा कि न्याय मित्र हैल्पलाइन नम्बरों पर फोन भी करेंगे और फोन करने वालों की मदद में इनके प्राभावी होने के बारे में अपनी रिपोर्ट देंगे। यह मामला तीन जून को चीफ जस्टिस के सामने सुनवाईं के लिए रखा जाएगा क्योंकि उनकी बैंच ही जनहित याचिकाओं पर विचार कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल इस व्यक्ति के वीडियो के मुताबिक उसने उन्नीस मईं को अपनी मां को एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया था। वहां इक्कीस मईं को उनके कोविड-उन्नीस से संक्रमित होने की पुष्टि हुईं। इसके बाद निजी अस्पताल ने किसी अन्य अस्पताल में वेंटिलेटर और बैड का बंदोबस्त करने के लिए उससे कहा। उसने कईं अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन कोईं नतीजा नहीं निकला। वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि हैल्पलाइन नम्बरों पर भी कोईं जवाब नहीं मिला। उधर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वेंद्र सरकार से कहा कि उन निजी अस्पतालों की पहचान की जाए, जहां कोविड-उन्नीस मरीजों का मुफ्त या कम से कम खर्च में इलाज किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि जिन अस्पतालों को मुफ्त या कौिड़यों के भाव में जमीनें दी गईं हैं, वहां इनका इलाज नाममात्र दरों पर क्यों नहीं होना चाहिए? चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस त्रषिकेश रॉय की पीठ वकील सचिन जैन की उस याचिका पर सुनवाईं कर रही है जिसमें निजी या कारपोरेट अस्पतालों में इलाज के लिए लागत संबंधी नियमों की मांग की गईं है। कोर्ट ने मामले में सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका में न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर निजी अस्पतालों पर भारी-भरकम बिल वसूलने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि जब देश महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है, तब निजी अस्पतालों जो सार्वजनिक जमीन पर चल रहे हैं और धर्मार्थ संस्थानों की श्रेणी में हैं, उन्हें इन मरीजों का मुफ्त इलाज करने के लिए कहा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि अन्य निजी अस्पतालों की दरों को भी सरकार द्वारा निश्चित लागत के आधार पर विनियमित किया जाना चाहिए। यह बहुत अच्छी बात है कि अदालतों ने कोरोना मरीजों को आ रही दिक्कतों का संज्ञान लेते हुए इन्हें हल करने में दिलचस्पी दिखाईं है। जो काम सरकारों को करना चाहिए वह अदालतें कर रही हैं। |
टमाटर को अच्छी तरह से धो कर सुखा लीजिए और इन्हे बारीक काट कर इनके बीजों को अलग कर लीजिए। फिर एक कढ़ाई में घी डालकर उसे अच्छे से गरम कीजिए, अब गैस के फ्लेम को धीमा करके कढ़ाई में जीरा, बारीक कटे हुए अदरक, हरी मिर्च, बारीक कटे हुए टमाटर, हल्दी धनिया पाउडर, और कश्मीरी लाल मिर्च को डालकर अच्छे से मिला लीजिए।
सभी चीज़ों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद अब इसमें अपने स्वाद के अनुसार नमक मिला दें। अब ढक्कन लगाकर 3 मिनट के लिए लो फ्लेम में पकाएं। टमाटर को पकाने के बाद अब इन्हे अच्छे से मैश कर लीजिए और फिर बाद में थोड़ा सा पानी डालकर उबाल आने तक पकाइए। अच्छी तरह से उबाल आने के बाद आलुओं को भी अच्छी तरह से मैश करने के बाद कढ़ाई में डाल कर मिलाएं। अब काला नमक और अमचूर को डालकर मिलाएं।
| टमाटर को अच्छी तरह से धो कर सुखा लीजिए और इन्हे बारीक काट कर इनके बीजों को अलग कर लीजिए। फिर एक कढ़ाई में घी डालकर उसे अच्छे से गरम कीजिए, अब गैस के फ्लेम को धीमा करके कढ़ाई में जीरा, बारीक कटे हुए अदरक, हरी मिर्च, बारीक कटे हुए टमाटर, हल्दी धनिया पाउडर, और कश्मीरी लाल मिर्च को डालकर अच्छे से मिला लीजिए। सभी चीज़ों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद अब इसमें अपने स्वाद के अनुसार नमक मिला दें। अब ढक्कन लगाकर तीन मिनट के लिए लो फ्लेम में पकाएं। टमाटर को पकाने के बाद अब इन्हे अच्छे से मैश कर लीजिए और फिर बाद में थोड़ा सा पानी डालकर उबाल आने तक पकाइए। अच्छी तरह से उबाल आने के बाद आलुओं को भी अच्छी तरह से मैश करने के बाद कढ़ाई में डाल कर मिलाएं। अब काला नमक और अमचूर को डालकर मिलाएं। |
पंन्यास भीमजी
तथा पश्चिमी सीमा प्रान्त, इस जाति की वीरता के फलस्वरूप सिक्ख राज्य में आ गये थे । आज भी सिक्खों की वीरता की धाक वहाँ वालों पर जमी हुई है।
सुबेदार हरिसिंह ललवानीद्वारा केवल ५००० सिपाहियों के द्वारा अफगानिस्तान के शाह की सवा लाख सेना का हराया जाना भारतीय इतिहास की अमर घटना है। आज भी सूबेदार हरिसिंह के नाम की इतनी धाक है कि काबुली औरतें अपने बच्चे को "चुप रह हरि आया " कह कर डराया करती हैं।
बर्तमान समय के ही यूरोपीय महायुद्ध को लीजिए। पंजाबी सेनाओं की शक्ति, सिक्खों की बहादुरी, उनका आत्मत्याग देखकर संपूर्ण अंग्रेज जाति चकित रह गई थी । वहाँ पंजाबियों की "वाह गुरु दाखालसा, बाह गुरु दी फतह " को सुनते ही दुश्मनों के होश हवाश फाख्ता हो जाते थे। इसप्रकार यह भूमि प्राचीनकाल से आजतक लाखों वीरों, महात्माओं, त्यागियों तथा सद्गृहस्थों की माता होने का सौभाग्य प्राप्त कर चुकी है। इसकी गोद में खेले हुए बालक भारत के सितारे तथा देश की शान रहे हैं और हैं।
ये तो शूरवीरता की बातें हुई, इस काल की वीरता के संस्थापक महात्माओं की, शहीदों की कहानियाँ भी भारत जाति का मस्तक गौरव से उच्च करने को प्रस्तुत है।
गुरु नानक और उनके पुत्र श्री चंद्रजी की योग तथा उपदेश की बातें जगद्विख्यात हैं। जिन्हों ने पेशावर, काश्मीर तथा पंजाब में हिन्दु धर्म का उद्धार किया था । गुरु गोविंदसिंह और गुरु तेगबहादुर जैसे योगीवीरों को भी इस भूमि ने ही उत्पन्न किया है।
गुरु गोविंदसिंह के पुत्रों का सा धर्मप्रेम, हकीकतराय आदि सैंकड़ों बच्चों की बहादुरी एवं साहस देख २ दाँतों तले उंगली दबानी पड़ती है। जिस के बच्चों तकने धर्म के लिए हँसते २ प्राण दे दिया था। भला उस भूमि को अपना कहते हुए किसे गौरव का अनुभव न होगा ? गुरु अमरदास जो अपने गुरुजी को स्नान कराने के लिए तीन कोस से उँधे पाँव जल लाया करते थे इसी प्रांत के थे । वर्तमानकालीन परम साधक स्वामी रामतीर्थजी जिन के योग तथा मक्ति आदर्श माने जाते हैं, इसी पंजाब प्रान्त में उन्नीसवीं शताबि में ही एक गांव मरालीवाला (गुजरावाला) में उत्पन्न हुए थे।
इधर उधर
हमारे स्वर्णस्थ न्यायाम्भोनिधि जैनाचार्यश्री १००८ श्री विजयानंदवरी जी ( आत्मारामजी ) महाराज साहब को उक्त पुण्य प्रसविनी भूमि ने ही अपनी मोड़ से उत्पन्न किया था। आप की मातृभूमि होने का सौभाग्य इसी पंजाब भूमि को प्राप्त था। और पांचाल भूमि ने उन्नीसवीं शताद्धि में भी एक बार अपनी प्राचीन ऋषि-मुनि एवं महात्माओं की एक सुन्दर झलक दिखा दी थी। पंजाब भूमि उक्त महाराजसाहब को पाकर कृतार्थ हुई और इस युग में अपने प्रकाश को संसार में चमका कर हमारे भावी जीवन का दीप-स्तम्भ दिखा कर हमारी शतशः नमस्कार भाजन हुई है ।
आप के परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री १०८ बुद्धिविजयजी महाराजसाहब ( प्रसिद्धनाम बुट्टेरायजी महाराज ), ज्येष्ठ गुरुभ्राता श्री १०८ श्री मुक्तिविजयजी महाराज साहब ( श्री मूलचंद्रजी महाराज सा० ), श्री १०८ वृद्धिविजयजी महाराज साहम ( श्री वृद्धिचंद्रजी महाराज सा० ) भी इसी प्रान्त में अद्भुत नररत्नों में थे। आप लोगों के द्वारा जाति तथा धर्म का कितना अपरिमित उपकार हुआ है, उसका वर्णन करना अस्थान समझ कर मूल विषय पर आना ही उचित है।
श्री आत्मारामजी महाराज साहब की जन्म शताद्वि मनाने का आगामी चैत्र शु० १ को आयोजन हो रहा है । शताद्धि का अर्थ शत+अद्वि अर्थात् सौ वर्षवाली है। किसी भी महापुरुप के जीवन की कोई भी घटना जैसे जन्म, निर्माण के सौ वर्ष बाद जो संस्मरण मनाया जाता है उसे शताद्वि और पचास वर्ष बाद के स्मरणोत्सव को अर्द्ध शताद्रि कहते हैं ।
भारतीयता का यह विशेष गुण है कि वह अपने महापुरुषों के संस्मरण बड़ी चतुरता से रखती है। यहाँ तक कि यह क्रिया एक प्रकार से धार्मिक विधान सी बन गई है । भगवान् श्री महावीर की जयन्ती चैत्र शुक्ल १३ को, श्री कृष्ण की जयन्ती भाद्र कृष्णा ८ मी को, श्री राम की जयन्ती नवमी, दशहरा आदि को, भगवान् बुद्ध की जयन्ती ज्येष्ठ कृष्ण १३ को, प्रतिवर्ष सार्वत्रिक रूप से मनाई जाती है। धार्मिक रूप से इन सब त्यौहारों का विधान किया गया है और जाति बड़े उत्साह से उक्त तिथियों को उत्सव करती है। यदि स्पष्टरूप से पूछा जाय तो ये सारी बातें उक्त महापुरूषों के संस्मरण के लिए ही हैं।
शताब्दि मनाने का प्राचीन इतिहास यद्यपि अज्ञात है, फिर भी यह मागमा ही पड़ेगा कि ये शताब्दियाँ भी वार्षिक जयन्ती का ही विशेष रूप हैं। वार्षिक रूप से
पंन्यास भी मित्रवजी
जितना महापुरुषों के सम्बन्ध में विवेचन नहीं हो सकता, उतने अधिक मनुष्य मिलकर महापुरुषों के सम्बन्ध में अपना विचार - विनिमय नहीं कर सकते, उतनी नवीन बातों की शोध नहीं हो सकती; जितनी प्रधान अवसरो पर । शताद्वि क्या १ अर्द्ध शताद्वि क्या? ऐसे उत्सवों के लिए जितना अधिक बार अवसर मिले उत्तम है। यों तो अच्छा हो क्शाशि तक मनाई जाय । किन्तु यह कार्य व्यय - साध्य होने के कारण उतना सफल नहीं हो सकता जितना अधिक २ दिनों पर किया गया उत्सव; इस लिए ऐसे अवसरों अर्थात् शताद्वि और अर्द्ध शताद्वि को विशेष महत्व दिया जाता है।
इस प्रकार के उत्सवों का इतिहास भी बहुत प्राचीन है। यह बात अवश्य थी कि उनमें ठीक सौ वर्ष का विधान ऐसा पक्का नहीं था । प्रत्येक बौद्ध साहित्य और इतिहास के अध्ययन करनेवाले को यह बात मालूम होगी कि अशोक, कनिष्क, हर्प आदि राजाओं ने महात्मा बुद्ध की मृत्यु के बाद निश्चित समयों पर महात्मा बुद्ध की जयन्ती मनाई थी और उन्हीं अवसरों पर बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों का संकलन किया गया था ।
बौद्ध लोग तो यहाँ तक बढ़े हुए हैं कि वे अब तक महात्मा बुद्ध की शताब्दियाँ मनाते हैं। कुछ ही दिन पूर्व टोकियो में महात्मा बुद्ध की चौबीसवीं शताद्वि मनाई गई थी, जिसमें संसारभर के बौद्ध एकत्रित हुए थे । को. वा. दाइसी नामक जापान के एक बड़े महात्मा की ग्यारहवी शताद्वि गत वर्ष मनाई है। इस प्रकार ऐतिहासिक दृष्टि से इस प्रकार के महापुरुषों के जीवन सम्बन्ध रखनेवाले उत्सव, शताब्दिउत्सव बहुत प्राचीन हैं। साथ ही विशुद्ध भारतीय उपज हैं।
बीच के समय में इनका काम कुछ ढीला पड़ गया था, अब फिर जागृति के साथ २ यह उत्सव भी जग गया है। श्री दयानन्द सरस्वती की जन्म शताब्दि मथुरा में तथा निर्माण अर्द्ध शताब्दि अजमेर में हुई है; यह तो कल की बात है। भारतेन्दु अर्द्ध शताब्दि, टाल्स्टाय शताब्दि, चर्च ऑफ इंग्लैण्ड की शताब्दि, बंकिमचन्द्र की शताब्दि, इस तरह रोज़ इनका क्रम चल रहा है। इनका उद्देश्य महापुरुषों की याद, उनकी शिक्षाओं का जीवित बनाये रखना है।
इसी ही उद्देश्य को लेकर यह शताब्दि मनाई जा रही है और उक्त महात्मा के थोड़े से जीवन के संस्मरण आप के सम्मुख रखने का प्रयत्न हो रहा है।
स्वर्गस्थ आचार्य महाराज साहब के संस्मरण बड़े ही सुन्दर तथा शिक्षाप्रद हैं। हो. भी क्यों न १ महात्मा पुरुषों की प्रत्येक घटनाएं कुछ न कुछ महश्व रखती हैं। भावनगर की एक घटना है। यह अचार्य श्री विजयकमलरिजी ने खंभात में मुझे सुनाई थी।
आचार्यदेव का विराजना भावनगर में था। आप का यह नियम था कि शौच बहुत दूर, मील डेढ़ मील तक पधारते थे, इसके साथ ही आप कभी अकेले- बिना किसी साधु के बाहर नहीं निकलते थे ।
प्रातःकाल का समय था । मुनिवृन्द के साथ आप शौच पधारे थे । समुद्र किनारे की ओर उस दिन पधारना हुआ था। आप किनारे २ बहुत आगे चले गये थे । जब उधर से लौटे तो दूर से आप ने देखा कि मुनि श्री कमलविजयजी तथा श्री जयविजयजी किसी वस्तु के उठाने में लगे हुए हैं।
बात यों थी कि रात में समुद्र की लहर आई थी, उसके साथ ही लकड़ी के दो लठ्ठे बह कर किनारे आ गये थे, उनके बीच दैवयोग से एक गधा फँस गया था और वह उन दोनों लट्टों के बीच पड़ा तड़फड़ा रहा था । उक्त दो मुनिगण एक लठ्ठे को हटा कर उसे बचाने की चेष्टा कर रहे थे।
गुरु महाराज निकट आये, बेचारे पंचेन्द्रिय की दशा देख जी भर आया । इन दोनों साधुओं से लढा उठाया नहीं पाता था। "हटो, इधर आओ " आप ने जोशभरे स्वर से कहाः " पकड़ो यह तिरपणी और डंडा ।
उक्त दोनों महानुभाव हट गये । आप ने चोलपट्टा कसकर काछिये सा बना लिया। वह पहला ही दिन था जब आप ने चोलपट्टा घुटनों से ऊँचा किया था। लठ्ठे के पास पहुँचे । दो तीन बार उस के बोझ को आजमाया और अंत में उठा कर इतने जोर से फेंका कि तीन साढ़े तीन हाथ दूर जाकर गिरा । आफत में फंसा हुआ गधा बंधनमुक्त हुआ, उछल करके चट्ट से बाहर हुआ, थोडी दूर तक दौडा किन्तु पेट में पानी भर गया था, गिर पड़ा। और मुख मार्ग से पानी निकल गया, धूप लगी, चंगा हो गया और चलता बना ।
एक बार की बात है आप उन दिनों जंडियाला गुरु में विराजमान थे । आपने अब तक संवेग दीक्षा नहीं ली थी, स्थानकवासी ढंग ही थे; किन्तु आप के विचार मुखपत्ति बांधने के विरुद्ध हो गये थे ।
[ श्री आरमारायची | पंन्यास भीमजी तथा पश्चिमी सीमा प्रान्त, इस जाति की वीरता के फलस्वरूप सिक्ख राज्य में आ गये थे । आज भी सिक्खों की वीरता की धाक वहाँ वालों पर जमी हुई है। सुबेदार हरिसिंह ललवानीद्वारा केवल पाँच हज़ार सिपाहियों के द्वारा अफगानिस्तान के शाह की सवा लाख सेना का हराया जाना भारतीय इतिहास की अमर घटना है। आज भी सूबेदार हरिसिंह के नाम की इतनी धाक है कि काबुली औरतें अपने बच्चे को "चुप रह हरि आया " कह कर डराया करती हैं। बर्तमान समय के ही यूरोपीय महायुद्ध को लीजिए। पंजाबी सेनाओं की शक्ति, सिक्खों की बहादुरी, उनका आत्मत्याग देखकर संपूर्ण अंग्रेज जाति चकित रह गई थी । वहाँ पंजाबियों की "वाह गुरु दाखालसा, बाह गुरु दी फतह " को सुनते ही दुश्मनों के होश हवाश फाख्ता हो जाते थे। इसप्रकार यह भूमि प्राचीनकाल से आजतक लाखों वीरों, महात्माओं, त्यागियों तथा सद्गृहस्थों की माता होने का सौभाग्य प्राप्त कर चुकी है। इसकी गोद में खेले हुए बालक भारत के सितारे तथा देश की शान रहे हैं और हैं। ये तो शूरवीरता की बातें हुई, इस काल की वीरता के संस्थापक महात्माओं की, शहीदों की कहानियाँ भी भारत जाति का मस्तक गौरव से उच्च करने को प्रस्तुत है। गुरु नानक और उनके पुत्र श्री चंद्रजी की योग तथा उपदेश की बातें जगद्विख्यात हैं। जिन्हों ने पेशावर, काश्मीर तथा पंजाब में हिन्दु धर्म का उद्धार किया था । गुरु गोविंदसिंह और गुरु तेगबहादुर जैसे योगीवीरों को भी इस भूमि ने ही उत्पन्न किया है। गुरु गोविंदसिंह के पुत्रों का सा धर्मप्रेम, हकीकतराय आदि सैंकड़ों बच्चों की बहादुरी एवं साहस देख दो दाँतों तले उंगली दबानी पड़ती है। जिस के बच्चों तकने धर्म के लिए हँसते दो प्राण दे दिया था। भला उस भूमि को अपना कहते हुए किसे गौरव का अनुभव न होगा ? गुरु अमरदास जो अपने गुरुजी को स्नान कराने के लिए तीन कोस से उँधे पाँव जल लाया करते थे इसी प्रांत के थे । वर्तमानकालीन परम साधक स्वामी रामतीर्थजी जिन के योग तथा मक्ति आदर्श माने जाते हैं, इसी पंजाब प्रान्त में उन्नीसवीं शताबि में ही एक गांव मरालीवाला में उत्पन्न हुए थे। इधर उधर हमारे स्वर्णस्थ न्यायाम्भोनिधि जैनाचार्यश्री एक हज़ार आठ श्री विजयानंदवरी जी महाराज साहब को उक्त पुण्य प्रसविनी भूमि ने ही अपनी मोड़ से उत्पन्न किया था। आप की मातृभूमि होने का सौभाग्य इसी पंजाब भूमि को प्राप्त था। और पांचाल भूमि ने उन्नीसवीं शताद्धि में भी एक बार अपनी प्राचीन ऋषि-मुनि एवं महात्माओं की एक सुन्दर झलक दिखा दी थी। पंजाब भूमि उक्त महाराजसाहब को पाकर कृतार्थ हुई और इस युग में अपने प्रकाश को संसार में चमका कर हमारे भावी जीवन का दीप-स्तम्भ दिखा कर हमारी शतशः नमस्कार भाजन हुई है । आप के परम श्रद्धेय गुरुदेव श्री एक सौ आठ बुद्धिविजयजी महाराजसाहब , ज्येष्ठ गुरुभ्राता श्री एक सौ आठ श्री मुक्तिविजयजी महाराज साहब , श्री एक सौ आठ वृद्धिविजयजी महाराज साहम भी इसी प्रान्त में अद्भुत नररत्नों में थे। आप लोगों के द्वारा जाति तथा धर्म का कितना अपरिमित उपकार हुआ है, उसका वर्णन करना अस्थान समझ कर मूल विषय पर आना ही उचित है। श्री आत्मारामजी महाराज साहब की जन्म शताद्वि मनाने का आगामी चैत्र शुशून्य एक को आयोजन हो रहा है । शताद्धि का अर्थ शत+अद्वि अर्थात् सौ वर्षवाली है। किसी भी महापुरुप के जीवन की कोई भी घटना जैसे जन्म, निर्माण के सौ वर्ष बाद जो संस्मरण मनाया जाता है उसे शताद्वि और पचास वर्ष बाद के स्मरणोत्सव को अर्द्ध शताद्रि कहते हैं । भारतीयता का यह विशेष गुण है कि वह अपने महापुरुषों के संस्मरण बड़ी चतुरता से रखती है। यहाँ तक कि यह क्रिया एक प्रकार से धार्मिक विधान सी बन गई है । भगवान् श्री महावीर की जयन्ती चैत्र शुक्ल तेरह को, श्री कृष्ण की जयन्ती भाद्र कृष्णा आठ मी को, श्री राम की जयन्ती नवमी, दशहरा आदि को, भगवान् बुद्ध की जयन्ती ज्येष्ठ कृष्ण तेरह को, प्रतिवर्ष सार्वत्रिक रूप से मनाई जाती है। धार्मिक रूप से इन सब त्यौहारों का विधान किया गया है और जाति बड़े उत्साह से उक्त तिथियों को उत्सव करती है। यदि स्पष्टरूप से पूछा जाय तो ये सारी बातें उक्त महापुरूषों के संस्मरण के लिए ही हैं। शताब्दि मनाने का प्राचीन इतिहास यद्यपि अज्ञात है, फिर भी यह मागमा ही पड़ेगा कि ये शताब्दियाँ भी वार्षिक जयन्ती का ही विशेष रूप हैं। वार्षिक रूप से पंन्यास भी मित्रवजी जितना महापुरुषों के सम्बन्ध में विवेचन नहीं हो सकता, उतने अधिक मनुष्य मिलकर महापुरुषों के सम्बन्ध में अपना विचार - विनिमय नहीं कर सकते, उतनी नवीन बातों की शोध नहीं हो सकती; जितनी प्रधान अवसरो पर । शताद्वि क्या एक अर्द्ध शताद्वि क्या? ऐसे उत्सवों के लिए जितना अधिक बार अवसर मिले उत्तम है। यों तो अच्छा हो क्शाशि तक मनाई जाय । किन्तु यह कार्य व्यय - साध्य होने के कारण उतना सफल नहीं हो सकता जितना अधिक दो दिनों पर किया गया उत्सव; इस लिए ऐसे अवसरों अर्थात् शताद्वि और अर्द्ध शताद्वि को विशेष महत्व दिया जाता है। इस प्रकार के उत्सवों का इतिहास भी बहुत प्राचीन है। यह बात अवश्य थी कि उनमें ठीक सौ वर्ष का विधान ऐसा पक्का नहीं था । प्रत्येक बौद्ध साहित्य और इतिहास के अध्ययन करनेवाले को यह बात मालूम होगी कि अशोक, कनिष्क, हर्प आदि राजाओं ने महात्मा बुद्ध की मृत्यु के बाद निश्चित समयों पर महात्मा बुद्ध की जयन्ती मनाई थी और उन्हीं अवसरों पर बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों का संकलन किया गया था । बौद्ध लोग तो यहाँ तक बढ़े हुए हैं कि वे अब तक महात्मा बुद्ध की शताब्दियाँ मनाते हैं। कुछ ही दिन पूर्व टोकियो में महात्मा बुद्ध की चौबीसवीं शताद्वि मनाई गई थी, जिसमें संसारभर के बौद्ध एकत्रित हुए थे । को. वा. दाइसी नामक जापान के एक बड़े महात्मा की ग्यारहवी शताद्वि गत वर्ष मनाई है। इस प्रकार ऐतिहासिक दृष्टि से इस प्रकार के महापुरुषों के जीवन सम्बन्ध रखनेवाले उत्सव, शताब्दिउत्सव बहुत प्राचीन हैं। साथ ही विशुद्ध भारतीय उपज हैं। बीच के समय में इनका काम कुछ ढीला पड़ गया था, अब फिर जागृति के साथ दो यह उत्सव भी जग गया है। श्री दयानन्द सरस्वती की जन्म शताब्दि मथुरा में तथा निर्माण अर्द्ध शताब्दि अजमेर में हुई है; यह तो कल की बात है। भारतेन्दु अर्द्ध शताब्दि, टाल्स्टाय शताब्दि, चर्च ऑफ इंग्लैण्ड की शताब्दि, बंकिमचन्द्र की शताब्दि, इस तरह रोज़ इनका क्रम चल रहा है। इनका उद्देश्य महापुरुषों की याद, उनकी शिक्षाओं का जीवित बनाये रखना है। इसी ही उद्देश्य को लेकर यह शताब्दि मनाई जा रही है और उक्त महात्मा के थोड़े से जीवन के संस्मरण आप के सम्मुख रखने का प्रयत्न हो रहा है। स्वर्गस्थ आचार्य महाराज साहब के संस्मरण बड़े ही सुन्दर तथा शिक्षाप्रद हैं। हो. भी क्यों न एक महात्मा पुरुषों की प्रत्येक घटनाएं कुछ न कुछ महश्व रखती हैं। भावनगर की एक घटना है। यह अचार्य श्री विजयकमलरिजी ने खंभात में मुझे सुनाई थी। आचार्यदेव का विराजना भावनगर में था। आप का यह नियम था कि शौच बहुत दूर, मील डेढ़ मील तक पधारते थे, इसके साथ ही आप कभी अकेले- बिना किसी साधु के बाहर नहीं निकलते थे । प्रातःकाल का समय था । मुनिवृन्द के साथ आप शौच पधारे थे । समुद्र किनारे की ओर उस दिन पधारना हुआ था। आप किनारे दो बहुत आगे चले गये थे । जब उधर से लौटे तो दूर से आप ने देखा कि मुनि श्री कमलविजयजी तथा श्री जयविजयजी किसी वस्तु के उठाने में लगे हुए हैं। बात यों थी कि रात में समुद्र की लहर आई थी, उसके साथ ही लकड़ी के दो लठ्ठे बह कर किनारे आ गये थे, उनके बीच दैवयोग से एक गधा फँस गया था और वह उन दोनों लट्टों के बीच पड़ा तड़फड़ा रहा था । उक्त दो मुनिगण एक लठ्ठे को हटा कर उसे बचाने की चेष्टा कर रहे थे। गुरु महाराज निकट आये, बेचारे पंचेन्द्रिय की दशा देख जी भर आया । इन दोनों साधुओं से लढा उठाया नहीं पाता था। "हटो, इधर आओ " आप ने जोशभरे स्वर से कहाः " पकड़ो यह तिरपणी और डंडा । उक्त दोनों महानुभाव हट गये । आप ने चोलपट्टा कसकर काछिये सा बना लिया। वह पहला ही दिन था जब आप ने चोलपट्टा घुटनों से ऊँचा किया था। लठ्ठे के पास पहुँचे । दो तीन बार उस के बोझ को आजमाया और अंत में उठा कर इतने जोर से फेंका कि तीन साढ़े तीन हाथ दूर जाकर गिरा । आफत में फंसा हुआ गधा बंधनमुक्त हुआ, उछल करके चट्ट से बाहर हुआ, थोडी दूर तक दौडा किन्तु पेट में पानी भर गया था, गिर पड़ा। और मुख मार्ग से पानी निकल गया, धूप लगी, चंगा हो गया और चलता बना । एक बार की बात है आप उन दिनों जंडियाला गुरु में विराजमान थे । आपने अब तक संवेग दीक्षा नहीं ली थी, स्थानकवासी ढंग ही थे; किन्तु आप के विचार मुखपत्ति बांधने के विरुद्ध हो गये थे । [ श्री आरमारायची |
इधर ग्वालियर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इसके बार में बात करने से इंकार करते हुए कहा कि अभी हम इस बार में कुछ नहीं बता सकते, उधर भूकंप की तीव्रता 4 होने के कारण इसे बहुत हानिकारक नहीं माना जा रहा है।
Earthquake in Gwalior : मंगलवार को दिल्ली NCR सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में आये भूकंप के बाद आज शुक्रवार को ग्वालियर में भी भूकंप के झटके महसूस किये गए, स्थानीय मौसम विभाग ने हालाँकि फ़िलहाल इसके बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है लेकिन समाचार एजेंसी ANI ने इसकी पुष्टि करते हुए एक पोस्ट अपने ट्विटर पर पोस्ट की है है।
जो जानकारी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology) नई दिल्ली से जारी हुई है उसके मुताबिक भारतीय समय के अनुसार आज शुक्रवार 24 मार्च 2023 को सुबह 10 बजकर 31 मिनट और 49 सेकंड पर ग्वालियर में भूकंप के झटके महसूस किये गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4 मापी गई है।
इधर ग्वालियर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इसके बार में बात करने से इंकार करते हुए कहा कि अभी हम इस बार में कुछ नहीं बता सकते, उधर भूकंप की तीव्रता 4 होने के कारण इसे बहुत हानिकारक नहीं माना जा रहा, शहर में भी कुछ जगह झटके महसूस किये गए और कुछ जगह महसूस नहीं किये गए लेकिन जिस किसी ने सुना वो दहशत में जरुर आ गया । अच्छी बात ये है कि अभी तक कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
| इधर ग्वालियर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इसके बार में बात करने से इंकार करते हुए कहा कि अभी हम इस बार में कुछ नहीं बता सकते, उधर भूकंप की तीव्रता चार होने के कारण इसे बहुत हानिकारक नहीं माना जा रहा है। Earthquake in Gwalior : मंगलवार को दिल्ली NCR सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में आये भूकंप के बाद आज शुक्रवार को ग्वालियर में भी भूकंप के झटके महसूस किये गए, स्थानीय मौसम विभाग ने हालाँकि फ़िलहाल इसके बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है लेकिन समाचार एजेंसी ANI ने इसकी पुष्टि करते हुए एक पोस्ट अपने ट्विटर पर पोस्ट की है है। जो जानकारी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र नई दिल्ली से जारी हुई है उसके मुताबिक भारतीय समय के अनुसार आज शुक्रवार चौबीस मार्च दो हज़ार तेईस को सुबह दस बजकर इकतीस मिनट और उनचास सेकंड पर ग्वालियर में भूकंप के झटके महसूस किये गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता चार मापी गई है। इधर ग्वालियर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इसके बार में बात करने से इंकार करते हुए कहा कि अभी हम इस बार में कुछ नहीं बता सकते, उधर भूकंप की तीव्रता चार होने के कारण इसे बहुत हानिकारक नहीं माना जा रहा, शहर में भी कुछ जगह झटके महसूस किये गए और कुछ जगह महसूस नहीं किये गए लेकिन जिस किसी ने सुना वो दहशत में जरुर आ गया । अच्छी बात ये है कि अभी तक कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। |
चंडीगढ़, 23 जून (ट्रिन्यू)
अब इसे मतदाताओं का सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति मोहभंग कहें या फिर प्रदेश में लचर हो रही कानून व्यवस्था के कारण चुनाव के प्रति उदासीनता, जिसके परिणामस्वरूप बृहस्पतिवार देर शाम तक मतदान का प्रतिशत 36 के आसपास बताया जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर अगर यह कहा जाये कि मतदाताओं का चुनाव के प्रति मोहभंग नहीं, बल्कि 36 का आंकड़ा हो गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
उधर, भगवंत सिंह मान के पंजाब का मुख्यमंत्री पद संभाले जाने के बाद उनके संसदीय गृह निर्वाचन क्षेत्र संगरूर के चुनाव को एक लिट्मस टेस्ट या यूं कहें कि मान के लिए एक अग्नि परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी अभी पंजाब की सत्ता संचालन की नब्ज-नाड़ी भी समझ नहीं पाई थी कि राज्य की लगभग सभी सियासी पार्टियों की चुनावी घोषणाएं भले जो भी हों, मगर दीवारों पर अंकित इबारत यही संदेश दे रही हैं कि सभी दलों का मुख्य निशाना आम आदमी पार्टी ही है।
असल में संगरूर लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के लिए लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उत्साह तो खूब दिखाया, लेकिन वोटिंग के समय मतदाताओं में उदासीनता ही नजर आई। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस गढ़ में महज 36.4 फीसदी वोटिंग हुई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां 72.44 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने वोट डाले थे। हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान, लोकसभा के सभी नौ निर्वाचन क्षेत्रों में बरनाला में सबसे कम 71.45 प्रतिशत जबकि लहर में सबसे अधिक 79.60 प्रतिशत मतदान हुआ था।
विपक्षी राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार में मतदाताओं के अविश्वास के कारण मतदान में गिरावट आई है, जबकि सत्तारूढ़ आप ने दावा किया है कि मतदाताओं ने आप को वोट दिया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 2014 और 2019 में संगरूर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। हाल में धूरी सीट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। गौर हो कि संगरूर उपचुनाव में आप, कांग्रेस, भाजपा, शिअद और शिअद (अमृतसर) समेत सभी राजनीतिक दलों के लगभग सभी शीर्ष नेताओं ने मतदाताओं को मनाने के लिए संगरूर लोकसभा क्षेत्र में जमकर प्रचार किया।
| चंडीगढ़, तेईस जून अब इसे मतदाताओं का सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति मोहभंग कहें या फिर प्रदेश में लचर हो रही कानून व्यवस्था के कारण चुनाव के प्रति उदासीनता, जिसके परिणामस्वरूप बृहस्पतिवार देर शाम तक मतदान का प्रतिशत छत्तीस के आसपास बताया जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर अगर यह कहा जाये कि मतदाताओं का चुनाव के प्रति मोहभंग नहीं, बल्कि छत्तीस का आंकड़ा हो गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उधर, भगवंत सिंह मान के पंजाब का मुख्यमंत्री पद संभाले जाने के बाद उनके संसदीय गृह निर्वाचन क्षेत्र संगरूर के चुनाव को एक लिट्मस टेस्ट या यूं कहें कि मान के लिए एक अग्नि परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी अभी पंजाब की सत्ता संचालन की नब्ज-नाड़ी भी समझ नहीं पाई थी कि राज्य की लगभग सभी सियासी पार्टियों की चुनावी घोषणाएं भले जो भी हों, मगर दीवारों पर अंकित इबारत यही संदेश दे रही हैं कि सभी दलों का मुख्य निशाना आम आदमी पार्टी ही है। असल में संगरूर लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के लिए लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उत्साह तो खूब दिखाया, लेकिन वोटिंग के समय मतदाताओं में उदासीनता ही नजर आई। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस गढ़ में महज छत्तीस.चार फीसदी वोटिंग हुई। वर्ष दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में यहां बहत्तर.चौंतालीस प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने वोट डाले थे। हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान, लोकसभा के सभी नौ निर्वाचन क्षेत्रों में बरनाला में सबसे कम इकहत्तर.पैंतालीस प्रतिशत जबकि लहर में सबसे अधिक उन्यासी.साठ प्रतिशत मतदान हुआ था। विपक्षी राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार में मतदाताओं के अविश्वास के कारण मतदान में गिरावट आई है, जबकि सत्तारूढ़ आप ने दावा किया है कि मतदाताओं ने आप को वोट दिया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस में संगरूर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। हाल में धूरी सीट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। गौर हो कि संगरूर उपचुनाव में आप, कांग्रेस, भाजपा, शिअद और शिअद समेत सभी राजनीतिक दलों के लगभग सभी शीर्ष नेताओं ने मतदाताओं को मनाने के लिए संगरूर लोकसभा क्षेत्र में जमकर प्रचार किया। |
सर्वदलीय बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा गलवान घाटी पर दिए गए बयान और उसके बाद सफाई पर चीन मामलों के विशेषज्ञ, राजनैतिक दल अब प्रधानमंत्री के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में शुक्रवार को कहा कि लद्दाख में किसी बाहरी व्यक्ति ने घुसपैठ नही की है। इसको लेकर राजनैतिक भूचाल खड़ा हो गया है।
चीन मामलों के विशेषज्ञ, राजनैतिक दल अब पीएम मोदी के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सीमा में चीनी अतिक्रमण के सामने समर्पण कर दिया है, अगर वह जमीन चीन की थी तो हमारे सैनिक क्यों मारे गए? वह कहां मारे गए हैं? "
एक तरफ राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने लोकमत से बातचीत में कहा की चीनी सैनिक गलवान घाटी में जहां तक घुस चुके हैं, वे अब उसे खाली नहीं करेंगे। उनका मानना था की चीन जिस जगह पर एक बार कब्ज़ा जमा लेता है फिर उसे वह खाली नहीं करता है। नटवर सिंह ने साफ़ किया कि अक्साईचीन पर जिस तरह चीन ने कब्ज़ा किया, भारत उसे आज तक उसे खाली नहीं करा पाया है।
इसके सात ही उनका यह भी मानना था की गलवान घाटी में जो कुछ हुआ उसके बाद भारत की तरफ से जो रणनीति अपनायी गयी है , उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है की इससे पीएम मोदी की विदेश नीति को गहरा धक्का लगेगा।
नटवर सिंह के अलावा पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का बयान भी कमोबेश ऐसा ही है। उनका कहना है कि मोदी सरकार जिस तरह दावे कर रही है उससे उनकी विदेश नीति की समझ को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच जो कुछ घटा उसने तमाम ऐसे भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका कोई उत्तर सरकार के पास नहीं है। मोदी को चाहिए की वह चीन की मानसिकता को समझें और उसके बाद करवाई करें। गुजरात और चेन्नई में झूले से लेकर नारियल पानी तक जो केमिस्ट्री बैठायी, यह घटना उसी का नतीजा है।
पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी मोदी के सर्वदलीय बैठक में दिए गए बयान की झूठ से तुलना करते हुए कहा की यदि यह मान भी लिया जाए की प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं वह सही है तो , 5-6 मई को दोनों सेनाओं के बीच टकराव क्यों हुआ। 5 मई से 6 जून के बीच भारतीय कमांडर चीनी कमांडरों से किस मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 6 जून को कोर कमांडरों के बीच बातचीत का क्या विषय था।
कांग्रसे ने कहा कि यदि चीनी सेना भारतीय सीमा में नहीं घुसी तो 15-16 जून को संघर्ष और भारतीय सैनिकों की शहादत कहां हुई। किस जगह पर 20 भारतीय सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए। चीन की सेना यदि भारतीय सीमा में नहीं घुसी थी तो विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश मंत्रालय ने यथास्तिथि बहाल करने की मांग क्यों की।
चीनी सेना पीछे लौट रही है सरकार द्वारा यह कहा जाना, इसका क्या मतलब था। क्या चीनी सेना अपनी ही सीमा में पीछे लौट रही थी। चिदंबरम ने जोर देते हुये कहा कि झूठे दावे करना सरकार छोड़ दे क्योंकि उसके पास झूठ का जवाब नहीं है।
मोदी के बयान पर हो रहे हमलों के बीच प्रियंका गांधी ने भी मोदी के बयान पर व्यंग किया और गोरख़ पांडे की कविता ट्वीट कर दी, "राजा बोला रात है , रानी बोली रात है , मंत्री बोला रात है , संत्री बोला रात है , यह सुबह सुबह की बात है। "
| सर्वदलीय बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा गलवान घाटी पर दिए गए बयान और उसके बाद सफाई पर चीन मामलों के विशेषज्ञ, राजनैतिक दल अब प्रधानमंत्री के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में शुक्रवार को कहा कि लद्दाख में किसी बाहरी व्यक्ति ने घुसपैठ नही की है। इसको लेकर राजनैतिक भूचाल खड़ा हो गया है। चीन मामलों के विशेषज्ञ, राजनैतिक दल अब पीएम मोदी के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सीमा में चीनी अतिक्रमण के सामने समर्पण कर दिया है, अगर वह जमीन चीन की थी तो हमारे सैनिक क्यों मारे गए? वह कहां मारे गए हैं? " एक तरफ राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने लोकमत से बातचीत में कहा की चीनी सैनिक गलवान घाटी में जहां तक घुस चुके हैं, वे अब उसे खाली नहीं करेंगे। उनका मानना था की चीन जिस जगह पर एक बार कब्ज़ा जमा लेता है फिर उसे वह खाली नहीं करता है। नटवर सिंह ने साफ़ किया कि अक्साईचीन पर जिस तरह चीन ने कब्ज़ा किया, भारत उसे आज तक उसे खाली नहीं करा पाया है। इसके सात ही उनका यह भी मानना था की गलवान घाटी में जो कुछ हुआ उसके बाद भारत की तरफ से जो रणनीति अपनायी गयी है , उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है की इससे पीएम मोदी की विदेश नीति को गहरा धक्का लगेगा। नटवर सिंह के अलावा पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का बयान भी कमोबेश ऐसा ही है। उनका कहना है कि मोदी सरकार जिस तरह दावे कर रही है उससे उनकी विदेश नीति की समझ को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच जो कुछ घटा उसने तमाम ऐसे भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका कोई उत्तर सरकार के पास नहीं है। मोदी को चाहिए की वह चीन की मानसिकता को समझें और उसके बाद करवाई करें। गुजरात और चेन्नई में झूले से लेकर नारियल पानी तक जो केमिस्ट्री बैठायी, यह घटना उसी का नतीजा है। पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भी मोदी के सर्वदलीय बैठक में दिए गए बयान की झूठ से तुलना करते हुए कहा की यदि यह मान भी लिया जाए की प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं वह सही है तो , पाँच-छः मई को दोनों सेनाओं के बीच टकराव क्यों हुआ। पाँच मई से छः जून के बीच भारतीय कमांडर चीनी कमांडरों से किस मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छः जून को कोर कमांडरों के बीच बातचीत का क्या विषय था। कांग्रसे ने कहा कि यदि चीनी सेना भारतीय सीमा में नहीं घुसी तो पंद्रह-सोलह जून को संघर्ष और भारतीय सैनिकों की शहादत कहां हुई। किस जगह पर बीस भारतीय सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए। चीन की सेना यदि भारतीय सीमा में नहीं घुसी थी तो विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश मंत्रालय ने यथास्तिथि बहाल करने की मांग क्यों की। चीनी सेना पीछे लौट रही है सरकार द्वारा यह कहा जाना, इसका क्या मतलब था। क्या चीनी सेना अपनी ही सीमा में पीछे लौट रही थी। चिदंबरम ने जोर देते हुये कहा कि झूठे दावे करना सरकार छोड़ दे क्योंकि उसके पास झूठ का जवाब नहीं है। मोदी के बयान पर हो रहे हमलों के बीच प्रियंका गांधी ने भी मोदी के बयान पर व्यंग किया और गोरख़ पांडे की कविता ट्वीट कर दी, "राजा बोला रात है , रानी बोली रात है , मंत्री बोला रात है , संत्री बोला रात है , यह सुबह सुबह की बात है। " |
कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से मॉक ड्रिल किया गया। इस दौरान ब्लाक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में कोरोना से निपटने की तैयारियों का अधिकारियों ने जायजा लिया। जिले में आठ कोरोना संक्रमित मरीज हैं।
जिला महिला अस्पताल में अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुरेश चंद्र कौशल व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय राजा के नेतृत्व में मॉक ड्रिल हुआ। दोनों ने जिला महिला अस्पताल कोविड सेंटर और ऑक्सीजन प्लांट का भी जायजा लिया।
अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुरेश चंद्र कौशल ने कहा कि कोरोना को लेकर विभाग एलर्ट है। कोरोना से निपटने के लिए तैयारियों का मॉक ड्रिल किया गया है। आईसीयू वार्ड का भी निरीक्षण किया। आपातकालीन व्यवस्था के लिए डॉक्टर और नर्स को प्रशिक्षित किया गया है।
इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट भी चालू हालत में रहेगा। बिजली जाने के बाद भी ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं होगी। मॉक ड्रिल के दौरान चिकित्सा और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
चिकित्सालयों का भ्रमण कर कोविड संक्रमण के रोकथाम और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही चिकित्सालयों में ऑक्सीजन प्लांट, कॉन्सेंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, बेड, सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित के निर्देश दिए। आवश्यकता अनुसार यदि कोई समस्या आती है तो उसका निराकरण सुनिश्चित कराएं।
यदि चिकित्सक और अन्य पैरामेडिकल स्टॉफ के पुनः प्रशिक्षण और संवेदीकरण की जरूरत हो तो तत्काल करें साथ ही यदि ऑक्सीजन प्लांट के संचालन या तकनीकी त्रुटि हो तो तत्काल शासन को अवगत कराते हुए दुरुस्त कराएं। नोडल अधिकारी ने सभी को निर्देशित किया कि सभी को समस्त तैयारियां सतत बनाए रखनी है।
कोविड केयर के लिए चिन्हित अन्य चिकित्सालयों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा नामित एसीएमओ, सीएमओ द्वारा भी जनपद के अन्य कोविड केयर चिकित्सा इकाइयों-जिला चिकित्सालय में डा. दीपक पाण्डेय, सीएचसी पूराबाजार में डॉ. डी के शर्मा, बीकापुर में डॉ राजेश चौधरी, मवई में डॉ दिलीप सिंह, मसौधा में डा सईद अहमद, श्रीराम हॉस्पिटल में डॉ संदीप शुक्ला, 100 बेड चिकित्सालय कुमारगंज में डाo अंसार अली के नेतृत्व में संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव की तैयारियों हेतु मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।
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| कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से मॉक ड्रिल किया गया। इस दौरान ब्लाक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में कोरोना से निपटने की तैयारियों का अधिकारियों ने जायजा लिया। जिले में आठ कोरोना संक्रमित मरीज हैं। जिला महिला अस्पताल में अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुरेश चंद्र कौशल व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय राजा के नेतृत्व में मॉक ड्रिल हुआ। दोनों ने जिला महिला अस्पताल कोविड सेंटर और ऑक्सीजन प्लांट का भी जायजा लिया। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सुरेश चंद्र कौशल ने कहा कि कोरोना को लेकर विभाग एलर्ट है। कोरोना से निपटने के लिए तैयारियों का मॉक ड्रिल किया गया है। आईसीयू वार्ड का भी निरीक्षण किया। आपातकालीन व्यवस्था के लिए डॉक्टर और नर्स को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट भी चालू हालत में रहेगा। बिजली जाने के बाद भी ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं होगी। मॉक ड्रिल के दौरान चिकित्सा और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे। चिकित्सालयों का भ्रमण कर कोविड संक्रमण के रोकथाम और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही चिकित्सालयों में ऑक्सीजन प्लांट, कॉन्सेंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, बेड, सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित के निर्देश दिए। आवश्यकता अनुसार यदि कोई समस्या आती है तो उसका निराकरण सुनिश्चित कराएं। यदि चिकित्सक और अन्य पैरामेडिकल स्टॉफ के पुनः प्रशिक्षण और संवेदीकरण की जरूरत हो तो तत्काल करें साथ ही यदि ऑक्सीजन प्लांट के संचालन या तकनीकी त्रुटि हो तो तत्काल शासन को अवगत कराते हुए दुरुस्त कराएं। नोडल अधिकारी ने सभी को निर्देशित किया कि सभी को समस्त तैयारियां सतत बनाए रखनी है। कोविड केयर के लिए चिन्हित अन्य चिकित्सालयों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा नामित एसीएमओ, सीएमओ द्वारा भी जनपद के अन्य कोविड केयर चिकित्सा इकाइयों-जिला चिकित्सालय में डा. दीपक पाण्डेय, सीएचसी पूराबाजार में डॉ. डी के शर्मा, बीकापुर में डॉ राजेश चौधरी, मवई में डॉ दिलीप सिंह, मसौधा में डा सईद अहमद, श्रीराम हॉस्पिटल में डॉ संदीप शुक्ला, एक सौ बेड चिकित्सालय कुमारगंज में डाo अंसार अली के नेतृत्व में संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव की तैयारियों हेतु मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
मिस्री रेत समुद्र का एक दृश्य मिस्री रेत समुद्र उत्तर अफ़्रीका के सहारा रेगिस्तान के लीबयाई रेगिस्तान उपभाग में स्थित है। यहाँ रेत ही रेत है और उसके अनंत लहरें और टीले ऐसे लगते हैं जैसे समुद्र में लहरें, जिस से इस का नाम पड़ा है। इसमें कुछ रेत के टीले 100 मीटर तक की ऊंचाई रखते हैं (तुलना के लिए दिल्ली का क़ुतुब मीनार केवल 72.5 मीटर ऊंचा है)। मिस्री रेत समुद्र लीबयाई रेगिस्तान का 25% हिस्सा है। .
1 संबंधः सीवा मरूद्यान।
सीवा में मिटटी के घर आम हैं सीवा मरूद्यान या सीवा नख़लिस्तान (अरबीः, "सीवा वाहा" या "सीउआ उआहा") पश्चिमी मिस्र में स्थित एक मरूद्यान (ओएसिस) है। यह क़त्तारा द्रोणी और मिस्री रेत समुद्र के बीच स्थित है। सिवा मिस्र की राजधानी क़ाहिरा से 560 किमी पश्चिम पर और लीबिया की सरहद से 50 किमी पूर्व पर पड़ता है। सहारा रेगिस्तान से दूर-दूर तक घिरे हुए इस नख़लिस्तान की लम्बाई 80 किमी और चौड़ाई 20 किमी है। यहाँ 23,000 बर्बर जाती के लोग रहते हैं जो एक "सीवी" नाम की बर्बर भाषा बोलते हैं। .
| मिस्री रेत समुद्र का एक दृश्य मिस्री रेत समुद्र उत्तर अफ़्रीका के सहारा रेगिस्तान के लीबयाई रेगिस्तान उपभाग में स्थित है। यहाँ रेत ही रेत है और उसके अनंत लहरें और टीले ऐसे लगते हैं जैसे समुद्र में लहरें, जिस से इस का नाम पड़ा है। इसमें कुछ रेत के टीले एक सौ मीटर तक की ऊंचाई रखते हैं । मिस्री रेत समुद्र लीबयाई रेगिस्तान का पच्चीस% हिस्सा है। . एक संबंधः सीवा मरूद्यान। सीवा में मिटटी के घर आम हैं सीवा मरूद्यान या सीवा नख़लिस्तान पश्चिमी मिस्र में स्थित एक मरूद्यान है। यह क़त्तारा द्रोणी और मिस्री रेत समुद्र के बीच स्थित है। सिवा मिस्र की राजधानी क़ाहिरा से पाँच सौ साठ किमी पश्चिम पर और लीबिया की सरहद से पचास किमी पूर्व पर पड़ता है। सहारा रेगिस्तान से दूर-दूर तक घिरे हुए इस नख़लिस्तान की लम्बाई अस्सी किमी और चौड़ाई बीस किमी है। यहाँ तेईस,शून्य बर्बर जाती के लोग रहते हैं जो एक "सीवी" नाम की बर्बर भाषा बोलते हैं। . |
जमीन से हवा में मार करने वाली S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के मिलने से भारत की मारक क्षमता और मजबूत हो जाएगी।
अमेरिका में न्यूयॉर्क के ब्रास अगेंस्ट बैंड की गायिका सोफिया उरिस्टा की शर्मनाक हरकत। स्टेज पर ही प्रशंसक के चेहरे पर कर दिया पेशाब।
अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य कैरोलिन मैलोनी की ओर से बुधवार (3 नवंबर 2021) को अमेरिकी कॉन्ग्रेस में एक विधेयक पेश किया जाएगा।
रोम में ऐसी अफवाहें उड़ी हैं कि वेटिकन में पोप फ्रांसिस के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन 'बाथरूम एक्सीडेंट' के शिकार हो गए।
अभिनेत्री मर्लिन मुनरो को अनुचित तरीके से श्रद्धांजलि देने के लिए गायिका मैडोना की सोशल मीडिया पर खिंचाई की गई।
अमेरिका के कंसास की एक अदालत ने यूनाइटेड नेशन ऑफ इस्लाम नामक संगठन के 8 लोगों को नाबालिगों के शोषण मामले में दोषी कार दिया है।
मॉडल ने बताया कि कैसे वह पार्टी में घंटों नंगे रहीं। उनके शरीर पर सिर्फ रंग हो रखा था। वहीं बाकी जाने-माने लोग खुलेआम सेक्स कर रहे थे।
हिंदू अक्टूबर में नवरात्रि और दीपावली मनाते हैं। इसलिए अमेरिका में इसे हिंदू विरासत माह के रूप में मनाने का फैसला किया गया है।
कैथोलिक कॉलेज सेंट जॉन यूनिवर्सिटी के लड़के अपने कॉलेज के सिस्टर कॉलेज सेंट बेनेडिक्ट की लड़कियों को फँसाकर उनके साथ सेक्स करते थे।
दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देने के चलते अमेरिका के 18 फौजियों को आज से लगभग 20 वर्ष पहले सोमालिया में अपनी जान गँवानी पड़ी थी।
| जमीन से हवा में मार करने वाली S-चार सौ मिसाइल डिफेंस सिस्टम के मिलने से भारत की मारक क्षमता और मजबूत हो जाएगी। अमेरिका में न्यूयॉर्क के ब्रास अगेंस्ट बैंड की गायिका सोफिया उरिस्टा की शर्मनाक हरकत। स्टेज पर ही प्रशंसक के चेहरे पर कर दिया पेशाब। अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य कैरोलिन मैलोनी की ओर से बुधवार को अमेरिकी कॉन्ग्रेस में एक विधेयक पेश किया जाएगा। रोम में ऐसी अफवाहें उड़ी हैं कि वेटिकन में पोप फ्रांसिस के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन 'बाथरूम एक्सीडेंट' के शिकार हो गए। अभिनेत्री मर्लिन मुनरो को अनुचित तरीके से श्रद्धांजलि देने के लिए गायिका मैडोना की सोशल मीडिया पर खिंचाई की गई। अमेरिका के कंसास की एक अदालत ने यूनाइटेड नेशन ऑफ इस्लाम नामक संगठन के आठ लोगों को नाबालिगों के शोषण मामले में दोषी कार दिया है। मॉडल ने बताया कि कैसे वह पार्टी में घंटों नंगे रहीं। उनके शरीर पर सिर्फ रंग हो रखा था। वहीं बाकी जाने-माने लोग खुलेआम सेक्स कर रहे थे। हिंदू अक्टूबर में नवरात्रि और दीपावली मनाते हैं। इसलिए अमेरिका में इसे हिंदू विरासत माह के रूप में मनाने का फैसला किया गया है। कैथोलिक कॉलेज सेंट जॉन यूनिवर्सिटी के लड़के अपने कॉलेज के सिस्टर कॉलेज सेंट बेनेडिक्ट की लड़कियों को फँसाकर उनके साथ सेक्स करते थे। दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देने के चलते अमेरिका के अट्ठारह फौजियों को आज से लगभग बीस वर्ष पहले सोमालिया में अपनी जान गँवानी पड़ी थी। |
व्यक्ति को बोधिचित्त की उपलब्धि हो जाना था, जिसमें शून्यता व करुणा का सामजस्य रहा करता है । इसी कारण 'हीनयान' के अनुयायी जहाँ श्रधिकतर नैतिक प्रवृत्तिवाले व्यक्ति ही हो पाते थे, वहाँ 'महायान' में सभी वर्ग, विचार एवं मत के लोगों का प्रवेश होने लगा । महायान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसने अपनी मून धर्म-भाषा पालि को छोड़कर हिंदुओं की संस्कृत भाषा को अपना लिया, तथा पौराणिक युग के हिंदुओं के प्रभाव में श्राकर वह उनके भक्तिवाद एवं तंत्रोपचार की पद्धतियों का भी पूर्ण समर्थक हो गया ! इसने अपने धर्म के मूल प्रवर्त्तक गौतम बुद्ध को देवत्व प्रदान कर दिया और उनकी विविध 'जातक' कथाओं के काल्पनिक आधार पर बोघिसत्वों की उपासना में भी प्रवृत्त हो गया । इस कार्य में इसके दर्शन- प्रेम ने किसी प्रकार की बाधा नहीं पहुॅचायी, पि इसके सूक्ष्मातिसूक्ष्म दार्शनिक विवेचन के कारण उसके ग्रंथों में कुछ ऐसी रहस्यमयी परिभाषाओं की सृष्टि भी हो चली, जिनके कारण इसकी सारी बातें मेदभरी व गूढातिगूढ़ प्रतीत होने लगीं। इसके अतिरिक्त उस समय के प्रचलित तंत्रवाद ने भी इसे भिन्न-भिन्न गुप्त साधनाओं की ओर संकेत करके उनके प्रपत्रों में उलझने के लिए विवश किया और गुह्य समाज की एक परम्परा चल निकली । इन समाजों की मुख्य साधनाएँ परम गुप्त हुआ करती थीं और उनकी विविध क्रियाओं के निर्वाह के लिए अनेक प्रतीकों की आवश्यकता पड़ती थी। तदनुसार साधना-मेद के आधार पर इसके अंतर्गत विविध उपयानों की भी सृष्टि होने लगी और एक दूसरे में बहुत दीख पड़ने लगा । मूल बौद्ध धर्म अथवा महायान सम्प्रदाय से ये उपयान इतने भिन्न हो गए कि इन्हें उनका विकसित रूप सिद्ध करना भी अत्यन्त कठिन हो गया ।
महायान द्वारा गौतम बुद्ध के देवत्व प्राप्त करते ही उनके उपदेशों को भी लौकिक महत्त्व मिल गया । इसलिए उनके अनुयायियों में उनके उपलब्ध वचनों के प्रति अपार श्रद्धा बढ़ चली, और वे उनका पाठ करना अपना कर्तव्य समझने लगे। परंतु ये पाठ साधारणतः लम्बे हो जाया करते थे, इस कारण उनके आधार पर छोटे-छोटे सूत्रों की रचना होने लगी और अंत में इन सूत्रों को भी और संक्षिप्त रूप देने की चेष्टा में क्रमशः मंत्रों की सृष्टि हो गई । इन मंत्रों का अर्थ-रहित होना ही सार्थक माना जाने लगा और
इनका प्रभाव इसी कारण उक्त लम्बे उपदेशों से किसी प्रकार भी कम नहीं समझा जाता था। ये मंत्र केवल दो-एक की भिन्न-भिन्न स्थिति व संयोग द्वारा बना लिये जाते थे और इनके उच्चारण की विशेष शैली पर ध्यान दिया जाता था। इसके सिवाय इन्हें जब लिखित रूप में प्रकट किया जाता था, तब इनके भिन्न-भिन्न अक्षरों की विशेष अवस्थिति के अनुसार इनके मंत्र भी बना लिये जाते थे और ऐसे मंत्रों के भिन्न-भिन्न प्रयोगों द्वारा भी उन्हीं परिणामों की कल्पना की जाती थी, जो मूल उपदेशों से हुआ करते थे । मत्रों को इस प्रकार महत्त्व प्रदान करनेवाला महादान का उप-सम्प्रदाय 'मंत्रयान' के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसके अनुयायियों की दृढ़ धारणा हो गई कि उक्त प्रकार से रचे गये मंत्रों की साधना यदि नियमित रूप से कर दी जाय, तो अपने ग्रीष्ट को प्राप्त कर लेना कठिन नहीं होगा। ऐसे मंत्रयान का उदय विक्रम की पाँचवीं शताब्दी के संभवतः कुछ पहले ही हो चुका था; किंतु उसका अधिक प्रचार उसी समय से होने लगा ।
मंत्रयान के अधिक प्रचार ने श्रद्धालुओं की संख्या में भी पर्याप्त अभिवृद्धि की और इस कारण मंत्रयानी साधकों में से अनेक व्यक्ति अपने विविध प्रयत्नों द्वारा ऐसे लोगों की उदारता से लाभ उठाकर धन-संग्रह की ओर भी प्रवृत्त हुए । इस धन-सग्रह ने काल पाकर विलासिता को जन्म दिया और उक्त साधकों में श्रम ऐसे व्यक्ति भी दीख पड़ने लगे जिन्हें मंत्रों के अतिरिक्त हटयोग व मैथुन की क्रियाओं में भी अधिक विश्वास रहा करता था। ऐसे ही साधकों ने श्रागे चलकर अपने विचारों को एक सुव्यवस्थित रूप दिया और इस प्रकार मंत्रयान के आगे वज्रयान' नाम के एक अन्य उपयान का प्रारंभ हो गया, जिसके प्रचारकों में प्रसिद्ध ८४ सिद्धों की भी गणना की जाती है। वज्रयानियों ने महायान की 'शून्यता' एवं 'करुणा' को क्रमशः 'प्रज्ञा' एवं 'उपाय' के नाम दे दिये और इन दोनों के मिलन को 'युगनद' की दशा वतलाकर उसे ही प्रत्येक साधक का प्रतिम लक्ष्य ठहराया । बोधिचित्त भी, जो पहले विशुद्ध चित्त एवं व्यापक कारुण्य - भाव का द्योतक रहा, इस प्रकार, 'वज्र सत्व' वन गया । प्रज्ञा का स्वरूप एक निविंशिष्ट, किंतु निष्क्रियज्ञान मात्र है, जिसे स्त्री रूप देते हैं और उपाय उसके विपरीत एक सक्रिय तत्व है, जिसे पुरुषवत् मानते है, और इन दोनों का अंतिम मिलन शक्ति एवं शिव के मिलन के समान | व्यक्ति को बोधिचित्त की उपलब्धि हो जाना था, जिसमें शून्यता व करुणा का सामजस्य रहा करता है । इसी कारण 'हीनयान' के अनुयायी जहाँ श्रधिकतर नैतिक प्रवृत्तिवाले व्यक्ति ही हो पाते थे, वहाँ 'महायान' में सभी वर्ग, विचार एवं मत के लोगों का प्रवेश होने लगा । महायान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसने अपनी मून धर्म-भाषा पालि को छोड़कर हिंदुओं की संस्कृत भाषा को अपना लिया, तथा पौराणिक युग के हिंदुओं के प्रभाव में श्राकर वह उनके भक्तिवाद एवं तंत्रोपचार की पद्धतियों का भी पूर्ण समर्थक हो गया ! इसने अपने धर्म के मूल प्रवर्त्तक गौतम बुद्ध को देवत्व प्रदान कर दिया और उनकी विविध 'जातक' कथाओं के काल्पनिक आधार पर बोघिसत्वों की उपासना में भी प्रवृत्त हो गया । इस कार्य में इसके दर्शन- प्रेम ने किसी प्रकार की बाधा नहीं पहुॅचायी, पि इसके सूक्ष्मातिसूक्ष्म दार्शनिक विवेचन के कारण उसके ग्रंथों में कुछ ऐसी रहस्यमयी परिभाषाओं की सृष्टि भी हो चली, जिनके कारण इसकी सारी बातें मेदभरी व गूढातिगूढ़ प्रतीत होने लगीं। इसके अतिरिक्त उस समय के प्रचलित तंत्रवाद ने भी इसे भिन्न-भिन्न गुप्त साधनाओं की ओर संकेत करके उनके प्रपत्रों में उलझने के लिए विवश किया और गुह्य समाज की एक परम्परा चल निकली । इन समाजों की मुख्य साधनाएँ परम गुप्त हुआ करती थीं और उनकी विविध क्रियाओं के निर्वाह के लिए अनेक प्रतीकों की आवश्यकता पड़ती थी। तदनुसार साधना-मेद के आधार पर इसके अंतर्गत विविध उपयानों की भी सृष्टि होने लगी और एक दूसरे में बहुत दीख पड़ने लगा । मूल बौद्ध धर्म अथवा महायान सम्प्रदाय से ये उपयान इतने भिन्न हो गए कि इन्हें उनका विकसित रूप सिद्ध करना भी अत्यन्त कठिन हो गया । महायान द्वारा गौतम बुद्ध के देवत्व प्राप्त करते ही उनके उपदेशों को भी लौकिक महत्त्व मिल गया । इसलिए उनके अनुयायियों में उनके उपलब्ध वचनों के प्रति अपार श्रद्धा बढ़ चली, और वे उनका पाठ करना अपना कर्तव्य समझने लगे। परंतु ये पाठ साधारणतः लम्बे हो जाया करते थे, इस कारण उनके आधार पर छोटे-छोटे सूत्रों की रचना होने लगी और अंत में इन सूत्रों को भी और संक्षिप्त रूप देने की चेष्टा में क्रमशः मंत्रों की सृष्टि हो गई । इन मंत्रों का अर्थ-रहित होना ही सार्थक माना जाने लगा और इनका प्रभाव इसी कारण उक्त लम्बे उपदेशों से किसी प्रकार भी कम नहीं समझा जाता था। ये मंत्र केवल दो-एक की भिन्न-भिन्न स्थिति व संयोग द्वारा बना लिये जाते थे और इनके उच्चारण की विशेष शैली पर ध्यान दिया जाता था। इसके सिवाय इन्हें जब लिखित रूप में प्रकट किया जाता था, तब इनके भिन्न-भिन्न अक्षरों की विशेष अवस्थिति के अनुसार इनके मंत्र भी बना लिये जाते थे और ऐसे मंत्रों के भिन्न-भिन्न प्रयोगों द्वारा भी उन्हीं परिणामों की कल्पना की जाती थी, जो मूल उपदेशों से हुआ करते थे । मत्रों को इस प्रकार महत्त्व प्रदान करनेवाला महादान का उप-सम्प्रदाय 'मंत्रयान' के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसके अनुयायियों की दृढ़ धारणा हो गई कि उक्त प्रकार से रचे गये मंत्रों की साधना यदि नियमित रूप से कर दी जाय, तो अपने ग्रीष्ट को प्राप्त कर लेना कठिन नहीं होगा। ऐसे मंत्रयान का उदय विक्रम की पाँचवीं शताब्दी के संभवतः कुछ पहले ही हो चुका था; किंतु उसका अधिक प्रचार उसी समय से होने लगा । मंत्रयान के अधिक प्रचार ने श्रद्धालुओं की संख्या में भी पर्याप्त अभिवृद्धि की और इस कारण मंत्रयानी साधकों में से अनेक व्यक्ति अपने विविध प्रयत्नों द्वारा ऐसे लोगों की उदारता से लाभ उठाकर धन-संग्रह की ओर भी प्रवृत्त हुए । इस धन-सग्रह ने काल पाकर विलासिता को जन्म दिया और उक्त साधकों में श्रम ऐसे व्यक्ति भी दीख पड़ने लगे जिन्हें मंत्रों के अतिरिक्त हटयोग व मैथुन की क्रियाओं में भी अधिक विश्वास रहा करता था। ऐसे ही साधकों ने श्रागे चलकर अपने विचारों को एक सुव्यवस्थित रूप दिया और इस प्रकार मंत्रयान के आगे वज्रयान' नाम के एक अन्य उपयान का प्रारंभ हो गया, जिसके प्रचारकों में प्रसिद्ध चौरासी सिद्धों की भी गणना की जाती है। वज्रयानियों ने महायान की 'शून्यता' एवं 'करुणा' को क्रमशः 'प्रज्ञा' एवं 'उपाय' के नाम दे दिये और इन दोनों के मिलन को 'युगनद' की दशा वतलाकर उसे ही प्रत्येक साधक का प्रतिम लक्ष्य ठहराया । बोधिचित्त भी, जो पहले विशुद्ध चित्त एवं व्यापक कारुण्य - भाव का द्योतक रहा, इस प्रकार, 'वज्र सत्व' वन गया । प्रज्ञा का स्वरूप एक निविंशिष्ट, किंतु निष्क्रियज्ञान मात्र है, जिसे स्त्री रूप देते हैं और उपाय उसके विपरीत एक सक्रिय तत्व है, जिसे पुरुषवत् मानते है, और इन दोनों का अंतिम मिलन शक्ति एवं शिव के मिलन के समान |
कैथल, 28 जनवरी (हप्र)
किसानों पर अभद्र टिप्पणी करने पर किसानों ने आज बलबीर राजेवाल का पुतला दहन किया। इससे पहले सरपंच जसमेर फ्रांसवाला की अध्यक्षता मे किसान पिहोवा चौक पर इकट्ठे हुए। किसानों ने बलवीर राजेवाल द्वारा किसानों पर की गई अभद्र टिप्पणी व जाट समाज को बदनाम करने की घोर निंदा की। जसमेर ने कहा कि क्या पंजाब में किसान जाट नहीं है जो बलवीर राजेवाल जाट समाज को बदनाम करने में लगा हुआ है।
वहीं, खेती बचाओ देश बचाओ संघर्ष समिति का रिलायंस पेट्रोल पंप पर 37वें दिन भी धरना जारी रहा।
जन संघर्ष मंच हरियाणा ने हनुमान वाटिका में शांतिपूर्ण आंदोलनरत किसान नेताओं पर बनाये झूठे मुकदमे रदद् किये जाने, किसान आंदोलन का दमन बंद किए जाने, जन विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तथा कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में ट्रेड यूनियन नेता नोदीप कौर की गिरफ्तारी के विरोध में सभा की। सभा के बाद जिला उपायुक्त कार्यालय तक प्रदर्शन किया गया। जिला उपायुक्त कैथल के माध्यम से प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता कामरेड फूल सिंह ने की।
| कैथल, अट्ठाईस जनवरी किसानों पर अभद्र टिप्पणी करने पर किसानों ने आज बलबीर राजेवाल का पुतला दहन किया। इससे पहले सरपंच जसमेर फ्रांसवाला की अध्यक्षता मे किसान पिहोवा चौक पर इकट्ठे हुए। किसानों ने बलवीर राजेवाल द्वारा किसानों पर की गई अभद्र टिप्पणी व जाट समाज को बदनाम करने की घोर निंदा की। जसमेर ने कहा कि क्या पंजाब में किसान जाट नहीं है जो बलवीर राजेवाल जाट समाज को बदनाम करने में लगा हुआ है। वहीं, खेती बचाओ देश बचाओ संघर्ष समिति का रिलायंस पेट्रोल पंप पर सैंतीसवें दिन भी धरना जारी रहा। जन संघर्ष मंच हरियाणा ने हनुमान वाटिका में शांतिपूर्ण आंदोलनरत किसान नेताओं पर बनाये झूठे मुकदमे रदद् किये जाने, किसान आंदोलन का दमन बंद किए जाने, जन विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तथा कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में ट्रेड यूनियन नेता नोदीप कौर की गिरफ्तारी के विरोध में सभा की। सभा के बाद जिला उपायुक्त कार्यालय तक प्रदर्शन किया गया। जिला उपायुक्त कैथल के माध्यम से प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता कामरेड फूल सिंह ने की। |
१७५४ ई० को सन्धि भलो प्रकार कार्यान्वित भो न हो पायो थो कि १७५६ ई० युरॅपमें फ्रान्म और इग्लैण्डके बीच सातवर्षीय युद्ध छिड गया । फलस्वरूप ससारके जिस किसी भागमें भी अंगरेज और फ्रान्सोसो पास-पास हुए वे परस्पर लडने लगे, भारतमें भी दानों जातियोंमें लडाई प्रारम्भ हो गयी। किन्तु फान्सोसियोका सेनापति मी १७५८ ई० के पूर्व भारत न पहुँच सका और जब वह यहाँ पहुँचा तो वगालको अद्भुत विजयके कारण अंगरेजोकी शक्ति दसगुनी वढ चुकी थी और उनका स्थिति बहुत सुदृढ हो चुकी थी। ललीने दूसरी भूल यह की कि हैदरावादसे बुसोबा भी वापस बुला लिया, फलस्वरूप निजामवे राज्यमें भी जो भारी प्रभाव आठ वपसे बुमोने जमा रखा था वह सर्वथा नष्ट हो गया मौर इस राज्य में भो मँगरेजाफा अपना प्रभाव जमानेका अवसर मिल गया जिसका लाभ उन्होंने नासिरजगको मृत्युपर सलावतजगको नवाम बनने में सहायता देकर सुरन्त और पूरा-पूरा उठाया। उधर लैलीफे नेतृत्वमें फान्सोसो सेनाको अंगरेज सेनापति मर आयर फूटने १७६० ई० में वाढवाशके युद्धमें बुरी तरह पराजित किया, लैलीने भागकर पाण्डुचेरोमॅ शरण लो । अंगरेजोंने उसका भो घेरा डाल दिया और १७६१ ६० में उसपर अधिकार कर लिया। उन्होंने लैली आदिको बन्दी बना लिया और भारतमें फान्सोसियोकी आकाक्षाका अन्त कर दिया तथा स्वयको सजातीय ( यूरोपवासी ) प्रतिद्वन्द्वियोंसे सर्वथा मुक्त कर लिया। इसो वर्प पानीपतको ऐतिहासिक रणभूमिम भारतके साम्राज्य के लिए मराठों और अफ़गानों, अथवा हिन्दुआ और मुसलमानों, या भारतीयों और विदेशियोंके बीच भोषण युद्ध हो रहा था । सारे देशकी आँखें उघर हो लगी हुई थीं, दक्षिण भारतके पूर्वी तटपर इन विदेशी फिरगियोंके बीच होने वाले इस छोटे से सघर्षकी ओर किसीका ध्यान भो न था । किन्तु वास्तव में भारतके भाग्यका निर्णय १७६१ ई० के पानोपसके युद्ध में शायद उठना नहीं हुआ जितना कि पाण्डुचेरोमें फान्सोसियोको पराजयमें हुआ । इस | एक हज़ार सात सौ चौवन ईशून्य को सन्धि भलो प्रकार कार्यान्वित भो न हो पायो थो कि एक हज़ार सात सौ छप्पन ईशून्य युरॅपमें फ्रान्म और इग्लैण्डके बीच सातवर्षीय युद्ध छिड गया । फलस्वरूप ससारके जिस किसी भागमें भी अंगरेज और फ्रान्सोसो पास-पास हुए वे परस्पर लडने लगे, भारतमें भी दानों जातियोंमें लडाई प्रारम्भ हो गयी। किन्तु फान्सोसियोका सेनापति मी एक हज़ार सात सौ अट्ठावन ईशून्य के पूर्व भारत न पहुँच सका और जब वह यहाँ पहुँचा तो वगालको अद्भुत विजयके कारण अंगरेजोकी शक्ति दसगुनी वढ चुकी थी और उनका स्थिति बहुत सुदृढ हो चुकी थी। ललीने दूसरी भूल यह की कि हैदरावादसे बुसोबा भी वापस बुला लिया, फलस्वरूप निजामवे राज्यमें भी जो भारी प्रभाव आठ वपसे बुमोने जमा रखा था वह सर्वथा नष्ट हो गया मौर इस राज्य में भो मँगरेजाफा अपना प्रभाव जमानेका अवसर मिल गया जिसका लाभ उन्होंने नासिरजगको मृत्युपर सलावतजगको नवाम बनने में सहायता देकर सुरन्त और पूरा-पूरा उठाया। उधर लैलीफे नेतृत्वमें फान्सोसो सेनाको अंगरेज सेनापति मर आयर फूटने एक हज़ार सात सौ साठ ईशून्य में वाढवाशके युद्धमें बुरी तरह पराजित किया, लैलीने भागकर पाण्डुचेरोमॅ शरण लो । अंगरेजोंने उसका भो घेरा डाल दिया और एक हज़ार सात सौ इकसठ साठ में उसपर अधिकार कर लिया। उन्होंने लैली आदिको बन्दी बना लिया और भारतमें फान्सोसियोकी आकाक्षाका अन्त कर दिया तथा स्वयको सजातीय प्रतिद्वन्द्वियोंसे सर्वथा मुक्त कर लिया। इसो वर्प पानीपतको ऐतिहासिक रणभूमिम भारतके साम्राज्य के लिए मराठों और अफ़गानों, अथवा हिन्दुआ और मुसलमानों, या भारतीयों और विदेशियोंके बीच भोषण युद्ध हो रहा था । सारे देशकी आँखें उघर हो लगी हुई थीं, दक्षिण भारतके पूर्वी तटपर इन विदेशी फिरगियोंके बीच होने वाले इस छोटे से सघर्षकी ओर किसीका ध्यान भो न था । किन्तु वास्तव में भारतके भाग्यका निर्णय एक हज़ार सात सौ इकसठ ईशून्य के पानोपसके युद्ध में शायद उठना नहीं हुआ जितना कि पाण्डुचेरोमें फान्सोसियोको पराजयमें हुआ । इस |
झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हान वन क्षेत्र के घनघोर जंगलों में घात लगाए बैठे नक्सली अब सुरक्षाबलों को निशाने के लिए प्रेशर बम बना रहे हैं और वह भी अस्पताल में इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज का इस्तेमाल कर।
सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले में करीब पांच माह से सुरक्षाबल के हजारों जवान नक्सलियों की टोह में इस भीषण गर्मी में जंगल-जंगल घूम रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर नक्सली भी सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के लिए जंगल में अपने सुरक्षित ठिकानों में घात लगाये बैठे हैं और नये-नये प्रयोग कर सुरक्षाबलों को अपने जाल में फंसाने की भी भरसक कोशिश कर रहे हैं।
जिले के कोल्हान वन क्षेत्र के घनघोर जंगलों में नक्सली छत्तीसगढ़ की तर्ज पर डायरेक्शनल बम, प्रेशर बम, बूबी ट्रैप और स्पाइक्स के बाद अब सिरिंज आइईडी बम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। 31 मई को पुलिस को सर्च आपरेशन में एक सिरिंज आइईडी मिला है।
दरअसल, पश्चिम सिंहभूम ज़िले के टोंटो थाना अंतर्गत तुंबाहाका और सरजमबुरू के साथ-साथ गोइलकेरा थाना अंतर्गत कुईड़ा एवं मारादिरी के सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने चार दिनों से नक्सल आपरेशन प्रारंभ किया है। इस क्रम में सुरक्षाबलों ने तीन दिन में 23 आइईडी बरामद की हैं। इनमें एक सिरिंज प्रेशर आइईडी भी है।
यह सिरिंज एक वायर के माध्यम से टिफिन से कनेक्ट की गयी थी। इससे पता चला है कि नक्सली अब आइईडी बनाने में यहां पहली बार अस्पतालों में प्रयोग होने वाली सिरिंज का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
बम विशेषज्ञों के अनुसार नक्सली आइईडी या प्रेशर बम में सिरिंज का इस्तेमाल स्विच के रूप में करते हैं। इसके लिये सिरिंज के पीछे और आगे तार इस तरह जोड़ी जाती है कि सिरिंज पर दबाव पड़ते ही सर्किट जुड़ जाता है और बम फट जाता है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने सिरिंज आइईडी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 31 मई को हम लोगों ने 7 आइईडी बरामद की। इनमें एक सिरिंज आइईडी भी शामिल है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे हम लोगों ने मौके पर ही विनिष्ट कर दिया है। जिले में सिरिंज आइईडी पहली बार मिली है।
ये सामान्य सिरिंज हैं जो अस्पतालों में इस्तेमाल होती हैं। नक्सली इनका प्रयोग आइईडी बनाने में कर रहे हैं। नक्सली सिरिंज के जरिये प्रेशर बम का सर्किट कनेक्ट कर देते हैं। इसके बाद सिरिंज जमीन में खड़ा कर गाड़ दी जाती है। सामान्य सिरिंज समझकर कोई यदि इसे उठाता है या किसी का पैर पड़ता है, तो सर्किट जुड़ जाता है और आइईडी फट जाती है।
बता दें कि पुलिस के पास सूचना है कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु, चमन, कांडे, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन आदि अपने दस्ते के सदस्यों के साथ कोल्हान क्षेत्र में विध्वंसक गतिविधि के लिए भ्रमणशील हैं।
इस सूचना के आलोक में 11 जनवरी 2023 से ही पूरे क्षेत्र में चाईबासा पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ की 60 बटालियन, 174 बटालियन , 197 बटालियन, 157 बटालियन, 193 बटालियन 07 बटालियन व 26 बटालियन का एक संयुक्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
नक्सलियों ने अपने आप को बचाने के लिए टोंटो थाना अंतर्गत तुम्बाहाका एवं अंजदबेड़ा के सीमावर्ती क्षेत्र तथा गोइलकेरा थाना अंतर्गत ग्राम कुईड़ा एवं मारादिरी के सीमावर्ती क्षेत्र में काफी संख्या में आइईडी लगा रखी हैं।
जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाये गये आइईडी की चपेट में आकर एक बच्चा, दो बुजुर्ग महिला समेत करीब 10 ग्रामीणों को मौत पिछले पांच माह में हो चुकी है जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें सीआरपीएफ के जवान भी शामिल हैं।
| झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हान वन क्षेत्र के घनघोर जंगलों में घात लगाए बैठे नक्सली अब सुरक्षाबलों को निशाने के लिए प्रेशर बम बना रहे हैं और वह भी अस्पताल में इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज का इस्तेमाल कर। सुधीर पांडेय, चाईबासा। झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले में करीब पांच माह से सुरक्षाबल के हजारों जवान नक्सलियों की टोह में इस भीषण गर्मी में जंगल-जंगल घूम रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर नक्सली भी सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के लिए जंगल में अपने सुरक्षित ठिकानों में घात लगाये बैठे हैं और नये-नये प्रयोग कर सुरक्षाबलों को अपने जाल में फंसाने की भी भरसक कोशिश कर रहे हैं। जिले के कोल्हान वन क्षेत्र के घनघोर जंगलों में नक्सली छत्तीसगढ़ की तर्ज पर डायरेक्शनल बम, प्रेशर बम, बूबी ट्रैप और स्पाइक्स के बाद अब सिरिंज आइईडी बम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इकतीस मई को पुलिस को सर्च आपरेशन में एक सिरिंज आइईडी मिला है। दरअसल, पश्चिम सिंहभूम ज़िले के टोंटो थाना अंतर्गत तुंबाहाका और सरजमबुरू के साथ-साथ गोइलकेरा थाना अंतर्गत कुईड़ा एवं मारादिरी के सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने चार दिनों से नक्सल आपरेशन प्रारंभ किया है। इस क्रम में सुरक्षाबलों ने तीन दिन में तेईस आइईडी बरामद की हैं। इनमें एक सिरिंज प्रेशर आइईडी भी है। यह सिरिंज एक वायर के माध्यम से टिफिन से कनेक्ट की गयी थी। इससे पता चला है कि नक्सली अब आइईडी बनाने में यहां पहली बार अस्पतालों में प्रयोग होने वाली सिरिंज का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। बम विशेषज्ञों के अनुसार नक्सली आइईडी या प्रेशर बम में सिरिंज का इस्तेमाल स्विच के रूप में करते हैं। इसके लिये सिरिंज के पीछे और आगे तार इस तरह जोड़ी जाती है कि सिरिंज पर दबाव पड़ते ही सर्किट जुड़ जाता है और बम फट जाता है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने सिरिंज आइईडी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इकतीस मई को हम लोगों ने सात आइईडी बरामद की। इनमें एक सिरिंज आइईडी भी शामिल है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे हम लोगों ने मौके पर ही विनिष्ट कर दिया है। जिले में सिरिंज आइईडी पहली बार मिली है। ये सामान्य सिरिंज हैं जो अस्पतालों में इस्तेमाल होती हैं। नक्सली इनका प्रयोग आइईडी बनाने में कर रहे हैं। नक्सली सिरिंज के जरिये प्रेशर बम का सर्किट कनेक्ट कर देते हैं। इसके बाद सिरिंज जमीन में खड़ा कर गाड़ दी जाती है। सामान्य सिरिंज समझकर कोई यदि इसे उठाता है या किसी का पैर पड़ता है, तो सर्किट जुड़ जाता है और आइईडी फट जाती है। बता दें कि पुलिस के पास सूचना है कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु, चमन, कांडे, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन आदि अपने दस्ते के सदस्यों के साथ कोल्हान क्षेत्र में विध्वंसक गतिविधि के लिए भ्रमणशील हैं। इस सूचना के आलोक में ग्यारह जनवरी दो हज़ार तेईस से ही पूरे क्षेत्र में चाईबासा पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ की साठ बटालियन, एक सौ चौहत्तर बटालियन , एक सौ सत्तानवे बटालियन, एक सौ सत्तावन बटालियन, एक सौ तिरानवे बटालियन सात बटालियन व छब्बीस बटालियन का एक संयुक्त अभियान लगातार चलाया जा रहा है। नक्सलियों ने अपने आप को बचाने के लिए टोंटो थाना अंतर्गत तुम्बाहाका एवं अंजदबेड़ा के सीमावर्ती क्षेत्र तथा गोइलकेरा थाना अंतर्गत ग्राम कुईड़ा एवं मारादिरी के सीमावर्ती क्षेत्र में काफी संख्या में आइईडी लगा रखी हैं। जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाये गये आइईडी की चपेट में आकर एक बच्चा, दो बुजुर्ग महिला समेत करीब दस ग्रामीणों को मौत पिछले पांच माह में हो चुकी है जबकि बीस से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें सीआरपीएफ के जवान भी शामिल हैं। |
श्रीनगर : पीएम नरेंद्र मोदी इस बार भी रोशनी का पर्व दिवाली (19 अक्टूबर, गुरुवार) को देश की रक्षा में तैनात जवानों संग मनाई। पीएम मोदी दीपोत्सव में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर में बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर पहुंचे। पीएम मोदी के साथ साथ आर्मी चीफ बिपिन रावत भी मौजूद थे। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।
साल 2014 में पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सियाचिन में सेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई थी। साल 2015 में डोगराई वॉर मेमोरियल पर उन्होंने जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया। वहीं, साल 2016 में पीएम मोदी ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी के जवानों संग दिवाली मनाई थी।
-रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी अंडमान-निकोबार में सैनिकों संग दिवाली मनाएंगी।
-सीतारमण गुरुवार से दो दिन के दौरे पर अंडमान-निकोबार पर हैं।
-वह विभिन्न समारोहों के दौरान जवानों के परिजन से बातचीत भी करेंगी।
| श्रीनगर : पीएम नरेंद्र मोदी इस बार भी रोशनी का पर्व दिवाली को देश की रक्षा में तैनात जवानों संग मनाई। पीएम मोदी दीपोत्सव में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर में बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर पहुंचे। पीएम मोदी के साथ साथ आर्मी चीफ बिपिन रावत भी मौजूद थे। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं। साल दो हज़ार चौदह में पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सियाचिन में सेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई थी। साल दो हज़ार पंद्रह में डोगराई वॉर मेमोरियल पर उन्होंने जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया। वहीं, साल दो हज़ार सोलह में पीएम मोदी ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी के जवानों संग दिवाली मनाई थी। -रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी अंडमान-निकोबार में सैनिकों संग दिवाली मनाएंगी। -सीतारमण गुरुवार से दो दिन के दौरे पर अंडमान-निकोबार पर हैं। -वह विभिन्न समारोहों के दौरान जवानों के परिजन से बातचीत भी करेंगी। |
अन्यद् गुह्याद् गुह्यतमं वदतः शृणु तन्मम । अस्ति त्र्तं महाराज ! केवलं सम्पदालयम् । कृते चाऽस्मिन् व्रते शीघ्रं भवद् राज्यागमो भवेत् ॥ १६॥ धर्मपुत्र उवाच
किं नाम व्रतमाहात्म्य मैश्वर्यं तस्य कीदृशम् ? । देवता तत्र का प्रोक्ता को विधि : पूजनं कथम् ? ।।१७।। कस्मिन् मासे च कैः पूर्वं व्रतमाचरितं प्रभो ! १ । इदानीमेव तत्कुर्यां यदि शीघ्रफलप्रदम् ।।१८।। इत्थं त्वयाऽतिदुःखार्ते कृपा चेन्मयि सानुजे । भवादृशानां महतां बान्धवो नाऽपरः क्वचित् ।।१९।। युधिष्ठिरेण स मुनिः स विश्वासमुदीरितः । प्रत्युवाच स्मरंश्चित्ते हनुमन्तं मुहुर्मुहुः ।।२०।।
निधिस्वरूप अत्यन्त गुप्त एक व्रत का मैं निरूपण करता हूँ, जिसे आप सावधान पुरस्सर सुनिए। इस व्रत को करने पर निश्चित ही नष्ट राज्य शीघ्र प्राप्त होता है ॥ १६॥
युधिष्ठिर ने कहा कि हे प्रभो ! इस व्रतका नाम, माहात्म्य, ऐश्वर्य, देवता एव विधि तथा पूजन किस प्रकार किया जाता है तथा किस मास में यह व्रत करना चाहिए, यह बताने की कृपा कीजिए, साथ-ही-साथ यह भी निरूपण कीजिए कि इस व्रत को पूर्व में किसने किया था ? यदि आपके कथनानुसार यह व्रत शीघ्र फलदायक है, तो क्या मैं इसी समय इस व्रत को करूँ ? कारण कि भाई सहित मैं अत्यन्त दुःखी हूँ, अतः आपकी मुझ पर विशेष अनुकम्पा है, और आप जैसा हितचिन्तक मेरा और कोई नहीं है। इस प्रकार युधिष्ठिरने अत्यन्त विश्वासपूर्वक भगवान् वेदव्यासजी से कहा । तत्पश्चात् अपने चित्त में श्री हनुमानजी | अन्यद् गुह्याद् गुह्यतमं वदतः शृणु तन्मम । अस्ति त्र्तं महाराज ! केवलं सम्पदालयम् । कृते चाऽस्मिन् व्रते शीघ्रं भवद् राज्यागमो भवेत् ॥ सोलह॥ धर्मपुत्र उवाच किं नाम व्रतमाहात्म्य मैश्वर्यं तस्य कीदृशम् ? । देवता तत्र का प्रोक्ता को विधि : पूजनं कथम् ? ।।सत्रह।। कस्मिन् मासे च कैः पूर्वं व्रतमाचरितं प्रभो ! एक । इदानीमेव तत्कुर्यां यदि शीघ्रफलप्रदम् ।।अट्ठारह।। इत्थं त्वयाऽतिदुःखार्ते कृपा चेन्मयि सानुजे । भवादृशानां महतां बान्धवो नाऽपरः क्वचित् ।।उन्नीस।। युधिष्ठिरेण स मुनिः स विश्वासमुदीरितः । प्रत्युवाच स्मरंश्चित्ते हनुमन्तं मुहुर्मुहुः ।।बीस।। निधिस्वरूप अत्यन्त गुप्त एक व्रत का मैं निरूपण करता हूँ, जिसे आप सावधान पुरस्सर सुनिए। इस व्रत को करने पर निश्चित ही नष्ट राज्य शीघ्र प्राप्त होता है ॥ सोलह॥ युधिष्ठिर ने कहा कि हे प्रभो ! इस व्रतका नाम, माहात्म्य, ऐश्वर्य, देवता एव विधि तथा पूजन किस प्रकार किया जाता है तथा किस मास में यह व्रत करना चाहिए, यह बताने की कृपा कीजिए, साथ-ही-साथ यह भी निरूपण कीजिए कि इस व्रत को पूर्व में किसने किया था ? यदि आपके कथनानुसार यह व्रत शीघ्र फलदायक है, तो क्या मैं इसी समय इस व्रत को करूँ ? कारण कि भाई सहित मैं अत्यन्त दुःखी हूँ, अतः आपकी मुझ पर विशेष अनुकम्पा है, और आप जैसा हितचिन्तक मेरा और कोई नहीं है। इस प्रकार युधिष्ठिरने अत्यन्त विश्वासपूर्वक भगवान् वेदव्यासजी से कहा । तत्पश्चात् अपने चित्त में श्री हनुमानजी |
प्रशसा और स्तुति प्रिय होती है, उतनी अन्य व्यक्ति की नहीं ।। इस कारण वह अन्य व्यक्ति की प्रशसा से प्रसन्न नहीं होता । लौकिक कार्य जिस व्यक्ति से कराना है, उसकी प्रशंसा या स्तुति करनी ही पड़ती है । यद्यपि आध्यात्मिक दृष्टि से उस व्यक्ति की यह क्रिया नितान्त गर्हित है, क्योंकि निन्दा और स्तुति दोनों ही उसके लिये समान होनो चाहिये। यह तो व्यक्ति की कमजोरी है, जो अपनी स्तुति और प्रशमा को सुनकर प्रसन्न होता है और अन्य की प्रशंसा को सुन कर असतुष्ट । जिसकी आत्मा में शक्ति उद्बुद्ध हो जाती है, उसको यह सकुचित दायरा नहीं रहता है। उसे गुणी मनुष्य क गुण प्रिय होते है, गुणो की प्रशंसा सुनकर उमे मन में हर्ष होता
। परन्तु राजा-महाराजाओ की प्रकृति यही होती है कि वे अपनी स्तुति और गुणगान से ही प्रसन्न होते हैं ।
शत्र राजाओ की प्रशसा और कीर्ति को सुनकर उनके मन में ईर्ष्या बुद्धि उत्पन्न होती है। वे उनके गुणों को सहन करने से असमर्थ होते है, इसी कारण उनमें अहर्निश परस्पर सघर्ष होता रहता है, वे लड़-झगड कर अपनी शक्ति को नष्ट करते हैं। राज्य के प्राप्त होने पर भी आत्मिक शान्ति नहीं मिल सकती है ।। इसके लिये उदार और विशाल हृदय बनना पडेगा। जो व्यक्ति चाहे वह राजा हो या रंक, संकीर्ण विचार का है, उसे रातदिन सघर्ष करना | प्रशसा और स्तुति प्रिय होती है, उतनी अन्य व्यक्ति की नहीं ।। इस कारण वह अन्य व्यक्ति की प्रशसा से प्रसन्न नहीं होता । लौकिक कार्य जिस व्यक्ति से कराना है, उसकी प्रशंसा या स्तुति करनी ही पड़ती है । यद्यपि आध्यात्मिक दृष्टि से उस व्यक्ति की यह क्रिया नितान्त गर्हित है, क्योंकि निन्दा और स्तुति दोनों ही उसके लिये समान होनो चाहिये। यह तो व्यक्ति की कमजोरी है, जो अपनी स्तुति और प्रशमा को सुनकर प्रसन्न होता है और अन्य की प्रशंसा को सुन कर असतुष्ट । जिसकी आत्मा में शक्ति उद्बुद्ध हो जाती है, उसको यह सकुचित दायरा नहीं रहता है। उसे गुणी मनुष्य क गुण प्रिय होते है, गुणो की प्रशंसा सुनकर उमे मन में हर्ष होता । परन्तु राजा-महाराजाओ की प्रकृति यही होती है कि वे अपनी स्तुति और गुणगान से ही प्रसन्न होते हैं । शत्र राजाओ की प्रशसा और कीर्ति को सुनकर उनके मन में ईर्ष्या बुद्धि उत्पन्न होती है। वे उनके गुणों को सहन करने से असमर्थ होते है, इसी कारण उनमें अहर्निश परस्पर सघर्ष होता रहता है, वे लड़-झगड कर अपनी शक्ति को नष्ट करते हैं। राज्य के प्राप्त होने पर भी आत्मिक शान्ति नहीं मिल सकती है ।। इसके लिये उदार और विशाल हृदय बनना पडेगा। जो व्यक्ति चाहे वह राजा हो या रंक, संकीर्ण विचार का है, उसे रातदिन सघर्ष करना |
इस बीच ब्लूमबर्ग डॉटइन ने आशंका जताई है कि इसकी दवा को विकसित करने में चूहों की कमी आड़े आ रही है. आपको बता दें कि किसी भी दवा के विकसित करने में जानवर बड़ी भूमिका निभाते हैं. इन पर वैज्ञानिक शुरुआती परीक्षण करते हैं. कोरोना को लेकर वैज्ञानिक चूहों पर दवा का परीक्षण करने में लगे है. आगे बढ़ने से पहले आपको ये भी बता दें कि अब तक इसकी दवा बनाने में वैज्ञानिक नाकाम रहे हैं.
वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसान और चूहों के अंदर कुछ जीन्स एक ही किस्म के होते हैं. कई बार जिस वायरस से इंसान की मौत तक हो सकती है उनका असर इन पर नहीं होता है. इसलिए वैज्ञानिक अक्सर ऐसे चूहों की तलाश करते हैं जिन्हें एसीई 2 नामक मानव जीन के साथ आनुवंशिक रूप से संशोधित किया गया हो. पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलने की वजह से यह काफी हद तक संभव है कि इस तरह के चूहे मिल जाएं. हालांकि पूरी दुनिया में इस तरह के चूहों की मौजूदगी को लेकर कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
चूहों की कमी के चलते विकसित नहीं हो पा रही है कोरोना की दवा,जानिए चूहों का कनेक्शन Reviewed by news himachali on March 23, 2020 Rating:
| इस बीच ब्लूमबर्ग डॉटइन ने आशंका जताई है कि इसकी दवा को विकसित करने में चूहों की कमी आड़े आ रही है. आपको बता दें कि किसी भी दवा के विकसित करने में जानवर बड़ी भूमिका निभाते हैं. इन पर वैज्ञानिक शुरुआती परीक्षण करते हैं. कोरोना को लेकर वैज्ञानिक चूहों पर दवा का परीक्षण करने में लगे है. आगे बढ़ने से पहले आपको ये भी बता दें कि अब तक इसकी दवा बनाने में वैज्ञानिक नाकाम रहे हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसान और चूहों के अंदर कुछ जीन्स एक ही किस्म के होते हैं. कई बार जिस वायरस से इंसान की मौत तक हो सकती है उनका असर इन पर नहीं होता है. इसलिए वैज्ञानिक अक्सर ऐसे चूहों की तलाश करते हैं जिन्हें एसीई दो नामक मानव जीन के साथ आनुवंशिक रूप से संशोधित किया गया हो. पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलने की वजह से यह काफी हद तक संभव है कि इस तरह के चूहे मिल जाएं. हालांकि पूरी दुनिया में इस तरह के चूहों की मौजूदगी को लेकर कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. चूहों की कमी के चलते विकसित नहीं हो पा रही है कोरोना की दवा,जानिए चूहों का कनेक्शन Reviewed by news himachali on March तेईस, दो हज़ार बीस Rating: |
रांची, 17 सितंबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को यहां प्रकृति के पर्व करमा पर लोगों को बधाई देते हुए कहा कि प्रकृति से मानव जीवन के गहरे जुड़ाव का पर्व करमा है ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में चलना ही नृत्य है और बोलना ही गान है । करमा पर्व इसी की पहचान है ।
इससे पहले करमा परब आयोजन समिति के द्वारा मुख्यमंत्री का परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया । मुख्यमंत्री ने करम राजा की पूजा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मांदर पर थाप दी तो छात्र छात्राओं के कदम थिरक रहे थे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| रांची, सत्रह सितंबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को यहां प्रकृति के पर्व करमा पर लोगों को बधाई देते हुए कहा कि प्रकृति से मानव जीवन के गहरे जुड़ाव का पर्व करमा है । मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में चलना ही नृत्य है और बोलना ही गान है । करमा पर्व इसी की पहचान है । इससे पहले करमा परब आयोजन समिति के द्वारा मुख्यमंत्री का परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया । मुख्यमंत्री ने करम राजा की पूजा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मांदर पर थाप दी तो छात्र छात्राओं के कदम थिरक रहे थे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
वैसेयहसाइनाकीलगातारदूसरीख़िताबीजीतहै. उन्होंनेपिछलेसप्ताहचेन्नईमेंइंडियनओपनग्रां प्रीख़िताबभी जीताथा. वो भारत की ऐसी पहली महिला बैटमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने लागातार दो सुपर सीरीज़ जीतीं हैं. साइनानेअपनीजीतपरकहा, "मुझेअपनेप्रदर्शनकेबारेमेंपूराविश्वासथा,निश्चितरूपसेयहएकशानदारजीतहै. "
बेटी की जीत के बाद साइना के पिता हरवीर सिंह ने भी अपनी ख़ुशी का इज़हार किया है. हरवीर सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि साइना निश्चित तौर पर ये ख़िताब जीतेगी और उनके लिए इस जीत के ख़ास मायने हैं. साइना के कोच पुलेला गोपी का कहना है कि सिंगापुर ओपन बैडमिंटन का ख़िताब हासिल करना एक बड़ी सफलता है.
उन्होंने याद दिलाया कि साइना ने इस टूर्नामेंट के सेमी फ़ाइनल में विश्व चैंपियन और चौथीं वरीयता प्राप्त लू लान को हरा कर ख़िताब के फ़ाइनल में प्रेवश किया था. पुलेला गोपी का कहना था कि इस जीत के साथ ही साइना बैटमिंटन की शिर्ष खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंच गई हैं. ग़ौरतलब है कि साइना ऑलंपिक में एकल क्वाटर र्फाइनल में पहुंचने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं.
| वैसेयहसाइनाकीलगातारदूसरीख़िताबीजीतहै. उन्होंनेपिछलेसप्ताहचेन्नईमेंइंडियनओपनग्रां प्रीख़िताबभी जीताथा. वो भारत की ऐसी पहली महिला बैटमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने लागातार दो सुपर सीरीज़ जीतीं हैं. साइनानेअपनीजीतपरकहा, "मुझेअपनेप्रदर्शनकेबारेमेंपूराविश्वासथा,निश्चितरूपसेयहएकशानदारजीतहै. " बेटी की जीत के बाद साइना के पिता हरवीर सिंह ने भी अपनी ख़ुशी का इज़हार किया है. हरवीर सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि साइना निश्चित तौर पर ये ख़िताब जीतेगी और उनके लिए इस जीत के ख़ास मायने हैं. साइना के कोच पुलेला गोपी का कहना है कि सिंगापुर ओपन बैडमिंटन का ख़िताब हासिल करना एक बड़ी सफलता है. उन्होंने याद दिलाया कि साइना ने इस टूर्नामेंट के सेमी फ़ाइनल में विश्व चैंपियन और चौथीं वरीयता प्राप्त लू लान को हरा कर ख़िताब के फ़ाइनल में प्रेवश किया था. पुलेला गोपी का कहना था कि इस जीत के साथ ही साइना बैटमिंटन की शिर्ष खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंच गई हैं. ग़ौरतलब है कि साइना ऑलंपिक में एकल क्वाटर र्फाइनल में पहुंचने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं. |
श्रज्ञानवासनासे अनेक पदार्थों के निर्णयका कथन -घट पर मकान आदिक अनेक पदार्थों का निर्णय करने वाला ज्ञान तो प्रज्ञानरूप है। ये नाना प्रकारके पदार्थ मयो विज्ञात होने लगते उसका कारण यह है कि प्रविद्याकी वासना लगी हुई है और उम हीके सकेतका स्मरण बनता है उससे विकल्प की प्रतीत होने लगती है और फिर यह अन्यकी अपेक्षा रखकर प्रतीतिमे प्राता है, यह वासविक वम्नुस्वरूप नहीं है । जर अन्य अस्तित्त्वकी अपेक्षा न दसकर अन्य पदार्थको कल्पनाएँ न बनाकर जो कुछ प्रतिभास हो वह है वस्तुका स्वरूप । और पदार्थमात्र उतना ही है । यह बहुत लम्बे समय तक याद रखना होगा कि जो ;छ कहा जा रहा है वह ब्रह्माद्वैतका स्वरूप कहा जा रहा है और इस ही दृष्टि से सुनना ।
सर्व विश्वको प्रतिभासान्त प्रविष्टका कथन - जो कुछ प्रतिभास हो रहा है वह सव प्रतिभास हो रहा है वह सब प्रतिभास स्वरूप जब कभी अपने आपका ज्ञानस्वरूप ज्ञानमे प्राता है तो वह ज्ञानमे भाता है तो वह ज्ञानस्वरूप ज्ञानमे ही तो प्रविष्ट है वाहर तो नहीं है। इस प्रकार जो जो कुछ भी प्रतिमासमे भा रहा है वह सब प्रतिभासके अन्तर न मे ही प्रविष्ट है, वाह्य भय कुछ नहीं है। जो कुछ दिख रहा है, प्रज्ञात हो रहा है यह सव मायारूप है । परमार्थवस्तुभूत तत्त्व तो एक ब्रह्म ही है । जो जो प्रतिभास होता है वह सब प्रतिभासके अन्दर ही प्रविष्ट है। जैसे प्रतिभास का खुदका स्वरूप प्रतिभासमे आता है तो वह प्रतिभासमे ही प्रविष्ट है । जो जो कुछ ज्ञानमे भ्राता है वह सब ज्ञानमे ही प्रविष्ट है। और यह सर्व चेतन प्रचेननरूप समग्रवस्तु प्रतिभासमे भा रहा है अत सव प्रतिभासान्त प्रवष्टि है, इस अनुमानसे भी श्रात्मा द्वैतकी सिद्धि होती है ।
विश्वकी प्रतिभासमात्रत्मताका अनुमान ब्रह्माद्वैत कहो, भात्माद्वैत कहो एक ही बात है। एक ब्रह्मके सिवाय इस लोकमे अन्य कुछ तत्त्व नहीं है। यहाँ यह अनुमान बनाया गया है कि सर्व पदार्थ ज्ञानमे ही गभित हैं, क्योकि ज्ञात होनेसे । यह हेतु प्रसिद्ध नहीं है क्योंकि सभी पदार्थोंका साक्षात् अथवा प्रसाक्षात् कुछ भी प्रतिभास न हो तो किसी सत्यके विकल्पकी व्यवहारकी उत्पत्ति ही न होगी और कहा भी न जा सकेगा । सब कुछ प्रथम ज्ञानमे आता है और वह ज्ञानरूप ही है वास्तवमे भेद कल्पना करके प्रज्ञानकी वासना के कारण सब कुछ भिन्न भिन्न समझमे आता है । ब्रह्माद्वैतके सिद्धान्तमे सीपीसी बात उन्होंने यह रखी है कि सब कुछ एक ब्रह्म है और उसकी ही ये नाना सृष्टिया हैं तो यह सब उसका ही बाग है, सब उसका ही प्रसार है वैभव है ये सब चीजें कुछ नही हैं ।
ब्रह्मा तवादके आगमवाक्योसे अभेद सृष्टिमूल ब्रह्मका समर्थन - इस बातको भागममे भी लिखा है ऐसा वे ब्रह्माद्वैतबादी ही अपना आगम रख रहे हैं -
मवं वै खल्विद ब्रह्म नेह नानास्ति किञ्चन । आराम तस्य पश्यन्ति न त पश्यति कश्चन
ऐसा हमारे आगममे लिखा है कि जगतमे जो कुछ है वह समस्त पदार्थ ब्रह्म है । ये नाना कुछ भी चीजे नही हैं और लोग जो कुछ निरखते हैं, उस एक ब्रह्म के आरामको, बागको फैलावको ही निरखते हैं, उस ब्रह्मको को नहीं देखता । औौर, भी बताया गया है । पुरुष एवंत सर्व यद्भुत यच्च भाव्य स एव हि सकललोकसर्गन्थितिप्रलयहेतु ।" यह सब कुछ जो अब तक हुम्रा जो आगे होगा वह सब एक यह ब्रह्म ही है, एक सर्वव्यापक या मा ही है और वह ही समस्त जगतकी सृष्टि स्थिति और प्रलयका कारणभूत है । जैसे कि मकडी जालकी सृष्टि रचती है तो वह जाल क्या मकडीसे जुदा है ? ल गोको ख़ुदा मालूम देती है उस जालकी व्यक्ति होनेपर यह लगने लगता है कि यह जाल पूरा गया है और देखो इसमे यह मक्डी फसी है वह जाल न्यारा है । मकडी न्यारी है और वह फसी है यो लंग देखते है पर वास्तविकता क्या है । वह जाल मकडीकी रचना है, मकडीसे ही उत्पन्न हुई है और वह मकडी उस जालके बीच रह रही है। वहीं दो चीज क्या है ? सब कुछ एक ही वरसु है । इसी तरह यह सारा जगत एक ब्रह्म ही है ब्रह्मसे ही यह सर्जित हुआ है और व्यक्तस्प हो जानेपर यह सब माया है और इस मायाके बीच यह ब्रह्म रह रहा है, सब कुछ वही एक ब्रह्म है, वही रचनाका, ठहरनेका और विनाशका कारण बन रहा है अथवा जैसे चन्द्रकान्तर्मारणसे जल नि वलता है तो उस जलकी रचनाका मूल हेतु तो चन्द्रकान्तर्माण है इसी तरह यह सव व्यक्त दृष्टिगोचर हो रहा है पर इस समस्त लोकका कारणभूत इसकी रचनाका साधन एक परम ब्रह्म ही है। अथवा जैसे वटका बीज प्रकुरोका कारणभूत है । वे भकुर क्या बीजसे न्यार हैं? वह एक बीजका ही फैलाव है । इसी प्रकार यहु सारा जगत ब्रह्मका ही फैलाव है । जितने भी जीव है जन्ममरण करने वाले समस्त प्राणियोका कारणभूम यह ब्रह्म ही है ।
ब्रह्मस्वरूपके ज्ञानकी प्रमाणता व कल्याणकारिताका कथन- इस ब्रह्मस्वरूपका ग्रहण करने वाला जो ज्ञान है वह तो प्रमाण है और सब पदार्थोंका ग्रहण करने वाले ये सव ज्ञान प्रमाण है क्योकि ये सारे पदार्थ हो मिथ्या है । तो मिथ्या पदार्थको सम्यक् रूपसे जाने वह ज्ञान मिथ्या है और प्रमाण है। अभेद ही एक तत्त्व है । भेद तो विकल्प और मूढतामें प्रकट हूं ता है । जो इस जगतको, जो इम समग्र लोकको भेदरूपसे देखा करते हैं उनकी तो निन्दा की गई है । 'मृत्यो स मृतुमाप्नोति य इह नानेव पश्यति । उपनिषदमे यह बताया है कि वह पुरुष मृत्युके द्वारा मनुको प्राप्त हंता है जो यहाँ कुछ भी नाना निरखता है, जो भेदरूपसे नाना रूपमे इस लेकको निरखता है, उसकी मृत्यु होती रहती है। इसका तात्पर्य यह है कि जो एक अभेद चैतन्यमात्र ब्रह्मस्वरूपको देखता है वह तो मृत्युसे बचता है, भ्रमर होता
प्रसङ्गमे थोडा ग्याद्वादीकी भी बात सुनिये । स्याद्वादी तय विभाग के कारण इस ही चीजको उनमे भी और अधिक ऊंचे ले जा सकते हैं। चैतन्यम्वरूप एक है, किन्तु स्याद्वाढवादी कहते हैं कि चैतन्यस्वरप एक हैमा एउपनाला देनेसे भी चैतन्यस्वरूप त्रिगड जाता है। वह तो केवल अनुभूतिका तत्त्व है, गनुभव करिये उसके बारेमें बह चैतन्यस्वरूप एक हे अथवा नाना है ऐसो जीभ मत हिलायो । उस ही चैतन्यस्वरूपका लक्ष्य करके एक ब्रह्माद्वैतका सिद्धान्त प्रकट हुआ है।
देशभेदसे पदार्थभेद करनेकी शवयनका प्रदर्शन प्रकरणमे यह कहा जा रहा है कि लोगोको जो ये पदार्थ भिन्न-मि नजर आते हैं, नाना नजर आते है क्या यह देशके दसे इन पदार्थोंका भेद है ? देशभेदो तो भेद करना मिथ्या है, क्यों कि जैसे एक प्रकाश है, स्वरूपसे ग्रभित है उस आकाशमे यह भेद करना कि यह इनके घरका आकाश है, यह मेरे घरका आकाश है, त ऐमा कह भले ही लो, किन्तु ऐसा श्रद्धान करणा मिथ्या है। आकाश तो स्वरूपसे भिन्न है फिर घर भी दिक ये भेदसे आकाशमे भेद न पड जायगा, क्योंकि भीटका भेद आकाशमें न प्रवेश करूंगा। इन प्रकार देशमा भेद प्रयों में प्रवेश नहीं कर सकता। देश न्यारे-न्यारे हैं। तो रहें देशके भेद अर्थमे भेद नहीं बनता। इसे यो समझिये थोडा जैनसिद्धान्तका एक दृष्टान्त लेकर । जिस जिस स्थानमे जीव हैं उसी उसी स्थानमे पुद्गल हैं। धर्म, अधर्म प्रकाश, काल ये ६ प्रकारके द्रव्य हैं । तो एक जगह इतने पदार्थ श्रा जानेसे क्या वे एक हो गए ? देशका अभेद होनेसे पदार्थ एक तो नही हो जाता। तो इसी कार देश का भेद होनेसे भी वे पदार्थ अनेक नही हुए।
देशभेदकी साधनामे विकल्पोका उत्थापन ब्रह्माद्वैतवादी कर रहे हैं - अच्छा बताओ यह देशभेद हो कैसे गया ? वया अन्य देशके भेदसे देशभेद हुआ या स्वत हुआ ? पूछा यह गया था कि ये पदार्थ जो नाना नजर आ रहे हैं ये भिन्न भिन्न क्यों नजर भा रहे हैं ? क्या देशके भेदसे भिन्न-भिन्न नजर या हे हैं ? तो देश भी जो भिन्न-भिन्न न र भा रहे हैं यह अमुक स्थान है, यह अमुक स्थान है, ये भी क्यो नजर थी रहे हैं ? इसमें कारण अन्य देशभेद मानोगे तब तो अनवस्या दोष प्रायगा। फिर वह देशमेद अन्य देशभेदसे हुआ, फिर वे भिन्न-भिन्न स्थान अन्य देशभेदसे हुए। और, यदि स्वत. ही मानते हो तो इन पदार्थोंको भिन्न-भिन्न समझाने के लिए देशभेद से हो वताना किन्तु सीधा ही भाव भेद माननेको वात न बोलना । भेदकी कल्पना करनेका प्रगाम ही क्यो करे ? इस कारण यह बात युक्त है कि ये जो पदार्थोंमे भेद नजर आ रहे हैं यह सब मिथ्या है। ये पदार्थ देशभेदके कारण भी मिन-भिन नही बन सकते हैं।
कालमेदसे पदार्थभेद न होनेका मन्तव्य-~-कालभेदसे भी मिन्न-मिन्न नही
बन सकते जैसे कालभेदसे लाग भिन्न-भिन्न कहा करते हैं कि यह चीज कल हुई अब यह चीज भाज नहीं है, यह कन हो जायगी इसप्रकार जो समयके भेदमे पदार्थों मे भेद माना है तो वह भी पूरा नहीं पड़ सकता, क्योकि कालका भेद ही प्रत्यक्षसे सिद्ध नही है । प्रत्यक्ष तो केवल सामने रहने वाली वस्तुमात्रको अस्तित्त्व मात्रको जानता है, इसमे कालभेद नही है। प्रत्यक्षसे गई गुजरी बात जाननेमे नही आया करती । प्रत्यक्ष विषय प्रतीत भविष्यकाल नही है अथवा उन कालोमे रहने वाले जो भिन्न भिन्न पदार्थ हैं उनका भेद प्रत्यक्षका विषय नहीं है, अतएव कालभेदसे भी हम इन पदार्थोको भिन्न-भिन्न नहीं मान सकते ।
आकारभेदसे भी पदार्थ भेदकी श्रमान्यता इसी तरह आकारभेदसे भी हम इन पदार्थोंको भिन्न-भिन्न नहीं कह सकते। आकारमेद पदार्थों का भेदक यह किसी भिन्न प्रमाणसे जाना जाता है ? अन्तर्वस्तु और बाह्यवस्तु इनके सिवाय और कुछ भी प्रतिभाममान नही होता है। न अन्य कोई प्रमाणका स्वरूप है । जो कुछ भी ज्ञानमे प्राता है वह सब एक प्रतिभासमय एक ब्रह्मका ही स्वरूप है, प्रतएव न ग्राकारभेदसे भी अर्थका नेद नजर आता है। जितने भी भिन्न-भिन्न पदार्थ दृट्टि - गोचर होते है वे सब मिथ्या है और मिथ्याका ज्ञान करना अप्रमारण है । एक परमात्मम्वरूपका ही ज्ञान करने वाला जो ज्ञान है वही प्रमाणभूत है, इन प्रकार ब्रह्माद्वैतवादी प्रपूर्व अर्थके ज्ञानकी प्रभारणताका खण्डन कर रहे हैं। इस अद्वैतवादके सिद्धान्तमे हरथमान, तर्क्यमारण समस्त पदार्थ मिथ्या है, मिथ्या ही नहीं, असत् हैं एक अभेद निरश नित्य अपरिणामी चात्मा है, ब्रह्म है। उस प्रभेद परमात्मत्वमात्र तत्त्वकी सिद्धि इसलिये एक दार्शनिक द्वारा की जा रही है कि उमे प्रमाण स्वरूपमें दिये गये "प्रपूर्वं अर्थ" इस विशेषणसे विरोध है, क्योंकि यह दार्शनिक सर्वथा अभेदवादी है ।
वस्तुस्वरूपकी निर्दोष व्यवस्था - वस्तु स्वरूपकी निर्दोष व्यवस्था तो यह है कि एक पदार्थ इतना हुआ करता है जितना कि वह अपनेमे अखण्ड हो । और, अखण्ड हं नेके प्रतिफलस्वरूप अनेमे अपने आपका परिणमन करता हो । अपनेसे बाहर कही परिणमन न हो, बाहरसे किसी ओोरसे अपनेमे परिणमन न आये केवल अपने आप जितने प्रदेशमे हैं उतनेको एक वस्तु कहते हैं इस दृष्टिसे जगतमें अनन्त वस्तुयें हैं। जिन सब वस्तुवोको हम जातिरूपमे विभाजित करें तो उन सबकी ६ जातियां बनती हैं - जीव, पुद्गल, धर्म, प्रघर्म, आकाश और काल । जिनमे चेतना पायी जाय, जो जानन देखनहार हो ऐसे जितने पदार्थ हैं वे सब जीव कहलाते हैं । जिनमे चेतना नहीं है, और रूप, रस, गध, स्पर्श है वे सब पुद्गल जातिमे गिने जाते हैं । ये दो जातिके पदार्थ तो व्यवहारमे बहुत प्राते हैं। इनके अतिरिक्त ४ जातियां ओर हैं एक धर्मद्रव्य - जो जीव और पुदेगलके चलनेमें महायक हो, निमित्त कारण हो वह एक ही है । एक अधर्म द्रव्य जो जीव और पुद्गलके ठहरनेमे निमित्त कारण
हो, एक ग्राकाश द्रव्य जिसमे पदार्थ रहा करे और एक कालद्रव्य जिसमे असख्यात कालद्रव्य हैं, वे लोकालोकके एक- एक प्रदेशपर अवस्थिन हैं और अपने प्रदेशपर जो भी पदार्थ स्थित हो उसके परिगमनके कारण है। इस तरह छ जातिके पदार्थ हैं।
प्रतिव्यक्तिगत भेदका प्रकाश - जीव और पुद्गलमे तो अनन्त व्यक्तिया स्पष्ट ही है अनन्त जीव है और अनन्त पुद्गल है। वस्तुस्वरूपकी व्यवस्था तो ऐसी है, किन्तु ह्माद्वैतवादी यहाँ यह कह रहे है कि ये भिन्न भिन्न पदार्थ मालूम हुए ना, यह सब अज्ञानसे प्रतीत होता है। वास्तवमे तो एक ब्रह्मरवरूप ही है । वह ब्रह्मस्वरूप निर्विकल्प हैं, एक सत्तामात्र है। जैसा कि कुछ भी जानते समयसे पहिले जो कुछ एक सामान्य प्रतिभास होता है उस रूप यह एक ब्रह्म है। इस सिद्धिके सिलसिले मे ब्रह्माद वाटी कह रहे है कि यदि कोई लोग जैन या अन्य कोई भेदवादी लोग यह कहे कि हमे भेद सही तो मालूम पड रहा है जैसे अपने त्राप जीवो के सम्बन्धमे ग्रहका प्रत्यय हुआ करना है मै हूँ। मैं तो हर प्रकार मैं मैं के ज्ञानमें भेद तो पडा हुआ है ।
तवादमे ग्रह प्रत्ययसे भी परमार्थ सतुके अलक्ष्यका प्रतिपादन इस प्रकार ब्रह्मा तवादी यह उत्तर दे रहै है कि यह बात सही नहीं है क्योकि बहुत से लोग जो अह अह कहकर अपना अलग अलग चरितत्त्व समझ रहे है उसमे शुद्ध बोध का तिभास नही है । जिसको ग्रह करके माना है वह स्वय भाया है। मैं सुखी हूँ । मैं दुखी हूँ । मैं मोटा हूँ, मैं दुबला हु श्रांदिक रूपमे जो हम लोग में मैं का अनुभव बरते है तो वह मुस आदिकका या शरीरका आलम्बन करके अनुभव करते है । जो
यद्रह्मस्वाप है उसका प्राश्रय करके उसका लक्ष्य लेकर लोग यह ग्रह नहीं बोलते तो यहा भेद तत्त्व सिद्ध किया जा रहा है । अहसे जो कुछ भी लोग रयाल करते हैं बह किसी अन्य पदार्थका स्याल करके यह बोला करते हैं, उसग्रहमे ब्रह्मतत्स्वपरमान्मस्वरूप नहीं पकड़ा जा रहा है। मैं सुखी हूँ तो सुरूपर लक्ष्य देकर सुस रूप जो परिग्रामने वाला है ३स तरह विकल्प और कल्पनाश्रोमे जो ग्मने वाला है वह में है तो ऐसा वह मैं मायारूप हू, शुद्ध ब्रह्म नहीं हू । बोव स्वरूपका आलम्बन करके उसका कोई अनुभव नहीं करता । वहा तो निविकरपता आती है। जैसे कि जैन लोग भी तो मिथ्यात्वके उद्यमे जीव जिस जिसको अई ग्रह से ग्रहण करते हैं ने सब भी तो पर्याय है, मिथ्या हैं। तो यहाँ ब्रह्मावादमे जिम- जिस को जुदा-जुदा व्यक्तिरूपमे मैं-मैं अनुभव करते है वह सब भेद है, मिथ्या है।
प्राकारभेदसे भी पदार्थोके भेदके प्रभावका कथन- यहाँ ब्रह्मवादी वादियोमे पथरहे हैं कि हम क्या प्राकारभेदसे पदार्थोम भेद मालूम करते हो तो आकार से जाना जाता है या म्वत जाना जाना है ? पढ़ने जाना जाता है इस विषयमे नहां तक ये अापत्तियाँ दी । यदि यह कहा कि ये पदार्थ सभीके सभी तो अपनः- गपनादा-जुदा प्राकार लिए हुए है स्त्रय अपने को जानते रहते हैं
यदि ऐसा कहो तो ब्रह्मवादी- कह रहे हैं कि इस तरहसे तो समस्त पदार्थ अपने ही प्रकाशमे नियत है यह आपत्ति आायगी । और ऐसा होनेपर तो जिसे हम चस्मा कह कह रहे है, उसके स्वरूपने अपने आकार और स्वरूपको जाना । जिसे मैं कह रहा है उसने स्वयं अपने आपके आकारको जाना। तब कोई भी पदार्थ किसी दूसरेको जान तो न सका । हम ग्राप परपदार्थों के सम्बन्धमे कुछ निर्णय चाह रहे है और हम केवल अपने तक ही जान पाते है तो फिर निर्णय कैसे बनेगा, आकारभेद कैसे सिद्ध होगा ? यो देशभेद कालभेदसे और आकारभेदसे भी पदार्थोंमे भेद सिद्ध नहीं होता । एक प्रभेद ही तत्त्व है ।
समयानुरूप तौर तके कथनका व्यवहार - देखये । आज कल इस सिद्धान्तका प्रचार तो बहुत है, पर कुछ ऐसे अटपटे ढङ्गमे है कि वही पुरुष पहिले बडा भेद सिद्ध कर रहा औौर थोडी देर बादमे उसका दिमाग बदल जाता है तो अभेदको सिद्ध करने लगता, इस तरह भी परम्परासे और रूढिसे अद्वैतके मानने वाले प्राण भी है। जैसे अभी चर्चा कर रहे हो कि एक ईश्वरने इन सब जीवोको बनाया, ये राव न्यारे-न्यारे है, पुद्गरा न्यारे प्यारे है । ये सव पदार्थ सत्त्व गुण, रजोगुण, तमोगुणकर सहित है । सबकी जुदी-जुदी खूब सत्ता मानने जैसी बात कहते है । थोडी ही देरमे खबर मा जाय कि पडिताई तो इसमे और ज्यादा समझी जाती है कि एक ब्रह्म है अन्य कुछ नही है ऐसा कहना चाहिए तो इस वुद्धिमे प्रेरित होकर फिर यो वालने लगते है। बहुत बडी पडिताई बुद्धिमानीकी वात मानी जाती है। तो इस कथन मे मान ली जाती है। जैसे कि अभी कहा है सब कुछ एक ही अभेदस्वरूप ब्रह्म हे और कहते ही है सव । सव कुछ एक परमात्मतत्त्व है, मन्य तो सव उसकी माया है। इस अभेदवादको यहाँ सिद्ध किया जा रहा है।
अविद्यारूप शास्त्र विद्याप्राप्तिके हेतुपर प्राशङ्का भैया । जितने भी कथन इस प्रसङ्गमे अभी पहे जा रहे है वे सब एक ब्रह्माद्वैतवादीके है । वे दूसरोको श्रो एक शङ्का उठाते हैं कि यदि जैन आदिक भेद मानने वाले दार्शनिक ऐसा कहे कि तुम्हारा यह सर्व विश्व एकस्वरूप ब्रह्म, यदि विद्यास्वभावरूप है ज्ञानरूप, बोध स्वभाव है और वही है सब यह ससारमे वोधस्वरूप । ब्रह्मके अतिरिक्त तो कुछ ससार नाना नहीं तो जब विद्यारूप ही हैं तो फिर इन जीवोको मोक्षके लिए शास्त्रोमे प्रवृत्ति क्यो करायी जाती है ? जब हम सब ज्ञानरूप ही हैं, बोधरप हो है. ब्रह्म ही हैं तो फिर शास्त्रोकी प्रवृत्ति व्यर्थ बन जायगी। क्योकि शास्त्रोकी प्रवृत्ति तो तव करे जव अविद्यासे हटने और विद्यामे लगनेका स्वभाव पडा हो या हम लोगोको जरूरत हो, हम गब तो विद्यारूप है और शास्त्र हैं अविद्यारूप और अविद्याम्प शास्त्र विद्यारप प्रो कैसे प्राप्त करा दें? एक ब्रह्म है उसके प्रतिरिक्त जो कुछ है वह सव प्रज्ञान है मायारूप है, शास्त्र भी मायारप हो गये और सारे उपदेश भी मायारूप है, समस्त
व्यवहार माया है । तो शास्त्रोकी प्रवृत्ति फिर क्यो की जाय ? कही अविद्यासे विद्या भी मिला करती है ?
अद्वैतवादमे शास्त्रकी अव्यर्थताका समाधान - इस प्रकार ब्रह्माद्वैतवादी उत्तर देते हैं कि विद्यास्वभाव होनेपर भो शास्त्रादिककी व्यर्थता नही है । शास्त्र विद्यामे नही लगाते है, किन्तु जितना अज्ञान बसा हुआ है उसका परिहार कराते हैं । यदि यह मैं विद्यास्वभाव न होता तो अनेक प्रयत्न करनेपर भी अविद्याका परिहार नही हो सकता था । हूँ में विद्यास्वभाव लेकिन शास्त्र की प्रवृत्ति हमे यो करनी पड़ती कि भविद्याकी प्रवृत्तियोका, प्रज्ञानके परिणमनोका परिहार हो जाय। श्रज्ञान हटानेके लिए हम शास्त्र पढते हैं, ज्ञान बनाने के लिए हम शास्त्र नही पढते । ऐसा ब्रह्माद्वैतवादी कह रहे हैं क्योंकि यदि यह कह बैठें कि हम ज्ञान पैदा करनेके लिए शास्त्र पढते है तो इसका अर्थ यह हो जायगा कि हम ज्ञानरूप नहीं हैं। शास्त्रोका हम ज्ञान बनाते है तो शास्त्रोकी प्रवृत्ति ज्ञानविकासमे कारण नही है किन्तु प्रज्ञानके हटानेमे कारण है, क्यो कि अविद्या ब्रह्मसे अलग वस्तिवमे कुछ नही है। अविद्याकी मायाकी सत्ता नही हुआ करती इस कारण यह अविद्या दूर हो जाती है। यदि वास्तवमे श्रविद्याका सद्भाव मान लें जैसा कि ब्रह्मस्वरूप है, परमात्मस्वरूप है उसी तरह माया भी कुछ होती है यो यदि सत्ता मान लें तो फिर उसे कभी हटाया हो न जा सकेगा । किसी भी सत्ता का प्रभाव कभी नहीं हुआ करता । इस कारण शास्त्रोकी प्रवृत्ति अविद्याके हटानेके लिए है और ऐसा तो सभी दार्शनिक मानते है कि मुमुक्षुवोका जितना भी प्रयत्न है, निर्वारण प्राप्त करने वालोका जितना भी प्रयत्न है वह सब प्रविद्याके उच्छेदके लिए है । मोह रागद्वेष प्रज्ञान जो कि अतात्त्विक है उनके विनाशके लिए है।
यह तवादका प्रयोजन - भैया । बहुत कुछ अशो तक ब्रह्माद्वैतवादमे हम अपना दिमाग लगाये, उसकी वातको मानकर चलें तो तत्काल फायदा तो जरूर होता है कि बहुत से विकल्प हमारे हटने लगते है। जब हम जानें कि यह मायारूप है। वास्तविक नही है, किन्तु एक अकल्पनीय ब्रह्मस्वरूप है वह ही सबका मूल है, इसतरह जब हम एक अकल्पनीय ग्रह्मस्वरूपपर दृष्टि देते हैं तो ये सब विकल्प हमारे शान्तसे होने लगते है, लेकिन ऐसा उपयोग बदल लेना, इस तरहका शान्त हो लेना यह देर तक नहीं टिक पाता है तथा अन्ततो गत्वा आत्ममग्न नही कर सकता । यो तो जैसे किसी लडकेको हुचकी आ रही हो और उसको कोई अचम्भे वाली वात कोई सुना दे या उसके हो लिए कोई ऐसा सुना दे कि तुम उसके घरमे क्यो सूनेमे गये थे, तुम नहीं क्यो चोरी करने गए थे। तो उसका कुछ उपयोग बदल जाता है और उसकी हिचकी थोडी देरको बन्द हो जाती है । औौर, ऐसा लोग करते भी हैं। कुछ देर बादमे फिर वह हिचकी चलने लगती है, वह तो रोग ही है। इसीतरह समस्त 'सतृपदार्थों का प्रभाव मान लेनेपर और मात्र एक कोई ब्रह्म मान लेनेपर कुछ कल्पनाएँ तो शान्त हो
जाती है कुछ अतिव्यक्त मोह रागद्वेषको परिणतिया मिट तो जाती है पर वहा फ्टि यो नही बैठ पाता है कि ऐसा सोचनेमे स चने वालेने स्वमे अपने ज्ञानको नही पाया । यदि उस ही ब्रह्मम्वरूपको केवल एक अपने आपमे इस स्वभावको सोचता कि मैं तो चैतन्यमान हू और जो कुछ भी यहाँ परिणमन बनता है वह सब मायारूप है इस प्रकार अपने आपकी इन विभाव सृष्टियोको मायारूप समझकर उनसे अपनेको हटाकर अपने एक ज्ञानम्वभावमे चित्त देता तो सोचने वाला भी यही है और अपने आपके भूतकी बात सोची तो यह इसमे मग्न हो जाता। हम उस स्वरूपको समझने के लिए अपनेसे मिन्न अन्यत्र दृष्टि लगायें कि इन सबका उपादानभूत कोई एक ब्रह्म है तो अन्यत्र दृष्टि लगानेसे अपने आपमे स्वरूपमग्नता नही हो पाती है इतना अन्तर है ।
अनादि विद्याके उच्छेदका तर्क - इस प्रसङ्गमे ब्रह्माद्वैतसे कोई प्रश्न कर रहा है कि अविद्या भी तो अनादिकाल से चली आयी है। जैसे ब्रह्मस्वरूप अनादि है तो यह विद्या भी अनादि है और प्रनादिमे चली आयी हुई श्रविद्याका उच्छेद कैसे हो सकता है। इसपर ब्रह्माद्वैतवादने उत्तर दिया कि देखो तुम्हारे यहाँ भी तो प्रागभाव अनादिसे चला आया है, उसका भी तो विनाश होता है। कैमी सुन्दर युक्तिसे उत्तर दे रहे है। प्रागभावका अर्थ है जो चीज बनती है उससे पहिले वह चीज नही रहती ऐसा तो सर्वत्र है ही। जैसे आज यह घडा वन रहा है तो इस घडेका ग्राजमे पहिले अनन्तराल तक प्रभाव था । तो प्रागभाव का समय है अनन्तकात अर्थात् प्रागभाव अनादिसे है। सो वहाँ भी जब घडा बन गया तो प्रागभाव मिट गया । जो इस समय रोटी बनायी जा रही हो उस रोटीका पहिले प्रभाव है कि नहीं ? तो कब तक प्रभाव रहा ? आज जो ८ बज रोटी वन रही है उसका प्रभाव ७ बजे है कि नही ? ७ बजे रोटी तो न थी। इसोप्रकार १० वर्ष पहिले, सैकडोसागर पहिले, और अनन्तकाल पहिले कभी भी इस रोटीका सद्भाव न था, अब बन रही है रोटी । तो रोटीका प्रागभाव रहा अनन्तकाल तक । रोटी बननेपर अनादिसे चला हुआ रोटीका प्रागभाव मिट जाता ना। इस तरह अनादिकालसे चली आयी हुई अविद्याका भी विनाश हो जाता है, और जैसे यो समझिये कि घडा बना तो घडेसे पहिले घटेका प्रागभाव था तो उस प्रागभावका नाम रख दीजिए अघट घट तो हुआ एक मिनटमे और अघट रहा अनन्तकाल तक । तो उस घटका सद्भाव अलगमे क्या है ? घटका प्रागभाव ही अघट है इसीतरह अविद्याका सद्भाव और कुछ नही है, विद्याका प्रागभाव ही अविद्या 4। जब तत्त्वज्ञानरूप विद्याको उत्पत्ति होती है तो अविद्या अपने आप नष्ट हो जाती है जैसे कि घडा बननेहर घडेका प्रभाव अपने ग्राप दूर हो जाता है।
ब्रह्म और अविद्यामें भिन्नाभिन्नादि विचार - अद्वैतवादी बह रहे हैं कि भैरवाद यह पूछा था कि भविद्या प्रयुसे अभिन्न है कि भिन्न है, सो भिन्न प्रभिन्न के वस्तुमे करने है । प्रविद्या तो श्रवस्तु है, इसमे भिन्न प्रकिा विकल्प
पवित्रा ये विकल्प नहीं उठाये जा सकते, यह सब कुछ प्रविधा माया है, मिथ्याभिाग है। जैन मिद्धान्नमे भी नो माने शरीरको गायारूप बताते, प्रौराधिक नीज बताते, निमित्त और उपादानपर दृटि हूँ तो न जीव की यह चीज है न पुद्गलकी यह नीज है । जीव और पुद्गलके परकार निमित्त नैमितिक भावने गा मारा नगार दिन रहा है। नो हम इन सबको किनी एककी बाव नही कह नवने ।
भैया । जैन गिद्धान्नमे तो नय विभाग है। द्रव्य गुग्ण पर्यायी व्यवस्था है किन्तु मद्वैतवादीसिद्धान्तमे द्रव्य गुरण पर्यायको व्यवस्था नहीं है। जो ब्रह्म है वह सवैय परिणाम है । का यह सब कुछ परिगमन नहीं है, किन्तु मायाका है, प्रकृतिका है, यह गव परिणमन झूठ है, इन सनकी मत्ता मिथ्या है, एक ब्रह्मरून है इस कार अपरिणामी नित्य निरक्ष एक स्वभावी ब्रह्मतत्त्वकी सिद्धि की जा रही है ।
शास्त्रमननादिकी त्रविद्यामे स्वपर विद्या के प्रशमनके सामर्थ्यका मन्तव्य - अद्वैतवादोसे ध्रुव भेदवादी पूछ रहे है कि हम जो मात्माकी बात सुनते हैं, थात्मतत्त्वका मनन करते है, भात्मतत्त्वका ध्यान करते है यह तो ब्रह्मसे भित्र है ना ? हाँ ग्रहह्मसे भिन्न है । तो यह अविद्यारूप हुआ ना । आत्माकी कथनी सुनना, चर्चा करना, आत्मा का मनन करना, ध्यान करना जब ये सब अविद्या है तो उन प्रविद्यास्वभावी प्रयत्नोसे विद्याकी प्राप्ति कैसे बन सकेगी ? ब्रह्माहतवादी इसपर उत्तर देते है और कितने तर्कके साथ उत्तर देते हैं । आप यह समझगे कि ठीक ही तो कह रहे ह । उनका उत्तर है कि जैसे किसी पानीमे गदापन है, कीचड भरा हुआ है, धूलका विशेष सम्बन्ध है ऐसे उस क्लुषित जलमे जब कोई निर्मली, चूर्ण वगैरह डालते हैं जो कि उस पानीको साफ करती है तो वहाँ वह चूर्ण उस धूलको भी नीचे दवा देता है और वह पूर्ण खुद भी नीचे दब जाता है। तो जो गन्दे जलके उस कीचको दबाने के लिए एक दवाई डालते है तो उस दवाईका यह काम है कि वूलको नीचे दवाकर खुद भी नीचे दब जाय । इसी तरह ये आत्माके ध्यान मनन आदिक तो जरूर है किन्तु इस अविद्या का इतना काम है कि भिन्न पदार्थ निरखनेको अविद्याको दबाकर खुद दब जाय ।
स्वपरप्रणामनपर विपका एक और उदाहरण और भी देखिये किसी विपको दूर करनेके लिए विप डालते है, विषैली चीजफा विष दूर करनेके लिए विष प्रयोग करते है तो उस विषका यह काम है कि दूसरे विषको शान्त कर दे और खुद भी शान्त हो जाय । तो जैसे विप खुद शान्त होकर दूसरे विषको शान्त कर देता है इसीप्रकार यह अविद्या भी शानध्यान स्वाध्याय ये सब मेदभावको शान्त कराकर खुद शान्त हो जाती है। ऐसा इस अविद्यामे प्रभाव है । यह अविद्या अपने आपमे उत्पन्न हुआ जो भाव है, अनेक प्रकारके जो दुराग्रह है, यह चौकी है, यह कमण्डल है, यह
पुरुष है, यह पक्षी है आदिक जो भेद डालने के आग्रह है उनको भी यह स्वाध्यायरूपी अविद्या शान्त कर देती है और यह अविद्या स्वय शान्त हो जाती है। और यह जीव यह ब्रह्म अपने स्वरूपमे अवस्थित हो जाता है । तो अविद्याका यह काम है । यह शका नही कर सकते कि फिर शास्त्र पढना व्यर्थ है। शास्त्र पढनेका जो ज्ञान है इसे भी ब्रह्म वादने ज्ञान माना है । यह शास्त्र पढनेका श्रज्ञान इन भिन्न भिन्न चीजोको समझानेका जो अज्ञान लगा है इस प्रज्ञानको नष्ट कर देता है और खुद नष्ट हो जाता है।
स्वपरविकल्पप्रशामनपर एक और दृष्टान्त - जैसे जैन सिद्धान्तका एक दृष्टान्त लो- दो नय होते ह-निश्चयनय और व्यवहारनय व्यवहारनय तो अन्य वस्तुमे अन्य कस्तुका सम्बन्ध जोडना कहलाता है और निश्चयनयमे एक ही वस्तुमे एक ही वस्तुके सहजस्वरूपको देखनेका काम बना रहता है । अव विकल्प की दृष्टिसे देखिये तो ब्यवहारनय भी विकल्प है और निश्चयनय भी विकल्प है। जब ध्यानी पुरुष अपने शुद्ध आत्मतत्त्वमे मग्न होना चाहता है तो भले ही व्यवहारनय पहिले साधक रहे लेकिन उस निर्विकल्प दशा से पहिले समयपर तो निश्चयनय साधक बनता है। वहाँ यदि कोई प्रश्न कर बैठे कि निश्चयनय भी विकल्प है, वह विकल्प अविकल्प दशाका कारण कैसे बन जाता है ? तो जैसे वहा यही उत्तर दिया जा सकता है कि उस शुद्ध निश्चयनयके विकल्पमे यह प्रभाव है कि बड़े बड़े व्यवहारनयके विकल्पोको समाप्त करते हुए खुद भी समाप्त हो जाता है और वहा निर्विकल्प दशा जगती है । इसीतरह हमारा ब्रह्माद्वैतवाद है । उस बह्मस्वरूपमे मग्न होनेके लिए जो शास्त्र अव्ययन आदिक करते हैं, आत्मध्यान आत्ममननका उपाय बनता है, यद्यपि ये उपाय भी सब मिटते हैं, विद्यास्वरूप तो एक अकल्पनीय अनिर्वचनीय स्वरूप है लेकिन यह आत्मध्यान आदिककी प्रविद्या भी इन बडी बडी अविद्यावोसे, भिन्न-भिन्न चीज मानने हठको, भज्ञानको समाप्त करते हुए खुद भी समाप्त हो जाता है । यो शास्त्रकी प्रवृत्ति व्यर्थ नही है और फिर भेदको बताने वाली जो यह अविद्या है इसका जब बिनाश हो जाता है तो एकस्वरूप स्वय अवस्थित हो जाता है ।
अभेदब्रह्मकी सिद्धिमे अभेद आकाशका उदाहरण - जैसे ५० घडे रखे है, जब हम भेददृष्टि रखते हैं यह घडा है, यह घडा है तो हमे वहीं आकाशका भी भेद नजर आता है, इस घडेका आकाश इस घडेमे है, इस घडेका प्रकाश इस घडेमे है । - यदि हम घडेके भेदको बताने वाली श्रविद्याको समाप्त कर दें तब एक शुद्ध प्रकाश रहता है इसीतरह जब हम इस भेदको दूर कर दे तो एक दृष्टि रहती है। इसप्रकार ब्रह्मवाद प्रभेदकी सिद्ध कर रहा है। एक शुद्ध ब्रह्म ही तत्त्व है । जैसे आकाश एक है, अखण्ड है, नित्य है, भपरिणामी है, इसी प्रकार ब्रह्म (आत्मा) एक है, अखण्ड है, नित्य है, अपरिणामी है इस परमोत्मरूपका ग्राहक ज्ञान ही प्रमाण है, इसके अतिरिक्त अन्य कुछ नही है, प्रत अपूर्व अयका निश्चय कराने वाला ज्ञान प्रमाण है यह कथन युक्त नहीं है।
समारोपित भेदसे लोकव्यवहारका अद्वैतवादमे कथन - लोकमे पदार्थं हैं तो अनन्तानन्त, किन्तु उनकी जातिका भ। भेद न करके चोर उन सब पदार्थों के एक सामान्य सत्त्वस्वरूपका ही आग्रह करके अद्वैतवादी कह रहे है कि ये जितने भी पदार्थ दिखते है ये वास्तव में कुछ नही है, एक यद्वैतव्रह्म ही तत्त्व है । इसपर यह शका की जा सकती है कि अनंत मानने पर फिर सुख दुख बन्ध मोक्ष आदिक कुछ भी भेदकी व्यवस्था न रह सकेगी क्योकि ये सब भेदमे हैं। इसके उत्तर में श्रद्धं तवादी कहते हैं कि कल्पितभेदसे भी सुग्ब दुख वन्ध मोक्ष आदिकके भेदकी व्यवस्था बन सकती है। जैसे भदवादी भी यह कहा करते हैं कि मेरे शिरमे पोडा है, मेरे पैरमे वेदना है । क्या शिरमे पीडा होती है ? अथवा पैरमे वेदना होती है। वेदना तो जीव मे होती है । शिर और पैर तो भौतिक चीज हैं फिर भी जीवमे होने वाली वेदनाको उपचारसे अपनी कल्पनाके अनुसार पैर और शिरमे कह देते है तो कलिनतभेदसे भी है भेद हो जाता है। इसी प्रकार ब्रह्माद्वैतवादमे भी यह बताया गया है कि जितने लोक मे ये भेद देखे जा रहे हैं, भिन्न-भिन्न पदार्थ माने जा रहे है, ये सब भेदकी कल्पनासे होते हैं, वास्तविक कुछ भी भेद नही है ।
लोकव्यवहारमे समारोपित भेदका शङ्कापरिहारपूर्वक समर्थन यदि इसके उत्तरमे जैन आदिक यह कहे कि पैर श्रादिकमे पीडा तो नहीं है पर वेदना का अनिकरण जरूर है अर्थात् पर शिरमें कुछ रोग हो जानेके निमित्तसे प्रात्मामे पीढाका अनुभव होता है, तो कुछ तो सम्बन्ध है इस कारण उसके भेदमे भेदकी व्यव स्था बन सकती है । इसके उत्तरमे अद्व तवादी कहते हैं कि यह भी युक्त नहीं है । क्योकि शिर और पैर तो कुछ तत्त्व ही नहीं हैं, ये क्या बेदनाका कुछ अनुभव कर लेंगे ? यदि शिर पर अनुभव करलें तो यह नास्तिक मत हो गया कि जीव कुछ नही है जो यह शरीर है, ढाँचा है यही है जीव और यही जानना है, यही भोगता है । इस शरीरके अतिरिक्त जीव कुछ नहीं है यही प्रसङ्ग भ्रा जायगा । तो इस तरह ब्रह्मा तवादी कहते जा रहे हैं कि एकत्व ही वास्तवमे सिद्ध है । प्रत्यक्षसे, धनुमानसे और आगमसे ब्रह्मवाद ही तत्त्व सिद्ध होता है, भिन्न-भिन्न पदार्थ कोई तत्त्व नही है, ऐसा ब्रह्माद्वंतवादीने इसलिए यह प्रकरण रखा कि प्रमाणका स्वरूप कहा जा रहा था कि जो रय और अपूर्व अर्थका निर्णय कराये वह ज्ञान प्रमाण है, तो अद्वैतवाद दर्शनका कथन है कि अर्थ तो अपूर्व और भिन्न-भिन्न कुछ होता ही नहीं । केवल एक ब्रह्म ही सत् है और ये सब पदार्थ मिथ्या है तब इसका बान करना कैसे सत्य कहला येगा ? इस प्रकार अतवादने अपना पक्ष रखा।
एक ब्रह्मसाधक प्रमाणके विकल्पोकी मीमासा - अब अद्वैत तत्त्वके सम्वन्धमे भाचार्यदेव कहते हैं कि सारा विश्व एक है, अभेद है ऐसा अभेद जो सिद्ध कर रहे हो, क्या इस वजहसे कर रहे हो कि अभेदको सिद्ध करने वाला कोई प्रमाण है,
अथवा इस कारण कह रहे हो कि भेदको सिद्ध करने वाला कोई प्रमाण ही नही है भेदमे वाघा डालने वाला कोई प्रमारण है । दोनो बातोसे भी अभेदकी सिद्धि की नही जा सकती है, जिसमे यह तो कहना युक्त है नही कि भेदकी सिद्धि प्रमाणसे नही है इस कारण एक अभेद ही ब्रह्म है। यह बात तो तुम्हारी इस कारण प्रयुक्त है क्योकि प्रत्यक्ष आदिक भेदके अनुकूल ही पड रहे हैं । हम आखसे या इन्द्रियसे जो कुछ भी जानते है प्रत्यक्षसे स्पष्ट यह सब जुदा जुदा मालुम पड रहा है और फिर भेद माने बिना तो यह भी व्यवस्था नहीं कर सकते कि कौन प्रमाण होता है कौन अप्रभारण होता है। जैसे अभेद प्रमाण है और भेद अप्रमाण है यह कहा तो कुछ प्रमाण होना कुछ प्रमारण होना ये दो चीजे है क्या ? यदि कहो कि ये दो चीजे हैं तो प्रभेद कहाँ रहा, अद्वैत कहाँ रहा ? फिर दो बातें हो गई । यदि कहो कि नही दो बात नही है तो प्रमाणकी अप्रमाण बताये विना सिद्ध नही और अप्रमाणका प्रमाण बताये बिना सिद्धि नही । तो भेद माने बिना तो हम क ई भी मनुष्य अपना सिद्धान्त रख ही नही 'सकते । आखिर यह तो समझना ही होगा कि मेरी बात प्रमारणभूत है इसके अतिरिक्त मन्य प्रमाण है । भेद, अपेक्षा, प्रतिपक्ष धर्म ये तो प्रत्येक तत्त्वके साथ जुड़े हुए है। जहाँ मु हसे "यह है" इतना भी निकला कि उसमे ही यह जुड़ा हुआ है कि यह और कुछ चीज नही है । तो है और नहीं, इनका भेद तो प्रत्येक कथनमे जुडा ही रहता है । कोई कहे कि मेरी बात सच है इसका क्या यह अर्थ नही है कि मेरी बात झूठ नही है ? तो सत्य असत्य, भेद अभेद, सुख दु.ख वष मोक्ष सब कुछ है, द्वैतका निषेध नही कर सकते ।
सर्वाभेदसाधक प्रमाणका अभाव - - यदि कहो कि अभेदका साधक प्रमाण मौजूद है इस कारण हम अभेद सिद्ध करते है तो पहिली बात तो यह है कि जो सिद्ध करना चाहे और कोई प्रमाण देकर सिद्ध करना चाहे तो जो प्रमाण देंगे वे तो कहलायेगे साधक और जिस वातको सिद्ध करेंगे वह कहलायगा साध्य । यो साध्य और साधकका भेद तो मानना ही पडेगा । साध्य साधक भेद भावके बिना निर्णय ही सम्भव नही फिर अभेद साधक प्रमाणके समान लोगे ? यदि है अमेद साधक प्रमाण तो अभेद हुआ साध्य और प्रमाण हुआ साधक । तो यो अभेद भा गया । भेद के बिना तो कुछ सिद्ध नही किया जा सकता ।
अभेदके एक व्यक्तिगतत्व व अनेक व्यक्तिगतत्वका विकल्प-आवान्तरसत्तावादी कह रहे हैं कि जो तुमने यह कहा था कि सर्वप्रथम निर्विकल्प प्रत्यक्षमे एकत्व ही ज्ञात होता है कहा था ना, कि जब नेत्र खुले, तो खुलनेक साथ ही सर्वप्रथम जब कि कुछ व्यक्तिगत सत्ता विदित होती है उससे भी पहिले कुछ प्रकाश सा विदित होता है वह परमार्थ सत् है, ब्रह्म है ऐसा जो कहा है तो हमे वतलावी कि वहा जो एकत्व विदित होता है वह एक व्यक्तिय रहने वाला विदित होता है या अनेक व्य३१२ ]
क्तियोंमे रहनेवाला एकत्व ज्ञात होता है या व्यक्तिमात्रमे रहने वाला एकत्व ज्ञात होता है। यहा प्रश्न यह किया गया है कि जो कोई यह मानता है कि जब हम कुछ भी जानते हैं तो उस जाननेने सर्वप्रथम अभेद एक निर्विकल्प प्रकाश ज्ञात होता है । तो वह एकत्व वह प्रकाश जिसे तुमने एक माना है वह क्या एक व्यक्तिमे नजर आया या अनेक व्यक्तियोमे या व्यक्तिमात्रमें ?
एकव्यक्तिगत अभेदके प्ररूपणसे सर्वाद्वितकी असिद्धि उस एकत्वको यदि एक व्यक्तिगत मानोगे तो यह बतलावो कि वह एकत्व फिर सर्वव्यापक है या उस ही एक व्यक्तिमे व्यापक है ? जो एकत्व नजर छाया वह उस ही एक व्यक्तिमे व्यापक है तो विश्वरूप एकत्व कहाँ रहा ? यो वह एक वस्तु विदित हुई मो समय वस्तुओमे एक-एक व्यक्तिगत एकत्व निरखे तन वे सब प्रत्येक पदार्थ न्यारे-न्यारे हुए यदि कहा कि नही, एकत्व एक व्यक्तिगत तो दीना, पर वह सर्वव्यापक दीखा, तो यह तो परस्पर विरुद्ध बात है। सर्वव्यापक हो और फिर एक व्यक्तिमे वैघा हुआ हो यह बात कँपे सम्भव हो सकती है ? तो इससे तुम्हारे अभेद की सिद्धि नहीं हो सकती है।
अनेक व्यक्तिगत अभेदके प्ररूपणसे सर्वाद्वितकी प्रसिद्धि - यदि यह कहो कि अनेक व्यक्तियोमें पाया जाने वाला एक अभेद एक्त्व एक स्वरूप जाना तो यह वतलावो कि वह एकत्व व्यक्तियोके आधार रूपये प्रतिभास होता है, ज्ञान मे चाता है या व्यक्तियोका घाघार न करके स्वय हो केवल एकत्व, ब्रह्म ज्ञात होता है। जिस ब्रह्मकी सिद्धि कर रहे हो वह ब्रह्म अनेक व्यक्तियों में पाया जाता है ऐसा मानते हो तो वह ब्रह्म व्यक्तियोके आधारमे रहता हुआ मालूम होता है या किसी भी व्यक्ति के आधारसे न रहकर स्वतंत्र स्वच्छन्द रहता हुआ मालूम होता है। यदि कहो कि व्यक्तियो आधारमे रहता है वह ब्रह्म, तब तो भेद सिद्ध हो गया, क्योंकि प्रत्येक ध्यक्तियोमं वह ब्रह्म रहा भाया । व्यक्ति अधिकररण हैं एकत्व अथवा ब्रह्म आधेय है, जिसे सर्वव्यापी कह रहे हो, लो यो भी यह भेद हुआ और अनेक व्यक्तियोसे भी भेद हुआ
भेटकी प्रत्यक्षसिद्धता - किन्ही भी व्यक्तियोका आधार न करके ब्रह्म अपने आप सर्वत्र मौजूद है यह मानोगे तव तो बीचमें, अन्तरालमे वह ब्रह्म प्रतीत होना चाहिए । एक व्यक्ति यहा बैठा एक दो गज दूर बैठा तो वीचमे यह अन्तर क्यो ग्रा जाता । जब ब्रह्म सर्वव्यापी है तो वह आत्मा गर्वत्र रहना चाहिए। तो इस प्रकार भव तो प्रत्यक्षके ही विरुद्ध है। जो भौधी सी बान है उसका निषेध करके एक कल्पित दो मोर ले जाना यह कहाकी वृद्धिमानी है। धौर, देखिये जितने भी कार्य होते है ६ राव व्यक्तियोंसे होते हैं, भेदसे या जाति नहीं होते। जैसे कोई कहे कि यह काम पल्दी कराओ। कैसे कराये मनुष्य जातिसे भगवो तो मनुष्य जानि करेगी क्या ? अरे वसे तो मनुष्य होगा। तो जो नाम प्यारो हंगा
उम काममे तुमने मनुष्य जातिकी कल्पना की। व्यक्तिकी कल्पना नही होती है कल्पना होती है जातिको अर्थक्रिया याने कार्यका होना व्यक्तिसे होता है जातिसे नही होता । कोई कहे कि जावो मनभर दूध लावो । कहाँसे लायें ? अरे गौ जातिसे दूध लावो । भला बतलावो गौ जाति से भी दूध निकलता है क्या ? अरे दूध तो गायोसे निकाला जायगा । तो कोई भी काम हो वह पदार्थसे बनता है, व्यक्तिसे बनता है जातिकी तो सदृशतासे कल्पनावी जाती है। तो इस प्रकार समस्त पदार्थों मे जो एक सत् स्वरूपकी कल्पना की जाती है वह सदृशतासे की जाती है ।
अथंत्रियासे पदार्थके अस्तित्वकी प्रसिद्धि भैया । चूकि सभी पदार्थ अपना अपना अस्तित्त्व रखते है अतएव अस्तित्त्वका स्वरूप लेकर एक ऐसी जाति बन गई कि सत् एकस्वरूप है। केवल अस्तित्त्वमे भेद क्या ? आपके शरीरमे, हाथ पैरमे आपके भीतरके कपात्र आदिक भावोमे फर्क है लेकिन कुछ भी होता है है मात्रमे क्या फर्क है ? तो वह है' मात्र जब सब पदाथों मे एक समान है तो इस सहश्ताको लेकर एक सत् स्वरूप माना जा सकता है। प्रत्येक पदार्थकी व्यवस्था जातिमे भी नही होती किन्तु परिणमनसे होती है। अर्थ त्रिया अर्थ से होती है। प्रत्येक पदार्थ अपना स्वरूप लिये हुए है, अपने ही प्रदेशमे रहता है, उसका गुरण शाश्वत है। वह भी उस पदार्थमे है, उसकी पर्याय परिणत हं ती हैं वे भी उस पदार्थके प्रदेशमे हैं पदार्थ से वाहर पदाथ का कोई काम नही है। परिणमनका ही नाम अर्यक्रिया है। जो परिणमन जितनेमे होना ही पड़े, जितनेसे बाहर कभी न हो बस उसका नाम एक उदार्थ है । पदार्थकी मर्यादाका कारण भी परिणमन है। जैसे मेरे क्रं धादिक परिगमन मेरे ही प्रदेशमे हो सकते हैं और मेरेसे बाहर एक प्रदेशमात्र भी अन्यत्र नहीं हो सकते, इस कारण यह मैं एक हू । इसी प्रकार प्रत्येक हृदार्थोंमे भी यही बात है। इससे तो पदार्थ ज्ञात होते है, पर जातिसे पदार्थकी व्यवस्था नही है। जाति कल्पित है, व्यक्ति कल्पित नही है ।
सिद्धान्तका मौलिक प्रयोजन यद्यपि ब्रह्माद्वैतवादका प्रयोजन भी यही है कि किसी प्रकार रागद्वेष मंह छूटे, रागद्वेष मोहकी वेदना ही व स्तिवक विपदा है । जीवोपर और कुछ विपदा नहीं है। ये बाह्य पदार्थ हैं, आज कोई अपने पास है, क्ल रहे या न रहे, यह जीवपर कोई विपदाकी बात नही है । परपदार्थमे जो मोहभाव वना, अज्ञान बना, रागद्वैप बना यह ही एक विपदा है। इस विपदासे वचना सभी दार्शनिकोने इष्ट माना है। किन्होने ईप्वरकी कृपापर अपनी विपदाका छूटना माना है तो ईश्वर भक्तिमे ही इस शैल से तन्मय ह ते है कि हे प्रभो । तू ही मेरा पिता है रक्षक है। मेरी खबर ले इस प्रकार भक्तिमे लीन होते है । यहाँ इस ब्रह्माद्वैत सिद्धान्तमै मोह रागद्वैष दूर करनेका यह उपाय सोचा गया है कि यह मानें कि दुनियामे ये सब पदार्थ कुछ है ही नहीं, मादास्प है, इन्द्र-जाल है, जब ये कोई वास्तविक चीज नही है तो फिर इनसे रागद्वेष मोह क्यो किया जायगा ? और ऐसे इन पदार्थों से
अपना चित्त हटानेके लिये कुछ तो अाधार चाहिए जिसमे अपना चित्त लगाये । नो जिसमे उपयोग देनेनर इन वाह्य पदार्थोसे हमारा उपयोग हट जाय, ऐसा कोई बताना अवश्य पडेगा । यह उपयोग हटने - हटने का ही काम नहीं करता बल्कि एक दृष्टिमे देखिये कि उपयोगका काम हटना नहीं है किन्तु लगना ही है। जिस ओर यह उपयोग लगा उसका ही नाम है दूसरी जगहसे हटना कहनाया । उपयोगका हटना काम नही है, लगना काम है । तो इन भिन्न-भिन्न पदार्थों से उपयोग हटाये इसके लिए एक अद्वैत सत्स्वरूप अनिर्वचनीय ब्रह्म है, ऐसे अद्भुत, अजानी, अविकल्प पदार्थों की ओर उपयोगको ले गए तो वहाँ उपयोग ले जाकर फिर ये भेदवादके उपयोग न टिक सकेंगे यद्यपि उद्देश्य तो अद्वैतवादका भी उत्तम है' कौन जीव सुख नहीं चाहता ? प्रत्येक जीव सुख चाहता है और जो जितने प्रयत्न करता है वह अपने सुखके लिए करता है, किन्नु वात यह देखना होगा कि जो प्रयत्न किये जा रहे है वे सही है अथवा नहीं है।
बाह्यके उपयोगमे निर्विकल्प स्थितिकी असभवता -अब इस प्रसङ्गमे निरखिये - जो सत् नही है उसका कुछ भी परिरगमन नही होता, न मायारूप न परमार्थरूप । मैं हूँ ऐसा अपने आपमे अपना निर्णय है, यह मै निर्विकल्प होना चाहूँ तो कुछ अपने आपमे ही ऐसा परमार्थतत्त्व खोजना होगा कि जिसमे लगनेपर फिर विकल्प सब समाप्त हो जाये । यो अपने मापने चैतन्य ब्रह्म परम ब्रह्मस्वरूपको निरखा जाय तो खुद ज्ञान हो और खुदके सहजस्वरूपमे मग्न होना चाहे तो यह बात तो चिग सकनेकी बन जायी लेकिन हम सारे विश्वका ठेका लें, इन सब पदार्थोंका मूल कोई एक ब्रह्म है ऐसा निरखकर हम सारे लोकमे एक ब्रह्म है ऐसा निरखें तो स्वसे दूर ही रहे । चाहे किसी रूपमे तत्त्वको रखे । जब हमारा चित्त हमारा उपयोग हममे न रह सका, वाहर रहा तो ऐसे उपायसे निर्विकल्प स्थितिकी भाशा करना असम्भव है। निर्विकल्प स्थिति नहीं बन सकती है ।
यहाँ आत्माद्वैतवादी यह कह रहे हैं कि लोकमे सब कुछ एक ब्रह्म ही है । जो कुछ ये भेद नजर भा रहे है ये सब कल्पित है, मायारूप हैं। तब उनसे पूछा जा रहा है कि यह जो एकत्व है, जो एकाकारता है वह एक व्यक्तिके जाननेके माध्यमसे जाना जा रहा है या समस्त व्यक्तियोका हम ग्रहरण करके जान रहे है कि यह ब्रह्म, यह एकत्व समस्त पदार्थोंमे मौजूद है । यदि कहोगे कि हम एक व्यक्तिको ग्रहण करके ही इस लोकव्यापी एकत्वको जान जायेंगे तो यह विरोधकी बात है कि हम एक व्यक्तिको ग्रहण करें और सर्वव्यापक एकत्वको जान जायें । एकाकारता तो उसका नाम है कि भनेक व्यक्तियोमे कुछ एकरूप हो उसे ही कह सकेंगे सर्वव्यापक एक । पर तुम तो एक व्यक्तिको ग्रहण कर रहे तो अनेक व्यक्तियोमे अनुयायीरूपसे रह सकने वाला कोई एकत्व एक व्यक्तिको ग्रहण करनेसे कैसे जान सकेगा । जैसे एक गोको देखनेसे उसकी एक जातिका ज्ञान नही हो सकता क्योकि गौ जातिका अर्थ क्या है कि समस्त गायोमे | श्रज्ञानवासनासे अनेक पदार्थों के निर्णयका कथन -घट पर मकान आदिक अनेक पदार्थों का निर्णय करने वाला ज्ञान तो प्रज्ञानरूप है। ये नाना प्रकारके पदार्थ मयो विज्ञात होने लगते उसका कारण यह है कि प्रविद्याकी वासना लगी हुई है और उम हीके सकेतका स्मरण बनता है उससे विकल्प की प्रतीत होने लगती है और फिर यह अन्यकी अपेक्षा रखकर प्रतीतिमे प्राता है, यह वासविक वम्नुस्वरूप नहीं है । जर अन्य अस्तित्त्वकी अपेक्षा न दसकर अन्य पदार्थको कल्पनाएँ न बनाकर जो कुछ प्रतिभास हो वह है वस्तुका स्वरूप । और पदार्थमात्र उतना ही है । यह बहुत लम्बे समय तक याद रखना होगा कि जो ;छ कहा जा रहा है वह ब्रह्माद्वैतका स्वरूप कहा जा रहा है और इस ही दृष्टि से सुनना । सर्व विश्वको प्रतिभासान्त प्रविष्टका कथन - जो कुछ प्रतिभास हो रहा है वह सव प्रतिभास हो रहा है वह सब प्रतिभास स्वरूप जब कभी अपने आपका ज्ञानस्वरूप ज्ञानमे प्राता है तो वह ज्ञानमे भाता है तो वह ज्ञानस्वरूप ज्ञानमे ही तो प्रविष्ट है वाहर तो नहीं है। इस प्रकार जो जो कुछ भी प्रतिमासमे भा रहा है वह सब प्रतिभासके अन्तर न मे ही प्रविष्ट है, वाह्य भय कुछ नहीं है। जो कुछ दिख रहा है, प्रज्ञात हो रहा है यह सव मायारूप है । परमार्थवस्तुभूत तत्त्व तो एक ब्रह्म ही है । जो जो प्रतिभास होता है वह सब प्रतिभासके अन्दर ही प्रविष्ट है। जैसे प्रतिभास का खुदका स्वरूप प्रतिभासमे आता है तो वह प्रतिभासमे ही प्रविष्ट है । जो जो कुछ ज्ञानमे भ्राता है वह सब ज्ञानमे ही प्रविष्ट है। और यह सर्व चेतन प्रचेननरूप समग्रवस्तु प्रतिभासमे भा रहा है अत सव प्रतिभासान्त प्रवष्टि है, इस अनुमानसे भी श्रात्मा द्वैतकी सिद्धि होती है । विश्वकी प्रतिभासमात्रत्मताका अनुमान ब्रह्माद्वैत कहो, भात्माद्वैत कहो एक ही बात है। एक ब्रह्मके सिवाय इस लोकमे अन्य कुछ तत्त्व नहीं है। यहाँ यह अनुमान बनाया गया है कि सर्व पदार्थ ज्ञानमे ही गभित हैं, क्योकि ज्ञात होनेसे । यह हेतु प्रसिद्ध नहीं है क्योंकि सभी पदार्थोंका साक्षात् अथवा प्रसाक्षात् कुछ भी प्रतिभास न हो तो किसी सत्यके विकल्पकी व्यवहारकी उत्पत्ति ही न होगी और कहा भी न जा सकेगा । सब कुछ प्रथम ज्ञानमे आता है और वह ज्ञानरूप ही है वास्तवमे भेद कल्पना करके प्रज्ञानकी वासना के कारण सब कुछ भिन्न भिन्न समझमे आता है । ब्रह्माद्वैतके सिद्धान्तमे सीपीसी बात उन्होंने यह रखी है कि सब कुछ एक ब्रह्म है और उसकी ही ये नाना सृष्टिया हैं तो यह सब उसका ही बाग है, सब उसका ही प्रसार है वैभव है ये सब चीजें कुछ नही हैं । ब्रह्मा तवादके आगमवाक्योसे अभेद सृष्टिमूल ब्रह्मका समर्थन - इस बातको भागममे भी लिखा है ऐसा वे ब्रह्माद्वैतबादी ही अपना आगम रख रहे हैं - मवं वै खल्विद ब्रह्म नेह नानास्ति किञ्चन । आराम तस्य पश्यन्ति न त पश्यति कश्चन ऐसा हमारे आगममे लिखा है कि जगतमे जो कुछ है वह समस्त पदार्थ ब्रह्म है । ये नाना कुछ भी चीजे नही हैं और लोग जो कुछ निरखते हैं, उस एक ब्रह्म के आरामको, बागको फैलावको ही निरखते हैं, उस ब्रह्मको को नहीं देखता । औौर, भी बताया गया है । पुरुष एवंत सर्व यद्भुत यच्च भाव्य स एव हि सकललोकसर्गन्थितिप्रलयहेतु ।" यह सब कुछ जो अब तक हुम्रा जो आगे होगा वह सब एक यह ब्रह्म ही है, एक सर्वव्यापक या मा ही है और वह ही समस्त जगतकी सृष्टि स्थिति और प्रलयका कारणभूत है । जैसे कि मकडी जालकी सृष्टि रचती है तो वह जाल क्या मकडीसे जुदा है ? ल गोको ख़ुदा मालूम देती है उस जालकी व्यक्ति होनेपर यह लगने लगता है कि यह जाल पूरा गया है और देखो इसमे यह मक्डी फसी है वह जाल न्यारा है । मकडी न्यारी है और वह फसी है यो लंग देखते है पर वास्तविकता क्या है । वह जाल मकडीकी रचना है, मकडीसे ही उत्पन्न हुई है और वह मकडी उस जालके बीच रह रही है। वहीं दो चीज क्या है ? सब कुछ एक ही वरसु है । इसी तरह यह सारा जगत एक ब्रह्म ही है ब्रह्मसे ही यह सर्जित हुआ है और व्यक्तस्प हो जानेपर यह सब माया है और इस मायाके बीच यह ब्रह्म रह रहा है, सब कुछ वही एक ब्रह्म है, वही रचनाका, ठहरनेका और विनाशका कारण बन रहा है अथवा जैसे चन्द्रकान्तर्मारणसे जल नि वलता है तो उस जलकी रचनाका मूल हेतु तो चन्द्रकान्तर्माण है इसी तरह यह सव व्यक्त दृष्टिगोचर हो रहा है पर इस समस्त लोकका कारणभूत इसकी रचनाका साधन एक परम ब्रह्म ही है। अथवा जैसे वटका बीज प्रकुरोका कारणभूत है । वे भकुर क्या बीजसे न्यार हैं? वह एक बीजका ही फैलाव है । इसी प्रकार यहु सारा जगत ब्रह्मका ही फैलाव है । जितने भी जीव है जन्ममरण करने वाले समस्त प्राणियोका कारणभूम यह ब्रह्म ही है । ब्रह्मस्वरूपके ज्ञानकी प्रमाणता व कल्याणकारिताका कथन- इस ब्रह्मस्वरूपका ग्रहण करने वाला जो ज्ञान है वह तो प्रमाण है और सब पदार्थोंका ग्रहण करने वाले ये सव ज्ञान प्रमाण है क्योकि ये सारे पदार्थ हो मिथ्या है । तो मिथ्या पदार्थको सम्यक् रूपसे जाने वह ज्ञान मिथ्या है और प्रमाण है। अभेद ही एक तत्त्व है । भेद तो विकल्प और मूढतामें प्रकट हूं ता है । जो इस जगतको, जो इम समग्र लोकको भेदरूपसे देखा करते हैं उनकी तो निन्दा की गई है । 'मृत्यो स मृतुमाप्नोति य इह नानेव पश्यति । उपनिषदमे यह बताया है कि वह पुरुष मृत्युके द्वारा मनुको प्राप्त हंता है जो यहाँ कुछ भी नाना निरखता है, जो भेदरूपसे नाना रूपमे इस लेकको निरखता है, उसकी मृत्यु होती रहती है। इसका तात्पर्य यह है कि जो एक अभेद चैतन्यमात्र ब्रह्मस्वरूपको देखता है वह तो मृत्युसे बचता है, भ्रमर होता प्रसङ्गमे थोडा ग्याद्वादीकी भी बात सुनिये । स्याद्वादी तय विभाग के कारण इस ही चीजको उनमे भी और अधिक ऊंचे ले जा सकते हैं। चैतन्यम्वरूप एक है, किन्तु स्याद्वाढवादी कहते हैं कि चैतन्यस्वरप एक हैमा एउपनाला देनेसे भी चैतन्यस्वरूप त्रिगड जाता है। वह तो केवल अनुभूतिका तत्त्व है, गनुभव करिये उसके बारेमें बह चैतन्यस्वरूप एक हे अथवा नाना है ऐसो जीभ मत हिलायो । उस ही चैतन्यस्वरूपका लक्ष्य करके एक ब्रह्माद्वैतका सिद्धान्त प्रकट हुआ है। देशभेदसे पदार्थभेद करनेकी शवयनका प्रदर्शन प्रकरणमे यह कहा जा रहा है कि लोगोको जो ये पदार्थ भिन्न-मि नजर आते हैं, नाना नजर आते है क्या यह देशके दसे इन पदार्थोंका भेद है ? देशभेदो तो भेद करना मिथ्या है, क्यों कि जैसे एक प्रकाश है, स्वरूपसे ग्रभित है उस आकाशमे यह भेद करना कि यह इनके घरका आकाश है, यह मेरे घरका आकाश है, त ऐमा कह भले ही लो, किन्तु ऐसा श्रद्धान करणा मिथ्या है। आकाश तो स्वरूपसे भिन्न है फिर घर भी दिक ये भेदसे आकाशमे भेद न पड जायगा, क्योंकि भीटका भेद आकाशमें न प्रवेश करूंगा। इन प्रकार देशमा भेद प्रयों में प्रवेश नहीं कर सकता। देश न्यारे-न्यारे हैं। तो रहें देशके भेद अर्थमे भेद नहीं बनता। इसे यो समझिये थोडा जैनसिद्धान्तका एक दृष्टान्त लेकर । जिस जिस स्थानमे जीव हैं उसी उसी स्थानमे पुद्गल हैं। धर्म, अधर्म प्रकाश, काल ये छः प्रकारके द्रव्य हैं । तो एक जगह इतने पदार्थ श्रा जानेसे क्या वे एक हो गए ? देशका अभेद होनेसे पदार्थ एक तो नही हो जाता। तो इसी कार देश का भेद होनेसे भी वे पदार्थ अनेक नही हुए। देशभेदकी साधनामे विकल्पोका उत्थापन ब्रह्माद्वैतवादी कर रहे हैं - अच्छा बताओ यह देशभेद हो कैसे गया ? वया अन्य देशके भेदसे देशभेद हुआ या स्वत हुआ ? पूछा यह गया था कि ये पदार्थ जो नाना नजर आ रहे हैं ये भिन्न भिन्न क्यों नजर भा रहे हैं ? क्या देशके भेदसे भिन्न-भिन्न नजर या हे हैं ? तो देश भी जो भिन्न-भिन्न न र भा रहे हैं यह अमुक स्थान है, यह अमुक स्थान है, ये भी क्यो नजर थी रहे हैं ? इसमें कारण अन्य देशभेद मानोगे तब तो अनवस्या दोष प्रायगा। फिर वह देशमेद अन्य देशभेदसे हुआ, फिर वे भिन्न-भिन्न स्थान अन्य देशभेदसे हुए। और, यदि स्वत. ही मानते हो तो इन पदार्थोंको भिन्न-भिन्न समझाने के लिए देशभेद से हो वताना किन्तु सीधा ही भाव भेद माननेको वात न बोलना । भेदकी कल्पना करनेका प्रगाम ही क्यो करे ? इस कारण यह बात युक्त है कि ये जो पदार्थोंमे भेद नजर आ रहे हैं यह सब मिथ्या है। ये पदार्थ देशभेदके कारण भी मिन-भिन नही बन सकते हैं। कालमेदसे पदार्थभेद न होनेका मन्तव्य-~-कालभेदसे भी मिन्न-मिन्न नही बन सकते जैसे कालभेदसे लाग भिन्न-भिन्न कहा करते हैं कि यह चीज कल हुई अब यह चीज भाज नहीं है, यह कन हो जायगी इसप्रकार जो समयके भेदमे पदार्थों मे भेद माना है तो वह भी पूरा नहीं पड़ सकता, क्योकि कालका भेद ही प्रत्यक्षसे सिद्ध नही है । प्रत्यक्ष तो केवल सामने रहने वाली वस्तुमात्रको अस्तित्त्व मात्रको जानता है, इसमे कालभेद नही है। प्रत्यक्षसे गई गुजरी बात जाननेमे नही आया करती । प्रत्यक्ष विषय प्रतीत भविष्यकाल नही है अथवा उन कालोमे रहने वाले जो भिन्न भिन्न पदार्थ हैं उनका भेद प्रत्यक्षका विषय नहीं है, अतएव कालभेदसे भी हम इन पदार्थोको भिन्न-भिन्न नहीं मान सकते । आकारभेदसे भी पदार्थ भेदकी श्रमान्यता इसी तरह आकारभेदसे भी हम इन पदार्थोंको भिन्न-भिन्न नहीं कह सकते। आकारमेद पदार्थों का भेदक यह किसी भिन्न प्रमाणसे जाना जाता है ? अन्तर्वस्तु और बाह्यवस्तु इनके सिवाय और कुछ भी प्रतिभाममान नही होता है। न अन्य कोई प्रमाणका स्वरूप है । जो कुछ भी ज्ञानमे प्राता है वह सब एक प्रतिभासमय एक ब्रह्मका ही स्वरूप है, प्रतएव न ग्राकारभेदसे भी अर्थका नेद नजर आता है। जितने भी भिन्न-भिन्न पदार्थ दृट्टि - गोचर होते है वे सब मिथ्या है और मिथ्याका ज्ञान करना अप्रमारण है । एक परमात्मम्वरूपका ही ज्ञान करने वाला जो ज्ञान है वही प्रमाणभूत है, इन प्रकार ब्रह्माद्वैतवादी प्रपूर्व अर्थके ज्ञानकी प्रभारणताका खण्डन कर रहे हैं। इस अद्वैतवादके सिद्धान्तमे हरथमान, तर्क्यमारण समस्त पदार्थ मिथ्या है, मिथ्या ही नहीं, असत् हैं एक अभेद निरश नित्य अपरिणामी चात्मा है, ब्रह्म है। उस प्रभेद परमात्मत्वमात्र तत्त्वकी सिद्धि इसलिये एक दार्शनिक द्वारा की जा रही है कि उमे प्रमाण स्वरूपमें दिये गये "प्रपूर्वं अर्थ" इस विशेषणसे विरोध है, क्योंकि यह दार्शनिक सर्वथा अभेदवादी है । वस्तुस्वरूपकी निर्दोष व्यवस्था - वस्तु स्वरूपकी निर्दोष व्यवस्था तो यह है कि एक पदार्थ इतना हुआ करता है जितना कि वह अपनेमे अखण्ड हो । और, अखण्ड हं नेके प्रतिफलस्वरूप अनेमे अपने आपका परिणमन करता हो । अपनेसे बाहर कही परिणमन न हो, बाहरसे किसी ओोरसे अपनेमे परिणमन न आये केवल अपने आप जितने प्रदेशमे हैं उतनेको एक वस्तु कहते हैं इस दृष्टिसे जगतमें अनन्त वस्तुयें हैं। जिन सब वस्तुवोको हम जातिरूपमे विभाजित करें तो उन सबकी छः जातियां बनती हैं - जीव, पुद्गल, धर्म, प्रघर्म, आकाश और काल । जिनमे चेतना पायी जाय, जो जानन देखनहार हो ऐसे जितने पदार्थ हैं वे सब जीव कहलाते हैं । जिनमे चेतना नहीं है, और रूप, रस, गध, स्पर्श है वे सब पुद्गल जातिमे गिने जाते हैं । ये दो जातिके पदार्थ तो व्यवहारमे बहुत प्राते हैं। इनके अतिरिक्त चार जातियां ओर हैं एक धर्मद्रव्य - जो जीव और पुदेगलके चलनेमें महायक हो, निमित्त कारण हो वह एक ही है । एक अधर्म द्रव्य जो जीव और पुद्गलके ठहरनेमे निमित्त कारण हो, एक ग्राकाश द्रव्य जिसमे पदार्थ रहा करे और एक कालद्रव्य जिसमे असख्यात कालद्रव्य हैं, वे लोकालोकके एक- एक प्रदेशपर अवस्थिन हैं और अपने प्रदेशपर जो भी पदार्थ स्थित हो उसके परिगमनके कारण है। इस तरह छ जातिके पदार्थ हैं। प्रतिव्यक्तिगत भेदका प्रकाश - जीव और पुद्गलमे तो अनन्त व्यक्तिया स्पष्ट ही है अनन्त जीव है और अनन्त पुद्गल है। वस्तुस्वरूपकी व्यवस्था तो ऐसी है, किन्तु ह्माद्वैतवादी यहाँ यह कह रहे है कि ये भिन्न भिन्न पदार्थ मालूम हुए ना, यह सब अज्ञानसे प्रतीत होता है। वास्तवमे तो एक ब्रह्मरवरूप ही है । वह ब्रह्मस्वरूप निर्विकल्प हैं, एक सत्तामात्र है। जैसा कि कुछ भी जानते समयसे पहिले जो कुछ एक सामान्य प्रतिभास होता है उस रूप यह एक ब्रह्म है। इस सिद्धिके सिलसिले मे ब्रह्माद वाटी कह रहे है कि यदि कोई लोग जैन या अन्य कोई भेदवादी लोग यह कहे कि हमे भेद सही तो मालूम पड रहा है जैसे अपने त्राप जीवो के सम्बन्धमे ग्रहका प्रत्यय हुआ करना है मै हूँ। मैं तो हर प्रकार मैं मैं के ज्ञानमें भेद तो पडा हुआ है । तवादमे ग्रह प्रत्ययसे भी परमार्थ सतुके अलक्ष्यका प्रतिपादन इस प्रकार ब्रह्मा तवादी यह उत्तर दे रहै है कि यह बात सही नहीं है क्योकि बहुत से लोग जो अह अह कहकर अपना अलग अलग चरितत्त्व समझ रहे है उसमे शुद्ध बोध का तिभास नही है । जिसको ग्रह करके माना है वह स्वय भाया है। मैं सुखी हूँ । मैं दुखी हूँ । मैं मोटा हूँ, मैं दुबला हु श्रांदिक रूपमे जो हम लोग में मैं का अनुभव बरते है तो वह मुस आदिकका या शरीरका आलम्बन करके अनुभव करते है । जो यद्रह्मस्वाप है उसका प्राश्रय करके उसका लक्ष्य लेकर लोग यह ग्रह नहीं बोलते तो यहा भेद तत्त्व सिद्ध किया जा रहा है । अहसे जो कुछ भी लोग रयाल करते हैं बह किसी अन्य पदार्थका स्याल करके यह बोला करते हैं, उसग्रहमे ब्रह्मतत्स्वपरमान्मस्वरूप नहीं पकड़ा जा रहा है। मैं सुखी हूँ तो सुरूपर लक्ष्य देकर सुस रूप जो परिग्रामने वाला है तीनस तरह विकल्प और कल्पनाश्रोमे जो ग्मने वाला है वह में है तो ऐसा वह मैं मायारूप हू, शुद्ध ब्रह्म नहीं हू । बोव स्वरूपका आलम्बन करके उसका कोई अनुभव नहीं करता । वहा तो निविकरपता आती है। जैसे कि जैन लोग भी तो मिथ्यात्वके उद्यमे जीव जिस जिसको अई ग्रह से ग्रहण करते हैं ने सब भी तो पर्याय है, मिथ्या हैं। तो यहाँ ब्रह्मावादमे जिम- जिस को जुदा-जुदा व्यक्तिरूपमे मैं-मैं अनुभव करते है वह सब भेद है, मिथ्या है। प्राकारभेदसे भी पदार्थोके भेदके प्रभावका कथन- यहाँ ब्रह्मवादी वादियोमे पथरहे हैं कि हम क्या प्राकारभेदसे पदार्थोम भेद मालूम करते हो तो आकार से जाना जाता है या म्वत जाना जाना है ? पढ़ने जाना जाता है इस विषयमे नहां तक ये अापत्तियाँ दी । यदि यह कहा कि ये पदार्थ सभीके सभी तो अपनः- गपनादा-जुदा प्राकार लिए हुए है स्त्रय अपने को जानते रहते हैं यदि ऐसा कहो तो ब्रह्मवादी- कह रहे हैं कि इस तरहसे तो समस्त पदार्थ अपने ही प्रकाशमे नियत है यह आपत्ति आायगी । और ऐसा होनेपर तो जिसे हम चस्मा कह कह रहे है, उसके स्वरूपने अपने आकार और स्वरूपको जाना । जिसे मैं कह रहा है उसने स्वयं अपने आपके आकारको जाना। तब कोई भी पदार्थ किसी दूसरेको जान तो न सका । हम ग्राप परपदार्थों के सम्बन्धमे कुछ निर्णय चाह रहे है और हम केवल अपने तक ही जान पाते है तो फिर निर्णय कैसे बनेगा, आकारभेद कैसे सिद्ध होगा ? यो देशभेद कालभेदसे और आकारभेदसे भी पदार्थोंमे भेद सिद्ध नहीं होता । एक प्रभेद ही तत्त्व है । समयानुरूप तौर तके कथनका व्यवहार - देखये । आज कल इस सिद्धान्तका प्रचार तो बहुत है, पर कुछ ऐसे अटपटे ढङ्गमे है कि वही पुरुष पहिले बडा भेद सिद्ध कर रहा औौर थोडी देर बादमे उसका दिमाग बदल जाता है तो अभेदको सिद्ध करने लगता, इस तरह भी परम्परासे और रूढिसे अद्वैतके मानने वाले प्राण भी है। जैसे अभी चर्चा कर रहे हो कि एक ईश्वरने इन सब जीवोको बनाया, ये राव न्यारे-न्यारे है, पुद्गरा न्यारे प्यारे है । ये सव पदार्थ सत्त्व गुण, रजोगुण, तमोगुणकर सहित है । सबकी जुदी-जुदी खूब सत्ता मानने जैसी बात कहते है । थोडी ही देरमे खबर मा जाय कि पडिताई तो इसमे और ज्यादा समझी जाती है कि एक ब्रह्म है अन्य कुछ नही है ऐसा कहना चाहिए तो इस वुद्धिमे प्रेरित होकर फिर यो वालने लगते है। बहुत बडी पडिताई बुद्धिमानीकी वात मानी जाती है। तो इस कथन मे मान ली जाती है। जैसे कि अभी कहा है सब कुछ एक ही अभेदस्वरूप ब्रह्म हे और कहते ही है सव । सव कुछ एक परमात्मतत्त्व है, मन्य तो सव उसकी माया है। इस अभेदवादको यहाँ सिद्ध किया जा रहा है। अविद्यारूप शास्त्र विद्याप्राप्तिके हेतुपर प्राशङ्का भैया । जितने भी कथन इस प्रसङ्गमे अभी पहे जा रहे है वे सब एक ब्रह्माद्वैतवादीके है । वे दूसरोको श्रो एक शङ्का उठाते हैं कि यदि जैन आदिक भेद मानने वाले दार्शनिक ऐसा कहे कि तुम्हारा यह सर्व विश्व एकस्वरूप ब्रह्म, यदि विद्यास्वभावरूप है ज्ञानरूप, बोध स्वभाव है और वही है सब यह ससारमे वोधस्वरूप । ब्रह्मके अतिरिक्त तो कुछ ससार नाना नहीं तो जब विद्यारूप ही हैं तो फिर इन जीवोको मोक्षके लिए शास्त्रोमे प्रवृत्ति क्यो करायी जाती है ? जब हम सब ज्ञानरूप ही हैं, बोधरप हो है. ब्रह्म ही हैं तो फिर शास्त्रोकी प्रवृत्ति व्यर्थ बन जायगी। क्योकि शास्त्रोकी प्रवृत्ति तो तव करे जव अविद्यासे हटने और विद्यामे लगनेका स्वभाव पडा हो या हम लोगोको जरूरत हो, हम गब तो विद्यारूप है और शास्त्र हैं अविद्यारूप और अविद्याम्प शास्त्र विद्यारप प्रो कैसे प्राप्त करा दें? एक ब्रह्म है उसके प्रतिरिक्त जो कुछ है वह सव प्रज्ञान है मायारूप है, शास्त्र भी मायारप हो गये और सारे उपदेश भी मायारूप है, समस्त व्यवहार माया है । तो शास्त्रोकी प्रवृत्ति फिर क्यो की जाय ? कही अविद्यासे विद्या भी मिला करती है ? अद्वैतवादमे शास्त्रकी अव्यर्थताका समाधान - इस प्रकार ब्रह्माद्वैतवादी उत्तर देते हैं कि विद्यास्वभाव होनेपर भो शास्त्रादिककी व्यर्थता नही है । शास्त्र विद्यामे नही लगाते है, किन्तु जितना अज्ञान बसा हुआ है उसका परिहार कराते हैं । यदि यह मैं विद्यास्वभाव न होता तो अनेक प्रयत्न करनेपर भी अविद्याका परिहार नही हो सकता था । हूँ में विद्यास्वभाव लेकिन शास्त्र की प्रवृत्ति हमे यो करनी पड़ती कि भविद्याकी प्रवृत्तियोका, प्रज्ञानके परिणमनोका परिहार हो जाय। श्रज्ञान हटानेके लिए हम शास्त्र पढते हैं, ज्ञान बनाने के लिए हम शास्त्र नही पढते । ऐसा ब्रह्माद्वैतवादी कह रहे हैं क्योंकि यदि यह कह बैठें कि हम ज्ञान पैदा करनेके लिए शास्त्र पढते है तो इसका अर्थ यह हो जायगा कि हम ज्ञानरूप नहीं हैं। शास्त्रोका हम ज्ञान बनाते है तो शास्त्रोकी प्रवृत्ति ज्ञानविकासमे कारण नही है किन्तु प्रज्ञानके हटानेमे कारण है, क्यो कि अविद्या ब्रह्मसे अलग वस्तिवमे कुछ नही है। अविद्याकी मायाकी सत्ता नही हुआ करती इस कारण यह अविद्या दूर हो जाती है। यदि वास्तवमे श्रविद्याका सद्भाव मान लें जैसा कि ब्रह्मस्वरूप है, परमात्मस्वरूप है उसी तरह माया भी कुछ होती है यो यदि सत्ता मान लें तो फिर उसे कभी हटाया हो न जा सकेगा । किसी भी सत्ता का प्रभाव कभी नहीं हुआ करता । इस कारण शास्त्रोकी प्रवृत्ति अविद्याके हटानेके लिए है और ऐसा तो सभी दार्शनिक मानते है कि मुमुक्षुवोका जितना भी प्रयत्न है, निर्वारण प्राप्त करने वालोका जितना भी प्रयत्न है वह सब प्रविद्याके उच्छेदके लिए है । मोह रागद्वेष प्रज्ञान जो कि अतात्त्विक है उनके विनाशके लिए है। यह तवादका प्रयोजन - भैया । बहुत कुछ अशो तक ब्रह्माद्वैतवादमे हम अपना दिमाग लगाये, उसकी वातको मानकर चलें तो तत्काल फायदा तो जरूर होता है कि बहुत से विकल्प हमारे हटने लगते है। जब हम जानें कि यह मायारूप है। वास्तविक नही है, किन्तु एक अकल्पनीय ब्रह्मस्वरूप है वह ही सबका मूल है, इसतरह जब हम एक अकल्पनीय ग्रह्मस्वरूपपर दृष्टि देते हैं तो ये सब विकल्प हमारे शान्तसे होने लगते है, लेकिन ऐसा उपयोग बदल लेना, इस तरहका शान्त हो लेना यह देर तक नहीं टिक पाता है तथा अन्ततो गत्वा आत्ममग्न नही कर सकता । यो तो जैसे किसी लडकेको हुचकी आ रही हो और उसको कोई अचम्भे वाली वात कोई सुना दे या उसके हो लिए कोई ऐसा सुना दे कि तुम उसके घरमे क्यो सूनेमे गये थे, तुम नहीं क्यो चोरी करने गए थे। तो उसका कुछ उपयोग बदल जाता है और उसकी हिचकी थोडी देरको बन्द हो जाती है । औौर, ऐसा लोग करते भी हैं। कुछ देर बादमे फिर वह हिचकी चलने लगती है, वह तो रोग ही है। इसीतरह समस्त 'सतृपदार्थों का प्रभाव मान लेनेपर और मात्र एक कोई ब्रह्म मान लेनेपर कुछ कल्पनाएँ तो शान्त हो जाती है कुछ अतिव्यक्त मोह रागद्वेषको परिणतिया मिट तो जाती है पर वहा फ्टि यो नही बैठ पाता है कि ऐसा सोचनेमे स चने वालेने स्वमे अपने ज्ञानको नही पाया । यदि उस ही ब्रह्मम्वरूपको केवल एक अपने आपमे इस स्वभावको सोचता कि मैं तो चैतन्यमान हू और जो कुछ भी यहाँ परिणमन बनता है वह सब मायारूप है इस प्रकार अपने आपकी इन विभाव सृष्टियोको मायारूप समझकर उनसे अपनेको हटाकर अपने एक ज्ञानम्वभावमे चित्त देता तो सोचने वाला भी यही है और अपने आपके भूतकी बात सोची तो यह इसमे मग्न हो जाता। हम उस स्वरूपको समझने के लिए अपनेसे मिन्न अन्यत्र दृष्टि लगायें कि इन सबका उपादानभूत कोई एक ब्रह्म है तो अन्यत्र दृष्टि लगानेसे अपने आपमे स्वरूपमग्नता नही हो पाती है इतना अन्तर है । अनादि विद्याके उच्छेदका तर्क - इस प्रसङ्गमे ब्रह्माद्वैतसे कोई प्रश्न कर रहा है कि अविद्या भी तो अनादिकाल से चली आयी है। जैसे ब्रह्मस्वरूप अनादि है तो यह विद्या भी अनादि है और प्रनादिमे चली आयी हुई श्रविद्याका उच्छेद कैसे हो सकता है। इसपर ब्रह्माद्वैतवादने उत्तर दिया कि देखो तुम्हारे यहाँ भी तो प्रागभाव अनादिसे चला आया है, उसका भी तो विनाश होता है। कैमी सुन्दर युक्तिसे उत्तर दे रहे है। प्रागभावका अर्थ है जो चीज बनती है उससे पहिले वह चीज नही रहती ऐसा तो सर्वत्र है ही। जैसे आज यह घडा वन रहा है तो इस घडेका ग्राजमे पहिले अनन्तराल तक प्रभाव था । तो प्रागभाव का समय है अनन्तकात अर्थात् प्रागभाव अनादिसे है। सो वहाँ भी जब घडा बन गया तो प्रागभाव मिट गया । जो इस समय रोटी बनायी जा रही हो उस रोटीका पहिले प्रभाव है कि नहीं ? तो कब तक प्रभाव रहा ? आज जो आठ बज रोटी वन रही है उसका प्रभाव सात बजे है कि नही ? सात बजे रोटी तो न थी। इसोप्रकार दस वर्ष पहिले, सैकडोसागर पहिले, और अनन्तकाल पहिले कभी भी इस रोटीका सद्भाव न था, अब बन रही है रोटी । तो रोटीका प्रागभाव रहा अनन्तकाल तक । रोटी बननेपर अनादिसे चला हुआ रोटीका प्रागभाव मिट जाता ना। इस तरह अनादिकालसे चली आयी हुई अविद्याका भी विनाश हो जाता है, और जैसे यो समझिये कि घडा बना तो घडेसे पहिले घटेका प्रागभाव था तो उस प्रागभावका नाम रख दीजिए अघट घट तो हुआ एक मिनटमे और अघट रहा अनन्तकाल तक । तो उस घटका सद्भाव अलगमे क्या है ? घटका प्रागभाव ही अघट है इसीतरह अविद्याका सद्भाव और कुछ नही है, विद्याका प्रागभाव ही अविद्या चार। जब तत्त्वज्ञानरूप विद्याको उत्पत्ति होती है तो अविद्या अपने आप नष्ट हो जाती है जैसे कि घडा बननेहर घडेका प्रभाव अपने ग्राप दूर हो जाता है। ब्रह्म और अविद्यामें भिन्नाभिन्नादि विचार - अद्वैतवादी बह रहे हैं कि भैरवाद यह पूछा था कि भविद्या प्रयुसे अभिन्न है कि भिन्न है, सो भिन्न प्रभिन्न के वस्तुमे करने है । प्रविद्या तो श्रवस्तु है, इसमे भिन्न प्रकिा विकल्प पवित्रा ये विकल्प नहीं उठाये जा सकते, यह सब कुछ प्रविधा माया है, मिथ्याभिाग है। जैन मिद्धान्नमे भी नो माने शरीरको गायारूप बताते, प्रौराधिक नीज बताते, निमित्त और उपादानपर दृटि हूँ तो न जीव की यह चीज है न पुद्गलकी यह नीज है । जीव और पुद्गलके परकार निमित्त नैमितिक भावने गा मारा नगार दिन रहा है। नो हम इन सबको किनी एककी बाव नही कह नवने । भैया । जैन गिद्धान्नमे तो नय विभाग है। द्रव्य गुग्ण पर्यायी व्यवस्था है किन्तु मद्वैतवादीसिद्धान्तमे द्रव्य गुरण पर्यायको व्यवस्था नहीं है। जो ब्रह्म है वह सवैय परिणाम है । का यह सब कुछ परिगमन नहीं है, किन्तु मायाका है, प्रकृतिका है, यह गव परिणमन झूठ है, इन सनकी मत्ता मिथ्या है, एक ब्रह्मरून है इस कार अपरिणामी नित्य निरक्ष एक स्वभावी ब्रह्मतत्त्वकी सिद्धि की जा रही है । शास्त्रमननादिकी त्रविद्यामे स्वपर विद्या के प्रशमनके सामर्थ्यका मन्तव्य - अद्वैतवादोसे ध्रुव भेदवादी पूछ रहे है कि हम जो मात्माकी बात सुनते हैं, थात्मतत्त्वका मनन करते है, भात्मतत्त्वका ध्यान करते है यह तो ब्रह्मसे भित्र है ना ? हाँ ग्रहह्मसे भिन्न है । तो यह अविद्यारूप हुआ ना । आत्माकी कथनी सुनना, चर्चा करना, आत्मा का मनन करना, ध्यान करना जब ये सब अविद्या है तो उन प्रविद्यास्वभावी प्रयत्नोसे विद्याकी प्राप्ति कैसे बन सकेगी ? ब्रह्माहतवादी इसपर उत्तर देते है और कितने तर्कके साथ उत्तर देते हैं । आप यह समझगे कि ठीक ही तो कह रहे ह । उनका उत्तर है कि जैसे किसी पानीमे गदापन है, कीचड भरा हुआ है, धूलका विशेष सम्बन्ध है ऐसे उस क्लुषित जलमे जब कोई निर्मली, चूर्ण वगैरह डालते हैं जो कि उस पानीको साफ करती है तो वहाँ वह चूर्ण उस धूलको भी नीचे दवा देता है और वह पूर्ण खुद भी नीचे दब जाता है। तो जो गन्दे जलके उस कीचको दबाने के लिए एक दवाई डालते है तो उस दवाईका यह काम है कि वूलको नीचे दवाकर खुद भी नीचे दब जाय । इसी तरह ये आत्माके ध्यान मनन आदिक तो जरूर है किन्तु इस अविद्या का इतना काम है कि भिन्न पदार्थ निरखनेको अविद्याको दबाकर खुद दब जाय । स्वपरप्रणामनपर विपका एक और उदाहरण और भी देखिये किसी विपको दूर करनेके लिए विप डालते है, विषैली चीजफा विष दूर करनेके लिए विष प्रयोग करते है तो उस विषका यह काम है कि दूसरे विषको शान्त कर दे और खुद भी शान्त हो जाय । तो जैसे विप खुद शान्त होकर दूसरे विषको शान्त कर देता है इसीप्रकार यह अविद्या भी शानध्यान स्वाध्याय ये सब मेदभावको शान्त कराकर खुद शान्त हो जाती है। ऐसा इस अविद्यामे प्रभाव है । यह अविद्या अपने आपमे उत्पन्न हुआ जो भाव है, अनेक प्रकारके जो दुराग्रह है, यह चौकी है, यह कमण्डल है, यह पुरुष है, यह पक्षी है आदिक जो भेद डालने के आग्रह है उनको भी यह स्वाध्यायरूपी अविद्या शान्त कर देती है और यह अविद्या स्वय शान्त हो जाती है। और यह जीव यह ब्रह्म अपने स्वरूपमे अवस्थित हो जाता है । तो अविद्याका यह काम है । यह शका नही कर सकते कि फिर शास्त्र पढना व्यर्थ है। शास्त्र पढनेका जो ज्ञान है इसे भी ब्रह्म वादने ज्ञान माना है । यह शास्त्र पढनेका श्रज्ञान इन भिन्न भिन्न चीजोको समझानेका जो अज्ञान लगा है इस प्रज्ञानको नष्ट कर देता है और खुद नष्ट हो जाता है। स्वपरविकल्पप्रशामनपर एक और दृष्टान्त - जैसे जैन सिद्धान्तका एक दृष्टान्त लो- दो नय होते ह-निश्चयनय और व्यवहारनय व्यवहारनय तो अन्य वस्तुमे अन्य कस्तुका सम्बन्ध जोडना कहलाता है और निश्चयनयमे एक ही वस्तुमे एक ही वस्तुके सहजस्वरूपको देखनेका काम बना रहता है । अव विकल्प की दृष्टिसे देखिये तो ब्यवहारनय भी विकल्प है और निश्चयनय भी विकल्प है। जब ध्यानी पुरुष अपने शुद्ध आत्मतत्त्वमे मग्न होना चाहता है तो भले ही व्यवहारनय पहिले साधक रहे लेकिन उस निर्विकल्प दशा से पहिले समयपर तो निश्चयनय साधक बनता है। वहाँ यदि कोई प्रश्न कर बैठे कि निश्चयनय भी विकल्प है, वह विकल्प अविकल्प दशाका कारण कैसे बन जाता है ? तो जैसे वहा यही उत्तर दिया जा सकता है कि उस शुद्ध निश्चयनयके विकल्पमे यह प्रभाव है कि बड़े बड़े व्यवहारनयके विकल्पोको समाप्त करते हुए खुद भी समाप्त हो जाता है और वहा निर्विकल्प दशा जगती है । इसीतरह हमारा ब्रह्माद्वैतवाद है । उस बह्मस्वरूपमे मग्न होनेके लिए जो शास्त्र अव्ययन आदिक करते हैं, आत्मध्यान आत्ममननका उपाय बनता है, यद्यपि ये उपाय भी सब मिटते हैं, विद्यास्वरूप तो एक अकल्पनीय अनिर्वचनीय स्वरूप है लेकिन यह आत्मध्यान आदिककी प्रविद्या भी इन बडी बडी अविद्यावोसे, भिन्न-भिन्न चीज मानने हठको, भज्ञानको समाप्त करते हुए खुद भी समाप्त हो जाता है । यो शास्त्रकी प्रवृत्ति व्यर्थ नही है और फिर भेदको बताने वाली जो यह अविद्या है इसका जब बिनाश हो जाता है तो एकस्वरूप स्वय अवस्थित हो जाता है । अभेदब्रह्मकी सिद्धिमे अभेद आकाशका उदाहरण - जैसे पचास घडे रखे है, जब हम भेददृष्टि रखते हैं यह घडा है, यह घडा है तो हमे वहीं आकाशका भी भेद नजर आता है, इस घडेका आकाश इस घडेमे है, इस घडेका प्रकाश इस घडेमे है । - यदि हम घडेके भेदको बताने वाली श्रविद्याको समाप्त कर दें तब एक शुद्ध प्रकाश रहता है इसीतरह जब हम इस भेदको दूर कर दे तो एक दृष्टि रहती है। इसप्रकार ब्रह्मवाद प्रभेदकी सिद्ध कर रहा है। एक शुद्ध ब्रह्म ही तत्त्व है । जैसे आकाश एक है, अखण्ड है, नित्य है, भपरिणामी है, इसी प्रकार ब्रह्म एक है, अखण्ड है, नित्य है, अपरिणामी है इस परमोत्मरूपका ग्राहक ज्ञान ही प्रमाण है, इसके अतिरिक्त अन्य कुछ नही है, प्रत अपूर्व अयका निश्चय कराने वाला ज्ञान प्रमाण है यह कथन युक्त नहीं है। समारोपित भेदसे लोकव्यवहारका अद्वैतवादमे कथन - लोकमे पदार्थं हैं तो अनन्तानन्त, किन्तु उनकी जातिका भ। भेद न करके चोर उन सब पदार्थों के एक सामान्य सत्त्वस्वरूपका ही आग्रह करके अद्वैतवादी कह रहे है कि ये जितने भी पदार्थ दिखते है ये वास्तव में कुछ नही है, एक यद्वैतव्रह्म ही तत्त्व है । इसपर यह शका की जा सकती है कि अनंत मानने पर फिर सुख दुख बन्ध मोक्ष आदिक कुछ भी भेदकी व्यवस्था न रह सकेगी क्योकि ये सब भेदमे हैं। इसके उत्तर में श्रद्धं तवादी कहते हैं कि कल्पितभेदसे भी सुग्ब दुख वन्ध मोक्ष आदिकके भेदकी व्यवस्था बन सकती है। जैसे भदवादी भी यह कहा करते हैं कि मेरे शिरमे पोडा है, मेरे पैरमे वेदना है । क्या शिरमे पीडा होती है ? अथवा पैरमे वेदना होती है। वेदना तो जीव मे होती है । शिर और पैर तो भौतिक चीज हैं फिर भी जीवमे होने वाली वेदनाको उपचारसे अपनी कल्पनाके अनुसार पैर और शिरमे कह देते है तो कलिनतभेदसे भी है भेद हो जाता है। इसी प्रकार ब्रह्माद्वैतवादमे भी यह बताया गया है कि जितने लोक मे ये भेद देखे जा रहे हैं, भिन्न-भिन्न पदार्थ माने जा रहे है, ये सब भेदकी कल्पनासे होते हैं, वास्तविक कुछ भी भेद नही है । लोकव्यवहारमे समारोपित भेदका शङ्कापरिहारपूर्वक समर्थन यदि इसके उत्तरमे जैन आदिक यह कहे कि पैर श्रादिकमे पीडा तो नहीं है पर वेदना का अनिकरण जरूर है अर्थात् पर शिरमें कुछ रोग हो जानेके निमित्तसे प्रात्मामे पीढाका अनुभव होता है, तो कुछ तो सम्बन्ध है इस कारण उसके भेदमे भेदकी व्यव स्था बन सकती है । इसके उत्तरमे अद्व तवादी कहते हैं कि यह भी युक्त नहीं है । क्योकि शिर और पैर तो कुछ तत्त्व ही नहीं हैं, ये क्या बेदनाका कुछ अनुभव कर लेंगे ? यदि शिर पर अनुभव करलें तो यह नास्तिक मत हो गया कि जीव कुछ नही है जो यह शरीर है, ढाँचा है यही है जीव और यही जानना है, यही भोगता है । इस शरीरके अतिरिक्त जीव कुछ नहीं है यही प्रसङ्ग भ्रा जायगा । तो इस तरह ब्रह्मा तवादी कहते जा रहे हैं कि एकत्व ही वास्तवमे सिद्ध है । प्रत्यक्षसे, धनुमानसे और आगमसे ब्रह्मवाद ही तत्त्व सिद्ध होता है, भिन्न-भिन्न पदार्थ कोई तत्त्व नही है, ऐसा ब्रह्माद्वंतवादीने इसलिए यह प्रकरण रखा कि प्रमाणका स्वरूप कहा जा रहा था कि जो रय और अपूर्व अर्थका निर्णय कराये वह ज्ञान प्रमाण है, तो अद्वैतवाद दर्शनका कथन है कि अर्थ तो अपूर्व और भिन्न-भिन्न कुछ होता ही नहीं । केवल एक ब्रह्म ही सत् है और ये सब पदार्थ मिथ्या है तब इसका बान करना कैसे सत्य कहला येगा ? इस प्रकार अतवादने अपना पक्ष रखा। एक ब्रह्मसाधक प्रमाणके विकल्पोकी मीमासा - अब अद्वैत तत्त्वके सम्वन्धमे भाचार्यदेव कहते हैं कि सारा विश्व एक है, अभेद है ऐसा अभेद जो सिद्ध कर रहे हो, क्या इस वजहसे कर रहे हो कि अभेदको सिद्ध करने वाला कोई प्रमाण है, अथवा इस कारण कह रहे हो कि भेदको सिद्ध करने वाला कोई प्रमाण ही नही है भेदमे वाघा डालने वाला कोई प्रमारण है । दोनो बातोसे भी अभेदकी सिद्धि की नही जा सकती है, जिसमे यह तो कहना युक्त है नही कि भेदकी सिद्धि प्रमाणसे नही है इस कारण एक अभेद ही ब्रह्म है। यह बात तो तुम्हारी इस कारण प्रयुक्त है क्योकि प्रत्यक्ष आदिक भेदके अनुकूल ही पड रहे हैं । हम आखसे या इन्द्रियसे जो कुछ भी जानते है प्रत्यक्षसे स्पष्ट यह सब जुदा जुदा मालुम पड रहा है और फिर भेद माने बिना तो यह भी व्यवस्था नहीं कर सकते कि कौन प्रमाण होता है कौन अप्रभारण होता है। जैसे अभेद प्रमाण है और भेद अप्रमाण है यह कहा तो कुछ प्रमाण होना कुछ प्रमारण होना ये दो चीजे है क्या ? यदि कहो कि ये दो चीजे हैं तो प्रभेद कहाँ रहा, अद्वैत कहाँ रहा ? फिर दो बातें हो गई । यदि कहो कि नही दो बात नही है तो प्रमाणकी अप्रमाण बताये विना सिद्ध नही और अप्रमाणका प्रमाण बताये बिना सिद्धि नही । तो भेद माने बिना तो हम क ई भी मनुष्य अपना सिद्धान्त रख ही नही 'सकते । आखिर यह तो समझना ही होगा कि मेरी बात प्रमारणभूत है इसके अतिरिक्त मन्य प्रमाण है । भेद, अपेक्षा, प्रतिपक्ष धर्म ये तो प्रत्येक तत्त्वके साथ जुड़े हुए है। जहाँ मु हसे "यह है" इतना भी निकला कि उसमे ही यह जुड़ा हुआ है कि यह और कुछ चीज नही है । तो है और नहीं, इनका भेद तो प्रत्येक कथनमे जुडा ही रहता है । कोई कहे कि मेरी बात सच है इसका क्या यह अर्थ नही है कि मेरी बात झूठ नही है ? तो सत्य असत्य, भेद अभेद, सुख दु.ख वष मोक्ष सब कुछ है, द्वैतका निषेध नही कर सकते । सर्वाभेदसाधक प्रमाणका अभाव - - यदि कहो कि अभेदका साधक प्रमाण मौजूद है इस कारण हम अभेद सिद्ध करते है तो पहिली बात तो यह है कि जो सिद्ध करना चाहे और कोई प्रमाण देकर सिद्ध करना चाहे तो जो प्रमाण देंगे वे तो कहलायेगे साधक और जिस वातको सिद्ध करेंगे वह कहलायगा साध्य । यो साध्य और साधकका भेद तो मानना ही पडेगा । साध्य साधक भेद भावके बिना निर्णय ही सम्भव नही फिर अभेद साधक प्रमाणके समान लोगे ? यदि है अमेद साधक प्रमाण तो अभेद हुआ साध्य और प्रमाण हुआ साधक । तो यो अभेद भा गया । भेद के बिना तो कुछ सिद्ध नही किया जा सकता । अभेदके एक व्यक्तिगतत्व व अनेक व्यक्तिगतत्वका विकल्प-आवान्तरसत्तावादी कह रहे हैं कि जो तुमने यह कहा था कि सर्वप्रथम निर्विकल्प प्रत्यक्षमे एकत्व ही ज्ञात होता है कहा था ना, कि जब नेत्र खुले, तो खुलनेक साथ ही सर्वप्रथम जब कि कुछ व्यक्तिगत सत्ता विदित होती है उससे भी पहिले कुछ प्रकाश सा विदित होता है वह परमार्थ सत् है, ब्रह्म है ऐसा जो कहा है तो हमे वतलावी कि वहा जो एकत्व विदित होता है वह एक व्यक्तिय रहने वाला विदित होता है या अनेक व्यतीन सौ बारह ] क्तियोंमे रहनेवाला एकत्व ज्ञात होता है या व्यक्तिमात्रमे रहने वाला एकत्व ज्ञात होता है। यहा प्रश्न यह किया गया है कि जो कोई यह मानता है कि जब हम कुछ भी जानते हैं तो उस जाननेने सर्वप्रथम अभेद एक निर्विकल्प प्रकाश ज्ञात होता है । तो वह एकत्व वह प्रकाश जिसे तुमने एक माना है वह क्या एक व्यक्तिमे नजर आया या अनेक व्यक्तियोमे या व्यक्तिमात्रमें ? एकव्यक्तिगत अभेदके प्ररूपणसे सर्वाद्वितकी असिद्धि उस एकत्वको यदि एक व्यक्तिगत मानोगे तो यह बतलावो कि वह एकत्व फिर सर्वव्यापक है या उस ही एक व्यक्तिमे व्यापक है ? जो एकत्व नजर छाया वह उस ही एक व्यक्तिमे व्यापक है तो विश्वरूप एकत्व कहाँ रहा ? यो वह एक वस्तु विदित हुई मो समय वस्तुओमे एक-एक व्यक्तिगत एकत्व निरखे तन वे सब प्रत्येक पदार्थ न्यारे-न्यारे हुए यदि कहा कि नही, एकत्व एक व्यक्तिगत तो दीना, पर वह सर्वव्यापक दीखा, तो यह तो परस्पर विरुद्ध बात है। सर्वव्यापक हो और फिर एक व्यक्तिमे वैघा हुआ हो यह बात कँपे सम्भव हो सकती है ? तो इससे तुम्हारे अभेद की सिद्धि नहीं हो सकती है। अनेक व्यक्तिगत अभेदके प्ररूपणसे सर्वाद्वितकी प्रसिद्धि - यदि यह कहो कि अनेक व्यक्तियोमें पाया जाने वाला एक अभेद एक्त्व एक स्वरूप जाना तो यह वतलावो कि वह एकत्व व्यक्तियोके आधार रूपये प्रतिभास होता है, ज्ञान मे चाता है या व्यक्तियोका घाघार न करके स्वय हो केवल एकत्व, ब्रह्म ज्ञात होता है। जिस ब्रह्मकी सिद्धि कर रहे हो वह ब्रह्म अनेक व्यक्तियों में पाया जाता है ऐसा मानते हो तो वह ब्रह्म व्यक्तियोके आधारमे रहता हुआ मालूम होता है या किसी भी व्यक्ति के आधारसे न रहकर स्वतंत्र स्वच्छन्द रहता हुआ मालूम होता है। यदि कहो कि व्यक्तियो आधारमे रहता है वह ब्रह्म, तब तो भेद सिद्ध हो गया, क्योंकि प्रत्येक ध्यक्तियोमं वह ब्रह्म रहा भाया । व्यक्ति अधिकररण हैं एकत्व अथवा ब्रह्म आधेय है, जिसे सर्वव्यापी कह रहे हो, लो यो भी यह भेद हुआ और अनेक व्यक्तियोसे भी भेद हुआ भेटकी प्रत्यक्षसिद्धता - किन्ही भी व्यक्तियोका आधार न करके ब्रह्म अपने आप सर्वत्र मौजूद है यह मानोगे तव तो बीचमें, अन्तरालमे वह ब्रह्म प्रतीत होना चाहिए । एक व्यक्ति यहा बैठा एक दो गज दूर बैठा तो वीचमे यह अन्तर क्यो ग्रा जाता । जब ब्रह्म सर्वव्यापी है तो वह आत्मा गर्वत्र रहना चाहिए। तो इस प्रकार भव तो प्रत्यक्षके ही विरुद्ध है। जो भौधी सी बान है उसका निषेध करके एक कल्पित दो मोर ले जाना यह कहाकी वृद्धिमानी है। धौर, देखिये जितने भी कार्य होते है छः राव व्यक्तियोंसे होते हैं, भेदसे या जाति नहीं होते। जैसे कोई कहे कि यह काम पल्दी कराओ। कैसे कराये मनुष्य जातिसे भगवो तो मनुष्य जानि करेगी क्या ? अरे वसे तो मनुष्य होगा। तो जो नाम प्यारो हंगा उम काममे तुमने मनुष्य जातिकी कल्पना की। व्यक्तिकी कल्पना नही होती है कल्पना होती है जातिको अर्थक्रिया याने कार्यका होना व्यक्तिसे होता है जातिसे नही होता । कोई कहे कि जावो मनभर दूध लावो । कहाँसे लायें ? अरे गौ जातिसे दूध लावो । भला बतलावो गौ जाति से भी दूध निकलता है क्या ? अरे दूध तो गायोसे निकाला जायगा । तो कोई भी काम हो वह पदार्थसे बनता है, व्यक्तिसे बनता है जातिकी तो सदृशतासे कल्पनावी जाती है। तो इस प्रकार समस्त पदार्थों मे जो एक सत् स्वरूपकी कल्पना की जाती है वह सदृशतासे की जाती है । अथंत्रियासे पदार्थके अस्तित्वकी प्रसिद्धि भैया । चूकि सभी पदार्थ अपना अपना अस्तित्त्व रखते है अतएव अस्तित्त्वका स्वरूप लेकर एक ऐसी जाति बन गई कि सत् एकस्वरूप है। केवल अस्तित्त्वमे भेद क्या ? आपके शरीरमे, हाथ पैरमे आपके भीतरके कपात्र आदिक भावोमे फर्क है लेकिन कुछ भी होता है है मात्रमे क्या फर्क है ? तो वह है' मात्र जब सब पदाथों मे एक समान है तो इस सहश्ताको लेकर एक सत् स्वरूप माना जा सकता है। प्रत्येक पदार्थकी व्यवस्था जातिमे भी नही होती किन्तु परिणमनसे होती है। अर्थ त्रिया अर्थ से होती है। प्रत्येक पदार्थ अपना स्वरूप लिये हुए है, अपने ही प्रदेशमे रहता है, उसका गुरण शाश्वत है। वह भी उस पदार्थमे है, उसकी पर्याय परिणत हं ती हैं वे भी उस पदार्थके प्रदेशमे हैं पदार्थ से वाहर पदाथ का कोई काम नही है। परिणमनका ही नाम अर्यक्रिया है। जो परिणमन जितनेमे होना ही पड़े, जितनेसे बाहर कभी न हो बस उसका नाम एक उदार्थ है । पदार्थकी मर्यादाका कारण भी परिणमन है। जैसे मेरे क्रं धादिक परिगमन मेरे ही प्रदेशमे हो सकते हैं और मेरेसे बाहर एक प्रदेशमात्र भी अन्यत्र नहीं हो सकते, इस कारण यह मैं एक हू । इसी प्रकार प्रत्येक हृदार्थोंमे भी यही बात है। इससे तो पदार्थ ज्ञात होते है, पर जातिसे पदार्थकी व्यवस्था नही है। जाति कल्पित है, व्यक्ति कल्पित नही है । सिद्धान्तका मौलिक प्रयोजन यद्यपि ब्रह्माद्वैतवादका प्रयोजन भी यही है कि किसी प्रकार रागद्वेष मंह छूटे, रागद्वेष मोहकी वेदना ही व स्तिवक विपदा है । जीवोपर और कुछ विपदा नहीं है। ये बाह्य पदार्थ हैं, आज कोई अपने पास है, क्ल रहे या न रहे, यह जीवपर कोई विपदाकी बात नही है । परपदार्थमे जो मोहभाव वना, अज्ञान बना, रागद्वैप बना यह ही एक विपदा है। इस विपदासे वचना सभी दार्शनिकोने इष्ट माना है। किन्होने ईप्वरकी कृपापर अपनी विपदाका छूटना माना है तो ईश्वर भक्तिमे ही इस शैल से तन्मय ह ते है कि हे प्रभो । तू ही मेरा पिता है रक्षक है। मेरी खबर ले इस प्रकार भक्तिमे लीन होते है । यहाँ इस ब्रह्माद्वैत सिद्धान्तमै मोह रागद्वैष दूर करनेका यह उपाय सोचा गया है कि यह मानें कि दुनियामे ये सब पदार्थ कुछ है ही नहीं, मादास्प है, इन्द्र-जाल है, जब ये कोई वास्तविक चीज नही है तो फिर इनसे रागद्वेष मोह क्यो किया जायगा ? और ऐसे इन पदार्थों से अपना चित्त हटानेके लिये कुछ तो अाधार चाहिए जिसमे अपना चित्त लगाये । नो जिसमे उपयोग देनेनर इन वाह्य पदार्थोसे हमारा उपयोग हट जाय, ऐसा कोई बताना अवश्य पडेगा । यह उपयोग हटने - हटने का ही काम नहीं करता बल्कि एक दृष्टिमे देखिये कि उपयोगका काम हटना नहीं है किन्तु लगना ही है। जिस ओर यह उपयोग लगा उसका ही नाम है दूसरी जगहसे हटना कहनाया । उपयोगका हटना काम नही है, लगना काम है । तो इन भिन्न-भिन्न पदार्थों से उपयोग हटाये इसके लिए एक अद्वैत सत्स्वरूप अनिर्वचनीय ब्रह्म है, ऐसे अद्भुत, अजानी, अविकल्प पदार्थों की ओर उपयोगको ले गए तो वहाँ उपयोग ले जाकर फिर ये भेदवादके उपयोग न टिक सकेंगे यद्यपि उद्देश्य तो अद्वैतवादका भी उत्तम है' कौन जीव सुख नहीं चाहता ? प्रत्येक जीव सुख चाहता है और जो जितने प्रयत्न करता है वह अपने सुखके लिए करता है, किन्नु वात यह देखना होगा कि जो प्रयत्न किये जा रहे है वे सही है अथवा नहीं है। बाह्यके उपयोगमे निर्विकल्प स्थितिकी असभवता -अब इस प्रसङ्गमे निरखिये - जो सत् नही है उसका कुछ भी परिरगमन नही होता, न मायारूप न परमार्थरूप । मैं हूँ ऐसा अपने आपमे अपना निर्णय है, यह मै निर्विकल्प होना चाहूँ तो कुछ अपने आपमे ही ऐसा परमार्थतत्त्व खोजना होगा कि जिसमे लगनेपर फिर विकल्प सब समाप्त हो जाये । यो अपने मापने चैतन्य ब्रह्म परम ब्रह्मस्वरूपको निरखा जाय तो खुद ज्ञान हो और खुदके सहजस्वरूपमे मग्न होना चाहे तो यह बात तो चिग सकनेकी बन जायी लेकिन हम सारे विश्वका ठेका लें, इन सब पदार्थोंका मूल कोई एक ब्रह्म है ऐसा निरखकर हम सारे लोकमे एक ब्रह्म है ऐसा निरखें तो स्वसे दूर ही रहे । चाहे किसी रूपमे तत्त्वको रखे । जब हमारा चित्त हमारा उपयोग हममे न रह सका, वाहर रहा तो ऐसे उपायसे निर्विकल्प स्थितिकी भाशा करना असम्भव है। निर्विकल्प स्थिति नहीं बन सकती है । यहाँ आत्माद्वैतवादी यह कह रहे हैं कि लोकमे सब कुछ एक ब्रह्म ही है । जो कुछ ये भेद नजर भा रहे है ये सब कल्पित है, मायारूप हैं। तब उनसे पूछा जा रहा है कि यह जो एकत्व है, जो एकाकारता है वह एक व्यक्तिके जाननेके माध्यमसे जाना जा रहा है या समस्त व्यक्तियोका हम ग्रहरण करके जान रहे है कि यह ब्रह्म, यह एकत्व समस्त पदार्थोंमे मौजूद है । यदि कहोगे कि हम एक व्यक्तिको ग्रहण करके ही इस लोकव्यापी एकत्वको जान जायेंगे तो यह विरोधकी बात है कि हम एक व्यक्तिको ग्रहण करें और सर्वव्यापक एकत्वको जान जायें । एकाकारता तो उसका नाम है कि भनेक व्यक्तियोमे कुछ एकरूप हो उसे ही कह सकेंगे सर्वव्यापक एक । पर तुम तो एक व्यक्तिको ग्रहण कर रहे तो अनेक व्यक्तियोमे अनुयायीरूपसे रह सकने वाला कोई एकत्व एक व्यक्तिको ग्रहण करनेसे कैसे जान सकेगा । जैसे एक गोको देखनेसे उसकी एक जातिका ज्ञान नही हो सकता क्योकि गौ जातिका अर्थ क्या है कि समस्त गायोमे |
- #डॉक्टरKidney Transplant में डॉक्टरों का कमाल, नवजात के कारण 58 साल की महिला को मिला 'नया जीवन'
वेबसाइट 'ब्रिस्बेन टाइम्स डॉट कॉम डॉट एयू' के मुताबिक न्यायाधीश जॉन बायर्न ने 60 वर्षीय पटेल से कहा, "ज्यूरी के फैसले को देखते हुए आपके अपराध की गंभीरता और चार मरीजों के इलाज में आपके द्वारा की गई लगातार उपेक्षा से इंकार नहीं किया जा सकता। "
पटेल को प्रत्येक हत्या के मामले में सात साल की कैद और शारीरिक हानि पहुंचाने के लिए तीन साल की सजा दी गई है। ये सजाएं साथ में चलेंगी। ज्यूरी द्वारा सात दिन के विचार-विमर्श के बाद मंगलवार को ब्रिस्बेन सुप्रीम कोर्ट में यह फैसला दिया।
पटेल बुंडाबर्ग बेस अस्पताल में 2003 से 2005 के बीच शल्य चिकित्सा प्रमुख थे। भारत में जन्मे और अमेरिका में प्रशिक्षित पटेल का कहना है कि वह 46 वर्षीय जेम्स फिलिप्स, 77 वर्षीय गेरी केम्प्स और 75 वर्षीय मेरविन मोरिस की हत्या के दोषी नहीं हैं।
पटेल द्वारा की गई शल्यचिकित्सा के बाद इन तीनों की मौत हो गई थी। उनका कहना है कि वह ईयान वेवल्स को शारीरिक हानि पहुंचाने के भी दोषी नहीं हैं। पटेल ने अक्टूबर 2004 में ईयान की स्वस्थ आंत निकाल दी थी।
| - #डॉक्टरKidney Transplant में डॉक्टरों का कमाल, नवजात के कारण अट्ठावन साल की महिला को मिला 'नया जीवन' वेबसाइट 'ब्रिस्बेन टाइम्स डॉट कॉम डॉट एयू' के मुताबिक न्यायाधीश जॉन बायर्न ने साठ वर्षीय पटेल से कहा, "ज्यूरी के फैसले को देखते हुए आपके अपराध की गंभीरता और चार मरीजों के इलाज में आपके द्वारा की गई लगातार उपेक्षा से इंकार नहीं किया जा सकता। " पटेल को प्रत्येक हत्या के मामले में सात साल की कैद और शारीरिक हानि पहुंचाने के लिए तीन साल की सजा दी गई है। ये सजाएं साथ में चलेंगी। ज्यूरी द्वारा सात दिन के विचार-विमर्श के बाद मंगलवार को ब्रिस्बेन सुप्रीम कोर्ट में यह फैसला दिया। पटेल बुंडाबर्ग बेस अस्पताल में दो हज़ार तीन से दो हज़ार पाँच के बीच शल्य चिकित्सा प्रमुख थे। भारत में जन्मे और अमेरिका में प्रशिक्षित पटेल का कहना है कि वह छियालीस वर्षीय जेम्स फिलिप्स, सतहत्तर वर्षीय गेरी केम्प्स और पचहत्तर वर्षीय मेरविन मोरिस की हत्या के दोषी नहीं हैं। पटेल द्वारा की गई शल्यचिकित्सा के बाद इन तीनों की मौत हो गई थी। उनका कहना है कि वह ईयान वेवल्स को शारीरिक हानि पहुंचाने के भी दोषी नहीं हैं। पटेल ने अक्टूबर दो हज़ार चार में ईयान की स्वस्थ आंत निकाल दी थी। |
मुरैना। ओलावृष्टि व बारिश से प्रभावित फसलों को लेकर किसानों ने मंगलवार को जिले में स्टेट हाईवे पर आठ जगह चक्काजाम किया। इसके अलावा एक जगह ग्रामीण क्षेत्र के मार्ग पर चक्काजाम किया गया। पोरसा के गढ़िया गांव के पास सुबह सात बजे से लगे चक्काजाम में नौ बजे पहुंचे अंबाह विधायक सत्यप्रकाश से किसानों ने माइक छीन लिया और कहा कि यहां से चले जाओ। उधर जिले में जगह-जगह हुए चक्काजाम कलेक्टर विनोद शर्मा व एसडीएम प्रदीप तोमर ने किसानों को सही सर्वे का आश्वासन देखकर खुलवाए। जिले के कुछ गांवों से किसान ओला प्रभावित फसलें लेकर मुरैना कलेक्टोरेट पर आए। दो गांवों के किसान कलेक्टर बंगले पर भी पहुंचे।
गढ़िया गांव के पास स्टेट हाईवे पर ट्रैक्टर लगाकर चक्काजाम किया गया। यहां एसडीओपी किशोर सिंह भदौरिया पहुंचे। फिर नौ बजे के करीब अंबाह विधायक सत्यप्रकाश पहुंचे। इसके बाद पोरसा तहसीलदार राजीव समाधिया आ गए। साथ ही अंबाह तहसीलदार मनीषा कौल भी मौके पर आईं। विधायक को देखकर यहां नारेबाजी होने लगी। जब विधायक सत्यप्रकाश ने माइक पकड़कर कुछ बोलना चाहा तो गुस्साए किसानों ने उनके हाथ से माइक छीन लिया। किसानों ने विधायक से कहा कि यहां से चले जाओ। अप्रिय स्थिति देख एसडीओपी भदौरिया ने कहा कि विधायकजी की बात तो सुन लीजिए। तब किसान बोले कि एसडीओपी साहब आप को जो कहना है कहिए, लेकिन विधायक को नहीं बोलने देंगे। तब विधायक यहां से अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। किसान चिल्ला रहे थे कि विधायक ने पिछले साल भी अपने गांव बुधारा के किसानों को मुआवजा दिलवाया जबकि प्रेमपुरा व गढ़िया गांव के किसानों का नुकसान ज्यादा था, उन्हें मुआवजा नहीं मिला। जबकि प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य व तब कीं कलेक्टर शिल्पा गुप्ता भी मेंहदोरा गांव तक में कह गई थीं कि सभी को मुआवजा मिलेगा, लेकिन बेटियों के विवाह तक किसान तरस गए।
| मुरैना। ओलावृष्टि व बारिश से प्रभावित फसलों को लेकर किसानों ने मंगलवार को जिले में स्टेट हाईवे पर आठ जगह चक्काजाम किया। इसके अलावा एक जगह ग्रामीण क्षेत्र के मार्ग पर चक्काजाम किया गया। पोरसा के गढ़िया गांव के पास सुबह सात बजे से लगे चक्काजाम में नौ बजे पहुंचे अंबाह विधायक सत्यप्रकाश से किसानों ने माइक छीन लिया और कहा कि यहां से चले जाओ। उधर जिले में जगह-जगह हुए चक्काजाम कलेक्टर विनोद शर्मा व एसडीएम प्रदीप तोमर ने किसानों को सही सर्वे का आश्वासन देखकर खुलवाए। जिले के कुछ गांवों से किसान ओला प्रभावित फसलें लेकर मुरैना कलेक्टोरेट पर आए। दो गांवों के किसान कलेक्टर बंगले पर भी पहुंचे। गढ़िया गांव के पास स्टेट हाईवे पर ट्रैक्टर लगाकर चक्काजाम किया गया। यहां एसडीओपी किशोर सिंह भदौरिया पहुंचे। फिर नौ बजे के करीब अंबाह विधायक सत्यप्रकाश पहुंचे। इसके बाद पोरसा तहसीलदार राजीव समाधिया आ गए। साथ ही अंबाह तहसीलदार मनीषा कौल भी मौके पर आईं। विधायक को देखकर यहां नारेबाजी होने लगी। जब विधायक सत्यप्रकाश ने माइक पकड़कर कुछ बोलना चाहा तो गुस्साए किसानों ने उनके हाथ से माइक छीन लिया। किसानों ने विधायक से कहा कि यहां से चले जाओ। अप्रिय स्थिति देख एसडीओपी भदौरिया ने कहा कि विधायकजी की बात तो सुन लीजिए। तब किसान बोले कि एसडीओपी साहब आप को जो कहना है कहिए, लेकिन विधायक को नहीं बोलने देंगे। तब विधायक यहां से अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। किसान चिल्ला रहे थे कि विधायक ने पिछले साल भी अपने गांव बुधारा के किसानों को मुआवजा दिलवाया जबकि प्रेमपुरा व गढ़िया गांव के किसानों का नुकसान ज्यादा था, उन्हें मुआवजा नहीं मिला। जबकि प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य व तब कीं कलेक्टर शिल्पा गुप्ता भी मेंहदोरा गांव तक में कह गई थीं कि सभी को मुआवजा मिलेगा, लेकिन बेटियों के विवाह तक किसान तरस गए। |
इस साल नई दिल्ली के राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथी के रूप में इजिप्ट यानी मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी हैं। वहीं कई लोगों के मन में यह सवाल है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुके भारत ने आखिर इतने अहम मौके पर चीफ गेस्ट के तौर पर अल सीसी को ही क्यों चुना। बता दें कि कोविड-19 की शुरुआत से अब तक इजिप्ट करीब-करीब दिवालिया होता नजर आया है। कुल विदेशी कर्ज 170 अरब डॉलर और महंगाई दर करीब 25% हो चुकी है।
मिस्र जोकि खाड़ी देशों के बीच अपनी अच्छी पकड़ रखता था, इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मिस्र की मुद्रा पाउंड पिछले साल मार्च में अपना मूल्य आधा खो चुकी है। परन्तु भारत ने मिस्र को लेकर अपना दिल बढ़ा लिया है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिस्र को आमंत्रित कर रहा है। आजादी के बाद का इतिहास देखें तो ये पहली बार होगा जब इजिप्ट का कोई लीडर रिपब्लिड डे सेरेमनी में चीफ गेस्ट बन रहा है।
राष्ट्रपति के साथ 120 सदस्यों का एक दल होगा जो 26 जनवरी को परेड में कर्तव्य पथ पर मार्च करेगा। देखा जाए तो भारत चाहता तो किसी भी देश में राष्ट्रपति को आमंत्रित कर सकता था लेकिन भारत ने सबको छोड़ मिस्र के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब मिस्र के राष्ट्रपति भारत आ रहे हैं। 2015 में वो पहली बार भारत आए थे। आगामी यात्रा राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी की तीसरी भारत यात्रा होगी।
गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव होना उनके लिए भी सर्वोच्च सम्मान होता है। मुख्य अतिथि को भारत के राष्ट्रपति के सामने गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। गणतंत्र दिवस की शाम को देश के राष्ट्रपति उनके लिए विशेष रिसेप्शन का आयोजन करते हैं। वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान में राजघाट पर श्रद्धांजलि देते हैं और उनके सम्मान में प्रधानमंत्री विशेष आयोजन करते हैं जहां उप-राष्ट्रपति और विदेश मंत्री मुख्य अतिथि से मुलाकात करते हैं। विदेशी मेहमान को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाने की तैयारी आयोजन से 6 महीने पहले से शुरू हो जाती है।
"सेना को सबूत देने की जरूरत नहीं", राहुल ने दिग्विजय सिंह पर कसा तंज !
| इस साल नई दिल्ली के राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथी के रूप में इजिप्ट यानी मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी हैं। वहीं कई लोगों के मन में यह सवाल है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुके भारत ने आखिर इतने अहम मौके पर चीफ गेस्ट के तौर पर अल सीसी को ही क्यों चुना। बता दें कि कोविड-उन्नीस की शुरुआत से अब तक इजिप्ट करीब-करीब दिवालिया होता नजर आया है। कुल विदेशी कर्ज एक सौ सत्तर अरब डॉलर और महंगाई दर करीब पच्चीस% हो चुकी है। मिस्र जोकि खाड़ी देशों के बीच अपनी अच्छी पकड़ रखता था, इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मिस्र की मुद्रा पाउंड पिछले साल मार्च में अपना मूल्य आधा खो चुकी है। परन्तु भारत ने मिस्र को लेकर अपना दिल बढ़ा लिया है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिस्र को आमंत्रित कर रहा है। आजादी के बाद का इतिहास देखें तो ये पहली बार होगा जब इजिप्ट का कोई लीडर रिपब्लिड डे सेरेमनी में चीफ गेस्ट बन रहा है। राष्ट्रपति के साथ एक सौ बीस सदस्यों का एक दल होगा जो छब्बीस जनवरी को परेड में कर्तव्य पथ पर मार्च करेगा। देखा जाए तो भारत चाहता तो किसी भी देश में राष्ट्रपति को आमंत्रित कर सकता था लेकिन भारत ने सबको छोड़ मिस्र के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब मिस्र के राष्ट्रपति भारत आ रहे हैं। दो हज़ार पंद्रह में वो पहली बार भारत आए थे। आगामी यात्रा राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी की तीसरी भारत यात्रा होगी। गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव होना उनके लिए भी सर्वोच्च सम्मान होता है। मुख्य अतिथि को भारत के राष्ट्रपति के सामने गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। गणतंत्र दिवस की शाम को देश के राष्ट्रपति उनके लिए विशेष रिसेप्शन का आयोजन करते हैं। वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान में राजघाट पर श्रद्धांजलि देते हैं और उनके सम्मान में प्रधानमंत्री विशेष आयोजन करते हैं जहां उप-राष्ट्रपति और विदेश मंत्री मुख्य अतिथि से मुलाकात करते हैं। विदेशी मेहमान को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाने की तैयारी आयोजन से छः महीने पहले से शुरू हो जाती है। "सेना को सबूत देने की जरूरत नहीं", राहुल ने दिग्विजय सिंह पर कसा तंज ! |
पूर्व Apple कार्यकारी ट्रिप हॉकिन्स, जिन्होंने सबसे अधिक बिकने वाली स्पोर्ट्स वीडियोगेम फ्रैंचाइज़ी फीफा के पीछे कंपनी की स्थापना की, एक वेब3 स्टार्टअप में शामिल हो रहे हैं, जो एक्सी इन्फिनिटी जैसे शीर्ष ब्लॉकचेन गेम को लेना चाहते हैं।
के संस्थापक इलेक्ट्रॉनिक आर्ट हॉकिन्स ने एक साक्षात्कार में रॉयटर्स को बताया, गेम्स फॉर ए लिविंग (GFAL) के सह-संस्थापक और रणनीति प्रमुख के रूप में शामिल होंगे।
GFAL कंसोल, पर्सनल कंप्यूटर और में ब्लॉकचेन तकनीक के साथ संगत शीर्षक प्रकाशित करता है स्मार्टफोन्स - आमतौर पर कहा जाता है वेब3.
Web3 गेमिंग के लिए रुचि पिछले एक साल में बढ़ी है क्योंकि इसे और अधिक आकर्षित करने के लिए कहा जाता है cryptocurrency उपयोगकर्ता। खिलाड़ी ऐसे खेलों में इन-गेम सामान खरीद सकते हैं, बेच सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं।
हांगकांग स्थित ब्लॉकचेन गेमिंग डेवलपर अनिमोका ब्रांड्स, जो लोकप्रिय एनएफटी गेम एक्सी इन्फिनिटी का समर्थन करता है, ने 2022 में $500 मिलियन (लगभग 4,150 करोड़ रुपये) से अधिक जुटाए।
हालाँकि सुरक्षा को लेकर चिंताएँ हैं क्योंकि "साइबर वॉलेट" हैकिंग के लिए अधिक प्रवण हैं, डेवलपर्स भी अपने प्लेटफ़ॉर्म में विविधता लाने और उच्च ऐप-स्टोर शुल्क के बीच विविधता लाने की तलाश कर रहे हैं।
2021 में पूर्व किंग एक्जीक्यूटिव मैनल सॉर्ट द्वारा स्थापित, बार्सिलोना स्थित जीएफएएल का पिछले साल अपने नवीनतम फंडिंग राउंड के बाद 13. 2 मिलियन यूरो (लगभग 115 करोड़ रुपये) का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन था।
जैसा कि कुछ दिन पहले भारतीय उद्योग के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट किया था विश्वास करना कि एनएफटी परियोजनाएं 2023 में वेब3 क्षेत्र में तूफान ला देंगी। वज़ीरएक्स के उपाध्यक्ष राजगोपाल मेनन ने कहा कि प्रौद्योगिकी दुनिया भर में औद्योगिक प्रतिद्वंद्विता और प्रचार गतिविधियों को तेज करेगी।
स्मार्टफोन कंपनियों जैसे हार्डवेयर निर्माताओं से भी उम्मीद की जाती है कि वे अगले साल से अपने उत्पादों को और अधिक 'वेब3-फ्रेंडली' बनाने के लिए बदलाव करेंगे।
बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में सैमसंग, श्याओमी, रियलमी, वनप्लस, ओप्पो और अन्य कंपनियों के नवीनतम लॉन्च और समाचारों के विवरण के लिए, हमारे यहां जाएं। MWC 2023 हब.
| पूर्व Apple कार्यकारी ट्रिप हॉकिन्स, जिन्होंने सबसे अधिक बिकने वाली स्पोर्ट्स वीडियोगेम फ्रैंचाइज़ी फीफा के पीछे कंपनी की स्थापना की, एक वेबतीन स्टार्टअप में शामिल हो रहे हैं, जो एक्सी इन्फिनिटी जैसे शीर्ष ब्लॉकचेन गेम को लेना चाहते हैं। के संस्थापक इलेक्ट्रॉनिक आर्ट हॉकिन्स ने एक साक्षात्कार में रॉयटर्स को बताया, गेम्स फॉर ए लिविंग के सह-संस्थापक और रणनीति प्रमुख के रूप में शामिल होंगे। GFAL कंसोल, पर्सनल कंप्यूटर और में ब्लॉकचेन तकनीक के साथ संगत शीर्षक प्रकाशित करता है स्मार्टफोन्स - आमतौर पर कहा जाता है वेबतीन. Webतीन गेमिंग के लिए रुचि पिछले एक साल में बढ़ी है क्योंकि इसे और अधिक आकर्षित करने के लिए कहा जाता है cryptocurrency उपयोगकर्ता। खिलाड़ी ऐसे खेलों में इन-गेम सामान खरीद सकते हैं, बेच सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं। हांगकांग स्थित ब्लॉकचेन गेमिंग डेवलपर अनिमोका ब्रांड्स, जो लोकप्रिय एनएफटी गेम एक्सी इन्फिनिटी का समर्थन करता है, ने दो हज़ार बाईस में पाँच सौ डॉलर मिलियन से अधिक जुटाए। हालाँकि सुरक्षा को लेकर चिंताएँ हैं क्योंकि "साइबर वॉलेट" हैकिंग के लिए अधिक प्रवण हैं, डेवलपर्स भी अपने प्लेटफ़ॉर्म में विविधता लाने और उच्च ऐप-स्टोर शुल्क के बीच विविधता लाने की तलाश कर रहे हैं। दो हज़ार इक्कीस में पूर्व किंग एक्जीक्यूटिव मैनल सॉर्ट द्वारा स्थापित, बार्सिलोना स्थित जीएफएएल का पिछले साल अपने नवीनतम फंडिंग राउंड के बाद तेरह. दो मिलियन यूरो का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन था। जैसा कि कुछ दिन पहले भारतीय उद्योग के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट किया था विश्वास करना कि एनएफटी परियोजनाएं दो हज़ार तेईस में वेबतीन क्षेत्र में तूफान ला देंगी। वज़ीरएक्स के उपाध्यक्ष राजगोपाल मेनन ने कहा कि प्रौद्योगिकी दुनिया भर में औद्योगिक प्रतिद्वंद्विता और प्रचार गतिविधियों को तेज करेगी। स्मार्टफोन कंपनियों जैसे हार्डवेयर निर्माताओं से भी उम्मीद की जाती है कि वे अगले साल से अपने उत्पादों को और अधिक 'वेबतीन-फ्रेंडली' बनाने के लिए बदलाव करेंगे। बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में सैमसंग, श्याओमी, रियलमी, वनप्लस, ओप्पो और अन्य कंपनियों के नवीनतम लॉन्च और समाचारों के विवरण के लिए, हमारे यहां जाएं। MWC दो हज़ार तेईस हब. |
ये थाई अंदाज के कॉर्न पकोड़े बनाने बेहद आसान हैं और इतने स्वादिष्ट बनते हैं की मेहमान इन्हे खाएंगे तो वो आपकी कुकिंग के फैन हो जाएंगे और बहुत तारीफ करेंगे।
Corn Pakoda: आये दिन कई नई नई रेसिपीज सुनने को मिलती हैं। जो बेहद इंटरेस्टिंग, हेल्थी, इजी और कम समय में बन जाने वाली होती हैं जिनका टास्ते भी लाजवाब होता है। ये रेसिपीज ज्यादातर अलग अलग देशों की होती हैं जहां लोग कम समय में बनने वाले स्वादिष्ट और टेस्टी खाना पसंद करते हैं। इन्ही में से एक रेसिपी है कॉर्न पकोड़ा वो भी थाई अंदाज में।
यह एक ऐसी रेसिपी जो कोई भी जल्दबाज़ी में खाना बनानेवाले को ज़रूर पसंद आएगी। बड़े बड़े शेफ को भी थाई कॉर्न पकौड़ा रेसिपी बेहद पसंद आती है। जो बनाने में बेहद आसान है और खाने में भी एकदम स्वादिष्ट। मेहमान आने से पहले ही आप इसे फ्राय करके रख सकते हैं और आने के बाद बस इसे अवन में गर्म करके गरम गरम परोसें।
ये थाई अंदाज के कॉर्न पकोड़े बनाने बेहद आसान हैं और इतने स्वादिष्ट बनते हैं की मेहमान इन्हे खाएंगे तो वो आपकी कुकिंग के फैन हो जाएंगे और बहुत तारीफ करेंगे। ये थाई कॉर्न पकौड़े उन बच्चों को भी काफी पसंद आएंगे जिनको खाना खिलने के लिए आपको काफी म्हणत मशक्कत करनी पड़ती है। आइये आपको बताते हैं की ये स्वादिष्ट, इजी और हेल्थी रेसिपी आखिर कैसे बनेगी और इसको बनाने के लिए किन किन चीजों की जरूरत पड़ेगी।
- लाल और हरी शिमला मिर्च लेकर दोनों को छोटे टुकड़ो में काट लें।
- एक कटोरे लें, उसमे टेम्पुरा आटा, थाई सीज़निंग सॉस, नमक स्वादानुसार और स्वादानुसार नींबू का रस डालकर मिला लें।
- कटी हुई सभी सब्जियों के साथ हर्ब्स डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें।
- इस मिक्सचर में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए, इसे अपने हाथों से मिलाना शुरू करें।
- हाथो के इस्तेमाल से ये और भी अच्छी तरह से मिक्स होगा और इनमे कोई लम्पस नहीं रहेंगे। साथ ही इस मिक्सचर को थोड़ा-सा ढीला ही रखें।
- इस मिक्सचर से छोटे आकार के अलग बॉल बनाएं और हथेली की मदद से उन्हें एक अच्छा सा शेप दे। जिससे वो देखने में भी अच्छे लगें।
- एक कढ़ाई लें और उसमे तेल डालें।
- मीडियम हीट पर तेल को गरम कर लें, फिर इसमें एक एक करके मिक्सचर से बनाई हुई बॉल डालें।
- ध्यान रहे, इन्हे तेल में डालते समय थोड़ा दूर खड़े हों, ताकि तेल की छींटे आपके चेहरे या हाथ में न पाएं।
- इसके बाद कॉर्न पकौड़ा को कुरकुरा और सुनहरा होने तक अच्छी तरह से डीप फ्राई कर लें।
- थाई अंदाज के कॉर्न पकौड़े बनाकर बिलकुल तैयार हैं। अब इन्हें स्वीट चिल्ली सॉस या अपनी पसंद की किसी भी ड्रेसिंग के साथ आप परोस सकते हैं।
| ये थाई अंदाज के कॉर्न पकोड़े बनाने बेहद आसान हैं और इतने स्वादिष्ट बनते हैं की मेहमान इन्हे खाएंगे तो वो आपकी कुकिंग के फैन हो जाएंगे और बहुत तारीफ करेंगे। Corn Pakoda: आये दिन कई नई नई रेसिपीज सुनने को मिलती हैं। जो बेहद इंटरेस्टिंग, हेल्थी, इजी और कम समय में बन जाने वाली होती हैं जिनका टास्ते भी लाजवाब होता है। ये रेसिपीज ज्यादातर अलग अलग देशों की होती हैं जहां लोग कम समय में बनने वाले स्वादिष्ट और टेस्टी खाना पसंद करते हैं। इन्ही में से एक रेसिपी है कॉर्न पकोड़ा वो भी थाई अंदाज में। यह एक ऐसी रेसिपी जो कोई भी जल्दबाज़ी में खाना बनानेवाले को ज़रूर पसंद आएगी। बड़े बड़े शेफ को भी थाई कॉर्न पकौड़ा रेसिपी बेहद पसंद आती है। जो बनाने में बेहद आसान है और खाने में भी एकदम स्वादिष्ट। मेहमान आने से पहले ही आप इसे फ्राय करके रख सकते हैं और आने के बाद बस इसे अवन में गर्म करके गरम गरम परोसें। ये थाई अंदाज के कॉर्न पकोड़े बनाने बेहद आसान हैं और इतने स्वादिष्ट बनते हैं की मेहमान इन्हे खाएंगे तो वो आपकी कुकिंग के फैन हो जाएंगे और बहुत तारीफ करेंगे। ये थाई कॉर्न पकौड़े उन बच्चों को भी काफी पसंद आएंगे जिनको खाना खिलने के लिए आपको काफी म्हणत मशक्कत करनी पड़ती है। आइये आपको बताते हैं की ये स्वादिष्ट, इजी और हेल्थी रेसिपी आखिर कैसे बनेगी और इसको बनाने के लिए किन किन चीजों की जरूरत पड़ेगी। - लाल और हरी शिमला मिर्च लेकर दोनों को छोटे टुकड़ो में काट लें। - एक कटोरे लें, उसमे टेम्पुरा आटा, थाई सीज़निंग सॉस, नमक स्वादानुसार और स्वादानुसार नींबू का रस डालकर मिला लें। - कटी हुई सभी सब्जियों के साथ हर्ब्स डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें। - इस मिक्सचर में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए, इसे अपने हाथों से मिलाना शुरू करें। - हाथो के इस्तेमाल से ये और भी अच्छी तरह से मिक्स होगा और इनमे कोई लम्पस नहीं रहेंगे। साथ ही इस मिक्सचर को थोड़ा-सा ढीला ही रखें। - इस मिक्सचर से छोटे आकार के अलग बॉल बनाएं और हथेली की मदद से उन्हें एक अच्छा सा शेप दे। जिससे वो देखने में भी अच्छे लगें। - एक कढ़ाई लें और उसमे तेल डालें। - मीडियम हीट पर तेल को गरम कर लें, फिर इसमें एक एक करके मिक्सचर से बनाई हुई बॉल डालें। - ध्यान रहे, इन्हे तेल में डालते समय थोड़ा दूर खड़े हों, ताकि तेल की छींटे आपके चेहरे या हाथ में न पाएं। - इसके बाद कॉर्न पकौड़ा को कुरकुरा और सुनहरा होने तक अच्छी तरह से डीप फ्राई कर लें। - थाई अंदाज के कॉर्न पकौड़े बनाकर बिलकुल तैयार हैं। अब इन्हें स्वीट चिल्ली सॉस या अपनी पसंद की किसी भी ड्रेसिंग के साथ आप परोस सकते हैं। |
Romeo And Juliet Allegations: साल 1968 की हिट फिल्म 'रोमियो एंड जूलियट में लीड रोल प्ले करने वाले ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली और फिल्म निर्माता कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स पर आरोप लगाए हैं. उन्हें कहा है कि धोखे से उनसे न्यूड सिन्स करवाए गए और उनका यौन शोषण किया गया था.
Olivia Hussey Leonard Whiting Sued Film Director For 500 Million Dollar: सच्चे प्यार की कहानियों में शामिल रोमियो एंड जुलिएट का नाम तो आपने जरूर सुना होगा. रोमियो और जूलिएट के किरदारों पर कई फिल्में बन चुकी हैं. हॉलीवुड के फिल्मकार निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली और पैरामाउंट पिक्चर्स ने साल 1968 में 'रोमियो एंड जूलियट फिल्म का निर्माण किया था. दो यंग कलाकारों को फिल्म में रोमियो और जूलिएट की भूमिका निभाने का मौका मिला. ये फिल्म उस वक्त की बेहद कामयाब फिल्म थी, लेकिन अब 55 साल बाद फिल्म के निर्देशक जिनकी मौत हो चुकी है और फिल्म निर्माण कंपनी पर 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा के मुआवजा का मुकदमा दायर किया गया है. जी हां ये मुकदमा किसी और ने नहीं बल्कि रोमियो और जुलिएट कर रोल प्ले करने वाले दोनों नाबालिग कलाकार ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने दायर किया है. दोनों कलाकार अब बूढ़े हो चुके हैं. आरोप है कि फिल्म में धोखे से उनका न्यूड शूट किया गया था.
दरअसल फिल्म 'रोमियो एंड जूलियट में मुख्य किरदार ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग फिल्म में धोखे से न्यूड सीन शूट करवाने का आरोप लगाया है. उस वक्त दोनों की उम्र 15 और 16 साल की थी, जबकि अब दोनों 71 और 72 के पास पहुंच हए हैं. दोनों कलाकरों ने लॉस एंजिल्स काउंटी सुपीरियर कोर्ट में यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली पर मुकदमा दायर किया है. खास बात यह है कि फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली की मौत साल 2019 में हो चुकी है. इसके अलावा उनकी कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स पर भी मुकदमा दायर किया गया है.
ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने शिकायत में कहा है कि उन्हें कहा गया था कि वे बेडरूम के सीन में अंडरगारमेंट पहनेंगे जो आखिरी दिनों में शूट किए गए थे, लेकिन शूटिंग की सुबह, ज़ेफिरेली ने रोमियो की भूमिका निभाने वाले व्हिटिंग और जूलियट की भूमिका निभाने वाली हसी से कहा कि उनके शरीर पर सिर्फ मेकअप किया जाएगा और कैमरा ऐसे रहेगा कि उनका शरीर न्यूड नहीं दिखेगा. हालांकि, ऐसे आश्वासन मिलने के बाद भी दोनों ने न्यूड सीन फिल्माया, जो कैलिफोर्निया के तत्कालीन अभद्रता और बच्चों के शोषण के खिलाफ संघीय कानूनों का उल्लंघन करने वाला एक्ट था.
कोर्ट फाइलिंग में कहा गया है कि हसी और व्हिटिंग ने जिस तरह की भावनात्मक क्षति और मानसिक पीड़ा झेली है उसे देखते हुए अभिनेता 500 मिलियन से ज्यादा के मुआवजे का हकदार है. हालांकि इससे पहले हसी ने 2018 में एक इंटरव्यू में दौरान कहा था कि मेरी उम्र के किसी कलाकार ने भी पहले ऐसा नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि ज़ेफेरीली ने इसे शानदार ढंग से शूट किया था और यह फिल्म की कहानी की मांग के मुताबिक जरूरी था. हालांकि अब इतने सालों बाद ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग अपने बयानों से पलट रहे हैं.
| Romeo And Juliet Allegations: साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ की हिट फिल्म 'रोमियो एंड जूलियट में लीड रोल प्ले करने वाले ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली और फिल्म निर्माता कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स पर आरोप लगाए हैं. उन्हें कहा है कि धोखे से उनसे न्यूड सिन्स करवाए गए और उनका यौन शोषण किया गया था. Olivia Hussey Leonard Whiting Sued Film Director For पाँच सौ Million Dollar: सच्चे प्यार की कहानियों में शामिल रोमियो एंड जुलिएट का नाम तो आपने जरूर सुना होगा. रोमियो और जूलिएट के किरदारों पर कई फिल्में बन चुकी हैं. हॉलीवुड के फिल्मकार निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली और पैरामाउंट पिक्चर्स ने साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में 'रोमियो एंड जूलियट फिल्म का निर्माण किया था. दो यंग कलाकारों को फिल्म में रोमियो और जूलिएट की भूमिका निभाने का मौका मिला. ये फिल्म उस वक्त की बेहद कामयाब फिल्म थी, लेकिन अब पचपन साल बाद फिल्म के निर्देशक जिनकी मौत हो चुकी है और फिल्म निर्माण कंपनी पर पचास करोड़ डॉलर से ज्यादा के मुआवजा का मुकदमा दायर किया गया है. जी हां ये मुकदमा किसी और ने नहीं बल्कि रोमियो और जुलिएट कर रोल प्ले करने वाले दोनों नाबालिग कलाकार ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने दायर किया है. दोनों कलाकार अब बूढ़े हो चुके हैं. आरोप है कि फिल्म में धोखे से उनका न्यूड शूट किया गया था. दरअसल फिल्म 'रोमियो एंड जूलियट में मुख्य किरदार ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग फिल्म में धोखे से न्यूड सीन शूट करवाने का आरोप लगाया है. उस वक्त दोनों की उम्र पंद्रह और सोलह साल की थी, जबकि अब दोनों इकहत्तर और बहत्तर के पास पहुंच हए हैं. दोनों कलाकरों ने लॉस एंजिल्स काउंटी सुपीरियर कोर्ट में यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली पर मुकदमा दायर किया है. खास बात यह है कि फिल्म के निर्देशक फ्रेंको ज़ेफेरीली की मौत साल दो हज़ार उन्नीस में हो चुकी है. इसके अलावा उनकी कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स पर भी मुकदमा दायर किया गया है. ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग ने शिकायत में कहा है कि उन्हें कहा गया था कि वे बेडरूम के सीन में अंडरगारमेंट पहनेंगे जो आखिरी दिनों में शूट किए गए थे, लेकिन शूटिंग की सुबह, ज़ेफिरेली ने रोमियो की भूमिका निभाने वाले व्हिटिंग और जूलियट की भूमिका निभाने वाली हसी से कहा कि उनके शरीर पर सिर्फ मेकअप किया जाएगा और कैमरा ऐसे रहेगा कि उनका शरीर न्यूड नहीं दिखेगा. हालांकि, ऐसे आश्वासन मिलने के बाद भी दोनों ने न्यूड सीन फिल्माया, जो कैलिफोर्निया के तत्कालीन अभद्रता और बच्चों के शोषण के खिलाफ संघीय कानूनों का उल्लंघन करने वाला एक्ट था. कोर्ट फाइलिंग में कहा गया है कि हसी और व्हिटिंग ने जिस तरह की भावनात्मक क्षति और मानसिक पीड़ा झेली है उसे देखते हुए अभिनेता पाँच सौ मिलियन से ज्यादा के मुआवजे का हकदार है. हालांकि इससे पहले हसी ने दो हज़ार अट्ठारह में एक इंटरव्यू में दौरान कहा था कि मेरी उम्र के किसी कलाकार ने भी पहले ऐसा नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि ज़ेफेरीली ने इसे शानदार ढंग से शूट किया था और यह फिल्म की कहानी की मांग के मुताबिक जरूरी था. हालांकि अब इतने सालों बाद ओलिविया हसी और लियोनार्ड व्हिटिंग अपने बयानों से पलट रहे हैं. |
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाई गई रोक को हटाने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि 11 फरवरी को शासनादेश पारित करते हुए स्कूलों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। लिहाजा अब फीस वृद्धि पर लगी रोक को हटाने पर भी विचार होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी। यह आदेश जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस एनके जौहरी की पीठ ने एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी के अध्यक्ष अतुल राय और एक अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया गया। याची ने प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों की फीस इस साल भी न बढ़ाए जाने संबंधी 7 जनवरी, 2022 के शासनादेश को चुनौती दी है।
याचिका में सरकार के 7 जनवरी के शासनादेश को खारिज करने की मांग की गई है। दलील दी गई है कि उक्त शासनादेश शैक्षिक संस्थानों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि अब जबकि स्वयं सरकार ने 11 फरवरी के शासनादेश के जरिए स्कूलों को खोलने का आदेश दिया है। जिसका आशय है कि हम सामान्य जीवन में लौट आए हैं।
कोर्ट ने याची पक्ष की इस दलील को सही माना है। कोर्ट ने कहा कि 1 अप्रैल से नए अकादमिक सत्र की शुरुआत होनी है। इसके पहले निजी स्कूलों को फी स्ट्रक्चर भी प्रकाशित करना है। इसके प्रकाशन के बाद बच्चों के माता-पिता की यदि आपत्तियां आती हैं, तो उन पर भी विचार करना है। कोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार शुल्क वृद्धि पर लगी रोक को हटाने पर विचार करेगी।
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| इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाई गई रोक को हटाने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ग्यारह फरवरी को शासनादेश पारित करते हुए स्कूलों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। लिहाजा अब फीस वृद्धि पर लगी रोक को हटाने पर भी विचार होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई अट्ठाईस फरवरी को होगी। यह आदेश जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस एनके जौहरी की पीठ ने एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी के अध्यक्ष अतुल राय और एक अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया गया। याची ने प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों की फीस इस साल भी न बढ़ाए जाने संबंधी सात जनवरी, दो हज़ार बाईस के शासनादेश को चुनौती दी है। याचिका में सरकार के सात जनवरी के शासनादेश को खारिज करने की मांग की गई है। दलील दी गई है कि उक्त शासनादेश शैक्षिक संस्थानों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि अब जबकि स्वयं सरकार ने ग्यारह फरवरी के शासनादेश के जरिए स्कूलों को खोलने का आदेश दिया है। जिसका आशय है कि हम सामान्य जीवन में लौट आए हैं। कोर्ट ने याची पक्ष की इस दलील को सही माना है। कोर्ट ने कहा कि एक अप्रैल से नए अकादमिक सत्र की शुरुआत होनी है। इसके पहले निजी स्कूलों को फी स्ट्रक्चर भी प्रकाशित करना है। इसके प्रकाशन के बाद बच्चों के माता-पिता की यदि आपत्तियां आती हैं, तो उन पर भी विचार करना है। कोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार शुल्क वृद्धि पर लगी रोक को हटाने पर विचार करेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
इस वीडियो में सनी की गोद में दिख रही है निशा और दोनों के सिर पर टियारा वाला फिल्टर नजर आ रहे है। वीडियो खत्म होते-होते उनके टियारा का कलर सफेद से मरून हो जाता है। इस वीडियो में मां-बेटी प्यारी सी मुस्कान देती नजर आ रही हैं।
Nisha is so so pretty! ! I'm a lucky mommy! With the sweetest heart! ! !
सनी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, 'निशा बेहद प्यारी है, मैं एक लकी मां हूं, जिसके पास इतनी प्यारी बेटी है। '
बता दें कि सनी लियोनी और उनके पति डेनियल वेबर ने साल 2017 में निशा को महाराष्ट्र के लातूर से गोद लिया था। इसके बाद से अक्सर वे अपनी बेटी के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट किया करते हैं। इसके अलावा सनी और डेनियल के दो और बेटे अशर और नोह हैं, जो सरॉगसी से हुए हैं।
सनी और डेनियल अक्सर अपने व्यस्त शेड्यू से वक्त निकाल कर बच्चों के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताते नजर आते हैं। पढ़ाने से लेकर बच्चों को बाहर ले जाने, उनके साथ खेलने जैसे काम कर लिए भी सनी वक्त निकाल लेती हैं।
| इस वीडियो में सनी की गोद में दिख रही है निशा और दोनों के सिर पर टियारा वाला फिल्टर नजर आ रहे है। वीडियो खत्म होते-होते उनके टियारा का कलर सफेद से मरून हो जाता है। इस वीडियो में मां-बेटी प्यारी सी मुस्कान देती नजर आ रही हैं। Nisha is so so pretty! ! I'm a lucky mommy! With the sweetest heart! ! ! सनी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, 'निशा बेहद प्यारी है, मैं एक लकी मां हूं, जिसके पास इतनी प्यारी बेटी है। ' बता दें कि सनी लियोनी और उनके पति डेनियल वेबर ने साल दो हज़ार सत्रह में निशा को महाराष्ट्र के लातूर से गोद लिया था। इसके बाद से अक्सर वे अपनी बेटी के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट किया करते हैं। इसके अलावा सनी और डेनियल के दो और बेटे अशर और नोह हैं, जो सरॉगसी से हुए हैं। सनी और डेनियल अक्सर अपने व्यस्त शेड्यू से वक्त निकाल कर बच्चों के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताते नजर आते हैं। पढ़ाने से लेकर बच्चों को बाहर ले जाने, उनके साथ खेलने जैसे काम कर लिए भी सनी वक्त निकाल लेती हैं। |
बन्द पडी खदान में पानी मे शव मिलने से क्षेत्र में मचा हड़कंप. .
डिजिटल भारत न्यूज़24x7LiVE -संवाददाता-(सुनील कुमार पाठक/ डाला/ सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश)
ब्रेकिंग न्यूज़ बन्द पडी खदान में पानी मे शव मिलने से क्षेत्र में मचा हड़कंप. .
डाला। सुनील कुमार पाठक डाला चौकी क्षेत्र के कोटा टोला स्थित बंद पड़ी पानी की खदान में शव मिलने से मचा हड़कंप मौके पर डाला चौकी इंचार्ज मौजूद अग्रिम कार्रवाई में जुटी।
| बन्द पडी खदान में पानी मे शव मिलने से क्षेत्र में मचा हड़कंप. . डिजिटल भारत न्यूज़चौबीसxसातLiVE -संवाददाता- ब्रेकिंग न्यूज़ बन्द पडी खदान में पानी मे शव मिलने से क्षेत्र में मचा हड़कंप. . डाला। सुनील कुमार पाठक डाला चौकी क्षेत्र के कोटा टोला स्थित बंद पड़ी पानी की खदान में शव मिलने से मचा हड़कंप मौके पर डाला चौकी इंचार्ज मौजूद अग्रिम कार्रवाई में जुटी। |
चंडीगढ़/पंचकूला (नस) : ज्वाइंट फोरम आफ ट्रेड यूनियंस एंड एसोसिएशन (जेएफटीयू) के बैनर तले बुधवार को चंडीगढ़ में चार पब्लिक सेक्टर बीमा कार्यालयों के कर्मचारी पूरा दिन हड़ताल पर रहेंगे। इनमें ओरियंटल इंश्योरेंस कार्पोरेशन लिमिटेड, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कार्पोरेशन लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस और यूनिाइटेड इंडिया इंयोरेंस कल जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन एक्ट 1972 संशोधित बिल के खिलाफ हड़ताल करेंगी। जेएफटीयू ने सरकार द्वारा जनविरोधी नीतियों का विरोध किया। चंडीगढ़ रीजन के कनवीनर हरमेल ठाकुर के मुताबिक सरकार द्वारा इंश्योरेंस सेक्टर को प्राइवेट करने के लिए गए फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
| चंडीगढ़/पंचकूला : ज्वाइंट फोरम आफ ट्रेड यूनियंस एंड एसोसिएशन के बैनर तले बुधवार को चंडीगढ़ में चार पब्लिक सेक्टर बीमा कार्यालयों के कर्मचारी पूरा दिन हड़ताल पर रहेंगे। इनमें ओरियंटल इंश्योरेंस कार्पोरेशन लिमिटेड, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कार्पोरेशन लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस और यूनिाइटेड इंडिया इंयोरेंस कल जनरल इंश्योरेंस बिजनेस नेशनलाइजेशन एक्ट एक हज़ार नौ सौ बहत्तर संशोधित बिल के खिलाफ हड़ताल करेंगी। जेएफटीयू ने सरकार द्वारा जनविरोधी नीतियों का विरोध किया। चंडीगढ़ रीजन के कनवीनर हरमेल ठाकुर के मुताबिक सरकार द्वारा इंश्योरेंस सेक्टर को प्राइवेट करने के लिए गए फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया। |
भारत किमी समय में जगदगुरू था । आज उसका वह गौरव कम हो गया है और शक्ति तथा वैभव यादि के क्षेत्रो मे वह विश्व के अन्य राष्ट्रों की अपेक्षा पिछड़ता जा रहा है। कारण यह है कि हम अपनी विशिष्ट संस्कृति का परित्याग करते जा रहे है । हम 'सगच्छध्व सवदध्व सवो मनासि जायताम्' थाले वैदिव उपदेश को भूलते जा रहे हैं। 'समाना तो आकृति ' अब हमारा आदर्श वाक्य नही रह गया है। विघटन और वैमनस्य की वृद्धि होती जा रही है और देश मी भावनात्मक एकता भग होती दिखाई पड रही है। आज हम यह पहले सोचते हैं कि हम हिन्दू है, हम मुसलमान है, हम पारसी है, हम मिस है और हम ईसाई है । हम यह नहीं सोचते कि हम भारतीय सबसे पहले है और कुछ भी बाद मे। दूसरे शब्दों में । दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि हमारा राष्ट्रधर्मं तिशेहित होता जा रहा है और व्यक्ति धर्मों का प्राधान्य होता जा रहा है ।
ऐमे सक्रान्तिकाल में, परिस्थितियों के सत्रमण के युग में जब हम इन सव अवालित प्रवृत्तियों से बचने और वास्तविक उन्नति का मार्ग खोजने का प्रयत्न करते हैं, तो सहज ही स्पष्ट हो जाता है कि अपनी ही प्राचीन भारतीय संस्कृति का अध्ययन और उसके श्रेष्ठ सिद्धान्तो एवं आदर्शों का जीवन में अनुगमन हो हमारे प्राचीन सम्मान की पुन प्राप्ति में हमारा प्रधान महायक बनेगा सच । तो यह है कि भारत की दुरवस्था के आर्थिक सामाजिव नैतिक तथा भौतिक लास का प्रमुख कारण ही यह है कि हम अपनी संस्कृति से दूर भाग आये है और उस संस्कृति में जाने का प्रयत्न करते रहे हैं जो हमारे अनुकुल नहीं है।
भारतीय सरकृति के अध्ययनको आवश्यक्ता और उसका महत्व इस प्रकार सहज ही स्पष्ट हो जाता है और इस अध्ययन की विशेष आवश्यक्ता हमारे नवयुवको को है पयोषि उन्ही के वलिष्ठ पर भविष्य में राष्ट्र का भार आने वाला है। राष्ट्र मा निर्माण वैसा ही होगा होगी, जैसा उन नवय्वों के जीवन का आदर्श हो ।
हमी दृष्टिकोण से भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षाक्रम के अन्तर्गत
भारतीय संस्कृति के अध्ययन वा समावेश किया गया है और इसी उद्देश्य की पूर्ति में सहायता पहुँचाने की दृष्टि से आगे के पृष्ठ लिखे गये है। लेखक ने बिखरी हुई सामग्री को यथेष्ट रूप से एकत्र उपस्थित करने का प्रयास किया है। यह प्रयास कहाँ तक सफल हुआ है इस विषय मे मौन रहकर हम इसका निर्णय उन छात्रों पर छोडते है जो इस पुस्तक को पढ़ने और लाभान्वित होगे ।
अध्याय २
प्राचीन भारत में पारिवारिक जीवन एवं उसका महत्व
प्राचीन भारत के पारिवारिक जीवन पर विवेचनात्मक दृष्टि-निशेष करने से ज्ञात होता है कि सामाजिक विकास का आरम्भ पारिवारिक जीवन से हो हुआ है। मानव जीवन के वस्त्र उद्देष्ट में रखकर ही पारिवारिक जीवन की व्याकी गई थी। व्यक्ति परिवार का और परिवार समाज का आवश्यक असमझा जाता था। समाज मे गृहपति का स्थान महत्वपूर्ण होना था। प्राचीन भारत में संयुक्त परिवार की प्रथा थी। ऋग्वेद के निम्नविसित शब्दो मे पारिवारिक जीवन के मर्म एव महत्व पर पर्याप्त प्रकाश
पड़ता है - "सगच्छध्व सवदध्व स बो मनासि जानतम् । " अर्थात मनुष्यों को चाहिए कि वे एक साथ चलें एक साथ तो तथा एक दूसरे के मन को भली प्रकार सम । तात्पर्य यह कि परस्पर सहयोग की भावना लेकर रहें ।
वैदि (वेद) बात मे पारिवारिक जीवन की प्रतिष्ठा थी, 'गृहपति' का महत्वपूर्ण स्थान इसका प्रमाण है । ह्मण, उपनिषदादि गन्यो मे भी पारिवारिक जीवन का उल्लेख मिलता है तथा महासूत्र, धर्मशास्त्र आदि में तो बिम्नत विवरण प्राप्त होता है। मेगस्थनीज आदि युनानी लेखको तथा अन्य विदेशी यायो आदि ने भारतीयों की सत्यप्रियता, धामिपता व उनके सर्वोकृपारिवारिक जीवन की भूरि-भूरि प्रशसा की है । प्राचीन भारतीय पारिवारिक जीवन के आधार-स्तम्भ, जो उच्च आदर्श थे, उनने मानव-नाति का तो हो हो सकता था, वागि मान के लिए भी वे गरी पे । | भारत किमी समय में जगदगुरू था । आज उसका वह गौरव कम हो गया है और शक्ति तथा वैभव यादि के क्षेत्रो मे वह विश्व के अन्य राष्ट्रों की अपेक्षा पिछड़ता जा रहा है। कारण यह है कि हम अपनी विशिष्ट संस्कृति का परित्याग करते जा रहे है । हम 'सगच्छध्व सवदध्व सवो मनासि जायताम्' थाले वैदिव उपदेश को भूलते जा रहे हैं। 'समाना तो आकृति ' अब हमारा आदर्श वाक्य नही रह गया है। विघटन और वैमनस्य की वृद्धि होती जा रही है और देश मी भावनात्मक एकता भग होती दिखाई पड रही है। आज हम यह पहले सोचते हैं कि हम हिन्दू है, हम मुसलमान है, हम पारसी है, हम मिस है और हम ईसाई है । हम यह नहीं सोचते कि हम भारतीय सबसे पहले है और कुछ भी बाद मे। दूसरे शब्दों में । दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि हमारा राष्ट्रधर्मं तिशेहित होता जा रहा है और व्यक्ति धर्मों का प्राधान्य होता जा रहा है । ऐमे सक्रान्तिकाल में, परिस्थितियों के सत्रमण के युग में जब हम इन सव अवालित प्रवृत्तियों से बचने और वास्तविक उन्नति का मार्ग खोजने का प्रयत्न करते हैं, तो सहज ही स्पष्ट हो जाता है कि अपनी ही प्राचीन भारतीय संस्कृति का अध्ययन और उसके श्रेष्ठ सिद्धान्तो एवं आदर्शों का जीवन में अनुगमन हो हमारे प्राचीन सम्मान की पुन प्राप्ति में हमारा प्रधान महायक बनेगा सच । तो यह है कि भारत की दुरवस्था के आर्थिक सामाजिव नैतिक तथा भौतिक लास का प्रमुख कारण ही यह है कि हम अपनी संस्कृति से दूर भाग आये है और उस संस्कृति में जाने का प्रयत्न करते रहे हैं जो हमारे अनुकुल नहीं है। भारतीय सरकृति के अध्ययनको आवश्यक्ता और उसका महत्व इस प्रकार सहज ही स्पष्ट हो जाता है और इस अध्ययन की विशेष आवश्यक्ता हमारे नवयुवको को है पयोषि उन्ही के वलिष्ठ पर भविष्य में राष्ट्र का भार आने वाला है। राष्ट्र मा निर्माण वैसा ही होगा होगी, जैसा उन नवय्वों के जीवन का आदर्श हो । हमी दृष्टिकोण से भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षाक्रम के अन्तर्गत भारतीय संस्कृति के अध्ययन वा समावेश किया गया है और इसी उद्देश्य की पूर्ति में सहायता पहुँचाने की दृष्टि से आगे के पृष्ठ लिखे गये है। लेखक ने बिखरी हुई सामग्री को यथेष्ट रूप से एकत्र उपस्थित करने का प्रयास किया है। यह प्रयास कहाँ तक सफल हुआ है इस विषय मे मौन रहकर हम इसका निर्णय उन छात्रों पर छोडते है जो इस पुस्तक को पढ़ने और लाभान्वित होगे । अध्याय दो प्राचीन भारत में पारिवारिक जीवन एवं उसका महत्व प्राचीन भारत के पारिवारिक जीवन पर विवेचनात्मक दृष्टि-निशेष करने से ज्ञात होता है कि सामाजिक विकास का आरम्भ पारिवारिक जीवन से हो हुआ है। मानव जीवन के वस्त्र उद्देष्ट में रखकर ही पारिवारिक जीवन की व्याकी गई थी। व्यक्ति परिवार का और परिवार समाज का आवश्यक असमझा जाता था। समाज मे गृहपति का स्थान महत्वपूर्ण होना था। प्राचीन भारत में संयुक्त परिवार की प्रथा थी। ऋग्वेद के निम्नविसित शब्दो मे पारिवारिक जीवन के मर्म एव महत्व पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है - "सगच्छध्व सवदध्व स बो मनासि जानतम् । " अर्थात मनुष्यों को चाहिए कि वे एक साथ चलें एक साथ तो तथा एक दूसरे के मन को भली प्रकार सम । तात्पर्य यह कि परस्पर सहयोग की भावना लेकर रहें । वैदि बात मे पारिवारिक जीवन की प्रतिष्ठा थी, 'गृहपति' का महत्वपूर्ण स्थान इसका प्रमाण है । ह्मण, उपनिषदादि गन्यो मे भी पारिवारिक जीवन का उल्लेख मिलता है तथा महासूत्र, धर्मशास्त्र आदि में तो बिम्नत विवरण प्राप्त होता है। मेगस्थनीज आदि युनानी लेखको तथा अन्य विदेशी यायो आदि ने भारतीयों की सत्यप्रियता, धामिपता व उनके सर्वोकृपारिवारिक जीवन की भूरि-भूरि प्रशसा की है । प्राचीन भारतीय पारिवारिक जीवन के आधार-स्तम्भ, जो उच्च आदर्श थे, उनने मानव-नाति का तो हो हो सकता था, वागि मान के लिए भी वे गरी पे । |
विदेश मंत्री एस जयशंकर आज राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. .
वहीं कांग्रेस ने कहा कि वह इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी क्योंकि राज्य विधानसभा में उसके पास ज्यादा सीटें नहीं हैं। गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष मनीष दोषी ने बताया कि पार्टी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अच्छे आंकड़े हासिल नहीं किए हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर आज गुजरात के गांधीनगर से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, गुजरात, गोवा और बंगाल की कुल 10 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को चुनाव होना है, जिसमें गुजरात की तीन सीटें शामिल हैं।
गुजरात की तीन सीटों में से एक सीट के लिए जयशंकर सोमवार को दोपहर 12 बजे अपना नामांकन दाखिल करेंगे। अगस्त में जयशंकर का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
जयशंकर के अलावा, गुजरात से राज्यसभा सदस्य दिनेश जेमलभाई अनावडीया और लोखंडवाला जुगल सिंह का भी कार्यकाल 18 अगस्त को खत्म हो रहा है। उधर, कांग्रेस ने गुजरात राज्यसभा चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया है।
कांग्रेस ने कहा कि वह इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि राज्य विधानसभा में उसके पास ज्यादा सीटें नहीं हैं। गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष मनीष दोषी ने बताया कि पार्टी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अच्छे आंकड़े हासिल नहीं किए हैं इसलिए इस बार फैसला लिया है कि आने वाले राज्यसभा चुनाव में पार्टी हिस्सा नहीं लेगी।
वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि गोवा, गुजरात और बंगाल के 10 सदस्य जुलाई और अगस्त के महीने में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। वोटों की गिनती 24 जुलाई को होगी।
- गोवा की एक राज्यसभा सीट पर चुनाव होंगे, क्योंकि विनय डी तेंदुलकर 28 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
- बंगाल की छह राज्यसभा सीटों पर भी मतदान होगा, क्योंकि डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन, प्रदीप भट्टाचार्य, सुष्मिता देव, शांता छेत्री, सुखेंदु शेखर रे 18 अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
| विदेश मंत्री एस जयशंकर आज राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. . वहीं कांग्रेस ने कहा कि वह इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी क्योंकि राज्य विधानसभा में उसके पास ज्यादा सीटें नहीं हैं। गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष मनीष दोषी ने बताया कि पार्टी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अच्छे आंकड़े हासिल नहीं किए हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर आज गुजरात के गांधीनगर से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, गुजरात, गोवा और बंगाल की कुल दस राज्यसभा सीटों पर चौबीस जुलाई को चुनाव होना है, जिसमें गुजरात की तीन सीटें शामिल हैं। गुजरात की तीन सीटों में से एक सीट के लिए जयशंकर सोमवार को दोपहर बारह बजे अपना नामांकन दाखिल करेंगे। अगस्त में जयशंकर का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जयशंकर के अलावा, गुजरात से राज्यसभा सदस्य दिनेश जेमलभाई अनावडीया और लोखंडवाला जुगल सिंह का भी कार्यकाल अट्ठारह अगस्त को खत्म हो रहा है। उधर, कांग्रेस ने गुजरात राज्यसभा चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया है। कांग्रेस ने कहा कि वह इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि राज्य विधानसभा में उसके पास ज्यादा सीटें नहीं हैं। गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष मनीष दोषी ने बताया कि पार्टी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अच्छे आंकड़े हासिल नहीं किए हैं इसलिए इस बार फैसला लिया है कि आने वाले राज्यसभा चुनाव में पार्टी हिस्सा नहीं लेगी। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि गोवा, गुजरात और बंगाल के दस सदस्य जुलाई और अगस्त के महीने में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख तेरह जुलाई है। वोटों की गिनती चौबीस जुलाई को होगी। - गोवा की एक राज्यसभा सीट पर चुनाव होंगे, क्योंकि विनय डी तेंदुलकर अट्ठाईस जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। - बंगाल की छह राज्यसभा सीटों पर भी मतदान होगा, क्योंकि डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन, प्रदीप भट्टाचार्य, सुष्मिता देव, शांता छेत्री, सुखेंदु शेखर रे अट्ठारह अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। |
सदृष्टिपादान्वितमुग्रदृष्टिविवर्जितं दृष्टियुतं ज्ञगुवः । तन्वादिकानामपि भाववीर्य विचारणीयं विदुषा प्रयत्नात् ॥ २६ ॥
लनादि भावस्वामियोका बलही भावबल होता है। मनुष्यराशि ३ ।६। ७ । ११ और धनका पूर्वार्द्ध और कुभ इनमे सप्तमभाव घटाय देना, चतुष्पद राशि १ । २ । ५ धनका उत्तरार्द्ध मकरका पूर्वार्द्ध इनमे चतुर्थ भाव घटाना कीटराशि कर्क वृश्चिकको लग्नमे घटाना । जलचर राशि मीन और मककरे पश्चिमार्द्धमेसे दशम भाव घटाना तब शेष ६ राशिसे अधिक होवे तो १२ मे शुद्ध करना षड्भावाल्प शेषसे दिग्बलमे पूर्वोक्त उच्चबलकी रीतिसे बल साधन करना तो भावदिग्बल होता है । तब यह दिग्बल भावबल ( स्वामिबल) मे युक्त करना । भावपर जिन ग्रहोकी दृष्टि हो उनमेसे शुभग्रहोकी दृष्टिका ऐक्य करके उसका चतुर्थाश लेना यह धन हम्बल होता है, तथा पापग्रहो की दृष्टिका ऐक्य करके उसका चतुर्थाश लेना यह ऋण हग्बल होता है। इन दोनो वन ऋण हग्बलोका अतर करना तब स्पष्ट हम्बल होता है । इस हम्बलसे भावबलको संस्कृत अर्थात् धन होवे तो युक्त ऋण होवे तौहीन करना तब उसको भावके ऊपरकी बुध गुरुकी दृष्टि युक्त करनी तो स्पष्ट भावबल होता है ॥ २५ ॥ २६ ॥
चेष्टोच्चरश्मयः ।
ये चेष्टतुंगाख्यबले रसप्ने सैके भवेयुर्निजरश्मयस्ते । स्वतुंगचेष्टाबलपातमूलमिटाख्यमेकोनबलाच्च कष्टम् ॥ २७ ॥
चन्द्रमेसे सूर्य घटानेसे चद्रमाका और मायन सूर्यमे ३ राशि जोडने से सूर्यका चेष्टाकेन्द्र होता है । इस केंद्र से रश्मि कष्टेट सावनार्थ उच्चबलमे कहीहुई विधिसे चेष्टाबल बनाना । यह चेष्टाबल पूर्वका जैसा षडूबलार्थ नहीं है क्योकि सूर्यका जो अयनबल है वही चेष्टाबल है इसलिये द्विगुण करना, चंद्रमाका जो पक्षबल वही चेष्टावल है इसलिये दूना करना यह नियम है । अब इष्ट कष्ट बल एवं दृष्टि के लिये कहते है कि, ग्रहोका जो चेष्टाबल और
उच्चबल उसको ६ से गुणाकर उसमें १ जोड देनेसे ग्रहोकी उच्चरश्मि और चेष्टारश्मि होती है । ग्रहोका चेष्टाबल और उच्चबलके गुणाकारका वर्गमूल निकालना बह ग्रहों का इष्ट होता है । ग्रहोका उच्चबल एवं चेष्टावल अलग अलग एकमे घटानेसे शेष गुणाकारका वर्गमूल निकालना वह ग्रहोका कष्ट होता है, इस इष्ट कष्टके अनुसार ग्रहोके शुभाशुभ दशाफल जानना । ग्रहोंका षड्बलैक्य और ग्रहोपर दृष्टिको पृथक् पृथक् ग्रहोके इष्ट और कष्टसे गुनदेनेसे ग्रहोका इष्टबल कष्टबळ और इष्टदृष्टि कष्टष्टष्टि होती है । यह वर्गमूल ग्रंथमे न होनेसे पाठकों के सुममार्थ अन्यत्रसे विधि लिखता हूं - " अंत्यं यावदिहाव्यांकादूर्ध्वतिर्यक्स्थरेखया । सना स्थानांककानां च विषमाख्यसमक्रमात् ॥ त्यक्त्वाऽन्त्याद्विषमात्कृतिं द्विगुणयेन्मूल समेत द्धृते त्यक्त्वा लब्धकृतिं तदाद्यविषमान्धं दिनिघ्नं न्यसेत् । पक्त्यां पंक्तिहृते समेऽन्य - विषमां त्यक्त्वाऽऽतवर्ग फलं पंक्त्या तद्विगुणं न्यसेदिति मुहुः पंकेर्दल स्यात् पदम् ॥ " अर्थात् जिस संख्याका मूल निकालना हो उसके दाहिने ओरसे विषमको ऊर्ध्व रेखासे और समको कुछ तिर्यक् रेखासे चिह्न करना जबतक अंककी समाप्ति न हो जाये तबतक सबके बाई ओर जो अतिम विषम हो उसमे जिस संख्याका वर्ग घटे वह घटाय देना और जिसका वर्ग घंटे उस सख्याको मूल कहते हैं, उसे दूना करना उसका नाम पक्ति है, उससे भाग देना जो विषमके पास सम हो उसमे लब्धि ऐसी लेनी कि, जिसका वर्ग आगेके विषममे घट जाय तो उस लब्धिका वर्ग आगेके विषममे घटाय देना, उसे दूना करके प्रथम जो पंक्तिसज्ञक है उसमे आगे एकस्थानमे बढायके रखना । यदि औरभी होवे तो उसी पक्तिसे पुनः पूर्वरीतिसे भाग देना, लब्धिका वर्ग आगेके विषममे घटाना, लब्धि दूनी पंक्ति में रखना ऐसा अंक समातिपर्यत करते जाना फिर उस पक्तिका आधा करना वह मूल होता है । " मूलावशेषक सैकं षष्टिघ्न विकलान्वितम् । द्विनिघ्नेन द्वियुक्तेन मूलेनाप्तं स्फुटं भवेत् ॥ " अर्थात् सावयव अकके अर्थात् सावयव अकके मूल निकालनेकी रीति कहते है कि, जब मूल निःशेष न होवे तो शेषभे १ जोडके ६० से
गुनना इससे आया जो मूल उसको दूना करके २ युक्त करके भागदेना तब मूलका अवयव होता है । यह स्थूल रीति है ॥ " सैकेन द्विघ्नमूलेन भक्तं " अर्थात् मूलावशेषकम् ।। लब्धं तु तदधः स्थाप्यं मूलं सूक्ष्मतर भवेत् ॥ सूक्ष्मरीति ऐसी है कि, जो मूल आया है उसे दूना करके तथा १ और जोडके मूलशेषमे भाग देना, लब्धिको उस मूलके नीचे रखना वह सूक्ष्ममूलके आसन्न होगा। एक और प्रकार है कि, जिसका मूल लेना हो उसे६० से गुणके कला युक्त करना पुनः ६० से गुनना उसका मूळ लेना उसे ६० से भाग देना तो ठीक मूल होगा । यदि ऊपरका अंक शून्य होवे तो नीचेके अकको ६० से गुणके विकला युक्त करके मूल लेना उमसे ६० से भाग देना तब मूल होता है । रश्युदाहरण - सूर्यका चेष्टावल ० । ४१ । ५८ इसे ६ से गुणके ४ । ११ । ४८ इसमे १ युक्त करके ५ । ११ । ४८ यह सूर्यकी चेष्टारश्मि हुई । सूर्यका उच्चबल ०१५८/५६ इसको ६ से गुना ५/५३ । ३६ इसे १ जोड दिया ६ । ५३ । ३६ यह सूर्यकी उच्चरश्मि हुई । ऐसेही अन्य ग्रहोकी भी जाननी । इष्टोदाहरण - सूर्यका चेष्टाबल ० । ४१ । ५८ को सूर्यके उच्चबल ० । ५८ । ५६ से गुना ० । ४१ । १३ इसका वर्गमूल ० । ४९ । ४३ यह सूर्यका इष्ट भया, ऐसेही अन्य ग्रहोका भी जानना । कष्टोदाहरण - सूर्यका चेटाबल ० । ४१ । ५८ इसको ३ घटायके ० । १८ । २ सूर्यका उच्चबल ० । ५८ । ५६ इसको १ मे घटायके ० । १ । ४ इससे ० । १८ । २ को गुणा ० । १८ । २ को गुणा ० । ०।१९ इसका वर्गमूल ० । ४ । २० यह सूर्यका कष्ट हुआ ऐसेही सबका जानना । इष्टकष्टबलोदाहरण- सूर्यका षड्बलैक्य ७ । ५१ । ५३ । ३० इसको सूर्यके इष्ट ० । ४९ । ४३ से गुना ६ । ३१ । ० । ५३ यह सूर्यका इष्टबल भया । सूर्यका कष्ट ० । ४ । २० इससे सूर्यके षड्बलैक्यको गुणके ० । ३४ । ४ । ५२ यह सूर्यका कष्टबल भया । ऐसेही चन्द्रादियोका भी जानना । इष्टकष्टदृष्टिका उदाहरण- चंद्रमापर सूर्यकी दृष्टि ० । १८ । ५४ इसको चंद्र इष्ट ० । २६ । ३ से गुणा ० । ८ । १२
यह चंद्रमापर सूर्यकी इष्टदृष्टि हुई । चंद्रमाका कष्ट ० । ३२ । ४७ से सूर्यकी दृष्टिके ० । १८ । ५४ गुणके ० । १० । १९ यह कष्टदृष्टि भई । ऐसे सबकी इष्टदृष्टि कष्टदृष्टि जाननी ॥ २७ ॥
विगम्ये खेटलीलाविलासे सम्यग्बोधे पुंजराजोदिते च । होरासारे शंभुहोराप्रकाशे वीर्याध्यायः पूर्ण आसीत्तृतीयः ॥ २८ ॥
इति श्रीपुजराजविचिते शम्भुहोराप्रकाशे ग्रहबलसाधनाध्यायस्तृतीयः ।। ३ ।। इसका अर्थ पूर्वोक्तही है, यह ग्रहबलसाधनाध्याय तीसरा है ॥ २८ ॥ इति श्री शम्भुहोराप्रकाशे माहीवरीभाषाटीकाया ग्रहालसावना यायस्तृतीय ॥ ३ ॥
अथ निषेकाध्यायः ४ ।
चलान्वितावर्कसितौ स्वभांशे पुंसां सदा चोपचये भवेताम् । तथाङ्गनानां शशिभूमिजौ वा तदा भवेद्गर्भसमुद्भवश्च ॥ १ ॥ स्त्रीणां विधौ चोपचये कुजेन दृष्टेऽपि गर्भग्रहणेऽपि योभ्या । पुंसां तथा गीप्पतिना प्रदृष्टे स्त्रीपुंसयोर्योगमतोऽन्यथा च ॥ २ ॥ निषेकेऽस्त राशिर्यथा मैथुने च तथा तत्समः पुरुषो मैथुने स्यात् । असत्खेचरैः संयुते वीक्षितेऽस्ते सरोषः शुभैस्यियुक्तद्विलासः ।।३।।
अब निषेकाध्याय कहते है - पुरुषकी राशिसे बलवान सूर्य शुक्र अपनी राशि वा अंशादिमे उपचयस्थानोमे होवे तथा स्त्रीके चन्द्रमा मगल बली एव उपचयमे होवे तो ऐसे अवसरमे गर्भ रहता है ॥ १ ॥ स्त्रियोके उपचयमे चन्द्रमा मंगलसे दृष्ट हो उस समय स्त्री गर्भग्रहणयोग्या होती है तसेही पुरुषांके उपचयगत चद्रमाको गुरु देखे ऐसे समय मे स्त्री पुरुषका संयोग गर्भयोग्य होता है अन्यथा नहीं ॥ २ ॥ आधानकालमे जैसी सप्तमराशि हो उसके अनुरूप पुरुष या स्त्रीकी प्रकृति होती है । अर्थात् सप्तम भावमे पापदृष्टि पापयोग होवे तो रोषकलहयुक्त और शुभग्रह योगदृष्टि से हासविलामयुक्त होती है ॥ ३ ॥
भाषाटीकासहितः अ० ४ । गर्भधारणसमयः ।
स्त्रीणामृतुः षोडशकं निशानां तासां त्यजेत्सप्तकमत्र पूर्वम् । समे नराणां विषमेऽङ्गनानां गर्भा भवेयुः पुरुषस्य योगात् ॥ ४ ॥ शनैश्चरक्ष्मासुतशुक्रसूर्यैर्निजांशगैश्चोपचयस्थितैश्च । त्रिकोणलग्नोपगते सुरेज्ये वीर्यान्विते गर्भसमुद्भवः स्यात् ॥ ५ ॥ वीर्यान्विते लग्नगते सुरेज्ये त्रिकोणसंस्थे यदिवाऽत्र योगः । स्युर्निष्फलास्ते ह्तवीर्यकाणां वीणेवशब्दाः श्रववर्जितानाम् ॥ ६ ॥ स्त्रियांकी ऋतु १६ रात्रिपर्यत रहती है, उनमेसे प्रथमकी ७ रात्रि छोडके सयोग करनेमे विषमदिनोमे कन्या, सम दिनोमें पुरुष गर्भमे पैदा होता है ॥ ४ ॥ आधानलग्नसे वा प्रश्नलग्नसे शनि, मगल, शुक्र और सूर्य अपने अशकोमे तथा उपचय ३।६।१०।११ मे हावै तथा त्रिकोण ५।९ वा लग्नमे बृहस्पति होवै तो गर्भोत्पत्ति होवे ॥ ५ ॥ अथवा बलवान् बृहस्पति लग्न मे हो वा त्रिकोणम होवे तौभी गर्भयोग होता ह । ऐसे योग हतवीर्य ( नपुसको ) को बविरको वीणाका शब्द जैसा निष्फल है ॥ ६ ॥
गर्भाधानसमयान्मातापित्रोररिष्टविचारः ।
यथा नृनायर्हि मनःस्वभाव रतौ तथा गर्भगतोऽत्र जन्तुः । द्यूने वेर्मन्दकुजौ तु पुसा रोगप्रदौ शीतरुचेः स्त्रियश्च ॥ ७ ॥ सूर्ये यमारांतगते तु पुंसः स्त्रियास्तथेन्दौ मृतिौ तयोः स्त· । मन्देन वाऽऽरेण दिवाकरेन्द्र युक्तौ च दृष्टौ निधनं तयोर्वा ॥ ८ ॥ स्वर्क्षस्थितौ रन्ध्रगतौ यमार्को प्रष्टः स्त्रियं संदिशतश्च वध्याम् । छिद्रस्थितौ चन्द्रबुधौ सदोषां वा काकवन्ध्यां वदतोऽङ्गनां वै ॥ ९ ॥
निषकसमयमे स्त्रीपुरुषका मनःस्वभाव जैसा होवै वैमाही गर्भगत जीवभी होता है । उस समयके लग्नसे या प्रश्नलग्न मे सूर्य से सप्तम शनि मगल होवै तो पुरुषको और चंद्रमासे सप्तम होवे तो स्त्रीको रोग करते है ॥ ७ ॥ शनि मंगलके बीच सूर्य होवै तो पुरुषको और चद्रमा होवै तो स्त्रीको मृत्यु देते
हैं। अथवा शनि मंगलसे युक्त सूर्य चन्द्रमा होवै अथवा दृष्ट होवै तो स्त्री पुरुष दोनोंहीका मरण होताहै । इन योगोंके फल गर्भके दिनोमे होतेहै ॥ ८ ॥ प्रश्नलग्न से अष्टमस्थान मे अपने राशिके शनि सूर्यमे से कोई होवे तो प्रष्टाकी स्त्री बांझ कहनी अर्थात् गर्भ नहीं है। चंद्र बुध अष्टम होवै तो उसकी स्त्रीपर कोई प्रकार रोग, या भूत, देवता आदिका दोष है । जिससे गर्भ नहीं होता । अथवा काकवंध्या - ( जिसका १ गर्भ होकर फिर न हो ) कहनी ॥ ९ ॥ गर्भस्रावो रजोवर्णाश्च ।
मृतप्रजा छिद्रगयोः सितेज्ययोर्गर्भस्रवा भूमिसुतेऽष्टमस्थे । छिद्रेश्वरे छिद्रगते बलान्विते पुष्पं न विन्दत्यबला सुगर्भदम् ॥ १० ॥ सूर्येऽत्र कपिलं पुष्पं चन्द्रे वेतं कुजेऽरुणम् । बुधे विचित्रवर्णाभं गुरौ मांजिष्ठवर्णकम् ॥ ११ ॥ सिते ॥ श्वेतं शनौ कृष्णं राहौ जलसमं वदेत् । शून्येऽष्टमे स्वभावस्थं मार्गे पात्यं खले गृहे ॥१२॥ पुष्पमेति तदुष्णं तु भौमाकौँ शीतलं परे । कटिवातं वदेगा पीडाकरमहर्निशम् ॥ १३ ॥
अष्टमस्थानमे गुरु शुक्र होवैं तो प्रष्टाकी स्त्रीके पुत्र मरते होगे, मगल अष्टम हो तो गर्भस्राव होते होगे, अष्टमेश अष्टम में बलवान् होवे तो गर्भ देनेवाला उत्तम पुष्प ( रज ) हीन होवै ॥ १० ॥ अष्टमस्थानमे सूर्य होवै तो धूम्ररंगका, चंद्रमासे श्वेत, मंगलसे लाल, बुधसे अनेक वर्ण, बृहस्पतिमे मंजीठके रगकासा ।। ११ ।। शुक्र से श्वेत, शानेसे काला, राहुसे जलके समान रजका रंग कहना । अष्टममे कोई ग्रह न होवै तो पुष्पका रंग स्वाभाविक कहना । तहां पापराशि होवै तो मार्गमे गिराने योग्य अर्थात् बहुत रज हो ॥ १२ ॥ मंगल सूर्यसे रज गरम उतरे, अन्य ग्रहोसे शीतल होवै, राहु अष्टम होवे तो दिन रात पीडा करनेवाला कटिमे वातकारक रज होवै ॥ १३ ॥
दिनेऽर्कशुक्रौ पितृमातृसंज्ञो नक्तं शनीन्दू सहजेऽन्यथा तत् । पितृव्यमातृष्वसृसंज्ञितौ च तयोः शुभावोजसमर्क्षगौ तौ ॥ १४ ॥
क्रूरान्तस्थौ लग्नचन्द्रौ निषेके क्रूरैः खेटेः संयुतौ वाथ दृष्टौ । सौम्यैश्चैतौ वीक्षितौ नैव युक्तौ नारी गर्भेणान्विता मृत्युमेति ॥ १५ ॥ चन्द्रात्तनोर्वा यदि पापखेटेर्वन्धुस्थितै भूमिसुतेऽष्टमस्थे । यद्वा कुजाकौं व्ययबन्धुसंस्थौ क्षीणे निशेशे मृतिरुक्तवत्स्यात् ॥१६॥ शुक्रो यदा मन्दयुतोऽथ दृष्टश्चन्द्रात्सुतस्थः स तु मातृहन्ता । सपापकः कर्मगतोऽथ वा चेदिवाकरो मातुरनिष्टदः स्यात् ॥ १७ ॥ क्षीणे विधौ पापयुते च मृत्युस्तदन्यथाऽर्के जनकस्य नूनम् । आधिर्भवेत्पापनिरीक्षितौ तौ मिश्रैर्विमिश्रं शुभदैः शुभं स्यात् ॥ १८॥ सप्तमस्थे दिवानाथे लग्नस्थे धरणीसुते ।
शस्त्र प्रहारान्निधनं जायते नात्र संशयः ॥ १९ ॥
दिनके आधानमे सूर्य पिता, शनि ताऊ ( चाचा ), शुक्र माता, चन्द्रमा माताकी बहिन । रातके आधानमे शनि पिता, सूर्य ताऊ (चाचा), चन्द्रमा माता, शुक्र माकी बहिन ऐसी संज्ञाये इस लिये कि, दिनके आधानमे सूर्य विषम राशिमे हो तो पिताको शुभ रात्रिकेमे पितृव्यको शुभ, समराशिमे होवै तो दिनके गर्भमे माताको, रातमे मांकी बहिनको शुभ, शनि विषम राशिमे हो तो रातके गर्भ में पिताको शुभ, दिनमे पितृव्यको शुभ, चद्रमा रामराशिमे हो तो रातमे माताको दिनमे मांकी बहिनको शुभ, शुक्र दिनके गर्भमे सम राशिमे माताको, रातमे माताकी बहिनको शुभ इत्यादि । उक्त राशि तथा दिनरातके विपरीत होनेमे शुभाशुभ फलभी विपरीत होता है ॥ १४ ॥ आधानलनमे लग्न चन्द्रमा पापग्रहोके बीचमे हो पापग्रहोसे युक्त वा दृष्ट हो शुभग्रहोसे युक्त हृष्ट न हो तो वह स्त्री गर्भसहित मरजावे ॥ १५ ॥ लग्नसे वा चन्द्रमासे चतुर्थ स्थानमे पापग्रह होवै, अष्टममे मंगल हो अथवा मंगल सूर्य १२ । ४ भावमे होवे, चन्द्रमा क्षीण होवै तो भी गर्भसहित स्त्री मरे ॥ १६ ॥ यदि शुक्र शनिसे युक्त वा दृष्ट हो और चन्द्रमासे पचम होवे तो माताका मारनेवाला होता है । सूर्य पापयुक्त दशम भावमे माताको अनिष्ट देनेवाला होता है ॥ १७ ॥ क्षीण चन्द्रमा
पापयुक्त होवै तो माताको मृत्यु हावै । उसके विपरीत फल अर्थात् सूर्यसे पिता की मृत्यु होती है। सूर्य चन्द्रमा पापदृष्ट होवै तो माता पिताको मानसी व्यथा होवै । शुभ पापोसे युक्त दृष्ट होनेमे फलभी मिश्रित होता है ॥ १८ ॥ सप्तममे सूर्य लग्नमे मगल होवै तो निःसदेह उक्त मृत्यू शस्त्र प्रहार से होवै ॥ १९ ॥ मासि मासि गर्भगतजीवावयवा मासेश्वराश्व ।
कललं च घनं शाखास्थित्वग्रोमोमः स्मृतिः । भुक्ति रु द्वेग संभूतिर्मासेष्वाधानतः कमात् ॥ २० ॥ शुक्रारजीवार्कशशीयमज्ञलग्नेशशीतांशुदिवाकराः स्युः । मासेश्वरास्तैः कलुषैः प्रपीडा पातो हतैर्वीर्ययुतैश्च पुष्टिः ॥२१॥ वर्याढ्यः स्यान्मासपः स्वोच्चगो वा वृद्धिर्गर्भस्येव चेन्निघ्नवीर्यः । अस्तं यातो नीचगः पापयुक्तस्तत्तन्मासे जायते गर्भपातः ॥ २२ ॥ गर्भ प्रथममासमे रज वीर्य मिलके पतला रहता है, दूसरे मासमे गाढा होकर पिण्डाकार होता है, तीसरेमे उसमे हाथ पैर आदि अवयव निकलते है, चौथेमे हड्डी पैदा होती है, पाचवेमे त्वचा ( चमडा ) बनता है, छठेमे रोम जमते है, सातवेमे हस्त पादादि हिलाने लगता है । आठवेमे माताके किये भोजनका असर उसपर होता है, नवममे चलनेकी नाई हस्तपाद सचालन और दशममे प्रसव होता है ॥ २० ॥ शुक्र, मंगल, बृहस्पति, सूर्य, चद्रमा, शनि, बुध, लग्नेश, चद्रमा और सूर्य ये गर्भके १० महीनोके मासाधिपति है । जिस महीनेका स्वामी निर्बल हो उसमे पीडा गर्भको होती है । जिस महीनेका स्वामी पीडित है उसमे गर्भपात और जिसका स्वामी वीर्यवान् हो उसमे पुष्टि होती है ॥ २१ ॥ जिस महीनेका स्वामी बलवान् अथवा उच्चका हो उसमे गर्भकी वृद्धि होती है, जिस महीनेका स्वामी हीनवीर्य अस्तगत नीचगत पापयुक्त हो उसमे गर्भपात होता है ॥ २२ ॥ गर्भस्रावयोगः ।
यमारौ लग्नगौ स्त्रीणां गर्भस्रावस्तथा विधौ । तद्भे दृष्टे तद्युते वा गर्भपातः प्रजायते ॥ २३ ॥
भाषाटीका सहितः अ० ४ ।
शनि मंगल लग्नमे होवै तो स्त्रियोका गर्भस्राव होवै चन्द्रमाभी उस भाव मे हो अथवा उसे देखे तो गर्भपात होता है ॥ २३ ॥
पुस्त्रीयमलाद्युत्पत्तियोगाः । ओजक्षकांशोपगतौ रवीज्यौ सूतौ च पुंजन्मकरौ निषेके । समर्क्षकांशोपगताः सितेन्दुधरात्मजाः स्त्रीजननप्रदाः स्युः ॥ २४॥ गुर्वर्कयोश्चापनृयुग्मभांशे ज्ञदृष्टयोः पुंयुगुलं तदा स्यात् । तद्वच्च कन्याझप गैः सितारकलाधरैः स्त्रीयुगलं सवीयैः ॥ २५ ॥ सूर्य गुरु आधानकालमे विषम राशि विषमांशकोमे होवै तो पुरुष जन्मेगा, शुक्र चन्द्रमा मगल समराशि समाशकोमे होवै तो कन्याका जन्म करते है ।। २४ गुरु सूर्य ९३ राशि अशकोमे बुधसे दृष्ट होवै तो दो पुत्र ( यमल ) हावै । ऐसेही कन्या ६ मीन १२ राशिके अंशकमे शुक्र मगल, चंद्रमा होवै तथा बलवान् होवै तो २ कन्या ( यमलकन्या ) होगी ॥ २५ ॥ क्लीबयोगाः ।
ओजेऽब्जलग्ने क्षितिजन दृष्टे समौजगौ वा द्विजराजसोम्यौ । ओजांशके भार्गवलग्नसूर्या वीर्यान्विताः क्लीबजनुःकराः स्युः ॥२६॥ समोजभस्थावपि लग्नसूय परस्परं चेत्परिपश्यतो वा । कुजोष्णगू वा शनिसोमजौ वा तद्वच्च तौ कीबकरौ निरुक्तौ ॥ २७ ॥ विषमराशि लग्न और चद्रमा मगलसे दृष्ट हो अथवा चद्रमा समराशिमे बुध विषमराशिमे हो, दोनो परस्पर देखे अथवा शुक्र सूर्य लग्न बलवान् हो तथा विषम नवाशकोने हो तो ये योग गर्भसे नपुसक उत्पन्न करनेवाले होते है ।॥ २६ ॥ लग्न सम राशि सूर्य विषम राशिमे हो परस्पर देखते हो अथवा ऐसेही मगल सूर्य अथवा चद्रमा बुध होवै तो भी नपुंसक उत्पन्न करनेवाले कहे है ॥ २७ ॥
गर्ने व्यधिकजन्तवः सर्पवेष्टितश्च । धनुर्विलग्नेऽन्त्यलवे प्रदृष्टे सौम्येन सौरेण च वीर्ययुक्तैः । धन्वांशक स्थैरखिलैश्च खेटैर्गर्भो भवेन्यूर्जकजंतुकच ॥ २८ ॥
शम्भुहोराप्रकाराः ।
भौमस्य द्वेष्काणगते हिमांशौ पापान्विते पापविलग्नके च । सौम्यग्रहेरायधनोपयातैः सर्पेण संवेष्टितगर्भ एव ॥ २९ ॥
लगमे धनका अन्त्य नवांशक हो बुध शनि उसे देखे, अन्य संपूर्ण ग्रह बलवान् हो तथा सभी धननवांशकमे होवै तो गर्भसे तीनसे अधिक जीव उत्पन्न होगे ॥ २८ ॥ चद्रमा मंगलके द्रेष्काणमे पापयुक्त होवै, पाप राशि लग्नमे हो और शुभग्रह लाभ धनभावमे होवै तो बालक सर्प वा सर्पसे वेष्टित होगा ॥ २९ ॥ सगर्भस्त्रीमरणयोगः ।
असद् हैर्व्ययस्थितैः शुभस्य दृष्टिवर्जितैः । निषेककालिके वदेन्मृतिर्बुधैस्तु योषितः ॥ ३० ॥
पापग्रह व्ययभावमे हो शुभग्रह उनको न देखे ऐसा योग आधानकाल चा प्रश्नमे होवै तो गर्भसहित स्त्रीका मरण होना पंडितोने कहा है ॥ ३० ॥ बामनशिरोबाहुपादादिरहितयोगाः ।
सूर्येन्दु मन्दैर्मकरेऽन्त्यलग्ने दृष्टे भवेद्वामनकः सपापैः । धीधर्मलग्नोपगतैर्हकाणैर्भुजांघ्रिशीषैश्च विवर्जितः स्यात् ॥ ३१ ॥ विलग्नद्रेष्काणगते महीजे निरीक्षिते सूर्यशनीदुभिश्च । कुर्यादशीर्ष सुत विबाहुं धर्मे विपादं न शुभेक्षितश्चेत् ॥ ३२ ॥
मकर लग्न अत्यनवाशक हो उसे सूर्य, चद्रमा, शनि देखे तो वामन ५२ अंगुल शरीवाला होवै । लग्नमे पापयुत द्रेष्काण दूसरा हो सू० च० श० देखे तो उसके हाथ न होवै और यदि लग्नमे पापयुक्त तीसरा द्रेष्काण तथा सू० च० शनिसे दृष्ट हो तो उसके पैर न होवै । प्रथम द्रेष्काण सू० च० श० दृष्ट होवै तो उसका शिर न होवै ॥ ३१ ॥ इसीको दूसरे प्रकार कहते है कि, लग्न द्रेष्काणमे मगल हो उसे सू० श० चन्द्रमा देखे तो वह देष्काण प्रथम होवै तो शिररहित, दूसरा हावै तो बाहुरहित और तीसरा हावे तो पादरहित हो परन्तु उसपर शुभदृष्टि न होगी जब पूरा फल होगा ॥ ३२ ॥
पितृमातृग्रहद्रेष्काणवशात्फले न्यूनाधिकत्वं गर्भसुखद्विगुणमुखादियोगाः ।
आदौ हि पूर्ण ददतु स्वकीयं फलं धुरात्र्योः पितृमातृखेटौ । मध्ये च मध्यं चरमेऽतितुच्छं शुभाशुभं वा परिकल्पनीयम् ॥ ३३ ॥ लग्नेन्दुतः केन्द्रधनत्रिकोणसंस्थैः शुभैख्यायगतैरसौम्यैः । गर्भस्तदानी सुखसंयुतः स्याद्वीर्यान्वितस्तिग्ममयूखदृष्टया ॥ ३४ ॥ बुधे त्रिकोणगे शेषैर्बलहीनैर्नभश्चरैः । मुखपादकरैरेव द्विगुणः स्यात्तदा शिशुः ॥ ३५ ॥
जो पहिले पितृमातृसज्ञक ग्रह कहे है उनका शुभाशुभ फल प्रथम द्रेष्काण में हो तो पूर्ण, मध्य द्रेष्काणमे मध्यम और तीसरेमे तुच्छ होता है। ऐसी कल्पना करना ॥ ३३ ॥ लग्न एवं चन्द्रमासे केंद्र १ । ४ । ७ । १० धन २ त्रिकोण ५ । ९ भावोमे शुभ ग्रह हो और ३ । ११ में पापग्रह होवें उनपर सूर्यकी दृष्टि होवै तो बलवान और सुखयुक्त रहकर जन्मेगा ॥ ३४ ॥ दुध त्रिकोण ५ । ९ मे हो अन्यग्रह बलरहित होवै तो बालकके मुख वा पाद वा हाथ द्विगुण होवै । बहुधा ६ अंगुलियां हाथ वा पैरमे देखनेमे आती है ॥ ३५॥ भांशे लग्नस्थेऽर्कसूनौ धुनस्थे मंदे चेत्स्यात्सूतिरब्दत्रयेण । प्रालेयांशौ तद्वदेवं निषेके संसूतिः स्याद्वत्सरैर्भानुसंख्यैः ॥ ३६ ॥ उक्ता योगाः खेचराणां खलानां पापास्ते स्युः सौम्यदृष्टाश्च युक्ताः । सत्खेटानां सत्फलं वा विदध्युर्मिश्रैर्मिश्रं हौरिकार्यैर्वैिचित्यम् ॥ ३७॥
लग्नमे शनेिकी राशि वा नवांशक हो और शनि सप्तम होवै तो गर्भप्रसव तीन वर्ष में होगा । चंद्रमाकी राशि नवांशक लग्न में और चंद्रमा सप्तम होवै तो १२ वर्षमे प्रसव होगा । जो योग पापग्रहकृत है वे पापफल देते हैं, जो शुभग्रहकृत योग है या शुभग्रहोसे इष्ट युत है वे शुभफल देते है । मिश्रितमें फलभी मिश्रित, श्रेष्ठ ज्योतिषी विचारे । यहांके विशेषोपयोगी प्रश्नयोग कन्या पुत्र होनेके योग सूतिकाध्यायमे देखे ।। ३६ ॥ ३७ ॥
विद्वगम्ये खेटलीलाविलासे सम्यग्बोधे पुंजराजोदिते च । होरासारे शंभुहोराप्रकाशे गर्भाधानाध्याय आसीत्सुपूर्णः ॥ ३८ ॥ इति श्रीपुञ्जराजविरचिते शम्भुहोराप्रकाश आधानाध्यायश्चतुर्थः ॥ ४ ॥ अध्यायश्लोकका अर्थ पूर्ववत् है । यह आधानाध्याय पूर्ण भया ॥ ३८॥ इति श्रीशम्भुहोराप्रकाशे माहीवरीभाषाटीकायामावाना व्यायश्चतुर्थ ॥ ४ ॥
फलादेश इष्टकाल ठीक होनेपर ठीक मिलता है अन्यथा ज्योतिषीका उपहास मात्र होता है । यह समय जन्मकालहीमे ठीक होगया तो ठीक है नही तो इष्टशोधनादि अनेक युक्तियोसे भी ठीक नहीं होता । प्रसूतिकालमे स्त्रीलोग कन्या पुत्र वा जीवित मृतकका निश्चय करके बाहर कहती है इसके बीचमे कुछ समय व्यतीत होजाता है तहा ज्योतिषी अपने अनुमानसे अंतर देके इष्टकाल रखते है । कोई कोई चलती वा कर्णाकर्णी सुनी प्रथाके आरूढ लोग ठीक समय जन्म होनेही मात्रमे बाहर सुनाने और घडी घण्टा ठीक हुए परभी अपनी गढंत कल्पना करके कुछ न कुछ घटायही देते है, कोई कहते है कि, शीर्षोदय मे इष्टकाल मानना चाहिये, उस शीर्षोदयके पीछे कुछ समय बाद प्रसव होकर बाहर खबर मिलती है तब अपने अदाजसे कुछ समय घटाय देते हैं परंतु उनको यह ज्ञान तो होताही नहीं है कि, शीर्षोदयसे कितने देरीमे जन्म भया है, शीर्षोदय इष्टकाल मानना एक स्थूल परपरासे मानते है उसमे विचार संशोधन युक्ति प्रमाणानुमानादिक आवश्यक है । आयुप्रमाण श्वासापर है । श्वासा पूरे होनेपर शरीर रहतेभी मर गया कहते है ऐसेही जन्ममे प्रथम श्वासा आयुका आरंभ है, विना श्वासाका शरीर मृततुल्य है, इसलिये बालकके प्रथम श्वासा भरनेपर जन्मेष्ट मानना ठीक है । काकतालीय न्यायसे शीर्षोदय होनेपर शीघ्र ही प्रमव पूरा हो और श्वासाभी उसी क्षणमे लेने लगे तब तो ठीक हो सकता है । अन्यथा ठीक नही मिलता । इस विषयमे ज्योतिष, वैदिक, डाक्टरी,
धर्मशास्त्र, अनुमान, प्रत्यक्षप्रमाण, अपना अनुभव ( तजुर्बा) आदियोसे मै मुक्तकंठसे कहताहू कि, प्रथम श्वासा लेने का समयही ठीक इष्टकाल है अन्य नही । इस विषयमे कुछ व्याख्या मैने बृहज्जातक माहीघरी मा०टी० सूतिकाध्यायके आदिमे भी लिखी है । विद्वान् शास्त्रज्ञ अनुभवी महाशय इसमें विचार करके देखलेवै ॥
आधानात्प्रश्नाद्वा जन्मसमयज्ञानम् ।
सम्यग्ज्ञाते नूनमाधानकाले योगानुक्तांश्चितयेज्जातकज्ञः । यद्वा सर्वे प्रश्नतः सूतिकालात्प्रोक्तास्ते वै तत्फलज्ञैर्महद्भिः ॥ १ ॥ प्रश्नभे कुमुदिनीपतिस्थिते सप्तमं वदति बादरायणः । गर्ग आह भगवान्नृजन्मभं पञ्चमं तु मुनिसंमतं त्विदम् ॥ २ ॥
आधानसमय अच्छे प्रकार जानके जातकज्ञने उक्त योग उसी लनसे बिचारै । वह समय ज्ञात न होवै तो प्रश्न लग्नसे अथवा जन्मलग्नसे ज्योतिष फला देशको जाननेवाले श्रेष्ठ ज्योतिषिये कहै ॥ १ ॥ प्रश्रमे जिस राशिका चद्रमा है उससे सप्तम राशिके चद्रमामे जन्म बादरायण कहते है । गर्ग कहते है कि, पंचम राशिके चन्द्रमामे जन्म होता है, यह मत मुनिसमत है ॥२॥
तत्काल शीतांशुनवांशकाच्च जामित्रगे शीतकरे प्रसूतिः । लग्नस्य नन्दांशपतेस्तु यद्वा क्षेत्रं प्रयाते हिमगौ प्रसूतिः ॥ ३ ॥ यस्मिद्विषट्रांशगते विधौ तद्राशिस्थितेऽब्जे पुरतः प्रसूतिः । रसातलेशे बलसंयुते च गर्भस्तदानी सुखसंयुतः स्यात् ॥४॥ यचोदयेद्वोः सबलस्तु तस्य द्विपाः सहितोऽत्र राशिः । तावद्धि तद्राशिगते मृगांके भवेत्प्रसूतिः पुरतश्च केचित् ॥५॥ यावानुदेति युनिशोर्नवांशस्तावद्गते घस्रनिशोर्जनुः स्यात् । युरात्रिसंज्ञाः कथितास्तु पूर्वं तद्राशितः कालविनिश्चयः स्यात् । आधानके चरगृहे दशमे प्रसूतिस्त्वेकादशे स्थिरगृहेऽप्युभयेऽर्कमासे ॥ ६ ॥
गर्भकुण्डलीका विधान कहते है कि, आधान वा प्रश्नलशमे चद्रमा जिस नवाशकमें है उससे सप्तम राशिगत चन्द्रमामें जन्म होगा। नवाशक जितना भुक्त हुआ है उससे अनुपात त्रैराशिक आदिसे प्रसूतिकालिक चद्रमाके अंश वा नक्षत्र मुक्त निकलता है उसीसे इष्टकालभी मिल जाता है । अथवा लग्नके नवांशपतिके राशिगत चन्द्रमामे जन्म होता है ॥ ३ ॥ तीसरा प्रकार है कि, आधान वा प्रश्नमे चद्रमा जिस द्वादशांशकमे है उस राशिके चंद्रमामे आगे जन्म कहना । इसमें भी आचार्यातरका मत है कि, चन्द्रमा जितने द्वादशांशपर है मेषादि गणनासे उतनेही सख्यक राशिके चंद्रमामे जन्म होगा। अथवा जिस राशिपर चन्द्रमा है उसीसे गिनकर जितने द्वादशांशपा चंद्रमा है उतनीही राशिके चंद्रमामे जन्म होगा । नक्षत्रभुक्त निकालनेका अनुपात है कि, एक चंद्रराशिकी १८०० लिता होती हैं, चंद्रमाने कितनी कला द्वादशांशककी भोगी है कितनी बाकी है, इनका त्रैराशिक करनेसे नक्षत्रभुक्त मिलता है उससे इष्टकाल तब ग्रहकुण्डली बन जाती है । यहां ४ प्रकारसे कहा है, जहां दो तीन प्रकारसे एकवाक्यता हो उसे ठीक समझना । नक्षत्रभुक्त निकालनेका उदाहरण है कि, प्रश्न समय में सूर्य स्पष्ट ११ । २८ । २४ । २५ ग० ५८ । ४५ । चंद्रस्पष्ट १ । ९ । ११ । २६, ल० ४ । ५। ५९ । १४, चंद्रस्पष्ट में द्वादशाश चौथा है वृषसे गिनकर चौथे सिंहके चंद्रमामें नवम वा दशम मासमे जन्म होगा । नक्षत्र भुक्तके लिये चद्रस्पष्टमे गत द्वादशांश ३ के ७ । ३० अशादि भुक्ते हुए यह चद्रस्पष्ट में घटाया शेष १ । ४१ । २६ अंशकी कला १०१ । २६ एक राशिकी कला १८०० से गुणा १८२५८० एक द्वादशाशककी कला १५० से भाग लिया लब्धि १२१७ । १२ यह नक्षत्रप्रमाण पिंड है । इसमे एक नक्षत्रप्रमाण ८०० घटाया शेष ४१७ । १२ इसमे चरणप्रमाण २०० घटाया २१७ । १२ पुनः चरणप्रमाण घटाया शेप १७ । १२ प्रथम एक नक्षत्र प्रमाण घटेमे सिंहके चंद्रमामें मचानक्षत्र घटा तब २ चरणप्रमाण घटनेसे पूर्वाफाल्गुनीके २ चरण घंटे अब कोई नही घटता
शेष अक १७ । १२ मे पूर्वाफाल्गुनी के तीसरे चरणका मुक्त निकालना है शेषको चरणप्रमाण घटी १५ से गुना २०० से भाग लिया लाभ १॥२ घट्यादि तीसरे चरणकी भुक्त हुई यह भुक्त पंचांग में किस समय मिलता है यह जन्म समय होगा । प्रलमे चतुर्थभावेश बलवान् होवै तो सुखसे गर्भ प्रसव होवै ॥ ४ ॥ किसीका मत है कि, लग्न और चन्द्रमामेसे जो विशेष बलवान हो उस तत्काल द्वांदशाशमें जो राशि है उस राशिके चद्रमामे जन्म होगा ॥ ५ ॥ तत्काल लग्नमे वर्त्तमान नवांशक दिवाबली हो तो दिनमे, रात्रिबली होवै तो रात्रिमे जन्म कहना । दिन रात्रि संज्ञायें पहिले कही है, उनके अनुसार कालका निश्चय होता है। उदाहरण - लग्न मे नवाशक वृष रात्रिबली है तो जन्म रात्रि मे होगा । इष्टकालके लिये ल० स्प० ४ । ५ । ५९ । १४ मे भुक्त नवांश ३ । २० अंशादि घटाया २ । ३९ । १४ इसकी कला १५९ । १४ लग्ननवाशक रात्रिबली होनेसे रात्रिमान २९ । ६ से गुणा ४६३३ चरणकलाप्रमाण २०० से भागलिया २३ । १० यह रात्रिका इष्टकाल भया । जहां दिवाबली अश होनेसे दिनका जन्म ज्ञात हो तहां दिनमानसे गुणना । जो ऊपर नवम वा दशम मासमे जन्म होना लिखा है सो प्रश्न समयमे गर्भ कितने मासका है इसके जानने के लिये कितनीही युक्तिया है उनमेसे एक यह है कि " लग्नादामादली शुक्रो यावद्वेहेऽथ तन्मिता " लग्नसे वा लग्नसे जिस स्थानमे शुक्र हो उससे जैसे गर्भका मिलान मिलता हो उतने महीनेका गर्भ जानना इससे ९ । १० मास गिन लेना दूसरा प्रकार अगले श्लोकमे कहेगे आधानकालमे लग्न चर राशि होवै तो दशम मासमे, स्थिरराशि होवै तो ग्यारहवेमे, द्विस्वभाव होवे तो बारहवेमे प्रसव होगा । आधान लन ज्ञात न होनेमे प्रश्नलग्न प्रश्ननवाशकमे जो बलवान् हो उससे कहना । प्रसूति नवम दशम मासमे होती है अधिक समय योगांतरसे कहना ॥ ६ ॥
मस्तकाद्युत्पत्त्यादि ।
शीर्षोदयैश्च शिरसाप्युभये कराभ्यां पृष्ठोदयैश्च जननं भवतीह पद्रयाम् ॥ ७ ॥ लग्नेषु सिहाजवृपस्थितेषु तत्स्थे
कुजे सूर्यसुते च यद्वा । साऽर्कजो भांशसमे च गात्रे स्यादर्भको नालकवेष्टितांगः ॥ ८ ॥
शीर्षोदय लग्न होवै तो शिरसे, उभयोदय से हाथोसे और पृष्ठोदय से पैरोसे बालकका जन्म होता है ॥ ७ ॥ लग्नमे ५ । १ । २ राशिमे कोई हो उसमे मगल वा सूर्य हो अथवा सूर्यसहित शनि होवे तो जिस गशि अशकमें है उसके समान राश्यगमे नालवेष्टित होगा ॥ ८ ॥
यमलसदन्तादियोगा दन्तोत्पत्तिप्रश्नानि च । खौ चतुष्पदस्थिते द्विदेहसंस्थितैः परैः । बलान्वितैस्तदा मौत एव कोशवेष्टितौ ॥ ९ ॥ सौम्यस्य भांशोपगतौ यमारौ बालं सदंतं कुरुतः प्रसूतौ । कुलीरलग्ने हिमगौ तदा चेन्मंदारदृष्टे स तु कुब्जकः स्यात् ॥ १० ॥ दन्तैर्युतश्चेत्प्रथमेऽर्भकः स्यात्स्वयं विनश्येदनुजं द्वितीये । हन्यातृतीये भगिनी चतुर्थे स्वमातरं बाणमितेऽग्रजातम् ॥ ११ ॥ पष्ठादिमासेषु शुभं फलं स्यात्साकं यदा जन्म भवेत्तु दन्तैः । तस्योपको प्रथमं द्विजाः स्युः स्वमातरं स्वं च निहंति तातम् ॥ १२ ॥
सूर्य चतुष्पदराशिमे हो, अन्य ग्रह बलवान् एव द्विस्वभाव राशियोमे हों तो यमल ( दो बालक ) नालवेष्टित होवै ॥ ९ ॥ शनि, मंगल, बुपके राशि नवांशकमे होवै तो बालकके गर्भहीसे दांब जमे होवै । कर्कका चन्द्रमा लग्नमे हो उसे शनि, मगल देखे तो कुबडा होवै ॥ १० ॥ अब मामपरके दंतोत्पत्तिफल कहते हैं कि, पहिले महीने से दांत जमे तो बालक आपही न रहे, दूसरेमे भाई न ठहरे, तीसरेमे बहिन, चौथेमे माता, पांचवमे ज्येष्ठनाता न रहे ॥ ११ ॥ छठे आदि मासोमे दंत जमे तो सुख होवै । यदि दतसहित जन्म हो वा प्रथम ऊपरकी पक्किमे दांत आवै तो अपने माता पिताकी हानि करता है ॥ १२ ॥
भाषाटीकासहितः अ० ५ । मूकपशुकरयोगादिः ।
कर्काल्यंत्यांतगैः पापैर्भान्त्यस्थैर्वा वृषे विधौ । मूकः पापेक्षिते सद्भिर्दृष्टे गीः स्याच्चिरेण तु ॥ १३ ॥ लग्ने झषे चंद्रयुते च यद्वा सिहाज चापांत्यगतैश्च पापैः । वृषे विधावर्कयमारदृष्टे पंगुर्नरः स्यांच्छुभदृष्टिहीने ॥ १४ ॥
कर्क, वृश्चिक, मीनके अंत्य नवांशकोमे पापग्रह हो अथवा राश्यतमें हो, चंद्रमा वृषका हो, उसपर पापदृष्टि होवै तो गूंगा होवै । शुभग्रहकी दृष्टि होवै तो वाणी बहुत दिनोमे बोले ॥ १३ ॥ लग्न मीन हो उसमे चन्द्रमा हो तथा ५ । १ । ९ के अत्यांशगत पाप हो अथवा वृषका चन्द्रमा सूर्य, शनि, मगलसे दृष्ट हो शुभग्रहकी दृष्टि न होवै तो मनुष्य ( पंगु ) पैरहीन वा लंगडा होगा ॥ १४ ॥
जडान्धबुदाक्षयोगाः । क्रूर ग्रहैः संधिगतैः शुभालोकनवर्जितैः । हिमांशुसहर्बालो जडः स्यान्नात्र संशयः ॥ १५ ॥ सिहे विलग्ने रविशीतभानू मन्दारदृष्टौ कुरुतो नराधम् । शुभाशुभैर्बुद नेत्रयुग्मं वामं हिनस्त्यब्ज इनाऽन्त्यगोऽन्यत् ॥ १६ ॥ पापग्रह सघियोमे शुभग्रहोसे अदृष्ट हो, चद्रमाभी उनके साथ होवै तो बालक निश्चय ( जड ) मूर्ख होवै ॥ १५ ॥ सिंहलग्नमे सूर्य और चन्द्रमा स्थित हो तथा शनि मंगलसे दृष्ट हो तो मनुष्य अंधा होवै । शुभाशुभ दोनोकी योगदृष्टि होवै तो नेत्र चचल अथवा कातर नेत्र हो । यह योग सूर्य चन्द्रमा दोनोसे दोनों नेत्रोके लिये है । यदि चद्रमाहीका योग होवै तो वामनेत्र, सूर्यका यह योग होवै तो दाहिना काणा वा कातर होगा ॥१६॥ विलोमजन्मनालरहितादियोगः ।
विलग्गेऽर्कजे विधौ व्यये च नीचगे रखौ । विलोमजन्म भूमिजे सभार्गवे त्वनालकः ॥ १७ ॥
विलग्नभांशाधिपतौ विलग्ने विलोमसंस्थे सति विग्रहं स्यात् । क्केशान्वितं व्यस्तगतं च जन्म शुभैः प्रदृष्टे च ततः सुखं हि ॥ १८ ॥ लग्नमे शनि बारहवाँ चन्द्रमा और सूर्य नीचराशि वा अशकमे होवे तो प्रसव उलटा होवै । मंगल, शुक्र से सहित हाँव तो नालवेष्टित न होवें ॥ १७ ॥ लग्नेश लग्ननवाशेश लग्नमे वक्रगति होवै तो कलह हावै । कोई वक्र कोई मार्ग अर्थात् लग्नकर्तरीमे होवै तो प्रसव क्लेशसहित होवे । यदि शुभग्रहकी दृष्टिमी होवै तो सुखपूर्वक होवै ॥ १८ ॥
जारजातयोगाः ।
न प्राग्विलनं च विघुं प्रपश्येज्जीवोऽर्कयुक्तं सितगुं च यद्वा । सार्के विधौ पापयुतेऽथवा चेत्स्याज्जारजातस्य तदा हि जन्म ॥१९॥ सुरेज्यदृष्टे तनुगेऽथवाऽब्जे देवेज्यवगोंज्झित एष चन्द्रे । सपापकेऽर्केण युतेऽथ चन्द्रे स्याज्जारजातस्य तदा हि जन्म ॥ २० ॥ नीचोपगाः सूर्यसुरेज्यचन्द्राः कुर्वति ते जन्मनि जारजातम् । यद्वा तनौ सूर्यसुतेन दृष्टाः शुभैश्च चंद्रोदयभार्गवाख्याः ॥ २१ ॥ लग्न एव चद्रमाको गुरु न देखे अथवा सूर्य चंद्रमा साथ हो उन्हें गुरु न देखे अथवा सूर्यसहित चद्रमा पापयुक्त होवै तो जारमे उत्पन्नका जन्म जानना ॥ १९ ॥ अथवा चद्रमा लग्नमे गुरुदृष्ट हो गुरुके राश्यादिवर्गसे रहित होवै अथवा पापसहित सूर्ययुत चंद्रमा होवै तो वही फल जानना ॥ २० ॥ सूर्य गुरु चन्द्रमा नीचके हो तो जारजात पैदा करते है । यद्वा लग्नमे शनि हो और चन्द्रमा, लग्न, शुक्र शुभदृष्ट न होवै तौभी वही फल ( जारजात ) कहना ॥ २१ ॥
जारजयोगभंगः ।
चंद्रे गुरुक्षेत्रगतेऽथवा चेत्सुरेज्ययुक्तेऽन्यगृहस्थितेऽब्जे । गुरोहकाणेऽथ नवांशके वान जारजातस्य भवेत्प्रसूतिः ॥ २२ ॥ उक्त योगोमे परिहार कहते है, चंद्रमा गुरुक्षेत्र मे हो अथवा गुरुमे युक्त हो अथवा अन्यगृहमे गुरुके देष्काणमे वा नवांशकमे होवै तो जाग्जा । न होवै ॥ २२ ॥
कारागारादिषु जन्मयोगाः ।
लग्नेन्दुभ्यां द्वादशे सूर्यपुत्रे गुप्त्यां सुतिर्वीक्षिते पापखेटैः । लग्ने कर्के वृश्चिके मन्दयुक्ते गर्तायां स्याचन्द्रयुक्ते प्रसूतिः ॥ २३ ॥ लग्ने सौम्ये वेश्मगे सौम्यखेटे प्रालेयांशौ स्वर्क्षगे पूर्णदेहे । आये लग्ने द्यूनगे वा मृगांके गर्भो नूनं सूयते नावसंस्थः ॥ २४ ॥ लग्ने नीरे मंदयुते दृष्टे चन्द्रार्कचन्द्रजैः । ऊपरे देवतागारे क्रीडागेहे कमात्सवः ॥२५॥ पुंलग्नभे भानुसुते इमझाने शैल्पिके गृहे । भूपालये च गोष्ठे च देवागारे मखालये ॥ २६ ॥ वीक्षिते भौमसौम्येन्दुशुक्र ार्कगुरुभिः क्रमात् । प्रसवोऽयं समाख्यातः सत्यलहादिसूरिभिः ॥ २७ ॥ लग्न चन्द्रमासे बारहवां शनि पापदृष्ट होवै तो कैदमे प्रसव होवे । कर्क वा वृश्चिक लग्नमे चन्द्रमासहित शनि होवै तो गढे ( खाई ) मे होवै ॥२३॥ लग्नमे बुध, चौथा कोई शुभग्रह हो चद्रमा अपनी राशि ४ का तथा पूर्ण हो अथवा ऐसा चद्रमा ११ । १ । ७ मेसे किसीमे होवै तो निश्चय वह नाव ( नौका जहाज) मे जन्मता है ॥ २४ ॥ जलचरराशि लग्नमे शनि चन्द्रदृष्ट होवै तो ऊपर भूमिमे, सूर्य से दृष्ट हो तो देवतालयमे, बुपसे दृष्ट होवै तो खेलके स्थान में क्रमसे प्रसव कहना ॥ २५ ॥ पुरुपराशिल शनि, भौम दृष्ट होवे तो श्मशानमे, बुधदृष्टि से शिल्प ( कारीगरी ) के घरमे, चन्द्रदृष्टिसे राजघरमे, शुक्रदृष्टि से गोशालामे, सूर्यदृष्टि से देवतालयमे, गुरुदृष्टि से यज्ञशालामे प्रसव होता है ऐसा सत्यलल्लादि पण्डितोने कहा है ॥ २६ ॥ २७ ॥ चरे भांशचारेण तुल्ये पथि स्यात्प्रसूतिः स्थिरे स्वर्क्षगैः खेचरेद्रेः । निजांशस्थितैः स्वीयगेहेऽथ वीर्यात्फलं भांशयोहरिकेद्रा वदंति ॥ २८ ॥ यदैकराशिगौ लग्नचन्द्रौदृष्टिविवर्जितौ । विजने प्रसवः प्रोक्तो मणित्याद्यैश्च सुरिभिः ॥ २९ ॥ ताताम्बाभानेषु तद्वलवशात्रीचस्थितैः साधुभिः सूतिः स्यात्तरुशालकादिषु तदा यद्वा तरोराश्रितः ।
मंदर्भाशगते विधौ हिब्रुकगे नीरांशकऽथवा मंदनैव युतेक्षिते तमसि वा भूमौ च नीचस्थिते ॥ ३० ॥
लग्न चरराशि और चरांशकी होवे तो मार्गमे प्रसव, स्थिरगारी और नवांशकमे तथा स्थिरराशि वा स्वराशि स्वांशकी ग्रहोंने अपने घरमे प्रमव वर्गोत्तमादि बलसे राश्यंशफल श्रेष्ठ ज्योतिषी कहते है ॥ २८ ॥ यदि लग्न चंद्रमा एक राशेिमे हो उन्हें कोईभी ग्रह न देखे तो जहाँ कोई मनुष्य न हो ऐसे स्थानमे प्रसव होना मणित्यादि पडितोने कहा है ॥ २९ ॥ पितृसजक यह सूर्य शनि बलवान् हो तो पिता वा उसके भाइयोके घरमे जन्म, यदि मातृसंज्ञक ग्रह चं० शु० बलवान् हो तो माता वा उसकी बहिनके घरमे प्रसव कहना । शुभग्रह नीचराशियोमे होवै तो वृक्षके नीचे वा लकडकेि घरमे, चंद्रमा शनिके राशि और अशकमे चौथा हो अथवा जलचर राशिमे वा जलचर राशिके अशकमे हो और शनिहीसे युक्त वा दृष्ट हो अथवा नीचका हो तो इन प्रत्येक योगोमे अधेरेमे जन्म कहना अथवा भूमिमे जन्म जानना । इनमे विशेष विचार है कि, सूर्य बलवान् मंगलसे दृष्ट होवै तो उक्त योगोके हुएमेंभी दीपसहित घरमे जन्म होगा अधेरेमे नहीं । जो ३से ऊपर ग्रह नीचराशियोमे हो अथवा लग्न वा चतुर्थमे नीचका चन्द्रमा हो तो भूमिमे जन्म कहना ॥ ३० ॥ सुखप्रसवपुत्रकन्योत्पत्तिविचारः ।
" शुभग्रहैः स्वबंधुगैः सुखेन संयुतः सवः । सुतांकसप्तमस्थितैरस्तु कष्टतः ॥ ३१ ॥ ओजभे च विषमांशकोपगैलन - चन्द्रगुरुभास्करैर्नरः । स्यात्तथापि समभे समांशगैः स्त्री निषेकसमयप्रसूतिषु ॥ ३२ ॥ लग्नं विनौजर्क्षगतो यदि स्यात्सौरोऽपि पुंजन्मकरः सवीर्यः । बलान्वितो व्योमचरी नराख्यश्चतुष्टये वा नरजन्म कृत्स्यात् ॥ ३३ ॥ शुभग्रह दूसरे और चौथे भावोंमे होवै तो प्रसव सुखपूर्वक होवै । पञ्चम, नवम, सप्तम भावोमे पापग्रह होवै तो कष्टसे प्रसव होवै ॥ ३१ ॥ विपमराशि विषमांशकमे लग्न, चंद्र, गुरु, सूर्य, होवै तो पुरुष होगा । स्त्रीराशि स्त्रीनवांशकोमे उक्त ग्रह आधान प्रश्नकालमे होवै तो कन्या जन्म होता है ॥ ३२॥
लग्न विना विषम राशिमे शनिभी पुरुषका जन्म करता है, यदि बलवान् हो । पुरुषग्रह बलवान होकर केन्द्रमे होवै तो पुत्र जन्म करता है । ये योग आधान वा प्रश्नमे विचारणीय है । जन्मपत्री पुरुषकी वा स्त्रीकी है ऐसे प्रश्नमें भी काम आते है इसलिये इस अध्याय लिखे है ॥ ३३ ॥ पितृपरोक्षादिजन्मयोगाः ।
क्रूरक्षगाः क्रूरखगा यदि स्युर्दिवामणेर्धर्मसुतास्तसंस्थाः । स्थिरादिभेकै जनकोऽन्यदेशे बद्धः स्वभावाद्विषयादिकेषु ॥ ३४ ॥ न प्राग्विलनं यदि पश्यतीन्दु शुऋयोर्मध्यगतेऽथवाऽब्जे । यमोदये वा कुसुतेऽस्तसंस्थे पितुः परोक्षस्य तदा हि जन्म ॥ ३५ ॥ तनुं न वीक्षिते विधौ चरर्क्षकांशसंधिगे । परोक्षसंस्थितस्य वा पितुर्जनुस्तदा भवेत् ॥३६॥ यदि क्रूरग्रह क्रूरराशियोये सूर्य से ९ । ५ । ७ भावोमे होवै तो बालकका पिता उस समयमे बधनमे होगा । इसमे विशेष विचार है कि, सूर्य स्थिर राशिमे होवै तो स्वदेशमे, चग्राशिमे होवै तो विदेशमे और द्विस्वभावमे होवे तो मार्गमे बालकका पिता बालकके जन्ममे बधनमे होगा ॥ ३४ ॥ लग्नको यदि चन्द्रमा न देखे अथवा चन्द्रमा बुध शुक्रके बीचमे होवै अथवा शनि लग्नमे मगल सम्ममे होवे तो जन्ममे पिता परोक्ष होगा ॥ ३५॥ चंद्रमा चरराशि और चराराककी सधिमे हो लग्नको न देखे तौभी पिता परोक्ष होगा ॥ ३६ ॥
पित्रोररिष्टयोगाः ।
भौमेक्षिता वर्कसितौ रात्र्योस्तदा वदेत्तत्पितरं व्यतीतम् । चरक्षगौ भौमयुतेक्षितौ वा तदान्यदेशे जनकस्य मृत्युः ॥ ३७ ॥ व्ययाष्टमस्थितौ खलौ विलग्नपे बलोज्झिते । तुरीयधर्मगौ हि वा पिता रुगर्दितः स वै ॥ ३८ ॥ जनौ रखेर्बलस्थिते शनौ तदीक्षिते यदा । पिता रुगर्दितस्तदा कुजेक्षितेऽथवा भवेत् ॥ ३९ ॥ | सदृष्टिपादान्वितमुग्रदृष्टिविवर्जितं दृष्टियुतं ज्ञगुवः । तन्वादिकानामपि भाववीर्य विचारणीयं विदुषा प्रयत्नात् ॥ छब्बीस ॥ लनादि भावस्वामियोका बलही भावबल होता है। मनुष्यराशि तीन ।छः। सात । ग्यारह और धनका पूर्वार्द्ध और कुभ इनमे सप्तमभाव घटाय देना, चतुष्पद राशि एक । दो । पाँच धनका उत्तरार्द्ध मकरका पूर्वार्द्ध इनमे चतुर्थ भाव घटाना कीटराशि कर्क वृश्चिकको लग्नमे घटाना । जलचर राशि मीन और मककरे पश्चिमार्द्धमेसे दशम भाव घटाना तब शेष छः राशिसे अधिक होवे तो बारह मे शुद्ध करना षड्भावाल्प शेषसे दिग्बलमे पूर्वोक्त उच्चबलकी रीतिसे बल साधन करना तो भावदिग्बल होता है । तब यह दिग्बल भावबल मे युक्त करना । भावपर जिन ग्रहोकी दृष्टि हो उनमेसे शुभग्रहोकी दृष्टिका ऐक्य करके उसका चतुर्थाश लेना यह धन हम्बल होता है, तथा पापग्रहो की दृष्टिका ऐक्य करके उसका चतुर्थाश लेना यह ऋण हग्बल होता है। इन दोनो वन ऋण हग्बलोका अतर करना तब स्पष्ट हम्बल होता है । इस हम्बलसे भावबलको संस्कृत अर्थात् धन होवे तो युक्त ऋण होवे तौहीन करना तब उसको भावके ऊपरकी बुध गुरुकी दृष्टि युक्त करनी तो स्पष्ट भावबल होता है ॥ पच्चीस ॥ छब्बीस ॥ चेष्टोच्चरश्मयः । ये चेष्टतुंगाख्यबले रसप्ने सैके भवेयुर्निजरश्मयस्ते । स्वतुंगचेष्टाबलपातमूलमिटाख्यमेकोनबलाच्च कष्टम् ॥ सत्ताईस ॥ चन्द्रमेसे सूर्य घटानेसे चद्रमाका और मायन सूर्यमे तीन राशि जोडने से सूर्यका चेष्टाकेन्द्र होता है । इस केंद्र से रश्मि कष्टेट सावनार्थ उच्चबलमे कहीहुई विधिसे चेष्टाबल बनाना । यह चेष्टाबल पूर्वका जैसा षडूबलार्थ नहीं है क्योकि सूर्यका जो अयनबल है वही चेष्टाबल है इसलिये द्विगुण करना, चंद्रमाका जो पक्षबल वही चेष्टावल है इसलिये दूना करना यह नियम है । अब इष्ट कष्ट बल एवं दृष्टि के लिये कहते है कि, ग्रहोका जो चेष्टाबल और उच्चबल उसको छः से गुणाकर उसमें एक जोड देनेसे ग्रहोकी उच्चरश्मि और चेष्टारश्मि होती है । ग्रहोका चेष्टाबल और उच्चबलके गुणाकारका वर्गमूल निकालना बह ग्रहों का इष्ट होता है । ग्रहोका उच्चबल एवं चेष्टावल अलग अलग एकमे घटानेसे शेष गुणाकारका वर्गमूल निकालना वह ग्रहोका कष्ट होता है, इस इष्ट कष्टके अनुसार ग्रहोके शुभाशुभ दशाफल जानना । ग्रहोंका षड्बलैक्य और ग्रहोपर दृष्टिको पृथक् पृथक् ग्रहोके इष्ट और कष्टसे गुनदेनेसे ग्रहोका इष्टबल कष्टबळ और इष्टदृष्टि कष्टष्टष्टि होती है । यह वर्गमूल ग्रंथमे न होनेसे पाठकों के सुममार्थ अन्यत्रसे विधि लिखता हूं - " अंत्यं यावदिहाव्यांकादूर्ध्वतिर्यक्स्थरेखया । सना स्थानांककानां च विषमाख्यसमक्रमात् ॥ त्यक्त्वाऽन्त्याद्विषमात्कृतिं द्विगुणयेन्मूल समेत द्धृते त्यक्त्वा लब्धकृतिं तदाद्यविषमान्धं दिनिघ्नं न्यसेत् । पक्त्यां पंक्तिहृते समेऽन्य - विषमां त्यक्त्वाऽऽतवर्ग फलं पंक्त्या तद्विगुणं न्यसेदिति मुहुः पंकेर्दल स्यात् पदम् ॥ " अर्थात् जिस संख्याका मूल निकालना हो उसके दाहिने ओरसे विषमको ऊर्ध्व रेखासे और समको कुछ तिर्यक् रेखासे चिह्न करना जबतक अंककी समाप्ति न हो जाये तबतक सबके बाई ओर जो अतिम विषम हो उसमे जिस संख्याका वर्ग घटे वह घटाय देना और जिसका वर्ग घंटे उस सख्याको मूल कहते हैं, उसे दूना करना उसका नाम पक्ति है, उससे भाग देना जो विषमके पास सम हो उसमे लब्धि ऐसी लेनी कि, जिसका वर्ग आगेके विषममे घट जाय तो उस लब्धिका वर्ग आगेके विषममे घटाय देना, उसे दूना करके प्रथम जो पंक्तिसज्ञक है उसमे आगे एकस्थानमे बढायके रखना । यदि औरभी होवे तो उसी पक्तिसे पुनः पूर्वरीतिसे भाग देना, लब्धिका वर्ग आगेके विषममे घटाना, लब्धि दूनी पंक्ति में रखना ऐसा अंक समातिपर्यत करते जाना फिर उस पक्तिका आधा करना वह मूल होता है । " मूलावशेषक सैकं षष्टिघ्न विकलान्वितम् । द्विनिघ्नेन द्वियुक्तेन मूलेनाप्तं स्फुटं भवेत् ॥ " अर्थात् सावयव अकके अर्थात् सावयव अकके मूल निकालनेकी रीति कहते है कि, जब मूल निःशेष न होवे तो शेषभे एक जोडके साठ से गुनना इससे आया जो मूल उसको दूना करके दो युक्त करके भागदेना तब मूलका अवयव होता है । यह स्थूल रीति है ॥ " सैकेन द्विघ्नमूलेन भक्तं " अर्थात् मूलावशेषकम् ।। लब्धं तु तदधः स्थाप्यं मूलं सूक्ष्मतर भवेत् ॥ सूक्ष्मरीति ऐसी है कि, जो मूल आया है उसे दूना करके तथा एक और जोडके मूलशेषमे भाग देना, लब्धिको उस मूलके नीचे रखना वह सूक्ष्ममूलके आसन्न होगा। एक और प्रकार है कि, जिसका मूल लेना हो उसेसाठ से गुणके कला युक्त करना पुनः साठ से गुनना उसका मूळ लेना उसे साठ से भाग देना तो ठीक मूल होगा । यदि ऊपरका अंक शून्य होवे तो नीचेके अकको साठ से गुणके विकला युक्त करके मूल लेना उमसे साठ से भाग देना तब मूल होता है । रश्युदाहरण - सूर्यका चेष्टावल शून्य । इकतालीस । अट्ठावन इसे छः से गुणके चार । ग्यारह । अड़तालीस इसमे एक युक्त करके पाँच । ग्यारह । अड़तालीस यह सूर्यकी चेष्टारश्मि हुई । सूर्यका उच्चबल एक सौ अट्ठावन/छप्पन इसको छः से गुना पाँच/तिरेपन । छत्तीस इसे एक जोड दिया छः । तिरेपन । छत्तीस यह सूर्यकी उच्चरश्मि हुई । ऐसेही अन्य ग्रहोकी भी जाननी । इष्टोदाहरण - सूर्यका चेष्टाबल शून्य । इकतालीस । अट्ठावन को सूर्यके उच्चबल शून्य । अट्ठावन । छप्पन से गुना शून्य । इकतालीस । तेरह इसका वर्गमूल शून्य । उनचास । तैंतालीस यह सूर्यका इष्ट भया, ऐसेही अन्य ग्रहोका भी जानना । कष्टोदाहरण - सूर्यका चेटाबल शून्य । इकतालीस । अट्ठावन इसको तीन घटायके शून्य । अट्ठारह । दो सूर्यका उच्चबल शून्य । अट्ठावन । छप्पन इसको एक मे घटायके शून्य । एक । चार इससे शून्य । अट्ठारह । दो को गुणा शून्य । अट्ठारह । दो को गुणा शून्य । शून्य।उन्नीस इसका वर्गमूल शून्य । चार । बीस यह सूर्यका कष्ट हुआ ऐसेही सबका जानना । इष्टकष्टबलोदाहरण- सूर्यका षड्बलैक्य सात । इक्यावन । तिरेपन । तीस इसको सूर्यके इष्ट शून्य । उनचास । तैंतालीस से गुना छः । इकतीस । शून्य । तिरेपन यह सूर्यका इष्टबल भया । सूर्यका कष्ट शून्य । चार । बीस इससे सूर्यके षड्बलैक्यको गुणके शून्य । चौंतीस । चार । बावन यह सूर्यका कष्टबल भया । ऐसेही चन्द्रादियोका भी जानना । इष्टकष्टदृष्टिका उदाहरण- चंद्रमापर सूर्यकी दृष्टि शून्य । अट्ठारह । चौवन इसको चंद्र इष्ट शून्य । छब्बीस । तीन से गुणा शून्य । आठ । बारह यह चंद्रमापर सूर्यकी इष्टदृष्टि हुई । चंद्रमाका कष्ट शून्य । बत्तीस । सैंतालीस से सूर्यकी दृष्टिके शून्य । अट्ठारह । चौवन गुणके शून्य । दस । उन्नीस यह कष्टदृष्टि भई । ऐसे सबकी इष्टदृष्टि कष्टदृष्टि जाननी ॥ सत्ताईस ॥ विगम्ये खेटलीलाविलासे सम्यग्बोधे पुंजराजोदिते च । होरासारे शंभुहोराप्रकाशे वीर्याध्यायः पूर्ण आसीत्तृतीयः ॥ अट्ठाईस ॥ इति श्रीपुजराजविचिते शम्भुहोराप्रकाशे ग्रहबलसाधनाध्यायस्तृतीयः ।। तीन ।। इसका अर्थ पूर्वोक्तही है, यह ग्रहबलसाधनाध्याय तीसरा है ॥ अट्ठाईस ॥ इति श्री शम्भुहोराप्रकाशे माहीवरीभाषाटीकाया ग्रहालसावना यायस्तृतीय ॥ तीन ॥ अथ निषेकाध्यायः चार । चलान्वितावर्कसितौ स्वभांशे पुंसां सदा चोपचये भवेताम् । तथाङ्गनानां शशिभूमिजौ वा तदा भवेद्गर्भसमुद्भवश्च ॥ एक ॥ स्त्रीणां विधौ चोपचये कुजेन दृष्टेऽपि गर्भग्रहणेऽपि योभ्या । पुंसां तथा गीप्पतिना प्रदृष्टे स्त्रीपुंसयोर्योगमतोऽन्यथा च ॥ दो ॥ निषेकेऽस्त राशिर्यथा मैथुने च तथा तत्समः पुरुषो मैथुने स्यात् । असत्खेचरैः संयुते वीक्षितेऽस्ते सरोषः शुभैस्यियुक्तद्विलासः ।।तीन।। अब निषेकाध्याय कहते है - पुरुषकी राशिसे बलवान सूर्य शुक्र अपनी राशि वा अंशादिमे उपचयस्थानोमे होवे तथा स्त्रीके चन्द्रमा मगल बली एव उपचयमे होवे तो ऐसे अवसरमे गर्भ रहता है ॥ एक ॥ स्त्रियोके उपचयमे चन्द्रमा मंगलसे दृष्ट हो उस समय स्त्री गर्भग्रहणयोग्या होती है तसेही पुरुषांके उपचयगत चद्रमाको गुरु देखे ऐसे समय मे स्त्री पुरुषका संयोग गर्भयोग्य होता है अन्यथा नहीं ॥ दो ॥ आधानकालमे जैसी सप्तमराशि हो उसके अनुरूप पुरुष या स्त्रीकी प्रकृति होती है । अर्थात् सप्तम भावमे पापदृष्टि पापयोग होवे तो रोषकलहयुक्त और शुभग्रह योगदृष्टि से हासविलामयुक्त होती है ॥ तीन ॥ भाषाटीकासहितः अशून्य चार । गर्भधारणसमयः । स्त्रीणामृतुः षोडशकं निशानां तासां त्यजेत्सप्तकमत्र पूर्वम् । समे नराणां विषमेऽङ्गनानां गर्भा भवेयुः पुरुषस्य योगात् ॥ चार ॥ शनैश्चरक्ष्मासुतशुक्रसूर्यैर्निजांशगैश्चोपचयस्थितैश्च । त्रिकोणलग्नोपगते सुरेज्ये वीर्यान्विते गर्भसमुद्भवः स्यात् ॥ पाँच ॥ वीर्यान्विते लग्नगते सुरेज्ये त्रिकोणसंस्थे यदिवाऽत्र योगः । स्युर्निष्फलास्ते ह्तवीर्यकाणां वीणेवशब्दाः श्रववर्जितानाम् ॥ छः ॥ स्त्रियांकी ऋतु सोलह रात्रिपर्यत रहती है, उनमेसे प्रथमकी सात रात्रि छोडके सयोग करनेमे विषमदिनोमे कन्या, सम दिनोमें पुरुष गर्भमे पैदा होता है ॥ चार ॥ आधानलग्नसे वा प्रश्नलग्नसे शनि, मगल, शुक्र और सूर्य अपने अशकोमे तथा उपचय तीन।छः।दस।ग्यारह मे हावै तथा त्रिकोण पाँच।नौ वा लग्नमे बृहस्पति होवै तो गर्भोत्पत्ति होवे ॥ पाँच ॥ अथवा बलवान् बृहस्पति लग्न मे हो वा त्रिकोणम होवे तौभी गर्भयोग होता ह । ऐसे योग हतवीर्य को बविरको वीणाका शब्द जैसा निष्फल है ॥ छः ॥ गर्भाधानसमयान्मातापित्रोररिष्टविचारः । यथा नृनायर्हि मनःस्वभाव रतौ तथा गर्भगतोऽत्र जन्तुः । द्यूने वेर्मन्दकुजौ तु पुसा रोगप्रदौ शीतरुचेः स्त्रियश्च ॥ सात ॥ सूर्ये यमारांतगते तु पुंसः स्त्रियास्तथेन्दौ मृतिौ तयोः स्त· । मन्देन वाऽऽरेण दिवाकरेन्द्र युक्तौ च दृष्टौ निधनं तयोर्वा ॥ आठ ॥ स्वर्क्षस्थितौ रन्ध्रगतौ यमार्को प्रष्टः स्त्रियं संदिशतश्च वध्याम् । छिद्रस्थितौ चन्द्रबुधौ सदोषां वा काकवन्ध्यां वदतोऽङ्गनां वै ॥ नौ ॥ निषकसमयमे स्त्रीपुरुषका मनःस्वभाव जैसा होवै वैमाही गर्भगत जीवभी होता है । उस समयके लग्नसे या प्रश्नलग्न मे सूर्य से सप्तम शनि मगल होवै तो पुरुषको और चंद्रमासे सप्तम होवे तो स्त्रीको रोग करते है ॥ सात ॥ शनि मंगलके बीच सूर्य होवै तो पुरुषको और चद्रमा होवै तो स्त्रीको मृत्यु देते हैं। अथवा शनि मंगलसे युक्त सूर्य चन्द्रमा होवै अथवा दृष्ट होवै तो स्त्री पुरुष दोनोंहीका मरण होताहै । इन योगोंके फल गर्भके दिनोमे होतेहै ॥ आठ ॥ प्रश्नलग्न से अष्टमस्थान मे अपने राशिके शनि सूर्यमे से कोई होवे तो प्रष्टाकी स्त्री बांझ कहनी अर्थात् गर्भ नहीं है। चंद्र बुध अष्टम होवै तो उसकी स्त्रीपर कोई प्रकार रोग, या भूत, देवता आदिका दोष है । जिससे गर्भ नहीं होता । अथवा काकवंध्या - कहनी ॥ नौ ॥ गर्भस्रावो रजोवर्णाश्च । मृतप्रजा छिद्रगयोः सितेज्ययोर्गर्भस्रवा भूमिसुतेऽष्टमस्थे । छिद्रेश्वरे छिद्रगते बलान्विते पुष्पं न विन्दत्यबला सुगर्भदम् ॥ दस ॥ सूर्येऽत्र कपिलं पुष्पं चन्द्रे वेतं कुजेऽरुणम् । बुधे विचित्रवर्णाभं गुरौ मांजिष्ठवर्णकम् ॥ ग्यारह ॥ सिते ॥ श्वेतं शनौ कृष्णं राहौ जलसमं वदेत् । शून्येऽष्टमे स्वभावस्थं मार्गे पात्यं खले गृहे ॥बारह॥ पुष्पमेति तदुष्णं तु भौमाकौँ शीतलं परे । कटिवातं वदेगा पीडाकरमहर्निशम् ॥ तेरह ॥ अष्टमस्थानमे गुरु शुक्र होवैं तो प्रष्टाकी स्त्रीके पुत्र मरते होगे, मगल अष्टम हो तो गर्भस्राव होते होगे, अष्टमेश अष्टम में बलवान् होवे तो गर्भ देनेवाला उत्तम पुष्प हीन होवै ॥ दस ॥ अष्टमस्थानमे सूर्य होवै तो धूम्ररंगका, चंद्रमासे श्वेत, मंगलसे लाल, बुधसे अनेक वर्ण, बृहस्पतिमे मंजीठके रगकासा ।। ग्यारह ।। शुक्र से श्वेत, शानेसे काला, राहुसे जलके समान रजका रंग कहना । अष्टममे कोई ग्रह न होवै तो पुष्पका रंग स्वाभाविक कहना । तहां पापराशि होवै तो मार्गमे गिराने योग्य अर्थात् बहुत रज हो ॥ बारह ॥ मंगल सूर्यसे रज गरम उतरे, अन्य ग्रहोसे शीतल होवै, राहु अष्टम होवे तो दिन रात पीडा करनेवाला कटिमे वातकारक रज होवै ॥ तेरह ॥ दिनेऽर्कशुक्रौ पितृमातृसंज्ञो नक्तं शनीन्दू सहजेऽन्यथा तत् । पितृव्यमातृष्वसृसंज्ञितौ च तयोः शुभावोजसमर्क्षगौ तौ ॥ चौदह ॥ क्रूरान्तस्थौ लग्नचन्द्रौ निषेके क्रूरैः खेटेः संयुतौ वाथ दृष्टौ । सौम्यैश्चैतौ वीक्षितौ नैव युक्तौ नारी गर्भेणान्विता मृत्युमेति ॥ पंद्रह ॥ चन्द्रात्तनोर्वा यदि पापखेटेर्वन्धुस्थितै भूमिसुतेऽष्टमस्थे । यद्वा कुजाकौं व्ययबन्धुसंस्थौ क्षीणे निशेशे मृतिरुक्तवत्स्यात् ॥सोलह॥ शुक्रो यदा मन्दयुतोऽथ दृष्टश्चन्द्रात्सुतस्थः स तु मातृहन्ता । सपापकः कर्मगतोऽथ वा चेदिवाकरो मातुरनिष्टदः स्यात् ॥ सत्रह ॥ क्षीणे विधौ पापयुते च मृत्युस्तदन्यथाऽर्के जनकस्य नूनम् । आधिर्भवेत्पापनिरीक्षितौ तौ मिश्रैर्विमिश्रं शुभदैः शुभं स्यात् ॥ अट्ठारह॥ सप्तमस्थे दिवानाथे लग्नस्थे धरणीसुते । शस्त्र प्रहारान्निधनं जायते नात्र संशयः ॥ उन्नीस ॥ दिनके आधानमे सूर्य पिता, शनि ताऊ , शुक्र माता, चन्द्रमा माताकी बहिन । रातके आधानमे शनि पिता, सूर्य ताऊ , चन्द्रमा माता, शुक्र माकी बहिन ऐसी संज्ञाये इस लिये कि, दिनके आधानमे सूर्य विषम राशिमे हो तो पिताको शुभ रात्रिकेमे पितृव्यको शुभ, समराशिमे होवै तो दिनके गर्भमे माताको, रातमे मांकी बहिनको शुभ, शनि विषम राशिमे हो तो रातके गर्भ में पिताको शुभ, दिनमे पितृव्यको शुभ, चद्रमा रामराशिमे हो तो रातमे माताको दिनमे मांकी बहिनको शुभ, शुक्र दिनके गर्भमे सम राशिमे माताको, रातमे माताकी बहिनको शुभ इत्यादि । उक्त राशि तथा दिनरातके विपरीत होनेमे शुभाशुभ फलभी विपरीत होता है ॥ चौदह ॥ आधानलनमे लग्न चन्द्रमा पापग्रहोके बीचमे हो पापग्रहोसे युक्त वा दृष्ट हो शुभग्रहोसे युक्त हृष्ट न हो तो वह स्त्री गर्भसहित मरजावे ॥ पंद्रह ॥ लग्नसे वा चन्द्रमासे चतुर्थ स्थानमे पापग्रह होवै, अष्टममे मंगल हो अथवा मंगल सूर्य बारह । चार भावमे होवे, चन्द्रमा क्षीण होवै तो भी गर्भसहित स्त्री मरे ॥ सोलह ॥ यदि शुक्र शनिसे युक्त वा दृष्ट हो और चन्द्रमासे पचम होवे तो माताका मारनेवाला होता है । सूर्य पापयुक्त दशम भावमे माताको अनिष्ट देनेवाला होता है ॥ सत्रह ॥ क्षीण चन्द्रमा पापयुक्त होवै तो माताको मृत्यु हावै । उसके विपरीत फल अर्थात् सूर्यसे पिता की मृत्यु होती है। सूर्य चन्द्रमा पापदृष्ट होवै तो माता पिताको मानसी व्यथा होवै । शुभ पापोसे युक्त दृष्ट होनेमे फलभी मिश्रित होता है ॥ अट्ठारह ॥ सप्तममे सूर्य लग्नमे मगल होवै तो निःसदेह उक्त मृत्यू शस्त्र प्रहार से होवै ॥ उन्नीस ॥ मासि मासि गर्भगतजीवावयवा मासेश्वराश्व । कललं च घनं शाखास्थित्वग्रोमोमः स्मृतिः । भुक्ति रु द्वेग संभूतिर्मासेष्वाधानतः कमात् ॥ बीस ॥ शुक्रारजीवार्कशशीयमज्ञलग्नेशशीतांशुदिवाकराः स्युः । मासेश्वरास्तैः कलुषैः प्रपीडा पातो हतैर्वीर्ययुतैश्च पुष्टिः ॥इक्कीस॥ वर्याढ्यः स्यान्मासपः स्वोच्चगो वा वृद्धिर्गर्भस्येव चेन्निघ्नवीर्यः । अस्तं यातो नीचगः पापयुक्तस्तत्तन्मासे जायते गर्भपातः ॥ बाईस ॥ गर्भ प्रथममासमे रज वीर्य मिलके पतला रहता है, दूसरे मासमे गाढा होकर पिण्डाकार होता है, तीसरेमे उसमे हाथ पैर आदि अवयव निकलते है, चौथेमे हड्डी पैदा होती है, पाचवेमे त्वचा बनता है, छठेमे रोम जमते है, सातवेमे हस्त पादादि हिलाने लगता है । आठवेमे माताके किये भोजनका असर उसपर होता है, नवममे चलनेकी नाई हस्तपाद सचालन और दशममे प्रसव होता है ॥ बीस ॥ शुक्र, मंगल, बृहस्पति, सूर्य, चद्रमा, शनि, बुध, लग्नेश, चद्रमा और सूर्य ये गर्भके दस महीनोके मासाधिपति है । जिस महीनेका स्वामी निर्बल हो उसमे पीडा गर्भको होती है । जिस महीनेका स्वामी पीडित है उसमे गर्भपात और जिसका स्वामी वीर्यवान् हो उसमे पुष्टि होती है ॥ इक्कीस ॥ जिस महीनेका स्वामी बलवान् अथवा उच्चका हो उसमे गर्भकी वृद्धि होती है, जिस महीनेका स्वामी हीनवीर्य अस्तगत नीचगत पापयुक्त हो उसमे गर्भपात होता है ॥ बाईस ॥ गर्भस्रावयोगः । यमारौ लग्नगौ स्त्रीणां गर्भस्रावस्तथा विधौ । तद्भे दृष्टे तद्युते वा गर्भपातः प्रजायते ॥ तेईस ॥ भाषाटीका सहितः अशून्य चार । शनि मंगल लग्नमे होवै तो स्त्रियोका गर्भस्राव होवै चन्द्रमाभी उस भाव मे हो अथवा उसे देखे तो गर्भपात होता है ॥ तेईस ॥ पुस्त्रीयमलाद्युत्पत्तियोगाः । ओजक्षकांशोपगतौ रवीज्यौ सूतौ च पुंजन्मकरौ निषेके । समर्क्षकांशोपगताः सितेन्दुधरात्मजाः स्त्रीजननप्रदाः स्युः ॥ चौबीस॥ गुर्वर्कयोश्चापनृयुग्मभांशे ज्ञदृष्टयोः पुंयुगुलं तदा स्यात् । तद्वच्च कन्याझप गैः सितारकलाधरैः स्त्रीयुगलं सवीयैः ॥ पच्चीस ॥ सूर्य गुरु आधानकालमे विषम राशि विषमांशकोमे होवै तो पुरुष जन्मेगा, शुक्र चन्द्रमा मगल समराशि समाशकोमे होवै तो कन्याका जन्म करते है ।। चौबीस गुरु सूर्य तिरानवे राशि अशकोमे बुधसे दृष्ट होवै तो दो पुत्र हावै । ऐसेही कन्या छः मीन बारह राशिके अंशकमे शुक्र मगल, चंद्रमा होवै तथा बलवान् होवै तो दो कन्या होगी ॥ पच्चीस ॥ क्लीबयोगाः । ओजेऽब्जलग्ने क्षितिजन दृष्टे समौजगौ वा द्विजराजसोम्यौ । ओजांशके भार्गवलग्नसूर्या वीर्यान्विताः क्लीबजनुःकराः स्युः ॥छब्बीस॥ समोजभस्थावपि लग्नसूय परस्परं चेत्परिपश्यतो वा । कुजोष्णगू वा शनिसोमजौ वा तद्वच्च तौ कीबकरौ निरुक्तौ ॥ सत्ताईस ॥ विषमराशि लग्न और चद्रमा मगलसे दृष्ट हो अथवा चद्रमा समराशिमे बुध विषमराशिमे हो, दोनो परस्पर देखे अथवा शुक्र सूर्य लग्न बलवान् हो तथा विषम नवाशकोने हो तो ये योग गर्भसे नपुसक उत्पन्न करनेवाले होते है ।॥ छब्बीस ॥ लग्न सम राशि सूर्य विषम राशिमे हो परस्पर देखते हो अथवा ऐसेही मगल सूर्य अथवा चद्रमा बुध होवै तो भी नपुंसक उत्पन्न करनेवाले कहे है ॥ सत्ताईस ॥ गर्ने व्यधिकजन्तवः सर्पवेष्टितश्च । धनुर्विलग्नेऽन्त्यलवे प्रदृष्टे सौम्येन सौरेण च वीर्ययुक्तैः । धन्वांशक स्थैरखिलैश्च खेटैर्गर्भो भवेन्यूर्जकजंतुकच ॥ अट्ठाईस ॥ शम्भुहोराप्रकाराः । भौमस्य द्वेष्काणगते हिमांशौ पापान्विते पापविलग्नके च । सौम्यग्रहेरायधनोपयातैः सर्पेण संवेष्टितगर्भ एव ॥ उनतीस ॥ लगमे धनका अन्त्य नवांशक हो बुध शनि उसे देखे, अन्य संपूर्ण ग्रह बलवान् हो तथा सभी धननवांशकमे होवै तो गर्भसे तीनसे अधिक जीव उत्पन्न होगे ॥ अट्ठाईस ॥ चद्रमा मंगलके द्रेष्काणमे पापयुक्त होवै, पाप राशि लग्नमे हो और शुभग्रह लाभ धनभावमे होवै तो बालक सर्प वा सर्पसे वेष्टित होगा ॥ उनतीस ॥ सगर्भस्त्रीमरणयोगः । असद् हैर्व्ययस्थितैः शुभस्य दृष्टिवर्जितैः । निषेककालिके वदेन्मृतिर्बुधैस्तु योषितः ॥ तीस ॥ पापग्रह व्ययभावमे हो शुभग्रह उनको न देखे ऐसा योग आधानकाल चा प्रश्नमे होवै तो गर्भसहित स्त्रीका मरण होना पंडितोने कहा है ॥ तीस ॥ बामनशिरोबाहुपादादिरहितयोगाः । सूर्येन्दु मन्दैर्मकरेऽन्त्यलग्ने दृष्टे भवेद्वामनकः सपापैः । धीधर्मलग्नोपगतैर्हकाणैर्भुजांघ्रिशीषैश्च विवर्जितः स्यात् ॥ इकतीस ॥ विलग्नद्रेष्काणगते महीजे निरीक्षिते सूर्यशनीदुभिश्च । कुर्यादशीर्ष सुत विबाहुं धर्मे विपादं न शुभेक्षितश्चेत् ॥ बत्तीस ॥ मकर लग्न अत्यनवाशक हो उसे सूर्य, चद्रमा, शनि देखे तो वामन बावन अंगुल शरीवाला होवै । लग्नमे पापयुत द्रेष्काण दूसरा हो सूशून्य चशून्य शशून्य देखे तो उसके हाथ न होवै और यदि लग्नमे पापयुक्त तीसरा द्रेष्काण तथा सूशून्य चशून्य शनिसे दृष्ट हो तो उसके पैर न होवै । प्रथम द्रेष्काण सूशून्य चशून्य शशून्य दृष्ट होवै तो उसका शिर न होवै ॥ इकतीस ॥ इसीको दूसरे प्रकार कहते है कि, लग्न द्रेष्काणमे मगल हो उसे सूशून्य शशून्य चन्द्रमा देखे तो वह देष्काण प्रथम होवै तो शिररहित, दूसरा हावै तो बाहुरहित और तीसरा हावे तो पादरहित हो परन्तु उसपर शुभदृष्टि न होगी जब पूरा फल होगा ॥ बत्तीस ॥ पितृमातृग्रहद्रेष्काणवशात्फले न्यूनाधिकत्वं गर्भसुखद्विगुणमुखादियोगाः । आदौ हि पूर्ण ददतु स्वकीयं फलं धुरात्र्योः पितृमातृखेटौ । मध्ये च मध्यं चरमेऽतितुच्छं शुभाशुभं वा परिकल्पनीयम् ॥ तैंतीस ॥ लग्नेन्दुतः केन्द्रधनत्रिकोणसंस्थैः शुभैख्यायगतैरसौम्यैः । गर्भस्तदानी सुखसंयुतः स्याद्वीर्यान्वितस्तिग्ममयूखदृष्टया ॥ चौंतीस ॥ बुधे त्रिकोणगे शेषैर्बलहीनैर्नभश्चरैः । मुखपादकरैरेव द्विगुणः स्यात्तदा शिशुः ॥ पैंतीस ॥ जो पहिले पितृमातृसज्ञक ग्रह कहे है उनका शुभाशुभ फल प्रथम द्रेष्काण में हो तो पूर्ण, मध्य द्रेष्काणमे मध्यम और तीसरेमे तुच्छ होता है। ऐसी कल्पना करना ॥ तैंतीस ॥ लग्न एवं चन्द्रमासे केंद्र एक । चार । सात । दस धन दो त्रिकोण पाँच । नौ भावोमे शुभ ग्रह हो और तीन । ग्यारह में पापग्रह होवें उनपर सूर्यकी दृष्टि होवै तो बलवान और सुखयुक्त रहकर जन्मेगा ॥ चौंतीस ॥ दुध त्रिकोण पाँच । नौ मे हो अन्यग्रह बलरहित होवै तो बालकके मुख वा पाद वा हाथ द्विगुण होवै । बहुधा छः अंगुलियां हाथ वा पैरमे देखनेमे आती है ॥ पैंतीस॥ भांशे लग्नस्थेऽर्कसूनौ धुनस्थे मंदे चेत्स्यात्सूतिरब्दत्रयेण । प्रालेयांशौ तद्वदेवं निषेके संसूतिः स्याद्वत्सरैर्भानुसंख्यैः ॥ छत्तीस ॥ उक्ता योगाः खेचराणां खलानां पापास्ते स्युः सौम्यदृष्टाश्च युक्ताः । सत्खेटानां सत्फलं वा विदध्युर्मिश्रैर्मिश्रं हौरिकार्यैर्वैिचित्यम् ॥ सैंतीस॥ लग्नमे शनेिकी राशि वा नवांशक हो और शनि सप्तम होवै तो गर्भप्रसव तीन वर्ष में होगा । चंद्रमाकी राशि नवांशक लग्न में और चंद्रमा सप्तम होवै तो बारह वर्षमे प्रसव होगा । जो योग पापग्रहकृत है वे पापफल देते हैं, जो शुभग्रहकृत योग है या शुभग्रहोसे इष्ट युत है वे शुभफल देते है । मिश्रितमें फलभी मिश्रित, श्रेष्ठ ज्योतिषी विचारे । यहांके विशेषोपयोगी प्रश्नयोग कन्या पुत्र होनेके योग सूतिकाध्यायमे देखे ।। छत्तीस ॥ सैंतीस ॥ विद्वगम्ये खेटलीलाविलासे सम्यग्बोधे पुंजराजोदिते च । होरासारे शंभुहोराप्रकाशे गर्भाधानाध्याय आसीत्सुपूर्णः ॥ अड़तीस ॥ इति श्रीपुञ्जराजविरचिते शम्भुहोराप्रकाश आधानाध्यायश्चतुर्थः ॥ चार ॥ अध्यायश्लोकका अर्थ पूर्ववत् है । यह आधानाध्याय पूर्ण भया ॥ अड़तीस॥ इति श्रीशम्भुहोराप्रकाशे माहीवरीभाषाटीकायामावाना व्यायश्चतुर्थ ॥ चार ॥ फलादेश इष्टकाल ठीक होनेपर ठीक मिलता है अन्यथा ज्योतिषीका उपहास मात्र होता है । यह समय जन्मकालहीमे ठीक होगया तो ठीक है नही तो इष्टशोधनादि अनेक युक्तियोसे भी ठीक नहीं होता । प्रसूतिकालमे स्त्रीलोग कन्या पुत्र वा जीवित मृतकका निश्चय करके बाहर कहती है इसके बीचमे कुछ समय व्यतीत होजाता है तहा ज्योतिषी अपने अनुमानसे अंतर देके इष्टकाल रखते है । कोई कोई चलती वा कर्णाकर्णी सुनी प्रथाके आरूढ लोग ठीक समय जन्म होनेही मात्रमे बाहर सुनाने और घडी घण्टा ठीक हुए परभी अपनी गढंत कल्पना करके कुछ न कुछ घटायही देते है, कोई कहते है कि, शीर्षोदय मे इष्टकाल मानना चाहिये, उस शीर्षोदयके पीछे कुछ समय बाद प्रसव होकर बाहर खबर मिलती है तब अपने अदाजसे कुछ समय घटाय देते हैं परंतु उनको यह ज्ञान तो होताही नहीं है कि, शीर्षोदयसे कितने देरीमे जन्म भया है, शीर्षोदय इष्टकाल मानना एक स्थूल परपरासे मानते है उसमे विचार संशोधन युक्ति प्रमाणानुमानादिक आवश्यक है । आयुप्रमाण श्वासापर है । श्वासा पूरे होनेपर शरीर रहतेभी मर गया कहते है ऐसेही जन्ममे प्रथम श्वासा आयुका आरंभ है, विना श्वासाका शरीर मृततुल्य है, इसलिये बालकके प्रथम श्वासा भरनेपर जन्मेष्ट मानना ठीक है । काकतालीय न्यायसे शीर्षोदय होनेपर शीघ्र ही प्रमव पूरा हो और श्वासाभी उसी क्षणमे लेने लगे तब तो ठीक हो सकता है । अन्यथा ठीक नही मिलता । इस विषयमे ज्योतिष, वैदिक, डाक्टरी, धर्मशास्त्र, अनुमान, प्रत्यक्षप्रमाण, अपना अनुभव आदियोसे मै मुक्तकंठसे कहताहू कि, प्रथम श्वासा लेने का समयही ठीक इष्टकाल है अन्य नही । इस विषयमे कुछ व्याख्या मैने बृहज्जातक माहीघरी माशून्यटीशून्य सूतिकाध्यायके आदिमे भी लिखी है । विद्वान् शास्त्रज्ञ अनुभवी महाशय इसमें विचार करके देखलेवै ॥ आधानात्प्रश्नाद्वा जन्मसमयज्ञानम् । सम्यग्ज्ञाते नूनमाधानकाले योगानुक्तांश्चितयेज्जातकज्ञः । यद्वा सर्वे प्रश्नतः सूतिकालात्प्रोक्तास्ते वै तत्फलज्ञैर्महद्भिः ॥ एक ॥ प्रश्नभे कुमुदिनीपतिस्थिते सप्तमं वदति बादरायणः । गर्ग आह भगवान्नृजन्मभं पञ्चमं तु मुनिसंमतं त्विदम् ॥ दो ॥ आधानसमय अच्छे प्रकार जानके जातकज्ञने उक्त योग उसी लनसे बिचारै । वह समय ज्ञात न होवै तो प्रश्न लग्नसे अथवा जन्मलग्नसे ज्योतिष फला देशको जाननेवाले श्रेष्ठ ज्योतिषिये कहै ॥ एक ॥ प्रश्रमे जिस राशिका चद्रमा है उससे सप्तम राशिके चद्रमामे जन्म बादरायण कहते है । गर्ग कहते है कि, पंचम राशिके चन्द्रमामे जन्म होता है, यह मत मुनिसमत है ॥दो॥ तत्काल शीतांशुनवांशकाच्च जामित्रगे शीतकरे प्रसूतिः । लग्नस्य नन्दांशपतेस्तु यद्वा क्षेत्रं प्रयाते हिमगौ प्रसूतिः ॥ तीन ॥ यस्मिद्विषट्रांशगते विधौ तद्राशिस्थितेऽब्जे पुरतः प्रसूतिः । रसातलेशे बलसंयुते च गर्भस्तदानी सुखसंयुतः स्यात् ॥चार॥ यचोदयेद्वोः सबलस्तु तस्य द्विपाः सहितोऽत्र राशिः । तावद्धि तद्राशिगते मृगांके भवेत्प्रसूतिः पुरतश्च केचित् ॥पाँच॥ यावानुदेति युनिशोर्नवांशस्तावद्गते घस्रनिशोर्जनुः स्यात् । युरात्रिसंज्ञाः कथितास्तु पूर्वं तद्राशितः कालविनिश्चयः स्यात् । आधानके चरगृहे दशमे प्रसूतिस्त्वेकादशे स्थिरगृहेऽप्युभयेऽर्कमासे ॥ छः ॥ गर्भकुण्डलीका विधान कहते है कि, आधान वा प्रश्नलशमे चद्रमा जिस नवाशकमें है उससे सप्तम राशिगत चन्द्रमामें जन्म होगा। नवाशक जितना भुक्त हुआ है उससे अनुपात त्रैराशिक आदिसे प्रसूतिकालिक चद्रमाके अंश वा नक्षत्र मुक्त निकलता है उसीसे इष्टकालभी मिल जाता है । अथवा लग्नके नवांशपतिके राशिगत चन्द्रमामे जन्म होता है ॥ तीन ॥ तीसरा प्रकार है कि, आधान वा प्रश्नमे चद्रमा जिस द्वादशांशकमे है उस राशिके चंद्रमामे आगे जन्म कहना । इसमें भी आचार्यातरका मत है कि, चन्द्रमा जितने द्वादशांशपर है मेषादि गणनासे उतनेही सख्यक राशिके चंद्रमामे जन्म होगा। अथवा जिस राशिपर चन्द्रमा है उसीसे गिनकर जितने द्वादशांशपा चंद्रमा है उतनीही राशिके चंद्रमामे जन्म होगा । नक्षत्रभुक्त निकालनेका अनुपात है कि, एक चंद्रराशिकी एक हज़ार आठ सौ लिता होती हैं, चंद्रमाने कितनी कला द्वादशांशककी भोगी है कितनी बाकी है, इनका त्रैराशिक करनेसे नक्षत्रभुक्त मिलता है उससे इष्टकाल तब ग्रहकुण्डली बन जाती है । यहां चार प्रकारसे कहा है, जहां दो तीन प्रकारसे एकवाक्यता हो उसे ठीक समझना । नक्षत्रभुक्त निकालनेका उदाहरण है कि, प्रश्न समय में सूर्य स्पष्ट ग्यारह । अट्ठाईस । चौबीस । पच्चीस गशून्य अट्ठावन । पैंतालीस । चंद्रस्पष्ट एक । नौ । ग्यारह । छब्बीस, लशून्य चार । पाँच। उनसठ । चौदह, चंद्रस्पष्ट में द्वादशाश चौथा है वृषसे गिनकर चौथे सिंहके चंद्रमामें नवम वा दशम मासमे जन्म होगा । नक्षत्र भुक्तके लिये चद्रस्पष्टमे गत द्वादशांश तीन के सात । तीस अशादि भुक्ते हुए यह चद्रस्पष्ट में घटाया शेष एक । इकतालीस । छब्बीस अंशकी कला एक सौ एक । छब्बीस एक राशिकी कला एक हज़ार आठ सौ से गुणा एक लाख बयासी हज़ार पाँच सौ अस्सी एक द्वादशाशककी कला एक सौ पचास से भाग लिया लब्धि एक हज़ार दो सौ सत्रह । बारह यह नक्षत्रप्रमाण पिंड है । इसमे एक नक्षत्रप्रमाण आठ सौ घटाया शेष चार सौ सत्रह । बारह इसमे चरणप्रमाण दो सौ घटाया दो सौ सत्रह । बारह पुनः चरणप्रमाण घटाया शेप सत्रह । बारह प्रथम एक नक्षत्र प्रमाण घटेमे सिंहके चंद्रमामें मचानक्षत्र घटा तब दो चरणप्रमाण घटनेसे पूर्वाफाल्गुनीके दो चरण घंटे अब कोई नही घटता शेष अक सत्रह । बारह मे पूर्वाफाल्गुनी के तीसरे चरणका मुक्त निकालना है शेषको चरणप्रमाण घटी पंद्रह से गुना दो सौ से भाग लिया लाभ एक॥दो घट्यादि तीसरे चरणकी भुक्त हुई यह भुक्त पंचांग में किस समय मिलता है यह जन्म समय होगा । प्रलमे चतुर्थभावेश बलवान् होवै तो सुखसे गर्भ प्रसव होवै ॥ चार ॥ किसीका मत है कि, लग्न और चन्द्रमामेसे जो विशेष बलवान हो उस तत्काल द्वांदशाशमें जो राशि है उस राशिके चद्रमामे जन्म होगा ॥ पाँच ॥ तत्काल लग्नमे वर्त्तमान नवांशक दिवाबली हो तो दिनमे, रात्रिबली होवै तो रात्रिमे जन्म कहना । दिन रात्रि संज्ञायें पहिले कही है, उनके अनुसार कालका निश्चय होता है। उदाहरण - लग्न मे नवाशक वृष रात्रिबली है तो जन्म रात्रि मे होगा । इष्टकालके लिये लशून्य स्पशून्य चार । पाँच । उनसठ । चौदह मे भुक्त नवांश तीन । बीस अंशादि घटाया दो । उनतालीस । चौदह इसकी कला एक सौ उनसठ । चौदह लग्ननवाशक रात्रिबली होनेसे रात्रिमान उनतीस । छः से गुणा चार हज़ार छः सौ तैंतीस चरणकलाप्रमाण दो सौ से भागलिया तेईस । दस यह रात्रिका इष्टकाल भया । जहां दिवाबली अश होनेसे दिनका जन्म ज्ञात हो तहां दिनमानसे गुणना । जो ऊपर नवम वा दशम मासमे जन्म होना लिखा है सो प्रश्न समयमे गर्भ कितने मासका है इसके जानने के लिये कितनीही युक्तिया है उनमेसे एक यह है कि " लग्नादामादली शुक्रो यावद्वेहेऽथ तन्मिता " लग्नसे वा लग्नसे जिस स्थानमे शुक्र हो उससे जैसे गर्भका मिलान मिलता हो उतने महीनेका गर्भ जानना इससे नौ । दस मास गिन लेना दूसरा प्रकार अगले श्लोकमे कहेगे आधानकालमे लग्न चर राशि होवै तो दशम मासमे, स्थिरराशि होवै तो ग्यारहवेमे, द्विस्वभाव होवे तो बारहवेमे प्रसव होगा । आधान लन ज्ञात न होनेमे प्रश्नलग्न प्रश्ननवाशकमे जो बलवान् हो उससे कहना । प्रसूति नवम दशम मासमे होती है अधिक समय योगांतरसे कहना ॥ छः ॥ मस्तकाद्युत्पत्त्यादि । शीर्षोदयैश्च शिरसाप्युभये कराभ्यां पृष्ठोदयैश्च जननं भवतीह पद्रयाम् ॥ सात ॥ लग्नेषु सिहाजवृपस्थितेषु तत्स्थे कुजे सूर्यसुते च यद्वा । साऽर्कजो भांशसमे च गात्रे स्यादर्भको नालकवेष्टितांगः ॥ आठ ॥ शीर्षोदय लग्न होवै तो शिरसे, उभयोदय से हाथोसे और पृष्ठोदय से पैरोसे बालकका जन्म होता है ॥ सात ॥ लग्नमे पाँच । एक । दो राशिमे कोई हो उसमे मगल वा सूर्य हो अथवा सूर्यसहित शनि होवे तो जिस गशि अशकमें है उसके समान राश्यगमे नालवेष्टित होगा ॥ आठ ॥ यमलसदन्तादियोगा दन्तोत्पत्तिप्रश्नानि च । खौ चतुष्पदस्थिते द्विदेहसंस्थितैः परैः । बलान्वितैस्तदा मौत एव कोशवेष्टितौ ॥ नौ ॥ सौम्यस्य भांशोपगतौ यमारौ बालं सदंतं कुरुतः प्रसूतौ । कुलीरलग्ने हिमगौ तदा चेन्मंदारदृष्टे स तु कुब्जकः स्यात् ॥ दस ॥ दन्तैर्युतश्चेत्प्रथमेऽर्भकः स्यात्स्वयं विनश्येदनुजं द्वितीये । हन्यातृतीये भगिनी चतुर्थे स्वमातरं बाणमितेऽग्रजातम् ॥ ग्यारह ॥ पष्ठादिमासेषु शुभं फलं स्यात्साकं यदा जन्म भवेत्तु दन्तैः । तस्योपको प्रथमं द्विजाः स्युः स्वमातरं स्वं च निहंति तातम् ॥ बारह ॥ सूर्य चतुष्पदराशिमे हो, अन्य ग्रह बलवान् एव द्विस्वभाव राशियोमे हों तो यमल नालवेष्टित होवै ॥ नौ ॥ शनि, मंगल, बुपके राशि नवांशकमे होवै तो बालकके गर्भहीसे दांब जमे होवै । कर्कका चन्द्रमा लग्नमे हो उसे शनि, मगल देखे तो कुबडा होवै ॥ दस ॥ अब मामपरके दंतोत्पत्तिफल कहते हैं कि, पहिले महीने से दांत जमे तो बालक आपही न रहे, दूसरेमे भाई न ठहरे, तीसरेमे बहिन, चौथेमे माता, पांचवमे ज्येष्ठनाता न रहे ॥ ग्यारह ॥ छठे आदि मासोमे दंत जमे तो सुख होवै । यदि दतसहित जन्म हो वा प्रथम ऊपरकी पक्किमे दांत आवै तो अपने माता पिताकी हानि करता है ॥ बारह ॥ भाषाटीकासहितः अशून्य पाँच । मूकपशुकरयोगादिः । कर्काल्यंत्यांतगैः पापैर्भान्त्यस्थैर्वा वृषे विधौ । मूकः पापेक्षिते सद्भिर्दृष्टे गीः स्याच्चिरेण तु ॥ तेरह ॥ लग्ने झषे चंद्रयुते च यद्वा सिहाज चापांत्यगतैश्च पापैः । वृषे विधावर्कयमारदृष्टे पंगुर्नरः स्यांच्छुभदृष्टिहीने ॥ चौदह ॥ कर्क, वृश्चिक, मीनके अंत्य नवांशकोमे पापग्रह हो अथवा राश्यतमें हो, चंद्रमा वृषका हो, उसपर पापदृष्टि होवै तो गूंगा होवै । शुभग्रहकी दृष्टि होवै तो वाणी बहुत दिनोमे बोले ॥ तेरह ॥ लग्न मीन हो उसमे चन्द्रमा हो तथा पाँच । एक । नौ के अत्यांशगत पाप हो अथवा वृषका चन्द्रमा सूर्य, शनि, मगलसे दृष्ट हो शुभग्रहकी दृष्टि न होवै तो मनुष्य पैरहीन वा लंगडा होगा ॥ चौदह ॥ जडान्धबुदाक्षयोगाः । क्रूर ग्रहैः संधिगतैः शुभालोकनवर्जितैः । हिमांशुसहर्बालो जडः स्यान्नात्र संशयः ॥ पंद्रह ॥ सिहे विलग्ने रविशीतभानू मन्दारदृष्टौ कुरुतो नराधम् । शुभाशुभैर्बुद नेत्रयुग्मं वामं हिनस्त्यब्ज इनाऽन्त्यगोऽन्यत् ॥ सोलह ॥ पापग्रह सघियोमे शुभग्रहोसे अदृष्ट हो, चद्रमाभी उनके साथ होवै तो बालक निश्चय मूर्ख होवै ॥ पंद्रह ॥ सिंहलग्नमे सूर्य और चन्द्रमा स्थित हो तथा शनि मंगलसे दृष्ट हो तो मनुष्य अंधा होवै । शुभाशुभ दोनोकी योगदृष्टि होवै तो नेत्र चचल अथवा कातर नेत्र हो । यह योग सूर्य चन्द्रमा दोनोसे दोनों नेत्रोके लिये है । यदि चद्रमाहीका योग होवै तो वामनेत्र, सूर्यका यह योग होवै तो दाहिना काणा वा कातर होगा ॥सोलह॥ विलोमजन्मनालरहितादियोगः । विलग्गेऽर्कजे विधौ व्यये च नीचगे रखौ । विलोमजन्म भूमिजे सभार्गवे त्वनालकः ॥ सत्रह ॥ विलग्नभांशाधिपतौ विलग्ने विलोमसंस्थे सति विग्रहं स्यात् । क्केशान्वितं व्यस्तगतं च जन्म शुभैः प्रदृष्टे च ततः सुखं हि ॥ अट्ठारह ॥ लग्नमे शनि बारहवाँ चन्द्रमा और सूर्य नीचराशि वा अशकमे होवे तो प्रसव उलटा होवै । मंगल, शुक्र से सहित हाँव तो नालवेष्टित न होवें ॥ सत्रह ॥ लग्नेश लग्ननवाशेश लग्नमे वक्रगति होवै तो कलह हावै । कोई वक्र कोई मार्ग अर्थात् लग्नकर्तरीमे होवै तो प्रसव क्लेशसहित होवे । यदि शुभग्रहकी दृष्टिमी होवै तो सुखपूर्वक होवै ॥ अट्ठारह ॥ जारजातयोगाः । न प्राग्विलनं च विघुं प्रपश्येज्जीवोऽर्कयुक्तं सितगुं च यद्वा । सार्के विधौ पापयुतेऽथवा चेत्स्याज्जारजातस्य तदा हि जन्म ॥उन्नीस॥ सुरेज्यदृष्टे तनुगेऽथवाऽब्जे देवेज्यवगोंज्झित एष चन्द्रे । सपापकेऽर्केण युतेऽथ चन्द्रे स्याज्जारजातस्य तदा हि जन्म ॥ बीस ॥ नीचोपगाः सूर्यसुरेज्यचन्द्राः कुर्वति ते जन्मनि जारजातम् । यद्वा तनौ सूर्यसुतेन दृष्टाः शुभैश्च चंद्रोदयभार्गवाख्याः ॥ इक्कीस ॥ लग्न एव चद्रमाको गुरु न देखे अथवा सूर्य चंद्रमा साथ हो उन्हें गुरु न देखे अथवा सूर्यसहित चद्रमा पापयुक्त होवै तो जारमे उत्पन्नका जन्म जानना ॥ उन्नीस ॥ अथवा चद्रमा लग्नमे गुरुदृष्ट हो गुरुके राश्यादिवर्गसे रहित होवै अथवा पापसहित सूर्ययुत चंद्रमा होवै तो वही फल जानना ॥ बीस ॥ सूर्य गुरु चन्द्रमा नीचके हो तो जारजात पैदा करते है । यद्वा लग्नमे शनि हो और चन्द्रमा, लग्न, शुक्र शुभदृष्ट न होवै तौभी वही फल कहना ॥ इक्कीस ॥ जारजयोगभंगः । चंद्रे गुरुक्षेत्रगतेऽथवा चेत्सुरेज्ययुक्तेऽन्यगृहस्थितेऽब्जे । गुरोहकाणेऽथ नवांशके वान जारजातस्य भवेत्प्रसूतिः ॥ बाईस ॥ उक्त योगोमे परिहार कहते है, चंद्रमा गुरुक्षेत्र मे हो अथवा गुरुमे युक्त हो अथवा अन्यगृहमे गुरुके देष्काणमे वा नवांशकमे होवै तो जाग्जा । न होवै ॥ बाईस ॥ कारागारादिषु जन्मयोगाः । लग्नेन्दुभ्यां द्वादशे सूर्यपुत्रे गुप्त्यां सुतिर्वीक्षिते पापखेटैः । लग्ने कर्के वृश्चिके मन्दयुक्ते गर्तायां स्याचन्द्रयुक्ते प्रसूतिः ॥ तेईस ॥ लग्ने सौम्ये वेश्मगे सौम्यखेटे प्रालेयांशौ स्वर्क्षगे पूर्णदेहे । आये लग्ने द्यूनगे वा मृगांके गर्भो नूनं सूयते नावसंस्थः ॥ चौबीस ॥ लग्ने नीरे मंदयुते दृष्टे चन्द्रार्कचन्द्रजैः । ऊपरे देवतागारे क्रीडागेहे कमात्सवः ॥पच्चीस॥ पुंलग्नभे भानुसुते इमझाने शैल्पिके गृहे । भूपालये च गोष्ठे च देवागारे मखालये ॥ छब्बीस ॥ वीक्षिते भौमसौम्येन्दुशुक्र ार्कगुरुभिः क्रमात् । प्रसवोऽयं समाख्यातः सत्यलहादिसूरिभिः ॥ सत्ताईस ॥ लग्न चन्द्रमासे बारहवां शनि पापदृष्ट होवै तो कैदमे प्रसव होवे । कर्क वा वृश्चिक लग्नमे चन्द्रमासहित शनि होवै तो गढे मे होवै ॥तेईस॥ लग्नमे बुध, चौथा कोई शुभग्रह हो चद्रमा अपनी राशि चार का तथा पूर्ण हो अथवा ऐसा चद्रमा ग्यारह । एक । सात मेसे किसीमे होवै तो निश्चय वह नाव मे जन्मता है ॥ चौबीस ॥ जलचरराशि लग्नमे शनि चन्द्रदृष्ट होवै तो ऊपर भूमिमे, सूर्य से दृष्ट हो तो देवतालयमे, बुपसे दृष्ट होवै तो खेलके स्थान में क्रमसे प्रसव कहना ॥ पच्चीस ॥ पुरुपराशिल शनि, भौम दृष्ट होवे तो श्मशानमे, बुधदृष्टि से शिल्प के घरमे, चन्द्रदृष्टिसे राजघरमे, शुक्रदृष्टि से गोशालामे, सूर्यदृष्टि से देवतालयमे, गुरुदृष्टि से यज्ञशालामे प्रसव होता है ऐसा सत्यलल्लादि पण्डितोने कहा है ॥ छब्बीस ॥ सत्ताईस ॥ चरे भांशचारेण तुल्ये पथि स्यात्प्रसूतिः स्थिरे स्वर्क्षगैः खेचरेद्रेः । निजांशस्थितैः स्वीयगेहेऽथ वीर्यात्फलं भांशयोहरिकेद्रा वदंति ॥ अट्ठाईस ॥ यदैकराशिगौ लग्नचन्द्रौदृष्टिविवर्जितौ । विजने प्रसवः प्रोक्तो मणित्याद्यैश्च सुरिभिः ॥ उनतीस ॥ ताताम्बाभानेषु तद्वलवशात्रीचस्थितैः साधुभिः सूतिः स्यात्तरुशालकादिषु तदा यद्वा तरोराश्रितः । मंदर्भाशगते विधौ हिब्रुकगे नीरांशकऽथवा मंदनैव युतेक्षिते तमसि वा भूमौ च नीचस्थिते ॥ तीस ॥ लग्न चरराशि और चरांशकी होवे तो मार्गमे प्रसव, स्थिरगारी और नवांशकमे तथा स्थिरराशि वा स्वराशि स्वांशकी ग्रहोंने अपने घरमे प्रमव वर्गोत्तमादि बलसे राश्यंशफल श्रेष्ठ ज्योतिषी कहते है ॥ अट्ठाईस ॥ यदि लग्न चंद्रमा एक राशेिमे हो उन्हें कोईभी ग्रह न देखे तो जहाँ कोई मनुष्य न हो ऐसे स्थानमे प्रसव होना मणित्यादि पडितोने कहा है ॥ उनतीस ॥ पितृसजक यह सूर्य शनि बलवान् हो तो पिता वा उसके भाइयोके घरमे जन्म, यदि मातृसंज्ञक ग्रह चंशून्य शुशून्य बलवान् हो तो माता वा उसकी बहिनके घरमे प्रसव कहना । शुभग्रह नीचराशियोमे होवै तो वृक्षके नीचे वा लकडकेि घरमे, चंद्रमा शनिके राशि और अशकमे चौथा हो अथवा जलचर राशिमे वा जलचर राशिके अशकमे हो और शनिहीसे युक्त वा दृष्ट हो अथवा नीचका हो तो इन प्रत्येक योगोमे अधेरेमे जन्म कहना अथवा भूमिमे जन्म जानना । इनमे विशेष विचार है कि, सूर्य बलवान् मंगलसे दृष्ट होवै तो उक्त योगोके हुएमेंभी दीपसहित घरमे जन्म होगा अधेरेमे नहीं । जो तीनसे ऊपर ग्रह नीचराशियोमे हो अथवा लग्न वा चतुर्थमे नीचका चन्द्रमा हो तो भूमिमे जन्म कहना ॥ तीस ॥ सुखप्रसवपुत्रकन्योत्पत्तिविचारः । " शुभग्रहैः स्वबंधुगैः सुखेन संयुतः सवः । सुतांकसप्तमस्थितैरस्तु कष्टतः ॥ इकतीस ॥ ओजभे च विषमांशकोपगैलन - चन्द्रगुरुभास्करैर्नरः । स्यात्तथापि समभे समांशगैः स्त्री निषेकसमयप्रसूतिषु ॥ बत्तीस ॥ लग्नं विनौजर्क्षगतो यदि स्यात्सौरोऽपि पुंजन्मकरः सवीर्यः । बलान्वितो व्योमचरी नराख्यश्चतुष्टये वा नरजन्म कृत्स्यात् ॥ तैंतीस ॥ शुभग्रह दूसरे और चौथे भावोंमे होवै तो प्रसव सुखपूर्वक होवै । पञ्चम, नवम, सप्तम भावोमे पापग्रह होवै तो कष्टसे प्रसव होवै ॥ इकतीस ॥ विपमराशि विषमांशकमे लग्न, चंद्र, गुरु, सूर्य, होवै तो पुरुष होगा । स्त्रीराशि स्त्रीनवांशकोमे उक्त ग्रह आधान प्रश्नकालमे होवै तो कन्या जन्म होता है ॥ बत्तीस॥ लग्न विना विषम राशिमे शनिभी पुरुषका जन्म करता है, यदि बलवान् हो । पुरुषग्रह बलवान होकर केन्द्रमे होवै तो पुत्र जन्म करता है । ये योग आधान वा प्रश्नमे विचारणीय है । जन्मपत्री पुरुषकी वा स्त्रीकी है ऐसे प्रश्नमें भी काम आते है इसलिये इस अध्याय लिखे है ॥ तैंतीस ॥ पितृपरोक्षादिजन्मयोगाः । क्रूरक्षगाः क्रूरखगा यदि स्युर्दिवामणेर्धर्मसुतास्तसंस्थाः । स्थिरादिभेकै जनकोऽन्यदेशे बद्धः स्वभावाद्विषयादिकेषु ॥ चौंतीस ॥ न प्राग्विलनं यदि पश्यतीन्दु शुऋयोर्मध्यगतेऽथवाऽब्जे । यमोदये वा कुसुतेऽस्तसंस्थे पितुः परोक्षस्य तदा हि जन्म ॥ पैंतीस ॥ तनुं न वीक्षिते विधौ चरर्क्षकांशसंधिगे । परोक्षसंस्थितस्य वा पितुर्जनुस्तदा भवेत् ॥छत्तीस॥ यदि क्रूरग्रह क्रूरराशियोये सूर्य से नौ । पाँच । सात भावोमे होवै तो बालकका पिता उस समयमे बधनमे होगा । इसमे विशेष विचार है कि, सूर्य स्थिर राशिमे होवै तो स्वदेशमे, चग्राशिमे होवै तो विदेशमे और द्विस्वभावमे होवे तो मार्गमे बालकका पिता बालकके जन्ममे बधनमे होगा ॥ चौंतीस ॥ लग्नको यदि चन्द्रमा न देखे अथवा चन्द्रमा बुध शुक्रके बीचमे होवै अथवा शनि लग्नमे मगल सम्ममे होवे तो जन्ममे पिता परोक्ष होगा ॥ पैंतीस॥ चंद्रमा चरराशि और चराराककी सधिमे हो लग्नको न देखे तौभी पिता परोक्ष होगा ॥ छत्तीस ॥ पित्रोररिष्टयोगाः । भौमेक्षिता वर्कसितौ रात्र्योस्तदा वदेत्तत्पितरं व्यतीतम् । चरक्षगौ भौमयुतेक्षितौ वा तदान्यदेशे जनकस्य मृत्युः ॥ सैंतीस ॥ व्ययाष्टमस्थितौ खलौ विलग्नपे बलोज्झिते । तुरीयधर्मगौ हि वा पिता रुगर्दितः स वै ॥ अड़तीस ॥ जनौ रखेर्बलस्थिते शनौ तदीक्षिते यदा । पिता रुगर्दितस्तदा कुजेक्षितेऽथवा भवेत् ॥ उनतालीस ॥ |
Seraikela District Jharkhand पात्र उम्मीदवारों को Accountant, Block Wash Coordinator के पद के लिए 3 रिक्तियों को भरने के लिए Purbi Singhbhum पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती 2022 से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है।
Seraikela District Jharkhand उन उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है जो N/A की योग्यता रखते हैं। Accountant, Block Wash Coordinator के पद के लिए पात्रता मानदंड और आवश्यक योग्यता को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand में 3 रिक्तियां हैं और इच्छुक उम्मीदवार Accountant, Block Wash Coordinator के पद का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती 2022 का पूरा विवरण देख सकते हैं। Seraikela District Jharkhand भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 30/07/2022 है और Seraikela District Jharkhand भर्ती 2022 रिक्ति गणना 3 है।
उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Seraikela District Jharkhand में Accountant, Block Wash Coordinator के रूप में रखा जाएगा।
Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator 2022 के लिए वेतन Rs. 12,000 - Rs. 20,000 Per Month है। इच्छुक उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और नीचे नौकरी के स्थान, अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं।
Seraikela District Jharkhand ने Accountant, Block Wash Coordinator रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 30/07/2022 है। पद के लिए नौकरी का स्थान Purbi Singhbhum है।
Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों को आमंत्रित करता है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 30/07/2022 है।
How to apply for Seraikela District Jharkhand Recruitment 2022?
Accountant, Block Wash Coordinator के पद के इच्छुक उम्मीदवार 30/07/2022 से पहले आवेदन कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती 2022 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया चरणों के रूप में दी गई है।
चरण 2: Seraikela District Jharkhand भर्ती 2022 अधिसूचना पर चयन करें।
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| Seraikela District Jharkhand पात्र उम्मीदवारों को Accountant, Block Wash Coordinator के पद के लिए तीन रिक्तियों को भरने के लिए Purbi Singhbhum पर आमंत्रित कर रहा है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, अंतिम तिथि और चयन प्रक्रिया के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती दो हज़ार बाईस से संबंधित आवेदन लिंक नीचे दिया गया है। Seraikela District Jharkhand उन उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है जो N/A की योग्यता रखते हैं। Accountant, Block Wash Coordinator के पद के लिए पात्रता मानदंड और आवश्यक योग्यता को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand में तीन रिक्तियां हैं और इच्छुक उम्मीदवार Accountant, Block Wash Coordinator के पद का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती दो हज़ार बाईस का पूरा विवरण देख सकते हैं। Seraikela District Jharkhand भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि तीस जुलाई दो हज़ार बाईस है और Seraikela District Jharkhand भर्ती दो हज़ार बाईस रिक्ति गणना तीन है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Seraikela District Jharkhand में Accountant, Block Wash Coordinator के रूप में रखा जाएगा। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator दो हज़ार बाईस के लिए वेतन Rs. बारह,शून्य - Rs. बीस,शून्य Per Month है। इच्छुक उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और नीचे नौकरी के स्थान, अंतिम तिथि और आवेदन प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand ने Accountant, Block Wash Coordinator रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि तीस जुलाई दो हज़ार बाईस है। पद के लिए नौकरी का स्थान Purbi Singhbhum है। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator रिक्तियों के लिए उम्मीदवारों को आमंत्रित करता है और आवेदन करने की अंतिम तिथि तीस जुलाई दो हज़ार बाईस है। How to apply for Seraikela District Jharkhand Recruitment दो हज़ार बाईस? Accountant, Block Wash Coordinator के पद के इच्छुक उम्मीदवार तीस जुलाई दो हज़ार बाईस से पहले आवेदन कर सकते हैं। Seraikela District Jharkhand Accountant, Block Wash Coordinator भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया चरणों के रूप में दी गई है। चरण दो: Seraikela District Jharkhand भर्ती दो हज़ार बाईस अधिसूचना पर चयन करें। चरण चार: सभी आवश्यक विवरण भरें। चरण पाँच: अंतिम तिथि से पहले आवेदन पत्र को आवेदन करें या भेजें। |
बिग बॉस 13 में हिमांशी खुराना और माहिरा शर्मा को काफी स्टाइलिश माना जाता है, लेकिन इन दोनों में से सबसे स्टाइलिश कौन है?
बिग बॉस 13 के घर में सभी घरवालों के अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ये सभी घरवाले आए दिन कुछ न कुछ नए विवाद से घिर जाते हैं। अभी घर के अंदर पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा के बीच काफी लड़ाई हुई जहां पारस ने माहिरा को 'चल निकल यहां से' तक कह दिया। जहां एक ओर घर के अंदर इतनी लड़ाई चल रही है वहीं दूसरी ओर हिमांशी खुराना एक बार घर से बाहर निकलने के बाद दोबारा घर के अंदर जाकर और फिर से बाहर आने के बाद से ही उनके और असीम के रिश्तों को लेकर काफी खबरें आ रही हैं। घर से दूसरी बार बाहर आने के बाद हिमांशी ने कहा है कि असीम के साथ रिश्ते के बारे में अगर असीम के घर वाले खुश नहीं हैं तो वो असीम के साथ रिश्ता आगे नहीं बढ़ाएंगी। एक ओर तो इन लोगों की बहस जारी है वहीं दूसरी ओर सबसे स्टाइलिश कंटेस्टेंट कौन रहा है बिग बॉस 13 के घर में ये भी एक सवाल है।
हिमांशी खुराना भले ही घर से बाहर हो गई हों, लेकिन वो बिग बॉस 13 के सबसे स्टाइलिश कंटेस्टेंट्स में से एक रही हैं। इसी के साथ, माहिरा शर्मा कितनी स्टाइलिश हैं ये भी हमें पता ही है। बिग बॉस सीजन फिनाले जहां पास आ गया है वहीं दूसरी ओर इनके फैशन को लेकर तुलना करना भी जायज़ है। इसमें तो कोई शक नहीं कि ये दोनों बिग बॉस की सबसे स्टालिश कंटेस्टेंट रही हैं, लेकिन इन दोनों में से सबसे ज्यादा स्टाइलिश कौन रहा है?
जहां एक ओर माहिरा शर्मा पंजाबी गानों और टिक टॉक स्टार हैं वहीं दूसरी ओर हिमांशी खुराना भी पंजाबी फिल्मों में काम करती हैं और साथ ही साथ बहुत फेमस स्टार हैं। दोनों के ही स्टाइल में कुछ अंतर देखने को मिलता है।
लुक्स को लेकर बात की जाए तो दोनों ही काफी अच्छी दिखती हैं। हां, उम्र में 22 साल की माहिरा काफी छोटी हैं और हिमांशी 28 साल की हैं।
दोनों ही इंडियन और वेस्टर्न ड्रेसेस दोनों में काफी अच्छी लगती हैं। पंजाबी फिल्मों से ताल्लुक रखने के कारण दोनों ही पंजाबी सूट आदि में काफी स्टाइलिश दिखती हैं।
जहां माहिरा शर्मा जम्मू में पैदा हुई थीं वहीं हिमांशी खुराना का जन्म कीरतपुर पंजाब में हुआ था।
माहिरा और हिमांशी दोनों ही पंजाबी म्यूजिक वीडियोज में काफी फेमस हैं। और उनकी अपनी फैन फॉलोविंग है।
इस बात को लेकर यकीनन कांटे की टक्कर है कि आखिर हिमांशी और माहिरा में से सबसे ज्यादा स्टाइलिश कौन है। अब आप खुद ही तस्वीरों में देख लीजिए। फैशन स्टेटमेंट की बात करें तो दोनों ही एक से बढ़कर एक हैं।
क्लोज अप शॉट्स और लॉन्ग शॉट्स सभी में हिमांशी और माहिरा बेस्ट हैं। वैसे तो शहनाज़ गिल, शैफाली बग्गा, शेफाली जरीवाला, आरती सिंह जैसे कई स्टाइलिश कंटेस्टेंट हैं, लेकिन माहिरा और हिमांशी जैसे स्टाइलिश कम हैं। अब आप ही इन तस्वीरों को देखकर बताएं कि इन दोनों में से कौन सी कंटेस्टेंट ज्यादा स्टाइलिश है।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
| बिग बॉस तेरह में हिमांशी खुराना और माहिरा शर्मा को काफी स्टाइलिश माना जाता है, लेकिन इन दोनों में से सबसे स्टाइलिश कौन है? बिग बॉस तेरह के घर में सभी घरवालों के अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। ये सभी घरवाले आए दिन कुछ न कुछ नए विवाद से घिर जाते हैं। अभी घर के अंदर पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा के बीच काफी लड़ाई हुई जहां पारस ने माहिरा को 'चल निकल यहां से' तक कह दिया। जहां एक ओर घर के अंदर इतनी लड़ाई चल रही है वहीं दूसरी ओर हिमांशी खुराना एक बार घर से बाहर निकलने के बाद दोबारा घर के अंदर जाकर और फिर से बाहर आने के बाद से ही उनके और असीम के रिश्तों को लेकर काफी खबरें आ रही हैं। घर से दूसरी बार बाहर आने के बाद हिमांशी ने कहा है कि असीम के साथ रिश्ते के बारे में अगर असीम के घर वाले खुश नहीं हैं तो वो असीम के साथ रिश्ता आगे नहीं बढ़ाएंगी। एक ओर तो इन लोगों की बहस जारी है वहीं दूसरी ओर सबसे स्टाइलिश कंटेस्टेंट कौन रहा है बिग बॉस तेरह के घर में ये भी एक सवाल है। हिमांशी खुराना भले ही घर से बाहर हो गई हों, लेकिन वो बिग बॉस तेरह के सबसे स्टाइलिश कंटेस्टेंट्स में से एक रही हैं। इसी के साथ, माहिरा शर्मा कितनी स्टाइलिश हैं ये भी हमें पता ही है। बिग बॉस सीजन फिनाले जहां पास आ गया है वहीं दूसरी ओर इनके फैशन को लेकर तुलना करना भी जायज़ है। इसमें तो कोई शक नहीं कि ये दोनों बिग बॉस की सबसे स्टालिश कंटेस्टेंट रही हैं, लेकिन इन दोनों में से सबसे ज्यादा स्टाइलिश कौन रहा है? जहां एक ओर माहिरा शर्मा पंजाबी गानों और टिक टॉक स्टार हैं वहीं दूसरी ओर हिमांशी खुराना भी पंजाबी फिल्मों में काम करती हैं और साथ ही साथ बहुत फेमस स्टार हैं। दोनों के ही स्टाइल में कुछ अंतर देखने को मिलता है। लुक्स को लेकर बात की जाए तो दोनों ही काफी अच्छी दिखती हैं। हां, उम्र में बाईस साल की माहिरा काफी छोटी हैं और हिमांशी अट्ठाईस साल की हैं। दोनों ही इंडियन और वेस्टर्न ड्रेसेस दोनों में काफी अच्छी लगती हैं। पंजाबी फिल्मों से ताल्लुक रखने के कारण दोनों ही पंजाबी सूट आदि में काफी स्टाइलिश दिखती हैं। जहां माहिरा शर्मा जम्मू में पैदा हुई थीं वहीं हिमांशी खुराना का जन्म कीरतपुर पंजाब में हुआ था। माहिरा और हिमांशी दोनों ही पंजाबी म्यूजिक वीडियोज में काफी फेमस हैं। और उनकी अपनी फैन फॉलोविंग है। इस बात को लेकर यकीनन कांटे की टक्कर है कि आखिर हिमांशी और माहिरा में से सबसे ज्यादा स्टाइलिश कौन है। अब आप खुद ही तस्वीरों में देख लीजिए। फैशन स्टेटमेंट की बात करें तो दोनों ही एक से बढ़कर एक हैं। क्लोज अप शॉट्स और लॉन्ग शॉट्स सभी में हिमांशी और माहिरा बेस्ट हैं। वैसे तो शहनाज़ गिल, शैफाली बग्गा, शेफाली जरीवाला, आरती सिंह जैसे कई स्टाइलिश कंटेस्टेंट हैं, लेकिन माहिरा और हिमांशी जैसे स्टाइलिश कम हैं। अब आप ही इन तस्वीरों को देखकर बताएं कि इन दोनों में से कौन सी कंटेस्टेंट ज्यादा स्टाइलिश है। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें। |
कुल्लू - सबसे बडे़ देवसमागम में गैर सामाजिक तत्त्व पांव न पसारे इसके लिए उपायुक्त कुल्लू ने नगर परिषद, नगर पंचायत और जिलाभर के पंचायत प्रतिनिधियों को अलर्ट किया है। इन सभी को निर्देशों का पालन करना होगा। ये आदेश 28 सितंबर से 20 अक्तूबर तक लागू रहेंगे। दशहरा उत्सव के दौरान किसी भी कहीं भी गैर सामाजिक तत्त्व देख जाते हैं तो वह तुरंत पुलिस के टोल फ्री नंबर को जानकारी दें सकता है, ताकि तुरंत उस व्यक्ति पर कार्रवाई अमल में लाई जा सके। जिला मुख्यालय कुल्लू ही नहीं जिला के सभी क्षेत्र और गांवों में पंचायत प्रतिनिधियों को सुरक्षा की दृष्टि से गैर सामाजिक तत्त्वों पर नजर रखनी होगी। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 30 सितंबर से छह अक्तूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसके चलते जिला कुल्लू में उत्सव को लेकर गैर सामाजिक तत्त्वों के प्रवेश की आशंका रहती है। इसी को मद्देनजर रखते हुए उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि धारा 144 के तहत कुल्लू, मनाली और भुंतर क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति के पास आग्नेय अस्त्र-शस्त्र रखने पर पाबंदी होगी। ये आदेश पुलिस, आर्मी, आईटीबीपी, एसएसबी पर लागू नहीं होंगे।
नगर परिषद कुल्लू, मनाली व नगर पंचायत भुंतर के चुने हुए प्रतिनिधियों, सदस्यों, सभी पंचायत प्रधानों, सदस्यों व चौकीदार उनके क्षेत्रों के अधीन रह रहे व्यक्तियों की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन में देने के लिए उत्तरदायी होंगे। विशेषकर विदेशी, कश्मीरी, शाल विक्रेता, और अन्य संदेहास्पद तत्त्वों के बारे में थानें में सूचना देनी होगी।
| कुल्लू - सबसे बडे़ देवसमागम में गैर सामाजिक तत्त्व पांव न पसारे इसके लिए उपायुक्त कुल्लू ने नगर परिषद, नगर पंचायत और जिलाभर के पंचायत प्रतिनिधियों को अलर्ट किया है। इन सभी को निर्देशों का पालन करना होगा। ये आदेश अट्ठाईस सितंबर से बीस अक्तूबर तक लागू रहेंगे। दशहरा उत्सव के दौरान किसी भी कहीं भी गैर सामाजिक तत्त्व देख जाते हैं तो वह तुरंत पुलिस के टोल फ्री नंबर को जानकारी दें सकता है, ताकि तुरंत उस व्यक्ति पर कार्रवाई अमल में लाई जा सके। जिला मुख्यालय कुल्लू ही नहीं जिला के सभी क्षेत्र और गांवों में पंचायत प्रतिनिधियों को सुरक्षा की दृष्टि से गैर सामाजिक तत्त्वों पर नजर रखनी होगी। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा तीस सितंबर से छह अक्तूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसके चलते जिला कुल्लू में उत्सव को लेकर गैर सामाजिक तत्त्वों के प्रवेश की आशंका रहती है। इसी को मद्देनजर रखते हुए उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने कहा कि धारा एक सौ चौंतालीस के तहत कुल्लू, मनाली और भुंतर क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति के पास आग्नेय अस्त्र-शस्त्र रखने पर पाबंदी होगी। ये आदेश पुलिस, आर्मी, आईटीबीपी, एसएसबी पर लागू नहीं होंगे। नगर परिषद कुल्लू, मनाली व नगर पंचायत भुंतर के चुने हुए प्रतिनिधियों, सदस्यों, सभी पंचायत प्रधानों, सदस्यों व चौकीदार उनके क्षेत्रों के अधीन रह रहे व्यक्तियों की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन में देने के लिए उत्तरदायी होंगे। विशेषकर विदेशी, कश्मीरी, शाल विक्रेता, और अन्य संदेहास्पद तत्त्वों के बारे में थानें में सूचना देनी होगी। |
नागरिक कहानियाँ । Nagarik Kahaniya के बारे में अधिक जानकारी :
इन कहानियो को मै ध्यान से देख गया हैं। कहानी मे लोकोत्तर आनन्द पाने की अभिलाषा रखते हुए भी मुझे इनमे एक विशेष रस मिला कला कला के लिये मत को मानने वाला पाठक शायद इन कहानियो मे टेकनीक ? का अभाव देखे, परन्तु इस प्रकार देखना पुस्तक और लेखक दोनो के प्रति अन्याय होगा। नागरिक कहानियाँ एक विशेष उद्देश्य को लेकर लिखी गई है। मेरा विचार है कि यदि लेखक के उद्देश्य को स्वीकार कर लिया जाय तो यह पुस्तक हिन्दी मे अभी तक अद्वितीय है।
| नागरिक कहानियाँ । Nagarik Kahaniya के बारे में अधिक जानकारी : इन कहानियो को मै ध्यान से देख गया हैं। कहानी मे लोकोत्तर आनन्द पाने की अभिलाषा रखते हुए भी मुझे इनमे एक विशेष रस मिला कला कला के लिये मत को मानने वाला पाठक शायद इन कहानियो मे टेकनीक ? का अभाव देखे, परन्तु इस प्रकार देखना पुस्तक और लेखक दोनो के प्रति अन्याय होगा। नागरिक कहानियाँ एक विशेष उद्देश्य को लेकर लिखी गई है। मेरा विचार है कि यदि लेखक के उद्देश्य को स्वीकार कर लिया जाय तो यह पुस्तक हिन्दी मे अभी तक अद्वितीय है। |
मुंबई में बने फ्लाईओवर के नीचे की जगह को राज्य सरकार ने नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया है। राज्य सरकार ने इसकी जानकारी मुंबई हाई कोर्ट की दी।
राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार फ्लाईओवर के नीचे गाड़ी पार्क करने पर अब कार्रवाई की जाएगी। इसके आदेश भी परिवहन पुलिस को दे दिए गये हैं।
इस बारे में प्रणव पोलिकर नामक व्यक्ति द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आशंका जताई गई थी कि फ्लाईओवर के नीचे गाड़ी खड़ी करना सुरक्षा में भारी चूक हो सकती है। याचिका में आगे यह भी दर्ज था कि इसका अनुचित फायदा आतंकवादी संगठन उठा सकते हैं। इस बारे में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुरक्षा संबधी आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया था। जिसे लेकर अब राज्य सरकार ने फ्लाईओवर के नीचे की जगह को नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया है।
मुंबई जैसे शहर में जहां लाखो करोडो गाड़ियां चलती हैं पार्किंग एक बहुत बड़ी समस्या है। सरकार के इस निर्णय से मुंबईकरों पर क्या प्रभाव पड़ता है यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा।
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| मुंबई में बने फ्लाईओवर के नीचे की जगह को राज्य सरकार ने नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया है। राज्य सरकार ने इसकी जानकारी मुंबई हाई कोर्ट की दी। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार फ्लाईओवर के नीचे गाड़ी पार्क करने पर अब कार्रवाई की जाएगी। इसके आदेश भी परिवहन पुलिस को दे दिए गये हैं। इस बारे में प्रणव पोलिकर नामक व्यक्ति द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आशंका जताई गई थी कि फ्लाईओवर के नीचे गाड़ी खड़ी करना सुरक्षा में भारी चूक हो सकती है। याचिका में आगे यह भी दर्ज था कि इसका अनुचित फायदा आतंकवादी संगठन उठा सकते हैं। इस बारे में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुरक्षा संबधी आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया था। जिसे लेकर अब राज्य सरकार ने फ्लाईओवर के नीचे की जगह को नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया है। मुंबई जैसे शहर में जहां लाखो करोडो गाड़ियां चलती हैं पार्किंग एक बहुत बड़ी समस्या है। सरकार के इस निर्णय से मुंबईकरों पर क्या प्रभाव पड़ता है यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। डाउनलोड करें Mumbai live APP और रहें हर छोटी बड़ी खबर से अपडेट। मुंबई से जुड़ी हर खबर की ताज़ा अपडेट पाने के लिए Mumbai live के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें। |
Chandra Grahan 2022: आज साल 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और थोड़ी ही देर में चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। क्योंकि किसी भी ग्रहण के साथ ही उसका सूतक काल भी बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। ग्रहण के दौरान और ग्रहण के सूतककाल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
Chandra Grahan 2022: आज साल 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और थोड़ी ही देर में चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। क्योंकि किसी भी ग्रहण के साथ ही उसका सूतक काल भी बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। ग्रहण के दौरान और ग्रहण के सूतककाल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। वहीं आज 08 नवंबर 2022, प्रातःकाल 08:13 बजे से सूतककाल प्रारंभ होने ही वाला है। इसीलिए हमें सूतक काल के नियमों का पालन जरुर करना चाहिए। तो आइए जानते हैं सूतककाल के दौरान क्या करें और क्या ना करें।
गर्भवती महिलाएं इस दौरान विशेष नियमों का पालन करें और धारदार व नकुली वस्तुओं के प्रयोग से बचें। वरना आपको और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान शयन और स्त्री सहवास बिलकुल ना करें। सूतक काल के दौरान अधिक से अधिक ध्यान करें और प्रभु के स्मरण में समय का सदुपयोग करें। सूतक काल के दौरान मौन रहने का प्रयत्न करें। चंद्र ग्रहण की शांति के लिए उसके मंत्रों का जाप करें। ग्रहण और सूतक काल में जितना अधिक ध्यान और मंत्र जाप करेंगे, उतना ही अधिक ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचे रहेंगे।
सूतक काल में भोजन ना तो बनाए और ना ही भोजन का सेवन करें। घर में रखें हुए भोजन में सूतक काल लगने से पहले ही तुलसीदल डाल दें। सूतक काल से पहले स्नान करें और ग्रहण समाप्त होने के बाद भी स्नान करें और घर की साफ-सफाई करें। किसी भी प्रतिमा को सूतक काल में हाथ ना लगाएं। मंदिरों के परदे सूतक काल से पहले ही गिरा दें। सूतक काल के दौरान नाखून और बाल आदि ना कटवाएं। अपने ईष्टदेव का ध्यान अधिक से अधिक करें।
(Disclaimer: इस स्टोरी में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Haribhoomi. com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें। )
| Chandra Grahan दो हज़ार बाईस: आज साल दो हज़ार बाईस का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और थोड़ी ही देर में चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। क्योंकि किसी भी ग्रहण के साथ ही उसका सूतक काल भी बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। ग्रहण के दौरान और ग्रहण के सूतककाल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। Chandra Grahan दो हज़ार बाईस: आज साल दो हज़ार बाईस का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और थोड़ी ही देर में चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। क्योंकि किसी भी ग्रहण के साथ ही उसका सूतक काल भी बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। ग्रहण के दौरान और ग्रहण के सूतककाल के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। वहीं आज आठ नवंबर दो हज़ार बाईस, प्रातःकाल आठ:तेरह बजे से सूतककाल प्रारंभ होने ही वाला है। इसीलिए हमें सूतक काल के नियमों का पालन जरुर करना चाहिए। तो आइए जानते हैं सूतककाल के दौरान क्या करें और क्या ना करें। गर्भवती महिलाएं इस दौरान विशेष नियमों का पालन करें और धारदार व नकुली वस्तुओं के प्रयोग से बचें। वरना आपको और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान शयन और स्त्री सहवास बिलकुल ना करें। सूतक काल के दौरान अधिक से अधिक ध्यान करें और प्रभु के स्मरण में समय का सदुपयोग करें। सूतक काल के दौरान मौन रहने का प्रयत्न करें। चंद्र ग्रहण की शांति के लिए उसके मंत्रों का जाप करें। ग्रहण और सूतक काल में जितना अधिक ध्यान और मंत्र जाप करेंगे, उतना ही अधिक ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचे रहेंगे। सूतक काल में भोजन ना तो बनाए और ना ही भोजन का सेवन करें। घर में रखें हुए भोजन में सूतक काल लगने से पहले ही तुलसीदल डाल दें। सूतक काल से पहले स्नान करें और ग्रहण समाप्त होने के बाद भी स्नान करें और घर की साफ-सफाई करें। किसी भी प्रतिमा को सूतक काल में हाथ ना लगाएं। मंदिरों के परदे सूतक काल से पहले ही गिरा दें। सूतक काल के दौरान नाखून और बाल आदि ना कटवाएं। अपने ईष्टदेव का ध्यान अधिक से अधिक करें। |
गैंगस्टर लगाए जाने पर पूर्व सांसद तबस्सुम हसन का बयान "किसान विरोधी नीतियों का विरोध करने पर की गई साजिशन कार्रवाई "।
मुजफ्फरनगरवासियों के लिए अच्छी खबर आज लंबे समय बाद कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला।
वर्ष 2020 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप के भारत आगमन पर डिक्की उनकी सुरक्षा में भी तैनात थी।
पड़ताल में आया कि पाकिस्तान का रहने वाला अब्दुल रहमान सन्धु और उसके साथियों ने इस कम्पनी को ब्रिटेन में रजिस्टर्ड करा रखा है लेकिन वहां कारोबार न करके भारत में पोंजी स्कीम चला रहा है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों की पहचान सुखमीत सिंह (35), गुनदीप सिंह (33) और हरविंदर सिंह (32) के रूप में हुई है।
रामपुर पुलिस ने पिछले दिनों शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली सहित शहर के कई उलेमाओं को नोटिस दी थी। फरहत जमाली को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। लेकिन उन्होेंने अपना बयान दर्ज नहीं कराया। इस बीच शनिवार की सुबह पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
एसएसपी अभिषेक यादव द्वारा जनपद पुलिस की ओवरहालिंग किये जाने के आज दूसरे दिन थानों में विदाई और स्वागत का माहौल बना नजर आया। नये थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों ने अपने अपने चार्ज संभाले और इस दौरान उनका स्वागत किया गया।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के सहयोगी हनुमान ने बताया कि गुरुवार शाम को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 1,590 करोड़ रुपये एकत्र किए गए हैं।
| गैंगस्टर लगाए जाने पर पूर्व सांसद तबस्सुम हसन का बयान "किसान विरोधी नीतियों का विरोध करने पर की गई साजिशन कार्रवाई "। मुजफ्फरनगरवासियों के लिए अच्छी खबर आज लंबे समय बाद कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला। वर्ष दो हज़ार बीस में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप के भारत आगमन पर डिक्की उनकी सुरक्षा में भी तैनात थी। पड़ताल में आया कि पाकिस्तान का रहने वाला अब्दुल रहमान सन्धु और उसके साथियों ने इस कम्पनी को ब्रिटेन में रजिस्टर्ड करा रखा है लेकिन वहां कारोबार न करके भारत में पोंजी स्कीम चला रहा है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों की पहचान सुखमीत सिंह , गुनदीप सिंह और हरविंदर सिंह के रूप में हुई है। रामपुर पुलिस ने पिछले दिनों शहर इमाम मुफ्ती महबूब अली सहित शहर के कई उलेमाओं को नोटिस दी थी। फरहत जमाली को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। लेकिन उन्होेंने अपना बयान दर्ज नहीं कराया। इस बीच शनिवार की सुबह पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी अभिषेक यादव द्वारा जनपद पुलिस की ओवरहालिंग किये जाने के आज दूसरे दिन थानों में विदाई और स्वागत का माहौल बना नजर आया। नये थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों ने अपने अपने चार्ज संभाले और इस दौरान उनका स्वागत किया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के सहयोगी हनुमान ने बताया कि गुरुवार शाम को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक,पाँच सौ नब्बे करोड़ रुपये एकत्र किए गए हैं। |
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल गुरुवार को राज्यसभा में आरटीआई संशोधन विधेयक पर चर्चा करने व इसे पारित करने से पहले प्रवर समिति (सिलेक्ट कमेटी) को भेजने की मांग पर अड़ गए।
राज्यसभा में मचे शोरगुल के बीच कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में संशोधन करने और इसे पारित करने के लिए विधेयक को सामने रखा।
वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सदस्य इसे प्रवर समिति के पास भेजने पर अड़े रहे। विपक्ष ने कहा, "हम प्रवर समिति चाहते हैं। " इसके अलावा उन्होंने कहा, "आरटीआई के कमजोर पड़ने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। " इस बीच अध्यक्ष को कुछ देर के लिए लिए दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित विपक्ष ने स्थिति स्पष्ट कर दी कि वे प्रवर समिति के पास भेजे बिना विधेयक पर सहमत नहीं होंगे।
वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सदन लोकसभा में पारित किए गए विधेयकों को पारित करने के लिए बाध्य नहीं है।
इसी बीच अध्यक्ष ने विधेयक पर चर्चा की अनुमति देते हुए कहा कि चर्चा समाप्त होने के बाद विधेयक को समिति के पास भेजा जा सकता है। अधिकांश विपक्षी सदस्य हालांकि इस निर्णय के प्रति आश्वस्त नहीं दिखे और अपना विरोध जारी रखा।
विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध तब भी जारी रखा, जब जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरटीआई का प्रभाव कम करने का उनका कोई भी इरादा नहीं है और विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।
एआईएडीएमके सदस्य नवनीत कृष्णा ने विधेयक का समर्थन किया।
| नई दिल्ली, पच्चीस जुलाई । कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल गुरुवार को राज्यसभा में आरटीआई संशोधन विधेयक पर चर्चा करने व इसे पारित करने से पहले प्रवर समिति को भेजने की मांग पर अड़ गए। राज्यसभा में मचे शोरगुल के बीच कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम, दो हज़ार पाँच में संशोधन करने और इसे पारित करने के लिए विधेयक को सामने रखा। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सदस्य इसे प्रवर समिति के पास भेजने पर अड़े रहे। विपक्ष ने कहा, "हम प्रवर समिति चाहते हैं। " इसके अलावा उन्होंने कहा, "आरटीआई के कमजोर पड़ने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। " इस बीच अध्यक्ष को कुछ देर के लिए लिए दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित विपक्ष ने स्थिति स्पष्ट कर दी कि वे प्रवर समिति के पास भेजे बिना विधेयक पर सहमत नहीं होंगे। वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सदन लोकसभा में पारित किए गए विधेयकों को पारित करने के लिए बाध्य नहीं है। इसी बीच अध्यक्ष ने विधेयक पर चर्चा की अनुमति देते हुए कहा कि चर्चा समाप्त होने के बाद विधेयक को समिति के पास भेजा जा सकता है। अधिकांश विपक्षी सदस्य हालांकि इस निर्णय के प्रति आश्वस्त नहीं दिखे और अपना विरोध जारी रखा। विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध तब भी जारी रखा, जब जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरटीआई का प्रभाव कम करने का उनका कोई भी इरादा नहीं है और विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है। एआईएडीएमके सदस्य नवनीत कृष्णा ने विधेयक का समर्थन किया। |
उत्तरपयडिट्टिदिउदीरणार गाणाजीबेहि कालो
अपज० मिच्छ० गबुंस० जह० ट्ठिदिउदी० जह० एयस०, - जह० एयस०, उक● आवलि० असंखे० भागो । अज० जह० भावलिया समयूणा, णवुंस० अंतोमुहुर्त्त, उक्क० पलिदो० असंखे० भागो । सोलसक० बराणोक० एवं चेत्र । णवरि अजह० ट्ठिदिउदी० जह० एयस०, उक्क पलिदो० असंखे० भागो ।
३६८४. देवेसु दंसणतियमोघं । सेसपय• जह• ट्ठिदिउदी० जह० एयसमओ, उक० आवलि० असंखे० भागो । अजह० सव्वद्धा । एवं भवरण० वाणवें० । णवरि सम्म० मिच्छत्तभंगो । जोदिमियादि जाव खत्रगेवज्जा ति दंसणतिय मोघं । सेसपय● जह० ट्ठिदिउदी० जह० एयसम, उक० संखेजा समया । अजह० सव्वद्धा । नवरि अणंताणु० चउक० जह० द्विदिउदी० जह० एयसमओ, उक्क० अंतोमु० । बरि जोदिमि० सम्म० मिच्छत्तभंगो । आणदादि णवगेवजा त्ति अनंताणु०४ जह० डिदिउदी० जह• एयस०, उक० संखेजा समया । अजह० सव्वद्धा । अणुहिसादि सच्चा त्ति सव्वपय● जह० ट्ठिदिउदी० जह० एयस०, उक्क० संखेजा समया । अजह सव्वद्धा । एवं जाव० ।
संख्यात समय है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इतनी विशेषता है कि इनमे सम्यग्मिध्यात्वका भंग सामान्य मनुष्यों के समान है। मनुष्य अपर्याप्तकों में मिथ्यास्व और नपुंसकवेदकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोका जघन्य काल मिथ्यात्वका एक समय कम एक आवलिप्रमाण है, नपुंसक वेदका अन्तर्मुहूर्त है और उत्कृष्ट काल पत्यके असंख्य भागप्रमाण है। सोलह कषाय और छह नोकपायोंका इसीप्रकार है। इतनी विशेषता है कि अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल पत्यके असंख्यातवें भागप्रमाण है।
८ ६८४. देबोंमें दर्शनमोहनीयत्रिकका भंग ओघके समान है। शेष प्रकृतियोंकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। अजघन्य स्थिति के उदोरकोका काल सर्वदा है। इसीप्रकार भवनवासी और व्यन्तर देवोंमे जानना चाहिए। इतनी विशेषता है कि इनमे सम्यक्त्वका भंग मिथ्यात्म के समान है। ज्योतिषी देवोसे लेकर नौ ग्रैवेयक तकके देवोमे दर्शन मोहनीयत्रिकका भंग ओघ के समान है। शेष प्रकृतियोंकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जवन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इतनी विशेषता है कि अनन्तानुबन्धी चतुक की जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है। इतनी विशेषता है कि ज्योतिषी देवोंमें सम्यक्त्वका भंग मिथ्यात्व के समान है। तथा मानतकल्पसे लेकर नौ मैवेयक तकके देवोंमें अनन्तानुबन्धी चतुष्क की जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जवन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है । अजघन्य स्थिति के उदोरकों का काल सर्वदा है। अनुदिशसे लेकर सर्वार्थसिद्धितक के देवोंमें सब प्रकृतियों की जघन्य स्थितिके उदीरकोका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है। अजवन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इसीप्रकार अनाहारक मार्गणातक | उत्तरपयडिट्टिदिउदीरणार गाणाजीबेहि कालो अपजशून्य मिच्छशून्य गबुंसशून्य जहशून्य ट्ठिदिउदीशून्य जहशून्य एयसशून्य, - जहशून्य एयसशून्य, उक● आवलिशून्य असंखेशून्य भागो । अजशून्य जहशून्य भावलिया समयूणा, णवुंसशून्य अंतोमुहुर्त्त, उक्कशून्य पलिदोशून्य असंखेशून्य भागो । सोलसकशून्य बराणोकशून्य एवं चेत्र । णवरि अजहशून्य ट्ठिदिउदीशून्य जहशून्य एयसशून्य, उक्क पलिदोशून्य असंखेशून्य भागो । तीन हज़ार छः सौ चौरासी. देवेसु दंसणतियमोघं । सेसपय• जह• ट्ठिदिउदीशून्य जहशून्य एयसमओ, उकशून्य आवलिशून्य असंखेशून्य भागो । अजहशून्य सव्वद्धा । एवं भवरणशून्य वाणवेंशून्य । णवरि सम्मशून्य मिच्छत्तभंगो । जोदिमियादि जाव खत्रगेवज्जा ति दंसणतिय मोघं । सेसपय● जहशून्य ट्ठिदिउदीशून्य जहशून्य एयसम, उकशून्य संखेजा समया । अजहशून्य सव्वद्धा । नवरि अणंताणुशून्य चउकशून्य जहशून्य द्विदिउदीशून्य जहशून्य एयसमओ, उक्कशून्य अंतोमुशून्य । बरि जोदिमिशून्य सम्मशून्य मिच्छत्तभंगो । आणदादि णवगेवजा त्ति अनंताणुचार जहशून्य डिदिउदीशून्य जह• एयसशून्य, उकशून्य संखेजा समया । अजहशून्य सव्वद्धा । अणुहिसादि सच्चा त्ति सव्वपय● जहशून्य ट्ठिदिउदीशून्य जहशून्य एयसशून्य, उक्कशून्य संखेजा समया । अजह सव्वद्धा । एवं जावशून्य । संख्यात समय है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इतनी विशेषता है कि इनमे सम्यग्मिध्यात्वका भंग सामान्य मनुष्यों के समान है। मनुष्य अपर्याप्तकों में मिथ्यास्व और नपुंसकवेदकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोका जघन्य काल मिथ्यात्वका एक समय कम एक आवलिप्रमाण है, नपुंसक वेदका अन्तर्मुहूर्त है और उत्कृष्ट काल पत्यके असंख्य भागप्रमाण है। सोलह कषाय और छह नोकपायोंका इसीप्रकार है। इतनी विशेषता है कि अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल पत्यके असंख्यातवें भागप्रमाण है। आठ छः सौ चौरासी. देबोंमें दर्शनमोहनीयत्रिकका भंग ओघके समान है। शेष प्रकृतियोंकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। अजघन्य स्थिति के उदोरकोका काल सर्वदा है। इसीप्रकार भवनवासी और व्यन्तर देवोंमे जानना चाहिए। इतनी विशेषता है कि इनमे सम्यक्त्वका भंग मिथ्यात्म के समान है। ज्योतिषी देवोसे लेकर नौ ग्रैवेयक तकके देवोमे दर्शन मोहनीयत्रिकका भंग ओघ के समान है। शेष प्रकृतियोंकी जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जवन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है। अजघन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इतनी विशेषता है कि अनन्तानुबन्धी चतुक की जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है। इतनी विशेषता है कि ज्योतिषी देवोंमें सम्यक्त्वका भंग मिथ्यात्व के समान है। तथा मानतकल्पसे लेकर नौ मैवेयक तकके देवोंमें अनन्तानुबन्धी चतुष्क की जघन्य स्थितिके उदीरकोंका जवन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है । अजघन्य स्थिति के उदोरकों का काल सर्वदा है। अनुदिशसे लेकर सर्वार्थसिद्धितक के देवोंमें सब प्रकृतियों की जघन्य स्थितिके उदीरकोका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है। अजवन्य स्थितिके उदीरकोंका काल सर्वदा है। इसीप्रकार अनाहारक मार्गणातक |
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी कि बीजेपी की सरकार में हरियाणा में जात पात और परिवारवाद की राजनीति हो रही है, वहीं प्रदेश के लोग शिक्षा के अधिकार की बात करने के लिए हिसार के बालसमंद पहुंचे हैं।
हिसार(विनोद): जिले के बालसमंद में आयोजित शिक्षा अधिकार पंचायत में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहुंचे, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर खट्टर सरकार स्कूलों पर ताला लगाने में लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ बालसमंद में शिक्षा अधिकार पंचायत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी कि बीजेपी की सरकार में हरियाणा में जात पात और परिवारवाद की राजनीति हो रही है, वहीं प्रदेश के लोग शिक्षा के अधिकार की बात करने के लिए हिसार के बालसमंद पहुंचे हैं।
सिसोदिया ने कहा कि जब दिल्ली सरकार ने राजधानी में काम शुरू किया तो अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि शिक्षा मंत्री का पद आपको देंगे। ऐसा काम करना कि 5 साल के बाद लोगों के बीच जाकर वोट न मांगना पड़े। उन्होंने कहा कि हमने दिल्ली के स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बनाने का काम किया। इसी के साथ डिप्टी सीएम ने कहा कि बाबा साहब का सपना था कि शिक्षा को मूलभूत अधिकार बनाया जाए। कुछ लोगों के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि यदि बाबा साहब के दिखाए रास्ते पर चलते तो एक भी स्कूल बंद ना होता। खट्टर सरकार प्रदेश के स्कूलों को एक के बाद एक बंद ना कर पाती। उन्होंने कहा कि 2015 में दिल्ली के स्कूलों को टेंट वाले स्कूल और गड्ढे वाले स्कूलों के नाम से जाना जाता था। केजरीवाल सरकार की मेहनत से दिल्ली के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा ने शिक्षा अधिकार पंचायत में कहा कि अभी 48 घंटे पहले ही एक आदमी गिड़गिड़ा कर दोनों हाथ जोड़कर कह रहा था कि आप पार्टी के कार्यक्रम में ना जाएं। यहां बालसमंद में पहुंचे सभी लोगों ने उनके मुंह पर तमाचा मारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आदमपुर किसी एक परिवार की बपौती नहीं है। चौधरी भजनलाल यहां से जीते और मुख्यमंत्री बने। यहां के लोगों को चौधर दिलाने का काम किया। लेकिन उनके बेटे ने उनके नाम पर वोट मांगी और अब उनका पौता भी उनके नाम पर वोट मांग रहा है। इस बार आदमपुर की जनता बेवकूफ नहीं बनेगी।
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| उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी कि बीजेपी की सरकार में हरियाणा में जात पात और परिवारवाद की राजनीति हो रही है, वहीं प्रदेश के लोग शिक्षा के अधिकार की बात करने के लिए हिसार के बालसमंद पहुंचे हैं। हिसार: जिले के बालसमंद में आयोजित शिक्षा अधिकार पंचायत में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहुंचे, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर खट्टर सरकार स्कूलों पर ताला लगाने में लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ बालसमंद में शिक्षा अधिकार पंचायत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी कि बीजेपी की सरकार में हरियाणा में जात पात और परिवारवाद की राजनीति हो रही है, वहीं प्रदेश के लोग शिक्षा के अधिकार की बात करने के लिए हिसार के बालसमंद पहुंचे हैं। सिसोदिया ने कहा कि जब दिल्ली सरकार ने राजधानी में काम शुरू किया तो अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि शिक्षा मंत्री का पद आपको देंगे। ऐसा काम करना कि पाँच साल के बाद लोगों के बीच जाकर वोट न मांगना पड़े। उन्होंने कहा कि हमने दिल्ली के स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बनाने का काम किया। इसी के साथ डिप्टी सीएम ने कहा कि बाबा साहब का सपना था कि शिक्षा को मूलभूत अधिकार बनाया जाए। कुछ लोगों के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि यदि बाबा साहब के दिखाए रास्ते पर चलते तो एक भी स्कूल बंद ना होता। खट्टर सरकार प्रदेश के स्कूलों को एक के बाद एक बंद ना कर पाती। उन्होंने कहा कि दो हज़ार पंद्रह में दिल्ली के स्कूलों को टेंट वाले स्कूल और गड्ढे वाले स्कूलों के नाम से जाना जाता था। केजरीवाल सरकार की मेहनत से दिल्ली के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा ने शिक्षा अधिकार पंचायत में कहा कि अभी अड़तालीस घंटाटे पहले ही एक आदमी गिड़गिड़ा कर दोनों हाथ जोड़कर कह रहा था कि आप पार्टी के कार्यक्रम में ना जाएं। यहां बालसमंद में पहुंचे सभी लोगों ने उनके मुंह पर तमाचा मारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आदमपुर किसी एक परिवार की बपौती नहीं है। चौधरी भजनलाल यहां से जीते और मुख्यमंत्री बने। यहां के लोगों को चौधर दिलाने का काम किया। लेकिन उनके बेटे ने उनके नाम पर वोट मांगी और अब उनका पौता भी उनके नाम पर वोट मांग रहा है। इस बार आदमपुर की जनता बेवकूफ नहीं बनेगी। |
आज की दुनिया में पोस्ट ग्रेजुएन या प्रोफेशनल योग्यता हासिल करना बहुत महत्तवपूर्ण है। कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) और फाइनेंस में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) सबसे पसंदीदा करियर विकल्पों में से हैं। क्योंकि ये अच्छे पैकेज के साथ रोमांचक अवसर प्रदान करते हैं। कई छात्रों को कन्फयूजन होती है कि उनके भविष्य के लिए MBA और CA में से कौन सा विकल्प बेहतर है। इस लेख से इन दोंनो के बारे में बताया है।
क्या है CA प्रोग्राम?
चार्टर्ड अकाउंटेंसी एकाउंटिंग के क्षेत्र में सबसे कठिन और सबसे अधिक मांग वाले प्रोफेशनल करियर विकल्पों में से एक है। यह एक तीन-स्तरीय कार्यक्रम है, जो देश में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा प्रदान किया जाता है। CA प्रोग्राम को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, जिसमें फाउंडेशन कोर्स, इंटरमीडिएट कोर्स और फाइनल कोर्स शामिल हैं।
क्या है फाइनेंस में MBA?
फाइनेंस में MBA स्नातक के बाद कॉमर्स छात्रों के बीच टॉप विकल्पों में से एक बना हुआ है। यह कई टॉप मैनेजेंट संस्थानों द्वारा पेश किया जाता है। टॉप बिजनेस स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट (CAT) या अन्य मैनेजेंट प्रवेश परीक्षा जैसे कि SNAP, MAT, CMAT, XAT आदि को पास करना होता है। कुछ प्राइवेट कॉलेज योग्यता के माध्यम से या मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से प्रवेश देते हैं।
क्या है दोनों कोर्स की अवधि?
CA पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम पात्रता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं परीक्षा या समकक्ष है। CA कोर्स की औसत अवधि 12वीं के बाद 4. 5 साल और स्नातक होने के बाद तीन साल है। वहीं दूसरी ओर फाइनेंस में MBA केवल स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद किया जा सकता है। फुलटाइम MBA की डिग्री की अवधि आम तौर पर 18-24 महीनों के बीच की होती है।
CA मुख्य रूप से फाइनेंशियल एकाउंटिंग और रिपोर्टिंग, टैक्सेशन, कानून, ऑडित, बिजनेस एनवायरमेंट, फाइनेंस आदि पर केंद्रित है। फाइनेंस में MBA मुख्य रूप से बिजनेस फाइनेंस से संबंधित है और छात्रों को कई क्षेत्रों में जैसे असिस्ट मैनेजमेंट, इनवेस्टमेंट बैंकिंग आदि भी तैयार करता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट प्राइवेट तौर पर प्रैक्टिस कर सकते हैं या बड़ी फर्मों के साथ उनके खातों और फाइनेंस विभागों में विभिन्न पदों पर काम कर सकते हैं। उनके पास नौकरी करने के लिए विभिन्न विकल्प होते हैं और वे इंटरनल ऑडित, फाइनेंशियल एंड एकाउंटिंग मैनेजमेंट, टैक्सेशन, बैंकिंग, निवेश निर्णय आदि में काम करना चुन सकते हैं। एक फ्रेशर CA औसतन 6-7 लाख रुपये प्रति वर्ष कमाता है।
| आज की दुनिया में पोस्ट ग्रेजुएन या प्रोफेशनल योग्यता हासिल करना बहुत महत्तवपूर्ण है। कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी और फाइनेंस में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन सबसे पसंदीदा करियर विकल्पों में से हैं। क्योंकि ये अच्छे पैकेज के साथ रोमांचक अवसर प्रदान करते हैं। कई छात्रों को कन्फयूजन होती है कि उनके भविष्य के लिए MBA और CA में से कौन सा विकल्प बेहतर है। इस लेख से इन दोंनो के बारे में बताया है। क्या है CA प्रोग्राम? चार्टर्ड अकाउंटेंसी एकाउंटिंग के क्षेत्र में सबसे कठिन और सबसे अधिक मांग वाले प्रोफेशनल करियर विकल्पों में से एक है। यह एक तीन-स्तरीय कार्यक्रम है, जो देश में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रदान किया जाता है। CA प्रोग्राम को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, जिसमें फाउंडेशन कोर्स, इंटरमीडिएट कोर्स और फाइनल कोर्स शामिल हैं। क्या है फाइनेंस में MBA? फाइनेंस में MBA स्नातक के बाद कॉमर्स छात्रों के बीच टॉप विकल्पों में से एक बना हुआ है। यह कई टॉप मैनेजेंट संस्थानों द्वारा पेश किया जाता है। टॉप बिजनेस स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट या अन्य मैनेजेंट प्रवेश परीक्षा जैसे कि SNAP, MAT, CMAT, XAT आदि को पास करना होता है। कुछ प्राइवेट कॉलेज योग्यता के माध्यम से या मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से प्रवेश देते हैं। क्या है दोनों कोर्स की अवधि? CA पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम पात्रता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से बारहवीं परीक्षा या समकक्ष है। CA कोर्स की औसत अवधि बारहवीं के बाद चार. पाँच साल और स्नातक होने के बाद तीन साल है। वहीं दूसरी ओर फाइनेंस में MBA केवल स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद किया जा सकता है। फुलटाइम MBA की डिग्री की अवधि आम तौर पर अट्ठारह-चौबीस महीनों के बीच की होती है। CA मुख्य रूप से फाइनेंशियल एकाउंटिंग और रिपोर्टिंग, टैक्सेशन, कानून, ऑडित, बिजनेस एनवायरमेंट, फाइनेंस आदि पर केंद्रित है। फाइनेंस में MBA मुख्य रूप से बिजनेस फाइनेंस से संबंधित है और छात्रों को कई क्षेत्रों में जैसे असिस्ट मैनेजमेंट, इनवेस्टमेंट बैंकिंग आदि भी तैयार करता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट प्राइवेट तौर पर प्रैक्टिस कर सकते हैं या बड़ी फर्मों के साथ उनके खातों और फाइनेंस विभागों में विभिन्न पदों पर काम कर सकते हैं। उनके पास नौकरी करने के लिए विभिन्न विकल्प होते हैं और वे इंटरनल ऑडित, फाइनेंशियल एंड एकाउंटिंग मैनेजमेंट, टैक्सेशन, बैंकिंग, निवेश निर्णय आदि में काम करना चुन सकते हैं। एक फ्रेशर CA औसतन छः-सात लाख रुपये प्रति वर्ष कमाता है। |
सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है, 'ना मेरे पिता को किसी पद या कुर्सी की लालसा रही कभी, ना ही मुझे ऐसी कोई भूख है। "
विधान सभा चुनावों के बाद मध्यप्रदेश की तस्वीर एकदम साफ है। कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए कोई भूमिका या पद सोचा है या नहीं, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम नहीं बनाने पर उनके 11 समर्थक विधायकों ने विरोध किया है।
उन्होंने विरोध प्रदशर्न करते हुए कहा है कि कहा है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश का अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो वह कमलनाथ के पक्ष में वोट नहीं करेंगे। हालांकि इस पर अभी कांग्रेस की ओर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।
सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक साक्षात्कार किया। सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है, 'ना मेरे पिता को किसी पद या कुर्सी की लालसा रही कभी, ना ही मुझे ऐसी कोई भूख है। "
कांग्रेस ने एमपी में कुल 114 सीटें जीती हैं। जबकि 230 विधानसभा सीटों वाले मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के लिए 116 सीटों की जरूरत लगेगी।
राज्य में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है जिसके चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रदेशभर के कार्यकर्ता कल से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर बड़ी तादाद में मौजूद हैं। वे मिठाइयां बांटकर खुशी व्यक्त कर रहे हैं और ढोल-नगाड़ों पर नाच रहे हैं। लेकिन इसी बीच कांग्रेस का आधा खेमा सिंधिया को सीएम ना बनाने की वजह से नाराज भी हैं।
| सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है, 'ना मेरे पिता को किसी पद या कुर्सी की लालसा रही कभी, ना ही मुझे ऐसी कोई भूख है। " विधान सभा चुनावों के बाद मध्यप्रदेश की तस्वीर एकदम साफ है। कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए कोई भूमिका या पद सोचा है या नहीं, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम नहीं बनाने पर उनके ग्यारह समर्थक विधायकों ने विरोध किया है। उन्होंने विरोध प्रदशर्न करते हुए कहा है कि कहा है कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश का अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो वह कमलनाथ के पक्ष में वोट नहीं करेंगे। हालांकि इस पर अभी कांग्रेस की ओर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक साक्षात्कार किया। सीएम पद ना मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है, 'ना मेरे पिता को किसी पद या कुर्सी की लालसा रही कभी, ना ही मुझे ऐसी कोई भूख है। " कांग्रेस ने एमपी में कुल एक सौ चौदह सीटें जीती हैं। जबकि दो सौ तीस विधानसभा सीटों वाले मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के लिए एक सौ सोलह सीटों की जरूरत लगेगी। राज्य में पंद्रह साल बाद कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है जिसके चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रदेशभर के कार्यकर्ता कल से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर बड़ी तादाद में मौजूद हैं। वे मिठाइयां बांटकर खुशी व्यक्त कर रहे हैं और ढोल-नगाड़ों पर नाच रहे हैं। लेकिन इसी बीच कांग्रेस का आधा खेमा सिंधिया को सीएम ना बनाने की वजह से नाराज भी हैं। |
वायरल हो रही तस्वीर में क्या है?
वायरल हो रही तस्वीर में आसिफ अली जरदारी पीएमएल- क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन के साथ आरामदायक कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। ये कुर्सियां इतनी बड़ी हैं कि दोनों नेता अपने-अपने पैरों को ऊपर पर आराम से बैठे हुए हैं। कल से वायरल हो रही इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसी मुलाकात ने हमजा शहबाज को पंजाब के मुख्यमंत्री के चुनाव में जीत दिया दी। दरअसल, वोटिंग से ठीक पहले पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष दोस्त मोहम्मद मजारी ने फैसला सुनाया कि पार्टी प्रमुख चौधरी शुजात के पत्र को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव में पीएमएल-क्यू सदस्यों के वोटों की गिनती नहीं की जाएगी।
चौधरी शुजात ने परवेज इलाही नहीं दिया समर्थन?
पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि पीएमएल-क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात ने परवेज इलाही को पीटीआई के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने से इनकार कर दिया था। हालांकि उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता मूनिस इलाही ने इस दावे को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि परवेज इलाही को पीएमएल-क्यू और पीटीआई दोनों ही पार्टियों ने संयुक्त रूप से उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बावजूद उनकी पार्टी के विधायकों के मतों की गिनती नहीं की गई।
इमरान खान ने एक दिन पहले ही आरोप लगाया था कि लाहौर में उनकी पार्टी के विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए एक-एक विधायक को 50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि इस खरीद-फरोख्त के पीछे आसिफ अली जरदारी का हाथ है। तीन महीने पहले भी इमरान खान की पार्टी के 25 विधायकों ने बगावत करते हुए हमजा शहबाज को समर्थन देने का ऐलान किया था। तब भी इमरान ने दावा किया था कि जरदारी ही इन विधायकों को पैसे देकर खरीदा है।
| वायरल हो रही तस्वीर में क्या है? वायरल हो रही तस्वीर में आसिफ अली जरदारी पीएमएल- क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन के साथ आरामदायक कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। ये कुर्सियां इतनी बड़ी हैं कि दोनों नेता अपने-अपने पैरों को ऊपर पर आराम से बैठे हुए हैं। कल से वायरल हो रही इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसी मुलाकात ने हमजा शहबाज को पंजाब के मुख्यमंत्री के चुनाव में जीत दिया दी। दरअसल, वोटिंग से ठीक पहले पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष दोस्त मोहम्मद मजारी ने फैसला सुनाया कि पार्टी प्रमुख चौधरी शुजात के पत्र को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव में पीएमएल-क्यू सदस्यों के वोटों की गिनती नहीं की जाएगी। चौधरी शुजात ने परवेज इलाही नहीं दिया समर्थन? पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि पीएमएल-क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात ने परवेज इलाही को पीटीआई के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने से इनकार कर दिया था। हालांकि उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता मूनिस इलाही ने इस दावे को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि परवेज इलाही को पीएमएल-क्यू और पीटीआई दोनों ही पार्टियों ने संयुक्त रूप से उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बावजूद उनकी पार्टी के विधायकों के मतों की गिनती नहीं की गई। इमरान खान ने एक दिन पहले ही आरोप लगाया था कि लाहौर में उनकी पार्टी के विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए एक-एक विधायक को पचास करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि इस खरीद-फरोख्त के पीछे आसिफ अली जरदारी का हाथ है। तीन महीने पहले भी इमरान खान की पार्टी के पच्चीस विधायकों ने बगावत करते हुए हमजा शहबाज को समर्थन देने का ऐलान किया था। तब भी इमरान ने दावा किया था कि जरदारी ही इन विधायकों को पैसे देकर खरीदा है। |
ब्रह्मपुर साइबर पुलिस ने यहां भागवत प्रसाद मिश्र नामक एक व्यक्ति को कॉलगर्ल के रूप में उसकी पत्नी के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और उसकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. बताया गया है कि भागवत कलाहांडी जिले के केसिंगा ब्लॉक से है और गंजाम जिले के खलीकोट इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहता है. उसकी पत्नी ने शुक्रवार को साइबर पुलिस स्टेशन में उसके नाम पर फर्जी खातों का उल्लेख करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने मामले की जांच की और आश्चर्यजनक रूप से पाया कि उन नकली खातों के संचालक के पीछे उसका पति भागवत ही है.
उनकी पत्नी ने बताया है कि मुझे मेरे फेसबुक हैंडल पर रेणु साहू नाम की एक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली. उसने मेरे रिश्तेदारों में से एक होने का दावा किया, लेकिन मैंने उसे ब्लॉक कर दिया, क्योंकि वह मुझे लगातार बेतुके संदेशों से परेशान कर रही थी. बाद में मैंने अपने नाम पर दो फर्जी आईडी पायी और उन हैंडल पर मेरी अश्लील क्लिप प्रसारित की गईं. मैंने अपने पति को इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन मेरे पति ने हर बार मना कर दिया. अंत में मैंने अपने दम पर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करायी. जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि इन कुकर्मों के पीछे मेरे पति का हाथ था. सूत्रों के अनुसार, भागवत अपनी पत्नी की नग्न तस्वीरों और वीडियो का प्रदर्शन करके विज्ञापन दे रहा था. उन्होंने अपनी पत्नी और सास-ससुर के संपर्क नंबरों को भी दो अलग-अलग फर्जी एकाउंट में जोड़ रखा था. पुलिस ने इस आरोपी को खलीकोट न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट के समक्ष पेश किया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गयी और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
ब्रह्मपुर एएसपी प्रभात राउत ने कहा कि जांच के दौरान हमने पाया कि केसिंगा के भागवत प्रसाद मिश्र ने शिकायतकर्ता से उनकी दूसरी पत्नी के रूप में शादी की थी और उनका एक बेटा भी है. वह कुछ निजी कारणों से उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा था.
| ब्रह्मपुर साइबर पुलिस ने यहां भागवत प्रसाद मिश्र नामक एक व्यक्ति को कॉलगर्ल के रूप में उसकी पत्नी के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और उसकी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. बताया गया है कि भागवत कलाहांडी जिले के केसिंगा ब्लॉक से है और गंजाम जिले के खलीकोट इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहता है. उसकी पत्नी ने शुक्रवार को साइबर पुलिस स्टेशन में उसके नाम पर फर्जी खातों का उल्लेख करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने मामले की जांच की और आश्चर्यजनक रूप से पाया कि उन नकली खातों के संचालक के पीछे उसका पति भागवत ही है. उनकी पत्नी ने बताया है कि मुझे मेरे फेसबुक हैंडल पर रेणु साहू नाम की एक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली. उसने मेरे रिश्तेदारों में से एक होने का दावा किया, लेकिन मैंने उसे ब्लॉक कर दिया, क्योंकि वह मुझे लगातार बेतुके संदेशों से परेशान कर रही थी. बाद में मैंने अपने नाम पर दो फर्जी आईडी पायी और उन हैंडल पर मेरी अश्लील क्लिप प्रसारित की गईं. मैंने अपने पति को इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन मेरे पति ने हर बार मना कर दिया. अंत में मैंने अपने दम पर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करायी. जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि इन कुकर्मों के पीछे मेरे पति का हाथ था. सूत्रों के अनुसार, भागवत अपनी पत्नी की नग्न तस्वीरों और वीडियो का प्रदर्शन करके विज्ञापन दे रहा था. उन्होंने अपनी पत्नी और सास-ससुर के संपर्क नंबरों को भी दो अलग-अलग फर्जी एकाउंट में जोड़ रखा था. पुलिस ने इस आरोपी को खलीकोट न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट के समक्ष पेश किया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गयी और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. ब्रह्मपुर एएसपी प्रभात राउत ने कहा कि जांच के दौरान हमने पाया कि केसिंगा के भागवत प्रसाद मिश्र ने शिकायतकर्ता से उनकी दूसरी पत्नी के रूप में शादी की थी और उनका एक बेटा भी है. वह कुछ निजी कारणों से उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा था. |
जोरों से जारी है; परिषद् विशाल भवन बनाने जा रही है।
हिन्दी-साहित्य परिषद्, बखतियारपुर, पटना - स्था० - २ अक्टूबर १९५० ; श्री शिवपूजन सहाय द्वारा उद्घाटन हुआ, उद्दे
के लोक-गीतों,
मगध- जनपद
कथाओं तथा पहेलियों का संकलन, संपादन और प्रकाशन; कार्य०प्रति पक्ष 'रसचक्र' नाम से एक गोष्ठी होती है ।
हिंदी-साहित्य परिषद्, मथुरास्था० - १६३२ ; कार्य- इसी के द्वारा 'व्रज साहित्य मंडल' संस्था का जन्म हुआ; स्वयं खड़ी बोली की सेवा कर रही है; परिषद ने ७००) आजाद हिन्द फौज - रक्षासमिति को भेजा था ।
हिन्दी-साहित्य परिषद्, मिर्जापुर- स्था० - श्री बल्लभदासबिन्नानी; साप्ताहिक बैठकें होती हैं, जयंतियाँ, गोष्ठियाँ और कवि सम्मेलन होते हैं, प्रकाशन कार्य भी होता है । हिन्दी-साहित्य परिषद्, मेरठ १६३६ में स्थापित
सम्मेलनों, व्याख्यानों, गल्प-सम्मेलों आदि की आयोजना करती
है, भारतीय ग्रंथमाला में साहित्यिक विषयों की विवेचना का प्रबन्ध; एक त्रैमासिक हस्तलिखित का प्रकाशन करती है।
हिन्दी साहित्य परिषद्, राठ, हमीरपुर - स्था०. २६ अगस्त १९४३; यह परिपद पुरानी संस्था 'कवि-संघ' का रूपांतर है; कार्य० - जयंतियों और कवि सम्मेलनों का आयोजन तीन वर्षों में २६ विशेष बैठकें हुई; परिषद का जनपद सा० सम्मे० और बुंदेलखंड हि० सा० सम्मे० से सम्बद्ध ।
हिन्दी-साहित्य परिषद्, लखीमपुर - १६४० में स्थापित कहानीसम्मेलन, हास्य-सम्मेलन, कविसम्मेलन, निबन्ध-सम्मेलन आदि का हुआ करता है।
हिन्दी-साहित्य परिषद्, लालगंज, रायबरेली - स्था० - पंडित देवीरत्न अवस्थी 'करील', नवम्बर १६४५, आचार्य पं० महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में; सद० - ५१; कार्य० - ( ख ) द्विवेदी और तुलसी-जयंती का समारोह, (ख) सम्मेलन-परीक्षाओं की पढ़ाई
का प्रबन्ध ।
हिंदी-साहित्य परिषद्, श्रीनगर, काश्मीर - हिन्दी - प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से स्थापित, परिषद द्वारा सम्मेलन की कोविद और परिचय परीक्षाओं का प्रचार किया जाता हैः सदस्य १२५ के लगभग हैं ।
हिन्दी साहित्य परिषद् सिरसा, इलाहाबाद - स्था०१ मई १६३२, बा० पुरुषोत्तमदास टंडन; सद० - २६३ : कार्य- - राष्ट्रभाषा का गाँवों में प्रचार, जयन्तियों का आयोजन ।
हिन्दी साहित्य पुस्तकालय, मौरावाँ, उन्नाव - ३ सितम्बर १९१७ को पं० बालकृष्ण पाठक, पं० मेड़ीलाल त्रिपाठी; बा० जयनारायण, कपूर ने नींव डाली : सेठ दीनदयाल की आर्थिक सहायता से वृद्धि हुई; और 'हिन्दी साहित्य पुस्तकालय' के नाम से यह प्रसिद्ध हुआ; २५ जून १९२४ को पं० सूर्य प्रसाद जी द्वारा दिये गये एक भवन में यह स्थायी रूप से स्थित हुआ; 8 जनवरी १९२२ को यंगमेंस लाइब्रेरी मौरावाँ के नाम से एक अँगरेजी पुस्तकालय खुला और वह भी ३१ दिसम्बर
१६२६ को इसी में शामिल हो गया; इसका संचालन १९ व्यक्तियों की एक कार्यकारिणी करती है; सद० - १६०; कार्य० - १८ वर्षों का समाचार - साहित्य है, हिन्दी, संस्कृत और फारसी के अप्राप्य ग्रंथ यहाँ सुरक्षित हैं हस्तलिखित ग्रन्थों की संख्या ११६ है, हरिजनो को निःशुल्क सदस्य बनाया जाता है; १० कोस की परिधि में जनता लाभ उठाती है; (क) पुस्तकालय की ओर से एक
पुस्तकालय प्रचार समिति की स्थापना १९२४ में हुई, गाँवों में 'पुस्तक वितरक' नामक कर्मचारी इसकी पुस्तकें पहुँचाता है; (ख) २८ दिसम्बर १६१६ को एक साहित्यसमिति की स्थापना हुई; इसके द्वारा जयंतियों, परिपदों, कविसम्मेलनों, प्रदर्शनियों और प्रतियोगिता का आयोजन होता है; १९४७ में 'स्वर्ग में कवि-दरबार' किया गया; (ग) १६३५ में एक वृहत् पुस्तकालय प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, इसमें पुस्तकालय विज्ञान की प्रगति ग्राफ, चार्टी और चित्रों द्वारा प्रदर्शित | जोरों से जारी है; परिषद् विशाल भवन बनाने जा रही है। हिन्दी-साहित्य परिषद्, बखतियारपुर, पटना - स्थाशून्य - दो अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पचास ; श्री शिवपूजन सहाय द्वारा उद्घाटन हुआ, उद्दे के लोक-गीतों, मगध- जनपद कथाओं तथा पहेलियों का संकलन, संपादन और प्रकाशन; कार्यशून्यप्रति पक्ष 'रसचक्र' नाम से एक गोष्ठी होती है । हिंदी-साहित्य परिषद्, मथुरास्थाशून्य - एक हज़ार छः सौ बत्तीस ; कार्य- इसी के द्वारा 'व्रज साहित्य मंडल' संस्था का जन्म हुआ; स्वयं खड़ी बोली की सेवा कर रही है; परिषद ने सात सौ) आजाद हिन्द फौज - रक्षासमिति को भेजा था । हिन्दी-साहित्य परिषद्, मिर्जापुर- स्थाशून्य - श्री बल्लभदासबिन्नानी; साप्ताहिक बैठकें होती हैं, जयंतियाँ, गोष्ठियाँ और कवि सम्मेलन होते हैं, प्रकाशन कार्य भी होता है । हिन्दी-साहित्य परिषद्, मेरठ एक हज़ार छः सौ छत्तीस में स्थापित सम्मेलनों, व्याख्यानों, गल्प-सम्मेलों आदि की आयोजना करती है, भारतीय ग्रंथमाला में साहित्यिक विषयों की विवेचना का प्रबन्ध; एक त्रैमासिक हस्तलिखित का प्रकाशन करती है। हिन्दी साहित्य परिषद्, राठ, हमीरपुर - स्थाशून्य. छब्बीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस; यह परिपद पुरानी संस्था 'कवि-संघ' का रूपांतर है; कार्यशून्य - जयंतियों और कवि सम्मेलनों का आयोजन तीन वर्षों में छब्बीस विशेष बैठकें हुई; परिषद का जनपद साशून्य सम्मेशून्य और बुंदेलखंड हिशून्य साशून्य सम्मेशून्य से सम्बद्ध । हिन्दी-साहित्य परिषद्, लखीमपुर - एक हज़ार छः सौ चालीस में स्थापित कहानीसम्मेलन, हास्य-सम्मेलन, कविसम्मेलन, निबन्ध-सम्मेलन आदि का हुआ करता है। हिन्दी-साहित्य परिषद्, लालगंज, रायबरेली - स्थाशून्य - पंडित देवीरत्न अवस्थी 'करील', नवम्बर एक हज़ार छः सौ पैंतालीस, आचार्य पंशून्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में; सदशून्य - इक्यावन; कार्यशून्य - द्विवेदी और तुलसी-जयंती का समारोह, सम्मेलन-परीक्षाओं की पढ़ाई का प्रबन्ध । हिंदी-साहित्य परिषद्, श्रीनगर, काश्मीर - हिन्दी - प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से स्थापित, परिषद द्वारा सम्मेलन की कोविद और परिचय परीक्षाओं का प्रचार किया जाता हैः सदस्य एक सौ पच्चीस के लगभग हैं । हिन्दी साहित्य परिषद् सिरसा, इलाहाबाद - स्थाएक मई एक हज़ार छः सौ बत्तीस, बाशून्य पुरुषोत्तमदास टंडन; सदशून्य - दो सौ तिरेसठ : कार्य- - राष्ट्रभाषा का गाँवों में प्रचार, जयन्तियों का आयोजन । हिन्दी साहित्य पुस्तकालय, मौरावाँ, उन्नाव - तीन सितम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्रह को पंशून्य बालकृष्ण पाठक, पंशून्य मेड़ीलाल त्रिपाठी; बाशून्य जयनारायण, कपूर ने नींव डाली : सेठ दीनदयाल की आर्थिक सहायता से वृद्धि हुई; और 'हिन्दी साहित्य पुस्तकालय' के नाम से यह प्रसिद्ध हुआ; पच्चीस जून एक हज़ार नौ सौ चौबीस को पंशून्य सूर्य प्रसाद जी द्वारा दिये गये एक भवन में यह स्थायी रूप से स्थित हुआ; आठ जनवरी एक हज़ार नौ सौ बाईस को यंगमेंस लाइब्रेरी मौरावाँ के नाम से एक अँगरेजी पुस्तकालय खुला और वह भी इकतीस दिसम्बर एक हज़ार छः सौ छब्बीस को इसी में शामिल हो गया; इसका संचालन उन्नीस व्यक्तियों की एक कार्यकारिणी करती है; सदशून्य - एक सौ साठ; कार्यशून्य - अट्ठारह वर्षों का समाचार - साहित्य है, हिन्दी, संस्कृत और फारसी के अप्राप्य ग्रंथ यहाँ सुरक्षित हैं हस्तलिखित ग्रन्थों की संख्या एक सौ सोलह है, हरिजनो को निःशुल्क सदस्य बनाया जाता है; दस कोस की परिधि में जनता लाभ उठाती है; पुस्तकालय की ओर से एक पुस्तकालय प्रचार समिति की स्थापना एक हज़ार नौ सौ चौबीस में हुई, गाँवों में 'पुस्तक वितरक' नामक कर्मचारी इसकी पुस्तकें पहुँचाता है; अट्ठाईस दिसम्बर एक हज़ार छः सौ सोलह को एक साहित्यसमिति की स्थापना हुई; इसके द्वारा जयंतियों, परिपदों, कविसम्मेलनों, प्रदर्शनियों और प्रतियोगिता का आयोजन होता है; एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में 'स्वर्ग में कवि-दरबार' किया गया; एक हज़ार छः सौ पैंतीस में एक वृहत् पुस्तकालय प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, इसमें पुस्तकालय विज्ञान की प्रगति ग्राफ, चार्टी और चित्रों द्वारा प्रदर्शित |
मेमोरियल बहकेलिएवलर हॉस्पिटल स्लीप सेंटर से छाती रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। सिनेम इलाज ने खराब गुणवत्ता वाली नींद के बारे में जानकारी दी।
यह उल्लेख करते हुए कि खराब गुणवत्ता वाली नींद शरीर को थका देती है, प्रो. डॉ। सिनम इलाज ने कहा, "खराब गुणवत्ता वाली नींद को उस नींद के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो अवधि में अपर्याप्त है, खराब गुणवत्ता वाली या आरामदेह नहीं है। नींद की गुणवत्ता को कम न करने के लिए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए। आपको बहुत देर तक सोने नहीं जाना चाहिए, शराब, चाय या कॉफी का सेवन सोने के करीब नहीं करना चाहिए। चूंकि चाय और कॉफी उत्तेजक होते हैं, वे नींद में देरी करते हैं, जबकि शराब नींद की संरचना को बाधित करती है और आराम करने से रोकती है। बिस्तर पर पर्याप्त समय बिताने या रात में बार-बार जागने के बावजूद नींद शुरू न कर पाना नींद की गुणवत्ता को खराब कर देता है। हो सकता है कि वह व्यक्ति गहरी नींद न ले पाया हो, भले ही उसे यह एहसास न हो कि वह जाग गया है, और हो सकता है कि बार-बार जागने के कारण उसे चैन की नींद न आई हो। नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना या उथला होना भी नींद को गहरा होने और आराम करने से रोकता है। उन्होंने कहा।
यह कहते हुए कि बच्चों के विकास में नींद का बहुत बड़ा योगदान होता है, प्रो. डॉ। सिनेम इलियाज ने कहा, 'नवजात काल में बच्चे नींद के साथ बड़े होते हैं। नींद के प्रत्येक चरण के बाद, बच्चा अपनी ऊर्जा एकत्र करता है और थक जाता है और फिर से सो जाता है। नींद की जरूरत उम्र के साथ कम होती जाती है। एक वयस्क को औसतन 7-8 घंटे की नींद की आवश्यकता हो सकती है। यह अवधि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है। जहां ऐसे लोग हैं जिन्हें अपने दैनिक कामकाज को बनाए रखने के लिए दिन में 10 घंटे की नींद की जरूरत होती है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो 5-6 घंटे की नींद के साथ बहुत सहज होते हैं। उन्होंने कहा।
यह कहते हुए कि प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और शरीर संक्रमण के लिए खुला हो सकता है, प्रो। डॉ। सिनेम इलियाज ने कहा, "इसलिए बीमारियां बार-बार हो सकती हैं। यदि स्लीप एपनिया सिंड्रोम है, जो नींद के दौरान सांस लेने की समाप्ति की विशेषता वाली बीमारी है, और यदि इसका निदान और उपचार नहीं किया जाता है, तो यह अत्यधिक दिन की नींद, उच्च रक्तचाप और ताल विकारों के कारण यातायात और कार्य दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है जो कठिन हैं नियंत्रण करने के लिए। इसलिए बिना समय गंवाए नींद संबंधी विकारों का इलाज किया जाना चाहिए। इस संबंध में, स्लीप सेंटर्स में स्लीप टेस्ट किए जाते हैं, जहां स्लीप डिसऑर्डर पर विशेषज्ञ टीमों को नियुक्त किया जाता है, और आवश्यक उपचार योजना व्यक्तिगत रूप से बनाई जाती है। कहा।
प्रो डॉ। Sinem İlaz ने नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए 6 सुझावों के रूप में निम्नलिखित कहाः
- वयस्कों के लिए आवश्यक 7-8 घंटे की नींद लेने के लिए, बहुत देर होने से पहले बिस्तर पर जाना चाहिए।
- दिन के दौरान सोने का कमरा हवादार होना चाहिए, बिस्तर की चादर को बार-बार बदलना चाहिए, और आरामदायक कपड़ों में सोना चाहिए जो बहुत तंग न हों।
- शांत और अंधेरा कमरा सोने और मेलाटोनिन को छोड़ने में आसान बनाता है। यदि व्यक्ति को प्रकाश स्रोत की आवश्यकता है, तो प्रकाश व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि वह सीधे चेहरे पर प्रतिबिंबित न हो।
- सोने से पहले बहुत सारे तरल पदार्थ पीने, शराब, चाय और कॉफी पीने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाएगी।
- बिस्तर पर जाने से पहले स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी, जिसे सफेद प्रकाश स्रोत कहा जाता है, के साथ लंबा समय बिताने की अनुशंसा नहीं की जाती है, क्योंकि यह उत्तेजक होगा।
- यदि खर्राटे लेना, साक्षी एपनिया, दिन में अत्यधिक नींद आना या बिना आराम के सुबह उठना जैसी शिकायतें हैं, तो स्लीप एपनिया सिंड्रोम के संदर्भ में मूल्यांकन किए जाने वाले स्लीप एपनिया आउट पेशेंट क्लीनिक में आवेदन करना निदान और उपचार की शुरुआत के संदर्भ में फायदेमंद होगा।
| मेमोरियल बहकेलिएवलर हॉस्पिटल स्लीप सेंटर से छाती रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। सिनेम इलाज ने खराब गुणवत्ता वाली नींद के बारे में जानकारी दी। यह उल्लेख करते हुए कि खराब गुणवत्ता वाली नींद शरीर को थका देती है, प्रो. डॉ। सिनम इलाज ने कहा, "खराब गुणवत्ता वाली नींद को उस नींद के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो अवधि में अपर्याप्त है, खराब गुणवत्ता वाली या आरामदेह नहीं है। नींद की गुणवत्ता को कम न करने के लिए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए। आपको बहुत देर तक सोने नहीं जाना चाहिए, शराब, चाय या कॉफी का सेवन सोने के करीब नहीं करना चाहिए। चूंकि चाय और कॉफी उत्तेजक होते हैं, वे नींद में देरी करते हैं, जबकि शराब नींद की संरचना को बाधित करती है और आराम करने से रोकती है। बिस्तर पर पर्याप्त समय बिताने या रात में बार-बार जागने के बावजूद नींद शुरू न कर पाना नींद की गुणवत्ता को खराब कर देता है। हो सकता है कि वह व्यक्ति गहरी नींद न ले पाया हो, भले ही उसे यह एहसास न हो कि वह जाग गया है, और हो सकता है कि बार-बार जागने के कारण उसे चैन की नींद न आई हो। नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना या उथला होना भी नींद को गहरा होने और आराम करने से रोकता है। उन्होंने कहा। यह कहते हुए कि बच्चों के विकास में नींद का बहुत बड़ा योगदान होता है, प्रो. डॉ। सिनेम इलियाज ने कहा, 'नवजात काल में बच्चे नींद के साथ बड़े होते हैं। नींद के प्रत्येक चरण के बाद, बच्चा अपनी ऊर्जा एकत्र करता है और थक जाता है और फिर से सो जाता है। नींद की जरूरत उम्र के साथ कम होती जाती है। एक वयस्क को औसतन सात-आठ घंटाटे की नींद की आवश्यकता हो सकती है। यह अवधि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है। जहां ऐसे लोग हैं जिन्हें अपने दैनिक कामकाज को बनाए रखने के लिए दिन में दस घंटाटे की नींद की जरूरत होती है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पाँच-छः घंटाटे की नींद के साथ बहुत सहज होते हैं। उन्होंने कहा। यह कहते हुए कि प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और शरीर संक्रमण के लिए खुला हो सकता है, प्रो। डॉ। सिनेम इलियाज ने कहा, "इसलिए बीमारियां बार-बार हो सकती हैं। यदि स्लीप एपनिया सिंड्रोम है, जो नींद के दौरान सांस लेने की समाप्ति की विशेषता वाली बीमारी है, और यदि इसका निदान और उपचार नहीं किया जाता है, तो यह अत्यधिक दिन की नींद, उच्च रक्तचाप और ताल विकारों के कारण यातायात और कार्य दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है जो कठिन हैं नियंत्रण करने के लिए। इसलिए बिना समय गंवाए नींद संबंधी विकारों का इलाज किया जाना चाहिए। इस संबंध में, स्लीप सेंटर्स में स्लीप टेस्ट किए जाते हैं, जहां स्लीप डिसऑर्डर पर विशेषज्ञ टीमों को नियुक्त किया जाता है, और आवश्यक उपचार योजना व्यक्तिगत रूप से बनाई जाती है। कहा। प्रो डॉ। Sinem İlaz ने नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए छः सुझावों के रूप में निम्नलिखित कहाः - वयस्कों के लिए आवश्यक सात-आठ घंटाटे की नींद लेने के लिए, बहुत देर होने से पहले बिस्तर पर जाना चाहिए। - दिन के दौरान सोने का कमरा हवादार होना चाहिए, बिस्तर की चादर को बार-बार बदलना चाहिए, और आरामदायक कपड़ों में सोना चाहिए जो बहुत तंग न हों। - शांत और अंधेरा कमरा सोने और मेलाटोनिन को छोड़ने में आसान बनाता है। यदि व्यक्ति को प्रकाश स्रोत की आवश्यकता है, तो प्रकाश व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि वह सीधे चेहरे पर प्रतिबिंबित न हो। - सोने से पहले बहुत सारे तरल पदार्थ पीने, शराब, चाय और कॉफी पीने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाएगी। - बिस्तर पर जाने से पहले स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी, जिसे सफेद प्रकाश स्रोत कहा जाता है, के साथ लंबा समय बिताने की अनुशंसा नहीं की जाती है, क्योंकि यह उत्तेजक होगा। - यदि खर्राटे लेना, साक्षी एपनिया, दिन में अत्यधिक नींद आना या बिना आराम के सुबह उठना जैसी शिकायतें हैं, तो स्लीप एपनिया सिंड्रोम के संदर्भ में मूल्यांकन किए जाने वाले स्लीप एपनिया आउट पेशेंट क्लीनिक में आवेदन करना निदान और उपचार की शुरुआत के संदर्भ में फायदेमंद होगा। |
अशरफ़ और कारवाँ ने इन जवानों की जाति का पता लगाने के लिए जिस नीचता का परिचय दिया, उसे जान कर आप कारवाँ मैगज़ीन के पन्नों का टॉयलेट पेपर की तरह प्रयोग करने से भी बचेंगे। मृतकों के परिजनों से हुतात्मा की जाति पूछना इनकी नीचता का परिचायक है।
ख़बर के अनुसार विस्फोटक के ट्रिगर को स्थानीय स्तर पर ही बनाया गया था। अमोनियम नाइट्रेट और RDX को विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
जहाँ की जनता ने पिछली बार उन्हें BJP सांसद के रूप में लोकसभा भेजा था, वहीं की जनता के सामने उन्होंने कॉन्ग्रेसी गुलामी कुबूल करते हुए स्वीकारा कि उनके पिताजी और खुद उनके लिए भी कॉन्ग्रेस के लोगों ने बूथ कब्जा किया था।
संख्या में मात्र 21 लेकिन अनंत साहस एवं पराक्रम से भरे सिख जवानों ने 10,000 इस्लामी आक्रांताओं के पसीने छुड़ा दिए। हम भले ही उनके बलिदान को भूल गए लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस में वे आज भी याद किए जाते हैं- सम्मान के साथ।
सरकार ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अब किसी भी अलगाववादी को भविष्य में सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी। साथ ही, इन्हें मिल रही अन्य सुविधाएँ भी छीन ली जाएँगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा देने वाला कोई शख़्स ऐसा कैसे हो सकता है? अगर वह वाकई शिक्षित हैं तो? या फिर जानबूझकर कश्मीरियों को कष्ट पहुँचाना चाहती हैं। विडंबना यह है कि वह लॉ गवर्नेंस की अध्यापिका हैं।
वेणु जी वायर ही पढ़ते हैं, वायर पर ही लिखते है, वायर से ही बिजली पाते हैं, और वायर से ही इस तरह के फर्जी आर्टिकल से शॉर्ट सर्किट करके आग लगाते हैं। यही कारण है कि सत्य से बहुत दूर रहते हैं क्योंकि प्रोपेगेंडा पोर्टल पर तथ्य तो कोने में छुपा रहता है।
कुछ गिने-चुने मुस्लिम ही ऐसे थे, जो सोशल मीडिया पर कुरीतियों और बुराइयों को स्वीकार कर उनका विरोध करते थे। लेकिन उनके एकाउंट को रिपोर्ट कर डिलीट करवा दिया गया। उनकी अभिव्यक्ति की आजादी ही छीन ली गई, क्योंकि वो सुधार की बात करते हैं।
Fact Check: NDTV वालो, और केतना बेज्जती करवाओगे शोना?
विवादस्पद NDTV की पहचान अब अक्सर फ़ेक न्यूज़ को प्रचारित करने की बन चुकी है। NDTV ने अपनी वेबसाइट में एक ऐसी भ्रामक हेडलाइन को प्रमुखता से जगह दी जिसमें यह दर्शाया गया कि पीएम मोदी ने वंदे भारत ट्रेन-18 का मजाक उड़ाते हुए लोगों के ख़िलाफ़ सज़ा की माँग की।
ऑपइंडिया के साथ ख़ास इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट 2019 से लेकर आगामी लोकसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु की राजनीति पर भी चर्चा की। उन्होंने रेलवे व अर्थव्यवस्था से जुड़े कठिन सवालों के बेधड़क जवाब देकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया।
| अशरफ़ और कारवाँ ने इन जवानों की जाति का पता लगाने के लिए जिस नीचता का परिचय दिया, उसे जान कर आप कारवाँ मैगज़ीन के पन्नों का टॉयलेट पेपर की तरह प्रयोग करने से भी बचेंगे। मृतकों के परिजनों से हुतात्मा की जाति पूछना इनकी नीचता का परिचायक है। ख़बर के अनुसार विस्फोटक के ट्रिगर को स्थानीय स्तर पर ही बनाया गया था। अमोनियम नाइट्रेट और RDX को विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल किया गया था। जहाँ की जनता ने पिछली बार उन्हें BJP सांसद के रूप में लोकसभा भेजा था, वहीं की जनता के सामने उन्होंने कॉन्ग्रेसी गुलामी कुबूल करते हुए स्वीकारा कि उनके पिताजी और खुद उनके लिए भी कॉन्ग्रेस के लोगों ने बूथ कब्जा किया था। संख्या में मात्र इक्कीस लेकिन अनंत साहस एवं पराक्रम से भरे सिख जवानों ने दस,शून्य इस्लामी आक्रांताओं के पसीने छुड़ा दिए। हम भले ही उनके बलिदान को भूल गए लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस में वे आज भी याद किए जाते हैं- सम्मान के साथ। सरकार ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अब किसी भी अलगाववादी को भविष्य में सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी। साथ ही, इन्हें मिल रही अन्य सुविधाएँ भी छीन ली जाएँगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा देने वाला कोई शख़्स ऐसा कैसे हो सकता है? अगर वह वाकई शिक्षित हैं तो? या फिर जानबूझकर कश्मीरियों को कष्ट पहुँचाना चाहती हैं। विडंबना यह है कि वह लॉ गवर्नेंस की अध्यापिका हैं। वेणु जी वायर ही पढ़ते हैं, वायर पर ही लिखते है, वायर से ही बिजली पाते हैं, और वायर से ही इस तरह के फर्जी आर्टिकल से शॉर्ट सर्किट करके आग लगाते हैं। यही कारण है कि सत्य से बहुत दूर रहते हैं क्योंकि प्रोपेगेंडा पोर्टल पर तथ्य तो कोने में छुपा रहता है। कुछ गिने-चुने मुस्लिम ही ऐसे थे, जो सोशल मीडिया पर कुरीतियों और बुराइयों को स्वीकार कर उनका विरोध करते थे। लेकिन उनके एकाउंट को रिपोर्ट कर डिलीट करवा दिया गया। उनकी अभिव्यक्ति की आजादी ही छीन ली गई, क्योंकि वो सुधार की बात करते हैं। Fact Check: NDTV वालो, और केतना बेज्जती करवाओगे शोना? विवादस्पद NDTV की पहचान अब अक्सर फ़ेक न्यूज़ को प्रचारित करने की बन चुकी है। NDTV ने अपनी वेबसाइट में एक ऐसी भ्रामक हेडलाइन को प्रमुखता से जगह दी जिसमें यह दर्शाया गया कि पीएम मोदी ने वंदे भारत ट्रेन-अट्ठारह का मजाक उड़ाते हुए लोगों के ख़िलाफ़ सज़ा की माँग की। ऑपइंडिया के साथ ख़ास इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बजट दो हज़ार उन्नीस से लेकर आगामी लोकसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु की राजनीति पर भी चर्चा की। उन्होंने रेलवे व अर्थव्यवस्था से जुड़े कठिन सवालों के बेधड़क जवाब देकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। |
हिमाचल प्रदेश के स्टील उद्यमियों ने प्रदेश सरकार से उद्योगों के लिए बर्ष 2019 में जारी रियायती बिजली शुल्क की अधिसूचना को जल्द लागू करने की मांग उठाई है। दरअससल जिस आर्कषण की वजह से नई औद्योगिक इकाईयां स्थापित हुई और मौजदूा इकाईयों ने विस्तार किया उन्हें रियायती बिजली शुल्क का लाभ नही मिल रहा है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने इंवेस्टर मीट में निवशेको को आर्कषित करने के मददेनजर बर्ष 2019 में रियायती बिजली शुल्क के संर्दभ में जो अधिसूचना जारी की थी उसे राज्य विद्युत बोर्ड अभी तक लागू नही कर पाया है। जिसके चलते करोड़ो का निवेश कर चुके सैंकड़ो नई व मौजूदा औद्योगिक इकाईयां बिशेषकर स्टील उद्योग पेशोपेश की स्थिति में है। इसी ज्वलंत मसले को लेकर स्टील इंडस्ट्रीज ऐशोसिएशन के प्रतिनिधिमंड़ल ने अध्यक्ष मेघराज गर्ग की अगवाई में सीएम जयराम ठाकुर से मुलाक ात की और ज्ञापन सौंपते हुए राज्य विद्युत बोर्ड दवारा अधिसूचना लागू न किए जाने की जानकारी दी। स्टील इंडस्ट्रीज ऐशोसिएशन ने सीएम को बताया कि इंवेस्टर मीट में नया निवेश आर्कषित करने के लिए जो अधिसूचना जारी की गई थी उसके तहत कई उद्योग बिजली शुल्क की रियायती दर सात प्रतिशत के लिए पात्र हैं, लेकिन वास्तविकता में उद्योगों को सरकार द्वारा घोषित रियायतों के लिए खासा संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि हैरत की बात है कि अधिसूचना के बावजूद अभी भी एचपीएसईबीएल सात प्रतिशत की बजाए 13 प्रतिशत बिजली शुल्क ले रहा है, क्योंकि रियायती विद्युत शुल्क को आज तक लागू नहीं किया गया है। स्टील उद्यमियों ने सीएम से रियायती बिजली शुल्क पॉलिसी को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। स्टील इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष मेघराज गर्ग ने कहा कि सरकार द्वारा नया निवेश जुटाने के इरादे से रियायतें तो दी गई है लेकिन बिजली बोर्ड द्वारा आदेशों की पालना नही करवाई जा रही है। गर्ग ने कहा कि 33 केवी से अधिक बिजली खपत वाली इंडस्ट्री को बिजली शुल्क में सात फीसदी छूट का फैसला डेढ़ साल पहले लिया गया था लेकिन हैरत की बात है कि आजतक इसे लागू नही किया गया। एसोसिएशन द्वारा उठाई गई मांगों पर मुख्यमंत्री ने सकरात्मक आश्वासन दिया। वहीं इसके अलावा स्टील इंडस्ट्री ने अतिरिक्त गुड्स टैक्स खत्म करने की मांग भी रखी है। इंडस्ट्री का कहना है कि किसी भी राज्य में जीएसटी के अलावा किसी तरह का टैक्स नही लिया जा रहा इसलिए दूसरे राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी एजीटी को खत्म कर देना चाहिए। वहीं इसके अलावा नए उद्योगों की तर्ज पर पुराने विस्तार करने वाले उद्योगों को भी टैरिफ पर 15 फीसदी की राहत मिलनी चाहिए।
| हिमाचल प्रदेश के स्टील उद्यमियों ने प्रदेश सरकार से उद्योगों के लिए बर्ष दो हज़ार उन्नीस में जारी रियायती बिजली शुल्क की अधिसूचना को जल्द लागू करने की मांग उठाई है। दरअससल जिस आर्कषण की वजह से नई औद्योगिक इकाईयां स्थापित हुई और मौजदूा इकाईयों ने विस्तार किया उन्हें रियायती बिजली शुल्क का लाभ नही मिल रहा है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने इंवेस्टर मीट में निवशेको को आर्कषित करने के मददेनजर बर्ष दो हज़ार उन्नीस में रियायती बिजली शुल्क के संर्दभ में जो अधिसूचना जारी की थी उसे राज्य विद्युत बोर्ड अभी तक लागू नही कर पाया है। जिसके चलते करोड़ो का निवेश कर चुके सैंकड़ो नई व मौजूदा औद्योगिक इकाईयां बिशेषकर स्टील उद्योग पेशोपेश की स्थिति में है। इसी ज्वलंत मसले को लेकर स्टील इंडस्ट्रीज ऐशोसिएशन के प्रतिनिधिमंड़ल ने अध्यक्ष मेघराज गर्ग की अगवाई में सीएम जयराम ठाकुर से मुलाक ात की और ज्ञापन सौंपते हुए राज्य विद्युत बोर्ड दवारा अधिसूचना लागू न किए जाने की जानकारी दी। स्टील इंडस्ट्रीज ऐशोसिएशन ने सीएम को बताया कि इंवेस्टर मीट में नया निवेश आर्कषित करने के लिए जो अधिसूचना जारी की गई थी उसके तहत कई उद्योग बिजली शुल्क की रियायती दर सात प्रतिशत के लिए पात्र हैं, लेकिन वास्तविकता में उद्योगों को सरकार द्वारा घोषित रियायतों के लिए खासा संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि हैरत की बात है कि अधिसूचना के बावजूद अभी भी एचपीएसईबीएल सात प्रतिशत की बजाए तेरह प्रतिशत बिजली शुल्क ले रहा है, क्योंकि रियायती विद्युत शुल्क को आज तक लागू नहीं किया गया है। स्टील उद्यमियों ने सीएम से रियायती बिजली शुल्क पॉलिसी को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। स्टील इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष मेघराज गर्ग ने कहा कि सरकार द्वारा नया निवेश जुटाने के इरादे से रियायतें तो दी गई है लेकिन बिजली बोर्ड द्वारा आदेशों की पालना नही करवाई जा रही है। गर्ग ने कहा कि तैंतीस केवी से अधिक बिजली खपत वाली इंडस्ट्री को बिजली शुल्क में सात फीसदी छूट का फैसला डेढ़ साल पहले लिया गया था लेकिन हैरत की बात है कि आजतक इसे लागू नही किया गया। एसोसिएशन द्वारा उठाई गई मांगों पर मुख्यमंत्री ने सकरात्मक आश्वासन दिया। वहीं इसके अलावा स्टील इंडस्ट्री ने अतिरिक्त गुड्स टैक्स खत्म करने की मांग भी रखी है। इंडस्ट्री का कहना है कि किसी भी राज्य में जीएसटी के अलावा किसी तरह का टैक्स नही लिया जा रहा इसलिए दूसरे राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी एजीटी को खत्म कर देना चाहिए। वहीं इसके अलावा नए उद्योगों की तर्ज पर पुराने विस्तार करने वाले उद्योगों को भी टैरिफ पर पंद्रह फीसदी की राहत मिलनी चाहिए। |
मुंबईः जाने-माने अभिनेता सुनील शेट्टी ने रविवार को मीडिया से शाहरुख खान के बेटे आर्यन को एक मौका दिये जाने की अपील की, जिसे स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई तट के पास एक क्रूज जहाज पर अवैध रेव पार्टी का भंडाफोड़ करने के बाद गिरफ्तार किया है।
आर्यन खान उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें एनसीबी ने शनिवार शाम गोवा जाने वाले क्रूज जहाज पर छापेमारी के बाद हिरासत में लिया था। बाद में, आर्यन को जहाज से प्रतिबंधित दवाओं की जब्ती के सिलसिले में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्यन को सोमवार तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया।
| मुंबईः जाने-माने अभिनेता सुनील शेट्टी ने रविवार को मीडिया से शाहरुख खान के बेटे आर्यन को एक मौका दिये जाने की अपील की, जिसे स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने मुंबई तट के पास एक क्रूज जहाज पर अवैध रेव पार्टी का भंडाफोड़ करने के बाद गिरफ्तार किया है। आर्यन खान उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें एनसीबी ने शनिवार शाम गोवा जाने वाले क्रूज जहाज पर छापेमारी के बाद हिरासत में लिया था। बाद में, आर्यन को जहाज से प्रतिबंधित दवाओं की जब्ती के सिलसिले में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्यन को सोमवार तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया। |
AMORARAMOR PARA
चलो अब कुछ खरीदें
ज़रूर ! पेंसिलें 16 रुपये की और रबड़ 15 रुपये की हैं।
why tipt
ओह! लगता है
तुम्हें दुबारा गृहकार्य मिला है।
OBS UPS UPS URUBUR
नहीं! इस बार मुझे 8 पेंसिलें और 5 रबड़ खरीदनी हैं।
ओह! 16 रुपये
का मतलब एक 10 रुपये का
नोट और 6 एक-एक रुपये के सिक्के ।
| AMORARAMOR PARA चलो अब कुछ खरीदें ज़रूर ! पेंसिलें सोलह रुपयापये की और रबड़ पंद्रह रुपयापये की हैं। why tipt ओह! लगता है तुम्हें दुबारा गृहकार्य मिला है। OBS UPS UPS URUBUR नहीं! इस बार मुझे आठ पेंसिलें और पाँच रबड़ खरीदनी हैं। ओह! सोलह रुपयापये का मतलब एक दस रुपयापये का नोट और छः एक-एक रुपये के सिक्के । |
ग्वालियर, CM व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ग्वालियर सेंट्रल जेल पहुंचे। यहां पुलिस सब इंस्पेक्टर की हत्या के प्रयास के आरोप में बंद NSUI के जिलाध्यक्ष शिवराज यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात में सारे नियम तोड़े गए। दिग्विजय ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर जेलर के केबिन में आरोपी से मुलाकात की। इसका VIDEO भी सोशल मीडिया पर कांग्रेसियों ने ही वायरल किया है।इस मुलाकात की शिकायत गृह विभाग और CM हाउस तक पहुंची। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश पर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है।
नयमों की अवहेलना को लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश पर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है।
NSUI जिलाध्यक्ष शिवराज यादव लगातार शहर में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। एक प्रदर्शन के दौरान फूलबाग पर कुछ समय पहले वह सीएम का पुतला दहन कर रहे थे, तभी वहां इंदरगंज के सब इंस्पेक्टर गौतम ने पुतला छीनने का प्रयास किया था। सब इंस्पेक्टर का आरोप है कि शिवराज और उसके साथियों ने इसे मार दो... कहते हुए पुतला उन पर फेंक दिया। एसआई काफी झुलस गए थे। दिल्ली तक उनका इलाज चला था। इस मामले में पुलिस ने NSUI जिलाध्यक्ष शिवराज यादव सहित कई लोगों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। तब से ही NSUI जिलाध्यक्ष जेल में है, जबकि कांग्रेस इसे एक्सीडेंट बता रही है। भाजपा की कार्रवाई को दमन की कार्रवाई बता रही है।
| ग्वालियर, CM व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ग्वालियर सेंट्रल जेल पहुंचे। यहां पुलिस सब इंस्पेक्टर की हत्या के प्रयास के आरोप में बंद NSUI के जिलाध्यक्ष शिवराज यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात में सारे नियम तोड़े गए। दिग्विजय ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर जेलर के केबिन में आरोपी से मुलाकात की। इसका VIDEO भी सोशल मीडिया पर कांग्रेसियों ने ही वायरल किया है।इस मुलाकात की शिकायत गृह विभाग और CM हाउस तक पहुंची। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश पर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है। नयमों की अवहेलना को लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश पर ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है। NSUI जिलाध्यक्ष शिवराज यादव लगातार शहर में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। एक प्रदर्शन के दौरान फूलबाग पर कुछ समय पहले वह सीएम का पुतला दहन कर रहे थे, तभी वहां इंदरगंज के सब इंस्पेक्टर गौतम ने पुतला छीनने का प्रयास किया था। सब इंस्पेक्टर का आरोप है कि शिवराज और उसके साथियों ने इसे मार दो... कहते हुए पुतला उन पर फेंक दिया। एसआई काफी झुलस गए थे। दिल्ली तक उनका इलाज चला था। इस मामले में पुलिस ने NSUI जिलाध्यक्ष शिवराज यादव सहित कई लोगों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। तब से ही NSUI जिलाध्यक्ष जेल में है, जबकि कांग्रेस इसे एक्सीडेंट बता रही है। भाजपा की कार्रवाई को दमन की कार्रवाई बता रही है। |
होना लेखकों की एक विशेष मनःस्थिति का पता देता है। जिसमें वह राजनायकों की तरह भारतीय ग्राम या कृषक जीवन को अस्पृश्य-उपेक्षित अथवा तिरस्कृत करने में ही अपने आहत कुंठित उच्च अहं को तुष्ट कर लेते हैं । जब नयी कहानी का यह हाल है तो 'अ-कहानी' का क्या पूछना है ? स्वाधीनतोत्तर प्रथम दशक की 'नयी कहानी' दूसरे दशक में साठोत्तरी पीढ़ी द्वारा 'अ-कहानी' और 'सचेतन कहानी' के रूप में रूपान्तरित हो गई। इसमें वैकृतिक संघात बहुत तीखेपन के साथ उभरे । बिम्ब, प्रतीक और नये सौन्दर्यबोध में उलझे रोमानी तत्त्वों से युक्त कहानी पूर्ण नंगी और अनौपचारिक हो गई । उसकी रूप दृष्टि और कथा - संवेदना झटके से आमूल परिवर्तित हो गई । इनमें चाहे नये स्तर पर नकार और अनास्था को प्रतिष्ठित करने वाले सैमुअल बैकट से प्रभावित 'अ-कहानीकार' हों चाहे स्वीकार और आस्था को पुनरुज्जीवित करने वाले अमरीकी एक्टिविस्टों से प्रभावित सचेतन कहानीकार हों, एक बात में दोनों समान हैं और वह यह कि उन्होंने ' नयी कहानी' के कथाकारों से भी अधिक ग्राम-जीवन के सत्य को अदेख किया । और इनके कृतित्व को हिन्दी साहित्य में युवा-लेखन की प्रतिष्ठा मिल गईं
नवीनतम युवा लेखन
वास्तव में यह अहं विस्फोटक युवा लेखन है जो नयी कहानियों में आया है । इस कहानी के विशाल मूर्तिभंजक आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में उपन्यासों को देखने पर और ही तथ्य दृष्टिगोचर होता है। आधुनिकता बोध से संदर्भित युवालेखन जिस वेग से नई कहानियों में फूटा उसका उपन्यास क्षेत्र में एकान्त अभाव रहा। नयी साँस से जुड़े अति आधुनिक उपन्यास भी घूम-फिर कर कहीं शिल्प के स्तर पर और कहीं कथ्य के स्तर पर पुराने पन को दुहराने लगते हैं । शुद्ध 'आज' इतना जटिल, गतिशील और संश्लिष्ट है कि संक्षिप्तक्षिप्र कथा-क्षण में तो चमक जाता है परन्तु उपन्यास के भारी भरकम समयसापेक्ष फार्म में छटक जाता है । पकड़ में नहीं आता; आते-आते अतीत हो जाता है । कथाकार के सामने विवशता होती है । वह एक पूर्ण 'समाज' को, उसके पूरे परिवेश को पूरे संदर्भ को उठाता है। उसके नूतन-पुरातन आयामों से जूझता है । प्रयोग भी करता है, लेकिन तब सारा ज़ोर शिल्प | होना लेखकों की एक विशेष मनःस्थिति का पता देता है। जिसमें वह राजनायकों की तरह भारतीय ग्राम या कृषक जीवन को अस्पृश्य-उपेक्षित अथवा तिरस्कृत करने में ही अपने आहत कुंठित उच्च अहं को तुष्ट कर लेते हैं । जब नयी कहानी का यह हाल है तो 'अ-कहानी' का क्या पूछना है ? स्वाधीनतोत्तर प्रथम दशक की 'नयी कहानी' दूसरे दशक में साठोत्तरी पीढ़ी द्वारा 'अ-कहानी' और 'सचेतन कहानी' के रूप में रूपान्तरित हो गई। इसमें वैकृतिक संघात बहुत तीखेपन के साथ उभरे । बिम्ब, प्रतीक और नये सौन्दर्यबोध में उलझे रोमानी तत्त्वों से युक्त कहानी पूर्ण नंगी और अनौपचारिक हो गई । उसकी रूप दृष्टि और कथा - संवेदना झटके से आमूल परिवर्तित हो गई । इनमें चाहे नये स्तर पर नकार और अनास्था को प्रतिष्ठित करने वाले सैमुअल बैकट से प्रभावित 'अ-कहानीकार' हों चाहे स्वीकार और आस्था को पुनरुज्जीवित करने वाले अमरीकी एक्टिविस्टों से प्रभावित सचेतन कहानीकार हों, एक बात में दोनों समान हैं और वह यह कि उन्होंने ' नयी कहानी' के कथाकारों से भी अधिक ग्राम-जीवन के सत्य को अदेख किया । और इनके कृतित्व को हिन्दी साहित्य में युवा-लेखन की प्रतिष्ठा मिल गईं नवीनतम युवा लेखन वास्तव में यह अहं विस्फोटक युवा लेखन है जो नयी कहानियों में आया है । इस कहानी के विशाल मूर्तिभंजक आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में उपन्यासों को देखने पर और ही तथ्य दृष्टिगोचर होता है। आधुनिकता बोध से संदर्भित युवालेखन जिस वेग से नई कहानियों में फूटा उसका उपन्यास क्षेत्र में एकान्त अभाव रहा। नयी साँस से जुड़े अति आधुनिक उपन्यास भी घूम-फिर कर कहीं शिल्प के स्तर पर और कहीं कथ्य के स्तर पर पुराने पन को दुहराने लगते हैं । शुद्ध 'आज' इतना जटिल, गतिशील और संश्लिष्ट है कि संक्षिप्तक्षिप्र कथा-क्षण में तो चमक जाता है परन्तु उपन्यास के भारी भरकम समयसापेक्ष फार्म में छटक जाता है । पकड़ में नहीं आता; आते-आते अतीत हो जाता है । कथाकार के सामने विवशता होती है । वह एक पूर्ण 'समाज' को, उसके पूरे परिवेश को पूरे संदर्भ को उठाता है। उसके नूतन-पुरातन आयामों से जूझता है । प्रयोग भी करता है, लेकिन तब सारा ज़ोर शिल्प |
मंगल बुध युति का प्रभाव कर्क राशि वालों को अपने काम में आगे बढ़ने के नए अवसर देने वाला हो सकता है. ये समय बाहरी संपर्क से अधिक आप जुड़ सकते हैं. आनलाईन से जुड़े कामों को कर सकते हैं. नए स्थानों से जुड़ने की भी इच्छा अधिक रह सकती है. संबंधों को लेकर आप काफी सजग होंगे कुछ नए रिश्ते जीवन में प्रवेश कर सकते हैं. परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं. घर पर किसी मेहमान के आगमन से चहल पहल बनी रह सकती है. फैसले लेने में भी काफी सजग दिखाई देंगे.
| मंगल बुध युति का प्रभाव कर्क राशि वालों को अपने काम में आगे बढ़ने के नए अवसर देने वाला हो सकता है. ये समय बाहरी संपर्क से अधिक आप जुड़ सकते हैं. आनलाईन से जुड़े कामों को कर सकते हैं. नए स्थानों से जुड़ने की भी इच्छा अधिक रह सकती है. संबंधों को लेकर आप काफी सजग होंगे कुछ नए रिश्ते जीवन में प्रवेश कर सकते हैं. परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं. घर पर किसी मेहमान के आगमन से चहल पहल बनी रह सकती है. फैसले लेने में भी काफी सजग दिखाई देंगे. |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कोरोना काल में भी 40 लाख कामगारों को रोजगार से जोड़ा। सरकार के लिए अपने आप में यह एक बड़ी उपलब्धि है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के प्रबंध निदेशक आईएएस कुणाल शिल्कू ने दी। वह मंगलवार को सरस्वती कुंज निरालानगर में कोरोना काल में पैदा हुए रोजगार संकट को लेकर विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के प्रबंध निदेशक कुणाल शिल्कू ने कहा कि इस संकट के समय में जो भी कुशल कामगार बाहर से लौटकर अपने घर आए हैं, वह अनुभव भी अपने पास लाए हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ने उन सभी लोगों की स्किल मैपिंग कराई है, ताकि लोगों को रोजगार से जोड़ा सके। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में करीब 37 लाख लोग घर वापस आए, उनमें से पहली लहर के समय करीब 11 लाख लोगों को सरकार ने अलग-अलग माध्यमों से रोजगार से जोड़ा और अब तक करीब 40 लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया है। इसके अलावा दैनिक मजदूरों के लिए नीति आयोग ने उन्नति एप और यूपी सरकार ने सेवा मित्र एप शुरू किया है, इसके माध्यम से भी जल्द ही कई लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
| लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कोरोना काल में भी चालीस लाख कामगारों को रोजगार से जोड़ा। सरकार के लिए अपने आप में यह एक बड़ी उपलब्धि है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के प्रबंध निदेशक आईएएस कुणाल शिल्कू ने दी। वह मंगलवार को सरस्वती कुंज निरालानगर में कोरोना काल में पैदा हुए रोजगार संकट को लेकर विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के प्रबंध निदेशक कुणाल शिल्कू ने कहा कि इस संकट के समय में जो भी कुशल कामगार बाहर से लौटकर अपने घर आए हैं, वह अनुभव भी अपने पास लाए हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ने उन सभी लोगों की स्किल मैपिंग कराई है, ताकि लोगों को रोजगार से जोड़ा सके। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में करीब सैंतीस लाख लोग घर वापस आए, उनमें से पहली लहर के समय करीब ग्यारह लाख लोगों को सरकार ने अलग-अलग माध्यमों से रोजगार से जोड़ा और अब तक करीब चालीस लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया है। इसके अलावा दैनिक मजदूरों के लिए नीति आयोग ने उन्नति एप और यूपी सरकार ने सेवा मित्र एप शुरू किया है, इसके माध्यम से भी जल्द ही कई लोगों को रोजगार मिल सकेगा। |
हाल ही में भारत ने अपने समग्र अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (IIP) स्कोर में 38.4% से 38.6% तक सुधार किया है और इसके परिणामस्वरूप भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक में 55 देशों में से 43वें स्थान पर है।
- अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा संकलित एक वार्षिक रिपोर्ट है।
- इस वर्ष (2022) अमेरिका 95.4% के साथ इस सूचकांक में शीर्ष पर है।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांकः
- 2020 यूएस चैंबर 'अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक' जिसका शीर्षक 'आर्ट ऑफ द पॉसिबल' है, उन अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक खाका तैयार करता है जो अधिक प्रभावी बौद्धिक संपदा सुरक्षा के माध्यम से 21वीं सदी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनने की इच्छा रखते हैं।
- अपने आठवें संस्करण में सूचकांक 53 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र का मानचित्रण करता है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 90% से अधिक का प्रतिनिधित्त्व करता है।
- सूचकांक 50 से अधिक अद्वितीय संकेतकों के साथ प्रत्येक उस अर्थव्यवस्था के लिये बौद्धिक संपदा ढाँचे का मूल्यांकन करता है जो सबसे प्रभावी बौद्धिक संपदा प्रणालियों के माध्यम से अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्त्व करते हैं।
- पेटेंट (Patents)
- कॉपीराइट (Copyrights)
- ट्रेडमार्क (Trademarks)
- डिज़ाइन का अधिकार (Design Rights)
- व्यापार में गोपनीयता (Trade Secrets)
- आईपी संपत्तियों का व्यावसायीकरण (Commercialization of IP Assets)
- प्रवर्तन (Enforcement)
- सर्वांगी दक्षता (Systemic Efficiency)
- सदस्यता और अंतर्राष्ट्रीय संधियों का अनुसमर्थन (Membership and Ratification of International Treaties)
- यह विश्व का सबसे बड़ा व्यापार संघ है जो आकार, क्षेत्रों तथा क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य एवं स्थानीय कक्षों व उद्योग संघों के 3 मिलियन से अधिक व्यवसायों के हितों का प्रतिनिधित्त्व करता है।
- इस समूह की स्थापना अप्रैल 1912 में राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट और उनके वाणिज्य एवं श्रम सचिव 'चार्ल्स नागेल' के आग्रह पर स्थानीय वाणिज्य मंडलों के माध्यम से की गई थी।
- भारत विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) का भी सदस्य है, जो कि आईपीआर से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों को प्रशासित करता है।
| हाल ही में भारत ने अपने समग्र अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा स्कोर में अड़तीस.चार% से अड़तीस.छः% तक सुधार किया है और इसके परिणामस्वरूप भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक में पचपन देशों में से तैंतालीसवें स्थान पर है। - अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा संकलित एक वार्षिक रिपोर्ट है। - इस वर्ष अमेरिका पचानवे.चार% के साथ इस सूचकांक में शीर्ष पर है। अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांकः - दो हज़ार बीस यूएस चैंबर 'अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक' जिसका शीर्षक 'आर्ट ऑफ द पॉसिबल' है, उन अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक खाका तैयार करता है जो अधिक प्रभावी बौद्धिक संपदा सुरक्षा के माध्यम से इक्कीसवीं सदी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनने की इच्छा रखते हैं। - अपने आठवें संस्करण में सूचकांक तिरेपन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र का मानचित्रण करता है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के नब्बे% से अधिक का प्रतिनिधित्त्व करता है। - सूचकांक पचास से अधिक अद्वितीय संकेतकों के साथ प्रत्येक उस अर्थव्यवस्था के लिये बौद्धिक संपदा ढाँचे का मूल्यांकन करता है जो सबसे प्रभावी बौद्धिक संपदा प्रणालियों के माध्यम से अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्त्व करते हैं। - पेटेंट - कॉपीराइट - ट्रेडमार्क - डिज़ाइन का अधिकार - व्यापार में गोपनीयता - आईपी संपत्तियों का व्यावसायीकरण - प्रवर्तन - सर्वांगी दक्षता - सदस्यता और अंतर्राष्ट्रीय संधियों का अनुसमर्थन - यह विश्व का सबसे बड़ा व्यापार संघ है जो आकार, क्षेत्रों तथा क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य एवं स्थानीय कक्षों व उद्योग संघों के तीन मिलियन से अधिक व्यवसायों के हितों का प्रतिनिधित्त्व करता है। - इस समूह की स्थापना अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बारह में राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट और उनके वाणिज्य एवं श्रम सचिव 'चार्ल्स नागेल' के आग्रह पर स्थानीय वाणिज्य मंडलों के माध्यम से की गई थी। - भारत विश्व बौद्धिक संपदा संगठन का भी सदस्य है, जो कि आईपीआर से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों को प्रशासित करता है। |
न्यूयॉर्कः भारतीय मूल के अमेरिकी रेस्तरां मालिक हरेंद्र सिंह ने स्वीकार किया है कि उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर को घूस देने की कोशिश की थी। हरेंद्र सिंह ने अदालत की बंद कमरे की सुनवाई में न्यूयॉर्क के मेयर बिल डी ब्लासियो को रिश्वत देने का प्रयास करने का जुर्म स्वीकार कर लिया है। 'टाइम्स' ने अदालत के रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि सिंह ने लॉन्ग द्वीप में संघीय न्यायाधीश के समक्ष डी ब्लासियो को घूस देने का प्रयास करने का अपराध अक्टूबर 2016 में ही स्वीकार कर लिया था।
टाइम्स के मुताबिक, हालांकि इसे एक साल से भी अधिक समय बाद मंगलवार को लॉन्ग द्वीप पर नसाउ काउंटी के पूर्व प्रमुख एडवर्ड मनगानो की सुनवाई के दौरान सार्वजनिक किया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, सिंह ने घूस के छह अन्य असंबद्ध मामलों में भी दोष स्वीकार किया था। इस मामले में मेयर पर आरोप दायर नहीं किए गए हैं और उनका अदालती दस्तावेजों में ऑफिशियल2 के नाम से उल्लेख किया गया है, जो टाइम्स के मुताबिक, स्पष्ट रूप से डी ब्लासियो के लिए है।
अभियोजक पक्ष कभी-कभार अदालती दस्तावेजों में नेताओं के नाम का उल्लेख नहीं करते। मेयर को घूस देने के प्रयास के मामले के केंद्र में रहा सिंह का वाटर्स एज रेस्तरां 2015 में बंद हो गया था।
| न्यूयॉर्कः भारतीय मूल के अमेरिकी रेस्तरां मालिक हरेंद्र सिंह ने स्वीकार किया है कि उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर को घूस देने की कोशिश की थी। हरेंद्र सिंह ने अदालत की बंद कमरे की सुनवाई में न्यूयॉर्क के मेयर बिल डी ब्लासियो को रिश्वत देने का प्रयास करने का जुर्म स्वीकार कर लिया है। 'टाइम्स' ने अदालत के रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि सिंह ने लॉन्ग द्वीप में संघीय न्यायाधीश के समक्ष डी ब्लासियो को घूस देने का प्रयास करने का अपराध अक्टूबर दो हज़ार सोलह में ही स्वीकार कर लिया था। टाइम्स के मुताबिक, हालांकि इसे एक साल से भी अधिक समय बाद मंगलवार को लॉन्ग द्वीप पर नसाउ काउंटी के पूर्व प्रमुख एडवर्ड मनगानो की सुनवाई के दौरान सार्वजनिक किया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, सिंह ने घूस के छह अन्य असंबद्ध मामलों में भी दोष स्वीकार किया था। इस मामले में मेयर पर आरोप दायर नहीं किए गए हैं और उनका अदालती दस्तावेजों में ऑफिशियलदो के नाम से उल्लेख किया गया है, जो टाइम्स के मुताबिक, स्पष्ट रूप से डी ब्लासियो के लिए है। अभियोजक पक्ष कभी-कभार अदालती दस्तावेजों में नेताओं के नाम का उल्लेख नहीं करते। मेयर को घूस देने के प्रयास के मामले के केंद्र में रहा सिंह का वाटर्स एज रेस्तरां दो हज़ार पंद्रह में बंद हो गया था। |
बडगाम में स्थानीय लोगों ने राहुल की हत्या पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और घाटी में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के लिए सुरक्षा की मांग की. वहीं कश्मीरी पंडितों की हालिया हत्याओं के विरोध में बडगाम में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे.
जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकवादियों की नापाक हरकत जारी है और उन्होंने बडगाम जिले में कश्मीरी पंडित राहुल भट (Rahul Bhat) को उसके ऑफिस में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के कुछ घंटे के अंदर ही आज शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई. बडगाम जिले (Budgam District) में आतंकवादियों के हाथों मारे गए कश्मीरी पंडित का आज बन तालाब में अंतिम संस्कार कर दिया गया. राहुल के परिजनों ने हत्याकांड की जांच और पत्नी को नौकरी दिए जाने की मांग की है.
राहुल भट्ट की मां उषा भट्ट ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सरकार उसके बेटे और पत्नी को नौकरी दे.' अंतिम संस्कार के दैरान एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह, संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और उपायुक्त अवनी लवासा भी श्मशान घाट पर मौजूद थे. चदूरा तहसील कार्यालय के एक कर्मचारी राहुल भट्ट को कल बडगाम में तहसील कार्यालय में आतंकवादियों ने गोली मार दी थी, जिसे जानबूझकर किया गया हमला बताया जा रहा है. गोली लगने से बुरी तरह से घायल राहुल को श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
स्थानीय लोगों ने इस हत्या पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और घाटी में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के लिए सुरक्षा की मांग की. वहीं कश्मीरी पंडितों की हालिया हत्याओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए बडगाम के एयरपोर्ट रोड की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे.
श्मशान घाट पर मौजूद एक अन्य स्थानीय राकेश भट्ट ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं को वापस कश्मीर नहीं भेजा जाना चाहिए बल्कि उन्हें जम्मू के सुरक्षित शिविरों में ही शरण देनी चाहिए.
केंद्र शासित प्रदेश के मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में कल गुरुवार को एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी की आतंकवादियों ने सरकारी ऑफिस में गोली मारकर हत्या कर दी. उसके बाद उनके घर पर शोक जताने वालों का तांता लग गया. मृतक के शव का इंतजार कर रहे परिजनों और रिश्तेदारों ने इस घटना की जांच की मांग की है.
इस घटना के 24 घंटे के अंदर पुलवामा जिले में आतंकवादियों ने आज शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी की उसके घर में गोली मारकर हत्या कर दी. जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि आतंकवादियों ने आज सुबह जिले के गुडूरा इलाके में कांस्टेबल रेयाज अहमद ठाकोर के घर पर उन्हें गोली मार दी. उन्होंने बताया कि रेयाज अहमद ठाकोर को शहर में स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई. यह पिछले 24 घंटे में आतंकवादियों का दूसरा हमला है.
| बडगाम में स्थानीय लोगों ने राहुल की हत्या पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और घाटी में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के लिए सुरक्षा की मांग की. वहीं कश्मीरी पंडितों की हालिया हत्याओं के विरोध में बडगाम में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की नापाक हरकत जारी है और उन्होंने बडगाम जिले में कश्मीरी पंडित राहुल भट को उसके ऑफिस में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के कुछ घंटे के अंदर ही आज शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई. बडगाम जिले में आतंकवादियों के हाथों मारे गए कश्मीरी पंडित का आज बन तालाब में अंतिम संस्कार कर दिया गया. राहुल के परिजनों ने हत्याकांड की जांच और पत्नी को नौकरी दिए जाने की मांग की है. राहुल भट्ट की मां उषा भट्ट ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सरकार उसके बेटे और पत्नी को नौकरी दे.' अंतिम संस्कार के दैरान एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह, संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और उपायुक्त अवनी लवासा भी श्मशान घाट पर मौजूद थे. चदूरा तहसील कार्यालय के एक कर्मचारी राहुल भट्ट को कल बडगाम में तहसील कार्यालय में आतंकवादियों ने गोली मार दी थी, जिसे जानबूझकर किया गया हमला बताया जा रहा है. गोली लगने से बुरी तरह से घायल राहुल को श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. स्थानीय लोगों ने इस हत्या पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और घाटी में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के लिए सुरक्षा की मांग की. वहीं कश्मीरी पंडितों की हालिया हत्याओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए बडगाम के एयरपोर्ट रोड की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. श्मशान घाट पर मौजूद एक अन्य स्थानीय राकेश भट्ट ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं को वापस कश्मीर नहीं भेजा जाना चाहिए बल्कि उन्हें जम्मू के सुरक्षित शिविरों में ही शरण देनी चाहिए. केंद्र शासित प्रदेश के मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में कल गुरुवार को एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी की आतंकवादियों ने सरकारी ऑफिस में गोली मारकर हत्या कर दी. उसके बाद उनके घर पर शोक जताने वालों का तांता लग गया. मृतक के शव का इंतजार कर रहे परिजनों और रिश्तेदारों ने इस घटना की जांच की मांग की है. इस घटना के चौबीस घंटाटे के अंदर पुलवामा जिले में आतंकवादियों ने आज शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी की उसके घर में गोली मारकर हत्या कर दी. जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि आतंकवादियों ने आज सुबह जिले के गुडूरा इलाके में कांस्टेबल रेयाज अहमद ठाकोर के घर पर उन्हें गोली मार दी. उन्होंने बताया कि रेयाज अहमद ठाकोर को शहर में स्थित सेना के बानवे बेस अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी मौत हो गई. यह पिछले चौबीस घंटाटे में आतंकवादियों का दूसरा हमला है. |
Virat Kohli IANS Test (Photo Credit: IANS)
नई दिल्ली :
IND vs SA Test Series : इस वक्त टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है. टेस्ट सीरीज शुरू हो चुकी है. पहला टेस्ट मैच सेंचुरियन में खेला जा रहा है. पहले दिन का तो खेल हो पाया, लेकिन दूसरे दिन बारिश के कारण एक भी ओवर का खेल नहीं हो पाया. पहले दिन जो खेल हुआ भी, उसमें भारत के तीन ही विकेट गिरे और भारत ने 272 रन बना लिए हैं, इससे तो लग रहा है कि ये मैच अब ड्रॉ की ओर जाएगा. इस बीच इस मैच में अब तक सबसे ज्यादा निराश टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने किया है. विराट कोहली इस मैच में केवल 35 रन बना सके और पवेलियन लौट गए. इससे विराट कोहली को निराश होंगे ही, साथ ही पूरी टीम इंडिया को भी झटका लगा है. अब विराट कोहली के पास इस मैच की दूसरी पारी बची है, लेकिन ये कह पाना मुश्किल है कि दूसरी पारी में उनकी बल्लेबाजी आएगी भी या नहीं.
टीम इंडिया का साल 2021 में आखिरी मैच चल रहा है. सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच तीन जनवरी से शुरू होगा, जो अगले साल है. विराट कोहली ने आखिरी इंटरनेशनल शतक साल 2019 के नवंबर में मारा था. इसके बाद से साल 2020 पूरा का पूरा खाली चला गया. हालांकि पिछले साल तो कई सारे मैच भी कोरोना वायरस के कारण रद कर दिए गए थे, लेकिन इस साल कुछ एक मैचों को छोड़ दें तो लगातार मैच हो रहे हैं. लेकिन विराट कोहली के बल्ले से अभी तक कोई शतक नहीं निकला है. विराट कोहली ने साल 2008 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था, इसके बाद से उनके करियर में ये पहली बार है, जब उनके बल्ले से लगातार दो साल तक एक भी शतक नहीं निकला है. इस मैच में अब उनके पास एक और पारी बची है. लेकिन अभी ये कह पाना मुश्किल है कि उनकी बल्लेबाजी आएगी भी या नहीं. क्योंकि अभी भारत के सात विकेट बचे हुए हैं. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की टीम बल्लेबाजी करेगी, उसके बाद फिर टीम इंडिया बैटिंग के लिए मैदान में उतरेगी. वो भी विराट कोहली नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए आएंगे. साथ ही दिक्कत ये भी है कि सेंचुरियन में अभी आने वाले दिनों में भी बारिश की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में मैच अच्छी तरह से लगातार हो पाएगा या नहीं, ये भी अभी पक्का नहीं है.
| Virat Kohli IANS Test नई दिल्ली : IND vs SA Test Series : इस वक्त टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है. टेस्ट सीरीज शुरू हो चुकी है. पहला टेस्ट मैच सेंचुरियन में खेला जा रहा है. पहले दिन का तो खेल हो पाया, लेकिन दूसरे दिन बारिश के कारण एक भी ओवर का खेल नहीं हो पाया. पहले दिन जो खेल हुआ भी, उसमें भारत के तीन ही विकेट गिरे और भारत ने दो सौ बहत्तर रन बना लिए हैं, इससे तो लग रहा है कि ये मैच अब ड्रॉ की ओर जाएगा. इस बीच इस मैच में अब तक सबसे ज्यादा निराश टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने किया है. विराट कोहली इस मैच में केवल पैंतीस रन बना सके और पवेलियन लौट गए. इससे विराट कोहली को निराश होंगे ही, साथ ही पूरी टीम इंडिया को भी झटका लगा है. अब विराट कोहली के पास इस मैच की दूसरी पारी बची है, लेकिन ये कह पाना मुश्किल है कि दूसरी पारी में उनकी बल्लेबाजी आएगी भी या नहीं. टीम इंडिया का साल दो हज़ार इक्कीस में आखिरी मैच चल रहा है. सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच तीन जनवरी से शुरू होगा, जो अगले साल है. विराट कोहली ने आखिरी इंटरनेशनल शतक साल दो हज़ार उन्नीस के नवंबर में मारा था. इसके बाद से साल दो हज़ार बीस पूरा का पूरा खाली चला गया. हालांकि पिछले साल तो कई सारे मैच भी कोरोना वायरस के कारण रद कर दिए गए थे, लेकिन इस साल कुछ एक मैचों को छोड़ दें तो लगातार मैच हो रहे हैं. लेकिन विराट कोहली के बल्ले से अभी तक कोई शतक नहीं निकला है. विराट कोहली ने साल दो हज़ार आठ में इंटरनेशनल डेब्यू किया था, इसके बाद से उनके करियर में ये पहली बार है, जब उनके बल्ले से लगातार दो साल तक एक भी शतक नहीं निकला है. इस मैच में अब उनके पास एक और पारी बची है. लेकिन अभी ये कह पाना मुश्किल है कि उनकी बल्लेबाजी आएगी भी या नहीं. क्योंकि अभी भारत के सात विकेट बचे हुए हैं. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका की टीम बल्लेबाजी करेगी, उसके बाद फिर टीम इंडिया बैटिंग के लिए मैदान में उतरेगी. वो भी विराट कोहली नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए आएंगे. साथ ही दिक्कत ये भी है कि सेंचुरियन में अभी आने वाले दिनों में भी बारिश की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में मैच अच्छी तरह से लगातार हो पाएगा या नहीं, ये भी अभी पक्का नहीं है. |
हरिभद्र नारा
करेगा, जैसे उसे अप्सराओं को बन्धनमुक्त करने का का हो, और उसकी परतन्त्रता में भोगूँगा, जैसे मुझे उसपर अनुमि करने का मिला हो । हरिन्द्र ! वास्तव में तू धन्य किन्तु मैं भी सहज ही में तुझे छुटकारा देकर अपना अपमान होनहूँगा। जिस कार्य को प्रारम्भ किया है, इसका अन विना पीछे न दूंगा।
विश्वामित्र के समीप से, महाराजा हरिश्शन्द्र महल की ओर विदा हुए। मार्ग में, उनके मन में जो तर्क-वितर्क होते जाते हैं, उनका वर्णन करना पठिन कार्य है। वे विचारते हैं, कि आज मुझे उस रानी के समीप जाना है, जिसने मुझ से पहा था, कि पिना सोने की पूँस वाला मृगशिशु लाये, मेरे पहल में मत आना । मैं, उसकी इच्छानुसार रूप सफ सोने की पूँघवाला मृगशिशु न ला सका और आज विना मृग-शिशु लाये ही उसके समीप जा रहा हूँ, सो क्या यह मेरा तिरस्कार करेगी लेकिन ऐसा होना वो सम्भव नहीं। रानी ऐसी निन्ठ करने वाली तो नहीं है, न उसे मेरा अपमान करना ही है। ऐसा होता तो इतने समय में उसका यह 'वसनकिसी रूप से प्रक हो जाता ही इससे
से मन कानेर '..'
H 47 GATủ
पूँड : | हरिभद्र नारा करेगा, जैसे उसे अप्सराओं को बन्धनमुक्त करने का का हो, और उसकी परतन्त्रता में भोगूँगा, जैसे मुझे उसपर अनुमि करने का मिला हो । हरिन्द्र ! वास्तव में तू धन्य किन्तु मैं भी सहज ही में तुझे छुटकारा देकर अपना अपमान होनहूँगा। जिस कार्य को प्रारम्भ किया है, इसका अन विना पीछे न दूंगा। विश्वामित्र के समीप से, महाराजा हरिश्शन्द्र महल की ओर विदा हुए। मार्ग में, उनके मन में जो तर्क-वितर्क होते जाते हैं, उनका वर्णन करना पठिन कार्य है। वे विचारते हैं, कि आज मुझे उस रानी के समीप जाना है, जिसने मुझ से पहा था, कि पिना सोने की पूँस वाला मृगशिशु लाये, मेरे पहल में मत आना । मैं, उसकी इच्छानुसार रूप सफ सोने की पूँघवाला मृगशिशु न ला सका और आज विना मृग-शिशु लाये ही उसके समीप जा रहा हूँ, सो क्या यह मेरा तिरस्कार करेगी लेकिन ऐसा होना वो सम्भव नहीं। रानी ऐसी निन्ठ करने वाली तो नहीं है, न उसे मेरा अपमान करना ही है। ऐसा होता तो इतने समय में उसका यह 'वसनकिसी रूप से प्रक हो जाता ही इससे से मन कानेर '..' H सैंतालीस GATủ पूँड : |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सपा के सामने भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. लोकसभा 2024 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के विदाई का चुनाव है.
समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सपा के सामने भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. लोकसभा 2024 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के विदाई का चुनाव है. वहीं भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह कुश्ती महासंघ अध्यक्ष से तत्काल हटाना चाहिए और जनता ने इन्हें यौन शोषण के लिए नहीं चुना है बल्कि सम्मान के लिए चुना है बृजभूषण शरण सिंह को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए.
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में आज सपा नेता पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का आगमन हुआ था. देवरिया के नंद पैलेस में पहुचते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका फूल माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया. स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्नातक चुनाव तैयारियों का जायजा लिया और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक किया और स्नातक चुनाव जीतने के टिप्स दिए.
विनेश फोगाट अंतरराष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन रही हैं. उनके नेतृत्व में रेसलिंग फेडरेशन के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया. उन्होंने जो कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर जो आरोप लगाए हैं बहुत ही संगीन है बहुत ही गंभीर है सरकार को उसको तत्काल संज्ञान में लेकर के महिला खिलाड़ियों को तत्काल न्याय दिलाने की कोशिश करनी चाहिए और तत्काल ऐसे महत्वपूर्ण पद से अध्यक्ष के पद से तत्काल हटाना चाहिए. महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.
विशेष रूप से हम नारी सम्मान की बात करते हैं, बेटियों को हम देवी मानते हैं और वही बेटियां आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिभा से देश का नाम रोशन कर रही हैं उनको योनाचार्य का शिकार बनाया जाए. हम समझते हैं यह बहुत बड़ा घिनौना कृत्य है. थोड़ी भी मर्यादा और नैतिकता है इस प्रकार के आरोप अपने आप में बहुत गंभीर हैं. इसके बाद भी पद पर बने रहना हम समझते है कि यह ओछी सोच है.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का निगाह तो मैनपुरी पर भी नहीं था. लेकिन तीन लाख रिकॉर्ड मतों से वह हारे वहां पर. समाजवादी पार्टी के आगे भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. इनकी कहीं भी दाल गलने वाली नहीं है. उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने 2 सीटों पर बड़े अंतराल से जीत दर्ज की है और एक सीट रामपुर की सीट पर भाजपा कैसे जीती है यह पूरा देश और पूरा दुनिया देखा है जानता है. 2024 का लोक सभा चुनाव भाजपा के विदाई का चुनाव होगा.
| समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सपा के सामने भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. लोकसभा दो हज़ार चौबीस का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के विदाई का चुनाव है. समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सपा के सामने भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. लोकसभा दो हज़ार चौबीस का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के विदाई का चुनाव है. वहीं भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह कुश्ती महासंघ अध्यक्ष से तत्काल हटाना चाहिए और जनता ने इन्हें यौन शोषण के लिए नहीं चुना है बल्कि सम्मान के लिए चुना है बृजभूषण शरण सिंह को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में आज सपा नेता पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का आगमन हुआ था. देवरिया के नंद पैलेस में पहुचते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका फूल माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया. स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्नातक चुनाव तैयारियों का जायजा लिया और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक किया और स्नातक चुनाव जीतने के टिप्स दिए. विनेश फोगाट अंतरराष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन रही हैं. उनके नेतृत्व में रेसलिंग फेडरेशन के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया. उन्होंने जो कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर जो आरोप लगाए हैं बहुत ही संगीन है बहुत ही गंभीर है सरकार को उसको तत्काल संज्ञान में लेकर के महिला खिलाड़ियों को तत्काल न्याय दिलाने की कोशिश करनी चाहिए और तत्काल ऐसे महत्वपूर्ण पद से अध्यक्ष के पद से तत्काल हटाना चाहिए. महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है. विशेष रूप से हम नारी सम्मान की बात करते हैं, बेटियों को हम देवी मानते हैं और वही बेटियां आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिभा से देश का नाम रोशन कर रही हैं उनको योनाचार्य का शिकार बनाया जाए. हम समझते हैं यह बहुत बड़ा घिनौना कृत्य है. थोड़ी भी मर्यादा और नैतिकता है इस प्रकार के आरोप अपने आप में बहुत गंभीर हैं. इसके बाद भी पद पर बने रहना हम समझते है कि यह ओछी सोच है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का निगाह तो मैनपुरी पर भी नहीं था. लेकिन तीन लाख रिकॉर्ड मतों से वह हारे वहां पर. समाजवादी पार्टी के आगे भारतीय जनता पार्टी के परखच्चे उड़ जाएंगे. इनकी कहीं भी दाल गलने वाली नहीं है. उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में तीन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने दो सीटों पर बड़े अंतराल से जीत दर्ज की है और एक सीट रामपुर की सीट पर भाजपा कैसे जीती है यह पूरा देश और पूरा दुनिया देखा है जानता है. दो हज़ार चौबीस का लोक सभा चुनाव भाजपा के विदाई का चुनाव होगा. |
अभिषेक पाठक की दृश्यम 2 को रिलीज हुए 26 दिन बीत चुके हैं। इस बीच कई फिल्में आईं और गईं और कई और फिल्में जैसे सलाम वैंकी आदि रिलीज हुईं। लेकिन कोई भी फिल्म अजय देवगन की दृश्यम 2 का बाल भी बांका नहीं कर सकी।
नई दिल्ली, जेएनएन। अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम 2' ने रिलीज के बाद से अब तक बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ सफलता हासिल की है। एक हफ्ते में 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद यह फिल्म पिछले हफ्ते 200 करोड़ क्लब में एंट्री करा पाने में कामयाब रही। हालांकि, की कमाई में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर अपनी धाक जमाने में कामयाब रही। खासकर नई रिलीज फिल्मों (एन एक्शन हीरो, सलाम वैंकी सहित बाकी फिल्में) के बीच भी 'दृश्यम 2' का जलवा कायम रहा। ऐसे में जानेंगे कि अब तक 'दृश्यम 2' के बीच 'सलाम वैंकी' और बाकी रिलीज फिल्मों का क्या हाल रहा।
अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित यह फिल्म 18 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। ओपनिंग डे पर फिल्म ने 15. 38 करोड़ का बिजनेस किया। इसके बाद फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ बिजनेस करना जारी रहा। 26वें दिन यानी कि 13 दिसंबर को फिल्म ने अपनी कमाई में कुछ गिरावट देखी। 26वें दिन फिल्म का कुल कलेक्शन 1. 50 करोड़ के आसपास सिमट गया। इस लिहाज से 'दृश्यम 2' का टोटल कलेक्शन 212. 86 करोड़ हो गया। हिंदी भाषा में इस फिल्म की 8. 36 प्रतिशत की ऑक्युपेंसी 26वें दिन रही।
अजय देवगन की इस फिल्म ने उनकी बाकी दो फिल्में 'गोलमाल अगेन' और 'तान्हाजी' को कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया है।
9 दिसंबर को तीन फिल्में मारिच, सलाम वैंकी और वध रिलीज हुईं थीं। इन दिनों फिल्मों में से काजोल की सलाम वैंकी को कुछ दर्शक मिले जबकि बाकी दोनों का और भी बुरा हाल रहा। कुल मिलाकर तीनों ही फिल्म में एक करोड़ का भी कनेक्शन नहीं कर पाईं। 'सलाम वैंकी' का कलेक्शन करीब 90-95 लाख रहा। जबकि 'मारिच' का कलेक्शन करीब 20 लाख रुपये और 'वध' का 35 से 40 लाख रुपये ही हुआ। हालांकि यह शुरुआती आंकड़े हैं।
कुछ ही दिनों में 'अवतारः द वे ऑफ वाटर' रिलीज होने वाली है। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग अभी तक बहुत अच्छी रही। ' दृश्यम 2' के बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह दूसरी मूवी होगी, जिसका लोगों में इतना क्रेज है।
| अभिषेक पाठक की दृश्यम दो को रिलीज हुए छब्बीस दिन बीत चुके हैं। इस बीच कई फिल्में आईं और गईं और कई और फिल्में जैसे सलाम वैंकी आदि रिलीज हुईं। लेकिन कोई भी फिल्म अजय देवगन की दृश्यम दो का बाल भी बांका नहीं कर सकी। नई दिल्ली, जेएनएन। अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम दो' ने रिलीज के बाद से अब तक बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ सफलता हासिल की है। एक हफ्ते में एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद यह फिल्म पिछले हफ्ते दो सौ करोड़ क्लब में एंट्री करा पाने में कामयाब रही। हालांकि, की कमाई में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर अपनी धाक जमाने में कामयाब रही। खासकर नई रिलीज फिल्मों के बीच भी 'दृश्यम दो' का जलवा कायम रहा। ऐसे में जानेंगे कि अब तक 'दृश्यम दो' के बीच 'सलाम वैंकी' और बाकी रिलीज फिल्मों का क्या हाल रहा। अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित यह फिल्म अट्ठारह नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। ओपनिंग डे पर फिल्म ने पंद्रह. अड़तीस करोड़ का बिजनेस किया। इसके बाद फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ बिजनेस करना जारी रहा। छब्बीसवें दिन यानी कि तेरह दिसंबर को फिल्म ने अपनी कमाई में कुछ गिरावट देखी। छब्बीसवें दिन फिल्म का कुल कलेक्शन एक. पचास करोड़ के आसपास सिमट गया। इस लिहाज से 'दृश्यम दो' का टोटल कलेक्शन दो सौ बारह. छियासी करोड़ हो गया। हिंदी भाषा में इस फिल्म की आठ. छत्तीस प्रतिशत की ऑक्युपेंसी छब्बीसवें दिन रही। अजय देवगन की इस फिल्म ने उनकी बाकी दो फिल्में 'गोलमाल अगेन' और 'तान्हाजी' को कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया है। नौ दिसंबर को तीन फिल्में मारिच, सलाम वैंकी और वध रिलीज हुईं थीं। इन दिनों फिल्मों में से काजोल की सलाम वैंकी को कुछ दर्शक मिले जबकि बाकी दोनों का और भी बुरा हाल रहा। कुल मिलाकर तीनों ही फिल्म में एक करोड़ का भी कनेक्शन नहीं कर पाईं। 'सलाम वैंकी' का कलेक्शन करीब नब्बे-पचानवे लाख रहा। जबकि 'मारिच' का कलेक्शन करीब बीस लाख रुपये और 'वध' का पैंतीस से चालीस लाख रुपये ही हुआ। हालांकि यह शुरुआती आंकड़े हैं। कुछ ही दिनों में 'अवतारः द वे ऑफ वाटर' रिलीज होने वाली है। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग अभी तक बहुत अच्छी रही। ' दृश्यम दो' के बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह दूसरी मूवी होगी, जिसका लोगों में इतना क्रेज है। |
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला हुआ है। सीआरपीएफ जवानों पर सोमवार को हुए इस हमले में एक जवान शहीद हो गया जबकि पांच जवान घायल हुए हैं।
दंतेवाड़ाः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला हुआ है। सीआरपीएफ जवानों पर सोमवार को हुए इस हमले में एक जवान शहीद हो गया जबकि पांच जवान घायल हुए हैं। यह हमला तब हुआ जब सीआरपीएफ की 231वीं बटालियन पुलिस यूनिट के साथ सड़के के रास्ते अरानपुर क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी पर निकले थे और रास्ते में आईईडी धमाका हुआ, जिसमें पांच सीआरपीएफ जवान घायल हो गए।
नक्सलियों ने आईईडी धमाके के बाद सीआरपीएफ जवानों पर फायरिंग भी की. घायल जवानों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया गया हैं। जिनमें से दो जवानों की हालत गम्भीर बताई जा रही है। यह हमला सोमवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ। उन्होंने बताया कि दांतेवाड़ा में सेना की कमल पोस्ट के पास हुआ। उन्होंने कहा कि घायल सैनिकों को हेलीकॉप्टर द्वारा इलाज के लिए ले जाया गया।
| छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला हुआ है। सीआरपीएफ जवानों पर सोमवार को हुए इस हमले में एक जवान शहीद हो गया जबकि पांच जवान घायल हुए हैं। दंतेवाड़ाः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला हुआ है। सीआरपीएफ जवानों पर सोमवार को हुए इस हमले में एक जवान शहीद हो गया जबकि पांच जवान घायल हुए हैं। यह हमला तब हुआ जब सीआरपीएफ की दो सौ इकतीसवीं बटालियन पुलिस यूनिट के साथ सड़के के रास्ते अरानपुर क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी पर निकले थे और रास्ते में आईईडी धमाका हुआ, जिसमें पांच सीआरपीएफ जवान घायल हो गए। नक्सलियों ने आईईडी धमाके के बाद सीआरपीएफ जवानों पर फायरिंग भी की. घायल जवानों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया गया हैं। जिनमें से दो जवानों की हालत गम्भीर बताई जा रही है। यह हमला सोमवार शाम करीब चार:तीस बजे हुआ। उन्होंने बताया कि दांतेवाड़ा में सेना की कमल पोस्ट के पास हुआ। उन्होंने कहा कि घायल सैनिकों को हेलीकॉप्टर द्वारा इलाज के लिए ले जाया गया। |
मनोऽहिना यत्पदचिन्तनेन समेति बक्रामलतामनेन । सदीय वृत्रेक समर्थना वाक् समस्तु किनात सुवर्णभावा ॥९॥ बीरोदय
जिन वीर भगवान् के चरणों का चिन्तवन करने से प्राणियों का मन पार्यो से रहित होकर निर्मलता को प्राप्त हो जाना है, तो फिर उन्हीं वीर भगवान् के एकमात्र चरित्र का चित्रण करने में समर्थ मेरी वाणी सुवर्ण भाव को क्यों नहीं प्राप्त होगी? अर्थात् वीर भगवान् के चरित्र को वर्णन करने के लिए मेरी वाणी भी उत्तम वर्ष पद वाक्य रूप से अवश्य ही परिणत होगी।
इस काव्य में साहित्यिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक और सैद्धान्तिक वैभव को देखकर प्रत्येक सचेत का हृदय आहूलादित हुए बिना नहीं रहता है । इसे जैन धर्म दर्शन की पूर्ण प्रस्तुति भी कहा जा सकता है क्योंकि कवि ने सभी विषयों के इसमें स्थान दिया है जिसमें कुछ आध्यात्मिक एवं सैद्धान्तिक विषयों का संक्षिप्त निदर्शन किया जा रहा है ।
आध्यत्मिक विकास के लिए जिस चिन्तन मनन एवं अनुशीलन की आवश्यकता है वह अन्तर्मन से जागृत होता है। सत्य के प्रति आग्रह रहित जितनी उन्मुक्त दृष्टि होगी चिन्तन जितना अत्यमुखीन होगा उतना ही आध्यात्मिक विकास होगा। इस शाश्वत नियम के दर्शन प्रतिभा सम्पन्न कवि के काव्य में होते हैं क्योंकि कवि ने विशेष रूप से पर पदार्थ की आसक्ति को दुःख का मूल हेतु माना है ।
मोहमाया का जंजाल चतुर्गति परिभ्रमण का प्रवल निमित्त है इस आध्यात्मिक चिन्तन को प्रस्तुत करते हुए कहा है
नरत्वमाप्त्वा भुवि मोहमायां मुञ्चेदमुञ्चेच्छितामथायात् ।
नोखेत्पुनः प्रत्यववर्तमानः संसार मेवाञ्चति चिन्निधानः ॥ वीरोदय 26 / 19
संसार में परिभ्रमण करते हुए जो जीव मनुष्य भव को पाकर मोहमाया को छोड़ देता है, वह शिवपने को प्राप्त हो जाता है । अर्थात् कर्मबन्धन से छूट जाता है, किन्तु जो संसार की मोहमाया को नहीं छोड़ता है, वह चैतन्य का निधान होकर भी चतुर्गति में परिभ्रमण करता हुआ संसार में ही पड़ा रहता है ।
यहां कवीश्वर के द्वारा संसारी प्राणी को मोह की असारता का परिचय कराया है और दुःखों से निवृत्ति हेतु मोहमाया के बन्धन से छूटने की प्रेरणा दी है ।
युवा महावीर को संसार की असारता को देखकर वैराग्य उत्पन्न हुआ। महावीर आत्मचिन्तन करते हुए विचारते है। अहो, में संसार के लोगों की मूर्खता और मूढ़ताओं से भरा हुआ देख रहा हूँ तथा प्राणिमात्र को अपने समान समझने वाला समातन धर्म विलुप्त होता हुआ देख रहा हूँ । इसलिए मुझे इसकी संभाल करना चाहिये । संसारी प्राणीयों के स्वार्थभव को उनकी सोच रूप में ही वर्णित किया है कि संसार में मैं सुख से रहूँ यदि अन्य कोई दुःख में गिरता है तो गिरे हमारे मन में अन्य जन को चिन्ता क्यों हो? इस प्रकार सर्व जन अपने-अपने स्वार्थ साधन के सिद्धान्त को पराप्त हो रहे हैं। स्वार्थ पूर्ति की भावना मोह मत्सर के साथ अहंकार जगा देती है। अहंकार प्राणी को पतन की ओर ले जाना वाला है ।
संसारी प्राणी प्रायः अहंकार के नागपाश में आबद्ध होता है । अंहकार या मद करता अत्यधिक रूप से अहित कारी है। कर्म की शक्ति बड़ी बलवान होती है उसके लिए क्षीण करने हेतु महान् पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। अतः प्राणी को अपनी वर्तमान अवस्था में आसक्त हो कथमपि उन्मत्त नहीं होना चाहिए। क्योंकि साता वेदनीय उदयकाल में जो वस्तु सुख दे रही है, वही असाता वेदनीय के उदयकाल में दुख देती है। सर्वकाल जीव की एक ही अवस्था रहना असंभव है अतः अहंकार करने से क्या लाभ? इसी सिद्धान्त के आलोक में आचार्य श्री की वीरोदय में प्रस्तुति
तुलयावस्था न सर्वेषां किन्तु सर्वेऽपि भागिनः ।
सन्ति तस्या अवस्थायाः सेवाबो यां वयं भुवि ॥ ४१ / 16
यद्यपि वर्तमान में सर्व जीवों की अवस्था एक सी नहीं है हमारी अवस्था कुछ और है, दूसरे की कुछ और किन्तु सम्प्रति हम संसार में जिस अवस्था को धारण कर रहें हैं। इस अवस्था को भविष्य में दूसरे लोग भी धारण कर सकते हैं और जिस अवस्था को आज दूसरे लोग प्राप्त हैं, उसे कल हम भी प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि कर्म के उदय से जीव की दशा कभी एक सी नहीं रह पाती है। हमेशा परिवर्तन होता रहता है, अतएव मानव को अपनी वर्तमान उच्च जाति या कुलादि का अभिमान कभी नहीं करना चाहिए । | मनोऽहिना यत्पदचिन्तनेन समेति बक्रामलतामनेन । सदीय वृत्रेक समर्थना वाक् समस्तु किनात सुवर्णभावा ॥नौ॥ बीरोदय जिन वीर भगवान् के चरणों का चिन्तवन करने से प्राणियों का मन पार्यो से रहित होकर निर्मलता को प्राप्त हो जाना है, तो फिर उन्हीं वीर भगवान् के एकमात्र चरित्र का चित्रण करने में समर्थ मेरी वाणी सुवर्ण भाव को क्यों नहीं प्राप्त होगी? अर्थात् वीर भगवान् के चरित्र को वर्णन करने के लिए मेरी वाणी भी उत्तम वर्ष पद वाक्य रूप से अवश्य ही परिणत होगी। इस काव्य में साहित्यिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक और सैद्धान्तिक वैभव को देखकर प्रत्येक सचेत का हृदय आहूलादित हुए बिना नहीं रहता है । इसे जैन धर्म दर्शन की पूर्ण प्रस्तुति भी कहा जा सकता है क्योंकि कवि ने सभी विषयों के इसमें स्थान दिया है जिसमें कुछ आध्यात्मिक एवं सैद्धान्तिक विषयों का संक्षिप्त निदर्शन किया जा रहा है । आध्यत्मिक विकास के लिए जिस चिन्तन मनन एवं अनुशीलन की आवश्यकता है वह अन्तर्मन से जागृत होता है। सत्य के प्रति आग्रह रहित जितनी उन्मुक्त दृष्टि होगी चिन्तन जितना अत्यमुखीन होगा उतना ही आध्यात्मिक विकास होगा। इस शाश्वत नियम के दर्शन प्रतिभा सम्पन्न कवि के काव्य में होते हैं क्योंकि कवि ने विशेष रूप से पर पदार्थ की आसक्ति को दुःख का मूल हेतु माना है । मोहमाया का जंजाल चतुर्गति परिभ्रमण का प्रवल निमित्त है इस आध्यात्मिक चिन्तन को प्रस्तुत करते हुए कहा है नरत्वमाप्त्वा भुवि मोहमायां मुञ्चेदमुञ्चेच्छितामथायात् । नोखेत्पुनः प्रत्यववर्तमानः संसार मेवाञ्चति चिन्निधानः ॥ वीरोदय छब्बीस / उन्नीस संसार में परिभ्रमण करते हुए जो जीव मनुष्य भव को पाकर मोहमाया को छोड़ देता है, वह शिवपने को प्राप्त हो जाता है । अर्थात् कर्मबन्धन से छूट जाता है, किन्तु जो संसार की मोहमाया को नहीं छोड़ता है, वह चैतन्य का निधान होकर भी चतुर्गति में परिभ्रमण करता हुआ संसार में ही पड़ा रहता है । यहां कवीश्वर के द्वारा संसारी प्राणी को मोह की असारता का परिचय कराया है और दुःखों से निवृत्ति हेतु मोहमाया के बन्धन से छूटने की प्रेरणा दी है । युवा महावीर को संसार की असारता को देखकर वैराग्य उत्पन्न हुआ। महावीर आत्मचिन्तन करते हुए विचारते है। अहो, में संसार के लोगों की मूर्खता और मूढ़ताओं से भरा हुआ देख रहा हूँ तथा प्राणिमात्र को अपने समान समझने वाला समातन धर्म विलुप्त होता हुआ देख रहा हूँ । इसलिए मुझे इसकी संभाल करना चाहिये । संसारी प्राणीयों के स्वार्थभव को उनकी सोच रूप में ही वर्णित किया है कि संसार में मैं सुख से रहूँ यदि अन्य कोई दुःख में गिरता है तो गिरे हमारे मन में अन्य जन को चिन्ता क्यों हो? इस प्रकार सर्व जन अपने-अपने स्वार्थ साधन के सिद्धान्त को पराप्त हो रहे हैं। स्वार्थ पूर्ति की भावना मोह मत्सर के साथ अहंकार जगा देती है। अहंकार प्राणी को पतन की ओर ले जाना वाला है । संसारी प्राणी प्रायः अहंकार के नागपाश में आबद्ध होता है । अंहकार या मद करता अत्यधिक रूप से अहित कारी है। कर्म की शक्ति बड़ी बलवान होती है उसके लिए क्षीण करने हेतु महान् पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। अतः प्राणी को अपनी वर्तमान अवस्था में आसक्त हो कथमपि उन्मत्त नहीं होना चाहिए। क्योंकि साता वेदनीय उदयकाल में जो वस्तु सुख दे रही है, वही असाता वेदनीय के उदयकाल में दुख देती है। सर्वकाल जीव की एक ही अवस्था रहना असंभव है अतः अहंकार करने से क्या लाभ? इसी सिद्धान्त के आलोक में आचार्य श्री की वीरोदय में प्रस्तुति तुलयावस्था न सर्वेषां किन्तु सर्वेऽपि भागिनः । सन्ति तस्या अवस्थायाः सेवाबो यां वयं भुवि ॥ इकतालीस / सोलह यद्यपि वर्तमान में सर्व जीवों की अवस्था एक सी नहीं है हमारी अवस्था कुछ और है, दूसरे की कुछ और किन्तु सम्प्रति हम संसार में जिस अवस्था को धारण कर रहें हैं। इस अवस्था को भविष्य में दूसरे लोग भी धारण कर सकते हैं और जिस अवस्था को आज दूसरे लोग प्राप्त हैं, उसे कल हम भी प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि कर्म के उदय से जीव की दशा कभी एक सी नहीं रह पाती है। हमेशा परिवर्तन होता रहता है, अतएव मानव को अपनी वर्तमान उच्च जाति या कुलादि का अभिमान कभी नहीं करना चाहिए । |
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को अनुमति दे दी है। शर्तों के साथ इस रथ यात्रा को अनुमति दी गई है। इस साल रथ यात्रा मंदिर कमेटी, राज्य और केंद्र सरकार के आपसी तालमेल से होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य (ओडिशा) भी यात्रा या उत्सव को रोक सकते हैं अगर उन्हें लगता है कि यह हाथ से निकल रहा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे ने पुरी रथ यात्रा के आयोजन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया था।
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पुरी में हर साल निकलने वाली 'भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा' की परंपरा सदियों पुरानी है। सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए श्रद्धालुओं को शामिल किए बगैर इसे निकलने की अनुमति दी जा सकती है। मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा, 'यह कोरोड़ों लोगों की आस्था का मामला है। भगवान जगन्नाथ यदि कल नहीं आएंगे तो परंपरा के मुताबिक वह फिर 12 वर्षों तक बाहर नहीं निकल सकते। '
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए गत 18 जून के अपने फैसले में इस वार्षिक एवं ऐतिहासिक 'रथ यात्रा' पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 'यदि हम रथ यात्रा की इजाजत देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे। ' बता दें कि इस वार्षिक 'रथ यात्रा' में शामिल होने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
कोर्ट का कहना था कि भक्तों के हुजूम को देखते हुए कोविड-19 के संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहेगा। इसे देखते हुए कोर्ट ने गत 18 जून को 'रथ यात्रा' निकालने पर रोक लगा दिया। अदालत के इस फैसले में संशोधन के लिए अर्जियां लगाई गईं। अर्जियों में कोर्ट से अपने पहले के आदेश में संशोधन करने की मांग की गई। अर्जियों में रथ यात्रा की अनुमति केवल पुरी में देने की मांग की गई। इन अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एस रवींद्र भट्ट सुनवाई करेंगे।
बता दें कि पुरी में नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को मिलकर दो बार हाथों से खींचते हैं। यह उत्सव 23 जून से शुरू होकर एक जुलाई को संपन्न होने वाला है।
ओडिशा सरकार का कहना है कि वह श्रद्धालुओं के एकत्रित हुए बगैर जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब के अनुरोध पर कानूनी रूप से 'अनुकूल कदम' उठाएगी। कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार जनभावनाओं के दबाव का सामना कर रही है। ओडिशा के कानून विभाग ने एक बयान में कहा, 'जब माननीय उच्चत्म न्यायालय में 2020 की रिट याचिका संख्या 571 सुनवाई के लिये आएगी तो राज्य सरकार गजपति महाराज के अनुरोध पर कानूनी रूप से अनुकूल कदम उठाएगी। '
| नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को अनुमति दे दी है। शर्तों के साथ इस रथ यात्रा को अनुमति दी गई है। इस साल रथ यात्रा मंदिर कमेटी, राज्य और केंद्र सरकार के आपसी तालमेल से होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य भी यात्रा या उत्सव को रोक सकते हैं अगर उन्हें लगता है कि यह हाथ से निकल रहा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे ने पुरी रथ यात्रा के आयोजन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया था। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पुरी में हर साल निकलने वाली 'भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा' की परंपरा सदियों पुरानी है। सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए श्रद्धालुओं को शामिल किए बगैर इसे निकलने की अनुमति दी जा सकती है। मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा, 'यह कोरोड़ों लोगों की आस्था का मामला है। भगवान जगन्नाथ यदि कल नहीं आएंगे तो परंपरा के मुताबिक वह फिर बारह वर्षों तक बाहर नहीं निकल सकते। ' सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-उन्नीस के प्रकोप को देखते हुए गत अट्ठारह जून के अपने फैसले में इस वार्षिक एवं ऐतिहासिक 'रथ यात्रा' पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 'यदि हम रथ यात्रा की इजाजत देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे। ' बता दें कि इस वार्षिक 'रथ यात्रा' में शामिल होने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। कोर्ट का कहना था कि भक्तों के हुजूम को देखते हुए कोविड-उन्नीस के संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहेगा। इसे देखते हुए कोर्ट ने गत अट्ठारह जून को 'रथ यात्रा' निकालने पर रोक लगा दिया। अदालत के इस फैसले में संशोधन के लिए अर्जियां लगाई गईं। अर्जियों में कोर्ट से अपने पहले के आदेश में संशोधन करने की मांग की गई। अर्जियों में रथ यात्रा की अनुमति केवल पुरी में देने की मांग की गई। इन अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एस रवींद्र भट्ट सुनवाई करेंगे। बता दें कि पुरी में नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को मिलकर दो बार हाथों से खींचते हैं। यह उत्सव तेईस जून से शुरू होकर एक जुलाई को संपन्न होने वाला है। ओडिशा सरकार का कहना है कि वह श्रद्धालुओं के एकत्रित हुए बगैर जगन्नाथ रथ यात्रा निकालने के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब के अनुरोध पर कानूनी रूप से 'अनुकूल कदम' उठाएगी। कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार जनभावनाओं के दबाव का सामना कर रही है। ओडिशा के कानून विभाग ने एक बयान में कहा, 'जब माननीय उच्चत्म न्यायालय में दो हज़ार बीस की रिट याचिका संख्या पाँच सौ इकहत्तर सुनवाई के लिये आएगी तो राज्य सरकार गजपति महाराज के अनुरोध पर कानूनी रूप से अनुकूल कदम उठाएगी। ' |
उभरते हुए पिंपल पर हल्का सा पेस्ट लगाकर सो जाएं। सुबह उठने तक पिंपल काफी हद तक ठीक हो चुका होगा। मिंट वाला टूथपेस्ट ज्यादा असर करेगा। न केवल पिंपल, बल्कि जलने पर या किसी कीड़े के काटने पर भी पेस्ट लगा लें। सूखने पर धो लें। ध्यान रखें कि हफ्ते में बस 2-3 बार ही इसे यूज करें। ज्यादा यूज करने से स्किन ड्र्राई हो सकती है।
| उभरते हुए पिंपल पर हल्का सा पेस्ट लगाकर सो जाएं। सुबह उठने तक पिंपल काफी हद तक ठीक हो चुका होगा। मिंट वाला टूथपेस्ट ज्यादा असर करेगा। न केवल पिंपल, बल्कि जलने पर या किसी कीड़े के काटने पर भी पेस्ट लगा लें। सूखने पर धो लें। ध्यान रखें कि हफ्ते में बस दो-तीन बार ही इसे यूज करें। ज्यादा यूज करने से स्किन ड्र्राई हो सकती है। |
जिला संवाददाता- मुकेश द्विवेदी (राबर्ट्सगंज / सोनभद्र, उत्तर प्रदेश)
सोनभद्रःपुलिस लाइन सोनभद्र में श्री आशीष श्रीवास्तव पुलिस अधीक्षक महोदय जी (सोनभद्र) के द्वारा रवि सिंह पुत्र श्री महामाया प्रसाद सिंह रेनुकूट सोनभद्र हिंडाल्को कॉलोनी निवासी को फर्स्ट इंटरनेशनल पुमसे लवर क्लब इन्विटेशनल ऑनलाइन चैंपियनशिप 2020 के ताइक्वांडो प्रतियोगिता में 32 देश के 420 खिलाड़ियों में से एक रवि सिंह ने भारत की ओर से प्रतिनिधित्व किया और प्रतिनिधित्व कर के अंडर 30 पूमसे में तृतीय स्थान प्राप्त करके जनपद सोनभद्र का मान बढ़ाया। इस हेतु पुलिस अधीक्षक महोदय ने अपने कार्यालय में आज श्री रवि सिंह जी को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की कि आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहें और जनपद सोनभद्र और अपने राष्ट्र का मान बढ़ाते रहें।
पुलिस अधीक्षक महोदय के साथ बधाई देने वालो में रेणुकूट के स्वतंत्र स्काउट मास्टर शैलेंद्र कुमार मिश्र, शिक्षिका श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरी म्योरपुर, संस्कृत विद्यालय रॉबर्टसगंज के शिक्षक श्री शेषनाथ तिवारी, श्री सुनील कुमार सिंह जिला संगठन आयुक्त स्काउट सोनभद्र, श्री सैयद अनवर हुसैन जिला प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट सोनभद्र और सुश्री स्नेहा सिंह युवा लीडर गाइड सोनभद्र आदि लोग रहे। इन सभी लोगों ने रवि जी को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की।
| जिला संवाददाता- मुकेश द्विवेदी सोनभद्रःपुलिस लाइन सोनभद्र में श्री आशीष श्रीवास्तव पुलिस अधीक्षक महोदय जी के द्वारा रवि सिंह पुत्र श्री महामाया प्रसाद सिंह रेनुकूट सोनभद्र हिंडाल्को कॉलोनी निवासी को फर्स्ट इंटरनेशनल पुमसे लवर क्लब इन्विटेशनल ऑनलाइन चैंपियनशिप दो हज़ार बीस के ताइक्वांडो प्रतियोगिता में बत्तीस देश के चार सौ बीस खिलाड़ियों में से एक रवि सिंह ने भारत की ओर से प्रतिनिधित्व किया और प्रतिनिधित्व कर के अंडर तीस पूमसे में तृतीय स्थान प्राप्त करके जनपद सोनभद्र का मान बढ़ाया। इस हेतु पुलिस अधीक्षक महोदय ने अपने कार्यालय में आज श्री रवि सिंह जी को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की कि आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहें और जनपद सोनभद्र और अपने राष्ट्र का मान बढ़ाते रहें। पुलिस अधीक्षक महोदय के साथ बधाई देने वालो में रेणुकूट के स्वतंत्र स्काउट मास्टर शैलेंद्र कुमार मिश्र, शिक्षिका श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरी म्योरपुर, संस्कृत विद्यालय रॉबर्टसगंज के शिक्षक श्री शेषनाथ तिवारी, श्री सुनील कुमार सिंह जिला संगठन आयुक्त स्काउट सोनभद्र, श्री सैयद अनवर हुसैन जिला प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट सोनभद्र और सुश्री स्नेहा सिंह युवा लीडर गाइड सोनभद्र आदि लोग रहे। इन सभी लोगों ने रवि जी को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। |
DESK : नई गाड़ी खरीदने के बाद अक्सर लोग मंदिर में पूजा करने के लिए जाते हैं. लेकिन तब क्या करें जब पूजा से पहले ही नई चमचमाती गाड़ी में ब्लास्ट हो जाए। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में ऐसी ही एक घटना हुई है, जहां नई चमचमाती बुलेट बाइक मंदिर के बाहर खड़ी थी, अचानक बाइक आग के लपटों में घिर गई और उसमें ब्लास्ट हो गया।
जानकारी के मुताबिक यह मामला आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले का बताया जा रहा है। रविचंद्र इसे मैसूर से चलाकर कासापुरम आंजनेय स्वामी मंदिर पहुंचे थे। बाइक बाहर सड़क किनारे खड़ी थी। वहीं थोड़ी देर पहले ही बाइक में से धुआं निकला और फिर अचानक बाइक ने आग पकड़ ली। आग पकड़ने के साथ ही बाइक से बहुत तेज धमाका हुआ। आसपास खड़े लोग धमाके की आवाज सुनकर घबरा गए।
बताया गया मंदिर के प्रति रविचंद्र की गहरी आस्था है। इस आस्था के कारण वह अपने घर से 387 किलोमीटर तक बिना रूके ही बुलेट लेकर मंदिर पहुंचा था। माना जा रहा है कि इतनी लंबी दूरी तक बाइक चलाने के कारण गाड़ी का इंजन इतना गर्म हो गया कि उसमें आग लग गई और ब्लास्ट हो गया।
बीते दिनों पुणे में ओला का इलेक्ट्रिक स्कूटर जलने का मामला सामने आया था। इसके बाद तमिलनाडु के वेल्लोर में घर में चार्ज हो रहे ओकिनावा इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी। इस घटना में दम घुटने से एक शख्स और उनकी बेटी की मौत हो गई थी।
| DESK : नई गाड़ी खरीदने के बाद अक्सर लोग मंदिर में पूजा करने के लिए जाते हैं. लेकिन तब क्या करें जब पूजा से पहले ही नई चमचमाती गाड़ी में ब्लास्ट हो जाए। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में ऐसी ही एक घटना हुई है, जहां नई चमचमाती बुलेट बाइक मंदिर के बाहर खड़ी थी, अचानक बाइक आग के लपटों में घिर गई और उसमें ब्लास्ट हो गया। जानकारी के मुताबिक यह मामला आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले का बताया जा रहा है। रविचंद्र इसे मैसूर से चलाकर कासापुरम आंजनेय स्वामी मंदिर पहुंचे थे। बाइक बाहर सड़क किनारे खड़ी थी। वहीं थोड़ी देर पहले ही बाइक में से धुआं निकला और फिर अचानक बाइक ने आग पकड़ ली। आग पकड़ने के साथ ही बाइक से बहुत तेज धमाका हुआ। आसपास खड़े लोग धमाके की आवाज सुनकर घबरा गए। बताया गया मंदिर के प्रति रविचंद्र की गहरी आस्था है। इस आस्था के कारण वह अपने घर से तीन सौ सत्तासी किलोग्राममीटर तक बिना रूके ही बुलेट लेकर मंदिर पहुंचा था। माना जा रहा है कि इतनी लंबी दूरी तक बाइक चलाने के कारण गाड़ी का इंजन इतना गर्म हो गया कि उसमें आग लग गई और ब्लास्ट हो गया। बीते दिनों पुणे में ओला का इलेक्ट्रिक स्कूटर जलने का मामला सामने आया था। इसके बाद तमिलनाडु के वेल्लोर में घर में चार्ज हो रहे ओकिनावा इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी। इस घटना में दम घुटने से एक शख्स और उनकी बेटी की मौत हो गई थी। |
कर दी। गांधीजी ने स्वयं इसके लिए खेद प्रकाशित करके मजदूरों को वापस काम पर भेज दिया । यद्यपि समझौता-भङ्ग दोनों ओर से हुआ था, तो भी मिल मालिक कुछ सुनते ही न थे। गांधीजी ने मजदूरों को कुछ निश्चित कार्य करने की सलाह देने से पहले खुद इस समस्या का गहराई के साथ अध्ययन किया । व्यापारिक अवस्था, उससे मिलों को होने वाले लाभ, जीवन की आवश्यक वस्तुओं की मंहगाई और दूसरी ओर मिलों में उत्पत्ति खर्च की वृद्धि - ये उनकी जांच के मुख्य विषय थे। इस जांच के पश्चात् जिस परिणाम पर गांधीजी पहुंचे वह यह था कि मजदूरों की मजदूरी में कम-से-कम ३५ फीसदी की वृद्धि की जाय । मजदूरों की मांग यद्यपि इससे बहुत अधिक थी, तो भी वे उसे स्वीकार कर लेने पर राजी कर लिये गये। इसके बाद उन्हें इस बात की शिक्षा दी गई कि अपनी मांग को सदैव कम-से-कम और जरूरी श्रावश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित करके पेश करना चाहिए । यह सु-परम्परा वहां आजतक बराबर चली आ रही है ।
इस प्रकार जो मांग तैयार की गई थी उसे मिल मालिकों के सामने रक्खा गया। उन्होंने २० फीसदी से अधिक देने से कतई इन्कार कर दिया और कह दिया कि २२ फरवरी १६१८ से मिलों में ताले डाल दिये जायंगे । इस पर गांधीजी ने सारे मजदूरों की एक सभा बुलाई और एक पेड़ के नीचे, जो अभीतक पवित्र समझा जाता है, उनसे प्रतिज्ञा कराई, कि वे तबतक काम पर नहीं लौटेंगे जबतक कि उनकी पूरी मांग स्वीकार नहीं हो जाती। प्रतिज्ञा में यह बात भी थी कि वे लोग जबतक मिलों में ताले पड़े रहेंगे तबतक किसी हालत में शांति-भङ्ग न करेंगे। यह प्रतिज्ञा कराने के बाद मजदूरों में शिक्षा देने का कार्य बड़े जोर-शोर के साथ प्रारम्भ किया गया । श्रीमती अनसूयाबेन दरवाजे दरवाजे जाती थीं। श्री शंकरलाल बैंकर तथा छगनलाल गांधी भी इसी कार्य में जुट पड़े थे । नोटिस बांटे जाते थे, रोज स्थान-स्थान पर विराट सार्वजनिक सभायें की जाती थीं। इन नोटिसों को गांधीजी स्वयं लिखते थे। उनमें वह मजदूरों को बड़ी आसान भाषा में यह समझाते थे कि जिस संघर्ष में वे लोग जुटे हुए हैं वह केवल श्रौद्योगिक ही नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक और नैतिक संघर्ष भी है जिसमें उनका प्रत्येक दृष्टि से उत्थान होगा और साथ-ही-साथ मजदूरी में भी वृद्धि हो जायगी। यह संघर्ष एक पखवाड़े तक बराबर चलता रहा। लेकिन मजदूर लोग इस बात के आदी नहीं थे कि वे अधिक समय तक अपनी मजदूरी का घाटा सह सके, इसलिए उनमें कमजोरी के लक्षण प्रतीत होने लगे ! उन लोगों में जो नासमझ थे वे तो यहां तक बड़बड़ाने लगे कि गांधीजी के लिए यह बात ठीक हो सकती है कि वह हमें इस बात का उपदेश दें कि हम लोग अपनी प्रतिज्ञाओं पर डटे रहें, लेकिन हम लोगों के लिए, जिनके बाल-बच्चों के भूखों मरने की नौबत आ गई है, यह इतना आसान नहीं है। यह गांधीजी के लिए एक ईश्वरीय चेतावनी सिद्ध हुई। उन्होंने शाम की सभा में यह घोषित कर दिया कि जबतक मजदूर लोग अपनी प्रतिका पर स्टे रहने की शक्ति नहीं पा जाते तनतक न तो वह किसी सवारी में ही चलेंगे और न भोजन ही करेंगे। यह समाचार विद्युत गति से सारे भारतवर्ष में फैल गया । यह श्रमरणअनशन था । यद्यपि उसमें जिस भाषा का प्रयोग किया गया था वह भिन्न थी, लेकिन उन्होंने अपने जीवन की बाजी उस महान् नैतिक कार्य के लिए लगा दी थी, जिसमें कि मजदूरों का एक विशाल जन समूह प्रतिज्ञायड था। नकवाचीनी करने वालों ने इस पर युवं आलोचनायें कीं, कि यह मिल-मालिकी पर पेजा दबाव डालना है । गाधीजी ने इस बात को स्वीकार किया कि हां, मेरे अपवासकार उन पर पड़े बिना नहीं रह सकता और इस हद तक वह बलात्कार ही हो सकता है। लेकिन उपवास का यह अप्रत्यक्ष प्रभाव मात्र ही होगा। क्योंकि उसका मुख्य उद्देश
तो मजदूरों को अपनी प्रतिज्ञा पर, जो कि उन्होंने बड़ी सच्चाई के साथ की थी, डटे रहने के लिए बल प्रदान करना ही है । गांधीजी प्रतिज्ञा की पवित्रता और ईमानदारी के साथ उसे पालन करने की बात से जितने प्रभावित होते हैं उतने और किसी से नहीं। फिर चाहे वह कितनी ही छोटी क्यो न हो । जितनी प्रतिज्ञा - भंग करने से उन्हें पीड़ा पहुंचती है, उतनी और किसी बात से नहीं । गजदूरों ने उन्हें बहुतेग समझाया, पर उनका निर्णय अटल था। इस पर गांधीजी ने उनसे अपील की कि वे अपना समय व्यर्थ ही नष्ट न करें, और उन्हें जो कोई भी काम मिल जाय उस पर ईमानदारी के साथ अपनी रोटी पैदा करें। गांधीजी के लिए यह बहुत श्रासान था कि वह इन मजदूरों की आर्थिक सहायता के लिए धन की अपील करते, जिससे काफी धन अवश्य था जाता, लेकिन इस तरह भिक्षान्न देना उन्हें पसन्द न था । उनका कहना था कि मजदूरों की सारी तपस्या निष्फल हो जायगी और उसका सारा मूल्य नला जायगा, यदि उन्हें इस प्रकार भिक्षा द्वारा सहायता दी जाय । सत्याग्रहाश्रम साबरमती की भूमि पर सैकड़ों मजदूरों को काम मिल भी गया, जहां कि इमारतें बन रही थीं। वे श्राश्रम के सदस्यों के साथ बड़े आनन्द से काम करने लगे। इनमें सबसे आगे श्रीमती अनसूया चेन थीं, जो मिट्टी, ईद और चूना ढो रही थीं। इसका बड़ा ही नैतिक प्रभाव पड़ा । इससे मजदूर अपनी प्रतिज्ञा पर और भी दृढ़ हो गए, और मिल-मालिकों के भी दिल दहल गए। देश के विभिन्न भागों से नेताओं ने उनसे अपीलें कीं। अपील करने वाले नेताओं में डा० बेसेण्ट का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने मिल-मालिकों को यह तार भेजा था"भारत के नाम पर मान जाओ और गांधीजी के प्राण बचाओ।" उपवास के चौथे दिन एक ऐसा रास्ता हाथ आया जिससे मजदूरों की भी प्रतिज्ञा - भङ्ग नहीं होती थी और इधर मिल मालिक भी अपनी प्रतिष्ठा कायम रखते हुए उनके साथ न्याय कर सकते थे। दोनों ने पंच- फैमला मानना स्वीकार कर लिया। पंचों ने मजदूरों की मांग के अनुसार ही ३५ फीसदी बढ़ोतरी कर देने का निर्णय किया ।
भजदूरों की समस्या के शान्तिपूर्ण ढङ्ग से सुलक जाने के कारण कांग्रेसी नेताओं और मज में एक सुदृढ़ सम्बन्ध स्थापित हो गया। इसीके फलस्वरूप मजदूरों का 'मजूर-महाजन' नामक एक ऐसा स्थायी संगठन हो गया जो आज १५ वर्ष से श्रीमती छान और श्री शंकरलाल बैंकर की देख-रेख में प्रगति के साथ काम करता हुआ चला आ रहा है। ये दोनों कांग्रेस के प्रमुख व्यक्ति हैं । इस संस्था के बदौलत मजदूर अब तक कितने ही कठिन तूफानों को पार कर गये हैं और अहमदाबाद नगर को बड़े-बड़े श्रौद्योगिक संकटों से बचाया है। यहां के मजदूर बहुत ही सुसंगठित हैं। 'मजूर महाजन' के प्रधान मन्त्री लाला गुलजारीलाल की देख रेख में उसके कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें जो सुन्दर शिक्षा दी जा रही है वह ऐसी है कि जिसके द्वारा मजदूरों ने समय पड़ने पर ठोस और व्यापक सार्वजनिक सेवायें की हैं। गांधीजी के परामर्श से 'मजूर महाजन' ने ११२७ के बाढ़ पीड़ितों की अच्छी सहायता की थी। १९३० के सत्याग्रह युद्ध के जमाने में इन मजदूरों ने बड़े जोरों से नशा-निषेध का कार्य किया । कांग्रेस के आदेशानुसार कोई २०० स्वयंसेवक इन लोगों में से पिकेटिंग के लिए आगे आये और उनमें से १६२ जेल गये। उसके बाद उनमें और मिलमालिकों में बड़ा सा झगड़ा खड़ा होगया था। लेकिन उनके भारी अनुशासन की प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जा सकता कि उन्होंने १६ महीने तक, अब तक गांधी जी पंच फैसले की बातचीत करते रहे, बराबर शान्ति रक्खी संसार-भर में श्रमदाबाद का ही यह ऐसा मजदूर संघ है जिसने सत्य की प्रतिज्ञा की हुई है और जिसका उद्देश है कपड़े के उद्योग का राष्ट्रीकरण इसके
कांग्रेस का इतिहास :
भाग ३
लगभग ३० हजार चन्दा देने वाले सदस्य हैं। इसके पास
१६३४ में लगभग चार हजार शिकायतें
आईं, जिनमें इसे ८० की सदी सफलता प्राप्त हुई । ३६ हड़वाले कराई, जिनमें २३ मजदूरों के पक्ष में तय हुई । 'मजूर महाजन' ने १,१८५ स्त्रियों के लिए 'जापे का लाभ प्राप्त किया, जो २६ हजार रुपये के करीब था । १८,०७४) दुर्घटना के हर्जाने और १६४ मजदूरों को ६, ८५६ ) विक्टमाइजेशन वेनिफिट' दिलवाया। सेवा के मुख्य कार्यों में डाक्टरी सहायता, शिक्षा, व्यायाम और खेल-कूद व मनोरंजन का प्रबन्ध म्युनिसिपैलिटी से सुविधायें प्राप्त कराना, नशे से बचाना तथा सामाजिक सुधार करना आदि हैं। | कर दी। गांधीजी ने स्वयं इसके लिए खेद प्रकाशित करके मजदूरों को वापस काम पर भेज दिया । यद्यपि समझौता-भङ्ग दोनों ओर से हुआ था, तो भी मिल मालिक कुछ सुनते ही न थे। गांधीजी ने मजदूरों को कुछ निश्चित कार्य करने की सलाह देने से पहले खुद इस समस्या का गहराई के साथ अध्ययन किया । व्यापारिक अवस्था, उससे मिलों को होने वाले लाभ, जीवन की आवश्यक वस्तुओं की मंहगाई और दूसरी ओर मिलों में उत्पत्ति खर्च की वृद्धि - ये उनकी जांच के मुख्य विषय थे। इस जांच के पश्चात् जिस परिणाम पर गांधीजी पहुंचे वह यह था कि मजदूरों की मजदूरी में कम-से-कम पैंतीस फीसदी की वृद्धि की जाय । मजदूरों की मांग यद्यपि इससे बहुत अधिक थी, तो भी वे उसे स्वीकार कर लेने पर राजी कर लिये गये। इसके बाद उन्हें इस बात की शिक्षा दी गई कि अपनी मांग को सदैव कम-से-कम और जरूरी श्रावश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित करके पेश करना चाहिए । यह सु-परम्परा वहां आजतक बराबर चली आ रही है । इस प्रकार जो मांग तैयार की गई थी उसे मिल मालिकों के सामने रक्खा गया। उन्होंने बीस फीसदी से अधिक देने से कतई इन्कार कर दिया और कह दिया कि बाईस फरवरी एक हज़ार छः सौ अट्ठारह से मिलों में ताले डाल दिये जायंगे । इस पर गांधीजी ने सारे मजदूरों की एक सभा बुलाई और एक पेड़ के नीचे, जो अभीतक पवित्र समझा जाता है, उनसे प्रतिज्ञा कराई, कि वे तबतक काम पर नहीं लौटेंगे जबतक कि उनकी पूरी मांग स्वीकार नहीं हो जाती। प्रतिज्ञा में यह बात भी थी कि वे लोग जबतक मिलों में ताले पड़े रहेंगे तबतक किसी हालत में शांति-भङ्ग न करेंगे। यह प्रतिज्ञा कराने के बाद मजदूरों में शिक्षा देने का कार्य बड़े जोर-शोर के साथ प्रारम्भ किया गया । श्रीमती अनसूयाबेन दरवाजे दरवाजे जाती थीं। श्री शंकरलाल बैंकर तथा छगनलाल गांधी भी इसी कार्य में जुट पड़े थे । नोटिस बांटे जाते थे, रोज स्थान-स्थान पर विराट सार्वजनिक सभायें की जाती थीं। इन नोटिसों को गांधीजी स्वयं लिखते थे। उनमें वह मजदूरों को बड़ी आसान भाषा में यह समझाते थे कि जिस संघर्ष में वे लोग जुटे हुए हैं वह केवल श्रौद्योगिक ही नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक और नैतिक संघर्ष भी है जिसमें उनका प्रत्येक दृष्टि से उत्थान होगा और साथ-ही-साथ मजदूरी में भी वृद्धि हो जायगी। यह संघर्ष एक पखवाड़े तक बराबर चलता रहा। लेकिन मजदूर लोग इस बात के आदी नहीं थे कि वे अधिक समय तक अपनी मजदूरी का घाटा सह सके, इसलिए उनमें कमजोरी के लक्षण प्रतीत होने लगे ! उन लोगों में जो नासमझ थे वे तो यहां तक बड़बड़ाने लगे कि गांधीजी के लिए यह बात ठीक हो सकती है कि वह हमें इस बात का उपदेश दें कि हम लोग अपनी प्रतिज्ञाओं पर डटे रहें, लेकिन हम लोगों के लिए, जिनके बाल-बच्चों के भूखों मरने की नौबत आ गई है, यह इतना आसान नहीं है। यह गांधीजी के लिए एक ईश्वरीय चेतावनी सिद्ध हुई। उन्होंने शाम की सभा में यह घोषित कर दिया कि जबतक मजदूर लोग अपनी प्रतिका पर स्टे रहने की शक्ति नहीं पा जाते तनतक न तो वह किसी सवारी में ही चलेंगे और न भोजन ही करेंगे। यह समाचार विद्युत गति से सारे भारतवर्ष में फैल गया । यह श्रमरणअनशन था । यद्यपि उसमें जिस भाषा का प्रयोग किया गया था वह भिन्न थी, लेकिन उन्होंने अपने जीवन की बाजी उस महान् नैतिक कार्य के लिए लगा दी थी, जिसमें कि मजदूरों का एक विशाल जन समूह प्रतिज्ञायड था। नकवाचीनी करने वालों ने इस पर युवं आलोचनायें कीं, कि यह मिल-मालिकी पर पेजा दबाव डालना है । गाधीजी ने इस बात को स्वीकार किया कि हां, मेरे अपवासकार उन पर पड़े बिना नहीं रह सकता और इस हद तक वह बलात्कार ही हो सकता है। लेकिन उपवास का यह अप्रत्यक्ष प्रभाव मात्र ही होगा। क्योंकि उसका मुख्य उद्देश तो मजदूरों को अपनी प्रतिज्ञा पर, जो कि उन्होंने बड़ी सच्चाई के साथ की थी, डटे रहने के लिए बल प्रदान करना ही है । गांधीजी प्रतिज्ञा की पवित्रता और ईमानदारी के साथ उसे पालन करने की बात से जितने प्रभावित होते हैं उतने और किसी से नहीं। फिर चाहे वह कितनी ही छोटी क्यो न हो । जितनी प्रतिज्ञा - भंग करने से उन्हें पीड़ा पहुंचती है, उतनी और किसी बात से नहीं । गजदूरों ने उन्हें बहुतेग समझाया, पर उनका निर्णय अटल था। इस पर गांधीजी ने उनसे अपील की कि वे अपना समय व्यर्थ ही नष्ट न करें, और उन्हें जो कोई भी काम मिल जाय उस पर ईमानदारी के साथ अपनी रोटी पैदा करें। गांधीजी के लिए यह बहुत श्रासान था कि वह इन मजदूरों की आर्थिक सहायता के लिए धन की अपील करते, जिससे काफी धन अवश्य था जाता, लेकिन इस तरह भिक्षान्न देना उन्हें पसन्द न था । उनका कहना था कि मजदूरों की सारी तपस्या निष्फल हो जायगी और उसका सारा मूल्य नला जायगा, यदि उन्हें इस प्रकार भिक्षा द्वारा सहायता दी जाय । सत्याग्रहाश्रम साबरमती की भूमि पर सैकड़ों मजदूरों को काम मिल भी गया, जहां कि इमारतें बन रही थीं। वे श्राश्रम के सदस्यों के साथ बड़े आनन्द से काम करने लगे। इनमें सबसे आगे श्रीमती अनसूया चेन थीं, जो मिट्टी, ईद और चूना ढो रही थीं। इसका बड़ा ही नैतिक प्रभाव पड़ा । इससे मजदूर अपनी प्रतिज्ञा पर और भी दृढ़ हो गए, और मिल-मालिकों के भी दिल दहल गए। देश के विभिन्न भागों से नेताओं ने उनसे अपीलें कीं। अपील करने वाले नेताओं में डाशून्य बेसेण्ट का नाम उल्लेखनीय है, जिन्होंने मिल-मालिकों को यह तार भेजा था"भारत के नाम पर मान जाओ और गांधीजी के प्राण बचाओ।" उपवास के चौथे दिन एक ऐसा रास्ता हाथ आया जिससे मजदूरों की भी प्रतिज्ञा - भङ्ग नहीं होती थी और इधर मिल मालिक भी अपनी प्रतिष्ठा कायम रखते हुए उनके साथ न्याय कर सकते थे। दोनों ने पंच- फैमला मानना स्वीकार कर लिया। पंचों ने मजदूरों की मांग के अनुसार ही पैंतीस फीसदी बढ़ोतरी कर देने का निर्णय किया । भजदूरों की समस्या के शान्तिपूर्ण ढङ्ग से सुलक जाने के कारण कांग्रेसी नेताओं और मज में एक सुदृढ़ सम्बन्ध स्थापित हो गया। इसीके फलस्वरूप मजदूरों का 'मजूर-महाजन' नामक एक ऐसा स्थायी संगठन हो गया जो आज पंद्रह वर्ष से श्रीमती छान और श्री शंकरलाल बैंकर की देख-रेख में प्रगति के साथ काम करता हुआ चला आ रहा है। ये दोनों कांग्रेस के प्रमुख व्यक्ति हैं । इस संस्था के बदौलत मजदूर अब तक कितने ही कठिन तूफानों को पार कर गये हैं और अहमदाबाद नगर को बड़े-बड़े श्रौद्योगिक संकटों से बचाया है। यहां के मजदूर बहुत ही सुसंगठित हैं। 'मजूर महाजन' के प्रधान मन्त्री लाला गुलजारीलाल की देख रेख में उसके कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें जो सुन्दर शिक्षा दी जा रही है वह ऐसी है कि जिसके द्वारा मजदूरों ने समय पड़ने पर ठोस और व्यापक सार्वजनिक सेवायें की हैं। गांधीजी के परामर्श से 'मजूर महाजन' ने एक हज़ार एक सौ सत्ताईस के बाढ़ पीड़ितों की अच्छी सहायता की थी। एक हज़ार नौ सौ तीस के सत्याग्रह युद्ध के जमाने में इन मजदूरों ने बड़े जोरों से नशा-निषेध का कार्य किया । कांग्रेस के आदेशानुसार कोई दो सौ स्वयंसेवक इन लोगों में से पिकेटिंग के लिए आगे आये और उनमें से एक सौ बासठ जेल गये। उसके बाद उनमें और मिलमालिकों में बड़ा सा झगड़ा खड़ा होगया था। लेकिन उनके भारी अनुशासन की प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जा सकता कि उन्होंने सोलह महीने तक, अब तक गांधी जी पंच फैसले की बातचीत करते रहे, बराबर शान्ति रक्खी संसार-भर में श्रमदाबाद का ही यह ऐसा मजदूर संघ है जिसने सत्य की प्रतिज्ञा की हुई है और जिसका उद्देश है कपड़े के उद्योग का राष्ट्रीकरण इसके कांग्रेस का इतिहास : भाग तीन लगभग तीस हजार चन्दा देने वाले सदस्य हैं। इसके पास एक हज़ार छः सौ चौंतीस में लगभग चार हजार शिकायतें आईं, जिनमें इसे अस्सी की सदी सफलता प्राप्त हुई । छत्तीस हड़वाले कराई, जिनमें तेईस मजदूरों के पक्ष में तय हुई । 'मजूर महाजन' ने एक,एक सौ पचासी स्त्रियों के लिए 'जापे का लाभ प्राप्त किया, जो छब्बीस हजार रुपये के करीब था । अट्ठारह,चौहत्तर) दुर्घटना के हर्जाने और एक सौ चौंसठ मजदूरों को छः, आठ सौ छप्पन ) विक्टमाइजेशन वेनिफिट' दिलवाया। सेवा के मुख्य कार्यों में डाक्टरी सहायता, शिक्षा, व्यायाम और खेल-कूद व मनोरंजन का प्रबन्ध म्युनिसिपैलिटी से सुविधायें प्राप्त कराना, नशे से बचाना तथा सामाजिक सुधार करना आदि हैं। |
अपने फैशन और अजब-गजब स्टाइल से इंटरनेट पर सेंसेशन बन चुकी urfi javed आए दिन लाइमलाइट में रहती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस का एक नया लुक सामने आया है, जिसे देखकर लोगों की नींद उड़ गई हैं।
उर्फी जावेद की ये नई ड्रेस बच्चों के साथ-साथ कई सेलेब्स को भी खासा पसंद आ रही है।
अपनी फैशन सेंस से इंटरनेट पर धमाल मचाने वाली उर्फी जावेद ने इस बार ऐसी ड्रेसी पहनी है कि वह खाना-पीना तो दूर चाय भी नहीं पी पा रही हैं।
मुंबई के एक रेस्तरां ने एक्ट्रेस को एंट्री देने से मना कर दिया, जिसके कारण एक्ट्रेस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रेस्तरां को खरी-खोटी सुनाई।
इस वीडियो में हमेशा की तरह उर्फी कपड़ो की जगह चीजों में बदन को ढकती नज़र आ रहीं हैं। जी हां इस बार उर्फी को गजरे से बनी ड्रेस पहनकर बोल्ड पोज देते हुए देखा जा सकता है।
टीवी की संस्कारी बहू "अनुपमा" से मिली फैशन सेंसेशन उर्फी जावेद।
विजय वर्मा का यह लेटेस्ट फोटोशूट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
उर्फी जावेद ने मुंबई में चल रहे लैक्मे फैशन शो में हिस्सा लिया। वह काफी बोल्ड ड्रेस पहनकर पहुंची थी। इसे लेकर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है।
सुर्खियों में रहने वाली उर्फी जावेद को लेकर खबर थी कि वे "खतरों के खिलाड़ी 13" में नजर आएंगी, हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक उर्फी इस स्टंट शो का हिस्सा नहीं हैं।
खबरों के अनुसार शिव ठाकरे, सुम्बुल तौकीर खान, प्रियंका चाहर चौधरी और अंकित गुप्ता खतरों के खिलाड़ी 13 में भाग ले रहे हैं।
हाल ही में, एक्ट्रेस उर्फी जावेद सेट पर एक शख्स के साथ लड़ते हुए देखी गईं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें उर्फी को शख्स पर गुस्सा निकालते हुए देखा गया।
हमेशा अपने ड्रेसिंग सेंस और बेबाकी से जानी जाने वाली उर्फी जावेद, जो इनदिनों 'स्प्लिट्सविला 14' में भी जमकर मसाला डाल रही है का एक विडियो सामने आया है।
अब उर्फी ने 'बेशरम रंग' में भगवा रंग पहनकर हंगामा मचा दिया है।
| अपने फैशन और अजब-गजब स्टाइल से इंटरनेट पर सेंसेशन बन चुकी urfi javed आए दिन लाइमलाइट में रहती हैं। हाल ही में एक्ट्रेस का एक नया लुक सामने आया है, जिसे देखकर लोगों की नींद उड़ गई हैं। उर्फी जावेद की ये नई ड्रेस बच्चों के साथ-साथ कई सेलेब्स को भी खासा पसंद आ रही है। अपनी फैशन सेंस से इंटरनेट पर धमाल मचाने वाली उर्फी जावेद ने इस बार ऐसी ड्रेसी पहनी है कि वह खाना-पीना तो दूर चाय भी नहीं पी पा रही हैं। मुंबई के एक रेस्तरां ने एक्ट्रेस को एंट्री देने से मना कर दिया, जिसके कारण एक्ट्रेस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रेस्तरां को खरी-खोटी सुनाई। इस वीडियो में हमेशा की तरह उर्फी कपड़ो की जगह चीजों में बदन को ढकती नज़र आ रहीं हैं। जी हां इस बार उर्फी को गजरे से बनी ड्रेस पहनकर बोल्ड पोज देते हुए देखा जा सकता है। टीवी की संस्कारी बहू "अनुपमा" से मिली फैशन सेंसेशन उर्फी जावेद। विजय वर्मा का यह लेटेस्ट फोटोशूट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। उर्फी जावेद ने मुंबई में चल रहे लैक्मे फैशन शो में हिस्सा लिया। वह काफी बोल्ड ड्रेस पहनकर पहुंची थी। इसे लेकर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। सुर्खियों में रहने वाली उर्फी जावेद को लेकर खबर थी कि वे "खतरों के खिलाड़ी तेरह" में नजर आएंगी, हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक उर्फी इस स्टंट शो का हिस्सा नहीं हैं। खबरों के अनुसार शिव ठाकरे, सुम्बुल तौकीर खान, प्रियंका चाहर चौधरी और अंकित गुप्ता खतरों के खिलाड़ी तेरह में भाग ले रहे हैं। हाल ही में, एक्ट्रेस उर्फी जावेद सेट पर एक शख्स के साथ लड़ते हुए देखी गईं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें उर्फी को शख्स पर गुस्सा निकालते हुए देखा गया। हमेशा अपने ड्रेसिंग सेंस और बेबाकी से जानी जाने वाली उर्फी जावेद, जो इनदिनों 'स्प्लिट्सविला चौदह' में भी जमकर मसाला डाल रही है का एक विडियो सामने आया है। अब उर्फी ने 'बेशरम रंग' में भगवा रंग पहनकर हंगामा मचा दिया है। |
जिले के एक गांव में एक विवाहिता का शव घर में लटकता मिलने से हड़कंप मच गया। लड़की के परिजनों ने मृतका के ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। पूरी खबर. .
महराजगंजः पुरंदरपुर थाना के अगया गांव में एक घर में महिला का शव लटकता मिला, जिससे वहां हड़कंप मच गया। महिला के परिजनों ने मृतका के ससुराल वालों पर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक वीरेंद्र प्रसाद की पुत्री रिंकी का विवाह 5 साल पहले संदीप पुत्र जुगल किशोर के साथ हुआ था। मंगलवार को रिंकी का शव उसके ससुराल में कड़ी से लटकता मिला। सूचना के बाद पहुंचे रिंकी के परिजनों ने लड़की के सुसराल वालों पर हत्या करने और हत्या के मामले को फांसी का रूप देने का आरोप लगाया है।
लड़की के पिता वीरेंद्र प्रसाद द्वारा पुलिस को दी गयी तहरीर में कहा गया है लड़की का पति संदीप, उसका पिता जुगल किशोर और लड़की का देवर मतृका को दहेज के लिये प्रताड़ित करते थे। तहरीर में ससुराल पक्ष वालों पर उसकी हत्या कर मामले को फांसी का रंग देने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस ने मृतक महिला का शव बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
| जिले के एक गांव में एक विवाहिता का शव घर में लटकता मिलने से हड़कंप मच गया। लड़की के परिजनों ने मृतका के ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। पूरी खबर. . महराजगंजः पुरंदरपुर थाना के अगया गांव में एक घर में महिला का शव लटकता मिला, जिससे वहां हड़कंप मच गया। महिला के परिजनों ने मृतका के ससुराल वालों पर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक वीरेंद्र प्रसाद की पुत्री रिंकी का विवाह पाँच साल पहले संदीप पुत्र जुगल किशोर के साथ हुआ था। मंगलवार को रिंकी का शव उसके ससुराल में कड़ी से लटकता मिला। सूचना के बाद पहुंचे रिंकी के परिजनों ने लड़की के सुसराल वालों पर हत्या करने और हत्या के मामले को फांसी का रूप देने का आरोप लगाया है। लड़की के पिता वीरेंद्र प्रसाद द्वारा पुलिस को दी गयी तहरीर में कहा गया है लड़की का पति संदीप, उसका पिता जुगल किशोर और लड़की का देवर मतृका को दहेज के लिये प्रताड़ित करते थे। तहरीर में ससुराल पक्ष वालों पर उसकी हत्या कर मामले को फांसी का रंग देने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मृतक महिला का शव बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है। |
शिवा यादव, सुकमा. सुकमा जिले के सीमा क्षेत्र में गुरुवार को हुए मुठभेड़ में एक नक्सली ढेर हो गया है. मारे गए नक्सली का शव बरामद हो गया है. जिसकी पहचान मिलीशिया डिप्टी कमांडर कवासी देवा के रुप में की गई है. जबकि दो अन्य नक्सली जंगल का सहारा लेकर भागने में कामयाब हो गए. चांदामेटा पहाड़ी में मुठभेड़ हुई थी.
जिला पुलिस ने पुष्टि करते हुए बताया कि गुरुवार शाम को डीआरजी पुलिस चांदामेटा की ओर जा रही थी. तभी नक्सलियों ने डीआरजी पुलिस पार्टी को देख फायरिंग करनी शुरु कर दी. जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की. जिसमें कवासी देवा मारा गया, जबकि लक्ष्मण और पांडू भागने में कामयाब रहे. पुलिस ने मिलीशिया डिप्टी कमांडर कवासी देवा का शव बरामद कर लिया है.
पुलिस के मुताबिक घटना स्थल से नक्सली शव के अलावा एक भरमार, बम बनाने का सामान, तोंगपाल शहर का नक्शा भी बरामद किया गया है. साथ ही कई दैनिक उपयोगी सामाग्री बरामद किया गया है.
| शिवा यादव, सुकमा. सुकमा जिले के सीमा क्षेत्र में गुरुवार को हुए मुठभेड़ में एक नक्सली ढेर हो गया है. मारे गए नक्सली का शव बरामद हो गया है. जिसकी पहचान मिलीशिया डिप्टी कमांडर कवासी देवा के रुप में की गई है. जबकि दो अन्य नक्सली जंगल का सहारा लेकर भागने में कामयाब हो गए. चांदामेटा पहाड़ी में मुठभेड़ हुई थी. जिला पुलिस ने पुष्टि करते हुए बताया कि गुरुवार शाम को डीआरजी पुलिस चांदामेटा की ओर जा रही थी. तभी नक्सलियों ने डीआरजी पुलिस पार्टी को देख फायरिंग करनी शुरु कर दी. जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की. जिसमें कवासी देवा मारा गया, जबकि लक्ष्मण और पांडू भागने में कामयाब रहे. पुलिस ने मिलीशिया डिप्टी कमांडर कवासी देवा का शव बरामद कर लिया है. पुलिस के मुताबिक घटना स्थल से नक्सली शव के अलावा एक भरमार, बम बनाने का सामान, तोंगपाल शहर का नक्शा भी बरामद किया गया है. साथ ही कई दैनिक उपयोगी सामाग्री बरामद किया गया है. |
क्षेत्र के बनकटिया गांव निवासी राम दुलारे का 10 वर्षीय बेटा दिव्यांशु मानसिक रूप से बीमार रहता था। मंगलवार को करीब 10 बजे वह घर की दूसरी मंजिल पर गया और टीन शेड में दुपट्टे के सहारे फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मां सीता देवी किसी काम से जब छत पर गई तो देखा उसका शव फंदे से लटक रहा था। मां की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों के मुताबिक मृतक मानसिक बीमारी से जूझ रहा था। बिना पोस्टमार्टम कराए उसके शव का गांव में ही अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
| क्षेत्र के बनकटिया गांव निवासी राम दुलारे का दस वर्षीय बेटा दिव्यांशु मानसिक रूप से बीमार रहता था। मंगलवार को करीब दस बजे वह घर की दूसरी मंजिल पर गया और टीन शेड में दुपट्टे के सहारे फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मां सीता देवी किसी काम से जब छत पर गई तो देखा उसका शव फंदे से लटक रहा था। मां की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों के मुताबिक मृतक मानसिक बीमारी से जूझ रहा था। बिना पोस्टमार्टम कराए उसके शव का गांव में ही अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। |
वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अशोक खेमका को राहत देते हुए हरियाणा की भाजपा सरकार ने उनके खिलाफ आरोपपत्र हटा दिया जिसमें पिछली कांग्रेस सरकार ने उन पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया था। खेमका ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के स्वामित्व वाली एक कंपनी और रियल्टी कंपनी डीएलएफ के बीच एक भूमि सौदे का दाखिल खारिज रद्द कर दिया था। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यहां कहा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के निर्देश पर 1991 बैच के आइएएस अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र हटाया गया।
सूत्रों ने कहा कि मुख्य सचिव के कार्यालय ने कल आरोपपत्र हटाने का आदेश जारी किया और खेमका के पास भी संबंधित पत्र भेजा गया है। पिछली हुड्डा सरकार ने खेमका के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। हुड्डा सरकार ने खेमका पर तीन साल पहले वाड्रा की स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ के बीच भूमि सौदे का दाखिल खारिज रद्द कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया था। इसमें कुछ दूसरे आरोप भी थे।
| वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अशोक खेमका को राहत देते हुए हरियाणा की भाजपा सरकार ने उनके खिलाफ आरोपपत्र हटा दिया जिसमें पिछली कांग्रेस सरकार ने उन पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया था। खेमका ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के स्वामित्व वाली एक कंपनी और रियल्टी कंपनी डीएलएफ के बीच एक भूमि सौदे का दाखिल खारिज रद्द कर दिया था। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यहां कहा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के निर्देश पर एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे बैच के आइएएस अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र हटाया गया। सूत्रों ने कहा कि मुख्य सचिव के कार्यालय ने कल आरोपपत्र हटाने का आदेश जारी किया और खेमका के पास भी संबंधित पत्र भेजा गया है। पिछली हुड्डा सरकार ने खेमका के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। हुड्डा सरकार ने खेमका पर तीन साल पहले वाड्रा की स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ के बीच भूमि सौदे का दाखिल खारिज रद्द कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया था। इसमें कुछ दूसरे आरोप भी थे। |
बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजकुमार सिंह ने आज गुरुग्राम, हरियाणा में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) के चौथे स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की।
समारोह के दौरान वैज्ञानिकों, अनुसंधान कर्मियों और उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए श्री राजकुमार सिंह ने कहा कि एनआईएसई को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी संस्थान बनने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान को सौर ऊर्जा में अनुसंधान और विकास के लिए क्षेत्रीय केंद्र भी स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
श्री राजकुमार सिंह ने कहा कि अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिए कोष की कोई कमी नहीं है। उन्होंने एनआईएसई के द्वारा विकसित अभिनव परियोजनाओं के लिए वैज्ञानिकों की सराहना की।
मंत्री महोदय ने उपभोक्ता सेवा प्रकोष्ठ के लिए ऑटोमेशन प्रणाली की शुरुआत की। उन्हें संस्थान द्वारा प्रकाशित सौर ऊर्जा पर चार पुस्तकों का सेट भी भेंट किया गया। उन्होंने एनआईएसई द्वारा सौर ऊर्जा पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता स्कूली बच्चों को पुरस्कार भी प्रदान किए। इन प्रतियोगिताओं को एनआईएसई द्वारा आयोजित और गुरुग्राम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल द्वारा संचालित किया गया था। इसका आयोजन अक्टूबर, 2017 में हुआ था।
| बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजकुमार सिंह ने आज गुरुग्राम, हरियाणा में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के चौथे स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की। समारोह के दौरान वैज्ञानिकों, अनुसंधान कर्मियों और उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए श्री राजकुमार सिंह ने कहा कि एनआईएसई को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी संस्थान बनने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान को सौर ऊर्जा में अनुसंधान और विकास के लिए क्षेत्रीय केंद्र भी स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। श्री राजकुमार सिंह ने कहा कि अनुसंधान और विकास गतिविधियों के लिए कोष की कोई कमी नहीं है। उन्होंने एनआईएसई के द्वारा विकसित अभिनव परियोजनाओं के लिए वैज्ञानिकों की सराहना की। मंत्री महोदय ने उपभोक्ता सेवा प्रकोष्ठ के लिए ऑटोमेशन प्रणाली की शुरुआत की। उन्हें संस्थान द्वारा प्रकाशित सौर ऊर्जा पर चार पुस्तकों का सेट भी भेंट किया गया। उन्होंने एनआईएसई द्वारा सौर ऊर्जा पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता स्कूली बच्चों को पुरस्कार भी प्रदान किए। इन प्रतियोगिताओं को एनआईएसई द्वारा आयोजित और गुरुग्राम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल द्वारा संचालित किया गया था। इसका आयोजन अक्टूबर, दो हज़ार सत्रह में हुआ था। |
सोवियत संघ में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, "तरण -" के नारे के साथ एक पोस्टर हथियार नायकों। " उस पर, अपने प्रोपेलर के साथ सोवियत विमान ने एक जर्मन बॉम्बर की पूंछ को ध्वस्त कर दिया। कलाकार वॉशोइन के पोस्टर को बनाने के लिए रेड आर्मी के एक जूनियर लेफ्टिनेंट, विक्टर तलालीखिन के वीर काम को प्रेरित किया। यह वह था जो 70 साल पहले एकल-इंजन फाइटर "I-16" पर रात में इस तरह से 7 से 8 अगस्त तक एक जुड़वां-इंजन "Heinkel-111X" को गोली मार दी।
विक्टर तलालिकहिन एक रात का राम करने वाला पहला सोवियत पायलट नहीं है। वह अपने भाई-सैनिक पीटर येरेमेव से आगे था, जो लाल सेना का एक वरिष्ठ लेफ्टिनेंट था। मिग-एक्सएनयूएमएक्स पर गोलोविनो (यह मॉस्को क्षेत्र) के गांव के ऊपर जुलाई एक्सएनयूएमएक्स की रात में, उन्होंने हिंकेल-एक्सएनयूएमएक्स पर हमला किया। उसने पूरे गोला-बारूद को अपने ऊपर फैंक दिया, लेकिन जर्मन विमान छह टन के उच्च विस्फोटक बमों के साथ राजधानी की ओर बढ़ते रहे। तब एक बहादुर सोवियत पायलट एक राम बनाता है - दुश्मन की मशीन जमीन पर गिर जाती है, पायलट खुद एक पैराशूट पर सफलतापूर्वक लैंड करता है।
लूफ़्टवाफे - नाजी जर्मनी की वायु सेना - ने जुलाई 22 की रात को मास्को में अपना पहला बड़ा छापा मारा। लगभग 200 हमलावरों ने इस ऑपरेशन में भाग लिया, फिर राजधानी में बमबारी लगभग हर रात जारी रही। अगस्त की शुरुआत तक, सोवियत कमान ने जर्मन की ओर से और अपने स्वयं के नुकसान की गणना की। निष्कर्ष इस प्रकार थाः लगभग एक से एक। इस तरह के आंकड़ों के बारे में जानने के बाद, सोवियत कमान ने राम के प्रति ठंडे रवैये को गर्म कर दिया। और बस फिर विक्टर तलालीखिन ने एक रात राम बनाया। सोवियत प्रचार ने लड़ाई के इस तरीके और पायलट के वीरतापूर्ण कार्य को निकालना शुरू कर दिया। लेकिन, प्रेस में सुंदर और आत्मा उठाने वाले लेखों के बावजूद, हवा में एक राम शायद लड़ने के सबसे अप्रभावी तरीकों में से एक था। इसके बाद, दोनों विमान "मर गए", और एक्सएनयूएमएक्स% मामलों में, एयर राम के "लेखक" की मृत्यु हो गई।
यूएसएसआर के हीरो विक्टर तलालखिन की अक्टूबर 27 1941 पर पोडॉल्स्क के पास एक हवाई लड़ाई में मौत हो गई। उसने एक्सएनयूएमएक्स विमान को नष्ट कर दिया। वीरता के उनके उदाहरण का "स्टालिन फाल्कन्स" पर एक मजबूत प्रभाव पड़ा, जो कई बार राम का वध करने लगे। और एक पायलट - चार!
अक्टूबर 29 और 1941 द्वारा शेख्टी, रोस्तोव क्षेत्र के शहर में पैदा हुए बोरिस कोज़न के लिए दो उत्कृष्ट हवाई जीतें थीं। फिर वह एक लड़ाकू मिशन से लौट आया, वह बारूद से बाहर चला गया। उन्होंने गलती से एक जर्मन विमान देखा और उसे घुसा दिया। टंबलिंग, जर्मन जमीन पर चला गया, और बोरिस कोवज़न ने अपने हवाई क्षेत्र के लिए उड़ान भरी।
22 फरवरी 1942, कोवन, वरिष्ठ लेफ्टिनेंट, इसी तरह एक जर्मन बॉम्बर को नष्ट कर दिया, और एक महीने बाद एक लड़ाकू। दोनों ही मामलों में, वह एक क्षतिग्रस्त विमान से सफलतापूर्वक उतरा। लेकिन चौथे राम के साथ वह कम भाग्यशाली थाः अगस्त एक्सएनयूएमएक्स, एक्सएनयूएमएक्स, बोरिस कोवज़न, यूएसएसआर के कप्तान और हीरो गंभीर रूप से घायल हो गए थे - एक गोली उनकी आंख पर लगी। सभी बलों को इकट्ठा करने के बाद, कप्तान ने एक और फासीवादी विमान को उतारा - दोनों कारें अलग हो गईं। पायलट ने होश खो दिया और पैराशूट के साथ छह किलोमीटर की ऊंचाई के साथ, जो पूरी तरह से खुला नहीं था, एक दलदल में गिर गया। वह अविश्वसनीय रूप से भाग्यशाली था - वह बच गया! केवल हाथ, पैर और कई पसलियों को तोड़ दिया।
इस घटना ने एक लड़ाकू कैरियर को आगे बढ़ाने से नहीं रोका। एक-आंखों वाले इक्का ने जर्मनों के साथ लड़ाई जारी रखी और एक्सएनयूएमएक्स नाजी विमान को मार गिराया। युद्ध के बाद, बोरिस कोवन ने वायु सेना अकादमी में प्रवेश किया, 28 में स्नातक किया, और 1954 में वह सेवानिवृत्त हुए। इस महान व्यक्ति का वर्ष के 1958 अगस्त 31 में निधन हो गया।
कुल मिलाकर, महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के वर्षों के दौरान, सोवियत पायलटों ने 600 से अधिक मेढ़े बनाए, जिनमें से दो-तिहाई 1941 और 1942 वर्षों के लिए जिम्मेदार थे। लूफ़्टवाफे़ की कमान ने एक फरमान भी जारी किया जिसमें सोवियत विमानों के करीब जाने से मना किया गया था।
जब सोवियत पायलटों के बीच हवाई मेढ़ों की लोकप्रियता कम हो गई, तो उन्होंने इसे जर्मन पायलटों से हासिल कर लिया। कर्नल हंस-जोकिम हेरमैन जर्मनी में रैमिंग की रणनीति के मुख्य विचारक बन गए। उसने एक योजना प्रस्तावित कीः एक रात में 400-500 के पास संबद्ध चार-एंग्री बॉम्बर को नष्ट करने के लिए। वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ब्रिटिश और अमेरिकियों को इस ऑपरेशन के बाद, कई हफ्तों तक देश में छापे में देरी करनी थी। इस बार, कर्नल के विचार में, नवीनतम मेसर्शचिट-एक्सएनयूएमएक्स लड़ाकू जेट विमानों के साथ रीच वायु रक्षा प्रणाली को फिर से लैस करने के लिए पर्याप्त होगा।
हरित युवा जिन्होंने अभी-अभी उड़ान स्कूलों से स्नातक किया है, प्रेरणा से इस ऑपरेशन में भाग लेने के लिए सहमत हुए। दिन के दौरान, लगभग दो हजार स्वयंसेवक एकत्र हुए। लगभग हर कोई अपने रिश्तेदारों की मौत के लिए ब्रिटिश और अमेरिकियों से बदला लेना चाहता था, जिनके फासिस्ट जर्मनी में बमों से लगभग सभी लोग रिश्तेदार मर गए थे। लेकिन ऑपरेशन के भौतिक भाग के साथ, गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईः 150 के केवल अप्रैल में ऑपरेशन के लिए हल्के मेसेन्स्मिट-109 का 1945 प्राप्त हुआ। एक घातक हमले के लिए, इन विमानों को 12 हजार मीटर की ऊंचाई तक जाना था और, तेज गति से उतरते हुए, हमलावरों को राम। धड़ के साथ पूंछ के छोर पर या पंख के साथ पंख को निशाना बनाना आवश्यक था। पायलट बाधाओं को जीवित रहने के लिए 50% पर रेट किया गया था।
7 अप्रैल 1945 आया है, जैसा कि वे कहते हैं, सच्चाई का क्षण। अमेरिकी वायु सेना के 8 हवाई हमले को प्रतिबिंबित करने के लिए, उत्तरी जर्मनी में 180 आत्मघाती पायलटों ने उड़ान भरी। पहले मिनटों से ऑपरेशन योजना के अनुसार नहीं हुआ। कई अनुभवहीन युवा पायलट हवा में खो गए, उन्हें कोई दुश्मन नहीं मिला, और कठिनाई के साथ भी अपने हवाई क्षेत्रों में लौट आए। दूसरों को अमेरिकी लड़ाकू जेट या फ्लाइंग फोर्ट एयर गनर द्वारा गोली मार दी गई थी। केवल 23 रैम जर्मन पायलटों द्वारा प्रतिबद्ध था, 8 अमेरिकी हमलावरों को नष्ट कर दिया। केवल 53 जर्मन पायलट घर लौट आए। ऑपरेशन को दोहराने का प्रयास जर्मनी ने नहीं किया है।
"दिव्य पवन"
विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रैंकिग रणनीति अप्रभावी है। लेकिन आपको एक बात पर ध्यान देने की आवश्यकता हैः यह वह विमान है जो मेढ़क का काम करता है। उदाहरण के लिए, सोवियत-जर्मन मोर्चे पर, एक ट्विन-इंजन बॉम्बर, जिसकी लागत फाइटर की तुलना में केवल तीन या चार गुना अधिक महंगी है। या . . . एक विमान वाहक। इस तरह के एक विचार के लिए (विमान वाहक के रूप में) जापान में आया जब वे अमेरिकियों से युद्ध हार गए। उस समय तक, इम्पीरियल एयर फोर्स में कभी कोई कमिकेज़ नहीं हुआ था। और केवल अक्टूबर 21 1944, पहला कमिकेज़ ने ब्रिटिश क्रूजर "ऑस्ट्रेलिया" को टक्कर दी। तब 29 अधिकारियों और 64 नाविक की मृत्यु हो गई।
जापानी कमांड ने अनुभवहीन पायलटों को कामिकेज़ के रूप में इस्तेमाल किया। यदि पायलट को दुश्मन नहीं मिला, तो बेस पर लौट आया। कुछ कामिकाज़ ने मरने से पहले 4-5 प्रस्थान भी किए। 1944-1945 में अमेरिकी नौसेना ने चार विमान वाहक खो दिए, जिनमें से तीन कामिकेज़ द्वारा डूब गए थे। युद्ध की समाप्ति के बाद, कुछ हज़ार विफल कामिकेज़ बच गए।
वैसे, 10 दिसंबर 1941, अमेरिकी कप्तान केली ने शत्रुता के प्रशांत थिएटर पर पहला राम बनाया। तब उन्होंने जापानी युद्धपोत "हारुना" में अपना "फ्लाइंग फ़ोर्ट" भेजा।
दिलचस्प है, शब्द "कामिकेज़" का अनुवाद "दिव्य पवन" के रूप में किया जाता है। इसलिए आंधी कहा जाता है, जो 13 सदी में मंगोल खान कुबलाई के बेड़े को डूब गया था, जो जापान को जब्त करना चाहते थे।
| सोवियत संघ में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, "तरण -" के नारे के साथ एक पोस्टर हथियार नायकों। " उस पर, अपने प्रोपेलर के साथ सोवियत विमान ने एक जर्मन बॉम्बर की पूंछ को ध्वस्त कर दिया। कलाकार वॉशोइन के पोस्टर को बनाने के लिए रेड आर्मी के एक जूनियर लेफ्टिनेंट, विक्टर तलालीखिन के वीर काम को प्रेरित किया। यह वह था जो सत्तर साल पहले एकल-इंजन फाइटर "I-सोलह" पर रात में इस तरह से सात से आठ अगस्त तक एक जुड़वां-इंजन "Heinkel-एक सौ ग्यारहX" को गोली मार दी। विक्टर तलालिकहिन एक रात का राम करने वाला पहला सोवियत पायलट नहीं है। वह अपने भाई-सैनिक पीटर येरेमेव से आगे था, जो लाल सेना का एक वरिष्ठ लेफ्टिनेंट था। मिग-एक्सएनयूएमएक्स पर गोलोविनो के गांव के ऊपर जुलाई एक्सएनयूएमएक्स की रात में, उन्होंने हिंकेल-एक्सएनयूएमएक्स पर हमला किया। उसने पूरे गोला-बारूद को अपने ऊपर फैंक दिया, लेकिन जर्मन विमान छह टन के उच्च विस्फोटक बमों के साथ राजधानी की ओर बढ़ते रहे। तब एक बहादुर सोवियत पायलट एक राम बनाता है - दुश्मन की मशीन जमीन पर गिर जाती है, पायलट खुद एक पैराशूट पर सफलतापूर्वक लैंड करता है। लूफ़्टवाफे - नाजी जर्मनी की वायु सेना - ने जुलाई बाईस की रात को मास्को में अपना पहला बड़ा छापा मारा। लगभग दो सौ हमलावरों ने इस ऑपरेशन में भाग लिया, फिर राजधानी में बमबारी लगभग हर रात जारी रही। अगस्त की शुरुआत तक, सोवियत कमान ने जर्मन की ओर से और अपने स्वयं के नुकसान की गणना की। निष्कर्ष इस प्रकार थाः लगभग एक से एक। इस तरह के आंकड़ों के बारे में जानने के बाद, सोवियत कमान ने राम के प्रति ठंडे रवैये को गर्म कर दिया। और बस फिर विक्टर तलालीखिन ने एक रात राम बनाया। सोवियत प्रचार ने लड़ाई के इस तरीके और पायलट के वीरतापूर्ण कार्य को निकालना शुरू कर दिया। लेकिन, प्रेस में सुंदर और आत्मा उठाने वाले लेखों के बावजूद, हवा में एक राम शायद लड़ने के सबसे अप्रभावी तरीकों में से एक था। इसके बाद, दोनों विमान "मर गए", और एक्सएनयूएमएक्स% मामलों में, एयर राम के "लेखक" की मृत्यु हो गई। यूएसएसआर के हीरो विक्टर तलालखिन की अक्टूबर सत्ताईस एक हज़ार नौ सौ इकतालीस पर पोडॉल्स्क के पास एक हवाई लड़ाई में मौत हो गई। उसने एक्सएनयूएमएक्स विमान को नष्ट कर दिया। वीरता के उनके उदाहरण का "स्टालिन फाल्कन्स" पर एक मजबूत प्रभाव पड़ा, जो कई बार राम का वध करने लगे। और एक पायलट - चार! अक्टूबर उनतीस और एक हज़ार नौ सौ इकतालीस द्वारा शेख्टी, रोस्तोव क्षेत्र के शहर में पैदा हुए बोरिस कोज़न के लिए दो उत्कृष्ट हवाई जीतें थीं। फिर वह एक लड़ाकू मिशन से लौट आया, वह बारूद से बाहर चला गया। उन्होंने गलती से एक जर्मन विमान देखा और उसे घुसा दिया। टंबलिंग, जर्मन जमीन पर चला गया, और बोरिस कोवज़न ने अपने हवाई क्षेत्र के लिए उड़ान भरी। बाईस फरवरी एक हज़ार नौ सौ बयालीस, कोवन, वरिष्ठ लेफ्टिनेंट, इसी तरह एक जर्मन बॉम्बर को नष्ट कर दिया, और एक महीने बाद एक लड़ाकू। दोनों ही मामलों में, वह एक क्षतिग्रस्त विमान से सफलतापूर्वक उतरा। लेकिन चौथे राम के साथ वह कम भाग्यशाली थाः अगस्त एक्सएनयूएमएक्स, एक्सएनयूएमएक्स, बोरिस कोवज़न, यूएसएसआर के कप्तान और हीरो गंभीर रूप से घायल हो गए थे - एक गोली उनकी आंख पर लगी। सभी बलों को इकट्ठा करने के बाद, कप्तान ने एक और फासीवादी विमान को उतारा - दोनों कारें अलग हो गईं। पायलट ने होश खो दिया और पैराशूट के साथ छह किलोमीटर की ऊंचाई के साथ, जो पूरी तरह से खुला नहीं था, एक दलदल में गिर गया। वह अविश्वसनीय रूप से भाग्यशाली था - वह बच गया! केवल हाथ, पैर और कई पसलियों को तोड़ दिया। इस घटना ने एक लड़ाकू कैरियर को आगे बढ़ाने से नहीं रोका। एक-आंखों वाले इक्का ने जर्मनों के साथ लड़ाई जारी रखी और एक्सएनयूएमएक्स नाजी विमान को मार गिराया। युद्ध के बाद, बोरिस कोवन ने वायु सेना अकादमी में प्रवेश किया, अट्ठाईस में स्नातक किया, और एक हज़ार नौ सौ चौवन में वह सेवानिवृत्त हुए। इस महान व्यक्ति का वर्ष के एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन अगस्त इकतीस में निधन हो गया। कुल मिलाकर, महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के वर्षों के दौरान, सोवियत पायलटों ने छः सौ से अधिक मेढ़े बनाए, जिनमें से दो-तिहाई एक हज़ार नौ सौ इकतालीस और एक हज़ार नौ सौ बयालीस वर्षों के लिए जिम्मेदार थे। लूफ़्टवाफे़ की कमान ने एक फरमान भी जारी किया जिसमें सोवियत विमानों के करीब जाने से मना किया गया था। जब सोवियत पायलटों के बीच हवाई मेढ़ों की लोकप्रियता कम हो गई, तो उन्होंने इसे जर्मन पायलटों से हासिल कर लिया। कर्नल हंस-जोकिम हेरमैन जर्मनी में रैमिंग की रणनीति के मुख्य विचारक बन गए। उसने एक योजना प्रस्तावित कीः एक रात में चार सौ-पाँच सौ के पास संबद्ध चार-एंग्री बॉम्बर को नष्ट करने के लिए। वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ब्रिटिश और अमेरिकियों को इस ऑपरेशन के बाद, कई हफ्तों तक देश में छापे में देरी करनी थी। इस बार, कर्नल के विचार में, नवीनतम मेसर्शचिट-एक्सएनयूएमएक्स लड़ाकू जेट विमानों के साथ रीच वायु रक्षा प्रणाली को फिर से लैस करने के लिए पर्याप्त होगा। हरित युवा जिन्होंने अभी-अभी उड़ान स्कूलों से स्नातक किया है, प्रेरणा से इस ऑपरेशन में भाग लेने के लिए सहमत हुए। दिन के दौरान, लगभग दो हजार स्वयंसेवक एकत्र हुए। लगभग हर कोई अपने रिश्तेदारों की मौत के लिए ब्रिटिश और अमेरिकियों से बदला लेना चाहता था, जिनके फासिस्ट जर्मनी में बमों से लगभग सभी लोग रिश्तेदार मर गए थे। लेकिन ऑपरेशन के भौतिक भाग के साथ, गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईः एक सौ पचास के केवल अप्रैल में ऑपरेशन के लिए हल्के मेसेन्स्मिट-एक सौ नौ का एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस प्राप्त हुआ। एक घातक हमले के लिए, इन विमानों को बारह हजार मीटर की ऊंचाई तक जाना था और, तेज गति से उतरते हुए, हमलावरों को राम। धड़ के साथ पूंछ के छोर पर या पंख के साथ पंख को निशाना बनाना आवश्यक था। पायलट बाधाओं को जीवित रहने के लिए पचास% पर रेट किया गया था। सात अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस आया है, जैसा कि वे कहते हैं, सच्चाई का क्षण। अमेरिकी वायु सेना के आठ हवाई हमले को प्रतिबिंबित करने के लिए, उत्तरी जर्मनी में एक सौ अस्सी आत्मघाती पायलटों ने उड़ान भरी। पहले मिनटों से ऑपरेशन योजना के अनुसार नहीं हुआ। कई अनुभवहीन युवा पायलट हवा में खो गए, उन्हें कोई दुश्मन नहीं मिला, और कठिनाई के साथ भी अपने हवाई क्षेत्रों में लौट आए। दूसरों को अमेरिकी लड़ाकू जेट या फ्लाइंग फोर्ट एयर गनर द्वारा गोली मार दी गई थी। केवल तेईस रैम जर्मन पायलटों द्वारा प्रतिबद्ध था, आठ अमेरिकी हमलावरों को नष्ट कर दिया। केवल तिरेपन जर्मन पायलट घर लौट आए। ऑपरेशन को दोहराने का प्रयास जर्मनी ने नहीं किया है। "दिव्य पवन" विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि रैंकिग रणनीति अप्रभावी है। लेकिन आपको एक बात पर ध्यान देने की आवश्यकता हैः यह वह विमान है जो मेढ़क का काम करता है। उदाहरण के लिए, सोवियत-जर्मन मोर्चे पर, एक ट्विन-इंजन बॉम्बर, जिसकी लागत फाइटर की तुलना में केवल तीन या चार गुना अधिक महंगी है। या . . . एक विमान वाहक। इस तरह के एक विचार के लिए जापान में आया जब वे अमेरिकियों से युद्ध हार गए। उस समय तक, इम्पीरियल एयर फोर्स में कभी कोई कमिकेज़ नहीं हुआ था। और केवल अक्टूबर इक्कीस एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस, पहला कमिकेज़ ने ब्रिटिश क्रूजर "ऑस्ट्रेलिया" को टक्कर दी। तब उनतीस अधिकारियों और चौंसठ नाविक की मृत्यु हो गई। जापानी कमांड ने अनुभवहीन पायलटों को कामिकेज़ के रूप में इस्तेमाल किया। यदि पायलट को दुश्मन नहीं मिला, तो बेस पर लौट आया। कुछ कामिकाज़ ने मरने से पहले चार-पाँच प्रस्थान भी किए। एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस-एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में अमेरिकी नौसेना ने चार विमान वाहक खो दिए, जिनमें से तीन कामिकेज़ द्वारा डूब गए थे। युद्ध की समाप्ति के बाद, कुछ हज़ार विफल कामिकेज़ बच गए। वैसे, दस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ इकतालीस, अमेरिकी कप्तान केली ने शत्रुता के प्रशांत थिएटर पर पहला राम बनाया। तब उन्होंने जापानी युद्धपोत "हारुना" में अपना "फ्लाइंग फ़ोर्ट" भेजा। दिलचस्प है, शब्द "कामिकेज़" का अनुवाद "दिव्य पवन" के रूप में किया जाता है। इसलिए आंधी कहा जाता है, जो तेरह सदी में मंगोल खान कुबलाई के बेड़े को डूब गया था, जो जापान को जब्त करना चाहते थे। |
लालजी भाई देशाई ने सेवादल के सम्मान परेड का निरीक्षण किया।
हुसैनी मस्जिद और कांग्रेस के मानवाधिकार विभाग ने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
हुसैनी मस्जिद और कांग्रेस के मानवाधिकार विभाग ने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
मुंबई प्रदेश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने देश के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दिया।
अशोक राज आहूजा ने समस्त भारतवासियों के खुशहाली के लिए ख्वाजा गरीब नवाज से दुवाएं मांगी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अपमान करने वालों के विरुद्ध कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन।
मुंबई में सेकड़ो कार्यकर्ताओ ने सेवादल का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण लिया।
सेवादल का राज्यस्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया।
भिवंडी मनपा में आरोग्य उपायुक्त के बोगस हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये के बिल निकालने का प्रयास ; फौजदारी का मामला दर्ज करने में टालमटोल।
| लालजी भाई देशाई ने सेवादल के सम्मान परेड का निरीक्षण किया। हुसैनी मस्जिद और कांग्रेस के मानवाधिकार विभाग ने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। हुसैनी मस्जिद और कांग्रेस के मानवाधिकार विभाग ने देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मुंबई प्रदेश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने देश के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दिया। अशोक राज आहूजा ने समस्त भारतवासियों के खुशहाली के लिए ख्वाजा गरीब नवाज से दुवाएं मांगी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अपमान करने वालों के विरुद्ध कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन। मुंबई में सेकड़ो कार्यकर्ताओ ने सेवादल का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण लिया। सेवादल का राज्यस्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। भिवंडी मनपा में आरोग्य उपायुक्त के बोगस हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये के बिल निकालने का प्रयास ; फौजदारी का मामला दर्ज करने में टालमटोल। |
मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भारत के लिए 4 विश्वकप खेले है जिसमें से उन्होने तीन में भारतीय टीम के नेतृत्व किया था। उन्होने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया है कि अभियान के शुरुआत में टीम कहा गलत गई और टीम के विश्वकप जीतने के मौको के बारे में भी बात की।
आपने लगातार (1992, 1996, 1999) में तीन विश्वकप में टीम की कप्तानी की है। कोई एक ऐसा कारण था जिसकी वजह से टीम खिताब पर कब्जा नही कर पाई थी?
हमने उस दौरान अच्छी क्रिकेट खेली थी लेकिन वह विश्वकप ट्रॉफी में कब्जा करने के मुताबिक अच्छी क्रिकेट नही खेल सके। हमारे पास 1996 में विश्वकप जीतने का अच्छा मौका था लेकिन हम सेमीफाइनल में श्रीलंका से हार गए।
भारत के विश्वकप जीतने के बारे में क्या कहेंगे?
भारत अच्छा कर रहा है। मुझे लगता है भारत खिताब पर कब्जा करने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ संयुक्त पसंदीदा है।
क्या आपको लगता है किवी खिताब के दावेदार हैं?
हां बिलुकल। जब आप विश्वकप इतिहास के पुराने रिकॉर्ड उठाकर देखते है तो, न्यूजीलैंड हमेशा से बहुत प्रतिस्पर्धी रहा है। यह उनका एक खराब भाग्य रहा है कि वह एक बार भी खिताब पर कब्जा नही कर सके। लेकिन वह खिताब पर कब्जा करने के लिए दावेदार है। मुझे यकीन है कि केन विलियमसन, रॉस टेलर और उनके कई खिलाड़ी इस बार भी एक अच्छे ब्रांड का क्रिकेट दिखाएंगे।
क्या आप भारत की वर्तमान टीम की मजबूती के बारे में बताएंगे?
टीम ऋषभ पंत और उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी को याद करने वाली है। वह कभी भी परिस्थिति के बारे में नही सोचते है और अपने खेल से मतलब रखते है और गेंद को बहुत आक्रमकता से मारते है।
भारतीय टीम की पूरी ताकत के बारे में बताए....
भारतीय टीम के पास अच्छे ओपनर है जिनके पीछे मजबूत कोहली है। नंबर चार पर विजय शंकर बल्लेबाजी कर सकते है। हमारे पास उचित बल्लेबाजी ताकत है। हार्दिक पांड्या भारत की बल्लेबाजी में एक्स-फेक्टर जोड़ सकते है। टीम के पास अच्छा गेंदबाजी आक्रमण है। इस समय विश्व में जसप्रीत बुमराह सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज है। कुलदीप-चहल और जडेजा की स्पिन जोड़ी एक मजबूत स्पिन आक्रमण बनाती है। अगर वह शांत प्रभाव से खेलते है तो टूर्नामेंट में किसी भी टीम को मात दे सकते है।
| मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भारत के लिए चार विश्वकप खेले है जिसमें से उन्होने तीन में भारतीय टीम के नेतृत्व किया था। उन्होने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बताया है कि अभियान के शुरुआत में टीम कहा गलत गई और टीम के विश्वकप जीतने के मौको के बारे में भी बात की। आपने लगातार में तीन विश्वकप में टीम की कप्तानी की है। कोई एक ऐसा कारण था जिसकी वजह से टीम खिताब पर कब्जा नही कर पाई थी? हमने उस दौरान अच्छी क्रिकेट खेली थी लेकिन वह विश्वकप ट्रॉफी में कब्जा करने के मुताबिक अच्छी क्रिकेट नही खेल सके। हमारे पास एक हज़ार नौ सौ छियानवे में विश्वकप जीतने का अच्छा मौका था लेकिन हम सेमीफाइनल में श्रीलंका से हार गए। भारत के विश्वकप जीतने के बारे में क्या कहेंगे? भारत अच्छा कर रहा है। मुझे लगता है भारत खिताब पर कब्जा करने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ संयुक्त पसंदीदा है। क्या आपको लगता है किवी खिताब के दावेदार हैं? हां बिलुकल। जब आप विश्वकप इतिहास के पुराने रिकॉर्ड उठाकर देखते है तो, न्यूजीलैंड हमेशा से बहुत प्रतिस्पर्धी रहा है। यह उनका एक खराब भाग्य रहा है कि वह एक बार भी खिताब पर कब्जा नही कर सके। लेकिन वह खिताब पर कब्जा करने के लिए दावेदार है। मुझे यकीन है कि केन विलियमसन, रॉस टेलर और उनके कई खिलाड़ी इस बार भी एक अच्छे ब्रांड का क्रिकेट दिखाएंगे। क्या आप भारत की वर्तमान टीम की मजबूती के बारे में बताएंगे? टीम ऋषभ पंत और उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी को याद करने वाली है। वह कभी भी परिस्थिति के बारे में नही सोचते है और अपने खेल से मतलब रखते है और गेंद को बहुत आक्रमकता से मारते है। भारतीय टीम की पूरी ताकत के बारे में बताए.... भारतीय टीम के पास अच्छे ओपनर है जिनके पीछे मजबूत कोहली है। नंबर चार पर विजय शंकर बल्लेबाजी कर सकते है। हमारे पास उचित बल्लेबाजी ताकत है। हार्दिक पांड्या भारत की बल्लेबाजी में एक्स-फेक्टर जोड़ सकते है। टीम के पास अच्छा गेंदबाजी आक्रमण है। इस समय विश्व में जसप्रीत बुमराह सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज है। कुलदीप-चहल और जडेजा की स्पिन जोड़ी एक मजबूत स्पिन आक्रमण बनाती है। अगर वह शांत प्रभाव से खेलते है तो टूर्नामेंट में किसी भी टीम को मात दे सकते है। |
डेस्कः बहुत दिनों के बाद नवग्रहों के चाल में परिवर्तन होने से सूर्य और मंगल का शुभ संयोग बन रहा हैं। जिसके कारण मंगलवार के दिन कुछ राशियों के जीवन में उजाला आ सकता हैं। उनके जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
मिथुन और तुला राशि, राशिफल में शामिल मिथुन और तुला राशि वाले लोगों के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। इनकी जिंदगी अचानक से बदल सकती हैं। इनके दैनिक में सुख और समृद्धि आ सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। इन्हे कई स्रोतों से धनलाभ हो सकता हैं। इस राशि के जातक आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं। सूर्य और मंगल के संयोग से इनके जीवन पर सकारात्मक शक्तियों का भी असर हो सकता हैं। हनुमान जी इन पर मेहरबान रहेंगे।
मेष और वृश्चिक राशि, सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से मेष और वृश्चिक राशि वाले लोगों के जीवन में खुशियों का संचार हो सकता हैं। कैरियर के छेत्र में इन्हे बड़ी सफलता मिल सकती हैं। बिजनेस व्यापार में तरक्की हासिल हो सकती हैं। इनके जीवन में उजाला आ सकता हैं। इस राशि के जातक हर कार्य में सफल हो सकते हैं। इन्हे सच्चा प्यार भी मिल सकता हैं। जीवनसाथी की तलाश पूरी हो सकती हैं। इनकी कुंडली में धनलाभ होने के भी संयोग बन रहे हैं।
वृष और सिंह राशि, राशिफल में शामिल वृष और सिंह राशि के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। इनकी जिंदगी में अचानक से बदलाव हो सकते हैं। इनकी परेशानियां दूर हो सकती हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों की तलाश पूरी हो सकती हैं। इनके मान सम्मान में वृद्धि हो सकती हैं। बुद्धि और विवेक में भी बढ़ोत्तरी देखी जा सकती हैं। यह समय इनके लिए सबसे शुभ हैं। इनके सपने पूरे हो सकते हैं। इनकी कुंडली में धनलाभ होने के भी संयोग बन रहे हैं। हनुमान जी का दर्शन करना लाभकारी रहेगा।
| डेस्कः बहुत दिनों के बाद नवग्रहों के चाल में परिवर्तन होने से सूर्य और मंगल का शुभ संयोग बन रहा हैं। जिसके कारण मंगलवार के दिन कुछ राशियों के जीवन में उजाला आ सकता हैं। उनके जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो सकती हैं। इसी विषय में ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे उन राशियों के बारे में जिन राशियों के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। मिथुन और तुला राशि, राशिफल में शामिल मिथुन और तुला राशि वाले लोगों के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। इनकी जिंदगी अचानक से बदल सकती हैं। इनके दैनिक में सुख और समृद्धि आ सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। इन्हे कई स्रोतों से धनलाभ हो सकता हैं। इस राशि के जातक आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं। सूर्य और मंगल के संयोग से इनके जीवन पर सकारात्मक शक्तियों का भी असर हो सकता हैं। हनुमान जी इन पर मेहरबान रहेंगे। मेष और वृश्चिक राशि, सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से मेष और वृश्चिक राशि वाले लोगों के जीवन में खुशियों का संचार हो सकता हैं। कैरियर के छेत्र में इन्हे बड़ी सफलता मिल सकती हैं। बिजनेस व्यापार में तरक्की हासिल हो सकती हैं। इनके जीवन में उजाला आ सकता हैं। इस राशि के जातक हर कार्य में सफल हो सकते हैं। इन्हे सच्चा प्यार भी मिल सकता हैं। जीवनसाथी की तलाश पूरी हो सकती हैं। इनकी कुंडली में धनलाभ होने के भी संयोग बन रहे हैं। वृष और सिंह राशि, राशिफल में शामिल वृष और सिंह राशि के जीवन में सूर्य और मंगल के शुभ संयोग से उजाला आ सकता हैं। इनकी जिंदगी में अचानक से बदलाव हो सकते हैं। इनकी परेशानियां दूर हो सकती हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों की तलाश पूरी हो सकती हैं। इनके मान सम्मान में वृद्धि हो सकती हैं। बुद्धि और विवेक में भी बढ़ोत्तरी देखी जा सकती हैं। यह समय इनके लिए सबसे शुभ हैं। इनके सपने पूरे हो सकते हैं। इनकी कुंडली में धनलाभ होने के भी संयोग बन रहे हैं। हनुमान जी का दर्शन करना लाभकारी रहेगा। |
पंकज झा शास्त्री9576281913 के द्वारा जानते हैं कि चंद्र राशि आधारित पुकार नाम अनुसार राशियों का बोलचाल आज के दिन।
आज रुका धन मिलने से धन संग्रह बढेगा। आत्मविश्वास के बलबूते पर आगे बढेंगे। पारिवारिक सुख-संतोष बना रहेगा। मनोरंजन के कार्यों में रुचि बढ़ेगी। लेकिन, आज अपनी वस्तुएं संभालकर रखें।
अपने स्वास्थ के प्रति लापरवाही न बरतें। किसी नए व्यापार में निवेश करने के योग हैं। आज विद्वानों के साथ रहने का अवसर मिलेगा। लाभदायक सौदे होंने के साथ ही प्रसिद्धि मिलेगी।
निजी जीवन में भागदौड़, के बाद सफलता की संभावना है। व्यवसाय में विकास की योजनाएं बन सकती हैं। आर्थिक अनुकूलता रहने से सुख साधन बढेगे। लेकिन, ध्यान रखें अपने संबंधो के प्रति आपकी लापरवाही आपको नुकसान पहुंचा सकती है। शनिदेव की आरधना लाभदायक रहेगी।
नौकरी में बदलाव की इच्छा के बीच फैसला लेने में असमंजस की स्थिति रहेगी। कारोबार में सोच-समझकर लिए गए निर्णय शुभ फल देंगे।
साहित्य पठन में रुचि बढ़ेगी। संतान के भविष्य की चिंता रहेगी।
समय का सदुपयोग करते हुए मेहनत करें और संकुचित मानसिकता बदलें। व्यापार में हर किसी पर विश्वास न करें। अपनों से प्रतिस्पर्धा से बचें। कानूनी विवाद पक्ष में हल होंगे।
आज खान-पान पर नियंत्रण रखने के साथ ही व्यर्थ के दिखावों से भी दूर रहें। न्यायालयीन कार्य आज पूरे होंगे। व्यवसाय में कोशिशों के बावजूद मंदी रहेगी। मानसिक शांति की तलाश में रहने के साथ ही संतान के विवाह में विलंब से चिंता होगी।
काम की अधिकता के बीच आज नौकरी में मनचाहे स्थानांतरण व पदोन्नति के भी योग बन रहे हैं। आर्थिक निवेश सोच-समझकर कार्य करे। पारिवारिक कार्यों मे आप की पूछ परख बढेगी।
व्यवसाय में उन्नति की संभावना के बीच आज आपको पत्नी से सहयोग व समर्थन मिलेगा। कारोबार में कुछ नवीन योजनाएं बनेंगी। लेकिन, आपके द्वारा लिए गए कुछ निर्णय गलत साबित होंगे।
व्यापार, व्यवसाय में लाभदायक सौदे आत्मबल बढ़ाएंगे। आज साहस, पराक्रम बढ़ेगा। समाजिक आयोजनों में आप की प्रशंसा होगी। धर्म ग्रंथो के पठन-पाठन में अभिरुचि बढ़ेगी।
दूसरों के विश्वास करने में जरा सतर्कता बरतें। विपरीत परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकेंगे। व्यापार में परेशानियों का अंत होगा। प्रेम प्रसंग के योग हैं। उधार लिया पैस कैसे चुकाएंगे इसी सोच में परेशान रहेंगे।
व्यवसाय में लाभ के योग बन रहे हैं। आप की दिनचर्या में आए बदलाव से निजी कार्य प्रभावित होंगे। परिवार में मांगलिक अवसर आएंगे। अपने कर्मचारियों पर नजर रखें।
उपरोक्त्त कोइ जरुरी नहीं कि सभी शब्द किसी एक व्यक्ति विशेष पर मिल ही जाए अतः बेहतर परिणाम जानने हेतु जन्मकुंडली का अध्यन जरूरी होता है।
| पंकज झा शास्त्री नौ पाँच सात छः दो आठ एक नौ एक तीन के द्वारा जानते हैं कि चंद्र राशि आधारित पुकार नाम अनुसार राशियों का बोलचाल आज के दिन। आज रुका धन मिलने से धन संग्रह बढेगा। आत्मविश्वास के बलबूते पर आगे बढेंगे। पारिवारिक सुख-संतोष बना रहेगा। मनोरंजन के कार्यों में रुचि बढ़ेगी। लेकिन, आज अपनी वस्तुएं संभालकर रखें। अपने स्वास्थ के प्रति लापरवाही न बरतें। किसी नए व्यापार में निवेश करने के योग हैं। आज विद्वानों के साथ रहने का अवसर मिलेगा। लाभदायक सौदे होंने के साथ ही प्रसिद्धि मिलेगी। निजी जीवन में भागदौड़, के बाद सफलता की संभावना है। व्यवसाय में विकास की योजनाएं बन सकती हैं। आर्थिक अनुकूलता रहने से सुख साधन बढेगे। लेकिन, ध्यान रखें अपने संबंधो के प्रति आपकी लापरवाही आपको नुकसान पहुंचा सकती है। शनिदेव की आरधना लाभदायक रहेगी। नौकरी में बदलाव की इच्छा के बीच फैसला लेने में असमंजस की स्थिति रहेगी। कारोबार में सोच-समझकर लिए गए निर्णय शुभ फल देंगे। साहित्य पठन में रुचि बढ़ेगी। संतान के भविष्य की चिंता रहेगी। समय का सदुपयोग करते हुए मेहनत करें और संकुचित मानसिकता बदलें। व्यापार में हर किसी पर विश्वास न करें। अपनों से प्रतिस्पर्धा से बचें। कानूनी विवाद पक्ष में हल होंगे। आज खान-पान पर नियंत्रण रखने के साथ ही व्यर्थ के दिखावों से भी दूर रहें। न्यायालयीन कार्य आज पूरे होंगे। व्यवसाय में कोशिशों के बावजूद मंदी रहेगी। मानसिक शांति की तलाश में रहने के साथ ही संतान के विवाह में विलंब से चिंता होगी। काम की अधिकता के बीच आज नौकरी में मनचाहे स्थानांतरण व पदोन्नति के भी योग बन रहे हैं। आर्थिक निवेश सोच-समझकर कार्य करे। पारिवारिक कार्यों मे आप की पूछ परख बढेगी। व्यवसाय में उन्नति की संभावना के बीच आज आपको पत्नी से सहयोग व समर्थन मिलेगा। कारोबार में कुछ नवीन योजनाएं बनेंगी। लेकिन, आपके द्वारा लिए गए कुछ निर्णय गलत साबित होंगे। व्यापार, व्यवसाय में लाभदायक सौदे आत्मबल बढ़ाएंगे। आज साहस, पराक्रम बढ़ेगा। समाजिक आयोजनों में आप की प्रशंसा होगी। धर्म ग्रंथो के पठन-पाठन में अभिरुचि बढ़ेगी। दूसरों के विश्वास करने में जरा सतर्कता बरतें। विपरीत परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकेंगे। व्यापार में परेशानियों का अंत होगा। प्रेम प्रसंग के योग हैं। उधार लिया पैस कैसे चुकाएंगे इसी सोच में परेशान रहेंगे। व्यवसाय में लाभ के योग बन रहे हैं। आप की दिनचर्या में आए बदलाव से निजी कार्य प्रभावित होंगे। परिवार में मांगलिक अवसर आएंगे। अपने कर्मचारियों पर नजर रखें। उपरोक्त्त कोइ जरुरी नहीं कि सभी शब्द किसी एक व्यक्ति विशेष पर मिल ही जाए अतः बेहतर परिणाम जानने हेतु जन्मकुंडली का अध्यन जरूरी होता है। |
संगड़ाह - जवाहर नवोदय विद्यालय की छठी कक्षा की प्रवेश परीक्षा के केंद्र इस बार शिक्षा खंड से बाहर अथवा इधर-उधर किए जाने से सैकड़ों छात्रों व अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। छह अप्रैल को होने वाले इस प्रवेश परीक्षा में अधिकतर छात्रों के एग्जामिनेशन सेंटर उनके गृह शिक्षा खंड की वजाय दूसरे ब्लॉक में दिए गए हैं। नवोदय प्रवेश परीक्षा के फार्म भर चुके छात्रों के दो दर्जन अभिभावकों ने कहा कि जेएनवी संस्थान की गलती की वजह से उन्हें अपने बच्चों को 50 से 80 किलोमीटर दूर एग्जाम के लिए ले जाना पड़ेगा। कुछ परीक्षा केंद्रों के लिए तो बस में एक दिन पहले पहुंचना पड़ेगा। शिक्षा खंड संगड़ाह के 100 के करीब छात्रों के परीक्षा केंद्र नौहराधार व ददाहू आदि स्थानों पर रखे गए हैं, जबकि इन दोनों शिक्षा खंडों में भी इस तरह की गड़बड़ी हुई है। विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नवोदय के 10 परीक्षा केंद्र बंद होने के चलते तथा संस्थान द्वारा इस बार कम्प्यूटराइज तरीके से परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किए जाने के चलते ऐसा हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी संगड़ाह रविंद्र चौहान के अनुसार इस बार इस शिक्षा खंड मुख्यालय में पिछले वर्ष से कम छात्रों के ही रोल नंबर आए हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय नाहन के प्रधानाचार्य ने बताया कि इस बार ऑनलाइन फार्म भरे गए हैं तथा परीक्षा केंद्रों का निर्धारण भी कम्प्यूटराइज ढंग से ही हुआ। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर अथवा ऑनलाइन सिस्टम द्वारा ही परीक्षा केंद्र तय किए गए हैं। प्रधानाचार्य के अनुसार अब परीक्षा केंद्रों में फेरबदल संभव नहीं है तथा पूरे देश में इस तरह से रोल नंबर जारी हुए हैं।
| संगड़ाह - जवाहर नवोदय विद्यालय की छठी कक्षा की प्रवेश परीक्षा के केंद्र इस बार शिक्षा खंड से बाहर अथवा इधर-उधर किए जाने से सैकड़ों छात्रों व अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। छह अप्रैल को होने वाले इस प्रवेश परीक्षा में अधिकतर छात्रों के एग्जामिनेशन सेंटर उनके गृह शिक्षा खंड की वजाय दूसरे ब्लॉक में दिए गए हैं। नवोदय प्रवेश परीक्षा के फार्म भर चुके छात्रों के दो दर्जन अभिभावकों ने कहा कि जेएनवी संस्थान की गलती की वजह से उन्हें अपने बच्चों को पचास से अस्सी किलोग्राममीटर दूर एग्जाम के लिए ले जाना पड़ेगा। कुछ परीक्षा केंद्रों के लिए तो बस में एक दिन पहले पहुंचना पड़ेगा। शिक्षा खंड संगड़ाह के एक सौ के करीब छात्रों के परीक्षा केंद्र नौहराधार व ददाहू आदि स्थानों पर रखे गए हैं, जबकि इन दोनों शिक्षा खंडों में भी इस तरह की गड़बड़ी हुई है। विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नवोदय के दस परीक्षा केंद्र बंद होने के चलते तथा संस्थान द्वारा इस बार कम्प्यूटराइज तरीके से परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किए जाने के चलते ऐसा हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी संगड़ाह रविंद्र चौहान के अनुसार इस बार इस शिक्षा खंड मुख्यालय में पिछले वर्ष से कम छात्रों के ही रोल नंबर आए हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय नाहन के प्रधानाचार्य ने बताया कि इस बार ऑनलाइन फार्म भरे गए हैं तथा परीक्षा केंद्रों का निर्धारण भी कम्प्यूटराइज ढंग से ही हुआ। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर अथवा ऑनलाइन सिस्टम द्वारा ही परीक्षा केंद्र तय किए गए हैं। प्रधानाचार्य के अनुसार अब परीक्षा केंद्रों में फेरबदल संभव नहीं है तथा पूरे देश में इस तरह से रोल नंबर जारी हुए हैं। |
Ram Charan: यह फिल्म आरआरआर से दर्शकों के दिल में छा गए हैं। अब एक्टर भी पेरेंट बनने वाले हैं। एक्टर की पत्नी उपासना कामिनेनी एक सक्सेसफुल बिजनेस वुमेन हैं। अभिनेता ने अपनी पत्नी के प्रेग्नेंट होने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस को दी हैं।
Parenting Tips: आज के समय में 6 महीने की बच्ची जिसे ठीक से बैठना भी नहीं आता, उसका बलात्कार हो जाता है। समाज से जैसे मानवत खत्म हो चुकी है। ऐसे माहौल में माता-पिता का फिक्र करना जायज है और इन्हीं कारणों के चलते लोग अपनी बच्चियों का समय से पहले ही स्कूल बंद करा देते हैं,
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय(एमएचआरडी) ने इस विषय पर अभिभावकों से उनके सुझाव मांगे हैं। स्कूल कब और कैसे खोले जाएं इसके लिए पूरे देश में अभिभावकों से उनके सुझाव मांगे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को छात्रों के साथ 'परीक्षा पर चर्चा' करने जा रहे हैं। इसमें छात्र, शिक्षक, अभिभावक हिस्सा लेंगे। परीक्षा पर चर्चा सुबह 11 बजे तालकटोरा स्टेडियम में होगी।
डॉ. साहनी ने माता-पिता के व्यवहार स्वरूपों और बच्चों पर इसके परिणामी प्रभावों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ये व्यवहार सुसंगत और असंगत दोनों हो सकते हैं।
| Ram Charan: यह फिल्म आरआरआर से दर्शकों के दिल में छा गए हैं। अब एक्टर भी पेरेंट बनने वाले हैं। एक्टर की पत्नी उपासना कामिनेनी एक सक्सेसफुल बिजनेस वुमेन हैं। अभिनेता ने अपनी पत्नी के प्रेग्नेंट होने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस को दी हैं। Parenting Tips: आज के समय में छः महीने की बच्ची जिसे ठीक से बैठना भी नहीं आता, उसका बलात्कार हो जाता है। समाज से जैसे मानवत खत्म हो चुकी है। ऐसे माहौल में माता-पिता का फिक्र करना जायज है और इन्हीं कारणों के चलते लोग अपनी बच्चियों का समय से पहले ही स्कूल बंद करा देते हैं, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस विषय पर अभिभावकों से उनके सुझाव मांगे हैं। स्कूल कब और कैसे खोले जाएं इसके लिए पूरे देश में अभिभावकों से उनके सुझाव मांगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को छात्रों के साथ 'परीक्षा पर चर्चा' करने जा रहे हैं। इसमें छात्र, शिक्षक, अभिभावक हिस्सा लेंगे। परीक्षा पर चर्चा सुबह ग्यारह बजे तालकटोरा स्टेडियम में होगी। डॉ. साहनी ने माता-पिता के व्यवहार स्वरूपों और बच्चों पर इसके परिणामी प्रभावों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ये व्यवहार सुसंगत और असंगत दोनों हो सकते हैं। |
नई दिल्ली : क्या मोदी सरकार ने चारधाम की यात्रा के लिए शानदार फोर-लेन की सड़क बना कर तैयार कर दी है? इस समय सोशल मीडिया पर एक तस्वीर के जरिए ठीक यही दावा किया जा रहा हैं। वहीं AFWA ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा सरासर गलत है। जिस शानदार सड़क को चारधाम का रास्ता बताया जा रहा है वो भारत की नहीं बल्कि मोरक्को की तस्वीर हैं।
बता दें की 16 अप्रैल को राघव वार्ष्णेय नाम के एक फेसबुक यूज़र ने इस फोटो को शेयर की हैं की जिसमें एक ऐसी शानदार सड़क दिख रही है, जिसमें एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ पानी का किनारा दिखाई दे रहा हैं।
अस्पताल में घुसे दबंगों ने अस्पताल कर्मियों से की मार-पीट, तीमारदारों को भी पहुंचाया नुकसान !
वायरल फोटो के कैप्शन में लिखा गया हैंकी स्विट्जरलैंड नहीं बल्कि हिंदुस्तान के उत्तराखंड में चारधाम यात्रा करने के लिए बनाया फोर लेन मार्ग है, सच ही तो है, मोदी ने किया ही क्या है। फेसबुक पर डाली गई इस फोटो को खबर लिखे जाने तक1100 से भी ज़्यादा लोग शेयर कर चुके हैं और 250 लोगों ने इसपर कमेंट भी कर चुके हैं।
खबरों के मुताबिक फोटो को देख कर पहली ही नजर में शक होता है कि ये चारधाम की सड़क नहीं हो सकती क्योंकि सड़क के किनारे समुद्र जैसा किनारा दिख रहा है. फोटो में ये भी देखा जा सकता है कि इस सड़क पर सभी गाड़ियां सड़क के दाहिनी तरफ चल रही हैं जबकि भारत में गाड़ियां बायीं तरफ चलती हैं।
गूगल रिवर्स इमेज सर्च में हमने देखा कि हूबहू इसी फोटो को, जिसमें नीचे बायीं तरफ Gharbaoui का नाम लिखा है, तमाम लोगों ने अगल अगल तरह के इस्तेमाल किया है। लेकिन यही फोटो हमें कई ऐसे लोगों के फेसबुक और ट्वविटर पर मिली जो उत्तरी अफ्रीका के देश मोरक्को के रहने वाले है। रिवर्स सर्च के माध्यम से हमें पिनटरेस्ट पर एक फोटो मिली जिसमें दावा किया गया कि यह फोटो मोरोक्को के शहर तैंजियर की है।
जहां हमने इसके बाद गूगल अर्थ प्रो पर तैंजियर शहर की सैटेलाइट फुटेज देखी और हम उसके जैसी हूबहू दिखने वाली सड़क तक तक पहुंच गए हैं। वहीँ मैप में और वायरल फोटो में दिख रही सड़क के लगभग सभी चिन्ह मेल खा रहे हैं , एक जैसे मोड़, फुटपाथ, पत्थर, स्ट्रीट लाइट की परछाई, सब कुछ फोटो जैसे ही दिखाई पड़ रहे हैं।
| नई दिल्ली : क्या मोदी सरकार ने चारधाम की यात्रा के लिए शानदार फोर-लेन की सड़क बना कर तैयार कर दी है? इस समय सोशल मीडिया पर एक तस्वीर के जरिए ठीक यही दावा किया जा रहा हैं। वहीं AFWA ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा सरासर गलत है। जिस शानदार सड़क को चारधाम का रास्ता बताया जा रहा है वो भारत की नहीं बल्कि मोरक्को की तस्वीर हैं। बता दें की सोलह अप्रैल को राघव वार्ष्णेय नाम के एक फेसबुक यूज़र ने इस फोटो को शेयर की हैं की जिसमें एक ऐसी शानदार सड़क दिख रही है, जिसमें एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ पानी का किनारा दिखाई दे रहा हैं। अस्पताल में घुसे दबंगों ने अस्पताल कर्मियों से की मार-पीट, तीमारदारों को भी पहुंचाया नुकसान ! वायरल फोटो के कैप्शन में लिखा गया हैंकी स्विट्जरलैंड नहीं बल्कि हिंदुस्तान के उत्तराखंड में चारधाम यात्रा करने के लिए बनाया फोर लेन मार्ग है, सच ही तो है, मोदी ने किया ही क्या है। फेसबुक पर डाली गई इस फोटो को खबर लिखे जाने तकएक हज़ार एक सौ से भी ज़्यादा लोग शेयर कर चुके हैं और दो सौ पचास लोगों ने इसपर कमेंट भी कर चुके हैं। खबरों के मुताबिक फोटो को देख कर पहली ही नजर में शक होता है कि ये चारधाम की सड़क नहीं हो सकती क्योंकि सड़क के किनारे समुद्र जैसा किनारा दिख रहा है. फोटो में ये भी देखा जा सकता है कि इस सड़क पर सभी गाड़ियां सड़क के दाहिनी तरफ चल रही हैं जबकि भारत में गाड़ियां बायीं तरफ चलती हैं। गूगल रिवर्स इमेज सर्च में हमने देखा कि हूबहू इसी फोटो को, जिसमें नीचे बायीं तरफ Gharbaoui का नाम लिखा है, तमाम लोगों ने अगल अगल तरह के इस्तेमाल किया है। लेकिन यही फोटो हमें कई ऐसे लोगों के फेसबुक और ट्वविटर पर मिली जो उत्तरी अफ्रीका के देश मोरक्को के रहने वाले है। रिवर्स सर्च के माध्यम से हमें पिनटरेस्ट पर एक फोटो मिली जिसमें दावा किया गया कि यह फोटो मोरोक्को के शहर तैंजियर की है। जहां हमने इसके बाद गूगल अर्थ प्रो पर तैंजियर शहर की सैटेलाइट फुटेज देखी और हम उसके जैसी हूबहू दिखने वाली सड़क तक तक पहुंच गए हैं। वहीँ मैप में और वायरल फोटो में दिख रही सड़क के लगभग सभी चिन्ह मेल खा रहे हैं , एक जैसे मोड़, फुटपाथ, पत्थर, स्ट्रीट लाइट की परछाई, सब कुछ फोटो जैसे ही दिखाई पड़ रहे हैं। |
देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर हल्दिया से लुधियाना तक यूपी के औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मेरठ से होकर बन रहा है परन्तु मेरठ में माल उतारने-चढ़ाने के लिए इस कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन का प्रस्ताव नहीं रखा गया है।
मेरठ, जेएनएन। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में मेरठ में ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) का एक स्टेशन (माल साईडिंग) बनाने की मांग की।
सांसद ने कहा कि देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) हल्दिया से लुधियाना तक उत्तर प्रदेश के औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर मेरठ से होकर बन रहा है परन्तु मेरठ में माल उतारने-चढ़ाने के लिए इस कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन (साईडिंग) का प्रस्ताव नहीं रखा गया है।
उन्होंने ने कहा कि मेरठ औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से देश का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र है। मेरठ में विभिन्न उत्पादों से संबंधित लगभग 20 हजार छोटी-बड़ी इकाईयाँ कार्यरत हैं। यहाँ से पूरे देश तथा विदेश में स्पोर्ट्स गुड्स, हैंडलूम, कागज, चीनी, आलू, कैंची आदि की आपूर्ति एवं निर्यात किया जाता है। इसके अतिरिक्त उद्योग की जरूरत की पूर्ति हेतु कच्चे एवं निर्मित माल का विभिन्न देशों से आयात भी यहाँ किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मेरठ शहर छह नेशनल हाईवे एवं 2 एक्सप्रैस वे के माध्यम से अन्य औद्योगिक शहर जैसे- मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, शामली, हापुड़, बुलन्दशहर एवं नोएडा से जुड़ा हुआ है।
सांसद ने सभापति के माध्यम से सरकार से अनुरोध किया कि मेरठ शहर के औद्योगिक महत्व तथा कनैक्टिविटी को देखते हुए EDFC का मेरठ में एक स्टेशन (माल साईडिंग) बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया जाए।
| देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर हल्दिया से लुधियाना तक यूपी के औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मेरठ से होकर बन रहा है परन्तु मेरठ में माल उतारने-चढ़ाने के लिए इस कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन का प्रस्ताव नहीं रखा गया है। मेरठ, जेएनएन। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में मेरठ में ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर का एक स्टेशन बनाने की मांग की। सांसद ने कहा कि देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कॉरिडोर हल्दिया से लुधियाना तक उत्तर प्रदेश के औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर मेरठ से होकर बन रहा है परन्तु मेरठ में माल उतारने-चढ़ाने के लिए इस कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन का प्रस्ताव नहीं रखा गया है। उन्होंने ने कहा कि मेरठ औद्योगिक एवं आर्थिक दृष्टि से देश का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र है। मेरठ में विभिन्न उत्पादों से संबंधित लगभग बीस हजार छोटी-बड़ी इकाईयाँ कार्यरत हैं। यहाँ से पूरे देश तथा विदेश में स्पोर्ट्स गुड्स, हैंडलूम, कागज, चीनी, आलू, कैंची आदि की आपूर्ति एवं निर्यात किया जाता है। इसके अतिरिक्त उद्योग की जरूरत की पूर्ति हेतु कच्चे एवं निर्मित माल का विभिन्न देशों से आयात भी यहाँ किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मेरठ शहर छह नेशनल हाईवे एवं दो एक्सप्रैस वे के माध्यम से अन्य औद्योगिक शहर जैसे- मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, शामली, हापुड़, बुलन्दशहर एवं नोएडा से जुड़ा हुआ है। सांसद ने सभापति के माध्यम से सरकार से अनुरोध किया कि मेरठ शहर के औद्योगिक महत्व तथा कनैक्टिविटी को देखते हुए EDFC का मेरठ में एक स्टेशन बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया जाए। |
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