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Salman Khan: सलमान खान ने सिर्फ फिल्मों एक बारे में ही नहीं बल्कि शाहरुख, अक्षय और अजय देवगन के बारे में भी बात की। सलमान खान ने इस दौरान पांच लोगों का जिक्र करते हुए बताया कि ये लोग कभी भी रुकने वाले नहीं हैं। यहां हम इसी खबर के बारे में आपको बताएंगे।
Filmfare OTT Awards: फिल्मफेयर ओटीटी अवॉर्ड्स में बेहतरीन फिल्मों, एक्टर्स, एक्ट्रेसेस को अवॉर्ड्स से नवाजा गया। इसके अलावा कई अलग-अलग कैटेगरी में भी अवॉर्ड्स दिए गए।
| Salman Khan: सलमान खान ने सिर्फ फिल्मों एक बारे में ही नहीं बल्कि शाहरुख, अक्षय और अजय देवगन के बारे में भी बात की। सलमान खान ने इस दौरान पांच लोगों का जिक्र करते हुए बताया कि ये लोग कभी भी रुकने वाले नहीं हैं। यहां हम इसी खबर के बारे में आपको बताएंगे। Filmfare OTT Awards: फिल्मफेयर ओटीटी अवॉर्ड्स में बेहतरीन फिल्मों, एक्टर्स, एक्ट्रेसेस को अवॉर्ड्स से नवाजा गया। इसके अलावा कई अलग-अलग कैटेगरी में भी अवॉर्ड्स दिए गए। |
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Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు. . హాట్ లుక్స్ వైరల్!
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स्पेशल न्यूज़ः शारदीय नवरात्रि की तैयारी जोरों-शोरों पर है, माता का यह पावन पर्व 07 अक्टूबर से मनाना शुरू किया जाएगा. चूंकि इन 9 दिनों में मां के अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है, इसलिए पूजन में लगने वाली संपूर्ण सामग्री की लिस्ट तैयार करना बेहद जरूरी है.
हवन कुंड, आम की लकड़ी, काले तिल, चावल, जौ, धूप, पांच मेवा, घी, लोबान, गुगल, लौंग का जौड़ा, कमल गट्टा, सुपारी, कपूर.
पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यानी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.
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| स्पेशल न्यूज़ः शारदीय नवरात्रि की तैयारी जोरों-शोरों पर है, माता का यह पावन पर्व सात अक्टूबर से मनाना शुरू किया जाएगा. चूंकि इन नौ दिनों में मां के अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है, इसलिए पूजन में लगने वाली संपूर्ण सामग्री की लिस्ट तैयार करना बेहद जरूरी है. हवन कुंड, आम की लकड़ी, काले तिल, चावल, जौ, धूप, पांच मेवा, घी, लोबान, गुगल, लौंग का जौड़ा, कमल गट्टा, सुपारी, कपूर. पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यानी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. |
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को काशीपुर में आयोजित कार्यक्रम में शमिल हुए। इस कार्यक्रम के दौरान हरीश रावत ने कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए जहां कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं से खास बातचीत की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
इसके साथ हरीश रावत ने कहा कि, देश में आर्थिक मंदी का संकट छाया हुआ है। दूसरी तरफ जहां महंगाई आसमान छू रही है, वहीं प्रदेश में बेरोजगार नौजवान पलायन करने को मजबूर हो रहे है।
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि, सीएए कानून असंवैधानिक है। केंद्र में कांग्रेस सरकार की वापसी हो जाने के बाद सबसे पहले इस कानून को समाप्त करने का काम किया जाएगा।
| उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को काशीपुर में आयोजित कार्यक्रम में शमिल हुए। इस कार्यक्रम के दौरान हरीश रावत ने कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए जहां कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में हरीश रावत ने कार्यकर्ताओं से खास बातचीत की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। इसके साथ हरीश रावत ने कहा कि, देश में आर्थिक मंदी का संकट छाया हुआ है। दूसरी तरफ जहां महंगाई आसमान छू रही है, वहीं प्रदेश में बेरोजगार नौजवान पलायन करने को मजबूर हो रहे है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि, सीएए कानून असंवैधानिक है। केंद्र में कांग्रेस सरकार की वापसी हो जाने के बाद सबसे पहले इस कानून को समाप्त करने का काम किया जाएगा। |
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
जाकिया की याचिका पर बहस कर रहे सिब्बल ने कहा, मैं नहीं चाहता कि किसी का नाम लिया जाए। यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। मैं केवल जांच चाहता हूं। मैं इस चरण पर कोई दोषसिद्धि नहीं चाहता।
कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2002 के गुजरात दंगों के पीछे नौकरशाही की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत की साजिश थी।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को ऊंचे रसूख वाले व्यक्तियों और राजनीति से कोई मतलब नहीं है। मसला कानून-व्यवस्था और व्यक्तियों के अधिकार से जुड़ा है। सिब्बल गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी और अन्य उच्च अधिकारियों को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया की याचिका पर बहस कर रहे थे।
पीठ ने कहा कि वह क्लोजर रिपोर्ट देखना चाहेगी, जिसे मजिस्ट्रेट ने स्वीकार कर लिया था। सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गुजरात के डीजीपी के समक्ष शिकायत कर आरोप लगाया था कि दंगा व्यापक साजिश था, जिसके कारण गोधरा कांड के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई।
सिब्बल ने कहा कि 23,000 पृष्ठों की सामग्री है जो केवल गुलबर्गा सोसायटी मामले तक सीमित नहीं है। हम केवल यह चाहते हैं कि यह अदालत इन पृष्ठों को देखे। अगर अदालत इसे गुलबर्गा तक सीमित कर देती है तो कानून के शासन का क्या होगा? 2018 में दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
81 वर्षीय जाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट के 5 अक्तूबर, 2017 के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट नियुक्त एसआईटी द्वारा मोदी और अन्य को दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखा था।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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| अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। जाकिया की याचिका पर बहस कर रहे सिब्बल ने कहा, मैं नहीं चाहता कि किसी का नाम लिया जाए। यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। मैं केवल जांच चाहता हूं। मैं इस चरण पर कोई दोषसिद्धि नहीं चाहता। कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दो हज़ार दो के गुजरात दंगों के पीछे नौकरशाही की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत की साजिश थी। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को ऊंचे रसूख वाले व्यक्तियों और राजनीति से कोई मतलब नहीं है। मसला कानून-व्यवस्था और व्यक्तियों के अधिकार से जुड़ा है। सिब्बल गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी और अन्य उच्च अधिकारियों को क्लीन चिट देने वाली एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया की याचिका पर बहस कर रहे थे। पीठ ने कहा कि वह क्लोजर रिपोर्ट देखना चाहेगी, जिसे मजिस्ट्रेट ने स्वीकार कर लिया था। सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गुजरात के डीजीपी के समक्ष शिकायत कर आरोप लगाया था कि दंगा व्यापक साजिश था, जिसके कारण गोधरा कांड के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई। सिब्बल ने कहा कि तेईस,शून्य पृष्ठों की सामग्री है जो केवल गुलबर्गा सोसायटी मामले तक सीमित नहीं है। हम केवल यह चाहते हैं कि यह अदालत इन पृष्ठों को देखे। अगर अदालत इसे गुलबर्गा तक सीमित कर देती है तो कानून के शासन का क्या होगा? दो हज़ार अट्ठारह में दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। इक्यासी वर्षीय जाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट के पाँच अक्तूबर, दो हज़ार सत्रह के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट नियुक्त एसआईटी द्वारा मोदी और अन्य को दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखा था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
आलिया भट्ट इन दिनों क्लोदिंग ब्रांड मोहे के नए एड में नजर आ रही हैं। इस एड की तारीफ हो रही है तो साथ ही कुछ इसे ट्रोल भी कर रहे हैं। मोहे के ब्राइडल कलेक्शन के विज्ञापन में आलिया भट्ट दुल्हन बनी हैं। एड में वो कन्यादान की जगह कन्यामान की बात कर रही हैं।
कन्यादान को कन्यामान से बदलने पर कुछ इसे सनातन संस्कृति का अपमान बता रहे हैं। वो कहते हैं ना बदनाम हुए तो क्या नाम तो हुआ। ऐसे में पूरे विवाद से ब्रांड और उसका एड चर्चा में हैं। ये पहला विज्ञापन नहीं है, जिस पर विवाद हो रहा है। इससे पहले भी महिलाओं को लेकर कई ऐसे विज्ञापन आए हैं जिन पर खूब बवाल मचा। कहीं कंपनी को ऐड हटाना पड़ा तो कहीं माफी मांगनी पड़ी। आइए जानते हैं कब-कब कुछ सेंकेंड्स के ऐड पर महीनों तक बवाल मचा रहा।
हर कंपनी फेस्टिव सीजन के दौरान बाजार में अपना नया प्रोड्क्ट उतारती है। पिछले साल अक्टूबर में ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने भी ऐसा ही किया था। तनिष्क ने अपने नए ज्वैलरी कलेक्शन को दिखाने के लिए एक विज्ञापन बनाया। उस विज्ञापन में सास-बहू के बीच का बॉन्ड दिखाने की कोशिश की गई थी। लेकिन बवाल इसलिए कट गया कि मुस्लिम परिवार में प्रेग्नेंट हिंदू बहू क्यों? चंद सेकेंड के उस विज्ञापन में लोगों ने लव-जिहाद का एंगल खोज लिया। सोशल मीडिया पर बॉयकट तनिष्क ट्रेंड हुआ और इतना जबरदस्त ट्रेंड हुआ कि कंपनी को अपना एड हटाना पड़ा।
वाइल्ड स्टोन। मर्दों का ब्रांड है। परफ्यूम, टेलकम पाउडर, साबुन सब बेचती है। खूब बिकती भी है। इसके एड पर अक्सर बवाल होता है। सवाल उठाने वाले कहते हैं कि कंपनी के एड में क्रिएटिविटी के साथ कामुकता भी होती है। कंपनी ने दस पहले एक ऐड बनाया था। टैगलाइन थी- वाइल्ड बाई नेचर। उस विज्ञापन में दिखाया गया कि दुर्गापूजा का माहौल है। महिलाओं की भीड़ में एक अनजान मर्द की एंट्री होती है। भीड़ में वो एक बंगाली महिला से टकराता है। और महिला उसकी फ्रेगरेंस से बहक जाती है। इस विज्ञापन को भी लेकर हंगामा हुआ। पूजा का माहौल और बंगाली महिला को ऐसे दिखाना, इसी पर विवाद हो गया।
यह विज्ञापन पुरुषों के डियो का था, पर विवाद हुआ महिलाओं को खास पैटर्न में दिखाने को लेकर। जटाक डियो के उस एड में दिखाया गया था कि एक महिला सुहागरात में पति का इंतजार कर रही हैं। इस बीच पड़ोस से डियो की खुशबू आती है और वो उठाकर खिड़की के पास जाती है। फिर धीरे-धीरे करके अपने गहने उतार देती है। इस विज्ञापन की टैगलाइन थी- 'जस्ट जटाक हर'। इस पर भी खूब बवाल मचा।
दो-तीन साल पहले मैनफोर्स कंडोम का एक ऐड आया था। गुजरात में इस पर विवाद हुआ। दरअसल हुआ ये था कि कंपनी की ब्रांड अंबेस्डर सनी लियोन की तस्वीर के साथ गुजरात में जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए। पोस्टर में सनी के अलावा गुजराती भाषा में ऐड की टैगलाइन लिखी थी। 'आ नवरात्री ए रामो, परानतु प्रेमथी'। माने नवरात्र में खेलें, मगर प्यार से'। लोगों ने फिर से संस्कृति का हवाला दिया। हंगामा हुआ। कंपनी के खिलाफ कैंपेन चला। कंपनी ने तुरंत हरकत में आते हुए एड हटा दिया।
अमूल वालों ने कई साल पहले मेल अडंरगारमेंटस ब्रांड को लेकर एक ऐड बनाया। ऐड में सना खान थी, जो कि अब गलैमर दुनिया को बाय कह चुकी हैं। इसमें दिखाया गया था कि एक नई-नवेली दुल्हन घाट पर कपड़े साफ करने जाती है। पहले से ही घाट पर मौजूद महिलाएं उसे कुछ अजीब तरह से देखती हैं। फिर वो नई-नवेली दुल्हन अपने पति के अंडरवियर को धोती है। विज्ञापन की टैगलाइन थी- ये तो बड़ा टॉइन है। विज्ञापन को बैन कराने में इस टैगलाइन का बड़ा रोल रहा। इस विज्ञापन को काफी अश्लील माना गया।
इनके अलावा भी कई ऐसे विज्ञापन रहे जिनमें महिलाओं को खास अंदाज में दिखाए जाने पर हंगामा हुआ। इसमें गोदरेज सिन्थॉल, कामसूत्र कंडोम, जटैक डियो, टफ शूज के और भी कई विज्ञापन रहे जिन पर काफी बवाल हुआ।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| आलिया भट्ट इन दिनों क्लोदिंग ब्रांड मोहे के नए एड में नजर आ रही हैं। इस एड की तारीफ हो रही है तो साथ ही कुछ इसे ट्रोल भी कर रहे हैं। मोहे के ब्राइडल कलेक्शन के विज्ञापन में आलिया भट्ट दुल्हन बनी हैं। एड में वो कन्यादान की जगह कन्यामान की बात कर रही हैं। कन्यादान को कन्यामान से बदलने पर कुछ इसे सनातन संस्कृति का अपमान बता रहे हैं। वो कहते हैं ना बदनाम हुए तो क्या नाम तो हुआ। ऐसे में पूरे विवाद से ब्रांड और उसका एड चर्चा में हैं। ये पहला विज्ञापन नहीं है, जिस पर विवाद हो रहा है। इससे पहले भी महिलाओं को लेकर कई ऐसे विज्ञापन आए हैं जिन पर खूब बवाल मचा। कहीं कंपनी को ऐड हटाना पड़ा तो कहीं माफी मांगनी पड़ी। आइए जानते हैं कब-कब कुछ सेंकेंड्स के ऐड पर महीनों तक बवाल मचा रहा। हर कंपनी फेस्टिव सीजन के दौरान बाजार में अपना नया प्रोड्क्ट उतारती है। पिछले साल अक्टूबर में ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने भी ऐसा ही किया था। तनिष्क ने अपने नए ज्वैलरी कलेक्शन को दिखाने के लिए एक विज्ञापन बनाया। उस विज्ञापन में सास-बहू के बीच का बॉन्ड दिखाने की कोशिश की गई थी। लेकिन बवाल इसलिए कट गया कि मुस्लिम परिवार में प्रेग्नेंट हिंदू बहू क्यों? चंद सेकेंड के उस विज्ञापन में लोगों ने लव-जिहाद का एंगल खोज लिया। सोशल मीडिया पर बॉयकट तनिष्क ट्रेंड हुआ और इतना जबरदस्त ट्रेंड हुआ कि कंपनी को अपना एड हटाना पड़ा। वाइल्ड स्टोन। मर्दों का ब्रांड है। परफ्यूम, टेलकम पाउडर, साबुन सब बेचती है। खूब बिकती भी है। इसके एड पर अक्सर बवाल होता है। सवाल उठाने वाले कहते हैं कि कंपनी के एड में क्रिएटिविटी के साथ कामुकता भी होती है। कंपनी ने दस पहले एक ऐड बनाया था। टैगलाइन थी- वाइल्ड बाई नेचर। उस विज्ञापन में दिखाया गया कि दुर्गापूजा का माहौल है। महिलाओं की भीड़ में एक अनजान मर्द की एंट्री होती है। भीड़ में वो एक बंगाली महिला से टकराता है। और महिला उसकी फ्रेगरेंस से बहक जाती है। इस विज्ञापन को भी लेकर हंगामा हुआ। पूजा का माहौल और बंगाली महिला को ऐसे दिखाना, इसी पर विवाद हो गया। यह विज्ञापन पुरुषों के डियो का था, पर विवाद हुआ महिलाओं को खास पैटर्न में दिखाने को लेकर। जटाक डियो के उस एड में दिखाया गया था कि एक महिला सुहागरात में पति का इंतजार कर रही हैं। इस बीच पड़ोस से डियो की खुशबू आती है और वो उठाकर खिड़की के पास जाती है। फिर धीरे-धीरे करके अपने गहने उतार देती है। इस विज्ञापन की टैगलाइन थी- 'जस्ट जटाक हर'। इस पर भी खूब बवाल मचा। दो-तीन साल पहले मैनफोर्स कंडोम का एक ऐड आया था। गुजरात में इस पर विवाद हुआ। दरअसल हुआ ये था कि कंपनी की ब्रांड अंबेस्डर सनी लियोन की तस्वीर के साथ गुजरात में जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए। पोस्टर में सनी के अलावा गुजराती भाषा में ऐड की टैगलाइन लिखी थी। 'आ नवरात्री ए रामो, परानतु प्रेमथी'। माने नवरात्र में खेलें, मगर प्यार से'। लोगों ने फिर से संस्कृति का हवाला दिया। हंगामा हुआ। कंपनी के खिलाफ कैंपेन चला। कंपनी ने तुरंत हरकत में आते हुए एड हटा दिया। अमूल वालों ने कई साल पहले मेल अडंरगारमेंटस ब्रांड को लेकर एक ऐड बनाया। ऐड में सना खान थी, जो कि अब गलैमर दुनिया को बाय कह चुकी हैं। इसमें दिखाया गया था कि एक नई-नवेली दुल्हन घाट पर कपड़े साफ करने जाती है। पहले से ही घाट पर मौजूद महिलाएं उसे कुछ अजीब तरह से देखती हैं। फिर वो नई-नवेली दुल्हन अपने पति के अंडरवियर को धोती है। विज्ञापन की टैगलाइन थी- ये तो बड़ा टॉइन है। विज्ञापन को बैन कराने में इस टैगलाइन का बड़ा रोल रहा। इस विज्ञापन को काफी अश्लील माना गया। इनके अलावा भी कई ऐसे विज्ञापन रहे जिनमें महिलाओं को खास अंदाज में दिखाए जाने पर हंगामा हुआ। इसमें गोदरेज सिन्थॉल, कामसूत्र कंडोम, जटैक डियो, टफ शूज के और भी कई विज्ञापन रहे जिन पर काफी बवाल हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
केंद्र सरकार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का प्रीमियम बढ़ा दिया है। ये दोनों योजनाएं बैंकों के खाताधारकों को दी जाती हैं। प्रीमियम की राशि भी खाते में से ही काटी जाती हैं। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की प्रीमियम दर को बढ़ाकर 1. 25 रुपए प्रति दिन कर दिया गया है। जिससे यह सालाना 330 रुपए से बढ़कर 436 रुपए हो गई है। केंद्र सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के लिए वार्षिक प्रीमियम 12 रुपए से बढ़ाकर 20 रुपए कर दिया गया है। ये नई प्रीमियम दरें 1 जून, 2022 से लागू हो जाएंगी।
31 मार्च, 2022 तक PMJJBY और PMSBY के तहत क्रमशः 6. 4 करोड़ और 22 करोड़ बीमाकर्ताओं ने नामांकन कराया है। इन दोनों योजनाओं के तहत लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मार्ग के माध्यम से दावा जमा किया गया है। इन योजनाओं की शुरुआत के बाद से पिछले सात वर्षों में प्रीमियम दरें नहीं बदली गई।
PMSBY की शुरुआत से 31 मार्च 2022 तक प्रीमियम के तौर पर 1,134 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की गई और 2,513 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया है। PMJJBY के तहत प्रीमियम के रूप में 9,737 करोड़ रुपए की राशि जमा की गई और 14,144 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी। यह एक साल का लाइफ इंश्योरेंस प्लान है। इसे हर साल रिन्यू करवाना पड़ता है। इस योजना को खरीदने पर व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके परिवार के सदस्यों को 2 लाख रुपए दिए जाते हैं। इस टर्म प्लान को लेने के लिए आपकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 50 साल होनी चाहिए। भारत का कोई भी नागरिक इस योजना में निवेश कर सकता है। इस योजना की परिपक्वता आयु 55 साल है।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना भी एक सरकारी बीमा योजना है। इसके जरिए अगर किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांग हो जाता है तो उसके परिवार को 2 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर मिलता है। इसके अलावा आशिंक रूप से दिव्यांग होने पर भी बीमाधारक को 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद सरकार द्वारा दी जाती है। इन दोनों योजनाओं में प्रीमियम पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति के खाते से ऑटो डेबिट सिस्टम के जरिए खुद ब खुद कटता है।
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| केंद्र सरकार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का प्रीमियम बढ़ा दिया है। ये दोनों योजनाएं बैंकों के खाताधारकों को दी जाती हैं। प्रीमियम की राशि भी खाते में से ही काटी जाती हैं। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की प्रीमियम दर को बढ़ाकर एक. पच्चीस रुपयापए प्रति दिन कर दिया गया है। जिससे यह सालाना तीन सौ तीस रुपयापए से बढ़कर चार सौ छत्तीस रुपयापए हो गई है। केंद्र सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के लिए वार्षिक प्रीमियम बारह रुपयापए से बढ़ाकर बीस रुपयापए कर दिया गया है। ये नई प्रीमियम दरें एक जून, दो हज़ार बाईस से लागू हो जाएंगी। इकतीस मार्च, दो हज़ार बाईस तक PMJJBY और PMSBY के तहत क्रमशः छः. चार करोड़ और बाईस करोड़ बीमाकर्ताओं ने नामांकन कराया है। इन दोनों योजनाओं के तहत लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण मार्ग के माध्यम से दावा जमा किया गया है। इन योजनाओं की शुरुआत के बाद से पिछले सात वर्षों में प्रीमियम दरें नहीं बदली गई। PMSBY की शुरुआत से इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक प्रीमियम के तौर पर एक,एक सौ चौंतीस करोड़ रुपए की राशि एकत्र की गई और दो,पाँच सौ तेरह करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया है। PMJJBY के तहत प्रीमियम के रूप में नौ,सात सौ सैंतीस करोड़ रुपए की राशि जमा की गई और चौदह,एक सौ चौंतालीस करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की शुरुआत नौ मई दो हज़ार पंद्रह को की गई थी। यह एक साल का लाइफ इंश्योरेंस प्लान है। इसे हर साल रिन्यू करवाना पड़ता है। इस योजना को खरीदने पर व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके परिवार के सदस्यों को दो लाख रुपए दिए जाते हैं। इस टर्म प्लान को लेने के लिए आपकी न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष और अधिकतम पचास साल होनी चाहिए। भारत का कोई भी नागरिक इस योजना में निवेश कर सकता है। इस योजना की परिपक्वता आयु पचपन साल है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना भी एक सरकारी बीमा योजना है। इसके जरिए अगर किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांग हो जाता है तो उसके परिवार को दो लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर मिलता है। इसके अलावा आशिंक रूप से दिव्यांग होने पर भी बीमाधारक को एक लाख रुपए की आर्थिक मदद सरकार द्वारा दी जाती है। इन दोनों योजनाओं में प्रीमियम पॉलिसी खरीदने वाले व्यक्ति के खाते से ऑटो डेबिट सिस्टम के जरिए खुद ब खुद कटता है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
३६६ : जैनसाहित्यका इतिहास
परम्पराका परिचय देते हुए उन्हे शुभचन्द्रका शिष्य बतलाया है। यह दान प्रशस्ति वि० सं० १५१९ में लिखी गई है और उस समय जिनचन्द्र मौजूद थे । चूंकि यह जिनच न्द्र शुभचन्द्र के शिष्य थे अत. यह भी भास्करनन्दिके गुरु नहीं हो सकते ।
चौथे जिनचन्द्र वे हैं जिनका नाम श्रवणबेलगोलाके शिला लेख नं० ५५( ६९ ) में द्वितीय माघनन्दि आचार्य के पश्चात् आया है । ५० ए० शान्तिराज शास्त्रीने सुखबोध वृत्तिकी अपनी प्रस्तावनामें बिना किसी उपपत्तिके इन्ही जिनचन्द्र को भास्करनन्दिका गुरु होनेकी संभावना की है और लिखा है कि वह माघनन्दि आचार्य १२५० मे जीवित थे ऐसा उल्लेख है । अतः किन्ही विद्वानोंने उनके उत्तर काल भावी जिनचन्द्राचार्यका काल १२७५ माना है। किन्तु शास्त्रीजीने यह नही स्पष्ट किया कि यह कौन सम्वत् है ।
श्रवणवेलगोलाके उक्त शिलालेखका सभावित समय लगभग शक स० १०२२ (वि० स० ११५७) है । उसमें उल्लिखित माघनन्दिका समय १२५० कैसे हो सकता है । कर्नाटक कविचरितेके अनुसार एक माघनन्दिका समय ई० सन् १९६० (वि० सं० १३१७ ) है । वे माघनन्दि श्रावकाचारके कर्ता है और उन्होंने शास्त्रसारसमुच्चयपर कनडीमें टीका लिखी है। शास्त्रीजीका अभिप्राय शायद उन्हीसे है । किन्तु उक्त शिलालेख में उल्लिखित माघनन्दि उनसे भिन्न है और इसलिए उनके पश्चात् उल्लिखित जिनचन्द्रका भी वह समय नही हो सकता जो शास्त्रीजीने लिखा है । और बिना किसी आधारके इन जिनचन्द्रको भास्करनन्दिका गुरु भी नही माना जा सकता । उक्त शिलालेखमे जिनचन्द्रको व्याकरणमे पूज्यपादके तुल्य, तर्कमे अकलकके तुल्य और कवितामे भारविके तुल्य बतलाया है । किन्तु भास्करनन्दिके गुरु तो महा संद्धान्त थे, उसका शिलालेखमे कोई निर्देश नहीं है । अत उसके आधारपर भास्करनन्दिका समय निर्धारित नही किया जा सकता । उसका आधार तो उनकी टीका ही हो सकती है ।
भास्करनन्दि पूज्यपाद, अकलंक और विद्यानन्दके पश्चात् हुए हैं यह उनकी टीकाके मगल श्लोकमें आगत 'विद्यानन्दा.' पदसे स्पष्ट है। उन्होंने यशस्तिलक ( वि० स० १०१७ ), गोम्मटसार, संस्कृत पञ्चसंग्रह ( वि० स० १०७३) और वसुनन्दि श्रावकाचारसे पद्य उद्धृत किये हैं। वसुनन्दि विक्रमकी बारहवी शताब्दीके विद्वान है । अत भास्करनन्दि उसके पश्चात् ही किसी समय हुए है ।
तत्त्वार्थसूत्रकी दो अप्रकाशित टीकाएँ
तत्त्वार्थसूत्र अपनी विशेषताओंके कारण अपने जन्मकालसे ही अत्यधिक | तीन सौ छयासठ : जैनसाहित्यका इतिहास परम्पराका परिचय देते हुए उन्हे शुभचन्द्रका शिष्य बतलाया है। यह दान प्रशस्ति विशून्य संशून्य एक हज़ार पाँच सौ उन्नीस में लिखी गई है और उस समय जिनचन्द्र मौजूद थे । चूंकि यह जिनच न्द्र शुभचन्द्र के शिष्य थे अत. यह भी भास्करनन्दिके गुरु नहीं हो सकते । चौथे जिनचन्द्र वे हैं जिनका नाम श्रवणबेलगोलाके शिला लेख नंशून्य पचपन में द्वितीय माघनन्दि आचार्य के पश्चात् आया है । पचास एशून्य शान्तिराज शास्त्रीने सुखबोध वृत्तिकी अपनी प्रस्तावनामें बिना किसी उपपत्तिके इन्ही जिनचन्द्र को भास्करनन्दिका गुरु होनेकी संभावना की है और लिखा है कि वह माघनन्दि आचार्य एक हज़ार दो सौ पचास मे जीवित थे ऐसा उल्लेख है । अतः किन्ही विद्वानोंने उनके उत्तर काल भावी जिनचन्द्राचार्यका काल एक हज़ार दो सौ पचहत्तर माना है। किन्तु शास्त्रीजीने यह नही स्पष्ट किया कि यह कौन सम्वत् है । श्रवणवेलगोलाके उक्त शिलालेखका सभावित समय लगभग शक सशून्य एक हज़ार बाईस है । उसमें उल्लिखित माघनन्दिका समय एक हज़ार दो सौ पचास कैसे हो सकता है । कर्नाटक कविचरितेके अनुसार एक माघनन्दिका समय ईशून्य सन् एक हज़ार नौ सौ साठ है । वे माघनन्दि श्रावकाचारके कर्ता है और उन्होंने शास्त्रसारसमुच्चयपर कनडीमें टीका लिखी है। शास्त्रीजीका अभिप्राय शायद उन्हीसे है । किन्तु उक्त शिलालेख में उल्लिखित माघनन्दि उनसे भिन्न है और इसलिए उनके पश्चात् उल्लिखित जिनचन्द्रका भी वह समय नही हो सकता जो शास्त्रीजीने लिखा है । और बिना किसी आधारके इन जिनचन्द्रको भास्करनन्दिका गुरु भी नही माना जा सकता । उक्त शिलालेखमे जिनचन्द्रको व्याकरणमे पूज्यपादके तुल्य, तर्कमे अकलकके तुल्य और कवितामे भारविके तुल्य बतलाया है । किन्तु भास्करनन्दिके गुरु तो महा संद्धान्त थे, उसका शिलालेखमे कोई निर्देश नहीं है । अत उसके आधारपर भास्करनन्दिका समय निर्धारित नही किया जा सकता । उसका आधार तो उनकी टीका ही हो सकती है । भास्करनन्दि पूज्यपाद, अकलंक और विद्यानन्दके पश्चात् हुए हैं यह उनकी टीकाके मगल श्लोकमें आगत 'विद्यानन्दा.' पदसे स्पष्ट है। उन्होंने यशस्तिलक , गोम्मटसार, संस्कृत पञ्चसंग्रह और वसुनन्दि श्रावकाचारसे पद्य उद्धृत किये हैं। वसुनन्दि विक्रमकी बारहवी शताब्दीके विद्वान है । अत भास्करनन्दि उसके पश्चात् ही किसी समय हुए है । तत्त्वार्थसूत्रकी दो अप्रकाशित टीकाएँ तत्त्वार्थसूत्र अपनी विशेषताओंके कारण अपने जन्मकालसे ही अत्यधिक |
कार की नंबर प्लेट पर अशोक चिन्ह का उपयोग कौन कर सकता है?
भारत का राज्य चिन्ह (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) अधिनियम, 2007 की अनुसूची 2 के नियम 7 के अनुसार केवल कुछ सांविधिक प्राधिकारियों और अन्य उच्चाधिकारियों को ही यह अधिकार होगा कि वे अपनी कारों पर अशोक का चिन्ह या EMBLEM इस्तेमाल कर सकते हैं. इस लेख में आप जानेंगे कि कौन कौन से लोग इस चिन्ह का इस्तेमाल कर सकते हैं.
भारत के राज्य चिन्ह (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) अधिनियम, 2007 की अनुसूची 2 के नियम 7 के अनुसार केवल कुछ सांविधिक प्राधिकारियों और अन्य उच्चाधिकारियों को ही यह अधिकार होगा कि वे अपनी कारों पर अशोक का चिन्ह या State Emblem इस्तेमाल कर सकते हैं.
यह अधिनियम इस बात को बताता है कि अशोक चिन्ह को किस लेखन सामग्री (लेटरहेड या विसिटिंग कार्ड इत्यादि), भवन, वाहन पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह अधिनियम बताता है कि इस चिन्ह को संसद, राष्ट्रपति भवन, उच्चतम न्यायालय, केन्द्रीय सचिवालय भवन जैसे अति महत्वपूर्ण भवनों पर लगाया जा सकता है.
इस लेख में आप जानेंगे कि कौन कौन से लोग इस अशोक चिन्ह का इस्तेमाल अपने वाहनों पर कर सकते हैं.
ज्ञातव्य है कि इस बारे में दिशा निर्देश गृह मंत्रालय द्वारा जारी किये जाते हैं. एक RTI के जबाब में गृह मंत्रालय ने माना कि अशोक के चिन्ह को अपनी गाड़ी पर वे लोग भी इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि इसके पात्र नहीं हैं. इसलिए सामान्य लोगों की जानकारी के लिए हमने यह लेख तैयार किया है.
गाड़ी की नंबर प्लेट पर A/F का क्या मतलब होता है?
निम्नलिखित सांविधिक पदाधिकारी अपनी कारों पर नम्बर प्लेट की जगह अशोक चिन्ह का प्रयोग कर सकते हैं;
1 .राष्ट्रपति भवन की कारें इस चिन्ह का प्रयोग कर सकती हैं;
जब निम्नलिखित पदाधिकारी उनके पति या पत्नी ऐसे वाहनों में यात्रा कर रहे हों;
3. राजभवन और राज निवासों की कारें इसका इस्तेमाल कर सकतीं हैं;
जब किसी सम्बंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भीतर निम्नलिखित पदाधिकारी या उनके पति या पत्नी ऐसे वाहनों में यात्रा कर रहे हों;
6. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल विभाग द्वारा रखी जाने वाली कारों में (जब उनका प्रयोग भारत में आये हुए कैबिनेट मंत्रियों और उससे उच्च रैंक के विदेशी उच्चधिकारियों और भारत के किसी समारोह में शामिल होने वाले विदेशी राजदूतों की ड्यूटी में तैनात गाड़ियों) किया जाता है.
इसी कानून का भाग 2 निम्नलिखित गणमान्य व्यक्तियों को भी अपनी कारों पर तिकोनी धातु की पट्टिका पर अशोक चक्र लगाने की अनुमति देता है; ये व्यक्ति भारत में कहीं भी यात्रा कर रहे हों तो वे इस पट्टिका पर अशोक चिन्ह का उपयोग अपनी गाड़ी पर कर सकते हैं.
निम्नलिखित पदाधिकारी अपनी कारों पर अशोक चिन्ह का प्रयोग केवल अपने राज्य क्षेत्र के भीतर ही कर सकते हैं;
ऊपर दिए गए नामों को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि अशोक चिन्ह का प्रयोग केवल बहुत महत्वपूर्ण व्यक्तियों के वाहनों पर ही किया जा सकता है. लेकिन देखने में यह आया है कि साधारण पद पर बैठे लोग भी अपनी कारों पर इसका उपयोग करते हैं जो कि इस अधिनियम के अनुसार प्रतिबंधित है.
कौन से गणमान्य व्यक्तियों को वाहन पर भारतीय तिरंगा फहराने की अनुमति है?
क्यों भारतीय वाहनों में अलग-अलग रंग की नम्बर प्लेट इस्तेमाल होती है?
| कार की नंबर प्लेट पर अशोक चिन्ह का उपयोग कौन कर सकता है? भारत का राज्य चिन्ह अधिनियम, दो हज़ार सात की अनुसूची दो के नियम सात के अनुसार केवल कुछ सांविधिक प्राधिकारियों और अन्य उच्चाधिकारियों को ही यह अधिकार होगा कि वे अपनी कारों पर अशोक का चिन्ह या EMBLEM इस्तेमाल कर सकते हैं. इस लेख में आप जानेंगे कि कौन कौन से लोग इस चिन्ह का इस्तेमाल कर सकते हैं. भारत के राज्य चिन्ह अधिनियम, दो हज़ार सात की अनुसूची दो के नियम सात के अनुसार केवल कुछ सांविधिक प्राधिकारियों और अन्य उच्चाधिकारियों को ही यह अधिकार होगा कि वे अपनी कारों पर अशोक का चिन्ह या State Emblem इस्तेमाल कर सकते हैं. यह अधिनियम इस बात को बताता है कि अशोक चिन्ह को किस लेखन सामग्री , भवन, वाहन पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह अधिनियम बताता है कि इस चिन्ह को संसद, राष्ट्रपति भवन, उच्चतम न्यायालय, केन्द्रीय सचिवालय भवन जैसे अति महत्वपूर्ण भवनों पर लगाया जा सकता है. इस लेख में आप जानेंगे कि कौन कौन से लोग इस अशोक चिन्ह का इस्तेमाल अपने वाहनों पर कर सकते हैं. ज्ञातव्य है कि इस बारे में दिशा निर्देश गृह मंत्रालय द्वारा जारी किये जाते हैं. एक RTI के जबाब में गृह मंत्रालय ने माना कि अशोक के चिन्ह को अपनी गाड़ी पर वे लोग भी इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि इसके पात्र नहीं हैं. इसलिए सामान्य लोगों की जानकारी के लिए हमने यह लेख तैयार किया है. गाड़ी की नंबर प्लेट पर A/F का क्या मतलब होता है? निम्नलिखित सांविधिक पदाधिकारी अपनी कारों पर नम्बर प्लेट की जगह अशोक चिन्ह का प्रयोग कर सकते हैं; एक .राष्ट्रपति भवन की कारें इस चिन्ह का प्रयोग कर सकती हैं; जब निम्नलिखित पदाधिकारी उनके पति या पत्नी ऐसे वाहनों में यात्रा कर रहे हों; तीन. राजभवन और राज निवासों की कारें इसका इस्तेमाल कर सकतीं हैं; जब किसी सम्बंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भीतर निम्नलिखित पदाधिकारी या उनके पति या पत्नी ऐसे वाहनों में यात्रा कर रहे हों; छः. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल विभाग द्वारा रखी जाने वाली कारों में किया जाता है. इसी कानून का भाग दो निम्नलिखित गणमान्य व्यक्तियों को भी अपनी कारों पर तिकोनी धातु की पट्टिका पर अशोक चक्र लगाने की अनुमति देता है; ये व्यक्ति भारत में कहीं भी यात्रा कर रहे हों तो वे इस पट्टिका पर अशोक चिन्ह का उपयोग अपनी गाड़ी पर कर सकते हैं. निम्नलिखित पदाधिकारी अपनी कारों पर अशोक चिन्ह का प्रयोग केवल अपने राज्य क्षेत्र के भीतर ही कर सकते हैं; ऊपर दिए गए नामों को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि अशोक चिन्ह का प्रयोग केवल बहुत महत्वपूर्ण व्यक्तियों के वाहनों पर ही किया जा सकता है. लेकिन देखने में यह आया है कि साधारण पद पर बैठे लोग भी अपनी कारों पर इसका उपयोग करते हैं जो कि इस अधिनियम के अनुसार प्रतिबंधित है. कौन से गणमान्य व्यक्तियों को वाहन पर भारतीय तिरंगा फहराने की अनुमति है? क्यों भारतीय वाहनों में अलग-अलग रंग की नम्बर प्लेट इस्तेमाल होती है? |
फूफी की आवाज़ कैसी बदली हुई है! एक बार मन हुआ कि आँख खोलकर देखे कि यह फूफी ही बोल रही है।
"क्या बात हो गई फूफी ?" ममी कितना मीठा बोल रही हैं। बहुत दिनों से उसने ममी की ऐसी मीठी आवाज़ ही नहीं सुनी।
"इतने साल आपकी नौकरी कर ली बहूजी, अब भगवान की नौकरी करेंगे, और क्या
"कुछ बात भी बताओगी?"
फूफी चुप ! रो तो नहीं रही ? पर किसी तरह की भी तो कोई आवाज़ नहीं आ रही ।
"तुम भी मुझसे नाराज़ हो फूफी ?" ममी की आवाज़ जैसे पिघलकर थरथरा रही है। | फूफी की आवाज़ कैसी बदली हुई है! एक बार मन हुआ कि आँख खोलकर देखे कि यह फूफी ही बोल रही है। "क्या बात हो गई फूफी ?" ममी कितना मीठा बोल रही हैं। बहुत दिनों से उसने ममी की ऐसी मीठी आवाज़ ही नहीं सुनी। "इतने साल आपकी नौकरी कर ली बहूजी, अब भगवान की नौकरी करेंगे, और क्या "कुछ बात भी बताओगी?" फूफी चुप ! रो तो नहीं रही ? पर किसी तरह की भी तो कोई आवाज़ नहीं आ रही । "तुम भी मुझसे नाराज़ हो फूफी ?" ममी की आवाज़ जैसे पिघलकर थरथरा रही है। |
एक प्राचीन कहावत है कि मनुष्य का परिचय उसके "शिष्टाचार" से मिल जाता है। उसका उठना, बैठना, चलना, फिरना, बातचीत करना, दूसरों के घर जाना, रास्ते में परिचितों से मिलना, ऐसे प्रत्येक कार्य एक अनुभवी को यह बतलाने के लिए पर्याप्त हैं कि वास्तव में व्यक्ति किस हद तक सामाजिक, शिष्ट एवं शालीन है। "सभ्यता" और "शिष्टाचार" का पारस्परिक संबंध काफी घनिष्ट है। इतना कि एक के बिना दूसरे को प्राप्त कर सकने का ख्याल निरर्थक है। जो सभ्य होगा, वह अवश्य ही शिष्ट होगा और जो शिष्टाचार का पालन करता है, उसे सब कोई सभ्य बतलाएँगे। ऐसा व्यक्ति सदैव ऐसी बातों से बचकर रहता है, जिससे किसी के मन को कष्ट पहुँचे या किसी प्रकार के अपमान का बोध हो। ऐसे व्यक्ति अपने विचारों को नम्रतापूर्वक प्रकट करते हैं और दूसरों के कथन को भी आदर के साथ सुनते हैं। ऐसा व्यक्ति आत्मप्रशंसा के दुर्गुण से दूर रहता है। वह अच्छी तरह जानता है कि अपने मुख से अपनी तारीफ करना "ओछे" व्यक्तियों का लक्षण है । सभ्य और शिष्ट व्यक्ति को तो अपना व्यवहार और बोलचाल ही ऐसा रखना चाहिए कि उसके संपर्क में आने वाले स्वयं उसकी प्रशंसा करें। "प्रशंसा" सुनने की लालसा व्यक्तित्व निर्माण में घातक है। शिष्टाचार में ऐसी शक्ति है कि मनुष्य किसी को बिना कुछ दिए-लिए अपने और परायों का श्रद्धाभाजन और आदर का पात्र बन जाता है, पर जिनमें शिष्टाचार का अभाव है, जो चाहे जिसके साथ अशिष्टता का व्यवहार कर बैठते हैं, ऐसे लोगों के घर के आदमी भी उनके अनुकूल नहीं होते। बहुत से लोग शिक्षा और अच्छे फैशन वाले वस्त्रों के प्रयोग को ही सभ्यता और शिष्टाचार का मुख्य अंग समझते हैं, पर यह धारणा गलत है। महँगी और बढ़िया पोशाक पहनने वाला व्यक्ति भी अशिष्ट हो सकता है और गाँव का एक हल चलाने वाला अशिक्षित किसान भी शिष्ट कहा जा सकता है। इस दृष्टि से जब हम अपने पास-पड़ोस पर दृष्टि डालते हैं और आधुनिक शिक्षा प्राप्त नवयुवकों को देखते हैं, तो हमें खेद के साथ स्वीकार करना पड़ता है कि इस समय हमारे देश में से शिष्टाचार की प्राचीन भावना का ह्रास हो रहा है। आज के पढ़े-लिखे युवक प्रायः शिष्टाचार को शून्य और उच्छृंखलता को आश्रय दे रहे हैं। कॉलेज और स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी रास्ते में और विद्यालय में भी आपस की बातचीत में अकारण ही गालियों का प्रयोग करते हैं, अश्लील भाषा का प्रयोग करते हैं और धक्का-मुक्की करते दिखाई देते हैं। इन सबके उठने-बैठने का तरीका भी सभ्य नहीं कहा जा सकता। उपरोक्त प्रवचन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक संतुलित जीवन के व्यावहारिक सूत्र पृष्ठ-20 से लिया गया है।
| एक प्राचीन कहावत है कि मनुष्य का परिचय उसके "शिष्टाचार" से मिल जाता है। उसका उठना, बैठना, चलना, फिरना, बातचीत करना, दूसरों के घर जाना, रास्ते में परिचितों से मिलना, ऐसे प्रत्येक कार्य एक अनुभवी को यह बतलाने के लिए पर्याप्त हैं कि वास्तव में व्यक्ति किस हद तक सामाजिक, शिष्ट एवं शालीन है। "सभ्यता" और "शिष्टाचार" का पारस्परिक संबंध काफी घनिष्ट है। इतना कि एक के बिना दूसरे को प्राप्त कर सकने का ख्याल निरर्थक है। जो सभ्य होगा, वह अवश्य ही शिष्ट होगा और जो शिष्टाचार का पालन करता है, उसे सब कोई सभ्य बतलाएँगे। ऐसा व्यक्ति सदैव ऐसी बातों से बचकर रहता है, जिससे किसी के मन को कष्ट पहुँचे या किसी प्रकार के अपमान का बोध हो। ऐसे व्यक्ति अपने विचारों को नम्रतापूर्वक प्रकट करते हैं और दूसरों के कथन को भी आदर के साथ सुनते हैं। ऐसा व्यक्ति आत्मप्रशंसा के दुर्गुण से दूर रहता है। वह अच्छी तरह जानता है कि अपने मुख से अपनी तारीफ करना "ओछे" व्यक्तियों का लक्षण है । सभ्य और शिष्ट व्यक्ति को तो अपना व्यवहार और बोलचाल ही ऐसा रखना चाहिए कि उसके संपर्क में आने वाले स्वयं उसकी प्रशंसा करें। "प्रशंसा" सुनने की लालसा व्यक्तित्व निर्माण में घातक है। शिष्टाचार में ऐसी शक्ति है कि मनुष्य किसी को बिना कुछ दिए-लिए अपने और परायों का श्रद्धाभाजन और आदर का पात्र बन जाता है, पर जिनमें शिष्टाचार का अभाव है, जो चाहे जिसके साथ अशिष्टता का व्यवहार कर बैठते हैं, ऐसे लोगों के घर के आदमी भी उनके अनुकूल नहीं होते। बहुत से लोग शिक्षा और अच्छे फैशन वाले वस्त्रों के प्रयोग को ही सभ्यता और शिष्टाचार का मुख्य अंग समझते हैं, पर यह धारणा गलत है। महँगी और बढ़िया पोशाक पहनने वाला व्यक्ति भी अशिष्ट हो सकता है और गाँव का एक हल चलाने वाला अशिक्षित किसान भी शिष्ट कहा जा सकता है। इस दृष्टि से जब हम अपने पास-पड़ोस पर दृष्टि डालते हैं और आधुनिक शिक्षा प्राप्त नवयुवकों को देखते हैं, तो हमें खेद के साथ स्वीकार करना पड़ता है कि इस समय हमारे देश में से शिष्टाचार की प्राचीन भावना का ह्रास हो रहा है। आज के पढ़े-लिखे युवक प्रायः शिष्टाचार को शून्य और उच्छृंखलता को आश्रय दे रहे हैं। कॉलेज और स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी रास्ते में और विद्यालय में भी आपस की बातचीत में अकारण ही गालियों का प्रयोग करते हैं, अश्लील भाषा का प्रयोग करते हैं और धक्का-मुक्की करते दिखाई देते हैं। इन सबके उठने-बैठने का तरीका भी सभ्य नहीं कहा जा सकता। उपरोक्त प्रवचन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक संतुलित जीवन के व्यावहारिक सूत्र पृष्ठ-बीस से लिया गया है। |
हिंदी में 'बर्फी', 'मुबारकां' और 'रेड' जैसी फिल्मों में नजर आईं इलियाना डिक्रूज ने 2006 में पहली तमिल फिल्म 'Kedi' की थी, लेकिन पिछले 11 साल से इस फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एक भी फिल्म पर्दे पर नहीं आई है।
एंटरटेनमेंट डेस्क. इलियाना डिक्रूज (Ileana D'Cruz) को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्हें तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बैन कर दिया गया है। दरअसल, तमिल फिल्मों के एक निर्माता ने इलियाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और दावा किया है कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के लिए एडवांस पेमेंट तो ले लिया, लेकिन वे शूटिंग से गायब रहीं। इसके चलते मेकर्स को तगड़ा घाटा उठाना पड़ा है। प्रोड्यूसर्स इलियाना के इस अनप्रोफेशनल रवैये से काफी नाराज है। दूसरी ओर इस घटना के बाद इलियाना ने खुद को तमिल फिल्मों में एक्टिंग करने से लिमिटेड कर लिया है।
इलियाना लंबे समय से तमिल फिल्मों से गायब चल रही हैं। इसलिए मेकर्स अब उनके पेशेवर रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर इलियाना ने भी इस खबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सोशल मीडिया पर भी इलियाना ने कोई पोस्ट इस संदर्भ में साझा नहीं की है। इलियाना ने यहां अपनी पिछली पोस्ट 7 दिन पहले साझा की थी, जो उनके म्यूजिक वीडियो 'सब गज़ब' की पहली झलक थी। पोस्ट के कैप्शन में इलियाना ने लिखा था, "साल का सबसे हॉट ट्रैक आ रहा है। क्योंकि नाम सब कुछ कह रहा है. . सब गज़ब सब गज़ब। "
इलियाना डिक्रूज तमिल के साथ-साथ तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों की भी पॉपुलर एक्ट्रेस हैं। उन्होंने 2013 में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म 'बर्फी' से बॉलीवुड में कदम रखा था, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी। इसके बाद वे 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'मैं तेरा हीरो'. 'रुस्तम', 'मुबारकां'. 'बादशाहो', 'रेड' और 'द बिग बुल' जैसी हिंदी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। उनकी आने वाली हिंदी फिल्मों में अनफेयर एंड लवली' और श्रीशा गुहा की अनटाइटल्ड फिल्म शामिल हैं। तमिल भाषा में इलियाना की पिछली फिल्म 2012 में आई 'Nanban' थी। इसके बाद उन्होंने कोई तमिल फिल्म नहीं की।
| हिंदी में 'बर्फी', 'मुबारकां' और 'रेड' जैसी फिल्मों में नजर आईं इलियाना डिक्रूज ने दो हज़ार छः में पहली तमिल फिल्म 'Kedi' की थी, लेकिन पिछले ग्यारह साल से इस फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एक भी फिल्म पर्दे पर नहीं आई है। एंटरटेनमेंट डेस्क. इलियाना डिक्रूज को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्हें तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बैन कर दिया गया है। दरअसल, तमिल फिल्मों के एक निर्माता ने इलियाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और दावा किया है कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के लिए एडवांस पेमेंट तो ले लिया, लेकिन वे शूटिंग से गायब रहीं। इसके चलते मेकर्स को तगड़ा घाटा उठाना पड़ा है। प्रोड्यूसर्स इलियाना के इस अनप्रोफेशनल रवैये से काफी नाराज है। दूसरी ओर इस घटना के बाद इलियाना ने खुद को तमिल फिल्मों में एक्टिंग करने से लिमिटेड कर लिया है। इलियाना लंबे समय से तमिल फिल्मों से गायब चल रही हैं। इसलिए मेकर्स अब उनके पेशेवर रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर इलियाना ने भी इस खबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सोशल मीडिया पर भी इलियाना ने कोई पोस्ट इस संदर्भ में साझा नहीं की है। इलियाना ने यहां अपनी पिछली पोस्ट सात दिन पहले साझा की थी, जो उनके म्यूजिक वीडियो 'सब गज़ब' की पहली झलक थी। पोस्ट के कैप्शन में इलियाना ने लिखा था, "साल का सबसे हॉट ट्रैक आ रहा है। क्योंकि नाम सब कुछ कह रहा है. . सब गज़ब सब गज़ब। " इलियाना डिक्रूज तमिल के साथ-साथ तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों की भी पॉपुलर एक्ट्रेस हैं। उन्होंने दो हज़ार तेरह में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म 'बर्फी' से बॉलीवुड में कदम रखा था, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी। इसके बाद वे 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'मैं तेरा हीरो'. 'रुस्तम', 'मुबारकां'. 'बादशाहो', 'रेड' और 'द बिग बुल' जैसी हिंदी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। उनकी आने वाली हिंदी फिल्मों में अनफेयर एंड लवली' और श्रीशा गुहा की अनटाइटल्ड फिल्म शामिल हैं। तमिल भाषा में इलियाना की पिछली फिल्म दो हज़ार बारह में आई 'Nanban' थी। इसके बाद उन्होंने कोई तमिल फिल्म नहीं की। |
संप्रमूढाः स्थिताः सर्वे प्रापद्यन्त न किंचन । ततस्तेषु प्रमूढेषु काव्यस्तान्पुनरब्रवीत् आचार्यो वो ह्यहं काव्यो देवाचार्योऽयमङ्गिराः । अनुगच्छत गां सर्वे त्यजतैनं बृहस्पतिम् एवमुक्ताऽसुराः सर्वे तावुभौ समवेक्ष्य च । तदासुरा विशेषं तु न व्यजानंस्तयोर्द्वयोः बृहस्पतिरुवाचैतानसंभ्रान्तोऽयमङ्गिराः । काव्योऽहं वो गुरुर्देत्या मद्रपोऽयं बृहस्पतिः स मोहयति रूपेण मामकेनैष वोऽसुराः । श्रुत्वा तस्य ततस्ते व संमन्यार्थवचोऽब्रवीत् अयं नो दश वर्षाणि सततं शास्ति वै प्रभुः । एष वै गुरुरस्माकमन्तरेप्सुरयं द्विजः ततस्ते दानवाः सर्वे प्रणिपत्याभिवाद्य च । वचनं जगृहुस्तस्य चिराभ्यासेन मोहिताः ऊचुस्तमसुराः सर्वे क्रुद्धाः संरक्तलोचनाः । अयं गुरुहितोऽस्माकं गच्छ त्वं नासि नो गुरुः भार्गवोऽङ्गिरसो ( ? ) वाऽयं भवत्वेणैव नो गुरुः । स्थिता वयं निदेशेऽस्य गच्छ त्वं साधु मा चिरम् ॥ एवमुक्त्वाऽसुराः सर्वे प्रापद्यन्त बृहस्पतिम् । यदा न प्रतिपद्यन्ते तेनोक्तं तन्महद्धितम्
तक इसी प्रकार से अज्ञान में पड़े रहे, किसी भी निश्चय पर नहीं पहुँच सके । दस्यों के किकत्र्तव्यविमूढ़ हो जाने पर शुक्राचार्य ने पुनः उनसे कहा, अरे दानवों ! तुम लोगों का आचार्य शुक्र मैं ही हूँ, यह अंगिरा का पुत्र देवताओं का गुरु बृहस्पति है, मेरी आज्ञा मानो, इसके कहने में न आवो, इसको छोड़ो ।' शुक्राचार्य के इस प्रकार कहने पर भी सब दानवगण दोनों आचार्यों की ओर देखते ही रह गये, उन्हें उन दोनों में कोई विशेषता नहीं जान पड़ी ।२३-२८। तदुपरान्त बिना किसी घबराहट के स्वाभाविक स्वर में बृहस्पति बोले, दैत्यो! तुम लोगों के गुरु शुक्राचार्य हमीं हैं, यह मेरा स्वरूप धारण कर अंगिरा पुत्र बृहस्पति है । अरे असुरो ! मेरा, स्वरूप धारण कर यह तुम लोगों को मोहित कर रहा है ।' बृहस्पति की ऐसी बातें सुनकर वैत्यों ने आपस में सम्मति करके निश्चय पूर्वक यह वचन कहा - 'परम ऐश्वयंशाली यही हमें आज दस वर्षों से पढ़ाते आ रहे हैं अतः यही हमारे वास्तविक गुरु हैं, यह ब्राह्मण हम लोगों के भेद को जानने की इच्छा से यहाँ कृत्रिम वेश धारणकर आया हुआ है। इस प्रकार कह कर चिरकाल के अभ्यास से मोह को प्राप्त होने वाले उन समस्त असुरगणों ने पुनः बृहस्पति को ही शुक्राचार्य समझकर प्रणाम और अभिवादन किया और उन्हीं की बातें अंगीकार कीं। इतना ही नहीं, शुक्राचार्य के ऊपर वे परमक्रुद्ध हो गये उनके नेत्र लाल हो आये, और वे आवेश में भरकर बोले, हमारे कल्याण के चाहनेवाले आचार्य यही हैं, तुम हमारे आचार्य नहीं हो, यहाँ से चले जाओ ।२६-३३। यह चाहे भृगु के पुत्र शुक्राचार्य हों या अंगिरा के पुत्र बृहस्पति हों, यही अब हमारे गुरु हैं, हम सब अब इन्हीं के आदेश में स्थित हैं, तुम यहाँ से चले जाओ, देर मत करो, इसी में तुम्हारी भलाई है । ऐसा कहकर दैत्यगण बृहस्पति के समीप चले आये। इस प्रकार शुक्राचार्य की महान् कल्याणकारिणी बातों की अवज्ञाकर जब दैत्यगण उनके | संप्रमूढाः स्थिताः सर्वे प्रापद्यन्त न किंचन । ततस्तेषु प्रमूढेषु काव्यस्तान्पुनरब्रवीत् आचार्यो वो ह्यहं काव्यो देवाचार्योऽयमङ्गिराः । अनुगच्छत गां सर्वे त्यजतैनं बृहस्पतिम् एवमुक्ताऽसुराः सर्वे तावुभौ समवेक्ष्य च । तदासुरा विशेषं तु न व्यजानंस्तयोर्द्वयोः बृहस्पतिरुवाचैतानसंभ्रान्तोऽयमङ्गिराः । काव्योऽहं वो गुरुर्देत्या मद्रपोऽयं बृहस्पतिः स मोहयति रूपेण मामकेनैष वोऽसुराः । श्रुत्वा तस्य ततस्ते व संमन्यार्थवचोऽब्रवीत् अयं नो दश वर्षाणि सततं शास्ति वै प्रभुः । एष वै गुरुरस्माकमन्तरेप्सुरयं द्विजः ततस्ते दानवाः सर्वे प्रणिपत्याभिवाद्य च । वचनं जगृहुस्तस्य चिराभ्यासेन मोहिताः ऊचुस्तमसुराः सर्वे क्रुद्धाः संरक्तलोचनाः । अयं गुरुहितोऽस्माकं गच्छ त्वं नासि नो गुरुः भार्गवोऽङ्गिरसो वाऽयं भवत्वेणैव नो गुरुः । स्थिता वयं निदेशेऽस्य गच्छ त्वं साधु मा चिरम् ॥ एवमुक्त्वाऽसुराः सर्वे प्रापद्यन्त बृहस्पतिम् । यदा न प्रतिपद्यन्ते तेनोक्तं तन्महद्धितम् तक इसी प्रकार से अज्ञान में पड़े रहे, किसी भी निश्चय पर नहीं पहुँच सके । दस्यों के किकत्र्तव्यविमूढ़ हो जाने पर शुक्राचार्य ने पुनः उनसे कहा, अरे दानवों ! तुम लोगों का आचार्य शुक्र मैं ही हूँ, यह अंगिरा का पुत्र देवताओं का गुरु बृहस्पति है, मेरी आज्ञा मानो, इसके कहने में न आवो, इसको छोड़ो ।' शुक्राचार्य के इस प्रकार कहने पर भी सब दानवगण दोनों आचार्यों की ओर देखते ही रह गये, उन्हें उन दोनों में कोई विशेषता नहीं जान पड़ी ।तेईस-अट्ठाईस। तदुपरान्त बिना किसी घबराहट के स्वाभाविक स्वर में बृहस्पति बोले, दैत्यो! तुम लोगों के गुरु शुक्राचार्य हमीं हैं, यह मेरा स्वरूप धारण कर अंगिरा पुत्र बृहस्पति है । अरे असुरो ! मेरा, स्वरूप धारण कर यह तुम लोगों को मोहित कर रहा है ।' बृहस्पति की ऐसी बातें सुनकर वैत्यों ने आपस में सम्मति करके निश्चय पूर्वक यह वचन कहा - 'परम ऐश्वयंशाली यही हमें आज दस वर्षों से पढ़ाते आ रहे हैं अतः यही हमारे वास्तविक गुरु हैं, यह ब्राह्मण हम लोगों के भेद को जानने की इच्छा से यहाँ कृत्रिम वेश धारणकर आया हुआ है। इस प्रकार कह कर चिरकाल के अभ्यास से मोह को प्राप्त होने वाले उन समस्त असुरगणों ने पुनः बृहस्पति को ही शुक्राचार्य समझकर प्रणाम और अभिवादन किया और उन्हीं की बातें अंगीकार कीं। इतना ही नहीं, शुक्राचार्य के ऊपर वे परमक्रुद्ध हो गये उनके नेत्र लाल हो आये, और वे आवेश में भरकर बोले, हमारे कल्याण के चाहनेवाले आचार्य यही हैं, तुम हमारे आचार्य नहीं हो, यहाँ से चले जाओ ।छब्बीस-तैंतीस। यह चाहे भृगु के पुत्र शुक्राचार्य हों या अंगिरा के पुत्र बृहस्पति हों, यही अब हमारे गुरु हैं, हम सब अब इन्हीं के आदेश में स्थित हैं, तुम यहाँ से चले जाओ, देर मत करो, इसी में तुम्हारी भलाई है । ऐसा कहकर दैत्यगण बृहस्पति के समीप चले आये। इस प्रकार शुक्राचार्य की महान् कल्याणकारिणी बातों की अवज्ञाकर जब दैत्यगण उनके |
बीएसएफ में काम करने की चाह रखने वालों के लिए एक बेहतर मौका आया है. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल ने अपने 1635 खाली पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे हैं. यदि आप इस जॉब को पाना चाहते हैं तो नीचे दी गई जानकारी को पूरा जरूर पढ़ें व आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जांचे ताकि आप आवेदन करते समय कंफ्यूज ना हो.
संगठनः सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)
बीएसएफ हेड कांस्टेबल आयु सीमा (BSF Head Constable Age Limit)
इच्छुक उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष व अधिकतम आयु 25 वर्ष तक की होनी चाहिए.
बीएसएफ हेड कांस्टेबल (आरओ / आरएम) भर्ती 2022 के लिए शारीरिक योग्यता (BSF Head Constable Physical Eligibility)
बीएसएफ हेड कांस्टेबल (आरओ / आरएम) भर्ती 2022 के लिए चयन (BSF Head Constable Selection Process)
इच्छुक उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा, पीईटी, पीएसटी, साक्षात्कार और व्यक्तित्व परीक्षण पास करना होगा उसके बाद ही वो इस पद के लिए सेलेक्ट हो सकेंगे.
बीएसएफ हेड कांस्टेबल (आरओ / आरएम) भर्ती 2022 आवेदन कैसे करें (BSF Head Constable Online Application)
यदि आप इस नौकरी करने के पात्र हैं और इसमें अपना आवेदन भरना चाहते हैं तो आपको इसकी आधिकारिक वेबसाइट rectt. bsf. gov. in पर जाना होगा.
अधिक जानकारी के लिए आप इसके आधिकारिक नोटिफिकेशन का पीडीएफ देख सकते हैंः
| बीएसएफ में काम करने की चाह रखने वालों के लिए एक बेहतर मौका आया है. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल ने अपने एक हज़ार छः सौ पैंतीस खाली पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे हैं. यदि आप इस जॉब को पाना चाहते हैं तो नीचे दी गई जानकारी को पूरा जरूर पढ़ें व आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जांचे ताकि आप आवेदन करते समय कंफ्यूज ना हो. संगठनः सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ हेड कांस्टेबल आयु सीमा इच्छुक उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष व अधिकतम आयु पच्चीस वर्ष तक की होनी चाहिए. बीएसएफ हेड कांस्टेबल भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए शारीरिक योग्यता बीएसएफ हेड कांस्टेबल भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए चयन इच्छुक उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा, पीईटी, पीएसटी, साक्षात्कार और व्यक्तित्व परीक्षण पास करना होगा उसके बाद ही वो इस पद के लिए सेलेक्ट हो सकेंगे. बीएसएफ हेड कांस्टेबल भर्ती दो हज़ार बाईस आवेदन कैसे करें यदि आप इस नौकरी करने के पात्र हैं और इसमें अपना आवेदन भरना चाहते हैं तो आपको इसकी आधिकारिक वेबसाइट rectt. bsf. gov. in पर जाना होगा. अधिक जानकारी के लिए आप इसके आधिकारिक नोटिफिकेशन का पीडीएफ देख सकते हैंः |
हमीरपुर के सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा रोजाना पार्टी छोड़ने की ख़बर आ रही हैं। रविवार औऱ सोमवार को भी दर्जनों परिवार कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। मीडिया प्रभारी विनोद ठाकुर ने बताया कि चबूतरा पंचायत के करीब 22 परिवारो के सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सामने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।
इस मौके पर उनके साथ सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की अलग-अलग पंचायतों के करीब 45 नव-मतदाता जो अभी पहली बार अपने मत का प्रयोग करेंगे उन्होंने भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। नव मतदाता युवाओं ने भारतीय जनता पार्टी की शपथ लेकर कहा कि आने वाले समय में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे और कांग्रेस विचारधारा ने जो सुजानपुर में नशे को जो बढ़ावा दिया है उसके खिलाफ लड़ाई लड़कर युवाओं को कांग्रेस नेताओं के बहकावे में आने से बचाएंगे।
सभी मतदाताओं ने एक स्वर में कहा की अनुराग ठाकुर के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनने से वह सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। आज उनकी पहचान कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर से होती है भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में तमाम परिवारों के साथ युवा वर्ग ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भारत माता की जय, वंदे मातरम ,के उद्घोष के साथ धूमल जी आप आगे बढ़ो हम आपके साथ हैं, एक बार धूमल बार-बार धूमल का नारा बुलंद करते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
| हमीरपुर के सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा रोजाना पार्टी छोड़ने की ख़बर आ रही हैं। रविवार औऱ सोमवार को भी दर्जनों परिवार कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। मीडिया प्रभारी विनोद ठाकुर ने बताया कि चबूतरा पंचायत के करीब बाईस परिवारो के सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सामने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस मौके पर उनके साथ सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की अलग-अलग पंचायतों के करीब पैंतालीस नव-मतदाता जो अभी पहली बार अपने मत का प्रयोग करेंगे उन्होंने भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। नव मतदाता युवाओं ने भारतीय जनता पार्टी की शपथ लेकर कहा कि आने वाले समय में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे और कांग्रेस विचारधारा ने जो सुजानपुर में नशे को जो बढ़ावा दिया है उसके खिलाफ लड़ाई लड़कर युवाओं को कांग्रेस नेताओं के बहकावे में आने से बचाएंगे। सभी मतदाताओं ने एक स्वर में कहा की अनुराग ठाकुर के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनने से वह सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। आज उनकी पहचान कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर से होती है भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में तमाम परिवारों के साथ युवा वर्ग ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भारत माता की जय, वंदे मातरम ,के उद्घोष के साथ धूमल जी आप आगे बढ़ो हम आपके साथ हैं, एक बार धूमल बार-बार धूमल का नारा बुलंद करते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। |
नयी दिल्ली । भारतीय रेल के स्टेशनों के विकास के लिए भारतीय स्टेट बैंक से ऋण मिल सकेगा। रेल मंत्रालय में आज दोपहर भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम लिमिटेड (आईआरएसडीसी) आैर भारतीय स्टेट बैंक एवं एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के बीच इस आशय के एक करार पर हस्ताक्षर किये गये। इस मौके पर भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष अजित बासु और रेलवे बोर्ड के सदस्य (इंजीनियरिंग) एवं आईआरएसडीसी के मानद अध्यक्ष विश्वेश चौबे मौजूद थे।
चौबे ने बताया कि आरंभ में देश के 50 रेलवे स्टेशनों को माइक्रो स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और एसबीअाई कैपमार्केट से ऋण लिया जा सकेगा और ऋण की कोई सीमा भी नहीं होगी। यह ऋण आने वाले 15 से 20 वर्षों के दौरान लिया जाएगा। बासु ने प्रसन्नता व्यक्त की कि स्टेट बैंक रेलवे स्टेशनों के विकास में सहभागी होगा। उन्होंने रेलवे में निवेश की सुरक्षा के प्रति पूर्ण आश्वस्त कराते हुए कहा कि स्टेशनों को टाउनशिप में बदल कर न केवल आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी बल्कि रोज़गार भी बढ़ेगा।
आईआरएसडीसी के प्रबंध निदेशक एस. के. लोहिया ने बताया कि लगभग 50 स्टेशनों को विकास के लिए चुना गया है। इसके लिए आरंभ में 50 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी और अगर स्टेशनों का वाणिज्यिक विकास किया जायेगा तो एक लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक की राशि की जरूरत होगी।
भारतीय स्टेट बैंक और निगम के बीच इस करार से निवेश की सुरक्षा का भरोसा कायम होगा और स्टेशन के विकास या पुनर्विकास के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले निजी डेवेलेपर भी बैंक से आसानी से ऋण ले सकेंगे। लोहिया ने कहा कि बैंक के ऋण की कोई सीमा नहीं होगी। परियोजना की व्यवहार्यता को देखते हुये ऋण राशि तय की जायेगी। ऋण अनुबंध के नियम एवं शर्तें बाद में तय की जायेंगी।
| नयी दिल्ली । भारतीय रेल के स्टेशनों के विकास के लिए भारतीय स्टेट बैंक से ऋण मिल सकेगा। रेल मंत्रालय में आज दोपहर भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम लिमिटेड आैर भारतीय स्टेट बैंक एवं एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के बीच इस आशय के एक करार पर हस्ताक्षर किये गये। इस मौके पर भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष अजित बासु और रेलवे बोर्ड के सदस्य एवं आईआरएसडीसी के मानद अध्यक्ष विश्वेश चौबे मौजूद थे। चौबे ने बताया कि आरंभ में देश के पचास रेलवे स्टेशनों को माइक्रो स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और एसबीअाई कैपमार्केट से ऋण लिया जा सकेगा और ऋण की कोई सीमा भी नहीं होगी। यह ऋण आने वाले पंद्रह से बीस वर्षों के दौरान लिया जाएगा। बासु ने प्रसन्नता व्यक्त की कि स्टेट बैंक रेलवे स्टेशनों के विकास में सहभागी होगा। उन्होंने रेलवे में निवेश की सुरक्षा के प्रति पूर्ण आश्वस्त कराते हुए कहा कि स्टेशनों को टाउनशिप में बदल कर न केवल आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी बल्कि रोज़गार भी बढ़ेगा। आईआरएसडीसी के प्रबंध निदेशक एस. के. लोहिया ने बताया कि लगभग पचास स्टेशनों को विकास के लिए चुना गया है। इसके लिए आरंभ में पचास हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी और अगर स्टेशनों का वाणिज्यिक विकास किया जायेगा तो एक लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक की राशि की जरूरत होगी। भारतीय स्टेट बैंक और निगम के बीच इस करार से निवेश की सुरक्षा का भरोसा कायम होगा और स्टेशन के विकास या पुनर्विकास के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले निजी डेवेलेपर भी बैंक से आसानी से ऋण ले सकेंगे। लोहिया ने कहा कि बैंक के ऋण की कोई सीमा नहीं होगी। परियोजना की व्यवहार्यता को देखते हुये ऋण राशि तय की जायेगी। ऋण अनुबंध के नियम एवं शर्तें बाद में तय की जायेंगी। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
(बदायूं से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट)
बदायूं जिले के दातागंज कोतवाली के एक गांव में होली के चलते दिल्ली से आए दो युवकों ने खेत पर जा रही एक नाबालिग किशोरी के साथ छेड़छाड़ की थी। उसके बाद गांव के लोगों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया और उन्हें घेर लिया। गांव के ही एक युवक ने दोनों आरोपी युवकों की जूते से पिटाई की।
घटनास्थस पर मौजूद किसी युवक ने पूरे मामले का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियों वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारी मामले की जानकारी के लिए गांव के लोगों से पूछताछ की। तो वहीं, इस पूरे मामले पर जब एसएसपी ने बताया कि, सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे एक वीडियो मिला है।
जिसमें दो युवकों की जूते से पिटाई कर की जा रही है। इसमें ये भी बात सामने आई थी मामला छेड़छाड़ का था। साथ ही उन्होंने कहा कि, मैंने इस पूरे मामले की जांच दातागंज सीओ को दे दी है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे उसमे विधिक अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
| बदायूं जिले के दातागंज कोतवाली के एक गांव में होली के चलते दिल्ली से आए दो युवकों ने खेत पर जा रही एक नाबालिग किशोरी के साथ छेड़छाड़ की थी। उसके बाद गांव के लोगों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया और उन्हें घेर लिया। गांव के ही एक युवक ने दोनों आरोपी युवकों की जूते से पिटाई की। घटनास्थस पर मौजूद किसी युवक ने पूरे मामले का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियों वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारी मामले की जानकारी के लिए गांव के लोगों से पूछताछ की। तो वहीं, इस पूरे मामले पर जब एसएसपी ने बताया कि, सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे एक वीडियो मिला है। जिसमें दो युवकों की जूते से पिटाई कर की जा रही है। इसमें ये भी बात सामने आई थी मामला छेड़छाड़ का था। साथ ही उन्होंने कहा कि, मैंने इस पूरे मामले की जांच दातागंज सीओ को दे दी है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे उसमे विधिक अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। |
WBJEE Counselling 2023: वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा में पास होने वाले छात्रों को काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट wbjeeb.nic.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इस साल 99.4 फीसदी छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं.
WBJEE 2023 Counselling: पश्चिम बंगाल के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा का रिजल्ट जारी हुए एक महीना से ऊपर हो गया है. अब कैंडिडेट्स को काउंसलिंग का इंतजार है. वेस्ट बंगाल जेईई WBJEE 2023 के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. हालांकि बोर्ड की तरफ से काउंसलिंग की तारीखों को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है.
पश्चिम बंगाल के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए WBJEE का रिजल्ट 26 मई 2023 को जारी किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परीक्षा में 99.4 फीसदी छात्र पास हुए थे. परीक्षा में सेलेक्ट होने वाले कैंडिडेट्स अब काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं. काउंसलिंग में शामिल होने से पहले डॉक्यूमेंट्स की डिटेल्स जान लें.
- PwD Certificate (अगल हो तो)
- कोई एक पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस)
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा के लिए 1,01,000 छात्र शामिल हुए थे. इनमें से लगभग 97000 छात्रों को रैंक प्राप्त हुआ है. इन सभी के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी. लेटेस्ट अपडेट के लिए ऑफिशियल वेबसाइट wbjeeb.nic.in पर नजर रखें. काउंसलिंग और एडमिशन से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट के लिए बोर्ड की तरफ से Sandes App लॉन्च हुआ है. इसके लिए फोन में एप्प डाउनलोड करके लॉगिन करना होगा.
काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए, WBJEE-योग्य उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. सफल रजिस्ट्रेशन के बाद, उम्मीदवारों को पोर्टल पर लॉगिन करना होगा और अपना पसंदीदा कॉलेज और पाठ्यक्रम चुनना होगा. विकल्प उन्हें लॉक करना होगा. अधिकारी रैंक, वरीयता और सीट की उपलब्धता के आधार पर उम्मीदवारों को सीटें आवंटित करेंगे.
| WBJEE Counselling दो हज़ार तेईस: वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा में पास होने वाले छात्रों को काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट wbjeeb.nic.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इस साल निन्यानवे.चार फीसदी छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं. WBJEE दो हज़ार तेईस Counselling: पश्चिम बंगाल के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा का रिजल्ट जारी हुए एक महीना से ऊपर हो गया है. अब कैंडिडेट्स को काउंसलिंग का इंतजार है. वेस्ट बंगाल जेईई WBJEE दो हज़ार तेईस के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. हालांकि बोर्ड की तरफ से काउंसलिंग की तारीखों को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है. पश्चिम बंगाल के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए WBJEE का रिजल्ट छब्बीस मई दो हज़ार तेईस को जारी किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परीक्षा में निन्यानवे.चार फीसदी छात्र पास हुए थे. परीक्षा में सेलेक्ट होने वाले कैंडिडेट्स अब काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं. काउंसलिंग में शामिल होने से पहले डॉक्यूमेंट्स की डिटेल्स जान लें. - PwD Certificate - कोई एक पहचान पत्र मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल वेस्ट बंगाल जेईई परीक्षा के लिए एक,एक,शून्य छात्र शामिल हुए थे. इनमें से लगभग सत्तानवे हज़ार छात्रों को रैंक प्राप्त हुआ है. इन सभी के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी. लेटेस्ट अपडेट के लिए ऑफिशियल वेबसाइट wbjeeb.nic.in पर नजर रखें. काउंसलिंग और एडमिशन से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट के लिए बोर्ड की तरफ से Sandes App लॉन्च हुआ है. इसके लिए फोन में एप्प डाउनलोड करके लॉगिन करना होगा. काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए, WBJEE-योग्य उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा. सफल रजिस्ट्रेशन के बाद, उम्मीदवारों को पोर्टल पर लॉगिन करना होगा और अपना पसंदीदा कॉलेज और पाठ्यक्रम चुनना होगा. विकल्प उन्हें लॉक करना होगा. अधिकारी रैंक, वरीयता और सीट की उपलब्धता के आधार पर उम्मीदवारों को सीटें आवंटित करेंगे. |
ज्यादातर लोगों को कढ़ी चावल का स्वाद पसंद होता है। आपने भी कढ़ी को कई तरह से बनाकर खाया होगा लेकिन आज जो रेसिपी हम आपको बताने जा रहे हैं वो सर्दियों में लोग खाना पसंद करते हैं। दरअसल कई बार लोग सर्दी की वजह से कढ़ी नहीं खाते हैं।
- सबसे पहले मिक्सी में लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया डालकर पीस लें।
- साइड में एक बर्तन में दही के साथ बेसन मिक्स करके उसका पेस्ट तैयार कर लें और साथ में लहसुन-अदरक और मिर्ची वाला पेस्ट डाल कर अच्छे से मिक्स करें।
- इसके बाद एक कढ़ाही में बेसन वाला मिश्रण डालकर उबलने देंअब इसमें मेथी दाने डालकर 10मिनट तक उबाल लें।
- जब ये मिश्रण अच्छे से उबल जाए तो एक पैन या कढ़ाही में देसी घी डालकर गर्म कर लें और इसमें लौंग, तेजपत्ता, हींग, जीरा, साबुत लाल मिर्च, करी पत्ता और लहसुन डालकर भून लें साथ में नमक और चीनी मिला लें।
- अब 3-4मिनट तक बेसन-लहसुन का मिश्रण उबालें। और इस लहसुन की कढी को आप इसे जैसे भी खाना पसंद करते हैं चावल या रोटी के साथ सर्व कर सकते हैं।
| ज्यादातर लोगों को कढ़ी चावल का स्वाद पसंद होता है। आपने भी कढ़ी को कई तरह से बनाकर खाया होगा लेकिन आज जो रेसिपी हम आपको बताने जा रहे हैं वो सर्दियों में लोग खाना पसंद करते हैं। दरअसल कई बार लोग सर्दी की वजह से कढ़ी नहीं खाते हैं। - सबसे पहले मिक्सी में लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया डालकर पीस लें। - साइड में एक बर्तन में दही के साथ बेसन मिक्स करके उसका पेस्ट तैयार कर लें और साथ में लहसुन-अदरक और मिर्ची वाला पेस्ट डाल कर अच्छे से मिक्स करें। - इसके बाद एक कढ़ाही में बेसन वाला मिश्रण डालकर उबलने देंअब इसमें मेथी दाने डालकर दस मिनट तक उबाल लें। - जब ये मिश्रण अच्छे से उबल जाए तो एक पैन या कढ़ाही में देसी घी डालकर गर्म कर लें और इसमें लौंग, तेजपत्ता, हींग, जीरा, साबुत लाल मिर्च, करी पत्ता और लहसुन डालकर भून लें साथ में नमक और चीनी मिला लें। - अब तीन-चार मिनट तक बेसन-लहसुन का मिश्रण उबालें। और इस लहसुन की कढी को आप इसे जैसे भी खाना पसंद करते हैं चावल या रोटी के साथ सर्व कर सकते हैं। |
(www. arya-tv. com) मथुरा में रेलवे स्टेशन से GRP ने डेढ़ लाख के नकली नोटों के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया। यह राजस्थान और बिहार के रहने वाले थे। GRP ने जांच बढ़ाई तो पता चला कि नकली नोट छापने का काम बनारस में हो रहा है। जीआरपी ने वाराणसी में छापा मारकर नोट छापने वाले मास्टरमाइंड रौनक को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास प्रिटिंग का डिप्लोमा है। यानी, वह प्रिटिंग में एक्सपर्ट है। उसने इस तरह के नोट छापे की सामान्य तरीके से उसे पहचान पाना मुश्किल होगा। नोट के बीच में पड़ने वाले हरे कलर के धागे, जिसे सिक्योरिटी थ्रेड करते हैं। इसे वह चीन से मंगाता है।
नकली नोट छापने और उनको खपाने वाली गैंग की जांच आगे बढ़ी तो GRP मथुरा, बनारस पहुंची। यहां सारनाथ क्षेत्र में श्रीनगर कॉलोनी से एक नकली नोट छापने वाले रौनक उर्फ मुकेश उर्फ टीपू को गिरफ्तार किया। रौनक नकली नोट छापने और उनके बांटने का काम करता था।
एसपी GRP अधीक्षक मोहम्मद मुस्ताक के मुताबिक, नोट छापने की मशीन और सिक्योरिटी थ्रेड बरामद हुए हैं। इसे लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी चीन की एक कंपनी से अलीबाबा. कॉम के जरिए भारत का सिक्योरिटी थ्रेड मंगाते थे। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे गिरोह के सदस्य इस सिक्योरिटी थ्रेड के जरिए नकली नोट छापते हैं।
नकली नोट मामले में चीन का कनेक्शन सामने आने के बाद इस मामले में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी जांच शुरू कर दी है। एसपी GRP ने बताया कि इस मामले की जानकारी NIA, IB के अलावा उत्तर प्रदेश ATS को भी दे दी गई है। केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले की जांच अपने स्तर से कर रही हैं। एजेंसियां यह पता करने का भी प्रयास कर रही हैं कि कहीं चीन भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए कोई बड़ा षड्यंत्र तो नहीं रच रहा। वहीं GRP ने इस मामले में SIT बनाई है, जो हर पहलू से जांच करेगी।
एसपी GRP ने बताया कि पकड़े गए आरोपी रौनक ने पूछताछ में बताया कि वह नोट छापने की मशीन तेलंगाना और पंजाब से मंगाते थे। इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में फैला है। इस गिरोह में सभी सदस्यों की अलग-अलग जिम्मेदारी है। कोई सदस्य चीन से सिक्योरिटी थ्रेड मंगाता है, कोई मशीन ,कोई नोट छापता है तो कोई उन नकली नोटों को खपाने का काम करते हैं।
पुलिस ने रौनक के पास से 550 सिक्योरिटी थ्रेड बरामद किए। 2 डॉलर के एक सिक्योरिटी थ्रेड पर 500-500 रुपए के 4 नोट छापे जाते हैं। यानी 550 सिक्योरिटी थ्रेड पर 18 लाख रुपए के नोट छापे जा सकते थे। एसपी GRP ने बताया कि नोट छापने में प्रयोग की जाने वाली इंक की कीमत 150 डॉलर है।
पुलिस की गिरफ्त में आए रौनक ने पूछताछ में बताया कि उसने प्रिंटिंग कोर्स का डिप्लोमा किया है। पूर्व में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था। इसी दौरान सन शाइन नामक प्रॉपर्टी डीलिंग कंपनी में पैसा इन्वेस्ट किया। इसमें डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के मालदा में नकली नोट का धंधा करने वाले ब्रजेश मौर्या से मुलाकात हुई। राजस्थान का रहने वाला ब्रजेश पश्चिम बंगाल से नकली नोट का धंधा करता है। ब्रजेश ने रौनक को नकली नोट छापने और ज्यादा पैसा कमाने के बारे में बताया। इसके बाद एक मकान किराए पर लिया और यह धंधा शुरू कर दिया।
पुलिस ने रौनक के पास से 500-500 रुपए के 21 नकली नोट बने , 4 अर्ध-निर्मित नोट, सिक्योरिटी थ्रेड का रोल, कंप्यूटर, हाई क्लास प्रिंटर, बड़ी फोटो स्टेट मशीन, लेमिनेशन मशीन,पंचिंग मशीन बड़ी, पेपर कटर, 8 फ्रेम स्लाइडर, 10 लकड़ी के फ्रेम के अलावा जाली नोट छापने के लिए प्रयोग में आने वाली स्याही, पाउडर, स्क्रीन प्रिंटिंग, वाटर मार्क आदि बरामद किया है।
| मथुरा में रेलवे स्टेशन से GRP ने डेढ़ लाख के नकली नोटों के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। यह राजस्थान और बिहार के रहने वाले थे। GRP ने जांच बढ़ाई तो पता चला कि नकली नोट छापने का काम बनारस में हो रहा है। जीआरपी ने वाराणसी में छापा मारकर नोट छापने वाले मास्टरमाइंड रौनक को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास प्रिटिंग का डिप्लोमा है। यानी, वह प्रिटिंग में एक्सपर्ट है। उसने इस तरह के नोट छापे की सामान्य तरीके से उसे पहचान पाना मुश्किल होगा। नोट के बीच में पड़ने वाले हरे कलर के धागे, जिसे सिक्योरिटी थ्रेड करते हैं। इसे वह चीन से मंगाता है। नकली नोट छापने और उनको खपाने वाली गैंग की जांच आगे बढ़ी तो GRP मथुरा, बनारस पहुंची। यहां सारनाथ क्षेत्र में श्रीनगर कॉलोनी से एक नकली नोट छापने वाले रौनक उर्फ मुकेश उर्फ टीपू को गिरफ्तार किया। रौनक नकली नोट छापने और उनके बांटने का काम करता था। एसपी GRP अधीक्षक मोहम्मद मुस्ताक के मुताबिक, नोट छापने की मशीन और सिक्योरिटी थ्रेड बरामद हुए हैं। इसे लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी चीन की एक कंपनी से अलीबाबा. कॉम के जरिए भारत का सिक्योरिटी थ्रेड मंगाते थे। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे गिरोह के सदस्य इस सिक्योरिटी थ्रेड के जरिए नकली नोट छापते हैं। नकली नोट मामले में चीन का कनेक्शन सामने आने के बाद इस मामले में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी जांच शुरू कर दी है। एसपी GRP ने बताया कि इस मामले की जानकारी NIA, IB के अलावा उत्तर प्रदेश ATS को भी दे दी गई है। केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले की जांच अपने स्तर से कर रही हैं। एजेंसियां यह पता करने का भी प्रयास कर रही हैं कि कहीं चीन भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए कोई बड़ा षड्यंत्र तो नहीं रच रहा। वहीं GRP ने इस मामले में SIT बनाई है, जो हर पहलू से जांच करेगी। एसपी GRP ने बताया कि पकड़े गए आरोपी रौनक ने पूछताछ में बताया कि वह नोट छापने की मशीन तेलंगाना और पंजाब से मंगाते थे। इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि राज्यों में फैला है। इस गिरोह में सभी सदस्यों की अलग-अलग जिम्मेदारी है। कोई सदस्य चीन से सिक्योरिटी थ्रेड मंगाता है, कोई मशीन ,कोई नोट छापता है तो कोई उन नकली नोटों को खपाने का काम करते हैं। पुलिस ने रौनक के पास से पाँच सौ पचास सिक्योरिटी थ्रेड बरामद किए। दो डॉलर के एक सिक्योरिटी थ्रेड पर पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए के चार नोट छापे जाते हैं। यानी पाँच सौ पचास सिक्योरिटी थ्रेड पर अट्ठारह लाख रुपए के नोट छापे जा सकते थे। एसपी GRP ने बताया कि नोट छापने में प्रयोग की जाने वाली इंक की कीमत एक सौ पचास डॉलर है। पुलिस की गिरफ्त में आए रौनक ने पूछताछ में बताया कि उसने प्रिंटिंग कोर्स का डिप्लोमा किया है। पूर्व में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था। इसी दौरान सन शाइन नामक प्रॉपर्टी डीलिंग कंपनी में पैसा इन्वेस्ट किया। इसमें डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के मालदा में नकली नोट का धंधा करने वाले ब्रजेश मौर्या से मुलाकात हुई। राजस्थान का रहने वाला ब्रजेश पश्चिम बंगाल से नकली नोट का धंधा करता है। ब्रजेश ने रौनक को नकली नोट छापने और ज्यादा पैसा कमाने के बारे में बताया। इसके बाद एक मकान किराए पर लिया और यह धंधा शुरू कर दिया। पुलिस ने रौनक के पास से पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए के इक्कीस नकली नोट बने , चार अर्ध-निर्मित नोट, सिक्योरिटी थ्रेड का रोल, कंप्यूटर, हाई क्लास प्रिंटर, बड़ी फोटो स्टेट मशीन, लेमिनेशन मशीन,पंचिंग मशीन बड़ी, पेपर कटर, आठ फ्रेम स्लाइडर, दस लकड़ी के फ्रेम के अलावा जाली नोट छापने के लिए प्रयोग में आने वाली स्याही, पाउडर, स्क्रीन प्रिंटिंग, वाटर मार्क आदि बरामद किया है। |
भारतीय टीम को इंग्लैंड में खेलने का बड़ा अनुभव है। टीम में ऐसे कई खिलाड़ी थे जो इंग्लैंड कंडीशन में पहले से खेल चुके हैं। ऐसे में ये खिलाड़ी इंग्लैंड की कंडीशन से वाकिफ हैं, तो वहीं भारतीय टीम मैनेजमेंट को भी अच्छे से पता था कि साउथैम्पटन में खेले जाने वाले फाइनल मैच में कैसी परिस्थितियां रहेंगी।
भारत ने साउथैम्पटन की पिच और वहां की परिस्थितियों को जानने के बाद भी उसके अनुसार प्लेइंग इलेवन का चयन नहीं किया। टीम में जहां 2 स्पिन गेंदबाजों को मौका दे दिया, तो वहीं टीम में 3 तेज गेंदबाज ही खिलाए गए। मतलब प्लेइंग-11 को कंडीशन के हिसाब से ना चुन पाना टीम की हार की प्रमुख वजह रही।
| भारतीय टीम को इंग्लैंड में खेलने का बड़ा अनुभव है। टीम में ऐसे कई खिलाड़ी थे जो इंग्लैंड कंडीशन में पहले से खेल चुके हैं। ऐसे में ये खिलाड़ी इंग्लैंड की कंडीशन से वाकिफ हैं, तो वहीं भारतीय टीम मैनेजमेंट को भी अच्छे से पता था कि साउथैम्पटन में खेले जाने वाले फाइनल मैच में कैसी परिस्थितियां रहेंगी। भारत ने साउथैम्पटन की पिच और वहां की परिस्थितियों को जानने के बाद भी उसके अनुसार प्लेइंग इलेवन का चयन नहीं किया। टीम में जहां दो स्पिन गेंदबाजों को मौका दे दिया, तो वहीं टीम में तीन तेज गेंदबाज ही खिलाए गए। मतलब प्लेइंग-ग्यारह को कंडीशन के हिसाब से ना चुन पाना टीम की हार की प्रमुख वजह रही। |
वहीं, गुरुवार को भी मल्लापुरम, कोझिकोड, पलक्कड़ और त्रिशूर में लोगों के मरने की खबर है। बीते 24 घंटों में मध्य केरल का पत्तनमतिट्टा जिला सर्वाधिक प्रभावित रहा। यहां छात्रों सहित हजारों की संख्या में लोग रानी, अरनमुला और कोझेनचेरी में अपने घरों में फंसे हैं। कोल्लम से नौका बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची और रक्षाकर्मियों की सहायता से बचाव अभियान जारी रहा। एर्नाकुलम और अंगामाले के बीच रेल संचालन बंद हैं। सभी शैक्षणिक संस्थान गुरुवार को बंद हैं। पीएम मोदी ने बुधवार शाम विजयन से कहा था कि केंद्र सरकार केरल के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में बारिश की वजह से 47 लोगों की मौत हो चुकी है और 14 जिलों में से 12 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
| वहीं, गुरुवार को भी मल्लापुरम, कोझिकोड, पलक्कड़ और त्रिशूर में लोगों के मरने की खबर है। बीते चौबीस घंटाटों में मध्य केरल का पत्तनमतिट्टा जिला सर्वाधिक प्रभावित रहा। यहां छात्रों सहित हजारों की संख्या में लोग रानी, अरनमुला और कोझेनचेरी में अपने घरों में फंसे हैं। कोल्लम से नौका बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची और रक्षाकर्मियों की सहायता से बचाव अभियान जारी रहा। एर्नाकुलम और अंगामाले के बीच रेल संचालन बंद हैं। सभी शैक्षणिक संस्थान गुरुवार को बंद हैं। पीएम मोदी ने बुधवार शाम विजयन से कहा था कि केंद्र सरकार केरल के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में बारिश की वजह से सैंतालीस लोगों की मौत हो चुकी है और चौदह जिलों में से बारह जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। |
VIDEO: लद्दाख में चीन बॉर्डर पर भारतीय सेना ने दिखाया दम, टैंकों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी घाटी, नापाक हरकत बर्दाश्त नहीं!
Indian Army Tanks Drills: भारतीय सेना (Indian Army) ने पूर्वी लद्दाख में टैंकों और अन्य लड़ाकू हथियारों के साथ युद्धाभ्यास (War Drill) किया. इस दौरान सेना ने सिंधु नदी को पार करके अभ्यास किया. अभ्यास में सेना के टी-90 और टी-72 टैंकों ने अपना दम दिखाया.
| VIDEO: लद्दाख में चीन बॉर्डर पर भारतीय सेना ने दिखाया दम, टैंकों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी घाटी, नापाक हरकत बर्दाश्त नहीं! Indian Army Tanks Drills: भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में टैंकों और अन्य लड़ाकू हथियारों के साथ युद्धाभ्यास किया. इस दौरान सेना ने सिंधु नदी को पार करके अभ्यास किया. अभ्यास में सेना के टी-नब्बे और टी-बहत्तर टैंकों ने अपना दम दिखाया. |
हाल ही में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (Raman Research Institute-RRI) के भारतीय शोधकर्त्ताओं ने सारस 3 रेडियो टेलीस्कोप (SARAS 3 Radio Telescope) का उपयोग करते हुए एक अध्ययन में कॉस्मिक डॉन (ब्रह्माण्ड का उद्भव) से एक रेडियो तरंग सिग्नल ( Radio Wave Signal) की खोज के हालिया दावे का खंडन किया है।
- वर्ष 2018 में अमेरिका में एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी (Arizona State University- ASU) और MIT के शोधकर्त्ताओं की एक टीम द्वारा ईडीजीईएस रेडियो टेलीस्कोप (EDGES Radio Telescope) से डेटा का उपयोग करके प्रारंभिक ब्रह्मांड में उभरते तारों से एक सिग्नल का पता लगाया था।
- कॉस्मिक डॉन (Cosmic Dawn) बिग बैंग के लगभग 50 मिलियन वर्ष से लेकर एक अरब वर्ष तक की अवधि है जब ब्रह्मांड में पहले तारे, ब्लैक होल और आकाशगंगाएँ बनीं।
- रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है जो बुनियादी विज्ञान में अनुसंधान में संलंग्न है। संस्थान की स्थापना वर्ष 1948 में भारतीय भौतिक विज्ञानी और नोबेल पुरस्कार विजेता सर सीवी रमन द्वारा की गई थी।
रेडियो तरंगें और रेडियो टेलीस्कोपः
- विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में रेडियो तरंगों की तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी होती है। ये एक फुटबॉल के आकार से लेकर पृथ्वी (ग्रह) के समान विशाल आकार तक हो सकती हैं। रेडियो तरंगों की खोज वर्ष 1880 के दशक के अंत में हेनरिक हर्ट्ज़ (Heinrich Hertz) ने की।
- रेडियो टेलीस्कोप की मदद से दुर्बल रेडियो प्रकाश तरंगों को एकत्र किया जाता है और उनकी केंद्रीयता बढ़ाकर इनका उपयोग विश्लेषण हेतु किया जाता है।
- ये तारों, आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और अन्य खगोलीय पिंडों से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले रेडियो प्रकाश का अध्ययन करने में मददगार साबित होती हैं।
- ये विशेष रूप से डिज़ाइन किये गए टेलीस्कोप प्रकाश की सबसे दीर्घ तरंगदैर्ध्य का निरीक्षण करते हैं, जो 1 मिलीमीटर से लेकर 10 मीटर से अधिक लंबे होते हैं। तुलना के लिये दृश्यमान प्रकाश तरंगें केवल कुछ सौ नैनोमीटर लंबी होती हैं। एक नैनोमीटर कागज़ के एक टुकड़े की मोटाई का केवल 1/10,000वाँ हिस्सा होता है! वास्तव में हम आमतौर पर रेडियो प्रकाश को उसकी तरंगदैर्ध्य से नहीं बल्कि उसकी आवृत्ति से संदर्भित करते हैं।
सारस 3 रेडियो टेलीस्कोप क्या है?
- सारस 'रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट' (RRI) का एक उच्च-जोखिम वाला उच्च-लाभ प्रायोगिक प्रयास है।
- सारस का लक्ष्य भारत में एक सटीक रेडियो टेलीस्कोप का डिज़ाइन, निर्माण और तैनाती करना है, जो हमारे अतीत से रेडियो तरंग संकेतों का पता लगाता है, जब प्रारंभिक ब्रह्मांड में पहले तारे और आकाशगंगाएँ बनी थीं।
निष्कर्ष क्या हैं?
- सारस 3 को 'EDGES' प्रयोग द्वारा दावा किये गए संकेत का कोई प्रमाण नहीं मिला।
- माप अनिश्चितताओं के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद संकेत की उपस्थिति को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया गया।
- EDGES' द्वारा रिपोर्ट किये गए संकेत प्रायः दूषित मापों पर आधारित थे, न कि अंतरिक्ष और समय की गहराई से प्राप्त संकेतों पर।
- हालाँकि खगोलविदों को अभी भी यह नहीं पता है कि वास्तविक संकेत कैसे दिखते हैं।
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजियेः (2018)
उपरोक्त में से कौन-सा/से अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत की भविष्यवाणी/भविष्यवाणियाँ है/हैं, जिसकी/जिनकी अक्सर मीडिया में चर्चा होती है?
| हाल ही में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के भारतीय शोधकर्त्ताओं ने सारस तीन रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए एक अध्ययन में कॉस्मिक डॉन से एक रेडियो तरंग सिग्नल की खोज के हालिया दावे का खंडन किया है। - वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में अमेरिका में एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी और MIT के शोधकर्त्ताओं की एक टीम द्वारा ईडीजीईएस रेडियो टेलीस्कोप से डेटा का उपयोग करके प्रारंभिक ब्रह्मांड में उभरते तारों से एक सिग्नल का पता लगाया था। - कॉस्मिक डॉन बिग बैंग के लगभग पचास मिलियन वर्ष से लेकर एक अरब वर्ष तक की अवधि है जब ब्रह्मांड में पहले तारे, ब्लैक होल और आकाशगंगाएँ बनीं। - रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है जो बुनियादी विज्ञान में अनुसंधान में संलंग्न है। संस्थान की स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में भारतीय भौतिक विज्ञानी और नोबेल पुरस्कार विजेता सर सीवी रमन द्वारा की गई थी। रेडियो तरंगें और रेडियो टेलीस्कोपः - विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में रेडियो तरंगों की तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी होती है। ये एक फुटबॉल के आकार से लेकर पृथ्वी के समान विशाल आकार तक हो सकती हैं। रेडियो तरंगों की खोज वर्ष एक हज़ार आठ सौ अस्सी के दशक के अंत में हेनरिक हर्ट्ज़ ने की। - रेडियो टेलीस्कोप की मदद से दुर्बल रेडियो प्रकाश तरंगों को एकत्र किया जाता है और उनकी केंद्रीयता बढ़ाकर इनका उपयोग विश्लेषण हेतु किया जाता है। - ये तारों, आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और अन्य खगोलीय पिंडों से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले रेडियो प्रकाश का अध्ययन करने में मददगार साबित होती हैं। - ये विशेष रूप से डिज़ाइन किये गए टेलीस्कोप प्रकाश की सबसे दीर्घ तरंगदैर्ध्य का निरीक्षण करते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर दस मीटर से अधिक लंबे होते हैं। तुलना के लिये दृश्यमान प्रकाश तरंगें केवल कुछ सौ नैनोमीटर लंबी होती हैं। एक नैनोमीटर कागज़ के एक टुकड़े की मोटाई का केवल एक/दस,शून्यवाँ हिस्सा होता है! वास्तव में हम आमतौर पर रेडियो प्रकाश को उसकी तरंगदैर्ध्य से नहीं बल्कि उसकी आवृत्ति से संदर्भित करते हैं। सारस तीन रेडियो टेलीस्कोप क्या है? - सारस 'रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट' का एक उच्च-जोखिम वाला उच्च-लाभ प्रायोगिक प्रयास है। - सारस का लक्ष्य भारत में एक सटीक रेडियो टेलीस्कोप का डिज़ाइन, निर्माण और तैनाती करना है, जो हमारे अतीत से रेडियो तरंग संकेतों का पता लगाता है, जब प्रारंभिक ब्रह्मांड में पहले तारे और आकाशगंगाएँ बनी थीं। निष्कर्ष क्या हैं? - सारस तीन को 'EDGES' प्रयोग द्वारा दावा किये गए संकेत का कोई प्रमाण नहीं मिला। - माप अनिश्चितताओं के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद संकेत की उपस्थिति को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया गया। - EDGES' द्वारा रिपोर्ट किये गए संकेत प्रायः दूषित मापों पर आधारित थे, न कि अंतरिक्ष और समय की गहराई से प्राप्त संकेतों पर। - हालाँकि खगोलविदों को अभी भी यह नहीं पता है कि वास्तविक संकेत कैसे दिखते हैं। निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजियेः उपरोक्त में से कौन-सा/से अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत की भविष्यवाणी/भविष्यवाणियाँ है/हैं, जिसकी/जिनकी अक्सर मीडिया में चर्चा होती है? |
Crime File: क्राइम फाइल, मुकेश मंगल।
नए साल में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनने का सपना देख रहे वरिष्ठ निरीक्षकों की हसरत अधूरी रह गई। वैसे ही महीनों बाद सूची बनाई गई थी। हालांकि इस बार निरीक्षकों का अति उत्साह ही बाधा बना है। शासन ने जिला बल, सीआइडी, बटालियन सहित विभिन्न इकाइयों के 129 निरीक्षकों को डीएसपी बनाने की हरी झंडी दे दी थी। इसमें 98 निरीक्षक जिला बल के हैं जो विभिन्न शहरों में पदस्थ हैं। आठ निरीक्षक इंदौर के हैं, जिनका डीएसपी बनना तय है। सभी ने बतौर डीएसपी पोस्टिंग की जुगाड़ जमा ली। एक-दूसरे को फोन कर बधाई देने का सिलसिला भी शुरू हो गया। मनमाफिक पोस्टिंग न पाने वालों ने पीएचक्यू में खबर फैला दी कि सब सेटिंग से पोस्टिंग हो रही है। गुस्साए अफसरों ने पदस्थापना के आदेश ही रोक लिए। जो निरीक्षक नए साल में डीएसपी बनना थे, वो अपनी ही गलती से अधर में लटके हैं।
यातायात सुधार के लिए एकत्र हुए नेता उस वक्त चौंक गए, जब डीसीपी(यातायात) महेशचंद जैन अचानक बोले कि मेरा तो जाने का वक्त आ गया है। आप ने वक्त नहीं निकाला तो समस्या बढ़ जाएगी। बैठक में मुख्य मुद्दा तो बायपास का जाम था जिसे लेकर विधायक आकाश विजयवर्गीय ने अफसरों से पत्राचार किया था। तय हुआ कि एकसाथ चर्चा कर समस्या के हल पर विचार करेंगे। कंट्रोल रूम (पलासिया) पर सांसद शंकर लालवानी, विधायक आकाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अन्य नेता भी पहुंच गए। जाम और प्रवासी भारतीय सम्मेलन का जिक्र आया तो डीसीपी बोले बिना नहीं रुके। पहले दौर में डीसीपी ने कहा कि 95 प्रतिशत काम नगर निगम का है। मैं तो यहां से चला जाऊंगा, लेकिन शहर तो आपका ही है। एडीसीपी राजेश हिंगणकर ने बात संभालते हुए कहा आपने ट्रैफिक में अच्छा काम किया है। जाना पड़ा तो मैं चला जाऊंगा।
भूमाफिया के विरुद्ध पिछले वर्ष चली मुहिम को लेकर अच्छा फीडबैक नहीं है। पुलिस ने दिखावे के लिए छोटे-मोटे माफिया गिरफ्तार किए और बड़ों के केस जांच में डाल दिए। हाल ही में इंदौर पदस्थ हुए अफसर अब माफिया की जांच करवा रहे हैं। जिन केसों को इकतरफा जांच कर दबा दिया गया था, उनकी फाइलें मंगवाई हैं। अफसरों तक यह भी फीडबैक पहुंचा कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है। सबसे बड़ा उदाहरण आशा डायरी कांड है, जिसकी कोतवाली थाना में एफआइआर दर्ज हुई थी। जिला प्रशासनकी मुहिम को पुलिस ने दबा दिया। ठेकेदार की अग्रिम जमानत हो गई और दोषी अधिकारी कर्मचारी गिरफ्तार नहीं हुए। इस तरह एक दर्ज केसों की कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा चल रही जिसमें अलग-स्तरों पर गड़बड़ी हुई है। कई संस्थाओं की रजिस्ट्री शून्य करने की तैयारी हो चुकी है।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी देखने आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र की तैयारी से संतुष्ट होकर गए। दिन-रात एक कर बनाया गया प्रजेंटेशन देखा तो सीएम ने बस इतना ही कहा कि बाकी सब तो ठीक है लेकिन तीन दिन शहर में अपराध नहीं होना चाहिए। इसके लिए बल से लेकर वाहन तक की आपकी सारी मांगें पूरी होंगी। जब विदेशी मेहमान इंदौर में हो, तब कोई अप्रिय घटना न हो। अपराधियों पर सख्ती के लिए पुलिस को छूट है। आयुक्त ने 20 दिन पहले ही खाका बना लिया था। इंटेलिजेंस से रिपोर्ट बनवाई और एटीएस व सुरक्षा विंग के अफसरों को माक ड्रिल पर लगा दिया। एयरपोर्ट से लेकर बीसीसी तक का प्लान देखा को सीएम मुहर लगाए बगैर नहीं रुके।
| Crime File: क्राइम फाइल, मुकेश मंगल। नए साल में उप पुलिस अधीक्षक बनने का सपना देख रहे वरिष्ठ निरीक्षकों की हसरत अधूरी रह गई। वैसे ही महीनों बाद सूची बनाई गई थी। हालांकि इस बार निरीक्षकों का अति उत्साह ही बाधा बना है। शासन ने जिला बल, सीआइडी, बटालियन सहित विभिन्न इकाइयों के एक सौ उनतीस निरीक्षकों को डीएसपी बनाने की हरी झंडी दे दी थी। इसमें अट्ठानवे निरीक्षक जिला बल के हैं जो विभिन्न शहरों में पदस्थ हैं। आठ निरीक्षक इंदौर के हैं, जिनका डीएसपी बनना तय है। सभी ने बतौर डीएसपी पोस्टिंग की जुगाड़ जमा ली। एक-दूसरे को फोन कर बधाई देने का सिलसिला भी शुरू हो गया। मनमाफिक पोस्टिंग न पाने वालों ने पीएचक्यू में खबर फैला दी कि सब सेटिंग से पोस्टिंग हो रही है। गुस्साए अफसरों ने पदस्थापना के आदेश ही रोक लिए। जो निरीक्षक नए साल में डीएसपी बनना थे, वो अपनी ही गलती से अधर में लटके हैं। यातायात सुधार के लिए एकत्र हुए नेता उस वक्त चौंक गए, जब डीसीपी महेशचंद जैन अचानक बोले कि मेरा तो जाने का वक्त आ गया है। आप ने वक्त नहीं निकाला तो समस्या बढ़ जाएगी। बैठक में मुख्य मुद्दा तो बायपास का जाम था जिसे लेकर विधायक आकाश विजयवर्गीय ने अफसरों से पत्राचार किया था। तय हुआ कि एकसाथ चर्चा कर समस्या के हल पर विचार करेंगे। कंट्रोल रूम पर सांसद शंकर लालवानी, विधायक आकाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अन्य नेता भी पहुंच गए। जाम और प्रवासी भारतीय सम्मेलन का जिक्र आया तो डीसीपी बोले बिना नहीं रुके। पहले दौर में डीसीपी ने कहा कि पचानवे प्रतिशत काम नगर निगम का है। मैं तो यहां से चला जाऊंगा, लेकिन शहर तो आपका ही है। एडीसीपी राजेश हिंगणकर ने बात संभालते हुए कहा आपने ट्रैफिक में अच्छा काम किया है। जाना पड़ा तो मैं चला जाऊंगा। भूमाफिया के विरुद्ध पिछले वर्ष चली मुहिम को लेकर अच्छा फीडबैक नहीं है। पुलिस ने दिखावे के लिए छोटे-मोटे माफिया गिरफ्तार किए और बड़ों के केस जांच में डाल दिए। हाल ही में इंदौर पदस्थ हुए अफसर अब माफिया की जांच करवा रहे हैं। जिन केसों को इकतरफा जांच कर दबा दिया गया था, उनकी फाइलें मंगवाई हैं। अफसरों तक यह भी फीडबैक पहुंचा कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है। सबसे बड़ा उदाहरण आशा डायरी कांड है, जिसकी कोतवाली थाना में एफआइआर दर्ज हुई थी। जिला प्रशासनकी मुहिम को पुलिस ने दबा दिया। ठेकेदार की अग्रिम जमानत हो गई और दोषी अधिकारी कर्मचारी गिरफ्तार नहीं हुए। इस तरह एक दर्ज केसों की कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा चल रही जिसमें अलग-स्तरों पर गड़बड़ी हुई है। कई संस्थाओं की रजिस्ट्री शून्य करने की तैयारी हो चुकी है। प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी देखने आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र की तैयारी से संतुष्ट होकर गए। दिन-रात एक कर बनाया गया प्रजेंटेशन देखा तो सीएम ने बस इतना ही कहा कि बाकी सब तो ठीक है लेकिन तीन दिन शहर में अपराध नहीं होना चाहिए। इसके लिए बल से लेकर वाहन तक की आपकी सारी मांगें पूरी होंगी। जब विदेशी मेहमान इंदौर में हो, तब कोई अप्रिय घटना न हो। अपराधियों पर सख्ती के लिए पुलिस को छूट है। आयुक्त ने बीस दिन पहले ही खाका बना लिया था। इंटेलिजेंस से रिपोर्ट बनवाई और एटीएस व सुरक्षा विंग के अफसरों को माक ड्रिल पर लगा दिया। एयरपोर्ट से लेकर बीसीसी तक का प्लान देखा को सीएम मुहर लगाए बगैर नहीं रुके। |
नगर प्रशासन कोविड नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है. (फाइल फोटोः Shutterstock)
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. जानकार इसका एक बड़ा कारण मुंबई में लोकल ट्रेन (Mumbai Local Trains) सेवाओं का शुरू होना बता रहे हैं. हालांकि, रेल सेवाओं से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हम कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं. वहीं, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का डेटा भी आंकड़े बढ़ने का एक कारण लोकल रेल सेवा को बता रहा है. फिलहाल सरकार ने इसके संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है.
उन्होंने कहा, 'हम लगातार ट्रेन रैक को सैनिटाइज कर रहे हैं और हमारे पास इस काम के लिए अलग से एक टीम है. यात्रियों की सुविधा के लिए हमने 300 से ज्यादा बुकिंग काउंटर खोल दिए हैं. ' ठाकुर ने जानकारी दी कि फिलहाल 1300 सेवाएं जारी हैं और राज्य सरकार की तरफ से मिले आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं. बीएमसी डेटा के अनुसार, 1 फरवरी तक रोज मिल रहे मामलों की संख्या 400 के अंदर थी, लेकिन पहले हफ्ते के अंत तक यह आंकड़ा 500 को पार कर गया.
खास बात है कि नगर प्रशासन कोविड नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है. वहीं, राज्य सरकार हालात की निगरानी कर रही है और मामलों के बढ़ने की स्थिति में अगले 8 दिनों में कोई बड़ा फैसला ले सकती है. अब तक करीब 95 फीसदी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं. वहीं, इन सेवाओं का करीब 22 लाख यात्री इस्तेमाल कर चुके हैं.
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| नगर प्रशासन कोविड नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है. मुंबई. महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. जानकार इसका एक बड़ा कारण मुंबई में लोकल ट्रेन सेवाओं का शुरू होना बता रहे हैं. हालांकि, रेल सेवाओं से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हम कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं. वहीं, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का डेटा भी आंकड़े बढ़ने का एक कारण लोकल रेल सेवा को बता रहा है. फिलहाल सरकार ने इसके संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है. उन्होंने कहा, 'हम लगातार ट्रेन रैक को सैनिटाइज कर रहे हैं और हमारे पास इस काम के लिए अलग से एक टीम है. यात्रियों की सुविधा के लिए हमने तीन सौ से ज्यादा बुकिंग काउंटर खोल दिए हैं. ' ठाकुर ने जानकारी दी कि फिलहाल एक हज़ार तीन सौ सेवाएं जारी हैं और राज्य सरकार की तरफ से मिले आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं. बीएमसी डेटा के अनुसार, एक फरवरी तक रोज मिल रहे मामलों की संख्या चार सौ के अंदर थी, लेकिन पहले हफ्ते के अंत तक यह आंकड़ा पाँच सौ को पार कर गया. खास बात है कि नगर प्रशासन कोविड नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है. वहीं, राज्य सरकार हालात की निगरानी कर रही है और मामलों के बढ़ने की स्थिति में अगले आठ दिनों में कोई बड़ा फैसला ले सकती है. अब तक करीब पचानवे फीसदी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं. वहीं, इन सेवाओं का करीब बाईस लाख यात्री इस्तेमाल कर चुके हैं. . |
वफादारी की जब भी बात आती है, डॉगी की मिसाल दी जाती है. डॉगी को सबसे वफादार पशु माना जाता है लेकिन नशे में हैवान बने एक युवक ने वफादार पशु पर चाकू से हमला कर दिया.
युवक ने शराब के नशे में चाकू से हमला कर बेजुबान की हत्या कर दिया. घटना ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के दनकौर कस्बे की है. आसपास के लोगों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है.
दनकौर पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है. दनकौर थाने के प्रभारी ने घटना की पुष्टि की है. दनकौर थाना प्रभारी ने कहा कि दनकौर कस्बे में एक डॉगी पर चाकू से हमला किए जाने की सूचना मिली. एक युवक पर हमले का आरोप लगा. उन्होंने बताया कि सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है.
दनकौर थाना प्रभारी ने बताया कि डॉगी की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि मामले की शुरुआती तहकीकात और आरोपी युवक से पूछताछ में ये बात सामने आई है कि आरोपी शराब का आदी है. आरोपी युवक से पूछताछ की जा रही है.
| वफादारी की जब भी बात आती है, डॉगी की मिसाल दी जाती है. डॉगी को सबसे वफादार पशु माना जाता है लेकिन नशे में हैवान बने एक युवक ने वफादार पशु पर चाकू से हमला कर दिया. युवक ने शराब के नशे में चाकू से हमला कर बेजुबान की हत्या कर दिया. घटना ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के दनकौर कस्बे की है. आसपास के लोगों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है. दनकौर पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है. दनकौर थाने के प्रभारी ने घटना की पुष्टि की है. दनकौर थाना प्रभारी ने कहा कि दनकौर कस्बे में एक डॉगी पर चाकू से हमला किए जाने की सूचना मिली. एक युवक पर हमले का आरोप लगा. उन्होंने बताया कि सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है. दनकौर थाना प्रभारी ने बताया कि डॉगी की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि मामले की शुरुआती तहकीकात और आरोपी युवक से पूछताछ में ये बात सामने आई है कि आरोपी शराब का आदी है. आरोपी युवक से पूछताछ की जा रही है. |
MUZZFARPUR : बिहार में सड़क हादसों में रोकथाम को लेकर सरकार सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाती रहती है। लेकिन, इसके बाबजुद राज्य में कहीं न कहीं से सड़क हादसे से जुडी हुई खबर निकल कर सामने आती रहती है। इस बीच अब एक ताजा मामला बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर से निकल कर सामने आ रहा है। जहां, एक अनियंत्रित पिकअप वैन ने इंटर की परीक्षा देने जा रहे चार स्टूडेंट को रौंद दिया है। जिसमें दो की हालत काफी नाजुक बताई जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मुज़फ़्फ़रपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र में सबहा चौक के पास इंटर का परीक्षा देने जा रहे 4 छात्र सड़क दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी हो गए। यह लोग दो बाइक पर सवार थे, तभी तेज गति से आ रही पिकअप वैन ने पीछे से धक्का मार दिया। इससे ये लोग सड़क किनारे गिर पड़े और पिकअप वैन का ड्राइवर इन लोगों को रौंद डाला। वही, घायल स्टूडेंट का इलाज सकरा के एक अस्पताल में कराया जा रहा है। जिसमें दो छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि, यह मामला जिले के सकरा थाना क्षेत्र के सबहा चौक स्थित काली मंदिर के पास की है। जहां एक पिकअप और बाइक में जबरदस्त टक्कर हो गई है। जिसमें इंटर के परीक्षा देने जा रहे 4 छात्र बुरी तरह जख्मी हो गए हैं। इस घटना के बाद घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई जिसके बाद आनन-फानन में स्थानीय लोगों के द्वारा घायल चारों छात्र को सकरा के रेफरल अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहीं स्थानीय लोगों ने पिकअप और पिकअप चालक को पकड़ पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना में घायल चारों छात्रों की पहचान सकरा थाना क्षेत्र के गन्नीपुर बेझा निवासी इंद्रजीत कुमार ,विक्की कुमार ,प्रकाश कुमार और मोहम्मद राजा उल्लाह के रूप में हुई है।
आपको बताते चलें कि, मुजफ्फरपुर जिले में हाईवे और प्रमुख सड़कों पर सड़क दुर्घटना पर लगाम लगाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर कैमरा और हाई स्पीड मीटर लगाया गया। लेकिन, इसके बाबजूद हाई स्पीड गाड़ी चलाने वालों लोगों में इन कैमरे का डर बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है। जिसका खामियाजा सड़क दुर्घटना के रूप में हमेशा नजर आ ही जाता है।
| MUZZFARPUR : बिहार में सड़क हादसों में रोकथाम को लेकर सरकार सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाती रहती है। लेकिन, इसके बाबजुद राज्य में कहीं न कहीं से सड़क हादसे से जुडी हुई खबर निकल कर सामने आती रहती है। इस बीच अब एक ताजा मामला बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर से निकल कर सामने आ रहा है। जहां, एक अनियंत्रित पिकअप वैन ने इंटर की परीक्षा देने जा रहे चार स्टूडेंट को रौंद दिया है। जिसमें दो की हालत काफी नाजुक बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, मुज़फ़्फ़रपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र में सबहा चौक के पास इंटर का परीक्षा देने जा रहे चार छात्र सड़क दुर्घटना में बुरी तरह जख्मी हो गए। यह लोग दो बाइक पर सवार थे, तभी तेज गति से आ रही पिकअप वैन ने पीछे से धक्का मार दिया। इससे ये लोग सड़क किनारे गिर पड़े और पिकअप वैन का ड्राइवर इन लोगों को रौंद डाला। वही, घायल स्टूडेंट का इलाज सकरा के एक अस्पताल में कराया जा रहा है। जिसमें दो छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि, यह मामला जिले के सकरा थाना क्षेत्र के सबहा चौक स्थित काली मंदिर के पास की है। जहां एक पिकअप और बाइक में जबरदस्त टक्कर हो गई है। जिसमें इंटर के परीक्षा देने जा रहे चार छात्र बुरी तरह जख्मी हो गए हैं। इस घटना के बाद घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई जिसके बाद आनन-फानन में स्थानीय लोगों के द्वारा घायल चारों छात्र को सकरा के रेफरल अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहीं स्थानीय लोगों ने पिकअप और पिकअप चालक को पकड़ पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना में घायल चारों छात्रों की पहचान सकरा थाना क्षेत्र के गन्नीपुर बेझा निवासी इंद्रजीत कुमार ,विक्की कुमार ,प्रकाश कुमार और मोहम्मद राजा उल्लाह के रूप में हुई है। आपको बताते चलें कि, मुजफ्फरपुर जिले में हाईवे और प्रमुख सड़कों पर सड़क दुर्घटना पर लगाम लगाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर कैमरा और हाई स्पीड मीटर लगाया गया। लेकिन, इसके बाबजूद हाई स्पीड गाड़ी चलाने वालों लोगों में इन कैमरे का डर बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है। जिसका खामियाजा सड़क दुर्घटना के रूप में हमेशा नजर आ ही जाता है। |
मेलबर्न, 30 दिसम्बर । अपने बल्लेबाजों और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच के पांचवें दिन शुक्रवार को एक पारी 18 रनों से हरा दिया। इस जीत के साथ ही आस्ट्रेलिया ने तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। इससे पहले ब्रिस्बेन में 15 से 19 दिसम्बर तक खेले गए पहले टेस्ट मैच में आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 39 रनों से हराया था।
पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। उसने अजहर अली (नाबाद 205) के नाबाद दोहरे शतक के दम पर आस्ट्रेलिया के खिलाफ नौ विकेट के नुकसान पर 443 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी।
इसके बाद आस्ट्रेलिया ने स्टीवन स्मिथ (नाबाद 165), डेविड वॉर्नर (144), उस्मान ख्वाजा (97), मिशेल स्टार्क (84) और पीटर हैंड्स्कोम्ब (54) की शानदार पारियों की बदौलत अपनी पहली पारी आठ विकेट के नुकसान पर 624 रनों पर घोषित कर दी। इस पारी के आधार पर आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के खिलाफ 181 रनों की बढ़त हासिल की।
मिशेल और ल्योन की शानदार गेंदबाजी की बदौलत आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान की दूसरी पारी 163 रनों पर ही समेट दी और एक पारी 18 रनों से जीत हासिल की। पाकिस्तान की दूसरी पारी में मिशेल ने चार और ल्योन ने तीन विकेट चटकाए। आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच तीसरा टेस्ट मैच सिडनी में तीन से सात जनवरी तक खेला जाएगा।
| मेलबर्न, तीस दिसम्बर । अपने बल्लेबाजों और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच के पांचवें दिन शुक्रवार को एक पारी अट्ठारह रनों से हरा दिया। इस जीत के साथ ही आस्ट्रेलिया ने तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में दो-शून्य की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। इससे पहले ब्रिस्बेन में पंद्रह से उन्नीस दिसम्बर तक खेले गए पहले टेस्ट मैच में आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को उनतालीस रनों से हराया था। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। उसने अजहर अली के नाबाद दोहरे शतक के दम पर आस्ट्रेलिया के खिलाफ नौ विकेट के नुकसान पर चार सौ तैंतालीस रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी। इसके बाद आस्ट्रेलिया ने स्टीवन स्मिथ , डेविड वॉर्नर , उस्मान ख्वाजा , मिशेल स्टार्क और पीटर हैंड्स्कोम्ब की शानदार पारियों की बदौलत अपनी पहली पारी आठ विकेट के नुकसान पर छः सौ चौबीस रनों पर घोषित कर दी। इस पारी के आधार पर आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के खिलाफ एक सौ इक्यासी रनों की बढ़त हासिल की। मिशेल और ल्योन की शानदार गेंदबाजी की बदौलत आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान की दूसरी पारी एक सौ तिरेसठ रनों पर ही समेट दी और एक पारी अट्ठारह रनों से जीत हासिल की। पाकिस्तान की दूसरी पारी में मिशेल ने चार और ल्योन ने तीन विकेट चटकाए। आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच तीसरा टेस्ट मैच सिडनी में तीन से सात जनवरी तक खेला जाएगा। |
स्वर अधिक दूर म ता नही श्रा रहा है ।
मन रहा है 70
क्या है ? जोहो वापिस लौट भाएँगे ।'
स्वरकार को क्या म जीवन था । उसमे उसने स्पुति पैग का उमना सगात जोर तेज बहने लगा । बहने लगा लय में द्रुतता भागई । उसका प्रभाव बल गया ।
व दोना उठ कर उसा और चल दिए जिधर से ध्वनि प्रा रही थी। ज्योज्यो समान का लयबन्ती गई उनके कम भी ज्यादा तेजी से बन्ने गए । जगन का रास्ता था। विमल एक वार उलझ गया और उमने विचार किया कि लक्ष्य को छोड़ दिया जाय । वह वापिस लौटने वा तयार हुआ और अपन कदम उसने एक जगह रोष भी दिए । मगर मजु बरावर आगे बढ़ा जा रही थी । विमल का साथ पाकर अब तक वह काफी मजबूत हो चुकी थी। उसका लक्ष्य उम स्पष्ट दिखाई देता था । यह किसी तरह रुकना न चाहता था। उस न विमल को सहारा दते हुए पुकाराहम
पहुच है।'
का प्रवाह बराबर वनता गया उसके साथ उसका प्रभाव भी । विमल न साहस करके अपन कम मजु के साथ २ चढ़ा दिए । वे एक ऊच टोल पर आए । अब उ होन साथ खडे होकर दखा कि उनका लश्य साफ था । कुजा के बीच सुदर भील थी, उसी म छिपा हुआ बाई अपनी मस्ता स जगन का भूमने पर मजबूर कर रहा था । प्रकृति उसका साथ द रही थी । संगीत की मधुरता अपनी पराराष्ट का पहुच चुका थी ।
मजु और विमल भी पर ग्राए । स्वच्छ नीर मे एक अलग समार बसा हुश्रा था बा र सभी अधिक सुगवना । मजु और विमल मनार आने पर उस मसार म बस गए। उन्होन इधर उधर नजर दोन मगर कोई खाई नहीं दिया। स्वर प्रवाह पूरण तेजी से बहा | स्वर अधिक दूर म ता नही श्रा रहा है । मन रहा है सत्तर क्या है ? जोहो वापिस लौट भाएँगे ।' स्वरकार को क्या म जीवन था । उसमे उसने स्पुति पैग का उमना सगात जोर तेज बहने लगा । बहने लगा लय में द्रुतता भागई । उसका प्रभाव बल गया । व दोना उठ कर उसा और चल दिए जिधर से ध्वनि प्रा रही थी। ज्योज्यो समान का लयबन्ती गई उनके कम भी ज्यादा तेजी से बन्ने गए । जगन का रास्ता था। विमल एक वार उलझ गया और उमने विचार किया कि लक्ष्य को छोड़ दिया जाय । वह वापिस लौटने वा तयार हुआ और अपन कदम उसने एक जगह रोष भी दिए । मगर मजु बरावर आगे बढ़ा जा रही थी । विमल का साथ पाकर अब तक वह काफी मजबूत हो चुकी थी। उसका लक्ष्य उम स्पष्ट दिखाई देता था । यह किसी तरह रुकना न चाहता था। उस न विमल को सहारा दते हुए पुकाराहम पहुच है।' का प्रवाह बराबर वनता गया उसके साथ उसका प्रभाव भी । विमल न साहस करके अपन कम मजु के साथ दो चढ़ा दिए । वे एक ऊच टोल पर आए । अब उ होन साथ खडे होकर दखा कि उनका लश्य साफ था । कुजा के बीच सुदर भील थी, उसी म छिपा हुआ बाई अपनी मस्ता स जगन का भूमने पर मजबूर कर रहा था । प्रकृति उसका साथ द रही थी । संगीत की मधुरता अपनी पराराष्ट का पहुच चुका थी । मजु और विमल भी पर ग्राए । स्वच्छ नीर मे एक अलग समार बसा हुश्रा था बा र सभी अधिक सुगवना । मजु और विमल मनार आने पर उस मसार म बस गए। उन्होन इधर उधर नजर दोन मगर कोई खाई नहीं दिया। स्वर प्रवाह पूरण तेजी से बहा |
चाकसू के कोटखावदा रोड पर गरूडवासी तिराहे के पास कुएं में एक युवक का शव मिलने से आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही कुएं के आसपास बडी संख्या में आसपास के लोग एकत्रित हो गए।
चाकसू थाना SI श्रीचंद मीणा ने बताया कि सोमवार को कस्बे के गरूडवासी मोड तिराहे के पास बने एक कुएं में युवक का शव मिला। जिसकी सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला। जिसको पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए चाकसू मॉर्च्युरी में रखवाया। मृतक की शिनाख्त चाकसू कृषि मंडी निवासी राजकुमार पुत्र मूलचंद (32) के रूप में हुई है परिजनों के अनुसार युवक मानसिक रूप से कमजोर था जो रविवार शाम से घर से लापता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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| चाकसू के कोटखावदा रोड पर गरूडवासी तिराहे के पास कुएं में एक युवक का शव मिलने से आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही कुएं के आसपास बडी संख्या में आसपास के लोग एकत्रित हो गए। चाकसू थाना SI श्रीचंद मीणा ने बताया कि सोमवार को कस्बे के गरूडवासी मोड तिराहे के पास बने एक कुएं में युवक का शव मिला। जिसकी सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला। जिसको पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए चाकसू मॉर्च्युरी में रखवाया। मृतक की शिनाख्त चाकसू कृषि मंडी निवासी राजकुमार पुत्र मूलचंद के रूप में हुई है परिजनों के अनुसार युवक मानसिक रूप से कमजोर था जो रविवार शाम से घर से लापता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
जो झलक दिखा उन्मादित कर, मन को विक्षिप्त कर देती है,
चपला कि तरह चमक तन में, बेचैनी सी भर देती है.
यह भूमंडल क्रीड़ास्थल सा, जन-जन जिसका प्रतियोगी है,
नर के उर कि लिप्सा तेरी, जय हो तू अक्षयभोगी है.
पर्वत कि चोटी पर चढ़ नर परवारों में कूद जाय,
जलते अंगारों पर लोटे या रक्त-सरित में डूब जाय.
हे लिप्से तेरे इंगित पर नर-नारायण-योगी-भोगी,
विषपान करें अमृत जैसे, यह जान मृत्यु निश्चित होगी.
हँस-हँस कर बाँट रही सबको, तू अमृत-गरल-मद का प्रसाद,
डँस कर विषधर नागिन जैसी, देती जीवनभर का विषाद.
करता दर्शन कोई तेरा, है स्वर्ण-रजत में, हीरों में,
कोई थक जाता तुझे खोज, ऋषियों-पैगम्बर-पीरों में.
तिरछी चितवन में गोरी के, कोई अवलोक रहा तुझको,
हो नष्ट भले यह जीवनधन, पर लिटा अंक में ले मुझको.
शशि कि मयूखमाला में, रवि कि किरणों में नर्तन करती,
हे प्राणमयी लिप्से तू ही, उर में उनके वर्तन करती.
पापी-पाखंडी-क्रूर-सदय लोभी-निर्मम हत्यारी तू,
गुण से अवगुण से परे प्रिये, धरती कि राजदुलारी तू.
सबकी डोरी तेरे कर में, मनमाने नाच नचाती है,
सुख के, दुःख के, ओ प्रिय लिप्से ! तू गीत अनवरत गाती है.
| जो झलक दिखा उन्मादित कर, मन को विक्षिप्त कर देती है, चपला कि तरह चमक तन में, बेचैनी सी भर देती है. यह भूमंडल क्रीड़ास्थल सा, जन-जन जिसका प्रतियोगी है, नर के उर कि लिप्सा तेरी, जय हो तू अक्षयभोगी है. पर्वत कि चोटी पर चढ़ नर परवारों में कूद जाय, जलते अंगारों पर लोटे या रक्त-सरित में डूब जाय. हे लिप्से तेरे इंगित पर नर-नारायण-योगी-भोगी, विषपान करें अमृत जैसे, यह जान मृत्यु निश्चित होगी. हँस-हँस कर बाँट रही सबको, तू अमृत-गरल-मद का प्रसाद, डँस कर विषधर नागिन जैसी, देती जीवनभर का विषाद. करता दर्शन कोई तेरा, है स्वर्ण-रजत में, हीरों में, कोई थक जाता तुझे खोज, ऋषियों-पैगम्बर-पीरों में. तिरछी चितवन में गोरी के, कोई अवलोक रहा तुझको, हो नष्ट भले यह जीवनधन, पर लिटा अंक में ले मुझको. शशि कि मयूखमाला में, रवि कि किरणों में नर्तन करती, हे प्राणमयी लिप्से तू ही, उर में उनके वर्तन करती. पापी-पाखंडी-क्रूर-सदय लोभी-निर्मम हत्यारी तू, गुण से अवगुण से परे प्रिये, धरती कि राजदुलारी तू. सबकी डोरी तेरे कर में, मनमाने नाच नचाती है, सुख के, दुःख के, ओ प्रिय लिप्से ! तू गीत अनवरत गाती है. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
आष्टा। अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए दर्शन वोहरा ने अपने पिता दिवंगत अरुण एस वोहरा की स्मृतियों को संजोते हुए उनके जन्मदिन की पूर्व बेला पर आनंद संजीवनी केंद्र श्री महावीर भवन जैन स्थानक आष्टा को चिकित्सीय उपकरण सौंपे।
श्री वर्धमान महावीर भवन स्थानक वासी श्रावक संघ अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट ने इस अवसर पर कहा कि परम वीररत्न विजयसूरी जी महाराज साहब के परम भक्त स्व. शांतिलाल जी वोहरा के सुपुत्र आष्टा निवासी स्व. अरुण वोहरा शुरू से ही सामाजिक व धार्मिक कार्य में अपनी रुचि रखते थे। आष्टा रहते हुए कई सामाजिक संस्थाओं को उन्होंने अपना योगदान दिया, वहीं शहर की पत्रकारिता को भी जीवित किया। सभी को साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता स्व. अरुण वोहरा में थी, जिसके चलते वह कुशल प्रबंधन के लिए देवास, उमरगांव (गुजरात) व मुंबई के व्यवसायिक संस्थानों में अपनी सेवाएं देते हुए सेवानिवृत्त हुए। आष्टा से नियमित उनका लगाव बना रहा। पारिवारिक गतिविधियों में जब भी आष्टा आते अपने मित्रों और सामाजिक लोगों से मिलना कभी नहीं भूलते। 23 फरवरी को हुए निधन के बाद उनकी स्मृतियां शेष है। दिवंगत अरुण वोहरा, समस्त वोहरा परिवार का यह जाना,पहचाना नाम जिसने सदैव स्वयं को समाज सेवा व धार्मिक गतिविधियों में आगे रखा है। चिकित्सीय उपकरण में इलेक्ट्रिक मेडिकल एयर बेड, नेबुलाइजर, डिजिटल ब्लड प्रेशर मशीन, सुगर ग्लूकोस चेक मशीन, डिजिटल थर्मामीटर और फर्स्ट एड किट भेंट किए ताकि चिकित्सा कार्य में सहायता हो सके।
| आष्टा। अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए दर्शन वोहरा ने अपने पिता दिवंगत अरुण एस वोहरा की स्मृतियों को संजोते हुए उनके जन्मदिन की पूर्व बेला पर आनंद संजीवनी केंद्र श्री महावीर भवन जैन स्थानक आष्टा को चिकित्सीय उपकरण सौंपे। श्री वर्धमान महावीर भवन स्थानक वासी श्रावक संघ अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट ने इस अवसर पर कहा कि परम वीररत्न विजयसूरी जी महाराज साहब के परम भक्त स्व. शांतिलाल जी वोहरा के सुपुत्र आष्टा निवासी स्व. अरुण वोहरा शुरू से ही सामाजिक व धार्मिक कार्य में अपनी रुचि रखते थे। आष्टा रहते हुए कई सामाजिक संस्थाओं को उन्होंने अपना योगदान दिया, वहीं शहर की पत्रकारिता को भी जीवित किया। सभी को साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता स्व. अरुण वोहरा में थी, जिसके चलते वह कुशल प्रबंधन के लिए देवास, उमरगांव व मुंबई के व्यवसायिक संस्थानों में अपनी सेवाएं देते हुए सेवानिवृत्त हुए। आष्टा से नियमित उनका लगाव बना रहा। पारिवारिक गतिविधियों में जब भी आष्टा आते अपने मित्रों और सामाजिक लोगों से मिलना कभी नहीं भूलते। तेईस फरवरी को हुए निधन के बाद उनकी स्मृतियां शेष है। दिवंगत अरुण वोहरा, समस्त वोहरा परिवार का यह जाना,पहचाना नाम जिसने सदैव स्वयं को समाज सेवा व धार्मिक गतिविधियों में आगे रखा है। चिकित्सीय उपकरण में इलेक्ट्रिक मेडिकल एयर बेड, नेबुलाइजर, डिजिटल ब्लड प्रेशर मशीन, सुगर ग्लूकोस चेक मशीन, डिजिटल थर्मामीटर और फर्स्ट एड किट भेंट किए ताकि चिकित्सा कार्य में सहायता हो सके। |
तेरी मिट्टी गाने की कॉपी के आरोपों को लेकर ईटाइम्स संग बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा कि जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं उन्हें पहले जांच लेना चाहिए कि वीडियो मेरी फिल्म केसरी के रिलीज के कई महीनों बाद अपलोड की गई है।
मुंबईः बॉलीवुड गीतकार मनोज मुंतशिर ने उन सभी आरोपों का खंडन किया है जिसमें फिल्म केसरी के उनके गाने- तेरी मिट्टी को पाकिस्तानी गीत की नकल बताया जा रहा था। हाल ही में सोशल मीडिया पर मनोज मुंतशिर पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाते हुए उनको ट्रोल किया गया था। उनपर एक कविता का हिंदी अनुवाद करके अपने नाम छपवाने सहित तेरी मिट्टी को एक पाकिस्तानी गीत की कॉपी का आरोप लगाया गया था।
आरोपों को लेकर ईटाइम्स संग बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा कि जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं उन्हें पहले जांच लेना चाहिए कि वीडियो मेरी फिल्म केसरी के रिलीज के कई महीनों बाद अपलोड की गई है। उन्होंने आगे कहा, आपकी जानकारी के लिए बता दे जिस वीडियो में गाते हुए गायक को पाकिस्तानी बताया जा रहा है, वह पाकिस्तानी नहीं बल्कि हमारी अपनी भारतीय लोक गायिका गीता रबारी हैं। आप उन्हें कॉल करके भी देख सकते हैं।
मुंतशिर ने कहा कि वह रबारी को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और वह हमेशा उनकी रचनाओं के प्रति सम्मान बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा कि गीताजी ने हमेशा मेरे काम की सराहना की है और आप उनसे पूछ भी सकते हैं।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर मनोज मुंतशिर पर इसके अलावा कई गानों के चोरी का आरोप लगा है। इसके पीछे की वजह पर बात करते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा,लोग मुझ पर हमला कर रहे हैं क्योंकि मैंने मुगलों पर जो वीडियो बनाया है, उसमें मैंने उनके खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है, उन्हें महिमामंडित डकैतों के रूप में संदर्भित किया है।
आरोप लगानेवालों पर निशाना साधते हुए मुंतशिर ने आगे कहा कि अगर मेरे YouTube वीडियो और सही इतिहास की रीटेलिंग किसी को परेशान करती है, तो मेरे साथ तर्क करने के लिए उनका स्वागत है। लेकिन उस गाने का अनादर न करें जो सशस्त्र बलों के लिए एक गान बन गया है। यह स्वीकार्य नहीं है। मुंतशिर ने कहा- अगर यह साबित हो जाता है कि तेरी मिट्टी किसी भी गीत की नकल है, तो मैं हमेशा के लिए लिखना छोड़ दूंगा।
| तेरी मिट्टी गाने की कॉपी के आरोपों को लेकर ईटाइम्स संग बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा कि जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं उन्हें पहले जांच लेना चाहिए कि वीडियो मेरी फिल्म केसरी के रिलीज के कई महीनों बाद अपलोड की गई है। मुंबईः बॉलीवुड गीतकार मनोज मुंतशिर ने उन सभी आरोपों का खंडन किया है जिसमें फिल्म केसरी के उनके गाने- तेरी मिट्टी को पाकिस्तानी गीत की नकल बताया जा रहा था। हाल ही में सोशल मीडिया पर मनोज मुंतशिर पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाते हुए उनको ट्रोल किया गया था। उनपर एक कविता का हिंदी अनुवाद करके अपने नाम छपवाने सहित तेरी मिट्टी को एक पाकिस्तानी गीत की कॉपी का आरोप लगाया गया था। आरोपों को लेकर ईटाइम्स संग बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा कि जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं उन्हें पहले जांच लेना चाहिए कि वीडियो मेरी फिल्म केसरी के रिलीज के कई महीनों बाद अपलोड की गई है। उन्होंने आगे कहा, आपकी जानकारी के लिए बता दे जिस वीडियो में गाते हुए गायक को पाकिस्तानी बताया जा रहा है, वह पाकिस्तानी नहीं बल्कि हमारी अपनी भारतीय लोक गायिका गीता रबारी हैं। आप उन्हें कॉल करके भी देख सकते हैं। मुंतशिर ने कहा कि वह रबारी को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और वह हमेशा उनकी रचनाओं के प्रति सम्मान बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा कि गीताजी ने हमेशा मेरे काम की सराहना की है और आप उनसे पूछ भी सकते हैं। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर मनोज मुंतशिर पर इसके अलावा कई गानों के चोरी का आरोप लगा है। इसके पीछे की वजह पर बात करते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा,लोग मुझ पर हमला कर रहे हैं क्योंकि मैंने मुगलों पर जो वीडियो बनाया है, उसमें मैंने उनके खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है, उन्हें महिमामंडित डकैतों के रूप में संदर्भित किया है। आरोप लगानेवालों पर निशाना साधते हुए मुंतशिर ने आगे कहा कि अगर मेरे YouTube वीडियो और सही इतिहास की रीटेलिंग किसी को परेशान करती है, तो मेरे साथ तर्क करने के लिए उनका स्वागत है। लेकिन उस गाने का अनादर न करें जो सशस्त्र बलों के लिए एक गान बन गया है। यह स्वीकार्य नहीं है। मुंतशिर ने कहा- अगर यह साबित हो जाता है कि तेरी मिट्टी किसी भी गीत की नकल है, तो मैं हमेशा के लिए लिखना छोड़ दूंगा। |
Old Bag Hacks: फ़ैशन के इस दौर में पर्स, बैग रखना जितना ट्रेंडी है उतना ही ज़रूरी भी। लेकिन अगर आपके घर में ट्रेंड के चक्कर में बहुत ज्यादा बैग इकट्ठा हो गए हैं तो क्या आप उन्हें फेक देंगी। अगर आपका जवाब हां है तो आप जरा रुकिए गृहलक्ष्मी हमेशा की तरह इस बार भी आपके लिए बैग का नए तरीके से इस्तेमाल के ढेरों आइडिया लाई है।
वैसे तो महिलाओं को ये बताने की जरुरत नहीं है कि घर के सामान का दुबारा से कैसे इस्तेमाल करना है। वे हर एक वस्तु का किसी न किसी रूप में इस्तेमल कर ही लेती हैं इसीलिए उन्हें गृहलक्ष्मी भी कहा जाता है। फिर भी अगर आपका बैग पुराना हो गया है और आप उसे फेंकने की सोच रही है तो इसे फेंकने की बजाय इसका इस्तेमाल पिलो कवर के रूप में करें। आपको शायद सुनकर यह बड़ा ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन आप बड़ी आसानी से बैग से पिलो कवर बना सकती हैं। बस इसके लिए आपको बैग के अंदर रूई या अन्य चीजें भरनी होगी। इसके बाद बैग को सिल लें। आप चाहें तो जिप से भी बैग को कवर कर सकते हैं। लीजिए तैयार आपका पुराने बैग से बना पिलो । अगर आप अपने पिलो कवर को और सुंदर बनाना चाहती हैं तो आप इसमें पेंट या स्टीकर चिपकाकर डिजाइनर बना सकती हैं।
अगर आपका बैग अब फैशन से मैच नही खाता है लेकिन अभी भी नए जैसा रखा है तो स्वाभाविक है की उसको फेंकने में आपका दिल भी दुखता होगा लेकिन क्या किया जाए कहीं लेकर भी तो नही जा सकती हैं। आप इसका एक अच्छा उपयोग कर सकती हैं। अक्सर लोग फर्स्ट ऐड किट के लिए डिब्बे का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको डिब्बे की जगह पुराने पड़े बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। बैग में आपका सारा फर्स्ट ऐड का सामान आ जाएगा और सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे कहीं भी आसानी से ले जा सकती हैं।
घर गृहस्थी की चीजों का ख्याल रखना एक स्त्री के लिए बड़ी ज़िम्मेदारी है। घर में हजारों कामों के साथ साथ हजारों चीजें होती है जिनको सही जगह में रखना बड़ा मुश्किल है। क्या आपने हथौड़ा और कील जैसी होम सप्लाई चीजों को किसी ड्राअर में रखा है? अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो अब ड्राअर की बजाय इन चीजों को रखने के लिए पुराने बैग का उपयोग करें। बैग इन होम सप्लाई को रखने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है। इसे न सिर्फ आपके घर की जगह बचेगी बल्कि आपका घर सुव्यवस्थित भी लगेगा। आप इसे घर के किसी भी कोने में रख सकती हैं।
आजकल हर किसी का काम लैपटॉप से ही होता है। लगातर लैपटाप का इस्तेमाल से अगर आपका भी बैग ख़राब हो गया है और आप नया लैपटॉप बैग खरीदने की सोच रहे हैं, तो अब ऐसा न करें। इसके लिए आप अपने किसी भी पुराने बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप अपने पुराने बैग को पेंट करके नया लुक दे सकते हैं। एक्रिलिक पेंट से बैग को पेंट करें। आप चाहें तो बैग पर किसी तरह का डिजाइन भी बना सकते हैं। फिर न्यू लुक बैग को लैपटॉप बैग के रूप में इस्तेमाल करें।
क्या आप हर बार की तरह इस बार भी बिजली का बिल , या अन्य छोटे कागज कहीं रखकर भूल गई हैं। बिजी लाइफ में कई बार कुछ जरूरी कागज़ वक्तपर नहीं मिल पाते हैं तो ये आर्टिकल वाकई आपके लिए बड़ा उपयोगी है। ये तो हो गई बड़े बैग के बड़े-बड़े आईडियाज लेकिन आप सोच रही होंगी कि जो छोटे बैग हैं उनका क्या किया जाय। आपको इसके लिए सोचने की ज़रूरत नहीं है। आप छोटे-छोटे बिल, रिसिप्ट, या फिर घर के छोटेमोटे कागजों को इसमें रख सकती हैं। जिन्हें बिना समय गवाएं ढूंढ सकती हैं।
घर में पड़े पुराने बैग का इस तरह से इस्तेमाल आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है। आपकी फाइल्स खो जाती हैं या आप फाइल्स रखकर भूल जाते हैं, तो अब आपके साथ ऐसा नहीं होगा। क्योंकि आज हम आपके लिए एक बेहद ही अच्छा उपाय लेकर आए हैं। आप अपने बैग का इस्तेमाल फाइल रखने के लिए कर सकते हैं।
| Old Bag Hacks: फ़ैशन के इस दौर में पर्स, बैग रखना जितना ट्रेंडी है उतना ही ज़रूरी भी। लेकिन अगर आपके घर में ट्रेंड के चक्कर में बहुत ज्यादा बैग इकट्ठा हो गए हैं तो क्या आप उन्हें फेक देंगी। अगर आपका जवाब हां है तो आप जरा रुकिए गृहलक्ष्मी हमेशा की तरह इस बार भी आपके लिए बैग का नए तरीके से इस्तेमाल के ढेरों आइडिया लाई है। वैसे तो महिलाओं को ये बताने की जरुरत नहीं है कि घर के सामान का दुबारा से कैसे इस्तेमाल करना है। वे हर एक वस्तु का किसी न किसी रूप में इस्तेमल कर ही लेती हैं इसीलिए उन्हें गृहलक्ष्मी भी कहा जाता है। फिर भी अगर आपका बैग पुराना हो गया है और आप उसे फेंकने की सोच रही है तो इसे फेंकने की बजाय इसका इस्तेमाल पिलो कवर के रूप में करें। आपको शायद सुनकर यह बड़ा ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन आप बड़ी आसानी से बैग से पिलो कवर बना सकती हैं। बस इसके लिए आपको बैग के अंदर रूई या अन्य चीजें भरनी होगी। इसके बाद बैग को सिल लें। आप चाहें तो जिप से भी बैग को कवर कर सकते हैं। लीजिए तैयार आपका पुराने बैग से बना पिलो । अगर आप अपने पिलो कवर को और सुंदर बनाना चाहती हैं तो आप इसमें पेंट या स्टीकर चिपकाकर डिजाइनर बना सकती हैं। अगर आपका बैग अब फैशन से मैच नही खाता है लेकिन अभी भी नए जैसा रखा है तो स्वाभाविक है की उसको फेंकने में आपका दिल भी दुखता होगा लेकिन क्या किया जाए कहीं लेकर भी तो नही जा सकती हैं। आप इसका एक अच्छा उपयोग कर सकती हैं। अक्सर लोग फर्स्ट ऐड किट के लिए डिब्बे का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको डिब्बे की जगह पुराने पड़े बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। बैग में आपका सारा फर्स्ट ऐड का सामान आ जाएगा और सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे कहीं भी आसानी से ले जा सकती हैं। घर गृहस्थी की चीजों का ख्याल रखना एक स्त्री के लिए बड़ी ज़िम्मेदारी है। घर में हजारों कामों के साथ साथ हजारों चीजें होती है जिनको सही जगह में रखना बड़ा मुश्किल है। क्या आपने हथौड़ा और कील जैसी होम सप्लाई चीजों को किसी ड्राअर में रखा है? अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो अब ड्राअर की बजाय इन चीजों को रखने के लिए पुराने बैग का उपयोग करें। बैग इन होम सप्लाई को रखने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है। इसे न सिर्फ आपके घर की जगह बचेगी बल्कि आपका घर सुव्यवस्थित भी लगेगा। आप इसे घर के किसी भी कोने में रख सकती हैं। आजकल हर किसी का काम लैपटॉप से ही होता है। लगातर लैपटाप का इस्तेमाल से अगर आपका भी बैग ख़राब हो गया है और आप नया लैपटॉप बैग खरीदने की सोच रहे हैं, तो अब ऐसा न करें। इसके लिए आप अपने किसी भी पुराने बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप अपने पुराने बैग को पेंट करके नया लुक दे सकते हैं। एक्रिलिक पेंट से बैग को पेंट करें। आप चाहें तो बैग पर किसी तरह का डिजाइन भी बना सकते हैं। फिर न्यू लुक बैग को लैपटॉप बैग के रूप में इस्तेमाल करें। क्या आप हर बार की तरह इस बार भी बिजली का बिल , या अन्य छोटे कागज कहीं रखकर भूल गई हैं। बिजी लाइफ में कई बार कुछ जरूरी कागज़ वक्तपर नहीं मिल पाते हैं तो ये आर्टिकल वाकई आपके लिए बड़ा उपयोगी है। ये तो हो गई बड़े बैग के बड़े-बड़े आईडियाज लेकिन आप सोच रही होंगी कि जो छोटे बैग हैं उनका क्या किया जाय। आपको इसके लिए सोचने की ज़रूरत नहीं है। आप छोटे-छोटे बिल, रिसिप्ट, या फिर घर के छोटेमोटे कागजों को इसमें रख सकती हैं। जिन्हें बिना समय गवाएं ढूंढ सकती हैं। घर में पड़े पुराने बैग का इस तरह से इस्तेमाल आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है। आपकी फाइल्स खो जाती हैं या आप फाइल्स रखकर भूल जाते हैं, तो अब आपके साथ ऐसा नहीं होगा। क्योंकि आज हम आपके लिए एक बेहद ही अच्छा उपाय लेकर आए हैं। आप अपने बैग का इस्तेमाल फाइल रखने के लिए कर सकते हैं। |
Maharashtra Government's Budget: पीएम मोदी की कई योजना को महाराष्ट्र सरकार ने कॉपी किया है। राज्य सरकार की कोशिश गरीब-जरूरतमंद को मदद सुनिश्चित करनी है। आइए महाराष्ट्र सरकार की बजट से जुड़ी बड़ी घोषणाएं जानते हैं।
संघ के एक नेता के मुताबिक, महाराष्ट्र भर से सरकारी निगम के कई कर्मचारी निजी वाहनों से शहर के लिए रवाना हुए हैं।
ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने जहां देश में किसी तरह के बिजली संकट नहीं होने का दावा किया लेकिन महाराष्ट्र सरकार के बिजली विभाग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्य की जनता से बिजली की बचत करने की अपील कर दी है।
गोकुल दूध ब्रांड का स्वामित्व रखने वाली कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक यूनियन ने रविवार से महाराष्ट्र में दूध के दाम दो रुपये लीटर बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि, यह मूल्यवद्धि कोल्हापुर, सांगली और कोंकण में लागू नहीं होगी।
कोरोना कर्फ्यू के बावजूद महाराष्ट्र में कोरोना की रफ्तार थमती नहीं दिख रही है। हर दिन करीब 60 हजार केस आ रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस मामलों में तेजी आने के बाद बुधवार से राज्य में 15 दिन के लिये कर्फ्यू लगाने की घोषणा की है। कर्फ्यू में आवश्यक सेवाओं को मुक्त रखा गया है।
महाराष्ट्र में शराब की कीमत बढ़ने वाली है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राज्य के वित्त मंत्री अजित पवार ने आज विधानसभा में वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश किया। इस बजट में शराब पर टैक्स बढ़ा दिया गया है।
पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलट ट्रेन को झटका लग सकता है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने गुरुवार को कहा कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पीछे रह सकता है अगर महाराष्ट्र में अगले तीन महीने में जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता है।
देश की प्रमुख ईकॉमर्स कंपनी में से एक फ्लिपकार्ट ( flipkart) अपने पोर्टफोलियो में विकास करने के लिए छोटे उद्योगों को स्थानीय शिल्प कारीगरों के साथ करार कर रही है।
महाराष्ट्र का आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में एक लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने रविवार को इसकी जानकारी दी।
इससे मुंबई, ठाणे, पुणे नवी मुंबई जैसे महानगरों में बनने वाली बिल्डिंग और फ्लैट लेने वाले ग्राहकों को खासा फायदा होगा क्योंकि सरकार के कदमों के मुताबिक बिल्डरों को प्रीमियम में मिली राहत आगे ग्राहकों को स्टैंप ड्यूटी के वक्त मिलेगी।
सर्किल दर वह न्यूनतम कीमत होती है, जिससे कम दर पर किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री की स्थिति में उसका पंजीकरण नहीं किया जा सकता है।
यह संयंत्र पुणे के पास तालेगांव में होगा। कंपनी यहां विश्वस्तरीय प्रीमियम उत्पाद बनाएगी। शोध एवं विकास केंद्र भी स्थपित करेगी।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इस आशय की जानकारी सरकार से मांगी थी।
बजट 2020-21 में राजस्व प्राप्तियां 3,47,457 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व खर्च 3,56,968 करोड़ रुपए का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप राजस्व घाटा 9511 करोड़ रुपए रहेगा।
उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का कोई भी खाता किसी भी निजी बैंक के साथ नहीं है। महाराष्ट्र सरकार के सभी खाते केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ हैं।
तुअर उत्पादन उन किसानों से खरीदा जाएगा, जिन्होंने खुद को सरकार के पास पंजीकृत कराया है।
नरीमन प्वॉइंट में मरीन ड्राइव पर 23-मंजिला टॉवर, वर्ष 2013 तक राष्ट्रीय विमानन कंपनी का मुख्यालय रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को नए साल का तोहफा दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने 1 जनवरी से अपने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की है।
| Maharashtra Government's Budget: पीएम मोदी की कई योजना को महाराष्ट्र सरकार ने कॉपी किया है। राज्य सरकार की कोशिश गरीब-जरूरतमंद को मदद सुनिश्चित करनी है। आइए महाराष्ट्र सरकार की बजट से जुड़ी बड़ी घोषणाएं जानते हैं। संघ के एक नेता के मुताबिक, महाराष्ट्र भर से सरकारी निगम के कई कर्मचारी निजी वाहनों से शहर के लिए रवाना हुए हैं। ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने जहां देश में किसी तरह के बिजली संकट नहीं होने का दावा किया लेकिन महाराष्ट्र सरकार के बिजली विभाग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्य की जनता से बिजली की बचत करने की अपील कर दी है। गोकुल दूध ब्रांड का स्वामित्व रखने वाली कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक यूनियन ने रविवार से महाराष्ट्र में दूध के दाम दो रुपये लीटर बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि, यह मूल्यवद्धि कोल्हापुर, सांगली और कोंकण में लागू नहीं होगी। कोरोना कर्फ्यू के बावजूद महाराष्ट्र में कोरोना की रफ्तार थमती नहीं दिख रही है। हर दिन करीब साठ हजार केस आ रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस मामलों में तेजी आने के बाद बुधवार से राज्य में पंद्रह दिन के लिये कर्फ्यू लगाने की घोषणा की है। कर्फ्यू में आवश्यक सेवाओं को मुक्त रखा गया है। महाराष्ट्र में शराब की कीमत बढ़ने वाली है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राज्य के वित्त मंत्री अजित पवार ने आज विधानसभा में वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए बजट पेश किया। इस बजट में शराब पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलट ट्रेन को झटका लग सकता है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने गुरुवार को कहा कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पीछे रह सकता है अगर महाराष्ट्र में अगले तीन महीने में जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता है। देश की प्रमुख ईकॉमर्स कंपनी में से एक फ्लिपकार्ट अपने पोर्टफोलियो में विकास करने के लिए छोटे उद्योगों को स्थानीय शिल्प कारीगरों के साथ करार कर रही है। महाराष्ट्र का आगामी वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट में एक लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने रविवार को इसकी जानकारी दी। इससे मुंबई, ठाणे, पुणे नवी मुंबई जैसे महानगरों में बनने वाली बिल्डिंग और फ्लैट लेने वाले ग्राहकों को खासा फायदा होगा क्योंकि सरकार के कदमों के मुताबिक बिल्डरों को प्रीमियम में मिली राहत आगे ग्राहकों को स्टैंप ड्यूटी के वक्त मिलेगी। सर्किल दर वह न्यूनतम कीमत होती है, जिससे कम दर पर किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री की स्थिति में उसका पंजीकरण नहीं किया जा सकता है। यह संयंत्र पुणे के पास तालेगांव में होगा। कंपनी यहां विश्वस्तरीय प्रीमियम उत्पाद बनाएगी। शोध एवं विकास केंद्र भी स्थपित करेगी। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कार्यकर्ता अनिल गलगली ने इस आशय की जानकारी सरकार से मांगी थी। बजट दो हज़ार बीस-इक्कीस में राजस्व प्राप्तियां तीन,सैंतालीस,चार सौ सत्तावन करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व खर्च तीन,छप्पन,नौ सौ अड़सठ करोड़ रुपए का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप राजस्व घाटा नौ हज़ार पाँच सौ ग्यारह करोड़ रुपए रहेगा। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का कोई भी खाता किसी भी निजी बैंक के साथ नहीं है। महाराष्ट्र सरकार के सभी खाते केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ हैं। तुअर उत्पादन उन किसानों से खरीदा जाएगा, जिन्होंने खुद को सरकार के पास पंजीकृत कराया है। नरीमन प्वॉइंट में मरीन ड्राइव पर तेईस-मंजिला टॉवर, वर्ष दो हज़ार तेरह तक राष्ट्रीय विमानन कंपनी का मुख्यालय रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को नए साल का तोहफा दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक जनवरी से अपने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की है। |
हिमाचल प्रदेश में सीएम के लिए चल रही खींचतान के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मंजूरी मिल गई है। 8 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश का नतीजा आने के बाद से ही मुख्यमंत्री को लेकर कई बैठकों का दौर होने के बाद भी किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी। अब खबर आ रही है कि सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि अन्य नेताओं से चर्चा के बाद सुक्खू के नाम की घोषणा आज यानी शनिवार शाम तक की जा सकती है। इस बीच यह भी खबर है कि सुक्खू के नाम पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है।
बता दें कि प्रतिभा सिंह समेत कई नेता सीएम के रेस में थे। शुक्रवार को एक होटल में वरिष्ठ नेताओं के बैठक में प्रतिभा सिंह के समर्थकों ने होटल के बाहर जमकर हंगामा भी किया था। बनके समर्थक प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग कर रहे थे। इतना ही नहीं खुद प्रतिभा सिंह भी इस संबंध संकेत भी दिए थे। इस बीच कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में चालीस विधायकों में से 25 से विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू के समर्थन में हैं। यही वजह है कि कांग्रेस को सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति जतानी पड़ी। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि बीजेपी को 26 सीटें मिली थी।
| हिमाचल प्रदेश में सीएम के लिए चल रही खींचतान के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मंजूरी मिल गई है। आठ दिसंबर को हिमाचल प्रदेश का नतीजा आने के बाद से ही मुख्यमंत्री को लेकर कई बैठकों का दौर होने के बाद भी किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी। अब खबर आ रही है कि सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि अन्य नेताओं से चर्चा के बाद सुक्खू के नाम की घोषणा आज यानी शनिवार शाम तक की जा सकती है। इस बीच यह भी खबर है कि सुक्खू के नाम पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है। बता दें कि प्रतिभा सिंह समेत कई नेता सीएम के रेस में थे। शुक्रवार को एक होटल में वरिष्ठ नेताओं के बैठक में प्रतिभा सिंह के समर्थकों ने होटल के बाहर जमकर हंगामा भी किया था। बनके समर्थक प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग कर रहे थे। इतना ही नहीं खुद प्रतिभा सिंह भी इस संबंध संकेत भी दिए थे। इस बीच कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में चालीस विधायकों में से पच्चीस से विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू के समर्थन में हैं। यही वजह है कि कांग्रेस को सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति जतानी पड़ी। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए चुनाव में कांग्रेस ने चालीस सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि बीजेपी को छब्बीस सीटें मिली थी। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद चारों और से बधाई मिल रही है. प्रधानमंत्री के साथ राजनीति में कईं बॉलीवुड स्टार को भी जीत हासिल हुई। वहीँ बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा ने भी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की है। अब बाकी स्टार्स की तरह प्रियंका भी राजनीति में आना चाहती है. जी हाँ लेकिन प्रियंका कोई सांसद नही बल्कि प्रधानमंत्री बनना चाहती है। हाल ही में एक इंटरव्यू प्रियंका ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में भी बताया।
उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा कि वह किसी दिन भारत की प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं। प्रियंका ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके पति निक कभी अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव लड़ें। अपनी इच्छा के साथ प्रियंका ने यह भी साफ़ कर दिया कि निक को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। प्रियंका की फिल्मों की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा अब फरहान अख्तर और जायरा वसीम के साथ शोनाली बोस की फिल्म 'द स्काई इज पिंक' में दिखाई देंगी।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद चारों और से बधाई मिल रही है. प्रधानमंत्री के साथ राजनीति में कईं बॉलीवुड स्टार को भी जीत हासिल हुई। वहीँ बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा ने भी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की है। अब बाकी स्टार्स की तरह प्रियंका भी राजनीति में आना चाहती है. जी हाँ लेकिन प्रियंका कोई सांसद नही बल्कि प्रधानमंत्री बनना चाहती है। हाल ही में एक इंटरव्यू प्रियंका ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा कि वह किसी दिन भारत की प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं। प्रियंका ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके पति निक कभी अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव लड़ें। अपनी इच्छा के साथ प्रियंका ने यह भी साफ़ कर दिया कि निक को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। प्रियंका की फिल्मों की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा अब फरहान अख्तर और जायरा वसीम के साथ शोनाली बोस की फिल्म 'द स्काई इज पिंक' में दिखाई देंगी। |
लखनऊः "जेपी समूह को वर्ष 2006 में मुलायम सिंह सरकार द्वारा वन विभाग की 2500 एकड़ भूमि के अवैध आवंटन के मामले की हो सीबीआई जाँच" यह मांग आज एस. आर. दारापुरी भूतपूर्व आई. जी. तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उठाई है. उन्होंने आगे कहा है कि उक्त भूमि मुलायम सिंह सरकार द्वारा वर्ष 2006 में सोनभद्र स्थित यूपी सीमेंट कारपोरेशन के दिवालिया होने पर जेपी समूह को बेचते समय दी गयी थी. यह ज्ञातव्य है कि वन विभाग की उक्त भूमि यूपी सीमेंट कारपोरेशन को 90 वर्ष की लीज़ पर दी गयी थी और लीज़ की शर्तों के अनुसार कारपोरेशन यह ज़मीं किसी दूसरे को नहीं दे सकता था. कारपोरेशन को उक्त भूमि की ज़रुरत न होने अथवा लीज़ अवधि समाप्त होने पर उक्त भूमि वन विभाग को ही वापस की जानी थी. मुलायम सरकार ने 2006 में सीमेंट कारपोरेशन के दिवालिया घोषित किये जाने पर सीमेंट कारपोरेशन को औने पौने दामों पर जेपी समूह को बेच दिया था और साथ ही वन विभाग की उक्त भूमि को भी गलत ढंग से उसे दे दिया था. 2007 में उक्त भूमि का कब्ज़ा मायावती सरकार द्वारा जेपी समूह को दिया गया था. इस पर उसी समय वन विभाग द्वारा आपत्ति की गयी थी परन्तु किन्हीं विशेष कारणों से उक्त भूमि वन विभाग न लौटा कर जेपी समूह को दे दी गयी. तब से लेकर जेपी समूह उक्त ज़मीन पर चूना और पत्थर का खनन करता आ रहा था. सीएजी और केंद्र सरकार ने गलत ढंग से वन विभाग की ज़मीन दिए जाने का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति उठाई थी. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अवैध तरीके से उक्त ज़मीन देकर सरकारी खजाने को 450 करोड़ का चूना लगाया गया है. इसकी वजह से ही संबधित वन प्रभागों की दस वर्षीय कार्ययोजना को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया गया था. जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तो प्रदेश सरकार ने वहां यह ज़मीन गलती से दिए जाने की बात स्वीकार की. इस पर जब सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछा कि सरकार उक्त ज़मीन वापस लेने के लिए क्या कार्रवाही कर रही है तो सरकार ने आनन फानन में ज़मीन वापस लेने का निर्णय लिया है और फैसले से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराने जा रही है.
अब सवाल यह पैदा होता है कि सीमेंट कारपोरेशन को जेपी समूह को बेचे जाने पर वन विभाग की ज़मीन सम्बन्धी लीज़ की शर्तों के विपरीत उक्त भूमि जेपी समूह को कैसे आवंटित की गयी? इस के लिए कौन ज़िम्मेदार है और उसे दण्डित किया जाये? दूसरे अवैध आवंटन के फलस्वरूप समूह द्वारा किये गए खनन से 450 करोड़ के नुक्सान की भरपाई कौन करेगा? अतः आइपीएफ मांग करता है कि इस नुक्सान की भरपाई जेपी समूह से ही करायी जाए क्योंकि भूमि के गलत आवंटन से उन्होंने ने ही अवैधानिक लाभ उठाया है. इस मामले में सरकार और जेपी समूह की सांठगाँठ से बहुत बड़ा घोटाला किया गया है जिस की जांच सीबीआई से करायी जानी चाहिए. यदि इस मामले की जांच सीबीआई से नहीं करायी जाती और अवैध आवंटन से हुयी हानि की भरपाई जेपी समूह से नहीं करायी जाती तो आइपीएफ इस सम्बन्ध में जनहित याचिका दायर करने की कार्रवाही करेगा.
| लखनऊः "जेपी समूह को वर्ष दो हज़ार छः में मुलायम सिंह सरकार द्वारा वन विभाग की दो हज़ार पाँच सौ एकड़ भूमि के अवैध आवंटन के मामले की हो सीबीआई जाँच" यह मांग आज एस. आर. दारापुरी भूतपूर्व आई. जी. तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उठाई है. उन्होंने आगे कहा है कि उक्त भूमि मुलायम सिंह सरकार द्वारा वर्ष दो हज़ार छः में सोनभद्र स्थित यूपी सीमेंट कारपोरेशन के दिवालिया होने पर जेपी समूह को बेचते समय दी गयी थी. यह ज्ञातव्य है कि वन विभाग की उक्त भूमि यूपी सीमेंट कारपोरेशन को नब्बे वर्ष की लीज़ पर दी गयी थी और लीज़ की शर्तों के अनुसार कारपोरेशन यह ज़मीं किसी दूसरे को नहीं दे सकता था. कारपोरेशन को उक्त भूमि की ज़रुरत न होने अथवा लीज़ अवधि समाप्त होने पर उक्त भूमि वन विभाग को ही वापस की जानी थी. मुलायम सरकार ने दो हज़ार छः में सीमेंट कारपोरेशन के दिवालिया घोषित किये जाने पर सीमेंट कारपोरेशन को औने पौने दामों पर जेपी समूह को बेच दिया था और साथ ही वन विभाग की उक्त भूमि को भी गलत ढंग से उसे दे दिया था. दो हज़ार सात में उक्त भूमि का कब्ज़ा मायावती सरकार द्वारा जेपी समूह को दिया गया था. इस पर उसी समय वन विभाग द्वारा आपत्ति की गयी थी परन्तु किन्हीं विशेष कारणों से उक्त भूमि वन विभाग न लौटा कर जेपी समूह को दे दी गयी. तब से लेकर जेपी समूह उक्त ज़मीन पर चूना और पत्थर का खनन करता आ रहा था. सीएजी और केंद्र सरकार ने गलत ढंग से वन विभाग की ज़मीन दिए जाने का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति उठाई थी. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अवैध तरीके से उक्त ज़मीन देकर सरकारी खजाने को चार सौ पचास करोड़ का चूना लगाया गया है. इसकी वजह से ही संबधित वन प्रभागों की दस वर्षीय कार्ययोजना को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया गया था. जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तो प्रदेश सरकार ने वहां यह ज़मीन गलती से दिए जाने की बात स्वीकार की. इस पर जब सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछा कि सरकार उक्त ज़मीन वापस लेने के लिए क्या कार्रवाही कर रही है तो सरकार ने आनन फानन में ज़मीन वापस लेने का निर्णय लिया है और फैसले से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराने जा रही है. अब सवाल यह पैदा होता है कि सीमेंट कारपोरेशन को जेपी समूह को बेचे जाने पर वन विभाग की ज़मीन सम्बन्धी लीज़ की शर्तों के विपरीत उक्त भूमि जेपी समूह को कैसे आवंटित की गयी? इस के लिए कौन ज़िम्मेदार है और उसे दण्डित किया जाये? दूसरे अवैध आवंटन के फलस्वरूप समूह द्वारा किये गए खनन से चार सौ पचास करोड़ के नुक्सान की भरपाई कौन करेगा? अतः आइपीएफ मांग करता है कि इस नुक्सान की भरपाई जेपी समूह से ही करायी जाए क्योंकि भूमि के गलत आवंटन से उन्होंने ने ही अवैधानिक लाभ उठाया है. इस मामले में सरकार और जेपी समूह की सांठगाँठ से बहुत बड़ा घोटाला किया गया है जिस की जांच सीबीआई से करायी जानी चाहिए. यदि इस मामले की जांच सीबीआई से नहीं करायी जाती और अवैध आवंटन से हुयी हानि की भरपाई जेपी समूह से नहीं करायी जाती तो आइपीएफ इस सम्बन्ध में जनहित याचिका दायर करने की कार्रवाही करेगा. |
कोरोनाकाल के चलते ज्यादातर कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं और वह ऑफिस आने-जाने के लिए ट्रैवल नहीं कर रहे हैं।
नई दिल्ली : कोरोनाकाल में ज्यादातर कर्मचारी और प्रोफेशनल वर्क फ्रॉम होम (WFH) कर रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि ये आपकी टैक्स देनदारी बढ़ा रहा है। वर्क फ्रॉम होम करने से कन्वेंस अलाउंस (Conveyance allowance) और लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) जैसे अलाउंस टैक्स फ्री नहीं रहे क्योंकि अब कर्मचारी इसे रीइंबर्स नहीं कर पा रहे हैं। रीइंबर्स क्लेम नहीं आने के कारण कुछ कपनियां कन्वेंस अलाउंस को वेतन के साथ दे रहीं हैं जिसके कारण कर्मचारियों के लिए ये कर योग्य आय में आ गया है।
कोरोनाकाल के चलते ज्यादातर कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं और वह ऑफिस आने-जाने के लिए ट्रैवल नहीं कर रहे हैं। कर्मचारी वेकेशन पर नहीं जा पा रहे हैं जिसके कारण वह एलटीए क्लेम भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी खर्चे दिखाकर इन अलाउंस को रीइंबर्स नहीं कर पा रहे हैं। जो खर्चे रीइंबर्स होते हैं वह टैक्स देनदारी का हिस्सा नहीं होते। टैक्स फ्री अलाउंस रीइंबर्स नहीं करने से ये वेतन का हिस्सा बन गए हैं और टैक्स देनदारी बढ़ा रहे हैं।
यदि घर का किराया बचाने अपने किराये के घर को छोड़कर अपने पारिवारिक घर में चले गए हैं, तो हो सकता है आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़े क्योंकि टैक्स फ्री हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) अब आपको टैक्स छूट के तहत उपलब्ध नहीं होगा।
अगर आपकी कंपनी ने वर्क फ्रॉम अलाउंस दिये हैं तो उन पर भी टैक्स चुकाना होगा क्योंकि ये आपकी आय का हिस्सा माना जाएगा।
अगर किसी व्यक्ति की सीटीसी (कॉस्ट टू कंपनी)10 लाख रुपये है जिसमें एचआरए, कन्वेंस, एलटीए और कम्यूनिकेशन रीइंबर्समेंट आपके वेतन का हिस्सा होते हैं। अगर आप अपने किराये के घर को खाली करते हैं और ये स्थिति पूरे वित्त वर्ष तक जारी रहती है तो आप वित्त वर्ष 2020-21 में 60 फीसदी ज्यादा टैक्स भरेंगे।
| कोरोनाकाल के चलते ज्यादातर कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं और वह ऑफिस आने-जाने के लिए ट्रैवल नहीं कर रहे हैं। नई दिल्ली : कोरोनाकाल में ज्यादातर कर्मचारी और प्रोफेशनल वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि ये आपकी टैक्स देनदारी बढ़ा रहा है। वर्क फ्रॉम होम करने से कन्वेंस अलाउंस और लीव ट्रैवल अलाउंस जैसे अलाउंस टैक्स फ्री नहीं रहे क्योंकि अब कर्मचारी इसे रीइंबर्स नहीं कर पा रहे हैं। रीइंबर्स क्लेम नहीं आने के कारण कुछ कपनियां कन्वेंस अलाउंस को वेतन के साथ दे रहीं हैं जिसके कारण कर्मचारियों के लिए ये कर योग्य आय में आ गया है। कोरोनाकाल के चलते ज्यादातर कर्मचारी अपने घर से काम कर रहे हैं और वह ऑफिस आने-जाने के लिए ट्रैवल नहीं कर रहे हैं। कर्मचारी वेकेशन पर नहीं जा पा रहे हैं जिसके कारण वह एलटीए क्लेम भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी खर्चे दिखाकर इन अलाउंस को रीइंबर्स नहीं कर पा रहे हैं। जो खर्चे रीइंबर्स होते हैं वह टैक्स देनदारी का हिस्सा नहीं होते। टैक्स फ्री अलाउंस रीइंबर्स नहीं करने से ये वेतन का हिस्सा बन गए हैं और टैक्स देनदारी बढ़ा रहे हैं। यदि घर का किराया बचाने अपने किराये के घर को छोड़कर अपने पारिवारिक घर में चले गए हैं, तो हो सकता है आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़े क्योंकि टैक्स फ्री हाउस रेंट अलाउंस अब आपको टैक्स छूट के तहत उपलब्ध नहीं होगा। अगर आपकी कंपनी ने वर्क फ्रॉम अलाउंस दिये हैं तो उन पर भी टैक्स चुकाना होगा क्योंकि ये आपकी आय का हिस्सा माना जाएगा। अगर किसी व्यक्ति की सीटीसी दस लाख रुपये है जिसमें एचआरए, कन्वेंस, एलटीए और कम्यूनिकेशन रीइंबर्समेंट आपके वेतन का हिस्सा होते हैं। अगर आप अपने किराये के घर को खाली करते हैं और ये स्थिति पूरे वित्त वर्ष तक जारी रहती है तो आप वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में साठ फीसदी ज्यादा टैक्स भरेंगे। |
कृष्ण प्रसाद जी और अवधूत दोनों की आंखें बंद है। उन्हें अब तक नहीं पता कि इस कमरे में बहुत सारे भयानक बदलाव हो रहे हैं। अचानक जब मेरी नजर ऊपर सीलिंग की ओर पड़ी तो वहाँ का दृश्य किसी को भी अंदर से हिला देगा।
कमरे के उस तरफ से सीलिंग पर एक बच्चा उल्टा चलता हुआ मेरे ही तरफ आ रहा था। उसके शरीर का रंग हल्का हरा है। एक नहीं उसके तीन सिर हैं। लाकिनी!
मेरे मुंह से ही तेज सिहरन की आवाज निकल गई। मेरे सीने के बाएं तरफ तेज दर्द होने लगा। वह भयानक छोटा बच्चा दांत दिखाते हुए खिलखिला कर हंस रहा था। तीन जोड़े भयानक आँख में नफरत और प्रतिहिंसा चमक रहा है। वह बच्चा मेरे सिर के ऊपर आकर रुका और हँसते हुए मुझे ध्यान से देखने लगा। अचानक ही धड़ाक से वह बच्चा मेरे सामने आकर गिरा। रक्षा घेरा के अंदर नहीं , वह रक्षा घेरा के बाहर गिरा था। गिरने की वजह से उसके शरीर का कुछ अंग चोट के कारण फट गए और खून निकलने लगा। कुछ सेकेंड तक फर्श पर वह ऐसे ही पड़ा रहा। देख कर ऐसा लगा कि वह मर गया है लेकिन अचानक ही मुझे आश्चर्य करते हुए वह बच्चा हँसता हुआ उठ बैठा। उसके एक सिर पर एक तरफ से बहुत ही जोर की चोट लगी है और वहां से निकलता खून उसके चेहरे और पूरे शरीर पर बह रहा है। ऐसी वीभत्स अवस्था में भी वह बच्चा हंसता ही जा रहा है। उस घिनौने हंसी से उसके पूरे शरीर की मांसपेशी हिल रहा है। यह दृश्य और सहन नहीं कर पाया और मैं तेजी से चिल्ला पड़ा।
अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी दोनों ने मेरी तरफ देखा लेकिन मंत्र पाठ को नहीं रोका। अवधूत ने इशारे से मुझे चुप रहने के लिए कहा।
कमरे के अंदर जो भयानक दृश्य चल रहा है क्या उन्हें कुछ भी नहीं दिख रहा? वह मुझे चुप रहने के लिए कैसे बोल सकता है?
वह छोटा बच्चा अब मेरे चारों तरफ टहलने लगा। एक बात समझ गया कि लाकिनी रक्षा घेरा पार करके मेरे पास नहीं आएगी , इसीलिए रक्षा घेरा के बाहर से मुझे डर दिखाने की कोशिश कर रही है। यह सोचते हैं मुझे थोड़ा बल मिला। मैं आंख बंद करके मूर्ति को हाथ में पकड़ कर बैठा रहा। इधर तेज ठंडी व आतंक की वजह से मेरा पूरा शरीर कांप रहा है।
मैंने ध्यान दिया कि लाकिनी जितनी पास आई है , ठंडी उतना ही बढ़ गया है।
कितनी देर तक ऐसे आंख बंद करके बैठा रहा मुझे नहीं पता। अचानक ही मैंने सुना कि दोनों ने मंत्र पाठ बंद कर दिया है। इसके तुरंत बाद ही कृष्ण प्रसाद जी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दिया। मैंने गलती से फिर आँख खोल दिया अगर नहीं खोलता तो ही अच्छा रहता। आंख खोलते ही जो दृश्य देखा उसे देख किसी की भी सांसे अटक जाए। अब वह बच्चा नहीं है। मेरे आस-पास कोई भी नहीं है। मेरे से कुछ ही दूरी पर बैठे कृष्ण प्रसाद जी के कंधे पर बैठकर उनके सिर को आक्रोश में पकड़ी हुई है। वह एक छोटी लड़की है। उसके सिर के दोनों तरफ से और दो सिर निकली हुई है। होंठ के पास से दो बड़े भेदक दाँत बाहर निकला हुआ है। प्रतिहिंसा के आक्रोश में तीनों मुंह से तीन जीभ निकला हुआ है। उसके धारदार बड़े नाखून चमक रहे हैं। मैं आगे की भयानक दृश्य के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था। उस लड़की ने अपने धारदार नाखून को कृष्ण प्रसाद जी के गले पर रखकर एक बार रगड़ते ही उनका सिर कटकर धड़ से नीचे गिर पड़ा। यह देखकर लाकिनी एक भयानक हंसी हंसने लगी।
मेरा तंत्रिका तंत्र यह दृश्य और नहीं झेल पाया, धीरे - धीरे चेतना लुप्त होने लगी। मैं फर्श पर ही लेट गया। हल्के खुले आंख से देखा कि जिस जगह पर अवधूत बैठा था लेकिन अब वहां से अवधूत गायब था। वहां पर एक और 3 सिर वाला व्यक्ति बैठा हुआ है और वह रेंगते हुए मेरे ही तरफ बढ़ रहा है। केवल वही नहीं , पूरे कमरे में ना जाने कहां से 3 सिर वाले प्राणियों का आगमन हुआ है? उनमें से कोई फर्श पर कोई दीवार पर कोई सीलिंग पर रेंगते हुए मेरे तरफ ही बढ़ रहे हैं। उन सभी के हंसने की वजह से चारों तरफ का परिवेश और भी भयानक हो गया है। सभी एक साथ मेरे तरफ से आ रहे हैं। मुझे ऐसा लगा कि मैं अभी तुरंत ही बेहोश होने वाला हूं।
उसी वक्त सभी भयानक हंसी की आवाजों से परे होकर कोई बोला ,
" सब कुछ गलत है। सब कुछ एक भ्रम है। "
यह आवाज़ मानो बहुत दूर कहीं से मेरे तक पहुंच रहा है। मेरे शरीर में चेतना नाम की कोई चीज ही नहीं है लेकिन फिर भी सुनने की कोशिश किया।
" सबकुछ एक मायाजाल है। उठकर बैठ और देख नर्क का द्वारा खुला है। उस मूर्ति को उसमें फेंक दो।"
मेरे आंखों के सामने अंधेरा उतर रहा है। अभी तक बेहोश नहीं हुआ हूं। कान में बार-बार यही आवाज सुनाई दे रहा है।
" उस मूर्ति को अभी नरक द्वार के अंदर डाल दो। उठ जाओ। "
यह आवाज़ और भी ठीक से सुनाई देने लगा। कितना समय या नहीं पता लेकिन बहुत देर बाद मैंने आंख को पूरा खोला। मेरे चेहरे के पास वो सभी तीन सिर वाले प्राणी खड़े हैं। उन सभी के अंदर से निकलने वाले ठंडी ने मानो मेरे पूरे शरीर की हड्डी को जमा दिया है। इच्छाशक्ति और मनोबल एकत्रित करके मैंने सामने की ओर ध्यान से देखा। सामने ही अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी बैठे हैं। सामने पीतल के टोकरी में जलता आग अब धीरे-धीरे लाल से नीला हो रहा था।
अब स्पष्ट रूप से कृष्ण प्रसाद जी का आवाज सुनाई दिया,
" उठो और देखो देवता वज्रपाणि आ गए हैं। उन्होंने अपने वज्र के द्वारा नरक के द्वार को खोल दिया है। अपने हाथ से उस भयानक मूर्ति को द्वार के अंदर फेंक दो। मेरे चारों तरफ के उन भयानक प्राणियों ने अब गुर्राना व डरावनी आवाज़ निकलना शुरू कर दिया। वो सभी अब भी रक्षा घेरे को पार करके मेरे पास नहीं आ पाए हैं। रक्षा घेरे के बाहर एकत्रित होकर , बैठकर , हवा में उड़ते हुए आक्रोश में गर्जन कर रहे हैं मानो अगर मुझे पा जाएं तो चीर फाड़ कर खा लेंगे। पूरे कमरे में फैला हल्का हरा रोशनी अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।उसके जगह पर अब एक गाढ़े नीले रोशनी ने अपना स्थान ले लिया है। इस रोशनी के अंदर कुछ शक्ति छुपा हुआ है। इसी रोशनी के वजह से मेरे शरीर में धीरे-धीरे बल लौटने लगा। शरीर के पूरे शक्ति को एकत्रित करके मैं अब उठ बैठा। सामने जलता नीला आग दो भागों में खुल रहा था। दरवाजे की तरफ खुलने के बाद अंदर लाल गड्ढे जैसा कुछ दिखाई दिया। उस गड्ढे से आगे की लपटें निकल रही थी।
कृष्ण प्रसाद जी गरज पड़े,
" फेंक दो , उस मूर्ति को अंदर फेंक दो। "
पूरा आवाज सुनने से पहले ही मेरे दिमाग में सिग्नल मिल गया था कि मेरे हाथ में जो मूर्ति है उसे उस लाल गड्ढे के अंदर फेंकना होगा। फिर से पूरे शरीर की शक्ति को एकत्रित करके अपने हाथ में लिए हुए पंचधातु की अभिशापित लाकिनी मूर्ति को मैंने उस गड्ढे की ओर फेंक दिया। तुरंत ही मेरे चारों तरफ के भयानक 3 सिर वाले सभी प्राणी जलने लगे। पूरे कमरे को उस वक्त गाढ़े नीले रोशनी ने अपने कब्जे में ले लिया था? उस रोशनी ने कमरे के अंदर के सभी भयानक शरीर को एक हरे रंग की रोशनी बदलकर उस गड्ढे में घुस गया। उन सभी के हाहाकार गर्जन से पूरे कमरे की दीवार कांप उठा। मेरे दिमाग के ऊपर फिर जोर पड़ने लगा।
बेहोश होने से कुछ सेकंड पहले मुझे एक गंभीर हंसी की आवाज़ सुनाई दिया। यह आवाज़ अवधूत , कृष्ण प्रसाद भट्टराई जी अथवा किसी मनुष्य का नहीं था। वह आवाज़ मन कोई तृप्त कर रहा था।
इसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं। मैंने ज़ब आँख खोला तो अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी मेरे ऊपर झुके हुए थे। बेहोशी के बाद आँख खोलते ही दोनों ने मुझे पकड़कर बैठाया। मैं लगभग एक घंटे बेहोश था। मेरे स्वाभाविक होते ही अवधूत ने जाकर कमरे का दरवाजा खोल दिया। धूपबत्ती की सुगंधित धुंआ हवा के साथ बाहर निकल गया।
अवधूत ने मुझसे पूछा ,
" क्या हाल ? चाय पिओगे? बैठे रहो मैं बनाकर लता हूं। आप भी पिएंगे न? "
अँधेरे में उन्होंने सिर हिलाया या नहीं मैं देख नहीं पाया। अवधूत ने क्या समझा नहीं पता। वह कमरे से बाहर चला गया। मैं भी धीरे - धीरे बाहर जाकर दरवाजे को पकड़कर खड़ा हुआ।
कुछ पक्षियों की आवाज़ सुनाई दिया। हालांकि अभी भोर होने में काफी समय है। आसमान में उस वक्त भी कुछ तारे जगमगा रहे थे। उस वक्त आसमान का रंग घना नीला है एकदम देवता वज्रपाणि की तरह...।
| कृष्ण प्रसाद जी और अवधूत दोनों की आंखें बंद है। उन्हें अब तक नहीं पता कि इस कमरे में बहुत सारे भयानक बदलाव हो रहे हैं। अचानक जब मेरी नजर ऊपर सीलिंग की ओर पड़ी तो वहाँ का दृश्य किसी को भी अंदर से हिला देगा। कमरे के उस तरफ से सीलिंग पर एक बच्चा उल्टा चलता हुआ मेरे ही तरफ आ रहा था। उसके शरीर का रंग हल्का हरा है। एक नहीं उसके तीन सिर हैं। लाकिनी! मेरे मुंह से ही तेज सिहरन की आवाज निकल गई। मेरे सीने के बाएं तरफ तेज दर्द होने लगा। वह भयानक छोटा बच्चा दांत दिखाते हुए खिलखिला कर हंस रहा था। तीन जोड़े भयानक आँख में नफरत और प्रतिहिंसा चमक रहा है। वह बच्चा मेरे सिर के ऊपर आकर रुका और हँसते हुए मुझे ध्यान से देखने लगा। अचानक ही धड़ाक से वह बच्चा मेरे सामने आकर गिरा। रक्षा घेरा के अंदर नहीं , वह रक्षा घेरा के बाहर गिरा था। गिरने की वजह से उसके शरीर का कुछ अंग चोट के कारण फट गए और खून निकलने लगा। कुछ सेकेंड तक फर्श पर वह ऐसे ही पड़ा रहा। देख कर ऐसा लगा कि वह मर गया है लेकिन अचानक ही मुझे आश्चर्य करते हुए वह बच्चा हँसता हुआ उठ बैठा। उसके एक सिर पर एक तरफ से बहुत ही जोर की चोट लगी है और वहां से निकलता खून उसके चेहरे और पूरे शरीर पर बह रहा है। ऐसी वीभत्स अवस्था में भी वह बच्चा हंसता ही जा रहा है। उस घिनौने हंसी से उसके पूरे शरीर की मांसपेशी हिल रहा है। यह दृश्य और सहन नहीं कर पाया और मैं तेजी से चिल्ला पड़ा। अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी दोनों ने मेरी तरफ देखा लेकिन मंत्र पाठ को नहीं रोका। अवधूत ने इशारे से मुझे चुप रहने के लिए कहा। कमरे के अंदर जो भयानक दृश्य चल रहा है क्या उन्हें कुछ भी नहीं दिख रहा? वह मुझे चुप रहने के लिए कैसे बोल सकता है? वह छोटा बच्चा अब मेरे चारों तरफ टहलने लगा। एक बात समझ गया कि लाकिनी रक्षा घेरा पार करके मेरे पास नहीं आएगी , इसीलिए रक्षा घेरा के बाहर से मुझे डर दिखाने की कोशिश कर रही है। यह सोचते हैं मुझे थोड़ा बल मिला। मैं आंख बंद करके मूर्ति को हाथ में पकड़ कर बैठा रहा। इधर तेज ठंडी व आतंक की वजह से मेरा पूरा शरीर कांप रहा है। मैंने ध्यान दिया कि लाकिनी जितनी पास आई है , ठंडी उतना ही बढ़ गया है। कितनी देर तक ऐसे आंख बंद करके बैठा रहा मुझे नहीं पता। अचानक ही मैंने सुना कि दोनों ने मंत्र पाठ बंद कर दिया है। इसके तुरंत बाद ही कृष्ण प्रसाद जी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दिया। मैंने गलती से फिर आँख खोल दिया अगर नहीं खोलता तो ही अच्छा रहता। आंख खोलते ही जो दृश्य देखा उसे देख किसी की भी सांसे अटक जाए। अब वह बच्चा नहीं है। मेरे आस-पास कोई भी नहीं है। मेरे से कुछ ही दूरी पर बैठे कृष्ण प्रसाद जी के कंधे पर बैठकर उनके सिर को आक्रोश में पकड़ी हुई है। वह एक छोटी लड़की है। उसके सिर के दोनों तरफ से और दो सिर निकली हुई है। होंठ के पास से दो बड़े भेदक दाँत बाहर निकला हुआ है। प्रतिहिंसा के आक्रोश में तीनों मुंह से तीन जीभ निकला हुआ है। उसके धारदार बड़े नाखून चमक रहे हैं। मैं आगे की भयानक दृश्य के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था। उस लड़की ने अपने धारदार नाखून को कृष्ण प्रसाद जी के गले पर रखकर एक बार रगड़ते ही उनका सिर कटकर धड़ से नीचे गिर पड़ा। यह देखकर लाकिनी एक भयानक हंसी हंसने लगी। मेरा तंत्रिका तंत्र यह दृश्य और नहीं झेल पाया, धीरे - धीरे चेतना लुप्त होने लगी। मैं फर्श पर ही लेट गया। हल्के खुले आंख से देखा कि जिस जगह पर अवधूत बैठा था लेकिन अब वहां से अवधूत गायब था। वहां पर एक और तीन सिर वाला व्यक्ति बैठा हुआ है और वह रेंगते हुए मेरे ही तरफ बढ़ रहा है। केवल वही नहीं , पूरे कमरे में ना जाने कहां से तीन सिर वाले प्राणियों का आगमन हुआ है? उनमें से कोई फर्श पर कोई दीवार पर कोई सीलिंग पर रेंगते हुए मेरे तरफ ही बढ़ रहे हैं। उन सभी के हंसने की वजह से चारों तरफ का परिवेश और भी भयानक हो गया है। सभी एक साथ मेरे तरफ से आ रहे हैं। मुझे ऐसा लगा कि मैं अभी तुरंत ही बेहोश होने वाला हूं। उसी वक्त सभी भयानक हंसी की आवाजों से परे होकर कोई बोला , " सब कुछ गलत है। सब कुछ एक भ्रम है। " यह आवाज़ मानो बहुत दूर कहीं से मेरे तक पहुंच रहा है। मेरे शरीर में चेतना नाम की कोई चीज ही नहीं है लेकिन फिर भी सुनने की कोशिश किया। " सबकुछ एक मायाजाल है। उठकर बैठ और देख नर्क का द्वारा खुला है। उस मूर्ति को उसमें फेंक दो।" मेरे आंखों के सामने अंधेरा उतर रहा है। अभी तक बेहोश नहीं हुआ हूं। कान में बार-बार यही आवाज सुनाई दे रहा है। " उस मूर्ति को अभी नरक द्वार के अंदर डाल दो। उठ जाओ। " यह आवाज़ और भी ठीक से सुनाई देने लगा। कितना समय या नहीं पता लेकिन बहुत देर बाद मैंने आंख को पूरा खोला। मेरे चेहरे के पास वो सभी तीन सिर वाले प्राणी खड़े हैं। उन सभी के अंदर से निकलने वाले ठंडी ने मानो मेरे पूरे शरीर की हड्डी को जमा दिया है। इच्छाशक्ति और मनोबल एकत्रित करके मैंने सामने की ओर ध्यान से देखा। सामने ही अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी बैठे हैं। सामने पीतल के टोकरी में जलता आग अब धीरे-धीरे लाल से नीला हो रहा था। अब स्पष्ट रूप से कृष्ण प्रसाद जी का आवाज सुनाई दिया, " उठो और देखो देवता वज्रपाणि आ गए हैं। उन्होंने अपने वज्र के द्वारा नरक के द्वार को खोल दिया है। अपने हाथ से उस भयानक मूर्ति को द्वार के अंदर फेंक दो। मेरे चारों तरफ के उन भयानक प्राणियों ने अब गुर्राना व डरावनी आवाज़ निकलना शुरू कर दिया। वो सभी अब भी रक्षा घेरे को पार करके मेरे पास नहीं आ पाए हैं। रक्षा घेरे के बाहर एकत्रित होकर , बैठकर , हवा में उड़ते हुए आक्रोश में गर्जन कर रहे हैं मानो अगर मुझे पा जाएं तो चीर फाड़ कर खा लेंगे। पूरे कमरे में फैला हल्का हरा रोशनी अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।उसके जगह पर अब एक गाढ़े नीले रोशनी ने अपना स्थान ले लिया है। इस रोशनी के अंदर कुछ शक्ति छुपा हुआ है। इसी रोशनी के वजह से मेरे शरीर में धीरे-धीरे बल लौटने लगा। शरीर के पूरे शक्ति को एकत्रित करके मैं अब उठ बैठा। सामने जलता नीला आग दो भागों में खुल रहा था। दरवाजे की तरफ खुलने के बाद अंदर लाल गड्ढे जैसा कुछ दिखाई दिया। उस गड्ढे से आगे की लपटें निकल रही थी। कृष्ण प्रसाद जी गरज पड़े, " फेंक दो , उस मूर्ति को अंदर फेंक दो। " पूरा आवाज सुनने से पहले ही मेरे दिमाग में सिग्नल मिल गया था कि मेरे हाथ में जो मूर्ति है उसे उस लाल गड्ढे के अंदर फेंकना होगा। फिर से पूरे शरीर की शक्ति को एकत्रित करके अपने हाथ में लिए हुए पंचधातु की अभिशापित लाकिनी मूर्ति को मैंने उस गड्ढे की ओर फेंक दिया। तुरंत ही मेरे चारों तरफ के भयानक तीन सिर वाले सभी प्राणी जलने लगे। पूरे कमरे को उस वक्त गाढ़े नीले रोशनी ने अपने कब्जे में ले लिया था? उस रोशनी ने कमरे के अंदर के सभी भयानक शरीर को एक हरे रंग की रोशनी बदलकर उस गड्ढे में घुस गया। उन सभी के हाहाकार गर्जन से पूरे कमरे की दीवार कांप उठा। मेरे दिमाग के ऊपर फिर जोर पड़ने लगा। बेहोश होने से कुछ सेकंड पहले मुझे एक गंभीर हंसी की आवाज़ सुनाई दिया। यह आवाज़ अवधूत , कृष्ण प्रसाद भट्टराई जी अथवा किसी मनुष्य का नहीं था। वह आवाज़ मन कोई तृप्त कर रहा था। इसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं। मैंने ज़ब आँख खोला तो अवधूत और कृष्ण प्रसाद जी मेरे ऊपर झुके हुए थे। बेहोशी के बाद आँख खोलते ही दोनों ने मुझे पकड़कर बैठाया। मैं लगभग एक घंटे बेहोश था। मेरे स्वाभाविक होते ही अवधूत ने जाकर कमरे का दरवाजा खोल दिया। धूपबत्ती की सुगंधित धुंआ हवा के साथ बाहर निकल गया। अवधूत ने मुझसे पूछा , " क्या हाल ? चाय पिओगे? बैठे रहो मैं बनाकर लता हूं। आप भी पिएंगे न? " अँधेरे में उन्होंने सिर हिलाया या नहीं मैं देख नहीं पाया। अवधूत ने क्या समझा नहीं पता। वह कमरे से बाहर चला गया। मैं भी धीरे - धीरे बाहर जाकर दरवाजे को पकड़कर खड़ा हुआ। कुछ पक्षियों की आवाज़ सुनाई दिया। हालांकि अभी भोर होने में काफी समय है। आसमान में उस वक्त भी कुछ तारे जगमगा रहे थे। उस वक्त आसमान का रंग घना नीला है एकदम देवता वज्रपाणि की तरह...। |
भारतीय राजनीति में हेमवंती नंदन बहुगुणा को चाणक्य का दर्जा दिया जाता है. उन्हें दूरदर्शी, जनप्रिय नेता माना जाता है. उनके राजनीतिक विवेक के कायल विरोधी तक हुआ करते थे. वे आजादी के आन्दोलन की अग्रणी पांत में रहे. वे विधानसभा सदस्य रहे, उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य रहे. अखिल भारतीय कांग्रेस समिति और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भी सदस्य रहे. मंत्रिमंडल महासचिव, समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेंट सेकेरेट्री, उद्योग विभाग के उपमंत्री, श्रम विभाग के उपमंत्री, वित्त व परिवहन मंत्री, केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री, केन्द्रीय मंत्रिमंडल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री, केन्द्रीय वित्त मंत्री रहे. 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
25 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश शासन के दौरान पौड़ी के बुधाणी गाँव में हेमवंती नंदन बहुगुणा का जन्म हुआ. उस समय देश में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर थी. आजादी के आन्दोलन की विभिन्न धाराओं का दौर था. बहुगुणा भला इससे अछूते कैसे रह सकते थे. डीएवी कॉलेज में उच्च शिक्षा हासिल करने के दौरान वे लाल बहादुर शास्त्री के सान्निध्य में आए.
लाल बहादुर शास्त्री के संपर्क से राजनीति में दिलचस्पी लेने वाले बहुगुणा जल्द ही छात्र आंदोलनों के अगुवा बन गए. वे 1936 के बाद लगातार छात्र राजनीति में सक्रिय रहे.
1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान उनकी सक्रियता से अंग्रेज काँप उठे. बहुगुणा के सर पर 5 हजार रुपये का ईनाम रख दिया गया, जिंदा या मुर्दा. करीब एक साल बाद बहुगुणा दिल्ली में गिरफ्तार किये जा सके. इस बीच वे अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर लगातार आजादी के आन्दोलन में सक्रिय रहे.
हेमवंती नंदन बहुगुणा 1945 में जेल से रिहा हुए और पुनः आजादी की लड़ाई में सक्रिय हो गए. उन जैसे ढेरों सूरमाओं की बदौलत आखिरकार देश आजाद हुआ.
आजादी के बाद हेमवंती नंदन बहुगुणा मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हो गए. उन्होंने 1952 के बाद से ही बहुगुणा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य बने रहे. 1958 में उद्योग उपमंत्री रहे. कई सालों तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव रहे.
1967 के आमचुनाव के बाद उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कांग्रेस के महामंत्री जैसा जिम्मेदार और महत्वपूर्ण पद दिया गया.
1969 में इंदिरा गाँधी के खिलाफ बगावत हुई और कांग्रेस 2 हिस्सों में बंट गयी. इस समय बहुगुणा ने इंदिरा गाँधी के साथ मजबूती से खड़े रहकर कांग्रेस को मजबूती और स्थायित्व प्रदान किया.
1971 में वे केंद्र सरकार को मजबूती प्रदान करने की गरज से पहली दफा सांसद बने, उन्हें संचार विभाग का दायित्व मिला.
इसके बाद इंदिरा गाँधी ने उन्हें उत्तर प्रदेश में हाशिये पर चल रही कांग्रेस में जान फूँकने का जिम्मा सौंपा. बहुगुणा ने न सिर्फ कांग्रेस में जान डाली बल्कि चुनाव भी जितवाया.
आपातकाल के दौर में बहुगुणा की इंदिरा गाँधी के साथ अनबन हुई. कहा जाता है कि बहुगुणा संजय गाँधी के लम्पट रवैये से क्षुब्ध थे. नतीजा 1977 के आम चुनावों में बहुगुणा की बगावत के रूप में सामने आया. बहुगुणा और जगजीवन राम ने कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी का गठन किया और 28 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की. इस पार्टी का जनता पार्टी में विलय हुआ.
जनता पार्टी के बिखर जाने के बाद बहुगुणा 1980 में पुनः कांग्रेस में शामिल हुए. चुनाव लड़ा और जीते भी. इंदिरा के दुर्वयवहार से आहत होकर एक बार फिर कांग्रेस के साथ-साथ लोकसभा सदस्यता भी त्याग दी.
1984 के चुनाव में बहुगुणा जैसे कद्दावार नेता राजनीति के नौसिखिये अमिताभ बच्चन से चुनाव हार गए.
इस हार और देवीलाल से मनमुटाव के चलते बहुगुणा राजनीति छोड़कर पर्यावरण के लिए काम करने लगे. 17 मार्च 1989 को भारतीय राजनीति के इस सितारे का निधन हो गया.
| भारतीय राजनीति में हेमवंती नंदन बहुगुणा को चाणक्य का दर्जा दिया जाता है. उन्हें दूरदर्शी, जनप्रिय नेता माना जाता है. उनके राजनीतिक विवेक के कायल विरोधी तक हुआ करते थे. वे आजादी के आन्दोलन की अग्रणी पांत में रहे. वे विधानसभा सदस्य रहे, उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य रहे. अखिल भारतीय कांग्रेस समिति और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भी सदस्य रहे. मंत्रिमंडल महासचिव, समाज कल्याण विभाग के पार्लियामेंट सेकेरेट्री, उद्योग विभाग के उपमंत्री, श्रम विभाग के उपमंत्री, वित्त व परिवहन मंत्री, केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री, केन्द्रीय मंत्रिमंडल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री, केन्द्रीय वित्त मंत्री रहे. दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. पच्चीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ उन्नीस को ब्रिटिश शासन के दौरान पौड़ी के बुधाणी गाँव में हेमवंती नंदन बहुगुणा का जन्म हुआ. उस समय देश में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर थी. आजादी के आन्दोलन की विभिन्न धाराओं का दौर था. बहुगुणा भला इससे अछूते कैसे रह सकते थे. डीएवी कॉलेज में उच्च शिक्षा हासिल करने के दौरान वे लाल बहादुर शास्त्री के सान्निध्य में आए. लाल बहादुर शास्त्री के संपर्क से राजनीति में दिलचस्पी लेने वाले बहुगुणा जल्द ही छात्र आंदोलनों के अगुवा बन गए. वे एक हज़ार नौ सौ छत्तीस के बाद लगातार छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. एक हज़ार नौ सौ बयालीस के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान उनकी सक्रियता से अंग्रेज काँप उठे. बहुगुणा के सर पर पाँच हजार रुपये का ईनाम रख दिया गया, जिंदा या मुर्दा. करीब एक साल बाद बहुगुणा दिल्ली में गिरफ्तार किये जा सके. इस बीच वे अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंककर लगातार आजादी के आन्दोलन में सक्रिय रहे. हेमवंती नंदन बहुगुणा एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में जेल से रिहा हुए और पुनः आजादी की लड़ाई में सक्रिय हो गए. उन जैसे ढेरों सूरमाओं की बदौलत आखिरकार देश आजाद हुआ. आजादी के बाद हेमवंती नंदन बहुगुणा मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हो गए. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ बावन के बाद से ही बहुगुणा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य बने रहे. एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में उद्योग उपमंत्री रहे. कई सालों तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव रहे. एक हज़ार नौ सौ सरसठ के आमचुनाव के बाद उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कांग्रेस के महामंत्री जैसा जिम्मेदार और महत्वपूर्ण पद दिया गया. एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में इंदिरा गाँधी के खिलाफ बगावत हुई और कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गयी. इस समय बहुगुणा ने इंदिरा गाँधी के साथ मजबूती से खड़े रहकर कांग्रेस को मजबूती और स्थायित्व प्रदान किया. एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में वे केंद्र सरकार को मजबूती प्रदान करने की गरज से पहली दफा सांसद बने, उन्हें संचार विभाग का दायित्व मिला. इसके बाद इंदिरा गाँधी ने उन्हें उत्तर प्रदेश में हाशिये पर चल रही कांग्रेस में जान फूँकने का जिम्मा सौंपा. बहुगुणा ने न सिर्फ कांग्रेस में जान डाली बल्कि चुनाव भी जितवाया. आपातकाल के दौर में बहुगुणा की इंदिरा गाँधी के साथ अनबन हुई. कहा जाता है कि बहुगुणा संजय गाँधी के लम्पट रवैये से क्षुब्ध थे. नतीजा एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के आम चुनावों में बहुगुणा की बगावत के रूप में सामने आया. बहुगुणा और जगजीवन राम ने कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी का गठन किया और अट्ठाईस सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की. इस पार्टी का जनता पार्टी में विलय हुआ. जनता पार्टी के बिखर जाने के बाद बहुगुणा एक हज़ार नौ सौ अस्सी में पुनः कांग्रेस में शामिल हुए. चुनाव लड़ा और जीते भी. इंदिरा के दुर्वयवहार से आहत होकर एक बार फिर कांग्रेस के साथ-साथ लोकसभा सदस्यता भी त्याग दी. एक हज़ार नौ सौ चौरासी के चुनाव में बहुगुणा जैसे कद्दावार नेता राजनीति के नौसिखिये अमिताभ बच्चन से चुनाव हार गए. इस हार और देवीलाल से मनमुटाव के चलते बहुगुणा राजनीति छोड़कर पर्यावरण के लिए काम करने लगे. सत्रह मार्च एक हज़ार नौ सौ नवासी को भारतीय राजनीति के इस सितारे का निधन हो गया. |
चेन्नई में जल संकट को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. याचिका में कहा गया कि तमिलनाडु में जलसंकट जलस्रोतों पर अतिक्रमण की वजह से गहराया है, लिहाज़ा जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश राज्य सरकार को दिया जाए. याचिका में ये भी कहा गया है कि राज्य भर में 2000 से ज्यादा बड़े तालाब और झील पूरी तरह सूख चुके हैं. अब वहां एक बूंद पानी भी नहीं है.
चेन्नई में जल संकट को लेकर राजनीतिक पार्टियां भी मुखर हैं. द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन इस मुद्दे पर चेन्नई में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. उन्होंने 24 जून को तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्ना द्रमुक सरकार पर आरोप लगाया कि जब शहर को जल आपूर्ति करने वाली झीलें सूख रही थीं तब मौजूदा सरकार ने जल संकट को दूर करने में सक्रियता नहीं दिखाई.
चेन्नई के जल संकट के समाधान की मांग करते हुए प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले स्टालिन ने कहा कि जब शहर में जल की आपूर्ति करने वाली झीलें सूखने लगीं तो सरकार ने कार्रवाई नहीं की. स्टालिन ने खाली बर्तनों के साथ प्रदर्शन कर रहे लोगों से कहा, पूरे तमिलनाडु में लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि पानी कहा है?
स्टालिन ने कहा कि अन्ना द्रमुक सरकार ने राज्य में पेयजल की किसी भी परियोजना को पूरा नहीं किया. , पार्टी के अधिकारी मंदिरों में यज्ञ कर रहे हैं, इसलिए नहीं कि बारिश हो, बल्कि इसलिए ताकि उनकी सरकार की रक्षा हो सके. द्रमुक प्रमुख ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो जल परियोजना को लागू करने में हो रही देरी की अनियमितताओं की जांच का आदेश देगी.
| चेन्नई में जल संकट को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. याचिका में कहा गया कि तमिलनाडु में जलसंकट जलस्रोतों पर अतिक्रमण की वजह से गहराया है, लिहाज़ा जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश राज्य सरकार को दिया जाए. याचिका में ये भी कहा गया है कि राज्य भर में दो हज़ार से ज्यादा बड़े तालाब और झील पूरी तरह सूख चुके हैं. अब वहां एक बूंद पानी भी नहीं है. चेन्नई में जल संकट को लेकर राजनीतिक पार्टियां भी मुखर हैं. द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन इस मुद्दे पर चेन्नई में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. उन्होंने चौबीस जून को तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्ना द्रमुक सरकार पर आरोप लगाया कि जब शहर को जल आपूर्ति करने वाली झीलें सूख रही थीं तब मौजूदा सरकार ने जल संकट को दूर करने में सक्रियता नहीं दिखाई. चेन्नई के जल संकट के समाधान की मांग करते हुए प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले स्टालिन ने कहा कि जब शहर में जल की आपूर्ति करने वाली झीलें सूखने लगीं तो सरकार ने कार्रवाई नहीं की. स्टालिन ने खाली बर्तनों के साथ प्रदर्शन कर रहे लोगों से कहा, पूरे तमिलनाडु में लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि पानी कहा है? स्टालिन ने कहा कि अन्ना द्रमुक सरकार ने राज्य में पेयजल की किसी भी परियोजना को पूरा नहीं किया. , पार्टी के अधिकारी मंदिरों में यज्ञ कर रहे हैं, इसलिए नहीं कि बारिश हो, बल्कि इसलिए ताकि उनकी सरकार की रक्षा हो सके. द्रमुक प्रमुख ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो जल परियोजना को लागू करने में हो रही देरी की अनियमितताओं की जांच का आदेश देगी. |
पत्ते भी चढ जाते हैं और गधहीन होकर भी गौरव पा लेते हैं उसी प्रकार दो महारथियों के बीच बैठने का एक लाभ यह हुआ कि मेरा गला भी फूल मालाओं से पूर्ण हो गया । १९३५ की १३ अप्रैल को जो छपरा मे साहित्य सम्मेलन हुआ था, उसमे जो जनता की भीड देखने को मिली वैसी भीड बहुत दिनो के बाद आज देखने को मिली। इस तरह की भीड बहुत कम साहित्य सम्मेलनो मे मैने देखी। हालाँकि बहुत सम्मेलनो मे मैं गया हू । ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जन-सागर सुधाशु को देखकर मान्दोलित, उद्वेलित हो रहा हो और दिनकर दर्शन के लिए प्रात्म मथन कर रहा हो । तीन बजे खुला अधिवेशन प्रारंभ हुआ जिसका उद्घाटन दिनकर जी ने किया था। इसके पश्चात् सुधांशु जी ने भाषण किया। डॉ० शभुनाथ सिंह, श्री काशीनाथ उपाध्याय "भ्रमर" "बेधडक' श्री राधाकृष्ण चौधरी, डॉ० श्यामनन्दन किशोर आदि विद्वानों ने भी सम्मेलन मे भाग लिया था । डॉ० सुधाशु और डॉ० दिनकर के सम्मान मे वहाँ कई एक सज्जनो ने प्रीतिभोज तथा जलपान का प्रबन्ध किया जिसमे सभी साहित्यकार सम्मिलित हुए । २१ अक्तूबर, १९६२ को ३ बजे खुला अधिवेशन प्रारम्भ हुआ। आगत अतिथि के बाद सुधाशु जी ने दिनकर को और मुझे कविताएँ सुनाने का प्राग्रह किया - हम दोनो ने कवितायें सुनाई रात्रि मे कवि सम्मेलन हुआ। इसके बाद सम्मेलन समाप्त हो गया। दूसरे दिन हम लोगो ने ३७ अप गाड़ी से फारबिसगज्र से प्रस्थान किया - वहाँ को जनता मे साहित्य के प्रति काफी उत्साह देखा । विदाई के समय मे फूल-माला के साथ वहाँ की जनता वैसे ही उमड पडी जैसे स्वागत के समय । गाडी २ बजे वहाँ से चली । पूर्णियाँ मे सुधांशु जी और दिनकर जी उतर गये, मुझे भी रुकने के लिए कहा गया लेकिन अपने प्रोग्राम के अनुसार श्री राधाकृष्ण चौधरी, एम० ए० के साथ में यह सोचते हुए सुहृदनगर लौटा कि जनता केवल राजनीतिक नेताओ की ही भारती नही उतारती वरन् साहित्यकारो की भी ।
१९४२ के आन्दोलन में हजारीबाग जेल मे डॉ० सुधाशु ने रस तत्व की वैज्ञानिक समीक्षा करते हुए छह सात सौ पृष्ठो का एक ग्रथ काव्य योग लिखा था, जो कई एक कारणो से अब तक वह अप्रकाशित है। जब यह ग्रंथ प्रकाशित होगा तब उनके साहित्यिक सुयश मे और चार चाँद लग जायेंगे । | पत्ते भी चढ जाते हैं और गधहीन होकर भी गौरव पा लेते हैं उसी प्रकार दो महारथियों के बीच बैठने का एक लाभ यह हुआ कि मेरा गला भी फूल मालाओं से पूर्ण हो गया । एक हज़ार नौ सौ पैंतीस की तेरह अप्रैल को जो छपरा मे साहित्य सम्मेलन हुआ था, उसमे जो जनता की भीड देखने को मिली वैसी भीड बहुत दिनो के बाद आज देखने को मिली। इस तरह की भीड बहुत कम साहित्य सम्मेलनो मे मैने देखी। हालाँकि बहुत सम्मेलनो मे मैं गया हू । ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जन-सागर सुधाशु को देखकर मान्दोलित, उद्वेलित हो रहा हो और दिनकर दर्शन के लिए प्रात्म मथन कर रहा हो । तीन बजे खुला अधिवेशन प्रारंभ हुआ जिसका उद्घाटन दिनकर जी ने किया था। इसके पश्चात् सुधांशु जी ने भाषण किया। डॉशून्य शभुनाथ सिंह, श्री काशीनाथ उपाध्याय "भ्रमर" "बेधडक' श्री राधाकृष्ण चौधरी, डॉशून्य श्यामनन्दन किशोर आदि विद्वानों ने भी सम्मेलन मे भाग लिया था । डॉशून्य सुधाशु और डॉशून्य दिनकर के सम्मान मे वहाँ कई एक सज्जनो ने प्रीतिभोज तथा जलपान का प्रबन्ध किया जिसमे सभी साहित्यकार सम्मिलित हुए । इक्कीस अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ बासठ को तीन बजे खुला अधिवेशन प्रारम्भ हुआ। आगत अतिथि के बाद सुधाशु जी ने दिनकर को और मुझे कविताएँ सुनाने का प्राग्रह किया - हम दोनो ने कवितायें सुनाई रात्रि मे कवि सम्मेलन हुआ। इसके बाद सम्मेलन समाप्त हो गया। दूसरे दिन हम लोगो ने सैंतीस अप गाड़ी से फारबिसगज्र से प्रस्थान किया - वहाँ को जनता मे साहित्य के प्रति काफी उत्साह देखा । विदाई के समय मे फूल-माला के साथ वहाँ की जनता वैसे ही उमड पडी जैसे स्वागत के समय । गाडी दो बजे वहाँ से चली । पूर्णियाँ मे सुधांशु जी और दिनकर जी उतर गये, मुझे भी रुकने के लिए कहा गया लेकिन अपने प्रोग्राम के अनुसार श्री राधाकृष्ण चौधरी, एमशून्य एशून्य के साथ में यह सोचते हुए सुहृदनगर लौटा कि जनता केवल राजनीतिक नेताओ की ही भारती नही उतारती वरन् साहित्यकारो की भी । एक हज़ार नौ सौ बयालीस के आन्दोलन में हजारीबाग जेल मे डॉशून्य सुधाशु ने रस तत्व की वैज्ञानिक समीक्षा करते हुए छह सात सौ पृष्ठो का एक ग्रथ काव्य योग लिखा था, जो कई एक कारणो से अब तक वह अप्रकाशित है। जब यह ग्रंथ प्रकाशित होगा तब उनके साहित्यिक सुयश मे और चार चाँद लग जायेंगे । |
और अपने प्रिय से मिलता है, और मर मिटने में ही चिर-मिलन की निद्रा है :
'तम में हो चल छाया का क्षय, सोमित को असीम में चिर ट्य, एक हार में हो शत-शत जय
सजनि ! विश्व का कण-कण मुझको आज कहेगा चिर मुहागिनी ।'
इस प्रकार जहाँ आपकी कविता का एक छोर आधुनिक छायावाद को छूता है, दूसरा हिन्दी के भक्त और रहस्यवादी कवियों की काव्य परम्परा को भी । आप हमारी परम्परागत काव्य साधना को नई रूप-रेखा देकर आगे बढ़ाती हैं :
'है युगों को सावना से
प्राण का क्रन्दन सुलाया,
आज लघु जोवन किसी निसीम प्रियतम में समाया 1,
किन्तु समाज की व्यवस्था पर जो आघात शुरू के गीतों में था, वह वीच में दूर हो गया था और आत्म-विस्मरण का भाव ही उनके काव्य का प्रधान गुण था । आपका काव्य वहिर्जगत् की विषमता भूलकर ब्रह्म मे निलय होना चाहता था, किन्तु केवल अहम् के चतुर्दिक चक्कर काटकर आपकी प्रेरणा को संतोष न मिल सका । 'वग-दर्शन' उसको वाह्य जगत् की ओर लाया है ।
साहित्यिक प्रेमचन्द का कोई क्रमबद्ध विकास न हुआ । 'सेवासदन' और 'सप्त- सरोज' की सफलता वह बहुत दिन तक न दुहरा सके । 'प्रेमाश्रम' सजीव कृति थी, 'गोदान' 'प्रेमाश्रम' की और भी याद दिला | और अपने प्रिय से मिलता है, और मर मिटने में ही चिर-मिलन की निद्रा है : 'तम में हो चल छाया का क्षय, सोमित को असीम में चिर ट्य, एक हार में हो शत-शत जय सजनि ! विश्व का कण-कण मुझको आज कहेगा चिर मुहागिनी ।' इस प्रकार जहाँ आपकी कविता का एक छोर आधुनिक छायावाद को छूता है, दूसरा हिन्दी के भक्त और रहस्यवादी कवियों की काव्य परम्परा को भी । आप हमारी परम्परागत काव्य साधना को नई रूप-रेखा देकर आगे बढ़ाती हैं : 'है युगों को सावना से प्राण का क्रन्दन सुलाया, आज लघु जोवन किसी निसीम प्रियतम में समाया एक, किन्तु समाज की व्यवस्था पर जो आघात शुरू के गीतों में था, वह वीच में दूर हो गया था और आत्म-विस्मरण का भाव ही उनके काव्य का प्रधान गुण था । आपका काव्य वहिर्जगत् की विषमता भूलकर ब्रह्म मे निलय होना चाहता था, किन्तु केवल अहम् के चतुर्दिक चक्कर काटकर आपकी प्रेरणा को संतोष न मिल सका । 'वग-दर्शन' उसको वाह्य जगत् की ओर लाया है । साहित्यिक प्रेमचन्द का कोई क्रमबद्ध विकास न हुआ । 'सेवासदन' और 'सप्त- सरोज' की सफलता वह बहुत दिन तक न दुहरा सके । 'प्रेमाश्रम' सजीव कृति थी, 'गोदान' 'प्रेमाश्रम' की और भी याद दिला |
अमरीका ने फ़लस्तीनी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक विशेष सुरक्षा दूत की नियुक्ति की है जिसके साथ ही मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में प्रगति की उम्मीदें भी बढ़ी हैं.
मध्य पूर्व के दौरे पर गईं अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल विलियम वार्ड आने वाले हफ्तों में फ़लस्तीनी इलाक़ों का दौरा करेंगे.
उन्होंने बताया कि जनरल वार्ड को सुरक्षा दूत बनाया गया है और वह द्विपक्षीय सुरक्षा समन्वय को बढ़ावा देने की कोशिश करेंगे.
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ बातचीत के बाद राइस एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रही थीं.
अब्बास ने मध्य पूर्व में अमरीकी हस्तक्षेप का स्वागत किया और इसराइल से अपील की कि वो भी शांति के लिए प्रयास करें.
उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के साथ उनकी बैठक में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
इसराइल सरकार और फ़लस्तीनी प्रशासन के बीच मिश्र में बैठक हो रही है जो सन् 2000 के बाद दोनों पक्षों के बीच सबसे उच्च स्तरीय बैठक होगी.
वेस्ट बैंक के रमल्लाह शहर में राइस ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच साझा ज़मीन तैयार करने के लिए अमरीका पूरी तरह सक्रिय रहेगा.
रविवार को राइस ने इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से मुलाक़ात की थी.
राइस ने घोषणा की कि दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस आने का अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है.
राइस ने फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ अपनी बातचीत के बाद फ़लस्तीन में चार करोड़ डॉलर के पूँजी निवेश का वादा भी किया है.
फ़लस्तीनी नेता के साथ अपनी बातचीत को सकारात्मक बताते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने वादा किया कि ये पूँजी निवेश अगले तीन महीने में किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अमरीका सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है लेकिन ये भी कहा कि दोनो पक्षों को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी.
उधर फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कहा कि अमरीका ने ये भी वादा किया है कि वह फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के बीच संभावित संघर्षविराम पर नज़र रखने के लिए निरीक्षक भेजेगा.
कोंडोलीज़ा राइस का कहना था कि ऐसे निरीक्षक फ़लस्तीनी सुरक्षा संस्थाओं के सुधार में मदद करेंगे.
लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर ये भी कहा कि महत्वपूर्ण है कि इसराइली और फ़लस्तीनी ख़ुद भी सुरक्षा के मुद्दे पर सहयोग करें.
उनका कहना था कि फ़लस्तीनियों ने एक ऐसे नेता को चुना है जो लोकतांत्रिक सुधार में विश्वास रखता है और इसराइल के साथ बातचीत से किसी सहमति पर पहुँचना चाहता है.
उन्होंने विश्वास दिलाया कि अमरीका साथ-साथ रहने वाले दो राज्यों के मकसद को पूरा करने के लिए जो कुछ भी संभव होगा, करेगा.
कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि फ़लस्तीनियों को अपने सकारात्मक प्रयास जारी रखने चाहिए वहीं उन्होंने कहा कि इसराइल की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वह पूरी तरह से प्रयास करे.
| अमरीका ने फ़लस्तीनी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक विशेष सुरक्षा दूत की नियुक्ति की है जिसके साथ ही मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में प्रगति की उम्मीदें भी बढ़ी हैं. मध्य पूर्व के दौरे पर गईं अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल विलियम वार्ड आने वाले हफ्तों में फ़लस्तीनी इलाक़ों का दौरा करेंगे. उन्होंने बताया कि जनरल वार्ड को सुरक्षा दूत बनाया गया है और वह द्विपक्षीय सुरक्षा समन्वय को बढ़ावा देने की कोशिश करेंगे. फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ बातचीत के बाद राइस एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रही थीं. अब्बास ने मध्य पूर्व में अमरीकी हस्तक्षेप का स्वागत किया और इसराइल से अपील की कि वो भी शांति के लिए प्रयास करें. उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के साथ उनकी बैठक में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसराइल सरकार और फ़लस्तीनी प्रशासन के बीच मिश्र में बैठक हो रही है जो सन् दो हज़ार के बाद दोनों पक्षों के बीच सबसे उच्च स्तरीय बैठक होगी. वेस्ट बैंक के रमल्लाह शहर में राइस ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच साझा ज़मीन तैयार करने के लिए अमरीका पूरी तरह सक्रिय रहेगा. रविवार को राइस ने इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से मुलाक़ात की थी. राइस ने घोषणा की कि दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस आने का अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. राइस ने फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के साथ अपनी बातचीत के बाद फ़लस्तीन में चार करोड़ डॉलर के पूँजी निवेश का वादा भी किया है. फ़लस्तीनी नेता के साथ अपनी बातचीत को सकारात्मक बताते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने वादा किया कि ये पूँजी निवेश अगले तीन महीने में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अमरीका सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है लेकिन ये भी कहा कि दोनो पक्षों को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी. उधर फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कहा कि अमरीका ने ये भी वादा किया है कि वह फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के बीच संभावित संघर्षविराम पर नज़र रखने के लिए निरीक्षक भेजेगा. कोंडोलीज़ा राइस का कहना था कि ऐसे निरीक्षक फ़लस्तीनी सुरक्षा संस्थाओं के सुधार में मदद करेंगे. लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर ये भी कहा कि महत्वपूर्ण है कि इसराइली और फ़लस्तीनी ख़ुद भी सुरक्षा के मुद्दे पर सहयोग करें. उनका कहना था कि फ़लस्तीनियों ने एक ऐसे नेता को चुना है जो लोकतांत्रिक सुधार में विश्वास रखता है और इसराइल के साथ बातचीत से किसी सहमति पर पहुँचना चाहता है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि अमरीका साथ-साथ रहने वाले दो राज्यों के मकसद को पूरा करने के लिए जो कुछ भी संभव होगा, करेगा. कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि फ़लस्तीनियों को अपने सकारात्मक प्रयास जारी रखने चाहिए वहीं उन्होंने कहा कि इसराइल की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वह पूरी तरह से प्रयास करे. |
देश में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और ईमानदार बनाने के लिए लंबे समय से सुझाव सामने आते रहे हैं। इसमें इस पहलू पर भी जोर दिया जाता रहा है कि चुनाव में उम्मीदवारी का दावा करने वाले लोग अगर अपने हलफनामे में कोई गलत जानकारी देते हैं तो उसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाए और सजा का दायरा बढ़ाया जाए। लेकिन अक्सर इस दिशा में होने वाली सुगबुगाहटों के बावजूद अब तक किसी ठोस नियम-कायदे तक बात नहीं पहुंच सकी है।
अब एक बार फिर चुनाव आयोग ने देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और नैतिक चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए चुनावी हलफनामों में किसी उम्मीदवार की ओर से दी गई गलत सूचना की चुनौती से सख्ती से निपटने का फैसला लिया है। यों यह अपने आप में एक विचित्र विडंबना है कि चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाला कोई उम्मीदवार अपने बारे में जरूरी ब्योरा देते समय कोई गलत जानकारी दर्ज कर देता है और चुनाव में जीत हासिल कर विधानसभा या लोकसभा में पहुंच कर जनप्रतिनिधि होने का दावा भी करता है। सवाल है कि इस तरह झूठ का सहारा लेने वाले लोग खुद को चुनने वाली जनता और देश के प्रति कितने ईमानदार रह सकते हैं!
इस लिहाज से देखें तो चुनाव आयोग का ताजा फैसला एक जरूरी कदम है। इसके तहत अब हलफनामे में दी गई किसी भी गलत जानकारी को चुनाव की अखंडता को प्रभावित करने वाला माना जाएगा और उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि चुनाव लड़ने वाले किसी व्यक्ति को फॉर्म-26 नाम का हलफनामा दायर करना होता है, जिसमें उसे अपनी संपत्ति, देनदारियों, शैक्षिक योग्यता और आपराधिक रिकॉर्ड होने पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होती है। अगर इसमें वह कोई गलत जानकारी देता है तो मौजूदा व्यवस्था में उसके खिलाफ सिर्फ धोखाधड़ी का ही मामला दर्ज होता है, जिसकी सजा छह महीने तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों है।
दरअसल, हलफनामे में झूठी जानकारी देने का दोषी पाए जाने पर मौजूदा सजा को एक तरह से हल्का माना गया है और इस मसले पर और सख्त कार्रवाई के स्वर उठते रहे हैं। लेकिन अब भी यथास्थिति बनी हुई है। अब अगर इसमें कोई बड़ा बदलाव लाए बिना पहले की ही व्यवस्था के तहत और सख्ती बरतने की बात होगी तो शायद कोई बड़ा फर्क नहीं पड़े। यह छिपी बात नहीं है कि चुनावी हलफनामे में गलत सूचनाओं से संबंधित शिकायतें आमतौर पर अदालतों में दायर की जाती हैं, जहां लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया के बाद अगर किसी को दोषी ठहरा भी दिया जाता है, तब तक बहुत वक्त गुजर चुका होता है।
इस संबंध में चुनाव सुधार की कोशिशों के तहत आयोग ने फरवरी 2011 में ही केंद्र सरकार से जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 में संशोधन करके झूठा हलफनामा देने पर सजा की अवधि को बढ़ा कर दो साल करने की सिफारिश की थी। फिर फरवरी 2014 में विधि आयोग ने भी अपनी दो सौ चौवालीसवीं रिपोर्ट में यही सिफारिश की।
इसके अलावा, इस अपराध के दोषियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करने की भी मांग की जाती रही है। लेकिन अब तक अलग-अलग सरकारों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। सवाल है कि इस बीच अगर जिन उम्मीदवारों ने हलफनामे में गलत सूचनाएं देने के बावजूद जीत हासिल की होगी और अपने कार्यकाल पूरा करके जनप्रतिनिधित्व करने का सारा फायदा ले रहे होंगे, उनकी जांच और उन पर कार्रवाई कैसे होगी! यह ध्यान रखने की जरूरत है कि हलफनामे में झूठी जानकारी देकर जनप्रतिनिधि बन जाना और निजी स्तर पर सारे लाभ उठाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के साथ-साथ लोकतांत्रिक अवधारणा के खिलाफ भी है।
| देश में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और ईमानदार बनाने के लिए लंबे समय से सुझाव सामने आते रहे हैं। इसमें इस पहलू पर भी जोर दिया जाता रहा है कि चुनाव में उम्मीदवारी का दावा करने वाले लोग अगर अपने हलफनामे में कोई गलत जानकारी देते हैं तो उसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाए और सजा का दायरा बढ़ाया जाए। लेकिन अक्सर इस दिशा में होने वाली सुगबुगाहटों के बावजूद अब तक किसी ठोस नियम-कायदे तक बात नहीं पहुंच सकी है। अब एक बार फिर चुनाव आयोग ने देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और नैतिक चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए चुनावी हलफनामों में किसी उम्मीदवार की ओर से दी गई गलत सूचना की चुनौती से सख्ती से निपटने का फैसला लिया है। यों यह अपने आप में एक विचित्र विडंबना है कि चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाला कोई उम्मीदवार अपने बारे में जरूरी ब्योरा देते समय कोई गलत जानकारी दर्ज कर देता है और चुनाव में जीत हासिल कर विधानसभा या लोकसभा में पहुंच कर जनप्रतिनिधि होने का दावा भी करता है। सवाल है कि इस तरह झूठ का सहारा लेने वाले लोग खुद को चुनने वाली जनता और देश के प्रति कितने ईमानदार रह सकते हैं! इस लिहाज से देखें तो चुनाव आयोग का ताजा फैसला एक जरूरी कदम है। इसके तहत अब हलफनामे में दी गई किसी भी गलत जानकारी को चुनाव की अखंडता को प्रभावित करने वाला माना जाएगा और उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि चुनाव लड़ने वाले किसी व्यक्ति को फॉर्म-छब्बीस नाम का हलफनामा दायर करना होता है, जिसमें उसे अपनी संपत्ति, देनदारियों, शैक्षिक योग्यता और आपराधिक रिकॉर्ड होने पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होती है। अगर इसमें वह कोई गलत जानकारी देता है तो मौजूदा व्यवस्था में उसके खिलाफ सिर्फ धोखाधड़ी का ही मामला दर्ज होता है, जिसकी सजा छह महीने तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों है। दरअसल, हलफनामे में झूठी जानकारी देने का दोषी पाए जाने पर मौजूदा सजा को एक तरह से हल्का माना गया है और इस मसले पर और सख्त कार्रवाई के स्वर उठते रहे हैं। लेकिन अब भी यथास्थिति बनी हुई है। अब अगर इसमें कोई बड़ा बदलाव लाए बिना पहले की ही व्यवस्था के तहत और सख्ती बरतने की बात होगी तो शायद कोई बड़ा फर्क नहीं पड़े। यह छिपी बात नहीं है कि चुनावी हलफनामे में गलत सूचनाओं से संबंधित शिकायतें आमतौर पर अदालतों में दायर की जाती हैं, जहां लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया के बाद अगर किसी को दोषी ठहरा भी दिया जाता है, तब तक बहुत वक्त गुजर चुका होता है। इस संबंध में चुनाव सुधार की कोशिशों के तहत आयोग ने फरवरी दो हज़ार ग्यारह में ही केंद्र सरकार से जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा एक सौ पच्चीस में संशोधन करके झूठा हलफनामा देने पर सजा की अवधि को बढ़ा कर दो साल करने की सिफारिश की थी। फिर फरवरी दो हज़ार चौदह में विधि आयोग ने भी अपनी दो सौ चौवालीसवीं रिपोर्ट में यही सिफारिश की। इसके अलावा, इस अपराध के दोषियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करने की भी मांग की जाती रही है। लेकिन अब तक अलग-अलग सरकारों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। सवाल है कि इस बीच अगर जिन उम्मीदवारों ने हलफनामे में गलत सूचनाएं देने के बावजूद जीत हासिल की होगी और अपने कार्यकाल पूरा करके जनप्रतिनिधित्व करने का सारा फायदा ले रहे होंगे, उनकी जांच और उन पर कार्रवाई कैसे होगी! यह ध्यान रखने की जरूरत है कि हलफनामे में झूठी जानकारी देकर जनप्रतिनिधि बन जाना और निजी स्तर पर सारे लाभ उठाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के साथ-साथ लोकतांत्रिक अवधारणा के खिलाफ भी है। |
अमित जलधारी, इंदौर। शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म यात्री ट्रेनों के लिए बनाए गए, लेकिन वहां से मालगाड़ियां भी गुजरेंगी। इंदौर-महू गेज कन्वर्जन और इंदौर-टीही बड़ी लाइन डलने के बावजूद स्टेशन पर थ्रू लाइन नहीं डाली जाएगी। इसके मायने ये हैं कि महू या टीही की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां प्लेटफॉर्म से होकर गुजरेंगी।
इससे जो सबसे बड़ी समस्या खड़ी होगी, वह यह कि मालगाड़ियों के लिए यात्री प्लेटफॉर्म खाली रखना पड़ेंगे। इससे भविष्य में यात्री ट्रेन के संचालन में दिक्कत आएगी। जब महू-खंडवा के बीच बड़ी लाइन बिछकर ट्रैफिक शुरू होगा या इंदौर-दाहोद लाइन तैयार हो जाएगी तो बड़े पैमाने पर मालगाड़ियों का मूवमेंट दोनों दिशाओं में होगा।
आमतौर पर बड़े रेलवे स्टेशनों पर मालगाड़ियों या बिना रुके गुजरने वाली ट्रेनों के लिए थ्रू लाइन बनाई जाती है। जानकार भी मानते हैं कि पश्चिम रेलवे को अभी से इस दिशा में सोचना चाहिए, वरना मालगाड़ियों के लिए कम से कम एक प्लेटफॉर्म ज्यादातर समय खाली रखना होगा। दाहोद लाइन की बात करें तो अभी रेलवे इंदौर से पीथमपुर के पहले स्थित टीही गांव तक लाइन बिछा रहा है।
अगले पांच-छह महीने में पीथमपुर से कंटेनर लेकर मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। इसी तरह इंदौर-महू के बीच बड़ी लाइन बिछने पर भी थोड़ा-बहुत माल यातायात शुरू होगा, क्योंकि छावनी के कारण महू से अकसर सैन्य साजो-सामान इधर से उधर भेजा जाता है।
भविष्य में इस झंझट से निबटने के लिए जरूरी है कि रेलवे अभी से इंदौर स्टेशन पर पटेल ब्रिज से शास्त्री ब्रिज के बीच थ्रू लाइन बिछाए। इसके लिए प्लेटफॉर्म एक-तीन व चार-पांच के बीच जगह जुटाई जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस आशय का प्रस्ताव पश्चिम रेलवे निर्माण विभाग के अधिकारियों को दिया जा चुका है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
इंदौर में फिलहाल तीन प्लेटफॉर्म से यात्री ट्रेनें चलती हैं। एक नंबर और आइलैंड प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद 2016 में तीन नए प्लेटफॉर्म से ट्रेन संचालन शुरू होगा। इंदौर से नए शहरों के लिए भी ट्रेन शुरू होना है, साथ ही गेज कन्वर्जन और टीही लाइन बिछने के बाद महू-इंदौर-उज्जैन और टीही-इंदौर-उज्जैन के बीच डेमू ट्रेन की शुरुआत होगी। इसलिए यह जरूरी है कि थ्रू लाइन बनाकर प्लेटफॉर्म को मालगाड़ियों की आवाजाही से मुक्त रखा जाए।
रेलवे मामलों के जानकार नागेश नामजोशी ने बताया कि एक और तीन नंबर प्लेटफॉर्म के बीच कर्वेचर के कारण थ्रू लाइन डालने में परेशानी आएगी, क्योंकि कर्वेचर के कारण नई लाइन की जगह नहीं निकल सकती। इसके बजाय चार और पांच नंबर प्लेटफॉर्म के बीच थ्रू लाइन डल सकती है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसका सुझाव रेल अधिकारियों को दिया है। शुक्रवार को होने वाली बैठक में इस पर जीएम से चर्चा होगी।
| अमित जलधारी, इंदौर। शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म यात्री ट्रेनों के लिए बनाए गए, लेकिन वहां से मालगाड़ियां भी गुजरेंगी। इंदौर-महू गेज कन्वर्जन और इंदौर-टीही बड़ी लाइन डलने के बावजूद स्टेशन पर थ्रू लाइन नहीं डाली जाएगी। इसके मायने ये हैं कि महू या टीही की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां प्लेटफॉर्म से होकर गुजरेंगी। इससे जो सबसे बड़ी समस्या खड़ी होगी, वह यह कि मालगाड़ियों के लिए यात्री प्लेटफॉर्म खाली रखना पड़ेंगे। इससे भविष्य में यात्री ट्रेन के संचालन में दिक्कत आएगी। जब महू-खंडवा के बीच बड़ी लाइन बिछकर ट्रैफिक शुरू होगा या इंदौर-दाहोद लाइन तैयार हो जाएगी तो बड़े पैमाने पर मालगाड़ियों का मूवमेंट दोनों दिशाओं में होगा। आमतौर पर बड़े रेलवे स्टेशनों पर मालगाड़ियों या बिना रुके गुजरने वाली ट्रेनों के लिए थ्रू लाइन बनाई जाती है। जानकार भी मानते हैं कि पश्चिम रेलवे को अभी से इस दिशा में सोचना चाहिए, वरना मालगाड़ियों के लिए कम से कम एक प्लेटफॉर्म ज्यादातर समय खाली रखना होगा। दाहोद लाइन की बात करें तो अभी रेलवे इंदौर से पीथमपुर के पहले स्थित टीही गांव तक लाइन बिछा रहा है। अगले पांच-छह महीने में पीथमपुर से कंटेनर लेकर मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। इसी तरह इंदौर-महू के बीच बड़ी लाइन बिछने पर भी थोड़ा-बहुत माल यातायात शुरू होगा, क्योंकि छावनी के कारण महू से अकसर सैन्य साजो-सामान इधर से उधर भेजा जाता है। भविष्य में इस झंझट से निबटने के लिए जरूरी है कि रेलवे अभी से इंदौर स्टेशन पर पटेल ब्रिज से शास्त्री ब्रिज के बीच थ्रू लाइन बिछाए। इसके लिए प्लेटफॉर्म एक-तीन व चार-पांच के बीच जगह जुटाई जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस आशय का प्रस्ताव पश्चिम रेलवे निर्माण विभाग के अधिकारियों को दिया जा चुका है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। इंदौर में फिलहाल तीन प्लेटफॉर्म से यात्री ट्रेनें चलती हैं। एक नंबर और आइलैंड प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद दो हज़ार सोलह में तीन नए प्लेटफॉर्म से ट्रेन संचालन शुरू होगा। इंदौर से नए शहरों के लिए भी ट्रेन शुरू होना है, साथ ही गेज कन्वर्जन और टीही लाइन बिछने के बाद महू-इंदौर-उज्जैन और टीही-इंदौर-उज्जैन के बीच डेमू ट्रेन की शुरुआत होगी। इसलिए यह जरूरी है कि थ्रू लाइन बनाकर प्लेटफॉर्म को मालगाड़ियों की आवाजाही से मुक्त रखा जाए। रेलवे मामलों के जानकार नागेश नामजोशी ने बताया कि एक और तीन नंबर प्लेटफॉर्म के बीच कर्वेचर के कारण थ्रू लाइन डालने में परेशानी आएगी, क्योंकि कर्वेचर के कारण नई लाइन की जगह नहीं निकल सकती। इसके बजाय चार और पांच नंबर प्लेटफॉर्म के बीच थ्रू लाइन डल सकती है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसका सुझाव रेल अधिकारियों को दिया है। शुक्रवार को होने वाली बैठक में इस पर जीएम से चर्चा होगी। |
एमजीएम हेल्थकेयर, जिसमें एसपी बालासुब्रमण्यम का इलाज चल रहा है, के वरिष्ठ डॉक्टर वी सबनयागम का कहना है कि सुब्रमण्यम को बीते 48 घंटों से आईसीयू में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है लेकिन उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है और साथ ही कोरोना से लड़ने के लिए रेमेडेसिविर दवाई दी जाएगी।
बालासुब्रमण्यम के बेटे एसपी चरन ने बताया है कि उनके पिता की हालत अब स्थिर है और उनके फेफड़ों ने पहले के मुकाबले बेहतर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि बालासुब्रमण्यम की हालत सुधरने में अभी वक्त लग सकता है। एसपी बालासुब्रमण्यम के कोरोना संक्रमित होने के बाद अब उनकी पत्नी सावित्री का भी कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आई है। वह भी अस्पताल में भर्ती हो गई हैं।
गंभीर रूप से बीमार एसपी बाला सुब्रमण्यम की सलामती के लिए लोग दुआएं कर रहे हैं। कई सेलिब्रिटीज ने भी ट्वीट कर अपने फैंस से मशहूर सिंगर की सेहत के लिए दुआ मांगने की अपील की है। वहीं कई सोशल मीडिया यूजर्स भी बाला सुब्रमण्यम की सेहत में सुधार के लिए दुआ मांग रहे हैं।
बता दें कि बालासुब्रमण्यम बीती 5 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद वह हल्के लक्षण दिखाई देने पर अस्पताल में भर्ती हो गए थे, जहां 13 अगस्त को उनकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई थी।
| एमजीएम हेल्थकेयर, जिसमें एसपी बालासुब्रमण्यम का इलाज चल रहा है, के वरिष्ठ डॉक्टर वी सबनयागम का कहना है कि सुब्रमण्यम को बीते अड़तालीस घंटाटों से आईसीयू में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है लेकिन उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है और साथ ही कोरोना से लड़ने के लिए रेमेडेसिविर दवाई दी जाएगी। बालासुब्रमण्यम के बेटे एसपी चरन ने बताया है कि उनके पिता की हालत अब स्थिर है और उनके फेफड़ों ने पहले के मुकाबले बेहतर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि बालासुब्रमण्यम की हालत सुधरने में अभी वक्त लग सकता है। एसपी बालासुब्रमण्यम के कोरोना संक्रमित होने के बाद अब उनकी पत्नी सावित्री का भी कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आई है। वह भी अस्पताल में भर्ती हो गई हैं। गंभीर रूप से बीमार एसपी बाला सुब्रमण्यम की सलामती के लिए लोग दुआएं कर रहे हैं। कई सेलिब्रिटीज ने भी ट्वीट कर अपने फैंस से मशहूर सिंगर की सेहत के लिए दुआ मांगने की अपील की है। वहीं कई सोशल मीडिया यूजर्स भी बाला सुब्रमण्यम की सेहत में सुधार के लिए दुआ मांग रहे हैं। बता दें कि बालासुब्रमण्यम बीती पाँच अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद वह हल्के लक्षण दिखाई देने पर अस्पताल में भर्ती हो गए थे, जहां तेरह अगस्त को उनकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई थी। |
लेख के लेखकों को यकीन है कि रूसी सेना के पास आधुनिक लेजर हथियार नहीं हैं, और जो कुछ भी दिखाया गया है वह सिर्फ प्रचार है, क्योंकि सेना ने "इस पर्सेवेट" को कभी कार्रवाई में नहीं दिखाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि रूस इस तरह का हथियार बनाएगा, लेकिन इसकी विशेषताओं के अनुसार यह कई गुना कमजोर होगा। इसके अलावा, रूसी वैज्ञानिकों के पास ऐसी प्रौद्योगिकियां नहीं हैं, जो उपग्रहों को शूट करने के लिए लेजर को एक वाहक विमान पर रखने की अनुमति देती हैं। उन्होंने (वैज्ञानिकों ने) अभी तक एक ऐसे शक्तिशाली स्रोत का आविष्कार नहीं किया है जो एन्टीसैटेलाइट लेजर में ऊर्जा की आपूर्ति करने में सक्षम हो।
अखबार ने लिखा है, लेकिन लेजर हथियारों के विकास में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से बहुत आगे निकल गया है। प्रकाशन में इस कथन ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने बार-बार लेज़रों को कार्रवाई में दिखाया है।
लेखकों का कहना है कि "लेजर हथियारों के बारे में झूठ" की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पहले "रूसी सरकार" ने नवीनतम विकास की घोषणा की थी कि "शक्ति के वैश्विक संतुलन को बदल दें। " हम Su-57 और T-14 "आर्मटा" के बारे में बात कर रहे हैं, जो "केवल प्रचार के लिए निकला। "
सैन्य इतिहासकार यूरी नॉटोव का मानना है कि अमेरिकी यह नहीं मानते हैं कि रूस के पास ऐसी स्थापना है, क्योंकि उन्होंने इसे बनाने का प्रबंधन नहीं किया था। उनके अनुसार, पेर्सेवेट कॉम्प्लेक्स अद्वितीय है, यही वजह है कि रूस इसे प्रदर्शित करने और तकनीकी क्षमताओं का खुलासा नहीं करने जा रहा है।
इससे पहले, रूसी रक्षा मंत्रालय ने रूसी सैन्य लेजर पेरेसिव के प्रयोगात्मक-लड़ाकू कर्तव्य पर नेटवर्क वीडियो उत्पादन पर पोस्ट किया था। परिसर को दुश्मन के विमानों और उपग्रहों के ऑप्टिकल अवलोकन प्रणालियों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
| लेख के लेखकों को यकीन है कि रूसी सेना के पास आधुनिक लेजर हथियार नहीं हैं, और जो कुछ भी दिखाया गया है वह सिर्फ प्रचार है, क्योंकि सेना ने "इस पर्सेवेट" को कभी कार्रवाई में नहीं दिखाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि रूस इस तरह का हथियार बनाएगा, लेकिन इसकी विशेषताओं के अनुसार यह कई गुना कमजोर होगा। इसके अलावा, रूसी वैज्ञानिकों के पास ऐसी प्रौद्योगिकियां नहीं हैं, जो उपग्रहों को शूट करने के लिए लेजर को एक वाहक विमान पर रखने की अनुमति देती हैं। उन्होंने अभी तक एक ऐसे शक्तिशाली स्रोत का आविष्कार नहीं किया है जो एन्टीसैटेलाइट लेजर में ऊर्जा की आपूर्ति करने में सक्षम हो। अखबार ने लिखा है, लेकिन लेजर हथियारों के विकास में संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से बहुत आगे निकल गया है। प्रकाशन में इस कथन ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने बार-बार लेज़रों को कार्रवाई में दिखाया है। लेखकों का कहना है कि "लेजर हथियारों के बारे में झूठ" की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पहले "रूसी सरकार" ने नवीनतम विकास की घोषणा की थी कि "शक्ति के वैश्विक संतुलन को बदल दें। " हम Su-सत्तावन और T-चौदह "आर्मटा" के बारे में बात कर रहे हैं, जो "केवल प्रचार के लिए निकला। " सैन्य इतिहासकार यूरी नॉटोव का मानना है कि अमेरिकी यह नहीं मानते हैं कि रूस के पास ऐसी स्थापना है, क्योंकि उन्होंने इसे बनाने का प्रबंधन नहीं किया था। उनके अनुसार, पेर्सेवेट कॉम्प्लेक्स अद्वितीय है, यही वजह है कि रूस इसे प्रदर्शित करने और तकनीकी क्षमताओं का खुलासा नहीं करने जा रहा है। इससे पहले, रूसी रक्षा मंत्रालय ने रूसी सैन्य लेजर पेरेसिव के प्रयोगात्मक-लड़ाकू कर्तव्य पर नेटवर्क वीडियो उत्पादन पर पोस्ट किया था। परिसर को दुश्मन के विमानों और उपग्रहों के ऑप्टिकल अवलोकन प्रणालियों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। |
अध्याय ।
पत्रों का नत्थी करना (Filing of Letters)
प्रत्येक व्यापारी के पास दो प्रकार के पत्र होते हैं, एक तो चे जो उसके पास बाहर से आते है, इनको Inward Correspondence कहते हैं और दूसरे वे जो उसके यहाँ से बाहर को भेजे जाते हैं, उनको Outward Correspondence कहते हैं । बाहर से आये हुए पत्रों को सँभाल कर रखना, और अपने यहाँ से गये हुये प्रत्येक पत्र की एक नकल रखना हरेक प्रकार के व्यापारी के लिये बहुत जरूरी है। इन पत्रों को क्रमशः तारीखवार संभाल कर रखने को फाइलिंग कहते हैं । पन्नों को सँभाल कर रखने से अनेकों लाभ हैः- (१) यदि किसी ग्राहक और व्यापारी में रुपया न देने से या और किसी कारण से अनबन हो जाय और मामला कचहरी तक चला जाय, उस समय व्यापारी और ग्राहक के पुराने पत्रों पर ही न्यायालय से फैसला हुआ करता है, (२) अन्य कानूनी कामों के लिए कुछ वर्षों तक पत्रों का रखना बहुत ज़रूरी है, (३) कभी कभी खरीदार व्यापारी बहुत महीनों के पश्चात् अपने आर्डरों को दुहराया करते हैं, और लिख देते हैं कि हमने अमुक महीने की अमुक तारीख को जितना सामान जिस प्रकार आप से मँगाया था, आप कृपया उतना ही माल उसी प्रकार से भेज दीजियेगा - ऐसी दशा में पुराने पत्र व्यापारी को माल भेजने में बड़ी सहायता करते हैं, (४) साल भर के व्यापार के बाद व्यापारी को यह मालूम होता रहता है कि साल भर उसने बाहर से किन-किन शर्तों पर किन4 | अध्याय । पत्रों का नत्थी करना प्रत्येक व्यापारी के पास दो प्रकार के पत्र होते हैं, एक तो चे जो उसके पास बाहर से आते है, इनको Inward Correspondence कहते हैं और दूसरे वे जो उसके यहाँ से बाहर को भेजे जाते हैं, उनको Outward Correspondence कहते हैं । बाहर से आये हुए पत्रों को सँभाल कर रखना, और अपने यहाँ से गये हुये प्रत्येक पत्र की एक नकल रखना हरेक प्रकार के व्यापारी के लिये बहुत जरूरी है। इन पत्रों को क्रमशः तारीखवार संभाल कर रखने को फाइलिंग कहते हैं । पन्नों को सँभाल कर रखने से अनेकों लाभ हैः- यदि किसी ग्राहक और व्यापारी में रुपया न देने से या और किसी कारण से अनबन हो जाय और मामला कचहरी तक चला जाय, उस समय व्यापारी और ग्राहक के पुराने पत्रों पर ही न्यायालय से फैसला हुआ करता है, अन्य कानूनी कामों के लिए कुछ वर्षों तक पत्रों का रखना बहुत ज़रूरी है, कभी कभी खरीदार व्यापारी बहुत महीनों के पश्चात् अपने आर्डरों को दुहराया करते हैं, और लिख देते हैं कि हमने अमुक महीने की अमुक तारीख को जितना सामान जिस प्रकार आप से मँगाया था, आप कृपया उतना ही माल उसी प्रकार से भेज दीजियेगा - ऐसी दशा में पुराने पत्र व्यापारी को माल भेजने में बड़ी सहायता करते हैं, साल भर के व्यापार के बाद व्यापारी को यह मालूम होता रहता है कि साल भर उसने बाहर से किन-किन शर्तों पर किनचार |
भारतीय किसान यूनियन असली राजनैतिक (हरपाल गुट) संगठन की जिला कार्यकारिणी की बैठक आज संभल शहर के शहीद भगत सिंह पार्क में आयोजित हुई। बैठक के दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ अगली रणनीति को लेकर चर्चा की।
भारतीय किसान यूनियन असली राजनैतिक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने बैठक के दौरान पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 13 महीने चले किसान आंदोलन को सरकार ने किसानों की तीनों कृषि कानून वापस लेने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और एमएसपी गारंटी कानून बनाने की आश्वासन देकर समाप्त कराया था। लेकिन सरकार के द्वारा आश्वासन देने के बावजूद लगातार किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को मुआवजा देने और एमएसपी गारंटी का कानून बनाने में लापरवाही बरती जा रही है जो की पूरी तरह से गलत है और इससे किसानों में रोष व्याप्त है सरकार के द्वारा किए गए वादे को याद दिलाने के लिए संगठन को दोबारा किसानों के बीच जाकर अपनी बात रखनी होगी तभी इसका निष्कर्ष निकलेगा।
वही बैठक के दौरान तय किया गया कि उत्तर प्रदेश में 4 चरणों का चुनाव संपन्न हो चुका है जबकि 3 चरणों का चुनाव होना अभी बाकी है चुनाव वाले क्षेत्रों को छोड़कर संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश की अलग-अलग क्षेत्रों में बैठक होगी जहां किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। वही बैठक के दौरान जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने कहा कि पहले संभल जिले की गुन्नौर तहसील से पहुंचकर अभियान की शुरुआत होगी और गांव-गांव जाकर एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।
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| भारतीय किसान यूनियन असली राजनैतिक संगठन की जिला कार्यकारिणी की बैठक आज संभल शहर के शहीद भगत सिंह पार्क में आयोजित हुई। बैठक के दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ अगली रणनीति को लेकर चर्चा की। भारतीय किसान यूनियन असली राजनैतिक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने बैठक के दौरान पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि तेरह महीने चले किसान आंदोलन को सरकार ने किसानों की तीनों कृषि कानून वापस लेने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और एमएसपी गारंटी कानून बनाने की आश्वासन देकर समाप्त कराया था। लेकिन सरकार के द्वारा आश्वासन देने के बावजूद लगातार किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को मुआवजा देने और एमएसपी गारंटी का कानून बनाने में लापरवाही बरती जा रही है जो की पूरी तरह से गलत है और इससे किसानों में रोष व्याप्त है सरकार के द्वारा किए गए वादे को याद दिलाने के लिए संगठन को दोबारा किसानों के बीच जाकर अपनी बात रखनी होगी तभी इसका निष्कर्ष निकलेगा। वही बैठक के दौरान तय किया गया कि उत्तर प्रदेश में चार चरणों का चुनाव संपन्न हो चुका है जबकि तीन चरणों का चुनाव होना अभी बाकी है चुनाव वाले क्षेत्रों को छोड़कर संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश की अलग-अलग क्षेत्रों में बैठक होगी जहां किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। वही बैठक के दौरान जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने कहा कि पहले संभल जिले की गुन्नौर तहसील से पहुंचकर अभियान की शुरुआत होगी और गांव-गांव जाकर एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नई दिल्ली। कोरोनावायरस का खौफ एक बार फिर लौटता दिख रहा है। करीब 1 महीने पहले जहां इसके मरीज लगभग आने बंद हो गए थे, वहीं अब फिर से संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ने लगा है। देश की राजधानी दिल्ली में तेजी से कोरोना के नए मरीज मिल रहे हैं और इसने एक बार फिर से लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दिल्ली में कोविड-19 के एक्टिव मरीजों की संख्या 3 हजार के पार चली गई है, जो काफी चिंता का विषय है।
देश में कोरोना की वापसी की आहत होती जा रही है। सरकार की ओर से कोरोना से मुकाबले के लिए 5 से 11 वर्ष तक के बच्चों को भी यह वैक्सीन लगाए जाने की शुरुआत की जानी है। वैसे अभी संक्रमण की रफ्तार मंद ही है।
बूस्टर डोज लगवाने उमड़ पड़े लोग : हरियाणा के झज्जर जिले में कोरोना की चौथी लहर की आहट के बीच अब बूस्टर डोज लगवाने को लेकर तत्परता देखी जा रही है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को यह डोज लग रही है। वैसे तो 30 मार्च के बाद करीब 3 सप्ताह के अंतराल पर 2 नए केस आना कोरोना की चौथी लहर की आहट ही मानी जा रही है, लेकिन 2 केस के बाद अब कोई नया केस पिछले 3 दिन से नहीं आ रहा है। जिले में 2 ही एक्टिव केस चल रहे हैं।
सरकार की ओर से मास्क भी जरूरी किया जा चुका है। अभी तो 90 प्रतिशत से अधिक लोग बिना मास्क के ही सावर्जनिक स्थलों और बाजारों में घूम रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी लापरवाही बरतना ठीक नहीं होगा। एक बार जब कोई नया वैरिएंट आता है तो उसका संक्रमण तेजी से फैलता है।
| नई दिल्ली। कोरोनावायरस का खौफ एक बार फिर लौटता दिख रहा है। करीब एक महीने पहले जहां इसके मरीज लगभग आने बंद हो गए थे, वहीं अब फिर से संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ने लगा है। देश की राजधानी दिल्ली में तेजी से कोरोना के नए मरीज मिल रहे हैं और इसने एक बार फिर से लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दिल्ली में कोविड-उन्नीस के एक्टिव मरीजों की संख्या तीन हजार के पार चली गई है, जो काफी चिंता का विषय है। देश में कोरोना की वापसी की आहत होती जा रही है। सरकार की ओर से कोरोना से मुकाबले के लिए पाँच से ग्यारह वर्ष तक के बच्चों को भी यह वैक्सीन लगाए जाने की शुरुआत की जानी है। वैसे अभी संक्रमण की रफ्तार मंद ही है। बूस्टर डोज लगवाने उमड़ पड़े लोग : हरियाणा के झज्जर जिले में कोरोना की चौथी लहर की आहट के बीच अब बूस्टर डोज लगवाने को लेकर तत्परता देखी जा रही है। साठ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को यह डोज लग रही है। वैसे तो तीस मार्च के बाद करीब तीन सप्ताह के अंतराल पर दो नए केस आना कोरोना की चौथी लहर की आहट ही मानी जा रही है, लेकिन दो केस के बाद अब कोई नया केस पिछले तीन दिन से नहीं आ रहा है। जिले में दो ही एक्टिव केस चल रहे हैं। सरकार की ओर से मास्क भी जरूरी किया जा चुका है। अभी तो नब्बे प्रतिशत से अधिक लोग बिना मास्क के ही सावर्जनिक स्थलों और बाजारों में घूम रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी लापरवाही बरतना ठीक नहीं होगा। एक बार जब कोई नया वैरिएंट आता है तो उसका संक्रमण तेजी से फैलता है। |
उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान एक के बाद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में निम्न दबाव के कारण कर्नाटक के एक बड़े हिस्से में अत्यधिक बारिश हुई, जिससे राज्य का दक्षिणी आंतरिक हिस्सा और तटीय इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ.
कर्नाटक सरकार ने पहली बार किसानों को इतनी जल्दी इनपुट सब्सिडी जारी की है. राज्य के 13 लाख 30 हजार किसानों के बैंक अकाउंट्स में 853 करोड़ रुपए भेजे गए हैं. कृषि विभाग ने बाढ़ और भारी बारिश से बर्बाद हुई फसलों की इनपुट सब्सिडी डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम के तहत भेजी है.
कर्नाटक स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के कमिश्नर मनोज राजन ने बताया कि पहली बार राज्य सरकार ने फसल नुकसान के एक महीने के भीतर किसानों को इनपुट सब्सिडी भेजी है. उन्होंने बताया कि हमने केंद्र सरकार की तरफ से फंड जारी होने का इंतजार नहीं किया और किसानों की तत्काल मदद की.
अक्टूबर-नवंबर के महीने में हुई भारी बारिश से किसानों की फसल तबाह गई थी. राज्य सरकार ने इसके एवज में इनपुट सब्सिडी जारी की. राजन ने बताया कि भूमि और आधार नंबर के हिसाब से प्राप्त डेटा को सत्यापित किया गया. विभिन्न स्तरों पर सत्यापन के बाद किसानों के खाते में पैसे भेजे गए.
इससे पहले किसानों को इनपुट सब्सिडी पाने के लिए काफी इंताजर करना पड़ता था. कृषि और बागवानी विभाग को नुकसान का सर्वे करने में काफी वक्त लग जाता था. इस वजह से किसानों को परेशानी होती थी. लेकिन इस बार पहले से मौजूद डेटा के आधार पर सत्यापन का काम कर लिया गया और किसानों के खाते में पैसे जारी कर दिए गए.
अभी तक राज्य सरकार ने फसल नुकसान से प्रभावित हुए किसानों को 12 चरण में पैसे भेजे हैं और हर चरण के बीच दो-तीन दिन का ही अंतर है.
उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान एक के बाद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में निम्न दबाव के कारण कर्नाटक के एक बड़े हिस्से में अत्यधिक बारिश हुई, जिससे राज्य का दक्षिणी आंतरिक हिस्सा और तटीय इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ.
मौसम विभाग के मुताबिक, 1 अक्टूबर से लेकर 30 नवंबर तक राज्य में 173 मिमी के मुकाबले 322 मिलीमीटर बारिश हुई. 1960 के बाद पहली बार 87 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई. राज्य के 31 में से 23 जिलों में जरूरत से अधिक बारिश हुई. इसका असर खेती-किसानी के कामों पर पड़ा और खेत में लगी फसल बर्बाद हो गई. साथ ही, आगामी सीजन में होने वाली बुवाई में भी विलंब हुआ है.
बाढ़ और भू स्खलन के कारण राज्य की 10.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसल प्रभावित हुई है. कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बारिश पर निर्भर फसलों के लिए 6800, सिंचिंत फसलों के लिए 13,500 और बारहमासी फसलों के लिए 18,000 रुपए की सहायता राशि प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को दी जा रही है.
| उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान एक के बाद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में निम्न दबाव के कारण कर्नाटक के एक बड़े हिस्से में अत्यधिक बारिश हुई, जिससे राज्य का दक्षिणी आंतरिक हिस्सा और तटीय इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ. कर्नाटक सरकार ने पहली बार किसानों को इतनी जल्दी इनपुट सब्सिडी जारी की है. राज्य के तेरह लाख तीस हजार किसानों के बैंक अकाउंट्स में आठ सौ तिरेपन करोड़ रुपए भेजे गए हैं. कृषि विभाग ने बाढ़ और भारी बारिश से बर्बाद हुई फसलों की इनपुट सब्सिडी डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीम के तहत भेजी है. कर्नाटक स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के कमिश्नर मनोज राजन ने बताया कि पहली बार राज्य सरकार ने फसल नुकसान के एक महीने के भीतर किसानों को इनपुट सब्सिडी भेजी है. उन्होंने बताया कि हमने केंद्र सरकार की तरफ से फंड जारी होने का इंतजार नहीं किया और किसानों की तत्काल मदद की. अक्टूबर-नवंबर के महीने में हुई भारी बारिश से किसानों की फसल तबाह गई थी. राज्य सरकार ने इसके एवज में इनपुट सब्सिडी जारी की. राजन ने बताया कि भूमि और आधार नंबर के हिसाब से प्राप्त डेटा को सत्यापित किया गया. विभिन्न स्तरों पर सत्यापन के बाद किसानों के खाते में पैसे भेजे गए. इससे पहले किसानों को इनपुट सब्सिडी पाने के लिए काफी इंताजर करना पड़ता था. कृषि और बागवानी विभाग को नुकसान का सर्वे करने में काफी वक्त लग जाता था. इस वजह से किसानों को परेशानी होती थी. लेकिन इस बार पहले से मौजूद डेटा के आधार पर सत्यापन का काम कर लिया गया और किसानों के खाते में पैसे जारी कर दिए गए. अभी तक राज्य सरकार ने फसल नुकसान से प्रभावित हुए किसानों को बारह चरण में पैसे भेजे हैं और हर चरण के बीच दो-तीन दिन का ही अंतर है. उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान एक के बाद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में निम्न दबाव के कारण कर्नाटक के एक बड़े हिस्से में अत्यधिक बारिश हुई, जिससे राज्य का दक्षिणी आंतरिक हिस्सा और तटीय इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ. मौसम विभाग के मुताबिक, एक अक्टूबर से लेकर तीस नवंबर तक राज्य में एक सौ तिहत्तर मिमी के मुकाबले तीन सौ बाईस मिलीमीटर बारिश हुई. एक हज़ार नौ सौ साठ के बाद पहली बार सत्तासी प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई. राज्य के इकतीस में से तेईस जिलों में जरूरत से अधिक बारिश हुई. इसका असर खेती-किसानी के कामों पर पड़ा और खेत में लगी फसल बर्बाद हो गई. साथ ही, आगामी सीजन में होने वाली बुवाई में भी विलंब हुआ है. बाढ़ और भू स्खलन के कारण राज्य की दस.तेईस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसल प्रभावित हुई है. कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बारिश पर निर्भर फसलों के लिए छः हज़ार आठ सौ, सिंचिंत फसलों के लिए तेरह,पाँच सौ और बारहमासी फसलों के लिए अट्ठारह,शून्य रुपयापए की सहायता राशि प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को दी जा रही है. |
उधमपुर, कृष्ण सिंह वीर चक्र मैमोरियल वैलफेयर कमेटी-उरलियां की तरफ से टाउन हाल के पास स्थित श्रद्धांजलि स्थल पर एक पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया जिसमें 1948 के वीर योद्धा सूबेदार कृष्ण सिंह जम्वाल, वीर चक्र पुरस्कार विजेता को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर वैलफेयर कमेटी उरलियां के अध्यक्ष महादीप सिंह जम्बाल ने बतााय कि शहीद सूबेदार कृष्ण सिंह 15/16 जुलाई 1948 को कृष्णघाटी 'शहीद के नाम से विख्यात' ने पुंछ में दुश्मनों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी और मरणोपरांत युद्ध के समय के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार वीर चक्र से भारत सरकार ने उन्हें अलंकृत किया था। महादीप सिंह ने दोहराया कि सरकार केवल शहीदों पर मुखर है और रैंक के आधार पर भेदभाव करती है। कृष्ण सिंह की शहादत इसका प्रमाण है। सरकार द्वारा शहीदों की मूर्तियों को खड़ा करके और उनके संबंधित स्थानों में विशिष्ट स्थानों का नामकरण करके सम्मान एक धोखा है। उच्च पदस्थ अधिकारियों के संबंध में ऐसी प्रतिमाएं रातों-रात खड़ी कर दी जाती हैं जबकि निम्न श्रेणी के शहीदों की फाइलें धूल में लटक जाती हैं। शहीद कृष्ण सिंह वीर चक्र पुरस्कार विजेता की मूर्ति को खड़ा करने और उनके नाम पर उधमपुर के एक विशिष्ट चैक का नाम रखने की फाइल 2015 से धूल फांक रही है और महामहिम उपराज्यपाल का शिकायत प्रकोष्ठ डाकघर की तरह काम कर रहा है।
जम्वाल ने सरकार को सलाह दी कि वह बात करना छोड़ दें और शहीदों के लिए काम करना शुरू करें। उन्होंने उधमपुर में उत्तरी कमान से शहीदों के परिवारों की देखभाल करने का अनुरोध किया, क्योंकि वे पिछले सैनिकों की शहादत के कारण ही आज कमान संभाल रहे हैं और शहीदों के प्रति उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह शहीदों के परिवार के कल्याण के लिए ध्यान दें।
उत्तरी कमान द्वारा आजतक शहीदों के प्रति आयोजित किसी भी समारोह में कृष्ण सिंह वीर चक्र के रिश्तेदारों या कृष्ण सिंह वीर चक्र मैमोरियल वैलफेयर कमेटी उरलियां के किसी भी सदस्य को आमंत्रित नहीं किया गया। जिसके कारण सारा गाँव उरलियां जिसने देश के प्रति एक बहादुर सैनिक समर्पित किया अपने आप में अपमानित महसूस करता है।
गौर रहे कि वैलफेयर कमेटी उरलियां के अध्यक्ष सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक महादीप सिंह जम्वाल के नेतृत्व में समिति के सदस्यों और परिवार द्वारा हर साल इस दिन को याद किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से उधमपुर के नागरिक शामिल होते हैं।
| उधमपुर, कृष्ण सिंह वीर चक्र मैमोरियल वैलफेयर कमेटी-उरलियां की तरफ से टाउन हाल के पास स्थित श्रद्धांजलि स्थल पर एक पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया जिसमें एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के वीर योद्धा सूबेदार कृष्ण सिंह जम्वाल, वीर चक्र पुरस्कार विजेता को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर वैलफेयर कमेटी उरलियां के अध्यक्ष महादीप सिंह जम्बाल ने बतााय कि शहीद सूबेदार कृष्ण सिंह पंद्रह/सोलह जुलाई एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को कृष्णघाटी 'शहीद के नाम से विख्यात' ने पुंछ में दुश्मनों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी और मरणोपरांत युद्ध के समय के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार वीर चक्र से भारत सरकार ने उन्हें अलंकृत किया था। महादीप सिंह ने दोहराया कि सरकार केवल शहीदों पर मुखर है और रैंक के आधार पर भेदभाव करती है। कृष्ण सिंह की शहादत इसका प्रमाण है। सरकार द्वारा शहीदों की मूर्तियों को खड़ा करके और उनके संबंधित स्थानों में विशिष्ट स्थानों का नामकरण करके सम्मान एक धोखा है। उच्च पदस्थ अधिकारियों के संबंध में ऐसी प्रतिमाएं रातों-रात खड़ी कर दी जाती हैं जबकि निम्न श्रेणी के शहीदों की फाइलें धूल में लटक जाती हैं। शहीद कृष्ण सिंह वीर चक्र पुरस्कार विजेता की मूर्ति को खड़ा करने और उनके नाम पर उधमपुर के एक विशिष्ट चैक का नाम रखने की फाइल दो हज़ार पंद्रह से धूल फांक रही है और महामहिम उपराज्यपाल का शिकायत प्रकोष्ठ डाकघर की तरह काम कर रहा है। जम्वाल ने सरकार को सलाह दी कि वह बात करना छोड़ दें और शहीदों के लिए काम करना शुरू करें। उन्होंने उधमपुर में उत्तरी कमान से शहीदों के परिवारों की देखभाल करने का अनुरोध किया, क्योंकि वे पिछले सैनिकों की शहादत के कारण ही आज कमान संभाल रहे हैं और शहीदों के प्रति उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह शहीदों के परिवार के कल्याण के लिए ध्यान दें। उत्तरी कमान द्वारा आजतक शहीदों के प्रति आयोजित किसी भी समारोह में कृष्ण सिंह वीर चक्र के रिश्तेदारों या कृष्ण सिंह वीर चक्र मैमोरियल वैलफेयर कमेटी उरलियां के किसी भी सदस्य को आमंत्रित नहीं किया गया। जिसके कारण सारा गाँव उरलियां जिसने देश के प्रति एक बहादुर सैनिक समर्पित किया अपने आप में अपमानित महसूस करता है। गौर रहे कि वैलफेयर कमेटी उरलियां के अध्यक्ष सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक महादीप सिंह जम्वाल के नेतृत्व में समिति के सदस्यों और परिवार द्वारा हर साल इस दिन को याद किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से उधमपुर के नागरिक शामिल होते हैं। |
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त जो की अभी तो अपनी अपकमिंग फिल्म 'भुमि' में हमे नजर आने वाले है. फिल्म में हमे संजय दत्त के साथ में अभिनेत्री अदिति राव हैदरी भी नजर आ रही है जो की फिल्म में संजय दत्त की बेटी के किरदार में हमे नजर आने वाली है. वैसे भी संजय दत्त की पत्नी मान्यता भी आजकल हॉलिडे एन्जॉय कर रही है.
संजय दत्त की पत्नी मान्यता जो की बहरहाल दुबई में बेटे शाहरान और बेटी इकरा के साथ वेकेशन एन्जॉय कर रही हैं. हाल ही में मान्यता को बच्चों के साथ विजिट करते और लंच करते स्पॉट किया गया है.
इस दौरान मान्यता डेनिम हॉट पेंट और पिंक टॉप में काफी स्टनिंग लुक में नजर आई. तो वही मान्यता के पति संजय दत्त इन दिनों आगरा में हैं. जहां वो अपनी कमबैक फिल्म 'भूमि' की शूटिंग कर रहे हैं. कुछ टाइम पहले मान्यता संजय दत्त से मिलने शूटिंग सेट पर पहुंची थीं. जिसकी फोटोज मान्यता ने इंस्टाग्राम पर भी शेयर की थीं.
| बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त जो की अभी तो अपनी अपकमिंग फिल्म 'भुमि' में हमे नजर आने वाले है. फिल्म में हमे संजय दत्त के साथ में अभिनेत्री अदिति राव हैदरी भी नजर आ रही है जो की फिल्म में संजय दत्त की बेटी के किरदार में हमे नजर आने वाली है. वैसे भी संजय दत्त की पत्नी मान्यता भी आजकल हॉलिडे एन्जॉय कर रही है. संजय दत्त की पत्नी मान्यता जो की बहरहाल दुबई में बेटे शाहरान और बेटी इकरा के साथ वेकेशन एन्जॉय कर रही हैं. हाल ही में मान्यता को बच्चों के साथ विजिट करते और लंच करते स्पॉट किया गया है. इस दौरान मान्यता डेनिम हॉट पेंट और पिंक टॉप में काफी स्टनिंग लुक में नजर आई. तो वही मान्यता के पति संजय दत्त इन दिनों आगरा में हैं. जहां वो अपनी कमबैक फिल्म 'भूमि' की शूटिंग कर रहे हैं. कुछ टाइम पहले मान्यता संजय दत्त से मिलने शूटिंग सेट पर पहुंची थीं. जिसकी फोटोज मान्यता ने इंस्टाग्राम पर भी शेयर की थीं. |
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय (एनवाईयू) के सर्जनों ने जेनेटिकली इंजीनियर्ड सुअर के दिलों को दो ब्रेन-डेड लोगों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया है। शोधकर्ताओं ने मंगलवार को कहा, इससे प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों की कमी को दूर करने के लिए सुअर के अंगों का उपयोग करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के करीब एक कदम आगे बढ़ने में सफलता मिली है।
एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, जून और जुलाई में तीन दिवसीय प्रयोगों के दौरान दिलों ने सामान्य रूप से काम किया, अस्वीकृति के कोई संकेत नहीं मिले। मार्च में 57 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत टर्मिनल हृदय रोग से हुई, जिसने दो महीने पहले मैरीलैंड विश्वविद्यालय में आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर का हृदय प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में इतिहास रचा था। उनका नया दिल अंततः विफल होने के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। इसके बाद नए शोध किए गए।
शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय ने रिविविकोर इंक द्वारा संशोधित सूअरों से दिलों को लेकर और एक उन्नत निगरानी प्रोटोकॉल का उपयोग करके वायरस के लिए उनकी जांच की। दिलों में सूअर के साइटोमेगालोवायरस नामक वायरस होने का कोई सबूत नहीं दिखा, जो मैरीलैंड के व्यक्ति के रक्त में पाया गया था, और हो सकता है कि उसकी मृत्यु उसी की वजह से हुई हो।
सूअरों में अस्वीकृति और असामान्य अंग वृद्धि को रोकने के लिए चार और सूअरों और मनुष्यों के बीच असंगति को रोकने में मदद करने के लिए छह जेनेटिक मॉडिफिकेशन किए गए थे। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2021 में सुअर के गुर्दे को दो ब्रेन-डेड प्राप्तकर्ताओं में भी प्रत्यारोपित किया था।
शोधकर्ताओं ने कहा कि खरीद, परिवहन, प्रत्यारोपण सर्जरी, और इम्यूनोसप्रेशन सभी सामान्य मानव हृदय प्रत्यारोपण के समान ही किए गए थे। एनवाईयू लैंगोन में हृदय प्रत्यारोपण के शल्य निदेशक डॉ. नादर मोआज़मी ने कहा, "हमारा लक्ष्य एक सामान्य, रोज़मर्रा के हृदय प्रत्यारोपण में उपयोग की जाने वाली प्रथाओं को एकीकृत करना है, केवल एक अमानवीय अंग के साथ जो बिना परीक्षण किए गए उपकरणों या दवाओं से अतिरिक्त सहायता के बिना सामान्य रूप से कार्य करेगा। " उन्होंने कहा कि 72 घंटे के प्रयोगों ने प्रारंभिक डेटा तैयार किया, जिससे मानव में सुअर के दिल का परीक्षण शुरू करने से पहले कई सवालों के जवाब देने होंगे।
| न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सर्जनों ने जेनेटिकली इंजीनियर्ड सुअर के दिलों को दो ब्रेन-डेड लोगों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया है। शोधकर्ताओं ने मंगलवार को कहा, इससे प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों की कमी को दूर करने के लिए सुअर के अंगों का उपयोग करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के करीब एक कदम आगे बढ़ने में सफलता मिली है। एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, जून और जुलाई में तीन दिवसीय प्रयोगों के दौरान दिलों ने सामान्य रूप से काम किया, अस्वीकृति के कोई संकेत नहीं मिले। मार्च में सत्तावन वर्षीय एक व्यक्ति की मौत टर्मिनल हृदय रोग से हुई, जिसने दो महीने पहले मैरीलैंड विश्वविद्यालय में आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर का हृदय प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में इतिहास रचा था। उनका नया दिल अंततः विफल होने के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। इसके बाद नए शोध किए गए। शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय ने रिविविकोर इंक द्वारा संशोधित सूअरों से दिलों को लेकर और एक उन्नत निगरानी प्रोटोकॉल का उपयोग करके वायरस के लिए उनकी जांच की। दिलों में सूअर के साइटोमेगालोवायरस नामक वायरस होने का कोई सबूत नहीं दिखा, जो मैरीलैंड के व्यक्ति के रक्त में पाया गया था, और हो सकता है कि उसकी मृत्यु उसी की वजह से हुई हो। सूअरों में अस्वीकृति और असामान्य अंग वृद्धि को रोकने के लिए चार और सूअरों और मनुष्यों के बीच असंगति को रोकने में मदद करने के लिए छह जेनेटिक मॉडिफिकेशन किए गए थे। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दो हज़ार इक्कीस में सुअर के गुर्दे को दो ब्रेन-डेड प्राप्तकर्ताओं में भी प्रत्यारोपित किया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि खरीद, परिवहन, प्रत्यारोपण सर्जरी, और इम्यूनोसप्रेशन सभी सामान्य मानव हृदय प्रत्यारोपण के समान ही किए गए थे। एनवाईयू लैंगोन में हृदय प्रत्यारोपण के शल्य निदेशक डॉ. नादर मोआज़मी ने कहा, "हमारा लक्ष्य एक सामान्य, रोज़मर्रा के हृदय प्रत्यारोपण में उपयोग की जाने वाली प्रथाओं को एकीकृत करना है, केवल एक अमानवीय अंग के साथ जो बिना परीक्षण किए गए उपकरणों या दवाओं से अतिरिक्त सहायता के बिना सामान्य रूप से कार्य करेगा। " उन्होंने कहा कि बहत्तर घंटाटे के प्रयोगों ने प्रारंभिक डेटा तैयार किया, जिससे मानव में सुअर के दिल का परीक्षण शुरू करने से पहले कई सवालों के जवाब देने होंगे। |
नई दिल्ली। होम लोन ने हमारे घर खरीदने के सपने को आसान बना दिया है। हम हर महीने छोटी-छोटी किश्तें चुकाकर लाखों रुपए कीमत वाले घर को अपना आशियाना बना लेते हैं। लेकिन घर वास्तव में हमारा तभी बनता है जब हम 25 से 30 साल में बैंक का पूरा कर्ज चुकाकर लोन के पूरे अमाउंट की भरपाई कर देते हैं। लेकिन इतने लंबे वक्त तक बैंक और हमारे बीच संबंध अच्छे ही रहें यह मुमकिन नहीं, कई बार बैंक दरें या शुल्क बढ़ा देते हैं, कई बार हमें बैंक कर्मियों का खराब रवैया और सुस्त बैंकिंग सर्विसेज को झेलना पड़ता है। लेकिन होम लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की सुविधा ने लोगों की इस मुश्किल का हल भी खोज लिया है। लेकिन इसमें भी हमें कई सावधानियां रखने की जरूरत होती है। इंडियाटीवी पैसा की टीम आज आपको इन्हीं बिंदुओं से रूबरू करवाने जा रही है। हम बता रहे हैं उन पहलुओं के बारे में जो नए लैंडर की ओर स्विच करते आपको ख्याल रखनी चाहिए।
लोन प्रोवाइडर स्विच करना लोन के लिए आवेदन करने के बराबर है। आपका नया लोन प्रोवाइडर आपको मौजूदा क्रेडिट हिस्ट्री और स्कोर को जांचने के बाद ही लोन देता है। इसके अलावा प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की कानूनी प्रमाणिकता और तकनीकी विश्लेषण भी किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही लोन की अनुमति मिलती है। शेष समय में आप अपने पुराने प्रोवाइडर से बेहतर ब्याज दरें या नियम व शर्तों पर बात कर सकते हैं।
होम लोन एक सबसे लंबे समय का लोन होता है। ऐसे में लोन स्विच करने से पहले बचे समय की तुलना करना जरूरी है। अगर आपने हालही में लोन एकाउंट शुरु किया है और ईएमआई के शुरुआती वर्षों में है तो कम ब्याज दर पर स्विच करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि ऐसे में आप पैसे बचा सकते हैं। लेकिन वहीं अगर आप लोन के कार्यकाल के अंत में हैं तो स्विच करना अच्छा विकल्प नहीं है।
लोन को स्विच करने के साथ अन्य कीमत भी जुड़ी होती हैं। इसमें नए बैंक की प्रोसेसिंग फी, प्रॉपर्टी को जांचने का खर्चा, डॉक्यूमेंटेशन खर्च, स्टैंप ड्यूटी और इंश्योरेंस खर्च सामिल होता है। कई बैंक अपने कस्टमर्स को लोन ट्रांसफर के वक्त भी प्रीपेमेंट चार्ज मांगते हैं। आम तौर पर पहले दो वर्ष के भीतर लोन ट्रांसफर करने पर आपको प्रीपेमेंट चार्ज देना होता है। होम लोन प्रोवाइडर को स्विच करने से पहले इस बात की जानकारी जरूर रखें।
होम लोन स्विच करने से पहले इसे जरूर चेक करें। जिस भी लैंडर पर आप स्विच करने की सोच रहे हैं वो लोन ट्रांस्फर एप्लिकेशन को लेने से पहले क्रेडिट रिपोर्ट और सिबिल स्कोर जरूर जांचेगा। खराब सिबिल स्कोर की वजह से एप्लिकेशन रिजेक्ट भी कर सकता है। इसलिए हमेशा कोशिश करें कि नए लैंडर पर होम लोन ट्रांस्फर करने से पहले अच्छा सिबिल स्कोर कायम रखें।
| नई दिल्ली। होम लोन ने हमारे घर खरीदने के सपने को आसान बना दिया है। हम हर महीने छोटी-छोटी किश्तें चुकाकर लाखों रुपए कीमत वाले घर को अपना आशियाना बना लेते हैं। लेकिन घर वास्तव में हमारा तभी बनता है जब हम पच्चीस से तीस साल में बैंक का पूरा कर्ज चुकाकर लोन के पूरे अमाउंट की भरपाई कर देते हैं। लेकिन इतने लंबे वक्त तक बैंक और हमारे बीच संबंध अच्छे ही रहें यह मुमकिन नहीं, कई बार बैंक दरें या शुल्क बढ़ा देते हैं, कई बार हमें बैंक कर्मियों का खराब रवैया और सुस्त बैंकिंग सर्विसेज को झेलना पड़ता है। लेकिन होम लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की सुविधा ने लोगों की इस मुश्किल का हल भी खोज लिया है। लेकिन इसमें भी हमें कई सावधानियां रखने की जरूरत होती है। इंडियाटीवी पैसा की टीम आज आपको इन्हीं बिंदुओं से रूबरू करवाने जा रही है। हम बता रहे हैं उन पहलुओं के बारे में जो नए लैंडर की ओर स्विच करते आपको ख्याल रखनी चाहिए। लोन प्रोवाइडर स्विच करना लोन के लिए आवेदन करने के बराबर है। आपका नया लोन प्रोवाइडर आपको मौजूदा क्रेडिट हिस्ट्री और स्कोर को जांचने के बाद ही लोन देता है। इसके अलावा प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की कानूनी प्रमाणिकता और तकनीकी विश्लेषण भी किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही लोन की अनुमति मिलती है। शेष समय में आप अपने पुराने प्रोवाइडर से बेहतर ब्याज दरें या नियम व शर्तों पर बात कर सकते हैं। होम लोन एक सबसे लंबे समय का लोन होता है। ऐसे में लोन स्विच करने से पहले बचे समय की तुलना करना जरूरी है। अगर आपने हालही में लोन एकाउंट शुरु किया है और ईएमआई के शुरुआती वर्षों में है तो कम ब्याज दर पर स्विच करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि ऐसे में आप पैसे बचा सकते हैं। लेकिन वहीं अगर आप लोन के कार्यकाल के अंत में हैं तो स्विच करना अच्छा विकल्प नहीं है। लोन को स्विच करने के साथ अन्य कीमत भी जुड़ी होती हैं। इसमें नए बैंक की प्रोसेसिंग फी, प्रॉपर्टी को जांचने का खर्चा, डॉक्यूमेंटेशन खर्च, स्टैंप ड्यूटी और इंश्योरेंस खर्च सामिल होता है। कई बैंक अपने कस्टमर्स को लोन ट्रांसफर के वक्त भी प्रीपेमेंट चार्ज मांगते हैं। आम तौर पर पहले दो वर्ष के भीतर लोन ट्रांसफर करने पर आपको प्रीपेमेंट चार्ज देना होता है। होम लोन प्रोवाइडर को स्विच करने से पहले इस बात की जानकारी जरूर रखें। होम लोन स्विच करने से पहले इसे जरूर चेक करें। जिस भी लैंडर पर आप स्विच करने की सोच रहे हैं वो लोन ट्रांस्फर एप्लिकेशन को लेने से पहले क्रेडिट रिपोर्ट और सिबिल स्कोर जरूर जांचेगा। खराब सिबिल स्कोर की वजह से एप्लिकेशन रिजेक्ट भी कर सकता है। इसलिए हमेशा कोशिश करें कि नए लैंडर पर होम लोन ट्रांस्फर करने से पहले अच्छा सिबिल स्कोर कायम रखें। |
महाराष्ट्र सरकार में नवाब मलिक (Nawab Malik) ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना पर बयान देते हुए तत्काल अजय मिश्र के बेटे की गिरफ्तारी की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में हुई हिंसा (Violence) पर राजनीतिक दलों के नेता भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। नेताओं के द्वारा केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र (Union Minister Ajay Mishra) के बेटे की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। साथ ही नेताओं के द्वारा अजय मिश्र को भी तत्काल बर्खास्त करने की मांग की जा रही है।
महाराष्ट्र सरकार में नवाब मलिक (Nawab Malik) ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना पर बयान देते हुए तत्काल अजय मिश्र के बेटे की गिरफ्तारी की मांग की है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) में मंत्री नवाब मलिक ने कहा है कि सिर्फ एफआईआर (FIR) दर्ज़ कर लेने से काम नहीं चलेगा। मंत्री के बेटे की तत्काल गिरफ्तारी हो और मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए। बता दें कि जब से किसानों को रौंदने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। तब राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा भाजपा सरकार की आलोचना तेज हो गई है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि रविवार को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 4 किसानों समेत 8 लोगों की मौत हुई है। पुलिस के द्वारा हिंसा के मामले में आशीष मिश्र सहित 14 लोगों पर हत्या और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया गया है। आशीष मिश्र केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे हैं।
| महाराष्ट्र सरकार में नवाब मलिक ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना पर बयान देते हुए तत्काल अजय मिश्र के बेटे की गिरफ्तारी की मांग की है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पर राजनीतिक दलों के नेता भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। नेताओं के द्वारा केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। साथ ही नेताओं के द्वारा अजय मिश्र को भी तत्काल बर्खास्त करने की मांग की जा रही है। महाराष्ट्र सरकार में नवाब मलिक ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की घटना पर बयान देते हुए तत्काल अजय मिश्र के बेटे की गिरफ्तारी की मांग की है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज़ कर लेने से काम नहीं चलेगा। मंत्री के बेटे की तत्काल गिरफ्तारी हो और मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए। बता दें कि जब से किसानों को रौंदने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। तब राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा भाजपा सरकार की आलोचना तेज हो गई है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि रविवार को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हुई है। पुलिस के द्वारा हिंसा के मामले में आशीष मिश्र सहित चौदह लोगों पर हत्या और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया गया है। आशीष मिश्र केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे हैं। |
दोस्तों शादियों का मौसम आ चुका है। ऐसे में टीवी और बॉलीवुड सितारों के बीच शादी करने की होड़ लग चुकी है। आने वाले हफ्तों में कई सितारे सात फेरे लेने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से कई सितारे तो लंबे समय से शादी करने के बारे में सोच रहे थे। कोरोना वायरस की वजह से इन सितारों की प्लानिंग पर पानी फिर गया। कोरोना का प्रकोप कम होते ही इन सितारों घर शहनाई बजने वाली है। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको इन सितारों के बारे में बताने जा रहे हैं।
सीरियल इश्क में मर जावां 2 में नजर आ चुके टीवी एक्टर विशाल वशिष्ठ ने भी शादी कर ली है। विशाल वशिष्ठ ने 15 नवंबर को सात फेरे लिए हैं।
सीरियल दो दिल एक जान में नजर आ चुकी अदाकारा निकिता शर्मा ने आज शादी कर ली है। सोशल मीडिया पर निकिता शर्मा की शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
टीवी के जाने माने कपल पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा आज यानी 15 नवंबर को गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग करने वाले हैं। बीते दिन ही पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने अपनी मेहंदी और संगीत सेरेमनी का आयोजन किया था।
हाल ही में राजकुमार राव और पत्रलेखा ने सगाई की है। राजकुमार राव और पत्रलेखा आज एक साथ जीने मरने की कसम खाने वाले हैं। राजकुमार राव और पत्रलेखा की शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वही दोनों 15 नवम्बर को शादी के बंधन में बांध चुके है।
सीरियल कुंडली भाग्य स्टार श्रद्धा आर्या की शादी की रस्मों का आगाज हो चुका है। श्रद्धा आर्या 16 नवंबर को शादी करने वाली हैं। कुछ समय पहले ही श्रद्धा आर्या ने अपने पति की पहली तस्वीर फैंस के साथ शेयर की है।
श्रद्धा आर्या के तुरंत बाद उनके को स्टार संजय गगनानी और पूनम प्रीत सात फेरे लेने वाले हैं। संजय गगनानी और पूनम प्रीत दिल्ली में 27 नवंबर को शादी करेंगे। जिसके बाद संजय गगनानी और पूनम प्रीत 28 नवंबर को अपने मेहमानों को एक शानदार रिसेप्शन पार्टी देंगे।
टीवी की नागिन शायंतनी घोष भी जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शायंतनी घोष 5 दिसंबर को अपने बॉयफ्रेंड के साथ सात फेरे लेंगी।
बॉलीवुड के चर्चित लव बर्ड्स विक्की कौशल और कटरीना कैफ भा शादी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। विक्की कौशल और कटरीना कैफ की शादी की रस्में 7 से 9 दिसंबर तक पूरी की जाएंगी। विक्की कौशल और कटरीना कैफ की शादी की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं।
पवित्र रिश्ता स्टार अंकिता लोखंडे दिसंबर 2021 में शादी करने की प्लानिंग कर रही हैं। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन की शादी की रस्में 12,13,14 दिसंबर को पूरी की जाएंगी। हाल ही में अंकिता लोखंडे अपनी शादी की शॉपिंग करती नदर आई थीं।
| दोस्तों शादियों का मौसम आ चुका है। ऐसे में टीवी और बॉलीवुड सितारों के बीच शादी करने की होड़ लग चुकी है। आने वाले हफ्तों में कई सितारे सात फेरे लेने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से कई सितारे तो लंबे समय से शादी करने के बारे में सोच रहे थे। कोरोना वायरस की वजह से इन सितारों की प्लानिंग पर पानी फिर गया। कोरोना का प्रकोप कम होते ही इन सितारों घर शहनाई बजने वाली है। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको इन सितारों के बारे में बताने जा रहे हैं। सीरियल इश्क में मर जावां दो में नजर आ चुके टीवी एक्टर विशाल वशिष्ठ ने भी शादी कर ली है। विशाल वशिष्ठ ने पंद्रह नवंबर को सात फेरे लिए हैं। सीरियल दो दिल एक जान में नजर आ चुकी अदाकारा निकिता शर्मा ने आज शादी कर ली है। सोशल मीडिया पर निकिता शर्मा की शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। टीवी के जाने माने कपल पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा आज यानी पंद्रह नवंबर को गोवा में डेस्टिनेशन वेडिंग करने वाले हैं। बीते दिन ही पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने अपनी मेहंदी और संगीत सेरेमनी का आयोजन किया था। हाल ही में राजकुमार राव और पत्रलेखा ने सगाई की है। राजकुमार राव और पत्रलेखा आज एक साथ जीने मरने की कसम खाने वाले हैं। राजकुमार राव और पत्रलेखा की शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वही दोनों पंद्रह नवम्बर को शादी के बंधन में बांध चुके है। सीरियल कुंडली भाग्य स्टार श्रद्धा आर्या की शादी की रस्मों का आगाज हो चुका है। श्रद्धा आर्या सोलह नवंबर को शादी करने वाली हैं। कुछ समय पहले ही श्रद्धा आर्या ने अपने पति की पहली तस्वीर फैंस के साथ शेयर की है। श्रद्धा आर्या के तुरंत बाद उनके को स्टार संजय गगनानी और पूनम प्रीत सात फेरे लेने वाले हैं। संजय गगनानी और पूनम प्रीत दिल्ली में सत्ताईस नवंबर को शादी करेंगे। जिसके बाद संजय गगनानी और पूनम प्रीत अट्ठाईस नवंबर को अपने मेहमानों को एक शानदार रिसेप्शन पार्टी देंगे। टीवी की नागिन शायंतनी घोष भी जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शायंतनी घोष पाँच दिसंबर को अपने बॉयफ्रेंड के साथ सात फेरे लेंगी। बॉलीवुड के चर्चित लव बर्ड्स विक्की कौशल और कटरीना कैफ भा शादी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। विक्की कौशल और कटरीना कैफ की शादी की रस्में सात से नौ दिसंबर तक पूरी की जाएंगी। विक्की कौशल और कटरीना कैफ की शादी की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। पवित्र रिश्ता स्टार अंकिता लोखंडे दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में शादी करने की प्लानिंग कर रही हैं। अंकिता लोखंडे और विक्की जैन की शादी की रस्में बारह,तेरह,चौदह दिसंबर को पूरी की जाएंगी। हाल ही में अंकिता लोखंडे अपनी शादी की शॉपिंग करती नदर आई थीं। |
पतंजलि की स्थापना साल 2006 में हरिद्वार में हुई थी.
नई दिल्ली. पतंजलि का नाम सामने आते ही हर किसी के जेहन में बाबा रामदेव की तस्वीर उतर आती है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि बाबा रामदेव ही इस कंपनी के असली मालिक हैं, लेकिन वास्तविकता इससे इतर है.
दरअसल, हर्बल और एफएमसीजी उत्पाद बनाने वाली कंपनी पतंजलि के घी का सैंपल फेल होने के बाद बाबा रामदेव ने हाल में कहा था कि ऐसा कैसे होता है कि उनकी कंपनी के सैंपल ऑस्ट्रेलिया में पास हो जाते हैं और भारत में फेल. इस बयान के बाद भी यही लगा कि पतंजलि बाबा रामदेव की कंपनी है, लेकिन इसके ज्यादातर हिस्से के असली मालिक हैं योग गुरु के बालसखा आचार्य बालकृष्ण.
ये भी पढ़ें - एक दिन में 20% चढ़ा ये टायर स्टॉक, तीन महीने में 60 फीसदी रिटर्न, जानें आगे भी जारी रहेगी तेजी?
पतंजलि की शुरुआत साल 2006 में हरिद्वार से हुई थी और योग गुरु बाबा रामदेव शुरुआत में इस कंपनी के सिर्फ ब्रांड प्रमोटर थे. कॉरपारेट मंत्रालय के अनुसार, कंपनी की 93 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी आचार्य बालकृष्ण के पास है, जो अभी पतंजलि आयुर्वेद के एमडी, चेयरमैन और सीईओ हैं. बाबा रामदेव की कुल संपत्ति करीब 20 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा रॉयल्टी के तौर पर आता है. बाबा रामदेव कंपनी के ब्रांडिंग प्रमोटर हैं और कंपनी की मार्केटिंग के लिए योग गुरु के तौर पर अपने चेहरे का इस्तेमाल करते हैं.
बालकृष्ण सुवेदी, जिन्हें आचार्य बालकृष्ण के नाम से जाना जाता है, उनके माता-पिता नेपाल के रहने वाले थे और बाद में भारत आ गए थे. हरियाणा के एक गुरुकुल में साल 1995 में उनकी मुलाकात बाबा रामदेव से हुई थी. शुरुआत में उन्होंने दिव्य फार्मेसी के नाम से कारोबार शुरू किया, जो बाद में पतंजलि ब्रांड बन गया. कंपनी में शीर्ष पदों पर भर्ती से लेकर मार्केटिंग और ब्रांडिंग तक सभी काम आचार्य बालकृष्ण ही देखते हैं.
करीब 40 हजार करोड़ रुपये के पतंजलि समूह के मालिक और सीईओ आचार्य बालकृष्ण एक भी रुपये की सैलरी नहीं लेते हैं. समूह के तहत वे करीब 34 कंपनियों और तीन ट्रस्ट की अगुवाई करते हैं. हालांकि, उनकी कुल संपत्ति करीब 25 हजार करोड़ रुपये है. उनके अथक प्रयासों से ही साल 2017 तक 10 हजार करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली पतंजलि अब 40 हजार करोड़ का टर्नओवर पार कर चुकी है. पिछले दिनों बाबा रामदेव ने कहा था कि अगले पांच साल में पतंजलि का टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा.
हमेशा सादगी भरे लिबास और मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने वाले आचार्य बालकृष्ण को भी साल 2011 में बड़े विवाद का सामना करना पड़ा था. उन पर धोखाधड़ी और फर्जी डिग्री के सहारे भारतीय पासपोर्ट लेने का आरोप लगा था. संपूर्णानंद यूनिवर्सिटी से आचार्य बालकृष्ण की हाई स्कूल और संस्कृत की डिग्री ऑफिशियल रिकॉर्ड से गायब हो गई थी. सीबीआई ने भी कहा था कि उनका पासपोर्ट फर्जी एजुकेशनल डिग्री पर जारी किया गया और उनकी भारतीय नागरिकता भी सवालों के घेरे में है. हालांकि, बाद में सबूतों के अभाव में इस केस को बंद कर दिया गया था.
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| पतंजलि की स्थापना साल दो हज़ार छः में हरिद्वार में हुई थी. नई दिल्ली. पतंजलि का नाम सामने आते ही हर किसी के जेहन में बाबा रामदेव की तस्वीर उतर आती है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि बाबा रामदेव ही इस कंपनी के असली मालिक हैं, लेकिन वास्तविकता इससे इतर है. दरअसल, हर्बल और एफएमसीजी उत्पाद बनाने वाली कंपनी पतंजलि के घी का सैंपल फेल होने के बाद बाबा रामदेव ने हाल में कहा था कि ऐसा कैसे होता है कि उनकी कंपनी के सैंपल ऑस्ट्रेलिया में पास हो जाते हैं और भारत में फेल. इस बयान के बाद भी यही लगा कि पतंजलि बाबा रामदेव की कंपनी है, लेकिन इसके ज्यादातर हिस्से के असली मालिक हैं योग गुरु के बालसखा आचार्य बालकृष्ण. ये भी पढ़ें - एक दिन में बीस% चढ़ा ये टायर स्टॉक, तीन महीने में साठ फीसदी रिटर्न, जानें आगे भी जारी रहेगी तेजी? पतंजलि की शुरुआत साल दो हज़ार छः में हरिद्वार से हुई थी और योग गुरु बाबा रामदेव शुरुआत में इस कंपनी के सिर्फ ब्रांड प्रमोटर थे. कॉरपारेट मंत्रालय के अनुसार, कंपनी की तिरानवे फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी आचार्य बालकृष्ण के पास है, जो अभी पतंजलि आयुर्वेद के एमडी, चेयरमैन और सीईओ हैं. बाबा रामदेव की कुल संपत्ति करीब बीस हजार करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा रॉयल्टी के तौर पर आता है. बाबा रामदेव कंपनी के ब्रांडिंग प्रमोटर हैं और कंपनी की मार्केटिंग के लिए योग गुरु के तौर पर अपने चेहरे का इस्तेमाल करते हैं. बालकृष्ण सुवेदी, जिन्हें आचार्य बालकृष्ण के नाम से जाना जाता है, उनके माता-पिता नेपाल के रहने वाले थे और बाद में भारत आ गए थे. हरियाणा के एक गुरुकुल में साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में उनकी मुलाकात बाबा रामदेव से हुई थी. शुरुआत में उन्होंने दिव्य फार्मेसी के नाम से कारोबार शुरू किया, जो बाद में पतंजलि ब्रांड बन गया. कंपनी में शीर्ष पदों पर भर्ती से लेकर मार्केटिंग और ब्रांडिंग तक सभी काम आचार्य बालकृष्ण ही देखते हैं. करीब चालीस हजार करोड़ रुपये के पतंजलि समूह के मालिक और सीईओ आचार्य बालकृष्ण एक भी रुपये की सैलरी नहीं लेते हैं. समूह के तहत वे करीब चौंतीस कंपनियों और तीन ट्रस्ट की अगुवाई करते हैं. हालांकि, उनकी कुल संपत्ति करीब पच्चीस हजार करोड़ रुपये है. उनके अथक प्रयासों से ही साल दो हज़ार सत्रह तक दस हजार करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली पतंजलि अब चालीस हजार करोड़ का टर्नओवर पार कर चुकी है. पिछले दिनों बाबा रामदेव ने कहा था कि अगले पांच साल में पतंजलि का टर्नओवर एक लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा. हमेशा सादगी भरे लिबास और मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने वाले आचार्य बालकृष्ण को भी साल दो हज़ार ग्यारह में बड़े विवाद का सामना करना पड़ा था. उन पर धोखाधड़ी और फर्जी डिग्री के सहारे भारतीय पासपोर्ट लेने का आरोप लगा था. संपूर्णानंद यूनिवर्सिटी से आचार्य बालकृष्ण की हाई स्कूल और संस्कृत की डिग्री ऑफिशियल रिकॉर्ड से गायब हो गई थी. सीबीआई ने भी कहा था कि उनका पासपोर्ट फर्जी एजुकेशनल डिग्री पर जारी किया गया और उनकी भारतीय नागरिकता भी सवालों के घेरे में है. हालांकि, बाद में सबूतों के अभाव में इस केस को बंद कर दिया गया था. . |
व्यजनहीन, तरल अथवा शुष्क जैसा भी उसे मिल जाये, वह अपने ऊपर पूर्ण सयम रखता हुआ उसे मधु और घी की तरह स्वादिष्ट समझ कर खा जाता है ।
४ श्रादाननिक्षेपण समिति 'किसी जीव-जन्तु का घात न हो जाए' इस भावना को ध्यान में रखते हुए जैन मुनि अपने उपकरणो को या अन्य प्रकार की वस्तुओं को अपने स्थान से उठाते समय या उनको रखते समय जो सावधानी वरतता है - उसीका नाम आदाननिक्षेपण समिति है । अहिसा के धर्म का कितने सूक्ष्म एव सतर्क रूप मे साधु को पालन करना होता है, इसकी स्पष्ट झलक इस चौथी समिति में मिलती है ।
५ परिष्ठापनिका समिति साधु को ऐसे स्थान पर मल मूत्र विसर्जित करना जहा जीवो की उत्पत्ति सभव न हो योर देखने वालो के मन मे घृणा की भावना भी उत्पन्न न हो । इसी क्रिया को परिष्ठापनिका समिति कहते है ।
तीनगुप्ति श्रात्म-नियंत्रण की गुटिका
अपनी इन्द्रियो पर तथा मन पर पूर्ण नियंत्रण रखते हुए उन्हे असत्य की प्रवृत्ति से रोककर अन्तर्मुखी करना या आत्माभिमुख करना गुप्ति कहलाता है । इसके तीन प्रकार है
१. मनोगुप्ति अशुभ, कुत्सित, निन्दनीय एव प्रशस्त विकारो की ओर आकर्षित होते हुए मन को वहा से रोकने का नाम मनोगुप्ति है ।
२ वचनगुप्ति किसी के प्रति मिथ्या, कर्कश चुभने वाली और खलने वाली भाषा के प्रयोग के रोकने को वचन गुप्ति कहा जाता है ।
३ कायगुप्ति यह सामान्य अनुभव की बात है कि मनुष्य की प्रवृत्ति अशुभ की ओर अधिक किन्तु शुभ की ओर बहुत कम होती है । जैन मुनि अपने शरीर के व्यापारो को अशुभ से रोकता है और शुभ की ओर उनकी प्रवृत्ति कराता है। अपनी सभी दैनिक क्रियाश्रो मे - खाने मे, पीने मे, सोने मे, जागने मे, उठने मे, बैठने मे, चलने मे, ठहरने मे, विहार मे और धर्म प्रचार मे, सर्वत्र सावधानी से काम लेता है ।
जैन सन्त की साधना की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे और उसमे किसी प्रकार की रुकावट न आने पाये, इसलिये साधु की प्राचारसहिता मे शास्त्रकारो ने अनाचीर्णो का व्याख्यान किया है । इन अना चीर्णो की संख्या बावन है। अनाचीर्ण का अर्थ है अनाचरणीयअर्थात् - साधु के द्वारा इनका आचरण वर्जित है। श्रौदेशिक नित्यपिण्ड, क्रोतकृत आदि बावन अनाचीर्णो का विवरण यहा विस्तार भय से देना संभव नही है । जिज्ञासु पाठक जैन धर्म ग्रन्थो मे यत्र-तत्र उनका विवरण पढ सकते है ।
भवनाशिनी बारह भावनाए
'अन्तर्जगत् का प्रतिबिम्ब ही बाह्य जगत् है', यह उक्ति क्षरण सत्य है । विचार प्रचार का बीज है । जैसा बीज होगा वैसा ही उसका प्रतिफलन होगा। बीज आक का है तो फल कडवे और विपाक्त ही होगे । बीज प्रगूर का है अगूर के मधुर फल ही खाने को मिलेगे । हमारी विचारधारा यदि विकृत है तो हमारा आचरण निश्चय से विकृत होगा । हमारी चिन्तन-धारा यदि पावन है तो हमारा आचरण भी अवश्यमेव पावन होगा। अतएव मानव जीवन को शुद्ध, बुद्ध, एव प्रबुद्ध बनाने के लिये अर्न्तजगत् का नियंत्रण परमावश्यक है । ग्रन्तर्जगत् का सचालन मन के ऊपर आश्रित है, इसलिये मन पर नियंत्रण होने से सारी मानवीय क्रियाए सुधर सकती है, सन्मार्ग की ओर असर हो सकती है, परमसुख की ओर बढ़ सकती है और मोक्ष मार्ग के परम-पद को प्राप्त कर सकती है । यही कारण है कि जैनाचार्य चिरकाल से मनकी साधना पर भी उतना ही बल देते आये है, जितना आत्म-साधना पर । मन की साधना के लिये, मन को सन्मुख रखने के लिये, श्रद्धा की स्थिरता के लिये और वीतरागता की भावना की अभिवृद्धि के लिये जैनागमो ने 'अनुप्रेक्षाओ-भावनाओं का विधान किया है । वारवार चिन्तन मे प्रवृत्त होने को 'अनुप्रेक्षा' कहते है । उसी का दूसरा नाम भावना है। इस अनुप्रेक्षा या भावना के बारह प्रकार है
१ श्रनित्य भावना ससार के सभी पदार्थ अनित्य है, नश्वर है कदापि स्थिर रहने वाले नही है । धन, ऐश्वर्य, अधिकार, परिवार, माता-पिता, पत्नी, सगे-सम्बन्धी और मित्र आदि सब नश्वर | व्यजनहीन, तरल अथवा शुष्क जैसा भी उसे मिल जाये, वह अपने ऊपर पूर्ण सयम रखता हुआ उसे मधु और घी की तरह स्वादिष्ट समझ कर खा जाता है । चार श्रादाननिक्षेपण समिति 'किसी जीव-जन्तु का घात न हो जाए' इस भावना को ध्यान में रखते हुए जैन मुनि अपने उपकरणो को या अन्य प्रकार की वस्तुओं को अपने स्थान से उठाते समय या उनको रखते समय जो सावधानी वरतता है - उसीका नाम आदाननिक्षेपण समिति है । अहिसा के धर्म का कितने सूक्ष्म एव सतर्क रूप मे साधु को पालन करना होता है, इसकी स्पष्ट झलक इस चौथी समिति में मिलती है । पाँच परिष्ठापनिका समिति साधु को ऐसे स्थान पर मल मूत्र विसर्जित करना जहा जीवो की उत्पत्ति सभव न हो योर देखने वालो के मन मे घृणा की भावना भी उत्पन्न न हो । इसी क्रिया को परिष्ठापनिका समिति कहते है । तीनगुप्ति श्रात्म-नियंत्रण की गुटिका अपनी इन्द्रियो पर तथा मन पर पूर्ण नियंत्रण रखते हुए उन्हे असत्य की प्रवृत्ति से रोककर अन्तर्मुखी करना या आत्माभिमुख करना गुप्ति कहलाता है । इसके तीन प्रकार है एक. मनोगुप्ति अशुभ, कुत्सित, निन्दनीय एव प्रशस्त विकारो की ओर आकर्षित होते हुए मन को वहा से रोकने का नाम मनोगुप्ति है । दो वचनगुप्ति किसी के प्रति मिथ्या, कर्कश चुभने वाली और खलने वाली भाषा के प्रयोग के रोकने को वचन गुप्ति कहा जाता है । तीन कायगुप्ति यह सामान्य अनुभव की बात है कि मनुष्य की प्रवृत्ति अशुभ की ओर अधिक किन्तु शुभ की ओर बहुत कम होती है । जैन मुनि अपने शरीर के व्यापारो को अशुभ से रोकता है और शुभ की ओर उनकी प्रवृत्ति कराता है। अपनी सभी दैनिक क्रियाश्रो मे - खाने मे, पीने मे, सोने मे, जागने मे, उठने मे, बैठने मे, चलने मे, ठहरने मे, विहार मे और धर्म प्रचार मे, सर्वत्र सावधानी से काम लेता है । जैन सन्त की साधना की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे और उसमे किसी प्रकार की रुकावट न आने पाये, इसलिये साधु की प्राचारसहिता मे शास्त्रकारो ने अनाचीर्णो का व्याख्यान किया है । इन अना चीर्णो की संख्या बावन है। अनाचीर्ण का अर्थ है अनाचरणीयअर्थात् - साधु के द्वारा इनका आचरण वर्जित है। श्रौदेशिक नित्यपिण्ड, क्रोतकृत आदि बावन अनाचीर्णो का विवरण यहा विस्तार भय से देना संभव नही है । जिज्ञासु पाठक जैन धर्म ग्रन्थो मे यत्र-तत्र उनका विवरण पढ सकते है । भवनाशिनी बारह भावनाए 'अन्तर्जगत् का प्रतिबिम्ब ही बाह्य जगत् है', यह उक्ति क्षरण सत्य है । विचार प्रचार का बीज है । जैसा बीज होगा वैसा ही उसका प्रतिफलन होगा। बीज आक का है तो फल कडवे और विपाक्त ही होगे । बीज प्रगूर का है अगूर के मधुर फल ही खाने को मिलेगे । हमारी विचारधारा यदि विकृत है तो हमारा आचरण निश्चय से विकृत होगा । हमारी चिन्तन-धारा यदि पावन है तो हमारा आचरण भी अवश्यमेव पावन होगा। अतएव मानव जीवन को शुद्ध, बुद्ध, एव प्रबुद्ध बनाने के लिये अर्न्तजगत् का नियंत्रण परमावश्यक है । ग्रन्तर्जगत् का सचालन मन के ऊपर आश्रित है, इसलिये मन पर नियंत्रण होने से सारी मानवीय क्रियाए सुधर सकती है, सन्मार्ग की ओर असर हो सकती है, परमसुख की ओर बढ़ सकती है और मोक्ष मार्ग के परम-पद को प्राप्त कर सकती है । यही कारण है कि जैनाचार्य चिरकाल से मनकी साधना पर भी उतना ही बल देते आये है, जितना आत्म-साधना पर । मन की साधना के लिये, मन को सन्मुख रखने के लिये, श्रद्धा की स्थिरता के लिये और वीतरागता की भावना की अभिवृद्धि के लिये जैनागमो ने 'अनुप्रेक्षाओ-भावनाओं का विधान किया है । वारवार चिन्तन मे प्रवृत्त होने को 'अनुप्रेक्षा' कहते है । उसी का दूसरा नाम भावना है। इस अनुप्रेक्षा या भावना के बारह प्रकार है एक श्रनित्य भावना ससार के सभी पदार्थ अनित्य है, नश्वर है कदापि स्थिर रहने वाले नही है । धन, ऐश्वर्य, अधिकार, परिवार, माता-पिता, पत्नी, सगे-सम्बन्धी और मित्र आदि सब नश्वर |
158 / हजारीप्रसाद द्विवेदी प्रयावली-2
मुक्ति देते हो ?" अदश्य श्राता ने क्या उत्तर दिया, यह शाविलव ने नहीं सुना । पर वडा माता वे वपोल दर विगलित अश्रुधारा से भीग गये। आग्बें खुली रही। कुछ देर चुप रहने के बाद वह वाली, "ठगते हो, ठगी को बढावा देते हो ! " फिर मौन फिर अश्रुपात 1 " ममता मे ही मुक्ति देते हो तो यह प्रपच लीला क्या ?" फिर बिना वे जद्ध स्फुट स्वर मे बोली, "सब तो लिया तुमने, यह ममता भी क्या नही ले लेते । क्या नाटक रच रच भरमाते हो। तुम्हारी दया भी छलना है।" पता नही अदृश्य श्रोना ने क्या उत्तर दिया। वृद्ध माता उसी प्रकार अभिभूत मुद्रा में तावती रही । आसो से अश्रुधारा उसी प्रकार झरती रही। फिर हारी हुई की भाति अपने बोन उठी "भाग्यहीना, सब छलना है, सब धोखा है, सव अभिनय है । क्या व्यथा पाती है । व्यथा भी छलना है । 22
शाक्लिक कुछ समय नहीं पाया कि माताजी के मन मे है । कही मम पर चोट पहुँची है। उनका सारा जस्तित्व ही मौन हो गयी हैं पर वही जतरतर की अत्यत गहराई मे कुछ यनयना उठा है। उनका सारा शरीर उद्भिन कैंसर क्दम्य पुष्प के समान रोमाच क्टक्ति हो उठा है। वे निवात-निष्वम्प दीप शिखा की भाति ऊध्वमुख जल रही है। धरता वा जड आकर्षण उह नीचे नहीं खीच सक्ता । वे उत्फुल्ल हैं, रोमाचित हैं निस्पद है।
धीरे धीरे वे सहज अवस्था में आने लगी । आखो की स्निग्धता लौट आयो, जधरा की लालिमा अपनी जगह आ गयी । नाम पुट का स्पदन बंद हो गया । उहोस्निग्ध दष्टि से श्यामरूप (शविलय ) की ओर देखा । फिर श्यामरूप की और मुडर उन्होने पूछा कौन शस्त्र तुम्हे चाहिए, वेटा ? तुम क्या क्षत्रिय कुमार हो ? ' श्यामरूप (शाविलक) ने कुछ लज्जित होकर कहा, "माता, हूँ तो ब्राह्मणकुमार ही, लेकिन सस्कार भ्रष्ट हूँ ।" वद्धा ने गदगद होकर कहा, 'कोइ बात नही वेटा । परमात्मा ने तुम्हारे भीतर जो शक्ति दी है उसी वा विकास यो, उसी को दीन दुखिया के क्ष्ट दूर करने मे उपयोग करो, उसी को असि लात्मा पुग्प की सेवा म लगा दो। मैंने तो केवल इसलिए पूछा कि साधारणत क्षत्रिय कुमार ही ग्रहण करते है । हम तो अति है । हमार पास कोई गम्य नहीं है । वैवन एक गम्त्र है जो इस मंदिर में मुझे मिला था । उसे देख लो अगर तुम्हारे वाम का हो तो ले जा सक्त हो । वह शिव काही वरदान है, इस लिए उससे कोई अनुचित वम नही करना ।" शाविलव एकदम उत्पुल हो उठा, "वहाँ है माता में उम देगूगा । विश्वास क्शे माँ अनावश्यक रूप से इस स्त्र या उपयोग नहीं करूँगा । वेवल दोन दुखिया की रक्षा के लिए आवश्यक हुआ ता भगवान शिव की अनुना से ही उसका उपयोग करूँगा परन्तु वह है वहीं ? में दमना चाहता हूँ वद्धा न श्यामस्प या आश्वस्त किया और कहा, 'पहले तुम स्नावरला घुछ विश्राम पर ला फिर सध्या समय में तुम्ह दिया दूंगी।" दगी चीत्र वद्ध गज्जन आ गये। उन आत ही गाविलय में सिर पर हाथ फेरा । | एक सौ अट्ठावन / हजारीप्रसाद द्विवेदी प्रयावली-दो मुक्ति देते हो ?" अदश्य श्राता ने क्या उत्तर दिया, यह शाविलव ने नहीं सुना । पर वडा माता वे वपोल दर विगलित अश्रुधारा से भीग गये। आग्बें खुली रही। कुछ देर चुप रहने के बाद वह वाली, "ठगते हो, ठगी को बढावा देते हो ! " फिर मौन फिर अश्रुपात एक " ममता मे ही मुक्ति देते हो तो यह प्रपच लीला क्या ?" फिर बिना वे जद्ध स्फुट स्वर मे बोली, "सब तो लिया तुमने, यह ममता भी क्या नही ले लेते । क्या नाटक रच रच भरमाते हो। तुम्हारी दया भी छलना है।" पता नही अदृश्य श्रोना ने क्या उत्तर दिया। वृद्ध माता उसी प्रकार अभिभूत मुद्रा में तावती रही । आसो से अश्रुधारा उसी प्रकार झरती रही। फिर हारी हुई की भाति अपने बोन उठी "भाग्यहीना, सब छलना है, सब धोखा है, सव अभिनय है । क्या व्यथा पाती है । व्यथा भी छलना है । बाईस शाक्लिक कुछ समय नहीं पाया कि माताजी के मन मे है । कही मम पर चोट पहुँची है। उनका सारा जस्तित्व ही मौन हो गयी हैं पर वही जतरतर की अत्यत गहराई मे कुछ यनयना उठा है। उनका सारा शरीर उद्भिन कैंसर क्दम्य पुष्प के समान रोमाच क्टक्ति हो उठा है। वे निवात-निष्वम्प दीप शिखा की भाति ऊध्वमुख जल रही है। धरता वा जड आकर्षण उह नीचे नहीं खीच सक्ता । वे उत्फुल्ल हैं, रोमाचित हैं निस्पद है। धीरे धीरे वे सहज अवस्था में आने लगी । आखो की स्निग्धता लौट आयो, जधरा की लालिमा अपनी जगह आ गयी । नाम पुट का स्पदन बंद हो गया । उहोस्निग्ध दष्टि से श्यामरूप की ओर देखा । फिर श्यामरूप की और मुडर उन्होने पूछा कौन शस्त्र तुम्हे चाहिए, वेटा ? तुम क्या क्षत्रिय कुमार हो ? ' श्यामरूप ने कुछ लज्जित होकर कहा, "माता, हूँ तो ब्राह्मणकुमार ही, लेकिन सस्कार भ्रष्ट हूँ ।" वद्धा ने गदगद होकर कहा, 'कोइ बात नही वेटा । परमात्मा ने तुम्हारे भीतर जो शक्ति दी है उसी वा विकास यो, उसी को दीन दुखिया के क्ष्ट दूर करने मे उपयोग करो, उसी को असि लात्मा पुग्प की सेवा म लगा दो। मैंने तो केवल इसलिए पूछा कि साधारणत क्षत्रिय कुमार ही ग्रहण करते है । हम तो अति है । हमार पास कोई गम्य नहीं है । वैवन एक गम्त्र है जो इस मंदिर में मुझे मिला था । उसे देख लो अगर तुम्हारे वाम का हो तो ले जा सक्त हो । वह शिव काही वरदान है, इस लिए उससे कोई अनुचित वम नही करना ।" शाविलव एकदम उत्पुल हो उठा, "वहाँ है माता में उम देगूगा । विश्वास क्शे माँ अनावश्यक रूप से इस स्त्र या उपयोग नहीं करूँगा । वेवल दोन दुखिया की रक्षा के लिए आवश्यक हुआ ता भगवान शिव की अनुना से ही उसका उपयोग करूँगा परन्तु वह है वहीं ? में दमना चाहता हूँ वद्धा न श्यामस्प या आश्वस्त किया और कहा, 'पहले तुम स्नावरला घुछ विश्राम पर ला फिर सध्या समय में तुम्ह दिया दूंगी।" दगी चीत्र वद्ध गज्जन आ गये। उन आत ही गाविलय में सिर पर हाथ फेरा । |
शोपण में प्रसन्नतापूर्वक अथवा अनिच्छुक सहयोग द्वारा ही संभव होते हैं। यदि समस्त. मनुष्य पूर्णतया एक अत्याचारी एवं अन्यायपूर्ण प्रणाली के साथ सहयोग करना बन्द कर दें तो अन्त में ये समाप्त हो जायगी। गांधीजी ने कहा है "बड़ी से बड़ी स्वेच्छाचारी, सरकार भी शासितों की इच्छा और सहयोग के बिना खड़ी नहीं रह सकती परन्तु यह सहयोग स्वेच्छाचारी शासक वल द्वारा प्राप्त करता है । ज्योंही प्रजा उसकी स्वेच्छाचारी शक्ति से डरंना वन्द कर देती है त्योंही उसकी शक्ति का अन्त हो जाता है। जो वात सरकार के विषय में सत्य है वही बात दूसरे शोपक समुदायों और समूहों पर लागू होती है। बुराई के साथ असहयोग स्वयं सत्याग्रहों की आत्मशुद्धि करता है और बुराई एवं पश्चाताप न करने वाली संस्थाओं से, जोकि स्वयं बुराइयों का पुंज होती हैं, सहयोग वापिस ले लेता है ।
अहिंसात्मक ढंग, जो सत्याग्रही असहयोग आंदोलन के बढ़ाने में प्रयोग कर सकते. हैं, हड़ताल, सामाजिक वहिष्कार और धरना हैं ।
क-हड़ताल-हड़ताल विरोध स्वरूप कार्य को बन्द कर देने को कहते हैं। इसका उद्देश्य जनता, सरकार एवं संबंधित संस्था के मस्तिष्क को प्रभावित करना है। यहां पर दो बातें आवश्यक हैं । प्रथम हड़ताल जल्दी-जल्दी नहीं होनी चाहियें वरना उनका प्रभाव समाप्त हो जायेगा; और द्वितीय वे पूर्णतः स्वेच्छापूर्वक प्रेमपूर्वक व्यवहार का परिणाम और अहिंसात्मक ढंग से किये गये प्रचार का परिणाम होनी चाहिय ।
ख - सामाजिक बहिष्कार --यह समाज कलंकी (Black legs ) लोगों का, जो जनमत की अवहेलना करते हैं और असहयोग नहीं करते, वहिष्कार है। गांधीजी यह अनुभव करते थे कि "सामाजिक जीवन में कुछ सीमा तक वहिष्कार न करना असंभव है परन्तु ये बहुत ही सीमित प्रकार के अतिरिक्त प्रयोग में नहीं लाना चाहिये ।" इसका अर्थ यह नहीं है कि एक मनुष्य को आवश्यक समाज सेवाओं से वंचित कर दिया जाय अथवा अनादर और गालियों से उसके जीवन को असह्य बना दिया जाय ।" इस सब का अर्थ हिंसा और दवाव होगा।
ग-धरना-धरना आवश्यक रूप से दबाव वाला नहीं होना चाहिये वरन् फुसलाने वाला होना चाहिये । गांधीजी ने बैटकर धरना देने को सदैव निन्दा की है और इसे अत्याः चार, जंगलीपन एवं हिंसा का ही एक रूप वतलाया है। इसी प्रकार गांधीजी "पुरुषों की दीवार बना कर" जिससे कि कोई मनुष्य उसके स्थान पर न जा सके, जहां पर धरना दिया जा रहा है, धरने से सहमत नहीं थे । शान्तिपूर्वक धरने का उद्देश्य किसी उस मनुष्य के मार्ग को रोकने से नहीं है, जो एक विशेष कार्य करना चाहता है परन्तु इसका उद्देश्य जन- निन्दा द्वारा समाज कलंकों को लज्जित करना और सचेत करना है। धरना दवाव, धमकी, पुतलों ( effigies ) के जलाने अथवा गाड़ने और मुरूप हड़ताल से रहित होना चाहिये । २. सविनय अवज्ञा ( Civil disobedience ) सविनय अविज्ञा असह-. योग की अन्तिम सोढ़ी और सबसे भयावह रूप है । गांधीजी ने इसे सबसे अधिक प्रभावशाली और सशस्त्र क्रांति का रक्तहीन रूप कहा है। उन्होंने सविनय अविज्ञा को "अनैतिक नियमों" का तोड़ना कहा है । यह "प्रतिरोधी के विद्रोह को असैनिक अर्थात अहिंसात्मक ढंग से प्रकट करता है ।" गांधीजी ने असैनिक ( सविनय ) शब्द पर असहयोग की अपेक्षा अधिक बल दिया था, जिससे कि आंदोलन हिंसापूर्ण एवं सैनिक न हो जाय। उन्होंने कहा | शोपण में प्रसन्नतापूर्वक अथवा अनिच्छुक सहयोग द्वारा ही संभव होते हैं। यदि समस्त. मनुष्य पूर्णतया एक अत्याचारी एवं अन्यायपूर्ण प्रणाली के साथ सहयोग करना बन्द कर दें तो अन्त में ये समाप्त हो जायगी। गांधीजी ने कहा है "बड़ी से बड़ी स्वेच्छाचारी, सरकार भी शासितों की इच्छा और सहयोग के बिना खड़ी नहीं रह सकती परन्तु यह सहयोग स्वेच्छाचारी शासक वल द्वारा प्राप्त करता है । ज्योंही प्रजा उसकी स्वेच्छाचारी शक्ति से डरंना वन्द कर देती है त्योंही उसकी शक्ति का अन्त हो जाता है। जो वात सरकार के विषय में सत्य है वही बात दूसरे शोपक समुदायों और समूहों पर लागू होती है। बुराई के साथ असहयोग स्वयं सत्याग्रहों की आत्मशुद्धि करता है और बुराई एवं पश्चाताप न करने वाली संस्थाओं से, जोकि स्वयं बुराइयों का पुंज होती हैं, सहयोग वापिस ले लेता है । अहिंसात्मक ढंग, जो सत्याग्रही असहयोग आंदोलन के बढ़ाने में प्रयोग कर सकते. हैं, हड़ताल, सामाजिक वहिष्कार और धरना हैं । क-हड़ताल-हड़ताल विरोध स्वरूप कार्य को बन्द कर देने को कहते हैं। इसका उद्देश्य जनता, सरकार एवं संबंधित संस्था के मस्तिष्क को प्रभावित करना है। यहां पर दो बातें आवश्यक हैं । प्रथम हड़ताल जल्दी-जल्दी नहीं होनी चाहियें वरना उनका प्रभाव समाप्त हो जायेगा; और द्वितीय वे पूर्णतः स्वेच्छापूर्वक प्रेमपूर्वक व्यवहार का परिणाम और अहिंसात्मक ढंग से किये गये प्रचार का परिणाम होनी चाहिय । ख - सामाजिक बहिष्कार --यह समाज कलंकी लोगों का, जो जनमत की अवहेलना करते हैं और असहयोग नहीं करते, वहिष्कार है। गांधीजी यह अनुभव करते थे कि "सामाजिक जीवन में कुछ सीमा तक वहिष्कार न करना असंभव है परन्तु ये बहुत ही सीमित प्रकार के अतिरिक्त प्रयोग में नहीं लाना चाहिये ।" इसका अर्थ यह नहीं है कि एक मनुष्य को आवश्यक समाज सेवाओं से वंचित कर दिया जाय अथवा अनादर और गालियों से उसके जीवन को असह्य बना दिया जाय ।" इस सब का अर्थ हिंसा और दवाव होगा। ग-धरना-धरना आवश्यक रूप से दबाव वाला नहीं होना चाहिये वरन् फुसलाने वाला होना चाहिये । गांधीजी ने बैटकर धरना देने को सदैव निन्दा की है और इसे अत्याः चार, जंगलीपन एवं हिंसा का ही एक रूप वतलाया है। इसी प्रकार गांधीजी "पुरुषों की दीवार बना कर" जिससे कि कोई मनुष्य उसके स्थान पर न जा सके, जहां पर धरना दिया जा रहा है, धरने से सहमत नहीं थे । शान्तिपूर्वक धरने का उद्देश्य किसी उस मनुष्य के मार्ग को रोकने से नहीं है, जो एक विशेष कार्य करना चाहता है परन्तु इसका उद्देश्य जन- निन्दा द्वारा समाज कलंकों को लज्जित करना और सचेत करना है। धरना दवाव, धमकी, पुतलों के जलाने अथवा गाड़ने और मुरूप हड़ताल से रहित होना चाहिये । दो. सविनय अवज्ञा सविनय अविज्ञा असह-. योग की अन्तिम सोढ़ी और सबसे भयावह रूप है । गांधीजी ने इसे सबसे अधिक प्रभावशाली और सशस्त्र क्रांति का रक्तहीन रूप कहा है। उन्होंने सविनय अविज्ञा को "अनैतिक नियमों" का तोड़ना कहा है । यह "प्रतिरोधी के विद्रोह को असैनिक अर्थात अहिंसात्मक ढंग से प्रकट करता है ।" गांधीजी ने असैनिक शब्द पर असहयोग की अपेक्षा अधिक बल दिया था, जिससे कि आंदोलन हिंसापूर्ण एवं सैनिक न हो जाय। उन्होंने कहा |
किन्तु इस बातको न मान कर वे विवाश र राजसे रुपये मांग बैठे।
विवाह र राजने पर्वत और समुद्रक मध्यवर्ती अपने राज्यको उत्तर सोमाका दुर्गं तुड़वा दिया । अब तक टोपू त्रिवार जय करने के लिए विशेष प्रयत्न कर रहे थे, अव तक त्रिवारराज्य दुर्मेध था, किसी भी तरफसे शत्र के आनेका मार्ग नहीं था । अब मौका देख कर टोपूने सेना बढ़ाई ।
१७८८ ई० के २८ दिसम्बर को इन्होंने शिवापुर पर आक्रमण किया । मद्राज-गव एट उसका कुछ भी प्रतिवाद न कर सको । विवाङ्ग रराज्य पर आक्रमण होनेका सम्वाद पा कर नानाफड़नवीने टोषूके विरुद्ध युद्ध करनेके लिए १७९• ई० के मार्च मास में ग्रेजोंसे सन्धि कर लो । जुलाई मास में निजामके साथ भी उसी अभिप्रायसे सन्धि हुई। बड़े लाट कर्नवालिसने महाराज के सेनापति मेडोज पर सैन्य परिचालनका भार दिया। १७८० ई० को २६वों मईको १५००० सुदक्ष सेना .ले कर अंग्रेज सेनापति त्रिचिनापल्लोसे चल दिये । २१ जुलाई को सेनान कोयम्बातुरमें उपस्थित हो कर कुछ दुर्ग पर कमा कर लिया। सेशे स्वरके भीतर हो -भीतर पालघाटचेरी और दिन्दिगुल अग्रेजोके अधिकारमें आ गया। अब वह विपुलबाहिनी महिसूरको सोमा पर उपस्थित हुई। टीपू सुलतान भी निश्चिन्त नहीं थे, उन्होंने विपुल विक्रमसे शत्रुको गति रोक कर घंग्रेजसेनापति कर्नल क्लाइड पर आक्रमण किया । अंग्रेज. सेनापतिको पीठ दिखा कर भाग जाना पड़ा। यहाँ तो अंग्रेजी सेना टोपूका कुछ कर न सको, पर उधर मल वार उपकूलमें कनल हारटलिने टोपूके सेनापति हुसेन अलीको परास्त कर दिया ।
उधर महाराष्ट्र से न्यॉन बम्बईको अंग्रेजी सेनाके माथ मिल करके टीपूके अन्य सेनापति वदरउल जमान् और कुतुब-उदीन को पराजित कर धारवार दुर्ग अधि कार कर लिया, इधर निजाम सेनासहित कपालदुर्गं और बहादुर बन्द अधिकार करने को अग्रसर हुए, इसी प्रकार चारों ओर आक्रॉन्स हो कर भी प्रतिज्ञ टीपू किसी तरह विचलित नहीं हुए। वे अचल भटल साइस४३
से नाना उपायोंका अबलम्बन कर मंत्र की गतिको रोकने लगे। बड़े लाट कर्नवालिसने जब देखा कि, टोपू सहजमें वशीभूत नहीं होंगे और उनको वश करना भी सामान्य बात नहीं है, तब उन्होंने स्वयं ही बुद्धक्षेत्र में अवतरण किया। ये महिसूरक गिरिशइट मुगलोघाट पार गये, वहसि उन्होंने कोशलसे बंगलर यात्रा को । यहाँ टीपूको साथ घोरतर युद्ध होने लगे । १७८१ ई० २० मार्चको रातको शत्रु ऑन अकस्मात् दुर्ग आक्रमगा किया । निजामको प्रातः १०००० सेना आ कर लार्ड कर्नवालिसको साथ मिल गई। बड़े लाटने उस महती सेनाको साथ श्रीरंगपत्तन की तरफ यात्रा की । अंग्रेजसेनापति अवरक्रम्बी उनको साथ देने को अग्रसर हुए । इस विषम विपदको समय टोप ने जब देखा कि, महा शक्ति उनको विरुद्ध का रही है जिसका प्रतिरोध करना उनकी हैसियतसे बाहर है, तब वे अपनी समस्त सेनाको एकत्र करके राजधानीक रचाथ यत्नवान् हुए। १३ अप्रैलको परिकेरा नामक स्थान में शत्रु ओंके साथ भोष घर्षण हुआ।
१३ अप्रोलकी रातको बड़े लाटन दुर्ग अधिकार करने की चेष्टा कौ । १४ अप्रोलको दुपहरको समय चोरतर युद्धको बाद टौप पराजित हुए । किन्तु लार्ड कनं. वालिसके जयंलाभसे विशेष कुंछ लाभ नहीं हुआ। उनकी सेनाको रसद निवट गई, इसलिए उन्हें पीछे लौटना पड़ा। इस समय मौका पा कर टोप न उनको मालगाड़ियाँ और भण्डार लूट लिया।
उस समय बड़े लाट बढ़ी सफ्टमें पड़ गये। इस समय यदि अंग्रेज सेनापति कहान लिट्ल, परभुरामराव द्वारा परिचालित महाराष्ट्र सेना के साथ जाकर सहायता न करते तो शायद उस अभियान से वे लौट कर न आते। कुछ भी हो, दूसरी बारके युद्धसे भी कुछ फल नहीं हुआ। अबकी बार टौपूको चारो तरफसे आक्र मण करनेके अभिप्रायसे परशरामराव और कलान लिट्लने बहुस ख्यक सेना ले कर उत्तर पश्चिम, निजामन अपनी और अंग्रेजी सेना ले कर उत्तर-पूर्व तथा लाई कर्नवालिसने महाराष्ट्र वीर हरिपत्य के साथ मध्यभाग भाक्रमव किवा । | किन्तु इस बातको न मान कर वे विवाश र राजसे रुपये मांग बैठे। विवाह र राजने पर्वत और समुद्रक मध्यवर्ती अपने राज्यको उत्तर सोमाका दुर्गं तुड़वा दिया । अब तक टोपू त्रिवार जय करने के लिए विशेष प्रयत्न कर रहे थे, अव तक त्रिवारराज्य दुर्मेध था, किसी भी तरफसे शत्र के आनेका मार्ग नहीं था । अब मौका देख कर टोपूने सेना बढ़ाई । एक हज़ार सात सौ अठासी ईशून्य के अट्ठाईस दिसम्बर को इन्होंने शिवापुर पर आक्रमण किया । मद्राज-गव एट उसका कुछ भी प्रतिवाद न कर सको । विवाङ्ग रराज्य पर आक्रमण होनेका सम्वाद पा कर नानाफड़नवीने टोषूके विरुद्ध युद्ध करनेके लिए एक सौ उन्यासी• ईशून्य के मार्च मास में ग्रेजोंसे सन्धि कर लो । जुलाई मास में निजामके साथ भी उसी अभिप्रायसे सन्धि हुई। बड़े लाट कर्नवालिसने महाराज के सेनापति मेडोज पर सैन्य परिचालनका भार दिया। एक हज़ार सात सौ अस्सी ईशून्य को छब्बीसवों मईको पंद्रह हज़ार सुदक्ष सेना .ले कर अंग्रेज सेनापति त्रिचिनापल्लोसे चल दिये । इक्कीस जुलाई को सेनान कोयम्बातुरमें उपस्थित हो कर कुछ दुर्ग पर कमा कर लिया। सेशे स्वरके भीतर हो -भीतर पालघाटचेरी और दिन्दिगुल अग्रेजोके अधिकारमें आ गया। अब वह विपुलबाहिनी महिसूरको सोमा पर उपस्थित हुई। टीपू सुलतान भी निश्चिन्त नहीं थे, उन्होंने विपुल विक्रमसे शत्रुको गति रोक कर घंग्रेजसेनापति कर्नल क्लाइड पर आक्रमण किया । अंग्रेज. सेनापतिको पीठ दिखा कर भाग जाना पड़ा। यहाँ तो अंग्रेजी सेना टोपूका कुछ कर न सको, पर उधर मल वार उपकूलमें कनल हारटलिने टोपूके सेनापति हुसेन अलीको परास्त कर दिया । उधर महाराष्ट्र से न्यॉन बम्बईको अंग्रेजी सेनाके माथ मिल करके टीपूके अन्य सेनापति वदरउल जमान् और कुतुब-उदीन को पराजित कर धारवार दुर्ग अधि कार कर लिया, इधर निजाम सेनासहित कपालदुर्गं और बहादुर बन्द अधिकार करने को अग्रसर हुए, इसी प्रकार चारों ओर आक्रॉन्स हो कर भी प्रतिज्ञ टीपू किसी तरह विचलित नहीं हुए। वे अचल भटल साइसतैंतालीस से नाना उपायोंका अबलम्बन कर मंत्र की गतिको रोकने लगे। बड़े लाट कर्नवालिसने जब देखा कि, टोपू सहजमें वशीभूत नहीं होंगे और उनको वश करना भी सामान्य बात नहीं है, तब उन्होंने स्वयं ही बुद्धक्षेत्र में अवतरण किया। ये महिसूरक गिरिशइट मुगलोघाट पार गये, वहसि उन्होंने कोशलसे बंगलर यात्रा को । यहाँ टीपूको साथ घोरतर युद्ध होने लगे । एक हज़ार सात सौ इक्यासी ईशून्य बीस मार्चको रातको शत्रु ऑन अकस्मात् दुर्ग आक्रमगा किया । निजामको प्रातः दस हज़ार सेना आ कर लार्ड कर्नवालिसको साथ मिल गई। बड़े लाटने उस महती सेनाको साथ श्रीरंगपत्तन की तरफ यात्रा की । अंग्रेजसेनापति अवरक्रम्बी उनको साथ देने को अग्रसर हुए । इस विषम विपदको समय टोप ने जब देखा कि, महा शक्ति उनको विरुद्ध का रही है जिसका प्रतिरोध करना उनकी हैसियतसे बाहर है, तब वे अपनी समस्त सेनाको एकत्र करके राजधानीक रचाथ यत्नवान् हुए। तेरह अप्रैलको परिकेरा नामक स्थान में शत्रु ओंके साथ भोष घर्षण हुआ। तेरह अप्रोलकी रातको बड़े लाटन दुर्ग अधिकार करने की चेष्टा कौ । चौदह अप्रोलको दुपहरको समय चोरतर युद्धको बाद टौप पराजित हुए । किन्तु लार्ड कनं. वालिसके जयंलाभसे विशेष कुंछ लाभ नहीं हुआ। उनकी सेनाको रसद निवट गई, इसलिए उन्हें पीछे लौटना पड़ा। इस समय मौका पा कर टोप न उनको मालगाड़ियाँ और भण्डार लूट लिया। उस समय बड़े लाट बढ़ी सफ्टमें पड़ गये। इस समय यदि अंग्रेज सेनापति कहान लिट्ल, परभुरामराव द्वारा परिचालित महाराष्ट्र सेना के साथ जाकर सहायता न करते तो शायद उस अभियान से वे लौट कर न आते। कुछ भी हो, दूसरी बारके युद्धसे भी कुछ फल नहीं हुआ। अबकी बार टौपूको चारो तरफसे आक्र मण करनेके अभिप्रायसे परशरामराव और कलान लिट्लने बहुस ख्यक सेना ले कर उत्तर पश्चिम, निजामन अपनी और अंग्रेजी सेना ले कर उत्तर-पूर्व तथा लाई कर्नवालिसने महाराष्ट्र वीर हरिपत्य के साथ मध्यभाग भाक्रमव किवा । |
कर्नाटक में महिलाएं अब नाइट शिफ्ट में भी कारखानों में काम कर सकेंगी। इसे लेकर एक विधेयक कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को पारित कर दिया गया। काम के घंटे भी 12 घंटे तक इसमें बढ़ाने की अनुमति होगी।
बेंगलुरुः कर्नाटक विधानसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया जिसके बाद महिलाएं अब कारखानों में रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी। इसके अलावा, कानून और संसदीय मामलों के मंत्री जेसी मधुस्वामी के अनुसार लगातार चार दिनों तक दिन में 12 घंटे काम करने वाले कर्मचारी सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी ले सकते हैं। जेसी मधुस्वामी की ओर से पेश किए गए कारखाना (कर्नाटक संशोधन) विधेयक को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया। यह बिल अब विधान परिषद में भेजा जाएगा।
विधानसभा में बिल पेश करते हुए जेसी मधुस्वामी ने कहा, 'महिलाओं के लिए काम के घंटों की सीमाएं थीं। सरकार पर सॉफ्टवेयर उद्योग सहित हर जगह से इस नियम में ढील देने का बहुत दबाव था। यहां तक कि हाई कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि अनुच्छेद 14 के तहत सभी को समान अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। '
इससे पहले 2020 में कर्नाटक सरकार ने महिलाओं को होटल, रेस्तरां, कैफे, थिएटर और ऐसी अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों में रात की पाली में काम करने की अनुमति दी थी।
विधेयक में दैनिक काम के घंटे 9 से बढ़ाकर 12 करने की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, यह सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं हो सकता है। विधेयक के अनुसार, 'नया प्रस्ताव अधिक आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। '
मधुस्वामी ने कहा, 'हम काम के घंटों को प्रति दिन 12 घंटे तक बढ़ा रहे हैं। जो लोग चार दिनों तक लगातार 12 घंटे काम करते हैं, सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं, वे इसके बाद तीन दिनों का अंतराल ले सकते हैं। '
विधेयक के अनुसार महिलाएं शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच काम कर सकती हैं, बशर्ते नियोक्ता सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रखें। बिल में कहा गया है, 'यौन उत्पीड़न के कृत्यों को रोकने की जिम्मेदारी कार्यस्थल पर नियोक्ता या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की होगी। '
विधेयक के अनुसार नियोक्ताओं के लिए जरूरी होगा कि रात की पाली के दौरान घर से लाने और वापस महिला श्रमिकों को उनके घर छो़ड़ने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध हो। इस काम में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक गाड़ी सीसीटीवी और जीपीएस से लैस होनी चाहिए। विधेयक में कहा गया है कि नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं के लिए 'उपयुक्त कामकाजी परिस्थितियां' हैं।
बिल के अनुसार नाइट शिफ्ट के लिए महिला कर्मचारियों को कम से कम दस के बैच में नियुक्त किया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि कारखानों में लाइट की उचित व्यवस्था और सीसीटीवी लगा होना चाहिए, जिनकी फुटेज को कम से कम 45 दिनों के लिए संग्रहित जरूर की जानी चाहिए।
| कर्नाटक में महिलाएं अब नाइट शिफ्ट में भी कारखानों में काम कर सकेंगी। इसे लेकर एक विधेयक कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को पारित कर दिया गया। काम के घंटे भी बारह घंटाटे तक इसमें बढ़ाने की अनुमति होगी। बेंगलुरुः कर्नाटक विधानसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया जिसके बाद महिलाएं अब कारखानों में रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी। इसके अलावा, कानून और संसदीय मामलों के मंत्री जेसी मधुस्वामी के अनुसार लगातार चार दिनों तक दिन में बारह घंटाटे काम करने वाले कर्मचारी सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी ले सकते हैं। जेसी मधुस्वामी की ओर से पेश किए गए कारखाना विधेयक को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया। यह बिल अब विधान परिषद में भेजा जाएगा। विधानसभा में बिल पेश करते हुए जेसी मधुस्वामी ने कहा, 'महिलाओं के लिए काम के घंटों की सीमाएं थीं। सरकार पर सॉफ्टवेयर उद्योग सहित हर जगह से इस नियम में ढील देने का बहुत दबाव था। यहां तक कि हाई कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि अनुच्छेद चौदह के तहत सभी को समान अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। ' इससे पहले दो हज़ार बीस में कर्नाटक सरकार ने महिलाओं को होटल, रेस्तरां, कैफे, थिएटर और ऐसी अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों में रात की पाली में काम करने की अनुमति दी थी। विधेयक में दैनिक काम के घंटे नौ से बढ़ाकर बारह करने की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, यह सप्ताह में अड़तालीस घंटाटे से अधिक नहीं हो सकता है। विधेयक के अनुसार, 'नया प्रस्ताव अधिक आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर पैदा करेगा। ' मधुस्वामी ने कहा, 'हम काम के घंटों को प्रति दिन बारह घंटाटे तक बढ़ा रहे हैं। जो लोग चार दिनों तक लगातार बारह घंटाटे काम करते हैं, सप्ताह में अड़तालीस घंटाटे से अधिक नहीं, वे इसके बाद तीन दिनों का अंतराल ले सकते हैं। ' विधेयक के अनुसार महिलाएं शाम सात बजे से सुबह छः बजे के बीच काम कर सकती हैं, बशर्ते नियोक्ता सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रखें। बिल में कहा गया है, 'यौन उत्पीड़न के कृत्यों को रोकने की जिम्मेदारी कार्यस्थल पर नियोक्ता या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की होगी। ' विधेयक के अनुसार नियोक्ताओं के लिए जरूरी होगा कि रात की पाली के दौरान घर से लाने और वापस महिला श्रमिकों को उनके घर छो़ड़ने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध हो। इस काम में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक गाड़ी सीसीटीवी और जीपीएस से लैस होनी चाहिए। विधेयक में कहा गया है कि नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं के लिए 'उपयुक्त कामकाजी परिस्थितियां' हैं। बिल के अनुसार नाइट शिफ्ट के लिए महिला कर्मचारियों को कम से कम दस के बैच में नियुक्त किया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि कारखानों में लाइट की उचित व्यवस्था और सीसीटीवी लगा होना चाहिए, जिनकी फुटेज को कम से कम पैंतालीस दिनों के लिए संग्रहित जरूर की जानी चाहिए। |
शाहीद कपूर फिल्म पद्मावती की शूटिंग में व्यस्त हैं. फिल्म पद्मावती में वह अपने करियर का अबतक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रहे हैं. फिल्म में राजा रतन सिंह के रूप में नजर आने वाले शाहिद किरदार को स्क्रीन पर असल दिखाने के लिए पुरे जीजान से लगे हुए हैं.
शाहिद कपूर को इंडस्ट्री में अपने डिसिप्लिन और प्रोफेशनल होने के लिए पहचाना जाता है. शाहिद ने एक पूरा बूट शिविर किया है और प्रशिक्षक समीर जौरा के मार्गदर्शन में अपनी बॉडी पर काम किया.
शाहिद दिन भर काम करने के अलावा हर रोज दिन में 2 घण्टे व्यायाम करते हैं, साथ ही शाहिद 40 दिन के सख्त डाइट पर हैं, उस डाइट में 50 ग्राम ब्राउन राइस, उबली हुई सब्जियां पुरे दिन के लिए होती है. बस इतना ही नहीं उनके इस डाइट नमक और शक्कर 15 दिनों के लिए पूरी तरह से गायब है.
शाहिद कपूर अपने फिल्म के करियर में अलग अलग रूप में नजर आये हैं, लेकिन फिल्म पद्मावती में शाहिद का लुक अब तक का सबसे अलग होगा जो दर्शको ने अभी तक देखा नहीं होगा. वे दिन के 14 घंटे की शिफ्ट में काम तो कर ही रहे हैं साथ ही हर रोज 2 घंटे कसरत करते हैं.
शाहिद के ट्रेनर समीर कहते हैं कि "हमारा उद्देश्य था की शरीर का फैट कम किया जाए और मसल्स को बढ़ाया जाये. हमने उनकी ट्रेनिंग और डाइट शूटिंग शुरू होने के 40 दिन पूर्व से शुरू की थी, शूटिंग के 15 दिन पहले उनके डाइट से नमक और शक्कर को पूरी तरह से बंद किया गया था. अब शाही वेशभूषा वाले सीन्स शुरू हो गये हैं जिसमे वे बखूबी जच रहे हैं.
| शाहीद कपूर फिल्म पद्मावती की शूटिंग में व्यस्त हैं. फिल्म पद्मावती में वह अपने करियर का अबतक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रहे हैं. फिल्म में राजा रतन सिंह के रूप में नजर आने वाले शाहिद किरदार को स्क्रीन पर असल दिखाने के लिए पुरे जीजान से लगे हुए हैं. शाहिद कपूर को इंडस्ट्री में अपने डिसिप्लिन और प्रोफेशनल होने के लिए पहचाना जाता है. शाहिद ने एक पूरा बूट शिविर किया है और प्रशिक्षक समीर जौरा के मार्गदर्शन में अपनी बॉडी पर काम किया. शाहिद दिन भर काम करने के अलावा हर रोज दिन में दो घण्टे व्यायाम करते हैं, साथ ही शाहिद चालीस दिन के सख्त डाइट पर हैं, उस डाइट में पचास ग्राम ब्राउन राइस, उबली हुई सब्जियां पुरे दिन के लिए होती है. बस इतना ही नहीं उनके इस डाइट नमक और शक्कर पंद्रह दिनों के लिए पूरी तरह से गायब है. शाहिद कपूर अपने फिल्म के करियर में अलग अलग रूप में नजर आये हैं, लेकिन फिल्म पद्मावती में शाहिद का लुक अब तक का सबसे अलग होगा जो दर्शको ने अभी तक देखा नहीं होगा. वे दिन के चौदह घंटाटे की शिफ्ट में काम तो कर ही रहे हैं साथ ही हर रोज दो घंटाटे कसरत करते हैं. शाहिद के ट्रेनर समीर कहते हैं कि "हमारा उद्देश्य था की शरीर का फैट कम किया जाए और मसल्स को बढ़ाया जाये. हमने उनकी ट्रेनिंग और डाइट शूटिंग शुरू होने के चालीस दिन पूर्व से शुरू की थी, शूटिंग के पंद्रह दिन पहले उनके डाइट से नमक और शक्कर को पूरी तरह से बंद किया गया था. अब शाही वेशभूषा वाले सीन्स शुरू हो गये हैं जिसमे वे बखूबी जच रहे हैं. |
२६८ प्रथम खण्ड स्थलमण्डल
बनान का प्रयास करती है। ऐसे वाना ( embarkments ) को जिह्वा ( spit ) वहने ) है। धाराएँ जिह्वाओं को जल में ऊपर नहीं बनाती है, विन्तु तरंगे उनव ढाला से पदाथको महावर उनके शीप व भागा तक ला सकती है और उस परिणाम की पूर्ति कर सकती है (चित्र ३१७ ) । इस प्रकार स स्थल भाग जन सक्त है जिसन वाद उनके ऊपर टिन (dunes ) विकसित हो सकते है । जब जिह्वाएँ साड़िया को पार कर जाती है तब वे रोधिकाएँ ( bars) बन जाती है (चिन ३१६ और ३२० ) । कुछ जिह्वाएँ और रोधिवाएँ अपन निर्माण काल में धाराओं के स्थानान्तरण ( shifting ) के फलस्वरूप अनुशयुक्त ( hooked - सावुश ) बन जाती ह (चिन ३२१ ) ।
Cop- IHatleras
7 two froz 00*
Map showing the early stages in the simplification of a shore line and showing that at this stage the irregularities are increased
जिह्वाएँ तथा अकुश अपने वदरगाहा को निर्मित करने हैं, और इस प्रकार उन्होन अनेकानेक बस्तिया और नगरा की स्थिनिया को निर्धारित किया है। प्रोविंसटाउन ( स० ग० ) ( Provincetown US ) नाम का वदरगाह एक विशाल अकुश से बना है जहा पर तीथयात्री पहले उतर थे, और जिस बदरगाह वे नटा पर अन्त में उन्होंने अपना निवासस्थान चुना, वह एक विशाल जिह्वा द्वारा निर्मित | दो सौ अड़सठ प्रथम खण्ड स्थलमण्डल बनान का प्रयास करती है। ऐसे वाना को जिह्वा वहने ) है। धाराएँ जिह्वाओं को जल में ऊपर नहीं बनाती है, विन्तु तरंगे उनव ढाला से पदाथको महावर उनके शीप व भागा तक ला सकती है और उस परिणाम की पूर्ति कर सकती है । इस प्रकार स स्थल भाग जन सक्त है जिसन वाद उनके ऊपर टिन विकसित हो सकते है । जब जिह्वाएँ साड़िया को पार कर जाती है तब वे रोधिकाएँ बन जाती है । कुछ जिह्वाएँ और रोधिवाएँ अपन निर्माण काल में धाराओं के स्थानान्तरण के फलस्वरूप अनुशयुक्त बन जाती ह । Cop- IHatleras सात two froz शून्य* Map showing the early stages in the simplification of a shore line and showing that at this stage the irregularities are increased जिह्वाएँ तथा अकुश अपने वदरगाहा को निर्मित करने हैं, और इस प्रकार उन्होन अनेकानेक बस्तिया और नगरा की स्थिनिया को निर्धारित किया है। प्रोविंसटाउन नाम का वदरगाह एक विशाल अकुश से बना है जहा पर तीथयात्री पहले उतर थे, और जिस बदरगाह वे नटा पर अन्त में उन्होंने अपना निवासस्थान चुना, वह एक विशाल जिह्वा द्वारा निर्मित |
मोदी कैबिनेट की मीटिंग में बीते बुधवार को सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी। जी हाँ, इस दौरान गैस पर तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए 22 हजार करोड़ रुपये की वन टाइम ग्रांट देने के लिए मंजूरी दी गई। वहीँ इसके बाद पेट्रोल-डीजल के रेट कम होने की भी चर्चा होने लगी। इसी के साथ क्रूड ऑयल के दाम में एक बार फिर नरमी देखी जा रही है। बीते दिनों कीमत में गिरावट के बाद ओपेक देशों ने (OPEC) ने उत्पादन घटाने का फैसला किया था। जी दरअसल पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) के भाव पिछले चार महीने से भी ज्यादा समय से एक ही स्तर पर बने हुए हैं।
जी हाँ और क्रूड के दाम में आए भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल की कीमत में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। इसी के साथ आपको यह भी बता दें कि आखिरी बार मोदी सरकार ने 22 मई 2022 को तेल की कीमत पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और उस समय देशभर में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 5 रुपये लीटर सस्ता हुआ था। इसी के साथ महाराष्ट्र और मेघालय में तेल की कीमत में बदलाव आया है। आपको बता दें कि अक्टूबर की शुरुआत में कंपनियों की तरफ से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में कटौती की गई। वहीं अब सरकारी तेल कंपनियों को सरकार की तरफ से दिए गए 22 हजार करोड़ के भारी-भरकम पैकेज का असर आने वाले समय में गैस की कीमत पर देखने को मिल सकता है।
बीते गुरुवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव गिरकर 87. 15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और ब्रेंट क्रूड 92. 39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर देखा गया। अगर पेट्रोल-डीजल के नए रेट के बारे में पता करना है तो इसके लिए तेल कंपनियां SMS के जरिये कीमत चेक करने की सुविधा देती हैं। जी हाँ और रेट चेक करने के लिए इंडियन ऑयल (IOC) के उपभोक्ता को RSP<डीलर कोड> लिखकर 9224992249 पर सेंड करना होगा। दूसरी तरफ, एचपीसीएल (HPCL) ग्राहकों को HPPRICE <डीलर कोड> लिखकर 9222201122 पर और बीपीसीएल (BPCL) कस्टमर RSP<डीलर कोड> लिखकर 9223112222 पर SMS करें।
आज आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल के दाम, जानिए यहाँ?
| मोदी कैबिनेट की मीटिंग में बीते बुधवार को सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी। जी हाँ, इस दौरान गैस पर तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए बाईस हजार करोड़ रुपये की वन टाइम ग्रांट देने के लिए मंजूरी दी गई। वहीँ इसके बाद पेट्रोल-डीजल के रेट कम होने की भी चर्चा होने लगी। इसी के साथ क्रूड ऑयल के दाम में एक बार फिर नरमी देखी जा रही है। बीते दिनों कीमत में गिरावट के बाद ओपेक देशों ने ने उत्पादन घटाने का फैसला किया था। जी दरअसल पेट्रोल-डीजल के भाव पिछले चार महीने से भी ज्यादा समय से एक ही स्तर पर बने हुए हैं। जी हाँ और क्रूड के दाम में आए भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल की कीमत में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। इसी के साथ आपको यह भी बता दें कि आखिरी बार मोदी सरकार ने बाईस मई दो हज़ार बाईस को तेल की कीमत पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और उस समय देशभर में पेट्रोल आठ रुपयापये और डीजल पाँच रुपयापये लीटर सस्ता हुआ था। इसी के साथ महाराष्ट्र और मेघालय में तेल की कीमत में बदलाव आया है। आपको बता दें कि अक्टूबर की शुरुआत में कंपनियों की तरफ से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में कटौती की गई। वहीं अब सरकारी तेल कंपनियों को सरकार की तरफ से दिए गए बाईस हजार करोड़ के भारी-भरकम पैकेज का असर आने वाले समय में गैस की कीमत पर देखने को मिल सकता है। बीते गुरुवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव गिरकर सत्तासी. पंद्रह डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और ब्रेंट क्रूड बानवे. उनतालीस डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर देखा गया। अगर पेट्रोल-डीजल के नए रेट के बारे में पता करना है तो इसके लिए तेल कंपनियां SMS के जरिये कीमत चेक करने की सुविधा देती हैं। जी हाँ और रेट चेक करने के लिए इंडियन ऑयल के उपभोक्ता को RSP<डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो चार नौ नौ दो दो चार नौ पर सेंड करना होगा। दूसरी तरफ, एचपीसीएल ग्राहकों को HPPRICE <डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो दो दो शून्य एक एक दो दो पर और बीपीसीएल कस्टमर RSP<डीलर कोड> लिखकर नौ दो दो तीन एक एक दो दो दो दो पर SMS करें। आज आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल के दाम, जानिए यहाँ? |
मुंबईः अपनी स्पीच से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले कन्हैया कुमार लोगों के बीच काफी फेमस हैं। कन्हैया हर मुद्दे पर मीडिया से बेबाक तरीके से बात करते हैं। जिसकी वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ चुका है। कई युवा उनसे प्रेरित होते हैं। उनकी इसी प्रेरणा की वजह से कन्हैया कुमार की जीवन से जुड़ी एक वेब सीरीज बहुत ही जल्दी बनने जा रही है। अभी तक इस बात पर पुष्टि नहीं कि गई है मगर रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही कन्हैया के जीवन पर आधारित एक वेब सीरीज बनाई जाएगी।
बिहार से तिहाड़ के लेखक और युवा नेता कन्हैया कुमार की लाइफ जर्नी से इंस्पायर्ड कैरेक्टर पर बहुत जल्द वेब सीरीज की ऑफिशियल अनाउंसमेंट होगी। अब तक तो अली अब्बास जफर की टीम की ओर से खबरें थीं कि वह कन्हैया के जीवन पर एक वेब सीरीज बना रहे हैं। मगर अब इससे जुड़े संकेत एमेजॉन प्राइम इंडिया के कंटेंट एवं कम्युनिकेशन प्रमुख विजय सुब्रमणियम ने भी कुछ संकेत जारी किए हैं। । उन्होंने यह माना कि कन्हैया कुमार की लाइफ जर्नी से इंस्पायर्ड कैरेक्टर पर वेब सीरीज 'तांडव' बनाने की सोची जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी ऑफिशियल अनाउंसमेंट जल्द होगी। इस वक्त उस बारे में नहीं बता सकते। वह इसलिए कि सीरीज स्क्रिप्टिंग के स्टेज में है। उधर,
अली अब्बास जफर की टीम ने बताया कि 'भारत' की शूटिंग पूरी होने के बाद वह 'तांडव' पर काम करना शुरु करेंगे। कबीर खान के बाद अली अब्बास जफर दूसरे ऐसे बड़े मेकर होंगे, जो वेब सीरीज के निर्माण में कदम रखेंगे। गौरतलब है कि नेटफिलक्स ने हाल ही में दर्जन भर ओरिजनल शोज एनाउंस किए हैं। एमेजॉन प्राइम इंडिया भी मार्केट हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ढेर सारे शोज लाने के लिए कमर कस चुका है।
कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगुसराय में हुआ है। वह 2015 में ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन कते ऐसे सदस्य हैं जो जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। चुनाव से एक दिन पहले की स्पीच ही उनके चुनाव जीतने का कारण मानी जाती है।
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| मुंबईः अपनी स्पीच से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले कन्हैया कुमार लोगों के बीच काफी फेमस हैं। कन्हैया हर मुद्दे पर मीडिया से बेबाक तरीके से बात करते हैं। जिसकी वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ चुका है। कई युवा उनसे प्रेरित होते हैं। उनकी इसी प्रेरणा की वजह से कन्हैया कुमार की जीवन से जुड़ी एक वेब सीरीज बहुत ही जल्दी बनने जा रही है। अभी तक इस बात पर पुष्टि नहीं कि गई है मगर रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द ही कन्हैया के जीवन पर आधारित एक वेब सीरीज बनाई जाएगी। बिहार से तिहाड़ के लेखक और युवा नेता कन्हैया कुमार की लाइफ जर्नी से इंस्पायर्ड कैरेक्टर पर बहुत जल्द वेब सीरीज की ऑफिशियल अनाउंसमेंट होगी। अब तक तो अली अब्बास जफर की टीम की ओर से खबरें थीं कि वह कन्हैया के जीवन पर एक वेब सीरीज बना रहे हैं। मगर अब इससे जुड़े संकेत एमेजॉन प्राइम इंडिया के कंटेंट एवं कम्युनिकेशन प्रमुख विजय सुब्रमणियम ने भी कुछ संकेत जारी किए हैं। । उन्होंने यह माना कि कन्हैया कुमार की लाइफ जर्नी से इंस्पायर्ड कैरेक्टर पर वेब सीरीज 'तांडव' बनाने की सोची जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी ऑफिशियल अनाउंसमेंट जल्द होगी। इस वक्त उस बारे में नहीं बता सकते। वह इसलिए कि सीरीज स्क्रिप्टिंग के स्टेज में है। उधर, अली अब्बास जफर की टीम ने बताया कि 'भारत' की शूटिंग पूरी होने के बाद वह 'तांडव' पर काम करना शुरु करेंगे। कबीर खान के बाद अली अब्बास जफर दूसरे ऐसे बड़े मेकर होंगे, जो वेब सीरीज के निर्माण में कदम रखेंगे। गौरतलब है कि नेटफिलक्स ने हाल ही में दर्जन भर ओरिजनल शोज एनाउंस किए हैं। एमेजॉन प्राइम इंडिया भी मार्केट हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ढेर सारे शोज लाने के लिए कमर कस चुका है। कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगुसराय में हुआ है। वह दो हज़ार पंद्रह में ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन कते ऐसे सदस्य हैं जो जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। चुनाव से एक दिन पहले की स्पीच ही उनके चुनाव जीतने का कारण मानी जाती है। बॉलीवुड से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें। Also Read: |
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आज ईदुल फ़ितर के मौके पर राज्य व देश के लोगों को ईद की मुबारकबाद दी।
सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भारत देश के लोग भाग्यशाली हैं कि उनको दुनिया के सबसे ज्यादा त्यौहार मनाने के लिए मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हम ईद भी मनाते हैं और दीपावली भी। होली भी खेलते हैं और क्रिसमस भी मनाते हैं। भारत के लोग सिख धर्म के गुरुओं के पर्व भी मनाते हैं और बुद्ध व महावीर की जयन्तियां भी धूम धाम से मनाते हैं। जैसे आज ईद के साथ साथ अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम की जयंती भी एक साथ मना रहे हैं। ऐसा सौभाग्य दुनिया के और किसी देश को नहीं मिलता।
इस अवसर पर कांवली मस्ज़िद के इमाम जनाब कारी अम्मार, सलीम अंसारी, सुल्तान अहमद, अल्ताफ, सुभान अली, इकराम, रवीश जमाल, इज़हार, अलाउद्दीन, सोनू काज़ी, जगपाल शर्मा, अवधेश कथीरिया, शुभम सैनी, मेहमूदन समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग ईद मिलन में शामिल हुए।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आज ईदुल फ़ितर के मौके पर राज्य व देश के लोगों को ईद की मुबारकबाद दी। सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भारत देश के लोग भाग्यशाली हैं कि उनको दुनिया के सबसे ज्यादा त्यौहार मनाने के लिए मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हम ईद भी मनाते हैं और दीपावली भी। होली भी खेलते हैं और क्रिसमस भी मनाते हैं। भारत के लोग सिख धर्म के गुरुओं के पर्व भी मनाते हैं और बुद्ध व महावीर की जयन्तियां भी धूम धाम से मनाते हैं। जैसे आज ईद के साथ साथ अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम की जयंती भी एक साथ मना रहे हैं। ऐसा सौभाग्य दुनिया के और किसी देश को नहीं मिलता। इस अवसर पर कांवली मस्ज़िद के इमाम जनाब कारी अम्मार, सलीम अंसारी, सुल्तान अहमद, अल्ताफ, सुभान अली, इकराम, रवीश जमाल, इज़हार, अलाउद्दीन, सोनू काज़ी, जगपाल शर्मा, अवधेश कथीरिया, शुभम सैनी, मेहमूदन समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग ईद मिलन में शामिल हुए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
है। "पतझड़ की आवाजें" में सुनीता के शब्दों में - "झूठें विवाह से तो ऊपरी सुख मिल ही जायेगें, मैं तुम्हें डिस्क्रेज नही करने वाली पर यह तो मानोगी कि बिना मर्जी के यौन-क्रिया में कितनी सड़ान्ध है । '
भारत में पारम्परिक विवाहों को आज भी सम्मान प्राप्त है किन्तु प्रेम विवाह भी अब अनहोनी नही रह गये है। लोगों की सामान्य मान्यता है कि अधिकांश प्रेम विवाह असफल होते हैं। इस सम्बन्ध में आज की नारी का अभिमत बदला है। 'पारू ने कहा था' उपन्यास में पारू की भम्मी कहती हैं-"प्रेम विवाह असफल होते हैं यह बात सम्बन्धियों के लिए मात्र सुनी सुनाई नही थी, आँखों देखा हाल था मैं उन्हें ये तर्क समझाने की स्थिति में नही थी कि विवाह होता है और समझदारी के अभाव में कोई भी विवाह असफल हो सकता है; केवल प्रेम विवाह ही नही । "2 सम्प्रति पारम्परिक विवाह तथा आदर्श विवाह पर बहस छिड़ी हुई है 'क्योंकि' उपन्यास में शशिप्रभा शास्त्री ने आर्दश विवाह की चर्चा छेड़ी है - आदर्श विवाह का तो केवल नाम ही दिया जाता है शादी तो पारम्परिक ही होती है। आदर्श विवाह में भी वहीं सब किया जाता है जो पारम्परिक विवाह में । इस उपन्यास की पात्रा श्रीमती ध्यानी कहती हैं- "आदर्श शादी अच्छी होती है, आप जब भी करेंगी आदर्श शादी करेंगी, पर मैं एक बात पूछती हूँ कि आप आदर्श
1 निरूपमा सेवती-पतझड़ की आवाजें, पृ० 156 2 मणिका मोहनी- पारू ने कहा था, पृ० 62
সখ % স | है। "पतझड़ की आवाजें" में सुनीता के शब्दों में - "झूठें विवाह से तो ऊपरी सुख मिल ही जायेगें, मैं तुम्हें डिस्क्रेज नही करने वाली पर यह तो मानोगी कि बिना मर्जी के यौन-क्रिया में कितनी सड़ान्ध है । ' भारत में पारम्परिक विवाहों को आज भी सम्मान प्राप्त है किन्तु प्रेम विवाह भी अब अनहोनी नही रह गये है। लोगों की सामान्य मान्यता है कि अधिकांश प्रेम विवाह असफल होते हैं। इस सम्बन्ध में आज की नारी का अभिमत बदला है। 'पारू ने कहा था' उपन्यास में पारू की भम्मी कहती हैं-"प्रेम विवाह असफल होते हैं यह बात सम्बन्धियों के लिए मात्र सुनी सुनाई नही थी, आँखों देखा हाल था मैं उन्हें ये तर्क समझाने की स्थिति में नही थी कि विवाह होता है और समझदारी के अभाव में कोई भी विवाह असफल हो सकता है; केवल प्रेम विवाह ही नही । "दो सम्प्रति पारम्परिक विवाह तथा आदर्श विवाह पर बहस छिड़ी हुई है 'क्योंकि' उपन्यास में शशिप्रभा शास्त्री ने आर्दश विवाह की चर्चा छेड़ी है - आदर्श विवाह का तो केवल नाम ही दिया जाता है शादी तो पारम्परिक ही होती है। आदर्श विवाह में भी वहीं सब किया जाता है जो पारम्परिक विवाह में । इस उपन्यास की पात्रा श्रीमती ध्यानी कहती हैं- "आदर्श शादी अच्छी होती है, आप जब भी करेंगी आदर्श शादी करेंगी, पर मैं एक बात पूछती हूँ कि आप आदर्श एक निरूपमा सेवती-पतझड़ की आवाजें, पृशून्य एक सौ छप्पन दो मणिका मोहनी- पारू ने कहा था, पृशून्य बासठ সখ % স |
जिन जीवों के मन होता है वे संझी कहलाते हैं और जिन जीवों के मन नहीं होता वे असंज्ञी कहलाते हैं। (समवायांग १४ ) ( हरिभद्रीयावश्यक)
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जीब के चौदह भेदों का पारस्परिक अन्य बहुत्व'कौन किससे अधिक है और कौन किससे कम इस बात को बतलाना अल्पबहुत्व है। उपरोक्त प्रकार से बतलाये गये जीव के चौदह भेदों का अल्पब हुत्व पत्रवरणा सूत्र के तीसरे अल्पबहुत्व द्वार के तीसरे इन्द्रिय द्वार, उनी सर्वे सूक्ष्मद्वार और बीसवें संज्ञी द्वार तथा जीवाभिगम सूत्र की चौथी प्रतिपत्ति के सूत्र २२५ के आधार से यहाँ दिया जाता हैसत्र से थोड़े अपर्याप्त संज्ञी पंचेन्द्रिय हैं, पर्याप्त संज्ञी पंचेन्द्रिय उन से असंख्यात गुणा । पर्याप्त चतुरिन्द्रिय उनसे संख्यात गुणा । पर्याप्त असंज्ञ। पंचेन्द्रिय उनसे विशेषाधिक। उनसे पर्याप्त बेइन्द्रिय विशेपाधिक । उनसे पर्याप्त तेइन्द्रिय विशेषाधिक । उनसे अपर्याप्त असंज्ञी पंचेन्द्रिय असंख्यात गुरगा। उनसे अपर्याप्त चतुरिन्द्रिय विशेषाधिक) पर्याप्त बादर एकेन्द्रिय उनसे अनन्त गुरगा। अपर्याप्त बादर एकेन्द्रिय उनसे असंख्यात गुणा । अपर्याप्त सूक्ष्म एकेन्द्रिय उनसे असंख्यात गुणा। पर्याप्त सूक्ष्म एकेन्द्रिय उनसे संख्यात गुणा अधिक हैं।
८२६ - संमूच्चिम मनुष्यों के उत्पत्तिस्थान चौदह
बिना माता पिता के उत्पन्न होने वाले अर्थात् स्त्री पुरुष के समागम के बिना ही उत्पन्न जीव सम्मूर्च्छिम कहलाते हैं। पैंतालीस लाख योजन परिमाण मनुष्य क्षेत्र में, ढाई द्वीप और समुद्रों में, पन्द्रह कर्मभूमि, तीस अकर्म भूमि और छप्पन अन्तर द्वीपों में गर्भज मनुष्य रहते हैं। उनके मल मूत्रादि में सम्मूर्णिम मनुष्य उत्पन्न होते हैं। उनकी उत्पत्ति के स्थान चौदह हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं | जिन जीवों के मन होता है वे संझी कहलाते हैं और जिन जीवों के मन नहीं होता वे असंज्ञी कहलाते हैं। wwwwvus in जीब के चौदह भेदों का पारस्परिक अन्य बहुत्व'कौन किससे अधिक है और कौन किससे कम इस बात को बतलाना अल्पबहुत्व है। उपरोक्त प्रकार से बतलाये गये जीव के चौदह भेदों का अल्पब हुत्व पत्रवरणा सूत्र के तीसरे अल्पबहुत्व द्वार के तीसरे इन्द्रिय द्वार, उनी सर्वे सूक्ष्मद्वार और बीसवें संज्ञी द्वार तथा जीवाभिगम सूत्र की चौथी प्रतिपत्ति के सूत्र दो सौ पच्चीस के आधार से यहाँ दिया जाता हैसत्र से थोड़े अपर्याप्त संज्ञी पंचेन्द्रिय हैं, पर्याप्त संज्ञी पंचेन्द्रिय उन से असंख्यात गुणा । पर्याप्त चतुरिन्द्रिय उनसे संख्यात गुणा । पर्याप्त असंज्ञ। पंचेन्द्रिय उनसे विशेषाधिक। उनसे पर्याप्त बेइन्द्रिय विशेपाधिक । उनसे पर्याप्त तेइन्द्रिय विशेषाधिक । उनसे अपर्याप्त असंज्ञी पंचेन्द्रिय असंख्यात गुरगा। उनसे अपर्याप्त चतुरिन्द्रिय विशेषाधिक) पर्याप्त बादर एकेन्द्रिय उनसे अनन्त गुरगा। अपर्याप्त बादर एकेन्द्रिय उनसे असंख्यात गुणा । अपर्याप्त सूक्ष्म एकेन्द्रिय उनसे असंख्यात गुणा। पर्याप्त सूक्ष्म एकेन्द्रिय उनसे संख्यात गुणा अधिक हैं। आठ सौ छब्बीस - संमूच्चिम मनुष्यों के उत्पत्तिस्थान चौदह बिना माता पिता के उत्पन्न होने वाले अर्थात् स्त्री पुरुष के समागम के बिना ही उत्पन्न जीव सम्मूर्च्छिम कहलाते हैं। पैंतालीस लाख योजन परिमाण मनुष्य क्षेत्र में, ढाई द्वीप और समुद्रों में, पन्द्रह कर्मभूमि, तीस अकर्म भूमि और छप्पन अन्तर द्वीपों में गर्भज मनुष्य रहते हैं। उनके मल मूत्रादि में सम्मूर्णिम मनुष्य उत्पन्न होते हैं। उनकी उत्पत्ति के स्थान चौदह हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं |
(www. arya-tv. com) देशभर के आर्य समाज मंदिरों में होने वाली शादियों की मान्यता पर सवाल उठाने वाले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। दरअसल हाईकोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादियां कराने वाले आर्य समाज को स्पेशल मैरिज एक्ट के नियमों का पालन करने के लिए कहा था। इसके बाद ही उन्हें शादी का सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति मिलेगी। इस फैसले के बाद आर्य समाज मंदिरों की शादियों पर सवाल खड़ा होने लगा। लोग मंदिरों में फोन कर यह पूछने लगे कि क्या उनकी शादी को मान्यता मिलेगी या नहीं। मगर हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
आर्य समाज मंदिर की शादियों को वैधता देने के लिए आजादी से पहले अंग्रेजों ने आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट को साल 1937 में पारित किया था। भारत में दूसरी जाति में शादी करने की इजाजत नहीं होने की वजह से कई लोगों ने आर्य समाज को अपनाया क्योंकि यहां उनके साथ जाति के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाता था। वैदिक रीति-रिवाजों को अनुसार होने वाली आर्य समाज की शादी को वैधता देने के लिए आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट लाया गया। जिसमें वर-वधू के अलग-अलग जाति के होने पर भी उनके विवाह को मान्यता दी जाती थी। इस एक्ट में यह भी साफ लिखा गया था कि अगर वर-वधू शादी से पहले हिंदू के अलावा किसी अन्य धर्म से होंगे तब भी उनका विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। यह एक्ट आज भी भारत में लागू है जिसे सभी आर्य समाज मंदिर अपनाते हैं।
आजादी के 8 साल बाद साल 1955 में भारत में हिंदू मैरिज एक्ट लागू किया गया। जिसमें हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के रिवाजों को शामिल किया गया। आर्य समाज द्वारा शादी के सर्टिफिकेट भी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ही जारी होते हैं।
साल 2016 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों पर सवाल उठाया था। कोर्ट का यह मानना था कि आर्य समाज के नाम पर कुछ संस्थाएं शादी का बिजनेस चला रही हैं। यहां कानूनी नियमों का पालन भी नहीं करते हैं। इसलिए अब आर्य समाज मंदिर भी स्पेशल मैरिज एक्ट के सभी नियमों का पालन करने के बाद ही सर्टिफिकेट जारी करेगा।
संस्था को विवाह कराने के 30 दिन पहले पब्लिक नोटिस जारी करना होगा ताकि कोई भी व्यक्ति शादी से पहले आपत्ति दर्ज करा सके। यह नियम स्पेशल मैरिज एक्ट में अपनाया जाता है। साथ ही कपल को कानूनी तौर पर सुरक्षा मिलती है। इसमें दोनों पक्ष किसी भी धर्म से हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों पर रोक लगा दी थी और उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने से भी रोक दिया था। जिस कारण आर्य समाज मंदिर की शादियों पर सवाल खड़ा हो गया था।
कोर्ट की तरफ से यह आदेश आने के बाद आर्य समाज ईकाईयों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आर्य समाज के पक्ष में फैसला लिया और उन्हें फिलहाल हिंदू मैरिज एक्ट का पालन करने के लिए कहा गया। एमपी हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई। हालांकि इस मामले में अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
इस मामले में आईएमएस लॉ कॉलेज नोएडा के प्रोफेसर अक्षय कुमार कहते हैं कि भारत में विवाह के लिए दो सिस्टम अपनाए जाते हैं। पहला कोर्ट मैरिज दूसरा धार्मिक। कोर्ट मैरिज पूरी तरह से कानूनी है, इसके लिए भारत में स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 का पालन किया जाता है। धार्मिक शादी के लिए हर धर्म के लिए अलग एक्ट बना हुआ है। जैसे कि हिंदू मैरिज एक्ट 1955, मुस्लिम मैरिज एक्ट 1954 और द इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 । यह सभी नियम भी कानूनी रूप से मान्य है। आर्य समाज में होने वाली शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के अंतर्गत आती है।
प्रोफेसर अक्षय बताते हैं कि आर्य समाज में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कराया जाता है और इसी का प्रमाण पत्र दिया जाता है। जिससे यह सिद्ध हो सके कि मंदिर में इस जोड़े ने विवाह किया था। हिंदू मैरिज एक्ट में इसे शादी का अंतिम प्रमाण पत्र माना गया है। आर्य समाज में शादी से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया जाता। न ही विवाह के बाद कपल की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी ली जाती है। अगर आर्य समाज में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू किया जाता तो उन्हें भी विवाह संपन्न कराने से 30 दिन पहले पब्लिक नोटिस जारी करना पड़ेगा। आपत्तियां दर्ज करनी होगी और तीन महीने में निवारण करने के बाद शादी कराई जाएगी। मगर आर्य समाज संस्था इसके लिए तैयार नहीं है।
प्रोफेसर अक्षय का यह भी कहना है कि देशभर में लोग आर्य समाज के नाम पर कई नकली संस्थाएं भी चला रहे हैं। पैसे के लालच में वह विवाह कराने से पहले किसी भी एक पक्ष का धर्म भी बदलवा देते हैं। शादी कराने के बाद नकली सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। मगर कोर्ट में रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर कपल को पुलिस सुरक्षा नहीं मिलती। इसलिए वह आगे भी परेशान रहते हैं। फर्जी संस्थाओं की समस्या इतनी ज्यादा है कि खुद आर्य समाज संस्था फर्जीवाड़े से लोगों को सावधान करने के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रचार करती है। वेबसाइट पर रजिस्टर्ड आर्य समाज मंदिरों की लिस्ट भी जारी की गई है।
क्या है आर्य समाज और आर्य विवाह ?
आर्य समाज असल में एक हिंदू धर्म सुधार आंदोलन है। जिसे आज से 147 साल पहले सन 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने शुरू किया था। यह संस्था हिंदू धर्म की कुरीतियों का विरोध करती थी। हिंदू धर्म के वेदों को आधार बनाकर काम करती है।
करीब 150 साल पहले तक महिलाओं के विवाह के लिए परिवार को दहेज इकट्ठा करना पड़ता था। वहीं, बाल विधवा की दूसरी शादी नहीं की जाती थी। आर्य समाज इस सभी प्रथाओं के खिलाफ खड़ा हुआ। यहां कम खर्च पर हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराए जाने लगे। जिसमें सिर्फ वर-वधू की इजाजत मायने रखती थी। इसलिए आर्य समाज आम जनता के बीच काफी प्रचलित रहा।
दिल्ली के आंबेडकर कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर डॉ तारा शंकर बताते हैं कि आर्य समाज की स्थापना तब हुई जब भारत में जातिवाद की समस्या बढ़ी हुई थी। उस समय ऐसी कुप्रथाएं चलती थी, जिसमें महिलाओं और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को दबाया जाता था। तब आर्य समाज बदलाव की किरण लेकर आया था।
यहां अंतरजातीय विवाह, बाल वधू पुनर्विवाह पर बात हुई। साथ ही स्त्रियों और शूद्रों को यज्ञ करने और वेद पढ़ने का अधिकार मिला। यहां मृत्यु के बाद तेरहवी या पिंड दान के लिए बहुत खर्चा नहीं कराया जाता था। शादी में कन्यादान होता था मगर दहेज नहीं स्वीकारा जाता। आर्य समाज में मूर्ति पूजा, अवतारवाद, बलि व अन्ध-विश्वासों को भी अस्वीकार गया। छुआछूत व जातिगत भेदभाव का जमकर विरोध किया गया। यही कारण है कि बदलते भारत में कई लोगों ने इसे अपनाया।
| देशभर के आर्य समाज मंदिरों में होने वाली शादियों की मान्यता पर सवाल उठाने वाले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। दरअसल हाईकोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादियां कराने वाले आर्य समाज को स्पेशल मैरिज एक्ट के नियमों का पालन करने के लिए कहा था। इसके बाद ही उन्हें शादी का सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति मिलेगी। इस फैसले के बाद आर्य समाज मंदिरों की शादियों पर सवाल खड़ा होने लगा। लोग मंदिरों में फोन कर यह पूछने लगे कि क्या उनकी शादी को मान्यता मिलेगी या नहीं। मगर हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। आर्य समाज मंदिर की शादियों को वैधता देने के लिए आजादी से पहले अंग्रेजों ने आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट को साल एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में पारित किया था। भारत में दूसरी जाति में शादी करने की इजाजत नहीं होने की वजह से कई लोगों ने आर्य समाज को अपनाया क्योंकि यहां उनके साथ जाति के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाता था। वैदिक रीति-रिवाजों को अनुसार होने वाली आर्य समाज की शादी को वैधता देने के लिए आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट लाया गया। जिसमें वर-वधू के अलग-अलग जाति के होने पर भी उनके विवाह को मान्यता दी जाती थी। इस एक्ट में यह भी साफ लिखा गया था कि अगर वर-वधू शादी से पहले हिंदू के अलावा किसी अन्य धर्म से होंगे तब भी उनका विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। यह एक्ट आज भी भारत में लागू है जिसे सभी आर्य समाज मंदिर अपनाते हैं। आजादी के आठ साल बाद साल एक हज़ार नौ सौ पचपन में भारत में हिंदू मैरिज एक्ट लागू किया गया। जिसमें हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के रिवाजों को शामिल किया गया। आर्य समाज द्वारा शादी के सर्टिफिकेट भी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ही जारी होते हैं। साल दो हज़ार सोलह में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों पर सवाल उठाया था। कोर्ट का यह मानना था कि आर्य समाज के नाम पर कुछ संस्थाएं शादी का बिजनेस चला रही हैं। यहां कानूनी नियमों का पालन भी नहीं करते हैं। इसलिए अब आर्य समाज मंदिर भी स्पेशल मैरिज एक्ट के सभी नियमों का पालन करने के बाद ही सर्टिफिकेट जारी करेगा। संस्था को विवाह कराने के तीस दिन पहले पब्लिक नोटिस जारी करना होगा ताकि कोई भी व्यक्ति शादी से पहले आपत्ति दर्ज करा सके। यह नियम स्पेशल मैरिज एक्ट में अपनाया जाता है। साथ ही कपल को कानूनी तौर पर सुरक्षा मिलती है। इसमें दोनों पक्ष किसी भी धर्म से हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों पर रोक लगा दी थी और उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने से भी रोक दिया था। जिस कारण आर्य समाज मंदिर की शादियों पर सवाल खड़ा हो गया था। कोर्ट की तरफ से यह आदेश आने के बाद आर्य समाज ईकाईयों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आर्य समाज के पक्ष में फैसला लिया और उन्हें फिलहाल हिंदू मैरिज एक्ट का पालन करने के लिए कहा गया। एमपी हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई। हालांकि इस मामले में अंतिम फैसला आना अभी बाकी है। इस मामले में आईएमएस लॉ कॉलेज नोएडा के प्रोफेसर अक्षय कुमार कहते हैं कि भारत में विवाह के लिए दो सिस्टम अपनाए जाते हैं। पहला कोर्ट मैरिज दूसरा धार्मिक। कोर्ट मैरिज पूरी तरह से कानूनी है, इसके लिए भारत में स्पेशल मैरिज एक्ट, एक हज़ार नौ सौ चौवन का पालन किया जाता है। धार्मिक शादी के लिए हर धर्म के लिए अलग एक्ट बना हुआ है। जैसे कि हिंदू मैरिज एक्ट एक हज़ार नौ सौ पचपन, मुस्लिम मैरिज एक्ट एक हज़ार नौ सौ चौवन और द इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट एक हज़ार आठ सौ बहत्तर । यह सभी नियम भी कानूनी रूप से मान्य है। आर्य समाज में होने वाली शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के अंतर्गत आती है। प्रोफेसर अक्षय बताते हैं कि आर्य समाज में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कराया जाता है और इसी का प्रमाण पत्र दिया जाता है। जिससे यह सिद्ध हो सके कि मंदिर में इस जोड़े ने विवाह किया था। हिंदू मैरिज एक्ट में इसे शादी का अंतिम प्रमाण पत्र माना गया है। आर्य समाज में शादी से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया जाता। न ही विवाह के बाद कपल की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी ली जाती है। अगर आर्य समाज में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू किया जाता तो उन्हें भी विवाह संपन्न कराने से तीस दिन पहले पब्लिक नोटिस जारी करना पड़ेगा। आपत्तियां दर्ज करनी होगी और तीन महीने में निवारण करने के बाद शादी कराई जाएगी। मगर आर्य समाज संस्था इसके लिए तैयार नहीं है। प्रोफेसर अक्षय का यह भी कहना है कि देशभर में लोग आर्य समाज के नाम पर कई नकली संस्थाएं भी चला रहे हैं। पैसे के लालच में वह विवाह कराने से पहले किसी भी एक पक्ष का धर्म भी बदलवा देते हैं। शादी कराने के बाद नकली सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। मगर कोर्ट में रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर कपल को पुलिस सुरक्षा नहीं मिलती। इसलिए वह आगे भी परेशान रहते हैं। फर्जी संस्थाओं की समस्या इतनी ज्यादा है कि खुद आर्य समाज संस्था फर्जीवाड़े से लोगों को सावधान करने के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रचार करती है। वेबसाइट पर रजिस्टर्ड आर्य समाज मंदिरों की लिस्ट भी जारी की गई है। क्या है आर्य समाज और आर्य विवाह ? आर्य समाज असल में एक हिंदू धर्म सुधार आंदोलन है। जिसे आज से एक सौ सैंतालीस साल पहले सन एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में स्वामी दयानंद सरस्वती ने शुरू किया था। यह संस्था हिंदू धर्म की कुरीतियों का विरोध करती थी। हिंदू धर्म के वेदों को आधार बनाकर काम करती है। करीब एक सौ पचास साल पहले तक महिलाओं के विवाह के लिए परिवार को दहेज इकट्ठा करना पड़ता था। वहीं, बाल विधवा की दूसरी शादी नहीं की जाती थी। आर्य समाज इस सभी प्रथाओं के खिलाफ खड़ा हुआ। यहां कम खर्च पर हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराए जाने लगे। जिसमें सिर्फ वर-वधू की इजाजत मायने रखती थी। इसलिए आर्य समाज आम जनता के बीच काफी प्रचलित रहा। दिल्ली के आंबेडकर कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर डॉ तारा शंकर बताते हैं कि आर्य समाज की स्थापना तब हुई जब भारत में जातिवाद की समस्या बढ़ी हुई थी। उस समय ऐसी कुप्रथाएं चलती थी, जिसमें महिलाओं और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को दबाया जाता था। तब आर्य समाज बदलाव की किरण लेकर आया था। यहां अंतरजातीय विवाह, बाल वधू पुनर्विवाह पर बात हुई। साथ ही स्त्रियों और शूद्रों को यज्ञ करने और वेद पढ़ने का अधिकार मिला। यहां मृत्यु के बाद तेरहवी या पिंड दान के लिए बहुत खर्चा नहीं कराया जाता था। शादी में कन्यादान होता था मगर दहेज नहीं स्वीकारा जाता। आर्य समाज में मूर्ति पूजा, अवतारवाद, बलि व अन्ध-विश्वासों को भी अस्वीकार गया। छुआछूत व जातिगत भेदभाव का जमकर विरोध किया गया। यही कारण है कि बदलते भारत में कई लोगों ने इसे अपनाया। |
श्रीसवाल जाति और आचार्ग्य
आप महान जैनाचार्य थे । आपने 'उपमिती भव प्रपंच कथा' नाम का एक प्रत्थ रचा कि जो न केवल जैन साहित्य का सबसे पहला रूपक ग्रन्थ था वरन् समस्त भारतीय साहित्य के रूपक ग्रन्थो में वह शिरोमणि गिना जाता है । उसका साहित्यक मूल्य महानू है। सुप्रख्यात डा० याकोबी अपनी 'उपमिती भव प्रपच कथा' की अग्रेजी प्रस्तावना मे लिखते हैंI did find something still more important The great literary value of the U. Katha and the fact that it is the first allegorical work in Indian Literature
अर्थात् मुझे और भी अधिक महत्व की वस्तु मातृम हुई है। उपमिति भव प्रपंच कथा का साहित्यक मूल्य महान है और यह भारतीय साहित्य का प्रथम रूपक ग्रन्थ है।
यह प्रथसत् ९६२ की ज्येष्ठ सुदी पचमी को समाप्त हुआ था। उपरोक्त सिद्धऋषिसूरि के सम्बन्ध में विभिन्न प्रथा मे कुछ ऐतिहासिक विवरण है। उससे यह प्रगट होता है कि राटदेश अर्थात् गुजरात मे सूर्याचा नामक एक जैन आचार्य्यं हुए ।। उनके शिष्य के शिष्य दुर्गस्वामी थे। वे मूल में बड़े धनवान, कीर्तिशाली तथा ब्रह्म गौत्र विभूषण ब्राह्मग थे । पोछे से उन्होंने जैन साधु की दीक्षा ली थी । मारवाद के भीनमाल नगर में स्वर्गवास हुआ । श्री सिद्धऋषि इन्हीं दुर्गस्वामी के शिष्य थे।
दुर्गस्वामी सिद्धऋषि के गुरु थे और सिद्ध ऋषि ने उनकी अनुकरणीय धर्मवृत्ति की बड़ी प्रशंसा की है। इन दोनो गुरु शिष्यों को गर्गस्वामी ने दीक्षित किया था। ये गर्गस्वामी संवत् ९६२ में विद्यमान थे। उन्होंने 'पासक केवली' तथा 'करम विपाक' नामक ग्रन्थों की रचना की थी ।
आचार्य सिद्धऋषि ने अपने ग्रन्थ में श्री हरिभवसूरि की बड़ी स्तुति की है। आपने कहा है कि मैं " इस प्रकार के हरिभद्रसूरि के चरण की रज के समान हूँ"। इसके आगे चल कर फिर आपने है कि "मुझे धर्म में प्रवेश कराने वाले धर्मबोधक आचार्य हरिभवसूरि है। श्री हरिभद्रसूरि ने अपनी अचिन्त्य शक्ति द्वारा मुफ्त में से कुर्वासना-मय विष को दूर करने की कृपा की और सुवासना रूप अमृत मेरे लाभ के लिये दृढ निकाला। ऐसे हरिभद्रसूरि को मेरा नमस्कार है"।
• सवत्सर शत नव के द्विषष्टि सहिते तिलघिते चास्या, ज्येष्टे सित पंचम्या पुनर्वसौ गुरु दिने समाप्तिर भूत + इन्हें श्री प्रभावकचरित्र में सूराचार्य का है
उपरोक्त वाक्यो से यह प्रतीत होता है कि यद्यपि हरिभद्रसूरि सिद्ध ऋषि के साक्षात गुरु मही थे पर उनके परोक्ष धर्मोपदेशक थे। श्री सिद्ध ऋषि ने इस महान् ग्रन्थ की रचना मारवाड़ के भीनमाल नगर के एक जैन देरासर में की थी और श्री दुर्गस्वामी की गणा नाम की शिष्या ने इस ग्रन्थ की प्रथम प्रति लिखी थी ।
आतरिक वृत्तियों का सूक्ष्म इतिहास जैसा इस ग्रन्थ में मिलता है वैसा दूसरे किसी प्रन्थ में नहीं मिलता। एक विन् का कथन है कि भारतीय धर्म और नीति के लेखकों में सिद्धऋषि का आसन सर्वोपरि है।
आचार्य सिद्धऋषि ने और भी कई महत्पूर्ण ग्रन्थ लिये थे। वला नामक प्राकृत भाषा के ग्रन्थ का आपने सस्कृत में अनुवाद (१) किया था। वि० स० ९७४ मे उन्होंने धर्मनाथ गणी कृत प्राकृत उपदेशमाला की संस्कृत टीका लिखी, जो अतीव महत्वपूर्ण और उपयोगी है। श्री सिद्धसेन दिवाकर कृत न्यायावतार ग्रन्थ पर भी अपने एक बहुत ही उत्तम वृत्ति लिखी है। तत्वाथा धिराम नामक सूत्र पर भी सिद्ध ऋषि की एक वृत्ति है पर ये सिद्धऋषि उक्त सिद्धऋषि से जुड़े मालूम पड़ते है।
श्री प्रभावक चरित्र में श्री सिद्ध ऋषि, उनकी गुरु परपरा तथा हरिभवसरि के साथ का उनका सम्बन्ध आदि बातों पर अच्छा प्रकाश डाला गया है। कहने का अर्थ यह है कि श्री सिद्ध ऋषि आचार्य जैन साहित्य के प्रकाशमान रल थे और उनकी उपमिती भवप्रपन्च कथा मानवीय हृदयों को जीवन उच्चातिउच्च क्षेत्र में लेजाकर शान्ति के अलौकिक वायु मण्डल से परिवेष्ठित कर देती है।
आचार्य जम्मनाथ
आप बड़े विद्वान जैन ग्रन्थकार थे । विद्वत्ममाज में आपका बडा गौरव था । । सवत् १००५ में आपने मणिपति चरित्र नामक ग्रन्थ की रचना की। इसके बाद आपने जिनशतक काव्य बनाया, जिसपर संवत् १०२५ में साब मुनिने इसपर विस्तृत टाका लिखी । मुनी जम्मनाथ ने दून काव्य नामक एक अन्य काव्य-ग्रन्थ भी रचा था ।
मुनी प्रद्युम्न सूरि
चन्द्रगच्छ मे प्रश्नसुर नामक एक जैन साधु हो गये । आप वैदिक शास्त्र के बडे पारगामी
* इस ग्रंथ की मूल प्रति श्री काति विजयजी क बहौदे के भण्डार में मौजूद है 1
( १ ) वाचक मिते वर्षे श्री सिद्धपिरिद महन् ।
प्राक् प्राकृत चरित्राद् वि चरित्र संस्कृत व्यधात् ॥
भोसवाल जाति और आचार्य
विद्वान् थे, उन्होंने अल्ल (२) की राजसभा में दिगम्बरियों को परास्त किया था। इसके अलावा उन्होंने सपादलक्ष, त्रिभुवनगिरि आदि राजाओं को जैन धर्म में दीक्षित किया था। ये बड़े जबर्दस्त तर्कवादी थे। आपके शिष्य समुदाय के माणिकचन्द्रसूरि ने अपने पाश्र्वनाथ चरित्र को प्रशस्ति में आपके गुणों का बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया है।
मुनी न्यायवनसिह
आप प्रभुन्नसूर के शिष्य थे। सुप्रख्यात आचार्य अभयसेनसूरि सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क नामक ग्रंथ पर आपने तत्वबोध विधायनी टीका रची, जो "बाद महार्णत्र" नाम से प्रख्यात है। इस पर आपकी अगाध विद्वत्ता का पता चलता है। यह अनेकान्त दृष्टि का दार्शनिक ग्रंथ
है और उसमें अनेकात दृष्टि का स्वरूप और उसकी व्याप्ति तथा उपयोगिता पर बहुत ही अच्छा प्रकाश डाला गया है। इसमें सैकडो दार्शनिक ग्रंथों का दहन करके जैन धर्म के गूदातिगूढ दार्शनिक सिद्धान्तों बहुत ही उत्तमता साथ समझाया गया है ।
महाकवि धनपाल
सुप्रख्यात् विद्याप्रेमी महाराजा भोज मालवाधिपति की सभा मे जो नवरल थे, उनके महाकवि धमपाल का आसन अपना विशेष स्थान रखता था । बाल्यावस्था से ही महाराजा भोज और धनपाल में बड़ी मैत्री का सम्बन्ध था । महाराज ने इनकी अगाध विद्वत्ता से प्रसन्न होकर इन्हें "सरस्वती" की उच्च उपाधि से विभूषित किया था। महाकवि धनपाल पहिले वैदिक धर्मावलम्बी थे पर पीछे से अपने बन्धु सोभनमुनि के ससर्ग से उन्होंने जैनधर्म स्वीकार किया। इतना ही नहीं, उन्होंने महेन्द्रसूरि नामक जैन साधु के पास से स्याद्वाद सिद्धान्त का अध्ययन कर जैन दर्शन में गम्भीर पारदर्शिता प्राप्त की थी। महाकवि धनपाल के इस धर्म परिवर्तन से महाराजा भोज को बडा आश्चर्य हुआ और उन्होंने धनपाल से इस संबंध में शास्त्रार्थ किया । पर इसमें महाकवि धनपाल ने जैन धर्म के महत्वको महाराजा भोज पर अंकित किया। महाकवि वनपाल बडे प्रतिभाशालो कवि और ग्रंथकार थे। आपकी लिखी हुई "तिलक मञ्जरी" बड़ा ही उच्च श्रेणी का प्रथ है। इसमें जैन सिद्धान्तों का गम्भीर तथा सुन्दर विवेचन है ।
इस ग्रन्थ के अवलोकन से महाकवि धनपाल के उदार हृदय का पता लगता है, आपने स्वमत तथा ( २ ) अल्ल मे शायद मेवाद के भालू रावल का बोध होता है। संवत् १००८ के शिला लेखों से ज्ञात होता है कि वह मैनाद के आ(आघाट ) प्रान्त में राज करता था
पर मत के महाकवियों की और उनकी कृतियों की बड़ी प्रशंसा की है। इन्द्रभूति, गणवर, वाल्मीकि, वेदव्यास, गुण्याज्य, ( बृहत्कथाकार ) प्रवरसेन पाद लिप्त कृत तरगवती, जीवदेवसूर, कालिदास, बाण, भारवी, हरिभद्रसूर, भवभूति, वाकूपति राज, बपभट्ट, राजशेखर कवि, महेन्द्रसूरि, रुद्रकवि आदि अनेक महाकवियों की बड़ी प्रशंसा की है। महाकवि धनपाल का तिलक मजरी प्रथ संस्कृत साहित्य का एक अमूल्य रण है । यह ग्रंथ बढ़ा ही लोक प्रिय है। इसकी समग्र कथा सरल और सुप्रसिद्ध पदों में लिखी गई है। प्रसाद है गुण से वह अलंकृत है। हेमचन्द्राचार्ग्य सरीखे प्रकाण्ड विद्वानों ने इस ग्रन्थ को उच्चकोटि का प्रथ माना है। उन्होंने अपने काव्यानुशासन में उसका बहुत कुछ अनुकरण करने की चेष्टा की है। यह कथा नवरस और काव्य से परिपूर्ण है। प्रभावक चरित्रकार का कथन है, कि उफ कथा को जैनाचार्य शांतसूरिजा मे संशोधित किया था। संवत् ११३० की लिखी हुई इसकी प्रति इस समय भी जैसलमेर के भण्डार में विद्य मान है। इसके अतिरिक्त महाकवि धनपाल ने प्राकृत भाषा मे श्रावकविधि, ऋषभ पंचाशिका, "सत्यपुरीय श्रीमहावीर उत्साह" नामक ग्रन्थ रचे, जिनमें अतिम अथ स्तुति काव्य पर है, और उसमें कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी है।
आचार्य शन्तिसूरिजी
आप प्रभावशाली तथा विद्वान थे। आपने ७०० श्रीमाली कुटुम्ब को जैन बनाया था । आप बड़गच्छ के थे। महाराजा भोज ने आपको अपनी राजधानी धार में निमंत्रित किया था। वहाँ विद्वानों की सभा में आपने अपनी अलौकिक प्रतिभा का परिचय दिया, इसमे महाराजा भोज ने आपको "वादि बैताल" की उपाधि से विभूति किया। आपने जैनियों के सुप्रमित उत्तरराध्ययन "मूत्र पर बड़ी ही सुन्दर टीका की । उसमें प्राकृत भाषा का बाहुल्य होने से उसका नाम" "पाईय टीका" रक्खा गया । सवत् १०९६ में आपका स्वर्गवास हुआ 1
भाचाय्य वर्द्धमामसूरि
संवत् १०५५ में आपने हरिभन्न कृत उपदेश पद की टीका की। इसके अतिरिक्त आपने उपदेश माला वृहद् वृत्ति नामक ग्रन्थ लिखा । विक्रम संवत् ९४५ का कटिग्राम में एक प्रतिमा लेख प्राप्त हुआ है, जिसमें आपके नाम का उल्लेख है। संवत् १०८८ में आपका स्वर्गवास हुआ। | श्रीसवाल जाति और आचार्ग्य आप महान जैनाचार्य थे । आपने 'उपमिती भव प्रपंच कथा' नाम का एक प्रत्थ रचा कि जो न केवल जैन साहित्य का सबसे पहला रूपक ग्रन्थ था वरन् समस्त भारतीय साहित्य के रूपक ग्रन्थो में वह शिरोमणि गिना जाता है । उसका साहित्यक मूल्य महानू है। सुप्रख्यात डाशून्य याकोबी अपनी 'उपमिती भव प्रपच कथा' की अग्रेजी प्रस्तावना मे लिखते हैंI did find something still more important The great literary value of the U. Katha and the fact that it is the first allegorical work in Indian Literature अर्थात् मुझे और भी अधिक महत्व की वस्तु मातृम हुई है। उपमिति भव प्रपंच कथा का साहित्यक मूल्य महान है और यह भारतीय साहित्य का प्रथम रूपक ग्रन्थ है। यह प्रथसत् नौ सौ बासठ की ज्येष्ठ सुदी पचमी को समाप्त हुआ था। उपरोक्त सिद्धऋषिसूरि के सम्बन्ध में विभिन्न प्रथा मे कुछ ऐतिहासिक विवरण है। उससे यह प्रगट होता है कि राटदेश अर्थात् गुजरात मे सूर्याचा नामक एक जैन आचार्य्यं हुए ।। उनके शिष्य के शिष्य दुर्गस्वामी थे। वे मूल में बड़े धनवान, कीर्तिशाली तथा ब्रह्म गौत्र विभूषण ब्राह्मग थे । पोछे से उन्होंने जैन साधु की दीक्षा ली थी । मारवाद के भीनमाल नगर में स्वर्गवास हुआ । श्री सिद्धऋषि इन्हीं दुर्गस्वामी के शिष्य थे। दुर्गस्वामी सिद्धऋषि के गुरु थे और सिद्ध ऋषि ने उनकी अनुकरणीय धर्मवृत्ति की बड़ी प्रशंसा की है। इन दोनो गुरु शिष्यों को गर्गस्वामी ने दीक्षित किया था। ये गर्गस्वामी संवत् नौ सौ बासठ में विद्यमान थे। उन्होंने 'पासक केवली' तथा 'करम विपाक' नामक ग्रन्थों की रचना की थी । आचार्य सिद्धऋषि ने अपने ग्रन्थ में श्री हरिभवसूरि की बड़ी स्तुति की है। आपने कहा है कि मैं " इस प्रकार के हरिभद्रसूरि के चरण की रज के समान हूँ"। इसके आगे चल कर फिर आपने है कि "मुझे धर्म में प्रवेश कराने वाले धर्मबोधक आचार्य हरिभवसूरि है। श्री हरिभद्रसूरि ने अपनी अचिन्त्य शक्ति द्वारा मुफ्त में से कुर्वासना-मय विष को दूर करने की कृपा की और सुवासना रूप अमृत मेरे लाभ के लिये दृढ निकाला। ऐसे हरिभद्रसूरि को मेरा नमस्कार है"। • सवत्सर शत नव के द्विषष्टि सहिते तिलघिते चास्या, ज्येष्टे सित पंचम्या पुनर्वसौ गुरु दिने समाप्तिर भूत + इन्हें श्री प्रभावकचरित्र में सूराचार्य का है उपरोक्त वाक्यो से यह प्रतीत होता है कि यद्यपि हरिभद्रसूरि सिद्ध ऋषि के साक्षात गुरु मही थे पर उनके परोक्ष धर्मोपदेशक थे। श्री सिद्ध ऋषि ने इस महान् ग्रन्थ की रचना मारवाड़ के भीनमाल नगर के एक जैन देरासर में की थी और श्री दुर्गस्वामी की गणा नाम की शिष्या ने इस ग्रन्थ की प्रथम प्रति लिखी थी । आतरिक वृत्तियों का सूक्ष्म इतिहास जैसा इस ग्रन्थ में मिलता है वैसा दूसरे किसी प्रन्थ में नहीं मिलता। एक विन् का कथन है कि भारतीय धर्म और नीति के लेखकों में सिद्धऋषि का आसन सर्वोपरि है। आचार्य सिद्धऋषि ने और भी कई महत्पूर्ण ग्रन्थ लिये थे। वला नामक प्राकृत भाषा के ग्रन्थ का आपने सस्कृत में अनुवाद किया था। विशून्य सशून्य नौ सौ चौहत्तर मे उन्होंने धर्मनाथ गणी कृत प्राकृत उपदेशमाला की संस्कृत टीका लिखी, जो अतीव महत्वपूर्ण और उपयोगी है। श्री सिद्धसेन दिवाकर कृत न्यायावतार ग्रन्थ पर भी अपने एक बहुत ही उत्तम वृत्ति लिखी है। तत्वाथा धिराम नामक सूत्र पर भी सिद्ध ऋषि की एक वृत्ति है पर ये सिद्धऋषि उक्त सिद्धऋषि से जुड़े मालूम पड़ते है। श्री प्रभावक चरित्र में श्री सिद्ध ऋषि, उनकी गुरु परपरा तथा हरिभवसरि के साथ का उनका सम्बन्ध आदि बातों पर अच्छा प्रकाश डाला गया है। कहने का अर्थ यह है कि श्री सिद्ध ऋषि आचार्य जैन साहित्य के प्रकाशमान रल थे और उनकी उपमिती भवप्रपन्च कथा मानवीय हृदयों को जीवन उच्चातिउच्च क्षेत्र में लेजाकर शान्ति के अलौकिक वायु मण्डल से परिवेष्ठित कर देती है। आचार्य जम्मनाथ आप बड़े विद्वान जैन ग्रन्थकार थे । विद्वत्ममाज में आपका बडा गौरव था । । सवत् एक हज़ार पाँच में आपने मणिपति चरित्र नामक ग्रन्थ की रचना की। इसके बाद आपने जिनशतक काव्य बनाया, जिसपर संवत् एक हज़ार पच्चीस में साब मुनिने इसपर विस्तृत टाका लिखी । मुनी जम्मनाथ ने दून काव्य नामक एक अन्य काव्य-ग्रन्थ भी रचा था । मुनी प्रद्युम्न सूरि चन्द्रगच्छ मे प्रश्नसुर नामक एक जैन साधु हो गये । आप वैदिक शास्त्र के बडे पारगामी * इस ग्रंथ की मूल प्रति श्री काति विजयजी क बहौदे के भण्डार में मौजूद है एक वाचक मिते वर्षे श्री सिद्धपिरिद महन् । प्राक् प्राकृत चरित्राद् वि चरित्र संस्कृत व्यधात् ॥ भोसवाल जाति और आचार्य विद्वान् थे, उन्होंने अल्ल की राजसभा में दिगम्बरियों को परास्त किया था। इसके अलावा उन्होंने सपादलक्ष, त्रिभुवनगिरि आदि राजाओं को जैन धर्म में दीक्षित किया था। ये बड़े जबर्दस्त तर्कवादी थे। आपके शिष्य समुदाय के माणिकचन्द्रसूरि ने अपने पाश्र्वनाथ चरित्र को प्रशस्ति में आपके गुणों का बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया है। मुनी न्यायवनसिह आप प्रभुन्नसूर के शिष्य थे। सुप्रख्यात आचार्य अभयसेनसूरि सिद्धसेन दिवाकर कृत सन्मति तर्क नामक ग्रंथ पर आपने तत्वबोध विधायनी टीका रची, जो "बाद महार्णत्र" नाम से प्रख्यात है। इस पर आपकी अगाध विद्वत्ता का पता चलता है। यह अनेकान्त दृष्टि का दार्शनिक ग्रंथ है और उसमें अनेकात दृष्टि का स्वरूप और उसकी व्याप्ति तथा उपयोगिता पर बहुत ही अच्छा प्रकाश डाला गया है। इसमें सैकडो दार्शनिक ग्रंथों का दहन करके जैन धर्म के गूदातिगूढ दार्शनिक सिद्धान्तों बहुत ही उत्तमता साथ समझाया गया है । महाकवि धनपाल सुप्रख्यात् विद्याप्रेमी महाराजा भोज मालवाधिपति की सभा मे जो नवरल थे, उनके महाकवि धमपाल का आसन अपना विशेष स्थान रखता था । बाल्यावस्था से ही महाराजा भोज और धनपाल में बड़ी मैत्री का सम्बन्ध था । महाराज ने इनकी अगाध विद्वत्ता से प्रसन्न होकर इन्हें "सरस्वती" की उच्च उपाधि से विभूषित किया था। महाकवि धनपाल पहिले वैदिक धर्मावलम्बी थे पर पीछे से अपने बन्धु सोभनमुनि के ससर्ग से उन्होंने जैनधर्म स्वीकार किया। इतना ही नहीं, उन्होंने महेन्द्रसूरि नामक जैन साधु के पास से स्याद्वाद सिद्धान्त का अध्ययन कर जैन दर्शन में गम्भीर पारदर्शिता प्राप्त की थी। महाकवि धनपाल के इस धर्म परिवर्तन से महाराजा भोज को बडा आश्चर्य हुआ और उन्होंने धनपाल से इस संबंध में शास्त्रार्थ किया । पर इसमें महाकवि धनपाल ने जैन धर्म के महत्वको महाराजा भोज पर अंकित किया। महाकवि वनपाल बडे प्रतिभाशालो कवि और ग्रंथकार थे। आपकी लिखी हुई "तिलक मञ्जरी" बड़ा ही उच्च श्रेणी का प्रथ है। इसमें जैन सिद्धान्तों का गम्भीर तथा सुन्दर विवेचन है । इस ग्रन्थ के अवलोकन से महाकवि धनपाल के उदार हृदय का पता लगता है, आपने स्वमत तथा अल्ल मे शायद मेवाद के भालू रावल का बोध होता है। संवत् एक हज़ार आठ के शिला लेखों से ज्ञात होता है कि वह मैनाद के आ प्रान्त में राज करता था पर मत के महाकवियों की और उनकी कृतियों की बड़ी प्रशंसा की है। इन्द्रभूति, गणवर, वाल्मीकि, वेदव्यास, गुण्याज्य, प्रवरसेन पाद लिप्त कृत तरगवती, जीवदेवसूर, कालिदास, बाण, भारवी, हरिभद्रसूर, भवभूति, वाकूपति राज, बपभट्ट, राजशेखर कवि, महेन्द्रसूरि, रुद्रकवि आदि अनेक महाकवियों की बड़ी प्रशंसा की है। महाकवि धनपाल का तिलक मजरी प्रथ संस्कृत साहित्य का एक अमूल्य रण है । यह ग्रंथ बढ़ा ही लोक प्रिय है। इसकी समग्र कथा सरल और सुप्रसिद्ध पदों में लिखी गई है। प्रसाद है गुण से वह अलंकृत है। हेमचन्द्राचार्ग्य सरीखे प्रकाण्ड विद्वानों ने इस ग्रन्थ को उच्चकोटि का प्रथ माना है। उन्होंने अपने काव्यानुशासन में उसका बहुत कुछ अनुकरण करने की चेष्टा की है। यह कथा नवरस और काव्य से परिपूर्ण है। प्रभावक चरित्रकार का कथन है, कि उफ कथा को जैनाचार्य शांतसूरिजा मे संशोधित किया था। संवत् एक हज़ार एक सौ तीस की लिखी हुई इसकी प्रति इस समय भी जैसलमेर के भण्डार में विद्य मान है। इसके अतिरिक्त महाकवि धनपाल ने प्राकृत भाषा मे श्रावकविधि, ऋषभ पंचाशिका, "सत्यपुरीय श्रीमहावीर उत्साह" नामक ग्रन्थ रचे, जिनमें अतिम अथ स्तुति काव्य पर है, और उसमें कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी है। आचार्य शन्तिसूरिजी आप प्रभावशाली तथा विद्वान थे। आपने सात सौ श्रीमाली कुटुम्ब को जैन बनाया था । आप बड़गच्छ के थे। महाराजा भोज ने आपको अपनी राजधानी धार में निमंत्रित किया था। वहाँ विद्वानों की सभा में आपने अपनी अलौकिक प्रतिभा का परिचय दिया, इसमे महाराजा भोज ने आपको "वादि बैताल" की उपाधि से विभूति किया। आपने जैनियों के सुप्रमित उत्तरराध्ययन "मूत्र पर बड़ी ही सुन्दर टीका की । उसमें प्राकृत भाषा का बाहुल्य होने से उसका नाम" "पाईय टीका" रक्खा गया । सवत् एक हज़ार छियानवे में आपका स्वर्गवास हुआ एक भाचाय्य वर्द्धमामसूरि संवत् एक हज़ार पचपन में आपने हरिभन्न कृत उपदेश पद की टीका की। इसके अतिरिक्त आपने उपदेश माला वृहद् वृत्ति नामक ग्रन्थ लिखा । विक्रम संवत् नौ सौ पैंतालीस का कटिग्राम में एक प्रतिमा लेख प्राप्त हुआ है, जिसमें आपके नाम का उल्लेख है। संवत् एक हज़ार अठासी में आपका स्वर्गवास हुआ। |
किया गया. वहीं सुबह 9. 45 से 10. 15 तक PC होगी.
गौरतलब है कि ग्वालियर का महाराजपुरा एयरबेस इंडियन एयरफोर्स के मिराज एयरक्राफ्ट का सबसे बड़ा स्टेशन है. 20 साल पहले सन् 1999 कारगिल युद्ध में मिराज इतिहास लिख चुका है. कारगिल युद्ध के समय मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरकर 30 हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन पर हमला किया था. इसमें लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया गया था.
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| किया गया. वहीं सुबह नौ. पैंतालीस से दस. पंद्रह तक PC होगी. गौरतलब है कि ग्वालियर का महाराजपुरा एयरबेस इंडियन एयरफोर्स के मिराज एयरक्राफ्ट का सबसे बड़ा स्टेशन है. बीस साल पहले सन् एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे कारगिल युद्ध में मिराज इतिहास लिख चुका है. कारगिल युद्ध के समय मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरकर तीस हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन पर हमला किया था. इसमें लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया गया था. . |
कोरोना महामारी के बीच यूएई में खेली जानी आईपीएल टी20 लीग में सनराईजरस हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का आमना सामना जारी है। ये मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, दुबई में खेला जा रहा है। जिसमें सनराइजर्स ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया है। इस तरह विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी पहले बल्लेबाजी कर रही है। जिसकी टीम की प्लेइंग 11 में जैसे आरोन फिंच को जगह मिली उनके नाम ये रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
जी हाँ, ऑस्ट्रेलिया के लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट के कप्तान व सलामी बल्लेबाज आरोन फिंच आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जो अपनी 8वीं टीम से आईपीएल के लिए खेल रहे हैं। इससे पहले वो 2010 में राजस्थान रॉयल्स, 2011-12 दिल्ली डेयरडेविल्स, 2013 पुणे वारियर्स, 2014 सनराइजर्स हैदराबाद, 2015 मुंबई इंडियंस, 2016-17 गुजरात लायंस , 2018 किंग्स इलेवन पंजाब और 2020 रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की तरफ से खेल रहे हैं।
ऐसे में जहां एक तरफ विराट कोहली की आरसीबी पहले बल्लेबाजी करते हुए फिंच से एक बड़े स्कोर की उम्मीद करेगी। जिसके चलते वो शुरू से ही हैदराबाद की गेंदबाजी पर अपना दबाव बनाने का प्रयास करेगी। वहीं हैदराबाद की गेंदबाजी काफी मजबूत है ऐसे में फिंच अपनी 8वीं फ्रेंचाईजी के लिए शानदार आगाज करना चाहेगी।
बता दें कि 19 सितंबर को अपने पहले मैच में जहां धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स ने मुम्बये इंडियंस के खिलाफ जीत से आगाज किया। वहीं दूसरे मैच में युवा श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स ने रोमांचक मैच में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ सुपर ओवर में जीत हासिल की।
| कोरोना महामारी के बीच यूएई में खेली जानी आईपीएल टीबीस लीटरग में सनराईजरस हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का आमना सामना जारी है। ये मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, दुबई में खेला जा रहा है। जिसमें सनराइजर्स ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया है। इस तरह विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी पहले बल्लेबाजी कर रही है। जिसकी टीम की प्लेइंग ग्यारह में जैसे आरोन फिंच को जगह मिली उनके नाम ये रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। जी हाँ, ऑस्ट्रेलिया के लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट के कप्तान व सलामी बल्लेबाज आरोन फिंच आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जो अपनी आठवीं टीम से आईपीएल के लिए खेल रहे हैं। इससे पहले वो दो हज़ार दस में राजस्थान रॉयल्स, दो हज़ार ग्यारह-बारह दिल्ली डेयरडेविल्स, दो हज़ार तेरह पुणे वारियर्स, दो हज़ार चौदह सनराइजर्स हैदराबाद, दो हज़ार पंद्रह मुंबई इंडियंस, दो हज़ार सोलह-सत्रह गुजरात लायंस , दो हज़ार अट्ठारह किंग्स इलेवन पंजाब और दो हज़ार बीस रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की तरफ से खेल रहे हैं। ऐसे में जहां एक तरफ विराट कोहली की आरसीबी पहले बल्लेबाजी करते हुए फिंच से एक बड़े स्कोर की उम्मीद करेगी। जिसके चलते वो शुरू से ही हैदराबाद की गेंदबाजी पर अपना दबाव बनाने का प्रयास करेगी। वहीं हैदराबाद की गेंदबाजी काफी मजबूत है ऐसे में फिंच अपनी आठवीं फ्रेंचाईजी के लिए शानदार आगाज करना चाहेगी। बता दें कि उन्नीस सितंबर को अपने पहले मैच में जहां धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स ने मुम्बये इंडियंस के खिलाफ जीत से आगाज किया। वहीं दूसरे मैच में युवा श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स ने रोमांचक मैच में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ सुपर ओवर में जीत हासिल की। |
नयी दिल्ली, 28 दिसंबर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के बाद अब हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) अपने चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी अदला-बदली की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके तहत वह कुछ ही मिनटों में डिस्चार्ज बैटरी के स्थान पर पूरी तरह से चार्ज बैटरी उपलब्ध कराएगी।
इसके लिए एचपीसीएल ने वोल्टअप के साथ करार किया है। वोल्टअप एक स्थान पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए बैटरी अदला-बदली सुविधा प्रदान करने वाली स्टार्टअप है।
वोल्टअप ने बयान में कहा कि इस भागीदारी के तहत जयपुर में दो बैटरी अदला-बदली स्टेशन शुरू किए गए हैं। इस भागीदारी के तहत अगले छह माह में देशभर में 50 बैटरी अदला-बदली समाधान केंद्र खोले जाएंगे।
चार्जिंग ढांचे की कमी, ऊंची लागत और चार्जिंग में लगने वाले लंबे समय की वजह से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के रास्ते में अड़चनें आ रही हैं। बयान में कहा गया है कि इस कमी को दूर करने के लिए वोल्टअप और एचपीसीएल ने हाथ मिलाया है।
इस भागीदारी के तहत देशभर में एचपीसीएल के नेटवर्क और वोल्टअप की बैटरी अदला-बदली प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दक्षता का लाभ उठाया जाएगा।
इससे पहले आईओसी ने अपने पेट्रोल पंपों पर बैटरी अदला-बदली सुविधा के लिए सन मोबिलिटी के साथ भागीदारी की थी।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, अट्ठाईस दिसंबर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के बाद अब हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. अपने चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी अदला-बदली की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके तहत वह कुछ ही मिनटों में डिस्चार्ज बैटरी के स्थान पर पूरी तरह से चार्ज बैटरी उपलब्ध कराएगी। इसके लिए एचपीसीएल ने वोल्टअप के साथ करार किया है। वोल्टअप एक स्थान पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए बैटरी अदला-बदली सुविधा प्रदान करने वाली स्टार्टअप है। वोल्टअप ने बयान में कहा कि इस भागीदारी के तहत जयपुर में दो बैटरी अदला-बदली स्टेशन शुरू किए गए हैं। इस भागीदारी के तहत अगले छह माह में देशभर में पचास बैटरी अदला-बदली समाधान केंद्र खोले जाएंगे। चार्जिंग ढांचे की कमी, ऊंची लागत और चार्जिंग में लगने वाले लंबे समय की वजह से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के रास्ते में अड़चनें आ रही हैं। बयान में कहा गया है कि इस कमी को दूर करने के लिए वोल्टअप और एचपीसीएल ने हाथ मिलाया है। इस भागीदारी के तहत देशभर में एचपीसीएल के नेटवर्क और वोल्टअप की बैटरी अदला-बदली प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दक्षता का लाभ उठाया जाएगा। इससे पहले आईओसी ने अपने पेट्रोल पंपों पर बैटरी अदला-बदली सुविधा के लिए सन मोबिलिटी के साथ भागीदारी की थी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
तिथि करने के लिए, वहाँ एक बहुत बड़ा हैनिष्पक्ष सेक्स के शांत और मापा जीवन का उल्लंघन करने वाली बीमारियों की संख्या इनमें से एक को अंडाशय के साइस्टडेनोमा सही तरीके से किया जा सकता है यह हर व्यक्ति के लिए क्या ज्ञात नहीं है वास्तव में, डिम्बग्रंथि साइस्ताडेनोमा, सबसे ऊपर है, न्यायपूर्ण सेक्स की प्रजनन प्रणाली के इस अंग का असली ट्यूमर है। अक्सर, इस तरह के ट्यूमर को काफी बड़ी संरचना होती है, जिसमें कैप्सूल और उपकला अस्तर होता है। यदि हम एक साधारण डिम्बग्रंथि पुटी के साथ इस बीमारी की तुलना करते हैं, तो पहले मामले में ट्यूमर को घातक से घातक से बढ़ने का एक बड़ा मौका है।
डिम्बग्रंथि साइस्ताडेनोमा दो प्रकारों में विभाजित हैः श्लेष्म और सीरस अंडाशय की सीरस साइस्ताडेमामा एक गठन है, जो बारी-बारी से एक-एक या एक तरफा हो सकती है, उदाहरण के लिए। हालांकि, अक्सर एक तथाकथित चिकनी दीवार वाले सिस्टोमा होता है, क्योंकि यह विशेषज्ञों के बीच इस तरह की बीमारी को कॉल करने के लिए प्रथागत है। इस मामले में साइस्ताडेनोमा की भयावहता के लिए, यह शायद ही कभी व्यास में तीस सेंटीमीटर से अधिक है। लेकिन आप सहमत होंगे, यह अंडाशय को नष्ट करने के लिए काफी पर्याप्त है। डिम्बग्रंथि साइस्ताडोमा में मुख्य रूप से द्रव तरल पदार्थ होते हैं। ज्यादातर मामलों में इस तरह के ट्यूमर के कैप्सूल में घने और रेशेदार संरचना होती है।
डिम्बग्रंथि साइस्ताडोनामा का एक अन्य प्रकार हैमोटे गले इसका नाम स्वयं के लिए बोलता है तथ्य यह है कि इस तरह के ट्यूमर में कई तरह की संरचनाएं होती हैं, या जैसा कि वैज्ञानिकों द्वारा कहा जाता है, सजीले टुकड़े। ये सभी सजीले टुकड़े हीलिनोसिस या बहुत गंभीर एडिडा के राज्य में हैं। ये पपीला एपिथेलियम की परत को कवर करती है जिसमें से इस प्रकार की पुटीय पंक्तिबद्ध है।
तीसरा प्रकार साइस्ताडोनामा सामान्यतः कहा जाता हैइल्लों से भरा हुआ। अंडाशय के अन्य ट्यूमर से इसका अंतर इस तथ्य में निहित है कि इस प्रकार की कोशिकाएं एक बहु-खंडीय संरचना है। इसमें ग्रोथ पेपिलरी प्रकार की एक बड़ी राशि है वे साइस्ताडेनोमा के प्रत्येक कक्ष में लगभग पूरी तरह से प्रवेश करते हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि इसकी उपस्थिति में ऐसा ट्यूमर अक्सर साधारण फूलगोभी जैसा दिखता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि वहाँ कुछ संरचनाएं भी हैं जो कि एक warty शरीर की तरह दिखती हैं। शरीर की शारीरिक विशेषताओं के आधार पर, पेपिलरी डिम्बग्रंथि साइस्टाडोनामा में अधिक या कम घनत्व हो सकता है। इस मामले में, यह कारक कैल्शियम संरचनाओं से प्रभावित होता है। इस प्रकार के cystoma के आकार के लिए, यह पहली या दूसरी तरह से बहुत छोटा है। पैपिलरी प्रजातियों के साइस्ताडेनोमा के अंदर भूरे या हल्के पीले रंग का एक तरल है। इसके अलावा, पेपिलरी संरचनाएं न केवल साइस्ताडेनोमा के अंदर, बल्कि ट्यूमर की सतह पर भी बाहर स्थित हो सकती हैं। इस cystadenoma में प्रत्येक papilla रक्त वाहिकाओं और कई कोशिकाओं के साथ संतृप्त है उपरोक्त के अतिरिक्त, यह स्पष्ट करने के लिए उपयुक्त है कि इन संरचनाओं के उपकला या तथाकथित पैपीला ट्यूबलर एपिथेलियम के समान ही हैं।
| तिथि करने के लिए, वहाँ एक बहुत बड़ा हैनिष्पक्ष सेक्स के शांत और मापा जीवन का उल्लंघन करने वाली बीमारियों की संख्या इनमें से एक को अंडाशय के साइस्टडेनोमा सही तरीके से किया जा सकता है यह हर व्यक्ति के लिए क्या ज्ञात नहीं है वास्तव में, डिम्बग्रंथि साइस्ताडेनोमा, सबसे ऊपर है, न्यायपूर्ण सेक्स की प्रजनन प्रणाली के इस अंग का असली ट्यूमर है। अक्सर, इस तरह के ट्यूमर को काफी बड़ी संरचना होती है, जिसमें कैप्सूल और उपकला अस्तर होता है। यदि हम एक साधारण डिम्बग्रंथि पुटी के साथ इस बीमारी की तुलना करते हैं, तो पहले मामले में ट्यूमर को घातक से घातक से बढ़ने का एक बड़ा मौका है। डिम्बग्रंथि साइस्ताडेनोमा दो प्रकारों में विभाजित हैः श्लेष्म और सीरस अंडाशय की सीरस साइस्ताडेमामा एक गठन है, जो बारी-बारी से एक-एक या एक तरफा हो सकती है, उदाहरण के लिए। हालांकि, अक्सर एक तथाकथित चिकनी दीवार वाले सिस्टोमा होता है, क्योंकि यह विशेषज्ञों के बीच इस तरह की बीमारी को कॉल करने के लिए प्रथागत है। इस मामले में साइस्ताडेनोमा की भयावहता के लिए, यह शायद ही कभी व्यास में तीस सेंटीमीटर से अधिक है। लेकिन आप सहमत होंगे, यह अंडाशय को नष्ट करने के लिए काफी पर्याप्त है। डिम्बग्रंथि साइस्ताडोमा में मुख्य रूप से द्रव तरल पदार्थ होते हैं। ज्यादातर मामलों में इस तरह के ट्यूमर के कैप्सूल में घने और रेशेदार संरचना होती है। डिम्बग्रंथि साइस्ताडोनामा का एक अन्य प्रकार हैमोटे गले इसका नाम स्वयं के लिए बोलता है तथ्य यह है कि इस तरह के ट्यूमर में कई तरह की संरचनाएं होती हैं, या जैसा कि वैज्ञानिकों द्वारा कहा जाता है, सजीले टुकड़े। ये सभी सजीले टुकड़े हीलिनोसिस या बहुत गंभीर एडिडा के राज्य में हैं। ये पपीला एपिथेलियम की परत को कवर करती है जिसमें से इस प्रकार की पुटीय पंक्तिबद्ध है। तीसरा प्रकार साइस्ताडोनामा सामान्यतः कहा जाता हैइल्लों से भरा हुआ। अंडाशय के अन्य ट्यूमर से इसका अंतर इस तथ्य में निहित है कि इस प्रकार की कोशिकाएं एक बहु-खंडीय संरचना है। इसमें ग्रोथ पेपिलरी प्रकार की एक बड़ी राशि है वे साइस्ताडेनोमा के प्रत्येक कक्ष में लगभग पूरी तरह से प्रवेश करते हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि इसकी उपस्थिति में ऐसा ट्यूमर अक्सर साधारण फूलगोभी जैसा दिखता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि वहाँ कुछ संरचनाएं भी हैं जो कि एक warty शरीर की तरह दिखती हैं। शरीर की शारीरिक विशेषताओं के आधार पर, पेपिलरी डिम्बग्रंथि साइस्टाडोनामा में अधिक या कम घनत्व हो सकता है। इस मामले में, यह कारक कैल्शियम संरचनाओं से प्रभावित होता है। इस प्रकार के cystoma के आकार के लिए, यह पहली या दूसरी तरह से बहुत छोटा है। पैपिलरी प्रजातियों के साइस्ताडेनोमा के अंदर भूरे या हल्के पीले रंग का एक तरल है। इसके अलावा, पेपिलरी संरचनाएं न केवल साइस्ताडेनोमा के अंदर, बल्कि ट्यूमर की सतह पर भी बाहर स्थित हो सकती हैं। इस cystadenoma में प्रत्येक papilla रक्त वाहिकाओं और कई कोशिकाओं के साथ संतृप्त है उपरोक्त के अतिरिक्त, यह स्पष्ट करने के लिए उपयुक्त है कि इन संरचनाओं के उपकला या तथाकथित पैपीला ट्यूबलर एपिथेलियम के समान ही हैं। |
Worlds Tallest Women: महिला 25 वर्ष की है और वह ज्यादातर व्हीलचेयर का ही इस्तेमाल करती है। इनकी इतनी लम्बाई बढ़ने का कारण इनको वीवर सिंड्रोम है।
Worlds Tallest Women: दुनिया की सबसे लम्बी महिला का नाम है रुमेसा गेलगी, इनकी हाइट 7 फिट है जो कि महिलाओं में बहुत कम देखने को मिलती है। ऐसे में महिला ने फ्लाइट में जाने का सोचा जिसकी वजह से एयरलाइन वालों महिला के लिए अपनी इकॉनमी क्लास की 6 सीटें हटानी पड़ी, ब्रिटिश अखबार द मिरर के मुताबिक उन्होंने फ्लाइट पर 13 घंटे की यात्रा करी वह भी लेटे हुए उन्होंने तुर्की के इस्तांबुल से संयुक्त राज्य अमेरिका में सैन फ्रांसिस्को के लिए उड़ान भरी, इसी के चलते एयरलाइन वालों ने सोचा की महिला को कोई परेशानी नहीं आए इसलिए उन्होंने इकॉनमी क्लास की 6 सीटें हटा दी।
महिला 25 वर्ष की है और वह ज्यादातर व्हीलचेयर का ही इस्तेमाल करती है। इनकी इतनी लम्बाई बढ़ने का कारण इनको वीवर सिंड्रोम है। यह एक डिजीज है जिसमें लम्बाई काफी तेजी से बढ़ती है। फ्लाइट में सफर करने के दौरान महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा शुरू से अंत ये एक अच्छी यात्रा रही. ये मेरी पहली हवाई जहाज की यात्रा थी. लेकिन ये निश्चित रूप से मेरी आखिरी नहीं होगी . . . हर उस व्यक्ति को दिल से धन्यवाद जो मेरी यात्रा का हिस्सा रहा है।
महिला ने कहा कि वह एक सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम करती हैं। इसलिए वह अमेरिका भी गई है। क्योंकि वह अपने करियर को बढ़ावा देना चाहती है। 2014 में महिला ने अपनी पहचान बनाई उन्होंने एक जीवित महिला पर सबसे लंबी उंगली, एक जीवित महिला पर सबसे बड़ा हाथ और एक जीवित महिला पर सबसे लंबी पीठ रखने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का खिताब भी तोड़ा है। आपको बता दें कि लंबा होने उनके लिए इतना आसान भी नहीं है महिला सारा समय व्हीलचेयर पर रहती है और कुछ ही समय तक चल सकती है।
| Worlds Tallest Women: महिला पच्चीस वर्ष की है और वह ज्यादातर व्हीलचेयर का ही इस्तेमाल करती है। इनकी इतनी लम्बाई बढ़ने का कारण इनको वीवर सिंड्रोम है। Worlds Tallest Women: दुनिया की सबसे लम्बी महिला का नाम है रुमेसा गेलगी, इनकी हाइट सात फिट है जो कि महिलाओं में बहुत कम देखने को मिलती है। ऐसे में महिला ने फ्लाइट में जाने का सोचा जिसकी वजह से एयरलाइन वालों महिला के लिए अपनी इकॉनमी क्लास की छः सीटें हटानी पड़ी, ब्रिटिश अखबार द मिरर के मुताबिक उन्होंने फ्लाइट पर तेरह घंटाटे की यात्रा करी वह भी लेटे हुए उन्होंने तुर्की के इस्तांबुल से संयुक्त राज्य अमेरिका में सैन फ्रांसिस्को के लिए उड़ान भरी, इसी के चलते एयरलाइन वालों ने सोचा की महिला को कोई परेशानी नहीं आए इसलिए उन्होंने इकॉनमी क्लास की छः सीटें हटा दी। महिला पच्चीस वर्ष की है और वह ज्यादातर व्हीलचेयर का ही इस्तेमाल करती है। इनकी इतनी लम्बाई बढ़ने का कारण इनको वीवर सिंड्रोम है। यह एक डिजीज है जिसमें लम्बाई काफी तेजी से बढ़ती है। फ्लाइट में सफर करने के दौरान महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा शुरू से अंत ये एक अच्छी यात्रा रही. ये मेरी पहली हवाई जहाज की यात्रा थी. लेकिन ये निश्चित रूप से मेरी आखिरी नहीं होगी . . . हर उस व्यक्ति को दिल से धन्यवाद जो मेरी यात्रा का हिस्सा रहा है। महिला ने कहा कि वह एक सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम करती हैं। इसलिए वह अमेरिका भी गई है। क्योंकि वह अपने करियर को बढ़ावा देना चाहती है। दो हज़ार चौदह में महिला ने अपनी पहचान बनाई उन्होंने एक जीवित महिला पर सबसे लंबी उंगली, एक जीवित महिला पर सबसे बड़ा हाथ और एक जीवित महिला पर सबसे लंबी पीठ रखने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का खिताब भी तोड़ा है। आपको बता दें कि लंबा होने उनके लिए इतना आसान भी नहीं है महिला सारा समय व्हीलचेयर पर रहती है और कुछ ही समय तक चल सकती है। |
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शासन को दो साल का समय पूरा हो गया है। साल साल 2015 के फरवरी महीने में ही आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली में सरकार बनाई थी। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में से आम आदमी पार्टी 67 सीटें जीतने में सफल रही थी। वहीं भाजपा सिर्फ 3 सीटों पर ही जीत दर्ज करने में सफल रही थी। तो वहीं उस चुनाव में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। दो सालों में आम आदमी पार्टी तरह तरह के विवादों में घिरी रही। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तल्खी अखबारों की सुर्खियां बनी रही। प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी अरविंद केजरीवाल ने कई तरह की विवादास्पद बातें कही। इसके साथ ही डेंगू और प्रदूषण को लेकर भी सरकार कई बार विरोधियों के निशाने पर रही। पार्टी के कई विधायक दो सालों में अलग अलग केसों में हवालात की हवा भी खा चुके हैं।
हालांकि पार्टी दिल्ली में अपने बेहतर काम का दावा करती आई है। पार्टी दिल्ली को आधार बनाकर राज्य से बाहर विस्तार को लेकर भी प्रयासरत है। पार्टी गोवा और पंजाब में चुनाव लड़ रही है। वहीं गुजरात में भी चुनाव लड़ने का मन बना रही है। दिल्ली में पार्टी के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने अपनी सरकार की उपलब्धी गिनाते हुए कहा कि हमने दो साल में बहुत काम किया है। पहली बार घोषणा पत्र के वादों पर बात की जा रही है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कपिल मिश्रा ने कहा केंद्र सरकार ने उनकी सरकार का भारी विरोध किया है। इसलिए उन्होंने ऐतिहासिक विरोध के बावजूद ऐतिहासिक काम करेक दिखाया है। आम आदमी के दो साल पूरे होने पर ट्विटर पर आप के दो साल बेमिसाल ट्विटर ट्रेंड कर रहा था।
Watch :
#AAPKe2SaalBemisaal No electricity tariff increase in last 2 years ! What else can the citizens want ! Thank you Delhi govt!
#AAPKe2SaalBemisaal No electricity tariff increase in last 2 years ! What else can the citizens want ! Thank you Delhi govt!
| दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शासन को दो साल का समय पूरा हो गया है। साल साल दो हज़ार पंद्रह के फरवरी महीने में ही आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली में सरकार बनाई थी। सत्तर सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में से आम आदमी पार्टी सरसठ सीटें जीतने में सफल रही थी। वहीं भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर ही जीत दर्ज करने में सफल रही थी। तो वहीं उस चुनाव में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। दो सालों में आम आदमी पार्टी तरह तरह के विवादों में घिरी रही। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तल्खी अखबारों की सुर्खियां बनी रही। प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी अरविंद केजरीवाल ने कई तरह की विवादास्पद बातें कही। इसके साथ ही डेंगू और प्रदूषण को लेकर भी सरकार कई बार विरोधियों के निशाने पर रही। पार्टी के कई विधायक दो सालों में अलग अलग केसों में हवालात की हवा भी खा चुके हैं। हालांकि पार्टी दिल्ली में अपने बेहतर काम का दावा करती आई है। पार्टी दिल्ली को आधार बनाकर राज्य से बाहर विस्तार को लेकर भी प्रयासरत है। पार्टी गोवा और पंजाब में चुनाव लड़ रही है। वहीं गुजरात में भी चुनाव लड़ने का मन बना रही है। दिल्ली में पार्टी के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने अपनी सरकार की उपलब्धी गिनाते हुए कहा कि हमने दो साल में बहुत काम किया है। पहली बार घोषणा पत्र के वादों पर बात की जा रही है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कपिल मिश्रा ने कहा केंद्र सरकार ने उनकी सरकार का भारी विरोध किया है। इसलिए उन्होंने ऐतिहासिक विरोध के बावजूद ऐतिहासिक काम करेक दिखाया है। आम आदमी के दो साल पूरे होने पर ट्विटर पर आप के दो साल बेमिसाल ट्विटर ट्रेंड कर रहा था। Watch : #AAPKeदोSaalBemisaal No electricity tariff increase in last दो years ! What else can the citizens want ! Thank you Delhi govt! #AAPKeदोSaalBemisaal No electricity tariff increase in last दो years ! What else can the citizens want ! Thank you Delhi govt! |
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर सरकार की रेलवे उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टुरिज्म कारपोरेशन (आईआरसीटीसी) में बाजार में खुली पेशकश (ओएफएस) के जरिये 20 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की योजना है। यह पेशकश बृहस्पतिवार को खुल सकती है।
बिक्री पेशकश के लिये 1,367 रुपये का न्यूनतम मूल्य रखा गया है। आईआरसीटीसी का शेयर बुधवार को कारोबार की समाप्ति पर 1,618. 05 रुपये पर बंद हुआ। यह पिछले दिने के बंद भाव के मुकाबले 1. 55 प्रतिशत नीचे रहा।
कंपनी की प्रवर्तक भारत सरकार इस बिक्री पेशकश के तहत कुल अपने 3. 2 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी जिससे उसे 4,374 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी। कोविड- 19 के कारण सरकार के खजाने पर काफी दबाव है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश से 2. 10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 1. 20 लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश से आने हैं जबकि 90 हजार करोड़ रुपये की राशि वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने से प्राप्त होंगे।
सरकार की आईआरसीटीसी में वर्तमान में 87. 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सेबी के दिशानिर्देशों के तहत सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 प्रतिशत पर लानी है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली, नौ दिसंबर सरकार की रेलवे उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टुरिज्म कारपोरेशन में बाजार में खुली पेशकश के जरिये बीस प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की योजना है। यह पेशकश बृहस्पतिवार को खुल सकती है। बिक्री पेशकश के लिये एक,तीन सौ सरसठ रुपयापये का न्यूनतम मूल्य रखा गया है। आईआरसीटीसी का शेयर बुधवार को कारोबार की समाप्ति पर एक,छः सौ अट्ठारह. पाँच रुपयापये पर बंद हुआ। यह पिछले दिने के बंद भाव के मुकाबले एक. पचपन प्रतिशत नीचे रहा। कंपनी की प्रवर्तक भारत सरकार इस बिक्री पेशकश के तहत कुल अपने तीन. दो करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी जिससे उसे चार,तीन सौ चौहत्तर करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी। कोविड- उन्नीस के कारण सरकार के खजाने पर काफी दबाव है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश से दो. दस लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से एक. बीस लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश से आने हैं जबकि नब्बे हजार करोड़ रुपये की राशि वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने से प्राप्त होंगे। सरकार की आईआरसीटीसी में वर्तमान में सत्तासी. चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी है। सेबी के दिशानिर्देशों के तहत सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाकर पचहत्तर प्रतिशत पर लानी है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
नीतीश कुमार का तेजस्वी पर अटैक,पूछा-पहले कैबिनेट मीटिंग होती थी क्या. . . 15 सालों में कितने नौजवानों को रोजगार दिया था?
बिहार चुनाव को लेकर RJD ने गाना किया लॉन्च , "इस बार तेजस्वी तय है"
Phone No.
| नीतीश कुमार का तेजस्वी पर अटैक,पूछा-पहले कैबिनेट मीटिंग होती थी क्या. . . पंद्रह सालों में कितने नौजवानों को रोजगार दिया था? बिहार चुनाव को लेकर RJD ने गाना किया लॉन्च , "इस बार तेजस्वी तय है" Phone No. |
Blood Sugar : लड शुगर को लेकर लोगों में कई तरह की गलत जानकारियां हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को लेकर गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. तो आइये जानते हैं कितना ब्लड शुगर होने पर यह खतरनाक हो जाता है.
Blood Sugar : खराब खानपान और व्यस्त जीवनशैली के चलते लोगों में तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं. इनमें सबसे आम बीमारी ब्लड शुगर है. ब्लड शुगर को लेकर लोगों में कई तरह की गलत जानकारियां हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को लेकर गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. तो आइये जानते हैं कितना ब्लड शुगर होने पर यह खतरनाक हो जाता है. साथ ही सामान्य ब्लड शुगर कितना होना चाहिए.
विशेषज्ञ बताते हैं कि डायबिटीज की बीमारी कई कारण से होती है. यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों में कभी भी हो सकती है. डायबिटीज मुख्य रूप से दो तरह की होती है. टाइप वन डायबिटीज और दूसरी टाइप टू डायबिटीज. टाइप वन डायबिटीज में व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन बनने की रफ्तार कम हो जाती है. इसकी वजह से ब्लड शुगर हाई हो जाता है. टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन तो बनती है, लेकिन इंसुलिन रजिस्टेंस की वजह से इसका इस्तेमाल सही तरीके से नहीं कर पाता है. इसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में फास्टिंग ब्लड शुगर का नॉर्मल स्तर 100 Mg/dl से कम होता है. साथ ही पोस्ट मील शुगर लेवल 120 से 140 के बीच होता है. ऐसी स्थिति में यह प्री डायबिटीज की श्रेणी में आता है. अगर ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर को नियंत्रित कर लिया जाए तो डायबिटीज की बीमारी से बचा जा सकता है.
खाना खाने के बाद अगर ब्लड शुगर लेवल 160 Mg/dl से ज्यादा होता है तो इसे डायबिटीज माना जाता है. हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से कंफर्म करने के लिए HbA1c टेस्ट किया जाता है. यह व्यक्ति के शरीर में पिछले तीन महीनों तक ब्लड शुगर रिकॉर्ड निकाल देता है. इसमें लगातार डाउन या ज्यादा लेवल देखकर डायबिटीज की पुष्टि की जाती है, जिसे कंट्रोल करना बेहद जरूरी है.
डिस्क्लेमरः यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. zeeupuk इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
| Blood Sugar : लड शुगर को लेकर लोगों में कई तरह की गलत जानकारियां हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को लेकर गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. तो आइये जानते हैं कितना ब्लड शुगर होने पर यह खतरनाक हो जाता है. Blood Sugar : खराब खानपान और व्यस्त जीवनशैली के चलते लोगों में तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं. इनमें सबसे आम बीमारी ब्लड शुगर है. ब्लड शुगर को लेकर लोगों में कई तरह की गलत जानकारियां हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को लेकर गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. तो आइये जानते हैं कितना ब्लड शुगर होने पर यह खतरनाक हो जाता है. साथ ही सामान्य ब्लड शुगर कितना होना चाहिए. विशेषज्ञ बताते हैं कि डायबिटीज की बीमारी कई कारण से होती है. यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों में कभी भी हो सकती है. डायबिटीज मुख्य रूप से दो तरह की होती है. टाइप वन डायबिटीज और दूसरी टाइप टू डायबिटीज. टाइप वन डायबिटीज में व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन बनने की रफ्तार कम हो जाती है. इसकी वजह से ब्लड शुगर हाई हो जाता है. टाइप दो डायबिटीज में इंसुलिन तो बनती है, लेकिन इंसुलिन रजिस्टेंस की वजह से इसका इस्तेमाल सही तरीके से नहीं कर पाता है. इसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में फास्टिंग ब्लड शुगर का नॉर्मल स्तर एक सौ Mg/dl से कम होता है. साथ ही पोस्ट मील शुगर लेवल एक सौ बीस से एक सौ चालीस के बीच होता है. ऐसी स्थिति में यह प्री डायबिटीज की श्रेणी में आता है. अगर ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर को नियंत्रित कर लिया जाए तो डायबिटीज की बीमारी से बचा जा सकता है. खाना खाने के बाद अगर ब्लड शुगर लेवल एक सौ साठ Mg/dl से ज्यादा होता है तो इसे डायबिटीज माना जाता है. हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से कंफर्म करने के लिए HbAएकc टेस्ट किया जाता है. यह व्यक्ति के शरीर में पिछले तीन महीनों तक ब्लड शुगर रिकॉर्ड निकाल देता है. इसमें लगातार डाउन या ज्यादा लेवल देखकर डायबिटीज की पुष्टि की जाती है, जिसे कंट्रोल करना बेहद जरूरी है. डिस्क्लेमरः यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. zeeupuk इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है. |
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यह पेपर चूहों में कैंसर रिसेक्शन सर्जरी के दौरान कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण (टीआईवीए) मॉडलिंग के लिए एक विधि का वर्णन करता है। लक्ष्य कैंसर के रोगियों के लिए संज्ञाहरण वितरण की प्रमुख विशेषताओं को दोहराना है। विधि इस बात की जांच की अनुमति देती है कि एनेस्थेटिक तकनीक रिसेक्शन सर्जरी के बाद कैंसर पुनरावृत्ति को कैसे प्रभावित करती है।
यह नया प्रोटोकॉल प्रोपोफोल एनेस्थीसिया का उपयोग करके चूहों में सर्जिकल संज्ञाहरण का वर्णन करता है। विधि रोग के माउस मॉडल में प्रोपोफोल संज्ञाहरण में अनुसंधान को सक्षम बनाती है। प्रोटोकॉल कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण के मूल्यांकन की अनुमति देता है और वाष्पशील संज्ञाहरण के उपयोग से बचता है।
प्रोटोकॉल का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि प्रोपोफोल एनेस्थीसिया रोग से संबंधित परिणामों को कैसे प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यहां हम ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी के बाद लघु और दीर्घकालिक कैंसर के परिणामों का मूल्यांकन करते हैं। शुरू करने के लिए, कल्चर 66 सीएल 4 मिराई स्तन कैंसर कोशिकाएं जो अल्फा एमईएम माध्यम में जुगनू लूसिफेरस को व्यक्त करने के लिए स्थिर रूप से ट्रांसड्यूस होती हैं जिसमें 10% एफबीएस और 200 मिलीमोलर ग्लूटामाइन होते हैं।
कोशिकाओं को 37 डिग्री सेल्सियस लेकिन 5% कार्बन डाइऑक्साइड पर इनक्यूबेट करें। उपसंस्कृति कोशिकाएं हैं जब कोशिकाएं लगभग 80% कंफ्लुएंसी तक पहुंच जाती हैं। जब कोशिकाएं ईडीटीए समाधान में दो मिलीलीटर ड्रिप के साथ लघुगणकीय विकास चरण में होती हैं, तो अनुयायी कोशिकाओं को उठाएं और हेमोसाइटोमीटर का उपयोग करके कोशिकाओं की गणना करें।
फिर पीबीएस में कोशिकाओं को पतला करें और पतला सेल निलंबन को बर्फ पर रखें जब तक कि माउस इंजेक्शन के लिए तैयार न हो जाए। एक बार जब माउस पूरी तरह से एनेस्थेटाइज हो जाता है, तो इंजेक्शन साइट तैयार करने के लिए एकल-उपयोग अल्कोहल स्वैब के साथ चौथे बाएं स्तन वसा पैड क्षेत्र को पोंछ दें। कैंसर सेल निलंबन के साथ बाँझ 27 गेज हाइपोडर्मिक सुई से जुड़े 25 माइक्रोलीटर हैमिल्टन सिरिंज को भरें।
त्वचा को उठाने और सुरक्षित करने के लिए बल का उपयोग करें। निप्पल से लगभग एक मिलीमीटर पर चौथे बाएं स्तन वसा पैड में पांचवीं कोशिकाओं और पीबीएस के 20 माइक्रोलीटर को एक बार इंजेक्ट करें। यदि कोशिकाओं को लूसिफेरस के साथ टैग किया जाता है, तो 30 गेज हाइपोडर्मिक सुई के साथ 0.5 मिलीलीटर इंसुलिन सिरिंज का उपयोग करके एनेस्थेटाइज्ड माउस की पार्श्व पूंछ नस में डी-लूसिफेरिन के 100 माइक्रोलीटर इंजेक्ट करें।
इंजेक्शन के दो मिनट बाद माउस को बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग सिस्टम में रखें, जिसमें स्तन वसा पैड का सामना किया जाता है और 10 सेकंड के लिए छवि को कैप्चर किया जाता है। इमेजिंग के बाद, माउस को साफ पिंजरे में रखें और इसे संज्ञाहरण से ठीक होने दें। कैलिपर का उपयोग करके प्राथमिक ट्यूमर के विकास की निगरानी करें।
ट्यूमर की मात्रा की गणना करें और ट्यूमर को ठीक करें जब प्राथमिक ट्यूमर 80 से 90 क्यूबिक मिलीमीटर की मात्रा तक पहुंच जाता है। 30 गेज एक मिलीलीटर इंसुलिन सिरिंज के साथ स्वचालित सिरिंज पंप स्थापित करें जिसमें दो प्रतिशत प्रोपोफोल फॉर्मूलेशन होता है। तीन प्रतिशत सेवोफ्लुरेन या आइसोफ्लुरेन के साथ एक प्रेरण कक्ष में संज्ञाहरण को प्रेरित करें।
फिर एनेस्थेटाइज्ड माउस को 37 डिग्री सेल्सियस पर हीटिंग पैड में स्थानांतरित करें और नाक शंकु का उपयोग करके दो से तीन प्रतिशत सेवोफ्लुरेन या आइसोफ्लुरेन के साथ संज्ञाहरण बनाए रखें। पेडल रिफ्लेक्स के नुकसान और प्रति मिनट 100 सांस से कम श्वसन दर द्वारा प्रदर्शित संज्ञाहरण की स्थिर गहराई को बनाए रखने के लिए अंतःशिरा प्रवेशनी के दौरान आवश्यक सेवोफ्लुरेन के वितरण को समायोजित करें। कॉर्निया को सूखने से रोकने के लिए आंखों पर जलीय स्नेहक लागू करें, और फिर 0.05 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम ब्यूप्रेनोर्फिन को चमड़े के नीचे इंजेक्ट करें।
प्रोपोफोल आधारित कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण देने के लिए, बाँझ पॉलीयुरेथेन कैथेटर से जुड़ी बाँझ 30 गेज हाइपोडर्मिक सुई का उपयोग करके पार्श्व पूंछ नस को कैनुलाट करें। कैथेटर में रक्त फ्लैशबैक द्वारा सही प्लेसमेंट की पुष्टि करें। कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण शुरू करने के लिए एक मिनट में 27 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम के प्रारंभिक बोलस के रूप में दो प्रतिशत प्रोपोफोल का प्रबंधन करें।
सेवोफ्लुरेन प्रशासन को बंद करें। सर्जरी के दौरान स्थिर संज्ञाहरण गहराई बनाए रखने के लिए 2.2 से 4.0 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम प्रति मिनट की दर से प्रोपोफोल इन्फ्यूजन बनाए रखें। पेट क्षेत्र को शेव करें और पोविडोन-आयोडीन समाधान के साथ सर्जिकल क्षेत्र को कीटाणुरहित करें।
बाएं चौथे स्तन वसा पैड में ट्यूमर से एक सेंटीमीटर चीरा कम करें। ट्यूमर और बाएं इंगुइनल लिम्फ नोड को विच्छेदित करने के लिए बल और कैंची का उपयोग करें। यदि लूसिफेरस-टैग ट्यूमर कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है तो पार्श्व पूंछ की नस में डी-लूसिफेरिन इंजेक्ट किया जाता है जैसा कि दिखाया गया है और स्पष्ट मार्जिन प्राप्त करने के लिए 60 सेकंड के लिए छवियों को कैप्चर करता है।
यदि एक अवशिष्ट ट्यूमर की पहचान की जाती है, तो स्तन वसा पैड से अतिरिक्त ऊतक को निकालें। एक बार सर्जिकल साइट पर हेमोस्टेसिस प्राप्त हो जाने के बाद, 5-0 नायलॉन सीवन का उपयोग करके त्वचा को बंद करें। घाव को पोविडोन-आयोडीन समाधान से पोंछें।
सर्जरी के पूरा होने पर, संज्ञाहरण को रोकें और माउस को हीटिंग पैड पर एक साफ पिंजरे में रखें ताकि इसे संज्ञाहरण से ठीक होने की अनुमति मिल सके। माउस को हर 15 मिनट में मॉनिटर करें जब तक कि माउस सामान्य सतर्कता पर वापस न आ जाए। फिर सर्जरी के बाद 48 घंटे के लिए हर 12 घंटे में एनाल्जेसिया की निगरानी करें और प्रदान करें।
प्राथमिक ट्यूमर पुनरावृत्ति या दूर पुनरावृत्ति मूल्यांकन के लिए, प्रति सप्ताह एक बार चूहों की निगरानी करें, बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग सिस्टम का उपयोग करके सर्जरी के बाद सप्ताह शुरू करें। बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग का उपयोग प्राथमिक ट्यूमर के शोधन के बाद फेफड़ों में दूर के ट्यूमर पुनरावृत्ति की पहचान करने के लिए किया गया था। इस मॉडल का उपयोग पेरीओपरेटिव अवधि के दौरान होने वाली घटनाओं का आकलन करने के लिए किया जा सकता है।
प्रोपोफोल के तहत कैंसर सर्जरी के 24 घंटे बाद, परिसंचारी प्लाज्मा साइटोकिन्स का मूल्यांकन किया गया। पार्श्व पूंछ की नस को तेजी से कैनुलेट करने और सेवोफ्लुरेन एक्सपोजर अवधि को कम करने के लिए आवश्यक अभ्यास। सेवोफ्लुरेन को धीरे-धीरे डाउन-टाइटेट किया जाना चाहिए क्योंकि प्रोपोफोल बोलस को ओवर-सेडेशन को रोकने के लिए प्रशासित किया जाता है।
इस विधि का उपयोग कार्डियक सर्जरी या गंभीर बीमारी, जैसे सेप्सिस के माउस मॉडल में प्रोपोफोल संज्ञाहरण के प्रभाव की जांच करने के लिए किया जा सकता है।
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Please note that all translations are automatically generated. यह पेपर चूहों में कैंसर रिसेक्शन सर्जरी के दौरान कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण मॉडलिंग के लिए एक विधि का वर्णन करता है। लक्ष्य कैंसर के रोगियों के लिए संज्ञाहरण वितरण की प्रमुख विशेषताओं को दोहराना है। विधि इस बात की जांच की अनुमति देती है कि एनेस्थेटिक तकनीक रिसेक्शन सर्जरी के बाद कैंसर पुनरावृत्ति को कैसे प्रभावित करती है। यह नया प्रोटोकॉल प्रोपोफोल एनेस्थीसिया का उपयोग करके चूहों में सर्जिकल संज्ञाहरण का वर्णन करता है। विधि रोग के माउस मॉडल में प्रोपोफोल संज्ञाहरण में अनुसंधान को सक्षम बनाती है। प्रोटोकॉल कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण के मूल्यांकन की अनुमति देता है और वाष्पशील संज्ञाहरण के उपयोग से बचता है। प्रोटोकॉल का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि प्रोपोफोल एनेस्थीसिया रोग से संबंधित परिणामों को कैसे प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यहां हम ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी के बाद लघु और दीर्घकालिक कैंसर के परिणामों का मूल्यांकन करते हैं। शुरू करने के लिए, कल्चर छयासठ सीएल चार मिराई स्तन कैंसर कोशिकाएं जो अल्फा एमईएम माध्यम में जुगनू लूसिफेरस को व्यक्त करने के लिए स्थिर रूप से ट्रांसड्यूस होती हैं जिसमें दस% एफबीएस और दो सौ मिलीमोलर ग्लूटामाइन होते हैं। कोशिकाओं को सैंतीस डिग्री सेल्सियस लेकिन पाँच% कार्बन डाइऑक्साइड पर इनक्यूबेट करें। उपसंस्कृति कोशिकाएं हैं जब कोशिकाएं लगभग अस्सी% कंफ्लुएंसी तक पहुंच जाती हैं। जब कोशिकाएं ईडीटीए समाधान में दो मिलीलीटर ड्रिप के साथ लघुगणकीय विकास चरण में होती हैं, तो अनुयायी कोशिकाओं को उठाएं और हेमोसाइटोमीटर का उपयोग करके कोशिकाओं की गणना करें। फिर पीबीएस में कोशिकाओं को पतला करें और पतला सेल निलंबन को बर्फ पर रखें जब तक कि माउस इंजेक्शन के लिए तैयार न हो जाए। एक बार जब माउस पूरी तरह से एनेस्थेटाइज हो जाता है, तो इंजेक्शन साइट तैयार करने के लिए एकल-उपयोग अल्कोहल स्वैब के साथ चौथे बाएं स्तन वसा पैड क्षेत्र को पोंछ दें। कैंसर सेल निलंबन के साथ बाँझ सत्ताईस गेज हाइपोडर्मिक सुई से जुड़े पच्चीस माइक्रोलीटर हैमिल्टन सिरिंज को भरें। त्वचा को उठाने और सुरक्षित करने के लिए बल का उपयोग करें। निप्पल से लगभग एक मिलीमीटर पर चौथे बाएं स्तन वसा पैड में पांचवीं कोशिकाओं और पीबीएस के बीस माइक्रोलीटर को एक बार इंजेक्ट करें। यदि कोशिकाओं को लूसिफेरस के साथ टैग किया जाता है, तो तीस गेज हाइपोडर्मिक सुई के साथ शून्य दशमलव पाँच मिलीलीटर इंसुलिन सिरिंज का उपयोग करके एनेस्थेटाइज्ड माउस की पार्श्व पूंछ नस में डी-लूसिफेरिन के एक सौ माइक्रोलीटर इंजेक्ट करें। इंजेक्शन के दो मिनट बाद माउस को बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग सिस्टम में रखें, जिसमें स्तन वसा पैड का सामना किया जाता है और दस सेकंड के लिए छवि को कैप्चर किया जाता है। इमेजिंग के बाद, माउस को साफ पिंजरे में रखें और इसे संज्ञाहरण से ठीक होने दें। कैलिपर का उपयोग करके प्राथमिक ट्यूमर के विकास की निगरानी करें। ट्यूमर की मात्रा की गणना करें और ट्यूमर को ठीक करें जब प्राथमिक ट्यूमर अस्सी से नब्बे क्यूबिक मिलीमीटर की मात्रा तक पहुंच जाता है। तीस गेज एक मिलीलीटर इंसुलिन सिरिंज के साथ स्वचालित सिरिंज पंप स्थापित करें जिसमें दो प्रतिशत प्रोपोफोल फॉर्मूलेशन होता है। तीन प्रतिशत सेवोफ्लुरेन या आइसोफ्लुरेन के साथ एक प्रेरण कक्ष में संज्ञाहरण को प्रेरित करें। फिर एनेस्थेटाइज्ड माउस को सैंतीस डिग्री सेल्सियस पर हीटिंग पैड में स्थानांतरित करें और नाक शंकु का उपयोग करके दो से तीन प्रतिशत सेवोफ्लुरेन या आइसोफ्लुरेन के साथ संज्ञाहरण बनाए रखें। पेडल रिफ्लेक्स के नुकसान और प्रति मिनट एक सौ सांस से कम श्वसन दर द्वारा प्रदर्शित संज्ञाहरण की स्थिर गहराई को बनाए रखने के लिए अंतःशिरा प्रवेशनी के दौरान आवश्यक सेवोफ्लुरेन के वितरण को समायोजित करें। कॉर्निया को सूखने से रोकने के लिए आंखों पर जलीय स्नेहक लागू करें, और फिर शून्य दशमलव पाँच मिलीग्राम प्रति किलोग्राम ब्यूप्रेनोर्फिन को चमड़े के नीचे इंजेक्ट करें। प्रोपोफोल आधारित कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण देने के लिए, बाँझ पॉलीयुरेथेन कैथेटर से जुड़ी बाँझ तीस गेज हाइपोडर्मिक सुई का उपयोग करके पार्श्व पूंछ नस को कैनुलाट करें। कैथेटर में रक्त फ्लैशबैक द्वारा सही प्लेसमेंट की पुष्टि करें। कुल अंतःशिरा संज्ञाहरण शुरू करने के लिए एक मिनट में सत्ताईस मिलीग्राम प्रति किलोग्राम के प्रारंभिक बोलस के रूप में दो प्रतिशत प्रोपोफोल का प्रबंधन करें। सेवोफ्लुरेन प्रशासन को बंद करें। सर्जरी के दौरान स्थिर संज्ञाहरण गहराई बनाए रखने के लिए दो.दो से चार दशमलव शून्य मिलीग्राम प्रति किलोग्राम प्रति मिनट की दर से प्रोपोफोल इन्फ्यूजन बनाए रखें। पेट क्षेत्र को शेव करें और पोविडोन-आयोडीन समाधान के साथ सर्जिकल क्षेत्र को कीटाणुरहित करें। बाएं चौथे स्तन वसा पैड में ट्यूमर से एक सेंटीमीटर चीरा कम करें। ट्यूमर और बाएं इंगुइनल लिम्फ नोड को विच्छेदित करने के लिए बल और कैंची का उपयोग करें। यदि लूसिफेरस-टैग ट्यूमर कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है तो पार्श्व पूंछ की नस में डी-लूसिफेरिन इंजेक्ट किया जाता है जैसा कि दिखाया गया है और स्पष्ट मार्जिन प्राप्त करने के लिए साठ सेकंड के लिए छवियों को कैप्चर करता है। यदि एक अवशिष्ट ट्यूमर की पहचान की जाती है, तो स्तन वसा पैड से अतिरिक्त ऊतक को निकालें। एक बार सर्जिकल साइट पर हेमोस्टेसिस प्राप्त हो जाने के बाद, पाँच-शून्य नायलॉन सीवन का उपयोग करके त्वचा को बंद करें। घाव को पोविडोन-आयोडीन समाधान से पोंछें। सर्जरी के पूरा होने पर, संज्ञाहरण को रोकें और माउस को हीटिंग पैड पर एक साफ पिंजरे में रखें ताकि इसे संज्ञाहरण से ठीक होने की अनुमति मिल सके। माउस को हर पंद्रह मिनट में मॉनिटर करें जब तक कि माउस सामान्य सतर्कता पर वापस न आ जाए। फिर सर्जरी के बाद अड़तालीस घंटाटे के लिए हर बारह घंटाटे में एनाल्जेसिया की निगरानी करें और प्रदान करें। प्राथमिक ट्यूमर पुनरावृत्ति या दूर पुनरावृत्ति मूल्यांकन के लिए, प्रति सप्ताह एक बार चूहों की निगरानी करें, बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग सिस्टम का उपयोग करके सर्जरी के बाद सप्ताह शुरू करें। बायोलुमिनेसेंस इमेजिंग का उपयोग प्राथमिक ट्यूमर के शोधन के बाद फेफड़ों में दूर के ट्यूमर पुनरावृत्ति की पहचान करने के लिए किया गया था। इस मॉडल का उपयोग पेरीओपरेटिव अवधि के दौरान होने वाली घटनाओं का आकलन करने के लिए किया जा सकता है। प्रोपोफोल के तहत कैंसर सर्जरी के चौबीस घंटाटे बाद, परिसंचारी प्लाज्मा साइटोकिन्स का मूल्यांकन किया गया। पार्श्व पूंछ की नस को तेजी से कैनुलेट करने और सेवोफ्लुरेन एक्सपोजर अवधि को कम करने के लिए आवश्यक अभ्यास। सेवोफ्लुरेन को धीरे-धीरे डाउन-टाइटेट किया जाना चाहिए क्योंकि प्रोपोफोल बोलस को ओवर-सेडेशन को रोकने के लिए प्रशासित किया जाता है। इस विधि का उपयोग कार्डियक सर्जरी या गंभीर बीमारी, जैसे सेप्सिस के माउस मॉडल में प्रोपोफोल संज्ञाहरण के प्रभाव की जांच करने के लिए किया जा सकता है। |
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को आईआईआरएफ (इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) की तरफ से जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को देश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय घोषित किया गया है।
- शिक्षण संस्थानों में शिक्षण,अनुसंधान गुणवत्ता व उत्पादकता, प्लेसमेंट, उद्योग से जुड़ाव, प्रतिष्ठा व छवि समेत कई मापदंडों को आधार बनाकर आईआईआरएफ रैंकिंग देती है।
- देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में बीएचयू को 1000 में 982.95 अंक दिये गए हैं। पहले स्थान पर आए जेएनयू को 983.12 अंक और तीसरे स्थान पर एएमयू को 982.88 अंक मिले हैं।
- अन्य विशिष्ट विश्वविद्यालयों में जामिया मिलिया इस्लामिया, हैदराबाद विश्वविद्यालय, डीयू और पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं।
- रैंक तालिका में बीएचयू को प्लेसमेंट और इंटरनेशनल आउटलुक के मामले में जेएनयू से ज्यादा अंक मिले हैं, जबकि शिक्षण, शोध, प्लेसमेंट व्यवस्था में यह मामूली अंतर से टॉप यूनिवर्सिटी से पीछे रहा है। पहले स्थान पर आए जेएनयू से बीएचयू को 0.17 अंक ही कम मिले हैं।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न पोषण वृद्धि निगरानी उपकरण उपलब्ध करवाने के लिये 16.97 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
- मुख्यमंत्री के इस निर्णय से आंगनबाड़ी केंद्रों में इंफेंटोमीटर, स्टेडियोमीटर, वज़न मापने की मशीन आदि उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
- इससे शिशु एवं माताओं के वज़न, लंबाई सहित विभिन्न पोषण सूचकांकों की सटीक जानकारी मिल सकेगी एवं उन्हें वांछित पोषण दिया जा सकेगा।
- उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के 23 लाख लघु एवं सीमांत कृषकों को प्रमुख फसलों के प्रमाणित किस्मों के बीज मिनिकिट निःशुल्क वितरित करने के लिये 128.57 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
- प्रदेश के प्रत्येक किसान को बीज मिनिकिट में संकर मक्का के 5 किग्रा., सरसों के 2 किग्रा., मूंग व मोठ के 4-4 किग्रा. एवं तिल के 1 किग्रा. प्रमाणित किस्मों के बीज निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
- जनजातीय कृषकों हेतु जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा तथा गैर जनजातीय कृषकों हेतु कृषि विभाग द्वारा बीज मिनिकिट की खरीद राजस्थान राज्य बीज निगम/राष्ट्रीय बीज निगम से की जाएगी।
- इन मिनिकिट का वितरण कृषि विभाग द्वारा राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा।
- उल्लेखनीय है कि राज्य में बीज उत्पादन बढ़ाने तथा लघु और सीमांत किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाने के लिये 'राजस्थान बीज उत्पादन एवं वितरण मिशन' चलाया जा रहा है। इस मिशन के उत्कृष्ट परिणामों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
- विदित है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो और राजनगर में जल प्रदाय व्यवस्था का प्रायोगिक परीक्षण प्रारंभ हो गया है।
- दोनों नगरों में स्वच्छ जल पहुँचाने के लिये कुटनी डैम पर 10 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। दोनों निकायों में जल प्रदाय परियोजना की 10 वर्षों के संचालन और संधारण के साथ संयुक्त रूप से लागत लगभग 69 करोड़ रुपए है।
- खजुराहो और राजनगर में 7 ओव्हर हेड टैंक निर्मित किये गए हैं, हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचाने के लिये दोनों नगरों में लगभग 150 किलोमीटर वितरण लाइन बिछाई गई है। खजुराहो में 3500 घर और राजनगर में 2000 घर में नल कनेक्शन दिये गए हैं।
- उल्लेखनीय है कि इस योजना में मीटरयुक्त नल कनेक्शन दिये जा रहे हैं। इसका लाभ यह होगा कि भविष्य में रहवासियों को पानी की उपयोगिता के अनुसार ही भुगतान करना होगा जो कि काफी किफायती रहेगा।
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से इन नगरों में जल प्रदाय परियोजना पर कार्य किया गया है।
- इससे अब यहाँ के निवासियों के घरों में शुद्ध जल पहुँच रहा है। पानी के लिये अब लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं है। इससे पानी भरने में व्यर्थ जाने वाले समय का सदुपयोग हो रहा है। पानी का दबाब भी पर्याप्त है, जिससे मोटर लगाने की जरूरत नहीं रहती।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने राज्य में छात्र-छात्राओं को उत्तम गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिये गुरुग्राम ज़िले के पाथवेज स्कूल में शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर की उपस्थिति में जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड) के इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किये।
- राज्य के शिक्षा स्तर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिये राज्य विद्यालय शिक्षा बोर्ड एवं आईबी बोर्ड के साथ एमओयू किया गया है।
- इस मौके पर शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आईबी बोर्ड द्वारा समय-समय पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अध्यापन के स्तर में सुधार के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी उत्तम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकेगी।
- उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्वीकार्यता होगी। इस दिशा में जल्द ही प्रदेश के विद्यार्थियों को सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
- ज्ञातव्य है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. वीपी यादव के बेहतर शैक्षणिक, सुधारात्मक व सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण ही बोर्ड नई ऊँचाइयां छू रहा है। बहुत कम समय के कार्यकाल में उन्होंने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधन, प्रथम बार पाठ्य योजना व चरणबद्ध मूल्यांकन योजना तैयार करवाने जैसी कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के दुर्ग विकासखंड के ग्राम पंचायत चंदखुरी में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) के अंतर्गत 2 करोड़ की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया गया है।
- रीपा के अंदर एक प्रशासनिक क्षेत्र का निर्माण किया गया है, जिसमें बैंकिंग सुविधा हेतु क्योस्क, इंटरनेट सुविधा हेतु वाईफाई कनेक्शन. राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी हेतु हेल्पडेस्क का निर्माण किया गया है एवं रीपा परिसर के मध्य में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित की गई है।
- रीपा केंद्र में युवाओं द्वारा पैकेज्ड मिल्क, दही व खोवा उत्पादन किया जाता है। इसके उत्पादन हेतु प्रशासन द्वारा आवश्यक मशीनें रीपा स्थल पर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र की मांग के अनुरूप निकट भविष्य में मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट में नए उत्पादों को भी स्थान दिया जाएगा।
- इस यूनिट से आसपास के क्षेत्र के कुल 41 लोगों को रोज़गार का अवसर प्रदान किया जाएगा। उद्यम के सफल संचालन के लिये ज़िला प्रशासन द्वारा प्राइवेट कंपनियों के साथ अनुबंध कर लोकल बाज़ारों में बिक्री सुनिश्चित की जा रही है।
- इसके अलावा तैयार उत्पादों को शासकीय विभागों में भी सप्लाई किया जाएगा, ताकि उत्पाद की खपत सुनिश्चित कर कार्य कर रहे श्रमिकों को रोज़गार की गारंटी प्रदान कर उनके भविष्य को आर्थिक दृष्टिकोण से बेहतर और समृद्ध बनाया जा सके।
चर्चा में क्यों?
29 मई, 2023 को उत्तराखंड सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश की 1114 ग्राम पंचायतों के सभी सरकारी कार्यालयों, निकायों में जल्द ही फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) और बीएसएनएल के बीच करार हुआ है।
- आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि 50 करोड़ की इस परियोजना के लिये बीएसएनएल के साथ करार किया गया है।
- इसके तहत 3090 फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन दिये जाएंगे। साथ ही, अगले पाँच सालों तक इनकी देखरेख भी बीएसएनएल ही सँभालेगा।
- गौरतलब है कि पिछले साल एफटीटीएच योजना के लिये सरकार ने 50 करोड़ का बजट जारी किया था, लेकिन समय से काम शुरू नहीं हो पाया। 31 मार्च के बाद बजट लैप्स होने से बचाने के लिये सरकार ने इस साल दोबारा यह बजट दिया है।
- इस योजना के तहत बीएसएनएल प्रदेश की 1114 ग्राम पंचायतों में एफटीटीएस सेवा देगा। इसके दायरे में उस ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी संस्थानों से लेकर पंचायत घर तक शामिल होंगे। इन सभी जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी।
- विदित हो कि भारत नेट-1 के तहत जिन ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम बीएसएनएल को दिया गया था, उसे तय समय में वह पूरा नहीं कर पाया था।
| चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को आईआईआरएफ की तरफ से जारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को देश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। - शिक्षण संस्थानों में शिक्षण,अनुसंधान गुणवत्ता व उत्पादकता, प्लेसमेंट, उद्योग से जुड़ाव, प्रतिष्ठा व छवि समेत कई मापदंडों को आधार बनाकर आईआईआरएफ रैंकिंग देती है। - देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में बीएचयू को एक हज़ार में नौ सौ बयासी.पचानवे अंक दिये गए हैं। पहले स्थान पर आए जेएनयू को नौ सौ तिरासी.बारह अंक और तीसरे स्थान पर एएमयू को नौ सौ बयासी.अठासी अंक मिले हैं। - अन्य विशिष्ट विश्वविद्यालयों में जामिया मिलिया इस्लामिया, हैदराबाद विश्वविद्यालय, डीयू और पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं। - रैंक तालिका में बीएचयू को प्लेसमेंट और इंटरनेशनल आउटलुक के मामले में जेएनयू से ज्यादा अंक मिले हैं, जबकि शिक्षण, शोध, प्लेसमेंट व्यवस्था में यह मामूली अंतर से टॉप यूनिवर्सिटी से पीछे रहा है। पहले स्थान पर आए जेएनयू से बीएचयू को शून्य.सत्रह अंक ही कम मिले हैं। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न पोषण वृद्धि निगरानी उपकरण उपलब्ध करवाने के लिये सोलह.सत्तानवे करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है। - मुख्यमंत्री के इस निर्णय से आंगनबाड़ी केंद्रों में इंफेंटोमीटर, स्टेडियोमीटर, वज़न मापने की मशीन आदि उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। - इससे शिशु एवं माताओं के वज़न, लंबाई सहित विभिन्न पोषण सूचकांकों की सटीक जानकारी मिल सकेगी एवं उन्हें वांछित पोषण दिया जा सकेगा। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के तेईस लाख लघु एवं सीमांत कृषकों को प्रमुख फसलों के प्रमाणित किस्मों के बीज मिनिकिट निःशुल्क वितरित करने के लिये एक सौ अट्ठाईस.सत्तावन करोड़ रुपए के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी है। - प्रदेश के प्रत्येक किसान को बीज मिनिकिट में संकर मक्का के पाँच किग्रा., सरसों के दो किग्रा., मूंग व मोठ के चार-चार किग्रा. एवं तिल के एक किग्रा. प्रमाणित किस्मों के बीज निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। - जनजातीय कृषकों हेतु जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा तथा गैर जनजातीय कृषकों हेतु कृषि विभाग द्वारा बीज मिनिकिट की खरीद राजस्थान राज्य बीज निगम/राष्ट्रीय बीज निगम से की जाएगी। - इन मिनिकिट का वितरण कृषि विभाग द्वारा राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। - उल्लेखनीय है कि राज्य में बीज उत्पादन बढ़ाने तथा लघु और सीमांत किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाने के लिये 'राजस्थान बीज उत्पादन एवं वितरण मिशन' चलाया जा रहा है। इस मिशन के उत्कृष्ट परिणामों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। - विदित है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो और राजनगर में जल प्रदाय व्यवस्था का प्रायोगिक परीक्षण प्रारंभ हो गया है। - दोनों नगरों में स्वच्छ जल पहुँचाने के लिये कुटनी डैम पर दस एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। दोनों निकायों में जल प्रदाय परियोजना की दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ संयुक्त रूप से लागत लगभग उनहत्तर करोड़ रुपए है। - खजुराहो और राजनगर में सात ओव्हर हेड टैंक निर्मित किये गए हैं, हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचाने के लिये दोनों नगरों में लगभग एक सौ पचास किलोग्राममीटर वितरण लाइन बिछाई गई है। खजुराहो में तीन हज़ार पाँच सौ घर और राजनगर में दो हज़ार घर में नल कनेक्शन दिये गए हैं। - उल्लेखनीय है कि इस योजना में मीटरयुक्त नल कनेक्शन दिये जा रहे हैं। इसका लाभ यह होगा कि भविष्य में रहवासियों को पानी की उपयोगिता के अनुसार ही भुगतान करना होगा जो कि काफी किफायती रहेगा। - नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से इन नगरों में जल प्रदाय परियोजना पर कार्य किया गया है। - इससे अब यहाँ के निवासियों के घरों में शुद्ध जल पहुँच रहा है। पानी के लिये अब लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं है। इससे पानी भरने में व्यर्थ जाने वाले समय का सदुपयोग हो रहा है। पानी का दबाब भी पर्याप्त है, जिससे मोटर लगाने की जरूरत नहीं रहती। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने राज्य में छात्र-छात्राओं को उत्तम गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिये गुरुग्राम ज़िले के पाथवेज स्कूल में शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर की उपस्थिति में जेनेवा के इंटरनेशनल बैकलॉरिएट के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किये। - राज्य के शिक्षा स्तर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिये राज्य विद्यालय शिक्षा बोर्ड एवं आईबी बोर्ड के साथ एमओयू किया गया है। - इस मौके पर शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आईबी बोर्ड द्वारा समय-समय पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अध्यापन के स्तर में सुधार के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी उत्तम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकेगी। - उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्वीकार्यता होगी। इस दिशा में जल्द ही प्रदेश के विद्यार्थियों को सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। - ज्ञातव्य है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. वीपी यादव के बेहतर शैक्षणिक, सुधारात्मक व सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण ही बोर्ड नई ऊँचाइयां छू रहा है। बहुत कम समय के कार्यकाल में उन्होंने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधन, प्रथम बार पाठ्य योजना व चरणबद्ध मूल्यांकन योजना तैयार करवाने जैसी कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के दुर्ग विकासखंड के ग्राम पंचायत चंदखुरी में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के अंतर्गत दो करोड़ की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया गया है। - रीपा के अंदर एक प्रशासनिक क्षेत्र का निर्माण किया गया है, जिसमें बैंकिंग सुविधा हेतु क्योस्क, इंटरनेट सुविधा हेतु वाईफाई कनेक्शन. राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी हेतु हेल्पडेस्क का निर्माण किया गया है एवं रीपा परिसर के मध्य में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित की गई है। - रीपा केंद्र में युवाओं द्वारा पैकेज्ड मिल्क, दही व खोवा उत्पादन किया जाता है। इसके उत्पादन हेतु प्रशासन द्वारा आवश्यक मशीनें रीपा स्थल पर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र की मांग के अनुरूप निकट भविष्य में मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट में नए उत्पादों को भी स्थान दिया जाएगा। - इस यूनिट से आसपास के क्षेत्र के कुल इकतालीस लोगों को रोज़गार का अवसर प्रदान किया जाएगा। उद्यम के सफल संचालन के लिये ज़िला प्रशासन द्वारा प्राइवेट कंपनियों के साथ अनुबंध कर लोकल बाज़ारों में बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। - इसके अलावा तैयार उत्पादों को शासकीय विभागों में भी सप्लाई किया जाएगा, ताकि उत्पाद की खपत सुनिश्चित कर कार्य कर रहे श्रमिकों को रोज़गार की गारंटी प्रदान कर उनके भविष्य को आर्थिक दृष्टिकोण से बेहतर और समृद्ध बनाया जा सके। चर्चा में क्यों? उनतीस मई, दो हज़ार तेईस को उत्तराखंड सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश की एक हज़ार एक सौ चौदह ग्राम पंचायतों के सभी सरकारी कार्यालयों, निकायों में जल्द ही फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी और बीएसएनएल के बीच करार हुआ है। - आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि पचास करोड़ की इस परियोजना के लिये बीएसएनएल के साथ करार किया गया है। - इसके तहत तीन हज़ार नब्बे फाइबर टू द होम कनेक्शन दिये जाएंगे। साथ ही, अगले पाँच सालों तक इनकी देखरेख भी बीएसएनएल ही सँभालेगा। - गौरतलब है कि पिछले साल एफटीटीएच योजना के लिये सरकार ने पचास करोड़ का बजट जारी किया था, लेकिन समय से काम शुरू नहीं हो पाया। इकतीस मार्च के बाद बजट लैप्स होने से बचाने के लिये सरकार ने इस साल दोबारा यह बजट दिया है। - इस योजना के तहत बीएसएनएल प्रदेश की एक हज़ार एक सौ चौदह ग्राम पंचायतों में एफटीटीएस सेवा देगा। इसके दायरे में उस ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी संस्थानों से लेकर पंचायत घर तक शामिल होंगे। इन सभी जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी। - विदित हो कि भारत नेट-एक के तहत जिन ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम बीएसएनएल को दिया गया था, उसे तय समय में वह पूरा नहीं कर पाया था। |
यूनिवर्स बॉस के नाम से मशहूर वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल ने ऑस्ट्रेलिया में रविवार (27 नवंबर) को खेले गए टी-20 प्रदर्शनी मैच में तूफानी अर्धशतक जड़कर धमाल मचा दिया। प्रदर्शन मैच में एंडेवर हिल्स के लिए खेलते हुए 43 साल के गेल ने वेस्टर्न सबर्ब्ज़ के खिलाफ हुए मुकाबले में 65 गेंदों में 95 रनों की तूफानी पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान गेल ने आठ छक्के जड़े, यानी 48 रन उन्होंने आठ गेंदों में सिर्फ छक्कों से ही बना डाले।
गेल की इस पारी के दम पर एंडेवर हिल्स ने 4 विकेट के नुकसान पर 167 रन बनाए।
बता दें कि आईपीएल 2023 का ऑक्शन 23 दिसंबर को कोच्चि में होना है, ऐसे में उनकी ये पारी टीमों को उनकी आर्कषित कर सकती है। गेल आईपीएल के इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने आईपीएल 2022 के मेगा ऑक्शन से अपना नाम वापस लिया था।
| यूनिवर्स बॉस के नाम से मशहूर वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल ने ऑस्ट्रेलिया में रविवार को खेले गए टी-बीस प्रदर्शनी मैच में तूफानी अर्धशतक जड़कर धमाल मचा दिया। प्रदर्शन मैच में एंडेवर हिल्स के लिए खेलते हुए तैंतालीस साल के गेल ने वेस्टर्न सबर्ब्ज़ के खिलाफ हुए मुकाबले में पैंसठ गेंदों में पचानवे रनों की तूफानी पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान गेल ने आठ छक्के जड़े, यानी अड़तालीस रन उन्होंने आठ गेंदों में सिर्फ छक्कों से ही बना डाले। गेल की इस पारी के दम पर एंडेवर हिल्स ने चार विकेट के नुकसान पर एक सौ सरसठ रन बनाए। बता दें कि आईपीएल दो हज़ार तेईस का ऑक्शन तेईस दिसंबर को कोच्चि में होना है, ऐसे में उनकी ये पारी टीमों को उनकी आर्कषित कर सकती है। गेल आईपीएल के इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने आईपीएल दो हज़ार बाईस के मेगा ऑक्शन से अपना नाम वापस लिया था। |
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कप्तानगंज थाने पर तैनात सिपाही को अनुशासनहीनता के मामले मे बर्खास्त कर दिया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को यहां कहा कि कप्तानगंज थाने पर तैनात सिपाही दिग्विजय राय को एक अर्मयादित वीडियो वारयल करने के मामले मे निलंबित कर दिया गया था।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले कई दिनो से बार-बार चेतावनी के बाद भी सिपाही ने अनुशासनहीनता बरतते हुए कई वीडियो वारयल किये। इस बारे मे उसके परिजनो को जानकारी दिया गया था लेकिन वह अपने हरकतो से बाज नही आया जिसको लेकर कार्यवाही हुई है।
| उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कप्तानगंज थाने पर तैनात सिपाही को अनुशासनहीनता के मामले मे बर्खास्त कर दिया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को यहां कहा कि कप्तानगंज थाने पर तैनात सिपाही दिग्विजय राय को एक अर्मयादित वीडियो वारयल करने के मामले मे निलंबित कर दिया गया था। श्री सिंह ने कहा कि पिछले कई दिनो से बार-बार चेतावनी के बाद भी सिपाही ने अनुशासनहीनता बरतते हुए कई वीडियो वारयल किये। इस बारे मे उसके परिजनो को जानकारी दिया गया था लेकिन वह अपने हरकतो से बाज नही आया जिसको लेकर कार्यवाही हुई है। |
योगी राज में अपराधियों के बीच एनकाउंटर का खौफ, अब तक 1350!
यूपी से भीम राव अंबेडकर होंगे BSP के राज्यसभा उम्मीदवार, ऐसे हो सकती है जीत!
1993 में SP-BSP 'तालमेल' 'राम लहर' रोकने को था, क्या अब 'मोदी लहर' थामने में कामयाब होंगे?
समाजवादी पार्टी को बीएसपी का समर्थन लंबी रणनीति का संकेत तो नहीं?
| योगी राज में अपराधियों के बीच एनकाउंटर का खौफ, अब तक एक हज़ार तीन सौ पचास! यूपी से भीम राव अंबेडकर होंगे BSP के राज्यसभा उम्मीदवार, ऐसे हो सकती है जीत! एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में SP-BSP 'तालमेल' 'राम लहर' रोकने को था, क्या अब 'मोदी लहर' थामने में कामयाब होंगे? समाजवादी पार्टी को बीएसपी का समर्थन लंबी रणनीति का संकेत तो नहीं? |
अगर आपके जीवन में आर्थिक समस्याओं ने घर कर लिया है तो होली पर चंद्र उपाय आपकी सारी परेशानियों को दूर करने में मददगार होगा। इसके लिए बहुत ही सरल उपाय करने होंगे।
होली की रात में चंद्रोदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नजर आए, पर खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे और कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ अगरबत्ती या धूप अर्पित करें।
अब दूध को अर्घ्य दें। इसके बाद कोई सफेद प्रसाद तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। अंत में चंद्रमा से आर्थिक संकट दूर कर समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखाना बच्चों में बांट दें।
फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य अवश्य दें। कुछ ही दिनों में आप महसूस करेंगें कि आर्थिक संकट दूर होंगे और समृद्धि निरंतर बढ़ रही है।
यह भी पढ़ेंः करवा चौथ : निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार, चंद्रमा और सुहाग!
| अगर आपके जीवन में आर्थिक समस्याओं ने घर कर लिया है तो होली पर चंद्र उपाय आपकी सारी परेशानियों को दूर करने में मददगार होगा। इसके लिए बहुत ही सरल उपाय करने होंगे। होली की रात में चंद्रोदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नजर आए, पर खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे और कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ अगरबत्ती या धूप अर्पित करें। अब दूध को अर्घ्य दें। इसके बाद कोई सफेद प्रसाद तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। अंत में चंद्रमा से आर्थिक संकट दूर कर समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखाना बच्चों में बांट दें। फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य अवश्य दें। कुछ ही दिनों में आप महसूस करेंगें कि आर्थिक संकट दूर होंगे और समृद्धि निरंतर बढ़ रही है। यह भी पढ़ेंः करवा चौथ : निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार, चंद्रमा और सुहाग! |
आर्थिक अवधारणा व विधियो
शेयर घोटाले में बैंकों की अवांछित भूमिका1991 92 में भारत में हुए प्रतिभूति घोटाले (Securities scam) ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस सम्बन्ध में जानकीरमन समिति की प्रथम रिपोर्ट 31 मई 1992 को दूसरी रिपोर्ट 5 जुलाई 1992 को तीसरी रिपोर्ट 23 अगस्त, 1992 को, चौथी रिपोर्ट 4 मार्च 1993 को तथा पाचवों व अन्तिम रिपोर्ट मई 1993 के मध्य में पेश हुई थी, जिनमें इस घोटाले में बैंकों व सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं की अवाछित भूमिका पर प्रकाश डाला गया या 1 प्रथम रिपोर्ट में 3,079 करोड रु के अनियमित विनियोग के लेन देन का उल्लेख किया गया था और दूसरी रिपोर्ट में इसे बढ़ा कर 3,544 करोड़ रुपये किया गया और चौथी व पाचवीं रिपोर्ट में 4,025 करोड रु किया गया था। दूसरी रिपोर्ट में यह पाया गया था कि राष्ट्रीय आवास बैंक (जो भारतीय रिजर्व बैंक की एक सहायक इकाई है) ने 12712 करोड़ रु तक के जो विनियोग के लेन-देन किये, उनके लिए न तो आवश्यक सिक्यूरिटियाँ रखीं, न सब्सिडियरी - जनरल लेजर (SGL) फार्म रखे और न बैंकर्स रसीदें (BRs) रखीं । इन लेन-देनों से दलालों के विशिष्ट समूहों को विशेष लाभ पहुंचा था। कुछ सौदों में बैंकों ने बैंक ऑफ कराड व मैट्रोपोलोटन सहकारी बैंक द्वारा जारी किये गये SGL ट्रान्सफर फॉर्म रखे थे, जबकि ये दोनों बैंक बाद में समाप्त (liqudate) कर दिये गये। दूसरी रिपोर्ट के अनुसार चार विदेशी बैंकों-सोटी बैंक, स्टेण्डर्ड चार्टर्ड बैंक, बैंक ऑफ अमेरिका तथा ए. एन.जैड (ANZ) ग्रिन्डलेज बैंक का अश दो तिहाई लेन-देनों (TWo-Thurd Transactions) में पाया गया है। बैंकों ने अन्य बैंकों को कॉल मनो (Call Money) के तहत काफी बडे भुगतान दिखाये हैं। लेकिन प्राप्तकर्ता बैंकों के खातों में इसका जमा खर्च न दिखाया जाकर ये राशियाँ दलालों के खातों में जमा दिखाई गयी है। इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, धोखाधडी व घपलों के कारण काफी बदनानी हुई है और काफी संख्या में छोटे विनियोगकर्ता बर्बाद हुए हैं। कई अधिकारियों को निलम्बित किया गया है, और इस सम्बन्ध में सरकार दोषी व्यक्तियों को कठोर सजा देने के लिए सकल्प व्यक्त कर रही है। प्रतिभूति घोटाले की जाँच के लिए जुलाई 1992 में श्री रामनिवास मिर्धा की अध्यक्षता में नियुक्त संयुक्त समिति (JPC) को रिपोर्ट भी पेश की गयी थी, जिसको लेकर ससद में काफी गर्मागर्मी रहो और बाद में सरकार को 'एक्शन रिपोर्ट भी पेश करनी पड़ी। लेकिन देश के सासद पूरी तरह सतुष्ट नहीं हो सके। सरकार भविष्य में इस प्रकार के घोटालों को रोकने के लिए बैंकिंग प्रणाली पर कारगर नियंत्रण की व्यवस्था करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने इसे 'व्यवस्था की विफलता' (System Failure) का मामला बताया है, जबकि विरोधी पक्ष इसे 'सरकार की विफलता' (Failure on the Part of the government) माना है। बहरहाल इस घोटाले से भारत की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा है और भविष्य में इस प्रकार के घोटाले की पुनरावृत्ति मे सम्पूर्ण आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया समाप्त हो सकती है।
अत आगामी दशक में भारत की बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए बैंकों की वित्तीय स्थिति, लाभप्रदता, स्वायत्तता व प्रबंध व्यवस्था में काफी सुधार करने की आवश्य है। इसके लिए ब्याज नकद रूप में प्राप्त होने पर ही उसे बैंक की आप में दिखाया जाना चाहिए। परिसम्पत्तियों का उचित रूप से वर्गीकरण किया जाना चाहिए और घाटे की परिसम्पत्तियों के लिए कोई वित्तीय व्यवस्था की जानी चाहिए। पूँजी का जोखिमो | आर्थिक अवधारणा व विधियो शेयर घोटाले में बैंकों की अवांछित भूमिकाएक हज़ार नौ सौ इक्यानवे बानवे में भारत में हुए प्रतिभूति घोटाले ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस सम्बन्ध में जानकीरमन समिति की प्रथम रिपोर्ट इकतीस मई एक हज़ार नौ सौ बानवे को दूसरी रिपोर्ट पाँच जुलाई एक हज़ार नौ सौ बानवे को तीसरी रिपोर्ट तेईस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ बानवे को, चौथी रिपोर्ट चार मार्च एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को तथा पाचवों व अन्तिम रिपोर्ट मई एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के मध्य में पेश हुई थी, जिनमें इस घोटाले में बैंकों व सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं की अवाछित भूमिका पर प्रकाश डाला गया या एक प्रथम रिपोर्ट में तीन,उन्यासी करोड रु के अनियमित विनियोग के लेन देन का उल्लेख किया गया था और दूसरी रिपोर्ट में इसे बढ़ा कर तीन,पाँच सौ चौंतालीस करोड़ रुपये किया गया और चौथी व पाचवीं रिपोर्ट में चार,पच्चीस करोड रु किया गया था। दूसरी रिपोर्ट में यह पाया गया था कि राष्ट्रीय आवास बैंक ने बारह हज़ार सात सौ बारह करोड़ रु तक के जो विनियोग के लेन-देन किये, उनके लिए न तो आवश्यक सिक्यूरिटियाँ रखीं, न सब्सिडियरी - जनरल लेजर फार्म रखे और न बैंकर्स रसीदें रखीं । इन लेन-देनों से दलालों के विशिष्ट समूहों को विशेष लाभ पहुंचा था। कुछ सौदों में बैंकों ने बैंक ऑफ कराड व मैट्रोपोलोटन सहकारी बैंक द्वारा जारी किये गये SGL ट्रान्सफर फॉर्म रखे थे, जबकि ये दोनों बैंक बाद में समाप्त कर दिये गये। दूसरी रिपोर्ट के अनुसार चार विदेशी बैंकों-सोटी बैंक, स्टेण्डर्ड चार्टर्ड बैंक, बैंक ऑफ अमेरिका तथा ए. एन.जैड ग्रिन्डलेज बैंक का अश दो तिहाई लेन-देनों में पाया गया है। बैंकों ने अन्य बैंकों को कॉल मनो के तहत काफी बडे भुगतान दिखाये हैं। लेकिन प्राप्तकर्ता बैंकों के खातों में इसका जमा खर्च न दिखाया जाकर ये राशियाँ दलालों के खातों में जमा दिखाई गयी है। इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, धोखाधडी व घपलों के कारण काफी बदनानी हुई है और काफी संख्या में छोटे विनियोगकर्ता बर्बाद हुए हैं। कई अधिकारियों को निलम्बित किया गया है, और इस सम्बन्ध में सरकार दोषी व्यक्तियों को कठोर सजा देने के लिए सकल्प व्यक्त कर रही है। प्रतिभूति घोटाले की जाँच के लिए जुलाई एक हज़ार नौ सौ बानवे में श्री रामनिवास मिर्धा की अध्यक्षता में नियुक्त संयुक्त समिति को रिपोर्ट भी पेश की गयी थी, जिसको लेकर ससद में काफी गर्मागर्मी रहो और बाद में सरकार को 'एक्शन रिपोर्ट भी पेश करनी पड़ी। लेकिन देश के सासद पूरी तरह सतुष्ट नहीं हो सके। सरकार भविष्य में इस प्रकार के घोटालों को रोकने के लिए बैंकिंग प्रणाली पर कारगर नियंत्रण की व्यवस्था करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने इसे 'व्यवस्था की विफलता' का मामला बताया है, जबकि विरोधी पक्ष इसे 'सरकार की विफलता' माना है। बहरहाल इस घोटाले से भारत की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुँचा है और भविष्य में इस प्रकार के घोटाले की पुनरावृत्ति मे सम्पूर्ण आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया समाप्त हो सकती है। अत आगामी दशक में भारत की बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए बैंकों की वित्तीय स्थिति, लाभप्रदता, स्वायत्तता व प्रबंध व्यवस्था में काफी सुधार करने की आवश्य है। इसके लिए ब्याज नकद रूप में प्राप्त होने पर ही उसे बैंक की आप में दिखाया जाना चाहिए। परिसम्पत्तियों का उचित रूप से वर्गीकरण किया जाना चाहिए और घाटे की परिसम्पत्तियों के लिए कोई वित्तीय व्यवस्था की जानी चाहिए। पूँजी का जोखिमो |
(ई) दोनों ही में उच्चारण-भेद के कारण 'क' और 'प' दो वर्ग बनाये जा सकते हैं। कुछ भाषाओं में जहां 'प' मिलता है वहाँ दूसरों भाषाओं में उसके स्थान पर 'क' मिलता है, जैसे वेश में 'पम्प' (=पाँच ) का आइरिश में 'कोइक' है । 'प' वर्ग को ब्रिटानिक और 'क' वर्ग को गायलिक कहते हैं । इसके अतिरिक्त एक गालिक वर्ग भी है। इस प्रकार इसके ३ वर्ग है ।
निटानिक या विथोनिक
गोइडेलिफ था सायलिक
सिमरिक या वेल्श कार्निश •ब्रीटन या ग्रामरिकन आयरिश स्कॉच मैक्स
गालिक, रोम के राजा प्रथम सोज़र के समय में बोली जाती थी । २८० ई० पू० में यह एशिया माइनर में पहुँच गई था। अब इस भाषा का दर्शन कुछ स्थान तथा आदमियों के नामों, पुराने लेखकों द्वारा उद्धृत शब्दों, सिक्कों और लगभग २५ अभिलेखों में ही मिलता है, अतः इसके विषय में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा
सकता ।
सिमरिक या वेल्श 'प' वर्ग को एक शखा है। इसके बोलने वाले आज भी हैं । इसका प्रधान क्षेत्र वेल्श है । इसके आठवीं सदी तक के लेख मिलते हैं । साहित्य का आरम्भ ११वीं सदी से हुआ है और १३वों तक कविता आदि की पर्याप्त संख्या में रचना हुई है। कुछ रचना आज भी होती है । इसके बोलने वालों को अपनी भाषा का वड़ा गर्व है ।
कार्निश कार्नवाल की एक बोलो थो । १७७० ई० के लगभग इसको इतिथी हो गई । इसका प्राचीन साहित्य हमें अवश्य प्राप्त है, जिसकी प्रधान पुस्तक १५वीं सदो की एक 'रहस्य-नाटिका है।
ब्रोटन फ्रांस के ब्रिटेनी प्रदेश में बोली जाती है। इसे आमेरिकन भी कहते हैं । यथार्थतः यह कार्निश की ही एक शाखा है, जो पाँचवीं सदी के लगभग अलग हुई थी । इसके पुराने उदाहरण दसवों सदी तक के मिलते हैं । १२वी सदो से साहित्य भी मिलता है ।
उत्तरी में निम्न जर्मन को । मध्यवर्ती शाखा दोनों के बीच की है। इसमें दोनों को ही कुछ-कुछ बातें आ गई हैं। उत्तरी गाखा से हो नीदरलैंड को बोलियों का भी विकास हुआ है, जिनका साहित्य तेरहवी सदी से मिलता है। इन बोलियों में डच और हालैंड की बोलियाँ प्रधान है। फ्लेनिश फ्लेंडर लोगों की बोली है, जो प्रमुखतः उच्चारण में हो इच से भिन्न है । 'वारवंत' बोली भी इमो का साधारण भिन्नता लिये हुए पा रूप है।
ट्यूटानिक को पश्चिमी शाखा की ऊपर दो गई सभी भाषाएँ तथा वोलियाँ केवल मध्य (जो तटस्थ है) तथा दक्षिणी (जो उच्च जर्मन में हैं ) को छोड़कर निम्न जर्मन के अन्तर्गत आती है।
अब हम उच्च जर्मन को ले सकते हैं। संपूर्ण जर्मनी तथा आस्ट्रिया के एक बड़े भाग की यह साहित्यिक और संस्कृत भाषा है। इसमें प्रधान शाखाएँ है। अलमानिन का क्षेत्र, स्विट्जरलैंड का जर्मन भाषा-भाषी प्रदेश, अलसेम तथा वादेन के दक्षिण में है । स्ववियन पfreni ववेरिया, उन्हेंमबर्ग आदि में बोली जाती है। वेरियन बोलने वाले शेप बवेरिया तथा आस्ट्रिया के एक बड़े भाग में है ।
उच्च जर्मन का इतिहाम तीन कालों में विभक्त है। प्राचीन उन जर्मन द्वितीय वर्ण परिवर्तन के पश्चात् ८वी सदी से आरम्भ होकर वारवी तक है। इसमें कुछ पुरानी कविताएं, बाइबिल के मंडित अंश तथा कुछ और लैस आदि मिलते हैं। इसके बाद मध्य जर्मन का समय है। 'निवेलुंजेन' काव्य को रचना में हुई है। वर्तमान उच्न जर्मन बहुत ही गंभीर और संस्कृत है। यह रचनात्मक ( building language भाषा है, जिसमें किसी भी भाषा के किसी भी शब्द का अनुवाद आमानी में किया जा सकता है। पूरे ट्यूटानिक परिवार में उच्च जगंन अपेक्षाकृत अपने मूल के सबसे अधिक निकट है। इनमें अंग्रेजी, फ्रेंच आदि में कुछ शब्द अवस्य उधार लिये गये है. पर उनका भी प्रायः स्वदेशीकरण कर लिया गया है। उच्च जर्मन भाषियों ने त का भी गम्भीर अध्ययन किया है, और दर्शन एवं भाषा-विज्ञान के क्षेत्र में उनका प्रमुख स्थान रहा है।
ट्युटानिक वर्ग की सबसे प्राचीन भाषा गायक है। इसके अवशेष एक मिन पुस्लर एवं उलफिला नामक पादरी द्वारा दिये गये बाइबिल के अनुवाद के में मिलते हैं। बाइबिल को पाडुलिपि लगभग पांचवीसदी की है,सका रचनाफार ३५० ६० के समीप का है।
इसका क्षेत्रका
के दक्षिण और दक्षिण में था। कुछ
और इटली में भी हुआ पर यहाँ से पो हो यह समाप्त हो गई। कुष्प वागर के किनारे यह भाषा न सही तर ही और कुछ स्थानों पर | दोनों ही में उच्चारण-भेद के कारण 'क' और 'प' दो वर्ग बनाये जा सकते हैं। कुछ भाषाओं में जहां 'प' मिलता है वहाँ दूसरों भाषाओं में उसके स्थान पर 'क' मिलता है, जैसे वेश में 'पम्प' का आइरिश में 'कोइक' है । 'प' वर्ग को ब्रिटानिक और 'क' वर्ग को गायलिक कहते हैं । इसके अतिरिक्त एक गालिक वर्ग भी है। इस प्रकार इसके तीन वर्ग है । निटानिक या विथोनिक गोइडेलिफ था सायलिक सिमरिक या वेल्श कार्निश •ब्रीटन या ग्रामरिकन आयरिश स्कॉच मैक्स गालिक, रोम के राजा प्रथम सोज़र के समय में बोली जाती थी । दो सौ अस्सी ईशून्य पूशून्य में यह एशिया माइनर में पहुँच गई था। अब इस भाषा का दर्शन कुछ स्थान तथा आदमियों के नामों, पुराने लेखकों द्वारा उद्धृत शब्दों, सिक्कों और लगभग पच्चीस अभिलेखों में ही मिलता है, अतः इसके विषय में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता । सिमरिक या वेल्श 'प' वर्ग को एक शखा है। इसके बोलने वाले आज भी हैं । इसका प्रधान क्षेत्र वेल्श है । इसके आठवीं सदी तक के लेख मिलते हैं । साहित्य का आरम्भ ग्यारहवीं सदी से हुआ है और तेरहवों तक कविता आदि की पर्याप्त संख्या में रचना हुई है। कुछ रचना आज भी होती है । इसके बोलने वालों को अपनी भाषा का वड़ा गर्व है । कार्निश कार्नवाल की एक बोलो थो । एक हज़ार सात सौ सत्तर ईशून्य के लगभग इसको इतिथी हो गई । इसका प्राचीन साहित्य हमें अवश्य प्राप्त है, जिसकी प्रधान पुस्तक पंद्रहवीं सदो की एक 'रहस्य-नाटिका है। ब्रोटन फ्रांस के ब्रिटेनी प्रदेश में बोली जाती है। इसे आमेरिकन भी कहते हैं । यथार्थतः यह कार्निश की ही एक शाखा है, जो पाँचवीं सदी के लगभग अलग हुई थी । इसके पुराने उदाहरण दसवों सदी तक के मिलते हैं । बारहवी सदो से साहित्य भी मिलता है । उत्तरी में निम्न जर्मन को । मध्यवर्ती शाखा दोनों के बीच की है। इसमें दोनों को ही कुछ-कुछ बातें आ गई हैं। उत्तरी गाखा से हो नीदरलैंड को बोलियों का भी विकास हुआ है, जिनका साहित्य तेरहवी सदी से मिलता है। इन बोलियों में डच और हालैंड की बोलियाँ प्रधान है। फ्लेनिश फ्लेंडर लोगों की बोली है, जो प्रमुखतः उच्चारण में हो इच से भिन्न है । 'वारवंत' बोली भी इमो का साधारण भिन्नता लिये हुए पा रूप है। ट्यूटानिक को पश्चिमी शाखा की ऊपर दो गई सभी भाषाएँ तथा वोलियाँ केवल मध्य तथा दक्षिणी को छोड़कर निम्न जर्मन के अन्तर्गत आती है। अब हम उच्च जर्मन को ले सकते हैं। संपूर्ण जर्मनी तथा आस्ट्रिया के एक बड़े भाग की यह साहित्यिक और संस्कृत भाषा है। इसमें प्रधान शाखाएँ है। अलमानिन का क्षेत्र, स्विट्जरलैंड का जर्मन भाषा-भाषी प्रदेश, अलसेम तथा वादेन के दक्षिण में है । स्ववियन पfreni ववेरिया, उन्हेंमबर्ग आदि में बोली जाती है। वेरियन बोलने वाले शेप बवेरिया तथा आस्ट्रिया के एक बड़े भाग में है । उच्च जर्मन का इतिहाम तीन कालों में विभक्त है। प्राचीन उन जर्मन द्वितीय वर्ण परिवर्तन के पश्चात् आठवी सदी से आरम्भ होकर वारवी तक है। इसमें कुछ पुरानी कविताएं, बाइबिल के मंडित अंश तथा कुछ और लैस आदि मिलते हैं। इसके बाद मध्य जर्मन का समय है। 'निवेलुंजेन' काव्य को रचना में हुई है। वर्तमान उच्न जर्मन बहुत ही गंभीर और संस्कृत है। यह रचनात्मक ( building language भाषा है, जिसमें किसी भी भाषा के किसी भी शब्द का अनुवाद आमानी में किया जा सकता है। पूरे ट्यूटानिक परिवार में उच्च जगंन अपेक्षाकृत अपने मूल के सबसे अधिक निकट है। इनमें अंग्रेजी, फ्रेंच आदि में कुछ शब्द अवस्य उधार लिये गये है. पर उनका भी प्रायः स्वदेशीकरण कर लिया गया है। उच्च जर्मन भाषियों ने त का भी गम्भीर अध्ययन किया है, और दर्शन एवं भाषा-विज्ञान के क्षेत्र में उनका प्रमुख स्थान रहा है। ट्युटानिक वर्ग की सबसे प्राचीन भाषा गायक है। इसके अवशेष एक मिन पुस्लर एवं उलफिला नामक पादरी द्वारा दिये गये बाइबिल के अनुवाद के में मिलते हैं। बाइबिल को पाडुलिपि लगभग पांचवीसदी की है,सका रचनाफार तीन सौ पचास साठ के समीप का है। इसका क्षेत्रका के दक्षिण और दक्षिण में था। कुछ और इटली में भी हुआ पर यहाँ से पो हो यह समाप्त हो गई। कुष्प वागर के किनारे यह भाषा न सही तर ही और कुछ स्थानों पर |
रक्षा प्रदर्शनी-2020 के साथ-साथ लखनऊ में 6 फरवरी, 2020 को पांचवां भारत-रूस सैन्य औद्योगिक सम्मेलन (आईआरएमआईसी) का आयोजन किया गया। भारत की ओर से रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार तथा रूसी संघ की ओर से उद्योग एवं व्यापार उपमंत्री श्री ओलेग रियाजांत्सेव ने सम्मेलन की अध्यक्षता की।
अपने शुरूआती वक्तव्य में डॉ. अजय कुमार ने बताया कि भारत में कल-पुर्जों के संयुक्त उत्पादन के बारे में अंतर-सरकारी समझौते (आईजीए) पर 4 सितम्बर, 2019 को रूस के व्लादिवोस्तक में हस्ताक्षर किए गए थे। इस अंतर-सरकारी समझौते में भारतीय रक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल के लिए रूस के मौलिक उपकरणों के कल-पुर्जों के निर्माण के लिए भारतीय उद्योग के साथ रूसी ओईएम की साझेदारी के लिए कार्यक्रम शामिल हैं। डॉ. अजय कुमार ने कहा कि भारत की ओर से दोनों देशों की कम्पनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के कई उपाय किए गए हैं तथा हम भारत में निर्माण की शुरूआत जल्द होने की आशा करते हैं। रूस के उपमंत्री श्री ओलेग रियाजांत्सेव ने कहा कि रूस आईजीए के तहत सहयोग में सक्रिय भागीदारी करेगा और भारत में कल-पुर्जों के निर्माण के लिए सभी आवश्यक कदम उठायेगा।
इस सम्मेलन में भारत तथा रूस की रक्षा क्षेत्र की कम्पनियों के बहुत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मेक इन इंडिया पहल के तहत अन्तर-सरकारी समझौते के उद्देश्यों की पूर्ति के उपायों के बारे में चर्चा की।
सम्मेलन के दौरान, रूसी ओईएम तथा भारतीय कम्पनियों के बीच 14 सहमति पत्रों का आदान-प्रदान किया गया।
| रक्षा प्रदर्शनी-दो हज़ार बीस के साथ-साथ लखनऊ में छः फरवरी, दो हज़ार बीस को पांचवां भारत-रूस सैन्य औद्योगिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत की ओर से रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार तथा रूसी संघ की ओर से उद्योग एवं व्यापार उपमंत्री श्री ओलेग रियाजांत्सेव ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। अपने शुरूआती वक्तव्य में डॉ. अजय कुमार ने बताया कि भारत में कल-पुर्जों के संयुक्त उत्पादन के बारे में अंतर-सरकारी समझौते पर चार सितम्बर, दो हज़ार उन्नीस को रूस के व्लादिवोस्तक में हस्ताक्षर किए गए थे। इस अंतर-सरकारी समझौते में भारतीय रक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल के लिए रूस के मौलिक उपकरणों के कल-पुर्जों के निर्माण के लिए भारतीय उद्योग के साथ रूसी ओईएम की साझेदारी के लिए कार्यक्रम शामिल हैं। डॉ. अजय कुमार ने कहा कि भारत की ओर से दोनों देशों की कम्पनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के कई उपाय किए गए हैं तथा हम भारत में निर्माण की शुरूआत जल्द होने की आशा करते हैं। रूस के उपमंत्री श्री ओलेग रियाजांत्सेव ने कहा कि रूस आईजीए के तहत सहयोग में सक्रिय भागीदारी करेगा और भारत में कल-पुर्जों के निर्माण के लिए सभी आवश्यक कदम उठायेगा। इस सम्मेलन में भारत तथा रूस की रक्षा क्षेत्र की कम्पनियों के बहुत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मेक इन इंडिया पहल के तहत अन्तर-सरकारी समझौते के उद्देश्यों की पूर्ति के उपायों के बारे में चर्चा की। सम्मेलन के दौरान, रूसी ओईएम तथा भारतीय कम्पनियों के बीच चौदह सहमति पत्रों का आदान-प्रदान किया गया। |
माना जा रहा है कि 2022 में चीन में नवजात की संख्या 10 मिलियन से भी कम रहने वाली है, जो पिछले साल 10.6 मिलियन रहा था. चीनी एक्सपर्ट मानते हैं कि 80 साल से भी कम समय में चीन की जनसंख्या का आकार 45% तक कम हो सकता है.
चीन में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कई समस्याएं पैदा हुई हैं, जो खासतौर पर मरीजों के इलाज से संबंधित हैं. मसलन कोरोना के इतर परेशानियों के लिए डॉक्टरों से अपॉइनमेंट भी मुश्किल ही मिलती है. कोरोना ऐसे तो दुनियाभर में गर्भवति महिलाओं के लिए कहर बनकर टूटा, लेकिन चीन में इससे आने वाले समय में चिंता और गहरा सकती है. कहा जा रहा है कि लोग यहां अपना बच्चा भी पैदा नहीं करना चाहते, जिससे चीन की डेमोग्राफी में एक बड़े बदलाव की आशंका है.
अस्पतालों में डॉक्टर कोरोना मरीजों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे गर्भवति महिलाएं अपना डिलिवरी चीन में नहीं कराना चाहतीं. झांग क़ी, एक 31 वर्षीय चीनी महिला हैं जिन्होंने अपनी आपबीती बताई. उन्होंने कहा कि वह कभी नहीं चाहेंगी कि मां बने, खासकर तब जब उन्हें किसी पब्लिक अस्पताल में डिलिवरी की नौबत आए. कमोबेश यही हाल पूरे चीन में देखा जा रहा है. 17 जनवरी को चीन अपनी आबादी पर डेटा जारी करने वाला है, जिसपर कई सवाल खड़े हो सकते हैं.
जानकार मानते हैं कि 1961 के ग्रेट फेमिन के बाद ऐसा पहली बार होगा जब चीन की आबादी में गिरावट देखने को मिल सकती है, जो ग्लोबल इकोनॉमी और वर्ल्ड ऑर्डर में बड़ा शिफ्ट साबित हो सकता है. माना जा रहा है कि 2022 में चीन में नवजात की संख्या 10 मिलियन से भी कम रहने वाली है, जो पिछले साल 10.6 मिलियन रहा था - और यह 2020 की तुलना में भी 11.6 फीसदी कम था. चीनी एक्सपर्ट मानते हैं कि 80 साल से भी कम समय में चीन की जनसंख्या का आकार 45% तक कम हो सकता है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में चीन की आबादी 1.4 अरब तक पहुंच गई, जहां आबादी में उसी साल 480,000 का इजाफा देखा गया था. युनाइटेड नेशन द्वारा अनुमानित है कि चीन की आबादी इस साल 2022 से कम होने लगेगी, जबकि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. यूएन एक्सपर्ट मानते हैं कि 2050 तक चीन की आबादी में 109 मिलियन की गिरावट आ सकती है, जो 2019 में अनुमानित संख्या के मुकाबले तीन गुना कम है.
रिपोर्ट्स बताते हैं कि 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में फर्टिलिटी रेट लगातार कम हो रहे हैं, और इस लिस्ट में चीन 1.18 के साथ टॉप पर है, जो कि स्टेबल पॉपुलेशन के ओईसीडी स्टैंडर्ड 2.1 से भी कम है. चीन में 1980-2015 तक वन-चाइल्ड पॉलिसी लागू थे, और आधिकारिक रूप से माना था चीन की आबादी में गिरावट आएगी. चीनी नेशनल हेल्थ कमिशन ने भी कहा था कि 2025 से चीन की आबादी में गिरावट आएगी. हालांकि, अक्टूबर महीने में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह कहा था कि उनकी सरकार देश में बर्थ रेट बढ़ाने के लिए नीतियां बनाएगी.
| माना जा रहा है कि दो हज़ार बाईस में चीन में नवजात की संख्या दस मिलियन से भी कम रहने वाली है, जो पिछले साल दस.छः मिलियन रहा था. चीनी एक्सपर्ट मानते हैं कि अस्सी साल से भी कम समय में चीन की जनसंख्या का आकार पैंतालीस% तक कम हो सकता है. चीन में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कई समस्याएं पैदा हुई हैं, जो खासतौर पर मरीजों के इलाज से संबंधित हैं. मसलन कोरोना के इतर परेशानियों के लिए डॉक्टरों से अपॉइनमेंट भी मुश्किल ही मिलती है. कोरोना ऐसे तो दुनियाभर में गर्भवति महिलाओं के लिए कहर बनकर टूटा, लेकिन चीन में इससे आने वाले समय में चिंता और गहरा सकती है. कहा जा रहा है कि लोग यहां अपना बच्चा भी पैदा नहीं करना चाहते, जिससे चीन की डेमोग्राफी में एक बड़े बदलाव की आशंका है. अस्पतालों में डॉक्टर कोरोना मरीजों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे गर्भवति महिलाएं अपना डिलिवरी चीन में नहीं कराना चाहतीं. झांग क़ी, एक इकतीस वर्षीय चीनी महिला हैं जिन्होंने अपनी आपबीती बताई. उन्होंने कहा कि वह कभी नहीं चाहेंगी कि मां बने, खासकर तब जब उन्हें किसी पब्लिक अस्पताल में डिलिवरी की नौबत आए. कमोबेश यही हाल पूरे चीन में देखा जा रहा है. सत्रह जनवरी को चीन अपनी आबादी पर डेटा जारी करने वाला है, जिसपर कई सवाल खड़े हो सकते हैं. जानकार मानते हैं कि एक हज़ार नौ सौ इकसठ के ग्रेट फेमिन के बाद ऐसा पहली बार होगा जब चीन की आबादी में गिरावट देखने को मिल सकती है, जो ग्लोबल इकोनॉमी और वर्ल्ड ऑर्डर में बड़ा शिफ्ट साबित हो सकता है. माना जा रहा है कि दो हज़ार बाईस में चीन में नवजात की संख्या दस मिलियन से भी कम रहने वाली है, जो पिछले साल दस.छः मिलियन रहा था - और यह दो हज़ार बीस की तुलना में भी ग्यारह.छः फीसदी कम था. चीनी एक्सपर्ट मानते हैं कि अस्सी साल से भी कम समय में चीन की जनसंख्या का आकार पैंतालीस% तक कम हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दो हज़ार इक्कीस में चीन की आबादी एक.चार अरब तक पहुंच गई, जहां आबादी में उसी साल चार सौ अस्सी,शून्य का इजाफा देखा गया था. युनाइटेड नेशन द्वारा अनुमानित है कि चीन की आबादी इस साल दो हज़ार बाईस से कम होने लगेगी, जबकि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. यूएन एक्सपर्ट मानते हैं कि दो हज़ार पचास तक चीन की आबादी में एक सौ नौ मिलियन की गिरावट आ सकती है, जो दो हज़ार उन्नीस में अनुमानित संख्या के मुकाबले तीन गुना कम है. रिपोर्ट्स बताते हैं कि दस सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में फर्टिलिटी रेट लगातार कम हो रहे हैं, और इस लिस्ट में चीन एक.अट्ठारह के साथ टॉप पर है, जो कि स्टेबल पॉपुलेशन के ओईसीडी स्टैंडर्ड दो.एक से भी कम है. चीन में एक हज़ार नौ सौ अस्सी-दो हज़ार पंद्रह तक वन-चाइल्ड पॉलिसी लागू थे, और आधिकारिक रूप से माना था चीन की आबादी में गिरावट आएगी. चीनी नेशनल हेल्थ कमिशन ने भी कहा था कि दो हज़ार पच्चीस से चीन की आबादी में गिरावट आएगी. हालांकि, अक्टूबर महीने में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह कहा था कि उनकी सरकार देश में बर्थ रेट बढ़ाने के लिए नीतियां बनाएगी. |
रांची। झारखंड पुलिस ने 50 हत्याएं करने वाले पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के दो लाख के इनामी नक्सली एरिया कमांडर जेठा कच्छप को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से नाइन एमएम की दो पिस्टल व एक एके 47 बरामद किया है।
जेठा ने रांची की मेयर व भाजपा नेत्री आशा लकड़ा के पति राजेंद्र धान सहित कई चर्चित लोगों की हत्या की है। जेठा मूल रूप से प्रदेश के खूंटी जिले का रहने वाला है।
पुलिस को सूचना मिली कि रविवार रात 12 बजे जेठा अपने घर पहुंचा है। रात दो बजे घेराबंदी देख जेठा ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन दबाव बढ़ता देख उसने हथियार डाल दिए।
| रांची। झारखंड पुलिस ने पचास हत्याएं करने वाले पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के दो लाख के इनामी नक्सली एरिया कमांडर जेठा कच्छप को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से नाइन एमएम की दो पिस्टल व एक एके सैंतालीस बरामद किया है। जेठा ने रांची की मेयर व भाजपा नेत्री आशा लकड़ा के पति राजेंद्र धान सहित कई चर्चित लोगों की हत्या की है। जेठा मूल रूप से प्रदेश के खूंटी जिले का रहने वाला है। पुलिस को सूचना मिली कि रविवार रात बारह बजे जेठा अपने घर पहुंचा है। रात दो बजे घेराबंदी देख जेठा ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन दबाव बढ़ता देख उसने हथियार डाल दिए। |
चंबा - चौगान वार्ड की पार्षद अंजलि मल्होत्रा ने नगर परिषद के शहर की सफाई व्यवस्था को ठेके पर देने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया न अपनाने को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि दो मर्तबा ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को रद्द करके चेहते ठेकेदारों से काम करवाया जा रहा है। उन्होंने साथ ही आरोप जड़ा है कि सफाई ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की चेष्टा से डोर टू डोर कूड़ा इक्ट्ठा करने को लेकर भुगतान अलग से लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल्लू व मंडी में भी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्ट किया जाता है, लेकिन इसके एवज में लोगों से कोई भुगतान नही लिया जाता है। ऐसे में नगर परिषद चंबा की सफाई ठेकेदारों को दोहरे भुगतान की व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर रखने के लिए ठेकेदारों को सालाना करीब पचास लाख का भुगतान कर रही है। साथ ही डोर टू डोर की कलेक्शन भी ठेकेदार की जेब में जा रही है। उन्होंने शहर के दो- तीन वार्डों में निःशुल्क डोर टू डोर कूड़ा कलेक्ट करने की योजना को बंद करने के नगर परिषद अध्यक्ष के फैसले का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने साथ ही रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन न करने को लेकर भी नगर परिषद को घेरा है। बहरहाल, चौगान वार्ड की पार्षद अंजलि मल्होत्रा ने एक बार फिर से नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
होली-घाटी की दयोल-न्याग्रां सड़क की हालत दयनीय होने के चलते हलके वाहनों को चलाना भी मुश्किल हो गया है। बर्फबारी के बाद सड़क पर बने गड्ढों का आकार भी बढ़ गया है। हालात यह है कि हल्के वाहनों को इस सड़क पर चलाने से मालिकों को सीधे तौर पर नुकसान भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कर राहत प्रदान की जाए। उल्लेखीय है कि यहां पर जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चला हुआ है। कंपनी के भारी वाहनों के चलते सड़क पर बडे़-बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिस कारण आमजन को यहां पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, पीडब्ल्यूडी के होली स्थित सहायक अभियंता पीके धीमान का कहना है कि सड़क पर पड़े गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है।
| चंबा - चौगान वार्ड की पार्षद अंजलि मल्होत्रा ने नगर परिषद के शहर की सफाई व्यवस्था को ठेके पर देने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया न अपनाने को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि दो मर्तबा ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को रद्द करके चेहते ठेकेदारों से काम करवाया जा रहा है। उन्होंने साथ ही आरोप जड़ा है कि सफाई ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की चेष्टा से डोर टू डोर कूड़ा इक्ट्ठा करने को लेकर भुगतान अलग से लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल्लू व मंडी में भी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्ट किया जाता है, लेकिन इसके एवज में लोगों से कोई भुगतान नही लिया जाता है। ऐसे में नगर परिषद चंबा की सफाई ठेकेदारों को दोहरे भुगतान की व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर रखने के लिए ठेकेदारों को सालाना करीब पचास लाख का भुगतान कर रही है। साथ ही डोर टू डोर की कलेक्शन भी ठेकेदार की जेब में जा रही है। उन्होंने शहर के दो- तीन वार्डों में निःशुल्क डोर टू डोर कूड़ा कलेक्ट करने की योजना को बंद करने के नगर परिषद अध्यक्ष के फैसले का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने साथ ही रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन न करने को लेकर भी नगर परिषद को घेरा है। बहरहाल, चौगान वार्ड की पार्षद अंजलि मल्होत्रा ने एक बार फिर से नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। होली-घाटी की दयोल-न्याग्रां सड़क की हालत दयनीय होने के चलते हलके वाहनों को चलाना भी मुश्किल हो गया है। बर्फबारी के बाद सड़क पर बने गड्ढों का आकार भी बढ़ गया है। हालात यह है कि हल्के वाहनों को इस सड़क पर चलाने से मालिकों को सीधे तौर पर नुकसान भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कर राहत प्रदान की जाए। उल्लेखीय है कि यहां पर जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चला हुआ है। कंपनी के भारी वाहनों के चलते सड़क पर बडे़-बड़े गड्ढे बन गए हैं। जिस कारण आमजन को यहां पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, पीडब्ल्यूडी के होली स्थित सहायक अभियंता पीके धीमान का कहना है कि सड़क पर पड़े गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है। |
जम्मू-कश्मीर राज्य में हिन्दी साहित्य सृजन की परम्परा अठारहवीं शताब्दी के कवि दत्तु तथा कश्मीर के संत कवि परमानन्द की अविस्मरणीय हिन्दी सेवा से अनुस्यूत है। कालान्तर में इसी परम्परा का निर्वाह करते चले आने में प्रयत्नशील राज्य के हिन्दी रचनाकारों ने समूचे भारतीय हिंदी साहित्य में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनायी है।
समय की गति समाज के साथ-साथ साहित्य को भी बदलाव देती चलती है। रचनाकार इस बदलाव का मात्र द्रष्टा न होकर भुक्तभोगी भी होता है । अतः साहित्य की विविध विधाओं से जुड़ी उसकी कृतियों में जहां बदलाव का सूक्ष्मस्थूल प्रभाव मुखर होता है वहां काल-संगत प्रवृत्तियां मात्र चलन न होकर उसके भुक्त यथार्थ का दस्तावेज़ बन जाती हैं ।
साहित्यिक जागरण एवं नव चेतना के आकलन स्वरूप हमने कई महत्त्वपूर्ण प्रकाशन अपने पाठकों के नाम किये हैं। 'जम्मू-कश्मीर का स्वातंत्र्योत्तर हिंदी साहित्यः एक विवेचन' जैसी कृति भी हमारे इन्हीं प्रयासों में से एक है जो राज्य के हिन्दी सृजन कर्म की क्रमबद्ध विकास यात्रा को चिह्नांकित करती है।
डॉ. राजकुमार स्वयं एक सुधि लेखक, चिंतक तथा परिश्रमी साधक हैं। यद्यपि साहित्य का सर्वेक्षण कर पाना सहज नहीं होता तथापि हमें आशा है कि उनका यह श्रमसाध्य प्रयास पाठकों को लाभान्वित करने में अवश्य समर्थ हो सकेगा।
बलवंत ठाकुर सचिव | जम्मू-कश्मीर राज्य में हिन्दी साहित्य सृजन की परम्परा अठारहवीं शताब्दी के कवि दत्तु तथा कश्मीर के संत कवि परमानन्द की अविस्मरणीय हिन्दी सेवा से अनुस्यूत है। कालान्तर में इसी परम्परा का निर्वाह करते चले आने में प्रयत्नशील राज्य के हिन्दी रचनाकारों ने समूचे भारतीय हिंदी साहित्य में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनायी है। समय की गति समाज के साथ-साथ साहित्य को भी बदलाव देती चलती है। रचनाकार इस बदलाव का मात्र द्रष्टा न होकर भुक्तभोगी भी होता है । अतः साहित्य की विविध विधाओं से जुड़ी उसकी कृतियों में जहां बदलाव का सूक्ष्मस्थूल प्रभाव मुखर होता है वहां काल-संगत प्रवृत्तियां मात्र चलन न होकर उसके भुक्त यथार्थ का दस्तावेज़ बन जाती हैं । साहित्यिक जागरण एवं नव चेतना के आकलन स्वरूप हमने कई महत्त्वपूर्ण प्रकाशन अपने पाठकों के नाम किये हैं। 'जम्मू-कश्मीर का स्वातंत्र्योत्तर हिंदी साहित्यः एक विवेचन' जैसी कृति भी हमारे इन्हीं प्रयासों में से एक है जो राज्य के हिन्दी सृजन कर्म की क्रमबद्ध विकास यात्रा को चिह्नांकित करती है। डॉ. राजकुमार स्वयं एक सुधि लेखक, चिंतक तथा परिश्रमी साधक हैं। यद्यपि साहित्य का सर्वेक्षण कर पाना सहज नहीं होता तथापि हमें आशा है कि उनका यह श्रमसाध्य प्रयास पाठकों को लाभान्वित करने में अवश्य समर्थ हो सकेगा। बलवंत ठाकुर सचिव |
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