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वाराणसी में रामचरितमानस का अपमान करने वाले समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की गाड़ी को काले झंडे भी दिखाए गए। साथ ही फेंकी गई स्याही। जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना मदनी को लताड़ लगाई। इसके बाद जैन मुनि समेत अन्य धर्मों के संत मंच से नीचे उतर गए। समाजवादी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद जया बच्चन का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वो उप-राष्ट्रपति को उँगली दिखाते हुए दिख रहीं हैं। इकबाल खान ट्विटर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की धमकी देने के अलावा प्रतिबंधित संगठन PFI के समर्थन में ट्वीट करता था। सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने रामचरितमानस विरोधी स्वामी प्रसाद मौर्य को विक्षिप्त बताया और कहा कि सनातन के खिलाफ एक शब्द बर्दाश्त नहीं। जमीयत वाले मौलाना मदनी ने कहा, "तुम्हारा पूर्वज हिन्दू नहीं था। तुम्हारा पूर्वज मनु, यानी आदम था। " जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने जताई आपत्ति। मराठा मंत्री नाना फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वो असाधारण बुद्धि के स्वामी थे और एक योद्धा न होने के बावजूद युद्धकला की समझ रखते थे। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में मुस्लिम युवक बहलीम ने हिन्दू लड़की का को भगाया। अब्बा शहजाद ने भी 25 साल पहले किया था उसी परिवार में रेप। कथित ईशनिंदा के आरोप में बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति पारितोष सरकार को 5 साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, हिंदू गाँव को जलाने वाले घूम रहे हैं। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में उन्मादी भीड़ ने थाने में बंद आरोपित को बाहर निकाला और बुरी तरह पीटने के बाद आग के हवाले कर दिया।
वाराणसी में रामचरितमानस का अपमान करने वाले समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की गाड़ी को काले झंडे भी दिखाए गए। साथ ही फेंकी गई स्याही। जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना मदनी को लताड़ लगाई। इसके बाद जैन मुनि समेत अन्य धर्मों के संत मंच से नीचे उतर गए। समाजवादी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद जया बच्चन का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वो उप-राष्ट्रपति को उँगली दिखाते हुए दिख रहीं हैं। इकबाल खान ट्विटर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की धमकी देने के अलावा प्रतिबंधित संगठन PFI के समर्थन में ट्वीट करता था। सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने रामचरितमानस विरोधी स्वामी प्रसाद मौर्य को विक्षिप्त बताया और कहा कि सनातन के खिलाफ एक शब्द बर्दाश्त नहीं। जमीयत वाले मौलाना मदनी ने कहा, "तुम्हारा पूर्वज हिन्दू नहीं था। तुम्हारा पूर्वज मनु, यानी आदम था। " जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने जताई आपत्ति। मराठा मंत्री नाना फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वो असाधारण बुद्धि के स्वामी थे और एक योद्धा न होने के बावजूद युद्धकला की समझ रखते थे। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में मुस्लिम युवक बहलीम ने हिन्दू लड़की का को भगाया। अब्बा शहजाद ने भी पच्चीस साल पहले किया था उसी परिवार में रेप। कथित ईशनिंदा के आरोप में बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति पारितोष सरकार को पाँच साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, हिंदू गाँव को जलाने वाले घूम रहे हैं। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में उन्मादी भीड़ ने थाने में बंद आरोपित को बाहर निकाला और बुरी तरह पीटने के बाद आग के हवाले कर दिया।
पति को वारिस का जन्म कैसे करना है? गर्भावस्था में रेट्रोकोरियोनल हेमेटोवा कैसे होता है? बाथरूम (स्लाइडिंग) के नीचे की स्क्रीन - यह कैसे होता है? Curlers "गोल्डन कर्ल" - सीधे बाल के लिए कर्लिंग की समस्या को हल! 3 साल की उम्र में, बच्चे को क्या करना चाहिए? 3 वर्षों में एक बच्चे को क्या पता होना चाहिए? पालतू पशु मालिकों के लिए युक्तियाँः कैसे बिल्ली मूत्र की गंध को दूर करने के लिए? छुट्टी का इतिहास - मातृभूमि के डिफेंडर का दिन (23 फरवरी)
पति को वारिस का जन्म कैसे करना है? गर्भावस्था में रेट्रोकोरियोनल हेमेटोवा कैसे होता है? बाथरूम के नीचे की स्क्रीन - यह कैसे होता है? Curlers "गोल्डन कर्ल" - सीधे बाल के लिए कर्लिंग की समस्या को हल! तीन साल की उम्र में, बच्चे को क्या करना चाहिए? तीन वर्षों में एक बच्चे को क्या पता होना चाहिए? पालतू पशु मालिकों के लिए युक्तियाँः कैसे बिल्ली मूत्र की गंध को दूर करने के लिए? छुट्टी का इतिहास - मातृभूमि के डिफेंडर का दिन
क्या करें ---हैवलॉक आइलैंड पर अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए आप कई मजेदार कार्यों में हिस्सा ले सकते हैं. स्नॉर्कल, स्कूबा डाइविंग, ट्रेकिंग, सेलिंग, पैरासेलिंग आदि कुछ एक्टिविटीज हैं जिनका आप यहां आनंद उठा सकते हैं. स्कूबा डाइविंग--- हालांकि हैवलॉक आइलैंड पर्यटकों के लिए नया है, इसलिए यहां का पानी शीशे जैसा साफ और यहां के कोरल रीफ्स बहुत आकर्षक हैं, जो अब स्कूबा डाइविंग का पसंदीदा प्वाइंट बनता जा रहा है. यहां का डाइविंग साइट पहली बार डाइविंग करने वाले के साथ ही अनुभवी गोताखोरों को भी खूब लुभाता है.
क्या करें ---हैवलॉक आइलैंड पर अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए आप कई मजेदार कार्यों में हिस्सा ले सकते हैं. स्नॉर्कल, स्कूबा डाइविंग, ट्रेकिंग, सेलिंग, पैरासेलिंग आदि कुछ एक्टिविटीज हैं जिनका आप यहां आनंद उठा सकते हैं. स्कूबा डाइविंग--- हालांकि हैवलॉक आइलैंड पर्यटकों के लिए नया है, इसलिए यहां का पानी शीशे जैसा साफ और यहां के कोरल रीफ्स बहुत आकर्षक हैं, जो अब स्कूबा डाइविंग का पसंदीदा प्वाइंट बनता जा रहा है. यहां का डाइविंग साइट पहली बार डाइविंग करने वाले के साथ ही अनुभवी गोताखोरों को भी खूब लुभाता है.
सीकरः राजस्थान के सीकर से कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष महरिया के द्वारा आरएसएस पदाधिकारी के साथ मारपीट के विरोध में भाजपा ने शुक्रवार को सीकर बंद का ऐलान किया है. जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त जाब्ते के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर रखा है. बताया जा रहा है कि कई व्यापारिक संगठनों ने भाजपा के इस बंद पर विरोध भी जताया है. घटना के बाद देर रात जिला कलक्टर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन भी दिया था. सीकर बंद का शहर में मिलाजुला प्रभाव दिखा. उल्लेखनीय है कि, सीकर में वोटिंग के दिन आरएसएस कार्यकर्ता सुधीर गर्ग के साथ मारपीट की गई थी. जिसके बाद मारपीट पर विरोध जताते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज सीकर बंद का ऐलान किया है. जिसका मिला जुला असर दिख रहा है. बंद के दौरान बंद समर्थकों और बंद का विरोध करने वालों के बीच कई बार तनाव के हालात पैदा हुए है. जिसके बाद पुलिस ने बंद समर्थकों को खदेड़ा भी. इस संबंध में पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई जबरदस्ती बंद कराता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. आपको बता दें कि, आरएसएस कार्यकर्ता सुधीर गर्ग ने कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष महरिया समेत 10 लोगों के खिलाफ मारपीट की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी. जिसके बाद कार्रवाई नहीं किए जाने पर गुरुवार को विभिन्न संगठनों ने बैठक कर घटना के विरोध में बंद का फैसला लिया था.
सीकरः राजस्थान के सीकर से कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष महरिया के द्वारा आरएसएस पदाधिकारी के साथ मारपीट के विरोध में भाजपा ने शुक्रवार को सीकर बंद का ऐलान किया है. जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त जाब्ते के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर रखा है. बताया जा रहा है कि कई व्यापारिक संगठनों ने भाजपा के इस बंद पर विरोध भी जताया है. घटना के बाद देर रात जिला कलक्टर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन भी दिया था. सीकर बंद का शहर में मिलाजुला प्रभाव दिखा. उल्लेखनीय है कि, सीकर में वोटिंग के दिन आरएसएस कार्यकर्ता सुधीर गर्ग के साथ मारपीट की गई थी. जिसके बाद मारपीट पर विरोध जताते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज सीकर बंद का ऐलान किया है. जिसका मिला जुला असर दिख रहा है. बंद के दौरान बंद समर्थकों और बंद का विरोध करने वालों के बीच कई बार तनाव के हालात पैदा हुए है. जिसके बाद पुलिस ने बंद समर्थकों को खदेड़ा भी. इस संबंध में पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई जबरदस्ती बंद कराता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. आपको बता दें कि, आरएसएस कार्यकर्ता सुधीर गर्ग ने कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष महरिया समेत दस लोगों के खिलाफ मारपीट की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी. जिसके बाद कार्रवाई नहीं किए जाने पर गुरुवार को विभिन्न संगठनों ने बैठक कर घटना के विरोध में बंद का फैसला लिया था.
नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा अपने यहां आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की बजाय उलटी नीति अपनाई जा रही है. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सेना को निर्देश दिए हैं कि वह भारत की तरफ से की जाने वाली किसी भी कार्रवाई का "निर्णायक और व्यापक रूप से" जवाब दें. Geo News की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान निर्देश जारी किए, जिसमें भू-रणनीतिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और पुलवामा घटना के बाद उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की गई. बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने ईमानदारी से घटना की जांच के साथ-साथ अन्य विवादित मुद्दों के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत की पेशकश की है. बयान में आगे कहा गया कि 'हम उम्मीद करते हैं कि भारत इस ऑफर का सकारात्मक रूप से जवाब देगा. जांच या उसके लिए दिए गए किसी भी ठोस सबूत में अगर आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की मिट्टी का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि यह एक नया पाकिस्तान है और हम अपने लोगों को यह दिखाने के लिए दृढ़ हैं कि हम उनकी रक्षा करने में सक्षम हैं. इसी दौरान बयान में कहा गया कि इमरान खान ने पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को "भारत की किसी भी आक्रामकता के खिलाफ निर्णायक और व्यापक रूप से जवाब देने के लिए" अधिकृत किया है.
नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा अपने यहां आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की बजाय उलटी नीति अपनाई जा रही है. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सेना को निर्देश दिए हैं कि वह भारत की तरफ से की जाने वाली किसी भी कार्रवाई का "निर्णायक और व्यापक रूप से" जवाब दें. Geo News की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान निर्देश जारी किए, जिसमें भू-रणनीतिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और पुलवामा घटना के बाद उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की गई. बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने ईमानदारी से घटना की जांच के साथ-साथ अन्य विवादित मुद्दों के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत की पेशकश की है. बयान में आगे कहा गया कि 'हम उम्मीद करते हैं कि भारत इस ऑफर का सकारात्मक रूप से जवाब देगा. जांच या उसके लिए दिए गए किसी भी ठोस सबूत में अगर आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की मिट्टी का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि यह एक नया पाकिस्तान है और हम अपने लोगों को यह दिखाने के लिए दृढ़ हैं कि हम उनकी रक्षा करने में सक्षम हैं. इसी दौरान बयान में कहा गया कि इमरान खान ने पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को "भारत की किसी भी आक्रामकता के खिलाफ निर्णायक और व्यापक रूप से जवाब देने के लिए" अधिकृत किया है.
सटीक ऋग्वेद-संहिता [ ४ अ०, ५ म०, ३ अध्या०, ५ अनु० अकविहस्ता सुकृते परस्पा यन्त्रासाधे बरुणेड़ा स्वन्तः । राजाना क्षेत्रमहृणीयमाना सहस्रस्थूणं विभृथः सह द्वौ ॥ ६ ॥ हिरण्यनिर्णिगयो अस्य स्थूणा वि भाजते दिव्यश्वाजनीव । भद्र क्षेत्र निमता तिल्विले वा सनेममध्वो अधिगर्त्यस्य ॥७॥ हिरण्यरूपमुपसो व्युष्टावयः स्थूणमुदिता सूर्यस्य । आ रोहथो बरुण मित्र गर्तमतश्चक्षार्थ अदितिं दितिं च ॥८॥ यद्व हिष्टं नातिविधे सुदान अच्छिद्र शर्म भुवनस्य गोपा। तेन नो मित्रावरुणा वविष्टं सिषासन्तो जिगीवांसः स्याम ।। ।। ६ हे मित्र और बरुण तुम दानां यज्ञभूमिमें जिस यजमानकी रक्षा करते हो, शोभन स्तुति करनेवाले उस मानके प्रति तुम दोनों दानशील होओ और उसकी रक्षा करो। तुम दोनों राजा और कोधविहीन होकर धन एवम् सहस्र म्तम्भसमन्वित सौध ( मंजिलवाला मकान ) धारण करते हो । ७ इनका रथ हिरण्मय है और कीलकादि भी हिग्ण्मय ही है। यह रव विद्युतकी तरह अन्तरिक्ष में शोभा पाता है। हम लोग कल्याणकर स्थान में अथवा यूपयष्टि समन्वित यज्ञभूमिमें, रथके ऊपर, सोमरस स्थापन करें । ८ हे मित्र और बरुण, तुम लोग उपाकाल में सूर्य के उदित होनेपर लौहकील-समन्वित सुवर्णमय रथपर यज्ञ में जाने के लिये आरोहण करो एवम् अदिति अर्थात् अखण्डनीय भूमि और दिति अर्थात् खण्डित प्रजाका अवलोकन करो । ६ हे दानशील तथा विश्वरक्षक मित्र और वरुण, जो सुख व्याघातरहित, अछिन्न और बहुतम है, उस सुखको तुम दोनों धारण करते हो उसी सुखसे हम लोगों की रक्षा करो हम लोग अभिलक्षित धन लाभ करें और शत्रु विजयी हो । तृतीय अध्याय समाप्त
सटीक ऋग्वेद-संहिता [ चार अशून्य, पाँच मशून्य, तीन अध्याशून्य, पाँच अनुशून्य अकविहस्ता सुकृते परस्पा यन्त्रासाधे बरुणेड़ा स्वन्तः । राजाना क्षेत्रमहृणीयमाना सहस्रस्थूणं विभृथः सह द्वौ ॥ छः ॥ हिरण्यनिर्णिगयो अस्य स्थूणा वि भाजते दिव्यश्वाजनीव । भद्र क्षेत्र निमता तिल्विले वा सनेममध्वो अधिगर्त्यस्य ॥सात॥ हिरण्यरूपमुपसो व्युष्टावयः स्थूणमुदिता सूर्यस्य । आ रोहथो बरुण मित्र गर्तमतश्चक्षार्थ अदितिं दितिं च ॥आठ॥ यद्व हिष्टं नातिविधे सुदान अच्छिद्र शर्म भुवनस्य गोपा। तेन नो मित्रावरुणा वविष्टं सिषासन्तो जिगीवांसः स्याम ।। ।। छः हे मित्र और बरुण तुम दानां यज्ञभूमिमें जिस यजमानकी रक्षा करते हो, शोभन स्तुति करनेवाले उस मानके प्रति तुम दोनों दानशील होओ और उसकी रक्षा करो। तुम दोनों राजा और कोधविहीन होकर धन एवम् सहस्र म्तम्भसमन्वित सौध धारण करते हो । सात इनका रथ हिरण्मय है और कीलकादि भी हिग्ण्मय ही है। यह रव विद्युतकी तरह अन्तरिक्ष में शोभा पाता है। हम लोग कल्याणकर स्थान में अथवा यूपयष्टि समन्वित यज्ञभूमिमें, रथके ऊपर, सोमरस स्थापन करें । आठ हे मित्र और बरुण, तुम लोग उपाकाल में सूर्य के उदित होनेपर लौहकील-समन्वित सुवर्णमय रथपर यज्ञ में जाने के लिये आरोहण करो एवम् अदिति अर्थात् अखण्डनीय भूमि और दिति अर्थात् खण्डित प्रजाका अवलोकन करो । छः हे दानशील तथा विश्वरक्षक मित्र और वरुण, जो सुख व्याघातरहित, अछिन्न और बहुतम है, उस सुखको तुम दोनों धारण करते हो उसी सुखसे हम लोगों की रक्षा करो हम लोग अभिलक्षित धन लाभ करें और शत्रु विजयी हो । तृतीय अध्याय समाप्त
नई दिल्लीः भारत में कोरोना ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। विशेष तौर पर दिल्ली-NCR के शहरों में कोरोना ने भारी तबाही मचा दी है। कोरोना संक्रमण की इस नई लहर में बच्चों में कोरोना के मामले काफी तेजी से आ रहे है। इसकी वजह है कि एक तो बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है, दूसरे विद्यालय खुल जाने से बच्चे एक-दूसरे के कांटेक्ट में तेजी गति से आ रहे हैं। बच्चे सामाजिक दुरी का पालन भी नहीं कर पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का यह नया वेरिएंट शेष सभी वेरिएंट्स के मुकाबले बहुत अधिक संक्रामक है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि माता-पिता को इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बच्चों में नजर आने वाले इस नए वेरिएंट के लक्षण बहुत हल्के हैं तथा वक़्त पर उपचार करवाने से बच्चे जल्दी ठीक भी हो रहे हैं किन्तु फिर भी आवश्यक है कि माता-पिता इसे लेकर बेफ्रिक ना हों। आवश्यक है कि कुछ सावधानियां बरती जाएं जिससे बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सके। - यदि आपका बच्चा बहुत छोटा है तो उसकी साफ-सफाई का जिम्मा आपके ऊपर है। यदि आपका बच्चा बड़ा तथा समझदार है तो उसे साफ-सफाई के बारे में बताएं। कोरोना को लेकर बच्चों को सभी आवश्यक बातें समझाएं तथा हाइजीन को लेकर भी उन्हें टिप्स दें। - बच्चे को बताएं कि खांसते तथा छींकते वक़्त टिशू का उपयोग करें। उपयोग किए गए टिशू को तुरंत डिस्पोज करें तथा साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें। खांसने या छींकने के पश्चात् हाथों को तुरंत साफ करें। - यदि आपका बेटा बहुत छोटा है कोरोना वायरस से बचने के लिए दिन में एक बार उसके सभी खिलौनों को धोएं। - अपने घर के फर्श को दिन में एक बार अवश्य साफ करें, जिससे बच्चे को किसी भी प्रकार का इंफेक्शन ना हो। - यदि किसी शख्स में खांसी, जुकाम या फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बच्चों को उस शख्स के संपर्क में जाने से रोकें। - बच्चों को किसी भीड-भीड़ वाले स्थान पर ले जाने से बचें। जहां तक संभव हो उसे घर में ही रखें। - बच्चे पर निगरानी रखें। यदि आपको उसमें खांसी, जुकाम तथा बुखार जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें या घरेलू उपचार शुरू कर दें। - बच्चों को भरपूर पानी के साथ पौष्टिक आहार देना न भूलें। खट्टे फल (नारंगी, नींबू, अंगूर) तथा सब्जियां दें जो विटामिन सी, विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ (पनीर, अंडे ) तथा जिंक युक्त खाद्य पदार्थ (फलियां, दाल, बीन्स और नट्स) से भरपूर हों। - घर की खिड़कियों तथा दरवाजों को खुला रखें जिससे बच्चे को हवा मिलती रहे। हो सके तो उन्हें छत पर लेकर जाएं।
नई दिल्लीः भारत में कोरोना ने फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। विशेष तौर पर दिल्ली-NCR के शहरों में कोरोना ने भारी तबाही मचा दी है। कोरोना संक्रमण की इस नई लहर में बच्चों में कोरोना के मामले काफी तेजी से आ रहे है। इसकी वजह है कि एक तो बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है, दूसरे विद्यालय खुल जाने से बच्चे एक-दूसरे के कांटेक्ट में तेजी गति से आ रहे हैं। बच्चे सामाजिक दुरी का पालन भी नहीं कर पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का यह नया वेरिएंट शेष सभी वेरिएंट्स के मुकाबले बहुत अधिक संक्रामक है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि माता-पिता को इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बच्चों में नजर आने वाले इस नए वेरिएंट के लक्षण बहुत हल्के हैं तथा वक़्त पर उपचार करवाने से बच्चे जल्दी ठीक भी हो रहे हैं किन्तु फिर भी आवश्यक है कि माता-पिता इसे लेकर बेफ्रिक ना हों। आवश्यक है कि कुछ सावधानियां बरती जाएं जिससे बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सके। - यदि आपका बच्चा बहुत छोटा है तो उसकी साफ-सफाई का जिम्मा आपके ऊपर है। यदि आपका बच्चा बड़ा तथा समझदार है तो उसे साफ-सफाई के बारे में बताएं। कोरोना को लेकर बच्चों को सभी आवश्यक बातें समझाएं तथा हाइजीन को लेकर भी उन्हें टिप्स दें। - बच्चे को बताएं कि खांसते तथा छींकते वक़्त टिशू का उपयोग करें। उपयोग किए गए टिशू को तुरंत डिस्पोज करें तथा साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें। खांसने या छींकने के पश्चात् हाथों को तुरंत साफ करें। - यदि आपका बेटा बहुत छोटा है कोरोना वायरस से बचने के लिए दिन में एक बार उसके सभी खिलौनों को धोएं। - अपने घर के फर्श को दिन में एक बार अवश्य साफ करें, जिससे बच्चे को किसी भी प्रकार का इंफेक्शन ना हो। - यदि किसी शख्स में खांसी, जुकाम या फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बच्चों को उस शख्स के संपर्क में जाने से रोकें। - बच्चों को किसी भीड-भीड़ वाले स्थान पर ले जाने से बचें। जहां तक संभव हो उसे घर में ही रखें। - बच्चे पर निगरानी रखें। यदि आपको उसमें खांसी, जुकाम तथा बुखार जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें या घरेलू उपचार शुरू कर दें। - बच्चों को भरपूर पानी के साथ पौष्टिक आहार देना न भूलें। खट्टे फल तथा सब्जियां दें जो विटामिन सी, विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ तथा जिंक युक्त खाद्य पदार्थ से भरपूर हों। - घर की खिड़कियों तथा दरवाजों को खुला रखें जिससे बच्चे को हवा मिलती रहे। हो सके तो उन्हें छत पर लेकर जाएं।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित देश के कुछ राज्यों में अवैध मकानों एवं प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चलाए जाने के बीच मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का एक सिविल इंजीनियर अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए बारात में परंपारिक घोड़ी, बग्गी या कार के बजाय बुलडोजर में बैठकर दुल्हन को लेने मंडप पहुंचा। प्रत्यक्षर्दिशयों के अनुसार, यह घटना मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बैतूल जिले के भैंसदेही विकासखंड के अंतर्गत आने वाले झल्लार गांव में मंगलवार को हुई और दूल्हे के साथ उसके परिवार की दो महिलाएं भी बुलडोजर में सवार थीं। उन्होंने बताया कि बारात में फूलों से सजे बुलडोजर में बैठकर शादी रचाने के लिए मंडप पहुंचने वाले अंकुश जायसवाल नाम के इस दूल्हे की शादी पूरे इलाके में चर्चा का सबब बनी हुई है। इस दौरान बैंड- बाजे एवं डीजे की धुन पर उसके परिजन एवं रिश्तेदार थिरकते नजर भी आए। अंकुश ने बताया कि झल्लार गांव से बारात निकलने के बाद उन्होंने केरपानी गांव स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान मंदिर में रात्रि विश्राम किया और फिर बुधवार को उनका विवाह केसर बाग में धूमधाम से संपन्न हुआ।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित देश के कुछ राज्यों में अवैध मकानों एवं प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चलाए जाने के बीच मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का एक सिविल इंजीनियर अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए बारात में परंपारिक घोड़ी, बग्गी या कार के बजाय बुलडोजर में बैठकर दुल्हन को लेने मंडप पहुंचा। प्रत्यक्षर्दिशयों के अनुसार, यह घटना मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बैतूल जिले के भैंसदेही विकासखंड के अंतर्गत आने वाले झल्लार गांव में मंगलवार को हुई और दूल्हे के साथ उसके परिवार की दो महिलाएं भी बुलडोजर में सवार थीं। उन्होंने बताया कि बारात में फूलों से सजे बुलडोजर में बैठकर शादी रचाने के लिए मंडप पहुंचने वाले अंकुश जायसवाल नाम के इस दूल्हे की शादी पूरे इलाके में चर्चा का सबब बनी हुई है। इस दौरान बैंड- बाजे एवं डीजे की धुन पर उसके परिजन एवं रिश्तेदार थिरकते नजर भी आए। अंकुश ने बताया कि झल्लार गांव से बारात निकलने के बाद उन्होंने केरपानी गांव स्थित प्रसिद्ध श्री हनुमान मंदिर में रात्रि विश्राम किया और फिर बुधवार को उनका विवाह केसर बाग में धूमधाम से संपन्न हुआ।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद ) ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद ) ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद ) ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
लखीमपुर हिंसा के मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। अब 11 अक्टूबर को कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले करीब 12 घंटे तक उससे पूछताछ हुई। आशीष पर मर्डर, एक्सीडेंट में मौत, आपराधिक साजिश और लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद उसके बयान दर्ज किए गए हैं। आशीष का क्राइम ब्रांच में ही मेडिकल टेस्ट हुआ। डीआईजी उपेंद्र कुमार ने बताया कि आशीष मिश्रा जांच में सहयोग नहीं कर रहा। कुछ सवालों के जवाब भी नहीं दे सके। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया है। अब कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं, आशीष को क्राइम ब्रांच में VIP ट्रीटमेंट मिला। उसे मेडिकल परीक्षण के लिए लखीमपुर जिला अस्पताल ले जाया गया। इसके लिए इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अखिलेश कुमार क्राइम ब्रांच में पहुंचे और मेडिकल टेस्ट किया गया। इससे पहले आशीष घटना के सातवें दिन शनिवार को क्राइम ब्रांच के सामने सुबह 10:36 पर पेश हुआ। इस दौरान उसने रुमाल से अपना मुंह छिपा रखा था। और पिछले दरवाजे से इंट्री की थी। क्राइम ब्रांच में पूछताछ के दौरान 14 बार चाय और नाश्ता अंदर गया। आशीष मिश्रा के साथ उनके वकील अवधेश सिंह और मंत्री अजय मिश्र टेनी के प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय और भाजपा के सदर विधायक योगेश वर्मा भी अंदर मौजूद रहे। क्राइम ब्रांच के दफ्तर में SDM सदर भी मौजूद रहे। पूछताछ में 10 एफिडेविट और एक पेन ड्राइव के साथ दो मोबाइल पेश किए गए। इनसे SIT संतुष्ट नहीं दिखी। बताया जा रहा है कि 13 वीडियो SIT को दिए गए हैं। इनकी जांच फॉरेंसिक एक्सपर्ट करेंगे। आशीष से 6 लोगों की टीम ने पूछताछ की। लखीमपुर में क्राइम ब्रांच के दफ्तर में आशीष मिश्रा से मजिस्ट्रेट के सामने सवाल-जवाब किए गए। आशीष अपने वकील के साथ मौजूद रहा। पूछताछ में डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल और लखीमपुर के एसडीएम भी शामिल रहे। आशीष मिश्रा ने अपने पक्ष में कई वीडियो पेश किए। उन्होंने 10 लोगों के बयान का हलफनामा भी पेश किया, जो बताते हैं कि वो काफिले के साथ नहीं था, दंगल मैदान में था। संयुक्त किसान मोर्चा लगातार मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। किसान अजय मिश्र को मंत्री पद से हटाने और आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे। मोर्चे ने इस घटना को लेकर आगे के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। लखीमपुर में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने BJP दफ्तर की बालकनी में आकर समर्थकों से शांत कराया। उन्होंने कहा कि बेटा पूछताछ के लिए गया है। इस सरकार में निष्पक्ष जांच होगी। ऐसी-वैसी कोई बात नहीं है। ऐसी-वैसी कोई बात होगी तो हम आपके साथ हैं। अजय मिश्रा के इस बयान को एक तरह से गिरफ्तारी की स्थिति में सरकार के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यालय पर मौजूद समर्थकों ने कहा कि आशीष भैया दंगल में थे। घटनास्थल पर किसानों के रूप में आतंकवादी थे। इधर, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने अपना मौन व्रत तोड़ दिया है। सिद्धू शुक्रवार को लखीमपुर पहुंचे थे। सिद्धू पहले हिंसा में मारे गए किसान लवप्रीत और फिर पत्रकार रमन के यहां पहुंचे। उन्होंने लिखकर कहा था कि जब तक केंद्रीय मंत्री का आरोपी बेटा गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक मौन धारण कर भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। सिद्धू करीब 20 घंटे से मौन व्रत पर थे। आशीष मिश्र से पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस थार जीप ने किसानों को कुचला था, उसके पीछे निकली फॉर्च्यूनर में आशीष मिश्र बैठे थे। माना जा रहा है कि यह सबूत सामने आने पर आशीष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे पहले लखीमपुर पुलिस ने शुक्रवार को मंत्री के घर पर दोबारा नोटिस चिपकाकर कर आशीष को शनिवार सुबह 11 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था। इससे पहले पुलिस ने गुरुवार को नोटिस लगाकर शुक्रवार को 10 बजे पेश होने के लिए कहा था, लेकिन आशीष नहीं पहुंचा। बाद में आशीष ने एक चिट्ठी लिखकर बताया था कि वह बीमार है इसलिए 9 अक्टूबर को पुलिस के सामने पेश होगा। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र दिल्ली में थे। सूत्रों का कहना है कि आशीष को पुलिस के सामने पेश होने के लिए अजय मिश्र के पास किसी बड़े नेता ने संदेश भेजा था। इसके बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हुए और कहा कि आशीष शनिवार को पुलिस के सामने सामने पेश हो जाएंगे और जांच में सहयोग करेंगे। केंद्रीय मंत्री का ये बयान सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सामने आया है, क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार को फटकार लगाई है। लखीमपुर में 3 अक्टूबर को हिंसा के बाद पहली बार इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। इसके बाद 5 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बहराइच में इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं। अब 8 अक्टूबर की शाम से लखीमपुर में इंटरनेट फिर से बंद कर दिया गया है। शुक्रवार को दिन भर क्या-क्या हुआ? This website follows the DNPA Code of Ethics.
लखीमपुर हिंसा के मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। अब ग्यारह अक्टूबर को कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले करीब बारह घंटाटे तक उससे पूछताछ हुई। आशीष पर मर्डर, एक्सीडेंट में मौत, आपराधिक साजिश और लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद उसके बयान दर्ज किए गए हैं। आशीष का क्राइम ब्रांच में ही मेडिकल टेस्ट हुआ। डीआईजी उपेंद्र कुमार ने बताया कि आशीष मिश्रा जांच में सहयोग नहीं कर रहा। कुछ सवालों के जवाब भी नहीं दे सके। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया है। अब कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं, आशीष को क्राइम ब्रांच में VIP ट्रीटमेंट मिला। उसे मेडिकल परीक्षण के लिए लखीमपुर जिला अस्पताल ले जाया गया। इसके लिए इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अखिलेश कुमार क्राइम ब्रांच में पहुंचे और मेडिकल टेस्ट किया गया। इससे पहले आशीष घटना के सातवें दिन शनिवार को क्राइम ब्रांच के सामने सुबह दस:छत्तीस पर पेश हुआ। इस दौरान उसने रुमाल से अपना मुंह छिपा रखा था। और पिछले दरवाजे से इंट्री की थी। क्राइम ब्रांच में पूछताछ के दौरान चौदह बार चाय और नाश्ता अंदर गया। आशीष मिश्रा के साथ उनके वकील अवधेश सिंह और मंत्री अजय मिश्र टेनी के प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय और भाजपा के सदर विधायक योगेश वर्मा भी अंदर मौजूद रहे। क्राइम ब्रांच के दफ्तर में SDM सदर भी मौजूद रहे। पूछताछ में दस एफिडेविट और एक पेन ड्राइव के साथ दो मोबाइल पेश किए गए। इनसे SIT संतुष्ट नहीं दिखी। बताया जा रहा है कि तेरह वीडियो SIT को दिए गए हैं। इनकी जांच फॉरेंसिक एक्सपर्ट करेंगे। आशीष से छः लोगों की टीम ने पूछताछ की। लखीमपुर में क्राइम ब्रांच के दफ्तर में आशीष मिश्रा से मजिस्ट्रेट के सामने सवाल-जवाब किए गए। आशीष अपने वकील के साथ मौजूद रहा। पूछताछ में डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल और लखीमपुर के एसडीएम भी शामिल रहे। आशीष मिश्रा ने अपने पक्ष में कई वीडियो पेश किए। उन्होंने दस लोगों के बयान का हलफनामा भी पेश किया, जो बताते हैं कि वो काफिले के साथ नहीं था, दंगल मैदान में था। संयुक्त किसान मोर्चा लगातार मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। किसान अजय मिश्र को मंत्री पद से हटाने और आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे। मोर्चे ने इस घटना को लेकर आगे के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। लखीमपुर में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने BJP दफ्तर की बालकनी में आकर समर्थकों से शांत कराया। उन्होंने कहा कि बेटा पूछताछ के लिए गया है। इस सरकार में निष्पक्ष जांच होगी। ऐसी-वैसी कोई बात नहीं है। ऐसी-वैसी कोई बात होगी तो हम आपके साथ हैं। अजय मिश्रा के इस बयान को एक तरह से गिरफ्तारी की स्थिति में सरकार के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यालय पर मौजूद समर्थकों ने कहा कि आशीष भैया दंगल में थे। घटनास्थल पर किसानों के रूप में आतंकवादी थे। इधर, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने अपना मौन व्रत तोड़ दिया है। सिद्धू शुक्रवार को लखीमपुर पहुंचे थे। सिद्धू पहले हिंसा में मारे गए किसान लवप्रीत और फिर पत्रकार रमन के यहां पहुंचे। उन्होंने लिखकर कहा था कि जब तक केंद्रीय मंत्री का आरोपी बेटा गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक मौन धारण कर भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। सिद्धू करीब बीस घंटाटे से मौन व्रत पर थे। आशीष मिश्र से पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस थार जीप ने किसानों को कुचला था, उसके पीछे निकली फॉर्च्यूनर में आशीष मिश्र बैठे थे। माना जा रहा है कि यह सबूत सामने आने पर आशीष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे पहले लखीमपुर पुलिस ने शुक्रवार को मंत्री के घर पर दोबारा नोटिस चिपकाकर कर आशीष को शनिवार सुबह ग्यारह बजे पूछताछ के लिए बुलाया था। इससे पहले पुलिस ने गुरुवार को नोटिस लगाकर शुक्रवार को दस बजे पेश होने के लिए कहा था, लेकिन आशीष नहीं पहुंचा। बाद में आशीष ने एक चिट्ठी लिखकर बताया था कि वह बीमार है इसलिए नौ अक्टूबर को पुलिस के सामने पेश होगा। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र दिल्ली में थे। सूत्रों का कहना है कि आशीष को पुलिस के सामने पेश होने के लिए अजय मिश्र के पास किसी बड़े नेता ने संदेश भेजा था। इसके बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हुए और कहा कि आशीष शनिवार को पुलिस के सामने सामने पेश हो जाएंगे और जांच में सहयोग करेंगे। केंद्रीय मंत्री का ये बयान सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सामने आया है, क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार को फटकार लगाई है। लखीमपुर में तीन अक्टूबर को हिंसा के बाद पहली बार इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। इसके बाद पाँच अक्टूबर को लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बहराइच में इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं। अब आठ अक्टूबर की शाम से लखीमपुर में इंटरनेट फिर से बंद कर दिया गया है। शुक्रवार को दिन भर क्या-क्या हुआ? This website follows the DNPA Code of Ethics.
आइकन "अटूट दीवार", नाम का अर्थजो एक अविश्वासी (मध्यस्थता) की पहचान करना आसान है, कीव के सोफिया के इस दिन मोज़ेक के संरक्षित में से एक है। राजकुमार व्लादिमीर यारोस्लाव द वाइस के बेटे द्वारा निर्मित यह कैथेड्रल, अभी भी उसकी सजावट की भव्यता के साथ आश्चर्यचकित है। और आज इसके राजसी परिसर, मोज़ेक और भित्तिचित्रों से सजाए गए, कृपया सभी विश्वासियों और सुंदरता के गुणकों की आंखों को देखें। "अटूट दीवार" आइकन, जिसका अर्थ हैपवित्र योजना स्पष्ट रूप से -, घर और एक बार परिवार के संरक्षण के एक समय पर बीजान्टिन और रूसी स्वामी बना दिया, धन्य वर्जिन के बाद में ईसाई छवियों के एक नंबर के लिए प्रोटोटाइप बन गया। सोफिया के भगवान की मां "अविश्वसनीय दीवार" की मां का प्रतीकKievskaya प्रौद्योगिकी पर smalt से बना है, जो बाद में कई सालों के लिए भूल गया था। भगवान की मां को स्वर्गीय नीले कपड़े पहने हुए चित्रित किया गया है और पवित्र आत्मा का प्रतीक सुनहरा गंध की "चमक" से घिरा हुआ है। कमर पर, वह बोर्डों में प्लग है, जो वह, ईसाई विश्वासियों की मान्यताओं के अनुसार, शोक करने वालों को आँसू दूर करती है। उठाए गए हाथों का मतलब उच्चतम से पहले मध्यस्थता है। हमारे समय में, विश्वासियों को लटकाने के लिए ऐसे आइकन सुझाए जाते हैंसीधे सामने के दरवाजे के विपरीत दीवार पर घर। इस मामले में, वर्जिन विश्वसनीय रूप से सभी दुश्मनों से निवास की रक्षा करेगा। दुष्ट बुद्धिमान, घर में प्रवेश करने और वर्जिन की सख्त दृष्टि को देखकर, अपने दुष्ट इरादों से शर्मिंदा होगा और अपार्टमेंट छोड़ देगा। इसके अलावा इस आइकन को दीवार पर लटका दिया गया है कि वे थोड़ी देर के लिए निवास छोड़ने जा रहे हैं। मालिकों की वापसी तक एक ही अपार्टमेंट या घर पर विश्वसनीय सुरक्षा के तहत होगा। केवल इसके लिए इस छवि को भी प्रार्थना करना जरूरी है। ये आइकन "अटूट दीवार" के गुण हैं। वर्जिन की प्रार्थना इस तरह की हैः "लेडी पवित्र, बिना किसी कारण के" अटूट दीवार "कहा जा रहा है, उन सभी के लिए बाधा बनें जो मेरे खिलाफ दुश्मन और बुराई, मेरे प्रियजनों और मेरे घर की साजिश करते हैं। हमारे लिए एक अविश्वसनीय किले बनें, हमें और हमारे आवास को सभी प्रकार की परेशानियों और कठिन परिस्थितियों से बचाएं। आमीन। "
आइकन "अटूट दीवार", नाम का अर्थजो एक अविश्वासी की पहचान करना आसान है, कीव के सोफिया के इस दिन मोज़ेक के संरक्षित में से एक है। राजकुमार व्लादिमीर यारोस्लाव द वाइस के बेटे द्वारा निर्मित यह कैथेड्रल, अभी भी उसकी सजावट की भव्यता के साथ आश्चर्यचकित है। और आज इसके राजसी परिसर, मोज़ेक और भित्तिचित्रों से सजाए गए, कृपया सभी विश्वासियों और सुंदरता के गुणकों की आंखों को देखें। "अटूट दीवार" आइकन, जिसका अर्थ हैपवित्र योजना स्पष्ट रूप से -, घर और एक बार परिवार के संरक्षण के एक समय पर बीजान्टिन और रूसी स्वामी बना दिया, धन्य वर्जिन के बाद में ईसाई छवियों के एक नंबर के लिए प्रोटोटाइप बन गया। सोफिया के भगवान की मां "अविश्वसनीय दीवार" की मां का प्रतीकKievskaya प्रौद्योगिकी पर smalt से बना है, जो बाद में कई सालों के लिए भूल गया था। भगवान की मां को स्वर्गीय नीले कपड़े पहने हुए चित्रित किया गया है और पवित्र आत्मा का प्रतीक सुनहरा गंध की "चमक" से घिरा हुआ है। कमर पर, वह बोर्डों में प्लग है, जो वह, ईसाई विश्वासियों की मान्यताओं के अनुसार, शोक करने वालों को आँसू दूर करती है। उठाए गए हाथों का मतलब उच्चतम से पहले मध्यस्थता है। हमारे समय में, विश्वासियों को लटकाने के लिए ऐसे आइकन सुझाए जाते हैंसीधे सामने के दरवाजे के विपरीत दीवार पर घर। इस मामले में, वर्जिन विश्वसनीय रूप से सभी दुश्मनों से निवास की रक्षा करेगा। दुष्ट बुद्धिमान, घर में प्रवेश करने और वर्जिन की सख्त दृष्टि को देखकर, अपने दुष्ट इरादों से शर्मिंदा होगा और अपार्टमेंट छोड़ देगा। इसके अलावा इस आइकन को दीवार पर लटका दिया गया है कि वे थोड़ी देर के लिए निवास छोड़ने जा रहे हैं। मालिकों की वापसी तक एक ही अपार्टमेंट या घर पर विश्वसनीय सुरक्षा के तहत होगा। केवल इसके लिए इस छवि को भी प्रार्थना करना जरूरी है। ये आइकन "अटूट दीवार" के गुण हैं। वर्जिन की प्रार्थना इस तरह की हैः "लेडी पवित्र, बिना किसी कारण के" अटूट दीवार "कहा जा रहा है, उन सभी के लिए बाधा बनें जो मेरे खिलाफ दुश्मन और बुराई, मेरे प्रियजनों और मेरे घर की साजिश करते हैं। हमारे लिए एक अविश्वसनीय किले बनें, हमें और हमारे आवास को सभी प्रकार की परेशानियों और कठिन परिस्थितियों से बचाएं। आमीन। "
बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते एमएलसी प्रिन्सू। जौनपुर। यात्रियों को बेहतर बस सेवा लखनऊ तक देने के लिए सरकार ने सोमवार से एक नयी बस सेवा का शुभारम्भ किया है। राजधानी एक्सप्रेस के नाम से यह बस भदोही से चलकर जौनपुर आएगी। यहां से सीधे सुल्तानपुर रु केगी। इसके बाद लखनऊ में स्टापेज होगा। इस बस को विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिन्सू ने सोमवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रोडवेज परिसर में आयी बस को फूलों से सजाया गया था। बस के बारे में लोगों को जानकारी दी गयी। बताया गया कि इस बस का किराया आम बसों से दस फीसदी अधिक होगा। यह बस रोज भदोही से चलकर जौनपुर आएगी फिर लखनऊ जाएगी। इस तरह से वापस भदोही जाएगी। एमएलसी श्री प्रिन्सू ने कहा कि सरकार बस यात्रियों के बारे में विचार करके इस व्यवस्था को लागू की है। ताकि लोगों को आराम से सफर करने का मौका मिले। एमएलसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार जनता की मूलभूत समस्याओं को देखते हुए काम कर रही है। हरी झंडी दिखाने से पहले एमएलसी का रोडवेज केन्द्र प्रभारी अनिल कुमार श्रीवास्तव, रमेश चन्द्र, अजीत चौबे समेत अन्य लोगों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते एमएलसी प्रिन्सू। जौनपुर। यात्रियों को बेहतर बस सेवा लखनऊ तक देने के लिए सरकार ने सोमवार से एक नयी बस सेवा का शुभारम्भ किया है। राजधानी एक्सप्रेस के नाम से यह बस भदोही से चलकर जौनपुर आएगी। यहां से सीधे सुल्तानपुर रु केगी। इसके बाद लखनऊ में स्टापेज होगा। इस बस को विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिन्सू ने सोमवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रोडवेज परिसर में आयी बस को फूलों से सजाया गया था। बस के बारे में लोगों को जानकारी दी गयी। बताया गया कि इस बस का किराया आम बसों से दस फीसदी अधिक होगा। यह बस रोज भदोही से चलकर जौनपुर आएगी फिर लखनऊ जाएगी। इस तरह से वापस भदोही जाएगी। एमएलसी श्री प्रिन्सू ने कहा कि सरकार बस यात्रियों के बारे में विचार करके इस व्यवस्था को लागू की है। ताकि लोगों को आराम से सफर करने का मौका मिले। एमएलसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार जनता की मूलभूत समस्याओं को देखते हुए काम कर रही है। हरी झंडी दिखाने से पहले एमएलसी का रोडवेज केन्द्र प्रभारी अनिल कुमार श्रीवास्तव, रमेश चन्द्र, अजीत चौबे समेत अन्य लोगों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
एक सौ सोलहवी अध्याय सत्पुरुषों द्वारा नहवाई गई नायिका की भाँति उस नदी को देखकर राजा को परम प्रसन्नता प्राप्त हुई । हृदय को मनोहर लगनेवाली, पुण्यमयी, मन में भक्ति एक प्रेमभाव बढ़ानेवाली, मुशीतल, परम मनोहर, कभी घटने और कभी बढ़नेवाली वह ऐरावती उस समय चन्द्रमा की दूसरी मूर्ति की भाँति मालूम पड़ रही थी । अति शीतल तथा चचल जलयुक्त, ब्राह्मण अथवा पक्षियों के वृन्द द्वारा सेवित, लोल लहरों द्वारा सुशोभित, हिमालय की श्रेष्ठ कन्या ऐरावती को देखकर राजा को परम प्रसन्नता हुई । तपस्वियों से सुशोभित, श्रमृत के समान सुस्वादु जल से पूर्ण, सम्पूर्ण पापों को नष्ट करनेवाली, स्वर्ग पर चढ़ने के लिए सीढ़ी के समान सहायिका, जलनिधि की परम सुन्दरी भियतमा, महर्षि वृन्दों द्वारा सुसेवित सभी जीवों के मन में उत्सुकता प्रकट करानेवाली वह मनोहर सरिता सभी चराचर जगत् का उपकार करनेवाली, स्वर्ग का सीधा मार्ग पकड़ानेवाली, दोनों किनारों पर गौनों के समूहों से व्याप्त, सेवार से रहित, परम मनोहर, हस तथा सारस जाति के पक्षियों के कलकल निनाद से गूँजित तथा कमलों से सुशोभित थी। गहरी ( गम्भीर) नाभि के के समान भँवरों वाली, जघनस्थली के समान सुरम्य स्थल भाग के पवित्र किनारों से सयुक्त, नेत्र के समान आकर्षक नीले कमल की शोभा से युक्त, मुख के समान खिले हुए कमलोंवाली, बरफ के समान निर्मल एवं स्वच्छ फेनरूपी वस्त्रों को धारण करनेवाली; थोंठों के समान चक्रवाक के जोड़ों से युक्त, कल्याणमयी, दाँतों की सुमनोहर पक्तियों के समान बगुलों की श्वेत पक्तियों से सुशोभित तथा भौहों के समान जल में चलनेवाली चचल मछलियों की पक्तियों से यह विराजित हो रही थी । उन्नत स्तनों के समान जल में छिपे हुए मतवाले हाथियों के मनोहर कुम्भ-स्थलों से सुशोभित, नूपुर के समान सुमधुर हसों के सुन्दर शब्दों से गूँजित, वलय (ककरण ) के समान कमल की नाल के समूहों से सयुक्त, उस ऐरावती नामक नदी को एक सर्वांग में सुन्दरी रमणी की भाँति देख कर राजा को परम प्रसन्नता हुई । हे राजन् । उस ऐरावती नदी में रूप के मद से मतवाली, गन्धर्वो के पीछे चलनेवाली अप्सराओं के समूह मध्याह्न के समय सर्वदा विहार करते थे । उन अप्सराओं के शरीर से धुले हुए सुन्दर केसर के साथ-साथ अपने दोनों किनारों के अनेक प्रकार के वृक्षों के पुष्पों की विभिन्न प्रकार की सुगन्धियों से सुगन्धित, तरंगों के समूहों में सूर्य की परछाई पड़ने से चकाचौध के कारण कठिनाई से देखने योग्य सूर्यमण्डल को धारण करनेवाली, देवताओं के हाथी ऐरावत की चोट से चिह्नित दोनों किनारों से युक्त उस ऐरावती का जल देवगज के कपोल स्थल से बहने वाले मद जल तथा देवांगनाओं के स्तनों में लगाये गये चन्दनों से व्याप्त एव सुगंधित हो रहा था, जिससे भ्रमरगण उसे चारों ओर से घेरे हुए थे । उस ऐरावती नदी के दोनों किनारों के वृक्ष सुगन्धित पुष्पों से लसे हुए थे और सुगन्धि के परम लालची तथा जरदी मचानेवाले भ्रमरों के समूहों से घिरे हुए थे । उस ऐरावती के मनोहर किनारों पर जाकर पशु, तपस्वी ऋषिगण एवं अप्सराओं समेत देववृन्द सर्वदा कामवश होकर प्रीति करने लगते थे । वहाँ देवताओं के समान सुन्दर पचित्र अगों वाले पुरुष तथा कमल एवं चन्द्रमा के समान आकर्षक मुखवाली स्वर्ग की सुन्दरियों के समान स्त्रियाँ प्रायः विहार करते हुए पाई जाती थीं। वह ऐरावती नदी सर्वदा देवता, भील, शबर, पुलिन्द थावि जगली जाति, राजाओं के समूह, एघ बाघ सिंह आदि हिंसक जगली
एक सौ सोलहवी अध्याय सत्पुरुषों द्वारा नहवाई गई नायिका की भाँति उस नदी को देखकर राजा को परम प्रसन्नता प्राप्त हुई । हृदय को मनोहर लगनेवाली, पुण्यमयी, मन में भक्ति एक प्रेमभाव बढ़ानेवाली, मुशीतल, परम मनोहर, कभी घटने और कभी बढ़नेवाली वह ऐरावती उस समय चन्द्रमा की दूसरी मूर्ति की भाँति मालूम पड़ रही थी । अति शीतल तथा चचल जलयुक्त, ब्राह्मण अथवा पक्षियों के वृन्द द्वारा सेवित, लोल लहरों द्वारा सुशोभित, हिमालय की श्रेष्ठ कन्या ऐरावती को देखकर राजा को परम प्रसन्नता हुई । तपस्वियों से सुशोभित, श्रमृत के समान सुस्वादु जल से पूर्ण, सम्पूर्ण पापों को नष्ट करनेवाली, स्वर्ग पर चढ़ने के लिए सीढ़ी के समान सहायिका, जलनिधि की परम सुन्दरी भियतमा, महर्षि वृन्दों द्वारा सुसेवित सभी जीवों के मन में उत्सुकता प्रकट करानेवाली वह मनोहर सरिता सभी चराचर जगत् का उपकार करनेवाली, स्वर्ग का सीधा मार्ग पकड़ानेवाली, दोनों किनारों पर गौनों के समूहों से व्याप्त, सेवार से रहित, परम मनोहर, हस तथा सारस जाति के पक्षियों के कलकल निनाद से गूँजित तथा कमलों से सुशोभित थी। गहरी नाभि के के समान भँवरों वाली, जघनस्थली के समान सुरम्य स्थल भाग के पवित्र किनारों से सयुक्त, नेत्र के समान आकर्षक नीले कमल की शोभा से युक्त, मुख के समान खिले हुए कमलोंवाली, बरफ के समान निर्मल एवं स्वच्छ फेनरूपी वस्त्रों को धारण करनेवाली; थोंठों के समान चक्रवाक के जोड़ों से युक्त, कल्याणमयी, दाँतों की सुमनोहर पक्तियों के समान बगुलों की श्वेत पक्तियों से सुशोभित तथा भौहों के समान जल में चलनेवाली चचल मछलियों की पक्तियों से यह विराजित हो रही थी । उन्नत स्तनों के समान जल में छिपे हुए मतवाले हाथियों के मनोहर कुम्भ-स्थलों से सुशोभित, नूपुर के समान सुमधुर हसों के सुन्दर शब्दों से गूँजित, वलय के समान कमल की नाल के समूहों से सयुक्त, उस ऐरावती नामक नदी को एक सर्वांग में सुन्दरी रमणी की भाँति देख कर राजा को परम प्रसन्नता हुई । हे राजन् । उस ऐरावती नदी में रूप के मद से मतवाली, गन्धर्वो के पीछे चलनेवाली अप्सराओं के समूह मध्याह्न के समय सर्वदा विहार करते थे । उन अप्सराओं के शरीर से धुले हुए सुन्दर केसर के साथ-साथ अपने दोनों किनारों के अनेक प्रकार के वृक्षों के पुष्पों की विभिन्न प्रकार की सुगन्धियों से सुगन्धित, तरंगों के समूहों में सूर्य की परछाई पड़ने से चकाचौध के कारण कठिनाई से देखने योग्य सूर्यमण्डल को धारण करनेवाली, देवताओं के हाथी ऐरावत की चोट से चिह्नित दोनों किनारों से युक्त उस ऐरावती का जल देवगज के कपोल स्थल से बहने वाले मद जल तथा देवांगनाओं के स्तनों में लगाये गये चन्दनों से व्याप्त एव सुगंधित हो रहा था, जिससे भ्रमरगण उसे चारों ओर से घेरे हुए थे । उस ऐरावती नदी के दोनों किनारों के वृक्ष सुगन्धित पुष्पों से लसे हुए थे और सुगन्धि के परम लालची तथा जरदी मचानेवाले भ्रमरों के समूहों से घिरे हुए थे । उस ऐरावती के मनोहर किनारों पर जाकर पशु, तपस्वी ऋषिगण एवं अप्सराओं समेत देववृन्द सर्वदा कामवश होकर प्रीति करने लगते थे । वहाँ देवताओं के समान सुन्दर पचित्र अगों वाले पुरुष तथा कमल एवं चन्द्रमा के समान आकर्षक मुखवाली स्वर्ग की सुन्दरियों के समान स्त्रियाँ प्रायः विहार करते हुए पाई जाती थीं। वह ऐरावती नदी सर्वदा देवता, भील, शबर, पुलिन्द थावि जगली जाति, राजाओं के समूह, एघ बाघ सिंह आदि हिंसक जगली
इसको बनाने के लिए आप सबसे पहले अंजीर को धोकर टुकड़ों में काट लें। फिर आप एक कढ़ाई में 2 टी स्पून घी डालें और गर्म करें। इसके बाद आप इसमें अंजीर के टुकड़े डालकर धीमी आंच पर भून लें। फिर आप एक बाउल में दूध डालकर इसमें भुने हुए अंजीर को करीब 4-5 घंटे तक भिगोकर रख दें। इसके बाद आप कढ़ाई में बचे हुए घी में छिलें हुए बादाम और कटी खारक डालें। फिर आप इनको धीमी आंच पर करीब 1-2 मिनट तक भूनकर एक बाउल में निकाल लें। इसके बाद आप मिक्सर जार भुने खारक, बादाम और हरी इलायची डालें। फिर आप इनको एक साथ अच्छी तरह से पीसकर चूरा बना लें। इसके बाद आप मिक्चर जार में दूध में भिगोई अंजीर डालें। फिर आप इसको भी सबके साथ अच्छी तरह से पीसकर मिक्चर को एक बर्तन में निकाल लें। इसके बाद आप बाकी के ड्राई फ्रूट्स को भी घी में भूनकर रख लें। फिर आप बचे हुए दूध को कढ़ाई में डालकर उबाल लें। इसके बाद आप इसमें पिसा हुआ अंजीर का पेस्ट डालें और मिलाकर पकाएं। फिर आप इसमें कंडेंस्ड मिल्क डालें और चलाते हुए धीमी आंच पर पका लें। इसके बाद आप इसमें स्वादानुसार चीनी डालकर घुलने तक पकाएं। फिर आप एक दो चम्मच दूध लेकर उसमें केसर को भिगोकर इसमें डाल दें। इसके बाद आप इस खीर को कम से कम 4-5 मिनट पकाकर गैस बंद कर दें। अब आपकी स्वादिष्ट अंजीर की खीर बनकर तैयार हो चुकी है। फिर आप इसको पिस्ता कतरन और अंजीर के टुकड़ों से गार्निश करके सर्व करें।
इसको बनाने के लिए आप सबसे पहले अंजीर को धोकर टुकड़ों में काट लें। फिर आप एक कढ़ाई में दो टी स्पून घी डालें और गर्म करें। इसके बाद आप इसमें अंजीर के टुकड़े डालकर धीमी आंच पर भून लें। फिर आप एक बाउल में दूध डालकर इसमें भुने हुए अंजीर को करीब चार-पाँच घंटाटे तक भिगोकर रख दें। इसके बाद आप कढ़ाई में बचे हुए घी में छिलें हुए बादाम और कटी खारक डालें। फिर आप इनको धीमी आंच पर करीब एक-दो मिनट तक भूनकर एक बाउल में निकाल लें। इसके बाद आप मिक्सर जार भुने खारक, बादाम और हरी इलायची डालें। फिर आप इनको एक साथ अच्छी तरह से पीसकर चूरा बना लें। इसके बाद आप मिक्चर जार में दूध में भिगोई अंजीर डालें। फिर आप इसको भी सबके साथ अच्छी तरह से पीसकर मिक्चर को एक बर्तन में निकाल लें। इसके बाद आप बाकी के ड्राई फ्रूट्स को भी घी में भूनकर रख लें। फिर आप बचे हुए दूध को कढ़ाई में डालकर उबाल लें। इसके बाद आप इसमें पिसा हुआ अंजीर का पेस्ट डालें और मिलाकर पकाएं। फिर आप इसमें कंडेंस्ड मिल्क डालें और चलाते हुए धीमी आंच पर पका लें। इसके बाद आप इसमें स्वादानुसार चीनी डालकर घुलने तक पकाएं। फिर आप एक दो चम्मच दूध लेकर उसमें केसर को भिगोकर इसमें डाल दें। इसके बाद आप इस खीर को कम से कम चार-पाँच मिनट पकाकर गैस बंद कर दें। अब आपकी स्वादिष्ट अंजीर की खीर बनकर तैयार हो चुकी है। फिर आप इसको पिस्ता कतरन और अंजीर के टुकड़ों से गार्निश करके सर्व करें।
Hardoi News: महिला के ससुर का आरोप है कि शाहाबाद CHC में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी नशे में धूत थे। स्वास्थ्य कर्मियों से काफ़ी मान मनौवल के बाद भी सीएचसी में भर्ती नहीं किया गया। Hardoi News: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधारने का नाम ही नहीं ले रही है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री लगातार प्रदेश के अस्पतालों सीएचसी का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश जिम्मेदारों को देते रहते है फिर भी स्वास्थ विभाग के मुलाजिम सुधारने का नाम ही नहीं लेते है। प्रदेश में प्रतिदिन अस्पतालों व सीएचसी पर लापरवाही व कर्मियों पर अभद्रता के आरोप लगते रहते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी से लगे हुए हरदोई जनपद जो कि स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ( UP Health Minister Brajesh Pathak) की जन्मभूमि में भी स्वास्थ विभाग के कर्मियों पर अभद्रता करने के आरोप लगते रहते है। बीती रात जनपद की शाहाबाद तहसील के अन्तर्गत आने वाली सीएचसी पर रात में कार्यरत स्वास्थ कर्मियों पर बीमार महिला को भर्ती ना करने व परिजनों के साथ अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शाहाबाद तहसील के नग़ला भगवान से एम्बुलेंस से पेट दर्द की शिकायत पर सीएचसी लेकर पहुंचे थे जहां पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने अभद्रता करते हुए पेट दर्द से पीड़ित महिला को भर्ती करने से माना कर दिया। महिला के ससुर का आरोप है कि शाहाबाद सीएचसी में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी नशे में धूत थे। स्वास्थ्य कर्मियों से काफ़ी मान मनौवल के बाद भी सीएचसी में भर्ती नहीं किया गया जिससे महिला की हालत और गंभीर हो गई। जिसके बाद महिला को एक निजी अस्पताल लेकर पहुँचे वहाँ भी अस्पताल का गेट ना खुलने के बाद महिला को हरदोई ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत इस्थिर बनी हुई है। लगातार स्वास्थ्य कर्मियों पर अभद्रता के उठ रहे सवालों पर कोई कार्यवाही जिम्मेदारों द्वारा क्यों नहीं की जाती है। उच्च अधिकारियों पर अभद्रता करने का आरोप लगातार प्रदर्शन व हड़ताल पर जाने वाले स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल आने वाले मरीज़ व उनके परिजनों की संवेदनाओं के साथ कैसे खिलवाड़ कर सकते है। मरिजों को भर्ती ना करने व अभद्रता करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए।
Hardoi News: महिला के ससुर का आरोप है कि शाहाबाद CHC में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी नशे में धूत थे। स्वास्थ्य कर्मियों से काफ़ी मान मनौवल के बाद भी सीएचसी में भर्ती नहीं किया गया। Hardoi News: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधारने का नाम ही नहीं ले रही है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री लगातार प्रदेश के अस्पतालों सीएचसी का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश जिम्मेदारों को देते रहते है फिर भी स्वास्थ विभाग के मुलाजिम सुधारने का नाम ही नहीं लेते है। प्रदेश में प्रतिदिन अस्पतालों व सीएचसी पर लापरवाही व कर्मियों पर अभद्रता के आरोप लगते रहते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी से लगे हुए हरदोई जनपद जो कि स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की जन्मभूमि में भी स्वास्थ विभाग के कर्मियों पर अभद्रता करने के आरोप लगते रहते है। बीती रात जनपद की शाहाबाद तहसील के अन्तर्गत आने वाली सीएचसी पर रात में कार्यरत स्वास्थ कर्मियों पर बीमार महिला को भर्ती ना करने व परिजनों के साथ अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शाहाबाद तहसील के नग़ला भगवान से एम्बुलेंस से पेट दर्द की शिकायत पर सीएचसी लेकर पहुंचे थे जहां पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने अभद्रता करते हुए पेट दर्द से पीड़ित महिला को भर्ती करने से माना कर दिया। महिला के ससुर का आरोप है कि शाहाबाद सीएचसी में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी नशे में धूत थे। स्वास्थ्य कर्मियों से काफ़ी मान मनौवल के बाद भी सीएचसी में भर्ती नहीं किया गया जिससे महिला की हालत और गंभीर हो गई। जिसके बाद महिला को एक निजी अस्पताल लेकर पहुँचे वहाँ भी अस्पताल का गेट ना खुलने के बाद महिला को हरदोई ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत इस्थिर बनी हुई है। लगातार स्वास्थ्य कर्मियों पर अभद्रता के उठ रहे सवालों पर कोई कार्यवाही जिम्मेदारों द्वारा क्यों नहीं की जाती है। उच्च अधिकारियों पर अभद्रता करने का आरोप लगातार प्रदर्शन व हड़ताल पर जाने वाले स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल आने वाले मरीज़ व उनके परिजनों की संवेदनाओं के साथ कैसे खिलवाड़ कर सकते है। मरिजों को भर्ती ना करने व अभद्रता करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए।
मंगलवार को देश को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि ये आर्थिक पैकेज पाकिस्तान की GDP के करीब-करीब बराबर है। विश्व बैंक के अनुसार, कोरोना वायरस के संकट में पाकिस्तान की GDP गिरकर 284 अरब डॉलर (लगभग 21. 38 लाख करोड़ रुपये) हो गई है। भारत की बात करें तो आर्थिक पैकेज उसकी GDP के 10 प्रतिशत के बराबर है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े बुरे असर से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। इसके जरिए न केवल जरूरतमंद वर्गों की मदद की जाएगी, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। यही कारण है कि इसे 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' नाम दिया गया है। पैकेज में लघु, कुटीर और मझोले उद्योगों, किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग पर जोर दिया गया है। अगर इस भारी-भरकम पैकेज की तुलना करें तो ये न केवल पाकिस्तान की GDP के लगभग बराबर है, बल्कि 149 देशों की GDP से अधिक है। इनमें वियतनाम, पुर्तगाल, ग्रीस, न्यूजीलैंड और रोमानिया आदि देश शामिल हैं। यही नहीं ये आर्थिक पैकेज भारत के 10 सबसे अमीर लोगों की कुल संपत्ति का लगभग दोगुना (1. 8 गुना) है। ये देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की निजी संपत्ति का पांच गुना है। अगर कंपनियों से तुलना करें तो भारत का आर्थिक पैकेज भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल कीमत के दोगुने से अधिक है। वहीं जेपीमॉर्गन और मास्टरकार्ड जैसे वैश्विक कंपनियों का बाजार मूल्य इसके बराबर है। अन्य वैश्विक कंपनियों से तुलना करें तो ये इंटेल, कोकाकोला और वेरीजोन जैसी कंपनियों के बाजार मूल्य से अधिक है। इसके अलावा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों के स्टॉक्स के 17 प्रतिशत के बराबर है। अन्य देशों की तुलना में कहां ठहरता है भारत का आर्थिक पैकेज? अगर कोरोना वायरस के संकट के समय अन्य देशों द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज से तुलना करें तो GDP के प्रतिशत के लिहाज से भारत का पैकेज बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पांचवें स्थान पर है। इस सूची में जापान सबसे ऊपर है जिसने अपनी GDP के 21 प्रतिशत के बराबर आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका का आर्थिक पैकेज उसकी GDP के 13 प्रतिशत के बराबर है। ऑस्ट्रेलिय में ये आंकड़ा 10. 8 प्रतिशत और जर्मनी में 10. 7 प्रतिशत है।
मंगलवार को देश को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीस लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि ये आर्थिक पैकेज पाकिस्तान की GDP के करीब-करीब बराबर है। विश्व बैंक के अनुसार, कोरोना वायरस के संकट में पाकिस्तान की GDP गिरकर दो सौ चौरासी अरब डॉलर हो गई है। भारत की बात करें तो आर्थिक पैकेज उसकी GDP के दस प्रतिशत के बराबर है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े बुरे असर से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को बीस लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। इसके जरिए न केवल जरूरतमंद वर्गों की मदद की जाएगी, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। यही कारण है कि इसे 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' नाम दिया गया है। पैकेज में लघु, कुटीर और मझोले उद्योगों, किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग पर जोर दिया गया है। अगर इस भारी-भरकम पैकेज की तुलना करें तो ये न केवल पाकिस्तान की GDP के लगभग बराबर है, बल्कि एक सौ उनचास देशों की GDP से अधिक है। इनमें वियतनाम, पुर्तगाल, ग्रीस, न्यूजीलैंड और रोमानिया आदि देश शामिल हैं। यही नहीं ये आर्थिक पैकेज भारत के दस सबसे अमीर लोगों की कुल संपत्ति का लगभग दोगुना है। ये देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की निजी संपत्ति का पांच गुना है। अगर कंपनियों से तुलना करें तो भारत का आर्थिक पैकेज भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल कीमत के दोगुने से अधिक है। वहीं जेपीमॉर्गन और मास्टरकार्ड जैसे वैश्विक कंपनियों का बाजार मूल्य इसके बराबर है। अन्य वैश्विक कंपनियों से तुलना करें तो ये इंटेल, कोकाकोला और वेरीजोन जैसी कंपनियों के बाजार मूल्य से अधिक है। इसके अलावा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड सभी कंपनियों के स्टॉक्स के सत्रह प्रतिशत के बराबर है। अन्य देशों की तुलना में कहां ठहरता है भारत का आर्थिक पैकेज? अगर कोरोना वायरस के संकट के समय अन्य देशों द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज से तुलना करें तो GDP के प्रतिशत के लिहाज से भारत का पैकेज बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पांचवें स्थान पर है। इस सूची में जापान सबसे ऊपर है जिसने अपनी GDP के इक्कीस प्रतिशत के बराबर आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका का आर्थिक पैकेज उसकी GDP के तेरह प्रतिशत के बराबर है। ऑस्ट्रेलिय में ये आंकड़ा दस. आठ प्रतिशत और जर्मनी में दस. सात प्रतिशत है।
नई दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निर्वाचन आयोग को 'बिना रीढ़ का' करार देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। केजरीवाल की टिप्पणी उन खबरों के प्रतिक्रियास्वरूप आई है, जिनमें कहा गया है कि लोग पार्टी के चुनाव चिन्ह और अन्य प्रचार सामग्रियों के साथ चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर जा रहे हैं और मतदान के दिन सोशल मीडिया और टीवी पर प्रचार कर रहे हैं। (देश-विदेश की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें) केजरीवाल ने कहा, "आरबीआई और सीबीआई की तरह ही निर्वाचन आयोग ने भी मोदीजी के समक्ष पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। " केजरीवाल ने कहा, "यह बिल्कुल बेशर्म और बिना रीढ़ वाला निर्वाचन आयोग है। " केजरीवाल ने कहा, "जिस प्रकार मोदीजी ने आरबीआई को बर्बाद कर दिया, उसी प्रकार उन्होंने निर्वाचन आयोग में अपने साथियों को नियुक्त करके आयोग को भी बर्बाद कर दिया है। " केजरीवाल ने नोटबंदी को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मोदीजी ने कहा था कि नोटबंदी से कालेधन पर लगाम लग जाएगी। लेकिन पंजाब और गोवा में यह खुलेआम बांटा जा रहा है। फिर नोटबंदी का क्या लाभ है। "
नई दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निर्वाचन आयोग को 'बिना रीढ़ का' करार देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। केजरीवाल की टिप्पणी उन खबरों के प्रतिक्रियास्वरूप आई है, जिनमें कहा गया है कि लोग पार्टी के चुनाव चिन्ह और अन्य प्रचार सामग्रियों के साथ चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर जा रहे हैं और मतदान के दिन सोशल मीडिया और टीवी पर प्रचार कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा, "आरबीआई और सीबीआई की तरह ही निर्वाचन आयोग ने भी मोदीजी के समक्ष पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। " केजरीवाल ने कहा, "यह बिल्कुल बेशर्म और बिना रीढ़ वाला निर्वाचन आयोग है। " केजरीवाल ने कहा, "जिस प्रकार मोदीजी ने आरबीआई को बर्बाद कर दिया, उसी प्रकार उन्होंने निर्वाचन आयोग में अपने साथियों को नियुक्त करके आयोग को भी बर्बाद कर दिया है। " केजरीवाल ने नोटबंदी को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मोदीजी ने कहा था कि नोटबंदी से कालेधन पर लगाम लग जाएगी। लेकिन पंजाब और गोवा में यह खुलेआम बांटा जा रहा है। फिर नोटबंदी का क्या लाभ है। "
- शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि नवाब मलिक का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा और लड़ाई लड़ी जाएगी। - संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए 'अफजल खान', 'कंस' और 'रावण' का जिक्र किया। मुंबईः प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नवाब मलिक को बुधवार को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया। मलिक की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया और चारों तरफ से बयानबाजी होने लगी। इसी कड़ी में शिवसेना के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए 'अफजल खान', 'कंस' और 'रावण' का जिक्र किया। राउत ने कहा कि नवाब मलिक का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा और लड़ाई लड़ी जाएगी। राउत ने कहा, 'महा विकास आघाडी से जब सामने-सामने नहीं लड़ सके, तब पीठ पीछे अफजल खान की तरह वार किया है, करने दो। एक मंत्री को कपट से अंदर डालने का काम करके किसी को आनंद आ रहा है तो आने दीजिए। नवाब मलिक से हम इस्तीफा नहीं लेंगे, हम लड़ेंगे और जीतेंगे। कंस और रावण को भी मारा गया था। यही हिंदुत्व है। जय महाराष्ट्र। ' इससे पहले राउत ने कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसियां 'माफिया' की तरह बीजेपी के उन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही हैं जिन्होंने उनके झूठ को उजागर किया है। राउत ने कहा, 'यह महाराष्ट्र सरकार के लिए एक चुनौती है। केंद्रीय एजेंसियां माफिया की भांति बीजेपी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही हैं जो उनके झूठ को उजागर करते हैं। लेकिन सच की जीत होगी और लड़ाई जारी रहेगी। यह 2024 तक जारी रहेगा और उसके बाद उन्हें नतीजा भुगतना होगा। मैंने महा विकास आघाडी सरकार के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं जल्द ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के बारे में खुलासा करूंगा। ' बता दें कि इससे पहले ईडी राउत के करीबियों के यहां भी छापे मार चुकी है और पीएमसी बैंक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी पत्नी वर्षा राउत से पूछताछ कर चुकी है।
- शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि नवाब मलिक का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा और लड़ाई लड़ी जाएगी। - संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए 'अफजल खान', 'कंस' और 'रावण' का जिक्र किया। मुंबईः प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नवाब मलिक को बुधवार को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया। मलिक की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया और चारों तरफ से बयानबाजी होने लगी। इसी कड़ी में शिवसेना के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए 'अफजल खान', 'कंस' और 'रावण' का जिक्र किया। राउत ने कहा कि नवाब मलिक का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा और लड़ाई लड़ी जाएगी। राउत ने कहा, 'महा विकास आघाडी से जब सामने-सामने नहीं लड़ सके, तब पीठ पीछे अफजल खान की तरह वार किया है, करने दो। एक मंत्री को कपट से अंदर डालने का काम करके किसी को आनंद आ रहा है तो आने दीजिए। नवाब मलिक से हम इस्तीफा नहीं लेंगे, हम लड़ेंगे और जीतेंगे। कंस और रावण को भी मारा गया था। यही हिंदुत्व है। जय महाराष्ट्र। ' इससे पहले राउत ने कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसियां 'माफिया' की तरह बीजेपी के उन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही हैं जिन्होंने उनके झूठ को उजागर किया है। राउत ने कहा, 'यह महाराष्ट्र सरकार के लिए एक चुनौती है। केंद्रीय एजेंसियां माफिया की भांति बीजेपी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही हैं जो उनके झूठ को उजागर करते हैं। लेकिन सच की जीत होगी और लड़ाई जारी रहेगी। यह दो हज़ार चौबीस तक जारी रहेगा और उसके बाद उन्हें नतीजा भुगतना होगा। मैंने महा विकास आघाडी सरकार के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं जल्द ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के बारे में खुलासा करूंगा। ' बता दें कि इससे पहले ईडी राउत के करीबियों के यहां भी छापे मार चुकी है और पीएमसी बैंक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी पत्नी वर्षा राउत से पूछताछ कर चुकी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है क्योंकि बड़ी संख्या में राज्यों ने इन पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप दिया है. वेतन, सोशल सिक्योरिटी, औद्योगिक संबंध और व्यवसाय सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर चार श्रम संहिताएं (Labour Codes) अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कम से कम 13 राज्यों में इन कानूनों पर मसौदा नियम पहले से जारी कर दिए हैं. केंद्र ने इन कोड्स के तहत नियमों को पहले ही अंतिम रूप दे दिया है और अब राज्यों को अपनी ओर से नियम बनाने की जरूरत है क्योंकि श्रम एक समवर्ती विषय है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है क्योंकि बड़ी संख्या में राज्यों ने इन पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप दिया है. केंद्र ने फरवरी 2021 में इन कोड्स पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन चूंकि श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र चाहता है कि राज्य इसे भी एक बार में लागू करें. केंद्रीय श्रम मंत्री (Union Labour Minister) भूपेंद्र यादव ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में एक जवाब में कहा था कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति संहिता ही एकमात्र कोड है जिस पर कम से कम 13 राज्यों ने मसौदा नियमों को पहले ही जारी कर दिया है. 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वेज कोड (Wage Code) पर सबसे अधिक मसौदा अधिसूचनाएं पूर्व-प्रकाशित की गई हैं. इसके बाद इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (Industrial Relations Code) (20 राज्यों द्वारा) और सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) (18) राज्यों द्वारा जारी किया गया है. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार और कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने चार लेबर कोड्स के तहत नियम जारी किए हैं. केंद्र सरकार बाकी राज्य सरकारों के साथ मिलकर चारों संहिताओं के तहत नियम बनाने का प्रयास कर रही है. केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया है. 8 अगस्त, 2019 को वेज कोड, 2019 और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 और 29 सितंबर 2020 को सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 व ऑक्युपेशनल सेफी, हेल्थ एंड वर्किंग कोड 2020 को नोटिफाई किया. हालांकि, केंद्र और राज्यों को इन कानूनों को संबंधित अधिकार क्षेत्र में लागू करने के लिए चार संहिताओं के तहत नियमों को अधिसूचित करने की जरूरत है. कोड्स के तहत नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उपयुक्त सरकार को सौंपी गई है और सार्वजनिक परामर्श के लिए 30 या 45 दिनों की अवधि के लिए उनके आधिकारिक राजपत्र में नियमों के प्रकाशन की आवश्यकता है. मंत्री के जवाब के अनुसार, वेतन संहिता पर मसौदा नियम 24 राज्यों द्वारा पूर्व-प्रकाशित किए जाते हैं. ये राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, राजस्थान, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, मिजोरम, तेलंगाना, असम, मणिपुर, केंद्र शासित प्रदेश हैं. जम्मू और कश्मीर, पुडुचेरी और दिल्ली के जीएनसीटी हैं. कम से कम 18 राज्यों ने सोशल सिक्योरिटी कोड्स पर नियमों का मसौदा पूर्व-प्रकाशित किया है. ये राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, असम, गुजरात, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर हैं. श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंध, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता को एक अप्रैल, 2021 से लागू करना था. इन चार संहिताओं से 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को सुसंगत किया जा सकेगा. मंत्रालय ने इन चार संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है. लेकिन कई राज्य इन नियमों को अधिसूचित करने की स्थिति में नहीं हैं ऐसे में इनका कार्यान्वयन अभी संभव नहीं है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है क्योंकि बड़ी संख्या में राज्यों ने इन पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप दिया है. वेतन, सोशल सिक्योरिटी, औद्योगिक संबंध और व्यवसाय सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर चार श्रम संहिताएं अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कम से कम तेरह राज्यों में इन कानूनों पर मसौदा नियम पहले से जारी कर दिए हैं. केंद्र ने इन कोड्स के तहत नियमों को पहले ही अंतिम रूप दे दिया है और अब राज्यों को अपनी ओर से नियम बनाने की जरूरत है क्योंकि श्रम एक समवर्ती विषय है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के अगले वित्तीय वर्ष तक लागू होने की संभावना है क्योंकि बड़ी संख्या में राज्यों ने इन पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप दिया है. केंद्र ने फरवरी दो हज़ार इक्कीस में इन कोड्स पर मसौदा नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन चूंकि श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र चाहता है कि राज्य इसे भी एक बार में लागू करें. केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में एक जवाब में कहा था कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति संहिता ही एकमात्र कोड है जिस पर कम से कम तेरह राज्यों ने मसौदा नियमों को पहले ही जारी कर दिया है. चौबीस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वेज कोड पर सबसे अधिक मसौदा अधिसूचनाएं पूर्व-प्रकाशित की गई हैं. इसके बाद इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड और सामाजिक सुरक्षा संहिता राज्यों द्वारा जारी किया गया है. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार और कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने चार लेबर कोड्स के तहत नियम जारी किए हैं. केंद्र सरकार बाकी राज्य सरकारों के साथ मिलकर चारों संहिताओं के तहत नियम बनाने का प्रयास कर रही है. केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया है. आठ अगस्त, दो हज़ार उन्नीस को वेज कोड, दो हज़ार उन्नीस और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड दो हज़ार बीस और उनतीस सितंबर दो हज़ार बीस को सोशल सिक्योरिटी कोड, दो हज़ार बीस व ऑक्युपेशनल सेफी, हेल्थ एंड वर्किंग कोड दो हज़ार बीस को नोटिफाई किया. हालांकि, केंद्र और राज्यों को इन कानूनों को संबंधित अधिकार क्षेत्र में लागू करने के लिए चार संहिताओं के तहत नियमों को अधिसूचित करने की जरूरत है. कोड्स के तहत नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उपयुक्त सरकार को सौंपी गई है और सार्वजनिक परामर्श के लिए तीस या पैंतालीस दिनों की अवधि के लिए उनके आधिकारिक राजपत्र में नियमों के प्रकाशन की आवश्यकता है. मंत्री के जवाब के अनुसार, वेतन संहिता पर मसौदा नियम चौबीस राज्यों द्वारा पूर्व-प्रकाशित किए जाते हैं. ये राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, राजस्थान, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, मिजोरम, तेलंगाना, असम, मणिपुर, केंद्र शासित प्रदेश हैं. जम्मू और कश्मीर, पुडुचेरी और दिल्ली के जीएनसीटी हैं. कम से कम अट्ठारह राज्यों ने सोशल सिक्योरिटी कोड्स पर नियमों का मसौदा पूर्व-प्रकाशित किया है. ये राज्य मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, असम, गुजरात, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर हैं. श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंध, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता को एक अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस से लागू करना था. इन चार संहिताओं से चौंतालीस केंद्रीय श्रम कानूनों को सुसंगत किया जा सकेगा. मंत्रालय ने इन चार संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है. लेकिन कई राज्य इन नियमों को अधिसूचित करने की स्थिति में नहीं हैं ऐसे में इनका कार्यान्वयन अभी संभव नहीं है.
PATNA : बिहार में कोरोना टीकाकरण अभियान में नई ऊंचाई हासिल कर ली है। राज्य में टीकाकरण 7 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। विशेष अभियान के तहत बिहार में 14 लाख 18 हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई गई। राज्य में अब तक 7 करोड़ 6 लाख 89 हजार 58 टीके लग चुके हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के मंगल पांडे ने इस उपलब्धि को बिहार के लिए एक बड़ी कामयाबी बताया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है कि नीतीश सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था उसे हासिल किया है। इतना ही नहीं मंत्री मंगल पांडे ने बिहार में इस सफलता के लिए स्वास्थ्यकर्मियों जिलों के डीएम और बिहार की जनता का शुक्रिया भी अदा किया है। रविवार को बिहार में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया इस अभियान के तहत 8846 से मोटरसाइकिल सवार टीकाकरण टीम ने घर-घर जाकर टीकाकरण किया स्वस्थ विभाग को उम्मीद है कि दूसरी खुराक का आंकड़ा भी दो करोड़ के पार चला जाएगा विभाग ने दिसंबर तक आठ करोड़ से ज्यादा टीके की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा है। विशेष टीकाकरण अभियान के तहत कटिहार के कई इलाकों में मस्जिदों से अजान के बाद लोगों से कोरोना वैक्सीन लेने की अपील की गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कई जिलों में मस्जिदों के जरिए की गई अपील का असर भी देखने को मिला है। खास बात यह रही कि 7 नवंबर की तारीख को ही टीकाकरण का यह आंकड़ा 7 करोड़ के पार चला गया। 6 नवंबर को या आंकड़ा 7 लाख पीछे था। उधर 18 साल से कम उम्र वाले किशोरों को कोरोना वैक्सीन जल्द मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने जाए द जायडस कैडिला के तीन खुराक वाले कोविड-19 जायकोव डी कि एक करोड़ खुराक खरीदने को मंजूरी दे दी है। 12 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को यह वैक्सीन लगाई जाएगी। जायडस कैडिला के मुताबिक टेस्टिंग के दौरान यह वैक्सीन 66. 6 फीसदी प्रभावी पाया गया है। एक आंकड़े के मुताबिक देश में 12 से 18 साल के बीच के किशारों की संख्या 14 करोड़ से ज्यादा है जबकि 2 से 18 साल के उम्र के बच्चों की संख्या 35 करोड़ से ज्यादा है।
PATNA : बिहार में कोरोना टीकाकरण अभियान में नई ऊंचाई हासिल कर ली है। राज्य में टीकाकरण सात करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। विशेष अभियान के तहत बिहार में चौदह लाख अट्ठारह हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई गई। राज्य में अब तक सात करोड़ छः लाख नवासी हजार अट्ठावन टीके लग चुके हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के मंगल पांडे ने इस उपलब्धि को बिहार के लिए एक बड़ी कामयाबी बताया है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है कि नीतीश सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था उसे हासिल किया है। इतना ही नहीं मंत्री मंगल पांडे ने बिहार में इस सफलता के लिए स्वास्थ्यकर्मियों जिलों के डीएम और बिहार की जनता का शुक्रिया भी अदा किया है। रविवार को बिहार में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया इस अभियान के तहत आठ हज़ार आठ सौ छियालीस से मोटरसाइकिल सवार टीकाकरण टीम ने घर-घर जाकर टीकाकरण किया स्वस्थ विभाग को उम्मीद है कि दूसरी खुराक का आंकड़ा भी दो करोड़ के पार चला जाएगा विभाग ने दिसंबर तक आठ करोड़ से ज्यादा टीके की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा है। विशेष टीकाकरण अभियान के तहत कटिहार के कई इलाकों में मस्जिदों से अजान के बाद लोगों से कोरोना वैक्सीन लेने की अपील की गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कई जिलों में मस्जिदों के जरिए की गई अपील का असर भी देखने को मिला है। खास बात यह रही कि सात नवंबर की तारीख को ही टीकाकरण का यह आंकड़ा सात करोड़ के पार चला गया। छः नवंबर को या आंकड़ा सात लाख पीछे था। उधर अट्ठारह साल से कम उम्र वाले किशोरों को कोरोना वैक्सीन जल्द मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने जाए द जायडस कैडिला के तीन खुराक वाले कोविड-उन्नीस जायकोव डी कि एक करोड़ खुराक खरीदने को मंजूरी दे दी है। बारह साल से अधिक उम्र वाले लोगों को यह वैक्सीन लगाई जाएगी। जायडस कैडिला के मुताबिक टेस्टिंग के दौरान यह वैक्सीन छयासठ. छः फीसदी प्रभावी पाया गया है। एक आंकड़े के मुताबिक देश में बारह से अट्ठारह साल के बीच के किशारों की संख्या चौदह करोड़ से ज्यादा है जबकि दो से अट्ठारह साल के उम्र के बच्चों की संख्या पैंतीस करोड़ से ज्यादा है।
New Delhi: फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' (Avatar: The way of water) ने अपनी धमाकेदार शुरुआत के बाद दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस (Avatar 2 Box Office Collection) पर रिकॉर्ड तोड़ना जारी रखा है. जेम्स कैमरून (James Cameron) के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने अपने पहले वीकेंड में लगभग 131 करोड़ से 133 करोड़ रुपये तक कमाए हैं. साथ ही, फिल्म टिकट खिड़की पर शानदार कमाई कर रही है. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म ने केवल तीन दिनों में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. आपको बता दें कि, बॉक्स ऑफिस पर पहले वीकेंड के अंत में, 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' ने भारत में केवल तीन दिनों में लगभग 131 करोड़ रुपये से 133 करोड़ रुपये की कमाई की है. इसके साथ, 'अवतार 2' ने मार्वल की फिल्म 'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' को पार कर लिया है, जिसने रिलीज के केवल तीन दिनों में 126 करोड़ रुपये कमाए थे. ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला के अनुसार, जेम्स कैमरन की फिल्म ने दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की थी. उन्होंने ट्वीट किया, और लिखा "#AvatarTheWayOfWater 1st Weekend BO: उत्तरी अमेरिका - $134 मिलियन. चीन - $59 मिलियन. शेष विश्व - $242 मिलियन. कुल - $435 मिलियन." इससे पहले, 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' (Avatar: The way of water) को इस फिल्म के पहले पार्ट अवतार (2009) के 13 साल बाद रिलीज किया गया है. फिल्म की कास्ट के बारे में बात करें तो, इस फिल्म में सैम वर्थिंगटन, सिगोरनी वीवर, जो सलदाना और केट विंसलेट सहित कई अन्य एक्टर्स शामिल हैं. फिल्म के अभी तक के कलेक्शन को देखते हुए 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' की आने वाले समय में कमाई में बढोतरी होने की उम्मीद है.
New Delhi: फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' ने अपनी धमाकेदार शुरुआत के बाद दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ना जारी रखा है. जेम्स कैमरून के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने अपने पहले वीकेंड में लगभग एक सौ इकतीस करोड़ से एक सौ तैंतीस करोड़ रुपये तक कमाए हैं. साथ ही, फिल्म टिकट खिड़की पर शानदार कमाई कर रही है. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म ने केवल तीन दिनों में एक सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. आपको बता दें कि, बॉक्स ऑफिस पर पहले वीकेंड के अंत में, 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' ने भारत में केवल तीन दिनों में लगभग एक सौ इकतीस करोड़ रुपये से एक सौ तैंतीस करोड़ रुपये की कमाई की है. इसके साथ, 'अवतार दो' ने मार्वल की फिल्म 'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' को पार कर लिया है, जिसने रिलीज के केवल तीन दिनों में एक सौ छब्बीस करोड़ रुपये कमाए थे. ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला के अनुसार, जेम्स कैमरन की फिल्म ने दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की थी. उन्होंने ट्वीट किया, और लिखा "#AvatarTheWayOfWater एकst Weekend BO: उत्तरी अमेरिका - एक सौ चौंतीस डॉलर मिलियन. चीन - उनसठ डॉलर मिलियन. शेष विश्व - दो सौ बयालीस डॉलर मिलियन. कुल - चार सौ पैंतीस डॉलर मिलियन." इससे पहले, 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' को इस फिल्म के पहले पार्ट अवतार के तेरह साल बाद रिलीज किया गया है. फिल्म की कास्ट के बारे में बात करें तो, इस फिल्म में सैम वर्थिंगटन, सिगोरनी वीवर, जो सलदाना और केट विंसलेट सहित कई अन्य एक्टर्स शामिल हैं. फिल्म के अभी तक के कलेक्शन को देखते हुए 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' की आने वाले समय में कमाई में बढोतरी होने की उम्मीद है.
भोपाल में पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नई किताब का विमोचन हुआ। इसको पूरा करने में 4 साल का वक्त लगा। बता दें समय-समय पर पुलिस रेगुलेशन एक्ट में संशोधन किए जाते रहे हैं। जिसे पुलिस मुख्यालय के लाइब्रेरियन के पद पर रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी कर रहे थे। इस दौरान उनकी तबीयत खराब हुई लेकिन एक्ट की सभी गलतियों को दूर करने के साथ नए कानूनों को शामिल किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्पताल में फरीद बज्मी के हाथों किताब का विमोचन कराया। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को पालीवाल अस्पताल में पुलिस रेगुलेशन एक्ट किताब का एडीजी अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने विमोचन किया। इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी मलय जैन, एडिशनल डीसीपी महावीर मुजाल्दे, एआईजी इरमीन शाह के साथ फरीद बज्मी के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। बता दें पुलिस रेगुलेशन एक्ट में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे है। उन संशोधनों को शामिल करके पुलिस रेगुलेशन एक्ट को अपडेट किया जाता है। लंबे समय से अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इस काम की पहल खुद ही पुलिस मुख्यालय के लाइब्रेरियन के पद पर रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी ने की। उन्होंने काफी प्रयास करके इन सारे संशोधनों को एकत्र करके किताब के रूप में तैयार किया जो पुलिस विभाग के कर्मचारियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। इस काम को 4 साल में पूरा किया गया। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई लेकिन पहले प्रकाशित हुई एक्ट की सभी गलतियों को दूर करने के साथ पुलिस एक्ट में बने नए कानूनों को भी इस किताब में शामिल किया। बज्मी की गंभीर अवस्था होने की वजह से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्पताल जाकर उनका हालचाल लिया। इसके साथ ही पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नई किताब का विमोचन भी फरीद बज्मी के हाथों कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भोपाल में पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नई किताब का विमोचन हुआ। इसको पूरा करने में चार साल का वक्त लगा। बता दें समय-समय पर पुलिस रेगुलेशन एक्ट में संशोधन किए जाते रहे हैं। जिसे पुलिस मुख्यालय के लाइब्रेरियन के पद पर रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी कर रहे थे। इस दौरान उनकी तबीयत खराब हुई लेकिन एक्ट की सभी गलतियों को दूर करने के साथ नए कानूनों को शामिल किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्पताल में फरीद बज्मी के हाथों किताब का विमोचन कराया। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को पालीवाल अस्पताल में पुलिस रेगुलेशन एक्ट किताब का एडीजी अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्त लाइब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने विमोचन किया। इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी मलय जैन, एडिशनल डीसीपी महावीर मुजाल्दे, एआईजी इरमीन शाह के साथ फरीद बज्मी के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। बता दें पुलिस रेगुलेशन एक्ट में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे है। उन संशोधनों को शामिल करके पुलिस रेगुलेशन एक्ट को अपडेट किया जाता है। लंबे समय से अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इस काम की पहल खुद ही पुलिस मुख्यालय के लाइब्रेरियन के पद पर रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी ने की। उन्होंने काफी प्रयास करके इन सारे संशोधनों को एकत्र करके किताब के रूप में तैयार किया जो पुलिस विभाग के कर्मचारियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। इस काम को चार साल में पूरा किया गया। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई लेकिन पहले प्रकाशित हुई एक्ट की सभी गलतियों को दूर करने के साथ पुलिस एक्ट में बने नए कानूनों को भी इस किताब में शामिल किया। बज्मी की गंभीर अवस्था होने की वजह से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्पताल जाकर उनका हालचाल लिया। इसके साथ ही पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नई किताब का विमोचन भी फरीद बज्मी के हाथों कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दुनिया की सबसे मशहूर टी-20 लीग यानी इंडियन प्रीमियर लीग में ना जाने खिलाड़ियों ने कितने ही हैरान कर देने वाले रिकॉर्ड बनाए है। चाहें वो क्रिस गेल का सबसे तेज शतक हो या एबी डिविलियर्स की तूफानी पारियों की कतार। इंडियन प्रीमियर लीग का हर मैच किसी जंग से कम नहीं होता, जिसमें खिलाड़ी अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी। इन्हीं बड़े-बड़े खिलाड़ियों के शानदार रिकॉर्डस के बीच आज हम बात करेंगे जाने-माने टॉप 5 खिलाड़ियों के ऐसे रिकॉर्ड के बारे में जो उनके लिए थोड़ा शर्मनाक है। इन खिलाड़ियों ने आईपीएल के इतिहास में सबसे ज्यादा बार जीरो पर आउट होकर पवेलियन लौटने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वहीं हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में पांचो खिलाड़ी भारतीय हैं। हरभजन सिंह- आईपीएल में सबसे ज्यादा बार जीरो पर आउट होने की लिस्ट में पहले नंबर पर भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का नाम आता है। भज्जी अबतक आईपीएल के इतिहास में कुल 13 बार बिना खाता खोले पवेलियन लौट चुके है। हरभजन ने इस दौरान आईपीएल में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेला है। पार्थिव पटेल- आईपीएल में 6 टीमों के लिए खेल चुके पार्थिव पटेल इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। पार्थिव आईपीएल में 139 मैचों की 137 पारियों में कुल 13 बार जीरो पर आउट होकर पवेलियन लौटे है। पटेल अब आईपीएल से संन्यास ले चुके है। इन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरूआत साल 2008 में एमएस धोनी की कप्तानी वाली सीएसके के साथ की थी।
दुनिया की सबसे मशहूर टी-बीस लीटरग यानी इंडियन प्रीमियर लीग में ना जाने खिलाड़ियों ने कितने ही हैरान कर देने वाले रिकॉर्ड बनाए है। चाहें वो क्रिस गेल का सबसे तेज शतक हो या एबी डिविलियर्स की तूफानी पारियों की कतार। इंडियन प्रीमियर लीग का हर मैच किसी जंग से कम नहीं होता, जिसमें खिलाड़ी अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी। इन्हीं बड़े-बड़े खिलाड़ियों के शानदार रिकॉर्डस के बीच आज हम बात करेंगे जाने-माने टॉप पाँच खिलाड़ियों के ऐसे रिकॉर्ड के बारे में जो उनके लिए थोड़ा शर्मनाक है। इन खिलाड़ियों ने आईपीएल के इतिहास में सबसे ज्यादा बार जीरो पर आउट होकर पवेलियन लौटने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वहीं हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में पांचो खिलाड़ी भारतीय हैं। हरभजन सिंह- आईपीएल में सबसे ज्यादा बार जीरो पर आउट होने की लिस्ट में पहले नंबर पर भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का नाम आता है। भज्जी अबतक आईपीएल के इतिहास में कुल तेरह बार बिना खाता खोले पवेलियन लौट चुके है। हरभजन ने इस दौरान आईपीएल में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेला है। पार्थिव पटेल- आईपीएल में छः टीमों के लिए खेल चुके पार्थिव पटेल इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। पार्थिव आईपीएल में एक सौ उनतालीस मैचों की एक सौ सैंतीस पारियों में कुल तेरह बार जीरो पर आउट होकर पवेलियन लौटे है। पटेल अब आईपीएल से संन्यास ले चुके है। इन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरूआत साल दो हज़ार आठ में एमएस धोनी की कप्तानी वाली सीएसके के साथ की थी।
पल भर में नष्ट हो जाती है । इस अवसर पर चक्रवर्ती को जो वैराग्य हुआ, उससे उन्होंने ससार का परित्याग कर दिया। दीक्षा धारण करने के बाद रानियाँ, कर्मचारी, अमीर, उमराव आदि ससार में वापस लाने की लालसा से छः महीने तक उनके पीछे लगे रहे; पर उन्होंने उनके सामने देखा तक नहीं । अन्त में निराश होकर वे सब लौट आये और सनत्कुमार मुनि रोगों की वेदना को शान्त-भाव से सहन करते हुए तपस्या करने लगे। रोगों की मौजूदगी में ही उन्होंने सात सौ वर्ष तक तपस्या की। इस तपस्या से उन्होंने ग्रामपपधि, विप्रौषधि, खेलीपधि, जल्लोषधि, सर्वोपधि श्रादि लब्धियों की प्राप्ति हुई। एक बार फिर इन्द्र महाराज ने उनके धैर्य और सहनशीलता की प्रशसा की । पहलेवाले दोनों देवता इन्द्र की सम्पति लेकर सनत्कुमार की धीरज की परीक्षा करने के लिए वैद्र के रूप में उस वन में आये, जहाँ सनत्कुमार मुनि तप कर रहे थे । वे सनत्कुमार मुनि के आस-पास चक्कर काटने लगे । मुनि ने पूछा- 'तुम यहाँ किस प्रयोजन से घूम रहे हो ?' वैद्यों ने कहा- हम चैय हैं। हमारे पास सब प्रकार की शरीर में बहुत से रोग हैं। इनकी चिकित्सा करा लीजिए। हमें पैसों की लालसा नहीं है। हम परोपकार के लिए मुफ्त चिकित्सा करते है, अपने मन में किसी प्रकार की प्राराका न कर हम से चिकित्सा करो लीजिए । सनत्कुमार ने कहा- 'वैयराजो ! तुम किस दर्द की दवा करते हो ? श्रान्तरिक दर्दों को १ या वाह्य दर्दो की ? शरीर के ददों की या श्रात्मा के ददर्दों की १' वैद्यों ने कहा- 'शरीर के बाह्य ददों की ।" मुनि बोले- 'इन दर्दों को 'दूर करना तो सहन है। देखो, इस थूक से भी ये मिट सकते है।' इतना कह कर उन्होंने अपना थूक लेकर शरीर के एक हिस्से पर चुपड़ लिया और वह हिस्सा सुवर्ण वर्ण का सा हो गया । भुनि ने फिर कहा- 'वैद्यो, शरीर के ददों की अपेक्षा आत्मा के दर्द अधिक कष्ट साध्य है। वे बहुत समय से लगे हुए हैं और बहुत हो त्रासजनक है। इन दर्दों - ज्ञानावरणीय आदिकों की दवा तुम्हारे पास हो तो दो। मैं उसका सेवन करूँगा ! वैद्यों ने कहा - ये रोग तो इमें भी कष्ट दे रहे हैं। इनकी दवा हमारे पास नहीं है। इतना कहकर उन्होंने मुनिराज की प्रशसा की, उनके धैर्य का बखान किया और चले. गये । सनत्कुमार मुनि बहुत वर्षों तक संयम की धाराधना करके एक मास का संयारा कर केवल ज्ञान पाकर समाधिपरिणामों के साथ, कालधर्म पाकर मोक्ष पधारे। इस दृष्टान्त ने शरीर की नश्वरता और रोगीलापन स्पष्ट ज्ञात हो जाता है। इस क्षणभगुर शरीर से भी सनत्कुमार ने जैसा सार निकाला, उसी प्रकार शरीर पर मोह न रखते हुए परोपकार, व्रत, नियम, तप, जप, करके उससे सार निकालना चाहिए । ॥४१॥ छठी भावना का उपसंहारज्ञात्वा गह्यं फल्गु पदार्थाचित्कायें, 'मुत्तवा मोह तद्विषयं भोगनिकायम् । लब्घु लाभ मानवतन्या कुरु काम, धर्म ज्ञान ध्यान तपस्यामयमर्हम् ।।४२।। अर्थ -हे मद्र ! निस्सार तुच्छ पदार्थों से भरपूर इस शरीर को निन्दनीय और तुच्छ समझकर इस पर जो श्रधप्रेम-मोह-है उसे त्याग दे । विषय-भोग की वासना को कम करके या जड़ से उखाड़ कर फेंक । इस मानव शरीर में से यात्मश्रेय तथा मोक्ष प्राप्ति रूप उत्तम लाभ को प्राप्त करने के लिए जानी महात्मानों द्वारा उपदिष्ट ज्ञान, ध्यान, तपमय उत्तम धर्म का सेवन कर, जिससे फर्म-वन्धन टूटे और भवभ्रमण छूटे। ( ४२ ) विवेचन - भगवती सूत्र के नवे शतक के तैतीसवें उद्देश में - जमालि क्षत्रिय कुमार अपनी माता के सामने शरीर का वर्णन करते हुए कहते हैं-' एवं खलु अम्मयाश्रो ! माणुस्सग सरीर दुक्खाययणं विविवाहि सयसनिकेयं अढिकढुट्टियं चिरापहारु जालडवणद्वसंपियद मट्टियमंड व दुध्य असुइस फिलिट्ठ अद्विविय सव्वकाल संठप्पयं जराकुणिम-जज्जरघर च सडणपण विद्ध सणधरमं पुर्विव वा पच्छा वा अवस्स विप्पजहियव्वं भविस्सइ ।' अर्थ--माता ! मनुष्य का शरीर दुःख का घर है। हजारों व्याधियों के उत्पन्न होने की भूमि है, हाड़-रूपी काठ के श्राधार पर टिका हुआ है, नाड़ियों और नसों से जकड़ा है, मिट्टी के कच्चे वर्त्तन की नाई दुर्बल है, ऋशुचिमय पदार्थों से भरा है, सदा अस्थिर है, जरा औौर मृत्यु का टूटा-फूटा झोपड़ा है, सड़ना पड़ना और विध्वंस होना इसका स्वभाव है, और पहले या पीछे-कभी न कभी, छोड़ना अवश्य ही पड़ेगा। उल्लिखित वाक्य में शरीर की भीतरी हालत का सच्चा चित्रण किया गया है। निस्सार, तुच्छ और अपवित्र पदार्थों से भरे हुए इस शरीर में न कस्तूरी, केशर, चदन, अर्ग्रजा जैसे सुगन्धित पदार्थ हैं और न सुवर्ण, मोती, माणिक, नीलम और पन्ना जैसे देखने में सुन्दर पदार्थ ही है। इसके विपरीत हाड़, मास श्रादि निस्सार और अपवित्र पदार्थ भरे पडे हैं। इसके भीतर निवास करना भी आत्मा के लिए दुःख का ही कारण है। पाखाने या ऐसे ही किसी गदगीवाले स्थान में निवास करना किसे रुचिकर होगा १ दुःख का दूसरा कारण शरीर की है। जिस वस्तु को इष्ट मान लिया है, उसे किसी प्रकार इजा पहुॅचते या नष्ट होते देखकर स्वभावतः मनुष्य को दुःख होता है । कहा भी है -- जे. केइ सरीरे सत्ता, वराणो रुवे य सव्वसो । मणसा कायवक केणं, सव्वेते दुक्खसंभवा ॥ अर्थात् जो मनुष्य शरीर या उसके रूप-लावण्य में मन, वचन और कार्य से आसक्त हो रहे हैं उन्हें अन्त में दुःख ही भुगतना पड़ता है ? देहे विमुह्य न कुरुषे किमधं न वेत्सि, 17 - देहस्थ एव भजसे भवदुःखजालम् । लोहाश्रितो हि सहते घनघातमग्निर्याधान तेऽस्य च नभोवदना श्रयत्वे ।। अर्थात् - हे भद्र ! शरीर में मोहित होकर उसके लिए विषयों में श्रासक्त बनकर पाप कर्म क्यों करता है ? तुझे सबर नहीं कि श्रात्मा शरीर में रहकर ही ससार के दुखों को भुगत रहा है। जैमे श्रमि यदि लोहे की सगति न करे, तो उसे घनों की चोटें नहीं मेलनी पड़तों, किन्तु लोहे का श्राश्रय लेने से सहनी पड़ती है, उसी प्रकार थमि जैसे तेजस्वी श्रात्मा को शरीर रूप लोहे का ससर्ग यदि न हो, वरन् प्रकाश की भाँति निर्लेपता, अनाभितता हो, तो किसी भी प्रकार की पीड़ा न सहनी पड़े । उत्तराध्ययन और श्राध्यात्मकल्पद्रुम के पद्यों में शरीर की ग्रासक्ति को दुस का कारण बतलाया गया है । हिरन शब्द की ग्रासक्ति में, पतगा रूप की आसक्ति में, भौंरा गन्ध की प्रासक्ति मे, मत्स्य स्वाद की ग्रासक्ति में और हाथी स्पर्श की ग्रासक्ति में अपने प्राण गँवा बैठता है। इन्हें एक-एक इन्द्रिय की आसक्ति में विडम्वना भोगनी पड़ती है । तब जो लोग पाँचों इन्द्रयों के साथ शरीर पर ग्रासक्ति रखते हैं, उन्हें यदि विडम्बनाएँ भोगनी पड़े, तो इसमें श्री क्या है इसीलिए कहा गया है - 'मुक्त्वा मोह ।' भोग बहुत भोगे हैं। देवता के भव में पल्योपम और सागरोपम पर्यन्त दिव्य भोग भोगे फिर भी तृति न हुई, तो मनुष्य के स्वल्पकालीन तुच्छ भोगों से क्या, तृति होना सम्भव है, जब तक मोह को न भगा दिया जाय, तब तक न भोगों से -तृप्ति हो सकती है, न संतोष ही । मोह हटाने से ही सतोप मिलता है। बिना सतोष के चित्तवृत्ति धर्म में नहीं स्थिर होती । ज्ञान-ध्यान में मन नहीं लगता, तपस्या नहीं हो सकती और जब तक यह न हो, तब तक कर्म से छुटकारा पाकर मोक्ष नहीं प्राप्त किया जा सकता । यदि इस जीवन में मोक्ष की निसेनी गुणश्रेणि पर न चढ पाये, तो फिर ऐसे सुअवसर के मिलने की आशा भी नहीं की जा सकती; क्योंकि 'माणुस्स खलु दुल्लह मनुष्य जीवन मिलना कठिन है। इस दुर्लभ जीवन को खाने-पीने, शरीर को सिंगारने या मौज- मैजे उड़ाने में भोग भोगने में व्यय कर दिया, तो वह लाभ नहीं हो सकता, जो इस जीवन से होना चाहिए, इसीलिए कहा है- 'लधुं लाभ' इत्यादि । मानव शरीर का लाभ समाज-सेवा, देश-सेवा, धर्म-सेवासेवा बजाना ही है। इस जीवन में जितनी सेवा बजाई जा सके, उतना ही लाभ है । इस लाभ को छोड़कर सिर्फ टीप-टाप करने या शरीर को पोषने में ही यदि समस्त शक्तियों का उपयोग किया जाय, तो उससे अमरता प्राप्त नहीं हो सकती । सुन्दर या असुन्दर, पुष्ट या अपुष्ट, बलबानू या दुर्बल, चाहे जैसा शरीर हो, अन्त में तो राख या मिट्टी में ही मिलनेवाला है। दलपतराम ने ठीक ही कहा है कि -राख थशे रणमां बली ने बधी, कंचन सरखी शुभ काया ।' और भी एक विद्वान ने कहा हैकितने मुफलिस हो गये, कितने तवंगर हो गये । खाक में जब मिल गये, दोनों यरायर हो गये । जब इस शरीर की वर्त्तमान स्थिति अपवित्रता से भरी हुई है और, भविष्य की स्थिति नष्ट होने की ऐ, तय ऐमे शरीर पर मोह रखकर विषयों में फैले रहकर श्रमूल्य श्रवार को गँवानेवाला वुढिमान् नहीं, वल्कि मूर्ख हो गिना जायगा। फौन विद्वान् पुरुष इस प्रकार की मूर्खता फरेगा ? कोई नहीं । विवेकी पुरुष तो अशुचि भावना से शरीर की श्रान्तरिक हालत का विचार करके उससे श्रेय साधन करने का ही प्रयास करेंगे । ॥४२॥
पल भर में नष्ट हो जाती है । इस अवसर पर चक्रवर्ती को जो वैराग्य हुआ, उससे उन्होंने ससार का परित्याग कर दिया। दीक्षा धारण करने के बाद रानियाँ, कर्मचारी, अमीर, उमराव आदि ससार में वापस लाने की लालसा से छः महीने तक उनके पीछे लगे रहे; पर उन्होंने उनके सामने देखा तक नहीं । अन्त में निराश होकर वे सब लौट आये और सनत्कुमार मुनि रोगों की वेदना को शान्त-भाव से सहन करते हुए तपस्या करने लगे। रोगों की मौजूदगी में ही उन्होंने सात सौ वर्ष तक तपस्या की। इस तपस्या से उन्होंने ग्रामपपधि, विप्रौषधि, खेलीपधि, जल्लोषधि, सर्वोपधि श्रादि लब्धियों की प्राप्ति हुई। एक बार फिर इन्द्र महाराज ने उनके धैर्य और सहनशीलता की प्रशसा की । पहलेवाले दोनों देवता इन्द्र की सम्पति लेकर सनत्कुमार की धीरज की परीक्षा करने के लिए वैद्र के रूप में उस वन में आये, जहाँ सनत्कुमार मुनि तप कर रहे थे । वे सनत्कुमार मुनि के आस-पास चक्कर काटने लगे । मुनि ने पूछा- 'तुम यहाँ किस प्रयोजन से घूम रहे हो ?' वैद्यों ने कहा- हम चैय हैं। हमारे पास सब प्रकार की शरीर में बहुत से रोग हैं। इनकी चिकित्सा करा लीजिए। हमें पैसों की लालसा नहीं है। हम परोपकार के लिए मुफ्त चिकित्सा करते है, अपने मन में किसी प्रकार की प्राराका न कर हम से चिकित्सा करो लीजिए । सनत्कुमार ने कहा- 'वैयराजो ! तुम किस दर्द की दवा करते हो ? श्रान्तरिक दर्दों को एक या वाह्य दर्दो की ? शरीर के ददों की या श्रात्मा के ददर्दों की एक' वैद्यों ने कहा- 'शरीर के बाह्य ददों की ।" मुनि बोले- 'इन दर्दों को 'दूर करना तो सहन है। देखो, इस थूक से भी ये मिट सकते है।' इतना कह कर उन्होंने अपना थूक लेकर शरीर के एक हिस्से पर चुपड़ लिया और वह हिस्सा सुवर्ण वर्ण का सा हो गया । भुनि ने फिर कहा- 'वैद्यो, शरीर के ददों की अपेक्षा आत्मा के दर्द अधिक कष्ट साध्य है। वे बहुत समय से लगे हुए हैं और बहुत हो त्रासजनक है। इन दर्दों - ज्ञानावरणीय आदिकों की दवा तुम्हारे पास हो तो दो। मैं उसका सेवन करूँगा ! वैद्यों ने कहा - ये रोग तो इमें भी कष्ट दे रहे हैं। इनकी दवा हमारे पास नहीं है। इतना कहकर उन्होंने मुनिराज की प्रशसा की, उनके धैर्य का बखान किया और चले. गये । सनत्कुमार मुनि बहुत वर्षों तक संयम की धाराधना करके एक मास का संयारा कर केवल ज्ञान पाकर समाधिपरिणामों के साथ, कालधर्म पाकर मोक्ष पधारे। इस दृष्टान्त ने शरीर की नश्वरता और रोगीलापन स्पष्ट ज्ञात हो जाता है। इस क्षणभगुर शरीर से भी सनत्कुमार ने जैसा सार निकाला, उसी प्रकार शरीर पर मोह न रखते हुए परोपकार, व्रत, नियम, तप, जप, करके उससे सार निकालना चाहिए । ॥इकतालीस॥ छठी भावना का उपसंहारज्ञात्वा गह्यं फल्गु पदार्थाचित्कायें, 'मुत्तवा मोह तद्विषयं भोगनिकायम् । लब्घु लाभ मानवतन्या कुरु काम, धर्म ज्ञान ध्यान तपस्यामयमर्हम् ।।बयालीस।। अर्थ -हे मद्र ! निस्सार तुच्छ पदार्थों से भरपूर इस शरीर को निन्दनीय और तुच्छ समझकर इस पर जो श्रधप्रेम-मोह-है उसे त्याग दे । विषय-भोग की वासना को कम करके या जड़ से उखाड़ कर फेंक । इस मानव शरीर में से यात्मश्रेय तथा मोक्ष प्राप्ति रूप उत्तम लाभ को प्राप्त करने के लिए जानी महात्मानों द्वारा उपदिष्ट ज्ञान, ध्यान, तपमय उत्तम धर्म का सेवन कर, जिससे फर्म-वन्धन टूटे और भवभ्रमण छूटे। विवेचन - भगवती सूत्र के नवे शतक के तैतीसवें उद्देश में - जमालि क्षत्रिय कुमार अपनी माता के सामने शरीर का वर्णन करते हुए कहते हैं-' एवं खलु अम्मयाश्रो ! माणुस्सग सरीर दुक्खाययणं विविवाहि सयसनिकेयं अढिकढुट्टियं चिरापहारु जालडवणद्वसंपियद मट्टियमंड व दुध्य असुइस फिलिट्ठ अद्विविय सव्वकाल संठप्पयं जराकुणिम-जज्जरघर च सडणपण विद्ध सणधरमं पुर्विव वा पच्छा वा अवस्स विप्पजहियव्वं भविस्सइ ।' अर्थ--माता ! मनुष्य का शरीर दुःख का घर है। हजारों व्याधियों के उत्पन्न होने की भूमि है, हाड़-रूपी काठ के श्राधार पर टिका हुआ है, नाड़ियों और नसों से जकड़ा है, मिट्टी के कच्चे वर्त्तन की नाई दुर्बल है, ऋशुचिमय पदार्थों से भरा है, सदा अस्थिर है, जरा औौर मृत्यु का टूटा-फूटा झोपड़ा है, सड़ना पड़ना और विध्वंस होना इसका स्वभाव है, और पहले या पीछे-कभी न कभी, छोड़ना अवश्य ही पड़ेगा। उल्लिखित वाक्य में शरीर की भीतरी हालत का सच्चा चित्रण किया गया है। निस्सार, तुच्छ और अपवित्र पदार्थों से भरे हुए इस शरीर में न कस्तूरी, केशर, चदन, अर्ग्रजा जैसे सुगन्धित पदार्थ हैं और न सुवर्ण, मोती, माणिक, नीलम और पन्ना जैसे देखने में सुन्दर पदार्थ ही है। इसके विपरीत हाड़, मास श्रादि निस्सार और अपवित्र पदार्थ भरे पडे हैं। इसके भीतर निवास करना भी आत्मा के लिए दुःख का ही कारण है। पाखाने या ऐसे ही किसी गदगीवाले स्थान में निवास करना किसे रुचिकर होगा एक दुःख का दूसरा कारण शरीर की है। जिस वस्तु को इष्ट मान लिया है, उसे किसी प्रकार इजा पहुॅचते या नष्ट होते देखकर स्वभावतः मनुष्य को दुःख होता है । कहा भी है -- जे. केइ सरीरे सत्ता, वराणो रुवे य सव्वसो । मणसा कायवक केणं, सव्वेते दुक्खसंभवा ॥ अर्थात् जो मनुष्य शरीर या उसके रूप-लावण्य में मन, वचन और कार्य से आसक्त हो रहे हैं उन्हें अन्त में दुःख ही भुगतना पड़ता है ? देहे विमुह्य न कुरुषे किमधं न वेत्सि, सत्रह - देहस्थ एव भजसे भवदुःखजालम् । लोहाश्रितो हि सहते घनघातमग्निर्याधान तेऽस्य च नभोवदना श्रयत्वे ।। अर्थात् - हे भद्र ! शरीर में मोहित होकर उसके लिए विषयों में श्रासक्त बनकर पाप कर्म क्यों करता है ? तुझे सबर नहीं कि श्रात्मा शरीर में रहकर ही ससार के दुखों को भुगत रहा है। जैमे श्रमि यदि लोहे की सगति न करे, तो उसे घनों की चोटें नहीं मेलनी पड़तों, किन्तु लोहे का श्राश्रय लेने से सहनी पड़ती है, उसी प्रकार थमि जैसे तेजस्वी श्रात्मा को शरीर रूप लोहे का ससर्ग यदि न हो, वरन् प्रकाश की भाँति निर्लेपता, अनाभितता हो, तो किसी भी प्रकार की पीड़ा न सहनी पड़े । उत्तराध्ययन और श्राध्यात्मकल्पद्रुम के पद्यों में शरीर की ग्रासक्ति को दुस का कारण बतलाया गया है । हिरन शब्द की ग्रासक्ति में, पतगा रूप की आसक्ति में, भौंरा गन्ध की प्रासक्ति मे, मत्स्य स्वाद की ग्रासक्ति में और हाथी स्पर्श की ग्रासक्ति में अपने प्राण गँवा बैठता है। इन्हें एक-एक इन्द्रिय की आसक्ति में विडम्वना भोगनी पड़ती है । तब जो लोग पाँचों इन्द्रयों के साथ शरीर पर ग्रासक्ति रखते हैं, उन्हें यदि विडम्बनाएँ भोगनी पड़े, तो इसमें श्री क्या है इसीलिए कहा गया है - 'मुक्त्वा मोह ।' भोग बहुत भोगे हैं। देवता के भव में पल्योपम और सागरोपम पर्यन्त दिव्य भोग भोगे फिर भी तृति न हुई, तो मनुष्य के स्वल्पकालीन तुच्छ भोगों से क्या, तृति होना सम्भव है, जब तक मोह को न भगा दिया जाय, तब तक न भोगों से -तृप्ति हो सकती है, न संतोष ही । मोह हटाने से ही सतोप मिलता है। बिना सतोष के चित्तवृत्ति धर्म में नहीं स्थिर होती । ज्ञान-ध्यान में मन नहीं लगता, तपस्या नहीं हो सकती और जब तक यह न हो, तब तक कर्म से छुटकारा पाकर मोक्ष नहीं प्राप्त किया जा सकता । यदि इस जीवन में मोक्ष की निसेनी गुणश्रेणि पर न चढ पाये, तो फिर ऐसे सुअवसर के मिलने की आशा भी नहीं की जा सकती; क्योंकि 'माणुस्स खलु दुल्लह मनुष्य जीवन मिलना कठिन है। इस दुर्लभ जीवन को खाने-पीने, शरीर को सिंगारने या मौज- मैजे उड़ाने में भोग भोगने में व्यय कर दिया, तो वह लाभ नहीं हो सकता, जो इस जीवन से होना चाहिए, इसीलिए कहा है- 'लधुं लाभ' इत्यादि । मानव शरीर का लाभ समाज-सेवा, देश-सेवा, धर्म-सेवासेवा बजाना ही है। इस जीवन में जितनी सेवा बजाई जा सके, उतना ही लाभ है । इस लाभ को छोड़कर सिर्फ टीप-टाप करने या शरीर को पोषने में ही यदि समस्त शक्तियों का उपयोग किया जाय, तो उससे अमरता प्राप्त नहीं हो सकती । सुन्दर या असुन्दर, पुष्ट या अपुष्ट, बलबानू या दुर्बल, चाहे जैसा शरीर हो, अन्त में तो राख या मिट्टी में ही मिलनेवाला है। दलपतराम ने ठीक ही कहा है कि -राख थशे रणमां बली ने बधी, कंचन सरखी शुभ काया ।' और भी एक विद्वान ने कहा हैकितने मुफलिस हो गये, कितने तवंगर हो गये । खाक में जब मिल गये, दोनों यरायर हो गये । जब इस शरीर की वर्त्तमान स्थिति अपवित्रता से भरी हुई है और, भविष्य की स्थिति नष्ट होने की ऐ, तय ऐमे शरीर पर मोह रखकर विषयों में फैले रहकर श्रमूल्य श्रवार को गँवानेवाला वुढिमान् नहीं, वल्कि मूर्ख हो गिना जायगा। फौन विद्वान् पुरुष इस प्रकार की मूर्खता फरेगा ? कोई नहीं । विवेकी पुरुष तो अशुचि भावना से शरीर की श्रान्तरिक हालत का विचार करके उससे श्रेय साधन करने का ही प्रयास करेंगे । ॥बयालीस॥
बच्चों के माता-पिता को बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में लिंग वाली जगह को ख़ाली छोड़ने की अनुमति होगी, इस तरह से 'अनिश्चित लिंग' की एक नई श्रेणी बनेगी. यह पहल बच्चों के माता-पिता के ऊपर बच्चों के लिंग निर्धारण पर तुरंत निर्णय लेने के दबाव को कम करने के उद्देश्य से की गई है. यहां 2,000 बच्चों में से एक बच्चे में उभयलिंगी विशेषताएं होती हैं. ऐसे लोगों को 'इंटरसेक्स' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उनमें पुरुष और महिला दोनों गुणसूत्रों का मिश्रण होता है, यहां तक कि उनके जननांगों में दोनों लिगों की विशेषताएं होती हैं. बर्लिन में बीबीसी के संवाददाता स्टीव इवांस ने बताया, "नवजात बच्चों के अधिकारियों के समक्ष पंजीकरण के समय माता-पिता को अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है. " उन्होंने कहा कि शारीरिक विशेषताओं में बदलाव के लिए कभी-कभी ऑपरेशन भी किए जाते हैं ताकि उनको एक संभावित दिशा दी जा सके. "मैं न तो एक पुरुष हूं और न एक महिला. मैं हमेशा डॉक्टरों की पैबंदकारी के कारण आघात और खरोंच से उपजे दागदार निशानों को ढोता रहूंगा. " जर्मनी के क़ानून में कुछ मामलों पर फिर से विचार किया जा रहा है, जिसके कारण कई लोगों को दुःखद स्थिति से गुज़रना पड़ा था. एक मामले में, एक व्यक्ति को लिंग निर्धारण की अनिश्चितता वाली स्थिति में ऑपरेशन से गुज़रना पड़ा था. उस व्यक्ति का सालों बाद कहना है, "मैं न तो एक पुरुष हूं और न एक महिला. मैं हमेशा डॉक्टरों की पैबंदकारी के कारण आघात और खरोंच से उपजे दाग़दार निशानों को ढोता रहूंगा. " जर्मनी के गृह मंत्रालय के मुताबिक़, "जर्मनी के पासपोर्ट पर पुरुष के लिए एम और महिला के एफ़ अक्षरों के संकेत का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें जल्दी ही एक नई श्रेणी तीसरे लिंग के लिए भी बनेगी, जिसका प्रतीक 'एक्स' होगा. " अभी यह अस्पष्ट है कि जर्मनी में इस बदलाव का शादी और रिश्तों से संबंधित क़ानून पर क्या असर होगा? अभी के क़ानून शादी को महिला और पुरुष के बीच संबंध के रूप में मान्यता देते हैं और नागरिक भागीदारी में समान लिंग वाले जोड़ों के लिए यही बात लागू होती है.
बच्चों के माता-पिता को बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में लिंग वाली जगह को ख़ाली छोड़ने की अनुमति होगी, इस तरह से 'अनिश्चित लिंग' की एक नई श्रेणी बनेगी. यह पहल बच्चों के माता-पिता के ऊपर बच्चों के लिंग निर्धारण पर तुरंत निर्णय लेने के दबाव को कम करने के उद्देश्य से की गई है. यहां दो,शून्य बच्चों में से एक बच्चे में उभयलिंगी विशेषताएं होती हैं. ऐसे लोगों को 'इंटरसेक्स' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उनमें पुरुष और महिला दोनों गुणसूत्रों का मिश्रण होता है, यहां तक कि उनके जननांगों में दोनों लिगों की विशेषताएं होती हैं. बर्लिन में बीबीसी के संवाददाता स्टीव इवांस ने बताया, "नवजात बच्चों के अधिकारियों के समक्ष पंजीकरण के समय माता-पिता को अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है. " उन्होंने कहा कि शारीरिक विशेषताओं में बदलाव के लिए कभी-कभी ऑपरेशन भी किए जाते हैं ताकि उनको एक संभावित दिशा दी जा सके. "मैं न तो एक पुरुष हूं और न एक महिला. मैं हमेशा डॉक्टरों की पैबंदकारी के कारण आघात और खरोंच से उपजे दागदार निशानों को ढोता रहूंगा. " जर्मनी के क़ानून में कुछ मामलों पर फिर से विचार किया जा रहा है, जिसके कारण कई लोगों को दुःखद स्थिति से गुज़रना पड़ा था. एक मामले में, एक व्यक्ति को लिंग निर्धारण की अनिश्चितता वाली स्थिति में ऑपरेशन से गुज़रना पड़ा था. उस व्यक्ति का सालों बाद कहना है, "मैं न तो एक पुरुष हूं और न एक महिला. मैं हमेशा डॉक्टरों की पैबंदकारी के कारण आघात और खरोंच से उपजे दाग़दार निशानों को ढोता रहूंगा. " जर्मनी के गृह मंत्रालय के मुताबिक़, "जर्मनी के पासपोर्ट पर पुरुष के लिए एम और महिला के एफ़ अक्षरों के संकेत का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें जल्दी ही एक नई श्रेणी तीसरे लिंग के लिए भी बनेगी, जिसका प्रतीक 'एक्स' होगा. " अभी यह अस्पष्ट है कि जर्मनी में इस बदलाव का शादी और रिश्तों से संबंधित क़ानून पर क्या असर होगा? अभी के क़ानून शादी को महिला और पुरुष के बीच संबंध के रूप में मान्यता देते हैं और नागरिक भागीदारी में समान लिंग वाले जोड़ों के लिए यही बात लागू होती है.
के कहा है। सिंगारे को शुक्रवार देर रात मानपुर से डकैती और अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया कि डकैती के अलावा सिंगारे दो अन्य मामलों में भी आरोपी है। पुलिस ने कहा, "उसे मानपुर में उसके घर से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उसकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। " हालांकि, मृतक के परिजनों ने पुलिस के दावों का खंडन किया और उन पर थाने में युवक के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया, जिससे उसकी मौत हो गई। सिंगारे की मौत से नाराज उनके परिवार के सदस्यों ने आदिवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया और परिवार के एक सदस्य के लिए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर थाने के सामने आगरा-मुंबई राजमार्ग को जाम कर दिया। बाद में, एसपी (ग्रामीण) भागवत सिंह विरदे ने मामले को संभालने वाले पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया और मामले की न्यायिक जांच की भी सिफारिश की। वीरडे द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया, "शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और जिला सत्र अदालत से मामले की न्यायिक जांच का अनुरोध किया गया है। " आदेश में कहा गया है कि एसआई कमल उइके, एएसआई देवेश वर्मा और निर्भय सिंह और कांस्टेबल गजराज और सोनबीर को निलंबित कर दिया गया है और जांच लंबित रहने तक उन्हें महू पुलिस लाइन से अटैच कर दिया गया है।
के कहा है। सिंगारे को शुक्रवार देर रात मानपुर से डकैती और अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया कि डकैती के अलावा सिंगारे दो अन्य मामलों में भी आरोपी है। पुलिस ने कहा, "उसे मानपुर में उसके घर से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उसकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। " हालांकि, मृतक के परिजनों ने पुलिस के दावों का खंडन किया और उन पर थाने में युवक के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया, जिससे उसकी मौत हो गई। सिंगारे की मौत से नाराज उनके परिवार के सदस्यों ने आदिवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया और परिवार के एक सदस्य के लिए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर थाने के सामने आगरा-मुंबई राजमार्ग को जाम कर दिया। बाद में, एसपी भागवत सिंह विरदे ने मामले को संभालने वाले पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया और मामले की न्यायिक जांच की भी सिफारिश की। वीरडे द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया, "शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और जिला सत्र अदालत से मामले की न्यायिक जांच का अनुरोध किया गया है। " आदेश में कहा गया है कि एसआई कमल उइके, एएसआई देवेश वर्मा और निर्भय सिंह और कांस्टेबल गजराज और सोनबीर को निलंबित कर दिया गया है और जांच लंबित रहने तक उन्हें महू पुलिस लाइन से अटैच कर दिया गया है।
ग्राम- बैंक मैंने श्रीयुत गोपालकृष्णजी पौराणिक के द्वारा प्रकाशित *'योजना' को बड़ी रुचि के साथ पढ़ा है। इस योजना को तथा ग्राम-सुधार की अन्य योजनाओं को सफल बनाने के लिए मैं गाँव के बैंकों को जारी करने के विचार को प्रस्तुत करता हूँ, जिससे न केवल समय की बचत होगी वरन् पैसे की भी और इससे ग्रामीणों के मस्तिष्क से निराशा की भावना भी दूर हो जायगी। मैं इस संस्था में ग्राम संगठन के बहुत से अन्य कार्यों को सम्मिलित नहीं करना चाहता। अभी तो मै गाँव के बैंकों के विस्तृत विवरण को कार्य रूप में परिणत करने का कार्य अपने-अपने क्षेत्रो में काम करने वाले ग्राम संगठन करने वालों पर छोड़ता हूँ । फिर भी मैं अपने विचार को अधिक स्पष्ट करने की दृष्टि से गाँव के कार्यकर्ताओं की सहायतार्थ कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। * यह 'योजना' विद्यामंदिर के अगले प्रकाशन 'ग्रामसुधार के प्रयोग' में मिलेगी। जैसा कि मैं पूर्व-अध्याओं में लिख चुका हूँ, ऊपर कहे हुए प्रकार का गाँव का बैंक उस ग्राम क्षेत्र में एक होना चाहिए जिसका क्षेत्रफल ४ वर्ग मील हो, क्योंकि ऐसे ही ग्राम क्षेत्र में पर्याप्त आबादी होगी जो इसके विकास कार्य को हाथ में ले सकेगा, योजना की आर्थिक पूर्ति के लिए आवश्यक कोष इकट्ठा कर सकेगा या उसी क्षेत्र से अवैतनिक स्थानीय कार्यकर्ताओं की सेवा भी प्राप्त कर सकेगा । गाँव के बैंक को अग्रमान्य ( preference ) या साधारण हिस्सों ( ordinary shares) के द्वारा अपना कोष इकट्ठा करना चाहिए । विशिष्ट हिस्से केवल विशुद्ध किसानों को ही देना चाहिए, जब कि साधारण हिस्से दूसरे लोगों को, जिनमें शासन भी शामिल है, देना चाहिए, यदि वे उन्हें लेना चाहें । विशिष्ट भाग किसानों को देने से उनमें यह विश्वास पैदा किया जा सकेगा कि उनसे उन्हें वापसी में कुछ अंश मिलेगा और बैंक के दिवालियेपन की दशा में उन्हें अग्रक्रयाधिकार ( Pre-emption ) का अधिकार प्राप्त होगा। बैंक के कार्य सर्वतोमुख होने चाहिए और आगे चलकर इसे ग्रामोन्नति के सारे कार्यों को समन्वित करने वाली संस्था के रूप में चलाना पड़ेगा । ग्रामोन्नति से कोई भी ऐसी बात संबंधित नहीं होनी चाहिए जो इसके उद्देश्य से बाहर हो और जिसके लिए यह पैसा इकट्ठा न कर सके या कोई कार्य न चला सके । सारे वैतनिक या अवैतनिक सलाहकारों के रूप में इस योजना के अन्तर्गत नियुक्त किये गए विशेषज्ञों अथवा सरकारी नौकरों को, जो इस बैंक के पद के अनुसार सदस्यों के रूप में कार्य कर रहे हों, केवल उसी समय अपनी सम्मति (vote) देनी चाहिए जब कि बैंक के सामने उनसे ही संबंध रखने वाले प्रश्न बहस के लिए उपस्थित हों । हर एक तहसील में एक केन्द्रीय बैंक होना चाहिये । सभी गाँव के बैंकों को इस बैंक से संबन्धित होने या न होने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए । यह बैंक उपज के लिए बाजार के कार्य में सुविधा पैदा करेगा और उच्चतर विशेषज्ञों की शिक्षा प्राप्त करने में भी आसानी पैदा करेगा । यह अपने क्षेत्र में औद्योगिक उत्पत्ति को नियमित करने तथा स्थानीय कच्चे माल को पक्के माल में परिणत करने का काम भी करेगा । निःसन्देह कृषकों की उन्नति के लिए विभिन्न संस्थायें सहकारी आधार पर काम कर रही हैं, परंतु उनमें से अधिकांश में कोई न कोई कमी अवश्य है । या तो उन्होंने अत्यधिक कार्य अपने जिम्मे लिया है अथवा बहुत सी संस्थायें, जो एक दूसरे के ऊपर दबाव डालती हैं, एक ही काम को करने के लिए उत्पन्न हो गई हैं । या तो उन्हें एक बड़े भारी क्षेत्र में कार्य करना होता है अथवा उन्हें कृषि क्षेत्र से अत्यन्त दूर नगरों मे सीमित होने की असुविधा का सामना करना पड़ता है । कृषकों को ऋण देने के अतिरिक्त इन संस्थाओं ने अपनी उपयोगिता को सिद्ध करने में असफलता दिखलाई है और ग्रामीणों को आकृष्ट करने में भी वे असफल रही हैं । मैं यह बात अपने व्यक्तिगत अनुभव के अधार पर कह रहा
ग्राम- बैंक मैंने श्रीयुत गोपालकृष्णजी पौराणिक के द्वारा प्रकाशित *'योजना' को बड़ी रुचि के साथ पढ़ा है। इस योजना को तथा ग्राम-सुधार की अन्य योजनाओं को सफल बनाने के लिए मैं गाँव के बैंकों को जारी करने के विचार को प्रस्तुत करता हूँ, जिससे न केवल समय की बचत होगी वरन् पैसे की भी और इससे ग्रामीणों के मस्तिष्क से निराशा की भावना भी दूर हो जायगी। मैं इस संस्था में ग्राम संगठन के बहुत से अन्य कार्यों को सम्मिलित नहीं करना चाहता। अभी तो मै गाँव के बैंकों के विस्तृत विवरण को कार्य रूप में परिणत करने का कार्य अपने-अपने क्षेत्रो में काम करने वाले ग्राम संगठन करने वालों पर छोड़ता हूँ । फिर भी मैं अपने विचार को अधिक स्पष्ट करने की दृष्टि से गाँव के कार्यकर्ताओं की सहायतार्थ कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। * यह 'योजना' विद्यामंदिर के अगले प्रकाशन 'ग्रामसुधार के प्रयोग' में मिलेगी। जैसा कि मैं पूर्व-अध्याओं में लिख चुका हूँ, ऊपर कहे हुए प्रकार का गाँव का बैंक उस ग्राम क्षेत्र में एक होना चाहिए जिसका क्षेत्रफल चार वर्ग मील हो, क्योंकि ऐसे ही ग्राम क्षेत्र में पर्याप्त आबादी होगी जो इसके विकास कार्य को हाथ में ले सकेगा, योजना की आर्थिक पूर्ति के लिए आवश्यक कोष इकट्ठा कर सकेगा या उसी क्षेत्र से अवैतनिक स्थानीय कार्यकर्ताओं की सेवा भी प्राप्त कर सकेगा । गाँव के बैंक को अग्रमान्य या साधारण हिस्सों के द्वारा अपना कोष इकट्ठा करना चाहिए । विशिष्ट हिस्से केवल विशुद्ध किसानों को ही देना चाहिए, जब कि साधारण हिस्से दूसरे लोगों को, जिनमें शासन भी शामिल है, देना चाहिए, यदि वे उन्हें लेना चाहें । विशिष्ट भाग किसानों को देने से उनमें यह विश्वास पैदा किया जा सकेगा कि उनसे उन्हें वापसी में कुछ अंश मिलेगा और बैंक के दिवालियेपन की दशा में उन्हें अग्रक्रयाधिकार का अधिकार प्राप्त होगा। बैंक के कार्य सर्वतोमुख होने चाहिए और आगे चलकर इसे ग्रामोन्नति के सारे कार्यों को समन्वित करने वाली संस्था के रूप में चलाना पड़ेगा । ग्रामोन्नति से कोई भी ऐसी बात संबंधित नहीं होनी चाहिए जो इसके उद्देश्य से बाहर हो और जिसके लिए यह पैसा इकट्ठा न कर सके या कोई कार्य न चला सके । सारे वैतनिक या अवैतनिक सलाहकारों के रूप में इस योजना के अन्तर्गत नियुक्त किये गए विशेषज्ञों अथवा सरकारी नौकरों को, जो इस बैंक के पद के अनुसार सदस्यों के रूप में कार्य कर रहे हों, केवल उसी समय अपनी सम्मति देनी चाहिए जब कि बैंक के सामने उनसे ही संबंध रखने वाले प्रश्न बहस के लिए उपस्थित हों । हर एक तहसील में एक केन्द्रीय बैंक होना चाहिये । सभी गाँव के बैंकों को इस बैंक से संबन्धित होने या न होने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए । यह बैंक उपज के लिए बाजार के कार्य में सुविधा पैदा करेगा और उच्चतर विशेषज्ञों की शिक्षा प्राप्त करने में भी आसानी पैदा करेगा । यह अपने क्षेत्र में औद्योगिक उत्पत्ति को नियमित करने तथा स्थानीय कच्चे माल को पक्के माल में परिणत करने का काम भी करेगा । निःसन्देह कृषकों की उन्नति के लिए विभिन्न संस्थायें सहकारी आधार पर काम कर रही हैं, परंतु उनमें से अधिकांश में कोई न कोई कमी अवश्य है । या तो उन्होंने अत्यधिक कार्य अपने जिम्मे लिया है अथवा बहुत सी संस्थायें, जो एक दूसरे के ऊपर दबाव डालती हैं, एक ही काम को करने के लिए उत्पन्न हो गई हैं । या तो उन्हें एक बड़े भारी क्षेत्र में कार्य करना होता है अथवा उन्हें कृषि क्षेत्र से अत्यन्त दूर नगरों मे सीमित होने की असुविधा का सामना करना पड़ता है । कृषकों को ऋण देने के अतिरिक्त इन संस्थाओं ने अपनी उपयोगिता को सिद्ध करने में असफलता दिखलाई है और ग्रामीणों को आकृष्ट करने में भी वे असफल रही हैं । मैं यह बात अपने व्यक्तिगत अनुभव के अधार पर कह रहा
31 दिसंबर। साल के आखिर में भारतीय फैन्स के लिए बुरी खबर आई है। भारत को अंडर 19 वर्ल्ड कप जीताने वाले खिलाड़ी मनजोत कालरा को उम्र में धोखाधड़ी के चलते बैन कर दिया गया है। मनजोत कालरा को 2 साल के लिए बैन किया गया है। दिल्ली क्रिकेट के लोकपाल ने मनजोत कालरा को उम्र में धोखाधड़ी का दोषी पाया जिसके कारण उनपर अब बैन लगा दिया गया है। साल 2018 में अंडंर 19 वर्ल्ड कप में मनजोत कालरा ने शानदार पऱफॉर्मेंस कर भारतीय अंडर 19 टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में मनजोत कालरा ने शतक जमाया था और मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजे गए थे। आपको बता दें कि साल 2019 के जून में दिल्ली पुलिस की जांच यूनिट ने मनजोत कालरा के माता-पिता पर चार्जशीट दाखिल की थी। मनजोत के माता- पिता पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे मनजोत की उम्र में फेरबदल कर जन्म तिथि 1999 बताई थी। वहीं खबरों के अनुसार मनोजत कालरा का जन्म तिथि 15 जनवरी 1998 है ना कि 15 जनवरी 1999 है। मनजोत कालरा के अलावा शिवम मावी और नीतिश राणा को लेकर भी खबरें आ रही है। खबर है कि इन दोनों की जन्म तिथि में भी कुछ गलत है। दोनों खिलाड़ियों को जन्म तिथि के असली कागज जमा करने के आदेश दिए गए हैं।
इकतीस दिसंबर। साल के आखिर में भारतीय फैन्स के लिए बुरी खबर आई है। भारत को अंडर उन्नीस वर्ल्ड कप जीताने वाले खिलाड़ी मनजोत कालरा को उम्र में धोखाधड़ी के चलते बैन कर दिया गया है। मनजोत कालरा को दो साल के लिए बैन किया गया है। दिल्ली क्रिकेट के लोकपाल ने मनजोत कालरा को उम्र में धोखाधड़ी का दोषी पाया जिसके कारण उनपर अब बैन लगा दिया गया है। साल दो हज़ार अट्ठारह में अंडंर उन्नीस वर्ल्ड कप में मनजोत कालरा ने शानदार पऱफॉर्मेंस कर भारतीय अंडर उन्नीस टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अंडर उन्नीस वर्ल्ड कप फाइनल में मनजोत कालरा ने शतक जमाया था और मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजे गए थे। आपको बता दें कि साल दो हज़ार उन्नीस के जून में दिल्ली पुलिस की जांच यूनिट ने मनजोत कालरा के माता-पिता पर चार्जशीट दाखिल की थी। मनजोत के माता- पिता पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे मनजोत की उम्र में फेरबदल कर जन्म तिथि एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे बताई थी। वहीं खबरों के अनुसार मनोजत कालरा का जन्म तिथि पंद्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे है ना कि पंद्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे है। मनजोत कालरा के अलावा शिवम मावी और नीतिश राणा को लेकर भी खबरें आ रही है। खबर है कि इन दोनों की जन्म तिथि में भी कुछ गलत है। दोनों खिलाड़ियों को जन्म तिथि के असली कागज जमा करने के आदेश दिए गए हैं।
IPL 2021: बेटे अर्जुन के साथ बीच पर मस्ती करते दिखे सचिन तेंदुलकर, सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीरें- मुंबई इंडियंस के मेंटर सचिन तेंदुलकर यूएई में बीच पर अपने बेटे अर्जुन तेंदुलकर के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हुए नजर आए हैं। मुंबई इंडियंस ने अर्जुन तेंदुलकर को पिछले साल नीलामी में अपनी टीम में शामिल किया था। सचिन तेंदुलकर ने अपने इंस्टाग्राम पर दो फोटो शेयर की है, जिसमें सचिन के साथ अर्जुन बीच पर मस्ती करते हुए दिख रहे हैं। सचिन ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, "मेरे सनशाइन के साथ"। इस पोस्ट में सचिन पीले रंग की टी-शर्ट पहने हुए हैं, जबकि अर्जुन ने लाल रंग का शर्ट पहना हुआ है। इस पोस्ट पर सचिन के बेटी सारा ने भी कमेंट किया है। मुंबई इंडियंस के मेंटर सचिन तेंदुलकर आईपीएल 2021 के लिए शनिवार को टीम के ट्रेनिंग सेशन में शामिल हुए थे। उससे पहले वो क्वारंटीन में थे। नीलामी के दौरान अर्जुन तेंदुलकर को फ्रेंचाइजी ने 20 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा था। अर्जुन तेंदुलकर इस बार मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए उत्सुक होंगे। पहले हाफ में इस खिलाड़ी को मौका नहीं मिला था। सोशल मीडिया पर मुंबई इंडियंस द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में अर्जुन को मुंबई इंडियंस के क्रिकेट संचालन निदेशक और गेंदबाजी कोच जहीर खान से महत्वपूर्ण जानकारी लेते हुए देखा गया। वीडियो को देख कर लग रहा था कि तेंदुलकर इस दिग्गज खिलाड़ी से स्विंग गेंदबाजी सीखने की कोशिश कर रहे थे।
IPL दो हज़ार इक्कीस: बेटे अर्जुन के साथ बीच पर मस्ती करते दिखे सचिन तेंदुलकर, सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीरें- मुंबई इंडियंस के मेंटर सचिन तेंदुलकर यूएई में बीच पर अपने बेटे अर्जुन तेंदुलकर के साथ क्वालिटी टाइम बिताते हुए नजर आए हैं। मुंबई इंडियंस ने अर्जुन तेंदुलकर को पिछले साल नीलामी में अपनी टीम में शामिल किया था। सचिन तेंदुलकर ने अपने इंस्टाग्राम पर दो फोटो शेयर की है, जिसमें सचिन के साथ अर्जुन बीच पर मस्ती करते हुए दिख रहे हैं। सचिन ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, "मेरे सनशाइन के साथ"। इस पोस्ट में सचिन पीले रंग की टी-शर्ट पहने हुए हैं, जबकि अर्जुन ने लाल रंग का शर्ट पहना हुआ है। इस पोस्ट पर सचिन के बेटी सारा ने भी कमेंट किया है। मुंबई इंडियंस के मेंटर सचिन तेंदुलकर आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के लिए शनिवार को टीम के ट्रेनिंग सेशन में शामिल हुए थे। उससे पहले वो क्वारंटीन में थे। नीलामी के दौरान अर्जुन तेंदुलकर को फ्रेंचाइजी ने बीस लाख के बेस प्राइस पर खरीदा था। अर्जुन तेंदुलकर इस बार मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए उत्सुक होंगे। पहले हाफ में इस खिलाड़ी को मौका नहीं मिला था। सोशल मीडिया पर मुंबई इंडियंस द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में अर्जुन को मुंबई इंडियंस के क्रिकेट संचालन निदेशक और गेंदबाजी कोच जहीर खान से महत्वपूर्ण जानकारी लेते हुए देखा गया। वीडियो को देख कर लग रहा था कि तेंदुलकर इस दिग्गज खिलाड़ी से स्विंग गेंदबाजी सीखने की कोशिश कर रहे थे।
बॉर्डर' और 'एलओसी' जैसी देश भक्ति फिल्में बनाने वाले जेपी दत्ता अब अपनी 'पलटन' लेकर आ गए हैं। यह एक मल्टी स्टारर फिल्म है। आज फिल्म के कई पोस्टर रिलीज किए गए हैं। पोस्टर में गुरमीत चौधरी के अलावा फिल्म के सभी किरदारों का लुक सामने आया है। खास बात इस फिल्म की रिलीज डेट है। दरअसल इस फिल्म की उसी हफ्ते रिलीज किया जा रहा है, जब 50 साल पहले 11 सितंबर को सिक्किम सीमा पर भारत-चीन युद्ध शुरू हुआ था। इससे पहले फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था। टीजर में जेपी दत्ता की पिछली दो फिल्में 'बॉर्डर' और 'एलओसी' का भी जिक्र किया गया था। टीजर में बर्फीले पहाड़ के बीच जाते हुए सैनिक वंदे मातरम के नारे लगा रहे हैं। आपको बता दें कि यह फिल्म 1967 में हुए भारत-चीन युद्ध पर आधारित होगी। जेपी दत्ता ने इस फिल्म से एक बार फिर देश के इतिहास को पलटने की कोशिश की है। सच्ची कहानी पर आधारित इस फिल्म में सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ, अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, हर्षवर्धन राणे, सिद्धार्थ कपूर और लव सिन्हा नजर आएंगे। इस फिल्म से टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने जा रही हैं। इनके अलावा फिल्म में ईशा गुप्ता भी नजर आएंगी ।
बॉर्डर' और 'एलओसी' जैसी देश भक्ति फिल्में बनाने वाले जेपी दत्ता अब अपनी 'पलटन' लेकर आ गए हैं। यह एक मल्टी स्टारर फिल्म है। आज फिल्म के कई पोस्टर रिलीज किए गए हैं। पोस्टर में गुरमीत चौधरी के अलावा फिल्म के सभी किरदारों का लुक सामने आया है। खास बात इस फिल्म की रिलीज डेट है। दरअसल इस फिल्म की उसी हफ्ते रिलीज किया जा रहा है, जब पचास साल पहले ग्यारह सितंबर को सिक्किम सीमा पर भारत-चीन युद्ध शुरू हुआ था। इससे पहले फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था। टीजर में जेपी दत्ता की पिछली दो फिल्में 'बॉर्डर' और 'एलओसी' का भी जिक्र किया गया था। टीजर में बर्फीले पहाड़ के बीच जाते हुए सैनिक वंदे मातरम के नारे लगा रहे हैं। आपको बता दें कि यह फिल्म एक हज़ार नौ सौ सरसठ में हुए भारत-चीन युद्ध पर आधारित होगी। जेपी दत्ता ने इस फिल्म से एक बार फिर देश के इतिहास को पलटने की कोशिश की है। सच्ची कहानी पर आधारित इस फिल्म में सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ, अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, हर्षवर्धन राणे, सिद्धार्थ कपूर और लव सिन्हा नजर आएंगे। इस फिल्म से टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने जा रही हैं। इनके अलावा फिल्म में ईशा गुप्ता भी नजर आएंगी ।
व्यवसाय के क्षेत्र में आपको लाभ होगा. दैनिक कार्यों में आपको सफलता मिलने की संभावना है. जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मधुर होंगे. आप में से कुछ महत्वपूर्ण लोगों से संपर्क स्थापित कर अधिक प्रभावशाली बन जाएंगे. प्रेम संबंधों के मामले में आप भाग्यशाली रहेंगे. आप अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए खूब मेहनत करेंगे. आपकी मेहनत रंग लायेगी. बच्चे अपना काम समय से पूरा कर लेंगे. यदि कोई कानूनी मामला लंबित है, तो उसमें सफलता के संकेत मिल रहे हैं. परिवार और दोस्त खुशी के समय और यादगार अवसरों को मनाने के लिए इकट्ठा होंगे. आपके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी. कार्यस्थल पर सहयोगी के साथ अपने व्यवहार को अच्छा बनाकर रखें. आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी. संपत्ति या वाहन की बिक्री या खरीद संभव है. आपको अपने बॉस की बातों को ध्यान से सुनने के बाद ही अपनी कोई राय देनी चाहिए. एस. एस. सी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए दिन बढ़िया रहने वाला है. वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंसल्टेंट और डॉक्टर खुद को बेहतर रूप में स्थापित करेंगे और खुद का नाम भी बनाएंगे. आर्थिक रूप से समय शुभ है, और आगे भी मौद्रिक लाभ का संकेत है. पहले दिये गए किसी एग्जाम का रिजल्ट आपके फेवर में रहेगा. आज आपको किसी मित्र की मदद करने का मौका मिलेगा. इससे मित्रों के बीच आपकी तारीफ होगी. इस समय पूरे दिल से किया हुआ कोई भी कार्य परिणाम अवश्य देगा. शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वालों को या शिक्षार्थियों को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है. आर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए दिन शानदार रहने वाला है. शिक्षकों का पूरा सपोर्ट मिलेगा. ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी.
व्यवसाय के क्षेत्र में आपको लाभ होगा. दैनिक कार्यों में आपको सफलता मिलने की संभावना है. जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मधुर होंगे. आप में से कुछ महत्वपूर्ण लोगों से संपर्क स्थापित कर अधिक प्रभावशाली बन जाएंगे. प्रेम संबंधों के मामले में आप भाग्यशाली रहेंगे. आप अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए खूब मेहनत करेंगे. आपकी मेहनत रंग लायेगी. बच्चे अपना काम समय से पूरा कर लेंगे. यदि कोई कानूनी मामला लंबित है, तो उसमें सफलता के संकेत मिल रहे हैं. परिवार और दोस्त खुशी के समय और यादगार अवसरों को मनाने के लिए इकट्ठा होंगे. आपके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी. कार्यस्थल पर सहयोगी के साथ अपने व्यवहार को अच्छा बनाकर रखें. आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी. संपत्ति या वाहन की बिक्री या खरीद संभव है. आपको अपने बॉस की बातों को ध्यान से सुनने के बाद ही अपनी कोई राय देनी चाहिए. एस. एस. सी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए दिन बढ़िया रहने वाला है. वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंसल्टेंट और डॉक्टर खुद को बेहतर रूप में स्थापित करेंगे और खुद का नाम भी बनाएंगे. आर्थिक रूप से समय शुभ है, और आगे भी मौद्रिक लाभ का संकेत है. पहले दिये गए किसी एग्जाम का रिजल्ट आपके फेवर में रहेगा. आज आपको किसी मित्र की मदद करने का मौका मिलेगा. इससे मित्रों के बीच आपकी तारीफ होगी. इस समय पूरे दिल से किया हुआ कोई भी कार्य परिणाम अवश्य देगा. शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वालों को या शिक्षार्थियों को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है. आर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए दिन शानदार रहने वाला है. शिक्षकों का पूरा सपोर्ट मिलेगा. ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी.
रूस के साथ यूक्रेन के 'रिश्तों' को कई संदर्भों के नजरिये से देखा जा सकता है। वर्ष 2014 में रूस पहले ही यूक्रेन के एक बड़े हिस्से (क्राइमिया) को अपने साथ मिला चुका है और फिलहाल दूसरे इलाकों (दोनेत्स्क और लुहान्स्क) को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों में लगा है। इसके पीछे उसका तर्क सदियों पुराने नस्लीय एवं सांस्कृतिक संबंधों के संदर्भ में मध्ययुगीन इतिहास की ओर लौटने का है। रूस ने व्यापक स्तरीय 'विशेष सैन्य अभियान' चलाने का जो जोखिम उठाया, उसके पीछे उसका ऊर्जा भू-राजनीति का आकलन ही है। करीब 11 साल पहले जापान में आई एक परमाणु आपदा ने पश्चिमी यूरोप में ऊर्जा स्रोतों के गणित को बदलकर रख दिया। इन बदली हुई परिस्थितियों ने रूस को यूरोपीय संघ (ईयू) और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के मुकाबले बढ़त दिला दी। वर्ष 2010 में जर्मनी में 17 परमाणु बिजली संयंत्र थे। उसकी करीब 22 प्रतिशत बिजली परमाणु संयंत्रों में बनती थी। वर्ष 2011 में सूनामी के शिकार हुए फूकूशीमा परमाणु संयंत्र में बड़ी जन हानि हुई थी और वहां उच्च विकिरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र भी बन गया। इससे सबक लेते हुए जर्मनी ने अपने परमाणु संयंत्रों को स्थगित करने का फैसला लिया। तमाम अन्य देश भी परमाणु बिजली से तौबा करते दिखे। केवल फ्रांस ही इकलौता बड़ा यूरोपीय देश है, जिसने फूकूशीमा हादसे के बाद अपनी परमाणु योजनाओं में कोई भारी कटौती नहीं की। वर्तमान की बात करें तो जर्मनी में केवल तीन परमाणु बिजली संयंत्र ही सक्रिय रह गए हैं। जर्मनी की बमुश्किल 10 प्रतिशत बिजली ही इन संयंत्रों से आती है। संभव है कि जर्मनी के नीति-निर्माता इस साल के अंत तक इन तीनों संयंत्रों को बंद करके शायद वापस कोयला आधारित तापीय बिजली संयंत्रों की ओर लौटें। निःसंदेह पिछले एक दशक के दौरान जर्मनी की ऊर्जा आवश्यकताएं बढ़ी हैं और उसकी कुल बिजली में करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों का हो गया है। वहीं परमाणु बिजली की जगह बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस ने ले ली है। जर्मनी को आधी गैस की आपूर्ति रूस करता है। इतना ही नहीं बल्गारिया , फ्रांस, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, लातविया जैसे यूरोपीय देशों का मुख्य गैस आपूर्तिकर्ता होने के साथ ही रूस तमाम छोटे बाल्कन देशों का इकलौता गैस आपूर्तिकर्ता भी है। यूरोपीय संघ और नाटो की ऊर्जा नब्ज पर अपनी ऐसी पकड़ को देखते हुए यूक्रेन के मसले पर रूस के हाथ बहुत मजबूत हैं। यहां तक कि इस साल यूक्रेन पर हमले के बावजूद पश्चिमी यूरोप की गैस पर निर्भरता के चलते यूरोपीय संघ ने रूस को रकम पहुंचाते रहने में कोई हिचक नहीं दिखाई। वास्तव में यूक्रेन युद्ध पर रूस का रोजाना जितना खर्च हो रहा है, उससे कहीं ज्यादा कमाई वह यूरोप को गैस बेचकर कर रहा है। यानी उसका युद्ध व्यय यूरोप से होने वाले गैस राजस्व से कम ही है। जहाज या पाइपलाइन के माध्यम से गैस को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के मामले में ढुलाई के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां हैं। इसमें जितनी दूरी बढ़ेगी, उसी अनुपात में खर्च भी बढ़ता जाएगा। इस समय यूरोपीय लोगों को अमेरिकियों की तुलना में गैस के लिए सात गुना अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। वैकल्पिक स्रोत तलाशने से कीमतों और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में जब तक रूस अपने ऊर्जा ढांचे को किफायती बनाने की राह तलाशने के लिए नए सिरे से काम नहीं करता, तब तक वह रूस के खिलाफ कदम उठाने में लड़खड़ाता रहेगा। ऊर्जा भू-राजनीति ही अक्सर बड़े संघर्षों की जड़ होती है। इतिहास ऐसी मिसालों से भरा है। जापान ने अमेरिकी प्रशांत बेड़े के मुख्यालय पर्ल हार्बर पर दिसंबर 1941 में इसीलिए हमला किया था कि अमेरिका ने जुलाई 1941 से जापान को तेल बेचना बंद कर दिया था। तब जापान को तेल एवं गैस की आपूर्ति के लिए इंडोनेशिया ( तब डच उपनिवेश) और मलेशिया (ब्रिटिश उपनिवेश) को साथ जोड़ने की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए जरूरी था कि वह पहले फिलिपींस (अमेरिकी उपनिवेश) का किला फतेह करे और इसीलिए जापान को प्रशांत बेड़े पर धावा बोलना पड़ा। जब भी तेल और गैस की बात आती है तो निर्यातकों के स्तर पर भी बड़ी सक्रियता देखने को मिलती है। प्रत्येक ऊर्जा आयातक किसी न किसी निर्यातक के साथ समीकरण साधने की जुगत भिड़ाता रहता है। उदाहरण के लिए इजरायल के पड़ोस में तेल निर्यातक देश हैं, लेकिन उनके साथ उलझन को देखते हुए उसे मैक्सिको, नॉर्वे, कोलंबिया और वेनेजुएला से तेल आयात करना पड़ता है। वहीं यूरोप को वैकल्पिक गैस स्रोत के लिए अजरबैजान और कतर की ओर देखना पड़ सकता है। यहां तक कि शायद वह ईरान के साथ फिर से पींगें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। वहीं अक्षय या नवीकरणीय ऊर्जा की बात आती है तो उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में एक ही दिग्गज चीन का दबदबा है। दुनिया के 80 प्रतिशत सौर पैनल का उत्पादन चीन करता है। विंड टरबाइन बाजार में भी उसका ही बड़ा वर्चस्व है। स्टोरेज बैटरी बाजार का भी वही अहम खिलाड़ी है। इन सबसे भी बढ़कर दुर्लभ धातुओं के उत्पादन (रेयर अर्थ प्रोडक्शन) के मामले में उसका एकाधिकार है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जिन देशों का चीन के साथ मेल नहीं खाएगा, वे सौर, पवन ऊर्जा और स्टोरेज जैसे स्रोतों के मामले में अपनी खुद की आपूर्ति श्रृंखला खड़ी करेंगे, भले ही उनकी लागत चीनी आयात से कहीं ज्यादा ही क्यों न हो। यहां तक तो ठीक है, लेकिन रेयर अर्थ का मामला जरा अलग है, क्योंकि इन 17 आवश्यक तत्वों के कुछ चुनिंदा ही स्रोत हैं। जलवायु परिवर्तन की निरंतर बढ़ती चुनौती को देखते हुए उत्सर्जन कटौती एक तात्कालिक प्राथमिकता है, लेकिन इस मोर्चे पर एक ही आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता वाली भू-राजनीति दुःस्वप्न साबित हो सकती है, विशेषकर तब जब ऐसे आपूर्तिकर्ता के साथ आपका सीमा विवाद हो। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
रूस के साथ यूक्रेन के 'रिश्तों' को कई संदर्भों के नजरिये से देखा जा सकता है। वर्ष दो हज़ार चौदह में रूस पहले ही यूक्रेन के एक बड़े हिस्से को अपने साथ मिला चुका है और फिलहाल दूसरे इलाकों को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों में लगा है। इसके पीछे उसका तर्क सदियों पुराने नस्लीय एवं सांस्कृतिक संबंधों के संदर्भ में मध्ययुगीन इतिहास की ओर लौटने का है। रूस ने व्यापक स्तरीय 'विशेष सैन्य अभियान' चलाने का जो जोखिम उठाया, उसके पीछे उसका ऊर्जा भू-राजनीति का आकलन ही है। करीब ग्यारह साल पहले जापान में आई एक परमाणु आपदा ने पश्चिमी यूरोप में ऊर्जा स्रोतों के गणित को बदलकर रख दिया। इन बदली हुई परिस्थितियों ने रूस को यूरोपीय संघ और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के मुकाबले बढ़त दिला दी। वर्ष दो हज़ार दस में जर्मनी में सत्रह परमाणु बिजली संयंत्र थे। उसकी करीब बाईस प्रतिशत बिजली परमाणु संयंत्रों में बनती थी। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में सूनामी के शिकार हुए फूकूशीमा परमाणु संयंत्र में बड़ी जन हानि हुई थी और वहां उच्च विकिरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र भी बन गया। इससे सबक लेते हुए जर्मनी ने अपने परमाणु संयंत्रों को स्थगित करने का फैसला लिया। तमाम अन्य देश भी परमाणु बिजली से तौबा करते दिखे। केवल फ्रांस ही इकलौता बड़ा यूरोपीय देश है, जिसने फूकूशीमा हादसे के बाद अपनी परमाणु योजनाओं में कोई भारी कटौती नहीं की। वर्तमान की बात करें तो जर्मनी में केवल तीन परमाणु बिजली संयंत्र ही सक्रिय रह गए हैं। जर्मनी की बमुश्किल दस प्रतिशत बिजली ही इन संयंत्रों से आती है। संभव है कि जर्मनी के नीति-निर्माता इस साल के अंत तक इन तीनों संयंत्रों को बंद करके शायद वापस कोयला आधारित तापीय बिजली संयंत्रों की ओर लौटें। निःसंदेह पिछले एक दशक के दौरान जर्मनी की ऊर्जा आवश्यकताएं बढ़ी हैं और उसकी कुल बिजली में करीब पैंतालीस प्रतिशत हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों का हो गया है। वहीं परमाणु बिजली की जगह बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस ने ले ली है। जर्मनी को आधी गैस की आपूर्ति रूस करता है। इतना ही नहीं बल्गारिया , फ्रांस, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, लातविया जैसे यूरोपीय देशों का मुख्य गैस आपूर्तिकर्ता होने के साथ ही रूस तमाम छोटे बाल्कन देशों का इकलौता गैस आपूर्तिकर्ता भी है। यूरोपीय संघ और नाटो की ऊर्जा नब्ज पर अपनी ऐसी पकड़ को देखते हुए यूक्रेन के मसले पर रूस के हाथ बहुत मजबूत हैं। यहां तक कि इस साल यूक्रेन पर हमले के बावजूद पश्चिमी यूरोप की गैस पर निर्भरता के चलते यूरोपीय संघ ने रूस को रकम पहुंचाते रहने में कोई हिचक नहीं दिखाई। वास्तव में यूक्रेन युद्ध पर रूस का रोजाना जितना खर्च हो रहा है, उससे कहीं ज्यादा कमाई वह यूरोप को गैस बेचकर कर रहा है। यानी उसका युद्ध व्यय यूरोप से होने वाले गैस राजस्व से कम ही है। जहाज या पाइपलाइन के माध्यम से गैस को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के मामले में ढुलाई के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां हैं। इसमें जितनी दूरी बढ़ेगी, उसी अनुपात में खर्च भी बढ़ता जाएगा। इस समय यूरोपीय लोगों को अमेरिकियों की तुलना में गैस के लिए सात गुना अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। वैकल्पिक स्रोत तलाशने से कीमतों और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में जब तक रूस अपने ऊर्जा ढांचे को किफायती बनाने की राह तलाशने के लिए नए सिरे से काम नहीं करता, तब तक वह रूस के खिलाफ कदम उठाने में लड़खड़ाता रहेगा। ऊर्जा भू-राजनीति ही अक्सर बड़े संघर्षों की जड़ होती है। इतिहास ऐसी मिसालों से भरा है। जापान ने अमेरिकी प्रशांत बेड़े के मुख्यालय पर्ल हार्बर पर दिसंबर एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में इसीलिए हमला किया था कि अमेरिका ने जुलाई एक हज़ार नौ सौ इकतालीस से जापान को तेल बेचना बंद कर दिया था। तब जापान को तेल एवं गैस की आपूर्ति के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया को साथ जोड़ने की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए जरूरी था कि वह पहले फिलिपींस का किला फतेह करे और इसीलिए जापान को प्रशांत बेड़े पर धावा बोलना पड़ा। जब भी तेल और गैस की बात आती है तो निर्यातकों के स्तर पर भी बड़ी सक्रियता देखने को मिलती है। प्रत्येक ऊर्जा आयातक किसी न किसी निर्यातक के साथ समीकरण साधने की जुगत भिड़ाता रहता है। उदाहरण के लिए इजरायल के पड़ोस में तेल निर्यातक देश हैं, लेकिन उनके साथ उलझन को देखते हुए उसे मैक्सिको, नॉर्वे, कोलंबिया और वेनेजुएला से तेल आयात करना पड़ता है। वहीं यूरोप को वैकल्पिक गैस स्रोत के लिए अजरबैजान और कतर की ओर देखना पड़ सकता है। यहां तक कि शायद वह ईरान के साथ फिर से पींगें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। वहीं अक्षय या नवीकरणीय ऊर्जा की बात आती है तो उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में एक ही दिग्गज चीन का दबदबा है। दुनिया के अस्सी प्रतिशत सौर पैनल का उत्पादन चीन करता है। विंड टरबाइन बाजार में भी उसका ही बड़ा वर्चस्व है। स्टोरेज बैटरी बाजार का भी वही अहम खिलाड़ी है। इन सबसे भी बढ़कर दुर्लभ धातुओं के उत्पादन के मामले में उसका एकाधिकार है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जिन देशों का चीन के साथ मेल नहीं खाएगा, वे सौर, पवन ऊर्जा और स्टोरेज जैसे स्रोतों के मामले में अपनी खुद की आपूर्ति श्रृंखला खड़ी करेंगे, भले ही उनकी लागत चीनी आयात से कहीं ज्यादा ही क्यों न हो। यहां तक तो ठीक है, लेकिन रेयर अर्थ का मामला जरा अलग है, क्योंकि इन सत्रह आवश्यक तत्वों के कुछ चुनिंदा ही स्रोत हैं। जलवायु परिवर्तन की निरंतर बढ़ती चुनौती को देखते हुए उत्सर्जन कटौती एक तात्कालिक प्राथमिकता है, लेकिन इस मोर्चे पर एक ही आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता वाली भू-राजनीति दुःस्वप्न साबित हो सकती है, विशेषकर तब जब ऐसे आपूर्तिकर्ता के साथ आपका सीमा विवाद हो। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
नांगलोई इलाके में आगे निकलने की होड़ में दो गाड़ियों ने बाइक बाइक सवार को रौंद दिया। हादसे के समय घायल बाइक सवार का भाई पीछे दूसरी बाइक से आ रहा था। उसके शोर मचाने पर दोनों वाहनों के चालक गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। घायल को पास के अस्पताल में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर चालकों की तलाश शुरू कर दी है। हादसे के वक्त उसने हेलमेट पहन रखा था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
नांगलोई इलाके में आगे निकलने की होड़ में दो गाड़ियों ने बाइक बाइक सवार को रौंद दिया। हादसे के समय घायल बाइक सवार का भाई पीछे दूसरी बाइक से आ रहा था। उसके शोर मचाने पर दोनों वाहनों के चालक गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। घायल को पास के अस्पताल में ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर चालकों की तलाश शुरू कर दी है। हादसे के वक्त उसने हेलमेट पहन रखा था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
नयी दिल्ली, दो नवम्बर उच्चतम न्यायालय को सोमवार को सूचित किया गया कि मद्रास उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति ने सांसदों और विधायकों के लिए विशेष अदालतों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं। इन विशेष अदालतों का गठन सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर किया गया है। समिति ने वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मामले में आदेश पारित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने काफी सावधानी बरती लेकिन सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए "विशेष अदालतों का गठन कर उसने भूल की है। " हंसारिया को शीर्ष अदालत ने मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि शीर्ष अदालत ने सरकारी आदेश के प्रारूप को अपनाया जिसे तेलंगाना ने पास किया था। इसने कहा कि सांसदों-विधायकों के लिए विशेष अदालतों का गठन करने के लिए सरकारी आदेश की "खामियों" का स्रोत उच्चतम न्यायालय के एक नवम्बर 2017 के आदेश में है, जिसे अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर मामले में पारित किया गया था, न कि इसका स्रोत कानून में है।
नयी दिल्ली, दो नवम्बर उच्चतम न्यायालय को सोमवार को सूचित किया गया कि मद्रास उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति ने सांसदों और विधायकों के लिए विशेष अदालतों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं। इन विशेष अदालतों का गठन सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर किया गया है। समिति ने वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मामले में आदेश पारित करते हुए उच्चतम न्यायालय ने काफी सावधानी बरती लेकिन सांसदों-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए "विशेष अदालतों का गठन कर उसने भूल की है। " हंसारिया को शीर्ष अदालत ने मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि शीर्ष अदालत ने सरकारी आदेश के प्रारूप को अपनाया जिसे तेलंगाना ने पास किया था। इसने कहा कि सांसदों-विधायकों के लिए विशेष अदालतों का गठन करने के लिए सरकारी आदेश की "खामियों" का स्रोत उच्चतम न्यायालय के एक नवम्बर दो हज़ार सत्रह के आदेश में है, जिसे अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर मामले में पारित किया गया था, न कि इसका स्रोत कानून में है।
मध्य प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस सामाजिक संगठनों का भी सहारा ले रही है. कांग्रेस एनजीओ और सामाजिक संगठनों के साथ बैठकर ज़मीन से जुड़े मुद्दों को समझने में लगी है. दरअसल. कांग्रेस का प्लान ये है कि सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आम जनता के बीच आम मुद्दों को लेकर पहुंचा जाए है. बहुत मुमकिन है कि एनजीओ के ज़रिए पार्टी ग्रासरूट लेवल पर अपनी बात पहुंचाए. कमलनाथ इस प्लान को लेकर खासे गंभीर भी हैं. इस प्लान को अमलीजामा पहनाने की ज़िम्मेदारी विवेक तन्खा को सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि प्रदेश में एनजीओ की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अपने मेनिफेस्टो में उन मुद्दों को शामिल करेगी जो जनता से सीधे जुड़े हुए हैं, साथ ही इन मुद्दों का समाधान निकालने का वादा मेनिफेस्टो में किया जाएगा. मैनिफेस्टो कमेटी के वाइस चेयरमैन विवेक तन्खा के मुताबिक एनजीओ से आइडिया लेना एक अच्छा आइडिया है. वहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि चुनाव में भले ही कोई भी पार्टी जीते लेकिन अगर सामाजिक संगठनों को सहयोग लिया जा रहा है तो ये समाज के नज़रिए से काफी फायदेमंद है. .
मध्य प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस सामाजिक संगठनों का भी सहारा ले रही है. कांग्रेस एनजीओ और सामाजिक संगठनों के साथ बैठकर ज़मीन से जुड़े मुद्दों को समझने में लगी है. दरअसल. कांग्रेस का प्लान ये है कि सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आम जनता के बीच आम मुद्दों को लेकर पहुंचा जाए है. बहुत मुमकिन है कि एनजीओ के ज़रिए पार्टी ग्रासरूट लेवल पर अपनी बात पहुंचाए. कमलनाथ इस प्लान को लेकर खासे गंभीर भी हैं. इस प्लान को अमलीजामा पहनाने की ज़िम्मेदारी विवेक तन्खा को सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि प्रदेश में एनजीओ की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अपने मेनिफेस्टो में उन मुद्दों को शामिल करेगी जो जनता से सीधे जुड़े हुए हैं, साथ ही इन मुद्दों का समाधान निकालने का वादा मेनिफेस्टो में किया जाएगा. मैनिफेस्टो कमेटी के वाइस चेयरमैन विवेक तन्खा के मुताबिक एनजीओ से आइडिया लेना एक अच्छा आइडिया है. वहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि चुनाव में भले ही कोई भी पार्टी जीते लेकिन अगर सामाजिक संगठनों को सहयोग लिया जा रहा है तो ये समाज के नज़रिए से काफी फायदेमंद है. .
Malaika Arora Surprised Arjun Kapoor: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर का दो दिन बाद यानी 26 जून को जन्मदिन है. अपना जन्मदिन मनाने के लिए अर्जुन कपूर विदेश निकल चुके हैं और उनके साथ उनकी लव लाइफ मलाइका अरोड़ा भी हैं. कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि मलाइका और अर्जुन पेरिस के लिए रवाना हुए हैं, जहां पर दोनों अकेले में अर्जुन कपूर का बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे. अर्जुन कपूर 37 साल के होने जा रहे हैं और वह अपने इस खास दिन को अपने लेडी लव के साथ ही सेलिब्रिट करना चाहते थे. इस बीच मलाइका ने भी अपने बर्थडे बॉय का दिन खास बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. मलाइका ने अर्जुन को जन्मदिन से पहले ही सरप्राइज गिफ्ट दे दिया है. अर्जुन कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक फोटो शेयर की है, जिसमें एक तीन टायर वाला बहुत ही सुंदर सा गिफ्ट नजर आ रहा है. हालांकि, इस गिफ्टे के अंदर क्या है, इसका खुलासा अर्जुन कपूर ने अपने फैंस के साथ नहीं किया है. अर्जुन कपूर ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा है कि पहले ही वह ये सुनिश्चित करती हैं कि आपको याद दिलाए कि ये आपका बर्थडे वीकेंड है.
Malaika Arora Surprised Arjun Kapoor: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर का दो दिन बाद यानी छब्बीस जून को जन्मदिन है. अपना जन्मदिन मनाने के लिए अर्जुन कपूर विदेश निकल चुके हैं और उनके साथ उनकी लव लाइफ मलाइका अरोड़ा भी हैं. कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि मलाइका और अर्जुन पेरिस के लिए रवाना हुए हैं, जहां पर दोनों अकेले में अर्जुन कपूर का बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे. अर्जुन कपूर सैंतीस साल के होने जा रहे हैं और वह अपने इस खास दिन को अपने लेडी लव के साथ ही सेलिब्रिट करना चाहते थे. इस बीच मलाइका ने भी अपने बर्थडे बॉय का दिन खास बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. मलाइका ने अर्जुन को जन्मदिन से पहले ही सरप्राइज गिफ्ट दे दिया है. अर्जुन कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक फोटो शेयर की है, जिसमें एक तीन टायर वाला बहुत ही सुंदर सा गिफ्ट नजर आ रहा है. हालांकि, इस गिफ्टे के अंदर क्या है, इसका खुलासा अर्जुन कपूर ने अपने फैंस के साथ नहीं किया है. अर्जुन कपूर ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा है कि पहले ही वह ये सुनिश्चित करती हैं कि आपको याद दिलाए कि ये आपका बर्थडे वीकेंड है.
उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर KRIBHCO भर्ती 2023 General Manager रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक लिंक और नौकरी का विवरण यहां अपडेट किया गया है। कुल रिक्तियों, वेतन, आयु सीमा, नौकरी के स्थान, पात्रता मानदंड के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें और KRIBHCO भर्ती 2023 के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। KRIBHCO भर्ती 2023 के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में KRIBHCO उपयुक्त योग्यता के साथ CA, ICWA, MBA/PGDM, PGDBM की भर्ती कर रहा है। General Manager के लिए कुल रिक्ति Various है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। KRIBHCO भर्ती 2023 के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें KRIBHCO में General Manager के रूप में रखा जाएगा। General Manager पर KRIBHCO भर्ती के लिए वेतन Rs. 140,000 - Rs. 300,000 Per Month है। कंपनी द्वारा चयनित उम्मीदवार General Manager के रूप में शामिल होंगे और उन्हें अधिसूचना में उल्लिखित वेतन दिया जाएगा। KRIBHCO ने Noida में General Manager पद की रिक्ति के लिए एक अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार यहां स्थान विवरण प्राप्त कर सकते हैं और KRIBHCO भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार KRIBHCO भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 16/05/2023 है। नियत तारीख के बाद भेजे गए आवेदनों को कंपनी द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। How to apply for KRIBHCO Recruitment 2023? उम्मीदवारों को KRIBHCO भर्ती 2023 के लिए 16/05/2023 से पहले आवेदन करना होगा। Var__company_name General Manager भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। यहां आवेदन लिंक भी देखें। चरण 1: पर जाएं KRIBHCO आधिकारिक वेबसाइट kribhco. net . चरण 4: आवेदन के तरीके की जांच करें और KRIBHCO भर्ती 2023 के लिए आवेदन करें।
उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस General Manager रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक लिंक और नौकरी का विवरण यहां अपडेट किया गया है। कुल रिक्तियों, वेतन, आयु सीमा, नौकरी के स्थान, पात्रता मानदंड के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें और KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में KRIBHCO उपयुक्त योग्यता के साथ CA, ICWA, MBA/PGDM, PGDBM की भर्ती कर रहा है। General Manager के लिए कुल रिक्ति Various है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले रिक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई आधिकारिक अधिसूचना देखें। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें KRIBHCO में General Manager के रूप में रखा जाएगा। General Manager पर KRIBHCO भर्ती के लिए वेतन Rs. एक सौ चालीस,शून्य - Rs. तीन सौ,शून्य Per Month है। कंपनी द्वारा चयनित उम्मीदवार General Manager के रूप में शामिल होंगे और उन्हें अधिसूचना में उल्लिखित वेतन दिया जाएगा। KRIBHCO ने Noida में General Manager पद की रिक्ति के लिए एक अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार यहां स्थान विवरण प्राप्त कर सकते हैं और KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि सोलह मई दो हज़ार तेईस है। नियत तारीख के बाद भेजे गए आवेदनों को कंपनी द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। How to apply for KRIBHCO Recruitment दो हज़ार तेईस? उम्मीदवारों को KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए सोलह मई दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन करना होगा। Var__company_name General Manager भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। यहां आवेदन लिंक भी देखें। चरण एक: पर जाएं KRIBHCO आधिकारिक वेबसाइट kribhco. net . चरण चार: आवेदन के तरीके की जांच करें और KRIBHCO भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करें।
Ram Rahim News : एक महीने के पेरोल से जेल से बाहर आया गुरमीत राम रहीम (Gurmit Ram Rahim) असली है या नकली इसकी जांच को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज सोमवार को सुनवाई हुई। चंडीगढ़, पंचकूला और अंबाला के कुछ श्रद्धालुओं की याचिका पर अदालत ने सुनवाई की। बता दें कि श्रद्धालुओं ने शक जताया है कि उत्तर प्रदेश के बागपत में आश्रम में पहुंचा राम रहीम नकली है। जिसके हाव-भाव उनके असली गुरु राम रहीम जैसे नहीं हैं। वहीं डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन ने इसे श्रद्धालुओं को गुमराह करने की साजिश करार दिया है। बता दें कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि लगता है कि तुम लोगों ने कोरोना महामारी के दौरान कोई फिक्शन फिल्म देखी है इसलिए ऐसी याचिका डाली है। जज ने कहा कि कीमत के साथ याचिका खारिज करूंगा। बता दें कि इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राम रहीम वीडियो में बोल रहे हैं कि उनकी 1 इंच हाइट बढ़ गई है। 50 साल की उम्र के बाद लंबाई कैसे बढ़ सकती है। इस पर जज ने कहा कि लंबाई बढ़ाई है या नहीं इससे आपको क्या फर्क पड़ता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। डेरे की तरफ से पेश हुए वकील जितेंद्र खुराना ने कहा है कि यह एक पर्टिकुलर ग्रुप है, जो जानबूझकर इस तरह की याचिका लगाता है। 2019 में भी इन्होंने एक ऐसी याचिका डाली थी। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 50000 का जुर्माना लगाया था। बात दें कि चंडीगढ़ के रहने वाले अशोक कुमार ने याचिका डाली थी और कई तर्क दिए थे। उनका कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। आपको जानकारी के लिए बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा सरकार द्वारा 1 महीने के लिए पैरोल दी गई है। वह वर्तमान में 2002 के अपने प्रबंधक की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और उन्हें 2017 में दो महिलाओं के बलात्कार के लिए भी दोषी ठहराया गया था।
Ram Rahim News : एक महीने के पेरोल से जेल से बाहर आया गुरमीत राम रहीम असली है या नकली इसकी जांच को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज सोमवार को सुनवाई हुई। चंडीगढ़, पंचकूला और अंबाला के कुछ श्रद्धालुओं की याचिका पर अदालत ने सुनवाई की। बता दें कि श्रद्धालुओं ने शक जताया है कि उत्तर प्रदेश के बागपत में आश्रम में पहुंचा राम रहीम नकली है। जिसके हाव-भाव उनके असली गुरु राम रहीम जैसे नहीं हैं। वहीं डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन ने इसे श्रद्धालुओं को गुमराह करने की साजिश करार दिया है। बता दें कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि लगता है कि तुम लोगों ने कोरोना महामारी के दौरान कोई फिक्शन फिल्म देखी है इसलिए ऐसी याचिका डाली है। जज ने कहा कि कीमत के साथ याचिका खारिज करूंगा। बता दें कि इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राम रहीम वीडियो में बोल रहे हैं कि उनकी एक इंच हाइट बढ़ गई है। पचास साल की उम्र के बाद लंबाई कैसे बढ़ सकती है। इस पर जज ने कहा कि लंबाई बढ़ाई है या नहीं इससे आपको क्या फर्क पड़ता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। डेरे की तरफ से पेश हुए वकील जितेंद्र खुराना ने कहा है कि यह एक पर्टिकुलर ग्रुप है, जो जानबूझकर इस तरह की याचिका लगाता है। दो हज़ार उन्नीस में भी इन्होंने एक ऐसी याचिका डाली थी। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पचास हज़ार का जुर्माना लगाया था। बात दें कि चंडीगढ़ के रहने वाले अशोक कुमार ने याचिका डाली थी और कई तर्क दिए थे। उनका कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। आपको जानकारी के लिए बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को हरियाणा सरकार द्वारा एक महीने के लिए पैरोल दी गई है। वह वर्तमान में दो हज़ार दो के अपने प्रबंधक की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और उन्हें दो हज़ार सत्रह में दो महिलाओं के बलात्कार के लिए भी दोषी ठहराया गया था।
निर्वाचन में बहुमत का नियम प्रयोग में लाया जाता है। न्यायालय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तीन वर्ष के लिए चुनता है। रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति भी न्यायालय द्वारा ही होती है। अध्यक्ष और रजिस्ट्रार हेग में ही निवास करते हैं। श्रमिकों के प्रश्नों पर विचार करते समय न्यायाधीशों की सहायता के लिए चार असेसर चुने जाते हैं, जिन्हें सम्मति देने का अधिकार नहीं होता। गमनागमन के सम्बन्ध में जो विवाद न्यायालय के सामने निर्णय के लिए पेश किये जाते हैं, उनके विषय में भी यह नियम लागू होता है । स्थायित्व - इस न्यायालय की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह न्याय के लिए सर्वदा तत्पर रहता है। हेग का प्राचीन पंचाEMAI यती न्यायालय किसी विवाद के उपस्थित होने पर ही नियुक्त किया जाता था। विवाद का निर्णय हो जाने पर न्यायालय की सत्ता मिट जाती है; इसीलिए इस न्यायालय के लिए स्थायी विशेषण का प्रयोग किया गया है। इस न्यायालय के न्यायाधीश जगत् विख्यात, अन्तर्राष्ट्रीय कानूनाचार्य ही नियुक्त किये जाते हैं। इस न्यायालय का वार्षिक अधिवेशन प्रतिवर्ष १५ जून को होता है । न्यायाधीशों की संख्या एवं संगठन में कभी परिवर्तन नहीं होता । न्यायालय की कार्य प्रणाली में भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता। न्यायालय के निर्णय केवल विवाद से सम्बन्ध रखनेवाले पक्षों पर ही लागू होते हैं। न्यायालय अपने पूर्व निर्णयों का खण्डन भी नहीं करता। न्यायालय में कोई एक पक्ष भी अपना निर्णय कराने की प्रार्थना कर सकता है, अर्थात् न्यायालय विवादों का निर्णय या तो एक पक्ष की प्रार्थना पर करता है, अथवा दोनों पक्षों की सम्मति से। राष्ट्र संघ में न्यायालय का स्थान- यहाँ हम संक्षेप में
निर्वाचन में बहुमत का नियम प्रयोग में लाया जाता है। न्यायालय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तीन वर्ष के लिए चुनता है। रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति भी न्यायालय द्वारा ही होती है। अध्यक्ष और रजिस्ट्रार हेग में ही निवास करते हैं। श्रमिकों के प्रश्नों पर विचार करते समय न्यायाधीशों की सहायता के लिए चार असेसर चुने जाते हैं, जिन्हें सम्मति देने का अधिकार नहीं होता। गमनागमन के सम्बन्ध में जो विवाद न्यायालय के सामने निर्णय के लिए पेश किये जाते हैं, उनके विषय में भी यह नियम लागू होता है । स्थायित्व - इस न्यायालय की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह न्याय के लिए सर्वदा तत्पर रहता है। हेग का प्राचीन पंचाEMAI यती न्यायालय किसी विवाद के उपस्थित होने पर ही नियुक्त किया जाता था। विवाद का निर्णय हो जाने पर न्यायालय की सत्ता मिट जाती है; इसीलिए इस न्यायालय के लिए स्थायी विशेषण का प्रयोग किया गया है। इस न्यायालय के न्यायाधीश जगत् विख्यात, अन्तर्राष्ट्रीय कानूनाचार्य ही नियुक्त किये जाते हैं। इस न्यायालय का वार्षिक अधिवेशन प्रतिवर्ष पंद्रह जून को होता है । न्यायाधीशों की संख्या एवं संगठन में कभी परिवर्तन नहीं होता । न्यायालय की कार्य प्रणाली में भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता। न्यायालय के निर्णय केवल विवाद से सम्बन्ध रखनेवाले पक्षों पर ही लागू होते हैं। न्यायालय अपने पूर्व निर्णयों का खण्डन भी नहीं करता। न्यायालय में कोई एक पक्ष भी अपना निर्णय कराने की प्रार्थना कर सकता है, अर्थात् न्यायालय विवादों का निर्णय या तो एक पक्ष की प्रार्थना पर करता है, अथवा दोनों पक्षों की सम्मति से। राष्ट्र संघ में न्यायालय का स्थान- यहाँ हम संक्षेप में
नई दिल्लीः भारत अगले साल से औपचारिक तौर पर जी-20 की अध्यक्षता संभालेगा. इस पर व्हाइट हाउस से कहा गया कि अमेरिका अगले साल भारत की जी-20 की अध्यक्षता का समर्थन करने के लिए उत्साहित है. भारत ने गुरुवार को दुनिया की सबसे अमीर अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 की अध्यक्षता औपचारिक रूप से संभाली है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस बीच, व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख के प्रभार संभालने पर बुधवार को कहा कि अमेरिका, इस्लामाबाद के साथ काम करने को लेकर उत्साहित है. लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर ने मंगलवार को औपचारिक रूप से पाकिस्तानी सेना की कमान संभाली है.
नई दिल्लीः भारत अगले साल से औपचारिक तौर पर जी-बीस की अध्यक्षता संभालेगा. इस पर व्हाइट हाउस से कहा गया कि अमेरिका अगले साल भारत की जी-बीस की अध्यक्षता का समर्थन करने के लिए उत्साहित है. भारत ने गुरुवार को दुनिया की सबसे अमीर अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-बीस की अध्यक्षता औपचारिक रूप से संभाली है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इस बीच, व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख के प्रभार संभालने पर बुधवार को कहा कि अमेरिका, इस्लामाबाद के साथ काम करने को लेकर उत्साहित है. लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर ने मंगलवार को औपचारिक रूप से पाकिस्तानी सेना की कमान संभाली है.
परम आत्मीय स्वजन, "साहिल के आस पास ही तूफ़ान बन गए " (बह्रे मुजारे मुसम्मन् अखरब मक्फूफ महजूफ) मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं 22 सितम्बर दिन सोमवार लगते ही हो जाएगी और दिनांक 23 सितम्बर दिन मंगलवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा. सदस्यों से विशेष अनुरोध है कि ग़ज़लों में बार बार संशोधन की गुजारिश न करें । ग़ज़ल को पोस्ट करते समय अच्छी तरह से पढ़कर टंकण की त्रुटियां अवश्य दूर कर लें । मुशायरे के दौरान होने वाली चर्चा में आये सुझावों को एक जगह नोट करते रहें और संकलन से पूर्व किसी भी समय संशोधन का अनुरोध प्रस्तुत करें । ग़ज़लों में संशोधन संकलन आने के बाद भी संभव है । सदस्य गण ध्यान रखें कि संशोधन एक सुविधा की तरह है न कि उनका अधिकार । (सदस्य प्रबंधन समूह) Replies are closed for this discussion. आदरणीय मंच संचालक जी से सादर निवेदन है कि मेरी गजल का तीसरा शे'र, काफिया(लॉन) दोषपूर्ण होने के कारण निरस्त कर दिया जाए। आदरणीया कल्पना जी, बाकमाल गजल पेश करने के लिए बधाई ,मतले के साथ ये शे'र बहुत अच्छा , पूँजी लुटा दी प्यार में, कल तक जुटाई जो, कोने में अब पड़े हुए सामान बन गए। घर-घर नहीं रहे हैं अब-मकान बन गए II२II .......हकीकत बयां करता शेर। अमित कुमार जी बहुत ही शानदार गज़ल है। बधाई स्वीकार करें।
परम आत्मीय स्वजन, "साहिल के आस पास ही तूफ़ान बन गए " मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है । मुशायरे की शुरुआत दिनाकं बाईस सितम्बर दिन सोमवार लगते ही हो जाएगी और दिनांक तेईस सितम्बर दिन मंगलवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा. सदस्यों से विशेष अनुरोध है कि ग़ज़लों में बार बार संशोधन की गुजारिश न करें । ग़ज़ल को पोस्ट करते समय अच्छी तरह से पढ़कर टंकण की त्रुटियां अवश्य दूर कर लें । मुशायरे के दौरान होने वाली चर्चा में आये सुझावों को एक जगह नोट करते रहें और संकलन से पूर्व किसी भी समय संशोधन का अनुरोध प्रस्तुत करें । ग़ज़लों में संशोधन संकलन आने के बाद भी संभव है । सदस्य गण ध्यान रखें कि संशोधन एक सुविधा की तरह है न कि उनका अधिकार । Replies are closed for this discussion. आदरणीय मंच संचालक जी से सादर निवेदन है कि मेरी गजल का तीसरा शे'र, काफिया दोषपूर्ण होने के कारण निरस्त कर दिया जाए। आदरणीया कल्पना जी, बाकमाल गजल पेश करने के लिए बधाई ,मतले के साथ ये शे'र बहुत अच्छा , पूँजी लुटा दी प्यार में, कल तक जुटाई जो, कोने में अब पड़े हुए सामान बन गए। घर-घर नहीं रहे हैं अब-मकान बन गए IIदोII .......हकीकत बयां करता शेर। अमित कुमार जी बहुत ही शानदार गज़ल है। बधाई स्वीकार करें।
इस समय कानपुर महानगर की तीन सीटें भाजपा के पास नहीं हैं। लेकिन, पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें जीतने के लिए कमर कस ली है। भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल को इन सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंगलवार को बृजलाल कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने एससी/एसटी वोटों को साधने की कोशिश करते दिखे। आज कैंट विधानसभा और दक्षिण कानपुर में उनके कार्यक्रम आयोजित किए गए। जहां उन्होंने सपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा। पिछली बार भाजपा कैंट विधानसभा सीट हार गई थी। इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इस सीट पर सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम वोटरों की है। इसके बाद एससी/एसटी वोटरों की संख्या सबसे निर्णायक मानी जाती है। यह वोटर यदि भाजपा वोटों में शामिल हो जाता है तो भाजपा की सीट निकलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे ही कुछ समीकरण सीसामऊ और आर्यनगर विधानसभा सीटों के भी हैं। यही वजह है कि भाजपा ने इन सभी सीटों पर बृजलाल को सक्रिय कर दिया है। आज कानपुर में भाजपा सांसद बृजलाल के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य में योगी सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाने के लिये कहा। साथ ही धारा-370 को हटाए जाने और राम मन्दिर निर्माण जैसे सरकार के कार्यों को आम जनता को पहुंचाने की अपील की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इस समय कानपुर महानगर की तीन सीटें भाजपा के पास नहीं हैं। लेकिन, पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें जीतने के लिए कमर कस ली है। भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल को इन सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंगलवार को बृजलाल कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने एससी/एसटी वोटों को साधने की कोशिश करते दिखे। आज कैंट विधानसभा और दक्षिण कानपुर में उनके कार्यक्रम आयोजित किए गए। जहां उन्होंने सपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा। पिछली बार भाजपा कैंट विधानसभा सीट हार गई थी। इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इस सीट पर सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम वोटरों की है। इसके बाद एससी/एसटी वोटरों की संख्या सबसे निर्णायक मानी जाती है। यह वोटर यदि भाजपा वोटों में शामिल हो जाता है तो भाजपा की सीट निकलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे ही कुछ समीकरण सीसामऊ और आर्यनगर विधानसभा सीटों के भी हैं। यही वजह है कि भाजपा ने इन सभी सीटों पर बृजलाल को सक्रिय कर दिया है। आज कानपुर में भाजपा सांसद बृजलाल के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य में योगी सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाने के लिये कहा। साथ ही धारा-तीन सौ सत्तर को हटाए जाने और राम मन्दिर निर्माण जैसे सरकार के कार्यों को आम जनता को पहुंचाने की अपील की। This website follows the DNPA Code of Ethics.
श्री सी.पी. जोशी (चित्तौड़गढ़): अध्यक्ष महोदय, मैं किसानों से संबंधित एक महत्वपूर्ण विषय आपके सामने रख रहा हूं, इसलिए मुझे आपका संरक्षण चाहिए । चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र सहित पूरे राजस्थान में किसानों की फसल बर्बाद हुई है ।...( व्यवधान) माननीय अध्यक्षः संरक्षण किसी को ज्यादा बोलने के लिए नहीं, बल्कि संरक्षण विषय के लिए है । श्री सी.पी. जोशीः अध्यक्ष महोदय, इस विषय में आपका संरक्षण इसलिए चाहिए, क्योंकि राजस्थान की सरकार इसमें सहयोग नहीं कर रही है और किसानों के प्रति भेदभाव कर रही है, इसलिए आपका संरक्षण चाहिए । महोदय, पिछले कार्यकाल में जब राजस्थान में आदरणीय वसुंधरा राजे जी मुख्य मंत्री थी, तो उस समय भी फसल खराब हुई थी, लेकिन उस समय तीन दिनों तक विधान सभा स्थगित की गयी और हम सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में गए थे । 50 परसेंट फसल खराबी का जो नियम था, पहली बार उसको घटाकर 33 परसेंट किया गया और करोड़ों रुपये किसानों के खातों में भारत सरकार, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के माध्यम से गए । अभी चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में एक दिन में ही 8 से 10 इंच बारिश हुई । प्रतापगढ़ में 125 इंच तक बारिश हुई, जो कि कल्पना से परे है । वहां किसानों के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है । मेरा आपके माध्यम से सरकार से मांग है कि उन किसानों को राहत पहुंचाई जाए । अभी राज्य सरकार ने किसानों की मांग के ऊपर गिरदावरी शुरू की है, लेकिन ऊपर से अधिकारियों को निर्देश है कि गिरदावरी में 30-32 परसेंट से ज्यादा फसल की खराबी नहीं दिखानी है, जब कि फसल की खराबी 80 परसेंट से ज्यादा हुई है । महोदय, इसके लिए मेरा आपके माध्यम से सरकार से मांग है । पहले भी भारत सरकार की टीम आई और अध्ययन करके गई । वहां वास्तव में जो फसल की खराबी हुई है, उसका अध्ययन करके किसानों की फसल खराबी का पैसा दिलाया जाए । महोदय, वहां अफीम के किसान भी हैं । उनकी फसल खराबी के कारण भी मार्फिन पूरी नहीं बैठ पाई । मेरी आपके माध्यम से सरकार से मांग है, माननीय मंत्री महोदय यहां विराजे हैं, हमने भी उनसे आग्रह किया है । अगर इसमें कमी होगी, तो निश्चित रूप से किसानों के हित में फैसला नहीं होगा । यही आग्रह मैं अपनी ओर से करता हूं । बहुतबहुत धन्यवाद । माननीय अध्यक्षः श्री दुष्यंत सिंह को श्री सी.पी. जोशी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है । जिन माननीय सदस्यों को इस सप्ताह के अंदर शून्य काल में अतिरिक्त समय बिना लिस्टेड दिया गया है, उनका नंबर अगले सप्ताह के शून्य काल में नहीं आएगा, जब तक कि बहुत अर्जेंट सब्जेक्ट नहीं हो । यदि बहुत अर्जेंट सब्जेक्ट होगा, तो उनका नंबर आ जाएगा और यदि जनरल विषय होगा, तो नहीं आएगा । न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए और सभी को मौका मिलना चाहिए । श्रीमती संध्या राय ( भिंड) : अध्यक्ष महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र भिंड, मध्य प्रदेश में विगत 15-16 नवंबर को अत्यधिक वर्षा हुई । कोटा बैराज और राजस्थान की चंबल नदी में लगातर अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई । इसके कारण आठ विधान सभा के छोटे एवं सीमांत किसानों की हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हुई, इसके साथ ही सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए, सड़कें बिल्कुल समाप्त हो चुकी हैं और बेजुबान मवेशियों को कष्ट झेलना पड़ा है । वहां कई मवेशियों की मौत भी हो गई है । मैं सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहती हूं कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और सड़कों की मरम्मतीकरण के लिए आर्थिक सहायता देनी चाहिए । वहां जिनके मकान बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके भवनों के जीर्णोद्धार कराने के साथ-साथ मवेशियों को चारा आदि उपलब्ध कराने के लिए भी मैं सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग करती हूं । जिन किसान भाई-बहनों की फसल बर्बाद हुई है, उनके लिए भी मैं मुआवजे की मांग करती हूं । महोदय, आपने मुझे शून्य काल में बोलने के लिए समय दिया, मैं आपका बहुतबहुत धन्यवाद करती हूं । SHRIMATI KANIMOZHI KARUNANIDHI (THOOTHUKKUDI): Sir, according to the research carried out by the Government, India has lost almost one-third of its coastline to sea erosion. In Tamil Nadu, nearly 41 per cent of its coastline has been lost to sea erosion. In my constituency, Thoothukkudi, we have a large coastline and hundreds of fishing hamlets are located there. Within a few weeks, we are loosing half of the village into the sea. It is a very, very alarming situation, and the Government is building seawalls and groynes which is not a permanent solution to this alarming situation across the country. I want to know what the Government is doing. Does it have a long-term plan to protect these villages and the lives of the fishermen? माननीय अध्यक्षः श्री बी. मणिक्कम टैगोर तथा श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले को श्रीमती कनिमोझी करुणानिधि द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है । श्रीमती सुप्रिया सुले जी । श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले (बारामती): सर, नमस्ते, थैंक यू । मेरे निर्वाचन क्षेत्र में कल एक एक्सीडेंट हुआ था । जो वारकरी सम्प्रदाय के लोग हैं, उनमें 2 का देहान्त हो गया और 16 का एक्सीडेंट हो गया । एक प्रोग्राम नितिन जी की लीडरशिप में शुरू हुआ था । आलंदी से पंडरपुर और देहू से पंडरपुर, जिसको हम महाराष्ट्र में पालकी मार्ग कहते हैं, उसको जल्द से जल्द पैसा मिले और वह काम पूरा हो जाए । SHRI H. VASANTHAKUMAR (KANYAKUMARI): I wish to bring to the notice of the House a serious issue concerning poor people of State of Tamil Nadu. The rice distributed under the Public Distribution System has been drastically reduced. It is understood that 10 per cent reduction has been made in the supply of rice based on the sale of rice in October. Because of the insensitive action by the Central Government, major portion of rice of the poor people will be affected due to non-availability of rice. It is estimated that every 100 persons out of 1,000 beneficiaries will be deprived of rice. Respected Speaker Sir, in my Kanyakumari constituency, 25 tonnes of rice have not been supplied to ration shops and in the whole State, 21,000 tonnes of rice have not been supplied. Sir, I would like to remind the House on this occasion that during the Congress rule, rice was supplied to State Governments at the rate of Rs.3.50 per kg, whereas the BJP Government now supply rice at the rate of Rs.32.50 per kg. There are two crore family ration cards in Tamil Nadu. Out of this, majority are getting rice. Due to Central Government's insensitive action, poor people will be affected. Therefore, I request, through you, the Central Government to restore the normal supply of rice to Tamil Nadu and safeguard the poor people. माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, अगर आप लिख कर भी लाए हैं, तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप एक मिनट का वहां पर ध्यान रखेंगे और उतना ही पढ़ कर बोलेंगे । SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Thank you very much, Speaker Sir. I would like to draw the attention of this august House regarding two incidents in
श्री सी.पी. जोशी : अध्यक्ष महोदय, मैं किसानों से संबंधित एक महत्वपूर्ण विषय आपके सामने रख रहा हूं, इसलिए मुझे आपका संरक्षण चाहिए । चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र सहित पूरे राजस्थान में किसानों की फसल बर्बाद हुई है ।... माननीय अध्यक्षः संरक्षण किसी को ज्यादा बोलने के लिए नहीं, बल्कि संरक्षण विषय के लिए है । श्री सी.पी. जोशीः अध्यक्ष महोदय, इस विषय में आपका संरक्षण इसलिए चाहिए, क्योंकि राजस्थान की सरकार इसमें सहयोग नहीं कर रही है और किसानों के प्रति भेदभाव कर रही है, इसलिए आपका संरक्षण चाहिए । महोदय, पिछले कार्यकाल में जब राजस्थान में आदरणीय वसुंधरा राजे जी मुख्य मंत्री थी, तो उस समय भी फसल खराब हुई थी, लेकिन उस समय तीन दिनों तक विधान सभा स्थगित की गयी और हम सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में गए थे । पचास परसेंट फसल खराबी का जो नियम था, पहली बार उसको घटाकर तैंतीस परसेंट किया गया और करोड़ों रुपये किसानों के खातों में भारत सरकार, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के माध्यम से गए । अभी चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में एक दिन में ही आठ से दस इंच बारिश हुई । प्रतापगढ़ में एक सौ पच्चीस इंच तक बारिश हुई, जो कि कल्पना से परे है । वहां किसानों के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है । मेरा आपके माध्यम से सरकार से मांग है कि उन किसानों को राहत पहुंचाई जाए । अभी राज्य सरकार ने किसानों की मांग के ऊपर गिरदावरी शुरू की है, लेकिन ऊपर से अधिकारियों को निर्देश है कि गिरदावरी में तीस-बत्तीस परसेंट से ज्यादा फसल की खराबी नहीं दिखानी है, जब कि फसल की खराबी अस्सी परसेंट से ज्यादा हुई है । महोदय, इसके लिए मेरा आपके माध्यम से सरकार से मांग है । पहले भी भारत सरकार की टीम आई और अध्ययन करके गई । वहां वास्तव में जो फसल की खराबी हुई है, उसका अध्ययन करके किसानों की फसल खराबी का पैसा दिलाया जाए । महोदय, वहां अफीम के किसान भी हैं । उनकी फसल खराबी के कारण भी मार्फिन पूरी नहीं बैठ पाई । मेरी आपके माध्यम से सरकार से मांग है, माननीय मंत्री महोदय यहां विराजे हैं, हमने भी उनसे आग्रह किया है । अगर इसमें कमी होगी, तो निश्चित रूप से किसानों के हित में फैसला नहीं होगा । यही आग्रह मैं अपनी ओर से करता हूं । बहुतबहुत धन्यवाद । माननीय अध्यक्षः श्री दुष्यंत सिंह को श्री सी.पी. जोशी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है । जिन माननीय सदस्यों को इस सप्ताह के अंदर शून्य काल में अतिरिक्त समय बिना लिस्टेड दिया गया है, उनका नंबर अगले सप्ताह के शून्य काल में नहीं आएगा, जब तक कि बहुत अर्जेंट सब्जेक्ट नहीं हो । यदि बहुत अर्जेंट सब्जेक्ट होगा, तो उनका नंबर आ जाएगा और यदि जनरल विषय होगा, तो नहीं आएगा । न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए और सभी को मौका मिलना चाहिए । श्रीमती संध्या राय : अध्यक्ष महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र भिंड, मध्य प्रदेश में विगत पंद्रह-सोलह नवंबर को अत्यधिक वर्षा हुई । कोटा बैराज और राजस्थान की चंबल नदी में लगातर अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई । इसके कारण आठ विधान सभा के छोटे एवं सीमांत किसानों की हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हुई, इसके साथ ही सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए, सड़कें बिल्कुल समाप्त हो चुकी हैं और बेजुबान मवेशियों को कष्ट झेलना पड़ा है । वहां कई मवेशियों की मौत भी हो गई है । मैं सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहती हूं कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और सड़कों की मरम्मतीकरण के लिए आर्थिक सहायता देनी चाहिए । वहां जिनके मकान बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके भवनों के जीर्णोद्धार कराने के साथ-साथ मवेशियों को चारा आदि उपलब्ध कराने के लिए भी मैं सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग करती हूं । जिन किसान भाई-बहनों की फसल बर्बाद हुई है, उनके लिए भी मैं मुआवजे की मांग करती हूं । महोदय, आपने मुझे शून्य काल में बोलने के लिए समय दिया, मैं आपका बहुतबहुत धन्यवाद करती हूं । SHRIMATI KANIMOZHI KARUNANIDHI : Sir, according to the research carried out by the Government, India has lost almost one-third of its coastline to sea erosion. In Tamil Nadu, nearly इकतालीस per cent of its coastline has been lost to sea erosion. In my constituency, Thoothukkudi, we have a large coastline and hundreds of fishing hamlets are located there. Within a few weeks, we are loosing half of the village into the sea. It is a very, very alarming situation, and the Government is building seawalls and groynes which is not a permanent solution to this alarming situation across the country. I want to know what the Government is doing. Does it have a long-term plan to protect these villages and the lives of the fishermen? माननीय अध्यक्षः श्री बी. मणिक्कम टैगोर तथा श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले को श्रीमती कनिमोझी करुणानिधि द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है । श्रीमती सुप्रिया सुले जी । श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले : सर, नमस्ते, थैंक यू । मेरे निर्वाचन क्षेत्र में कल एक एक्सीडेंट हुआ था । जो वारकरी सम्प्रदाय के लोग हैं, उनमें दो का देहान्त हो गया और सोलह का एक्सीडेंट हो गया । एक प्रोग्राम नितिन जी की लीडरशिप में शुरू हुआ था । आलंदी से पंडरपुर और देहू से पंडरपुर, जिसको हम महाराष्ट्र में पालकी मार्ग कहते हैं, उसको जल्द से जल्द पैसा मिले और वह काम पूरा हो जाए । SHRI H. VASANTHAKUMAR : I wish to bring to the notice of the House a serious issue concerning poor people of State of Tamil Nadu. The rice distributed under the Public Distribution System has been drastically reduced. It is understood that दस per cent reduction has been made in the supply of rice based on the sale of rice in October. Because of the insensitive action by the Central Government, major portion of rice of the poor people will be affected due to non-availability of rice. It is estimated that every एक सौ persons out of एक,शून्य beneficiaries will be deprived of rice. Respected Speaker Sir, in my Kanyakumari constituency, पच्चीस tonnes of rice have not been supplied to ration shops and in the whole State, इक्कीस,शून्य tonnes of rice have not been supplied. Sir, I would like to remind the House on this occasion that during the Congress rule, rice was supplied to State Governments at the rate of Rs.तीन.पचास per kg, whereas the BJP Government now supply rice at the rate of Rs.बत्तीस.पचास per kg. There are two crore family ration cards in Tamil Nadu. Out of this, majority are getting rice. Due to Central Government's insensitive action, poor people will be affected. Therefore, I request, through you, the Central Government to restore the normal supply of rice to Tamil Nadu and safeguard the poor people. माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, अगर आप लिख कर भी लाए हैं, तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप एक मिनट का वहां पर ध्यान रखेंगे और उतना ही पढ़ कर बोलेंगे । SHRI N. K. PREMACHANDRAN : Thank you very much, Speaker Sir. I would like to draw the attention of this august House regarding two incidents in
भड़काऊ भाषण के आरोपी बीजेपी नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) को Y श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। इसके चलते अब उनकी सुरक्षा में चौबीसों घंटे छह सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। बताया जा रहा है कि कपिल मिश्रा को Y श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला गृह मंत्रालय ने लिया है। हालांकि, दिल्ली के ज्वाइंट सीपी (सिक्योरिटी) ने इससे इन्कार किया है। बता दें कि कपिल मिश्रा ने अपनी जान को खतरा बताया है।
भड़काऊ भाषण के आरोपी बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को Y श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। इसके चलते अब उनकी सुरक्षा में चौबीसों घंटे छह सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। बताया जा रहा है कि कपिल मिश्रा को Y श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला गृह मंत्रालय ने लिया है। हालांकि, दिल्ली के ज्वाइंट सीपी ने इससे इन्कार किया है। बता दें कि कपिल मिश्रा ने अपनी जान को खतरा बताया है।
अमरीका, संयुक्त राष्ट्र महासभा में हमास की निंदा में प्रस्ताव पारित कराने में नाकाम हो गया। अमरीका की ओर से हमास की निंदा में लाया गया प्रस्ताव कि जिसका मसौदा अमरीका ने तय्यार किया था, बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा। 193 सदस्यीय महासभा में गुरुवार को मतदान में इस प्रस्ताव के पक्ष में 87 और विरोध में 57 मत पड़े जबकि 33 सदस्य देशों ने इस मतदान मे भाग नहीं लिया, जिसकी वजह से वॉशिंग्टन इस प्रस्ताव को स्वीकार कराने के लिए ज़रूरी दो तिहाई मत हासिल करने में बुरी तरह नाकाम रहा। अमरीका ने सादा बहुमत की अपील की थी जिसके दौरान इस प्रस्ताव के पक्ष में 75 और विरोध में 72 वोट पड़े जबकि 26 देश अनुपस्थित रहे थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो तिहाई बहुमत का विकल्प अपनाया जिसमें अमरीका को बुरी तरह नाकामी हुयी। इस प्रस्ताव का लक्ष्य हमास के इस्राईल के ख़िलाफ़ रॉकेट हमले और अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी भूमि में रहने वाले ज़ायोनियों के ख़िलाफ़ एयरबोर्न इनसेन्डिअरी डीवाइस के इस्तेमाल की निंदा करना था। ग़ौरतलब है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में कुछ हफ़ते पहले हमास के कमान्डर पर इस्राईल के नाकाम हमले के बाद दो दिन तक भड़की हिंसा में, हमास के जियालों ने अतिग्रहित फ़िलिस्तीन पर 400 रॉकेट फ़ायर किए थे, जिसके बाद यह प्रस्ताव लाया गया। हमास ने अपने कमान्डर पर हमले की कोशिश का जिस तरह जवाब दिया था उससे ज़ायोनी सेना में हड़कंप मच गया था, क्योंकि, रिपोर्ट के अनुसार, इस्राईल का मशहूर आयरन डोम मीज़ाईल तंत्र, 20 फ़ीसद से ज़्यादा इन रॉकेटों को नाकाम नहीं बना पाया था। उधर महासभा में अमरीका को प्रस्ताव लाने में हुयी नाकामी पर हमास ने इसे ट्रम्प सरकार के मुंह पर तमांचे की संज्ञा दी। (MAQ/N)
अमरीका, संयुक्त राष्ट्र महासभा में हमास की निंदा में प्रस्ताव पारित कराने में नाकाम हो गया। अमरीका की ओर से हमास की निंदा में लाया गया प्रस्ताव कि जिसका मसौदा अमरीका ने तय्यार किया था, बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा। एक सौ तिरानवे सदस्यीय महासभा में गुरुवार को मतदान में इस प्रस्ताव के पक्ष में सत्तासी और विरोध में सत्तावन मत पड़े जबकि तैंतीस सदस्य देशों ने इस मतदान मे भाग नहीं लिया, जिसकी वजह से वॉशिंग्टन इस प्रस्ताव को स्वीकार कराने के लिए ज़रूरी दो तिहाई मत हासिल करने में बुरी तरह नाकाम रहा। अमरीका ने सादा बहुमत की अपील की थी जिसके दौरान इस प्रस्ताव के पक्ष में पचहत्तर और विरोध में बहत्तर वोट पड़े जबकि छब्बीस देश अनुपस्थित रहे थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो तिहाई बहुमत का विकल्प अपनाया जिसमें अमरीका को बुरी तरह नाकामी हुयी। इस प्रस्ताव का लक्ष्य हमास के इस्राईल के ख़िलाफ़ रॉकेट हमले और अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी भूमि में रहने वाले ज़ायोनियों के ख़िलाफ़ एयरबोर्न इनसेन्डिअरी डीवाइस के इस्तेमाल की निंदा करना था। ग़ौरतलब है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में कुछ हफ़ते पहले हमास के कमान्डर पर इस्राईल के नाकाम हमले के बाद दो दिन तक भड़की हिंसा में, हमास के जियालों ने अतिग्रहित फ़िलिस्तीन पर चार सौ रॉकेट फ़ायर किए थे, जिसके बाद यह प्रस्ताव लाया गया। हमास ने अपने कमान्डर पर हमले की कोशिश का जिस तरह जवाब दिया था उससे ज़ायोनी सेना में हड़कंप मच गया था, क्योंकि, रिपोर्ट के अनुसार, इस्राईल का मशहूर आयरन डोम मीज़ाईल तंत्र, बीस फ़ीसद से ज़्यादा इन रॉकेटों को नाकाम नहीं बना पाया था। उधर महासभा में अमरीका को प्रस्ताव लाने में हुयी नाकामी पर हमास ने इसे ट्रम्प सरकार के मुंह पर तमांचे की संज्ञा दी।
Jamshedpur : शनिवार की शाम करीब छह बजे टेल्को कॉलोनी के एक घर में अनियंत्रित मिनी ट्रक घुस गया. यह दुर्घटना टेल्को लेबर ब्यूरो गोलचक्कर और मेन गेट के बीच हुई. मिनी ट्रक जेएच 05 एएल 2985 पर माल लदे होने के कारण अनियंत्रित होने पर यह क्वार्टर की दीवार तोड़ते हुए घुस गया. हालांकि इस हादसे के वक्त मकान में रहने वाला कोई भी सदस्य बाहर नहीं था, जिसके कारण किसी भी सदस्य को किसी तरह की कोई क्षति नहीं पहुंची है.
Jamshedpur : शनिवार की शाम करीब छह बजे टेल्को कॉलोनी के एक घर में अनियंत्रित मिनी ट्रक घुस गया. यह दुर्घटना टेल्को लेबर ब्यूरो गोलचक्कर और मेन गेट के बीच हुई. मिनी ट्रक जेएच पाँच एएल दो हज़ार नौ सौ पचासी पर माल लदे होने के कारण अनियंत्रित होने पर यह क्वार्टर की दीवार तोड़ते हुए घुस गया. हालांकि इस हादसे के वक्त मकान में रहने वाला कोई भी सदस्य बाहर नहीं था, जिसके कारण किसी भी सदस्य को किसी तरह की कोई क्षति नहीं पहुंची है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Morbi Bridge Collapse Tragedy: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को गुजरात के मोरबी में पुल गिरने की घटना पर दुख और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहतीं हैं। तमिलनाड़ु के मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन से मिलने के लिए चेन्नई रवाना होने से पहले कोलकाता हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात कर रहे बनर्जी ने कहा कि घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक आयोग का गठन किया जाना चाहिए। बता दें कि गुजरात के मोरबी में 30 अक्टूबर को करीब 140 साल पुराना हैंगिंग ब्रिज गिर गया था, जिसमें कम से कम 135 लोगों की मौत हो गई। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 9 लोगों में से 4 को पुलिस हिरासत में और शेष पांच को 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस हिरासत में चार व्यक्तियों में से दो ओरेवा कंपनी के प्रबंधक हैं और अन्य दो ठेकेदार हैं।
Morbi Bridge Collapse Tragedy: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को गुजरात के मोरबी में पुल गिरने की घटना पर दुख और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहतीं हैं। तमिलनाड़ु के मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन से मिलने के लिए चेन्नई रवाना होने से पहले कोलकाता हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात कर रहे बनर्जी ने कहा कि घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक आयोग का गठन किया जाना चाहिए। बता दें कि गुजरात के मोरबी में तीस अक्टूबर को करीब एक सौ चालीस साल पुराना हैंगिंग ब्रिज गिर गया था, जिसमें कम से कम एक सौ पैंतीस लोगों की मौत हो गई। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से चार को पुलिस हिरासत में और शेष पांच को पाँच नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस हिरासत में चार व्यक्तियों में से दो ओरेवा कंपनी के प्रबंधक हैं और अन्य दो ठेकेदार हैं।
Don't Miss! मशहूर शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार से संम्मानित किया जा चुका है। प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर का 84 साल की उम्र में सोमवार देर रात निधन हो गया। वो जयपुर घराने से ताल्लुक रखती थीं और उन्होंने संगीत की दीक्षा अपनी माताजी से ली थी। देश विदेश में उनके गायन का असर दिखता था और उनकी आवाज़ में बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए, राग भैरवी में सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। किशोरी जी को भारत सरकार ने पद्म भूषण, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और साहित्य अकादमी की फेलोशिप से सम्मानित किया था। अपने पीछे वो अपने शिष्यों के लिए अपने संगीत की धरोहर छोड़ कर गई हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने संगीत सीखने के दिनों को याद करते हुए बताया कि मैं अपनी मां से गाना सीखती थीं और वो केवल दो बार स्थाई और अंतरा गाती थीं। तीसरी बार कभी उनके मुंह से वही चीज़ नहीं सुनाई देगी। मुझे दो ही बार में सीखना होता था। मुंबई स्थित उनके निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने शास्त्रीय विधा में ख्याल और लाइट क्लासिकल म्यूजिक के ठुमरी व भजन गायकी में देश- विदेश में बहुत प्रस्तुतियां दीं।
Don't Miss! मशहूर शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर का चौरासी साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार से संम्मानित किया जा चुका है। प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर का चौरासी साल की उम्र में सोमवार देर रात निधन हो गया। वो जयपुर घराने से ताल्लुक रखती थीं और उन्होंने संगीत की दीक्षा अपनी माताजी से ली थी। देश विदेश में उनके गायन का असर दिखता था और उनकी आवाज़ में बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए, राग भैरवी में सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। किशोरी जी को भारत सरकार ने पद्म भूषण, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और साहित्य अकादमी की फेलोशिप से सम्मानित किया था। अपने पीछे वो अपने शिष्यों के लिए अपने संगीत की धरोहर छोड़ कर गई हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने संगीत सीखने के दिनों को याद करते हुए बताया कि मैं अपनी मां से गाना सीखती थीं और वो केवल दो बार स्थाई और अंतरा गाती थीं। तीसरी बार कभी उनके मुंह से वही चीज़ नहीं सुनाई देगी। मुझे दो ही बार में सीखना होता था। मुंबई स्थित उनके निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने शास्त्रीय विधा में ख्याल और लाइट क्लासिकल म्यूजिक के ठुमरी व भजन गायकी में देश- विदेश में बहुत प्रस्तुतियां दीं।
नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक से कहा कि वह उन 39 फ्लैट खरीदारों के ब्याज का भुगतान करे, जिन्होंने वादे के अनुसार फ्लैट न मिलने पर कंपनी से अपने पैसे वापस मांगे हैं। खरीदारों ने हरियाणा के गुरुग्राम में यूनिटेक के विस्टा प्रोजेक्ट में फ्लैटों की बुकिंग कराई थी। सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने बिल्डर को कोर्ट की रजिस्ट्री में 14 फीसदी की दर से ब्याज जमा कराने के लिए आठ हफ्ते का वक्त दिया है। ब्याज की गणना पहली जनवरी, 2010 से लेकर यूनिटेक द्वारा मूलधन जमा कराने की अवधि तक के लिए की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री में जमा की गई ब्याज की 90 फीसदी रकम 39 खरीदारों में बांटी जाएगी, जिन्होंने फ्लैट न लेने का विकल्प चुना है। अब यूनिटेक को 39 फ्लैट खरीदारों के द्वारा जमा किए गए 16. 55 करोड़ रुपए के मूल धन पर 14 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।
नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक से कहा कि वह उन उनतालीस फ्लैट खरीदारों के ब्याज का भुगतान करे, जिन्होंने वादे के अनुसार फ्लैट न मिलने पर कंपनी से अपने पैसे वापस मांगे हैं। खरीदारों ने हरियाणा के गुरुग्राम में यूनिटेक के विस्टा प्रोजेक्ट में फ्लैटों की बुकिंग कराई थी। सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने बिल्डर को कोर्ट की रजिस्ट्री में चौदह फीसदी की दर से ब्याज जमा कराने के लिए आठ हफ्ते का वक्त दिया है। ब्याज की गणना पहली जनवरी, दो हज़ार दस से लेकर यूनिटेक द्वारा मूलधन जमा कराने की अवधि तक के लिए की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री में जमा की गई ब्याज की नब्बे फीसदी रकम उनतालीस खरीदारों में बांटी जाएगी, जिन्होंने फ्लैट न लेने का विकल्प चुना है। अब यूनिटेक को उनतालीस फ्लैट खरीदारों के द्वारा जमा किए गए सोलह. पचपन करोड़ रुपए के मूल धन पर चौदह फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।
नई दिल्ली। रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती दूर करने व घर खरीददारों को बड़ी राहत देने के मकसद से देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एक खास स्कीम लॉन्च की है। अकसर देखा जाता है कि लोग होम लोन लेकर घर की बुकिंग तो कर लेते हैं लेकिन आवंटन प्रमाणपत्र (ओसी) मिलने से पहले प्रोजेक्ट अटक जाता है, ऐसे में लोगों को घर भी नहीं मिलता और वो होम लोन भी दे रहे होते हैं। लेकिन अब घर खरीदारों के लिए एसबीआई ने 'रेशिडेंशल बिल्डर फाइनेंस विद बायर गारंटी स्कीम' लॉन्च की है। इस स्कीम के तहत यदि घर खरीदार को निर्धारित समय पर घर का पजेशन नहीं मिल पाता है तो बैंक ग्राहक को पूरा प्रिंसिपल अमाउंट यानी मूलधन लौटा देगा। यह रिफंड स्कीम तब तक मान्य होगी, जब तक बिल्डर को आवंटन प्रमाणपत्र (ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट/ओसी) नहीं मिल जाता है। फिलहाल एसबीआई की ये स्कीम 10 शहरों में मंजूर किए गए प्रोजेक्ट पर लागू होगी। वहीं 'रेशिडेंशल बिल्डर फाइनेंस विद बायर गारंटी स्कीम' के तहत ग्राहकों को अधिकतम 2. 5 करोड़ रुपए कीमत के मकान के लिए होम लोन मिल सकता है। इसमें बैंक के शर्तों का पालन करने वाले बिल्डर को भी 50 करोड़ रुपए से लेकर 400 करोड़ रुपए तक का लोन मिल सकता है। इसके लिए बिल्डर का स्टार रेटिंग और सिबिल स्कोर जांचा जाएगा। मान लीजिए कि रमेश ने 2 करोड़ रुपए का फ्लैट बुक कराया है और 1 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। ऐसे में अगर प्रोजेक्ट अटक जाता है तो एसबीआई सुरेश का 1 करोड़ रुपए रिफंड कर देगा। बैंक की ओर से दी गई गारंटी की अवधि आवंटन प्रमाणपत्र (ओसी) से जुड़ी रहेगी। यह गारंटी रेरा रजिस्टर्ड परियोजनाओं पर ही लागू होगी। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की समय-सीमा पार होने के बाद प्रोजेक्ट को अटका माना जाएगा। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बताया कि इस स्कीम का रियल एस्टेट सेक्टर के साथ-साथ उन मकान खरीदारों पर पर बड़ा असर पड़ेगा, जो मकान का पजेशन न मिलने के कारण परेशानी में फंस जाते हैं। रजनीश कुमार ने कहा कि रेरा, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के नियमों में बदलाव के अलावा टबंदी के बाद हमें इस बात का एहसास हुआ कि होमबायर्स को समय पर मकान देने और उनका पैसा फंसने से बचाने का यह बढ़िया तरीका है। पहले चरण में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सनटेक डेवलपर्स के साथ तीन प्रोजेक्ट्स के लिए समझौता किया है। ये सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट मुंबई के मेट्रोपॉलिटन रीजन में बनेंगे। बता दें कि सुस्ती से जूझ रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के सरकार लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अनफिनिश्ड प्रॉजेक्ट्स वाले डेवलपर्स को राहत देने के लिए 25,000 करोड़ रुपए के अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) बनाया है।
नई दिल्ली। रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती दूर करने व घर खरीददारों को बड़ी राहत देने के मकसद से देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने एक खास स्कीम लॉन्च की है। अकसर देखा जाता है कि लोग होम लोन लेकर घर की बुकिंग तो कर लेते हैं लेकिन आवंटन प्रमाणपत्र मिलने से पहले प्रोजेक्ट अटक जाता है, ऐसे में लोगों को घर भी नहीं मिलता और वो होम लोन भी दे रहे होते हैं। लेकिन अब घर खरीदारों के लिए एसबीआई ने 'रेशिडेंशल बिल्डर फाइनेंस विद बायर गारंटी स्कीम' लॉन्च की है। इस स्कीम के तहत यदि घर खरीदार को निर्धारित समय पर घर का पजेशन नहीं मिल पाता है तो बैंक ग्राहक को पूरा प्रिंसिपल अमाउंट यानी मूलधन लौटा देगा। यह रिफंड स्कीम तब तक मान्य होगी, जब तक बिल्डर को आवंटन प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता है। फिलहाल एसबीआई की ये स्कीम दस शहरों में मंजूर किए गए प्रोजेक्ट पर लागू होगी। वहीं 'रेशिडेंशल बिल्डर फाइनेंस विद बायर गारंटी स्कीम' के तहत ग्राहकों को अधिकतम दो. पाँच करोड़ रुपए कीमत के मकान के लिए होम लोन मिल सकता है। इसमें बैंक के शर्तों का पालन करने वाले बिल्डर को भी पचास करोड़ रुपए से लेकर चार सौ करोड़ रुपए तक का लोन मिल सकता है। इसके लिए बिल्डर का स्टार रेटिंग और सिबिल स्कोर जांचा जाएगा। मान लीजिए कि रमेश ने दो करोड़ रुपए का फ्लैट बुक कराया है और एक करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। ऐसे में अगर प्रोजेक्ट अटक जाता है तो एसबीआई सुरेश का एक करोड़ रुपए रिफंड कर देगा। बैंक की ओर से दी गई गारंटी की अवधि आवंटन प्रमाणपत्र से जुड़ी रहेगी। यह गारंटी रेरा रजिस्टर्ड परियोजनाओं पर ही लागू होगी। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की समय-सीमा पार होने के बाद प्रोजेक्ट को अटका माना जाएगा। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बताया कि इस स्कीम का रियल एस्टेट सेक्टर के साथ-साथ उन मकान खरीदारों पर पर बड़ा असर पड़ेगा, जो मकान का पजेशन न मिलने के कारण परेशानी में फंस जाते हैं। रजनीश कुमार ने कहा कि रेरा, वस्तु एवं सेवा कर के नियमों में बदलाव के अलावा टबंदी के बाद हमें इस बात का एहसास हुआ कि होमबायर्स को समय पर मकान देने और उनका पैसा फंसने से बचाने का यह बढ़िया तरीका है। पहले चरण में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सनटेक डेवलपर्स के साथ तीन प्रोजेक्ट्स के लिए समझौता किया है। ये सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट मुंबई के मेट्रोपॉलिटन रीजन में बनेंगे। बता दें कि सुस्ती से जूझ रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के सरकार लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अनफिनिश्ड प्रॉजेक्ट्स वाले डेवलपर्स को राहत देने के लिए पच्चीस,शून्य करोड़ रुपए के अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड बनाया है।
जातक कथाओं में से एक प्रसंग एक दिन उत्साह की उमंग में दौड़ती भाई, उल्लसित कण्ठ से एक परिचारिका ने स्वामिनी से - कर कहा - "देवी देवी... देवी...!" परन्तु इससे आगे जैसे वह कुछ भी कहने में असमर्थ रही। कारण ? उसका श्वास अभी भी फूल रहा था । देवी आम्रपाली मध्यान्ह का विश्राम कर अभी भी अपने प्रसाधन कक्ष में प्राई थी। मानवाकार दर्पण में प्रतिबिम्बित होते अपने अलसाए अंगों एवं अपनी मुखछवि को निहार वह, जैसे अपने पर ही मुग्ध हो उठी। परिचारिका इतना उत्साह दिखा कर भी जब कुछ न कह सकी, तो इस पर वह कुछ झल्ला - सी गई । बोली -- "देख मदिरे ! मैंने तुझे कितनी बार सावधान किया है कि इतनी भावुक न बन । घरी श्रो, भावुकता तो बस उतनी ही उचित है कि वह अभिव्यक्ति को सुन्दरता में संवार सके । औौर, तू है कि...... ऋच्छा... अब कुछ बोलेगी भी कि.... " परिचारिका के मुख का फैलता गाढ़ा रंग जैसे वहीं रुक, और प्रगाढ़ हो गया । किन्तु, उसके नेत्रों में से प्रस्फुटित होता उल्लास और ज्योतित हो उठा। संयत कण्ठ से मानों सप्रयास वह बोली- "स्वामिनी जानती हो, आज अपने ग्राम्रकुंज में भगवान तथागत पधारे है ! देवी आम्रपाली अपनी निहारती छवि को जैसे दर्पण में ही धकेल, पीठिका से उठ खड़ी हुई ; उसके नेत्र विस्फारित हो गए । संसभ्रम पूछने लगी- "सचमुच मदिरे ! " और फिर वह सवेग रथ में जा बैठी; रथ तीव्र गति से थाम्रकुंज की ओर दौड़ लिया । उधर, लिच्छवयों को भी जब तथागत के आने का पता चला तो वे भी सोत्याह एक-दूसरे को यह संवाद सुनाते, तथागत के दर्शन को दौड़ लिए । पर, तब तक सामने से देवी आम्रपाली का रथ धूलि धूसरित मार्ग को सावेग रौंदता लौट रहा था; इतना सावेग कि लिच्छवियों के रथों से उसका रथ टकरा गया; धुरे से धुरे टकरा, घर्रा उठे । आखिर उन्होंने अपने रथ रोक, ग्राम्रपाली से पूछा- "देवी, भला आज ऐसा क्या हुआ है, जो तू इतनी प्रसन्न है ! " तब, आम्रपाली ने सगर्व कहा - "तथागत कल भिक्षुसंघ समेत मेरे यहाँ ज्योनार पर जो प्राएँगे ।" यह सुन सभी लिच्छदियों ही की तो मुख प्राभा निस्तेज हो " वे जैसे ठगे से खड़े रह गए । परास्त हुए कण्ठ स्वर में बोले - " देवी, तू एक कोटि कार्षापण ले ले और और यह ज्योनार हमें दे दे।" इस पर, आम्रपाली ने सगर्व अपने सारथी को रथ आगे बढ़ाने का आदेश कर, लिच्छवियों की ओर देखते हुए कहा - "क्या कहा, एक कोटि कार्षापण ? " उपहास की मुस्कान से स्पष्ट ही उसके प्रोष्ठ फैल गए। वह फिर बोली-"भद्रजनो, यदि तुम समूचा वज्जि संघ देकर भी मुझ से यह ज्योनार चाहोगे तो तुम्हें उसका मिलना असम्भव है । " और, अष्टकुल को प्रतिबिम्बित करती लिच्छवियों के परिधानों की इंद्रधनुपीय छटा देवी साम्रपाली के रथ के पहियों से उड़ती धूलि में विलीन-सी हो गई ।
जातक कथाओं में से एक प्रसंग एक दिन उत्साह की उमंग में दौड़ती भाई, उल्लसित कण्ठ से एक परिचारिका ने स्वामिनी से - कर कहा - "देवी देवी... देवी...!" परन्तु इससे आगे जैसे वह कुछ भी कहने में असमर्थ रही। कारण ? उसका श्वास अभी भी फूल रहा था । देवी आम्रपाली मध्यान्ह का विश्राम कर अभी भी अपने प्रसाधन कक्ष में प्राई थी। मानवाकार दर्पण में प्रतिबिम्बित होते अपने अलसाए अंगों एवं अपनी मुखछवि को निहार वह, जैसे अपने पर ही मुग्ध हो उठी। परिचारिका इतना उत्साह दिखा कर भी जब कुछ न कह सकी, तो इस पर वह कुछ झल्ला - सी गई । बोली -- "देख मदिरे ! मैंने तुझे कितनी बार सावधान किया है कि इतनी भावुक न बन । घरी श्रो, भावुकता तो बस उतनी ही उचित है कि वह अभिव्यक्ति को सुन्दरता में संवार सके । औौर, तू है कि...... ऋच्छा... अब कुछ बोलेगी भी कि.... " परिचारिका के मुख का फैलता गाढ़ा रंग जैसे वहीं रुक, और प्रगाढ़ हो गया । किन्तु, उसके नेत्रों में से प्रस्फुटित होता उल्लास और ज्योतित हो उठा। संयत कण्ठ से मानों सप्रयास वह बोली- "स्वामिनी जानती हो, आज अपने ग्राम्रकुंज में भगवान तथागत पधारे है ! देवी आम्रपाली अपनी निहारती छवि को जैसे दर्पण में ही धकेल, पीठिका से उठ खड़ी हुई ; उसके नेत्र विस्फारित हो गए । संसभ्रम पूछने लगी- "सचमुच मदिरे ! " और फिर वह सवेग रथ में जा बैठी; रथ तीव्र गति से थाम्रकुंज की ओर दौड़ लिया । उधर, लिच्छवयों को भी जब तथागत के आने का पता चला तो वे भी सोत्याह एक-दूसरे को यह संवाद सुनाते, तथागत के दर्शन को दौड़ लिए । पर, तब तक सामने से देवी आम्रपाली का रथ धूलि धूसरित मार्ग को सावेग रौंदता लौट रहा था; इतना सावेग कि लिच्छवियों के रथों से उसका रथ टकरा गया; धुरे से धुरे टकरा, घर्रा उठे । आखिर उन्होंने अपने रथ रोक, ग्राम्रपाली से पूछा- "देवी, भला आज ऐसा क्या हुआ है, जो तू इतनी प्रसन्न है ! " तब, आम्रपाली ने सगर्व कहा - "तथागत कल भिक्षुसंघ समेत मेरे यहाँ ज्योनार पर जो प्राएँगे ।" यह सुन सभी लिच्छदियों ही की तो मुख प्राभा निस्तेज हो " वे जैसे ठगे से खड़े रह गए । परास्त हुए कण्ठ स्वर में बोले - " देवी, तू एक कोटि कार्षापण ले ले और और यह ज्योनार हमें दे दे।" इस पर, आम्रपाली ने सगर्व अपने सारथी को रथ आगे बढ़ाने का आदेश कर, लिच्छवियों की ओर देखते हुए कहा - "क्या कहा, एक कोटि कार्षापण ? " उपहास की मुस्कान से स्पष्ट ही उसके प्रोष्ठ फैल गए। वह फिर बोली-"भद्रजनो, यदि तुम समूचा वज्जि संघ देकर भी मुझ से यह ज्योनार चाहोगे तो तुम्हें उसका मिलना असम्भव है । " और, अष्टकुल को प्रतिबिम्बित करती लिच्छवियों के परिधानों की इंद्रधनुपीय छटा देवी साम्रपाली के रथ के पहियों से उड़ती धूलि में विलीन-सी हो गई ।
केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में हिंसक हालात के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाईयों से इतर नया राजनीतिक माहौल बनाने पर गंभीरता से काम कर रही है। ऐसे राजनीतिक चेहरे की तालाश की जा रही जो जनता के बीच राज्य के काले इतिहास की जगह नए भविष्य की बात करे। सरकार के नीतिकारों का मानना है कि अशांत घाटी में लोगों का बड़ा हिस्सा अलगाववाद, आतंकवाद और पाकिस्तानी अड़ंगों से तंग आ कर देश की मुख्य धारा में शामिल होने का मौका ढूंढ़ रहा है। योजना के मुताबिक यह नया नेतृत्व इन लोगों के समर्थन से नया राजनीतिक नैरेटिव शुरू करेगा। इस पर काम करने वाला तंत्र इस बात से आश्वस्त है कि कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसका समाधान सिर्फ बंदूक से नहीं हो सकता। सूत्रों ने बताया कि हिंसा पर काबू पाने के साथ कश्मीरी पंडितों की वापसी और युवकों का देश के अन्य हिस्सों में बेपरवाह काम करने का माहौल तैयार करना इस नए प्रयोग का लिटमस टेस्ट होगा। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा जोखिम ऐसे नेतृत्व की जान का है। अब तक के तजुर्बे के मुताबिक घाटी में जिसने भी ऐसी बात की है पाकिस्तानी गुट ने उसकी हत्या कर दी है। इसके लिए भी एजेंसियां व्यापक योजना पर काम कर रही है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कश्मीरी युवक काफी मुखर हैं। एजेंसियां इसे आतंकवाद से ज्यादा उग्रवाद की स्थिति मान रही जो स्थानीय जमीन में ही पनपती है। अगर इस पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो स्थित और भयावह हो सकती है। ऐसे में नया नेतृत्व युवाओं को नया रास्ता दे सकता है।
केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में हिंसक हालात के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाईयों से इतर नया राजनीतिक माहौल बनाने पर गंभीरता से काम कर रही है। ऐसे राजनीतिक चेहरे की तालाश की जा रही जो जनता के बीच राज्य के काले इतिहास की जगह नए भविष्य की बात करे। सरकार के नीतिकारों का मानना है कि अशांत घाटी में लोगों का बड़ा हिस्सा अलगाववाद, आतंकवाद और पाकिस्तानी अड़ंगों से तंग आ कर देश की मुख्य धारा में शामिल होने का मौका ढूंढ़ रहा है। योजना के मुताबिक यह नया नेतृत्व इन लोगों के समर्थन से नया राजनीतिक नैरेटिव शुरू करेगा। इस पर काम करने वाला तंत्र इस बात से आश्वस्त है कि कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसका समाधान सिर्फ बंदूक से नहीं हो सकता। सूत्रों ने बताया कि हिंसा पर काबू पाने के साथ कश्मीरी पंडितों की वापसी और युवकों का देश के अन्य हिस्सों में बेपरवाह काम करने का माहौल तैयार करना इस नए प्रयोग का लिटमस टेस्ट होगा। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा जोखिम ऐसे नेतृत्व की जान का है। अब तक के तजुर्बे के मुताबिक घाटी में जिसने भी ऐसी बात की है पाकिस्तानी गुट ने उसकी हत्या कर दी है। इसके लिए भी एजेंसियां व्यापक योजना पर काम कर रही है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कश्मीरी युवक काफी मुखर हैं। एजेंसियां इसे आतंकवाद से ज्यादा उग्रवाद की स्थिति मान रही जो स्थानीय जमीन में ही पनपती है। अगर इस पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो स्थित और भयावह हो सकती है। ऐसे में नया नेतृत्व युवाओं को नया रास्ता दे सकता है।
पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर अब बॉलीवुड एक्टर कमाल राशिद खान (KRK) ने तंज कसा है। केआरके ने पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर कहा है कि जो बल्लेबाज पिच पर लोट जाता है वह क्या खाक बल्लेबाजी करेगा? विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हैं। पहले दो मैच हारने के बाद उनकी कप्तानी में टीम ने अगले दो मैच जीतकर सीरीज में 2-2 से बराबरी हासिल कर ली है। हालांकि पंत का निजी फॉर्म सवालों के घेरे में है। उन्होंने पिछले चारों मैचों में केवल 57 रन ही बनाए हैं और ऐसे में उनका औसत भी 14. 25 का ही रहा है। पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर अब बॉलीवुड एक्टर कमाल राशिद खान (KRK) ने तंज कसा है। केआरके ने पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर कहा है कि जो बल्लेबाज पिच पर लोट जाता है वह क्या खाक बल्लेबाजी करेगा? KRK ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ राजकोट में खेले गए चौथे टी20 मैच के बाद ट्विटर पर लिखा, 'मैं सच में समझ नहीं पा रहा हूं कि पंत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सदस्य कैसे हो सकते है? जो खिलाड़ी हर गेंद पर, पिच पर लेट जाता हो, वो अच्छा खिलाड़ी कैसा हो सकता है? ' कमाल खान अपने बयान को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इस उन्होंने पंत की बल्लेबाजी पर निशाना साधा है। हालांकि केआरके के इस बयान का फैंस भी सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रहे हैं। IPL 2022 में भी पंत ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए एक भी अर्धशतक नहीं जड़ा था। पंत शुक्रवार को भी राजकोट में खेले गए चौथे टी20 मैच में लापरवाही भरा शॉट खेल कर आउट हो गए। उन्होंने 23 गेंदें खेलने के बाद केवल 17 रनों का योगदान दिया। इसमें दो चौके भी शामिल थे। पंत 2022 की शुरुआत के बाद से टी20 क्रिकेट में दस बार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद पर आउट हुए हैं।
पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर अब बॉलीवुड एक्टर कमाल राशिद खान ने तंज कसा है। केआरके ने पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर कहा है कि जो बल्लेबाज पिच पर लोट जाता है वह क्या खाक बल्लेबाजी करेगा? विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जारी पांच मैचों की टीबीस सीरीज में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हैं। पहले दो मैच हारने के बाद उनकी कप्तानी में टीम ने अगले दो मैच जीतकर सीरीज में दो-दो से बराबरी हासिल कर ली है। हालांकि पंत का निजी फॉर्म सवालों के घेरे में है। उन्होंने पिछले चारों मैचों में केवल सत्तावन रन ही बनाए हैं और ऐसे में उनका औसत भी चौदह. पच्चीस का ही रहा है। पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर अब बॉलीवुड एक्टर कमाल राशिद खान ने तंज कसा है। केआरके ने पंत की खराब बल्लेबाजी को लेकर कहा है कि जो बल्लेबाज पिच पर लोट जाता है वह क्या खाक बल्लेबाजी करेगा? KRK ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ राजकोट में खेले गए चौथे टीबीस मैच के बाद ट्विटर पर लिखा, 'मैं सच में समझ नहीं पा रहा हूं कि पंत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सदस्य कैसे हो सकते है? जो खिलाड़ी हर गेंद पर, पिच पर लेट जाता हो, वो अच्छा खिलाड़ी कैसा हो सकता है? ' कमाल खान अपने बयान को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इस उन्होंने पंत की बल्लेबाजी पर निशाना साधा है। हालांकि केआरके के इस बयान का फैंस भी सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रहे हैं। IPL दो हज़ार बाईस में भी पंत ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए एक भी अर्धशतक नहीं जड़ा था। पंत शुक्रवार को भी राजकोट में खेले गए चौथे टीबीस मैच में लापरवाही भरा शॉट खेल कर आउट हो गए। उन्होंने तेईस गेंदें खेलने के बाद केवल सत्रह रनों का योगदान दिया। इसमें दो चौके भी शामिल थे। पंत दो हज़ार बाईस की शुरुआत के बाद से टीबीस क्रिकेट में दस बार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद पर आउट हुए हैं।
अमरोहा। जिले में अवैध रूप से कारतूसों की खरीद-फरोख्त के आरोपी गन हाउस स्वामी की 44 लाख की संपत्ति मंगलवार को कुर्क (Property Attached) की गई है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इससे पहले गन हाउस स्वामी के बेटे प्रतीक सक्सेना की भी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को भी कुर्क किया जा चुका है। उन्होने बताया कि 22 अप्रैल 2022 को फिरोजाबाद के टूंडला में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की टीम द्वारा चेकिंग के दौरान दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तलाशी लेने पर उनके पास से अवैध कारतूस का जखीरा बरामद हुआ था। पुलिस को पूछताछ में बताया था कि अवैध कारतूसों को जनपद अमरोहा के हसनपुर निवासी हरदयाल सिंह एंड संस गन हाउस स्वामी के बेटे प्रतीक सक्सेना से खरीदा गया था। इसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की गहनता से जांच पड़ताल करने परि अवैध रूप से कारतूस की खरीद-फरोख्त की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपी गन हाउस स्वामी एवं उसके बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जिलाधिकारी (डीएम) के आदेश पर आरोपी गन हाउस की दुकान का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। करीब एक माह पूर्व अवैध रूप से धन अर्जित कर खरीदी गई प्रतीक सक्सेना की संपत्ति को भी कुर्क करने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जा चुकी है। मंगलवार को पुलिस क्षेत्राधिकारी अभिषेक कुमार यादव, तहसीलदार अर्चना शर्मा, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा की संयुक्त टीम के साथ मोहल्ला कायस्थान में हरदयाल सिंह एंड संस गन हाउस एवं दुकान के मालिक के घर व एक प्लाट की करीब 44 लाख की संपत्ति को मुनादी कराने के बाद कुर्क कर दिया। पुलिस क्षेत्राधिकारी ( सीओ) हसनपुर अभिषेक कुमार यादव ने बताया कि अवैध कारतूस प्रकरण में अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को कुर्क किया गया है।
अमरोहा। जिले में अवैध रूप से कारतूसों की खरीद-फरोख्त के आरोपी गन हाउस स्वामी की चौंतालीस लाख की संपत्ति मंगलवार को कुर्क की गई है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इससे पहले गन हाउस स्वामी के बेटे प्रतीक सक्सेना की भी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को भी कुर्क किया जा चुका है। उन्होने बताया कि बाईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को फिरोजाबाद के टूंडला में राजकीय रेलवे पुलिस की टीम द्वारा चेकिंग के दौरान दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तलाशी लेने पर उनके पास से अवैध कारतूस का जखीरा बरामद हुआ था। पुलिस को पूछताछ में बताया था कि अवैध कारतूसों को जनपद अमरोहा के हसनपुर निवासी हरदयाल सिंह एंड संस गन हाउस स्वामी के बेटे प्रतीक सक्सेना से खरीदा गया था। इसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की गहनता से जांच पड़ताल करने परि अवैध रूप से कारतूस की खरीद-फरोख्त की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपी गन हाउस स्वामी एवं उसके बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जिलाधिकारी के आदेश पर आरोपी गन हाउस की दुकान का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। करीब एक माह पूर्व अवैध रूप से धन अर्जित कर खरीदी गई प्रतीक सक्सेना की संपत्ति को भी कुर्क करने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जा चुकी है। मंगलवार को पुलिस क्षेत्राधिकारी अभिषेक कुमार यादव, तहसीलदार अर्चना शर्मा, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार वर्मा की संयुक्त टीम के साथ मोहल्ला कायस्थान में हरदयाल सिंह एंड संस गन हाउस एवं दुकान के मालिक के घर व एक प्लाट की करीब चौंतालीस लाख की संपत्ति को मुनादी कराने के बाद कुर्क कर दिया। पुलिस क्षेत्राधिकारी हसनपुर अभिषेक कुमार यादव ने बताया कि अवैध कारतूस प्रकरण में अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को कुर्क किया गया है।
Aaj Ka Panchang: 9 दिसंबर 2022 शुक्रवार को पहले मृगशिरा नक्षत्र होने से मानस और उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र होने से पद्म नाम के 2 शुभ योग दिन भर रहेंगे। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन बनेंगे। 9 दिसंबर का पंचांग (Aaj Ka Panchang 8 December 2022) 9 दिसंबर 2022, दिन शुक्रवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 11:34 तक रहेगी। इसके बाद द्वितिया तिथि आरंभ हो जाएगी। शुक्रवार को मृगशिरा नक्षत्र दोपहर 02:59 तक रहेगा। इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। शुक्रवार को पहले मृगशिरा नक्षत्र होने से मानस और उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र होने से पद्म नाम के 2 शुभ योग दिन भर रहेंगे। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन बनेंगे। राहुकाल सुबह 10:59 से 12:19 तक रहेगा। शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में, शुक्र और बुध ग्रह धनु राशि में, राहु मेष राशि में, सूर्य वृश्चिक राशि में, शनि मकर राशि में, मंगल वृष राशि, गुरु मीन राशि में और केतु तुला राशि में रहेंगे। शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो जौ या राईं खाकर घर से बाहर निकलें। 9 दिसंबर का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें) Mahabharata: इस योद्धा को मारने वाले की मृत्यु भी निश्चित थी, तो फिर श्रीकृष्ण ने कैसे बचाया अर्जुन को? Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
Aaj Ka Panchang: नौ दिसंबर दो हज़ार बाईस शुक्रवार को पहले मृगशिरा नक्षत्र होने से मानस और उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र होने से पद्म नाम के दो शुभ योग दिन भर रहेंगे। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के दो अन्य योग भी इस दिन बनेंगे। नौ दिसंबर का पंचांग नौ दिसंबर दो हज़ार बाईस, दिन शुक्रवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह ग्यारह:चौंतीस तक रहेगी। इसके बाद द्वितिया तिथि आरंभ हो जाएगी। शुक्रवार को मृगशिरा नक्षत्र दोपहर दो:उनसठ तक रहेगा। इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। शुक्रवार को पहले मृगशिरा नक्षत्र होने से मानस और उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र होने से पद्म नाम के दो शुभ योग दिन भर रहेंगे। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के दो अन्य योग भी इस दिन बनेंगे। राहुकाल सुबह दस:उनसठ से बारह:उन्नीस तक रहेगा। शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में, शुक्र और बुध ग्रह धनु राशि में, राहु मेष राशि में, सूर्य वृश्चिक राशि में, शनि मकर राशि में, मंगल वृष राशि, गुरु मीन राशि में और केतु तुला राशि में रहेंगे। शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो जौ या राईं खाकर घर से बाहर निकलें। नौ दिसंबर का अशुभ समय Mahabharata: इस योद्धा को मारने वाले की मृत्यु भी निश्चित थी, तो फिर श्रीकृष्ण ने कैसे बचाया अर्जुन को? Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
पुणे : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने भारत में सामाजिक क्रांति की भविष्यवाणी की है। उन्होंने रविवार को कहा कि जब जाति, मत और धर्म पर विचार किए बिना भूख और अभाव का कष्ट झेल रहे लोग एकजुट हो जाएंगे, तो सामाजिक क्रांति हो जाएगी। कन्हैया ने दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे के दौरान लगातार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला जारी रखते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्य मुद्दों का समाधान किए बगैर देश को जाति और संप्रदाय के आधार पर बांटना चाहती है। कन्हैया ने मोदी सरकार द्वारा मीडिया में बड़े-बड़े विज्ञापन देने, रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' और टेलीविजन प्रचार पर 'जनता का पैसा बर्बाद करने पर' भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जनता को 'जुमले' (झूठे वादे) देना बंद करें। लोग नौकरी या बेरोजगारी भत्ता और सामाजिक सुरक्षा चाहते हैं। जैसा कि बी. आर. अंबेडकर ने सपना देखा था, देश से जाति प्रथा को पूरी तरह समाप्त करें। कन्हैया ने दावा किया था कि रविवार की सुबह जेट एयरवेज के विमान में उनकी जान लेने की कोशिश की गई थी। कन्हैया ने वामपंथियों, युवकों एवं दलितों की बड़ी भीड़ को संबोधित किया। उन्हें सुनने के लिए बाल गंधर्व हॉल खचाखच भरा हुआ था। भीड़ में कई हस्तियां भी मौजूद थीं। हाल के अंदर जितनी भीड़ थी, उतनी ही हाल के बाहर और आस-पास की सड़कों पर भी थी।
पुणे : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने भारत में सामाजिक क्रांति की भविष्यवाणी की है। उन्होंने रविवार को कहा कि जब जाति, मत और धर्म पर विचार किए बिना भूख और अभाव का कष्ट झेल रहे लोग एकजुट हो जाएंगे, तो सामाजिक क्रांति हो जाएगी। कन्हैया ने दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे के दौरान लगातार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला जारी रखते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी मुख्य मुद्दों का समाधान किए बगैर देश को जाति और संप्रदाय के आधार पर बांटना चाहती है। कन्हैया ने मोदी सरकार द्वारा मीडिया में बड़े-बड़े विज्ञापन देने, रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' और टेलीविजन प्रचार पर 'जनता का पैसा बर्बाद करने पर' भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जनता को 'जुमले' देना बंद करें। लोग नौकरी या बेरोजगारी भत्ता और सामाजिक सुरक्षा चाहते हैं। जैसा कि बी. आर. अंबेडकर ने सपना देखा था, देश से जाति प्रथा को पूरी तरह समाप्त करें। कन्हैया ने दावा किया था कि रविवार की सुबह जेट एयरवेज के विमान में उनकी जान लेने की कोशिश की गई थी। कन्हैया ने वामपंथियों, युवकों एवं दलितों की बड़ी भीड़ को संबोधित किया। उन्हें सुनने के लिए बाल गंधर्व हॉल खचाखच भरा हुआ था। भीड़ में कई हस्तियां भी मौजूद थीं। हाल के अंदर जितनी भीड़ थी, उतनी ही हाल के बाहर और आस-पास की सड़कों पर भी थी।
अर्की उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गांव मांजू में 'प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमंडल अधिकारी (नागरिक) अर्की शहजाद आलम ने की। उन्होंने इस मौके स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुना तथा उसका निपटारा करने के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से आए अधिकारियों ने सरकार की योजनाओं के बारे में भी लोगों को अवगत करवाया। उपमंडल अधिकारी (नागरिक) अर्की शहजाद आलम ने कहा कि जन शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत मांजू गांव में लोगों ने विभिन्न विभागों से सबंधित अपनी शिकायतें विभाग के समक्ष रखीं, जिन्हें जल्द दूर करने के लिए विभाग के उपस्थित अधिकारियों को तय अवधि में पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम में लोगों की ओर से विभिन्न समस्याओं को लेकर करीब दो दर्जन शिकायतें आई हैं, जिन्हें जल्द दूर किया जाएगा। इस मौके पर तहसीलदार रमन ठाकुर, एसडीओ लोक निर्माण विभाग बलीराम कश्यप, एसडीओ जलशक्ति विभाग विनय कांत गौतम, एसडीओ विद्युत विभाग रविंद्र कुमार, सीडीपीओ विनोद गौतम, जेई जलशक्ति विभाग गोपाल सिंह चौधरी, जेई विद्युत विभाग नरेंद्र ठाकुर, पंचायत प्रधान नरेंद्र कुमार, उप प्रधान तिलकराज शर्मा, पंचायत सदस्य प्रेम शर्मा, कांता देवी, देवेंद्र शर्मा, बीडीसी सदस्य सुनीता रघुवंशी, पूर्व प्रधान योगेश चौहान, पंचायत सचिव सुरेश चंद व रमेश चंद सहित ग्रामवासी उपस्थित रहे।
अर्की उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गांव मांजू में 'प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमंडल अधिकारी अर्की शहजाद आलम ने की। उन्होंने इस मौके स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुना तथा उसका निपटारा करने के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से आए अधिकारियों ने सरकार की योजनाओं के बारे में भी लोगों को अवगत करवाया। उपमंडल अधिकारी अर्की शहजाद आलम ने कहा कि जन शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत मांजू गांव में लोगों ने विभिन्न विभागों से सबंधित अपनी शिकायतें विभाग के समक्ष रखीं, जिन्हें जल्द दूर करने के लिए विभाग के उपस्थित अधिकारियों को तय अवधि में पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन गांव की ओर कार्यक्रम में लोगों की ओर से विभिन्न समस्याओं को लेकर करीब दो दर्जन शिकायतें आई हैं, जिन्हें जल्द दूर किया जाएगा। इस मौके पर तहसीलदार रमन ठाकुर, एसडीओ लोक निर्माण विभाग बलीराम कश्यप, एसडीओ जलशक्ति विभाग विनय कांत गौतम, एसडीओ विद्युत विभाग रविंद्र कुमार, सीडीपीओ विनोद गौतम, जेई जलशक्ति विभाग गोपाल सिंह चौधरी, जेई विद्युत विभाग नरेंद्र ठाकुर, पंचायत प्रधान नरेंद्र कुमार, उप प्रधान तिलकराज शर्मा, पंचायत सदस्य प्रेम शर्मा, कांता देवी, देवेंद्र शर्मा, बीडीसी सदस्य सुनीता रघुवंशी, पूर्व प्रधान योगेश चौहान, पंचायत सचिव सुरेश चंद व रमेश चंद सहित ग्रामवासी उपस्थित रहे।
हाल में देश-विदेश में रोबोट के हाथों दो मजदूरों की मौत का मामला काफी चर्चा में रहा। इनमें पहली घटना जर्मनी की आॅटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन से जुड़ी है, जहां उत्पादन संयंत्र में रोबोट ने एक मजदूर की जान ले ली। कुछ ऐसा ही वाकया गुड़गांव के मानेसर स्थित मारुति सुजुकी की एक बेंडर कंपनी में भी सामने आया। यहां भी एक चौबीस वर्षीय मजदूर गलती से रोबोट एरिया में चला गया। रोबोट ने उसे मैटल प्लेट पर गिरा दिया, जहां आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई। गौरतलब है कि अभी तक विज्ञान की फंतासी कथाओं में ही रोबोट की कहानियां सुनने और पढ़ने को मिलती रही हैं। पर भारत में अपनी तरह का यह पहला हादसा है। रोबोट के हाथों हुए इन हादसों को लेकर दुनिया भर में एक बहस खड़ी हो गई है। इस बहस में उठा सबसे खास सवाल यह है कि क्या इस हादसे के लिए उस रोबोट को दोषी माना जाए या उसे बनाने वाली कंपनी को, या फिर उस मजदूर को दोषी माना जाए जो बिना जानकारी के उस रोबोट के सामने पहुंच गया? बहस का रुख चाहे जो हो, लेकिन मानव और मशीन के बीच तेजी से बढ़ता यह फासला अब इस कृत्रिम बुद्धि के संभावित खतरों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने को मजबूर कर रहा है। कहना न होगा कि अभी तक लोग जिन रोबोटों को विज्ञान की कथाओं, नाटकों और फिल्मों में देखते-सुनते आए हैं, वे अब इस मशीनी दुनिया की कड़वी सच्चाई बन कर सामने आ रहे हैं। दरअसल, रोबोट कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिए काम करता है। यह एक मशीनी गतिविधि है, जिसमें टाइमिंग के आधार पर उसका समय, क्रिया और एक निश्चित व्यवहार तय है। उसका एक निश्चित सॉफ्टवेयर है, जिसके आधार पर ही उस मशीन का संचालन होता है। आज दुनिया की हजारों कंपनियां अपने उत्पादन में अधिक से अधिक रोबोट का इस्तेमाल कर रही हैं। गुड़गांव और फरीदाबाद में होंडा, यामहा, मारुति, एस्कॉर्ट्स और शोवा इंडिया जैसी डेढ़ सौ से अधिक कंपनियों में अधिकतर जोखिम भरा काम इन्हीं रोबोट से लिया जा रहा है। कंपनियां मानती हैं कि रोबोट के जरिए किया जाने वाला काम मानव से अच्छा और त्रुटिविहीन होता है। साथ ही इनके काम करने से औद्योगिक दुर्घटनाएं भी कम होती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोबोट न तो थकता है और न ही काम को अधूरा छोड़ता है। इसके काम की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन रोबोटों का न तो कोई लंच होता है और न ही इनसे पीएफ या हड़ताल का खतरा होता है। पचास लाख रुपए से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए तक की कीमत के ये रोबोट आज शिक्षा, चिकित्सा, खेल, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र के अलावा कार उत्पादन, पैकेजिंग और वेल्डिंग जैसी अनेक कंपनियों में काम कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि चीन, कोरिया, जापान, जर्मनी और अमेरिका के केवल कार निर्माण उद्योग में प्रति दस हजार लोगों पर तीस से लेकर पांच सौ तक रोबोट काम कर रहे हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि आज रोबोट विज्ञान में जापान सबसे आगे है। अकेले चीन में रोबोट से जुड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और इसके कल-पुर्जों का बाजार तीस अरब डॉलर के करीब है। कहना न होगा कि पिछले वर्ष चीन में यह बाजार करीब दस अरब डॉलर का रहा और वहां पचपन हजार से अधिक रोबोट की बिक्री हुई। भारत में भी रोबोट से जुड़ा बाजार पिछले चार-पांच साल में चार गुना से अधिक बढ़ गया। वर्तमान में रोबोटिक विज्ञान का तेजी से विस्तार होने से अब विश्व स्तर पर तमाम ऐसे रोबोट काम कर रहे हैं, जो लोगों की मेजबानी करने के साथ-साथ नाचने, गाने, गेंद को किक मारने, देखभाल करने, किचन में काम करने, अनेक भाषाओं को जानने और समझने तथा तरह-तरह के शोध में सहायता करने जैसे कामों को अंजाम दे रहे हैं। सच यह है कि आज दुनिया में मानव श्रम को हिकारत की नजर से देखा जा रहा है। दूसरे, बढ़ती मजदूरी, वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की मांग और हड़ताल जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए रोबोट इसका स्थानापन्न बन रहे हैं। रोबोट केवल मानवीय श्रम को दरकिनार नहीं कर रहे, बल्कि कृत्रिम बुद्धि के रूप में संचालित होने वाले रोबोट मानव मस्तिष्क से भी आगे जाने की तैयारी में हैं। ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक स्टुअर्ट आर्मस्ट्रांग का कहना है कि भविष्य में रोबोट मनुष्यों से ज्यादा तेज और चालाक ही नहीं होंगे, बल्कि वे देशों का शासन चलाने और मानव का सफाया करने में भी सक्षम होंगे। उनका यह भी कहना है कि अगर इस कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र में हो रहे शोध में सावधानियां नहीं बरती गर्इं, तो मानव जाति को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। शायद इस कृत्रिम बुद्धि के विकास से जुड़े खतरों को भांपते हुए ही गूगल ने इस पर चल रहे शोध पर निगाह रखने के लिए एक नैतिक बोर्ड का गठन भी कर दिया है। गूगल ने हाल ही में कुछ ऐसी कंपनियां भी खरीदी हैं, जो कंप्यूटरों के लिए कृत्रिम बुद्धि से युक्त सॉफ्टवेयर का विकास कर रही हैं। उनको उम्मीद है कि इस सॉफ्टवेयर से ये कंप्यूटर मानव की तरह ही सोचने ओर विचारने लगेंगे। अभी तक रोबोटिक विज्ञान और उसके विस्तार का जो जिक्र किया गया है वह इस बहस का एक उजला पक्ष है। इसके नकारात्मक पक्ष की ओर ध्यान दिलाते हुए मशहूर भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने साफ-साफ कहा है कि रोबोट धरती से मानव जीवन के समाप्त होने की प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे। उनकी यह चिंता इसलिए वाजिब लगती है कि मानव का आज का यह धीमा जैविक विकास अभी के इन रोबोट के तीव्र और कृत्रिम बुद्धि के विकास के सामने ठहर नहीं पा रहा है। निश्चित ही मनुष्य जाति के लिए यह एक खतरे की घंटी है। आज की यह तकनीक जिस तरह वर्तमान की चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालना सीख रही है उससे मानव जाति के सामने एक अनिश्चित भविष्य की लकीरें जरूर खिंच रही हैं। औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना और कामगारों के वेतन-पारिश्रमिक आदि की मांगों से निपटने के लिए रोबोट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना कंपनियों के स्वार्थ के हिसाब से ठीक हो सकता है, पर क्या इसमें व्यापक समाज-हित भी है? रोबोट के इस्तेमाल के चलते जो रोजगार की कमी होगी, क्या वह एक नए असंतोष को जन्म नहीं देगी? मशीन क्या मनुष्य से ऊपर है? रोबोट की मशीनी सक्रियता से जो घटनाएं सामने आ रही हैं उससे देश में चिंता की लकीरें खिंचना लाजमी है। वह इसलिए कि कृत्रिम बुद्धि का क्रमिक विकास इन रोबोटों को अत्याधुनिक बनाने का काम कर रहा है। कड़वा सच यह है कि इस समय आइएस और अन्य आतंकवादी संगठन देश में अपना जाल फैलाने और खुद को नई तकनीक से युक्त बनाने को बेचैन हैं। इस समय देश में यह चिंता भी है कि अगर ये संगठन रोबोट से जुड़े सॉफ्टवेयर का उपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करने लगे तो मानवता सिहर उठेगी। अंतरराष्ट्रीय नागरिक जमात के साथ-साथ दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय और विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी इस ओर बिना देरी किए ध्यान देने की आवश्यकता है। इतिहास गवाह है कि आज तक वैज्ञानिकों द्वारा देश और समाज के कल्याण के लिए जो सृजनात्मक शोध हुए हैं, उनसे मानव विकास के साथ-साथ विनाश के साधन भी तैयार हुए हैं। वह चाहे परमाणु ऊर्जा की खोज हो या तमाम प्रकार के रासायनिक तत्त्वों अथवा प्लास्टिक का निर्माण या चाहे तरह-तरह की कारों का निर्माण ही क्यों न हो, इन सभी ने लोगों की सुविधाओं के साथ आतंक और प्रदूषण के रूप में काफी क्षति पहुंचाई है। यही आशंकाएं एक बार फिर रोबोट के अत्यधिक उपयोग को लेकर उठ रही हैं। जरा गौर करें कि अमेरिका में टेक्सला कार के जनक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक इलोन मस्क ने एक समय में रोबोट से संबद्ध कृत्रिम बुद्धि को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। पर मस्क अब इसके प्रखर आलोचक बन गए हैं। आज उनका कहना है कि रोबोट के निर्माण का मतलब सीधे-सीधे दानवों को निमंत्रण देना है। रोबोट से जुड़े हादसे सही मायनों में मानव और मशीन के बीच संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। यह सच है कि मानव निर्मित मशीन चाहे जितनी तरक्की कर ले, पर वह हमेशा मानवीय विवेक और संवेदनाओं से दूर ही रहेगी। निश्चित ही रोबोट की कल्पना मानवीय श्रम के विभिन्न रूपों का ही एक विकल्प है। पर ये रोबोट धीरे-धीरे अब 'टर्मिनेटर' बन रहे हैं। इक्कीसवीं सदी के इस वैश्विक दौर में मशीनीकरण के विस्तार को रोकना नामुमकिन है। महात्मा गांधी इन तमाम वजहों के चलते ही मशीनीकरण के अतिरेकी प्रयोग के खिलाफ थे। पर अब समय आ गया है, जब मानव विकास और उसके अस्तित्व के संरक्षण के लिए रोबोट जैसी मशीन की सीमाओं को तय करना पड़ेगा। अन्यथा भविष्य में मानव निर्मित अधिक चतुराई वाले ये रोबोट मानव को विस्थापित ही नहीं करेंगे, बल्कि देश और दुनिया से बेदखल करने में भी ये खासी भूमिका निभाएंगे।
हाल में देश-विदेश में रोबोट के हाथों दो मजदूरों की मौत का मामला काफी चर्चा में रहा। इनमें पहली घटना जर्मनी की आॅटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन से जुड़ी है, जहां उत्पादन संयंत्र में रोबोट ने एक मजदूर की जान ले ली। कुछ ऐसा ही वाकया गुड़गांव के मानेसर स्थित मारुति सुजुकी की एक बेंडर कंपनी में भी सामने आया। यहां भी एक चौबीस वर्षीय मजदूर गलती से रोबोट एरिया में चला गया। रोबोट ने उसे मैटल प्लेट पर गिरा दिया, जहां आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई। गौरतलब है कि अभी तक विज्ञान की फंतासी कथाओं में ही रोबोट की कहानियां सुनने और पढ़ने को मिलती रही हैं। पर भारत में अपनी तरह का यह पहला हादसा है। रोबोट के हाथों हुए इन हादसों को लेकर दुनिया भर में एक बहस खड़ी हो गई है। इस बहस में उठा सबसे खास सवाल यह है कि क्या इस हादसे के लिए उस रोबोट को दोषी माना जाए या उसे बनाने वाली कंपनी को, या फिर उस मजदूर को दोषी माना जाए जो बिना जानकारी के उस रोबोट के सामने पहुंच गया? बहस का रुख चाहे जो हो, लेकिन मानव और मशीन के बीच तेजी से बढ़ता यह फासला अब इस कृत्रिम बुद्धि के संभावित खतरों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने को मजबूर कर रहा है। कहना न होगा कि अभी तक लोग जिन रोबोटों को विज्ञान की कथाओं, नाटकों और फिल्मों में देखते-सुनते आए हैं, वे अब इस मशीनी दुनिया की कड़वी सच्चाई बन कर सामने आ रहे हैं। दरअसल, रोबोट कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जरिए काम करता है। यह एक मशीनी गतिविधि है, जिसमें टाइमिंग के आधार पर उसका समय, क्रिया और एक निश्चित व्यवहार तय है। उसका एक निश्चित सॉफ्टवेयर है, जिसके आधार पर ही उस मशीन का संचालन होता है। आज दुनिया की हजारों कंपनियां अपने उत्पादन में अधिक से अधिक रोबोट का इस्तेमाल कर रही हैं। गुड़गांव और फरीदाबाद में होंडा, यामहा, मारुति, एस्कॉर्ट्स और शोवा इंडिया जैसी डेढ़ सौ से अधिक कंपनियों में अधिकतर जोखिम भरा काम इन्हीं रोबोट से लिया जा रहा है। कंपनियां मानती हैं कि रोबोट के जरिए किया जाने वाला काम मानव से अच्छा और त्रुटिविहीन होता है। साथ ही इनके काम करने से औद्योगिक दुर्घटनाएं भी कम होती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोबोट न तो थकता है और न ही काम को अधूरा छोड़ता है। इसके काम की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन रोबोटों का न तो कोई लंच होता है और न ही इनसे पीएफ या हड़ताल का खतरा होता है। पचास लाख रुपए से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए तक की कीमत के ये रोबोट आज शिक्षा, चिकित्सा, खेल, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र के अलावा कार उत्पादन, पैकेजिंग और वेल्डिंग जैसी अनेक कंपनियों में काम कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि चीन, कोरिया, जापान, जर्मनी और अमेरिका के केवल कार निर्माण उद्योग में प्रति दस हजार लोगों पर तीस से लेकर पांच सौ तक रोबोट काम कर रहे हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि आज रोबोट विज्ञान में जापान सबसे आगे है। अकेले चीन में रोबोट से जुड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और इसके कल-पुर्जों का बाजार तीस अरब डॉलर के करीब है। कहना न होगा कि पिछले वर्ष चीन में यह बाजार करीब दस अरब डॉलर का रहा और वहां पचपन हजार से अधिक रोबोट की बिक्री हुई। भारत में भी रोबोट से जुड़ा बाजार पिछले चार-पांच साल में चार गुना से अधिक बढ़ गया। वर्तमान में रोबोटिक विज्ञान का तेजी से विस्तार होने से अब विश्व स्तर पर तमाम ऐसे रोबोट काम कर रहे हैं, जो लोगों की मेजबानी करने के साथ-साथ नाचने, गाने, गेंद को किक मारने, देखभाल करने, किचन में काम करने, अनेक भाषाओं को जानने और समझने तथा तरह-तरह के शोध में सहायता करने जैसे कामों को अंजाम दे रहे हैं। सच यह है कि आज दुनिया में मानव श्रम को हिकारत की नजर से देखा जा रहा है। दूसरे, बढ़ती मजदूरी, वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की मांग और हड़ताल जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए रोबोट इसका स्थानापन्न बन रहे हैं। रोबोट केवल मानवीय श्रम को दरकिनार नहीं कर रहे, बल्कि कृत्रिम बुद्धि के रूप में संचालित होने वाले रोबोट मानव मस्तिष्क से भी आगे जाने की तैयारी में हैं। ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक स्टुअर्ट आर्मस्ट्रांग का कहना है कि भविष्य में रोबोट मनुष्यों से ज्यादा तेज और चालाक ही नहीं होंगे, बल्कि वे देशों का शासन चलाने और मानव का सफाया करने में भी सक्षम होंगे। उनका यह भी कहना है कि अगर इस कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र में हो रहे शोध में सावधानियां नहीं बरती गर्इं, तो मानव जाति को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। शायद इस कृत्रिम बुद्धि के विकास से जुड़े खतरों को भांपते हुए ही गूगल ने इस पर चल रहे शोध पर निगाह रखने के लिए एक नैतिक बोर्ड का गठन भी कर दिया है। गूगल ने हाल ही में कुछ ऐसी कंपनियां भी खरीदी हैं, जो कंप्यूटरों के लिए कृत्रिम बुद्धि से युक्त सॉफ्टवेयर का विकास कर रही हैं। उनको उम्मीद है कि इस सॉफ्टवेयर से ये कंप्यूटर मानव की तरह ही सोचने ओर विचारने लगेंगे। अभी तक रोबोटिक विज्ञान और उसके विस्तार का जो जिक्र किया गया है वह इस बहस का एक उजला पक्ष है। इसके नकारात्मक पक्ष की ओर ध्यान दिलाते हुए मशहूर भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने साफ-साफ कहा है कि रोबोट धरती से मानव जीवन के समाप्त होने की प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे। उनकी यह चिंता इसलिए वाजिब लगती है कि मानव का आज का यह धीमा जैविक विकास अभी के इन रोबोट के तीव्र और कृत्रिम बुद्धि के विकास के सामने ठहर नहीं पा रहा है। निश्चित ही मनुष्य जाति के लिए यह एक खतरे की घंटी है। आज की यह तकनीक जिस तरह वर्तमान की चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालना सीख रही है उससे मानव जाति के सामने एक अनिश्चित भविष्य की लकीरें जरूर खिंच रही हैं। औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना और कामगारों के वेतन-पारिश्रमिक आदि की मांगों से निपटने के लिए रोबोट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना कंपनियों के स्वार्थ के हिसाब से ठीक हो सकता है, पर क्या इसमें व्यापक समाज-हित भी है? रोबोट के इस्तेमाल के चलते जो रोजगार की कमी होगी, क्या वह एक नए असंतोष को जन्म नहीं देगी? मशीन क्या मनुष्य से ऊपर है? रोबोट की मशीनी सक्रियता से जो घटनाएं सामने आ रही हैं उससे देश में चिंता की लकीरें खिंचना लाजमी है। वह इसलिए कि कृत्रिम बुद्धि का क्रमिक विकास इन रोबोटों को अत्याधुनिक बनाने का काम कर रहा है। कड़वा सच यह है कि इस समय आइएस और अन्य आतंकवादी संगठन देश में अपना जाल फैलाने और खुद को नई तकनीक से युक्त बनाने को बेचैन हैं। इस समय देश में यह चिंता भी है कि अगर ये संगठन रोबोट से जुड़े सॉफ्टवेयर का उपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करने लगे तो मानवता सिहर उठेगी। अंतरराष्ट्रीय नागरिक जमात के साथ-साथ दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय और विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी इस ओर बिना देरी किए ध्यान देने की आवश्यकता है। इतिहास गवाह है कि आज तक वैज्ञानिकों द्वारा देश और समाज के कल्याण के लिए जो सृजनात्मक शोध हुए हैं, उनसे मानव विकास के साथ-साथ विनाश के साधन भी तैयार हुए हैं। वह चाहे परमाणु ऊर्जा की खोज हो या तमाम प्रकार के रासायनिक तत्त्वों अथवा प्लास्टिक का निर्माण या चाहे तरह-तरह की कारों का निर्माण ही क्यों न हो, इन सभी ने लोगों की सुविधाओं के साथ आतंक और प्रदूषण के रूप में काफी क्षति पहुंचाई है। यही आशंकाएं एक बार फिर रोबोट के अत्यधिक उपयोग को लेकर उठ रही हैं। जरा गौर करें कि अमेरिका में टेक्सला कार के जनक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक इलोन मस्क ने एक समय में रोबोट से संबद्ध कृत्रिम बुद्धि को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। पर मस्क अब इसके प्रखर आलोचक बन गए हैं। आज उनका कहना है कि रोबोट के निर्माण का मतलब सीधे-सीधे दानवों को निमंत्रण देना है। रोबोट से जुड़े हादसे सही मायनों में मानव और मशीन के बीच संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। यह सच है कि मानव निर्मित मशीन चाहे जितनी तरक्की कर ले, पर वह हमेशा मानवीय विवेक और संवेदनाओं से दूर ही रहेगी। निश्चित ही रोबोट की कल्पना मानवीय श्रम के विभिन्न रूपों का ही एक विकल्प है। पर ये रोबोट धीरे-धीरे अब 'टर्मिनेटर' बन रहे हैं। इक्कीसवीं सदी के इस वैश्विक दौर में मशीनीकरण के विस्तार को रोकना नामुमकिन है। महात्मा गांधी इन तमाम वजहों के चलते ही मशीनीकरण के अतिरेकी प्रयोग के खिलाफ थे। पर अब समय आ गया है, जब मानव विकास और उसके अस्तित्व के संरक्षण के लिए रोबोट जैसी मशीन की सीमाओं को तय करना पड़ेगा। अन्यथा भविष्य में मानव निर्मित अधिक चतुराई वाले ये रोबोट मानव को विस्थापित ही नहीं करेंगे, बल्कि देश और दुनिया से बेदखल करने में भी ये खासी भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुग्राम में 'एनएफटी, एआई और मेटावर्स के युग में अपराध और सुरक्षा पर जी20 सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इंटरपोल की साल 2022 की ग्लोबल ट्रेंड समरी रिपोर्ट के मुताबिक रेनसमवेयर, फिशिंग, ऑफलाइन टेलीकॉम, ऑफलाइन बाल यौन-शोषण और हैकिंग जैसे साइबर क्राइम की कुछ प्रवृत्तियां विश्वभर में गंभीर खतरे की स्थिति पैदा कर रही हैं. ऐसी संभावना है कि भविष्य में ये साइबर क्राइम कई गुना बढ़ जाएगा. दुनिया भर के देशों के लिए डायनामाइट-से-मेटावर्स और हवाला से क्रिप्टो-करेंसी तक की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को इस खतरे के खिलाफ "एक आम रणनीति तैयार करने" की आवश्यकता पर जोर दिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'Crime and Security in the age of Non-Fungible Token, AI and Metaverse' जी20 सम्मेलन में बोलते हुए तेजी से जुड़ी दुनिया में साइबर लचीलापन बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सहयोग की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि साइबर अपराधी मेटावर्स, डार्कनेट, टूलकिट आधारित भ्रामक सूचना अभियान की मदद लेते हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जी20 ने आर्थिक दृष्टिकोण के लिए डिजिटल बदलाव , डेटा प्रवाह पर ध्यान केंद्रित किया लेकिन अब अपराध तथा सुरक्षा पहलुओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है. इस सम्मेलन में जी20 सदस्यों के अलावा नौ अतिथि देश और दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरपोल और यूएनओडीसी के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी भाग ले रहे हैं. अमित शाह ने आर्थिक और आर्थिक संकट के मद्देनजर साइबर सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण, कट्टरपंथ, नार्को, नार्को-आतंकवादी लिंक और गलत सूचना सहित नई और उभरती, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए राष्ट्रों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है. (इनपुट भाषा से) .
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुग्राम में 'एनएफटी, एआई और मेटावर्स के युग में अपराध और सुरक्षा पर जीबीस सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इंटरपोल की साल दो हज़ार बाईस की ग्लोबल ट्रेंड समरी रिपोर्ट के मुताबिक रेनसमवेयर, फिशिंग, ऑफलाइन टेलीकॉम, ऑफलाइन बाल यौन-शोषण और हैकिंग जैसे साइबर क्राइम की कुछ प्रवृत्तियां विश्वभर में गंभीर खतरे की स्थिति पैदा कर रही हैं. ऐसी संभावना है कि भविष्य में ये साइबर क्राइम कई गुना बढ़ जाएगा. दुनिया भर के देशों के लिए डायनामाइट-से-मेटावर्स और हवाला से क्रिप्टो-करेंसी तक की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को इस खतरे के खिलाफ "एक आम रणनीति तैयार करने" की आवश्यकता पर जोर दिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'Crime and Security in the age of Non-Fungible Token, AI and Metaverse' जीबीस सम्मेलन में बोलते हुए तेजी से जुड़ी दुनिया में साइबर लचीलापन बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सहयोग की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि साइबर अपराधी मेटावर्स, डार्कनेट, टूलकिट आधारित भ्रामक सूचना अभियान की मदद लेते हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जीबीस ने आर्थिक दृष्टिकोण के लिए डिजिटल बदलाव , डेटा प्रवाह पर ध्यान केंद्रित किया लेकिन अब अपराध तथा सुरक्षा पहलुओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है. इस सम्मेलन में जीबीस सदस्यों के अलावा नौ अतिथि देश और दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरपोल और यूएनओडीसी के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी भाग ले रहे हैं. अमित शाह ने आर्थिक और आर्थिक संकट के मद्देनजर साइबर सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण, कट्टरपंथ, नार्को, नार्को-आतंकवादी लिंक और गलत सूचना सहित नई और उभरती, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए राष्ट्रों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है. .
शेखपुरा में सोमवार को जिला पदाधिकारी सावन कुमार द्वारा जिले में जारी शीतलहर और भारी ठंड के मद्देनजर विशेष आदेश जारी किया है। इस आदेश को 3 जनवरी से लागू होने की बात कही गई है। सरकारी और गैर सरकारी सभी विद्यालयों में कक्षा आठवीं तक सभी शैक्षणिक गतिविधियों पर 7 जनवरी तक प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि जिले में चल रही शीतलहर और ठंड से जन जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। बता दें कि जिले में शीतलहर का प्रकोप 1 जनवरी से ही भीषण है। कड़ाके की ठंड और जारी शीतलहर के कारण आम लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। सड़कों और बाजारों में वीरानियां नजर आने लगी है। लोग सूर्य उगने की आस में सुबह कई घंटों तक घरों में दुबके नजर आ रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शेखपुरा में सोमवार को जिला पदाधिकारी सावन कुमार द्वारा जिले में जारी शीतलहर और भारी ठंड के मद्देनजर विशेष आदेश जारी किया है। इस आदेश को तीन जनवरी से लागू होने की बात कही गई है। सरकारी और गैर सरकारी सभी विद्यालयों में कक्षा आठवीं तक सभी शैक्षणिक गतिविधियों पर सात जनवरी तक प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि जिले में चल रही शीतलहर और ठंड से जन जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। बता दें कि जिले में शीतलहर का प्रकोप एक जनवरी से ही भीषण है। कड़ाके की ठंड और जारी शीतलहर के कारण आम लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। सड़कों और बाजारों में वीरानियां नजर आने लगी है। लोग सूर्य उगने की आस में सुबह कई घंटों तक घरों में दुबके नजर आ रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमरावती/ दि. 17 - भारतीय जनता पार्टी व्दारा इस समय जिस तरह से मनमाना कामकाज किया जा रहा है और अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास हो रहा है. उससे ब्रिटीश राज की यादें ताजा हो रही है. लेकिन उस समय भी कुछ लोग जेल जाने से नहीं डरे थे और देश ब्रिटीश राज से आजाद हुआ था. इसी तरह आज हम भी जेल जाने से नहीं डरते. बल्कि किसी भी जांच एजेंसी व्दारा जांच व पूछताछ के नाम पर बुलाए जाने की स्थिति में अपने घर से अपने कपडे-लत्ते व जरुरी सामान लेकर निकलते है. ताकि अगर पूछताछ के नाम पर पुलिस या जांच एजेंसी व्दारा गिरफ्तार भी कर लिया जाए, तो किसी तरह की कोई तकलिफ या दिक्कत न हो, इस आशय का प्रतिपादन बालापुर निर्वाचन क्षेत्र के शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक नितीन देशमुख ने किया. आय से अधिक संपत्ति को लेकर मिली शिकायत के मामले में विगत दिनों ही भ्रष्टाचार प्रतिबंधात्मक विभाग (एसीबी) व्दारा विधायक नितीन देशमुख को नोटीस जारी करते हुए 17 जनवरी की सुबह 11 बजे अमरावती स्थित एसीबी कार्यालय में उपस्थित रहने कहा गया था. यह लगभग पहले से तय था कि, विधायक नितीन देशमुख व्दारा एसीबी कार्यालय में उपस्थित रहते समय शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा और यहां पर उनके साथ उनके सैकडों समर्थक भी उपस्थित हो सकते है, इस बात के मद्देनजर शहर पुलिस उपायुक्त सागर पाटील व सहायक पुलिस आयुक्त पूनम पाटील के नेतृत्व में आज सुबह से एसीबी ऑफिस कार्यालय परिसर में पुलिस का तगडा बंदोबस्त लगाया गया था. इसके तहत एसीबी ऑफिस की ओर जिलाधिश कार्यालय पंचवटी चौक व आरटीओ ऑफिस की तरफ से आने वाले रास्तों पर नाकाबंद व बैरिकेटेड कर दी गई थी. सुबह 11 बजे के आसपास एसीबी ऑफिस परिसर में अकोला सहित अमरावती के ठाकरे गुट वाली शिवसेना समर्थक का जमावडा लगना शुरु हो गया था. जहां पर सेनापदाधिकारियों व्दारा भाजपा सहित शिंदे-फडणवीस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही थी. करीब 12. 35 बजे विधायक नितीन देशमुख अपने कुछ चुनिंदा समर्थकों के साथ एक काफिले की शक्ल में एसीबी कार्यालय पहुंचे. जहां पर उनका सेनापदाधिकारियों व शिवसैनिकों ने जल्लोषपूर्ण स्वागत किया. इस समय मीडिया कर्मियों से संवाद साधते हुए विधायक नितीन देशमुख ने कहा कि, वे शुुरुआत से हीे 'ईडी' सरकार के निशाने पर है और एसीबी की ओर से नोटीस मिलने पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है. साथ ही जरुरत पडने पर सच की लडाई के लिए जेल जाने के लिए भी तैयार है. मीडिया से संवाद साधने के बाद नितीन देशमुख ने अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को हाथ हिलाकर शांत रहने का आह्वान किया. जिसके बाद एसीबी कार्यालय के भीतर गए. विधायक देशमुख के एसीबी कार्यालय में जाते ही बाहर मौजूद शिवसेना समर्थकों ने ओर भी जोर-जोर से सरकार विरोधी नारेबाजी करनी शुरु कर दी. वहीं एसीबी कार्यालय के भीतर एसीबी अधिकारियों व्दारा विधायक देशमुख से बेनामी संपत्ति के मामले में पूछताछ करने शुरु की गई. जो समाचार लिखे जाने तक जारी थी. एसीबी कार्यालय के भीतर जाने से पहले मीडिया कर्मियों के साथ संवाद साधते हुए विधायक नितीन देशमुख ने कहा कि, उनके खिलाफ एसीबी के पास किसने शिकायत दी है, यह अभी एसीबी व्दारा स्पष्ट नहीं किया गया है. जबकि उन्हें अपने खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति के नाम का पूरा अनुमान व अंदाजा है. जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, खुद उस व्यक्ति के खिलाफ धोखाधडी व जालसाजी सहित कई संगीन धाराओं के तहत अपराध दर्ज है और यदि आगे चलकर वहीं व्यक्ति शिकायतकर्ता निकलता है, तो उनके पास उस व्यक्ति और सीएम एकनाथ शिंदे के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है. जिसे वे वक्त आने पर उजागर कर देंगे. नितिन देशमुख से एसीबी.... .... . नितिन देशमुख अपने समर्थकों के साथ दोपहर 12. 25 बजे अमरावती एसीबी कार्यालय पहुंचे और दोपहर 3. 25 बजे एसीबी कार्यालय से बाहर निकले. इस तीन घंटे के दौरान अकोला और अमरावती जिले के उद्धव ठाकरे शिवसेना के समर्थकों ने विधायक नितिन देशमुख के पोस्टर हाथ में लिए राज्य की शिंदे-फडणवीस सरकार के विरोध में जोरदार नारेबाजी करते हुए तीव्र प्रदर्शन किया. इस अवसर पर तरबूज फोड़कर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के खिलाफ नारेबाजी कर इस कार्रवाई को लेकर रोष जताया. अकोला जिले के बालापुर के शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक नितिन देशमुख से एसीबी कार्यालय में तीन घंटे चली पूछताछ के दौरान एसीबी कार्यालय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था. पुलिस उपायुक्त सागर पाटील, सहायक आयुक्त पूनम पाटील, निरीक्षक श्रीमती लोेंढे, फ्रेजरपुरा के थानेदार गोरखनाथ जाधव, सीपी कार्यालय के निरीक्षक अनिल कुरलकर, गाडगेनगर के निरीक्षक कुलट के नेतृत्व में गाड़गेनगर, फ्रेजरपुरा, बडनेरा, मुख्यालय की पुलिस भारी संख्या में एसीबी कार्यालय परिसर में तैनात थी. क्यूआरटी दल भी इस समय तैनात रखा गया था. विधायक नितिन देशमुख नोटीस मिलने के बाद एसीबी कार्यालय पहुंचे,तब उनके साथ शिवसैनिकों ने भी एसीबी कार्यालय में जाने का प्रयास किया. उनके साथ अकोला और अमरावती जिले के समर्थक बड़ी संख्या में थे. पुलिस ने पहले से ही एसीबी कार्यालय के प्रवेशद्वार के बाहर बेरिकेटींग कर रखी थी. नितिन देशमुख के भीतर जाने के बाद समर्थकों ने भीतर जाने का प्रयास किया तब उन्हें पुलिस ने रोक दिया. तब कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ धक्कामुक्की कर भीतर घुसने का प्रयास किया. इस वक्त कुछ समय के लिए तनावपूर्ण वातावरण निर्माण हो गया था. तीन घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद नितिन देशमुख ने एसीबी कार्यालय के बाहर आकर पत्रकारों से कहा कि उनसे विधानसभा के वर्ष 2019 के चुनाव के पूर्व की संपत्ति का ब्यौरा और उसके बाद अब तक आय का ब्यौरा मांगा गया जो उन्होंने अधिकारियों को दिया. साथ ही उनके द्वारा पूछे गए हर सवालों का जवाब दिया गया है. लेकिन इस पूछताछ के दौरान खेद इस बात का लगा कि अधिकारियों का सवाल था कि वह जिस चारपहिया वाहन का इस्तेमाल करते हैं, उसमें डीजल किस पेट्रोल पंप से भरते हैं और वह पैसा कहां से लाते हैं. देशमुख ने कहा कि उन्हें यह सवाल करना चाहिए था कि गुवाहाटी से जिस चार्टर्ड प्लेन से वह आए, वह वापस लौटे, वह खर्च किसने किया? लेकिन यह सवाल नहीं पूछा गया. अब तक वर्तमान सरकार विपक्ष के मराठी भाषियों को ईडी की नोटीस देकर धमकाते हुए दबाव डाल रही है और गैर मराठी शिरीष कोंबे, राणा दंपत्ति, परमवीर सिंह, मोहित कंबोज और किरीट सोमैय्या जैसे लोग देवेन्द्र फडणवीस के इशारे पर वक्तव्य कर रहे हैं. राज्य के आगामी 2024 के चुनाव में भाजपा को इसके परिणाम भुगतने होंगे. वर्ष 2014 के चुनाव में शिवसेना साथ में थी इस कारण विदर्भ में भाजपा को सफलता मिली. लेकिन 2024 के चुनाव में इसका असर दिखाई देगा.
अमरावती/ दि. सत्रह - भारतीय जनता पार्टी व्दारा इस समय जिस तरह से मनमाना कामकाज किया जा रहा है और अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास हो रहा है. उससे ब्रिटीश राज की यादें ताजा हो रही है. लेकिन उस समय भी कुछ लोग जेल जाने से नहीं डरे थे और देश ब्रिटीश राज से आजाद हुआ था. इसी तरह आज हम भी जेल जाने से नहीं डरते. बल्कि किसी भी जांच एजेंसी व्दारा जांच व पूछताछ के नाम पर बुलाए जाने की स्थिति में अपने घर से अपने कपडे-लत्ते व जरुरी सामान लेकर निकलते है. ताकि अगर पूछताछ के नाम पर पुलिस या जांच एजेंसी व्दारा गिरफ्तार भी कर लिया जाए, तो किसी तरह की कोई तकलिफ या दिक्कत न हो, इस आशय का प्रतिपादन बालापुर निर्वाचन क्षेत्र के शिवसेना के विधायक नितीन देशमुख ने किया. आय से अधिक संपत्ति को लेकर मिली शिकायत के मामले में विगत दिनों ही भ्रष्टाचार प्रतिबंधात्मक विभाग व्दारा विधायक नितीन देशमुख को नोटीस जारी करते हुए सत्रह जनवरी की सुबह ग्यारह बजे अमरावती स्थित एसीबी कार्यालय में उपस्थित रहने कहा गया था. यह लगभग पहले से तय था कि, विधायक नितीन देशमुख व्दारा एसीबी कार्यालय में उपस्थित रहते समय शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा और यहां पर उनके साथ उनके सैकडों समर्थक भी उपस्थित हो सकते है, इस बात के मद्देनजर शहर पुलिस उपायुक्त सागर पाटील व सहायक पुलिस आयुक्त पूनम पाटील के नेतृत्व में आज सुबह से एसीबी ऑफिस कार्यालय परिसर में पुलिस का तगडा बंदोबस्त लगाया गया था. इसके तहत एसीबी ऑफिस की ओर जिलाधिश कार्यालय पंचवटी चौक व आरटीओ ऑफिस की तरफ से आने वाले रास्तों पर नाकाबंद व बैरिकेटेड कर दी गई थी. सुबह ग्यारह बजे के आसपास एसीबी ऑफिस परिसर में अकोला सहित अमरावती के ठाकरे गुट वाली शिवसेना समर्थक का जमावडा लगना शुरु हो गया था. जहां पर सेनापदाधिकारियों व्दारा भाजपा सहित शिंदे-फडणवीस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही थी. करीब बारह. पैंतीस बजे विधायक नितीन देशमुख अपने कुछ चुनिंदा समर्थकों के साथ एक काफिले की शक्ल में एसीबी कार्यालय पहुंचे. जहां पर उनका सेनापदाधिकारियों व शिवसैनिकों ने जल्लोषपूर्ण स्वागत किया. इस समय मीडिया कर्मियों से संवाद साधते हुए विधायक नितीन देशमुख ने कहा कि, वे शुुरुआत से हीे 'ईडी' सरकार के निशाने पर है और एसीबी की ओर से नोटीस मिलने पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है. साथ ही जरुरत पडने पर सच की लडाई के लिए जेल जाने के लिए भी तैयार है. मीडिया से संवाद साधने के बाद नितीन देशमुख ने अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को हाथ हिलाकर शांत रहने का आह्वान किया. जिसके बाद एसीबी कार्यालय के भीतर गए. विधायक देशमुख के एसीबी कार्यालय में जाते ही बाहर मौजूद शिवसेना समर्थकों ने ओर भी जोर-जोर से सरकार विरोधी नारेबाजी करनी शुरु कर दी. वहीं एसीबी कार्यालय के भीतर एसीबी अधिकारियों व्दारा विधायक देशमुख से बेनामी संपत्ति के मामले में पूछताछ करने शुरु की गई. जो समाचार लिखे जाने तक जारी थी. एसीबी कार्यालय के भीतर जाने से पहले मीडिया कर्मियों के साथ संवाद साधते हुए विधायक नितीन देशमुख ने कहा कि, उनके खिलाफ एसीबी के पास किसने शिकायत दी है, यह अभी एसीबी व्दारा स्पष्ट नहीं किया गया है. जबकि उन्हें अपने खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति के नाम का पूरा अनुमान व अंदाजा है. जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, खुद उस व्यक्ति के खिलाफ धोखाधडी व जालसाजी सहित कई संगीन धाराओं के तहत अपराध दर्ज है और यदि आगे चलकर वहीं व्यक्ति शिकायतकर्ता निकलता है, तो उनके पास उस व्यक्ति और सीएम एकनाथ शिंदे के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है. जिसे वे वक्त आने पर उजागर कर देंगे. नितिन देशमुख से एसीबी.... .... . नितिन देशमुख अपने समर्थकों के साथ दोपहर बारह. पच्चीस बजे अमरावती एसीबी कार्यालय पहुंचे और दोपहर तीन. पच्चीस बजे एसीबी कार्यालय से बाहर निकले. इस तीन घंटे के दौरान अकोला और अमरावती जिले के उद्धव ठाकरे शिवसेना के समर्थकों ने विधायक नितिन देशमुख के पोस्टर हाथ में लिए राज्य की शिंदे-फडणवीस सरकार के विरोध में जोरदार नारेबाजी करते हुए तीव्र प्रदर्शन किया. इस अवसर पर तरबूज फोड़कर उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के खिलाफ नारेबाजी कर इस कार्रवाई को लेकर रोष जताया. अकोला जिले के बालापुर के शिवसेना के विधायक नितिन देशमुख से एसीबी कार्यालय में तीन घंटे चली पूछताछ के दौरान एसीबी कार्यालय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था. पुलिस उपायुक्त सागर पाटील, सहायक आयुक्त पूनम पाटील, निरीक्षक श्रीमती लोेंढे, फ्रेजरपुरा के थानेदार गोरखनाथ जाधव, सीपी कार्यालय के निरीक्षक अनिल कुरलकर, गाडगेनगर के निरीक्षक कुलट के नेतृत्व में गाड़गेनगर, फ्रेजरपुरा, बडनेरा, मुख्यालय की पुलिस भारी संख्या में एसीबी कार्यालय परिसर में तैनात थी. क्यूआरटी दल भी इस समय तैनात रखा गया था. विधायक नितिन देशमुख नोटीस मिलने के बाद एसीबी कार्यालय पहुंचे,तब उनके साथ शिवसैनिकों ने भी एसीबी कार्यालय में जाने का प्रयास किया. उनके साथ अकोला और अमरावती जिले के समर्थक बड़ी संख्या में थे. पुलिस ने पहले से ही एसीबी कार्यालय के प्रवेशद्वार के बाहर बेरिकेटींग कर रखी थी. नितिन देशमुख के भीतर जाने के बाद समर्थकों ने भीतर जाने का प्रयास किया तब उन्हें पुलिस ने रोक दिया. तब कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ धक्कामुक्की कर भीतर घुसने का प्रयास किया. इस वक्त कुछ समय के लिए तनावपूर्ण वातावरण निर्माण हो गया था. तीन घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद नितिन देशमुख ने एसीबी कार्यालय के बाहर आकर पत्रकारों से कहा कि उनसे विधानसभा के वर्ष दो हज़ार उन्नीस के चुनाव के पूर्व की संपत्ति का ब्यौरा और उसके बाद अब तक आय का ब्यौरा मांगा गया जो उन्होंने अधिकारियों को दिया. साथ ही उनके द्वारा पूछे गए हर सवालों का जवाब दिया गया है. लेकिन इस पूछताछ के दौरान खेद इस बात का लगा कि अधिकारियों का सवाल था कि वह जिस चारपहिया वाहन का इस्तेमाल करते हैं, उसमें डीजल किस पेट्रोल पंप से भरते हैं और वह पैसा कहां से लाते हैं. देशमुख ने कहा कि उन्हें यह सवाल करना चाहिए था कि गुवाहाटी से जिस चार्टर्ड प्लेन से वह आए, वह वापस लौटे, वह खर्च किसने किया? लेकिन यह सवाल नहीं पूछा गया. अब तक वर्तमान सरकार विपक्ष के मराठी भाषियों को ईडी की नोटीस देकर धमकाते हुए दबाव डाल रही है और गैर मराठी शिरीष कोंबे, राणा दंपत्ति, परमवीर सिंह, मोहित कंबोज और किरीट सोमैय्या जैसे लोग देवेन्द्र फडणवीस के इशारे पर वक्तव्य कर रहे हैं. राज्य के आगामी दो हज़ार चौबीस के चुनाव में भाजपा को इसके परिणाम भुगतने होंगे. वर्ष दो हज़ार चौदह के चुनाव में शिवसेना साथ में थी इस कारण विदर्भ में भाजपा को सफलता मिली. लेकिन दो हज़ार चौबीस के चुनाव में इसका असर दिखाई देगा.
तेल के बढ़ते दामों के बीच लो अब ऐसी बाइक या कार की तलाश में हैं जो ज्यादा माइलेज देती हो। अगर आप दो पहिया वाहन खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपको बता दें कि इस वक्त कई ऐसी टू-व्हीलर हैं जो जबरदस्त माइलेज देती हैं। इसके साथ ही आज हम आपको ऐसी स्कूटर के बारे में बताएंगे जिसकी कीमत सिर्फ 36,445 रुपये है। और इसमें माइलेज भी जबरदस्त है। होंडा एविएटर 110 सीसी (Honda Aviator 110cc) एक बेहतर माइलेज देने वाला स्कूटर है। इसमें आप एक लीटर पेट्रोल में 60 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकते हैं। इसमें एक बार में 6 लीटर पेट्रोल भरा जा सकता है। यह स्कूटर 7,000 आरपीएम पर 8बीएचपी पावर जनरेट करता है, जबकि 5500 आरपीएम पर 8. 77 एनएम टॉर्क जनरेट करता है। इसमें ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है। Honda Aviator 110cc को सिर्फ 36,445 रुपये में खरीद सकते हैं। इस स्कूटर की कीमत Droom नाम की वेबसाइट पर लिस्टेड है और यह एक सेकेंड हैंड सेगमेंट का स्कूटर है। होंडा के इस स्कूटर में इलेक्ट्रिक स्टार्ट और किट स्टार्ट दोनों का फीचर दिया गया है। इसमें न तो एंटी थेफ्ट अलार्म, एबीएस और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स नहीं दिए गए हैं। इसमें आपको यूएसबी चार्ज मिलेगा और न ही ब्लूटूथ कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स दिए हैं। Droom पर लिस्टेड जानकारी के मुताबिक, यह स्कूटर साल 2015 का मॉडल है जो फर्स्ट ऑनर है और 12 हजार किलोमीटर तक चल चुकी है। दिल्ली के DL 9S आरटीओ में रजिस्टर्ज है। पेट्रोल पर चलने वाले इस स्कूटर में ऑटोमेटिक गियर दिया गया है।
तेल के बढ़ते दामों के बीच लो अब ऐसी बाइक या कार की तलाश में हैं जो ज्यादा माइलेज देती हो। अगर आप दो पहिया वाहन खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपको बता दें कि इस वक्त कई ऐसी टू-व्हीलर हैं जो जबरदस्त माइलेज देती हैं। इसके साथ ही आज हम आपको ऐसी स्कूटर के बारे में बताएंगे जिसकी कीमत सिर्फ छत्तीस,चार सौ पैंतालीस रुपयापये है। और इसमें माइलेज भी जबरदस्त है। होंडा एविएटर एक सौ दस सीसी एक बेहतर माइलेज देने वाला स्कूटर है। इसमें आप एक लीटर पेट्रोल में साठ किलोग्राममीटर तक का सफर तय कर सकते हैं। इसमें एक बार में छः लीटरटर पेट्रोल भरा जा सकता है। यह स्कूटर सात,शून्य आरपीएम पर आठबीएचपी पावर जनरेट करता है, जबकि पाँच हज़ार पाँच सौ आरपीएम पर आठ. सतहत्तर एनएम टॉर्क जनरेट करता है। इसमें ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है। Honda Aviator एक सौ दसcc को सिर्फ छत्तीस,चार सौ पैंतालीस रुपयापये में खरीद सकते हैं। इस स्कूटर की कीमत Droom नाम की वेबसाइट पर लिस्टेड है और यह एक सेकेंड हैंड सेगमेंट का स्कूटर है। होंडा के इस स्कूटर में इलेक्ट्रिक स्टार्ट और किट स्टार्ट दोनों का फीचर दिया गया है। इसमें न तो एंटी थेफ्ट अलार्म, एबीएस और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स नहीं दिए गए हैं। इसमें आपको यूएसबी चार्ज मिलेगा और न ही ब्लूटूथ कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स दिए हैं। Droom पर लिस्टेड जानकारी के मुताबिक, यह स्कूटर साल दो हज़ार पंद्रह का मॉडल है जो फर्स्ट ऑनर है और बारह हजार किलोमीटर तक चल चुकी है। दिल्ली के DL नौS आरटीओ में रजिस्टर्ज है। पेट्रोल पर चलने वाले इस स्कूटर में ऑटोमेटिक गियर दिया गया है।
You Searched For "Viral video. " स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पंख लगभग दस फुट चौड़े होते हैं और ये जमीन से 21 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। शेर किस मूड में है! देखते-देखते कीपर पर अचानक हमला. . ब्रिटिश पार्क मालिक द्वारा ट्विटर पर संबंधित वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद, धक्का देने वाली जनजाति वायरल हो रही है। भोषणम, जो पुराने मकान को तोड़े जाने के समय निकला था. . इसमें क्या है?
You Searched For "Viral video. " स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पंख लगभग दस फुट चौड़े होते हैं और ये जमीन से इक्कीस हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। शेर किस मूड में है! देखते-देखते कीपर पर अचानक हमला. . ब्रिटिश पार्क मालिक द्वारा ट्विटर पर संबंधित वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद, धक्का देने वाली जनजाति वायरल हो रही है। भोषणम, जो पुराने मकान को तोड़े जाने के समय निकला था. . इसमें क्या है?
स्पेसएक्स नाम की कंपनी अगले साल दो लोगों को एक-हफ्ते लंबी चांद की सैर पर ले जाएगी। अमेरिका की इस स्पेसफ्लाइट कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अगर यह यात्रा सफल रही, तो यह सबसे कम समय में इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने का रेकॉर्ड बनाएगी। वॉशिंगटन स्पेसएक्स नाम की कंपनी अगले साल दो लोगों को एक-हफ्ते लंबी चांद की सैर पर ले जाएगी। अमेरिका की इस स्पेसफ्लाइट कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अगर यह यात्रा सफल रही, तो यह सबसे कम समय में इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने का रेकॉर्ड बनाएगी। चांद पर जाने वाले ये दो यात्री कौन होंगे, इसका खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी ने कहा है कि ये दोनों यात्री एक-दूसरे को जानते हैं। स्पेसएक्स की ओर से यह भी साफ किया गया है कि ये दोनों यात्री हॉलिवुड कलाकार नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों यात्रियों से इस मून मिशन के लिए एक निश्चित रकम ली गई गई है। यह भी साफ कर दिया गया है कि यह अंतरिक्षयान चांद की सतह पर नहीं उतरेगा। मालूम हो कि 1970 के दशक के बाद अबतक अमेरिका ने एक भी अंतरिक्षयात्री को चांद पर नहीं भेजा है। स्पेसएक्स के CEO ऐलन मस्क ने एक बयान जारी कर कहा, 'हम बहुत रोमांच और उत्साह के साथ यह बता रहे हैं कि पिछले साल दो यात्रियों ने चांद के चारों ओर यात्रा पर ले जाने के लिए हमसे संपर्क किया था। ' मस्क ने कहा, 'यह इंसानों के सामने एक सुनहरा मौका पेश करती है। पिछले 45 सालों में यह पहला मौका होगा जब आम इंसान अंतरिक्ष में इतनी दूर जाएंगे। इससे पहले अंतरिक्ष की इतनी तेज यात्रा किसी ने नहीं की गई होगी। ' यात्रा पर रवाना होने से पहले दोनों यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। साथ ही, दोनों यात्रियों को इस यात्रा के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। NASA के व्यावसायिक क्रू कार्यक्रम के तहत स्पेसएक्स इसी साल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अपने क्रू ड्रैगन अंतरिक्षयान को लॉन्च करेगा। उनकी पहली उड़ान ऑटोमैटिक मोड में होगी और इसमें कोई भी मानव उड़ान पर नहीं जाएगा। दूसरे उड़ान में क्रू सदस्यों के अलावा चुने गए दोनों यात्री भी अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। उम्मीद है कि यह मिशन 2018 की दूसरी तिमाही के आसपास रवाना होगी। ड्रैगन अंतरिक्षयान को इस तरह विकसित किया गया है कि इससे इंसान और कार्गो दोनों को अंतरिक्ष से लाया-ले जाया जा सकता है। साल 2012 में ड्रैगन अंतरिक्षयान इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन तक कार्गो पहुंचाने और सुरक्षित धरती पर वापस लौटने वाला पहला व्यावसायिक स्पेसक्राफ्ट बन गया। इसे डिजाइन करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान रखा गया था कि भविष्य में कार्गो ढोने के साथ-साथ इंसान भी इसमें बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा कर सकें। स्पेसएक्स ने कहा, 'अपोलो के अंतरिक्षयात्रियों की तरह ये लोग भी अंतरिक्ष में यात्रा करेंगे। उनके साथ पूरी मानव सभ्यता की उम्मीदें और इनके सपने होंगे। ' कंपनी ने कहा, 'निजी क्रू वाले मिशन को अंतरिक्ष में भेजकर अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर लगने वाले सरकारी खर्च को कम किया जाएगा।
स्पेसएक्स नाम की कंपनी अगले साल दो लोगों को एक-हफ्ते लंबी चांद की सैर पर ले जाएगी। अमेरिका की इस स्पेसफ्लाइट कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अगर यह यात्रा सफल रही, तो यह सबसे कम समय में इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने का रेकॉर्ड बनाएगी। वॉशिंगटन स्पेसएक्स नाम की कंपनी अगले साल दो लोगों को एक-हफ्ते लंबी चांद की सैर पर ले जाएगी। अमेरिका की इस स्पेसफ्लाइट कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अगर यह यात्रा सफल रही, तो यह सबसे कम समय में इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने का रेकॉर्ड बनाएगी। चांद पर जाने वाले ये दो यात्री कौन होंगे, इसका खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी ने कहा है कि ये दोनों यात्री एक-दूसरे को जानते हैं। स्पेसएक्स की ओर से यह भी साफ किया गया है कि ये दोनों यात्री हॉलिवुड कलाकार नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों यात्रियों से इस मून मिशन के लिए एक निश्चित रकम ली गई गई है। यह भी साफ कर दिया गया है कि यह अंतरिक्षयान चांद की सतह पर नहीं उतरेगा। मालूम हो कि एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक के बाद अबतक अमेरिका ने एक भी अंतरिक्षयात्री को चांद पर नहीं भेजा है। स्पेसएक्स के CEO ऐलन मस्क ने एक बयान जारी कर कहा, 'हम बहुत रोमांच और उत्साह के साथ यह बता रहे हैं कि पिछले साल दो यात्रियों ने चांद के चारों ओर यात्रा पर ले जाने के लिए हमसे संपर्क किया था। ' मस्क ने कहा, 'यह इंसानों के सामने एक सुनहरा मौका पेश करती है। पिछले पैंतालीस सालों में यह पहला मौका होगा जब आम इंसान अंतरिक्ष में इतनी दूर जाएंगे। इससे पहले अंतरिक्ष की इतनी तेज यात्रा किसी ने नहीं की गई होगी। ' यात्रा पर रवाना होने से पहले दोनों यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। साथ ही, दोनों यात्रियों को इस यात्रा के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। NASA के व्यावसायिक क्रू कार्यक्रम के तहत स्पेसएक्स इसी साल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अपने क्रू ड्रैगन अंतरिक्षयान को लॉन्च करेगा। उनकी पहली उड़ान ऑटोमैटिक मोड में होगी और इसमें कोई भी मानव उड़ान पर नहीं जाएगा। दूसरे उड़ान में क्रू सदस्यों के अलावा चुने गए दोनों यात्री भी अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। उम्मीद है कि यह मिशन दो हज़ार अट्ठारह की दूसरी तिमाही के आसपास रवाना होगी। ड्रैगन अंतरिक्षयान को इस तरह विकसित किया गया है कि इससे इंसान और कार्गो दोनों को अंतरिक्ष से लाया-ले जाया जा सकता है। साल दो हज़ार बारह में ड्रैगन अंतरिक्षयान इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन तक कार्गो पहुंचाने और सुरक्षित धरती पर वापस लौटने वाला पहला व्यावसायिक स्पेसक्राफ्ट बन गया। इसे डिजाइन करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान रखा गया था कि भविष्य में कार्गो ढोने के साथ-साथ इंसान भी इसमें बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा कर सकें। स्पेसएक्स ने कहा, 'अपोलो के अंतरिक्षयात्रियों की तरह ये लोग भी अंतरिक्ष में यात्रा करेंगे। उनके साथ पूरी मानव सभ्यता की उम्मीदें और इनके सपने होंगे। ' कंपनी ने कहा, 'निजी क्रू वाले मिशन को अंतरिक्ष में भेजकर अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर लगने वाले सरकारी खर्च को कम किया जाएगा।
- सरमा ने कहा कि राहुल गांधी को भारत सरकार ने दोषी नहीं ठहराया है. - उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को समुदाय से माफी मांगनी चाहिए थी. - मानहानि मामले में कोर्ट ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जानबूझकर देश के ओबीसी समुदाय को अपमानित किया है. शनिवार को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक चुनावी भाषण के दौरान जानबूझकर ओबीसी समुदाय को अपमानित किया. उन्हें समुदाय से माफी मांगनी चाहिए, लेकिन उन्होंने अपने बयान के लिए समुदाय से माफी नहीं मांगी, जो एक नेता के अहंकार को दर्शाता है. सरमा ने कहा, "राहुल गांधी को भारत सरकार ने दोषी नहीं ठहराया है. उन्हें एक समुदाय के खिलाफ असंसदीय भाषण के लिए कानून की अदालत ने दोषी ठहराया. अपने भाषण में उन्होंने (राहुल गांधी) ओबीसी समुदाय के खिलाफ असंसदीय, मानहानि करने वाले शब्द का इस्तेमाल किया. उनके बयान के लिए कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है. " इसके साथ ही उन्होंने कहा, "उन्हें (राहुल गांधी को) बयान के बाद माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. गलतियां हर किसी से हो सकती हैं. कभी-कभी जुबान फिसलने से हमसे भी गलती हो जाती हैं, लेकिन तुरंत माफी मांग लेते हैं. पांच साल की लंबी न्यायपालिका प्रक्रिया के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया है. " असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं हिंदू दर्शन में विश्वास करता हूं, जो कहता है कि 'आपको अपने कर्मों का फल मिलता है'. राहुल गांधी ने 2013 में अध्यादेश फाड़ दिया था. अब वह भारत जोड़ो यात्रा कर सकते हैं, लेकिन संसद नहीं जा सकते. " कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 2019 में 'मोदी' उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के लिए मानहानि के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई है. इसके एक दिन बाद शुक्रवार को उनकी लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिया गया. शुक्रवार सुबह राहुल गांधी के लोकसभा में आने के कुछ घंटे बाद ही यह अधिसूचना जारी की गई. ये भी पढ़ें :
- सरमा ने कहा कि राहुल गांधी को भारत सरकार ने दोषी नहीं ठहराया है. - उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को समुदाय से माफी मांगनी चाहिए थी. - मानहानि मामले में कोर्ट ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जानबूझकर देश के ओबीसी समुदाय को अपमानित किया है. शनिवार को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक चुनावी भाषण के दौरान जानबूझकर ओबीसी समुदाय को अपमानित किया. उन्हें समुदाय से माफी मांगनी चाहिए, लेकिन उन्होंने अपने बयान के लिए समुदाय से माफी नहीं मांगी, जो एक नेता के अहंकार को दर्शाता है. सरमा ने कहा, "राहुल गांधी को भारत सरकार ने दोषी नहीं ठहराया है. उन्हें एक समुदाय के खिलाफ असंसदीय भाषण के लिए कानून की अदालत ने दोषी ठहराया. अपने भाषण में उन्होंने ओबीसी समुदाय के खिलाफ असंसदीय, मानहानि करने वाले शब्द का इस्तेमाल किया. उनके बयान के लिए कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है. " इसके साथ ही उन्होंने कहा, "उन्हें बयान के बाद माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. गलतियां हर किसी से हो सकती हैं. कभी-कभी जुबान फिसलने से हमसे भी गलती हो जाती हैं, लेकिन तुरंत माफी मांग लेते हैं. पांच साल की लंबी न्यायपालिका प्रक्रिया के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया है. " असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं हिंदू दर्शन में विश्वास करता हूं, जो कहता है कि 'आपको अपने कर्मों का फल मिलता है'. राहुल गांधी ने दो हज़ार तेरह में अध्यादेश फाड़ दिया था. अब वह भारत जोड़ो यात्रा कर सकते हैं, लेकिन संसद नहीं जा सकते. " कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो हज़ार उन्नीस में 'मोदी' उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के लिए मानहानि के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई है. इसके एक दिन बाद शुक्रवार को उनकी लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिया गया. शुक्रवार सुबह राहुल गांधी के लोकसभा में आने के कुछ घंटे बाद ही यह अधिसूचना जारी की गई. ये भी पढ़ें :
चारा घोटाले के एक केस में लालू यादव को पेशी से राहत मिल गई है। बांका कोषागार से 46 लाख रुपए की अवैध निकासी मामले में लालू मंगलवार को पटना के CBI की विशेष अदालत MP-MLA कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से सशरीर पेशी से राहत देने की मांग की। इस पर कोर्ट राजी हो गया। RJD सुप्रीमो ने कहा, "हुजूर. . . मैं अक्सर बीमार रहता हूं। ऐसे में मुझे पेश होने से राहत दीजिए। मेरे वकील इस मामले को देखेंगे। ' उनकी इस मांग पर कोर्ट ने कहा, "ठीक है अब से आप अपने वकील को तारीख पर भेज दीजिएगा। ' इतनी सुनवाई के बाद केस की अगली तारीख 30 नवंबर तय की गई। कोर्ट में हाजिरी के बाद लालू संत जोसेफ स्कूल के मैरी वार्ड में बीमार सिस्टर नीलिमा से मिलने पहुंचे। बता दें, इस केस में पटना के स्पेशल जज प्रजेश कुमार की अदालत ने लालू सहित 28 आरोपियों को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद RJD सुप्रीमो सोमवार शाम दिल्ली से पटना आए हैं। बांका उपकोषागार से फर्जी विपत्र के सहारे 46 लाख रुपए की अवैध निकासी का मामला 1996 से चल रहा है। इसमें शुरू में तात्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के अलावा 44 आरोपी थे। फिलहाल 28 लोगों पर केस चल रहा है। आधा दर्जन आरोपियों की मौत हो चुकी है। इसकी सूचना कोर्ट को दी गई है। फिलहाल लालू यादव कई बीमारियों के शिकार हैं। उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही है। उनकी किडनी पूरी तरह से काम नहीं कर रही है। इसलिए परेशानी बढ़ी हुई है। जमानत मिलने के बाद से वे लगातार दिल्ली स्थित अपनी बेटी मीसा भारती के आवास पर रह रहे हैं। इससे पहले वे बिहार में दो सीटों पर हुए उपचुनाव में पटना आए थे और हेलीकॉप्टर से तारापुर और कुशेश्वर स्थान चुनाव प्रचार में भी गए थे, लेकिन चुनाव परिणाम में हार के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और दूसरे ही दिन उन्हें एकाएक दिल्ली ले जाया गया था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चारा घोटाले के एक केस में लालू यादव को पेशी से राहत मिल गई है। बांका कोषागार से छियालीस लाख रुपए की अवैध निकासी मामले में लालू मंगलवार को पटना के CBI की विशेष अदालत MP-MLA कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से सशरीर पेशी से राहत देने की मांग की। इस पर कोर्ट राजी हो गया। RJD सुप्रीमो ने कहा, "हुजूर. . . मैं अक्सर बीमार रहता हूं। ऐसे में मुझे पेश होने से राहत दीजिए। मेरे वकील इस मामले को देखेंगे। ' उनकी इस मांग पर कोर्ट ने कहा, "ठीक है अब से आप अपने वकील को तारीख पर भेज दीजिएगा। ' इतनी सुनवाई के बाद केस की अगली तारीख तीस नवंबर तय की गई। कोर्ट में हाजिरी के बाद लालू संत जोसेफ स्कूल के मैरी वार्ड में बीमार सिस्टर नीलिमा से मिलने पहुंचे। बता दें, इस केस में पटना के स्पेशल जज प्रजेश कुमार की अदालत ने लालू सहित अट्ठाईस आरोपियों को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद RJD सुप्रीमो सोमवार शाम दिल्ली से पटना आए हैं। बांका उपकोषागार से फर्जी विपत्र के सहारे छियालीस लाख रुपए की अवैध निकासी का मामला एक हज़ार नौ सौ छियानवे से चल रहा है। इसमें शुरू में तात्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के अलावा चौंतालीस आरोपी थे। फिलहाल अट्ठाईस लोगों पर केस चल रहा है। आधा दर्जन आरोपियों की मौत हो चुकी है। इसकी सूचना कोर्ट को दी गई है। फिलहाल लालू यादव कई बीमारियों के शिकार हैं। उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही है। उनकी किडनी पूरी तरह से काम नहीं कर रही है। इसलिए परेशानी बढ़ी हुई है। जमानत मिलने के बाद से वे लगातार दिल्ली स्थित अपनी बेटी मीसा भारती के आवास पर रह रहे हैं। इससे पहले वे बिहार में दो सीटों पर हुए उपचुनाव में पटना आए थे और हेलीकॉप्टर से तारापुर और कुशेश्वर स्थान चुनाव प्रचार में भी गए थे, लेकिन चुनाव परिणाम में हार के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और दूसरे ही दिन उन्हें एकाएक दिल्ली ले जाया गया था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राहुल गांधी मध्यप्रदेश जाकर इतने कंफ्यूज क्यों हो गए? मध्य प्रदेश में चुनाव हैं और राहुल गांधी प्रचार के दौरान कन्फ्यूज हुए हैं. ऐसे में डर बस इस बात का है कि कहीं उनका ये कंफ्यूजन पार्टी की परफॉरमेंस पर असर न डाले और इसकी उसे भारी कीमत न चुकानी पड़े. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 29 और 30 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के चुनावी दौरे पर थे. एमपी में 28 नवम्बर को चुनाव होने हैं. यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए अहम है. भाजपा यहां 15 सालों से सत्ता पर काबिज है जिसे बचाने की चुनौती है. वहीं कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव करो या मरो वाला है. कांग्रेस को पता है कि इस राज्य का प्रदर्शन ही आनेवाले लोकसभा चुनाव में उसे एक मजबूत महागठबंधन बनाने में मदद करेगा. अन्यथा सभी क्षेत्रीय पार्टियां उसे दबाना चाहेंगी और मनमानी करेंगी. चुनाव को अपनी-अपनी झोली में लाने की कोशिशों के बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी चुनावी जंग जारी है. लेकिन इस बीच कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी कन्फ्यूज हो गए हैं. मध्यप्रदेश की दो दिनों की चुनावी यात्रा के दौरान वो तीन बार कन्फ्यूज हुए. राहुल गांधी इतने कन्फ्यूजड क्यों हैं? क्या उन्हें चुनाव में हार का आभास अभी से हो गया है? वैसे भी ओपिनियन पोल्स यहां कांटे की टक्कर के साथ ही भाजपा को जीतते हुए दिखा रहे हैं. राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के झाबुआ में एक सभा को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान पर निशाना साधा. राहुल ने कहा कि,'पनामा पेपर्स मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे का नाम भी सामने आया है, लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि पाकिस्तान जैसे देश ने इसी मामले को लेकर अपने पूर्व प्रधानमंत्री (नवाज शरीफ) को दंडित कर जेल में डाल दिया' जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बेटे का नाम कांग्रेस के नेताओं ने पनामा पेपर्स में आने का दावा किया था. लेकिन जब मुख्यमंत्री ने राहुल के खिलाफ मानहानि का केस करने की धमकी दी तो उसके अगले दिन ही राहुल गांधी ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि,'भाजपा में इतना भ्रष्टाचार है कि मैं कल कन्फ्यूज हो गया था. मध्य प्रदेश के सीएम ने पनामा नहीं किया, उन्होंने तो ई-टेंडरिंग और व्यापमं घोटाले किए हैं. ' राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आप चिप्स कै पैकेट उठाएं. आलू का क्या दाम है आज कल? 5 रुपया. चिप्स का पैकेट कितने में बिकता है? उसमें कितना आलू होता है? आधा आलू होता है. उस चिप्स के पैकेट में से किसान को कितना रुपया मिलता है? 50 पैसे, उससे भी कम. ' राहुल गांधी ने यहां आलू और चिप्स का उदाहरण देते हुए किसानों को उनकी उपज के कम दाम मिलने की बात समझाने की कोशिश करते हुए आलू की कीमत 5 रूपये किलो बता दी. लेकिन आलू की कीमत देश में कहीं भी इतनी कम नहीं है. यहां तक की थोक भाव में भी इतना सस्ता नहीं है. और राहुल के इस बयान के बाद एक बार फिर वो सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए. दरअसल राहुल गांधी ने एक ऐसे सैनिक स्कूल के बारे में खबर साझा की थी जिसने अपनी शुरुआत के 50 साल बाद लड़कियों के लिए अपने दरवाजे खोले थे. यह स्कूल मिजोरम में था लेकिन अपनी फेसबुक पोस्ट में राहुल ने गलती से मणिपुर लिख दिया था. राहुल गांधी की इस गलती पर भाजपा आइटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने उन पर निशाना साधते हुए लिखा था कि, 'राहुल गांधी ने मिजोरम पर एक खबर साझा की है और उन्होंने मणिपुर लिखा है. पूर्वोत्तर के बारे में यह उनकी अज्ञानता है जो बड़ी समस्या है. ' राहुल गांधी का यह कन्फ्यूजन कांग्रेस के लिए भी एक बड़ी टेंशन साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव है और अगले साल लोकसभा का भी चुनाव होना है. ऐसे में राहुल गांधी की ये गलतियां चुनावों में उन्हें वो परिणाम दे सकती हैं तो कहीं से भी उनके लिए सुखद न होंगे. प्रियंका वाड्रा की पोस्टर लगाकर इमोशनल 'बेइज्जती'
राहुल गांधी मध्यप्रदेश जाकर इतने कंफ्यूज क्यों हो गए? मध्य प्रदेश में चुनाव हैं और राहुल गांधी प्रचार के दौरान कन्फ्यूज हुए हैं. ऐसे में डर बस इस बात का है कि कहीं उनका ये कंफ्यूजन पार्टी की परफॉरमेंस पर असर न डाले और इसकी उसे भारी कीमत न चुकानी पड़े. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उनतीस और तीस अक्टूबर को मध्यप्रदेश के चुनावी दौरे पर थे. एमपी में अट्ठाईस नवम्बर को चुनाव होने हैं. यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए अहम है. भाजपा यहां पंद्रह सालों से सत्ता पर काबिज है जिसे बचाने की चुनौती है. वहीं कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव करो या मरो वाला है. कांग्रेस को पता है कि इस राज्य का प्रदर्शन ही आनेवाले लोकसभा चुनाव में उसे एक मजबूत महागठबंधन बनाने में मदद करेगा. अन्यथा सभी क्षेत्रीय पार्टियां उसे दबाना चाहेंगी और मनमानी करेंगी. चुनाव को अपनी-अपनी झोली में लाने की कोशिशों के बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी चुनावी जंग जारी है. लेकिन इस बीच कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी कन्फ्यूज हो गए हैं. मध्यप्रदेश की दो दिनों की चुनावी यात्रा के दौरान वो तीन बार कन्फ्यूज हुए. राहुल गांधी इतने कन्फ्यूजड क्यों हैं? क्या उन्हें चुनाव में हार का आभास अभी से हो गया है? वैसे भी ओपिनियन पोल्स यहां कांटे की टक्कर के साथ ही भाजपा को जीतते हुए दिखा रहे हैं. राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के झाबुआ में एक सभा को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान पर निशाना साधा. राहुल ने कहा कि,'पनामा पेपर्स मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे का नाम भी सामने आया है, लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि पाकिस्तान जैसे देश ने इसी मामले को लेकर अपने पूर्व प्रधानमंत्री को दंडित कर जेल में डाल दिया' जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बेटे का नाम कांग्रेस के नेताओं ने पनामा पेपर्स में आने का दावा किया था. लेकिन जब मुख्यमंत्री ने राहुल के खिलाफ मानहानि का केस करने की धमकी दी तो उसके अगले दिन ही राहुल गांधी ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि,'भाजपा में इतना भ्रष्टाचार है कि मैं कल कन्फ्यूज हो गया था. मध्य प्रदेश के सीएम ने पनामा नहीं किया, उन्होंने तो ई-टेंडरिंग और व्यापमं घोटाले किए हैं. ' राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आप चिप्स कै पैकेट उठाएं. आलू का क्या दाम है आज कल? पाँच रुपयापया. चिप्स का पैकेट कितने में बिकता है? उसमें कितना आलू होता है? आधा आलू होता है. उस चिप्स के पैकेट में से किसान को कितना रुपया मिलता है? पचास पैसे, उससे भी कम. ' राहुल गांधी ने यहां आलू और चिप्स का उदाहरण देते हुए किसानों को उनकी उपज के कम दाम मिलने की बात समझाने की कोशिश करते हुए आलू की कीमत पाँच रूपये किलो बता दी. लेकिन आलू की कीमत देश में कहीं भी इतनी कम नहीं है. यहां तक की थोक भाव में भी इतना सस्ता नहीं है. और राहुल के इस बयान के बाद एक बार फिर वो सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए. दरअसल राहुल गांधी ने एक ऐसे सैनिक स्कूल के बारे में खबर साझा की थी जिसने अपनी शुरुआत के पचास साल बाद लड़कियों के लिए अपने दरवाजे खोले थे. यह स्कूल मिजोरम में था लेकिन अपनी फेसबुक पोस्ट में राहुल ने गलती से मणिपुर लिख दिया था. राहुल गांधी की इस गलती पर भाजपा आइटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने उन पर निशाना साधते हुए लिखा था कि, 'राहुल गांधी ने मिजोरम पर एक खबर साझा की है और उन्होंने मणिपुर लिखा है. पूर्वोत्तर के बारे में यह उनकी अज्ञानता है जो बड़ी समस्या है. ' राहुल गांधी का यह कन्फ्यूजन कांग्रेस के लिए भी एक बड़ी टेंशन साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव है और अगले साल लोकसभा का भी चुनाव होना है. ऐसे में राहुल गांधी की ये गलतियां चुनावों में उन्हें वो परिणाम दे सकती हैं तो कहीं से भी उनके लिए सुखद न होंगे. प्रियंका वाड्रा की पोस्टर लगाकर इमोशनल 'बेइज्जती'
Todd Murphy Kaun Hain IND vs AUS : भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले मैच में भले कप्तान रोहित शर्मा ने शानदार शतक लगाया हो, साथ ही टीम इंडिया ने मैच पर मजबूत पकड़ बना ली हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज टॉड मर्फी की भी तारीफ करनी होगी। टॉड मर्फी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने डेब्यू मैच में ही टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ियों को न केवल परेशान किया, साथ ही पांच भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन की राह भी दिखा दी। खास बात ये भी है कि टॉड मर्फी को ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल तो किया गया था, लेकिन आखिरी वक्त तक वे टीम इंडिया के खिलाफ पहले मैच की प्लेइंग इलेवन में शामिल ही नहीं थे। लेकिन अचानक से उन्हें डेब्यू का मौका देने का फैसला किया गया और उसके बाद मर्फी पर ये जिम्मेदारी थी कि वे अपने सेलेक्शन को सही साबित करें और उन्होंने अपने डेब्यू को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के टॉड मर्फी ने कमाल कर दिया। बताया जाता है कि पहले टॉड मर्फी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने पर विचार नहीं किया जा रहा था। लेकिन जब कप्तान पैट कमिंस और टीम मैनेजमेंट ने नागपुर की पिच देखी तो उन्हें अंदाजा हो गया कि ये पिच स्पिनर्स के लिए काफी ज्यादा मददगार होगी। बताया जाता है कि पहले ट्रेविस हेड को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना था, वे भी आफ स्पिनर हैं और भारतीय कंडीशन में काफी घातक साबित हो सकते थे, लेकिन कप्तान पैट कमिंस और बाकी लोगों की भी यही राय बनी कि टॉड मर्फी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाए। टॉड मर्फी को अचानक से मौका देने की बात सामने आई और वे अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया ने इस में डेब्यू कराया। टॉड मर्फी के लिए चुनौती ये भी थी कि उन्हें अपने ही सीनियर साथी नाथन लॉयन के साथ गेंदबाजी करनी थी, जो पहले से ही ऑस्ट्रेलिया के महानतम स्पिनर्स में शुमार किए जाते हैं। टॉड मर्फी ने अपना जलवा पहले दिन के खेल से ही दिखाना शुरू कर दिया था। मैच के पहले दिन टीम इंडिया का एक ही विकेट गिरा था, वे थे केएल राहुल और उनको भी टॉड मर्फी ने ही आउट किया। टॉड मर्फी ने पहले केएल राहुल को आउट किया, उसके बाद नाइटबॉचमैन रविचंद्रन अश्विन को चलता कर दिया। वे यहीं पर नहीं रुके और चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली को आउट कर भारतीय टीम को बड़ा झटका दिया। टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले केएस भरत भी उन्हीं के शिकार बने। टॉड मर्फी ने अपने डेब्यू को लेकर कहा है कि जब उन्हें पता चला कि वे ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, लेकिन ये फैसला हैरान करने वाला जरूर था। उनका कहना है कि अपने प्रथम श्रेणी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है, उसी की बदौलत उन्हें अपने देश की टीम में के लिए खेलने का मौका मिला। खास बात ये भी रही कि ऑस्ट्रेलिया ने करीब 35 साल बाद अपनी टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में दो स्पेशलिस्ट स्पिनर शामिल किए हैं। इसेस पहले साल 1988 में जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई टीम खेल रही थी, तब दो स्पिनर एक साथ खेले थे, लेकिन नागपुर की पिच को देखने के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने जो फैसला किया, वो सही रहा और सबसे ज्यादा टॉड मर्फी ने ही टीम इंडिया को परेशान करने का काम किया है।
Todd Murphy Kaun Hain IND vs AUS : भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले मैच में भले कप्तान रोहित शर्मा ने शानदार शतक लगाया हो, साथ ही टीम इंडिया ने मैच पर मजबूत पकड़ बना ली हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज टॉड मर्फी की भी तारीफ करनी होगी। टॉड मर्फी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने डेब्यू मैच में ही टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ियों को न केवल परेशान किया, साथ ही पांच भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन की राह भी दिखा दी। खास बात ये भी है कि टॉड मर्फी को ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल तो किया गया था, लेकिन आखिरी वक्त तक वे टीम इंडिया के खिलाफ पहले मैच की प्लेइंग इलेवन में शामिल ही नहीं थे। लेकिन अचानक से उन्हें डेब्यू का मौका देने का फैसला किया गया और उसके बाद मर्फी पर ये जिम्मेदारी थी कि वे अपने सेलेक्शन को सही साबित करें और उन्होंने अपने डेब्यू को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के टॉड मर्फी ने कमाल कर दिया। बताया जाता है कि पहले टॉड मर्फी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने पर विचार नहीं किया जा रहा था। लेकिन जब कप्तान पैट कमिंस और टीम मैनेजमेंट ने नागपुर की पिच देखी तो उन्हें अंदाजा हो गया कि ये पिच स्पिनर्स के लिए काफी ज्यादा मददगार होगी। बताया जाता है कि पहले ट्रेविस हेड को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना था, वे भी आफ स्पिनर हैं और भारतीय कंडीशन में काफी घातक साबित हो सकते थे, लेकिन कप्तान पैट कमिंस और बाकी लोगों की भी यही राय बनी कि टॉड मर्फी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाए। टॉड मर्फी को अचानक से मौका देने की बात सामने आई और वे अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया ने इस में डेब्यू कराया। टॉड मर्फी के लिए चुनौती ये भी थी कि उन्हें अपने ही सीनियर साथी नाथन लॉयन के साथ गेंदबाजी करनी थी, जो पहले से ही ऑस्ट्रेलिया के महानतम स्पिनर्स में शुमार किए जाते हैं। टॉड मर्फी ने अपना जलवा पहले दिन के खेल से ही दिखाना शुरू कर दिया था। मैच के पहले दिन टीम इंडिया का एक ही विकेट गिरा था, वे थे केएल राहुल और उनको भी टॉड मर्फी ने ही आउट किया। टॉड मर्फी ने पहले केएल राहुल को आउट किया, उसके बाद नाइटबॉचमैन रविचंद्रन अश्विन को चलता कर दिया। वे यहीं पर नहीं रुके और चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली को आउट कर भारतीय टीम को बड़ा झटका दिया। टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले केएस भरत भी उन्हीं के शिकार बने। टॉड मर्फी ने अपने डेब्यू को लेकर कहा है कि जब उन्हें पता चला कि वे ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, लेकिन ये फैसला हैरान करने वाला जरूर था। उनका कहना है कि अपने प्रथम श्रेणी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है, उसी की बदौलत उन्हें अपने देश की टीम में के लिए खेलने का मौका मिला। खास बात ये भी रही कि ऑस्ट्रेलिया ने करीब पैंतीस साल बाद अपनी टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में दो स्पेशलिस्ट स्पिनर शामिल किए हैं। इसेस पहले साल एक हज़ार नौ सौ अठासी में जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई टीम खेल रही थी, तब दो स्पिनर एक साथ खेले थे, लेकिन नागपुर की पिच को देखने के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने जो फैसला किया, वो सही रहा और सबसे ज्यादा टॉड मर्फी ने ही टीम इंडिया को परेशान करने का काम किया है।
PATNA : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'ट्रंप वाले अंदाज' पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का मिजाज बदल गया है। एक बाऱ फिर वे फिल्मियाना मूड मे आ गये हैं। फिल्म का गाना गाकर ही उन्हें अपने धुर विरोधी को निशाने पर ले लिया है। इस ट्वीट के साथ लालू यादव ने सीएम नीतीश कुमार को वो फोटो भी ट्वीट किया है जो उनके मधुबनी दौरे पर सामने आयी थी। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर मधुबनी और दरभंगा में जो इंतजाम दिखा वह चौंका देने वाला था। दरअसल नीतीश जहां कहीं भी गए वहां कपड़े की दीवार खड़ी नजर आई हर रिहायशी इलाके कस्बे के सामने कपड़े की दीवार खड़ी कर दी गई। यह दीवार बिल्कुल वैसी ही थी जैसे नमस्ते ट्रंप में शामिल होने के लिए अहमदाबाद पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति के काफिले वाले रास्ते पर ईंट की दीवार खड़ी कर दी गई थी। इसके बाद सियासी गलियारे में ये बात उठी थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नक्शे कदम पर है। मधुबनी में सीएम जिन-जिन जगहों पर सीएम नीतीश कुमार ने निरीक्षण किया। उस सड़क किनारे बस्ती को कपड़े से घेर दिया गया था। इतना ही नहीं ऐसा ही कुछ नजारा पटना में भी देखने को मिला था जब 19 जून को सीएम नीतीश कुमार बारिश के बाद हुए जलजमाव के बाद पटना के कई इलाकों का जायजा लेने के लिए अधिकारियों के जत्थे के साथ निकले थे। उन्होनें तमाम बड़े संप हाउस और नालों का जायजा लिया था इस दौरान वह योगीपुर संप हाउस, पहाड़ी ड्रेनेज के अलावे बादशाही पइन, बस टर्मिनल, बैरिया, गांधी सेतु इलाके का निरीक्षण किया। लेकिन इस दौरान भी नालों के किनारों सफेद कपड़े की दीवारें खड़ी कर दी गई थी।
PATNA : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'ट्रंप वाले अंदाज' पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का मिजाज बदल गया है। एक बाऱ फिर वे फिल्मियाना मूड मे आ गये हैं। फिल्म का गाना गाकर ही उन्हें अपने धुर विरोधी को निशाने पर ले लिया है। इस ट्वीट के साथ लालू यादव ने सीएम नीतीश कुमार को वो फोटो भी ट्वीट किया है जो उनके मधुबनी दौरे पर सामने आयी थी। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर मधुबनी और दरभंगा में जो इंतजाम दिखा वह चौंका देने वाला था। दरअसल नीतीश जहां कहीं भी गए वहां कपड़े की दीवार खड़ी नजर आई हर रिहायशी इलाके कस्बे के सामने कपड़े की दीवार खड़ी कर दी गई। यह दीवार बिल्कुल वैसी ही थी जैसे नमस्ते ट्रंप में शामिल होने के लिए अहमदाबाद पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति के काफिले वाले रास्ते पर ईंट की दीवार खड़ी कर दी गई थी। इसके बाद सियासी गलियारे में ये बात उठी थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नक्शे कदम पर है। मधुबनी में सीएम जिन-जिन जगहों पर सीएम नीतीश कुमार ने निरीक्षण किया। उस सड़क किनारे बस्ती को कपड़े से घेर दिया गया था। इतना ही नहीं ऐसा ही कुछ नजारा पटना में भी देखने को मिला था जब उन्नीस जून को सीएम नीतीश कुमार बारिश के बाद हुए जलजमाव के बाद पटना के कई इलाकों का जायजा लेने के लिए अधिकारियों के जत्थे के साथ निकले थे। उन्होनें तमाम बड़े संप हाउस और नालों का जायजा लिया था इस दौरान वह योगीपुर संप हाउस, पहाड़ी ड्रेनेज के अलावे बादशाही पइन, बस टर्मिनल, बैरिया, गांधी सेतु इलाके का निरीक्षण किया। लेकिन इस दौरान भी नालों के किनारों सफेद कपड़े की दीवारें खड़ी कर दी गई थी।
शहर के श्रीमती शारदा जौहरी नगर पालिका कन्या महाविद्यालय में वसंत पंचमी व महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कालेज की छात्राओं ने सामूहिक वसंत गीत, नाटक समेत अन्य कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ डिग्री कालेज की प्रबंधक रजनी साहू ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, श्रीमती शारदा जौहरी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। मां शारदे की आराधना गीत दुख हर दे से डा. शशिवाला यादव, डा. मंगला तलेगांवकर ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इस दौरान सामूहिक वसंत गीत ब्रज धुन, नाट्य रूपांतरण, पंजाबी लोक नृत्य समेत अन्य कार्यक्रम छात्राओं ने प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन डिग्री कालेज के संगीत विभाग ने कराया। मंजू यादव, शिवानी, पूनम सिसोदिया, प्रिया गोयल, पल्लवी गहलौत, प्रतीक्षा पाठक, डा. लोकेंद्र तलेगांवकर ने अपनी-अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान डा. शशिबाला यादव, डा. लोकेंद्र तलेगांवकर, पल्लवी गहलौत, वीरेंद्र कुमार गुप्ता को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान डा. रजनी अग्रवाल, डा. विद्युतलता कुलश्रेष्ठ, सपना, डा. दीपा, चेतना मौर्य, अनुपमा तिवारी, डा. रेखारानी, डा. रंजना, डा. अर्पणा, रश्मि पल्तानी, रश्मि, सोनिया शर्मा, डा. अनीता, रोशनी पुंढीर, बिंदेश्वरी, प्रिया गोयल, पुष्पेंद्री, अशोक बाबू, कर्मवीर, गिरवर, राहुल, मीरा, मंजू मौजूद रहे।
शहर के श्रीमती शारदा जौहरी नगर पालिका कन्या महाविद्यालय में वसंत पंचमी व महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कालेज की छात्राओं ने सामूहिक वसंत गीत, नाटक समेत अन्य कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ डिग्री कालेज की प्रबंधक रजनी साहू ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, श्रीमती शारदा जौहरी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। मां शारदे की आराधना गीत दुख हर दे से डा. शशिवाला यादव, डा. मंगला तलेगांवकर ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इस दौरान सामूहिक वसंत गीत ब्रज धुन, नाट्य रूपांतरण, पंजाबी लोक नृत्य समेत अन्य कार्यक्रम छात्राओं ने प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन डिग्री कालेज के संगीत विभाग ने कराया। मंजू यादव, शिवानी, पूनम सिसोदिया, प्रिया गोयल, पल्लवी गहलौत, प्रतीक्षा पाठक, डा. लोकेंद्र तलेगांवकर ने अपनी-अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान डा. शशिबाला यादव, डा. लोकेंद्र तलेगांवकर, पल्लवी गहलौत, वीरेंद्र कुमार गुप्ता को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान डा. रजनी अग्रवाल, डा. विद्युतलता कुलश्रेष्ठ, सपना, डा. दीपा, चेतना मौर्य, अनुपमा तिवारी, डा. रेखारानी, डा. रंजना, डा. अर्पणा, रश्मि पल्तानी, रश्मि, सोनिया शर्मा, डा. अनीता, रोशनी पुंढीर, बिंदेश्वरी, प्रिया गोयल, पुष्पेंद्री, अशोक बाबू, कर्मवीर, गिरवर, राहुल, मीरा, मंजू मौजूद रहे।
वहीं सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से बिहार के तापमान में कमी आने की मौसमी दशा बन रही है। इससे राज्य के सभी जिलों में तापमान गिरेगी और लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में लोगों को ठंड से बचने की तैयारी कर लेगी चाहिए। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो 13 नवंबर से पारा अचानक नीचे आयेगा, जिससे लोगों को रात के साथ साथ दिन में भी ठंड का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल बिहार के लोगों को दिन में ठंड का सामना करना नहीं पड़ रहा हैं। लेकिन जल्द ही मौसम करवट लेने वाला हैं। आपको बता दें की प्रदेश के आसमान में बन रही मौसमी दशा बिहार के सभी जिलों में अच्छी ठंड का संकेत दे रही हैं। इस साल कड़ाके की ठंड पड़ने का पूर्वानुमान हैं। वहीं इस साल पिछले साल की तुलना में कोहरा भी अधिक नजर आ सकता है।
वहीं सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के असर से बिहार के तापमान में कमी आने की मौसमी दशा बन रही है। इससे राज्य के सभी जिलों में तापमान गिरेगी और लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में लोगों को ठंड से बचने की तैयारी कर लेगी चाहिए। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो तेरह नवंबर से पारा अचानक नीचे आयेगा, जिससे लोगों को रात के साथ साथ दिन में भी ठंड का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल बिहार के लोगों को दिन में ठंड का सामना करना नहीं पड़ रहा हैं। लेकिन जल्द ही मौसम करवट लेने वाला हैं। आपको बता दें की प्रदेश के आसमान में बन रही मौसमी दशा बिहार के सभी जिलों में अच्छी ठंड का संकेत दे रही हैं। इस साल कड़ाके की ठंड पड़ने का पूर्वानुमान हैं। वहीं इस साल पिछले साल की तुलना में कोहरा भी अधिक नजर आ सकता है।
नई दिल्ली : हम अपने आस पास अक्सर ऐसी बहुत सी जगह देखते हैं जो दिखने में तो मामूली होती है लेकिन उसके पीछे बहुत से राज दफ़न होते हैं. कुछ जगह के रहस्य का तो खुलासा हुआ है मगर बहुत सी ऐसी जगह हैं जिनके रहस्य से पर्दा आज तक नहीं उठ पाया है. आज हम आपको को कुछ ऐसी जगह के बारे में बताएगें, जहां दूर- दूर से लोग घूमने की लिए तो आते हैं. लेकिन इन जगह के रहस्य से आज भी परे हैं. अगर आपको को भी रहस्यमय जगह के बारें में जाननें में दिलचस्पी है तो एक बार इन जगह पर जरुर जाएं. आइसलैंड का यह आइलैंड किसी रहस्यमय जगह से कम नहीं है। 1963 से पहले इस आइलैंड का अस्तित्व ही नहीं था। इसी साल यहां पर पानी के अंदर एक ज्वालामुखी फटा और 1967 तक लगातार विस्फोट होते रहे। इस ज्वालामुखी के बंद होने पर यहां एक आइलैंड बाकी रह गया। अंटार्कटिका का टेलर ग्लेशियर पर जमी बर्फ में एक जगह ऐसी भी है, जहां से लाल रंग का झरना बहता है. इसे देखकर ऐसा लगता है कि उस झरने से पानी की जगह खून बेह रहा है. कनाडा में एक जगह है जिसका नाम मॉन्कटन है इस जगह को 'मैगनेटिक हिल' भी जाना जाता है यहां गाड़ी को चलाने के लिए उसे 'स्टार्ट' करने की जरूरत भी नहीं पड़ती. यहां की कुछ पहाड़ियां ऐसी हैं जहां यहां बंद गाड़ियां भी अपने आप स्टार्ट हो जाती हैं. यहां पर गाड़िया ढ़लान से उतरने की बजह पहाड़ियों पर उपर की ओर चढ़ती है.
नई दिल्ली : हम अपने आस पास अक्सर ऐसी बहुत सी जगह देखते हैं जो दिखने में तो मामूली होती है लेकिन उसके पीछे बहुत से राज दफ़न होते हैं. कुछ जगह के रहस्य का तो खुलासा हुआ है मगर बहुत सी ऐसी जगह हैं जिनके रहस्य से पर्दा आज तक नहीं उठ पाया है. आज हम आपको को कुछ ऐसी जगह के बारे में बताएगें, जहां दूर- दूर से लोग घूमने की लिए तो आते हैं. लेकिन इन जगह के रहस्य से आज भी परे हैं. अगर आपको को भी रहस्यमय जगह के बारें में जाननें में दिलचस्पी है तो एक बार इन जगह पर जरुर जाएं. आइसलैंड का यह आइलैंड किसी रहस्यमय जगह से कम नहीं है। एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ से पहले इस आइलैंड का अस्तित्व ही नहीं था। इसी साल यहां पर पानी के अंदर एक ज्वालामुखी फटा और एक हज़ार नौ सौ सरसठ तक लगातार विस्फोट होते रहे। इस ज्वालामुखी के बंद होने पर यहां एक आइलैंड बाकी रह गया। अंटार्कटिका का टेलर ग्लेशियर पर जमी बर्फ में एक जगह ऐसी भी है, जहां से लाल रंग का झरना बहता है. इसे देखकर ऐसा लगता है कि उस झरने से पानी की जगह खून बेह रहा है. कनाडा में एक जगह है जिसका नाम मॉन्कटन है इस जगह को 'मैगनेटिक हिल' भी जाना जाता है यहां गाड़ी को चलाने के लिए उसे 'स्टार्ट' करने की जरूरत भी नहीं पड़ती. यहां की कुछ पहाड़ियां ऐसी हैं जहां यहां बंद गाड़ियां भी अपने आप स्टार्ट हो जाती हैं. यहां पर गाड़िया ढ़लान से उतरने की बजह पहाड़ियों पर उपर की ओर चढ़ती है.
है कि उसमे नैरेटर होते है, लेकिन जैसा कि हम पहले विचार कर चुके है, केवल नैरेटर या नैरेटरोके रहनेमे ही कोई रचना 'रूप' नही हो जाती । हाँ, कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो सकती है, जिनमे 'संगीत-रूपक' अपने नामकी सार्थकता सिद्ध कर सकता है। यदि किसी संगीतज्ञ अथवा कविके जीवन एन कृतियोपर कोई रूपक लिसना हो, तो उसके गीतोमे जीवनकी यथातथ्य वास्तविकता चित्रित हो सकती है । प्रश्न यह अवश्य उठता है कि जब 'मगीत-रूपक' नाम सार्थक नही हे, तो उसे क्या कहा जाय ? इस प्रश्नपर विचार करने के लिए हमें प्रचलित संगीत-रूपकोकी विषय-वस्तु एव प्रकारोपर विचार करना होगा । आजकल जो संगीत-रूपक लिखे जाते है, वे निम्नलिखित कोटियोमे आ सकते है (१) जो कल्पित कहानियोपर आधारित होते है, (२) जो कवियो और संगीतज्ञोके जीवनपर आधारित होते है, (३) जिनमें प्राकृतिक सौंदर्य चित्रित होता है, और (४) जिनमे पर्याप्त नाटकीयता भी रहती है। एक विशेषता तो इन सबमे रहती ही है कि इनमे संगीतकी प्रधानता रहती है । तो, पहली श्रेणोकी रचनाओको हम सरलतामे 'संगीत-चहानी' कह सकते हैं, और दूसरी श्रेणीकी रचनाओको 'सगीत-रूपक' । तीसरी श्रेणीकी रचनाएँ 'सगीत - चित्र' कही जा सकेगी, और चोयी श्रेणीकी रचनाएँ 'सगीत-नाटक' । इस प्रकार यदि रचनाओके स्वरूप-विधानका नामकरण किया जाय, तो इसमें वैज्ञानिकता आएगी । इन नामोके अर्थ भी स्वत स्पष्ट है। 'गीत-कहानी से लोग सरलतामे समझ सकेंगे कि यह ऐसी कहानी के लिए है, जिसमें मगीतकी प्रधानता है, उसी प्रकार अन्य नाम भी सहज बोधगम्य है । इन सब रचनाओं के लिए 'रूपक' के प्रसगमं कही गयी वात दुह्रायी जा सकती है कि इनका मुनगठित होना अनिवार्य है। ऐसा होनेगे ही ये श्रोताजीपर एक निश्चित प्रभाव छोड सांगी। आजाल बहुत से ऐसे 'मगीतसंगीत-रूपक रूपक' देखने को मिलते हैं, जिनके गीत विभिन्न परिस्थितियो एव वातापरणमे लिसे गये होते हैं, जिन्हें नैरेटरोकी उदितनोसे परस्पर जोड दिया जाता है। ऐसो रचनाजोके गीत विखरे विखरे से लगते है, और उनसे श्रोतापर एक निश्चित प्रभाव नहीं पड पाता । इसलिए सफल संगीतरचनाओके लिए अनिवार्य है कि वे सुसवद्ध और सुसगठित हो । ऐसी लगीत - रचनाओका भविष्य बहुत उज्ज्वल हे । इन नये स्वरूपदिवानोमे वन-तत्र गंधे हुए छोटे-छोटे गीत लोगोका मनोरजन भी करेगे और सगोतको लोकप्रिय भी बनाने में समर्थ हो सकेंगे ।
है कि उसमे नैरेटर होते है, लेकिन जैसा कि हम पहले विचार कर चुके है, केवल नैरेटर या नैरेटरोके रहनेमे ही कोई रचना 'रूप' नही हो जाती । हाँ, कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो सकती है, जिनमे 'संगीत-रूपक' अपने नामकी सार्थकता सिद्ध कर सकता है। यदि किसी संगीतज्ञ अथवा कविके जीवन एन कृतियोपर कोई रूपक लिसना हो, तो उसके गीतोमे जीवनकी यथातथ्य वास्तविकता चित्रित हो सकती है । प्रश्न यह अवश्य उठता है कि जब 'मगीत-रूपक' नाम सार्थक नही हे, तो उसे क्या कहा जाय ? इस प्रश्नपर विचार करने के लिए हमें प्रचलित संगीत-रूपकोकी विषय-वस्तु एव प्रकारोपर विचार करना होगा । आजकल जो संगीत-रूपक लिखे जाते है, वे निम्नलिखित कोटियोमे आ सकते है जो कल्पित कहानियोपर आधारित होते है, जो कवियो और संगीतज्ञोके जीवनपर आधारित होते है, जिनमें प्राकृतिक सौंदर्य चित्रित होता है, और जिनमे पर्याप्त नाटकीयता भी रहती है। एक विशेषता तो इन सबमे रहती ही है कि इनमे संगीतकी प्रधानता रहती है । तो, पहली श्रेणोकी रचनाओको हम सरलतामे 'संगीत-चहानी' कह सकते हैं, और दूसरी श्रेणीकी रचनाओको 'सगीत-रूपक' । तीसरी श्रेणीकी रचनाएँ 'सगीत - चित्र' कही जा सकेगी, और चोयी श्रेणीकी रचनाएँ 'सगीत-नाटक' । इस प्रकार यदि रचनाओके स्वरूप-विधानका नामकरण किया जाय, तो इसमें वैज्ञानिकता आएगी । इन नामोके अर्थ भी स्वत स्पष्ट है। 'गीत-कहानी से लोग सरलतामे समझ सकेंगे कि यह ऐसी कहानी के लिए है, जिसमें मगीतकी प्रधानता है, उसी प्रकार अन्य नाम भी सहज बोधगम्य है । इन सब रचनाओं के लिए 'रूपक' के प्रसगमं कही गयी वात दुह्रायी जा सकती है कि इनका मुनगठित होना अनिवार्य है। ऐसा होनेगे ही ये श्रोताजीपर एक निश्चित प्रभाव छोड सांगी। आजाल बहुत से ऐसे 'मगीतसंगीत-रूपक रूपक' देखने को मिलते हैं, जिनके गीत विभिन्न परिस्थितियो एव वातापरणमे लिसे गये होते हैं, जिन्हें नैरेटरोकी उदितनोसे परस्पर जोड दिया जाता है। ऐसो रचनाजोके गीत विखरे विखरे से लगते है, और उनसे श्रोतापर एक निश्चित प्रभाव नहीं पड पाता । इसलिए सफल संगीतरचनाओके लिए अनिवार्य है कि वे सुसवद्ध और सुसगठित हो । ऐसी लगीत - रचनाओका भविष्य बहुत उज्ज्वल हे । इन नये स्वरूपदिवानोमे वन-तत्र गंधे हुए छोटे-छोटे गीत लोगोका मनोरजन भी करेगे और सगोतको लोकप्रिय भी बनाने में समर्थ हो सकेंगे ।
( जन्म सं० १९०७ - अवसान सं० १९४१ ) भारतेन्दु हिन्दी के युग प्रवर्तक साहित्यकार थे । खड़ी बोली साहित्य और गद्य-युग का वास्तविक आरम्भ उन्हीं से होता है। उनका सर्वतोमुखी व्यक्तित्व काव्य, नाटक, निबन्ध, कथा, उपन्यास, इतिहास, आदि साहित्य की विभिन्न दिशाओं में क्रियाशील हुआ ! जिसका परिचय देना भी यहाँ कठिन है । अन्य क्षेत्रों में तो उन्होंने नवीन दृष्टिकोण को प्रतिष्ठिति किया किन्तु जहाँ तक कविता का सम्बन्ध है उनकी आत्मा पूर्णतया प्राचीन संस्कारों में आबद्ध थी और यह भी सत्य है कि उनकी आभ्यंतरिक भावाभिव्यक्ति का सर्वप्रधान माध्यम काव्य ही रहा । उनके कवि-हृदय में वैष्णव भक्ति-भावना और रीतिकाल की शृंगारिक प्रेमानुभूति दोनों संयुक्त रूप से निवास करती थीं । तुलसीदास की तरह भारतेन्दु ने भी अपने युग को सभी प्रचलित काव्य-शैलियों तथा भाषा रूपों में काव्य-रचना की। उनका कवि रूप विविध तत्त्वों से निर्मित है और स्वतन्त्र परिशीलन की अपेक्षा रखता है । रीतिकाव्य में वे मुख्यतया घनानन्द, ठाकुर और बोधा जैसे प्रेमी कवियों की परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं। यों उनकी रचनाओं पर देव, बिहारी, पद्माकर, द्विजदेव आदि का भी गहरा प्रभाव है । 'सुंदरी सिंदूर' नाम से देव के तथा 'सुंदरी तिलक' नाम से अपने समय तक के ब्रजभाषा कवियों के सरस एवं भावपूर्ण सवैयों का सुंदर संकलन उन्होंने प्रस्तुत किया जो उनकी विशिष्ट काव्य-रुचि का परिचायक है। रीतिकालीन शैली में रचे गये उनके कवित्त सवैयों का संकलन मुख्यतया 'प्रेममाधुरी' में मिलता है । कुछ 'कृष्णचरित', विनयप्रेमपचासा', और 'प्रेम-प्रलाप' जैसी मिश्रित प्रकार की रचनाओं में भी उपलब्ध होते हैं । 'सतसई सिंगार' नाम से बिहारी के कतिपय दोहों पर उन्होंने कुंडलियों का निर्माण किया' चंद्रावली' एक नाटिका होते हुए भी अनेक भावपूर्ण छंदों से आपूरित है। उसका प्रसिद्ध प्रारंभिक दोहा भारतेन्दु के कृष्णप्रेम की गंभीर अभिव्यक्ति करता हैभरित नेह नव नीर नित बरसत सुरस अथोर । जयति अपूरब घन कोऊ लखि नाचत मन मोर ।। भारतेन्दु वल्लभीय सम्प्रदाय के वैष्णव थे । अष्टछाप के कवियों की पदशैली
भारतेन्दु हिन्दी के युग प्रवर्तक साहित्यकार थे । खड़ी बोली साहित्य और गद्य-युग का वास्तविक आरम्भ उन्हीं से होता है। उनका सर्वतोमुखी व्यक्तित्व काव्य, नाटक, निबन्ध, कथा, उपन्यास, इतिहास, आदि साहित्य की विभिन्न दिशाओं में क्रियाशील हुआ ! जिसका परिचय देना भी यहाँ कठिन है । अन्य क्षेत्रों में तो उन्होंने नवीन दृष्टिकोण को प्रतिष्ठिति किया किन्तु जहाँ तक कविता का सम्बन्ध है उनकी आत्मा पूर्णतया प्राचीन संस्कारों में आबद्ध थी और यह भी सत्य है कि उनकी आभ्यंतरिक भावाभिव्यक्ति का सर्वप्रधान माध्यम काव्य ही रहा । उनके कवि-हृदय में वैष्णव भक्ति-भावना और रीतिकाल की शृंगारिक प्रेमानुभूति दोनों संयुक्त रूप से निवास करती थीं । तुलसीदास की तरह भारतेन्दु ने भी अपने युग को सभी प्रचलित काव्य-शैलियों तथा भाषा रूपों में काव्य-रचना की। उनका कवि रूप विविध तत्त्वों से निर्मित है और स्वतन्त्र परिशीलन की अपेक्षा रखता है । रीतिकाव्य में वे मुख्यतया घनानन्द, ठाकुर और बोधा जैसे प्रेमी कवियों की परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं। यों उनकी रचनाओं पर देव, बिहारी, पद्माकर, द्विजदेव आदि का भी गहरा प्रभाव है । 'सुंदरी सिंदूर' नाम से देव के तथा 'सुंदरी तिलक' नाम से अपने समय तक के ब्रजभाषा कवियों के सरस एवं भावपूर्ण सवैयों का सुंदर संकलन उन्होंने प्रस्तुत किया जो उनकी विशिष्ट काव्य-रुचि का परिचायक है। रीतिकालीन शैली में रचे गये उनके कवित्त सवैयों का संकलन मुख्यतया 'प्रेममाधुरी' में मिलता है । कुछ 'कृष्णचरित', विनयप्रेमपचासा', और 'प्रेम-प्रलाप' जैसी मिश्रित प्रकार की रचनाओं में भी उपलब्ध होते हैं । 'सतसई सिंगार' नाम से बिहारी के कतिपय दोहों पर उन्होंने कुंडलियों का निर्माण किया' चंद्रावली' एक नाटिका होते हुए भी अनेक भावपूर्ण छंदों से आपूरित है। उसका प्रसिद्ध प्रारंभिक दोहा भारतेन्दु के कृष्णप्रेम की गंभीर अभिव्यक्ति करता हैभरित नेह नव नीर नित बरसत सुरस अथोर । जयति अपूरब घन कोऊ लखि नाचत मन मोर ।। भारतेन्दु वल्लभीय सम्प्रदाय के वैष्णव थे । अष्टछाप के कवियों की पदशैली
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक स्कूल में मंगलवार (16 मई) को एक ऑन-ड्यूटी पुलिस कांस्टेबल की गोली लगने से एक छात्र की मौत हो गई और सात अन्य छात्राएं घायल हो गईं। यह घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की स्वात घाटी में लड़कियों के स्कूल की छुट्टी के बाद हुई जब छात्राएं घर जाने की तैयारी कर रही थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिला पुलिस अधिकारी शफीउल्लाह गंडापुर ने कहा कि आरोपी की पहचान कांस्टेबल आलम खान के रूप में हुई है और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. खैबर पख्तूनख्वा के एक जिला पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। मैं सभी को विश्वास दिलाता हूं कि दोषियों को सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। शफीउल्लाह गंडापुर ने बताया कि आरोपी सलामपुर इलाके का रहने वाला है और दो बार पुलिस बल से निलंबित हो चुका है. आलम खान को पिछले साल पुलिस विभाग में बहाल किया गया था और 3 महीने पहले सुरक्षा के लिए स्कूल के बाहर तैनात किया गया था। उन्होंने बताया कि घायलों को सैदु शरीफ टीचिंग अस्पताल ले जाया गया है और अस्पताल में आपात स्थिति लागू कर दी गयी है. हमले में घायल एक लड़की ने स्थानीय मीडिया को बताया कि जैसे ही वह स्कूल के गेट से बाहर निकली हमलावरों ने उसकी वैन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. सभी स्कूली बच्चे डर गए और चिल्लाने लगे जिसके बाद लोग जमा हो गए। गोलीबारी की घटना की सूचना मिलने के बाद, केपी महानिरीक्षक अख्तर हयात गंडापुर ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया, जबकि मलकंद क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी नासिर महमूद दस्ती, डीपीओ गंडापुर और स्वात के उपायुक्त इफरानुल्लाह वजीर घायलों का हालचाल लेने अस्पताल पहुंचे। स्वात पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि आरपीओ मलकंद ने अस्पताल के अधिकारियों को घायल लड़कियों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक स्कूल में मंगलवार को एक ऑन-ड्यूटी पुलिस कांस्टेबल की गोली लगने से एक छात्र की मौत हो गई और सात अन्य छात्राएं घायल हो गईं। यह घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की स्वात घाटी में लड़कियों के स्कूल की छुट्टी के बाद हुई जब छात्राएं घर जाने की तैयारी कर रही थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिला पुलिस अधिकारी शफीउल्लाह गंडापुर ने कहा कि आरोपी की पहचान कांस्टेबल आलम खान के रूप में हुई है और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. खैबर पख्तूनख्वा के एक जिला पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। मैं सभी को विश्वास दिलाता हूं कि दोषियों को सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। शफीउल्लाह गंडापुर ने बताया कि आरोपी सलामपुर इलाके का रहने वाला है और दो बार पुलिस बल से निलंबित हो चुका है. आलम खान को पिछले साल पुलिस विभाग में बहाल किया गया था और तीन महीने पहले सुरक्षा के लिए स्कूल के बाहर तैनात किया गया था। उन्होंने बताया कि घायलों को सैदु शरीफ टीचिंग अस्पताल ले जाया गया है और अस्पताल में आपात स्थिति लागू कर दी गयी है. हमले में घायल एक लड़की ने स्थानीय मीडिया को बताया कि जैसे ही वह स्कूल के गेट से बाहर निकली हमलावरों ने उसकी वैन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. सभी स्कूली बच्चे डर गए और चिल्लाने लगे जिसके बाद लोग जमा हो गए। गोलीबारी की घटना की सूचना मिलने के बाद, केपी महानिरीक्षक अख्तर हयात गंडापुर ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया, जबकि मलकंद क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी नासिर महमूद दस्ती, डीपीओ गंडापुर और स्वात के उपायुक्त इफरानुल्लाह वजीर घायलों का हालचाल लेने अस्पताल पहुंचे। स्वात पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि आरपीओ मलकंद ने अस्पताल के अधिकारियों को घायल लड़कियों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम द्वारा पगारा रोड पर अतिक्रमण हटाने कार्रवाई के बाद शनिवार को पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने पत्रकार वार्ता आयोजित की। अतिक्रमण हटाने के बाद श्री यादव के पुत्र व भाजपा नेता सुधीर यादव के खिलाफ पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज की गई है। इसको लेकर पूर्व सांसद श्री यादव ने कहा कि राजनीतिक द्वेषवश, झूठे तथ्य एकत्र कर अतिक्रमण की अवैधानिक कार्रवाई की गई है। मेरे पुत्र को राजनीतिक द्वेषवश षडयंत्रपूर्वक फंसाया जा रहा है। यह षडयंत्र किसके द्वारा रचाए जाने के सवाल पर पूर्व सांसद बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण की कार्रवाई की जांच निष्पक्ष होना चाहिए। श्री यादव ने कहा कि मेरी एवं मेरे परिवार पर अतिक्रमण संबंधी झूठी व अवैधानिक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद हम न्यायालय में इस बात को रख मानहानि का दावा पेश करेंगें। श्री यादव ने कहा कि मेरे पुत्र सुधीर यादव द्वारा मौजा सागर खास पटवारी हलका नंबर 65 में खसरा नंबर 216/19 रकबा 0. 057 हेक्टेयर। ( 62 बाय 100 ) 6200 वर्ग फीट भूमि पंजीकृत विक्रय पत्र दिनांक 09. 08. 2009 को सिद्देलाल उर्फ कन्छेदी पिता निरपत जाटव से खरीदी की है। इस पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरा विक्रय पत्र हरेंद्र पिता लीलाधर खटीक से दिनांक 08. 02. 2011 को खसरा नंबर 216/24 रकबा 0. 012 हे . ( 1500 वर्ग फीट भूमि) खरीदी की गई है। दोनों विक्रय पत्र राजस्व विभाग एवं निगम के अभिलेखों में दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पुत्र द्वारा कुल 7700 वर्ग फीट दो विक्रय पत्रों के माध्यम से खरीदी की गई है। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस की भूमि पर अतिक्रमण नहीं है। मेरे पुत्र सुधीर यादव की अतिक्रमण के संबंध लोकायुक्त में पूर्व भी शिकायत की गई थी। इसकी जांच एवं सीमांकन 10. 12. 2011 को नगर निगम सागर एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर सीमांकन कर जांच प्रतिवेदन दिया गया। इसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि स्लाटर हाउस की भूमि पर अतिक्रमण नहीं पाया गया था। सीमांकन दिनांक से आज दिनांक तक मेरी स्वयं की भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया। स्लाटर हाउस की भूमि खसरा नंबर 216/2 , 217/2 रकबा क्रमश थ 0015, 0. 006 मौजा सागर खास एवं ललई टौरी में स्थित भूमि खसरा नंबर 60/ 2,61 / 2 रकबा क्रमशः 0. 089 , 0. 121 कुल रकबा 0. 210 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन नगर पालिक निगम के की गठित सीमांकन दल द्वारा दिनांक 10/12/2011 को सीमांकन किया गया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रतिवेदन की भूमि पर अशोक उपयंत्री एवं राजस्व विभाग दोनों विभागों भाई पिता मणीभाई का कब्जा है। शेष भूमि खाली है। मौजा सागर खास की स्लाटर हाउस की भूमि खसरा नंबर 216 / 2 रकबा 005 अंश भाग पर रास्ता बनी है। खसरा नंबर 217/2 रकबा 006 पर खुरई मार्ग से पगारा मार्ग बना है। सुधीर यादव का वर्तमान में कोई अवैध निर्माण व अतिक्रमण नहीं किया गया है।
सागर । नगर निगम द्वारा पगारा रोड पर अतिक्रमण हटाने कार्रवाई के बाद शनिवार को पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने पत्रकार वार्ता आयोजित की। अतिक्रमण हटाने के बाद श्री यादव के पुत्र व भाजपा नेता सुधीर यादव के खिलाफ पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज की गई है। इसको लेकर पूर्व सांसद श्री यादव ने कहा कि राजनीतिक द्वेषवश, झूठे तथ्य एकत्र कर अतिक्रमण की अवैधानिक कार्रवाई की गई है। मेरे पुत्र को राजनीतिक द्वेषवश षडयंत्रपूर्वक फंसाया जा रहा है। यह षडयंत्र किसके द्वारा रचाए जाने के सवाल पर पूर्व सांसद बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण की कार्रवाई की जांच निष्पक्ष होना चाहिए। श्री यादव ने कहा कि मेरी एवं मेरे परिवार पर अतिक्रमण संबंधी झूठी व अवैधानिक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद हम न्यायालय में इस बात को रख मानहानि का दावा पेश करेंगें। श्री यादव ने कहा कि मेरे पुत्र सुधीर यादव द्वारा मौजा सागर खास पटवारी हलका नंबर पैंसठ में खसरा नंबर दो सौ सोलह/उन्नीस रकबा शून्य. सत्तावन हेक्टेयर। छः हज़ार दो सौ वर्ग फीट भूमि पंजीकृत विक्रय पत्र दिनांक नौ. आठ. दो हज़ार नौ को सिद्देलाल उर्फ कन्छेदी पिता निरपत जाटव से खरीदी की है। इस पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरा विक्रय पत्र हरेंद्र पिता लीलाधर खटीक से दिनांक आठ. दो. दो हज़ार ग्यारह को खसरा नंबर दो सौ सोलह/चौबीस रकबा शून्य. बारह हे . खरीदी की गई है। दोनों विक्रय पत्र राजस्व विभाग एवं निगम के अभिलेखों में दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पुत्र द्वारा कुल सात हज़ार सात सौ वर्ग फीट दो विक्रय पत्रों के माध्यम से खरीदी की गई है। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस की भूमि पर अतिक्रमण नहीं है। मेरे पुत्र सुधीर यादव की अतिक्रमण के संबंध लोकायुक्त में पूर्व भी शिकायत की गई थी। इसकी जांच एवं सीमांकन दस. बारह. दो हज़ार ग्यारह को नगर निगम सागर एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर सीमांकन कर जांच प्रतिवेदन दिया गया। इसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि स्लाटर हाउस की भूमि पर अतिक्रमण नहीं पाया गया था। सीमांकन दिनांक से आज दिनांक तक मेरी स्वयं की भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया। स्लाटर हाउस की भूमि खसरा नंबर दो सौ सोलह/दो , दो सौ सत्रह/दो रकबा क्रमश थ पंद्रह, शून्य. छः मौजा सागर खास एवं ललई टौरी में स्थित भूमि खसरा नंबर साठ/ दो,इकसठ / दो रकबा क्रमशः शून्य. नवासी , शून्य. एक सौ इक्कीस कुल रकबा शून्य. दो सौ दस हेक्टेयर भूमि का सीमांकन नगर पालिक निगम के की गठित सीमांकन दल द्वारा दिनांक दस दिसंबर दो हज़ार ग्यारह को सीमांकन किया गया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रतिवेदन की भूमि पर अशोक उपयंत्री एवं राजस्व विभाग दोनों विभागों भाई पिता मणीभाई का कब्जा है। शेष भूमि खाली है। मौजा सागर खास की स्लाटर हाउस की भूमि खसरा नंबर दो सौ सोलह / दो रकबा पाँच अंश भाग पर रास्ता बनी है। खसरा नंबर दो सौ सत्रह/दो रकबा छः पर खुरई मार्ग से पगारा मार्ग बना है। सुधीर यादव का वर्तमान में कोई अवैध निर्माण व अतिक्रमण नहीं किया गया है।
DESK : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले केंद्र की मोदी सरकार गरीबों को लुभाने के लिए अब अपना पिटारा खुलने वाली है. केंद्र सरकार ने अपने खजाने से अब गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को उज्जवला योजना के तहत में फायदे देने की तैयारी कर ली है. ऐसे परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उज्जवला योजना के तहत फ्री दी जाती है. लेकिन अब इसे एक बार फिर से लांच करने की तैयारी है. खबर यह है कि उज्जवला योजना के लाभार्थियों को अब मुफ्त कनेक्शन के साथ साथ गैस स्टोर और भरा हुआ सिलेंडर भी मुफ्त मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उत्तर प्रदेश में उज्ज्वला योजना 2. 0 की शुरुआत करेंगे. पीएम मोदी इस योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से करने जा रहे हैं. उज्वला 2. 0 के तहत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन के साथ-साथ स्टोर और भरा हुआ सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा. आपको बता दें कि अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव है. केंद्र की उज्जवला योजना गरीबों के बीच काफी लोकप्रिय रही है. लेकिन गैस स्टोव और भरा हुआ सिलेंडर इस योजना के लाभार्थियों को मुक्त नहीं मिलता. लिहाजा अब सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए यह दोनों भी मुफ्त मुहैया कराने का फैसला किया है. उज्जवला योजना के तहत सरकार एलपीजी कनेक्शन के लिए 1600 रुपए की डिपॉजिट मनी की राहत आर्थिक सहायता के तौर पर लाभार्थियों को देती है. उज्जवला योजना 2. 0 के तहत केंद्र सरकार इसी वित्तीय वर्ष में 10 लाख गैस कनेक्शन गरीबों को मुफ्त बांटेगी. आपको याद दिलाते हैं कि उज्ज्वला योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने की थी. 1 मई 2016 को उज्जवला 1. 0 लांच किया गया था और अब एक बार फिर इसके रीलॉन्चिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है. मोदी सरकार को उम्मीद है कि बीजेपी को आगामी चुनाव में इस योजना का फायदा मिलेगा.
DESK : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले केंद्र की मोदी सरकार गरीबों को लुभाने के लिए अब अपना पिटारा खुलने वाली है. केंद्र सरकार ने अपने खजाने से अब गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को उज्जवला योजना के तहत में फायदे देने की तैयारी कर ली है. ऐसे परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उज्जवला योजना के तहत फ्री दी जाती है. लेकिन अब इसे एक बार फिर से लांच करने की तैयारी है. खबर यह है कि उज्जवला योजना के लाभार्थियों को अब मुफ्त कनेक्शन के साथ साथ गैस स्टोर और भरा हुआ सिलेंडर भी मुफ्त मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उत्तर प्रदेश में उज्ज्वला योजना दो. शून्य की शुरुआत करेंगे. पीएम मोदी इस योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से करने जा रहे हैं. उज्वला दो. शून्य के तहत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन के साथ-साथ स्टोर और भरा हुआ सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा. आपको बता दें कि अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव है. केंद्र की उज्जवला योजना गरीबों के बीच काफी लोकप्रिय रही है. लेकिन गैस स्टोव और भरा हुआ सिलेंडर इस योजना के लाभार्थियों को मुक्त नहीं मिलता. लिहाजा अब सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए यह दोनों भी मुफ्त मुहैया कराने का फैसला किया है. उज्जवला योजना के तहत सरकार एलपीजी कनेक्शन के लिए एक हज़ार छः सौ रुपयापए की डिपॉजिट मनी की राहत आर्थिक सहायता के तौर पर लाभार्थियों को देती है. उज्जवला योजना दो. शून्य के तहत केंद्र सरकार इसी वित्तीय वर्ष में दस लाख गैस कनेक्शन गरीबों को मुफ्त बांटेगी. आपको याद दिलाते हैं कि उज्ज्वला योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने की थी. एक मई दो हज़ार सोलह को उज्जवला एक. शून्य लांच किया गया था और अब एक बार फिर इसके रीलॉन्चिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है. मोदी सरकार को उम्मीद है कि बीजेपी को आगामी चुनाव में इस योजना का फायदा मिलेगा.
India vs England Test Series Breaks Viewership Record in last 5 years of Test Cricket history: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही द्विपक्षीय श्रृंंखला का आगाज 4 मैचोंं की टेस्ट सीरीज के साथ हुआ था जिसे भारतीय टीम ने 3-1 से जीतने का काम किया। इस जीत के साथ ही भारतीय क्रिकेट टीम ने जून में होने वाले आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने का काम भी कर लिया है। इस ऐतिहासिक सीरीज जीत के साथ ही इस सीरीज में टेस्ट व्यूअरशिप का एक और बड़ा रिकॉर्ड कायम कर लिया है और पिछले साल में खेली गई टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज बन गई है। स्टार स्पोर्टस की ओर से जारी की गई व्यूअरशिप लिस्ट के अनुसार भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई सीरीज को 13 लाख एवरेज मिनट ऑडियंस (एएमए व्यूअरशिप) दर्ज किया गया है। इस सीरीज की व्यूअरशिप बताती है कि टेस्ट सीरीज की लोकप्रियता बढ़ी है। इतना ही नहीं व्यूअरशिप का यह आंकड़ा बताता है कि टेस्ट चैम्पियनशिप को लेकर आईसीसी की ओर से किया गया नया आविष्कार कामयाब रहा है। भारत-इंग्लैंड के बीच खेली गई इस सीरीज के दौरान टेस्ट चैम्पियनशिप को देखने वाले दर्शकों की संख्या में 10 करोड़ 30 लाख की वृद्धि भी हुई है। स्टार स्पोर्टस के इंडिया हेड संजय गुप्ता ने व्यूअरशिप रिपोर्ट पर बात करते हुए कहा कि भारत-इंग्लैंड के बीच हुई टेस्ट सीरीज में दर्शकों की ओर से मिले रिस्पोन्स से हम काफी खुश हैं। उन्होंने आगे कहा,'भारत में लगभग एक साल बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के लिये लगातार बदल रहे कठिन आंकड़ों की वजह से दर्शकों की संंख्या में हमें वृद्धि देखने को मिली है। हम इस लय को वनडे सीरीज में बरकरार रखना चाहेंगे। ' गौरतलब है कि स्टार स्पोर्टस इस सीरीज का प्रसारण 4 भाषाओं में करता है, स्थानीय भाषाओं में उपलब्धता की वजह से व्यूअरशिप में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। वनडे सीरीज के बाद आईपीएल 2021 और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल मुकाबला भी स्टार स्पोर्टस पर प्रसारित किया जाना है। आपको बता दें कि भारत की ओर से इस टेस्ट सीरीज में रविचंद्रन अश्विन, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत और अक्षर पटेल ने शानदार प्रदर्शन किया और 3-1 से जीत कर विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने का काम किया। अब भारत को फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भिड़ना है जिसकी शुरुआत 18 जून से होनी है।
India vs England Test Series Breaks Viewership Record in last पाँच years of Test Cricket history: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही द्विपक्षीय श्रृंंखला का आगाज चार मैचोंं की टेस्ट सीरीज के साथ हुआ था जिसे भारतीय टीम ने तीन-एक से जीतने का काम किया। इस जीत के साथ ही भारतीय क्रिकेट टीम ने जून में होने वाले आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने का काम भी कर लिया है। इस ऐतिहासिक सीरीज जीत के साथ ही इस सीरीज में टेस्ट व्यूअरशिप का एक और बड़ा रिकॉर्ड कायम कर लिया है और पिछले साल में खेली गई टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज बन गई है। स्टार स्पोर्टस की ओर से जारी की गई व्यूअरशिप लिस्ट के अनुसार भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई सीरीज को तेरह लाख एवरेज मिनट ऑडियंस दर्ज किया गया है। इस सीरीज की व्यूअरशिप बताती है कि टेस्ट सीरीज की लोकप्रियता बढ़ी है। इतना ही नहीं व्यूअरशिप का यह आंकड़ा बताता है कि टेस्ट चैम्पियनशिप को लेकर आईसीसी की ओर से किया गया नया आविष्कार कामयाब रहा है। भारत-इंग्लैंड के बीच खेली गई इस सीरीज के दौरान टेस्ट चैम्पियनशिप को देखने वाले दर्शकों की संख्या में दस करोड़ तीस लाख की वृद्धि भी हुई है। स्टार स्पोर्टस के इंडिया हेड संजय गुप्ता ने व्यूअरशिप रिपोर्ट पर बात करते हुए कहा कि भारत-इंग्लैंड के बीच हुई टेस्ट सीरीज में दर्शकों की ओर से मिले रिस्पोन्स से हम काफी खुश हैं। उन्होंने आगे कहा,'भारत में लगभग एक साल बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के लिये लगातार बदल रहे कठिन आंकड़ों की वजह से दर्शकों की संंख्या में हमें वृद्धि देखने को मिली है। हम इस लय को वनडे सीरीज में बरकरार रखना चाहेंगे। ' गौरतलब है कि स्टार स्पोर्टस इस सीरीज का प्रसारण चार भाषाओं में करता है, स्थानीय भाषाओं में उपलब्धता की वजह से व्यूअरशिप में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। वनडे सीरीज के बाद आईपीएल दो हज़ार इक्कीस और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल मुकाबला भी स्टार स्पोर्टस पर प्रसारित किया जाना है। आपको बता दें कि भारत की ओर से इस टेस्ट सीरीज में रविचंद्रन अश्विन, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत और अक्षर पटेल ने शानदार प्रदर्शन किया और तीन-एक से जीत कर विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने का काम किया। अब भारत को फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भिड़ना है जिसकी शुरुआत अट्ठारह जून से होनी है।
जिला ललितपुर, ब्लाक महरौनी इते मौसमी बीमारी को प्रकोप बढ़त ही जा रओ आदमी गांव में इलाज करवा करवा के थक गये अब महरौनी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र जा रए सब आदमी इलाज कराबे के लाने। मुन्नालाल ने बताई के हमे मामा को इलाज करवावे आय उन्हें खांसी आ रही दो महीना से हमने इलाज मुड़ारा महरौनी ललितपुर सब जघा करवा लओ आराम ही नई हो रओ। प्यारे लाल ने बताई के हमे खांसी आ रही पंद्रह दिन से इलाज करवाबे आय महरौनी स्वास्थ केंद्र में। विनीता ने बताई के चार पांच दिन से बुखार आ रओ डॉक्टर को दिखाओ सो डॉक्टर ने मलेरिया और पीलिया बताओ अब बई की दवाई दई। मालती ने बताई के बुखार हे पूरे शरीर में दर्द हे हाथ पांव पिरा इलाज भी करवा लओ कछु आराम नई हो रओ। नाथू लाल ने बताई के हमे स्वास की बीमारी हे। हमने ललितपुर, टीकमगढ, नौ गांव, ईशागढ सब जघा करवा लओ कोनऊ आराम नई हो रओ हमे।
जिला ललितपुर, ब्लाक महरौनी इते मौसमी बीमारी को प्रकोप बढ़त ही जा रओ आदमी गांव में इलाज करवा करवा के थक गये अब महरौनी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र जा रए सब आदमी इलाज कराबे के लाने। मुन्नालाल ने बताई के हमे मामा को इलाज करवावे आय उन्हें खांसी आ रही दो महीना से हमने इलाज मुड़ारा महरौनी ललितपुर सब जघा करवा लओ आराम ही नई हो रओ। प्यारे लाल ने बताई के हमे खांसी आ रही पंद्रह दिन से इलाज करवाबे आय महरौनी स्वास्थ केंद्र में। विनीता ने बताई के चार पांच दिन से बुखार आ रओ डॉक्टर को दिखाओ सो डॉक्टर ने मलेरिया और पीलिया बताओ अब बई की दवाई दई। मालती ने बताई के बुखार हे पूरे शरीर में दर्द हे हाथ पांव पिरा इलाज भी करवा लओ कछु आराम नई हो रओ। नाथू लाल ने बताई के हमे स्वास की बीमारी हे। हमने ललितपुर, टीकमगढ, नौ गांव, ईशागढ सब जघा करवा लओ कोनऊ आराम नई हो रओ हमे।
जीरकपुर, 13 फरवरी (निस) डेराबस्सी के हलका विधायक एवं शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी एनके शर्मा ने कहा कि पंजाब में अकाली दल की सरकार के सत्ता में आने पर जीरकपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा सीवरेज सिस्टम का विस्तार किया जायेगा। पिछले पांच साल के दौरान यहां इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। श्री शर्मा ने आज पालिका बाजार, बसंत विहार, ग्रीन सिटी, लक्ष्मी एनक्लेव, विक्टोरिया हाइट, त्रिशला होम, सावित्री ग्रीन-1, बिशनपुरा, सुखना कॉलोनी, जयपुरिया एनक्लेव, पाम कोर्ट निर्मल छाया और सूर्य टावर सोसायटियों में चुनाव प्रचार किया। इस अवसर पर बलटाना में गढ़वाल सभा ने एनके शर्मा को समर्थन देने का ऐलान किया। जीरकपुर क्षेत्र में इससे पहले कई संगठनों द्वारा शर्मा को समर्थन दिया जा चुका है। डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजीव खन्ना ने हलका विधायक एनके शर्मा को विकास के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपना और अपने चहेतों का ही विकास किया है। आज तक हलके के विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। संजीव खन्ना आज चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पीरमुछल्ला की विक्टोरिया हाइट्स सोसायटी में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीरकपुर नगर परिषद में लंबे समय तक एनके शर्मा का कब्जा रहा है।
जीरकपुर, तेरह फरवरी डेराबस्सी के हलका विधायक एवं शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी एनके शर्मा ने कहा कि पंजाब में अकाली दल की सरकार के सत्ता में आने पर जीरकपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा सीवरेज सिस्टम का विस्तार किया जायेगा। पिछले पांच साल के दौरान यहां इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। श्री शर्मा ने आज पालिका बाजार, बसंत विहार, ग्रीन सिटी, लक्ष्मी एनक्लेव, विक्टोरिया हाइट, त्रिशला होम, सावित्री ग्रीन-एक, बिशनपुरा, सुखना कॉलोनी, जयपुरिया एनक्लेव, पाम कोर्ट निर्मल छाया और सूर्य टावर सोसायटियों में चुनाव प्रचार किया। इस अवसर पर बलटाना में गढ़वाल सभा ने एनके शर्मा को समर्थन देने का ऐलान किया। जीरकपुर क्षेत्र में इससे पहले कई संगठनों द्वारा शर्मा को समर्थन दिया जा चुका है। डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजीव खन्ना ने हलका विधायक एनके शर्मा को विकास के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपना और अपने चहेतों का ही विकास किया है। आज तक हलके के विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। संजीव खन्ना आज चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पीरमुछल्ला की विक्टोरिया हाइट्स सोसायटी में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीरकपुर नगर परिषद में लंबे समय तक एनके शर्मा का कब्जा रहा है।
NAUGACHHIA : नवगछिया पुलिस जिला के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवटोलिया सुदन टोला में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने से 4 घर जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि घर में 2 बकरी भी जलकर राख हो गई हैं। घर की महिलाओं नें बताया की आगजनी के बाद खाने के लिए एक अन्न का दाना भी उनके पास नहीं बचा है। बताया जा रहा है की सुग्रीव मंडल, अंगद मंडल, रंजीत मंडल, माखन मंडल के घर में आगजनी की घटना हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया की बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगने से 4 घर जलकर राख हो गए। बताया जा रहा है कि सपरिवार मकई काटने के लिए अपने खेत गए हुए थे शाम करीबन 4 बजे के लगभग बिजली के शॉर्ट सर्किट से घर में आग लगी आग लगने के बाद एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे घर तक आग फैलती गई। जिससे 2 सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। सिलेंडर ब्लास्ट होने की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों में भगदड़ मच गई आग लगने से घर में रखें लगभग 6 लाख की क्षति बताई जा रही है।
NAUGACHHIA : नवगछिया पुलिस जिला के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवटोलिया सुदन टोला में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने से चार घर जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि घर में दो बकरी भी जलकर राख हो गई हैं। घर की महिलाओं नें बताया की आगजनी के बाद खाने के लिए एक अन्न का दाना भी उनके पास नहीं बचा है। बताया जा रहा है की सुग्रीव मंडल, अंगद मंडल, रंजीत मंडल, माखन मंडल के घर में आगजनी की घटना हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया की बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगने से चार घर जलकर राख हो गए। बताया जा रहा है कि सपरिवार मकई काटने के लिए अपने खेत गए हुए थे शाम करीबन चार बजे के लगभग बिजली के शॉर्ट सर्किट से घर में आग लगी आग लगने के बाद एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे घर तक आग फैलती गई। जिससे दो सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। सिलेंडर ब्लास्ट होने की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों में भगदड़ मच गई आग लगने से घर में रखें लगभग छः लाख की क्षति बताई जा रही है।
जारी रही। ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन् १८३५ ई० तक इसे जारी रक्खा और प्रचलित अँग्रेजी सिक्के का भी इसी पर निर्धार हुआ । शेरशाह के समय का चाँदी का रुपया जिसक के १८० ग्रेन तोल है और जिसमें १६५ ग्रेन सरी चाँदी है, शाय मूल्य में प्रचलित रूपप्प के बराबर ही है। उस पर नागरी लिपि में बादशाह का नाम तथा सामान्य अरबी लेख अंकित है। अकबरी सिर्फ ~~ अकबर ने पहले तो शरेशाह के ढंग पर सिके बनाए परंतु तीसचं वर्ष अर्थात् सन् १५८४ ई० में उसने अपने ईश्वरीय मत का सिक्कों में उल्लेख किया। उसके बाद जितने सिक्के बने, सब में ईश्वरीय संवत् दिया हुआ है। इस संवत का प्रथम वर्ष फ़रवरी सन् १५५६ ई० से प्रारंभ होता है। अकबर ने अरबी महीनों के नाम की जगह फ़ारसी महीनों के नाम रक्खे। बहुत से सिक्कों में 'अल्लाह अकबर' मुद्रित है। इसके दो अर्थ है- या तो अल्लाहो ( ईश्वर ) घड़ा है, या अकबर अल्लाह ( ईश्वर ) हैं। अकबर ने शायद यह नाम इस लिये चुना था कि कुछ गिने चुने लोगों को जो उसके मत के भेदों और गुप्त रहस्यों से परिचित थे, दोनों अर्थों का बोध हो । जहाँगीर तथा उसके उत्तराधिकारियों के सिकउहाँगीर के सिक्के सुंदरता तथा अन्य अनेक विलक्षण यातों के कारण प्रसिद्ध हैं। हिंदुस्तान में केवल यही एक ऐसा मुसल मान वादशाह हुआ जिसने सिक्कों पर अपना चित्र बनवाया । इसके बाद इसके बेटे शाहजहाँ ने इस लोकाचार विरुद्ध रीति का परित्याग किया और चाँदी सोने के बहुत से सिक्क यनवाए । कट्टर मुसलमान श्रीरंगज़ेय के सिक्को निस्संदेह मुसलमान धर्मानुकूल है। उसके निर्बल उत्तराधिकारियों का मुद्रा विषयक इतिहास इस कारण से प्रसिद्ध है कि यद्यपि उनके राज्य में बड़ी अवनति श्रोर अशांति फैल रही थी, तथापि सरकारी सिक्कों का वज़न तथा खरापन ज्यों का त्यों चना रहा। उनमें कोई त्रुटि नहीं आई। धीरे धीरे ये ही सिक्के ऍग्लो-इंडियन हो गए। कंपनी के सिक-ईस्ट इंडिया कंपनी बहुत दिनों तक छिपे तौर पर बादशाही सिक्कों का अनुकरण करती रही, अंत में उद्योग करने पर जनवरी सन् १७१७ ई० में उसे बंबई में सिक्का बनाने की नियमानुसार आशा मिल गई । सन् १७४२ ई० में आरफट के रुपयों की नकल करने की भी इजाज़त मिल गई और सन् १७५७ ई० में कंपनी की टकसाल फलकत्ते में स्थापित हो गई। परंतु सन् १८३५-३६ के नियमानुसार यह असंतोषजनक रोति भी जाती रही। कंपनी ने मुग़ल बादशाह के नाम के स्थान में विलियम चतुर्थ को मूर्ति का अपना ख़ास अँग्रेज़ी सिक्का चलाया और पुराने सय सिक्कों के रद्द करने का हुकुम दे दिया। सन् १८३५ ई० से हिंदुस्तानी रुपया अँग्रेज़ी राज्य के रुपए का एक अंग हो गया । (३) दक्षिणीय हिंदुस्तान । दक्षिणीय हिंदुस्तान के सिक-दक्षिणीय हिंदुस्तान के सिक्कों में उत्तरीय हिंदुस्तान की अपेक्षा परिश्रम तो अधिक होता है, परंतु लाभ फम है। द्राविड़ देशों का राजनैतिक इतिहास प्राप्त है, वास्तविक पुरातन सिक्के बहुत ही कम हैं और पीछे के सिक्कों से भी इतिहासकारों को प्राचीन फाल का इतिहास मालूम करने में कुछ सहायता नहीं मिलती। यहाँ के सिक्के प्रायः बहुत ही छोटे हैं। कोई कोई तोल में दो ग्रेन से भी कम हैं। जो चित्र उन पर बने हुए हैं वे भद्दे हैं और साफ़ दिसलाई नहीं देते। या तो उन पर कुछ भी लिखा हुआ नहीं है या इतना थोड़ा लिखा हुआ है कि उससे कुछ काम नहीं चल सकता। कुछ बाद के मुसलमानी सिक्कों को छोड़ कर शेप में तारीख़ भी नहीं है। दक्षिण में प्राचीन सिको के अभाव का एक कारण यह भी है कि उत्तर से अनेक लुटेरों ने दक्षिण में चढ़ाइयाँ कीं और जो कुछ उन्हें मिल सका वे सब लूट कर ले गए। दोनों शलाका रूप के उप्पेदार सिक्के तो उत्तर दक्षिण, जगहा में प्रचलित थे, परंतु ऐसा जान पड़ता है कि प्राचीन ढले हुए सिक दक्षिण में नहीं थे। प्राचीन समय के उप्पे के बने हुए चाँदी के सिक्को बहुत ही कम हैं और जो है वे किसी काम के नहीं हैं। ऐतिहासिक समय में दक्षिण में चाँदी के स्थान में सोने का सिक्का प्रचलित था। सोने का कय प्रचार और कैसे हुआ, यह मालूम नहीं है। जहाँ तक अनुमान किया जाता है सोने की खानों के मिल जाने से चॉदी के स्थान में सोने का सिक्का जारी किया गया । सिक्कों के तोल का परिमाणउत्तरीय हिंदुस्तान के समान दक्षिणीय हिंदुस्तान में भी सिकोका तोल रती के परिमाण पर निर्भर था जो प्रायः उत्तर में १८० ग्रेन के बराबर माना गया है। पुरान वा टप्पेदार चॉदी का सिक्का बत्तीस रतियाँ के वरावर तोल में होता था । दक्षिणी लोग कालंजू तथा मंजादी के बीजों को काम में लाते थे । कालजू तोल में ५० ग्रेन के करीव था और मंजादी कालंजू का दसवां हिस्सा अर्थात् ५ मेन के बराबर था । इसके अनुसार पुरान और कालंजू कुरोब करीब तोल में बराबर थे। बाद के पोन, होन, बराह, वा, पैगोड़ा सिक्कों की तोल ५२ प्रेन के करीब थी और छोटे सिके बड़े सिक्कों के १० भाग के बराबर थे। चालुक्य सिक्कों पर सुअर की आकृति बनी रहती थी, इसी कारण से उनको बराह (सुअर) कहते थे । दक्षिण के इस विलक्षण सोने के सिकेको सर्वत्र इसी नाम से पुकारते हैं। युरोप के लोग इसको पैगोडा कहने लगे। यह शब्द भगवती या देवी का अपभ्रंश माना गया है । ५- हिंदुस्तान का वास्तु विद्या । परिभाषा - इस विद्या से केवल किसी प्रकार के मकान वगैरह बनाने का ही तात्पर्य नहीं है, किंतु इसकी परिभाषा इस प्रकार है कि ऐसी उत्तम विद्या जिसके द्वारा फाट, पापाणचा अन्य किसी वस्तु की सुंदर अलंकारिक इमारतें चनाई जाँय । अतपय इसमें और साधारण इमारतों के बनाने चा इंजीनियरिंग में भेद है। लकड़ी की प्रारंभिक इमारतें यह यात सर्वमान्य है कि प्रारंभ में वरमा, चीन, जापान के समान हिंदुस्तान में मी लकड़ी ही हर एक काम में लाई जाती थी। यदि ईंट या पत्थर लगाया भी जाता था, पर यह नीयों के भरने वा इंजीनि यरी वगैरह के काम में ही लगाया जाता था। ई० सन् से पायीं शताब्दी पूर्व के अंत तक भी भेगास्थनीज़ ने लिया है कि चंद्रगुत की राजधानी पाटलीपुत्र के पर्व तरफ लकड़ी की दीवार थी और उसमें तीरों के चान के लिये छेद बने हुए थे। जय राजधानी की रक्षा की दीवार से की जाती थी तो इस बात के मानने में तनिक भी संकोच नहीं हो सकता कि उस समय की इमारतें विलकुल लकड़ी की थी। गर्म देशों में धार्मिक या माइट मान के लिये पत्थर की अपेक्षा लकड़ी अधिक लाभकारी है। पत्र का चाई कभी चलन हुआ हो, परंतु हिंदू लोग बराबर पहले जैसी इमारतें बनाते रहे और वही ढंग उन्होंने जारी रक्खा । इससे ही ज्ञात होता है कि पहले सर्वत्र लकड़ी का प्रचार था । लकड़ी बहुत दिनों तक नहीं रहती, जल्दी नष्ट हो जाती है । इसी कारण से आजकल लकड़ी की इमारतें देखने में नहीं श्रीं । प्रायः सय नष्ट भ्रष्ट हो गई हैं। इसमें संदेह नहीं कि प्राचीन तत्ववे ताओं ने कुछ स्मारक स्तूपों को ई० सन् से चौथी शताब्दी के पूर्व से भी पहले का यतलाया है। परंतु वे ऐसी बेपरवाही से सोदे गए हैं कि वैज्ञानिक रीति की कुछ भी परवाह नही की गई जिसका यह परिणाम हुआ कि वह साक्षी ही नष्ट हो गई जिससे उनके असली समय का पता लगता । वर्तमान में ऐसी कोई भी इमारत नहीं है जिसको हम निश्चयपूर्वक ई० सन् से तीसरी शताब्दी के पूर्व को कह सकें। पत्थर की इमारतें, स्तूप - ईसवी सन् से पूर्व तीसरी शताब्दी के मध्य में हिंदुस्तान में अशोक का राज्य था । अशोक का सीरिया, मिस्र, मेसोडनिया, एपिरस तथा साइरीन के समकालीन बादशाहों से पत्रव्यवहार था। उसने अपने राज्य में सर्वत्र पाषाण के बड़े बड़े विशाल स्तंभ बनवाए थे और उन पर अपने धार्मिक सिद्धांतों को अंकित कराया था। बौद्ध धर्मावलंयी अशोक ने भारतवर्ष में योद्ध गुरुओं के स्मरणार्थ सेकड़ों स्तूप (घड़ी घड़ी इमारतें जिनके नीचे साफ्यमुनि वा अन्य यौद्ध ऋषियों के स्मारक रक्से आते थे ) बनवाए तथा इनके पास ही साधुओं के रहने के लिये अनेक मठ और मंदिर बनवाए । आज कल जो कहीं कहीं पर स्तूप पाए जाते हैं, उनके विषय में हम नहीं कह सकते कि वे अशोक के घनाए हुए हैं या और किसी के । परंतु इसमें कोई भी संदेह नहीं कि घुद्ध गया वा भरूट के कटह, बराबर की गुफ़ाएँ और पश्चिमीय हिंदुस्तान के सब से प्राचीन गुफामंदिर मौर्यकुल के समय में अथवा अशोक के राज्याभिषेक के कम से कम दो सौ वर्ष के अंदर अंदर बने । साँची के कानाखेदा स्तूप, जिनमें से दो तीन १६ वीं शताब्दी के प्रारंभ में बिलकुल समूचे थे, तथा दूसरे जिनमें सब से बड़ा ई० सन् से ३००० वर्ष पहले का है, अशोक समय के नमूने हैं। गुफ़ामंदिर - चट्टान में कटे हुए प्राचीन मंदिर भी, उसी समय के होंगे जिस समय के ये स्तूप हैं । गया से १६ मील उत्तर की तरफ़ वरायर के पहाड़ों में कुछ गुफ़ाएँ धनी हुई है। उनमें अशोक के छोटे छोटे लेख हैं। इन्हें अशोक ने अपने राज्य के १२ वॅ घा १६ वें वर्ष में आजीविकाओं को समर्पण किया था जो जैनियों के समान एक नग्न संप्रदाय के मालूम होते हैं। उनके पास ही तीन और गुफाएँ हैं। इनको भी अशोक के पौत्र दशरथ ने ईसवी सन् से २१५ वर्ष पहले आजीविकाओं को समर्पण किया था । गंधार स्मारक - अहम उन चीजों का वर्णन करते हैं जो हिंदुस्तान के उत्तर पश्चिम में पाई गई हैं और जो प्राचीन गंधार प्रांत की मानी जाती हैं। जहाँ तक संभावना की जा सकती है ये ई० सन् के प्रारंभ से चौथी शताब्दी तक को हैं और बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय से संबंध रसती हैं । यह धर्म उस प्राचीन बौद्ध धर्म से सर्वथा भिन्न है जिसमें ऋषियों और देवताओं के प्रति मान नहीं था किंतु उनके शव तथा पूज्य चिह्नों की उपासना की जाती थी । गंधार की इन बहुत सी मूर्तियों में जो तक्षण शिल्प का काम हो रहा है, उससे यह यात स्पष्ट है कि ये मूर्तियां विदेशीय ढंग पर बनाई गई। ग्रीको-वैक्टीरियत राज्य तो इन तक्षित वस्तुओं से पहले हो जाता रहा था, किंतु अयोनियन तथा अन्य यूनानो लोग अपनी बनाई हुई शिल्प वस्तुओं तथा सामग्री को लेकर बहुत दूर चले गए थे तथा पौद्ध दूत पश्चिम में लेवेंट तक निकल गए थे । गुप्त इमारतें-पाँचवीं शताब्दी में इमारतों का ढंग कई तरह का तथा मनोहर हो गया। सुगमता के लिये इस पिछले समय के ढंग को गुप्त ढंग कहते हैं, क्योंकि मन् ३१६ ई० से ५२० ई० तक हिंदुस्तान में मुख्यतः गुप्तवंशियों का राज्य रहा है, परंतु उनके याद भी यही ढंग प्रचलित रहा। मंदिरों के शियर सादे होते थे और आरंभ में फ़रीब करीय लंबे ऊँचे उठाए जाते थे, परंतु चोटी की तरफ अंदर को मुड़े हुए होते थे । घोटी सदा एक यड़े गोल 'अलक' अर्थात् एक पहलवार चक्के से ढका हुई होती थी जिसके ऊपर एक कलश होता है। परंतु बुर्ज की पीठ एक विलक्षण प्रकार की घोड़े की नाल की शकल के बूटेदार मैनू से ढको होती थी । काशमीरी इमारतें - यादवीं शताब्दी से मुसलमानों की विजय के समय तक की काशमीर तथा उसके आस पास में ऐसी इमारते देखने में आती हैं जिनमें कुछ कुछ प्राचीन ढंग मिलता है। उनके देखने से एफवारगी पश्चिमीय इमारतों का स्मरण हो आता है। उनका शेष हिंदुस्तान के शिल्प से कोई भी संबंध नहीं है। इस प्रकार का सब से अच्छा नमूना मार्चड मंदिर है जो प्राचीन राजधानी अनंतनाग वा इसलामाबाद से लगभग ३ मील के अंतर पर है। करीय २२० कुद लंबे और १४२ फुट घड़े हाते में यह मंदिर यना दुधा है। इसके चारों तरफ करीव ८० गुफाओं के सँडहर पड़े हुए हैं और पूर्वीय किनारे पर एक यड़ी ड्योढ़ी बनी हुई है। मातंड शब्द से प्रगट होता है कि यह मंदिर सूर्य का है। कम से कम ग्यारहवीं शताब्दी तक हिंदुस्तान के उत्तर पश्चिम में सूर्य-पूजा का बड़ा प्रचार था । कनारा के जैन मंदिर-दपिय कमारा में मुड़विद्रो के जैनमंदिरों तथा समाधियों का दंग भी हिंदू इमारतों के ढंग से मिन है। उनमें दादरी और तेहरी दालू छूते हैं। समा धियों में एक ही केंद्र की और नेपाली अनेक वे हैं। उनके देखते हो नेपाल के चैत्यों तथा चीन के बुर्जी का स्मरण हो आता है। द्राविड़ इमारतें - द्राविड़ देश की इमारतें हिंदुस्तान के अन्य प्रदेशों की इमारतों से बिलकुल भिन्न हैं। वहाँ की इमारतें एक ही नमूने की हैं। उसी में धीरे धीरे परिवर्त्तन होता रहता है, परंतु परिवर्त्तन सदा बुरा ही होता है, अच्छा कभी नहीं होता । जहाँ तक मालूम हुआ है द्राविड़ देश में कोई भी इमारत छठी वा सातवीं शताब्दी से पूर्व की नहीं है । सब से उत्तम स्मारक दक्षिणीय भाग में मामल्लपुर-रंथ अर्थात् ७ मंदिर है जो मद्रास के दक्षिण की ओर समुद्र के किनारे पर बने हुए हैं। इसके बाद पत्तदकल में विरूपाक्ष का मंदिर तथा एलोरा में कैलाश की चट्टान में कटा हुआ मंदिर है। पीछे के समय की द्राविड़ इमारतों में तक्षण का काम बहुत ज्यादा होने लगा। यद्यपि जड़ाई पर इतनी शक्ति और परिश्रम व्यय किया जाता था और जन साधारण को यह बड़ा सुंदर मालूम होता था, परंतु स्मरण रहे, इमारत के भिन्न भिन्न भागों को ठीक तौर पर तरतीय नहीं हो जाती थी। इससे विद्वानों को इन इमारतों में अलंकृत होने पर भी कोई सुंदरता नहीं मालूम होती थी। इस प्रकार की सब से अच्छी मिसाल तंजार का मंदिर है । वालुक्य इमारतें- चालुक्य रीति की इमारतें गोदाघरी की संपूर्ण घाटी में फैली हुई हैं। चालुक्य-मंदिरों में चीच में एक बड़ा मंडप वा हाल होता है और उसके गिर्द तीन तरफ़ मंदिर होते हैं। इस ढंग की इमारतों में कई चीज़ बड़ी सुंदर होती हैं। वास्तव में उत्तम मंदिरों में से अधिकतर तक्षणशिल्प या अलंकारों से विलकुल ढके हुए होते थे। इंडो-आर्यन इमारतें - उत्तरीय हिंदुस्तान अथवा उस क्षेत्र में जिसको खास हिंदुस्तान कहते हैं, अनेक प्रकार की इंडो-आर्यन इमारतें हैं। उनको दो वा अधिक श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं। सब से पहली पात जो इनके विषय में उल्लेखनीय है वह यह है कि इस प्रकार के मंदिरों के शि खर गावदुम हुआ करते हैं जिसका श्राकार प्रायः गाजर या गोपुच्छ जैसा हुआ करता है। दूसरी बात यह है कि इनमें दक्षिण के चालुक्य-मंदिरों के समान तक्षण शिल्प की अधिकता नहीं होती। बहुधा जैन मंदिरों के समान पीच में १२ संभे सड़े कर के उन पर अष्टभुज रूप में उतरंग रख दिए जाते हैं और उनपर गुंबद बना देने से इस के बीच में घद्भुत या स्थान निकल आता है। पश्चिमीय हिंदुस्तान में जो जैनियों की गृहनिर्माण की रीति है, यह इस इंडो-आर्यन रीति का ही रूपांतर है। राजपुताना, मालवा और गुजरात में सर्वत्र हिंदू और जैन, दोनों इस ही रीति की इमारतें बनाया करते थे। भुवनेश्वर में जो मंदिर बने हुए हैं, घे मिलकुल इंडो-आर्यन हौंग के सूचक है। मुसलमानी इमारतें - जय बारहवीं शताब्दी के अंत में मुसलमान हिंदुस्तान में राज्याधिकारी हुए तो उन्होंने सारमें सेनी ढंग की इमारतें बनानी शुरू की। यद्यपि मसजिदें और फ़बरें अधिकतर इसी ढंग की बर्नी तथापि भिन्न भिन्न प्रांतों में भिन्न भिन्न राजवंशों के समय में समय समय पर इस ढंग में बहुत कुछ परिवर्तन हुआ। आरंभ में ३०० वर्ष तक तुर्क वा पठान लोगों के हाथ में दिल्ली का राज्य रहा, परंतु १६ वीं शताब्दी के प्रारंभ में यह मुग़लों के हाथ में चला गया । मुग़ल राज्य का पठान कुल के गृहनिर्माण कला कीशल्य पर बहुत कुछ प्रभाव पड़ा। मुग़ल राज्य के अतिरिक्त बहुत से स्थानीय राज्य थे जिनके ढंग अपने अपने निराले थे । तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभ में बंगाल पृथक् राज्य हो गया था। गुलबर्ग और यीदर में यहमनी राज्य १४ वीं शताब्दी के मध्य में स्थापित हो गया था। जौनपुर गुजरात और मालवा १४०० ई० में, बीजापुर अहमदनगर लगभग १४६० ईसवी से और गोलकंडा २२ वर्ष याद से स्वतंत्र राज्य हो गए थे। इस तरह १०, १२ प्रकार की सारसेनी इमारतें हो गई थीं। मुग़ल सारसेनी रीति-मुग़लों के समय में हिंदुस्तान में सारसेनी ढंग की इमारतें याचर के समय में प्रारंभ हुई, परंतु यायर अथवा उसके पुत्र हुमायूँ के समय का कोई मुख्य इमारत श्रव नहीं पाई जाती। सब से पहले नमूने शेरशाह के समय के हैं जिनमें सब से प्रसिद्ध दिल्ली के निकट पुराने किले में क़िला कोहन अर्थात् शेरशाह की मसजिद है । घहीं पर तथा रोहतास में और भी कुछ खंडहर पाए जाते हैं। यद्यपि दिल्ली, आगरा, फतेहपुर सिकरी तथा अन्य स्थानों की छे की इमारतों की, जिनमें शेरशाह के समय की इमारतों से बहुत भेद हो गया, बहुत कुछ परीक्षा की गई है और उनके चित्र आदि भी प्रकाशित किए गए हैं परंतु शेरशाह के समय की प्रारंभिक इमारतों की ओर जो सारसेनी ढंग के प्राचीन नमूने हैं, किसी ने कुछ भी ध्यान नहीं दिया। चे अय तक अंध कूप में पड़ी हुई हैं। सब से पहली इमारत की भी अंग्रेजी राज्य में ही अधिकतर हानि हुई। जैसा फरगुसन साहब ने कहा है मुग़लवंश की समस्त इमारतों में एकता पाई जाती है और उनका इतिहास भी परिपूर्ण है। इससे भी उनके समय का हाल बड़ा मनोरंजक बन जाता है। उनके समय की कुछ इमारतों का किसी किसी अंश में संसार की किसी भी इमारत से मिलान किया जा सकता है। अकबर-बादशाह अकबर के समय में (सन् १५५६-१६ ०५ ई० ) मुग़ल इमारतों के रूप में बड़ी उन्नति हुई । अवर ने बहुत सी इमारतें बनाई और उसके विस्तृत राज्य में इस कला ने इतनी उन्नति की कि उसके समय को अनेक इमारती के संपूर्ण विशेष राक्षयों का पताना एक कटिन काम है। उस इमारतों में हिंदू तथा मुसलमान दोनों जाति के चिह्न पाए जाते हैं, परंतु ये चिह्न पूर्ण रूप से मिल नहीं गए। पठानों के समान मुग़ल लोग भी समाधियां (मकवरे) बनवाया करते थे। पहले मुग़ल बादशाहा की अपेक्षा पिछले यादशाहा ने जो मकबरे वनचाए वे अधिक सुंदर और उत्तम थे। उनमें सब से उत्तम और प्रसिद्ध जगत् विख्यात रोज़ा श्रागरे का ताजमहल है। यह शाहजहां की स्त्री मुमताजमहल को मकवरा है। अन्य मुसलमानी मकवरों के समान इसके भी चारों तरफ बाग़ है। जहांगीर- अफवर के मरते ही रूपांतर हो गया । हिंदू चिह्न बिलकुल जाते रहे। जहांगीर अधिकतर लाहौर में रहने लगा। आगरे दिल्ली में उसके राज्य का कोई भी चिह्न नहीं पाया जाता। लाहौर में उसकी जामे मसजिद ईरानी ढंग की चनी हुई है जिसमें रंग बिरंग की मीना की हुई सपरैल लगी हुई हैं। जहाँगीर की क़बर भी पास ही बनी हुई है । सिक्ख लोगों ने उससे सान का काम लिया और उसकी ईंटों से अमृतसर में अपना मंदिर बनवाया । यंगाल में जहाँगीर ने ढाके में राजमहल यनवाया था। वह अधिकतर ईंट का था । नमी के कारण अब वह बिलकुल नष्ट भ्रष्ट हो गया है । आगरे में एतमादुद्दौला का रोज़ा जहाँगीर के ही समय का है। यह बिलकुल संगमरमर का बना हुआ है और इसमें सर्वत्र पञ्चीकारी का काम हो रहा है, इस कारण से यह इस प्रकार के काम का बड़ा संदर नमूना है। शाहजहाँ-शाहजहाँ के समय में ( सन् १६२८ ई०५८ ई० ) गृह निर्माण की रीति में बड़ा भारी परिवर्त्तन हो गया। चारीकी और सुंदरता की ओर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। यह बात शाहजहाँ की दिल्ली आगरे की विशाल इमारतों से प्रगट होती है। आगरे का ताजमहल एशिया में सर्वोत्तम इमारत है । ताजमहल के विषय में जो अब तक पूर्ण रूप से सुरक्षित है, कुछ कहने की आवश्यकता नहीं । उसकी सुंदरता तथा उत्कृष्टता की संसार भर के विद्वानों ने प्रशंसा की है। ताजमहल के समान नागरे की मोती मसजिद की भी बड़ी सुंदर और विशाल इमारत है । यह आगरे के किले में बिलकुल सँगमरमर की बनी हुई है। वास्तव में यह इस प्रकार की इमारतों में मोती है। दिल्ली की जामे-मसजिद भी बड़ी विशाल है। इसकी स्थिति तथा इसका निर्माण बहुत ही सोच विचार कर किया गया है, जिससे देखने में यह घड़ी मनोहर और विशाल मालूम हो। हिंदुस्तान के बाद शाहों में शाहजहाँ ने सब से अधिक सुंदर और विशाल इमारतें बनाई । औरंगजेय औरंगजेब केस में अर्थात् १६५८ ई० से इस कला की अवनति होने सभी । औरंगज़ेव को इस कार्य से कुछ भी शौक न था । यह अधिकतर डेरों में रहा। इसी कारण से उसने कोई भी महल नहीं बनवाया । धौरंगाबाद में उसकी प्यारी बीबी का रोज़ा बना हुआ है जिसको लोग मूर्खता से आगरे के ताजमहल के सदृश बताते हैं । यद्यपि औरंगज़ेब की बहुत उमर हुई, परंतु उसने अपने लिये कोई रोज़ा नहीं बनवाया। उसके समय की इमारतों से भी प्रगट होता है कि इस कला में अवनति हो चली थी। चौकोर पत्थर और संगमरमर के स्थान में ईंट या पलस्तर होने लंगा था । पीछे की इमारतें-- सिरंगापटम तथा लखनऊ की इमारतें पीछे की हैं। यद्यपि वे सामान्य रूप से देखने में विशाल मालूम होती हैं, परंतु विशेष रूप से देखने से बड़ी भद्दी मालूम होती हैं, तथापि गृह निर्माण कला हिंदुस्तान से नष्ट नहीं हो गई है। हाल में भी अनेक मंदिर और रोज़ बिलकुल देशीय ढौंग के बने हैं जो बड़े सुंदर और सुडौल हैं और जिनमें बनावट के संपूर्ण आवश्यक गुण पाए जाते हैं, परंतु किसी किसी इमारत में ये गुण नहीं भी पाए जाते । चाहे उन पर कितना ही काम किया जाय, परंतु उससे इन गुणों की पूर्ति नहीं हो सकती। इसके अतिरिक्त विदेशीय रीति के अनुकरण से हिंदुस्तानी शिल्प कला में बड़ी हानि हो रही है। ६-- संस्कृत साहित्य । साहित्य का महत्त्व - वर्तमान हिंदुस्तान रूप से ज्ञान प्राप्त करने के लिये संस्कृत साहित्य का ज्ञान अत्यावश्यक है। जिस भाषा में यह साहित्य लिखा गया है वह प्रारंभिक अवस्था में, उत्तरीय हिंदुस्तान की प्रायः समस्त देशभाषाओं की माता थी। उसी से सब भाषाएँ निकली हैं । दक्षिण की द्राविड़ भाषाओं में भी संस्कृत शब्द मिले हुए हैं। उक्त साहित्य से हिंदुओं की सभ्यता का पता लगता है। प्राचीन जातियों के साहित्य में भावविन्यास में यह बहुत ऊँचे दर्जे पर है। परंतु विकाशसिद्धांत के पाठ वा अभ्यास के लिये तो यह सब से बढ़ चढ़कर है। इसका प्रमाण यह है कि जहाँ संस्कृत भाषा के आविष्कार से शब्दशास्त्र की रचना हुई, वहाँ वेदों के ज्ञान से पुराण शास्त्र तथा धर्मशास्त्रों की उत्पत्ति हुई । संस्कृत साहित्य के दो मुख्य विभाग हैं। एक उनमें से धर्म है। इसके एक अंश से ज्ञात होता है फि फेवल हिंदुस्तानी लोग ही इंडो-युरोपियन फुल में है जिनसे न केवल एक महान् जातीय धर्म अर्थात् ब्राह्मण धर्म की उत्पत्ति हुई, किंतु एक महान् विश्वव्यापी धर्म अर्थात् यौद्ध धर्म का प्रादुर्भाव हुआ। सिद्धांत विषय में भी हिंदुस्तानी मस्तिष्क से अनेक स्वतंत्र सिद्धांत और दर्शन निकले
जारी रही। ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन् एक हज़ार आठ सौ पैंतीस ईशून्य तक इसे जारी रक्खा और प्रचलित अँग्रेजी सिक्के का भी इसी पर निर्धार हुआ । शेरशाह के समय का चाँदी का रुपया जिसक के एक सौ अस्सी ग्रेन तोल है और जिसमें एक सौ पैंसठ ग्रेन सरी चाँदी है, शाय मूल्य में प्रचलित रूपप्प के बराबर ही है। उस पर नागरी लिपि में बादशाह का नाम तथा सामान्य अरबी लेख अंकित है। अकबरी सिर्फ ~~ अकबर ने पहले तो शरेशाह के ढंग पर सिके बनाए परंतु तीसचं वर्ष अर्थात् सन् एक हज़ार पाँच सौ चौरासी ईशून्य में उसने अपने ईश्वरीय मत का सिक्कों में उल्लेख किया। उसके बाद जितने सिक्के बने, सब में ईश्वरीय संवत् दिया हुआ है। इस संवत का प्रथम वर्ष फ़रवरी सन् एक हज़ार पाँच सौ छप्पन ईशून्य से प्रारंभ होता है। अकबर ने अरबी महीनों के नाम की जगह फ़ारसी महीनों के नाम रक्खे। बहुत से सिक्कों में 'अल्लाह अकबर' मुद्रित है। इसके दो अर्थ है- या तो अल्लाहो घड़ा है, या अकबर अल्लाह हैं। अकबर ने शायद यह नाम इस लिये चुना था कि कुछ गिने चुने लोगों को जो उसके मत के भेदों और गुप्त रहस्यों से परिचित थे, दोनों अर्थों का बोध हो । जहाँगीर तथा उसके उत्तराधिकारियों के सिकउहाँगीर के सिक्के सुंदरता तथा अन्य अनेक विलक्षण यातों के कारण प्रसिद्ध हैं। हिंदुस्तान में केवल यही एक ऐसा मुसल मान वादशाह हुआ जिसने सिक्कों पर अपना चित्र बनवाया । इसके बाद इसके बेटे शाहजहाँ ने इस लोकाचार विरुद्ध रीति का परित्याग किया और चाँदी सोने के बहुत से सिक्क यनवाए । कट्टर मुसलमान श्रीरंगज़ेय के सिक्को निस्संदेह मुसलमान धर्मानुकूल है। उसके निर्बल उत्तराधिकारियों का मुद्रा विषयक इतिहास इस कारण से प्रसिद्ध है कि यद्यपि उनके राज्य में बड़ी अवनति श्रोर अशांति फैल रही थी, तथापि सरकारी सिक्कों का वज़न तथा खरापन ज्यों का त्यों चना रहा। उनमें कोई त्रुटि नहीं आई। धीरे धीरे ये ही सिक्के ऍग्लो-इंडियन हो गए। कंपनी के सिक-ईस्ट इंडिया कंपनी बहुत दिनों तक छिपे तौर पर बादशाही सिक्कों का अनुकरण करती रही, अंत में उद्योग करने पर जनवरी सन् एक हज़ार सात सौ सत्रह ईशून्य में उसे बंबई में सिक्का बनाने की नियमानुसार आशा मिल गई । सन् एक हज़ार सात सौ बयालीस ईशून्य में आरफट के रुपयों की नकल करने की भी इजाज़त मिल गई और सन् एक हज़ार सात सौ सत्तावन ईशून्य में कंपनी की टकसाल फलकत्ते में स्थापित हो गई। परंतु सन् एक हज़ार आठ सौ पैंतीस-छत्तीस के नियमानुसार यह असंतोषजनक रोति भी जाती रही। कंपनी ने मुग़ल बादशाह के नाम के स्थान में विलियम चतुर्थ को मूर्ति का अपना ख़ास अँग्रेज़ी सिक्का चलाया और पुराने सय सिक्कों के रद्द करने का हुकुम दे दिया। सन् एक हज़ार आठ सौ पैंतीस ईशून्य से हिंदुस्तानी रुपया अँग्रेज़ी राज्य के रुपए का एक अंग हो गया । दक्षिणीय हिंदुस्तान । दक्षिणीय हिंदुस्तान के सिक-दक्षिणीय हिंदुस्तान के सिक्कों में उत्तरीय हिंदुस्तान की अपेक्षा परिश्रम तो अधिक होता है, परंतु लाभ फम है। द्राविड़ देशों का राजनैतिक इतिहास प्राप्त है, वास्तविक पुरातन सिक्के बहुत ही कम हैं और पीछे के सिक्कों से भी इतिहासकारों को प्राचीन फाल का इतिहास मालूम करने में कुछ सहायता नहीं मिलती। यहाँ के सिक्के प्रायः बहुत ही छोटे हैं। कोई कोई तोल में दो ग्रेन से भी कम हैं। जो चित्र उन पर बने हुए हैं वे भद्दे हैं और साफ़ दिसलाई नहीं देते। या तो उन पर कुछ भी लिखा हुआ नहीं है या इतना थोड़ा लिखा हुआ है कि उससे कुछ काम नहीं चल सकता। कुछ बाद के मुसलमानी सिक्कों को छोड़ कर शेप में तारीख़ भी नहीं है। दक्षिण में प्राचीन सिको के अभाव का एक कारण यह भी है कि उत्तर से अनेक लुटेरों ने दक्षिण में चढ़ाइयाँ कीं और जो कुछ उन्हें मिल सका वे सब लूट कर ले गए। दोनों शलाका रूप के उप्पेदार सिक्के तो उत्तर दक्षिण, जगहा में प्रचलित थे, परंतु ऐसा जान पड़ता है कि प्राचीन ढले हुए सिक दक्षिण में नहीं थे। प्राचीन समय के उप्पे के बने हुए चाँदी के सिक्को बहुत ही कम हैं और जो है वे किसी काम के नहीं हैं। ऐतिहासिक समय में दक्षिण में चाँदी के स्थान में सोने का सिक्का प्रचलित था। सोने का कय प्रचार और कैसे हुआ, यह मालूम नहीं है। जहाँ तक अनुमान किया जाता है सोने की खानों के मिल जाने से चॉदी के स्थान में सोने का सिक्का जारी किया गया । सिक्कों के तोल का परिमाणउत्तरीय हिंदुस्तान के समान दक्षिणीय हिंदुस्तान में भी सिकोका तोल रती के परिमाण पर निर्भर था जो प्रायः उत्तर में एक सौ अस्सी ग्रेन के बराबर माना गया है। पुरान वा टप्पेदार चॉदी का सिक्का बत्तीस रतियाँ के वरावर तोल में होता था । दक्षिणी लोग कालंजू तथा मंजादी के बीजों को काम में लाते थे । कालजू तोल में पचास ग्रेन के करीव था और मंजादी कालंजू का दसवां हिस्सा अर्थात् पाँच मेन के बराबर था । इसके अनुसार पुरान और कालंजू कुरोब करीब तोल में बराबर थे। बाद के पोन, होन, बराह, वा, पैगोड़ा सिक्कों की तोल बावन प्रेन के करीब थी और छोटे सिके बड़े सिक्कों के दस भाग के बराबर थे। चालुक्य सिक्कों पर सुअर की आकृति बनी रहती थी, इसी कारण से उनको बराह कहते थे । दक्षिण के इस विलक्षण सोने के सिकेको सर्वत्र इसी नाम से पुकारते हैं। युरोप के लोग इसको पैगोडा कहने लगे। यह शब्द भगवती या देवी का अपभ्रंश माना गया है । पाँच- हिंदुस्तान का वास्तु विद्या । परिभाषा - इस विद्या से केवल किसी प्रकार के मकान वगैरह बनाने का ही तात्पर्य नहीं है, किंतु इसकी परिभाषा इस प्रकार है कि ऐसी उत्तम विद्या जिसके द्वारा फाट, पापाणचा अन्य किसी वस्तु की सुंदर अलंकारिक इमारतें चनाई जाँय । अतपय इसमें और साधारण इमारतों के बनाने चा इंजीनियरिंग में भेद है। लकड़ी की प्रारंभिक इमारतें यह यात सर्वमान्य है कि प्रारंभ में वरमा, चीन, जापान के समान हिंदुस्तान में मी लकड़ी ही हर एक काम में लाई जाती थी। यदि ईंट या पत्थर लगाया भी जाता था, पर यह नीयों के भरने वा इंजीनि यरी वगैरह के काम में ही लगाया जाता था। ईशून्य सन् से पायीं शताब्दी पूर्व के अंत तक भी भेगास्थनीज़ ने लिया है कि चंद्रगुत की राजधानी पाटलीपुत्र के पर्व तरफ लकड़ी की दीवार थी और उसमें तीरों के चान के लिये छेद बने हुए थे। जय राजधानी की रक्षा की दीवार से की जाती थी तो इस बात के मानने में तनिक भी संकोच नहीं हो सकता कि उस समय की इमारतें विलकुल लकड़ी की थी। गर्म देशों में धार्मिक या माइट मान के लिये पत्थर की अपेक्षा लकड़ी अधिक लाभकारी है। पत्र का चाई कभी चलन हुआ हो, परंतु हिंदू लोग बराबर पहले जैसी इमारतें बनाते रहे और वही ढंग उन्होंने जारी रक्खा । इससे ही ज्ञात होता है कि पहले सर्वत्र लकड़ी का प्रचार था । लकड़ी बहुत दिनों तक नहीं रहती, जल्दी नष्ट हो जाती है । इसी कारण से आजकल लकड़ी की इमारतें देखने में नहीं श्रीं । प्रायः सय नष्ट भ्रष्ट हो गई हैं। इसमें संदेह नहीं कि प्राचीन तत्ववे ताओं ने कुछ स्मारक स्तूपों को ईशून्य सन् से चौथी शताब्दी के पूर्व से भी पहले का यतलाया है। परंतु वे ऐसी बेपरवाही से सोदे गए हैं कि वैज्ञानिक रीति की कुछ भी परवाह नही की गई जिसका यह परिणाम हुआ कि वह साक्षी ही नष्ट हो गई जिससे उनके असली समय का पता लगता । वर्तमान में ऐसी कोई भी इमारत नहीं है जिसको हम निश्चयपूर्वक ईशून्य सन् से तीसरी शताब्दी के पूर्व को कह सकें। पत्थर की इमारतें, स्तूप - ईसवी सन् से पूर्व तीसरी शताब्दी के मध्य में हिंदुस्तान में अशोक का राज्य था । अशोक का सीरिया, मिस्र, मेसोडनिया, एपिरस तथा साइरीन के समकालीन बादशाहों से पत्रव्यवहार था। उसने अपने राज्य में सर्वत्र पाषाण के बड़े बड़े विशाल स्तंभ बनवाए थे और उन पर अपने धार्मिक सिद्धांतों को अंकित कराया था। बौद्ध धर्मावलंयी अशोक ने भारतवर्ष में योद्ध गुरुओं के स्मरणार्थ सेकड़ों स्तूप बनवाए तथा इनके पास ही साधुओं के रहने के लिये अनेक मठ और मंदिर बनवाए । आज कल जो कहीं कहीं पर स्तूप पाए जाते हैं, उनके विषय में हम नहीं कह सकते कि वे अशोक के घनाए हुए हैं या और किसी के । परंतु इसमें कोई भी संदेह नहीं कि घुद्ध गया वा भरूट के कटह, बराबर की गुफ़ाएँ और पश्चिमीय हिंदुस्तान के सब से प्राचीन गुफामंदिर मौर्यकुल के समय में अथवा अशोक के राज्याभिषेक के कम से कम दो सौ वर्ष के अंदर अंदर बने । साँची के कानाखेदा स्तूप, जिनमें से दो तीन सोलह वीं शताब्दी के प्रारंभ में बिलकुल समूचे थे, तथा दूसरे जिनमें सब से बड़ा ईशून्य सन् से तीन हज़ार वर्ष पहले का है, अशोक समय के नमूने हैं। गुफ़ामंदिर - चट्टान में कटे हुए प्राचीन मंदिर भी, उसी समय के होंगे जिस समय के ये स्तूप हैं । गया से सोलह मील उत्तर की तरफ़ वरायर के पहाड़ों में कुछ गुफ़ाएँ धनी हुई है। उनमें अशोक के छोटे छोटे लेख हैं। इन्हें अशोक ने अपने राज्य के बारह वॅ घा सोलह वें वर्ष में आजीविकाओं को समर्पण किया था जो जैनियों के समान एक नग्न संप्रदाय के मालूम होते हैं। उनके पास ही तीन और गुफाएँ हैं। इनको भी अशोक के पौत्र दशरथ ने ईसवी सन् से दो सौ पंद्रह वर्ष पहले आजीविकाओं को समर्पण किया था । गंधार स्मारक - अहम उन चीजों का वर्णन करते हैं जो हिंदुस्तान के उत्तर पश्चिम में पाई गई हैं और जो प्राचीन गंधार प्रांत की मानी जाती हैं। जहाँ तक संभावना की जा सकती है ये ईशून्य सन् के प्रारंभ से चौथी शताब्दी तक को हैं और बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय से संबंध रसती हैं । यह धर्म उस प्राचीन बौद्ध धर्म से सर्वथा भिन्न है जिसमें ऋषियों और देवताओं के प्रति मान नहीं था किंतु उनके शव तथा पूज्य चिह्नों की उपासना की जाती थी । गंधार की इन बहुत सी मूर्तियों में जो तक्षण शिल्प का काम हो रहा है, उससे यह यात स्पष्ट है कि ये मूर्तियां विदेशीय ढंग पर बनाई गई। ग्रीको-वैक्टीरियत राज्य तो इन तक्षित वस्तुओं से पहले हो जाता रहा था, किंतु अयोनियन तथा अन्य यूनानो लोग अपनी बनाई हुई शिल्प वस्तुओं तथा सामग्री को लेकर बहुत दूर चले गए थे तथा पौद्ध दूत पश्चिम में लेवेंट तक निकल गए थे । गुप्त इमारतें-पाँचवीं शताब्दी में इमारतों का ढंग कई तरह का तथा मनोहर हो गया। सुगमता के लिये इस पिछले समय के ढंग को गुप्त ढंग कहते हैं, क्योंकि मन् तीन सौ सोलह ईशून्य से पाँच सौ बीस ईशून्य तक हिंदुस्तान में मुख्यतः गुप्तवंशियों का राज्य रहा है, परंतु उनके याद भी यही ढंग प्रचलित रहा। मंदिरों के शियर सादे होते थे और आरंभ में फ़रीब करीय लंबे ऊँचे उठाए जाते थे, परंतु चोटी की तरफ अंदर को मुड़े हुए होते थे । घोटी सदा एक यड़े गोल 'अलक' अर्थात् एक पहलवार चक्के से ढका हुई होती थी जिसके ऊपर एक कलश होता है। परंतु बुर्ज की पीठ एक विलक्षण प्रकार की घोड़े की नाल की शकल के बूटेदार मैनू से ढको होती थी । काशमीरी इमारतें - यादवीं शताब्दी से मुसलमानों की विजय के समय तक की काशमीर तथा उसके आस पास में ऐसी इमारते देखने में आती हैं जिनमें कुछ कुछ प्राचीन ढंग मिलता है। उनके देखने से एफवारगी पश्चिमीय इमारतों का स्मरण हो आता है। उनका शेष हिंदुस्तान के शिल्प से कोई भी संबंध नहीं है। इस प्रकार का सब से अच्छा नमूना मार्चड मंदिर है जो प्राचीन राजधानी अनंतनाग वा इसलामाबाद से लगभग तीन मील के अंतर पर है। करीय दो सौ बीस कुद लंबे और एक सौ बयालीस फुट घड़े हाते में यह मंदिर यना दुधा है। इसके चारों तरफ करीव अस्सी गुफाओं के सँडहर पड़े हुए हैं और पूर्वीय किनारे पर एक यड़ी ड्योढ़ी बनी हुई है। मातंड शब्द से प्रगट होता है कि यह मंदिर सूर्य का है। कम से कम ग्यारहवीं शताब्दी तक हिंदुस्तान के उत्तर पश्चिम में सूर्य-पूजा का बड़ा प्रचार था । कनारा के जैन मंदिर-दपिय कमारा में मुड़विद्रो के जैनमंदिरों तथा समाधियों का दंग भी हिंदू इमारतों के ढंग से मिन है। उनमें दादरी और तेहरी दालू छूते हैं। समा धियों में एक ही केंद्र की और नेपाली अनेक वे हैं। उनके देखते हो नेपाल के चैत्यों तथा चीन के बुर्जी का स्मरण हो आता है। द्राविड़ इमारतें - द्राविड़ देश की इमारतें हिंदुस्तान के अन्य प्रदेशों की इमारतों से बिलकुल भिन्न हैं। वहाँ की इमारतें एक ही नमूने की हैं। उसी में धीरे धीरे परिवर्त्तन होता रहता है, परंतु परिवर्त्तन सदा बुरा ही होता है, अच्छा कभी नहीं होता । जहाँ तक मालूम हुआ है द्राविड़ देश में कोई भी इमारत छठी वा सातवीं शताब्दी से पूर्व की नहीं है । सब से उत्तम स्मारक दक्षिणीय भाग में मामल्लपुर-रंथ अर्थात् सात मंदिर है जो मद्रास के दक्षिण की ओर समुद्र के किनारे पर बने हुए हैं। इसके बाद पत्तदकल में विरूपाक्ष का मंदिर तथा एलोरा में कैलाश की चट्टान में कटा हुआ मंदिर है। पीछे के समय की द्राविड़ इमारतों में तक्षण का काम बहुत ज्यादा होने लगा। यद्यपि जड़ाई पर इतनी शक्ति और परिश्रम व्यय किया जाता था और जन साधारण को यह बड़ा सुंदर मालूम होता था, परंतु स्मरण रहे, इमारत के भिन्न भिन्न भागों को ठीक तौर पर तरतीय नहीं हो जाती थी। इससे विद्वानों को इन इमारतों में अलंकृत होने पर भी कोई सुंदरता नहीं मालूम होती थी। इस प्रकार की सब से अच्छी मिसाल तंजार का मंदिर है । वालुक्य इमारतें- चालुक्य रीति की इमारतें गोदाघरी की संपूर्ण घाटी में फैली हुई हैं। चालुक्य-मंदिरों में चीच में एक बड़ा मंडप वा हाल होता है और उसके गिर्द तीन तरफ़ मंदिर होते हैं। इस ढंग की इमारतों में कई चीज़ बड़ी सुंदर होती हैं। वास्तव में उत्तम मंदिरों में से अधिकतर तक्षणशिल्प या अलंकारों से विलकुल ढके हुए होते थे। इंडो-आर्यन इमारतें - उत्तरीय हिंदुस्तान अथवा उस क्षेत्र में जिसको खास हिंदुस्तान कहते हैं, अनेक प्रकार की इंडो-आर्यन इमारतें हैं। उनको दो वा अधिक श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं। सब से पहली पात जो इनके विषय में उल्लेखनीय है वह यह है कि इस प्रकार के मंदिरों के शि खर गावदुम हुआ करते हैं जिसका श्राकार प्रायः गाजर या गोपुच्छ जैसा हुआ करता है। दूसरी बात यह है कि इनमें दक्षिण के चालुक्य-मंदिरों के समान तक्षण शिल्प की अधिकता नहीं होती। बहुधा जैन मंदिरों के समान पीच में बारह संभे सड़े कर के उन पर अष्टभुज रूप में उतरंग रख दिए जाते हैं और उनपर गुंबद बना देने से इस के बीच में घद्भुत या स्थान निकल आता है। पश्चिमीय हिंदुस्तान में जो जैनियों की गृहनिर्माण की रीति है, यह इस इंडो-आर्यन रीति का ही रूपांतर है। राजपुताना, मालवा और गुजरात में सर्वत्र हिंदू और जैन, दोनों इस ही रीति की इमारतें बनाया करते थे। भुवनेश्वर में जो मंदिर बने हुए हैं, घे मिलकुल इंडो-आर्यन हौंग के सूचक है। मुसलमानी इमारतें - जय बारहवीं शताब्दी के अंत में मुसलमान हिंदुस्तान में राज्याधिकारी हुए तो उन्होंने सारमें सेनी ढंग की इमारतें बनानी शुरू की। यद्यपि मसजिदें और फ़बरें अधिकतर इसी ढंग की बर्नी तथापि भिन्न भिन्न प्रांतों में भिन्न भिन्न राजवंशों के समय में समय समय पर इस ढंग में बहुत कुछ परिवर्तन हुआ। आरंभ में तीन सौ वर्ष तक तुर्क वा पठान लोगों के हाथ में दिल्ली का राज्य रहा, परंतु सोलह वीं शताब्दी के प्रारंभ में यह मुग़लों के हाथ में चला गया । मुग़ल राज्य का पठान कुल के गृहनिर्माण कला कीशल्य पर बहुत कुछ प्रभाव पड़ा। मुग़ल राज्य के अतिरिक्त बहुत से स्थानीय राज्य थे जिनके ढंग अपने अपने निराले थे । तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभ में बंगाल पृथक् राज्य हो गया था। गुलबर्ग और यीदर में यहमनी राज्य चौदह वीं शताब्दी के मध्य में स्थापित हो गया था। जौनपुर गुजरात और मालवा एक हज़ार चार सौ ईशून्य में, बीजापुर अहमदनगर लगभग एक हज़ार चार सौ साठ ईसवी से और गोलकंडा बाईस वर्ष याद से स्वतंत्र राज्य हो गए थे। इस तरह दस, बारह प्रकार की सारसेनी इमारतें हो गई थीं। मुग़ल सारसेनी रीति-मुग़लों के समय में हिंदुस्तान में सारसेनी ढंग की इमारतें याचर के समय में प्रारंभ हुई, परंतु यायर अथवा उसके पुत्र हुमायूँ के समय का कोई मुख्य इमारत श्रव नहीं पाई जाती। सब से पहले नमूने शेरशाह के समय के हैं जिनमें सब से प्रसिद्ध दिल्ली के निकट पुराने किले में क़िला कोहन अर्थात् शेरशाह की मसजिद है । घहीं पर तथा रोहतास में और भी कुछ खंडहर पाए जाते हैं। यद्यपि दिल्ली, आगरा, फतेहपुर सिकरी तथा अन्य स्थानों की छे की इमारतों की, जिनमें शेरशाह के समय की इमारतों से बहुत भेद हो गया, बहुत कुछ परीक्षा की गई है और उनके चित्र आदि भी प्रकाशित किए गए हैं परंतु शेरशाह के समय की प्रारंभिक इमारतों की ओर जो सारसेनी ढंग के प्राचीन नमूने हैं, किसी ने कुछ भी ध्यान नहीं दिया। चे अय तक अंध कूप में पड़ी हुई हैं। सब से पहली इमारत की भी अंग्रेजी राज्य में ही अधिकतर हानि हुई। जैसा फरगुसन साहब ने कहा है मुग़लवंश की समस्त इमारतों में एकता पाई जाती है और उनका इतिहास भी परिपूर्ण है। इससे भी उनके समय का हाल बड़ा मनोरंजक बन जाता है। उनके समय की कुछ इमारतों का किसी किसी अंश में संसार की किसी भी इमारत से मिलान किया जा सकता है। अकबर-बादशाह अकबर के समय में मुग़ल इमारतों के रूप में बड़ी उन्नति हुई । अवर ने बहुत सी इमारतें बनाई और उसके विस्तृत राज्य में इस कला ने इतनी उन्नति की कि उसके समय को अनेक इमारती के संपूर्ण विशेष राक्षयों का पताना एक कटिन काम है। उस इमारतों में हिंदू तथा मुसलमान दोनों जाति के चिह्न पाए जाते हैं, परंतु ये चिह्न पूर्ण रूप से मिल नहीं गए। पठानों के समान मुग़ल लोग भी समाधियां बनवाया करते थे। पहले मुग़ल बादशाहा की अपेक्षा पिछले यादशाहा ने जो मकबरे वनचाए वे अधिक सुंदर और उत्तम थे। उनमें सब से उत्तम और प्रसिद्ध जगत् विख्यात रोज़ा श्रागरे का ताजमहल है। यह शाहजहां की स्त्री मुमताजमहल को मकवरा है। अन्य मुसलमानी मकवरों के समान इसके भी चारों तरफ बाग़ है। जहांगीर- अफवर के मरते ही रूपांतर हो गया । हिंदू चिह्न बिलकुल जाते रहे। जहांगीर अधिकतर लाहौर में रहने लगा। आगरे दिल्ली में उसके राज्य का कोई भी चिह्न नहीं पाया जाता। लाहौर में उसकी जामे मसजिद ईरानी ढंग की चनी हुई है जिसमें रंग बिरंग की मीना की हुई सपरैल लगी हुई हैं। जहाँगीर की क़बर भी पास ही बनी हुई है । सिक्ख लोगों ने उससे सान का काम लिया और उसकी ईंटों से अमृतसर में अपना मंदिर बनवाया । यंगाल में जहाँगीर ने ढाके में राजमहल यनवाया था। वह अधिकतर ईंट का था । नमी के कारण अब वह बिलकुल नष्ट भ्रष्ट हो गया है । आगरे में एतमादुद्दौला का रोज़ा जहाँगीर के ही समय का है। यह बिलकुल संगमरमर का बना हुआ है और इसमें सर्वत्र पञ्चीकारी का काम हो रहा है, इस कारण से यह इस प्रकार के काम का बड़ा संदर नमूना है। शाहजहाँ-शाहजहाँ के समय में गृह निर्माण की रीति में बड़ा भारी परिवर्त्तन हो गया। चारीकी और सुंदरता की ओर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। यह बात शाहजहाँ की दिल्ली आगरे की विशाल इमारतों से प्रगट होती है। आगरे का ताजमहल एशिया में सर्वोत्तम इमारत है । ताजमहल के विषय में जो अब तक पूर्ण रूप से सुरक्षित है, कुछ कहने की आवश्यकता नहीं । उसकी सुंदरता तथा उत्कृष्टता की संसार भर के विद्वानों ने प्रशंसा की है। ताजमहल के समान नागरे की मोती मसजिद की भी बड़ी सुंदर और विशाल इमारत है । यह आगरे के किले में बिलकुल सँगमरमर की बनी हुई है। वास्तव में यह इस प्रकार की इमारतों में मोती है। दिल्ली की जामे-मसजिद भी बड़ी विशाल है। इसकी स्थिति तथा इसका निर्माण बहुत ही सोच विचार कर किया गया है, जिससे देखने में यह घड़ी मनोहर और विशाल मालूम हो। हिंदुस्तान के बाद शाहों में शाहजहाँ ने सब से अधिक सुंदर और विशाल इमारतें बनाई । औरंगजेय औरंगजेब केस में अर्थात् एक हज़ार छः सौ अट्ठावन ईशून्य से इस कला की अवनति होने सभी । औरंगज़ेव को इस कार्य से कुछ भी शौक न था । यह अधिकतर डेरों में रहा। इसी कारण से उसने कोई भी महल नहीं बनवाया । धौरंगाबाद में उसकी प्यारी बीबी का रोज़ा बना हुआ है जिसको लोग मूर्खता से आगरे के ताजमहल के सदृश बताते हैं । यद्यपि औरंगज़ेब की बहुत उमर हुई, परंतु उसने अपने लिये कोई रोज़ा नहीं बनवाया। उसके समय की इमारतों से भी प्रगट होता है कि इस कला में अवनति हो चली थी। चौकोर पत्थर और संगमरमर के स्थान में ईंट या पलस्तर होने लंगा था । पीछे की इमारतें-- सिरंगापटम तथा लखनऊ की इमारतें पीछे की हैं। यद्यपि वे सामान्य रूप से देखने में विशाल मालूम होती हैं, परंतु विशेष रूप से देखने से बड़ी भद्दी मालूम होती हैं, तथापि गृह निर्माण कला हिंदुस्तान से नष्ट नहीं हो गई है। हाल में भी अनेक मंदिर और रोज़ बिलकुल देशीय ढौंग के बने हैं जो बड़े सुंदर और सुडौल हैं और जिनमें बनावट के संपूर्ण आवश्यक गुण पाए जाते हैं, परंतु किसी किसी इमारत में ये गुण नहीं भी पाए जाते । चाहे उन पर कितना ही काम किया जाय, परंतु उससे इन गुणों की पूर्ति नहीं हो सकती। इसके अतिरिक्त विदेशीय रीति के अनुकरण से हिंदुस्तानी शिल्प कला में बड़ी हानि हो रही है। छः-- संस्कृत साहित्य । साहित्य का महत्त्व - वर्तमान हिंदुस्तान रूप से ज्ञान प्राप्त करने के लिये संस्कृत साहित्य का ज्ञान अत्यावश्यक है। जिस भाषा में यह साहित्य लिखा गया है वह प्रारंभिक अवस्था में, उत्तरीय हिंदुस्तान की प्रायः समस्त देशभाषाओं की माता थी। उसी से सब भाषाएँ निकली हैं । दक्षिण की द्राविड़ भाषाओं में भी संस्कृत शब्द मिले हुए हैं। उक्त साहित्य से हिंदुओं की सभ्यता का पता लगता है। प्राचीन जातियों के साहित्य में भावविन्यास में यह बहुत ऊँचे दर्जे पर है। परंतु विकाशसिद्धांत के पाठ वा अभ्यास के लिये तो यह सब से बढ़ चढ़कर है। इसका प्रमाण यह है कि जहाँ संस्कृत भाषा के आविष्कार से शब्दशास्त्र की रचना हुई, वहाँ वेदों के ज्ञान से पुराण शास्त्र तथा धर्मशास्त्रों की उत्पत्ति हुई । संस्कृत साहित्य के दो मुख्य विभाग हैं। एक उनमें से धर्म है। इसके एक अंश से ज्ञात होता है फि फेवल हिंदुस्तानी लोग ही इंडो-युरोपियन फुल में है जिनसे न केवल एक महान् जातीय धर्म अर्थात् ब्राह्मण धर्म की उत्पत्ति हुई, किंतु एक महान् विश्वव्यापी धर्म अर्थात् यौद्ध धर्म का प्रादुर्भाव हुआ। सिद्धांत विषय में भी हिंदुस्तानी मस्तिष्क से अनेक स्वतंत्र सिद्धांत और दर्शन निकले
Nord 2 में कुछ हल्के अपग्रेड करने के बाद नए OnePlus Nord 2T 5G में लगभग सबकुछ उपलब्ध हो जाता है। वनप्लस का पहला 'T' मॉडल कोई ब्रैंड न्यू फोन नहीं है, लेकिन इसमें बेसिक्स अच्छे हो गए हैं जैसे- एक अच्छा मिडरेंज प्रोसेसर, एक अपग्रेडेड फास्ट चार्जिंग सिस्टम, एक क्वालिटी डिस्प्ले और क्षमतावान प्राइमरी कैमरा जिसमें OIS का सपोर्ट भी मिल जाता है। बल्कि यूं कहें, इसमें वो सब कुछ है जो किसी यूजर को थोड़े कम पैसों यानी 28,999 रुपये की शुरुआती कीमत में चाहिए होता है। (Review), जो इससे भी कम कीमत में इसी तरह के हार्डवेयर ऑफर करता है। तो फिर Nord 2T 5G कैसे अपने सेग्मेंट में मुकाबला करता है और क्या ये एक परफेक्ट मिडरेंजर स्मार्टफोन है? मैंने कुछ हफ्ते इस फोन को इस्तेमाल किया और यहां पर मैं बता रहा हूं कि मुझे इस बारे में क्या लगता है। अपने 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वेरिएंट के साथ 28,999 रुपये से शुरू होता है और 12GB RAM व 256GB स्टोरेज के साथ 33,999 रुपये तक जाता है। फोन ग्रीनिश जेड फॉग और ग्रे शेडो फिनिश में आता है। मुझे रिव्यू के लिए इसका 12GB का ग्रे शेडो वेरिएंट मिला। OnePlus Nord 2T 5G के डिजाइन में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह फोन का 'T' वर्जन है, जिससे उम्मीद की जाती है कि यह केवल हार्डवेयर में कुछ हल्के बदलावों के साथ आएगा। फिर भी, इसमें डिजाइन के अंदर कुछ डिटेल्स बदले गए हैं जो कि रियर में ही ज्यादा दिखते हैं। कैमरा मॉड्यूल में अब दो सर्कुलर कटआउट दिखते हैं। एक में प्राइमरी कैमरा है और दूसरा अल्ट्रावाइड और मोनोक्रोम कैमरा के लिए दिया गया है। फोन का ले-आउट साफ सुथरा दिखता है लेकिन मॉड्यूल फोन की बॉडी से हल्का सा ज्यादा बाहर निकला हुआ है। इससे फोन समतल जगह पर रख देने पर डगमगाता है। में हटा दिया गया था। डिस्प्ले में हल्के कर्व्ड किनारे हैं और यह पूरी तरह से फ्लैट नहीं है। यह अच्छा ग्रिप एक्सपीरयंस देता है। सेल्फी कैमरा के लिए इसमें एक होलपंच दिया गया है। फिंगरप्रिंट स्कैनर भी डिस्प्ले में दिया गया है जो भरोसेमंद है। डिस्प्ले में Corning Gorilla Glass 5 का प्रोटेक्शन है, जिस पर फिंगरप्रिंट आसानी से पड़ जाते हैं, लेकिन जल्दी से साफ भी किए जा सकते हैं। मुझे इसकी डिस्प्ले का मोटा बेजल पसंद नहीं आया। यह बाकी तीनों साइड्स को देखते हुए काफी मोटा सा लगता है। OnePlus Nord 2T 5G में MediaTek Dimensity 1300 प्रोसेसर दिया गया है। पिछले मॉडल में Dimensity 1200-AI SoC दिया गया था। इस मॉडल के साथ यही एक मेन अपग्रेड है। फोन में LPDDR4X RAM और UFS 3. 1 स्टोरेज दी गई है। इसमें डुअल सिम ट्रे है जिसमें दो 5G नैनो सिम लगाई जा सकती हैं। कम्युनिकेशन के लिए इसमें Wi-Fi 6, Bluetooth 5. 2, NFC का सपोर्ट है। फोन में 4,500mAh बैटरी और 80W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है। ध्यान रहे कि Nord 2 में 65W फास्ट चार्जिंग दी गई थी। फोन में कोई IP रेटिंग नहीं मिलती, जबकि यह फीचर मिडरेंज में अब आम हो गया है। फोन Android 12 बेस्ड OxygenOS 12. 1 पर चलता है। सॉफ्टवेयर वनप्लस जैसा ही है लेकिन अबकी बार मैंने एक अजीब चूक इसमें देखी कि, इसमें लाइव वॉलपेपर नहीं दिए गए हैं, केवल स्टेबल वॉलपेपर मिलते हैं। सपोर्ट के लिए कंपनी दो बड़े एंड्रॉयड अपडेट और तीन साल के सिक्योरिटी अपडेट का वादा करती है जो कि एक मिड रेंज डिवाइस के लिए अच्छी बात है। OnePlus ने अपनी परंपरा को जारी रखते हुए कम से कम ब्लॉटवेयर वाला स्मार्टफोन पेश किया है। थर्ड पार्टी एप्स में मुझे इसमें केवल Netflix मिला। मुझे अनचाहे नोटिफिकेशन नहीं मिले। बाकी का सॉफ्टवेयर कस्टमाइज करने लायक है। थीम इंजन वॉलपेपर के कलर्स को अपने आप पिक कर लेता है और उसे विजेट्स और कीबोर्ड पर अप्लाई कर देता है। लेकिन वही कलर सिस्टम के एक्सेंट कलर पर एप्लाई नहीं होता, इसे पर्सनलाइजेशन मेन्यु से मैन्युअली अप्लाई करना पड़ता है। से कम थे जिसने AnTuTu पर 7,29,331 और Geekbench के सिंगल और मल्टी कोर टेस्ट में क्रमशः 983 और 3,074 पॉइंट्स का स्कोर किया था। फोन की गेमिंग परफॉर्मेंस अच्छी है और खेलते समय फोन ज्यादा गर्म नहीं होता। मैंने इसमें Call of Duty: Mobile और Asphalt 9: Legends को खेलकर देखा। दोनों ही गेम्स डिफॉल्ट सेटिंग्स में स्मूदली चले। ग्राफिक सेटिंग्स को मैक्सिमम करने पर भी परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं दिखी। फास्ट पेस टाइटल खेलते समय भी डिस्प्ले का 180Hz का रिफ्रेश रेट पर्याप्त रहा। फोन में 6. 43 इंच का AMOLED पैनल है जिसका रिफ्रेश रेट 90Hz है। कंपनी का कहना है कि यह HDR10+ सर्टिफाइड है। डिफॉल्ट विविड कलर सेटिंग पर डिस्प्ले सैचुरेटेड कलर्स पैदा करता है। नैचरल मोड पर कलर्स रियल दिखते हैं। आउटडोर में डिस्प्ले सही मात्रा में चमकता है लेकिन इसका एम्बियंट लाइट सेंसर इनडोर में आने पर ब्राइटनेस को कुछ ज्यादा ही डिम कर देता है और मुझे अंदर आने के बाद ब्राइटनेस को बार में जाकर ऊपर करना पड़ता था। इसका HDR10+ सर्टिफिकेशन ज्यादा काम का नहीं लगा। Netflix जैसे ऐप्स में डिस्प्ले एचडीआर रेटेड डिटेक्ट नहीं हुआ। YouTube पर एचडीआर कंटेंट देखते समय कलर बैंडिंग महसूस हो रही थी। SD कंटेंट शार्प दिखा और ब्लैक काफी डीप दिख रहे थे। स्टीरिओ स्पीकर्स का साउंड अच्छा रहा लेकिन हाई वॉल्यूम पर आवाज हल्की फट रही थी। OnePlus Nord 2T 5G की बैटरी लाइफ अच्छी है। साधारण इस्तेमाल में फोन दो दिन आराम से निकाल देता है जिसमें कुछ गेमिंग भी शामिल है। हैवी यूसेज में 2 घंटे की गेमिंग और आधे घंटे के कैमरा यूज के साथ फोन डेढ़ दिन चल जाता है। एचडी वीडियो लूप टेस्ट में फोन 22 घंटे 55 मिनट चला जो कि काफी प्रभावित करने वाला है। इसके साथ आने वाले चार्जर के साथ फोन 0 से 55 प्रतिशत 15 मिनट में चार्ज हो गया और 30 मिनट में पूरी तरह से चार्ज हो गया। OnePlus Nord 2T 5G में तीन रियर कैमरा दिए गए हैं। इसमें 50 मेगापिक्सल का Sony IMX766 प्राइमरी सेंसर है जिसमें OIS का सपोर्ट है। साथ में 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा और 2 मेगापिक्सल का मोनोक्रोम कैमरा है। सेल्फी के लिए फोन में 32 मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। कैमरा इंटरफेस हाल ही के वनप्लस फोन्स के जैसा ही है। कुछ ऑप्शन एलिप्सिस बटन में मिनी स्लाइड आउट मेन्यु में छुपा दिए गए हैं। यह वैसा ही है जैसा हाल ही में लॉन्च हुए Oppo और Realme डिवाइसेज में मिलता है। डे-लाइट में लिए गए फोटो शार्प और क्लियर थे जिनमें डाइनेमिक रेंज अच्छी थी, लेकिन डार्क एरिया में डिटेल्स कुछ कम मिलीं। कलर्स सटीक दिखे लेकिन ये मेरे द्वारा सेट की गई कलर प्रोफाइल पर निर्भर था कि कलर कैसे दिख रहे हैं। विविड में सेट करने पर ये ओवरसैचुरेटेड दिख रहे थे। इसका 2X डिजिटल जूम काफी चौंका देता है, जिसने पर्याप्त रोशनी में काफी क्लियर शॉट लिए। अल्ट्रवाइड कैमरा कम डिटेल्स के साथ फोटो लेता है। अधिक चमकीले स्थानों पर फोटो में किनारों पर पर्पल छटा दिख रही थी। प्राइमरी कैमरा एक डेडिकेटेड मैक्रो कैमरा की जगह नहीं ले सकता है, फिर भी मैंने कुछ दूरी पर से प्राइमरी कैमरा के साथ फूलों के अच्छे क्लोज शॉट्स लिए जो काफी शार्प दिख रहे थे। सेल्फी में शार्पनेस कुछ ज्यादा दिख रही थी लेकिन कुल मिलाकर डाइनेमिक रेंज अच्छी थी। सेल्फी में पोर्ट्रेट शॉट्स में एज डिटेक्शन अच्छा था, लेकिन डाइनेमिक रेंज लिमिटिड थी और बैकग्राउंड ओवरएक्सपोज हो रहा था। लो- लाइट में अल्ट्रा वाइड कैमरा इस्तेमाल करने लायक फोटो लेता है। प्राइमरी कैमरा भी शार्प फोटो लेता है जिसमें डिटेल और डाइनेमिक रेंज अच्छी रही। बहुत ज्यादा कम रोशनी में ही मुझे इसका डेडिकेटेड नाइट मोड इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि फोन की लो लाइट परफॉर्मेंस हमेशा प्रभावित करने वाली नहीं मिली। नाइट मोड में इसने इमेज को बेहतर डाइनेमिक रेंज और कम नॉइज के साथ कैप्चर किया लेकिन शार्पनेस कुछ ज्यादा हो गई। मैंने Realme 9 Pro+ 5G में इससे ज्यादा अच्छी लो-लाइट कैमरा परफॉर्मेंस देखी है। फोन 1080p वीडियो 30fps पर रिकॉर्ड करता है जिसमें हल्की सॉफ्टनेस थी लेकिन स्टेबलाइजेशन कमाल की मिली। 60fps के 1080p वीडियो में कम डिटेल्स मिलीं। 4K में वीडियो रिकॉर्ड करते समय 30fps पर बेस्ट रिजल्ट मिले। वहीं, लो-लाइट में वीडियो रिकॉर्डिंग करते समय 4K में बेस्ट रिजल्ट मिले। लो-लाइट में 1080p फुटेज सॉफ्ट दिखी और चलते समय शेक भी हो रही थी। जैसे स्मार्टफोन इस प्राइस पर ज्यादा फीचर्स जैसे वायरलेस चार्जिंग और IP53 रेटिंग दे रहे हैं। अगर आप Nord 2T 5G के अलावा दूसरे ऑप्शन देख रहे हैं तो iQoo और Realme जैसे ब्रैंड्स हैं जो ज्यादा वैल्यू फॉर मनी स्मार्टफोन दे रहे हैं। iQoo Neo 6 में पावरफुल Snapdragon 870 SoC है, 120Hz AMOLED डिस्प्ले है और 4,700mAh बैटरी है। यह 29,999 रुपये में आता है। Realme 9 Pro+ 5G में Dimensity 920 SoC है, समान प्राइमरी कैमरा, एक मैक्रो कैमरा और समान 90Hz AMOLED पैनल है लेकिन यह 6GB वेरिएंट के साथ 24,999 रुपये से शुरू होता है।
Nord दो में कुछ हल्के अपग्रेड करने के बाद नए OnePlus Nord दोT पाँचG में लगभग सबकुछ उपलब्ध हो जाता है। वनप्लस का पहला 'T' मॉडल कोई ब्रैंड न्यू फोन नहीं है, लेकिन इसमें बेसिक्स अच्छे हो गए हैं जैसे- एक अच्छा मिडरेंज प्रोसेसर, एक अपग्रेडेड फास्ट चार्जिंग सिस्टम, एक क्वालिटी डिस्प्ले और क्षमतावान प्राइमरी कैमरा जिसमें OIS का सपोर्ट भी मिल जाता है। बल्कि यूं कहें, इसमें वो सब कुछ है जो किसी यूजर को थोड़े कम पैसों यानी अट्ठाईस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की शुरुआती कीमत में चाहिए होता है। , जो इससे भी कम कीमत में इसी तरह के हार्डवेयर ऑफर करता है। तो फिर Nord दोT पाँचG कैसे अपने सेग्मेंट में मुकाबला करता है और क्या ये एक परफेक्ट मिडरेंजर स्मार्टफोन है? मैंने कुछ हफ्ते इस फोन को इस्तेमाल किया और यहां पर मैं बता रहा हूं कि मुझे इस बारे में क्या लगता है। अपने आठGB RAM और एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट के साथ अट्ठाईस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से शुरू होता है और बारहGB RAM व दो सौ छप्पनGB स्टोरेज के साथ तैंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये तक जाता है। फोन ग्रीनिश जेड फॉग और ग्रे शेडो फिनिश में आता है। मुझे रिव्यू के लिए इसका बारहGB का ग्रे शेडो वेरिएंट मिला। OnePlus Nord दोT पाँचG के डिजाइन में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह फोन का 'T' वर्जन है, जिससे उम्मीद की जाती है कि यह केवल हार्डवेयर में कुछ हल्के बदलावों के साथ आएगा। फिर भी, इसमें डिजाइन के अंदर कुछ डिटेल्स बदले गए हैं जो कि रियर में ही ज्यादा दिखते हैं। कैमरा मॉड्यूल में अब दो सर्कुलर कटआउट दिखते हैं। एक में प्राइमरी कैमरा है और दूसरा अल्ट्रावाइड और मोनोक्रोम कैमरा के लिए दिया गया है। फोन का ले-आउट साफ सुथरा दिखता है लेकिन मॉड्यूल फोन की बॉडी से हल्का सा ज्यादा बाहर निकला हुआ है। इससे फोन समतल जगह पर रख देने पर डगमगाता है। में हटा दिया गया था। डिस्प्ले में हल्के कर्व्ड किनारे हैं और यह पूरी तरह से फ्लैट नहीं है। यह अच्छा ग्रिप एक्सपीरयंस देता है। सेल्फी कैमरा के लिए इसमें एक होलपंच दिया गया है। फिंगरप्रिंट स्कैनर भी डिस्प्ले में दिया गया है जो भरोसेमंद है। डिस्प्ले में Corning Gorilla Glass पाँच का प्रोटेक्शन है, जिस पर फिंगरप्रिंट आसानी से पड़ जाते हैं, लेकिन जल्दी से साफ भी किए जा सकते हैं। मुझे इसकी डिस्प्ले का मोटा बेजल पसंद नहीं आया। यह बाकी तीनों साइड्स को देखते हुए काफी मोटा सा लगता है। OnePlus Nord दोT पाँचG में MediaTek Dimensity एक हज़ार तीन सौ प्रोसेसर दिया गया है। पिछले मॉडल में Dimensity एक हज़ार दो सौ-AI SoC दिया गया था। इस मॉडल के साथ यही एक मेन अपग्रेड है। फोन में LPDDRचारX RAM और UFS तीन. एक स्टोरेज दी गई है। इसमें डुअल सिम ट्रे है जिसमें दो पाँचG नैनो सिम लगाई जा सकती हैं। कम्युनिकेशन के लिए इसमें Wi-Fi छः, Bluetooth पाँच. दो, NFC का सपोर्ट है। फोन में चार,पाँच सौmAh बैटरी और अस्सी वाट फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है। ध्यान रहे कि Nord दो में पैंसठ वाट फास्ट चार्जिंग दी गई थी। फोन में कोई IP रेटिंग नहीं मिलती, जबकि यह फीचर मिडरेंज में अब आम हो गया है। फोन Android बारह बेस्ड OxygenOS बारह. एक पर चलता है। सॉफ्टवेयर वनप्लस जैसा ही है लेकिन अबकी बार मैंने एक अजीब चूक इसमें देखी कि, इसमें लाइव वॉलपेपर नहीं दिए गए हैं, केवल स्टेबल वॉलपेपर मिलते हैं। सपोर्ट के लिए कंपनी दो बड़े एंड्रॉयड अपडेट और तीन साल के सिक्योरिटी अपडेट का वादा करती है जो कि एक मिड रेंज डिवाइस के लिए अच्छी बात है। OnePlus ने अपनी परंपरा को जारी रखते हुए कम से कम ब्लॉटवेयर वाला स्मार्टफोन पेश किया है। थर्ड पार्टी एप्स में मुझे इसमें केवल Netflix मिला। मुझे अनचाहे नोटिफिकेशन नहीं मिले। बाकी का सॉफ्टवेयर कस्टमाइज करने लायक है। थीम इंजन वॉलपेपर के कलर्स को अपने आप पिक कर लेता है और उसे विजेट्स और कीबोर्ड पर अप्लाई कर देता है। लेकिन वही कलर सिस्टम के एक्सेंट कलर पर एप्लाई नहीं होता, इसे पर्सनलाइजेशन मेन्यु से मैन्युअली अप्लाई करना पड़ता है। से कम थे जिसने AnTuTu पर सात,उनतीस,तीन सौ इकतीस और Geekbench के सिंगल और मल्टी कोर टेस्ट में क्रमशः नौ सौ तिरासी और तीन,चौहत्तर पॉइंट्स का स्कोर किया था। फोन की गेमिंग परफॉर्मेंस अच्छी है और खेलते समय फोन ज्यादा गर्म नहीं होता। मैंने इसमें Call of Duty: Mobile और Asphalt नौ: Legends को खेलकर देखा। दोनों ही गेम्स डिफॉल्ट सेटिंग्स में स्मूदली चले। ग्राफिक सेटिंग्स को मैक्सिमम करने पर भी परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं दिखी। फास्ट पेस टाइटल खेलते समय भी डिस्प्ले का एक सौ अस्सी हर्ट्ज़ का रिफ्रेश रेट पर्याप्त रहा। फोन में छः. तैंतालीस इंच का AMOLED पैनल है जिसका रिफ्रेश रेट नब्बे हर्ट्ज़ है। कंपनी का कहना है कि यह HDRदस+ सर्टिफाइड है। डिफॉल्ट विविड कलर सेटिंग पर डिस्प्ले सैचुरेटेड कलर्स पैदा करता है। नैचरल मोड पर कलर्स रियल दिखते हैं। आउटडोर में डिस्प्ले सही मात्रा में चमकता है लेकिन इसका एम्बियंट लाइट सेंसर इनडोर में आने पर ब्राइटनेस को कुछ ज्यादा ही डिम कर देता है और मुझे अंदर आने के बाद ब्राइटनेस को बार में जाकर ऊपर करना पड़ता था। इसका HDRदस+ सर्टिफिकेशन ज्यादा काम का नहीं लगा। Netflix जैसे ऐप्स में डिस्प्ले एचडीआर रेटेड डिटेक्ट नहीं हुआ। YouTube पर एचडीआर कंटेंट देखते समय कलर बैंडिंग महसूस हो रही थी। SD कंटेंट शार्प दिखा और ब्लैक काफी डीप दिख रहे थे। स्टीरिओ स्पीकर्स का साउंड अच्छा रहा लेकिन हाई वॉल्यूम पर आवाज हल्की फट रही थी। OnePlus Nord दोT पाँचG की बैटरी लाइफ अच्छी है। साधारण इस्तेमाल में फोन दो दिन आराम से निकाल देता है जिसमें कुछ गेमिंग भी शामिल है। हैवी यूसेज में दो घंटाटे की गेमिंग और आधे घंटे के कैमरा यूज के साथ फोन डेढ़ दिन चल जाता है। एचडी वीडियो लूप टेस्ट में फोन बाईस घंटाटे पचपन मिनट चला जो कि काफी प्रभावित करने वाला है। इसके साथ आने वाले चार्जर के साथ फोन शून्य से पचपन प्रतिशत पंद्रह मिनट में चार्ज हो गया और तीस मिनट में पूरी तरह से चार्ज हो गया। OnePlus Nord दोT पाँचG में तीन रियर कैमरा दिए गए हैं। इसमें पचास मेगापिक्सल का Sony IMXसात सौ छयासठ प्राइमरी सेंसर है जिसमें OIS का सपोर्ट है। साथ में आठ मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा और दो मेगापिक्सल का मोनोक्रोम कैमरा है। सेल्फी के लिए फोन में बत्तीस मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। कैमरा इंटरफेस हाल ही के वनप्लस फोन्स के जैसा ही है। कुछ ऑप्शन एलिप्सिस बटन में मिनी स्लाइड आउट मेन्यु में छुपा दिए गए हैं। यह वैसा ही है जैसा हाल ही में लॉन्च हुए Oppo और Realme डिवाइसेज में मिलता है। डे-लाइट में लिए गए फोटो शार्प और क्लियर थे जिनमें डाइनेमिक रेंज अच्छी थी, लेकिन डार्क एरिया में डिटेल्स कुछ कम मिलीं। कलर्स सटीक दिखे लेकिन ये मेरे द्वारा सेट की गई कलर प्रोफाइल पर निर्भर था कि कलर कैसे दिख रहे हैं। विविड में सेट करने पर ये ओवरसैचुरेटेड दिख रहे थे। इसका दोX डिजिटल जूम काफी चौंका देता है, जिसने पर्याप्त रोशनी में काफी क्लियर शॉट लिए। अल्ट्रवाइड कैमरा कम डिटेल्स के साथ फोटो लेता है। अधिक चमकीले स्थानों पर फोटो में किनारों पर पर्पल छटा दिख रही थी। प्राइमरी कैमरा एक डेडिकेटेड मैक्रो कैमरा की जगह नहीं ले सकता है, फिर भी मैंने कुछ दूरी पर से प्राइमरी कैमरा के साथ फूलों के अच्छे क्लोज शॉट्स लिए जो काफी शार्प दिख रहे थे। सेल्फी में शार्पनेस कुछ ज्यादा दिख रही थी लेकिन कुल मिलाकर डाइनेमिक रेंज अच्छी थी। सेल्फी में पोर्ट्रेट शॉट्स में एज डिटेक्शन अच्छा था, लेकिन डाइनेमिक रेंज लिमिटिड थी और बैकग्राउंड ओवरएक्सपोज हो रहा था। लो- लाइट में अल्ट्रा वाइड कैमरा इस्तेमाल करने लायक फोटो लेता है। प्राइमरी कैमरा भी शार्प फोटो लेता है जिसमें डिटेल और डाइनेमिक रेंज अच्छी रही। बहुत ज्यादा कम रोशनी में ही मुझे इसका डेडिकेटेड नाइट मोड इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि फोन की लो लाइट परफॉर्मेंस हमेशा प्रभावित करने वाली नहीं मिली। नाइट मोड में इसने इमेज को बेहतर डाइनेमिक रेंज और कम नॉइज के साथ कैप्चर किया लेकिन शार्पनेस कुछ ज्यादा हो गई। मैंने Realme नौ Pro+ पाँचG में इससे ज्यादा अच्छी लो-लाइट कैमरा परफॉर्मेंस देखी है। फोन एक हज़ार अस्सीp वीडियो तीसfps पर रिकॉर्ड करता है जिसमें हल्की सॉफ्टनेस थी लेकिन स्टेबलाइजेशन कमाल की मिली। साठfps के एक हज़ार अस्सीp वीडियो में कम डिटेल्स मिलीं। चार केल्विन में वीडियो रिकॉर्ड करते समय तीसfps पर बेस्ट रिजल्ट मिले। वहीं, लो-लाइट में वीडियो रिकॉर्डिंग करते समय चार केल्विन में बेस्ट रिजल्ट मिले। लो-लाइट में एक हज़ार अस्सीp फुटेज सॉफ्ट दिखी और चलते समय शेक भी हो रही थी। जैसे स्मार्टफोन इस प्राइस पर ज्यादा फीचर्स जैसे वायरलेस चार्जिंग और IPतिरेपन रेटिंग दे रहे हैं। अगर आप Nord दोT पाँचG के अलावा दूसरे ऑप्शन देख रहे हैं तो iQoo और Realme जैसे ब्रैंड्स हैं जो ज्यादा वैल्यू फॉर मनी स्मार्टफोन दे रहे हैं। iQoo Neo छः में पावरफुल Snapdragon आठ सौ सत्तर SoC है, एक सौ बीस हर्ट्ज़ AMOLED डिस्प्ले है और चार,सात सौmAh बैटरी है। यह उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में आता है। Realme नौ Pro+ पाँचG में Dimensity नौ सौ बीस SoC है, समान प्राइमरी कैमरा, एक मैक्रो कैमरा और समान नब्बे हर्ट्ज़ AMOLED पैनल है लेकिन यह छःGB वेरिएंट के साथ चौबीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से शुरू होता है।
किसी भी फूलों में फूल होना चाहिएध्यान आकर्षित किया, केंद्र में था और पूरे बगीचे का राजा था, इस तरह की भूमिका alstroemerias द्वारा भी किया जा सकता है। उनमें से खेती बहुत मुश्किल नहीं है और यहां तक कि नौसिखिया शौकिया गार्डनर्स भी कर सकते हैं। इस क्षेत्र में, यह अतिथि दक्षिण अमेरिका से आया और तुरंत कई लोगों को पसंद आया। Alstroemeria ग्रीन हाउस में उगाया जाता है, बर्तनों में बिक्री के लिए या गुलदस्ते में काटा जाता है। खुले मैदान में अल्स्ट्रोमेरिया में बोया जा सकता हैअप्रैल या मई, जब पृथ्वी उगता है, लेकिन रोपण अभी भी बढ़ाना बेहतर है। इसके लिए, तैयार बर्तन, कप या बक्से में आपको पत्ते और टर्फ ग्राउंड को 2: 1 के अनुपात में डालना होगा, फिर अल्स्ट्रोमेरिया के बीज डालें, थोड़ा और प्रिप्रोशिव पृथ्वी दबाएं। बढ़ते रंगों में स्तरीकरण होता है, जो एक महीने के लिए +5 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर किया जाता है। संयंत्र बहुत मांग नहीं कर रहा है, लेकिन पसंद करता हैअच्छी तरह से सूखा, उपजाऊ और अम्लीय मिट्टी पर उगता है। सुबह में नाजुक पेनम्बरा या धूप वाली साइट अल्स्ट्रोमेरिया के लिए एक उत्कृष्ट जगह होगी। इस तरह की जगह में खेती पूरे मौसम में एक शानदार फूल प्रदान करेगी।
किसी भी फूलों में फूल होना चाहिएध्यान आकर्षित किया, केंद्र में था और पूरे बगीचे का राजा था, इस तरह की भूमिका alstroemerias द्वारा भी किया जा सकता है। उनमें से खेती बहुत मुश्किल नहीं है और यहां तक कि नौसिखिया शौकिया गार्डनर्स भी कर सकते हैं। इस क्षेत्र में, यह अतिथि दक्षिण अमेरिका से आया और तुरंत कई लोगों को पसंद आया। Alstroemeria ग्रीन हाउस में उगाया जाता है, बर्तनों में बिक्री के लिए या गुलदस्ते में काटा जाता है। खुले मैदान में अल्स्ट्रोमेरिया में बोया जा सकता हैअप्रैल या मई, जब पृथ्वी उगता है, लेकिन रोपण अभी भी बढ़ाना बेहतर है। इसके लिए, तैयार बर्तन, कप या बक्से में आपको पत्ते और टर्फ ग्राउंड को दो: एक के अनुपात में डालना होगा, फिर अल्स्ट्रोमेरिया के बीज डालें, थोड़ा और प्रिप्रोशिव पृथ्वी दबाएं। बढ़ते रंगों में स्तरीकरण होता है, जो एक महीने के लिए +पाँच डिग्री सेल्सियस के तापमान पर किया जाता है। संयंत्र बहुत मांग नहीं कर रहा है, लेकिन पसंद करता हैअच्छी तरह से सूखा, उपजाऊ और अम्लीय मिट्टी पर उगता है। सुबह में नाजुक पेनम्बरा या धूप वाली साइट अल्स्ट्रोमेरिया के लिए एक उत्कृष्ट जगह होगी। इस तरह की जगह में खेती पूरे मौसम में एक शानदार फूल प्रदान करेगी।
फीरोजाबाद : फर्जी वोट बनवाकर प्रधानी की सीट पर कब्जा जमाने की ख्वाहिश इस बार पूरी नहीं होगी। प्रशासन पहले से ही इसके लिए मुस्तैद है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में फर्जी नाम शामिल करा पाना भी इस बार मुश्किल होगा। आयोग की पहल और जिलाधिकारी की सख्ती फर्जीवाड़े पर रोक लगाएगी। डीएम ने सभी उप जिलाधिकारी एवं खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे बीएलओ द्वारा किए जाने वाले सत्यापन कार्य की कड़ी निगरानी करें। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची बनाने का काम जिले में शुरू हो गया है। वर्ष 2010 में हुए चुनाव के दौरान जिले में 1806 बूथ बनाए गए थे। फिलहाल इन पर बीएलओ की नियुक्ति का काम चल रहा है। इनमें से जिन बूथों पर विधानसभा मतदाता सूची के लिए बीएलओ के रूप में शिक्षक तैनात किए गए थे। उन्हें छोड़कर अन्य बूथों पर तैनाती की जानी हैं। मतदाता सूची तैयार करने का जो तरीका निकाला गया है वह थोड़ा जटिल है। इस संबंध में राज्य राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं बीएलओ के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकत्री या अन्य किसी की तैनाती न की जाए। केवल शिक्षकों को ही बीएलओ बनाएं। दरअसल निर्वाचन आयोग ने पांच साल पहले बनी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का मिलान मौजूदा विधानसभा सूची से करने के निर्देश दिए हैं। इन सूचियों में जो भिन्नता पाई जाएगी, उसकी हकीकत जानने के लिए बीएलओ घर घर जाएंगे। इस दौरान कहीं कोई दबंगई या प्रलोभन देकर फर्जी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल न करा सके। इस पर भी प्रशासन खत्म है। इसे रोकने के लिए डीएम विजय किरन आनंद ने सभी एसडीएम एवं खंड विकास अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया है। डीएम ने बताया यदि कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की जाएगी।
फीरोजाबाद : फर्जी वोट बनवाकर प्रधानी की सीट पर कब्जा जमाने की ख्वाहिश इस बार पूरी नहीं होगी। प्रशासन पहले से ही इसके लिए मुस्तैद है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में फर्जी नाम शामिल करा पाना भी इस बार मुश्किल होगा। आयोग की पहल और जिलाधिकारी की सख्ती फर्जीवाड़े पर रोक लगाएगी। डीएम ने सभी उप जिलाधिकारी एवं खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे बीएलओ द्वारा किए जाने वाले सत्यापन कार्य की कड़ी निगरानी करें। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची बनाने का काम जिले में शुरू हो गया है। वर्ष दो हज़ार दस में हुए चुनाव के दौरान जिले में एक हज़ार आठ सौ छः बूथ बनाए गए थे। फिलहाल इन पर बीएलओ की नियुक्ति का काम चल रहा है। इनमें से जिन बूथों पर विधानसभा मतदाता सूची के लिए बीएलओ के रूप में शिक्षक तैनात किए गए थे। उन्हें छोड़कर अन्य बूथों पर तैनाती की जानी हैं। मतदाता सूची तैयार करने का जो तरीका निकाला गया है वह थोड़ा जटिल है। इस संबंध में राज्य राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं बीएलओ के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकत्री या अन्य किसी की तैनाती न की जाए। केवल शिक्षकों को ही बीएलओ बनाएं। दरअसल निर्वाचन आयोग ने पांच साल पहले बनी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का मिलान मौजूदा विधानसभा सूची से करने के निर्देश दिए हैं। इन सूचियों में जो भिन्नता पाई जाएगी, उसकी हकीकत जानने के लिए बीएलओ घर घर जाएंगे। इस दौरान कहीं कोई दबंगई या प्रलोभन देकर फर्जी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल न करा सके। इस पर भी प्रशासन खत्म है। इसे रोकने के लिए डीएम विजय किरन आनंद ने सभी एसडीएम एवं खंड विकास अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया है। डीएम ने बताया यदि कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची पारदर्शी तरीके से तैयार की जाएगी।
नई दिल्ली। पाकिस्तानी फौजी द्वारा भारतीय सेना के कैप्टन सौरभ कालिया के कत्ल का जिससे पाक हमेशा इंकार करता रहा है के खुलासे का मामला देखने को मिला है। सेना के समारोह की एक वीडियों में पाक फौजी ने दावा किया है कि पाक सेना ने ही कैप्टन कालिया और उनके पांच साथियों का कत्ल किया था। जबकी इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार और सेना कहती रही है कि उन्होंने कैप्टन कालिया का कत्ल नहीं किया। कैप्टन कालिया का शव उन्हें एक खाई में मिला था। 4 जाट रेजिमेंट का 23 वर्षीय कैप्टन सौरभ कालिया भारत के पहले सेना अधिकारी थे,जिन्होंने सबसे पहले पाकिस्तानी सेना की जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ का खुलासा किया था। कैप्टन कालिया और उनके पांच साथी सैनिकों को गश्त के दौरान पाक फौज ने कैद कर लिया था। उसके बाद उनकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी,जो कि इंटरनेशनल युद्ध बंधी व्यवहार का उल्लघन है। कैप्टन और इनके साथियों को 5 मई 1999 में कैद करके करीब 20 दिनों तक अपनी कैद में ही रखा गया था। कैप्टन के पिता एनके कालिया का कहना है कि भारतीय सेना ने माना है कि 1999 में मई के बीच में यह घटना घटी थी। लेकिन पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और जनरल का कहना है कि ऎसी कोई घटना नहीं घटी थी। भारत सरकार पर आरोप लगाते हुए कैप्टन के पिता ने कहा कि इस मुद्दें को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाने को लेकर भारत सरकार हमेशा ही उदासीन रही है। इस मुद्दे को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाया जाना चाहिए।
नई दिल्ली। पाकिस्तानी फौजी द्वारा भारतीय सेना के कैप्टन सौरभ कालिया के कत्ल का जिससे पाक हमेशा इंकार करता रहा है के खुलासे का मामला देखने को मिला है। सेना के समारोह की एक वीडियों में पाक फौजी ने दावा किया है कि पाक सेना ने ही कैप्टन कालिया और उनके पांच साथियों का कत्ल किया था। जबकी इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार और सेना कहती रही है कि उन्होंने कैप्टन कालिया का कत्ल नहीं किया। कैप्टन कालिया का शव उन्हें एक खाई में मिला था। चार जाट रेजिमेंट का तेईस वर्षीय कैप्टन सौरभ कालिया भारत के पहले सेना अधिकारी थे,जिन्होंने सबसे पहले पाकिस्तानी सेना की जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ का खुलासा किया था। कैप्टन कालिया और उनके पांच साथी सैनिकों को गश्त के दौरान पाक फौज ने कैद कर लिया था। उसके बाद उनकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी,जो कि इंटरनेशनल युद्ध बंधी व्यवहार का उल्लघन है। कैप्टन और इनके साथियों को पाँच मई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में कैद करके करीब बीस दिनों तक अपनी कैद में ही रखा गया था। कैप्टन के पिता एनके कालिया का कहना है कि भारतीय सेना ने माना है कि एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में मई के बीच में यह घटना घटी थी। लेकिन पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और जनरल का कहना है कि ऎसी कोई घटना नहीं घटी थी। भारत सरकार पर आरोप लगाते हुए कैप्टन के पिता ने कहा कि इस मुद्दें को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाने को लेकर भारत सरकार हमेशा ही उदासीन रही है। इस मुद्दे को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाया जाना चाहिए।
जयपुर। राजस्थान में 19 जून को 3 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए राजनितिक पार्टियों की तैयारियां जोरों पर चल रही है। भाजपा को चुनाव प्रक्रिया के लिए पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की नियुक्ति करनी है। जिसकी जिम्मेदारी पार्टी के 4 वरिष्ठ नेताओं को सौंपी जानी है। इनमें प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़ और बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी के नाम शामिल हो सकते हैं। इसी सम्बन्ध में गुलाबचंद कटारिया और विधायक वासुदेव देवनानी सोमवार को विधानसभा पहुंचे, और इसकी प्रकिया शुरू कर दी। वहीं बीजेपी विधि प्रकोष्ठ के संयोजक सुरेंद्र सिंह नरूका भी विधानसभा से पोलिंग और काउंटिंग एजेंट से जुड़े फॉर्म भी लेकर आए। पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की नियुक्ति के नियमानुसार 1 काउंटिंग एजेंट और 3 पोलिंग एजेंट बनेंगे। भाजपा के तमाम विधायक अपना वोट उस अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाकर ही डालेंगे। जबकि काउंटिंग एजेंट मतगणना के दौरान वहां मौजूद रहेगा।
जयपुर। राजस्थान में उन्नीस जून को तीन सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए राजनितिक पार्टियों की तैयारियां जोरों पर चल रही है। भाजपा को चुनाव प्रक्रिया के लिए पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की नियुक्ति करनी है। जिसकी जिम्मेदारी पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं को सौंपी जानी है। इनमें प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़ और बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी के नाम शामिल हो सकते हैं। इसी सम्बन्ध में गुलाबचंद कटारिया और विधायक वासुदेव देवनानी सोमवार को विधानसभा पहुंचे, और इसकी प्रकिया शुरू कर दी। वहीं बीजेपी विधि प्रकोष्ठ के संयोजक सुरेंद्र सिंह नरूका भी विधानसभा से पोलिंग और काउंटिंग एजेंट से जुड़े फॉर्म भी लेकर आए। पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की नियुक्ति के नियमानुसार एक काउंटिंग एजेंट और तीन पोलिंग एजेंट बनेंगे। भाजपा के तमाम विधायक अपना वोट उस अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाकर ही डालेंगे। जबकि काउंटिंग एजेंट मतगणना के दौरान वहां मौजूद रहेगा।
घटना के तीन दिन बाद महिला ने बयान दर्ज कराया। अगरतला : त्रिपुरा में गोमती जिले की एक अदालत ने एक महिला से बलात्कार के मामले में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एच. चक्रवर्ती ने जघन्य अपराध के लिए सोमवार को ताजुल इस्लाम, सद्दाम हुसैन, रब्बन अली, समीमन अली और दुधु मिया पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। ये सभी सिपाहीजाला जिले के सोनमुरा के निवासी हैं। गोमती जिले के किला की निवासी महिला अपने पति के साथ 20 नवंबर 2021 को उदयपुर से करीब आठ किलोमीटर दूर पैटीचेरी में एक धार्मिक कार्यक्रम में गई थी।
घटना के तीन दिन बाद महिला ने बयान दर्ज कराया। अगरतला : त्रिपुरा में गोमती जिले की एक अदालत ने एक महिला से बलात्कार के मामले में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एच. चक्रवर्ती ने जघन्य अपराध के लिए सोमवार को ताजुल इस्लाम, सद्दाम हुसैन, रब्बन अली, समीमन अली और दुधु मिया पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। ये सभी सिपाहीजाला जिले के सोनमुरा के निवासी हैं। गोमती जिले के किला की निवासी महिला अपने पति के साथ बीस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को उदयपुर से करीब आठ किलोमीटर दूर पैटीचेरी में एक धार्मिक कार्यक्रम में गई थी।
Jaipur News : हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद नगर निगम ग्रेटर मानसरोवर की ओर से जारी नोटिस से मानसरोवर मध्यम मार्ग में 468 परिवारों में हडकंप मच गया हैं। सात दिन में गैर कानूनी निर्माणकर्ताओं ने अपने स्तर पर गैर कानूनी निर्माण नहीं हटाया तो नगर निगम का बुलडोजर गजरेगा। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर को मानसरोवर के मध्यम मार्ग के मकानों से सैटबैक के गैर कानूनी निर्माण और आवासीय इस्तेमाल वाले भवनों का व्यवसायिक उपयोग होने पर हटाने के आदेश दिए हैं। मानसरोवर जोन उपायुक्त मुकेश चौधरी ने बताया की उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद नगर निगम मानसरोवर जोन टीम ने सर्वे के बाद नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। जोन उपायुक्त ने बताया की आवासीय भूखंड की राजस्थान आवासन मंडल द्वारा जारी टाइप डिजाइन के वितरित सैटबैक क्षेत्र में गैर कानूनी निर्माण कर लिया गया हैं। जो नियम खिलाफ हैं। जिन्हे नोटिस दिए गए हैं उन्हे सात दिन में अपना गैर कानूनी निर्माण अपने स्तर पर हटाकर अपना उत्तर फोटोग्राफ के साथ प्रस्तुत करना होगा। जिससे उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना हो सके। यदि इस अवधि में कोई गैर कानूनी निर्माणकर्ता ने अपने स्तर पर गैर कानूनी निर्माण हटाकर उत्तर पेश नहीं करेगा तो नगर निगम के स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। और उसका हर्जा-खर्चा भी वसूला जाएगा। गौरतलब हैं कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर को मानसरोवर के मध्यम मार्ग के मकानों से सैटबैक के गैर कानूनी निर्माण को हटाने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने निगम को इसके लिए 30 दिन का समय देते हुए 24 अप्रेल को पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मंगलवार को यह निर्देश मनमोहन नागपाल की याचिका पर दिए। याचिकाकर्ता नागपाल का मानरोवर के सैक्टर 30 में फ्लैट है। उनका यह फ्लैट प्रथम तल पर है और भूतल पर मध्यम मार्ग की ओर खुलने वाले मकान में ना सिर्फ व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं बल्कि सैटबैक में भी दुकानें बना रखी हैं। नगर निगम ग्रेटर ने दो मार्च को दुकानों को सीज कर दिया था। इस पर दुकान मालिक अनिल गुप्ता तीन मार्च को उच्च न्यायालय में हाजिर हुए और न्यायालय को बताया कि करीब 5 किलोमीटर लंबे पूरे मध्यम मार्ग पर ही व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो अकेले उसकी ही दुकानों को सीज क्यों किया गया है। इस पर न्यायालय ने नगर निगम ग्रेटर को मध्यम मार्ग का सर्वे करके रिपोर्ट पेश करने को बोला था। मंगलवार को नगर निगम ग्रेटर की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सीनियर एडवोकेट मेजर आर पी सिंह से न्यायालय ने पूछा कि गवर्नमेंट कानून के साथ है या कानून तोडने वालों के साथ। इस पर सिंह ने बोला कि गवर्नमेंट पूरी तरह से कानून के साथ है। इस पर न्यायालय ने नगर निगम ग्रेटर को मानवरोवर के मध्यम मार्ग पर सैटबैक में हो रहे निर्माणों को नोटिस देकर तोडने और पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुद्दे में अगली सुनवाई 24 अप्रेल को सुबह 11 बजे होगी।
Jaipur News : हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद नगर निगम ग्रेटर मानसरोवर की ओर से जारी नोटिस से मानसरोवर मध्यम मार्ग में चार सौ अड़सठ परिवारों में हडकंप मच गया हैं। सात दिन में गैर कानूनी निर्माणकर्ताओं ने अपने स्तर पर गैर कानूनी निर्माण नहीं हटाया तो नगर निगम का बुलडोजर गजरेगा। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर को मानसरोवर के मध्यम मार्ग के मकानों से सैटबैक के गैर कानूनी निर्माण और आवासीय इस्तेमाल वाले भवनों का व्यवसायिक उपयोग होने पर हटाने के आदेश दिए हैं। मानसरोवर जोन उपायुक्त मुकेश चौधरी ने बताया की उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद नगर निगम मानसरोवर जोन टीम ने सर्वे के बाद नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। जोन उपायुक्त ने बताया की आवासीय भूखंड की राजस्थान आवासन मंडल द्वारा जारी टाइप डिजाइन के वितरित सैटबैक क्षेत्र में गैर कानूनी निर्माण कर लिया गया हैं। जो नियम खिलाफ हैं। जिन्हे नोटिस दिए गए हैं उन्हे सात दिन में अपना गैर कानूनी निर्माण अपने स्तर पर हटाकर अपना उत्तर फोटोग्राफ के साथ प्रस्तुत करना होगा। जिससे उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना हो सके। यदि इस अवधि में कोई गैर कानूनी निर्माणकर्ता ने अपने स्तर पर गैर कानूनी निर्माण हटाकर उत्तर पेश नहीं करेगा तो नगर निगम के स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। और उसका हर्जा-खर्चा भी वसूला जाएगा। गौरतलब हैं कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर को मानसरोवर के मध्यम मार्ग के मकानों से सैटबैक के गैर कानूनी निर्माण को हटाने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने निगम को इसके लिए तीस दिन का समय देते हुए चौबीस अप्रेल को पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मंगलवार को यह निर्देश मनमोहन नागपाल की याचिका पर दिए। याचिकाकर्ता नागपाल का मानरोवर के सैक्टर तीस में फ्लैट है। उनका यह फ्लैट प्रथम तल पर है और भूतल पर मध्यम मार्ग की ओर खुलने वाले मकान में ना सिर्फ व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं बल्कि सैटबैक में भी दुकानें बना रखी हैं। नगर निगम ग्रेटर ने दो मार्च को दुकानों को सीज कर दिया था। इस पर दुकान मालिक अनिल गुप्ता तीन मार्च को उच्च न्यायालय में हाजिर हुए और न्यायालय को बताया कि करीब पाँच किलोग्राममीटर लंबे पूरे मध्यम मार्ग पर ही व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो अकेले उसकी ही दुकानों को सीज क्यों किया गया है। इस पर न्यायालय ने नगर निगम ग्रेटर को मध्यम मार्ग का सर्वे करके रिपोर्ट पेश करने को बोला था। मंगलवार को नगर निगम ग्रेटर की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सीनियर एडवोकेट मेजर आर पी सिंह से न्यायालय ने पूछा कि गवर्नमेंट कानून के साथ है या कानून तोडने वालों के साथ। इस पर सिंह ने बोला कि गवर्नमेंट पूरी तरह से कानून के साथ है। इस पर न्यायालय ने नगर निगम ग्रेटर को मानवरोवर के मध्यम मार्ग पर सैटबैक में हो रहे निर्माणों को नोटिस देकर तोडने और पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुद्दे में अगली सुनवाई चौबीस अप्रेल को सुबह ग्यारह बजे होगी।
मेरठ। दिल्ली पुलिस ने देर रात सोतीगंज में वाहनों का कटान करने वाले गद्दू के भाई दानिश कबाड़ी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। इस दौरान पुलिस को विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, आरोपी दानिश नहीं मिला। इसके बाद टीम लौट गई। बताया जा रहा है दिल्ली एनसीआर से चोरी और लूट के वाहनों का कटान दानिश ने कराया है। पुलिस सर्विलांस के माध्यम से आरोपी दानिश को ट्रेस करते हुए मेरठ पहुंची थी। वाहनों के कटान के लिए बदनाम रहा सोतीगंज भले ही बंद हो गया हो, लेकिन अभी भी दूसरे राज्यों की पुलिस का यहां पर आना-जाना लगा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने चोरी और लूट करने वाले गैंग को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्होंने वाहनों का कटान सोतीगंज में दानिश कबाड़ी के यहां कराया। दानिश कबाड़ी पुरानी गाड़ी की फर्जी आरसी और अन्य कागजात बनाकर बेचने का काम करता है। ऐसा दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है। दानिश की तलाश में टीम देर रात सोतीगंज पहुंची। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो गया। आरोपी के परिजनों ने पुलिस के छापे का विरोध किया। सदर बाजार पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस आई थी, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगा।
मेरठ। दिल्ली पुलिस ने देर रात सोतीगंज में वाहनों का कटान करने वाले गद्दू के भाई दानिश कबाड़ी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी। इस दौरान पुलिस को विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, आरोपी दानिश नहीं मिला। इसके बाद टीम लौट गई। बताया जा रहा है दिल्ली एनसीआर से चोरी और लूट के वाहनों का कटान दानिश ने कराया है। पुलिस सर्विलांस के माध्यम से आरोपी दानिश को ट्रेस करते हुए मेरठ पहुंची थी। वाहनों के कटान के लिए बदनाम रहा सोतीगंज भले ही बंद हो गया हो, लेकिन अभी भी दूसरे राज्यों की पुलिस का यहां पर आना-जाना लगा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने चोरी और लूट करने वाले गैंग को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्होंने वाहनों का कटान सोतीगंज में दानिश कबाड़ी के यहां कराया। दानिश कबाड़ी पुरानी गाड़ी की फर्जी आरसी और अन्य कागजात बनाकर बेचने का काम करता है। ऐसा दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है। दानिश की तलाश में टीम देर रात सोतीगंज पहुंची। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो गया। आरोपी के परिजनों ने पुलिस के छापे का विरोध किया। सदर बाजार पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस आई थी, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगा।
बिहार के सीतामढ़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मंगलवार सुबह डुमरा प्रखंड के सीओ चंद्रजीत प्रकाश को रिश्वतखोरी में रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. बताया जा रहा है कि रामपुर परोड़ी पंचायत के शंकर सिंह के द्वारा शिकायत की गयी थी कि सीओ के द्वारा उनसे 50 हजार रुपये की डिमाड की गयी है. डीएसपी गोपाल कृष्णा और पवन कुमार के नेतृत्व में 11 सदस्यीय टीम ने सीओ को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया. बताया जा रहा है कि टीम ने सीओ को उनके निजी आवास से हाफ पैंट और टी शर्ट में गिरफ्तार किया और चप्पल तक पहने का वक्त नहीं दिया. सीधे उन्हें लेकर सर्किट हाउस आ गयी. शंकर सिंह ने निगरानी को शिकायत की थी कि बेरबास पंचायत में उनकी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सीओ 50 हजार रिश्वत मांगी है. बड़ी बात ये है कि सीओ ने रिश्वत तब मांगी थी जबकि, अतिक्रमण मुक्ति का आदेश पूर्ववर्ती दो-दो लोक शिकायत जिला पदाधिकारी सह डीएम के द्वारा अंचलाधिकारी को दिया गया था. डीएम के आदेश के बाद भी जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया था. उसके खाली कराने के लिए सीओ से कई बार शिकायत की गयी थी. जिसमें डीएम के आदेश की कॉपी भी साथ थी. मगर, सीओ के द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम के द्वारा मंगलवार को सीतामढ़ी में सीओ की गिरफ्तारी के द्वारा पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि निगरानी के द्वारा आरोपी से सख्ती से पूछताछ की जा रही है. मामले में केस दर्ज किया जा चूका है. अब पूछताछ के बाद कार्रवाई की जाएगी.
बिहार के सीतामढ़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मंगलवार सुबह डुमरा प्रखंड के सीओ चंद्रजीत प्रकाश को रिश्वतखोरी में रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. बताया जा रहा है कि रामपुर परोड़ी पंचायत के शंकर सिंह के द्वारा शिकायत की गयी थी कि सीओ के द्वारा उनसे पचास हजार रुपये की डिमाड की गयी है. डीएसपी गोपाल कृष्णा और पवन कुमार के नेतृत्व में ग्यारह सदस्यीय टीम ने सीओ को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया. बताया जा रहा है कि टीम ने सीओ को उनके निजी आवास से हाफ पैंट और टी शर्ट में गिरफ्तार किया और चप्पल तक पहने का वक्त नहीं दिया. सीधे उन्हें लेकर सर्किट हाउस आ गयी. शंकर सिंह ने निगरानी को शिकायत की थी कि बेरबास पंचायत में उनकी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सीओ पचास हजार रिश्वत मांगी है. बड़ी बात ये है कि सीओ ने रिश्वत तब मांगी थी जबकि, अतिक्रमण मुक्ति का आदेश पूर्ववर्ती दो-दो लोक शिकायत जिला पदाधिकारी सह डीएम के द्वारा अंचलाधिकारी को दिया गया था. डीएम के आदेश के बाद भी जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया था. उसके खाली कराने के लिए सीओ से कई बार शिकायत की गयी थी. जिसमें डीएम के आदेश की कॉपी भी साथ थी. मगर, सीओ के द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम के द्वारा मंगलवार को सीतामढ़ी में सीओ की गिरफ्तारी के द्वारा पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि निगरानी के द्वारा आरोपी से सख्ती से पूछताछ की जा रही है. मामले में केस दर्ज किया जा चूका है. अब पूछताछ के बाद कार्रवाई की जाएगी.
कंपनी ने चैनल भागीदार कार्यक्रम चरण-2 के तहत मांग सृजित और बढ़ाने वाली इकाइयों के पैनल के लिए पंजीकरण खोले हैं, जिसमें वह ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं को तैयार करने, लागू करने और रखरखाव में केंद्रीय तथा राज्य एजेंसियों के साथ सहयोग करेगी। पंजीकरण प्रक्रिया 31 मई 2022 तक खुली रहेगी और सफल पक्षों की घोषणा एक जुलाई 2022 को की जाएगी। चैनल भागीदार कार्यक्रम चरण-2 के साथ ईईएसएल अपने ऊर्जा कुशल उपकरणों जैसे एलईडी ट्यूबलाइट, बल्ब, बीएलडीसी पंखे, अत्यधिक दक्ष एसी और चिलर के साथ ही अन्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यह कार्यक्रम ईईएसएल और इसके चैनल भागीदारों, दोनों को वृद्धि के कई अवसर मुहैया कराएगा।
कंपनी ने चैनल भागीदार कार्यक्रम चरण-दो के तहत मांग सृजित और बढ़ाने वाली इकाइयों के पैनल के लिए पंजीकरण खोले हैं, जिसमें वह ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं को तैयार करने, लागू करने और रखरखाव में केंद्रीय तथा राज्य एजेंसियों के साथ सहयोग करेगी। पंजीकरण प्रक्रिया इकतीस मई दो हज़ार बाईस तक खुली रहेगी और सफल पक्षों की घोषणा एक जुलाई दो हज़ार बाईस को की जाएगी। चैनल भागीदार कार्यक्रम चरण-दो के साथ ईईएसएल अपने ऊर्जा कुशल उपकरणों जैसे एलईडी ट्यूबलाइट, बल्ब, बीएलडीसी पंखे, अत्यधिक दक्ष एसी और चिलर के साथ ही अन्य उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यह कार्यक्रम ईईएसएल और इसके चैनल भागीदारों, दोनों को वृद्धि के कई अवसर मुहैया कराएगा।
बरेली : मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला का आज यानि संडे को आगाज होगा। यह मेला डिस्ट्रिक्ट के समस्त सीएचसी-पीएचसी पर लगाया जाएगा। शहर में संजय नगर स्थित सीएचसी पर मेले का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार करेंगे। इस मौके पर डीएम नितीश कुमार, सीएमओ विनीत कुमार शुक्ला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस आरोग्य मेले में डिस्ट्रिक्ट के मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स भी प्रतिभाग कर चिकित्सा अनुभव लेंगे। वहीं मेले में एक आयुष चिकित्सक और मोबाइल यूनिट भी तैनात होगी। आरोग्य मेले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभागए आरबीएसके की टीम भी रहेगी। वह लोगों के बीच योजनाओं का प्रचार करेगी। मेले में ओपीडी की सुविधा होगी। मरीजों की जांच के साथ ही उनको दवाएं दी जाएंगी। आरोग्य मेला सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगाया जाएगा। आरोग्य मेले में टीबी, मलेरिया, डेंगू, दिमागी बुखार, कालाजार, फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारियोंकी जांच की जाएगी। गर्भवती महिलाओं के लिए चलने वाली योजनाओंए संस्थागत प्रसव के बारे में बताया जाएगा। पूर्ण टीकाकरण की जानकारी भी दी जाएगी। आज से हर एक सीएचसी-पीएचसी पर जन आरोग्य स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लोगों को काफी स्वास्थ्य लाभ के साथ गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जाएगा। डॉ। विनीत कुमार शुक्ला, सीएमओ।
बरेली : मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला का आज यानि संडे को आगाज होगा। यह मेला डिस्ट्रिक्ट के समस्त सीएचसी-पीएचसी पर लगाया जाएगा। शहर में संजय नगर स्थित सीएचसी पर मेले का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार करेंगे। इस मौके पर डीएम नितीश कुमार, सीएमओ विनीत कुमार शुक्ला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। इस आरोग्य मेले में डिस्ट्रिक्ट के मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स भी प्रतिभाग कर चिकित्सा अनुभव लेंगे। वहीं मेले में एक आयुष चिकित्सक और मोबाइल यूनिट भी तैनात होगी। आरोग्य मेले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभागए आरबीएसके की टीम भी रहेगी। वह लोगों के बीच योजनाओं का प्रचार करेगी। मेले में ओपीडी की सुविधा होगी। मरीजों की जांच के साथ ही उनको दवाएं दी जाएंगी। आरोग्य मेला सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक लगाया जाएगा। आरोग्य मेले में टीबी, मलेरिया, डेंगू, दिमागी बुखार, कालाजार, फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारियोंकी जांच की जाएगी। गर्भवती महिलाओं के लिए चलने वाली योजनाओंए संस्थागत प्रसव के बारे में बताया जाएगा। पूर्ण टीकाकरण की जानकारी भी दी जाएगी। आज से हर एक सीएचसी-पीएचसी पर जन आरोग्य स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लोगों को काफी स्वास्थ्य लाभ के साथ गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जाएगा। डॉ। विनीत कुमार शुक्ला, सीएमओ।
लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के बीच महाराष्ट्र सरकार ने 11 लाख से ज्यादा प्रवासी कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने में परिवहन पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शनिवार को कहा कि इसके लिए केंद्रीय सहायता की भी प्रतीक्षा नहीं की गई. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में चलाई जा रही 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' के तहत कोविड-19 मरीजों मुफ्त इलाज किया जाएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि कोरोना वायरस के हालात की समीक्षा के बाद देशमुख ने कहा, 'केंद्र सरकार ने 85 फीसद सब्सिडी (श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से महाराष्ट्र से बाहर जाने वाले कामगारों के टिकट पर) देने का आश्वासन दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता की प्रतीक्षा नहीं की और 11 लाख कामगारों की यात्रा पर 100 रुपये खर्च कर दिए. ' अपने बयान में औरंगाबाद में पत्रकारों से अनिल देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस जांच प्रयोगशालाओं की संख्या 85 हो गई है. मार्च में महामारी फैलने की शुरुआत के समय दो से तीन ही थे. देशमुख के पास ही मेडिकल शिक्षा मंत्रालय भी है. वही, दूसरी तरफ, राज्य में निजी लैब में कोविड-19 जांच का शुल्क तय करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चार सदस्यीय समिति गठित की है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि सात दिनों के भीतर दर तय कर दी जाएगी. वही, महाराष्ट्र देश में सबसे प्रभावित राज्यों में शीर्ष बना हुआ है. राज्य में 2,739 नए मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या 82,968 हो गई है जबकि, अब तक 2,969 लोगों की जान जा चुकी है.
लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के बीच महाराष्ट्र सरकार ने ग्यारह लाख से ज्यादा प्रवासी कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने में परिवहन पर एक सौ करोड़ रुपये खर्च किए हैं. राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शनिवार को कहा कि इसके लिए केंद्रीय सहायता की भी प्रतीक्षा नहीं की गई. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में चलाई जा रही 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' के तहत कोविड-उन्नीस मरीजों मुफ्त इलाज किया जाएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि कोरोना वायरस के हालात की समीक्षा के बाद देशमुख ने कहा, 'केंद्र सरकार ने पचासी फीसद सब्सिडी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता की प्रतीक्षा नहीं की और ग्यारह लाख कामगारों की यात्रा पर एक सौ रुपयापये खर्च कर दिए. ' अपने बयान में औरंगाबाद में पत्रकारों से अनिल देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस जांच प्रयोगशालाओं की संख्या पचासी हो गई है. मार्च में महामारी फैलने की शुरुआत के समय दो से तीन ही थे. देशमुख के पास ही मेडिकल शिक्षा मंत्रालय भी है. वही, दूसरी तरफ, राज्य में निजी लैब में कोविड-उन्नीस जांच का शुल्क तय करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चार सदस्यीय समिति गठित की है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि सात दिनों के भीतर दर तय कर दी जाएगी. वही, महाराष्ट्र देश में सबसे प्रभावित राज्यों में शीर्ष बना हुआ है. राज्य में दो,सात सौ उनतालीस नए मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या बयासी,नौ सौ अड़सठ हो गई है जबकि, अब तक दो,नौ सौ उनहत्तर लोगों की जान जा चुकी है.
नई दिल्लीः शराब घोटाले में बुरी तरह घिरी दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के MLA 7 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने वाले हैं। इस दौरान AAP राष्ट्रपति से भाजपा के कथित 'ऑपरेशन लोटस' की शिकायत करेंगे। AAP विधायक, महामहिम से इसकी जांच कराने की मांग करेंगे। बता दें कि AAP ने आरोप लगाते हुए कहा था कि दिल्ली में उनकी सरकार गिराने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया गया, जिसमें विधायकों को 20-20 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। आप MLA आतिशी ने बताया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 सितंबर को मिलने का वक़्त दिया है। विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने जाएगा। हम उनसे ऑपरेशन लोटस की जांच कराए जाने की मांग करेंगे। AAP का भाजपा पर आरोप है कि ऑपरेशन लोटस के माध्यम से दूसरे राज्यों में जहां भाजपा की सरकार नहीं है, वहां उसे अस्थिर किया जा रहा है। विधायकों को खरीदकर सरकारें गिराई जा रही हैं। महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक सहित कई राज्यों में यह हो चुका है। दिल्ली में भाजपा का यही करने का प्रयास था, मगर यहां सफल नहीं हो पाया। AAP का यह भी आरोप है कि देश में ऑपरेशन लोटस के तहत कुल 277 MLA खरीदे गए, जिसके लिए भाजपा ने 6300 करोड़ रुपये खर्च किए। बता दें कि दिल्ली में भाजपा और AAP के बीच जारी सियासी लड़ाई अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दर तक पहुंचने वाली है। भाजपा विधायक 6 सितंबर को राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात कर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को उसके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दों पर बर्खास्त करने की मांग करेंगे।
नई दिल्लीः शराब घोटाले में बुरी तरह घिरी दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के MLA सात सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने वाले हैं। इस दौरान AAP राष्ट्रपति से भाजपा के कथित 'ऑपरेशन लोटस' की शिकायत करेंगे। AAP विधायक, महामहिम से इसकी जांच कराने की मांग करेंगे। बता दें कि AAP ने आरोप लगाते हुए कहा था कि दिल्ली में उनकी सरकार गिराने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया गया, जिसमें विधायकों को बीस-बीस करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। आप MLA आतिशी ने बताया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सात सितंबर को मिलने का वक़्त दिया है। विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने जाएगा। हम उनसे ऑपरेशन लोटस की जांच कराए जाने की मांग करेंगे। AAP का भाजपा पर आरोप है कि ऑपरेशन लोटस के माध्यम से दूसरे राज्यों में जहां भाजपा की सरकार नहीं है, वहां उसे अस्थिर किया जा रहा है। विधायकों को खरीदकर सरकारें गिराई जा रही हैं। महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक सहित कई राज्यों में यह हो चुका है। दिल्ली में भाजपा का यही करने का प्रयास था, मगर यहां सफल नहीं हो पाया। AAP का यह भी आरोप है कि देश में ऑपरेशन लोटस के तहत कुल दो सौ सतहत्तर MLA खरीदे गए, जिसके लिए भाजपा ने छः हज़ार तीन सौ करोड़ रुपये खर्च किए। बता दें कि दिल्ली में भाजपा और AAP के बीच जारी सियासी लड़ाई अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दर तक पहुंचने वाली है। भाजपा विधायक छः सितंबर को राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात कर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को उसके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दों पर बर्खास्त करने की मांग करेंगे।
के जेलोंमें रहा । मार्क्सबादका और मनन, मार्क्सवादी पार्टी का संगठन यही काम रहा। अगस्त १६४२ में केरलियन्को जेलसे छुट्टी मिली। फिर उसे खाने- नहानेकी फुरसत न थी। अब सारे मलबार जिले में फासिस्त विरोधी मोर्चा बाँधनेका काम केरलियन और उसके साथियोंका था । "अन्न अधिक उपजाओ" को विज्ञापन नहीं कार्यरूपमे परिणत करना है । जनताकी अन्न समस्याको भी हल करना है। लेकिन, आज सारा मलबार उसके साथ है। केरलियन्का छोटा भाई, जो खुद अध्यापक है, पाठशालाके अध्यापकोंमें काम करता है। तीनों बहने ( दो बडी ) केरलियन्के पथ को अच्छा मानती हैं। केरलियन और उसके साथियोंने मलबार में वह भूमि तय्यार करली है, जहाँ समय तेही प्रकृतिके हाथोंसे संवारा केरलका सुन्दर देश मनुष्यके हाथोंसे भी अलंकृत हो सुन्दरतर हो जायगा । श्रीपाद अमृत डाँगे जो ब्रह्माणीके गर्भ से पैदा हुआ, लेकिन अब्राह्मणी मॉकी गोद में पला और उस जातिके कड़वे मीठे अनुभवोको नजदीकसे देखा । होश सम्हालते जो तिलकका शैदायी हुआ और १८ सालकी उम्र में "होमरूल" भाग लिया । गाँधीवादसे कृष्ठ हो जिसने कॉलेज छोड़ देशसेवा के लिये जीवन दिया, और २२ सालकी उम्रमे सबसे पहले मार्क्सके पास पहुॅचा। जिसका सारा जीवन मजूरोकी लड़ाई लड़ने में बीता और जो भारतकी पार्टीकी नींव की पहिली ईट बना । जिसका जीवन एक व्यर्थका १८९९ अक्टूबर जन्म, १८९९-१९०६ ववई, ९९०६-१५ नासिकके, मराठीस्कूल में, १९०७ जनेऊ, १९१०-१५ नासिक हाईस्कूलमें, १९१५ वबईमें, १९१५-१७ भरडा हाईकलमें, १९१७ मेट्रिक पास, १९१७-२० विल्सन कालेजमें, १९१८ इन्फ्लुयेंजामें मजूरामें काम, ~ कालेजमें मराठी सोसाइटी स्थापना, "यग कालेजियट" सनगढन, १९१७ अनीश्वरवादी १९२० बी० ए० परीक्षासे तीन मास पहिले असहयोग, १९०१ राष्ट्रीय विद्यालयमें अध्यापक, १९२१ अगस्त "गॉधी वनाम लेनिन " लिखा, १९२२ "सोशलिस्ट" निकाला, १९२४ मजूरॉकी हडतालमें, १९२४ कानपुर वाल्शेविक षड्यंत्रमे, १९२४-२७ जेलोंमें, १९२७ मई २३ जेलसे वाहर, १९२८ आम हडताल, १९२९ मार्च २० मेरठ केसमें गिरफ्तार, १९३३ जनवरी वारह सालकी सजा, अपील में तीन साल, १९३५ मई जेलसे बाहर, १९३६ स्वास्थ्य ख़राब, १९३७ दिसम्बर फैजपुरमें प्रस्ताव पेश किया, १९३९ काग्रेस मिनिस्ट्रीके जेलमे, १९४० मार्च गिरफ्तार और नजरवन्ड, १९४१ अप्रेल-जुलाई जेलकी जेलमें, १९४३ फरवरी जेलसे गहर । जीवन नही बल्कि एक महान् आन्दोलनके जीवनका विकास है। श्रीपाद अमृत डागे वह पुरुष है । ठारहवी शताब्दी में मध्यभारत और युक्तप्रान्तमे मराठोंका शासन फैला हुआ था । मराठा साम्राज्य जब छिन्न-भिन्न हुआ, तो मराठा सर दारोंने अलग-अलग कितनीही रियासते कायम कर लीं। झासीका राज्य उन्हींमेंसे एक था । झासीकी बीर रानी लक्ष्मीबाईने अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई । लड़ते-लड़ते रणक्षेत्रमे उसने अपने प्राण दिये। झांसीका राज्यों ले लिया और झासीके सरदार जहाँतहाँ बिखर गये। इसी भगदड़ मे रघुनाथ डांगे अपने दो भाइयों के साथ मांडोगणमे ( अ पास बस गये। मकान बनानेमे जमीनसे तीनों भाइयोंको सोनेका एक चहबच्चा मिला। एक भाई निस्सन्तान मर गया, जिसके हिस्सेका सोना उन्होंने मणिकर्णिका ( बनारस ) में दान दे दिया। उन्होंने नासिकके पास कितनेही गॉव खरीदे और वे सुखी जीवन बिताने लगे । बूढ़ोंके पोता रघुनाथ डागे आदि नासिक शहरमे आ बसे । फजूलखर्चीमे धीरे-धीरे सारी जायदाद त्रिक गई । रघुनाथ के पुत्र अमृत तीन भाई जीविकाकी तलाश में १८६० में बम्बई चले। एक भाईने खूब रुपया कमाया । वह अपनी औरत छोड़ एक तरुण ब्राह्मण कन्या के प्रेमपाश में बद्ध हुआ और में पागल होकर मरा । एक भाई मृत डागे ( मृत्यु १९२० ) एक छोटे-मोटे कलाकार थे, ब्रुश चलाने वाले नहीं कैची चलाने वाले। वह ग्वालियर दरबार में कुछ समय तक रहे, लेकिन उन्होंने दरबारके लायक हृदय नही पाया था। फिर बम्बई में एक सोलीसीटरफर्ममें क्लर्क होगये। बड़े भाईके पागल हो जाने ( १९०५ ) पर उनके कामको अमृत डागेने सॅभाला । जन्म और बाल्य - अमृत रघुनाथ डागेको अक्टूबर १८६६ में एक लड़का पैदा हुआ, जिसका नाम रखा गया था श्रीपाद । श्रीपाद दो वर्षका भी नहीं होने पाया था, कि मॉ मर गई और उसका लालन-पालन उसके
के जेलोंमें रहा । मार्क्सबादका और मनन, मार्क्सवादी पार्टी का संगठन यही काम रहा। अगस्त एक हज़ार छः सौ बयालीस में केरलियन्को जेलसे छुट्टी मिली। फिर उसे खाने- नहानेकी फुरसत न थी। अब सारे मलबार जिले में फासिस्त विरोधी मोर्चा बाँधनेका काम केरलियन और उसके साथियोंका था । "अन्न अधिक उपजाओ" को विज्ञापन नहीं कार्यरूपमे परिणत करना है । जनताकी अन्न समस्याको भी हल करना है। लेकिन, आज सारा मलबार उसके साथ है। केरलियन्का छोटा भाई, जो खुद अध्यापक है, पाठशालाके अध्यापकोंमें काम करता है। तीनों बहने केरलियन्के पथ को अच्छा मानती हैं। केरलियन और उसके साथियोंने मलबार में वह भूमि तय्यार करली है, जहाँ समय तेही प्रकृतिके हाथोंसे संवारा केरलका सुन्दर देश मनुष्यके हाथोंसे भी अलंकृत हो सुन्दरतर हो जायगा । श्रीपाद अमृत डाँगे जो ब्रह्माणीके गर्भ से पैदा हुआ, लेकिन अब्राह्मणी मॉकी गोद में पला और उस जातिके कड़वे मीठे अनुभवोको नजदीकसे देखा । होश सम्हालते जो तिलकका शैदायी हुआ और अट्ठारह सालकी उम्र में "होमरूल" भाग लिया । गाँधीवादसे कृष्ठ हो जिसने कॉलेज छोड़ देशसेवा के लिये जीवन दिया, और बाईस सालकी उम्रमे सबसे पहले मार्क्सके पास पहुॅचा। जिसका सारा जीवन मजूरोकी लड़ाई लड़ने में बीता और जो भारतकी पार्टीकी नींव की पहिली ईट बना । जिसका जीवन एक व्यर्थका एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे अक्टूबर जन्म, एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे-एक हज़ार नौ सौ छः ववई, नौ हज़ार नौ सौ छः-पंद्रह नासिकके, मराठीस्कूल में, एक हज़ार नौ सौ सात जनेऊ, एक हज़ार नौ सौ दस-पंद्रह नासिक हाईस्कूलमें, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह वबईमें, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह-सत्रह भरडा हाईकलमें, एक हज़ार नौ सौ सत्रह मेट्रिक पास, एक हज़ार नौ सौ सत्रह-बीस विल्सन कालेजमें, एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह इन्फ्लुयेंजामें मजूरामें काम, ~ कालेजमें मराठी सोसाइटी स्थापना, "यग कालेजियट" सनगढन, एक हज़ार नौ सौ सत्रह अनीश्वरवादी एक हज़ार नौ सौ बीस बीशून्य एशून्य परीक्षासे तीन मास पहिले असहयोग, एक हज़ार नौ सौ एक राष्ट्रीय विद्यालयमें अध्यापक, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस अगस्त "गॉधी वनाम लेनिन " लिखा, एक हज़ार नौ सौ बाईस "सोशलिस्ट" निकाला, एक हज़ार नौ सौ चौबीस मजूरॉकी हडतालमें, एक हज़ार नौ सौ चौबीस कानपुर वाल्शेविक षड्यंत्रमे, एक हज़ार नौ सौ चौबीस-सत्ताईस जेलोंमें, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस मई तेईस जेलसे वाहर, एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस आम हडताल, एक हज़ार नौ सौ उनतीस मार्च बीस मेरठ केसमें गिरफ्तार, एक हज़ार नौ सौ तैंतीस जनवरी वारह सालकी सजा, अपील में तीन साल, एक हज़ार नौ सौ पैंतीस मई जेलसे बाहर, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस स्वास्थ्य ख़राब, एक हज़ार नौ सौ सैंतीस दिसम्बर फैजपुरमें प्रस्ताव पेश किया, एक हज़ार नौ सौ उनतालीस काग्रेस मिनिस्ट्रीके जेलमे, एक हज़ार नौ सौ चालीस मार्च गिरफ्तार और नजरवन्ड, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस अप्रेल-जुलाई जेलकी जेलमें, एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस फरवरी जेलसे गहर । जीवन नही बल्कि एक महान् आन्दोलनके जीवनका विकास है। श्रीपाद अमृत डागे वह पुरुष है । ठारहवी शताब्दी में मध्यभारत और युक्तप्रान्तमे मराठोंका शासन फैला हुआ था । मराठा साम्राज्य जब छिन्न-भिन्न हुआ, तो मराठा सर दारोंने अलग-अलग कितनीही रियासते कायम कर लीं। झासीका राज्य उन्हींमेंसे एक था । झासीकी बीर रानी लक्ष्मीबाईने अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई । लड़ते-लड़ते रणक्षेत्रमे उसने अपने प्राण दिये। झांसीका राज्यों ले लिया और झासीके सरदार जहाँतहाँ बिखर गये। इसी भगदड़ मे रघुनाथ डांगे अपने दो भाइयों के साथ मांडोगणमे में दान दे दिया। उन्होंने नासिकके पास कितनेही गॉव खरीदे और वे सुखी जीवन बिताने लगे । बूढ़ोंके पोता रघुनाथ डागे आदि नासिक शहरमे आ बसे । फजूलखर्चीमे धीरे-धीरे सारी जायदाद त्रिक गई । रघुनाथ के पुत्र अमृत तीन भाई जीविकाकी तलाश में एक हज़ार आठ सौ साठ में बम्बई चले। एक भाईने खूब रुपया कमाया । वह अपनी औरत छोड़ एक तरुण ब्राह्मण कन्या के प्रेमपाश में बद्ध हुआ और में पागल होकर मरा । एक भाई मृत डागे एक छोटे-मोटे कलाकार थे, ब्रुश चलाने वाले नहीं कैची चलाने वाले। वह ग्वालियर दरबार में कुछ समय तक रहे, लेकिन उन्होंने दरबारके लायक हृदय नही पाया था। फिर बम्बई में एक सोलीसीटरफर्ममें क्लर्क होगये। बड़े भाईके पागल हो जाने पर उनके कामको अमृत डागेने सॅभाला । जन्म और बाल्य - अमृत रघुनाथ डागेको अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ छयासठ में एक लड़का पैदा हुआ, जिसका नाम रखा गया था श्रीपाद । श्रीपाद दो वर्षका भी नहीं होने पाया था, कि मॉ मर गई और उसका लालन-पालन उसके
नाहन - पुलिस की ड्यूटी के साथ-साथ समाजसेवा की दिशा में अहम कार्य करने के लिए जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित छठी आईआरबी के कमांडेंट आईपीएस अजय कृष्ण शर्मा को दिल्ली स्थित समाजसेवी संस्था अधिकार मंच द्वारा छह दिसंबर को दिल्ली स्टार अवार्ड 2018 से सम्मानित किया जाएगा। आईपीएस अधिकारी अजय कृष्ण शर्मा को समाज सेवा मंे अहम योगदान के लिए यह पुरस्कार केंद्रीय मंत्री डा. हर्षवर्धन व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल द्वारा दिया जाएगा। इस बात की सूचना दिल्ली की समाजसेवी संस्था अधिकार मंच के महासचिव सतेंद्र त्रिपाठी ने आईआरबी छठी बटालियन धौलाकुआं जिला सिरमौर के कमांडेंट को भेजे गए एक सूचना पत्र में दी है। पत्र में कहा गया है कि सामाजिक संस्था अधिकार मंच की ओर से आगामी छह दिसंबर को 20 विंडसर प्लेस सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर दिल्ली स्टार अवार्ड बातचीत पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। सरकारी सेवा मंे रहते हुए सामाजिक क्षेत्र में अजय कृष्ण शर्मा के योगदान को देखते हुए संस्था द्वारा उन्हें दिल्ली स्टार अवार्ड 2018 के पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। गौर हो कि जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित आईआरबी छठी बटालियन ने कमांडेंट अजय कृष्ण शर्मा के नेतृत्व में जहां पूरे जिला सिरमौर में कालेज व स्कूल स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया है, वहीं धौलाकुआं मंे आईआरबी के कैंपस मंे गरीब बच्चों के लिए एक निःशुल्क कोचिंग सेंटर भी खोला गया है, जिसमें आईआरबी के अधिकारी व जवान क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को विभिन्न प्रकार की कोचिंग व शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
नाहन - पुलिस की ड्यूटी के साथ-साथ समाजसेवा की दिशा में अहम कार्य करने के लिए जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित छठी आईआरबी के कमांडेंट आईपीएस अजय कृष्ण शर्मा को दिल्ली स्थित समाजसेवी संस्था अधिकार मंच द्वारा छह दिसंबर को दिल्ली स्टार अवार्ड दो हज़ार अट्ठारह से सम्मानित किया जाएगा। आईपीएस अधिकारी अजय कृष्ण शर्मा को समाज सेवा मंे अहम योगदान के लिए यह पुरस्कार केंद्रीय मंत्री डा. हर्षवर्धन व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल द्वारा दिया जाएगा। इस बात की सूचना दिल्ली की समाजसेवी संस्था अधिकार मंच के महासचिव सतेंद्र त्रिपाठी ने आईआरबी छठी बटालियन धौलाकुआं जिला सिरमौर के कमांडेंट को भेजे गए एक सूचना पत्र में दी है। पत्र में कहा गया है कि सामाजिक संस्था अधिकार मंच की ओर से आगामी छह दिसंबर को बीस विंडसर प्लेस सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर दिल्ली स्टार अवार्ड बातचीत पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। सरकारी सेवा मंे रहते हुए सामाजिक क्षेत्र में अजय कृष्ण शर्मा के योगदान को देखते हुए संस्था द्वारा उन्हें दिल्ली स्टार अवार्ड दो हज़ार अट्ठारह के पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। गौर हो कि जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित आईआरबी छठी बटालियन ने कमांडेंट अजय कृष्ण शर्मा के नेतृत्व में जहां पूरे जिला सिरमौर में कालेज व स्कूल स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया है, वहीं धौलाकुआं मंे आईआरबी के कैंपस मंे गरीब बच्चों के लिए एक निःशुल्क कोचिंग सेंटर भी खोला गया है, जिसमें आईआरबी के अधिकारी व जवान क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को विभिन्न प्रकार की कोचिंग व शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
इत्यादि बातें कैसे उठ गई । शायद मैने कह दिया था कि भारतवर्ष शीघ्र ही स्वाधीन होगा और उसे विश्व के पुनर्निर्माण में हिस्सा लेना पड़ेगा । उस दिन के लिये भारतवर्षको से ही तैयार हो जाना चाहिए । - कुछ ऐसी ही बातें मैंने कही हांगी । गुरुदेव ने स्त्रय 'साधना' में भारतवर्ष के इस सन्देश की बात कही है, ऐसी मेरी धारणा थी । मुझे याद है कि उन्होंने प्रेम से मेरी बात सुनी और शान्त भाव से उत्तर दिया कि इस बात के लिये तैयारी की ज़रूरत नहीं है । ज़रूरत इस बात की है कि भारतवर्ष तपस्या करकेने योग्य सिद्ध करे । यदि वह साधना करेगा, तपस्या करेगा तो ससार स्वयं उसका सन्देश सुनने के लिये उत्सुक होगा । भारतवर्ष में साधना का भाव है, यदि वह स्वाधीन भी हो जाय तो सन्देश सुनाने की योग्यता उसमें भी नहीं आएगी । गुलामी केवल राजनीतिक थोड़े ही है । वह तो उसकी नस में व्याप्त हो चली है । अभी तुमने दुःख पाया कहाँ है ? अभी पुराने पापों का बहुत प्रायश्चित्त बाक़ी है । मैने उन बातों का कोई नोट नहीं रखा है और न मेरी इतनी तेज़ है कि उन्हें ज्यों-का-त्या उद्धृत कर सकें । परन्तु मुझे उनकी बातें मुझे बिलकुल नये रास्ते सोचने को मजबूर कर अनुभव किया कि भारतवर्ष यदि ही विश्व के दरबार में उसे अपनी बात सुनाने का मौक़ा ही नहीं दिया जाएगा । मै यह बात उस महा. मानव के मुँह से सुन रहा था जिसका सन्देश सुनने के लिये पश्चिम और पूर्व की जनता समुद्र की भाँति उमड़ पड़ती थी, जिसने उपेक्षित मात भारत को गड्ढे से उठाकर पहाड़ की चोटी पर बैठा दिया था । भारतीय मनीषा के सर्वोत्तम अंश के प्रतिनिधि रवीन्द्रनाथ थे और उन्हीं के मुँह से मैंने क्या सुना ? मेरा चित्त उस दिन कुछ प्रशान्त हो गया था यद्यपि मै ऐसा आदमी को नहीं मानता जो शहर की चिन्ता में दुबला हो जाया करता है। मुझे वह सुहावना समय, वह भव्य मूर्ति और वे झकझोर देनेवाली बातें कल की सी मालूम हो रही हैं । उस दिन उन्होंने कुछ उत्तेजित होकर ही कहा था कि भारतीय समाज तब तक शक्ति-संचय नहीं कर सकता जब तक वह साहसपूर्वक सत्य को स्वीकार न कर ले; परन्तु तुम जानते हो, सत्य को स्वीकार करने का महसूल इस देश में कितना है ? दीर्घकाल तक सच्चे मनुष्यों की बलि पाकर ही इस देश की शक्ति प्रसन्न हो सकती है। अभी तुमने बलि दी ही कहाँ है ?
इत्यादि बातें कैसे उठ गई । शायद मैने कह दिया था कि भारतवर्ष शीघ्र ही स्वाधीन होगा और उसे विश्व के पुनर्निर्माण में हिस्सा लेना पड़ेगा । उस दिन के लिये भारतवर्षको से ही तैयार हो जाना चाहिए । - कुछ ऐसी ही बातें मैंने कही हांगी । गुरुदेव ने स्त्रय 'साधना' में भारतवर्ष के इस सन्देश की बात कही है, ऐसी मेरी धारणा थी । मुझे याद है कि उन्होंने प्रेम से मेरी बात सुनी और शान्त भाव से उत्तर दिया कि इस बात के लिये तैयारी की ज़रूरत नहीं है । ज़रूरत इस बात की है कि भारतवर्ष तपस्या करकेने योग्य सिद्ध करे । यदि वह साधना करेगा, तपस्या करेगा तो ससार स्वयं उसका सन्देश सुनने के लिये उत्सुक होगा । भारतवर्ष में साधना का भाव है, यदि वह स्वाधीन भी हो जाय तो सन्देश सुनाने की योग्यता उसमें भी नहीं आएगी । गुलामी केवल राजनीतिक थोड़े ही है । वह तो उसकी नस में व्याप्त हो चली है । अभी तुमने दुःख पाया कहाँ है ? अभी पुराने पापों का बहुत प्रायश्चित्त बाक़ी है । मैने उन बातों का कोई नोट नहीं रखा है और न मेरी इतनी तेज़ है कि उन्हें ज्यों-का-त्या उद्धृत कर सकें । परन्तु मुझे उनकी बातें मुझे बिलकुल नये रास्ते सोचने को मजबूर कर अनुभव किया कि भारतवर्ष यदि ही विश्व के दरबार में उसे अपनी बात सुनाने का मौक़ा ही नहीं दिया जाएगा । मै यह बात उस महा. मानव के मुँह से सुन रहा था जिसका सन्देश सुनने के लिये पश्चिम और पूर्व की जनता समुद्र की भाँति उमड़ पड़ती थी, जिसने उपेक्षित मात भारत को गड्ढे से उठाकर पहाड़ की चोटी पर बैठा दिया था । भारतीय मनीषा के सर्वोत्तम अंश के प्रतिनिधि रवीन्द्रनाथ थे और उन्हीं के मुँह से मैंने क्या सुना ? मेरा चित्त उस दिन कुछ प्रशान्त हो गया था यद्यपि मै ऐसा आदमी को नहीं मानता जो शहर की चिन्ता में दुबला हो जाया करता है। मुझे वह सुहावना समय, वह भव्य मूर्ति और वे झकझोर देनेवाली बातें कल की सी मालूम हो रही हैं । उस दिन उन्होंने कुछ उत्तेजित होकर ही कहा था कि भारतीय समाज तब तक शक्ति-संचय नहीं कर सकता जब तक वह साहसपूर्वक सत्य को स्वीकार न कर ले; परन्तु तुम जानते हो, सत्य को स्वीकार करने का महसूल इस देश में कितना है ? दीर्घकाल तक सच्चे मनुष्यों की बलि पाकर ही इस देश की शक्ति प्रसन्न हो सकती है। अभी तुमने बलि दी ही कहाँ है ?
नवादा, बीपी प्रतिनिधि। बिहार के नवादा जिले के कई युवक सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है। वहीं युवाओं का कहना है कि भारत वापसी नहीं होने पर वह सुसाइड कर लेंगे। युवाओं का कहना है कि नौकरी के लिए सऊदी अरब गये दर्जनों युवक के साथ साउदी अरब की एक कंपनी महारा द्वारा धोखाधड़ी व जबरन पासपोर्ट कब्ज़े में लेकर शोषण करने का एक मामला का वीडियो वायरल हो रहा है। साउदी अरब में फसे दर्जनों युवक बिहार के नवादा, रजौली, शेखपुरा, बरबीघा, छपरा, सिवान और भागलपुर के निवासी बताए जाते है। सभी युवक सऊदी के रियाद शहर में स्तिथ महारा कंपनी पर शोषण करने का आरोप लगाया है। सभी पीड़ित युवक ने सोशल मीडिया पर जल्द से जल्द स्वदेश वापसी की गुहार लगा रहा है। अन्यथा सभी बिहार के युवक सुसाइड करने की बात पर कह रहे।
नवादा, बीपी प्रतिनिधि। बिहार के नवादा जिले के कई युवक सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई है। वहीं युवाओं का कहना है कि भारत वापसी नहीं होने पर वह सुसाइड कर लेंगे। युवाओं का कहना है कि नौकरी के लिए सऊदी अरब गये दर्जनों युवक के साथ साउदी अरब की एक कंपनी महारा द्वारा धोखाधड़ी व जबरन पासपोर्ट कब्ज़े में लेकर शोषण करने का एक मामला का वीडियो वायरल हो रहा है। साउदी अरब में फसे दर्जनों युवक बिहार के नवादा, रजौली, शेखपुरा, बरबीघा, छपरा, सिवान और भागलपुर के निवासी बताए जाते है। सभी युवक सऊदी के रियाद शहर में स्तिथ महारा कंपनी पर शोषण करने का आरोप लगाया है। सभी पीड़ित युवक ने सोशल मीडिया पर जल्द से जल्द स्वदेश वापसी की गुहार लगा रहा है। अन्यथा सभी बिहार के युवक सुसाइड करने की बात पर कह रहे।