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मुकेश अंबानी (फाइल फोटो) मुंबईः एशिया के सबसे अमीर अरबपति मुकेश अंबानी, गुरुवार को मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की 44वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयर धारकों को वर्चुअली संबोधित करेंगे. एजीएम के दौरान बड़ी धमाकेदार घोषणाओं के लिए मशहूर अंबानी से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने मुख्य O2C कारोबार और कंज्यूमर-फेसिंग रिटेल और टेलीकॉम बिजनेस में बड़ी घोषणाओं के साथ शेयरधारकों को खुश करेंगे. बाजार को उम्मीद है कि 64 वर्षीय बिजनेस टाइकून दुनिया की सबसे बड़ी तेल फर्म सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के साथ आरआईएल के नए ऑयल-टू-कैमिकल (O2C) व्यवसाय में 20% हिस्सेदारी बेचने के लिए लंबे समय से चल रहे 15 बिलियन सौदे को स्पष्ट करेंगे. पिछले साल, एजीएम के दौरान, अंबानी ने कहा था, "पिछले साल, मैंने आपके साथ हमारे O2C व्यवसाय में सऊदी अरामको द्वारा इक्विटी निवेश का आधार साझा किया था. ऊर्जा बाजार में अप्रत्याशित परिस्थितियों और कोविड -19 स्थिति के कारण, सौदे में मूल समयरेखा के अनुसार प्रगति नहीं हुई. हम इस प्रक्रिया को 2021 की शुरुआत तक पूरा करने की उम्मीद करते हैं. " सऊदी अरामको के चेयरमैन और किंगडम के वेल्थ फंड पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के गवर्नर यासिर अल-रुमायन को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बोर्ड में शामिल किया जा सकता है, जो 15 बिलियन डॉलर के सौदे का अग्रदूत है. हालांकि, 2019 में हस्ताक्षरित सौदा अभी तक पूरा नहीं हुआ है. आरआईएल ने अपनी खुदरा और डिजिटल संपत्तियों में हिस्सेदारी बेचकर 2. 6 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे, और अब निवेशक नई पहल (जैसे ई-कॉमर्स से लेकर 5G रोलआउट तक) के लिए रणनीतिक रोड मैप तैयार करने के लिए आरआईएल प्रमुख को देख रहे हैं. रिलायंस अपना पहला 5G फोन Google और JioBook के साथ मिलकर लॉन्च कर सकता है, जो Reliance Jio का कम कीमत वाला किफायती लैपटॉप है. हालांकि, अंबानी की स्थानीय रूप से असेंबल किए गए Google-संचालित स्मार्टफोन के साथ भारतीय बाजार को जीतने की योजना को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ब्लूमबर्ग ने पिछले सप्ताह मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया था कि आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान और उत्पादन की मात्रा को दबाने वाले घटकों की बढ़ती कीमतों जैसे मुश्किलें आ रही है. विश्लेषकों का मानना है कि फीचर फोन ग्राहकों को जियो 4जी ग्राहकों में बदलने के लिए फोन की कीमत महत्वपूर्ण होगी. पिछले साल अंबानी ने देश में 5जी की तैनाती की बात कही थी. अंबानी ने पिछले साल की एजीएम के दौरान कहा था, "JIO ने शुरू से एक पूर्ण 5G सॉल्यूशन डिजाइन विकसित किया है. यह हमें 100% घरेलू प्रौद्योगिकियों और समाधानों का उपयोग करके भारत में एक विश्व स्तरीय 5G सेवा शुरू करने में सक्षम करेगा. यह मेड-इन-इंडिया 5G सॉल्यूशन 5जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध होते ही परीक्षण के लिए तैयार होगा. . . और अगले साल फील्ड परिनियोजन के लिए तैयार हो सकता है. जिओ के अभिसरण, सभी-आईपी नेटवर्क आर्किटेक्चर के कारण हम आसानी से अपने 4 जी नेटवर्क को 5 जी में अपग्रेड कर सकते हैं. एक बार जब जियो का 5 जी सॉल्यूशन राष्ट्रीय-स्तर पर सिद्ध हो जाता है तो Jio प्लेटफॉर्म पूरी तरह से प्रबंधित सेवा के रूप में, वैश्विक स्तर पर अन्य दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए 5G सॉल्यूशन के निर्यातक के रूप में अच्छी तरह से तैनात होंगे. " अंबानी के 5जी प्लान पर निवेशकों की नजर होगी. खुदरा मोर्चे पर, निवेशक JioMart के संचालन पर स्पष्टता की तलाश करेंगे, (जिसकी अब 200 शहरों में मौजूदगी है), साथ ही AJIO फैशन और लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म पर भी उनकी नजर होगी. ग्लोबल ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म Goldman Sachs के मुताबिक, रिटेल आरआईएल के लिए ग्रोथ का अगला इंजन हो सकता है क्योंकि उसका मानना है कि रिटेल EBITDA अगले 10 सालों में 10 गुना बढ़ सकता है. आरआईएल की एजीएम ऐतिहासिक रूप से एक उत्सुकता से देखी जाने वाली घटना रही है (पहले फिजिकल फॉर्मेट में आयोजित होने पर 3,000 शेयरधारकों ने भाग लिया था और पिछले साल 42 देशों और 468 शहरों में वर्चुअल एजीएम को 300,000 समवर्ती दर्शकों ने देखा था) यह भी पढ़ेंः
मुकेश अंबानी मुंबईः एशिया के सबसे अमीर अरबपति मुकेश अंबानी, गुरुवार को मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की चौंतालीसवीं वार्षिक आम बैठक में शेयर धारकों को वर्चुअली संबोधित करेंगे. एजीएम के दौरान बड़ी धमाकेदार घोषणाओं के लिए मशहूर अंबानी से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने मुख्य Oदो डिग्री सेल्सियस कारोबार और कंज्यूमर-फेसिंग रिटेल और टेलीकॉम बिजनेस में बड़ी घोषणाओं के साथ शेयरधारकों को खुश करेंगे. बाजार को उम्मीद है कि चौंसठ वर्षीय बिजनेस टाइकून दुनिया की सबसे बड़ी तेल फर्म सऊदी अरामको के साथ आरआईएल के नए ऑयल-टू-कैमिकल व्यवसाय में बीस% हिस्सेदारी बेचने के लिए लंबे समय से चल रहे पंद्रह बिलियन सौदे को स्पष्ट करेंगे. पिछले साल, एजीएम के दौरान, अंबानी ने कहा था, "पिछले साल, मैंने आपके साथ हमारे Oदो डिग्री सेल्सियस व्यवसाय में सऊदी अरामको द्वारा इक्विटी निवेश का आधार साझा किया था. ऊर्जा बाजार में अप्रत्याशित परिस्थितियों और कोविड -उन्नीस स्थिति के कारण, सौदे में मूल समयरेखा के अनुसार प्रगति नहीं हुई. हम इस प्रक्रिया को दो हज़ार इक्कीस की शुरुआत तक पूरा करने की उम्मीद करते हैं. " सऊदी अरामको के चेयरमैन और किंगडम के वेल्थ फंड पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के गवर्नर यासिर अल-रुमायन को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बोर्ड में शामिल किया जा सकता है, जो पंद्रह बिलियन डॉलर के सौदे का अग्रदूत है. हालांकि, दो हज़ार उन्नीस में हस्ताक्षरित सौदा अभी तक पूरा नहीं हुआ है. आरआईएल ने अपनी खुदरा और डिजिटल संपत्तियों में हिस्सेदारी बेचकर दो. छः लाख करोड़ रुपये जुटाए थे, और अब निवेशक नई पहल के लिए रणनीतिक रोड मैप तैयार करने के लिए आरआईएल प्रमुख को देख रहे हैं. रिलायंस अपना पहला पाँचG फोन Google और JioBook के साथ मिलकर लॉन्च कर सकता है, जो Reliance Jio का कम कीमत वाला किफायती लैपटॉप है. हालांकि, अंबानी की स्थानीय रूप से असेंबल किए गए Google-संचालित स्मार्टफोन के साथ भारतीय बाजार को जीतने की योजना को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ब्लूमबर्ग ने पिछले सप्ताह मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया था कि आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान और उत्पादन की मात्रा को दबाने वाले घटकों की बढ़ती कीमतों जैसे मुश्किलें आ रही है. विश्लेषकों का मानना है कि फीचर फोन ग्राहकों को जियो चारजी ग्राहकों में बदलने के लिए फोन की कीमत महत्वपूर्ण होगी. पिछले साल अंबानी ने देश में पाँचजी की तैनाती की बात कही थी. अंबानी ने पिछले साल की एजीएम के दौरान कहा था, "JIO ने शुरू से एक पूर्ण पाँचG सॉल्यूशन डिजाइन विकसित किया है. यह हमें एक सौ% घरेलू प्रौद्योगिकियों और समाधानों का उपयोग करके भारत में एक विश्व स्तरीय पाँचG सेवा शुरू करने में सक्षम करेगा. यह मेड-इन-इंडिया पाँचG सॉल्यूशन पाँचजी स्पेक्ट्रम उपलब्ध होते ही परीक्षण के लिए तैयार होगा. . . और अगले साल फील्ड परिनियोजन के लिए तैयार हो सकता है. जिओ के अभिसरण, सभी-आईपी नेटवर्क आर्किटेक्चर के कारण हम आसानी से अपने चार जी नेटवर्क को पाँच जी में अपग्रेड कर सकते हैं. एक बार जब जियो का पाँच जी सॉल्यूशन राष्ट्रीय-स्तर पर सिद्ध हो जाता है तो Jio प्लेटफॉर्म पूरी तरह से प्रबंधित सेवा के रूप में, वैश्विक स्तर पर अन्य दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए पाँचG सॉल्यूशन के निर्यातक के रूप में अच्छी तरह से तैनात होंगे. " अंबानी के पाँचजी प्लान पर निवेशकों की नजर होगी. खुदरा मोर्चे पर, निवेशक JioMart के संचालन पर स्पष्टता की तलाश करेंगे, , साथ ही AJIO फैशन और लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म पर भी उनकी नजर होगी. ग्लोबल ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म Goldman Sachs के मुताबिक, रिटेल आरआईएल के लिए ग्रोथ का अगला इंजन हो सकता है क्योंकि उसका मानना है कि रिटेल EBITDA अगले दस सालों में दस गुना बढ़ सकता है. आरआईएल की एजीएम ऐतिहासिक रूप से एक उत्सुकता से देखी जाने वाली घटना रही है यह भी पढ़ेंः
Ranchi : केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन एवं उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे 22 नवम्बर को रांची आ रहे हैं. वे 22 से 24 नवंबर तक झारखंड दौरे पर रहेंगे. केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री चौबे 22 नवंबर को रांची आयेंगे और 25 नवंबर को देवघर से बिहार जायेंगे. तीन दिवसीय झारखंड दौरे में श्री चौबे राज्यपाल रमेश बैस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिष्टाचार मुलकात करेंगे. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन विभाग, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, एकीकृत क्षेत्रीय निदेशक व अधिकारियों के साथ और उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारतीय खाद्य निगम झारखंड के महाप्रबंधक, बीआईएस झारखंड के उपमहानिरीक्षक सीडब्ल्यूसी के क्षेत्रीय निदेशक व अधिकारियों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठक करेंगे. प्रदेश भाजपा कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. आजादी के अमृत महोत्सव के आईकॉनिक वीक के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भाग लेंगे. श्री चौबे रजरप्पा, पेटरवार देवघर व तारापीठ होते हुए भागलपुर जायेंगे.
Ranchi : केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन एवं उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे बाईस नवम्बर को रांची आ रहे हैं. वे बाईस से चौबीस नवंबर तक झारखंड दौरे पर रहेंगे. केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री चौबे बाईस नवंबर को रांची आयेंगे और पच्चीस नवंबर को देवघर से बिहार जायेंगे. तीन दिवसीय झारखंड दौरे में श्री चौबे राज्यपाल रमेश बैस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिष्टाचार मुलकात करेंगे. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन विभाग, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, एकीकृत क्षेत्रीय निदेशक व अधिकारियों के साथ और उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारतीय खाद्य निगम झारखंड के महाप्रबंधक, बीआईएस झारखंड के उपमहानिरीक्षक सीडब्ल्यूसी के क्षेत्रीय निदेशक व अधिकारियों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठक करेंगे. प्रदेश भाजपा कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. आजादी के अमृत महोत्सव के आईकॉनिक वीक के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भाग लेंगे. श्री चौबे रजरप्पा, पेटरवार देवघर व तारापीठ होते हुए भागलपुर जायेंगे.
जब बादल फटता हैं तो होता क्या है...पल भर में कैसे आती है आसमान से प्रलय? What is cloud burst and Why it happens: बीते एक हफ्ते में उत्तराखंड और हिमाचल में बादल फटने की खबरें आई है. ऐसे में जान और माल का भारी नुकसान हुआ है. आइए जानें आखिर क्यों और कैसे बादल फटता है. अक्सर लोग सवाल करते हैं कि क्या बादल गुब्बारें की तरह फटता है? क्या एक साथ पानी का सैलाब आ जाता है? जब बादल फटता है तो क्या होता है? इस पर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादल फटने की घटना तब होती है जब काफी ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह पर रुक जाते हैं और वहां मौजूद पानी की बूंदें आपस में मिलने लगती हैं. बूंदों के भार से बादल का घनत्व काफी बढ़ जाता है और फिर अचानक भारी बारिश शुरू हो जाती है.बादल फटने पर 100 मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश हो सकती है. बादल फटने का मतलब होता है एक जगह पर बड़ी मात्रा में बारिश एक साथ हो जाना. 100 मिलीमीटर प्रति घंटे यानी 5 इंच प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश पड़े तो उसे बादल फटना कहा जाता है. ऐसी परिस्थिति में बूंदों का आकार भी सामान्य से बड़ा होता है. इसकी वजह होती है ऑरोग्राफिक लिफ्ट. यही वजह है की बादल फटने की घटनाएं अकसर पहाड़ों पर होती हैं. मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि पानी से भरे बादल जब पहाड़ों के बीच फंस जाते हैं और ऊंचाई की वजह से बादल आगे नहीं बढ़ पाते. तभी अचानक एक ही स्थान पर भारी बारिश शुरू हो जाता है. कुछ ही सेकेंड्स में 2 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो जाती है. आमतौर पर ऐसा पाहड़ों पर होता है. अक्सर 15 किमी की ऊंचाई पर बादल फटते हैं.बादल फटने का दायरा ज्यादातर एक वर्ग किमी से ज्यादा रिकॉर्ड नहीं किया गया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जैसे-जैसे ये बूंदे इकट्ठी होती जाती हैं वैसे ही पानी की सघनता बढ़ने लगती है और पानी का वजन बढ़ने लगता है. इस बढ़ते बोझ को बादल सहन नहीं कर पाते हैं और एक साथ सारा पानी बरसा देते हैं. ऐसे बादलों को प्रैग्नेंट क्लाउड यानी गर्भवती बादल कहते हैं. ऐसे बादल अकसर कम ऊंचाई यानी 15 किलोमीटर के आसपास ही होते हैं. बादल फटने का इलाका ज्यादा नहीं होता है. लेकिन एक ही जगह पर इतनी ज्यादा बारिश होने से अव्यवस्था हो जाती है. पहाड़ों से यह पानी तेज बहाव से नीचे आता है. इस पानी के साथ कीचड़ और मलबा भी होता है जो ज्यादा घातक होता है. पहले यह माना जाता था कि बादल फटने की घटना सिर्फ पहाड़ों पर ही होती है. लेकिन, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 26 जुलाई 2005 को बादल फटने की एक घटना के बाद यह धारणा बदल गई है. अब यह माना जाता है कि कई बार मौदानी इलाकों में भी ऐसी स्थिति बन जाती है. जब बादल फट सकता है. माना जाता है कि बादल के मार्ग में अचानक से गर्म हवा का झोंका आ जाए तो भी बादल फट जाते हैं. मुंबई की घटना इसी वजह से हुई थी. पहाड़ों में ऐसा क्या होता है...जो वहीं सबसे ज्यादा बादल फटते है? पहाड़ की तलहटी में मौजूद गर्म हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठने लगती है. जब यह गर्म हवा ऊपर मौजूद बादलों से टकराती है. बादलों में मौजूद पानी के अणुओं के बीच लगने वाला अंतरआण्विक बल कमजोर हो जाता है. इस वजह से पानी की बूंदें भी हवा के साथ ऊपर उठने लगती हैं. ये बूंदे आपस में मिलकर बड़ी बूंदों में बदल जाती हैं. ये संघनित तो हो जाती हैं लेकिन इलेक्ट्रो बलों के चलते ये बादलों से बाहर नहीं निकल पाती. ज्यादा नमी वाले ऐसे बहुत सारे बादल एक साथ इकट्ठा होते जाते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहाड़ों पर बादल फटने से इतनी तेज बारिश होती है जो सैलाब बन जाती है. पहाड़ों पर पानी रूकता नहीं इसलिए तेजी से पानी नीचे आता है. नीचे आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, कीचड़ और पत्थरों के टुकड़े ले आता है. इसकी गति इतनी तेज होती है कि इसके सामने पड़ने वाली हर चीज बर्बाद हो जाती है.
जब बादल फटता हैं तो होता क्या है...पल भर में कैसे आती है आसमान से प्रलय? What is cloud burst and Why it happens: बीते एक हफ्ते में उत्तराखंड और हिमाचल में बादल फटने की खबरें आई है. ऐसे में जान और माल का भारी नुकसान हुआ है. आइए जानें आखिर क्यों और कैसे बादल फटता है. अक्सर लोग सवाल करते हैं कि क्या बादल गुब्बारें की तरह फटता है? क्या एक साथ पानी का सैलाब आ जाता है? जब बादल फटता है तो क्या होता है? इस पर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादल फटने की घटना तब होती है जब काफी ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह पर रुक जाते हैं और वहां मौजूद पानी की बूंदें आपस में मिलने लगती हैं. बूंदों के भार से बादल का घनत्व काफी बढ़ जाता है और फिर अचानक भारी बारिश शुरू हो जाती है.बादल फटने पर एक सौ मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश हो सकती है. बादल फटने का मतलब होता है एक जगह पर बड़ी मात्रा में बारिश एक साथ हो जाना. एक सौ मिलीमीटर प्रति घंटे यानी पाँच इंच प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश पड़े तो उसे बादल फटना कहा जाता है. ऐसी परिस्थिति में बूंदों का आकार भी सामान्य से बड़ा होता है. इसकी वजह होती है ऑरोग्राफिक लिफ्ट. यही वजह है की बादल फटने की घटनाएं अकसर पहाड़ों पर होती हैं. मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि पानी से भरे बादल जब पहाड़ों के बीच फंस जाते हैं और ऊंचाई की वजह से बादल आगे नहीं बढ़ पाते. तभी अचानक एक ही स्थान पर भारी बारिश शुरू हो जाता है. कुछ ही सेकेंड्स में दो सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो जाती है. आमतौर पर ऐसा पाहड़ों पर होता है. अक्सर पंद्रह किमी की ऊंचाई पर बादल फटते हैं.बादल फटने का दायरा ज्यादातर एक वर्ग किमी से ज्यादा रिकॉर्ड नहीं किया गया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जैसे-जैसे ये बूंदे इकट्ठी होती जाती हैं वैसे ही पानी की सघनता बढ़ने लगती है और पानी का वजन बढ़ने लगता है. इस बढ़ते बोझ को बादल सहन नहीं कर पाते हैं और एक साथ सारा पानी बरसा देते हैं. ऐसे बादलों को प्रैग्नेंट क्लाउड यानी गर्भवती बादल कहते हैं. ऐसे बादल अकसर कम ऊंचाई यानी पंद्रह किलोग्राममीटर के आसपास ही होते हैं. बादल फटने का इलाका ज्यादा नहीं होता है. लेकिन एक ही जगह पर इतनी ज्यादा बारिश होने से अव्यवस्था हो जाती है. पहाड़ों से यह पानी तेज बहाव से नीचे आता है. इस पानी के साथ कीचड़ और मलबा भी होता है जो ज्यादा घातक होता है. पहले यह माना जाता था कि बादल फटने की घटना सिर्फ पहाड़ों पर ही होती है. लेकिन, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में छब्बीस जुलाई दो हज़ार पाँच को बादल फटने की एक घटना के बाद यह धारणा बदल गई है. अब यह माना जाता है कि कई बार मौदानी इलाकों में भी ऐसी स्थिति बन जाती है. जब बादल फट सकता है. माना जाता है कि बादल के मार्ग में अचानक से गर्म हवा का झोंका आ जाए तो भी बादल फट जाते हैं. मुंबई की घटना इसी वजह से हुई थी. पहाड़ों में ऐसा क्या होता है...जो वहीं सबसे ज्यादा बादल फटते है? पहाड़ की तलहटी में मौजूद गर्म हवा पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठने लगती है. जब यह गर्म हवा ऊपर मौजूद बादलों से टकराती है. बादलों में मौजूद पानी के अणुओं के बीच लगने वाला अंतरआण्विक बल कमजोर हो जाता है. इस वजह से पानी की बूंदें भी हवा के साथ ऊपर उठने लगती हैं. ये बूंदे आपस में मिलकर बड़ी बूंदों में बदल जाती हैं. ये संघनित तो हो जाती हैं लेकिन इलेक्ट्रो बलों के चलते ये बादलों से बाहर नहीं निकल पाती. ज्यादा नमी वाले ऐसे बहुत सारे बादल एक साथ इकट्ठा होते जाते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहाड़ों पर बादल फटने से इतनी तेज बारिश होती है जो सैलाब बन जाती है. पहाड़ों पर पानी रूकता नहीं इसलिए तेजी से पानी नीचे आता है. नीचे आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, कीचड़ और पत्थरों के टुकड़े ले आता है. इसकी गति इतनी तेज होती है कि इसके सामने पड़ने वाली हर चीज बर्बाद हो जाती है.
फिर यह सलाह होने लगी कि इन कागजात के बगैर मुकदमा कैसे चलेगा । पच तो पहले ही से निर्बल था । जो कुछ बल था, वह इसी बही खाते का था। अब तो वे सबूत भी हाथ से गये । दावे में कुछ जान ही न रही ; मगर भानुकुँवरि ने कहा - चला से हार जायँगे। हमारी चीज कोई छीन ले, तो हमारा धर्म है कि उससे यथाशक्ति लड़ें, हारकर बैठ रहना कायरों का काम है । सेठजी (वकोल ) को इस दुर्घटना का समाचार मिला तो उन्होंने भी यही कहा कि अब दावे में जरा भी जान नहीं है। केवल अनुमान और तर्क का भरोसा है । अदालत ने माना तो माना ; नहीं तो हार माननी पड़ेगी ; पर भानुकुँत्ररि ने एक न मानी । लखनऊ और इलाहाबाद से दो होशियार बैरिस्टर बुलाये । मुकदमा शुरू होगया । सारे शहर में इस मुकदमे की इस मुकदमे की धूम थी। कितने ही रईसों को भानुकुँवरि ने साथी बनाया था। मुकदमा शुरू होने के समय हजारों आदमियों को भौड़ हो जाती थी । लोगों के इस खिंचाव का मुख्य कारण यह था कि भानुकुँवरि एक पर्दे की भाड़ में बैठी हुई श्रदालत की कार्रवाई देखा करती थी; क्योंकि उसे अपने नौकरों पर जरा भी विश्वास न था । वादी बैरिस्टर ने एक बड़ी मार्मिक वक्तृता दी। उसने सत्यनारायण की पूर्भवस्था का खूब अच्छा चित्र खींचा। उसने दिखलाया कि "वे कैसे स्वामिभक्त, कैसे कार्य-कुशल, कैसे कर्म-शील थे; और स्वर्गवासी पण्डित भृगदत्त का उनपर पूर्ण विश्वास हो जाना किस तरह स्वाभाविक था। इसके बाद उसने सिद्ध किया कि मुंशी सत्यनारायण की आर्थिक अवस्था कभी ऐसी न थी कि बे इतना धन संचय करते । अन्त में उसने मुंशोजी की स्वार्थपरता, कूटनीति निर्दयता और विश्वास वातकता का ऐसा घृणोलादक चित्र खींचा कि लोग मुंशीजी को गालियाँ देने लगे । इसके साथ ही उसने परिडतजी के अनाथ बालकों की दशा का बड़ा ही करुणोदक वर्णन किया - कैसे शोक और लज्बा की बात है कि ऐसा चरित्रवान्, ऐसा नीतिकुशल मनुष्य इतना गिर जाय कि अपने स्वामी के अनाथ बालकों की गर्दन पर छुरी चलाने में संकोच न करे । मानव-पतन का ऐसा करुण, ऐसा हृदय विदारक उदाहरण मिलना कठिन है, इस कुटिल कार्य के परिणाम की दृष्टि से इस मनुष्य के पूर्व-परिचित सद्गुणों का गौरव लुप्त हो जाता है। क्योंकि वे असली मोती नहीं, नकली काँव के दाने थे, जो केवल विश्वास जमाने के
फिर यह सलाह होने लगी कि इन कागजात के बगैर मुकदमा कैसे चलेगा । पच तो पहले ही से निर्बल था । जो कुछ बल था, वह इसी बही खाते का था। अब तो वे सबूत भी हाथ से गये । दावे में कुछ जान ही न रही ; मगर भानुकुँवरि ने कहा - चला से हार जायँगे। हमारी चीज कोई छीन ले, तो हमारा धर्म है कि उससे यथाशक्ति लड़ें, हारकर बैठ रहना कायरों का काम है । सेठजी को इस दुर्घटना का समाचार मिला तो उन्होंने भी यही कहा कि अब दावे में जरा भी जान नहीं है। केवल अनुमान और तर्क का भरोसा है । अदालत ने माना तो माना ; नहीं तो हार माननी पड़ेगी ; पर भानुकुँत्ररि ने एक न मानी । लखनऊ और इलाहाबाद से दो होशियार बैरिस्टर बुलाये । मुकदमा शुरू होगया । सारे शहर में इस मुकदमे की इस मुकदमे की धूम थी। कितने ही रईसों को भानुकुँवरि ने साथी बनाया था। मुकदमा शुरू होने के समय हजारों आदमियों को भौड़ हो जाती थी । लोगों के इस खिंचाव का मुख्य कारण यह था कि भानुकुँवरि एक पर्दे की भाड़ में बैठी हुई श्रदालत की कार्रवाई देखा करती थी; क्योंकि उसे अपने नौकरों पर जरा भी विश्वास न था । वादी बैरिस्टर ने एक बड़ी मार्मिक वक्तृता दी। उसने सत्यनारायण की पूर्भवस्था का खूब अच्छा चित्र खींचा। उसने दिखलाया कि "वे कैसे स्वामिभक्त, कैसे कार्य-कुशल, कैसे कर्म-शील थे; और स्वर्गवासी पण्डित भृगदत्त का उनपर पूर्ण विश्वास हो जाना किस तरह स्वाभाविक था। इसके बाद उसने सिद्ध किया कि मुंशी सत्यनारायण की आर्थिक अवस्था कभी ऐसी न थी कि बे इतना धन संचय करते । अन्त में उसने मुंशोजी की स्वार्थपरता, कूटनीति निर्दयता और विश्वास वातकता का ऐसा घृणोलादक चित्र खींचा कि लोग मुंशीजी को गालियाँ देने लगे । इसके साथ ही उसने परिडतजी के अनाथ बालकों की दशा का बड़ा ही करुणोदक वर्णन किया - कैसे शोक और लज्बा की बात है कि ऐसा चरित्रवान्, ऐसा नीतिकुशल मनुष्य इतना गिर जाय कि अपने स्वामी के अनाथ बालकों की गर्दन पर छुरी चलाने में संकोच न करे । मानव-पतन का ऐसा करुण, ऐसा हृदय विदारक उदाहरण मिलना कठिन है, इस कुटिल कार्य के परिणाम की दृष्टि से इस मनुष्य के पूर्व-परिचित सद्गुणों का गौरव लुप्त हो जाता है। क्योंकि वे असली मोती नहीं, नकली काँव के दाने थे, जो केवल विश्वास जमाने के
इस क्रम में सबसे पहला नाम आता है मलिंगा का। श्रीलंका के लसिथ मलिंगा 38 विकटों के साथ वर्ल्ड टी 20 के अब तक के सबसे सफल गेंदबाज बन चुके हैं। इस बार के वर्ल्ड टी20 में नंबर एक मलिंगा को पाकिस्तान के कप्तान शाहिद अफरीदी चुनौती देंगे। अब तक वर्ल्डकप टी 20 में अफरीदी के नाम 35 विकेट लिखे हुए हैं। इसके बाद अब ये बात तो तय है कि वह किसी भी कीमत पर मलिंगा को पछाड़ने का प्रयास करते रहेंगे। मलिंगा के बारे में इन दिनों सुनने को मिल रहा है कि वैसे भी वह इन दिनों चोटों से खासे परेशान हैं। इसी वजह से वह एशिया कप के कई अहम मुकाबलों में नहीं खेल सके। अब वर्ल्ड टी20 के स्क्वाड में शामिल मलिंगा का खेलना उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। ऐसे में अब अगर मलिंगा नहीं खेल पाते हैं तो जाहिर तौर पर अफरीदी आगे निकल जाएंगे। इस तरह से वे बन जाएंगे वर्ल्ड टी 20 के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज। वहीं दूसरी ओर ये बात भी साफ है कि अगर मलिंगा खेले तो मुसीबत अफरीदी के लिए भी हो जाएगी। मलिंगा के बाद दूसरा नंबर आता है पाकिस्तान के सईद अजमल का। अजमल ने 23 मैचों में 36 विकेट लिए हैं। इसके इतर वर्ल्ड टी20 में श्रीलंका के अजंता मेंडिस ने 21 मैचों में 35 विकेट और पाकिस्तान के उमर गुल ने 24 मैचों में कुल 35 विकेट लेने का अब तक का रिकॉर्ड बनाया है।
इस क्रम में सबसे पहला नाम आता है मलिंगा का। श्रीलंका के लसिथ मलिंगा अड़तीस विकटों के साथ वर्ल्ड टी बीस के अब तक के सबसे सफल गेंदबाज बन चुके हैं। इस बार के वर्ल्ड टीबीस में नंबर एक मलिंगा को पाकिस्तान के कप्तान शाहिद अफरीदी चुनौती देंगे। अब तक वर्ल्डकप टी बीस में अफरीदी के नाम पैंतीस विकेट लिखे हुए हैं। इसके बाद अब ये बात तो तय है कि वह किसी भी कीमत पर मलिंगा को पछाड़ने का प्रयास करते रहेंगे। मलिंगा के बारे में इन दिनों सुनने को मिल रहा है कि वैसे भी वह इन दिनों चोटों से खासे परेशान हैं। इसी वजह से वह एशिया कप के कई अहम मुकाबलों में नहीं खेल सके। अब वर्ल्ड टीबीस के स्क्वाड में शामिल मलिंगा का खेलना उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। ऐसे में अब अगर मलिंगा नहीं खेल पाते हैं तो जाहिर तौर पर अफरीदी आगे निकल जाएंगे। इस तरह से वे बन जाएंगे वर्ल्ड टी बीस के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज। वहीं दूसरी ओर ये बात भी साफ है कि अगर मलिंगा खेले तो मुसीबत अफरीदी के लिए भी हो जाएगी। मलिंगा के बाद दूसरा नंबर आता है पाकिस्तान के सईद अजमल का। अजमल ने तेईस मैचों में छत्तीस विकेट लिए हैं। इसके इतर वर्ल्ड टीबीस में श्रीलंका के अजंता मेंडिस ने इक्कीस मैचों में पैंतीस विकेट और पाकिस्तान के उमर गुल ने चौबीस मैचों में कुल पैंतीस विकेट लेने का अब तक का रिकॉर्ड बनाया है।
जमशेदपुरः जमशेदपुर के सिदगोड़ा बाजार में भाजपा नेता रंजन सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के भतीजे कमलेश साहू के खिलाफ हमला करने और मारपीट का आरोप लगाया है. इस घटना में रंजन सिंह बुरी तरह से घायल हो गये हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव के समय किसी बात को लेकर दोनों के बीच तू-तू मैं-मैं हुई थी और तब से कमलेश साहू समय का इंतजार कर रहा था. उधर पिछले दिन रंजन सिंह अपने कार्यालय में बैठे थे तभी करीब 25 की संख्या में कमलेश साहू अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे और मारपीट करने लगे. इस संबंध में कमलेश साहू के खिलाफ सिदगोड़ा थाना में एक मामला दर्ज किया गया है लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. मामले की लीपापोती करने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. वैसे सीसीटीवी फुटेज में सब कुछ दिख रहा है कि कैसे कमलेश साहू अपने गुर्गों के साथ पहुंचता है और उसके बाद मारपीट करता है. उजला शर्ट पहने हुए कमलेश शाहु दबंग अंदाज में आते हैं और रंजन सिंह पर हमला कर देते हैं, जिसमें रंजन सिंह जख्मी हो जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक रघुवर दास के भतीजे कमलेश साहु की गुंडागर्दी की ये पहली कहानी नहीं है, उनके खिलाफ मारपीट के कई आरोप लग चुके हैं और पूर्व में चाचा रघुवर दास के सत्ता में रहने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती थी और इस बार भी लीपापोती की कोशिश जारी हो गई है.
जमशेदपुरः जमशेदपुर के सिदगोड़ा बाजार में भाजपा नेता रंजन सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के भतीजे कमलेश साहू के खिलाफ हमला करने और मारपीट का आरोप लगाया है. इस घटना में रंजन सिंह बुरी तरह से घायल हो गये हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव के समय किसी बात को लेकर दोनों के बीच तू-तू मैं-मैं हुई थी और तब से कमलेश साहू समय का इंतजार कर रहा था. उधर पिछले दिन रंजन सिंह अपने कार्यालय में बैठे थे तभी करीब पच्चीस की संख्या में कमलेश साहू अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे और मारपीट करने लगे. इस संबंध में कमलेश साहू के खिलाफ सिदगोड़ा थाना में एक मामला दर्ज किया गया है लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. मामले की लीपापोती करने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. वैसे सीसीटीवी फुटेज में सब कुछ दिख रहा है कि कैसे कमलेश साहू अपने गुर्गों के साथ पहुंचता है और उसके बाद मारपीट करता है. उजला शर्ट पहने हुए कमलेश शाहु दबंग अंदाज में आते हैं और रंजन सिंह पर हमला कर देते हैं, जिसमें रंजन सिंह जख्मी हो जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक रघुवर दास के भतीजे कमलेश साहु की गुंडागर्दी की ये पहली कहानी नहीं है, उनके खिलाफ मारपीट के कई आरोप लग चुके हैं और पूर्व में चाचा रघुवर दास के सत्ता में रहने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती थी और इस बार भी लीपापोती की कोशिश जारी हो गई है.
तपते हिमाचल में आसमान से राहत की फुहारे बरसी है। शिमला सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शनिवार दोपहर बाद बारिश हुई है। शिमला में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई है। बारिश होने से अधिकतम तापमान में एक से तीन डिग्री तक की गिरावट आई है। तापमान में गिरावट आने से लोगों ने पड़ रही प्रचड़ गर्मी से काफी हद तक की राहत ली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान प्रदेश के मैदानी इलाकों सहित शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन, सिरमौर, चंबा और डलहौजी में रविवार को भी एक- दो स्थानों पर भारी बारिश होगी। इसके लिए विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में तीन मई को मौसम साफ बना रहेगा, जबकि चार व पांच मई को फिर से भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। राज्य में सात मई तक मौसम खराब बना रहेगा। प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में दोपहर तक मौसम साफ बना रहा। मगर दोपहर बाद आसमान में काले बादलों के घिरने के साथ बारिश शुरू हो गई। शिमला में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश होने से अधिकतम तापमान में एक से तीन डिग्री तक की गिरावट आई है। नाहन व सोलन के अधिकतम तापमान में सबसे ज्यादा तीन डिग्री तक की गिरावट रिकार्ड की गई है। भुंतर में दो, शिमला, सुंदरनगर, ऊना व केलांग के तापमान में एक डिग्री तक की गिरावट आई है। चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर व कल्पा के तापमान में शुक्रवार के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश में मैदानी व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तीन दिनों के दौरान भारी बारिश होगी। प्रदेश में सात मई तक मौसम खराब बना रहेगा।
तपते हिमाचल में आसमान से राहत की फुहारे बरसी है। शिमला सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शनिवार दोपहर बाद बारिश हुई है। शिमला में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई है। बारिश होने से अधिकतम तापमान में एक से तीन डिग्री तक की गिरावट आई है। तापमान में गिरावट आने से लोगों ने पड़ रही प्रचड़ गर्मी से काफी हद तक की राहत ली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान प्रदेश के मैदानी इलाकों सहित शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन, सिरमौर, चंबा और डलहौजी में रविवार को भी एक- दो स्थानों पर भारी बारिश होगी। इसके लिए विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में तीन मई को मौसम साफ बना रहेगा, जबकि चार व पांच मई को फिर से भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। राज्य में सात मई तक मौसम खराब बना रहेगा। प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में दोपहर तक मौसम साफ बना रहा। मगर दोपहर बाद आसमान में काले बादलों के घिरने के साथ बारिश शुरू हो गई। शिमला में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि हुई। बारिश होने से अधिकतम तापमान में एक से तीन डिग्री तक की गिरावट आई है। नाहन व सोलन के अधिकतम तापमान में सबसे ज्यादा तीन डिग्री तक की गिरावट रिकार्ड की गई है। भुंतर में दो, शिमला, सुंदरनगर, ऊना व केलांग के तापमान में एक डिग्री तक की गिरावट आई है। चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर व कल्पा के तापमान में शुक्रवार के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने बताया कि प्रदेश में मैदानी व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तीन दिनों के दौरान भारी बारिश होगी। प्रदेश में सात मई तक मौसम खराब बना रहेगा।
सिद्धांत चतुर्वेदी ने कही ये बात (Photo Credit: Social Media) नई दिल्लीः सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) अब तक तीन फिल्मों में दिखाई दिए हैं. जिनमें 'गली बॉय', 'बंटी और बबली 2' और 'गहराइयां' का नाम शामिल है. लेकिन गली बॉय छोड़कर उनकी किसी भी फिल्म ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया. इस बीच हाल ही में एक्टर ने अपने फिल्म सेलेक्शन (Siddhant Chaturvedi on his film selection style) के तरीके पर बात की है. जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसे सुनने के बाद लोगों ने उन्हें बुरी तरह से ट्रोल (Siddhant Chaturvedi trolled) करना शुरू कर दिया है. नेटिजन्म की तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. तो एक्टर ने ऐसा क्या कह दिया, ये हम आपको इस आर्टिकल में बताने वाले हैं. उन्होंने आगे जोया अख्तर के निर्देशन में बन रही फिल्म 'खो गए हम कहां' (Siddhant Chaturvedi on kho gaye hum kahan) समेत अन्य फिल्मों पर बात की. जिसमें एक्टर ने कहा कि उन्होंने इसी तरह से इस फिल्म को चुना है और यहां तक कि उन्होंने एक्शन फिल्म 'युद्ध्रा' (Siddhant Chaturvedi on yudhra) भी इसी तरह से साइन किया है. उनका कहना है कि वो अपनी पीढ़ी से जुड़ी फिल्में बनाना चाहते हैं. सिद्धार्थ के फिल्म सेलेक्शन के तरीके के बारे में जानकर फैंस ने उनकी तारीफ की है. जबकि नेटिजन्स का कहना है कि एक्टर को फिल्में चुनने का तरीका सुधारना चाहिए, क्योंकि उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रहीं हैं. हालांकि, आपको बताते चलें कि एक्टर जल्द ही फिल्म 'फोन भूत' (Siddhant Chaturvedi in phone bhoot) में दिखने वाले हैं. जिसके प्रमोशन में फिलहाल एक्टर व्यस्त हैं.
सिद्धांत चतुर्वेदी ने कही ये बात नई दिल्लीः सिद्धांत चतुर्वेदी अब तक तीन फिल्मों में दिखाई दिए हैं. जिनमें 'गली बॉय', 'बंटी और बबली दो' और 'गहराइयां' का नाम शामिल है. लेकिन गली बॉय छोड़कर उनकी किसी भी फिल्म ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया. इस बीच हाल ही में एक्टर ने अपने फिल्म सेलेक्शन के तरीके पर बात की है. जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसे सुनने के बाद लोगों ने उन्हें बुरी तरह से ट्रोल करना शुरू कर दिया है. नेटिजन्म की तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. तो एक्टर ने ऐसा क्या कह दिया, ये हम आपको इस आर्टिकल में बताने वाले हैं. उन्होंने आगे जोया अख्तर के निर्देशन में बन रही फिल्म 'खो गए हम कहां' समेत अन्य फिल्मों पर बात की. जिसमें एक्टर ने कहा कि उन्होंने इसी तरह से इस फिल्म को चुना है और यहां तक कि उन्होंने एक्शन फिल्म 'युद्ध्रा' भी इसी तरह से साइन किया है. उनका कहना है कि वो अपनी पीढ़ी से जुड़ी फिल्में बनाना चाहते हैं. सिद्धार्थ के फिल्म सेलेक्शन के तरीके के बारे में जानकर फैंस ने उनकी तारीफ की है. जबकि नेटिजन्स का कहना है कि एक्टर को फिल्में चुनने का तरीका सुधारना चाहिए, क्योंकि उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप हो रहीं हैं. हालांकि, आपको बताते चलें कि एक्टर जल्द ही फिल्म 'फोन भूत' में दिखने वाले हैं. जिसके प्रमोशन में फिलहाल एक्टर व्यस्त हैं.
सर्दी का मौसम पूरे जोरों पर है। ठंड बढने के साथ तमाम लोग कोल्ड, फ्लू और थ्रोट इंफेक्शन की चपेट में आ गए हैं। इस मौसम में गले का इंफेक्शन बेहद कॉमन प्रॉब्लम है। आपने जरा सा कुछ उलटा-सीधा खाया नहीं कि सीधे गला इंफेक्शन की चपेट में आ जाता है। कई बार तो गले का इंफेक्शन इतना जबर्दस्त होता है कि आप चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते और खाने की बात तो दूर पानी पीने में गला दर्द करता है। हद तो तब हो जाती है, जब थ्रोट इंफेक्शन की वजह से पूरे दिन आपके गले में दर्द रहता है। जानते हैं कि आप इससे कैसे छुटकारा पा सकते हैं।
सर्दी का मौसम पूरे जोरों पर है। ठंड बढने के साथ तमाम लोग कोल्ड, फ्लू और थ्रोट इंफेक्शन की चपेट में आ गए हैं। इस मौसम में गले का इंफेक्शन बेहद कॉमन प्रॉब्लम है। आपने जरा सा कुछ उलटा-सीधा खाया नहीं कि सीधे गला इंफेक्शन की चपेट में आ जाता है। कई बार तो गले का इंफेक्शन इतना जबर्दस्त होता है कि आप चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाते और खाने की बात तो दूर पानी पीने में गला दर्द करता है। हद तो तब हो जाती है, जब थ्रोट इंफेक्शन की वजह से पूरे दिन आपके गले में दर्द रहता है। जानते हैं कि आप इससे कैसे छुटकारा पा सकते हैं।
क्या भ्रष्टाचार का मुद्दा मिशन 2019 का भी चुनावी एजेंडा बनने वाला है? ख़बरदार में आज हम विश्लेषण की शुरुआत इसी सवाल के साथ करेंगे, क्योंकि पिछले 24 घंटे की पॉलिटिक्स से तो यही समझ में आ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के चुनावी एजेंडे को 2019 में भी रिपीट करना चाहते हैं. भले ही राफेल को लेकर राहुल गांधी लगातार उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सिर्फ पलटवार ही नहीं बल्कि इसे चुनाव तक भी ले जाना चाहते हैं. क्रिश्चियन मिशेल की बात हो या फिर रॉबर्ट वाड्रा के करीबियों के खिलाफ जांच हों, टीम मोदी हर मुमकिन रास्तों से कांग्रेस को फिर उसी मुद्दे पर घेरने में जुटी है जो नरेंद्र मोदी को 2014 की जीत दिलवाने में एक बड़ा फैक्टर रहा था. भ्रष्टाचार के इस चुनावी एजेंडे में नया मामला यूपी का जुड़ा गया है, जहां अखिलेश सरकार के दौरान खनन मामले को सीबीआई ने खोला, जिसकी टाइमिंग के बारे में विरोधी ये कह रहे हैं कि गठबंधन के पीछे सीबीआई लगा दी गई है. Is corruption, once again, going to become an agenda in 2019 elections? Today, in Khabardar we will start our analysis with the same question, because if we look at the politics of past 24 hours then it is visible that PM Modi will, once again, bring corruption as an election agenda just like he did in the year 2014. Be it Christian Michell or be it about raiding close aides of Robert Vadra, team of PM Modi is trying to attack the Congress party on the same issues, which they have used in the year 2014. Case of illegal mining during the Akhilesh government is the fresh case which has joined the corruption agenda.
क्या भ्रष्टाचार का मुद्दा मिशन दो हज़ार उन्नीस का भी चुनावी एजेंडा बनने वाला है? ख़बरदार में आज हम विश्लेषण की शुरुआत इसी सवाल के साथ करेंगे, क्योंकि पिछले चौबीस घंटाटे की पॉलिटिक्स से तो यही समझ में आ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो हज़ार चौदह के चुनावी एजेंडे को दो हज़ार उन्नीस में भी रिपीट करना चाहते हैं. भले ही राफेल को लेकर राहुल गांधी लगातार उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सिर्फ पलटवार ही नहीं बल्कि इसे चुनाव तक भी ले जाना चाहते हैं. क्रिश्चियन मिशेल की बात हो या फिर रॉबर्ट वाड्रा के करीबियों के खिलाफ जांच हों, टीम मोदी हर मुमकिन रास्तों से कांग्रेस को फिर उसी मुद्दे पर घेरने में जुटी है जो नरेंद्र मोदी को दो हज़ार चौदह की जीत दिलवाने में एक बड़ा फैक्टर रहा था. भ्रष्टाचार के इस चुनावी एजेंडे में नया मामला यूपी का जुड़ा गया है, जहां अखिलेश सरकार के दौरान खनन मामले को सीबीआई ने खोला, जिसकी टाइमिंग के बारे में विरोधी ये कह रहे हैं कि गठबंधन के पीछे सीबीआई लगा दी गई है. Is corruption, once again, going to become an agenda in दो हज़ार उन्नीस elections? Today, in Khabardar we will start our analysis with the same question, because if we look at the politics of past चौबीस hours then it is visible that PM Modi will, once again, bring corruption as an election agenda just like he did in the year दो हज़ार चौदह. Be it Christian Michell or be it about raiding close aides of Robert Vadra, team of PM Modi is trying to attack the Congress party on the same issues, which they have used in the year दो हज़ार चौदह. Case of illegal mining during the Akhilesh government is the fresh case which has joined the corruption agenda.
एकीवाल क्यो विकल्प मालोक्य संगरगत कुरुराजसैन्यं । सस्मारतत्वमा हपुंगवकायकान्त निद्रांचयोगकलितां भगवान्युकुन्दः ।। एक होते हुए भी प्रलय के समुद्र के समान युद्ध में आयी कुरुराज दुर्योधन की सेनादेखकर भगवान् कृ ष्ठा को सर्पराज शेष के शरीर की शय्या का योगनिद्रा का समरण हो जाया । इस श्लोक में यद्यपि तत्व और निद्रा का स्मरण उनके सादृश्य देखने से उद्बुद्ध संस्कार के फलस्वरूप नहीं होता तथापि सेना में समुद्र कासादृश्य देखने के कारण समुद्र का संस्कार उद्बुद्ध होता है फलस्वरूप समुद्र का स्मरण होता है और उस स्मरण के अधीन है तत्व और निद्रा का स्मरण । इस प्रकार परम्परयातल्प और निद्रा का स्मरण भी उद्बुद्ध संस्कार के ही फलस्वरूप होता है इसलिए यहाँ लक्षण के प्रयुक्त होने में कोई कठिनाई नहीं है क्योंकि लक्षण में यह विवक्षित नहीं है कि सादृश्य, जिसका स्मरण ही उसका सम्बन्धी होना चाहिए बल्कि यह अभीष्ट है कि सादृश्य चाहे किसी से सम्बन्ध रखे किन्तु वह सादृश्य द्वारा साक्षात अथवा परम्परा उद्बुद्ध संस्कार के फलस्वरूप होना चाहिए। पण्डितराज में कुछ लोगों के मत का स्मरण किया है जिनके अनुसार सादृश्य के ज्ञान से उत्पन्न संस्कार से जनित और सदृश विषयक ही स्मरण अलंकार रूप होता है और इसलिए उपर्युक्त श्लोक में भुजवेन्द्र शेष और निद्रा का स्मरण अलंकार रूप नहीं है। किन्तु नागेश भट्ट ने इस मत के प्रति पण्डितराज की रूचि को स्पष्ट कर दिया है। इस मत में पूर्व लक्षण के प्रयोज्य पद के स्थान पर अन्य पद तथा सादृश्यविषयकमेव इतना अतिरिक्त सनिवेश किया गया है। पूर्वात पथ में शेषशा और निद्रा का स्मरण यद्यपि समुद्र के स्मरण से उत्पन्न होता है तथापि सदृश के विषय में नहीं है अतः ऐसे स्मरण की अलंकार नहीं कहा जा सकता । किन्तु इस प्रशा में सदृशविषयकमेव - इस वंश का लाण में सन्निवेश व्यर्थ है क्योंकि सदृश के ज्ञान से उद्बुद्ध संस्कार द्वारा उत्पन्न स्मरण के बारे में नहीं होता और दूसरे समुद्र का स्मरण तो सदृश का ज्ञान है ही क्योंकि स्मरण ज्ञानरूप ही है। समुद्र सैना के समान है। इस समुद्र के स्मरण के द्वारा शय्या यादि के स्मरण के अनुकूल संस्कार का उद्बोधन होता ही है तल्प आदि का स्मरण भी सादृश्यज्ञान से उद्भूत संस्कार द्वारा जनित ही सिद्ध हो जाता है अतः केचित का प्रयत्न व्यर्थ ही है । अप्पय दीक्षित का लक्षण है स्मृतिसादृश्यमूलाया वस्त्वन्तरसमाया । स्मरणालंकृतिसास्यादव्यंग्यत्व विशेषता ।। अर्थात सादृश्यमूलक भिन्नवस्तुसमात्रिता अव्यंग्य स्मृति स्मरणलंकार होता है । इस लाण में वस्त्वन्तर शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है कि स्मरणालंकार सदृश वस्तु तथा सदृश वस्तु सम्बन्धी वस्तु दोनों के स्मरण में होता है त सदृश वस्तु सम्बन्धी वस्तु का संग्रह करने के लिए वस्त्वन्तर के साथ सदृशविशेषण नहीं लगाया बह गया। साथ ही व्यंग्य रूप स्मृति के वारण के लिए अव्यंग्यत्व विशेषता विशेषण दिया गया है । पण्डितराज इन दोनों विशेषणों को व्यर्थ समझते हैं। पहला विशेषण इसलिए व्यर्थ है कि सादृश्यमूलस्मृतिः स्मरणालंकार : - इतने लक्षण से ही दीक्षित की अभिमत दोनों वस्तुओं का ग्रहण हो जाता है। श्रव्यंग्यत्वविशेषता विशेषण भी व्यर्थ है क्योंकि व्यंग्य भी गुणीभूत होने पर अलंकार बनते ही है अतः स्मृति भी जहां रसादि की उपस्कारिता होगी वहां अलंकार बन ही जाएगी। जहां केवल स्मृति होती है और इसके १ः रसगंगाधर, - मप्रकाश, पृ०२८७-२८८ २. चित्रमीमांसा - पृ० १५६ प्रयोजक रूप में कोई सदृश वस्तु नहीं होती वहां स्मरणालंकार न होकर स्मृति नामक संचारीभाव हो सकता है १ इसी बात को लंकारसर्वस्वकार ने ऋत्रानुगोद मृगमानिवृतस्स रंगवातेनु विनिमलसैदः रहस्त्वदुपउंग निषOTमूर्धा स्मरानि वानीरगृहेषु सुप्तः ।। अर्थात यहां गोदावरी के किनारे-किनारे मृगया से लोटकर तरंगों से लग कर आती वायु से श्रान्ति रहित हुआ में वैसनिकुंजों में तुम्हारी गोद में सिर रख कर सोता था - यह याद कर रहा हूं । यहां स्मृति भाव मान कर स्पष्ट किया है । पण्डितराज ने अलंकारसर्वस्वकार के लक्षण में सदृशानुभव को स्मरण का बीज मानने का खण्डन किया है क्योंकि ऐसा मानते पर ऐसे स्थलों पर जहां सदृश स्मरण से उत्पन्न संस्कार से भी स्मरण होता है वहां स्मरणालंकार न हो सकेगा क्योंकि सदृश स्मरण से उत्पन्न संस्कार तो सदृशानुभव कहला नहीं सकता । रुय्यक का लक्षण मानने पर निम्नलिखित श्लोक में स्मरणालंकार ही ही नहीं सकेगा सन्स्यैवास्मिन जगति बच्चः पणि रम्यरूपा स्तैषां मध्ये मम तुमहती वासना चातकेष्ट । मेर व्यवरथ निजसवं नीर स्मारमभिः स्मृत्वास्ठं भवति किमपि वसं कृष्णााभिधानम् ।। मेरी इस संसार में बहुतैर रमणीय रूप वाले पी है पर उनमें से बातकों पर मरती प्रीति है, जो भारत के सामने आते ही अपने मित्र मेघों का स्मरण कराते और जिससे कृष्णा नामक एक अनिर्वचनीय ब्रत स्मृति में मास्क हो जाता है। १ः रसगंगाधर, पृ० २६०-२६१ २. अलंकारसर्वस्व, पृ० ४०
एकीवाल क्यो विकल्प मालोक्य संगरगत कुरुराजसैन्यं । सस्मारतत्वमा हपुंगवकायकान्त निद्रांचयोगकलितां भगवान्युकुन्दः ।। एक होते हुए भी प्रलय के समुद्र के समान युद्ध में आयी कुरुराज दुर्योधन की सेनादेखकर भगवान् कृ ष्ठा को सर्पराज शेष के शरीर की शय्या का योगनिद्रा का समरण हो जाया । इस श्लोक में यद्यपि तत्व और निद्रा का स्मरण उनके सादृश्य देखने से उद्बुद्ध संस्कार के फलस्वरूप नहीं होता तथापि सेना में समुद्र कासादृश्य देखने के कारण समुद्र का संस्कार उद्बुद्ध होता है फलस्वरूप समुद्र का स्मरण होता है और उस स्मरण के अधीन है तत्व और निद्रा का स्मरण । इस प्रकार परम्परयातल्प और निद्रा का स्मरण भी उद्बुद्ध संस्कार के ही फलस्वरूप होता है इसलिए यहाँ लक्षण के प्रयुक्त होने में कोई कठिनाई नहीं है क्योंकि लक्षण में यह विवक्षित नहीं है कि सादृश्य, जिसका स्मरण ही उसका सम्बन्धी होना चाहिए बल्कि यह अभीष्ट है कि सादृश्य चाहे किसी से सम्बन्ध रखे किन्तु वह सादृश्य द्वारा साक्षात अथवा परम्परा उद्बुद्ध संस्कार के फलस्वरूप होना चाहिए। पण्डितराज में कुछ लोगों के मत का स्मरण किया है जिनके अनुसार सादृश्य के ज्ञान से उत्पन्न संस्कार से जनित और सदृश विषयक ही स्मरण अलंकार रूप होता है और इसलिए उपर्युक्त श्लोक में भुजवेन्द्र शेष और निद्रा का स्मरण अलंकार रूप नहीं है। किन्तु नागेश भट्ट ने इस मत के प्रति पण्डितराज की रूचि को स्पष्ट कर दिया है। इस मत में पूर्व लक्षण के प्रयोज्य पद के स्थान पर अन्य पद तथा सादृश्यविषयकमेव इतना अतिरिक्त सनिवेश किया गया है। पूर्वात पथ में शेषशा और निद्रा का स्मरण यद्यपि समुद्र के स्मरण से उत्पन्न होता है तथापि सदृश के विषय में नहीं है अतः ऐसे स्मरण की अलंकार नहीं कहा जा सकता । किन्तु इस प्रशा में सदृशविषयकमेव - इस वंश का लाण में सन्निवेश व्यर्थ है क्योंकि सदृश के ज्ञान से उद्बुद्ध संस्कार द्वारा उत्पन्न स्मरण के बारे में नहीं होता और दूसरे समुद्र का स्मरण तो सदृश का ज्ञान है ही क्योंकि स्मरण ज्ञानरूप ही है। समुद्र सैना के समान है। इस समुद्र के स्मरण के द्वारा शय्या यादि के स्मरण के अनुकूल संस्कार का उद्बोधन होता ही है तल्प आदि का स्मरण भी सादृश्यज्ञान से उद्भूत संस्कार द्वारा जनित ही सिद्ध हो जाता है अतः केचित का प्रयत्न व्यर्थ ही है । अप्पय दीक्षित का लक्षण है स्मृतिसादृश्यमूलाया वस्त्वन्तरसमाया । स्मरणालंकृतिसास्यादव्यंग्यत्व विशेषता ।। अर्थात सादृश्यमूलक भिन्नवस्तुसमात्रिता अव्यंग्य स्मृति स्मरणलंकार होता है । इस लाण में वस्त्वन्तर शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है कि स्मरणालंकार सदृश वस्तु तथा सदृश वस्तु सम्बन्धी वस्तु दोनों के स्मरण में होता है त सदृश वस्तु सम्बन्धी वस्तु का संग्रह करने के लिए वस्त्वन्तर के साथ सदृशविशेषण नहीं लगाया बह गया। साथ ही व्यंग्य रूप स्मृति के वारण के लिए अव्यंग्यत्व विशेषता विशेषण दिया गया है । पण्डितराज इन दोनों विशेषणों को व्यर्थ समझते हैं। पहला विशेषण इसलिए व्यर्थ है कि सादृश्यमूलस्मृतिः स्मरणालंकार : - इतने लक्षण से ही दीक्षित की अभिमत दोनों वस्तुओं का ग्रहण हो जाता है। श्रव्यंग्यत्वविशेषता विशेषण भी व्यर्थ है क्योंकि व्यंग्य भी गुणीभूत होने पर अलंकार बनते ही है अतः स्मृति भी जहां रसादि की उपस्कारिता होगी वहां अलंकार बन ही जाएगी। जहां केवल स्मृति होती है और इसके एकः रसगंगाधर, - मप्रकाश, पृदो सौ सत्तासी-दो सौ अठासी दो. चित्रमीमांसा - पृशून्य एक सौ छप्पन प्रयोजक रूप में कोई सदृश वस्तु नहीं होती वहां स्मरणालंकार न होकर स्मृति नामक संचारीभाव हो सकता है एक इसी बात को लंकारसर्वस्वकार ने ऋत्रानुगोद मृगमानिवृतस्स रंगवातेनु विनिमलसैदः रहस्त्वदुपउंग निषOTमूर्धा स्मरानि वानीरगृहेषु सुप्तः ।। अर्थात यहां गोदावरी के किनारे-किनारे मृगया से लोटकर तरंगों से लग कर आती वायु से श्रान्ति रहित हुआ में वैसनिकुंजों में तुम्हारी गोद में सिर रख कर सोता था - यह याद कर रहा हूं । यहां स्मृति भाव मान कर स्पष्ट किया है । पण्डितराज ने अलंकारसर्वस्वकार के लक्षण में सदृशानुभव को स्मरण का बीज मानने का खण्डन किया है क्योंकि ऐसा मानते पर ऐसे स्थलों पर जहां सदृश स्मरण से उत्पन्न संस्कार से भी स्मरण होता है वहां स्मरणालंकार न हो सकेगा क्योंकि सदृश स्मरण से उत्पन्न संस्कार तो सदृशानुभव कहला नहीं सकता । रुय्यक का लक्षण मानने पर निम्नलिखित श्लोक में स्मरणालंकार ही ही नहीं सकेगा सन्स्यैवास्मिन जगति बच्चः पणि रम्यरूपा स्तैषां मध्ये मम तुमहती वासना चातकेष्ट । मेर व्यवरथ निजसवं नीर स्मारमभिः स्मृत्वास्ठं भवति किमपि वसं कृष्णााभिधानम् ।। मेरी इस संसार में बहुतैर रमणीय रूप वाले पी है पर उनमें से बातकों पर मरती प्रीति है, जो भारत के सामने आते ही अपने मित्र मेघों का स्मरण कराते और जिससे कृष्णा नामक एक अनिर्वचनीय ब्रत स्मृति में मास्क हो जाता है। एकः रसगंगाधर, पृशून्य दो सौ साठ-दो सौ इकसठ दो. अलंकारसर्वस्व, पृशून्य चालीस
नई दिल्लीः बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने दिल्ली की अदालत में सरेंडर कर दिया उसके बाद कोर्ट ने कहा कि अनंत सिंह को उपयुक्त अदालत के सामने पेश किया जाए। अनंत सिंह का मेडिकल कराने के बाद उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बीच अनंत सिंह के दिल्ली की अदालत में सरेंडर करने की खबर मिलते ही बिहार पुलिस भी हरकत में आ गई थी। बिहार पुलिस की टीम अनंत सिंह को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कस्टडी में लेकर पटना जाएगी। इससे पहले अनंत सिंह ने अपना वीडियो जारी करते हुए कहा था कि वह पुलिस के समक्ष नहीं, अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे। अनंत सिंह के घर से एक एके-47 राइफल और ग्रेनेड बरामद हुआ था और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए करीब एक सप्ताह से फरार थे। वह इससे पहले दो ऐसे वीडियो जारी कर चुके थे। अनंत सिंह ने इस दौरान 19 अगस्त को एक वीडियो जारी कर कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं घबराते हैं, 2 से 3 दिनों बाद अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे। अनंत ने गुरुवार को जारी एक नए वीडियो में कहा कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है। वह पुलिस के सामने नहीं बल्कि अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। हमें अदालत पर भरोसा है। उन्होंने पटना पुलिस के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पता चल गया है कि "राज्य की सत्ताधारी जदयू के सांसद ललन सिंह, मंत्री नीरज कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह ने मेरे खिलाफ साजिश रचकर एक रिश्तेदार के माध्यम से घर मे हथियार रखवाए थे। " आधुनिक हथियार और आग्नेयास्त्र बरामद बरामद होने के मद्देनजर अनंत सिंह के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून- "गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम" (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी । अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने हाल ही में लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लडा था पर पराजित रही थीं । (इनपुट-भाषा)
नई दिल्लीः बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने दिल्ली की अदालत में सरेंडर कर दिया उसके बाद कोर्ट ने कहा कि अनंत सिंह को उपयुक्त अदालत के सामने पेश किया जाए। अनंत सिंह का मेडिकल कराने के बाद उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बीच अनंत सिंह के दिल्ली की अदालत में सरेंडर करने की खबर मिलते ही बिहार पुलिस भी हरकत में आ गई थी। बिहार पुलिस की टीम अनंत सिंह को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कस्टडी में लेकर पटना जाएगी। इससे पहले अनंत सिंह ने अपना वीडियो जारी करते हुए कहा था कि वह पुलिस के समक्ष नहीं, अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे। अनंत सिंह के घर से एक एके-सैंतालीस राइफल और ग्रेनेड बरामद हुआ था और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए करीब एक सप्ताह से फरार थे। वह इससे पहले दो ऐसे वीडियो जारी कर चुके थे। अनंत सिंह ने इस दौरान उन्नीस अगस्त को एक वीडियो जारी कर कहा था कि वह गिरफ्तारी से नहीं घबराते हैं, दो से तीन दिनों बाद अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे। अनंत ने गुरुवार को जारी एक नए वीडियो में कहा कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है। वह पुलिस के सामने नहीं बल्कि अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। हमें अदालत पर भरोसा है। उन्होंने पटना पुलिस के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पता चल गया है कि "राज्य की सत्ताधारी जदयू के सांसद ललन सिंह, मंत्री नीरज कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक लिपि सिंह ने मेरे खिलाफ साजिश रचकर एक रिश्तेदार के माध्यम से घर मे हथियार रखवाए थे। " आधुनिक हथियार और आग्नेयास्त्र बरामद बरामद होने के मद्देनजर अनंत सिंह के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून- "गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम" के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी । अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने हाल ही में लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लडा था पर पराजित रही थीं ।
गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जाहरवीर गोगा जी के नाम से भी जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गोगा/गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। गोगा नवमी के चलते कुंभकारों ने क्षेत्र में पिछले 15 दिनों में करीब चार लाख मिट्टी के घोड़े बेच दिए हैं। उपरोक्त मिट्टी के घोड़ो को प्रत्येक घर में पहुंचाया गया है। अलग-अलग गांव के कई कुंभकार गोगा नवमी पर्व पर मिट्टी के घोड़े घर-घर तक पहुंचाने की परंपरा को पिछले कई वर्षों से कायम रखे हुए हैं। गांवों में एक कुंभकार मिट्टी के दो घोड़े देकर बदले में सौ ग्राम से आधा किलो तक अनाज प्राप्त कर रहे है। गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जाहरवीर गोगा जी के नाम से भी जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गोगा/गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। ग्रामीणों में गोगा नवमी को लेकर आस्था एवं श्रद्धा भी बनी होती है। अलग-अलग कुंभकार गांवों में एक घर में दर्जनों की संख्या में मिट्टी के घोड़े बेच जाते हैं। अगर एक घर में दस से भी अधिक कुंभकार आते हैं तो भी उनको खाली हाथ नहीं लौटाया जाता और उनके घोड़े घरों में रखवा लिए जाते हैं, इसलिए गोगा नवमी पर्व पर कुंभकारों के चेहरे चमक उठते हैं, क्योंकि इन्हीं मिट्टी के घोड़ों की वजह से कुंभकारों के घरों में पूरे वर्ष के लिए गेहूं अनाज एकत्रित हो जाता है। गांव नाढोडी निवासी सेठी बहेरा व उसकी पत्नी रामप्यारी ने बताया कि पिछले कई दिनों से एक दर्जन गांवों में 50 हजार के लगभग मिट्टी के घोड़े गोवा नवमी पर्व को लेकर घर-घर पहुंचा दिए हैं। घोड़े बनाने में पूरे परिवार के लोग मदद करते हैं। भूना निवासी श्योचंद व उसकी बेटी सुमन देवी ने बताया कि 30 हजार के लगभग मिट्टी के घोड़े बनाए जा चुके हैं और कार्य चल रहा है। ग्रामीणों को भी घोड़े लेने का इंतजार रहता है, इसलिए किसी भी घर में इनकार नहीं किया जाता। गांव भूथन कला के सुरजीत, कृष्ण कुमार, राजबीर सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने करीब 80 हजार मिट्टी के घोड़े तैयार किए हैं, जिनको घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। हसंगा के रूली राम ने बताया कि गोगा नवमी को लेकर एक लाख के करीब घोड़े तैयार किए है, जिन्हें कई कुंभकार खरीदकर ले जाते हैं। गांव नाढोड़ी के ईश्वर सिंह ने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों ने 60 हजार के करीब मिट्टी के घोड़े की बिक्री की है। गांव धौलू में कुंभकार दुनीचंद के बेटे राम रतन, कृष्ण लाल व कुलदीप सिंह के परिवार ने लगभग 80 हजार घोड़े तैयार करके घर-घर तक पहुंचाने में अथक परिश्रम किया है। धौलू के ही लालचद व उसके बेटे नरेश कुमार ने भी हजारों की संख्या में मिट्टी की घोड़े बनाए और परिवार की मदद से गोगा नवमी के दिन पूजा अर्चना के लिए दर्जनों गांव में पहुंचा दिए है। लहरियां, गोरखपुर तथा नहला गांव में भी कुंभकारों ने मिट्टी के घोड़े तैयार करने की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार हजारों घोड़े बेच दिए हैं।
गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जाहरवीर गोगा जी के नाम से भी जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गोगा/गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। गोगा नवमी के चलते कुंभकारों ने क्षेत्र में पिछले पंद्रह दिनों में करीब चार लाख मिट्टी के घोड़े बेच दिए हैं। उपरोक्त मिट्टी के घोड़ो को प्रत्येक घर में पहुंचाया गया है। अलग-अलग गांव के कई कुंभकार गोगा नवमी पर्व पर मिट्टी के घोड़े घर-घर तक पहुंचाने की परंपरा को पिछले कई वर्षों से कायम रखे हुए हैं। गांवों में एक कुंभकार मिट्टी के दो घोड़े देकर बदले में सौ ग्राम से आधा किलो तक अनाज प्राप्त कर रहे है। गोगाजी राजस्थान के लोक देवता हैं जिन्हे जाहरवीर गोगा जी के नाम से भी जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गोगा/गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। ग्रामीणों में गोगा नवमी को लेकर आस्था एवं श्रद्धा भी बनी होती है। अलग-अलग कुंभकार गांवों में एक घर में दर्जनों की संख्या में मिट्टी के घोड़े बेच जाते हैं। अगर एक घर में दस से भी अधिक कुंभकार आते हैं तो भी उनको खाली हाथ नहीं लौटाया जाता और उनके घोड़े घरों में रखवा लिए जाते हैं, इसलिए गोगा नवमी पर्व पर कुंभकारों के चेहरे चमक उठते हैं, क्योंकि इन्हीं मिट्टी के घोड़ों की वजह से कुंभकारों के घरों में पूरे वर्ष के लिए गेहूं अनाज एकत्रित हो जाता है। गांव नाढोडी निवासी सेठी बहेरा व उसकी पत्नी रामप्यारी ने बताया कि पिछले कई दिनों से एक दर्जन गांवों में पचास हजार के लगभग मिट्टी के घोड़े गोवा नवमी पर्व को लेकर घर-घर पहुंचा दिए हैं। घोड़े बनाने में पूरे परिवार के लोग मदद करते हैं। भूना निवासी श्योचंद व उसकी बेटी सुमन देवी ने बताया कि तीस हजार के लगभग मिट्टी के घोड़े बनाए जा चुके हैं और कार्य चल रहा है। ग्रामीणों को भी घोड़े लेने का इंतजार रहता है, इसलिए किसी भी घर में इनकार नहीं किया जाता। गांव भूथन कला के सुरजीत, कृष्ण कुमार, राजबीर सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने करीब अस्सी हजार मिट्टी के घोड़े तैयार किए हैं, जिनको घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। हसंगा के रूली राम ने बताया कि गोगा नवमी को लेकर एक लाख के करीब घोड़े तैयार किए है, जिन्हें कई कुंभकार खरीदकर ले जाते हैं। गांव नाढोड़ी के ईश्वर सिंह ने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों ने साठ हजार के करीब मिट्टी के घोड़े की बिक्री की है। गांव धौलू में कुंभकार दुनीचंद के बेटे राम रतन, कृष्ण लाल व कुलदीप सिंह के परिवार ने लगभग अस्सी हजार घोड़े तैयार करके घर-घर तक पहुंचाने में अथक परिश्रम किया है। धौलू के ही लालचद व उसके बेटे नरेश कुमार ने भी हजारों की संख्या में मिट्टी की घोड़े बनाए और परिवार की मदद से गोगा नवमी के दिन पूजा अर्चना के लिए दर्जनों गांव में पहुंचा दिए है। लहरियां, गोरखपुर तथा नहला गांव में भी कुंभकारों ने मिट्टी के घोड़े तैयार करने की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार हजारों घोड़े बेच दिए हैं।
भारत के समीर ने सोमवार को यहां आईएसएसएफ विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप की जूनियर पुरुष 25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का रजत पदक जीता। सोनीपत के समीर ने पदक मुकाबले में 23 हिट लगाए और चीन के वैंग शिवेन के बाद दूसरे स्थान पर रहे। शिवेन ने 25 हिट के साथ स्वर्ण पदक जीता। ल्यू येंगपैन ने कांस्य पदक जीता। पदक मुकाबलों में चीन के तीन खिलाड़ी और समीर पहुंचे थे। समीर क्वालीफिकेशन में 573 अंक के साथ चौथे स्थान पर रहे थे और फिर रैंकिंग दौर में उन्होंने यैंगपैन को पछाड़कर पदक दौर में जगह बनाई। इस बीच टीम के उनके साथी उदयवीर सिद्धू ने भी रैंकिंग मुकाबले में जगह बनाई लेकिन चौथे स्थान पर रहते हुए बाहर हो गए। वह क्वालीफिकेशन में 569 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे थे। तीन अन्य भारतीय जतिन (567 अंक के साथ 10वें), आदर्श सिंह (565 अंक के साथ 13वें) और हर्षवर्धन यादव (562 अंक के साथ 16वें) क्वालीफिकेशन दौर से आगे नहीं बढ़ पाए। महिला एयर पिस्टल टीम ने मंगलवार को होने वाले स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह बनाई। इशा सिंह, शिखा नरवाल और वर्षा सिंह की तिकड़ी पहले क्वालीफिकेशन चरण में 855 अंक के साथ शीर्ष पर रही और फिर दूसरे चरण में 576 अंक के साथ चीन की वैंग सियू, झाओ नैन और शेन यियाओ के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए खिताबी दौर में जगह बनाई। मिश्रित टीम की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में निराशा हाथ लगी जब मेहुली घोष और अर्जुन बबूता की जोड़ी 630. 0 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए मात्र 0. 3 अंक से पदक दौर में जगह बनाने से चूक गई। इलावेनिल वलारिवान और किरण अंकुश जाधव 627. 5 अंक के साथ 17वें स्थान पर रहे। भारत के समीर ने सोमवार को यहां आईएसएसएफ विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप की जूनियर पुरुष 25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का रजत पदक जीता।
भारत के समीर ने सोमवार को यहां आईएसएसएफ विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप की जूनियर पुरुष पच्चीस मीटर रेपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का रजत पदक जीता। सोनीपत के समीर ने पदक मुकाबले में तेईस हिट लगाए और चीन के वैंग शिवेन के बाद दूसरे स्थान पर रहे। शिवेन ने पच्चीस हिट के साथ स्वर्ण पदक जीता। ल्यू येंगपैन ने कांस्य पदक जीता। पदक मुकाबलों में चीन के तीन खिलाड़ी और समीर पहुंचे थे। समीर क्वालीफिकेशन में पाँच सौ तिहत्तर अंक के साथ चौथे स्थान पर रहे थे और फिर रैंकिंग दौर में उन्होंने यैंगपैन को पछाड़कर पदक दौर में जगह बनाई। इस बीच टीम के उनके साथी उदयवीर सिद्धू ने भी रैंकिंग मुकाबले में जगह बनाई लेकिन चौथे स्थान पर रहते हुए बाहर हो गए। वह क्वालीफिकेशन में पाँच सौ उनहत्तर अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे थे। तीन अन्य भारतीय जतिन , आदर्श सिंह और हर्षवर्धन यादव क्वालीफिकेशन दौर से आगे नहीं बढ़ पाए। महिला एयर पिस्टल टीम ने मंगलवार को होने वाले स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह बनाई। इशा सिंह, शिखा नरवाल और वर्षा सिंह की तिकड़ी पहले क्वालीफिकेशन चरण में आठ सौ पचपन अंक के साथ शीर्ष पर रही और फिर दूसरे चरण में पाँच सौ छिहत्तर अंक के साथ चीन की वैंग सियू, झाओ नैन और शेन यियाओ के बाद दूसरे स्थान पर रहते हुए खिताबी दौर में जगह बनाई। मिश्रित टीम की दस मीटर एयर राइफल स्पर्धा में निराशा हाथ लगी जब मेहुली घोष और अर्जुन बबूता की जोड़ी छः सौ तीस. शून्य अंक के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए मात्र शून्य. तीन अंक से पदक दौर में जगह बनाने से चूक गई। इलावेनिल वलारिवान और किरण अंकुश जाधव छः सौ सत्ताईस. पाँच अंक के साथ सत्रहवें स्थान पर रहे। भारत के समीर ने सोमवार को यहां आईएसएसएफ विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप की जूनियर पुरुष पच्चीस मीटर रेपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का रजत पदक जीता।
सरकारी नौकरी क्यों जरूरी है? निजीकरण की तमाम बहस के बावजूद सरकारी नौकरी का मोह जाता नही , क्यूं? वजह ये है कि सरकारी नौकरी एक तिलिस्मी चाभी है जो एक निम्नवर्गीय व्यक्ति को भी समाज के इलीट क्लास में पहुचने का रास्ता दिखाता है। सदियों से जो दबे कुचले वंचित गरीब रहे है, जिनके बाप बड़े व्यवसायी, किसान, होल्डर नही है, जो बेटे को बड़ी विरासत दे जाएं , और कहें बेटा डर मत मैं हूं , न तुम्हारा भविष्य सिक्योर है, 600 से 1000 के कमरे में रात 2 बजे तक अपनी आँखें खराब कर रहा होता है। मैकडोनाल्ड डोमिनोज़ कौन कहे, सड़क के ढाबे पर खाने के पहले भी दो बार सोचता है कि उसके पिता कैसे ये सब खर्च मैनेज कर रहे होंगे। वो जिंदगी का सबसे बड़ा दाव खेलता है, जो बड़े बड़े दिग्गजों के बस की नही होती। 18 साल से 30 साल की गोल्डन age बन्द कमरों की किताबों पर कुर्बान कर देता है, बिना यह सोचे कि जॉब नही मिली तो वो क्या करेगा, साहब जिंदगी के 18 20 साल सिर्फ एक उम्मीद पर झोंक देना मज़ाक नही होता, ऐसा भी नही होता कि सब सफल हो, दहाई और सैकड़ो की संख्या में सीट होती है, और लाखों की संख्या में फॉर्म होते है। घपले, रिश्वत, कोर्ट का रिस्क होता है, फिर भी वो लड़ता है, सिर्फ एक उम्मीद पर, की जॉब मिल जाएगी और लाइफ संवार जाएगी। इसलिए सरकारी नौकरी वालो को दी जाने वाली सैलरी उनके 15 20 साल के तप का फल है। उनकी जॉब उनके इलीट क्लास में घुसने का रास्ता है, क्योंकि जॉब मिलते ही, वो दोस्त जो नजरें चुरा कर निकल जाते थे, वो गर्व से बताते है कि मेरा दोस्त आईएएस बन गया, यार काम करवा दो। जिन घरों की दहलीज पर घुस नही सकते थे, वहाँ से शादी के रिश्ते आने लगते है। जिन्होंने कभी आपके बाप से भी तू कह कर बात की हो, वो आप कहने लगते है। जिन घरों में खाने को ठीक से अनाज नही होता था, वो भी एयरपोर्ट पर 135/- की चाय पीते है। साहब,अमीरों को फर्क नही पड़ता, उनकी लाइफ को बेहतर बनाने के 100 रास्ते वो खुद बना सकते है, या सरकार या जुगाड़ बना देती है। पर गरीब का क्या वो तो ले देकर सरकारी नौकरी को ही अपनी सबसे बड़ी सीढी समझता है। निजीकरण अच्छा हो सकता है, पर क्या वो गरीब को ये सम्मान दे पाएगा। क्या निजीकरण के बाद एक गरीब का बच्चा महंगे कॉलेज से mbbs md इंजीनियर अफसर बन पाएगा। अगर नही, तो सरकारी संस्थानों के निजीकरण को रोकिए। इसलिए नही क्योंकि आप गरीब है। इसलिए भी क्योंकि आप मिडिल क्लास है, और ये निजीकरण एक ऐसे व्यवस्था बनाता है, जिसमे अमीर और ताकतवर होते जाते है, और बाकी कमजोर। भरोसा न हो तो प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फी पता कर लीजियेगा, और अपनी जेब टटोलकर देखिएगा की बच्चे को एडमिशन दिला पाएंगे क्या? ? ?
सरकारी नौकरी क्यों जरूरी है? निजीकरण की तमाम बहस के बावजूद सरकारी नौकरी का मोह जाता नही , क्यूं? वजह ये है कि सरकारी नौकरी एक तिलिस्मी चाभी है जो एक निम्नवर्गीय व्यक्ति को भी समाज के इलीट क्लास में पहुचने का रास्ता दिखाता है। सदियों से जो दबे कुचले वंचित गरीब रहे है, जिनके बाप बड़े व्यवसायी, किसान, होल्डर नही है, जो बेटे को बड़ी विरासत दे जाएं , और कहें बेटा डर मत मैं हूं , न तुम्हारा भविष्य सिक्योर है, छः सौ से एक हज़ार के कमरे में रात दो बजे तक अपनी आँखें खराब कर रहा होता है। मैकडोनाल्ड डोमिनोज़ कौन कहे, सड़क के ढाबे पर खाने के पहले भी दो बार सोचता है कि उसके पिता कैसे ये सब खर्च मैनेज कर रहे होंगे। वो जिंदगी का सबसे बड़ा दाव खेलता है, जो बड़े बड़े दिग्गजों के बस की नही होती। अट्ठारह साल से तीस साल की गोल्डन age बन्द कमरों की किताबों पर कुर्बान कर देता है, बिना यह सोचे कि जॉब नही मिली तो वो क्या करेगा, साहब जिंदगी के अट्ठारह बीस साल सिर्फ एक उम्मीद पर झोंक देना मज़ाक नही होता, ऐसा भी नही होता कि सब सफल हो, दहाई और सैकड़ो की संख्या में सीट होती है, और लाखों की संख्या में फॉर्म होते है। घपले, रिश्वत, कोर्ट का रिस्क होता है, फिर भी वो लड़ता है, सिर्फ एक उम्मीद पर, की जॉब मिल जाएगी और लाइफ संवार जाएगी। इसलिए सरकारी नौकरी वालो को दी जाने वाली सैलरी उनके पंद्रह बीस साल के तप का फल है। उनकी जॉब उनके इलीट क्लास में घुसने का रास्ता है, क्योंकि जॉब मिलते ही, वो दोस्त जो नजरें चुरा कर निकल जाते थे, वो गर्व से बताते है कि मेरा दोस्त आईएएस बन गया, यार काम करवा दो। जिन घरों की दहलीज पर घुस नही सकते थे, वहाँ से शादी के रिश्ते आने लगते है। जिन्होंने कभी आपके बाप से भी तू कह कर बात की हो, वो आप कहने लगते है। जिन घरों में खाने को ठीक से अनाज नही होता था, वो भी एयरपोर्ट पर एक सौ पैंतीस/- की चाय पीते है। साहब,अमीरों को फर्क नही पड़ता, उनकी लाइफ को बेहतर बनाने के एक सौ रास्ते वो खुद बना सकते है, या सरकार या जुगाड़ बना देती है। पर गरीब का क्या वो तो ले देकर सरकारी नौकरी को ही अपनी सबसे बड़ी सीढी समझता है। निजीकरण अच्छा हो सकता है, पर क्या वो गरीब को ये सम्मान दे पाएगा। क्या निजीकरण के बाद एक गरीब का बच्चा महंगे कॉलेज से mbbs md इंजीनियर अफसर बन पाएगा। अगर नही, तो सरकारी संस्थानों के निजीकरण को रोकिए। इसलिए नही क्योंकि आप गरीब है। इसलिए भी क्योंकि आप मिडिल क्लास है, और ये निजीकरण एक ऐसे व्यवस्था बनाता है, जिसमे अमीर और ताकतवर होते जाते है, और बाकी कमजोर। भरोसा न हो तो प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फी पता कर लीजियेगा, और अपनी जेब टटोलकर देखिएगा की बच्चे को एडमिशन दिला पाएंगे क्या? ? ?
लखनऊः भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि भाजपा ने पिछडों को सम्मान देने का काम किया है। उन्होंने कहा सपा-बसपा और कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है। भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी पार्टी का राष्टीय अध्यक्ष बन सकता है। वह मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं। उन्होंने सबके कल्याण के लिए काम किया है। आज पिछड़ा वर्ग की शासन प्रशासन में बड़ी हिस्सेदारी है। यह भाजपा सरकार की ही देन है। उन्होने कहा कि सपा-बसपा ने पिछड़ों को धोखा देने का काम किया है। आज पहली बार प्रदेश कार्यालय पहुंचाने पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि वह पार्टी कार्यकतार्आं और पिछड़े वर्ग के लोगों की समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर करायेंगे। इस मौके पर शिव नायक वर्मा और सुधीर कुमार सिंह सिददू ने कार्यालय पहुंचने पर स्वागत किया।
लखनऊः भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि भाजपा ने पिछडों को सम्मान देने का काम किया है। उन्होंने कहा सपा-बसपा और कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है। भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी पार्टी का राष्टीय अध्यक्ष बन सकता है। वह मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं। उन्होंने सबके कल्याण के लिए काम किया है। आज पिछड़ा वर्ग की शासन प्रशासन में बड़ी हिस्सेदारी है। यह भाजपा सरकार की ही देन है। उन्होने कहा कि सपा-बसपा ने पिछड़ों को धोखा देने का काम किया है। आज पहली बार प्रदेश कार्यालय पहुंचाने पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि वह पार्टी कार्यकतार्आं और पिछड़े वर्ग के लोगों की समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर करायेंगे। इस मौके पर शिव नायक वर्मा और सुधीर कुमार सिंह सिददू ने कार्यालय पहुंचने पर स्वागत किया।
खुशियों का ठिकाना नौकरी के क्षेत्र में आप अपने मेहनत के द्वारा नई कीर्तिमान स्थापना और आपके प्रशंसा प्राप्त करेंगे। दांपत्य जीवन में खुशियां आंगी। वैवाहिक जीवन सुखमे व्यतीत होगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी समाप्त हो जा रहा है। कला के क्षेत्र में करियर बनाना आपके लिए शुभ रहना लेन-देन में सावधानी रखें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रखें। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। कानूनी मामले सुधरेंगे। धन का प्रबंध करने में कठिनाई आ सकती है। आहार की अनियमितता से बचें। व्यापार, नौकरी में उन्नति होगी। आप अच्छे लाभ मिल के योग बन रहे हैं। आर्थिक मामलों में आप सफलता हासिल करेंगे। कोर्ट कचहरी के मामले में आपका पक्ष में आयागा। कोई पुराना वाद-विवाद निपटान हो सकता है, अगर आप किसी भी जगह पूंजी लगाने का विचार कर रहे हैं। परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जा रहा है। नौकरी के आसार बढ़ने वाले हैं। वर्तमान बिजनेस आप और मजबूत बनाने की कोशिश करें। इन राशि के लोग समाज में सराहना मिलगी और आप लोगो के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। व्यापार की कोई नई योजना पर विचार करें। अपने स्वयं के पढ़ने में व्यस्त रहना। प्रेमी प्रेमिका के बीच गलत फहमी उत्पन्न हो सकता है। आप अचानक भारी धन लाभ हो सकता है। आप तेजी से बढ़ते बढ़ते हैं।
खुशियों का ठिकाना नौकरी के क्षेत्र में आप अपने मेहनत के द्वारा नई कीर्तिमान स्थापना और आपके प्रशंसा प्राप्त करेंगे। दांपत्य जीवन में खुशियां आंगी। वैवाहिक जीवन सुखमे व्यतीत होगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी समाप्त हो जा रहा है। कला के क्षेत्र में करियर बनाना आपके लिए शुभ रहना लेन-देन में सावधानी रखें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रखें। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। कानूनी मामले सुधरेंगे। धन का प्रबंध करने में कठिनाई आ सकती है। आहार की अनियमितता से बचें। व्यापार, नौकरी में उन्नति होगी। आप अच्छे लाभ मिल के योग बन रहे हैं। आर्थिक मामलों में आप सफलता हासिल करेंगे। कोर्ट कचहरी के मामले में आपका पक्ष में आयागा। कोई पुराना वाद-विवाद निपटान हो सकता है, अगर आप किसी भी जगह पूंजी लगाने का विचार कर रहे हैं। परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जा रहा है। नौकरी के आसार बढ़ने वाले हैं। वर्तमान बिजनेस आप और मजबूत बनाने की कोशिश करें। इन राशि के लोग समाज में सराहना मिलगी और आप लोगो के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। व्यापार की कोई नई योजना पर विचार करें। अपने स्वयं के पढ़ने में व्यस्त रहना। प्रेमी प्रेमिका के बीच गलत फहमी उत्पन्न हो सकता है। आप अचानक भारी धन लाभ हो सकता है। आप तेजी से बढ़ते बढ़ते हैं।
Indian Railway News: भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने यात्रियों को बड़ी खुशखबरी दी है। अब पैसेंजर कम कीमत पर एसी कोच में सफर कर सकते हैं। दरअसल उत्तर-मध्य रेलवे (North Central Railway) ने ट्रेन नंबर 02403/02404 प्रयागराज-जयपुर-प्रयागराज (डेली) स्पेशल शुरू की है। इस ट्रेन में एसी 3 टियर इकोनॉमी कोच (AC 3 Tier Economy Coach) भी हैं। जिसमें कम किराए पर एसी कोच में यात्रा का मजा उठा सकते हैं। रेलवे के अनुसार नए थ्री टियर इकोनॉमी कोच का किराया थ्री एसी कोच की अपेक्षा कम है। जिससे यात्रियों को कम पैसों में अच्छा अनुभव मिलेगा। उत्तर मध्य रेलवे जोन को भारतीय रेलवे ने हाल ही में ये कोच दिए हैं। इसमें यात्रा के लिए टिकट बुकिंग 28 अगस्त से शुरू हो गई है। इस ट्रेन में यात्रियों को काफी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसमें सात कोच है, प्रत्येक में 6 सीसीटीवी लगाए गए हैं। प्रयागराज से जयपुर स्पेशल ट्रेन में दिव्यांगों के लिए खास शौचालय बनाया गया है। वहीं कोरोना वायरस से बचाव के लिए ऑटोमेटिक बॉश बेसिन है। जिसमें पैर से दबाकर पानी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही हर सीट पर चार्जिंग पॉइंट और एसी कंट्रोलर हैं। As the new AC 3 tier economy coaches all set to start their maiden run in 02403, NCR briefing about their features. इस ट्रेन की थ्री एसी का किराया 1175 रुपए है। वहीं इकोनॉमी कोच का किराया 1050 रुपए है।
Indian Railway News: भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी खुशखबरी दी है। अब पैसेंजर कम कीमत पर एसी कोच में सफर कर सकते हैं। दरअसल उत्तर-मध्य रेलवे ने ट्रेन नंबर दो हज़ार चार सौ तीन/दो हज़ार चार सौ चार प्रयागराज-जयपुर-प्रयागराज स्पेशल शुरू की है। इस ट्रेन में एसी तीन टियर इकोनॉमी कोच भी हैं। जिसमें कम किराए पर एसी कोच में यात्रा का मजा उठा सकते हैं। रेलवे के अनुसार नए थ्री टियर इकोनॉमी कोच का किराया थ्री एसी कोच की अपेक्षा कम है। जिससे यात्रियों को कम पैसों में अच्छा अनुभव मिलेगा। उत्तर मध्य रेलवे जोन को भारतीय रेलवे ने हाल ही में ये कोच दिए हैं। इसमें यात्रा के लिए टिकट बुकिंग अट्ठाईस अगस्त से शुरू हो गई है। इस ट्रेन में यात्रियों को काफी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसमें सात कोच है, प्रत्येक में छः सीसीटीवी लगाए गए हैं। प्रयागराज से जयपुर स्पेशल ट्रेन में दिव्यांगों के लिए खास शौचालय बनाया गया है। वहीं कोरोना वायरस से बचाव के लिए ऑटोमेटिक बॉश बेसिन है। जिसमें पैर से दबाकर पानी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही हर सीट पर चार्जिंग पॉइंट और एसी कंट्रोलर हैं। As the new AC तीन tier economy coaches all set to start their maiden run in दो हज़ार चार सौ तीन, NCR briefing about their features. इस ट्रेन की थ्री एसी का किराया एक हज़ार एक सौ पचहत्तर रुपयापए है। वहीं इकोनॉमी कोच का किराया एक हज़ार पचास रुपयापए है।
प्रदेश तथा केंद्र सरकार के बालिकाओं को लेकर तमाम जागरूकता अभियान के बाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालात ठीक नहीं हैं। खाप पंचायत के साथ ही यहां पर ऑनर किलिंग का कहर जारी है। ताजा मामला मुजफ्फरनगर का है। मुजफ्फरनगर के ककरौली थाना क्षेत्र के तेवड़ा गांव में ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। युवती के प्रेम प्रसंग से परेशान परिवार के लोगों ने युवती की हत्या कर शव को घर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया। पुलिस ने घर से गला-सडा शव बरामद कर लिया है। यह मामला करीब दो माह पुराना माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक तेवड़ा गांव के मकसूद की बेटी साकिरा (19) का पड़ोसी युवक मुनासिब से प्रेम प्रसंग चल रहा था। परिवार के लोगों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने युवती पर पाबंदी लगा दी। युवती के पास एक मोबाइल भी पकड़ा गया, जो मुनासिब ने उसे दिया था। घर वालों की तमाम बंदिश के बाद भी युवती मुनासिब से ही शादी करने की जिद पर अड़ी थी। दो माह पहले परिवार के लोगों ने साकिरा की हत्या कर शव को घर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया।
प्रदेश तथा केंद्र सरकार के बालिकाओं को लेकर तमाम जागरूकता अभियान के बाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालात ठीक नहीं हैं। खाप पंचायत के साथ ही यहां पर ऑनर किलिंग का कहर जारी है। ताजा मामला मुजफ्फरनगर का है। मुजफ्फरनगर के ककरौली थाना क्षेत्र के तेवड़ा गांव में ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। युवती के प्रेम प्रसंग से परेशान परिवार के लोगों ने युवती की हत्या कर शव को घर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया। पुलिस ने घर से गला-सडा शव बरामद कर लिया है। यह मामला करीब दो माह पुराना माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक तेवड़ा गांव के मकसूद की बेटी साकिरा का पड़ोसी युवक मुनासिब से प्रेम प्रसंग चल रहा था। परिवार के लोगों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने युवती पर पाबंदी लगा दी। युवती के पास एक मोबाइल भी पकड़ा गया, जो मुनासिब ने उसे दिया था। घर वालों की तमाम बंदिश के बाद भी युवती मुनासिब से ही शादी करने की जिद पर अड़ी थी। दो माह पहले परिवार के लोगों ने साकिरा की हत्या कर शव को घर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद प्रयागराज का महिला एडवाइजरी सेल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भूमिका' विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उक्त कार्यक्रम की चीफ गेस्ट मेयर प्रयागराज श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नंदी थी। मेयर प्रयागराज ने महिलाओं को पहला मैनेजमेंट गुरु बताते हुए कहा कि हमें महिलाओं का सहयोग करना चाहिए। सभी तरह के उद्यमों में महिलाओं के योगदान को आज समाज द्वारा वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है. कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी, मुख्य अतिथि मेयर प्रयागराज श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नंदी, महिला एडवाइजरी सेल की चेयरमैन प्रोफेसर गीतिका, कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर रिचा नेगी एवं प्रोफेसर विजया भदौरिया तथा वक्ता प्रोफ़ेसर विजय लक्ष्मी यादव विभागाध्यक्ष केमिकल इंजीनियरिंग बीएचयू एवं डॉ तनवीर जहां सिद्दीकी जेके इंस्टीट्यूट इलाहाबाद, कुलसचिव डॉक्टर सर्वेश कुमार तिवारी, तथा सहायक कुलसचिव मनीषा यादव इत्यादि ने दीप प्रज्वलित करके किया। मंच का संचालन प्रियंका अग्रवाल तथा प्रोफेसर रिचा नेगी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की ओर से जिला कचेहरी स्थित डिप्लोमा इंजी। महासंघ के यूनियन हॉल में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। जहां पर चीफ गेस्ट मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने 26 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महिला सशक्तिकरण सम्मान से सम्मानित किया। इस मौके पर सीएम को संबोधित मांग पत्र भी मेयर को सौंपा गया। मेयर ने भरोसा दिलाया कि पीएम व सीएम के सामने प्रकरण रखकर मांगों का समाधान कराया जाएगा।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद प्रयागराज का महिला एडवाइजरी सेल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भूमिका' विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उक्त कार्यक्रम की चीफ गेस्ट मेयर प्रयागराज श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नंदी थी। मेयर प्रयागराज ने महिलाओं को पहला मैनेजमेंट गुरु बताते हुए कहा कि हमें महिलाओं का सहयोग करना चाहिए। सभी तरह के उद्यमों में महिलाओं के योगदान को आज समाज द्वारा वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है. कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी, मुख्य अतिथि मेयर प्रयागराज श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नंदी, महिला एडवाइजरी सेल की चेयरमैन प्रोफेसर गीतिका, कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर रिचा नेगी एवं प्रोफेसर विजया भदौरिया तथा वक्ता प्रोफ़ेसर विजय लक्ष्मी यादव विभागाध्यक्ष केमिकल इंजीनियरिंग बीएचयू एवं डॉ तनवीर जहां सिद्दीकी जेके इंस्टीट्यूट इलाहाबाद, कुलसचिव डॉक्टर सर्वेश कुमार तिवारी, तथा सहायक कुलसचिव मनीषा यादव इत्यादि ने दीप प्रज्वलित करके किया। मंच का संचालन प्रियंका अग्रवाल तथा प्रोफेसर रिचा नेगी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की ओर से जिला कचेहरी स्थित डिप्लोमा इंजी। महासंघ के यूनियन हॉल में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। जहां पर चीफ गेस्ट मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने छब्बीस आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महिला सशक्तिकरण सम्मान से सम्मानित किया। इस मौके पर सीएम को संबोधित मांग पत्र भी मेयर को सौंपा गया। मेयर ने भरोसा दिलाया कि पीएम व सीएम के सामने प्रकरण रखकर मांगों का समाधान कराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नक्सली हमले में शहीद जवानों को श्रध्दांजलि देने सुकमा जाएंगे। सुकमा जिले में शनिवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बल के 17 जवान लापता हो गए थे तथा 15 जवान घायल हो गए थे। आज सभी लापता जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने जवानों की शहादत पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल 23 मार्च को रायपुर से हेलीकॉप्टर से सुकमा पहुंचेंगे और वहां शहीद जवानों को श्रध्दांजलि देंगे। बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले के मिनपा गांव के जंगल में 250 की संख्या में नक्सलियों ने लगभग 1. 5 किलोमीटर तक घात लगाकर जवानों पर हमला किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को जिले के एलमागुड़ा में नक्सली गतिविधियों की सूचना के बाद चिंतागुफा, बुरकपाल और तिमेलवाड़ा से डीआरजी, एसटीएफ और सीआपीएफ के कोबरा बटालियन के छह सौ जवानों को रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बल के जवान मिनपा गांव के जंगल में थे तब लगभग 250 की संख्या में नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। इस घटना में 15 जवान घायल हो गए थे। देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद 17 जवान लापता हो गए थे। बाद में सुरक्षा बलों ने लापता जवानों की खोज में खोजी अभियान चलाया था। आज लापता जवानों का शव बरामद कर लिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के बटालियन नंबर एक का कमांडर हिड़मा अपने दल का नेतृत्व कर कर रहा था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का जमकर मुकाबला किया और लगभग चार घंटों तक गोलबारी होती रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान आठ से नौ नक्सलियों को मार गिराया है और इतने ही संख्या में नक्सली घायल भी हुए हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद से कम से कम 15 हथियार गायब हैं जिनमें एके 47 और अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर जैसे हथियार भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में घायल जवानों को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुकमा जिले में यह नक्सली हमला इस वर्ष का सबसे बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले 2017 में करीब के बुरकापाल क्षेत्र में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या कर दी थी।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नक्सली हमले में शहीद जवानों को श्रध्दांजलि देने सुकमा जाएंगे। सुकमा जिले में शनिवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बल के सत्रह जवान लापता हो गए थे तथा पंद्रह जवान घायल हो गए थे। आज सभी लापता जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने जवानों की शहादत पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल तेईस मार्च को रायपुर से हेलीकॉप्टर से सुकमा पहुंचेंगे और वहां शहीद जवानों को श्रध्दांजलि देंगे। बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले के मिनपा गांव के जंगल में दो सौ पचास की संख्या में नक्सलियों ने लगभग एक. पाँच किलोग्राममीटर तक घात लगाकर जवानों पर हमला किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को जिले के एलमागुड़ा में नक्सली गतिविधियों की सूचना के बाद चिंतागुफा, बुरकपाल और तिमेलवाड़ा से डीआरजी, एसटीएफ और सीआपीएफ के कोबरा बटालियन के छह सौ जवानों को रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बल के जवान मिनपा गांव के जंगल में थे तब लगभग दो सौ पचास की संख्या में नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। इस घटना में पंद्रह जवान घायल हो गए थे। देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद सत्रह जवान लापता हो गए थे। बाद में सुरक्षा बलों ने लापता जवानों की खोज में खोजी अभियान चलाया था। आज लापता जवानों का शव बरामद कर लिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के बटालियन नंबर एक का कमांडर हिड़मा अपने दल का नेतृत्व कर कर रहा था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का जमकर मुकाबला किया और लगभग चार घंटों तक गोलबारी होती रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान आठ से नौ नक्सलियों को मार गिराया है और इतने ही संख्या में नक्सली घायल भी हुए हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद से कम से कम पंद्रह हथियार गायब हैं जिनमें एके सैंतालीस और अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर जैसे हथियार भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में घायल जवानों को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुकमा जिले में यह नक्सली हमला इस वर्ष का सबसे बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले दो हज़ार सत्रह में करीब के बुरकापाल क्षेत्र में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के पच्चीस जवानों की हत्या कर दी थी।
CBSE Results 2020: फेक सीबीएसई नोटिफिकेशन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर यह कहकर राउंड कर रही है कि सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2020 के रिजल्ट 11 जुलाई और 13 जुलाई को घोषित किए जाएंगे। सीबीएसई अधिकारी की पुष्टि के अनुसार नोटिफिकेशन फर्जी है। CBSE Results 2020: फेक सीबीएसई नोटिफिकेशन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर यह कहकर राउंड कर रही है कि सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2020 के रिजल्ट 11 जुलाई और 13 जुलाई को घोषित किए जाएंगे। सीबीएसई अधिकारी की पुष्टि के अनुसार नोटिफिकेशन फर्जी है। छात्रों से अनुरोध किया जाता है कि वे फर्जी खबरों में न पड़ें क्योंकि 2020 तक के लिए रद्द किए गए सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के साथ तनाव अधिक चल रहा है और अगले शैक्षणिक वर्ष के सीबीएसई सिलेबस कोविड -19 महामारी के कारण 30 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम 2020 के बारे में प्रामाणिक समाचार जानने के लिए फेसबुक और ट्विटर पर सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in या आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल की जांच करें। 25 जून को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के अनुसार सीबीएसई बोर्ड 10 वीं कक्षा और 12 वीं दोनों के लिए परीक्षा परिणाम 15 जुलाई तक घोषित करेगा। हालांकि सीबीएसई के परिणाम पूर्ण और अंतिम होंगे, सीबीएसई कक्षा 12 के छात्र बाद में होने वाली वैकल्पिक परीक्षाओं में शामिल होने का विकल्प चुन सकते हैं, जब वे अपने परिणामों में सुधार करना चाहते हैं तो महामारी की स्थिति में सुधार होगा।
CBSE Results दो हज़ार बीस: फेक सीबीएसई नोटिफिकेशन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर यह कहकर राउंड कर रही है कि सीबीएसई दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा दो हज़ार बीस के रिजल्ट ग्यारह जुलाई और तेरह जुलाई को घोषित किए जाएंगे। सीबीएसई अधिकारी की पुष्टि के अनुसार नोटिफिकेशन फर्जी है। CBSE Results दो हज़ार बीस: फेक सीबीएसई नोटिफिकेशन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर यह कहकर राउंड कर रही है कि सीबीएसई दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा दो हज़ार बीस के रिजल्ट ग्यारह जुलाई और तेरह जुलाई को घोषित किए जाएंगे। सीबीएसई अधिकारी की पुष्टि के अनुसार नोटिफिकेशन फर्जी है। छात्रों से अनुरोध किया जाता है कि वे फर्जी खबरों में न पड़ें क्योंकि दो हज़ार बीस तक के लिए रद्द किए गए सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के साथ तनाव अधिक चल रहा है और अगले शैक्षणिक वर्ष के सीबीएसई सिलेबस कोविड -उन्नीस महामारी के कारण तीस प्रतिशत तक कम हो गए हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम दो हज़ार बीस के बारे में प्रामाणिक समाचार जानने के लिए फेसबुक और ट्विटर पर सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse. nic. in या आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल की जांच करें। पच्चीस जून को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के अनुसार सीबीएसई बोर्ड दस वीं कक्षा और बारह वीं दोनों के लिए परीक्षा परिणाम पंद्रह जुलाई तक घोषित करेगा। हालांकि सीबीएसई के परिणाम पूर्ण और अंतिम होंगे, सीबीएसई कक्षा बारह के छात्र बाद में होने वाली वैकल्पिक परीक्षाओं में शामिल होने का विकल्प चुन सकते हैं, जब वे अपने परिणामों में सुधार करना चाहते हैं तो महामारी की स्थिति में सुधार होगा।
बारिश के मौसम में बालों का झड़ना एक आम समस्या है. बहुत से लोगों को बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समस्या से निपटने के लिए आप कई तरह के घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. मॉनसून में मौसम उमसभरा रहता है. हवा में नमी का स्तर बढ़ने के कारण बालों संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. बारिश के मौसम में बालों का झड़ना एक आम समस्या है. अधिक नमी के कारण स्कैल्प ऑयली और चिपचिपा हो जाता है. ये बालों के झड़ने का मुख्य कारण है. बहुत से लोग बारिश के मौसम में बाल झड़ने की समस्या से परेशान रहते हैं. कई लोग इस समस्या से बचने के लिए केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में बालों संबंधित समस्या से बचने के लिए आप कई तरह के घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. आइए जानें आप कौन से घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं. बालों को झड़ने से रोकने के लिए सबसे अच्छा नुस्खा है गर्म तेल से सिर की मसाज करना. इसके लिए एक कटोरी में थोड़ा तेल लें. इसे गर्म करें. इसे गुनगुने तेल से सिर की मालिश करें. ऐसा करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन लेवल बढ़ता है. ये बालों का झड़ना कम करने में मदद करता है. मेथी और सौंफ बालों को बढ़ाने के लिए अच्छा तरीका है. ये बालों का झड़ना कम करने में भी मदद करते हैं. इसका इस्तेमाल हेयर मास्क के रूप में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हेयर मास्क बनाने के लिए इन दोनों चीजों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इसे अगली सुबह ब्लेंडर में पीस लें. इस मिश्रण को स्कैल्प और बालों में लगाएं. इसे आधे घंटे के लिए लगा रहने दें. इसके बाद सादे पानी से धो लें. आप इस हेयर पैक का इस्तेमाल हफ्ते में 2 बार कर सकते हैं. ये बालों को झड़ने से रोकने के लिए एक बहुत ही अच्छा उपाय है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए आपको एलोवेरा, करी पत्ता, आंवला, मेथी और हिबिस्कस की जरूरत होगी. एक मिक्सर में इन सारी चीजों को पीसकर एक पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर लगाएं. इसे 40 मिनट तक लगा रहने दें. ये हेयर पैक आपके बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा. ये बालों के पीएच संतुलन को बनाए रखने का काम करेगा. आप इस पेस्ट का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार कर सकते हैं. बालों को गहराई से पोषण देने के लिए हेल्दी डाइट का होना भी बहुत जरूरी है. बालों के झड़ने की समस्या को कम करने के लिए पौष्टिक भोजन का सेवन करें. इसी के साथ स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना आवश्यक है. योग और प्राणायाम से दिन की शुरुआत करें. ये बालों का झड़ना कंट्रोल करने में मदद करेंगे. ब्यूटीकी ताज़ा खबर यहां पर पढ़ें.. (इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. TV9 Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही इस पर अमल करें.)
बारिश के मौसम में बालों का झड़ना एक आम समस्या है. बहुत से लोगों को बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समस्या से निपटने के लिए आप कई तरह के घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. मॉनसून में मौसम उमसभरा रहता है. हवा में नमी का स्तर बढ़ने के कारण बालों संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. बारिश के मौसम में बालों का झड़ना एक आम समस्या है. अधिक नमी के कारण स्कैल्प ऑयली और चिपचिपा हो जाता है. ये बालों के झड़ने का मुख्य कारण है. बहुत से लोग बारिश के मौसम में बाल झड़ने की समस्या से परेशान रहते हैं. कई लोग इस समस्या से बचने के लिए केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में बालों संबंधित समस्या से बचने के लिए आप कई तरह के घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं. आइए जानें आप कौन से घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं. बालों को झड़ने से रोकने के लिए सबसे अच्छा नुस्खा है गर्म तेल से सिर की मसाज करना. इसके लिए एक कटोरी में थोड़ा तेल लें. इसे गर्म करें. इसे गुनगुने तेल से सिर की मालिश करें. ऐसा करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन लेवल बढ़ता है. ये बालों का झड़ना कम करने में मदद करता है. मेथी और सौंफ बालों को बढ़ाने के लिए अच्छा तरीका है. ये बालों का झड़ना कम करने में भी मदद करते हैं. इसका इस्तेमाल हेयर मास्क के रूप में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हेयर मास्क बनाने के लिए इन दोनों चीजों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इसे अगली सुबह ब्लेंडर में पीस लें. इस मिश्रण को स्कैल्प और बालों में लगाएं. इसे आधे घंटे के लिए लगा रहने दें. इसके बाद सादे पानी से धो लें. आप इस हेयर पैक का इस्तेमाल हफ्ते में दो बार कर सकते हैं. ये बालों को झड़ने से रोकने के लिए एक बहुत ही अच्छा उपाय है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए आपको एलोवेरा, करी पत्ता, आंवला, मेथी और हिबिस्कस की जरूरत होगी. एक मिक्सर में इन सारी चीजों को पीसकर एक पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को बालों और स्कैल्प पर लगाएं. इसे चालीस मिनट तक लगा रहने दें. ये हेयर पैक आपके बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा. ये बालों के पीएच संतुलन को बनाए रखने का काम करेगा. आप इस पेस्ट का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार कर सकते हैं. बालों को गहराई से पोषण देने के लिए हेल्दी डाइट का होना भी बहुत जरूरी है. बालों के झड़ने की समस्या को कम करने के लिए पौष्टिक भोजन का सेवन करें. इसी के साथ स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना आवश्यक है. योग और प्राणायाम से दिन की शुरुआत करें. ये बालों का झड़ना कंट्रोल करने में मदद करेंगे. ब्यूटीकी ताज़ा खबर यहां पर पढ़ें..
कोलकाता, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के छठे सीजन में पदार्पण कर रही है हैदराबाद एफसी शुक्रवार को अपना पहला मैच एटीके के खिलाफ खेलेगी। टीम के कोच फिल ब्राउन ने कहा है कि टीम की कोशिश अपनी खुद की पहचान हासिल करने की है। हैदराबाद एफसी इस साल लीग में एफसी पुणे सिटी का स्थान ले रही है। टीम के नए सह-मालिक विजय मादुरी और वरुण त्रिपुरानेनी इस साल आईएसएल बोर्ड में नए आए हैं। यह टीम हैदराबाद से आईएसएल में पहली टीम है। ब्राउन को उम्मीद है कि साल्ट लेक स्टेडियम में शुक्रवार को होने वाले मैच में भी उतने ही दर्शक आएंगे जितने भारत और बांग्लादेश के बीच विश्व कप क्वालीफायर के मैच में आए थे।
कोलकाता, चौबीस अक्टूबर । इंडियन सुपर लीग के छठे सीजन में पदार्पण कर रही है हैदराबाद एफसी शुक्रवार को अपना पहला मैच एटीके के खिलाफ खेलेगी। टीम के कोच फिल ब्राउन ने कहा है कि टीम की कोशिश अपनी खुद की पहचान हासिल करने की है। हैदराबाद एफसी इस साल लीग में एफसी पुणे सिटी का स्थान ले रही है। टीम के नए सह-मालिक विजय मादुरी और वरुण त्रिपुरानेनी इस साल आईएसएल बोर्ड में नए आए हैं। यह टीम हैदराबाद से आईएसएल में पहली टीम है। ब्राउन को उम्मीद है कि साल्ट लेक स्टेडियम में शुक्रवार को होने वाले मैच में भी उतने ही दर्शक आएंगे जितने भारत और बांग्लादेश के बीच विश्व कप क्वालीफायर के मैच में आए थे।
बोनी कपूर ने 1996 में श्रीदेवी से शादी कर ली थी। उन दोनों ने इसके पहले 'मिस्टर इंडिया', 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'जुदाई' जैसी पॉप्युलर फिल्में दी थीं। जहां बोनी कपूर फिल्म प्रड्यूसर थे। वहीं श्रीदेवी भी फेमस ऐक्ट्रेस थीं और मोना कपूर टीवी सीरियल प्रड्यूसर थीं। लेकिन पति के दूसरी शादी के बाद मोना बुरी तरह टूट गई थीं। बाद में साल 2012 में उनका कैंसर की वजह से निधन भी हो गया था। इसके बाद उनके दोनों बच्चे अंशुला कपूर और अर्जुन कपूर एकदम बिखर गए थे। क्योंकि वह अपने पिता से ज्यादा मां के काफी क्लोज थे। ऐसे में वह खुद को बेसहारा और अनाथ भी महसूस करने लगे थे। अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) ने 8 साल पहले दिए एक इंटरव्यू में बोनी कपूर की दूसरी शादी के बारे में बात की थी। Zee Cafe को साल 2014 में दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था कि उन्हें शुरुआत में तो बहुत गुस्सा आता था लेकिन बाद में वह स्थिति को समझ गए थे। उन्होंने कहा था, 'ये आपके सफर का हिस्सा हो सकता है लेकिन ये ही सिर्फ एक चीज नहीं हो सकती क्योंकि मेरे पापा ने ऐसा किया था तो मेरा सारा फैसला उसी पर आधारित होगा। इस तरह जीवन नहीं चलता है। वह मेरे लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ थे। शुक्रगुजार हूं कि मेरा मां ने मुझे इतना काबिल बनाया कि मैं अपने फैसले खुद ले सकूं। मैं खुश हूं और धन्य हूं कि उन्होंने वो रास्ता अपनाया। ' अर्जुन कपूर ने आगे बताया था, 'अगर मेरी मां ने पिता की शादी के बारे में कुछ भी जहर भरा होता तो मुझे नहीं लगता कि मैं आज पहले जैसा होता। उन्होंने जो कुछ भी किया उसके लिए मेरी मां ने कभी भी नहीं भड़काया। और न उनके खिलाफ मेरे से कुछ कहा। उन्होंने हमें अपनी मर्जी से जीने दिया। मुझे लगता है कि इसी वजह से मैं इस बारे में शांति से बात कर पा रही हूं। ' बता दें कि अर्जुन कपूर 26 जून को 37 बरस के पूरे हुए। वह अपना बर्थडे ऐक्ट्रेस और गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा के साथ पेरिस में सेलिब्रेट कर रहे हैं। इनकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें यह दोनों वहां पर मस्ती कर रहे हैं। । हालांकि ये दोनों तक एक-दूसरे को डेट करेंगे और कब शादी करेंगे, इसके बारे में अभी किसी को कुछ नहीं मालूम। फिलहाल तो ये दोनों साथ में क्वॉलिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं।
बोनी कपूर ने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में श्रीदेवी से शादी कर ली थी। उन दोनों ने इसके पहले 'मिस्टर इंडिया', 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'जुदाई' जैसी पॉप्युलर फिल्में दी थीं। जहां बोनी कपूर फिल्म प्रड्यूसर थे। वहीं श्रीदेवी भी फेमस ऐक्ट्रेस थीं और मोना कपूर टीवी सीरियल प्रड्यूसर थीं। लेकिन पति के दूसरी शादी के बाद मोना बुरी तरह टूट गई थीं। बाद में साल दो हज़ार बारह में उनका कैंसर की वजह से निधन भी हो गया था। इसके बाद उनके दोनों बच्चे अंशुला कपूर और अर्जुन कपूर एकदम बिखर गए थे। क्योंकि वह अपने पिता से ज्यादा मां के काफी क्लोज थे। ऐसे में वह खुद को बेसहारा और अनाथ भी महसूस करने लगे थे। अर्जुन कपूर ने आठ साल पहले दिए एक इंटरव्यू में बोनी कपूर की दूसरी शादी के बारे में बात की थी। Zee Cafe को साल दो हज़ार चौदह में दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था कि उन्हें शुरुआत में तो बहुत गुस्सा आता था लेकिन बाद में वह स्थिति को समझ गए थे। उन्होंने कहा था, 'ये आपके सफर का हिस्सा हो सकता है लेकिन ये ही सिर्फ एक चीज नहीं हो सकती क्योंकि मेरे पापा ने ऐसा किया था तो मेरा सारा फैसला उसी पर आधारित होगा। इस तरह जीवन नहीं चलता है। वह मेरे लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ थे। शुक्रगुजार हूं कि मेरा मां ने मुझे इतना काबिल बनाया कि मैं अपने फैसले खुद ले सकूं। मैं खुश हूं और धन्य हूं कि उन्होंने वो रास्ता अपनाया। ' अर्जुन कपूर ने आगे बताया था, 'अगर मेरी मां ने पिता की शादी के बारे में कुछ भी जहर भरा होता तो मुझे नहीं लगता कि मैं आज पहले जैसा होता। उन्होंने जो कुछ भी किया उसके लिए मेरी मां ने कभी भी नहीं भड़काया। और न उनके खिलाफ मेरे से कुछ कहा। उन्होंने हमें अपनी मर्जी से जीने दिया। मुझे लगता है कि इसी वजह से मैं इस बारे में शांति से बात कर पा रही हूं। ' बता दें कि अर्जुन कपूर छब्बीस जून को सैंतीस बरस के पूरे हुए। वह अपना बर्थडे ऐक्ट्रेस और गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा के साथ पेरिस में सेलिब्रेट कर रहे हैं। इनकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें यह दोनों वहां पर मस्ती कर रहे हैं। । हालांकि ये दोनों तक एक-दूसरे को डेट करेंगे और कब शादी करेंगे, इसके बारे में अभी किसी को कुछ नहीं मालूम। फिलहाल तो ये दोनों साथ में क्वॉलिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं।
एमपी में एक बार फिर दिन दहाड़े गोलियां चली। देवास के एक गांव में दो पक्षों में पुराने विवाद को लेकर हुई झड़प में दिन दहाडे़ फायरिंग हुई जिसमें भाजयुमो नेता के परिवार के दो लोगों की मौत हो गई वहीं एक अन्य घायल हो गया। घटना के बाद से पुलिस बल तैनात। देवास (dewas News). मध्य प्रदेश में एक बार फिर गोलीबारी की सनसनीखेज खबर सामने आई है। फायरिंग की घटना में तीन लोगों को गोलियां लगी है जिनमें से दो की मौत हो चुकी है जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। गोलीबारी की घटना भाजयुमों नेता के घर में हुई है जिसमें उनके भाई और पिता की मौत हुई है। घटना का पता चलते ही पुलिस बल मौके पर मौजूद है। मामले की जांच सतवास थाना क्षेत्र की है। दरअसल पूरा घटनाक्रम शहर के सतवास पुलिस थाने के गोलगांव की है। यहां के गोलगांव के ही गोदरा व देदड़ परिवार के बीच काफी समय से विवाद चल रहा था। पुरानी रंजिश के चलते रविवार के दिन एक बार फिर दोनों के बीच कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया। हाथापाई तक पहुंची नौबत के तहत देदड़ परिवार ने गोदरा परिवार के लोगों पर फायरिंग कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार गोली चलने से गोदरा परिवार के 3 लोग राजेश गोदरा और कैलाश गोदरा और एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें राजेश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कैलाश गोदरा की इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई वहीं अन्य घायल सुनील को इंदौर में भर्ती कराया गया है। बता दे कि कैलाश गोदरा भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महासचिव अनिल गोदरा के पिता है। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी संपत उपाध्याय ने बताया कि रविवार के दिन दो जाट परिवारों में हुई गोलीबारी की घटना में तीन लोगों में दो की जान चली गई है। पुलिस ने बताया कि फायरिंग की घटना में दो आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। उनसे पूछताछ करते हुए फायरिंग के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही माहौल को शांत बनाए रखने के लिए घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
एमपी में एक बार फिर दिन दहाड़े गोलियां चली। देवास के एक गांव में दो पक्षों में पुराने विवाद को लेकर हुई झड़प में दिन दहाडे़ फायरिंग हुई जिसमें भाजयुमो नेता के परिवार के दो लोगों की मौत हो गई वहीं एक अन्य घायल हो गया। घटना के बाद से पुलिस बल तैनात। देवास . मध्य प्रदेश में एक बार फिर गोलीबारी की सनसनीखेज खबर सामने आई है। फायरिंग की घटना में तीन लोगों को गोलियां लगी है जिनमें से दो की मौत हो चुकी है जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। गोलीबारी की घटना भाजयुमों नेता के घर में हुई है जिसमें उनके भाई और पिता की मौत हुई है। घटना का पता चलते ही पुलिस बल मौके पर मौजूद है। मामले की जांच सतवास थाना क्षेत्र की है। दरअसल पूरा घटनाक्रम शहर के सतवास पुलिस थाने के गोलगांव की है। यहां के गोलगांव के ही गोदरा व देदड़ परिवार के बीच काफी समय से विवाद चल रहा था। पुरानी रंजिश के चलते रविवार के दिन एक बार फिर दोनों के बीच कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया। हाथापाई तक पहुंची नौबत के तहत देदड़ परिवार ने गोदरा परिवार के लोगों पर फायरिंग कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार गोली चलने से गोदरा परिवार के तीन लोग राजेश गोदरा और कैलाश गोदरा और एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें राजेश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कैलाश गोदरा की इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई वहीं अन्य घायल सुनील को इंदौर में भर्ती कराया गया है। बता दे कि कैलाश गोदरा भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महासचिव अनिल गोदरा के पिता है। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी संपत उपाध्याय ने बताया कि रविवार के दिन दो जाट परिवारों में हुई गोलीबारी की घटना में तीन लोगों में दो की जान चली गई है। पुलिस ने बताया कि फायरिंग की घटना में दो आरोपियों को अरेस्ट किया गया है। उनसे पूछताछ करते हुए फायरिंग के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही माहौल को शांत बनाए रखने के लिए घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
जोया अख्तर (Zoya Akhtar) के घर पर फरहान और शिबानी का रिसेप्शन पार्टी रखा गया। जहां बॉलीवुड से जुड़े कई सितारें शामिल हुए। बेटे की खुशी में शामिल होने के लिए जावेद अख्तर भी पहुंचे। फरहान अख्तर जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बेटे हैं। जावेद अख्तर अपनी पत्नी शबाना आजमी के साथ नजर आए। इस दौरान दोनों ने पैपराजी को पोज भी दिए। जावेद अख्तर ने ब्लैक कुर्ता पर ब्लू जैकेट पहन रखा था। वहीं,शबाना आजमी ने व्हाइट प्रिटेंड सूट के साथ रेड चोकर पहन रखा था। वो बेहद ही खूबसूरत लग रही थी। शबाना आजमी फरहान को बहुत प्यार करती हैं। सगाई से लेकर शादी तक हर रस्म में शबाना शामिल हुईं। बता दें कि शबाना और जावेद अख्तर ने 1984 में एक दूसरे का हाथ पकड़ा था। वहीं, शिबानी दांडेकर की बहन अनुषा दांडेकर और अपेक्षा दांडेकर भी रिसेप्शन पार्टी में शिरकत किए। इस दौरान दोनों बहनें बेहद ही खूबसूरत नजर आईं। रिया चक्रवर्ती (rhea chakraborty) भी रिसेप्शन पार्टी में शामिल हुईं। वो ट्रांसपेरेंट साड़ी में बेहद हसीन नजर आईं। बता दें कि रिया चक्रवर्ती शिबानी दांडेकर की अच्छी दोस्त हैं। फरहान अख्तर के रिसेप्शन पार्टी में फरहा खान (farah khan) भी पहुंची। उन्होंने बैगनी कलर का सूट पहन रखा था। गले में एथेनिक हार पहन रखा था। वो इस आउटफिट में खूबसूरत लग रही थीं। भाई की खुशी में जोया अख्तर ( Zoya Akhtar) भी शामिल हुईं। वो ट्रेडिशनल आउटफिट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। फिल्म प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी (Ritesh Sidhwani) अपनी पत्नी डॉली सिधवानी के साथ पार्टी में पहुंचे। इस दौरान दोनों ने पैपराजी को पोज भी दिये। बता दें कि फरहान अख्तर-शिबानी दांडेकर एक-दूसरे को लंबे समय डेट कर रहे हैं। कुछ समय तक सबसे छुपाने के बाद दोनों ने साल 2018 में अपने रिलेशनशिप को ऑफिशियल कर दिया था। और पढ़ेंः
जोया अख्तर के घर पर फरहान और शिबानी का रिसेप्शन पार्टी रखा गया। जहां बॉलीवुड से जुड़े कई सितारें शामिल हुए। बेटे की खुशी में शामिल होने के लिए जावेद अख्तर भी पहुंचे। फरहान अख्तर जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बेटे हैं। जावेद अख्तर अपनी पत्नी शबाना आजमी के साथ नजर आए। इस दौरान दोनों ने पैपराजी को पोज भी दिए। जावेद अख्तर ने ब्लैक कुर्ता पर ब्लू जैकेट पहन रखा था। वहीं,शबाना आजमी ने व्हाइट प्रिटेंड सूट के साथ रेड चोकर पहन रखा था। वो बेहद ही खूबसूरत लग रही थी। शबाना आजमी फरहान को बहुत प्यार करती हैं। सगाई से लेकर शादी तक हर रस्म में शबाना शामिल हुईं। बता दें कि शबाना और जावेद अख्तर ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में एक दूसरे का हाथ पकड़ा था। वहीं, शिबानी दांडेकर की बहन अनुषा दांडेकर और अपेक्षा दांडेकर भी रिसेप्शन पार्टी में शिरकत किए। इस दौरान दोनों बहनें बेहद ही खूबसूरत नजर आईं। रिया चक्रवर्ती भी रिसेप्शन पार्टी में शामिल हुईं। वो ट्रांसपेरेंट साड़ी में बेहद हसीन नजर आईं। बता दें कि रिया चक्रवर्ती शिबानी दांडेकर की अच्छी दोस्त हैं। फरहान अख्तर के रिसेप्शन पार्टी में फरहा खान भी पहुंची। उन्होंने बैगनी कलर का सूट पहन रखा था। गले में एथेनिक हार पहन रखा था। वो इस आउटफिट में खूबसूरत लग रही थीं। भाई की खुशी में जोया अख्तर भी शामिल हुईं। वो ट्रेडिशनल आउटफिट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। फिल्म प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी अपनी पत्नी डॉली सिधवानी के साथ पार्टी में पहुंचे। इस दौरान दोनों ने पैपराजी को पोज भी दिये। बता दें कि फरहान अख्तर-शिबानी दांडेकर एक-दूसरे को लंबे समय डेट कर रहे हैं। कुछ समय तक सबसे छुपाने के बाद दोनों ने साल दो हज़ार अट्ठारह में अपने रिलेशनशिप को ऑफिशियल कर दिया था। और पढ़ेंः
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देवभूमि उत्तराखण्ड आने पर आर्मी हैलीपेड, हल्द्वानी पर राज्यपाल ले. ज. (से. नि) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया। मोदी यहां हल्द्वानी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की आधारशिला रखेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी 23 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की आधारशिला भी रखेंगे। हल्द्वानी का एम्स ऋषिकेश के बाद उत्तराखंड का दूसरा एम्स होगा। इससे कुमाऊं क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए ऋषिकेश तक जाने को मजबूर नहीं होना होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देवभूमि उत्तराखण्ड आने पर आर्मी हैलीपेड, हल्द्वानी पर राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया। मोदी यहां हल्द्वानी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की आधारशिला रखेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी तेईस अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की आधारशिला भी रखेंगे। हल्द्वानी का एम्स ऋषिकेश के बाद उत्तराखंड का दूसरा एम्स होगा। इससे कुमाऊं क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए ऋषिकेश तक जाने को मजबूर नहीं होना होगा।
बेगूसराय-रोसड़ा एसएच-55 पर दौलतपुर चौक के निकट सोमवार की दोपहर सैकड़ों बाइक सवार सहित विभिन्न प्रकार की गाड़ियों के अनियंत्रित परिचालन के कारण लगभग तीन घंटे तक सड़क जाम रही। इस कारण दौलतपुर चौक के दोनों ओर लगभग चार किलोमीटर दूर तक सैकड़ों गाड़ियां लगभग तीन घंटे तक जाम में फंसी रहीं। कड़ाके की धूप व उमस में जाम के कारण महिलाओं व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान प्रशासन निष्क्रिय दिखा।
बेगूसराय-रोसड़ा एसएच-पचपन पर दौलतपुर चौक के निकट सोमवार की दोपहर सैकड़ों बाइक सवार सहित विभिन्न प्रकार की गाड़ियों के अनियंत्रित परिचालन के कारण लगभग तीन घंटे तक सड़क जाम रही। इस कारण दौलतपुर चौक के दोनों ओर लगभग चार किलोमीटर दूर तक सैकड़ों गाड़ियां लगभग तीन घंटे तक जाम में फंसी रहीं। कड़ाके की धूप व उमस में जाम के कारण महिलाओं व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान प्रशासन निष्क्रिय दिखा।
Posted On: आवासन और शहरी कार्य और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 154वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वह आज राजघाट पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ शामिल हुए। गांधी जयंती के विशेष अवसर का जश्न मनाने के लिए, श्री पुरी और उनकी पत्नी श्रीमती लक्ष्मी एम पुरी ने खादी इंडिया से खादी कपड़े खरीदे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, मंत्री ने कहा, "खादी, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा के रूप में शुरू हुई, आज भारत की #अमृतकाल की यात्रा तक यह नागरिकों की पसंद बनी हुई है।" मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, "मैं स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। एक अनुकरणीय दिग्गज, उनका सरल और संयमित जीवन पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।"
Posted On: आवासन और शहरी कार्य और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी एक सौ चौवनवीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वह आज राजघाट पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ शामिल हुए। गांधी जयंती के विशेष अवसर का जश्न मनाने के लिए, श्री पुरी और उनकी पत्नी श्रीमती लक्ष्मी एम पुरी ने खादी इंडिया से खादी कपड़े खरीदे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, मंत्री ने कहा, "खादी, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा के रूप में शुरू हुई, आज भारत की #अमृतकाल की यात्रा तक यह नागरिकों की पसंद बनी हुई है।" मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, "मैं स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। एक अनुकरणीय दिग्गज, उनका सरल और संयमित जीवन पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।"
वर्ल्ड टीवी का सबसे पॉपुलर शो माना जाने वाला 'ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट' में पार्टिसिपेट करना ही बहुत बड़ी बात हो जाती है. ऐसा ही एक करिश्मा कर दिखाया है भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से 13 साल के एक लड़के अक्षत सिंह ने. उन्होंने यहां पर न सिर्फ 'ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट' में पार्टिसिपेट किया, बल्कि उन्होंने गोल्डन बजर भी इस दौरान हासिल किया. बता दें कि अक्षत ने ऐसा कर पूरे भारत का नाम एक बार फिर विदेशी जमीन पर रोशन किया है. अक्षत ने शो में अपने डांस से न सिर्फ वहां मौजूद दर्शकों को, बल्कि शो के चारों जजों साइमन कोवेल, डेविड विलियम्स, एलेशा डिक्सन और अमांडा होल्डन को भी तालियां बजने और उन्हें खड़ा होने पर मजबूर कर दिया. शो में उन्होंने कई तरह की बातें भी के. बता दें हसी अक्षत की उम्र अभी बहुत कम है, लेकिन वह काफी मोटे भी हैं. इसके बावजूद जब वह स्टेज पर परफॉर्म करने उतरे, तो अपने डांस के बीच उन्होंने न तो अपनी उम्र को और न ही अपने मोटापे को बीचे में आने दिया. उन्होंने इस शो में 'अग्निपथ' के 'देवा श्री गणेशा' गाने से परफॉर्म की शुरुआत की और रैपर निकी मिनाज के गाने 'स्टार्सहिप्स' के गाने पर जबरदस्त डांस कर हर किसी का दिल जीत लिया. वहीं उन्होंने कहा कि उनकी लाइफ के सिर्फ दो उद्देश्य है- पहला कि वह सभी को खुश रखना चाहते हैं और दूसरा कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता है. बता दें कि यह वीडियो 20 अप्रैल को यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को अब तक 63 लाख व्यू मिल चुके हैं.
वर्ल्ड टीवी का सबसे पॉपुलर शो माना जाने वाला 'ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट' में पार्टिसिपेट करना ही बहुत बड़ी बात हो जाती है. ऐसा ही एक करिश्मा कर दिखाया है भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से तेरह साल के एक लड़के अक्षत सिंह ने. उन्होंने यहां पर न सिर्फ 'ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट' में पार्टिसिपेट किया, बल्कि उन्होंने गोल्डन बजर भी इस दौरान हासिल किया. बता दें कि अक्षत ने ऐसा कर पूरे भारत का नाम एक बार फिर विदेशी जमीन पर रोशन किया है. अक्षत ने शो में अपने डांस से न सिर्फ वहां मौजूद दर्शकों को, बल्कि शो के चारों जजों साइमन कोवेल, डेविड विलियम्स, एलेशा डिक्सन और अमांडा होल्डन को भी तालियां बजने और उन्हें खड़ा होने पर मजबूर कर दिया. शो में उन्होंने कई तरह की बातें भी के. बता दें हसी अक्षत की उम्र अभी बहुत कम है, लेकिन वह काफी मोटे भी हैं. इसके बावजूद जब वह स्टेज पर परफॉर्म करने उतरे, तो अपने डांस के बीच उन्होंने न तो अपनी उम्र को और न ही अपने मोटापे को बीचे में आने दिया. उन्होंने इस शो में 'अग्निपथ' के 'देवा श्री गणेशा' गाने से परफॉर्म की शुरुआत की और रैपर निकी मिनाज के गाने 'स्टार्सहिप्स' के गाने पर जबरदस्त डांस कर हर किसी का दिल जीत लिया. वहीं उन्होंने कहा कि उनकी लाइफ के सिर्फ दो उद्देश्य है- पहला कि वह सभी को खुश रखना चाहते हैं और दूसरा कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता है. बता दें कि यह वीडियो बीस अप्रैल को यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को अब तक तिरेसठ लाख व्यू मिल चुके हैं.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि राज्य में सितंबर-अक्टूबर में हर दिन कोरोना की 18,000 जांच हो रही थीं. इस क्षमता को बढ़ाकर अब 30 हजार से अधिक कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना की शत प्रतिशत जांच RT-PCR से हो रही हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने कोरोनावायरस महामारी के बीच स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे (Medical Infrastructure) को लगातार मजबूत किया है और इस समय राज्य में हर दिन कोरोना के 30 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं. गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बातचीत में यह बात कही. उन्होंने कहा कि राज्य में सितंबर-अक्टूबर में हर दिन कोरोना (Coronavirus) की 18 हजार जांच हो रही थीं. इस क्षमता को बढ़ाकर अब 30 हजार से अधिक कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना की शत प्रतिशत जांच RT-PCR से हो रही हैं, जो कि जांच की अब तक की सबसे विश्वसनीय विधि है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे (Medical Health Infrastructure) को मजबूत करने पर ध्यान दिया है, जिसके तहत ऑक्सीजन की व्यवस्था करना, ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाना, ICU और ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड की संख्या बढ़ाना शामिल है. मुख्यमंत्री गहलोत ने संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए पटाखों पर प्रतिबंध, मास्क पहनना अनिवार्य करने के लिए कानून, कई शहरों में नाइट कर्फ्यू और जागरूकता के लिए जन आंदोलन (Awareness Mass Movement) जैसे कदमों की जानकारी भी इस वीडियो कान्फ्रेंस में दी. मालूम हो कि हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसी को लेकर पीएम मोदी ने आज अपनी पहली बैठक में इन 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बात की. इसके बाद उन्होंने दूसरी बैठक में कोरोना वैक्सीन पर बात की. कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) आने से पहले राजस्थान सरकार भी तैयारियां करने में लगी हुई है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अभी से वैक्सीन को लेकर पूरी तैयारियां रखें.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य में सितंबर-अक्टूबर में हर दिन कोरोना की अट्ठारह,शून्य जांच हो रही थीं. इस क्षमता को बढ़ाकर अब तीस हजार से अधिक कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना की शत प्रतिशत जांच RT-PCR से हो रही हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने कोरोनावायरस महामारी के बीच स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत किया है और इस समय राज्य में हर दिन कोरोना के तीस हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं. गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बातचीत में यह बात कही. उन्होंने कहा कि राज्य में सितंबर-अक्टूबर में हर दिन कोरोना की अट्ठारह हजार जांच हो रही थीं. इस क्षमता को बढ़ाकर अब तीस हजार से अधिक कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना की शत प्रतिशत जांच RT-PCR से हो रही हैं, जो कि जांच की अब तक की सबसे विश्वसनीय विधि है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया है, जिसके तहत ऑक्सीजन की व्यवस्था करना, ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाना, ICU और ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड की संख्या बढ़ाना शामिल है. मुख्यमंत्री गहलोत ने संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए पटाखों पर प्रतिबंध, मास्क पहनना अनिवार्य करने के लिए कानून, कई शहरों में नाइट कर्फ्यू और जागरूकता के लिए जन आंदोलन जैसे कदमों की जानकारी भी इस वीडियो कान्फ्रेंस में दी. मालूम हो कि हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसी को लेकर पीएम मोदी ने आज अपनी पहली बैठक में इन आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ऑनलाइन बात की. इसके बाद उन्होंने दूसरी बैठक में कोरोना वैक्सीन पर बात की. कोरोना वैक्सीन आने से पहले राजस्थान सरकार भी तैयारियां करने में लगी हुई है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अभी से वैक्सीन को लेकर पूरी तैयारियां रखें.
मिस अमेरिका प्रतियोगिता एक लम्बे समय से चली आ रही प्रतियोगिता है जो ५० राज्यों सहित वॉशिंगटन डी॰ सी॰, प्युर्तो रिको और संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीपसमूह की युवा महिलाओं के मध्य छात्रवृत्ति पुरस्कार के रूप में होती है। वर्तमान मिस अमेरिका न्यूयॉर्क से नीना दावुलूरी हैं जिन्हें 87वीं सौन्दर्य प्रतियोगिता में 15 सितम्बर 2013 को विजेता का ताज पहनाया गया। वो प्रथम भारतीय अमरीकी मिस अमेरिका हैं। . 6 संबंधोंः नीना दावुलूरी, पोर्टो रीको, भारतीय अमरीकी, संयुक्त राज्य, संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीपसमूह, वॉशिंगटन, डी॰ सी॰। नीना दावुलूरी (నీనా దావులూరి; उनके मातृगृह में पैतृक परम्परा के बावजूद, वो "दावुलूरी" को अपने उपनाम की तरह काम में लेती हैं; जन्मः अप्रैल 20, 1989) अमेरिकी सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता हैं जिन्हें मिस न्यूयॉर्क 2013 से नामित किया गया था जिसके पश्चात उन्होंने मिस अमेरिका 2014 का खिताब भी अपने नाम कर लिया। वो प्रथम भारतीय अमेरिकी हैं जिन्होंने मिस अमेरिका का खिताब जीता। दावुलूरी का जन्म न्यूयॉर्क राज्य के सेराक्यूज़ नगर में हुआ जहाँ से चार वर्ष की आयु में वो अपने परिवार के साथ ओक्लाहोमा चली गईं और वहाँ से बाद में सेंट जोसेफ, मिशिगन में स्थापित हो गईं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपने परिवार के साथ वो वर्ष 2000 के मध्य में पुनः फयेत्टविल (सेराक्यूज़) चली गईं, जहाँ उनके पिता सेंट जोज़फ अस्पताल में स्त्रीरोग चिकित्सक हैं . पोर्टो रिको या प्युर्तो रिको उत्तर अमेरिका महाद्वीप में केरिबियन क्षेत्र में एक राष्ट्रमंडल है। . अमरीका में बसे १७ लाख भारतीय अमेरिकी भारत और अमेरिका के बीच मजबूत कङी बनाते हैं। सैनफ्रांसिस्को-लॉस एंजेलस, न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी, शिकागो, डैट्रायट, ह्यूस्टन, एटलांटा, मायामी-आरलैंडो-टैंपा और वाशिंगटन डी. सी. के बड़े क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति है। १९६० और १९७० के दशकों में अमरीका आए पहले भारतीयों में डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर (अभियान्त्रक) जैसे पेशों के लोग थे पर हाल ही में बहुत से अन्य पेशों के लोग भी आने लगे हैं। भारतीय अमेरिकियों ने बहुत सी संस्थाएं और संगठन बनाये हुए हैं जो मुख्य रूप से भाषा के आधार पर और कुछेक व्यवसाय के आधार पर बनाये गये हैं। संपन्नता बढ़ने से, ख़ासकर सूचना तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में, यह समुदाय राजनीति के क्षेत्र में भी लगातार सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय अमेरिकी समुदाय की बढ़ती हुई राजनीतिक चेतना और प्रभाव का एक महत्वपूर्ण परिणाम कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन्स के रूप में सामने आया है। निचले सदन में इस कॉकस के सदस्यों की संख्या १३० है और सदन में यह किसी एक देश से संबंधित सबसे बड़ा गुट है। इस गुट और भारतीय अमेरिकी समुदाय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनकी कोशिश है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अतीत को भुला दें और अपनी नीतियों और हितों में मजबूत तालमेल बनायें श्रेणीःभारतीय अमेरिकी. संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. यह उत्तर अमेरिका महाद्वीप में केरिबियन क्षेत्र में एक देश है। श्रेणीःदेश श्रेणीःउत्तर अमेरिका. वाशिंगटन डी॰ सी॰ (अंग्रेजीः Washington D.C.) संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी है। १६ जुलाई १७९० पर अमेरिकी कांग्रेस ने उसका सृजन अनुमोदित किया था। यह कोई अमेरिकी राज्य का हिस्सा नहीं है। यह शहर मेरीलैंड राज्य से बनाया गया था। पहले यूरोपीयन लोग वहाँ १७वीं शताब्दी में आ गए। वाशिंगटन पोटोमैक नदी पर स्थित है। .
मिस अमेरिका प्रतियोगिता एक लम्बे समय से चली आ रही प्रतियोगिता है जो पचास राज्यों सहित वॉशिंगटन डी॰ सी॰, प्युर्तो रिको और संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीपसमूह की युवा महिलाओं के मध्य छात्रवृत्ति पुरस्कार के रूप में होती है। वर्तमान मिस अमेरिका न्यूयॉर्क से नीना दावुलूरी हैं जिन्हें सत्तासीवीं सौन्दर्य प्रतियोगिता में पंद्रह सितम्बर दो हज़ार तेरह को विजेता का ताज पहनाया गया। वो प्रथम भारतीय अमरीकी मिस अमेरिका हैं। . छः संबंधोंः नीना दावुलूरी, पोर्टो रीको, भारतीय अमरीकी, संयुक्त राज्य, संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीपसमूह, वॉशिंगटन, डी॰ सी॰। नीना दावुलूरी अमेरिकी सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता हैं जिन्हें मिस न्यूयॉर्क दो हज़ार तेरह से नामित किया गया था जिसके पश्चात उन्होंने मिस अमेरिका दो हज़ार चौदह का खिताब भी अपने नाम कर लिया। वो प्रथम भारतीय अमेरिकी हैं जिन्होंने मिस अमेरिका का खिताब जीता। दावुलूरी का जन्म न्यूयॉर्क राज्य के सेराक्यूज़ नगर में हुआ जहाँ से चार वर्ष की आयु में वो अपने परिवार के साथ ओक्लाहोमा चली गईं और वहाँ से बाद में सेंट जोसेफ, मिशिगन में स्थापित हो गईं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपने परिवार के साथ वो वर्ष दो हज़ार के मध्य में पुनः फयेत्टविल चली गईं, जहाँ उनके पिता सेंट जोज़फ अस्पताल में स्त्रीरोग चिकित्सक हैं . पोर्टो रिको या प्युर्तो रिको उत्तर अमेरिका महाद्वीप में केरिबियन क्षेत्र में एक राष्ट्रमंडल है। . अमरीका में बसे सत्रह लाख भारतीय अमेरिकी भारत और अमेरिका के बीच मजबूत कङी बनाते हैं। सैनफ्रांसिस्को-लॉस एंजेलस, न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी, शिकागो, डैट्रायट, ह्यूस्टन, एटलांटा, मायामी-आरलैंडो-टैंपा और वाशिंगटन डी. सी. के बड़े क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति है। एक हज़ार नौ सौ साठ और एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशकों में अमरीका आए पहले भारतीयों में डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर जैसे पेशों के लोग थे पर हाल ही में बहुत से अन्य पेशों के लोग भी आने लगे हैं। भारतीय अमेरिकियों ने बहुत सी संस्थाएं और संगठन बनाये हुए हैं जो मुख्य रूप से भाषा के आधार पर और कुछेक व्यवसाय के आधार पर बनाये गये हैं। संपन्नता बढ़ने से, ख़ासकर सूचना तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में, यह समुदाय राजनीति के क्षेत्र में भी लगातार सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय अमेरिकी समुदाय की बढ़ती हुई राजनीतिक चेतना और प्रभाव का एक महत्वपूर्ण परिणाम कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन्स के रूप में सामने आया है। निचले सदन में इस कॉकस के सदस्यों की संख्या एक सौ तीस है और सदन में यह किसी एक देश से संबंधित सबसे बड़ा गुट है। इस गुट और भारतीय अमेरिकी समुदाय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनकी कोशिश है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अतीत को भुला दें और अपनी नीतियों और हितों में मजबूत तालमेल बनायें श्रेणीःभारतीय अमेरिकी. संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. यह उत्तर अमेरिका महाद्वीप में केरिबियन क्षेत्र में एक देश है। श्रेणीःदेश श्रेणीःउत्तर अमेरिका. वाशिंगटन डी॰ सी॰ संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी है। सोलह जुलाई एक हज़ार सात सौ नब्बे पर अमेरिकी कांग्रेस ने उसका सृजन अनुमोदित किया था। यह कोई अमेरिकी राज्य का हिस्सा नहीं है। यह शहर मेरीलैंड राज्य से बनाया गया था। पहले यूरोपीयन लोग वहाँ सत्रहवीं शताब्दी में आ गए। वाशिंगटन पोटोमैक नदी पर स्थित है। .
Medininagar (Palamu): सतबरवा थाना क्षेत्र में सोमवार को घर में महिला और बच्चे की लाश मिली. घटना रबदा गांव की है. मृतकों की पहचान जीतन सिंह की पत्नी लाखो देवी और उसके एक साल की बच्ची टहली कुमारी के रूप में हुई है. मंगलवार को पोस्टमार्टम के लिए शव को पीएमसीएच मेदिनीनगर भेज दिया गया. घटना शाम तीन बजे की है. जानकारी के अनुसार ग्रामीण जब घर पहुंचे तो लाखो देवी नायलॉन की रस्सी के सहारे छत के कंडी में बंधी बांस से झूल रही थी. ग्रामीणों ने रस्सी को काटकर उतारा. जबकि बच्ची का शव खाट पर पड़ा हुआ था. उसके गले में निशान था. जीभ बाहर निकली हुई थी. इसकी सूचना जल्द ही ग्रामीणों ने सतबरवा थाने को दी. थाना प्रभारी राहुल कुमार पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर थाने ले आये. पुलिस ने मृतका के पति को बुलाकर पूछताछ की. जानकारी के अनुसार अभी तक किसी ने लिखित आवेदन नहीं दिया है. थाना प्रभारी ने कहा कि लिखित आवेदन मिलने के बाद और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. फिलहाल छानबीन चल रही है.
Medininagar : सतबरवा थाना क्षेत्र में सोमवार को घर में महिला और बच्चे की लाश मिली. घटना रबदा गांव की है. मृतकों की पहचान जीतन सिंह की पत्नी लाखो देवी और उसके एक साल की बच्ची टहली कुमारी के रूप में हुई है. मंगलवार को पोस्टमार्टम के लिए शव को पीएमसीएच मेदिनीनगर भेज दिया गया. घटना शाम तीन बजे की है. जानकारी के अनुसार ग्रामीण जब घर पहुंचे तो लाखो देवी नायलॉन की रस्सी के सहारे छत के कंडी में बंधी बांस से झूल रही थी. ग्रामीणों ने रस्सी को काटकर उतारा. जबकि बच्ची का शव खाट पर पड़ा हुआ था. उसके गले में निशान था. जीभ बाहर निकली हुई थी. इसकी सूचना जल्द ही ग्रामीणों ने सतबरवा थाने को दी. थाना प्रभारी राहुल कुमार पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर थाने ले आये. पुलिस ने मृतका के पति को बुलाकर पूछताछ की. जानकारी के अनुसार अभी तक किसी ने लिखित आवेदन नहीं दिया है. थाना प्रभारी ने कहा कि लिखित आवेदन मिलने के बाद और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. फिलहाल छानबीन चल रही है.
शहरों में सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति में रहने वाले जो लोग हैं, उनमें मुख्य स्थान बेघर लोगों का है। जहां एक ओर बेघर होने के कारण वे मौसम की मार सीधे अपने शरीर पर सहने को मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर उनमें भूख व कुपोषण का प्रकोप भी बहुत अधिक है। कुपोषण की समस्या से तो लगभग सभी बेघर त्रस्त हैं। इस कारण बीमारी सहने की उनकी क्षमता भी कम हो जाती है। यह मान लिया जाता है कि फुटपाथ पर जो रहेगा उसे बीमारी व दुर्घटना की संभावना तो अधिक होगी ही। यही कारण है कि देश में हजारों बेघर लोग असमय मौत के गाल में समा जाते हैं। शायद इस मौत से भी ज्यादा दर्दनाक कहानी उन बच्चों-बच्चियों की है जिन्हें फुटपाथ की जिंदगी जीने के कारण यौन उत्पीड़न और नशे की ऐसी अंधी गली में धकेल देती है जिससे वापसी बहुत कठिन होती है। जब शहरों में महिलाओं की असुरक्षा पर इतनी चिंता व्यक्त की जाती है तो बेघर महिलाओं को क्या कुछ सहना पड़ता होगा इसकी कल्पना करना ही एक बेहद दर्दनाक अनुभव है। शहरी आवासहीन लोगों को एक तो वैसे ही बहुत कष्ट सहने पड़ते हैं उस पर कानून व्यवस्था भी उनके प्रति संवेदनहीन होती है। आवास के अभाव में फुटपाथ पर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से रहने वाले व्यक्ति को समय-समय पर पुलिस की मार झेलनी पड़ती है और न जाने किन-किन यातनाओं से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं भिखारियों को पकड़ने के अपने लक्ष्य पूरा करने के लिए पुलिस इन्हें पकड़कर भिक्षु गृह में भेज देती है है। भिक्षु गृह में उन्हें कई महीनों तक जेल के कैदी की तरह रहना पड़ सकता है और कई बार तो उन्हें यह भी नहीं बताया जाता है कि उन्हें कितने समय के लिए बंद किया गया है। सरकार को जितने भी बेघर लोग हैं उनकी उचित संख्या का अनुमान लगाना चाहिए तथा इसके अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इसके लिए रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने और इनकी हालत हालत में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार निर्देश दिए हैं, लेकिन यह सब खबरों में छपने के लिए होता है। इनका वास्तवविक अनुपालन सरकारें शायद ही करती हैं। नियमानुसार रैन बसेरों में सोने की पर्याप्त जगह के साथ-साथ बिस्तरों व शौचालयों की ठीक से सफाई सुनिश्चित होनी चाहिए। महिलाओं के लिए अलग रैन बसेरे होने चाहिए और पुरुषों व महिलाओं के लिए कुछ रैन बसेरे पास-पास में भी बनने चाहिए ताकि बेघर परिवारों के सदस्यों को एक-दूसरे से अलग होकर दूर न जाना पड़े। अपना थोड़ा बहुत, हल्का सामान यहां सोने वाले रख सकें इसकी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों की रात सुरक्षित बीत सके इसकी व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। रैन बसेरों को चलाने में बेघर लोगों के ही कुछ प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाए तो उनकी समस्याएं कम हो सकती हैं, लेकिन इस दिशा में शायद ही सोचा जाता है। कई रिक्शा चालक, पानी की टंकी वाले, ठेले वाले अपने रिक्शा या टंकी को असुरक्षित छोड़कर रैन बसेरों में नहीं आ सकते हैं। इसलिए यदि संभव हो तो रैन बसेरों के बाहर इन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जीविका भी चला सकें। जहां यह व्यवस्था संभव नहीं हो वहां रिक्शा चालकों को अपने वर्तमान विश्राम स्थल पर ही पॉलीथीन की शीट, बांस, टिन आदि से अस्थायी आश्रय स्थल बनाने की इजाजत सरकार को देनी चाहिए। विभिन्न धर्मस्थानों से संपर्क स्थापित कर उन्हें रात को अपने यहां बेघर लोगों के विश्राम के लिए कहा जा सकता हैं जिसकी एवज में सरकार उन्हें कुछ धन मुहैया करा सकती है। विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी इमारतें जहां कोई बहुमूल्य सामग्री नहीं है और जो रात को खाली रहती हैं वहां कई लोग सो सकते हैं। ऐसे स्थानों को बेघर लोगों के लिए रात को उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। बेशक सुबह आठ बजे तक इनकी सफाई कर स्थान खाली करा लिया जाए। इस तरह की इमारतों का यह सार्थक उपयोग संभव बनाने के लिए संवेदनशील सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र के लोगों को आगे आना चाहिए। यह सब कार्य बेघर लोगों के आपसी संगठन बनाने और जिम्मेदारियां संभालने से ही संभव होगा। जब बेघरों के अपने प्रतिनिधि ही जिम्मेदारियां संभालेंगे और निभाएंगे तो ही स्थिति में बदलाव आने की उम्मीद की जा सकती है। अन्यथा यह व्यवस्था भी एक खानापूर्ति तक सीमित हो जाएगा। इस काम में पुलिस के साथ सुरक्षा संबंधी मामलों में सहयोग जरूरी है। इससे न केवल बेघरों का आसरा मिलेगा, बल्कि पुलिस के सहयोग से अपराधों पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। बेघर लोगों के संगठन व प्रशिक्षण में सामाजिक कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण भूमिका दी जानी चाहिए। इससे जहां संभव होगा वे बेघर लोगों के सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास करेंगे और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व नशा दूर करने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे। जहां विशेष आवश्यकता होगी वहां मानसिक स्वास्थ्य, विकलांगता, कुष्ठरोग आदि से जुड़ी संस्थाओं से इन लोगों का प्रत्यक्ष संबंध स्थापित कराने का प्रयास करेंगे। इससे जहां सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग होगा वहीं स्वैच्छिक संस्थाओं के साधन व बेघर लोगों की मेहनत भी जुड़ेगी तो आश्रयविहीन लोगों की भलाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। बेघर लोगों को जबरदस्ती भिक्षु गृह में ले जाने पर रोक लगनी चाहिए व बिना वजह उन्हें जो समय-समय पर पुलिस द्वारा पीटा जाता है उस पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। बेघर लोगों से अन्याय करने वाले कानूनों को हटाना चाहिए और इसके स्थान पर ऐसे कानून बनने चाहिए जिससे बेघर लोगों से जुड़े विभिन्न कल्याणकारी कार्य बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ सकें। सर्दी के दिनों में कई दयालु लोगों में यह गहरी इच्छा जागृत होती है कि वे बेघर लोगों के लिए कंबल व रजाई का दान करें। यह बहुत अच्छी भावना है पर केवल कुछ कंबल ही किसी फुटपाथ तक पंहुचा देने से महानगर के सभी बेघर लोगों की समस्याएं दूर नहीं हो जातीं। दूसरी ओर यदि आश्रयविहीन लोगों से पूछकर उनकी अपनी भागीदारी से एक आश्रय अभियान विकसित हो तो उसमें अपना भरपूर योगदान देकर सभी नागरिक अपने जरूरतमंद भाई-बहनों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी वास्तव में निभा सकते हैं। समस्या यह है कि शीतलहर के दौरान बेघर लोगों के लिए जो सहानुभूति उत्पन्न होती है वह कुछ दिनों में ही थम जाती है। शीत लहर में बेघर लोगों की मौत अचानक नहीं होती अपितु भूख व कुपोषण बढ़ने के कारण वे इतने असहाय और कमजोर हो जाते हैं कि प्रतिकूल मौसम की मार नहीं झेल पाते हैं। हमारे शहरों में न केवल लाखों लोग बेघर रहते हैं, अपितु अनेक शहरों में विविध कारणों से बेघर लोगों की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है। यह संख्या कभी झोपडि़यों के हटाए जाने तो कभी गांवों में सूखे-बाढ़ के संकट के कारण बढ़ रही है। अतः बेघर लोगों के प्रति उचित व न्यायसंगत नीति अपनाना अब और भी जरूरी हो गया है।
शहरों में सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति में रहने वाले जो लोग हैं, उनमें मुख्य स्थान बेघर लोगों का है। जहां एक ओर बेघर होने के कारण वे मौसम की मार सीधे अपने शरीर पर सहने को मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर उनमें भूख व कुपोषण का प्रकोप भी बहुत अधिक है। कुपोषण की समस्या से तो लगभग सभी बेघर त्रस्त हैं। इस कारण बीमारी सहने की उनकी क्षमता भी कम हो जाती है। यह मान लिया जाता है कि फुटपाथ पर जो रहेगा उसे बीमारी व दुर्घटना की संभावना तो अधिक होगी ही। यही कारण है कि देश में हजारों बेघर लोग असमय मौत के गाल में समा जाते हैं। शायद इस मौत से भी ज्यादा दर्दनाक कहानी उन बच्चों-बच्चियों की है जिन्हें फुटपाथ की जिंदगी जीने के कारण यौन उत्पीड़न और नशे की ऐसी अंधी गली में धकेल देती है जिससे वापसी बहुत कठिन होती है। जब शहरों में महिलाओं की असुरक्षा पर इतनी चिंता व्यक्त की जाती है तो बेघर महिलाओं को क्या कुछ सहना पड़ता होगा इसकी कल्पना करना ही एक बेहद दर्दनाक अनुभव है। शहरी आवासहीन लोगों को एक तो वैसे ही बहुत कष्ट सहने पड़ते हैं उस पर कानून व्यवस्था भी उनके प्रति संवेदनहीन होती है। आवास के अभाव में फुटपाथ पर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से रहने वाले व्यक्ति को समय-समय पर पुलिस की मार झेलनी पड़ती है और न जाने किन-किन यातनाओं से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं भिखारियों को पकड़ने के अपने लक्ष्य पूरा करने के लिए पुलिस इन्हें पकड़कर भिक्षु गृह में भेज देती है है। भिक्षु गृह में उन्हें कई महीनों तक जेल के कैदी की तरह रहना पड़ सकता है और कई बार तो उन्हें यह भी नहीं बताया जाता है कि उन्हें कितने समय के लिए बंद किया गया है। सरकार को जितने भी बेघर लोग हैं उनकी उचित संख्या का अनुमान लगाना चाहिए तथा इसके अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इसके लिए रैन बसेरों की संख्या बढ़ाने और इनकी हालत हालत में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार निर्देश दिए हैं, लेकिन यह सब खबरों में छपने के लिए होता है। इनका वास्तवविक अनुपालन सरकारें शायद ही करती हैं। नियमानुसार रैन बसेरों में सोने की पर्याप्त जगह के साथ-साथ बिस्तरों व शौचालयों की ठीक से सफाई सुनिश्चित होनी चाहिए। महिलाओं के लिए अलग रैन बसेरे होने चाहिए और पुरुषों व महिलाओं के लिए कुछ रैन बसेरे पास-पास में भी बनने चाहिए ताकि बेघर परिवारों के सदस्यों को एक-दूसरे से अलग होकर दूर न जाना पड़े। अपना थोड़ा बहुत, हल्का सामान यहां सोने वाले रख सकें इसकी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों की रात सुरक्षित बीत सके इसकी व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। रैन बसेरों को चलाने में बेघर लोगों के ही कुछ प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाए तो उनकी समस्याएं कम हो सकती हैं, लेकिन इस दिशा में शायद ही सोचा जाता है। कई रिक्शा चालक, पानी की टंकी वाले, ठेले वाले अपने रिक्शा या टंकी को असुरक्षित छोड़कर रैन बसेरों में नहीं आ सकते हैं। इसलिए यदि संभव हो तो रैन बसेरों के बाहर इन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था कराई जानी चाहिए ताकि वह अपनी जीविका भी चला सकें। जहां यह व्यवस्था संभव नहीं हो वहां रिक्शा चालकों को अपने वर्तमान विश्राम स्थल पर ही पॉलीथीन की शीट, बांस, टिन आदि से अस्थायी आश्रय स्थल बनाने की इजाजत सरकार को देनी चाहिए। विभिन्न धर्मस्थानों से संपर्क स्थापित कर उन्हें रात को अपने यहां बेघर लोगों के विश्राम के लिए कहा जा सकता हैं जिसकी एवज में सरकार उन्हें कुछ धन मुहैया करा सकती है। विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी इमारतें जहां कोई बहुमूल्य सामग्री नहीं है और जो रात को खाली रहती हैं वहां कई लोग सो सकते हैं। ऐसे स्थानों को बेघर लोगों के लिए रात को उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। बेशक सुबह आठ बजे तक इनकी सफाई कर स्थान खाली करा लिया जाए। इस तरह की इमारतों का यह सार्थक उपयोग संभव बनाने के लिए संवेदनशील सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र के लोगों को आगे आना चाहिए। यह सब कार्य बेघर लोगों के आपसी संगठन बनाने और जिम्मेदारियां संभालने से ही संभव होगा। जब बेघरों के अपने प्रतिनिधि ही जिम्मेदारियां संभालेंगे और निभाएंगे तो ही स्थिति में बदलाव आने की उम्मीद की जा सकती है। अन्यथा यह व्यवस्था भी एक खानापूर्ति तक सीमित हो जाएगा। इस काम में पुलिस के साथ सुरक्षा संबंधी मामलों में सहयोग जरूरी है। इससे न केवल बेघरों का आसरा मिलेगा, बल्कि पुलिस के सहयोग से अपराधों पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। बेघर लोगों के संगठन व प्रशिक्षण में सामाजिक कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण भूमिका दी जानी चाहिए। इससे जहां संभव होगा वे बेघर लोगों के सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास करेंगे और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व नशा दूर करने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे। जहां विशेष आवश्यकता होगी वहां मानसिक स्वास्थ्य, विकलांगता, कुष्ठरोग आदि से जुड़ी संस्थाओं से इन लोगों का प्रत्यक्ष संबंध स्थापित कराने का प्रयास करेंगे। इससे जहां सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग होगा वहीं स्वैच्छिक संस्थाओं के साधन व बेघर लोगों की मेहनत भी जुड़ेगी तो आश्रयविहीन लोगों की भलाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। बेघर लोगों को जबरदस्ती भिक्षु गृह में ले जाने पर रोक लगनी चाहिए व बिना वजह उन्हें जो समय-समय पर पुलिस द्वारा पीटा जाता है उस पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। बेघर लोगों से अन्याय करने वाले कानूनों को हटाना चाहिए और इसके स्थान पर ऐसे कानून बनने चाहिए जिससे बेघर लोगों से जुड़े विभिन्न कल्याणकारी कार्य बिना किसी अवरोध के आगे बढ़ सकें। सर्दी के दिनों में कई दयालु लोगों में यह गहरी इच्छा जागृत होती है कि वे बेघर लोगों के लिए कंबल व रजाई का दान करें। यह बहुत अच्छी भावना है पर केवल कुछ कंबल ही किसी फुटपाथ तक पंहुचा देने से महानगर के सभी बेघर लोगों की समस्याएं दूर नहीं हो जातीं। दूसरी ओर यदि आश्रयविहीन लोगों से पूछकर उनकी अपनी भागीदारी से एक आश्रय अभियान विकसित हो तो उसमें अपना भरपूर योगदान देकर सभी नागरिक अपने जरूरतमंद भाई-बहनों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी वास्तव में निभा सकते हैं। समस्या यह है कि शीतलहर के दौरान बेघर लोगों के लिए जो सहानुभूति उत्पन्न होती है वह कुछ दिनों में ही थम जाती है। शीत लहर में बेघर लोगों की मौत अचानक नहीं होती अपितु भूख व कुपोषण बढ़ने के कारण वे इतने असहाय और कमजोर हो जाते हैं कि प्रतिकूल मौसम की मार नहीं झेल पाते हैं। हमारे शहरों में न केवल लाखों लोग बेघर रहते हैं, अपितु अनेक शहरों में विविध कारणों से बेघर लोगों की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है। यह संख्या कभी झोपडि़यों के हटाए जाने तो कभी गांवों में सूखे-बाढ़ के संकट के कारण बढ़ रही है। अतः बेघर लोगों के प्रति उचित व न्यायसंगत नीति अपनाना अब और भी जरूरी हो गया है।
जनता से रिश्ता वेबडेसक । छोले-कुलचे एक ऐसी डिश है जो स्वास्थ्यकारी भी है, आम और खास दोनों में मशहूर है साथ ही जेब पर भारी नहीं पड़ती. दिल्ली के किसी भी इलाके में जाइए, वहां आपको छोले-कुलचे (Chole Kulche) की दुकान या ठीया जरूर दिख जाएगा. बेचने वाले भी अपने-अपने तरीके से ग्राहकों को रिझाने के लिए कवायद करते रहते हैं. किसी के कुलचे मक्खन में तर है तो किसी के देसी घी में, कोई अपने छोलों को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें प्याज का तड़का लगा रहा है तो कोई नींबू और खटाई उडेंल रहा है. सबका मकसद एक ही है कि ग्राहक उनके पास आए और वे तारीफ पाएं. आज हम आपको ऐसे ही छोले-कुलचे वाले के पास ले चल रहे हैं. इसका मसला यह है कि यह साहब मक्खन-घी का बिल्कूल भी प्रयोग नहीं करते हैं. इनके कुलचे अलग ही तरीके से गरम (फ्राई) होते हैं ओर छोलों और आलू का संगम ही स्वाद को लाजवाब बना रहा है. दिल्ली के पुराने बाजारों में से एक करोल बाग में आएंगे तो आर्य समाज रोड पर गफ्फार मार्केट की साइड पर (दुर्गा साईं मन्दिर के बगल में) छतरी ताने ठीया नजर आ जाएगा. इस ठीए को 'गणेश छोले-कुलचे' से निकल रही भाप (स्टीम) से कुलचे गरम हो रहे हैं. इस ठीए को 'गणेश छोले-कुलचे' के नाम से जाना जाता है. सजाया जाता है. उसके ऊपर कटी हरी मिर्च, हरा धनिया व अदरक के लच्छे रखे जाते हैं. साथ में आधा नींबू काटकर पेश कर दिया जाता है. इनकी जो हरी मिर्च का अचार है, वह इन छोले-कुलचे के स्वाद को अलग ही टेस्ट देता है. न कोई घी, न मक्खन. बस इसी डिश के दीवाने हुए जा रहे हैं लोग. तीन कुलचों के साथ 70 रुपये में पेट भरा जा सकता है. यहां तीन कुलचों के साथ 70 रुपये में पेट भरा जा सकता है. डिश के साथ स्पेशल रायता भी लिया जा सकता है. रायता वाला भी साथ में है. उनका नाम अमरीश है. उनकी पूरे इलाके में रायते की सप्लाई है. वह रोजाना रोहतक से ताजी छाछ मंगाते हैं और काला नमक, बूंदी, पुदीने के टुकड़ों को मिलाकर रायता तैयार करते हैं. गाढ़ा रायते का यह बड़ा गिलास 20 रुपये का है. छोले-कुलचे खाकर रायते का गिलास लपेंटे और आपका खाना हजम होता दिखाई देगा.
जनता से रिश्ता वेबडेसक । छोले-कुलचे एक ऐसी डिश है जो स्वास्थ्यकारी भी है, आम और खास दोनों में मशहूर है साथ ही जेब पर भारी नहीं पड़ती. दिल्ली के किसी भी इलाके में जाइए, वहां आपको छोले-कुलचे की दुकान या ठीया जरूर दिख जाएगा. बेचने वाले भी अपने-अपने तरीके से ग्राहकों को रिझाने के लिए कवायद करते रहते हैं. किसी के कुलचे मक्खन में तर है तो किसी के देसी घी में, कोई अपने छोलों को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें प्याज का तड़का लगा रहा है तो कोई नींबू और खटाई उडेंल रहा है. सबका मकसद एक ही है कि ग्राहक उनके पास आए और वे तारीफ पाएं. आज हम आपको ऐसे ही छोले-कुलचे वाले के पास ले चल रहे हैं. इसका मसला यह है कि यह साहब मक्खन-घी का बिल्कूल भी प्रयोग नहीं करते हैं. इनके कुलचे अलग ही तरीके से गरम होते हैं ओर छोलों और आलू का संगम ही स्वाद को लाजवाब बना रहा है. दिल्ली के पुराने बाजारों में से एक करोल बाग में आएंगे तो आर्य समाज रोड पर गफ्फार मार्केट की साइड पर छतरी ताने ठीया नजर आ जाएगा. इस ठीए को 'गणेश छोले-कुलचे' से निकल रही भाप से कुलचे गरम हो रहे हैं. इस ठीए को 'गणेश छोले-कुलचे' के नाम से जाना जाता है. सजाया जाता है. उसके ऊपर कटी हरी मिर्च, हरा धनिया व अदरक के लच्छे रखे जाते हैं. साथ में आधा नींबू काटकर पेश कर दिया जाता है. इनकी जो हरी मिर्च का अचार है, वह इन छोले-कुलचे के स्वाद को अलग ही टेस्ट देता है. न कोई घी, न मक्खन. बस इसी डिश के दीवाने हुए जा रहे हैं लोग. तीन कुलचों के साथ सत्तर रुपयापये में पेट भरा जा सकता है. यहां तीन कुलचों के साथ सत्तर रुपयापये में पेट भरा जा सकता है. डिश के साथ स्पेशल रायता भी लिया जा सकता है. रायता वाला भी साथ में है. उनका नाम अमरीश है. उनकी पूरे इलाके में रायते की सप्लाई है. वह रोजाना रोहतक से ताजी छाछ मंगाते हैं और काला नमक, बूंदी, पुदीने के टुकड़ों को मिलाकर रायता तैयार करते हैं. गाढ़ा रायते का यह बड़ा गिलास बीस रुपयापये का है. छोले-कुलचे खाकर रायते का गिलास लपेंटे और आपका खाना हजम होता दिखाई देगा.
देश में कोरोना वायरस का कहर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अब इसे रोकने के लिए सरकार ने टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया हैं। अब देश में आने वाले एक मई से 18 साल से ऊपर वाले सभी लोग कोरोना का टीका लगवा सकते हैं। आपको पता ही होगा इससे पहले ये उम्र 45 साल तय की गई थी। अब बढ़ती हुई महामारी को देखते हुए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमतों की नई लिस्ट जारी की थी। इस नई लिस्ट को देखा जाए तो, कोविशील्ड राज्यों को 400 रुपए में, प्राइवेट अस्पतालों को 600 रुपए और केंद्र को 150 रुपए में दिया जाएगा। जैसे ही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा कोविशील्ड के नए मूल्यों की लिस्ट जारी हुई वैसे ही एक्टर फरहान अख्तर ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन केंद्र के रेट पर ही राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को क्यों नहीं देनी चाहिए। हाल ही में फरहान ने एक अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की रेट लिस्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, "ये कहने के बावजूद कि प्रति वैक्सीन के 150 रुपए लेने पर भी फायदा हो रहा है। अब हम पूछेंगे कि इसके लिए हम कई देशों से ज्यादा भुगतान करेंगे। सीरम ऑफ इंडिया कृप्या बताएंगे क्यों? " आप देख सकते हैं फरहान ने जिस खबर को शेयर किया है, उसमें लिखा है कि" भारत कोविशील्ड वैक्सीन की सबसे ज्यादा कीमत 600 रुपए ले रहे है। सऊदी अरब, अमेरिका, साउथ अफ्रीका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशो में इसकी कीमत आधी है। " वैसे अपने इस ट्वीट के चलते फरहान खान ट्रोल हो गए हैं। फरहान के इस ट्वीट पर कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी है। कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, "दूसरे देश हमें वैक्सीन के लिए रॉ मैटेरियल(कच्चा माल) उपलब्ध करा रहे हैं, वे इसे किस कीमत पर खरीदते हैं और किस कीमत पर बेचते हैं, ये उनकी अर्थव्यवस्था और आबादी के हिसाब से होता है, हमने फेक प्रोपेगेंडा की वजह से कई टन टीके बर्बाद कर दिए और अब अमेरिका ने हमारे कच्चे माल को रोक दिया है। " अब यह देखना होगा कि फरहान इस पर क्या कहते हैं?
देश में कोरोना वायरस का कहर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अब इसे रोकने के लिए सरकार ने टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया हैं। अब देश में आने वाले एक मई से अट्ठारह साल से ऊपर वाले सभी लोग कोरोना का टीका लगवा सकते हैं। आपको पता ही होगा इससे पहले ये उम्र पैंतालीस साल तय की गई थी। अब बढ़ती हुई महामारी को देखते हुए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमतों की नई लिस्ट जारी की थी। इस नई लिस्ट को देखा जाए तो, कोविशील्ड राज्यों को चार सौ रुपयापए में, प्राइवेट अस्पतालों को छः सौ रुपयापए और केंद्र को एक सौ पचास रुपयापए में दिया जाएगा। जैसे ही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा कोविशील्ड के नए मूल्यों की लिस्ट जारी हुई वैसे ही एक्टर फरहान अख्तर ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन केंद्र के रेट पर ही राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को क्यों नहीं देनी चाहिए। हाल ही में फरहान ने एक अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की रेट लिस्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, "ये कहने के बावजूद कि प्रति वैक्सीन के एक सौ पचास रुपयापए लेने पर भी फायदा हो रहा है। अब हम पूछेंगे कि इसके लिए हम कई देशों से ज्यादा भुगतान करेंगे। सीरम ऑफ इंडिया कृप्या बताएंगे क्यों? " आप देख सकते हैं फरहान ने जिस खबर को शेयर किया है, उसमें लिखा है कि" भारत कोविशील्ड वैक्सीन की सबसे ज्यादा कीमत छः सौ रुपयापए ले रहे है। सऊदी अरब, अमेरिका, साउथ अफ्रीका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशो में इसकी कीमत आधी है। " वैसे अपने इस ट्वीट के चलते फरहान खान ट्रोल हो गए हैं। फरहान के इस ट्वीट पर कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी है। कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, "दूसरे देश हमें वैक्सीन के लिए रॉ मैटेरियल उपलब्ध करा रहे हैं, वे इसे किस कीमत पर खरीदते हैं और किस कीमत पर बेचते हैं, ये उनकी अर्थव्यवस्था और आबादी के हिसाब से होता है, हमने फेक प्रोपेगेंडा की वजह से कई टन टीके बर्बाद कर दिए और अब अमेरिका ने हमारे कच्चे माल को रोक दिया है। " अब यह देखना होगा कि फरहान इस पर क्या कहते हैं?
मुजफ्फरनगर जिले के मोहल्ला खालापार में मंगलवार देर रात महिला को गोली मारने के आरोपी भाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पूछताछ में हमलावर भाई ने महिला के चालचलन पर उंगली उठाते हुए कहा कि वह लगातार इज्जत से खिलवाड़ कर रही थी, आखिर कैसे और कब तक बर्दाश्त करता ? इसीलिए उसे गोली मार दी। उधर, मेरठ मेडिकल में भर्ती महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला खालापार में मंगलवार देर रात महिला शाहिदा पत्नी नन्ना को उसी के भाई मोनी उर्फ शाहिद ने घर में घुसकर गोली मार दी थी। गंभीर हालत में शाहिदा को जिला अस्पताल से मेरठ रेफर कर दिया गया था। शाहिदा के पति नन्ना ने मामले में हमलावर शाहिद उर्फ मोनी के खिलाफ नामजद तहरीर देकर बताया कि आरोपी ने घर में घुसकर दो मोबाइल चोरी कर लिए थे, जिसे रोकने पर उसने शाहिदा को गोली मार दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में शाहिद उर्फ मोनी का कहना है कि उसकी बहन के मोहल्ले के ही एक युवक से संबंध थे, जिसे कई बार समझाया गया, लेकिन वह नहीं मानी। इसके चलते उन्होंने करीब एक साल पूर्व उससे सभी संबंध खत्म कर लिए थे। शाहिद ने बताया कि कुछ माह पूर्व बहन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी नाबालिग बेटी का भी अपहरण करा दिया था, तभी से वह बहन से बदला लेने की फिराक में था और इसी के चलते उसने मंगलवार देर रात उसे गोली मार दी। हमलावर भाई का कहना है कि उसे बहन को गोली मारने का कोई अफसोस नहीं है। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मुजफ्फरनगर जिले के मोहल्ला खालापार में मंगलवार देर रात महिला को गोली मारने के आरोपी भाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पूछताछ में हमलावर भाई ने महिला के चालचलन पर उंगली उठाते हुए कहा कि वह लगातार इज्जत से खिलवाड़ कर रही थी, आखिर कैसे और कब तक बर्दाश्त करता ? इसीलिए उसे गोली मार दी। उधर, मेरठ मेडिकल में भर्ती महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला खालापार में मंगलवार देर रात महिला शाहिदा पत्नी नन्ना को उसी के भाई मोनी उर्फ शाहिद ने घर में घुसकर गोली मार दी थी। गंभीर हालत में शाहिदा को जिला अस्पताल से मेरठ रेफर कर दिया गया था। शाहिदा के पति नन्ना ने मामले में हमलावर शाहिद उर्फ मोनी के खिलाफ नामजद तहरीर देकर बताया कि आरोपी ने घर में घुसकर दो मोबाइल चोरी कर लिए थे, जिसे रोकने पर उसने शाहिदा को गोली मार दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में शाहिद उर्फ मोनी का कहना है कि उसकी बहन के मोहल्ले के ही एक युवक से संबंध थे, जिसे कई बार समझाया गया, लेकिन वह नहीं मानी। इसके चलते उन्होंने करीब एक साल पूर्व उससे सभी संबंध खत्म कर लिए थे। शाहिद ने बताया कि कुछ माह पूर्व बहन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी नाबालिग बेटी का भी अपहरण करा दिया था, तभी से वह बहन से बदला लेने की फिराक में था और इसी के चलते उसने मंगलवार देर रात उसे गोली मार दी। हमलावर भाई का कहना है कि उसे बहन को गोली मारने का कोई अफसोस नहीं है। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली के लिए बुरी और दिल्ली पुलिस के लिए चिंता की खबर, वो ये कि दिल्ली में बदमाशों को किसी भी दाम पर हथियार चाहिए। यह हम नहीं कह रहे बल्कि तिलक नगर पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी बता रहा है। निहाल विहार के उपाध्याय नगर के रविन्द्र उर्प रवि को गिरफ्तर करके उसके पास से 18 देशी कट्टे व इतने ही कारतूस बरामद किए। पुलिस अधिकारियों की मानें तो आयुक्त के आदशें पर पिछले कुछ समय से हर एक जिले में बस चैकिंग अभियान छिड़ा हुआ है इसी के तहत ही तिलक नगर पुलिस जब सुभाष नगर मैट्रो स्टेशन के पास बस चैकिंग कर रही थी तभी डीटीसी की रूट नं. 816 की चैकिंग करने के दौरान रविन्द्र को संदिग्धावस्था में देखकर उसके पास रखे जिसे उसने सब्जियों से भरा बैग बताया उसकी तलाशी लेने पर बरामद हथियार जब्त किए। पूछतांछ पर मालूम पड़ा कि सर्दियों में बदमाश हथियार ज्यादा से ज्यादा और किसी भी कीमत पर खरीदना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखकर पैसा आसानी व जल्दी से कमाने की कोशिश में वह मेरठ में रहने वाले अपने पुराने साथी से मिला था। जिसने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन आकर यह हथियार दिए थे। इन हथियारों को वह अपने घर ले जाकर बेचता। वह नांगलोई में लूट व आर्म्स एक्ट में शामिल भी रहा है।
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली के लिए बुरी और दिल्ली पुलिस के लिए चिंता की खबर, वो ये कि दिल्ली में बदमाशों को किसी भी दाम पर हथियार चाहिए। यह हम नहीं कह रहे बल्कि तिलक नगर पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी बता रहा है। निहाल विहार के उपाध्याय नगर के रविन्द्र उर्प रवि को गिरफ्तर करके उसके पास से अट्ठारह देशी कट्टे व इतने ही कारतूस बरामद किए। पुलिस अधिकारियों की मानें तो आयुक्त के आदशें पर पिछले कुछ समय से हर एक जिले में बस चैकिंग अभियान छिड़ा हुआ है इसी के तहत ही तिलक नगर पुलिस जब सुभाष नगर मैट्रो स्टेशन के पास बस चैकिंग कर रही थी तभी डीटीसी की रूट नं. आठ सौ सोलह की चैकिंग करने के दौरान रविन्द्र को संदिग्धावस्था में देखकर उसके पास रखे जिसे उसने सब्जियों से भरा बैग बताया उसकी तलाशी लेने पर बरामद हथियार जब्त किए। पूछतांछ पर मालूम पड़ा कि सर्दियों में बदमाश हथियार ज्यादा से ज्यादा और किसी भी कीमत पर खरीदना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखकर पैसा आसानी व जल्दी से कमाने की कोशिश में वह मेरठ में रहने वाले अपने पुराने साथी से मिला था। जिसने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन आकर यह हथियार दिए थे। इन हथियारों को वह अपने घर ले जाकर बेचता। वह नांगलोई में लूट व आर्म्स एक्ट में शामिल भी रहा है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज और चेयरमैन जेल समिति जस्टिस राजन गुप्ता की तरफ से 1 मई को केंद्रीय जैल पटियाला में कैदियों की तरफ से मास्क बनाने के प्रोजैक्ट की शुरुआत करवाई गई थी जिस के अंतर्गत तैयार हुए मास्क आज पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज -कम -चेयरमैन पंजाब राज्य कानूनी सेवांए अथारटी जस्टिस श्री राकेश कुमार जैन और जिला और सैशन जज श्री राजिन्दर अग्रवाल के नेतृत्व में नीचे जिला कानूनी सेवाएं अथारटी की तरफ से गुरबख्श कालोनी और झिल गाँव में जरूरतमंदों को बाँटे गए। इस मौके जानकारी देते हुए सी.जे.एम. कम - सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारटी मिस परमिन्दर कौर ने बताया कि कोरोना वायरस (कोविड -19) महामारी से बचाव के लिए जेल के अंडर ट्रायल कैदियों की तरफ से बनाए गए मास्क जरूरतमंदों को बीमारी से बचाने के लिए सहायक सिद्ध होंगे और यह मास्क धोने योग्य हैं और बार -बार प्रयोग में लाए जा सकते हैं। सी.जे.एम. ने बताया कि एन.जी.ओ. जनहित समिति के सहयोग से आज केंद्रीय जेल में बने 890 मास्क गुरबख्श कालोनी और झिल गाँव में जरूरतमंद लोगों को मुहैया करवाए गए हैं और इस मौके जरूरतमंद परिवारों को राशन और बच्चों को कापियां भी बाँटी गई हैं। इस मौके पर ए.सी.जे.एम श्रीमती त्रिपतजोत कौर, सी.जे.एम. डा. दीप्ति गुप्ता और सी.जे.एम. -कम - सचिव, जिला कानूनी सेवाएं अथारटी मैडम परमिन्दर कौर, जरनल सचिव जनहित समिति श्री विनोद शर्मा और वाइस प्रधान श्री एस.एस. छाबड़ा सहित पैरा लीगल वलंटियर उपस्थित रहे।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज और चेयरमैन जेल समिति जस्टिस राजन गुप्ता की तरफ से एक मई को केंद्रीय जैल पटियाला में कैदियों की तरफ से मास्क बनाने के प्रोजैक्ट की शुरुआत करवाई गई थी जिस के अंतर्गत तैयार हुए मास्क आज पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज -कम -चेयरमैन पंजाब राज्य कानूनी सेवांए अथारटी जस्टिस श्री राकेश कुमार जैन और जिला और सैशन जज श्री राजिन्दर अग्रवाल के नेतृत्व में नीचे जिला कानूनी सेवाएं अथारटी की तरफ से गुरबख्श कालोनी और झिल गाँव में जरूरतमंदों को बाँटे गए। इस मौके जानकारी देते हुए सी.जे.एम. कम - सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारटी मिस परमिन्दर कौर ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए जेल के अंडर ट्रायल कैदियों की तरफ से बनाए गए मास्क जरूरतमंदों को बीमारी से बचाने के लिए सहायक सिद्ध होंगे और यह मास्क धोने योग्य हैं और बार -बार प्रयोग में लाए जा सकते हैं। सी.जे.एम. ने बताया कि एन.जी.ओ. जनहित समिति के सहयोग से आज केंद्रीय जेल में बने आठ सौ नब्बे मास्क गुरबख्श कालोनी और झिल गाँव में जरूरतमंद लोगों को मुहैया करवाए गए हैं और इस मौके जरूरतमंद परिवारों को राशन और बच्चों को कापियां भी बाँटी गई हैं। इस मौके पर ए.सी.जे.एम श्रीमती त्रिपतजोत कौर, सी.जे.एम. डा. दीप्ति गुप्ता और सी.जे.एम. -कम - सचिव, जिला कानूनी सेवाएं अथारटी मैडम परमिन्दर कौर, जरनल सचिव जनहित समिति श्री विनोद शर्मा और वाइस प्रधान श्री एस.एस. छाबड़ा सहित पैरा लीगल वलंटियर उपस्थित रहे।
DEHRADUN: विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस व पीडीएफ की साढ़े चार साल से अधिक समय की पुरानी दोस्ती में दरार बढ़ती जा रही है। पीडीएफ व कांग्रेस की तरफ से तल्ख तेवरों के साथ बयानों की बौछारें जारी है। अब तो पीडीएफ ने भी साफ कर दिया है कांग्रेस व सीएम तय करे कि वे सरकार चाहते हैं या नहीं। वहीं कांग्रेस ने भी सरकार में शामिल पीडीएफ के मंत्रियों को सलाह दी है कि कांग्रेस संगठन पर बयानबाजियों के बजाए वे अपने मंत्रालयों की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दें। सरकार में शामिल पीडीएफ के सदस्यों व कांग्रेस संगठन की लड़ाई आमने-सामने आ गई है। इसकी वजह भी साफ है। पीडीएफ के सदस्यों को हाल में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान खासी तरजीह दी। संगठन को शक है कि टिहरी से पीडीएफ कोटे से मंत्री दिनेश धनै व धनौल्टी से प्रीतम को टिकट न मिल जाए। जबकि कांग्रेस टिहरी से पीसीसी चीफ किशोर व धनौल्टी से उपाध्यक्ष जोत सिंह उम्मीदवार बनाना चाह रही है। चरम पर पहुंची लड़ाई का कारण यही बताया जा रहा है। हाल में धनै ने तो विकास कार्यो में कांग्रेस संगठन की दखलंदाजी तक का आरोप लगाया। जबकि वे कुछ दिनों पहले तीन दिनों तक सीएम आवास पर मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देते रहे। सूत्र बताते हैं कि वे सीएम से चाहते हैं कि टिहरी सीट पर उनके नाम की घोषण्ा हो। अब जब पीपीसी चीफ किशोर का पीडीएफ के चक्कर में कांग्रेस को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा, बयान आया तो पीडीएफ सदस्यों का गुस्सा बेकाबू हो गया। बताया जा रहा है कि धनै ने सारी सरकारी सुविधाएं वापस करने का ऐलान कर दिया है। वहीं, प्रीतम सिंह पंवार ने भी दो टूक कांग्रेस व सीएम से सरकार चलाने के लिए रुख स्पष्ट करने को कहा है। इधर, गुरुवार को संगठन ने भी जारी बयान में स्पष्ट कह दिया कि पीडीएफ को कंाग्रेस ने सरकार बनाने के लिए दिये गये समर्थन के बदले पूरा सम्मान दिया। वे राजनैतिक लाभ भी ले रहे हैं। मुख्य प्रवक्ता एमडी जोशी ने तो यहां तक कह दिया कि पीडीएफ के मंत्री जिस डाल पर बैठे हैं, उसको काटने की बजाय उन्हें दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करते तो इसका लाभ सूबे को मिलता। पीडीएफ अध्यक्ष मंत्री प्रसाद नैथानी के पास जो विभाग हैं, उनकी सबसे ज्यादा हालत खराब है। शिक्षक सड़कों पर हैं। कांग्रेस संगठन व सीएम स्पष्ट करे दें कि वे सरकार चलाना चाहते हैं या नहीं। पीडीएफ ने तो पहले से ही स्पष्ट किया हुआ है। कांग्रेस को अब अपना रुख साफ कर देना चाहिए। कोई नाराज नहीं है, जो हमारे साथ आ जाते हैं, वे खुश हो जाते हैं। इसके बाद भी कहीं कोई नाराजगी होगी तो उसको मिलकर बैठकर दूर करने की कोशिश की जाएगी। हरीश रावत, सीएम। सिस्टम को सुधारने की जरुरत है। हम तो शुरू से ही कह रहे हैं कि समय पर राज्य में विकास कार्य होने चाहिए। जिसकी कमी साफ दिख रही है। दिनेश धनै, पीडीएफ सदस्य व काबिना मंत्री। पीडीएफ के मंत्रियों को सलाह है कि वे कंागे्रस संगठन पर बयानबाजी के बजाए अपने मंत्रालय की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दें। कंाग्रेस ने सरकार बनाने को समर्थन के बदले पूरा सम्मान दिया है। जिसका वे पूरा लाभ भी ले रहे हैं। एमडी जोशी, मुख्य प्रवक्ता पीसीसी।
DEHRADUN: विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस व पीडीएफ की साढ़े चार साल से अधिक समय की पुरानी दोस्ती में दरार बढ़ती जा रही है। पीडीएफ व कांग्रेस की तरफ से तल्ख तेवरों के साथ बयानों की बौछारें जारी है। अब तो पीडीएफ ने भी साफ कर दिया है कांग्रेस व सीएम तय करे कि वे सरकार चाहते हैं या नहीं। वहीं कांग्रेस ने भी सरकार में शामिल पीडीएफ के मंत्रियों को सलाह दी है कि कांग्रेस संगठन पर बयानबाजियों के बजाए वे अपने मंत्रालयों की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दें। सरकार में शामिल पीडीएफ के सदस्यों व कांग्रेस संगठन की लड़ाई आमने-सामने आ गई है। इसकी वजह भी साफ है। पीडीएफ के सदस्यों को हाल में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान खासी तरजीह दी। संगठन को शक है कि टिहरी से पीडीएफ कोटे से मंत्री दिनेश धनै व धनौल्टी से प्रीतम को टिकट न मिल जाए। जबकि कांग्रेस टिहरी से पीसीसी चीफ किशोर व धनौल्टी से उपाध्यक्ष जोत सिंह उम्मीदवार बनाना चाह रही है। चरम पर पहुंची लड़ाई का कारण यही बताया जा रहा है। हाल में धनै ने तो विकास कार्यो में कांग्रेस संगठन की दखलंदाजी तक का आरोप लगाया। जबकि वे कुछ दिनों पहले तीन दिनों तक सीएम आवास पर मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देते रहे। सूत्र बताते हैं कि वे सीएम से चाहते हैं कि टिहरी सीट पर उनके नाम की घोषण्ा हो। अब जब पीपीसी चीफ किशोर का पीडीएफ के चक्कर में कांग्रेस को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा, बयान आया तो पीडीएफ सदस्यों का गुस्सा बेकाबू हो गया। बताया जा रहा है कि धनै ने सारी सरकारी सुविधाएं वापस करने का ऐलान कर दिया है। वहीं, प्रीतम सिंह पंवार ने भी दो टूक कांग्रेस व सीएम से सरकार चलाने के लिए रुख स्पष्ट करने को कहा है। इधर, गुरुवार को संगठन ने भी जारी बयान में स्पष्ट कह दिया कि पीडीएफ को कंाग्रेस ने सरकार बनाने के लिए दिये गये समर्थन के बदले पूरा सम्मान दिया। वे राजनैतिक लाभ भी ले रहे हैं। मुख्य प्रवक्ता एमडी जोशी ने तो यहां तक कह दिया कि पीडीएफ के मंत्री जिस डाल पर बैठे हैं, उसको काटने की बजाय उन्हें दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करते तो इसका लाभ सूबे को मिलता। पीडीएफ अध्यक्ष मंत्री प्रसाद नैथानी के पास जो विभाग हैं, उनकी सबसे ज्यादा हालत खराब है। शिक्षक सड़कों पर हैं। कांग्रेस संगठन व सीएम स्पष्ट करे दें कि वे सरकार चलाना चाहते हैं या नहीं। पीडीएफ ने तो पहले से ही स्पष्ट किया हुआ है। कांग्रेस को अब अपना रुख साफ कर देना चाहिए। कोई नाराज नहीं है, जो हमारे साथ आ जाते हैं, वे खुश हो जाते हैं। इसके बाद भी कहीं कोई नाराजगी होगी तो उसको मिलकर बैठकर दूर करने की कोशिश की जाएगी। हरीश रावत, सीएम। सिस्टम को सुधारने की जरुरत है। हम तो शुरू से ही कह रहे हैं कि समय पर राज्य में विकास कार्य होने चाहिए। जिसकी कमी साफ दिख रही है। दिनेश धनै, पीडीएफ सदस्य व काबिना मंत्री। पीडीएफ के मंत्रियों को सलाह है कि वे कंागे्रस संगठन पर बयानबाजी के बजाए अपने मंत्रालय की समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान दें। कंाग्रेस ने सरकार बनाने को समर्थन के बदले पूरा सम्मान दिया है। जिसका वे पूरा लाभ भी ले रहे हैं। एमडी जोशी, मुख्य प्रवक्ता पीसीसी।
बॉलीवुड अभिनेता रणबीर सिंह कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसकी जानकारी उनकी मां नीतू कपूर ने सोशल मीडिया के जरिए फैंस को दी थी, जिसके बाद से अभिनेता चर्चा में बने हुए थे। साथ ही फैंस भी अभिनेता के लिए चिंतित हो गए थे और सोशल मीडिया के माध्यम से उन तक अपनी प्रार्थनाएं पहुंचा रहे थे व जल्द स्वस्थ होने की कामना भी कर रहे थे। लेकिन इस बीमारी को मात देने के बाद वो वापस अपने फिजिक पर ध्यान देने लगे हैं और जिम में वर्कआउट करना शुरू कर दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में रणबीर के ट्रेनर दीपेश ने रणबीर के रूटीन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद रणबीर बहुत जल्द कमजोरी से उबर गए हैं। वो अपनी आने वाली फिल्मों के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जिम के अलावा रणबीर अपने काम पर भी लौट चुके हैं। रणबीर कपूर के स्वस्थ होने की खबर से उनके फैंस काफी खुश हो गए हैं और सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वहीं ट्रेनर दीपेश ने बताया कि पहले दिन रणबीर ने बेसिक स्ट्रेचेज किए इस वक्त हेवी लिफ्टिंग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। पिछले कुछ दिनों में रणबीर अपने उसी फिटनेस लेवल के नजदीक पहुंच गए हैं जैसा कि वे पहले थे। रणबीर के चाचा रणधीर कपूर ने यह जानकारी दी थी कि 'रणबीर अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह ठीक हैं। मैंने उनसे मुलाकात की है। इसके अलावा कोरोना से ठीक होने के बाद रणबीर अपनी बहन रिद्धिमा के साथ पूजा करते भी नजर आए थे। ऋषि कपूर के निधन को 11 महीने बीत जाने के बाद कपूर परिवार ने प्रार्थना सभा रखी थी। रिद्धिमा ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'आपका प्यार हमारी राहों को आसान करेगा। आपकी यादें हमेशा हमारे साथ और हमारे दिल में रहेंगी। ' उम्मीद की जा रही है कि कोविड को मात देने के बाद अब रणबीर एक बार फिर से अपनी फिल्मों पर फोकस करेंगे। उनके पास इस समय कई बड़ी फिल्में हैं। इनमें ब्रह्मास्त्र, एनिमल और शमशेरा के अलावा एक अनटाइटल्ड मूवी भी है। अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्म ब्रह्मास्त्र में अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, मौनी रॉय और नागार्जुन भी हैं।
बॉलीवुड अभिनेता रणबीर सिंह कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसकी जानकारी उनकी मां नीतू कपूर ने सोशल मीडिया के जरिए फैंस को दी थी, जिसके बाद से अभिनेता चर्चा में बने हुए थे। साथ ही फैंस भी अभिनेता के लिए चिंतित हो गए थे और सोशल मीडिया के माध्यम से उन तक अपनी प्रार्थनाएं पहुंचा रहे थे व जल्द स्वस्थ होने की कामना भी कर रहे थे। लेकिन इस बीमारी को मात देने के बाद वो वापस अपने फिजिक पर ध्यान देने लगे हैं और जिम में वर्कआउट करना शुरू कर दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में रणबीर के ट्रेनर दीपेश ने रणबीर के रूटीन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद रणबीर बहुत जल्द कमजोरी से उबर गए हैं। वो अपनी आने वाली फिल्मों के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जिम के अलावा रणबीर अपने काम पर भी लौट चुके हैं। रणबीर कपूर के स्वस्थ होने की खबर से उनके फैंस काफी खुश हो गए हैं और सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वहीं ट्रेनर दीपेश ने बताया कि पहले दिन रणबीर ने बेसिक स्ट्रेचेज किए इस वक्त हेवी लिफ्टिंग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। पिछले कुछ दिनों में रणबीर अपने उसी फिटनेस लेवल के नजदीक पहुंच गए हैं जैसा कि वे पहले थे। रणबीर के चाचा रणधीर कपूर ने यह जानकारी दी थी कि 'रणबीर अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह ठीक हैं। मैंने उनसे मुलाकात की है। इसके अलावा कोरोना से ठीक होने के बाद रणबीर अपनी बहन रिद्धिमा के साथ पूजा करते भी नजर आए थे। ऋषि कपूर के निधन को ग्यारह महीने बीत जाने के बाद कपूर परिवार ने प्रार्थना सभा रखी थी। रिद्धिमा ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'आपका प्यार हमारी राहों को आसान करेगा। आपकी यादें हमेशा हमारे साथ और हमारे दिल में रहेंगी। ' उम्मीद की जा रही है कि कोविड को मात देने के बाद अब रणबीर एक बार फिर से अपनी फिल्मों पर फोकस करेंगे। उनके पास इस समय कई बड़ी फिल्में हैं। इनमें ब्रह्मास्त्र, एनिमल और शमशेरा के अलावा एक अनटाइटल्ड मूवी भी है। अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्म ब्रह्मास्त्र में अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, मौनी रॉय और नागार्जुन भी हैं।
Jaipur Gold Smuggling: राजधानी के सांगानेर इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर एक फ्लाइट से आए एक युवक के बैगों की तलाशी ली गई तो कस्टम अधिकारी चौंक गए। युवक के बैग में रेडियम कोटेड 2 किलो 170 ग्राम वजन से भी अधिक के सोने के तार मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद किए गए सोने की बाजार में कीमत 1 करोड़ 12 लाख से अधिक है। इसके बाद कस्टम विभाग ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। महकमे के सहायक आयुक्त भारत भूषण ने बताया कि, आरंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया है कि, उसे किसी परिचित ने सऊदी अरब रियाद एयरपोर्ट पर दो बैग दिए थे। इसके बदले में उसे जयपुर तक का हवाई टिकट बनवाकर दिया था। उसने बताया कि, उसके जानकार ने कहा कि जयपुर में ये दोनों बैग मेरा एक आदमी लेने आएगा तो उसे दे देना। सहायक आयुक्त के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में इसके अलावा कोई अन्य जानकारी होने से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि, आरोपी प्रदेश के बीकानेर इलाके का रहने वाला है। गत वर्ष सितंबर में सऊदी अरब कमाने के लिए गया था। कस्टम विभाग के अधिकारी अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि, सोने की तस्करी का राजधानी में कहां-कहां नेटवर्क फैला है। इसके अलावा अब एयरपोर्ट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं जिससे आरोपी का इंतजार कर रहे संदिग्ध शख्स की पहचान हो सके। सहायक आयुक्त भारत भूषण ने बताया कि, एयर अरबिया की फ्लाइट से आए आरोपी के दो बैग एक्स-रे में स्कैन किए गए तो उनमें कुछ संदिग्ध धातु के तार दिखाई दिए। एक्स-रे में साफ नहीं दिखे तो पेंसेजर को बैग खोलने के लिए बोला तो उसने अपना घरेलू सामान होने की बात कही। इसके बाद अधिकारियों ने बैगों को खोलकर उनकी जांच की तो हैरान रह गए। बैग के नीचे के पेंदे में एक फ्रेम बनाकर उसके चारों ओर रेडियम कोटेड सोने के तार निकले। दोनों बैगों में से कुल 4 तार बरामद हुए। जिनका कुल वजन 2. 170 ग्राम से भी अधिक था। इसके बाद जांच में पता चला कि पकड़े गए सोने की बाजार कीमत इस समय 1 करोड़ 12 लाख से भी अधिक है। बहरहाल कस्टम महकमे के अधिकारी आगे की जांच में जुटे हैं। आपको बता दें कि, जयपुर एयरपोर्ट पर 11 जुलाई को तीन थाइलैंड की युवतियों से भी लाखों का सोना बरामद किया गया था। गत दो माह में कस्टम विभाग की ये तीसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है।
Jaipur Gold Smuggling: राजधानी के सांगानेर इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर एक फ्लाइट से आए एक युवक के बैगों की तलाशी ली गई तो कस्टम अधिकारी चौंक गए। युवक के बैग में रेडियम कोटेड दो किलो एक सौ सत्तर ग्राम वजन से भी अधिक के सोने के तार मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद किए गए सोने की बाजार में कीमत एक करोड़ बारह लाख से अधिक है। इसके बाद कस्टम विभाग ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। महकमे के सहायक आयुक्त भारत भूषण ने बताया कि, आरंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया है कि, उसे किसी परिचित ने सऊदी अरब रियाद एयरपोर्ट पर दो बैग दिए थे। इसके बदले में उसे जयपुर तक का हवाई टिकट बनवाकर दिया था। उसने बताया कि, उसके जानकार ने कहा कि जयपुर में ये दोनों बैग मेरा एक आदमी लेने आएगा तो उसे दे देना। सहायक आयुक्त के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में इसके अलावा कोई अन्य जानकारी होने से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि, आरोपी प्रदेश के बीकानेर इलाके का रहने वाला है। गत वर्ष सितंबर में सऊदी अरब कमाने के लिए गया था। कस्टम विभाग के अधिकारी अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि, सोने की तस्करी का राजधानी में कहां-कहां नेटवर्क फैला है। इसके अलावा अब एयरपोर्ट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं जिससे आरोपी का इंतजार कर रहे संदिग्ध शख्स की पहचान हो सके। सहायक आयुक्त भारत भूषण ने बताया कि, एयर अरबिया की फ्लाइट से आए आरोपी के दो बैग एक्स-रे में स्कैन किए गए तो उनमें कुछ संदिग्ध धातु के तार दिखाई दिए। एक्स-रे में साफ नहीं दिखे तो पेंसेजर को बैग खोलने के लिए बोला तो उसने अपना घरेलू सामान होने की बात कही। इसके बाद अधिकारियों ने बैगों को खोलकर उनकी जांच की तो हैरान रह गए। बैग के नीचे के पेंदे में एक फ्रेम बनाकर उसके चारों ओर रेडियम कोटेड सोने के तार निकले। दोनों बैगों में से कुल चार तार बरामद हुए। जिनका कुल वजन दो. एक सौ सत्तर ग्राम से भी अधिक था। इसके बाद जांच में पता चला कि पकड़े गए सोने की बाजार कीमत इस समय एक करोड़ बारह लाख से भी अधिक है। बहरहाल कस्टम महकमे के अधिकारी आगे की जांच में जुटे हैं। आपको बता दें कि, जयपुर एयरपोर्ट पर ग्यारह जुलाई को तीन थाइलैंड की युवतियों से भी लाखों का सोना बरामद किया गया था। गत दो माह में कस्टम विभाग की ये तीसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है।
हुई । 67 सत एव 80 सतियो की उपस्थिति देशनोकवासी श्रद्धालुओं के प्रमोद का कारण थी । देशनोक से विहार कर उदयरामसर गगाशहर भीनासर होते हुए सभी सन्त सतियाजी वीकानेर पधारे। सन्तो का नगर प्रवेश फाल्गुन शुक्ला 5 को था। चार-चार की पक्ति मे धवल वेश शान्तवदन एव ईर्यापूर्वक चलते हुए सन्त-पक्ति को निहार कर अपार जनसमूह प्रफुल्लित था। गोगागेट मे ज्योही उपाचार्यश्री ने प्रवेश किया ऐसा लग रहा था मानों शुभ कार्य के लिए श्रीगणेश ने साक्षात प्रवेश किया हो । वह प्रवेश भव्य चित्ताकर्षक एवं अद्भुत था। जुलुस का अथ और इति युगपत् कोई नहीं देख सकता था। बीकानेर म भी पहले की तरह प्रात एव मध्याह्न अनौपचारिक विचार गोष्ठियों का आयोजन होता रहा। इस समय बीकानेर में 135 सन्त एव 147 सतियाजी विराज रहे थे और इन बैठको मे प्रतिनिधि मुनिया के अतिरिक्त अन्य सन्त- सतियाजी के दर्शक के रूप में विराजने की व्यवस्था की गई थी। साधु-सम्मेलन के अवसर पर ही श्री अ भा श्वे स्थानकवासी जैन कॉन्फरेस का स्वर्णजयन्ती अधिवेशन दि 4 5 6 अप्रैल 56 को श्री विनयचन्दभाई दुर्लभजीभाई जवेरी जयपुर की अध्यक्षता में होने वाला था । इन दोनो महत्त्वपूर्ण समारोहो मे उपस्थित होने वाले स्वधर्मी बन्धुओ की आवास व्यवस्था के लिये शामियाने आदि लगाकर नगर का निर्माण किया गया था। 35 हजार जनता के लिए जवाहर विद्यापीठ एव वैदजी को कोटड़ी में संयुक्त रूप से विशाल पण्डाल की व्यवस्था की गई जहा प्रवचनादि कार्यक्रम होते थे। बीकानेर श्रावक सघ की ओर से भी बीकानेर में बाहर से आने वाले दर्शनार्थी श्रावक-श्राविकाओ के आवास भोजनादि का सुन्दर और उचित प्रबन्ध किया गया था जो साधु-सम्मेलन एव कॉन्फरेस का अधिवेशन सम्पन्न होने के बाद तक भी चलता रहा। साधु सम्मेलन स 2012 मिती चैत्र कृष्णा 3 दि 293.56 से भीनासर मे विधिवत् प्रारम्भ होने वाला था। अत चैत्र कृष्णा 2 दि 28.356 बुधवार को बीकानेर में विराजित समस्त सन्त सतियाजी विहार कर भीनासर पधार गये। बीकानेर प्रवेण की तरह ही भीगसर प्रवेश भी चार-चार की पंक्ति में हुआ। पन्द्रह हजार की विशाल उपस्थिति ने प्रवेश को रमणीय बना दिया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी औषधालय भवन में विराजे कन्याशाला लूणियों की कोटड़ी आँघलियों की कोटड़ी आदि में भी सन्तो के ठहरने की व्यवस्था की गई। सतियाँजी मसा भी विशाल संख्या में थीं अत उपाश्रय पुगलियों की कोटडी बोथरों की कोटडी महादेवजी के मन्दिर में उनके विराजने की व्यवस्था की गई।
हुई । सरसठ सत एव अस्सी सतियो की उपस्थिति देशनोकवासी श्रद्धालुओं के प्रमोद का कारण थी । देशनोक से विहार कर उदयरामसर गगाशहर भीनासर होते हुए सभी सन्त सतियाजी वीकानेर पधारे। सन्तो का नगर प्रवेश फाल्गुन शुक्ला पाँच को था। चार-चार की पक्ति मे धवल वेश शान्तवदन एव ईर्यापूर्वक चलते हुए सन्त-पक्ति को निहार कर अपार जनसमूह प्रफुल्लित था। गोगागेट मे ज्योही उपाचार्यश्री ने प्रवेश किया ऐसा लग रहा था मानों शुभ कार्य के लिए श्रीगणेश ने साक्षात प्रवेश किया हो । वह प्रवेश भव्य चित्ताकर्षक एवं अद्भुत था। जुलुस का अथ और इति युगपत् कोई नहीं देख सकता था। बीकानेर म भी पहले की तरह प्रात एव मध्याह्न अनौपचारिक विचार गोष्ठियों का आयोजन होता रहा। इस समय बीकानेर में एक सौ पैंतीस सन्त एव एक सौ सैंतालीस सतियाजी विराज रहे थे और इन बैठको मे प्रतिनिधि मुनिया के अतिरिक्त अन्य सन्त- सतियाजी के दर्शक के रूप में विराजने की व्यवस्था की गई थी। साधु-सम्मेलन के अवसर पर ही श्री अ भा श्वे स्थानकवासी जैन कॉन्फरेस का स्वर्णजयन्ती अधिवेशन दि चार पाँच छः अप्रैल छप्पन को श्री विनयचन्दभाई दुर्लभजीभाई जवेरी जयपुर की अध्यक्षता में होने वाला था । इन दोनो महत्त्वपूर्ण समारोहो मे उपस्थित होने वाले स्वधर्मी बन्धुओ की आवास व्यवस्था के लिये शामियाने आदि लगाकर नगर का निर्माण किया गया था। पैंतीस हजार जनता के लिए जवाहर विद्यापीठ एव वैदजी को कोटड़ी में संयुक्त रूप से विशाल पण्डाल की व्यवस्था की गई जहा प्रवचनादि कार्यक्रम होते थे। बीकानेर श्रावक सघ की ओर से भी बीकानेर में बाहर से आने वाले दर्शनार्थी श्रावक-श्राविकाओ के आवास भोजनादि का सुन्दर और उचित प्रबन्ध किया गया था जो साधु-सम्मेलन एव कॉन्फरेस का अधिवेशन सम्पन्न होने के बाद तक भी चलता रहा। साधु सम्मेलन स दो हज़ार बारह मिती चैत्र कृष्णा तीन दि दो सौ तिरानवे.छप्पन से भीनासर मे विधिवत् प्रारम्भ होने वाला था। अत चैत्र कृष्णा दो दि अट्ठाईस.तीन सौ छप्पन बुधवार को बीकानेर में विराजित समस्त सन्त सतियाजी विहार कर भीनासर पधार गये। बीकानेर प्रवेण की तरह ही भीगसर प्रवेश भी चार-चार की पंक्ति में हुआ। पन्द्रह हजार की विशाल उपस्थिति ने प्रवेश को रमणीय बना दिया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी औषधालय भवन में विराजे कन्याशाला लूणियों की कोटड़ी आँघलियों की कोटड़ी आदि में भी सन्तो के ठहरने की व्यवस्था की गई। सतियाँजी मसा भी विशाल संख्या में थीं अत उपाश्रय पुगलियों की कोटडी बोथरों की कोटडी महादेवजी के मन्दिर में उनके विराजने की व्यवस्था की गई।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पैरों में पहने जाने वाले जूते भी क्या आपके दुःख और दुर्भाग्य का बड़ा कारण बन सकते हैं? फुटवियर (Footwear) से जुड़ी आखिर वो कौन सी बातें या फिर कहें नियम हैं, जिनकी अनदेखी के कारण इंसान को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. किसी इंसान की पर्सनालिटी और उसका स्टेटस पैरों में पहचाने वाले जूतों (Shoes) के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है. फिर चाहे वह लेदर का शूज पहनता हो या फिर स्पोर्ट्स का, लेकिन फैशन के इस दौर में अपने लिए जूतों को खरीदते समय उन जरूरी नियमों का विशेष ख्याल रखना चाहिए, जिसका संबंध आपकी किस्मत से जुड़ा हुआ है. ज्योतिष (Astrology) के अनुसार पैरों में पहने जाने वाले फुटवियर (Footwear) का संबंध आपकी कुंडली के नवग्रह में सबसे महत्वूपर्ण माने जाने वाले शनि भी होता है. आइए जूतों से जुड़े दोष और उन नियमों के बारे में जानते हैं, जिसकी अनदेखी करने पर इंसान को सुख-सौभाग्य (Good Luck) की जगह दुःख-दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है. कुछ लोगों की आदत होती है कि वे कभी भी कोई चप्पल या जूता पहनकर कहीं भी चल देते हैं, लेकिन ऐसा करने से इंसान को हमेशा बचना चाहिए. विशेष तौर पर यदि आप किसी कार्य विशेष के लिए जा रहे हों तो भूलकर भी फटे हुए या फिर किसी दूसरे के जूते पहनकर न जाएं, अन्यथा आपको कार्य में असफलता और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ज्योतिष में कुछेक ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिसे कभी भी दूसरों से उपहार में नहीं लेना चाहिए. मान्यता है कि न तो कभी किसी को उपहार में जूते देने और न ही किसी से उपहार में लेने चाहिए. यदि आपकी कुंडली में शनि दोष हो तो इस नियम को सख्ती के साथ पालन करना चाहिए नहीं बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि आपकी कुंडली में शनि ग्रह से संबंधित कोई दोष है या फिर कहें आप पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है तो आपको जूते से जुड़ा ये उपाय जरूर एक बार आजमाना चाहिए. मान्यता है कि यदि शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर में काले रंग का फुटवियर को चुपचाप उताकर घर वापस लौट आने पर शनि संबंधी दोष में कमी आती है. इस उपाय को करते समय पीछे पलट कर नहीं देखना चाहिए. कई बार कुछ लोगों के जूते या चप्पल चोरी या फिर गुम हो जाते है तो उन्हें बहुत दुःख होता है, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना चाहिए. फुटवियर चोरी होने पर दुःखी होने की बजाय खुश होते हुए अपने घर आ जाना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि जूते या चप्पल के साथ आपके शनि संबंधी दोष और परेशानियां भी चली जाती हैं. (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
पैरों में पहने जाने वाले जूते भी क्या आपके दुःख और दुर्भाग्य का बड़ा कारण बन सकते हैं? फुटवियर से जुड़ी आखिर वो कौन सी बातें या फिर कहें नियम हैं, जिनकी अनदेखी के कारण इंसान को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. किसी इंसान की पर्सनालिटी और उसका स्टेटस पैरों में पहचाने वाले जूतों के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है. फिर चाहे वह लेदर का शूज पहनता हो या फिर स्पोर्ट्स का, लेकिन फैशन के इस दौर में अपने लिए जूतों को खरीदते समय उन जरूरी नियमों का विशेष ख्याल रखना चाहिए, जिसका संबंध आपकी किस्मत से जुड़ा हुआ है. ज्योतिष के अनुसार पैरों में पहने जाने वाले फुटवियर का संबंध आपकी कुंडली के नवग्रह में सबसे महत्वूपर्ण माने जाने वाले शनि भी होता है. आइए जूतों से जुड़े दोष और उन नियमों के बारे में जानते हैं, जिसकी अनदेखी करने पर इंसान को सुख-सौभाग्य की जगह दुःख-दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है. कुछ लोगों की आदत होती है कि वे कभी भी कोई चप्पल या जूता पहनकर कहीं भी चल देते हैं, लेकिन ऐसा करने से इंसान को हमेशा बचना चाहिए. विशेष तौर पर यदि आप किसी कार्य विशेष के लिए जा रहे हों तो भूलकर भी फटे हुए या फिर किसी दूसरे के जूते पहनकर न जाएं, अन्यथा आपको कार्य में असफलता और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ज्योतिष में कुछेक ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिसे कभी भी दूसरों से उपहार में नहीं लेना चाहिए. मान्यता है कि न तो कभी किसी को उपहार में जूते देने और न ही किसी से उपहार में लेने चाहिए. यदि आपकी कुंडली में शनि दोष हो तो इस नियम को सख्ती के साथ पालन करना चाहिए नहीं बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि आपकी कुंडली में शनि ग्रह से संबंधित कोई दोष है या फिर कहें आप पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है तो आपको जूते से जुड़ा ये उपाय जरूर एक बार आजमाना चाहिए. मान्यता है कि यदि शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर में काले रंग का फुटवियर को चुपचाप उताकर घर वापस लौट आने पर शनि संबंधी दोष में कमी आती है. इस उपाय को करते समय पीछे पलट कर नहीं देखना चाहिए. कई बार कुछ लोगों के जूते या चप्पल चोरी या फिर गुम हो जाते है तो उन्हें बहुत दुःख होता है, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना चाहिए. फुटवियर चोरी होने पर दुःखी होने की बजाय खुश होते हुए अपने घर आ जाना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि जूते या चप्पल के साथ आपके शनि संबंधी दोष और परेशानियां भी चली जाती हैं.
(current) Kareena Kapoor Girl Gang : करीना कपूर के लिए उनकी गर्ल गैंग आखिर क्यों है इतनी खास ? इस वजह से फेल हुई Laal Singh Chadha, बॉयकॉट नहीं है कारण! Aamir Khan apologizes : बॉयकॉट आर्मी ने डरा दिया क्या ? Aamir Khan ने मांगी माफी ?
Kareena Kapoor Girl Gang : करीना कपूर के लिए उनकी गर्ल गैंग आखिर क्यों है इतनी खास ? इस वजह से फेल हुई Laal Singh Chadha, बॉयकॉट नहीं है कारण! Aamir Khan apologizes : बॉयकॉट आर्मी ने डरा दिया क्या ? Aamir Khan ने मांगी माफी ?
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दिए जाने पर इसे सच्चाई की जीत बताया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि ये फैसला कुछ राजनीतिक दलों विशेषकर कांग्रेस द्वारा पिछले कुछ अर्से से किए जा रहे दुष्प्रचार और झूठ की राजनीति पर करारा तमाचा है। कोर्ट के फैसले से कांग्रेस पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े झूठ का सहारा लेकर कांग्रेस ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने कोशिश की बल्कि देश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी की ईमानदार छवि है, जिसे कलंकित करने की कोशिश करने वाले स्वयं बेनकाब हो गए हैं। मोदी न केवल देश के लोकप्रिय नेता है, बल्कि विश्व के सभी विकसित देश भी इन्हें विश्व नेता के रूप में देख रहे हैं। जब केन्द्र में वर्तमान एनडीए की सरकार ने देश के हित में राफेल सौदे जैसा बड़ा फैसला लिया, तो देशहित का यह फैसला कांग्रेस अन्य पार्टियों के कुछ नेताओं को रास नहीं आया और इस पर खामियां ढूंढने के दांव-पेच का खेल शुरू कर दिया। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने राफेल सौदे पर दुष्प्रचार कर देश की साख को गिराने का प्रयास किया है, जिसे देश की जनता सदैव याद रखेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना सोचे समझे कुछ भी अनैतिक कहने से गुरेज नहीं करते हैं। वह राफेल सौदे को बोफोर्स सौदे जैसा प्रकरण का रूप देने की कोशिश में थे। कांग्रेस ने देश में लाखों-करोड़ों के घोटाले किए हैं, जिनसे आज तक न देश उभर पाया है और न ही देश के लोग।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दिए जाने पर इसे सच्चाई की जीत बताया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि ये फैसला कुछ राजनीतिक दलों विशेषकर कांग्रेस द्वारा पिछले कुछ अर्से से किए जा रहे दुष्प्रचार और झूठ की राजनीति पर करारा तमाचा है। कोर्ट के फैसले से कांग्रेस पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े झूठ का सहारा लेकर कांग्रेस ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने कोशिश की बल्कि देश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी की ईमानदार छवि है, जिसे कलंकित करने की कोशिश करने वाले स्वयं बेनकाब हो गए हैं। मोदी न केवल देश के लोकप्रिय नेता है, बल्कि विश्व के सभी विकसित देश भी इन्हें विश्व नेता के रूप में देख रहे हैं। जब केन्द्र में वर्तमान एनडीए की सरकार ने देश के हित में राफेल सौदे जैसा बड़ा फैसला लिया, तो देशहित का यह फैसला कांग्रेस अन्य पार्टियों के कुछ नेताओं को रास नहीं आया और इस पर खामियां ढूंढने के दांव-पेच का खेल शुरू कर दिया। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने राफेल सौदे पर दुष्प्रचार कर देश की साख को गिराने का प्रयास किया है, जिसे देश की जनता सदैव याद रखेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना सोचे समझे कुछ भी अनैतिक कहने से गुरेज नहीं करते हैं। वह राफेल सौदे को बोफोर्स सौदे जैसा प्रकरण का रूप देने की कोशिश में थे। कांग्रेस ने देश में लाखों-करोड़ों के घोटाले किए हैं, जिनसे आज तक न देश उभर पाया है और न ही देश के लोग।
उत्तर रामचरित मे वासन्ती राम से कहती है'तुम मेरे प्राण हो, तुम मेरा दूमरा हृदय हो। तुम मेरो नेत्रकौमुदी हो। तुम मेरे शरीर पर अमृत हो' - इत्यादि सैकडों प्रिय बातो के द्वारा उस मुग्धा सोग का प्रसन्न करके उसे कुछ नही आगे की घटना की चर्चा व्यर्थ है। (आपने उसे वन मे छाया दिया- यह वान नहीं कही गई, जिससे वह वाकली है।) उति-प्रत्युक्ति के द्वारा वाकोली का उशहरण रत्नावली में है। विदूषक - मदनित्रे, मुझे भी यह घचॅरी मिखा दो । मदनिका-यभागे, यह चर्चरी नही, द्विपदा-पण्ड है। विद्रुपक-श्रीमति, क्या इस खण्ड से लड्डू बनाये जाते है ? मदनिका- नहीं, पह पढ़ो जाती है । वालो को दो परिभाषायें धनजय न दा हैं, उनमें से प्रथम के अनुसार कहो जाती हुई बात बीच नही बद कर दी जानी है और दूसरी पे अनुसार उतिप्रत्युक्ति की घोषी परम्परा छेत्रोक्ति द्वारा प्रस्तुत की जाती है जिसमे आक्षपमयी वाग्धारा होती है । भरत न एक दूसरी ही परिभाषा दा है, जिसके अनुसार दा प्रश्नो का एक हो उत्तर होता है। अभिनवगुप्त के अनुसार उपलक्षग से दो अनेकार्यवाची है। अर्थात् अनेक प्रश्नाव एक ही उत्तर हो सकता है। अभिनवगु ने इसका उदाहरण नाचे निये पद्य मे दिया हैनदीनां मेघविगमे वा शोभा प्रतिभामने । बाह्यान्तरा दिव्या के नाम वृतिनोऽत्य 1 इमे पहला प्रश्न है वर्षा ऋऋतु के पश्चात् नदी की पया शोमा होती है और दूसरा प्रश्न है कि सफल व्यक्ति के लिए बाह्य और सम्यन्तरोन जेतव्य है । उत्तर है अश्य । पहले मग्न के उत्तर के लिए अश्य की है नग्य अर्थात् तेज धारा का भाव या गति को और दूसरे प्रश्न के लिए अश्य से सापर्य है । अयोधिर नम् १८. अन्योन्यवाक्याधिक्योक्ति स्पर्धयाधिवल भवेत् । यथा वेणीसंहारे - भोम. पुजपाशा यत्र वद्धा मुनैस्ते तृणमिव परिभूतो यम्य गर्येण लोक । १. मात्र मरता है । अर्थपरका अभिनय
उत्तर रामचरित मे वासन्ती राम से कहती है'तुम मेरे प्राण हो, तुम मेरा दूमरा हृदय हो। तुम मेरो नेत्रकौमुदी हो। तुम मेरे शरीर पर अमृत हो' - इत्यादि सैकडों प्रिय बातो के द्वारा उस मुग्धा सोग का प्रसन्न करके उसे कुछ नही आगे की घटना की चर्चा व्यर्थ है। उति-प्रत्युक्ति के द्वारा वाकोली का उशहरण रत्नावली में है। विदूषक - मदनित्रे, मुझे भी यह घचॅरी मिखा दो । मदनिका-यभागे, यह चर्चरी नही, द्विपदा-पण्ड है। विद्रुपक-श्रीमति, क्या इस खण्ड से लड्डू बनाये जाते है ? मदनिका- नहीं, पह पढ़ो जाती है । वालो को दो परिभाषायें धनजय न दा हैं, उनमें से प्रथम के अनुसार कहो जाती हुई बात बीच नही बद कर दी जानी है और दूसरी पे अनुसार उतिप्रत्युक्ति की घोषी परम्परा छेत्रोक्ति द्वारा प्रस्तुत की जाती है जिसमे आक्षपमयी वाग्धारा होती है । भरत न एक दूसरी ही परिभाषा दा है, जिसके अनुसार दा प्रश्नो का एक हो उत्तर होता है। अभिनवगुप्त के अनुसार उपलक्षग से दो अनेकार्यवाची है। अर्थात् अनेक प्रश्नाव एक ही उत्तर हो सकता है। अभिनवगु ने इसका उदाहरण नाचे निये पद्य मे दिया हैनदीनां मेघविगमे वा शोभा प्रतिभामने । बाह्यान्तरा दिव्या के नाम वृतिनोऽत्य एक इमे पहला प्रश्न है वर्षा ऋऋतु के पश्चात् नदी की पया शोमा होती है और दूसरा प्रश्न है कि सफल व्यक्ति के लिए बाह्य और सम्यन्तरोन जेतव्य है । उत्तर है अश्य । पहले मग्न के उत्तर के लिए अश्य की है नग्य अर्थात् तेज धारा का भाव या गति को और दूसरे प्रश्न के लिए अश्य से सापर्य है । अयोधिर नम् अट्ठारह. अन्योन्यवाक्याधिक्योक्ति स्पर्धयाधिवल भवेत् । यथा वेणीसंहारे - भोम. पुजपाशा यत्र वद्धा मुनैस्ते तृणमिव परिभूतो यम्य गर्येण लोक । एक. मात्र मरता है । अर्थपरका अभिनय
Ranchi: स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से अपने कथित वायरल वीडियो को लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी थी. इस दौरान उन्होंने कई बार भाजपा विधायक सीपी सिंह का भी जिक्र किया था. इससे नाराज सीपी सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिये बन्ना गुप्ता से 6 सवाल पूछे हैं. सीपी सिंह ने कहा कि उनका सिद्धांत है कि वे किसी की व्यक्तिगत जिंदगी में टीका-टिप्पणी नहीं करते हैं. बन्ना मामले में भी जब मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल किया था, तो उन्होंने यही कहा कि मामला पुलिस के पास है, लेकिन जमाना कुछ ऐसा हो गया है कि लोग शराफत को कमजोरी समझने की भूल कर बैठते हैं. यही भूल बन्ना गुप्ता ने की है. अब वे जब मीडिया के सामने सीना चौड़ा करके बैठ ही गये हैं, तो लगे हाथों मेरे भी दो-चार सवालों के जवाब दे दें. 1. 24 अप्रैल की रात 1:15 बजे मेरे नंबर पर कॉल आया था. कॉल उठाने से काटने तक की सारी जानकारी मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दे दी. बन्ना बताएं, अब इसमें किंतु परंतु कहां है? 2. ऐसे मामले आजकल रोज सामने आ रहे हैं, अपराधियों ने पैसे कमाने का यह तरीका इजाद किया है. बन्ना गुप्ता क्या बता पाएंगे कि वे ऐसे किसी मामले में फंसे हैं, या उनका मामला "दूसरा" है? 3. कहीं ऐसा तो नहीं कि बन्ना गुप्ता के मामले को दबाने के लिए कुछ षड्यंत्र किया गया हो, लेकिन षड्यंत्र विफल हो गया? 4. 24 अप्रैल की रात 1:15 की तरह 25 की रात को भी 1:25 बजे मुझे दूसरे नंबर से एक मिस्ड कॉल आया था. बन्ना गुप्ता सरकार में मंत्री हैं. जरा पता लगाएं कि आखिर माजरा क्या है? 5. बन्ना गुप्ता में जरा भी हिम्मत है, तो वह बताएं कि आखिर वे किससे बात कर रहे थे. मोबाइल नंबर क्या था? 6. मुझे जिस नंबर से कॉल आया था, वह यूपी का बताया जा रहा है. मैं अपने मामले को लेकर यूपी के डीजीपी को पत्र लिखूंगा. क्या बन्ना गुप्ता भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग करने की हिम्मत रखते हैं?
Ranchi: स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से अपने कथित वायरल वीडियो को लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी थी. इस दौरान उन्होंने कई बार भाजपा विधायक सीपी सिंह का भी जिक्र किया था. इससे नाराज सीपी सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिये बन्ना गुप्ता से छः सवाल पूछे हैं. सीपी सिंह ने कहा कि उनका सिद्धांत है कि वे किसी की व्यक्तिगत जिंदगी में टीका-टिप्पणी नहीं करते हैं. बन्ना मामले में भी जब मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल किया था, तो उन्होंने यही कहा कि मामला पुलिस के पास है, लेकिन जमाना कुछ ऐसा हो गया है कि लोग शराफत को कमजोरी समझने की भूल कर बैठते हैं. यही भूल बन्ना गुप्ता ने की है. अब वे जब मीडिया के सामने सीना चौड़ा करके बैठ ही गये हैं, तो लगे हाथों मेरे भी दो-चार सवालों के जवाब दे दें. एक. चौबीस अप्रैल की रात एक:पंद्रह बजे मेरे नंबर पर कॉल आया था. कॉल उठाने से काटने तक की सारी जानकारी मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दे दी. बन्ना बताएं, अब इसमें किंतु परंतु कहां है? दो. ऐसे मामले आजकल रोज सामने आ रहे हैं, अपराधियों ने पैसे कमाने का यह तरीका इजाद किया है. बन्ना गुप्ता क्या बता पाएंगे कि वे ऐसे किसी मामले में फंसे हैं, या उनका मामला "दूसरा" है? तीन. कहीं ऐसा तो नहीं कि बन्ना गुप्ता के मामले को दबाने के लिए कुछ षड्यंत्र किया गया हो, लेकिन षड्यंत्र विफल हो गया? चार. चौबीस अप्रैल की रात एक:पंद्रह की तरह पच्चीस की रात को भी एक:पच्चीस बजे मुझे दूसरे नंबर से एक मिस्ड कॉल आया था. बन्ना गुप्ता सरकार में मंत्री हैं. जरा पता लगाएं कि आखिर माजरा क्या है? पाँच. बन्ना गुप्ता में जरा भी हिम्मत है, तो वह बताएं कि आखिर वे किससे बात कर रहे थे. मोबाइल नंबर क्या था? छः. मुझे जिस नंबर से कॉल आया था, वह यूपी का बताया जा रहा है. मैं अपने मामले को लेकर यूपी के डीजीपी को पत्र लिखूंगा. क्या बन्ना गुप्ता भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग करने की हिम्मत रखते हैं?
६३९. पत्रः नरहरि द्वा० परीखको मगनवाडी, वर्धा २६ सितम्बर, १९३५ तुम्हारा पत्र मिला । इस तरह हिम्मत हारने से थोड़े काम चलनेवाला है। पत्रके द्वारा मै ज्यादा नही समझा सकता । परीक्षितलाल वहाँ पहुँच जाये तब कुछ समय निकालकर आ जाना । यह सच बात है कि लडकियोको हम उतना नहीं दे सकते जितना कि देना चाहिए। किन्तु यह भी सच है कि ऐसा काम करनेवाली स्त्री कार्यकत्रियाँ भी हमारे पास नही है । भगवान् कठिनाइयाँ इसलिए पैदा करता है कि हम उन्हें जीत सकें, न कि उनसे घवराकर भाग खड़े हो । भगवानजी को छुट्टी देकर ठीक किया। पुरातन चाहे तो भले ही गाँवने जाये । तुम जो सुधार करना चाहते हो उन्हें और उनके अतिरिक्त जिन्हें हम सोच सकते हो, ऐसे सब सुधारोको हम अवश्य कार्यान्वित करे। सिर्फ इतना याद रखे कि जोकुछ हमने शुरू किया है उसमे जबतक कोई नैतिक बुराई नजर न आये तबतक हम उसे वन्द नही कर सकते। तुम यहाँ आओ इस बीच इस वारेमे सोच-विचार कर लेना । जो छोटी लडकियाँ तुम्हे परेशान करती है क्या अनसूयावहन उन्हे अपनी निगरानीमे रख सकती है ? यदि अनसूयाबहनको जगहकी तगी हो तो क्या वह अपना वालमन्दिर हरिजन आश्रममें ले जा सकती है ? चमडे और दुग्धालयका काम तो तुम वहाँ बैठे हुए भी कर सकते हो । जमीन आदि की जो सुविधा तुम्हे वहाँ है वह अन्यत्र कहाँ मिल सकेगी? वालुजकर यहाँ अपना काम जिस तत्परता और चतुराईसे कर रहा है उससे मुझे आशा बँधती है कि वह थोडे समयमे विभिन्न स्थानोपर चर्मालय चलाने में समर्थ हो जायेगा । नासिकमें ऐसा ही चर्मालय आरम्भ करने की बात उसने स्वीकार कर भी ली है। वहाँ इमारत भी वननी शुरू हो गई है और इमारत पूरी होते ही वहाँ तुरन्त काम शुरू हो जायेगा । जव तुम यहाँ आओगे तो तुम्हे यह भी देखने को मिलेगा। इस काममे कही कोई नुकसान न हो, इसका निश्चय उसने अभीसे कर लिया है और इस सम्वन्धमे विभिन्न योजनाओपर विचार किया जा रहा है। मुझे लगता है कि आर्थिक दृष्टिसे यहाँका काम सतीशवाबूवाले कामकी अपेक्षा अधिक सफल होगा । सतीगवाबूवाले काममें अवतक काफी पैसा फंस चुका है। आय तो जब होगी तब होगी। वालुजकरके काममे पैसा बहुत कम लगाया गया है, और तब भी चमड़ा पकाया जाने लगा है, कामके लिए काफी मोची है और सीखनेवाले भी तैयार हो रहे है।
छः सौ उनतालीस. पत्रः नरहरि द्वाशून्य परीखको मगनवाडी, वर्धा छब्बीस सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ पैंतीस तुम्हारा पत्र मिला । इस तरह हिम्मत हारने से थोड़े काम चलनेवाला है। पत्रके द्वारा मै ज्यादा नही समझा सकता । परीक्षितलाल वहाँ पहुँच जाये तब कुछ समय निकालकर आ जाना । यह सच बात है कि लडकियोको हम उतना नहीं दे सकते जितना कि देना चाहिए। किन्तु यह भी सच है कि ऐसा काम करनेवाली स्त्री कार्यकत्रियाँ भी हमारे पास नही है । भगवान् कठिनाइयाँ इसलिए पैदा करता है कि हम उन्हें जीत सकें, न कि उनसे घवराकर भाग खड़े हो । भगवानजी को छुट्टी देकर ठीक किया। पुरातन चाहे तो भले ही गाँवने जाये । तुम जो सुधार करना चाहते हो उन्हें और उनके अतिरिक्त जिन्हें हम सोच सकते हो, ऐसे सब सुधारोको हम अवश्य कार्यान्वित करे। सिर्फ इतना याद रखे कि जोकुछ हमने शुरू किया है उसमे जबतक कोई नैतिक बुराई नजर न आये तबतक हम उसे वन्द नही कर सकते। तुम यहाँ आओ इस बीच इस वारेमे सोच-विचार कर लेना । जो छोटी लडकियाँ तुम्हे परेशान करती है क्या अनसूयावहन उन्हे अपनी निगरानीमे रख सकती है ? यदि अनसूयाबहनको जगहकी तगी हो तो क्या वह अपना वालमन्दिर हरिजन आश्रममें ले जा सकती है ? चमडे और दुग्धालयका काम तो तुम वहाँ बैठे हुए भी कर सकते हो । जमीन आदि की जो सुविधा तुम्हे वहाँ है वह अन्यत्र कहाँ मिल सकेगी? वालुजकर यहाँ अपना काम जिस तत्परता और चतुराईसे कर रहा है उससे मुझे आशा बँधती है कि वह थोडे समयमे विभिन्न स्थानोपर चर्मालय चलाने में समर्थ हो जायेगा । नासिकमें ऐसा ही चर्मालय आरम्भ करने की बात उसने स्वीकार कर भी ली है। वहाँ इमारत भी वननी शुरू हो गई है और इमारत पूरी होते ही वहाँ तुरन्त काम शुरू हो जायेगा । जव तुम यहाँ आओगे तो तुम्हे यह भी देखने को मिलेगा। इस काममे कही कोई नुकसान न हो, इसका निश्चय उसने अभीसे कर लिया है और इस सम्वन्धमे विभिन्न योजनाओपर विचार किया जा रहा है। मुझे लगता है कि आर्थिक दृष्टिसे यहाँका काम सतीशवाबूवाले कामकी अपेक्षा अधिक सफल होगा । सतीगवाबूवाले काममें अवतक काफी पैसा फंस चुका है। आय तो जब होगी तब होगी। वालुजकरके काममे पैसा बहुत कम लगाया गया है, और तब भी चमड़ा पकाया जाने लगा है, कामके लिए काफी मोची है और सीखनेवाले भी तैयार हो रहे है।
एक बच्चे में लक्षणों के बिना क्यों बुखार है? मासिक धर्म के बीच रक्त आवंटन का सबूत क्या है? एनोरेक्सिया। वे इस "फैशनेबल" बीमारी से कैसे बीमार हो जाते हैं? क्या सीरिंजिंग गर्भाधान के लिए प्रभावी है?
एक बच्चे में लक्षणों के बिना क्यों बुखार है? मासिक धर्म के बीच रक्त आवंटन का सबूत क्या है? एनोरेक्सिया। वे इस "फैशनेबल" बीमारी से कैसे बीमार हो जाते हैं? क्या सीरिंजिंग गर्भाधान के लिए प्रभावी है?
से एक एनसेंट की उपस्थिति एषः अन्य संभावना हो सकती है । जब गंतरी का कार्य अने रहा था इनसैट के साथ लगा देखिर छोटा हो गया और अंततः यह नाकाम हो गया। पुराने और रिक्त शाफट से संबंध के परिणामस्वरूप एक तीव्र दक्षिणवर्ती घुमाव बन गया। अपने निरीक्षण के दौरान चालीसहि गैज़री की पूरा लम्बाई के प्रकार प्रकार में मैंने अधिक अन्तर अनुभव नहीं किया । अतः मुझे यह सम्भव नहीं लगता है कि पहले यह एक शाफट इन्सैट या शाफट संख्या 34 में एक गैलरी विमान थी। इसके अलावा सभी अदपदावर्शी गवाहों के इल ब्यान के अनुसार कि एक मध्य रेखा का प्रावधान भा, और इसके विपरीत इनका कोई विद्यमान न होने के गैसरी में चुनाव होने की तीसरी सम्भावना से इन्कार करता हूँ। इस प्रकार में यह महसूस करता हूँ. कि यह गम्भव है कि गैलरी में जानबूझकर परिवर्तन किया गया था। THE GAZETTE OF INDIA: JANUARY 9, 1995/PAUSA 19, 1914 7.7.2 जैसे कि पहले भी कहा गया है, पुराने शाफट संख्या 34 के समीप के 40 हिप फेस को उस क्षेत्र में ज्यादा पानी रिसने के कारण जनवरी 1985 से अन्य कर दिया गया था । उन समय 28 स्तर से हम फैस की दूरी आदा से ज्यादा 10 से 12 फीट की थी ( 3 से 3.6 मी) । बाद में 28 स्तर के समीप के 40 डिप के जंक्शन पर अनंत मनय तक समान परिवहन करने के लिये रिर्टन घरखी स्थापित कर दी गयी । मो. कलीम (एमयू 17 ) ने यह बयान दिया है कि नालीरा डिप गैलरी को नम्ववर, 1989 में फिर से शुरू किया गया जबकि श्री के. दस्त ( एमडक्ल्यू 19 ) ने यह ध्यान दिया है कि इसको नवम्बर 1989 के प्रथम सप्ताह में पूनः शुरू किया गया । श्री मिहीर कुमार चटर्जी (एम. 10), श्री शिवदास चटशी ( एस डब्ल्यू) और श्री सी. डी. सिंह (एमडब्ल्यू 11 ) जैसे अन्य गवाहों ने यह स्थान दिया है कि 40 डिप में इसको 18 नवम्बर 1989 से पुन शुरू किया गया । अतः मेरा मानना है कि 28 स्तर के समीप 40 दिप फेस जो पुराने शाफ्ट संख्या 34 से जुड़ गया था और जिसके कारण यह घातक दुर्घटना हुई, को दुर्घटना के ठोक 5 दिन पहले 8 नवम्बर 1999 से पुनः शुरू किया गया । 7.7.3 अलगा सुददा यह है कि क्य शाफट संख्य 14 से 40 डिप गैलरी के जुड जाने के अन्य कारण और परिस्थितियां यो श्री पी. एल. बनर्जी ( एम. डब्रूपू 16 ) यह दावा किया है कि शट संख्या 34 और गैंगरी के बीच 3 मीटर ने भी ज्यादा के एक कोयला बैरियर के प्रधानक टूट जाने के कारण यह सम्बन्ध ( कनैक्शन) स्थापित हुआ। 7.7.4 दुर्घटना के पहले, 40 डिप फेस को लम्बाई का आकलन श्री राम शकर सरकार (एमडब्ल्यू 12 ) श्री शिव दास पटर्जी (एम डब्ल्यू 9), श्री सी. डी. सिंह ( एम 11 ) और श्रीमिहीर कुमार चटर्जी (एमडल्यू10) जैसे अन्य गवाहों द्वारा किया गया जो कि करीब 40 से 45 फीट के बीस था, ( 12 से 17मी. ) 7.7.5 40 डिप गैमरी की लम्बाई और दुर्घटना स्थल के प्लान अवर्श एम 12 ) से निर्धारित पुराने शाफट संख्या 33 के बारे उपरोक्त गवाहों के आकलन के आधार पर श्री पी. एल. बनजी ( एम. डब्ल्यू 16 ने यह बयान दिया है कि दुर्घटना होने के ठीक पहले शाफट संख्या 34 और 41) डिप फेस के बीच का बैरियर 3 मीटर से पा : लेकिन मैंने यह स्वीकार नहीं किया है क्योंकि विमित गवाहों द्वारा बतायी भर्पी 40 डिप फेत की लम्बाई केवल नेत्रवानुमान पर आधारित थी। और वास्तव में इसकी कोई नाप जो नहीं की गई थी । अध्याय-VIII 81 यह सर्वविदित था कि नारायणकुरी सीम के 24 मीटर ऊप पुराने रानीगंज कोलियरी के नेगा सीम के कार्यस्थलों में पानी भगा इसमें अनेक पुराने शाफ्ट भी थे, जिनमें से कुछ की गहराई अभी तक श से । ऐसा है एक पुराना 34 था, जो मलबे में तय हुआ घा और जिसकी गहराई मी ज्ञात नहीं की। बल प्रबंधन ने यह भयान दिया है कि उन्होंने उपलब्ध पुराने प्लान और वस्तावेज का मध्ययन किया, लेकिन इससे भी पुराने शाफ्ट की गहराई का पता नही चालथापि समी के कार्यस्थल के एक ए. एम. पी. ने शाफ्ट संवा 34 की गहराई 86 फीट होने का संकेत दिया, जोकि उस क्षेत्र नेगा सोम की गहराई के बराबर है। बान सुरक्षा महा ते 1934 में विकास की अनुमति (प्रवर्ण - एम / 5) देते हु बहुत ही सतर्क ये उन्होंने नारायणकुरी सोम तक पुराने शाप के आने का अाशंकाका रखते हुए कोर सेस्ट्रल एडवोस होल का प्रावधान करने की शर्त को इसमें शामिल कर दिया 1988 में जब पुराने शाफट सं.-34 समीप विकास कार्य हो रहा था तब खान प्रबंधन ने भी ज्यादा पानी के रिसाव की बात देखी थी । जैस कि पहले भी देख किया गया है। उन्होंने विकास कार्य रोक दिया और कोयला खान नियमावली, 1957 के विनियमन 127 (5) के अन्तर्गत आपेक्षिक शर्तो के अनुसार खान सुरक्षा महानिदेशालय की सूचिस किया चूंकि सं.-34 शाफ्ट का वास्तविक स्थल संदेहा स्वयं था अतः प्रबंधन ने अपब्ध दस्तावेजों और सूचना प्राप्त करने के अन्य स्त्रोतों के माध्यम से जानकारी लेनी चाही ताकि शाफ्ट मं. 34 की गहराई निश्चित की जा सके । तथापि, उनको इसकी महराई के बारे में कोई निश्चित सूचना नहीं मिली । अहोंने प्रत्यक्ष निरीक्षण करके भी शाफ्ट सं. -34 के स्थान को निश्चित करने का किया, लेकिन वे असफल रहे क्योंकि शाफ्ट सं. 34 मलबे से भर गया था। बाद में, ज्ञान प्रबंधन ने 39 दिन के समीप 27 स्तर से एक संवा गोरहोल करके शापट का स्थान निश्चित करने का प्रयास किया। लेकिन न दोरहोस का संपर्क पुराने राम्पट से हुआ और न इससे पानी का रिसाव हुआ। । खान प्रबंधन से यह स्वीकार किया कि पुराने प्लान में पता लगाने प्लान के छोटे हो जाने की संभावना और सर्वेक्षण शौर नक्ला बनाने में हुयी चूक के कारण वर्किंग (प्रवर्ण - एम / JI ) में दशोपी गयी शाफ्ट सं. 34 की स्थिति में गलती की संभावना थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शायद लवे बोरहोल को दिशा में परिवर्तन हो गया था। स्पष्टतः करीब 40 मीटर लंबे एक बहोत द्वारा केवल 3 मीटर व्यास के एक पुराने शाट के स्थान को पाने का तरीका बहुत पुराना था । 3.1 साक्ष्यों का विश्लेषण गरफ्ट सं. 3.1 का एक्सटेंशन 8.2 पानी का प्रसामान्य रिमाव 8.3 40 डिप का पुनः शुरू किया जान ९.4 एडवांस बोर होल 8.5 स्तरों का खिसकना ( मुत्रमेंट) 8.6 पलीर पत्थर का होला होना 8.7 दुर्घटना का कारण 8.2 1988 में जानकारी करने और संभाि पुराने शाफ्ट सं.-34 के बाइपास द्वारा विका कार्य की दिशा में परिवर्तन करने का सही निर्णय लिया। 26, 27 और 25 स्तरों पर पानी के असा मान्य रिसाव के कारण प्रोजेक्शन में परिवर्तन का आवेदन किया गया । इस क्षेत्र से करीब 100 मीटर की दूरी पर संशोधित प्रोजे की मंत्ररी खान सुरक्षा महा द्वारा मार्च, 1988 में दी गयी ( प्रदर्श एम / ४ ) 8.3 नवंबर 1989 में संशोधित प्रोजेक्शन 1988 ( प्रदर्श-एम 8 ) के अनुसार जब विकास कार्य हो रहा था तब 42 कास कट भाग में एक बाइक संपर्क में आया । बढ़ने में एक मया कार्य क्षेत्र इंटने के उद्देश्य मो.. कलीम (एनएउहभू. (17) ने सर्वेक्षण कार्यालय में का अवलोकन किया और 28 स्पर के समीप 40 डिग फेस को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया। जैसा कि पहले भी उल्लेख किया गया है। इस फेस में किया जा रहा कार्य 1988 से बंद कर दिया गया था। प्रबंधन के इस कथन कि इस क्षेत्र में केवल वायु मंदार में सुधार करने के लिये 8 नवंबर 1999 से 40 डिपो को पुनः शुरू किया गया था, को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि बागु संचार प्रौसी में सुधार करने के लिए अन्याय भी मौजूद थे। 49 डिप के पास कार्य शुरू करके भी कलोम ( एम.डब्ल्यू. 17) ने कलसा खानशिवली 1957 के विनियमन 127 (5) के प्रावधानी का सष्ट उल्लंघन किया, जिसके द्वारा अपेक्षित था कि कार्य शुरू करने के पूर्व खान सुरक्षा महा से तुमति ली जाए दूसरे शब्दों में ज्यादा पानी रिसाव के कारण अनवरी, 1988 में शाफ्ट [भाग II --खंड 3 (ii) ] सं. 34 के पास अब कार्य एक बार बंद कर दिया गया था, तब कोयला खान निथमायली, 1957 के विनियमन 127 ( 5 ) के अन्तर्गत ऐसे कार्यो को अपने आप पुनः शुरू करने के लिए मो. कलोम प्राधिकृत नहीं थे । इस प्रकार मैं समझता हूं कि मो. कलीम ने ब्रान सुरक्षा महा की अनंमति के बिना प्रौर कोयल। स्नान नियमावली, 1957 के विनियमन 127 ( 3 ) का उल्लन करते हुए 40 डिप, जो पानी जमाव क्षेत्र के 60 मीटर के भीतर स्थित है, का विकास कार्य 8 नवंबर, 1989 से शुरु कर दिया । भारत का राजपत्र : जनवरी 9, 1993 / पौष 19, 1914 8.4 अनेक गवाहों ने यह बयान दिया है कि जून 1989 से एक नियमित कार्यदल द्वारा उचित तर्र के से एडवांस ओरहोल की ड्रिलिंग बंब कर दी गयी थी बाव में, एडवांस बोरदोल को कथित रूप से सामान्य मजदूरों द्वारा ड्रिल करवाया जाता था. एसी ड्रिलिंग के लिये कथित रूप से काम पर लगाये गये ये सामान्य मजदूर नियमित नहीं थे बल्कि उनको मैमित्तिक आधार पर काम में लगाया गया था। ये कर्मकार अपेक्षाकृत प्रकुशल कर्मकार थे जबकि नियमित ड्रिलर कुशल कर्मकार होते हैं । 40 डिप के दीवारों में किसी फ्लैक बोरहोल का भी निशान नही है । यह संकेत देने के लिये भी कोई रिकार्ड नहीं है कि ऐसे बोरहोल ड्रिल किये गये थे । एडवांस बोरहोल को ट्रिल करने वाले कर्मकारों को प्रबंधन द्वारा गवाह के रूप में पेश किया गया । एजेट सह-प्रबंधक द्वारा ऐसे एउयास बोरहोल के ड्रिलिंग का पर्यवेक्षण करने के लिये किसी सक्षम प्राधि कारी की नियुक्ति भी नहीं की गयी थी। एडवांस बोगटोके प्रावधानों से संबंधित म्यूमतम सांविधिक रिकार्ड रखने सहित किस अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के न होने से, ऐसे बरहील की ड्रिलिंग के लिये नियमित कर्मकारों और ड्रिलिंग के पर्यवेक्षण के लिये सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति न करने से, ऐसे बोरोल की लंबाई और दिशा मापने को पद्धति और मेरे निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर फ्लैक बोरहोल के न होने से मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि 40 डिप फेस में सेन्ट्रल बोरहोस भी दिल नहीं किया गया था । 8.6 कुछ अन्य साक्ष्य भी हैं, क्योंकि सुरक्षा अधिकारी श्री पी. एल. बनर्जी ( एम. डब्ल्यू. 16 ) ने बताया है कि एक बड़े भूस्तर के खिसकने के कारण 40 डिप फेस और शाफ्ट सं. - 34 के बीच का कोयला बैरियर टूट गया । इंडियन माइन मैनेजर्स एसोसिएशन का भी यही तर्क है । श्री चंद्रधारी बराई ( एम. डब्ल्यू. 14), जब वे 40 डिप फेस में दूसरी बार गाट फायर कर रहे थे तब उन्होंने फेस के भागे और पीछे छत को घट्टान टूटने की आवाज सुनी। 40 डिप और 28 स्तर के जंयपान से भूतल पत्थरों के बड़े टुकड़ों का खिसकना और सतह पर पोटहोल बन जाना भूस्तर खिसकने का साक्ष्य बताया गया है। यदि षट्टान टूटने की प्रायाज हुई होती तो वह न केवल श्री चन्द्रधारी बराई ( एम. डब्ल्यू. 14 ) को सुनाई देती बल्फि 28 लेखन के आसपास उपस्थित अन्य फर्मकारों को भी सुनाई देती । लेकिन हम बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि अन्य कर्मकारों से किसी चीज की टूटने की आवाज सुनी। मेरे विचार से 27 सार और 40 डिप के बीच एक मीटर से भी कम मोटे कोयला रिष और छत पर किसी भी बृष्टव्य प्रमाण के न होने सहित 50 डिप के करीब बड़े भूस्तर मूमेंट के बारे में किसी सबूत के न होने के कारण इस प्रकार की घटना के होने की संभावना को नकारता है । अतः यह कहना उचित नहीं होगा कि ऊपर स्थित नेगा सीम में पुराने और परित्यक्त स्टूक के टूटने के कारण ये भूस्तर मूमेंट से 40 डिप मैलरी और शाफ्ट सं. 34 के बीच का कोयला यदि बैरियर टूट गया । यदि ऐसा कोई भूस्तर मूवमेंट हुआ रहता तो इससे कहीं-कहीं पॉटहोल होने की बजाए भूमि का बहुत बडा भाग नीचे खिसक गया होता। पॉटहोल का बनना पुराने कार्यस्थल से पानी निकालने के बाद ग्रामतौर पर देखी जाती है । जब प्रचारक गानी अंदर आया तो शायद पत्रीका ढीला खड़ अपनी वास्तविक स्थिति से करीब आधे पिलर की दूरी पर चला गया । किसी भी स्थिति में 40 टिप और 28 स्तर के जंक्शन की सतह पर पत्थर ढोला होने की घटना का हग घातक दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है । 8. 6 यह कहना उचित नही होगा कि 10 लिप की रातह और 20 स्तर जंक्शन से बड़े पत्थरों की चट्टानों के खिसकने का चट्टानों के करीब प्राधा पिलर की दूरी पर चले जाने का कारण भूस्तरोय मूवमेंट था, जिसके कारण यह घातक दुर्घटना हुयी । यह संभव हो सकता है कि मूलतः हलका होने के कारण फ्लोर स्टोन ढीला हो गया हो । 3128 GI/92-4 8. 7 साक्ष्य के आधार पर मैं यह समझता हूँ कि उस पर स्थित परित्यक्त और पानी से भरे नेगा सीम से जुड़े नारायणकुरी सोम में एडवांस 40 डिप गैलरी और पानी से भरे शाफ्ट सं. -34 के बीच संधेि संपर्क के कारण यह घातक दुर्घटना हुई । नारायणकुरी सीम में पानी से भरे शाफट सं - 34 की ओर बढ़े 28 स्तर के समीप 10 डिप गैलरी में सेन्ट्रल और फलैक बोरहोल न होने के कारण यह दुर्घटना हुई । ऐसे वो रहोल का होना कोयला खान नियमावली, 1957 के विनियमन 127 ( 6 ) के अन्तर्गत अनिवार्य है तथा खान सुरक्षा महा की कार्य अनुमति द्वारा अपेक्षित है । इसके अलावा 28 स्तर के समीप 40 डिप गैलरी की खान सुरक्षा महा द्वारा कार्य करने के लिये गैर मंजूरो कृत क्षेत्र में पानी से मरे शाफ्ट सं. 34 की ओर बढ़ाया गया था । अतः गेर मंजूरी कृत क्षेत्र जहां ज्यादा पानी रिसने के कारण जनवरी, 1988 में खनन कार्य बंद कर दिया गया था, को गैलरी में कार्य शुरू करने के पांच दिनों के भीतर यह घातक दुर्घटन। पी। यह गैर मंजूरीकृत क्षेत्र खान सुरक्षा महा, द्वारा खनन कार्य के लिये मंजूर क्षेत्र से करीब 100 मीटर की दूरी पर था । इस प्रकार यह घातक दुर्घटना अभियोज्य नवीय लापरवाही के कारण थी । श्रध्याय IX 91 वायित्य का विश्लेषण 9. 2 एजेंट व प्रबंधक 9. 3 सुरक्षा अधिकारी 9. 4 सहायक प्रबंधक 9. 5 सर्वेक्षक 9.6 उच्च प्रबंधक 9.7 श्रन्य 9. 1 दुर्घटना के कारणों का पता लग जाने के पश्चात् इसके लिए जिम्मेदार कौन था इसका पता लगाना होगा। दुर्घटना के कारणों से यह स्पष्ट है कि यह अभियोज्य मानवीय लापरवाही के कारण से हुई। निम्नलिखित पैराग्राफों में मैंने उत्तरदायित्व के निर्धारण के लिए साक्ष्यों का विश्लेषण किया है :-- 9.2.1 मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू 17 ) जून, 1987 से खान प्रबंधक और जुलाई, 1988 से एजेंट-सह-प्रबंधक हैं। अतः वे दिसम्बर, 1987 से 13 नवम्बर, 1989 तक की खान की घटनाओं से पूर्णतः परिचित हैं। खान के पुराने शाफ्ट सं. 33 और 34 के समीप 26, 27 और 28 स्तर के पास के कार्यस्थलों में विसम्बर, 1987 में ज्यादा पानी की रिमाष की घटना देखी गयी और पूर्व एजेंट श्री के. के. दास ( एम डब्ल्यू 18 ) द्वारा जनवरी, 1988 में उस क्षेत्र में कार्य स्थगित कर दिया गया था। तब उन्होंने ज्यादा पानी रिसाव को देखते हुए विकास की दिशा में परिवर्तन करने के लिए खान सुरक्षा महानिदेशक के पास आवेदन दिया। जनवरी, 1988 में खान सुरक्षा महा. को दिए गए संशोधित आवेदन सहित शाफ्ट सं. 34 को 100 मी. की दूरी से बाइपास करने की प्रोजक्शन योजना (प्रवर्ण - - एम / 7 ) के बारे में मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) को प्रबंधक की हैसियत से जानकारी थी । संशोधित प्रोजक्शन को मंजूर करते हुए मनुमति पन्न ( प्रवर्श एम / 8 ) की प्रति खान सुरक्षा मा द्वारा प्रबंधक मो. कलीम ( एम. अल्यू 17 ) को मार्च, 1988 को भेजी गयी । 1998 में, शाफ्ट सं. 34 की संभावित स्थिति की और 27 स्तर से एक लंबा बोरहोल ड्रिल किया गया। चूंकि संबे योहोल का संपर्क शाफ्ट सं. 34 से नहीं हुआ और बोरहोल से पानी का भी रिसाव नहीं हुआ, प्रतः मो. कलीम ( एम यब्ल्यू 17 ) ने यह अनुमान लगाया कि पुराना शाफ्ट केवल नेगा सीम तक ही था । सडा. इन प्रा आधार पर मो. कलीम ( एम डब्ल्यू 17 ) जैसे एक अनुभवी प्रबंधक के लिए यह समझना उचित नहीं था कि पुराने शाफ्ट सं. 34 का विस्तार केवल नेगा सीम तक ही था । 9.2.3 नवंबर 1989 में जब खान सुरक्षा महा द्वारा मंजूर नियमित क्षेत्रों के कार्यस्थल में बहुत सारे डाइक मिले तो मो. कलीम ( एम. ब्यू 17 ) ने सर्वेक्षण कार्यालय से संपर्क करके, और सर्वेक्षक से प्लान के बारे में विचार-विमर्श करके 28 स्तर फेम के समीप 40 शिप में कार्य पुनः शुरू करने का निर्णय लिया । उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खान सुरक्षा से संबंधित खान सुरक्षा महा के पूर्व के सभी मनुमति पत्नों और भन्य पत्नाचारों का अध्ययन किया । इस प्रकार मो. कलीम इस बात से पूर्ण रूप से अयगत थे कि ज्यादा पानी रिसाव के कारण जनवरो, 1988 में शाफ्ट सं. 34 के समीप कार्य बंद कर दिया गया था। उन्हें कोयला खान नियमावली 1857 के विनियमन 127 ( 5 ) के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी थी, जिसके द्वारा यह अपेक्षित था कि ज्यादा पानी के रिसाव के कारण जिन कार्य स्थलों को बंद कर दिया गया है उनको खान सुरक्षा महा की लिखित पूर्व अनुमति के बिना भागे नहीं बढ़ाया जा सकता । चूंकि ऐसी कोई प्रनुमति प्राप्त नहीं की गयी थी अतः नवंबर 1989 से उनके द्वारा स्वयं ही 40 डिप को पुनः शुरु कर दिए जाने की घटना कोयला बास नियमावली 1937 के विनियमन 127 ( 5 ) का जानबूझकर किया गया उल्लंघन है । 9. 2.2 मो. फलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) ने यह भी स्वीकार किया है कि खान सुरक्षा महा के अनुमति पत ( प्रदर्श एम 18 ) और कोयला खान नियमावली 1937 के अन्तर्गत अपेक्षित एडवांस सेन्ट्रल और फ्लैक बोरहोल तथा कार्य का प्लान का रिकार्ड नहीं रखा गया । उन्होंने एडवांस दोल के ड्रिलिंग का पर्यवेक्षण करने के लिये किसी सक्षम अधिकारी को भी प्राधिकृत नहीं किया। यह कोयला खान नियमावली 1937 के विनियमन 127 (6) (ख) का स्पष्ट उल्लंघन था। एडवांस बोर होल को ड्रिल करने के लिये उन्होंने नियमित ड्रिलिंग गंग का भी प्रावधान नहीं किया और इसके स्थान पर इस कार्य के लिये सामान्य मजदूरों जैसे प्रकुमल कर्मकारों को नैमित्तिक प्राधार पर कार्य लगाया । यह दुःखद बात है कि मो. फलीम (एम. डब्ल्यू. 17 ), जिनके पास वर्षों का अनुभव है। इस स्पष्ट खतरे को पहचान नहीं सके। यह खतरा मचानक नहीं भाया बल्कि पर्याप्त पूर्वसूचनाओं के लक्षण के बाद ही आया। मो. फलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) ने या तो आत्म विश्वास के कारण या इस गलत धारणा के कारण, कि शाफ्ट सं. 34 नेगा सोम के आगे नहीं गई है। खतरे को भांपने में असमर्थ रहे जिसके परिणामस्वरूप यह बालक दुर्घटना हुयी। प्रतः मैं उन्हें 13 नवंबर 1984 को महाबीर खान में घटित दुर्घटना का प्रमुख घोषी व्यक्ति मानता हूँ। लेकिन दुर्घटना के मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) को प्रमुख दोषी मानते हुये भी साक्ष्य देने में उनकी बृढ़ता तथा जिस रीति से उन्होंने सच्चाई से बयान दिया है, प्रशंसनीय है। उन्होंने यह भी बयान दिया है कि वे खान-कार्यों का संचालन कर रहे थे और उन्हें कोयला उत्पादन की उस सीमा के बारे में निर्देश नहीं दिया गया जिसके बाद सुरक्षा विनयमनों का उल्लंघन हो सकता है। जांच के शेरान उचित व्यवहार के लिये मो. फलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) निश्चय हो प्रशंसा के पास हैं। [PART II - SEC 3 (ii) ] 9.3.2 श्री पी. एल. बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पुराने प्लान का अध्ययन किया और उन्हें पता चला कि शाफ्ट सं.. --34 में मलवा भरा है । कार्यक्षेत्रों का प्लान बनाने के लिये उन्होंने खान कार्यालय में उपलब्ध विभिन्न प्लानों का उपयोग किया। सतह पर शौफ्ट सं. 34 उनको नजर नही आई । जनवरी 1988 में उन्होंने 27 स्तर के पास ज्यादा पानी का रिसाव देखा था और इसके लिये एक लंबा मोहोन ड्रिल करवाने का इंतजाम किया था। उनके बयान के अनुसार लंबे बोर होल को घुमाव की सभावना के बारे में भी उनकी जानकारी थी। उन्होंने खान सुरक्षा महा. की 1984 की अनुमति ( प्रदर्शन एम. 15) और 1988 की अनुमति ( प्रदर्शन एम 18 ) का अध्ययन किया था और अनुमति के शर्तो से वाकिफ पे 18 नवंबर, 1989 से 40 सिप फेस को पुनः शुरू किये जाने के बारे में भी उनकी जानकारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि 40 डिप फेस से पानी का रिसाव नहीं हो रहा था और 8 नवंबर 1989 से कार्य शुरू किये जाने के बाद फलैक और सेन्ट्रल बोर होल के वायरे में फेस को प्रागे मढ़ाया जा रहा था। लेकिन उन्होंने बयान दिया कि प्रत्येक कार्यक्षेत्र फेस में एडवांस बोरोल को आये बढ़ाने के पहले इन बोरहोलों की ड्रिलिंग सुनिश्चित करने के लिये उनके पास कोई पद्धति नहीं थी। उन्होंने कार्यक्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान ऐसे बोहोलों की मानिटरिंग सुनिश्चित की तथापि उनके बयाम के अनुसार वर्किंग फेसो के निरीक्षणों की कोई निर्धारित समय सूची नहीं थी। मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि गैर मंजूरी कृत कार्य क्षेत्र में ज्यादा पानी के रिसाव के बावजूद एडवांस बोर होल तैयार किये बिना 40 डिप फेसको भने बढ़ाये जाने के कारण यह घातक दुर्घटना हुयी इम उल्लंघनों के बारे में भी पी. एल. बनर्जी (एम. डम्यू. 16 ) को जानकारी थी । इस प्रकार उन्होंने कोयला खाम नियमावली 1957 के विनियमन 41 ए और बी (iii) के घन्तयंत छपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया, क्योंकि पानी भर जाने के एक संभावित स्रोत के रूप में शाफ्ट सं. 34 के बारे में उन्होंने एजेंट-सह प्रबंधक (एम. डब्ल्यू. 17 ) को सूचना नहीं वी। अपने निरीक्षण के दौरान न तो उन्होंने सेन्ट्रल और फूलैक बोरहोल जिल किये जाने पर ध्यान नहीं दिया बस्कि कोयला खान मि. 1957 के विनियमन 41 ए (1) (एफ) के साथ पठित कोयमा खान नि. 1957 के विनियमन 127 ( 6 )का उल्लंघन करते हुये बिना बोरहोल बनाये 40 डिप फेस को घामे बढ़ाने की जानबूझकर प्रनुमति दी । प्रतः ग्रह् स्पष्ट है कि श्री पी. एल. बनर्जी (एम.डब्ल्यू. 10) मे फोयला खान विनियमन 1957 के विनियमन 41 ए ( 1 ) (जी. ) के साथ पठित विनियमन 127 का उल्लंघन करते हुए 40 लिप फेस के एडवांस बोरहोल की सुरक्षात्मक डिखिम पद्धति को सुनिश्चित करने के लिये भी कोई उपाय नहीं किया। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि संभावित खतरों को जानते हुए श्री पी. एख. बनर्जी ( एम. डब्यू 16 ) ने कोयला खान नियमावली 1957 के विनियमन 41 ए ( 1 ) (जी.) के अन्तर्गत उपेक्षित सुरक्षा उपायों के पालन करने के लिय उचित कदम नहीं उठाया । अतः इस दुर्घटना के लिये वे मी उत्तरदावी है। 9.3.1 क्रमानुक्रम में श्री पी. एल. बनर्जी ( एम. लम्फ्यू 16 ) खान में मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू 17 ) के बाद अधीनस्थ अधिकारी है । उन्होंने महाबीर खान में जून 1988 से सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्य किया । 1983 से उन्होंने उक्त खाम के सहायक प्रबंधक के रूप में भी कार्य किया। इस प्रकार वे 1983 से लगातार खान में कार्य करते प्रा रहे थे। उनकी ड्यूटी में पानी भरने की घटना सहित सभी संभावित खतरों के स्रोत के बारे में प्रबंधक ( अर्थात् मो. कलीम) को जानकारी देना शामिल है। उनको खान के विभिन्न भागों का अवलोकन करके प्रबंधक को इस बात की रिपोर्ट देनी होती है कि खान अधिनियम और इसके असर त बनाये गये विनियमनों का पालन किया जा रहा है या नहीं । 9.4.1 महाबीर खान में दो सहायक प्रबंधक थे। एक का माम श्री के. दस (एम. पू. 19 ) और दूसरे का नाम श्री एस. के. सेनगुप्ता ( सोपू 1 ) है। श्री के बस में सहायक प्रबंधक के रूप में महाबीर खान में 1979 में कार्य करना प्रारंभ किया। उन्होंने 7 नवंबर और 12 नवंबर, 1989 के बीच 40 पिकाबो बार निरीक्षण किया और 12 नवंबर 1989 की दूसरी पारी में भी इसका निरीक्षण किया। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि ज्यादा पानी रिसाव के कारण 40 टिप फेस में ऊनवरी 1988 से काम बंद कर दिया गया था। उन्हें इस बात की भी जानकारी था कि उपस्थित मेगा सीम में पूर्णतः पानी भरा है। उन्होंने बयान दिया कि 40 सिप फेस उचित लम्बाई के एडवांस सेन्ट्रल और फजैक बोरोस का प्रावधाम किया था लेकिन इतना साफ बयान देने के बावजूद भी तो उन्होंने इस उद्देश्य के लिये रखे जा रहे किमी रिकार्ड से इस बयान को साबित किया न ही ऐसा स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत किया जो यह कह सके कि ऐसे बोरहोल नियमित रूप से बनाये जाते थे। उन्होंने यह भी साबित नहीं किया कि गंबरी आगे बढ़ाये जाने से पहले पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा ऐसे बोरहोल की उचित जांच होती थी । 9.4.2 श्राः इस क्षेत्र के सहायक प्रबंधक के रूप में वे यह सुनिश्चित करने में असफल रहे कि को. खा. नि. 1957 के विनियमन 127 (6) के साथ पठित को. खा. नि. 1957 के विनियमन पर की अपेक्षाओं के अनुमार 40 डिप फेस में एडबास बोरहोल की ड्रिलिंग हो रही थी। इस प्रकार से उन्होंने भी कानून का जानबूझकर उल्लंघन किया जिसके कारण दुर्घटना हुयी और इस दुर्घटना के लिये में भी उतरवायी है। भारत का राजपक्ष : जनवरी 9, 1993 / वौष 19, 1914 9.4.3 दूसरे सहायक प्रबंधक श्री एस. के. सेनगुप्ता (सी. डब्ल्यू. 1) ने खान में अक्तूबर 1989 से ही कार्यभार ग्रहण किया। में कुछ दिनों के अवकाश पर थे इसके बाद उनकी किसी अन्य विकास कार्य का जिम्मा दिया गया और उन्होंने दुर्घटना स्थल के 43 कास-कट क्षेत्र का पर्यवेक्षण का कार्य नहीं किया । इस प्रकार इस घातक दुर्घटना के लिये वे उत्तरखापी नही है । 9.51 श्री पी. एल. ठवकर ( एम. डब्ल्यू 15 ) 1957 में महाबोर खान के सर्वेयर थे। उन्होंने जनवरी 1988 में 27 स्तर के ज्यादा पानी के रिसाव की घटना देखी। उन्होंने इस बात को भरनों सांविधिक सर्वेक्षक डायरी में रिकार्ड किया तथा यह भी सूचना दर्ज की कि पानी से भरे शाफ्ट सं. 34 का कार्य क्षेत्र बढ़ रहा है। इस डायरी को प्रबंधक मो. कलीम ( एम. उन्हपू. 17) द्वारा प्रति हस्ताक्षरित किया गया। उनकी यह ड्यूटो थी कि वे प्रबंधक को इस बात की सूचना में कि हो रहा कार्य पानी से अपे प्यापट सं. 34 के पास पहुंच रहा था। उन्होंने इस मामले में भी ऐसा हो । पूर्ण एजेंट श्री के. के. दास ( एम.डब्ल्यू. 18) मे यह बयान दिया कि उन्हें इस बात का स्मरण है कि श्री पी. एल. ठक्कर ( एम.डब्ल्यू.15) ने उन्हें एक रिपोर्ट दी थी कि 27 स्तर का कार्य क्षेत्र परित्यक्त फाफ्ट मं. 34 की और बढ़ रहा था। मो. कलीम (एमडब्ल्यू 17 ) ने भी स्वीकार किया कि श्री पी. एल. ठक्कर ( एम. डब्ल्यू 15 ) की डायरी द्वारा पानी भर जाने के खतरे को और भी उनका ध्यान प्राकर्षित किया गया था। इस प्रकार श्री पी. एल. ठक्कर ( एम. बब्ल्यू. 15) से को. पा. टि. 1957 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन अपनी ड्यूटी का उचित ढंग से पाल किया। 9.5.2 इस स्थिति में, मैं दुर्घटना के लिये श्री पी. एल. ठक्कर ( एम.डब्ल्यू. 15 ) को उत्तरदायी नहीं मानता हूं । 8 नवंबर 1939 मे 40 डिप की गैलग़ में कार्य शुरू होने के बारे में महाप्रबंधक को जानकारी के संबंध में जांच न्यायालय के समक्ष बयान दिया हो। इस बात का भी कोई साक्ष्य नहीं है कि महाप्रबंधक को इस बात की जानकारी थी कि सुरक्षा विनियमनों का उल्लंघन किया जा रहा था और गैलरी को बढ़ाते समय एडवांस सेन्ट्रल ओर फलैक ओर होल नहीं बनाये गये थे । महाप्रबंधक ग्यारह खानों के प्रभारी हैं। जिनमें से एक महावीर खान है। उनके लिये यह संभव नहीं था कि ये को. स्था. मि. 1957 के विनियमन 127 के अनुसार एडवांस बोरहोल बनाने के लिए खान सुरक्षा कहा की अनुमति में निहित शर्तों के प्रवर्तन का पर्यवेक्षण करें। तवनुसार, मैं कुनुस्तोरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक को इस दुर्घटना के लिये उत्तरदायी नह मानता हूं । 9.6.1 जिरह के दौरान मो. कलोम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) ने यह दिया कि पर्यवेक्षकों से विचार कर केही वे कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करते रहे थे। यह एक संयुक्त निर्णय था और यह महाप्रबंधक द्वारा जो कि उनका वरिष्ठ अधिकारी था, आरोपित स्वेच्छाचारी निर्णय नहीं था । इसके अलावा कार्य के दौरान यदि कोई समस्या थी तो ये उत्पावन लक्ष्य पर विचार-विमर्श करने और इसमें संशोधन करने के लिये स्वतंत्र थे। उन्होंने इस प्रारोप का खंडन किया कि उत्पादन लक्ष्य में कमी होने की संभावना के कारण उन्होंने अनधिकृत प्रोडेक्शन में स्थित खान में बेरोक-टोक स्वनन कार्य किया। कार्य अनुमति के लिए खान सुरक्षा महा. को प्रस्तुत प्रावेदन के संबंध में उन्होंने बयान दिया कि महाप्रबंधक को औपचारिक प्रनुमति अपेक्षित नहीं है फिर भी उन्होंने ऐसे मामलों पर महाप्रबंधक से विचार किया। उन्होंने बयान दिया कि खान सुरक्षा विनियमनों के प्रवर्तन के लिये एजेंट सह प्रबंधक के रूप में उनके पास पर्याप्त पाकियाँ थीं। उनके ठीक ऊपर वरिष्ठ अधिकारी कुनस्तोरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक थे। महाप्रबंधक को क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी, जो उनका स्टाफ कर्मचारी है, द्वारा सुरक्षा मामलों पर सलाह वो गयी थी । मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू. 17 ) ने पानी भर जाने के संभावित खतरे के बारे में क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी और महाप्रबंधक से विचार-विमर्श किया था । मो. कलीम (एम. डब्ल्यू. (17) ने यह बयान दिया है कि इन अधि कारियों ने उनको सदैव खान सुरक्षा महा की "मनुमति" का पालन करने की सलाह दी थी। इस प्रकार मो. कलीम ( एम. ब्ल्यू 17 ) ने यह स्वोकार किया कि 8 नवंबर, 1989 से 28 स्तर के पास 40 लिप में उनके भावेश से कार्य शुरू किया गया और इससे उनके वरिष्ठ अधिकारियों का कुछ लेना-देना नहीं था। इसके अलावा ऐसा कोई गवाह नहीं है जिसने 9.7.1 भोवर मन और रिसदार जैसे पर्यवेक्षी कर्मचारियों द्वारा भी चूके हुयी है। इन चूकों का विश्लेषण इस प्रकार है :9.7.2 श्री निहिर कुमार चटर्जी ( एम डब्ल्यू 10) प्रोवरमैन जो सामान्य पारी कहे जाने वाली प्रथम पारी में स्थायी रूप से तैनात थे । उन्होंने बयान दिया है कि चूंकि उनका कार्य विविध प्रकृति का है और उनको एडवांस बोरहोल के पर्यवेक्षण के लिये प्रौपचारिक रूप से नियुक्त नहीं किया गया था, बल्कि एजेंट-सह प्रबंधक मो. कलीम ( एम. डब्ल्यू 17 ) आमतौर पर उनसे ऐसे बोरोल के ड्रिलिंग पादि का पर्यवेक्षप्प करने को कहा करते थे । श्री सी. डी. सिंह ( एम. डब्ल्यू 4 ) 42 कासकट क्षेत्र के शिफ्ट ओवरमैम थे और 12 नवंबर, 1989 की पहली पारी में वे डयुटी पर थे। श्री शिवदास चटर्जी भोयरमैन ( एम डब्ल्यू 9 ) और श्री फौजवार सिंह ( एम डब्ल्यू 1) अन्य भोवर मैन थे जिनको 12 नवंबर 1989 को क्रमशः दूसरी और तीसरी पारी में डयूटी पर लगाया गया था। 9.7.3 श्री निहिर कुमार चटर्जी (एम. डब्ल्यू. 10 ) और श्री मी. डी. सिंह ( एम. सम्ल्यू 4 ) 12 नवंबर, 1989 को पहली पारी में 40 सिप फेस में 5.4 मीटर लेबे एमवास सेन्ट्रल बोरहोल और वो फलैंक बोर शेल की निश्चित ट्रिलिंग करने का दावा किया है। श्री शिवदास चटर्जी ( एम डब्ल्यू 9) मे उसी दिन की दूसरी पारी में जन एडवांस बोर होनों की नापजोख करने का दावा किया है। इन सभी भोवर मैनों ने यह दावा किया है कि 40 डिप फेस में ज्यादा पानी का रिसाव नहीं 9.7.4, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि 12 नवंबर, 1989 को 28 स्तर के समीप 40 शिप फेस में कोई एडवांस बोरहोल नहीं या और उसी दिन फेस से ज्यादा पानी का रिसाव है। रहा था। अतः एडवांस बोरहोल की ड्रिलिंग और ज्यादा पानी न रिसने के संबंध में इन सोबर मेनों के बयान पर मैं विश्वास नहीं करता हूं । 9.7.5 श्री फौजदार सिंह ( एम डब्ल्यू 1 ) ही अकेले 13 नवंबर, 1989 की तीसरी पारी में जब दुर्घटना हुयी थी, ओवर मैन को सयुटी पर थे और उनके चार्ज में अधिक दूरी पर स्थित तीन क्षेत्र थे । प्रतः दुर्घटना होने के पूर्व 40 डिप फेस का निरीक्षण करने का अवसर उन्हें नहीं मिला । 9.7.6. श्री राम शंकर सरकार ( एम उन्हयू 12 ) औौर दूदन पाण्डेय ( एम डब्ल्यू 13 ) 12 नवंबर, 1989 की दूसरी और तोसरी पारी में 42 क्रासकट क्षेत्र में ड्यूटी पर थे। मैं उनके बयान पर भी विश्वास नही करता कि 40 डिप फेस में एडवांस बोरहोस थे और फेस में से ज्याष पानी का रिसाव नहीं हो रहा था। 9.7.7. श्री चंद्र धारी बराई (एम डब्ल्यू. 14 ) 12 नवंबर, 1989 की तीसरी पारी में 40 डिप फेस के शाट फायरर की ड्यूटी पर थे। मैं उनके इस बयान पर भी विश्वास नही करता कि उन्होंने दुर्घटना वाले दिन 13 नवंबर, 1989 को शाट फायर करने के पहले 40 डिप फेस के एडवांस और फलैक बोरहोल की जांच कर ली थी । THE GAZETTE OF INDIA : JANUARY 9, 1993 / PAUSA 19, 1914 9.7.8 खान सुरक्षा का प्रथम उत्तरदायित्व प्रबंधन पर है। खान के सहायक कर्मचारियों से यह अपेक्षा होती है कि वे उनके आदेशों का पालन करें । मैंने पहले भी कहा है कि इस बात की जानकारी एजेंट सहप्रबंधक ( एम. डब्ल्यू. 17 ) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को थी कि 40 डिप फेस में एडवांस वोरहोल ड्रिल नहीं किये गये है और इससे ज्यादा पानी रिस रहा है । यदि एजेंट सह-प्रबंधक और अन्य वरिष्ठ कर्मचारी सतर्क रहते और खान सुरक्षा के अपने उत्तरदायित्व के प्रति सतर्क रहते तो उन्होंने एडवांस बोरहोल की ड्रिलिंग करवा ली होती और ज्यादा पानी के रिसाव की ओर ध्यान दिया होता । उनके द्वारा स्थिति को हाथ से निकलने देने के कारण अधीनस्थ कर्मचारियों जैसे भोवरमैनों, सिरदारों तथा सोट फाइररों को गलत संकेत मिले । अतः उनकी गल्तियों के बावजूद भी मैं सर्वश्री मिहिर कुमार चटर्जी ( एम डब्ल्यू 10 ) , सी. डी. सिह ( एम. डब्ल्यू 11 ) , शिबदास चटर्जी राम शंकर सरकार ( एम डब्ल्यू 12 ) , दोदन पाण्डे ( एम डब्ल्यू 13 ) चन्द्रधारी बराई ( एम डब्ल्यू 14 ) को घातक दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नही ठहराता हूं । 9.7.9 पानी भर जाने के कारण हुई अधिकांश दुर्घटनाओं तथा श्रापदा के कारणों का विश्लेषण यह दर्शाता है कि खान में कार्यरत उच्चाधिकारी मूल रूप से जिम्मेदार होते है, परन्तु सामान्य कर्मकार तथा उनके पर्यवेक्षकों जैसे सोटफाइररों, सिरदारों तथा श्रोवरमैन के लिए सुरक्षा पैरामीटर की जानकारी अपेक्षित है सामान्यतः पानी भर जाने के कारण हुयी किसी दुर्घटना पहले कुछ अपसामान्य संकेत तथा लक्षणों जैसे बहुत अधिक पानी की सोपेज इत्यादि होती है । यह जरूरी है कि भूमिगत कोयला खानों में काम करने वाले प्रथम स्तर के पर्यवेक्षक तथा कर्मकार ऐसे सूचच लक्षणो / कारण की पहचान कर उन्हें प्रबन्धन के उच्च स्तर की जानकारी में लाएं । यह आवश्यक है कि पर्यवेक्षकों तथा कर्मकारों को इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और सुरक्षा संबंनी ज्ञान उन्हें दिया जाना चाहिए । 9.7.10 कमकारों के निरीक्षकों के संस्थान तथा सुरक्षा समिति को इस आशय से कानूनी समर्थन दिया गया है कि कमकारों की सुरक्षा में संस्थानों के क्रियाकलाप दुर्घटनाओं तथा गम्भीर संकट की घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस मामले में कम कारों क निरीक्षक तथा सुरक्षा समिति उनसे अपेक्षित उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे । कमकारों के निरीक्षक ने स्वीकृत क्षेत्र में 40 डिप को पुनः प्रारम्भ करने के कारणों के बारे में पूछताछ नहीं की। उन्होंने यह भी सुनिश्चित नहीं किया कि 40 डिप फेस बोरहोलों खुदायी भी पहले से कर ली जाए । इसक विपरीत उसने मेरे सामने पानी के अपसामान्य सीपेज न होने तथा 12 नवम्बर, 1989 को 40 डिप फेस पर बोर होलों को पहले से ही खुदायी के बारे में गलत बयान दिया । 9.7.11 लगभग सभो पयवेक्षक स्टाफ और अनेक कमकारों को इस बात की जानकारी थी कि उपरिशायी नेगासीम में काफी पानी जमा था। फिर भी खान में पानी भर जाने के खतरे का मामला सुरक्षा समिति जिसकी बैठक महीने में लगभग एक बार होती है के सामने विचार के लिए नहीं आया । 9.7.12 यह सही है कि खान की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबन्धन की है। परन्तु यह भी सही है कि इसे बिना कर्मकारों के तथा ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग के प्राप्त नहीं किया जा सकता है । इस मामले में यह प्रतीत होता है कि एडवान्स बोर होल को व्यवस्था तथा फेस पर पानी की असामान्य सीपेज की जानकारी कुछ कर्मकारों द्वारा स्थानीय ट्रेय यूनियन नेताओं के ध्यान में लायी गयी थी । दुर्भाग्य से ऐसी सूचना होने पर उनके द्वारा भी कोई अनुकूल कारवाई नहीं की गई। 10.1 निष्कर्षो का सा 10. 2 सिफारिशें 10. 3 खर्चा की वसूली 10.4 प्रभार अध्याय 10 10.1.1 13 नवम्बर, 1989 को महाबीर खान की नारायणकूरी सीम में घटित घातक दुर्घटना का कारण पुराने पड़े हुए उपरिसायी तथा साफ्ट सं. 34 के कार्यों से जलाकांत नेगा सीम से पानी का तेज बहाव था । परित्यक्त तथा जलाक्रांत साफ्ट सं. 34 जिसे 28 लेवल के पास 40 डिप गैलरी को बढ़ाते हुए नाराणकु सीम तक जोड़ा गया था के कारण दुर्घटना हुयी और इससे 6 बहुमूल्य जाने गयी । 10.1.2 यह दुर्घटना, जलाक्रांत साफ्ट सं. 34की ओर जाने वाली 40 डिप गैलरी में पर्याप्त संख्यां में मध्य तथा फलैक बोर होल्स उपलब्ध न कराये जाने के कारण हुयी । यदि ऐसे विकसित बोरहोल्स कवर उपलब्ध कराये गये होते तो अधिकारीगण जलाक्रांत साफ्ट के खतरे के बारे में सावधान हो जाते और इस प्रकार से घातक दुघटना को टाला जा सकता था । ऐसे विकसित बोरहोल्स कोयला खान नियमावली 1957 के 127 विनियम के अन्तर्गत आवश्यक है । खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा जारी कार्य सम्बन्धी अनुमति में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि ऐसे बोरहोल्स उपलब्ध कराये जाने चाहिएं थे । इसके अतिरिक्त 28 लेवल के पास तक 40 खिप गैलरी को खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा कार्य कर के लिए स्वीकृत परिवर्धन प्रक्षेषण से दूर लगभग 100 मी. अनाधिकृत क्षेत्र में बढ़ा दिया गया था । यह घातक दुर्घटना 28 लेवल के पास 40 डिप गैलरी जहां पानी की अपसामान्य सीपेज के कारण जनवरी, 1988 में खनन कार्य रोक दिया गया था, में कार्य प्रारम्भ कि जाने ले मात्र 5 दिन के भीतर ही हो गयी। मेरे विचार से यह घातक दुर्घटना सर्व श्री मो. कलीम एजेंट तथा प्रबन्धक तथा पी. एल. बनर्जी सुरक्षा अधिकारी तथा महाबीर खान के सहायक प्रबन्धक श्री के. दत्ता की गम्भीर लापरवाही के कारण घटी है । इन तीनों अधिकारियों ने कोयला खान नियमावली 1957 के विनियम 127 ले प्रावधानों तथा साथ ही साथ खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा जारी की गयी कार्यानुमति में निर्धारित शर्तों का उल्लघंन किया है । 10.2.1. हमारे देश की भूमिगत कोयला खानों में बाढ़ के कारण अन्य घोर विपदाओं की तरह यह घातक दुर्घटना कोयला खान विनियमों के संगत प्रावधानों के अनुपालन में मनुष्य द्वारा की गयी चूक के कारण हुयी । जबकि संगत कोयला खान विनियमों का अनुऐसे क और घोर विपदाओं को रोक सकता है, चिन्ता की बात यह है कि समयसमय पर इसकी पुनरावृत्ति होती है। मेरे विचार में कर्मकारों को तथा प्रथम पंक्ति के पर्यवेक्षक कर्मचारियों जैसे शॉट फाइर्स, सिरदारों तथा ओवर मैनों को इस बारे में कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियों के प्रति श्रवगत कराना बाढ़ संबंधी खतरे के संकेतों के बारे में पहले से सचेत रहने के लिए उपयुक्त रूप से उन्हें प्रशिक्षित करना जिससे कि समय पर दोष निवारक उपाय किए जा सकें । मैंने यह भी पाया कि कर्मकारों के निरीक्षण के स्थान तथा सुरक्षा समिति जो कि काफी हद तक सुरक्षा चेतना जगा सकती है को सुदृढ़ करने की पर्याप्त गुंजाइश है ।
से एक एनसेंट की उपस्थिति एषः अन्य संभावना हो सकती है । जब गंतरी का कार्य अने रहा था इनसैट के साथ लगा देखिर छोटा हो गया और अंततः यह नाकाम हो गया। पुराने और रिक्त शाफट से संबंध के परिणामस्वरूप एक तीव्र दक्षिणवर्ती घुमाव बन गया। अपने निरीक्षण के दौरान चालीसहि गैज़री की पूरा लम्बाई के प्रकार प्रकार में मैंने अधिक अन्तर अनुभव नहीं किया । अतः मुझे यह सम्भव नहीं लगता है कि पहले यह एक शाफट इन्सैट या शाफट संख्या चौंतीस में एक गैलरी विमान थी। इसके अलावा सभी अदपदावर्शी गवाहों के इल ब्यान के अनुसार कि एक मध्य रेखा का प्रावधान भा, और इसके विपरीत इनका कोई विद्यमान न होने के गैसरी में चुनाव होने की तीसरी सम्भावना से इन्कार करता हूँ। इस प्रकार में यह महसूस करता हूँ. कि यह गम्भव है कि गैलरी में जानबूझकर परिवर्तन किया गया था। THE GAZETTE OF INDIA: JANUARY नौ, एक हज़ार नौ सौ पचानवे/PAUSA उन्नीस, एक हज़ार नौ सौ चौदह सात.सात.दो जैसे कि पहले भी कहा गया है, पुराने शाफट संख्या चौंतीस के समीप के चालीस हिप फेस को उस क्षेत्र में ज्यादा पानी रिसने के कारण जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचासी से अन्य कर दिया गया था । उन समय अट्ठाईस स्तर से हम फैस की दूरी आदा से ज्यादा दस से बारह फीट की थी । बाद में अट्ठाईस स्तर के समीप के चालीस डिप के जंक्शन पर अनंत मनय तक समान परिवहन करने के लिये रिर्टन घरखी स्थापित कर दी गयी । मो. कलीम ने यह बयान दिया है कि नालीरा डिप गैलरी को नम्ववर, एक हज़ार नौ सौ नवासी में फिर से शुरू किया गया जबकि श्री के. दस्त ने यह ध्यान दिया है कि इसको नवम्बर एक हज़ार नौ सौ नवासी के प्रथम सप्ताह में पूनः शुरू किया गया । श्री मिहीर कुमार चटर्जी , श्री शिवदास चटशी और श्री सी. डी. सिंह जैसे अन्य गवाहों ने यह स्थान दिया है कि चालीस डिप में इसको अट्ठारह नवम्बर एक हज़ार नौ सौ नवासी से पुन शुरू किया गया । अतः मेरा मानना है कि अट्ठाईस स्तर के समीप चालीस दिप फेस जो पुराने शाफ्ट संख्या चौंतीस से जुड़ गया था और जिसके कारण यह घातक दुर्घटना हुई, को दुर्घटना के ठोक पाँच दिन पहले आठ नवम्बर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे से पुनः शुरू किया गया । सात.सात.तीन अलगा सुददा यह है कि क्य शाफट संख्य चौदह से चालीस डिप गैलरी के जुड जाने के अन्य कारण और परिस्थितियां यो श्री पी. एल. बनर्जी यह दावा किया है कि शट संख्या चौंतीस और गैंगरी के बीच तीन मीटर ने भी ज्यादा के एक कोयला बैरियर के प्रधानक टूट जाने के कारण यह सम्बन्ध स्थापित हुआ। सात.सात.चार दुर्घटना के पहले, चालीस डिप फेस को लम्बाई का आकलन श्री राम शकर सरकार श्री शिव दास पटर्जी , श्री सी. डी. सिंह और श्रीमिहीर कुमार चटर्जी जैसे अन्य गवाहों द्वारा किया गया जो कि करीब चालीस से पैंतालीस फीट के बीस था, सात.सात.पाँच चालीस डिप गैमरी की लम्बाई और दुर्घटना स्थल के प्लान अवर्श एम बारह ) से निर्धारित पुराने शाफट संख्या तैंतीस के बारे उपरोक्त गवाहों के आकलन के आधार पर श्री पी. एल. बनजी डिप फेस के बीच का बैरियर तीन मीटर से पा : लेकिन मैंने यह स्वीकार नहीं किया है क्योंकि विमित गवाहों द्वारा बतायी भर्पी चालीस डिप फेत की लम्बाई केवल नेत्रवानुमान पर आधारित थी। और वास्तव में इसकी कोई नाप जो नहीं की गई थी । अध्याय-VIII इक्यासी यह सर्वविदित था कि नारायणकुरी सीम के चौबीस मीटर ऊप पुराने रानीगंज कोलियरी के नेगा सीम के कार्यस्थलों में पानी भगा इसमें अनेक पुराने शाफ्ट भी थे, जिनमें से कुछ की गहराई अभी तक श से । ऐसा है एक पुराना चौंतीस था, जो मलबे में तय हुआ घा और जिसकी गहराई मी ज्ञात नहीं की। बल प्रबंधन ने यह भयान दिया है कि उन्होंने उपलब्ध पुराने प्लान और वस्तावेज का मध्ययन किया, लेकिन इससे भी पुराने शाफ्ट की गहराई का पता नही चालथापि समी के कार्यस्थल के एक ए. एम. पी. ने शाफ्ट संवा चौंतीस की गहराई छियासी फीट होने का संकेत दिया, जोकि उस क्षेत्र नेगा सोम की गहराई के बराबर है। बान सुरक्षा महा ते एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में विकास की अनुमति देते हु बहुत ही सतर्क ये उन्होंने नारायणकुरी सोम तक पुराने शाप के आने का अाशंकाका रखते हुए कोर सेस्ट्रल एडवोस होल का प्रावधान करने की शर्त को इसमें शामिल कर दिया एक हज़ार नौ सौ अठासी में जब पुराने शाफट सं.-चौंतीस समीप विकास कार्य हो रहा था तब खान प्रबंधन ने भी ज्यादा पानी के रिसाव की बात देखी थी । जैस कि पहले भी देख किया गया है। उन्होंने विकास कार्य रोक दिया और कोयला खान नियमावली, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के अन्तर्गत आपेक्षिक शर्तो के अनुसार खान सुरक्षा महानिदेशालय की सूचिस किया चूंकि सं.-चौंतीस शाफ्ट का वास्तविक स्थल संदेहा स्वयं था अतः प्रबंधन ने अपब्ध दस्तावेजों और सूचना प्राप्त करने के अन्य स्त्रोतों के माध्यम से जानकारी लेनी चाही ताकि शाफ्ट मं. चौंतीस की गहराई निश्चित की जा सके । तथापि, उनको इसकी महराई के बारे में कोई निश्चित सूचना नहीं मिली । अहोंने प्रत्यक्ष निरीक्षण करके भी शाफ्ट सं. -चौंतीस के स्थान को निश्चित करने का किया, लेकिन वे असफल रहे क्योंकि शाफ्ट सं. चौंतीस मलबे से भर गया था। बाद में, ज्ञान प्रबंधन ने उनतालीस दिन के समीप सत्ताईस स्तर से एक संवा गोरहोल करके शापट का स्थान निश्चित करने का प्रयास किया। लेकिन न दोरहोस का संपर्क पुराने राम्पट से हुआ और न इससे पानी का रिसाव हुआ। । खान प्रबंधन से यह स्वीकार किया कि पुराने प्लान में पता लगाने प्लान के छोटे हो जाने की संभावना और सर्वेक्षण शौर नक्ला बनाने में हुयी चूक के कारण वर्किंग में दशोपी गयी शाफ्ट सं. चौंतीस की स्थिति में गलती की संभावना थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शायद लवे बोरहोल को दिशा में परिवर्तन हो गया था। स्पष्टतः करीब चालीस मीटर लंबे एक बहोत द्वारा केवल तीन मीटर व्यास के एक पुराने शाट के स्थान को पाने का तरीका बहुत पुराना था । तीन.एक साक्ष्यों का विश्लेषण गरफ्ट सं. तीन.एक का एक्सटेंशन आठ.दो पानी का प्रसामान्य रिमाव आठ.तीन चालीस डिप का पुनः शुरू किया जान नौ.चार एडवांस बोर होल आठ.पाँच स्तरों का खिसकना आठ.छः पलीर पत्थर का होला होना आठ.सात दुर्घटना का कारण आठ.दो एक हज़ार नौ सौ अठासी में जानकारी करने और संभाि पुराने शाफ्ट सं.-चौंतीस के बाइपास द्वारा विका कार्य की दिशा में परिवर्तन करने का सही निर्णय लिया। छब्बीस, सत्ताईस और पच्चीस स्तरों पर पानी के असा मान्य रिसाव के कारण प्रोजेक्शन में परिवर्तन का आवेदन किया गया । इस क्षेत्र से करीब एक सौ मीटर की दूरी पर संशोधित प्रोजे की मंत्ररी खान सुरक्षा महा द्वारा मार्च, एक हज़ार नौ सौ अठासी में दी गयी आठ.तीन नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी में संशोधित प्रोजेक्शन एक हज़ार नौ सौ अठासी के अनुसार जब विकास कार्य हो रहा था तब बयालीस कास कट भाग में एक बाइक संपर्क में आया । बढ़ने में एक मया कार्य क्षेत्र इंटने के उद्देश्य मो.. कलीम ने सर्वेक्षण कार्यालय में का अवलोकन किया और अट्ठाईस स्पर के समीप चालीस डिग फेस को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया। जैसा कि पहले भी उल्लेख किया गया है। इस फेस में किया जा रहा कार्य एक हज़ार नौ सौ अठासी से बंद कर दिया गया था। प्रबंधन के इस कथन कि इस क्षेत्र में केवल वायु मंदार में सुधार करने के लिये आठ नवंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे से चालीस डिपो को पुनः शुरू किया गया था, को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि बागु संचार प्रौसी में सुधार करने के लिए अन्याय भी मौजूद थे। उनचास डिप के पास कार्य शुरू करके भी कलोम ने कलसा खानशिवली एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के प्रावधानी का सष्ट उल्लंघन किया, जिसके द्वारा अपेक्षित था कि कार्य शुरू करने के पूर्व खान सुरक्षा महा से तुमति ली जाए दूसरे शब्दों में ज्यादा पानी रिसाव के कारण अनवरी, एक हज़ार नौ सौ अठासी में शाफ्ट [भाग II --खंड तीन ] सं. चौंतीस के पास अब कार्य एक बार बंद कर दिया गया था, तब कोयला खान निथमायली, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के अन्तर्गत ऐसे कार्यो को अपने आप पुनः शुरू करने के लिए मो. कलोम प्राधिकृत नहीं थे । इस प्रकार मैं समझता हूं कि मो. कलीम ने ब्रान सुरक्षा महा की अनंमति के बिना प्रौर कोयल। स्नान नियमावली, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस का उल्लन करते हुए चालीस डिप, जो पानी जमाव क्षेत्र के साठ मीटर के भीतर स्थित है, का विकास कार्य आठ नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी से शुरु कर दिया । भारत का राजपत्र : जनवरी नौ, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे / पौष उन्नीस, एक हज़ार नौ सौ चौदह आठ.चार अनेक गवाहों ने यह बयान दिया है कि जून एक हज़ार नौ सौ नवासी से एक नियमित कार्यदल द्वारा उचित तर्र के से एडवांस ओरहोल की ड्रिलिंग बंब कर दी गयी थी बाव में, एडवांस बोरदोल को कथित रूप से सामान्य मजदूरों द्वारा ड्रिल करवाया जाता था. एसी ड्रिलिंग के लिये कथित रूप से काम पर लगाये गये ये सामान्य मजदूर नियमित नहीं थे बल्कि उनको मैमित्तिक आधार पर काम में लगाया गया था। ये कर्मकार अपेक्षाकृत प्रकुशल कर्मकार थे जबकि नियमित ड्रिलर कुशल कर्मकार होते हैं । चालीस डिप के दीवारों में किसी फ्लैक बोरहोल का भी निशान नही है । यह संकेत देने के लिये भी कोई रिकार्ड नहीं है कि ऐसे बोरहोल ड्रिल किये गये थे । एडवांस बोरहोल को ट्रिल करने वाले कर्मकारों को प्रबंधन द्वारा गवाह के रूप में पेश किया गया । एजेट सह-प्रबंधक द्वारा ऐसे एउयास बोरहोल के ड्रिलिंग का पर्यवेक्षण करने के लिये किसी सक्षम प्राधि कारी की नियुक्ति भी नहीं की गयी थी। एडवांस बोगटोके प्रावधानों से संबंधित म्यूमतम सांविधिक रिकार्ड रखने सहित किस अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के न होने से, ऐसे बरहील की ड्रिलिंग के लिये नियमित कर्मकारों और ड्रिलिंग के पर्यवेक्षण के लिये सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति न करने से, ऐसे बोरोल की लंबाई और दिशा मापने को पद्धति और मेरे निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर फ्लैक बोरहोल के न होने से मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि चालीस डिप फेस में सेन्ट्रल बोरहोस भी दिल नहीं किया गया था । आठ.छः कुछ अन्य साक्ष्य भी हैं, क्योंकि सुरक्षा अधिकारी श्री पी. एल. बनर्जी ने बताया है कि एक बड़े भूस्तर के खिसकने के कारण चालीस डिप फेस और शाफ्ट सं. - चौंतीस के बीच का कोयला बैरियर टूट गया । इंडियन माइन मैनेजर्स एसोसिएशन का भी यही तर्क है । श्री चंद्रधारी बराई , जब वे चालीस डिप फेस में दूसरी बार गाट फायर कर रहे थे तब उन्होंने फेस के भागे और पीछे छत को घट्टान टूटने की आवाज सुनी। चालीस डिप और अट्ठाईस स्तर के जंयपान से भूतल पत्थरों के बड़े टुकड़ों का खिसकना और सतह पर पोटहोल बन जाना भूस्तर खिसकने का साक्ष्य बताया गया है। यदि षट्टान टूटने की प्रायाज हुई होती तो वह न केवल श्री चन्द्रधारी बराई को सुनाई देती बल्फि अट्ठाईस लेखन के आसपास उपस्थित अन्य फर्मकारों को भी सुनाई देती । लेकिन हम बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि अन्य कर्मकारों से किसी चीज की टूटने की आवाज सुनी। मेरे विचार से सत्ताईस सार और चालीस डिप के बीच एक मीटर से भी कम मोटे कोयला रिष और छत पर किसी भी बृष्टव्य प्रमाण के न होने सहित पचास डिप के करीब बड़े भूस्तर मूमेंट के बारे में किसी सबूत के न होने के कारण इस प्रकार की घटना के होने की संभावना को नकारता है । अतः यह कहना उचित नहीं होगा कि ऊपर स्थित नेगा सीम में पुराने और परित्यक्त स्टूक के टूटने के कारण ये भूस्तर मूमेंट से चालीस डिप मैलरी और शाफ्ट सं. चौंतीस के बीच का कोयला यदि बैरियर टूट गया । यदि ऐसा कोई भूस्तर मूवमेंट हुआ रहता तो इससे कहीं-कहीं पॉटहोल होने की बजाए भूमि का बहुत बडा भाग नीचे खिसक गया होता। पॉटहोल का बनना पुराने कार्यस्थल से पानी निकालने के बाद ग्रामतौर पर देखी जाती है । जब प्रचारक गानी अंदर आया तो शायद पत्रीका ढीला खड़ अपनी वास्तविक स्थिति से करीब आधे पिलर की दूरी पर चला गया । किसी भी स्थिति में चालीस टिप और अट्ठाईस स्तर के जंक्शन की सतह पर पत्थर ढोला होने की घटना का हग घातक दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है । आठ. छः यह कहना उचित नही होगा कि दस लिप की रातह और बीस स्तर जंक्शन से बड़े पत्थरों की चट्टानों के खिसकने का चट्टानों के करीब प्राधा पिलर की दूरी पर चले जाने का कारण भूस्तरोय मूवमेंट था, जिसके कारण यह घातक दुर्घटना हुयी । यह संभव हो सकता है कि मूलतः हलका होने के कारण फ्लोर स्टोन ढीला हो गया हो । तीन हज़ार एक सौ अट्ठाईस GI/बानवे-चार आठ. सात साक्ष्य के आधार पर मैं यह समझता हूँ कि उस पर स्थित परित्यक्त और पानी से भरे नेगा सीम से जुड़े नारायणकुरी सोम में एडवांस चालीस डिप गैलरी और पानी से भरे शाफ्ट सं. -चौंतीस के बीच संधेि संपर्क के कारण यह घातक दुर्घटना हुई । नारायणकुरी सीम में पानी से भरे शाफट सं - चौंतीस की ओर बढ़े अट्ठाईस स्तर के समीप दस डिप गैलरी में सेन्ट्रल और फलैक बोरहोल न होने के कारण यह दुर्घटना हुई । ऐसे वो रहोल का होना कोयला खान नियमावली, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के अन्तर्गत अनिवार्य है तथा खान सुरक्षा महा की कार्य अनुमति द्वारा अपेक्षित है । इसके अलावा अट्ठाईस स्तर के समीप चालीस डिप गैलरी की खान सुरक्षा महा द्वारा कार्य करने के लिये गैर मंजूरो कृत क्षेत्र में पानी से मरे शाफ्ट सं. चौंतीस की ओर बढ़ाया गया था । अतः गेर मंजूरी कृत क्षेत्र जहां ज्यादा पानी रिसने के कारण जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अठासी में खनन कार्य बंद कर दिया गया था, को गैलरी में कार्य शुरू करने के पांच दिनों के भीतर यह घातक दुर्घटन। पी। यह गैर मंजूरीकृत क्षेत्र खान सुरक्षा महा, द्वारा खनन कार्य के लिये मंजूर क्षेत्र से करीब एक सौ मीटर की दूरी पर था । इस प्रकार यह घातक दुर्घटना अभियोज्य नवीय लापरवाही के कारण थी । श्रध्याय IX इक्यानवे वायित्य का विश्लेषण नौ. दो एजेंट व प्रबंधक नौ. तीन सुरक्षा अधिकारी नौ. चार सहायक प्रबंधक नौ. पाँच सर्वेक्षक नौ.छः उच्च प्रबंधक नौ.सात श्रन्य नौ. एक दुर्घटना के कारणों का पता लग जाने के पश्चात् इसके लिए जिम्मेदार कौन था इसका पता लगाना होगा। दुर्घटना के कारणों से यह स्पष्ट है कि यह अभियोज्य मानवीय लापरवाही के कारण से हुई। निम्नलिखित पैराग्राफों में मैंने उत्तरदायित्व के निर्धारण के लिए साक्ष्यों का विश्लेषण किया है :-- नौ.दो.एक मो. कलीम जून, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी से खान प्रबंधक और जुलाई, एक हज़ार नौ सौ अठासी से एजेंट-सह-प्रबंधक हैं। अतः वे दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी से तेरह नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ नवासी तक की खान की घटनाओं से पूर्णतः परिचित हैं। खान के पुराने शाफ्ट सं. तैंतीस और चौंतीस के समीप छब्बीस, सत्ताईस और अट्ठाईस स्तर के पास के कार्यस्थलों में विसम्बर, एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में ज्यादा पानी की रिमाष की घटना देखी गयी और पूर्व एजेंट श्री के. के. दास द्वारा जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अठासी में उस क्षेत्र में कार्य स्थगित कर दिया गया था। तब उन्होंने ज्यादा पानी रिसाव को देखते हुए विकास की दिशा में परिवर्तन करने के लिए खान सुरक्षा महानिदेशक के पास आवेदन दिया। जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अठासी में खान सुरक्षा महा. को दिए गए संशोधित आवेदन सहित शाफ्ट सं. चौंतीस को एक सौ मी. की दूरी से बाइपास करने की प्रोजक्शन योजना के बारे में मो. कलीम को प्रबंधक की हैसियत से जानकारी थी । संशोधित प्रोजक्शन को मंजूर करते हुए मनुमति पन्न की प्रति खान सुरक्षा मा द्वारा प्रबंधक मो. कलीम को मार्च, एक हज़ार नौ सौ अठासी को भेजी गयी । एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में, शाफ्ट सं. चौंतीस की संभावित स्थिति की और सत्ताईस स्तर से एक लंबा बोरहोल ड्रिल किया गया। चूंकि संबे योहोल का संपर्क शाफ्ट सं. चौंतीस से नहीं हुआ और बोरहोल से पानी का भी रिसाव नहीं हुआ, प्रतः मो. कलीम ने यह अनुमान लगाया कि पुराना शाफ्ट केवल नेगा सीम तक ही था । सडा. इन प्रा आधार पर मो. कलीम जैसे एक अनुभवी प्रबंधक के लिए यह समझना उचित नहीं था कि पुराने शाफ्ट सं. चौंतीस का विस्तार केवल नेगा सीम तक ही था । नौ.दो.तीन नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी में जब खान सुरक्षा महा द्वारा मंजूर नियमित क्षेत्रों के कार्यस्थल में बहुत सारे डाइक मिले तो मो. कलीम ने सर्वेक्षण कार्यालय से संपर्क करके, और सर्वेक्षक से प्लान के बारे में विचार-विमर्श करके अट्ठाईस स्तर फेम के समीप चालीस शिप में कार्य पुनः शुरू करने का निर्णय लिया । उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खान सुरक्षा से संबंधित खान सुरक्षा महा के पूर्व के सभी मनुमति पत्नों और भन्य पत्नाचारों का अध्ययन किया । इस प्रकार मो. कलीम इस बात से पूर्ण रूप से अयगत थे कि ज्यादा पानी रिसाव के कारण जनवरो, एक हज़ार नौ सौ अठासी में शाफ्ट सं. चौंतीस के समीप कार्य बंद कर दिया गया था। उन्हें कोयला खान नियमावली एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी थी, जिसके द्वारा यह अपेक्षित था कि ज्यादा पानी के रिसाव के कारण जिन कार्य स्थलों को बंद कर दिया गया है उनको खान सुरक्षा महा की लिखित पूर्व अनुमति के बिना भागे नहीं बढ़ाया जा सकता । चूंकि ऐसी कोई प्रनुमति प्राप्त नहीं की गयी थी अतः नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी से उनके द्वारा स्वयं ही चालीस डिप को पुनः शुरु कर दिए जाने की घटना कोयला बास नियमावली एक हज़ार नौ सौ सैंतीस के विनियमन एक सौ सत्ताईस का जानबूझकर किया गया उल्लंघन है । नौ. दो.दो मो. फलीम ने यह भी स्वीकार किया है कि खान सुरक्षा महा के अनुमति पत और कोयला खान नियमावली एक हज़ार नौ सौ सैंतीस के अन्तर्गत अपेक्षित एडवांस सेन्ट्रल और फ्लैक बोरहोल तथा कार्य का प्लान का रिकार्ड नहीं रखा गया । उन्होंने एडवांस दोल के ड्रिलिंग का पर्यवेक्षण करने के लिये किसी सक्षम अधिकारी को भी प्राधिकृत नहीं किया। यह कोयला खान नियमावली एक हज़ार नौ सौ सैंतीस के विनियमन एक सौ सत्ताईस का स्पष्ट उल्लंघन था। एडवांस बोर होल को ड्रिल करने के लिये उन्होंने नियमित ड्रिलिंग गंग का भी प्रावधान नहीं किया और इसके स्थान पर इस कार्य के लिये सामान्य मजदूरों जैसे प्रकुमल कर्मकारों को नैमित्तिक प्राधार पर कार्य लगाया । यह दुःखद बात है कि मो. फलीम , जिनके पास वर्षों का अनुभव है। इस स्पष्ट खतरे को पहचान नहीं सके। यह खतरा मचानक नहीं भाया बल्कि पर्याप्त पूर्वसूचनाओं के लक्षण के बाद ही आया। मो. फलीम ने या तो आत्म विश्वास के कारण या इस गलत धारणा के कारण, कि शाफ्ट सं. चौंतीस नेगा सोम के आगे नहीं गई है। खतरे को भांपने में असमर्थ रहे जिसके परिणामस्वरूप यह बालक दुर्घटना हुयी। प्रतः मैं उन्हें तेरह नवंबर एक हज़ार नौ सौ चौरासी को महाबीर खान में घटित दुर्घटना का प्रमुख घोषी व्यक्ति मानता हूँ। लेकिन दुर्घटना के मो. कलीम को प्रमुख दोषी मानते हुये भी साक्ष्य देने में उनकी बृढ़ता तथा जिस रीति से उन्होंने सच्चाई से बयान दिया है, प्रशंसनीय है। उन्होंने यह भी बयान दिया है कि वे खान-कार्यों का संचालन कर रहे थे और उन्हें कोयला उत्पादन की उस सीमा के बारे में निर्देश नहीं दिया गया जिसके बाद सुरक्षा विनयमनों का उल्लंघन हो सकता है। जांच के शेरान उचित व्यवहार के लिये मो. फलीम निश्चय हो प्रशंसा के पास हैं। [PART II - SEC तीन ] नौ.तीन.दो श्री पी. एल. बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पुराने प्लान का अध्ययन किया और उन्हें पता चला कि शाफ्ट सं.. --चौंतीस में मलवा भरा है । कार्यक्षेत्रों का प्लान बनाने के लिये उन्होंने खान कार्यालय में उपलब्ध विभिन्न प्लानों का उपयोग किया। सतह पर शौफ्ट सं. चौंतीस उनको नजर नही आई । जनवरी एक हज़ार नौ सौ अठासी में उन्होंने सत्ताईस स्तर के पास ज्यादा पानी का रिसाव देखा था और इसके लिये एक लंबा मोहोन ड्रिल करवाने का इंतजाम किया था। उनके बयान के अनुसार लंबे बोर होल को घुमाव की सभावना के बारे में भी उनकी जानकारी थी। उन्होंने खान सुरक्षा महा. की एक हज़ार नौ सौ चौरासी की अनुमति और एक हज़ार नौ सौ अठासी की अनुमति का अध्ययन किया था और अनुमति के शर्तो से वाकिफ पे अट्ठारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी से चालीस सिप फेस को पुनः शुरू किये जाने के बारे में भी उनकी जानकारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि चालीस डिप फेस से पानी का रिसाव नहीं हो रहा था और आठ नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी से कार्य शुरू किये जाने के बाद फलैक और सेन्ट्रल बोर होल के वायरे में फेस को प्रागे मढ़ाया जा रहा था। लेकिन उन्होंने बयान दिया कि प्रत्येक कार्यक्षेत्र फेस में एडवांस बोरोल को आये बढ़ाने के पहले इन बोरहोलों की ड्रिलिंग सुनिश्चित करने के लिये उनके पास कोई पद्धति नहीं थी। उन्होंने कार्यक्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान ऐसे बोहोलों की मानिटरिंग सुनिश्चित की तथापि उनके बयाम के अनुसार वर्किंग फेसो के निरीक्षणों की कोई निर्धारित समय सूची नहीं थी। मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि गैर मंजूरी कृत कार्य क्षेत्र में ज्यादा पानी के रिसाव के बावजूद एडवांस बोर होल तैयार किये बिना चालीस डिप फेसको भने बढ़ाये जाने के कारण यह घातक दुर्घटना हुयी इम उल्लंघनों के बारे में भी पी. एल. बनर्जी को जानकारी थी । इस प्रकार उन्होंने कोयला खाम नियमावली एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन इकतालीस ए और बी के घन्तयंत छपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया, क्योंकि पानी भर जाने के एक संभावित स्रोत के रूप में शाफ्ट सं. चौंतीस के बारे में उन्होंने एजेंट-सह प्रबंधक को सूचना नहीं वी। अपने निरीक्षण के दौरान न तो उन्होंने सेन्ट्रल और फूलैक बोरहोल जिल किये जाने पर ध्यान नहीं दिया बस्कि कोयला खान मि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन इकतालीस ए के साथ पठित कोयमा खान नि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस का उल्लंघन करते हुये बिना बोरहोल बनाये चालीस डिप फेस को घामे बढ़ाने की जानबूझकर प्रनुमति दी । प्रतः ग्रह् स्पष्ट है कि श्री पी. एल. बनर्जी मे फोयला खान विनियमन एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन इकतालीस ए के साथ पठित विनियमन एक सौ सत्ताईस का उल्लंघन करते हुए चालीस लिप फेस के एडवांस बोरहोल की सुरक्षात्मक डिखिम पद्धति को सुनिश्चित करने के लिये भी कोई उपाय नहीं किया। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि संभावित खतरों को जानते हुए श्री पी. एख. बनर्जी ने कोयला खान नियमावली एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन इकतालीस ए के अन्तर्गत उपेक्षित सुरक्षा उपायों के पालन करने के लिय उचित कदम नहीं उठाया । अतः इस दुर्घटना के लिये वे मी उत्तरदावी है। नौ.तीन.एक क्रमानुक्रम में श्री पी. एल. बनर्जी खान में मो. कलीम के बाद अधीनस्थ अधिकारी है । उन्होंने महाबीर खान में जून एक हज़ार नौ सौ अठासी से सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्य किया । एक हज़ार नौ सौ तिरासी से उन्होंने उक्त खाम के सहायक प्रबंधक के रूप में भी कार्य किया। इस प्रकार वे एक हज़ार नौ सौ तिरासी से लगातार खान में कार्य करते प्रा रहे थे। उनकी ड्यूटी में पानी भरने की घटना सहित सभी संभावित खतरों के स्रोत के बारे में प्रबंधक को जानकारी देना शामिल है। उनको खान के विभिन्न भागों का अवलोकन करके प्रबंधक को इस बात की रिपोर्ट देनी होती है कि खान अधिनियम और इसके असर त बनाये गये विनियमनों का पालन किया जा रहा है या नहीं । नौ.चार.एक महाबीर खान में दो सहायक प्रबंधक थे। एक का माम श्री के. दस और दूसरे का नाम श्री एस. के. सेनगुप्ता है। श्री के बस में सहायक प्रबंधक के रूप में महाबीर खान में एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में कार्य करना प्रारंभ किया। उन्होंने सात नवंबर और बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी के बीच चालीस पिकाबो बार निरीक्षण किया और बारह नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी की दूसरी पारी में भी इसका निरीक्षण किया। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि ज्यादा पानी रिसाव के कारण चालीस टिप फेस में ऊनवरी एक हज़ार नौ सौ अठासी से काम बंद कर दिया गया था। उन्हें इस बात की भी जानकारी था कि उपस्थित मेगा सीम में पूर्णतः पानी भरा है। उन्होंने बयान दिया कि चालीस सिप फेस उचित लम्बाई के एडवांस सेन्ट्रल और फजैक बोरोस का प्रावधाम किया था लेकिन इतना साफ बयान देने के बावजूद भी तो उन्होंने इस उद्देश्य के लिये रखे जा रहे किमी रिकार्ड से इस बयान को साबित किया न ही ऐसा स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत किया जो यह कह सके कि ऐसे बोरहोल नियमित रूप से बनाये जाते थे। उन्होंने यह भी साबित नहीं किया कि गंबरी आगे बढ़ाये जाने से पहले पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा ऐसे बोरहोल की उचित जांच होती थी । नौ.चार.दो श्राः इस क्षेत्र के सहायक प्रबंधक के रूप में वे यह सुनिश्चित करने में असफल रहे कि को. खा. नि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के साथ पठित को. खा. नि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन पर की अपेक्षाओं के अनुमार चालीस डिप फेस में एडबास बोरहोल की ड्रिलिंग हो रही थी। इस प्रकार से उन्होंने भी कानून का जानबूझकर उल्लंघन किया जिसके कारण दुर्घटना हुयी और इस दुर्घटना के लिये में भी उतरवायी है। भारत का राजपक्ष : जनवरी नौ, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे / वौष उन्नीस, एक हज़ार नौ सौ चौदह नौ.चार.तीन दूसरे सहायक प्रबंधक श्री एस. के. सेनगुप्ता ने खान में अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ नवासी से ही कार्यभार ग्रहण किया। में कुछ दिनों के अवकाश पर थे इसके बाद उनकी किसी अन्य विकास कार्य का जिम्मा दिया गया और उन्होंने दुर्घटना स्थल के तैंतालीस कास-कट क्षेत्र का पर्यवेक्षण का कार्य नहीं किया । इस प्रकार इस घातक दुर्घटना के लिये वे उत्तरखापी नही है । नौ.इक्यावन श्री पी. एल. ठवकर एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में महाबोर खान के सर्वेयर थे। उन्होंने जनवरी एक हज़ार नौ सौ अठासी में सत्ताईस स्तर के ज्यादा पानी के रिसाव की घटना देखी। उन्होंने इस बात को भरनों सांविधिक सर्वेक्षक डायरी में रिकार्ड किया तथा यह भी सूचना दर्ज की कि पानी से भरे शाफ्ट सं. चौंतीस का कार्य क्षेत्र बढ़ रहा है। इस डायरी को प्रबंधक मो. कलीम द्वारा प्रति हस्ताक्षरित किया गया। उनकी यह ड्यूटो थी कि वे प्रबंधक को इस बात की सूचना में कि हो रहा कार्य पानी से अपे प्यापट सं. चौंतीस के पास पहुंच रहा था। उन्होंने इस मामले में भी ऐसा हो । पूर्ण एजेंट श्री के. के. दास मे यह बयान दिया कि उन्हें इस बात का स्मरण है कि श्री पी. एल. ठक्कर ने उन्हें एक रिपोर्ट दी थी कि सत्ताईस स्तर का कार्य क्षेत्र परित्यक्त फाफ्ट मं. चौंतीस की और बढ़ रहा था। मो. कलीम ने भी स्वीकार किया कि श्री पी. एल. ठक्कर की डायरी द्वारा पानी भर जाने के खतरे को और भी उनका ध्यान प्राकर्षित किया गया था। इस प्रकार श्री पी. एल. ठक्कर से को. पा. टि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन अपनी ड्यूटी का उचित ढंग से पाल किया। नौ.पाँच.दो इस स्थिति में, मैं दुर्घटना के लिये श्री पी. एल. ठक्कर को उत्तरदायी नहीं मानता हूं । आठ नवंबर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस मे चालीस डिप की गैलग़ में कार्य शुरू होने के बारे में महाप्रबंधक को जानकारी के संबंध में जांच न्यायालय के समक्ष बयान दिया हो। इस बात का भी कोई साक्ष्य नहीं है कि महाप्रबंधक को इस बात की जानकारी थी कि सुरक्षा विनियमनों का उल्लंघन किया जा रहा था और गैलरी को बढ़ाते समय एडवांस सेन्ट्रल ओर फलैक ओर होल नहीं बनाये गये थे । महाप्रबंधक ग्यारह खानों के प्रभारी हैं। जिनमें से एक महावीर खान है। उनके लिये यह संभव नहीं था कि ये को. स्था. मि. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियमन एक सौ सत्ताईस के अनुसार एडवांस बोरहोल बनाने के लिए खान सुरक्षा कहा की अनुमति में निहित शर्तों के प्रवर्तन का पर्यवेक्षण करें। तवनुसार, मैं कुनुस्तोरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक को इस दुर्घटना के लिये उत्तरदायी नह मानता हूं । नौ.छः.एक जिरह के दौरान मो. कलोम ने यह दिया कि पर्यवेक्षकों से विचार कर केही वे कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करते रहे थे। यह एक संयुक्त निर्णय था और यह महाप्रबंधक द्वारा जो कि उनका वरिष्ठ अधिकारी था, आरोपित स्वेच्छाचारी निर्णय नहीं था । इसके अलावा कार्य के दौरान यदि कोई समस्या थी तो ये उत्पावन लक्ष्य पर विचार-विमर्श करने और इसमें संशोधन करने के लिये स्वतंत्र थे। उन्होंने इस प्रारोप का खंडन किया कि उत्पादन लक्ष्य में कमी होने की संभावना के कारण उन्होंने अनधिकृत प्रोडेक्शन में स्थित खान में बेरोक-टोक स्वनन कार्य किया। कार्य अनुमति के लिए खान सुरक्षा महा. को प्रस्तुत प्रावेदन के संबंध में उन्होंने बयान दिया कि महाप्रबंधक को औपचारिक प्रनुमति अपेक्षित नहीं है फिर भी उन्होंने ऐसे मामलों पर महाप्रबंधक से विचार किया। उन्होंने बयान दिया कि खान सुरक्षा विनियमनों के प्रवर्तन के लिये एजेंट सह प्रबंधक के रूप में उनके पास पर्याप्त पाकियाँ थीं। उनके ठीक ऊपर वरिष्ठ अधिकारी कुनस्तोरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक थे। महाप्रबंधक को क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी, जो उनका स्टाफ कर्मचारी है, द्वारा सुरक्षा मामलों पर सलाह वो गयी थी । मो. कलीम ने पानी भर जाने के संभावित खतरे के बारे में क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी और महाप्रबंधक से विचार-विमर्श किया था । मो. कलीम ने यह बयान दिया है कि इन अधि कारियों ने उनको सदैव खान सुरक्षा महा की "मनुमति" का पालन करने की सलाह दी थी। इस प्रकार मो. कलीम ने यह स्वोकार किया कि आठ नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी से अट्ठाईस स्तर के पास चालीस लिप में उनके भावेश से कार्य शुरू किया गया और इससे उनके वरिष्ठ अधिकारियों का कुछ लेना-देना नहीं था। इसके अलावा ऐसा कोई गवाह नहीं है जिसने नौ.सात.एक भोवर मन और रिसदार जैसे पर्यवेक्षी कर्मचारियों द्वारा भी चूके हुयी है। इन चूकों का विश्लेषण इस प्रकार है :नौ.सात.दो श्री निहिर कुमार चटर्जी प्रोवरमैन जो सामान्य पारी कहे जाने वाली प्रथम पारी में स्थायी रूप से तैनात थे । उन्होंने बयान दिया है कि चूंकि उनका कार्य विविध प्रकृति का है और उनको एडवांस बोरहोल के पर्यवेक्षण के लिये प्रौपचारिक रूप से नियुक्त नहीं किया गया था, बल्कि एजेंट-सह प्रबंधक मो. कलीम आमतौर पर उनसे ऐसे बोरोल के ड्रिलिंग पादि का पर्यवेक्षप्प करने को कहा करते थे । श्री सी. डी. सिंह बयालीस कासकट क्षेत्र के शिफ्ट ओवरमैम थे और बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी की पहली पारी में वे डयुटी पर थे। श्री शिवदास चटर्जी भोयरमैन और श्री फौजवार सिंह अन्य भोवर मैन थे जिनको बारह नवंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी को क्रमशः दूसरी और तीसरी पारी में डयूटी पर लगाया गया था। नौ.सात.तीन श्री निहिर कुमार चटर्जी और श्री मी. डी. सिंह बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को पहली पारी में चालीस सिप फेस में पाँच दशमलव चार मीटर लेबे एमवास सेन्ट्रल बोरहोल और वो फलैंक बोर शेल की निश्चित ट्रिलिंग करने का दावा किया है। श्री शिवदास चटर्जी मे उसी दिन की दूसरी पारी में जन एडवांस बोर होनों की नापजोख करने का दावा किया है। इन सभी भोवर मैनों ने यह दावा किया है कि चालीस डिप फेस में ज्यादा पानी का रिसाव नहीं नौ.सात.चार, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को अट्ठाईस स्तर के समीप चालीस शिप फेस में कोई एडवांस बोरहोल नहीं या और उसी दिन फेस से ज्यादा पानी का रिसाव है। रहा था। अतः एडवांस बोरहोल की ड्रिलिंग और ज्यादा पानी न रिसने के संबंध में इन सोबर मेनों के बयान पर मैं विश्वास नहीं करता हूं । नौ.सात.पाँच श्री फौजदार सिंह ही अकेले तेरह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी की तीसरी पारी में जब दुर्घटना हुयी थी, ओवर मैन को सयुटी पर थे और उनके चार्ज में अधिक दूरी पर स्थित तीन क्षेत्र थे । प्रतः दुर्घटना होने के पूर्व चालीस डिप फेस का निरीक्षण करने का अवसर उन्हें नहीं मिला । नौ.सात.छः. श्री राम शंकर सरकार औौर दूदन पाण्डेय बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी की दूसरी और तोसरी पारी में बयालीस क्रासकट क्षेत्र में ड्यूटी पर थे। मैं उनके बयान पर भी विश्वास नही करता कि चालीस डिप फेस में एडवांस बोरहोस थे और फेस में से ज्याष पानी का रिसाव नहीं हो रहा था। नौ.सात.सात. श्री चंद्र धारी बराई बारह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी की तीसरी पारी में चालीस डिप फेस के शाट फायरर की ड्यूटी पर थे। मैं उनके इस बयान पर भी विश्वास नही करता कि उन्होंने दुर्घटना वाले दिन तेरह नवंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को शाट फायर करने के पहले चालीस डिप फेस के एडवांस और फलैक बोरहोल की जांच कर ली थी । THE GAZETTE OF INDIA : JANUARY नौ, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे / PAUSA उन्नीस, एक हज़ार नौ सौ चौदह नौ.सात.आठ खान सुरक्षा का प्रथम उत्तरदायित्व प्रबंधन पर है। खान के सहायक कर्मचारियों से यह अपेक्षा होती है कि वे उनके आदेशों का पालन करें । मैंने पहले भी कहा है कि इस बात की जानकारी एजेंट सहप्रबंधक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को थी कि चालीस डिप फेस में एडवांस वोरहोल ड्रिल नहीं किये गये है और इससे ज्यादा पानी रिस रहा है । यदि एजेंट सह-प्रबंधक और अन्य वरिष्ठ कर्मचारी सतर्क रहते और खान सुरक्षा के अपने उत्तरदायित्व के प्रति सतर्क रहते तो उन्होंने एडवांस बोरहोल की ड्रिलिंग करवा ली होती और ज्यादा पानी के रिसाव की ओर ध्यान दिया होता । उनके द्वारा स्थिति को हाथ से निकलने देने के कारण अधीनस्थ कर्मचारियों जैसे भोवरमैनों, सिरदारों तथा सोट फाइररों को गलत संकेत मिले । अतः उनकी गल्तियों के बावजूद भी मैं सर्वश्री मिहिर कुमार चटर्जी , सी. डी. सिह , शिबदास चटर्जी राम शंकर सरकार , दोदन पाण्डे चन्द्रधारी बराई को घातक दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नही ठहराता हूं । नौ.सात.नौ पानी भर जाने के कारण हुई अधिकांश दुर्घटनाओं तथा श्रापदा के कारणों का विश्लेषण यह दर्शाता है कि खान में कार्यरत उच्चाधिकारी मूल रूप से जिम्मेदार होते है, परन्तु सामान्य कर्मकार तथा उनके पर्यवेक्षकों जैसे सोटफाइररों, सिरदारों तथा श्रोवरमैन के लिए सुरक्षा पैरामीटर की जानकारी अपेक्षित है सामान्यतः पानी भर जाने के कारण हुयी किसी दुर्घटना पहले कुछ अपसामान्य संकेत तथा लक्षणों जैसे बहुत अधिक पानी की सोपेज इत्यादि होती है । यह जरूरी है कि भूमिगत कोयला खानों में काम करने वाले प्रथम स्तर के पर्यवेक्षक तथा कर्मकार ऐसे सूचच लक्षणो / कारण की पहचान कर उन्हें प्रबन्धन के उच्च स्तर की जानकारी में लाएं । यह आवश्यक है कि पर्यवेक्षकों तथा कर्मकारों को इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और सुरक्षा संबंनी ज्ञान उन्हें दिया जाना चाहिए । नौ.सात.दस कमकारों के निरीक्षकों के संस्थान तथा सुरक्षा समिति को इस आशय से कानूनी समर्थन दिया गया है कि कमकारों की सुरक्षा में संस्थानों के क्रियाकलाप दुर्घटनाओं तथा गम्भीर संकट की घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस मामले में कम कारों क निरीक्षक तथा सुरक्षा समिति उनसे अपेक्षित उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे । कमकारों के निरीक्षक ने स्वीकृत क्षेत्र में चालीस डिप को पुनः प्रारम्भ करने के कारणों के बारे में पूछताछ नहीं की। उन्होंने यह भी सुनिश्चित नहीं किया कि चालीस डिप फेस बोरहोलों खुदायी भी पहले से कर ली जाए । इसक विपरीत उसने मेरे सामने पानी के अपसामान्य सीपेज न होने तथा बारह नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को चालीस डिप फेस पर बोर होलों को पहले से ही खुदायी के बारे में गलत बयान दिया । नौ.सात.ग्यारह लगभग सभो पयवेक्षक स्टाफ और अनेक कमकारों को इस बात की जानकारी थी कि उपरिशायी नेगासीम में काफी पानी जमा था। फिर भी खान में पानी भर जाने के खतरे का मामला सुरक्षा समिति जिसकी बैठक महीने में लगभग एक बार होती है के सामने विचार के लिए नहीं आया । नौ.सात.बारह यह सही है कि खान की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबन्धन की है। परन्तु यह भी सही है कि इसे बिना कर्मकारों के तथा ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग के प्राप्त नहीं किया जा सकता है । इस मामले में यह प्रतीत होता है कि एडवान्स बोर होल को व्यवस्था तथा फेस पर पानी की असामान्य सीपेज की जानकारी कुछ कर्मकारों द्वारा स्थानीय ट्रेय यूनियन नेताओं के ध्यान में लायी गयी थी । दुर्भाग्य से ऐसी सूचना होने पर उनके द्वारा भी कोई अनुकूल कारवाई नहीं की गई। दस.एक निष्कर्षो का सा दस. दो सिफारिशें दस. तीन खर्चा की वसूली दस.चार प्रभार अध्याय दस दस.एक.एक तेरह नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ नवासी को महाबीर खान की नारायणकूरी सीम में घटित घातक दुर्घटना का कारण पुराने पड़े हुए उपरिसायी तथा साफ्ट सं. चौंतीस के कार्यों से जलाकांत नेगा सीम से पानी का तेज बहाव था । परित्यक्त तथा जलाक्रांत साफ्ट सं. चौंतीस जिसे अट्ठाईस लेवल के पास चालीस डिप गैलरी को बढ़ाते हुए नाराणकु सीम तक जोड़ा गया था के कारण दुर्घटना हुयी और इससे छः बहुमूल्य जाने गयी । दस.एक.दो यह दुर्घटना, जलाक्रांत साफ्ट सं. चौंतीसकी ओर जाने वाली चालीस डिप गैलरी में पर्याप्त संख्यां में मध्य तथा फलैक बोर होल्स उपलब्ध न कराये जाने के कारण हुयी । यदि ऐसे विकसित बोरहोल्स कवर उपलब्ध कराये गये होते तो अधिकारीगण जलाक्रांत साफ्ट के खतरे के बारे में सावधान हो जाते और इस प्रकार से घातक दुघटना को टाला जा सकता था । ऐसे विकसित बोरहोल्स कोयला खान नियमावली एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के एक सौ सत्ताईस विनियम के अन्तर्गत आवश्यक है । खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा जारी कार्य सम्बन्धी अनुमति में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि ऐसे बोरहोल्स उपलब्ध कराये जाने चाहिएं थे । इसके अतिरिक्त अट्ठाईस लेवल के पास तक चालीस खिप गैलरी को खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा कार्य कर के लिए स्वीकृत परिवर्धन प्रक्षेषण से दूर लगभग एक सौ मी. अनाधिकृत क्षेत्र में बढ़ा दिया गया था । यह घातक दुर्घटना अट्ठाईस लेवल के पास चालीस डिप गैलरी जहां पानी की अपसामान्य सीपेज के कारण जनवरी, एक हज़ार नौ सौ अठासी में खनन कार्य रोक दिया गया था, में कार्य प्रारम्भ कि जाने ले मात्र पाँच दिन के भीतर ही हो गयी। मेरे विचार से यह घातक दुर्घटना सर्व श्री मो. कलीम एजेंट तथा प्रबन्धक तथा पी. एल. बनर्जी सुरक्षा अधिकारी तथा महाबीर खान के सहायक प्रबन्धक श्री के. दत्ता की गम्भीर लापरवाही के कारण घटी है । इन तीनों अधिकारियों ने कोयला खान नियमावली एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के विनियम एक सौ सत्ताईस ले प्रावधानों तथा साथ ही साथ खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा जारी की गयी कार्यानुमति में निर्धारित शर्तों का उल्लघंन किया है । दस.दो.एक. हमारे देश की भूमिगत कोयला खानों में बाढ़ के कारण अन्य घोर विपदाओं की तरह यह घातक दुर्घटना कोयला खान विनियमों के संगत प्रावधानों के अनुपालन में मनुष्य द्वारा की गयी चूक के कारण हुयी । जबकि संगत कोयला खान विनियमों का अनुऐसे क और घोर विपदाओं को रोक सकता है, चिन्ता की बात यह है कि समयसमय पर इसकी पुनरावृत्ति होती है। मेरे विचार में कर्मकारों को तथा प्रथम पंक्ति के पर्यवेक्षक कर्मचारियों जैसे शॉट फाइर्स, सिरदारों तथा ओवर मैनों को इस बारे में कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारियों के प्रति श्रवगत कराना बाढ़ संबंधी खतरे के संकेतों के बारे में पहले से सचेत रहने के लिए उपयुक्त रूप से उन्हें प्रशिक्षित करना जिससे कि समय पर दोष निवारक उपाय किए जा सकें । मैंने यह भी पाया कि कर्मकारों के निरीक्षण के स्थान तथा सुरक्षा समिति जो कि काफी हद तक सुरक्षा चेतना जगा सकती है को सुदृढ़ करने की पर्याप्त गुंजाइश है ।
जालंधर - भारत की विरासत संस्था कन्या महाविद्यालय जालंधर द्वारा नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में शिक्षा के 135 साल पूरे होने और इंडिया टुडे मैगजीन के बेस्ट कालेजेस 2020 सर्वेक्षण में टॉप नेशनल और स्टेट रैंकिंग हासिल करने पर होनहार छात्राओं के लिए एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप का ऐलान किया गया है। अच्छी शिक्षा और जिंदगी में मेहनत के साथ नया मुकाम हासिल करने के सपने संजोने वाली छात्राओं को केएमवी द्वारा कई प्रकार के वजीफे और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विद्यालय द्वारा 93 फीसदी या इससे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली और किसी भी स्ट्रीम में यूनिवर्सिटी की टॉप पोजिशन हासिल करने वाली छात्राओं को फुल फ्रीशिप प्रदान की जाती है। विद्यालय प्रिंसीपल प्रो अतिमा शर्मा दिवेदी ने कहा कि केएमवी महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर लड़कियों को शिक्षा के हर मौके प्रदान करवाने और निरंतर यत्नों के साथ समाज के पिछड़े वर्ग तक पहुंच कर लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है।
जालंधर - भारत की विरासत संस्था कन्या महाविद्यालय जालंधर द्वारा नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में शिक्षा के एक सौ पैंतीस साल पूरे होने और इंडिया टुडे मैगजीन के बेस्ट कालेजेस दो हज़ार बीस सर्वेक्षण में टॉप नेशनल और स्टेट रैंकिंग हासिल करने पर होनहार छात्राओं के लिए एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप का ऐलान किया गया है। अच्छी शिक्षा और जिंदगी में मेहनत के साथ नया मुकाम हासिल करने के सपने संजोने वाली छात्राओं को केएमवी द्वारा कई प्रकार के वजीफे और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विद्यालय द्वारा तिरानवे फीसदी या इससे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली और किसी भी स्ट्रीम में यूनिवर्सिटी की टॉप पोजिशन हासिल करने वाली छात्राओं को फुल फ्रीशिप प्रदान की जाती है। विद्यालय प्रिंसीपल प्रो अतिमा शर्मा दिवेदी ने कहा कि केएमवी महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर लड़कियों को शिक्षा के हर मौके प्रदान करवाने और निरंतर यत्नों के साथ समाज के पिछड़े वर्ग तक पहुंच कर लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है।
कुछ एस्ट्रेस साड़ी में बेहद खूबसूरत लगती हैं और भाग्यश्री उनमें से एक हैं। भाग्यश्री ने कांजीवरम सिल्क साड़ी पहनी है, जिसपर बारीक धागों से फ्लोरल कढ़ाई की गई हैं। एक्ट्रेस ने गोल्डन प्लीटेड साड़ी पहनी हैं और इसके साथ प्यारा सा पोज़ दिया है। शिमरी ग्रेइश ब्लैक मेटैलिक साड़ी में एक्ट्रेस ग्लैमरस लग रही हैं। भाग्यश्री का रफल्ड-बेल्टेड साड़ी किसी भी फंक्शन के लिए परफेक्ट हैं। भाग्यश्री ने ऑफ-व्हाइट सीक्विन साड़ी को मिररवर्क ब्लाउज़ के साथ पेयर किया हैं। भाग्यश्री ने ब्लैक प्लेन साड़ी को डीप नेक ब्लाउज़ के साथ टीमअप किया हैं। एक्ट्रेस ने व्हाइट-रेड प्रिंटेड साड़ी के साथ हॉल्टर नेकलाइन ब्लाउज़ पहना हैं। शिमर सीक्विन साड़ी के साथ भाग्यश्री ने टोनल एम्ब्रॉयडवरी वाला ब्लाउज़ पहना हैं। भाग्यश्री ने सीक्विन साड़ी को नूडल स्ट्रैप ब्लाउज़ के साथ पेयर किया हैं।
कुछ एस्ट्रेस साड़ी में बेहद खूबसूरत लगती हैं और भाग्यश्री उनमें से एक हैं। भाग्यश्री ने कांजीवरम सिल्क साड़ी पहनी है, जिसपर बारीक धागों से फ्लोरल कढ़ाई की गई हैं। एक्ट्रेस ने गोल्डन प्लीटेड साड़ी पहनी हैं और इसके साथ प्यारा सा पोज़ दिया है। शिमरी ग्रेइश ब्लैक मेटैलिक साड़ी में एक्ट्रेस ग्लैमरस लग रही हैं। भाग्यश्री का रफल्ड-बेल्टेड साड़ी किसी भी फंक्शन के लिए परफेक्ट हैं। भाग्यश्री ने ऑफ-व्हाइट सीक्विन साड़ी को मिररवर्क ब्लाउज़ के साथ पेयर किया हैं। भाग्यश्री ने ब्लैक प्लेन साड़ी को डीप नेक ब्लाउज़ के साथ टीमअप किया हैं। एक्ट्रेस ने व्हाइट-रेड प्रिंटेड साड़ी के साथ हॉल्टर नेकलाइन ब्लाउज़ पहना हैं। शिमर सीक्विन साड़ी के साथ भाग्यश्री ने टोनल एम्ब्रॉयडवरी वाला ब्लाउज़ पहना हैं। भाग्यश्री ने सीक्विन साड़ी को नूडल स्ट्रैप ब्लाउज़ के साथ पेयर किया हैं।
कोलकाताः सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग से पहले पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। भाजपा के रोड शो से पहले पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पोस्टर उतारने का विडियो प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच भारी झड़प शुरू हो है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे बंगाल में लोकतंत्र की हत्या बताया है। भाजपा का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल भाजपा के खिलाफ किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बंगाल में अब तक छह चरण में वोटिंग हुई है और हर चरण में भयंकर हिंसा हुई है। बंगाल में इन चुनाव में सियासी घमासान चरम पर है। भाजपा प्रमुख अमित शाह का कोलकाता में आज रोड शो निकल रहा है। हालांकि, रोडशो से पहले भाजपा के पोस्टर उतार दिए गए। इसके बाद कोलकाता में जमकर सियासी बवाल शुरू हो गया। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में 15 मई को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की हावड़ा में रैली थी, किन्तु उसे रद्द कर दिया गया। भाजपा के प्रत्याशियों भारती घोष और बाबुल सुप्रियो की गाड़ी पर हमले को लेकर भी भाजपा और टीएमसी में तनाव गहरा रहा है। इससे पहले सोमवार को भाजपा प्रमुख को जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के बरूईपुर में हेलिकॉप्टर उतरने की इजाजत नहीं मिली थी।
कोलकाताः सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग से पहले पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। भाजपा के रोड शो से पहले पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पोस्टर उतारने का विडियो प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच भारी झड़प शुरू हो है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसे बंगाल में लोकतंत्र की हत्या बताया है। भाजपा का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल भाजपा के खिलाफ किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बंगाल में अब तक छह चरण में वोटिंग हुई है और हर चरण में भयंकर हिंसा हुई है। बंगाल में इन चुनाव में सियासी घमासान चरम पर है। भाजपा प्रमुख अमित शाह का कोलकाता में आज रोड शो निकल रहा है। हालांकि, रोडशो से पहले भाजपा के पोस्टर उतार दिए गए। इसके बाद कोलकाता में जमकर सियासी बवाल शुरू हो गया। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में पंद्रह मई को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की हावड़ा में रैली थी, किन्तु उसे रद्द कर दिया गया। भाजपा के प्रत्याशियों भारती घोष और बाबुल सुप्रियो की गाड़ी पर हमले को लेकर भी भाजपा और टीएमसी में तनाव गहरा रहा है। इससे पहले सोमवार को भाजपा प्रमुख को जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के बरूईपुर में हेलिकॉप्टर उतरने की इजाजत नहीं मिली थी।
देशभर में त्योहारों का सिलसिला शुरु हो गया है। वैसे तो अक्टूबर के महीने में बहुत सारे त्योहार है। लेकिन दो सबसे बड़े त्योहार दिवाली और छठ है। इस दौरान यात्रियों के आने-जाने की तादाद में काफी ज्यादा इजाफा होता है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि इस नियामक संस्था ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में त्योहारी मौसम के दौरान मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए खोये और घी जैसे दुग्ध उत्पादों की निगरानी बढ़ा दी है।
देशभर में त्योहारों का सिलसिला शुरु हो गया है। वैसे तो अक्टूबर के महीने में बहुत सारे त्योहार है। लेकिन दो सबसे बड़े त्योहार दिवाली और छठ है। इस दौरान यात्रियों के आने-जाने की तादाद में काफी ज्यादा इजाफा होता है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि इस नियामक संस्था ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में त्योहारी मौसम के दौरान मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए खोये और घी जैसे दुग्ध उत्पादों की निगरानी बढ़ा दी है।
फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव ने रूस के विदेश मंत्री से मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन के हालात के बारे में बातचीत की। ज़्याद नख़ाला ने रूसी विदेश मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ से मॉस्को में मुलाक़ात में, अमरीकी योजना "सेन्चुरी डील" से फ़िलिस्तीनी कॉज़ और शरणार्थी फ़िलिस्तीनियों को होने वाले नुक़सान की व्याख्या की। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि रूसी अधिकारी ने इस मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन-इस्राईल के विवाद के हल और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के मद्देनज़र दो सरकारों के गठन के हल का समर्थन किया। जारी महीने मार्च में फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास का एक प्रतिनिधिमंडल इस आंदोलन के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रमुख इस्माईल हनीया के नेतृत्व में मॉस्को गया था और उसने फ़िलिस्तीन के मामले में रूसी विदेश मंत्री से विचार विमर्श किया था। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने 28 जनवरी 2020 को ज़ायोनी प्रधान मंत्री नेतनयाहू के साथ नस्लभेदी यौजना "सेन्चुरी डील" को पेश किया। बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देना, पश्चिमी तट की 30 फ़ीसद ज़मीन ज़ायोनी शासन के हवाले करना, शरणार्थी फ़िलिस्तीनियों की वतन वापसी पर रोक लगाना और फ़िलिस्तीन का पूरी तरह निरस्त्रीकरण करना, इस लज्जाजनक योजना के मुख्य बिन्दु हैं। अमरीका ने जबसे आधिकारिक रूप से सेन्चुरी डील को पेश किया है उस वक़्त से न सिर्फ़ फ़िलिस्तीनी जनता और प्रतिरोध गुट, बल्कि दुनिया के देश भी इस योजना का विरोध कर रहे हैं। (MAQ/N)
फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव ने रूस के विदेश मंत्री से मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन के हालात के बारे में बातचीत की। ज़्याद नख़ाला ने रूसी विदेश मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ से मॉस्को में मुलाक़ात में, अमरीकी योजना "सेन्चुरी डील" से फ़िलिस्तीनी कॉज़ और शरणार्थी फ़िलिस्तीनियों को होने वाले नुक़सान की व्याख्या की। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि रूसी अधिकारी ने इस मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन-इस्राईल के विवाद के हल और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के मद्देनज़र दो सरकारों के गठन के हल का समर्थन किया। जारी महीने मार्च में फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास का एक प्रतिनिधिमंडल इस आंदोलन के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रमुख इस्माईल हनीया के नेतृत्व में मॉस्को गया था और उसने फ़िलिस्तीन के मामले में रूसी विदेश मंत्री से विचार विमर्श किया था। अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार बीस को ज़ायोनी प्रधान मंत्री नेतनयाहू के साथ नस्लभेदी यौजना "सेन्चुरी डील" को पेश किया। बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देना, पश्चिमी तट की तीस फ़ीसद ज़मीन ज़ायोनी शासन के हवाले करना, शरणार्थी फ़िलिस्तीनियों की वतन वापसी पर रोक लगाना और फ़िलिस्तीन का पूरी तरह निरस्त्रीकरण करना, इस लज्जाजनक योजना के मुख्य बिन्दु हैं। अमरीका ने जबसे आधिकारिक रूप से सेन्चुरी डील को पेश किया है उस वक़्त से न सिर्फ़ फ़िलिस्तीनी जनता और प्रतिरोध गुट, बल्कि दुनिया के देश भी इस योजना का विरोध कर रहे हैं।
टीम इंडिया ने श्रीलंका (IND vs SL) के खिलाफ एशिया कप 2022 (Asia Cup) के तीसरे सुपर-4 मैच में एक बड़ा बदलाव किया है। इसके पहले बता दें कि श्रीलंका ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी चुनी। रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने टूर्नामेंट में तीसरी बार टॉस हारा है। साथ ही ये तीसरा मौका है जब भारत टूर्नामेंट में पहले बल्लेबाजी करेगा। गौरतलब हो कि टीम इंडिया के लिए ये करो या मरो वाला मैच है। इस मुकाबले को जीतकर भारतीय टीम फाइनल की राह में एक कदम और आगे बढ़ जाएगी। इसके विपरीत मैच गंवाने रोहित शर्मा (Rohit Sharma) की टीम को फाइनल में एंट्री पाने के लिए दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर करना पड़ेगा। इस स्थिति से बचने और फाइनल की दौड़ में खुद को बरकरार रखने के लिए भारत को हर हाल में श्रीलंका के खिलाफ आज जीत हासिल करनी होगी। श्रीलंका के विरुद्ध अहम मुकाबले में टीम इंडिया ने अपनी प्लेइंग इलेवन (Team India's Playing XI) में एक फेरबदल किया है। पिछले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई (Ravi Bishnoi) को ऑफ स्पिनर आर अश्विन (R Ashwin) के लिए जगह खाली करनी पड़ी है। बता दें कि अश्विन पिछले तीनों मैच में बेंच का हिस्सा थे। रवि बिश्नोई की बात करे तो वे पाकिस्तान के विरुद्ध पिछले मुकाबले में भारतीय टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे थे। उन्होंने सबसे किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 26 रन देकर एक विकेट झटका था। इतना ही नहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज में बिश्नोई ने शानदार गेंदबाजी की थी। तब 3 मैचों में उन्होंने एक फॉर विकेट हॉल करते हुए 69 रन के बदले 8 विकेट झटके थे।
टीम इंडिया ने श्रीलंका के खिलाफ एशिया कप दो हज़ार बाईस के तीसरे सुपर-चार मैच में एक बड़ा बदलाव किया है। इसके पहले बता दें कि श्रीलंका ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी चुनी। रोहित शर्मा ने टूर्नामेंट में तीसरी बार टॉस हारा है। साथ ही ये तीसरा मौका है जब भारत टूर्नामेंट में पहले बल्लेबाजी करेगा। गौरतलब हो कि टीम इंडिया के लिए ये करो या मरो वाला मैच है। इस मुकाबले को जीतकर भारतीय टीम फाइनल की राह में एक कदम और आगे बढ़ जाएगी। इसके विपरीत मैच गंवाने रोहित शर्मा की टीम को फाइनल में एंट्री पाने के लिए दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर करना पड़ेगा। इस स्थिति से बचने और फाइनल की दौड़ में खुद को बरकरार रखने के लिए भारत को हर हाल में श्रीलंका के खिलाफ आज जीत हासिल करनी होगी। श्रीलंका के विरुद्ध अहम मुकाबले में टीम इंडिया ने अपनी प्लेइंग इलेवन में एक फेरबदल किया है। पिछले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को ऑफ स्पिनर आर अश्विन के लिए जगह खाली करनी पड़ी है। बता दें कि अश्विन पिछले तीनों मैच में बेंच का हिस्सा थे। रवि बिश्नोई की बात करे तो वे पाकिस्तान के विरुद्ध पिछले मुकाबले में भारतीय टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे थे। उन्होंने सबसे किफायती गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में छब्बीस रन देकर एक विकेट झटका था। इतना ही नहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछली टीबीस सीरीज में बिश्नोई ने शानदार गेंदबाजी की थी। तब तीन मैचों में उन्होंने एक फॉर विकेट हॉल करते हुए उनहत्तर रन के बदले आठ विकेट झटके थे।
नई दिल्ली, । ब्रिटेन की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सब ठीक नहीं चल रहा है। पहले पार्टी गेट घोटाला और अब सांसद क्रिस पिंचर पर लगे आरोप। एक महीना पहले विश्वास मत का सामना करने वाले ब्रिटिश पीएम बोरिस जानसन के लिए फिर संकट की घड़ी आ गई है। मंगलवार रात अचानक बोरिस जानसन के दो मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वित्त मंत्री ऋषि सुनक के बाद स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने अपना इस्तीफा सौंपा। दोनों मंत्रियों के इस्तीफे के बाद बोरिस जानसन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जानसन पर पीएम की कुर्सी छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। बोरिस जानसन की कुर्सी पर मंडराए खतरे के बादल की वजह सांसद क्रिस पिंचर की हरकतों को माना जा रहा है। कंजरवेटिव पार्टी के उप मुख्य सचेतक (डिप्टी चीफ व्हिप) रहे क्रिस पिंचर ने एक क्लब में पहले तो जमकर शराब पी और फिर नशे में धुत होकर दो लोगों से मारपीट भी कर ली। इस घटना के बाद 52 वर्षीय क्रिस पिंचर ने डिप्टी चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वीकार किया कि उन्होंने बहुत अधिक शराब पीकर फजीहत कराई, खुद को और अन्य लोगों को शर्मिंदा किया। पार्टी गेट घोटाले में बोरिस जानसन को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जानसन के पक्ष में 211 जबकि विपक्ष में 148 वोट पड़े थे। ये मामला कोरोना लाकडाउन के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। नियमों को तोड़ने पर जानसन पर जुर्माना लगाया गया था। जानसन को बाद में माफी भी मांगनी पड़ी थी।
नई दिल्ली, । ब्रिटेन की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सब ठीक नहीं चल रहा है। पहले पार्टी गेट घोटाला और अब सांसद क्रिस पिंचर पर लगे आरोप। एक महीना पहले विश्वास मत का सामना करने वाले ब्रिटिश पीएम बोरिस जानसन के लिए फिर संकट की घड़ी आ गई है। मंगलवार रात अचानक बोरिस जानसन के दो मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वित्त मंत्री ऋषि सुनक के बाद स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद ने अपना इस्तीफा सौंपा। दोनों मंत्रियों के इस्तीफे के बाद बोरिस जानसन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जानसन पर पीएम की कुर्सी छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। बोरिस जानसन की कुर्सी पर मंडराए खतरे के बादल की वजह सांसद क्रिस पिंचर की हरकतों को माना जा रहा है। कंजरवेटिव पार्टी के उप मुख्य सचेतक रहे क्रिस पिंचर ने एक क्लब में पहले तो जमकर शराब पी और फिर नशे में धुत होकर दो लोगों से मारपीट भी कर ली। इस घटना के बाद बावन वर्षीय क्रिस पिंचर ने डिप्टी चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वीकार किया कि उन्होंने बहुत अधिक शराब पीकर फजीहत कराई, खुद को और अन्य लोगों को शर्मिंदा किया। पार्टी गेट घोटाले में बोरिस जानसन को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जानसन के पक्ष में दो सौ ग्यारह जबकि विपक्ष में एक सौ अड़तालीस वोट पड़े थे। ये मामला कोरोना लाकडाउन के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। नियमों को तोड़ने पर जानसन पर जुर्माना लगाया गया था। जानसन को बाद में माफी भी मांगनी पड़ी थी।
(जी. एन. एस) ता. 12 'मसान' और 'हरामखोर' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी आजकल अपनी शादी खबरों को लेकर चर्चा में हैं। खबर है कि श्वेता ऐक्टर और रैपर चैतन्य शर्मा उर्फ 'स्लोचीता' से 29 जून को शादी करने जा रही हैं। चैतन्य श्वेता से उम्र में 5 साल छोटे हैं। श्वेता की उम्र इस समय 32 साल है, हालांकि वह अपनी उम्र से काफी छोटी दिखती हैं।
ता. बारह 'मसान' और 'हरामखोर' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी आजकल अपनी शादी खबरों को लेकर चर्चा में हैं। खबर है कि श्वेता ऐक्टर और रैपर चैतन्य शर्मा उर्फ 'स्लोचीता' से उनतीस जून को शादी करने जा रही हैं। चैतन्य श्वेता से उम्र में पाँच साल छोटे हैं। श्वेता की उम्र इस समय बत्तीस साल है, हालांकि वह अपनी उम्र से काफी छोटी दिखती हैं।
चंद दिन ही हुए हैं, जब कुलदीप शाहदाना वली के मजार से चालीस दिन जंजीरों में कैद के बाद रिहा हुए. एक पैर में अभी भी पाजेब की तरह चेन बंधी है, जिसमें छोटा सा ताला लटका है. दलित परिवार में जन्मे कुलदीप कभी ताइक्वांडो के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और जवानी में ही डॉ.आंबेडकर के लेखन और विचारों से प्रभावित होकर समाज को बेहतर बनाने की कोशिश में लग गए. कुछ समय बाद वामपंथी छात्र संगठन के संपर्क में आकर उसके सक्रिय कार्यकर्ता भी हो गए. जिंदगी की उथल-पुथल शुरू हुई तो उनसे जुड़े 'उच्च कोटि' के विचारों वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पल्ला झाड़ लिया. समाज ने सिर्फ तमाशा बनाया और आनंद लिया. उस वक्त भी जब उन्हें जबरन मजार की कथित पुलिस कैद करके ले गए, बेशक! परिजनों की मर्जी से. कुलदीप अकेले लड़े और मानसिक अवसाद में घिर गए. आज भी उनके साथ तमाम परेशानियां हैं, लेकिन वैचारिक मामलों में वे अडिग हैं. कुलदीप देश के माहौल से दुखी हैं. उनका मानना है कि जब आंबेडकरवाद, मार्क्सवाद जैसी विचारधाराएं हथियार डाले बैठी हों, वहां लोग पागल ही हो सकते हैं. ये पागलपन है. ऐसे लोग मेरे आसपास हैं, वे मुझे पागल कहकर खुश होते हैं, खुद आईना नहीं देखते. उनको समझाने वाले भी शायद नहीं हैं, या उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. आज 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' के मौके पर कुलदीप की बातों को बारीकी से समझने की जरूरत हैं. वे कोई नामचीन बुद्धिजीवी नहीं हैं, लेकिन जीवन का जो सबक सीखा है, वह मार्के का है. ऐसे ही जूझते हुए उन्होंने एमफिल करके पुस्तक भी लिखी है. कुलदीप की बातों को आंकड़ों से भी समझा जाए. संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि दुनियाभर के 42 देशों में लगभग 132 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, वे हालात के शिकार होकर अवसाद से घिरे हैं. विश्वभर में लगभग 69 मिलियन लोग हिंसा और संघर्ष से जबरन विस्थापित हो चुके हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे अधिक संख्या है. डब्ल्यूएचओ के एक अध्ययन में कहा गया है कि कम से कम 6.5 प्रतिशत भारतीय आबादी गंभीर मानसिक विकार से पीडि़त है. उनके बेहतर उपचार की व्यवस्था भी नहीं है. मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की बहुत कमी है. वर्ष 2014 की रिपोर्ट बताती है कि हर एक लाख लोगों में एक प्रतिशत मनोरोगी हैं. भारत में औसत आत्महत्या की दर प्रति लाख लोगों पर 10.9 है और आत्महत्या करने वाले अधिकांश लोग 44 वर्ष से कम उम्र के हैं. ऐसा क्यों? सिर्फ इसलिए कि गरीबी, बेकारी, उत्पीडऩ की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों से जूझ रहे लोगों में तनाव और अवसाद हिंसक घटनाओं में तब्दील हो रहा है. उनको उकसाने का काम सियासी लोग कर रहे हैं. उनकी बुद्धि-विवेक काल्पनिक दुश्मनों को तलाशने, उसके प्रति हिंसा करने, काल्पनिक दुश्मन पर कहर खुशी का अहसास बनता जा रहा है. कुछ भी होता रहे, ऐसे लोग या तो तमाशबीन हैं या फिर तमाशे के किरदार. उनके पास कोई वैज्ञानिक समाधान नहीं है और तर्कहीनता के शिकार हैं. सैंकड़ों वर्ष पुरानी आदतें और मूल्यों से उपजी मानसिकता कुंठा ने उन्हें इस चौखट पर ला पटका है, भले वे शिक्षित हों या अनपढ़. शायद इसी का नतीजा है कि बड़े पैमाने पर धार्मिकता और देशभक्ति का माहौल होने के बावजूद पोर्न साइट्स के विश्व में तीसरे नंबर के उपभोक्ता भारत के हैं. हत्याओं व हिंसा में अमानवीयता की पराकाष्ठा का एक के बाद एक नया रिकॉर्ड बनता जा रहा है. ऐसी खबरों से अखबार पटे रहते हैं. बरेली में रहने वाले आशीष सक्सेना अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबारों में काम कर चुके हैं. फिलहाल दैनिक जनमोर्चा के सम्पादक हैं.
चंद दिन ही हुए हैं, जब कुलदीप शाहदाना वली के मजार से चालीस दिन जंजीरों में कैद के बाद रिहा हुए. एक पैर में अभी भी पाजेब की तरह चेन बंधी है, जिसमें छोटा सा ताला लटका है. दलित परिवार में जन्मे कुलदीप कभी ताइक्वांडो के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और जवानी में ही डॉ.आंबेडकर के लेखन और विचारों से प्रभावित होकर समाज को बेहतर बनाने की कोशिश में लग गए. कुछ समय बाद वामपंथी छात्र संगठन के संपर्क में आकर उसके सक्रिय कार्यकर्ता भी हो गए. जिंदगी की उथल-पुथल शुरू हुई तो उनसे जुड़े 'उच्च कोटि' के विचारों वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पल्ला झाड़ लिया. समाज ने सिर्फ तमाशा बनाया और आनंद लिया. उस वक्त भी जब उन्हें जबरन मजार की कथित पुलिस कैद करके ले गए, बेशक! परिजनों की मर्जी से. कुलदीप अकेले लड़े और मानसिक अवसाद में घिर गए. आज भी उनके साथ तमाम परेशानियां हैं, लेकिन वैचारिक मामलों में वे अडिग हैं. कुलदीप देश के माहौल से दुखी हैं. उनका मानना है कि जब आंबेडकरवाद, मार्क्सवाद जैसी विचारधाराएं हथियार डाले बैठी हों, वहां लोग पागल ही हो सकते हैं. ये पागलपन है. ऐसे लोग मेरे आसपास हैं, वे मुझे पागल कहकर खुश होते हैं, खुद आईना नहीं देखते. उनको समझाने वाले भी शायद नहीं हैं, या उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. आज 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' के मौके पर कुलदीप की बातों को बारीकी से समझने की जरूरत हैं. वे कोई नामचीन बुद्धिजीवी नहीं हैं, लेकिन जीवन का जो सबक सीखा है, वह मार्के का है. ऐसे ही जूझते हुए उन्होंने एमफिल करके पुस्तक भी लिखी है. कुलदीप की बातों को आंकड़ों से भी समझा जाए. संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि दुनियाभर के बयालीस देशों में लगभग एक सौ बत्तीस मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, वे हालात के शिकार होकर अवसाद से घिरे हैं. विश्वभर में लगभग उनहत्तर मिलियन लोग हिंसा और संघर्ष से जबरन विस्थापित हो चुके हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे अधिक संख्या है. डब्ल्यूएचओ के एक अध्ययन में कहा गया है कि कम से कम छः.पाँच प्रतिशत भारतीय आबादी गंभीर मानसिक विकार से पीडि़त है. उनके बेहतर उपचार की व्यवस्था भी नहीं है. मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की बहुत कमी है. वर्ष दो हज़ार चौदह की रिपोर्ट बताती है कि हर एक लाख लोगों में एक प्रतिशत मनोरोगी हैं. भारत में औसत आत्महत्या की दर प्रति लाख लोगों पर दस.नौ है और आत्महत्या करने वाले अधिकांश लोग चौंतालीस वर्ष से कम उम्र के हैं. ऐसा क्यों? सिर्फ इसलिए कि गरीबी, बेकारी, उत्पीडऩ की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों से जूझ रहे लोगों में तनाव और अवसाद हिंसक घटनाओं में तब्दील हो रहा है. उनको उकसाने का काम सियासी लोग कर रहे हैं. उनकी बुद्धि-विवेक काल्पनिक दुश्मनों को तलाशने, उसके प्रति हिंसा करने, काल्पनिक दुश्मन पर कहर खुशी का अहसास बनता जा रहा है. कुछ भी होता रहे, ऐसे लोग या तो तमाशबीन हैं या फिर तमाशे के किरदार. उनके पास कोई वैज्ञानिक समाधान नहीं है और तर्कहीनता के शिकार हैं. सैंकड़ों वर्ष पुरानी आदतें और मूल्यों से उपजी मानसिकता कुंठा ने उन्हें इस चौखट पर ला पटका है, भले वे शिक्षित हों या अनपढ़. शायद इसी का नतीजा है कि बड़े पैमाने पर धार्मिकता और देशभक्ति का माहौल होने के बावजूद पोर्न साइट्स के विश्व में तीसरे नंबर के उपभोक्ता भारत के हैं. हत्याओं व हिंसा में अमानवीयता की पराकाष्ठा का एक के बाद एक नया रिकॉर्ड बनता जा रहा है. ऐसी खबरों से अखबार पटे रहते हैं. बरेली में रहने वाले आशीष सक्सेना अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबारों में काम कर चुके हैं. फिलहाल दैनिक जनमोर्चा के सम्पादक हैं.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पिहोवा के गांव सरस्वती खेड़ा में मकान की छत गिरने से नीचे दबकर पति-पत्नी की मौत हो गई। दोनों यहां रिश्तेदारी में आए हुए थे। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को कब्जे में ले लिया। मिली जानकारी के अनुसार, गांव सरस्वती खेड़ा निवासी हरबंस सिंह की माता के भोग पर पटियाला निवासी जोगा सिंह और उसकी पत्नी आए हुए थे। गुरुवार रात को सभी खाना खाकर सोने चले गए। शुक्रवार सुबह घर की छत गिर गई। परिवार के अन्य लोगों ने दोनों को मलबे के नीचे से बाहर निकाला और अस्पताल लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। थाना सदर प्रभारी निर्मल सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। शुरुआती जांच में यही सामने आया है कि छत गिरने से ही दोनों की मौत हुई है। फिलहाल दोनों के शव को कब्जे में लिया। पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद सौंपा जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पिहोवा के गांव सरस्वती खेड़ा में मकान की छत गिरने से नीचे दबकर पति-पत्नी की मौत हो गई। दोनों यहां रिश्तेदारी में आए हुए थे। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को कब्जे में ले लिया। मिली जानकारी के अनुसार, गांव सरस्वती खेड़ा निवासी हरबंस सिंह की माता के भोग पर पटियाला निवासी जोगा सिंह और उसकी पत्नी आए हुए थे। गुरुवार रात को सभी खाना खाकर सोने चले गए। शुक्रवार सुबह घर की छत गिर गई। परिवार के अन्य लोगों ने दोनों को मलबे के नीचे से बाहर निकाला और अस्पताल लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। थाना सदर प्रभारी निर्मल सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। शुरुआती जांच में यही सामने आया है कि छत गिरने से ही दोनों की मौत हुई है। फिलहाल दोनों के शव को कब्जे में लिया। पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद सौंपा जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कृष्णचन्द्रिका -- जज्ञ को ईस ताकौं नहीं आ । मूढ ऐसे हैं जज्ञ पूरी करें ॥ ३६॥ दो०- मुरकि गोप आये तहाँ जहँ ठाडे नँदनंद । लाल न दुजवर मानहीं ऐसे सठ मतिमंद ।। ३७ ।। -हँसि बोले भगवान अखिल लोक ईस्वर प्रभो । फेरि जाहु मतिवान दुजपतिनिनकी प्रीति लखि ॥ ३८ ॥ तोमर ० - तुम जाहु सो फिरि गोप कहियौ तहाँ करि चोप । 0तिनकी त्रियानि सुनाइ जुगबन्धु यों कहआइ ॥ ३१ ॥ उपजी छुधा तिहिं पाइ दधि भातु बेगि मगाइ । त्रिय ले चलौ हम संग करि प्रीति रीति अभंग ।। ४० ।। दो०- गोप बचन सुनि उर उमँगि प्रेम मगन अकुलाइ । भोजन सजि आतुर चलीं बिप्र बधू सुख पाइ ।। ४१ ।। तोटक ० - रचि भोजन चारि प्रकार लिये । दधि ओदन आदि बिसेखि किये । दरसे प्रभु मंडल रूप खरे । हग हीतल सीतल देखि परे ॥ ४२ ॥ इमि साँवर गौर सरीर बनें । छवि वोज मनोजनि कोटि घर्ने । सिर पै सुभ चंद्रक चारु रचें । बिच गुच्छन सुच्छ प्रसून सधैँ ॥ ४३ ॥ झलक मुख छुटि भनौ । अहि की त्रिय चंद समीप मनौ । श्रवनोदय कुंडल जोति करें । चल चारु मरीच कपोल परें ॥ ४४ ॥ हग भोंह मरोर मरोर हियौ । चितु चन्द्रक हास चुराइ लियौ । बन माल बिसाल रसाल गरे ।
कृष्णचन्द्रिका -- जज्ञ को ईस ताकौं नहीं आ । मूढ ऐसे हैं जज्ञ पूरी करें ॥ छत्तीस॥ दोशून्य- मुरकि गोप आये तहाँ जहँ ठाडे नँदनंद । लाल न दुजवर मानहीं ऐसे सठ मतिमंद ।। सैंतीस ।। -हँसि बोले भगवान अखिल लोक ईस्वर प्रभो । फेरि जाहु मतिवान दुजपतिनिनकी प्रीति लखि ॥ अड़तीस ॥ तोमर शून्य - तुम जाहु सो फिरि गोप कहियौ तहाँ करि चोप । शून्यतिनकी त्रियानि सुनाइ जुगबन्धु यों कहआइ ॥ इकतीस ॥ उपजी छुधा तिहिं पाइ दधि भातु बेगि मगाइ । त्रिय ले चलौ हम संग करि प्रीति रीति अभंग ।। चालीस ।। दोशून्य- गोप बचन सुनि उर उमँगि प्रेम मगन अकुलाइ । भोजन सजि आतुर चलीं बिप्र बधू सुख पाइ ।। इकतालीस ।। तोटक शून्य - रचि भोजन चारि प्रकार लिये । दधि ओदन आदि बिसेखि किये । दरसे प्रभु मंडल रूप खरे । हग हीतल सीतल देखि परे ॥ बयालीस ॥ इमि साँवर गौर सरीर बनें । छवि वोज मनोजनि कोटि घर्ने । सिर पै सुभ चंद्रक चारु रचें । बिच गुच्छन सुच्छ प्रसून सधैँ ॥ तैंतालीस ॥ झलक मुख छुटि भनौ । अहि की त्रिय चंद समीप मनौ । श्रवनोदय कुंडल जोति करें । चल चारु मरीच कपोल परें ॥ चौंतालीस ॥ हग भोंह मरोर मरोर हियौ । चितु चन्द्रक हास चुराइ लियौ । बन माल बिसाल रसाल गरे ।
भीनमाल मर्चेंट एसोसिएशन की बैठक कृषि मंडी प्रांगण में सचिव श्याम खेतावत की उपस्थिति में आयोजित हुई। बैठक में श्याम खेतावत ने कहा कि मंडी प्रांगण एवं मुख्य व्यवसाय अन्य जगहों की डीएलसी समान है जबकि मंडी प्रांगण में सिर्फ कृषि जींस के का अलावा अन्य कोई व्यापार नहीं कर सकते हैं। ऐसे में डीएलसी दर का समान होना सही नहीं है। इसको लेकर कलेक्टर को ज्ञापन भेजने के लिए चर्चा की गई। बैठक के दौरान बताया गया कि मर्चेंट एसोसिएशन का गठन करीबन आज से 75 वर्ष पूर्ण किया गया था। जिस पर एसोसिएशन की हीरक जयंती मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर कोलचंद सोनी, जेठाराम माली, अरविंद सेठ, दिनेश जोशी, पुखराज कानूनगो, रामलाल जाट, बगदाराम घाची, जमुनादास माहेश्वरी, मनीष खेतावत, भंवरलाल कानूनगो, सावला राम माली, बाबूलाल घाची, दिनेश कुमार सहित कई व्यापारी उपस्थित उपस्थित रहे। श्री राम नवमी के उपलक्ष में शहर में निकलने वाली शोभायात्रा में भीनमाल मर्चेंट एसोसिएशन के व्यापारी केसरिया साफ़ा के साथ भाग लेंगे। इस दौरान मंडी परिसर में प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भीनमाल मर्चेंट एसोसिएशन की बैठक कृषि मंडी प्रांगण में सचिव श्याम खेतावत की उपस्थिति में आयोजित हुई। बैठक में श्याम खेतावत ने कहा कि मंडी प्रांगण एवं मुख्य व्यवसाय अन्य जगहों की डीएलसी समान है जबकि मंडी प्रांगण में सिर्फ कृषि जींस के का अलावा अन्य कोई व्यापार नहीं कर सकते हैं। ऐसे में डीएलसी दर का समान होना सही नहीं है। इसको लेकर कलेक्टर को ज्ञापन भेजने के लिए चर्चा की गई। बैठक के दौरान बताया गया कि मर्चेंट एसोसिएशन का गठन करीबन आज से पचहत्तर वर्ष पूर्ण किया गया था। जिस पर एसोसिएशन की हीरक जयंती मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर कोलचंद सोनी, जेठाराम माली, अरविंद सेठ, दिनेश जोशी, पुखराज कानूनगो, रामलाल जाट, बगदाराम घाची, जमुनादास माहेश्वरी, मनीष खेतावत, भंवरलाल कानूनगो, सावला राम माली, बाबूलाल घाची, दिनेश कुमार सहित कई व्यापारी उपस्थित उपस्थित रहे। श्री राम नवमी के उपलक्ष में शहर में निकलने वाली शोभायात्रा में भीनमाल मर्चेंट एसोसिएशन के व्यापारी केसरिया साफ़ा के साथ भाग लेंगे। इस दौरान मंडी परिसर में प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छिंदवाड़ा : माचागोरा डैम की जमीन से एक मजदूर का शव बरामद हुआ है। शव की हालत को देखकर कहा जा रहा है कि लगता है उस पर से रोडरोलर भी गुजरा है। खबर है कि मजदूर वहां सो रहा था इसी दौरान मजदूर पर पहले डंपर से मुरम डाल दी। इसके बाद डोजर से मिट्टी को लेवल कर उस पर रोलर चला दिया। शव के बारे में पता चलने के करीब 9 घंटे बाद उसे निकाला गया। गुरुवार की सुबह 8 बजे ही जानकारी मिली कि किसी मजदूर का शव दबा हुआ है, लेकिन इसके बाद वहां हंगामा शुरु हो गया है। अन्य मजदूर कांग्रेस व अन्य संगठनों ने कंपनी के ठेकेदारों के खिलाफ पर हत्या का मामला दर्ज करने और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग करने लगे। शाम के करीब 5 बजे शव को निकालना मुमकिन हुआ। चौरई पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम बुद्धू उइके था और वो बाम्हनवाड़ा का रहने वाला था। जब कुछ मजदूर साथियों ने शव को गड़ा हुआ दे्खा, तो तत्काल पुलिस को सूचित किया। सूचना पर पुलिस मौैके पर पहुंची ही थी कि थोड़ी ही देर बाद किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी सहित सैकड़ो ग्रामीण भी पहुंच गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डेम के ठेकेदार ने मजदूर जयराम की हत्या कर शव डेम की जमीन के अंदर गाड़ दिया। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और साथ ही मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपए दिए जाए। जब अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया तो मजदूर मान गए। मांग के चलते आन्ध्रप्रदेश की मेंटेना कंपनी के अधिकारियों ने जयराम के परिजन को 5 लाख स्र्पए की राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा प्रशासनिक मदद भी दी जाएगी।
छिंदवाड़ा : माचागोरा डैम की जमीन से एक मजदूर का शव बरामद हुआ है। शव की हालत को देखकर कहा जा रहा है कि लगता है उस पर से रोडरोलर भी गुजरा है। खबर है कि मजदूर वहां सो रहा था इसी दौरान मजदूर पर पहले डंपर से मुरम डाल दी। इसके बाद डोजर से मिट्टी को लेवल कर उस पर रोलर चला दिया। शव के बारे में पता चलने के करीब नौ घंटाटे बाद उसे निकाला गया। गुरुवार की सुबह आठ बजे ही जानकारी मिली कि किसी मजदूर का शव दबा हुआ है, लेकिन इसके बाद वहां हंगामा शुरु हो गया है। अन्य मजदूर कांग्रेस व अन्य संगठनों ने कंपनी के ठेकेदारों के खिलाफ पर हत्या का मामला दर्ज करने और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग करने लगे। शाम के करीब पाँच बजे शव को निकालना मुमकिन हुआ। चौरई पुलिस ने बताया कि मृतक का नाम बुद्धू उइके था और वो बाम्हनवाड़ा का रहने वाला था। जब कुछ मजदूर साथियों ने शव को गड़ा हुआ दे्खा, तो तत्काल पुलिस को सूचित किया। सूचना पर पुलिस मौैके पर पहुंची ही थी कि थोड़ी ही देर बाद किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी सहित सैकड़ो ग्रामीण भी पहुंच गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डेम के ठेकेदार ने मजदूर जयराम की हत्या कर शव डेम की जमीन के अंदर गाड़ दिया। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और साथ ही मुआवजे के तौर पर दस लाख रुपए दिए जाए। जब अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया तो मजदूर मान गए। मांग के चलते आन्ध्रप्रदेश की मेंटेना कंपनी के अधिकारियों ने जयराम के परिजन को पाँच लाख स्र्पए की राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा प्रशासनिक मदद भी दी जाएगी।
भारत और वेस्टइंडीज की टीमों के बीच 12 जुलाई से टेस्ट सीरीज़ खेली जाएगी, जिसके लिए भारतीय टीम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली इस सीरीज़ में शुभमन गिल, ईशान किशन और मोहम्मद सिराज को भी टीम इंडिया का हिस्सा बनाया गया है। भारतीय टीम के खिलाड़ी सीरीज़ की तैयारी करने के साथ-साथ मौज-मस्ती भी करते हुए देखे जा रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर ईशान किशन ने अपने दोस्त शुभमन गिल और मोहम्मद सिराज के साथ तस्वीरें साझा की हैं, जिसपर सूर्यकुमार यादव ने मज़ेदार प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज़ ईशान किशन ने इन्स्टाग्राम पर 2 तस्वीरें साझा की हैं। ईशान किशन द्वारा साझा की गई यह तस्वीर किसी होटल की लग रही है। इस तस्वीर में किशन के साथ भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज़ शुभमन गिल और तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज भी दिखाई दे रहे हैं। खबर लिखे जाने तक 6 लाख से भी ज़्यादा लोग इन तस्वीरों को लाइक कर चुके हैं। जहां एक तरफ कई लोगों ने इन तस्वीरों को लाइक किया तो वहीं दूसरी तरफ कई यूज़र्स ने कमेंट के ज़रिए भी अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की। इसी बीच टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज़ सूर्यकुमार यादव ने भी इन तस्वीरों के नीचे एक मज़ेदार कमेंट किया है। सूर्या ने सिराज को लेकर एक ऐसी बात लिख दी कि इन्स्टाग्राम पर कमेंट्स की बौछार होने लगी। सूर्यकुमार यादव ने मज़ाकिया अंदाज़ में सिराज के बारे में लिखा है कि वह इतना ग्लो क्यों कर रहे हैं। सूर्या के इस कमेंट पर अब तक 200 से भी ज़्यादा लोग रिप्लाई कर चुके हैं। गौरतलब है कि ईशान किशन ने अपनी इन्स्टाग्राम स्टोरी पर भी एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वह शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल के साथ दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर में तीनों ही खिलाड़ियों ने ट्रेनिंग किट पहनी हुई है।
भारत और वेस्टइंडीज की टीमों के बीच बारह जुलाई से टेस्ट सीरीज़ खेली जाएगी, जिसके लिए भारतीय टीम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली इस सीरीज़ में शुभमन गिल, ईशान किशन और मोहम्मद सिराज को भी टीम इंडिया का हिस्सा बनाया गया है। भारतीय टीम के खिलाड़ी सीरीज़ की तैयारी करने के साथ-साथ मौज-मस्ती भी करते हुए देखे जा रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर ईशान किशन ने अपने दोस्त शुभमन गिल और मोहम्मद सिराज के साथ तस्वीरें साझा की हैं, जिसपर सूर्यकुमार यादव ने मज़ेदार प्रतिक्रिया दी है। दरअसल, टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज़ ईशान किशन ने इन्स्टाग्राम पर दो तस्वीरें साझा की हैं। ईशान किशन द्वारा साझा की गई यह तस्वीर किसी होटल की लग रही है। इस तस्वीर में किशन के साथ भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज़ शुभमन गिल और तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज भी दिखाई दे रहे हैं। खबर लिखे जाने तक छः लाख से भी ज़्यादा लोग इन तस्वीरों को लाइक कर चुके हैं। जहां एक तरफ कई लोगों ने इन तस्वीरों को लाइक किया तो वहीं दूसरी तरफ कई यूज़र्स ने कमेंट के ज़रिए भी अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की। इसी बीच टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज़ सूर्यकुमार यादव ने भी इन तस्वीरों के नीचे एक मज़ेदार कमेंट किया है। सूर्या ने सिराज को लेकर एक ऐसी बात लिख दी कि इन्स्टाग्राम पर कमेंट्स की बौछार होने लगी। सूर्यकुमार यादव ने मज़ाकिया अंदाज़ में सिराज के बारे में लिखा है कि वह इतना ग्लो क्यों कर रहे हैं। सूर्या के इस कमेंट पर अब तक दो सौ से भी ज़्यादा लोग रिप्लाई कर चुके हैं। गौरतलब है कि ईशान किशन ने अपनी इन्स्टाग्राम स्टोरी पर भी एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वह शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल के साथ दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर में तीनों ही खिलाड़ियों ने ट्रेनिंग किट पहनी हुई है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि छात्रों से सम्बंधित इन मांगो को प्रशासन जल्द पूरा करे। इकाई उपाध्यक्ष अनिल ने बताया कि आज विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी 2 सूत्रीय मांगो को लेकर पुस्तकालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को विस्तार से बताते हुए अनिल ने कहा कि वि. विविश्वविद्यालय प्रशासन को विश्वविद्यालय पुस्तकालय का 24 घंटे का भाग तुरंत खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के फाइनल एग्जाम अगले माह से शुरू होने वाले हैं, तो ऐसे में छात्र अब दिन रात अपनी परीक्षाओं की तैयारी में डटे हुए हैं। उन छात्रों को अपनी परीक्षाओं की तैयारी करते समय किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े इसके लिए पुस्तकालय का 24 घंटे का भाग तुरंत प्रभाव से खोला जाए। अपनी दूसरी मांग को बताते हुए अनिल ने कहा कि सभी शोधार्थियों के लाइब्रेरी कार्ड रिन्यू किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19,2019-20,2020-21 के शोधार्थियों को यूजीसी के द्वारा शोध कार्य समाप्त करने के लिए जून 2022 तक एक्सटेंशन प्रदान की गई। लेकिन सभी शोधार्थियों के लाइब्रेरी कार्ड की वैधता दिसंबर 2021 में समाप्त हो चुकी है। ऐसे में लाइब्रेरी प्रशासन उनको अब लाइब्रेरी में बैठने के लिए इंकार कर रहा है। इस से उन छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इन सभी छात्रों को लाइब्रेरी से किताबें उपलब्ध नहीं हो रही हैं। इसीलिए विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि इन छात्रों के लाइब्रेरी कार्ड अति शीघ्र रिन्यू किए जाए। अनिल ने कहा कि विद्यार्थी परिषद आशा करती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द उनकी इन मांगों को पूरा करेगा। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए भी कहा कि अगर जल्द से जल्द इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में प्रशासन को विरोध का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए प्रशासन स्वंय जिम्मेदार होगा। पे नाऊ पर क्लिक करे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि छात्रों से सम्बंधित इन मांगो को प्रशासन जल्द पूरा करे। इकाई उपाध्यक्ष अनिल ने बताया कि आज विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी दो सूत्रीय मांगो को लेकर पुस्तकालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को विस्तार से बताते हुए अनिल ने कहा कि वि. विविश्वविद्यालय प्रशासन को विश्वविद्यालय पुस्तकालय का चौबीस घंटाटे का भाग तुरंत खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के फाइनल एग्जाम अगले माह से शुरू होने वाले हैं, तो ऐसे में छात्र अब दिन रात अपनी परीक्षाओं की तैयारी में डटे हुए हैं। उन छात्रों को अपनी परीक्षाओं की तैयारी करते समय किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े इसके लिए पुस्तकालय का चौबीस घंटाटे का भाग तुरंत प्रभाव से खोला जाए। अपनी दूसरी मांग को बताते हुए अनिल ने कहा कि सभी शोधार्थियों के लाइब्रेरी कार्ड रिन्यू किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस,दो हज़ार उन्नीस-बीस,दो हज़ार बीस-इक्कीस के शोधार्थियों को यूजीसी के द्वारा शोध कार्य समाप्त करने के लिए जून दो हज़ार बाईस तक एक्सटेंशन प्रदान की गई। लेकिन सभी शोधार्थियों के लाइब्रेरी कार्ड की वैधता दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में समाप्त हो चुकी है। ऐसे में लाइब्रेरी प्रशासन उनको अब लाइब्रेरी में बैठने के लिए इंकार कर रहा है। इस से उन छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इन सभी छात्रों को लाइब्रेरी से किताबें उपलब्ध नहीं हो रही हैं। इसीलिए विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि इन छात्रों के लाइब्रेरी कार्ड अति शीघ्र रिन्यू किए जाए। अनिल ने कहा कि विद्यार्थी परिषद आशा करती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द उनकी इन मांगों को पूरा करेगा। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए भी कहा कि अगर जल्द से जल्द इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में प्रशासन को विरोध का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए प्रशासन स्वंय जिम्मेदार होगा। पे नाऊ पर क्लिक करे।
IPL 2023 में विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच का विवाद जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. 10 साल पहले साल 2013 में एक IPL मैच के दौरान गौतम गंभीर और विराट कोहली बीच मैदान पर आमने-सामने हो गए थे. दोनों दिग्गजों की लड़ाई चर्चा में रही थी. वहीं अब दोनों फिर से लड़ पड़े है. हाल ही में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में एक मैच हुआ. मैच के बाद किसी बात पर विराट और गौतम फिर आमने-सामने आ गए. दोनों के बीच बहसबाजी हुई. इसके बाद अन्य खिलाड़ियों की मदद से दोनों को अलग कराया गया. विराट और गंभीर के बीच का विवद लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है. दोनों के विवाद पर फैंस के साथ ही कई क्रिकेट दिग्गजों ने भी अपनी बात रखी है. किसी ने कोहली का समर्थन किया तो किसी ने गंभीर का पक्ष लिया. वहीं अब भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने दोनों खिलाड़ियों को बैन करने की मांग की है. सहवाग ने हाल ही में एक बातचीत में कहा है कि, "मैच खत्म होते ही मैंने टीवी बंद कर दिया, मैच के बाद क्या हुआ मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अगले दिन जब मैं उठा तो सोशल मीडिया पर काफी बवाल देखा. जो हुआ वह ठीक नहीं था. हारने वाले को चुपचाप हार मान लेनी चाहिए और चले जाना चाहिए और जीतने वाली टीम को जश्न मनाना चाहिए". सहवाग ने आगे कहा कि, "उन्हें एक-दूसरे से कुछ कहने की जरूरत क्यों पड़ी...मैं हमेशा एक बात कहता हूं कि ये लोग देश के आइकॉन हैं. अगर वे कुछ करते या कहते हैं, तो लाखों बच्चे उन्हें फॉलो करते हैं और शायद सोचते हैं कि 'अगर मेरे आइकन ने ऐसा किया है, तो मैं भी करूंगा', इसलिए अगर वे इन बातों को ध्यान में रखेंगे तो ऐसी घटनाओं को मैदान पर नहीं होने देंगे". सहवाग ने खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग भी की है. पूर्व क्रिकेटर ने कहा है कि, "अगर बीसीसीआई किसी पर बैन लगाने का फैसला करता है तो शायद ऐसी घटनाएं कभी-कभार ही होंगी या बिल्कुल भी नहीं होंगी. इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप ड्रेसिंग रूम के नियंत्रित माहौल में जो चाहें करें". सहवाग आगे कहते है कि, "जब आप मैदान पर होते हैं तो ये चीजें अच्छी नहीं लगतीं. . मेरे अपने बच्चे लिप-रीड कर सकते हैं और वे 'बेन स्टोक्स' को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए मुझे बुरा लगता है. यदि आप ऐसी बातें कह रहे हैं, यदि मेरे बच्चे इसे पढ़ सकते हैं, तो दूसरे भी पढ़ सकते हैं और कल वे सोचेंगे कि यदि वे (कोहली और गंभीर) ऐसा कह सकते हैं, तो मैं भी कर सकता हूं". इस विवाद के बाद विराट कोहली और गौतम गंभीर पर 100 फीसदी मैच फीस का जुर्माना भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तरफ से लगाया गया है. वहीं विवाद में शामिल रहे लखनऊ के गेंदबाज नवीन उल हक पर 50 फीसदी का जुर्माना लगा है.
IPL दो हज़ार तेईस में विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच का विवाद जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. दस साल पहले साल दो हज़ार तेरह में एक IPL मैच के दौरान गौतम गंभीर और विराट कोहली बीच मैदान पर आमने-सामने हो गए थे. दोनों दिग्गजों की लड़ाई चर्चा में रही थी. वहीं अब दोनों फिर से लड़ पड़े है. हाल ही में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में एक मैच हुआ. मैच के बाद किसी बात पर विराट और गौतम फिर आमने-सामने आ गए. दोनों के बीच बहसबाजी हुई. इसके बाद अन्य खिलाड़ियों की मदद से दोनों को अलग कराया गया. विराट और गंभीर के बीच का विवद लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है. दोनों के विवाद पर फैंस के साथ ही कई क्रिकेट दिग्गजों ने भी अपनी बात रखी है. किसी ने कोहली का समर्थन किया तो किसी ने गंभीर का पक्ष लिया. वहीं अब भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने दोनों खिलाड़ियों को बैन करने की मांग की है. सहवाग ने हाल ही में एक बातचीत में कहा है कि, "मैच खत्म होते ही मैंने टीवी बंद कर दिया, मैच के बाद क्या हुआ मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अगले दिन जब मैं उठा तो सोशल मीडिया पर काफी बवाल देखा. जो हुआ वह ठीक नहीं था. हारने वाले को चुपचाप हार मान लेनी चाहिए और चले जाना चाहिए और जीतने वाली टीम को जश्न मनाना चाहिए". सहवाग ने आगे कहा कि, "उन्हें एक-दूसरे से कुछ कहने की जरूरत क्यों पड़ी...मैं हमेशा एक बात कहता हूं कि ये लोग देश के आइकॉन हैं. अगर वे कुछ करते या कहते हैं, तो लाखों बच्चे उन्हें फॉलो करते हैं और शायद सोचते हैं कि 'अगर मेरे आइकन ने ऐसा किया है, तो मैं भी करूंगा', इसलिए अगर वे इन बातों को ध्यान में रखेंगे तो ऐसी घटनाओं को मैदान पर नहीं होने देंगे". सहवाग ने खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग भी की है. पूर्व क्रिकेटर ने कहा है कि, "अगर बीसीसीआई किसी पर बैन लगाने का फैसला करता है तो शायद ऐसी घटनाएं कभी-कभार ही होंगी या बिल्कुल भी नहीं होंगी. इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप ड्रेसिंग रूम के नियंत्रित माहौल में जो चाहें करें". सहवाग आगे कहते है कि, "जब आप मैदान पर होते हैं तो ये चीजें अच्छी नहीं लगतीं. . मेरे अपने बच्चे लिप-रीड कर सकते हैं और वे 'बेन स्टोक्स' को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए मुझे बुरा लगता है. यदि आप ऐसी बातें कह रहे हैं, यदि मेरे बच्चे इसे पढ़ सकते हैं, तो दूसरे भी पढ़ सकते हैं और कल वे सोचेंगे कि यदि वे ऐसा कह सकते हैं, तो मैं भी कर सकता हूं". इस विवाद के बाद विराट कोहली और गौतम गंभीर पर एक सौ फीसदी मैच फीस का जुर्माना भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तरफ से लगाया गया है. वहीं विवाद में शामिल रहे लखनऊ के गेंदबाज नवीन उल हक पर पचास फीसदी का जुर्माना लगा है.
भारतीय कप्तान विराट कोहली बुधवार को जारी ताजा आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। शुक्रवार से साउथम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत की अगवाई करने वाले कोहली के 814 अंक हैं। टॉप-10 में शामिल अन्य भारतीयों में कोहली के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत (747 अंक) और स्टार सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा (747 अंक) मौजूद हैं, जिन्होंने अपना संयुक्त छठा स्थान बरकरार रखा है। स्मिथ ने पिछले साल बाक्सिंग डे टेस्ट के बाद पहली बार शीर्ष स्थान हासिल किया, उन्होंने न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को हटाया जो वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में अपनी टीम की अगवाई करेंगे। विलियम्सन चोटिल होने के कारण इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में नहीं खेले थे, जिससे वह स्मिथ से पांच अंक खिसक गए।
भारतीय कप्तान विराट कोहली बुधवार को जारी ताजा आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। शुक्रवार से साउथम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत की अगवाई करने वाले कोहली के आठ सौ चौदह अंक हैं। टॉप-दस में शामिल अन्य भारतीयों में कोहली के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत और स्टार सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा मौजूद हैं, जिन्होंने अपना संयुक्त छठा स्थान बरकरार रखा है। स्मिथ ने पिछले साल बाक्सिंग डे टेस्ट के बाद पहली बार शीर्ष स्थान हासिल किया, उन्होंने न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को हटाया जो वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में अपनी टीम की अगवाई करेंगे। विलियम्सन चोटिल होने के कारण इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में नहीं खेले थे, जिससे वह स्मिथ से पांच अंक खिसक गए।
स्पोर्ट्स डेस्क : भारत के पूर्व फील्डिंग कोच आर श्रीधर ने हाल ही में अपनी किताब 'कोचिंग बियॉन्डः माई डेज विद द इंडियन क्रिकेट टीम' का विमोचन किया और तब से क्रिकेट की दुनिया उनके शब्दों से बंधी हुई है। श्रीधर ने अपनी पुस्तक में भारतीय ड्रेसिंग रूम के बारे में कुछ दिलचस्प घटनाओं का विवरण दिया है जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। अब उनकी आत्मकथा के एक और किस्से ने इंटरनेट का ध्यान खींचा है। पूर्व फील्डिंग कोच ने 2014-15 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के हिस्से के रूप में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान एमएस धोनी और विराट कोहली के बीच चर्चा की शुरुआत की। श्रीधर ने खुलासा किया कि कैसे धोनी ने दौरे के दौरान भारतीय टेस्ट टीम की बागडोर कोहली को सौंपने और प्रारूप से संन्यास लेने का मन बना लिया था। श्रृंखला के पहले एडिलेड टेस्ट के अंतिम दिन से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत को कोच ने विस्तार से बताया। एडिलेड टेस्ट की अंतिम पारी में भारत एक बड़ा स्कोर खड़ा कर रहा था। धोनी मैच में नहीं खेल रहे थे, उन्होंने कोहली को समझाने की कोशिश की कि अगर ऑस्ट्रेलिया ने पारी घोषित कर दी तो ड्रॉ का लक्ष्य रखना चाहिए और आक्रामक मोड में नहीं जाना चाहिए। इस दौरान कोहली स्टैंड-इन कप्तान थे। श्रीधर ने लिखा कि कोहली ने उन्हें बताया था कि धोनी ने क्या सुझाव दिया था। श्रीधर ने कहा, 'देखो, विराट, तुम इस लक्ष्य का पीछा कर सकते हो, (धोनी ने कहा)। आप उस तरह के खिलाड़ी हो और हम सभी यह जानते हैं लेकिन कप्तान के तौर पर आपको दूसरों के बारे में भी सोचना होगा। क्या बल्लेबाज सकारात्मक रूप से खेलने में सक्षम हैं और टेस्ट मैच के अंतिम दिन 360 रनों का पीछा करने का प्रयास कर रहे हैं? निर्णय लेते समय, आपको पूरी टीम की ताकत पर विचार करना होगा। ' श्रीधर ने किताब में कोहली के हवाले से कहा, 'हमने टेस्ट मैच के आखिरी दिन 360 का पीछा पहले कभी नहीं किया है क्योंकि हमने अभी तक ऐसा करने की कोशिश नहीं की है। आइए कोशिश करें और इसे एक शॉट दें। जब तक हम कोशिश नहीं करेंगे, हमें कैसे पता चलेगा कि हम कितने अच्छे हैं? ' अंततः खेल के अंतिम दिन भारत को 364 रनों का लक्ष्य दिया गया। कोहली ने टेस्ट में अपना दूसरा शतक लगाया। लेकिन उनके और मुरली विजय के आउट होने के बाद भारतीय टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख पाई और 48 रनों से मैच हार गए। श्रीधर ने लिखा, 'उन्होंने कहा कि टेस्ट में विराट के दूसरे शतक के बावजूद हम 48 रन से हार गए लेकिन मेरे लिए वह मैच उसकी शुरुआत थी जहां आज भारतीय टेस्ट टीम है। वह क्षण था जब हम एक टीम के रूप में जानते थे कि हम इस तरह टेस्ट क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। ' गौर हो कि कोहली के मार्गदर्शन में भारत ने 68 टेस्ट खेले और उनमें से 40 जीते। स्टार बल्लेबाज देश के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने हुए हैं। 2022 में दक्षिण अफ्रीका से भारत की श्रृंखला हार के बाद कोहली ने टेस्ट कप्तान के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
स्पोर्ट्स डेस्क : भारत के पूर्व फील्डिंग कोच आर श्रीधर ने हाल ही में अपनी किताब 'कोचिंग बियॉन्डः माई डेज विद द इंडियन क्रिकेट टीम' का विमोचन किया और तब से क्रिकेट की दुनिया उनके शब्दों से बंधी हुई है। श्रीधर ने अपनी पुस्तक में भारतीय ड्रेसिंग रूम के बारे में कुछ दिलचस्प घटनाओं का विवरण दिया है जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। अब उनकी आत्मकथा के एक और किस्से ने इंटरनेट का ध्यान खींचा है। पूर्व फील्डिंग कोच ने दो हज़ार चौदह-पंद्रह में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के हिस्से के रूप में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान एमएस धोनी और विराट कोहली के बीच चर्चा की शुरुआत की। श्रीधर ने खुलासा किया कि कैसे धोनी ने दौरे के दौरान भारतीय टेस्ट टीम की बागडोर कोहली को सौंपने और प्रारूप से संन्यास लेने का मन बना लिया था। श्रृंखला के पहले एडिलेड टेस्ट के अंतिम दिन से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत को कोच ने विस्तार से बताया। एडिलेड टेस्ट की अंतिम पारी में भारत एक बड़ा स्कोर खड़ा कर रहा था। धोनी मैच में नहीं खेल रहे थे, उन्होंने कोहली को समझाने की कोशिश की कि अगर ऑस्ट्रेलिया ने पारी घोषित कर दी तो ड्रॉ का लक्ष्य रखना चाहिए और आक्रामक मोड में नहीं जाना चाहिए। इस दौरान कोहली स्टैंड-इन कप्तान थे। श्रीधर ने लिखा कि कोहली ने उन्हें बताया था कि धोनी ने क्या सुझाव दिया था। श्रीधर ने कहा, 'देखो, विराट, तुम इस लक्ष्य का पीछा कर सकते हो, । आप उस तरह के खिलाड़ी हो और हम सभी यह जानते हैं लेकिन कप्तान के तौर पर आपको दूसरों के बारे में भी सोचना होगा। क्या बल्लेबाज सकारात्मक रूप से खेलने में सक्षम हैं और टेस्ट मैच के अंतिम दिन तीन सौ साठ रनों का पीछा करने का प्रयास कर रहे हैं? निर्णय लेते समय, आपको पूरी टीम की ताकत पर विचार करना होगा। ' श्रीधर ने किताब में कोहली के हवाले से कहा, 'हमने टेस्ट मैच के आखिरी दिन तीन सौ साठ का पीछा पहले कभी नहीं किया है क्योंकि हमने अभी तक ऐसा करने की कोशिश नहीं की है। आइए कोशिश करें और इसे एक शॉट दें। जब तक हम कोशिश नहीं करेंगे, हमें कैसे पता चलेगा कि हम कितने अच्छे हैं? ' अंततः खेल के अंतिम दिन भारत को तीन सौ चौंसठ रनों का लक्ष्य दिया गया। कोहली ने टेस्ट में अपना दूसरा शतक लगाया। लेकिन उनके और मुरली विजय के आउट होने के बाद भारतीय टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख पाई और अड़तालीस रनों से मैच हार गए। श्रीधर ने लिखा, 'उन्होंने कहा कि टेस्ट में विराट के दूसरे शतक के बावजूद हम अड़तालीस रन से हार गए लेकिन मेरे लिए वह मैच उसकी शुरुआत थी जहां आज भारतीय टेस्ट टीम है। वह क्षण था जब हम एक टीम के रूप में जानते थे कि हम इस तरह टेस्ट क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। ' गौर हो कि कोहली के मार्गदर्शन में भारत ने अड़सठ टेस्ट खेले और उनमें से चालीस जीते। स्टार बल्लेबाज देश के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने हुए हैं। दो हज़ार बाईस में दक्षिण अफ्रीका से भारत की श्रृंखला हार के बाद कोहली ने टेस्ट कप्तान के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इन्दौर : राठौर रॉयल्स सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार का आयोजन रविवार 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे जाल सभागृह में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें शहर के जाने-माने शिक्षाविद् शामिल होकर स्टूडेंट्स को कॅरियर पर मार्गदर्शन के साथ ही सेमीनार देंगे। मयंक राठौर, लोकेंद्र राठौर एवं अमरसिंह राठौर, अमित राठौर ने बताया कि आओ हम भविष्य की बात करें शिर्षक से यह कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि हर विद्यार्थी के मन में यह सवाल उठता है कि भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए वह अपनी उच्च शिक्षा किस विषय का अध्ययन करते हुए हासिल करें। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में ना केवल विद्यार्थी अपितु माता-पिता भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। उज्जवल भविष्य की नीव रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि विद्यार्थी द्वारा सही समय पर सही विषय का चयन किया जाए। इस तरह के सभी सवालों को ध्यान रखकर यह आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राठौर समाज के स्टूडेंट्स अपने कॅरियर को लेकर शिक्षाविदों से निःशुल्क मार्गदर्शन ले सकते हैं। वहीं इस अवसर पर सेमीनार का आयोजन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् जयंतीलाल भंडारी, गिरजेश राठौर, डॉक्टर संदीप राठौर,नीरज राठौर, विजिता भटोरे अपना उद्बोधन भी युवाओं को देंगे। राठौर समाज के बच्चे व अभिभावकों ने इस सेमीनार में शामिल होने के लिए पंजीयन करा चुके हैं। कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार में राठौर रॉयल सोशल वेलफेयर सोसाइटी इंदौर द्वारा सर्व राठौर समाज के विद्यार्थीयों को आमंत्रित किया गया है। शिविर की अन्य जानकारियों के लिए लोकेंद्र राठौर (9893079791) एवं अमर जी राठौर (9827740609)से स्टूडेंट्स व अभिभावक संपर्क कर सकते हैं।
इन्दौर : राठौर रॉयल्स सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार का आयोजन रविवार अट्ठारह फरवरी को दोपहर बारह बजे जाल सभागृह में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें शहर के जाने-माने शिक्षाविद् शामिल होकर स्टूडेंट्स को कॅरियर पर मार्गदर्शन के साथ ही सेमीनार देंगे। मयंक राठौर, लोकेंद्र राठौर एवं अमरसिंह राठौर, अमित राठौर ने बताया कि आओ हम भविष्य की बात करें शिर्षक से यह कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि हर विद्यार्थी के मन में यह सवाल उठता है कि भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए वह अपनी उच्च शिक्षा किस विषय का अध्ययन करते हुए हासिल करें। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में ना केवल विद्यार्थी अपितु माता-पिता भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। उज्जवल भविष्य की नीव रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि विद्यार्थी द्वारा सही समय पर सही विषय का चयन किया जाए। इस तरह के सभी सवालों को ध्यान रखकर यह आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राठौर समाज के स्टूडेंट्स अपने कॅरियर को लेकर शिक्षाविदों से निःशुल्क मार्गदर्शन ले सकते हैं। वहीं इस अवसर पर सेमीनार का आयोजन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् जयंतीलाल भंडारी, गिरजेश राठौर, डॉक्टर संदीप राठौर,नीरज राठौर, विजिता भटोरे अपना उद्बोधन भी युवाओं को देंगे। राठौर समाज के बच्चे व अभिभावकों ने इस सेमीनार में शामिल होने के लिए पंजीयन करा चुके हैं। कॅरियर काउंसलिंग व सेमीनार में राठौर रॉयल सोशल वेलफेयर सोसाइटी इंदौर द्वारा सर्व राठौर समाज के विद्यार्थीयों को आमंत्रित किया गया है। शिविर की अन्य जानकारियों के लिए लोकेंद्र राठौर एवं अमर जी राठौर से स्टूडेंट्स व अभिभावक संपर्क कर सकते हैं।
वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक और कामबंदी को रोकने के लिए एक बिल पारित कर दिया है। इस बिल को सीनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मेक्सिको सीमा दीवार के लिए धन प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करेंगे।
वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक और कामबंदी को रोकने के लिए एक बिल पारित कर दिया है। इस बिल को सीनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मेक्सिको सीमा दीवार के लिए धन प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करेंगे।
अपनी गायन प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के बाद, आस्था गिल खतरों के खिलाड़ी 11 में अपने साहसिक पक्ष का पता लगाने के लिए तैयार है। गायिका रोहित शेट्टी द्वारा होस्ट किए गए कलर्स रियलिटी शो में प्रतियोगियों में से एक है। KKK 11 की शूटिंग के लिए केप टाउन जाने से पहले, आस्था ने साथ एक विशेष बातचीत में साझा किया कि वह शुरुआत में शो लेने के लिए काफी अनिच्छुक थीं। "जब उन्होंने मुझे बुलाया, तो मुझे यकीन नहीं था, लेकिन फिर मैंने हाँ कहा क्योंकि यह किसी के डर को दूर करने का एक अच्छा मंच है। इसके अलावा, यह सब रोमांच के बारे में है, इसलिए मैं इसे आगे लाने की तरह थी, चलो इसे करते हैं, "उसने कहा।
अपनी गायन प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के बाद, आस्था गिल खतरों के खिलाड़ी ग्यारह में अपने साहसिक पक्ष का पता लगाने के लिए तैयार है। गायिका रोहित शेट्टी द्वारा होस्ट किए गए कलर्स रियलिटी शो में प्रतियोगियों में से एक है। KKK ग्यारह की शूटिंग के लिए केप टाउन जाने से पहले, आस्था ने साथ एक विशेष बातचीत में साझा किया कि वह शुरुआत में शो लेने के लिए काफी अनिच्छुक थीं। "जब उन्होंने मुझे बुलाया, तो मुझे यकीन नहीं था, लेकिन फिर मैंने हाँ कहा क्योंकि यह किसी के डर को दूर करने का एक अच्छा मंच है। इसके अलावा, यह सब रोमांच के बारे में है, इसलिए मैं इसे आगे लाने की तरह थी, चलो इसे करते हैं, "उसने कहा।
गिरवर में धात धात मैं गिरवर, गिरवर धात न षाया ॥ भेष भरोसे मति कोई भूलै जब लग यहु मत नाया ॥१०॥ चौमासे दोइ चात्रिग ग्रास्या, निरपषि निजरि समाया ।। सात समद मोती मैं वास्या, मरजीवा ले आया ।।११।। नवघण घटा वरसती थाकी, भार अठारह पाई । चिंता षिवणि गाजै गत आप वसुधा गिगन समाई ॥१२॥ गागरिका पांणी कूवा पीवै, मया अचंभा मारी ॥ उलटी नेज अगम सूँ लागी, पड़ि फूटी पणिहारी ।।१३।। पाठभेद - इहु - २ । चात्रग - २ । निरपष - ३-४ । नौघरण- १ । स्यू - १ । १० वीं साखी - गिरवर सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ चेतनतत्व के धातु त्रिगुरणात्मक, पंचभूतात्मक, स्थूल तत्व हैं । धातु स्थूल तत्वों में चेतन व्याप्त है, पर चेतनतत्व स्थूल देहादि का नाशक नहीं है, उनका नाश कर्मानुबन्धिकालजन्य है। केवल भेष से काल की चपेट टल जाय ऐसी भूल कोई न करे । काल जब ही जीता जायगा, जब साधना से आत्मज्ञान की प्राप्ति की जाय । ११ वीं साखी - एकाग्र प्रात्मरत वृत्तिरूपी चातुर्मास दशा ने प्रज्ञान तथा मोहरूपी दो चात्रज्ञ पक्षियों को ग्रसित किया, जिससे द्वेत बुद्धि का निवारण हो । निरपष - धर्म, जाति, कुलादि का पक्ष निवृत्त हो व्यापक समत्व दृष्टि प्राप्त हुई । विशुद्ध मन रूपी मोती में साधना की सत्य भूमिका सिद्ध हुई। इस तरह - मरजीवाजीवन्मृतक साधक जीवन्मुक्त अवस्था को ले आया-प्राप्त हुआ । १२ वीं साखी - नवघर-पाँचों इन्द्रियाँ व चारों अन्तःकररणरूपी बादलों की घटायें बरस बरस थक गई । भार अठारह-आठ महत दस लघु सिद्धियाँ पुष्ट हुईं । चिता षिवरिण - वासना रूपी बिजली की गरज व प्रधानता समाप्त हुई । गत पौ अहंकार नष्ट हुआ । वसुधा वृत्ति गगनदशम द्वार में स्थिर हुई अर्थात् समाधिदशा प्राप्त हुई। १३ वीं साखी - आत्मतत्वरूपी कुआ देहध्यासरूपी गागर का पानी पीने लगा, जिससे प्रति आश्चर्य हुआ, उलटी नेज-वृत्तिरूपी नेज-डोरी अन्तर्मुख आत्माभिमुख हुई । अगम सू - ब्रह्म से लगी, ब्रह्मनिष्ठ हुई । वासनामय पणिहारी पड़ीखत्म हुई, तब भोगरूपी गगरी भी फूट गई । मेरडंड वाई चढ़ छेद्या, जलमल अगनि ग्रास्या ।। मिट गया त्रिवधि तिमिर या तन तैं, परम सूर परकास्या ।।१४।। सीमरता सकला जुग सूता, पडदा परहा न होई ।। उदै कँवल तहाँ अनि वलत है, जागि न देषे कोई ॥१५॥ सत रज तम गुण काम क्रोध मद, मोह दोह कस दीया ।। पांगी जलै अगनि जल सोषै, ऐसा आरंभ कीया ॥१६॥ मुद्रा सवद सुवधि कंठि सींगी, ग्यांन चक्र करि धार । चेला पांच जटा सिरि जरणां, आसण सूनि हमारं ।।१७।। पैंडा अधर अगम उरिं उदबुद कथा अभेदं ।। षिम्यां षड़ग लै ऐसे षेलू, जनम मरण सिरि छेदं ।।१८।। पाठमेद - मेरदंड - १ । सुवुधि - १ । बेलौ - १ । जन्म-४ । १४ वीं साखी - वाई प्रारण- मेरुदण्ड सुषुम्ना मार्ग द्वारा गगनमंडल में पहुंचा, प्रदीप्त योगाग्नि ने वासना के जल व भोग के कालुष्य का शोषण किया, देह के त्रिविध ताप निवृत्त हो गए - मल, विक्षेप, ध्यासरूपी तिमिर- प्रज्ञानान्धकार का भी निवारण हुआ और परम सूर - विशुद्ध ब्रह्मतेज का प्रकाश फैला । १५ वीं साखी - सांसारिक भोग-विलासमय शीत से त्रस्त सब संसार सो रहा है - अज्ञानरूपी अन्धकार का पर्दा दूर नहीं हो रहा है । उदै कँवल - नाभिकमल में ज्ञानज्योति जल रही है पर कोई जागकर सचेत होकर देख नहीं रहा है। १६ वीं साखी - त्रिगुरणात्मक अन्तःकरण के धर्म, काम, क्रोध, मोह आदि सब को कस दिये - काबू में कर लिये। ज्ञानाग्नि प्रदीप्त हो विषयवासना के जल को जला रही है - शोषण कर रही है । ऐसा आरंभ कीया - इस तरह की साधना में लगा हूँ । १७ वीं साखी - साधक रूपक द्वारा अपना भेष बता रहा है । शब्द - अनहद शब्द का श्रवरण मुद्रा है, कण्ठ में अजपा-जाप होता है वह सींगी है, ज्ञानरूपी चक्र वही हाथ में कड़ा है, पांचों ज्ञानेन्द्रियां हैं वे ही शिष्यवर्ग हैं, जरगां है वही सिर पर जटा है, शून्य - गगनमंडल में वृत्ति को स्थिति वही आसन है । १८ वीं साखी - पेंडा - मार्ग हमारा अधर निरालंबी है, चेतन से सम्बन्धित है, अगम- इन्द्रियातीत स्वस्वरूप है वही हृदय में निवास करता है। यह प्रभेदरूपी ज्ञानकथा उदबुद - अद्भुत है । क्षमारूपी खड्ग को ले जन्ममृत्यु के कारणरूप काल का सिर काट देता हूँ । जप मंत्र मैं सीष्या, लोभ लहरि सब झाड़ ।। काली नागणि डसण न पावै, गिणि गिणि डाढ उपाड़ ।।१६।। पाणी मैं पैसि न परसू पांगी, अवनि न ग्रालं ।। गुणां पैस निरगुण होइ निक, आसा वसि रहूं निरासं ।।२०।। करूं कर रहूं निरारंभ, जीवण कूँ पपू न हारूँ ।। छाडू साथ न साथी राघूँ, ना मैं मरूँ न मारूँ ।॥ २१॥ रहूँनयां आऊँ चालू नहीं चलाया ।। सोऊँ सहज न हठ करि जागू, भूषा , भूषा रहूं न धाया ।।२२।। पाठभेद - प्रसौ- १ । गिरास - २ - ४ । निकस्यू - १ । करौ - १ ५ । रहौं-१ । कौं-१ । षपौं-१ । हारौं - १ । छाड़ौं-१ । राषौं-१ । मरौं - १ । मारौं-१ । १६वीं साखी - मैंने अजपा जाप वृत्तिमय चिन्तन का मन्त्र सीखा है । लोभलालसा की लहरें सब झाड़ भड़क दी हैं - दूर कर दी हैं। मायारूपी काली नागिन अब काट नहीं सकती, उसकी विषय-वासना काम क्रोधादि सब डाढ़ जड़ें गिनगिन कर निकाल दी हैं । २०वीं साखी - रज वीर्यरूपी पानी से उत्पन्न इस देह में रहकर भी देहाध्यास रूप पानी का स्पर्श नहीं करता । काम-क्रोधादि की इस देह में अग्नि जलती रहती है, पर मैं उस काम-क्रोधादि विषयवासनादि अग्नि से ग्रसित नहीं हूँ । त्रिगुरणात्मक शरीर में रहकर भी मैं निर्गुरण होकर उससे तटस्थ हूँ। विविध प्राशा वाले मन के साथ रहते हुए भी मैं सब आशाओं से मुक्त हूँ । २१वीं साखी - साधना रूपी कर्म का प्रारम्भ करता हूँ, पर वह कर्म निष्काम है । अतः आरम्भ दिखते हुए भी निरारम्भ है । मुक्त होने के प्रयास में हूँ, इसमें आने वाली बाधाओं से हारूगा नहीं। अपने आत्मस्वरूप का साथ छोडूंगा नहीं, ज्ञानेन्द्रियों को अन्तर्मुख कर साथ रखूँगा । न मैं काल-कवलित होऊँगा, अभेदभावना से किसी का में मारक भी नहीं । २२वीं साखी - कामादि प्रवृत्तियों से रुक नहीं, लोभ-लालसा के बुलाने पर ग्राऊँ नहीं, मन के चलाने से चलू नहीं, सहज दशा प्राप्त कर समाधि में सोऊ । सांसारिक प्रवृत्तियों के दुराग्रह से जागू नहीं, अपनी साधना छोडू नहीं, स्वस्वरूप - प्राप्ति के परमानन्द से तृप्त रहूं पर उससे धापू नहीं - विरत नहीं होऊ । का सहज गुण ग्रासै, गुण कोई व्यापै नांही ॥ अवधू तन मन ऐसे राषै ज्यू, चंदा जल मांही ।।२३।। साहिब घट साध सब घट घर, कीमति कहत न आवै ।। वार पार कोई मधिन जांग, सब कोई अगम बतावे ।॥ २४ ॥ परमपुरिष परग्यांन परमसुष, परापरै पति पाया ।। जन हरीदास मन उनमनि लागा, सहजैं सुनि समाया ।।२५।। पारब्रह्म पति परम सनेही, समद रूप सब मांहीं ॥ जन हरीदास साध सुषि लागा, धार पार कछु नांही ।।२६।। ।। इति जोगध्यान जोगग्रन्थ सम्पूर्ण ।। ॥ अथ प्राणमात्रा जोगग्रन्थ ॥ ॐ प्राणमात्रा सुगौ हो साधौ, भजन का भेद, कांम क्रोध का करिवा छेद ।। राषिवा पाँच साथी, मन मैमंत मारिवा हाथी ॥१॥ मैं तैं मोह दल जीतिवा जोगी, जुरा भै मेटिवा पवन रस भोगी ।। सवद की गूदड़ी सास सव धागा, अचाहि की सूई लै सींव लागा ।।२।। पाठभेद - ज्यौं-२ । कहैत - २ । उनमन - २ । पंच-१ । शब्दार्थ - प्रारणमात्रा = प्रारण का काल से नियन्त्रण । एकपहि एक स्थान, एकाग्र । मैमंत= मस्त । मैं तें मेरा तेरा । पवन रस भोगी - प्रारणसमाधि रस । प्रचाहि-अनिच्छा । २३वीं साखी - जैसे प्रकाश में विविध वर्गों की प्रतीति होते हुए भी प्रकाश सब वर्गों से अलिप्त रहता है- ऐसे ही आत्मसाधना में लगा साधक अपने तन-मन को सब विषय-भोगों से अलिप्त रखे जैसे जल में चन्द्रमा । श्री हरिदासजी की वारमी निरास मैं मुद्रा सील संतोष सति चेला, ध्यांन की धूई तहां सिधां का मेला ॥ दया धीरज डंड साच करि गहिवा, विचार के उनमनि रहिवा ॥३॥ सवद की सींगी सहज की माला, जत की कोपीन तहाँ जोग का ताला ।। निरमोह मढी निहचल वासा, जरणां की जटा सिरि देषिवा तमासा ॥४॥ निरास उड़ाणी अकल की छाया, अवर उठि चालिवा तजिवा काम क्रोध काया। भेद सिर टोपी तन वाघंवर, निरगुण जो घोटा सूनि वस्ती न घर ॥५॥ Xपताल का पांणी काकू चढ़ाइवा, कलपना सरपणी पवन मुषि षाइवा ॥ सतगुर सवद ले अगह अगम उर धारिवा, ग्यांन का चक्र लै काल कूँ मारिवा वारह सोलहकला लै एक वरि आणिवा, जोगका मूल यह जुगति सब जांणिवा । गुर का सवद लै भौंरा जगाइवा, सरप बंबई तजि अगम तहाँ जाइवा । ७ । देषि पग धरिवा दया पंथ करिवा, उद्र भरि न सोइवा धात करि न धरिवा ।। भैमीत नग्री मोहनी माया, कामना मिटी तब जोग पंथ पाया ।।८। रहता सो भाई वहता सो वहरणां, अवधू उलटा गोता मारिस मैं रहणां ।। की अंमध्यान भाषिवा, निरंजन मात्रा जतन सूँ राषिवा ॥६॥ पाठमेद - दंड - १ । वसती -२ । श्रपणी - १ -५ । अगेह- १ । बारह - ३-५ । देषि पांव धारिवा-१ । उदर - १ । नगरी - १ । अर्थ - ४-५ । शब्दार्थ - भेद-रहस्य, ज्ञान, तथ्य । वारह - सूर्य की कला, पिंगला । सोलहचन्द्रमा की सोलह कला, इड़ा । इड़ा पिंगला को एक घर सुषुम्ना में आरिणवालाना । भौंरा = जीवात्मारूपी भ्रमर । सरप वंवई संशय का मूल । देषि-ज्ञानदृष्टि से । दया पंथ करिवा=मन, बचन, कर्म से अहिंसक रहना । उद्र भरि प्रतिहार कर । धात करि न घरिवा- सोना, चांदी आदि धातु को लेना नहीं । भयभीत नग्री = देह रूपी नगरी कालभय से भयभीत है । रहता = एकाग्र मन । वहता चंचल मन । प्ररथ की अंधारी रूप, रस, शब्दादि विषयों का अन्धकार न आने देना । x पांरगी - शुक्ररूपी द्रव जो स्वभावतः अधोगति है, जिसके निकलने का स्थान मूत्रेन्द्रिय है। उस पाताल स्थान से वीर्य को प्रकाश में चढ़ाना - ऊर्ध्व रेता होना । मन की चंचलतारूपी सर्पिणी को प्रारणायाम की साधना द्वारा समाप्त करना, सतगुरु के उपदेशानुसार पकड़ में न आने वाले इन्द्रियातीत चेतन तत्व की स्वानुभूति करना, नित्यानित्य विवेक रूपी चक्र से काल पर विजय पाना ।
गिरवर में धात धात मैं गिरवर, गिरवर धात न षाया ॥ भेष भरोसे मति कोई भूलै जब लग यहु मत नाया ॥दस॥ चौमासे दोइ चात्रिग ग्रास्या, निरपषि निजरि समाया ।। सात समद मोती मैं वास्या, मरजीवा ले आया ।।ग्यारह।। नवघण घटा वरसती थाकी, भार अठारह पाई । चिंता षिवणि गाजै गत आप वसुधा गिगन समाई ॥बारह॥ गागरिका पांणी कूवा पीवै, मया अचंभा मारी ॥ उलटी नेज अगम सूँ लागी, पड़ि फूटी पणिहारी ।।तेरह।। पाठभेद - इहु - दो । चात्रग - दो । निरपष - तीन-चार । नौघरण- एक । स्यू - एक । दस वीं साखी - गिरवर सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ चेतनतत्व के धातु त्रिगुरणात्मक, पंचभूतात्मक, स्थूल तत्व हैं । धातु स्थूल तत्वों में चेतन व्याप्त है, पर चेतनतत्व स्थूल देहादि का नाशक नहीं है, उनका नाश कर्मानुबन्धिकालजन्य है। केवल भेष से काल की चपेट टल जाय ऐसी भूल कोई न करे । काल जब ही जीता जायगा, जब साधना से आत्मज्ञान की प्राप्ति की जाय । ग्यारह वीं साखी - एकाग्र प्रात्मरत वृत्तिरूपी चातुर्मास दशा ने प्रज्ञान तथा मोहरूपी दो चात्रज्ञ पक्षियों को ग्रसित किया, जिससे द्वेत बुद्धि का निवारण हो । निरपष - धर्म, जाति, कुलादि का पक्ष निवृत्त हो व्यापक समत्व दृष्टि प्राप्त हुई । विशुद्ध मन रूपी मोती में साधना की सत्य भूमिका सिद्ध हुई। इस तरह - मरजीवाजीवन्मृतक साधक जीवन्मुक्त अवस्था को ले आया-प्राप्त हुआ । बारह वीं साखी - नवघर-पाँचों इन्द्रियाँ व चारों अन्तःकररणरूपी बादलों की घटायें बरस बरस थक गई । भार अठारह-आठ महत दस लघु सिद्धियाँ पुष्ट हुईं । चिता षिवरिण - वासना रूपी बिजली की गरज व प्रधानता समाप्त हुई । गत पौ अहंकार नष्ट हुआ । वसुधा वृत्ति गगनदशम द्वार में स्थिर हुई अर्थात् समाधिदशा प्राप्त हुई। तेरह वीं साखी - आत्मतत्वरूपी कुआ देहध्यासरूपी गागर का पानी पीने लगा, जिससे प्रति आश्चर्य हुआ, उलटी नेज-वृत्तिरूपी नेज-डोरी अन्तर्मुख आत्माभिमुख हुई । अगम सू - ब्रह्म से लगी, ब्रह्मनिष्ठ हुई । वासनामय पणिहारी पड़ीखत्म हुई, तब भोगरूपी गगरी भी फूट गई । मेरडंड वाई चढ़ छेद्या, जलमल अगनि ग्रास्या ।। मिट गया त्रिवधि तिमिर या तन तैं, परम सूर परकास्या ।।चौदह।। सीमरता सकला जुग सूता, पडदा परहा न होई ।। उदै कँवल तहाँ अनि वलत है, जागि न देषे कोई ॥पंद्रह॥ सत रज तम गुण काम क्रोध मद, मोह दोह कस दीया ।। पांगी जलै अगनि जल सोषै, ऐसा आरंभ कीया ॥सोलह॥ मुद्रा सवद सुवधि कंठि सींगी, ग्यांन चक्र करि धार । चेला पांच जटा सिरि जरणां, आसण सूनि हमारं ।।सत्रह।। पैंडा अधर अगम उरिं उदबुद कथा अभेदं ।। षिम्यां षड़ग लै ऐसे षेलू, जनम मरण सिरि छेदं ।।अट्ठारह।। पाठमेद - मेरदंड - एक । सुवुधि - एक । बेलौ - एक । जन्म-चार । चौदह वीं साखी - वाई प्रारण- मेरुदण्ड सुषुम्ना मार्ग द्वारा गगनमंडल में पहुंचा, प्रदीप्त योगाग्नि ने वासना के जल व भोग के कालुष्य का शोषण किया, देह के त्रिविध ताप निवृत्त हो गए - मल, विक्षेप, ध्यासरूपी तिमिर- प्रज्ञानान्धकार का भी निवारण हुआ और परम सूर - विशुद्ध ब्रह्मतेज का प्रकाश फैला । पंद्रह वीं साखी - सांसारिक भोग-विलासमय शीत से त्रस्त सब संसार सो रहा है - अज्ञानरूपी अन्धकार का पर्दा दूर नहीं हो रहा है । उदै कँवल - नाभिकमल में ज्ञानज्योति जल रही है पर कोई जागकर सचेत होकर देख नहीं रहा है। सोलह वीं साखी - त्रिगुरणात्मक अन्तःकरण के धर्म, काम, क्रोध, मोह आदि सब को कस दिये - काबू में कर लिये। ज्ञानाग्नि प्रदीप्त हो विषयवासना के जल को जला रही है - शोषण कर रही है । ऐसा आरंभ कीया - इस तरह की साधना में लगा हूँ । सत्रह वीं साखी - साधक रूपक द्वारा अपना भेष बता रहा है । शब्द - अनहद शब्द का श्रवरण मुद्रा है, कण्ठ में अजपा-जाप होता है वह सींगी है, ज्ञानरूपी चक्र वही हाथ में कड़ा है, पांचों ज्ञानेन्द्रियां हैं वे ही शिष्यवर्ग हैं, जरगां है वही सिर पर जटा है, शून्य - गगनमंडल में वृत्ति को स्थिति वही आसन है । अट्ठारह वीं साखी - पेंडा - मार्ग हमारा अधर निरालंबी है, चेतन से सम्बन्धित है, अगम- इन्द्रियातीत स्वस्वरूप है वही हृदय में निवास करता है। यह प्रभेदरूपी ज्ञानकथा उदबुद - अद्भुत है । क्षमारूपी खड्ग को ले जन्ममृत्यु के कारणरूप काल का सिर काट देता हूँ । जप मंत्र मैं सीष्या, लोभ लहरि सब झाड़ ।। काली नागणि डसण न पावै, गिणि गिणि डाढ उपाड़ ।।सोलह।। पाणी मैं पैसि न परसू पांगी, अवनि न ग्रालं ।। गुणां पैस निरगुण होइ निक, आसा वसि रहूं निरासं ।।बीस।। करूं कर रहूं निरारंभ, जीवण कूँ पपू न हारूँ ।। छाडू साथ न साथी राघूँ, ना मैं मरूँ न मारूँ ।॥ इक्कीस॥ रहूँनयां आऊँ चालू नहीं चलाया ।। सोऊँ सहज न हठ करि जागू, भूषा , भूषा रहूं न धाया ।।बाईस।। पाठभेद - प्रसौ- एक । गिरास - दो - चार । निकस्यू - एक । करौ - एक पाँच । रहौं-एक । कौं-एक । षपौं-एक । हारौं - एक । छाड़ौं-एक । राषौं-एक । मरौं - एक । मारौं-एक । सोलहवीं साखी - मैंने अजपा जाप वृत्तिमय चिन्तन का मन्त्र सीखा है । लोभलालसा की लहरें सब झाड़ भड़क दी हैं - दूर कर दी हैं। मायारूपी काली नागिन अब काट नहीं सकती, उसकी विषय-वासना काम क्रोधादि सब डाढ़ जड़ें गिनगिन कर निकाल दी हैं । बीसवीं साखी - रज वीर्यरूपी पानी से उत्पन्न इस देह में रहकर भी देहाध्यास रूप पानी का स्पर्श नहीं करता । काम-क्रोधादि की इस देह में अग्नि जलती रहती है, पर मैं उस काम-क्रोधादि विषयवासनादि अग्नि से ग्रसित नहीं हूँ । त्रिगुरणात्मक शरीर में रहकर भी मैं निर्गुरण होकर उससे तटस्थ हूँ। विविध प्राशा वाले मन के साथ रहते हुए भी मैं सब आशाओं से मुक्त हूँ । इक्कीसवीं साखी - साधना रूपी कर्म का प्रारम्भ करता हूँ, पर वह कर्म निष्काम है । अतः आरम्भ दिखते हुए भी निरारम्भ है । मुक्त होने के प्रयास में हूँ, इसमें आने वाली बाधाओं से हारूगा नहीं। अपने आत्मस्वरूप का साथ छोडूंगा नहीं, ज्ञानेन्द्रियों को अन्तर्मुख कर साथ रखूँगा । न मैं काल-कवलित होऊँगा, अभेदभावना से किसी का में मारक भी नहीं । बाईसवीं साखी - कामादि प्रवृत्तियों से रुक नहीं, लोभ-लालसा के बुलाने पर ग्राऊँ नहीं, मन के चलाने से चलू नहीं, सहज दशा प्राप्त कर समाधि में सोऊ । सांसारिक प्रवृत्तियों के दुराग्रह से जागू नहीं, अपनी साधना छोडू नहीं, स्वस्वरूप - प्राप्ति के परमानन्द से तृप्त रहूं पर उससे धापू नहीं - विरत नहीं होऊ । का सहज गुण ग्रासै, गुण कोई व्यापै नांही ॥ अवधू तन मन ऐसे राषै ज्यू, चंदा जल मांही ।।तेईस।। साहिब घट साध सब घट घर, कीमति कहत न आवै ।। वार पार कोई मधिन जांग, सब कोई अगम बतावे ।॥ चौबीस ॥ परमपुरिष परग्यांन परमसुष, परापरै पति पाया ।। जन हरीदास मन उनमनि लागा, सहजैं सुनि समाया ।।पच्चीस।। पारब्रह्म पति परम सनेही, समद रूप सब मांहीं ॥ जन हरीदास साध सुषि लागा, धार पार कछु नांही ।।छब्बीस।। ।। इति जोगध्यान जोगग्रन्थ सम्पूर्ण ।। ॥ अथ प्राणमात्रा जोगग्रन्थ ॥ ॐ प्राणमात्रा सुगौ हो साधौ, भजन का भेद, कांम क्रोध का करिवा छेद ।। राषिवा पाँच साथी, मन मैमंत मारिवा हाथी ॥एक॥ मैं तैं मोह दल जीतिवा जोगी, जुरा भै मेटिवा पवन रस भोगी ।। सवद की गूदड़ी सास सव धागा, अचाहि की सूई लै सींव लागा ।।दो।। पाठभेद - ज्यौं-दो । कहैत - दो । उनमन - दो । पंच-एक । शब्दार्थ - प्रारणमात्रा = प्रारण का काल से नियन्त्रण । एकपहि एक स्थान, एकाग्र । मैमंत= मस्त । मैं तें मेरा तेरा । पवन रस भोगी - प्रारणसमाधि रस । प्रचाहि-अनिच्छा । तेईसवीं साखी - जैसे प्रकाश में विविध वर्गों की प्रतीति होते हुए भी प्रकाश सब वर्गों से अलिप्त रहता है- ऐसे ही आत्मसाधना में लगा साधक अपने तन-मन को सब विषय-भोगों से अलिप्त रखे जैसे जल में चन्द्रमा । श्री हरिदासजी की वारमी निरास मैं मुद्रा सील संतोष सति चेला, ध्यांन की धूई तहां सिधां का मेला ॥ दया धीरज डंड साच करि गहिवा, विचार के उनमनि रहिवा ॥तीन॥ सवद की सींगी सहज की माला, जत की कोपीन तहाँ जोग का ताला ।। निरमोह मढी निहचल वासा, जरणां की जटा सिरि देषिवा तमासा ॥चार॥ निरास उड़ाणी अकल की छाया, अवर उठि चालिवा तजिवा काम क्रोध काया। भेद सिर टोपी तन वाघंवर, निरगुण जो घोटा सूनि वस्ती न घर ॥पाँच॥ Xपताल का पांणी काकू चढ़ाइवा, कलपना सरपणी पवन मुषि षाइवा ॥ सतगुर सवद ले अगह अगम उर धारिवा, ग्यांन का चक्र लै काल कूँ मारिवा वारह सोलहकला लै एक वरि आणिवा, जोगका मूल यह जुगति सब जांणिवा । गुर का सवद लै भौंरा जगाइवा, सरप बंबई तजि अगम तहाँ जाइवा । सात । देषि पग धरिवा दया पंथ करिवा, उद्र भरि न सोइवा धात करि न धरिवा ।। भैमीत नग्री मोहनी माया, कामना मिटी तब जोग पंथ पाया ।।आठ। रहता सो भाई वहता सो वहरणां, अवधू उलटा गोता मारिस मैं रहणां ।। की अंमध्यान भाषिवा, निरंजन मात्रा जतन सूँ राषिवा ॥छः॥ पाठमेद - दंड - एक । वसती -दो । श्रपणी - एक -पाँच । अगेह- एक । बारह - तीन-पाँच । देषि पांव धारिवा-एक । उदर - एक । नगरी - एक । अर्थ - चार-पाँच । शब्दार्थ - भेद-रहस्य, ज्ञान, तथ्य । वारह - सूर्य की कला, पिंगला । सोलहचन्द्रमा की सोलह कला, इड़ा । इड़ा पिंगला को एक घर सुषुम्ना में आरिणवालाना । भौंरा = जीवात्मारूपी भ्रमर । सरप वंवई संशय का मूल । देषि-ज्ञानदृष्टि से । दया पंथ करिवा=मन, बचन, कर्म से अहिंसक रहना । उद्र भरि प्रतिहार कर । धात करि न घरिवा- सोना, चांदी आदि धातु को लेना नहीं । भयभीत नग्री = देह रूपी नगरी कालभय से भयभीत है । रहता = एकाग्र मन । वहता चंचल मन । प्ररथ की अंधारी रूप, रस, शब्दादि विषयों का अन्धकार न आने देना । x पांरगी - शुक्ररूपी द्रव जो स्वभावतः अधोगति है, जिसके निकलने का स्थान मूत्रेन्द्रिय है। उस पाताल स्थान से वीर्य को प्रकाश में चढ़ाना - ऊर्ध्व रेता होना । मन की चंचलतारूपी सर्पिणी को प्रारणायाम की साधना द्वारा समाप्त करना, सतगुरु के उपदेशानुसार पकड़ में न आने वाले इन्द्रियातीत चेतन तत्व की स्वानुभूति करना, नित्यानित्य विवेक रूपी चक्र से काल पर विजय पाना ।
दरअसल केंद्रनीत मोदी सरकार से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर रविवार को ब्राह्मण, पंजाबी, बनिया व राजपूत बिरादरी के लोगों ने हरियाणा के जींद शहर में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि देश में जातिगत आधार की बजाए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अगर मई माह तक आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया गया तो प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने के साथ जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष हरीराम दीक्षित ने कहा कि पंजाबी, ब्राह्मण, बनिए और राजपूतों ने अपना हक पाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इन चार जातियों के लोग पिछले कई वर्षों से केंद्र में आर्थिक आधार पर आरक्षण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा की नियत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी की नियत सही होती तो बीते दस महीनों के अंतराल में ठोस कदम उठाती। मोदी सरकार की अनदेखी के चलते ही ब्राह्मण, पंजाबी, बनिया और राजपूतों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। कौशिक खाप के उप्रपधान बलवान सिंह ने कहा कि चारों जातियों के लोगों ने 4 प्रस्ताव पारित किए। मई 2015 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अमारण अनशन आंदोलन से पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास का घेराव किया जाएगा। आमरण अनशन पर शुरूआत में तीन लोग बैठेंगे, जो मांग पूरी न होने तक अंतिम सांसों तक डटे रहेंगे। केंद्र सरकार का सकारात्मक रुख न मिलने पर ब्राह्मण, पंजाबी, बनिये और राजपूत समाज के लोग भाजपा का बहिष्कार करेंगे। आंदोलन के लिए ब्राह्मण, पंजाबी, बनिये और राजपूतों की अलग-अलग कमेटियां गठित की जाएगी, जो देश भर में प्रचार करेंगी।
दरअसल केंद्रनीत मोदी सरकार से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर रविवार को ब्राह्मण, पंजाबी, बनिया व राजपूत बिरादरी के लोगों ने हरियाणा के जींद शहर में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि देश में जातिगत आधार की बजाए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अगर मई माह तक आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया गया तो प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने के साथ जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष हरीराम दीक्षित ने कहा कि पंजाबी, ब्राह्मण, बनिए और राजपूतों ने अपना हक पाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इन चार जातियों के लोग पिछले कई वर्षों से केंद्र में आर्थिक आधार पर आरक्षण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा की नियत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी की नियत सही होती तो बीते दस महीनों के अंतराल में ठोस कदम उठाती। मोदी सरकार की अनदेखी के चलते ही ब्राह्मण, पंजाबी, बनिया और राजपूतों ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। कौशिक खाप के उप्रपधान बलवान सिंह ने कहा कि चारों जातियों के लोगों ने चार प्रस्ताव पारित किए। मई दो हज़ार पंद्रह में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अमारण अनशन आंदोलन से पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास का घेराव किया जाएगा। आमरण अनशन पर शुरूआत में तीन लोग बैठेंगे, जो मांग पूरी न होने तक अंतिम सांसों तक डटे रहेंगे। केंद्र सरकार का सकारात्मक रुख न मिलने पर ब्राह्मण, पंजाबी, बनिये और राजपूत समाज के लोग भाजपा का बहिष्कार करेंगे। आंदोलन के लिए ब्राह्मण, पंजाबी, बनिये और राजपूतों की अलग-अलग कमेटियां गठित की जाएगी, जो देश भर में प्रचार करेंगी।
इस स्थिति में न होते। जैसा अभी श्री चन्द्रिक कहा, यह देश कृषि प्रधान देश है और 70 फी सदी आदमी कृषि के ऊपर निर्भर करते हैं। बिहार में तो 80 फीसदी आदमी खेती पर निर्भर हैं । जैसा कि उन्होंने कहा खेती सारे उद्योगों की मां है । जिस प्रकार कि सौर मंडल में सूर्य का मुख्य स्थान और सारे नक्षत्र उसके चारों ओर घूमते हैं, उसी प्रकार सारे उद्योगों में खेती का मुख्य स्थान है और सारे उद्योग उसी से प्रेरणा पाते हैं । VAISAKHA 9, 1887 ( SAKA) बेती के बारे में हमने दो पंचवर्षीय योजनाओं में कोई खास ध्यान नहीं दिया और उसी का नतीजा है कि प्राज ढाई वर्षो के बीच में खाद्यान्न की कीमत डेढ़ गुनी हो गयी है और हमको बाहर से पहले की अपेक्षा तीन गुना अधिक खाद्यान्न मंगाने की आव श्यकता पड़ गयी है । हिन्दुस्तान कृषि प्रधान देश है, यहां के खेत इतने उपजाऊ हैं, गैजेटिक बली जैसी उपजाऊ भूमि यहां है, और फिर भी अगर खाद्य की कमी हो तो यह सचमुच में बड़े शर्म की बात है । लेकिन सिर्फ बातों से और चर्चाओं से इस काम को पूरा कर सकें यह सम्भव नहीं हो सकता । यह हर व्यक्ति का कर्तव्य हो जाता है कि वह खेती के बारे में खुद भी सोचे और अपने क्षेत्र में जो भी इसकी जानकारी रखते हैं उनको बताए । लेकिन हम सिर्फ बात करके रह जाते हैं । सारी जवाबदेही सरकार पर डाल देते हैं और सिर्फ यह सोचते हैं कि सरकार ही इन सारी मुसीबतों को दूर कर देगी । लेकिन यह सम्भव नहीं है । मैं खाद्य मंत्री को धन्यवाद देता हूं कि इन चन्द वर्षों में उन्होंने इस समस्या विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है और विभिन्न पहलुओं की पुष्टि की है और इसकी खामियों को दूर करने की कोशिश की है । काफी चर्चाएं हुई हैं। मैं इन चर्चाओं से भिन्न कुछ अपनी विनम्न राय देना चाहता हूं कि हम प्राखिर खेती किस तरह से बढाएं। हमारे सामने दो समस्याएं हैं, एक है कि उपज बढ़े और दूसरी है कि वितरण कैसे हो । लेकिन उपज बढ़ाने की समस्या सबसे बड़ी है । उपज बढ़ाने के लिये हमें क्या करना चाहिए ? एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट दशाब्दियों पुराना विभाग है और इस पर हम हर वर्ष काफी पैसा खर्च करते हैं, लेकिन इस डिपार्टमेंट से, मुझे निजो तजरबा है, खेतिहर को कोई विशेष लाभ नहीं हो सका है क्योंकि कोई खेती का जानने वाला श्रादमी किसानों तक नहीं पहुंच पाता है । वह भी सोचता है कि आखिर पहुंचे तो क्या ले कर पहुंचे । इसलिए यह जरूरी है कि हम ब्लाक लेविल पर कुछ ऐसा काम करें, कुछ इस प्रकार अपने विचारों को कार्यान्वित करें कि जो सरकार का अफसर हो बनाक में, वह हर व्यक्ति के पास जाए और उसको कुछ रचनात्मक सुझाव दे । कुछ तजुरबा ले कर जाए और उनको बताये कि यह कैसे हो सकता है। इसलिए मेरी राय है कि हर ब्लाक में एक प्रयोगशाला हो और उस प्रयोगशाला में खेती को बढ़ाने वाली प्रौसतन सब चीजें हों, ट्रैक्टर भी हो, फर्टीलाइजर भी हो, इनसेक्टीसाइड भी हो और उसमें सोयल टेस्टिंग की भी व्यवस्था हो । हमारे खेती करने वाले यह नहीं जानते हैं कि उनके खेत म किस केमिकल की कमी है, किस प्रकार का रसायन डालने से उनकी खेती को उपज बढ़ेगी। सोयल टेस्टिंग का काम बहुत आसान है। इसमें बहुत दिक्कत की बात नहीं है । ऐसी व्यवस्था की जाए कि खेती करने वालों को ये सुविधाएं पहले बिना कीमत लिए दी जाएं, प्राफिट शेयरंग बेसिस पर, और उनकी श्रौसतन तीन साल की जो उपज है, उससे जितनी उपज इन चीजों के कारण ज्यादा हो उसका प्राधा भाग या जो भी आपका खर्चा हुआ हो, उसके अनुसार उन से ले लिया जाए । इससे खेती करने वालों को नकद पैसा भी नहीं लगाना पड़ेगा और उनको इस से लाभ भी बहुत अच्छा होगा । लेकिन यह व्यवस्था अभी तक नहीं हो पायी है । D. G-Min. APRIL 29, 1965 of Food and Agriculture 11898 [ श्री शशिरंजन] अभी हमारे खेती करने वाले मामूली बातें नहीं जानते, जैसे रोटेशन श्राफ कास एग्रोनोमी इकानमिक होल्डिंग प्रादि । मैं एक खेतिहर परिवार का व्यक्ति हं । और मुझे याद नहीं है कि कभी भी कोई भी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट का प्रादमी हमारे यहां गया हो और उसने यह बताया हो कि तुम अपने मसलों को इस तरह से हल करो या उसने पूछा हो कि तुम्हारी क्या दिक्कतें हैं। इसलिए यह जरूरी है कि किसानों को जनाया जाए कि किस फसल के बाद कौन सी फसल रोपनी चाहिए, कितनी कितनी दूरी पर रोपनी चाहिए कुछ लोगों के इतने इतने छोटे खेत हैं कि जिनमें वे प्रासानी से हल भी नहीं घुमा सकते उनको तोड़ कर और आपस में मिलजुल कर उनको बड़ा करना चाहिए ताकि वह होल्डिंग इकानमिक हो सके । हमारी अनाज की कमी करीब आठ या मौ फीसदी है । मैं समझता हूं कि अगर इन सब प्रयोगों को काम में लाया जाए तो हम अपनी इस कमी को पूरा कर सकते हैं । हम लोग सिचाई की बात करते हैं, सूखे की बात करते हैं, बाढ़ की बात करते हैं । यह सच है कि सूखा भी माता है, बाढ़ भी भाती है और उन पर हमको काबू भी पाना है । पर इन पर काबू पाना तुरन्त सम्भव नहीं है, उसे करने में समय लगेगा । लेकिन बो चीजें मैंने ऊपर बतलायी हैं उनकी हम तुरन्त कार्यान्वित कर सकते हैं और उन से हम को लाभ हो सकता है । हमारी कांग्रेस ने भी कोआपरेटिव फार्मिंग के बारे में कुछ बातें पहले की थीं प्रौर उसकी उपादेयता को लोगों के सामने रखा था। लेकिन चन्द जगह इसका प्रयोग किया गया पर अनुभव अच्छा नहीं भाया । लेकिन मैं समझता हूं कि इसको ठीक से समझा नहीं गया, लोग कोमापरेटिव माइंडेड नहीं हुए, उनको यह नहीं मालूम कि इस काम को कैसे कार्यान्वित किया जाए। ये चीजें पहले किसानों को समझाने की जरूरत है। श्राज व्यक्तिवाद का जामना नहीं है । श्राज सहकारिता का माजना है । हम भले ही इसको न समझें यह और बात हैं । एक माननीय सदस्य : किसानों को समझाओ । श्री शशिरंजन : किसान को समझाने की तो बात ही है । अभी अभी दिल्ली के कुछ ही दूर, कोई दस मील एक जगह है, जहाँ लोग भूखे मरते थे। वहां उन्होंने सहकारिता के प्राधार पर एक कुंघ्रा खुदवाया और उससे सिंचाई की व्यवस्था की है । भांज वहां पर यह अवस्था है कि किसान लोग कहते हैं कि जिस जमीन को वे एक हजार रुपया प्रति एकड़ बेचने को पहले तैयार थे उसको वे पांच हजार प्रति एकड़ में भी बेचने को तैयार नहीं हैं । तो सहकारिता का एक यह भी पहलू है । यह जरूरी नहीं है कि हम सब की खेती को मिला कर के ही सहकारिता शुरू करें । हम सिंचाई का बन्दोबस्त सहकारी रूप में कर सकते हैं, बाद का बन्दोबस्त सहकारी रूप से कर सकते हैं । तो इसके विभिन्न पहलू हैं। उन पर हमें गौर करना चाहिए, और किसानों बतांना होगा कि किस तरह से वे अपना काम करें । दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि खेती की पढ़ाई हम लोगों को प्राइमरी और सैकेंडरी क्लास से शुरू करनी चाहिए क्योंकि हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है । हमारे बच्चे जन्मजात खेती के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं और अगर खेती की पढ़ाई की व्यवस्था हम उन के लिए प्राइमरी स्कूल से कर दें, दो तीन साल की ट्रेनिंग अगर हम उन्हें दे दें तो मैं समझता हूं कि उस से काफ़ी लाभ होगा । भाज हमारे खेती के ग्रेजु1899 D. G. - Min. एट्स इंटरमीडिएट पास करने के बाद, तीन, चार साल पढ़ने के बाद वह खेतों में जाना पसन्द नहीं करते। उन के पैर में कीचड़ लगती है । वह सोचते हैं कि एक इंजीनियर, एक डाक्टर और एक आई० ए० एस० जब हमारे ऊपर बैठकर शासन करता है तो मैं ही वहां कीचड़ में क्यों जाऊं ? इसलिए पहले हम लोग यह सोचें, उन का मानस ऐसा बनायें कि वह उसकी उपादेयता समझें तभी खेती की उन्नति संभव हो सकेगी । इसके लिए हम प्राइमरी और सैकेंडरी क्लास से ही खेती की पढ़ाई शुरू कर दें । मैं समझता हूं कि खाद्य मंत्री उस पर गौर करेंगे और इस पर अमल करेंगे । VAISAKHA 9, 1887 (SAKA) अभी हम लोगों को जो एक रिव्यु दिया गया है उसके छठे पृष्ठ पर कुछ विचार सरकार ने रक्खा है । मैं उस विचार से सहमत हूं लेकिन मैं अपने शासक भाइयों को कहना चाहता हूं कि क़ानून के जरिए न कर के लोगों के सहयोग के जरिए इस को अमल में लायें । चूंकि अब समय नहीं रहा है इसलिए मैं केवल एक, दो शब्द प्रौर कह कर समाप्त करूंगा । आज जो हमें कमी महसूस होती है उस में मुख्य कारण कंट्रोल को क्रियान्वित करने का है । इस में हम ने भूल की है । कंट्रोल को हम सही तौर से कार्यान्वित नहीं कर सके हैं ? उसका नतीजा यह है कि एक आदमी का सारा दिन भर का समय कंट्रोल की दुकानों में अपने लिए खाद्यान्न उपलब्ध करने में लग जाता है । चूंकि सामान लेने के लिए लाइन लगानी पड़ती है और लोग ऐसा समझते हैं कि प्राज जो मिल रहा है पता नहीं वह कल को मिलेगा भी या नहीं इसलिए जिसकी जितनी क्षमता होती है उसके मुताबिक वह अपनी पुरचेज कर लेता है। खरीद कर ले जाता है । मैंने देखा कि जो रोज खरीद कर खानें वाले लोग होते हैं, पहले तो रोज का रोज खरीद कर खाते थे अब कंट्रोल हो जाने के कारण जिसकी जितनी क्षमता है एक हफ्ते की, एक महीने की या छँ महीने की उतना वह खरीद कर रख लेता है । मैं एक बात और कहना चाहता हूं और वह यह है कि खेती करने वालों को प्रोत्साहन मिलना चाहिये लेकिन आज उनको कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता है । भाज हमारा प्रौद्योगिक उत्पादन नहीं बढ़ रहा है इसका खास कारण यह है कि हमारी खेती की उपज नहीं बढ़ती है और जब तक खेती की उपज नहीं बढ़ेगी तब तक हम उद्योगों में तरक्की नहीं कर सकते हैं। इसलिए सरकार को बड़े बड़े प्रौद्योगिकों को, बैंक कर्णधारों को, इस दिशा में सोचना पड़ेगा और गांवों में बैंक खोल कर किसानों को सहूलियत देनी पड़ेगी । खेतिहर लोगों को सभी सम्भव सुविधायें प्रदान करनी पड़ेंगी ताकि बे उनका लाभ उठा सकें और इस देश को कम से कम समय में खाद्यान्न के मामले में प्रात्मनिर्भर बना सकें और हमें विदेशों से अनाज मंगाने के लिये बाध्य न होना पड़े । श्री सुमत प्रसाब ( मुजफ्फरनगर) : उपाध्यक्ष महोदय, कृषि का मुल्क की माथिक उन्नति में बड़ा हाथ है। हमारे देश में लगभग 70 प्रतिशत आदमियों का इस खेतीबाड़ी पर दारोमदार है । पिछला साल एक बड़े संकट का साल हुआ और उस समय गेहूं की कीमत देश के बहुत से भागों में 50 रुपये मन तक चली गई । नतीजा उसका यह हुआ कि हर जगह महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिये प्रान्दोलन किया जाने लगा। टीचर्स, डाक्टर्स, कुली मजदूर और क्लर्कस सारे के सारे लोगों का महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिये मुतालबा हुआ। अब हकीकत यह है कि अगर हम प्रपनी खेती को सम्हाल नहीं सके, उसकी प्रगति नहीं कर सके तो हमारी योजना
इस स्थिति में न होते। जैसा अभी श्री चन्द्रिक कहा, यह देश कृषि प्रधान देश है और सत्तर फी सदी आदमी कृषि के ऊपर निर्भर करते हैं। बिहार में तो अस्सी फीसदी आदमी खेती पर निर्भर हैं । जैसा कि उन्होंने कहा खेती सारे उद्योगों की मां है । जिस प्रकार कि सौर मंडल में सूर्य का मुख्य स्थान और सारे नक्षत्र उसके चारों ओर घूमते हैं, उसी प्रकार सारे उद्योगों में खेती का मुख्य स्थान है और सारे उद्योग उसी से प्रेरणा पाते हैं । VAISAKHA नौ, एक हज़ार आठ सौ सत्तासी बेती के बारे में हमने दो पंचवर्षीय योजनाओं में कोई खास ध्यान नहीं दिया और उसी का नतीजा है कि प्राज ढाई वर्षो के बीच में खाद्यान्न की कीमत डेढ़ गुनी हो गयी है और हमको बाहर से पहले की अपेक्षा तीन गुना अधिक खाद्यान्न मंगाने की आव श्यकता पड़ गयी है । हिन्दुस्तान कृषि प्रधान देश है, यहां के खेत इतने उपजाऊ हैं, गैजेटिक बली जैसी उपजाऊ भूमि यहां है, और फिर भी अगर खाद्य की कमी हो तो यह सचमुच में बड़े शर्म की बात है । लेकिन सिर्फ बातों से और चर्चाओं से इस काम को पूरा कर सकें यह सम्भव नहीं हो सकता । यह हर व्यक्ति का कर्तव्य हो जाता है कि वह खेती के बारे में खुद भी सोचे और अपने क्षेत्र में जो भी इसकी जानकारी रखते हैं उनको बताए । लेकिन हम सिर्फ बात करके रह जाते हैं । सारी जवाबदेही सरकार पर डाल देते हैं और सिर्फ यह सोचते हैं कि सरकार ही इन सारी मुसीबतों को दूर कर देगी । लेकिन यह सम्भव नहीं है । मैं खाद्य मंत्री को धन्यवाद देता हूं कि इन चन्द वर्षों में उन्होंने इस समस्या विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है और विभिन्न पहलुओं की पुष्टि की है और इसकी खामियों को दूर करने की कोशिश की है । काफी चर्चाएं हुई हैं। मैं इन चर्चाओं से भिन्न कुछ अपनी विनम्न राय देना चाहता हूं कि हम प्राखिर खेती किस तरह से बढाएं। हमारे सामने दो समस्याएं हैं, एक है कि उपज बढ़े और दूसरी है कि वितरण कैसे हो । लेकिन उपज बढ़ाने की समस्या सबसे बड़ी है । उपज बढ़ाने के लिये हमें क्या करना चाहिए ? एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट दशाब्दियों पुराना विभाग है और इस पर हम हर वर्ष काफी पैसा खर्च करते हैं, लेकिन इस डिपार्टमेंट से, मुझे निजो तजरबा है, खेतिहर को कोई विशेष लाभ नहीं हो सका है क्योंकि कोई खेती का जानने वाला श्रादमी किसानों तक नहीं पहुंच पाता है । वह भी सोचता है कि आखिर पहुंचे तो क्या ले कर पहुंचे । इसलिए यह जरूरी है कि हम ब्लाक लेविल पर कुछ ऐसा काम करें, कुछ इस प्रकार अपने विचारों को कार्यान्वित करें कि जो सरकार का अफसर हो बनाक में, वह हर व्यक्ति के पास जाए और उसको कुछ रचनात्मक सुझाव दे । कुछ तजुरबा ले कर जाए और उनको बताये कि यह कैसे हो सकता है। इसलिए मेरी राय है कि हर ब्लाक में एक प्रयोगशाला हो और उस प्रयोगशाला में खेती को बढ़ाने वाली प्रौसतन सब चीजें हों, ट्रैक्टर भी हो, फर्टीलाइजर भी हो, इनसेक्टीसाइड भी हो और उसमें सोयल टेस्टिंग की भी व्यवस्था हो । हमारे खेती करने वाले यह नहीं जानते हैं कि उनके खेत म किस केमिकल की कमी है, किस प्रकार का रसायन डालने से उनकी खेती को उपज बढ़ेगी। सोयल टेस्टिंग का काम बहुत आसान है। इसमें बहुत दिक्कत की बात नहीं है । ऐसी व्यवस्था की जाए कि खेती करने वालों को ये सुविधाएं पहले बिना कीमत लिए दी जाएं, प्राफिट शेयरंग बेसिस पर, और उनकी श्रौसतन तीन साल की जो उपज है, उससे जितनी उपज इन चीजों के कारण ज्यादा हो उसका प्राधा भाग या जो भी आपका खर्चा हुआ हो, उसके अनुसार उन से ले लिया जाए । इससे खेती करने वालों को नकद पैसा भी नहीं लगाना पड़ेगा और उनको इस से लाभ भी बहुत अच्छा होगा । लेकिन यह व्यवस्था अभी तक नहीं हो पायी है । D. G-Min. APRIL उनतीस, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ of Food and Agriculture ग्यारह हज़ार आठ सौ अट्ठानवे [ श्री शशिरंजन] अभी हमारे खेती करने वाले मामूली बातें नहीं जानते, जैसे रोटेशन श्राफ कास एग्रोनोमी इकानमिक होल्डिंग प्रादि । मैं एक खेतिहर परिवार का व्यक्ति हं । और मुझे याद नहीं है कि कभी भी कोई भी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट का प्रादमी हमारे यहां गया हो और उसने यह बताया हो कि तुम अपने मसलों को इस तरह से हल करो या उसने पूछा हो कि तुम्हारी क्या दिक्कतें हैं। इसलिए यह जरूरी है कि किसानों को जनाया जाए कि किस फसल के बाद कौन सी फसल रोपनी चाहिए, कितनी कितनी दूरी पर रोपनी चाहिए कुछ लोगों के इतने इतने छोटे खेत हैं कि जिनमें वे प्रासानी से हल भी नहीं घुमा सकते उनको तोड़ कर और आपस में मिलजुल कर उनको बड़ा करना चाहिए ताकि वह होल्डिंग इकानमिक हो सके । हमारी अनाज की कमी करीब आठ या मौ फीसदी है । मैं समझता हूं कि अगर इन सब प्रयोगों को काम में लाया जाए तो हम अपनी इस कमी को पूरा कर सकते हैं । हम लोग सिचाई की बात करते हैं, सूखे की बात करते हैं, बाढ़ की बात करते हैं । यह सच है कि सूखा भी माता है, बाढ़ भी भाती है और उन पर हमको काबू भी पाना है । पर इन पर काबू पाना तुरन्त सम्भव नहीं है, उसे करने में समय लगेगा । लेकिन बो चीजें मैंने ऊपर बतलायी हैं उनकी हम तुरन्त कार्यान्वित कर सकते हैं और उन से हम को लाभ हो सकता है । हमारी कांग्रेस ने भी कोआपरेटिव फार्मिंग के बारे में कुछ बातें पहले की थीं प्रौर उसकी उपादेयता को लोगों के सामने रखा था। लेकिन चन्द जगह इसका प्रयोग किया गया पर अनुभव अच्छा नहीं भाया । लेकिन मैं समझता हूं कि इसको ठीक से समझा नहीं गया, लोग कोमापरेटिव माइंडेड नहीं हुए, उनको यह नहीं मालूम कि इस काम को कैसे कार्यान्वित किया जाए। ये चीजें पहले किसानों को समझाने की जरूरत है। श्राज व्यक्तिवाद का जामना नहीं है । श्राज सहकारिता का माजना है । हम भले ही इसको न समझें यह और बात हैं । एक माननीय सदस्य : किसानों को समझाओ । श्री शशिरंजन : किसान को समझाने की तो बात ही है । अभी अभी दिल्ली के कुछ ही दूर, कोई दस मील एक जगह है, जहाँ लोग भूखे मरते थे। वहां उन्होंने सहकारिता के प्राधार पर एक कुंघ्रा खुदवाया और उससे सिंचाई की व्यवस्था की है । भांज वहां पर यह अवस्था है कि किसान लोग कहते हैं कि जिस जमीन को वे एक हजार रुपया प्रति एकड़ बेचने को पहले तैयार थे उसको वे पांच हजार प्रति एकड़ में भी बेचने को तैयार नहीं हैं । तो सहकारिता का एक यह भी पहलू है । यह जरूरी नहीं है कि हम सब की खेती को मिला कर के ही सहकारिता शुरू करें । हम सिंचाई का बन्दोबस्त सहकारी रूप में कर सकते हैं, बाद का बन्दोबस्त सहकारी रूप से कर सकते हैं । तो इसके विभिन्न पहलू हैं। उन पर हमें गौर करना चाहिए, और किसानों बतांना होगा कि किस तरह से वे अपना काम करें । दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि खेती की पढ़ाई हम लोगों को प्राइमरी और सैकेंडरी क्लास से शुरू करनी चाहिए क्योंकि हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है । हमारे बच्चे जन्मजात खेती के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं और अगर खेती की पढ़ाई की व्यवस्था हम उन के लिए प्राइमरी स्कूल से कर दें, दो तीन साल की ट्रेनिंग अगर हम उन्हें दे दें तो मैं समझता हूं कि उस से काफ़ी लाभ होगा । भाज हमारे खेती के ग्रेजुएक हज़ार आठ सौ निन्यानवे D. G. - Min. एट्स इंटरमीडिएट पास करने के बाद, तीन, चार साल पढ़ने के बाद वह खेतों में जाना पसन्द नहीं करते। उन के पैर में कीचड़ लगती है । वह सोचते हैं कि एक इंजीनियर, एक डाक्टर और एक आईशून्य एशून्य एसशून्य जब हमारे ऊपर बैठकर शासन करता है तो मैं ही वहां कीचड़ में क्यों जाऊं ? इसलिए पहले हम लोग यह सोचें, उन का मानस ऐसा बनायें कि वह उसकी उपादेयता समझें तभी खेती की उन्नति संभव हो सकेगी । इसके लिए हम प्राइमरी और सैकेंडरी क्लास से ही खेती की पढ़ाई शुरू कर दें । मैं समझता हूं कि खाद्य मंत्री उस पर गौर करेंगे और इस पर अमल करेंगे । VAISAKHA नौ, एक हज़ार आठ सौ सत्तासी अभी हम लोगों को जो एक रिव्यु दिया गया है उसके छठे पृष्ठ पर कुछ विचार सरकार ने रक्खा है । मैं उस विचार से सहमत हूं लेकिन मैं अपने शासक भाइयों को कहना चाहता हूं कि क़ानून के जरिए न कर के लोगों के सहयोग के जरिए इस को अमल में लायें । चूंकि अब समय नहीं रहा है इसलिए मैं केवल एक, दो शब्द प्रौर कह कर समाप्त करूंगा । आज जो हमें कमी महसूस होती है उस में मुख्य कारण कंट्रोल को क्रियान्वित करने का है । इस में हम ने भूल की है । कंट्रोल को हम सही तौर से कार्यान्वित नहीं कर सके हैं ? उसका नतीजा यह है कि एक आदमी का सारा दिन भर का समय कंट्रोल की दुकानों में अपने लिए खाद्यान्न उपलब्ध करने में लग जाता है । चूंकि सामान लेने के लिए लाइन लगानी पड़ती है और लोग ऐसा समझते हैं कि प्राज जो मिल रहा है पता नहीं वह कल को मिलेगा भी या नहीं इसलिए जिसकी जितनी क्षमता होती है उसके मुताबिक वह अपनी पुरचेज कर लेता है। खरीद कर ले जाता है । मैंने देखा कि जो रोज खरीद कर खानें वाले लोग होते हैं, पहले तो रोज का रोज खरीद कर खाते थे अब कंट्रोल हो जाने के कारण जिसकी जितनी क्षमता है एक हफ्ते की, एक महीने की या छँ महीने की उतना वह खरीद कर रख लेता है । मैं एक बात और कहना चाहता हूं और वह यह है कि खेती करने वालों को प्रोत्साहन मिलना चाहिये लेकिन आज उनको कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता है । भाज हमारा प्रौद्योगिक उत्पादन नहीं बढ़ रहा है इसका खास कारण यह है कि हमारी खेती की उपज नहीं बढ़ती है और जब तक खेती की उपज नहीं बढ़ेगी तब तक हम उद्योगों में तरक्की नहीं कर सकते हैं। इसलिए सरकार को बड़े बड़े प्रौद्योगिकों को, बैंक कर्णधारों को, इस दिशा में सोचना पड़ेगा और गांवों में बैंक खोल कर किसानों को सहूलियत देनी पड़ेगी । खेतिहर लोगों को सभी सम्भव सुविधायें प्रदान करनी पड़ेंगी ताकि बे उनका लाभ उठा सकें और इस देश को कम से कम समय में खाद्यान्न के मामले में प्रात्मनिर्भर बना सकें और हमें विदेशों से अनाज मंगाने के लिये बाध्य न होना पड़े । श्री सुमत प्रसाब : उपाध्यक्ष महोदय, कृषि का मुल्क की माथिक उन्नति में बड़ा हाथ है। हमारे देश में लगभग सत्तर प्रतिशत आदमियों का इस खेतीबाड़ी पर दारोमदार है । पिछला साल एक बड़े संकट का साल हुआ और उस समय गेहूं की कीमत देश के बहुत से भागों में पचास रुपयापये मन तक चली गई । नतीजा उसका यह हुआ कि हर जगह महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिये प्रान्दोलन किया जाने लगा। टीचर्स, डाक्टर्स, कुली मजदूर और क्लर्कस सारे के सारे लोगों का महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिये मुतालबा हुआ। अब हकीकत यह है कि अगर हम प्रपनी खेती को सम्हाल नहीं सके, उसकी प्रगति नहीं कर सके तो हमारी योजना
जैद खान (Zaid Khan) और सोनल मोंटेरो (Sonal Monterio) की फिल्म 'बनारस' (Banaras) का पहला पोस्टर (First Poster) रिलीज हो चुका है। फिल्म को 5 भाषाओं हिन्दी सहित कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मलायलम भाषा में एक साथ रिलीज किया जाएगा। फिल्म को जयतीर्थ (Jayathirtha) डायरेक्ट किया है। और फिल्म के निर्माता तिलकराज बल्लाल (Tilakraj Ballal) हैं। फिल्म का पोस्टर काफी अच्छा बना है जिसे देखकर लग रहा है। कि फिल्म मेकर्स ने फिल्म को बड़े रुप में बनाया है। इसे टी-सीरीज (T-Series) ने अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जारी किया है।
जैद खान और सोनल मोंटेरो की फिल्म 'बनारस' का पहला पोस्टर रिलीज हो चुका है। फिल्म को पाँच भाषाओं हिन्दी सहित कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मलायलम भाषा में एक साथ रिलीज किया जाएगा। फिल्म को जयतीर्थ डायरेक्ट किया है। और फिल्म के निर्माता तिलकराज बल्लाल हैं। फिल्म का पोस्टर काफी अच्छा बना है जिसे देखकर लग रहा है। कि फिल्म मेकर्स ने फिल्म को बड़े रुप में बनाया है। इसे टी-सीरीज ने अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जारी किया है।
नई दिल्ली. फिनटेक प्लेटफॉर्म पेमी ने गुरुवार को बोला कि वह यूपी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जिससे क्षेत्र में 2,000 नौकरियां सृजित होंगी और फिनटेक स्पेस में प्रशिक्षण और कुशल संसाधनों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. कंपनी ने यीडा के ओसडी शैलेंद्र भाटिया और उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट के नोडल अधिकारी और पेमी के निदेशक मानव मुंजाल और एचआर के वीपी विशाल रंजन की उपस्थिति में राज्य गवर्नमेंट के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. पेमी के संस्थापक और सीईओ महेश शुक्ला ने कहा- मैं गोरखपुर, टियर 2 जिले से आता हूं, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना और जॉब के अवसर मिलना दुर्लभ थे. अब जब हमारे पास समाज को वापस देने का साधन है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उत्तर प्रदेश निवेशक शिखर सम्मेलन की पहल का हिस्सा बनें. फिनटेक कंपनी ने बोला कि यह निवेश यूपी में फिनटेक क्षेत्र की वृद्धि और विकास में सहयोग देगा, जिससे क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए नए अवसर मौजूद होंगे. शुक्ला ने कहा, पेमी जबरदस्त गति से बढ़ रहा है, पिछले एक वर्ष में कर्मचारियों की संख्या में छह गुना वृद्धि हुई है, और हम अगले 5 सालों में 5,000 रोजगार के अवसर पैदा करने की आशा करते हैं. 2016 में स्थापित, नोएडा स्थित पेमी व्यक्तियों और कॉर्पोरेट्स के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं का पूल प्रदान करता है. अग्रणी स्टार्टअप समाचार पोर्टल इंक42 द्वारा 2 मिलियन $ की शुरूआती पूंजी के साथ, कंपनी को शीर्ष 30 उभरते हुए फिनटेक स्टार्ट-अप में दर किया गया था.
नई दिल्ली. फिनटेक प्लेटफॉर्म पेमी ने गुरुवार को बोला कि वह यूपी में दो सौ करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जिससे क्षेत्र में दो,शून्य नौकरियां सृजित होंगी और फिनटेक स्पेस में प्रशिक्षण और कुशल संसाधनों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. कंपनी ने यीडा के ओसडी शैलेंद्र भाटिया और उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट के नोडल अधिकारी और पेमी के निदेशक मानव मुंजाल और एचआर के वीपी विशाल रंजन की उपस्थिति में राज्य गवर्नमेंट के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. पेमी के संस्थापक और सीईओ महेश शुक्ला ने कहा- मैं गोरखपुर, टियर दो जिले से आता हूं, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना और जॉब के अवसर मिलना दुर्लभ थे. अब जब हमारे पास समाज को वापस देने का साधन है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उत्तर प्रदेश निवेशक शिखर सम्मेलन की पहल का हिस्सा बनें. फिनटेक कंपनी ने बोला कि यह निवेश यूपी में फिनटेक क्षेत्र की वृद्धि और विकास में सहयोग देगा, जिससे क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए नए अवसर मौजूद होंगे. शुक्ला ने कहा, पेमी जबरदस्त गति से बढ़ रहा है, पिछले एक वर्ष में कर्मचारियों की संख्या में छह गुना वृद्धि हुई है, और हम अगले पाँच सालों में पाँच,शून्य रोजगार के अवसर पैदा करने की आशा करते हैं. दो हज़ार सोलह में स्थापित, नोएडा स्थित पेमी व्यक्तियों और कॉर्पोरेट्स के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं का पूल प्रदान करता है. अग्रणी स्टार्टअप समाचार पोर्टल इंकबयालीस द्वारा दो मिलियन $ की शुरूआती पूंजी के साथ, कंपनी को शीर्ष तीस उभरते हुए फिनटेक स्टार्ट-अप में दर किया गया था.
बुलंदशहर। सोशल मीडिया पर अगौता क्षेत्र के कुछ युवकों के तमंचा लहराते हुए फोटो वायरल हुए हैं। पूरे मामले में अगौता पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे में हैं। रालोद की राष्ट्रीय सचिव अंजू मुस्कान के ट्विटर एकाउंट से दो युवकों के फोटो ट्विट किए गए हैं। फोटो में दोनों युवक हाथों में तमंचा लेकर लहराते हुए दिख रहे हैं। रालोद नेता का कहना है कि अगौता पुलिस की नजर में उक्त दोनों युवक बेहद शरीफ हैं और युवक पक्ष से उनके खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। मामले में डीजीपी से कार्रवाई की मांग की गई है। उधर, अगौता पुलिस की ओर से कहा गया है कि 4 मई को गांव ढकौली में दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ, जिसमें दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर एक-एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। हालांकि, थाना पुलिस की ओर से तमंचे से संबंधित फोटो वायरल होने पर की जाने वाली कार्रवाई को लेकर चुप्पी साध ली गई है। इस संबंध में बुलंदशहर पुलिस की ओर से ट्विट किया गया है कि मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बुलंदशहर। सोशल मीडिया पर अगौता क्षेत्र के कुछ युवकों के तमंचा लहराते हुए फोटो वायरल हुए हैं। पूरे मामले में अगौता पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे में हैं। रालोद की राष्ट्रीय सचिव अंजू मुस्कान के ट्विटर एकाउंट से दो युवकों के फोटो ट्विट किए गए हैं। फोटो में दोनों युवक हाथों में तमंचा लेकर लहराते हुए दिख रहे हैं। रालोद नेता का कहना है कि अगौता पुलिस की नजर में उक्त दोनों युवक बेहद शरीफ हैं और युवक पक्ष से उनके खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। मामले में डीजीपी से कार्रवाई की मांग की गई है। उधर, अगौता पुलिस की ओर से कहा गया है कि चार मई को गांव ढकौली में दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ, जिसमें दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर एक-एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। हालांकि, थाना पुलिस की ओर से तमंचे से संबंधित फोटो वायरल होने पर की जाने वाली कार्रवाई को लेकर चुप्पी साध ली गई है। इस संबंध में बुलंदशहर पुलिस की ओर से ट्विट किया गया है कि मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बरकट्ठा। प्रखंड क्षेत्र के ग्राम चांदगढ़ में सांस्कृतिक कार्यक्रम दुगोला का आयोजन किया गया। चांदगढ निवासी महादेव पासवान और भुनेश्वर पासवान के सहयोग से दुगोला आयोजित किया गया। उदघाटन मुख्य अतिथि बेड़ोकला पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया रिंकी पांडेय ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम में चांदगढ एवं इसके आस पास के क्षेत्रों से काफी संख्या में लोग शामिल पहुंचे। कार्यक्रम में मनोरंजक गीतों और प्रसंग से रातभर दर्शक झुमते रहे। मौके पर समाजसेवी तुलसी पांडेय, देवेंद्र पांडेय समेत कई लोग उपस्थित थे।
बरकट्ठा। प्रखंड क्षेत्र के ग्राम चांदगढ़ में सांस्कृतिक कार्यक्रम दुगोला का आयोजन किया गया। चांदगढ निवासी महादेव पासवान और भुनेश्वर पासवान के सहयोग से दुगोला आयोजित किया गया। उदघाटन मुख्य अतिथि बेड़ोकला पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया रिंकी पांडेय ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम में चांदगढ एवं इसके आस पास के क्षेत्रों से काफी संख्या में लोग शामिल पहुंचे। कार्यक्रम में मनोरंजक गीतों और प्रसंग से रातभर दर्शक झुमते रहे। मौके पर समाजसेवी तुलसी पांडेय, देवेंद्र पांडेय समेत कई लोग उपस्थित थे।
सेडान कार सेगमेंट में आने वाली कारों को उनके डिजाइन, फीचर्स, कीमत और स्पेसिफिकेशन के लिए पसंद किया जाता है। इस सेगमेंट में मौजूद कारों में आज बात कर रहे हैं होंडा सिटी के बारे में जो इस सेगमेंट की एक प्रीमियम सेडान कार है। होंडा सिटी को इसके प्रीमियम डिजाइन, इसके फीचर्स और केबिन स्पेस के लिए काफी पसंद किया जाता है। अगर आप शोरूम से होंडा सिटी खरीदते हैं तो इसके लिए आपको 12 से 16 लाख रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन आपका बजट कम है तो यहां जान लीजिए इस सेडान पर मिलने वाले उन ऑफर्स की डिटेल जिसके जरिए आप इस सेडान को महज 2 लाख रुपये से भी कम कीमत में खरीद सकते हैं। होंडा सिटी पर मिलने वाले ये ऑफर सेकेंड हैंड कार खरीदने वाली अलग अलग वेबसाइट पर दिए गए हैं। जिसमें से हम आपको चुनिंदा ऑफर्स की डिटेल बताएंगे ताकि आप कम से कम बजट में इस कार को खरीद सकें। पहला ऑफर OLX वेबसाइट से मिला है जहां इस होंडा सिटी का 2010 मॉडल लिस्ट किया गया है। यहां इसकी कीमत 1. 20 लाख रुपये तय की गई है। यहां इस सेडान के साथ कोई फाइनेंस ऑफर या प्लान नहीं मिलेगा। दूसरा ऑफर CARDEKHO वेबसाइट पर दिया गया है। यहां इस होंडा सिटी का 2009 मॉडल लिस्ट किया गया है। इस कार की कीमत 1 लाख रुपये तय की गई है और इसके साथ कोई भी फाइनेंस प्लान या ऑफर नहीं मिलेगा। तीसरा ऑफर DROOM वेबसाइट पर दिया गया है। यहां होंडा सिटी का 2010 मॉडल लिस्ट किया गया है और इसकी कीमत 1. 15 लाख रुपये तय की गई है। इस कार को खरीदने पर आपको फाइनेंस प्लान भी मिल सकता है। होंडा सिटी पर मिलने वाले ऑफर्स की डिटेल पढ़ने के बाद आप जान लीजिए इस सेडान के इंजन और माइलेज की पूरी डिटेल ताकि आपको इस डिटेल के लिए कहीं और न जाना पड़े। होंडा सिटी 2010 मॉडल के इंजन और पावर की बात करें तो इसमें 1497 सीसी का चार सिलेंडर वाला इंजन दिया गया है। यह इंजन 118 पीएस की पावर और 146 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ मैनुअल ट्रांसमिशन दिया गया है। माइलेज को लेकर कंपनी दावा करती है कि ये होंडा सिटी 17. 0 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और इस माइलेज को ARAI द्वारा प्रमाणित किया गया है।
सेडान कार सेगमेंट में आने वाली कारों को उनके डिजाइन, फीचर्स, कीमत और स्पेसिफिकेशन के लिए पसंद किया जाता है। इस सेगमेंट में मौजूद कारों में आज बात कर रहे हैं होंडा सिटी के बारे में जो इस सेगमेंट की एक प्रीमियम सेडान कार है। होंडा सिटी को इसके प्रीमियम डिजाइन, इसके फीचर्स और केबिन स्पेस के लिए काफी पसंद किया जाता है। अगर आप शोरूम से होंडा सिटी खरीदते हैं तो इसके लिए आपको बारह से सोलह लाख रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन आपका बजट कम है तो यहां जान लीजिए इस सेडान पर मिलने वाले उन ऑफर्स की डिटेल जिसके जरिए आप इस सेडान को महज दो लाख रुपये से भी कम कीमत में खरीद सकते हैं। होंडा सिटी पर मिलने वाले ये ऑफर सेकेंड हैंड कार खरीदने वाली अलग अलग वेबसाइट पर दिए गए हैं। जिसमें से हम आपको चुनिंदा ऑफर्स की डिटेल बताएंगे ताकि आप कम से कम बजट में इस कार को खरीद सकें। पहला ऑफर OLX वेबसाइट से मिला है जहां इस होंडा सिटी का दो हज़ार दस मॉडल लिस्ट किया गया है। यहां इसकी कीमत एक. बीस लाख रुपये तय की गई है। यहां इस सेडान के साथ कोई फाइनेंस ऑफर या प्लान नहीं मिलेगा। दूसरा ऑफर CARDEKHO वेबसाइट पर दिया गया है। यहां इस होंडा सिटी का दो हज़ार नौ मॉडल लिस्ट किया गया है। इस कार की कीमत एक लाख रुपये तय की गई है और इसके साथ कोई भी फाइनेंस प्लान या ऑफर नहीं मिलेगा। तीसरा ऑफर DROOM वेबसाइट पर दिया गया है। यहां होंडा सिटी का दो हज़ार दस मॉडल लिस्ट किया गया है और इसकी कीमत एक. पंद्रह लाख रुपये तय की गई है। इस कार को खरीदने पर आपको फाइनेंस प्लान भी मिल सकता है। होंडा सिटी पर मिलने वाले ऑफर्स की डिटेल पढ़ने के बाद आप जान लीजिए इस सेडान के इंजन और माइलेज की पूरी डिटेल ताकि आपको इस डिटेल के लिए कहीं और न जाना पड़े। होंडा सिटी दो हज़ार दस मॉडल के इंजन और पावर की बात करें तो इसमें एक हज़ार चार सौ सत्तानवे सीसी का चार सिलेंडर वाला इंजन दिया गया है। यह इंजन एक सौ अट्ठारह पीएस की पावर और एक सौ छियालीस एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन के साथ मैनुअल ट्रांसमिशन दिया गया है। माइलेज को लेकर कंपनी दावा करती है कि ये होंडा सिटी सत्रह. शून्य किलोग्राममीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और इस माइलेज को ARAI द्वारा प्रमाणित किया गया है।
स्वच्छ, चिकनी और रेशमी त्वचा, जिस पर कोई भी विश्वासघाती बाल फैलाने वाला नहीं है - यह वही है जो आज भी किसी भी महिला की इच्छा रखते हैं। अनचाहे बालों से मुकाबला करने के कई तरीके हैंः ब्यूटी सैलून और मोम स्ट्रिप्स में स्वयं-उपयोग, डेफाईशन क्रीम और लेजर बालों को हटाने, फोटो एपिलेशन और एलोस-बालों को हटाने, होम एपिलेटर और शक्कर हटाने (शगिंग) के उपयोग के लिए एपॉक्सेस। परिणाम कितना समय तक रहता है अनावश्यक बालों, उपभोग्य पदार्थों की गुणवत्ता और प्रक्रिया का संचालन करने वाले व्यक्ति के अनुभव से छुटकारा पाने के लिए चुना गया विधि पर काफी हद तक निर्भर होता है। Shugaring क्या है? चीनी मिलावण कई हजार साल पहले प्राचीन मिस्र में जाना जाता था। क्लियोपेट्रा के समय भी, महिलाओं ने पानी और चीनी के मिश्रण के साथ बाल हटा दिए। लेकिन यूरोपीय और रूसी सुंदरता सैलून, आलसी प्रक्रिया केवल हाल ही में शुरू की गई, तुरन्त मेले सेक्स में लोकप्रियता प्राप्त कर रही है। शिंगिंग एक प्रक्रिया है जिसमें एक विशेष चीनी का पेस्ट इस्तेमाल किया जाता है जो आवेदन के दौरान बाल को ढंकता है और उन्हें विकास की दिशा में हटा देता है। आप दोनों को स्वतंत्र रूप से पेस्ट तैयार कर सकते हैं और उचित योग्यता रखने वाले स्वामी को इस काम को सौंप दे सकते हैं। शीलिंग की मदद से, आप पेट, पीठ, नितंबों पर, बिकनी क्षेत्र में चेहरे, बगल, पैर, कूल्हों, हाथों पर बालों से छुटकारा पा सकते हैं । इसके अलावा इस प्रक्रिया से शरीर पर गंदे बालों से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। अब आपको समझ है कि वास्तव में क्या शर्मनाक है। प्रक्रिया का परिणाम कितना है? यह प्रश्न कई सुंदरताओं को चिंता करता है जो लंबे समय तक शरीर पर अवांछित वनस्पति से छुटकारा चाहते हैं। इसके बारे में और जानें। Shugaring। परिणाम कितना है? चीनी एपिलेशन के बाद की त्वचा 3 सप्ताह तक चिकनी और रेशमी रहती है। इस प्रक्रिया के प्रभाव की अवधि इस तथ्य से सुलभ है कि एनाफ़ेस अवधि के दौरान बालों को अपने विकास की दिशा में हटा दिया गया है। यह आपको बाल उत्थान के स्तर को बढ़ाने के लिए अनुमति देता है। इसके अलावा, चीनी एपिलेशन के साथ, संरचना बालों के कूप में गहराई से प्रवेश करती है और बाल को पूरी तरह से हटा देती है, बिना उन्हें तोड़कर या झुकता है। इसी समय, शरीर पर त्वचा सूजन नहीं हो जाती है, जलता है, लाली और एलर्जी को बाहर रखा जाता है। शीलिंग के बारे में प्रश्नों के अतिरिक्त , प्रक्रिया का कितना परिणाम है, और शरीर में किन क्षेत्रों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, महिलाओं को भी चीनी बालों को हटाने के लाभों के बारे में चिंतित हैं। चलो विधि के मुख्य लाभ सूचीः - दर्द रहित प्रक्रिया एपिलेशन और मैकेनिकल एपिलेशन की तुलना में, प्रक्रिया लगभग एट्रुमेक्टिक है। - हानिकारक रंजक, योजक और सुगंध के उपयोग के बिना पानी और चीनी के हाइपोलेर्लैजेनिक प्राकृतिक संरचना को निकालने में उपयोग करें। - सुविधा। उच्च गुणवत्ता वाले कीचड़ बनाने की प्रक्रिया के लिए, यह पर्याप्त है कि बाल केवल 1-2 मिमी बढ़ता है। - त्वचा की सतह पर न केवल बाल निकालना, लेकिन बिना भड़काऊ प्रतिक्रियाओं के बाल भी शामिल है। - नाजुक छीलने के रूप में अतिरिक्त प्रभाव, जो त्वचा छीलने से महिला को बचाएगा। अक्सर, महिलाओं, एक ब्यूटी सैलून में चीनी बालों को हटाने की प्रक्रिया का दौरा करने के बाद, तो स्वयं अपने घर बनाने की कोशिश करें इसके अलावा, शीलिंग की तकनीक काफी सरल है, और एक मास्टर के काम के लिए अधिक भुगतान नहीं करने का अवसर बेहद आकर्षक है। यहां तक कि एक छोटी सी आय वाली महिला भी घर पर शील करने में सक्षम हो सकती है। नतीजा, इस प्रक्रिया के एक महीने बाद, उसके बाद, तस्वीर पुष्टि करती है कि विधि का चुनाव सही बनाया गया था। आपको कुछ विशेष, सिर्फ चीनी, नींबू और पानी खरीदने की ज़रूरत नहीं है वास्तविक बचत की गणना केवल एक किलोग्राम चीनी के छह महीनों के भीतर शर्म करने के लिए पर्याप्त है। घर पर सिरप तैयार करने के लिए आप आधे से ज्यादा घंटे नहीं लेंगे। चरण-दर-चरण नुस्खा इस प्रकार दिखता हैः - एक सॉस पैन में चीनी के 10 बड़े चम्मच, नींबू के रस के 2 बड़े चम्मच और 5 चम्मच पानी मिलाएं, एक मजबूत आग के लिए एक स्टोव पर डालें और दो मिनट के लिए लगातार सरगर्मी के साथ पकाना। - तब आग दो बार कम होनी चाहिए, एक ढक्कन के साथ पैन को कवर करें और मिश्रण पकाना, कभी-कभी सरगर्मी, जब तक यह सजातीय और तरल नहीं हो जाता। - जब आप देखते हैं कि मिश्रण फोम और बुलबुले के साथ कवर किया गया है, तो इसे ढकने के साथ एक और 5 मिनट के लिए आग में मिश्रित होना चाहिए और इसे छोड़ दिया जाएगा। - पेस्ट के बाद थोड़ा ठंडा हो गया है, आप सीधे आलसी की प्रक्रिया में जा सकते हैं। शुरू करने के लिए, आपको पहले से ही गैर-गर्म का एक टुकड़ा लेने की जरूरत है, लेकिन अपने हाथों में काफी कठोर पेस्ट नहीं करना चाहिए और ध्यान से इसे लोचदार स्थिति में फैलाना होगा। सबसे पहले यह आसान नहीं होगा, लेकिन फिर हाथों की गर्मी के कारण मिश्रण अधिक नरम हो जाएगा। अगर, हालांकि, जब सानना, इस तथ्य के कारण कठिनाइयाँ उठी कि चीनी बहुत मोटी है, तो आप संरचना के लिए थोड़ा पानी जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, कई लोग कहते हैं कि इस पद्धति के लिए एक मोक्ष बन गया है, क्योंकि हर रोज शेविंग ने परेशान किया है। महिलाओं को घर पर खुद की प्रक्रिया करते हैं, लेकिन इस उद्देश्य के लिए एक विशेष पेस्ट का उपयोग करें, जो वे पेशेवर सौंदर्य प्रसाधनों के स्टोर में खरीदते हैं। उपयोग के प्रभाव काफी संतोषजनक हैं। निष्पक्ष सेक्स के अन्य प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया है कि पकाया जाता है घर में, शीगेरिंग पेस्ट बाल के रूप में गहन रूप में घुसना नहीं करता है, इसलिए यह बालों को तोड़ने की ओर जाता है, और बाद में अपने गहनों के लिए। इसलिए, उनकी राय में, मास्टर के सैलून में कम से कम करना आवश्यक है, या कम से कम चीनी एपिलेशन के लिए एक विशेष पेस्ट की सहायता से, और गैस स्टोव के साथ प्रयोग करना इसके लिए उपयुक्त नहीं है। फिर भी, नियमित रूप से घर के बने शर्करा का इस्तेमाल बाल के छुटकारा पाने के लिए करते हैं, जो उनके अनुभव मित्रों से प्रेरित होते हैं। उत्तरदाताओं में से कुछ उत्साही नहीं थे, उन्होंने कहा कि प्रक्रिया दर्दनाक थी, और कुछ बाल जगह पर बने रहे। ऐसे भी लोग हैं, जो पहली बार घर पर शर्म करने की कोशिश कर रहे थे, केवल अपने पैरों पर घावों को छोड़ दिया , चूंकि यह लागू होने पर त्वचा पर दृढ़ता से प्रेस करने के लिए आवश्यक था। इसलिए, उन्होंने स्वयं के लिए यह निष्कर्ष निकाला कि घर में शीलिंग का इस्तेमाल केवल शरीर के छोटे क्षेत्रों (उदाहरण के लिए, शिन पर) में बाल निकालने के लिए किया जा सकता है।
स्वच्छ, चिकनी और रेशमी त्वचा, जिस पर कोई भी विश्वासघाती बाल फैलाने वाला नहीं है - यह वही है जो आज भी किसी भी महिला की इच्छा रखते हैं। अनचाहे बालों से मुकाबला करने के कई तरीके हैंः ब्यूटी सैलून और मोम स्ट्रिप्स में स्वयं-उपयोग, डेफाईशन क्रीम और लेजर बालों को हटाने, फोटो एपिलेशन और एलोस-बालों को हटाने, होम एपिलेटर और शक्कर हटाने के उपयोग के लिए एपॉक्सेस। परिणाम कितना समय तक रहता है अनावश्यक बालों, उपभोग्य पदार्थों की गुणवत्ता और प्रक्रिया का संचालन करने वाले व्यक्ति के अनुभव से छुटकारा पाने के लिए चुना गया विधि पर काफी हद तक निर्भर होता है। Shugaring क्या है? चीनी मिलावण कई हजार साल पहले प्राचीन मिस्र में जाना जाता था। क्लियोपेट्रा के समय भी, महिलाओं ने पानी और चीनी के मिश्रण के साथ बाल हटा दिए। लेकिन यूरोपीय और रूसी सुंदरता सैलून, आलसी प्रक्रिया केवल हाल ही में शुरू की गई, तुरन्त मेले सेक्स में लोकप्रियता प्राप्त कर रही है। शिंगिंग एक प्रक्रिया है जिसमें एक विशेष चीनी का पेस्ट इस्तेमाल किया जाता है जो आवेदन के दौरान बाल को ढंकता है और उन्हें विकास की दिशा में हटा देता है। आप दोनों को स्वतंत्र रूप से पेस्ट तैयार कर सकते हैं और उचित योग्यता रखने वाले स्वामी को इस काम को सौंप दे सकते हैं। शीलिंग की मदद से, आप पेट, पीठ, नितंबों पर, बिकनी क्षेत्र में चेहरे, बगल, पैर, कूल्हों, हाथों पर बालों से छुटकारा पा सकते हैं । इसके अलावा इस प्रक्रिया से शरीर पर गंदे बालों से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। अब आपको समझ है कि वास्तव में क्या शर्मनाक है। प्रक्रिया का परिणाम कितना है? यह प्रश्न कई सुंदरताओं को चिंता करता है जो लंबे समय तक शरीर पर अवांछित वनस्पति से छुटकारा चाहते हैं। इसके बारे में और जानें। Shugaring। परिणाम कितना है? चीनी एपिलेशन के बाद की त्वचा तीन सप्ताह तक चिकनी और रेशमी रहती है। इस प्रक्रिया के प्रभाव की अवधि इस तथ्य से सुलभ है कि एनाफ़ेस अवधि के दौरान बालों को अपने विकास की दिशा में हटा दिया गया है। यह आपको बाल उत्थान के स्तर को बढ़ाने के लिए अनुमति देता है। इसके अलावा, चीनी एपिलेशन के साथ, संरचना बालों के कूप में गहराई से प्रवेश करती है और बाल को पूरी तरह से हटा देती है, बिना उन्हें तोड़कर या झुकता है। इसी समय, शरीर पर त्वचा सूजन नहीं हो जाती है, जलता है, लाली और एलर्जी को बाहर रखा जाता है। शीलिंग के बारे में प्रश्नों के अतिरिक्त , प्रक्रिया का कितना परिणाम है, और शरीर में किन क्षेत्रों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, महिलाओं को भी चीनी बालों को हटाने के लाभों के बारे में चिंतित हैं। चलो विधि के मुख्य लाभ सूचीः - दर्द रहित प्रक्रिया एपिलेशन और मैकेनिकल एपिलेशन की तुलना में, प्रक्रिया लगभग एट्रुमेक्टिक है। - हानिकारक रंजक, योजक और सुगंध के उपयोग के बिना पानी और चीनी के हाइपोलेर्लैजेनिक प्राकृतिक संरचना को निकालने में उपयोग करें। - सुविधा। उच्च गुणवत्ता वाले कीचड़ बनाने की प्रक्रिया के लिए, यह पर्याप्त है कि बाल केवल एक-दो मिमी बढ़ता है। - त्वचा की सतह पर न केवल बाल निकालना, लेकिन बिना भड़काऊ प्रतिक्रियाओं के बाल भी शामिल है। - नाजुक छीलने के रूप में अतिरिक्त प्रभाव, जो त्वचा छीलने से महिला को बचाएगा। अक्सर, महिलाओं, एक ब्यूटी सैलून में चीनी बालों को हटाने की प्रक्रिया का दौरा करने के बाद, तो स्वयं अपने घर बनाने की कोशिश करें इसके अलावा, शीलिंग की तकनीक काफी सरल है, और एक मास्टर के काम के लिए अधिक भुगतान नहीं करने का अवसर बेहद आकर्षक है। यहां तक कि एक छोटी सी आय वाली महिला भी घर पर शील करने में सक्षम हो सकती है। नतीजा, इस प्रक्रिया के एक महीने बाद, उसके बाद, तस्वीर पुष्टि करती है कि विधि का चुनाव सही बनाया गया था। आपको कुछ विशेष, सिर्फ चीनी, नींबू और पानी खरीदने की ज़रूरत नहीं है वास्तविक बचत की गणना केवल एक किलोग्राम चीनी के छह महीनों के भीतर शर्म करने के लिए पर्याप्त है। घर पर सिरप तैयार करने के लिए आप आधे से ज्यादा घंटे नहीं लेंगे। चरण-दर-चरण नुस्खा इस प्रकार दिखता हैः - एक सॉस पैन में चीनी के दस बड़े चम्मच, नींबू के रस के दो बड़े चम्मच और पाँच चम्मच पानी मिलाएं, एक मजबूत आग के लिए एक स्टोव पर डालें और दो मिनट के लिए लगातार सरगर्मी के साथ पकाना। - तब आग दो बार कम होनी चाहिए, एक ढक्कन के साथ पैन को कवर करें और मिश्रण पकाना, कभी-कभी सरगर्मी, जब तक यह सजातीय और तरल नहीं हो जाता। - जब आप देखते हैं कि मिश्रण फोम और बुलबुले के साथ कवर किया गया है, तो इसे ढकने के साथ एक और पाँच मिनट के लिए आग में मिश्रित होना चाहिए और इसे छोड़ दिया जाएगा। - पेस्ट के बाद थोड़ा ठंडा हो गया है, आप सीधे आलसी की प्रक्रिया में जा सकते हैं। शुरू करने के लिए, आपको पहले से ही गैर-गर्म का एक टुकड़ा लेने की जरूरत है, लेकिन अपने हाथों में काफी कठोर पेस्ट नहीं करना चाहिए और ध्यान से इसे लोचदार स्थिति में फैलाना होगा। सबसे पहले यह आसान नहीं होगा, लेकिन फिर हाथों की गर्मी के कारण मिश्रण अधिक नरम हो जाएगा। अगर, हालांकि, जब सानना, इस तथ्य के कारण कठिनाइयाँ उठी कि चीनी बहुत मोटी है, तो आप संरचना के लिए थोड़ा पानी जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, कई लोग कहते हैं कि इस पद्धति के लिए एक मोक्ष बन गया है, क्योंकि हर रोज शेविंग ने परेशान किया है। महिलाओं को घर पर खुद की प्रक्रिया करते हैं, लेकिन इस उद्देश्य के लिए एक विशेष पेस्ट का उपयोग करें, जो वे पेशेवर सौंदर्य प्रसाधनों के स्टोर में खरीदते हैं। उपयोग के प्रभाव काफी संतोषजनक हैं। निष्पक्ष सेक्स के अन्य प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया है कि पकाया जाता है घर में, शीगेरिंग पेस्ट बाल के रूप में गहन रूप में घुसना नहीं करता है, इसलिए यह बालों को तोड़ने की ओर जाता है, और बाद में अपने गहनों के लिए। इसलिए, उनकी राय में, मास्टर के सैलून में कम से कम करना आवश्यक है, या कम से कम चीनी एपिलेशन के लिए एक विशेष पेस्ट की सहायता से, और गैस स्टोव के साथ प्रयोग करना इसके लिए उपयुक्त नहीं है। फिर भी, नियमित रूप से घर के बने शर्करा का इस्तेमाल बाल के छुटकारा पाने के लिए करते हैं, जो उनके अनुभव मित्रों से प्रेरित होते हैं। उत्तरदाताओं में से कुछ उत्साही नहीं थे, उन्होंने कहा कि प्रक्रिया दर्दनाक थी, और कुछ बाल जगह पर बने रहे। ऐसे भी लोग हैं, जो पहली बार घर पर शर्म करने की कोशिश कर रहे थे, केवल अपने पैरों पर घावों को छोड़ दिया , चूंकि यह लागू होने पर त्वचा पर दृढ़ता से प्रेस करने के लिए आवश्यक था। इसलिए, उन्होंने स्वयं के लिए यह निष्कर्ष निकाला कि घर में शीलिंग का इस्तेमाल केवल शरीर के छोटे क्षेत्रों में बाल निकालने के लिए किया जा सकता है।
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। वस्त्र मंत्रालय द्वारा वस्त्र क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना के तहत आवेदन जमा करने की समयसीमा फिर से 28.02.2022 तक बढ़ा दी गई है। पहले वस्त्र क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी, 2022 तक थी, जिसे 14 फरवरी, 2022 तक बढ़ा दिया गया था। पात्र आवेदक केवल ऑनलाइन माध्यम से आवेदन दाखिल कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन जमा करने का यहां क्लिक करें। दिशानिर्देशों के बारे में जानने के लिए क्लिक करें। स्त्राेत : समाचार सेवा प्रभाग, आकाशवाणी। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें) इस भाग में धनलक्ष्मी याेजना की जानकारी दी गई है।
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। वस्त्र मंत्रालय द्वारा वस्त्र क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना के तहत आवेदन जमा करने की समयसीमा फिर से अट्ठाईस.दो.दो हज़ार बाईस तक बढ़ा दी गई है। पहले वस्त्र क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि इकतीस जनवरी, दो हज़ार बाईस तक थी, जिसे चौदह फरवरी, दो हज़ार बाईस तक बढ़ा दिया गया था। पात्र आवेदक केवल ऑनलाइन माध्यम से आवेदन दाखिल कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन जमा करने का यहां क्लिक करें। दिशानिर्देशों के बारे में जानने के लिए क्लिक करें। स्त्राेत : समाचार सेवा प्रभाग, आकाशवाणी। इस भाग में धनलक्ष्मी याेजना की जानकारी दी गई है।
सही और सक्षम भाषण की कला सभी के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह भाषण कई लोगों के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से जिनकी गतिविधियां सक्रिय संचार से जुड़ी हैं - बातचीत, बड़े दर्शकों के सामने प्रदर्शन, ग्राहकों के साथ संचार। सक्षम रूप से वितरित भाषण - सुंदर और सूचनात्मक रूप से संतृप्त, तार्किक रूप से निर्मित और अभिव्यक्तिपूर्ण। दुर्भाग्यवश, आधुनिक विद्यालय एक साक्षर और स्पष्ट भाषण बनाने के लिए थोडा समय देता है, और नतीजा यह है कि कई लोगों को उनकी मूल भाषा की समृद्धि का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने में असमर्थता है। साक्षर भाषण के नियमों में टौटोलॉजी ("नृत्य नृत्य", "युवा लड़का", "एक प्रश्न पूछें"), परजीवी शब्दों ("सामान्य रूप से", "बोलने के लिए", "जैसे", "छोटा") के व्याख्यान से बाहर निकलने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, आपको उन शब्दों से छुटकारा पाना चाहिए, जिनके अर्थ आप नहीं जानते हैं, साथ ही रूसी एनालॉग वाले विदेशी शब्दों के अन्यायपूर्ण उपयोग से भी। कुछ शब्दों के तनाव और जेनेरा के लिए देखें। मध्यम प्रकार के शब्द के रूप में "कॉफी" का उपयोग करने के प्रवेश के बावजूद, शिक्षित लोग सकारात्मक रूप से इसकी सराहना करने की संभावना नहीं रखते हैं। और यदि "अंगूठी" शब्द में तनाव पहले अक्षर पर पड़ता है, और "बार्मन" शब्द में - दूसरे पर, यह आपको एक अशिक्षित व्यक्ति देगा। भाषण रंगीन रूपकों, मूल तुलनाओं, विवरण, कहानियों और अफवाहों में भाषण में प्रयोग करें - ये सभी टूल आपकी कहानी को जीवंत और सुंदर बनाने में मदद करेंगे। साक्षर भाषण कैसे सीखें? सबसे अच्छा साहित्यिक भाषण शास्त्रीय कथाओं द्वारा पढ़ाया जाता है। पढ़ना आपको शब्दावली का विस्तार करने, वाक्यांशों को खूबसूरती से बनाने का तरीका सीखने, शब्दों के साथ अपने विचारों और भावनाओं को आसानी से व्यक्त करने की अनुमति देता है। और, इसके अलावा, पढ़ना और लिखना, इसे और अधिक साक्षर और अधिक कल्पनाशील बनाना। सही ढंग से वितरित भाषण सीखने के लिए एक तानाशाह की मदद से जरूरी है। एक साहित्यिक काम या फिल्म की अपनी रीटेलिंग लिखने का प्रयास करें। फिर रिकॉर्ड सुनें, भाषण त्रुटियों को ढूंढें - शब्द परजीवी, पुनरावृत्ति, खराब शब्द वाक्यांश। भविष्य में, आप जो कह रहे हैं उसका ट्रैक रखने की कोशिश करें, और इन त्रुटियों को अनुमति न दें। नए शब्दों को सीखने के बाद, अपना अर्थ जानने और सक्रिय शब्दावली में प्रवेश करने का प्रयास करें। हालांकि, अपने भाषण को बहुत जटिल शब्दों से तृप्त करने से बचें - यह आपको एक अच्छा वार्तालाप नहीं करेगा।
सही और सक्षम भाषण की कला सभी के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह भाषण कई लोगों के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से जिनकी गतिविधियां सक्रिय संचार से जुड़ी हैं - बातचीत, बड़े दर्शकों के सामने प्रदर्शन, ग्राहकों के साथ संचार। सक्षम रूप से वितरित भाषण - सुंदर और सूचनात्मक रूप से संतृप्त, तार्किक रूप से निर्मित और अभिव्यक्तिपूर्ण। दुर्भाग्यवश, आधुनिक विद्यालय एक साक्षर और स्पष्ट भाषण बनाने के लिए थोडा समय देता है, और नतीजा यह है कि कई लोगों को उनकी मूल भाषा की समृद्धि का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने में असमर्थता है। साक्षर भाषण के नियमों में टौटोलॉजी , परजीवी शब्दों के व्याख्यान से बाहर निकलने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, आपको उन शब्दों से छुटकारा पाना चाहिए, जिनके अर्थ आप नहीं जानते हैं, साथ ही रूसी एनालॉग वाले विदेशी शब्दों के अन्यायपूर्ण उपयोग से भी। कुछ शब्दों के तनाव और जेनेरा के लिए देखें। मध्यम प्रकार के शब्द के रूप में "कॉफी" का उपयोग करने के प्रवेश के बावजूद, शिक्षित लोग सकारात्मक रूप से इसकी सराहना करने की संभावना नहीं रखते हैं। और यदि "अंगूठी" शब्द में तनाव पहले अक्षर पर पड़ता है, और "बार्मन" शब्द में - दूसरे पर, यह आपको एक अशिक्षित व्यक्ति देगा। भाषण रंगीन रूपकों, मूल तुलनाओं, विवरण, कहानियों और अफवाहों में भाषण में प्रयोग करें - ये सभी टूल आपकी कहानी को जीवंत और सुंदर बनाने में मदद करेंगे। साक्षर भाषण कैसे सीखें? सबसे अच्छा साहित्यिक भाषण शास्त्रीय कथाओं द्वारा पढ़ाया जाता है। पढ़ना आपको शब्दावली का विस्तार करने, वाक्यांशों को खूबसूरती से बनाने का तरीका सीखने, शब्दों के साथ अपने विचारों और भावनाओं को आसानी से व्यक्त करने की अनुमति देता है। और, इसके अलावा, पढ़ना और लिखना, इसे और अधिक साक्षर और अधिक कल्पनाशील बनाना। सही ढंग से वितरित भाषण सीखने के लिए एक तानाशाह की मदद से जरूरी है। एक साहित्यिक काम या फिल्म की अपनी रीटेलिंग लिखने का प्रयास करें। फिर रिकॉर्ड सुनें, भाषण त्रुटियों को ढूंढें - शब्द परजीवी, पुनरावृत्ति, खराब शब्द वाक्यांश। भविष्य में, आप जो कह रहे हैं उसका ट्रैक रखने की कोशिश करें, और इन त्रुटियों को अनुमति न दें। नए शब्दों को सीखने के बाद, अपना अर्थ जानने और सक्रिय शब्दावली में प्रवेश करने का प्रयास करें। हालांकि, अपने भाषण को बहुत जटिल शब्दों से तृप्त करने से बचें - यह आपको एक अच्छा वार्तालाप नहीं करेगा।
भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में साजिश करने के आरोपी 83 साल के स्टैन स्वामी को अब पानी और जूस पीने की स्ट्रॉ और सिपर के लिए कम से कम एक हफ्ते का इंतजार करना पड़ेगा। पार्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें परेशानी की वजह से स्ट्रॉ और सिपर कप की जरूरत है और एनआईए को यह दोनों चीजें लौटानी चाहिए। हालांकि, एनआईए ने कोर्ट को बताया कि उसने स्टैन स्वामी की गिरफ्तारी के वक्त उनकी कोई भी चीज जब्त नहीं की थी। एनआईए के एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर मीडिया ग्रुप एनडीटीवी को बताया कि स्टैन स्वामी को कभी एनआईए की कस्टडी में ले ही नहीं जाया गया, इसलिए उनकी कोई भी चीज हमारे पास नहीं है। उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, इसलिए उन्हें अब किसी भी चीज के लिए जेल अधिकारियों से मांग करनी होगी। हमें नहीं पता कि उन्होंने जेल अधिकारियों से ऐसी कोई मांग की भी है या नहीं। पुणे स्थित विशेष अदालत ने एनआईए के जवाब के बाद स्टैन स्वामी की याचिका को रद्द कर दिया। हालांकि, उन्होंने एक नई ऐप्लीकेशन में जेल के अंदर स्ट्रॉ-सिपर और सर्दी के कपड़ों की मांग की है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में जेल प्रशासन से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई 4 दिसंबर तक स्थगित कर दी। यानी स्टैन स्वामी को अभी स्ट्रॉ-सिपर कप के लिए कम से कम अगले शुक्रवार तक इंतजार करना होगा। बता दें कि आदिवासियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी को पिछले महीने एनआईए की टीम ने दिल्ली से झारखंड के रांची जाकर पकड़ा था। स्टैन स्वामी अब तक भीमा-कोरेगांव केस में गिरफ्तार किए गए सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं। वे पहले से ही कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। क्या है भीमा-कोरेगांव मामला? : यहा मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुए एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में हिंसा और आगजनी जैसी घटनाएं हुई थीं और एक व्यक्ति की जान भी गई थी। जांचकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में एल्गार परिषद के लोगों ने भड़काऊ बयान दिए थे, जिससे अगले दिन ही हिंसा भड़क उठी थी। जांच में दावा किया गया है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का भी खुलासा हुआ।
भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में साजिश करने के आरोपी तिरासी साल के स्टैन स्वामी को अब पानी और जूस पीने की स्ट्रॉ और सिपर के लिए कम से कम एक हफ्ते का इंतजार करना पड़ेगा। पार्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें परेशानी की वजह से स्ट्रॉ और सिपर कप की जरूरत है और एनआईए को यह दोनों चीजें लौटानी चाहिए। हालांकि, एनआईए ने कोर्ट को बताया कि उसने स्टैन स्वामी की गिरफ्तारी के वक्त उनकी कोई भी चीज जब्त नहीं की थी। एनआईए के एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर मीडिया ग्रुप एनडीटीवी को बताया कि स्टैन स्वामी को कभी एनआईए की कस्टडी में ले ही नहीं जाया गया, इसलिए उनकी कोई भी चीज हमारे पास नहीं है। उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, इसलिए उन्हें अब किसी भी चीज के लिए जेल अधिकारियों से मांग करनी होगी। हमें नहीं पता कि उन्होंने जेल अधिकारियों से ऐसी कोई मांग की भी है या नहीं। पुणे स्थित विशेष अदालत ने एनआईए के जवाब के बाद स्टैन स्वामी की याचिका को रद्द कर दिया। हालांकि, उन्होंने एक नई ऐप्लीकेशन में जेल के अंदर स्ट्रॉ-सिपर और सर्दी के कपड़ों की मांग की है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में जेल प्रशासन से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई चार दिसंबर तक स्थगित कर दी। यानी स्टैन स्वामी को अभी स्ट्रॉ-सिपर कप के लिए कम से कम अगले शुक्रवार तक इंतजार करना होगा। बता दें कि आदिवासियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी को पिछले महीने एनआईए की टीम ने दिल्ली से झारखंड के रांची जाकर पकड़ा था। स्टैन स्वामी अब तक भीमा-कोरेगांव केस में गिरफ्तार किए गए सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं। वे पहले से ही कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। क्या है भीमा-कोरेगांव मामला? : यहा मामला इकतीस दिसंबर दो हज़ार सत्रह को पुणे में हुए एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में हिंसा और आगजनी जैसी घटनाएं हुई थीं और एक व्यक्ति की जान भी गई थी। जांचकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में एल्गार परिषद के लोगों ने भड़काऊ बयान दिए थे, जिससे अगले दिन ही हिंसा भड़क उठी थी। जांच में दावा किया गया है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश का भी खुलासा हुआ।
घर में कभी भी टूटा हुआ सामान नहीं रखना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक का सामान, फर्नीचर, घड़ियां या कोई भी टूटी हुई चीज अपने घर में न रखें। मान्यताओं के अनुसार, ऐसी चीजें घर में रखने से नेगेटिव एनर्जी का आगमन होता है। इसलिए यदि कोई ऐसी चीज घर में पड़ी है तो उसे तुरंत निकाल दें। घर में कभी भी अव्यवस्थित सामान नहीं रखना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, बिखरा हुआ सामान रखने से घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और नेगेटिविटी आती है इसके अलावा घर के वातावरण में भी नेगेटिविटी फैलती है। जो चीजें आप इस्तेमाल नहीं करते उन्हें किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान कर दें इसके अलावा अपना कमरा भी हमेशा साफ रखें। इससे घर में पॉजिटिव माहौल बना रहेगा। यदि आप चाहते हैं कि घर में नेगेटिव एनर्जी न हो तो अपने पॉजिटिविटी लाने के लिए खिड़कियां, दरवाजों को हमेशा खुला रखें। सूरज की रोशनी सकरात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ घर के सदस्यों का मूड भी अच्छा करती है। वास्तु शास्त्र में नमक को ऐसा तत्व माना जाता है जिसमें नेगेटिव एनर्जी को अंदर खींच लेने का गुण होता है। पोछा मारते समय यदि समुद्री नमक मिलाया जाए तो घर की नेगेटिविटी दूर होती है। इसके अलावा बाथरुम में एक कांच की कटोरी में नमक रखने से वास्तु दोष भही दूर होता है।
घर में कभी भी टूटा हुआ सामान नहीं रखना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक का सामान, फर्नीचर, घड़ियां या कोई भी टूटी हुई चीज अपने घर में न रखें। मान्यताओं के अनुसार, ऐसी चीजें घर में रखने से नेगेटिव एनर्जी का आगमन होता है। इसलिए यदि कोई ऐसी चीज घर में पड़ी है तो उसे तुरंत निकाल दें। घर में कभी भी अव्यवस्थित सामान नहीं रखना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, बिखरा हुआ सामान रखने से घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और नेगेटिविटी आती है इसके अलावा घर के वातावरण में भी नेगेटिविटी फैलती है। जो चीजें आप इस्तेमाल नहीं करते उन्हें किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान कर दें इसके अलावा अपना कमरा भी हमेशा साफ रखें। इससे घर में पॉजिटिव माहौल बना रहेगा। यदि आप चाहते हैं कि घर में नेगेटिव एनर्जी न हो तो अपने पॉजिटिविटी लाने के लिए खिड़कियां, दरवाजों को हमेशा खुला रखें। सूरज की रोशनी सकरात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ घर के सदस्यों का मूड भी अच्छा करती है। वास्तु शास्त्र में नमक को ऐसा तत्व माना जाता है जिसमें नेगेटिव एनर्जी को अंदर खींच लेने का गुण होता है। पोछा मारते समय यदि समुद्री नमक मिलाया जाए तो घर की नेगेटिविटी दूर होती है। इसके अलावा बाथरुम में एक कांच की कटोरी में नमक रखने से वास्तु दोष भही दूर होता है।
दवा "रेवॉलाइड" उत्तेजक को संदर्भित करता हैthrombopoiesis। यह रक्तस्राव के खतरे को कम करने के लिए, प्रतिरक्षा थ्रंबोक्सीथोपिक पपुपुरा (आईटीपी) के पुराना रूप से रोगियों के लिए निर्धारित है। इसके अलावा, "रिवॉलाइड" निर्देश thrombocytopenia के उपचार में इंटरफेनॉन के साथ एंटीवायरल थेरेपी को अनुकूलित करने के लिए हेपेटाइटिस सी के रोगियों में उपयोग की सिफारिश करता है। जिन रोगियों के लिए"रिवॉलाइड" कीमत अधिक है, यह जेनेरिक दवा पर ध्यान देने योग्य है एक सामान्य क्या है? यह दवा, जिसकी मूल तैयारी के समान रचना है, एक ही उच्च दक्षता का है और एक लाइसेंस प्राप्त कंपनी द्वारा निर्मित है तो सामान्य सस्ता क्यों है? किसी भी औषधीय उत्पाद के निर्माण मेंसबसे पहले, एक प्रभावी औषधीय सूत्र विकसित किया गया है, फिर जानवरों और मनुष्यों में परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद दवाएं फार्मेसियों को दी जाती हैं। इसके अलावा, एक विज्ञापन अभियान आवश्यक है, ताकि संभावित खरीदारों नए उपकरण पर ध्यान दे सकें। जेनरिक मौजूदा सूत्र के आधार पर जारी किया जाता है, परीक्षण पूरा नहीं किया जाता है, क्योंकि मूल के परिणाम मान्य हैं। विज्ञापन अभियान की भी जरूरत नहीं है यही कारण है कि एक कंपनी जो एक सामान्य उत्पाद का उत्पादन करती है, जिसके उत्पादन की लागत कम है, वह कम कीमत निर्धारित करने में सक्षम है। इस ऑनलाइन फ़ार्मेसी में "रिवाल्डेड" खरीदने के लिए, एक चिकित्सक से पहले ही डॉक्टर के पर्चे तैयार करें। औषधीय उत्पादों के वितरण के लिए यह अनिवार्य स्थिति है। खुराक रोगी की उपस्थित चिकित्सक द्वारा चुना जाता है, खून परीक्षण के मानकों को ध्यान में रखते हुए। ITP के लिए अनुशंसित प्रारंभिक खुराक 50 मिलीग्राम / दिन है, हेपेटाइटिस सी में यह मात्रा एक नियम के रूप में आधे से कम हो जाती है। Antacids के उपयोग के बाद दवा 4 घंटे या 4 घंटे पहले ली जाती है। "रेवॉलाइड" में ITP और हेपेटाइटिस सी वाले मरीजों के लिए कोई मतभेद नहीं है। दवा के उपयोग से निम्न अवांछनीय प्रभाव हो सकते हैंः कुछ मामलों में, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी के लक्षणों का विकास संभव है।
दवा "रेवॉलाइड" उत्तेजक को संदर्भित करता हैthrombopoiesis। यह रक्तस्राव के खतरे को कम करने के लिए, प्रतिरक्षा थ्रंबोक्सीथोपिक पपुपुरा के पुराना रूप से रोगियों के लिए निर्धारित है। इसके अलावा, "रिवॉलाइड" निर्देश thrombocytopenia के उपचार में इंटरफेनॉन के साथ एंटीवायरल थेरेपी को अनुकूलित करने के लिए हेपेटाइटिस सी के रोगियों में उपयोग की सिफारिश करता है। जिन रोगियों के लिए"रिवॉलाइड" कीमत अधिक है, यह जेनेरिक दवा पर ध्यान देने योग्य है एक सामान्य क्या है? यह दवा, जिसकी मूल तैयारी के समान रचना है, एक ही उच्च दक्षता का है और एक लाइसेंस प्राप्त कंपनी द्वारा निर्मित है तो सामान्य सस्ता क्यों है? किसी भी औषधीय उत्पाद के निर्माण मेंसबसे पहले, एक प्रभावी औषधीय सूत्र विकसित किया गया है, फिर जानवरों और मनुष्यों में परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद दवाएं फार्मेसियों को दी जाती हैं। इसके अलावा, एक विज्ञापन अभियान आवश्यक है, ताकि संभावित खरीदारों नए उपकरण पर ध्यान दे सकें। जेनरिक मौजूदा सूत्र के आधार पर जारी किया जाता है, परीक्षण पूरा नहीं किया जाता है, क्योंकि मूल के परिणाम मान्य हैं। विज्ञापन अभियान की भी जरूरत नहीं है यही कारण है कि एक कंपनी जो एक सामान्य उत्पाद का उत्पादन करती है, जिसके उत्पादन की लागत कम है, वह कम कीमत निर्धारित करने में सक्षम है। इस ऑनलाइन फ़ार्मेसी में "रिवाल्डेड" खरीदने के लिए, एक चिकित्सक से पहले ही डॉक्टर के पर्चे तैयार करें। औषधीय उत्पादों के वितरण के लिए यह अनिवार्य स्थिति है। खुराक रोगी की उपस्थित चिकित्सक द्वारा चुना जाता है, खून परीक्षण के मानकों को ध्यान में रखते हुए। ITP के लिए अनुशंसित प्रारंभिक खुराक पचास मिलीग्राम / दिन है, हेपेटाइटिस सी में यह मात्रा एक नियम के रूप में आधे से कम हो जाती है। Antacids के उपयोग के बाद दवा चार घंटाटे या चार घंटाटे पहले ली जाती है। "रेवॉलाइड" में ITP और हेपेटाइटिस सी वाले मरीजों के लिए कोई मतभेद नहीं है। दवा के उपयोग से निम्न अवांछनीय प्रभाव हो सकते हैंः कुछ मामलों में, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी के लक्षणों का विकास संभव है।
साधनपादः सूत्र १६ आनन्दपूर्वक जीवन बिताते हैं और कुछ प्राणी गलियों में भूखे मारे-मारे घूमते हैं। इसका भाव यह हुआ कि जो सुख-दुःख अन्यों को दिया है, उसका फल उसे अवश्य ही प्राप्त होता है, उसने चाहे जिस किसी भी योनि में जन्म धारण किया हो ॥ १४ ॥ (६६) परिणामतापसंस्कारदुःखैर्गुणवृत्तिविरोधाच्च दुःखमेव सर्वं विवेकिनः ॥ १५ सूत्रार्थ - परिणामतापसंस्कारदुःखैः = परिणाम, ताप और संस्कार दुःख - ये तीन प्रकार के दुःख सभी में स्थित रहने के कारण, च = और, गुणवृत्तिविरोधात् = तीनों गुणों की वृत्तियों में परस्पर विरोध होने के कारण, विवेकिनः = विवेकशील के लिए, सर्वम् = सब के सब (कर्मफल), दुःखम् एव दुःख रूप ही हैं व्याख्या - इस सूत्र में चार तरह के दुःखों का प्रतिपादन किया गया है, वे इस प्रकार हैं- १. परिणामदुःख २. ताप दुःख, ३. संस्कार दुःख ४ गुणवृत्तिविरोध दुःख । १. परिणाम दुःख - भोगेन्द्रियों की तृप्ति में शान्ति है, प्रायः मनुष्य उस तृप्ति लाभ को ही सुख मानने लगता है; किन्तु विषय भोगों से इन्द्रियों की तृप्ति कभी भी नहीं होती। जिस प्रकार आग में घृत डालने से अग्नि और अधिक प्रदीप्त होती है, वैसे ही विषयों के भोग से विषय भोगों की आकांक्षा अधिक बनी रहती है। भोग के पश्चात् इन्द्रियों के अशक्त-दुर्बल होने पर तृष्णा और ही परेशान करती है। इसे ही परिणाम दुःख की संज्ञा प्रदान की गई है । २. तापदुःख- • विषय भोगों के द्वारा सुख की प्राप्ति होने पर राग नामक क्लेश उत्पन्न होता है । राग की प्राप्ति में जो अवरोध होता है, उसी में द्वेष की उत्पत्ति होती है। ये राग और द्वेष दोनों ही दुःख देने वाले कहे गये हैं। ३. संस्कार दुःख - मनुष्य राग-द्वेष नामक क्लेशों के द्वारा वशीभूत हो विभिन्न तरह के शुभ एवं अशुभ कर्म करता है । उसके संस्कार उसे जन्म-मरण के चक्र में डालकर दुःख ही दिया करते हैं । ४. गुण-वृत्ति-विरोध-दुःख - सत्त्व, रजस्, तमस् गुणों के कार्य का नाम गुण-वृत्ति है । सत्त्व का कार्य सुख है, तमस् का कार्य - मोह है और रजोगुण का कार्य दुःख है । इन त्रिगुणों में परस्पर ऐक्य भाव न होने से कभी एक गुण दूसरे अन्य गुणों को दबा लेता है तथा कभी दूसरा उसके गुणों को अपने प्रभाव में ले लेता है, कभी सत्त्वगुण, रजस् और तमस् पर भारी हो जाता है, तब सुखवृत्ति का आभास होने लगता है; किन्तु दुःख और मोह की वृत्तियाँ उस समय भी रहती हैं, लेकिन दबी रहती हैं रजोगुण जब अन्य दूसरे गुणों को दबा देता है, तब दुःख की उत्पत्ति होती है तथा जब तमस् की अधिकता होती है, तब मोह का प्रादुर्भाव होने लगता है। इसे ही गुण-वृत्ति - विरोध-दुःख कहा गया है। उपर्युक्त समस्त दुःख-सुखादि को एवं विवेक के द्वारा प्राप्त हुए सुख - आनन्द को भी विषय-जन्य मानकर ज्ञानी मनुष्य त्याग कर देते हैं ॥ १५ ॥ हेयं दुःखमनागतम् ॥ १६ ॥ सूत्रार्थ- अनागतम् = जो आया नहीं, बल्कि आने वाला है वह, दुःखम् = दुःख, हेयम् = हंय (त्यागने योग्य ) है । व्याख्या- इस सूत्र में दुःख की चार संज्ञाएँ कही गई हैं- हेय, हेय- हेतु, हान हानोपाय । १. हेय - जो त्यागने योग्य है, उसे हेय नामक दुःख कहते हैं । २. हेयहेतु - द्रष्टा-दृश्य का संयोग ही दुःख का हेतु है । इसे ही 'हेयहेतु' दुःख के नाम से जाना जाता हैं
साधनपादः सूत्र सोलह आनन्दपूर्वक जीवन बिताते हैं और कुछ प्राणी गलियों में भूखे मारे-मारे घूमते हैं। इसका भाव यह हुआ कि जो सुख-दुःख अन्यों को दिया है, उसका फल उसे अवश्य ही प्राप्त होता है, उसने चाहे जिस किसी भी योनि में जन्म धारण किया हो ॥ चौदह ॥ परिणामतापसंस्कारदुःखैर्गुणवृत्तिविरोधाच्च दुःखमेव सर्वं विवेकिनः ॥ पंद्रह सूत्रार्थ - परिणामतापसंस्कारदुःखैः = परिणाम, ताप और संस्कार दुःख - ये तीन प्रकार के दुःख सभी में स्थित रहने के कारण, च = और, गुणवृत्तिविरोधात् = तीनों गुणों की वृत्तियों में परस्पर विरोध होने के कारण, विवेकिनः = विवेकशील के लिए, सर्वम् = सब के सब , दुःखम् एव दुःख रूप ही हैं व्याख्या - इस सूत्र में चार तरह के दुःखों का प्रतिपादन किया गया है, वे इस प्रकार हैं- एक. परिणामदुःख दो. ताप दुःख, तीन. संस्कार दुःख चार गुणवृत्तिविरोध दुःख । एक. परिणाम दुःख - भोगेन्द्रियों की तृप्ति में शान्ति है, प्रायः मनुष्य उस तृप्ति लाभ को ही सुख मानने लगता है; किन्तु विषय भोगों से इन्द्रियों की तृप्ति कभी भी नहीं होती। जिस प्रकार आग में घृत डालने से अग्नि और अधिक प्रदीप्त होती है, वैसे ही विषयों के भोग से विषय भोगों की आकांक्षा अधिक बनी रहती है। भोग के पश्चात् इन्द्रियों के अशक्त-दुर्बल होने पर तृष्णा और ही परेशान करती है। इसे ही परिणाम दुःख की संज्ञा प्रदान की गई है । दो. तापदुःख- • विषय भोगों के द्वारा सुख की प्राप्ति होने पर राग नामक क्लेश उत्पन्न होता है । राग की प्राप्ति में जो अवरोध होता है, उसी में द्वेष की उत्पत्ति होती है। ये राग और द्वेष दोनों ही दुःख देने वाले कहे गये हैं। तीन. संस्कार दुःख - मनुष्य राग-द्वेष नामक क्लेशों के द्वारा वशीभूत हो विभिन्न तरह के शुभ एवं अशुभ कर्म करता है । उसके संस्कार उसे जन्म-मरण के चक्र में डालकर दुःख ही दिया करते हैं । चार. गुण-वृत्ति-विरोध-दुःख - सत्त्व, रजस्, तमस् गुणों के कार्य का नाम गुण-वृत्ति है । सत्त्व का कार्य सुख है, तमस् का कार्य - मोह है और रजोगुण का कार्य दुःख है । इन त्रिगुणों में परस्पर ऐक्य भाव न होने से कभी एक गुण दूसरे अन्य गुणों को दबा लेता है तथा कभी दूसरा उसके गुणों को अपने प्रभाव में ले लेता है, कभी सत्त्वगुण, रजस् और तमस् पर भारी हो जाता है, तब सुखवृत्ति का आभास होने लगता है; किन्तु दुःख और मोह की वृत्तियाँ उस समय भी रहती हैं, लेकिन दबी रहती हैं रजोगुण जब अन्य दूसरे गुणों को दबा देता है, तब दुःख की उत्पत्ति होती है तथा जब तमस् की अधिकता होती है, तब मोह का प्रादुर्भाव होने लगता है। इसे ही गुण-वृत्ति - विरोध-दुःख कहा गया है। उपर्युक्त समस्त दुःख-सुखादि को एवं विवेक के द्वारा प्राप्त हुए सुख - आनन्द को भी विषय-जन्य मानकर ज्ञानी मनुष्य त्याग कर देते हैं ॥ पंद्रह ॥ हेयं दुःखमनागतम् ॥ सोलह ॥ सूत्रार्थ- अनागतम् = जो आया नहीं, बल्कि आने वाला है वह, दुःखम् = दुःख, हेयम् = हंय है । व्याख्या- इस सूत्र में दुःख की चार संज्ञाएँ कही गई हैं- हेय, हेय- हेतु, हान हानोपाय । एक. हेय - जो त्यागने योग्य है, उसे हेय नामक दुःख कहते हैं । दो. हेयहेतु - द्रष्टा-दृश्य का संयोग ही दुःख का हेतु है । इसे ही 'हेयहेतु' दुःख के नाम से जाना जाता हैं
यूपीएससी 2017 की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल करने वाले अतुल प्रकाश बिहार के रहने वाले है। अतुल के पिता रेलवे में इंजिनियर हैं। अतुल ने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की। हालांकि, अतुल IAS बनना चाहते थे और उन्होंने तैयारी कर अपने दूसरे ही प्रयास में इस कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर लिया।
यूपीएससी दो हज़ार सत्रह की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल करने वाले अतुल प्रकाश बिहार के रहने वाले है। अतुल के पिता रेलवे में इंजिनियर हैं। अतुल ने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की। हालांकि, अतुल IAS बनना चाहते थे और उन्होंने तैयारी कर अपने दूसरे ही प्रयास में इस कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर लिया।
रेणु अग्रवाल, धार/अमझेरा। अमझेरा- मनावर रास्ते पर मजदूरों से भरी पिकअप को ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में 2 मजदूरों की मौत हो गई। वहीं 12 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। इन दिनों सोयाबीन कटाई का कार्य तेजी से चल रहा है। रविवार सुबह करीब 7 बजे अमझेरा मनावर मार्ग पर शीतला माता मंदिर के समीप मजदूरों से भरे पिकअप वाहन और ट्रक की आमने सामने भिंडत हो गई। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मनावर की और से मजदुरो से भरा पिकअप आ रहा था। वहीं अमझेरा से मनावर की और जा रहे ट्रक से उसकी भिंडत हो गई। भिंडत होते ही पिकअप मे बैठे मजदुर गिर गए। भिंडत मे मौके पर ही दो मजदूरो की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद सडक पर जाम लग गया। घटना की जानकारी लगते है अमझेरा थाने से पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों और मृतकों को सामुदायिक स्वास्थ केद्र अमझेरा भेजा। मार्ग पर जाम को खुलवाकर आवागमन शुरू किया। घटना में चार व्यक्ति गंभीर घायल हैं, जिनका प्राथमिक इलाज कर धार रेफर किया गया। वहीं बाकी घायलों का अमझेरा में ही इलाज चल रहा है।
रेणु अग्रवाल, धार/अमझेरा। अमझेरा- मनावर रास्ते पर मजदूरों से भरी पिकअप को ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं बारह से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। इन दिनों सोयाबीन कटाई का कार्य तेजी से चल रहा है। रविवार सुबह करीब सात बजे अमझेरा मनावर मार्ग पर शीतला माता मंदिर के समीप मजदूरों से भरे पिकअप वाहन और ट्रक की आमने सामने भिंडत हो गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार मनावर की और से मजदुरो से भरा पिकअप आ रहा था। वहीं अमझेरा से मनावर की और जा रहे ट्रक से उसकी भिंडत हो गई। भिंडत होते ही पिकअप मे बैठे मजदुर गिर गए। भिंडत मे मौके पर ही दो मजदूरो की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद सडक पर जाम लग गया। घटना की जानकारी लगते है अमझेरा थाने से पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों और मृतकों को सामुदायिक स्वास्थ केद्र अमझेरा भेजा। मार्ग पर जाम को खुलवाकर आवागमन शुरू किया। घटना में चार व्यक्ति गंभीर घायल हैं, जिनका प्राथमिक इलाज कर धार रेफर किया गया। वहीं बाकी घायलों का अमझेरा में ही इलाज चल रहा है।
"रियासती मामलों में कदम रखने की हमारी नीति के विषय में काफी आलोचना हुई हैं। भारत के इतिहास का कोई भी निष्पक्ष विद्यार्थी इस बात को स्पष्ट कर सकता है कि भारत सरकार का रियासतों के मामलों में जितना हाथ है, उसमे उन पर कोई भी दवाब नहीं डाला गया । यदि दवाब डालने जैसी कोई स्थिति नजर भी आई है तो वह घटनाओ के दवाब के कारण हुई है। यह कहना नितान्त गलत है कि घटनाओं से नरेश झुक गये । " "एक तरफ भारत सरकार की उपरोक्त आलोचना हुई तो दूसरी ओर यह भी शिकायत हुई कि भारत सरकार की नरेशों के प्रति नीति बहुत ही मुलायम है और भारत सरकार भारत में सामन्तशाही अड्डे कायम रखना चाहती है। ये आलोचक यह भूल जाते हैं कि नरेशो की सार्वजनिक भावना और जनता की देश भक्ति पूर्ण उत्साह, भारत को एक संयुक्त लोकतन्त्री देश बनाने की इच्छा तथा शान्तिपूर्ण तरीको से रियाती जनता को शक्ति और सत्ता हस्तान्तरित करने की प्रदत्त भावनाओं ने ही यह कार्य संभव किया है। इनके शुभ इरादों और देशभक्ति ने ही रियासती भारत का ढांचा बदला है। उनके इस कार्य की हम सराहना करते हैं।" "स्वतन्त्रता के जन्म के साथ ही रियासतों की जनता मे एक उत्कट अभिलापा जागृत हुई कि पड़ौसी प्रान्तों में जिस कदर स्वतंत्रता का जनता उपभोग कर रही है उतनी ही स्वतंत्रता हमें भी अवश्य ही मिलनी चाहिये । इस उत्कट अमिलाषा का परिणाम यह हुआ कि रियासती जनता ने नरेशों के विरुद्ध सत्ता हस्तान्तर कर देने के लिये आन्दोलन चलाये । वे शासक जो जनता की अभिरुचि के जानकार थे, समय से पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपनी प्रजा को जिम्मेदाराना हुकूमत फौरन ही सौंप दी । बड़ी रियासतों में यह समस्या सिर्फ इतनी ही बात से सुलझ सकती हैं कि वहां की शासन व्यवस्था मे लोकतन्त्रात्मकता का प्रवेश कर दिया जाये। किन्तु छोटो दियाशासकों का शासक ] सतों में जो हमेशा से ही पराये आधारों पर जीवित रही हैं और जो स्वतंत्र इकाई के रूप में कभी अपना अस्तित्व कायम रख ही नहीं सकती। ऐसी रियासतों में जिम्मेदाराना हुकूमत कायम कर देना एक -मजाक है। सबसे पहिले यह बात पूर्वीय रियासतों के मामलों में सिद्ध हुई जहां शासन और व्यवस्था इस हद तक पहुँच चुकी थी कि उससे पड़ोसी प्रान्तों को खतरा नजर आने लगा था। इन रियासतों के नाम -उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की रियासतें हैं। इनके पास ऐसा कोई भी साधत नहीं है जिससे वे आधुनिक ढंग की शासन व्यवस्था कायम कर सकें। इसके लिये सरदार वल्लभभाई पटेल और सम्बन्धित नरेशों की कटक और नागपुर में बातचीत हुई । वशं यह निश्चय हुआ कि इन रियासतों की सर्वोत्तस भलाई के लिये इन्हें पडौसी प्रान्तो में मिला देता ही श्रेयस्कर है । नरेशों के इस शुभ निर्णय के परिणाम स्वरूप जनता को सत्ता हस्तान्तरित करना बहुत ही आसान हो गया और इस प्रकार उपरोक्त छोटी छोटी रियासते प्रान्तों में सित्ता ही गई । इससे उनको प्रान्तो के समान ही साधन और सुविधाएँ प्राप्त हो गई ।" "इम निर्णय में जिस आधारभूत सिद्धान्त का सहारा लिया गया है और जिस सिद्धान्त को दूसरे मामलो में अभी तक व्य किया गया है, वह यह है कि कोई भी लोकतन्त्र या लोकतन्त्र संस्था तभी क्रिया शील हो सकती है जब कि उसे जिस इकाई में व्यवहत की जाय वह किमी भी लोकतन्त्री अस्तित्व में जिन्दा रह सके। कोई भी रियामत क्षेत्रफल की बेहद कमी, मावनों की न्यूनता और स्थिति की पूर्ण के कारण आज की शामन व्यवस्था अपने यहाँ कायम नही कर सकती, इसीलिये लोकतन्त्री करण और समृहीकरण ही सर्वोत्तम उपाय माने गये । पूर्वीय रियामतों के विलीय करण के कारण दूसरी रियासतों के लोगों को भी अपनी सावन हीनना आदि कमियों को दूर करने का उपाय दिखाई देने लगा । परिणाम बड़
"रियासती मामलों में कदम रखने की हमारी नीति के विषय में काफी आलोचना हुई हैं। भारत के इतिहास का कोई भी निष्पक्ष विद्यार्थी इस बात को स्पष्ट कर सकता है कि भारत सरकार का रियासतों के मामलों में जितना हाथ है, उसमे उन पर कोई भी दवाब नहीं डाला गया । यदि दवाब डालने जैसी कोई स्थिति नजर भी आई है तो वह घटनाओ के दवाब के कारण हुई है। यह कहना नितान्त गलत है कि घटनाओं से नरेश झुक गये । " "एक तरफ भारत सरकार की उपरोक्त आलोचना हुई तो दूसरी ओर यह भी शिकायत हुई कि भारत सरकार की नरेशों के प्रति नीति बहुत ही मुलायम है और भारत सरकार भारत में सामन्तशाही अड्डे कायम रखना चाहती है। ये आलोचक यह भूल जाते हैं कि नरेशो की सार्वजनिक भावना और जनता की देश भक्ति पूर्ण उत्साह, भारत को एक संयुक्त लोकतन्त्री देश बनाने की इच्छा तथा शान्तिपूर्ण तरीको से रियाती जनता को शक्ति और सत्ता हस्तान्तरित करने की प्रदत्त भावनाओं ने ही यह कार्य संभव किया है। इनके शुभ इरादों और देशभक्ति ने ही रियासती भारत का ढांचा बदला है। उनके इस कार्य की हम सराहना करते हैं।" "स्वतन्त्रता के जन्म के साथ ही रियासतों की जनता मे एक उत्कट अभिलापा जागृत हुई कि पड़ौसी प्रान्तों में जिस कदर स्वतंत्रता का जनता उपभोग कर रही है उतनी ही स्वतंत्रता हमें भी अवश्य ही मिलनी चाहिये । इस उत्कट अमिलाषा का परिणाम यह हुआ कि रियासती जनता ने नरेशों के विरुद्ध सत्ता हस्तान्तर कर देने के लिये आन्दोलन चलाये । वे शासक जो जनता की अभिरुचि के जानकार थे, समय से पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपनी प्रजा को जिम्मेदाराना हुकूमत फौरन ही सौंप दी । बड़ी रियासतों में यह समस्या सिर्फ इतनी ही बात से सुलझ सकती हैं कि वहां की शासन व्यवस्था मे लोकतन्त्रात्मकता का प्रवेश कर दिया जाये। किन्तु छोटो दियाशासकों का शासक ] सतों में जो हमेशा से ही पराये आधारों पर जीवित रही हैं और जो स्वतंत्र इकाई के रूप में कभी अपना अस्तित्व कायम रख ही नहीं सकती। ऐसी रियासतों में जिम्मेदाराना हुकूमत कायम कर देना एक -मजाक है। सबसे पहिले यह बात पूर्वीय रियासतों के मामलों में सिद्ध हुई जहां शासन और व्यवस्था इस हद तक पहुँच चुकी थी कि उससे पड़ोसी प्रान्तों को खतरा नजर आने लगा था। इन रियासतों के नाम -उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की रियासतें हैं। इनके पास ऐसा कोई भी साधत नहीं है जिससे वे आधुनिक ढंग की शासन व्यवस्था कायम कर सकें। इसके लिये सरदार वल्लभभाई पटेल और सम्बन्धित नरेशों की कटक और नागपुर में बातचीत हुई । वशं यह निश्चय हुआ कि इन रियासतों की सर्वोत्तस भलाई के लिये इन्हें पडौसी प्रान्तो में मिला देता ही श्रेयस्कर है । नरेशों के इस शुभ निर्णय के परिणाम स्वरूप जनता को सत्ता हस्तान्तरित करना बहुत ही आसान हो गया और इस प्रकार उपरोक्त छोटी छोटी रियासते प्रान्तों में सित्ता ही गई । इससे उनको प्रान्तो के समान ही साधन और सुविधाएँ प्राप्त हो गई ।" "इम निर्णय में जिस आधारभूत सिद्धान्त का सहारा लिया गया है और जिस सिद्धान्त को दूसरे मामलो में अभी तक व्य किया गया है, वह यह है कि कोई भी लोकतन्त्र या लोकतन्त्र संस्था तभी क्रिया शील हो सकती है जब कि उसे जिस इकाई में व्यवहत की जाय वह किमी भी लोकतन्त्री अस्तित्व में जिन्दा रह सके। कोई भी रियामत क्षेत्रफल की बेहद कमी, मावनों की न्यूनता और स्थिति की पूर्ण के कारण आज की शामन व्यवस्था अपने यहाँ कायम नही कर सकती, इसीलिये लोकतन्त्री करण और समृहीकरण ही सर्वोत्तम उपाय माने गये । पूर्वीय रियामतों के विलीय करण के कारण दूसरी रियासतों के लोगों को भी अपनी सावन हीनना आदि कमियों को दूर करने का उपाय दिखाई देने लगा । परिणाम बड़
- 25 min ago Year Ender 2023- इस साल दुनिया को अलविदा कह गए ये दिग्गज सितारे.. एक एक नाम कर देगा दुखी! - 2 hrs ago अरबाज खान के दुल्हा बनते ही मलाइका अरोड़ा ने किया शादी का ऐलान? बोलीं- मैं जरूर शादी करूंगी.. Don't Miss! Bigg Boss OTT Grand Finale: 'बिग बॉस ओटीटी 2' के कंटेस्टेंट्स अभिषेक मल्हान (Abhishek Malhan), जिन्होंने टॉप 5 में जगह बनाई है, को 14 अगस्त को फिनाले से पहले तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर के पास ले जाया गया। सूत्रों के मुताबिक अभिषेक को वायरल बुखार के कारण शरीर में दर्द था और कमजोरी महसूस हो रही थी। एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "अभिषेक को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, लेकिन उन्हें डॉक्टरों के पास ले जाया गया क्योंकि उनकी हालत खराब थी। उन्हें सही मेडिकल केयर प्रदान की गई और वह ग्रैंड फिनाले में नजर आएंगे।" अभिषेक की बहन ने भी एक्स पर इस खबर की पुष्टि की। हो सकता है कि वह सोमवार रात को फिनाले एपिसोड में परफॉर्म न करें। अभिषेक की बहन प्रेरणा ने लिखा, "अभी पता चला कि अभिषेक काफी अस्वस्थ हैं और शायद अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए, वह आज रात आप सभी के लिए परफॉर्म नहीं कर पाएगा। उन्होंने पूरे सीजन में हमारा भरपूर मनोरंजन किया है। आइये उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करें।" तबीयत बिगड़ने से पहले अभिषेक एक हफ्ते से अस्वस्थ चल रहे थे। फिनाले जियो सिनेमा पर प्रसारित होगा। इस सीज़न की ट्रॉफी के दावेदार अभिषेक, एल्विश यादव, पूजा भट्ट, मनीषा रानी और बेबिका धुर्वे हैं।
- पच्चीस मिनट ago Year Ender दो हज़ार तेईस- इस साल दुनिया को अलविदा कह गए ये दिग्गज सितारे.. एक एक नाम कर देगा दुखी! - दो hrs ago अरबाज खान के दुल्हा बनते ही मलाइका अरोड़ा ने किया शादी का ऐलान? बोलीं- मैं जरूर शादी करूंगी.. Don't Miss! Bigg Boss OTT Grand Finale: 'बिग बॉस ओटीटी दो' के कंटेस्टेंट्स अभिषेक मल्हान , जिन्होंने टॉप पाँच में जगह बनाई है, को चौदह अगस्त को फिनाले से पहले तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर के पास ले जाया गया। सूत्रों के मुताबिक अभिषेक को वायरल बुखार के कारण शरीर में दर्द था और कमजोरी महसूस हो रही थी। एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "अभिषेक को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, लेकिन उन्हें डॉक्टरों के पास ले जाया गया क्योंकि उनकी हालत खराब थी। उन्हें सही मेडिकल केयर प्रदान की गई और वह ग्रैंड फिनाले में नजर आएंगे।" अभिषेक की बहन ने भी एक्स पर इस खबर की पुष्टि की। हो सकता है कि वह सोमवार रात को फिनाले एपिसोड में परफॉर्म न करें। अभिषेक की बहन प्रेरणा ने लिखा, "अभी पता चला कि अभिषेक काफी अस्वस्थ हैं और शायद अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए, वह आज रात आप सभी के लिए परफॉर्म नहीं कर पाएगा। उन्होंने पूरे सीजन में हमारा भरपूर मनोरंजन किया है। आइये उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करें।" तबीयत बिगड़ने से पहले अभिषेक एक हफ्ते से अस्वस्थ चल रहे थे। फिनाले जियो सिनेमा पर प्रसारित होगा। इस सीज़न की ट्रॉफी के दावेदार अभिषेक, एल्विश यादव, पूजा भट्ट, मनीषा रानी और बेबिका धुर्वे हैं।
मुंबईः लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के चार दिन पहले चुनावी प्रचार में काफी तेजी आ गयी है। बुधवार को ईशान्य मुंबई के भाजपा उम्मीदवार मनोज कोटक के लिए घाटकोपर पश्चिम के अमृत नगर सभा में सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी का भाषण खयाली पुलाव है। वह सिर्फ मनोरंजन के लिए भाषण देते है। देवेंद्र फडणवीस ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को टारगेट करते हुए कहा कि भाड़े की इंजन बंद हो चुकी है। इंजन में जंग लग चुका है जिससे अब पूरी तरह बंद हो चुकी पार्टी सिर्फ सुपारी लेकर अपना काम चला रही है। हम सिर्फ 2 मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं एक देश का विकास दूसरा देश की सुरक्षा, आप सभी का मत मनोज कोटक को मिलेगा लेकिन ताकत नरेंद्र मोदी की बढ़ेगी। राहुल गांधी के गरीबों को घर के वादे की नकल करते हुए BJP प्रत्याशी मनोज कोटक ने कहा की हमारा सतत प्रयास है कि सभी झोपड़पट्टी वालों को घर दिया जाएगा। कोटक ने कहा, कांग्रेस सिर्फ मुंगेरी लाल के सपने दिखा रही है। हम विकास की और राष्ट्र सुरक्षा एवं सभी बुनियादी सुविधाओं को पूर्ण करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
मुंबईः लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के चार दिन पहले चुनावी प्रचार में काफी तेजी आ गयी है। बुधवार को ईशान्य मुंबई के भाजपा उम्मीदवार मनोज कोटक के लिए घाटकोपर पश्चिम के अमृत नगर सभा में सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी का भाषण खयाली पुलाव है। वह सिर्फ मनोरंजन के लिए भाषण देते है। देवेंद्र फडणवीस ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को टारगेट करते हुए कहा कि भाड़े की इंजन बंद हो चुकी है। इंजन में जंग लग चुका है जिससे अब पूरी तरह बंद हो चुकी पार्टी सिर्फ सुपारी लेकर अपना काम चला रही है। हम सिर्फ दो मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं एक देश का विकास दूसरा देश की सुरक्षा, आप सभी का मत मनोज कोटक को मिलेगा लेकिन ताकत नरेंद्र मोदी की बढ़ेगी। राहुल गांधी के गरीबों को घर के वादे की नकल करते हुए BJP प्रत्याशी मनोज कोटक ने कहा की हमारा सतत प्रयास है कि सभी झोपड़पट्टी वालों को घर दिया जाएगा। कोटक ने कहा, कांग्रेस सिर्फ मुंगेरी लाल के सपने दिखा रही है। हम विकास की और राष्ट्र सुरक्षा एवं सभी बुनियादी सुविधाओं को पूर्ण करने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
फिलीपिंस की सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार की वकील ज़ारा अल्वारेज़ की हत्या सोमवार 17 अगस्त को नीग्रोस द्वीप में बैकोलॉड शहर में अज्ञात बंदूकधारियों ने कर दी थी। एक तरफ जहां अमन व शांति के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता रान्डौल एकानिस के अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया चल रही थी ठीक इसी दिन इस हत्या का मामला सामने आया है। एकानिस को आम तौर पर का रैंडी (Ka Randy) के रूप में जाना जाता है। इनकी हत्या राष्ट्रीय राजधानी के पास इसी परिस्थितियों में एक सप्ताह पहले की गई थी। अल्वारेज़ नीग्रोस द्वीप हेल्थ इंटिग्रेटेड प्रोग्राम और ह्यूमन राइट्स कोलिशन कारापातन से जुड़े एक प्रमुख कार्यकर्ता थीं। उनकी गतिविधियां काफी हद तक नीग्रोस द्वीप के कृषि क्षेत्र में केंद्रित थी। इस द्वीप में रॉड्रिगो डुटर्टे के 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रेड यूनियनिस्टों और कार्यकर्ताओं पर सबसे हिंसक हमले हुए हैं। अल्वारेज़ को पहले फिलीपींस नेशनल पुलिस ने फिलीपींस की बागी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीपी) से जुड़े आतंकी होने के निराधार आरोपों में हिरासत में रखा था। वह 2018 में डुटर्टे प्रशासन द्वारा एक आधिकारिक आतंकी सूची में शामिल 600 से अधिक लोगों में से भी थें। व्यापक रूप से बदनाम करने वाले कार्यकर्ताओं के रूप में इसकी निंदा की गई थी। अदालत के आदेश के बाद इस सूची में केवल दो नामों को शामिल करने के लिए बड़े पैमाने पर संशोधन किया गया था। सामाजिक आंदोलन के नेताओं, वामपंथी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन दो हत्याओं पर आवाज़ उठाई है। अपनी हत्या को लेकर कारापातन ने "गहरा दुःख और नाराज़गी" जाहिर करते हुए एक बयान जारी किया था। कारापातन ने कहा, "हम ज़ारा, का रैंडी और न्यायेत्तर हत्याओं के सभी पीड़ितों के लिए न्याय पाने में कभी भरोसा नहीं करेंगे।" एकानिस सीपीपी की राजनीतिक शाखा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ) की शांति सलाहकार (Peace consultant ) थे। शांति सलाहकार राष्ट्रपति रोड्रिगो दुटेर्टे की सरकार के साथ शांति वार्ता में कम्युनिस्टों के प्रतिनिधि होते हैं। उनकी मृत्यु की परिस्थितियां एक अन्य एनडीएप शांति सलाहकार रैंडी मलायओ से मिलती जुलती थीं जिन्हें जनवरी 2019 में मार दिया गया था। वामपंथी राजनीतिक दल बायान मुना (Bayan Muna) और मकाबायान गठबंधन ने उनकी मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इसने अल्वारेज़ की मौत की भी निंदा की है और उन्हें सरकार की "हिट लिस्ट" का शिकार बताया जिसमें उस अवैध आतंकवादी सूची का उल्लेख किया गया था जिसमें उनका नाम था। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
फिलीपिंस की सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार की वकील ज़ारा अल्वारेज़ की हत्या सोमवार सत्रह अगस्त को नीग्रोस द्वीप में बैकोलॉड शहर में अज्ञात बंदूकधारियों ने कर दी थी। एक तरफ जहां अमन व शांति के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता रान्डौल एकानिस के अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया चल रही थी ठीक इसी दिन इस हत्या का मामला सामने आया है। एकानिस को आम तौर पर का रैंडी के रूप में जाना जाता है। इनकी हत्या राष्ट्रीय राजधानी के पास इसी परिस्थितियों में एक सप्ताह पहले की गई थी। अल्वारेज़ नीग्रोस द्वीप हेल्थ इंटिग्रेटेड प्रोग्राम और ह्यूमन राइट्स कोलिशन कारापातन से जुड़े एक प्रमुख कार्यकर्ता थीं। उनकी गतिविधियां काफी हद तक नीग्रोस द्वीप के कृषि क्षेत्र में केंद्रित थी। इस द्वीप में रॉड्रिगो डुटर्टे के दो हज़ार सत्रह में राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रेड यूनियनिस्टों और कार्यकर्ताओं पर सबसे हिंसक हमले हुए हैं। अल्वारेज़ को पहले फिलीपींस नेशनल पुलिस ने फिलीपींस की बागी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े आतंकी होने के निराधार आरोपों में हिरासत में रखा था। वह दो हज़ार अट्ठारह में डुटर्टे प्रशासन द्वारा एक आधिकारिक आतंकी सूची में शामिल छः सौ से अधिक लोगों में से भी थें। व्यापक रूप से बदनाम करने वाले कार्यकर्ताओं के रूप में इसकी निंदा की गई थी। अदालत के आदेश के बाद इस सूची में केवल दो नामों को शामिल करने के लिए बड़े पैमाने पर संशोधन किया गया था। सामाजिक आंदोलन के नेताओं, वामपंथी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन दो हत्याओं पर आवाज़ उठाई है। अपनी हत्या को लेकर कारापातन ने "गहरा दुःख और नाराज़गी" जाहिर करते हुए एक बयान जारी किया था। कारापातन ने कहा, "हम ज़ारा, का रैंडी और न्यायेत्तर हत्याओं के सभी पीड़ितों के लिए न्याय पाने में कभी भरोसा नहीं करेंगे।" एकानिस सीपीपी की राजनीतिक शाखा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट की शांति सलाहकार थे। शांति सलाहकार राष्ट्रपति रोड्रिगो दुटेर्टे की सरकार के साथ शांति वार्ता में कम्युनिस्टों के प्रतिनिधि होते हैं। उनकी मृत्यु की परिस्थितियां एक अन्य एनडीएप शांति सलाहकार रैंडी मलायओ से मिलती जुलती थीं जिन्हें जनवरी दो हज़ार उन्नीस में मार दिया गया था। वामपंथी राजनीतिक दल बायान मुना और मकाबायान गठबंधन ने उनकी मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इसने अल्वारेज़ की मौत की भी निंदा की है और उन्हें सरकार की "हिट लिस्ट" का शिकार बताया जिसमें उस अवैध आतंकवादी सूची का उल्लेख किया गया था जिसमें उनका नाम था। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
पासपोर्ट में कमल के चिह्न का इस्तेमाल करने को लेकर सरकार घिर गयी है, दरअसल बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल है जिस पर विपक्ष ने उन्हें घेर लिया है और अब सरकार को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी है। केरल के कोझिकोड में कमल प्रिंट वाले पासपोर्ट बांटे जाने का मुद्दा कांग्रेस सांसद एम के राघवन ने शून्यकाल के दौरान लोकसभा में उठाया था, उन्होंने आरोप लगाया है की सरकार संस्थानों का भगवाकरण कर रही है। इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सफाई दी , उन्होंने बताया है की यह प्रतीक हमारा राष्ट्रीय फूल है और फर्जी पासपोर्ट को पहचानने के लिए सिक्यॉरिटी फीचर मजबूत करने का एक कदम है। आगे उन्होंने यह भी बताया है की कमल के अलावा बारी-बारी से देश के अन्य चिह्नों का इस्तेमाल किया जाएगा। अभी यह कमल है और अगले महीने कुछ और होगा। ये प्रतीक चिह्न भारत से जुड़े हैं जैसे कि राष्ट्रीय फूल और राष्ट्रीय पशु।
पासपोर्ट में कमल के चिह्न का इस्तेमाल करने को लेकर सरकार घिर गयी है, दरअसल बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल है जिस पर विपक्ष ने उन्हें घेर लिया है और अब सरकार को इस मामले पर सफाई देनी पड़ी है। केरल के कोझिकोड में कमल प्रिंट वाले पासपोर्ट बांटे जाने का मुद्दा कांग्रेस सांसद एम के राघवन ने शून्यकाल के दौरान लोकसभा में उठाया था, उन्होंने आरोप लगाया है की सरकार संस्थानों का भगवाकरण कर रही है। इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सफाई दी , उन्होंने बताया है की यह प्रतीक हमारा राष्ट्रीय फूल है और फर्जी पासपोर्ट को पहचानने के लिए सिक्यॉरिटी फीचर मजबूत करने का एक कदम है। आगे उन्होंने यह भी बताया है की कमल के अलावा बारी-बारी से देश के अन्य चिह्नों का इस्तेमाल किया जाएगा। अभी यह कमल है और अगले महीने कुछ और होगा। ये प्रतीक चिह्न भारत से जुड़े हैं जैसे कि राष्ट्रीय फूल और राष्ट्रीय पशु।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक सफर बीच मंझधार में फंस गया है. उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है. उनकी तरफ से इस सिलसिले में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पहले ही एक पत्र भेजा जा चुका था. अभी के लिए संवैधानिक संकट का हवाला देकर ये इस्तीफा देने की बात कही गई है. लेकिन सत्ता संभालते ही तीरथ सिंह रावत ने कई मौकों पर विवाद खड़ा किया था. उनकी तरफ से ऐसे बयान दिए गए थे जिसकी वजह से विपक्ष ने तो निशाना साधा ही, बीजेपी के लिए भी कई मौकों पर जवाब देना मुश्किल रहा. 14 मार्च को एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की गई थी. अब तारीफ करते-करते वे इतना आगे बढ़ लिए कि उन्होंने पीएम की तुलना सीधे भगवान से कर डाली. उन्होंने कहा था कि जैसे राम और कृष्ण को पूजा जाता है, वैसे ही आने वाले समय में नरेंद्र मोदी को भी पूजा जाएगा. जिस तरह से भगवान राम ने समाज का कल्याण किया था, उसके बाद से ही उन्हें भगवान का दर्जा मिला, वैसे ही पीएम मोदी भी समाज के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं और लोग उन्हें भी मानेंगे. तीरथ सिंह के इस बयान पर काफी बवाल काटा गया था. पीएम मोदी को भगवान बताने के दो दिन बाद ही एक दूसरे कार्यक्रम में तीरथ सिंह रावत ने महिलाओं के कपड़ों पर टिप्पणी कर दी थी. उनकी तरफ से फटी जींस वाले फैशन पर तंज कसा गया था. उन्होंने कहा था कि जब वो जहाज से एक बार उड़ान भर रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक महिला अपने दो बच्चों के साथ बिल्कुल पास में ही बैठी थी, वो फटी हुई जीन्स पहनकर बैठी थी. मैंने उनसे पूछा कि बहनजी कहां जाना है, तो महिला ने जवाब दिया कि दिल्ली जाना हैं, उनके पति जेएनयू में प्रोफेसर हैं और वो खुद एनजीओ चलाती थीं. मैंने सोचा जो महिला खुद एनजीओ चलाती हो और फटी हुई जींस पहनी हो, वह समाज में क्या संस्कृति फैलाती होंगी. जब हम स्कूलों में पढ़ते थे, तो ऐसा नहीं होता था. तीरथ सिंह का ये बयान उनके कार्यकाल का सबसे विवादित बयान साबित हुआ था. क्या महिला नेता और क्या बॉलीवुड, सभी ने एक सुर में उनके इस बयान की निंदा की थी. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा था कि कोई क्या कपड़े पहनता है, इससे नेताओं का कोई लेना देना नहीं रहना चाहिए. उनकी तरफ से इस बात पर भी जोर दिया गया था कि कुछ नेताओं ने गलत बयानी की है. मार्च 21 को पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत की तरफ से ज्यादा बच्चे और राशन वितरण के बीच का कनेक्शन बताया गया था. उन्होंने कहा था कि जिनके ज्यादा यूनिट ( बच्चे) हैं, उन्हें ज्यादा राशन मिलता है. बयान में बोला था- अगर मेरे परिवार में दो सदस्य हैं तो हमे 10 किलो राशन मिला, अब जिनके 20 यूनिट ( बच्चे) रहे उन्हें क्विंटल भर राशन मिला. अब इसमें किसकी गलती है? जिसने 20 किए उसे क्विंटल मिला, तुमने सिर्फ दो किए. जलन किस बात की है. जब समय था तब सिर्फ दो क्यों किए, 20 क्यों नहीं किए. 'अमेरिका ने भारत पर किया 200 साल राज' जिस कार्यक्रम में तीरथ सिंह की तरफ से बच्चों वाला बयान दिया गया था, वहीं पर उनकी तरफ से एक बड़ी गलती भी कर दी गई थी. वे कोरोना मैनेजमेंट के लिए भारत की तारीफ कर रहे थे, लेकिन बयान में कह गए कि भारत पर 200 साल अमेरिका ने राज किया था. उन्होंने कहा था कि दूसरे देशों की तुलना में भारत कोरोना से प्रभावी अंदाज में लड़ रहा है. वहीं जो महाशक्ति अमेरिका है जिसने हम पर 200 साल राज किया था, वो संघर्ष कर रहा है. उनके इस बयान की खूब खिल्ली उड़ाई गई थी. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने तंज कसते हुए कह दिया था कि पीएम मोदी 'बेहतरीन टैलेंट' लाए हैं. 'मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलेगा' जब देश में कोरोना की दूसरी लहर तबाही मचा रही थी, तब उत्तराखंड में कुंभ मेले को लेकर काफी विवाद था. कहा गया था कि कोरोना काल में कुंभ का होना खतरनाक है. लेकिन एक मीटिंग के दौरान तब पूर्व सीएम तीरथ कह गए थे कि मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलने वाला है. वहीं उन्होंने यहां तक कह दिया था कि कुंभ की तुलना मरकज से नहीं की जा सकती है क्योंकि मरकज वाला कार्यक्रम बंद कमरे हुआ था, वहीं कुंभ तो नीलकंठ और देवप्रयाग तक फैला हुआ है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक सफर बीच मंझधार में फंस गया है. उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है. उनकी तरफ से इस सिलसिले में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पहले ही एक पत्र भेजा जा चुका था. अभी के लिए संवैधानिक संकट का हवाला देकर ये इस्तीफा देने की बात कही गई है. लेकिन सत्ता संभालते ही तीरथ सिंह रावत ने कई मौकों पर विवाद खड़ा किया था. उनकी तरफ से ऐसे बयान दिए गए थे जिसकी वजह से विपक्ष ने तो निशाना साधा ही, बीजेपी के लिए भी कई मौकों पर जवाब देना मुश्किल रहा. चौदह मार्च को एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की गई थी. अब तारीफ करते-करते वे इतना आगे बढ़ लिए कि उन्होंने पीएम की तुलना सीधे भगवान से कर डाली. उन्होंने कहा था कि जैसे राम और कृष्ण को पूजा जाता है, वैसे ही आने वाले समय में नरेंद्र मोदी को भी पूजा जाएगा. जिस तरह से भगवान राम ने समाज का कल्याण किया था, उसके बाद से ही उन्हें भगवान का दर्जा मिला, वैसे ही पीएम मोदी भी समाज के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं और लोग उन्हें भी मानेंगे. तीरथ सिंह के इस बयान पर काफी बवाल काटा गया था. पीएम मोदी को भगवान बताने के दो दिन बाद ही एक दूसरे कार्यक्रम में तीरथ सिंह रावत ने महिलाओं के कपड़ों पर टिप्पणी कर दी थी. उनकी तरफ से फटी जींस वाले फैशन पर तंज कसा गया था. उन्होंने कहा था कि जब वो जहाज से एक बार उड़ान भर रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक महिला अपने दो बच्चों के साथ बिल्कुल पास में ही बैठी थी, वो फटी हुई जीन्स पहनकर बैठी थी. मैंने उनसे पूछा कि बहनजी कहां जाना है, तो महिला ने जवाब दिया कि दिल्ली जाना हैं, उनके पति जेएनयू में प्रोफेसर हैं और वो खुद एनजीओ चलाती थीं. मैंने सोचा जो महिला खुद एनजीओ चलाती हो और फटी हुई जींस पहनी हो, वह समाज में क्या संस्कृति फैलाती होंगी. जब हम स्कूलों में पढ़ते थे, तो ऐसा नहीं होता था. तीरथ सिंह का ये बयान उनके कार्यकाल का सबसे विवादित बयान साबित हुआ था. क्या महिला नेता और क्या बॉलीवुड, सभी ने एक सुर में उनके इस बयान की निंदा की थी. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा था कि कोई क्या कपड़े पहनता है, इससे नेताओं का कोई लेना देना नहीं रहना चाहिए. उनकी तरफ से इस बात पर भी जोर दिया गया था कि कुछ नेताओं ने गलत बयानी की है. मार्च इक्कीस को पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत की तरफ से ज्यादा बच्चे और राशन वितरण के बीच का कनेक्शन बताया गया था. उन्होंने कहा था कि जिनके ज्यादा यूनिट हैं, उन्हें ज्यादा राशन मिलता है. बयान में बोला था- अगर मेरे परिवार में दो सदस्य हैं तो हमे दस किलो राशन मिला, अब जिनके बीस यूनिट रहे उन्हें क्विंटल भर राशन मिला. अब इसमें किसकी गलती है? जिसने बीस किए उसे क्विंटल मिला, तुमने सिर्फ दो किए. जलन किस बात की है. जब समय था तब सिर्फ दो क्यों किए, बीस क्यों नहीं किए. 'अमेरिका ने भारत पर किया दो सौ साल राज' जिस कार्यक्रम में तीरथ सिंह की तरफ से बच्चों वाला बयान दिया गया था, वहीं पर उनकी तरफ से एक बड़ी गलती भी कर दी गई थी. वे कोरोना मैनेजमेंट के लिए भारत की तारीफ कर रहे थे, लेकिन बयान में कह गए कि भारत पर दो सौ साल अमेरिका ने राज किया था. उन्होंने कहा था कि दूसरे देशों की तुलना में भारत कोरोना से प्रभावी अंदाज में लड़ रहा है. वहीं जो महाशक्ति अमेरिका है जिसने हम पर दो सौ साल राज किया था, वो संघर्ष कर रहा है. उनके इस बयान की खूब खिल्ली उड़ाई गई थी. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने तंज कसते हुए कह दिया था कि पीएम मोदी 'बेहतरीन टैलेंट' लाए हैं. 'मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलेगा' जब देश में कोरोना की दूसरी लहर तबाही मचा रही थी, तब उत्तराखंड में कुंभ मेले को लेकर काफी विवाद था. कहा गया था कि कोरोना काल में कुंभ का होना खतरनाक है. लेकिन एक मीटिंग के दौरान तब पूर्व सीएम तीरथ कह गए थे कि मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलने वाला है. वहीं उन्होंने यहां तक कह दिया था कि कुंभ की तुलना मरकज से नहीं की जा सकती है क्योंकि मरकज वाला कार्यक्रम बंद कमरे हुआ था, वहीं कुंभ तो नीलकंठ और देवप्रयाग तक फैला हुआ है.
1960 वर्ष में, संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे पुरानी हेलीकाप्टर कंपनियों में से एक - पाइसेकी एयरक्राफ्ट - अपने तरीके से कार्यक्रम पाथफाइंडर शुरू करता है। शुरुआत से ही, प्रोटोटाइप 16H-1 एक सिंगल-स्क्रू योजना के अनुसार बनाया गया था, जिसमें एक टेलोर है। 1-th की उड़ान वर्ष के 21 फरवरी 1961 से हुई। एक वर्ष से भी कम समय में, जैसा कि इरादा था, विंग 16H-1 पर स्थापित किया गया था और आरवी को तीन-ब्लेड फ़्लिप किए गए पेंच के साथ नियंत्रणीय निकास सतहों के साथ बदल दिया गया था। बाद वाले ने ट्रैक कंट्रोल और टॉर्क पैरीइंग की। उड़ान परीक्षणों के दौरान, 273 किमी / घंटा की गति को प्राप्त किया गया था। उसके बाद, 370 किमी / घंटा की गति लाने की शर्त के साथ सैन्य परियोजना के वित्तपोषण से जुड़ा। सेना के आग्रह पर, परियोजना में कई बदलाव किए गए, अर्थात् धड़ को लंबा करना और पेलोड को बढ़ाना, पुनः आकार देना, मुख्य और प्रोपेलर को बदलना आदि। हेलीकाप्टर ने सूचकांक 16Н-XINUMXА या पाथफाइंडर II को अपनाया। कम वोल्टेज से पुशिंग तक इनपुट पावर को पुनर्वितरित करके महत्वपूर्ण त्वरण प्राप्त किया गया था। इस मोड में, विंग द्वारा मुख्य लिफ्ट बनाया गया था। परीक्षणों के परिणाम उत्साहजनक थे - गति 1 किमी / घंटा, अच्छी हैंडलिंग और गतिशीलता, दोनों उच्च और कम उड़ान गति पर। भविष्य में, कंपनी ने विभिन्न टेक-ऑफ वेट के साथ कई संशोधनों को विकसित किया है, लेकिन उनमें से एक भी प्रोटोटाइप तक नहीं पहुंची है। अनुसंधान के परिणाम सेना द्वारा AH-361A Cheyenne बनाने के लिए लागू किए गए थे। Piasecki ने 1978 तक की चुनी हुई योजना पर सैद्धांतिक काम जारी रखा। पूर्व विषय पर वापसी स्पष्ट हो गई जब 90-ies के बीच में सेना AH-64 Apache और AH-1W सुपरकोबरा के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए Piasecki का उपयोग करने में रुचि रखती है। एक बड़े पैमाने पर काम किया गया था, जिसमें एक पूर्ण पैमाने पर सिमुलेशन और जमीनी परीक्षणों की एक श्रृंखला शामिल थी। बेसलाइन हेलीकॉप्टर प्रसारण, नई नियंत्रण प्रणाली आदि में बदलाव की आवश्यकता थी। लेकिन परिणाम औसत बहुउद्देश्यीय UH-60 ब्लैक हॉक को संशोधित करने का एक अनुबंध था। 3 के माध्यम से, प्रोटोटाइप ने X-49A स्पीडहॉक इंडेक्स को अपनाया। 16H-1 से मुख्य अंतर पुशर स्क्रू के वायु प्रवाह की अवहेलना के लिए एक अलग डिज़ाइन था - उन्होंने अधिक कुशल, समग्र गोलार्ध का उपयोग किया जो कम गति और गति पर 90 C पर खुलासा होता है, और क्षैतिज उड़ान के उच्च गति पर आवरण के समोच्च में फिट होता है, जिससे परीक्षण नहीं होता है। लोड और पूंछ उछाल के कंपन के स्रोत को हटाने। X-49A ने 1-th फ्लाइट 29 जून 2007 को साल का बनाया। 2008 में, कंपनी Piasecki विमान को प्रायोगिक X-49A हेलीकॉप्टर के उड़ान परीक्षणों के दूसरे चरण के परिशोधन और संचालन के लिए धन प्राप्त हुआ। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उड़ान परीक्षणों के पहले चरण के पूरा होने के बाद, X-49A स्पीडहॉक की भविष्य की संभावनाएं अस्पष्ट रहीं। इसके अलावा, प्रदान की गई फंडिंग सभी समस्याओं को हल नहीं करती है, क्योंकि, पियासेकी एयरक्राफ्ट के प्रतिनिधियों के अनुसार, यह पूरी तरह से कार्यक्रम को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इसी समय, कंपनी अमेरिकी रक्षा विभाग से सकारात्मक संकेत नोट करती है। X-49A स्पीडहॉक उड़ान परीक्षण का पहला चरण पिछले साल जून में शुरू हुआ था। उनका लक्ष्य रचनात्मक समाधानों का मूल्यांकन करना था जो गति विशेषताओं में SH-60F Seahawk के मूल संस्करण को पार करने के लिए प्रयोगात्मक हेलीकॉप्टर की अनुमति देने वाले थे। परीक्षणों के दौरान, X-49A स्पीडहॉक ने SH-47F के साथ समान बिजली दरों पर 60 प्रतिशत की गति में वृद्धि का प्रदर्शन किया, साथ ही कंपन का आधा स्तर भी। वेक्टर जोर VTDP (वेक्टर थ्रस्ट डक्ट्ड प्रोपेलर) और पंखों के साथ एक ट्यूब में लगाए गए थ्रस्ट वेक्टरिंग स्क्रू के उपयोग के कारण हेलीकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं में सुधार किया गया था, जिससे लिफ्टिंग बल में वृद्धि हुई और मुख्य रोटर पर लोड कम हो गया। निकटतम विकास योजनाओं में X-49A स्पीडहॉक पर तीसरे इंजन की स्थापना, साथ ही कंपन को कम करने के लिए रोटर हब पर वापस लेने योग्य लैंडिंग गियर और फेयरिंग शामिल हैं। यह योजना बनाई गई है कि धारावाहिक हेलीकॉप्टरों की क्रूज़िंग गति 383 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होगी, और अधिकतम - 415 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि SH-60F पर संबंधित आंकड़े 241 और 256 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर हैं। 700 किलोग्राम से अधिक भार अनलोड हो जाएगा, मुख्य रूप से तीसरे इंजन की स्थापना के कारण। इसी समय, हेलीकॉप्टर का पेलोड लगभग 230 किलोग्राम बढ़ जाएगा, और कार्रवाई का मुकाबला त्रिज्या लगभग तीन गुना बढ़ जाएगा। LTH:
एक हज़ार नौ सौ साठ वर्ष में, संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे पुरानी हेलीकाप्टर कंपनियों में से एक - पाइसेकी एयरक्राफ्ट - अपने तरीके से कार्यक्रम पाथफाइंडर शुरू करता है। शुरुआत से ही, प्रोटोटाइप सोलहH-एक एक सिंगल-स्क्रू योजना के अनुसार बनाया गया था, जिसमें एक टेलोर है। एक-th की उड़ान वर्ष के इक्कीस फरवरी एक हज़ार नौ सौ इकसठ से हुई। एक वर्ष से भी कम समय में, जैसा कि इरादा था, विंग सोलहH-एक पर स्थापित किया गया था और आरवी को तीन-ब्लेड फ़्लिप किए गए पेंच के साथ नियंत्रणीय निकास सतहों के साथ बदल दिया गया था। बाद वाले ने ट्रैक कंट्रोल और टॉर्क पैरीइंग की। उड़ान परीक्षणों के दौरान, दो सौ तिहत्तर किमी / घंटा की गति को प्राप्त किया गया था। उसके बाद, तीन सौ सत्तर किमी / घंटा की गति लाने की शर्त के साथ सैन्य परियोजना के वित्तपोषण से जुड़ा। सेना के आग्रह पर, परियोजना में कई बदलाव किए गए, अर्थात् धड़ को लंबा करना और पेलोड को बढ़ाना, पुनः आकार देना, मुख्य और प्रोपेलर को बदलना आदि। हेलीकाप्टर ने सूचकांक सोलहН-XINUMXА या पाथफाइंडर II को अपनाया। कम वोल्टेज से पुशिंग तक इनपुट पावर को पुनर्वितरित करके महत्वपूर्ण त्वरण प्राप्त किया गया था। इस मोड में, विंग द्वारा मुख्य लिफ्ट बनाया गया था। परीक्षणों के परिणाम उत्साहजनक थे - गति एक किमी / घंटा, अच्छी हैंडलिंग और गतिशीलता, दोनों उच्च और कम उड़ान गति पर। भविष्य में, कंपनी ने विभिन्न टेक-ऑफ वेट के साथ कई संशोधनों को विकसित किया है, लेकिन उनमें से एक भी प्रोटोटाइप तक नहीं पहुंची है। अनुसंधान के परिणाम सेना द्वारा AH-तीन सौ इकसठ एम्पीयर Cheyenne बनाने के लिए लागू किए गए थे। Piasecki ने एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर तक की चुनी हुई योजना पर सैद्धांतिक काम जारी रखा। पूर्व विषय पर वापसी स्पष्ट हो गई जब नब्बे-ies के बीच में सेना AH-चौंसठ Apache और AH-एक वाट सुपरकोबरा के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए Piasecki का उपयोग करने में रुचि रखती है। एक बड़े पैमाने पर काम किया गया था, जिसमें एक पूर्ण पैमाने पर सिमुलेशन और जमीनी परीक्षणों की एक श्रृंखला शामिल थी। बेसलाइन हेलीकॉप्टर प्रसारण, नई नियंत्रण प्रणाली आदि में बदलाव की आवश्यकता थी। लेकिन परिणाम औसत बहुउद्देश्यीय UH-साठ ब्लैक हॉक को संशोधित करने का एक अनुबंध था। तीन के माध्यम से, प्रोटोटाइप ने X-उनचास एम्पीयर स्पीडहॉक इंडेक्स को अपनाया। सोलहH-एक से मुख्य अंतर पुशर स्क्रू के वायु प्रवाह की अवहेलना के लिए एक अलग डिज़ाइन था - उन्होंने अधिक कुशल, समग्र गोलार्ध का उपयोग किया जो कम गति और गति पर नब्बे डिग्री सेल्सियस पर खुलासा होता है, और क्षैतिज उड़ान के उच्च गति पर आवरण के समोच्च में फिट होता है, जिससे परीक्षण नहीं होता है। लोड और पूंछ उछाल के कंपन के स्रोत को हटाने। X-उनचास एम्पीयर ने एक-th फ्लाइट उनतीस जून दो हज़ार सात को साल का बनाया। दो हज़ार आठ में, कंपनी Piasecki विमान को प्रायोगिक X-उनचास एम्पीयर हेलीकॉप्टर के उड़ान परीक्षणों के दूसरे चरण के परिशोधन और संचालन के लिए धन प्राप्त हुआ। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उड़ान परीक्षणों के पहले चरण के पूरा होने के बाद, X-उनचास एम्पीयर स्पीडहॉक की भविष्य की संभावनाएं अस्पष्ट रहीं। इसके अलावा, प्रदान की गई फंडिंग सभी समस्याओं को हल नहीं करती है, क्योंकि, पियासेकी एयरक्राफ्ट के प्रतिनिधियों के अनुसार, यह पूरी तरह से कार्यक्रम को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए। इसी समय, कंपनी अमेरिकी रक्षा विभाग से सकारात्मक संकेत नोट करती है। X-उनचास एम्पीयर स्पीडहॉक उड़ान परीक्षण का पहला चरण पिछले साल जून में शुरू हुआ था। उनका लक्ष्य रचनात्मक समाधानों का मूल्यांकन करना था जो गति विशेषताओं में SH-साठF Seahawk के मूल संस्करण को पार करने के लिए प्रयोगात्मक हेलीकॉप्टर की अनुमति देने वाले थे। परीक्षणों के दौरान, X-उनचास एम्पीयर स्पीडहॉक ने SH-सैंतालीसF के साथ समान बिजली दरों पर साठ प्रतिशत की गति में वृद्धि का प्रदर्शन किया, साथ ही कंपन का आधा स्तर भी। वेक्टर जोर VTDP और पंखों के साथ एक ट्यूब में लगाए गए थ्रस्ट वेक्टरिंग स्क्रू के उपयोग के कारण हेलीकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं में सुधार किया गया था, जिससे लिफ्टिंग बल में वृद्धि हुई और मुख्य रोटर पर लोड कम हो गया। निकटतम विकास योजनाओं में X-उनचास एम्पीयर स्पीडहॉक पर तीसरे इंजन की स्थापना, साथ ही कंपन को कम करने के लिए रोटर हब पर वापस लेने योग्य लैंडिंग गियर और फेयरिंग शामिल हैं। यह योजना बनाई गई है कि धारावाहिक हेलीकॉप्टरों की क्रूज़िंग गति तीन सौ तिरासी किलोग्राममीटर प्रति घंटे से अधिक होगी, और अधिकतम - चार सौ पंद्रह किलोग्राममीटर प्रति घंटा, जबकि SH-साठF पर संबंधित आंकड़े दो सौ इकतालीस और दो सौ छप्पन किलोग्राममीटर प्रति घंटे के बराबर हैं। सात सौ किलोग्रामग्राम से अधिक भार अनलोड हो जाएगा, मुख्य रूप से तीसरे इंजन की स्थापना के कारण। इसी समय, हेलीकॉप्टर का पेलोड लगभग दो सौ तीस किलोग्रामग्राम बढ़ जाएगा, और कार्रवाई का मुकाबला त्रिज्या लगभग तीन गुना बढ़ जाएगा। LTH:
लखनऊ। लखनऊ नाईटराइडर्स ने आज रविवार को जानकीपुरम विस्तार सेक्टर 8 के मिनी स्टेडियम पर खेले जाने वाले जानकीपुरम टी-10 क्रिकेट प्रतियोगिता जीत ली। फाइनल मैच में थंडर्स इलेवन को 17 रनों से पराजित किया। विजेता टीम को ट्राफी और नगद पांच हजार रूपये और उपविजेता को रनरअप ट्राफी के साथ ढाई हजार रूपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। प्ले ग्राउण्ड सेक्टर आठ जानकीपुरम विस्तार में लखनऊ जनविकास महासभा के तत्वाधान में हुई प्रतियोगिता का समापन व पुरस्कार वितरण एस. आर. कॉलेज ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चैहान ने किया। इस मौके पर महासभा के संस्थापक संयोजक पंकज तिवारी, संरक्षक डॉ. अगम दयाल, अरविन्द कुमार मिश्रा, उपाध्यक्ष संतोष तिवारी, महामंत्री राम तिवारी, अजय कुमार यादव-मंत्री, राजीव कुमार गुप्ता-कोषाध्यक्ष, उमेष कुमार मिश्रा-विषेष सलाहकार, विजय कान्त श्रीवास्तव-सह संयोजक योग प्रकोष्ठ, अरविन्द कुमार शुक्ला-जनसम्पर्क प्रभारी, राजीव मेहरोत्रा-संयोजक आवासीय समिति प्रकोष्ठ, शकर अग्रवाल-सहसंयोजक युवा प्रकोष्ठ, अजय मौर्या, मनोज दुबे, पंकज मिश्रा आदर्श श्रीवास्तव दयाराम अभिषेक तिवारी, रोचक पटेल, अभिषेक त्रिपाठी डॉक्टर प्रणव मिश्रा सुशील गुप्ता संजीव खरे विपिन त्रिवेदी डी. सी. गुप्ता आदि मौजूद थे। फाइनल मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुये लखनऊ नाईटराइडर्स ने निर्धारित 10 ओवर में दो विकेट खोकर 129 रन बनाये जिसके जवाब में थंडर्स इलेवन पूरे ओवर का सामना करने के बाद तीन विकेट खोकर 112 रन ही बना सका। विजेता टीम के हीरो रहे सनी ने बेहतरी बल्लेबाजी करते हुये 56 रन बनाये जबकि देवेष ने 28 रन बनाए। जवाब में थंडर्स इलेवन की ओर से मोनी ने 42 और अभिषेक ने 25 रन बनाए।
लखनऊ। लखनऊ नाईटराइडर्स ने आज रविवार को जानकीपुरम विस्तार सेक्टर आठ के मिनी स्टेडियम पर खेले जाने वाले जानकीपुरम टी-दस क्रिकेट प्रतियोगिता जीत ली। फाइनल मैच में थंडर्स इलेवन को सत्रह रनों से पराजित किया। विजेता टीम को ट्राफी और नगद पांच हजार रूपये और उपविजेता को रनरअप ट्राफी के साथ ढाई हजार रूपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। प्ले ग्राउण्ड सेक्टर आठ जानकीपुरम विस्तार में लखनऊ जनविकास महासभा के तत्वाधान में हुई प्रतियोगिता का समापन व पुरस्कार वितरण एस. आर. कॉलेज ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चैहान ने किया। इस मौके पर महासभा के संस्थापक संयोजक पंकज तिवारी, संरक्षक डॉ. अगम दयाल, अरविन्द कुमार मिश्रा, उपाध्यक्ष संतोष तिवारी, महामंत्री राम तिवारी, अजय कुमार यादव-मंत्री, राजीव कुमार गुप्ता-कोषाध्यक्ष, उमेष कुमार मिश्रा-विषेष सलाहकार, विजय कान्त श्रीवास्तव-सह संयोजक योग प्रकोष्ठ, अरविन्द कुमार शुक्ला-जनसम्पर्क प्रभारी, राजीव मेहरोत्रा-संयोजक आवासीय समिति प्रकोष्ठ, शकर अग्रवाल-सहसंयोजक युवा प्रकोष्ठ, अजय मौर्या, मनोज दुबे, पंकज मिश्रा आदर्श श्रीवास्तव दयाराम अभिषेक तिवारी, रोचक पटेल, अभिषेक त्रिपाठी डॉक्टर प्रणव मिश्रा सुशील गुप्ता संजीव खरे विपिन त्रिवेदी डी. सी. गुप्ता आदि मौजूद थे। फाइनल मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुये लखनऊ नाईटराइडर्स ने निर्धारित दस ओवर में दो विकेट खोकर एक सौ उनतीस रन बनाये जिसके जवाब में थंडर्स इलेवन पूरे ओवर का सामना करने के बाद तीन विकेट खोकर एक सौ बारह रन ही बना सका। विजेता टीम के हीरो रहे सनी ने बेहतरी बल्लेबाजी करते हुये छप्पन रन बनाये जबकि देवेष ने अट्ठाईस रन बनाए। जवाब में थंडर्स इलेवन की ओर से मोनी ने बयालीस और अभिषेक ने पच्चीस रन बनाए।
सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड (Sidhu Moose Wala Murder) में महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुणे पुलिस (Pune Police) ने इस मामले में फरार आरोपी संतोष जाधव (Santosh Jadhav) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्याकांड के दो आरोपियों संतोष जाधव (Santosh Jadhav) और नवनाथ सूर्यवंशी को गिरफ्तार कर लिया है। पुणे की ग्रामीण पुलिस ने संतोष जाधव को गुजरात से गिरफ्तार किया। इसे रविवार रात मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। साथ ही 20 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। हत्या मामले में गिरफ्तार सौरभ महाकाल ने जाधव के बारे में बताया था जिसके बाद ये गिरफ्तारी हुई है। पहले बताया जा रहा था कि जाधव नेपाल भाग चुका है।
सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुणे पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपी संतोष जाधव को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्याकांड के दो आरोपियों संतोष जाधव और नवनाथ सूर्यवंशी को गिरफ्तार कर लिया है। पुणे की ग्रामीण पुलिस ने संतोष जाधव को गुजरात से गिरफ्तार किया। इसे रविवार रात मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। साथ ही बीस जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। हत्या मामले में गिरफ्तार सौरभ महाकाल ने जाधव के बारे में बताया था जिसके बाद ये गिरफ्तारी हुई है। पहले बताया जा रहा था कि जाधव नेपाल भाग चुका है।