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paytm के शेयर पिछले एक महीने में 30 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं.
Paytm Share में भारी गिरावट के बाद भी इन कंपनियों ने बड़ी संख्या में खरीदे स्टॉक्सPaytm Share Price Today: आईपीओ की लिस्टिंग के दौरान जिन निवेशकों को पेटीएम के शेयर मिले हैं, भले भी वे अब पछता रहे होंगे लेकिन कुछ ऐसी कंपनियों भी हैं जो पेटीएम में गिरावट के बाद जोरदार खरीदारी करने में लगे हुए हैं. कई सबसे बड़े निवेशकों ने भारतीय फिनटेक के शेयरों में 41 फीसदी की गिरावट के बाद भी स्टॉक खरीदे हैं.
BlackRock और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड IPO में वो एंकर इनवेस्टर्स में से थे, जिन्होंने बीते दो दिनों में पेटीएम के ज्यादा शेयर खरीदे हैं.
बता दें कि 18 नवंबर को पेटीएम का आईपीओ 1950 रुपये पर लिस्ट हुआ था. जबकि इसका इश्यू प्राइस 2,150 रुपए था. इसके बाद इसमें लगातार गिरावट बनी रही. पहले दिन यह स्टॉक बड़ी गिरावट के साथ 1650 रुपये पर पहुंच गया. 22 नवंबर को यह स्टॉक सबसे नीचले स्तर 1281 रुपये तक गिर गया. हालांकि इस बड़ी गिरावट के बाद पेटीएम के शेयर ने ऊपर का रुख किया और वर्तमान में यह स्टॉक 1800 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है.
एंकर इनवेस्टर्स इस स्टॉक की लगातार खरीदारी कर रहे हैं. बताया गया है कि BlackRock और कनाडा पेंशन प्लान (CPPIB) ने कंपनी के 41 परसेंट शेयर खरीदे हैं. हालांकि दोनों ही कंपनियों ने इस बारे में अपनी तरफ से कोई जानकारी नहीं दी है.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक BlackRock और CPPIB ने इस हफ्ते पेटीएम के कितने शेयर खरीदे, इस बारे में तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस पर टिप्पणी करने से इन्कार दिया. पेटीएम के शेयरहोल्डर्स में वॉरेन बफे (Warren Buffett) की Berkshire Hathaway Inc. और मासायोशी सन (Masayoshi Son) SoftBank Group Corp. शामिल हैं.
जानकार बताते हैं कि अगर ब्लैकरॉक जैसी कंपनी paytm में निवेश करती है तो इससे निवेशकों की चिंता कम होगी.
Paytm ने विदेशी निवेशकों से 17 अरब डॉलर फंड जुटाए थे. लेकिन लोकल निवेशकों के बीच अपनी पैठ नहीं बना पाया और शेयरों की लिस्टिंग कमजोर हुई.
Paytm के शेयर होल्डर्स में वॉरेन बफेट के बर्कशायर हैथवे और मासायोशी सोन के सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प जैसे बड़े नाम वाले निवेशक शामिल हैं.
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| paytm के शेयर पिछले एक महीने में तीस फीसदी से ज्यादा गिरे हैं. Paytm Share में भारी गिरावट के बाद भी इन कंपनियों ने बड़ी संख्या में खरीदे स्टॉक्सPaytm Share Price Today: आईपीओ की लिस्टिंग के दौरान जिन निवेशकों को पेटीएम के शेयर मिले हैं, भले भी वे अब पछता रहे होंगे लेकिन कुछ ऐसी कंपनियों भी हैं जो पेटीएम में गिरावट के बाद जोरदार खरीदारी करने में लगे हुए हैं. कई सबसे बड़े निवेशकों ने भारतीय फिनटेक के शेयरों में इकतालीस फीसदी की गिरावट के बाद भी स्टॉक खरीदे हैं. BlackRock और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड IPO में वो एंकर इनवेस्टर्स में से थे, जिन्होंने बीते दो दिनों में पेटीएम के ज्यादा शेयर खरीदे हैं. बता दें कि अट्ठारह नवंबर को पेटीएम का आईपीओ एक हज़ार नौ सौ पचास रुपयापये पर लिस्ट हुआ था. जबकि इसका इश्यू प्राइस दो,एक सौ पचास रुपयापए था. इसके बाद इसमें लगातार गिरावट बनी रही. पहले दिन यह स्टॉक बड़ी गिरावट के साथ एक हज़ार छः सौ पचास रुपयापये पर पहुंच गया. बाईस नवंबर को यह स्टॉक सबसे नीचले स्तर एक हज़ार दो सौ इक्यासी रुपयापये तक गिर गया. हालांकि इस बड़ी गिरावट के बाद पेटीएम के शेयर ने ऊपर का रुख किया और वर्तमान में यह स्टॉक एक हज़ार आठ सौ रुपयापये के आसपास ट्रेड कर रहा है. एंकर इनवेस्टर्स इस स्टॉक की लगातार खरीदारी कर रहे हैं. बताया गया है कि BlackRock और कनाडा पेंशन प्लान ने कंपनी के इकतालीस परसेंट शेयर खरीदे हैं. हालांकि दोनों ही कंपनियों ने इस बारे में अपनी तरफ से कोई जानकारी नहीं दी है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक BlackRock और CPPIB ने इस हफ्ते पेटीएम के कितने शेयर खरीदे, इस बारे में तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस पर टिप्पणी करने से इन्कार दिया. पेटीएम के शेयरहोल्डर्स में वॉरेन बफे की Berkshire Hathaway Inc. और मासायोशी सन SoftBank Group Corp. शामिल हैं. जानकार बताते हैं कि अगर ब्लैकरॉक जैसी कंपनी paytm में निवेश करती है तो इससे निवेशकों की चिंता कम होगी. Paytm ने विदेशी निवेशकों से सत्रह अरब डॉलर फंड जुटाए थे. लेकिन लोकल निवेशकों के बीच अपनी पैठ नहीं बना पाया और शेयरों की लिस्टिंग कमजोर हुई. Paytm के शेयर होल्डर्स में वॉरेन बफेट के बर्कशायर हैथवे और मासायोशी सोन के सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प जैसे बड़े नाम वाले निवेशक शामिल हैं. . |
भारतीय भोजन अपनी सुगंध और स्वाद प्रोफाइल के लिए प्रसिद्ध विश्वव्यापी है. स्वाद के अलावा, आयुर्वेद में बताया गया है कि भारतीय भोजन हमारे शरीर के लिए पर्याप्त ईंधन है. यह इसलिए है क्योंकि भोजन अधिकतर पौधे आधारित होता है और इसमें विभिन्न प्रकार के फल, दालें, फल आदि शामिल हैं.
फिर भी भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी है. 40% से अधिक भारतीय मोटे होते हैं और सामान्य बीएमआई वाले लगभग 43% लोग चयापचयी रूप से अस्वस्थ हैं. कोविड-19 के प्रेरित लॉकडाउन के बाद भारतीयों में से 70% से अधिक लोगों को अपना स्वास्थ्य और खराब महसूस हुआ.
ये नंबर भारतीयों के वर्तमान खाने के पैटर्न पर आधारित हैं. भारतीयों द्वारा प्राप्त औसत 70% कैलोरी में सफेद चावल, ब्रेड और स्टार्ची खाद्य पदार्थों जैसे खराब गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का सेवन होता है. जहां चीनी के 5 चम्मच की सिफारिश करते हैं, भारतीयों के पास एक दिन में औसतन 15 चम्मच चीनी होती है.
स्वस्थ और स्वादिष्ट खाने के बीच के अंतर को कम करने के लिए, बचपन के दोस्तों अपूर्व गुरुराज और सुरेश रेड्डी ने 2020 में Foodio. fit लॉन्च किया. दोनों ही भोजन करना चाहते थे जो मस्तिष्क (स्वस्थ) और हृदय (स्वादिष्ट) दोनों के लिए पर्याप्त हो.
अपूर्व के पास खाद्य विज्ञान और पोषण में मास्टर डिग्री है. उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले ब्रिटेनिया, अपोलो, एचयूएल, ग्रो फिट, जियो नेचुरल और अन्य कंपनियों के साथ काम किया था. दूसरी ओर सुरेश Foodio. fit वाला एक सीरियल उद्यमी है 5th वेंचर होने के कारण.
स्टार्टअप भारत का पहला हेल्दी पैकेज्ड फूड ब्रांड होने का दावा करता है जो स्वस्थ सब्जियों से बने चिप्स, बीज-आधारित आटा और प्राकृतिक पेय की सेवा करता है. उनके ऑफर में कम कार्ब, मल्टीग्रेन, हाई प्रोटीन, कीटो और अन्य शामिल हैं. बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप स्थानीय किसानों से अपनी सामग्री का स्रोत करता है और अंतिम उत्पाद पैकेज होने से पहले कई गुणवत्ता परीक्षण करता है.
शुरुआत के एक वर्ष के भीतर, उन्होंने 5000 ग्राहकों को डिलीवर किया था और उन्होंने 1 लाख+ ऑर्डर प्राप्त किए हैं. वे Amazon, Swiggy, Bigbasket आदि जैसे मार्केटप्लेस पर मौजूद हैं. बूटस्ट्रैप किए गए उद्यम में 50 से अधिक वितरक हैं जहां से इसकी राजस्व का 60% आता है. बाकी 40% उनके बी2सी स्पेस से आता है.
भारत के अलावा, वे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके में सेवा करते हैं. वे अफ्रीका, न्यूजीलैंड, दुबई और सिंगापुर में विस्तार करना चाहते हैं. वे 1000 नए रिटेल स्टोर में खुद को स्थापित करने की योजना बनाते हैं. फॉर्च्यून बिज़नेस इनसाइट रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल हेल्थ स्नैक मार्केट 2027 तक $108. 11 बिलियन तक पहुंचेगा.
| भारतीय भोजन अपनी सुगंध और स्वाद प्रोफाइल के लिए प्रसिद्ध विश्वव्यापी है. स्वाद के अलावा, आयुर्वेद में बताया गया है कि भारतीय भोजन हमारे शरीर के लिए पर्याप्त ईंधन है. यह इसलिए है क्योंकि भोजन अधिकतर पौधे आधारित होता है और इसमें विभिन्न प्रकार के फल, दालें, फल आदि शामिल हैं. फिर भी भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी है. चालीस% से अधिक भारतीय मोटे होते हैं और सामान्य बीएमआई वाले लगभग तैंतालीस% लोग चयापचयी रूप से अस्वस्थ हैं. कोविड-उन्नीस के प्रेरित लॉकडाउन के बाद भारतीयों में से सत्तर% से अधिक लोगों को अपना स्वास्थ्य और खराब महसूस हुआ. ये नंबर भारतीयों के वर्तमान खाने के पैटर्न पर आधारित हैं. भारतीयों द्वारा प्राप्त औसत सत्तर% कैलोरी में सफेद चावल, ब्रेड और स्टार्ची खाद्य पदार्थों जैसे खराब गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का सेवन होता है. जहां चीनी के पाँच चम्मच की सिफारिश करते हैं, भारतीयों के पास एक दिन में औसतन पंद्रह चम्मच चीनी होती है. स्वस्थ और स्वादिष्ट खाने के बीच के अंतर को कम करने के लिए, बचपन के दोस्तों अपूर्व गुरुराज और सुरेश रेड्डी ने दो हज़ार बीस में Foodio. fit लॉन्च किया. दोनों ही भोजन करना चाहते थे जो मस्तिष्क और हृदय दोनों के लिए पर्याप्त हो. अपूर्व के पास खाद्य विज्ञान और पोषण में मास्टर डिग्री है. उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले ब्रिटेनिया, अपोलो, एचयूएल, ग्रो फिट, जियो नेचुरल और अन्य कंपनियों के साथ काम किया था. दूसरी ओर सुरेश Foodio. fit वाला एक सीरियल उद्यमी है पाँचth वेंचर होने के कारण. स्टार्टअप भारत का पहला हेल्दी पैकेज्ड फूड ब्रांड होने का दावा करता है जो स्वस्थ सब्जियों से बने चिप्स, बीज-आधारित आटा और प्राकृतिक पेय की सेवा करता है. उनके ऑफर में कम कार्ब, मल्टीग्रेन, हाई प्रोटीन, कीटो और अन्य शामिल हैं. बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप स्थानीय किसानों से अपनी सामग्री का स्रोत करता है और अंतिम उत्पाद पैकेज होने से पहले कई गुणवत्ता परीक्षण करता है. शुरुआत के एक वर्ष के भीतर, उन्होंने पाँच हज़ार ग्राहकों को डिलीवर किया था और उन्होंने एक लाख+ ऑर्डर प्राप्त किए हैं. वे Amazon, Swiggy, Bigbasket आदि जैसे मार्केटप्लेस पर मौजूद हैं. बूटस्ट्रैप किए गए उद्यम में पचास से अधिक वितरक हैं जहां से इसकी राजस्व का साठ% आता है. बाकी चालीस% उनके बीदोसी स्पेस से आता है. भारत के अलावा, वे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके में सेवा करते हैं. वे अफ्रीका, न्यूजीलैंड, दुबई और सिंगापुर में विस्तार करना चाहते हैं. वे एक हज़ार नए रिटेल स्टोर में खुद को स्थापित करने की योजना बनाते हैं. फॉर्च्यून बिज़नेस इनसाइट रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल हेल्थ स्नैक मार्केट दो हज़ार सत्ताईस तक एक सौ आठ डॉलर. ग्यारह बिलियन तक पहुंचेगा. |
नरसिंहपुर जिले में नर्सेज एसोसिएशन मध्यप्रदेश के आह्वान पर चिकित्सालय परिसर में नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर कामबंद हड़ताल प्रारंभ कर दी। इसमें मंगलवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने जिला अस्पताल परिसर में धरना दे रहे स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग स्टाफ से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना और धरने को समर्थन दिया।
नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल की जरूरी व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन कई वर्षों से ज्ञापन देकर प्रत्यक्ष चर्चा कर मांगों के निराकरण के संबंध में निरंतर शासन विभागों से अनुरोध कर रहा है कि प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग की मांगों का निराकरण किया जाए।
मांगों का निराकरण आज तक नहीं किया गया। इससे प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग में असंतोष व्याप्त है, नर्से चरणबद्ध आंदोलन करने मजबूर है। मध्यप्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की मांगों में अन्य प्रदेशों की भांति सेकेंड ग्रेड-पे दिया जाए। नर्सिंग संवर्ग के वेतन विसंगति को दूर किया जाए।
जिला अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हमेशा से नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। खास तौर पर कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डाल कर मरीजों को सेवाएं प्रदान की। शासन को आपकी मांगों को अविलंब पूरा किया जाना चाहिए।
राजपूत ने उनकी मांगों को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंचाया जाएगा, ताकि कांग्रेस सरकार बनने पर नर्सिंग संवर्ग को अधिक से अधिक सुविधाएं दी जा सकें। डॉ. संजीव चांदोरकर ने नर्सिंग स्टॉफ की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव उनके साथ है। इस मौके पर कांग्रेस नेता संजीव चांदोरकर, जिला उपाध्यक्ष नीलू राय, आशीष राजवैद्य, मनीष साहू, जिला महामंत्री अस्सु नेमा, प्रतीक त्रिवेदी मौजूद रहे।
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| नरसिंहपुर जिले में नर्सेज एसोसिएशन मध्यप्रदेश के आह्वान पर चिकित्सालय परिसर में नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर कामबंद हड़ताल प्रारंभ कर दी। इसमें मंगलवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने जिला अस्पताल परिसर में धरना दे रहे स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग स्टाफ से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना और धरने को समर्थन दिया। नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल की जरूरी व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन कई वर्षों से ज्ञापन देकर प्रत्यक्ष चर्चा कर मांगों के निराकरण के संबंध में निरंतर शासन विभागों से अनुरोध कर रहा है कि प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग की मांगों का निराकरण किया जाए। मांगों का निराकरण आज तक नहीं किया गया। इससे प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग में असंतोष व्याप्त है, नर्से चरणबद्ध आंदोलन करने मजबूर है। मध्यप्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन की मांगों में अन्य प्रदेशों की भांति सेकेंड ग्रेड-पे दिया जाए। नर्सिंग संवर्ग के वेतन विसंगति को दूर किया जाए। जिला अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में हमेशा से नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। खास तौर पर कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डाल कर मरीजों को सेवाएं प्रदान की। शासन को आपकी मांगों को अविलंब पूरा किया जाना चाहिए। राजपूत ने उनकी मांगों को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंचाया जाएगा, ताकि कांग्रेस सरकार बनने पर नर्सिंग संवर्ग को अधिक से अधिक सुविधाएं दी जा सकें। डॉ. संजीव चांदोरकर ने नर्सिंग स्टॉफ की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव उनके साथ है। इस मौके पर कांग्रेस नेता संजीव चांदोरकर, जिला उपाध्यक्ष नीलू राय, आशीष राजवैद्य, मनीष साहू, जिला महामंत्री अस्सु नेमा, प्रतीक त्रिवेदी मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई।
यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई। किसान की मौत के मामले में अंतिम संस्कार की नौबत आई तो परिजन अड़ गये हैं कि तहसील के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने मुकदमा नामजद नहीं किया तो परिजनो ने पुलिस चौकी घेरकर बरेली-बदायूं हाइवे पर जाम लगा दिया है। बतादें कि एक दिन पहले तहसील परिसर में बुजुर्ग ने सल्फास खाकर जान दे दी थी।
शुक्रवार की दोपहर में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र क गांव नगला शर्की बुजुर्ग किसान रूम सिंह का शव पहुंच गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां हुईं, तो परिजन जवाहरपुरी पुलिस चौकी पर पहुंचे और नामजद मुकदमा दर्ज करने की मांग की। परिजनों ने नायब तहसीलदार, लेखपाल सहित आधा दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। जिसके पर प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिये और अज्ञात में मुकदमा दर्ज करने का सिटी मजिस्ट्रेट बृजेश कुमार व सीओ सिटी आलोक मिश्र, एसडीएम सदर एसपी वर्मा करने कहा।
वहीं पूर्वमंत्री आबिद रजा भी पहुंच गये परिजनों की बात को सुना है। मगर मुकदमा नामजद नहीं हुआ तो जवाहपुरी पुलिस चौकी को घेर लिया और उसके सामने मुरादाबाद-फर्रूखाबाद हाईवे, बरेली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया है। दूर-दूर तक जाम लगा है और राहगीर परेशान हैं। वहीं भारी मात्रा में पुलिस फोर्स पहुंच गया है।
| यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई। यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई। किसान की मौत के मामले में अंतिम संस्कार की नौबत आई तो परिजन अड़ गये हैं कि तहसील के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने मुकदमा नामजद नहीं किया तो परिजनो ने पुलिस चौकी घेरकर बरेली-बदायूं हाइवे पर जाम लगा दिया है। बतादें कि एक दिन पहले तहसील परिसर में बुजुर्ग ने सल्फास खाकर जान दे दी थी। शुक्रवार की दोपहर में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र क गांव नगला शर्की बुजुर्ग किसान रूम सिंह का शव पहुंच गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां हुईं, तो परिजन जवाहरपुरी पुलिस चौकी पर पहुंचे और नामजद मुकदमा दर्ज करने की मांग की। परिजनों ने नायब तहसीलदार, लेखपाल सहित आधा दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। जिसके पर प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिये और अज्ञात में मुकदमा दर्ज करने का सिटी मजिस्ट्रेट बृजेश कुमार व सीओ सिटी आलोक मिश्र, एसडीएम सदर एसपी वर्मा करने कहा। वहीं पूर्वमंत्री आबिद रजा भी पहुंच गये परिजनों की बात को सुना है। मगर मुकदमा नामजद नहीं हुआ तो जवाहपुरी पुलिस चौकी को घेर लिया और उसके सामने मुरादाबाद-फर्रूखाबाद हाईवे, बरेली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया है। दूर-दूर तक जाम लगा है और राहगीर परेशान हैं। वहीं भारी मात्रा में पुलिस फोर्स पहुंच गया है। |
लिपेट्सक क्षेत्र में अपनी अवकाश कैसे बिताना है? मनोरंजन केंद्रः कौन से एक को चुनना है?
गर्मी के दृष्टिकोण के साथ, कई लोगों की तलाश शुरू होती हैलिपेटस्क क्षेत्र में मनोरंजन के लिए उपयुक्त जगहें। हर कोई प्रकृति में एक आरामदायक कोने चुनना चाहता है, जहां आप एक दिन या कुछ हफ्तों के लिए जा सकते हैं। आमतौर पर पसंद ज़ेडोंस्क, लिपेटस्क क्षेत्र में आराम पर पड़ता है, यहां पर्यटक केंद्रों की सबसे बड़ी संख्या है। यह वह क्षेत्र है जो सुरम्य जंगलों, ट्रैक्ट्स, रेवेन्स और डॉन भूमि की प्रचुरता के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय मनोरंजन केंद्र न केवल प्राचीन प्रकृति और इसकी स्वच्छ हवा का आनंद लेने के लिए, बल्कि स्वच्छ पानी में दिल से स्नान करने की पेशकश करते हैं।
मनोरंजन केंद्र "चािका"
यदि आप एक आरामदायक और किफायती छुट्टी की तलाश में हैंलिपेटस्क क्षेत्र, आधार "सीगल" एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है। यह नदी के तट पर स्थित है। एक मिश्रित जंगल से घिरा डॉन। दो या तीन स्थानों के लिए आरामदायक कुटीर में बसने का प्रस्ताव है। आधार के क्षेत्र में बच्चों और खेल के मैदान हैं। चलने वाले पथ आपको कैफे-बार में ले जा सकते हैं। यहां मनोरंजन के बीच पेंटबॉल और बिलियर्ड्स भी हैं।
"ग्रीन वैली"
"ग्रीन वैली" एक और अद्भुत विकल्प हैलिपेटस्क क्षेत्र में अपनी छुट्टियां कैसे व्यतीत करें। मनोरंजन केंद्र 7 हेक्टेयर को कवर करता है और सुंदर और सुरम्य प्रकृति से घिरा हुआ है। वह गार्ड में है, इसलिए वह हमेशा अच्छी तरह तैयार होती है। साल के किसी भी समय यहां आने की सिफारिश की जाती है। आपको आरामदायक कमरे में छात्रावास में समायोजित किया जा सकता है। इसके अलावा, कई कमरे और दो कॉटेज लक्ज़री क्लास के लिए छोटे घर हैं। मनोरंजन के लिए खेल मैदान हैं। टेनिस, बिलियर्ड्स, शूटिंग रेंज, सौना, डाइनिंग रूम, बीच, डांस फ्लोर और अन्य मनोरंजन हैं।
"ब्लू लाइट"
यह परिसर ज़ेडोंस्क से 3 किमी दूर स्थित हैनदी के तट। डॉन। यह पूरे वर्ष दौर में मेहमानों का स्वागत करता है और साथ ही 280 मेहमानों को समायोजित करता है। एकल लोग और परिवार कमरे में रह सकते हैंः एक से पांच पर्यटकों तक। यहां ऐसी इमारतें हैं जिनमें ठंड के मौसम, साथ ही गर्मी के घरों में भी अच्छी तरह से रहना है।
मनोरंजन केंद्र में एक अच्छा बुनियादी ढांचा है। कई खेल मैदान हैं, एक बच्चों के खेल का मैदान, एक बिलियर्ड कमरा, और सर्दियों में एक स्की रन है। इसकी लंबाई दो किलोमीटर तक पहुंच जाती है। नदी के किनारे पर छाता, कैनोपी, catamarans, नौकाओं, नौकाओं के साथ एक समुद्र तट है। उपलब्ध और मछली पकड़ना। "ब्लू लाइट" में लिपेटस्क क्षेत्र में आराम घोड़े और लंबी पैदल यात्रा से विविधतापूर्ण हो सकता है। एक सौना और सौना है। आधार के क्षेत्र में 80 आगंतुकों के लिए कैंटीन और एक आरामदायक कैफे है, जो 120 सीटों के लिए डिज़ाइन किया गया है। आधार के भीतर बारबेक्यू और बारबेक्यू सुविधाओं के लिए आरक्षित क्षेत्र स्थापित हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यहां गठबंधन करना संभव हैकॉर्पोरेट घटनाओं और अवकाश। लिपेटस्क क्षेत्र में, ब्लू लाइट बेस सम्मेलनों, संगोष्ठियों, व्यापार मीटिंगों के मामले में सबसे लोकप्रिय है। एक सम्मेलन कक्ष है, जहां 100 लोगों तक समायोजित किया जा सकता है। यह जगह एयर कंडीशनिंग, नए उपकरण से लैस है। इसके अलावा, एक कंप्यूटर प्रौद्योगिकी है। एक कनेक्शन और वाई-फाई है। चूंकि हॉस्टल में 120 सीटें और एक अलग डाइनिंग रूम वाला विशाल बार है, कई लोग यहां भोज और अन्य कार्यक्रमों को व्यवस्थित करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, विवाह, कॉर्पोरेट मीटिंग्स, सालगिरह हैं। इसके अलावा, आधार के प्रशासन से एक मनोरंजन कार्यक्रम का आदेश देने का अवसर है।
"चुप बहती है डॉन"
आधार घरों में से एक में आवास प्रदान करता है,एक बार का निर्माण प्रत्येक कमरे में एक बाथरूम, टीवी, रेफ्रिजरेटर, गर्म पानी है। शिविर स्थल का क्षेत्र आरामदायक आराम के लिए सुसज्जित है। एक सौना, तालाब, मछली पकड़ना उपलब्ध है, बच्चों के लिए एक खेल का मैदान, एक कैफे है। एक खेल उपकरण किराए पर लेना संभव है। आप साल के किसी भी समय आराम करने के लिए आ सकते हैं। एक अतिरिक्त सुखद बिंदु यह है कि कमरे में और कैफे में फर्नीचर प्राकृतिक लकड़ी से एक शैली में बनाया जाता है - खासकर "रूसी मनोर" के लिए।
| लिपेट्सक क्षेत्र में अपनी अवकाश कैसे बिताना है? मनोरंजन केंद्रः कौन से एक को चुनना है? गर्मी के दृष्टिकोण के साथ, कई लोगों की तलाश शुरू होती हैलिपेटस्क क्षेत्र में मनोरंजन के लिए उपयुक्त जगहें। हर कोई प्रकृति में एक आरामदायक कोने चुनना चाहता है, जहां आप एक दिन या कुछ हफ्तों के लिए जा सकते हैं। आमतौर पर पसंद ज़ेडोंस्क, लिपेटस्क क्षेत्र में आराम पर पड़ता है, यहां पर्यटक केंद्रों की सबसे बड़ी संख्या है। यह वह क्षेत्र है जो सुरम्य जंगलों, ट्रैक्ट्स, रेवेन्स और डॉन भूमि की प्रचुरता के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय मनोरंजन केंद्र न केवल प्राचीन प्रकृति और इसकी स्वच्छ हवा का आनंद लेने के लिए, बल्कि स्वच्छ पानी में दिल से स्नान करने की पेशकश करते हैं। मनोरंजन केंद्र "चािका" यदि आप एक आरामदायक और किफायती छुट्टी की तलाश में हैंलिपेटस्क क्षेत्र, आधार "सीगल" एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है। यह नदी के तट पर स्थित है। एक मिश्रित जंगल से घिरा डॉन। दो या तीन स्थानों के लिए आरामदायक कुटीर में बसने का प्रस्ताव है। आधार के क्षेत्र में बच्चों और खेल के मैदान हैं। चलने वाले पथ आपको कैफे-बार में ले जा सकते हैं। यहां मनोरंजन के बीच पेंटबॉल और बिलियर्ड्स भी हैं। "ग्रीन वैली" "ग्रीन वैली" एक और अद्भुत विकल्प हैलिपेटस्क क्षेत्र में अपनी छुट्टियां कैसे व्यतीत करें। मनोरंजन केंद्र सात हेक्टेयर को कवर करता है और सुंदर और सुरम्य प्रकृति से घिरा हुआ है। वह गार्ड में है, इसलिए वह हमेशा अच्छी तरह तैयार होती है। साल के किसी भी समय यहां आने की सिफारिश की जाती है। आपको आरामदायक कमरे में छात्रावास में समायोजित किया जा सकता है। इसके अलावा, कई कमरे और दो कॉटेज लक्ज़री क्लास के लिए छोटे घर हैं। मनोरंजन के लिए खेल मैदान हैं। टेनिस, बिलियर्ड्स, शूटिंग रेंज, सौना, डाइनिंग रूम, बीच, डांस फ्लोर और अन्य मनोरंजन हैं। "ब्लू लाइट" यह परिसर ज़ेडोंस्क से तीन किमी दूर स्थित हैनदी के तट। डॉन। यह पूरे वर्ष दौर में मेहमानों का स्वागत करता है और साथ ही दो सौ अस्सी मेहमानों को समायोजित करता है। एकल लोग और परिवार कमरे में रह सकते हैंः एक से पांच पर्यटकों तक। यहां ऐसी इमारतें हैं जिनमें ठंड के मौसम, साथ ही गर्मी के घरों में भी अच्छी तरह से रहना है। मनोरंजन केंद्र में एक अच्छा बुनियादी ढांचा है। कई खेल मैदान हैं, एक बच्चों के खेल का मैदान, एक बिलियर्ड कमरा, और सर्दियों में एक स्की रन है। इसकी लंबाई दो किलोमीटर तक पहुंच जाती है। नदी के किनारे पर छाता, कैनोपी, catamarans, नौकाओं, नौकाओं के साथ एक समुद्र तट है। उपलब्ध और मछली पकड़ना। "ब्लू लाइट" में लिपेटस्क क्षेत्र में आराम घोड़े और लंबी पैदल यात्रा से विविधतापूर्ण हो सकता है। एक सौना और सौना है। आधार के क्षेत्र में अस्सी आगंतुकों के लिए कैंटीन और एक आरामदायक कैफे है, जो एक सौ बीस सीटों के लिए डिज़ाइन किया गया है। आधार के भीतर बारबेक्यू और बारबेक्यू सुविधाओं के लिए आरक्षित क्षेत्र स्थापित हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यहां गठबंधन करना संभव हैकॉर्पोरेट घटनाओं और अवकाश। लिपेटस्क क्षेत्र में, ब्लू लाइट बेस सम्मेलनों, संगोष्ठियों, व्यापार मीटिंगों के मामले में सबसे लोकप्रिय है। एक सम्मेलन कक्ष है, जहां एक सौ लोगों तक समायोजित किया जा सकता है। यह जगह एयर कंडीशनिंग, नए उपकरण से लैस है। इसके अलावा, एक कंप्यूटर प्रौद्योगिकी है। एक कनेक्शन और वाई-फाई है। चूंकि हॉस्टल में एक सौ बीस सीटें और एक अलग डाइनिंग रूम वाला विशाल बार है, कई लोग यहां भोज और अन्य कार्यक्रमों को व्यवस्थित करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, विवाह, कॉर्पोरेट मीटिंग्स, सालगिरह हैं। इसके अलावा, आधार के प्रशासन से एक मनोरंजन कार्यक्रम का आदेश देने का अवसर है। "चुप बहती है डॉन" आधार घरों में से एक में आवास प्रदान करता है,एक बार का निर्माण प्रत्येक कमरे में एक बाथरूम, टीवी, रेफ्रिजरेटर, गर्म पानी है। शिविर स्थल का क्षेत्र आरामदायक आराम के लिए सुसज्जित है। एक सौना, तालाब, मछली पकड़ना उपलब्ध है, बच्चों के लिए एक खेल का मैदान, एक कैफे है। एक खेल उपकरण किराए पर लेना संभव है। आप साल के किसी भी समय आराम करने के लिए आ सकते हैं। एक अतिरिक्त सुखद बिंदु यह है कि कमरे में और कैफे में फर्नीचर प्राकृतिक लकड़ी से एक शैली में बनाया जाता है - खासकर "रूसी मनोर" के लिए। |
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Adarsh Vijay Mudgil, MD1कोजिक एसिड (kojic acid) के साथ मेलानिन (melanin) को कम करेंः कोजिक एसिड सभी तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं में मदद कर सकता है, जिसमें पिग्मेंटेशन (pigmentation) भी शामिल है। इस्तेमाल करने और अपनी त्वचा को हल्का करने के लिए इस इंग्रेडिएंट वाली एक क्रीम खरीद लाएँ।[१] X विश्वसनीय स्त्रोत Science Direct स्त्रोत (source) पर जायें ये प्रॉडक्ट प्रिस्क्रिप्शन के बिना उपलब्ध होने चाहिए।
- डर्मेटाइटिस (dermatitis) और त्वचा में इरिटेशन कोजिक एसिड के सबसे मुख्य साइड इफेक्ट हैं।
- अगर कोई भी इंग्रेडिएंट कैलोमेल (calomel), सिनाबारिस (cinnabaris), हाइड्रारगिरि ऑक्सीडम रूब्रम (hydrargyri oxydum rubrum), या क्विकसिल्वर (quicksilver) हैं, तो प्रॉडक्ट में मर्करी है।
- अगर उस पर ऐसा कोई वॉर्निंग साइन है, जो कहता है कि क्रीम का संपर्क चांदी, सोना, एल्युमिनियम और गहनों और एक्सेसरीज़ के साथ नहीं होना चाहिए, तो उसमें मर्करी है।
- अगर आपको कोई भी रिएक्शन हो रही है, तो आप इस क्रीम का इंतज़ार न करें।
- फिर चाहे आप एक कॉटन स्वेब भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन तब भी अच्छा होगा कि आप अपने हाथों को भी धो लें, कहीं गलती से आपको पता चले बिना लोशन आपके हाथ पर न लग गया हो।
- अगर प्रॉडक्ट पर और कोई दूसरे इन्सट्रक्शन दिए हैं, तो उन्हें फॉलो करें।
संभावित घरेलू उपचार (Potential Home Remedies)
ऑनलाइन आपको आपकी त्वचा को हल्का करने के लिए न जाने कितनी ही होम रेमेडीज या घरेलू उपचार मिल जाएंगे। लेकिन, इनमें से ज़्यादातर उपाय काम नहीं करेंगे। घर पर अगर आप कुछ कर सकते हैं, तो वो ये कि आप अपनी त्वचा को डार्क होने से रोकने के लिए अपने धूप के सामने जाने के टाइम को लिमिट करें। इसके अलावा, अपने डर्मेटॉलॉजिस्ट से बात करना भी करने योग्य सबसे अच्छा काम है।
- अगर इस समय के दौरान आपको बाहर जाना भी पड़े, तो ज्यादा से ज्यादा समय छाँव में बिताने की कोशिश करें।
{"smallUrl":"https:\/\/www1अपनी स्किन को लाइट करने के बारे में किसी डर्मेटॉलॉजिस्ट के पास जाएँः स्किन लाइटनिंग ट्रीटमेंट्स, जिनमें लेजर ट्रीटमेंट भी शामिल हैं, को डर्मेटॉलॉजिस्ट के ऑफिस में कराया जाता है। एक अपोइंटमेंट लें और आपके लिए एक सही प्रोसीजर के बारे में बात करें।
- डर्मेटॉलॉजिस्ट पहले एक हल्के स्किन टेस्ट को करके ये सुनिश्चित करेंगे कि आप कहीं लेजर्स को लेकर सेंसिटिव तो नहीं। वो आपकी त्वचा के एक छोटे हिस्से को लेजर के सामने लाएँगे और फिर कुछ हफ्ते इंतज़ार करके देखेंगे कि इससे आपको कोई रिएक्शन तो नहीं हो रही है। अगर नहीं, तो ये ट्रीटमेंट आपके लिए सेफ होगा।
- आप चाहें तो असहूलियत को कम करने में मदद के लिए दर्द निवारक (pain relievers) भी ले सकते हैं।
- बाद की देखभाल के लिए हमेशा आपके डर्मेटॉलॉजिस्ट के द्वारा दिए खास निर्देशों का पालन करें।
अगर आप अपनी त्वचा को हल्का करने के प्राकृतिक तरीकों की तलाश में हैं, तो ऐसे आप अकेले व्यक्ति नहीं हैं जो ऐसा कर रहे हैं। लेकिन ऐसा कोई घरेलू उपचार नहीं है, जिसे गोरी त्वचा पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। अच्छी बात ये है कि अगर आप अपनी त्वचा को हल्का करना चाहते हैं, तो आपके पास ऐसा करने के और भी कई सारे दूसरे विकल्प हैं। अगर आप ठीक से इस्तेमाल करें और पहले अपने डर्मेटॉलॉजिस्ट से पूछ लें, तो कुछ OTC (ओवर-द-काउंटर) लाइटनिंग क्रीम भी काम कर सकती हैं। अगर इनसे कोई फायदा न मिले, तो आपके डर्मेटॉलॉजिस्ट द्वारा बताएं कुछ इलाज से आपको अपना मकसद पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खुद को बदलने की कोशिश करने की बजाय, आप अपनी स्किन टोन को स्वीकार करना और आप जैसे हैं, उसमें ही खुद को अपनाना सीखने की भी कोशिश कर सकते हैं।
| यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Adarsh Vijay Mudgil, MDएककोजिक एसिड के साथ मेलानिन को कम करेंः कोजिक एसिड सभी तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं में मदद कर सकता है, जिसमें पिग्मेंटेशन भी शामिल है। इस्तेमाल करने और अपनी त्वचा को हल्का करने के लिए इस इंग्रेडिएंट वाली एक क्रीम खरीद लाएँ।[एक] X विश्वसनीय स्त्रोत Science Direct स्त्रोत पर जायें ये प्रॉडक्ट प्रिस्क्रिप्शन के बिना उपलब्ध होने चाहिए। - डर्मेटाइटिस और त्वचा में इरिटेशन कोजिक एसिड के सबसे मुख्य साइड इफेक्ट हैं। - अगर कोई भी इंग्रेडिएंट कैलोमेल , सिनाबारिस , हाइड्रारगिरि ऑक्सीडम रूब्रम , या क्विकसिल्वर हैं, तो प्रॉडक्ट में मर्करी है। - अगर उस पर ऐसा कोई वॉर्निंग साइन है, जो कहता है कि क्रीम का संपर्क चांदी, सोना, एल्युमिनियम और गहनों और एक्सेसरीज़ के साथ नहीं होना चाहिए, तो उसमें मर्करी है। - अगर आपको कोई भी रिएक्शन हो रही है, तो आप इस क्रीम का इंतज़ार न करें। - फिर चाहे आप एक कॉटन स्वेब भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन तब भी अच्छा होगा कि आप अपने हाथों को भी धो लें, कहीं गलती से आपको पता चले बिना लोशन आपके हाथ पर न लग गया हो। - अगर प्रॉडक्ट पर और कोई दूसरे इन्सट्रक्शन दिए हैं, तो उन्हें फॉलो करें। संभावित घरेलू उपचार ऑनलाइन आपको आपकी त्वचा को हल्का करने के लिए न जाने कितनी ही होम रेमेडीज या घरेलू उपचार मिल जाएंगे। लेकिन, इनमें से ज़्यादातर उपाय काम नहीं करेंगे। घर पर अगर आप कुछ कर सकते हैं, तो वो ये कि आप अपनी त्वचा को डार्क होने से रोकने के लिए अपने धूप के सामने जाने के टाइम को लिमिट करें। इसके अलावा, अपने डर्मेटॉलॉजिस्ट से बात करना भी करने योग्य सबसे अच्छा काम है। - अगर इस समय के दौरान आपको बाहर जाना भी पड़े, तो ज्यादा से ज्यादा समय छाँव में बिताने की कोशिश करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकअपनी स्किन को लाइट करने के बारे में किसी डर्मेटॉलॉजिस्ट के पास जाएँः स्किन लाइटनिंग ट्रीटमेंट्स, जिनमें लेजर ट्रीटमेंट भी शामिल हैं, को डर्मेटॉलॉजिस्ट के ऑफिस में कराया जाता है। एक अपोइंटमेंट लें और आपके लिए एक सही प्रोसीजर के बारे में बात करें। - डर्मेटॉलॉजिस्ट पहले एक हल्के स्किन टेस्ट को करके ये सुनिश्चित करेंगे कि आप कहीं लेजर्स को लेकर सेंसिटिव तो नहीं। वो आपकी त्वचा के एक छोटे हिस्से को लेजर के सामने लाएँगे और फिर कुछ हफ्ते इंतज़ार करके देखेंगे कि इससे आपको कोई रिएक्शन तो नहीं हो रही है। अगर नहीं, तो ये ट्रीटमेंट आपके लिए सेफ होगा। - आप चाहें तो असहूलियत को कम करने में मदद के लिए दर्द निवारक भी ले सकते हैं। - बाद की देखभाल के लिए हमेशा आपके डर्मेटॉलॉजिस्ट के द्वारा दिए खास निर्देशों का पालन करें। अगर आप अपनी त्वचा को हल्का करने के प्राकृतिक तरीकों की तलाश में हैं, तो ऐसे आप अकेले व्यक्ति नहीं हैं जो ऐसा कर रहे हैं। लेकिन ऐसा कोई घरेलू उपचार नहीं है, जिसे गोरी त्वचा पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। अच्छी बात ये है कि अगर आप अपनी त्वचा को हल्का करना चाहते हैं, तो आपके पास ऐसा करने के और भी कई सारे दूसरे विकल्प हैं। अगर आप ठीक से इस्तेमाल करें और पहले अपने डर्मेटॉलॉजिस्ट से पूछ लें, तो कुछ OTC लाइटनिंग क्रीम भी काम कर सकती हैं। अगर इनसे कोई फायदा न मिले, तो आपके डर्मेटॉलॉजिस्ट द्वारा बताएं कुछ इलाज से आपको अपना मकसद पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खुद को बदलने की कोशिश करने की बजाय, आप अपनी स्किन टोन को स्वीकार करना और आप जैसे हैं, उसमें ही खुद को अपनाना सीखने की भी कोशिश कर सकते हैं। |
स वर्ष के लिये इन कुप्रथाओं की अनुमति जाय। और दोनों की साथ अनुमति दी नाय । यह स्वाभाविक है कि अगर स्त्रियाँ अधिक होंगी तो बहुपत्नीत्व अधिक और बहुपतित्व कम होगा और अगर पुरुष ज्यादह होंगे तो बहुपतित्व अधिक और बहुपत्नीत्व कम होगा ।
प्रश्न - विषम संख्या के कारण जहां बहुत्नीत्व की ही ज़रूरत है - वहां बहु-पतित्व को चालू करने से क्या लाभ ? इससे तो संकट ही बढ़ेगा ?
उत्तर - इससे कुछ न कुछ अंश में नरशरी समभाव बना रहेगा और इन कुप्रथाओं को दूर हटाने में नर और नारी दोनों के स्वार्थ प्रेरक बनेंगे ।
अच्छी बात तो यह है कि किसी भी कुप्रथा को जगह न दी जाय, और दी जाय तो दोनों को दी जाय और परिमित समय के लिये दी जाय । ६ - अनेक विवाह बहु-पत्नी-पतिक भिन्न दाम्पत्य वह है जिसमें अनेक स्त्री पुरुष सामूहिक रूप में एक साथ दाम्पत्य स्थापित करते हैं
और नये नये स्त्री-पुरुषों को उसमें शामिल करते रहते हैं। पुराने समय में वाम मार्ग में ऐसी बातें हुआ करती थी ऐसी किंवदन्ती है। एक तरह से यह परिमित क्षेत्र में विवाह की प्रथा को मिटा देना है, परन्तु विवाह प्रथा को मिटा देना ठीक नहीं ।
इस प्रकार ये छः प्रकार के भिन्न दाम्पत्य बताये गये हैं । ये दाम्पत्य जीवन को कलंकित करनेवाले हैं । इसलिये इन्हें समाज में स्थान न मिलना चाहिये ।
उपसंहार - नर और नारी मानव-जीवन के दो अंग हैं, पर इन अंगों के समन्वय की समस्या बहुत जटिल हैं । यहां उन के मिलने, व्यवस्थित रहने, विछुड़ने और विषमता दूर करने के बारे में कुछ सूचनाएँ दी गई हैं । पर सूचनाएँ कितनी भी दी जायँ-कहीं न कहीं जटिलता आ ही जाती है । इसलिये सबसे बड़ी सूचना तो यह है कि विवेकी बनकर स्वपर कल्याण का विचार किया जाय और उसके अनुसार अपना
व्यवहार बनाया जाय । | स वर्ष के लिये इन कुप्रथाओं की अनुमति जाय। और दोनों की साथ अनुमति दी नाय । यह स्वाभाविक है कि अगर स्त्रियाँ अधिक होंगी तो बहुपत्नीत्व अधिक और बहुपतित्व कम होगा और अगर पुरुष ज्यादह होंगे तो बहुपतित्व अधिक और बहुपत्नीत्व कम होगा । प्रश्न - विषम संख्या के कारण जहां बहुत्नीत्व की ही ज़रूरत है - वहां बहु-पतित्व को चालू करने से क्या लाभ ? इससे तो संकट ही बढ़ेगा ? उत्तर - इससे कुछ न कुछ अंश में नरशरी समभाव बना रहेगा और इन कुप्रथाओं को दूर हटाने में नर और नारी दोनों के स्वार्थ प्रेरक बनेंगे । अच्छी बात तो यह है कि किसी भी कुप्रथा को जगह न दी जाय, और दी जाय तो दोनों को दी जाय और परिमित समय के लिये दी जाय । छः - अनेक विवाह बहु-पत्नी-पतिक भिन्न दाम्पत्य वह है जिसमें अनेक स्त्री पुरुष सामूहिक रूप में एक साथ दाम्पत्य स्थापित करते हैं और नये नये स्त्री-पुरुषों को उसमें शामिल करते रहते हैं। पुराने समय में वाम मार्ग में ऐसी बातें हुआ करती थी ऐसी किंवदन्ती है। एक तरह से यह परिमित क्षेत्र में विवाह की प्रथा को मिटा देना है, परन्तु विवाह प्रथा को मिटा देना ठीक नहीं । इस प्रकार ये छः प्रकार के भिन्न दाम्पत्य बताये गये हैं । ये दाम्पत्य जीवन को कलंकित करनेवाले हैं । इसलिये इन्हें समाज में स्थान न मिलना चाहिये । उपसंहार - नर और नारी मानव-जीवन के दो अंग हैं, पर इन अंगों के समन्वय की समस्या बहुत जटिल हैं । यहां उन के मिलने, व्यवस्थित रहने, विछुड़ने और विषमता दूर करने के बारे में कुछ सूचनाएँ दी गई हैं । पर सूचनाएँ कितनी भी दी जायँ-कहीं न कहीं जटिलता आ ही जाती है । इसलिये सबसे बड़ी सूचना तो यह है कि विवेकी बनकर स्वपर कल्याण का विचार किया जाय और उसके अनुसार अपना व्यवहार बनाया जाय । |
जेत परमार था, वह पृथ्वीराज चौहान की सहायता में मारा गया, उसके वंशज आबु पर थे. जबकि सोनगरा कान्हडदेव जालोर की गद्दी पर था, तब देवडा विजड के पुत्रों (जसमरो, लूणो, लुभो, लखो व तेजसी,) सरणुआ के पहाड में रहते थे, उन्होंने आबु कब्जे करने का विचार किया, दरमियान परमारों का एक चारण वहां पर आया, उसचारण के आगे पांच भाईओं के पांच २ पुत्री होना बताकर, उनकी शादी के विषय में चिन्ता प्रगट की. जिसपर चारण ने आबु के परमारों के साथ उनकी शादी करा देने की आशा दी, और चारण ने आबु पर पहुंच कर परमारों को निवेदन किया, जिसपर वे शादी करने के वास्ते तैयार हुए, परन्तु धोका होनेकी शंका आनेसे, विजड के पुत्र लूणा को बतौर जामिन आबु पर अपने पास रखने की शर्त की. देवडों ने वह शर्त मंजूर रखी, और लूणा को आबु पर भेज दिया. बाद पचीस परमारों की बरात आई. देवडे चौहानों ने बरातीओं की अच्छी सरभरा महमानगिरी करके, शराब पिलाकर नशे में गुलतान कर दिये, और अपनी तरफ के पचीस जवान लडकों को स्त्री के कपडे पहिना कर, उनको कटारियां देकर चौरी में उपस्थित किये. उन लडकों को यह सूचना की गई थी कि, जब फेरा फिरने का कहा जाय, तब एक एक विंद पर एक साथ कटारी चलाना. जब कि २५ परमार विंद शादी के वास्ते मंडप में आये, तव बहुत से बराती नशे में में चकनाचूर होने से डेरे पर पडे रहे थे, जिससे सिर्फ ४९ वराती विंदो के साथ चौरी पर आये थे, परन्तु देवडों ने मर्यादा भंग होनेका + बहाना बताकर उनको भी बहार रखे, और सिर्फ बिंदों को ही चौरी में लिये गये, जिनको चौरी में ही पूर्व संकेतनुसार मार डाले, और बरातीओं को भी जानीवास में मार दिये. बाद एक राजपूत को आबु पर भेजा गया.
जब कि भेजा हुआ राजपूत आबु पर पहुचा, तब देवडा लूणा व आबु का 'दलपत परमार दोनों बात कर रहे थे, जिनको राजपूत ने शादी हो जानेका समाचार निवेदन किया, जिस पर लूणा ने पूछा कि विवाह का जश किसको रहा ? राजपूत ने चौहानों को जश मिलने का कहा, वह सुनते ही दलपत परमार को लूणा ने कहा कि, आबु मेरा है, अब तेरी दशा भी उसी बरातीओं के नांई होगी, इस तरह वात वात में ही दोनों के बीच लडाई हुई, और दोनों वहां काम आये, इतने में वरातीओं को मार कर दूसरे देवडे चौहानों भी आबु पर आपहुंचे और आबु कब्जे कर लिया.
x विजलराय के पांच पुत्रों के नाम में भी मतभेद है. बडुआ की पुस्तक में व दूसरे कवित्तों में १ ऌभा, २ लूणा, ३ लक्ष्मण, ४ चूढराय व ५ लूढा, यह नाम अंकित है. उपर्युक्त कवित्त में जशवंत व समर नाम उपलब्ध होते है, व नेणसी की ख्यात में जसमरो व तेजसी के नाम लिखे है, ईस विषय में ज्यादह खुलासा प्रकरण २५ वां में किया गया है.
+ देवडा चौहानों में वर्तमान समय में भी शादी के समय पर बिंद के पक्ष के, सिवाय विंद के दूसरे किसी आदमी को चौरी पर नहीं आने देते है,
* आबु कब्जे करने के विषय में दंतकथा में कहा जाता है कि, देवडा चौहानों ने अपनी २५ कन्याओं के विवाह
इस विषय में उक्त पुस्तक में चौहानों को राजावली के कवित्त में कविने कहा है किx
" पंचवीस पंवार तेड तोना तिड तोड़ें, थांणे गूजर खंड मुगल मंडाहर मोडै. "
लणो सामो लोह मुवो दलपल पंमारे, तेजसिंह अरबद सेस पीतीयै वधारे.
पग आण धरा गिर पालटे, घणु विरंद आवत घणां; मूर थांन गया राखै सिको तपे त्रुग बीजड तणां."
उपर्युक्त कवित्त से पाया जाता है कि तेजसिह नामके देवडा चौहान ने प्रथम आबु पर आकर ' दलपत' नामके परमार के हाथ से आबु कब्जे किया. तेजसिंह ने ही आबु लिया, उस विषय में एक दूसरा कवित्त के अखीर के चरण में कविने कहा है कि -
आयु तेजल आन दवावे, मछर परमार सातसें मारे.
बडुआ की पुस्तक में लिखा है कि, बिजलराय के समय में वि. सं. १३०७ में वडगाम व वि. सं. २७० में मढार लिया गया, और वि. सं. १३५२ में परमारों के साथ 'वाडेली' में युद्ध हुआ, उसमें आबु कब्जे करने का संवत् दर्ज नहीं है, परन्तु दूसरी हस्त लिखित प्रति में लिखा है किx
राव लुवोजी तथा पांचेई भाई आबु लीधो परमारां ने मार ने. गाम वाडेली वाद हुवो. संवत १३५२ साल परमार ७५२ सारीया. श्री अचलेश्वरजी वर हुओ.
परमारों के माथ करने का ठहराव मढार राज्यस्थान से किया, मगर परमारों ने वरात लेकर मढार आनेका मंजूर नहीं करनेसे आयु से पश्चिम दिशा में ' पाईमता ' नामक पहाड की तलेटी में देवडे चौहानों ने लग्न समारंभ की तैयारी की. परमारों ने पहिले से एक अपने चारण को वहां पर भेज रखा था, उसको देवडे चौहानों ने अच्छी सरभरा की, मगर वह जाने न पावे और कुछ भी समाचार न भेज सके, उसके वास्ते पक्का इतिजाम रखा गया. चालाक चारण को लग्न की तैयारी के साथ हथियार दुरूस्त होनेकी बातमी भी मिली, लेकिन वह समाचार कहलाने का मौका हाथ न लगा, जिससे मौका पाकर एक मिट्टी के ठिकरे पर कोयला से कुछ लिख का एक भीत्र आबु पर जा रहा था, उसको जंगल में वह ठिकरा देकर परमारों को दे देने की समजूत की. उसमें लिखा था कि
" विजड रे विवाह वख गोलीजे वाटके, बलके रे बाणां, सावल होवे सांतरा. "
भीलने आयु पर वह ठीकरा पहुंचा दिया. उसको पढ कर परमारों ने यह मतलव निकाला कि बिजलराय के वहां विवाह की तैयारी बडी घामधून से हो रही है, और अफीम कवा कटोरे भर २ के निकल रहे है, जिसकी खबर चारण ने दी है. वस्तुतः चारण ने यह मतलब से लिखा था कि- " बिजलराय के वहां विवाह की सामग्री में तीरों के माथे बलक ( झलक ) रहे है, और भाले दुरुस्त किये जाते हैं, यानी तुम्हारे वास्ने कटोरे भर २ के त्रिप तैयार हो रहा है, "
यह भी कहा जाता है कि पचीस परमारों की वरात आ पहुंची तत्र चारण ने एक बिंद को सान करके भाग जानेका दाग दिया, जिससे वह शादी में शामिल न रहते भाग गया, जिससे उनकी जान बचन पाई, और वह रह गया जिससे यानी' बना हुआ विंद' कहलाया. जिसकी ओला वर्तमान समय में महीकांठा एजन्सी में 'मोहनपुर आदि के नारदार है. और परमारों में उनकी पहिचान ' रीयोवर' नामकी शाखा से कहलाई जाती है. जिस स्थान पर यह लग्न परंभ हुआ वहां पर ही मंत्र परमार कतल हो गये, वह स्थान ' वाडेली ' यानी वत्ल करने की जगह के नाम से मशहूर है, कि यहां पर जो गांव पाया गया वह " वाडेली " कहलाता है.
उक्त प्रति में यह दोहा अंकित है कि" बीजड सूरां जे वडीयां, परमार सात से परचंड; जालोर पत लीधो जुडे, आवै गढ अरबुद
मूता नेणसी की ख्यात के कवित्त व दूसरे प्रमाणों में मत भेद इतना ही है, कि नेणसी की ख्यात मुआफिक जालोर में रावल कान्हडदेव था, उस समय में देवडे चौहानों ने आबु लिया वैसा मालूम होता है, और बहुआ की पुस्तक व दूसरी हस्त लिखित प्रति अनुसार वि. सं. १३५२ में वाडेली में युद्ध हुआ, और आबु कब्जे किया वैसा उल्लेख हुआ है. नेणसी की ख्यात में एक जगह लिखा गया है कि " वि. सं. १२९६ महा वदि १ के रोज लूणा ने अपना पुत्र तेजसिंह की मदद से आबु लिया. " परन्तु इसमें दर्ज हुआ संवत् विश्वास पात्र नहीं है.
आबु पहाड देवडे चौहानों ने कौन संवत् में लिया ? इस विषय में हस्त लिखित प्रति से पाया जाता है कि आबु कब्जे आने पीछे सात वर्ष बाद, ( वि. सं. १३५९ में ) राव लूभा ने चंद्रावती कब्जे किया, परन्तु बहुआ की पुस्तक में स्पष्ट लिखा गया है कि महारावलूभा ने वि. सं. १३६७ में चंद्रावती में राज्यस्थान किया और गद्दी पर बेठा. सि.रा.ई.
अचलेश्वर के वि. सं. १३७७ के शिलालेख अनुसार, लूभा ने वि. सं. १३६८ में चंद्रावती में राज्यस्थान करने का लिखा है, जिससे अनुमान होता है, कि वि. सं. १३६० के अरसे में आबु पहाड देवडा चौहानों के कब्जे में आया है, क्योंकि उस समय जालोर में रावल कान्हडदेव गद्दी पर आ चूका था.
मूता नेणसी की ख्यात व दंतकथा में यह बात मशहूर की गई है कि देवडे चौहानों ने अपनी पचीस कन्या के विवाह के बहाने से आबु के परमारों को बुला कर के मार डाले, परन्तु बहुआ की पुस्तक में व दूसरी हस्त लिखित प्रति, जो उदयपुर से प्राप्त हुई है, ( जिसमें सिर्फ देवडे चौहानों का नहीं परन्तु दूसरे राज्य वंशो का भी अहवाल लिखा हुआ है. ) उसमें विवाह के बहाने का मुतलक जिक्र नहीं है, वल्कि वाडेली में युद्ध हुआ उसमें ७५२ परमार मारे गये, वैसा उल्लेख किया है. वस्तुतः ७०० ( कवित्त में सातसों है. ) या ७५२ परमारों का 'वाडेली' में दगा से मारा जाना, यह असम्भावित बात पाई जाती है, वल्कि पचीस विंदो की एक साथ वरात जाना, और धोका होनेके खोफ से मढार में शादी करने को नहीं जाते, पाईमता पहाड की तलेटी में डेरे खडे कराकर वहां पर लग्न समारंभ की तैयारी कराना, देवडा लूणा को आबु पर बतौर जामिन ओल में रखकर, वाद बरात लेजाना, वगैरह चातें इतनी अतिशयोक्ति वाली पाई जाती है, कि वह ऐतिहासिक दृष्टि से तुलना करने वाले हरगिज स्वीकार नहीं कर सक्ते है. पाया जाता है कि देवडे चौहानों ने युद्ध करने के वास्ते
पाइमता पहाड़ की तलेटी में डेरे लगाकर अपनी छावनी की, और आबु के परमारों के पचीस सरदार, दृल्हा के नांइ वन ठन कर अपनी फौज के साथ उनसे युद्ध करने को वहां पहुंचे, जो सातसों परमारों के साथ वहां काम आये, और +तेजसिंह देवडा ने दूसरी तरफ से आबु पहाड़ पर पहुंच कर, दलपत परमार आदि जो आबु पर रहे थे, उनके साथ युद्ध करके आबु कब्जे किया है, जिसके वास्ते शादी के अलंकार देकर किसी कविने यह घटना जोडने की तजवीज की है, कींवा परमारों की बरात देवों के वहां जाने पर शादी में कुछ तकरार उपस्थित होनेसे पचीस परमार सरदारों ने उन पर आक्रमण करनेसे 'वाडेली' में आकर देवडे चौहानों से लडाई की होगी.
+ तेनसिंह विजयराय के पुत्र लूणा का पुत्र था. नेणसी की ख्यात में लूणा आबु पर दलपत परमार के साथ लडकर मारा जाना लिखा है, परन्तु दंतकथा व बहुआ की पुस्तक से ' लूणा ' मदार के युद्ध में काम आया था, वैसा मालूम होता है.
प्रकरण २५ वाँ.
बिजलराय व उसके पुत्रों ने वि. सं. १३०७ से वि. सं. १३६७ तक ६० वर्षों का समय आबु व उसके पश्चिम दिशा के मुलक को कब्जे करने में व्यतित किया, परन्तु उन्हों ने किसी स्थान को अपना पाट नगर नहीं बनाया. इसका कारण यही होना पाया जाता है कि उनकी नजर परमारों के पाट नगर चंद्रावती पर थी, वह हाथ नहीं आया था, और वृद्ध बिजलराय उस समय तक विद्यमान था, वि. सं. १३६७ में विजलराय के बड़े पुत्र लूंभा उर्फ लुंभकरण ने, अग्रसेन परमार के पुत्र मेरूपतंग से चंद्रावती नगर उसको मार कर लिया, और महाराव पद धारण करके, वहां पर देवडे चौहानों को राज्यगद्दी स्थापन की.
आबु कब्जे आने बाद बिजलराय के पुत्रों का जालोर के रावल कान्हडदेव के साथ मेल झोल होना पाया जाता है, बल्कि जब कि जालोरगढ पर प्रथम अल्लाउद्दीन की फौज ने आक्रमण किया, तब कान्हडदेव ने बिजलराय के पुत्रों को सहायता के वास्ते बुलाये थे. इस विषय में कवि ने कहा है कि,
" बलवंत विजडरा वाहला; हेरां करसव लगे हिमाला. "
" बलवंत विजडरा वाहला; पाडे ग्रहीणे हुंत पांखाला. "
" विजडरा एहवाज वखाणै; जहेवा पांचे पांडव जाणे. " सनमाने कान्हड तेडे सहु; रूखे प्रसन्न करे खग रहु.
जबकि वि. सं. १३६८ में जालोरगढ पर मुसलमानों का हमला हुआ, तब देवडे चौहानों ने सोनगरे चौहानों को सहायता की हा ऐसा नहीं पाया जाता.
* सि. रा. ई. की पुस्तक में गृष्ट १८४ पर लिखा है कि " बीजड की स्त्री नामल्लदेवी थी, जिससे ४ पुत्र, लावण्यकर्ण, लुंढ ( लूभा ), लक्ष्मण और लुणवर्मा, ( लूणा ) हुए. लावण्यकर्ण का देहान्त अपने पिता के सामने ही हो गया था, जिससे इसका छोटा भाई लूभा अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ, " परन्तु वहुआ की पुस्तक में लिखा है कि " विजडराय की राणी बारडजी हरियांदेवी दांता के राणा वैरीसाल की पुत्री से लूंगा, दूसरी राणी वाघेलीजी इन्द्रादेवी साणंद (गुजरात) के वाघेला मेहाजल भाणावत की पुत्री से लूणा, तीसरी राठौरी पद्मादेवी से लक्ष्मण व चुंडराय, और चौथी वीरपदीजी प्रतापकुंवर लुणावाडा ( गुजरात ) के सोलंकी राणा राघवदेव की पुत्री से लूंढा का जन्म हुआ, बल्कि इस विषय में किसी कवि ने कहा है कि -
" विजड पूत पंच ही जाया, कूल उद्योत रण खत्री कहाया.
लूणो लूढो लखमण लूत्रो, असूरां सूंढ वढेवा उभो. "
इससे पाया जाता है कि बहुआ के पुस्तक में लिखे हुए नाम ज्यादह विश्वासपात्र है, और इन नाम वालों की ओलाद वर्तमांन समय में कहां कहां है उसका भी उक्त पुस्तक में उल्लेख किया गया है. | जेत परमार था, वह पृथ्वीराज चौहान की सहायता में मारा गया, उसके वंशज आबु पर थे. जबकि सोनगरा कान्हडदेव जालोर की गद्दी पर था, तब देवडा विजड के पुत्रों सरणुआ के पहाड में रहते थे, उन्होंने आबु कब्जे करने का विचार किया, दरमियान परमारों का एक चारण वहां पर आया, उसचारण के आगे पांच भाईओं के पांच दो पुत्री होना बताकर, उनकी शादी के विषय में चिन्ता प्रगट की. जिसपर चारण ने आबु के परमारों के साथ उनकी शादी करा देने की आशा दी, और चारण ने आबु पर पहुंच कर परमारों को निवेदन किया, जिसपर वे शादी करने के वास्ते तैयार हुए, परन्तु धोका होनेकी शंका आनेसे, विजड के पुत्र लूणा को बतौर जामिन आबु पर अपने पास रखने की शर्त की. देवडों ने वह शर्त मंजूर रखी, और लूणा को आबु पर भेज दिया. बाद पचीस परमारों की बरात आई. देवडे चौहानों ने बरातीओं की अच्छी सरभरा महमानगिरी करके, शराब पिलाकर नशे में गुलतान कर दिये, और अपनी तरफ के पचीस जवान लडकों को स्त्री के कपडे पहिना कर, उनको कटारियां देकर चौरी में उपस्थित किये. उन लडकों को यह सूचना की गई थी कि, जब फेरा फिरने का कहा जाय, तब एक एक विंद पर एक साथ कटारी चलाना. जब कि पच्चीस परमार विंद शादी के वास्ते मंडप में आये, तव बहुत से बराती नशे में में चकनाचूर होने से डेरे पर पडे रहे थे, जिससे सिर्फ उनचास वराती विंदो के साथ चौरी पर आये थे, परन्तु देवडों ने मर्यादा भंग होनेका + बहाना बताकर उनको भी बहार रखे, और सिर्फ बिंदों को ही चौरी में लिये गये, जिनको चौरी में ही पूर्व संकेतनुसार मार डाले, और बरातीओं को भी जानीवास में मार दिये. बाद एक राजपूत को आबु पर भेजा गया. जब कि भेजा हुआ राजपूत आबु पर पहुचा, तब देवडा लूणा व आबु का 'दलपत परमार दोनों बात कर रहे थे, जिनको राजपूत ने शादी हो जानेका समाचार निवेदन किया, जिस पर लूणा ने पूछा कि विवाह का जश किसको रहा ? राजपूत ने चौहानों को जश मिलने का कहा, वह सुनते ही दलपत परमार को लूणा ने कहा कि, आबु मेरा है, अब तेरी दशा भी उसी बरातीओं के नांई होगी, इस तरह वात वात में ही दोनों के बीच लडाई हुई, और दोनों वहां काम आये, इतने में वरातीओं को मार कर दूसरे देवडे चौहानों भी आबु पर आपहुंचे और आबु कब्जे कर लिया. x विजलराय के पांच पुत्रों के नाम में भी मतभेद है. बडुआ की पुस्तक में व दूसरे कवित्तों में एक ऌभा, दो लूणा, तीन लक्ष्मण, चार चूढराय व पाँच लूढा, यह नाम अंकित है. उपर्युक्त कवित्त में जशवंत व समर नाम उपलब्ध होते है, व नेणसी की ख्यात में जसमरो व तेजसी के नाम लिखे है, ईस विषय में ज्यादह खुलासा प्रकरण पच्चीस वां में किया गया है. + देवडा चौहानों में वर्तमान समय में भी शादी के समय पर बिंद के पक्ष के, सिवाय विंद के दूसरे किसी आदमी को चौरी पर नहीं आने देते है, * आबु कब्जे करने के विषय में दंतकथा में कहा जाता है कि, देवडा चौहानों ने अपनी पच्चीस कन्याओं के विवाह इस विषय में उक्त पुस्तक में चौहानों को राजावली के कवित्त में कविने कहा है किx " पंचवीस पंवार तेड तोना तिड तोड़ें, थांणे गूजर खंड मुगल मंडाहर मोडै. " लणो सामो लोह मुवो दलपल पंमारे, तेजसिंह अरबद सेस पीतीयै वधारे. पग आण धरा गिर पालटे, घणु विरंद आवत घणां; मूर थांन गया राखै सिको तपे त्रुग बीजड तणां." उपर्युक्त कवित्त से पाया जाता है कि तेजसिह नामके देवडा चौहान ने प्रथम आबु पर आकर ' दलपत' नामके परमार के हाथ से आबु कब्जे किया. तेजसिंह ने ही आबु लिया, उस विषय में एक दूसरा कवित्त के अखीर के चरण में कविने कहा है कि - आयु तेजल आन दवावे, मछर परमार सातसें मारे. बडुआ की पुस्तक में लिखा है कि, बिजलराय के समय में वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सात में वडगाम व वि. सं. दो सौ सत्तर में मढार लिया गया, और वि. सं. एक हज़ार तीन सौ बावन में परमारों के साथ 'वाडेली' में युद्ध हुआ, उसमें आबु कब्जे करने का संवत् दर्ज नहीं है, परन्तु दूसरी हस्त लिखित प्रति में लिखा है किx राव लुवोजी तथा पांचेई भाई आबु लीधो परमारां ने मार ने. गाम वाडेली वाद हुवो. संवत एक हज़ार तीन सौ बावन साल परमार सात सौ बावन सारीया. श्री अचलेश्वरजी वर हुओ. परमारों के माथ करने का ठहराव मढार राज्यस्थान से किया, मगर परमारों ने वरात लेकर मढार आनेका मंजूर नहीं करनेसे आयु से पश्चिम दिशा में ' पाईमता ' नामक पहाड की तलेटी में देवडे चौहानों ने लग्न समारंभ की तैयारी की. परमारों ने पहिले से एक अपने चारण को वहां पर भेज रखा था, उसको देवडे चौहानों ने अच्छी सरभरा की, मगर वह जाने न पावे और कुछ भी समाचार न भेज सके, उसके वास्ते पक्का इतिजाम रखा गया. चालाक चारण को लग्न की तैयारी के साथ हथियार दुरूस्त होनेकी बातमी भी मिली, लेकिन वह समाचार कहलाने का मौका हाथ न लगा, जिससे मौका पाकर एक मिट्टी के ठिकरे पर कोयला से कुछ लिख का एक भीत्र आबु पर जा रहा था, उसको जंगल में वह ठिकरा देकर परमारों को दे देने की समजूत की. उसमें लिखा था कि " विजड रे विवाह वख गोलीजे वाटके, बलके रे बाणां, सावल होवे सांतरा. " भीलने आयु पर वह ठीकरा पहुंचा दिया. उसको पढ कर परमारों ने यह मतलव निकाला कि बिजलराय के वहां विवाह की तैयारी बडी घामधून से हो रही है, और अफीम कवा कटोरे भर दो के निकल रहे है, जिसकी खबर चारण ने दी है. वस्तुतः चारण ने यह मतलब से लिखा था कि- " बिजलराय के वहां विवाह की सामग्री में तीरों के माथे बलक रहे है, और भाले दुरुस्त किये जाते हैं, यानी तुम्हारे वास्ने कटोरे भर दो के त्रिप तैयार हो रहा है, " यह भी कहा जाता है कि पचीस परमारों की वरात आ पहुंची तत्र चारण ने एक बिंद को सान करके भाग जानेका दाग दिया, जिससे वह शादी में शामिल न रहते भाग गया, जिससे उनकी जान बचन पाई, और वह रह गया जिससे यानी' बना हुआ विंद' कहलाया. जिसकी ओला वर्तमान समय में महीकांठा एजन्सी में 'मोहनपुर आदि के नारदार है. और परमारों में उनकी पहिचान ' रीयोवर' नामकी शाखा से कहलाई जाती है. जिस स्थान पर यह लग्न परंभ हुआ वहां पर ही मंत्र परमार कतल हो गये, वह स्थान ' वाडेली ' यानी वत्ल करने की जगह के नाम से मशहूर है, कि यहां पर जो गांव पाया गया वह " वाडेली " कहलाता है. उक्त प्रति में यह दोहा अंकित है कि" बीजड सूरां जे वडीयां, परमार सात से परचंड; जालोर पत लीधो जुडे, आवै गढ अरबुद मूता नेणसी की ख्यात के कवित्त व दूसरे प्रमाणों में मत भेद इतना ही है, कि नेणसी की ख्यात मुआफिक जालोर में रावल कान्हडदेव था, उस समय में देवडे चौहानों ने आबु लिया वैसा मालूम होता है, और बहुआ की पुस्तक व दूसरी हस्त लिखित प्रति अनुसार वि. सं. एक हज़ार तीन सौ बावन में वाडेली में युद्ध हुआ, और आबु कब्जे किया वैसा उल्लेख हुआ है. नेणसी की ख्यात में एक जगह लिखा गया है कि " वि. सं. एक हज़ार दो सौ छियानवे महा वदि एक के रोज लूणा ने अपना पुत्र तेजसिंह की मदद से आबु लिया. " परन्तु इसमें दर्ज हुआ संवत् विश्वास पात्र नहीं है. आबु पहाड देवडे चौहानों ने कौन संवत् में लिया ? इस विषय में हस्त लिखित प्रति से पाया जाता है कि आबु कब्जे आने पीछे सात वर्ष बाद, राव लूभा ने चंद्रावती कब्जे किया, परन्तु बहुआ की पुस्तक में स्पष्ट लिखा गया है कि महारावलूभा ने वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सरसठ में चंद्रावती में राज्यस्थान किया और गद्दी पर बेठा. सि.रा.ई. अचलेश्वर के वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सतहत्तर के शिलालेख अनुसार, लूभा ने वि. सं. एक हज़ार तीन सौ अड़सठ में चंद्रावती में राज्यस्थान करने का लिखा है, जिससे अनुमान होता है, कि वि. सं. एक हज़ार तीन सौ साठ के अरसे में आबु पहाड देवडा चौहानों के कब्जे में आया है, क्योंकि उस समय जालोर में रावल कान्हडदेव गद्दी पर आ चूका था. मूता नेणसी की ख्यात व दंतकथा में यह बात मशहूर की गई है कि देवडे चौहानों ने अपनी पचीस कन्या के विवाह के बहाने से आबु के परमारों को बुला कर के मार डाले, परन्तु बहुआ की पुस्तक में व दूसरी हस्त लिखित प्रति, जो उदयपुर से प्राप्त हुई है, उसमें विवाह के बहाने का मुतलक जिक्र नहीं है, वल्कि वाडेली में युद्ध हुआ उसमें सात सौ बावन परमार मारे गये, वैसा उल्लेख किया है. वस्तुतः सात सौ या सात सौ बावन परमारों का 'वाडेली' में दगा से मारा जाना, यह असम्भावित बात पाई जाती है, वल्कि पचीस विंदो की एक साथ वरात जाना, और धोका होनेके खोफ से मढार में शादी करने को नहीं जाते, पाईमता पहाड की तलेटी में डेरे खडे कराकर वहां पर लग्न समारंभ की तैयारी कराना, देवडा लूणा को आबु पर बतौर जामिन ओल में रखकर, वाद बरात लेजाना, वगैरह चातें इतनी अतिशयोक्ति वाली पाई जाती है, कि वह ऐतिहासिक दृष्टि से तुलना करने वाले हरगिज स्वीकार नहीं कर सक्ते है. पाया जाता है कि देवडे चौहानों ने युद्ध करने के वास्ते पाइमता पहाड़ की तलेटी में डेरे लगाकर अपनी छावनी की, और आबु के परमारों के पचीस सरदार, दृल्हा के नांइ वन ठन कर अपनी फौज के साथ उनसे युद्ध करने को वहां पहुंचे, जो सातसों परमारों के साथ वहां काम आये, और +तेजसिंह देवडा ने दूसरी तरफ से आबु पहाड़ पर पहुंच कर, दलपत परमार आदि जो आबु पर रहे थे, उनके साथ युद्ध करके आबु कब्जे किया है, जिसके वास्ते शादी के अलंकार देकर किसी कविने यह घटना जोडने की तजवीज की है, कींवा परमारों की बरात देवों के वहां जाने पर शादी में कुछ तकरार उपस्थित होनेसे पचीस परमार सरदारों ने उन पर आक्रमण करनेसे 'वाडेली' में आकर देवडे चौहानों से लडाई की होगी. + तेनसिंह विजयराय के पुत्र लूणा का पुत्र था. नेणसी की ख्यात में लूणा आबु पर दलपत परमार के साथ लडकर मारा जाना लिखा है, परन्तु दंतकथा व बहुआ की पुस्तक से ' लूणा ' मदार के युद्ध में काम आया था, वैसा मालूम होता है. प्रकरण पच्चीस वाँ. बिजलराय व उसके पुत्रों ने वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सात से वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सरसठ तक साठ वर्षों का समय आबु व उसके पश्चिम दिशा के मुलक को कब्जे करने में व्यतित किया, परन्तु उन्हों ने किसी स्थान को अपना पाट नगर नहीं बनाया. इसका कारण यही होना पाया जाता है कि उनकी नजर परमारों के पाट नगर चंद्रावती पर थी, वह हाथ नहीं आया था, और वृद्ध बिजलराय उस समय तक विद्यमान था, वि. सं. एक हज़ार तीन सौ सरसठ में विजलराय के बड़े पुत्र लूंभा उर्फ लुंभकरण ने, अग्रसेन परमार के पुत्र मेरूपतंग से चंद्रावती नगर उसको मार कर लिया, और महाराव पद धारण करके, वहां पर देवडे चौहानों को राज्यगद्दी स्थापन की. आबु कब्जे आने बाद बिजलराय के पुत्रों का जालोर के रावल कान्हडदेव के साथ मेल झोल होना पाया जाता है, बल्कि जब कि जालोरगढ पर प्रथम अल्लाउद्दीन की फौज ने आक्रमण किया, तब कान्हडदेव ने बिजलराय के पुत्रों को सहायता के वास्ते बुलाये थे. इस विषय में कवि ने कहा है कि, " बलवंत विजडरा वाहला; हेरां करसव लगे हिमाला. " " बलवंत विजडरा वाहला; पाडे ग्रहीणे हुंत पांखाला. " " विजडरा एहवाज वखाणै; जहेवा पांचे पांडव जाणे. " सनमाने कान्हड तेडे सहु; रूखे प्रसन्न करे खग रहु. जबकि वि. सं. एक हज़ार तीन सौ अड़सठ में जालोरगढ पर मुसलमानों का हमला हुआ, तब देवडे चौहानों ने सोनगरे चौहानों को सहायता की हा ऐसा नहीं पाया जाता. * सि. रा. ई. की पुस्तक में गृष्ट एक सौ चौरासी पर लिखा है कि " बीजड की स्त्री नामल्लदेवी थी, जिससे चार पुत्र, लावण्यकर्ण, लुंढ , लक्ष्मण और लुणवर्मा, हुए. लावण्यकर्ण का देहान्त अपने पिता के सामने ही हो गया था, जिससे इसका छोटा भाई लूभा अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ, " परन्तु वहुआ की पुस्तक में लिखा है कि " विजडराय की राणी बारडजी हरियांदेवी दांता के राणा वैरीसाल की पुत्री से लूंगा, दूसरी राणी वाघेलीजी इन्द्रादेवी साणंद के वाघेला मेहाजल भाणावत की पुत्री से लूणा, तीसरी राठौरी पद्मादेवी से लक्ष्मण व चुंडराय, और चौथी वीरपदीजी प्रतापकुंवर लुणावाडा के सोलंकी राणा राघवदेव की पुत्री से लूंढा का जन्म हुआ, बल्कि इस विषय में किसी कवि ने कहा है कि - " विजड पूत पंच ही जाया, कूल उद्योत रण खत्री कहाया. लूणो लूढो लखमण लूत्रो, असूरां सूंढ वढेवा उभो. " इससे पाया जाता है कि बहुआ के पुस्तक में लिखे हुए नाम ज्यादह विश्वासपात्र है, और इन नाम वालों की ओलाद वर्तमांन समय में कहां कहां है उसका भी उक्त पुस्तक में उल्लेख किया गया है. |
अपनी रुचिके अनुसार लेखनी, तलवार, कुदाल, रासभ आदिको पूजा भी करते है । परन्तु कामनाओं करके उनके चित्त हरे हुए रहने के कारण वे इसके रहस्यको नहीं जानते और चास्तविक फलसे वञ्चित रह जाते है । वस्तुत उपर्युक्त सब पदार्थ उस एक ही साक्षी - चेतनकी भिन्न-भिन्न उपाधि है । उन भिन्न-भिन्न उपाधियोके मूलमे भेद से रहित वह एक ही साक्षीचेतन विद्यमान है और उन सकामियोंके भिन्न-भिन्न भावोंके अनुसार फल भी उस एक निरूपाधि साक्षी चेतनसे ही प्राप्त होता है, परन्तु उम तत्त्व-वस्तुको न जान वे उन जड़ उपाधियोंसे ही फलको सिद्धि मानते हैं । आय यह है कि यथार्थमे उन भिन्न भिन्न उपाधियोंको पूजकर भी वास्तवमे वे तद्गत्-चेतनको ही पूजते हैं और उनकी मनोरथसिद्धि भी वास्तव मे उन उपाधियों से न होकर तद्गत-चेतनसे ही होती है । परन्तु वे जड़मति अपनी जडता के कारण उन जड़ उपाधियोंसे ही मनोरथसिद्धि जानते हैं और अपनेको उन उपाधियोंकी ही पूजा करनेवाला मान लेते हैं । इस प्रकार बुद्धि की जड़ता के कारण वे वास्तव फल से वञ्चित ही रह जाते है । यथार्थमें तो निष्काम भावुक भक्तोंके लिये उपयुक्त पूजाएँ निकटसे निकट और दूरसे दूर भिन्न-भिन्न 4 विभूतियोंमे भगवान्का रूप निहार-विहार प्रोममे मग्न होनेके लिये ही थीं ।
; सियाराममय सब जग जानी, करूँ प्रणाम जोरि युग पानी ।
गीता १० अर्जुनके प्रश्न पर कि 'केषु केषु च भावेषु 'चिन्त्योऽसि भगवन्मया' अर्थात् 'हे भगवन् । आप किन-किन भावोंमें मेरे द्वारा चिन्तन करनेयोग्य है ?" उत्तरमे भगवान्ने लोक २० से ३८ तक सम्पूर्ण चराचरमे अपनी विभूतियोका "संक्षेपसे निरूपण किया है। जैसे
मी र | अपनी रुचिके अनुसार लेखनी, तलवार, कुदाल, रासभ आदिको पूजा भी करते है । परन्तु कामनाओं करके उनके चित्त हरे हुए रहने के कारण वे इसके रहस्यको नहीं जानते और चास्तविक फलसे वञ्चित रह जाते है । वस्तुत उपर्युक्त सब पदार्थ उस एक ही साक्षी - चेतनकी भिन्न-भिन्न उपाधि है । उन भिन्न-भिन्न उपाधियोके मूलमे भेद से रहित वह एक ही साक्षीचेतन विद्यमान है और उन सकामियोंके भिन्न-भिन्न भावोंके अनुसार फल भी उस एक निरूपाधि साक्षी चेतनसे ही प्राप्त होता है, परन्तु उम तत्त्व-वस्तुको न जान वे उन जड़ उपाधियोंसे ही फलको सिद्धि मानते हैं । आय यह है कि यथार्थमे उन भिन्न भिन्न उपाधियोंको पूजकर भी वास्तवमे वे तद्गत्-चेतनको ही पूजते हैं और उनकी मनोरथसिद्धि भी वास्तव मे उन उपाधियों से न होकर तद्गत-चेतनसे ही होती है । परन्तु वे जड़मति अपनी जडता के कारण उन जड़ उपाधियोंसे ही मनोरथसिद्धि जानते हैं और अपनेको उन उपाधियोंकी ही पूजा करनेवाला मान लेते हैं । इस प्रकार बुद्धि की जड़ता के कारण वे वास्तव फल से वञ्चित ही रह जाते है । यथार्थमें तो निष्काम भावुक भक्तोंके लिये उपयुक्त पूजाएँ निकटसे निकट और दूरसे दूर भिन्न-भिन्न चार विभूतियोंमे भगवान्का रूप निहार-विहार प्रोममे मग्न होनेके लिये ही थीं । ; सियाराममय सब जग जानी, करूँ प्रणाम जोरि युग पानी । गीता दस अर्जुनके प्रश्न पर कि 'केषु केषु च भावेषु 'चिन्त्योऽसि भगवन्मया' अर्थात् 'हे भगवन् । आप किन-किन भावोंमें मेरे द्वारा चिन्तन करनेयोग्य है ?" उत्तरमे भगवान्ने लोक बीस से अड़तीस तक सम्पूर्ण चराचरमे अपनी विभूतियोका "संक्षेपसे निरूपण किया है। जैसे मी र |
जिले में शुक्रवार को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर एसपी सुजाता सिंह ने कैंप कार्यालय पर शपथ दिलाई। एएसपी ग्रामीण ने अपने कार्यालय में आयोजन किया। थानों पर भी थानाध्यक्षों ने शपथ दिलाई। इस अवसर पर कोविड 19 की गाइडलाइंस पर विशेष ध्यान दिया।
पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने शुक्रवार की सुबह कोविड 19 की गाइड लाइंस के साथ अपने कैंप कार्यालय में आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ अफसरों को दिलाई गई। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अशोक कुमार ने अपने कार्यालय मे आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ का आयोजन किया। सभी सर्किलों के सीओ ने अपने दफ्तर में आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ दिलाई। जिले के सभी थाना प्रभारियों ने थानों पर आयोजन किया। पुलिस महकमे की विभिन्न शाखा प्रभारियों की ओर से अपने-अपने कार्यालय मे उपस्थित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ दिलाई गई। शुक्रवार को इस वृहद आयोजन में आतंकवाद व हिंसा का डटकर विरोध करने, मानव जाति के सभी वर्गों के बीच शांति, सामाजिक सद्भाव व सूझबूझ कायम करने, मानव जीवन मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से मास्क धारण कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया।
| जिले में शुक्रवार को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर एसपी सुजाता सिंह ने कैंप कार्यालय पर शपथ दिलाई। एएसपी ग्रामीण ने अपने कार्यालय में आयोजन किया। थानों पर भी थानाध्यक्षों ने शपथ दिलाई। इस अवसर पर कोविड उन्नीस की गाइडलाइंस पर विशेष ध्यान दिया। पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह ने शुक्रवार की सुबह कोविड उन्नीस की गाइड लाइंस के साथ अपने कैंप कार्यालय में आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ अफसरों को दिलाई गई। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अशोक कुमार ने अपने कार्यालय मे आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ का आयोजन किया। सभी सर्किलों के सीओ ने अपने दफ्तर में आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ दिलाई। जिले के सभी थाना प्रभारियों ने थानों पर आयोजन किया। पुलिस महकमे की विभिन्न शाखा प्रभारियों की ओर से अपने-अपने कार्यालय मे उपस्थित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को आतंकवाद विरोधी दिवस की शपथ दिलाई गई। शुक्रवार को इस वृहद आयोजन में आतंकवाद व हिंसा का डटकर विरोध करने, मानव जाति के सभी वर्गों के बीच शांति, सामाजिक सद्भाव व सूझबूझ कायम करने, मानव जीवन मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से मास्क धारण कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। |
इस टेक्निकल वर्ल्ड में सब कुछ इतना आसान होगया है कि हमे बस एक बटन दबने की ज़रूरत होती है। जिससे हमे अपने हाथ पैर हिलाने तक की ज़रूरत नहीं पड़ती। और इस आधुनिक ज़माने में हम बैठे बैठे अपना वजन बढ़ा रहे हैं। और तो और उस वजन को कम करने के लिए भी हम मशीन का उपयोग करते हैं। अब हम आपको बताते हैं कि एक ऐसी मशीन आई है जिससे आपका वजन तो कम होगा ही साथ ही साथ आपके कपडे की धुलाई भी होगी। जी हाँ,सही सुना आपने ,एक ऐसी बाइक वाशिंग मशीन जिससे आप एक तीर से दो शिकार कर सकते हैं। आइये हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही मशीन के बारे में।
इस मशीन को चीन की डालियान नेशनलिटिज यूनिवर्सिटी के छात्रों ने डिजाइन किया है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस बाइक वाशिंग मशीन की पहली जानकारी कब प्रकाशिक की गई, लेकिन यह इन दिनों मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इस परियोजना को खासतौर पर उन लोगों के लिए अधिक कारगर माना जा सकता है, जो एक ही समय में एक से अधिक काम करने को तवज्जो देते हैं।
| इस टेक्निकल वर्ल्ड में सब कुछ इतना आसान होगया है कि हमे बस एक बटन दबने की ज़रूरत होती है। जिससे हमे अपने हाथ पैर हिलाने तक की ज़रूरत नहीं पड़ती। और इस आधुनिक ज़माने में हम बैठे बैठे अपना वजन बढ़ा रहे हैं। और तो और उस वजन को कम करने के लिए भी हम मशीन का उपयोग करते हैं। अब हम आपको बताते हैं कि एक ऐसी मशीन आई है जिससे आपका वजन तो कम होगा ही साथ ही साथ आपके कपडे की धुलाई भी होगी। जी हाँ,सही सुना आपने ,एक ऐसी बाइक वाशिंग मशीन जिससे आप एक तीर से दो शिकार कर सकते हैं। आइये हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही मशीन के बारे में। इस मशीन को चीन की डालियान नेशनलिटिज यूनिवर्सिटी के छात्रों ने डिजाइन किया है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस बाइक वाशिंग मशीन की पहली जानकारी कब प्रकाशिक की गई, लेकिन यह इन दिनों मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इस परियोजना को खासतौर पर उन लोगों के लिए अधिक कारगर माना जा सकता है, जो एक ही समय में एक से अधिक काम करने को तवज्जो देते हैं। |
- Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग?
एचपी के डीएम4 में 6 जीबी की डीडीआर3 मैमोरी स्पेस के साथ 2. 3 गीगा हर्ट का कोर आई5-2410 एम प्रोसेसर दिया गया है। लैपटॉप में फास्ट प्रोसेसिंग के लिए 640 जीबी की हार्डडिस्क इनबिल्ड है। बिना चार्जिंग के 7 घंटे तक यूजर लगातार लैपटॉप में काम कर सकता है अन्य लैपटॉप के मुकाबले एचपी डीएम4 ज्यादा बैटरी बैकप प्रोवाइड करता है।
अगर आप कोई जरूरी डेटा अपने लैपटॉप में कोई जरूरी डेटा सेव करना चाहते है तो डीएम 4 में आपका डेटा पूरी तरह से सेव रहेगा। डीएम 4 में फिंगर प्रिंट रीडर ऑपशन दिया गया है जो केवल आपके द्वारा दिए गए फिंगर प्रिंट टच से ही ऑन होगा। लैपटॉप में इलेक्ट्रानिक मीडिया रीडर का खास फीचर दिया गया है जो कैमरे, एमपी3 प्लेयर और एसडी कार्ड से फास्ट डेटा ट्रांसफरिंग स्पीड प्रोवाइड करता है।
यूजर चाहें तो ब्लूटूथ की मदद से डेटा ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा लैपटॉप में क्विक वेब की शार्ट बटन दी गई है जिससे आप अपनी जरूरी नेट साइटों को सर्च कर सकते हैं। कंपनी ने अपने नए लैपटॉप के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है जैसे ही इसकी कीमत के बारे में हमें कोई अपडेट मालूम पड़ता है हम आपको जरूर बताएंगे।
| - Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग? एचपी के डीएमचार में छः जीबी की डीडीआरतीन मैमोरी स्पेस के साथ दो. तीन गीगा हर्ट का कोर आईपाँच-दो हज़ार चार सौ दस एम प्रोसेसर दिया गया है। लैपटॉप में फास्ट प्रोसेसिंग के लिए छः सौ चालीस जीबी की हार्डडिस्क इनबिल्ड है। बिना चार्जिंग के सात घंटाटे तक यूजर लगातार लैपटॉप में काम कर सकता है अन्य लैपटॉप के मुकाबले एचपी डीएमचार ज्यादा बैटरी बैकप प्रोवाइड करता है। अगर आप कोई जरूरी डेटा अपने लैपटॉप में कोई जरूरी डेटा सेव करना चाहते है तो डीएम चार में आपका डेटा पूरी तरह से सेव रहेगा। डीएम चार में फिंगर प्रिंट रीडर ऑपशन दिया गया है जो केवल आपके द्वारा दिए गए फिंगर प्रिंट टच से ही ऑन होगा। लैपटॉप में इलेक्ट्रानिक मीडिया रीडर का खास फीचर दिया गया है जो कैमरे, एमपीतीन प्लेयर और एसडी कार्ड से फास्ट डेटा ट्रांसफरिंग स्पीड प्रोवाइड करता है। यूजर चाहें तो ब्लूटूथ की मदद से डेटा ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा लैपटॉप में क्विक वेब की शार्ट बटन दी गई है जिससे आप अपनी जरूरी नेट साइटों को सर्च कर सकते हैं। कंपनी ने अपने नए लैपटॉप के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है जैसे ही इसकी कीमत के बारे में हमें कोई अपडेट मालूम पड़ता है हम आपको जरूर बताएंगे। |
सदर विधायक पवन नैयर ने कहा कि मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विख्यात खजियार को अब नई पहचान मिलने वाली है। 26 से 28 नवंबर तक खजियार में हिमालयन मोनाल नेशनल एरोफेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के 15 राज्यों के 100 से अधिक पैराग्लाइडर भाग ले रहे हैं। यह अपने आप में पहली ऐसी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए हेलिकाप्टर की व्यवस्था भी मौजूद रहेगी। वह मंगलवार को राष्ट्रीय स्तरीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता की तैयारियों का जायजा लेने के बाद खजियार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक चंबा को जयराम सरकार ने पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान देने के लिए चलो चंबा अभियान को चलाए हुए हैं। इस अभियान के तहत अब तक जिला चंबा में तीन राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा चुका है। 26 से 28 नवंबर तक आयोजित होने वाली इस पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता के माध्यम से पूरे देश में खजियार एक नए आयाम को छुएगा। विधायक ने कहा कि यूं तो खजियार में पिछले कई वर्षों से पैराग्लाइडिंग हो रही थी। मगर इसके लिए स्थानीय लोगों को को चोरी-छिपे यह काम करना पड़ता था।
यही नहीं कई बार पुलिस व वन्य प्राणी विभाग की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता था। जयराम सरकार ने सबसे पहले खजियार के दो स्थानों को पैराग्लाइडिंग के लिए न सिर्फ चिन्हित किया बल्कि स्वीकृति भी प्रदान की। इसके साथ ही पर्यटन विभाग ने 165 आउटडोर फोटोग्राफरों और 65 पैराग्लाइडरों को पंजीकृत किया। सदर विधायक ने कहा कि प्रदेश मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जिला चंबा के विकास को लेकर विशेष तौर पर प्रयासरत हैं और समय-समय पर उनके मार्गदर्शन से इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन जिला चंबा में किया जा रहा है। उन्होंने खजियार में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता की तैयारियों का सदर विधायक ने बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने तैयारियों पर संतोष जताते हुए उपायुक्त चंबा डीसी राणा, एसडीएम चंबा नवीन तंवर, जिला पर्यटन अधिकारी विजय कुमार व लोक निर्माण विभाग मंडल चंबा के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर के कार्यों की सराहना की।
| सदर विधायक पवन नैयर ने कहा कि मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से विख्यात खजियार को अब नई पहचान मिलने वाली है। छब्बीस से अट्ठाईस नवंबर तक खजियार में हिमालयन मोनाल नेशनल एरोफेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के पंद्रह राज्यों के एक सौ से अधिक पैराग्लाइडर भाग ले रहे हैं। यह अपने आप में पहली ऐसी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए हेलिकाप्टर की व्यवस्था भी मौजूद रहेगी। वह मंगलवार को राष्ट्रीय स्तरीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता की तैयारियों का जायजा लेने के बाद खजियार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक चंबा को जयराम सरकार ने पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान देने के लिए चलो चंबा अभियान को चलाए हुए हैं। इस अभियान के तहत अब तक जिला चंबा में तीन राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा चुका है। छब्बीस से अट्ठाईस नवंबर तक आयोजित होने वाली इस पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता के माध्यम से पूरे देश में खजियार एक नए आयाम को छुएगा। विधायक ने कहा कि यूं तो खजियार में पिछले कई वर्षों से पैराग्लाइडिंग हो रही थी। मगर इसके लिए स्थानीय लोगों को को चोरी-छिपे यह काम करना पड़ता था। यही नहीं कई बार पुलिस व वन्य प्राणी विभाग की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता था। जयराम सरकार ने सबसे पहले खजियार के दो स्थानों को पैराग्लाइडिंग के लिए न सिर्फ चिन्हित किया बल्कि स्वीकृति भी प्रदान की। इसके साथ ही पर्यटन विभाग ने एक सौ पैंसठ आउटडोर फोटोग्राफरों और पैंसठ पैराग्लाइडरों को पंजीकृत किया। सदर विधायक ने कहा कि प्रदेश मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जिला चंबा के विकास को लेकर विशेष तौर पर प्रयासरत हैं और समय-समय पर उनके मार्गदर्शन से इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन जिला चंबा में किया जा रहा है। उन्होंने खजियार में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता की तैयारियों का सदर विधायक ने बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने तैयारियों पर संतोष जताते हुए उपायुक्त चंबा डीसी राणा, एसडीएम चंबा नवीन तंवर, जिला पर्यटन अधिकारी विजय कुमार व लोक निर्माण विभाग मंडल चंबा के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर के कार्यों की सराहना की। |
पुलिस लाइन में बिहार पुलिस के 242 महिला सिपाही का ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आज पारण परेड कराया गया। परेड की आखिरी सलामी लेने ट्रेनिंग आईजी विजय प्रसाद वर्मा पुलिस लाइन पहुंचे हुए थे। राष्ट्रगान के साथ परेड की शुरआत की गई। महिला सिपाहियों द्वारा कदम से कदम ताल मिलाकर ग्राउंड में काफ़ी बेहतर प्रदर्शन करने का कार्य किया। पारण परेड करने वाली महिलाओं की कुछ दिनों के छुट्टी के बाद थानों में पोस्टिंग के लिए भेज दिया जायेगा। बताया गया कि नए पुलिस जवान के आने से लॉ एंड ऑर्डर और मजबूत होगा।
पासिंग आउट परेड की शुरुआत सोमवार की सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक हुई। मुख्य अतिथि IG विजय प्रसाद वर्मा ने परेड की सलामी ली। इसके बाद रिक्रूट महिलाओ ने कदमताल कर परेड निकाली। उन्हें देखने के लिए उनके अभिभावक, कार्यक्रम के अतिथि व पुलिस कर्मी मौजूद रहे।
सभी ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षण में प्रथम स्थान और बेहतर करने वाली रिक्रूट महिलाओं को सम्मानित भी किया। मुख्यातिथि ने कहा कि महिला किसी पुरुष से पीछे नहीं हैं और न ही खुद को कमजोर समझें। उनमें ऐसी ताकत है, जिससे वह समाज, पुलिस व देश सेवा में योगदान कर सकती हैं।
SP नीरज कुमार द्वारा बताया गया कि बिहार पुलिस के कई जिले और रेल पुलिस के महिला को पुलिस की ट्रेनिंग दी गई है। बिहार महिला सिपाही का ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आज पारण परेड कराया गया। सभी सिपाहियों को उनके कर्तव्य निष्ठा का पथ पढ़ाने के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर उनके पोस्टिंग जिला भेज का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बक्सर पुलिस लाइन में कुल 242 महिला सिपाहियों को ट्रेंड किया गया।
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| पुलिस लाइन में बिहार पुलिस के दो सौ बयालीस महिला सिपाही का ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आज पारण परेड कराया गया। परेड की आखिरी सलामी लेने ट्रेनिंग आईजी विजय प्रसाद वर्मा पुलिस लाइन पहुंचे हुए थे। राष्ट्रगान के साथ परेड की शुरआत की गई। महिला सिपाहियों द्वारा कदम से कदम ताल मिलाकर ग्राउंड में काफ़ी बेहतर प्रदर्शन करने का कार्य किया। पारण परेड करने वाली महिलाओं की कुछ दिनों के छुट्टी के बाद थानों में पोस्टिंग के लिए भेज दिया जायेगा। बताया गया कि नए पुलिस जवान के आने से लॉ एंड ऑर्डर और मजबूत होगा। पासिंग आउट परेड की शुरुआत सोमवार की सुबह नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक हुई। मुख्य अतिथि IG विजय प्रसाद वर्मा ने परेड की सलामी ली। इसके बाद रिक्रूट महिलाओ ने कदमताल कर परेड निकाली। उन्हें देखने के लिए उनके अभिभावक, कार्यक्रम के अतिथि व पुलिस कर्मी मौजूद रहे। सभी ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षण में प्रथम स्थान और बेहतर करने वाली रिक्रूट महिलाओं को सम्मानित भी किया। मुख्यातिथि ने कहा कि महिला किसी पुरुष से पीछे नहीं हैं और न ही खुद को कमजोर समझें। उनमें ऐसी ताकत है, जिससे वह समाज, पुलिस व देश सेवा में योगदान कर सकती हैं। SP नीरज कुमार द्वारा बताया गया कि बिहार पुलिस के कई जिले और रेल पुलिस के महिला को पुलिस की ट्रेनिंग दी गई है। बिहार महिला सिपाही का ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आज पारण परेड कराया गया। सभी सिपाहियों को उनके कर्तव्य निष्ठा का पथ पढ़ाने के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर उनके पोस्टिंग जिला भेज का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बक्सर पुलिस लाइन में कुल दो सौ बयालीस महिला सिपाहियों को ट्रेंड किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
(www. arya-tv. com)बॉलीवुड फिल्म धूम में अभिनेता ऋतिक रोशन के किरदार ने गाजियाबाद के रहने वाले एक चोर को इस कदर प्रभावित किया कि वह उसी अंदाज में चोरी करने लगा। लेकिन उसकी एक चूक भारी पड़ी और दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। चोर की पहचान रघु खोसला के रूप में हुई है। उसके साथ बागपत पुलिस लाइन में तैनात सिपाही श्रीकांत को भी पकड़ा गया है। सिपाही पर बादली इलाके से क्रेटा कार लूटने का आरोप है। वह बुलंदशहर जिले का रहने वाला है। सिपाही चोर गैंग का सरगना है। पुलिस ने जीपीएस और सीसीटीवी की मदद से इस हाईटेक चोरी का खुलासा किया है।
पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि सोनीपत के रहने वाले रोशन से 17 अगस्त की सुबह मुकरबा चौक करनाल बाइपास के पास श्रीकांत और रघु के साथ बदमाशों ने पिस्टल दिखकर कार, मोबाइल और नकली लूट ली थी। पूछताछ में रोशन ने पुलिस को बताया कि उसकी कार में जीपीएस लगा है। यह पुलिस के लिए तफ्तीश में अहम था। छानबीन के बाद पुलिस ने सिपाही श्रीकांत को दबोच लिया। उसके पास से रोशन का मोबाइल बरामद हुआ। श्रीकांत की मदद से पुलिस गाजियाबाद के वेद विहार निवासी रघु खोसला तक पहुंची।
पुलिस के अनुसार, श्रीकांत 2011 में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। वह क्राइम ब्रांच में भी रहा है। वर्तमान में उसकी तैनाती बागपत पुलिस लाइन में थी। वह लूट की चार वारदातों में शामिल रहा है।
श्रीकांत ने बुलंदशहर में अपने गांव में अमन से दोस्ती की थी। अमन आपराधिक वारदातों में शामिल रहता था। अमन के जरिए श्रीकांत की मुलाकात समीर, सूरज और रघु खोसला से हुई। चारों ने मिलकर गैंग बनाया। सरगना खुद श्रीकांत बना। चारों वारदात को अंजाम देते, उनकी मददद श्रीकांत करता था। रोशन की कार अमन, समीर, सूरज और रघु ने लूटी थी। इसके बाद श्रीकांत के कहने पर कार गाजियाबाद में खड़ा किया था।
यह कार पवन नाम के बदमाश की हत्या के लिए लूटी गई थी। पवन हत्या के मामले में जेल में था। हाल ही में वह पैरोल पर बाहर आया हुआ है। समीर और पवन की रंजिश चल रही है। उसका बदला लेने के लिए कार लूट की योजना बनाई गई है। लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद श्रीकांत चारों आरोपियों को वर्दी पहनाकर पूर्वी दिल्ली आया था।
रघु खोसला शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों में टिकट लेकर चढ़ता है। रात के समय आठ से 10 महिलाओं के पर्स चोरी कर ऐसे रेलवे स्टेशन पर उतर जाता है, जहां से एयरपोर्ट नजदीक हो। चोरी का माल लेकर वह हवाई जहाज से दिल्ली वापस लौट आता है। वह ट्रेन में 100 से अधिक चोरी की वारदातों में शामिल रहा है।
| बॉलीवुड फिल्म धूम में अभिनेता ऋतिक रोशन के किरदार ने गाजियाबाद के रहने वाले एक चोर को इस कदर प्रभावित किया कि वह उसी अंदाज में चोरी करने लगा। लेकिन उसकी एक चूक भारी पड़ी और दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। चोर की पहचान रघु खोसला के रूप में हुई है। उसके साथ बागपत पुलिस लाइन में तैनात सिपाही श्रीकांत को भी पकड़ा गया है। सिपाही पर बादली इलाके से क्रेटा कार लूटने का आरोप है। वह बुलंदशहर जिले का रहने वाला है। सिपाही चोर गैंग का सरगना है। पुलिस ने जीपीएस और सीसीटीवी की मदद से इस हाईटेक चोरी का खुलासा किया है। पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि सोनीपत के रहने वाले रोशन से सत्रह अगस्त की सुबह मुकरबा चौक करनाल बाइपास के पास श्रीकांत और रघु के साथ बदमाशों ने पिस्टल दिखकर कार, मोबाइल और नकली लूट ली थी। पूछताछ में रोशन ने पुलिस को बताया कि उसकी कार में जीपीएस लगा है। यह पुलिस के लिए तफ्तीश में अहम था। छानबीन के बाद पुलिस ने सिपाही श्रीकांत को दबोच लिया। उसके पास से रोशन का मोबाइल बरामद हुआ। श्रीकांत की मदद से पुलिस गाजियाबाद के वेद विहार निवासी रघु खोसला तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, श्रीकांत दो हज़ार ग्यारह में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। वह क्राइम ब्रांच में भी रहा है। वर्तमान में उसकी तैनाती बागपत पुलिस लाइन में थी। वह लूट की चार वारदातों में शामिल रहा है। श्रीकांत ने बुलंदशहर में अपने गांव में अमन से दोस्ती की थी। अमन आपराधिक वारदातों में शामिल रहता था। अमन के जरिए श्रीकांत की मुलाकात समीर, सूरज और रघु खोसला से हुई। चारों ने मिलकर गैंग बनाया। सरगना खुद श्रीकांत बना। चारों वारदात को अंजाम देते, उनकी मददद श्रीकांत करता था। रोशन की कार अमन, समीर, सूरज और रघु ने लूटी थी। इसके बाद श्रीकांत के कहने पर कार गाजियाबाद में खड़ा किया था। यह कार पवन नाम के बदमाश की हत्या के लिए लूटी गई थी। पवन हत्या के मामले में जेल में था। हाल ही में वह पैरोल पर बाहर आया हुआ है। समीर और पवन की रंजिश चल रही है। उसका बदला लेने के लिए कार लूट की योजना बनाई गई है। लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद श्रीकांत चारों आरोपियों को वर्दी पहनाकर पूर्वी दिल्ली आया था। रघु खोसला शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों में टिकट लेकर चढ़ता है। रात के समय आठ से दस महिलाओं के पर्स चोरी कर ऐसे रेलवे स्टेशन पर उतर जाता है, जहां से एयरपोर्ट नजदीक हो। चोरी का माल लेकर वह हवाई जहाज से दिल्ली वापस लौट आता है। वह ट्रेन में एक सौ से अधिक चोरी की वारदातों में शामिल रहा है। |
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए रिटेंशन के तहत जिन खिलाड़ियों को रखा हैं उसकी लिस्ट 4 जनवरी को शाम को कर दी गयी हैं जिसमें कई बड़े खिलाड़ियों को रिटेन नहीं हैं और कई चौंकाने वाले नाम भी सामने आये हैं। जी हाँ, इस बार रिटेंशन पालिसी जारी की गई है, जिसमें कोई भी टीम रिटेन के अंतर्गत अधिकतम 3 खिलाड़ियों को बनाये रख सकती थी और 2 खिलाड़ियों को राईट टू मैच यानि आर टी एम कार्ड से।
इसी बीच रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने भी अपने ख़ास तीन खिलाड़ियों को बनाये रखा हैं जिसमें कप्तान विराट कोहली को सबसे ज्यादा 17 करोड़ में और जबकि एबी डिविलियर्स और सबसे चौंका देने वाले सरफराज खान को भी बैंगलोर ने रिटेन किया हैं।
इसी बीच ख़ास बात यह हैं बैंगलोर ने न तो हार्ड हिटर क्रिस गेल को रिटेन किया और न ही साल 2017 के सबसे बेस्ट गेंदबाज चहल को लेकिन इन्होंने 20 वर्षीय सरफराज खान पर भरोसा किया हैं जिन्होंने अभी तक इतना ज्यादा क्रिकेट तो नहीं खेला हैं। तो अब देखना यही होगा कि क्या सरफराज अपने आप को आईपीएल 11 में साबित कर पायेंगे।
इसी बीच ख़बरें यह मिल रही है कि एक बार कप्तान विराट कोहली ने सरफराज खान को उनके वजन के कारण कहा था कि आप अपना पहले वजन को कम करो फिर बाद में ही आपको मौका दिया जाएगा, अर्थात आपको बता दें कि सरफराज खान उम्र में भले 20 साल के है, लेकिन इनपर मोटापा आमतौर पर काफी देखा जा सकता हैं। इस कारण विराट से भी यह डांट सुननी पड़ी थी। इसी बिच सरफराज खान ने अपने कप्तान विराट कोहली की बात को नजरअंदाज नहीं किया और आज अच्छी फिटनेस के साथ नजर आ रहे हैं।
इस प्रकार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर द्वारा रिटेन किये जाने के बाद सरफराज खान का एक वीडियो रॉयल चैलेंजर्स ने ट्विटर पर अपलोड किया हैं, जिसमें इन्होंने बैंगलोर टीम मैनेजमेंट और विराट कोहली को धन्यवाद दिया हैं।
| इंडियन प्रीमियर लीग के लिए रिटेंशन के तहत जिन खिलाड़ियों को रखा हैं उसकी लिस्ट चार जनवरी को शाम को कर दी गयी हैं जिसमें कई बड़े खिलाड़ियों को रिटेन नहीं हैं और कई चौंकाने वाले नाम भी सामने आये हैं। जी हाँ, इस बार रिटेंशन पालिसी जारी की गई है, जिसमें कोई भी टीम रिटेन के अंतर्गत अधिकतम तीन खिलाड़ियों को बनाये रख सकती थी और दो खिलाड़ियों को राईट टू मैच यानि आर टी एम कार्ड से। इसी बीच रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने भी अपने ख़ास तीन खिलाड़ियों को बनाये रखा हैं जिसमें कप्तान विराट कोहली को सबसे ज्यादा सत्रह करोड़ में और जबकि एबी डिविलियर्स और सबसे चौंका देने वाले सरफराज खान को भी बैंगलोर ने रिटेन किया हैं। इसी बीच ख़ास बात यह हैं बैंगलोर ने न तो हार्ड हिटर क्रिस गेल को रिटेन किया और न ही साल दो हज़ार सत्रह के सबसे बेस्ट गेंदबाज चहल को लेकिन इन्होंने बीस वर्षीय सरफराज खान पर भरोसा किया हैं जिन्होंने अभी तक इतना ज्यादा क्रिकेट तो नहीं खेला हैं। तो अब देखना यही होगा कि क्या सरफराज अपने आप को आईपीएल ग्यारह में साबित कर पायेंगे। इसी बीच ख़बरें यह मिल रही है कि एक बार कप्तान विराट कोहली ने सरफराज खान को उनके वजन के कारण कहा था कि आप अपना पहले वजन को कम करो फिर बाद में ही आपको मौका दिया जाएगा, अर्थात आपको बता दें कि सरफराज खान उम्र में भले बीस साल के है, लेकिन इनपर मोटापा आमतौर पर काफी देखा जा सकता हैं। इस कारण विराट से भी यह डांट सुननी पड़ी थी। इसी बिच सरफराज खान ने अपने कप्तान विराट कोहली की बात को नजरअंदाज नहीं किया और आज अच्छी फिटनेस के साथ नजर आ रहे हैं। इस प्रकार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर द्वारा रिटेन किये जाने के बाद सरफराज खान का एक वीडियो रॉयल चैलेंजर्स ने ट्विटर पर अपलोड किया हैं, जिसमें इन्होंने बैंगलोर टीम मैनेजमेंट और विराट कोहली को धन्यवाद दिया हैं। |
खबर के अनुसार सरकारी नौकरी करने वाले पति-पत्नी में से एक की भी मौत हो जाती हैं तो अब आश्रित परिवार को भी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दिया जायेगा। इसको लेकर बिहार सरकार के द्वारा भी स्वीकृति दे दी गई हैं।
आपको बता दें की इससे पहले बिहार में पति-पत्नी दोनों के सेवा में रहने पर किसी एक की मौत होने की स्थिति में उनके परिवार को अनुकंपा पर नौकरी नहीं मिलती थी। लेकिन सरकार ने अब इस स्थिति में भी अनुकंपा पर नौकरी देने की स्वीकृति दी हैं।
वहीं सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा की अनुकंपा बहाली में जिस वर्ग में उन्हें नियुक्ति दी जाएगी, उसके लिए उम्मीदवार को निर्धारित योग्यता की शर्तें को पूरा करना होगा। योग्यता पूरी करने के बाद ही उन्हें सरकारी सेवा में रखा जायेगा।
| खबर के अनुसार सरकारी नौकरी करने वाले पति-पत्नी में से एक की भी मौत हो जाती हैं तो अब आश्रित परिवार को भी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दिया जायेगा। इसको लेकर बिहार सरकार के द्वारा भी स्वीकृति दे दी गई हैं। आपको बता दें की इससे पहले बिहार में पति-पत्नी दोनों के सेवा में रहने पर किसी एक की मौत होने की स्थिति में उनके परिवार को अनुकंपा पर नौकरी नहीं मिलती थी। लेकिन सरकार ने अब इस स्थिति में भी अनुकंपा पर नौकरी देने की स्वीकृति दी हैं। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा की अनुकंपा बहाली में जिस वर्ग में उन्हें नियुक्ति दी जाएगी, उसके लिए उम्मीदवार को निर्धारित योग्यता की शर्तें को पूरा करना होगा। योग्यता पूरी करने के बाद ही उन्हें सरकारी सेवा में रखा जायेगा। |
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भारत की पवित्र नदी गंगा के तट पर बसा बनारस सदियों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह वह पवित्र भूमि है, जिसके कण-कण में तुलसीदास विराजते हैं। बनारस का सबसे बड़ा आकर्षक गंगा नदी पर बने वे आकर्षक घाट हैं जिन्हें विभिन्न शासकों ने अपने-अपने शासनकाल में इन्हें बनाया और समय-समय पर इन घाटों का जीर्णोंद्धार किया जाता रहा है।
कोई अगर बनारस जाए तो भला उन घाटों में एक घाट ऐसा भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि तुलसीदास ने यहां 'रामचरितमानस' की रचना की थी। मैं भी जब बनारस घूमने के लिए गया तो वहां के घाट और गंगा आरती देखने की इच्छा दबा नहीं पाया और मैं निकल पड़ा इन घाटों को देखने के लिए। यह घाट अन्य घाटों की तुलना में थोड़ा ऊंचा व अलग दिखायी देता है। वहां एक बंदर 'चौकीदारी' कर रहा था, उसने मुझे गुस्से से देखा लेकिन मुझे आगे बढ़ने दिया, रोका नहीं। मैं दर्जन भर सीढ़ियां ऊपर चढ़ा तो सामने बोर्ड पर लिखा था- तुलसी घाट। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि अवधी में 'रामचरितमानस' रचने वाले संत, कवि और लेखक तुलसीदास 16 वी शताब्दी में यही आकर रहते थे और उन्होंने इसी घाट पर बै"कर अपने ग्रंथ रामचरितमानस लिखा करते थे। राम के लिए मंदिर भी यहीं बनाया गया।
यह जगह जितनी मशहूर है उससे मुझे लगा था कि इसे आसानी से पहचान लिया जायेगा, लेकिन जैसे-जैसे मैं हांफता हुआ सीढ़ियों पर चढ़ता जा रहा था तो बात इसके एकदम उलट लग रही थी। जब मैं ऊपर आंगन में पहुंचा और मदद के लिए इधर-उधर देखा तो कोई इंसान नजर नहीं आया। लेकिन कुछ मिनट बाद एक व्यक्ति हाथ में दूध का डिब्बा लिए हुए दिखाई दिया। मैंने उससे तुलसीदास के घर का पता पूछा। उसने सामने की पतली गली की ओर इशारा किया जहां कई सारे मकान बने हुए हैं। दूर से सारे घर एक से ही दिखाई दे रहे थे।
जब मैं करीब पहुंचा तो एक घर के बाहर कुछ जूते व चप्पल उतरे हुए रखे थे, जो इस बात का संकेत था कि इस घर का कुछ अलग ही महत्व है।
एक गलियारा नुमा फ्रवेश द्वार मुझे बालकनी में ले गया जहां से घाट नजर आ रहे थे। बालकनी के किनारे वाली दीवार में बने छेद से मैंने अंदर झांक कर देखा तो अंदर मन्दिर बना हुआ था। एक पुजारी सोने के छत्र के नीचे स्थापित हनुमान की मूर्ति के समक्ष नतमस्तक होकर फ्रार्थना पुस्तक से पढ़ रहा था।
मूर्ति के सामने संगमरमर का चबूतरा है जिस पर सफेद मार्बल से बने तुलसीदास के खड़ाऊं हैं, लेकिन वर्षों से भक्तों द्वारा कुमकुम अर्पण के कारण उनका रंग बदल गया है।
मैंने पुजारी से पूछा, क्या तुलसीदास यहीं रहते थे? ' उन्होंने जवाब दिया, "हां, वह यहीं लगभग 500 वर्ष पहले रहते थे। यह बनारस के उन घरों में से एक है जहां वह रहते थे, लेकिन यहां वह सबसे अधिक समय के लिए रहे थे। '
वह यहां पर क्या करते थे? '
यहां वह अपना अधिकतर समय राम की पूजा करने में व्यतीत करते थे। यहीं पर उन्होंने रामचरितमानस को पूर्ण किया था। '
मैंने सुना है कि उस समय के बहुत से विद्वानों ने उनके कार्य की फ्रमाणिकता को चुनौती दी थी। '
हां, यह बात सही है। एक बार बनारस के ब्राह्मणों ने रामचरितमानस के महत्व को जानने का फ्रयास किया। उन्होंने उस विश्वनाथ मंदिर में वेदों व अन्य धर्मग्रन्थों के नीचे रात भर के लिए दबाकर रख दिया। अगली सुबह जब उन्होंने कपाट खोले तो रामचरितमानस सबसे ऊपर थी और उस पर सत्यम शिवम् सुन्दरम् लिखा हुआ था। '
मुझे संत-कवि के बारे में कुछ और बताएं।
तुलसीदास राम के भक्त और वाल्मीकि के अवतार थे। उनके लिए राम, विष्णु सहित सभी देवताओं से ऊपर थे। वह राम के जीवन से इतने फ्रभावित थे कि उन्होंने बनारस में वार्षिक रामलीला को चर्चित बनाया और उत्तर भारत में हनुमान की पूजा को बढ़ावा दिया। तुलसीदास का निधन 80 वर्ष की आयु में 1623 में हुआ। '
जब मैंने सूरज को गंगा में डूबते हुए और घाटों पर पानी की छाया को लम्बा होते हुए देखा तो मैंने वापस लौटने का इरादा किया।
पुजारी ने कहा, "जाने से पहले तुम्हें राम मन्दिर के दर्शन करने चाहिए, जो कि बालकनी के अंत में है। ' मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं और पतले गलियारे से बाहर निकलता हूं और बालकनी पर चलते हुए राम मन्दिर की तरफ जाने के लिए मुड़ता हूं, लेकिन बंदरों की पूरी टोली सामने आ जाती है और मुझे डराने का फ्रयास करती है। स्पष्ट है कि वह नहीं चाहते कि मैं मन्दिर में फ्रवेश करूं। 'रामायण' की रचना के हजारों वर्ष बाद भी यह छोटे 'हनुमान' अपने फ्रिय राम के जबरदस्त वफादार हैं। मैंने वहां से हटना ही बेहतर समझा।
राम और तुलसीदास बनारस की जीवित परम्परा का अटूट हिस्सा हैं। इस बात को अनुभव करने की सबसे अच्छी जगह तुलसी मानस मन्दिर है जो कि "ाrक बनारस के बीच में है। उस मंदिर में जाकर राम के दर्शन लाभ से मैं खुद को वंचित न रख सका। एक दिन सुबह मैं उस मंदिर में जाने के लिए होटल से निकल पड़ा। मंदिर के बाहर एक शानदार सफेद संगमरमर का चबूतरा दिखायी दिया, ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण 20 वी शताब्दी के मध्य में राम के सबसे बड़े भक्त तुलसीदास के सम्मान में किया गया था।
मैं मंदिर के अंदर खड़ा हुआ था कि कुछ लोग मेरे पास से होते हुए विशाल मुख्य हॉल में प्रविष्ट हुए। बायी तरफ तुलसीदास की मूर्ति है, प्लास्टिक से बनी हुई और वह बै"s हुए अपने महाकाव्य के पृष्" पलट रहे हैं व 'राम राम' जप रहे हैं। भक्त यहां कुछ देर रुकते हैं और इस रोबोटिक चमत्कार का आनंद लेते हैं।
दूसरे भक्तगण हॉल में आगे की ओर बढ़ते हैं जिसके दूसरी तरफ सीता, राम व लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित हैं। वह अपने फ्रिय राम के दर्शन करके फ्रसन्न हैं। कुछ पूर्ण समर्पण भाव से मूर्तियों के आगे दंडवत हो जाते हैं और अन्य हाथ जोड़ कर खड़े रहते हैं, भावविभोर होकर। मैं भक्तों के पीछे-पीछे पहले माले पर जाता हूं जहां पूरी रामचरितमानस दीवार पर लगे मार्बल पैनलों पर खुदी हुई है। लेकिन जो बात सबसे अधिक आकर्षित करती है वह यह है कि गलियारे के अंत में जो म्यूजियम है उसमें रामायण के बहुत से दृश्य हैं जिन्हें मशीनों द्वारा संचालित किया जाता है उन्हें देखकर लगता है कि मानो वे अभी सजीव हो उ"sंगे।
नयी पीढ़ी का एक लड़का हैरान होकर अपने दादा की बातें सुन रहा था, जो उसे यह बता रहे थे कि किस तरह रावण ने सीता का अपहरण किया था। भक्तों का एक अन्य समूह जटायू को देख रहा है कि किस फ्रकार वह मरने से पहले हर किसी को सीता के अपहरण के बारे में बताते हैं।
सीढ़ियों से उतरते हुए मैं सोच रहा था कि यहां के लोगों के लिए राम, लक्ष्मण, सीता या फिर तुलसीदास महाकाव्य के पात्र केवल उनके नायक नहीं हैं, यह केवल कहानी का हिस्सा नहीं हैं बल्कि जीवित देवता हैं, भगवान हैं, जिनको वह न केवल पूजते हैं बल्कि उनको जीते भी हैं।
| भारत की पवित्र नदी गंगा के तट पर बसा बनारस सदियों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह वह पवित्र भूमि है, जिसके कण-कण में तुलसीदास विराजते हैं। बनारस का सबसे बड़ा आकर्षक गंगा नदी पर बने वे आकर्षक घाट हैं जिन्हें विभिन्न शासकों ने अपने-अपने शासनकाल में इन्हें बनाया और समय-समय पर इन घाटों का जीर्णोंद्धार किया जाता रहा है। कोई अगर बनारस जाए तो भला उन घाटों में एक घाट ऐसा भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि तुलसीदास ने यहां 'रामचरितमानस' की रचना की थी। मैं भी जब बनारस घूमने के लिए गया तो वहां के घाट और गंगा आरती देखने की इच्छा दबा नहीं पाया और मैं निकल पड़ा इन घाटों को देखने के लिए। यह घाट अन्य घाटों की तुलना में थोड़ा ऊंचा व अलग दिखायी देता है। वहां एक बंदर 'चौकीदारी' कर रहा था, उसने मुझे गुस्से से देखा लेकिन मुझे आगे बढ़ने दिया, रोका नहीं। मैं दर्जन भर सीढ़ियां ऊपर चढ़ा तो सामने बोर्ड पर लिखा था- तुलसी घाट। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि अवधी में 'रामचरितमानस' रचने वाले संत, कवि और लेखक तुलसीदास सोलह वी शताब्दी में यही आकर रहते थे और उन्होंने इसी घाट पर बै"कर अपने ग्रंथ रामचरितमानस लिखा करते थे। राम के लिए मंदिर भी यहीं बनाया गया। यह जगह जितनी मशहूर है उससे मुझे लगा था कि इसे आसानी से पहचान लिया जायेगा, लेकिन जैसे-जैसे मैं हांफता हुआ सीढ़ियों पर चढ़ता जा रहा था तो बात इसके एकदम उलट लग रही थी। जब मैं ऊपर आंगन में पहुंचा और मदद के लिए इधर-उधर देखा तो कोई इंसान नजर नहीं आया। लेकिन कुछ मिनट बाद एक व्यक्ति हाथ में दूध का डिब्बा लिए हुए दिखाई दिया। मैंने उससे तुलसीदास के घर का पता पूछा। उसने सामने की पतली गली की ओर इशारा किया जहां कई सारे मकान बने हुए हैं। दूर से सारे घर एक से ही दिखाई दे रहे थे। जब मैं करीब पहुंचा तो एक घर के बाहर कुछ जूते व चप्पल उतरे हुए रखे थे, जो इस बात का संकेत था कि इस घर का कुछ अलग ही महत्व है। एक गलियारा नुमा फ्रवेश द्वार मुझे बालकनी में ले गया जहां से घाट नजर आ रहे थे। बालकनी के किनारे वाली दीवार में बने छेद से मैंने अंदर झांक कर देखा तो अंदर मन्दिर बना हुआ था। एक पुजारी सोने के छत्र के नीचे स्थापित हनुमान की मूर्ति के समक्ष नतमस्तक होकर फ्रार्थना पुस्तक से पढ़ रहा था। मूर्ति के सामने संगमरमर का चबूतरा है जिस पर सफेद मार्बल से बने तुलसीदास के खड़ाऊं हैं, लेकिन वर्षों से भक्तों द्वारा कुमकुम अर्पण के कारण उनका रंग बदल गया है। मैंने पुजारी से पूछा, क्या तुलसीदास यहीं रहते थे? ' उन्होंने जवाब दिया, "हां, वह यहीं लगभग पाँच सौ वर्ष पहले रहते थे। यह बनारस के उन घरों में से एक है जहां वह रहते थे, लेकिन यहां वह सबसे अधिक समय के लिए रहे थे। ' वह यहां पर क्या करते थे? ' यहां वह अपना अधिकतर समय राम की पूजा करने में व्यतीत करते थे। यहीं पर उन्होंने रामचरितमानस को पूर्ण किया था। ' मैंने सुना है कि उस समय के बहुत से विद्वानों ने उनके कार्य की फ्रमाणिकता को चुनौती दी थी। ' हां, यह बात सही है। एक बार बनारस के ब्राह्मणों ने रामचरितमानस के महत्व को जानने का फ्रयास किया। उन्होंने उस विश्वनाथ मंदिर में वेदों व अन्य धर्मग्रन्थों के नीचे रात भर के लिए दबाकर रख दिया। अगली सुबह जब उन्होंने कपाट खोले तो रामचरितमानस सबसे ऊपर थी और उस पर सत्यम शिवम् सुन्दरम् लिखा हुआ था। ' मुझे संत-कवि के बारे में कुछ और बताएं। तुलसीदास राम के भक्त और वाल्मीकि के अवतार थे। उनके लिए राम, विष्णु सहित सभी देवताओं से ऊपर थे। वह राम के जीवन से इतने फ्रभावित थे कि उन्होंने बनारस में वार्षिक रामलीला को चर्चित बनाया और उत्तर भारत में हनुमान की पूजा को बढ़ावा दिया। तुलसीदास का निधन अस्सी वर्ष की आयु में एक हज़ार छः सौ तेईस में हुआ। ' जब मैंने सूरज को गंगा में डूबते हुए और घाटों पर पानी की छाया को लम्बा होते हुए देखा तो मैंने वापस लौटने का इरादा किया। पुजारी ने कहा, "जाने से पहले तुम्हें राम मन्दिर के दर्शन करने चाहिए, जो कि बालकनी के अंत में है। ' मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं और पतले गलियारे से बाहर निकलता हूं और बालकनी पर चलते हुए राम मन्दिर की तरफ जाने के लिए मुड़ता हूं, लेकिन बंदरों की पूरी टोली सामने आ जाती है और मुझे डराने का फ्रयास करती है। स्पष्ट है कि वह नहीं चाहते कि मैं मन्दिर में फ्रवेश करूं। 'रामायण' की रचना के हजारों वर्ष बाद भी यह छोटे 'हनुमान' अपने फ्रिय राम के जबरदस्त वफादार हैं। मैंने वहां से हटना ही बेहतर समझा। राम और तुलसीदास बनारस की जीवित परम्परा का अटूट हिस्सा हैं। इस बात को अनुभव करने की सबसे अच्छी जगह तुलसी मानस मन्दिर है जो कि "ाrक बनारस के बीच में है। उस मंदिर में जाकर राम के दर्शन लाभ से मैं खुद को वंचित न रख सका। एक दिन सुबह मैं उस मंदिर में जाने के लिए होटल से निकल पड़ा। मंदिर के बाहर एक शानदार सफेद संगमरमर का चबूतरा दिखायी दिया, ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण बीस वी शताब्दी के मध्य में राम के सबसे बड़े भक्त तुलसीदास के सम्मान में किया गया था। मैं मंदिर के अंदर खड़ा हुआ था कि कुछ लोग मेरे पास से होते हुए विशाल मुख्य हॉल में प्रविष्ट हुए। बायी तरफ तुलसीदास की मूर्ति है, प्लास्टिक से बनी हुई और वह बै"s हुए अपने महाकाव्य के पृष्" पलट रहे हैं व 'राम राम' जप रहे हैं। भक्त यहां कुछ देर रुकते हैं और इस रोबोटिक चमत्कार का आनंद लेते हैं। दूसरे भक्तगण हॉल में आगे की ओर बढ़ते हैं जिसके दूसरी तरफ सीता, राम व लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित हैं। वह अपने फ्रिय राम के दर्शन करके फ्रसन्न हैं। कुछ पूर्ण समर्पण भाव से मूर्तियों के आगे दंडवत हो जाते हैं और अन्य हाथ जोड़ कर खड़े रहते हैं, भावविभोर होकर। मैं भक्तों के पीछे-पीछे पहले माले पर जाता हूं जहां पूरी रामचरितमानस दीवार पर लगे मार्बल पैनलों पर खुदी हुई है। लेकिन जो बात सबसे अधिक आकर्षित करती है वह यह है कि गलियारे के अंत में जो म्यूजियम है उसमें रामायण के बहुत से दृश्य हैं जिन्हें मशीनों द्वारा संचालित किया जाता है उन्हें देखकर लगता है कि मानो वे अभी सजीव हो उ"sंगे। नयी पीढ़ी का एक लड़का हैरान होकर अपने दादा की बातें सुन रहा था, जो उसे यह बता रहे थे कि किस तरह रावण ने सीता का अपहरण किया था। भक्तों का एक अन्य समूह जटायू को देख रहा है कि किस फ्रकार वह मरने से पहले हर किसी को सीता के अपहरण के बारे में बताते हैं। सीढ़ियों से उतरते हुए मैं सोच रहा था कि यहां के लोगों के लिए राम, लक्ष्मण, सीता या फिर तुलसीदास महाकाव्य के पात्र केवल उनके नायक नहीं हैं, यह केवल कहानी का हिस्सा नहीं हैं बल्कि जीवित देवता हैं, भगवान हैं, जिनको वह न केवल पूजते हैं बल्कि उनको जीते भी हैं। |
कोले हैं, जिन की बड़ाई अल्लाह ही को मालूम है। वे कीलें पुल सिरात पर चलने वालों को बंद आमालियों की वजह से घसीट कर दोज़ख़ गिराने की कोशिश करेंगी, जिसके नतीजे में कुछ हलाक होकर (दोज़ख़ में) गिर जाएंगे (और कभी न निकल सकेंगे, ये काफिर होंगे) और कुछ कट-कटाकर दोज़ख़ में गिरेंगे और फिर नजात पा जाएंगे (ये फासिक होंगे) ।
दूसरी रिवायत में है कि कुछ मोमिन पलक झपकने में गुज़र जाएंगे और कुछ बिजली की तरह जल्दी से गुज़र जाएंगे । और कुछ हवा की तरह और कुछ तेज़ घोड़ों और ऊंटों की तरह, इन रफ़्तारों में कुछ सलामती के साथ नजात पा जाएंगे और कुछ (कीलों से) छिल-छिलाकर छूट जाएंगे और कुछ दोज़ख़ में औंधे धकेल दिए जाएंगे।
- बुख़ारी व मुस्लिम हज़रत काब रजि० फरमाते थे कि जहन्नम अपनी पीठ पर तमाम लोगों को जमा लेगा । जब सब नेक व बद जमा हो जाएंगे तो अल्लाह तआला का इर्शाद होगा कि तू अपनों को पकड़ ले, जन्नतियों को छोड़ दे। जहन्नम बुरों का निवाला कर जाएगा, जिनको वह इस तरह पहचानता होगा जैसे तुम अपनी औलाद को पहचानते हो, बल्कि उससे भी ज्यादा । - इब्ने कसीर
हासिल यह है कि जन्नत वाले पार होकर जन्नत में पहुंच जाएंगे जिनके लिए जन्नत के दरवाज़े पहले से खुले हुए होंगे और दोज़ख़ी दोज़ख़ में झोंक दिए जाएंगे, जिसको अल्लाह जल्ल शानुहू ने यों बयान फरमाया हैः
ثم ننجي الذين اتقوا ونذر الظلمين فيها جنباه
सुम्म नुनज्जिल्लज़ी- नत्-तकौ व नज़-रुज्ज़ालिमी-न फीहा जिसिय्या.
- सूरः मरयमः 72
'फिर हम उनको नजात देंगे जो डरा करते थे और जालिमों को 1. खुलासा, मार, मतलब | कोले हैं, जिन की बड़ाई अल्लाह ही को मालूम है। वे कीलें पुल सिरात पर चलने वालों को बंद आमालियों की वजह से घसीट कर दोज़ख़ गिराने की कोशिश करेंगी, जिसके नतीजे में कुछ हलाक होकर गिर जाएंगे और कुछ कट-कटाकर दोज़ख़ में गिरेंगे और फिर नजात पा जाएंगे । दूसरी रिवायत में है कि कुछ मोमिन पलक झपकने में गुज़र जाएंगे और कुछ बिजली की तरह जल्दी से गुज़र जाएंगे । और कुछ हवा की तरह और कुछ तेज़ घोड़ों और ऊंटों की तरह, इन रफ़्तारों में कुछ सलामती के साथ नजात पा जाएंगे और कुछ छिल-छिलाकर छूट जाएंगे और कुछ दोज़ख़ में औंधे धकेल दिए जाएंगे। - बुख़ारी व मुस्लिम हज़रत काब रजिशून्य फरमाते थे कि जहन्नम अपनी पीठ पर तमाम लोगों को जमा लेगा । जब सब नेक व बद जमा हो जाएंगे तो अल्लाह तआला का इर्शाद होगा कि तू अपनों को पकड़ ले, जन्नतियों को छोड़ दे। जहन्नम बुरों का निवाला कर जाएगा, जिनको वह इस तरह पहचानता होगा जैसे तुम अपनी औलाद को पहचानते हो, बल्कि उससे भी ज्यादा । - इब्ने कसीर हासिल यह है कि जन्नत वाले पार होकर जन्नत में पहुंच जाएंगे जिनके लिए जन्नत के दरवाज़े पहले से खुले हुए होंगे और दोज़ख़ी दोज़ख़ में झोंक दिए जाएंगे, जिसको अल्लाह जल्ल शानुहू ने यों बयान फरमाया हैः ثم ننجي الذين اتقوا ونذر الظلمين فيها جنباه सुम्म नुनज्जिल्लज़ी- नत्-तकौ व नज़-रुज्ज़ालिमी-न फीहा जिसिय्या. - सूरः मरयमः बहत्तर 'फिर हम उनको नजात देंगे जो डरा करते थे और जालिमों को एक. खुलासा, मार, मतलब |
बॉलीवुड की मस्त मुलगी बोले तो हमारी खूबसूरत मोहतरमा हम बात कर रहे है दीपिका पादुकोणे के बारे में जो के एक बार फिर से अपने प्रेमी के चलते सुर्खियों में बन आई है. वैसे भी दीपिका के बॉयफ्रेंड बोले तो हमारे छिछोरे एक्टर रणवीर सिंह जो के एक बार फिर से अपनी आगामी फिल्म 'पद्मावती' के चलते सुर्खियों में बन आए है. वैसे भी बॉलीवुड का यह मस्तमौला छेलछबीला अपनी अटपटी ड्रेस के चलते भी हमेशा से ही सुर्खियों में बना रहता है.
एक बार फिर से जब रणवीर सिंह अपने अलबेले ड्रेसअप के चलते नजर आए तो उनकी जान दीपिका पादुकोण की भी हंसी निकल पड़ी. जी हां, रणवीर ने एक तस्वीर ट्वीट की. यह तस्वीर जीक्यू मैगजीन के अवॉर्ड नाइट की थी. दरअसल, रणवीर जीक्यू के 50 प्रभावशाली हस्तियों में शामिल थे.
यह तस्वीर ट्वीट करने पर एक तरफ जहां रणवीर के लिए बधाइयों का तांता लग गया वहीं. दीपिका की नजर उनकी ड्रेस पर रही. रणवीर की तस्वीर रीट्वीट करते हुए दीपिका ने लिखा, नहीं. . . रणवीर ने इस इवेंट में डिजाइनर राजेश प्रताप सिंह की ड्रेस पहनी थी. बहरहाल अभी तो यह दोनों ही अभिनेता अपने अपने फ़िल्मी प्रोजक्ट में व्यस्त चल रहे है.
| बॉलीवुड की मस्त मुलगी बोले तो हमारी खूबसूरत मोहतरमा हम बात कर रहे है दीपिका पादुकोणे के बारे में जो के एक बार फिर से अपने प्रेमी के चलते सुर्खियों में बन आई है. वैसे भी दीपिका के बॉयफ्रेंड बोले तो हमारे छिछोरे एक्टर रणवीर सिंह जो के एक बार फिर से अपनी आगामी फिल्म 'पद्मावती' के चलते सुर्खियों में बन आए है. वैसे भी बॉलीवुड का यह मस्तमौला छेलछबीला अपनी अटपटी ड्रेस के चलते भी हमेशा से ही सुर्खियों में बना रहता है. एक बार फिर से जब रणवीर सिंह अपने अलबेले ड्रेसअप के चलते नजर आए तो उनकी जान दीपिका पादुकोण की भी हंसी निकल पड़ी. जी हां, रणवीर ने एक तस्वीर ट्वीट की. यह तस्वीर जीक्यू मैगजीन के अवॉर्ड नाइट की थी. दरअसल, रणवीर जीक्यू के पचास प्रभावशाली हस्तियों में शामिल थे. यह तस्वीर ट्वीट करने पर एक तरफ जहां रणवीर के लिए बधाइयों का तांता लग गया वहीं. दीपिका की नजर उनकी ड्रेस पर रही. रणवीर की तस्वीर रीट्वीट करते हुए दीपिका ने लिखा, नहीं. . . रणवीर ने इस इवेंट में डिजाइनर राजेश प्रताप सिंह की ड्रेस पहनी थी. बहरहाल अभी तो यह दोनों ही अभिनेता अपने अपने फ़िल्मी प्रोजक्ट में व्यस्त चल रहे है. |
Beauty Tips: टी ट्री प्लांट (Tea Tree Plant) और आम ब्लैक और ग्रीन टी (Black or Green Tea) जो आप पीते हैं एक जैसे नहीं हैं। टी ट्री ऑयल से स्किन की कई सारी कंडीशन (Skin Condition) के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके एंटीबैक्टीरियल (Antibacterial) और एंटी-एलर्जी (Anti Allergy) गुणों के कारण, आप मुंहासे, फोड़े और अन्य स्किन इंफेक्शन के लिए टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil) का उपयोग कर सकते हैं। इसके एंटीसेप्टिक (Antiseptic) गुण मुंह, गले और कान के इंफेक्शन से लड़ने में भी मदद करते हैं। टी ट्री ऑयल को आमतौर पर नींबू, लैवेंडर, एलोवेरा, विच हेज़ल, और नारियल, जैतून और बादाम जैसे तेलों के साथ मिलाकर त्वचा के लिए कई प्रकार के सौंदर्य उपचार तैयार किए जाते हैं। यहां हम आपको एक्ने से छुटकारा दिलाने के लिए टी ट्री ऑयल के कुछ उपायों के बारे में बता रहे हैं।
मुंहासों के स्पॉट ट्रीटमेंट के लिए दो चम्मच एलोवेरा जेल में 1 चम्मच टी ट्री ऑयल मिलाएं। मिश्रण को कांच की शीशी में भरकर रख लें। अपना चेहरा धोने के बाद, दिन में दो बार क्यू-टिप या कॉटन ईयरबड से इसे चेहरे पर लगाएं। आप एलोवेरा की जगह पानी, नारियल तेल या बादाम के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
गुलाब जल के साथ क्ले पाउडर में टी ट्री ऑयल की 2-3 बूंदें मिलाएं। अपने चेहरे पर एक पतली परत लगाएं और सूखने दें। ठंडे पानी से धो लें, और पानी आधारित नींव के साथ पालन करें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें इसे आपको ऑयली स्किन से राहत मिलेगी और एक्ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
3 बूंद टी ट्री ऑयल, 1 टीस्पून जोजोबा ऑयल और आधा टमाटर का गूदा मिलाएं। अपने चेहरे पर इसे लगाएं और 10 मिनट के बाद गुनगुने पानी से धो लें। ये फेस मास्क आपको ऑयली स्किन और एक्ने की समस्या से छुटकारा दिलाएगा।
आधा कप चावल को पीसकर बहुत महीन पाउडर बना लें। चावल के आटे में 2-3 बड़े चम्मच जैतून का तेल और 1 बड़ा चम्मच अरंडी का तेल मिलाएं। अरंडी का तेल एक कसैला है जो आपकी ग्रंथियों द्वारा स्रावित तेल को नियंत्रित करने में मदद करता है। टी ट्री ऑयल की 3-4 बूंदें और लैवेंडर ऑयल मिलाएं। आप हफ्ते में दो बार इस स्क्रब का प्रयोग करें। ये आपकी त्वचा को निखारने के साथ साथ उस पर से ऑयल को कम करेगा जिससे एक्ने की समस्या खुद ब खुद ठीक हो जाएगी।
| Beauty Tips: टी ट्री प्लांट और आम ब्लैक और ग्रीन टी जो आप पीते हैं एक जैसे नहीं हैं। टी ट्री ऑयल से स्किन की कई सारी कंडीशन के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटी-एलर्जी गुणों के कारण, आप मुंहासे, फोड़े और अन्य स्किन इंफेक्शन के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग कर सकते हैं। इसके एंटीसेप्टिक गुण मुंह, गले और कान के इंफेक्शन से लड़ने में भी मदद करते हैं। टी ट्री ऑयल को आमतौर पर नींबू, लैवेंडर, एलोवेरा, विच हेज़ल, और नारियल, जैतून और बादाम जैसे तेलों के साथ मिलाकर त्वचा के लिए कई प्रकार के सौंदर्य उपचार तैयार किए जाते हैं। यहां हम आपको एक्ने से छुटकारा दिलाने के लिए टी ट्री ऑयल के कुछ उपायों के बारे में बता रहे हैं। मुंहासों के स्पॉट ट्रीटमेंट के लिए दो चम्मच एलोवेरा जेल में एक चम्मच टी ट्री ऑयल मिलाएं। मिश्रण को कांच की शीशी में भरकर रख लें। अपना चेहरा धोने के बाद, दिन में दो बार क्यू-टिप या कॉटन ईयरबड से इसे चेहरे पर लगाएं। आप एलोवेरा की जगह पानी, नारियल तेल या बादाम के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। गुलाब जल के साथ क्ले पाउडर में टी ट्री ऑयल की दो-तीन बूंदें मिलाएं। अपने चेहरे पर एक पतली परत लगाएं और सूखने दें। ठंडे पानी से धो लें, और पानी आधारित नींव के साथ पालन करें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें इसे आपको ऑयली स्किन से राहत मिलेगी और एक्ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी। तीन बूंद टी ट्री ऑयल, एक टीस्पून जोजोबा ऑयल और आधा टमाटर का गूदा मिलाएं। अपने चेहरे पर इसे लगाएं और दस मिनट के बाद गुनगुने पानी से धो लें। ये फेस मास्क आपको ऑयली स्किन और एक्ने की समस्या से छुटकारा दिलाएगा। आधा कप चावल को पीसकर बहुत महीन पाउडर बना लें। चावल के आटे में दो-तीन बड़े चम्मच जैतून का तेल और एक बड़ा चम्मच अरंडी का तेल मिलाएं। अरंडी का तेल एक कसैला है जो आपकी ग्रंथियों द्वारा स्रावित तेल को नियंत्रित करने में मदद करता है। टी ट्री ऑयल की तीन-चार बूंदें और लैवेंडर ऑयल मिलाएं। आप हफ्ते में दो बार इस स्क्रब का प्रयोग करें। ये आपकी त्वचा को निखारने के साथ साथ उस पर से ऑयल को कम करेगा जिससे एक्ने की समस्या खुद ब खुद ठीक हो जाएगी। |
पारमार्थिक जीव क्या है ? वह एक शरीरमें नहीं है। देखो, आप ऐसे तो बोलते हो न कि 'मैं चलता हूँ', 'मैं हाथसे पकड़ता हूँ' और 'आँखसे देखता हूँ' कानसे सुनता हूँ, मैं ही नाकसे सूँघता हूँ और जीभसे चखता हूँ ।' तो ये सब अलग-अलग हैं कि नहीं? हाथ अलग है, पाँव अलग है, आँख अलग है, कान अलग है, नाक अलग है। आप इन्द्रिय अगर होते, तो आपके अन्दर एक ही चीज होती !
जैसे कोई अपने घरमें तरह-तरहके शीशे हों और आनेवाले मेहमानको दिखावे कि 'देखो, हमारे पास यह लाल शीशा है, यह हरा शीशा है, यह पीला शीशा है।' शीशे तो रङ्गीन तरह-तरहके होते हैं, पर दिखानेवाला तो एक है न !
हम एक सेठके घरमें गये । जहाँ जूते रखे जाते हैं न, वहाँ कोई सौ जोड़े जूते रखे थे। मैंने पूछा कि 'भाई, क्या बात है? कोई दुकान है ? इसका कोई व्यवहार होता है ?'
बोले -'नहीं, ये तो अपने ही हैं । ' तो तरह-तरहके जूते पहनके सेठजी निकलते हैं न ! कल एकको मैंने देखा, तो हमको भ्रम हुआ कि यह बहुत भक्त होगा । व्यक्ति था कोई ! सफेद टीका लगा था सिरपर, बिल्कुल सफेद ! मैंने कहा, 'चन्दन लगाया होगा इसने । कोई भक्त होगा ।' तुरन्त ही ख्याल आया कि यह साड़ी सफेद है इसलिए टीका सफेद है। हाँ, यह मलयगिरि चन्दनकी सफेदी नहीं है । यह तो साड़ीसे मैच करनेवाली सफेदी है, तिलककीटीकाकी सफेदी है ।
आपके पास इन्द्रियाँ बहुत हैं, औजार बहुत हैं। आप एक हैं, आपके मनमें इच्छाएँ बहुत हैं। आप एक दिनकी सब इच्छाओंको गिन लें, तब मालूम पड़े। ये इच्छाएं करी नहीं जातीं। करनेसे नहीं होती हैं। इनका शास्त्रमें निषेध है। करनेसे नहीं होती हैं।
जैसा शुभ-अशुभ संस्कार मनमें बैठा हुआ है, वैसे उभरता रहता है। जैसे खारे समुद्र में खारी तरङ्गे उठती हैं और गङ्गाजीके जलमें स्वच्छ निर्मल शीतल अमृतमय तरङ्गे उठती हैं, वैसे तुम्हारे कर्माशयमें जो भरा हुआ है-रागका खजाना है तुम्हारा दिल; द्वेषका खजाना है तुम्हारा दिल लोभका - मोहका खजाना है तुम्हारा दिल ! वह उद्गम है। उसमेंसे तरङ्गे निकलती रहती हैं। तो इच्छाएँ संस्कारके अनुसार होती हैं। आप उनके कर्ता नहीं हैं।
आप कभी पापके कर्ता बनते हो, कभी पुण्यके कर्ता बनते हो! आप कौनसे कर्ता हो ? आप असलमें कर्ता भी नहीं हो! आप कभी दुःखके भोक्ता बनते हो, कभी सुखके भोक्ता बनते हो। तो आप कैसे भोक्ता हो ? असलमें आप भोक्ता भी नहीं हो। दो प्रकारका भोक्तापना - सुखीपना, दुःखीपना आता-जाता रहता है । दो | पारमार्थिक जीव क्या है ? वह एक शरीरमें नहीं है। देखो, आप ऐसे तो बोलते हो न कि 'मैं चलता हूँ', 'मैं हाथसे पकड़ता हूँ' और 'आँखसे देखता हूँ' कानसे सुनता हूँ, मैं ही नाकसे सूँघता हूँ और जीभसे चखता हूँ ।' तो ये सब अलग-अलग हैं कि नहीं? हाथ अलग है, पाँव अलग है, आँख अलग है, कान अलग है, नाक अलग है। आप इन्द्रिय अगर होते, तो आपके अन्दर एक ही चीज होती ! जैसे कोई अपने घरमें तरह-तरहके शीशे हों और आनेवाले मेहमानको दिखावे कि 'देखो, हमारे पास यह लाल शीशा है, यह हरा शीशा है, यह पीला शीशा है।' शीशे तो रङ्गीन तरह-तरहके होते हैं, पर दिखानेवाला तो एक है न ! हम एक सेठके घरमें गये । जहाँ जूते रखे जाते हैं न, वहाँ कोई सौ जोड़े जूते रखे थे। मैंने पूछा कि 'भाई, क्या बात है? कोई दुकान है ? इसका कोई व्यवहार होता है ?' बोले -'नहीं, ये तो अपने ही हैं । ' तो तरह-तरहके जूते पहनके सेठजी निकलते हैं न ! कल एकको मैंने देखा, तो हमको भ्रम हुआ कि यह बहुत भक्त होगा । व्यक्ति था कोई ! सफेद टीका लगा था सिरपर, बिल्कुल सफेद ! मैंने कहा, 'चन्दन लगाया होगा इसने । कोई भक्त होगा ।' तुरन्त ही ख्याल आया कि यह साड़ी सफेद है इसलिए टीका सफेद है। हाँ, यह मलयगिरि चन्दनकी सफेदी नहीं है । यह तो साड़ीसे मैच करनेवाली सफेदी है, तिलककीटीकाकी सफेदी है । आपके पास इन्द्रियाँ बहुत हैं, औजार बहुत हैं। आप एक हैं, आपके मनमें इच्छाएँ बहुत हैं। आप एक दिनकी सब इच्छाओंको गिन लें, तब मालूम पड़े। ये इच्छाएं करी नहीं जातीं। करनेसे नहीं होती हैं। इनका शास्त्रमें निषेध है। करनेसे नहीं होती हैं। जैसा शुभ-अशुभ संस्कार मनमें बैठा हुआ है, वैसे उभरता रहता है। जैसे खारे समुद्र में खारी तरङ्गे उठती हैं और गङ्गाजीके जलमें स्वच्छ निर्मल शीतल अमृतमय तरङ्गे उठती हैं, वैसे तुम्हारे कर्माशयमें जो भरा हुआ है-रागका खजाना है तुम्हारा दिल; द्वेषका खजाना है तुम्हारा दिल लोभका - मोहका खजाना है तुम्हारा दिल ! वह उद्गम है। उसमेंसे तरङ्गे निकलती रहती हैं। तो इच्छाएँ संस्कारके अनुसार होती हैं। आप उनके कर्ता नहीं हैं। आप कभी पापके कर्ता बनते हो, कभी पुण्यके कर्ता बनते हो! आप कौनसे कर्ता हो ? आप असलमें कर्ता भी नहीं हो! आप कभी दुःखके भोक्ता बनते हो, कभी सुखके भोक्ता बनते हो। तो आप कैसे भोक्ता हो ? असलमें आप भोक्ता भी नहीं हो। दो प्रकारका भोक्तापना - सुखीपना, दुःखीपना आता-जाता रहता है । दो |
विपक्षी दल लगातार किसी न किसी बहाने सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार उनको सफलता नहीं मिलती। इसकी वजह हवा-हवाई तरीके के आरोप होते हैं। ऐसा ही एक हवा-हवाई आरोप मोदी सरकार पर लगाकर कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई बुधवार को फंस गए।
साल 2021 में संसद के मॉनसून सत्र से ठीक एक दिन पहले आरोप लगा था कि दुनियाभर की सरकारों ने इजरायल की कंपनी एनएसओ के इस जासूसी सॉफ्टवेयर से अपने विरोधियों की जासूसी कराई। जिन लोगों का भारत में नाम आया था, उनमें कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और मौजूदा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का भी नाम था।
| विपक्षी दल लगातार किसी न किसी बहाने सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार उनको सफलता नहीं मिलती। इसकी वजह हवा-हवाई तरीके के आरोप होते हैं। ऐसा ही एक हवा-हवाई आरोप मोदी सरकार पर लगाकर कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई बुधवार को फंस गए। साल दो हज़ार इक्कीस में संसद के मॉनसून सत्र से ठीक एक दिन पहले आरोप लगा था कि दुनियाभर की सरकारों ने इजरायल की कंपनी एनएसओ के इस जासूसी सॉफ्टवेयर से अपने विरोधियों की जासूसी कराई। जिन लोगों का भारत में नाम आया था, उनमें कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और मौजूदा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का भी नाम था। |
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है. कुंबले ने आरवी कॉलेज और इंजीनियरिंग से पढ़ाई की है. (Anil Kumble/Instagram)
नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर पिछले ढाई महीने से किसान नए कृषि कानून को रद्द करने की मांग करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का भी समर्थन मिल रहा है. पॉप स्टार रिहाना, स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस और कई अन्य प्रमुख लोगों ने भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के समर्थन में ट्विटर पर अपनी आवाज उठाई है. भारत सरकार ने विदेशी हस्तियों के टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ट्विटर पर इंडिया अगेंस्ट प्रोपगेंडा (#IndiaAgainstPropaganda) और इंडिया टूगेदर (IndiaTogether) ट्रेंड कर रहा है. किसान आंदोलन पर सचिन तेंदुलकर के बाद पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. कुंबले ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत अपने आंतरिक मुद्दों को सौहार्दपूर्ण समाधानों तक ले जाने में सक्षम है.
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| भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है. कुंबले ने आरवी कॉलेज और इंजीनियरिंग से पढ़ाई की है. नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर पिछले ढाई महीने से किसान नए कृषि कानून को रद्द करने की मांग करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का भी समर्थन मिल रहा है. पॉप स्टार रिहाना, स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस और कई अन्य प्रमुख लोगों ने भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के समर्थन में ट्विटर पर अपनी आवाज उठाई है. भारत सरकार ने विदेशी हस्तियों के टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ट्विटर पर इंडिया अगेंस्ट प्रोपगेंडा और इंडिया टूगेदर ट्रेंड कर रहा है. किसान आंदोलन पर सचिन तेंदुलकर के बाद पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. कुंबले ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत अपने आंतरिक मुद्दों को सौहार्दपूर्ण समाधानों तक ले जाने में सक्षम है. यह भी पढ़ेंः . |
PM Modi Nepal Visit: पीएम मोदी (PM Modi) पड़ोसी देश नेपाल के दौरे पर हैं। बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे नरेंद्र मोदी नेपाल के लुंबिनी पहुंचे, जहां नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मोदी ने नेपाल स्थित माया देवी मंदिर, पुष्कर्णी तालाब और बोधि वृक्ष की पूजा की। यह वही बोधि वृक्ष है, जिसे उन्होंने 2014 में नेपाल को गिफ्ट में दिया था। बता दें कि 2014 के बाद से यह पीएम मोदी की 5वीं नेपाल यात्रा है। इससे पहले उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर, जनकपुर के जानकी मंदिर और मुक्तिनाथ मंदिर के दर्शन किए थे। पीएम मोदी की नेपाल यात्रा के मौके पर हम दिखा रहे हैं नेपाल की कुछ खूबसूरत तस्वीरें।
काठमांडू (राजधानी) :
पहाड़ों का देश नेपाल बेहद खूबसूरत है। राजधानी काठमांडू से लेकर कई और शहरों में भी खूबसूरती बिखरी हुई है। नेपाल समुद्रतल से करीब 1400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पशुपतिनाथ मंदिर के अलावा कई और खूबसूरत मठ हैं। अगर आप शांति का अनुभव करना चाहते हैं तो नेपाल बेहतरीन जगह है।
पोखरा :
पोखरा नेपाल की राजधानी काठमांडू के बाद सबसे बड़ा शहर है। इसे नेपाल के टूरिस्ट कैपिटल भी कहते हैं। पोखरा समुद्रतल से करीब 900 मीटर की ऊंचाई पर है। पोखरा में शांति स्तूप, ताल बाराही मंदिर, फेवा झील, घोरपानी हिल्स और डेविस फॉल देखने लायक जगह हैं।
लुम्बिनी :
लुम्बिनी वो जगह है, जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। यह शहर पहाड़ों की गोद में बसा हुआ है। लुम्बिनी बेहद शांत होने के साथ ही बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल भी है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहरों में शामिल किया है। लुम्बिनी में सम्राट अशोक के स्मारकों के अलावा माया देवी मंदिर भी घूमने लायक प्रमुख स्थान है।
नगरकोट :
नगरकोट नेपाल के भक्तपुर जिले में स्थित एक छोटा सा कस्बा है। प्रकृति ने मानों इस जगह पर अपनी सारी खूबसूरती बिखेर दी है। यहां से माउंट एवरेस्ट की खूबसूरती का दीदार भी किया जा सकता है। नगरकोट समुद्रतल से करीब 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा है।
भक्तपुर :
यह नेपाल की राजधानी काठमांडू की घाटी में स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां बड़ी संख्या में छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिसकी वजह से भक्तों का तांता लगा रहता है। यही वजह है कि इस जगह का नाम भक्तपुर है। इस पहाड़ी स्थल में टेढ़ी और घुमावदार सड़कें भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
चांगुनारायण मंदिर :
चांगुनारायण मंदिर में भगवान विष्णु और शेषनाग की प्रतिमा विराजमान है। यह नेपाल के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इतिहासकारों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण चौथी शताब्दी में हुआ है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर :
पशुपतिनाथ मंदिर राजधानी काठमांडू के पास ही बागमती नदी के किनारे पर बना है। इस मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा है। पशुपतिनाथ मंदिर को यूनेस्को ने 1979 में विश्व धरोहरों में स्थान दिया है। यहां रोजाना नेपाल के अलावा भारत से भी लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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पांचवीं यात्राः बुद्ध जयंती पर लुंबिनी पहुंचे PM मोदी ने जाहिर की खुशी-'नेपाल के अद्भुत लोगों के बीच खुश हूं'
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महावीर मंदिर जाने वाले दर्शनार्थी वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी गेट से प्रवेश कर जीपीओ गोलंबर होते हुए महावीर मंदिर जाएंगे। दर्शन के बाद लोगों को डाकबंगला की ओर से निकाला जाएगा।
रामनवमी पर शहर में भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने कई रूटों पर वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। कई रूट में बदलाव किए गए हैं। बुधवार (29 मार्च) की रात 8 बजे से 30 मार्च की रात 11 बजे तक डाकबंगला चौराहे से पटना जंक्शन की ओर वाहनों का परिचालन नहीं होगा। निजी वाहन डाकबंगला से भट्टाचार्या या गांधी मैदान की ओर जाएंगे। महावीर मंदिर जाने वाले दर्शनार्थी वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी गेट (आर ब्लॉक के पास) से प्रवेश कर कतार में वीर कुंवर सिंह पार्क से जीपीओ गोलंबर होते हुए महावीर मंदिर जाएंगे। दर्शन के बाद लोगों को डाकबंगला की ओर से निकाला जाएगा।
दर्शनार्थियों के वाहनों की पार्किंग व्यवस्था वीरचंद पटेल पथ स्थित मिलर हाई स्कूल मैदान और पथ परिवहन निगम कार्यालय के परिसर में की गई है। बिना प्रसाद लेकर श्रद्धालुओं के वाहन मल्टी लेवल पार्किंग में लगेंगे। वीणा सिनेमा रोड से ऑटो या अन्य व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। मेट्रो निर्माण कार्य को देखते हुए जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहा होते जाने वाले जुलूस स्वामीनंदन तिराहे से एसपी वर्मा रोड से न्यू डाकबंगला रोड होते हुए जाएंगे। प्रशासन ने पटना जंक्शन जाने वाले यात्रियों से अपील की है कि करबिगहिया की तरफ वाले प्रवेश द्वार का इस्तेमाल करें।
बुद्ध मार्ग में हिन्दुस्तान कार्यालय से आगे फ्लाईओवर के नीचे होते वाहन नहीं चलेंगे। बुद्ध मार्ग होकर जाने वाले दर्शनार्थियों को कतार में लगने की अनुमति नहीं होगी। प्रसाद एवं फूल माला आदि खरीदने के लिए वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी छोर पर व्यवस्था की गई है। अदालतगंज रोड में पूरब से पश्चिम यातायात व्यवस्था वन-वे रहेगा।
| महावीर मंदिर जाने वाले दर्शनार्थी वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी गेट से प्रवेश कर जीपीओ गोलंबर होते हुए महावीर मंदिर जाएंगे। दर्शन के बाद लोगों को डाकबंगला की ओर से निकाला जाएगा। रामनवमी पर शहर में भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने कई रूटों पर वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। कई रूट में बदलाव किए गए हैं। बुधवार की रात आठ बजे से तीस मार्च की रात ग्यारह बजे तक डाकबंगला चौराहे से पटना जंक्शन की ओर वाहनों का परिचालन नहीं होगा। निजी वाहन डाकबंगला से भट्टाचार्या या गांधी मैदान की ओर जाएंगे। महावीर मंदिर जाने वाले दर्शनार्थी वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी गेट से प्रवेश कर कतार में वीर कुंवर सिंह पार्क से जीपीओ गोलंबर होते हुए महावीर मंदिर जाएंगे। दर्शन के बाद लोगों को डाकबंगला की ओर से निकाला जाएगा। दर्शनार्थियों के वाहनों की पार्किंग व्यवस्था वीरचंद पटेल पथ स्थित मिलर हाई स्कूल मैदान और पथ परिवहन निगम कार्यालय के परिसर में की गई है। बिना प्रसाद लेकर श्रद्धालुओं के वाहन मल्टी लेवल पार्किंग में लगेंगे। वीणा सिनेमा रोड से ऑटो या अन्य व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। मेट्रो निर्माण कार्य को देखते हुए जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहा होते जाने वाले जुलूस स्वामीनंदन तिराहे से एसपी वर्मा रोड से न्यू डाकबंगला रोड होते हुए जाएंगे। प्रशासन ने पटना जंक्शन जाने वाले यात्रियों से अपील की है कि करबिगहिया की तरफ वाले प्रवेश द्वार का इस्तेमाल करें। बुद्ध मार्ग में हिन्दुस्तान कार्यालय से आगे फ्लाईओवर के नीचे होते वाहन नहीं चलेंगे। बुद्ध मार्ग होकर जाने वाले दर्शनार्थियों को कतार में लगने की अनुमति नहीं होगी। प्रसाद एवं फूल माला आदि खरीदने के लिए वीर कुंवर सिंह पार्क के पश्चिमी छोर पर व्यवस्था की गई है। अदालतगंज रोड में पूरब से पश्चिम यातायात व्यवस्था वन-वे रहेगा। |
राजा योगी अगनि जल, इनकी उलटी रीति । बचते रहियो परसराम थोडी पाले प्रीति । अतएव सिर्फ राजा के पेम पर निर्भर 7 रहकर किसी दूसरे का भी अपना मित्र बनाये रखना उचित है। मित्र होगा तो समय पर काम आयेगा ।
इस प्रकार विचार कर प्रधान ने एक नित्य मित्र बनाया। प्रधान अपन इस मित्र के साथ ही खाता पीता और रहता था। वह समझता था कि नित्य मित्र भी मेरा आत्मा है। इस प्रकार प्रधान अपने मित्र को बड़े प्रेम स
रखन लगा।
एक भित्र पर्याप्त नहीं है यह विचार कर प्रधान ने दूसरा मित्र भी बनाया। यह मित्र पर्व मित्र था। किसी पर्व या त्यौहार के दिन प्रधान उसे बुलाता खिलाता-पिलाता और गपशप करता था। प्रधान ने एक तीसरा मित्र ओर बनाया जो सैन-जुहारी मित्र था । जब कभी अचानक मिल गया। तो जुहार उससे कर लिया करता था। इस प्रकार प्रधान ने तीन मित्र बनाये ।
समय ने पलटा खाया। राजा प्रधान पर कुपित हो गया। कुछ चुगलखोरों ने राजा के कान भर दिये कि पधान ने अपना घर भर लिया है राज्य को अमुक हानि पहुचाई है यह किया है वह किया है आदि आदि । राजा कान के कच्चे होते है। उसने एक दिन पुलिस को हुक्म दिया कि प्रधान के घर पहरा लगा दो ओर पात काल होते ही उसे दरबार में हाजिर करो। पारम्भ मे राज्य व्यवस्था प्रजा की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। लागा अपनी रक्षा के लोभ से राजा की शरण ली थी। मगर धीरे-धीरे राजा लाग स्वार्थी बन गये। पहले राजा और प्रजा के स्वार्थों में विरोध नही था । राजाओं का हित प्रजा का ओर प्रजा का हित राजा का हित था मगर राजाओ म विलासिता ओर स्वार्थ भावना ने प्रवेश किया। तब राजा के हित का घात रकी राजा अपने स्वार्थ सिद्ध करने लगे। तभी से राजा ओर प्रजा के बीच
का सूत्रपात हुआ। आज वह सघर्ष अपनी चरम सीमा को पहुच गया सन - सूत्र हट रहा है। राजतन्त्र मरणासन्न हो | राजा योगी अगनि जल, इनकी उलटी रीति । बचते रहियो परसराम थोडी पाले प्रीति । अतएव सिर्फ राजा के पेम पर निर्भर सात रहकर किसी दूसरे का भी अपना मित्र बनाये रखना उचित है। मित्र होगा तो समय पर काम आयेगा । इस प्रकार विचार कर प्रधान ने एक नित्य मित्र बनाया। प्रधान अपन इस मित्र के साथ ही खाता पीता और रहता था। वह समझता था कि नित्य मित्र भी मेरा आत्मा है। इस प्रकार प्रधान अपने मित्र को बड़े प्रेम स रखन लगा। एक भित्र पर्याप्त नहीं है यह विचार कर प्रधान ने दूसरा मित्र भी बनाया। यह मित्र पर्व मित्र था। किसी पर्व या त्यौहार के दिन प्रधान उसे बुलाता खिलाता-पिलाता और गपशप करता था। प्रधान ने एक तीसरा मित्र ओर बनाया जो सैन-जुहारी मित्र था । जब कभी अचानक मिल गया। तो जुहार उससे कर लिया करता था। इस प्रकार प्रधान ने तीन मित्र बनाये । समय ने पलटा खाया। राजा प्रधान पर कुपित हो गया। कुछ चुगलखोरों ने राजा के कान भर दिये कि पधान ने अपना घर भर लिया है राज्य को अमुक हानि पहुचाई है यह किया है वह किया है आदि आदि । राजा कान के कच्चे होते है। उसने एक दिन पुलिस को हुक्म दिया कि प्रधान के घर पहरा लगा दो ओर पात काल होते ही उसे दरबार में हाजिर करो। पारम्भ मे राज्य व्यवस्था प्रजा की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। लागा अपनी रक्षा के लोभ से राजा की शरण ली थी। मगर धीरे-धीरे राजा लाग स्वार्थी बन गये। पहले राजा और प्रजा के स्वार्थों में विरोध नही था । राजाओं का हित प्रजा का ओर प्रजा का हित राजा का हित था मगर राजाओ म विलासिता ओर स्वार्थ भावना ने प्रवेश किया। तब राजा के हित का घात रकी राजा अपने स्वार्थ सिद्ध करने लगे। तभी से राजा ओर प्रजा के बीच का सूत्रपात हुआ। आज वह सघर्ष अपनी चरम सीमा को पहुच गया सन - सूत्र हट रहा है। राजतन्त्र मरणासन्न हो |
शशिकांत डिक्सेना, कटघोरा। कटघोरा का दशहरा उत्सव प्रतिवर्ष किसी न किसी हरकतों की वजह से चर्चा में रहता है. इस वर्ष दशहरा उत्सव बस स्टैंड में न होकर कटघोरा हाई स्कूल स्टेडियम मैदान में आयोजित किया गया. जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम कटघोरा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ. जहां कांग्रेस के साथ भाजपा के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे. कार्यक्रम में भाजपा पार्षद की अश्लील हरकत से सियासी माहौल गर्म है.
कार्यक्रम के दौरान मंच पर डांसरों के डांस करने के दौरान भाजपा के एक पार्षद अश्लील हरकतों के साथ जमकर नोट बरसाते नज़र आए. नगर के लोगों का कहना है कि आम जनता के बीच डांसरों पर नोट बरसाना कहीं न कहीं पार्टी की छवि और समाज को धूमिल करने की कोशिश की गई है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रतिनिधि डॉ. शेख इश्तियाक ने इस मामले पर कहा कि एक संस्कारी पार्टी भाजपा के पार्षद द्वारा मंच पर डांसरों के ऊपर नोट बरसना एक अशोभनीय हरकत है, जोकि काफी शर्मनाक है.
डॉ. शेख इश्तियाक ने कहा कि पार्टी को इस विषय पर संज्ञान लेना चाहिए. एक गरिमामय मंच पर इस तरह की करतूत से कार्यक्रम की शोभा भंग होती है. इस तरह की हरकत से समाज पर गलत संदेश जाता है.
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| शशिकांत डिक्सेना, कटघोरा। कटघोरा का दशहरा उत्सव प्रतिवर्ष किसी न किसी हरकतों की वजह से चर्चा में रहता है. इस वर्ष दशहरा उत्सव बस स्टैंड में न होकर कटघोरा हाई स्कूल स्टेडियम मैदान में आयोजित किया गया. जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम कटघोरा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ. जहां कांग्रेस के साथ भाजपा के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे. कार्यक्रम में भाजपा पार्षद की अश्लील हरकत से सियासी माहौल गर्म है. कार्यक्रम के दौरान मंच पर डांसरों के डांस करने के दौरान भाजपा के एक पार्षद अश्लील हरकतों के साथ जमकर नोट बरसाते नज़र आए. नगर के लोगों का कहना है कि आम जनता के बीच डांसरों पर नोट बरसाना कहीं न कहीं पार्टी की छवि और समाज को धूमिल करने की कोशिश की गई है. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रतिनिधि डॉ. शेख इश्तियाक ने इस मामले पर कहा कि एक संस्कारी पार्टी भाजपा के पार्षद द्वारा मंच पर डांसरों के ऊपर नोट बरसना एक अशोभनीय हरकत है, जोकि काफी शर्मनाक है. डॉ. शेख इश्तियाक ने कहा कि पार्टी को इस विषय पर संज्ञान लेना चाहिए. एक गरिमामय मंच पर इस तरह की करतूत से कार्यक्रम की शोभा भंग होती है. इस तरह की हरकत से समाज पर गलत संदेश जाता है. - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें, - खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें . |
भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच डब्ल्यूवी रमन को विश्वास है कि 15 साल की शेफाली वर्मा आगे चलकर वीरेंदर सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी से स्तर की खिलाड़ी बनेंगी। पिछले साल नवंबर में सचिन तेंदुलकर के 30 साल पुराने रिकार्ड को तोड़कर शेफाली अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाली खिलाड़ी बनी थीं।
शेफाली को अगले महीने होने वाले महिला टी-20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। शेफाली टीम में इकलौती युवा खिलाड़ी नहीं हैं। 19 साल की ऋचा घोष को भी टीम में जगह मिली है। रमन ने कहा कि टूर्नामेंट में जाने के लिए अहम है कि भावनाओं पर काबू रखा जाए।
| भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच डब्ल्यूवी रमन को विश्वास है कि पंद्रह साल की शेफाली वर्मा आगे चलकर वीरेंदर सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी से स्तर की खिलाड़ी बनेंगी। पिछले साल नवंबर में सचिन तेंदुलकर के तीस साल पुराने रिकार्ड को तोड़कर शेफाली अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाली खिलाड़ी बनी थीं। शेफाली को अगले महीने होने वाले महिला टी-बीस विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह मिली है। शेफाली टीम में इकलौती युवा खिलाड़ी नहीं हैं। उन्नीस साल की ऋचा घोष को भी टीम में जगह मिली है। रमन ने कहा कि टूर्नामेंट में जाने के लिए अहम है कि भावनाओं पर काबू रखा जाए। |
साहित्यिक शर्तों के शब्दकोश में ऐसा हैअवधारणा "elegy" के रूप में। संगीत में एक समान शब्द है। उन्हें क्या जोड़ता है, मतभेद क्या हैं - सवाल बहुत दिलचस्प है। इसके अलावा, "एलिगिक" की परिभाषा अक्सर छायांकन में पाए जाने वाले चित्रकला, मूर्तिकला से संबंधित है।
जैसा कि आप देख सकते हैं, पाठ से संगीत का सख्त अलगाव।इस शब्द के प्रारंभिक उपयोग पर अभी तक मनाया नहीं गया है। यह कुछ हद तक उभर जाएगा, जब सौंदर्यशास्त्र - सुंदर का विज्ञान - कला के विभिन्न क्षेत्रों के प्रजातियों-विशिष्ट संकेतों की पहचान करना संभव कर देगा। तब यह माना जाता था कि हाथी साहित्यिक काम की एक गीतात्मक शैली है। प्राचीन कविता में, तथाकथित कविताओं, जिनमें कई स्टेन्जा शामिल हैं। प्रत्येक में 2 लाइनें शामिल थीं, कविता (खाली कविता) द्वारा एकजुट नहीं थीं। पहला हेक्सामीटर के साथ लिखा गया था, दूसरा पेंटामीटर के साथ। प्राचीन काव्य अभ्यास में लंबे समय तक पंजीकरण की यह विधि। इसके अलावा, डिस्टिच स्टील को न केवल लालित्य कहा जाता था। रोजमर्रा की शिकायतों को व्यक्त करने के लिए दार्शनिक प्रतिबिंब व्यक्त करना उनकी परंपरा थी। इस प्रकार, पुरातनता के युग में, यह माना जाता था कि हाथी एक गीतकार काम था, जो महाकाव्य में निहित था और लेखक के कुछ मूड को दर्शाता था।
इससे संबंधित कविताओं की सामग्रीशैली, काफी विविधतापूर्ण। प्राचीन ग्रीस में, दार्शनिक, सैन्य, राजनीतिक, और आरोप लगाना विशेष रूप से लोकप्रिय थे। प्राचीन रोमन मिट्टी पर प्यार ग्यारह सबसे अच्छा आदी हो गया। यह शैली मौजूद है और सक्रिय रूप से विकासशील है। इसके आधार पर, आधुनिक कविता के कई क्षेत्रों। और क्लासिक उदाहरण अभी भी ओविड द्वारा कविताओं हैं। वे स्पष्ट रूप से सभी विशेषताओं के माध्यम से दिखाते हैंः पाठक, उदासी और निराशा के लिए घनिष्ठता, मित्रता और भरोसेमंदता का एक तत्व, अकेलापन, बेघर मौत की पूर्वनिर्धारितता और जीवन के बारे में शिकायतों, भाग्य का अनुचित दोष। इस संबंध में विशेष रूप से विशेषता उनके दार्शनिक और प्रेम सुंदरता है।
"रोमुलस से हमारे दिनों तक"
नई टेकऑफ शैली देर से कविता में पहले से ही अनुभव कर रही हैपुनर्जागरण और अगली शताब्दी। और इसका फूल कला में ऐसे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है जो भावनात्मकता और रोमांटिकवाद के रूप में है। बढ़ी भावनात्मकता, भावनात्मक उत्तेजना, कुछ निराशावाद, उदासीन विचारशीलता शब्द "elegy" का अर्थ बनाते हैं। रूसी साहित्य में, बरतिन्स्की, झुकोव्स्की, बट्युशकोव अपनी उत्पत्ति पर खड़े हैं। कविता "द ग्राम कब्रिस्तान" - पृथ्वी पर मानव अस्तित्व की कमजोरी, विद्रोह का अंधेरा, वी। ए झुकोव्स्की (टी ग्रे के काव्य रेखाओं का एक मुफ्त अनुवाद) द्वारा लिखे गए एक प्रतिबिंब ने राष्ट्रीय सुरुचिपूर्ण साहित्य में भावनात्मकता के लिए जुनून को चिन्हित किया। और फिर एक और ग्यारह जनता को प्रस्तुत किया गया, जो एक क्लासिक उदाहरण - "सागर" भी बन गया।
बाद में, पुष्किन, लर्मोंटोव, नेक्रसोव, ट्यूतुचेव और फेटगहरी, दिल से गीली कविताओं के साथ समृद्ध दुनिया कविता। प्रसिद्ध "मैड फेडेड इयर्स ऑफ फन" और "1 9 अक्टूबर" को याद करने के लिए पर्याप्त है, "दुख की बात है कि हमारी पीढ़ी पर देखो" और "क्या दुखद है! गली का अंत ... "- और यह स्पष्ट हो जाता है कि शैली की संभावनाएं कितनी व्यापक हैं, समय के साथ दार्शनिक गहराई और नाटकीय गर्मी कितनी है। लेकिन अभी भी ब्लोक, प्रतीकात्मक कवि हैं ... और यद्यपि गतिशील 20 वीं शताब्दी ने कुछ हद तक लालित्य लालित्य और अशुभ नियमितता को दबा दिया है, वे धीरे-धीरे साहित्य में लौट आते हैं।
उसी समय, यह शैली अधिक जोरदार हैसंगीत में लागू यह 17 वीं शताब्दी में स्वतंत्र हो जाता है। और बीथोवेन का काम सच्चे कृतियों के निर्माण से चिह्नित किया गया था। उदासीन, स्पर्श करने के लिए "एलिस", उदाहरण के लिए, उदासीन छोड़ देंगे! हां, लिस्ट्ट, ग्रिग, ग्लिंका, बोरोडिन, त्चैकोव्स्की, रचमेनिनॉफ ने हाथी के लोकप्रियता में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसके आधार पर एक नई शैली पैदा हुई - शहरी रोमांस, और बाद में - एक गीत गीत।
| साहित्यिक शर्तों के शब्दकोश में ऐसा हैअवधारणा "elegy" के रूप में। संगीत में एक समान शब्द है। उन्हें क्या जोड़ता है, मतभेद क्या हैं - सवाल बहुत दिलचस्प है। इसके अलावा, "एलिगिक" की परिभाषा अक्सर छायांकन में पाए जाने वाले चित्रकला, मूर्तिकला से संबंधित है। जैसा कि आप देख सकते हैं, पाठ से संगीत का सख्त अलगाव।इस शब्द के प्रारंभिक उपयोग पर अभी तक मनाया नहीं गया है। यह कुछ हद तक उभर जाएगा, जब सौंदर्यशास्त्र - सुंदर का विज्ञान - कला के विभिन्न क्षेत्रों के प्रजातियों-विशिष्ट संकेतों की पहचान करना संभव कर देगा। तब यह माना जाता था कि हाथी साहित्यिक काम की एक गीतात्मक शैली है। प्राचीन कविता में, तथाकथित कविताओं, जिनमें कई स्टेन्जा शामिल हैं। प्रत्येक में दो लाइनें शामिल थीं, कविता द्वारा एकजुट नहीं थीं। पहला हेक्सामीटर के साथ लिखा गया था, दूसरा पेंटामीटर के साथ। प्राचीन काव्य अभ्यास में लंबे समय तक पंजीकरण की यह विधि। इसके अलावा, डिस्टिच स्टील को न केवल लालित्य कहा जाता था। रोजमर्रा की शिकायतों को व्यक्त करने के लिए दार्शनिक प्रतिबिंब व्यक्त करना उनकी परंपरा थी। इस प्रकार, पुरातनता के युग में, यह माना जाता था कि हाथी एक गीतकार काम था, जो महाकाव्य में निहित था और लेखक के कुछ मूड को दर्शाता था। इससे संबंधित कविताओं की सामग्रीशैली, काफी विविधतापूर्ण। प्राचीन ग्रीस में, दार्शनिक, सैन्य, राजनीतिक, और आरोप लगाना विशेष रूप से लोकप्रिय थे। प्राचीन रोमन मिट्टी पर प्यार ग्यारह सबसे अच्छा आदी हो गया। यह शैली मौजूद है और सक्रिय रूप से विकासशील है। इसके आधार पर, आधुनिक कविता के कई क्षेत्रों। और क्लासिक उदाहरण अभी भी ओविड द्वारा कविताओं हैं। वे स्पष्ट रूप से सभी विशेषताओं के माध्यम से दिखाते हैंः पाठक, उदासी और निराशा के लिए घनिष्ठता, मित्रता और भरोसेमंदता का एक तत्व, अकेलापन, बेघर मौत की पूर्वनिर्धारितता और जीवन के बारे में शिकायतों, भाग्य का अनुचित दोष। इस संबंध में विशेष रूप से विशेषता उनके दार्शनिक और प्रेम सुंदरता है। "रोमुलस से हमारे दिनों तक" नई टेकऑफ शैली देर से कविता में पहले से ही अनुभव कर रही हैपुनर्जागरण और अगली शताब्दी। और इसका फूल कला में ऐसे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है जो भावनात्मकता और रोमांटिकवाद के रूप में है। बढ़ी भावनात्मकता, भावनात्मक उत्तेजना, कुछ निराशावाद, उदासीन विचारशीलता शब्द "elegy" का अर्थ बनाते हैं। रूसी साहित्य में, बरतिन्स्की, झुकोव्स्की, बट्युशकोव अपनी उत्पत्ति पर खड़े हैं। कविता "द ग्राम कब्रिस्तान" - पृथ्वी पर मानव अस्तित्व की कमजोरी, विद्रोह का अंधेरा, वी। ए झुकोव्स्की द्वारा लिखे गए एक प्रतिबिंब ने राष्ट्रीय सुरुचिपूर्ण साहित्य में भावनात्मकता के लिए जुनून को चिन्हित किया। और फिर एक और ग्यारह जनता को प्रस्तुत किया गया, जो एक क्लासिक उदाहरण - "सागर" भी बन गया। बाद में, पुष्किन, लर्मोंटोव, नेक्रसोव, ट्यूतुचेव और फेटगहरी, दिल से गीली कविताओं के साथ समृद्ध दुनिया कविता। प्रसिद्ध "मैड फेडेड इयर्स ऑफ फन" और "एक नौ अक्टूबर" को याद करने के लिए पर्याप्त है, "दुख की बात है कि हमारी पीढ़ी पर देखो" और "क्या दुखद है! गली का अंत ... "- और यह स्पष्ट हो जाता है कि शैली की संभावनाएं कितनी व्यापक हैं, समय के साथ दार्शनिक गहराई और नाटकीय गर्मी कितनी है। लेकिन अभी भी ब्लोक, प्रतीकात्मक कवि हैं ... और यद्यपि गतिशील बीस वीं शताब्दी ने कुछ हद तक लालित्य लालित्य और अशुभ नियमितता को दबा दिया है, वे धीरे-धीरे साहित्य में लौट आते हैं। उसी समय, यह शैली अधिक जोरदार हैसंगीत में लागू यह सत्रह वीं शताब्दी में स्वतंत्र हो जाता है। और बीथोवेन का काम सच्चे कृतियों के निर्माण से चिह्नित किया गया था। उदासीन, स्पर्श करने के लिए "एलिस", उदाहरण के लिए, उदासीन छोड़ देंगे! हां, लिस्ट्ट, ग्रिग, ग्लिंका, बोरोडिन, त्चैकोव्स्की, रचमेनिनॉफ ने हाथी के लोकप्रियता में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसके आधार पर एक नई शैली पैदा हुई - शहरी रोमांस, और बाद में - एक गीत गीत। |
"लड़की हूँ लड़ सकती हूं" के नारे के साथ विधानसभा चुनाव में आगाज करने वाली कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने वादे पर अमल करते हुए उत्तर प्रदेश में सराहनीय पहल कर दी है। अपने वादे के अनुसार उन्होंने उन महिलाओं को विधानसभा के टिकट दिए हैं जो रेप पीड़िता के परिवार से हैं। यही नहीं बल्कि प्रियंका गांधी की पहल पर ही उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाओं को चुनावी मैदान में उतार दिया गया है।
प्रियंका गांधी का यह चुनावी नारा था कि उनकी पार्टी 40 प्रतिशत महिलाओं को विधानसभा में टिकट देंगी। इस तरह प्रियंका गांधी ने एक तीर से दो निशाने साधें है। पहला यह है कि वह उत्तर प्रदेश में महिलाओं को प्राथमिकता के तौर पर चुनाव मैदान में उतार रही है।
प्रियंका गांधी ने उन परिवारों की महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है जिनकी बेटियां रेप का शिकार हुई है। इससे कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्तासीन योगी सरकार पर चुनाव के बहाने जमकर बार करेगी। उन पीड़ितों की कहानी सुनाएगी जिनके साथ ज्यादतिया हुई है। ऐसी महिलाओं की कहानियां सुना कर कांग्रेस प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाएगी। इसी के साथ कांग्रेस महिलाओं के प्रति सहानुभूति बनाने की तैयारी में है।
आज कांग्रेस ने 125 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें 50 प्रतिशत महिलाएं हैं ।इनमें उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा रानी को टिकट दिया गया है। जबकि लखीमपुर में चीरहरण कांड की पीड़िता रितु सिंह को भी टिकट दिया गया है। इसके अलावा शाहजहांपुर में मानदेय को लेकर योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन करने वाली आशा वर्कर पूनम पांडे को पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कहती है कि हमारी उन्नाव की प्रत्याशी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की मां है। हमने उनको मौका दिया है कि वह अपना संघर्ष जारी रखें। जिस सत्ता के जरिए उनकी बेटी के साथ अत्याचार हुआ उनके परिवार को बर्बाद किया गया वहीं सत्ता हासिल करें। इसी तरह आशा बहनों ने करोना में बहुत काम किया । लेकिन उन्हें पीटा गया। उन्हीं में से एक पूनम पांडे हैं। जिन्हें पार्टी ने टिकट दिया है। इसी के साथ ही प्रियंका गांधी कहती है कि हमने महिलाओं की बात शुरू की तो सभी पार्टियां घोषणा करने लगी।
| "लड़की हूँ लड़ सकती हूं" के नारे के साथ विधानसभा चुनाव में आगाज करने वाली कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने वादे पर अमल करते हुए उत्तर प्रदेश में सराहनीय पहल कर दी है। अपने वादे के अनुसार उन्होंने उन महिलाओं को विधानसभा के टिकट दिए हैं जो रेप पीड़िता के परिवार से हैं। यही नहीं बल्कि प्रियंका गांधी की पहल पर ही उत्तर प्रदेश में चालीस प्रतिशत महिलाओं को चुनावी मैदान में उतार दिया गया है। प्रियंका गांधी का यह चुनावी नारा था कि उनकी पार्टी चालीस प्रतिशत महिलाओं को विधानसभा में टिकट देंगी। इस तरह प्रियंका गांधी ने एक तीर से दो निशाने साधें है। पहला यह है कि वह उत्तर प्रदेश में महिलाओं को प्राथमिकता के तौर पर चुनाव मैदान में उतार रही है। प्रियंका गांधी ने उन परिवारों की महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है जिनकी बेटियां रेप का शिकार हुई है। इससे कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्तासीन योगी सरकार पर चुनाव के बहाने जमकर बार करेगी। उन पीड़ितों की कहानी सुनाएगी जिनके साथ ज्यादतिया हुई है। ऐसी महिलाओं की कहानियां सुना कर कांग्रेस प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाएगी। इसी के साथ कांग्रेस महिलाओं के प्रति सहानुभूति बनाने की तैयारी में है। आज कांग्रेस ने एक सौ पच्चीस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें पचास प्रतिशत महिलाएं हैं ।इनमें उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा रानी को टिकट दिया गया है। जबकि लखीमपुर में चीरहरण कांड की पीड़िता रितु सिंह को भी टिकट दिया गया है। इसके अलावा शाहजहांपुर में मानदेय को लेकर योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन करने वाली आशा वर्कर पूनम पांडे को पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कहती है कि हमारी उन्नाव की प्रत्याशी उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की मां है। हमने उनको मौका दिया है कि वह अपना संघर्ष जारी रखें। जिस सत्ता के जरिए उनकी बेटी के साथ अत्याचार हुआ उनके परिवार को बर्बाद किया गया वहीं सत्ता हासिल करें। इसी तरह आशा बहनों ने करोना में बहुत काम किया । लेकिन उन्हें पीटा गया। उन्हीं में से एक पूनम पांडे हैं। जिन्हें पार्टी ने टिकट दिया है। इसी के साथ ही प्रियंका गांधी कहती है कि हमने महिलाओं की बात शुरू की तो सभी पार्टियां घोषणा करने लगी। |
माफिया अतीक अहमद की पत्नी फरार है और उसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। इस बीच मुंडी पासी ने सामने आकर सफाई दी है कि उसका शाइस्ता से कोई लेना देना नहीं है।
प्रयागराजः माफिया अतीक अहमद और उसके भाई के हत्या के बाद शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस सरगर्मी से जुटी हुई है। शाइस्ता को लेकर कई जगहों पर दबिश दी गई लेकिन कहीं भी उसका पता नहीं लगा। इस बीच रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि शाइस्ता की मुश्किल की इस घड़ी में लेडी डॉन मुंडी पासी उनकी मदद कर रही है। हालांकि मुंडी पासी ने इससे इंकार किया है। उसने कहा कि उमेश पाल हत्याकांड में उसे फर्जी फंसाया जा रहा है।
मुंडी के द्वारा जानकारी दी गई कि उनका शाइस्ता से कोई भी लेना देना नहीं है। उसने मुझे चुनाव के बहाने से पास में बुलाया था। मुंडी पासी ने कहा कि अतीक ने मेरे भाई की हत्या की थी। वहीं इस बीच पुलिस सूत्रों के द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि शाइस्ता कुछ दिन पहले भी प्रयागराज में मौजूद थी। हालांकि वह भीड़ और बुर्का पहने महिलाओं का फायदा उठाकर वहां से भाग गई। आपको बता दें कि मुंडी पासी लेडी डॉन के तौर पर जानी जाती हैं। वह धूमनगंज थाने में हिस्ट्रीशीटर रही है। उमेश पाल हत्याकांड को लेकर भी उसकी भूमिका सामने आ रही है। बीते दिनों अतीक की पत्नी शाइस्ता के साथ साबिर के अलावा बली पंडित को भी देखा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साबिर की पहचान राइफल से गोलिया बरसाने वाले शख्स के तौर पर हुई और पुलिस ने उसे चिन्हित किया।
मुंडी पासी पर धूमनगंज थाने में हत्या, रंगदारी मांगने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। वह किसी के भी मकान बेचने और जमीन खरीदने जैसे मामलों में रंगदारी वसूलती है। साल 2009 में मुंडी पासी पर यह भी आरोप लगा था कि उसने एक व्यक्ति का मकान दबाव डालकर बेचवा दिया था। मकान बेचने के बाद जो कीमत मिली उसे भी आतंकित करके लूट लिया गया था।
| माफिया अतीक अहमद की पत्नी फरार है और उसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। इस बीच मुंडी पासी ने सामने आकर सफाई दी है कि उसका शाइस्ता से कोई लेना देना नहीं है। प्रयागराजः माफिया अतीक अहमद और उसके भाई के हत्या के बाद शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस सरगर्मी से जुटी हुई है। शाइस्ता को लेकर कई जगहों पर दबिश दी गई लेकिन कहीं भी उसका पता नहीं लगा। इस बीच रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि शाइस्ता की मुश्किल की इस घड़ी में लेडी डॉन मुंडी पासी उनकी मदद कर रही है। हालांकि मुंडी पासी ने इससे इंकार किया है। उसने कहा कि उमेश पाल हत्याकांड में उसे फर्जी फंसाया जा रहा है। मुंडी के द्वारा जानकारी दी गई कि उनका शाइस्ता से कोई भी लेना देना नहीं है। उसने मुझे चुनाव के बहाने से पास में बुलाया था। मुंडी पासी ने कहा कि अतीक ने मेरे भाई की हत्या की थी। वहीं इस बीच पुलिस सूत्रों के द्वारा यह भी दावा किया जा रहा है कि शाइस्ता कुछ दिन पहले भी प्रयागराज में मौजूद थी। हालांकि वह भीड़ और बुर्का पहने महिलाओं का फायदा उठाकर वहां से भाग गई। आपको बता दें कि मुंडी पासी लेडी डॉन के तौर पर जानी जाती हैं। वह धूमनगंज थाने में हिस्ट्रीशीटर रही है। उमेश पाल हत्याकांड को लेकर भी उसकी भूमिका सामने आ रही है। बीते दिनों अतीक की पत्नी शाइस्ता के साथ साबिर के अलावा बली पंडित को भी देखा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साबिर की पहचान राइफल से गोलिया बरसाने वाले शख्स के तौर पर हुई और पुलिस ने उसे चिन्हित किया। मुंडी पासी पर धूमनगंज थाने में हत्या, रंगदारी मांगने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। वह किसी के भी मकान बेचने और जमीन खरीदने जैसे मामलों में रंगदारी वसूलती है। साल दो हज़ार नौ में मुंडी पासी पर यह भी आरोप लगा था कि उसने एक व्यक्ति का मकान दबाव डालकर बेचवा दिया था। मकान बेचने के बाद जो कीमत मिली उसे भी आतंकित करके लूट लिया गया था। |
परिवहन निगम चंबा के पीस मील कर्मचारियों की टूल डाउन हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है। गुरुवार को भी पीस मील कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में निगम कार्यशाला परिसर के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। पीस मील कर्मचारी मंच चंबा के प्रधान विनोद कुमार का कहना है कि मुख्य मांगों में पीस मील कर्मचारियों को अनुबंध के दायरे में लाना और पांच-छह वर्ष पुरानी व्यवस्था को बहाल करना है। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने 5-6 वर्ष पूर्व पालिसी बनाकर 410 कर्मचारियों को अनुबंध में लाया था, जोकि नियमित भी हो चुके हैं। मगर खेद का विषय है कि भाजपा सरकार ने इस पालिसी को लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण उन्हें टूल डाउन स्ट्राइक पर बैठने का कड़ा फैसला लेने का बाध्य होना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि बीते तीन अगस्त को शिमला में मांगों के समर्थन में प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने पंद्रह अगस्त तक सकारात्मक कार्रवाई की बात कही थी। मगर बड़े खेद का विषय है कि इस अवधि में भी मांगों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस कारण उन्हें मजबूरन टूल डाउन स्ट्राइक पर जाने का कड़ा फैसला लेने को बाध्य होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह टूल डाउन स्ट्राइक मांगें न पूरी होने तक जारी रहेगी। उन्होंने सरकार को चेताया है कि जल्द पीस मील कर्मचारियों की सेवाओं को स्थायी नीति के दायरे में लाया जाए। अन्यथा वर्ष 2022 के चुनावों में सरकार को पीस मील कर्मचारियों की नाराजगी का बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ सकता है।
| परिवहन निगम चंबा के पीस मील कर्मचारियों की टूल डाउन हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है। गुरुवार को भी पीस मील कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में निगम कार्यशाला परिसर के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। पीस मील कर्मचारी मंच चंबा के प्रधान विनोद कुमार का कहना है कि मुख्य मांगों में पीस मील कर्मचारियों को अनुबंध के दायरे में लाना और पांच-छह वर्ष पुरानी व्यवस्था को बहाल करना है। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने पाँच-छः वर्ष पूर्व पालिसी बनाकर चार सौ दस कर्मचारियों को अनुबंध में लाया था, जोकि नियमित भी हो चुके हैं। मगर खेद का विषय है कि भाजपा सरकार ने इस पालिसी को लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस कारण उन्हें टूल डाउन स्ट्राइक पर बैठने का कड़ा फैसला लेने का बाध्य होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बीते तीन अगस्त को शिमला में मांगों के समर्थन में प्रदर्शन के बाद प्रबंधन ने पंद्रह अगस्त तक सकारात्मक कार्रवाई की बात कही थी। मगर बड़े खेद का विषय है कि इस अवधि में भी मांगों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस कारण उन्हें मजबूरन टूल डाउन स्ट्राइक पर जाने का कड़ा फैसला लेने को बाध्य होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह टूल डाउन स्ट्राइक मांगें न पूरी होने तक जारी रहेगी। उन्होंने सरकार को चेताया है कि जल्द पीस मील कर्मचारियों की सेवाओं को स्थायी नीति के दायरे में लाया जाए। अन्यथा वर्ष दो हज़ार बाईस के चुनावों में सरकार को पीस मील कर्मचारियों की नाराजगी का बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ सकता है। |
India China Relation: चीन के हवाले से भारत को लेकर एक ऐसी खबर आई है, जिस पर यकीन होना मुश्किल है। दरअसल, चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) के उस बयान की तारीफ कर डाली हैं, जिसमें उन्होंने भारत और चीन के रिश्तों पर यूरोप के दबदबे को नकारा था।
By- Election: राजेंद्र नगर सीट पर होने वाले उपचुनाव में अगर आम आदमी पार्टी जीत दर्ज करती हैं तो उससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता हैं, लेकिन यदि राजेंद्र नगर के उपचुनाव में 'आप' हार जाती है, तो इससे उनकी छवि पर काफी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2015 की तुलना में 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में दागी विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। आम आदमी पार्टी के जीते हुए 62 में से 38 विधायकों (61%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को कहा कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने रामलीला मैदान में रविवार को होने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी कैबिनेट के शपथग्रहण समारोह में स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को निमंत्रण दिया है। पार्टी ने कहा कि शिक्षक बीते पांच वर्षो में दिल्ली के कायाकल्प के ध्वजवाहक रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं कि केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुत चालाकी से कैंपेनिंग की। वह वाम या दक्षिण की राजनीति की जगह मध्यमार्गी बनने की कोशिश करते रहे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 'गोली मारो' और 'भारत-पाक मैच' जैसे बयानों ने भाजपा नेताओं को बचना चाहिए था।
दिल्ली में पार्टी की बुरी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सलाह दी है कि पार्टी खुद को निर्ममता से पुनर्जीवित करे अन्यथा कांग्रेस पार्टी अप्रासंगिक होने की संभावना के लिए तैयार रहे।
इस बार केजरीवाल 16 फरवरी को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में ही शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहां केजरीवाल के साथ-साथ उनके मंत्री भी शपथ लेंगे।
गौरतलब है कि विश्वासनगर विधानसभा सीट से भाजपा के ओम प्रकाश शर्मा ने 65830 वोट हासिल कर जीत हासिल की है। उनके खिलाफ आम आदमी पार्टी ने दीपक सिंगला को उतारा था, जिन्हें 49373 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के गुरचरण सिंह को यहां से महज 7881 वोट मिले हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुई मतगणना में आम आदमी पार्टी आप ने भारी जीत दर्ज की है। आप ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 62 सीटें जीती है, जबकि भाजपा महज आठ सीटें जीत पाई है।
| India China Relation: चीन के हवाले से भारत को लेकर एक ऐसी खबर आई है, जिस पर यकीन होना मुश्किल है। दरअसल, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान की तारीफ कर डाली हैं, जिसमें उन्होंने भारत और चीन के रिश्तों पर यूरोप के दबदबे को नकारा था। By- Election: राजेंद्र नगर सीट पर होने वाले उपचुनाव में अगर आम आदमी पार्टी जीत दर्ज करती हैं तो उससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता हैं, लेकिन यदि राजेंद्र नगर के उपचुनाव में 'आप' हार जाती है, तो इससे उनकी छवि पर काफी गहरा प्रभाव पड़ेगा। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट से पता चलता है कि दो हज़ार पंद्रह की तुलना में दो हज़ार बीस के दिल्ली विधानसभा चुनाव में दागी विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। आम आदमी पार्टी के जीते हुए बासठ में से अड़तीस विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। आम आदमी पार्टी ने शनिवार को कहा कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने रामलीला मैदान में रविवार को होने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी कैबिनेट के शपथग्रहण समारोह में स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को निमंत्रण दिया है। पार्टी ने कहा कि शिक्षक बीते पांच वर्षो में दिल्ली के कायाकल्प के ध्वजवाहक रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं कि केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुत चालाकी से कैंपेनिंग की। वह वाम या दक्षिण की राजनीति की जगह मध्यमार्गी बनने की कोशिश करते रहे। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 'गोली मारो' और 'भारत-पाक मैच' जैसे बयानों ने भाजपा नेताओं को बचना चाहिए था। दिल्ली में पार्टी की बुरी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सलाह दी है कि पार्टी खुद को निर्ममता से पुनर्जीवित करे अन्यथा कांग्रेस पार्टी अप्रासंगिक होने की संभावना के लिए तैयार रहे। इस बार केजरीवाल सोलह फरवरी को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में ही शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहां केजरीवाल के साथ-साथ उनके मंत्री भी शपथ लेंगे। गौरतलब है कि विश्वासनगर विधानसभा सीट से भाजपा के ओम प्रकाश शर्मा ने पैंसठ हज़ार आठ सौ तीस वोट हासिल कर जीत हासिल की है। उनके खिलाफ आम आदमी पार्टी ने दीपक सिंगला को उतारा था, जिन्हें उनचास हज़ार तीन सौ तिहत्तर वोट मिले। वहीं कांग्रेस के गुरचरण सिंह को यहां से महज सात हज़ार आठ सौ इक्यासी वोट मिले हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुई मतगणना में आम आदमी पार्टी आप ने भारी जीत दर्ज की है। आप ने सत्तर सदस्यीय विधानसभा में बासठ सीटें जीती है, जबकि भाजपा महज आठ सीटें जीत पाई है। |
टीम इंडिया के टी 20 वर्ल्ड कप जीतने की संभावना के बारे में बात करते हुए सुरेश रैना ने कहा, "टीम अभी अच्छा कर रही है। शमी ने बुमराह की जगह ली है, यह टीम के लिए थोड़ा एक्स-फैक्टर देगा। हमारे पास अर्शदीप सिंह, सूर्यकुमार यादव हैं। हर कोई अच्छी फॉर्म में है, विराट कोहली वास्तव में अच्छा दिख रहे हैं।
इस बार ऑस्ट्रेलिया में टी20 वर्ल्ड कप खेला जा रहा है। फिलहाल शुरुआती ग्रुप स्टेज के मुकाबले जारी हैं, जिसमें से चार टीमें सुपर 12 स्टेज के लिए क्वालीफाई करेंगी। इस वर्ल्ड कप में सभी क्रिकेट फैंस की निगाहें 23 अक्टूबर पर टिकी हैं, इस दिन भारत-पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होना है। भारतीय क्रिकेट टीम मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में करीब एक लाख दर्शकों के बीच पाकिस्तान से भिड़ेगी।
रोहित शर्मा (कप्तान) केएल राहुल (उप-कप्तान), विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, दीपक हुड्डा, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, आर अश्विन, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद शमी।
| टीम इंडिया के टी बीस वर्ल्ड कप जीतने की संभावना के बारे में बात करते हुए सुरेश रैना ने कहा, "टीम अभी अच्छा कर रही है। शमी ने बुमराह की जगह ली है, यह टीम के लिए थोड़ा एक्स-फैक्टर देगा। हमारे पास अर्शदीप सिंह, सूर्यकुमार यादव हैं। हर कोई अच्छी फॉर्म में है, विराट कोहली वास्तव में अच्छा दिख रहे हैं। इस बार ऑस्ट्रेलिया में टीबीस वर्ल्ड कप खेला जा रहा है। फिलहाल शुरुआती ग्रुप स्टेज के मुकाबले जारी हैं, जिसमें से चार टीमें सुपर बारह स्टेज के लिए क्वालीफाई करेंगी। इस वर्ल्ड कप में सभी क्रिकेट फैंस की निगाहें तेईस अक्टूबर पर टिकी हैं, इस दिन भारत-पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होना है। भारतीय क्रिकेट टीम मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में करीब एक लाख दर्शकों के बीच पाकिस्तान से भिड़ेगी। रोहित शर्मा केएल राहुल , विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, दीपक हुड्डा, ऋषभ पंत , दिनेश कार्तिक , हार्दिक पांड्या, आर अश्विन, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद शमी। |
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द ग्रेट इंडियन किचन हर महिला की कहानी है चाहे हाउस वाइफ हो या वर्किंग वूमेन। ये कहती है कि अपने अस्तित्व को पहचानो, उसके सम्मान को पहचानो।
रेणुका शहाणे की फिल्म का शीर्षक 'त्रिभंग' नृत्य की एक जटिल भंगिमा से लिया गया है जो एक ऐसी स्त्री अपने लिए प्रयोग करती है जिसके रिश्ते 'आदर्श' से बहुत दूर हैं।
बीते हफ्ते सुष्मिता सेन की 21 साल की बेटी रिनी सेन की शॉर्ट फिल्म सुट्टाबाजी रिलीज़ हुई जो धीरे-धीरे नोटिस की जा रही है।
बॉलीवुड में पहले जहां शादी और बच्चों को एक एक्ट्रेस के करियर का अंत मान लिया जाता था, क्या अब शादी के बाद की बदल रही है तस्वीर?
रेणुका शहाणे की इस फ़िल्म त्रिभंग की कहानी में तीनों स्त्रियों का दर्द टूटता नहीं बल्कि एक से दूसरे के पास खूबसूरती से पहुँच जाता है।
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| कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं? जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड! द ग्रेट इंडियन किचन हर महिला की कहानी है चाहे हाउस वाइफ हो या वर्किंग वूमेन। ये कहती है कि अपने अस्तित्व को पहचानो, उसके सम्मान को पहचानो। रेणुका शहाणे की फिल्म का शीर्षक 'त्रिभंग' नृत्य की एक जटिल भंगिमा से लिया गया है जो एक ऐसी स्त्री अपने लिए प्रयोग करती है जिसके रिश्ते 'आदर्श' से बहुत दूर हैं। बीते हफ्ते सुष्मिता सेन की इक्कीस साल की बेटी रिनी सेन की शॉर्ट फिल्म सुट्टाबाजी रिलीज़ हुई जो धीरे-धीरे नोटिस की जा रही है। बॉलीवुड में पहले जहां शादी और बच्चों को एक एक्ट्रेस के करियर का अंत मान लिया जाता था, क्या अब शादी के बाद की बदल रही है तस्वीर? रेणुका शहाणे की इस फ़िल्म त्रिभंग की कहानी में तीनों स्त्रियों का दर्द टूटता नहीं बल्कि एक से दूसरे के पास खूबसूरती से पहुँच जाता है। अपना ईमेल पता दर्ज करें - हर हफ्ते हम आपको दिलचस्प लेख भेजेंगे! |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
शादी के एक दिन पहले दाढ़ी बनवाने की बात कहकर निकला दूल्हा लौटकर घर नहीं आया। समाज में होने वाली किरकिरी से बचने के लिए दूल्हे का पिता अपने छोटे बेटे को लेकर विवाह करने पहुंच गया। इस बात की जानकारी मिलने पर कन्या पक्ष के लोगों ने दूल्हे के पिता को बंधक बना लिया। दूसरे दिन शादी में हुए खर्च की भरपाई करने के बाद उसे आजादी मिली। इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
फतनपुर थाना क्षेत्र के नाथ का पूरा के रहने वाले युवक की शादी नारायणपुर खुर्द में तय थी। शुक्रवार को उसकी बारात जानी थी, लेकिन वह गुरुवार को ही घर से भाग निकला। परिवार के लोग उसे खोजने लगे, मगर उसका पता नहीं लगा। शुक्रवार को उसका पिता बारात लेकर नारायणपुर खुर्द पहुंचा। उसने अपने छोटे बेटे को दूल्हा बनाया था। द्वारपूजा की रस्म पूरी हो गई। विवाह की रस्म के पहले कन्या पक्ष के लोग दूल्हे को लेकर शंका जताने लगे।
हकीकत सामने आते ही हंगामा होने लगा। कुछ ही देर में बाराती वहां से खिसक लिए। कन्या पक्ष के लोगों ने लडक़े के पिता को बंधक बना लिया। शनिवार को दिन भर बातचीत होती रही, लेकिन सहमति नहीं बनी। इस बीच कन्या के पिता ने पुलिस को तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि जिससे शादी करने की बात तय हुई थी, उसके छोटे भाई से शादी कराने की साजिश लडक़े का पिता कर रहा था।
हालांकि फतनपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। रविवार को कन्या पक्ष की ओर शादी की तैयारी में हुए खर्च के रूप में 80 हजार रुपये देने के बाद दूल्हे के पिता को आजादी मिल सकी। कन्या पक्ष के लोगों ने जेवरात लौटाए। फिलहाल इस घटना को लेकर तीन दिनों से नारायणपुर खुर्द में समाज के लोगों को जुटना लगा रहा। एसओ ने बताया कि तहरीर मिली थी। आपस में दोनों पक्ष बातचीत कर रहे थे। इसलिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया।
| शादी के एक दिन पहले दाढ़ी बनवाने की बात कहकर निकला दूल्हा लौटकर घर नहीं आया। समाज में होने वाली किरकिरी से बचने के लिए दूल्हे का पिता अपने छोटे बेटे को लेकर विवाह करने पहुंच गया। इस बात की जानकारी मिलने पर कन्या पक्ष के लोगों ने दूल्हे के पिता को बंधक बना लिया। दूसरे दिन शादी में हुए खर्च की भरपाई करने के बाद उसे आजादी मिली। इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। फतनपुर थाना क्षेत्र के नाथ का पूरा के रहने वाले युवक की शादी नारायणपुर खुर्द में तय थी। शुक्रवार को उसकी बारात जानी थी, लेकिन वह गुरुवार को ही घर से भाग निकला। परिवार के लोग उसे खोजने लगे, मगर उसका पता नहीं लगा। शुक्रवार को उसका पिता बारात लेकर नारायणपुर खुर्द पहुंचा। उसने अपने छोटे बेटे को दूल्हा बनाया था। द्वारपूजा की रस्म पूरी हो गई। विवाह की रस्म के पहले कन्या पक्ष के लोग दूल्हे को लेकर शंका जताने लगे। हकीकत सामने आते ही हंगामा होने लगा। कुछ ही देर में बाराती वहां से खिसक लिए। कन्या पक्ष के लोगों ने लडक़े के पिता को बंधक बना लिया। शनिवार को दिन भर बातचीत होती रही, लेकिन सहमति नहीं बनी। इस बीच कन्या के पिता ने पुलिस को तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि जिससे शादी करने की बात तय हुई थी, उसके छोटे भाई से शादी कराने की साजिश लडक़े का पिता कर रहा था। हालांकि फतनपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। रविवार को कन्या पक्ष की ओर शादी की तैयारी में हुए खर्च के रूप में अस्सी हजार रुपये देने के बाद दूल्हे के पिता को आजादी मिल सकी। कन्या पक्ष के लोगों ने जेवरात लौटाए। फिलहाल इस घटना को लेकर तीन दिनों से नारायणपुर खुर्द में समाज के लोगों को जुटना लगा रहा। एसओ ने बताया कि तहरीर मिली थी। आपस में दोनों पक्ष बातचीत कर रहे थे। इसलिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। |
>DEHRADUN: राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) ने ट्यूजडे को संस्थान का 97वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने बतौर चीफ गेस्ट शिकरत की. एयर चीफ मार्शल आरआईएमसी से ही पास आउट हैं. इस अवसर पर कैडेटों ने हैरतंगेज करतब दिखाए. जिन्हें देख दर्शक रोमांचित हो उठे. रिमकोज (कैडेट) व रिमकोलियंस (ओल्ड कैडेट) के मध्य खेला गया मैत्री हॉकी मैच भी रोमांचक रहा. वायुसेना के जवानों द्वारा प्रस्तुत 'एयर वॉरियर ड्रिल' भी आकर्षण का केंद्र रही. शाम को थिमैया ऑडिटोरियम में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को पुरस्कृत किया गया. यहां पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा ने विजेता कैडेटों को ट्रॉफी व पुरस्कार प्रदान किए. स्थापना दिवस समारोह में आरआईएमसी कैडेटों ने इन जांबाज सैन्य अधिकारियों को भी याद किया. शुद्ध स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहीद सैनिकों को नमन किया.
आरआईएमसी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में अंतर सदन घुड़सवारी में भी कैडेटों ने दमखम दिखाया. जबकि इस प्रतियोगिता का खिताब प्रताप सदन के नाम रहा. कैडेट प्रखर नेगी सर्वश्रेष्ठ घुड़सवार चुने गए. शाम को थिमैया सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के विजेता कैडेटों को पुरस्कार प्रदान किए गए. इस अवसर पर एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने संस्थान में बिताए अपने पुराने दिनों को याद किया. इस मौके पर कई आर्मी के पूर्व शीर्षस्थ अधिकारियों में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा, वाइस एडमिरल विमल वर्मा आदि मौजूद रहे.
आरआईएमसी में रिमकोज (कैडेट) व रिमकोलियंस (भूतपूर्व कैडेट) के बीच मैत्री हॉकी मैच भी खेला गया. रिमकोज ने रिमकोलियंस को चार के मुकाबले छह गोल से हराया. जबकि अंतर सदन बॉक्सिंग प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला भी खेला गया. जिसमें बाजी रंजीत सदन के प्रतिभागी कैडेटों ने मारी. कैडेट राघुवेंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर के लिए चुना गया.
| >DEHRADUN: राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज ने ट्यूजडे को संस्थान का सत्तानवेवां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने बतौर चीफ गेस्ट शिकरत की. एयर चीफ मार्शल आरआईएमसी से ही पास आउट हैं. इस अवसर पर कैडेटों ने हैरतंगेज करतब दिखाए. जिन्हें देख दर्शक रोमांचित हो उठे. रिमकोज व रिमकोलियंस के मध्य खेला गया मैत्री हॉकी मैच भी रोमांचक रहा. वायुसेना के जवानों द्वारा प्रस्तुत 'एयर वॉरियर ड्रिल' भी आकर्षण का केंद्र रही. शाम को थिमैया ऑडिटोरियम में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को पुरस्कृत किया गया. यहां पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा ने विजेता कैडेटों को ट्रॉफी व पुरस्कार प्रदान किए. स्थापना दिवस समारोह में आरआईएमसी कैडेटों ने इन जांबाज सैन्य अधिकारियों को भी याद किया. शुद्ध स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहीद सैनिकों को नमन किया. आरआईएमसी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में अंतर सदन घुड़सवारी में भी कैडेटों ने दमखम दिखाया. जबकि इस प्रतियोगिता का खिताब प्रताप सदन के नाम रहा. कैडेट प्रखर नेगी सर्वश्रेष्ठ घुड़सवार चुने गए. शाम को थिमैया सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के विजेता कैडेटों को पुरस्कार प्रदान किए गए. इस अवसर पर एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने संस्थान में बिताए अपने पुराने दिनों को याद किया. इस मौके पर कई आर्मी के पूर्व शीर्षस्थ अधिकारियों में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा, वाइस एडमिरल विमल वर्मा आदि मौजूद रहे. आरआईएमसी में रिमकोज व रिमकोलियंस के बीच मैत्री हॉकी मैच भी खेला गया. रिमकोज ने रिमकोलियंस को चार के मुकाबले छह गोल से हराया. जबकि अंतर सदन बॉक्सिंग प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला भी खेला गया. जिसमें बाजी रंजीत सदन के प्रतिभागी कैडेटों ने मारी. कैडेट राघुवेंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर के लिए चुना गया. |
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के रौनाहट में स्थित कॉलेज स्टाफ और भवन की कमी से जूझ रहा है. यहां पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर है. यहां पढ़ रहे छात्रों ने राज्य सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि फिलहाल यहां दो ही शिक्षक है इसलिए यहां पर्याप्त टीचिंग स्टाफ मुहैया करवाई जाए. इसके साथ ही उन्होने कहा कि पूरा कॉलेज एक ही भवन में चल रहा है, यह ठीक नहीं है. कॉलेज की नई बिल्डिंग बनाई जाए.
छात्रों ने बताया कि पूर्व की वीरभद्र सरकार ने सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र रौनाहट में साल 2017 में इस क्षेत्र के लोगों को कॉलेज की सौगात दी थी. उस समय यह उम्मीद की गई थी कि इस इलाके के घर - घर के बच्चों को घर द्वार पर शिक्षा की सुविधा मिलेगी. मगर हालत यह है कि यह कॉलेज सिर्फ 2 शिक्षकों के सहारे चल रहा है. वही भवन की अगर बात की जाए तो यहां पंचायत समिति ने तीन कमरे कॉलेज को मुहैया करवाए हैं उसमें से दो में कार्यालय चल रहे हैं और सिर्फ एक रूम में सभी कक्षाएं चलती हैं.
'टीचिंग स्टाफ की कमी के चलते पढ़ाई हो रही प्रभावित'
छात्रों का कहना है कि अध्यापक नहीं होने के चलते हमारी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. छात्रों ने यह भी मांग की है कि सरकार यहां भवन की सुविधा उपलब्ध करवाएं ताकि आसानी से बैठकर पढ़ाई की जा सके. वहीं कॉलेज के प्रिंसिपल हेमंत कुमार ने माना कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
'छात्रों को बैठने में आती है काफी दिक्कतें'
उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षा विभाग को अवगत करवाया जा चुका है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भवन की कमी के चलते बच्चों को बैठने में काफी दिक्कतें पेश आ रही है.
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| हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के रौनाहट में स्थित कॉलेज स्टाफ और भवन की कमी से जूझ रहा है. यहां पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर है. यहां पढ़ रहे छात्रों ने राज्य सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि फिलहाल यहां दो ही शिक्षक है इसलिए यहां पर्याप्त टीचिंग स्टाफ मुहैया करवाई जाए. इसके साथ ही उन्होने कहा कि पूरा कॉलेज एक ही भवन में चल रहा है, यह ठीक नहीं है. कॉलेज की नई बिल्डिंग बनाई जाए. छात्रों ने बताया कि पूर्व की वीरभद्र सरकार ने सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र रौनाहट में साल दो हज़ार सत्रह में इस क्षेत्र के लोगों को कॉलेज की सौगात दी थी. उस समय यह उम्मीद की गई थी कि इस इलाके के घर - घर के बच्चों को घर द्वार पर शिक्षा की सुविधा मिलेगी. मगर हालत यह है कि यह कॉलेज सिर्फ दो शिक्षकों के सहारे चल रहा है. वही भवन की अगर बात की जाए तो यहां पंचायत समिति ने तीन कमरे कॉलेज को मुहैया करवाए हैं उसमें से दो में कार्यालय चल रहे हैं और सिर्फ एक रूम में सभी कक्षाएं चलती हैं. 'टीचिंग स्टाफ की कमी के चलते पढ़ाई हो रही प्रभावित' छात्रों का कहना है कि अध्यापक नहीं होने के चलते हमारी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. छात्रों ने यह भी मांग की है कि सरकार यहां भवन की सुविधा उपलब्ध करवाएं ताकि आसानी से बैठकर पढ़ाई की जा सके. वहीं कॉलेज के प्रिंसिपल हेमंत कुमार ने माना कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है. 'छात्रों को बैठने में आती है काफी दिक्कतें' उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षा विभाग को अवगत करवाया जा चुका है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भवन की कमी के चलते बच्चों को बैठने में काफी दिक्कतें पेश आ रही है. . |
पीएम नरेंद्र मोदी का आज (17 सितंबर) 69वां जन्मदिन है। इस दौरान वह गुजरात में सरदार सरोवर डैम का दौरा करने पहुंचे। साथ ही, उन्होंने रिक्शा में बैठकर जंगल सफारी का आनंद भी लिया। बता दें कि पीएम मोदी के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए पूरे देश में काफी तैयारियां की गई हैं। गुजरात की केवड़िया कॉलोनी में स्टेज बनाया गया है, जहां पीएम मोदी नमामि नर्मदा महोत्सव में शामिल होंगे। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम गुजरात सरकार द्वारा आयोजित किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान 100 से अधिक पुजारी नर्मदा नदी पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं, पीएम मोदी नदी में नारियल व चुनरी चढ़ाएंगे। मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुए था। आजादी के बाद से केंद्र में सबसे बड़ी गैर-कांग्रेसी सरकार बनाने का श्रेय मोदी को जाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर 303 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस पार्टी महज 52 सीटों पर सिमट गई।
| पीएम नरेंद्र मोदी का आज उनहत्तरवां जन्मदिन है। इस दौरान वह गुजरात में सरदार सरोवर डैम का दौरा करने पहुंचे। साथ ही, उन्होंने रिक्शा में बैठकर जंगल सफारी का आनंद भी लिया। बता दें कि पीएम मोदी के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए पूरे देश में काफी तैयारियां की गई हैं। गुजरात की केवड़िया कॉलोनी में स्टेज बनाया गया है, जहां पीएम मोदी नमामि नर्मदा महोत्सव में शामिल होंगे। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम गुजरात सरकार द्वारा आयोजित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान एक सौ से अधिक पुजारी नर्मदा नदी पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं, पीएम मोदी नदी में नारियल व चुनरी चढ़ाएंगे। मोदी का जन्म सत्रह सितंबर एक हज़ार नौ सौ पचास को गुजरात के वडनगर में हुए था। आजादी के बाद से केंद्र में सबसे बड़ी गैर-कांग्रेसी सरकार बनाने का श्रेय मोदी को जाता है। दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर तीन सौ तीन सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस पार्टी महज बावन सीटों पर सिमट गई। |
सहयोगी महिला कर्मी ने नप ईओ नरवाना पर छेड़छाड़ व अश्लील हरकत करने के आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। फिलहाल पुलिस आरोपित ईओ से पूछताछ कर रही है।
नगर परिषद नरवाना के कार्यकारी अधिकारी ( EO) को सहयोगी महिला कर्मी से अश्लील हरकत करने पर महिला थाना पुलिस ने छेडछाड समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।
नरवाना नगर परिषद की महिला कर्मी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि नगर परिषद के ईओ डा. सुरेश उसे नाजायज तौर पर परेशान कर रहा है। मोबाइल फोन पर अश्लील टिप्पणी करता है तो उसके मोबाइल पर अश्लील मैसेज भी भेजता है। यहां तक की उसकी बात न मानने पर अतिरिक्त कामकाज का बोझ भी डालता है। जब वह विरोध करती है तो उसे बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दे रहा है। महिला थाना पुलिस ने महिला कर्मी की शिकायत पर नगर परिषद ईओ डा. सुरेश के खिलाफ छेडछाड समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को नरवाना नगर परिषद कार्यालय से गिरफ्तार लिया। फिलहाल पुलिस आरोपित ईओ से पूछताछ कर रही है।
महिला थाना प्रभारी गीता ने बताया कि सहयोगी महिला कर्मी ने नप ईओ नरवाना पर छेडछाड व अश्लील हरकत करने के आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। जिसके आधार पर मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को गिरफ्तार कर लिया गया है।
| सहयोगी महिला कर्मी ने नप ईओ नरवाना पर छेड़छाड़ व अश्लील हरकत करने के आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। फिलहाल पुलिस आरोपित ईओ से पूछताछ कर रही है। नगर परिषद नरवाना के कार्यकारी अधिकारी को सहयोगी महिला कर्मी से अश्लील हरकत करने पर महिला थाना पुलिस ने छेडछाड समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। नरवाना नगर परिषद की महिला कर्मी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि नगर परिषद के ईओ डा. सुरेश उसे नाजायज तौर पर परेशान कर रहा है। मोबाइल फोन पर अश्लील टिप्पणी करता है तो उसके मोबाइल पर अश्लील मैसेज भी भेजता है। यहां तक की उसकी बात न मानने पर अतिरिक्त कामकाज का बोझ भी डालता है। जब वह विरोध करती है तो उसे बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दे रहा है। महिला थाना पुलिस ने महिला कर्मी की शिकायत पर नगर परिषद ईओ डा. सुरेश के खिलाफ छेडछाड समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को नरवाना नगर परिषद कार्यालय से गिरफ्तार लिया। फिलहाल पुलिस आरोपित ईओ से पूछताछ कर रही है। महिला थाना प्रभारी गीता ने बताया कि सहयोगी महिला कर्मी ने नप ईओ नरवाना पर छेडछाड व अश्लील हरकत करने के आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। जिसके आधार पर मामला दर्ज कर आरोपित ईओ को गिरफ्तार कर लिया गया है। |
बड़कागांवः झारखंड स्टेट स्टूडेंट यूनियन एवं नागरिक अधिकार मंच के तत्वावधान में झारखंड में 60-40 नियोजन नीति को रद्द करने, सभी नियुक्तियों में झारखंड का स्थाई निवासी शब्द जोड़ने, खतियानी नियोजन नीति को लागू करने एवं मूल निवासियों को नौकरी देने की मांगों को लेकर हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के मुख्य चौक पर प्रदर्शनकारियों ने शनिवार की सुबह सड़क जाम किया. 11 जून को भी छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं और अभिभावक सड़क पर उतरेंगे. सड़क जाम से यात्री बस एवं अन्य प्रकार के वाहन दोपहर तक नहीं चले. इससे यात्रियों को परेशानी हुई.
सड़क जाम करने को लेकर बड़कागांव मुख्य चौक पर नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया. मौके पर अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि झारखंड गठन हुए 23 वर्ष हो गये हैं, लेकिन आज तक झारखंड के मूल निवासियों को हक और अधिकार नहीं मिला है. सरकार में बाहरी तत्वों को शामिल होने के कारण मूल झारखंडियों की नहीं चलती है. उन्होंने कहा कि झारखंड के बाहरी लोग विधायक, सांसद और मंत्री बने हुए हैं, तो वे कैसे झारखंड की भला चाहेंगे. ऐसे लोगों को मंत्री और विधायक और सांसद नहीं बनने देना है. अधिवक्ता ने कहा कि हजारीबाग, रांची, चतरा अन्य संसदीय क्षेत्र से चुने गए सांसद झारखंड के मूल निवासी नहीं हैं.
जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि 60-40 नियोजन नीति से झारखंड में बाहरी लोगों का नियुक्ति में दबदबा बन जाएगा और झारखंड के मूल निवासियों को नौकरी से वंचित रहना पड़ जाएगा. मनोज गुप्ता ने कहा कि 1932 का खतियान लागू करने से ही झारखंड के मूल निवासियों को हक व अधिकार मिलेगा. समाजसेवी लखींद्र ठाकुर ने कहा कि बड़कागांव में बड़ी-बड़ी कंपनियां रैयतों से जबरदस्ती जमीन छीन कर करोड़ों रुपए का कोयला निकाल रही हैं, लेकिन यहां के मूल निवासियों को नौकरी नहीं दे रही हैं, बल्कि बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है. इससे मूल निवासियों का शोषण हो रहा है.
नुक्कड़ सभा की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार, राकेश कुमार एवं संचालन मोहम्मद इब्राहिम ने किया. मौके पर रंजन कुमार उर्फ गुड्डू, रामचरित्र प्रसाद, अवधेश कुमार, मोहम्मद जानिसार, मुकेश प्रजापति,मोहम्मद असद, पंचम कुमार, मोनल कुमार, सागर कुमार,विकास कुमार, मोहम्मद कासिम रजा, प्रीति कुमारी,रामदुलार कुमार साव, समाजसेवी सोनू इराकी, सरिता कुमारी, कंचन कुमारी,अफसाना प्रवीण, सोनी कुमारी, तिलेश्वर कुमार समेत अन्य उपस्थित थे.
| बड़कागांवः झारखंड स्टेट स्टूडेंट यूनियन एवं नागरिक अधिकार मंच के तत्वावधान में झारखंड में साठ-चालीस नियोजन नीति को रद्द करने, सभी नियुक्तियों में झारखंड का स्थाई निवासी शब्द जोड़ने, खतियानी नियोजन नीति को लागू करने एवं मूल निवासियों को नौकरी देने की मांगों को लेकर हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के मुख्य चौक पर प्रदर्शनकारियों ने शनिवार की सुबह सड़क जाम किया. ग्यारह जून को भी छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं और अभिभावक सड़क पर उतरेंगे. सड़क जाम से यात्री बस एवं अन्य प्रकार के वाहन दोपहर तक नहीं चले. इससे यात्रियों को परेशानी हुई. सड़क जाम करने को लेकर बड़कागांव मुख्य चौक पर नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया. मौके पर अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि झारखंड गठन हुए तेईस वर्ष हो गये हैं, लेकिन आज तक झारखंड के मूल निवासियों को हक और अधिकार नहीं मिला है. सरकार में बाहरी तत्वों को शामिल होने के कारण मूल झारखंडियों की नहीं चलती है. उन्होंने कहा कि झारखंड के बाहरी लोग विधायक, सांसद और मंत्री बने हुए हैं, तो वे कैसे झारखंड की भला चाहेंगे. ऐसे लोगों को मंत्री और विधायक और सांसद नहीं बनने देना है. अधिवक्ता ने कहा कि हजारीबाग, रांची, चतरा अन्य संसदीय क्षेत्र से चुने गए सांसद झारखंड के मूल निवासी नहीं हैं. जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि मोहम्मद इब्राहिम ने कहा कि साठ-चालीस नियोजन नीति से झारखंड में बाहरी लोगों का नियुक्ति में दबदबा बन जाएगा और झारखंड के मूल निवासियों को नौकरी से वंचित रहना पड़ जाएगा. मनोज गुप्ता ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ बत्तीस का खतियान लागू करने से ही झारखंड के मूल निवासियों को हक व अधिकार मिलेगा. समाजसेवी लखींद्र ठाकुर ने कहा कि बड़कागांव में बड़ी-बड़ी कंपनियां रैयतों से जबरदस्ती जमीन छीन कर करोड़ों रुपए का कोयला निकाल रही हैं, लेकिन यहां के मूल निवासियों को नौकरी नहीं दे रही हैं, बल्कि बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है. इससे मूल निवासियों का शोषण हो रहा है. नुक्कड़ सभा की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार, राकेश कुमार एवं संचालन मोहम्मद इब्राहिम ने किया. मौके पर रंजन कुमार उर्फ गुड्डू, रामचरित्र प्रसाद, अवधेश कुमार, मोहम्मद जानिसार, मुकेश प्रजापति,मोहम्मद असद, पंचम कुमार, मोनल कुमार, सागर कुमार,विकास कुमार, मोहम्मद कासिम रजा, प्रीति कुमारी,रामदुलार कुमार साव, समाजसेवी सोनू इराकी, सरिता कुमारी, कंचन कुमारी,अफसाना प्रवीण, सोनी कुमारी, तिलेश्वर कुमार समेत अन्य उपस्थित थे. |
प्रतिभा उम्र, जीवन के अनुभव या शिक्षा पर निर्भर नहीं करता। आप अपनी सारी जिंदगी सीख सकते हैं, लेकिन नहीं किया "शूट"। लेकिन उनके 25 वर्षों में Ksave डोलन - एक अभिनेता, निर्देशक, कलाकार, संगीतकार। उनकी पहली फिल्म एक उत्तेजना है, और वेनिस फ़िल्म समारोह में वाहवाही "फार्म में टॉम" के अंतिम चित्र बनाया। और कौन दावा कर सकता है कि इस तरह के एक युवा उम्र में गंभीरता से प्रतिस्पर्धा करने के लिए मीटर की दूरी पर सिनेमा में सक्षम है? हालांकि, मान्यता प्राप्त स्वामी को स्थानांतरित करने के लिए किया था।
Ksave डोलन - तो यह कौन है?
कुछ आलोचकों का एक नवोदय, वह बहरूपिया रूप में उसे पर विचार करें। वे जोर उसके सारे चित्रों है कि - एक सतत के हवाले से यह है कि यह सिनेमा के लिए कोई नई बात नहीं नहीं किया जाता है है।
अन्य लोग, इसके विपरीत, यह "नई लहर", स्वतंत्र सिनेमा, जिनकी फिल्में व्यक्तित्व और मौलिकता की छाप सहन के एक प्रतिनिधि के प्रतिष्ठित निर्देशक है।
कौन सही है? सबसे अधिक संभावना है, आमतौर पर इस तरह के रूप, नहीं।
जेवियर खुद मानते हैं कि अभी भी फार्म के लिए लग रही है, विभिन्न सामग्रियों, दृश्य, निर्देशक की विधियों का प्रयास करें। हालांकि, इस प्रयोग के लिए एक प्रयोग नहीं है। उनकी कहानियों की कहानी के लिए नए अवसर के लिए यह खोज।
डोलन सिर्फ एक निर्देशक नहीं है, वह अपने टेप में अभिनय किया। उन्होंने पटकथाओं लिखते हैं, साउंडट्रैक उठाता है, फिल्म के भविष्य रचना बनाता है और अपने स्वयं के प्रामाणिक कहानियों के लिए उपयुक्त व्यक्तियों के लिए लग रही है।
उनका पूरा नाम - Ksave डोलन-Tadros। उन्होंने कहा कि 1989 में पैदा हुआ था, 20 मार्च, मॉन्ट्रियल में। Tadros - अपने पिता का नाम है। मिस्र के अभिनेता मैनुअल और विश्वविद्यालय कर्मचारी Genevieve जेवियर की उम्र से पहले लंबे समय तक अलग कर लिए। हालांकि, यह के तहत अपने पिता की युवा प्रतिभा का प्रभाव पहले अभिनय कैरियर पर अपने हाथ की कोशिश की है। सभी बहुत आम। उन्होंने कहा कि विज्ञापनों में अभिनय किया। तो फिर वहाँ डबिंग का अनुभव था। धारावाहिकों में छोटी भूमिकाएं पर लेने के पांच साल के साथ। वह जलाया और फिल्मों में। फिर, एपिसोड में। इस तरह के लिए एक युवा उम्र कैरियर बहुत सफल रहा।
नतीजतन, जेवियर स्कूल पर समय बर्बाद नहीं करने का फैसला, फेंक दिया, यहां तक कि एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए परेशान कर रहा है। की अवधि "शून्य" के रूप में वह यह समय डोलन पहले फिल्म निर्देशक की स्क्रिप्ट लिखने समाप्त करार दिया - "। मैं मारे मेरी माँ"
"मैं मार डाला मेरी माँ" - पहली फिल्म है, जो निर्देशक और लेखक Ksave डोलन ले लिया। इस बिंदु तक उनकी फिल्मोग्राफी तुरंत भुला दिया गया। दरअसल, जहां से पहले polubiograficheskogo फिल्म रहस्योद्घाटन कभी बच्चे भूमिकाओं है।
कई टेप के नाम repels। हालांकि, इससे पहले दर्शकों को एक रोमांचक फिल्म है, न कि एक भयानक फिल्म नोयर, एक किशोर के इस खरा कहानी नहीं है, अपनी मां के overprotection कुचल दिया। के कगार पर अपनी मां के साथ रिश्ता कई परिचित प्यार-नफरत है। कभी-कभी अपने ही माता-पिता अपने बच्चों के जीवन का निर्माण करने की इच्छा राक्षसी संघर्ष पैदा करता है।
समानांतर में, इस फिल्म में, वहाँ एक और, कोई स्पष्ट कहानी है। नायक और उसके प्रेमी के बीच संबंध। हाँ, Ksave डोलन - समलैंगिक। और वह छिपा नहीं है।
फिल्म 'मैं मेरी माँ "होने का अनुमान जूरी किल्ड कान फिल्म महोत्सव के। चित्र भी मुख्य सूची में, "ऑस्कर" के लिए नामित किया तथापि, और अनुमति नहीं थी। यह एक पंथ का दर्जा प्राप्त करने के लिए युवा निर्देशक को नहीं रोका।
चित्रकला एक बार फिर से हमें मना है कि एक उत्कृष्ट कृति के निर्माण एक बड़ी वित्तीय निवेश की जरूरत है, प्रचार और विज्ञापन प्रचार नहीं है। यहां तक कि बहुत से लोगों को लाने की जरूरत है। सत्रह साल के लड़के वह दूर ले गया, घुड़सवार, गढ़ी दृश्यों,, ध्वनि उठाया शीर्षक भूमिका में अभिनय किया। और वहाँ सिनेमा में एक 'नई' खोज भी थी।
लगभग तुरंत पहली फिल्म टेप जेवियर द्वारा अगली फिल्म बाहर चल के बाद। काम के लिए सभी विभिन्न अद्भुत क्षमता पर युवा कलाकार।
वहाँ 2009 में "काल्पनिक लव" की एक तस्वीर थी। लेखक खुद को मुख्य पात्रों की भावनाओं के मामले में के रूप में "छोटे" फिल्म का वर्णन, अहंकार में डूबे खुद को। आदर्श प्रेम किसी तरह का निर्माण करने के लिए कोशिश कर रहा है, वे साधारण "छोटे" कामुक जुनून में आते हैं। दृश्य सीमा क्या यह पहली तस्वीर में था से बहुत अलग है। तेज, कभी कभी दूर वास्तविकता से, छवियों कृत्रिमता अंडरस्कोर, की "तस्वीर" एक प्रेम त्रिकोण।
फिल्म फिर से कान कार्यक्रम पर था और श्रेणी "अन कुछ संबंध" में सम्मानित किया गया। अब कोई भी जेवियर की प्रतिभा पर शक।
2012 में, अगली फिल्म के कान प्रीमियर। फिल्में Ksave Dolana अपनी मौलिकता के साथ विस्मित संघर्ष कभी नहीं।
इस बार, निदेशक transsexuality की पड़ताल। यह प्रतीत होता है कि एक प्रसिद्ध जटिलताः एक आदमी और एक औरत। वे एक दूसरे से प्यार है, लेकिन यहां एक आदमी अंत में अपने आप को उसकी प्रकृति की सच्चाई स्वीकार करने का फैसला करता है। उन्होंने कहा कि के लिए तैयारी कर रहा है सेक्स परिवर्तन आपरेशनों।
प्रत्येक नई फिल्म के साथ डोलन परिपक्व। masterfully एक कहानी बताने के लिए क्षमता - यह मुख्य बात खोने के बिना, एक नया दृश्य तकनीक को दर्शाता है।
दर्शक एक अजनबी, ट्रांस की दुनिया के कई, द्वारा तुच्छ जीने का विचित्र चेहरे पर मास्क से परे देखने के लिए के साथ सहानुभूति शुरू होता है।
प्रशंसक है, और वे जेवियर का एक बहुत, कलाकार की योजनाओं के बारे में खबर पर नज़र रखने के लिए करीब ध्यान के साथ शुरू हुआ मिला है। 2012 में, वहाँ खेलने Bacharda माइकल के फिल्म रूपांतरण के बारे में जानकारी है। उनकी "टॉम पर खेत" खुद Ksave डोलन शूट करने के लिए जा रहा था। वेनिस फिल्म समारोह से तस्वीरें खुश प्रशंसक हैं। डोलन सिर्फ फिल्म के फिल्मांकन के समाप्त हो गया है नहीं, लेकिन यह भी प्रतियोगिता कार्यक्रम में उसके साथ शामिल किया गया।
चित्र के पहले मिनट से हम टेप हाईवे घास के मैदान और खेतों की विशालता में खो देखते हैं। यही कारण है कि अभी से ग्रामीण शांति नहीं एक निशान बना हुआ है, जैसे ही मुख्य चरित्र अपने मृत प्रेमी के परिवार के साथ मिलता है के रूप में है। बल्कि प्रत्याशित विभाजित दुः ख, टॉम एक माँ जो अपने बेटे की वास्तविक प्रकृति को नहीं जानता है के साथ सामना करना पड़ा। इसके अलावा, मृतक के भाई से समलैंगिकों के साफदिल घृणा आता है।
कई आलोचकों जेवियर घटना हिचकॉक रोमांच के साथ एक नया चित्र के प्रभाव की तुलना करने के लिए त्वरित थे। हालांकि, स्क्रीन से खतरे का एक स्पष्ट समझ। लगभग स्पष्ट रोष, दुखद समापन के अनिवार्यता। अपनी त्वचा में दर्शक डर, चिंता और गंभीर अलगाव की उम्मीद महसूस करता है।
"वॉल्यूम" में डोलन फिर से बढ़त बना ली। प्रशंसक न केवल एक निर्देशक लेकिन यह भी स्वतंत्र सिनेमा के अपने अभिनय प्रतिभा का आनंद लेने के लिए सक्षम थे।
हालांकि, द्वेषी आलोचकों में भी वृद्धि हुई। हालांकि, उनके escapades जूरी पुरस्कार एक पुरस्कार रिबन से नहीं सुना गया था।
Ksave डोलन आलोचना को खारिज करने के लिए इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके काम की विस्तृत समीक्षा का उपयोग करता है और आगे तकनीक पॉलिश करने। एक ही समय में उन्होंने एक साक्षात्कार प्रशंसकों या गुस्से में बयान विरोधियों से चापलूसी का शिकार भी कोशिश करता है में बल दिया।
पांचवीं फिल्म शायद "माँ। " कहा जाएगा इसमें निदेशक माँ और बेटा संबंध के विषय में वापस आती है। यह एक औरत जो अंधेरे, अस्पष्ट अतीत के साथ एक लड़के की परवरिश में ले लिया गया है के बारे में एक कहानी हो जाएगा।
और फिर भी Ksave डोलन नाटक पर आधारित इस फिल्म में एक अभिनेता के रूप में दिखाई देगा "हाथियों के गीत। "
सब कुछ तथ्यों के बारे में, निर्देशक ध्यान से चुप का काम से संबंधित नहीं। यहां तक कि डोलन के साथ सबसे अधिक स्पष्ट साक्षात्कार में उनके जीवन के विवरण का खुलासा नहीं किया। वह उदारता से अपनी योजनाओं, अनुभव साझा करता है। वह शब्दों के साथ उदार जब उनकी फिल्मों पर चर्चा है। हालांकि, यह वह कैसे मिलता है Ksave डोलन बारे में जानकारी प्राप्त करना असंभव है। निजी जीवन, उनकी राय में, यह इस तरह रहना चाहिए। वह अपने बाहर आ बनाया है, और बस इतना ही। इस स्थिति में सम्मान के हकदार।
स्वतंत्र सिनेमा के युवा प्रतिभा भी तीस नहीं है। अपने अथक ऊर्जा, गोली मार और शूट करने के लिए एक इच्छा को देखते हुए आप भविष्य में बहुत अधिक रोमांचक फिल्मों में उम्मीद कर सकते हैं।
| प्रतिभा उम्र, जीवन के अनुभव या शिक्षा पर निर्भर नहीं करता। आप अपनी सारी जिंदगी सीख सकते हैं, लेकिन नहीं किया "शूट"। लेकिन उनके पच्चीस वर्षों में Ksave डोलन - एक अभिनेता, निर्देशक, कलाकार, संगीतकार। उनकी पहली फिल्म एक उत्तेजना है, और वेनिस फ़िल्म समारोह में वाहवाही "फार्म में टॉम" के अंतिम चित्र बनाया। और कौन दावा कर सकता है कि इस तरह के एक युवा उम्र में गंभीरता से प्रतिस्पर्धा करने के लिए मीटर की दूरी पर सिनेमा में सक्षम है? हालांकि, मान्यता प्राप्त स्वामी को स्थानांतरित करने के लिए किया था। Ksave डोलन - तो यह कौन है? कुछ आलोचकों का एक नवोदय, वह बहरूपिया रूप में उसे पर विचार करें। वे जोर उसके सारे चित्रों है कि - एक सतत के हवाले से यह है कि यह सिनेमा के लिए कोई नई बात नहीं नहीं किया जाता है है। अन्य लोग, इसके विपरीत, यह "नई लहर", स्वतंत्र सिनेमा, जिनकी फिल्में व्यक्तित्व और मौलिकता की छाप सहन के एक प्रतिनिधि के प्रतिष्ठित निर्देशक है। कौन सही है? सबसे अधिक संभावना है, आमतौर पर इस तरह के रूप, नहीं। जेवियर खुद मानते हैं कि अभी भी फार्म के लिए लग रही है, विभिन्न सामग्रियों, दृश्य, निर्देशक की विधियों का प्रयास करें। हालांकि, इस प्रयोग के लिए एक प्रयोग नहीं है। उनकी कहानियों की कहानी के लिए नए अवसर के लिए यह खोज। डोलन सिर्फ एक निर्देशक नहीं है, वह अपने टेप में अभिनय किया। उन्होंने पटकथाओं लिखते हैं, साउंडट्रैक उठाता है, फिल्म के भविष्य रचना बनाता है और अपने स्वयं के प्रामाणिक कहानियों के लिए उपयुक्त व्यक्तियों के लिए लग रही है। उनका पूरा नाम - Ksave डोलन-Tadros। उन्होंने कहा कि एक हज़ार नौ सौ नवासी में पैदा हुआ था, बीस मार्च, मॉन्ट्रियल में। Tadros - अपने पिता का नाम है। मिस्र के अभिनेता मैनुअल और विश्वविद्यालय कर्मचारी Genevieve जेवियर की उम्र से पहले लंबे समय तक अलग कर लिए। हालांकि, यह के तहत अपने पिता की युवा प्रतिभा का प्रभाव पहले अभिनय कैरियर पर अपने हाथ की कोशिश की है। सभी बहुत आम। उन्होंने कहा कि विज्ञापनों में अभिनय किया। तो फिर वहाँ डबिंग का अनुभव था। धारावाहिकों में छोटी भूमिकाएं पर लेने के पांच साल के साथ। वह जलाया और फिल्मों में। फिर, एपिसोड में। इस तरह के लिए एक युवा उम्र कैरियर बहुत सफल रहा। नतीजतन, जेवियर स्कूल पर समय बर्बाद नहीं करने का फैसला, फेंक दिया, यहां तक कि एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए परेशान कर रहा है। की अवधि "शून्य" के रूप में वह यह समय डोलन पहले फिल्म निर्देशक की स्क्रिप्ट लिखने समाप्त करार दिया - "। मैं मारे मेरी माँ" "मैं मार डाला मेरी माँ" - पहली फिल्म है, जो निर्देशक और लेखक Ksave डोलन ले लिया। इस बिंदु तक उनकी फिल्मोग्राफी तुरंत भुला दिया गया। दरअसल, जहां से पहले polubiograficheskogo फिल्म रहस्योद्घाटन कभी बच्चे भूमिकाओं है। कई टेप के नाम repels। हालांकि, इससे पहले दर्शकों को एक रोमांचक फिल्म है, न कि एक भयानक फिल्म नोयर, एक किशोर के इस खरा कहानी नहीं है, अपनी मां के overprotection कुचल दिया। के कगार पर अपनी मां के साथ रिश्ता कई परिचित प्यार-नफरत है। कभी-कभी अपने ही माता-पिता अपने बच्चों के जीवन का निर्माण करने की इच्छा राक्षसी संघर्ष पैदा करता है। समानांतर में, इस फिल्म में, वहाँ एक और, कोई स्पष्ट कहानी है। नायक और उसके प्रेमी के बीच संबंध। हाँ, Ksave डोलन - समलैंगिक। और वह छिपा नहीं है। फिल्म 'मैं मेरी माँ "होने का अनुमान जूरी किल्ड कान फिल्म महोत्सव के। चित्र भी मुख्य सूची में, "ऑस्कर" के लिए नामित किया तथापि, और अनुमति नहीं थी। यह एक पंथ का दर्जा प्राप्त करने के लिए युवा निर्देशक को नहीं रोका। चित्रकला एक बार फिर से हमें मना है कि एक उत्कृष्ट कृति के निर्माण एक बड़ी वित्तीय निवेश की जरूरत है, प्रचार और विज्ञापन प्रचार नहीं है। यहां तक कि बहुत से लोगों को लाने की जरूरत है। सत्रह साल के लड़के वह दूर ले गया, घुड़सवार, गढ़ी दृश्यों,, ध्वनि उठाया शीर्षक भूमिका में अभिनय किया। और वहाँ सिनेमा में एक 'नई' खोज भी थी। लगभग तुरंत पहली फिल्म टेप जेवियर द्वारा अगली फिल्म बाहर चल के बाद। काम के लिए सभी विभिन्न अद्भुत क्षमता पर युवा कलाकार। वहाँ दो हज़ार नौ में "काल्पनिक लव" की एक तस्वीर थी। लेखक खुद को मुख्य पात्रों की भावनाओं के मामले में के रूप में "छोटे" फिल्म का वर्णन, अहंकार में डूबे खुद को। आदर्श प्रेम किसी तरह का निर्माण करने के लिए कोशिश कर रहा है, वे साधारण "छोटे" कामुक जुनून में आते हैं। दृश्य सीमा क्या यह पहली तस्वीर में था से बहुत अलग है। तेज, कभी कभी दूर वास्तविकता से, छवियों कृत्रिमता अंडरस्कोर, की "तस्वीर" एक प्रेम त्रिकोण। फिल्म फिर से कान कार्यक्रम पर था और श्रेणी "अन कुछ संबंध" में सम्मानित किया गया। अब कोई भी जेवियर की प्रतिभा पर शक। दो हज़ार बारह में, अगली फिल्म के कान प्रीमियर। फिल्में Ksave Dolana अपनी मौलिकता के साथ विस्मित संघर्ष कभी नहीं। इस बार, निदेशक transsexuality की पड़ताल। यह प्रतीत होता है कि एक प्रसिद्ध जटिलताः एक आदमी और एक औरत। वे एक दूसरे से प्यार है, लेकिन यहां एक आदमी अंत में अपने आप को उसकी प्रकृति की सच्चाई स्वीकार करने का फैसला करता है। उन्होंने कहा कि के लिए तैयारी कर रहा है सेक्स परिवर्तन आपरेशनों। प्रत्येक नई फिल्म के साथ डोलन परिपक्व। masterfully एक कहानी बताने के लिए क्षमता - यह मुख्य बात खोने के बिना, एक नया दृश्य तकनीक को दर्शाता है। दर्शक एक अजनबी, ट्रांस की दुनिया के कई, द्वारा तुच्छ जीने का विचित्र चेहरे पर मास्क से परे देखने के लिए के साथ सहानुभूति शुरू होता है। प्रशंसक है, और वे जेवियर का एक बहुत, कलाकार की योजनाओं के बारे में खबर पर नज़र रखने के लिए करीब ध्यान के साथ शुरू हुआ मिला है। दो हज़ार बारह में, वहाँ खेलने Bacharda माइकल के फिल्म रूपांतरण के बारे में जानकारी है। उनकी "टॉम पर खेत" खुद Ksave डोलन शूट करने के लिए जा रहा था। वेनिस फिल्म समारोह से तस्वीरें खुश प्रशंसक हैं। डोलन सिर्फ फिल्म के फिल्मांकन के समाप्त हो गया है नहीं, लेकिन यह भी प्रतियोगिता कार्यक्रम में उसके साथ शामिल किया गया। चित्र के पहले मिनट से हम टेप हाईवे घास के मैदान और खेतों की विशालता में खो देखते हैं। यही कारण है कि अभी से ग्रामीण शांति नहीं एक निशान बना हुआ है, जैसे ही मुख्य चरित्र अपने मृत प्रेमी के परिवार के साथ मिलता है के रूप में है। बल्कि प्रत्याशित विभाजित दुः ख, टॉम एक माँ जो अपने बेटे की वास्तविक प्रकृति को नहीं जानता है के साथ सामना करना पड़ा। इसके अलावा, मृतक के भाई से समलैंगिकों के साफदिल घृणा आता है। कई आलोचकों जेवियर घटना हिचकॉक रोमांच के साथ एक नया चित्र के प्रभाव की तुलना करने के लिए त्वरित थे। हालांकि, स्क्रीन से खतरे का एक स्पष्ट समझ। लगभग स्पष्ट रोष, दुखद समापन के अनिवार्यता। अपनी त्वचा में दर्शक डर, चिंता और गंभीर अलगाव की उम्मीद महसूस करता है। "वॉल्यूम" में डोलन फिर से बढ़त बना ली। प्रशंसक न केवल एक निर्देशक लेकिन यह भी स्वतंत्र सिनेमा के अपने अभिनय प्रतिभा का आनंद लेने के लिए सक्षम थे। हालांकि, द्वेषी आलोचकों में भी वृद्धि हुई। हालांकि, उनके escapades जूरी पुरस्कार एक पुरस्कार रिबन से नहीं सुना गया था। Ksave डोलन आलोचना को खारिज करने के लिए इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके काम की विस्तृत समीक्षा का उपयोग करता है और आगे तकनीक पॉलिश करने। एक ही समय में उन्होंने एक साक्षात्कार प्रशंसकों या गुस्से में बयान विरोधियों से चापलूसी का शिकार भी कोशिश करता है में बल दिया। पांचवीं फिल्म शायद "माँ। " कहा जाएगा इसमें निदेशक माँ और बेटा संबंध के विषय में वापस आती है। यह एक औरत जो अंधेरे, अस्पष्ट अतीत के साथ एक लड़के की परवरिश में ले लिया गया है के बारे में एक कहानी हो जाएगा। और फिर भी Ksave डोलन नाटक पर आधारित इस फिल्म में एक अभिनेता के रूप में दिखाई देगा "हाथियों के गीत। " सब कुछ तथ्यों के बारे में, निर्देशक ध्यान से चुप का काम से संबंधित नहीं। यहां तक कि डोलन के साथ सबसे अधिक स्पष्ट साक्षात्कार में उनके जीवन के विवरण का खुलासा नहीं किया। वह उदारता से अपनी योजनाओं, अनुभव साझा करता है। वह शब्दों के साथ उदार जब उनकी फिल्मों पर चर्चा है। हालांकि, यह वह कैसे मिलता है Ksave डोलन बारे में जानकारी प्राप्त करना असंभव है। निजी जीवन, उनकी राय में, यह इस तरह रहना चाहिए। वह अपने बाहर आ बनाया है, और बस इतना ही। इस स्थिति में सम्मान के हकदार। स्वतंत्र सिनेमा के युवा प्रतिभा भी तीस नहीं है। अपने अथक ऊर्जा, गोली मार और शूट करने के लिए एक इच्छा को देखते हुए आप भविष्य में बहुत अधिक रोमांचक फिल्मों में उम्मीद कर सकते हैं। |
Gobardhan Yojana (Photo Credit: News Nation)
New Delhi:
Budget 2023: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने आज संसद में देश का आम बजट 2023 पेश किया. इस बजट में वित्त मंत्री ने गोवर्धन (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना को बढ़ावा देने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि योजना के तहत पांच सौ नए कचरे से संपदा तैयार करने वाले संयंत्रों की स्थापित किया जाएगा. जिनमें से 75 संयंत्र की स्थापना शहरों में की जाएगी. इसके साथ ही 200 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र 10 हजार करोड़ रुपए के टोटल इन्वेस्टमेंट के साथ 300 कम्यूनिटी या क्लस्टर बेस्ड संयंत्र होंगे.
आपको बता दें कि मोदी सरकार ने जिस गोवर्धन योजना की शुरुआत की थी, उसका उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता को बढ़ावा देकर गावों में मवेशियों के जैविक अपशिष्ट से धन व ऊर्जा का उत्पादन करना है. इसके साथ ही इस योजना से ग्रामीणों की आजीविका के नए-नए अवसर पैदा होंगे, जिससे उनकी आमदनी में इजाफा होगा. वित्त मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम करेगी और एक करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिगं के लिए सुविधा प्रदान करेगी.
जानकारी के लिए बता दें कि गोबर-धन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अंचलों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है. इसका सीधा लाभ किसानों और पशुपालकों को पहुंचाया जायेगा. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे प्रदुषण काम होगा. साथ ही किसानो की आमदनी भी बढ़ेगी. सरकार इस योजना के तहत किसानो से उनके पशुओ के गोबर की खरीद करेगी. इस तरह से किसानों से गोबर खरीदकर उसको बायोगैस में परिवर्तित किया जायेगा.
| Gobardhan Yojana New Delhi: Budget दो हज़ार तेईस: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में देश का आम बजट दो हज़ार तेईस पेश किया. इस बजट में वित्त मंत्री ने गोवर्धन योजना को बढ़ावा देने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि योजना के तहत पांच सौ नए कचरे से संपदा तैयार करने वाले संयंत्रों की स्थापित किया जाएगा. जिनमें से पचहत्तर संयंत्र की स्थापना शहरों में की जाएगी. इसके साथ ही दो सौ संपीड़ित बायोगैस संयंत्र दस हजार करोड़ रुपए के टोटल इन्वेस्टमेंट के साथ तीन सौ कम्यूनिटी या क्लस्टर बेस्ड संयंत्र होंगे. आपको बता दें कि मोदी सरकार ने जिस गोवर्धन योजना की शुरुआत की थी, उसका उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता को बढ़ावा देकर गावों में मवेशियों के जैविक अपशिष्ट से धन व ऊर्जा का उत्पादन करना है. इसके साथ ही इस योजना से ग्रामीणों की आजीविका के नए-नए अवसर पैदा होंगे, जिससे उनकी आमदनी में इजाफा होगा. वित्त मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम करेगी और एक करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिगं के लिए सुविधा प्रदान करेगी. जानकारी के लिए बता दें कि गोबर-धन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अंचलों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है. इसका सीधा लाभ किसानों और पशुपालकों को पहुंचाया जायेगा. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे प्रदुषण काम होगा. साथ ही किसानो की आमदनी भी बढ़ेगी. सरकार इस योजना के तहत किसानो से उनके पशुओ के गोबर की खरीद करेगी. इस तरह से किसानों से गोबर खरीदकर उसको बायोगैस में परिवर्तित किया जायेगा. |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
नवाचार अर्थशास्त्र, व्यापार, तकनीकी एवं समाज शास्त्र में बहुत महत्व का विषय है। नवाचार (नव+आचार) का अर्थ किसी उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा में थोडा या बहुत बडा परिवर्तन लाने से है। नवाचार के अन्तर्गत कुछ नया और उपयोगी तरीका अपनाया जाता है, जैसे- नयी विधि, नयी तकनीक, नयी कार्य-पद्धति, नयी सेवा, नया उत्पाद आदि। नवाचार को अर्थतंत्र का सारथी माना जाता है। किसी संस्था के संदर्भ में नवाचार के द्वारा दक्षता, उत्पादकता, गुणवता, बाजार में पकड आदि के सुधार सम्मिलित हैं। अस्पताल, विश्वविद्यालय, ग्राम-पंचायतें आदि सभी संस्थायें नवाचारी हो सकती हैं। जो संस्थायें नवाचार नहीं कर पातीं वे नाश को प्राप्त होती हैं। उनका स्थान नवाचार में सफल हुई संस्थायें ले लेतीं हैं। नवाचार में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती प्रक्रिया-नवाचार तथा उत्पाद-नवाचार में सामंजस्य बैठाना होता है। . प्रौद्योगिकीय विकास (Technological evolution) नवप्रवर्तन तथा प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित एक सिद्धान्त का नाम है। इसका प्रवर्तन चेक दार्शनिक रादोवन रिचता (Radovan Richta) ने किया था। रिचता के अनुसार प्रौद्योगिकी तीन चरणों में विकसित होती है, ये तीन चरण हैं- उपकरण (tools), मशीन और स्वचालन। विकास की इस प्रक्रिया में पहले शारीरिक श्रम के स्थान पर मानसिक श्रम की स्थापना होती है और उसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक पर्यावरण पर अधिक नियंत्रण प्राप्त होता है। 'अधिक नियंत्रण' के अन्तर्गत कच्चे माल को अधिक जटिल उत्पादों में परिवर्तन करना भी सम्मिलित है। श्रेणीःप्रौद्योगिकीय सिद्धान्त.
नवाचार और प्रौद्योगिकीय विकास आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
नवाचार 3 संबंध है और प्रौद्योगिकीय विकास 6 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (3 + 6)।
यह लेख नवाचार और प्रौद्योगिकीय विकास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नवाचार अर्थशास्त्र, व्यापार, तकनीकी एवं समाज शास्त्र में बहुत महत्व का विषय है। नवाचार का अर्थ किसी उत्पाद, प्रक्रिया या सेवा में थोडा या बहुत बडा परिवर्तन लाने से है। नवाचार के अन्तर्गत कुछ नया और उपयोगी तरीका अपनाया जाता है, जैसे- नयी विधि, नयी तकनीक, नयी कार्य-पद्धति, नयी सेवा, नया उत्पाद आदि। नवाचार को अर्थतंत्र का सारथी माना जाता है। किसी संस्था के संदर्भ में नवाचार के द्वारा दक्षता, उत्पादकता, गुणवता, बाजार में पकड आदि के सुधार सम्मिलित हैं। अस्पताल, विश्वविद्यालय, ग्राम-पंचायतें आदि सभी संस्थायें नवाचारी हो सकती हैं। जो संस्थायें नवाचार नहीं कर पातीं वे नाश को प्राप्त होती हैं। उनका स्थान नवाचार में सफल हुई संस्थायें ले लेतीं हैं। नवाचार में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती प्रक्रिया-नवाचार तथा उत्पाद-नवाचार में सामंजस्य बैठाना होता है। . प्रौद्योगिकीय विकास नवप्रवर्तन तथा प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित एक सिद्धान्त का नाम है। इसका प्रवर्तन चेक दार्शनिक रादोवन रिचता ने किया था। रिचता के अनुसार प्रौद्योगिकी तीन चरणों में विकसित होती है, ये तीन चरण हैं- उपकरण , मशीन और स्वचालन। विकास की इस प्रक्रिया में पहले शारीरिक श्रम के स्थान पर मानसिक श्रम की स्थापना होती है और उसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक पर्यावरण पर अधिक नियंत्रण प्राप्त होता है। 'अधिक नियंत्रण' के अन्तर्गत कच्चे माल को अधिक जटिल उत्पादों में परिवर्तन करना भी सम्मिलित है। श्रेणीःप्रौद्योगिकीय सिद्धान्त. नवाचार और प्रौद्योगिकीय विकास आम में शून्य बातें हैं । नवाचार तीन संबंध है और प्रौद्योगिकीय विकास छः है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख नवाचार और प्रौद्योगिकीय विकास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
की स्त्री को ले गया । कहा ऐसा जाता है कि सारनपूला से पहिले उस स्त्री की शादी पाँडु को होने वाली थी । पाँडु ने स्त्री को उड़ा कर गलती ही की। किन्तु सभी जाट राज्यों का उससे शत्रुता कर लेना भी उचित न था । एक ओर से मोहिल जाति गोदारों की शत्रु बनी हुई थी, दूसरी ओर से जैसलमेर के भाटी उन्हें हड़प जाना चाहते थे, तीसरी ओर स्वयं जाट उन्हें मिटाने पर तुले हुए थे। चौथी ओर से प्रवल राठौर आक्रान्ता आ रहे थे। ऐसी हालत में गोदारा क्या करते ? आत्म-समपेरण के सिवा उन्हें कोई चारा नहीं दिखाई दिया। उन्होंने राठौरों के साथ जो संघि की थी उसकी शर्ते मांडलिक राजों से कम नहीं हैं। मुन्शी ज्वालासहायजी ने लिखा है-बीका के वंशजों ने उन शर्तों को पालन नहीं किया १ ।
गोदारों का वर्णन जो 'वानए राजपूताना' में लिखा गया है उसके कुछ अंश हम ज्यों के त्यों देते हैं"अपनी कीम रियासत जोधपुर से आने के कुछ दिनों बाद बीका २४७० गाँव का मालिक हो गया। चूंकि इन दलों के लोगों ने उसे खुद मालिक स्वीकार कर लिया था, यह स्वीकारी उसे विजय से अच्छी पड़ी। किन्तु तब से अब तक उनमें से आधे देहात वरवाद हो गये हैं। किन्तु सूरतसिंह के ज़माने में तो आधे भी न रहे थे। इस देश के जाट और जोहिया उत्तरी देशों में गाढ़ा नदी तक फैले हुए थे । वे अपना निर्वाह प्रायः पशुपालन से करते थे । भेड़-बकरियों के ऊन और भैंसों गायों के घी को सारस्वत ब्राह्मणों के हाथ बेच देते थे । उस रुपये से आवश्यक वस्तु मँगा लेते थे। जाटों की प्राचीन सादगी रफा ही के राजपूतों के अधिकृत होने और राज्य चीकानेर के कायन होने में चन्द नगर अनुकूल हो गये थे । बीदा के मोहिलों पर विजयी होने से उन्हें विजय करना सुगम हो गया था। किन्तु जाटों में वह फूट न होती जिसने दुनियाँ की प्रायः सल्तनतों को चर्बाद कर दिया है तो सहज ही में बिना ख़ून सराबी के सफल न होता । जाटों के छः दलों में से उनके दो बड़े दलों --- जोहिया और गोदारों में अन-यन थी। इससे उन्होंने राजी से पका की हुकूमत को स्वीकार कर लिया। दूसरे वे र्यादा की फ़ौज के उस अत्याचार को देरा चुके थे जो उसने मोहिलो पर विजय पाने के समय किये थे । तीसरे वे यह भी चाहते थे कि हमारे और जैसलमेर के यीच फोई सरहद कायम हो जाय ।
१राजाना । जिरव ३ । | की स्त्री को ले गया । कहा ऐसा जाता है कि सारनपूला से पहिले उस स्त्री की शादी पाँडु को होने वाली थी । पाँडु ने स्त्री को उड़ा कर गलती ही की। किन्तु सभी जाट राज्यों का उससे शत्रुता कर लेना भी उचित न था । एक ओर से मोहिल जाति गोदारों की शत्रु बनी हुई थी, दूसरी ओर से जैसलमेर के भाटी उन्हें हड़प जाना चाहते थे, तीसरी ओर स्वयं जाट उन्हें मिटाने पर तुले हुए थे। चौथी ओर से प्रवल राठौर आक्रान्ता आ रहे थे। ऐसी हालत में गोदारा क्या करते ? आत्म-समपेरण के सिवा उन्हें कोई चारा नहीं दिखाई दिया। उन्होंने राठौरों के साथ जो संघि की थी उसकी शर्ते मांडलिक राजों से कम नहीं हैं। मुन्शी ज्वालासहायजी ने लिखा है-बीका के वंशजों ने उन शर्तों को पालन नहीं किया एक । गोदारों का वर्णन जो 'वानए राजपूताना' में लिखा गया है उसके कुछ अंश हम ज्यों के त्यों देते हैं"अपनी कीम रियासत जोधपुर से आने के कुछ दिनों बाद बीका दो हज़ार चार सौ सत्तर गाँव का मालिक हो गया। चूंकि इन दलों के लोगों ने उसे खुद मालिक स्वीकार कर लिया था, यह स्वीकारी उसे विजय से अच्छी पड़ी। किन्तु तब से अब तक उनमें से आधे देहात वरवाद हो गये हैं। किन्तु सूरतसिंह के ज़माने में तो आधे भी न रहे थे। इस देश के जाट और जोहिया उत्तरी देशों में गाढ़ा नदी तक फैले हुए थे । वे अपना निर्वाह प्रायः पशुपालन से करते थे । भेड़-बकरियों के ऊन और भैंसों गायों के घी को सारस्वत ब्राह्मणों के हाथ बेच देते थे । उस रुपये से आवश्यक वस्तु मँगा लेते थे। जाटों की प्राचीन सादगी रफा ही के राजपूतों के अधिकृत होने और राज्य चीकानेर के कायन होने में चन्द नगर अनुकूल हो गये थे । बीदा के मोहिलों पर विजयी होने से उन्हें विजय करना सुगम हो गया था। किन्तु जाटों में वह फूट न होती जिसने दुनियाँ की प्रायः सल्तनतों को चर्बाद कर दिया है तो सहज ही में बिना ख़ून सराबी के सफल न होता । जाटों के छः दलों में से उनके दो बड़े दलों --- जोहिया और गोदारों में अन-यन थी। इससे उन्होंने राजी से पका की हुकूमत को स्वीकार कर लिया। दूसरे वे र्यादा की फ़ौज के उस अत्याचार को देरा चुके थे जो उसने मोहिलो पर विजय पाने के समय किये थे । तीसरे वे यह भी चाहते थे कि हमारे और जैसलमेर के यीच फोई सरहद कायम हो जाय । एकराजाना । जिरव तीन । |
वीडियो में जेठालाल फोन पर एक क्लाइंट से जरूरी बात कर रहा होता है। इससे पहले जेठालाल दया के काम में हाथ बंटा रहा होता है, तभी फोन बज उठता है। जेठालाल के हाथ में दयाबेन की साड़ी का एक किनारा होता है। दया साड़ी तय कर रही होती है। ऐसे में साड़ीकी किनारी को जेठालाल अपनी कमरपटी में फंसा देता है। इसके बाद घर का फोन बज उठता है। दया बेन फोन उठाती है और जठा को बताती है कि शॉप से फोन है। फोन रखते ही दया को शरारत सूझती है।
इसके बाद से ही दया बेन साड़ी जेठालाल पर लपेट देती है। दया बात करते हुए जेठालाल पर साड़ी लपेटती रहती है। इसके बाद बापूजी घर में आते हैं और जेठालाल को पुकारने लगते हैं। तो वहीं जेठालाल बापूजी के पास दौड़े चले जाते हैं।
जेठा को ऐसे देख चंपक चाचा चिल्ला पड़ते हैं और कहते हैं तेरेको शर्म नहीं आती। जेठा लाल की बोलती बंद हो जाती है। तभी जेठा कुछ कह नहीं पाता और दया बेन को भी बहुत बुरा लगता है वहअपने कमरे में होती है । दया सोचती है कि उसकी वजह से टप्पू के पापा जेठा को डांट पड़ गई। इसने में बबीताजी भी वहां आ धमकती हैं। बापूजी पहले ही जेठा को डांट रहे होते हैं । ऐसे में जेठा की शक्ल देखने वाली होती है। इस सीन को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं।
| वीडियो में जेठालाल फोन पर एक क्लाइंट से जरूरी बात कर रहा होता है। इससे पहले जेठालाल दया के काम में हाथ बंटा रहा होता है, तभी फोन बज उठता है। जेठालाल के हाथ में दयाबेन की साड़ी का एक किनारा होता है। दया साड़ी तय कर रही होती है। ऐसे में साड़ीकी किनारी को जेठालाल अपनी कमरपटी में फंसा देता है। इसके बाद घर का फोन बज उठता है। दया बेन फोन उठाती है और जठा को बताती है कि शॉप से फोन है। फोन रखते ही दया को शरारत सूझती है। इसके बाद से ही दया बेन साड़ी जेठालाल पर लपेट देती है। दया बात करते हुए जेठालाल पर साड़ी लपेटती रहती है। इसके बाद बापूजी घर में आते हैं और जेठालाल को पुकारने लगते हैं। तो वहीं जेठालाल बापूजी के पास दौड़े चले जाते हैं। जेठा को ऐसे देख चंपक चाचा चिल्ला पड़ते हैं और कहते हैं तेरेको शर्म नहीं आती। जेठा लाल की बोलती बंद हो जाती है। तभी जेठा कुछ कह नहीं पाता और दया बेन को भी बहुत बुरा लगता है वहअपने कमरे में होती है । दया सोचती है कि उसकी वजह से टप्पू के पापा जेठा को डांट पड़ गई। इसने में बबीताजी भी वहां आ धमकती हैं। बापूजी पहले ही जेठा को डांट रहे होते हैं । ऐसे में जेठा की शक्ल देखने वाली होती है। इस सीन को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। |
MUZAFFARPUR : जिले में आज ने एक बार फिर आग की तबाही का मंजर देखने को मिला है। मामला जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र के डकरामा गांव का है। जहाँं अचानक देखते ही देखते आग का वह मंजर दिखने लगा। जिससे स्थानीय लोगों की रूह कांप उठी।
स्थानीय लोगों की मानें तो करीब आधा दर्जन से अधिक घर जलकर खाक हो गए। वहीं करीब आधा दर्जन मवेशी भी इस अगलगी में जलकर खाक हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक गृहस्वामी भी झुलस गया। जिसे गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
फिलहाल मौके पर अग्निशमन विभाग की टीम ने पहुंचकर आग पर काबू पा लिया है। लेकिन आधा दर्जन से अधिक मवेशी की झुलस कर मौत हो गई है। वहीं एक व्यक्ति की झुलस जाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। कुल मिलाकर स्थानीय लोगों की मानें तो लाखों की संपत्ति इस अगलगी में खाक हो गई है।
| MUZAFFARPUR : जिले में आज ने एक बार फिर आग की तबाही का मंजर देखने को मिला है। मामला जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र के डकरामा गांव का है। जहाँं अचानक देखते ही देखते आग का वह मंजर दिखने लगा। जिससे स्थानीय लोगों की रूह कांप उठी। स्थानीय लोगों की मानें तो करीब आधा दर्जन से अधिक घर जलकर खाक हो गए। वहीं करीब आधा दर्जन मवेशी भी इस अगलगी में जलकर खाक हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक गृहस्वामी भी झुलस गया। जिसे गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। फिलहाल मौके पर अग्निशमन विभाग की टीम ने पहुंचकर आग पर काबू पा लिया है। लेकिन आधा दर्जन से अधिक मवेशी की झुलस कर मौत हो गई है। वहीं एक व्यक्ति की झुलस जाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। कुल मिलाकर स्थानीय लोगों की मानें तो लाखों की संपत्ति इस अगलगी में खाक हो गई है। |
पत्नी ज्ञानी चेतनदास के दर्शन को जाने लगती है । गॉव भर में केवल
एक फत्तू मियाँ हलधर के सगे मित्र बनाए गए और अपना सर्वस्व गँवाकर वह हलधर को छुड़ा लाया। हलधर बदला लेने निकलता है और मार्ग में चेतनदास के यहाँ जाती हुई ज्ञानी की डॉकुओं से रक्षा करता है। चेतनदास सबलसिंह के विरुद्ध मुकद्दमा इसलिए चलवा देता है, जिसमें उनके फॅस जाने पर ज्ञानी उसकी हो सकेगी। पुलिस आने पर ज्ञानी पर अपना प्रभाव डालने और उसका विश्वास अपने पर बढ़ाने के लिए चेतनदास सबलसिह का जामिन बनकर उसे छुड़ाता है क्योंकि पुलिस उसी की बुलाई आई थी। सबलसिंह कं वनसिंह को स्वयं मारने को तैयार होता है और हलधर इसे तलवार लेकर मारने आता है तब यह चालाकी से उसे समझाकर कंचनसिह को गंगा के किनारे मार डालने की राय देता है। कंचनसिंह आत्महत्या करने को जब गंगा में कूदता है तब हलधर, जो उसे मारने आया था, जल में से उसे निकालकर बचाता है। चेतनदास आकर हलधर को पुनः सबलसिंह को मारने को उभाडता है पर कंचनसिह रोकता है । इधर ज्ञानी चेतनदास के पास कृतज्ञता दिखलाने जाती है और वह उसे अकेला पाकर अपनाता है । सबलसिह भाई की हत्या से उन्मादग्रस्त सा हो जाता है और अब राजेश्वरी के पास जाकर उसका सतीत्व माँगता है पर वह अपने 'सत' पर दृढ़ रहती है। सबलसिंह राजेश्वरी के यहाॅ से अपने घर चला जाता है और ज्ञानी से भी अपने को तिरस्कृत समझकर पिस्तौल से आत्महत्या करना चाहता है कि हलधर ठीक समय पर उसे मारने को पहुँचता है पर आत्महत्या करते देखकर बचाता है। अब हलधर राजेश्वरी को मारने चलता है। इधर सबलसिंह को खोजते हुए ज्ञानी राजेश्वरी के, घर जाती है और हीरा की कनी खाकर मर जाती है। राजेश्वरी फॉसी लगाकर आत्महत्या की तैयारी करती है कि हलधर भी ठीक अवसर पर पहुॅचकर रस्सी काटकर उसकी जान बचाता है। चेतनदास आत्महत्यां करता है और सबलसिंह अपने भाई तथा पुत्र के साथ विरक्त हो जाता है । इधर हलधर के गॉव में बधावा बजता है।
सारी कथा अस्वाभाविकता से भरी हुई है, कहीं किसी बात में संबंध नहीं है। कपोल-कल्पना भी इतनी उड़ान ले सकती है, यह संभव नहीं। ऋरण के लिए जेलखाने भेज देना राजेश्वरी की दृष्टि में इतना बड़ा पाप नहीं हो गया था कि वह सबलसिंह का, जिसे देवता के समान मानती थी, सपरिवार नाश करने के लिए अपने मुख में कालिख
लगाकर घर छोड़ उनके पास चली आती । जेलखाने जाने के भी दस दिन बाद तक सबलसिह उस पर अत्याचार करने नहीं गए और न वें अत्याचार करते, ऐसा राजेश्वरी को अंत तक विश्वास रहा। ऐसा ही दिखलाया भी गया है, केवल अंत में प्रेम को कामलिप्सा बतला दिया गया है। कई दुःखपूर्ण घटनाओं के कारण आत्महत्या करने का निश्चयं कर कोई किसी का सतीत्व हरण करने न जायगा । नाटककार ने केवल अमीर जमींदार होने के कारण ही सबलसिह का, उसके भाई तथा साध्वी पत्नी का पतन दिखलाया है और गरीब होने के कारण कारण घर को त्यागनेवाली, महल में संपत्ति के बीच स्वेच्छा से जाकर रहनेवाली तथा वराबर अन्य पुरुषों को अपनी ओर आकृष्ट करते हुए रात्रि में एकाकिनी उनके साथ रहनेवाली राजेश्वरी को 'सत' पर दृढ़ रखा है । हलधर किसान होने के कारण ही ऊँचे उठाया गया है और उसके तीन तीन शिकारों की उसीसे रक्षा कराना प्रदर्शित किया गया है । फत्तू मियों द्वारा घर-द्वार बेचकर हिदू पड़ोसी की सहायता कराई गई है। यह सब नाटककार के विशेष ध्येय रहे है, पर सभी अनुभव - विरुद्ध तथा अस्वाभाविक है। एक हरे भरे घर के ध्वंस पर मौलूद शरीफ इसी. विचार से कराया गया था ।
चरित्र चित्रण के लिए दो युगल मूर्तियों हलधर - राजेश्वरी तथा सबलसिह - ज्ञानी और दो अन्य कंचनसिह तथा चेतनदास ही मुख्य पात्र हैं पर एक विशेषता यह सबमें है कि उनका चरित्र आप से आप स्वाभाविक प्रवाह से नहीं चल पाया है प्रत्युत् सूत्र द्वारा परिचालित ज्ञात होता. है । प्रथम युग्म में यह पूर्ण रूप से तथा द्वितीय में कुछ कम है। द्वितीय में कुछ भी विकसित हो पाया है। कंचन सिंह तथा चेतनदास का चित्ररण भी पूर्णतः स्वाभाविक नहीं हो सका है। रस के नाते किसका. नाम लिया जा सकता है, जबरदस्ती शृंगार, करुण कह लीजिए। वास्तव में यह नाटक बिना जासूस का जासूसी उपन्यास-सा है, जिसमें खून, आत्महत्या का ही जोर है ।
आपने उक्त दो के सिवा एक और नाटक लिखा है, जिसका नाम स्यात् 'प्रेम की बलि वेदी पर' है ।
रामायण के टीकाकार आगरा निवासी रामेश्वर भट्ट के यह पुत्र थे । इनके दो बड़े भाई ऋषीश्वरनाथ तथा केदारनाथ भी साहित्य-सेवी है । बी० ए० पास कर बद्रीनाथ लेख लिखने लगे, जो 'सरस्वती में छपते थे तथा वही से निकलनेवाले पत्र बालसखा के पहिले-पहिल संपादक हुए। इसके बाद सुधारक के भी कुछ
दिन तक संपादक रहे । लखनऊ विश्वविद्यालय खुलने पर यह हिंदी के अध्यापक नियत हुए और अंत तक वहीं रहे । १ मई सन् १९३७ को तैंतालीस वर्ष की अवस्था में इनका देहांत हो गया । यह सुकवि, पत्रकार, परिहास-लेखक तथा नाटककार थे । दुर्गावती, चद्रगुप्त, वेन-चरित, तुलसीदास आदि कई नाटक लिखे हैं, जिनमे प्रथम विशेष प्रसिद्ध है।
दुर्गावतो गढ़ाकटक की रानी थी, जिस पर अकबर के सेनाध्यक्ष सफ ने चढ़ाई की। रानी ने बड़ी वीरता से सामना किया पर अपने आश्रित देशद्रोहियों के कारण वह परास्त हुई और मारी गई । उसका वीर पुत्र वीरनारायण भी वीरगति को प्राप्त हुआ। रानी, वीर मंत्री तथा सेनापति का चरित्र चित्रण अच्छा ही हुआ है इसमें देशद्रोहियों को उचित पुरस्कार दिलाया गया है और उनके प्रति पाठकों को घृरणा भी होगी । बदनसिह की पत्नी का त्याग तथा साहस देशभक्ति का अच्छा उदाहरण है। हास्य की योजना अवसर पर की गई है और वह भी गिरधारी का गिड़धाड़ी करके हास्य लाने का निर्जीव प्रयास मात्र है । वीर रस प्रधान नाटक के योग्य चरित्र चित्रण कोई भी नही हो सका है और कथा सगठन भी कही अति मंथर गति तथा विस्तार से और कही अति संक्षेप तथा व्यर्थ की जल्दी के साथ हुआ है । इतिहास - विरोधी बातो का प्रयोग कथानक का उन्नायक नही हो सका है । कथोपकथन सरल तथा व्यावहारिक भाषा ही में हुआ है पर कहींकहीं स्वगत भी कविता में कहा गया है। शाही दरबार की मर्यादा का नाटककार ने कुछ भी ध्यान नहीं रखा है। कविताएँ प्रायः सब शिथिल है, और रानी आदि सबसे कहलाया गया है । नाटक, अभिनय को दृष्टि से लिखा हुआ कहा गया है पर तीसरे अंक का रंगमंच पर सफलता से दिखलाना संभव नहीं ।
इनका प्रथम नाटक कुरुवनदहन सन् १९१२ ई० की कृति है और भट्टनारायण के वेणीसंहार के आधार पर बना हुआ है। कुछ हेर फेर के के साथ यह अनुवाद ही कहा जा सकता है। शुद्ध तथा सफल अनुवाद भी कठिन कार्य है उस पर वेणीसंहार क्लिष्ट भी है अतः यह स्वतंत्र अनुवाद का प्रयास है । कुछ नए पात्रों की कल्पना भी की गई हैं और परिहास लाने का प्रयत्न भी किया गया है। इसकी भाषा सरल तथा सुगम है और कविता भी खड़ी बोली में अच्छी की गई है। इसके दो वर्ष बाद 'चुंगी की उम्मीदवारी या मेबरी की धूम' प्रहसन लिखा गया, जो साधारण कोटि का हुआ है । भाषा इसकी उर्दू मिश्रित है और यत्र | पत्नी ज्ञानी चेतनदास के दर्शन को जाने लगती है । गॉव भर में केवल एक फत्तू मियाँ हलधर के सगे मित्र बनाए गए और अपना सर्वस्व गँवाकर वह हलधर को छुड़ा लाया। हलधर बदला लेने निकलता है और मार्ग में चेतनदास के यहाँ जाती हुई ज्ञानी की डॉकुओं से रक्षा करता है। चेतनदास सबलसिंह के विरुद्ध मुकद्दमा इसलिए चलवा देता है, जिसमें उनके फॅस जाने पर ज्ञानी उसकी हो सकेगी। पुलिस आने पर ज्ञानी पर अपना प्रभाव डालने और उसका विश्वास अपने पर बढ़ाने के लिए चेतनदास सबलसिह का जामिन बनकर उसे छुड़ाता है क्योंकि पुलिस उसी की बुलाई आई थी। सबलसिंह कं वनसिंह को स्वयं मारने को तैयार होता है और हलधर इसे तलवार लेकर मारने आता है तब यह चालाकी से उसे समझाकर कंचनसिह को गंगा के किनारे मार डालने की राय देता है। कंचनसिंह आत्महत्या करने को जब गंगा में कूदता है तब हलधर, जो उसे मारने आया था, जल में से उसे निकालकर बचाता है। चेतनदास आकर हलधर को पुनः सबलसिंह को मारने को उभाडता है पर कंचनसिह रोकता है । इधर ज्ञानी चेतनदास के पास कृतज्ञता दिखलाने जाती है और वह उसे अकेला पाकर अपनाता है । सबलसिह भाई की हत्या से उन्मादग्रस्त सा हो जाता है और अब राजेश्वरी के पास जाकर उसका सतीत्व माँगता है पर वह अपने 'सत' पर दृढ़ रहती है। सबलसिंह राजेश्वरी के यहाॅ से अपने घर चला जाता है और ज्ञानी से भी अपने को तिरस्कृत समझकर पिस्तौल से आत्महत्या करना चाहता है कि हलधर ठीक समय पर उसे मारने को पहुँचता है पर आत्महत्या करते देखकर बचाता है। अब हलधर राजेश्वरी को मारने चलता है। इधर सबलसिंह को खोजते हुए ज्ञानी राजेश्वरी के, घर जाती है और हीरा की कनी खाकर मर जाती है। राजेश्वरी फॉसी लगाकर आत्महत्या की तैयारी करती है कि हलधर भी ठीक अवसर पर पहुॅचकर रस्सी काटकर उसकी जान बचाता है। चेतनदास आत्महत्यां करता है और सबलसिंह अपने भाई तथा पुत्र के साथ विरक्त हो जाता है । इधर हलधर के गॉव में बधावा बजता है। सारी कथा अस्वाभाविकता से भरी हुई है, कहीं किसी बात में संबंध नहीं है। कपोल-कल्पना भी इतनी उड़ान ले सकती है, यह संभव नहीं। ऋरण के लिए जेलखाने भेज देना राजेश्वरी की दृष्टि में इतना बड़ा पाप नहीं हो गया था कि वह सबलसिंह का, जिसे देवता के समान मानती थी, सपरिवार नाश करने के लिए अपने मुख में कालिख लगाकर घर छोड़ उनके पास चली आती । जेलखाने जाने के भी दस दिन बाद तक सबलसिह उस पर अत्याचार करने नहीं गए और न वें अत्याचार करते, ऐसा राजेश्वरी को अंत तक विश्वास रहा। ऐसा ही दिखलाया भी गया है, केवल अंत में प्रेम को कामलिप्सा बतला दिया गया है। कई दुःखपूर्ण घटनाओं के कारण आत्महत्या करने का निश्चयं कर कोई किसी का सतीत्व हरण करने न जायगा । नाटककार ने केवल अमीर जमींदार होने के कारण ही सबलसिह का, उसके भाई तथा साध्वी पत्नी का पतन दिखलाया है और गरीब होने के कारण कारण घर को त्यागनेवाली, महल में संपत्ति के बीच स्वेच्छा से जाकर रहनेवाली तथा वराबर अन्य पुरुषों को अपनी ओर आकृष्ट करते हुए रात्रि में एकाकिनी उनके साथ रहनेवाली राजेश्वरी को 'सत' पर दृढ़ रखा है । हलधर किसान होने के कारण ही ऊँचे उठाया गया है और उसके तीन तीन शिकारों की उसीसे रक्षा कराना प्रदर्शित किया गया है । फत्तू मियों द्वारा घर-द्वार बेचकर हिदू पड़ोसी की सहायता कराई गई है। यह सब नाटककार के विशेष ध्येय रहे है, पर सभी अनुभव - विरुद्ध तथा अस्वाभाविक है। एक हरे भरे घर के ध्वंस पर मौलूद शरीफ इसी. विचार से कराया गया था । चरित्र चित्रण के लिए दो युगल मूर्तियों हलधर - राजेश्वरी तथा सबलसिह - ज्ञानी और दो अन्य कंचनसिह तथा चेतनदास ही मुख्य पात्र हैं पर एक विशेषता यह सबमें है कि उनका चरित्र आप से आप स्वाभाविक प्रवाह से नहीं चल पाया है प्रत्युत् सूत्र द्वारा परिचालित ज्ञात होता. है । प्रथम युग्म में यह पूर्ण रूप से तथा द्वितीय में कुछ कम है। द्वितीय में कुछ भी विकसित हो पाया है। कंचन सिंह तथा चेतनदास का चित्ररण भी पूर्णतः स्वाभाविक नहीं हो सका है। रस के नाते किसका. नाम लिया जा सकता है, जबरदस्ती शृंगार, करुण कह लीजिए। वास्तव में यह नाटक बिना जासूस का जासूसी उपन्यास-सा है, जिसमें खून, आत्महत्या का ही जोर है । आपने उक्त दो के सिवा एक और नाटक लिखा है, जिसका नाम स्यात् 'प्रेम की बलि वेदी पर' है । रामायण के टीकाकार आगरा निवासी रामेश्वर भट्ट के यह पुत्र थे । इनके दो बड़े भाई ऋषीश्वरनाथ तथा केदारनाथ भी साहित्य-सेवी है । बीशून्य एशून्य पास कर बद्रीनाथ लेख लिखने लगे, जो 'सरस्वती में छपते थे तथा वही से निकलनेवाले पत्र बालसखा के पहिले-पहिल संपादक हुए। इसके बाद सुधारक के भी कुछ दिन तक संपादक रहे । लखनऊ विश्वविद्यालय खुलने पर यह हिंदी के अध्यापक नियत हुए और अंत तक वहीं रहे । एक मई सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस को तैंतालीस वर्ष की अवस्था में इनका देहांत हो गया । यह सुकवि, पत्रकार, परिहास-लेखक तथा नाटककार थे । दुर्गावती, चद्रगुप्त, वेन-चरित, तुलसीदास आदि कई नाटक लिखे हैं, जिनमे प्रथम विशेष प्रसिद्ध है। दुर्गावतो गढ़ाकटक की रानी थी, जिस पर अकबर के सेनाध्यक्ष सफ ने चढ़ाई की। रानी ने बड़ी वीरता से सामना किया पर अपने आश्रित देशद्रोहियों के कारण वह परास्त हुई और मारी गई । उसका वीर पुत्र वीरनारायण भी वीरगति को प्राप्त हुआ। रानी, वीर मंत्री तथा सेनापति का चरित्र चित्रण अच्छा ही हुआ है इसमें देशद्रोहियों को उचित पुरस्कार दिलाया गया है और उनके प्रति पाठकों को घृरणा भी होगी । बदनसिह की पत्नी का त्याग तथा साहस देशभक्ति का अच्छा उदाहरण है। हास्य की योजना अवसर पर की गई है और वह भी गिरधारी का गिड़धाड़ी करके हास्य लाने का निर्जीव प्रयास मात्र है । वीर रस प्रधान नाटक के योग्य चरित्र चित्रण कोई भी नही हो सका है और कथा सगठन भी कही अति मंथर गति तथा विस्तार से और कही अति संक्षेप तथा व्यर्थ की जल्दी के साथ हुआ है । इतिहास - विरोधी बातो का प्रयोग कथानक का उन्नायक नही हो सका है । कथोपकथन सरल तथा व्यावहारिक भाषा ही में हुआ है पर कहींकहीं स्वगत भी कविता में कहा गया है। शाही दरबार की मर्यादा का नाटककार ने कुछ भी ध्यान नहीं रखा है। कविताएँ प्रायः सब शिथिल है, और रानी आदि सबसे कहलाया गया है । नाटक, अभिनय को दृष्टि से लिखा हुआ कहा गया है पर तीसरे अंक का रंगमंच पर सफलता से दिखलाना संभव नहीं । इनका प्रथम नाटक कुरुवनदहन सन् एक हज़ार नौ सौ बारह ईशून्य की कृति है और भट्टनारायण के वेणीसंहार के आधार पर बना हुआ है। कुछ हेर फेर के के साथ यह अनुवाद ही कहा जा सकता है। शुद्ध तथा सफल अनुवाद भी कठिन कार्य है उस पर वेणीसंहार क्लिष्ट भी है अतः यह स्वतंत्र अनुवाद का प्रयास है । कुछ नए पात्रों की कल्पना भी की गई हैं और परिहास लाने का प्रयत्न भी किया गया है। इसकी भाषा सरल तथा सुगम है और कविता भी खड़ी बोली में अच्छी की गई है। इसके दो वर्ष बाद 'चुंगी की उम्मीदवारी या मेबरी की धूम' प्रहसन लिखा गया, जो साधारण कोटि का हुआ है । भाषा इसकी उर्दू मिश्रित है और यत्र |
शिमला - राजधानी शिमला एक छात्रा रहस्यमीय हालात गायब हो गई। छात्रा के अपहरण की आशंका जताई जा रही है। गायब हुई लड़की एक कालेज की छात्रा बताई जा रही थी। पुलिस के अनुसार गुरुवार को करीब पौने बारह बजे लड़की के मोबाइल पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने इसको फोन किया। बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह फोन आया उस समय वह अपने क्लास रूम में थी। फोन सुनने पर वह क्लास से बाहर निकली। इसके बाद वह गायब हो गई। इसके कुछ समय बाद कालेज का एक अन्य लड़की के मोबाइल फोन नंबर पर मैसेज आया जिसमें अपहरण होने की बात कही गई। छात्रा द्वारा इसकी शिकायत पुलिस में की गई है। डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने कहा है कि पुलिस छात्रा की तलाश कर रही है। लड़की की मोबाइल लोकशन जांची जा रही है। हालांकि अभी इसमें अपहरण का मामला दर्ज नहीं हुआ है।
| शिमला - राजधानी शिमला एक छात्रा रहस्यमीय हालात गायब हो गई। छात्रा के अपहरण की आशंका जताई जा रही है। गायब हुई लड़की एक कालेज की छात्रा बताई जा रही थी। पुलिस के अनुसार गुरुवार को करीब पौने बारह बजे लड़की के मोबाइल पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने इसको फोन किया। बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह फोन आया उस समय वह अपने क्लास रूम में थी। फोन सुनने पर वह क्लास से बाहर निकली। इसके बाद वह गायब हो गई। इसके कुछ समय बाद कालेज का एक अन्य लड़की के मोबाइल फोन नंबर पर मैसेज आया जिसमें अपहरण होने की बात कही गई। छात्रा द्वारा इसकी शिकायत पुलिस में की गई है। डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने कहा है कि पुलिस छात्रा की तलाश कर रही है। लड़की की मोबाइल लोकशन जांची जा रही है। हालांकि अभी इसमें अपहरण का मामला दर्ज नहीं हुआ है। |
जब से भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है जब से राम मंदिर निर्माण को लेकर हिंदुओं की उम्मीद दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है.
इस उम्मीद के पीछे खास वजह भी है. वह यह है कि आज तक डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जिस काम का भी बीड़ा उठाया है उसको मुकाम तक पहुंचाकर ही दम लिया है.
इस बात का समर्थन 26 मार्च को बिहार की राजधानी पटना में पूर्व आइआरएस अधिकारी आशीर्वादन आचार्य ने भी किया है. उन्होंने कहा कि डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अभी तक जिस क्षेत्र में हाथ डाला, उसमें उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली.
आपको बता दें कि भारतीय नृत्यकला मंदिर सभागार में विराट हिंदुस्तान संगम (बिहार शाखा) के राम, राम मंदिर एवं हिंदू पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के लिए सुब्रह्मण्यम स्वामी और गोविंदाचार्य आदि भाग पटना में जुटे थे.
जहां स्वामी ने कहा कि अयोध्या, मथुरा और काशी इन तीनों जगहों पर हम मंदिर जरूर बनायेंगे. क्योंकि राममंदिर की लड़ाई को इतनी दूर तक लाने में न जाने कितने लोगों का त्याग रहा है. इतिहास में भी हिन्दू कभी झुका नहीं.
मुसलमान शासकों ने भारतवर्ष के 40 हजार मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाया. हम उसमें से सिर्फ तीन को छोड़ने की मांग कर रहे हैं. यही हमारा कृष्णा पैकेज है- अयोध्या, मथुरा और काशी. उन्होंने कहा कि ये मुसलमानों को भारत को देने ही होंगे.
आपको बता दें कि इससे पहले जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के काल में रामसेतू को तोड़ने के लिए तैयारी चल रही थी तो उस समय भी उसको बचाने वाले डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही थे. जिन्होंने पूरे मामले को लेकर न केवल लोगों को जागृत किया बल्कि रामसेतू को बचाने के लिए अदालत में कानूनी लड़ाई भी लड़ी.
आपको जानकार हैरानी होगी कि राजीव गांधी के समय राम मंदिर का ताला खुलवाने में भी डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिका थी.
यही नहीं जब यूपीए के शासनकाल में देश के संसाधनों की खूली लूट मची हुई थी. उस वक्त भी पूरे देश की उम्मीदे डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी पर ही टिकी हुई थी. अगर देश के संसाधनों को कोई लूटने से बचा सकता है तो वो शख्स केवल डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही है.
स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा को जेल भिजवाने से लेकर नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कठघरे तक लाने वाले डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही है.
| जब से भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है जब से राम मंदिर निर्माण को लेकर हिंदुओं की उम्मीद दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है. इस उम्मीद के पीछे खास वजह भी है. वह यह है कि आज तक डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जिस काम का भी बीड़ा उठाया है उसको मुकाम तक पहुंचाकर ही दम लिया है. इस बात का समर्थन छब्बीस मार्च को बिहार की राजधानी पटना में पूर्व आइआरएस अधिकारी आशीर्वादन आचार्य ने भी किया है. उन्होंने कहा कि डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अभी तक जिस क्षेत्र में हाथ डाला, उसमें उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली. आपको बता दें कि भारतीय नृत्यकला मंदिर सभागार में विराट हिंदुस्तान संगम के राम, राम मंदिर एवं हिंदू पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के लिए सुब्रह्मण्यम स्वामी और गोविंदाचार्य आदि भाग पटना में जुटे थे. जहां स्वामी ने कहा कि अयोध्या, मथुरा और काशी इन तीनों जगहों पर हम मंदिर जरूर बनायेंगे. क्योंकि राममंदिर की लड़ाई को इतनी दूर तक लाने में न जाने कितने लोगों का त्याग रहा है. इतिहास में भी हिन्दू कभी झुका नहीं. मुसलमान शासकों ने भारतवर्ष के चालीस हजार मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाया. हम उसमें से सिर्फ तीन को छोड़ने की मांग कर रहे हैं. यही हमारा कृष्णा पैकेज है- अयोध्या, मथुरा और काशी. उन्होंने कहा कि ये मुसलमानों को भारत को देने ही होंगे. आपको बता दें कि इससे पहले जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के काल में रामसेतू को तोड़ने के लिए तैयारी चल रही थी तो उस समय भी उसको बचाने वाले डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही थे. जिन्होंने पूरे मामले को लेकर न केवल लोगों को जागृत किया बल्कि रामसेतू को बचाने के लिए अदालत में कानूनी लड़ाई भी लड़ी. आपको जानकार हैरानी होगी कि राजीव गांधी के समय राम मंदिर का ताला खुलवाने में भी डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिका थी. यही नहीं जब यूपीए के शासनकाल में देश के संसाधनों की खूली लूट मची हुई थी. उस वक्त भी पूरे देश की उम्मीदे डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी पर ही टिकी हुई थी. अगर देश के संसाधनों को कोई लूटने से बचा सकता है तो वो शख्स केवल डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही है. स्पेक्ट्रम घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा को जेल भिजवाने से लेकर नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कठघरे तक लाने वाले डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ही है. |
सोलन में तालाब में मिली ट्रक ड्राइवर की लाश.
नालागढ़ (सोलन). हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले (Solan) में औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के तहत बेरसन गांव के साथ लगते एक स्टोन क्रेशर के पास तालाब में एक ट्रक चालक का शव (Dead body) मिला है. संदिग्ध परिस्थितियों में शुक्रवार दोपहर 1 बजे शव मिला. पुलिस को सूचना मिली थी कि बेरसन गांव के पास एक बंद पड़े स्टोन क्रेशर के पास तालाब (Pond) में एक शव उतरा रहा है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को तालाब से निकाला और पोस्टमार्टम के लिए नालागढ़ के सिविल अस्पताल में लाए.
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद ही कारणों का खुलासा हो पाएगा. मृतक की पहचान दीपक कुमार सोलन के रूप में हुई है. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करके आगामी जांच शुरू कर दी है।
चालक के परिजनों ने बताया कि उनका बेटा दीपक 13 मार्च को शिमला के टूटू से सीमेंट भरकर नालागढ़ आया था. नालागढ़ के बेरसन गांव के पास एक स्टोन क्रेशर से रेता भरकर उसने वापस शिमला की ओर आना था. उन्होंने बताया कि रात करीबन 8 बजे बेटे की माता हुई थी, जिसमें उसने कहा था कि मैंने खाना खा लिया है. उसके बाद उसका फोन उसकी मां मिलाती रही, लेकिन उसका फोन नहीं लगा. अगले दिन सुबह मां और उसके रिश्तेदारों ने नालागढ़ में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई.
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| सोलन में तालाब में मिली ट्रक ड्राइवर की लाश. नालागढ़ . हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के तहत बेरसन गांव के साथ लगते एक स्टोन क्रेशर के पास तालाब में एक ट्रक चालक का शव मिला है. संदिग्ध परिस्थितियों में शुक्रवार दोपहर एक बजे शव मिला. पुलिस को सूचना मिली थी कि बेरसन गांव के पास एक बंद पड़े स्टोन क्रेशर के पास तालाब में एक शव उतरा रहा है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को तालाब से निकाला और पोस्टमार्टम के लिए नालागढ़ के सिविल अस्पताल में लाए. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद ही कारणों का खुलासा हो पाएगा. मृतक की पहचान दीपक कुमार सोलन के रूप में हुई है. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करके आगामी जांच शुरू कर दी है। चालक के परिजनों ने बताया कि उनका बेटा दीपक तेरह मार्च को शिमला के टूटू से सीमेंट भरकर नालागढ़ आया था. नालागढ़ के बेरसन गांव के पास एक स्टोन क्रेशर से रेता भरकर उसने वापस शिमला की ओर आना था. उन्होंने बताया कि रात करीबन आठ बजे बेटे की माता हुई थी, जिसमें उसने कहा था कि मैंने खाना खा लिया है. उसके बाद उसका फोन उसकी मां मिलाती रही, लेकिन उसका फोन नहीं लगा. अगले दिन सुबह मां और उसके रिश्तेदारों ने नालागढ़ में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. . |
वेडिंग सीजन स्टार्ट होते ही ट्रेन्स में जहरखुरानी को लेकर आरपीएफ एलर्ट हो गया है। आए दिन पैसेंजर्स के साथ होने वाली घटना को रोकने के लिए आरपीएफ ने खास प्लान बनाया है। यूं कहें कि रेलवे ने ट्रेन्स में जर्नी के दौरान पैसेंजर्स के साथ आए दिन हो रही जहरखुरानी की घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की ठान ली है। इसी का नतीजा है कि आरपीएफ की स्पेशल सीसीई टीम को आरपीएफ पोस्ट से अटैच करने का आदेश दिया गया है। जिससे कि अब ट्रेन्स में चलने वाली आरपीएफ की स्कॉर्ट पार्टी के साथ यह स्पेशल टीम जहरखुरानी की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगा सके। टीम में लेडीज कॉन्सटेबल्स भी शामिल हैं। आवश्यकतानुसार टीम के मेंबर अलग अलग रोल में नजर आएंगे। सीसीई टीम का नेतृत्व आरपीएफ इंस्पेक्टर करेंगे।
शादी समारोह में शामिल होने के लिए इस समय लोग विभिन्न शहरों से ट्रेन्स से अपने घर लौट रहे हैं। इस दौरान मौका पाते ही जहरखुरान इन्हें अपना शिकार बना ले रहे हैं। लेकिन अब ट्रेन्स में जहरखुरानी की घटनाओं को रोकने के लिए महिला जवानों की विशेष भूमिका रहेगी। ऑफिसर्स के मुताबिक टीम में शामिल महिला जवानों को पैसेंजर्स के बीच में सीट पर बैठा दिया जाएगा। जो सिविल ड्रेस में हाई-फाई पैसेंजर बनकर खुद जहखुरानों के जाल में फंसेंगी। इस दौरान इन महिला जवानों को फॉलो कर रही स्पेशल टीम जहरखुरान गैंग को धर दबोचेगी।
दरअसल सीसीई टीम इससे पहले आरपीएफ के रिजर्व फोर्स में होती थी। जिसे जरूरत के हिसाब से जगह-जगह तैनात किया जाता था या फिर किसी स्पेशल मिशन में लगाया जाता था। लेकिन अब इस टीम को जंक्शन पोस्ट से अटैच कर दिया गया है। जिससे कि जंक्शन पर व पैसेंजर्स दोनों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। ये टीम ट्रेन में जहरखुरानी, चोरी या फिर तस्करी जैसे अपराध को रोकने के लिए तैनात रहेगी। जिससे कि रूटीन कामों के साथ क्राइम को भी कंट्रोल किया जा सके। यह पूरी तरह ट्रेंड टीम है। जल्द ही इसका रिजल्ट भी सामने होगा।
आरपीएफ ऑफिसर्स के मुताबिक अभी तक आरपीएफ की ओर से ट्रेनों में स्कॉर्ट पार्टी चल रही है लेकिन जवानों की संख्या कम होने से जहरखुरानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस स्पेशल टीम से ट्रेनों के स्कॉर्ट में तो वृद्धि होगी ही, साथ ही छोटी-छोटी टुकड़ी बनाकर इन्हें जहरखुरान गिरोह को दबोचने में भी लगाया जाएगा। ऑफिसर्स का मानना है कि आरपीएफ का काम सिर्फ रेल सम्पत्तियों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि पैसेंजर्स की सिक्योरिटी ही उनकी प्राथमिकता है। हालांकि रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेनों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ के पास पहले से ही पर्याप्त जवान हैं। लेकिन पैसेंजर्स की सिक्योरिटी के लिए बनी रणनीति में इनकी अहम भूमिका होगी। कम से कम पैसेंजर्स के जहरखुरानों का शिकार बनने से पहले ही उन्हें दबोचा जा सकेगा।
बनारस रीजन में जीआरपी ने जहरखुरानों के भ्9 गैंग को चिन्हित किया है। यह गैंग बनारस सहित अन्य स्टेशंस को जोड़ने वाली ट्रेन्स में सक्रिय हैं। जो आए दिन पैसेंजर्स को अपना शिकार बनाने में कामयाब हो जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये पकड़ में भी नहीं आते। कैंट स्टेशन स्थित जीआरपी थाने में हर महीने लगभग क्0 से क्भ् जहरखुरानी के मामले दर्ज होते हैं। इसी तरह मुगलसराय में भी जहरखुरानी की महीने में क्भ् से ख्0 घटनाएं हो रही हैं।
(फार योर हेल्प)
-जर्नी में अपनी रिवर्ज सीट पर ही बैठें।
-किसी भी सूरत में अनजान व्यक्ति का दिया हुआ फूड आइटम न खाएं।
-अपना लगेज सेफ्टी चेन से बांध कर रखें।
-अवैध वेंडर्स से चाय या फूड आइटम खरीदने से बचें।
-अनजान व्यक्ति को अपना एड्रेस न बताएं।
-ज्यादातर अकेले जर्नी करने वालों को ही निशाना बनाया जाता है।
-याद रखें, जहरखुरान अब फैमिली के रूप में भी सफर करते हैं।
(डू यू नो)
-चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक में।
-बिस्किट, पीने का पानी, केक में।
-प्रसाद के नाम पर बिकने वाली चीजों में।
ट्रेन्स में जहरखुरानी की घटना को रोकने के लिए खास प्लान बनाया गया है। आरपीएफ टीम को इसके लिए स्पेशल तौर पर लगाया गया है। स्कॉर्ट के अलावा आरपीएफ टीम के मेंबर जहरखुरानों को पकड़ने के लिए ट्रेंस में तैनात रहेंगे।
| वेडिंग सीजन स्टार्ट होते ही ट्रेन्स में जहरखुरानी को लेकर आरपीएफ एलर्ट हो गया है। आए दिन पैसेंजर्स के साथ होने वाली घटना को रोकने के लिए आरपीएफ ने खास प्लान बनाया है। यूं कहें कि रेलवे ने ट्रेन्स में जर्नी के दौरान पैसेंजर्स के साथ आए दिन हो रही जहरखुरानी की घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की ठान ली है। इसी का नतीजा है कि आरपीएफ की स्पेशल सीसीई टीम को आरपीएफ पोस्ट से अटैच करने का आदेश दिया गया है। जिससे कि अब ट्रेन्स में चलने वाली आरपीएफ की स्कॉर्ट पार्टी के साथ यह स्पेशल टीम जहरखुरानी की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगा सके। टीम में लेडीज कॉन्सटेबल्स भी शामिल हैं। आवश्यकतानुसार टीम के मेंबर अलग अलग रोल में नजर आएंगे। सीसीई टीम का नेतृत्व आरपीएफ इंस्पेक्टर करेंगे। शादी समारोह में शामिल होने के लिए इस समय लोग विभिन्न शहरों से ट्रेन्स से अपने घर लौट रहे हैं। इस दौरान मौका पाते ही जहरखुरान इन्हें अपना शिकार बना ले रहे हैं। लेकिन अब ट्रेन्स में जहरखुरानी की घटनाओं को रोकने के लिए महिला जवानों की विशेष भूमिका रहेगी। ऑफिसर्स के मुताबिक टीम में शामिल महिला जवानों को पैसेंजर्स के बीच में सीट पर बैठा दिया जाएगा। जो सिविल ड्रेस में हाई-फाई पैसेंजर बनकर खुद जहखुरानों के जाल में फंसेंगी। इस दौरान इन महिला जवानों को फॉलो कर रही स्पेशल टीम जहरखुरान गैंग को धर दबोचेगी। दरअसल सीसीई टीम इससे पहले आरपीएफ के रिजर्व फोर्स में होती थी। जिसे जरूरत के हिसाब से जगह-जगह तैनात किया जाता था या फिर किसी स्पेशल मिशन में लगाया जाता था। लेकिन अब इस टीम को जंक्शन पोस्ट से अटैच कर दिया गया है। जिससे कि जंक्शन पर व पैसेंजर्स दोनों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। ये टीम ट्रेन में जहरखुरानी, चोरी या फिर तस्करी जैसे अपराध को रोकने के लिए तैनात रहेगी। जिससे कि रूटीन कामों के साथ क्राइम को भी कंट्रोल किया जा सके। यह पूरी तरह ट्रेंड टीम है। जल्द ही इसका रिजल्ट भी सामने होगा। आरपीएफ ऑफिसर्स के मुताबिक अभी तक आरपीएफ की ओर से ट्रेनों में स्कॉर्ट पार्टी चल रही है लेकिन जवानों की संख्या कम होने से जहरखुरानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस स्पेशल टीम से ट्रेनों के स्कॉर्ट में तो वृद्धि होगी ही, साथ ही छोटी-छोटी टुकड़ी बनाकर इन्हें जहरखुरान गिरोह को दबोचने में भी लगाया जाएगा। ऑफिसर्स का मानना है कि आरपीएफ का काम सिर्फ रेल सम्पत्तियों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि पैसेंजर्स की सिक्योरिटी ही उनकी प्राथमिकता है। हालांकि रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेनों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ के पास पहले से ही पर्याप्त जवान हैं। लेकिन पैसेंजर्स की सिक्योरिटी के लिए बनी रणनीति में इनकी अहम भूमिका होगी। कम से कम पैसेंजर्स के जहरखुरानों का शिकार बनने से पहले ही उन्हें दबोचा जा सकेगा। बनारस रीजन में जीआरपी ने जहरखुरानों के भ्नौ गैंग को चिन्हित किया है। यह गैंग बनारस सहित अन्य स्टेशंस को जोड़ने वाली ट्रेन्स में सक्रिय हैं। जो आए दिन पैसेंजर्स को अपना शिकार बनाने में कामयाब हो जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये पकड़ में भी नहीं आते। कैंट स्टेशन स्थित जीआरपी थाने में हर महीने लगभग क्शून्य से क्भ् जहरखुरानी के मामले दर्ज होते हैं। इसी तरह मुगलसराय में भी जहरखुरानी की महीने में क्भ् से ख्शून्य घटनाएं हो रही हैं। -जर्नी में अपनी रिवर्ज सीट पर ही बैठें। -किसी भी सूरत में अनजान व्यक्ति का दिया हुआ फूड आइटम न खाएं। -अपना लगेज सेफ्टी चेन से बांध कर रखें। -अवैध वेंडर्स से चाय या फूड आइटम खरीदने से बचें। -अनजान व्यक्ति को अपना एड्रेस न बताएं। -ज्यादातर अकेले जर्नी करने वालों को ही निशाना बनाया जाता है। -याद रखें, जहरखुरान अब फैमिली के रूप में भी सफर करते हैं। -चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक में। -बिस्किट, पीने का पानी, केक में। -प्रसाद के नाम पर बिकने वाली चीजों में। ट्रेन्स में जहरखुरानी की घटना को रोकने के लिए खास प्लान बनाया गया है। आरपीएफ टीम को इसके लिए स्पेशल तौर पर लगाया गया है। स्कॉर्ट के अलावा आरपीएफ टीम के मेंबर जहरखुरानों को पकड़ने के लिए ट्रेंस में तैनात रहेंगे। |
पणजी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि आगामी गोवा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के घोषणापत्र में मेट्रो रेल समेत व्यापक यातायात सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा। पार्टी की बैठक को संबोधित करने के बाद वास्को में पर्रिकर ने संवाददाताओं से कहा, घोषणापत्र में राज्य के यातायात से जुड़ी व्यापक योजना पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें बिजली से चलने वाली बसों, अंतर-नगरीय बसों और यहां तक कि मेट्रो रेल सुविधा को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने घोषणापत्र से जुड़ी अधिक जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि 25-26 जनवरी को इसे जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में एक बार फिर सत्ता में आने पर भाजपा समाज कल्याण और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को मुद्रास्फीति से जोड़ेगी। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, समाज कल्याण और शिक्षा कार्यक्रमों को मुद्रास्फीति से जोड़ा जाएगा।
मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर कार्यक्रम के फंड में इजाफा हो जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कुछ सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन देने से जुड़ी अफवाहों को खारिज कर दिया। पर्रिकर ने कहा, भाजपा ने 36 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं और मैंने चार विधानसभा क्षेत्रों में समर्थन का ऐलान किया है। इन चार सीटों के अलावा मैंने किसी अन्य निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया है।
| पणजी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि आगामी गोवा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के घोषणापत्र में मेट्रो रेल समेत व्यापक यातायात सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा। पार्टी की बैठक को संबोधित करने के बाद वास्को में पर्रिकर ने संवाददाताओं से कहा, घोषणापत्र में राज्य के यातायात से जुड़ी व्यापक योजना पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें बिजली से चलने वाली बसों, अंतर-नगरीय बसों और यहां तक कि मेट्रो रेल सुविधा को शामिल किया जाएगा। उन्होंने घोषणापत्र से जुड़ी अधिक जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि पच्चीस-छब्बीस जनवरी को इसे जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में एक बार फिर सत्ता में आने पर भाजपा समाज कल्याण और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को मुद्रास्फीति से जोड़ेगी। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, समाज कल्याण और शिक्षा कार्यक्रमों को मुद्रास्फीति से जोड़ा जाएगा। मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर कार्यक्रम के फंड में इजाफा हो जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कुछ सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन देने से जुड़ी अफवाहों को खारिज कर दिया। पर्रिकर ने कहा, भाजपा ने छत्तीस सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं और मैंने चार विधानसभा क्षेत्रों में समर्थन का ऐलान किया है। इन चार सीटों के अलावा मैंने किसी अन्य निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया है। |
हांगकांग, 03 अगस्त (हि.स.)। चीन ने बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत पर चिंता जताते हुए उनके उपयोग की समय सीमा तय करने की तैयारी कर रहा है। युवा विशेषकर बच्चों में स्मार्ट फोन की दीवानगी लत बनती जा रही है। चीन के साइबर स्पेस रेगुलेटर (सीएसी) ने बुधवार को कहा कि दिनभर में बच्चों की ओर से स्मार्ट फोन के उपयोग को दो घंटे तक सीमित किया जाना चाहिए।
सीएसी का कहना है कि वह चाहता है कि स्मार्ट डिवाइस से जुड़ी कंपनियां ऐसे नाबालिग मोड की सुविधा दे, जिसमें रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक 18 वर्ष से नीचे उम्र वाला इंटरनेट एक्सेस न कर सके। प्रस्तावित बदलाव में कंपनी की ओर से समय की भी सीमा तय की जाए।
प्रस्ताव के अनुसार, 16 और 18 वर्ष के बीच के किशोरों के लिए यह समय सीमा दो घंटे तय हो। आठ से 16 वर्ष के बीच वालों के लिए यह एक घंटे, जबकि आठ वर्ष से नीचे के बच्चों के लिए यह सिर्फ आठ मिनट हो। साथ ही साइबर स्पेस रेगुलेटर ने सेवा प्रदाता कंपनियों से कहा है कि वह समय सीमा तय करने का अधिकार उनके परिजनों को दे।
| हांगकांग, तीन अगस्त । चीन ने बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत पर चिंता जताते हुए उनके उपयोग की समय सीमा तय करने की तैयारी कर रहा है। युवा विशेषकर बच्चों में स्मार्ट फोन की दीवानगी लत बनती जा रही है। चीन के साइबर स्पेस रेगुलेटर ने बुधवार को कहा कि दिनभर में बच्चों की ओर से स्मार्ट फोन के उपयोग को दो घंटे तक सीमित किया जाना चाहिए। सीएसी का कहना है कि वह चाहता है कि स्मार्ट डिवाइस से जुड़ी कंपनियां ऐसे नाबालिग मोड की सुविधा दे, जिसमें रात दस बजे से सुबह छह बजे तक अट्ठारह वर्ष से नीचे उम्र वाला इंटरनेट एक्सेस न कर सके। प्रस्तावित बदलाव में कंपनी की ओर से समय की भी सीमा तय की जाए। प्रस्ताव के अनुसार, सोलह और अट्ठारह वर्ष के बीच के किशोरों के लिए यह समय सीमा दो घंटे तय हो। आठ से सोलह वर्ष के बीच वालों के लिए यह एक घंटे, जबकि आठ वर्ष से नीचे के बच्चों के लिए यह सिर्फ आठ मिनट हो। साथ ही साइबर स्पेस रेगुलेटर ने सेवा प्रदाता कंपनियों से कहा है कि वह समय सीमा तय करने का अधिकार उनके परिजनों को दे। |
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केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को कहा कि विभिन्न कालखंडों के दौरान भारत से बाहर ले जायी गयीं 229 प्राचीन वस्तुओं को पिछले आठ सालों में विदेशों से वापस लाया गया जबकि उससे पहले 2014 तक उनकी संख्या महज 13 थी। उन्होंने कहा कि यह देश के सांस्कृतिक गौरव से जुड़ी बेशकीमती चीजों को वापस लाने के केंद्र के दृढ़ निश्चय को दर्शाता है।
जब उनसे ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा वापस लाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि यह प्रसिद्ध रत्न वापस आये।
वह जी20 के संस्कृति समूह की पहली बैठक से इतर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। यह बैठक मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले के खुजराहो में महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुई। यह बैठक 25 फरवरी तक चलेगी।
मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से लेकर 2014 तक केवल 13 प्राचीन बेशकीमती वस्तुएं विदेश से भारत लायी गयीं । उन्होंने कहा कि इसकी तुलना में पिछले आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से 229 ऐसी वस्तुएं भारत वापस लायी गयीं और उनमें से 25 खजुराहो में हो रही बैठक के दौरान प्रदर्शित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि यह देश के सांस्कृतिक गौरव की वस्तुएं वापस लाने के केंद्र के निश्चय को दर्शाता है।
| Quick links: केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को कहा कि विभिन्न कालखंडों के दौरान भारत से बाहर ले जायी गयीं दो सौ उनतीस प्राचीन वस्तुओं को पिछले आठ सालों में विदेशों से वापस लाया गया जबकि उससे पहले दो हज़ार चौदह तक उनकी संख्या महज तेरह थी। उन्होंने कहा कि यह देश के सांस्कृतिक गौरव से जुड़ी बेशकीमती चीजों को वापस लाने के केंद्र के दृढ़ निश्चय को दर्शाता है। जब उनसे ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा वापस लाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि यह प्रसिद्ध रत्न वापस आये। वह जीबीस के संस्कृति समूह की पहली बैठक से इतर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। यह बैठक मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले के खुजराहो में महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुई। यह बैठक पच्चीस फरवरी तक चलेगी। मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से लेकर दो हज़ार चौदह तक केवल तेरह प्राचीन बेशकीमती वस्तुएं विदेश से भारत लायी गयीं । उन्होंने कहा कि इसकी तुलना में पिछले आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से दो सौ उनतीस ऐसी वस्तुएं भारत वापस लायी गयीं और उनमें से पच्चीस खजुराहो में हो रही बैठक के दौरान प्रदर्शित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह देश के सांस्कृतिक गौरव की वस्तुएं वापस लाने के केंद्र के निश्चय को दर्शाता है। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
असेनी माइनर / . / .
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
कव्रिस्तान / . / .
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । असेनी माइनर / . / . ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। कव्रिस्तान / . / . ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
।Q.50683: ' मनोविज्ञान ने सर्वप्रथम आत्मा को खोया, फिर मन/मस्तिष्क को खोया इसके बाद चेतनशीलता को खोया, अब भी यह व्यवहार का अध्ययन बना हुआ है।' यह कथन है ? (राजस्थान, III-ग्रेड अध्यापक 2012)
| ।Q.पचास हज़ार छः सौ तिरासी: ' मनोविज्ञान ने सर्वप्रथम आत्मा को खोया, फिर मन/मस्तिष्क को खोया इसके बाद चेतनशीलता को खोया, अब भी यह व्यवहार का अध्ययन बना हुआ है।' यह कथन है ? |
पुरुष इस द्रष्टा को मारता है ) इत्यादि । इस प्रकार के स्वप्नदर्शनों से अचिरजीवित्व आवेदित, सूचित होता है, यह श्रुति सुनाती है । स्वप्नाध्याय ग्रन्थ को जाननेवाले कहते हैं कि ( स्वप्न में हाथी पर चढना आदि धन्य पुण्यमय शुभ ) है और गदहा पर चढ़कर गमनादि अधन्य है । मन्त्र, देवता, द्रव्यविशेष निमित्तक, मन्त्रादिजन्य कोई स्वप्न सत्यार्थ के गन्ध ( सम्बन्ध ) वाले होते है, ऐसा कोई मानते है । इससे स्वप्न सत्य है । इस प्रकार इस मूत्र से पूर्वपक्ष होने पर इसी से निराकरण है कि सूचक होने से उस द्वारा सूच्यमान सूचित वस्तु को सत्यत्व वहाँ भी होता है कि जैसे मिथ्या शुक्ति रूप्य के दर्शन से सत्य हर्प होता, मिथ्यारज्जु सर्प के दर्शन से सत्य भय होता है । परन्तु वाधित होने से स्त्री- दर्शनादि को मिथ्यात्व होता ही है, इससे श्रुति आदि से सूचक मात्र सिद्ध होता है । सत्य नही सिद्ध होता है यह अभिप्राय है । इससे स्वप्न को मायामात्रत्व उपपन्न हुआ। जो यह कहा है कि ( श्रुति स्वप्न की सृष्टि को कहती है ) वहाँ इस प्रकार स्वप्नसृष्टि को मायामात्र सिद्ध होने पर उस सुप्त के स्रष्टृत्वादि वचन भाक्त ( गौण ) व्याख्यान के योग्य है । जैसे कहा जाता है कि लांगल ( हल ) गौ आदि का उद्वहन ( धारण, जीवन ) करता है, वहाँ कृषि द्वारा गो आदि के जीवन की निमित्तमात्रता से हल इस प्रकार जीवनकर्ता कहा जाता है । हल प्रत्यक्ष ही गो आदि का उद्वहन नही करता है । इसी प्रकार अदृष्ट द्वारा निमित्त मात्रता से मुप्तपुरुप रथादि को रचता है । वही कर्ता है इस प्रकार कहा जाता है, सुप्तपुरुप प्रत्यक्ष ही रथादि को नहीं रचता है। परन्तु रथादि के प्रतिभान ( प्रतीति ) निमित्तक हर्पभयादि के दर्शन से उन हर्षादिकों के निमित्तस्वरूप पुण्य-पाप के कर्तृत्व द्वारा इस स्वप्नद्रष्टा के निमित्तत्व को कहना चाहिए ।
अपि च जागरिते विपयेन्द्रियसंयोगादादित्यादिज्योतिर्व्यतिकराञ्चात्मनः स्वयंज्योतिष्ट्वं दुर्विवेचनमिति तद्विवचनाय स्वप्न उपन्यस्तः, यत्र यदि रथादिसृष्टिवचनं श्रुत्या नीयेत तदा स्वयंज्योतिष्ट्वं न निर्णीतं स्यात् । तस्माद्रथाद्यभाववचनं श्रुत्या रथादिसृष्टिवचनं तु भक्त्येति व्याख्येयम् । एतेन निर्माणश्रवणं व्याख्यातम् । यदप्युक्तम् - 'प्राज्ञमेनं निर्मातारमामनन्ति' इति । तदप्यसत् । श्रुत्यन्तरे 'स्वयं विहत्य स्वयं निर्माय स्वेन भासा स्वन ज्योतिपा प्रस्वपिति' ( वृ० ४ । ३ १९ ) इति जीवव्यापारश्रवणात् । इहापि य एप सुप्तेपु जागति' ( क० ५१८ ) इति प्रसिद्धानुवादाज्जीव एवायं कामानां निर्माता संकीर्त्यते । तस्य तु वाक्यशेषेण तदेव शुक्रं तद्ब्रह्मेति जीवभावं व्यावर्त्य प्रगृह्यभाव उपदिश्यते 'तत्त्वमसि' ( छा० ६१९ ४ ) इत्यादिवदिति न ब्रह्मप्रकरणं विरुध्यते । न चास्माभिः स्वप्नेऽपि प्राज्ञव्यवहारः प्रतिपिध्यते तस्य सर्वेश्वरत्वा - त्सर्वास्वप्यवस्थास्वधिष्ठातृत्वोपपत्तेः । पारमार्थिकस्तु नायं संध्याश्रयः सर्गो वियदादिसर्गवदित्येतावत्प्रतिपाद्यते । नच वियदादिसर्गस्याप्यात्यन्तिकं सत्यत्व७०४
मस्ति, प्रतिपादित हि 'तदनन्यत्वमारम्भणशब्दादिभ्य' ( क्र० स० २११११४ ) भायामात्रत्वम् । प्रातु ब्रह्मात्मत्वनाद्वयदादिलपत्रो व्यवस्थिनस्पो भवति । मव्याश्रयस्तु प्रपञ्च प्रतिदिन वाध्यत इति, जनो वैशेषिकमिद मध्यम्य मायामात्रत्वमुदितम् ॥ ४ ॥
दूसरी बात है कि जागरित वार मे, विषय इन्द्रियों के मयोग की वर्तमानना में और आदित्यादिस्य ज्योतियों के व्यतिर ( समिश्रण ) से आत्मा की स्वय ज्योति - स्वतावा निवचन दुख है, इस जासय से उस आत्मा को स्वयज्योति स्वस्पता का निवेचन के लिए श्रुति मे स्वप्न उपन्यस्त ( वर्णित ) हुआ है । वहाँ यदि सृष्टि आदि का वोधन वचन त्या । श्रुतिक तात्पर्य का विषय म्पम ) जागरित तुल्य नमझा जायगा, स्वीकृत होगा तो आत्मा को स्वयं ज्याति स्वरुपता नहीं निर्णात हारी । ज्योति जाग्रत् के समान ही स्वप्न भी हो जायगा, इससे ग्यादि का अभाव वचन श्रुति से तात्पयविषय मुल्य वृत्ति से है। स्थादि सृष्टि का बोधर वचन नविन गोणी वृत्ति से है इस प्रकार व्याख्यान करना चाहिए। इस भारत रूप में ही निर्माण बुति भी व्याख्यान हो गई । जो यह मो कहा था कि इस स्वप्ननिर्माना का भुनिया प्राज्ञी है ) वह भी कथन जस जिसमे दूसरी श्रुति में ( स्वयं अपने जाद को निहत्य निश्चट करके स्वय वामनामय देह का निर्माण करके अपने मनोवृतिप्राय से और निजननन्य रूप से स्वप्न का अनुभव करता है ) इस प्रकार जीव के व्यापार के श्रवण म प्राज्ञ स्वप्न का निर्माता नहीं है। इस वठ श्रुति मे मी ( जो यह इन्द्रियों के सोने पर जागता है ) इस प्रसिद्ध के अनुवाद से काभी का निर्माता से यह जीव से कहा जाता है । ( वही शुद्ध है वही ब्रह्म है ) इस वाक्य के द्वारा ता उसी के जीवभाव को निवृत्त करके प्रभाव का उपदेश दिया जाता है। वह उपदे ( तत्त्वममि ) इत्यादि के समान है, इससे ब्रह्म प्रकरण-विरुद्ध नहीं होता है । स्वप्न मे भी प्राज्ञ के व्यवहार ( व्यापार ) वा प्रतिषेध हम नहीं करते हैं, क्योकि सर्वेश्वर से सभी अवस्थाओं में मान के अधिष्ठातृत्व की सिद्धि से उसका निषेध नहीं हो सकता है। परन्तु सध्यप आश्रम वाला सर्ग ( ससार सृष्टि ) आकाश आदि के मर्ग के समान पारमार्थिक नहीं है। इतना ही प्रतिपादन किया जाना है। वियदादि सगँ वा भी आत्यन्ति ( भुम्य ) सत्यत्व नहीं है। जिससे ( तदनन्यत्वम् ) इत्यादि सूत्र म समन्न प्रपन्च ( मसार ) वा मायामायत्व प्रतिपादित हो चुका है। परन्तु ब्रह्मास्त्व दर्शन में पूर्वकाल में जावास जादि म्प प्रपञ्च व्यवस्थित स्वम्पवाला ( बाध रहित ) रहता है और सध्यम्प आयल प्रपन्च प्रतिदिन बाधित होता है, इसमें विशेष रूप से यह सव्य की मायामानना ही गई है ॥ ४ ॥
पराभिध्यानात्त, तिरोहित ततो ह्यस्य यन्धविपर्ययौ ।। ५ ।। अथापि स्यात्परस्यैव नावात्मनोयो जीवोजनेरिव विस्फुलिङ्ग तत्रैव मनि यथाग्निविस्फुलियो समाने दहनप्रकाशनशती भवत एव जीवश्वरपादः २ ]
योरपि जानैश्वर्यशक्ती, ततश्च जीवस्य जानैश्वर्यवशात्सांकल्पिकी स्वप्ने रथादिसृष्टिर्भविष्यतीति । अत्रोच्यते । सत्यपि जीवेश्वरयोरंशांशिभावे प्रत्यक्षमेव जीवस्त्रेश्वर विपरीतवर्मत्वम् । किं पुनर्जीवस्येश्वरसमानधर्मत्वं नास्त्येव । न नास्त्येव ( १ ) । विद्यमानमपि तत्तिरोहितम विद्यादिव्यवधानात् । तत्पुनस्तिरोहितं सत्परमेश्वरमभिव्यायतो यतमानस्य जन्तोर्विधूतध्वान्तस्य तिमिरतिरस्कृतेव दृक्शक्तिरौपच त्रीर्यादीश्वरप्रसादात्संसिद्धस्य कस्यचिदेवाविर्भवति न स्वभावत एव सर्वेषां जन्तूनाम् । कुतः ? ततो हीश्वराद्धतोरस्य जीवस्य बन्धमोक्षौ भवतः । ईश्वरस्वरूपापरिज्ञानाद्वन्धस्तत्स्वरूपपरिज्ञानात्तु मोक्षः । तथा च श्रुतिः -
जात्वा देव सर्वपाशापहानिः क्षीणैः क्लेशैर्जन्ममृत्युप्रहाणिः । तस्याभिध्यानात्तृतीयं देहभेदे विश्वैश्वर्य केवल आप्तकामः ।। ( वे० १११११) इत्येवमाद्या ॥ ५ ॥
पूर्व कथित रीति से स्वप्न के मायामय सिद्ध होने पर भी यदि शंका हो कि परमात्मा ही का उपाधिपरिच्छिन्न अंग जीव अग्नि का अंश विस्फुलिङ्ग के समान है। यहाँ ऐसा होने पर जैसे अग्नि और विस्फुलिङ्ग में दहन और प्रकाशन शक्ति ( जलाने और प्रकाशने का सामर्थ्य ) तुल्य रहती है । उसी प्रकार जीव और ईश्वर में भी ज्ञान शक्ति और ऐश्वर्य शक्ति तुल्य होगी । जिससे जीव के ज्ञान ऐश्वर्य ( ईश्वरत्ता ) के वश ( वलशक्ति ) से स्वप्न से स्थादि को सांकल्पिकी ( सकल्पजन्य ) सृष्टि सत्य ही होगी, जैसे कि ईश्वर से संकल्प से सत्य सृष्टि होती है । यहाँ उत्तर कहा जाता है कि जीव और ईश्वर को अश ओर अंशी भाव ( अंग्रांशी रूपता ) के रहते भी जीव को ईश्वर से विपरीतधर्मवत्त्व ( असत्य संकल्पत्वादि ) प्रत्यक्ष ही है। इससे जीव के संकल्प से सृष्टि नही हो सकती है । शंका होती है कि विरुद्ध धर्म, वाला होने से क्या जीव को ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व सर्वथा नही है । उत्तर है कि सर्वथा ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व नहीं है, यह बात तो नही है, ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व है भी, परन्तु वह विद्यमान ( वर्तमान ) भी तुल्य धर्मवत्त्व, अविद्या आदि रूप व्यवधान ( परदा ) से तिरोहित ( आच्छादित ) है । ( तिरोहित होता हुआ भी वह समान धर्मवत्त्व, परमेश्वर का ध्यान करने वाले संयमादि यत्न करने वाले विनाशित ध्वान्त ( मोह, पाप ) वाले संसिद्ध ( शुद्ध अणिमादि युक्त ) किसी प्राणी को ईश्वर की कृपा से वह तिरोहित जानैश्वर्यशक्ति आविर्भूत ( प्रकट ) होती है, जैसे कि तिमिर ( नेत्ररोग ) से तिरस्कृत ( आच्छादित ) दृष्टिशक्ति ओपधि के बल से प्रकट होती है । स्वभाव से ही सब प्राणियों को ज्ञानैश्वर्य-शक्ति नही प्रकट हो सकती है । क्योकि उस ईश्वररूप हेतु से ही इस जीव के वन्ध-मोक्ष होते हैं । ईश्वर के स्वरूप के अपरिज्ञान ( अविद्या ) से बन्ध होता है । ईश्वर स्वरूप के परिज्ञान ( अनुभव ) से मोक्ष होता है और इसी प्रकार श्रुति कहती है कि ( दिव्यात्मा को जान कर स्थिर
ज्ञानी के सब अन्धनो की निवृत्ति होती है, क्षीण हुए क्लेशो द्वारा जन्म-मरण की निवृत्ति होती है। उस देव के ध्यान से प्रारब्ध भोग के अन्त में इस देह् के भेदन ( नाग ) होने पर वह ध्याना मार्ग दो से मिन तृतोय विश्वैश्वयं ( सम्पूर्ण ऐश्वयं ) स्वम्प परमात्मा का अनुभव करके अविद्यामय प्रपन्च मे रहित केवर आलकाम पूर्णानन्दम्वरूप हो जाता है। इस सूत्र का यह भी स्थूलायें हो मक्ता है कि ( तदेव शुव तद्ब्रह्म ) इस श्रुति में कथित जीव वा निज स्वरूप पर ( अनात्म वस्तु ) के ध्यान ( चिन्तन ) से जाग्रत् मे तथा स्वप्न में तिरोहित रहता है, तथा ज्ञानेश्वर्यादि सामय्यं तिरोहित रहता है। इसी से इसको निजम्वरूप में भी और स्वप्न में मो मिय्यादि वन्ध और मोक्ष भी भासता है, ऐसे अन्य भो मायामय प्रतिमास होता है इत्यादि ॥ ५ ॥
देहयोगाद्वा सोऽपि ॥ ६॥
कम्मात्पुनर्जीव परमात्माश एवं मस्तिरस्कृतज्ञानेश्वर्यो भवति, युक्त तु ज्ञानेश्वर्ययोरतिरस्कृतत्व विस्फुलिङ्गस्येव दहनप्रकाशनयोरिति । उच्यते मत्यमेवैनन्, सोऽपि तु जीवम्य ज्ञानैश्वर्यंतिरोभावो देहयोगाहेहेन्द्रियमनोबुद्धिविषयवेदनादियोगाद्भवति । अस्ति चात्रोपमा यथाग्नेर्दहन प्रकाशनसम्पन्नम्याप्यरणिगतस्य दहनप्रकाशने तिरोहिते भवतो यथा वा भम्मच्छलस्य, एवमविद्याप्रत्युपस्थापितनामस्पकृतदेहाद्युपाधियोगात्तदविवेकभ्रमकृनो जीवम्य ज्ञानेश्वर्यतिरोभाव । वाशब्दो जीवश्वरयोरन्यत्वाशङ्काव्यावृत्त्यर्थ । नन्वन्य एव जीव ईश्वरादस्तु तिरस्कृतज्ञानेश्वर्यत्वात्कि देहयोगकल्पनया । नेत्युच्यते, नान्यत्व जीवस्येश्वरादुपपद्यते 'सेय देवतेक्षत' ( छा० ६१३१२ ) इत्युपक्रम्य 'अनेन जीवेनारमनाउनुप्र विश्य ( छा० ६३श२ ) इत्यात्मशव्देन, जीवपरामशत् । 'तत्सत्यं म आत्मा तत्त्वममि इवेनकेतो (छा० ६९१४) इति च जीवायोपदिशनीश्वरात्मत्वम् अतोऽनन्य एवेश्वरा जीव मन् देहयोगात्तिरोहितज्ञानेश्वयों भवति, अतश्च न साकल्पिकी जीवस्य म्वप्ने स्थादिसृष्टिघंटते । यदि च साकल्पिको स्वप्ने स्थादिसृष्टि स्यान्नैवानिष्ट कश्चित्स्वप्न पश्येत् । नहि कश्चिदनिष्ट सकल्पयते । यत्पुनेत- जागरितदेवश्रुति स्वप्नम्य मन्यन्व स्थापयनीति - इनि, न तत्माम्यवचन सत्यत्वाभिप्राय स्वयज्योतिष्ठविरोधात् । श्रुत्यैव च स्वप्ने रयाद्यभावस्य दर्शितत्वात् जागरितप्रभववासनानिमित त्वातु स्वप्नम्य तत्तुल्यनिर्भामत्वाभिप्राय तन् । तम्मादुपपन्न स्वप्नम्य मायामात्रत्वम् ॥ ६॥
फिर शका होती है कि परमात्मा का अश ही होता हुआ जीव तिरस्कृत ज्ञान और ऐश्वयं वाला किस हेतु से होता है, इसके ज्ञान और ऐदवयं को तो निरस्कार रहिन होना उचित है, जैसे विम्फुलिङ्ग के दहन और प्रकाशन अतिरस्कृत रहते हैं,
ऐसे जीव को ज्ञान और ऐश्वर्य होना चाहिये । उत्तर कहा जाता है कि अग्नि के दहन - प्रकाशन के समान सत्यतिरस्कार के अयोग्य यह ज्ञान और ऐश्वर्य है यह कथन सत्य है, तो भी जीव के ज्ञान और ऐश्वर्य का वह प्रसिद्ध तिरोभाव भी देह के योग से होता है । अर्थात् सूत्रगत देह शब्द के उपलक्षण होने से देह, इन्द्रिय, मन, वृद्धि, विषय, वेदना, आदि के योग से ज्ञान और ऐश्वयं तिरस्कृत होते है। इस विद्यमान के तिरस्कार में उपमा ( दृष्टान्त ) है कि जैसे दहन - प्रकाशन से सम्पन्न ( युक्त ) भी काष्ठगत अग्नि के दहन - प्रकाशन व्यापार तिरोहित होते हैं, अथवा जैसे भस्म से आच्छादित के प्रकाशनादि तिरोहित होते हैं । इसी प्रकार अविद्या से प्रत्युपस्थापित ( साधित ) नाम और रूप से कृत देहादि रूप उपाधि के योग से उसके अविवेक और भ्रमकृत जीव के ज्ञानैश्वर्य का तिरोभाव है । सूत्रगत वा शब्द जीव और ईश्वर के भेद की आशंका की निवृत्ति के लिए है । शंका होती है कि तिरस्कृत ज्ञानेश्वयं वाला होने से ईश्वर से अन्य ही जीव हो सकता है। देहादियोग की कल्पना का क्या फल है । उत्तर है कि ईश्वर से अन्य जीव नहीं हो सकता है, जिससे जीव का ईश्वर से अन्यत्व उपपन्न नही होता है सो ( यह देवता ने विचार किया ) ऐसा आरम्भ करके ( इस जीवात्मा रूप से प्रवेश करके ) इस प्रकार आत्म शब्द से जीव के परामर्श से ईश्वरस्वरूप जीव है । और ( वह ब्रह्म सत्य है वह आत्मा है हे श्वेतकेतो ! तुम वही हो ) इस प्रकार जीव के प्रति ईश्वरात्मता का उपदेश श्रुति करती हैं, इससे ईश्वर से अनन्य होता हुआ भी जीव देह के योग से तिरोहित जानैश्चर्य वाला होता है, अतः स्वप्न में जीव के संकल्प से जन्य स्थादि की सृष्टि नहीं संघटित होती है। यदि जीव के संकल्प से जन्य स्वप्न में स्थादि की सृष्टि हो, तो स्वप्न मे कोई अनिष्ट नहीं देखे, जिससे कोई अनिष्ट का संकल्प नहीं करता है । जो यह कहा था कि जागरित देशविपयक श्रुति स्वप्न के सत्यत्व का स्थापन करती है, वहाँ कहा जाता है कि स्वयं ज्योतिःस्वरूपत्व के साथ विरोध से वह जाग्रत् के साथ स्वप्न को तुल्यता का वचन स्वप्न की सत्यता के अभिप्राय से नहीं है । श्रुति से ही स्वप्न में स्थादि के अभाव के दर्शितत्व से उक्त अभिप्राय का अभाव सिद्ध होता है । जागरित अवस्था में उत्पन्न वासना से निर्मित होने से स्वप्न को जागरिततुल्य निर्मामत्व के अभिप्राय से वह वचन है, जिससे स्वप्न को मायामयत्व उपपन्न हुआ। स्थूलार्थ हो सकता है कि अथवा जो वाह्यविरागादिमात्र से अनात्मा का ध्यान वाह्यवस्तु का चिन्तन नहीं करता है, सो भी अविवेक से देह के साथ तादात्म्य का अभिमान करता है, इससे भी वन्ध-मोक्ष भासतें हैं इत्यादि ॥ ६ ॥
तदभावाधिकरण ( २ )
नाडीपुरीतद्ब्रह्मणि विकल्प्यन्ते सुषुप्तये । समुच्चितानि वैकार्थ्याद्विकल्प्यन्ते यवादिवत् ॥१॥ समुच्चितानि नाडीभिरुपसृत्य पुरीतति । हृत्स्ये ब्रह्मणि यात्येक्यं विकल्पे त्वष्टदोषता ॥२॥
सुपुति का हेतु रूप से उस नाडी आदि के श्रवण से उन नादिया में, और आत्मा मे समुच्चितरूप वतमान मे पूर्यास्त स्वप्न वा अभावस्य मुति होती है । ममय है कि श्रुति म सुपुति के लिए सुने गय स्थानम्प नाटी, पुरी और ब्रह्म त्रिकल्पित होते हैं, अर्थात् कमो नाटी, कभी पुरीत, कभी ब्रह्म मुपति का स्थान होता है, अथवा तीनो मिल कर सम काल में सुषुप्ति का स्थान होते हैं। पूर्वप है कि जैसे, ग्रीहिमियंजन, यवैर्वा यजेत, प्रोति से याग करे, जथवा यव से याग परे, इन दोनों बचना में एक याग के लिये प्रोहि और यव का विधान होता है, वहाँ एकायना एक्प्रयोजनना से विकल्प होता कभी व्रीहि के पुरोडाग द्वारा यज्ञ होता है, तो कमी यव से पुरोडाश द्वारा होना है। इसी प्रकार यहाँ भी एक मुषुप्ति के लिए श्रुति मे नाडो, पुरीत और ब्रह्म स्थानम्प से कहे गय हैं, इससे जीव कभी नाडी में, कभी पुरीतत् में, कभी ब्रह्म मे सोधेगा ।। सिद्धान्त है कि तीनो स्थान विकसित नहीं है, किन्तु समुच्चित ( मिलित ) ह, सोना सम काल में मुप्ति के हेतु है, जिससे नाडियों द्वारा गमन करके पुरीत के मध्य मे हृदयस्थ ब्रह्म में जीव सुषुप्ति काल में एकता को प्राप्त करना है, इससे तीनो समुच्चित स्थान हो जाते है। विकल्प मानने पर अटदोपता की प्राप्ति होगी। भाव है कि विर मानने पर तीनों प्रकार के वाक्या को स्वतन्त्र प्रमाणरूप मानना होगा। वहीं एकवचन
वे अनुसार स्थान को मानने के काल में अन्य वचन के अनुसार प्राप्त स्थान का निषेध नहीं कर सकते है, क्योंकि वह भी शास्त्र में प्राप्त है, किन्तु उस समय,' दूसरे बचन मे प्रास प्रमाणना की त्यागना होगा, और अप्राप्त अप्रमाणता का स्वीकार करके उसके अनुसार स्थान का स्वीकार नहीं करना होगा। इसी प्रकार उस दूसरे वचन के अनुसार शयन होने पर उस वाक्य को व्यक्तप्रमाणता का फिर स्वीकार करना होगा और गृहीन अप्रमाणता को त्यागना होगा, द्वितीय वाक्य के समान ये हो चारों दोप प्रथम वाक्य मे भो प्राप्त होने से अष्ट दोपता होती है सो अन्यत्र प्रसिद्ध है, इससे समुच्चय युक्त है ॥ १-२ ॥
तदभावो नाडोषु तच्छृतेरात्मनि च ॥ ७ ॥ स्वप्नावस्था परीक्षिता सुपुप्तानस्थेदानी परीक्ष्यते । तत्रेता सुषुप्तिविपया श्रुनयां भवन्ति । क्वचिच्यते- 'तद्यत्रतत्सुत समस्त नप्रसन स्वप्न न विजानात्यानु ना नादीपु सृष्ती भवति' ( छा० ८।६।३ ) इति । जन्यन तु नाडोरेवानुक्रम्य श्रूयते- 'ताभि प्रत्यवमृष्य पुरीनति येते' ( वृ० २११११९ ) इति । तथान्यत्र नाडीरेवानुकम्प 'नामु तदा भवति यदा सुप्त स्वप्न न कचन पञ्यत्ययास्मिन्त्राग एवंकवा भवति' (कपी०१२) इति । तथान्यन 'मना माम्य तदा सपन्नो भवति स्वनपीतो भवति' (छा०६८ ) इति । तथा 'प्राज्ञेनात्मना सम्परिप्क्ती न बाह्य किंचन वेद नान्तरम्' (० २१ ) इति च । तत्र सशय - किमेनानि नाड्यादीनि परम्परनिरपेक्षाणि भिन्नानि सुषुप्ति | पुरुष इस द्रष्टा को मारता है ) इत्यादि । इस प्रकार के स्वप्नदर्शनों से अचिरजीवित्व आवेदित, सूचित होता है, यह श्रुति सुनाती है । स्वप्नाध्याय ग्रन्थ को जाननेवाले कहते हैं कि है और गदहा पर चढ़कर गमनादि अधन्य है । मन्त्र, देवता, द्रव्यविशेष निमित्तक, मन्त्रादिजन्य कोई स्वप्न सत्यार्थ के गन्ध वाले होते है, ऐसा कोई मानते है । इससे स्वप्न सत्य है । इस प्रकार इस मूत्र से पूर्वपक्ष होने पर इसी से निराकरण है कि सूचक होने से उस द्वारा सूच्यमान सूचित वस्तु को सत्यत्व वहाँ भी होता है कि जैसे मिथ्या शुक्ति रूप्य के दर्शन से सत्य हर्प होता, मिथ्यारज्जु सर्प के दर्शन से सत्य भय होता है । परन्तु वाधित होने से स्त्री- दर्शनादि को मिथ्यात्व होता ही है, इससे श्रुति आदि से सूचक मात्र सिद्ध होता है । सत्य नही सिद्ध होता है यह अभिप्राय है । इससे स्वप्न को मायामात्रत्व उपपन्न हुआ। जो यह कहा है कि वहाँ इस प्रकार स्वप्नसृष्टि को मायामात्र सिद्ध होने पर उस सुप्त के स्रष्टृत्वादि वचन भाक्त व्याख्यान के योग्य है । जैसे कहा जाता है कि लांगल गौ आदि का उद्वहन करता है, वहाँ कृषि द्वारा गो आदि के जीवन की निमित्तमात्रता से हल इस प्रकार जीवनकर्ता कहा जाता है । हल प्रत्यक्ष ही गो आदि का उद्वहन नही करता है । इसी प्रकार अदृष्ट द्वारा निमित्त मात्रता से मुप्तपुरुप रथादि को रचता है । वही कर्ता है इस प्रकार कहा जाता है, सुप्तपुरुप प्रत्यक्ष ही रथादि को नहीं रचता है। परन्तु रथादि के प्रतिभान निमित्तक हर्पभयादि के दर्शन से उन हर्षादिकों के निमित्तस्वरूप पुण्य-पाप के कर्तृत्व द्वारा इस स्वप्नद्रष्टा के निमित्तत्व को कहना चाहिए । अपि च जागरिते विपयेन्द्रियसंयोगादादित्यादिज्योतिर्व्यतिकराञ्चात्मनः स्वयंज्योतिष्ट्वं दुर्विवेचनमिति तद्विवचनाय स्वप्न उपन्यस्तः, यत्र यदि रथादिसृष्टिवचनं श्रुत्या नीयेत तदा स्वयंज्योतिष्ट्वं न निर्णीतं स्यात् । तस्माद्रथाद्यभाववचनं श्रुत्या रथादिसृष्टिवचनं तु भक्त्येति व्याख्येयम् । एतेन निर्माणश्रवणं व्याख्यातम् । यदप्युक्तम् - 'प्राज्ञमेनं निर्मातारमामनन्ति' इति । तदप्यसत् । श्रुत्यन्तरे 'स्वयं विहत्य स्वयं निर्माय स्वेन भासा स्वन ज्योतिपा प्रस्वपिति' इति जीवव्यापारश्रवणात् । इहापि य एप सुप्तेपु जागति' इति प्रसिद्धानुवादाज्जीव एवायं कामानां निर्माता संकीर्त्यते । तस्य तु वाक्यशेषेण तदेव शुक्रं तद्ब्रह्मेति जीवभावं व्यावर्त्य प्रगृह्यभाव उपदिश्यते 'तत्त्वमसि' इत्यादिवदिति न ब्रह्मप्रकरणं विरुध्यते । न चास्माभिः स्वप्नेऽपि प्राज्ञव्यवहारः प्रतिपिध्यते तस्य सर्वेश्वरत्वा - त्सर्वास्वप्यवस्थास्वधिष्ठातृत्वोपपत्तेः । पारमार्थिकस्तु नायं संध्याश्रयः सर्गो वियदादिसर्गवदित्येतावत्प्रतिपाद्यते । नच वियदादिसर्गस्याप्यात्यन्तिकं सत्यत्वसात सौ चार मस्ति, प्रतिपादित हि 'तदनन्यत्वमारम्भणशब्दादिभ्य' भायामात्रत्वम् । प्रातु ब्रह्मात्मत्वनाद्वयदादिलपत्रो व्यवस्थिनस्पो भवति । मव्याश्रयस्तु प्रपञ्च प्रतिदिन वाध्यत इति, जनो वैशेषिकमिद मध्यम्य मायामात्रत्वमुदितम् ॥ चार ॥ दूसरी बात है कि जागरित वार मे, विषय इन्द्रियों के मयोग की वर्तमानना में और आदित्यादिस्य ज्योतियों के व्यतिर से आत्मा की स्वय ज्योति - स्वतावा निवचन दुख है, इस जासय से उस आत्मा को स्वयज्योति स्वस्पता का निवेचन के लिए श्रुति मे स्वप्न उपन्यस्त हुआ है । वहाँ यदि सृष्टि आदि का वोधन वचन त्या । श्रुतिक तात्पर्य का विषय म्पम ) जागरित तुल्य नमझा जायगा, स्वीकृत होगा तो आत्मा को स्वयं ज्याति स्वरुपता नहीं निर्णात हारी । ज्योति जाग्रत् के समान ही स्वप्न भी हो जायगा, इससे ग्यादि का अभाव वचन श्रुति से तात्पयविषय मुल्य वृत्ति से है। स्थादि सृष्टि का बोधर वचन नविन गोणी वृत्ति से है इस प्रकार व्याख्यान करना चाहिए। इस भारत रूप में ही निर्माण बुति भी व्याख्यान हो गई । जो यह मो कहा था कि इस स्वप्ननिर्माना का भुनिया प्राज्ञी है ) वह भी कथन जस जिसमे दूसरी श्रुति में इस प्रकार जीव के व्यापार के श्रवण म प्राज्ञ स्वप्न का निर्माता नहीं है। इस वठ श्रुति मे मी इस प्रसिद्ध के अनुवाद से काभी का निर्माता से यह जीव से कहा जाता है । इस वाक्य के द्वारा ता उसी के जीवभाव को निवृत्त करके प्रभाव का उपदेश दिया जाता है। वह उपदे इत्यादि के समान है, इससे ब्रह्म प्रकरण-विरुद्ध नहीं होता है । स्वप्न मे भी प्राज्ञ के व्यवहार वा प्रतिषेध हम नहीं करते हैं, क्योकि सर्वेश्वर से सभी अवस्थाओं में मान के अधिष्ठातृत्व की सिद्धि से उसका निषेध नहीं हो सकता है। परन्तु सध्यप आश्रम वाला सर्ग आकाश आदि के मर्ग के समान पारमार्थिक नहीं है। इतना ही प्रतिपादन किया जाना है। वियदादि सगँ वा भी आत्यन्ति सत्यत्व नहीं है। जिससे इत्यादि सूत्र म समन्न प्रपन्च वा मायामायत्व प्रतिपादित हो चुका है। परन्तु ब्रह्मास्त्व दर्शन में पूर्वकाल में जावास जादि म्प प्रपञ्च व्यवस्थित स्वम्पवाला रहता है और सध्यम्प आयल प्रपन्च प्रतिदिन बाधित होता है, इसमें विशेष रूप से यह सव्य की मायामानना ही गई है ॥ चार ॥ पराभिध्यानात्त, तिरोहित ततो ह्यस्य यन्धविपर्ययौ ।। पाँच ।। अथापि स्यात्परस्यैव नावात्मनोयो जीवोजनेरिव विस्फुलिङ्ग तत्रैव मनि यथाग्निविस्फुलियो समाने दहनप्रकाशनशती भवत एव जीवश्वरपादः दो ] योरपि जानैश्वर्यशक्ती, ततश्च जीवस्य जानैश्वर्यवशात्सांकल्पिकी स्वप्ने रथादिसृष्टिर्भविष्यतीति । अत्रोच्यते । सत्यपि जीवेश्वरयोरंशांशिभावे प्रत्यक्षमेव जीवस्त्रेश्वर विपरीतवर्मत्वम् । किं पुनर्जीवस्येश्वरसमानधर्मत्वं नास्त्येव । न नास्त्येव । विद्यमानमपि तत्तिरोहितम विद्यादिव्यवधानात् । तत्पुनस्तिरोहितं सत्परमेश्वरमभिव्यायतो यतमानस्य जन्तोर्विधूतध्वान्तस्य तिमिरतिरस्कृतेव दृक्शक्तिरौपच त्रीर्यादीश्वरप्रसादात्संसिद्धस्य कस्यचिदेवाविर्भवति न स्वभावत एव सर्वेषां जन्तूनाम् । कुतः ? ततो हीश्वराद्धतोरस्य जीवस्य बन्धमोक्षौ भवतः । ईश्वरस्वरूपापरिज्ञानाद्वन्धस्तत्स्वरूपपरिज्ञानात्तु मोक्षः । तथा च श्रुतिः - जात्वा देव सर्वपाशापहानिः क्षीणैः क्लेशैर्जन्ममृत्युप्रहाणिः । तस्याभिध्यानात्तृतीयं देहभेदे विश्वैश्वर्य केवल आप्तकामः ।। इत्येवमाद्या ॥ पाँच ॥ पूर्व कथित रीति से स्वप्न के मायामय सिद्ध होने पर भी यदि शंका हो कि परमात्मा ही का उपाधिपरिच्छिन्न अंग जीव अग्नि का अंश विस्फुलिङ्ग के समान है। यहाँ ऐसा होने पर जैसे अग्नि और विस्फुलिङ्ग में दहन और प्रकाशन शक्ति तुल्य रहती है । उसी प्रकार जीव और ईश्वर में भी ज्ञान शक्ति और ऐश्वर्य शक्ति तुल्य होगी । जिससे जीव के ज्ञान ऐश्वर्य के वश से स्वप्न से स्थादि को सांकल्पिकी सृष्टि सत्य ही होगी, जैसे कि ईश्वर से संकल्प से सत्य सृष्टि होती है । यहाँ उत्तर कहा जाता है कि जीव और ईश्वर को अश ओर अंशी भाव के रहते भी जीव को ईश्वर से विपरीतधर्मवत्त्व प्रत्यक्ष ही है। इससे जीव के संकल्प से सृष्टि नही हो सकती है । शंका होती है कि विरुद्ध धर्म, वाला होने से क्या जीव को ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व सर्वथा नही है । उत्तर है कि सर्वथा ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व नहीं है, यह बात तो नही है, ईश्वर के तुल्य धर्मवत्त्व है भी, परन्तु वह विद्यमान भी तुल्य धर्मवत्त्व, अविद्या आदि रूप व्यवधान से तिरोहित है । वाले संसिद्ध किसी प्राणी को ईश्वर की कृपा से वह तिरोहित जानैश्वर्यशक्ति आविर्भूत होती है, जैसे कि तिमिर से तिरस्कृत दृष्टिशक्ति ओपधि के बल से प्रकट होती है । स्वभाव से ही सब प्राणियों को ज्ञानैश्वर्य-शक्ति नही प्रकट हो सकती है । क्योकि उस ईश्वररूप हेतु से ही इस जीव के वन्ध-मोक्ष होते हैं । ईश्वर के स्वरूप के अपरिज्ञान से बन्ध होता है । ईश्वर स्वरूप के परिज्ञान से मोक्ष होता है और इसी प्रकार श्रुति कहती है कि होने पर वह ध्याना मार्ग दो से मिन तृतोय विश्वैश्वयं स्वम्प परमात्मा का अनुभव करके अविद्यामय प्रपन्च मे रहित केवर आलकाम पूर्णानन्दम्वरूप हो जाता है। इस सूत्र का यह भी स्थूलायें हो मक्ता है कि इस श्रुति में कथित जीव वा निज स्वरूप पर के ध्यान से जाग्रत् मे तथा स्वप्न में तिरोहित रहता है, तथा ज्ञानेश्वर्यादि सामय्यं तिरोहित रहता है। इसी से इसको निजम्वरूप में भी और स्वप्न में मो मिय्यादि वन्ध और मोक्ष भी भासता है, ऐसे अन्य भो मायामय प्रतिमास होता है इत्यादि ॥ पाँच ॥ देहयोगाद्वा सोऽपि ॥ छः॥ कम्मात्पुनर्जीव परमात्माश एवं मस्तिरस्कृतज्ञानेश्वर्यो भवति, युक्त तु ज्ञानेश्वर्ययोरतिरस्कृतत्व विस्फुलिङ्गस्येव दहनप्रकाशनयोरिति । उच्यते मत्यमेवैनन्, सोऽपि तु जीवम्य ज्ञानैश्वर्यंतिरोभावो देहयोगाहेहेन्द्रियमनोबुद्धिविषयवेदनादियोगाद्भवति । अस्ति चात्रोपमा यथाग्नेर्दहन प्रकाशनसम्पन्नम्याप्यरणिगतस्य दहनप्रकाशने तिरोहिते भवतो यथा वा भम्मच्छलस्य, एवमविद्याप्रत्युपस्थापितनामस्पकृतदेहाद्युपाधियोगात्तदविवेकभ्रमकृनो जीवम्य ज्ञानेश्वर्यतिरोभाव । वाशब्दो जीवश्वरयोरन्यत्वाशङ्काव्यावृत्त्यर्थ । नन्वन्य एव जीव ईश्वरादस्तु तिरस्कृतज्ञानेश्वर्यत्वात्कि देहयोगकल्पनया । नेत्युच्यते, नान्यत्व जीवस्येश्वरादुपपद्यते 'सेय देवतेक्षत' इत्युपक्रम्य 'अनेन जीवेनारमनाउनुप्र विश्य इत्यात्मशव्देन, जीवपरामशत् । 'तत्सत्यं म आत्मा तत्त्वममि इवेनकेतो इति च जीवायोपदिशनीश्वरात्मत्वम् अतोऽनन्य एवेश्वरा जीव मन् देहयोगात्तिरोहितज्ञानेश्वयों भवति, अतश्च न साकल्पिकी जीवस्य म्वप्ने स्थादिसृष्टिघंटते । यदि च साकल्पिको स्वप्ने स्थादिसृष्टि स्यान्नैवानिष्ट कश्चित्स्वप्न पश्येत् । नहि कश्चिदनिष्ट सकल्पयते । यत्पुनेत- जागरितदेवश्रुति स्वप्नम्य मन्यन्व स्थापयनीति - इनि, न तत्माम्यवचन सत्यत्वाभिप्राय स्वयज्योतिष्ठविरोधात् । श्रुत्यैव च स्वप्ने रयाद्यभावस्य दर्शितत्वात् जागरितप्रभववासनानिमित त्वातु स्वप्नम्य तत्तुल्यनिर्भामत्वाभिप्राय तन् । तम्मादुपपन्न स्वप्नम्य मायामात्रत्वम् ॥ छः॥ फिर शका होती है कि परमात्मा का अश ही होता हुआ जीव तिरस्कृत ज्ञान और ऐश्वयं वाला किस हेतु से होता है, इसके ज्ञान और ऐदवयं को तो निरस्कार रहिन होना उचित है, जैसे विम्फुलिङ्ग के दहन और प्रकाशन अतिरस्कृत रहते हैं, ऐसे जीव को ज्ञान और ऐश्वर्य होना चाहिये । उत्तर कहा जाता है कि अग्नि के दहन - प्रकाशन के समान सत्यतिरस्कार के अयोग्य यह ज्ञान और ऐश्वर्य है यह कथन सत्य है, तो भी जीव के ज्ञान और ऐश्वर्य का वह प्रसिद्ध तिरोभाव भी देह के योग से होता है । अर्थात् सूत्रगत देह शब्द के उपलक्षण होने से देह, इन्द्रिय, मन, वृद्धि, विषय, वेदना, आदि के योग से ज्ञान और ऐश्वयं तिरस्कृत होते है। इस विद्यमान के तिरस्कार में उपमा है कि जैसे दहन - प्रकाशन से सम्पन्न भी काष्ठगत अग्नि के दहन - प्रकाशन व्यापार तिरोहित होते हैं, अथवा जैसे भस्म से आच्छादित के प्रकाशनादि तिरोहित होते हैं । इसी प्रकार अविद्या से प्रत्युपस्थापित नाम और रूप से कृत देहादि रूप उपाधि के योग से उसके अविवेक और भ्रमकृत जीव के ज्ञानैश्वर्य का तिरोभाव है । सूत्रगत वा शब्द जीव और ईश्वर के भेद की आशंका की निवृत्ति के लिए है । शंका होती है कि तिरस्कृत ज्ञानेश्वयं वाला होने से ईश्वर से अन्य ही जीव हो सकता है। देहादियोग की कल्पना का क्या फल है । उत्तर है कि ईश्वर से अन्य जीव नहीं हो सकता है, जिससे जीव का ईश्वर से अन्यत्व उपपन्न नही होता है सो ऐसा आरम्भ करके इस प्रकार आत्म शब्द से जीव के परामर्श से ईश्वरस्वरूप जीव है । और इस प्रकार जीव के प्रति ईश्वरात्मता का उपदेश श्रुति करती हैं, इससे ईश्वर से अनन्य होता हुआ भी जीव देह के योग से तिरोहित जानैश्चर्य वाला होता है, अतः स्वप्न में जीव के संकल्प से जन्य स्थादि की सृष्टि नहीं संघटित होती है। यदि जीव के संकल्प से जन्य स्वप्न में स्थादि की सृष्टि हो, तो स्वप्न मे कोई अनिष्ट नहीं देखे, जिससे कोई अनिष्ट का संकल्प नहीं करता है । जो यह कहा था कि जागरित देशविपयक श्रुति स्वप्न के सत्यत्व का स्थापन करती है, वहाँ कहा जाता है कि स्वयं ज्योतिःस्वरूपत्व के साथ विरोध से वह जाग्रत् के साथ स्वप्न को तुल्यता का वचन स्वप्न की सत्यता के अभिप्राय से नहीं है । श्रुति से ही स्वप्न में स्थादि के अभाव के दर्शितत्व से उक्त अभिप्राय का अभाव सिद्ध होता है । जागरित अवस्था में उत्पन्न वासना से निर्मित होने से स्वप्न को जागरिततुल्य निर्मामत्व के अभिप्राय से वह वचन है, जिससे स्वप्न को मायामयत्व उपपन्न हुआ। स्थूलार्थ हो सकता है कि अथवा जो वाह्यविरागादिमात्र से अनात्मा का ध्यान वाह्यवस्तु का चिन्तन नहीं करता है, सो भी अविवेक से देह के साथ तादात्म्य का अभिमान करता है, इससे भी वन्ध-मोक्ष भासतें हैं इत्यादि ॥ छः ॥ तदभावाधिकरण नाडीपुरीतद्ब्रह्मणि विकल्प्यन्ते सुषुप्तये । समुच्चितानि वैकार्थ्याद्विकल्प्यन्ते यवादिवत् ॥एक॥ समुच्चितानि नाडीभिरुपसृत्य पुरीतति । हृत्स्ये ब्रह्मणि यात्येक्यं विकल्पे त्वष्टदोषता ॥दो॥ सुपुति का हेतु रूप से उस नाडी आदि के श्रवण से उन नादिया में, और आत्मा मे समुच्चितरूप वतमान मे पूर्यास्त स्वप्न वा अभावस्य मुति होती है । ममय है कि श्रुति म सुपुति के लिए सुने गय स्थानम्प नाटी, पुरी और ब्रह्म त्रिकल्पित होते हैं, अर्थात् कमो नाटी, कभी पुरीत, कभी ब्रह्म मुपति का स्थान होता है, अथवा तीनो मिल कर सम काल में सुषुप्ति का स्थान होते हैं। पूर्वप है कि जैसे, ग्रीहिमियंजन, यवैर्वा यजेत, प्रोति से याग करे, जथवा यव से याग परे, इन दोनों बचना में एक याग के लिये प्रोहि और यव का विधान होता है, वहाँ एकायना एक्प्रयोजनना से विकल्प होता कभी व्रीहि के पुरोडाग द्वारा यज्ञ होता है, तो कमी यव से पुरोडाश द्वारा होना है। इसी प्रकार यहाँ भी एक मुषुप्ति के लिए श्रुति मे नाडो, पुरीत और ब्रह्म स्थानम्प से कहे गय हैं, इससे जीव कभी नाडी में, कभी पुरीतत् में, कभी ब्रह्म मे सोधेगा ।। सिद्धान्त है कि तीनो स्थान विकसित नहीं है, किन्तु समुच्चित ह, सोना सम काल में मुप्ति के हेतु है, जिससे नाडियों द्वारा गमन करके पुरीत के मध्य मे हृदयस्थ ब्रह्म में जीव सुषुप्ति काल में एकता को प्राप्त करना है, इससे तीनो समुच्चित स्थान हो जाते है। विकल्प मानने पर अटदोपता की प्राप्ति होगी। भाव है कि विर मानने पर तीनों प्रकार के वाक्या को स्वतन्त्र प्रमाणरूप मानना होगा। वहीं एकवचन वे अनुसार स्थान को मानने के काल में अन्य वचन के अनुसार प्राप्त स्थान का निषेध नहीं कर सकते है, क्योंकि वह भी शास्त्र में प्राप्त है, किन्तु उस समय,' दूसरे बचन मे प्रास प्रमाणना की त्यागना होगा, और अप्राप्त अप्रमाणता का स्वीकार करके उसके अनुसार स्थान का स्वीकार नहीं करना होगा। इसी प्रकार उस दूसरे वचन के अनुसार शयन होने पर उस वाक्य को व्यक्तप्रमाणता का फिर स्वीकार करना होगा और गृहीन अप्रमाणता को त्यागना होगा, द्वितीय वाक्य के समान ये हो चारों दोप प्रथम वाक्य मे भो प्राप्त होने से अष्ट दोपता होती है सो अन्यत्र प्रसिद्ध है, इससे समुच्चय युक्त है ॥ एक-दो ॥ तदभावो नाडोषु तच्छृतेरात्मनि च ॥ सात ॥ स्वप्नावस्था परीक्षिता सुपुप्तानस्थेदानी परीक्ष्यते । तत्रेता सुषुप्तिविपया श्रुनयां भवन्ति । क्वचिच्यते- 'तद्यत्रतत्सुत समस्त नप्रसन स्वप्न न विजानात्यानु ना नादीपु सृष्ती भवति' इति । जन्यन तु नाडोरेवानुक्रम्य श्रूयते- 'ताभि प्रत्यवमृष्य पुरीनति येते' इति । तथान्यत्र नाडीरेवानुकम्प 'नामु तदा भवति यदा सुप्त स्वप्न न कचन पञ्यत्ययास्मिन्त्राग एवंकवा भवति' इति । तथान्यन 'मना माम्य तदा सपन्नो भवति स्वनपीतो भवति' इति । तथा 'प्राज्ञेनात्मना सम्परिप्क्ती न बाह्य किंचन वेद नान्तरम्' इति च । तत्र सशय - किमेनानि नाड्यादीनि परम्परनिरपेक्षाणि भिन्नानि सुषुप्ति |
एमपीः गुना कांड के बाद एक्शन मोड में सीएम शिवराज, पुलिस अधिकारियों से कहा- 'अपराधियों को करो नेस्तनाबूत'
रविवार को समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कानून- व्यवस्था और जन-कल्याण सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश के सभी कमिश्नर्स और पुलिस महानिरीक्षकों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में पूरे समन्वय के साथ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जनता के कल्याण के कार्यों को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था है। पुलिस का कार्य है कि सभी नागरिकों के लिए शांति से जीने की व्यवस्था करें।
इस दौरान सीएम शिवराज ने कहा कि अपराधियों को नेस्तनाबूद किया जाए। मध्य प्रदेश में कोई भी माफिया पनपना नहीं चाहिए। प्रदेश में हजारों एकड़ भूमि माफियाओं से मुक्त करवाई गई हैं। इस भूमि के उपयोग की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम शिवराज ने निर्देश दिए कि शिकार करने और अवैध शराब का कारोबार करने वालों को क्रश किया जाए। उन्होंने कहा कि आज प्रातः बुलाई गई इस बैठक को एक नए उजाले के रूप में अंगीकार कर अधिकारी सार्थक भूमिका का निर्वहन करें। योग, ध्यान और शारीरिक व्यायाम, सुबह की सैर के साथ स्वस्थ रहते हुए आमजन के हित में सक्रिय रूप से सभी कार्य करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मेरा मुख्यमंत्री होना और आपका पद पर होना तभी सार्थक है जब हम जनसेवा पर पूरा ध्यान दें।
कहा कि गुना की घटना से मैं बहुत बेचैन हूँ। मेरा संकल्प है, किसी भी अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा। गुना के प्रकरण में अपराधियों के विरुद्ध ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो इतिहास में दर्ज होगी। शिकार करने और अन्य अपराधों को अंजाम देने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो। इसके लिए पुलिस महानिदेशक से लेकर थाना स्तर तक निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग में निरंतर समीक्षा का कार्य हो। अपराधियों को चिन्हित किया जाये। ऐसा प्रयास हो कि अपराध घटित ही न हों।
| एमपीः गुना कांड के बाद एक्शन मोड में सीएम शिवराज, पुलिस अधिकारियों से कहा- 'अपराधियों को करो नेस्तनाबूत' रविवार को समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कानून- व्यवस्था और जन-कल्याण सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश के सभी कमिश्नर्स और पुलिस महानिरीक्षकों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में पूरे समन्वय के साथ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जनता के कल्याण के कार्यों को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था है। पुलिस का कार्य है कि सभी नागरिकों के लिए शांति से जीने की व्यवस्था करें। इस दौरान सीएम शिवराज ने कहा कि अपराधियों को नेस्तनाबूद किया जाए। मध्य प्रदेश में कोई भी माफिया पनपना नहीं चाहिए। प्रदेश में हजारों एकड़ भूमि माफियाओं से मुक्त करवाई गई हैं। इस भूमि के उपयोग की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम शिवराज ने निर्देश दिए कि शिकार करने और अवैध शराब का कारोबार करने वालों को क्रश किया जाए। उन्होंने कहा कि आज प्रातः बुलाई गई इस बैठक को एक नए उजाले के रूप में अंगीकार कर अधिकारी सार्थक भूमिका का निर्वहन करें। योग, ध्यान और शारीरिक व्यायाम, सुबह की सैर के साथ स्वस्थ रहते हुए आमजन के हित में सक्रिय रूप से सभी कार्य करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मेरा मुख्यमंत्री होना और आपका पद पर होना तभी सार्थक है जब हम जनसेवा पर पूरा ध्यान दें। कहा कि गुना की घटना से मैं बहुत बेचैन हूँ। मेरा संकल्प है, किसी भी अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा। गुना के प्रकरण में अपराधियों के विरुद्ध ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो इतिहास में दर्ज होगी। शिकार करने और अन्य अपराधों को अंजाम देने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो। इसके लिए पुलिस महानिदेशक से लेकर थाना स्तर तक निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग में निरंतर समीक्षा का कार्य हो। अपराधियों को चिन्हित किया जाये। ऐसा प्रयास हो कि अपराध घटित ही न हों। |
अम्बाला शहर, 20 मार्च (हप्र)
कोरोना के बढ़ते मामलों को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने आज शहर के कई स्थानों पर नाकाबंदी करके मास्क नहीं पहनने वाले लोगों के चालान काटे। जानकारी के अनुसार गृह मंत्री अनिल विज द्वारा दिए गए आदेशों की परिपालना में आज शहर के कोर्ट चौक, कपड़ा मार्केट सहित कई स्थानों पर सिटी पुलिस ने नाकाबंदी की। इस दौरान दोपहिया व चौपहिया पर आने-जाने वाले बिना मास्क पहले लोगों के न केवल चालान काटे गये बल्कि पुलिस ने उन्हें जागरूक करके कोरोना के नियमों यानी मास्क पहनने, दो गज की दूरी रखने और सेनेटाइजर का प्रयोग करने को भी कहा। महिला पुलिस ने अलग से नाके लगाकर बिना मास्क वालों के चालान काटे। इस दौरान इक्का-दुक्का स्थानों पर नागरिकों ने पुलिस से बहस भी की। बीती शाम भी एक महिला चौकी नंबर 2 के पास अपने स्कूटर पर दो युवतियों के साथ बिना मास्क पहने जा रही थी कि चैकिंग करते पुलिस कर्मियों ने उसे रोक कर चालान करना चाहा लेकिन महिला ने उलटे पुलिस का ही अपमान कर डाला और अपना स्कूटर लेकर चलती बनी।
पुलिस नाकाबंदी के दौरान चरणजीत सिंह निवासी रामनगर अम्बाला शहर को चोरी की एक्टिवा सहित गिरफ्तार किया गया। पुराना सरकारी अस्पताल चौक के पास नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध वाहनों, यक्तियों की चैकिंग करते समय आरोपी की एक्टिवा रुकवा कर उससे एक्टिवा से सम्बन्धित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा लेकिन आरोपी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बतलाया कि यह एक्टिवा उसने शिव मन्दिर रामबाग अम्बाला शहर के पास से चोरी की है।
| अम्बाला शहर, बीस मार्च कोरोना के बढ़ते मामलों को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने आज शहर के कई स्थानों पर नाकाबंदी करके मास्क नहीं पहनने वाले लोगों के चालान काटे। जानकारी के अनुसार गृह मंत्री अनिल विज द्वारा दिए गए आदेशों की परिपालना में आज शहर के कोर्ट चौक, कपड़ा मार्केट सहित कई स्थानों पर सिटी पुलिस ने नाकाबंदी की। इस दौरान दोपहिया व चौपहिया पर आने-जाने वाले बिना मास्क पहले लोगों के न केवल चालान काटे गये बल्कि पुलिस ने उन्हें जागरूक करके कोरोना के नियमों यानी मास्क पहनने, दो गज की दूरी रखने और सेनेटाइजर का प्रयोग करने को भी कहा। महिला पुलिस ने अलग से नाके लगाकर बिना मास्क वालों के चालान काटे। इस दौरान इक्का-दुक्का स्थानों पर नागरिकों ने पुलिस से बहस भी की। बीती शाम भी एक महिला चौकी नंबर दो के पास अपने स्कूटर पर दो युवतियों के साथ बिना मास्क पहने जा रही थी कि चैकिंग करते पुलिस कर्मियों ने उसे रोक कर चालान करना चाहा लेकिन महिला ने उलटे पुलिस का ही अपमान कर डाला और अपना स्कूटर लेकर चलती बनी। पुलिस नाकाबंदी के दौरान चरणजीत सिंह निवासी रामनगर अम्बाला शहर को चोरी की एक्टिवा सहित गिरफ्तार किया गया। पुराना सरकारी अस्पताल चौक के पास नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध वाहनों, यक्तियों की चैकिंग करते समय आरोपी की एक्टिवा रुकवा कर उससे एक्टिवा से सम्बन्धित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा लेकिन आरोपी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बतलाया कि यह एक्टिवा उसने शिव मन्दिर रामबाग अम्बाला शहर के पास से चोरी की है। |
Asaduddin Owaisi on Nitish Kumar: एआईएमआईएम पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दलित अफसर की हत्या करने वाले शख्स की रिहाई को लेकर हैदराबाद में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पूरे देश में विपक्षी एकता के नाम पर घुम रहे हैं। वे खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे हैं।
उन्होंने हमला करते हुए कहा कि नीतीश कुमार भी बीजेपी की राह पर चल रही है। उन्होंने भी बिलकिस बानो की तरह दलित अधिकारी की हत्या करने वाले व्यक्ति को छोड़ दिया। कहा कि नीतीश कुमार 2024 में दलित समुदाय को बोलेंगे कि उन्होंने एक दलित अफसर की हत्या करने वाले व्यक्ति को छोड़ दिया।
बता दें कि आनंद मोहन की रिहाई के बाद उनके समर्थक जश्न मना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार इसे देश के खिलाफ नाइंसाफी बता रहा है। इसको लेकर पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता अलका वर्मा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये फैसला जनहित में नहीं है। मनमानी कार्रवाई करते हुए सरकार ने अनुचित संशोधन किया है। वहीं बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई पर DM जी कृष्णैया की बेटी ने एतराज जताया है।
बिहार के बाहुबली नेता की रिहाई पर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ चुका है। उनके जेल से रिहा होने के बाद विपक्ष हमलावर है। आनंद मोहन की रिहाई के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन की सरकार ने अपनी सियासी पैठ मजबूत करने के लिए नियम में बदलाव क्या है?
| Asaduddin Owaisi on Nitish Kumar: एआईएमआईएम पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दलित अफसर की हत्या करने वाले शख्स की रिहाई को लेकर हैदराबाद में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पूरे देश में विपक्षी एकता के नाम पर घुम रहे हैं। वे खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे हैं। उन्होंने हमला करते हुए कहा कि नीतीश कुमार भी बीजेपी की राह पर चल रही है। उन्होंने भी बिलकिस बानो की तरह दलित अधिकारी की हत्या करने वाले व्यक्ति को छोड़ दिया। कहा कि नीतीश कुमार दो हज़ार चौबीस में दलित समुदाय को बोलेंगे कि उन्होंने एक दलित अफसर की हत्या करने वाले व्यक्ति को छोड़ दिया। बता दें कि आनंद मोहन की रिहाई के बाद उनके समर्थक जश्न मना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार इसे देश के खिलाफ नाइंसाफी बता रहा है। इसको लेकर पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता अलका वर्मा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये फैसला जनहित में नहीं है। मनमानी कार्रवाई करते हुए सरकार ने अनुचित संशोधन किया है। वहीं बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई पर DM जी कृष्णैया की बेटी ने एतराज जताया है। बिहार के बाहुबली नेता की रिहाई पर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ चुका है। उनके जेल से रिहा होने के बाद विपक्ष हमलावर है। आनंद मोहन की रिहाई के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन की सरकार ने अपनी सियासी पैठ मजबूत करने के लिए नियम में बदलाव क्या है? |
लखनऊ 7 अगस्त, 2016 : मोदी जी की गौरक्षकों को फटकार केवल राजनीतिक हथकंडा है. यह बात एस. आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने आगे कहा है पूरे देश में गौरक्षा समितियों का गठन भारतीय जनता पार्टी के तत्वाधान में ही किया गया था और उन्हें पूरा सरकारी संरक्षण दिया गया था. वास्तव में भाजपा ने गौरक्षा को अपने विरोधियों को दबाने और आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में अपनाया था. इसी लिए दो साल तक पूरे देश में गौरक्षकों की गुंडागर्दी निर्वाध चलती रही.
गौरक्षा के नाम पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखण्ड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुसलामानों और दलितों की हत्याएं की गयीं तथा उन्हें प्रताड़ित किया गया जिस पर न तो किसी सरकार ने कोई प्रभावी कार्रवाही की और न ही भाजपा के किसी नेता ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की. इससे गौरक्षकों के हौसले बहुत बुलंद हो गए और यह धरना बनी कि यह सब भाजपा की रजामंदी से ही हो रहा है.
गुजरात में गौरक्षकों द्वारा गोहत्या के आरोप में चार दलितों की निर्मम पिटाई के मामले को लेकर दलितों द्वारा व्यक्त किये गए प्रतिरोध ने भाजपा के गौरक्षा के मुद्दे की हवा निकाल दी है. इससे गुजरात में दलितों का एक बड़ा जनांदोलन उठ खड़ा हुआ है जिस में मुसलमान भी शामिल हैं. इस प्रतिरोध की गूँज पूरे देश में सुनाई दे रही है और दलितों द्वारा इसका समर्थन किया जा रहा है. निकट भविष्य में गुजरात, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिन में दलित प्रतिरोध का असर पड़ना ज़रूरी है. इसीलिए मोदी जी ने दलितों की नाराज़गी को कम करने के लिए गौरक्षकों को फटकार लगायी है और अधिकतर गौरक्षकों को अपराधी और गुंडे कहा है.
मोदी जी की गौरक्षकों को यह फटकार उनका गौरक्षा की राजनीति को लेकर कोई नीति परिवर्तन नहीं है बल्कि यह केवल एक राजनीतिक हथकंडा है. यह भी प्रश्न उठता है कि मोदी जी को इस निष्कर्ष पर पहुँचने और अपना मुंह खोलने में दो वर्ष का समय क्यों लगा? अब पासा पलटने और चुनाव के नजदीक आने पर ही उन्हें इस गुंडागर्दी की निंदा करने की ज़रुरत क्यों महसूस हुयी?
राष्ट्रीय प्रवक्ता,
| लखनऊ सात अगस्त, दो हज़ार सोलह : मोदी जी की गौरक्षकों को फटकार केवल राजनीतिक हथकंडा है. यह बात एस. आर. दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने आगे कहा है पूरे देश में गौरक्षा समितियों का गठन भारतीय जनता पार्टी के तत्वाधान में ही किया गया था और उन्हें पूरा सरकारी संरक्षण दिया गया था. वास्तव में भाजपा ने गौरक्षा को अपने विरोधियों को दबाने और आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में अपनाया था. इसी लिए दो साल तक पूरे देश में गौरक्षकों की गुंडागर्दी निर्वाध चलती रही. गौरक्षा के नाम पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखण्ड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुसलामानों और दलितों की हत्याएं की गयीं तथा उन्हें प्रताड़ित किया गया जिस पर न तो किसी सरकार ने कोई प्रभावी कार्रवाही की और न ही भाजपा के किसी नेता ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की. इससे गौरक्षकों के हौसले बहुत बुलंद हो गए और यह धरना बनी कि यह सब भाजपा की रजामंदी से ही हो रहा है. गुजरात में गौरक्षकों द्वारा गोहत्या के आरोप में चार दलितों की निर्मम पिटाई के मामले को लेकर दलितों द्वारा व्यक्त किये गए प्रतिरोध ने भाजपा के गौरक्षा के मुद्दे की हवा निकाल दी है. इससे गुजरात में दलितों का एक बड़ा जनांदोलन उठ खड़ा हुआ है जिस में मुसलमान भी शामिल हैं. इस प्रतिरोध की गूँज पूरे देश में सुनाई दे रही है और दलितों द्वारा इसका समर्थन किया जा रहा है. निकट भविष्य में गुजरात, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिन में दलित प्रतिरोध का असर पड़ना ज़रूरी है. इसीलिए मोदी जी ने दलितों की नाराज़गी को कम करने के लिए गौरक्षकों को फटकार लगायी है और अधिकतर गौरक्षकों को अपराधी और गुंडे कहा है. मोदी जी की गौरक्षकों को यह फटकार उनका गौरक्षा की राजनीति को लेकर कोई नीति परिवर्तन नहीं है बल्कि यह केवल एक राजनीतिक हथकंडा है. यह भी प्रश्न उठता है कि मोदी जी को इस निष्कर्ष पर पहुँचने और अपना मुंह खोलने में दो वर्ष का समय क्यों लगा? अब पासा पलटने और चुनाव के नजदीक आने पर ही उन्हें इस गुंडागर्दी की निंदा करने की ज़रुरत क्यों महसूस हुयी? राष्ट्रीय प्रवक्ता, |
वर्ष 2000 में अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट ली बेहद ही हैण्डसम क्रिकेटर रहे हैं. ली सबसे समय तक ऑस्ट्रेलिया टीम में प्रमुख तेज गेंदबाज़ की हैसीयत से खेलते रहे.
ली हाल में फिल्मो में भी हाथ अजमा चुके हैं. ब्रेट ली इंडो-ऑस्ट्रेलियन फिल्म अनइंडियन 16 अगस्त 2016 को रिलीज हुई. ब्रेट ले इसके आलावा मशहुर 'सिक्स एंड रॉक' बंद में गिटार बजाते हैं.
| वर्ष दो हज़ार में अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट ली बेहद ही हैण्डसम क्रिकेटर रहे हैं. ली सबसे समय तक ऑस्ट्रेलिया टीम में प्रमुख तेज गेंदबाज़ की हैसीयत से खेलते रहे. ली हाल में फिल्मो में भी हाथ अजमा चुके हैं. ब्रेट ली इंडो-ऑस्ट्रेलियन फिल्म अनइंडियन सोलह अगस्त दो हज़ार सोलह को रिलीज हुई. ब्रेट ले इसके आलावा मशहुर 'सिक्स एंड रॉक' बंद में गिटार बजाते हैं. |
AIT Worldwide Logistics (12:10PM)
Itasca, Ill. , United States:
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला समाधान अग्रणी एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स ने मिशिगन स्थित कैलिटा एयर, वाईपीसिलांटी के साथ एक नई सिविल रिजर्व एयर फ्लीट (सीआरएएफ) साझेदारी की घोषणा की है। यह रणनीतिक गठबंधन सीआरएएफ-प्रायोजित फ्रेट फारवर्डर के रूप में एआईटी की मौजूदगी को जारी रखता है, जिससे कंपनी को संयुक्त राज्य परिवहन कमांड (यूस्ट्रांसकॉम) मिशनों के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला समर्थन जारी रखने में मदद मिलती है और साथ में ग्राहकों के लिए वैश्विक मार्गों, क्षमता और चार्टर्स तक पहुंच में भी इजाफा होता है।
एआईटी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी, ग्रेग वीगेल ने कहा, "10 से अधिक वर्षों के साथ हमें गर्व है और सीआरएएफ कार्यक्रम के माध्यम से यूएसट्रान्सकॉम का समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार हैं। " उन्होंने कहा, "जैसा कि एआईटी ने हमारी वैश्विक मौजूदगी और दायरे को बढ़ाना जारी रखा है और ऐसे में एक ऐसी एयरलाइन के साथ सीआरएएफ साझेदारी हासिल करना, जो दुनिया के कुछ सबसे बड़े कार्गो विमानों के साथ समान वैश्विक पहुंच रखता है, वह हमारी टीम और कैलिटा दोनों के लिए सार्थक है। "
कैलिटा लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय चार्टर और अनुसूचित सेवाओं के लिए बी747-400 और बी777एफ मालवाहकों का संचालन करती है। उनके बेड़े में बी737एफ के साथ-साथ छोटे जेट और टर्बोप्रॉप विमान भी शामिल हैं जो समय-महत्वपूर्ण चार्टर, जीवन विज्ञान और जमीनी मिशनों पर विमान के समर्थन के साथ उत्तरी अमेरिकी बाजार में सेवा प्रदान करते हैं।
कैलिटा एयर के वाइस प्रेसिडेंट कार्गो मार्केटिंग लिन स्टॉफर ने कहा, "हम एआईटी के साथ सहयोग के एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए उत्साहित हैं। " उन्होंने कहा, "वे लंबे समय से एक विश्वसनीय भागीदार रहे हैं, और हम आने वाले वर्षों के लिए यूएसट्रांसकॉम का समर्थन करने के लिए एक साथ काम करने के लिए तत्पर हैं। "
वीगेल ने कहा कि कैलिटा दशकों से एआईटी कोर कैरियर रहा है, जो विशेष रूप से कंपनी की सरकार और एयरोस्पेस व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी के बाद से एयरलाइन एआईटी के शीर्ष तीन करियर या वाहकों में से एक है।
दुनिया भर में सैन्य ठिकानों से उतरने और उड़ान भरने के लिए और संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, एशिया और दक्षिण अमेरिका के हब में रणनीतिक रूप से तैनात विमानों के साथ, कैलिटा के पास दुनिया में कहीं भी कार्गो को कुछ ही घंटों में ले जाने की क्षमता है। वीगेल के अनुसार, एयरलाइन पहले ही सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय चार्टर परियोजनाओं पर एआईटी के साथ काम कर चुकी है।
1951 में स्थापित, सीआरएएफ एक तत्परता कार्यक्रम है जिसका उपयोग देश के वायु गतिशीलता संसाधनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदान करने के लिए किया जाता है जब रक्षा विभाग (डीओडी) की हवाई ढुलाई सैन्य विमानों की क्षमता से अधिक हो जाती है।
इस सहकारी, स्वैच्छिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय रक्षा संबंधी संकट के दौरान डीओडी विमानन क्षमता को बढ़ाने के लिए यू. एस. परिवहन विभाग और यू. एस सिविल एयर करियर इंडस्ट्री शामिल है।
एयर कैरियर एयर मोबिलिटी कमांड के साथ अनुबंधात्मक समझौतों के माध्यम से सीआरएएफ कार्यक्रम के लिए अपने विमान को स्वेच्छा से देते हैं और बदले में, भाग लेने वाली कंपनियों को डीओडी के लिए वाणिज्यिक पीकटाइम कार्गो और यात्री यातायात ले जाने में वरीयता दी जाती है।
कंपनी की सीआरएएफ साझेदारी के अलावा, एआईटी ट्रांसपोर्ट असेट प्रोटेक्शन एसोसिएशन का भी सदस्य है और आतंकवाद के अनुपालन प्रदाता के खिलाफ एक प्रमाणित सीमा शुल्क व्यापार साझेदारी होते हुए राष्ट्रीय रक्षा परिवहन संघ का एक स्थायी सदस्य है।
सीआरएएफ कार्यक्रम में एआईटी की भागीदारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए, https://www. aitworldwide. com/craf-sponsed-forwarder।
कैलिटा एयर के बारे में अधिक जानकारी के लिए kalittaair. com पर जाएं।
एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स एक वैश्विक फ्रेट फारवर्डर है जो कंपनियों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच का विस्तार करके बढ़ने में मदद करता है जहां वे अपने कच्चे माल, घटकों और तैयार माल को बेच और/या खरीद सकते हैं। 40 से अधिक वर्षों के लिए, शिकागो स्थित आपूर्ति श्रृंखला समाधान नेता ने एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, उपभोक्ता खुदरा, खाद्य, सरकार, स्वास्थ्य सेवा, उच्च तकनीक, औद्योगिक और जीवन विज्ञान सहित लगभग हर उद्योग में एक वैश्विक नेटवर्क और विश्वसनीय भागीदारी बनाने के लिए एक परामर्शी दृष्टिकोण पर भरोसा किया है। व्यापक, उपयोगकर्ता के अनुकूल तकनीक द्वारा समर्थित, एआईटी का लचीला व्यवसाय मॉडल समय पर और बजट पर समुद्र, वायु, जमीन और रेल के माध्यम से डोर-टू-डोर डिलीवरी को अनुकूलित करता है। एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में दुनिया भर में 100 से अधिक स्थानों पर विशेषज्ञ टीम के साथियों के साथ, एआईटी के पूर्ण-सेवा विकल्पों में सीमा शुल्क निकासी, गोदाम प्रबंधन और व्हाइट ग्लोव सेवाएं भी शामिल हैं। www. aitworldwide. com पर और जानें।
एआईटी में, हम अपने सहकर्मियों, भागीदारों और समुदायों का उत्साहपूर्वक मूल्यांकन करते हुए असाधारण विश्वव्यापी लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करके अपने ग्राहकों का विश्वास अर्जित करने के अवसरों की तलाश करते हैं।
संपर्कः
एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स, इंक.
800-669-4 एआईटी (4248)
घोषणा (अस्वीकरण): इस घोषणा की मूलस्रोत भाषा का यह आधिकारिक, अधिकृत रूपांतर है। अनुवाद सिर्फ सुविधा के लिए मुहैया कराए जाते हैं और उनका स्रोत भाषा के आलेख से संदर्भ लिया जा सकता है और यह आलेख का एकमात्र रूप है जिसका कानूनी प्रभाव हो सकता है।
| AIT Worldwide Logistics Itasca, Ill. , United States: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला समाधान अग्रणी एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स ने मिशिगन स्थित कैलिटा एयर, वाईपीसिलांटी के साथ एक नई सिविल रिजर्व एयर फ्लीट साझेदारी की घोषणा की है। यह रणनीतिक गठबंधन सीआरएएफ-प्रायोजित फ्रेट फारवर्डर के रूप में एआईटी की मौजूदगी को जारी रखता है, जिससे कंपनी को संयुक्त राज्य परिवहन कमांड मिशनों के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला समर्थन जारी रखने में मदद मिलती है और साथ में ग्राहकों के लिए वैश्विक मार्गों, क्षमता और चार्टर्स तक पहुंच में भी इजाफा होता है। एआईटी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी, ग्रेग वीगेल ने कहा, "दस से अधिक वर्षों के साथ हमें गर्व है और सीआरएएफ कार्यक्रम के माध्यम से यूएसट्रान्सकॉम का समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार हैं। " उन्होंने कहा, "जैसा कि एआईटी ने हमारी वैश्विक मौजूदगी और दायरे को बढ़ाना जारी रखा है और ऐसे में एक ऐसी एयरलाइन के साथ सीआरएएफ साझेदारी हासिल करना, जो दुनिया के कुछ सबसे बड़े कार्गो विमानों के साथ समान वैश्विक पहुंच रखता है, वह हमारी टीम और कैलिटा दोनों के लिए सार्थक है। " कैलिटा लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय चार्टर और अनुसूचित सेवाओं के लिए बीसात सौ सैंतालीस-चार सौ और बीसात सौ सतहत्तरएफ मालवाहकों का संचालन करती है। उनके बेड़े में बीसात सौ सैंतीसएफ के साथ-साथ छोटे जेट और टर्बोप्रॉप विमान भी शामिल हैं जो समय-महत्वपूर्ण चार्टर, जीवन विज्ञान और जमीनी मिशनों पर विमान के समर्थन के साथ उत्तरी अमेरिकी बाजार में सेवा प्रदान करते हैं। कैलिटा एयर के वाइस प्रेसिडेंट कार्गो मार्केटिंग लिन स्टॉफर ने कहा, "हम एआईटी के साथ सहयोग के एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए उत्साहित हैं। " उन्होंने कहा, "वे लंबे समय से एक विश्वसनीय भागीदार रहे हैं, और हम आने वाले वर्षों के लिए यूएसट्रांसकॉम का समर्थन करने के लिए एक साथ काम करने के लिए तत्पर हैं। " वीगेल ने कहा कि कैलिटा दशकों से एआईटी कोर कैरियर रहा है, जो विशेष रूप से कंपनी की सरकार और एयरोस्पेस व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है। कोविड-उन्नीस महामारी के बाद से एयरलाइन एआईटी के शीर्ष तीन करियर या वाहकों में से एक है। दुनिया भर में सैन्य ठिकानों से उतरने और उड़ान भरने के लिए और संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, एशिया और दक्षिण अमेरिका के हब में रणनीतिक रूप से तैनात विमानों के साथ, कैलिटा के पास दुनिया में कहीं भी कार्गो को कुछ ही घंटों में ले जाने की क्षमता है। वीगेल के अनुसार, एयरलाइन पहले ही सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय चार्टर परियोजनाओं पर एआईटी के साथ काम कर चुकी है। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में स्थापित, सीआरएएफ एक तत्परता कार्यक्रम है जिसका उपयोग देश के वायु गतिशीलता संसाधनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदान करने के लिए किया जाता है जब रक्षा विभाग की हवाई ढुलाई सैन्य विमानों की क्षमता से अधिक हो जाती है। इस सहकारी, स्वैच्छिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय रक्षा संबंधी संकट के दौरान डीओडी विमानन क्षमता को बढ़ाने के लिए यू. एस. परिवहन विभाग और यू. एस सिविल एयर करियर इंडस्ट्री शामिल है। एयर कैरियर एयर मोबिलिटी कमांड के साथ अनुबंधात्मक समझौतों के माध्यम से सीआरएएफ कार्यक्रम के लिए अपने विमान को स्वेच्छा से देते हैं और बदले में, भाग लेने वाली कंपनियों को डीओडी के लिए वाणिज्यिक पीकटाइम कार्गो और यात्री यातायात ले जाने में वरीयता दी जाती है। कंपनी की सीआरएएफ साझेदारी के अलावा, एआईटी ट्रांसपोर्ट असेट प्रोटेक्शन एसोसिएशन का भी सदस्य है और आतंकवाद के अनुपालन प्रदाता के खिलाफ एक प्रमाणित सीमा शुल्क व्यापार साझेदारी होते हुए राष्ट्रीय रक्षा परिवहन संघ का एक स्थायी सदस्य है। सीआरएएफ कार्यक्रम में एआईटी की भागीदारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए, https://www. aitworldwide. com/craf-sponsed-forwarder। कैलिटा एयर के बारे में अधिक जानकारी के लिए kalittaair. com पर जाएं। एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स एक वैश्विक फ्रेट फारवर्डर है जो कंपनियों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंच का विस्तार करके बढ़ने में मदद करता है जहां वे अपने कच्चे माल, घटकों और तैयार माल को बेच और/या खरीद सकते हैं। चालीस से अधिक वर्षों के लिए, शिकागो स्थित आपूर्ति श्रृंखला समाधान नेता ने एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, उपभोक्ता खुदरा, खाद्य, सरकार, स्वास्थ्य सेवा, उच्च तकनीक, औद्योगिक और जीवन विज्ञान सहित लगभग हर उद्योग में एक वैश्विक नेटवर्क और विश्वसनीय भागीदारी बनाने के लिए एक परामर्शी दृष्टिकोण पर भरोसा किया है। व्यापक, उपयोगकर्ता के अनुकूल तकनीक द्वारा समर्थित, एआईटी का लचीला व्यवसाय मॉडल समय पर और बजट पर समुद्र, वायु, जमीन और रेल के माध्यम से डोर-टू-डोर डिलीवरी को अनुकूलित करता है। एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में दुनिया भर में एक सौ से अधिक स्थानों पर विशेषज्ञ टीम के साथियों के साथ, एआईटी के पूर्ण-सेवा विकल्पों में सीमा शुल्क निकासी, गोदाम प्रबंधन और व्हाइट ग्लोव सेवाएं भी शामिल हैं। www. aitworldwide. com पर और जानें। एआईटी में, हम अपने सहकर्मियों, भागीदारों और समुदायों का उत्साहपूर्वक मूल्यांकन करते हुए असाधारण विश्वव्यापी लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करके अपने ग्राहकों का विश्वास अर्जित करने के अवसरों की तलाश करते हैं। संपर्कः एआईटी वर्ल्डवाइड लॉजिस्टिक्स, इंक. आठ सौ-छः सौ उनहत्तर-चार एआईटी घोषणा : इस घोषणा की मूलस्रोत भाषा का यह आधिकारिक, अधिकृत रूपांतर है। अनुवाद सिर्फ सुविधा के लिए मुहैया कराए जाते हैं और उनका स्रोत भाषा के आलेख से संदर्भ लिया जा सकता है और यह आलेख का एकमात्र रूप है जिसका कानूनी प्रभाव हो सकता है। |
2002 दुनिया के लिए एक मील का पत्थर थाज्ञात ऑटोमोबाइल ब्रांड "वोक्सवैगन" ऐसा तब था जब कंपनी की नई जीप "ट्यूरेग" नामक एक विधानसभा लाइन से निकली। यह एसयूवी की दुनिया में एक वास्तविक सफलता थी। घटकों और क्रॉसओवर मेनू आइटम उस समय मानकों से काफी श्रेष्ठ थे। कि केवल एक चाबीless एक्सेस सिस्टम है! गियरबॉक्स वितरित करना और अंतर-धुरा विभेदक लॉक सड़क और ऑफ-सड़क दोनों पर आश्वस्त महसूस करने का उत्कृष्ट अवसर देता है।
एक ठोस उपस्थिति, ठाठ इंटीरियर ट्रिम औरआधुनिक विकल्प - यह इस कार के बारे में है तिथि करने के लिए, वोक्सवैगन तुरेग, जिनकी तकनीकी विशेषताओं उच्चतम स्तर पर हैं, प्रतिनिधि वर्ग के पहले एसयूवी माना जाता है वह "वोक्सवैगन" की नई अवधारणा का प्रतीक है, जो सभी इलाकों के वाहनों के उत्कृष्ट गुणों, सेडान के आराम और स्पोर्ट्स कार की गतिशीलता के संयोजन में शामिल है।
यह एक सुरक्षित और विश्वसनीय कार है अगर हम वोक्सवैगन टूआर्ग के बारे में बात कर रहे हैं, तकनीकी विनिर्देश इसकी व्यावहारिक उपयोगिता की एक सैद्धांतिक पुष्टि होगी।
उच्च क्रॉस कंट्री ऑफ़-रोड वाहन प्रदान करता हैसभी पहिया ड्राइव सिस्टम को अपडेट किया यदि कार का एक पहिया निकल जाता है, तो तंत्र इसे निलंबित कर देता है और मोटर की शक्ति शेष पहियों तक स्थानांतरित करता है। इसके अलावा, अवरुद्ध अंतर-एक्सल अंतर और कम संचरण श्रेणी केवल उच्च ऑफ-रोड क्षमता पर जोर देती है।
"वोक्सवैगन टौरेग" के इंजन प्रस्तुत किए जाते हैंपेट्रोल (वॉल्यूम 3.2 लीटर) और डीजल (5 लीटर) इस श्रृंखला का विस्तार करने की योजना है, जिसमें 2.5 लीटर की मात्रा में पांच सिलेंडर इंजन शामिल है। इस इंजन के साथ, छह स्पीड मैनुअल या स्वचालित गियरबॉक्स ठीक काम कर सकता है।
एक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली गाड़ी की रक्षा करती है और कार को सुरक्षा से निकालती है, जब कार का मालिक दृष्टिकोण या इसे हटा देता है और इसे किसी बटन के स्पर्श पर सक्रिय करने की अनुमति देता है।
लाइट उपकरण पूरी तरह से सभी 5 से सुसज्जित हैसीटों की संख्या इसके अलावा, केबिन के अंदर हर सेंटीमीटर को सचमुच जलाया, इंजन डिब्बे और ट्रंक के कुछ हिस्सों दरवाजे, ध्वनिक ग्लास और शीट धातु भागों के लिए टोपोलॉजी सिस्टम की उत्कृष्ट शोर इन्सुलेशन प्रदान करते हैं।
सही सैलून के बारे में और क्या कहना है? महंगी सामग्री के साथ सजाए गए सुरुचिपूर्ण डिजाइन, कार्यात्मक। सैलून एक माइक्रोक्रिल्ट सिस्टम से लैस है, और इसकी कॉन्फ़िगरेशन खरीदार की पसंद पर किया जा सकता है।
"वोक्सवैगन टौअरेग", जिनके स्पेयर पार्ट्स को विभिन्न स्थितियों में एक आदर्श कदम के लिए डिजाइन किया गया है, संभावनाओं का एक विस्तृत क्षितिज खुलता है।
टायर दबाव स्थिरीकरण और निगरानी प्रणाली, स्वतंत्र निलंबन और अखिल व्हील ड्राइव उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
और एक सुखद बोनस की स्थापना हो सकती हैआरामदायक पार्किंग अल्ट्रासोनिक सेंसर के साथ यह डिवाइस कार के पीछे 120 सेमी तक और 150 सेमी तक की दूरी पर हस्तक्षेप का पता लगाता है।
| दो हज़ार दो दुनिया के लिए एक मील का पत्थर थाज्ञात ऑटोमोबाइल ब्रांड "वोक्सवैगन" ऐसा तब था जब कंपनी की नई जीप "ट्यूरेग" नामक एक विधानसभा लाइन से निकली। यह एसयूवी की दुनिया में एक वास्तविक सफलता थी। घटकों और क्रॉसओवर मेनू आइटम उस समय मानकों से काफी श्रेष्ठ थे। कि केवल एक चाबीless एक्सेस सिस्टम है! गियरबॉक्स वितरित करना और अंतर-धुरा विभेदक लॉक सड़क और ऑफ-सड़क दोनों पर आश्वस्त महसूस करने का उत्कृष्ट अवसर देता है। एक ठोस उपस्थिति, ठाठ इंटीरियर ट्रिम औरआधुनिक विकल्प - यह इस कार के बारे में है तिथि करने के लिए, वोक्सवैगन तुरेग, जिनकी तकनीकी विशेषताओं उच्चतम स्तर पर हैं, प्रतिनिधि वर्ग के पहले एसयूवी माना जाता है वह "वोक्सवैगन" की नई अवधारणा का प्रतीक है, जो सभी इलाकों के वाहनों के उत्कृष्ट गुणों, सेडान के आराम और स्पोर्ट्स कार की गतिशीलता के संयोजन में शामिल है। यह एक सुरक्षित और विश्वसनीय कार है अगर हम वोक्सवैगन टूआर्ग के बारे में बात कर रहे हैं, तकनीकी विनिर्देश इसकी व्यावहारिक उपयोगिता की एक सैद्धांतिक पुष्टि होगी। उच्च क्रॉस कंट्री ऑफ़-रोड वाहन प्रदान करता हैसभी पहिया ड्राइव सिस्टम को अपडेट किया यदि कार का एक पहिया निकल जाता है, तो तंत्र इसे निलंबित कर देता है और मोटर की शक्ति शेष पहियों तक स्थानांतरित करता है। इसके अलावा, अवरुद्ध अंतर-एक्सल अंतर और कम संचरण श्रेणी केवल उच्च ऑफ-रोड क्षमता पर जोर देती है। "वोक्सवैगन टौरेग" के इंजन प्रस्तुत किए जाते हैंपेट्रोल और डीजल इस श्रृंखला का विस्तार करने की योजना है, जिसमें दो दशमलव पाँच लीटरटर की मात्रा में पांच सिलेंडर इंजन शामिल है। इस इंजन के साथ, छह स्पीड मैनुअल या स्वचालित गियरबॉक्स ठीक काम कर सकता है। एक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली गाड़ी की रक्षा करती है और कार को सुरक्षा से निकालती है, जब कार का मालिक दृष्टिकोण या इसे हटा देता है और इसे किसी बटन के स्पर्श पर सक्रिय करने की अनुमति देता है। लाइट उपकरण पूरी तरह से सभी पाँच से सुसज्जित हैसीटों की संख्या इसके अलावा, केबिन के अंदर हर सेंटीमीटर को सचमुच जलाया, इंजन डिब्बे और ट्रंक के कुछ हिस्सों दरवाजे, ध्वनिक ग्लास और शीट धातु भागों के लिए टोपोलॉजी सिस्टम की उत्कृष्ट शोर इन्सुलेशन प्रदान करते हैं। सही सैलून के बारे में और क्या कहना है? महंगी सामग्री के साथ सजाए गए सुरुचिपूर्ण डिजाइन, कार्यात्मक। सैलून एक माइक्रोक्रिल्ट सिस्टम से लैस है, और इसकी कॉन्फ़िगरेशन खरीदार की पसंद पर किया जा सकता है। "वोक्सवैगन टौअरेग", जिनके स्पेयर पार्ट्स को विभिन्न स्थितियों में एक आदर्श कदम के लिए डिजाइन किया गया है, संभावनाओं का एक विस्तृत क्षितिज खुलता है। टायर दबाव स्थिरीकरण और निगरानी प्रणाली, स्वतंत्र निलंबन और अखिल व्हील ड्राइव उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। और एक सुखद बोनस की स्थापना हो सकती हैआरामदायक पार्किंग अल्ट्रासोनिक सेंसर के साथ यह डिवाइस कार के पीछे एक सौ बीस सेमी तक और एक सौ पचास सेमी तक की दूरी पर हस्तक्षेप का पता लगाता है। |
बीते दो महीनों से दिल्ली के कई स्कूलों को इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं जिससे स्कूलों में हड़कंप मच जाता है। कुछ समय में मथुरा रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल को ही दो बार इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं।
By Jagran NewsPublish Date: Tue, 16 May 2023 09:47 AM (IST)Updated Date: Tue, 16 May 2023 10:18 AM (IST)
नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। दिल्ली के पुष्प विहार स्थित अमृता स्कूल को मंगलवार सुबह एक मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिससे पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया है।
इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद पुलिस और बम निरोधी दस्ता स्कूल पहुंचा और मामले की जांच कर रहा है।
एहतियात के तौर पर स्कूल को खाली करा लिया गया है और पुलिस स्कूल की जांच-पड़ताल चल रही है।
| बीते दो महीनों से दिल्ली के कई स्कूलों को इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं जिससे स्कूलों में हड़कंप मच जाता है। कुछ समय में मथुरा रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल को ही दो बार इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। By Jagran NewsPublish Date: Tue, सोलह मई दो हज़ार तेईस नौ:सैंतालीस AM Updated Date: Tue, सोलह मई दो हज़ार तेईस दस:अट्ठारह AM नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। दिल्ली के पुष्प विहार स्थित अमृता स्कूल को मंगलवार सुबह एक मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिससे पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया है। इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद पुलिस और बम निरोधी दस्ता स्कूल पहुंचा और मामले की जांच कर रहा है। एहतियात के तौर पर स्कूल को खाली करा लिया गया है और पुलिस स्कूल की जांच-पड़ताल चल रही है। |
फिर मैं एक QSAR विकसित करता हूं, इसलिए उस QSAR के साथ मैं 2 चीजें कर सकता हूं। मैं अपनी wet lab में जाने से पहले एक नए अणु की गतिविधि की भविष्यवाणी कर सकता हूं, अगर एक औषधीय रसायनज्ञ कहता है कि QSAR के साथ तुरंत यह संरचना क्यों नहीं है तो मैं अज्ञात अणुओं की भविष्यवाणी कर सकता हूं और अगर मेरे पास सैकड़ों अणु या हजारों अणु हैं, बजाय उन सभी को मेरी wetlab में ले जाने की जगह और फिर जैविक गतिविधि की जाँच में बहुत समय लग सकता है, मैं इन सैकड़ों या हजारों की गतिविधि की भविष्यवाणी कर सकता हूं।
और फिर उन्हें अवरोही क्रम में रखें और शीर्ष 10%, शीर्ष 20%, इसे मेरी wet lab में ले जाएं और उनकी जैविक गतिविधि की जांच करें। तो मैं इस तरह से शॉर्टलिस्ट कर सकता हूं जो कि मेरा बहुत समय बचाएगा बजाय हजारों अणु लेने से। तो QSAR उस तरह से भी उपयोगी है। तो मूल रूप से आप एक गणितीय संबंध विकसित करते हैं, बाएं हाथ की गतिविधि आपके पास है।
दाहिने हाथ की ओर; हमारे पास प्रॉपर्टी फंक्शन 1, प्रॉपर्टी फंक्शन 2 के कुछ कार्य होंगे जैसे यह अणु का माप, अणु का आकार, हाइड्रोजन बांड दान समूहों की संख्या, हाइड्रोजन बांड बनाने वाले समूहों की संख्या, इलेक्ट्रोस्टैटिक, बहुत सी चीजें हो सकती हैं। हम उन्हें और अधिक विस्तार से देखेंगे, इन्हें अणु के गुण कहा जाता है।
(Refer Slide Time: 05:09 )
Why Are QSARs Important
Estimate physical/ chemical properties of unknown compounds based on known compounds
Activity = function (x)
Property= function (x)
Toxicity = function (x)
X7, X, X 3 ...... are the descriptors/properties / structural feature of
the molecule
तो, हम QSAR कर सकते हैं; मात्रात्मक संरचना गतिविधि संबंध। आजकल, मात्रात्मक संरचना प्रॉपर्टी संबंध आ गए हैं, जिसका अर्थ है, मैं उदाहरण के लिए गुणों की भविष्यवाणी कर सकता हूं, log P, अगर आप नए अणुओं के लिए log P की भविष्यवाणी करना चाहते हैं, तो सॉफ्टवेअर कैसे करते हैं? उनके पास QSPR है। तो वे अनुमान लगाते हैं प्रॉपर्टी का अथवा ज्ञात अणुओं से एक नए अणु के log P से वे गणितीय संबंध विकसित कर सकते हैं।
Activity = function (x;),
| फिर मैं एक QSAR विकसित करता हूं, इसलिए उस QSAR के साथ मैं दो चीजें कर सकता हूं। मैं अपनी wet lab में जाने से पहले एक नए अणु की गतिविधि की भविष्यवाणी कर सकता हूं, अगर एक औषधीय रसायनज्ञ कहता है कि QSAR के साथ तुरंत यह संरचना क्यों नहीं है तो मैं अज्ञात अणुओं की भविष्यवाणी कर सकता हूं और अगर मेरे पास सैकड़ों अणु या हजारों अणु हैं, बजाय उन सभी को मेरी wetlab में ले जाने की जगह और फिर जैविक गतिविधि की जाँच में बहुत समय लग सकता है, मैं इन सैकड़ों या हजारों की गतिविधि की भविष्यवाणी कर सकता हूं। और फिर उन्हें अवरोही क्रम में रखें और शीर्ष दस%, शीर्ष बीस%, इसे मेरी wet lab में ले जाएं और उनकी जैविक गतिविधि की जांच करें। तो मैं इस तरह से शॉर्टलिस्ट कर सकता हूं जो कि मेरा बहुत समय बचाएगा बजाय हजारों अणु लेने से। तो QSAR उस तरह से भी उपयोगी है। तो मूल रूप से आप एक गणितीय संबंध विकसित करते हैं, बाएं हाथ की गतिविधि आपके पास है। दाहिने हाथ की ओर; हमारे पास प्रॉपर्टी फंक्शन एक, प्रॉपर्टी फंक्शन दो के कुछ कार्य होंगे जैसे यह अणु का माप, अणु का आकार, हाइड्रोजन बांड दान समूहों की संख्या, हाइड्रोजन बांड बनाने वाले समूहों की संख्या, इलेक्ट्रोस्टैटिक, बहुत सी चीजें हो सकती हैं। हम उन्हें और अधिक विस्तार से देखेंगे, इन्हें अणु के गुण कहा जाता है। Why Are QSARs Important Estimate physical/ chemical properties of unknown compounds based on known compounds Activity = function Property= function Toxicity = function Xसात, X, X तीन ...... are the descriptors/properties / structural feature of the molecule तो, हम QSAR कर सकते हैं; मात्रात्मक संरचना गतिविधि संबंध। आजकल, मात्रात्मक संरचना प्रॉपर्टी संबंध आ गए हैं, जिसका अर्थ है, मैं उदाहरण के लिए गुणों की भविष्यवाणी कर सकता हूं, log P, अगर आप नए अणुओं के लिए log P की भविष्यवाणी करना चाहते हैं, तो सॉफ्टवेअर कैसे करते हैं? उनके पास QSPR है। तो वे अनुमान लगाते हैं प्रॉपर्टी का अथवा ज्ञात अणुओं से एक नए अणु के log P से वे गणितीय संबंध विकसित कर सकते हैं। Activity = function , |
UP Nikay Chunav: प्रदेश निकाय चुनाव(state body elections) के संग्राम में सभी पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी है लेकिन कांग्रेस की डूबती नईया का कौन होगा खेवन हार? कांग्रेस को नहीं मिल रहे पार्षद प्रत्याशी। जी हां महज 2 दिन ही बचे हैं लेकिन अभी तक महज 25 लोगों के लिस्ट को कांग्रेस जारी कर पाई है। ऐसे में कांग्रेस क्या इन दो दिनों में प्रत्याशी इकट्ठा कर पाएगी, ये एक बड़ा सवाल है?
दरअसल, गोरखपुर में कांग्रेस(UP congress) के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है क्योकि कांग्रेस को निकाय चुनाव (Nikay Chunav) में वार्ड से लड़ने के लिए प्रत्याशी भी नहीं मिल पा रहे हैं। शायद यही वजह है कि महज 25 नामों को ही काँग्रेस ने जारी किया है। जबकि गोरखपुर जिले में कुल 80 वार्ड हैं और इन वार्डों में से महज 25 नाम ही मिले जिन्हें कांग्रेस ने जारी कर दिया। जिसके बाद बाकी वार्डों को लेकर जब जिला अध्यक्ष से सवाल किया गया तो उन्होंने हंस कर कहा कि ऐसी कोई बात नही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आने के लिए और चुनाव लड़ने के लिए लोग भीड़ लगाए रहते हैं। और ये विपक्षियों की एक चाल है। इससे कांग्रेस को कोई फर्क नही पड़ता है।
कांग्रेस को वाकई प्रत्याशी वार्डो में चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर इन जारी लिस्ट को देख कर समझा जा सकता है। फिलहाल जो महज 2 दिन बचे हैं। इन दो दिनों ये भी साफ हो जाएगा। कांग्रेस द्वारा महज 25 नामों की लिस्ट को जारी करना वो भी इतने इंतजार के बाद कहीं न कहीं हारने का डर है या फिर कोई कांग्रेसी लड़ना ही नहीं चाहता है। वजह जो भी लेकिन सवाल कई है जिसका जवाब अभी मिलना बाकी है।
| UP Nikay Chunav: प्रदेश निकाय चुनाव के संग्राम में सभी पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी है लेकिन कांग्रेस की डूबती नईया का कौन होगा खेवन हार? कांग्रेस को नहीं मिल रहे पार्षद प्रत्याशी। जी हां महज दो दिन ही बचे हैं लेकिन अभी तक महज पच्चीस लोगों के लिस्ट को कांग्रेस जारी कर पाई है। ऐसे में कांग्रेस क्या इन दो दिनों में प्रत्याशी इकट्ठा कर पाएगी, ये एक बड़ा सवाल है? दरअसल, गोरखपुर में कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है क्योकि कांग्रेस को निकाय चुनाव में वार्ड से लड़ने के लिए प्रत्याशी भी नहीं मिल पा रहे हैं। शायद यही वजह है कि महज पच्चीस नामों को ही काँग्रेस ने जारी किया है। जबकि गोरखपुर जिले में कुल अस्सी वार्ड हैं और इन वार्डों में से महज पच्चीस नाम ही मिले जिन्हें कांग्रेस ने जारी कर दिया। जिसके बाद बाकी वार्डों को लेकर जब जिला अध्यक्ष से सवाल किया गया तो उन्होंने हंस कर कहा कि ऐसी कोई बात नही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आने के लिए और चुनाव लड़ने के लिए लोग भीड़ लगाए रहते हैं। और ये विपक्षियों की एक चाल है। इससे कांग्रेस को कोई फर्क नही पड़ता है। कांग्रेस को वाकई प्रत्याशी वार्डो में चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर इन जारी लिस्ट को देख कर समझा जा सकता है। फिलहाल जो महज दो दिन बचे हैं। इन दो दिनों ये भी साफ हो जाएगा। कांग्रेस द्वारा महज पच्चीस नामों की लिस्ट को जारी करना वो भी इतने इंतजार के बाद कहीं न कहीं हारने का डर है या फिर कोई कांग्रेसी लड़ना ही नहीं चाहता है। वजह जो भी लेकिन सवाल कई है जिसका जवाब अभी मिलना बाकी है। |
Chandigarh दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनकी ओवर ऑल डेवलेपमेंट का पूरा खाका तैयार किया गया है। एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट पर 10 जून तक लोग सुझाव दे सकते हैं। शहर के चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को नई पॉलिसी से सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़ः चंडीगढ़ प्रशासन शहर के सैकड़ों दिव्यांग बच्चों को जल्द बड़ा तोहफा देने जा रहा है। जल्द दिव्यांग बच्चों के लिए खास एजुकेशन पॉलिसी तैयार होगी। पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। अगले एक से दो महीने के भीतर पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी कर दिया जाएगा।
देश में दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ऐसी खास पॉलिसी बनाने वाला पहला विभाग होगा। यूटी प्रशासन के निर्देशों पर शिक्षा विभाग ने पॉलिसी फॉर एजुकेशन टू चिल्ड्रन विद डिसेबिलिटी इन यूनियन टेरेट्री चंडीगढ़ तैयार की है।
नौ पेज की पॉलिसी में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनकी ओवर ऑल डेवलेपमेंट का पूरा खाका तैयार किया गया है। एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट पर 10 जून तक लोग सुझाव दे सकते हैं। शहर के चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को नई पॉलिसी से सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
नई पॉलिसी में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई, खेल और यहां तक उनके भविष्य को लेकर भी पूरा कैरीकुलम तैयार किया गया है। खास बात यह है कि दिव्यांग बच्चे अब सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई करेंगे। दाखिले में भी बच्चों को रिजर्वेशन मिलेगा।
शिक्षा विभाग हर चार महीने में दिव्यांग बच्चों के लिए असेसमेंट कैंप आयोजित करेगा। पूरा खर्च चंडीगढ़ प्रशासन उठाएगा। दिव्यांग बच्चों की यूटी प्रशासन के साथ ही प्राइवेट कंपिनयां सीएसआर स्कीम के तहत मदद करेंगी।
स्पेशल बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूलों में अलग से तैयार होगा सिलेबस । शिक्षा विभाग हर क्लस्टर में स्पेशल बच्चों के लिए इंटीग्रेटेड स्कूल चयनित करेगा।
- दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए शहर में नए सिरे से सर्वे होगा।
- शिक्षा विभाग सोशल वेलफेयर विभाग के साथ मिलकर असेसमेंट और दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाएगा।
- दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष पोर्टल बनेगा जहां उनसे जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी अपडेट की जाएगी।
- ग्रिड में टीचर्स को स्पेशल बच्चों के लिए विशेष तौर पर ट्रेनिंग।
- स्कूल नहीं जा पाने वाले स्पेशल बच्चों को घर पर स्पेशल टीचर्स की सुविधा मिलेगी।
शिक्षा विभाग ने सामान्य स्कूलों में एनरोल दिव्यांग बच्चों से जुड़ी सभी तरह की जानकारी शहर के सभी सरकारी, एडेड और प्राइवेट स्कूलों से मांगी है। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों से दिव्यांग बच्चों के लिए प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक स्पेशल टीचर और काउंसलर के बारे में पूरी जानकारी मांगी है।
शिक्षा विभाग दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों के लिए विशेष काउंसिलिंग कैंप लगाने के निर्देश जारी करेगा। स्पेशल बच्चों के कैरीकुलम तैयार में एससीईआरटी सेक्टर-32,पंजाब यूनिवर्सिटी भी मदद करेगी।
शहर में स्पेशल बच्चों के लिए खास एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। लोग पॉलिसी पर अपने सुझाव दें, ताकि दिव्यांग बच्चों के लिए बेहतर पॉलिसी मिल सके। स्पेशल बच्चों को शिक्षा विभाग मुख्य धारा में शामिल करने का हर संभव प्रयास करेगा।
चंडीगढ़ प्रशासन शहर के दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके ओवर ऑल डेवलेपमेंट के लिए काम कर रहा है। स्पेशल बच्चों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जल्द ही इसे फाइनल कर लागू कर दिया जाएगा।
| Chandigarh दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनकी ओवर ऑल डेवलेपमेंट का पूरा खाका तैयार किया गया है। एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट पर दस जून तक लोग सुझाव दे सकते हैं। शहर के चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को नई पॉलिसी से सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़ः चंडीगढ़ प्रशासन शहर के सैकड़ों दिव्यांग बच्चों को जल्द बड़ा तोहफा देने जा रहा है। जल्द दिव्यांग बच्चों के लिए खास एजुकेशन पॉलिसी तैयार होगी। पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। अगले एक से दो महीने के भीतर पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी कर दिया जाएगा। देश में दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ऐसी खास पॉलिसी बनाने वाला पहला विभाग होगा। यूटी प्रशासन के निर्देशों पर शिक्षा विभाग ने पॉलिसी फॉर एजुकेशन टू चिल्ड्रन विद डिसेबिलिटी इन यूनियन टेरेट्री चंडीगढ़ तैयार की है। नौ पेज की पॉलिसी में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनकी ओवर ऑल डेवलेपमेंट का पूरा खाका तैयार किया गया है। एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट पर दस जून तक लोग सुझाव दे सकते हैं। शहर के चार हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को नई पॉलिसी से सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। नई पॉलिसी में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई, खेल और यहां तक उनके भविष्य को लेकर भी पूरा कैरीकुलम तैयार किया गया है। खास बात यह है कि दिव्यांग बच्चे अब सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई करेंगे। दाखिले में भी बच्चों को रिजर्वेशन मिलेगा। शिक्षा विभाग हर चार महीने में दिव्यांग बच्चों के लिए असेसमेंट कैंप आयोजित करेगा। पूरा खर्च चंडीगढ़ प्रशासन उठाएगा। दिव्यांग बच्चों की यूटी प्रशासन के साथ ही प्राइवेट कंपिनयां सीएसआर स्कीम के तहत मदद करेंगी। स्पेशल बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूलों में अलग से तैयार होगा सिलेबस । शिक्षा विभाग हर क्लस्टर में स्पेशल बच्चों के लिए इंटीग्रेटेड स्कूल चयनित करेगा। - दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए शहर में नए सिरे से सर्वे होगा। - शिक्षा विभाग सोशल वेलफेयर विभाग के साथ मिलकर असेसमेंट और दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाएगा। - दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष पोर्टल बनेगा जहां उनसे जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी अपडेट की जाएगी। - ग्रिड में टीचर्स को स्पेशल बच्चों के लिए विशेष तौर पर ट्रेनिंग। - स्कूल नहीं जा पाने वाले स्पेशल बच्चों को घर पर स्पेशल टीचर्स की सुविधा मिलेगी। शिक्षा विभाग ने सामान्य स्कूलों में एनरोल दिव्यांग बच्चों से जुड़ी सभी तरह की जानकारी शहर के सभी सरकारी, एडेड और प्राइवेट स्कूलों से मांगी है। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों से दिव्यांग बच्चों के लिए प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक स्पेशल टीचर और काउंसलर के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। शिक्षा विभाग दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों के लिए विशेष काउंसिलिंग कैंप लगाने के निर्देश जारी करेगा। स्पेशल बच्चों के कैरीकुलम तैयार में एससीईआरटी सेक्टर-बत्तीस,पंजाब यूनिवर्सिटी भी मदद करेगी। शहर में स्पेशल बच्चों के लिए खास एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। लोग पॉलिसी पर अपने सुझाव दें, ताकि दिव्यांग बच्चों के लिए बेहतर पॉलिसी मिल सके। स्पेशल बच्चों को शिक्षा विभाग मुख्य धारा में शामिल करने का हर संभव प्रयास करेगा। चंडीगढ़ प्रशासन शहर के दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके ओवर ऑल डेवलेपमेंट के लिए काम कर रहा है। स्पेशल बच्चों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जल्द ही इसे फाइनल कर लागू कर दिया जाएगा। |
इससे पहले धर्मेन्द्र सिंह वर्ष 2021 से ग्वालियर में बतौर रेजिडेंट एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह दिल्ली में दैनिक भास्कर के नेशनल ब्यूरो में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
जहां तक न्यूज चैनल्स की बात है, तो दो नेटवर्क पहले ही BARC से अपने कदम वापस खींच चुके हैं और और दो अन्य प्रमुख नेटवर्क भी इसे छोड़ने की कगार पर हैं।
आपको बता दें कि दिनेश 'Moon Light Theaters' के साथ बतौर क्रिएटिव हेड भी जुड़े रहे हैं और कई नाटकों का लेखन और निर्देशन भी कर चुके हैं।
समाचार4मीडिया से बातचीत में नीरज राजपूत ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर देश की रक्षा-सुरक्षा से जुड़ी सभी जानकारी और स्ट्रेटेजिक अफेयर्स जैसे जटिल मुद्दों का आसान शब्दों में विश्लेषण किया जाएगा।
हरीश कुमार ने इस बारे में अपनी एक लिंक्डइन पोस्ट में जानकारी शेयर की है। पूर्व में वह 'अमर उजाला पब्लिकेशंस लिमिटेड' और 'हिन्दुस्तान टाइम्स' में भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
दीपक चौरसिया इन दिनों हिंदी न्यूज चैनल 'जी न्यूज' (Zee News) में कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वह इस चैनल पर 'ताल ठोक के' और 'कसम संविधान की' शो होस्ट कर रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को आपराधिक मानहानि के मामले में ऑनलाइन न्यूज पोर्टल 'द वायर' के संपादक और उपसंपादक को जारी समन को दरकिनार कर दिया है।
अडानी समूह के चीफ फाइनेंस ऑफिसर जुगशिंदर रॉबी सिंह ने जानबूझकर गलतबयानी के लिए डिजिटल पब्लिकेशन 'द केन' की आलोचना की है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में नीरज राजपूत ने खुद अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। फिलहाल वह नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं।
'टीवी9 भारतवर्ष' में दिनेश गौतम सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर करीब साढ़े तीन साल से अपनी भूमिका निभा रहे थे। यहां वह लोकप्रिय टीवी शो 'अड़ी' समेत तमाम प्रमुख शो होस्ट करते थे।
देश के किसानों के लिए समर्पित 'इंडिया टुडे' ग्रुप का डिजिटल चैनल 'किसान तक' (Kisan Tak) मंगलवार को लॉन्च हो गया।
अलेक्जेंडर हाल ही में अपने बिजनेस मीडिया स्टार्टअप 'फाउंडरइंडिया' से अलग हुए हैं। डिजिटल बिजनेस चैनल करेंगे लॉन्च।
पुलक बाजपेयी भोपाल में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर (डिजिटल) अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से उन्होंने कुछ दिनों पहले इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने करीब दो साल पूर्व इस मीडिया समूह को जॉइन किया था।
उन्होंने करीब दो साल पूर्व इस मीडिया समूह को जॉइन किया था और भोपाल में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर (डिजिटल) अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
पाणिनि आनंद ने कुछ दिनों पहले ही 'इंडिया टुडे' (India Today) समूह इस्तीफा दे दिया था। यहां वह बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर 'आजतक' (डिजिटल) में अपनी भूमिका निभा रहे थे।
| इससे पहले धर्मेन्द्र सिंह वर्ष दो हज़ार इक्कीस से ग्वालियर में बतौर रेजिडेंट एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह दिल्ली में दैनिक भास्कर के नेशनल ब्यूरो में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं। जहां तक न्यूज चैनल्स की बात है, तो दो नेटवर्क पहले ही BARC से अपने कदम वापस खींच चुके हैं और और दो अन्य प्रमुख नेटवर्क भी इसे छोड़ने की कगार पर हैं। आपको बता दें कि दिनेश 'Moon Light Theaters' के साथ बतौर क्रिएटिव हेड भी जुड़े रहे हैं और कई नाटकों का लेखन और निर्देशन भी कर चुके हैं। समाचारचारमीडिया से बातचीत में नीरज राजपूत ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर देश की रक्षा-सुरक्षा से जुड़ी सभी जानकारी और स्ट्रेटेजिक अफेयर्स जैसे जटिल मुद्दों का आसान शब्दों में विश्लेषण किया जाएगा। हरीश कुमार ने इस बारे में अपनी एक लिंक्डइन पोस्ट में जानकारी शेयर की है। पूर्व में वह 'अमर उजाला पब्लिकेशंस लिमिटेड' और 'हिन्दुस्तान टाइम्स' में भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। दीपक चौरसिया इन दिनों हिंदी न्यूज चैनल 'जी न्यूज' में कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वह इस चैनल पर 'ताल ठोक के' और 'कसम संविधान की' शो होस्ट कर रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को आपराधिक मानहानि के मामले में ऑनलाइन न्यूज पोर्टल 'द वायर' के संपादक और उपसंपादक को जारी समन को दरकिनार कर दिया है। अडानी समूह के चीफ फाइनेंस ऑफिसर जुगशिंदर रॉबी सिंह ने जानबूझकर गलतबयानी के लिए डिजिटल पब्लिकेशन 'द केन' की आलोचना की है। समाचारचारमीडिया से बातचीत में नीरज राजपूत ने खुद अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। फिलहाल वह नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं। 'टीवीनौ भारतवर्ष' में दिनेश गौतम सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर करीब साढ़े तीन साल से अपनी भूमिका निभा रहे थे। यहां वह लोकप्रिय टीवी शो 'अड़ी' समेत तमाम प्रमुख शो होस्ट करते थे। देश के किसानों के लिए समर्पित 'इंडिया टुडे' ग्रुप का डिजिटल चैनल 'किसान तक' मंगलवार को लॉन्च हो गया। अलेक्जेंडर हाल ही में अपने बिजनेस मीडिया स्टार्टअप 'फाउंडरइंडिया' से अलग हुए हैं। डिजिटल बिजनेस चैनल करेंगे लॉन्च। पुलक बाजपेयी भोपाल में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से उन्होंने कुछ दिनों पहले इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने करीब दो साल पूर्व इस मीडिया समूह को जॉइन किया था। उन्होंने करीब दो साल पूर्व इस मीडिया समूह को जॉइन किया था और भोपाल में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पाणिनि आनंद ने कुछ दिनों पहले ही 'इंडिया टुडे' समूह इस्तीफा दे दिया था। यहां वह बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर 'आजतक' में अपनी भूमिका निभा रहे थे। |
UP Top 10 News Today: भारी बारिश के चलते आगरा रेल मंडल से गुजरने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनों को रेलवे ने निरस्त/शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया। ज्योति-आलोक केस में अब गुलाबी गैंग की एंट्री हो गई है।
UP Top 10 News Today: भारी बारिश का असर ट्रेनों पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को भारी बारिश के चलते आगरा रेल मंडल से गुजरने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनों को रेलवे ने निरस्त/शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया। अंबाला, चंडीगढ़, पठानकोट, जम्मू, उधमपुर, श्री माता वैष्णो देवी कटरा से आने-जाने वाली वाली ट्रेन पांच से 10 घंटे देरी से चल रही है।
11 साल बाद सचिवालय में उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ चुनाव के लिए मतदान होगा। विधानभवन सचिवालय के तिलक हाल में सुबह 9. 30 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। मतों की गणना 13 व 14 जुलाई को होगी। अध्यक्ष पद के लिए नौ और उपाध्यक्ष पद के लिए ग्यारह प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला है।
उत्तराखंड चार धाम यात्रा पर भी मौसम की मार पड़ी है। भारी बारिश के बाद हाईवे वे पर मलबा आने से यात्रा प्रभावित हो रही है। चिंता की बात है कि यूपी, दिल्ली-एनसीआर, एमपी, सहित देश से के अन्य राज्यों से गंगोत्री-यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जाने वाले तीर्थ यात्री सड़कें बंद होने से फंस रहे हैं। यात्रियों से अपील की जाती है कि वे चार धाम यात्रा पर जाने से पहले उत्तराखंड मौसम पूर्वानुमान का अपडेट जरूर लें।
वाराणसी में एक दारोगा की अजब पत्नी भक्ति सामने आई है। दारोगा की पत्नी ने अपने घर की छत से ही सड़क पर कूड़ा फेंका जो नीचे सफाई कर रहे कर्मचारी पर गिरा। सफाई कर्मचारी ने इस तरह कूड़ा फेंकने का विरोध किया तो दारोगा जी का पारा चढ़ गया। सफाई कर्मी को थाने उठा लाए। वह भी जिस इलाके में घटना हुई वहां नहीं बल्कि चार थाना दूर कोतवाली थाने में उठा लाए। यहां सफाई कर्मी को दो अन्य पुलिस वालों के साथ मिलकर खूब पीटा।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश होने की चेतावानी जारी की है। इसके लिए कई जिलों में येलो और रेड अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक मानसून की ट्रफ लाइन उरई और सुल्तानपुर होते हुए राज्य में बंगाल की खाड़ी से आ रही दक्षिणी-पूर्वी हवाओं के असर और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में बदलाव हुआ है। आने वाले तीन दिनों में यूपी के कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटा होने के बाद भी पिछले चुनाव में भाजपा को जौनपुर में करारा झटका लगा था। भाजपा के केपी सिंह को बसपा का श्याम सिंह यादव ने हरा दिया था। हालांकि झटके के पीछे सपा-बसपा गठबंधन को कारण माना जा रहा था। जौनपुर में आजमगढ़ से भी सटा होने के कारण हमेशा से सपा और बसपा के गढ़ के रूप में भी जाना जाता रहा है। यहां तक कि योगी सरकार के दौरान हुए उपचुनाव में भी सपा ने यहां से जीत हासिल की थी। चुनावों के दौरान यहां जातीय गोलबंदी के आगे स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे भी गायब हो जाते रहे हैं।
एडीएम ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या का मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्योति मौर्य के कथित प्रेमी मनीष दुबे की इस मामले में एंट्री के बाद से ही लोगों की सहानुभूति आलोक मौर्या के साथ दिखाई पड़ रही है। अब आलोक की तरफ से गुलाबी गैंग भी मैदान में उतर आया है। महोबा का यह गैंग पहले से ही काफी प्रसिद्ध रहा है। इस गैंग ने ऐलान कर दिया है कि अगर मनीष दुबे और ज्योति मौर्या को बर्खास्त नहीं किया गया तो गुलाबी गैंग की महिलाएं ऐसा उसके दफ्तर में डंडा ठोकेंगी कि उसका जीना हराम हो जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से बुधवार को माफिया मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी को गजल होटल के मामले में राहत मिल गई है। दोनों के खिलाफ नीचली अदालत में चल रही कार्यवाही और चार्जशीट पर रोक लगा दी। वहीं, गैंगस्टर के मामले में चार साल की सजा के खिलाफ दायर मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। इस पर फैसला 24 जुलाई को आएगा।
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद अपने ऊपर हुए हमले को लेकर आक्रोशित हैं। वह इसी बहाने एक बड़ा सियासी खेल रचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए 21 जुलाई की तारीख तय की गई है। इस दिन दिल्ली के जंतर मंतर पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की गई है। चंद्रशेखर का साफ कहना है कि मुझ पर गोली चलाने वालों को 21 जुलाई को जवाब मिलेगा। चंद्रशेखर के समर्थकों का मानना है कि पुलिस ने गोली कांड का फर्जी खुलासा किया है। असली गुनहगारों को बचाया जा रहा है। मुख्य साजिशकर्ता कोई और है। मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी और चंद्रशेखर को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग भी उठाई है।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने रोडवेज बसों में यात्री सुविधा को बेहतर बनाने और यात्रियों के साथ अच्छे व्यवहार संबंधी निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। प्रमुख सचिव (परिवहन) एवं अध्यक्ष एल वेंकटेश्वर लू, एमडी मासूम अली सरवर, एएमडी अन्नपूर्णा गर्ग एवं यूपीएसआरटीसी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये सभी क्षेत्रीय प्रबंधक, सेवा प्रबंधक एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ संचालन तथा अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा महत्व विभाग की छवि सुधारने को लेकर रहा।
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया आगरा के करीम की दीवानी थीं। कहने को तो वह उनके यहां नौकरी पर भेजे गए थे। लेकिन वह उन्हें हिन्दुस्तानी भाषा सिखाते थे। यहां तक कि महारानी को खाना बनाकर भी खिलाया। महारानी की उनसे इतनी नजदीकी हो गई कि वह उनकी दीवानी हो गईं। उन्होंने मरते दम तक करीम का साथ निभाया। मरने से पहले उन्होंने करीम को आगरा भेज दिया। इन दोनों की करीबी पर हॉलीवुड की फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल भी बनी। करीम की मौत के बाद उसे आगरा के पचकुइयां कब्रिस्तान में दफना दिया गया। हर साल एक खास तारीख को यहां उर्स लगता है।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक शख्स ने कोर्ट मैरिज के सालभर बाद अपनी पत्नी को साथ रखने से इनकार कर दिया। युवक का कहना था कि युवती दूसरी जाति की है इसलिए साथ नहीं रख सकता। वहीं, इस पर परेशान होकर युवती ने थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के सामने ही जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
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| UP Top दस News Today: भारी बारिश के चलते आगरा रेल मंडल से गुजरने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनों को रेलवे ने निरस्त/शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया। ज्योति-आलोक केस में अब गुलाबी गैंग की एंट्री हो गई है। UP Top दस News Today: भारी बारिश का असर ट्रेनों पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को भारी बारिश के चलते आगरा रेल मंडल से गुजरने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनों को रेलवे ने निरस्त/शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया। अंबाला, चंडीगढ़, पठानकोट, जम्मू, उधमपुर, श्री माता वैष्णो देवी कटरा से आने-जाने वाली वाली ट्रेन पांच से दस घंटाटे देरी से चल रही है। ग्यारह साल बाद सचिवालय में उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ चुनाव के लिए मतदान होगा। विधानभवन सचिवालय के तिलक हाल में सुबह नौ. तीस बजे से शाम पाँच बजे तक मतदान होगा। मतों की गणना तेरह व चौदह जुलाई को होगी। अध्यक्ष पद के लिए नौ और उपाध्यक्ष पद के लिए ग्यारह प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला है। उत्तराखंड चार धाम यात्रा पर भी मौसम की मार पड़ी है। भारी बारिश के बाद हाईवे वे पर मलबा आने से यात्रा प्रभावित हो रही है। चिंता की बात है कि यूपी, दिल्ली-एनसीआर, एमपी, सहित देश से के अन्य राज्यों से गंगोत्री-यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जाने वाले तीर्थ यात्री सड़कें बंद होने से फंस रहे हैं। यात्रियों से अपील की जाती है कि वे चार धाम यात्रा पर जाने से पहले उत्तराखंड मौसम पूर्वानुमान का अपडेट जरूर लें। वाराणसी में एक दारोगा की अजब पत्नी भक्ति सामने आई है। दारोगा की पत्नी ने अपने घर की छत से ही सड़क पर कूड़ा फेंका जो नीचे सफाई कर रहे कर्मचारी पर गिरा। सफाई कर्मचारी ने इस तरह कूड़ा फेंकने का विरोध किया तो दारोगा जी का पारा चढ़ गया। सफाई कर्मी को थाने उठा लाए। वह भी जिस इलाके में घटना हुई वहां नहीं बल्कि चार थाना दूर कोतवाली थाने में उठा लाए। यहां सफाई कर्मी को दो अन्य पुलिस वालों के साथ मिलकर खूब पीटा। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटाटों में भारी बारिश होने की चेतावानी जारी की है। इसके लिए कई जिलों में येलो और रेड अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक मानसून की ट्रफ लाइन उरई और सुल्तानपुर होते हुए राज्य में बंगाल की खाड़ी से आ रही दक्षिणी-पूर्वी हवाओं के असर और पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में बदलाव हुआ है। आने वाले तीन दिनों में यूपी के कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटा होने के बाद भी पिछले चुनाव में भाजपा को जौनपुर में करारा झटका लगा था। भाजपा के केपी सिंह को बसपा का श्याम सिंह यादव ने हरा दिया था। हालांकि झटके के पीछे सपा-बसपा गठबंधन को कारण माना जा रहा था। जौनपुर में आजमगढ़ से भी सटा होने के कारण हमेशा से सपा और बसपा के गढ़ के रूप में भी जाना जाता रहा है। यहां तक कि योगी सरकार के दौरान हुए उपचुनाव में भी सपा ने यहां से जीत हासिल की थी। चुनावों के दौरान यहां जातीय गोलबंदी के आगे स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे भी गायब हो जाते रहे हैं। एडीएम ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या का मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्योति मौर्य के कथित प्रेमी मनीष दुबे की इस मामले में एंट्री के बाद से ही लोगों की सहानुभूति आलोक मौर्या के साथ दिखाई पड़ रही है। अब आलोक की तरफ से गुलाबी गैंग भी मैदान में उतर आया है। महोबा का यह गैंग पहले से ही काफी प्रसिद्ध रहा है। इस गैंग ने ऐलान कर दिया है कि अगर मनीष दुबे और ज्योति मौर्या को बर्खास्त नहीं किया गया तो गुलाबी गैंग की महिलाएं ऐसा उसके दफ्तर में डंडा ठोकेंगी कि उसका जीना हराम हो जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट से बुधवार को माफिया मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी को गजल होटल के मामले में राहत मिल गई है। दोनों के खिलाफ नीचली अदालत में चल रही कार्यवाही और चार्जशीट पर रोक लगा दी। वहीं, गैंगस्टर के मामले में चार साल की सजा के खिलाफ दायर मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। इस पर फैसला चौबीस जुलाई को आएगा। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद अपने ऊपर हुए हमले को लेकर आक्रोशित हैं। वह इसी बहाने एक बड़ा सियासी खेल रचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए इक्कीस जुलाई की तारीख तय की गई है। इस दिन दिल्ली के जंतर मंतर पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की गई है। चंद्रशेखर का साफ कहना है कि मुझ पर गोली चलाने वालों को इक्कीस जुलाई को जवाब मिलेगा। चंद्रशेखर के समर्थकों का मानना है कि पुलिस ने गोली कांड का फर्जी खुलासा किया है। असली गुनहगारों को बचाया जा रहा है। मुख्य साजिशकर्ता कोई और है। मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी और चंद्रशेखर को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग भी उठाई है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने रोडवेज बसों में यात्री सुविधा को बेहतर बनाने और यात्रियों के साथ अच्छे व्यवहार संबंधी निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। प्रमुख सचिव एवं अध्यक्ष एल वेंकटेश्वर लू, एमडी मासूम अली सरवर, एएमडी अन्नपूर्णा गर्ग एवं यूपीएसआरटीसी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये सभी क्षेत्रीय प्रबंधक, सेवा प्रबंधक एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ संचालन तथा अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा महत्व विभाग की छवि सुधारने को लेकर रहा। ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया आगरा के करीम की दीवानी थीं। कहने को तो वह उनके यहां नौकरी पर भेजे गए थे। लेकिन वह उन्हें हिन्दुस्तानी भाषा सिखाते थे। यहां तक कि महारानी को खाना बनाकर भी खिलाया। महारानी की उनसे इतनी नजदीकी हो गई कि वह उनकी दीवानी हो गईं। उन्होंने मरते दम तक करीम का साथ निभाया। मरने से पहले उन्होंने करीम को आगरा भेज दिया। इन दोनों की करीबी पर हॉलीवुड की फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल भी बनी। करीम की मौत के बाद उसे आगरा के पचकुइयां कब्रिस्तान में दफना दिया गया। हर साल एक खास तारीख को यहां उर्स लगता है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक शख्स ने कोर्ट मैरिज के सालभर बाद अपनी पत्नी को साथ रखने से इनकार कर दिया। युवक का कहना था कि युवती दूसरी जाति की है इसलिए साथ नहीं रख सकता। वहीं, इस पर परेशान होकर युवती ने थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के सामने ही जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। यूपी की अन्य खबरें और पल-पल की अपडेट्स जानने के लिए बने रहिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
1415फ.आदेश च.अ.बढ़पुरा वाद सं.100 ता.फै.20.7.07अश्वनी कु मार वनाम चकबंदी समिति आदेश तह.इटावादि.13.8.07 नवीन आकार पत्र 45के खाता सं.10कानवीन गाटा सं.116मि./0.0285 खारिज होकर खाता सं.62में दर्ज हो तथा नवीन खाता सं.62से नवीन गाटा सं.
208मि./0.0150 पृथक होकर चकमार्ग खाता सं. 275 मे दर्ज हो, नवीन चकमार्ग खाता 275 से नवीन गाटा 210मि./0.0150 पृथक होकर नवीन खाता सं.38 में दर्ज हो,उक्त आदेश च0अ0आदेश सं./दि.199/27.8.04 व 4.1.07 के अनुसार दर्ज हो,परवाना ह.अ.
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। एक हज़ार चार सौ पंद्रहफ.आदेश च.अ.बढ़पुरा वाद सं.एक सौ ता.फै.बीस.सात.सातअश्वनी कु मार वनाम चकबंदी समिति आदेश तह.इटावादि.तेरह.आठ.सात नवीन आकार पत्र पैंतालीसके खाता सं.दसकानवीन गाटा सं.एक सौ सोलहमि./शून्य.दो सौ पचासी खारिज होकर खाता सं.बासठमें दर्ज हो तथा नवीन खाता सं.बासठसे नवीन गाटा सं. दो सौ आठमि./शून्य.एक सौ पचास पृथक होकर चकमार्ग खाता सं. दो सौ पचहत्तर मे दर्ज हो, नवीन चकमार्ग खाता दो सौ पचहत्तर से नवीन गाटा दो सौ दसमि./शून्य.एक सौ पचास पृथक होकर नवीन खाता सं.अड़तीस में दर्ज हो,उक्त आदेश चशून्यअशून्यआदेश सं./दि.एक सौ निन्यानवे/सत्ताईस.आठ.चार व चार.एक.सात के अनुसार दर्ज हो,परवाना ह.अ. ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
कोलंबो। श्रीलंका में पिछले हफ्ते से ही तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति के लापता होने की खबर है।
आपदा प्रबंधन केन्द्र की ओर से कहा गया है कि प्रतिकूल मौसम की वजह से नौ जिलों में 100,000 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे, जबकि 114 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। केंद्र ने यह भी कहा कि बारिश से जुड़ी घटनाओं में 22 लोग घायल हुए हैं। श्रीलंका के मौसम विभाग की ओर से कहा गया है कि गुरुवार को 19 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था क्योंकि 19 जिलों में 100 मिमी से अधिक की भारी बारिश की संभावना थी।
| कोलंबो। श्रीलंका में पिछले हफ्ते से ही तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है, जिसमें चौदह लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति के लापता होने की खबर है। आपदा प्रबंधन केन्द्र की ओर से कहा गया है कि प्रतिकूल मौसम की वजह से नौ जिलों में एक सौ,शून्य से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे, जबकि एक सौ चौदह लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। केंद्र ने यह भी कहा कि बारिश से जुड़ी घटनाओं में बाईस लोग घायल हुए हैं। श्रीलंका के मौसम विभाग की ओर से कहा गया है कि गुरुवार को उन्नीस जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था क्योंकि उन्नीस जिलों में एक सौ मिमी से अधिक की भारी बारिश की संभावना थी। |
होती हैं, अर्थात् रामानन्दकी शिष्य परम्परा अनन्तानन्दसे चली और उनकी उपासना पारब्रह्मसे सम्बन्ध रखती है। देखिये -
'रामानंदको अनन्तानंदू । सदा प्रगट ज्यूँ पूरण चंदू ।। । ताको अगर आगरै नेमूँ । ले निवह्यो सुमिरन कौ नेमूँ ।। अगरकी सीप बिनौ दीयाई । ताको दास अनंत ही आई । ता परसाद प्रचई भाखी । सुनहु संत जन साची साखी ।। यह प्रचई सुने जो कोई । सहजै सब सुख पावइ सोई ।।
जोग जग्य जप तप जेते । हरिकी कथा हि न पूजै तेते ॥ सुर नर मुनि ब्रह्मादिक गावहीं । पारब्रह्म को अन्त न पावही' । '
'सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरंजनि' के आधारपर रामानन्द और उनके शिष्योंकी जो चर्चा ऊपर की गयी उससे यही कहा जा सकता है कि रामानन्द और तुलसीदासकी उपासनामें कोई सम्बन्ध नहीं । दोनोंके सिद्धान्त भिन्न-भिन्न हैं । जहाँ रामानन्द योग- पद्धतिसे पारब्रह्मकी उपासनाको प्रश्रय देनेवाले हैं, वहाँ तुलसीदास सगुण भक्ति- पद्धति से रामोपासना करनेवाले हैं।
उक्त 'सेवादासकी वानी, चेलादासकी निरञ्जनि में लगभग ढाई सौ पृष्ठोंकी किसी 'तुरसीदास की 'वाणीसंग्रह' भी हैं । इस 'तुरसीदासकी बाणीसंग्रह मे निर्गुण पन्थकी बृहद् व्यंजना हुई है। उसमें कबीर की रचनाओं मे मिलनेवाले सभी सिद्धान्त समाविष्ट हैं। इस वाणीके रचयिता ये 'तुरसीदास' रामानन्दजीके पक्के अनुयायी दिखाई पड़ते हैं । सम्भवतः ये ही रामानन्दकी शिष्य परम्परासे सम्बद्ध रहे हों । नामके भ्रममें पड़कर लोग हमारे गोस्वामी तुलसीदासको रामानन्दकी शिष्य परम्परा में घसीट लाये हों ।
'बाबा सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरञ्जनि के आधारपर रामानन्दके विषय में हमे जो कहना था, कह चुके । अव पीछे स्थगित किये प्रसंगकी ओर आइये । सर्वप्रथम, हमें रामानन्दकी शिष्य परम्परा को ध्यान में रखकर विचार करना चाहिये कि उसमें गोस्वामीजीको सम्मिलित करना कहाँतक समीचीन होगा । रामानन्द के प्रधान द्वादश शिष्योंका नामोल्लेख हो चुका है। उन्हीमें नरर्यानन्दका नाम भी आया है। यदि भ्रमवश हम उन्हीं नरहर्यानन्दका शिष्य मानकर तुलसीको रामानन्दकी शिष्य परम्पराका ठहरावें तो यह संगत कैसे होगा ? कहाँ चौदहवाँ शतक और कहाँ सोलहवाँ और सत्रहवाँ शतक ? यदि कोई नरहर्यानन्दकी लगभग तीन-चार सौ वर्षकी आयु सम्भाव्य माने तो उसे नरहर्यानन्दके शिष्य किसी 'तुलसियानन्द' आदिकी कल्पना भी कर लेनी चाहिये ।
कुछ विशेष विचारशीलोंने तुलसीदासको रामानन्दकी शिष्य परम्पराकी आठवीं पीढ़ीमें बताया है। ग्रियर्सन साहबको प्राप्त किन्हीं दो सूचियोंकी ओर संकेत करते हुए गुरु परम्पराका निर्देश यों किया है - १. रामानन्द - २. सुरसुरानन्द, - ३. माधवानन्द, -४. गरीबानन्द, -५. लक्ष्मीदास, - ६. गोपालदास, - ७. नरहरिदास, -८. तुलसीदास ।
१. दे० 'बाबा सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरन्जनि' पृ० ६५१ । २. वही, पृ० ३९५, ५३५ । ३. दे० डा० श्यामसुन्दरदास, डा० बड़थ्वाल : 'गोस्वामी तुलसीदास, पृ० ३८ ।
रामानन्द और तुलसीदासके बीच लगभग तीन सौ वर्षोंका अन्तर पड़ता है। फलतः इन आठ पीढ़ियोंका क्रम खींचा तानी करके उसमें खपाया जा सकता है। हाँ, गोस्वामीजी के पूर्वकी तीन पीढ़ियों के गुरुओंके नामके साथ 'दास' देखकर उक्त परम्परासे उन्हें जोड़ना कुछ कम कृत्रिम लगता है। जो भी हो, रामानन्दी सम्प्रदायकी जितनी भी शिष्य परम्पराएँ मानी जाती हैं उनमें से किसी में तुलसीदासका नाम अभीतक कहीं न देखनेके कारण मैं नहीं कह सकता कि वे रामानन्दकी शिष्य परम्परामें थे ।
अस्सी घाटपर स्थित जिस मटका सम्बन्ध गोस्वामीजीसे बताया जाता है उससे सम्बद्ध कोई लिखित या परम्पराश्रुत प्रमाण नहीं मिलता कि उक्त मट किसी रामानन्दी महन्त या उसके शिष्य प्रशिग्यके अधि कारमें रहा हो और तुलसीने उन्हींसे अधिकार पाया हो । तात्पर्य यह कि मठ आदिके आधारपर भी तुलमीदास रामानन्दकी शिष्य परम्परामे नहीं ढकेले जा सकते ।
रामानन्दी सम्प्रदाय तथा तुलसीदास दोनोंकी उपासना-सम्बन्धी कुछ विशेषताओका तारतम्य करते हुए भी देखना चाहिये कि क्या ये रामानन्दकी सम्प्रदायके वैष्णव प्रतीत होते हैं । इष्टदेवके विचार से ऐसी प्रतीति होती है कि बाबाजी रामानन्दी सम्प्रदाय के थे, क्योंकि रामको रामानन्दी वैष्णव अपना इष्टदेव मानते हैं और सीताराम एवं लक्ष्मणकी त्रिमूर्तिका ध्यान करते हैं । इधर गोस्वामीजीको भी यही विधि अभीष्ट है । तुलसीकी माला और तिलकका बाह्य विधान रामानन्दी सम्प्रदाय ग्रहण करता है और तुलसीको भी यह मान्य है । जाति-पाँति-भेद भगवद्भक्तिके मार्ग में नगण्य है, सभी भगवत्प्रेमके अधिकारी हैं, ऐसा रामानन्दी सम्प्रदाय और तुलसीदास दोनों ही मानते हैं। गृही अथवा त्यागी किसी रूपमे रहकर उपासना की जा सकती है - यह रामानन्दी सम्प्रदाय स्वीकार करता है । तुलसीदासजी भी इसके प्रतिकूल नहीं । इस साग्यसे ऐसा आभास मिलता है कि गोस्वामीजी रामानन्दी वैष्णव थे । परन्तु जब हमारा ध्यान उनकी पञ्चदेवोपासना आदि के व्यापक विचारकी ओर जाता है तो मालूम पड़ता है कि वे स्मार्त वैष्णव थे । अस्तु, उनके सम्बन्ध में हमें ये वाक्य यथातथ्य जनते हैं- 'तुलसीदास रामानन्द सम्प्रदायकी वैरागी परम्परामे नहीं जान पड़ते । उक्त सम्प्रदायके अन्तर्गत जितनी शिष्य परम्पराएँ मानी जाती है उनमें तुबमी दासका नाम कहीं नहीं है। रामानन्दकी परम्परामें सम्मिलित करनेके लिए उन्हें नरहरिदासका शिष्य बताकर जो परम्परा मिलायी गयी है वह कल्पित प्रतीत होती है। वे रामोपासक वैष्णव अवरूप में पर स्मार्त वैष्णव थे ।
वैरागी सम्प्रदाय और तुलसीदास
वैरागी सम्प्रदाय के बीच गोस्वामीजीकी वाणी आसवाक्यवत् पूजित है। इसके अनुयायी रागचरितमानस को अपना धर्म-ग्रन्थ मानते और उसका पारायण करते हैं। उनकी प्रबल आस्था देखते हुए विचार उठता है, हो न हो वैरागी सम्प्रदाय के प्रवर्तक गोस्वामी तुलसीदास ही हो । परन्तु यह कोरी कल्पना है। हमें अनेकानेक प्रमाण मिलते हैं कि वैरागी सम्प्रदाय तुलसीके बहुत पहले से चला आ रहा है।
वैरागिन् ( सं० ति० ) 'विरागस्य भावः वैराग्यं तदस्यास्तीति' वैरागी- उदासीन वैष्णव सम्म दाय-भेद । इन लोगोंने विषय-वासनाको तिलाञ्जलि देकर संसार- धर्मका त्याग किया है । इस सम्प्रदायक अनुयायी रामानुजी या रामानन्दी मतका अनुसरण करते हैं। ये लोग श्रीकृष्ण या श्रीरामको अपना उपास्य १. रामचन्द्र शुक्ल : 'हिन्दी साहित्यका इतिहास' नवीन संस्करण, पृ० १५९ । २. 'हिन्दी विश्वकोश', भाग २२ पृ० ३४० ।
देव मानते हैं तथा उदासीन संन्यासीकी भाँति राह-राह भीग्य माँगते हैं । 'ओं रामाय नमः' इनका मूल मन्त्र है । ये श्रीकृष्णका भजन तो करते हैं, पर राधाको उनकी शक्ति के रूप में न ग्रहण कर अनुगत भामिनी के रूप में मानते हैं। इनके मतमे भगवान् श्रीकृष्णकी शक्तिरुपिणी हैं--रुक्मिणी देवी । जो लोग अयोध्यापति रामके उपासक हैं वे सीताको लक्ष्मी स्वरूपिणी मानकर उपासना करते हैं । यह संक्षिप्त विवरण वैरागियोके दो भेदोंका द्योतक है, अर्थात् रामानुज सम्प्रदाय या श्रीमम्प्रदाय के वैष्णव तथा रामानन्दी वैरागी ।
वैरागी सम्प्रदायका जो सर्व जन प्रसिद्ध या रूढ़ अर्थ लिया जाता है उसके अन्तर्गत प्रायः रामानन्दी वैष्णव सम्प्रदाय के अन्तर्भुत साधु अथवा उसी सम्प्रदायकी अन्य शाखाओंके प्रवर्तक कबीर, ढाढू आदिके द्वारा प्रवर्तित पथके अनुयायी आते हैं। इस संकुचित अर्थके विचारसे भी वैरागियोंका कोई सामान्य स्वरूप नहीं निर्दिष्ट किया जा सकता। उनके दीक्षा मन्त्रमें एकता अवश्य है, पर उनके सिद्धान्त और व्यवहारके भेद तो असंख्य दिखाई पड़ते हैं । प्रायः जो मटोंमे रहते हैं उनके सिद्धान्त तो बहुत कुछ स्थिर रहते हैं, परन्तु जो विचरते ही रहते हैं और जिनका सम्पर्क नये-नये देवोपासकों अथवा विविध आचार विचारवालोंसे होता ही रहता है उनके सिद्धान्त और व्यवहार में स्थिरता कैसे टिक सकती है ?
सन् १९०१ ई० की 'सैन्सस रिपोर्ट से प्रकट होता है कि उस समय वैरागियोंकी संख्या ७,६५,२५३ थी, इनमे अधिकांश बंगाल और राजपूतानामें रहते थे। यद्यपि 'वैरागी' शब्द प्रायः विष्णुभक्तका द्योतक है तथापि यह साक्षात् विष्णु और उनके अन्य अवतारोंके उपासकोंका बोधक न होकर प्रधानतः राम अथवा कृष्णके उपासकोंका ही व्यञ्जक है। कुछ ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि उत्तरी भारत मे दिखाई देनेवाले वैरागी सम्प्रदायकी प्रतिष्ठा बौद्ध शासकों के ह्रासकाल के पश्चात् राजपूतोंके अभ्युदय-कालमे हुई । इस सम्प्रदायकी प्राचीनता की पुष्टि कतिपय विद्वज्जनोंकी सम्मतियोंके आधारपर डब्लू कूकेने अपने अनुसन्धानमै यों की है - 'वैरागी लोग कदाचित् भारतीय धर्मका बहुत प्राचीन तत्त्व प्रकट करते है, इस सम्प्रदाय के वाघम्बरधारी अनुयायी निस्सन्देह नृसिंह अवतारका प्रतीक वैसे ही व्यक्त करते हैं जैसे भागवत लोग अपने वस्त्र या नृत्यादिके द्वारा कृष्णका अनुकरण करते हैं। उपास्यकी स्वरूपाभिव्यक्ति के लिए पुजारीका अपने इष्टदेवका प्रतीक धारण करना तो प्रायः सभी प्राचीन धर्मोकी आदिम अवस्था में मिलता है। विकासके पश्चात् भी पुरानी धार्मिक प्रथा जीवित रहती है, किसी विशिष्ट पशुचर्मके धारण आदिका यही अभिप्राय है । तिब्बत में ऐसी प्रथा आज भी वर्तमान है' ।
पहले कहा जा चुका है कि रामानुजी सम्प्रदाय और रामानन्दी सम्प्रदाय दोनोंमें ही वैरागी वैष्णव होते हैं। हमें यह स्वीकार करने में आपत्ति न होनी चाहिये कि वैरागी सम्प्रदायकी प्रतिष्ठा रामानन्दके बहुत पहले हुई, क्योंकि रामानुजका समय रामानन्द के बहुत पूर्वका है । यदि रामानन्द वैरागी सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जायँ तो भारी ऐतिहासिक भूल होगी । अतएव यह कहना अधिक संगत होगा कि वैरागी सम्प्रदायका प्रवर्तन कदाचित दक्षिण से रामानुजके सिद्धान्तों के साथ हुआ । चाहे यह सम्प्रदाय दक्षिण में रामानुजके समय उद्भूत हुआ हो, चाहे और भी प्राचीन अज्ञात कालमे, पर इतना तो निर्विवाद रूपसे कहा जा सकता है कि इसकी जो व्यापकता और प्रधानता इस समय उत्तरी भारत में वर्तमान है
१. वही 'विश्वकोश' । २. विल्सन : 'एसेज एण्ड लेक्स आन् दी रेलिजन्स आव् हिन्दूज'; १८४-८५ । ३. इन्साइक्लोपीडिया आव् रेलिजन एण्ड एथिक्स', भाग २, पृ० ३३७ । ४. वही । | होती हैं, अर्थात् रामानन्दकी शिष्य परम्परा अनन्तानन्दसे चली और उनकी उपासना पारब्रह्मसे सम्बन्ध रखती है। देखिये - 'रामानंदको अनन्तानंदू । सदा प्रगट ज्यूँ पूरण चंदू ।। । ताको अगर आगरै नेमूँ । ले निवह्यो सुमिरन कौ नेमूँ ।। अगरकी सीप बिनौ दीयाई । ताको दास अनंत ही आई । ता परसाद प्रचई भाखी । सुनहु संत जन साची साखी ।। यह प्रचई सुने जो कोई । सहजै सब सुख पावइ सोई ।। जोग जग्य जप तप जेते । हरिकी कथा हि न पूजै तेते ॥ सुर नर मुनि ब्रह्मादिक गावहीं । पारब्रह्म को अन्त न पावही' । ' 'सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरंजनि' के आधारपर रामानन्द और उनके शिष्योंकी जो चर्चा ऊपर की गयी उससे यही कहा जा सकता है कि रामानन्द और तुलसीदासकी उपासनामें कोई सम्बन्ध नहीं । दोनोंके सिद्धान्त भिन्न-भिन्न हैं । जहाँ रामानन्द योग- पद्धतिसे पारब्रह्मकी उपासनाको प्रश्रय देनेवाले हैं, वहाँ तुलसीदास सगुण भक्ति- पद्धति से रामोपासना करनेवाले हैं। उक्त 'सेवादासकी वानी, चेलादासकी निरञ्जनि में लगभग ढाई सौ पृष्ठोंकी किसी 'तुरसीदास की 'वाणीसंग्रह' भी हैं । इस 'तुरसीदासकी बाणीसंग्रह मे निर्गुण पन्थकी बृहद् व्यंजना हुई है। उसमें कबीर की रचनाओं मे मिलनेवाले सभी सिद्धान्त समाविष्ट हैं। इस वाणीके रचयिता ये 'तुरसीदास' रामानन्दजीके पक्के अनुयायी दिखाई पड़ते हैं । सम्भवतः ये ही रामानन्दकी शिष्य परम्परासे सम्बद्ध रहे हों । नामके भ्रममें पड़कर लोग हमारे गोस्वामी तुलसीदासको रामानन्दकी शिष्य परम्परा में घसीट लाये हों । 'बाबा सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरञ्जनि के आधारपर रामानन्दके विषय में हमे जो कहना था, कह चुके । अव पीछे स्थगित किये प्रसंगकी ओर आइये । सर्वप्रथम, हमें रामानन्दकी शिष्य परम्परा को ध्यान में रखकर विचार करना चाहिये कि उसमें गोस्वामीजीको सम्मिलित करना कहाँतक समीचीन होगा । रामानन्द के प्रधान द्वादश शिष्योंका नामोल्लेख हो चुका है। उन्हीमें नरर्यानन्दका नाम भी आया है। यदि भ्रमवश हम उन्हीं नरहर्यानन्दका शिष्य मानकर तुलसीको रामानन्दकी शिष्य परम्पराका ठहरावें तो यह संगत कैसे होगा ? कहाँ चौदहवाँ शतक और कहाँ सोलहवाँ और सत्रहवाँ शतक ? यदि कोई नरहर्यानन्दकी लगभग तीन-चार सौ वर्षकी आयु सम्भाव्य माने तो उसे नरहर्यानन्दके शिष्य किसी 'तुलसियानन्द' आदिकी कल्पना भी कर लेनी चाहिये । कुछ विशेष विचारशीलोंने तुलसीदासको रामानन्दकी शिष्य परम्पराकी आठवीं पीढ़ीमें बताया है। ग्रियर्सन साहबको प्राप्त किन्हीं दो सूचियोंकी ओर संकेत करते हुए गुरु परम्पराका निर्देश यों किया है - एक. रामानन्द - दो. सुरसुरानन्द, - तीन. माधवानन्द, -चार. गरीबानन्द, -पाँच. लक्ष्मीदास, - छः. गोपालदास, - सात. नरहरिदास, -आठ. तुलसीदास । एक. देशून्य 'बाबा सेवादासकी बानी, चेलादासकी निरन्जनि' पृशून्य छः सौ इक्यावन । दो. वही, पृशून्य तीन सौ पचानवे, पाँच सौ पैंतीस । तीन. देशून्य डाशून्य श्यामसुन्दरदास, डाशून्य बड़थ्वाल : 'गोस्वामी तुलसीदास, पृशून्य अड़तीस । रामानन्द और तुलसीदासके बीच लगभग तीन सौ वर्षोंका अन्तर पड़ता है। फलतः इन आठ पीढ़ियोंका क्रम खींचा तानी करके उसमें खपाया जा सकता है। हाँ, गोस्वामीजी के पूर्वकी तीन पीढ़ियों के गुरुओंके नामके साथ 'दास' देखकर उक्त परम्परासे उन्हें जोड़ना कुछ कम कृत्रिम लगता है। जो भी हो, रामानन्दी सम्प्रदायकी जितनी भी शिष्य परम्पराएँ मानी जाती हैं उनमें से किसी में तुलसीदासका नाम अभीतक कहीं न देखनेके कारण मैं नहीं कह सकता कि वे रामानन्दकी शिष्य परम्परामें थे । अस्सी घाटपर स्थित जिस मटका सम्बन्ध गोस्वामीजीसे बताया जाता है उससे सम्बद्ध कोई लिखित या परम्पराश्रुत प्रमाण नहीं मिलता कि उक्त मट किसी रामानन्दी महन्त या उसके शिष्य प्रशिग्यके अधि कारमें रहा हो और तुलसीने उन्हींसे अधिकार पाया हो । तात्पर्य यह कि मठ आदिके आधारपर भी तुलमीदास रामानन्दकी शिष्य परम्परामे नहीं ढकेले जा सकते । रामानन्दी सम्प्रदाय तथा तुलसीदास दोनोंकी उपासना-सम्बन्धी कुछ विशेषताओका तारतम्य करते हुए भी देखना चाहिये कि क्या ये रामानन्दकी सम्प्रदायके वैष्णव प्रतीत होते हैं । इष्टदेवके विचार से ऐसी प्रतीति होती है कि बाबाजी रामानन्दी सम्प्रदाय के थे, क्योंकि रामको रामानन्दी वैष्णव अपना इष्टदेव मानते हैं और सीताराम एवं लक्ष्मणकी त्रिमूर्तिका ध्यान करते हैं । इधर गोस्वामीजीको भी यही विधि अभीष्ट है । तुलसीकी माला और तिलकका बाह्य विधान रामानन्दी सम्प्रदाय ग्रहण करता है और तुलसीको भी यह मान्य है । जाति-पाँति-भेद भगवद्भक्तिके मार्ग में नगण्य है, सभी भगवत्प्रेमके अधिकारी हैं, ऐसा रामानन्दी सम्प्रदाय और तुलसीदास दोनों ही मानते हैं। गृही अथवा त्यागी किसी रूपमे रहकर उपासना की जा सकती है - यह रामानन्दी सम्प्रदाय स्वीकार करता है । तुलसीदासजी भी इसके प्रतिकूल नहीं । इस साग्यसे ऐसा आभास मिलता है कि गोस्वामीजी रामानन्दी वैष्णव थे । परन्तु जब हमारा ध्यान उनकी पञ्चदेवोपासना आदि के व्यापक विचारकी ओर जाता है तो मालूम पड़ता है कि वे स्मार्त वैष्णव थे । अस्तु, उनके सम्बन्ध में हमें ये वाक्य यथातथ्य जनते हैं- 'तुलसीदास रामानन्द सम्प्रदायकी वैरागी परम्परामे नहीं जान पड़ते । उक्त सम्प्रदायके अन्तर्गत जितनी शिष्य परम्पराएँ मानी जाती है उनमें तुबमी दासका नाम कहीं नहीं है। रामानन्दकी परम्परामें सम्मिलित करनेके लिए उन्हें नरहरिदासका शिष्य बताकर जो परम्परा मिलायी गयी है वह कल्पित प्रतीत होती है। वे रामोपासक वैष्णव अवरूप में पर स्मार्त वैष्णव थे । वैरागी सम्प्रदाय और तुलसीदास वैरागी सम्प्रदाय के बीच गोस्वामीजीकी वाणी आसवाक्यवत् पूजित है। इसके अनुयायी रागचरितमानस को अपना धर्म-ग्रन्थ मानते और उसका पारायण करते हैं। उनकी प्रबल आस्था देखते हुए विचार उठता है, हो न हो वैरागी सम्प्रदाय के प्रवर्तक गोस्वामी तुलसीदास ही हो । परन्तु यह कोरी कल्पना है। हमें अनेकानेक प्रमाण मिलते हैं कि वैरागी सम्प्रदाय तुलसीके बहुत पहले से चला आ रहा है। वैरागिन् 'विरागस्य भावः वैराग्यं तदस्यास्तीति' वैरागी- उदासीन वैष्णव सम्म दाय-भेद । इन लोगोंने विषय-वासनाको तिलाञ्जलि देकर संसार- धर्मका त्याग किया है । इस सम्प्रदायक अनुयायी रामानुजी या रामानन्दी मतका अनुसरण करते हैं। ये लोग श्रीकृष्ण या श्रीरामको अपना उपास्य एक. रामचन्द्र शुक्ल : 'हिन्दी साहित्यका इतिहास' नवीन संस्करण, पृशून्य एक सौ उनसठ । दो. 'हिन्दी विश्वकोश', भाग बाईस पृशून्य तीन सौ चालीस । देव मानते हैं तथा उदासीन संन्यासीकी भाँति राह-राह भीग्य माँगते हैं । 'ओं रामाय नमः' इनका मूल मन्त्र है । ये श्रीकृष्णका भजन तो करते हैं, पर राधाको उनकी शक्ति के रूप में न ग्रहण कर अनुगत भामिनी के रूप में मानते हैं। इनके मतमे भगवान् श्रीकृष्णकी शक्तिरुपिणी हैं--रुक्मिणी देवी । जो लोग अयोध्यापति रामके उपासक हैं वे सीताको लक्ष्मी स्वरूपिणी मानकर उपासना करते हैं । यह संक्षिप्त विवरण वैरागियोके दो भेदोंका द्योतक है, अर्थात् रामानुज सम्प्रदाय या श्रीमम्प्रदाय के वैष्णव तथा रामानन्दी वैरागी । वैरागी सम्प्रदायका जो सर्व जन प्रसिद्ध या रूढ़ अर्थ लिया जाता है उसके अन्तर्गत प्रायः रामानन्दी वैष्णव सम्प्रदाय के अन्तर्भुत साधु अथवा उसी सम्प्रदायकी अन्य शाखाओंके प्रवर्तक कबीर, ढाढू आदिके द्वारा प्रवर्तित पथके अनुयायी आते हैं। इस संकुचित अर्थके विचारसे भी वैरागियोंका कोई सामान्य स्वरूप नहीं निर्दिष्ट किया जा सकता। उनके दीक्षा मन्त्रमें एकता अवश्य है, पर उनके सिद्धान्त और व्यवहारके भेद तो असंख्य दिखाई पड़ते हैं । प्रायः जो मटोंमे रहते हैं उनके सिद्धान्त तो बहुत कुछ स्थिर रहते हैं, परन्तु जो विचरते ही रहते हैं और जिनका सम्पर्क नये-नये देवोपासकों अथवा विविध आचार विचारवालोंसे होता ही रहता है उनके सिद्धान्त और व्यवहार में स्थिरता कैसे टिक सकती है ? सन् एक हज़ार नौ सौ एक ईशून्य की 'सैन्सस रिपोर्ट से प्रकट होता है कि उस समय वैरागियोंकी संख्या सात,पैंसठ,दो सौ तिरेपन थी, इनमे अधिकांश बंगाल और राजपूतानामें रहते थे। यद्यपि 'वैरागी' शब्द प्रायः विष्णुभक्तका द्योतक है तथापि यह साक्षात् विष्णु और उनके अन्य अवतारोंके उपासकोंका बोधक न होकर प्रधानतः राम अथवा कृष्णके उपासकोंका ही व्यञ्जक है। कुछ ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि उत्तरी भारत मे दिखाई देनेवाले वैरागी सम्प्रदायकी प्रतिष्ठा बौद्ध शासकों के ह्रासकाल के पश्चात् राजपूतोंके अभ्युदय-कालमे हुई । इस सम्प्रदायकी प्राचीनता की पुष्टि कतिपय विद्वज्जनोंकी सम्मतियोंके आधारपर डब्लू कूकेने अपने अनुसन्धानमै यों की है - 'वैरागी लोग कदाचित् भारतीय धर्मका बहुत प्राचीन तत्त्व प्रकट करते है, इस सम्प्रदाय के वाघम्बरधारी अनुयायी निस्सन्देह नृसिंह अवतारका प्रतीक वैसे ही व्यक्त करते हैं जैसे भागवत लोग अपने वस्त्र या नृत्यादिके द्वारा कृष्णका अनुकरण करते हैं। उपास्यकी स्वरूपाभिव्यक्ति के लिए पुजारीका अपने इष्टदेवका प्रतीक धारण करना तो प्रायः सभी प्राचीन धर्मोकी आदिम अवस्था में मिलता है। विकासके पश्चात् भी पुरानी धार्मिक प्रथा जीवित रहती है, किसी विशिष्ट पशुचर्मके धारण आदिका यही अभिप्राय है । तिब्बत में ऐसी प्रथा आज भी वर्तमान है' । पहले कहा जा चुका है कि रामानुजी सम्प्रदाय और रामानन्दी सम्प्रदाय दोनोंमें ही वैरागी वैष्णव होते हैं। हमें यह स्वीकार करने में आपत्ति न होनी चाहिये कि वैरागी सम्प्रदायकी प्रतिष्ठा रामानन्दके बहुत पहले हुई, क्योंकि रामानुजका समय रामानन्द के बहुत पूर्वका है । यदि रामानन्द वैरागी सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जायँ तो भारी ऐतिहासिक भूल होगी । अतएव यह कहना अधिक संगत होगा कि वैरागी सम्प्रदायका प्रवर्तन कदाचित दक्षिण से रामानुजके सिद्धान्तों के साथ हुआ । चाहे यह सम्प्रदाय दक्षिण में रामानुजके समय उद्भूत हुआ हो, चाहे और भी प्राचीन अज्ञात कालमे, पर इतना तो निर्विवाद रूपसे कहा जा सकता है कि इसकी जो व्यापकता और प्रधानता इस समय उत्तरी भारत में वर्तमान है एक. वही 'विश्वकोश' । दो. विल्सन : 'एसेज एण्ड लेक्स आन् दी रेलिजन्स आव् हिन्दूज'; एक सौ चौरासी-पचासी । तीन. इन्साइक्लोपीडिया आव् रेलिजन एण्ड एथिक्स', भाग दो, पृशून्य तीन सौ सैंतीस । चार. वही । |
इस मामले में अदालत ने कुल 11 आरोपितों में से सात आरोपितों को बरी भी किया है। madhya pradeshWed, 13 Mar 2019 07:25 AM (IST)
*देशी कट्टे के साथ गिरफ्तार जमील को जेल भेजा मंदसौर। पशुपतिनाथ गेट के सामने से देशी कट्टे के साथ गिरफ्तार आरोपी के आजम लाला से संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि उसका वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड में हाथ होने के कोई तथ. . . madhya pradeshSun, 24 Jan 2016 04:02 AM (IST)
*मामला वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड का *अब तक पुलिस को बता रहे थे जुबेर का नाम मंदसौर। वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड में पुलिस रिमांड पर शूटरों ने एक सप्ताह बाद पुलिस को तीसरे शूटर का सही नाम बताया है। अभी तक वे ताल निवासी जु. . . madhya pradeshSun, 10 Jan 2016 04:00 AM (IST)
*ताल से फरार शूटर भी नहीं मिला मंदसौर। वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के मामले के मास्टरमाइंड आजम लाला की तलाश तेज हो गई है। प्रतापगढ़ क्षेत्र में पुलिस दल घूम रहे हैं। इधर ताल से फरार शूटर जुबेर खान भी नहीं मिला। इधर पुलिस रि. . . madhya pradeshThu, 07 Jan 2016 04:00 AM (IST)
| इस मामले में अदालत ने कुल ग्यारह आरोपितों में से सात आरोपितों को बरी भी किया है। madhya pradeshWed, तेरह मार्च दो हज़ार उन्नीस सात:पच्चीस AM *देशी कट्टे के साथ गिरफ्तार जमील को जेल भेजा मंदसौर। पशुपतिनाथ गेट के सामने से देशी कट्टे के साथ गिरफ्तार आरोपी के आजम लाला से संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि उसका वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड में हाथ होने के कोई तथ. . . madhya pradeshSun, चौबीस जनवरी दो हज़ार सोलह चार:दो AM *मामला वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड का *अब तक पुलिस को बता रहे थे जुबेर का नाम मंदसौर। वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड में पुलिस रिमांड पर शूटरों ने एक सप्ताह बाद पुलिस को तीसरे शूटर का सही नाम बताया है। अभी तक वे ताल निवासी जु. . . madhya pradeshSun, दस जनवरी दो हज़ार सोलह चार:शून्य AM *ताल से फरार शूटर भी नहीं मिला मंदसौर। वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड के मामले के मास्टरमाइंड आजम लाला की तलाश तेज हो गई है। प्रतापगढ़ क्षेत्र में पुलिस दल घूम रहे हैं। इधर ताल से फरार शूटर जुबेर खान भी नहीं मिला। इधर पुलिस रि. . . madhya pradeshThu, सात जनवरी दो हज़ार सोलह चार:शून्य AM |
गैंगरेप के झूठे आरोप में बरी होकर 10 हजार करोड़ रुपए का क्षतिपूर्ति का दावा लगाकर सुर्खियों में आया फरियादी कांतु अब पुरुष उत्पीड़न विरोधी यात्रा लेकर दिल्ली पहुंच गया है । राष्ट्रपति भवन पहुंचकर कांतु और उसके एडवोकेट विजय सिंह यादव राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर पुरुषों पर लगाए जा रहे झूठे मुकदमों के संबंध में ज्ञापन सौंपा । जय कुलदेवी फाउंडेशन द्वारा निकाली गई इस यात्रा में गैंग रेप के झूठे आरोप में करीब 2 साल तक जेल में रहने वाला कांतु भी शामिल हुआ है। गौरतलब है कि कांतु के एडवोकेट विजय सिंह यादव द्वारा 10 हजार 6 करोड़ 2 लाख रुपए का क्षतिपूर्ति दावा जिला न्यायालय में लगाया गया था। इसके बाद यह मामला मीडिया में सुर्खियों में छाया हुआ था।
दरअसल रतलाम के घोड़ाखेड़ा निवासी कांतिलाल उर्फ कांतु अमलियार को 2 साल पहले गैंगरेप के मामले में आरोपी बनाया गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय रतलाम से इस केस में उसे अब दोषमुक्त कर दिया है। कांतु के अनुसार, बेगुनाह होते हुए भी उसे 2 साल तक जेल की प्रताड़ना सहना पड़ी। इसकी वजह से उसका परिवार सड़क पर आ गया। बच्चों के लिए खाने-पीने का इंतजाम नहीं कर पा रहा हूं। पुलिस ने मुझे जबरदस्ती झूठे केस में फंसा दिया। 5 साल हो गए परेशान होते-होते। 3 साल पुलिस परेशान करती रही, 2 साल जेल में रहा। कांतू की ओर से वकील विजय सिंह यादव ने राज्य शासन और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध 10 हजार 6 करोड़ 2 लाख रुपए का क्षतिपूर्ति दावा जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया था ।
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| गैंगरेप के झूठे आरोप में बरी होकर दस हजार करोड़ रुपए का क्षतिपूर्ति का दावा लगाकर सुर्खियों में आया फरियादी कांतु अब पुरुष उत्पीड़न विरोधी यात्रा लेकर दिल्ली पहुंच गया है । राष्ट्रपति भवन पहुंचकर कांतु और उसके एडवोकेट विजय सिंह यादव राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर पुरुषों पर लगाए जा रहे झूठे मुकदमों के संबंध में ज्ञापन सौंपा । जय कुलदेवी फाउंडेशन द्वारा निकाली गई इस यात्रा में गैंग रेप के झूठे आरोप में करीब दो साल तक जेल में रहने वाला कांतु भी शामिल हुआ है। गौरतलब है कि कांतु के एडवोकेट विजय सिंह यादव द्वारा दस हजार छः करोड़ दो लाख रुपए का क्षतिपूर्ति दावा जिला न्यायालय में लगाया गया था। इसके बाद यह मामला मीडिया में सुर्खियों में छाया हुआ था। दरअसल रतलाम के घोड़ाखेड़ा निवासी कांतिलाल उर्फ कांतु अमलियार को दो साल पहले गैंगरेप के मामले में आरोपी बनाया गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय रतलाम से इस केस में उसे अब दोषमुक्त कर दिया है। कांतु के अनुसार, बेगुनाह होते हुए भी उसे दो साल तक जेल की प्रताड़ना सहना पड़ी। इसकी वजह से उसका परिवार सड़क पर आ गया। बच्चों के लिए खाने-पीने का इंतजाम नहीं कर पा रहा हूं। पुलिस ने मुझे जबरदस्ती झूठे केस में फंसा दिया। पाँच साल हो गए परेशान होते-होते। तीन साल पुलिस परेशान करती रही, दो साल जेल में रहा। कांतू की ओर से वकील विजय सिंह यादव ने राज्य शासन और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध दस हजार छः करोड़ दो लाख रुपए का क्षतिपूर्ति दावा जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया था । This website follows the DNPA Code of Ethics. |
आगरा में इनर रिंग रोड की जमीन वापसी के लिए किसान आज 14वें भी दिन भूख हड़ताल पर हैं। कुछ किसानों की तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उनकी तबीयत बार-बार बिगड़ रही है। किसानों ने कुछ भी खाने से मना कर दिया है। किसानों अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
विकास प्राधिकरण ने इनर रिंग रोड थर्ड फेस के लिए 5 गांवों के किसान की जमीन अधिग्रहीत की थी। साल 2017 में इनर रिंग रोड थर्ड फेस का ले आउट बदल गया। इसके बाद से ही किसान जमीन वापसी की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि उनको जमीन का मुआवजा भी नहीं मिला है। बिना मुआवजा दिए एडीए ने खाते-खतौनी से किसानों ने नाम कटवाकर जमीन अपने नाम करा ली है।
नियम के मुताबिक, अधिग्रहीत जमीन का 5 साल में उपयोग न होने या फिर कब्जा न लेने वापस लिए जाने का प्रावधान है। एडीए नियमों की अनदेखी कर किसानों की जमीन को पूंजीपतियों को देना चाहता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि वह मर जाएंगे, मगर अपनी जमीन नहीं छोडेंगे।
सदर तहसील परिसर में भूख हड़ताल के दौरान शुक्रवार को किसान नेता श्याम सिंह चाहर समेत रघुनाथ शर्मा, वेद प्रकाश, श्रीभगवान शर्मा, मेहंद्र सिंह चाहर, प्रमोद जैन आदि किसानों की तबियत बिगड़ गई थी। सेहत खराब होने पर किसानों को प्रशासन ने जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। पिछले तीन दिन किसानों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जिला हॉस्पिटल में आज सुबह से किसानों की तबीयत बार-बार बिगड़ रही है। किसान नेता श्याम सिंह चाहर की पल्स बार-बार गिर रही है। जिला अस्पताल में किसानों का इलाज कर रहे चिकित्सक इस बात से परेशान हैं कि किसान कुछ खाने-पीने को तैयार रहीं हैं। किसानों की मांग है कि उनकी वापसी का प्रस्ताव पहले एडीए बोर्ड की बैठक में पास करे। इसके बाद उसे शासन को भेजा जाए।
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| आगरा में इनर रिंग रोड की जमीन वापसी के लिए किसान आज चौदहवें भी दिन भूख हड़ताल पर हैं। कुछ किसानों की तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उनकी तबीयत बार-बार बिगड़ रही है। किसानों ने कुछ भी खाने से मना कर दिया है। किसानों अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। विकास प्राधिकरण ने इनर रिंग रोड थर्ड फेस के लिए पाँच गांवों के किसान की जमीन अधिग्रहीत की थी। साल दो हज़ार सत्रह में इनर रिंग रोड थर्ड फेस का ले आउट बदल गया। इसके बाद से ही किसान जमीन वापसी की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि उनको जमीन का मुआवजा भी नहीं मिला है। बिना मुआवजा दिए एडीए ने खाते-खतौनी से किसानों ने नाम कटवाकर जमीन अपने नाम करा ली है। नियम के मुताबिक, अधिग्रहीत जमीन का पाँच साल में उपयोग न होने या फिर कब्जा न लेने वापस लिए जाने का प्रावधान है। एडीए नियमों की अनदेखी कर किसानों की जमीन को पूंजीपतियों को देना चाहता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि वह मर जाएंगे, मगर अपनी जमीन नहीं छोडेंगे। सदर तहसील परिसर में भूख हड़ताल के दौरान शुक्रवार को किसान नेता श्याम सिंह चाहर समेत रघुनाथ शर्मा, वेद प्रकाश, श्रीभगवान शर्मा, मेहंद्र सिंह चाहर, प्रमोद जैन आदि किसानों की तबियत बिगड़ गई थी। सेहत खराब होने पर किसानों को प्रशासन ने जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। पिछले तीन दिन किसानों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिला हॉस्पिटल में आज सुबह से किसानों की तबीयत बार-बार बिगड़ रही है। किसान नेता श्याम सिंह चाहर की पल्स बार-बार गिर रही है। जिला अस्पताल में किसानों का इलाज कर रहे चिकित्सक इस बात से परेशान हैं कि किसान कुछ खाने-पीने को तैयार रहीं हैं। किसानों की मांग है कि उनकी वापसी का प्रस्ताव पहले एडीए बोर्ड की बैठक में पास करे। इसके बाद उसे शासन को भेजा जाए। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
OnePlus 8 सीरीज़ को 14 अप्रैल को भारत में पेश किया जा चुका है लेकिन OnePlus 8 Lite (OnePlus Z) से पर्दा उठना बाकी है। कहा जा रहा है कि फोन के लॉन्च को कोरोनावायरस के लिए हुए लॉकडाउन के कारण आगे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, OnePlus Z की कीमत के बारे में आई जानकारी को देखते हुए अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि फोन वास्तव में आ रहा है और इसे जुलाई में लॉन्च किया जा सकता है।
पहले लीकस्टर OnLeaks ने संकेत दिए हैं कि OnePlus Z के लॉन्च को अपकमिंग समर में पेश किया जा सकता है। इसके अलावा, लेटेस्ट इन्फॉर्मेशन से पुष्टि होती है कि जल्द ही किफ़ायती OnePlus 8 Lite या OnePlus Z देखने को मिलेगा।
OnePlus 8 और OnePlus 8 Pro को भारत में प्री-ऑर्डर के लिए Amazon पर पेश किया जा चुका है और फोन को 11 मई से ओपन सेल में लाया जाएगा। हालांकि, अगर सरकार देश भर में चल रहे लॉकडाउन को आगे नहीं बढ़ती है तो डिवाइस की सेल शुरू होने की संभावना है। मौजूदा समय में सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को नॉन-एसेंशियल प्रोडक्टस सेल करने की मंज़ूरी नहीं दी है जिसमें स्मार्टफोंस, लैपटॉप्स आदि भी शामिल हैं।
OnePlus का अपकमिंग बजट फोन 6.4 इंच की OLED फुल HD+ रेज़ोल्यूशन वाली डिस्प्ले से लैस है। ट्वीट में देखे गए पोस्टर से पता चलता है कि फोन के फ्रंट टॉप पर पंच-होल मिलेगा जिसमें 16 मेगापिक्सल के सेल्फी कैमरा को जगह दी जाएगी। स्क्रीन 90Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट कर सकती है और इसमें एक फिंगरप्रिंट रीडर को शामिल किया जा सकता है।
OnePlus Z मीडियाटेक Dimensity 1000 chip द्वारा संचालित हो सकता है और यह 5G सपोर्ट के साथ आएगा। इसके अलावा फोन में 8GB रैम और 256GB स्टोरेज मिलेगा। फोन में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलेगा जिसमें एक 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा, 16 मेगापिक्सल का दूसरा कैमरा और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेन्सर होगा।
OnePlus Z में 4,000mAh की बैटरी मिल सकती है जो Warp Charge 30 की बदौलत 30W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करेगी। इसकी कीमत CNY 2,999 हो सकती है जो लगभग Rs 32,000 बैठती है।
| OnePlus आठ सीरीज़ को चौदह अप्रैल को भारत में पेश किया जा चुका है लेकिन OnePlus आठ Lite से पर्दा उठना बाकी है। कहा जा रहा है कि फोन के लॉन्च को कोरोनावायरस के लिए हुए लॉकडाउन के कारण आगे बढ़ा दिया गया है। हालांकि, OnePlus Z की कीमत के बारे में आई जानकारी को देखते हुए अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि फोन वास्तव में आ रहा है और इसे जुलाई में लॉन्च किया जा सकता है। पहले लीकस्टर OnLeaks ने संकेत दिए हैं कि OnePlus Z के लॉन्च को अपकमिंग समर में पेश किया जा सकता है। इसके अलावा, लेटेस्ट इन्फॉर्मेशन से पुष्टि होती है कि जल्द ही किफ़ायती OnePlus आठ Lite या OnePlus Z देखने को मिलेगा। OnePlus आठ और OnePlus आठ Pro को भारत में प्री-ऑर्डर के लिए Amazon पर पेश किया जा चुका है और फोन को ग्यारह मई से ओपन सेल में लाया जाएगा। हालांकि, अगर सरकार देश भर में चल रहे लॉकडाउन को आगे नहीं बढ़ती है तो डिवाइस की सेल शुरू होने की संभावना है। मौजूदा समय में सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को नॉन-एसेंशियल प्रोडक्टस सेल करने की मंज़ूरी नहीं दी है जिसमें स्मार्टफोंस, लैपटॉप्स आदि भी शामिल हैं। OnePlus का अपकमिंग बजट फोन छः.चार इंच की OLED फुल HD+ रेज़ोल्यूशन वाली डिस्प्ले से लैस है। ट्वीट में देखे गए पोस्टर से पता चलता है कि फोन के फ्रंट टॉप पर पंच-होल मिलेगा जिसमें सोलह मेगापिक्सल के सेल्फी कैमरा को जगह दी जाएगी। स्क्रीन नब्बे हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट सपोर्ट कर सकती है और इसमें एक फिंगरप्रिंट रीडर को शामिल किया जा सकता है। OnePlus Z मीडियाटेक Dimensity एक हज़ार chip द्वारा संचालित हो सकता है और यह पाँचG सपोर्ट के साथ आएगा। इसके अलावा फोन में आठGB रैम और दो सौ छप्पनGB स्टोरेज मिलेगा। फोन में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलेगा जिसमें एक अड़तालीस मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा, सोलह मेगापिक्सल का दूसरा कैमरा और दो मेगापिक्सल का डेप्थ सेन्सर होगा। OnePlus Z में चार,शून्यmAh की बैटरी मिल सकती है जो Warp Charge तीस की बदौलत तीस वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करेगी। इसकी कीमत CNY दो,नौ सौ निन्यानवे हो सकती है जो लगभग बत्तीस रुपया,शून्य बैठती है। |
गुरुग्राम हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने गुरुग्राम के संपदा-2 के सेक्टर 47 में नीलामी के जरिए लगभग 10 एकड़ जमीन की प्रॉपर्टी को 842 करोड रुपए में बेच दिया है। यह प्राधिकरण की अब तक की सबसे बड़ी नीलामी थी।
हुडा के प्रवक्ता ने बताया कि इस साइट को इस साल 6 अक्टूबर को ई-नीलामी के लिए रखा गया था और 31 अक्तूबर को बोली लगाई गई थी। साइट को आईकेईए, जो एक अंतरराष्टीय ग्रुप है, को सफलतापूर्वक नीलाम किया गया, जिनका मुख्यालय नीदरलैंड में है। यह कंपनी दुनिया में सबसे बडी फर्निचर रिटेलर मानी जाती है और यह तैयार फर्निचर, रसोई के उपकरण और घरेलू सहायक उपकरण को बेचती है। इस ई-नीलामी न केवल हुडा विभाग की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि हरियाणा के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी ई-नीलामी भी है।
हुडा के मुख्य प्रशासक जे. गणेशन के अनुसार यह हुडा के लिए स्थिर रेवेन्यू प्रवाह को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। यह कोई एक करार नहीं है, क्योंकि हमने अगले कुछ महीनों में शहर में अन्य संस्थागत और कमर्शल संपत्तियों की नीलामी की योजना भी बनाई है। मुख्य रूप से रियल एस्टेट में तेजी से बदलते निवेश के परिदृश्य के कारण गुरुग्राम में कम मांग हुई विषेषकर वाणिज्यिक खंड में। जे. गणेशन के अनुसार, हालांकि, हमें अधिक संपत्ति बेचने और गुरुग्राम के संपदा से हुडा के लिए अच्छा राजस्व जमा करने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में आईकेईए के आने से शहर का महत्व बढ़ेगा। गुरुग्राम व्यापार और निवेश के अनुकूल गंतव्य के रूप में एक वैश्विक बाजार की स्थिति के रूप में उभरेगा। यह साइट ई-नीलामी के लिए 3 बार पहले भी रखी गई थी लेकिन 31 अक्टूबर को इस मल्टिनैशनल कंपनी ने भाग लिया और यह सफल रहा। उन्होंने बताया कि मुख्य प्रशासक के अनुसार जब हम शहर में ऐसी और अधिक साइटों की नीलामी करने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए एक अच्छी रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इस सौदे से वह काफी आशावादी हैं जिससे व्यापार और रियल एस्टेट बाजार में तेजी आएगी।
| गुरुग्राम हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने गुरुग्राम के संपदा-दो के सेक्टर सैंतालीस में नीलामी के जरिए लगभग दस एकड़ जमीन की प्रॉपर्टी को आठ सौ बयालीस करोड रुपए में बेच दिया है। यह प्राधिकरण की अब तक की सबसे बड़ी नीलामी थी। हुडा के प्रवक्ता ने बताया कि इस साइट को इस साल छः अक्टूबर को ई-नीलामी के लिए रखा गया था और इकतीस अक्तूबर को बोली लगाई गई थी। साइट को आईकेईए, जो एक अंतरराष्टीय ग्रुप है, को सफलतापूर्वक नीलाम किया गया, जिनका मुख्यालय नीदरलैंड में है। यह कंपनी दुनिया में सबसे बडी फर्निचर रिटेलर मानी जाती है और यह तैयार फर्निचर, रसोई के उपकरण और घरेलू सहायक उपकरण को बेचती है। इस ई-नीलामी न केवल हुडा विभाग की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि हरियाणा के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी ई-नीलामी भी है। हुडा के मुख्य प्रशासक जे. गणेशन के अनुसार यह हुडा के लिए स्थिर रेवेन्यू प्रवाह को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। यह कोई एक करार नहीं है, क्योंकि हमने अगले कुछ महीनों में शहर में अन्य संस्थागत और कमर्शल संपत्तियों की नीलामी की योजना भी बनाई है। मुख्य रूप से रियल एस्टेट में तेजी से बदलते निवेश के परिदृश्य के कारण गुरुग्राम में कम मांग हुई विषेषकर वाणिज्यिक खंड में। जे. गणेशन के अनुसार, हालांकि, हमें अधिक संपत्ति बेचने और गुरुग्राम के संपदा से हुडा के लिए अच्छा राजस्व जमा करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में आईकेईए के आने से शहर का महत्व बढ़ेगा। गुरुग्राम व्यापार और निवेश के अनुकूल गंतव्य के रूप में एक वैश्विक बाजार की स्थिति के रूप में उभरेगा। यह साइट ई-नीलामी के लिए तीन बार पहले भी रखी गई थी लेकिन इकतीस अक्टूबर को इस मल्टिनैशनल कंपनी ने भाग लिया और यह सफल रहा। उन्होंने बताया कि मुख्य प्रशासक के अनुसार जब हम शहर में ऐसी और अधिक साइटों की नीलामी करने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए एक अच्छी रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इस सौदे से वह काफी आशावादी हैं जिससे व्यापार और रियल एस्टेट बाजार में तेजी आएगी। |
पन्ना, नईदुनिया प्रतिनिधि। श्री पांच पद्मावतीपुरी धाम पन्ना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में सोमवार की शाम सद्गुरु के सम्मान का प्रतीक कही जाने वाली श्री प्राणनाथ जी की दिव्य शोभायात्रा श्री खेजड़ा मंदिर से भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर उत्साह व धूमधाम के साथ सोमवार को शाम पांच बजे से निकाली गई। इस ऐतिहासिक सवारी रथ में श्रीजी की मनमोहक सेवा शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। जिसकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु बेताब दिखे। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण अन्य राज्यों से श्रृद्धालु पन्ना कम संख्या में आ सके। इसके अलावा सीमित संख्या में स्थानीय श्रृद्धालु शासन द्वारा जारी कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए सवारी निकाली गई।
नगर के प्रमुख मार्गों से निकली श्रीजी की सवारी : प्रणामी सम्प्रदाय के आस्था का केंद्र अति प्राचीन खेजड़ा मंदिर से सोमवार शाम पांच बजे से अखंड मुक्तिदाता, निष्कलंक बुद्ध अवतार महामति प्राणनाथ जी की सवारी जब निकली तो ऐसा लगा मानो सभी संत मनीषी विविध रूप धारण कर इस सवारी की शोभा बढ़ा रहे हों। दिव्य रथ पर सवार श्री जी तथा धर्मगुरु इस भव्य सवारी की धर्म निष्ठता व भक्तिभाव के साथ 400 वर्षों से सतत आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने। श्री जी की इस दिव्य सवारी में नगर के निवासियों ने तहे दिल से स्वागत किया। वहीं प्रणामी धर्म के स्थानीय अनुनायियों ने जगह-जगह श्री जी की आरती उतारकर पुण्य लाभ लिया।
सद्गुरु के सम्मान का प्रतीक है तेरस की सवारी : अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के दौरान पन्ना नगर में सैकड़ों वर्षों से लगातार श्री जी की सवारी भव्य स्वरूप के साथ निकाली जाती है। इस सवारी का आयोजन पहली बार बुंदेलखंड केशरी महाराजा छत्रसाल जी ने किया था। सद्गुरू के सम्मान का प्रतीक कही जाने वाली इस तेरस की सवारी को लेकर मान्यता है कि जब बुंदेलखंड को चारों तरफ से औरंगजेब के सरदारों ने घेर लिया था तब महामति प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल को अपनी चमत्कारी दिव्य तलवार देकर विजयश्री का आशीर्वाद दिया था और कहा था कि हे राजन जब तक तुम अपने दुश्मनों को धूल चटाकर नहीं आ जाते तब तक में इसी खेजड़ा मंदिर में ही रुकूंगा। तेरस को जब महाराजा छत्रसाल अपने दुश्मनों पर फतह हासिल कर लौटे तो अपने सद्गुरु महामति प्राणनाथ जी को पालकी में बैठाकर अपने कंघों का सहारा देकर श्री प्राणनाथ जी मंदिर में स्थित गुम्मट बंगला जिसे ब्रम्ह चबूतरा भी कहते हैं में लाए थे। जिसके प्रतीक स्वरूप तभी से यह आयोजन हर वर्ष किया जाता है। श्री खेजड़ा जी मंदिर से निकली श्री जी की सवारी को श्री प्राणनाथ जी मंदिर की कुल तीन किलोमीटर तक की यात्रा में सात से आठ घंटे का समय लग जाता है।
श्री जी की आरती और फूलों की वर्षा कर किया स्वागत : धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व की इस शोभायात्रा में पन्ना नगर वासियों ने भी पूरे उत्साह व भक्ति भाव के साथ बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। रथ में सवार श्री जी की एक झलक निहारने के लिए लोग घंटों सड़क के किनारे खड़े रहे। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह श्री जी की आरती उतारी व फूलों की बारिश कर स्वागत किया गया साथ ही शोभा यात्रा में सम्मिलित सुन्दरसाथ को मिठाइयां बांटी गईं।
| पन्ना, नईदुनिया प्रतिनिधि। श्री पांच पद्मावतीपुरी धाम पन्ना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में सोमवार की शाम सद्गुरु के सम्मान का प्रतीक कही जाने वाली श्री प्राणनाथ जी की दिव्य शोभायात्रा श्री खेजड़ा मंदिर से भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर उत्साह व धूमधाम के साथ सोमवार को शाम पांच बजे से निकाली गई। इस ऐतिहासिक सवारी रथ में श्रीजी की मनमोहक सेवा शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। जिसकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु बेताब दिखे। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण अन्य राज्यों से श्रृद्धालु पन्ना कम संख्या में आ सके। इसके अलावा सीमित संख्या में स्थानीय श्रृद्धालु शासन द्वारा जारी कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए सवारी निकाली गई। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली श्रीजी की सवारी : प्रणामी सम्प्रदाय के आस्था का केंद्र अति प्राचीन खेजड़ा मंदिर से सोमवार शाम पांच बजे से अखंड मुक्तिदाता, निष्कलंक बुद्ध अवतार महामति प्राणनाथ जी की सवारी जब निकली तो ऐसा लगा मानो सभी संत मनीषी विविध रूप धारण कर इस सवारी की शोभा बढ़ा रहे हों। दिव्य रथ पर सवार श्री जी तथा धर्मगुरु इस भव्य सवारी की धर्म निष्ठता व भक्तिभाव के साथ चार सौ वर्षों से सतत आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने। श्री जी की इस दिव्य सवारी में नगर के निवासियों ने तहे दिल से स्वागत किया। वहीं प्रणामी धर्म के स्थानीय अनुनायियों ने जगह-जगह श्री जी की आरती उतारकर पुण्य लाभ लिया। सद्गुरु के सम्मान का प्रतीक है तेरस की सवारी : अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के दौरान पन्ना नगर में सैकड़ों वर्षों से लगातार श्री जी की सवारी भव्य स्वरूप के साथ निकाली जाती है। इस सवारी का आयोजन पहली बार बुंदेलखंड केशरी महाराजा छत्रसाल जी ने किया था। सद्गुरू के सम्मान का प्रतीक कही जाने वाली इस तेरस की सवारी को लेकर मान्यता है कि जब बुंदेलखंड को चारों तरफ से औरंगजेब के सरदारों ने घेर लिया था तब महामति प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल को अपनी चमत्कारी दिव्य तलवार देकर विजयश्री का आशीर्वाद दिया था और कहा था कि हे राजन जब तक तुम अपने दुश्मनों को धूल चटाकर नहीं आ जाते तब तक में इसी खेजड़ा मंदिर में ही रुकूंगा। तेरस को जब महाराजा छत्रसाल अपने दुश्मनों पर फतह हासिल कर लौटे तो अपने सद्गुरु महामति प्राणनाथ जी को पालकी में बैठाकर अपने कंघों का सहारा देकर श्री प्राणनाथ जी मंदिर में स्थित गुम्मट बंगला जिसे ब्रम्ह चबूतरा भी कहते हैं में लाए थे। जिसके प्रतीक स्वरूप तभी से यह आयोजन हर वर्ष किया जाता है। श्री खेजड़ा जी मंदिर से निकली श्री जी की सवारी को श्री प्राणनाथ जी मंदिर की कुल तीन किलोमीटर तक की यात्रा में सात से आठ घंटे का समय लग जाता है। श्री जी की आरती और फूलों की वर्षा कर किया स्वागत : धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व की इस शोभायात्रा में पन्ना नगर वासियों ने भी पूरे उत्साह व भक्ति भाव के साथ बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। रथ में सवार श्री जी की एक झलक निहारने के लिए लोग घंटों सड़क के किनारे खड़े रहे। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह श्री जी की आरती उतारी व फूलों की बारिश कर स्वागत किया गया साथ ही शोभा यात्रा में सम्मिलित सुन्दरसाथ को मिठाइयां बांटी गईं। |
आजादी के बाद ऐसा प्रथम बार हुआ है जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार का एक भी सदस्य नहीं है। इससे पूर्व प्रथम संप्रग सरकार में बिहार के आठ सांसद मंत्री थे। वे थेöसर्वश्री लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान, रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रेमचन्द गुप्ता, शकील अहमद, अखिलेश प्रसाद, श्रीमती कांति सिंह और तसलीमुद्दीन अंग्रेजीकाल में जब प्रथम बार केंद्र में पं. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में आंतरिक सरकार बनी थी तब भी बिहार के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और जगजीवन राम मंत्री बने थे। बाद में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने। इस देश में जगजीवन राम एकमात्र ऐसे नेता हैं जो 34 वर्ष तक लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे हैं। आजादी के बाद 1975 के आपातकाल तक जो प्रमुख नेता, समय-समय पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य बने उनमें जगजीवन राम, सत्यनारायण सिंह, केदार पाण्डेय, ललित नारायण मिश्रा, रामसुभग सिंह, अनन्त प्रसाद शर्मा, अब्दुल गफूर, श्रीमती तारकेश्वरी सिन्हा, धर्मवीर, आदि प्रमुख थे। बिहार के नेताओं का रेल मंत्रालय सबसे प्रिय विभाग रहा है। भारतीय रेल के विगत 60 वर्षों में 30 वर्ष बिहार के नेता रेल मंत्री रहे हैं। सन् 1956 में एक रेल दुर्घटना में तत्कालीन रेल मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्राr ने त्यागपत्र दे दिया था। उस समय प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने देश के अग्रगण्य नेता सासाराम से लोकसभा के लिए चुने गए नेता बाबू जगजीवन राम को रेल मंत्री बनाया था। उनके बाद में डॉ. रामसुभग सिंह, ललित नारायण मिश्रा, केदार पाण्डे. जॉर्ज फर्नांडीस, रामविलास पासवान, नीतिश कुमार और लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री बने थे। हालांकि बिहार के ही नेता श्रीमती मीरा कुमार लोकसभा की अध्यक्ष है किन्तु एक भी मंत्री नहीं होने से बिहार के नागरिक अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं। इस समय जबकि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हो रही है, बिहार के लोगों को विश्वास है कि उनका भी एक प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होगा। -उमेश प्रसाद सिंह, के-100, लक्ष्मी नगर, दिल्ली।
| आजादी के बाद ऐसा प्रथम बार हुआ है जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिहार का एक भी सदस्य नहीं है। इससे पूर्व प्रथम संप्रग सरकार में बिहार के आठ सांसद मंत्री थे। वे थेöसर्वश्री लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान, रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रेमचन्द गुप्ता, शकील अहमद, अखिलेश प्रसाद, श्रीमती कांति सिंह और तसलीमुद्दीन अंग्रेजीकाल में जब प्रथम बार केंद्र में पं. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में आंतरिक सरकार बनी थी तब भी बिहार के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और जगजीवन राम मंत्री बने थे। बाद में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने। इस देश में जगजीवन राम एकमात्र ऐसे नेता हैं जो चौंतीस वर्ष तक लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे हैं। आजादी के बाद एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के आपातकाल तक जो प्रमुख नेता, समय-समय पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य बने उनमें जगजीवन राम, सत्यनारायण सिंह, केदार पाण्डेय, ललित नारायण मिश्रा, रामसुभग सिंह, अनन्त प्रसाद शर्मा, अब्दुल गफूर, श्रीमती तारकेश्वरी सिन्हा, धर्मवीर, आदि प्रमुख थे। बिहार के नेताओं का रेल मंत्रालय सबसे प्रिय विभाग रहा है। भारतीय रेल के विगत साठ वर्षों में तीस वर्ष बिहार के नेता रेल मंत्री रहे हैं। सन् एक हज़ार नौ सौ छप्पन में एक रेल दुर्घटना में तत्कालीन रेल मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्राr ने त्यागपत्र दे दिया था। उस समय प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने देश के अग्रगण्य नेता सासाराम से लोकसभा के लिए चुने गए नेता बाबू जगजीवन राम को रेल मंत्री बनाया था। उनके बाद में डॉ. रामसुभग सिंह, ललित नारायण मिश्रा, केदार पाण्डे. जॉर्ज फर्नांडीस, रामविलास पासवान, नीतिश कुमार और लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री बने थे। हालांकि बिहार के ही नेता श्रीमती मीरा कुमार लोकसभा की अध्यक्ष है किन्तु एक भी मंत्री नहीं होने से बिहार के नागरिक अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं। इस समय जबकि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हो रही है, बिहार के लोगों को विश्वास है कि उनका भी एक प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होगा। -उमेश प्रसाद सिंह, के-एक सौ, लक्ष्मी नगर, दिल्ली। |
है । बोली- "तो, इसमें डरने की क्या बात ? मेले में हिरिया की माँ ने ही लड़ाई-झगड़ा करके कानून पास करवाया है कि किसी के मवक्किल को कोई नहीं फुटकावे । जो कानून मेले में, वही गाँव में ! ...हिरिया की बीमारी का पता नहीं है अभी किसी को !"
गंगाबाई से रार करके पार नहीं पा सकती हिरिया की माँ । मेले में जाकर गंगाबाई का कलेजा और भी दो हाथ बढ़ गया है। उसके बाल फिर से काले हो रहे हैं और आजकल वह दिन-रात रंगीन साड़ी पहनती है। गंगाबाई नहीं रहती तो कोई नट्रिटन इस साल मेले में तम्बू नहीं गाड़ पाती । कितने झमेले !
सबसे पहले ही, मेले के मुस्ताजिर ठेकेदार से ठकठक । मेले से आध मील पच्छिम ही सरकारी सिपाही के साथ रास्ता रोक के हुकुम सुना दिया- "नया कानून पास हुआ है। मेले में कोई रण्डी-पतुरिया, मोजरा गानेवाली हो या तम्बुकवाली, किसी को बसने का हुकुम नहीं है । गाड़ी खोलो ! नाम लिखाओ, सिपाहीजी को पहले... ।" मेले के चारों ओर छेकी हुई रण्डियों के झुण्ड ! जिले के बड़े-बड़े कस्बे की कस्त्रिनों के होश उड़ रहे थे, देहातिनों की क्या बात ! अपनी-अपनी ऐंठ-गेंठ, गठरी-मोटरी, हाँस-मुर्गी, लटकन-फुदना, तम्बू- कनात के साथ कुछ धन खेतों के पास, कोई पक्की सड़क के पुल के नीचे तीन दिन से पड़ी हुई थीं। क्या करेंगी ? सिपाही का पहरा चारो ओर । मुजरा खेमटा गानेवालियों फारबिसगंज स्टेशन के प्लेटफार्म - पर, पड़ी-पडी आती-जाती गाडियों से उतरनेवाले यात्रियों को देखकर कहतीं इस बार; पाट का भाव तेज है न ! न जाने, खुदा को क्या मंजूर है! सभी किस्म की नटिनियों की जमात मुरझायी हुई पास के पैसे तुडाकर खाती रही।
तीसरे दिन, गंगाबाई पर परानपुर परती, पर रहनेवाली कोई देवी आकर सवार हो गयी, शायद । देहात की नट्रिटयो में भी परानपुर की नटूिटनें ! जो पहली बार मेले में तम्बू लेकर आयी हैं। बसेटी-हॉसा, होटिल - बँगला, टोल मीरगंज और खुट्टी-खरैया की खुर्राट नटिनों से कुछ मदद नहीं मॉगी गंगाबाई ने । गाड़ी से उतरकर सीधे मेले की ओर चली । तम्बू नहीं गाडने दे, मेला जाने से भी रोकेगा कोई ? वह सीधे मेले के डाकबँगले पर गयी और चौकीदार को सलाम कर बोली- "अन्दर में कौन हाकिम हैं भैया ?"
चौकीदार ने धीरे से कहा- "इशडिवो साहेब हैं ।"...इशडिवो कहते समय उसके मुँह से एक मिसकी सीटी- जैसी निकली - शी- ई !
लेकिन गंगाबाई डरी नहीं । डाकबँगले के बरामदे पर जाकर गुहार दी - "हुजूर
माय-बाप !"
डाकबँगले की कोठरी से तुरत बाहर आ गये, हाकिम ! गगाबाई ने सलाम करके कहा- "हुजूर माय-बाप ! मेले में यदि नहीं बसने देंगे तो हम खायेंगे क्या ? कौन उपाय करके पेट पालें ?" गंगाबाई पर सचमुच कोई देवी ही सवार हुई थी ! हाकिम ने झुंझलाकर सिगरेट की राख झाड़ते हुए कहा- "क्या बक-बक करती है ? दुनिया में कोई काम ही नहीं इ-इ-इसके सिवा ?"
562/ रेणु रचनावली-2 | है । बोली- "तो, इसमें डरने की क्या बात ? मेले में हिरिया की माँ ने ही लड़ाई-झगड़ा करके कानून पास करवाया है कि किसी के मवक्किल को कोई नहीं फुटकावे । जो कानून मेले में, वही गाँव में ! ...हिरिया की बीमारी का पता नहीं है अभी किसी को !" गंगाबाई से रार करके पार नहीं पा सकती हिरिया की माँ । मेले में जाकर गंगाबाई का कलेजा और भी दो हाथ बढ़ गया है। उसके बाल फिर से काले हो रहे हैं और आजकल वह दिन-रात रंगीन साड़ी पहनती है। गंगाबाई नहीं रहती तो कोई नट्रिटन इस साल मेले में तम्बू नहीं गाड़ पाती । कितने झमेले ! सबसे पहले ही, मेले के मुस्ताजिर ठेकेदार से ठकठक । मेले से आध मील पच्छिम ही सरकारी सिपाही के साथ रास्ता रोक के हुकुम सुना दिया- "नया कानून पास हुआ है। मेले में कोई रण्डी-पतुरिया, मोजरा गानेवाली हो या तम्बुकवाली, किसी को बसने का हुकुम नहीं है । गाड़ी खोलो ! नाम लिखाओ, सिपाहीजी को पहले... ।" मेले के चारों ओर छेकी हुई रण्डियों के झुण्ड ! जिले के बड़े-बड़े कस्बे की कस्त्रिनों के होश उड़ रहे थे, देहातिनों की क्या बात ! अपनी-अपनी ऐंठ-गेंठ, गठरी-मोटरी, हाँस-मुर्गी, लटकन-फुदना, तम्बू- कनात के साथ कुछ धन खेतों के पास, कोई पक्की सड़क के पुल के नीचे तीन दिन से पड़ी हुई थीं। क्या करेंगी ? सिपाही का पहरा चारो ओर । मुजरा खेमटा गानेवालियों फारबिसगंज स्टेशन के प्लेटफार्म - पर, पड़ी-पडी आती-जाती गाडियों से उतरनेवाले यात्रियों को देखकर कहतीं इस बार; पाट का भाव तेज है न ! न जाने, खुदा को क्या मंजूर है! सभी किस्म की नटिनियों की जमात मुरझायी हुई पास के पैसे तुडाकर खाती रही। तीसरे दिन, गंगाबाई पर परानपुर परती, पर रहनेवाली कोई देवी आकर सवार हो गयी, शायद । देहात की नट्रिटयो में भी परानपुर की नटूिटनें ! जो पहली बार मेले में तम्बू लेकर आयी हैं। बसेटी-हॉसा, होटिल - बँगला, टोल मीरगंज और खुट्टी-खरैया की खुर्राट नटिनों से कुछ मदद नहीं मॉगी गंगाबाई ने । गाड़ी से उतरकर सीधे मेले की ओर चली । तम्बू नहीं गाडने दे, मेला जाने से भी रोकेगा कोई ? वह सीधे मेले के डाकबँगले पर गयी और चौकीदार को सलाम कर बोली- "अन्दर में कौन हाकिम हैं भैया ?" चौकीदार ने धीरे से कहा- "इशडिवो साहेब हैं ।"...इशडिवो कहते समय उसके मुँह से एक मिसकी सीटी- जैसी निकली - शी- ई ! लेकिन गंगाबाई डरी नहीं । डाकबँगले के बरामदे पर जाकर गुहार दी - "हुजूर माय-बाप !" डाकबँगले की कोठरी से तुरत बाहर आ गये, हाकिम ! गगाबाई ने सलाम करके कहा- "हुजूर माय-बाप ! मेले में यदि नहीं बसने देंगे तो हम खायेंगे क्या ? कौन उपाय करके पेट पालें ?" गंगाबाई पर सचमुच कोई देवी ही सवार हुई थी ! हाकिम ने झुंझलाकर सिगरेट की राख झाड़ते हुए कहा- "क्या बक-बक करती है ? दुनिया में कोई काम ही नहीं इ-इ-इसके सिवा ?" पाँच सौ बासठ/ रेणु रचनावली-दो |
समय के साथ-साथ हर चीज ने आधुनिक रूप लिया है, लेकिन फिर भी कई चीजें हैं जो प्राचीन काल से आज तक भी मानव जीवन में वही महत्व रखती हैं। दुनिया के कई अलग-अलग हिस्सों से अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां विकसित हुई, जिनमें से कुछ आज भी हमारी जीवनशैली काफी महत्व रखती है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की तरह ही सोवा रिग्पा भी ऐसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसका प्रभाव आज भी कायम है। सोवा रिग्पा तिब्बत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसे भी दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में गिना जाता है, जो आज भी पूरी तरह से सक्रिय है। सोवा रिग्पा प्रमुख रूप से चार चिकित्सीय तंत्रों (rGyudbZhi) पर आधारित है। सोवा रिग्पा को आमची के नाम से भी जाना जाता है और कई वेस्टर्न देशों में इसे टिब्बटन मेडिसिन सिस्टम (tibetan medicine system) के नाम से भी जाना जाता है। यह चिकित्सा प्रणाली न सिर्फ शारीरिक रोगों का निवारण करती है, बल्कि मानसिक कई गंभीर मानसिक समस्याओं को दूर करती है। वहीं सोवा रिग्पा के बारे में यह भी मान्यताएं हैं कि इसकी मदद से कई लाइलाज बीमारियों का जड़ से इलाज किया जा सकता है। हालांकि, अभी इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं मिल पाई है और वर्तमान में भी इसकी क्षमता को साइड इफेक्ट्स की जांच करने के लिए टेस्ट किए जा रहे है।
सोवा रिग्पा को आमची (या आमचि) और तिब्बत चिकित्सा प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है। यह सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है और वर्तमान में भी इसका उपयोग भारत के तिब्बत, भूटान, चीन और भारत के कई हिस्सों में किया जाता है। सोवा रिग्पा में रोगों का इलाज आमतौर पर इसके पांच तत्वों सा (sa), चू (chu), मे (me), लंग (lung) और नम-खा (nam-kha) पर आधारित है। इस चिकित्सा प्रणाली में रोगों का इलाज उसकी नैदानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद किया जाता है और इस प्रक्रिया के दौरान रोग के कारण व प्रकार का पता लगाया जाता है और साथ परिणाम के अनुसार ही इलाज किया जाता है।
सोवा रिग्पा की जड़ें प्राचीन तिब्बत, भूटान, मंगोलिया, नेपाल और चीन व भारत के कुछ हिमालयी हिस्सों से जुड़े मिलते हैं। हालांकि, इसका जन्म कब और किस जगह पर हुआ है इस बारे में सटीक जानकारी अभी तक मिल नहीं पाई है। लेकिन कुछ जानकारों के अनुसार यह लगभग 2500 साल पुरानी सभ्यता है और 8वीं शताब्दी के आसपास इसका हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलन होने लगा था। इसके जन्म स्थान की बात करें तो, कुछ अध्ययनकर्ता मानते हैं कि इसका जन्म भारत के हिमालयी क्षेत्र में हुआ, तो कुछ इसका जन्म चीन से जुड़ा मानते हैं। वहीं कुछ अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि सोवा रिग्पा का जन्म तिब्बत में ही हुआ था। इंटरनेट पर मिली जानकारियों के अनुसार तिब्बत के युथोग योंटेन गोंपो (Yuthog Yonten Gonpo) को सोवा रिग्पा के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
सोवा रिग्पा वैसे तो अपने आप में खुद एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और यह अपने ही सिद्धातों पर काम करती है। लेकिन देखा गया है कि इसके ज्यादातर सिद्धांत और अभ्यास आयुर्वेद से मेल खाते हैं। तिब्बत में आयुर्वेद का प्रभाव सबसे पहले तीसरी शताब्दी में देखा गया था, लेकिन बौद्ध धर्म के प्रभाव को देखते हुए आयुर्वेद का ज्यादा प्रचलन सातवीं शताब्दी में हो पाया था। तिब्बत में बौद्ध धर्म के कारण भारतीय कला, संस्कृति और चिकित्सा साहित्य का प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी तक रहा।
सोवा रिग्पा प्रमुख रूप से जंग-वा-न्गा और न्गेपा-सुम के सिद्धांतों पर आधारित है। जंग-वा-न्गा को संस्कृत में पंचमहाभूत और न्गेपा-सुम को त्रिदोष के नाम से जाना जाता है। सोवा रिग्पा के सिद्धांतों के अनुसार ब्रह्मांड की सभी जीवित और निर्जीव चीजें जंग-वा-न्गा के पांच तत्वों यानी सा, चू, मे, लंग और नम-खा (Sa, Chu, Me, Lung and Nam-kha) से मिलकर बने हैं। संस्कृत में सा, चू, मे, लंग और नम-खा का मतलब पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश है। इन सिद्धांतों के आधार पर ही सोवा रिग्पा के फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी और फार्मोकोलॉजी स्थापित की जाती है। अर्थात इन सिद्धांतों के माध्यम से ही रोग की जांच, इलाज और औषधियों का चयन किया जाता है। इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के शरीर में इन पांचों तत्वों में से किसी एक का भी संतुलन खराब (कम या ज्यादा) हो गया है, तो ऐसे में बीमारी विकसित होती है।
- मारक दवा (एंटीडोट)
सोवा रिग्पा में ऐसे नुस्खे तैयार किए गए हैं, जिनकी मदद से व्यक्ति घर पर ही अपनी समस्याओं का इलाज कर सकता है। इसके कई नुस्खे विशेष रूप से ऐसी सामग्री और विधियों के देखकर तैयार किए गए हैं, जिन्हें आसानी से घर पर ही तैयार किया जा सकता है। विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों का घर पर इलाज करने के लिए सोवा रिग्पा चिकित्सा पद्धति की मदद ली जाती है। भारतीय रसोई में ऐसे लगभग सभी प्रकार की सामग्री पाई जाती है, जिनका इस्तेमाल सोवा रिग्पा में सांस संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने की दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, सोवा रिग्पा के घरेलू नुस्खों पर समय-समय पर कुछ अध्ययन भी चलते हैं, जिनमें कुछ परिणाम सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक भी पाए गए हैं।
सोवा रिग्पा भले ही विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक हो, लेकिन इसके रोग निदान की कार्य-शैली शुरुआत से ही प्रभावी रही है। सोवा रिग्पा चिकित्सा प्रणाली में रोग का पता लगाने और उसके लिए उचित इलाज का चयन करने के लिए जिन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, उनका इस्तेमाल वर्तमान में भी कई मेडिसिन सिस्टम में किया जाता है। इसमें मरीज की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करते हुए उसकी जीभ, नाड़ी और मल-मूत्र की जांच की जाती है।
सोवा रिग्पा में में रोग का उपचार भी काफी हद तक एलोपैथी की तरह रोग निदान पर निर्भर करता है। रोग के निदान के अनुसार ही इलाज डिजाइन किया जाता है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव (आदतें व परहेज), प्राकृतिक औषधीय दवाएं और थेरेपी आदि शामिल हैं। सोवा रिग्पा में इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी कई थेरेपी हैं, जिनका इस्तेमाल आज भी काफी प्रभावी है। इनमें थेरेपी में आमतौर पर कून्ये मसाज, एक्यूपंक्चर, मॉक्सिबस्चिन, कंप्रैस (सिकाई), औषधि स्नान और अन्य कई थेरेपी शामिल हैं। इसके अलावा सोवा रिग्पा में आध्यात्मिक उपचार तकनीकें भी शामिल हैं, जिनमें योगासन, मंत्र उच्चारण, श्वसन प्रक्रियाएं और ध्यान लगाना (मेडिटेशन) आदि का भी अभ्यास किया जाता है, जो शरीर का संतुलन बनाए रखने और मन व दिमाग को शांति देने का काम करती हैं।
सोवा रिग्पा के दौरान किसी बीमारी का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाले दवाएं व आहार भी इस चिकित्सा पद्धति के पांच तत्वों पर आधारित होती है। शरीर में ये तत्व न्गेपा-सुम (त्रिदोष) लुस-सुंग-दुन (सप्त धातु) और द्री-मा-सुम (त्रिमाला) के रूप में मौजूद हैं। सोवा रिग्पा में उपयोग की जाने वाली दवाएं व सिरप प्रमुख रूप से रो-दुग (शस्त-रस), नुस-पा (वीर्य), योन्तन (गुण) और ज्हू-जेस (विपाक) के रूप में होती हैं। सोवा रिग्पा का यह उपचार सिद्धांत दर्शाता है, कि चिकित्सक अपने ज्ञान और कौशल के आधार पर इन तत्वों का उपयोग करके हुए या इन्हें ध्यान में रखते हुए रोग निवारण करेगा।
सोवा रिग्पा चिकित्सा प्रणाली से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि सोवा रिग्पा पूरी तरह से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और शरीर अनुकूलित प्रक्रियाओं पर आधारित है और शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम के अनुसार सोवा रिग्पा, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी चिकित्सा पद्धतियों में कई ऐसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो रक्त के सामान्य संतुलन को बिगाड़ सकता है। हालांकि, अभी तक इस बात की भी पुष्टि नहीं की गई है, कि सोवा रिग्पा चिकित्सा लेने से स्वास्थ्य पर कौन से विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। इस चिकित्सा प्रणाली से क्या संभावित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इस बारे में अध्ययन किए जा रहे हैं।
भारत के हिमालयी क्षेत्रों से सोवा रिग्पा का इतिहास जुड़ा है। आज भी भारत में ऐसी कई जगह पाई जाती हैं, जहां पर सोवा रिग्पा की प्राचीन जड़ें मिलती हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में भारत में सोवा रिग्पा का महत्व काफी बढ़ा है। भारत के कई हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सालयों, अस्पतालों और फार्मेसियों में आधुनिक और पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए इसे अपनाया जाने लगा है। धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) और लद्दाख में सोवा रिग्पा के संस्थानों का मुख्य केंद्र हैं। दरअसल, भारत में आश्रय लेने के बाद दलाई लामा जहां उन्होंने इस तिब्बती चिकित्सा पद्धति के संस्थान की स्थापना की। धर्मशाला में तिब्बती चिकित्सा परिषद है, जो सोवा-रिग्पा के चिकित्सा अभ्यास को विनियमित करता है और इस पद्थति से जुड़ी अन्य कार्य प्रक्रियाओं को देखता है। हालांकि, भारत की तरह चीन को भी सोवा रिग्पा पर आधिकारिक रूप से अपना हक जताते हुए देखा गया है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 50 से 60 फीसद लोग आज भी अपनी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों के लिए इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली पर निर्भर हैं। कुछ सोवा रिग्पा संस्थानों से जुड़े चिकित्सकों और अभ्यायसकर्ताओं के अनुसार, यह (सोवा रिग्पा) कई स्वास्थ्य समस्याओं का जड़ से इलाज करने की क्षमता रखती है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में के अनुसार सोवा-रिग्पा की मदद से लाइलाज बीमारियों का इलाज भी किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं मिली है और इस पर अभी भी रिसर्च चल रहे हैं।
| समय के साथ-साथ हर चीज ने आधुनिक रूप लिया है, लेकिन फिर भी कई चीजें हैं जो प्राचीन काल से आज तक भी मानव जीवन में वही महत्व रखती हैं। दुनिया के कई अलग-अलग हिस्सों से अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां विकसित हुई, जिनमें से कुछ आज भी हमारी जीवनशैली काफी महत्व रखती है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की तरह ही सोवा रिग्पा भी ऐसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसका प्रभाव आज भी कायम है। सोवा रिग्पा तिब्बत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसे भी दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में गिना जाता है, जो आज भी पूरी तरह से सक्रिय है। सोवा रिग्पा प्रमुख रूप से चार चिकित्सीय तंत्रों पर आधारित है। सोवा रिग्पा को आमची के नाम से भी जाना जाता है और कई वेस्टर्न देशों में इसे टिब्बटन मेडिसिन सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है। यह चिकित्सा प्रणाली न सिर्फ शारीरिक रोगों का निवारण करती है, बल्कि मानसिक कई गंभीर मानसिक समस्याओं को दूर करती है। वहीं सोवा रिग्पा के बारे में यह भी मान्यताएं हैं कि इसकी मदद से कई लाइलाज बीमारियों का जड़ से इलाज किया जा सकता है। हालांकि, अभी इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं मिल पाई है और वर्तमान में भी इसकी क्षमता को साइड इफेक्ट्स की जांच करने के लिए टेस्ट किए जा रहे है। सोवा रिग्पा को आमची और तिब्बत चिकित्सा प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है। यह सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है और वर्तमान में भी इसका उपयोग भारत के तिब्बत, भूटान, चीन और भारत के कई हिस्सों में किया जाता है। सोवा रिग्पा में रोगों का इलाज आमतौर पर इसके पांच तत्वों सा , चू , मे , लंग और नम-खा पर आधारित है। इस चिकित्सा प्रणाली में रोगों का इलाज उसकी नैदानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद किया जाता है और इस प्रक्रिया के दौरान रोग के कारण व प्रकार का पता लगाया जाता है और साथ परिणाम के अनुसार ही इलाज किया जाता है। सोवा रिग्पा की जड़ें प्राचीन तिब्बत, भूटान, मंगोलिया, नेपाल और चीन व भारत के कुछ हिमालयी हिस्सों से जुड़े मिलते हैं। हालांकि, इसका जन्म कब और किस जगह पर हुआ है इस बारे में सटीक जानकारी अभी तक मिल नहीं पाई है। लेकिन कुछ जानकारों के अनुसार यह लगभग दो हज़ार पाँच सौ साल पुरानी सभ्यता है और आठवीं शताब्दी के आसपास इसका हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलन होने लगा था। इसके जन्म स्थान की बात करें तो, कुछ अध्ययनकर्ता मानते हैं कि इसका जन्म भारत के हिमालयी क्षेत्र में हुआ, तो कुछ इसका जन्म चीन से जुड़ा मानते हैं। वहीं कुछ अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि सोवा रिग्पा का जन्म तिब्बत में ही हुआ था। इंटरनेट पर मिली जानकारियों के अनुसार तिब्बत के युथोग योंटेन गोंपो को सोवा रिग्पा के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। सोवा रिग्पा वैसे तो अपने आप में खुद एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और यह अपने ही सिद्धातों पर काम करती है। लेकिन देखा गया है कि इसके ज्यादातर सिद्धांत और अभ्यास आयुर्वेद से मेल खाते हैं। तिब्बत में आयुर्वेद का प्रभाव सबसे पहले तीसरी शताब्दी में देखा गया था, लेकिन बौद्ध धर्म के प्रभाव को देखते हुए आयुर्वेद का ज्यादा प्रचलन सातवीं शताब्दी में हो पाया था। तिब्बत में बौद्ध धर्म के कारण भारतीय कला, संस्कृति और चिकित्सा साहित्य का प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी तक रहा। सोवा रिग्पा प्रमुख रूप से जंग-वा-न्गा और न्गेपा-सुम के सिद्धांतों पर आधारित है। जंग-वा-न्गा को संस्कृत में पंचमहाभूत और न्गेपा-सुम को त्रिदोष के नाम से जाना जाता है। सोवा रिग्पा के सिद्धांतों के अनुसार ब्रह्मांड की सभी जीवित और निर्जीव चीजें जंग-वा-न्गा के पांच तत्वों यानी सा, चू, मे, लंग और नम-खा से मिलकर बने हैं। संस्कृत में सा, चू, मे, लंग और नम-खा का मतलब पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश है। इन सिद्धांतों के आधार पर ही सोवा रिग्पा के फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी और फार्मोकोलॉजी स्थापित की जाती है। अर्थात इन सिद्धांतों के माध्यम से ही रोग की जांच, इलाज और औषधियों का चयन किया जाता है। इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के शरीर में इन पांचों तत्वों में से किसी एक का भी संतुलन खराब हो गया है, तो ऐसे में बीमारी विकसित होती है। - मारक दवा सोवा रिग्पा में ऐसे नुस्खे तैयार किए गए हैं, जिनकी मदद से व्यक्ति घर पर ही अपनी समस्याओं का इलाज कर सकता है। इसके कई नुस्खे विशेष रूप से ऐसी सामग्री और विधियों के देखकर तैयार किए गए हैं, जिन्हें आसानी से घर पर ही तैयार किया जा सकता है। विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों का घर पर इलाज करने के लिए सोवा रिग्पा चिकित्सा पद्धति की मदद ली जाती है। भारतीय रसोई में ऐसे लगभग सभी प्रकार की सामग्री पाई जाती है, जिनका इस्तेमाल सोवा रिग्पा में सांस संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने की दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, सोवा रिग्पा के घरेलू नुस्खों पर समय-समय पर कुछ अध्ययन भी चलते हैं, जिनमें कुछ परिणाम सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक भी पाए गए हैं। सोवा रिग्पा भले ही विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में से एक हो, लेकिन इसके रोग निदान की कार्य-शैली शुरुआत से ही प्रभावी रही है। सोवा रिग्पा चिकित्सा प्रणाली में रोग का पता लगाने और उसके लिए उचित इलाज का चयन करने के लिए जिन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, उनका इस्तेमाल वर्तमान में भी कई मेडिसिन सिस्टम में किया जाता है। इसमें मरीज की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करते हुए उसकी जीभ, नाड़ी और मल-मूत्र की जांच की जाती है। सोवा रिग्पा में में रोग का उपचार भी काफी हद तक एलोपैथी की तरह रोग निदान पर निर्भर करता है। रोग के निदान के अनुसार ही इलाज डिजाइन किया जाता है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव , प्राकृतिक औषधीय दवाएं और थेरेपी आदि शामिल हैं। सोवा रिग्पा में इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी कई थेरेपी हैं, जिनका इस्तेमाल आज भी काफी प्रभावी है। इनमें थेरेपी में आमतौर पर कून्ये मसाज, एक्यूपंक्चर, मॉक्सिबस्चिन, कंप्रैस , औषधि स्नान और अन्य कई थेरेपी शामिल हैं। इसके अलावा सोवा रिग्पा में आध्यात्मिक उपचार तकनीकें भी शामिल हैं, जिनमें योगासन, मंत्र उच्चारण, श्वसन प्रक्रियाएं और ध्यान लगाना आदि का भी अभ्यास किया जाता है, जो शरीर का संतुलन बनाए रखने और मन व दिमाग को शांति देने का काम करती हैं। सोवा रिग्पा के दौरान किसी बीमारी का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाले दवाएं व आहार भी इस चिकित्सा पद्धति के पांच तत्वों पर आधारित होती है। शरीर में ये तत्व न्गेपा-सुम लुस-सुंग-दुन और द्री-मा-सुम के रूप में मौजूद हैं। सोवा रिग्पा में उपयोग की जाने वाली दवाएं व सिरप प्रमुख रूप से रो-दुग , नुस-पा , योन्तन और ज्हू-जेस के रूप में होती हैं। सोवा रिग्पा का यह उपचार सिद्धांत दर्शाता है, कि चिकित्सक अपने ज्ञान और कौशल के आधार पर इन तत्वों का उपयोग करके हुए या इन्हें ध्यान में रखते हुए रोग निवारण करेगा। सोवा रिग्पा चिकित्सा प्रणाली से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि सोवा रिग्पा पूरी तरह से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और शरीर अनुकूलित प्रक्रियाओं पर आधारित है और शरीर पर इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम के अनुसार सोवा रिग्पा, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी चिकित्सा पद्धतियों में कई ऐसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो रक्त के सामान्य संतुलन को बिगाड़ सकता है। हालांकि, अभी तक इस बात की भी पुष्टि नहीं की गई है, कि सोवा रिग्पा चिकित्सा लेने से स्वास्थ्य पर कौन से विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। इस चिकित्सा प्रणाली से क्या संभावित साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इस बारे में अध्ययन किए जा रहे हैं। भारत के हिमालयी क्षेत्रों से सोवा रिग्पा का इतिहास जुड़ा है। आज भी भारत में ऐसी कई जगह पाई जाती हैं, जहां पर सोवा रिग्पा की प्राचीन जड़ें मिलती हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में भारत में सोवा रिग्पा का महत्व काफी बढ़ा है। भारत के कई हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सालयों, अस्पतालों और फार्मेसियों में आधुनिक और पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए इसे अपनाया जाने लगा है। धर्मशाला और लद्दाख में सोवा रिग्पा के संस्थानों का मुख्य केंद्र हैं। दरअसल, भारत में आश्रय लेने के बाद दलाई लामा जहां उन्होंने इस तिब्बती चिकित्सा पद्धति के संस्थान की स्थापना की। धर्मशाला में तिब्बती चिकित्सा परिषद है, जो सोवा-रिग्पा के चिकित्सा अभ्यास को विनियमित करता है और इस पद्थति से जुड़ी अन्य कार्य प्रक्रियाओं को देखता है। हालांकि, भारत की तरह चीन को भी सोवा रिग्पा पर आधिकारिक रूप से अपना हक जताते हुए देखा गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग पचास से साठ फीसद लोग आज भी अपनी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों के लिए इस प्राचीन चिकित्सा प्रणाली पर निर्भर हैं। कुछ सोवा रिग्पा संस्थानों से जुड़े चिकित्सकों और अभ्यायसकर्ताओं के अनुसार, यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का जड़ से इलाज करने की क्षमता रखती है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में के अनुसार सोवा-रिग्पा की मदद से लाइलाज बीमारियों का इलाज भी किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं मिली है और इस पर अभी भी रिसर्च चल रहे हैं। |
"कोई नहीं । "
" तो आपरेशन करवा देना चाहिए।"
"अवश्य और जल्दी । साधारण विलम्ब भी हानि पहुँचा सकता है। "
लाला अमरनाथ ने पूछा- आपरेशन किससे करवाना
अस्पताल सबसे अच्छा
करुण-दृष्टि से देखकर
कवि तनकर खड़ा हो गया। मानों उसको साहस ने पैरों तले कुचल डाला। इस समय उसके मुख पर निर्भयता के चिह्न थे। साहस से बोला-साधारण बात है। अब रेशकोई खा काम तो नहीं रहा। प्रति दिन होते रहते हैं ।
वह दूसरे दिन आपरेशन रूम में मेज़ पर लेटा हुआ था ।
उचित होगा ?
"मेरे विचार में सरकारी
स्थान है ।"
लाला अमरनाथ ने कवि की कहा - तो करवा लो ।
एकाएक सर्जन साहब घबराये हुए बाहर निकले । अमरनाथ का कलेजा धड़कने लगा। उन्होंने आगे बढ़कर पूछा - साहब ! आपरेशन हो गया ?
सर्जन के मस्तक पर पसीने की बूँदें टपक रही थीं, "टुम उसका कौन होटा है ?"
" मैं उसका मित्र हूँ । उसका क्या हाल है ?" "हार्ट फेल हो गया । "
अमरनाथ पर जैसे बिजली गिर पड़ी। चिल्लाकर बोलेक्या कहा आपने ?
"मैन ! उसका हार्ट फेल हो गया। दिल का धड़कना
रुक गया ।"
" तो वह मर गया ?"
"यस ! हमको यह होप न था । "
कवि की स्त्री सुशीला अमरनाथ से कुछ दूर खड़ी थी । यह सुनकर पास आ गई, और रोती हुई बोली- भाई मुझे - धोखे में न रक्खा । जो बात हो साफ़-साफ़ कह दो ।
अमरनाथ को कवि से हार्दिक प्रेम था । इस प्रकार चाहते थे, जैसे भाई भाई को चाहता है। इतना ही नहीं, उन्हें उससे बड़ी-बड़ी आशाएँ थीं । सोचा करते थे, यह भारतवर्ष का नाम निकालेगा। इसकी कविता टागोर रातोल फ्रान्स के समान है। वे जब उसकी "चन्द्रलोक" को देखते तब मतवाले हो जाते थे 1 इस समय सर्जन के शब्दों ने उनके कलेजे पर रख दिये । उनको एकाएक विश्वास न आया कि कवि सचमुच मर गया । उन्होंने रेत की दीवार खड़ी की। उसकी स्त्री के प्रश्न | "कोई नहीं । " " तो आपरेशन करवा देना चाहिए।" "अवश्य और जल्दी । साधारण विलम्ब भी हानि पहुँचा सकता है। " लाला अमरनाथ ने पूछा- आपरेशन किससे करवाना अस्पताल सबसे अच्छा करुण-दृष्टि से देखकर कवि तनकर खड़ा हो गया। मानों उसको साहस ने पैरों तले कुचल डाला। इस समय उसके मुख पर निर्भयता के चिह्न थे। साहस से बोला-साधारण बात है। अब रेशकोई खा काम तो नहीं रहा। प्रति दिन होते रहते हैं । वह दूसरे दिन आपरेशन रूम में मेज़ पर लेटा हुआ था । उचित होगा ? "मेरे विचार में सरकारी स्थान है ।" लाला अमरनाथ ने कवि की कहा - तो करवा लो । एकाएक सर्जन साहब घबराये हुए बाहर निकले । अमरनाथ का कलेजा धड़कने लगा। उन्होंने आगे बढ़कर पूछा - साहब ! आपरेशन हो गया ? सर्जन के मस्तक पर पसीने की बूँदें टपक रही थीं, "टुम उसका कौन होटा है ?" " मैं उसका मित्र हूँ । उसका क्या हाल है ?" "हार्ट फेल हो गया । " अमरनाथ पर जैसे बिजली गिर पड़ी। चिल्लाकर बोलेक्या कहा आपने ? "मैन ! उसका हार्ट फेल हो गया। दिल का धड़कना रुक गया ।" " तो वह मर गया ?" "यस ! हमको यह होप न था । " कवि की स्त्री सुशीला अमरनाथ से कुछ दूर खड़ी थी । यह सुनकर पास आ गई, और रोती हुई बोली- भाई मुझे - धोखे में न रक्खा । जो बात हो साफ़-साफ़ कह दो । अमरनाथ को कवि से हार्दिक प्रेम था । इस प्रकार चाहते थे, जैसे भाई भाई को चाहता है। इतना ही नहीं, उन्हें उससे बड़ी-बड़ी आशाएँ थीं । सोचा करते थे, यह भारतवर्ष का नाम निकालेगा। इसकी कविता टागोर रातोल फ्रान्स के समान है। वे जब उसकी "चन्द्रलोक" को देखते तब मतवाले हो जाते थे एक इस समय सर्जन के शब्दों ने उनके कलेजे पर रख दिये । उनको एकाएक विश्वास न आया कि कवि सचमुच मर गया । उन्होंने रेत की दीवार खड़ी की। उसकी स्त्री के प्रश्न |
तारिकाएँ जो शाति की वर्षा-सी कर रही हैं, तुम्हारी पुतलियों में समाई हुई शाति का परिचय दे रही है ।
वि० --- यद्यपि यहाँ स्पष्ट नाम नहीं लिखा, पर वर्णन से ही स्पष्ट है कि भगवान शिव को सम्बोधन करके कहा जा रहा है।
अखिल विश्व का - अखिल - - समस्त । विप - पाप और ताप का हलाहल । मर - शाश्वत, चिरतन, सदा रहने वाली ।
अर्थ - तुम्हारे सम्बन्ध में जो यह प्रसिद्ध हे कि तुम विषपान करते हो, वह वास्तव में ससार भर की पीड़ा का विष है। सृष्टि इस पीड़ा और पाप के कारण जीवित नहीं रह सकती थी, पर उन्हें तुमने अगीकार कर लिया है, इसी से वह नवीन रूप से जी उठी है । पर मै यह पूछना चाहती हूँ कि यह शाश्वत शान्ति तुम किस दिशा से प्राप्त करते हो ?
वि० - विष पीने वाला तो अशान्त रहना चाहिए, पर शिव हलाहल पान करके भी शान्त हैं, यही आश्चर्य है ।
पृष्ठ १२३
अचल अनंत नील-अचल - अडिग । अमकण-पसीने की बूँदें । अर्थ यह नीला आकाश समुद्र की अनन्त नीली लहरो के समूह सा प्रतीत होता है। इस पर जमाये तुम बैठे हो । हे प्रभु, तारे जिसके शरीर से भारी पसीने की बूँदो से प्रतीत होते हैं, ऐसे तुम कौन हो ?
वि० -- आकाश में शिव की मूर्ति सामान्य दृष्टि को कहीं दिखाई नहीं देतो, पर ताराओ को शरीर के श्रमकरण मान उनके वही कही भ्यानत्थ बैठे रहने काम कर लिया है ।
इन चरणो मे -- इन तुम्हारे । छायापथ-ग्राकाश गंगा । अर्थ-का-गगा में पथिकों के समान भ्रमण करने वाले
तारे जो
अनेक लोक है, क्या तुम्हारे चरणों में अपने कर्म सुमन की ग्रनलि चढ़ाने ग्रा रहे है और निरन्तर चलते-चलते थक गये हैं ? | तारिकाएँ जो शाति की वर्षा-सी कर रही हैं, तुम्हारी पुतलियों में समाई हुई शाति का परिचय दे रही है । विशून्य --- यद्यपि यहाँ स्पष्ट नाम नहीं लिखा, पर वर्णन से ही स्पष्ट है कि भगवान शिव को सम्बोधन करके कहा जा रहा है। अखिल विश्व का - अखिल - - समस्त । विप - पाप और ताप का हलाहल । मर - शाश्वत, चिरतन, सदा रहने वाली । अर्थ - तुम्हारे सम्बन्ध में जो यह प्रसिद्ध हे कि तुम विषपान करते हो, वह वास्तव में ससार भर की पीड़ा का विष है। सृष्टि इस पीड़ा और पाप के कारण जीवित नहीं रह सकती थी, पर उन्हें तुमने अगीकार कर लिया है, इसी से वह नवीन रूप से जी उठी है । पर मै यह पूछना चाहती हूँ कि यह शाश्वत शान्ति तुम किस दिशा से प्राप्त करते हो ? विशून्य - विष पीने वाला तो अशान्त रहना चाहिए, पर शिव हलाहल पान करके भी शान्त हैं, यही आश्चर्य है । पृष्ठ एक सौ तेईस अचल अनंत नील-अचल - अडिग । अमकण-पसीने की बूँदें । अर्थ यह नीला आकाश समुद्र की अनन्त नीली लहरो के समूह सा प्रतीत होता है। इस पर जमाये तुम बैठे हो । हे प्रभु, तारे जिसके शरीर से भारी पसीने की बूँदो से प्रतीत होते हैं, ऐसे तुम कौन हो ? विशून्य -- आकाश में शिव की मूर्ति सामान्य दृष्टि को कहीं दिखाई नहीं देतो, पर ताराओ को शरीर के श्रमकरण मान उनके वही कही भ्यानत्थ बैठे रहने काम कर लिया है । इन चरणो मे -- इन तुम्हारे । छायापथ-ग्राकाश गंगा । अर्थ-का-गगा में पथिकों के समान भ्रमण करने वाले तारे जो अनेक लोक है, क्या तुम्हारे चरणों में अपने कर्म सुमन की ग्रनलि चढ़ाने ग्रा रहे है और निरन्तर चलते-चलते थक गये हैं ? |
श्रावण मास, कृष्ण पक्ष।
विक्रम संवत् 2079,
शक संवत् 1944,
दक्षिणायण, उत्तर गोलः,
वर्षा ऋतु, पश्चिम कालः,
नवमी तिथि दि 12:12 तक,
उपरान्त दशमी तिथि आरम्भ।
भरणी नक्षत्र रा 08:02 तक,
उपरान्त कृतिका नक्षत्र आरम्भ।
योग धृति द 29 प 04,
करण कौलव द 18: प 09,
चंद्रमा मेष राशि में रा 02:35 तक, उपरान्त वृष राशि में।
सूर्योदय 05:17, सूर्यास्त 06:43,
दिन का राहु काल -दि 08:38 से 12:01 तक।
आज -इंद्रसवर्णीमन्वादि, अमृतयोगः दि 12: 12यावत्।
उपरोक्त मिथिला क्षेत्रीय पंचांग अनुसार संक्षिप्त विवरण।
ज्योतिष हस्तलिखित जन्मकुंडली, वास्तु, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, पूजा पाठ महा मृत्युंजय जाप एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। रहन-सहन व्यवस्थित रहेगा। धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। कारोबार में अनुकूल परिस्थितियां रहेंगी। मित्रों से भेंट होगी। दैनिक कार्यों में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
- जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। भागदौड़ अधिक रहेगी। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा की मनःस्थिति रहेगी। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। कला-संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। सुस्वादु खानपान में रुचि रहेगी। माता का सहयोग मिलेगा। बातचीत में संयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। यात्रा के योग हैं।
संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध एवं वाद-विवाद से परेशान हो सकते हैं। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी। किसी मित्र के सहयोग से आय वृद्धि हो सकती है। भाइयों से मनमुटाव हो सकता है। संचित धन में कमी आ सकती है। बातचीत में सन्तुलन बनाए रखें। वस्त्रों पर खर्च बढ़ेंगे। परिवार में आपसी मतभेद हो सकते हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। सुखद समाचार मिलेगा।
माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। परिवार का साथ मिलेगा। खर्च बढ़ेंगे। मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, परन्तु बातचीत में संयत रहें। वाणी में कठोरता का प्रभाव हो सकता है। कारोबार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय से रुके हुए काम बनेंगे। कार्यक्षेत्र में बदलाव आने के योग बन रहे हैं।
मन परेशान हो सकता है। खर्चों की अधिकता रहेगी। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। स्थान परिवर्तन भी संभव है। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता में कमी आ सकती है। जीवनसाथी से नोंकझोंक हो सकती है। पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं। भाई-बहनों का साथ मिलेगा। धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाना हो सकता है।
मन प्रसन्न रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। किसी मित्र का सहयोग मिल सकता है। लाभ के अवसर मिलेंगे। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। अफसरों का सहयोग मिलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। वस्त्र उपहार में प्राप्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र का विस्तार भी हो सकता है।
आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परन्तु मन अशान्त भी रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। खर्चों में वृद्धि होगी। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी रहेगी। कुटुम्ब-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों के सार्थक परिणाम मिलेंगे। नौकरीमीठे खानपान में रुचि भी रहेगी। मित्रों के साथ यात्रा पर जा सकते हैं।
मानसिक शान्ति रहेगी। शैक्षिक कार्यों के लिए विदेश जा सकते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी मित्र के सहयोग से आय के साधन बन सकते हैं। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव मन में रहेंगे। अनियोजित खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सुखद परिणाम मिलेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। किसी प्रॉपर्टी से आय के स्रोत विकसित होंगे।
संयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। धार्मिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। मीठे खानपान में रुचि बढ़ सकती है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। खर्च बढ़ेंगे। मन में नकारात्मकता का प्रभाव हो सकता है। धर्म के प्रति श्रद्धाभाव रहेगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जा सकते हैं। आय में कमी एवं खर्च अधिक की स्थिति हो सकती है।
नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। कार्यभार में वृद्धि होगी। परिवार से दूर किसी दूसरे स्थान पर रहना पड़ सकता है। आय में वृद्धि होगी। यात्रा खर्च बढ़ सकते है। आत्मसंयत रहें। क्रोध में वृद्धि हो सकती है। आशा-निराशा के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। कुछ पुराने मित्रों से भेंट हो सकती है। परिवार में तनाव की स्थिति हो सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।
पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में भी संयत रहें। सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। पिता का सानिध्य मिलेगा। परिश्रम अधिक रहेगा। वाणी में सौम्यता रहेगी। शैक्षिक एवं बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। जीवनसाथी को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं।
उपरोक्त कोई जरूरी नहीं कि सभी शब्द किसी एक व्यक्ति विशेष पर मिल ही जाय अतः बेहतर परिणाम जानने हेतु जन्म कुंडली का अध्यन जरूरी होता है।
| श्रावण मास, कृष्ण पक्ष। विक्रम संवत् दो हज़ार उन्यासी, शक संवत् एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस, दक्षिणायण, उत्तर गोलः, वर्षा ऋतु, पश्चिम कालः, नवमी तिथि दि बारह:बारह तक, उपरान्त दशमी तिथि आरम्भ। भरणी नक्षत्र रा आठ:दो तक, उपरान्त कृतिका नक्षत्र आरम्भ। योग धृति द उनतीस प चार, करण कौलव द अट्ठारह: प नौ, चंद्रमा मेष राशि में रा दो:पैंतीस तक, उपरान्त वृष राशि में। सूर्योदय पाँच:सत्रह, सूर्यास्त छः:तैंतालीस, दिन का राहु काल -दि आठ:अड़तीस से बारह:एक तक। आज -इंद्रसवर्णीमन्वादि, अमृतयोगः दि बारह: बारहयावत्। उपरोक्त मिथिला क्षेत्रीय पंचांग अनुसार संक्षिप्त विवरण। ज्योतिष हस्तलिखित जन्मकुंडली, वास्तु, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, पूजा पाठ महा मृत्युंजय जाप एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए संपर्क कर सकते हैं। मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। रहन-सहन व्यवस्थित रहेगा। धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। कारोबार में अनुकूल परिस्थितियां रहेंगी। मित्रों से भेंट होगी। दैनिक कार्यों में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। - जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। भागदौड़ अधिक रहेगी। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा की मनःस्थिति रहेगी। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। कला-संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। सुस्वादु खानपान में रुचि रहेगी। माता का सहयोग मिलेगा। बातचीत में संयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। यात्रा के योग हैं। संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध एवं वाद-विवाद से परेशान हो सकते हैं। परिवार में सुख-शान्ति रहेगी। किसी मित्र के सहयोग से आय वृद्धि हो सकती है। भाइयों से मनमुटाव हो सकता है। संचित धन में कमी आ सकती है। बातचीत में सन्तुलन बनाए रखें। वस्त्रों पर खर्च बढ़ेंगे। परिवार में आपसी मतभेद हो सकते हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। सुखद समाचार मिलेगा। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। परिवार का साथ मिलेगा। खर्च बढ़ेंगे। मानसिक शान्ति रहेगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, परन्तु बातचीत में संयत रहें। वाणी में कठोरता का प्रभाव हो सकता है। कारोबार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय से रुके हुए काम बनेंगे। कार्यक्षेत्र में बदलाव आने के योग बन रहे हैं। मन परेशान हो सकता है। खर्चों की अधिकता रहेगी। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। स्थान परिवर्तन भी संभव है। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता में कमी आ सकती है। जीवनसाथी से नोंकझोंक हो सकती है। पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं। भाई-बहनों का साथ मिलेगा। धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाना हो सकता है। मन प्रसन्न रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। किसी मित्र का सहयोग मिल सकता है। लाभ के अवसर मिलेंगे। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव रहेंगे। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। अफसरों का सहयोग मिलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। वस्त्र उपहार में प्राप्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र का विस्तार भी हो सकता है। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परन्तु मन अशान्त भी रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। खर्चों में वृद्धि होगी। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी रहेगी। कुटुम्ब-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों के सार्थक परिणाम मिलेंगे। नौकरीमीठे खानपान में रुचि भी रहेगी। मित्रों के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। मानसिक शान्ति रहेगी। शैक्षिक कार्यों के लिए विदेश जा सकते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। किसी मित्र के सहयोग से आय के साधन बन सकते हैं। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। क्षणे रुष्टा-क्षणे तुष्टा के भाव मन में रहेंगे। अनियोजित खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सुखद परिणाम मिलेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। किसी प्रॉपर्टी से आय के स्रोत विकसित होंगे। संयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। धार्मिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। मीठे खानपान में रुचि बढ़ सकती है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। खर्च बढ़ेंगे। मन में नकारात्मकता का प्रभाव हो सकता है। धर्म के प्रति श्रद्धाभाव रहेगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जा सकते हैं। आय में कमी एवं खर्च अधिक की स्थिति हो सकती है। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। कार्यभार में वृद्धि होगी। परिवार से दूर किसी दूसरे स्थान पर रहना पड़ सकता है। आय में वृद्धि होगी। यात्रा खर्च बढ़ सकते है। आत्मसंयत रहें। क्रोध में वृद्धि हो सकती है। आशा-निराशा के मिश्रित भाव मन में रहेंगे। कुछ पुराने मित्रों से भेंट हो सकती है। परिवार में तनाव की स्थिति हो सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में भी संयत रहें। सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। पिता का सानिध्य मिलेगा। परिश्रम अधिक रहेगा। वाणी में सौम्यता रहेगी। शैक्षिक एवं बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। जीवनसाथी को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। उपरोक्त कोई जरूरी नहीं कि सभी शब्द किसी एक व्यक्ति विशेष पर मिल ही जाय अतः बेहतर परिणाम जानने हेतु जन्म कुंडली का अध्यन जरूरी होता है। |
राम प्रकाश गुप्ता। 76 साल की उम्र में 12 नवंबर 1999 को यूपी के सीएम बनाए गए। कहीं जाते तो सेक्रेटरी उन्हें स्पीच याद दिलाते। लेकिन, मंच पर पहुंचते तो सब भूल जाते थे। वहां वही बोलते जो ज़ुबान पर आया। कैबिनेट में शामिल मंत्रियों को पहचान नहीं पाते थे। पार्टी के नेताओं को खुश रखने के लिए वह हर बात मान लेते थे। वह जिसे कहते, सीएम उनका ट्रांसफर कर देते थे।
आज यूपी के सबसे बुजुर्ग सीएम बनाए गए राम प्रकाश गुप्ता की जयंती है। वो ज्योतिष परिवार से थे। जेल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बड़ा नेता बनने की भविष्यवाणी की। अजब यह कि राजनाथ सिंह राम प्रकाश गुप्ता को ही हटाकर प्रदेश के सीएम बने। ऐसे ही अनेक रोचक कहानियां हैं। आइए शुरू से जानते हैं।
25 जून 1975 को उस वक्त की पीएम इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी। जनसंघ के नेताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। सारे बड़े नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। राम प्रकाश गुप्ता भी इसमें शामिल थे। वहां उनकी मुलाकात राजनाथ सिंह से हुई।
1976 में जेल के अंदर एक दिन राम प्रकाश गुप्ता तमाम युवा कैदियों के साथ बैठे थे। 25 साल के राजनाथ सिंह को अपने पास बुलाया। कहा, "दाहिना हाथ आगे बढ़ाओ। " राजनाथ ने बढ़ा दिया। ज्योतिष परिवार से आने वाले राम प्रकाश ने हाथों की लकीरों को ध्यान से देखा। फिर कहा, "एक दिन तुम यूपी के बहुत बड़े नेता बनोगे। " बाकी साथियों ने पूछा, "कितना बड़ा नेता? " राम प्रकाश गुप्ता ने जवाब दिया, "यूपी के सीएम से भी बड़ा। "
इस भविष्यवाणी के 24 साल बाद 28 अक्टूबर 2000 को राम प्रकाश गुप्ता की भविष्यवाणी सच हो गई। राजनाथ सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने। अजब ये कि वह राम प्रकाश को हटाकर ही इस पद पर पहुंचे।
1997 में बसपा और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई। 6-6 महीने सीएम पद का फॉर्मूला अपनाया गया। 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक सीएम रहीं। इसके बाद कल्याण सिंह सीएम बने तो अपने पद से 2 साल 52 दिन तक हटे ही नहीं। सरकार न गिरे इसके लिए 93 विधायकों को मंत्री बना दिया। मतलब प्रदेश का हर चौथा विधायक मंत्री।
1998 में कल्याण सरकार के सहयोगी दल लोकतांत्रिक कांग्रेस के नेता जगदम्बिका पाल उस वक्त के राज्यपाल रोमेश भंडारी के पास पहुंचे और कहा, "मेरे पास बहुमत है। " रोमेश भंडारी को पता नहीं क्या सूझा उन्होंने कल्याण सिंह से बिना बात किए सरकार बर्खास्त कर दी। कल्याण सिंह हाईकोर्ट पहुंचे और स्टे ले लिया। अगले दिन दफ्तर पहुंचे तो जगदम्बिका पाल उनकी कुर्सी पर बतौर सीएम बैठे मिले। कोर्ट का आदेश दिखाया तो जगदम्बिका पाल कुर्सी छोड़कर चले गए।
1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी से 57 सीटें मिली। 1999 में मात्र 29 सीट। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम कल्याण सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत के बिगुल फूंक दिए। इसके बावजूद 10 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। एक महीने बाद 12 नवंबर को कल्याण सिंह की छुट्टी कर दी गई। सीएम पद के लिए नए नाम को लेकर बैठक शुरू हो गई।
वाजपेयी चाहते थे राजनाथ सिंह बनें। मुरली मनोहर जोशी किसी ब्राह्मण को सीएम बनाना चाहते थे। कल्याण सिंह के लिए झंडा बुलंद करने वाले लालजी टंडन और कलराज मिश्रा भी दावेदार थे। लेकिन, सबका नाम खारिज कर दिया गया और मुहर लगी राजनीति से रिटायर हो चुके 76 साल के राम प्रकाश गुप्ता के नाम पर। गुप्ता को दिल्ली बुलाने का फरमान जारी हुआ। लेकिन, किसी को पता ही नहीं कि वह लखनऊ में रहते कहां हैं।
लखनऊ पुलिस 2 घंटे तक लखनऊ में उनका घर खोजती रही। तब जाकर उनका दो कमरों का घर मिला। अगले दिन दिल्ली पहुंचे तो किसी पत्रकार ने पहचाना ही नहीं। बीजेपी अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे देखा तो उनके पास पहुंचे और ऐलान किया कि ये राम प्रकाश गुप्ता हैं, यूपी के नए मुख्यमंत्री। इस तरह करीब 10 साल से सक्रिय राजनीति से दूर रहे राम प्रकाश 12 नवबंर को मुख्यमंत्री बना दिए गए।
राम प्रकाश गुप्ता पार्टी के किसी नेता को नाराज नहीं करना चाहते थे। इसलिए जब भी किसी अधिकारी के ट्रांसफर की मांग होती वह हामी भर देते थे। नवंबर 1999 से फरवरी 2000 के बीच 350 से अधिक अफसरों का ट्रांसफर कर दिया। उन्नाव जिले में 40 दिन के अंदर 5 कलेक्टरों का ट्रांसफर किया गया। श्रावस्ती के डीएम बिहारी लाल को 30 दिन के अंदर 6 ट्रांसफर लेटर थमाया गया।
राम प्रकाश गुप्ता को उनके सेक्रेटरी स्पीच लिखकर देते थे। याद भी करवाते थे, लेकिन सीएम जैसे ही मंच पर जाते वह वही बोलते जो उनकी जुबान पर आता था। धीरे-धीरे उनकी छवि भुलक्कड़ सीएम के रूप में स्थापित हो गई। मायावती ने तो एक बार कह दिया, "बेचारे गुप्ता जी, वो हमेशा भूल जाते हैं कि उन्हें कहना क्या है, पार्टी ने अयोध्या पर नहीं बोलने को कहा है लेकिन वह साफ-साफ बोल जाते हैं। "
राम प्रकाश गुप्ता की कैबिनेट में 100 से अधिक मंत्री थे। इन्हीं में से एक प्रेम प्रकाश सिंह ने तो साफ-साफ कह दिया, "अगर इतना भुलक्कड़ व्यक्ति सीएम बनेगा तो राज्य का कुछ नहीं हो सकता। " प्रेम प्रकाश के अलावा और भी मंत्रियों का यही मानना था। इसकी बड़ी वजह यह थी कि राम प्रकाश अपने ही मंत्रियों का नाम नहीं जानते थे। उस वक्त के अखबारों में सीएम के कार्यक्रम की कवरेज से ज्यादा उनके भुलने की आदत को कवर किया जाता था।
राम प्रकाश गुप्ता जैसे तैसे 351 दिन तक सीएम बने रहे। 28 अक्टूबर 2000 को उन्हें सीएम पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने। इस तरह से राम प्रकाश गुप्ता की 24 साल पहले वाली भविष्यवाणी सच हो गई। लेकिन खुद को हटाकर राजनाथ इस पद पर पहुंचेंगे इसका अंदेशा राम प्रकाश को तो नहीं ही रहा होगा।
2002 में राम प्रकाश के साथ एक अजीब घटना घटी। लखनऊ के इनके पार्क रोड घर की बिजली काट दी गई। वजह बताई गई कि बिजली का बिल नहीं जमा किया गया था। यूपी के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री के घर की बिजली बिल नहीं जमा कर पाने की वजह से काटी गई थी।
फिलहाल. . . राम प्रकाश गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं हैं। 1 मई 2004 को उनका देहांत हो गया। जिस वक्त निधन हुआ उस वक्त वह मध्य प्रदेश के राज्यपाल थे।
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| राम प्रकाश गुप्ता। छिहत्तर साल की उम्र में बारह नवंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को यूपी के सीएम बनाए गए। कहीं जाते तो सेक्रेटरी उन्हें स्पीच याद दिलाते। लेकिन, मंच पर पहुंचते तो सब भूल जाते थे। वहां वही बोलते जो ज़ुबान पर आया। कैबिनेट में शामिल मंत्रियों को पहचान नहीं पाते थे। पार्टी के नेताओं को खुश रखने के लिए वह हर बात मान लेते थे। वह जिसे कहते, सीएम उनका ट्रांसफर कर देते थे। आज यूपी के सबसे बुजुर्ग सीएम बनाए गए राम प्रकाश गुप्ता की जयंती है। वो ज्योतिष परिवार से थे। जेल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बड़ा नेता बनने की भविष्यवाणी की। अजब यह कि राजनाथ सिंह राम प्रकाश गुप्ता को ही हटाकर प्रदेश के सीएम बने। ऐसे ही अनेक रोचक कहानियां हैं। आइए शुरू से जानते हैं। पच्चीस जून एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को उस वक्त की पीएम इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी। जनसंघ के नेताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। सारे बड़े नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। राम प्रकाश गुप्ता भी इसमें शामिल थे। वहां उनकी मुलाकात राजनाथ सिंह से हुई। एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में जेल के अंदर एक दिन राम प्रकाश गुप्ता तमाम युवा कैदियों के साथ बैठे थे। पच्चीस साल के राजनाथ सिंह को अपने पास बुलाया। कहा, "दाहिना हाथ आगे बढ़ाओ। " राजनाथ ने बढ़ा दिया। ज्योतिष परिवार से आने वाले राम प्रकाश ने हाथों की लकीरों को ध्यान से देखा। फिर कहा, "एक दिन तुम यूपी के बहुत बड़े नेता बनोगे। " बाकी साथियों ने पूछा, "कितना बड़ा नेता? " राम प्रकाश गुप्ता ने जवाब दिया, "यूपी के सीएम से भी बड़ा। " इस भविष्यवाणी के चौबीस साल बाद अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार को राम प्रकाश गुप्ता की भविष्यवाणी सच हो गई। राजनाथ सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने। अजब ये कि वह राम प्रकाश को हटाकर ही इस पद पर पहुंचे। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में बसपा और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई। छः-छः महीने सीएम पद का फॉर्मूला अपनाया गया। इक्कीस मार्च एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे से इक्कीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे तक सीएम रहीं। इसके बाद कल्याण सिंह सीएम बने तो अपने पद से दो साल बावन दिन तक हटे ही नहीं। सरकार न गिरे इसके लिए तिरानवे विधायकों को मंत्री बना दिया। मतलब प्रदेश का हर चौथा विधायक मंत्री। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में कल्याण सरकार के सहयोगी दल लोकतांत्रिक कांग्रेस के नेता जगदम्बिका पाल उस वक्त के राज्यपाल रोमेश भंडारी के पास पहुंचे और कहा, "मेरे पास बहुमत है। " रोमेश भंडारी को पता नहीं क्या सूझा उन्होंने कल्याण सिंह से बिना बात किए सरकार बर्खास्त कर दी। कल्याण सिंह हाईकोर्ट पहुंचे और स्टे ले लिया। अगले दिन दफ्तर पहुंचे तो जगदम्बिका पाल उनकी कुर्सी पर बतौर सीएम बैठे मिले। कोर्ट का आदेश दिखाया तो जगदम्बिका पाल कुर्सी छोड़कर चले गए। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी से सत्तावन सीटें मिली। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में मात्र उनतीस सीट। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम कल्याण सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत के बिगुल फूंक दिए। इसके बावजूद दस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। एक महीने बाद बारह नवंबर को कल्याण सिंह की छुट्टी कर दी गई। सीएम पद के लिए नए नाम को लेकर बैठक शुरू हो गई। वाजपेयी चाहते थे राजनाथ सिंह बनें। मुरली मनोहर जोशी किसी ब्राह्मण को सीएम बनाना चाहते थे। कल्याण सिंह के लिए झंडा बुलंद करने वाले लालजी टंडन और कलराज मिश्रा भी दावेदार थे। लेकिन, सबका नाम खारिज कर दिया गया और मुहर लगी राजनीति से रिटायर हो चुके छिहत्तर साल के राम प्रकाश गुप्ता के नाम पर। गुप्ता को दिल्ली बुलाने का फरमान जारी हुआ। लेकिन, किसी को पता ही नहीं कि वह लखनऊ में रहते कहां हैं। लखनऊ पुलिस दो घंटाटे तक लखनऊ में उनका घर खोजती रही। तब जाकर उनका दो कमरों का घर मिला। अगले दिन दिल्ली पहुंचे तो किसी पत्रकार ने पहचाना ही नहीं। बीजेपी अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे देखा तो उनके पास पहुंचे और ऐलान किया कि ये राम प्रकाश गुप्ता हैं, यूपी के नए मुख्यमंत्री। इस तरह करीब दस साल से सक्रिय राजनीति से दूर रहे राम प्रकाश बारह नवबंर को मुख्यमंत्री बना दिए गए। राम प्रकाश गुप्ता पार्टी के किसी नेता को नाराज नहीं करना चाहते थे। इसलिए जब भी किसी अधिकारी के ट्रांसफर की मांग होती वह हामी भर देते थे। नवंबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे से फरवरी दो हज़ार के बीच तीन सौ पचास से अधिक अफसरों का ट्रांसफर कर दिया। उन्नाव जिले में चालीस दिन के अंदर पाँच कलेक्टरों का ट्रांसफर किया गया। श्रावस्ती के डीएम बिहारी लाल को तीस दिन के अंदर छः ट्रांसफर लेटर थमाया गया। राम प्रकाश गुप्ता को उनके सेक्रेटरी स्पीच लिखकर देते थे। याद भी करवाते थे, लेकिन सीएम जैसे ही मंच पर जाते वह वही बोलते जो उनकी जुबान पर आता था। धीरे-धीरे उनकी छवि भुलक्कड़ सीएम के रूप में स्थापित हो गई। मायावती ने तो एक बार कह दिया, "बेचारे गुप्ता जी, वो हमेशा भूल जाते हैं कि उन्हें कहना क्या है, पार्टी ने अयोध्या पर नहीं बोलने को कहा है लेकिन वह साफ-साफ बोल जाते हैं। " राम प्रकाश गुप्ता की कैबिनेट में एक सौ से अधिक मंत्री थे। इन्हीं में से एक प्रेम प्रकाश सिंह ने तो साफ-साफ कह दिया, "अगर इतना भुलक्कड़ व्यक्ति सीएम बनेगा तो राज्य का कुछ नहीं हो सकता। " प्रेम प्रकाश के अलावा और भी मंत्रियों का यही मानना था। इसकी बड़ी वजह यह थी कि राम प्रकाश अपने ही मंत्रियों का नाम नहीं जानते थे। उस वक्त के अखबारों में सीएम के कार्यक्रम की कवरेज से ज्यादा उनके भुलने की आदत को कवर किया जाता था। राम प्रकाश गुप्ता जैसे तैसे तीन सौ इक्यावन दिन तक सीएम बने रहे। अट्ठाईस अक्टूबर दो हज़ार को उन्हें सीएम पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने। इस तरह से राम प्रकाश गुप्ता की चौबीस साल पहले वाली भविष्यवाणी सच हो गई। लेकिन खुद को हटाकर राजनाथ इस पद पर पहुंचेंगे इसका अंदेशा राम प्रकाश को तो नहीं ही रहा होगा। दो हज़ार दो में राम प्रकाश के साथ एक अजीब घटना घटी। लखनऊ के इनके पार्क रोड घर की बिजली काट दी गई। वजह बताई गई कि बिजली का बिल नहीं जमा किया गया था। यूपी के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री के घर की बिजली बिल नहीं जमा कर पाने की वजह से काटी गई थी। फिलहाल. . . राम प्रकाश गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं हैं। एक मई दो हज़ार चार को उनका देहांत हो गया। जिस वक्त निधन हुआ उस वक्त वह मध्य प्रदेश के राज्यपाल थे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या पर पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इनके बलिदान बेकार नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्तों का जाना देश के लिये बड़ी क्षति है। पूरा समाज पीड़ित परिवारो के साथ है।
जेपी नड्डा ने ट्वीट कर कहा-'जम्मू-कश्मीर के कुलगाम मे कायराना हमले में आतंकवादियों ने ज़िला भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव फिदा हुसैन समेत 3 नेताओं की हत्या कर दी। ऐसे राष्ट्रभक्तों का जाना देश के लिये बड़ी क्षति है। पूरा समाज पीड़ित परिवारों के साथ है। ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएँगे। परिवारों के प्रति संवेदना। '
गौरतलब है कि बृहस्पतिवार देर शाम कुलगाम जिले के वाई के पोरा इलाके में भाजपा नेताओं फिदा हुसैन, उमर हाजम एवं उमर राशिद बेग की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माने जाने वाले 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है।
| श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या पर पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इनके बलिदान बेकार नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्तों का जाना देश के लिये बड़ी क्षति है। पूरा समाज पीड़ित परिवारो के साथ है। जेपी नड्डा ने ट्वीट कर कहा-'जम्मू-कश्मीर के कुलगाम मे कायराना हमले में आतंकवादियों ने ज़िला भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव फिदा हुसैन समेत तीन नेताओं की हत्या कर दी। ऐसे राष्ट्रभक्तों का जाना देश के लिये बड़ी क्षति है। पूरा समाज पीड़ित परिवारों के साथ है। ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएँगे। परिवारों के प्रति संवेदना। ' गौरतलब है कि बृहस्पतिवार देर शाम कुलगाम जिले के वाई के पोरा इलाके में भाजपा नेताओं फिदा हुसैन, उमर हाजम एवं उमर राशिद बेग की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माने जाने वाले 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है। |
Don't Miss!
फिल्म सारे जहां से अच्छा एक फिर अटक चुकी है। शाहरुख खान के फिल्म से पीछे हटते ही अफवाह उड़ी थी कि कार्तिक आर्यन और राजकुमार राव को इस फिल्म के लिए अप्रोच किया जा रहा है। लेकिन कार्तिक आर्यन ने बयान जारी किया है कि उन्हें यह फिल्म अभी तक ऑफर नहीं की गई है और वे किसी भी ऐसी 'स्पेस' फिल्म का हिस्सा नहीं है।
तो ऐसी 'बोरिंग' फिल्म नहीं करना चाहते शाहरुख- अक्षय कुमार पर मारा करारा ताना ?
कार्तिक आर्यन की ओर से बयान दिया गया है- हमें पता चला है कि कुछ ऐसी खबरें आ रही हैं कि कार्तिक आर्यन एक 'स्पेस' फिल्म के लिए अप्रोच किया गया है। लेकिन बता दें, यह खबर पूरी तरह से कोरी अफवाह है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
गौरतलब है कि रॉनी स्क्रूवाला और सिद्धार्थ रॉय कपूर के प्रोडक्शन की यह फिल्म काफी बड़े स्तर पर बन रही है। पहले यह फिल्म आमिर खान को ऑफर की गई थी। लेकिन आमिर ने दूसरे प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होने की वजह से फिल्म को इंकार कर दिया। हालांकि फिर आमिर ने ही निर्माता- निर्देशक को शाहरुख खान का नाम सुझाया और शाहरुख ने फिल्म को हां कर दी थी। लेकिन जीरो के फ्लॉप होते ही शाहरुख ने इरादा बदल लिया।
शाहरुख के निकलने के बाद अब फिल्म से कार्तिक, राजकुमार राव और विकी कौशल का नाम जोड़ा जा रहा था। लेकिन कार्तिक अब पीछे हट चुके हैं। वहीं, अफवाह है कि विकी कौशल को हाल ही में फिल्म के प्रोड्यूसर सिद्धार्थ रॉय कपूर के ऑफिस में भी देखा गया है। बहरहाल, देखना दिलचस्प होगा कि यह बिग बजट फिल्म किसके हाथ लगती है।
| Don't Miss! फिल्म सारे जहां से अच्छा एक फिर अटक चुकी है। शाहरुख खान के फिल्म से पीछे हटते ही अफवाह उड़ी थी कि कार्तिक आर्यन और राजकुमार राव को इस फिल्म के लिए अप्रोच किया जा रहा है। लेकिन कार्तिक आर्यन ने बयान जारी किया है कि उन्हें यह फिल्म अभी तक ऑफर नहीं की गई है और वे किसी भी ऐसी 'स्पेस' फिल्म का हिस्सा नहीं है। तो ऐसी 'बोरिंग' फिल्म नहीं करना चाहते शाहरुख- अक्षय कुमार पर मारा करारा ताना ? कार्तिक आर्यन की ओर से बयान दिया गया है- हमें पता चला है कि कुछ ऐसी खबरें आ रही हैं कि कार्तिक आर्यन एक 'स्पेस' फिल्म के लिए अप्रोच किया गया है। लेकिन बता दें, यह खबर पूरी तरह से कोरी अफवाह है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। गौरतलब है कि रॉनी स्क्रूवाला और सिद्धार्थ रॉय कपूर के प्रोडक्शन की यह फिल्म काफी बड़े स्तर पर बन रही है। पहले यह फिल्म आमिर खान को ऑफर की गई थी। लेकिन आमिर ने दूसरे प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होने की वजह से फिल्म को इंकार कर दिया। हालांकि फिर आमिर ने ही निर्माता- निर्देशक को शाहरुख खान का नाम सुझाया और शाहरुख ने फिल्म को हां कर दी थी। लेकिन जीरो के फ्लॉप होते ही शाहरुख ने इरादा बदल लिया। शाहरुख के निकलने के बाद अब फिल्म से कार्तिक, राजकुमार राव और विकी कौशल का नाम जोड़ा जा रहा था। लेकिन कार्तिक अब पीछे हट चुके हैं। वहीं, अफवाह है कि विकी कौशल को हाल ही में फिल्म के प्रोड्यूसर सिद्धार्थ रॉय कपूर के ऑफिस में भी देखा गया है। बहरहाल, देखना दिलचस्प होगा कि यह बिग बजट फिल्म किसके हाथ लगती है। |
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं कई अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी। लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों के तबादले किए जाएंगे। इसके लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं।
MP Transfer, Employees Transfer : मध्यप्रदेश में जल्दी बड़े पैमाने पर अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी। नवंबर में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा तैयारी तेज कर दी गई है। वही मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। जारी निर्देश के तहत उन अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे। जो अपने गृह जिले में पदस्थ है। इतना ही नहीं 4 वर्ष की अवधि में एक ही स्थान पर पदस्थ रहने वाले कई कर्मचारियों को भी नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी।
इस मामले में आयोग के वरिष्ठ प्रमुख सचिव नरेंद्र एम बुटोलिया ने शुक्रवार को मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश जारी किये। निर्देश में कहा गया कि 31 जनवरी 2024 की स्थिति में जिन अधिकारियों को एक ही स्थान पर पदस्थ रहते हुए 3 वर्षीय उसे अधिक का समय बीत चुका है। इसके अलावा वह अपने गृह जिले में पदस्थ है। उन्हें स्थानांतरित किया जाए। इसके दायरे में चुनाव कार्य में सलंगन रहने वाले अधिकारी और समकक्ष अधिकारी भी शामिल होंगे।
हालांकि मतदाता सूची के काम में जुड़े अधिकारी कर्मचारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे । हालांकि किसी का तबादला करना है तो इसके लिए प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक होगा कि उसके पहले आयोग की अनुमति ली जाए। तबादला करने से पहले इसकी सूचना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को अनिवार्य रूप से देना होगा। इसके अलावा जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं, उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा। दंडित अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव में नहीं लगेगी। उन्हें चुनाव से दूर रखा जाएगा।
इसके अलावा राज्य मुख्यालय में पदस्थ विभागीय अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रिंसिपल, शिक्षक सहित जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर ऑफिसर के तबादले नहीं किए जाएंगे।
ऐसे में माना जा रहा है कि जिला और उप निर्वाचन पदाधिकारी रिटर्निंग ऑफिसर के अलावा सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रजिस्ट्रीकरण ऑफिसर, वही अतिरिक्त और संयुक्त सहित उप कलेक्टर, तहसीलदार समकक्ष श्रेणी के अधिकारी कर्मचारी शामिल होंगे। इसके अलावा उपमहानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, कमांडेंट, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित निरीक्षक और उप निरीक्षक के अलावा रक्षित निरीक्षक और समकक्ष श्रेणी के अधिकारियों के भी तबादले किए जा सकते हैं।
| मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं कई अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी। लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों के तबादले किए जाएंगे। इसके लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। MP Transfer, Employees Transfer : मध्यप्रदेश में जल्दी बड़े पैमाने पर अधिकारी कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी। नवंबर में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा तैयारी तेज कर दी गई है। वही मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। जारी निर्देश के तहत उन अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे। जो अपने गृह जिले में पदस्थ है। इतना ही नहीं चार वर्ष की अवधि में एक ही स्थान पर पदस्थ रहने वाले कई कर्मचारियों को भी नवीन पदस्थापना सौंपी जाएगी। इस मामले में आयोग के वरिष्ठ प्रमुख सचिव नरेंद्र एम बुटोलिया ने शुक्रवार को मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश जारी किये। निर्देश में कहा गया कि इकतीस जनवरी दो हज़ार चौबीस की स्थिति में जिन अधिकारियों को एक ही स्थान पर पदस्थ रहते हुए तीन वर्षीय उसे अधिक का समय बीत चुका है। इसके अलावा वह अपने गृह जिले में पदस्थ है। उन्हें स्थानांतरित किया जाए। इसके दायरे में चुनाव कार्य में सलंगन रहने वाले अधिकारी और समकक्ष अधिकारी भी शामिल होंगे। हालांकि मतदाता सूची के काम में जुड़े अधिकारी कर्मचारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे । हालांकि किसी का तबादला करना है तो इसके लिए प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक होगा कि उसके पहले आयोग की अनुमति ली जाए। तबादला करने से पहले इसकी सूचना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को अनिवार्य रूप से देना होगा। इसके अलावा जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं, उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा। दंडित अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव में नहीं लगेगी। उन्हें चुनाव से दूर रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य मुख्यालय में पदस्थ विभागीय अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रिंसिपल, शिक्षक सहित जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर ऑफिसर के तबादले नहीं किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि जिला और उप निर्वाचन पदाधिकारी रिटर्निंग ऑफिसर के अलावा सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रजिस्ट्रीकरण ऑफिसर, वही अतिरिक्त और संयुक्त सहित उप कलेक्टर, तहसीलदार समकक्ष श्रेणी के अधिकारी कर्मचारी शामिल होंगे। इसके अलावा उपमहानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, कमांडेंट, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित निरीक्षक और उप निरीक्षक के अलावा रक्षित निरीक्षक और समकक्ष श्रेणी के अधिकारियों के भी तबादले किए जा सकते हैं। |
दूसरा सर्ग आशा । ४७
'पवन, वरण आदि किसकी इच्छा से अपना कार्य कर रहे हैं और किसके क्रोध ये प्राकृतिक शक्ति चिह्न विवर्ण पड गये है । वे सोचने लगे कि हम भले ही अपनी शक्ति पर थोडो देर के लिए गर्व कर ले अन्यथा हम सभी परिवर्तन
पुतले है। मनु विचार कर रहे है कि इन महानील विराट् आकाश चक्र मे ग्रह, नक्षत्र और विद्युत्कण किसे खोजते फिर रहे हैं तथा यह कौन है जिसवा अस्तित्व सभी मौन होकर स्वीकार करते हैं ?
शर्न शनै सृष्टि से मनु का सम्बन्ध स्थापित सा होने लगता है और उनसे हृदय मे आशा उत्पन्न होती है तथा जीवन की पुकार भी पुन उनके अतरतम मे उठने लगती है । अपने अस्तित्व की भावना से वे यह सोचने लगती हैं कि जीवन धारा तो कभी छिन्न-भिन्न होने वाली नहीं हैं और लालसा क्यो इतनी प्रबल होती जा रही है तथा यह जीवन किसकी सत्ता को इतनी प्रबलता से स्थापित करता है ।
मनु उस हिम खड से उठकर थोडी दूर नीचे एक अत्यन्त स्वच्छ गुफा मे अपना निवास स्थान बनाते हैं । उस गुफा के पास ही सागर लहराता था । अब मनु का अग्निहोत्र निरंतर चलने लगता है और वे तप साधना मे ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं । रह-रह कर वे यह भी सोचते है कि जिस प्रकार में बच गया सभवत उसी प्रकार कोई और भी बच सकता है । अतएव वे अग्निहोत्र का थोडा सा अन्न कुछ दूर पर उस सभावित अपरिचित व्यक्ति के लिए रख आते है। उनकी यह क्रिया चलती रहती है और अब उनकी वह उन्मत्तता भी दूर हो चुकी थी जो कि जल-प्रलय के पश्चात उनमे दीग्ख पड़ती थी तथा उसके स्थान मे सहानुभूति का भाव जाग्रत हो रहा था ।
मनु अग्निहोत्र के सामने बैठे-बैठे ही निरंतर मनन किया करते और रहरह कर उनका मन अशात एव अस्थिर हो जाता । उनके मन मे नित्य नवीन जिज्ञासाये उत्पन्न हो और नवीन प्रश्न उठते परन्तु उत्तर कुछ भी नहीं सूझता था । इतना होते हुए भी अपने अस्तित्व की रक्षा मे वे अपने जीवन को व्यस्त बनाए रखते और नियमित रूप से अपना कार्य करते । शनै शनै उनका कर्मक्षेत्र विस्तृत होने लगा और नियति के शासन से वाध्य हो उन्हें जीवन-पथ पर चलने के लिए आसर होना पडा ।
चाँदनी रात का आगमन हुआ और शीतल, मद समीर प्रवाहित होने | दूसरा सर्ग आशा । सैंतालीस 'पवन, वरण आदि किसकी इच्छा से अपना कार्य कर रहे हैं और किसके क्रोध ये प्राकृतिक शक्ति चिह्न विवर्ण पड गये है । वे सोचने लगे कि हम भले ही अपनी शक्ति पर थोडो देर के लिए गर्व कर ले अन्यथा हम सभी परिवर्तन पुतले है। मनु विचार कर रहे है कि इन महानील विराट् आकाश चक्र मे ग्रह, नक्षत्र और विद्युत्कण किसे खोजते फिर रहे हैं तथा यह कौन है जिसवा अस्तित्व सभी मौन होकर स्वीकार करते हैं ? शर्न शनै सृष्टि से मनु का सम्बन्ध स्थापित सा होने लगता है और उनसे हृदय मे आशा उत्पन्न होती है तथा जीवन की पुकार भी पुन उनके अतरतम मे उठने लगती है । अपने अस्तित्व की भावना से वे यह सोचने लगती हैं कि जीवन धारा तो कभी छिन्न-भिन्न होने वाली नहीं हैं और लालसा क्यो इतनी प्रबल होती जा रही है तथा यह जीवन किसकी सत्ता को इतनी प्रबलता से स्थापित करता है । मनु उस हिम खड से उठकर थोडी दूर नीचे एक अत्यन्त स्वच्छ गुफा मे अपना निवास स्थान बनाते हैं । उस गुफा के पास ही सागर लहराता था । अब मनु का अग्निहोत्र निरंतर चलने लगता है और वे तप साधना मे ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं । रह-रह कर वे यह भी सोचते है कि जिस प्रकार में बच गया सभवत उसी प्रकार कोई और भी बच सकता है । अतएव वे अग्निहोत्र का थोडा सा अन्न कुछ दूर पर उस सभावित अपरिचित व्यक्ति के लिए रख आते है। उनकी यह क्रिया चलती रहती है और अब उनकी वह उन्मत्तता भी दूर हो चुकी थी जो कि जल-प्रलय के पश्चात उनमे दीग्ख पड़ती थी तथा उसके स्थान मे सहानुभूति का भाव जाग्रत हो रहा था । मनु अग्निहोत्र के सामने बैठे-बैठे ही निरंतर मनन किया करते और रहरह कर उनका मन अशात एव अस्थिर हो जाता । उनके मन मे नित्य नवीन जिज्ञासाये उत्पन्न हो और नवीन प्रश्न उठते परन्तु उत्तर कुछ भी नहीं सूझता था । इतना होते हुए भी अपने अस्तित्व की रक्षा मे वे अपने जीवन को व्यस्त बनाए रखते और नियमित रूप से अपना कार्य करते । शनै शनै उनका कर्मक्षेत्र विस्तृत होने लगा और नियति के शासन से वाध्य हो उन्हें जीवन-पथ पर चलने के लिए आसर होना पडा । चाँदनी रात का आगमन हुआ और शीतल, मद समीर प्रवाहित होने |
सवालः क्या आपको कभी किसी तरह का संक्रमण हुआ है?
हां, मुझे पिछले कुछ वर्षों में जंगलों में कई संक्रमण हुए हैं, मधुमक्खी के डंक के कारण एनाफिलेक्टिक शॉक से लेकर सांप के काटने से संक्रमित हो चुका है। आपको जंगल में काफी सचेत रहना होता है और जब स्थितियां विपरीत हो रही हों तो अपनी रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करें। कभी-कभी यह एक जंग की तरह होता है।
सवालः क्या आपने संक्रमण को रोकने के लिए खुद को टीका लगवाया है, क्योंकि आपको तो हमेशा खतरनाक वातावरण में संक्रमणों को आमंत्रण देने की आदत है?
हां, मुझे अक्सर दुनिया के जंगली हिस्सों में जाने से पहले टाइफाइड या हेपेटाइटिस जैसी चीजों के खिलाफ टीके लगवाने पड़ते हैं। यह काम का हिस्सा है। खुद को सुरक्षित रखें फिर साहसिक कार्य करें।
सवालः जीवन का सबसे रोमांचक और खतरनाक क्षण कौन सा है?
एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ना निश्चित रूप से मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा क्षण था। चोटी से तिब्बत में सूर्योदय देखने की छवि दिमाग में अमिट है। लेकिन इसमें जोखिम था, चढ़ाई में 4 पर्वतारोहियों की जान चली गई। अभियान ने मुझे कई तरह से बदल दिया। उस नुकसान को झेलना बेहद कठिन था लेकिन घटना में मुझे भी जीवनदान मिला जिसके लिए मैं कृतज्ञ हूं।
सवालः नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर आपका नया कार्यक्रम आ रहा है, इसमें हम क्या देखेंगे, यह कितना अलग होगा?
दुनिया के सबसे भयानक व डरावने और सबसे खूबसूरत जंगलों में से कुछेक स्थानों पर जाएंगे। आप देखेंगे कि मैं आम लोगों और मशहूर हस्तियों को यह अनुभव करा रहा हूं कि बीहड़ वातावरण हमें किस तरह बदल देते हैं। बीहड़ हमें मजबूत व ज्यादा संकल्पित होने की प्रेरणा देते हैं।
सवालः आप पहले भी मशहूर हस्तियों को एडवेंचर पर ले गए हैं, कठोर स्थिति के मामले में आप उन्हें कैसा पाते हैं?
मेरा मानना है कि कि हम सभी अंगूर की तरह हैं केवल जब हमें निचोड़ा जाता है तभी हम जान पाते हैं कि हम वास्तव में किस मिट्टी से बने हैं। जंगल किसी के साथ भेदभाव नहीं करता-आप बूढ़े हों या जवान, मशहूर हों या नहीं, लंबे हों या छोटे।
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| सवालः क्या आपको कभी किसी तरह का संक्रमण हुआ है? हां, मुझे पिछले कुछ वर्षों में जंगलों में कई संक्रमण हुए हैं, मधुमक्खी के डंक के कारण एनाफिलेक्टिक शॉक से लेकर सांप के काटने से संक्रमित हो चुका है। आपको जंगल में काफी सचेत रहना होता है और जब स्थितियां विपरीत हो रही हों तो अपनी रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करें। कभी-कभी यह एक जंग की तरह होता है। सवालः क्या आपने संक्रमण को रोकने के लिए खुद को टीका लगवाया है, क्योंकि आपको तो हमेशा खतरनाक वातावरण में संक्रमणों को आमंत्रण देने की आदत है? हां, मुझे अक्सर दुनिया के जंगली हिस्सों में जाने से पहले टाइफाइड या हेपेटाइटिस जैसी चीजों के खिलाफ टीके लगवाने पड़ते हैं। यह काम का हिस्सा है। खुद को सुरक्षित रखें फिर साहसिक कार्य करें। सवालः जीवन का सबसे रोमांचक और खतरनाक क्षण कौन सा है? एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ना निश्चित रूप से मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा क्षण था। चोटी से तिब्बत में सूर्योदय देखने की छवि दिमाग में अमिट है। लेकिन इसमें जोखिम था, चढ़ाई में चार पर्वतारोहियों की जान चली गई। अभियान ने मुझे कई तरह से बदल दिया। उस नुकसान को झेलना बेहद कठिन था लेकिन घटना में मुझे भी जीवनदान मिला जिसके लिए मैं कृतज्ञ हूं। सवालः नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर आपका नया कार्यक्रम आ रहा है, इसमें हम क्या देखेंगे, यह कितना अलग होगा? दुनिया के सबसे भयानक व डरावने और सबसे खूबसूरत जंगलों में से कुछेक स्थानों पर जाएंगे। आप देखेंगे कि मैं आम लोगों और मशहूर हस्तियों को यह अनुभव करा रहा हूं कि बीहड़ वातावरण हमें किस तरह बदल देते हैं। बीहड़ हमें मजबूत व ज्यादा संकल्पित होने की प्रेरणा देते हैं। सवालः आप पहले भी मशहूर हस्तियों को एडवेंचर पर ले गए हैं, कठोर स्थिति के मामले में आप उन्हें कैसा पाते हैं? मेरा मानना है कि कि हम सभी अंगूर की तरह हैं केवल जब हमें निचोड़ा जाता है तभी हम जान पाते हैं कि हम वास्तव में किस मिट्टी से बने हैं। जंगल किसी के साथ भेदभाव नहीं करता-आप बूढ़े हों या जवान, मशहूर हों या नहीं, लंबे हों या छोटे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Financial Influencers: सोशल मीडिया (Social Media) लोगों के साथ संवाद करने और अपनी बात पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है. ऐसे में कई फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स (Financial Influencers) इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को फाइनैंशियल एडवाइस (Financial Advice) देने का काम करते हैं. इन सुझावों के झांसे में आकर कई बार निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई गंवा देते हैं. लेकिन शेयर बाजार के रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स के बढ़ते बेस को देखते हुए इन पर निगरानी रखने के लिए गाइडलाइंस बनाने की तैयारी में है.
फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स पर शिकंजा!
सेबी के मेंबर एस के मोहंती ने मुंबई में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि हम गाइडलाइंस बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. दरअसल कोरोना महामारी ( Covid 19 Pandemic) के बाद शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों ( Retail Investors) की तादाद बढ़ी है तो उसी प्रकार फाइनैंशियल और इवेंटस्टमेंट एडवाइस देने वाले ऑनलाइन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. ये फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स ऐसे सुझाव देने के लिए अधिकृत नहीं हैं बावजूद इसके वे सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को निवेश को लेकर सुझाव देते हैं.
बीते एक साल में स्टार्टअप टेक कंपनियों के आईपीओ और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के दौरान इन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स की भूमिका बेहद संदिग्ध रही है. कंपनियों ने अपने शेयरों के रेट भगाने के लिए इन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स को पैसे देती है और ये फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स निवेशकों को इन कंपनियों में निवेश करने का सुझाव देते हैं.
सेबी के नियमों के मुताबिक फाइनैंशियल एडवाइजर्स को खुद को रजिस्टर कराना होता है. देश में 1300 से ज्यादा फाइनैंशियल एडवाइजर्स मौजूद हैं. फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स के बढ़ते प्रभाव ने सेबी की भी चिंता बढ़ा दी है. 2021-22 में फाइनैंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कंटेट में फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स और सेलीब्रिटी द्वारा 415 उल्लंघन का का मामला सामने आया है. हाल में सेबी प्रमुख ने भी फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी.
| Financial Influencers: सोशल मीडिया लोगों के साथ संवाद करने और अपनी बात पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है. ऐसे में कई फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को फाइनैंशियल एडवाइस देने का काम करते हैं. इन सुझावों के झांसे में आकर कई बार निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई गंवा देते हैं. लेकिन शेयर बाजार के रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स के बढ़ते बेस को देखते हुए इन पर निगरानी रखने के लिए गाइडलाइंस बनाने की तैयारी में है. फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स पर शिकंजा! सेबी के मेंबर एस के मोहंती ने मुंबई में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि हम गाइडलाइंस बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. दरअसल कोरोना महामारी के बाद शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की तादाद बढ़ी है तो उसी प्रकार फाइनैंशियल और इवेंटस्टमेंट एडवाइस देने वाले ऑनलाइन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. ये फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स ऐसे सुझाव देने के लिए अधिकृत नहीं हैं बावजूद इसके वे सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को निवेश को लेकर सुझाव देते हैं. बीते एक साल में स्टार्टअप टेक कंपनियों के आईपीओ और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के दौरान इन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स की भूमिका बेहद संदिग्ध रही है. कंपनियों ने अपने शेयरों के रेट भगाने के लिए इन फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स को पैसे देती है और ये फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स निवेशकों को इन कंपनियों में निवेश करने का सुझाव देते हैं. सेबी के नियमों के मुताबिक फाइनैंशियल एडवाइजर्स को खुद को रजिस्टर कराना होता है. देश में एक हज़ार तीन सौ से ज्यादा फाइनैंशियल एडवाइजर्स मौजूद हैं. फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स के बढ़ते प्रभाव ने सेबी की भी चिंता बढ़ा दी है. दो हज़ार इक्कीस-बाईस में फाइनैंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कंटेट में फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स और सेलीब्रिटी द्वारा चार सौ पंद्रह उल्लंघन का का मामला सामने आया है. हाल में सेबी प्रमुख ने भी फाइनैंशियल इंफ्लुएंसर्स को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी. |
नोएडा के सेक्टर-76 में आम्रपाली सिलिकॉन सोसायटी में मंगलवार सुबह एक अज्ञात महिला का शव टॉवरों के गैप के बीच फंसा हुआ नजर आया. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है. महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई हैं. लाश मिलने के बाद सोसायटी के लोगों डरे और सहमे हुए है.
घटना सेक्टर- 49 कोतवाली इलाके की है. पुलिस के मुताबिक आम्रपाली सिलिकॉन सोसायटी में मंगलवार सुबह एक अज्ञात महिला की लाश दो टॉवरों के बीच फंसी हुई है. पुलिस ने बताया कि शव से बदबू आने पर सोसायटी के लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी. मृतक महिला की पहचान नहीं हो पाई है.
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| नोएडा के सेक्टर-छिहत्तर में आम्रपाली सिलिकॉन सोसायटी में मंगलवार सुबह एक अज्ञात महिला का शव टॉवरों के गैप के बीच फंसा हुआ नजर आया. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है. महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई हैं. लाश मिलने के बाद सोसायटी के लोगों डरे और सहमे हुए है. घटना सेक्टर- उनचास कोतवाली इलाके की है. पुलिस के मुताबिक आम्रपाली सिलिकॉन सोसायटी में मंगलवार सुबह एक अज्ञात महिला की लाश दो टॉवरों के बीच फंसी हुई है. पुलिस ने बताया कि शव से बदबू आने पर सोसायटी के लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी. मृतक महिला की पहचान नहीं हो पाई है. . |
संवाद सूत्र, कालाढूंगी (हल्द्वानी) : उत्तराखंड में भाजपा की विजय संकल्प यात्रा चल रही है। यात्रा के दौरान पार्टी चुनावी माहौल बना रही है। लोगों के बीच जाकर अपने काम गिना रही है। शनिवार को रामनगर मार्ग पर कमोला के पास रोडवेज बस ने कार सवार भाजपा कोटाबाग मंडल महामंत्री व मंत्री को रौंद दिया। हादसे में दोनों नेताओं की मौत हो गई। मृतक बैलपड़ाव से भाजपा की विजय संकल्प यात्रा से वापस अपने घर लौट रहे थे। बस ने एक अन्य कार व बाइक को भी टक्कर मारकर तीन लोगों को घायल कर दिया, जिनका हल्द्वानी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
भीमपुरी गेट कमोला निवासी जगदीश गुर्रो (40) कोटाबाग भाजपा के मंडल महामंत्री व सुमित चौहान (35) कोटाबाग भाजपा मंडी के मंत्री थे। शनिवार को दोनों पदाधिकारी बैलपड़ाव पहुंची भाजपा की विजय संकल्प यात्रा में शामिल होने गए थे। देर शाम वह वापस आल्टो से घर लौट रहे थे। कमोला में पहुंचते ही सामने से आ रही रामनगर डिपो की रोडवेज बस ने कार को रौंद दिया। सुमित की मौके पर ही मौत हो गई। जगदीश गुर्रो ने हल्द्वानी के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एसओ रमेश बोहरा ने बताया कि मृतकों का पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।
रविवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। बताया कि कार सवारों को रौंदने के बाद बस ने एक अन्य कार व बाइक सवार को टक्कर मारी। मोतीनगर हल्द्वानी निवासी घायल बाइक सवार विशाल नेगी व रजत नगरकोटी को ड्यूटी से लौट रहे एलआईयू दरोगा महेंद्र नेगी अपनी निजी कार से हल्द्वानी अस्पताल ले गए। एक अन्य घायल को भी इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।
हादसे के बाद सड़क पर तीन घंटे जाम लग गया। बस चालक मौके से फरार हो गया। बस अनियंत्रित होकर गन्ने के खेत में जा घुसी।
जगदीश व सुमित की मौत से स्वजनों में कोहराम मचा है। दोनों परिवारों के लिए साल का पहला दिन काल बनकर आया। देर शाम तक दोनों के स्वजन पीएम हाउस में थे।
दुर्घटना के समय बस में दर्जनों यात्री सवार थे। बस दो कार व एक बाइक को रौंदते हुए गन्ने के खेत में घुसी तो यात्रियों में चीख पुकार मच गई। बस से बाहर उतरकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।
कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने दोनों पदाधिकारियों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचकर स्वजनों को ढांढस बधाया। कहा कि दोनों पदाधिकारियों की मौत से भाजपा परिवार को क्षति हुई है।
| संवाद सूत्र, कालाढूंगी : उत्तराखंड में भाजपा की विजय संकल्प यात्रा चल रही है। यात्रा के दौरान पार्टी चुनावी माहौल बना रही है। लोगों के बीच जाकर अपने काम गिना रही है। शनिवार को रामनगर मार्ग पर कमोला के पास रोडवेज बस ने कार सवार भाजपा कोटाबाग मंडल महामंत्री व मंत्री को रौंद दिया। हादसे में दोनों नेताओं की मौत हो गई। मृतक बैलपड़ाव से भाजपा की विजय संकल्प यात्रा से वापस अपने घर लौट रहे थे। बस ने एक अन्य कार व बाइक को भी टक्कर मारकर तीन लोगों को घायल कर दिया, जिनका हल्द्वानी अस्पताल में इलाज चल रहा है। भीमपुरी गेट कमोला निवासी जगदीश गुर्रो कोटाबाग भाजपा के मंडल महामंत्री व सुमित चौहान कोटाबाग भाजपा मंडी के मंत्री थे। शनिवार को दोनों पदाधिकारी बैलपड़ाव पहुंची भाजपा की विजय संकल्प यात्रा में शामिल होने गए थे। देर शाम वह वापस आल्टो से घर लौट रहे थे। कमोला में पहुंचते ही सामने से आ रही रामनगर डिपो की रोडवेज बस ने कार को रौंद दिया। सुमित की मौके पर ही मौत हो गई। जगदीश गुर्रो ने हल्द्वानी के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एसओ रमेश बोहरा ने बताया कि मृतकों का पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। रविवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। बताया कि कार सवारों को रौंदने के बाद बस ने एक अन्य कार व बाइक सवार को टक्कर मारी। मोतीनगर हल्द्वानी निवासी घायल बाइक सवार विशाल नेगी व रजत नगरकोटी को ड्यूटी से लौट रहे एलआईयू दरोगा महेंद्र नेगी अपनी निजी कार से हल्द्वानी अस्पताल ले गए। एक अन्य घायल को भी इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। हादसे के बाद सड़क पर तीन घंटे जाम लग गया। बस चालक मौके से फरार हो गया। बस अनियंत्रित होकर गन्ने के खेत में जा घुसी। जगदीश व सुमित की मौत से स्वजनों में कोहराम मचा है। दोनों परिवारों के लिए साल का पहला दिन काल बनकर आया। देर शाम तक दोनों के स्वजन पीएम हाउस में थे। दुर्घटना के समय बस में दर्जनों यात्री सवार थे। बस दो कार व एक बाइक को रौंदते हुए गन्ने के खेत में घुसी तो यात्रियों में चीख पुकार मच गई। बस से बाहर उतरकर यात्रियों ने राहत की सांस ली। कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने दोनों पदाधिकारियों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचकर स्वजनों को ढांढस बधाया। कहा कि दोनों पदाधिकारियों की मौत से भाजपा परिवार को क्षति हुई है। |
देवरिया। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही द्वारा उत्तर प्रदेश की मुखिया के विरोध में भाषण बाजी करने से खार खायी पुलिस ने आज श्री शाही के साथ जबरदस्त धक्का मुक्की तथा बदसलूकी की। पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजी जिससे दर्जनों कार्यकर्ता घायल हो गये। घायलों में आम जनता के साथ ही दैनिक जागरण समाचार पत्र के एक पत्रकार भी शामिल हैं जो श्री शाही का समाचार कवर रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष श्री शाही ने बताया कि स्वयं उनको तथा भाजपा के जिला के मीडिया प्रभारी विजय शुक्ल को भी चोटें चोटें आयी हैं।
देवरिया जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी उत्तर पूर्व दिशा में स्थित पथरदेवा बाजार में आम जन सभा के बाद सड़क पर कई सालों से हुए जल जमाव के विरोध स्वरूप धान के बेहन की रोपाई करने से जिला प्रशासन द्वारा रोके जाने के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस में जमकर टकराव हुआ। बाद में पुलिस ने लाठी चार्ज कर कार्यकर्ताओं को खदेड़ने की कोशिश की। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता घायल हो गये। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के साथ पुलिस ने धक्का मुक्की की और उनके साथ बदसलूकी भी किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का दावा है कि पुलिस ने मायावती के इशारे पर लाठी चार्ज किया है जिसमें भाजपा के करीब दो सौ कार्यकर्ताओं को चोटे आयी है।
इसके पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री शाही ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जितने भी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्याएं हुईं है सभी में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती सीधे सीधे दोषी है। उनको भी हत्या का आरोपी बनाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिये। श्री शाही ने यह भी कहा कि सीएमओ बीपी सिंह हत्याकाण्ड के मामले में संदेह के दायरे में आये देवरिया के बरहज से बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल को प्रदेश की पुलिस प्रशासन ने पहले पकड़ा लेकिन बाद में छोड़ दिया। उन्होने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि सीएमओ हत्याकाण्ड में शामिल इस बसपा विधायक को किसके दबाव में छोड़ा गया।
श्री शाही ने बुधवार को जिले के पथरदेवा बाजार में सड़क पर पिछले कई महीनों से लगे भारी जल जमाव का निकासी स्थानीय प्रशासन द्वारा नहीं किये जाने के विरोध में सड़क पर जमा पानी में धान के बेहन की रोपाई की। इसके पूर्व उन्होने आम जन सभा को सम्बोधित करते हुए जिला प्रशासन को चेताया कि यदि जिले की नहरों की सफाई 9 अगस्त तक नहीं हो सकी और उसमें भरपूर पानी नहीं छोड़ा गया तो नहरों को पाटने का काम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता करेंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.
| देवरिया। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही द्वारा उत्तर प्रदेश की मुखिया के विरोध में भाषण बाजी करने से खार खायी पुलिस ने आज श्री शाही के साथ जबरदस्त धक्का मुक्की तथा बदसलूकी की। पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजी जिससे दर्जनों कार्यकर्ता घायल हो गये। घायलों में आम जनता के साथ ही दैनिक जागरण समाचार पत्र के एक पत्रकार भी शामिल हैं जो श्री शाही का समाचार कवर रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष श्री शाही ने बताया कि स्वयं उनको तथा भाजपा के जिला के मीडिया प्रभारी विजय शुक्ल को भी चोटें चोटें आयी हैं। देवरिया जिला मुख्यालय से करीब बीस किमी उत्तर पूर्व दिशा में स्थित पथरदेवा बाजार में आम जन सभा के बाद सड़क पर कई सालों से हुए जल जमाव के विरोध स्वरूप धान के बेहन की रोपाई करने से जिला प्रशासन द्वारा रोके जाने के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस में जमकर टकराव हुआ। बाद में पुलिस ने लाठी चार्ज कर कार्यकर्ताओं को खदेड़ने की कोशिश की। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता घायल हो गये। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के साथ पुलिस ने धक्का मुक्की की और उनके साथ बदसलूकी भी किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का दावा है कि पुलिस ने मायावती के इशारे पर लाठी चार्ज किया है जिसमें भाजपा के करीब दो सौ कार्यकर्ताओं को चोटे आयी है। इसके पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री शाही ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जितने भी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्याएं हुईं है सभी में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती सीधे सीधे दोषी है। उनको भी हत्या का आरोपी बनाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिये। श्री शाही ने यह भी कहा कि सीएमओ बीपी सिंह हत्याकाण्ड के मामले में संदेह के दायरे में आये देवरिया के बरहज से बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल को प्रदेश की पुलिस प्रशासन ने पहले पकड़ा लेकिन बाद में छोड़ दिया। उन्होने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि सीएमओ हत्याकाण्ड में शामिल इस बसपा विधायक को किसके दबाव में छोड़ा गया। श्री शाही ने बुधवार को जिले के पथरदेवा बाजार में सड़क पर पिछले कई महीनों से लगे भारी जल जमाव का निकासी स्थानीय प्रशासन द्वारा नहीं किये जाने के विरोध में सड़क पर जमा पानी में धान के बेहन की रोपाई की। इसके पूर्व उन्होने आम जन सभा को सम्बोधित करते हुए जिला प्रशासन को चेताया कि यदि जिले की नहरों की सफाई नौ अगस्त तक नहीं हो सकी और उसमें भरपूर पानी नहीं छोड़ा गया तो नहरों को पाटने का काम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता करेंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट. |
भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने बार्सिलोना मास्टर्स (Barcelona Masters)में विजयी शुरुआत करते हुए दूसरे दौर में स्थान बना लिया है. पांचवीं सीड साइना (Saina Nehwal)ने टूर्नामेंट के महिला एकल के पहले राउंड में वर्ल्ड नंबर-42 जर्मनी की यूवोने ली को 35 मिनट में 21-16, 21-14 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया. पुरुष वर्ग में भारत के अजय जयराम और किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth)ने भी अपने मैच में जीत हासिल करके अगले दौर में प्रवेश कर लिया. जयराम को क्वालीफिकेशन में वॉकओवर मिला था. जयराम ने पहले राउंड में फ्रांस के क्रिस्टो पोपोव को सीधे गेमों में 30 मिनट तक चले मुकाबले में 21-14, 21-12 से हराकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की की. दूसरे राउंड में उनका सामना हमवतन किदांबी श्रीकांत से होगा. तीसरी सीड श्रीकांत ने भारत के ही शुभांकर डे को 23-21 21-18 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया.
पुरुष वर्ग में एचएस प्रणय (HS Prannoy)और पारुपल्ली कश्यप पहले राउंड में बाहर हो गए हैं. मलेशिया के डेरेन ल्यू ने प्रणय को 21-18 21-15 से मात दी. कश्यप को अपने पहले राउंड में ब्राजील के यगोल कोइलहो के खिलाफ बीच में ही मुकाबला छोड़ना पड़ा. कश्यप के रिटायर्ड होने से कोइलहो को अगले दौर में जाने का मौका मिल गया।
कश्यप ने जिस समय मुकाबला छोड़ा उस समय कोइलहो के खिलाफ उनका 9-21 21-18 14-12 का स्कोर था. इस बीच, मिश्रित युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और एन सिक्की रेड्डी की जोड़ी ने पहले दौर में मैथियास क्रिस्टियन और एलेक्जेंड्रा बोजे को 56 मिनट में 10-21 21-16 21-17 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है। )
| भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने बार्सिलोना मास्टर्स में विजयी शुरुआत करते हुए दूसरे दौर में स्थान बना लिया है. पांचवीं सीड साइना ने टूर्नामेंट के महिला एकल के पहले राउंड में वर्ल्ड नंबर-बयालीस जर्मनी की यूवोने ली को पैंतीस मिनट में इक्कीस-सोलह, इक्कीस-चौदह से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया. पुरुष वर्ग में भारत के अजय जयराम और किदांबी श्रीकांत ने भी अपने मैच में जीत हासिल करके अगले दौर में प्रवेश कर लिया. जयराम को क्वालीफिकेशन में वॉकओवर मिला था. जयराम ने पहले राउंड में फ्रांस के क्रिस्टो पोपोव को सीधे गेमों में तीस मिनट तक चले मुकाबले में इक्कीस-चौदह, इक्कीस-बारह से हराकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की की. दूसरे राउंड में उनका सामना हमवतन किदांबी श्रीकांत से होगा. तीसरी सीड श्रीकांत ने भारत के ही शुभांकर डे को तेईस-इक्कीस इक्कीस-अट्ठारह से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया. पुरुष वर्ग में एचएस प्रणय और पारुपल्ली कश्यप पहले राउंड में बाहर हो गए हैं. मलेशिया के डेरेन ल्यू ने प्रणय को इक्कीस-अट्ठारह इक्कीस-पंद्रह से मात दी. कश्यप को अपने पहले राउंड में ब्राजील के यगोल कोइलहो के खिलाफ बीच में ही मुकाबला छोड़ना पड़ा. कश्यप के रिटायर्ड होने से कोइलहो को अगले दौर में जाने का मौका मिल गया। कश्यप ने जिस समय मुकाबला छोड़ा उस समय कोइलहो के खिलाफ उनका नौ-इक्कीस इक्कीस-अट्ठारह चौदह-बारह का स्कोर था. इस बीच, मिश्रित युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और एन सिक्की रेड्डी की जोड़ी ने पहले दौर में मैथियास क्रिस्टियन और एलेक्जेंड्रा बोजे को छप्पन मिनट में दस-इक्कीस इक्कीस-सोलह इक्कीस-सत्रह से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया. |
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