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खोखरा थाना क्षेत्र के भेलवाडीह गांव के निवासी नुनूचंद महतो (Nunuchand Mahato) ने जब नक्सल क्षेत्र में प्रवेश किया, तब उसकी उम्र 35 साल थी। झारखंडः नक्सलियों को सरेंडर करने पर क्यों मिलता है इनाम? क्या है सरकार की सरेंडर पॉलिसी! झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। इसका असर ये हुआ है कि कई नक्सली मारे गए हैं और कई ने सरेंडर किया है। नक्सल विरोधी अभियान पर निकली लोहरदगा जिले की सेरेंगदाग थाना पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हार्डकोर नक्सली (Naxalite) सुंदर लाल खेरवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरिडीह के उपायुक्त राहुल सिन्हा ने राज्य सरकार से 18 कुख्यात नक्सलियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाने की मांग की है। Palamu: BDO ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, TSPC के कमांडर नगीना ने BDO से लेवी मांगी है। साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) के पास से पुलिस ने 28 मोबाइल फोन, 54 सिम कार्ड, 12 एटीएम, 11 पासबुक, दो लैपटॉप, एक 'माइक्रो पोस' मशीन व तीन दोपहिया वाहन बरामद किये हैं। झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है। इस बीच चतरा से एक बड़ी खबर सामने आई है। गोपाल सिंह भोक्ता इंटर कॉलेज को NIA ने बुधवार को सीज कर दिया है। 5 लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो (Nunuchand Mahato) के सरेंडर करने के 4 दिन बाद मंगलवार को झारखंड की गिरिडीह पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। झारखंड (Jharkhand) के गुमला जिले में 31 मई को हुई नक्सली मुठभेड़ (Gumla Naxal Encounter) के बाद झारखंड सेक्टर सीआरपीएफ (CRPF) के आईजी महेश्वर दयाल 1 जून को गुमला पहुंचे। झारखंड (Jharkhand) के गुमला में 31 मई को हुई नक्सली मुठभेड़ (Naxal Encounter) के बाद पुलिस ने इलाके में बड़ी संख्या में आईईडी (IED) बरामद किया है। नक्सली उदय उरांव पेशरार थाना क्षेत्र के मुरहु-करचा छापरटोली गांव का है। उदय उरांव को एक कट्टर नक्सली के रूप में पहचान मिली है। वह रविंद्र गंझू दस्ते के साथ काम करता है। झारखंड की गिरिडीह पुलिस के सामने सरेंडर करने वाले 5 लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो के बारे में चर्चाओं का बाजार गरम है। नुनूचंद (Nunuchand) से बीते 4 दिनों में हुई पूछताछ में पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा। उसने नक्सली संगठन या बड़े नक्सली नेताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। गिरीडीह (Giridih) के एसपी अमित रेणु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 5 लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो ने गिरीडीह पुलिस के सामने सरेंडर किया। झारखंड (Jharkhand) सड़क का नेटवर्क तैयार होगा। इसके लिए राज्य को केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से एक बड़ी सौगात मिली है। ये मुठभेड़ भाकपा माओवादी के नक्सलियों और गुमला पुलिस के बीच हुई थी, और इसमें 15 लाख का इनामी नक्सली बुद्धेश्वर उरांव बच निकला। झारखंड (Jharkhand) में नक्सलियों (Naxalites) के खिलाफ कार्रवाई में गिरिडीह और धनबाद में सक्रिय 5 लाख के इनामी नक्सली (Naxalite) कुख्यात नुनूचंद महतो ने 28 मई को सरेंडर कर दिया।
खोखरा थाना क्षेत्र के भेलवाडीह गांव के निवासी नुनूचंद महतो ने जब नक्सल क्षेत्र में प्रवेश किया, तब उसकी उम्र पैंतीस साल थी। झारखंडः नक्सलियों को सरेंडर करने पर क्यों मिलता है इनाम? क्या है सरकार की सरेंडर पॉलिसी! झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। इसका असर ये हुआ है कि कई नक्सली मारे गए हैं और कई ने सरेंडर किया है। नक्सल विरोधी अभियान पर निकली लोहरदगा जिले की सेरेंगदाग थाना पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हार्डकोर नक्सली सुंदर लाल खेरवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरिडीह के उपायुक्त राहुल सिन्हा ने राज्य सरकार से अट्ठारह कुख्यात नक्सलियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाने की मांग की है। Palamu: BDO ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, TSPC के कमांडर नगीना ने BDO से लेवी मांगी है। साइबर अपराधियों के पास से पुलिस ने अट्ठाईस मोबाइल फोन, चौवन सिम कार्ड, बारह एटीएम, ग्यारह पासबुक, दो लैपटॉप, एक 'माइक्रो पोस' मशीन व तीन दोपहिया वाहन बरामद किये हैं। झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है। इस बीच चतरा से एक बड़ी खबर सामने आई है। गोपाल सिंह भोक्ता इंटर कॉलेज को NIA ने बुधवार को सीज कर दिया है। पाँच लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो के सरेंडर करने के चार दिन बाद मंगलवार को झारखंड की गिरिडीह पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। झारखंड के गुमला जिले में इकतीस मई को हुई नक्सली मुठभेड़ के बाद झारखंड सेक्टर सीआरपीएफ के आईजी महेश्वर दयाल एक जून को गुमला पहुंचे। झारखंड के गुमला में इकतीस मई को हुई नक्सली मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके में बड़ी संख्या में आईईडी बरामद किया है। नक्सली उदय उरांव पेशरार थाना क्षेत्र के मुरहु-करचा छापरटोली गांव का है। उदय उरांव को एक कट्टर नक्सली के रूप में पहचान मिली है। वह रविंद्र गंझू दस्ते के साथ काम करता है। झारखंड की गिरिडीह पुलिस के सामने सरेंडर करने वाले पाँच लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो के बारे में चर्चाओं का बाजार गरम है। नुनूचंद से बीते चार दिनों में हुई पूछताछ में पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा। उसने नक्सली संगठन या बड़े नक्सली नेताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। गिरीडीह के एसपी अमित रेणु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पाँच लाख के इनामी नक्सली नुनूचंद महतो ने गिरीडीह पुलिस के सामने सरेंडर किया। झारखंड सड़क का नेटवर्क तैयार होगा। इसके लिए राज्य को केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी सौगात मिली है। ये मुठभेड़ भाकपा माओवादी के नक्सलियों और गुमला पुलिस के बीच हुई थी, और इसमें पंद्रह लाख का इनामी नक्सली बुद्धेश्वर उरांव बच निकला। झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में गिरिडीह और धनबाद में सक्रिय पाँच लाख के इनामी नक्सली कुख्यात नुनूचंद महतो ने अट्ठाईस मई को सरेंडर कर दिया।
अमलनेर- Shri Mangal Dev Grah Mandir । यहां के श्री मंगलग्रह मंदिर में प्रातःकाल में मंगलाभिषेक करने से मन को अलौकिक शांति और मन प्रसन्न होता है। मंदिर के स्वच्छ, सुंदर और सुखद वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। वेस्ट इंडीज में भारतीय राजदूत केजे श्रीनिवास द्वारा ने कहा- हालांकि मैं एक अधिकारी हूं परंतु मुझे धर्म और आध्यात्मिकता में विश्वास है। वेस्ट इंडीज में भारतीय राजदूत डॉ. के. जे. श्रीनिवास ने 16 तारीख को अमलनेर में श्री मंगलग्रह मंदिर का दौरा किया। सुबह-सुबह महापूजा के बाद यहां संतश्री प्रसाद महाराज अभिषेकगृह में उनके सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। वे इस अवसर पर बोल रहे थे। डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि चूंकि मैं कर्नाटक के दूर-दराज के इलाके का मध्यम वर्ग का हूं, इसलिए मैंने प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोई क्लास नहीं ली। श्रीनिवासजी ने वेस्टइंडीज और भारत के संबंध, भारत की उदार और सहिष्णु नीति, नई पासपोर्ट नीति में उनका यादगार योगदान, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की दिलचस्प कहानियां बताई। उन्होंने भोंगा के लिए टॉवर स्थल का भूमिपूजन भी किया। कई गणमान्य लोगों ने उनका स्वागत और सम्मान किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक स्मिता वाघ, पुलिस उपाधीक्षक राकेश जाधव, पुलिस निरीक्षक विजय शिंदे, मनीषा शिंदे, अध्यक्ष हरि भीका वाणी, निदेशक प्रदीप अग्रवाल, लायंस क्लब के अध्यक्ष योगेश मुंदडा, कोषाध्यक्ष अनिल रायसोनी, लियो क्लब के अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल, सरकार. वकील शशिकांत पाटिल और राजेंद्र चौधरी, भाजपा तालुक अध्यक्ष हीरालाल पाटिल, श्री. शी मंडल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. किशोर शाह, वरिष्ठ सुवर्णलंकार व्यवसायी मदनलाल सराफ, अर्बन बैंक के निदेशक पंकज मुंडे, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एस आर चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता विनोद अग्रवाल, प्रदीप जैन, श्यामलाल गोकलानी, राजू नंदा, दिलीप गांधी, रवि पाटिल, रमेश महाजन, नरेंद्र निकुंभ, कुमारपाल कोठारी, राजेंद्र निकुंभ, आशीष चौधरी, विशाल शर्मा, मनीष जोशी, ललित सौंदगर डॉ. महेश पाटिल, दीपक पाटिल (वावड़े), सेवा संस्थान अध्यक्ष डिंगबर महाले, उपाध्यक्ष येस एन पाटिल, सचिव येस बी बाविस्कर, कोषाध्यक्ष गिरीश कुलकर्णी, संयुक्त सचिव दिलीप बहिराम, ट्रस्टी अनिल अहिरराव हरियाली सलाहकार सुबोध पाटिल, निर्माण सलाहकार संजय पाटिल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री डिगंबर महाले ने संचालन किया और आभार व्यक्त किया।
अमलनेर- Shri Mangal Dev Grah Mandir । यहां के श्री मंगलग्रह मंदिर में प्रातःकाल में मंगलाभिषेक करने से मन को अलौकिक शांति और मन प्रसन्न होता है। मंदिर के स्वच्छ, सुंदर और सुखद वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। वेस्ट इंडीज में भारतीय राजदूत केजे श्रीनिवास द्वारा ने कहा- हालांकि मैं एक अधिकारी हूं परंतु मुझे धर्म और आध्यात्मिकता में विश्वास है। वेस्ट इंडीज में भारतीय राजदूत डॉ. के. जे. श्रीनिवास ने सोलह तारीख को अमलनेर में श्री मंगलग्रह मंदिर का दौरा किया। सुबह-सुबह महापूजा के बाद यहां संतश्री प्रसाद महाराज अभिषेकगृह में उनके सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। वे इस अवसर पर बोल रहे थे। डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि चूंकि मैं कर्नाटक के दूर-दराज के इलाके का मध्यम वर्ग का हूं, इसलिए मैंने प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोई क्लास नहीं ली। श्रीनिवासजी ने वेस्टइंडीज और भारत के संबंध, भारत की उदार और सहिष्णु नीति, नई पासपोर्ट नीति में उनका यादगार योगदान, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की दिलचस्प कहानियां बताई। उन्होंने भोंगा के लिए टॉवर स्थल का भूमिपूजन भी किया। कई गणमान्य लोगों ने उनका स्वागत और सम्मान किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक स्मिता वाघ, पुलिस उपाधीक्षक राकेश जाधव, पुलिस निरीक्षक विजय शिंदे, मनीषा शिंदे, अध्यक्ष हरि भीका वाणी, निदेशक प्रदीप अग्रवाल, लायंस क्लब के अध्यक्ष योगेश मुंदडा, कोषाध्यक्ष अनिल रायसोनी, लियो क्लब के अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल, सरकार. वकील शशिकांत पाटिल और राजेंद्र चौधरी, भाजपा तालुक अध्यक्ष हीरालाल पाटिल, श्री. शी मंडल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. किशोर शाह, वरिष्ठ सुवर्णलंकार व्यवसायी मदनलाल सराफ, अर्बन बैंक के निदेशक पंकज मुंडे, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एस आर चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता विनोद अग्रवाल, प्रदीप जैन, श्यामलाल गोकलानी, राजू नंदा, दिलीप गांधी, रवि पाटिल, रमेश महाजन, नरेंद्र निकुंभ, कुमारपाल कोठारी, राजेंद्र निकुंभ, आशीष चौधरी, विशाल शर्मा, मनीष जोशी, ललित सौंदगर डॉ. महेश पाटिल, दीपक पाटिल , सेवा संस्थान अध्यक्ष डिंगबर महाले, उपाध्यक्ष येस एन पाटिल, सचिव येस बी बाविस्कर, कोषाध्यक्ष गिरीश कुलकर्णी, संयुक्त सचिव दिलीप बहिराम, ट्रस्टी अनिल अहिरराव हरियाली सलाहकार सुबोध पाटिल, निर्माण सलाहकार संजय पाटिल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री डिगंबर महाले ने संचालन किया और आभार व्यक्त किया।
West Bengal Bomb Blast: पश्चिम बंगाल में बम बरामदगी और ब्लास्ट की घटना पर लगाम नहीं लग पा रही है. शुक्रवार को पूर्वी मेदिनीपुर के पोटाशपुर में निर्दलीय उम्मीदवार के घर में बम ब्लास्ट की घटना घटी है. कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के पोटाशपुर में एक निर्दलीय उम्मीदवार के घर पर बम विस्फोटहुआ है. विस्फोट इतना जोर का था कि घर की छत उड़ गई. अभी तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि अभी तक इस विस्फोट में कुल कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है या नहीं, लेकिन आरोपी कैंडिडेट फरार बताया जा रहा है. स्थानीय निवासियों ने पुलिस को घेरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों ने पुलिस के सामने विरोध प्रदर्शन किया और गो बैक के नारे लगाये. इस बीच पुलिस ने पटाशपुर इलाके में अपनी गश्त बढ़ा दी है और घटना स्थल पर भारी संख्या में पुलिस टीम पहुंच गयी है. पोटाशपुर के पालपाड़ा में एक निर्दलीय उम्मीदवार के घर पर शुक्रवार सुबह विस्फोट हो गया. धमाके के असर से पूरा इलाका दहल गया. टिन के मकान का एक हिस्सा भी ढह गया. जब तक स्थानीय निवासी इलाके में पहुंचे, तब तक घायल व्यक्ति भाग चुका था. आरोप है कि घर में बम रखे हुए थे. बम फट गया. विपक्ष का आरोप है कि इलाके पर कब्ज़ा जमाने के लिए बम जमा किए जा रहे हैं. और यह फट गया. फिलहाल पुलिस इलाके से विस्फोट के नमूने इकट्ठा कर रही है. निर्दलीय प्रत्याशी की तलाश जारी है. इससे पहले एगरा में भीषण बम विस्फोट हुआ था. खादीकुले में एक पटाखे फैक्ट्री में हुए बम विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी. स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि वास्तव में अवैध पटाखे के कारखानों में बम बनाए जा रहे थे. उस समय विस्फोट का असर इतना जबरदस्त था कि शव तालाब में जा गिरा थे. वहां से शव बरामद किया गये थे. पूर्वी मेदिनीपुर में लगातार हो रहे बम धमाकों से प्रशासन भी चिंतित है. इस बीच, पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ-साथ राज्य के विभिन्न इलाकों में बम बरामद किये जा रहे हैं. मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना के इलाके में बड़ी मात्रा में बम बरामद किए गये हैं. इस बीच, पिछले 22 दिनों में चुनावी हिंसा में 12 लोगों की जान चली गई है. राज्य के विभिन्न इलाकों में बमबाजी, हिंसक झड़प और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही है. इस बीच, फिर से कैंडिडेट के घर में बम ब्लास्ट की घटना ने प्रशासन की पोल खोल दी है. हालांकि कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रविवार से राज्य में 315 कंपनी केंद्रीय वाहिनी पहुंच जाएगी, लेकिन राज्य में हिंसा की कमी फिलहाल नहीं आ रही है.
West Bengal Bomb Blast: पश्चिम बंगाल में बम बरामदगी और ब्लास्ट की घटना पर लगाम नहीं लग पा रही है. शुक्रवार को पूर्वी मेदिनीपुर के पोटाशपुर में निर्दलीय उम्मीदवार के घर में बम ब्लास्ट की घटना घटी है. कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के पोटाशपुर में एक निर्दलीय उम्मीदवार के घर पर बम विस्फोटहुआ है. विस्फोट इतना जोर का था कि घर की छत उड़ गई. अभी तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि अभी तक इस विस्फोट में कुल कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है या नहीं, लेकिन आरोपी कैंडिडेट फरार बताया जा रहा है. स्थानीय निवासियों ने पुलिस को घेरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों ने पुलिस के सामने विरोध प्रदर्शन किया और गो बैक के नारे लगाये. इस बीच पुलिस ने पटाशपुर इलाके में अपनी गश्त बढ़ा दी है और घटना स्थल पर भारी संख्या में पुलिस टीम पहुंच गयी है. पोटाशपुर के पालपाड़ा में एक निर्दलीय उम्मीदवार के घर पर शुक्रवार सुबह विस्फोट हो गया. धमाके के असर से पूरा इलाका दहल गया. टिन के मकान का एक हिस्सा भी ढह गया. जब तक स्थानीय निवासी इलाके में पहुंचे, तब तक घायल व्यक्ति भाग चुका था. आरोप है कि घर में बम रखे हुए थे. बम फट गया. विपक्ष का आरोप है कि इलाके पर कब्ज़ा जमाने के लिए बम जमा किए जा रहे हैं. और यह फट गया. फिलहाल पुलिस इलाके से विस्फोट के नमूने इकट्ठा कर रही है. निर्दलीय प्रत्याशी की तलाश जारी है. इससे पहले एगरा में भीषण बम विस्फोट हुआ था. खादीकुले में एक पटाखे फैक्ट्री में हुए बम विस्फोट में ग्यारह लोगों की मौत हो गई थी. स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि वास्तव में अवैध पटाखे के कारखानों में बम बनाए जा रहे थे. उस समय विस्फोट का असर इतना जबरदस्त था कि शव तालाब में जा गिरा थे. वहां से शव बरामद किया गये थे. पूर्वी मेदिनीपुर में लगातार हो रहे बम धमाकों से प्रशासन भी चिंतित है. इस बीच, पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ-साथ राज्य के विभिन्न इलाकों में बम बरामद किये जा रहे हैं. मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम और दक्षिण चौबीस परगना के इलाके में बड़ी मात्रा में बम बरामद किए गये हैं. इस बीच, पिछले बाईस दिनों में चुनावी हिंसा में बारह लोगों की जान चली गई है. राज्य के विभिन्न इलाकों में बमबाजी, हिंसक झड़प और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही है. इस बीच, फिर से कैंडिडेट के घर में बम ब्लास्ट की घटना ने प्रशासन की पोल खोल दी है. हालांकि कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रविवार से राज्य में तीन सौ पंद्रह कंपनी केंद्रीय वाहिनी पहुंच जाएगी, लेकिन राज्य में हिंसा की कमी फिलहाल नहीं आ रही है.
एक औद्योगिक आघात को किसी भी रूप में माना जाता हैमानव शरीर को नुकसान, उस समय एक दुर्घटना के परिणामस्वरूप कर्मचारी द्वारा प्राप्त किया गया, जब वह अपने काम के कर्तव्यों का पालन करता था, और परिणामस्वरूप काम करने की क्षमता में कमी आई उत्पादन चोटों के सभी मामलों की समग्रता को औद्योगिक चोटों कहा जाता है दुर्घटनाओं में शामिल हैंः - गंभीरता मेंः फेफड़े, गंभीर और घातक; - पीड़ितों की संख्या सेः एकल और समूह; एक विशेष दुर्घटना से जुड़ी परिस्थितियों की एक विस्तृत अध्ययन, व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य समिति है, जो जानकारी संघ से बीमा प्रतिनिधियों इकट्ठा करने के लिए भेजता है में लगी हुई है। औद्योगिक चोटें नकारात्मक हैंऔद्योगिक और सामाजिक प्रकृति के परिणाम, जिनके लिए आर्थिक सुविधाओं पर निवारक उपायों के कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है। इस घटना का मुकाबला करना संभव है, अगर इसकी घटना के कारणों का एक व्यवस्थित विश्लेषण किया जाए। व्यावसायिक चोटों के कारणों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जाता है। जब पर दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करते हैंउत्पादन, उनके उन्मूलन और समय पर चेतावनी के उद्देश्य से कई उपायों को विकसित किया जा रहा है। उसी समय, व्यावसायिक भौगोलिक स्थिति के विश्लेषण, मोनोग्राफिक और सांख्यिकीय जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है। स्थानों को निर्धारित करने के लिए स्थलाकृतिक विधि की आवश्यकता हैएक निश्चित अवधि में चोटों की सबसे अक्सर घटना। भविष्य में यह है कि कार्यस्थलों का अनुकूलन और समस्या निवारण किया जाता है। मोनोग्राफिक विधि में सावधान होते हैंकार्यस्थल में व्यावसायिक चोट लगने के कारणों का एक बहुआयामी विश्लेषण। इसका उपयोग विश्लेषण की सांख्यिकीय पद्धति के साथ संयोजन में अधिक प्रभावी होगा। सांख्यिकीय पद्धति में कार्य पर दुर्घटनाओं की रिपोर्ट के मात्रात्मक संकेतकों का अध्ययन शामिल है। पूरी तस्वीर के लिए, गुरुत्वाकर्षण के गुणांक और चोटों की आवृत्ति गणना की जाती है। एहतियाती उपायों के रूप में,उपकरण अलमारियाँ और सुरक्षा के कोण। इसमें योजनाएं, पोस्टर, निर्देश दिए गए हैं, सुरक्षा के अलग-अलग साधनों के साथ, कंपन, शोर, प्रकाश को मापने के लिए उपकरण हैं।
एक औद्योगिक आघात को किसी भी रूप में माना जाता हैमानव शरीर को नुकसान, उस समय एक दुर्घटना के परिणामस्वरूप कर्मचारी द्वारा प्राप्त किया गया, जब वह अपने काम के कर्तव्यों का पालन करता था, और परिणामस्वरूप काम करने की क्षमता में कमी आई उत्पादन चोटों के सभी मामलों की समग्रता को औद्योगिक चोटों कहा जाता है दुर्घटनाओं में शामिल हैंः - गंभीरता मेंः फेफड़े, गंभीर और घातक; - पीड़ितों की संख्या सेः एकल और समूह; एक विशेष दुर्घटना से जुड़ी परिस्थितियों की एक विस्तृत अध्ययन, व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य समिति है, जो जानकारी संघ से बीमा प्रतिनिधियों इकट्ठा करने के लिए भेजता है में लगी हुई है। औद्योगिक चोटें नकारात्मक हैंऔद्योगिक और सामाजिक प्रकृति के परिणाम, जिनके लिए आर्थिक सुविधाओं पर निवारक उपायों के कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है। इस घटना का मुकाबला करना संभव है, अगर इसकी घटना के कारणों का एक व्यवस्थित विश्लेषण किया जाए। व्यावसायिक चोटों के कारणों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जाता है। जब पर दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करते हैंउत्पादन, उनके उन्मूलन और समय पर चेतावनी के उद्देश्य से कई उपायों को विकसित किया जा रहा है। उसी समय, व्यावसायिक भौगोलिक स्थिति के विश्लेषण, मोनोग्राफिक और सांख्यिकीय जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है। स्थानों को निर्धारित करने के लिए स्थलाकृतिक विधि की आवश्यकता हैएक निश्चित अवधि में चोटों की सबसे अक्सर घटना। भविष्य में यह है कि कार्यस्थलों का अनुकूलन और समस्या निवारण किया जाता है। मोनोग्राफिक विधि में सावधान होते हैंकार्यस्थल में व्यावसायिक चोट लगने के कारणों का एक बहुआयामी विश्लेषण। इसका उपयोग विश्लेषण की सांख्यिकीय पद्धति के साथ संयोजन में अधिक प्रभावी होगा। सांख्यिकीय पद्धति में कार्य पर दुर्घटनाओं की रिपोर्ट के मात्रात्मक संकेतकों का अध्ययन शामिल है। पूरी तस्वीर के लिए, गुरुत्वाकर्षण के गुणांक और चोटों की आवृत्ति गणना की जाती है। एहतियाती उपायों के रूप में,उपकरण अलमारियाँ और सुरक्षा के कोण। इसमें योजनाएं, पोस्टर, निर्देश दिए गए हैं, सुरक्षा के अलग-अलग साधनों के साथ, कंपन, शोर, प्रकाश को मापने के लिए उपकरण हैं।
जम्मू कश्मीर। श्रीनगर के पांथा चौक इलाके में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई ज़ारी है। शनिवार शाम लश्कर के आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई से आतंकी इलाके के डीपीएस स्कूल में छुप गए हैं। स्कूल को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है, आतंकी वहीं से गोलीबारी कर रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा के इस हमले में दो जवान शहीद हो गए हैं और 16 घायल हैं। श्रीनगर के आर्मी कैंट इलाके (पांथा चौक) में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों के हमले के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद आतंकी पास के डीपीएस स्कूल में घुस गए हैं और वहीं से गोलीबारी कर रहे हैं। स्कूल को चारों ओर से घेर लिया गया है। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए और 15 घायल हुए हैं। आतंकी लश्कर के कमांडर जुनैद मट्टू के मारे जाने के बाद से बौखलाए हुए हैं और भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। सीआरपीएफ के आईजी रविदीप साही ने बताया कि हमारी गाड़ी पर फायरिंग की गई। एक सब इंस्पेक्टर शहीद और दो जवान घायल हो गए। हमने इलाके को घेर लिया है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
जम्मू कश्मीर। श्रीनगर के पांथा चौक इलाके में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई ज़ारी है। शनिवार शाम लश्कर के आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई से आतंकी इलाके के डीपीएस स्कूल में छुप गए हैं। स्कूल को सुरक्षाबलों ने घेर लिया है, आतंकी वहीं से गोलीबारी कर रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा के इस हमले में दो जवान शहीद हो गए हैं और सोलह घायल हैं। श्रीनगर के आर्मी कैंट इलाके में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों के हमले के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद आतंकी पास के डीपीएस स्कूल में घुस गए हैं और वहीं से गोलीबारी कर रहे हैं। स्कूल को चारों ओर से घेर लिया गया है। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए और पंद्रह घायल हुए हैं। आतंकी लश्कर के कमांडर जुनैद मट्टू के मारे जाने के बाद से बौखलाए हुए हैं और भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। सीआरपीएफ के आईजी रविदीप साही ने बताया कि हमारी गाड़ी पर फायरिंग की गई। एक सब इंस्पेक्टर शहीद और दो जवान घायल हो गए। हमने इलाके को घेर लिया है। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
हैदराबाद में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से विधान परिषद सदस्य महिला से बदसलूकी करते कैमरे में कैद हुआ है। वह उसे गालियां दे रहा था और बाद में चप्पल से हमला भी करना चाह रहा था। मामला घर खाली करने और छह महीने से किराया न चुकाने को लेकर दोनों पक्षों में पनपा। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सोमवार दोपहर दो मिनट पांच सेकेंड्स की एक क्लिप सामने आई। टीआरएस नेता फारूख हुसैन उसमें एक महिला से बदतमीजी करते नजर आए। सोफे पर बनियान पहने वह महिला को गालियां दे रहे थे। यही नहीं, बाद में वह अचानक उठते हैं और चप्पल से उन्हें मारने की कोशिश करते हैं। जानकारी के मुताबिक हुसैन जिस महिला पर हमला कर रहे थे, वह उनकी मकान मालकिन है। वह तकरीबन एक साल से घर खाली कराना चाह रही हैं, लेकिन नेता उसे खाली करने को राजी नहीं है। इतना ही नहीं, उसने छह महीनों से किराया नहीं चुकाया है। मकान मालकिन जब इस बात को लेकर उसके पास पहुंची और घर खाली करने के लिए बोली, तो वह बहस पर ऊतारू हो गया। मामला बाद में और बढ़ गया। वह उन्हें गालियां देने लगा और बदतमीजी करने लगा। एक पल को तो यह नौबत भी आ गई थी कि उसने चप्पल फेंककर मारने की कोशिश की थी। देखिए क्या होता है इस वीडियो में।
हैदराबाद में तेलंगाना राष्ट्र समिति से विधान परिषद सदस्य महिला से बदसलूकी करते कैमरे में कैद हुआ है। वह उसे गालियां दे रहा था और बाद में चप्पल से हमला भी करना चाह रहा था। मामला घर खाली करने और छह महीने से किराया न चुकाने को लेकर दोनों पक्षों में पनपा। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सोमवार दोपहर दो मिनट पांच सेकेंड्स की एक क्लिप सामने आई। टीआरएस नेता फारूख हुसैन उसमें एक महिला से बदतमीजी करते नजर आए। सोफे पर बनियान पहने वह महिला को गालियां दे रहे थे। यही नहीं, बाद में वह अचानक उठते हैं और चप्पल से उन्हें मारने की कोशिश करते हैं। जानकारी के मुताबिक हुसैन जिस महिला पर हमला कर रहे थे, वह उनकी मकान मालकिन है। वह तकरीबन एक साल से घर खाली कराना चाह रही हैं, लेकिन नेता उसे खाली करने को राजी नहीं है। इतना ही नहीं, उसने छह महीनों से किराया नहीं चुकाया है। मकान मालकिन जब इस बात को लेकर उसके पास पहुंची और घर खाली करने के लिए बोली, तो वह बहस पर ऊतारू हो गया। मामला बाद में और बढ़ गया। वह उन्हें गालियां देने लगा और बदतमीजी करने लगा। एक पल को तो यह नौबत भी आ गई थी कि उसने चप्पल फेंककर मारने की कोशिश की थी। देखिए क्या होता है इस वीडियो में।
राजा बलि के सबसे बड़े पुत्र बाणासुर हुए जो महान शिवभक्त थे । उनकी राजधानी केदारनाथ के पास स्थित शोणितपुर थी । बाणासुक के हजार हाथ थे । जब ताण्डव नृत्य के समय शंकरजी लय पर नाचते, तब बाणासुर हजार हाथों से बाजे बजाते थे । बाणासुर के ताण्डव से रीझ कर भगवान शंकर उसके नगररक्षक बन गए ।
राजा बलि के सबसे बड़े पुत्र बाणासुर हुए जो महान शिवभक्त थे । उनकी राजधानी केदारनाथ के पास स्थित शोणितपुर थी । बाणासुक के हजार हाथ थे । जब ताण्डव नृत्य के समय शंकरजी लय पर नाचते, तब बाणासुर हजार हाथों से बाजे बजाते थे । बाणासुर के ताण्डव से रीझ कर भगवान शंकर उसके नगररक्षक बन गए ।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जिले के 34 खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय खेलवृत्ति दी गई। खिलाड़ियों को 2400 व 1800 रुपए की नगद राशि दी गई। खेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मौसमी चंद्राकर पिता जितेंद्र कुमार, अकलिया अंजूम. . . chhattisgarhWed, 22 Apr 2015 10:24 PM (IST) बिलासपुर(निप्र)। अपीलीय न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत के आदेश को आंशिक रूप से संसोधन किया है। इसके अनुसार छह माह की सजा को तीन में बदल दिया गया हैं। न्यायालय ने आरोपी को जेल भेजने का आदेश दिया है। रेलवे . . . chhattisgarhSat, 24 Jan 2015 04:00 AM (IST) जांजगीर-चांपा। गवाही पेशी में समंस तामिल होने के बाद भी उपस्थित नहीं होने पर सक्ती एसडीओपी के खिलापᆬ द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। दहेज मृत्य के मामले में साक. . . chhattisgarhFri, 18 Jul 2014 12:33 AM (IST) सागर (ब्यूरो)। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि में शुक्रवार को दो प्रशासनिक निर्णय लिए गए। हाल ही में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से विवि इंजीनियर बनाए गए जितेंद्र कुमार सक्सेना को स्थाई कर्मचारी से अस्थाई कर्मचारियों की सूची मे. . . madhya pradeshFri, 04 Apr 2014 08:29 PM (IST)
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जिले के चौंतीस खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय खेलवृत्ति दी गई। खिलाड़ियों को दो हज़ार चार सौ व एक हज़ार आठ सौ रुपयापए की नगद राशि दी गई। खेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मौसमी चंद्राकर पिता जितेंद्र कुमार, अकलिया अंजूम. . . chhattisgarhWed, बाईस अप्रैल दो हज़ार पंद्रह दस:चौबीस PM बिलासपुर। अपीलीय न्यायालय ने चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत के आदेश को आंशिक रूप से संसोधन किया है। इसके अनुसार छह माह की सजा को तीन में बदल दिया गया हैं। न्यायालय ने आरोपी को जेल भेजने का आदेश दिया है। रेलवे . . . chhattisgarhSat, चौबीस जनवरी दो हज़ार पंद्रह चार:शून्य AM जांजगीर-चांपा। गवाही पेशी में समंस तामिल होने के बाद भी उपस्थित नहीं होने पर सक्ती एसडीओपी के खिलापᆬ द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। दहेज मृत्य के मामले में साक. . . chhattisgarhFri, अट्ठारह जुलाई दो हज़ार चौदह बारह:तैंतीस AM सागर । डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि में शुक्रवार को दो प्रशासनिक निर्णय लिए गए। हाल ही में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से विवि इंजीनियर बनाए गए जितेंद्र कुमार सक्सेना को स्थाई कर्मचारी से अस्थाई कर्मचारियों की सूची मे. . . madhya pradeshFri, चार अप्रैल दो हज़ार चौदह आठ:उनतीस PM
ये खिलाड़ी भारत को जिताएगा एशिया कप! एशिया कप में सूर्यकुमार यादव भारत के लिए सबसे बड़े मैच विनर साबित हो सकते हैं। क्योंकि इस खिलाड़ी ने हाल ही में खेले गए कई टी20 मुकाबलों में बड़ी और ताबड़तोड़ पारी खेलकर साबित कर दिया है की वो किसी से कम नहीं। इतना ही नहीं बल्कि यादव ने इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद टी20 में बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। अगर वह एशिया कप में अपनी इस फॉर्म को बरकरार रखते हैं तो जल्द सूर्यकुमार यादव पाकिस्तान के बाबर आज़म को रैंकिंग में पछाड़ देंगे। रोहित शर्मा (कप्तान), केएल राहुल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, दीपक हुड्डा, दिनेश कार्तिक, हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, युजवेंद्र चहल, रवि बिश्नोई, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह, अवेश खान। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।
ये खिलाड़ी भारत को जिताएगा एशिया कप! एशिया कप में सूर्यकुमार यादव भारत के लिए सबसे बड़े मैच विनर साबित हो सकते हैं। क्योंकि इस खिलाड़ी ने हाल ही में खेले गए कई टीबीस मुकाबलों में बड़ी और ताबड़तोड़ पारी खेलकर साबित कर दिया है की वो किसी से कम नहीं। इतना ही नहीं बल्कि यादव ने इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद टीबीस में बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। अगर वह एशिया कप में अपनी इस फॉर्म को बरकरार रखते हैं तो जल्द सूर्यकुमार यादव पाकिस्तान के बाबर आज़म को रैंकिंग में पछाड़ देंगे। रोहित शर्मा , केएल राहुल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, दीपक हुड्डा, दिनेश कार्तिक, हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, युजवेंद्र चहल, रवि बिश्नोई, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह, अवेश खान। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें।
प्रत्यक्ष प्रमाण भारतीय दर्शन में स्वीकृत समस्त प्रमाणो मे प्रत्यक्ष प्रमाण का सर्वप्रथम और सर्वप्रमुख स्थान है। यह अन्य समस्त प्रमाणो का उपजीव्य है। इसीलिए सम्पूर्ण भारतीय दार्शनिक वाडमय मे प्रत्यक्ष प्रमाण की विस्तृत विवेचना पायी जाती है। जिस प्रकार से प्रमाण शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाकरण दोनो के लिए उपलब्ध होता है और इन दो विभिन्न अर्थो मे भी अकेला प्रमाण शब्द का प्रयोग आधारहीन नहीं कहा जा सकता ठीक उसी प्रकार प्रमाणो के अन्तर्गत आने वाले प्रत्यक्ष प्रमाण मे प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग - इन्द्रिय जन्य प्रमा उस प्रमा के करण तथा उस प्रमा के विषयभूत पदार्थ आदि तीन विभिन्न अर्थो मे होता है। इसलिए इन तीनो मे भी अकेला प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग आधारशून्य नही कहा जा सकता। यह प्रत्यक्ष शब्द की तीन विभिन्न व्युत्पत्तियो पर आधारित होता है जिनका विवेचन अधोवत् है। प्रथम व्युत्पत्ति के अनुसार प्रति विषय प्रति गतम् अक्षम् इन्द्रिय यस्मै प्रयोजनाय तत् प्रत्यक्षम् - 1 प्रत्यक्ष शब्द इन्द्रियजन्य ज्ञान का बोधक होता है क्योकि उसी ज्ञानात्मक प्रयोजन को सम्पन्न करने के लिए इन्द्रिय विषय के प्रति गमन करता है। द्वितीय व्युत्पत्ति के अनुसार प्रतिगतम् - विषय प्रतिगतम् अर्थात विषयसन्निकृष्टम् अक्ष प्रत्यक्षम् अर्थात् प्रत्यक्ष शब्द प्रत्यक्ष प्रमा के करण का बोधक होता है, क्योकि विषयसन्निकृष्ट इन्द्रिय को ही मुख्यत प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है। तृतीय व्युत्पत्ति के अनुसार प्रति-य विषय प्रति गतम् अक्ष स प्रत्यक्ष ।" अर्थात प्रत्यक्ष शब्द प्रत्यक्ष प्रमा के विषयभूत अर्थ का बोधक होता है क्योकि जिस विषय के प्रति इन्द्रिय का गमन होता है अर्थात जो अर्थ इन्द्रियसन्निकृष्ट होता है वही प्रत्यक्ष प्रमा का विषय होता है। अत विभिन्न व्युत्पत्तियों के आधार पर प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग प्रत्यक्ष प्रमा, प्रत्यक्षप्रमाकरण, तथा प्रत्यक्षप्रमा के विषय के रूप में होने पर भी किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। सम्पूर्ण भारतीय दर्शन में प्रत्यक्ष और अर्थापत्ति को छोड़कर अन्य किसी शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाण (प्रमा के साधन ) के लिए नही हुआ है। जैसे अनुमान उपमान शब्द व अनुपलब्धि से जन्य प्रमा को क्रमश अनुमिति उपमिति शाब्दी प्रमा व अभाव - प्रमा व इनके साधन को क्रमश अनुमान, उपमान शब्द व अनुपलब्धि कहा जाता है। किन्तु प्रत्यक्ष और अर्थापत्ति शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाण इन दोनो अर्थो मे होता है। पीनो देवदत्तो दिवा न भुङ्क्ते इस आधार पर रात्रौ भुङ्क्ते जो प्रमा होती है वह अर्थापत्ति है और उस प्रमा को उत्पन्न करने वाले पुष्टत्वज्ञान रूप करण को भी अर्थापत्ति कहते है। किन्तु केशव मिश्र प्रभृति कुछ नैयायिक प्रमा व प्रमाण दोनो के लिए प्रत्यक्ष' शब्द का प्रयोग किये जाने का विरोध करते हैं। इनके अनुसार प्रत्यक्ष से व्युत्पन्न ज्ञान के लिए "साक्षात्कार' शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए । प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग केवल प्रत्यक्ष प्रमाण के लिए ही किया जाना चाहिए - साक्षात्कारिप्रमाकरण प्रत्यक्षम् । साक्षात्कारिणी च प्रमा, सा एवोच्यते या इन्द्रियजा । 3 लेकिन अधिकाश विद्वान प्रत्यक्ष को प्रमा व प्रमाण दोनो का बोधक मानते है । यूँ तो प्रमाणो के विचार - प्रसग मे सभी प्रमाण प्रमुख है परन्तु प्रत्यक्ष ही एक ऐसा प्रमाण है जिसका विवेचन सभी भारतीय दर्शनो मे हुआ है और इसी लिए यहाँ विभिन्न दृष्टियो से प्रत्यक्ष की परिभाषा प्रस्तुत की गयी है। सर्वप्रथम यहाँ यह बताया गया है कि प्रत्यक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई है? कहा गया है कि प्रत्यक्ष शब्द प्रति और अक्ष इन दो शब्दो के योग से बना है जिसमे प्रति का अर्थ है समीप तथा अक्ष का अर्थ आँख से लिया जाता है। यहाॅ आँख के साथ-साथ अन्य इन्द्रियॉ भी शामिल हो सकती है। अत जो वस्तु इन्द्रियो के समाने हो उससे प्राप्त ज्ञान को यहाँ प्रत्यक्ष कहा गया है। अर्थात 'इन्द्रियार्थसन्निकर्षजन्य ज्ञान प्रत्यक्षम्" इस परिभाषा के विश्लेषण से हम पाते है कि इसमे तीन महत्वपूर्ण तत्त्व है- इन्द्रिय अर्थ और सन्निकर्ष । प्रत्यक्ष ज्ञान की उत्पत्ति के लिए अर्थ के साथ इन्द्रिय के सन्निकर्ष का होना परम आवश्यक है अन्यथा प्रत्यक्ष ज्ञान की प्राप्ति नही हो सकती। इसीलिए प्रत्यक्ष की उक्त परिभाषा स्वीकृत की गयी । प्रत्यक्ष की इसी परिभाषा को मानने वाले दार्शनिको मे हैं- न्याय दर्शन के प्रवर्तक गौतम वैशेषिक भाट्ट मीमासक एव कई अन्य दार्शनिक । लेकिन प्रत्यक्ष की उपर्युक्त परिभाषा ज्यादा दिनो तक टिक नहीं पायी और कई अन्य दर्शनो ने इसमे 'अतिव्याप्ति दोष बताकर उसे मानने से अस्वीकार कर दिया। इनके अनुसार चूँकि प्रत्यक्ष का सम्बन्ध साक्षात् प्रतीति से है, जिसे हम "इमिडियट नालेज कहते है अत साक्षात्प्रतीति को ही प्रत्यक्ष मानना चाहिए । प्रत्यक्ष की इस परिभाषा को मानने वालो मे नव्य - नैयायिक प्रभाकर मीमासक तथा वेदान्ती आते है। नव्य-न्याय के प्रवर्तक गगेश उपाध्याय ने 'ज्ञानाकरणक ज्ञान प्रत्यक्षम्" माना है। अर्थात् प्रत्यक्ष मे किसी ऐसे विषय की साक्षात् प्रतीति होती है, जिसमे मन का सयोग रहता है। परन्तु कुछ अद्वैत वेदान्ती अतरिन्द्रिय मन को नहीं मानते है। इसी प्रकार बौद्ध दार्शनिक कहते है कि "Perception is the knowledge of the unique particular object that is given directly " जीतवनही जीम मदेमश्र इस तरह हम देखते है कि भिन्न-भिन्न दर्शनो मे प्रत्यक्ष का भिन्न-भिन्न लक्षण निर्धारित किया गया हैं जिनका विवेचन इस प्रकार है । प्रत्यक्ष का लक्षण चार्वाक दर्शन मे केवल प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण माना गया है। 'बृहस्पतिसूत्र' मे स्पष्ट कहा गया है। प्रत्यक्षमेवेक प्रमाणम् । अर्थात प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण मानने के पीछे चार्वाको का तर्क है कि जिस प्रमाण के द्वारा यथार्थ, निश्चित और असन्दिग्ध ज्ञान की प्राप्ति सभव हो, केवल वहीं प्रमाण माना जा सकता है। अनुमान, शब्दादि प्रमाणो से प्राप्त ज्ञान मे उपर्युक्त विशेषताओ का अभाव पाया जाता है, इसलिए उन्हे प्रमाण नही माना जा सकता है। वस्तुत ज्ञेय वस्तु की सत्यता या असत्यता की ही मुख्यत ज्ञेय वस्तु का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष होना है। प्रत्यक्ष को ही ज्ञान प्राप्ति का एक मात्र प्रामाणिक साधन मानते हुए भी चार्वाको ने निश्चित रूप से प्रत्यक्ष को परिभाषित नही किया है। फिर भी चार्वाक दर्शन में प्रत्यक्ष का जो विवेचन किया गया है उसके आधार पर कहा जा सकता है कि चार्वाको के अनुसार प्रत्यक्ष वह ज्ञान है जो इन्द्रिय और अर्थ (विषय) के सन्निकर्ष से उत्पन्न होता है। प्रारम्भ मे चार्वाक केवल चाक्षुष प्रत्यक्ष को ही मानते थे किन्तु कालान्तर मे वे अन्य इन्द्रिय से उत्पन्न ज्ञान को भी प्रत्यक्ष की कोटि मे रखने लगे । इसका परिणाम यह हुआ कि चार्वाक दर्शन में प्रत्यक्ष के दो भेद स्वीकृत हुए - वाह्य तथा मानस । वाह्य प्रत्यक्ष आँख नाक, कान त्वचा तथा जिह्वा के द्वारा होता है जबकि मानस प्रत्यक्ष मानसिक अनुभूतियों के साथ मन के सयोग से होता है। इस तरह बाद मे चार्वाक दर्शन मे प्रत्यक्ष के कुल छ भेद स्वीकृत हुए - चाक्षुष, श्रौत स्पार्शन रासन घ्राणज तथा मानस । जैन दर्शन मे स्वीकृत प्रत्यक्ष की अवधारणा अन्य दर्शनो की प्रत्यक्ष की अवधारणा से भिन्न है। अन्य दर्शनो मे साधारणतया इन्द्रिय - प्रत्यक्ष को ही प्रत्यक्ष कहा गया है किन्तु जैन दर्शन मे आत्म-सापेक्ष ज्ञान को प्रत्यक्ष कहा गया है। उनके अनुसार जिस ज्ञान को आत्मा स्वयं जानता है, और जिसके लिए आत्मा को इन्द्रिय या मनरूपी माध्यम या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, वह ज्ञान प्रत्यक्ष है तथा जो ज्ञान इन्द्रिय-मन सापेक्ष है, अर्थात जिस ज्ञान के लिए आत्मा को इन्द्रिय या मन या दोनो की आवश्यकता होती है, वह ज्ञान परोक्ष होता है। प्रख्यात जैनाचार्य कुन्दकुन्द अनुसार अन्य दार्शनिक इन्द्रियजन्य ज्ञान को प्रत्यक्ष कहते है किन्तु इन्दिय अनात्म होने से परद्रव्य है। अत इन्द्रियो से उपलब्ध ज्ञान प्रत्यक्ष कैसे हो सकता है ? इससे स्पष्ट होता है कि जैन दर्शन में प्रत्यक्ष को सामान्य इन्द्रियजन्यज्ञान से भिन्न अपरोक्ष ज्ञान के अर्थ में प्रयुक्त किया गया है और प्रत्यक्ष को विशद ज्ञान कहा गया है- प्रत्यक्षस्य वैशद्य स्वरूपम् । स्पष्टता या निर्मलता या स्वच्छतापूर्वक भासित होने वाला ज्ञान विशद ज्ञान है और यही प्रत्यक्ष है। वस्तुत जैन दर्शन में प्रत्यक्ष को तीन अर्थों में परिभाषित किया गया है- 1 विशद ज्ञान (पारमार्थिक) के अर्थ मे, 2 आत्मा के अर्थ मे 3 परापेक्षारहित के अर्थ मे जैनो के अनुसार प्रत्यक्ष एक स्पष्ट सविकल्पक तथा व्यभिचाररहित ज्ञान है, जो सामान्यरूप द्रव्य और विशेषरूप पर्याय तथा अपने स्वरूप का भी बोध कराता है"प्रत्यक्ष लक्षण प्राहु स्पष्ट साकारमजसा । द्रव्यपर्यायसामान्य विशेषार्थात्म-वेदनम् ।।" जो ज्ञान केवल आत्मा से होता है, उसे प्रत्यक्ष कहते है। अज्ञ, ज्ञा और व्याप् धातुएँ एकार्थवाचक है, इसलिए अक्ष का अर्थ है आत्मा - अक्ष्णोति, व्याप्नोति जानातीत्यक्ष आत्मा । तमेव प्रतिनियत प्रत्यक्षम् ।"5 अर्थात् मन, इन्द्रिय, परोपदेश आदि परद्रव्यो की अपेक्षा रखे बिना
प्रत्यक्ष प्रमाण भारतीय दर्शन में स्वीकृत समस्त प्रमाणो मे प्रत्यक्ष प्रमाण का सर्वप्रथम और सर्वप्रमुख स्थान है। यह अन्य समस्त प्रमाणो का उपजीव्य है। इसीलिए सम्पूर्ण भारतीय दार्शनिक वाडमय मे प्रत्यक्ष प्रमाण की विस्तृत विवेचना पायी जाती है। जिस प्रकार से प्रमाण शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाकरण दोनो के लिए उपलब्ध होता है और इन दो विभिन्न अर्थो मे भी अकेला प्रमाण शब्द का प्रयोग आधारहीन नहीं कहा जा सकता ठीक उसी प्रकार प्रमाणो के अन्तर्गत आने वाले प्रत्यक्ष प्रमाण मे प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग - इन्द्रिय जन्य प्रमा उस प्रमा के करण तथा उस प्रमा के विषयभूत पदार्थ आदि तीन विभिन्न अर्थो मे होता है। इसलिए इन तीनो मे भी अकेला प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग आधारशून्य नही कहा जा सकता। यह प्रत्यक्ष शब्द की तीन विभिन्न व्युत्पत्तियो पर आधारित होता है जिनका विवेचन अधोवत् है। प्रथम व्युत्पत्ति के अनुसार प्रति विषय प्रति गतम् अक्षम् इन्द्रिय यस्मै प्रयोजनाय तत् प्रत्यक्षम् - एक प्रत्यक्ष शब्द इन्द्रियजन्य ज्ञान का बोधक होता है क्योकि उसी ज्ञानात्मक प्रयोजन को सम्पन्न करने के लिए इन्द्रिय विषय के प्रति गमन करता है। द्वितीय व्युत्पत्ति के अनुसार प्रतिगतम् - विषय प्रतिगतम् अर्थात विषयसन्निकृष्टम् अक्ष प्रत्यक्षम् अर्थात् प्रत्यक्ष शब्द प्रत्यक्ष प्रमा के करण का बोधक होता है, क्योकि विषयसन्निकृष्ट इन्द्रिय को ही मुख्यत प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है। तृतीय व्युत्पत्ति के अनुसार प्रति-य विषय प्रति गतम् अक्ष स प्रत्यक्ष ।" अर्थात प्रत्यक्ष शब्द प्रत्यक्ष प्रमा के विषयभूत अर्थ का बोधक होता है क्योकि जिस विषय के प्रति इन्द्रिय का गमन होता है अर्थात जो अर्थ इन्द्रियसन्निकृष्ट होता है वही प्रत्यक्ष प्रमा का विषय होता है। अत विभिन्न व्युत्पत्तियों के आधार पर प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग प्रत्यक्ष प्रमा, प्रत्यक्षप्रमाकरण, तथा प्रत्यक्षप्रमा के विषय के रूप में होने पर भी किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। सम्पूर्ण भारतीय दर्शन में प्रत्यक्ष और अर्थापत्ति को छोड़कर अन्य किसी शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाण के लिए नही हुआ है। जैसे अनुमान उपमान शब्द व अनुपलब्धि से जन्य प्रमा को क्रमश अनुमिति उपमिति शाब्दी प्रमा व अभाव - प्रमा व इनके साधन को क्रमश अनुमान, उपमान शब्द व अनुपलब्धि कहा जाता है। किन्तु प्रत्यक्ष और अर्थापत्ति शब्द का प्रयोग प्रमा और प्रमाण इन दोनो अर्थो मे होता है। पीनो देवदत्तो दिवा न भुङ्क्ते इस आधार पर रात्रौ भुङ्क्ते जो प्रमा होती है वह अर्थापत्ति है और उस प्रमा को उत्पन्न करने वाले पुष्टत्वज्ञान रूप करण को भी अर्थापत्ति कहते है। किन्तु केशव मिश्र प्रभृति कुछ नैयायिक प्रमा व प्रमाण दोनो के लिए प्रत्यक्ष' शब्द का प्रयोग किये जाने का विरोध करते हैं। इनके अनुसार प्रत्यक्ष से व्युत्पन्न ज्ञान के लिए "साक्षात्कार' शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए । प्रत्यक्ष शब्द का प्रयोग केवल प्रत्यक्ष प्रमाण के लिए ही किया जाना चाहिए - साक्षात्कारिप्रमाकरण प्रत्यक्षम् । साक्षात्कारिणी च प्रमा, सा एवोच्यते या इन्द्रियजा । तीन लेकिन अधिकाश विद्वान प्रत्यक्ष को प्रमा व प्रमाण दोनो का बोधक मानते है । यूँ तो प्रमाणो के विचार - प्रसग मे सभी प्रमाण प्रमुख है परन्तु प्रत्यक्ष ही एक ऐसा प्रमाण है जिसका विवेचन सभी भारतीय दर्शनो मे हुआ है और इसी लिए यहाँ विभिन्न दृष्टियो से प्रत्यक्ष की परिभाषा प्रस्तुत की गयी है। सर्वप्रथम यहाँ यह बताया गया है कि प्रत्यक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई है? कहा गया है कि प्रत्यक्ष शब्द प्रति और अक्ष इन दो शब्दो के योग से बना है जिसमे प्रति का अर्थ है समीप तथा अक्ष का अर्थ आँख से लिया जाता है। यहाॅ आँख के साथ-साथ अन्य इन्द्रियॉ भी शामिल हो सकती है। अत जो वस्तु इन्द्रियो के समाने हो उससे प्राप्त ज्ञान को यहाँ प्रत्यक्ष कहा गया है। अर्थात 'इन्द्रियार्थसन्निकर्षजन्य ज्ञान प्रत्यक्षम्" इस परिभाषा के विश्लेषण से हम पाते है कि इसमे तीन महत्वपूर्ण तत्त्व है- इन्द्रिय अर्थ और सन्निकर्ष । प्रत्यक्ष ज्ञान की उत्पत्ति के लिए अर्थ के साथ इन्द्रिय के सन्निकर्ष का होना परम आवश्यक है अन्यथा प्रत्यक्ष ज्ञान की प्राप्ति नही हो सकती। इसीलिए प्रत्यक्ष की उक्त परिभाषा स्वीकृत की गयी । प्रत्यक्ष की इसी परिभाषा को मानने वाले दार्शनिको मे हैं- न्याय दर्शन के प्रवर्तक गौतम वैशेषिक भाट्ट मीमासक एव कई अन्य दार्शनिक । लेकिन प्रत्यक्ष की उपर्युक्त परिभाषा ज्यादा दिनो तक टिक नहीं पायी और कई अन्य दर्शनो ने इसमे 'अतिव्याप्ति दोष बताकर उसे मानने से अस्वीकार कर दिया। इनके अनुसार चूँकि प्रत्यक्ष का सम्बन्ध साक्षात् प्रतीति से है, जिसे हम "इमिडियट नालेज कहते है अत साक्षात्प्रतीति को ही प्रत्यक्ष मानना चाहिए । प्रत्यक्ष की इस परिभाषा को मानने वालो मे नव्य - नैयायिक प्रभाकर मीमासक तथा वेदान्ती आते है। नव्य-न्याय के प्रवर्तक गगेश उपाध्याय ने 'ज्ञानाकरणक ज्ञान प्रत्यक्षम्" माना है। अर्थात् प्रत्यक्ष मे किसी ऐसे विषय की साक्षात् प्रतीति होती है, जिसमे मन का सयोग रहता है। परन्तु कुछ अद्वैत वेदान्ती अतरिन्द्रिय मन को नहीं मानते है। इसी प्रकार बौद्ध दार्शनिक कहते है कि "Perception is the knowledge of the unique particular object that is given directly " जीतवनही जीम मदेमश्र इस तरह हम देखते है कि भिन्न-भिन्न दर्शनो मे प्रत्यक्ष का भिन्न-भिन्न लक्षण निर्धारित किया गया हैं जिनका विवेचन इस प्रकार है । प्रत्यक्ष का लक्षण चार्वाक दर्शन मे केवल प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण माना गया है। 'बृहस्पतिसूत्र' मे स्पष्ट कहा गया है। प्रत्यक्षमेवेक प्रमाणम् । अर्थात प्रत्यक्ष ही एकमात्र प्रमाण है। प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण मानने के पीछे चार्वाको का तर्क है कि जिस प्रमाण के द्वारा यथार्थ, निश्चित और असन्दिग्ध ज्ञान की प्राप्ति सभव हो, केवल वहीं प्रमाण माना जा सकता है। अनुमान, शब्दादि प्रमाणो से प्राप्त ज्ञान मे उपर्युक्त विशेषताओ का अभाव पाया जाता है, इसलिए उन्हे प्रमाण नही माना जा सकता है। वस्तुत ज्ञेय वस्तु की सत्यता या असत्यता की ही मुख्यत ज्ञेय वस्तु का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष होना है। प्रत्यक्ष को ही ज्ञान प्राप्ति का एक मात्र प्रामाणिक साधन मानते हुए भी चार्वाको ने निश्चित रूप से प्रत्यक्ष को परिभाषित नही किया है। फिर भी चार्वाक दर्शन में प्रत्यक्ष का जो विवेचन किया गया है उसके आधार पर कहा जा सकता है कि चार्वाको के अनुसार प्रत्यक्ष वह ज्ञान है जो इन्द्रिय और अर्थ के सन्निकर्ष से उत्पन्न होता है। प्रारम्भ मे चार्वाक केवल चाक्षुष प्रत्यक्ष को ही मानते थे किन्तु कालान्तर मे वे अन्य इन्द्रिय से उत्पन्न ज्ञान को भी प्रत्यक्ष की कोटि मे रखने लगे । इसका परिणाम यह हुआ कि चार्वाक दर्शन में प्रत्यक्ष के दो भेद स्वीकृत हुए - वाह्य तथा मानस । वाह्य प्रत्यक्ष आँख नाक, कान त्वचा तथा जिह्वा के द्वारा होता है जबकि मानस प्रत्यक्ष मानसिक अनुभूतियों के साथ मन के सयोग से होता है। इस तरह बाद मे चार्वाक दर्शन मे प्रत्यक्ष के कुल छ भेद स्वीकृत हुए - चाक्षुष, श्रौत स्पार्शन रासन घ्राणज तथा मानस । जैन दर्शन मे स्वीकृत प्रत्यक्ष की अवधारणा अन्य दर्शनो की प्रत्यक्ष की अवधारणा से भिन्न है। अन्य दर्शनो मे साधारणतया इन्द्रिय - प्रत्यक्ष को ही प्रत्यक्ष कहा गया है किन्तु जैन दर्शन मे आत्म-सापेक्ष ज्ञान को प्रत्यक्ष कहा गया है। उनके अनुसार जिस ज्ञान को आत्मा स्वयं जानता है, और जिसके लिए आत्मा को इन्द्रिय या मनरूपी माध्यम या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, वह ज्ञान प्रत्यक्ष है तथा जो ज्ञान इन्द्रिय-मन सापेक्ष है, अर्थात जिस ज्ञान के लिए आत्मा को इन्द्रिय या मन या दोनो की आवश्यकता होती है, वह ज्ञान परोक्ष होता है। प्रख्यात जैनाचार्य कुन्दकुन्द अनुसार अन्य दार्शनिक इन्द्रियजन्य ज्ञान को प्रत्यक्ष कहते है किन्तु इन्दिय अनात्म होने से परद्रव्य है। अत इन्द्रियो से उपलब्ध ज्ञान प्रत्यक्ष कैसे हो सकता है ? इससे स्पष्ट होता है कि जैन दर्शन में प्रत्यक्ष को सामान्य इन्द्रियजन्यज्ञान से भिन्न अपरोक्ष ज्ञान के अर्थ में प्रयुक्त किया गया है और प्रत्यक्ष को विशद ज्ञान कहा गया है- प्रत्यक्षस्य वैशद्य स्वरूपम् । स्पष्टता या निर्मलता या स्वच्छतापूर्वक भासित होने वाला ज्ञान विशद ज्ञान है और यही प्रत्यक्ष है। वस्तुत जैन दर्शन में प्रत्यक्ष को तीन अर्थों में परिभाषित किया गया है- एक विशद ज्ञान के अर्थ मे, दो आत्मा के अर्थ मे तीन परापेक्षारहित के अर्थ मे जैनो के अनुसार प्रत्यक्ष एक स्पष्ट सविकल्पक तथा व्यभिचाररहित ज्ञान है, जो सामान्यरूप द्रव्य और विशेषरूप पर्याय तथा अपने स्वरूप का भी बोध कराता है"प्रत्यक्ष लक्षण प्राहु स्पष्ट साकारमजसा । द्रव्यपर्यायसामान्य विशेषार्थात्म-वेदनम् ।।" जो ज्ञान केवल आत्मा से होता है, उसे प्रत्यक्ष कहते है। अज्ञ, ज्ञा और व्याप् धातुएँ एकार्थवाचक है, इसलिए अक्ष का अर्थ है आत्मा - अक्ष्णोति, व्याप्नोति जानातीत्यक्ष आत्मा । तमेव प्रतिनियत प्रत्यक्षम् ।"पाँच अर्थात् मन, इन्द्रिय, परोपदेश आदि परद्रव्यो की अपेक्षा रखे बिना
'फ़ीफ़ा ने 2010 विश्व कप के लिए ली थी घूस' अमरीकी एटॉर्नी जनरल लॉरेटा लिंच के मुताबिक फ़ीफ़ा अधिकारियों ने साल 2010 के विश्व कप के आयोजन के अधिकार दक्षिण अफ़्रीका को दिलाने के लिए कथित तौर पर घूस लिया था. लिंच विश्व फ़ुटबॉल की संचालक संस्था फ़ीफ़ा की भ्रष्टाचार के मामले में चल रही जाँच का ब्योरा दे रही थीं. उन्होंने फ़ीफ़ा पर 2011 के अध्यक्ष चुनाव और 2016 में अमरीका में होने वाले कोपा अमरीकी टूर्नामेंट में भी घूसखोरी का आरोप लगाया. लिंच ने कहा, "फ़ीफ़ा के अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और घूस ली. उन्होंने बार-बार, साल दर साल, एक के बाद एक टूर्नामेंटों के दौरान ऐसा किया. " इससे पहले फ़ीफ़ा के सात खेल अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप में स्विट्जरलैंड में गिरफ़्तार किए गए थे. इन सात अधिकारियों समेत फ़ीफ़ा के 14 अधिकारियों पर घूस और कमीशन लेने के आरोप की जाँच हो रही है. माना जा रहा है कि पिछले 24 सालों में 15 करोड़ डॉलर कथित तौर पर घूस या कमीशन के रूप में लिए गए हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
'फ़ीफ़ा ने दो हज़ार दस विश्व कप के लिए ली थी घूस' अमरीकी एटॉर्नी जनरल लॉरेटा लिंच के मुताबिक फ़ीफ़ा अधिकारियों ने साल दो हज़ार दस के विश्व कप के आयोजन के अधिकार दक्षिण अफ़्रीका को दिलाने के लिए कथित तौर पर घूस लिया था. लिंच विश्व फ़ुटबॉल की संचालक संस्था फ़ीफ़ा की भ्रष्टाचार के मामले में चल रही जाँच का ब्योरा दे रही थीं. उन्होंने फ़ीफ़ा पर दो हज़ार ग्यारह के अध्यक्ष चुनाव और दो हज़ार सोलह में अमरीका में होने वाले कोपा अमरीकी टूर्नामेंट में भी घूसखोरी का आरोप लगाया. लिंच ने कहा, "फ़ीफ़ा के अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और घूस ली. उन्होंने बार-बार, साल दर साल, एक के बाद एक टूर्नामेंटों के दौरान ऐसा किया. " इससे पहले फ़ीफ़ा के सात खेल अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप में स्विट्जरलैंड में गिरफ़्तार किए गए थे. इन सात अधिकारियों समेत फ़ीफ़ा के चौदह अधिकारियों पर घूस और कमीशन लेने के आरोप की जाँच हो रही है. माना जा रहा है कि पिछले चौबीस सालों में पंद्रह करोड़ डॉलर कथित तौर पर घूस या कमीशन के रूप में लिए गए हैं.
रेमो डिसूजा की पहचान कोरियोग्राफर के तौर पर होती है। उन्होंने कई फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। प्रभुदेवा मशहूर कोरियोग्राफर हैं। प्रभुदेवा ने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया है। अहमद खान ने कोरियोग्राफी के अलावा फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। गणेश आचार्य पॉपुलर कोरियोग्राफर में से एक हैं। उन्होंने फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। बास्को मार्टिस ने भी फिल्म का डायरेक्शन किया है। हालांकि, वह कोरियोग्राफर हैं। चिन्नी प्रकाश ने कोरियोग्राफी से करियर शुर किया था। उन्होंने फिल्म का डायरेक्शन भी किया। इमरान सरधरिया ने बतौर कोरियोग्राफर पहचान बनाई है। हालांकि, उन्होंने फिल्म का डायरेक्शन भी किया है। कमल हासन ने कोरियोग्राफर बनकर करियर शुरू किया था। उन्होंने फिल्मों को डायरेक्ट भी किया। गुरु दत्त ने करियर की शुरुआत कोरियोग्राफी से की थी। उन्होंने फिल्मों का डायरेक्शन भी किया था। वैभवी मर्चेंट भी जानी-मानी कोरियाग्राफर हैं। बताया जा रहै है कि वह फिल्म डायरेक्ट करने वाली हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading! Next: इस हफ्ते ट्रोल्स के हत्थे चढ़े ये स्टार्स!
रेमो डिसूजा की पहचान कोरियोग्राफर के तौर पर होती है। उन्होंने कई फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। प्रभुदेवा मशहूर कोरियोग्राफर हैं। प्रभुदेवा ने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया है। अहमद खान ने कोरियोग्राफी के अलावा फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। गणेश आचार्य पॉपुलर कोरियोग्राफर में से एक हैं। उन्होंने फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। बास्को मार्टिस ने भी फिल्म का डायरेक्शन किया है। हालांकि, वह कोरियोग्राफर हैं। चिन्नी प्रकाश ने कोरियोग्राफी से करियर शुर किया था। उन्होंने फिल्म का डायरेक्शन भी किया। इमरान सरधरिया ने बतौर कोरियोग्राफर पहचान बनाई है। हालांकि, उन्होंने फिल्म का डायरेक्शन भी किया है। कमल हासन ने कोरियोग्राफर बनकर करियर शुरू किया था। उन्होंने फिल्मों को डायरेक्ट भी किया। गुरु दत्त ने करियर की शुरुआत कोरियोग्राफी से की थी। उन्होंने फिल्मों का डायरेक्शन भी किया था। वैभवी मर्चेंट भी जानी-मानी कोरियाग्राफर हैं। बताया जा रहै है कि वह फिल्म डायरेक्ट करने वाली हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading! Next: इस हफ्ते ट्रोल्स के हत्थे चढ़े ये स्टार्स!
भोपालः मध्यप्रदेश में ठंड ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को भोपाल का तापमान पचमढ़ी से भी कम रहा। वहीं उत्तर भारत में जारी बर्फबारी की वजह से रविवार को भोपाल में रात का तापमान सामान्य से 3 डिग्री नीचे 13.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। पचमढ़ी में तापमान 15.2 डिग्री रहा। आठ साल में ऐसा पहली बार हुआ है। जब नवंबर के पहले दिन की रात इतनी ठंडी रही हो। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले साल सिर्फ 19 नवंबर को पारा 13.8 डिग्री दर्ज हुआ था। जो कि उस महीने सबसे कम था। अगले एक-दो दिन ऐसी ही ठंड रहने की संभावना है, तो वहीं प्रदेश में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 12.60 उमरिया और नौगांव में 13.0-13.10 डिग्री तापमान रहा। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार नवंबर से जम्मू-कश्मीर के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा। जैसे-जैसे यह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की ओर शिफ्ट होगा ठंड का असर बढ़ता जाएगा। इसी तरह तापमान में भी लगातार गिरावट आती जाएगी। धीरे-धीरे दिन का तापमान 30 डिग्री से कम होगा और रात का 16 से 18 के बीच रहेगा। नवंबर और दिसंबर के पहले हफ्ते तक गुलाबी ठंड रहेगी। जनवरी के आखिरी तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। जनवरी में पाला पड़ने का अनुमान है। इसका असर पहले से तीसरे सप्ताह तक रहेगा। वहीं दिसंबर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में ओला वृष्टि की संभावनाएं जताई जा रही है।
भोपालः मध्यप्रदेश में ठंड ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को भोपाल का तापमान पचमढ़ी से भी कम रहा। वहीं उत्तर भारत में जारी बर्फबारी की वजह से रविवार को भोपाल में रात का तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे तेरह.पाँच डिग्री रिकॉर्ड हुआ। पचमढ़ी में तापमान पंद्रह.दो डिग्री रहा। आठ साल में ऐसा पहली बार हुआ है। जब नवंबर के पहले दिन की रात इतनी ठंडी रही हो। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले साल सिर्फ उन्नीस नवंबर को पारा तेरह.आठ डिग्री दर्ज हुआ था। जो कि उस महीने सबसे कम था। अगले एक-दो दिन ऐसी ही ठंड रहने की संभावना है, तो वहीं प्रदेश में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां पारा बारह.साठ उमरिया और नौगांव में तेरह.शून्य-तेरह.दस डिग्री तापमान रहा। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार नवंबर से जम्मू-कश्मीर के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा। जैसे-जैसे यह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की ओर शिफ्ट होगा ठंड का असर बढ़ता जाएगा। इसी तरह तापमान में भी लगातार गिरावट आती जाएगी। धीरे-धीरे दिन का तापमान तीस डिग्री से कम होगा और रात का सोलह से अट्ठारह के बीच रहेगा। नवंबर और दिसंबर के पहले हफ्ते तक गुलाबी ठंड रहेगी। जनवरी के आखिरी तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। जनवरी में पाला पड़ने का अनुमान है। इसका असर पहले से तीसरे सप्ताह तक रहेगा। वहीं दिसंबर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में ओला वृष्टि की संभावनाएं जताई जा रही है।
हीटिंग की बड़ी पसंद के संदर्भ मेंउपकरण खरीदारों अक्सर यह तय नहीं कर सकते कि कौन सा मॉडल वरीयता देना है। हाल ही में, विशेषज्ञों ने दीवार हीटर बिजली अर्थव्यवस्था "अच्छी गर्मी" खरीदने की सलाह दी। आप कई उपभोक्ताओं के उदाहरण का पालन कर सकते हैं और इस डिवाइस को अपने घर के लिए खरीद सकते हैं। यह समझने के लिए कि इसे कैसे हल किया जाएप्रश्न, आपको उन कार्यों को निर्धारित करने की आवश्यकता है जो डिवाइस को सौंपी जाएंगी। आप इकाई को अतिरिक्त या बुनियादी हीटिंग के रूप में उपयोग कर सकते हैं। यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि डिवाइस कहां स्थित होगा और क्या इसकी गतिशीलता महत्वपूर्ण है। यदि आप दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर को खरीदने का फैसला करते हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि आधुनिक बाजारों द्वारा कौन सी किस्मों का प्रतिनिधित्व किया जाता है, और कमरे में तापमान बढ़ाने के लिए उपकरणों के पेशेवरों और विपक्ष क्या हैं। यदि आप वॉटर हीटर खरीदना चाहते हैंदीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक, फिर, सबसे अधिक संभावना है कि यह डिवाइस कमरे में तापमान नहीं बढ़ा सकता है, लेकिन यह आपको गर्म पानी प्रदान कर सकता है। सबसे आम आज 4 मुख्य प्रकार के हीटर हैं, अर्थात् अवरक्त रेडिएटर, तेल कूलर, प्रशंसक हीटर और संवहनी। यह तय करने के लिए कि सूचीबद्ध उपकरणों का कौन सा संस्करण चुनने के लिए, आपको यह पता लगाने के लिए कि कौन सा सही है, आपको प्रत्येक हीटिंग डिवाइस से परिचित होना चाहिए। दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर का चयन करना,आधुनिक उपभोक्ता शायद ही कभी तेल की विविधता पसंद करता है। कंपनी "टर्मिया" सहित उत्पादित ऐसी इकाइयां एक हीटिंग सिस्टम हैं, क्योंकि हीटिंग तत्व तेल है। हीट वाहक गरम किया जाता है, और लंबे समय के बाद एक आरामदायक इनडोर माइक्रोक्रिमिट बनाए रखता है। डिज़ाइन में टाइमर और थर्मोस्टेट होने पर, इस तरह के उपकरणों के फायदों में आग सुरक्षा की पहचान की जा सकती है, डिवाइस को स्वचालित रूप से बंद करने की क्षमता। उपभोक्ता तेल कूलर भी चुनते हैं क्योंकि वे पूरी तरह से बेकार काम करते हैं। यदि आप दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर में रूचि रखते हैं, तो यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस रूप में तेल रेडिएटर शायद ही कभी महसूस किए जाते हैं। अन्य चीजों के अलावा, उनके पास एक महत्वपूर्ण कमी है, जो इस तथ्य में व्यक्त की गई है कि डिवाइस की धातु की सतह को 100 डिग्री तक गरम किया जा सकता है। यह घर में खतरनाक हो सकता है जहां बच्चे और पालतू जानवर हैं। कुछ मॉडल भी सतह को 150 डिग्री तक गर्म करने का सुझाव देते हैं। यह जलने का कारण बन सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप उपकरणों के पास कोई ज्वलनशील वस्तुएं न हों, आपको अथक रूप से काम करना होगा। यदि आप अभी भी एक समान मॉडल चुनने का निर्णय लेते हैं, तो विशेषज्ञ अंतर्निहित प्रशंसकों से लैस विकल्पों को पसंद करते हैं। वे गर्मी विनिमय की प्रक्रिया में तेजी लाने में सक्षम हैं, यानी, डिवाइस स्विच करने के बाद कमरे को तेज़ी से गर्म करता है। जैसे ही सेट तापमान तक पहुंच जाता है, प्रशंसक बंद हो जाता है, जबकि हीटर सामान्य रूप से काम करना जारी रख सकता है। दीवार तेल इलेक्ट्रिक हीटर नहीं हैंविशेष रखरखाव की आवश्यकता है। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सतह को बंद करने और ठंडा करने के बाद ही इस तरह के डिवाइस को साफ करना आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, एक शुष्क मुलायम रग का उपयोग करें। ऑपरेशन की प्रक्रिया में, आपको याद रखना चाहिए कि ऐसे उपकरणों को बाथरूम में घर के अंदर कपड़े सूखने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, और पावर कॉर्ड गर्म रेडिएटर पर नहीं होना चाहिए, इससे प्लास्टिक के खोल की पिघलने से रोका जा सकेगा। डिवाइस को विशेष रूप से सीधे स्थिति में उपयोग करें, और एक्सटेंशन कॉर्ड के उपयोग की अनुशंसा नहीं की जाती है, क्योंकि इससे डिवाइस की अति ताप हो सकती है। गर्म स्थान का क्षेत्र 8 वर्ग मीटर से अधिक होना चाहिए। यदि आप बिजली बचाने में रुचि रखते हैं, तो इस समाधान के लिए तेल हीटर को सर्वश्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता है। यदि आप दीवार माउंट का उपयोग करना चाहते हैंबिजली के हीटर और कैसे आंतरिक स्थान स्थापित करने के बाद बदलने के लिए के बारे में चिंतित हैं, यह convector चयन करने के लिए, के रूप में यह शेष हीटर के बीच सबसे सफल, अन्य लोकप्रिय prozvoditeley के बीच ब्रांड "Teplofon" का चयन कर सकते हैं सबसे अच्छा है। शक्ति और आकार के मामले में, यह डिवाइस भी जीतता है, जबकि आप जो रंग चुन सकते हैं वह कमरे में प्रचलित रंगों पर निर्भर करता है। यदि आप दीवार पर इतने पतले हीटर स्थापित करते हैं, तो आप अंतरिक्ष को बचा सकते हैं, क्योंकि यह आकार में कॉम्पैक्ट है। हीटर इलेक्ट्रिक घरेलू दीवार को ध्यान में रखते हुए, विशेषज्ञ हमेशा कन्वेयर पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। एक हीटिंग तत्व की भूमिका में हीटर होता है, जिसे धातु घुमावदार रॉड के रूप में निर्मित किया जाता है। इसमें धातु सुरक्षा ट्यूब शामिल है, जो एक सुरक्षित आवास में है। गर्मी संवहन का कानून है, जिससे गर्म हवा ऊपर की ओर वृद्धि होगी, ठंडी हवा के प्रवाह के लिए अंतरिक्ष को मुक्त कराने के अनुसार वितरित किया जाएगा। उपयोग की आसानी के लिए, ऐसे हीटर थर्मोस्टैट से लैस होते हैं, जो एक निश्चित स्तर पर आवश्यक तापमान को बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि आपको नहीं पता कि क्या चुनना है - तेलथर्मोस्टेट के साथ डिवाइस या वॉल-माउंटेड इलेक्ट्रिक हीटर, जिसे ऊपर वर्णित किया गया था, तो आपको दूसरा विकल्प पसंद करना चाहिए, जो कि अगर आप विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा के मुद्दे में रूचि रखते हैं तो यह सच है। यह संवहनी और तेल-प्रकार रेडिएटर के बीच मुख्य अंतर है। कन्वर्टर्स में ऐसा प्रभावशाली तापमान नहीं होता है, जो जलने में योगदान दे सकता है। वे निर्विवाद हैं, देखभाल और पूरी तरह से फायरप्रूफ की मांग नहीं कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के मामले में, इन उपकरणों को तेल कूलर से लाभ होता है। दीवार पेंटिंग्स-हीटर बिजली हैं,शायद, दूसरों के बीच में सबसे फायदेमंद विकल्प है, लेकिन यह समझ में आता है अपने घर में एक आरामदायक वातावरण बनाने के लिए अन्य प्रकार के डिवाइस पर विचार करना। आप के लिए बचत का कार्य विशेष रूप से तीव्र है, तो यह एक हीटर है कि ऊपर वर्णित हीटर की भागीदारी के साथ दौड़ में अग्रणी है का चयन करने के लिए आवश्यक है। डिवाइस का यह संस्करण उपभोक्ता के लिए सबसे सस्ती है और प्रदर्शन करने में सबसे आसान है। प्रशंसक हीटर के मुख्य लाभ की भूमिका में कमरे की हीटिंग दर है, जिसमें एक छोटा सा क्षेत्र है। कन्वर्टर्स और ऑयल कूलर की तुलना में ये डिवाइस छोटे होते हैं, जो कि मुक्त स्थान की कमी वाले अपार्टमेंट के लिए महत्वपूर्ण है। वे सार्वभौमिक हैं, यानी, उन्हें दीवार पर भी कमरे में कहीं भी रखा जा सकता है। इस डिवाइस में, ठंडी हवा, चमक बिजली हेलिक्स की हीटिंग द्वारा उत्पादित जबकि धाराओं एक प्रशंसक जो आवास में घूमती द्वारा हीटिंग क्षेत्र में खिलाया जाता है। हैं, तो आप अभी भी बचत और चुप में रुचि रखते हैं के अलावा, आप एक बिजली की दीवार हीटर फिल्म का चयन करना चाहिए, लेकिन जो लोग प्रशंसक की आवाज से डरते नहीं हैं के लिए, डिवाइस पूरी तरह से सूट करेगा। तुम भी धूल की एक अप्रिय गंध, जो आपरेशन सर्पिल के दौरान 80 डिग्री पर जलता की उपस्थिति की संभावना के साथ सामना कर सकते हैं। उपभोक्ता भी ऑक्सीजन जलने के बारे में शिकायत करते हैं, जब हीटर लंबे समय तक काम करता है। दीवार इलेक्ट्रिक हीटर घुड़सवारअक्सर इन्फ्रारेड उपकरणों के आधार पर प्रदर्शन किया जाता है। आज वे सबसे उन्नत और कुशल, और आर्थिक भी हैं, आप सबसे लोकप्रिय कंपनी थर्मो ग्लास चुन सकते हैं। क्वार्ट्ज रेडिएटर हवा को गर्म नहीं करते हैं, बल्कि वस्तुओं और यहां तक कि व्यक्ति स्वयं भी। ऐसे हीटर की मदद से, कमरे को गर्म करने के लिए अतिरिक्त बिजली बर्बाद किए बिना स्थानीय हीटिंग जोन बनाना संभव है। छत पर भी ऐसी लचीली दीवार-घुड़सवार इलेक्ट्रिक हीटर स्थापित किया जा सकता है। एक दोष के रूप में केवल कीमत है, जो डिवाइस के संचालन में उचित है।
हीटिंग की बड़ी पसंद के संदर्भ मेंउपकरण खरीदारों अक्सर यह तय नहीं कर सकते कि कौन सा मॉडल वरीयता देना है। हाल ही में, विशेषज्ञों ने दीवार हीटर बिजली अर्थव्यवस्था "अच्छी गर्मी" खरीदने की सलाह दी। आप कई उपभोक्ताओं के उदाहरण का पालन कर सकते हैं और इस डिवाइस को अपने घर के लिए खरीद सकते हैं। यह समझने के लिए कि इसे कैसे हल किया जाएप्रश्न, आपको उन कार्यों को निर्धारित करने की आवश्यकता है जो डिवाइस को सौंपी जाएंगी। आप इकाई को अतिरिक्त या बुनियादी हीटिंग के रूप में उपयोग कर सकते हैं। यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि डिवाइस कहां स्थित होगा और क्या इसकी गतिशीलता महत्वपूर्ण है। यदि आप दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर को खरीदने का फैसला करते हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि आधुनिक बाजारों द्वारा कौन सी किस्मों का प्रतिनिधित्व किया जाता है, और कमरे में तापमान बढ़ाने के लिए उपकरणों के पेशेवरों और विपक्ष क्या हैं। यदि आप वॉटर हीटर खरीदना चाहते हैंदीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक, फिर, सबसे अधिक संभावना है कि यह डिवाइस कमरे में तापमान नहीं बढ़ा सकता है, लेकिन यह आपको गर्म पानी प्रदान कर सकता है। सबसे आम आज चार मुख्य प्रकार के हीटर हैं, अर्थात् अवरक्त रेडिएटर, तेल कूलर, प्रशंसक हीटर और संवहनी। यह तय करने के लिए कि सूचीबद्ध उपकरणों का कौन सा संस्करण चुनने के लिए, आपको यह पता लगाने के लिए कि कौन सा सही है, आपको प्रत्येक हीटिंग डिवाइस से परिचित होना चाहिए। दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर का चयन करना,आधुनिक उपभोक्ता शायद ही कभी तेल की विविधता पसंद करता है। कंपनी "टर्मिया" सहित उत्पादित ऐसी इकाइयां एक हीटिंग सिस्टम हैं, क्योंकि हीटिंग तत्व तेल है। हीट वाहक गरम किया जाता है, और लंबे समय के बाद एक आरामदायक इनडोर माइक्रोक्रिमिट बनाए रखता है। डिज़ाइन में टाइमर और थर्मोस्टेट होने पर, इस तरह के उपकरणों के फायदों में आग सुरक्षा की पहचान की जा सकती है, डिवाइस को स्वचालित रूप से बंद करने की क्षमता। उपभोक्ता तेल कूलर भी चुनते हैं क्योंकि वे पूरी तरह से बेकार काम करते हैं। यदि आप दीवार पर चलने वाले इलेक्ट्रिक हीटर में रूचि रखते हैं, तो यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस रूप में तेल रेडिएटर शायद ही कभी महसूस किए जाते हैं। अन्य चीजों के अलावा, उनके पास एक महत्वपूर्ण कमी है, जो इस तथ्य में व्यक्त की गई है कि डिवाइस की धातु की सतह को एक सौ डिग्री तक गरम किया जा सकता है। यह घर में खतरनाक हो सकता है जहां बच्चे और पालतू जानवर हैं। कुछ मॉडल भी सतह को एक सौ पचास डिग्री तक गर्म करने का सुझाव देते हैं। यह जलने का कारण बन सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप उपकरणों के पास कोई ज्वलनशील वस्तुएं न हों, आपको अथक रूप से काम करना होगा। यदि आप अभी भी एक समान मॉडल चुनने का निर्णय लेते हैं, तो विशेषज्ञ अंतर्निहित प्रशंसकों से लैस विकल्पों को पसंद करते हैं। वे गर्मी विनिमय की प्रक्रिया में तेजी लाने में सक्षम हैं, यानी, डिवाइस स्विच करने के बाद कमरे को तेज़ी से गर्म करता है। जैसे ही सेट तापमान तक पहुंच जाता है, प्रशंसक बंद हो जाता है, जबकि हीटर सामान्य रूप से काम करना जारी रख सकता है। दीवार तेल इलेक्ट्रिक हीटर नहीं हैंविशेष रखरखाव की आवश्यकता है। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सतह को बंद करने और ठंडा करने के बाद ही इस तरह के डिवाइस को साफ करना आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, एक शुष्क मुलायम रग का उपयोग करें। ऑपरेशन की प्रक्रिया में, आपको याद रखना चाहिए कि ऐसे उपकरणों को बाथरूम में घर के अंदर कपड़े सूखने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, और पावर कॉर्ड गर्म रेडिएटर पर नहीं होना चाहिए, इससे प्लास्टिक के खोल की पिघलने से रोका जा सकेगा। डिवाइस को विशेष रूप से सीधे स्थिति में उपयोग करें, और एक्सटेंशन कॉर्ड के उपयोग की अनुशंसा नहीं की जाती है, क्योंकि इससे डिवाइस की अति ताप हो सकती है। गर्म स्थान का क्षेत्र आठ वर्ग मीटर से अधिक होना चाहिए। यदि आप बिजली बचाने में रुचि रखते हैं, तो इस समाधान के लिए तेल हीटर को सर्वश्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता है। यदि आप दीवार माउंट का उपयोग करना चाहते हैंबिजली के हीटर और कैसे आंतरिक स्थान स्थापित करने के बाद बदलने के लिए के बारे में चिंतित हैं, यह convector चयन करने के लिए, के रूप में यह शेष हीटर के बीच सबसे सफल, अन्य लोकप्रिय prozvoditeley के बीच ब्रांड "Teplofon" का चयन कर सकते हैं सबसे अच्छा है। शक्ति और आकार के मामले में, यह डिवाइस भी जीतता है, जबकि आप जो रंग चुन सकते हैं वह कमरे में प्रचलित रंगों पर निर्भर करता है। यदि आप दीवार पर इतने पतले हीटर स्थापित करते हैं, तो आप अंतरिक्ष को बचा सकते हैं, क्योंकि यह आकार में कॉम्पैक्ट है। हीटर इलेक्ट्रिक घरेलू दीवार को ध्यान में रखते हुए, विशेषज्ञ हमेशा कन्वेयर पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। एक हीटिंग तत्व की भूमिका में हीटर होता है, जिसे धातु घुमावदार रॉड के रूप में निर्मित किया जाता है। इसमें धातु सुरक्षा ट्यूब शामिल है, जो एक सुरक्षित आवास में है। गर्मी संवहन का कानून है, जिससे गर्म हवा ऊपर की ओर वृद्धि होगी, ठंडी हवा के प्रवाह के लिए अंतरिक्ष को मुक्त कराने के अनुसार वितरित किया जाएगा। उपयोग की आसानी के लिए, ऐसे हीटर थर्मोस्टैट से लैस होते हैं, जो एक निश्चित स्तर पर आवश्यक तापमान को बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि आपको नहीं पता कि क्या चुनना है - तेलथर्मोस्टेट के साथ डिवाइस या वॉल-माउंटेड इलेक्ट्रिक हीटर, जिसे ऊपर वर्णित किया गया था, तो आपको दूसरा विकल्प पसंद करना चाहिए, जो कि अगर आप विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा के मुद्दे में रूचि रखते हैं तो यह सच है। यह संवहनी और तेल-प्रकार रेडिएटर के बीच मुख्य अंतर है। कन्वर्टर्स में ऐसा प्रभावशाली तापमान नहीं होता है, जो जलने में योगदान दे सकता है। वे निर्विवाद हैं, देखभाल और पूरी तरह से फायरप्रूफ की मांग नहीं कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के मामले में, इन उपकरणों को तेल कूलर से लाभ होता है। दीवार पेंटिंग्स-हीटर बिजली हैं,शायद, दूसरों के बीच में सबसे फायदेमंद विकल्प है, लेकिन यह समझ में आता है अपने घर में एक आरामदायक वातावरण बनाने के लिए अन्य प्रकार के डिवाइस पर विचार करना। आप के लिए बचत का कार्य विशेष रूप से तीव्र है, तो यह एक हीटर है कि ऊपर वर्णित हीटर की भागीदारी के साथ दौड़ में अग्रणी है का चयन करने के लिए आवश्यक है। डिवाइस का यह संस्करण उपभोक्ता के लिए सबसे सस्ती है और प्रदर्शन करने में सबसे आसान है। प्रशंसक हीटर के मुख्य लाभ की भूमिका में कमरे की हीटिंग दर है, जिसमें एक छोटा सा क्षेत्र है। कन्वर्टर्स और ऑयल कूलर की तुलना में ये डिवाइस छोटे होते हैं, जो कि मुक्त स्थान की कमी वाले अपार्टमेंट के लिए महत्वपूर्ण है। वे सार्वभौमिक हैं, यानी, उन्हें दीवार पर भी कमरे में कहीं भी रखा जा सकता है। इस डिवाइस में, ठंडी हवा, चमक बिजली हेलिक्स की हीटिंग द्वारा उत्पादित जबकि धाराओं एक प्रशंसक जो आवास में घूमती द्वारा हीटिंग क्षेत्र में खिलाया जाता है। हैं, तो आप अभी भी बचत और चुप में रुचि रखते हैं के अलावा, आप एक बिजली की दीवार हीटर फिल्म का चयन करना चाहिए, लेकिन जो लोग प्रशंसक की आवाज से डरते नहीं हैं के लिए, डिवाइस पूरी तरह से सूट करेगा। तुम भी धूल की एक अप्रिय गंध, जो आपरेशन सर्पिल के दौरान अस्सी डिग्री पर जलता की उपस्थिति की संभावना के साथ सामना कर सकते हैं। उपभोक्ता भी ऑक्सीजन जलने के बारे में शिकायत करते हैं, जब हीटर लंबे समय तक काम करता है। दीवार इलेक्ट्रिक हीटर घुड़सवारअक्सर इन्फ्रारेड उपकरणों के आधार पर प्रदर्शन किया जाता है। आज वे सबसे उन्नत और कुशल, और आर्थिक भी हैं, आप सबसे लोकप्रिय कंपनी थर्मो ग्लास चुन सकते हैं। क्वार्ट्ज रेडिएटर हवा को गर्म नहीं करते हैं, बल्कि वस्तुओं और यहां तक कि व्यक्ति स्वयं भी। ऐसे हीटर की मदद से, कमरे को गर्म करने के लिए अतिरिक्त बिजली बर्बाद किए बिना स्थानीय हीटिंग जोन बनाना संभव है। छत पर भी ऐसी लचीली दीवार-घुड़सवार इलेक्ट्रिक हीटर स्थापित किया जा सकता है। एक दोष के रूप में केवल कीमत है, जो डिवाइस के संचालन में उचित है।
नई दिल्लीः ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए अच्छी खबर है। जी हां फ्लिपकार्ट और अमेजन का सेल आज से शुरू हो गया है। आज से अमेजन पर दो दिनों के लिए प्राइम डे सेल की शुरुआत हो रही है। इस सेल में वेबसाइट पर 1000 से ज्यादा नए प्रोडक्ट लॉन्च किए जाएंगे। अगर आप भी छूट के साथ स्मार्टफोन खरीदना चाहते हो तो आपके लिए अमेजन शानदार मौका लेकर आ रही है जिससे की आप स्मार्टफोन खरीद सकते हो। वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने बिग शॉपिंग डेज सेल की शुरुआत फिर से की है। बता दें कि ये शॉपिंग सेल 15 जुलाई से 18 जुलाई तक चलेगी। सेल के पहले दिन, फ्लिपकार्ट प्लस यूज़र्स डील्स को एक्सेस कर पाएंगे। जबकि दूसरे लोग को सेल में 16 जुलाई से खरीदने का मौका मिलेगा। जी हां फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स के लिए यह सेल 15 जुलाई को सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। फ्लिपकार्ट बिग शॉपिंग डेज सेलः सेल के लिए फ्लिपकार्ट ने एसबीआई बैंक के साथ पार्टनरशिप की है। इसमें एसबीआई क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर कई प्रोडक्ट्स पर 10 फीसदी का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। वहीं कंपनी ने यह भी बताया है कि फ्लिपकार्ट प्लास मेंबर्स को 15 जुलाई सुबह 8 बजे से अर्ली एक्सेस मिलेगा। सेल के दौरान, टीवी और एप्लायंसेज पर 75 फीसदी तक का ऑफ मिलेगा। फैशन कैटेगरी पर 80 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। जानकारी दें कि कंपनी ने यह भी घोषणा की है की फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स को 15 जुलाई सुबह 8 बजे से अर्ली एक्सेस मिलेगा। सेल के दौरान, टीवी और एप्लायंसेज पर 75 फीसदी तक का ऑफ मिलेगा। फैशन कैटेगरी पर 80 प्रतिशत तक का ऑफ देखने को मिलेगा। सेल में होम एंड फर्नीचर कैटेगरी के तहत 40-80 फीसदी तक की छूट होगी। ब्लैंकेट्स, बेडशीट और लाइटिंग पर 30-70 फीसदी छूट, किचर व डाइनिंग से जुड़ी चीजों की कीमत 199 रुपये से शुरू होना जैसी डील्स रहेंगी। इन डील्स के अलावा बिग शॉपिंग डेज सेल में सुबह और शाम 6 बजे व दोपहर व रात 12 बजे ब्लॉक बस्टर डील्स रहेंगी। दोपहर 12-2 बजे के बीच रश ऑवर्स होंगे, जिनमें 5 फीसदी की एक्स्ट्रा छूट होगी। बाई 3 पर 10 फीसदी की एक्स्ट्रा छूट, बाई 4 पर 15 फीसदी की एक्स्ट्रा छूट, 1999 रुपये की शॉपिंग पर 15 फीसदी ऑफ और 1499 रुपये की शॉपिंग पर 10 फीसदी का ऑफ कॉम्बो डील्स के तहत रहेगा। अमेजन पर प्राइम डे सेलः दो दिनों तक चलने वाली सेल में प्राइम कस्टमर के लिए तमाम ऑफर लाए गए हैं। 48 घंटे तक चलने वाली इस सेल में स्मार्टफोन, ऑडियो प्रॉडक्ट्स, टीवी और कई इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स पर बंपर डिस्काउंट ऑफर्स मिलने वाले हैं। आप भी इस ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो और सस्ते अच्छे प्रॉडक्ट खरीदना चाहते हैं तो कुछ टिप्स आपको अपनाने होंगे। अमेजन जो सेल लाया है उसका ज्यादा फायदा प्राइम मेंबर को मिलेगा। ऐसे में अगर आप भी इस सेल का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो सबसे पहले अमेजन प्राइम को सब्सक्राइब करें। जानकारी दें कि अमेजन इस बार एचडीएफसी बैंक से टाईअप किया है। एचडीएफसी कार्ड पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। अगर आपके पास एचडीएफसी का कार्ड हो तो पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करें। - सेल के दौरान 14,990 रुपए की कीमत वाला सैमसंग गैलेक्सी M30 करीब 1000 रुपए की छूट के साथ 13,990 रुपए में मिलेगा। - हॉनर 8सी 11,999 रुपए की बजाय 7,999 रुपए में मिलेगा। - Xiaomi ब्रांड के मी ए2 सेल के दौरान 9,999 रुपये में उपलब्ध होगा, जिसकी लॉन्चिंग 16,999 प्राइस टैग के साथ हुई थी। - नोकिया 8. 1 स्मार्टफोन 26,999 रुपए की बजाय 18,499 रुपए में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। - एलजी वी40 फोन 60,000 रुपए की बजाय सेल के दौरान इसे 39,990 रुपये में खरीदा जा सकेगा। - हॉनर व्यू 20 को 37,999 रुपए की बजाय 27,990 रुपए में खरीद सकेंगे। - हुवावे वाई9 को भारत में 15,990 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया गया था लेकिन यह 11,990 रुपये में उपलब्ध होगा।
नई दिल्लीः ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए अच्छी खबर है। जी हां फ्लिपकार्ट और अमेजन का सेल आज से शुरू हो गया है। आज से अमेजन पर दो दिनों के लिए प्राइम डे सेल की शुरुआत हो रही है। इस सेल में वेबसाइट पर एक हज़ार से ज्यादा नए प्रोडक्ट लॉन्च किए जाएंगे। अगर आप भी छूट के साथ स्मार्टफोन खरीदना चाहते हो तो आपके लिए अमेजन शानदार मौका लेकर आ रही है जिससे की आप स्मार्टफोन खरीद सकते हो। वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने बिग शॉपिंग डेज सेल की शुरुआत फिर से की है। बता दें कि ये शॉपिंग सेल पंद्रह जुलाई से अट्ठारह जुलाई तक चलेगी। सेल के पहले दिन, फ्लिपकार्ट प्लस यूज़र्स डील्स को एक्सेस कर पाएंगे। जबकि दूसरे लोग को सेल में सोलह जुलाई से खरीदने का मौका मिलेगा। जी हां फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स के लिए यह सेल पंद्रह जुलाई को सुबह आठ बजे से शुरू हो गई है। फ्लिपकार्ट बिग शॉपिंग डेज सेलः सेल के लिए फ्लिपकार्ट ने एसबीआई बैंक के साथ पार्टनरशिप की है। इसमें एसबीआई क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर कई प्रोडक्ट्स पर दस फीसदी का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। वहीं कंपनी ने यह भी बताया है कि फ्लिपकार्ट प्लास मेंबर्स को पंद्रह जुलाई सुबह आठ बजे से अर्ली एक्सेस मिलेगा। सेल के दौरान, टीवी और एप्लायंसेज पर पचहत्तर फीसदी तक का ऑफ मिलेगा। फैशन कैटेगरी पर अस्सी प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। जानकारी दें कि कंपनी ने यह भी घोषणा की है की फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स को पंद्रह जुलाई सुबह आठ बजे से अर्ली एक्सेस मिलेगा। सेल के दौरान, टीवी और एप्लायंसेज पर पचहत्तर फीसदी तक का ऑफ मिलेगा। फैशन कैटेगरी पर अस्सी प्रतिशत तक का ऑफ देखने को मिलेगा। सेल में होम एंड फर्नीचर कैटेगरी के तहत चालीस-अस्सी फीसदी तक की छूट होगी। ब्लैंकेट्स, बेडशीट और लाइटिंग पर तीस-सत्तर फीसदी छूट, किचर व डाइनिंग से जुड़ी चीजों की कीमत एक सौ निन्यानवे रुपयापये से शुरू होना जैसी डील्स रहेंगी। इन डील्स के अलावा बिग शॉपिंग डेज सेल में सुबह और शाम छः बजे व दोपहर व रात बारह बजे ब्लॉक बस्टर डील्स रहेंगी। दोपहर बारह-दो बजे के बीच रश ऑवर्स होंगे, जिनमें पाँच फीसदी की एक्स्ट्रा छूट होगी। बाई तीन पर दस फीसदी की एक्स्ट्रा छूट, बाई चार पर पंद्रह फीसदी की एक्स्ट्रा छूट, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की शॉपिंग पर पंद्रह फीसदी ऑफ और एक हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये की शॉपिंग पर दस फीसदी का ऑफ कॉम्बो डील्स के तहत रहेगा। अमेजन पर प्राइम डे सेलः दो दिनों तक चलने वाली सेल में प्राइम कस्टमर के लिए तमाम ऑफर लाए गए हैं। अड़तालीस घंटाटे तक चलने वाली इस सेल में स्मार्टफोन, ऑडियो प्रॉडक्ट्स, टीवी और कई इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स पर बंपर डिस्काउंट ऑफर्स मिलने वाले हैं। आप भी इस ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो और सस्ते अच्छे प्रॉडक्ट खरीदना चाहते हैं तो कुछ टिप्स आपको अपनाने होंगे। अमेजन जो सेल लाया है उसका ज्यादा फायदा प्राइम मेंबर को मिलेगा। ऐसे में अगर आप भी इस सेल का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो सबसे पहले अमेजन प्राइम को सब्सक्राइब करें। जानकारी दें कि अमेजन इस बार एचडीएफसी बैंक से टाईअप किया है। एचडीएफसी कार्ड पर अतिरिक्त दस प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। अगर आपके पास एचडीएफसी का कार्ड हो तो पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करें। - सेल के दौरान चौदह,नौ सौ नब्बे रुपयापए की कीमत वाला सैमसंग गैलेक्सी Mतीस करीब एक हज़ार रुपयापए की छूट के साथ तेरह,नौ सौ नब्बे रुपयापए में मिलेगा। - हॉनर आठसी ग्यारह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए की बजाय सात,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए में मिलेगा। - Xiaomi ब्रांड के मी एदो सेल के दौरान नौ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में उपलब्ध होगा, जिसकी लॉन्चिंग सोलह,नौ सौ निन्यानवे प्राइस टैग के साथ हुई थी। - नोकिया आठ. एक स्मार्टफोन छब्बीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए की बजाय अट्ठारह,चार सौ निन्यानवे रुपयापए में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। - एलजी वीचालीस फोन साठ,शून्य रुपयापए की बजाय सेल के दौरान इसे उनतालीस,नौ सौ नब्बे रुपयापये में खरीदा जा सकेगा। - हॉनर व्यू बीस को सैंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए की बजाय सत्ताईस,नौ सौ नब्बे रुपयापए में खरीद सकेंगे। - हुवावे वाईनौ को भारत में पंद्रह,नौ सौ नब्बे रुपयापये की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया गया था लेकिन यह ग्यारह,नौ सौ नब्बे रुपयापये में उपलब्ध होगा।
ऑस्ट्रेलिया चौथे दिन 1 विकेट पर 29 रनों से आगे खेलने उतरी थी। पहली पारी में दोहरा शतक जड़ने वाले लाबुशेन ने दूसरी पारी में भी शतक जड़ा। पहले सेशन में एकमात्र झटका डेविड वॉर्नर के रूप में लगा, जो 48 रन पर आउट हुए। वेस्टइंडीज के लिए दूसरी पारी में रोस्टन चेज औऱ केमार रोच ने एक-एक विकेट लिया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के 598 रनों के जवाब में तीसरे दिन वेस्टइंडीज की टीम 283 रनों पर ऑलआउट हो घई थी।
ऑस्ट्रेलिया चौथे दिन एक विकेट पर उनतीस रनों से आगे खेलने उतरी थी। पहली पारी में दोहरा शतक जड़ने वाले लाबुशेन ने दूसरी पारी में भी शतक जड़ा। पहले सेशन में एकमात्र झटका डेविड वॉर्नर के रूप में लगा, जो अड़तालीस रन पर आउट हुए। वेस्टइंडीज के लिए दूसरी पारी में रोस्टन चेज औऱ केमार रोच ने एक-एक विकेट लिया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के पाँच सौ अट्ठानवे रनों के जवाब में तीसरे दिन वेस्टइंडीज की टीम दो सौ तिरासी रनों पर ऑलआउट हो घई थी।
उज्जैन। प्रदेश में कोरोना महामारी अपने प्रचंड दौर में है। रोजाना सैकड़ों नए मरीज सामने आ रहे हैं। प्रदेश के अस्पतालों में मरीज पटे पड़े हैं। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की काफी किल्लत देखने को मिल रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के आर्डी गार्डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 100 बेड का कोरोना वॉर्ड तैयार किया गया है। इस वॉर्ड में मरीजों के लिए 24 घंटे ऑक्सीजन उपलब्ध रहेगी। वहीं मरीजों की हर समय देखभाल के लिए डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद रहेगा। बता दें कि इस अस्पताल में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मशनें भी लगाई गईं हैं। इन मशीनों के जरिए ऑटोमेटिक ऑक्सीजन की सप्लाई होती रहेगी। इस वॉर्ड में 100 बेड लगाए गए हैं। यहां एक साथ सभी मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। यहां ऑक्सीजन की कमी न हो इसलिए अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन टैंक भी लगाया गया है। इसकी जानकारी देते हुए अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉक्टर सुधाकर वैद्य ने बताया कि इस अस्पताल को ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। 24 घंटे उपलब्ध रहेगी ऑक्सीजन.... यहां भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके। यहां हर बेड पर एक-एक मशीन रहेगी जो वातावरण से निर्मित होगी। यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। बता दें कि प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजाना सैकड़ों नए मरीज सामने आ रहे हैं। रविवार की बात करें तो प्रदेशभर में 12,897 नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। वहीं एक दिन में रिकॉर्ड 79 लोगों की मौत हुई है। भोपाल में 1703 नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। वहीं पांच लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। बता दें कि प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए सीएम शिवराज सिंह ने भी रविवार को जनता को संबोधित किया था। सीएम शिवराज सिंह ने जनता से कोरोना नियमों का पालन करने, मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने की अपील की है।
उज्जैन। प्रदेश में कोरोना महामारी अपने प्रचंड दौर में है। रोजाना सैकड़ों नए मरीज सामने आ रहे हैं। प्रदेश के अस्पतालों में मरीज पटे पड़े हैं। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की काफी किल्लत देखने को मिल रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के आर्डी गार्डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक सौ बेड का कोरोना वॉर्ड तैयार किया गया है। इस वॉर्ड में मरीजों के लिए चौबीस घंटाटे ऑक्सीजन उपलब्ध रहेगी। वहीं मरीजों की हर समय देखभाल के लिए डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद रहेगा। बता दें कि इस अस्पताल में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर मशनें भी लगाई गईं हैं। इन मशीनों के जरिए ऑटोमेटिक ऑक्सीजन की सप्लाई होती रहेगी। इस वॉर्ड में एक सौ बेड लगाए गए हैं। यहां एक साथ सभी मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। यहां ऑक्सीजन की कमी न हो इसलिए अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन टैंक भी लगाया गया है। इसकी जानकारी देते हुए अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉक्टर सुधाकर वैद्य ने बताया कि इस अस्पताल को ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। चौबीस घंटाटे उपलब्ध रहेगी ऑक्सीजन.... यहां भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके। यहां हर बेड पर एक-एक मशीन रहेगी जो वातावरण से निर्मित होगी। यहां ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। बता दें कि प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजाना सैकड़ों नए मरीज सामने आ रहे हैं। रविवार की बात करें तो प्रदेशभर में बारह,आठ सौ सत्तानवे नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। वहीं एक दिन में रिकॉर्ड उन्यासी लोगों की मौत हुई है। भोपाल में एक हज़ार सात सौ तीन नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। वहीं पांच लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। बता दें कि प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए सीएम शिवराज सिंह ने भी रविवार को जनता को संबोधित किया था। सीएम शिवराज सिंह ने जनता से कोरोना नियमों का पालन करने, मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने की अपील की है।
इंडियन क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के शानदार गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) ने इस साल के आईपीएल (IPL 2021) में शानदार प्रदर्शन किया था। उनकी दमदार गेंदबाजी की वजह से उन्होंने कई विकेट भी चटकाए। लेकिन आज हम उनका एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसका ज़िक्र उन्होंने खुद किया है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मोहम्मद सिराज ने अपने पिता को खो दिया था। जिसके बाद वह टूट चुके थे। लेकिन, अपने अब्बू का सपना पूरा करने के लिए वह ऑस्ट्रेलिया (Australia) में ही रहे और अपने मैच को खेलना ही उचित समझे थे। जिसकी वजह से वह अपने पिता के अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो पाए थे। सिराज आगे कहते हैं, 'विराट भैया ने मुझसे कहा कि तुम चिंता मत करो और अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहो। ' इसके अलावा सिराज ने अपना इंटरव्यू में सीधे तौर पर कहा कि आज मैं जहां तक करियर में पहुंचा हूं उसमें कोहली भैया का बड़ा हाथ रहा है। मेरे करियर में विराट भैया ने अपना समर्थन देकर मुझे अच्छा गेंदबाज बनने में मदद की। बता दें कि मोहम्मद सिराज ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार गेंदबाजी कर 3 टेस्ट मैचों में 13 विकेट चटकाए। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गाबा टेस्ट में सिराज ने एक पारी में 5 विकेट हॉल करने में सफलता भी हासिल की। अब अगर इस साल के आईपीएल की बात करें तो सिराज ने 6 विकेट झटके लिए। साथ ही उन्होंने कमाल की गेंदबाजी कर बल्लेबाज को खूब परेशान भी किया है। वहीं अब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर जाएगी, जिसमें सिराज भी टीम में शामिल हैं।
इंडियन क्रिकेट टीम के शानदार गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज ने इस साल के आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया था। उनकी दमदार गेंदबाजी की वजह से उन्होंने कई विकेट भी चटकाए। लेकिन आज हम उनका एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसका ज़िक्र उन्होंने खुद किया है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मोहम्मद सिराज ने अपने पिता को खो दिया था। जिसके बाद वह टूट चुके थे। लेकिन, अपने अब्बू का सपना पूरा करने के लिए वह ऑस्ट्रेलिया में ही रहे और अपने मैच को खेलना ही उचित समझे थे। जिसकी वजह से वह अपने पिता के अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो पाए थे। सिराज आगे कहते हैं, 'विराट भैया ने मुझसे कहा कि तुम चिंता मत करो और अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहो। ' इसके अलावा सिराज ने अपना इंटरव्यू में सीधे तौर पर कहा कि आज मैं जहां तक करियर में पहुंचा हूं उसमें कोहली भैया का बड़ा हाथ रहा है। मेरे करियर में विराट भैया ने अपना समर्थन देकर मुझे अच्छा गेंदबाज बनने में मदद की। बता दें कि मोहम्मद सिराज ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार गेंदबाजी कर तीन टेस्ट मैचों में तेरह विकेट चटकाए। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गाबा टेस्ट में सिराज ने एक पारी में पाँच विकेट हॉल करने में सफलता भी हासिल की। अब अगर इस साल के आईपीएल की बात करें तो सिराज ने छः विकेट झटके लिए। साथ ही उन्होंने कमाल की गेंदबाजी कर बल्लेबाज को खूब परेशान भी किया है। वहीं अब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर जाएगी, जिसमें सिराज भी टीम में शामिल हैं।
केजरीवाल सरकार राजधानी की सड़कों पर छोटे आकार की इलेक्ट्रिक मोहल्ला बसों की शुरुआत करने जा रही है. दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर मोहल्ला बस सेवाओं की आवश्यकता की पहचान करने और उपयुक्त मार्गों का निर्धारण करने के लिए विभाग ने गुरुवार से एक व्यापक सर्वे शुरू किया है। यह 15 जून तक चलेगा, जिसमें 23 तकनीकी टीमों को अध्ययन करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। सरकार की 2025 तक कुल 2,180 ऐसी बसों को चलाने की योजना है। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया कि दिल्ली सरकार ने इससे पहले कभी भी 2000 से अधिक फीडर बसें नहीं खरीदी हैं। छोटे आकार की 9-मीटर बसें उन मार्गों पर चलेंगी, जहां 12-मीटर बसों की पहुंच नहीं है। दिल्ली की जनता से प्रतिक्रिया लेने के लिए शहरों में टीमों का गठन करके, यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इन मोहल्ला बसों द्वारा सभी महत्वपूर्ण मार्गों को कवर किया जाए। टेक्निकल टीमें इलाकों का दौरा करेंगीः समर्पित टेक्निकल टीमें उच्च क्षमता वाले मेट्रो स्टेशनों, बस टर्मिनलों, स्टॉप और दिल्ली के विभिन्न इलाकों का दौरा करेंगी। उनका प्राथमिक ध्यान यात्रा की मांग का आकलन, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी का वर्तमान स्तर और पैरा-ट्रांजिट कनेक्टिविटी, जिसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य पैरा-ट्रांजिट विकल्पों की उपलब्धता का अध्ययन किया जाएगा। इस दौरान एकत्र डेटा को डिजिटाइज किया जाएगा और प्रत्येक इलाके में प्रस्तावित मोहल्ला बस सेवाओं की ओरिजिन और गंतव्य का निर्धारण करने के लिए उपयोग किया जाएगा। इस सर्वे का उद्देश्य ऐसे संभावित मार्गों की पहचान करना है, जिससे उस रूट के अधिकतम यात्री इससे लाभान्वित हो सकें। इस योजना का उद्देश्य पड़ोस या फीडर बस सेवाएं प्रदान करने के लिए 9 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करना है। यह पहल शहर में एक स्थायी और सुलभ परिवहन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
केजरीवाल सरकार राजधानी की सड़कों पर छोटे आकार की इलेक्ट्रिक मोहल्ला बसों की शुरुआत करने जा रही है. दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर मोहल्ला बस सेवाओं की आवश्यकता की पहचान करने और उपयुक्त मार्गों का निर्धारण करने के लिए विभाग ने गुरुवार से एक व्यापक सर्वे शुरू किया है। यह पंद्रह जून तक चलेगा, जिसमें तेईस तकनीकी टीमों को अध्ययन करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। सरकार की दो हज़ार पच्चीस तक कुल दो,एक सौ अस्सी ऐसी बसों को चलाने की योजना है। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया कि दिल्ली सरकार ने इससे पहले कभी भी दो हज़ार से अधिक फीडर बसें नहीं खरीदी हैं। छोटे आकार की नौ-मीटर बसें उन मार्गों पर चलेंगी, जहां बारह-मीटर बसों की पहुंच नहीं है। दिल्ली की जनता से प्रतिक्रिया लेने के लिए शहरों में टीमों का गठन करके, यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इन मोहल्ला बसों द्वारा सभी महत्वपूर्ण मार्गों को कवर किया जाए। टेक्निकल टीमें इलाकों का दौरा करेंगीः समर्पित टेक्निकल टीमें उच्च क्षमता वाले मेट्रो स्टेशनों, बस टर्मिनलों, स्टॉप और दिल्ली के विभिन्न इलाकों का दौरा करेंगी। उनका प्राथमिक ध्यान यात्रा की मांग का आकलन, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी का वर्तमान स्तर और पैरा-ट्रांजिट कनेक्टिविटी, जिसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य पैरा-ट्रांजिट विकल्पों की उपलब्धता का अध्ययन किया जाएगा। इस दौरान एकत्र डेटा को डिजिटाइज किया जाएगा और प्रत्येक इलाके में प्रस्तावित मोहल्ला बस सेवाओं की ओरिजिन और गंतव्य का निर्धारण करने के लिए उपयोग किया जाएगा। इस सर्वे का उद्देश्य ऐसे संभावित मार्गों की पहचान करना है, जिससे उस रूट के अधिकतम यात्री इससे लाभान्वित हो सकें। इस योजना का उद्देश्य पड़ोस या फीडर बस सेवाएं प्रदान करने के लिए नौ मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करना है। यह पहल शहर में एक स्थायी और सुलभ परिवहन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
तो उससे बमीन को नुकसान ही पहुँचेगा । एमोनियम विस्तृत और काफी असे तक व्यपहार से जिन बमीनों में चूने की म श्यकता नहीं है, उनमें अम्ल पदार्थ पैदा हो जाता है। रासायनिक खाद से बमीन में नमी नहीं के पैदा होती।" हमें मदिराठायनिक शाद का इस्तेमाल करना होगा, वो उतनी ही मात्रा में हम उसे काम में सायेगे, जितना मनुष्य की वृद्धि के लिए टॉनिक का इस्तेमाल किया है। पानी बनस्पति की जान है। यहाँ भी नमी होगी यहाँ कुन कुछ सम्मी पैरा हो ही बायगी। आम न हो और पानी खून मिले, तो पौधे उग ही भले ही लार के भिना मे तिचाई की व्यवस्मा पुष्ट हो सकें। पानी किना चाई मिनी लेती के लिए पानी की सबसे महत्व का उपादान है। इतनी आवश्यक सामग्री होने पर भी हमारे खेतों के विहाई हिस्सों में ही पनी पहुँचता है। इस दिशा में हमें विशेष म करना पड़ेगा। प्रश्न यह है कि पानी की प्राप्ति के लिए हमारा धमा हो । पंसार में सिचाई का काम ४५ परियों से किया जाता है( १ ) नहy ( २ ) भूम देश, (३) , (४) वाया और ( ५ ) मदी माशा भील आषि । नहर के मामले में मेरी रामही है। नहर से फामा है, लेकिन उससे नुकसान मी इतना है कि किसी योजना में महर का प्रस्थान करते समय हर पहल पर गम्भीर विचार कर लेना चाहिए । महर की व्यवस्था भनि सरकार के अधीन रखनी होगी, चिचा अर्थ किसी दूसरे पर निर्भर रखना होगा। अगर इस मौलिक स्थान के सिद्धान्त को फिलहा मीदें, तो मी कई स्वावहारिक शनियाँ भी नहर से होती हैं। नहर से पानी का है, उसकी गहराई काफी नहीं होती और माइ की कायम रखने के लिए बगह-जगह उसे
तो उससे बमीन को नुकसान ही पहुँचेगा । एमोनियम विस्तृत और काफी असे तक व्यपहार से जिन बमीनों में चूने की म श्यकता नहीं है, उनमें अम्ल पदार्थ पैदा हो जाता है। रासायनिक खाद से बमीन में नमी नहीं के पैदा होती।" हमें मदिराठायनिक शाद का इस्तेमाल करना होगा, वो उतनी ही मात्रा में हम उसे काम में सायेगे, जितना मनुष्य की वृद्धि के लिए टॉनिक का इस्तेमाल किया है। पानी बनस्पति की जान है। यहाँ भी नमी होगी यहाँ कुन कुछ सम्मी पैरा हो ही बायगी। आम न हो और पानी खून मिले, तो पौधे उग ही भले ही लार के भिना मे तिचाई की व्यवस्मा पुष्ट हो सकें। पानी किना चाई मिनी लेती के लिए पानी की सबसे महत्व का उपादान है। इतनी आवश्यक सामग्री होने पर भी हमारे खेतों के विहाई हिस्सों में ही पनी पहुँचता है। इस दिशा में हमें विशेष म करना पड़ेगा। प्रश्न यह है कि पानी की प्राप्ति के लिए हमारा धमा हो । पंसार में सिचाई का काम पैंतालीस परियों से किया जाता है नहy भूम देश, , वाया और मदी माशा भील आषि । नहर के मामले में मेरी रामही है। नहर से फामा है, लेकिन उससे नुकसान मी इतना है कि किसी योजना में महर का प्रस्थान करते समय हर पहल पर गम्भीर विचार कर लेना चाहिए । महर की व्यवस्था भनि सरकार के अधीन रखनी होगी, चिचा अर्थ किसी दूसरे पर निर्भर रखना होगा। अगर इस मौलिक स्थान के सिद्धान्त को फिलहा मीदें, तो मी कई स्वावहारिक शनियाँ भी नहर से होती हैं। नहर से पानी का है, उसकी गहराई काफी नहीं होती और माइ की कायम रखने के लिए बगह-जगह उसे
1. बात करें सिंदूर की तो ऐसा माना जाता है कि शादीशुदा औरत को अपना सिंदूर किसी को नहीं देना चाहिए और न ही उसे किसी दूसरी स्त्री का सिंदूर यूज़ करना चाहिए। ऐसा करने से मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम्स होती हैं। 2. ऐसी मान्यता है कि विवाहित महिला को कभी अपने गले का मंगलसूत्र नहीं उतारना चाहिए, अगर कभी ऐसा करना भी पड़े तो उसे अपने गले में कोई काला धागा पहन लेना चाहिए। 3. मैरिड लड़की को कभी किसी दूसरी महिला का मंगलसूत्र भी नहीं पहनना चाहिए, ऐसा करने से मैरिड लाइफ में स्ट्रेस होता है। 4. मंगलसूत्र में काले मोती होना बहुत जरूरी है, यह आपको बुरी नजर से बचाता है। साथ ही मंगसूत्र में सोने का होना भी आवश्यक है, यह बृहस्पति की कृपा का प्रतीक है और एक अच्छी मैरिड लाइफ के लिए बृहस्पति ग्रह का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। 5. अगर मंगलसूत्र की पॉलिश निकल गई है या वह काला पड़ने लगा है तो आपको उसे दोबारा साफ और सही करवाने के बाद ही पहनना चाहिए, अन्यथा आपके लिए यह शुभ साबित नहीं होगा। 6. मान्यताओं के अनुसार अगर सुहागिन महिलाएं अपने मंगसूत्र का अनादर करती हैं तो इससे उनका विवाहित जीवन खराब होता है और पति की आयु पर भी इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
एक. बात करें सिंदूर की तो ऐसा माना जाता है कि शादीशुदा औरत को अपना सिंदूर किसी को नहीं देना चाहिए और न ही उसे किसी दूसरी स्त्री का सिंदूर यूज़ करना चाहिए। ऐसा करने से मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम्स होती हैं। दो. ऐसी मान्यता है कि विवाहित महिला को कभी अपने गले का मंगलसूत्र नहीं उतारना चाहिए, अगर कभी ऐसा करना भी पड़े तो उसे अपने गले में कोई काला धागा पहन लेना चाहिए। तीन. मैरिड लड़की को कभी किसी दूसरी महिला का मंगलसूत्र भी नहीं पहनना चाहिए, ऐसा करने से मैरिड लाइफ में स्ट्रेस होता है। चार. मंगलसूत्र में काले मोती होना बहुत जरूरी है, यह आपको बुरी नजर से बचाता है। साथ ही मंगसूत्र में सोने का होना भी आवश्यक है, यह बृहस्पति की कृपा का प्रतीक है और एक अच्छी मैरिड लाइफ के लिए बृहस्पति ग्रह का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। पाँच. अगर मंगलसूत्र की पॉलिश निकल गई है या वह काला पड़ने लगा है तो आपको उसे दोबारा साफ और सही करवाने के बाद ही पहनना चाहिए, अन्यथा आपके लिए यह शुभ साबित नहीं होगा। छः. मान्यताओं के अनुसार अगर सुहागिन महिलाएं अपने मंगसूत्र का अनादर करती हैं तो इससे उनका विवाहित जीवन खराब होता है और पति की आयु पर भी इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
कार्य से रहित है । महदादिक सात में बुद्धि, प्रकृति का कार्य है। अहकार बुद्धि का कार्य है । अहंकार का कार्य पांच तन्मात्रा, पांच ज्ञानेन्द्रिय, पांच कर्मेन्द्रिय और एक मन ये सोलह पदार्थ हैं। इनमे पांच तन्मात्राओं के कार्यं पांच भूत हैं। इस प्रकार बुद्धितत्त्वं कार्य भी है और कारण भी है, इसी तरह अहंकार और पांचतर मात्राएं है। पांच ज्ञानेन्द्रिय, पांच कर्मोन्द्रिय, पाच भूत एवं मन ये सोलह पदार्थ कार्य रूप ही है। इससे यह फलित हुआ कि इन पच्चीस तत्त्वो में कोई कारण कोई २ कार्य कारण कोई सिर्फ कार्य एवं कोई अकार्य इस तरह ४ रूप से १ व्यवस्थित है। इस प्रकार सांख्यो ने इन पच्चीस तत्त्वो को सर्वथा एकान्त रूप से अस्तित्त्व स्वरूप ही माना है नास्तित्व स्वरूप नहीं अतः इस प्रकार की यह मान्यता भावैकान्त है। इस मान्यता में प्रागभावादिक चार प्रकार के अभाव का लोप होता है। इसमें इतरेतराभाव का लोप होने पर ये पच्चीस तत्त्व सब के सब एक तत्त्व रुप ही ठहरते है । अतः इस प्रकार के भेद वरन का प्रयोजन ही क्या रहता है । ये जितनी भी व्यक्तात्मक तत्व है वे सब अव्यक्तात्मक ठहरते है इसलिये इस मान्यता में "सर्वात्मक" यह प्रथम दोष आकर उपस्थित हो जाता है । प्रकृति और पुरुप में अत्यन्ताभाव का निव करने पर प्रकृति को पुरुपात्मक रूप होने पर प्रकृति और पुरुप के भिन्न २ लक्षरण के कथन का विरोध उपस्थित होता है । तथा च ' त्रिगुणमविवेकी विषय, सामान्यमचेतनं प्रसवधर्मी । व्यक्त तथा प्रधान, र्ताद्वपरीतस्तथा च १ पुमान् " इस कारिकागत उनका भेद कथन शोभित नहीं होता । प्रागभाव के अपह्नव करने पर "प्रकृतेर्महान् ततोऽहंकारस्तस्माद्वरणश्च षोडशकः, तस्मादपि पोडशकात्पञ्चभ्यः पञ्चभूतानि, प्रकृति से महात्, महान, से अहंकार, अहंकार से सोलहगरण, पांच तन्मात्राओसे पांचभूत इस प्रकार से सृष्टि की उत्पत्तिके क्रम का बर्णन विरुद्ध पडता है क्योंकि ये सब के सब अनादि ठहरते हैं । प्रध्वसाभाव के लोप मे यह वर्णन करना कि "पृथिवी आदिक पांचमहाभूत पांचतन्मात्राओ में, षोडशगरण अहकार मे, अहंकार महाव में, और महान प्रकृति में लय हो जाते है, विरुद्ध पड़ जाता है। क्योंकि ये सब अन्तरहित १ - "प्रकृतेर्नहानु ततोऽहकादस्तस्माद्गरगश्च षोडशक, तस्मादपि षोडश कात्पञ्चभ्य पञ्च भूतानि" सांख्यक्रारिका सांख्यतत्त्व कोमुदी
कार्य से रहित है । महदादिक सात में बुद्धि, प्रकृति का कार्य है। अहकार बुद्धि का कार्य है । अहंकार का कार्य पांच तन्मात्रा, पांच ज्ञानेन्द्रिय, पांच कर्मेन्द्रिय और एक मन ये सोलह पदार्थ हैं। इनमे पांच तन्मात्राओं के कार्यं पांच भूत हैं। इस प्रकार बुद्धितत्त्वं कार्य भी है और कारण भी है, इसी तरह अहंकार और पांचतर मात्राएं है। पांच ज्ञानेन्द्रिय, पांच कर्मोन्द्रिय, पाच भूत एवं मन ये सोलह पदार्थ कार्य रूप ही है। इससे यह फलित हुआ कि इन पच्चीस तत्त्वो में कोई कारण कोई दो कार्य कारण कोई सिर्फ कार्य एवं कोई अकार्य इस तरह चार रूप से एक व्यवस्थित है। इस प्रकार सांख्यो ने इन पच्चीस तत्त्वो को सर्वथा एकान्त रूप से अस्तित्त्व स्वरूप ही माना है नास्तित्व स्वरूप नहीं अतः इस प्रकार की यह मान्यता भावैकान्त है। इस मान्यता में प्रागभावादिक चार प्रकार के अभाव का लोप होता है। इसमें इतरेतराभाव का लोप होने पर ये पच्चीस तत्त्व सब के सब एक तत्त्व रुप ही ठहरते है । अतः इस प्रकार के भेद वरन का प्रयोजन ही क्या रहता है । ये जितनी भी व्यक्तात्मक तत्व है वे सब अव्यक्तात्मक ठहरते है इसलिये इस मान्यता में "सर्वात्मक" यह प्रथम दोष आकर उपस्थित हो जाता है । प्रकृति और पुरुप में अत्यन्ताभाव का निव करने पर प्रकृति को पुरुपात्मक रूप होने पर प्रकृति और पुरुप के भिन्न दो लक्षरण के कथन का विरोध उपस्थित होता है । तथा च ' त्रिगुणमविवेकी विषय, सामान्यमचेतनं प्रसवधर्मी । व्यक्त तथा प्रधान, र्ताद्वपरीतस्तथा च एक पुमान् " इस कारिकागत उनका भेद कथन शोभित नहीं होता । प्रागभाव के अपह्नव करने पर "प्रकृतेर्महान् ततोऽहंकारस्तस्माद्वरणश्च षोडशकः, तस्मादपि पोडशकात्पञ्चभ्यः पञ्चभूतानि, प्रकृति से महात्, महान, से अहंकार, अहंकार से सोलहगरण, पांच तन्मात्राओसे पांचभूत इस प्रकार से सृष्टि की उत्पत्तिके क्रम का बर्णन विरुद्ध पडता है क्योंकि ये सब के सब अनादि ठहरते हैं । प्रध्वसाभाव के लोप मे यह वर्णन करना कि "पृथिवी आदिक पांचमहाभूत पांचतन्मात्राओ में, षोडशगरण अहकार मे, अहंकार महाव में, और महान प्रकृति में लय हो जाते है, विरुद्ध पड़ जाता है। क्योंकि ये सब अन्तरहित एक - "प्रकृतेर्नहानु ततोऽहकादस्तस्माद्गरगश्च षोडशक, तस्मादपि षोडश कात्पञ्चभ्य पञ्च भूतानि" सांख्यक्रारिका सांख्यतत्त्व कोमुदी
डोम का बाग नामक स्थान पर वीरवार रात्रि करीब अढ़ाई बजे एक अप्लाइड फॉर टिप्पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में रोनहाट उपतहसील के पनोग गांव निवासी 29 वर्षीय वीरेंद्र सिंह पुत्र सूरत राम की मौके पर ही मौत हो गई। श्री रेणुका जी (नरेंद्र): डोम का बाग नामक स्थान पर वीरवार रात्रि करीब अढ़ाई बजे एक अप्लाइड फॉर टिप्पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में रोनहाट उपतहसील के पनोग गांव निवासी 29 वर्षीय वीरेंद्र सिंह पुत्र सूरत राम की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार संगड़ाह-हरिपुरधार-चौपाल मार्ग पर हुए इस हादसे की सूचना दिए बिना मौके से फरार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जानकारी के अनुसार आसपास के लोगों को शुक्रवार सुबह हादसे का पता चला। अगर हादसे के बाद समय रहते घायल वीरेंद्र को अस्पताल पहुंचाया जाता तो संभवतः उसकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों की सहायता से वीरेंद्र के शव को खाई से निकाला गया। शुक्रवार दोपहर पोस्टमार्टम करवाने बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। डीएसपी संगड़ाह मुकेश कुमार ने बताया कि लापता टिपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। संगड़ाह के कार्यवाहक तहसीलदार मदन लाल शर्मा ने बताया कि मृतक के परिजनों को 25000 रुपए की फौरी राहत जारी की गई है।
डोम का बाग नामक स्थान पर वीरवार रात्रि करीब अढ़ाई बजे एक अप्लाइड फॉर टिप्पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में रोनहाट उपतहसील के पनोग गांव निवासी उनतीस वर्षीय वीरेंद्र सिंह पुत्र सूरत राम की मौके पर ही मौत हो गई। श्री रेणुका जी : डोम का बाग नामक स्थान पर वीरवार रात्रि करीब अढ़ाई बजे एक अप्लाइड फॉर टिप्पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में रोनहाट उपतहसील के पनोग गांव निवासी उनतीस वर्षीय वीरेंद्र सिंह पुत्र सूरत राम की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार संगड़ाह-हरिपुरधार-चौपाल मार्ग पर हुए इस हादसे की सूचना दिए बिना मौके से फरार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जानकारी के अनुसार आसपास के लोगों को शुक्रवार सुबह हादसे का पता चला। अगर हादसे के बाद समय रहते घायल वीरेंद्र को अस्पताल पहुंचाया जाता तो संभवतः उसकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों की सहायता से वीरेंद्र के शव को खाई से निकाला गया। शुक्रवार दोपहर पोस्टमार्टम करवाने बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। डीएसपी संगड़ाह मुकेश कुमार ने बताया कि लापता टिपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। संगड़ाह के कार्यवाहक तहसीलदार मदन लाल शर्मा ने बताया कि मृतक के परिजनों को पच्चीस हज़ार रुपयापए की फौरी राहत जारी की गई है।
ऑटो डेस्कः मारुति सुजुकी ने ऑटो एक्सपो 2023 में 5-डोर जिम्नी को अनवील कर दिया था। अनवीलिंग के साथ ही कंपनी ने इसके लिए बुकिंग्स शुरू लेना शुरू कर दिया था। अब जानकारी सामने आई कि नई जिम्नी के प्रोडक्शन का काम अप्रैल में शुरू किया जाएगा और कंपनी प्रतिवर्ष 1 लाख यूनिट प्रोड्यूस करेगी। वहीं मारुति सुजुकी का मकसद भारतीय बाजार के लिए हर महीने करीब 7,000 यूनिट्स बनाने का है। जिम्नी सिर्फ 2 ट्रिम्स - जीटा और अल्फा में उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा जिम्नी का इंटीरियर कई सारे फीचर्स जैसे- ऑटो हेडलैम्प्स, स्मार्टप्ले प्रो+ इंफोटेनमेंट सिस्टम और साउंड सिस्टम आदि से लैस होगा। वही सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग और हिल-होल्ड असिस्ट को शामिल किया जाएगा। जिम्नी में 1. 5-लीटर K15B पेट्रोल इंजन दिया जाएगा, जिसे 5-स्पीड मैनुअल या 4-स्पीड टॉर्क-कनवर्टर ऑटोमैटिक गियरबाक्स के साथ जोड़ा जाएगा। बता दें कि जिम्नी की कीमत को लेकर कोई जानकारी सामने नही आई है, लेकिन इसकी अनुमानित कीमत 12 लाख रुपए के आस-पास की हो सकती है। लॉन्च के समय, इसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी नहीं होगा, लेकिन महिंद्रा थार और फोर्स गुरखा से इसका मुकाबला होगा।
ऑटो डेस्कः मारुति सुजुकी ने ऑटो एक्सपो दो हज़ार तेईस में पाँच-डोर जिम्नी को अनवील कर दिया था। अनवीलिंग के साथ ही कंपनी ने इसके लिए बुकिंग्स शुरू लेना शुरू कर दिया था। अब जानकारी सामने आई कि नई जिम्नी के प्रोडक्शन का काम अप्रैल में शुरू किया जाएगा और कंपनी प्रतिवर्ष एक लाख यूनिट प्रोड्यूस करेगी। वहीं मारुति सुजुकी का मकसद भारतीय बाजार के लिए हर महीने करीब सात,शून्य यूनिट्स बनाने का है। जिम्नी सिर्फ दो ट्रिम्स - जीटा और अल्फा में उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा जिम्नी का इंटीरियर कई सारे फीचर्स जैसे- ऑटो हेडलैम्प्स, स्मार्टप्ले प्रो+ इंफोटेनमेंट सिस्टम और साउंड सिस्टम आदि से लैस होगा। वही सेफ्टी के लिए इसमें छः एयरबैग और हिल-होल्ड असिस्ट को शामिल किया जाएगा। जिम्नी में एक. पाँच-लीटर Kपंद्रहB पेट्रोल इंजन दिया जाएगा, जिसे पाँच-स्पीड मैनुअल या चार-स्पीड टॉर्क-कनवर्टर ऑटोमैटिक गियरबाक्स के साथ जोड़ा जाएगा। बता दें कि जिम्नी की कीमत को लेकर कोई जानकारी सामने नही आई है, लेकिन इसकी अनुमानित कीमत बारह लाख रुपए के आस-पास की हो सकती है। लॉन्च के समय, इसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी नहीं होगा, लेकिन महिंद्रा थार और फोर्स गुरखा से इसका मुकाबला होगा।
नाच मेरी राधा का टीज़र रिलीज़,संजू संग जमेगी नताशा की जोड़ी। युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा तेरी जादूगरी का नशा,वीडियो हो रहा वायरल। पौर परार वीडियो का पोस्टर जारी,एक बार फिर प्राची पंवार आएगी नए अंदाज में नजर। दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है छलपट्टी का जादू, यूट्यूब पर वीडियो ने भी बटोरे 3 मिलियन व्यूज। सौंण कूयेडी गीत ने छोड़ी दिलों पर छांप,श्रोताओं ने कहा आंखे भर आई। छोरी बिंदास वीडियो ने मचाया धमाल, गीताराम कंसवाल का अंदाज दर्शकों पसंद। रौंसल्या ज्वानि गीत को दर्शकों किया ने पसंद, जानिए किसने दिए हैं स्वर। छोरी सुमना वीडियो बना लाखों की पसंद,दर्शकों ने की गायकों की तारीफ। रोहित प्राची के इस वीडियो ने जीता युवाओं का दिल,याद आया बचपन का प्यार। गौचर का मेला गढ़वाली वीडियो ने बटोरे लाखों व्यूज,मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया।
नाच मेरी राधा का टीज़र रिलीज़,संजू संग जमेगी नताशा की जोड़ी। युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा तेरी जादूगरी का नशा,वीडियो हो रहा वायरल। पौर परार वीडियो का पोस्टर जारी,एक बार फिर प्राची पंवार आएगी नए अंदाज में नजर। दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है छलपट्टी का जादू, यूट्यूब पर वीडियो ने भी बटोरे तीन मिलियन व्यूज। सौंण कूयेडी गीत ने छोड़ी दिलों पर छांप,श्रोताओं ने कहा आंखे भर आई। छोरी बिंदास वीडियो ने मचाया धमाल, गीताराम कंसवाल का अंदाज दर्शकों पसंद। रौंसल्या ज्वानि गीत को दर्शकों किया ने पसंद, जानिए किसने दिए हैं स्वर। छोरी सुमना वीडियो बना लाखों की पसंद,दर्शकों ने की गायकों की तारीफ। रोहित प्राची के इस वीडियो ने जीता युवाओं का दिल,याद आया बचपन का प्यार। गौचर का मेला गढ़वाली वीडियो ने बटोरे लाखों व्यूज,मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया।
अपनी खुद की अर्थव्यवस्थाओं में सैन्य उत्पादन के उच्च हिस्से वाले राज्यों के लिए चीखों में तलवारों को बनाना एक शाश्वत समस्या है। एक निश्चित चरण में, जिस सवाल का अधिक महत्वपूर्ण है, बंदूकें या तेल, बस इसके लायक नहीं है, क्योंकि स्थिति ऐसी है कि यदि आपके पास पर्याप्त बंदूकें नहीं हैं, तो कोई और आपके तेल को बहुत जल्द खा जाएगा। हालांकि, एक मौजूदा या संभावित दुश्मन पर सैन्य-तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करने के लिए जरूरी झटका या हथियार मामलों में उसके साथ कम से कम समानता के बाद, एक क्षण आता है जब आपको निर्णय लेने की आवश्यकता होती हैः रक्षा उद्योगों में सफलता के साथ क्या करना है? रूस के लिए, यह मुद्दा प्रासंगिक से अधिक है। मुझे याद है कि कुछ साल पहले, व्लादिमीर पुतिन, सोची में आयोजित एक प्रतिनिधि बैठक के दौरान, जिस विषय की रक्षा की समस्या ठीक थी, इस विषय पर काफी विशिष्ट आंकड़े कहलाते हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति के अनुसार, 2020 तक, रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर के कुल शाफ्ट में नागरिक उत्पादों का हिस्सा 17% तक पहुंच गया था, और 2025 और 2030 में - क्रमशः एक तिहाई और एक आधा तक बढ़ गया! इस तरह के संस्करणों की प्राप्ति के बारे में कुछ संदेह मुख्य रूप से दुनिया में स्थिति के कारण होते हैं, जो अब तक सैन्य कार्यक्रमों को कम करने में बहुत योगदान नहीं देता है। बल्कि, इसके विपरीत है। हालाँकि, समस्या केवल यही नहीं है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शांतिपूर्ण माल (रूपांतरण) के उत्पादन के लिए रक्षा उद्योग को फिर से परिभाषित करने का प्रयास यूएसएसआर और रूस में 80 के दशक में पिछली शताब्दी के 90 के दशक में किया गया था। परिणाम क्या है? इसके निष्पादन में सैन्य-औद्योगिक परिसर, भयानक, बेकार हस्तशिल्पों का लगभग पूरा पतन और अपमानजनक अभिव्यक्तियों की श्रेणी में "रूपांतरण" शब्द का संक्रमण। इस प्रयोग को दोहराना असंभव है, जो कि, नवीनतम अनुमानों के अनुसार, "एक गंभीर सैद्धांतिक आधार और ध्वनि योजनाओं और कार्यक्रमों दोनों की पूर्ण अनुपस्थिति में" किया गया थाः "पेरोस्ट्रोइका" और उनके अनुयायियों "रक्षा उद्योग" द्वारा मूर्खतापूर्ण रूप से खाई का पुनर्जन्म बहुत महंगा दिया गया था। "। इसलिए क्या करना है? सबसे पहले, शायद यह स्पष्ट रूप से तय करने योग्य है कि क्या नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी रूपांतरण को कुछ सैन्य उद्योगों की बारीकियों के बारे में उनकी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का उपयोग करते हुए किया जाना चाहिए, न कि इसे पूरी तरह से त्याग कर। सीधे शब्दों में कहें, नहीं करना चाहिए टैंक कारखानों में प्रेशर कुकर बनाने की कोशिश की जाती है, और रॉकेट ईंधन उत्पादक इत्र उत्पादन में बदल जाते हैं। सभी समान, कुछ भी अच्छा नहीं होगा - केवल कच्चे माल को व्यर्थ में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और उत्पादन बर्बाद हो जाएगा। हालांकि, एक और बात और भी महत्वपूर्ण हैः जब कुछ उद्यमों का विमुद्रीकरण किया जाता है, तो किसी को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि क्या सैन्य-औद्योगिक परिसर से उनका बहिष्कार सशस्त्र बलों की लड़ाकू तत्परता को प्रभावित करेगा। और यह 90 के दशक की तरह होगा, जब एक बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया था। इसकी समझ राज्य स्तर पर होनी चाहिए और इस पर उचित निर्णय किए जाने चाहिए। उम्मीद है, नया रूपांतरण पिछले प्रयास की तुलना में अधिक सफल होगा। इसके लिए आशा करने का हर कारण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक ही रोस्टेक काफी सफलतापूर्वक री-प्रोफाइलिंग है, जहां उत्पादन की कुल मात्रा में गैर-सैन्य नमूने पहले से ही एक तिहाई तक पहुंच जाते हैं। इसी समय, छोटी चीज़ों के लिए प्राप्त क्षमता का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है, लेकिन इसका उपयोग जारी रहता है, बस एक अलग उद्देश्य के लिए। विनिर्माण उद्यम विमान लड़ाकू विमानों के लिए इंजन गजप्रॉम के लिए गैस टरबाइन इकाइयों के उत्पादन का एक उत्कृष्ट काम करते हैं। समान सैन्य विमान उद्योग में उपयोग की जाने वाली उच्च शक्ति सामग्री (उदाहरण के लिए, ग्लास जो अल्ट्रा-हाई लोड का सामना कर सकते हैं) का उपयोग नागरिक यात्री परिवहन के निर्माण में पूरी तरह से किया जाता है। "उच्च" प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सबसे उन्नत रक्षा विकास की संभावनाओं के बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं है। कई मायनों में, यह शहरी वातावरण के लिए तकनीकी सुरक्षा का उच्चतम स्तर था जिसने चीन को इतनी जल्दी और सफलतापूर्वक उस महामारी पर काबू पाने में मदद की जो उस पर गिरी थी। इस क्षेत्र में हमारे पास अभी भी "बढ़ने" के लिए बहुत कुछ है। एक सक्षम, विचारशील और संतुलित रूपांतरण रूस को बहुत कुछ दे सकता है, न केवल आवश्यक उत्पादों के साथ नागरिकों को प्रदान करने के मामले में, बल्कि इसके आगे के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के लिए एक प्रेरणा के रूप में। मैं विश्वास करना चाहता हूं कि ऐसा होगा। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः - साइट "रोस्टेक"
अपनी खुद की अर्थव्यवस्थाओं में सैन्य उत्पादन के उच्च हिस्से वाले राज्यों के लिए चीखों में तलवारों को बनाना एक शाश्वत समस्या है। एक निश्चित चरण में, जिस सवाल का अधिक महत्वपूर्ण है, बंदूकें या तेल, बस इसके लायक नहीं है, क्योंकि स्थिति ऐसी है कि यदि आपके पास पर्याप्त बंदूकें नहीं हैं, तो कोई और आपके तेल को बहुत जल्द खा जाएगा। हालांकि, एक मौजूदा या संभावित दुश्मन पर सैन्य-तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करने के लिए जरूरी झटका या हथियार मामलों में उसके साथ कम से कम समानता के बाद, एक क्षण आता है जब आपको निर्णय लेने की आवश्यकता होती हैः रक्षा उद्योगों में सफलता के साथ क्या करना है? रूस के लिए, यह मुद्दा प्रासंगिक से अधिक है। मुझे याद है कि कुछ साल पहले, व्लादिमीर पुतिन, सोची में आयोजित एक प्रतिनिधि बैठक के दौरान, जिस विषय की रक्षा की समस्या ठीक थी, इस विषय पर काफी विशिष्ट आंकड़े कहलाते हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति के अनुसार, दो हज़ार बीस तक, रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर के कुल शाफ्ट में नागरिक उत्पादों का हिस्सा सत्रह% तक पहुंच गया था, और दो हज़ार पच्चीस और दो हज़ार तीस में - क्रमशः एक तिहाई और एक आधा तक बढ़ गया! इस तरह के संस्करणों की प्राप्ति के बारे में कुछ संदेह मुख्य रूप से दुनिया में स्थिति के कारण होते हैं, जो अब तक सैन्य कार्यक्रमों को कम करने में बहुत योगदान नहीं देता है। बल्कि, इसके विपरीत है। हालाँकि, समस्या केवल यही नहीं है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शांतिपूर्ण माल के उत्पादन के लिए रक्षा उद्योग को फिर से परिभाषित करने का प्रयास यूएसएसआर और रूस में अस्सी के दशक में पिछली शताब्दी के नब्बे के दशक में किया गया था। परिणाम क्या है? इसके निष्पादन में सैन्य-औद्योगिक परिसर, भयानक, बेकार हस्तशिल्पों का लगभग पूरा पतन और अपमानजनक अभिव्यक्तियों की श्रेणी में "रूपांतरण" शब्द का संक्रमण। इस प्रयोग को दोहराना असंभव है, जो कि, नवीनतम अनुमानों के अनुसार, "एक गंभीर सैद्धांतिक आधार और ध्वनि योजनाओं और कार्यक्रमों दोनों की पूर्ण अनुपस्थिति में" किया गया थाः "पेरोस्ट्रोइका" और उनके अनुयायियों "रक्षा उद्योग" द्वारा मूर्खतापूर्ण रूप से खाई का पुनर्जन्म बहुत महंगा दिया गया था। "। इसलिए क्या करना है? सबसे पहले, शायद यह स्पष्ट रूप से तय करने योग्य है कि क्या नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी रूपांतरण को कुछ सैन्य उद्योगों की बारीकियों के बारे में उनकी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का उपयोग करते हुए किया जाना चाहिए, न कि इसे पूरी तरह से त्याग कर। सीधे शब्दों में कहें, नहीं करना चाहिए टैंक कारखानों में प्रेशर कुकर बनाने की कोशिश की जाती है, और रॉकेट ईंधन उत्पादक इत्र उत्पादन में बदल जाते हैं। सभी समान, कुछ भी अच्छा नहीं होगा - केवल कच्चे माल को व्यर्थ में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और उत्पादन बर्बाद हो जाएगा। हालांकि, एक और बात और भी महत्वपूर्ण हैः जब कुछ उद्यमों का विमुद्रीकरण किया जाता है, तो किसी को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि क्या सैन्य-औद्योगिक परिसर से उनका बहिष्कार सशस्त्र बलों की लड़ाकू तत्परता को प्रभावित करेगा। और यह नब्बे के दशक की तरह होगा, जब एक बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया था। इसकी समझ राज्य स्तर पर होनी चाहिए और इस पर उचित निर्णय किए जाने चाहिए। उम्मीद है, नया रूपांतरण पिछले प्रयास की तुलना में अधिक सफल होगा। इसके लिए आशा करने का हर कारण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक ही रोस्टेक काफी सफलतापूर्वक री-प्रोफाइलिंग है, जहां उत्पादन की कुल मात्रा में गैर-सैन्य नमूने पहले से ही एक तिहाई तक पहुंच जाते हैं। इसी समय, छोटी चीज़ों के लिए प्राप्त क्षमता का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है, लेकिन इसका उपयोग जारी रहता है, बस एक अलग उद्देश्य के लिए। विनिर्माण उद्यम विमान लड़ाकू विमानों के लिए इंजन गजप्रॉम के लिए गैस टरबाइन इकाइयों के उत्पादन का एक उत्कृष्ट काम करते हैं। समान सैन्य विमान उद्योग में उपयोग की जाने वाली उच्च शक्ति सामग्री का उपयोग नागरिक यात्री परिवहन के निर्माण में पूरी तरह से किया जाता है। "उच्च" प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सबसे उन्नत रक्षा विकास की संभावनाओं के बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं है। कई मायनों में, यह शहरी वातावरण के लिए तकनीकी सुरक्षा का उच्चतम स्तर था जिसने चीन को इतनी जल्दी और सफलतापूर्वक उस महामारी पर काबू पाने में मदद की जो उस पर गिरी थी। इस क्षेत्र में हमारे पास अभी भी "बढ़ने" के लिए बहुत कुछ है। एक सक्षम, विचारशील और संतुलित रूपांतरण रूस को बहुत कुछ दे सकता है, न केवल आवश्यक उत्पादों के साथ नागरिकों को प्रदान करने के मामले में, बल्कि इसके आगे के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के लिए एक प्रेरणा के रूप में। मैं विश्वास करना चाहता हूं कि ऐसा होगा। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः - साइट "रोस्टेक"
मूस से व्यंजन, हालांकि, किसी भी खेल से, परहमारी मेज एक दुर्लभता है। और जब एक एल्क तैयार करने का अवसर होता है, तो कई मालकिनों ने अपना हाथ बढ़ायाः "मुझे इसके साथ क्या करना चाहिए?"। आप गोमांस के साथ लगभग वही काम कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास एक समान संरचना है। कटलेट बनाने का एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि खेल मांस अधिक कठोर है, इसलिए पेशेवर पाक विशेषज्ञों की सलाह सुनना बेहतर है। एक छोटी सामग्री के साथ लिया कटलेट के लिए मांसनसों और वसा, वे tenderloin से बहुत शुष्क हो जाएगा। एल्क टेंडर और स्वादिष्ट से पैटी को काटने के लिए, मिनेस को इसकी संरचना में वसा पोर्क या दाढ़ी के लगभग 20% होना चाहिए। नरमता दूध में भिगोकर सफेद रोटी देगी। छोटा हुआ मांस बनाने से पहले, मांस को छोटे टुकड़ों में काट लें और मांस ग्राइंडर के माध्यम से दो बार पास करें। एल्क की पैटीज़ में बहुत सारे मसालों को जोड़ा नहीं जाना चाहिए, क्योंकि मांस का अपना समृद्ध स्वाद होता है, और विभिन्न सुगंधित जड़ी बूटियों ने इसे डूब दिया है। आदर्श मसाला काला या सफेद काली मिर्च है। एक फ्राइंग पैन में सामान्य रूप से कटलेट फ्राइये, और फिर स्टोव पर या ओवन में लगभग आधा घंटे तक एक सॉटे पैन और स्टू में डाल दें। मूस से कटलेट बनाने के लिए,- किलोग्राम, सूअर का मांस वसा या चरबी - 300 ग्राम, एक आलू, सफेद रोटी का आधा एक पाव रोटी, दूध का एक गिलास, कम वसा क्रीम के दो कप, एक प्याज, दो अंडे, breading, नमक और मसाले के लिए टुकड़ों एल्क का मांसः निम्नलिखित उत्पादों की आवश्यकता होगी। एल्क मांस को अच्छी तरह से एक मांस मिक्सी में धोया जाता है, मोड़, सूअर का मांस या बेकन के साथ-साथ, कच्चे आलू भेजने के लिए। वह अतिरिक्त वसा लेगा और कटोरे को एल्के fluffy से बना देगा। इसके बाद, रोटी दूध, निचोड़ और मोड़ में एक मांस मिक्सी में एक साथ बल्ब से लथपथ। भरने में हम एक अंडे चलाते हैं, नमक और मसालों को जोड़ें। एक छोटे से शोरबा या पानी डालो - इस मूस बर्गर juicier कर रहे हैं, सब कुछ ठीक गूंथ। फिर, एक उथले कटोरा और प्रोटीन की जर्दी के साथ रखा करने के लिए कांटा गप्पी में एक अंडा ड्राइव करने के लिए कोशिश कर रहा। छोटी-छोटी गोलियां बनाने कीमा बनाया हुआ, थोड़ा उन्हें शीर्ष पर priplyusnuv,, अंडे में से हर एक डुबकी ब्रेडक्रंब साथ छिड़के और पैन डाल दिया। लगभग 15-20 मिनट फ्राइये। फिर मोटी दीवारों के साथ एक पैन में स्थानांतरित करें, क्रीम डालें और 30 मिनट के लिए उबाल लें। मांस खेल को एक स्वादिष्ट माना जाता है,इसलिए इससे व्यंजन मूल तैयार करने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, यहां यह हैः क्रैनबेरी और जई-फ्लेक्स के साथ एल्क से कटलेट। 800 ग्राम, चरबी - - 200 ग्राम, एक गिलास दलिया polbatona, दूध का एक गिलास, एक बल्ब, polstakana क्रैनबेरी, एक अंडा, नमक, काली मिर्च एल्कः की जरूरत तैयार करने के लिए। मांस चक्की में, हम मांस को बेकन, एक बल्ब, दूध में भिगोकर एक रोटी के साथ मोड़ते हैं। हम स्टफिंग में एक अंडा ड्राइव करने के लिए, दलिया, फ्रोजन cranberries और सभी मिश्रण अच्छी तरह से जोड़ सकते हैं और patties फार्म कोशिश कर रहे हैं। यदि cranberries ताजा, यह भरने के लिए जोड़ सकते हैं और प्रत्येक पैटी में कुछ जामुन डाल नहीं है। हम फ्लेक्स और तलना में पैन। जब कटलेट भूरे रंग के होते हैं, तो 15 मिनट के लिए एक फ्राइंग पैन और स्टू में थोड़ा पानी डालें।
मूस से व्यंजन, हालांकि, किसी भी खेल से, परहमारी मेज एक दुर्लभता है। और जब एक एल्क तैयार करने का अवसर होता है, तो कई मालकिनों ने अपना हाथ बढ़ायाः "मुझे इसके साथ क्या करना चाहिए?"। आप गोमांस के साथ लगभग वही काम कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास एक समान संरचना है। कटलेट बनाने का एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि खेल मांस अधिक कठोर है, इसलिए पेशेवर पाक विशेषज्ञों की सलाह सुनना बेहतर है। एक छोटी सामग्री के साथ लिया कटलेट के लिए मांसनसों और वसा, वे tenderloin से बहुत शुष्क हो जाएगा। एल्क टेंडर और स्वादिष्ट से पैटी को काटने के लिए, मिनेस को इसकी संरचना में वसा पोर्क या दाढ़ी के लगभग बीस% होना चाहिए। नरमता दूध में भिगोकर सफेद रोटी देगी। छोटा हुआ मांस बनाने से पहले, मांस को छोटे टुकड़ों में काट लें और मांस ग्राइंडर के माध्यम से दो बार पास करें। एल्क की पैटीज़ में बहुत सारे मसालों को जोड़ा नहीं जाना चाहिए, क्योंकि मांस का अपना समृद्ध स्वाद होता है, और विभिन्न सुगंधित जड़ी बूटियों ने इसे डूब दिया है। आदर्श मसाला काला या सफेद काली मिर्च है। एक फ्राइंग पैन में सामान्य रूप से कटलेट फ्राइये, और फिर स्टोव पर या ओवन में लगभग आधा घंटे तक एक सॉटे पैन और स्टू में डाल दें। मूस से कटलेट बनाने के लिए,- किलोग्राम, सूअर का मांस वसा या चरबी - तीन सौ ग्राम, एक आलू, सफेद रोटी का आधा एक पाव रोटी, दूध का एक गिलास, कम वसा क्रीम के दो कप, एक प्याज, दो अंडे, breading, नमक और मसाले के लिए टुकड़ों एल्क का मांसः निम्नलिखित उत्पादों की आवश्यकता होगी। एल्क मांस को अच्छी तरह से एक मांस मिक्सी में धोया जाता है, मोड़, सूअर का मांस या बेकन के साथ-साथ, कच्चे आलू भेजने के लिए। वह अतिरिक्त वसा लेगा और कटोरे को एल्के fluffy से बना देगा। इसके बाद, रोटी दूध, निचोड़ और मोड़ में एक मांस मिक्सी में एक साथ बल्ब से लथपथ। भरने में हम एक अंडे चलाते हैं, नमक और मसालों को जोड़ें। एक छोटे से शोरबा या पानी डालो - इस मूस बर्गर juicier कर रहे हैं, सब कुछ ठीक गूंथ। फिर, एक उथले कटोरा और प्रोटीन की जर्दी के साथ रखा करने के लिए कांटा गप्पी में एक अंडा ड्राइव करने के लिए कोशिश कर रहा। छोटी-छोटी गोलियां बनाने कीमा बनाया हुआ, थोड़ा उन्हें शीर्ष पर priplyusnuv,, अंडे में से हर एक डुबकी ब्रेडक्रंब साथ छिड़के और पैन डाल दिया। लगभग पंद्रह-बीस मिनट फ्राइये। फिर मोटी दीवारों के साथ एक पैन में स्थानांतरित करें, क्रीम डालें और तीस मिनट के लिए उबाल लें। मांस खेल को एक स्वादिष्ट माना जाता है,इसलिए इससे व्यंजन मूल तैयार करने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, यहां यह हैः क्रैनबेरी और जई-फ्लेक्स के साथ एल्क से कटलेट। आठ सौ ग्राम, चरबी - - दो सौ ग्राम, एक गिलास दलिया polbatona, दूध का एक गिलास, एक बल्ब, polstakana क्रैनबेरी, एक अंडा, नमक, काली मिर्च एल्कः की जरूरत तैयार करने के लिए। मांस चक्की में, हम मांस को बेकन, एक बल्ब, दूध में भिगोकर एक रोटी के साथ मोड़ते हैं। हम स्टफिंग में एक अंडा ड्राइव करने के लिए, दलिया, फ्रोजन cranberries और सभी मिश्रण अच्छी तरह से जोड़ सकते हैं और patties फार्म कोशिश कर रहे हैं। यदि cranberries ताजा, यह भरने के लिए जोड़ सकते हैं और प्रत्येक पैटी में कुछ जामुन डाल नहीं है। हम फ्लेक्स और तलना में पैन। जब कटलेट भूरे रंग के होते हैं, तो पंद्रह मिनट के लिए एक फ्राइंग पैन और स्टू में थोड़ा पानी डालें।
जोधपुर राज्य की ख्यात में लिखा है- 'वि० सं० १६६६ ( ६० स० १६०६ ) में राणा अमरसिंह का दमन करने के लिए बादशाह ने महावतखां' को नियतकर उसे मोही भेजा। उसने वहां जाकर पता लगाया तो मालूम हुआ कि राणा का परिवार सूरसिंह के इलाके के सोजत नामक स्थान में है । इससे अप्रसन्न होकर उसने सोजत का परगना कर्मसेन ( उग्रसेनोत) को देकर उससे राणा के परिवार का पता लगाने के लिए कहा। (श्रावणादि ) वि० सं० १६६६ (चैत्रादि १६६७) वैशाख चदि २ (ई०स० १६१० ता० ३१ मार्च) को कर्मसेन ने जाकर सोजत पर अधिकार किया। दक्षिण जाते समय मार्ग में इसकी खबर पाकर सूरसिंह ने गोयन्द्रदास भाटी को भेजा, जिसने महाबतखां से इस सम्बन्ध में बहुत कुछ कहा सुना, पर कोई परिणाम न निकला । तब वह मेड़ते में कुंवर गजसिंह के पास चला गया। कुछ दिनों पश्चात् महावतखां के स्थान में अब्दुल्लाखां की नियुक्ति हुई, जिसने कुंवर गजसिंह और गोविन्ददास को बुलाकर नाडोल और सोजत वापस दे दिये । तब गजसिंह ने कर्मसेन को निकालकर सोजत और गज़नीखां को निकाल कर नाडोल पर अधिकार कर लिया ।' वि० सं० १६६८ ( ई० स० १६११ ) में सीसोदिया भीम इसाली (१) लूटकर भागा । उस समय राठोड़ लक्ष्मण ( नारायणोत) और राठोड़ अमरा ( १ ) काबुल के ग़फ़रवेग का पुत्र जमानावेग । पीछे से इसे महायतवां का निताब मिला । (२) भिणायवालों का पूर्वज ( ३ ) जिल्द १, पृ० १२६-७ । "तुज़ुक-इ जहांगीरी" मैं इस घटना का उल्लेख नहीं है, परन्तु उससे इतना पता चलता है कि जहांगीर के चौथे राज्यवर्प के श्रारम्भ में महाबतखां हटाया जाकर उसके स्थान में अब्दुल्लाखां राणा पर नियुक्त किया गया था ( रॉजर्स और वेवरिज-कृत अनुवाद; जि० १, पृ० १५२ ) । उक्न तवारीख के अनुसार यह घटना हि० स० १०१७ ( वि० सं० १६६५ = ६० स० १६०८ ) की है । यदि स्यात की घटना ठीक भी मान ली जाय तो यही मानना पड़ेगा कि उसका समय उसमें राजत दिया है ।
जोधपुर राज्य की ख्यात में लिखा है- 'विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ छयासठ में राणा अमरसिंह का दमन करने के लिए बादशाह ने महावतखां' को नियतकर उसे मोही भेजा। उसने वहां जाकर पता लगाया तो मालूम हुआ कि राणा का परिवार सूरसिंह के इलाके के सोजत नामक स्थान में है । इससे अप्रसन्न होकर उसने सोजत का परगना कर्मसेन को देकर उससे राणा के परिवार का पता लगाने के लिए कहा। विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ छयासठ वैशाख चदि दो को कर्मसेन ने जाकर सोजत पर अधिकार किया। दक्षिण जाते समय मार्ग में इसकी खबर पाकर सूरसिंह ने गोयन्द्रदास भाटी को भेजा, जिसने महाबतखां से इस सम्बन्ध में बहुत कुछ कहा सुना, पर कोई परिणाम न निकला । तब वह मेड़ते में कुंवर गजसिंह के पास चला गया। कुछ दिनों पश्चात् महावतखां के स्थान में अब्दुल्लाखां की नियुक्ति हुई, जिसने कुंवर गजसिंह और गोविन्ददास को बुलाकर नाडोल और सोजत वापस दे दिये । तब गजसिंह ने कर्मसेन को निकालकर सोजत और गज़नीखां को निकाल कर नाडोल पर अधिकार कर लिया ।' विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ अड़सठ में सीसोदिया भीम इसाली लूटकर भागा । उस समय राठोड़ लक्ष्मण और राठोड़ अमरा काबुल के ग़फ़रवेग का पुत्र जमानावेग । पीछे से इसे महायतवां का निताब मिला । भिणायवालों का पूर्वज जिल्द एक, पृशून्य एक सौ छब्बीस-सात । "तुज़ुक-इ जहांगीरी" मैं इस घटना का उल्लेख नहीं है, परन्तु उससे इतना पता चलता है कि जहांगीर के चौथे राज्यवर्प के श्रारम्भ में महाबतखां हटाया जाकर उसके स्थान में अब्दुल्लाखां राणा पर नियुक्त किया गया था । उक्न तवारीख के अनुसार यह घटना हिशून्य सशून्य एक हज़ार सत्रह की है । यदि स्यात की घटना ठीक भी मान ली जाय तो यही मानना पड़ेगा कि उसका समय उसमें राजत दिया है ।
PATNA: क्फ्वीं वैलेंटाइन थ्रोबॉल चैम्पियनशिप के फाइनल में होस्ट पटना वीमेंस कालेज चैम्पियन बना। पटना वीमेंस कॉलेज की टीम ने डीएवी बोर्ड कॉलोनी को पराजित किया। इसमें पंद्रह प्वाइंट का पांच मैच खेला गया। दोनों टीमों से क्भ्-क्भ् टीमों ने पार्टिसिपेट किया। विनर टीम की कैप्टन सुरुचि ने बेहतरीन को-आर्डिनेशन दिखाया और टीम को जीत हासिल करने में खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। इस प्रकार डीएवी बोर्ड कॉलोनी की टीम मैच में रनर-अप रही। टीम की कैप्टन अनामिका थी। सभी पार्टिसिपेंट्स प्लेयर्स को सर्टिफिकेट, मेडल और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। इससे पहले खेले गए मैच में डीएवी, बोर्ड कॉलोनी ने वीणा विद्या निकेतन को हराया था। इस मौके पर चीफ गेस्ट थ्रोबॉल एसोसिएशन के देवेंद्र कुमार उपस्थित थे। टूर्नामेंट का आयोजन पीडब्ल्यूसी की स्पोर्ट्स को-आर्डिनेटर डॉ मंजुला सुशीला की ओर से किया गया। स्पोर्ट्स टीचर काजी बुशरा अहमद उपस्थित थे।
PATNA: क्फ्वीं वैलेंटाइन थ्रोबॉल चैम्पियनशिप के फाइनल में होस्ट पटना वीमेंस कालेज चैम्पियन बना। पटना वीमेंस कॉलेज की टीम ने डीएवी बोर्ड कॉलोनी को पराजित किया। इसमें पंद्रह प्वाइंट का पांच मैच खेला गया। दोनों टीमों से क्भ्-क्भ् टीमों ने पार्टिसिपेट किया। विनर टीम की कैप्टन सुरुचि ने बेहतरीन को-आर्डिनेशन दिखाया और टीम को जीत हासिल करने में खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। इस प्रकार डीएवी बोर्ड कॉलोनी की टीम मैच में रनर-अप रही। टीम की कैप्टन अनामिका थी। सभी पार्टिसिपेंट्स प्लेयर्स को सर्टिफिकेट, मेडल और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। इससे पहले खेले गए मैच में डीएवी, बोर्ड कॉलोनी ने वीणा विद्या निकेतन को हराया था। इस मौके पर चीफ गेस्ट थ्रोबॉल एसोसिएशन के देवेंद्र कुमार उपस्थित थे। टूर्नामेंट का आयोजन पीडब्ल्यूसी की स्पोर्ट्स को-आर्डिनेटर डॉ मंजुला सुशीला की ओर से किया गया। स्पोर्ट्स टीचर काजी बुशरा अहमद उपस्थित थे।
अगरतला। त्रिपुरा सरकार ने गुरुवार को 1988 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ रंजन को पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रंजन, (वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत खुफिया ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक के रूप में तैनात हैं) वी. एस. यादव की जगह लेंगे, जो नवंबर 2020 से अपनी सेवा में विस्तार कर रहे थे, उन्हें नई दिल्ली में त्रिपुरा भवन में प्रधान निवासी आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मुख्य सचिव कुमार आलोक के तबादले के बाद 19 दिनों के भीतर पुलिस प्रमुख को बदल दिया। 15 मई को पदभार ग्रहण करने वाले साहा ने 9 जुलाई को अचानक मुख्य सचिव कुमार आलोक को राज्य लोक प्रशासन और ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईपीएआरडी) के महानिदेशक (डीजी) के रूप में स्थानांतरित कर दिया और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जे. के. सिन्हा को नया मुख्य सचिव बनाया।
अगरतला। त्रिपुरा सरकार ने गुरुवार को एक हज़ार नौ सौ अठासी बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ रंजन को पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रंजन, वी. एस. यादव की जगह लेंगे, जो नवंबर दो हज़ार बीस से अपनी सेवा में विस्तार कर रहे थे, उन्हें नई दिल्ली में त्रिपुरा भवन में प्रधान निवासी आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मुख्य सचिव कुमार आलोक के तबादले के बाद उन्नीस दिनों के भीतर पुलिस प्रमुख को बदल दिया। पंद्रह मई को पदभार ग्रहण करने वाले साहा ने नौ जुलाई को अचानक मुख्य सचिव कुमार आलोक को राज्य लोक प्रशासन और ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक के रूप में स्थानांतरित कर दिया और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जे. के. सिन्हा को नया मुख्य सचिव बनाया।
यह देखने में शानदार और पहनने में आरामदायक Men Loafers हैं। इनमें आपको साइज और कलर के कई ऑप्शन मिल जाएंगे। पार्टी और कैजुअल वेयर के लिए लोफर शूज एक बेहतरीन ऑप्शन होते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर यहां पर हम आपके लिए देखने में स्टाइलिश और पहनने में आरामदायक Men Loafers का खास कलेक्शन लेकर आए हैं। इनमें आपको साइज के कई ऑप्शन मिल जाएंगे जिन्हें फिटिंग के हिसाब से लिया जा सकता है। ये किसी को गिफ्ट देने के लिए भी अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं। इन्हें जींस से लेकर ट्राउजर्स तक के साथ पहना जा सकता है। इन्हें पहनकर आपको बेहतर आउटफिट और लुक मिल सकता है।
यह देखने में शानदार और पहनने में आरामदायक Men Loafers हैं। इनमें आपको साइज और कलर के कई ऑप्शन मिल जाएंगे। पार्टी और कैजुअल वेयर के लिए लोफर शूज एक बेहतरीन ऑप्शन होते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर यहां पर हम आपके लिए देखने में स्टाइलिश और पहनने में आरामदायक Men Loafers का खास कलेक्शन लेकर आए हैं। इनमें आपको साइज के कई ऑप्शन मिल जाएंगे जिन्हें फिटिंग के हिसाब से लिया जा सकता है। ये किसी को गिफ्ट देने के लिए भी अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं। इन्हें जींस से लेकर ट्राउजर्स तक के साथ पहना जा सकता है। इन्हें पहनकर आपको बेहतर आउटफिट और लुक मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चली पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने अब्बास अंसारी से 9 घंटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, अब्बास पूछे गए कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए। ईडी ने अब्बास अंसारी से दो राउंड में पूछताछ की थी। इससे पहले अब्बास से पहले राउंड की पूछताछ 20 मई को की गई थी। ईडी ने अब्बास अंसारी के खिलाफ पिछले महीने लुक आउट नोटिस जारी किया था। ईडी ने कुछ दिन पहले भी पूछताछ के लिए अब्बास को समन जारी किया था। अब्बास अंसारी मऊ से विधायक हैं। अब्बास अंसारी को पूछताछ के लिए ईडी ने प्रयागराज दफ्तर में बुलाया था। शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे अब्बास अंसारी ईडी के ऑफिस पहुंचे थे। वहां उनसे करीब 9 घंटे तक ईडी की टीम ने पूछताछ की, लेकिन अब्बास अंसारी ईडी के पूछे गए सवालों के सही-सही जवाब नहीं दे सके। ईडी ने ने 90 सवाल पूछे। इसके बाद पहले ईडी ने अब्बास को हिरासत में ले लिया। इस दौरान ईडी ऑफिस के बाहर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने लगी और धीरे-धीरे ईडी दफ्तर पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल गया। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और फिर देर रात अब्बास अंसारी को ईडी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। अब्बास अंसारी के साथ उनका ड्राइवर भी मौजूद था। उससे भी ईडी ने पूछताछ की। हालांकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। अब ईडी की टीम अब्बास को लेकर कहां गई है, इस बारे में ना तो उनके वकील को और ना ही उनके ड्राइवर को पता है। दरअसल, अब्बास अंसारी के पिता मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। इस मामले में मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों और उनके भाइयों से भी पूछताछ की जा चुकी है। इसी मामले में ईडी ने अब्बास अंसारी से भी पूछताछ की और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अब्बास को गिरफ्तार कर लिया। अफज़ाल अंसारी से पूछताछ के बाद अब्बास को गिरफ्तार किया किया। अफज़ाल से इसी साल 9 मई को पूछताछ हुई थी। मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह से 10 मई को पूछताछ हुई थी। इसके अलावा मुख्तार के विधायक भतीजे शोएब से 10 मई को पूछताछ की गई थी। गौरतलब है कि इस साल 25 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब्बास को भगोड़ा घोषित कर दिया था। भगोड़ा घोषित करने के पीछे अब्बास का कोर्ट में नहीं पेश होना था। मुख्तार के बेटे अब्बास के खिलाफ आर्म्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कई मामले दर्ज हैं।
उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चली पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने अब्बास अंसारी से नौ घंटाटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, अब्बास पूछे गए कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए। ईडी ने अब्बास अंसारी से दो राउंड में पूछताछ की थी। इससे पहले अब्बास से पहले राउंड की पूछताछ बीस मई को की गई थी। ईडी ने अब्बास अंसारी के खिलाफ पिछले महीने लुक आउट नोटिस जारी किया था। ईडी ने कुछ दिन पहले भी पूछताछ के लिए अब्बास को समन जारी किया था। अब्बास अंसारी मऊ से विधायक हैं। अब्बास अंसारी को पूछताछ के लिए ईडी ने प्रयागराज दफ्तर में बुलाया था। शुक्रवार की दोपहर करीब दो बजे अब्बास अंसारी ईडी के ऑफिस पहुंचे थे। वहां उनसे करीब नौ घंटाटे तक ईडी की टीम ने पूछताछ की, लेकिन अब्बास अंसारी ईडी के पूछे गए सवालों के सही-सही जवाब नहीं दे सके। ईडी ने ने नब्बे सवाल पूछे। इसके बाद पहले ईडी ने अब्बास को हिरासत में ले लिया। इस दौरान ईडी ऑफिस के बाहर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने लगी और धीरे-धीरे ईडी दफ्तर पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल गया। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और फिर देर रात अब्बास अंसारी को ईडी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। अब्बास अंसारी के साथ उनका ड्राइवर भी मौजूद था। उससे भी ईडी ने पूछताछ की। हालांकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। अब ईडी की टीम अब्बास को लेकर कहां गई है, इस बारे में ना तो उनके वकील को और ना ही उनके ड्राइवर को पता है। दरअसल, अब्बास अंसारी के पिता मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। इस मामले में मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों और उनके भाइयों से भी पूछताछ की जा चुकी है। इसी मामले में ईडी ने अब्बास अंसारी से भी पूछताछ की और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अब्बास को गिरफ्तार कर लिया। अफज़ाल अंसारी से पूछताछ के बाद अब्बास को गिरफ्तार किया किया। अफज़ाल से इसी साल नौ मई को पूछताछ हुई थी। मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह से दस मई को पूछताछ हुई थी। इसके अलावा मुख्तार के विधायक भतीजे शोएब से दस मई को पूछताछ की गई थी। गौरतलब है कि इस साल पच्चीस अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब्बास को भगोड़ा घोषित कर दिया था। भगोड़ा घोषित करने के पीछे अब्बास का कोर्ट में नहीं पेश होना था। मुख्तार के बेटे अब्बास के खिलाफ आर्म्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कई मामले दर्ज हैं।
खेत में काम कर रहे युवक की करंट लगने से हुई मौत (सांकेतिक तस्वीर) अलवर. राजस्थान के अलवर (Alwar) जिले में आज सुबह खेत( farm) में काम करते समय एक युवक की करंट (Electric Current) लगने से मौत (dead) हो गई. युवक की मौत से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सौंप दिया. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच की जा रही है. घटना जिले के सैयद खेड़ली गांव की है. जानकारी के अनुसार युवक अपने खेत में काम कर रहा था, जहां पर 11000 विद्युत केवी लाइन जा रही है. बिजली की लाइन के तार नीचे लटके होने के कारण वह उसकी चपेट में आ गया, जिससे करंट लगने से उसकी मौत हो गई. युवक की शिनाख्त 22 वर्षीय सोनू जाटव के रूप में हुई है. बता दें कि युवक की 21 दिन पहले ही शादी हुई थी. परिजनों का कहना है कि खेत में तार नीचे लटके होने की शिकायत उनके द्वारा कई बार विद्युत विभाग में की गई थी, लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक वहां कोई कार्य नहीं हुआ है. विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण ही युवक की मौत हो गई. वहीं थाना पुलिस के हैड कांस्टेबल मनोहर लाल ने बताया कि सैयद खेड़ली निवासी सोनू जाटव सुबह खेत में काम कर रहा था, इस दौरान विद्युत लाइन के संपर्क आने से उसकी मौत हो गई. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच में जुट गई है. .
खेत में काम कर रहे युवक की करंट लगने से हुई मौत अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में आज सुबह खेत में काम करते समय एक युवक की करंट लगने से मौत हो गई. युवक की मौत से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को सौंप दिया. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच की जा रही है. घटना जिले के सैयद खेड़ली गांव की है. जानकारी के अनुसार युवक अपने खेत में काम कर रहा था, जहां पर ग्यारह हज़ार विद्युत केवी लाइन जा रही है. बिजली की लाइन के तार नीचे लटके होने के कारण वह उसकी चपेट में आ गया, जिससे करंट लगने से उसकी मौत हो गई. युवक की शिनाख्त बाईस वर्षीय सोनू जाटव के रूप में हुई है. बता दें कि युवक की इक्कीस दिन पहले ही शादी हुई थी. परिजनों का कहना है कि खेत में तार नीचे लटके होने की शिकायत उनके द्वारा कई बार विद्युत विभाग में की गई थी, लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक वहां कोई कार्य नहीं हुआ है. विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण ही युवक की मौत हो गई. वहीं थाना पुलिस के हैड कांस्टेबल मनोहर लाल ने बताया कि सैयद खेड़ली निवासी सोनू जाटव सुबह खेत में काम कर रहा था, इस दौरान विद्युत लाइन के संपर्क आने से उसकी मौत हो गई. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच में जुट गई है. .
जिला निर्वाचन अधिकारी व DC सोलन कृतिका कुलहरी और SP वीरेंद्र शर्मा ने शुक्रवार को शहर में बनाए गए दो स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने सोलन डिग्री कॉलेज और नगर निगम भवन में बनाए गए स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला सोलन में EVM की सुरक्षा के लिए स्ट्रांग में सुरक्षा के पुख्ता इतज़ाम किए गए है। परिसर के भीतर किसी भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। कृतिका कुलहरी ने कहा कि जिला की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थित स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए वे स्वयं निरीक्षण कर रहे हैं। SP और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा भी स्ट्रांग रूम का प्रतिदिन निरीक्षण किया जा रहा है। EVM को थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था में स्ट्रांग रूम में रखी गई है। इसमें पैरामिलिट्री फोर्स, पुलिस बटालियन जवान और फिर जिला पुलिस के जवान तैनात हैं। इसके साथ ही स्ट्रांग रूम में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं। सोलन सीट का स्ट्रांग रूम नगर निगम के भवन में बनाया गया है। जबकि कसौली सीट का स्ट्रांग रूम डिग्री कॉलेज सोलन में है। SP सोलन वीरेंद्र शर्मा ने कहा एक स्ट्रांग रूम की सुरक्षा पैरा मिलिट्री फोर्स, बटालियन और स्थानीय पुलिस के 60 जवानों के जिम्मे है। यह जवान बारी-बारी से 3-3 घंटे की ड्यूटी दे रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जिला निर्वाचन अधिकारी व DC सोलन कृतिका कुलहरी और SP वीरेंद्र शर्मा ने शुक्रवार को शहर में बनाए गए दो स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने सोलन डिग्री कॉलेज और नगर निगम भवन में बनाए गए स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला सोलन में EVM की सुरक्षा के लिए स्ट्रांग में सुरक्षा के पुख्ता इतज़ाम किए गए है। परिसर के भीतर किसी भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। कृतिका कुलहरी ने कहा कि जिला की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थित स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए वे स्वयं निरीक्षण कर रहे हैं। SP और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा भी स्ट्रांग रूम का प्रतिदिन निरीक्षण किया जा रहा है। EVM को थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था में स्ट्रांग रूम में रखी गई है। इसमें पैरामिलिट्री फोर्स, पुलिस बटालियन जवान और फिर जिला पुलिस के जवान तैनात हैं। इसके साथ ही स्ट्रांग रूम में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं। सोलन सीट का स्ट्रांग रूम नगर निगम के भवन में बनाया गया है। जबकि कसौली सीट का स्ट्रांग रूम डिग्री कॉलेज सोलन में है। SP सोलन वीरेंद्र शर्मा ने कहा एक स्ट्रांग रूम की सुरक्षा पैरा मिलिट्री फोर्स, बटालियन और स्थानीय पुलिस के साठ जवानों के जिम्मे है। यह जवान बारी-बारी से तीन-तीन घंटाटे की ड्यूटी दे रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा के साथ शुकवार को यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर (डी. एम. आई. सी. ) की पगति, राज्य में चल रही विभिन्न परियोजनाओं एवं संभावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में भारत सरकार एवं राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के विकास के साथ ही पदेश में युवाओं के लिये रोजगार के वृहद् अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि कॉरीडोर का 39 पतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा। पदेश में इससे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों एवं औद्योगिक विकास की संभावनाओं के बारे में व्यापक पचार पसार किया जा रहा है ताकि लोगों में इसे लेकर जागरूकता आये। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजन को बढावा देने के लिये केन्द सरकार के सहयोग से स्किल डवलपमेन्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस दिशा में केन्द सरकार के सहयोग से पभावी योजना बनाई जायेगी। गहलोत ने बताया कि नीमराणा के पास नई ग्रीन फील्ड इंटेग्रेटड स्मार्ट सिटी के पथम चरण के विकास के लिये 1506 हैटेयर क्षेत्र में भूमि अवाप्ति के लिये राज्य सरकार ने धारा-4 के तहत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से आग्रह किया कि डीएमआईसी के तहत अलवर जिले में एक नये एयरपोर्ट की स्थापना संबंधी राजस्थान सरकार द्वारा भारत सरकार को भेजे गये पस्ताव की तुरंत स्वीकृति दिलाने के लिये वे भी अपनी तरफ से पयास करें। मुख्यमंत्री के आग्रह पर शर्मा ने इसमें पूरी तरह से सहयोग का आश्वासन दिया। ाr गहलोत ने कहा कि राजस्थान ने नई सौर ऊढर्जा नीति बनाई है जो कि देशभर में सबसे अच्छी है। उन्होंने कहा कि सौर ऊढर्जा के क्षेत्र में राज्य तेजी से पगति कर रहा है। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सोलर मिशन के तहत 1100 मेगावाट में से राजस्थान को करीब 750 मेगावाट की स्वीकृति मिली है। हाल ही में पोकरण में 40 मेगावाट के सौर ऊढर्जा संयंत्र का उद्घाटन हुआ है। एमएमटीसी द्वारा राज्य में 10 मेगावाट के सौर ऊढर्जा संयंत्र लगाने के पस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सौर ऊढर्जा नीति के तहत पश्चिमी राजस्थान में इसके लिये भूमि उपलब्ध कराई जायेगी। गहलोत ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के विकास के साथ-साथ दिल्ली-मुम्बई डेडिकेटेडक्व फेट कॉरीडोर (डी. एफ. सी. ) के तहत बिछाई जाने वाली रेलवे लाइन का कार्य भी समयबद्घ रूप से पूरा हो। उन्होंने कहा कि इसके लिये उद्योग विभाग एवं रेलवे आपस में सामजंस्य स्थापित करें ताकि राजस्थान की जनता को इसका लाभ तय समय में मिल सके। बैठक में केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के तहत दो निवेश क्षेत्र (नोड) एक साथ विकसित किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल मैन्यूफक्चरिंग पॉलिसी के तहत राजस्थान में बनने वाले दो मैन्यूफेक्चरिंग जोन जिनमें एक एनसीआर क्षेत्र एवं एक जोधपुर के निकट बनेगा का अनुमोदन कर दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इनके कार्य शीघ्र पारंभ किये जायेंगे। शर्मा ने राजस्थान की इस बात के लिये तारीफ की कि टैक्सटाइल सेक्टर में राजस्थान में निवेश के आधार पर राज्य देश भर में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग के विकास के लिये राज्य में काफी संभावनाएं हैं। बैठक में बताया गया कि अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर `वस्त्र-2012' इस साल नवम्बर माह में जयपुर में आयोजित किया जायेगा। इस आयोजन से वस्त्र उद्योग को पोत्साहन मिलेगा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने नेशनल मैन्यूफेक्चरिंग पॉलिसी के पावधानों, डीएमआईसी के तहत खुशखेडक्वा-भिवाडक्वी-नीमराणा में स्थापित होने वाले नेशनल मैन्यूफेक्चरिंग इन्वेस्टमेंट जोन से जुडक्वे कार्य की पगति, ई-बिज परियोजना की राजस्थान में कियान्विति के बारे में पजेन्टेशन दिया। बैठक में बताया गया कि ई-बिज परियोजना से विभिन्न विभागों के एक प्लेटफॉर्म पर आने से निवेशकों को काफी सहूलियत मिलेगी। बैठक में यह भी बताया गया कि अलवर के टपूकडक्वा में एक वृहद अपैरल सिटी का विकास कर यहां 50,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इसके लिये शीघ्र ही भूमि उपलब्ध करायेगी। बैठक में राज्य के उद्योग मंत्री राजेन्द पारीक, दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के सी. एम. डी. अमिताभ कांत, डी. सी. (हेण्डलूम) भारत सरकार आर. एन. चौबे, केन्दीय टैक्सटाइल विभाग के जॉइन्ट सेकेट्री वी. श्रीनिवास एवं श्रीमती सुनयना तोमर, राज्य के उद्योग विभाग के पमुख शासन सचिव सुनील अरोडक्वा, बी. आई. पी. आयुक्त डॉ पुरूषोत्तम अग्रवाल, पमुख शासन सचिव (एस. एस. आई) अशोक सिंघवी तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा के साथ शुकवार को यहां मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर की पगति, राज्य में चल रही विभिन्न परियोजनाओं एवं संभावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में भारत सरकार एवं राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के विकास के साथ ही पदेश में युवाओं के लिये रोजगार के वृहद् अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि कॉरीडोर का उनतालीस पतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा। पदेश में इससे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों एवं औद्योगिक विकास की संभावनाओं के बारे में व्यापक पचार पसार किया जा रहा है ताकि लोगों में इसे लेकर जागरूकता आये। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजन को बढावा देने के लिये केन्द सरकार के सहयोग से स्किल डवलपमेन्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस दिशा में केन्द सरकार के सहयोग से पभावी योजना बनाई जायेगी। गहलोत ने बताया कि नीमराणा के पास नई ग्रीन फील्ड इंटेग्रेटड स्मार्ट सिटी के पथम चरण के विकास के लिये एक हज़ार पाँच सौ छः हैटेयर क्षेत्र में भूमि अवाप्ति के लिये राज्य सरकार ने धारा-चार के तहत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से आग्रह किया कि डीएमआईसी के तहत अलवर जिले में एक नये एयरपोर्ट की स्थापना संबंधी राजस्थान सरकार द्वारा भारत सरकार को भेजे गये पस्ताव की तुरंत स्वीकृति दिलाने के लिये वे भी अपनी तरफ से पयास करें। मुख्यमंत्री के आग्रह पर शर्मा ने इसमें पूरी तरह से सहयोग का आश्वासन दिया। ाr गहलोत ने कहा कि राजस्थान ने नई सौर ऊढर्जा नीति बनाई है जो कि देशभर में सबसे अच्छी है। उन्होंने कहा कि सौर ऊढर्जा के क्षेत्र में राज्य तेजी से पगति कर रहा है। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सोलर मिशन के तहत एक हज़ार एक सौ मेगावाट में से राजस्थान को करीब सात सौ पचास मेगावाट की स्वीकृति मिली है। हाल ही में पोकरण में चालीस मेगावाट के सौर ऊढर्जा संयंत्र का उद्घाटन हुआ है। एमएमटीसी द्वारा राज्य में दस मेगावाट के सौर ऊढर्जा संयंत्र लगाने के पस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सौर ऊढर्जा नीति के तहत पश्चिमी राजस्थान में इसके लिये भूमि उपलब्ध कराई जायेगी। गहलोत ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के विकास के साथ-साथ दिल्ली-मुम्बई डेडिकेटेडक्व फेट कॉरीडोर के तहत बिछाई जाने वाली रेलवे लाइन का कार्य भी समयबद्घ रूप से पूरा हो। उन्होंने कहा कि इसके लिये उद्योग विभाग एवं रेलवे आपस में सामजंस्य स्थापित करें ताकि राजस्थान की जनता को इसका लाभ तय समय में मिल सके। बैठक में केन्दीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के तहत दो निवेश क्षेत्र एक साथ विकसित किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल मैन्यूफक्चरिंग पॉलिसी के तहत राजस्थान में बनने वाले दो मैन्यूफेक्चरिंग जोन जिनमें एक एनसीआर क्षेत्र एवं एक जोधपुर के निकट बनेगा का अनुमोदन कर दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इनके कार्य शीघ्र पारंभ किये जायेंगे। शर्मा ने राजस्थान की इस बात के लिये तारीफ की कि टैक्सटाइल सेक्टर में राजस्थान में निवेश के आधार पर राज्य देश भर में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग के विकास के लिये राज्य में काफी संभावनाएं हैं। बैठक में बताया गया कि अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर `वस्त्र-दो हज़ार बारह' इस साल नवम्बर माह में जयपुर में आयोजित किया जायेगा। इस आयोजन से वस्त्र उद्योग को पोत्साहन मिलेगा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने नेशनल मैन्यूफेक्चरिंग पॉलिसी के पावधानों, डीएमआईसी के तहत खुशखेडक्वा-भिवाडक्वी-नीमराणा में स्थापित होने वाले नेशनल मैन्यूफेक्चरिंग इन्वेस्टमेंट जोन से जुडक्वे कार्य की पगति, ई-बिज परियोजना की राजस्थान में कियान्विति के बारे में पजेन्टेशन दिया। बैठक में बताया गया कि ई-बिज परियोजना से विभिन्न विभागों के एक प्लेटफॉर्म पर आने से निवेशकों को काफी सहूलियत मिलेगी। बैठक में यह भी बताया गया कि अलवर के टपूकडक्वा में एक वृहद अपैरल सिटी का विकास कर यहां पचास,शून्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इसके लिये शीघ्र ही भूमि उपलब्ध करायेगी। बैठक में राज्य के उद्योग मंत्री राजेन्द पारीक, दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के सी. एम. डी. अमिताभ कांत, डी. सी. भारत सरकार आर. एन. चौबे, केन्दीय टैक्सटाइल विभाग के जॉइन्ट सेकेट्री वी. श्रीनिवास एवं श्रीमती सुनयना तोमर, राज्य के उद्योग विभाग के पमुख शासन सचिव सुनील अरोडक्वा, बी. आई. पी. आयुक्त डॉ पुरूषोत्तम अग्रवाल, पमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जबलपुर, यशभारत। भेड़ाघाट के अंधमूक बायपास के समीप रोड एक्सीडेंट में एक व्यक्ति की मौत हो गयी। जबकि दो बच्चे और पत्नी गंभीर रुप से घायल हो गए। बाइक में बैठकर पूरा परिवार तेवर से लौटकर अपने घर सलैया जा रहा रहा था। हादसा उस वक्त हुआ जब सामने से आ रही तेज रफ्तार एम्बुलेंस ने बाइक सवार को सीधी टक्कर मार दी। जिससे पूरा परिवार रोड पर जा गिरा। इस दौरान बाइक चला रहे पति को सिर में गंभीर चोट आई। जिसने मौके पर ही दम तोड़ दिया, तो वहीं पत्नी और दो बच्चों को तत्काल एम्बुलेंस से मेडिकल में भर्ती कराया गया है। जिसका इलाज जारी है। जानकारी अनुसार विनोद बेन निवासी सलैया अपनी पत्नी सपना और दो बच्चे मुन्ना और शिवा के साथ बाइक में सवार होकर कल तेवर के पास स्थित पडुया में मढ़ई (चंड़ी)में शामिल होने गया था। आज शुक्रवार को वह सपरिवार अपने घर सलैया लौट रहा था। इसी बीच अंधमूक वायपास के पास एम्बुलेंस के चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में विनोद बेन की दर्दनाक मौत हो गयी है। तो वहीं पत्नी और दोनों बच्चों को घटना के तत्काल बाद मेडिकल अस्पताल में भर्ती किया गया है। जहां उनका इलाज जारी है।
जबलपुर, यशभारत। भेड़ाघाट के अंधमूक बायपास के समीप रोड एक्सीडेंट में एक व्यक्ति की मौत हो गयी। जबकि दो बच्चे और पत्नी गंभीर रुप से घायल हो गए। बाइक में बैठकर पूरा परिवार तेवर से लौटकर अपने घर सलैया जा रहा रहा था। हादसा उस वक्त हुआ जब सामने से आ रही तेज रफ्तार एम्बुलेंस ने बाइक सवार को सीधी टक्कर मार दी। जिससे पूरा परिवार रोड पर जा गिरा। इस दौरान बाइक चला रहे पति को सिर में गंभीर चोट आई। जिसने मौके पर ही दम तोड़ दिया, तो वहीं पत्नी और दो बच्चों को तत्काल एम्बुलेंस से मेडिकल में भर्ती कराया गया है। जिसका इलाज जारी है। जानकारी अनुसार विनोद बेन निवासी सलैया अपनी पत्नी सपना और दो बच्चे मुन्ना और शिवा के साथ बाइक में सवार होकर कल तेवर के पास स्थित पडुया में मढ़ई में शामिल होने गया था। आज शुक्रवार को वह सपरिवार अपने घर सलैया लौट रहा था। इसी बीच अंधमूक वायपास के पास एम्बुलेंस के चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में विनोद बेन की दर्दनाक मौत हो गयी है। तो वहीं पत्नी और दोनों बच्चों को घटना के तत्काल बाद मेडिकल अस्पताल में भर्ती किया गया है। जहां उनका इलाज जारी है।
रोजा के पास शनिवार सुबह रेल ट्रैक में फ्रैक्चर हो गया। इससे उपासना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई। इस दौरान डाउन लाइन पर करीब 40 मिनट यातायात प्रभावित रहा। लखनऊ-चंडीगढ़ और बेगमपुरा एक्सप्रेस को भी रोकना पड़ा। डाउन लाइन पर शनिवार सुबह 9:20 बजे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल रेलवे स्टेशन के पास किमी संख्या 1224/20-22 पर कंपनी ज्वाइंट के पास रेल ट्रैक में दरार हो गई। इसी समय यहां से उपासना एक्सप्रेस के गुजरने वाली थी। ट्रेन अगर टूटी पटरी से गुजरती तो गैप ज्यादा होने से हादसा हो सकता था। कीमैन रोहित कुमार की टूटी पटरी पर नजर पड़ी। उसने लाल झंडी लगाकर उपासना एक्सप्रेस को रोक लिया। ट्रैक पर सात स्थानों पर फॉग सिग्नल विस्फोट भी किए गए। पीडब्ल्यूआई अरुण कुमार सक्सेना भी टीम के साथ पहुंच गए। उपासना एक्सप्रेस के पीछे आ रही 12232 लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस को रोजा और 12238 बेगमपुरा एक्सप्रेस को शाहजहांपुर स्टेशन पर रोक दिया गया। रेल पथ विभाग ने समय रहते ट्रैक को दुरुस्त किया। करीब 40 मिनट बाद उपासना एक्सप्रेस को रवाना किया जा सका। रेल ट्रैक पर प्लेट में मामूली फ्रैक्चर हुआ था। समय रहते इसको दुरुस्त कर लिया गया। सर्दियों में रेल ट्रैक फ्रैक्चर होने के मामले बढ़ जाते हैं। इस पर पूरी नजर रखी जा रही है।
रोजा के पास शनिवार सुबह रेल ट्रैक में फ्रैक्चर हो गया। इससे उपासना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई। इस दौरान डाउन लाइन पर करीब चालीस मिनट यातायात प्रभावित रहा। लखनऊ-चंडीगढ़ और बेगमपुरा एक्सप्रेस को भी रोकना पड़ा। डाउन लाइन पर शनिवार सुबह नौ:बीस बजे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल रेलवे स्टेशन के पास किमी संख्या बाईस बीस एक हज़ार दो सौ चौबीस पर कंपनी ज्वाइंट के पास रेल ट्रैक में दरार हो गई। इसी समय यहां से उपासना एक्सप्रेस के गुजरने वाली थी। ट्रेन अगर टूटी पटरी से गुजरती तो गैप ज्यादा होने से हादसा हो सकता था। कीमैन रोहित कुमार की टूटी पटरी पर नजर पड़ी। उसने लाल झंडी लगाकर उपासना एक्सप्रेस को रोक लिया। ट्रैक पर सात स्थानों पर फॉग सिग्नल विस्फोट भी किए गए। पीडब्ल्यूआई अरुण कुमार सक्सेना भी टीम के साथ पहुंच गए। उपासना एक्सप्रेस के पीछे आ रही बारह हज़ार दो सौ बत्तीस लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस को रोजा और बारह हज़ार दो सौ अड़तीस बेगमपुरा एक्सप्रेस को शाहजहांपुर स्टेशन पर रोक दिया गया। रेल पथ विभाग ने समय रहते ट्रैक को दुरुस्त किया। करीब चालीस मिनट बाद उपासना एक्सप्रेस को रवाना किया जा सका। रेल ट्रैक पर प्लेट में मामूली फ्रैक्चर हुआ था। समय रहते इसको दुरुस्त कर लिया गया। सर्दियों में रेल ट्रैक फ्रैक्चर होने के मामले बढ़ जाते हैं। इस पर पूरी नजर रखी जा रही है।
"जंगल जंगल बात चली है पता चला है, चड्ढी पहन के फुल खिला है फूल खिला है". . . . हर बच्चे से लेकर बूढ़े तक को आज भी ये गाना अच्छी तरह से याद है। ये गाना है मोगली का, जो कालजयी रचना 'द जंगल बुक' का है। इसमें मोगली, बाघा, शेरखान जैसे नायाब किरदार हैं जिन्होंने हर बच्चे का जीवन उत्साह से भरा है। नोबल प्राइज विजेता जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग ने कालजयी रचना 'द जंगल बुक' लिखी थी। इस किताब का मुख्य किरदार मोगली, ऐसा किरदार है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक में काफी प्रमुख है। दुनिया और देश भर के लोग इस किरदार को आज भी पसंद करते है। द जंगल बुक पर कई फिल्में और कार्टून सीरीज बन चुकी है। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग की इस रचना के लिए उन्हें दुनिया भर में आज भी याद किया जाता है। रुडयार्ड किपलिंग एक अंग्रेजी साहित्यकार, स्टोरी लेखक, कवि और पत्रकार थे। उन्हें साहित्य श्रेणी में द जंगल बुक के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले सबसे युवा साहित्यकार हैं। उन्हें इसके अलावा कई पुरस्कार मिले थे। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग ने वर्ष 1894 में द जंगल बुक का निर्माण किया था। इसकी मुख्य कहानी एक ऐसे बच्चे (मोगली) की है जो कि अपने परिवार से बिछड़ा हुआ है। इस बिना परिवार के बच्चे को जंगल में इंसानों का नहीं बल्कि जानवरों का प्यार मिलात है। आज भी भारत के हर घर में जंगल जंगल बात चली है पता चला है, शब्दों को काफी आसानी से पहचाना जाता है। बता दें कि किपलिंग को 'द जंगल बुक' लिखने की प्रेरणा पेंच टाइगर रिजर्व से मिली थी। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी जीवनकाल में सिर्फ मोगली की 'द जंगल बुक' ही नहीं बल्कि कई और कहानियां भी दुनिया को दी है। रुडयार्ड किपलिंग साहित्य की दुनिया का ऐसा नाम है जिसके बिना बच्चों का बचपन पूरा नहीं हो सकता है। उनका जन्म 30 दिसंबर 1865 में मुंबई में हुआ था। मगर महज 5 साल की उम्र में वो इंग्लैंड चले गए थे। आगे चलकर वो दुनिया के मशहूर लेखक और कवि भी बने। जानकारी के मुताबिक रुडयार्ड किपलिंग को बच्चों से खास लगाव था। शायद यही कारण रहा कि उन्होंने बच्चों को ध्यान में रखकर 'द जंगल बुक' की रचना की। मगर ये ऐसी कहानी निकली जिसपर एक या दो नहीं बल्कि कई बार अलग अलग भाषाओं में टीवी सीरीज, फिल्में, एनिमेशन फिल्में कई बार बनी है। दुनिया भर में अपने काम के जरिए अमर होने के बाद किपलिंग का 18 जनवरी 1936 को लंदन में निधन हो गया था। किपलिंग महज 5 वर्ष की उम्र में इंग्लैंड चले गए थे मगर बाद में वो भारत लौटे। इस दौरान वो कोलकाता, देहरादून, शिमला और राजस्थान में रहे। भारत में रहते हुए किपलिंग ने पत्रकारिता की और वो कई अखबारों के साथ जुड़े रहे। पत्रकारिता के साथ वो साहित्य से भी जुड़े रहे और अपना लेखन जारी रखा। साहित्य में उनके योगदान के लिए 1907 में उन्हें नोबल पुरस्कार दिया गया। वो पहले अंग्रेजी लेखक थे जिन्हें ये पुरस्कार मिला था। जानकारों का कहना है कि मोगली, जो कहानी आज भी लोग चाव से देखना पसंद करते हैं, वो असलियत में मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के जंगल (जिसे आज पेंच टाइगर रिजर्व कहा जाता है) में मिला था। इस रिजर्व में असल में ऐसा बच्चा मिला था जो जंगली भेड़ियों के साथ जंगल में उनकी गुफाओं में रहता था। इसकी जानकारी सर विलियम हेनरी स्लीमन के "एन अकाउंट ऑफ वुल्व्ज नरचरिंग चिल्ड्रन इन देयर डेन्स" में मिलती है। ये बच्चा 1831 में पकड़ा गया था। वहीं जंगल बुक में जो भी जानकारी, नदियों की स्थिति, पहाड़ों आदि का वर्णन मिलता है वो पेंच टाइगर रिजर्व की भौगोलिक स्थितियों से मिलती जुलती है।
"जंगल जंगल बात चली है पता चला है, चड्ढी पहन के फुल खिला है फूल खिला है". . . . हर बच्चे से लेकर बूढ़े तक को आज भी ये गाना अच्छी तरह से याद है। ये गाना है मोगली का, जो कालजयी रचना 'द जंगल बुक' का है। इसमें मोगली, बाघा, शेरखान जैसे नायाब किरदार हैं जिन्होंने हर बच्चे का जीवन उत्साह से भरा है। नोबल प्राइज विजेता जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग ने कालजयी रचना 'द जंगल बुक' लिखी थी। इस किताब का मुख्य किरदार मोगली, ऐसा किरदार है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक में काफी प्रमुख है। दुनिया और देश भर के लोग इस किरदार को आज भी पसंद करते है। द जंगल बुक पर कई फिल्में और कार्टून सीरीज बन चुकी है। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग की इस रचना के लिए उन्हें दुनिया भर में आज भी याद किया जाता है। रुडयार्ड किपलिंग एक अंग्रेजी साहित्यकार, स्टोरी लेखक, कवि और पत्रकार थे। उन्हें साहित्य श्रेणी में द जंगल बुक के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले सबसे युवा साहित्यकार हैं। उन्हें इसके अलावा कई पुरस्कार मिले थे। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग ने वर्ष एक हज़ार आठ सौ चौरानवे में द जंगल बुक का निर्माण किया था। इसकी मुख्य कहानी एक ऐसे बच्चे की है जो कि अपने परिवार से बिछड़ा हुआ है। इस बिना परिवार के बच्चे को जंगल में इंसानों का नहीं बल्कि जानवरों का प्यार मिलात है। आज भी भारत के हर घर में जंगल जंगल बात चली है पता चला है, शब्दों को काफी आसानी से पहचाना जाता है। बता दें कि किपलिंग को 'द जंगल बुक' लिखने की प्रेरणा पेंच टाइगर रिजर्व से मिली थी। बता दें कि रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी जीवनकाल में सिर्फ मोगली की 'द जंगल बुक' ही नहीं बल्कि कई और कहानियां भी दुनिया को दी है। रुडयार्ड किपलिंग साहित्य की दुनिया का ऐसा नाम है जिसके बिना बच्चों का बचपन पूरा नहीं हो सकता है। उनका जन्म तीस दिसंबर एक हज़ार आठ सौ पैंसठ में मुंबई में हुआ था। मगर महज पाँच साल की उम्र में वो इंग्लैंड चले गए थे। आगे चलकर वो दुनिया के मशहूर लेखक और कवि भी बने। जानकारी के मुताबिक रुडयार्ड किपलिंग को बच्चों से खास लगाव था। शायद यही कारण रहा कि उन्होंने बच्चों को ध्यान में रखकर 'द जंगल बुक' की रचना की। मगर ये ऐसी कहानी निकली जिसपर एक या दो नहीं बल्कि कई बार अलग अलग भाषाओं में टीवी सीरीज, फिल्में, एनिमेशन फिल्में कई बार बनी है। दुनिया भर में अपने काम के जरिए अमर होने के बाद किपलिंग का अट्ठारह जनवरी एक हज़ार नौ सौ छत्तीस को लंदन में निधन हो गया था। किपलिंग महज पाँच वर्ष की उम्र में इंग्लैंड चले गए थे मगर बाद में वो भारत लौटे। इस दौरान वो कोलकाता, देहरादून, शिमला और राजस्थान में रहे। भारत में रहते हुए किपलिंग ने पत्रकारिता की और वो कई अखबारों के साथ जुड़े रहे। पत्रकारिता के साथ वो साहित्य से भी जुड़े रहे और अपना लेखन जारी रखा। साहित्य में उनके योगदान के लिए एक हज़ार नौ सौ सात में उन्हें नोबल पुरस्कार दिया गया। वो पहले अंग्रेजी लेखक थे जिन्हें ये पुरस्कार मिला था। जानकारों का कहना है कि मोगली, जो कहानी आज भी लोग चाव से देखना पसंद करते हैं, वो असलियत में मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के जंगल में मिला था। इस रिजर्व में असल में ऐसा बच्चा मिला था जो जंगली भेड़ियों के साथ जंगल में उनकी गुफाओं में रहता था। इसकी जानकारी सर विलियम हेनरी स्लीमन के "एन अकाउंट ऑफ वुल्व्ज नरचरिंग चिल्ड्रन इन देयर डेन्स" में मिलती है। ये बच्चा एक हज़ार आठ सौ इकतीस में पकड़ा गया था। वहीं जंगल बुक में जो भी जानकारी, नदियों की स्थिति, पहाड़ों आदि का वर्णन मिलता है वो पेंच टाइगर रिजर्व की भौगोलिक स्थितियों से मिलती जुलती है।
स्टार्टअप परिवेश के लिए सबसे बड़े बैंक सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) के दिवालिया होने से क्षेत्र में रातोरात ही अनिश्चितता के हालात बन गए हैं और इससे भारत के स्टार्टअप परिदृश्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उद्योग के विशेषज्ञों ने यह कहा। बैंक में खाता रखने वाले कुछ स्टार्टअप को अपने कर्मचारियों को भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें डर है कि अगल वे अपने धन का इस्तेमाल नहीं कर सके, तो उन्हें अपनी परियोजनाओं को रोकना पड़ सकता है। गर्ग ने कहा, 'सिलिकॉन वैली बैंक भारतीय स्टार्टअप के लिए एक वास्तविक समर्थक रहा है और उसने उन्हें बैंकिंग सेवाएं दी हैं।
स्टार्टअप परिवेश के लिए सबसे बड़े बैंक सिलिकॉन वैली बैंक के दिवालिया होने से क्षेत्र में रातोरात ही अनिश्चितता के हालात बन गए हैं और इससे भारत के स्टार्टअप परिदृश्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उद्योग के विशेषज्ञों ने यह कहा। बैंक में खाता रखने वाले कुछ स्टार्टअप को अपने कर्मचारियों को भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें डर है कि अगल वे अपने धन का इस्तेमाल नहीं कर सके, तो उन्हें अपनी परियोजनाओं को रोकना पड़ सकता है। गर्ग ने कहा, 'सिलिकॉन वैली बैंक भारतीय स्टार्टअप के लिए एक वास्तविक समर्थक रहा है और उसने उन्हें बैंकिंग सेवाएं दी हैं।
मुंबई। महाराष्ट्र दिवस (maharashtra day) पर दादर के शिवाजी पार्क में होने वाली परेड के मद्देनजर पुलिस ने 1 मई 2023 को माहिम, शिवाजी पार्क (Shivaji Park) और वर्ली पुलिस सीमा के भीतर उड़ान संचालन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश बृहन्मुंबई के पुलिस उपायुक्त (ऑपरेशन) ने जारी किया है। पुलिस ने कहा कि महाराष्ट्र डे पर परेड के दौरान दादर के शिवाजी पार्क में कुछ वीआईपी लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस दौरान शिवाजी पार्क के अधिकार क्षेत्र में सभी उड़ने वाली वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और धारा 144 लागू रहेगी। यह आदेश इलाके में 24 घंटे के लिए लागू रहेगा। पुलिस के नोटिफिकेशन (Notification) में कहा गया है कि मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर औपचारिक परेड के दौरान आतंकवादी/असामाजिक तत्व शांति भंग करने के लिए हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वे सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि महाराष्ट्र डे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल होने की संभावना है, इसलिए यह जरूरी है कि दादर के शिवाजी पार्क क्षेत्र के आसपास अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा जांच की जाए। निषेधाज्ञा में कहा गया है कि महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर औपचारिक परेड और सार्वजनिक कार्यक्रम के मद्देनजर आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का अधिनियम II) की धारा 144 जारी की गई है। निषेधाज्ञा के अनुसार माहिम पुलिस स्टेशन, शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन, दादर पुलिस स्टेशन और वर्ली पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह की उड़ान गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी, 1860 की धारा 188 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई। महाराष्ट्र दिवस पर दादर के शिवाजी पार्क में होने वाली परेड के मद्देनजर पुलिस ने एक मई दो हज़ार तेईस को माहिम, शिवाजी पार्क और वर्ली पुलिस सीमा के भीतर उड़ान संचालन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश बृहन्मुंबई के पुलिस उपायुक्त ने जारी किया है। पुलिस ने कहा कि महाराष्ट्र डे पर परेड के दौरान दादर के शिवाजी पार्क में कुछ वीआईपी लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस दौरान शिवाजी पार्क के अधिकार क्षेत्र में सभी उड़ने वाली वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और धारा एक सौ चौंतालीस लागू रहेगी। यह आदेश इलाके में चौबीस घंटाटे के लिए लागू रहेगा। पुलिस के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर औपचारिक परेड के दौरान आतंकवादी/असामाजिक तत्व शांति भंग करने के लिए हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वे सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि महाराष्ट्र डे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल होने की संभावना है, इसलिए यह जरूरी है कि दादर के शिवाजी पार्क क्षेत्र के आसपास अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा जांच की जाए। निषेधाज्ञा में कहा गया है कि महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर औपचारिक परेड और सार्वजनिक कार्यक्रम के मद्देनजर आपराधिक प्रक्रिया संहिता एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर की धारा एक सौ चौंतालीस जारी की गई है। निषेधाज्ञा के अनुसार माहिम पुलिस स्टेशन, शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन, दादर पुलिस स्टेशन और वर्ली पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह की उड़ान गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी, एक हज़ार आठ सौ साठ की धारा एक सौ अठासी के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
चावलः डायबीटीज के मरीज हर प्रकार के चावल खा सकते हैं। हालांकि, इसकी मात्रा को ध्यान में रखना जरूरी है। ब्राउन राइस, वाइट राइस के मुकाबले बेहतर ऑप्शन हैं। ब्राउन राइस में विटमिन, मिनरल्स और फाइबर होते हैं, जिससे यह धीरे पचता है और ब्लड शुगर को तेजी से प्रभावित नहीं करता। इसका जीआई इंडेक्स 68 होता है वहीं वाइट राइस का जीआई 73 होता है।
चावलः डायबीटीज के मरीज हर प्रकार के चावल खा सकते हैं। हालांकि, इसकी मात्रा को ध्यान में रखना जरूरी है। ब्राउन राइस, वाइट राइस के मुकाबले बेहतर ऑप्शन हैं। ब्राउन राइस में विटमिन, मिनरल्स और फाइबर होते हैं, जिससे यह धीरे पचता है और ब्लड शुगर को तेजी से प्रभावित नहीं करता। इसका जीआई इंडेक्स अड़सठ होता है वहीं वाइट राइस का जीआई तिहत्तर होता है।
धरने के तीसरे दिन इनेलो प्रदेश सचिव बलदेव घणघस ने पहुंच कर पार्टी की तरफ से धरने का समर्थन करने की घोषणा की। बलदेव घणघस ने कहा कि वो अभय चौटाला के कहने पर पार्टी की तरफ से धरने का समर्थन करने पहुचें हैं और मांग पूरी होने तक धरने पर इनेलो डटी रहेगी। वहीं जाट नेता रामकुमार मित्ताथल ने बताया कि सरकार ने आज तक पिछले साल के आंदोलन की मांगे पूरी नहीं की हैं जिनको लेकर ये धरने दिए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि सरकार जाटों के खिलाफ वादाखिलाफी की है। उन्होने कहा कि उनके धरने शांतिपूर्वक चल रहे हैं लेकिन सरकार किसी ना किसी बहाने उन्हे भङकाने का प्रयास कर रही है। रामकुमार ने बताया कि प्रशासन की तरफ से धरने पर माईक ना लगाने के फरमान जारी किए हैं जो गलत हैं। उन्होने कहा कि माईक आज एक अचार बेचने वाला भी बजाता है।
धरने के तीसरे दिन इनेलो प्रदेश सचिव बलदेव घणघस ने पहुंच कर पार्टी की तरफ से धरने का समर्थन करने की घोषणा की। बलदेव घणघस ने कहा कि वो अभय चौटाला के कहने पर पार्टी की तरफ से धरने का समर्थन करने पहुचें हैं और मांग पूरी होने तक धरने पर इनेलो डटी रहेगी। वहीं जाट नेता रामकुमार मित्ताथल ने बताया कि सरकार ने आज तक पिछले साल के आंदोलन की मांगे पूरी नहीं की हैं जिनको लेकर ये धरने दिए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि सरकार जाटों के खिलाफ वादाखिलाफी की है। उन्होने कहा कि उनके धरने शांतिपूर्वक चल रहे हैं लेकिन सरकार किसी ना किसी बहाने उन्हे भङकाने का प्रयास कर रही है। रामकुमार ने बताया कि प्रशासन की तरफ से धरने पर माईक ना लगाने के फरमान जारी किए हैं जो गलत हैं। उन्होने कहा कि माईक आज एक अचार बेचने वाला भी बजाता है।
वैज्ञानिकों ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट टिवटर पर फर्जी अकाउंटों के नेटवर्क का खुलासा किया है। इनमें सबसे बड़े नेटवर्क में करीबन साढ़े तीन लाख प्रोफाइल हैं। लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज में कंप्यूटर वैज्ञानिक जुआन चेवेरिया ने इस फर्जी अकाउंट नेटवर्क का पता लगाया है। उन्होंने कहा कि टि्वटर पर बॉट्स ऐसे अकाउंट हैं जो कि किसी एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाते हैं और इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि कितने टि्वटर यूजर्स बॉट्स हैं। माना जा रहा है कि सबसे बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल फॉलोवर्स की संख्या गढ़ने, स्पैम भेजने और प्रचलित मुद्दों पर रचि बढ़ाने के लिया किया गया होगा। यह शोध इस बात का पता लगाने के लिए किया गया था कि लोग सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल किस प्रकार से करते हैं। इसके लिए एक प्रतिशत टि्वटर यूजर्स के सैंपल को देखा गया, इन आंकड़ों में बहुत से अकाउंटों के जुड़े होने का पता चला जिससे यह समझ में आया कि कोई एक व्यक्ति ही बॉटनेट को चला रहा है। बीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इस शोध से यह बात सामने आई कि बॉट्स का पता लगाने के लिए पहले के शोध इस तरह के नेटवर्कों का पता लगाने से इसलिए चूक गए क्योंकि ये स्वचालित अकाउंटों में अलग तरह से व्यवहार करते हैं। साढ़े तीन लाख बॉट्स के नेटवर्क का खुलासा इसलिए हो पाया क्योंकि इसके सभी अकाउंटों ने ऐसी कई साझा विशेषताएं दिखाईं जिससे पता चला कि ये सारे जुड़े हुए हैं.
वैज्ञानिकों ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट टिवटर पर फर्जी अकाउंटों के नेटवर्क का खुलासा किया है। इनमें सबसे बड़े नेटवर्क में करीबन साढ़े तीन लाख प्रोफाइल हैं। लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज में कंप्यूटर वैज्ञानिक जुआन चेवेरिया ने इस फर्जी अकाउंट नेटवर्क का पता लगाया है। उन्होंने कहा कि टि्वटर पर बॉट्स ऐसे अकाउंट हैं जो कि किसी एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाते हैं और इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि कितने टि्वटर यूजर्स बॉट्स हैं। माना जा रहा है कि सबसे बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल फॉलोवर्स की संख्या गढ़ने, स्पैम भेजने और प्रचलित मुद्दों पर रचि बढ़ाने के लिया किया गया होगा। यह शोध इस बात का पता लगाने के लिए किया गया था कि लोग सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल किस प्रकार से करते हैं। इसके लिए एक प्रतिशत टि्वटर यूजर्स के सैंपल को देखा गया, इन आंकड़ों में बहुत से अकाउंटों के जुड़े होने का पता चला जिससे यह समझ में आया कि कोई एक व्यक्ति ही बॉटनेट को चला रहा है। बीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इस शोध से यह बात सामने आई कि बॉट्स का पता लगाने के लिए पहले के शोध इस तरह के नेटवर्कों का पता लगाने से इसलिए चूक गए क्योंकि ये स्वचालित अकाउंटों में अलग तरह से व्यवहार करते हैं। साढ़े तीन लाख बॉट्स के नेटवर्क का खुलासा इसलिए हो पाया क्योंकि इसके सभी अकाउंटों ने ऐसी कई साझा विशेषताएं दिखाईं जिससे पता चला कि ये सारे जुड़े हुए हैं.
अलवर के भिवाड़ी से किडनैप हुए 3 मासूम भाइयों में से दो के शव दिल्ली में मिले हैं। वहीं, एक बच्चे को पुलिस ने बाल सुधार गृह से बरामद किया है। पुलिस ने बताया कि दोनों मासूमों के शव यमुना किनारे से मिले हैं। बच्चों के माता-पिता दो दिन से भिवाड़ी एसपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे थे। भिवाड़ी पुलिस ने 15 अक्टूबर को किडनैप हुए 3 बच्चों में से 2 अमन (12) और विपिन (8) की हत्या करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा बच्चा शिवा (8) बेहोश मिला था, जिसे मामले का खुलासा होने के बाद दिल्ली पुलिस ने अलवर बाल कल्याण समिति के सदस्यों को सौंप दिया। फिलहाल बच्चा शिवा स्वस्थ है। पुलिस के अनुसार आरोपी महावीर और मंजा कुमार दोनों मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। दोनों नशेड़ी हैं। आरोपियों ने बिहार में जमीन खरीदी थी, उसका कर्ज करीब 8 लाख रुपए चुकाने के लिए आरोपियों ने 15 अक्टूबर को तीनों बच्चों को किडनैप कर लिया था। आरोपी बच्चों को बहला-फुसला कर साथ ले गए थे। आरोपी महावीर और मंजा कुमार बच्चों के पिता ज्ञान सिंह के पास मुकुट कॉलोनी में किराए पर रहते थे। दोनों ही गांजा और शराब के आदी थे। कर्ज उतारने के लिए दोनों ने मिलकर ज्ञान सिंह के बच्चों के अपहरण का प्लान बनाया। बच्चे आरोपियों को जानते थे, इसका फायदा उठाते हुए 15 अक्टूबर को तीनों बच्चों को झांसे में लेकर वे दिल्ली ले गए। पुलिस के मुताबिक 15 अक्टूबर को ही आरोपियों ने अमन व विपिन का मर्डर कर दिया। 17 अक्टूबर को उन्होंने बच्चों के चाचा राधा कृष्ण को फोन कर 8 लाख रुपए की फिरौती मांगी। पुलिस ने फिरौती के लिए आए कॉल के नंबर को ट्रेसिंग पर डाला तो वह आरोपियों तक पहुंच गई। फिलहाल भिवाड़ी पुलिस ने आरोपी महावीर व मंजा कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने सबसे छोटे बच्चे शिवा को मरा हुआ समझकर दिल्ली में यमुना पार पटक दिया था। लेकिन वह बच गया। स्थानीय लोगों ने उसे पुलिस को सौंपा। दिल्ली पुलिस ने बच्चे को अपने कब्जे में लेकर लाजपत नगर के चाइल्ड होम केयर में भर्ती करा दिया। फिलहाल 8 साल का शिवा सकुशल है। पुलिस ने उसे उसके मां-बाप के सुपुर्द कर दिया है। मंगलवार को बच्चों का पोस्टमार्टम नहीं होने की वजह से भिवाड़ी पुलिस उनको भिवाड़ी लेकर नहीं आ सकी। अब बुधवार सुबह दिल्ली में एम्स में दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम कराने के बाद ही दोनों बच्चों के शवों को भिवाड़ी लाया जाएगा। फिलहाल भिवाड़ी से पुलिस डीएसपी जसवीर मीणा व यूआईटी फेज थर्ड थानाधिकारी मुकेश कुमार टीम के साथ दिल्ली पहुंचे। भिवाड़ी के UIT एरिया के फेज-3 थाने का मामला है। प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि भिवाड़ी की सांथलका की लेबर कॉलोनी में रहने वाले ज्ञान सिंह ने 15 अक्टूबर को बच्चों की गुमशुदगी की सूचना दी थी। 16 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। कुछ संदिग्धों को उठाकर पूछताछ की थी। इसके बाद 17 अक्टूबर को ज्ञान के छोटे भाई राधा कृष्ण के पास फिरौती का फोन आया तो ट्रैस किया। आरोपियों की लोकेशन मिली तो दिल्ली पहुंच गए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो बच्चों की हत्या करना कबूल कर लिया। निशानदेही पर दो बच्चों के शव तो मिल गए, तीसरा बच्चा शिवा सकुशल मिल गया। 18 अक्टूबर की सुबह पुलिस भिवाड़ी से बच्चों के माता-पिता को लेकर बच्चों की शिनाख्त के लिए दिल्ली लेकर गई। इससे पहले सोमवार देर शाम तक बच्चों के पिता ज्ञान सिंह (35) पुत्र रजिया राम अपनी पत्नी उर्मिला (32) के साथ एसपी ऑफिस के सामने धरना देकर बैठे थे। वो रो-रोकर बच्चों को ढूंढ कर लाने की गुहार लगाते रहे। ज्ञान सिंह व उर्मिला मूल रूप से यूपी के रहने वाले हैं। बीते 5 साल से भिवाड़ी में रह रहे थे। दोनों के 6 बच्चे हैं, जिनमें से विपिन (12), अमन (10) और शिव (8) का किडनैप किया गया था। बच्चों के चाचा राधा कृष्ण ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे तीनों बच्चे घर से गायब हुए थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जयपुर में 10वीं क्लास की स्टूडेंट से गैंगरेप के मामले में आरोपियों ने पीड़िता के परिवार को इतना धमकाया कि मौसा ने परेशान होकर सुसाइड कर लिया। शनिवार को देर रात घर के पीछे ही फंदे पर लटक गया। अब इस मामले में मृतक के बेटे ने मुहाना थाने में रविवार रात रेप के आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। (पूरी खबर पढ़ें) This website follows the DNPA Code of Ethics.
अलवर के भिवाड़ी से किडनैप हुए तीन मासूम भाइयों में से दो के शव दिल्ली में मिले हैं। वहीं, एक बच्चे को पुलिस ने बाल सुधार गृह से बरामद किया है। पुलिस ने बताया कि दोनों मासूमों के शव यमुना किनारे से मिले हैं। बच्चों के माता-पिता दो दिन से भिवाड़ी एसपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे थे। भिवाड़ी पुलिस ने पंद्रह अक्टूबर को किडनैप हुए तीन बच्चों में से दो अमन और विपिन की हत्या करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा बच्चा शिवा बेहोश मिला था, जिसे मामले का खुलासा होने के बाद दिल्ली पुलिस ने अलवर बाल कल्याण समिति के सदस्यों को सौंप दिया। फिलहाल बच्चा शिवा स्वस्थ है। पुलिस के अनुसार आरोपी महावीर और मंजा कुमार दोनों मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। दोनों नशेड़ी हैं। आरोपियों ने बिहार में जमीन खरीदी थी, उसका कर्ज करीब आठ लाख रुपए चुकाने के लिए आरोपियों ने पंद्रह अक्टूबर को तीनों बच्चों को किडनैप कर लिया था। आरोपी बच्चों को बहला-फुसला कर साथ ले गए थे। आरोपी महावीर और मंजा कुमार बच्चों के पिता ज्ञान सिंह के पास मुकुट कॉलोनी में किराए पर रहते थे। दोनों ही गांजा और शराब के आदी थे। कर्ज उतारने के लिए दोनों ने मिलकर ज्ञान सिंह के बच्चों के अपहरण का प्लान बनाया। बच्चे आरोपियों को जानते थे, इसका फायदा उठाते हुए पंद्रह अक्टूबर को तीनों बच्चों को झांसे में लेकर वे दिल्ली ले गए। पुलिस के मुताबिक पंद्रह अक्टूबर को ही आरोपियों ने अमन व विपिन का मर्डर कर दिया। सत्रह अक्टूबर को उन्होंने बच्चों के चाचा राधा कृष्ण को फोन कर आठ लाख रुपए की फिरौती मांगी। पुलिस ने फिरौती के लिए आए कॉल के नंबर को ट्रेसिंग पर डाला तो वह आरोपियों तक पहुंच गई। फिलहाल भिवाड़ी पुलिस ने आरोपी महावीर व मंजा कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने सबसे छोटे बच्चे शिवा को मरा हुआ समझकर दिल्ली में यमुना पार पटक दिया था। लेकिन वह बच गया। स्थानीय लोगों ने उसे पुलिस को सौंपा। दिल्ली पुलिस ने बच्चे को अपने कब्जे में लेकर लाजपत नगर के चाइल्ड होम केयर में भर्ती करा दिया। फिलहाल आठ साल का शिवा सकुशल है। पुलिस ने उसे उसके मां-बाप के सुपुर्द कर दिया है। मंगलवार को बच्चों का पोस्टमार्टम नहीं होने की वजह से भिवाड़ी पुलिस उनको भिवाड़ी लेकर नहीं आ सकी। अब बुधवार सुबह दिल्ली में एम्स में दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम कराने के बाद ही दोनों बच्चों के शवों को भिवाड़ी लाया जाएगा। फिलहाल भिवाड़ी से पुलिस डीएसपी जसवीर मीणा व यूआईटी फेज थर्ड थानाधिकारी मुकेश कुमार टीम के साथ दिल्ली पहुंचे। भिवाड़ी के UIT एरिया के फेज-तीन थाने का मामला है। प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि भिवाड़ी की सांथलका की लेबर कॉलोनी में रहने वाले ज्ञान सिंह ने पंद्रह अक्टूबर को बच्चों की गुमशुदगी की सूचना दी थी। सोलह अक्टूबर को मामला दर्ज किया। कुछ संदिग्धों को उठाकर पूछताछ की थी। इसके बाद सत्रह अक्टूबर को ज्ञान के छोटे भाई राधा कृष्ण के पास फिरौती का फोन आया तो ट्रैस किया। आरोपियों की लोकेशन मिली तो दिल्ली पहुंच गए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो बच्चों की हत्या करना कबूल कर लिया। निशानदेही पर दो बच्चों के शव तो मिल गए, तीसरा बच्चा शिवा सकुशल मिल गया। अट्ठारह अक्टूबर की सुबह पुलिस भिवाड़ी से बच्चों के माता-पिता को लेकर बच्चों की शिनाख्त के लिए दिल्ली लेकर गई। इससे पहले सोमवार देर शाम तक बच्चों के पिता ज्ञान सिंह पुत्र रजिया राम अपनी पत्नी उर्मिला के साथ एसपी ऑफिस के सामने धरना देकर बैठे थे। वो रो-रोकर बच्चों को ढूंढ कर लाने की गुहार लगाते रहे। ज्ञान सिंह व उर्मिला मूल रूप से यूपी के रहने वाले हैं। बीते पाँच साल से भिवाड़ी में रह रहे थे। दोनों के छः बच्चे हैं, जिनमें से विपिन , अमन और शिव का किडनैप किया गया था। बच्चों के चाचा राधा कृष्ण ने बताया कि शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे तीनों बच्चे घर से गायब हुए थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जयपुर में दसवीं क्लास की स्टूडेंट से गैंगरेप के मामले में आरोपियों ने पीड़िता के परिवार को इतना धमकाया कि मौसा ने परेशान होकर सुसाइड कर लिया। शनिवार को देर रात घर के पीछे ही फंदे पर लटक गया। अब इस मामले में मृतक के बेटे ने मुहाना थाने में रविवार रात रेप के आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Don't Miss! खली बने बिग बॉस के सबसे महंगे प्रतिभागी! हो सकता है कि खली को शो से हफ्ते 10 दिन में जाना पड़े,पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि खली हर हाल में उनके लिए इस शो में आना फायदे का सौदा साबित हुआ है। फिलहाल अभी 10 दिनों में थोड़ा वक्त है, इसलिए अभी 10 दिनों तक महाबली खली की हरकतों का जमकर लुत्फ उठाइये।
Don't Miss! खली बने बिग बॉस के सबसे महंगे प्रतिभागी! हो सकता है कि खली को शो से हफ्ते दस दिन में जाना पड़े,पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि खली हर हाल में उनके लिए इस शो में आना फायदे का सौदा साबित हुआ है। फिलहाल अभी दस दिनों में थोड़ा वक्त है, इसलिए अभी दस दिनों तक महाबली खली की हरकतों का जमकर लुत्फ उठाइये।
- #Madhya-pradeshMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'? शहडोल जिले में कुएं में डूबने से 2 सगे भाइयों की मौत हो गई। दरअसल कुएं में लगे मोटर पंप को सुधार कार्य कर रहे छोटे भाई को बचाने में दूसरा भाई भी डूब गया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई। घटना शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के मऊ गांव की है। ब्यौहारी पुलिस थाना प्रभारी निरीक्षक मोहम्मद समीर जानकारी देते हुए बताया कि मामला मऊ गांव में हुई। ददन गोस्वामी 32 वर्ष घर के कुएं में लगे मोटर पंप के बिगड़ जाने पर मरम्मत का कार्य करने के लिये दोपहर में कुएं के अंदर घुसा हुआ था। उसका बड़ा भाई चंद्र प्रकाश गोस्वामी उर्फ लल्लू 45 वर्षीय कुएं के ऊपर खड़ा था। ददन अचानक पानी के नीचे गिरकर बचाने के लिए चिल्लाने लगा, छोटे भाई की आवाज सुनकर चंद्र प्रकाश कुएं में छलांग लगा दी, वह भी कुए के पानी में डूब गया। समीर ने जानकारी दी कि दोनों भाइयों को कुएं में गिरते देख परिवार के अन्य परिजनों ने शोर मचाया और फिर पुलिस को जानकारी दी। जब तक पुलिस वहां पहुंची या अन्य लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तब तक दोनों नीचे पानी में समा चुके थे। आगे जानकारी दी कि दोनों मृतकों के शव कुएं में ही पानी में डूबे हुए थे। लाशो को कुएं से निकालने के लिए शहडोल से होमगार्ड रेस्क्यू टीम बुलाई गई है। रेस्क्यू टीम के आने के बाद ही दोनों की लाश को निकाला जा सका है।
- #Madhya-pradeshMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'? शहडोल जिले में कुएं में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई। दरअसल कुएं में लगे मोटर पंप को सुधार कार्य कर रहे छोटे भाई को बचाने में दूसरा भाई भी डूब गया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई। घटना शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के मऊ गांव की है। ब्यौहारी पुलिस थाना प्रभारी निरीक्षक मोहम्मद समीर जानकारी देते हुए बताया कि मामला मऊ गांव में हुई। ददन गोस्वामी बत्तीस वर्ष घर के कुएं में लगे मोटर पंप के बिगड़ जाने पर मरम्मत का कार्य करने के लिये दोपहर में कुएं के अंदर घुसा हुआ था। उसका बड़ा भाई चंद्र प्रकाश गोस्वामी उर्फ लल्लू पैंतालीस वर्षीय कुएं के ऊपर खड़ा था। ददन अचानक पानी के नीचे गिरकर बचाने के लिए चिल्लाने लगा, छोटे भाई की आवाज सुनकर चंद्र प्रकाश कुएं में छलांग लगा दी, वह भी कुए के पानी में डूब गया। समीर ने जानकारी दी कि दोनों भाइयों को कुएं में गिरते देख परिवार के अन्य परिजनों ने शोर मचाया और फिर पुलिस को जानकारी दी। जब तक पुलिस वहां पहुंची या अन्य लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तब तक दोनों नीचे पानी में समा चुके थे। आगे जानकारी दी कि दोनों मृतकों के शव कुएं में ही पानी में डूबे हुए थे। लाशो को कुएं से निकालने के लिए शहडोल से होमगार्ड रेस्क्यू टीम बुलाई गई है। रेस्क्यू टीम के आने के बाद ही दोनों की लाश को निकाला जा सका है।
रिवालसर -हिमाचल किसान यूनियन ने बल्ह में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अधिग्रहण होने वाली किसानों की जमीन का चार गुना मुआवजा और निर्माण कार्य में 70 प्रतिशत रोजगार देने की मांग की है। प्रदेश किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुंका राम की अध्यक्षता में बुधवार को बल्ह के कंसा चौक मैदान में आयोजित विशेष बैठक में केंद्र व प्रदेश सरकार से यह मांग की है। किसान यूनियन के सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नागरिक विमानन मंत्रालय भारत सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी दिलाने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार प्रकट किया है। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे के समर्थन में क्षेत्र के करीब 22 युवक मंडल व 20 महिला मंडल, क्षेत्र की पंचायतों के प्रधान, किसान वर्ग व बहुत सी संस्थाओं के लोग, जिनकी मिलकीयत भूमि हवाई अड्डे में जा रही है, वे हवाई अड्डे के पुरजोर समर्थन में हंै। इस मौके पर जिला प्रधान भूप सिंह, जिला महासचिव दुनीचंद, सीताराम वर्मा राज्य महासचिव, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष बलदेव सैणी, हरि सिंह सैणी, परम देव सैणी, प्रदीप ठाकुर, संजय तरुण व सुरेश शर्मा सहित कई लोगों ने कहा कि हवाई अड्डे का वही लोग विरोध कर रहे हैं, जिनकी एक विस्बा भूमि भी अधिकृत नहीं होगी और जिन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा या दूसरे की जमीन कब्जा रखी है। ये लोग राजनीतिक रोटियां सेक कर किसानों को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन प्रभावित इसके झांसे में नहीं आएंगे। सभी किसान हवाई अड्डे के निर्माण से खुश हंै और शीघ्र निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील करते हैं।
रिवालसर -हिमाचल किसान यूनियन ने बल्ह में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अधिग्रहण होने वाली किसानों की जमीन का चार गुना मुआवजा और निर्माण कार्य में सत्तर प्रतिशत रोजगार देने की मांग की है। प्रदेश किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुंका राम की अध्यक्षता में बुधवार को बल्ह के कंसा चौक मैदान में आयोजित विशेष बैठक में केंद्र व प्रदेश सरकार से यह मांग की है। किसान यूनियन के सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नागरिक विमानन मंत्रालय भारत सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी दिलाने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार प्रकट किया है। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे के समर्थन में क्षेत्र के करीब बाईस युवक मंडल व बीस महिला मंडल, क्षेत्र की पंचायतों के प्रधान, किसान वर्ग व बहुत सी संस्थाओं के लोग, जिनकी मिलकीयत भूमि हवाई अड्डे में जा रही है, वे हवाई अड्डे के पुरजोर समर्थन में हंै। इस मौके पर जिला प्रधान भूप सिंह, जिला महासचिव दुनीचंद, सीताराम वर्मा राज्य महासचिव, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष बलदेव सैणी, हरि सिंह सैणी, परम देव सैणी, प्रदीप ठाकुर, संजय तरुण व सुरेश शर्मा सहित कई लोगों ने कहा कि हवाई अड्डे का वही लोग विरोध कर रहे हैं, जिनकी एक विस्बा भूमि भी अधिकृत नहीं होगी और जिन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा या दूसरे की जमीन कब्जा रखी है। ये लोग राजनीतिक रोटियां सेक कर किसानों को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन प्रभावित इसके झांसे में नहीं आएंगे। सभी किसान हवाई अड्डे के निर्माण से खुश हंै और शीघ्र निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील करते हैं।
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और महिला पत्रकार मीना कोटवाल को 25 दिसंबर के बाद लगातार फोन से धमकी दी जा रही है. उनका कहना है कि डर के चलते वह अपने घर से भी नहीं निकल पा रही हैं. उनके मोबाइल फोन पर जिन नंबरों से उनको धमकी दी गई है, उन नंबरों के साथ मीना कोटवाल ने एक लिखित शिकायत भी दिल्ली पुलिस को दी है. लेकिन खबर लिखे जाने तक मामला नहीं दर्ज किया गया था. पुलिस नंबरों के जांच की बात कह रही है. दरअसल, मीना कोटवाल स्वतंत्र पत्रकार हैं और बीते 25 दिसंबर को उन्होंने सांकेतिक तौर पर मनु स्मृति को जलाने की फोटो और वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थी. जिसके बाद उनको फोन करके जान से मारने की धमकी और गालियां दी जाने लगी. मीना कोतवाल ने बताया कि एक शख्श ने फोन करके बोला कि मैं विश्व हिन्दू परिषद से बोल रहा हूं, आपके खिलाफ FIR होने जा रही है. दूसरे शख्श ने फोन पर कहा कि तुम्हारा नंबर कई ग्रुप में शेयर किया है और कहा कि परेशान करें. पीड़िता ने बताया कि तमाम लोगों ने फोन करके उनको जाति सूचक गालियां भी दी हैं. लगातार आ रहे इस तरह के फोन से वह डरी हुई हैं और इसके चलते उनका घर से निकलना भी दूभर हो गया है. उनका कहन है कि ऐसे में उनका पत्रकार के तौर पर फील्ड में रिपोर्टिंग करना भी खतरनाक है.
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और महिला पत्रकार मीना कोटवाल को पच्चीस दिसंबर के बाद लगातार फोन से धमकी दी जा रही है. उनका कहना है कि डर के चलते वह अपने घर से भी नहीं निकल पा रही हैं. उनके मोबाइल फोन पर जिन नंबरों से उनको धमकी दी गई है, उन नंबरों के साथ मीना कोटवाल ने एक लिखित शिकायत भी दिल्ली पुलिस को दी है. लेकिन खबर लिखे जाने तक मामला नहीं दर्ज किया गया था. पुलिस नंबरों के जांच की बात कह रही है. दरअसल, मीना कोटवाल स्वतंत्र पत्रकार हैं और बीते पच्चीस दिसंबर को उन्होंने सांकेतिक तौर पर मनु स्मृति को जलाने की फोटो और वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थी. जिसके बाद उनको फोन करके जान से मारने की धमकी और गालियां दी जाने लगी. मीना कोतवाल ने बताया कि एक शख्श ने फोन करके बोला कि मैं विश्व हिन्दू परिषद से बोल रहा हूं, आपके खिलाफ FIR होने जा रही है. दूसरे शख्श ने फोन पर कहा कि तुम्हारा नंबर कई ग्रुप में शेयर किया है और कहा कि परेशान करें. पीड़िता ने बताया कि तमाम लोगों ने फोन करके उनको जाति सूचक गालियां भी दी हैं. लगातार आ रहे इस तरह के फोन से वह डरी हुई हैं और इसके चलते उनका घर से निकलना भी दूभर हो गया है. उनका कहन है कि ऐसे में उनका पत्रकार के तौर पर फील्ड में रिपोर्टिंग करना भी खतरनाक है.
- Movies तो इस वजह से जल्द ही सिर के बाल मुंडवाकर गंजी हो जाएंगी राखी सावंत? - Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग? वायरलेस इयरफ़ोन लोकप्रियता प्राप्त करने के साथ, बहुत सारे ब्रांड अपने विकल्प लॉन्च कर रहे हैं। हालांकि, इस श्रेणी के कुछ शुरुआती विकल्पों की कीमत प्रीमियम में रखी गई है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह सेग्मेंट बहुत अधिक किफायती हो गया है। इनमें से एक नवीनतम किफायती विकल्प boat airdopes 411 है, जो वायरलेस इयरफ़ोन की एक जोड़ी है जिसकी कीमत रुपए 2,999 है। वायरलेस इयरफ़ोन अब अमेज़ॅन पर उपलब्ध हैं। बोट एयरडोप का हिस्सा है जिसमें एयरपॉड्स 211 इयरफ़ोन भी शामिल हैं। नए बोट एयरडोप्स 411 हेडसेट में बोट एयरडोप्स 211 की तुलना में बेहतर बैटरी लाइफ दी गई है, जिसे इस साल फरवरी में लॉन्च किया गया था। प्रत्येक ईयरबड्स में 50mAh बैटरी दी गई है, जबकि चार्जिंग केस में 500mAh की बैटरी है। पूरा फुल चार्ज करने के बाद इसके ईयरबड्स की बैटरी लाइफ 3. 5 घंटे की है। एयरडोप्स 411 में ब्लूटूथ 5. 0 की सुविधा है, और इसमें 6 मिमी डॉयनामिक ड्राइवर हैं। इसके अलावा, इयरफ़ोन पानी को रोकने के लिए IPX4- रेटेड हैं, और एक पूरे स्मार्टफोन पर वॉयस असिस्टेंट को ट्रिगर करने की क्षमता के साथ प्लेबैक और वॉल्यूम के लिए नियंत्रण भी रखता है। चार्जिंग केस इंडिकेटर के साथ आता है जिससे आपको बैटरी का बैटरी का लेवल जानने में आसानी होगी। हालांकि इसका दाम थोड़ा सा ज्यादा है। 2,999 रुपए की कीमत के साथ बोट एयरडोप्स 411, एयरडोप्स 211 से काफी मयनों में बेहतर है। कीमत रु। एयरडोप्स 211 की कीमत 2,499 रुपए है। नए इयरफ़ोन किफायती वायरलेस सेगमेंट में विभिन्न प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जाते हैं, साथ ही ब्लौपंकट BTW01 जैसे थोड़े अधिक महंगे विकल्प भी हैं।
- Movies तो इस वजह से जल्द ही सिर के बाल मुंडवाकर गंजी हो जाएंगी राखी सावंत? - Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग? वायरलेस इयरफ़ोन लोकप्रियता प्राप्त करने के साथ, बहुत सारे ब्रांड अपने विकल्प लॉन्च कर रहे हैं। हालांकि, इस श्रेणी के कुछ शुरुआती विकल्पों की कीमत प्रीमियम में रखी गई है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह सेग्मेंट बहुत अधिक किफायती हो गया है। इनमें से एक नवीनतम किफायती विकल्प boat airdopes चार सौ ग्यारह है, जो वायरलेस इयरफ़ोन की एक जोड़ी है जिसकी कीमत रुपए दो,नौ सौ निन्यानवे है। वायरलेस इयरफ़ोन अब अमेज़ॅन पर उपलब्ध हैं। बोट एयरडोप का हिस्सा है जिसमें एयरपॉड्स दो सौ ग्यारह इयरफ़ोन भी शामिल हैं। नए बोट एयरडोप्स चार सौ ग्यारह हेडसेट में बोट एयरडोप्स दो सौ ग्यारह की तुलना में बेहतर बैटरी लाइफ दी गई है, जिसे इस साल फरवरी में लॉन्च किया गया था। प्रत्येक ईयरबड्स में पचासmAh बैटरी दी गई है, जबकि चार्जिंग केस में पाँच सौmAh की बैटरी है। पूरा फुल चार्ज करने के बाद इसके ईयरबड्स की बैटरी लाइफ तीन. पाँच घंटाटे की है। एयरडोप्स चार सौ ग्यारह में ब्लूटूथ पाँच. शून्य की सुविधा है, और इसमें छः मिमी डॉयनामिक ड्राइवर हैं। इसके अलावा, इयरफ़ोन पानी को रोकने के लिए IPXचार- रेटेड हैं, और एक पूरे स्मार्टफोन पर वॉयस असिस्टेंट को ट्रिगर करने की क्षमता के साथ प्लेबैक और वॉल्यूम के लिए नियंत्रण भी रखता है। चार्जिंग केस इंडिकेटर के साथ आता है जिससे आपको बैटरी का बैटरी का लेवल जानने में आसानी होगी। हालांकि इसका दाम थोड़ा सा ज्यादा है। दो,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए की कीमत के साथ बोट एयरडोप्स चार सौ ग्यारह, एयरडोप्स दो सौ ग्यारह से काफी मयनों में बेहतर है। कीमत रु। एयरडोप्स दो सौ ग्यारह की कीमत दो,चार सौ निन्यानवे रुपयापए है। नए इयरफ़ोन किफायती वायरलेस सेगमेंट में विभिन्न प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जाते हैं, साथ ही ब्लौपंकट BTWएक जैसे थोड़े अधिक महंगे विकल्प भी हैं।
- 3 min ago Seema Haider कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोईं, कहा- 'मेरा कोई नहीं है, अगर वो मुझे पसंद करता है तो...' - 25 min ago पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' - 40 min ago Anupamaa Spoiler Alert : अनुपमा को देख छोटी अनु को पड़ा पैनिक अटैक,बढ़ी अनुज की धड़कनें फिर हुआ.. Don't Miss! - News इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस भारत में फिर एक्टिव, दो बड़े पत्रकार बने निशाना, जानें नाम, क्या-क्या पता चला? Bollywood Live Updates 27 Septeber- सुबह होते ही हम आपके लिए फिर से बी-टाउन की कुछ खबरें लेकर सामने आए हैं और ये सिलसिला पूरे दिन जारी रहेगा। इस पेज पर आपको हर खबर की अपडेट मिलेगी। Farah Khan- मुंबई के लाल के राजा के दर्शन करना इस वक्त काफी मुश्किल हो चुका है। सितारों के जो वीडियोज सामने आ रहे हैं वो आपको हैरान करने के लिए काफी हैं। भीड़ में बुरी तरह से फंसने पर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान की हालत काफी खराब हो गई। शादी के बाद मुंबई छोड़कर इस शहर में शिफ्ट होंगी परिणीति चोपड़ा? इस खबर से चौंक जाएंगे फैंस! नौबत उनकी तबियत बिगड़ने तक आ गई थी। इस दौरान देखा गया कि कुछ लोग उनको सहारा देकर भीड़ से निकालकर लिए जा रहे हैं। फिलहाल फराह खान ने पोस्ट करते हुए खुद बताया है कि वो ठीक हैं लेकिन भीड़ में फंसने की वजह से उनकी हालत ऐसी हो गई थी। Shehnaaz Gill Troll- बिग बॉस से निकलकर मशहूर हुईं शहनाज गिल इस वक्त अपने लुक्स को लेकर काफी चर्चा में रहती हैं। इस वक्त फिर से वो इस तरह की ड्रेस में सामने आई हैं कि लोग उनको खरी खोटी सुना रहे हैं। इस दौरान वो भूमि पेडनेकर के साथ थीं और येलो कलर की बेहद शॉर्ट ड्रेस पहने हुईं थीं। वायरल वीडियो में लोगों के कमेंट्स सामने आए हैं और उनको शहनाज गिल का ये बोल्ड अवतार बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है। लोगों का मानना है कि शहनाज अब पहले जैसी नहीं रही। इसी तरह की ढेरों बॉलीवुड की चटपटी खबरों के लिए आप बने रहिए फिल्मीबीट हिंदी के इस लाइव पेज के साथ.. सुपरहिट फिल्म आशिकी 2 फेम आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर एक बार फिर साथ में देखे गए। दोनों को साथ में ऐसे देखकर फैंस इमोशनल हो गए। इनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 'फुकरे' फ्रेंचाइजी की तीसरी कड़ी 'फुकरे 3' का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। कॉमेडी से भरपूर इस फिल्म का ट्रेलर जारी हो चुका है। इसमें फुकरे गैंग को मजेदार अंदाज में देखकर दर्शक उत्साहित हो गए हैं। हालांकि, इस बार फिल्म में अली फजल की अनुपस्थिति ने दर्शकों को थोड़ा निराश कर दिया है। हालांकि, अब खबर आ रही है कि फिल्म के तीसरे पार्ट में अली फजल का स्पेशल अपीयरेंस देखने को मिलेगा। हनीमून से पहले ही राघव को अपने इस काम से दीवाना बना रही परिणीति चोपड़ा, सुनकर आपको लगेगा झटका! Parineeti Chopra Raghav Chadha reception: न्यूली मैरिड कपल परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा अपनी शादी के बाद लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। एयरपोर्ट लुक से लेकर शादी के लुक को लेकर परिणीति चोपड़ा के वीडियो और फोटोज जमकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब खबर है कि जल्द ही परिणीति और राघव दो जगहों पर अपनी कुछ समस्याओं की वजह से रिसेप्शन करेंगे। ऐसी खबर है कि, कपल दिल्ली में राजनेताओं और मुंबई में सेलेब्स की वजह से रिसेप्शन होगा। Bigg Boss 17: टीवी की दुनिया सबसे ज्यादा चर्चित और पॉपुलर रियालिटी शो बिग बॉस जल्द ही फिर से अपने नए सीजन के साथ दस्तक देने वाला है। सलमान खान के इस धमाकेदार शो बिग बॉस 17 में इस बार अंकिता लोखंडे और विक्की जैन एंट्री लेने वाले हैं। ऐसी खबर है कि, शो में अपनी जबरदस्त एंट्री के लिए अंकिता ने पूरा का पूजा बाजार ही खरीद लिया है। As per the report, They have purchased 200 outfits and plan on not repeating their clothes inside the house. अजीबों-गरीब ड्रेस पहनकर निकली Urfi Javed ने कहा, -"मैं राज कुंद्रा की तरह करना..." Urfi Javed: हमेशा ही अपने कपड़ो और अपने बयानों को लेकर खबरों में रहने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुंसर उर्फी जावेद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है। उर्फी हाल ही में अपने नए अतरंगी लुक के साथ मुंबई में स्पोर्ट हुई, इस दौरान उर्फी ने शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को लेकर बयान दिया और कहा वह उनकी तरह की कुछ करना चाहती हैं। इस टीवी एक्ट्रेस की मौत की खबर सुनकर रो रहे थे लोग, तभी हसीना ने फोटो शेयर करके कहा- 'मैं जिंदा हूं' Thapki Pyaar Ki Actress: मशहूर टीवी शो 'थपकी प्यार की' से प्रसिद्धि पाने वाली टेलीविजन एक्ट्रेस जिज्ञासा सिंह ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी मौत की अफवाहों को खारिज कर दिया। उन्होंने यूट्यूब वीडियो का एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसका शीर्षक था 'थपकी प्यार की अभिनेत्री का निधन', 'एक्ट्रेस का आखिरी वीडियो' और 'एक्ट्रेस थपकी का निधन-चौंकाने वाली खबर'। Sonam Kapoor Video: मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर को फैशन क्वीन भी कहा जाता है। लेकिन फैशन की एक बात जो लोगों को कत्तई पसंद नहीं आती, वो है इसमें होने वाला अंग प्रदर्शन और खासतौर पर तब जब ये अंग प्रदर्शन ऊप्स मोमेंट में तब्दील हो जाए तो। Bhojpuri Unmarried Actress: बॉलीवुड की तरह ही भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री अपना नाम कमाने की कोशिश कर रही है, हालांकि, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री आए दिन विवादों में ही रहती है। वजह है अश्लील कंटेंट। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में भर-भरकर अश्लीलता परोसी जाती है और महिला एक्ट्रेस को तो खूब हॉटनेस दिखानी पड़ती है। लेकिन इनका खामियाजा भी भोजपुरी हसीनाओं को भुगतना पड़ता है। परिणीति चोपड़ा, जो अपने अभिनय कौशल के लिए जानी जाती हैं, एक प्रतिभाशाली गायिका भी हैं और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा के साथ अपनी शादी के लिए, उन्होंने 'ओ पिया' नामक एक रोमांटिक गाना रिकॉर्ड किया। हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में बोल वाले गाने के माध्यम से, परिणीति ने राघव के प्रति अपना प्यार जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुमान है कि जवान ने सभी भाषाओं में अपने 20वें दिन भारत में ₹5.1 करोड़ की कमाई की है। फिल्म ने पहले हफ्ते में ₹389.88 करोड़ (हिंदी में ₹347.98 करोड़, तमिल में ₹23.86 करोड़ और तेलुगु में ₹18.04 करोड़) और दूसरे हफ्ते में ₹136.1 करोड़ (हिंदी में ₹125.46 करोड़, तमिल में ₹4.17 करोड़) का कलेक्शन किया। , और तेलुगु में ₹6.47 करोड़)। सलमान खान ने फैंस के इंतजार को खत्म कर दिया है। वादे के मुताबिक टाइगर 3 का दमदार टीजर 11 बजे रिलीज हो गया है। जाहिर है कि फैंस के लिए ये किसी उपहार से कम नहीं है। जब भी बॉलीवुड में रोमांस या फिर रोमांटिक फिल्मों की बात होगी तो सबसे पहले अगर किसी का नाम आएगा तो वो होंगे यश चोपड़ा। मशहूर फिल्म फिलहाल हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी बनाई हुई हर फिल्म आज भी उनके होने का एहसास दिलाती है। आज यश चोपड़ा का जन्मदिन है और इस मौके पर उनको याद करते हुए उनके फैंस भावुक हो रहे हैँ। टाइगर श्रॉफ और कृति सैनन की धमाकेदार फिल्म गणपत को लेकर चर्चा है। इस वक्त एक पोस्टर रिलीज किया गया गया है जिसमें टाइगर श्रॉफ और कृति सैनन नजर आ रही है। कृति सैनन का ये लुक काफी पसंद किया जा रहा है। आमिर खान के साथ हाथ मिलाएंगे सनी देओल! सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी एक एक्शन फिल्म पर चर्चा कर रहे हैं। और ये फिल्म आमिर खान के प्रोडक्शन तले बनाई जाएगी। यह तिकड़ी फिल्म को दिसंबर 2023 या जनवरी 2024 के आसपास फ्लोर पर ले जाने की सोच रही है। वहीं, फिल्म की आधिकारिक घोषणा सनी देओल के जन्मदिन (19 अक्टूबर) पर की जा सकती है। दरअसल 26 सितंबर को उनको जुड़वां बच्चों का जन्मदिन था और इस मौके पर एक बेहतरीन पोस्ट सामने आई थी। इस पोस्ट में उनके साथ उनके पति और फिल्म निर्माता विग्नेश शिवन नजर आ रहे हैं। नयनतारा के जुड़वां बच्चों का नाम उइर और उलाग है। सहज ने लिखा, "मीडिया और जनता से अपील... मुझमें साक्षात्कार करने का साहस नहीं है। बिना सबूत के किसी की फर्जी बातों पर विश्वास करके हमारी छवि को और खराब न करें। पुलिस अपना काम कर रही है। जब हमने राजनीतिक दबाव में मामला नहीं निपटाने का फैसला किया तो उन्होंने हमारे खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। नसीरुद्दीन शाह बोले, "मैंने आरआरआर देखने की कोशिश की, लेकिन नहीं देख सका, मैंने पुष्पा देखने की कोशिश की, लेकिन नहीं देख सका। हालाँकि मैंने मणिरत्नम की फिल्म देखी। क्योंकि वह बहुत सक्षम फिल्म निर्माता हैं और उनका कोई एजेंडा नहीं है। देखने के बाद अक्सर एक ख़ुशी का एहसास होता है जो कई दिनों तक बना रहता है। मैं कल्पना नहीं कर सकता, मैं ऐसी फिल्में देखने कभी नहीं जाऊंगा।" लाल बागचा राजा के पंडाल से एक और चौकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में सोनू सूद, शेखर सुमन और फराह खान नजर आ रही हैं। बेशक इस वीडियो को देखने के बाद स्टार्स स्टार्स नहीं लगेंगे बल्कि भीड़ का एक हिस्सा दिख रहे हैं। लाल बाग के राजा के दर्शन करने के दौरान भीड़ में फंसी फराह की हालत खराब, सामने आया ये वीडियो..
- तीन मिनट ago Seema Haider कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोईं, कहा- 'मेरा कोई नहीं है, अगर वो मुझे पसंद करता है तो...' - पच्चीस मिनट ago पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' - चालीस मिनट ago Anupamaa Spoiler Alert : अनुपमा को देख छोटी अनु को पड़ा पैनिक अटैक,बढ़ी अनुज की धड़कनें फिर हुआ.. Don't Miss! - News इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस भारत में फिर एक्टिव, दो बड़े पत्रकार बने निशाना, जानें नाम, क्या-क्या पता चला? Bollywood Live Updates सत्ताईस सितंबरteber- सुबह होते ही हम आपके लिए फिर से बी-टाउन की कुछ खबरें लेकर सामने आए हैं और ये सिलसिला पूरे दिन जारी रहेगा। इस पेज पर आपको हर खबर की अपडेट मिलेगी। Farah Khan- मुंबई के लाल के राजा के दर्शन करना इस वक्त काफी मुश्किल हो चुका है। सितारों के जो वीडियोज सामने आ रहे हैं वो आपको हैरान करने के लिए काफी हैं। भीड़ में बुरी तरह से फंसने पर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान की हालत काफी खराब हो गई। शादी के बाद मुंबई छोड़कर इस शहर में शिफ्ट होंगी परिणीति चोपड़ा? इस खबर से चौंक जाएंगे फैंस! नौबत उनकी तबियत बिगड़ने तक आ गई थी। इस दौरान देखा गया कि कुछ लोग उनको सहारा देकर भीड़ से निकालकर लिए जा रहे हैं। फिलहाल फराह खान ने पोस्ट करते हुए खुद बताया है कि वो ठीक हैं लेकिन भीड़ में फंसने की वजह से उनकी हालत ऐसी हो गई थी। Shehnaaz Gill Troll- बिग बॉस से निकलकर मशहूर हुईं शहनाज गिल इस वक्त अपने लुक्स को लेकर काफी चर्चा में रहती हैं। इस वक्त फिर से वो इस तरह की ड्रेस में सामने आई हैं कि लोग उनको खरी खोटी सुना रहे हैं। इस दौरान वो भूमि पेडनेकर के साथ थीं और येलो कलर की बेहद शॉर्ट ड्रेस पहने हुईं थीं। वायरल वीडियो में लोगों के कमेंट्स सामने आए हैं और उनको शहनाज गिल का ये बोल्ड अवतार बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है। लोगों का मानना है कि शहनाज अब पहले जैसी नहीं रही। इसी तरह की ढेरों बॉलीवुड की चटपटी खबरों के लिए आप बने रहिए फिल्मीबीट हिंदी के इस लाइव पेज के साथ.. सुपरहिट फिल्म आशिकी दो फेम आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर एक बार फिर साथ में देखे गए। दोनों को साथ में ऐसे देखकर फैंस इमोशनल हो गए। इनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 'फुकरे' फ्रेंचाइजी की तीसरी कड़ी 'फुकरे तीन' का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। कॉमेडी से भरपूर इस फिल्म का ट्रेलर जारी हो चुका है। इसमें फुकरे गैंग को मजेदार अंदाज में देखकर दर्शक उत्साहित हो गए हैं। हालांकि, इस बार फिल्म में अली फजल की अनुपस्थिति ने दर्शकों को थोड़ा निराश कर दिया है। हालांकि, अब खबर आ रही है कि फिल्म के तीसरे पार्ट में अली फजल का स्पेशल अपीयरेंस देखने को मिलेगा। हनीमून से पहले ही राघव को अपने इस काम से दीवाना बना रही परिणीति चोपड़ा, सुनकर आपको लगेगा झटका! Parineeti Chopra Raghav Chadha reception: न्यूली मैरिड कपल परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा अपनी शादी के बाद लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। एयरपोर्ट लुक से लेकर शादी के लुक को लेकर परिणीति चोपड़ा के वीडियो और फोटोज जमकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब खबर है कि जल्द ही परिणीति और राघव दो जगहों पर अपनी कुछ समस्याओं की वजह से रिसेप्शन करेंगे। ऐसी खबर है कि, कपल दिल्ली में राजनेताओं और मुंबई में सेलेब्स की वजह से रिसेप्शन होगा। Bigg Boss सत्रह: टीवी की दुनिया सबसे ज्यादा चर्चित और पॉपुलर रियालिटी शो बिग बॉस जल्द ही फिर से अपने नए सीजन के साथ दस्तक देने वाला है। सलमान खान के इस धमाकेदार शो बिग बॉस सत्रह में इस बार अंकिता लोखंडे और विक्की जैन एंट्री लेने वाले हैं। ऐसी खबर है कि, शो में अपनी जबरदस्त एंट्री के लिए अंकिता ने पूरा का पूजा बाजार ही खरीद लिया है। As per the report, They have purchased दो सौ outfits and plan on not repeating their clothes inside the house. अजीबों-गरीब ड्रेस पहनकर निकली Urfi Javed ने कहा, -"मैं राज कुंद्रा की तरह करना..." Urfi Javed: हमेशा ही अपने कपड़ो और अपने बयानों को लेकर खबरों में रहने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुंसर उर्फी जावेद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है। उर्फी हाल ही में अपने नए अतरंगी लुक के साथ मुंबई में स्पोर्ट हुई, इस दौरान उर्फी ने शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को लेकर बयान दिया और कहा वह उनकी तरह की कुछ करना चाहती हैं। इस टीवी एक्ट्रेस की मौत की खबर सुनकर रो रहे थे लोग, तभी हसीना ने फोटो शेयर करके कहा- 'मैं जिंदा हूं' Thapki Pyaar Ki Actress: मशहूर टीवी शो 'थपकी प्यार की' से प्रसिद्धि पाने वाली टेलीविजन एक्ट्रेस जिज्ञासा सिंह ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी मौत की अफवाहों को खारिज कर दिया। उन्होंने यूट्यूब वीडियो का एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसका शीर्षक था 'थपकी प्यार की अभिनेत्री का निधन', 'एक्ट्रेस का आखिरी वीडियो' और 'एक्ट्रेस थपकी का निधन-चौंकाने वाली खबर'। Sonam Kapoor Video: मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर को फैशन क्वीन भी कहा जाता है। लेकिन फैशन की एक बात जो लोगों को कत्तई पसंद नहीं आती, वो है इसमें होने वाला अंग प्रदर्शन और खासतौर पर तब जब ये अंग प्रदर्शन ऊप्स मोमेंट में तब्दील हो जाए तो। Bhojpuri Unmarried Actress: बॉलीवुड की तरह ही भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री अपना नाम कमाने की कोशिश कर रही है, हालांकि, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री आए दिन विवादों में ही रहती है। वजह है अश्लील कंटेंट। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में भर-भरकर अश्लीलता परोसी जाती है और महिला एक्ट्रेस को तो खूब हॉटनेस दिखानी पड़ती है। लेकिन इनका खामियाजा भी भोजपुरी हसीनाओं को भुगतना पड़ता है। परिणीति चोपड़ा, जो अपने अभिनय कौशल के लिए जानी जाती हैं, एक प्रतिभाशाली गायिका भी हैं और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा के साथ अपनी शादी के लिए, उन्होंने 'ओ पिया' नामक एक रोमांटिक गाना रिकॉर्ड किया। हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में बोल वाले गाने के माध्यम से, परिणीति ने राघव के प्रति अपना प्यार जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुमान है कि जवान ने सभी भाषाओं में अपने बीसवें दिन भारत में पाँच दशमलव एक रुपया करोड़ की कमाई की है। फिल्म ने पहले हफ्ते में तीन सौ नवासी दशमलव अठासी रुपया करोड़ और दूसरे हफ्ते में एक सौ छत्तीस दशमलव एक रुपया करोड़ का कलेक्शन किया। , और तेलुगु में छः दशमलव सैंतालीस रुपया करोड़)। सलमान खान ने फैंस के इंतजार को खत्म कर दिया है। वादे के मुताबिक टाइगर तीन का दमदार टीजर ग्यारह बजे रिलीज हो गया है। जाहिर है कि फैंस के लिए ये किसी उपहार से कम नहीं है। जब भी बॉलीवुड में रोमांस या फिर रोमांटिक फिल्मों की बात होगी तो सबसे पहले अगर किसी का नाम आएगा तो वो होंगे यश चोपड़ा। मशहूर फिल्म फिलहाल हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी बनाई हुई हर फिल्म आज भी उनके होने का एहसास दिलाती है। आज यश चोपड़ा का जन्मदिन है और इस मौके पर उनको याद करते हुए उनके फैंस भावुक हो रहे हैँ। टाइगर श्रॉफ और कृति सैनन की धमाकेदार फिल्म गणपत को लेकर चर्चा है। इस वक्त एक पोस्टर रिलीज किया गया गया है जिसमें टाइगर श्रॉफ और कृति सैनन नजर आ रही है। कृति सैनन का ये लुक काफी पसंद किया जा रहा है। आमिर खान के साथ हाथ मिलाएंगे सनी देओल! सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी एक एक्शन फिल्म पर चर्चा कर रहे हैं। और ये फिल्म आमिर खान के प्रोडक्शन तले बनाई जाएगी। यह तिकड़ी फिल्म को दिसंबर दो हज़ार तेईस या जनवरी दो हज़ार चौबीस के आसपास फ्लोर पर ले जाने की सोच रही है। वहीं, फिल्म की आधिकारिक घोषणा सनी देओल के जन्मदिन पर की जा सकती है। दरअसल छब्बीस सितंबर को उनको जुड़वां बच्चों का जन्मदिन था और इस मौके पर एक बेहतरीन पोस्ट सामने आई थी। इस पोस्ट में उनके साथ उनके पति और फिल्म निर्माता विग्नेश शिवन नजर आ रहे हैं। नयनतारा के जुड़वां बच्चों का नाम उइर और उलाग है। सहज ने लिखा, "मीडिया और जनता से अपील... मुझमें साक्षात्कार करने का साहस नहीं है। बिना सबूत के किसी की फर्जी बातों पर विश्वास करके हमारी छवि को और खराब न करें। पुलिस अपना काम कर रही है। जब हमने राजनीतिक दबाव में मामला नहीं निपटाने का फैसला किया तो उन्होंने हमारे खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। नसीरुद्दीन शाह बोले, "मैंने आरआरआर देखने की कोशिश की, लेकिन नहीं देख सका, मैंने पुष्पा देखने की कोशिश की, लेकिन नहीं देख सका। हालाँकि मैंने मणिरत्नम की फिल्म देखी। क्योंकि वह बहुत सक्षम फिल्म निर्माता हैं और उनका कोई एजेंडा नहीं है। देखने के बाद अक्सर एक ख़ुशी का एहसास होता है जो कई दिनों तक बना रहता है। मैं कल्पना नहीं कर सकता, मैं ऐसी फिल्में देखने कभी नहीं जाऊंगा।" लाल बागचा राजा के पंडाल से एक और चौकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में सोनू सूद, शेखर सुमन और फराह खान नजर आ रही हैं। बेशक इस वीडियो को देखने के बाद स्टार्स स्टार्स नहीं लगेंगे बल्कि भीड़ का एक हिस्सा दिख रहे हैं। लाल बाग के राजा के दर्शन करने के दौरान भीड़ में फंसी फराह की हालत खराब, सामने आया ये वीडियो..
वाराणसी जिले में गंगा नदी में नहाने के दौरान दो लड़कियों की आज सुबह तकरीबन 6 बजे डूबने से मौत हो गयी। घटना जिले के चिरईगांव ब्लॉक, बभनपुरा गांव की है। जानकारी के अनुसार, एक कक्षा 6 व दूसरी कक्षा 11 में पढ़ने वाली छात्रा थी। नदी में डूबने से मौत होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा नदी में नहाने से रोक नहीं लगाई है वहीं नदी के पास बैरिकैड लगा दिए गए हैं कि लोग उसी दायरे में रहकर नहाए। ये भी देखें - सिवनी : जानें कैसे बनते हैं मक्के के बरे? परिवार ने बताया कि उनकी बेटियों के साथ कई और बच्चियां भी नहाने गयी थी। डूबने की घटना के बारे में प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम को भी सूचित किया गया था जो सूचना देने के 5 घंटे बाद घटनास्थल पहुंची। जानकारी के अनुसार, अभी भी खोजबीन ज़ारी है। गांव के पूर्व प्रधान अनिल ने खबर लहरिया को बताया कि नदी में आस-पास के काफी लोग नहाने आते हैं। अगर प्रशासन द्वारा बैरिकैड लग जाए तो शायद यह घटनाएं न हो। चौबेपुर थाने के एसओ राजेश सिंह ने जानकारी दी कि पूरा परिवार सुबह 6 बजे नहाने गया था जिसमें दो बच्चियों की डूबने से मौत हो गयी। प्रशासन द्वारा खोज की जा रही है।
वाराणसी जिले में गंगा नदी में नहाने के दौरान दो लड़कियों की आज सुबह तकरीबन छः बजे डूबने से मौत हो गयी। घटना जिले के चिरईगांव ब्लॉक, बभनपुरा गांव की है। जानकारी के अनुसार, एक कक्षा छः व दूसरी कक्षा ग्यारह में पढ़ने वाली छात्रा थी। नदी में डूबने से मौत होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा नदी में नहाने से रोक नहीं लगाई है वहीं नदी के पास बैरिकैड लगा दिए गए हैं कि लोग उसी दायरे में रहकर नहाए। ये भी देखें - सिवनी : जानें कैसे बनते हैं मक्के के बरे? परिवार ने बताया कि उनकी बेटियों के साथ कई और बच्चियां भी नहाने गयी थी। डूबने की घटना के बारे में प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम को भी सूचित किया गया था जो सूचना देने के पाँच घंटाटे बाद घटनास्थल पहुंची। जानकारी के अनुसार, अभी भी खोजबीन ज़ारी है। गांव के पूर्व प्रधान अनिल ने खबर लहरिया को बताया कि नदी में आस-पास के काफी लोग नहाने आते हैं। अगर प्रशासन द्वारा बैरिकैड लग जाए तो शायद यह घटनाएं न हो। चौबेपुर थाने के एसओ राजेश सिंह ने जानकारी दी कि पूरा परिवार सुबह छः बजे नहाने गया था जिसमें दो बच्चियों की डूबने से मौत हो गयी। प्रशासन द्वारा खोज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक दर्दनाक खबर है. बलिया के नरही थाना क्षेत्र के सोहांव गांव के निकट एक कार से टक्कर में मोटरसाइकिल सवार 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल है. मृतकों में एक दंपति और उनकी बेटी शामिल है, जबकि इसी दंपत्ति का पुत्र गंभीर रूप से घायल है. अपर पुलिस अधीक्षक संजय यादव ने रविवार को बताया कि नरही थाना क्षेत्र के सोहांव गांव के निकट शनिवार को एक मोटरसाइकिल असंतुलित होकर विपरीत दिशा से आ रही कार से टकरा गई, जिससे मोटरसाइकिल सवार गुलाब राजभर, उसकी पत्नी सीमा और एक माह की मासूम पुत्री की मौत हो गई तथा डेढ़ साल का पुत्र अंश गंभीर रूप से घायल हो गया. उन्होंने बताया कि अंश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस के अनुसार गुलाब अपनी ससुराल से पत्नी और बच्चों को लेकर घर आ रहा था, तभी यह हादसा हुआ. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक दर्दनाक खबर है. बलिया के नरही थाना क्षेत्र के सोहांव गांव के निकट एक कार से टक्कर में मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल है. मृतकों में एक दंपति और उनकी बेटी शामिल है, जबकि इसी दंपत्ति का पुत्र गंभीर रूप से घायल है. अपर पुलिस अधीक्षक संजय यादव ने रविवार को बताया कि नरही थाना क्षेत्र के सोहांव गांव के निकट शनिवार को एक मोटरसाइकिल असंतुलित होकर विपरीत दिशा से आ रही कार से टकरा गई, जिससे मोटरसाइकिल सवार गुलाब राजभर, उसकी पत्नी सीमा और एक माह की मासूम पुत्री की मौत हो गई तथा डेढ़ साल का पुत्र अंश गंभीर रूप से घायल हो गया. उन्होंने बताया कि अंश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस के अनुसार गुलाब अपनी ससुराल से पत्नी और बच्चों को लेकर घर आ रहा था, तभी यह हादसा हुआ. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
की ओर झुकना पड़ा। लेकिन इसमे भी साधारण, खुफिया और विशेष सब तरह की पुलिस के विस्तृत जाल से बचकर काम करने की शक्ति मे उन्होंने अपनेको पूरा पटु सावित किया । काग्रेस कार्यालयो के बने रहने और हस्तपत्रको के नियमित प्रकाशनद्वारा जनता व काग्रेसियो को नये-नये कार्यक्रमो की हिदायते पहुँचाते रहने का उल्लेख हम कर ही चुके है। सत्याग्रह के लिए यद्यपि वहुत बड़ी रकम की जरूरत नही, लेकिन इतने विस्तृत पैमाने पर होनेवाली लडाई के लिए तो वह भी चाहिए ही । यह सौभाग्य की बात है कि घनाभाव के कारण काम मे रुकावट पड़ने का मौका कभी उपस्थित नही हुआ । धन तो कही न कही से माता ही रहा। गुमनाम दानियो तक ने सहायता दी - और, कभी-कभी तो यह भी नहीं देखा कि किसे वह दान दे रहे है । यह मार्के की बात है कि ऐसी परिस्थिति में भी, जबकि सारा दफ्तर लोगो की जेवो मे ही रहता था, हिसाव किताव वडी कड़ाई के साथ रक्खा गया और प्राप्त सहायता का उपयोग सावधानी के साथ लड़ाई के लिए ही किया गया । इस वर्णन को खतम करने से पहले कांग्रेस के दिल्ली- अधिवेशन का भी वर्णन कर देना चाहिए जो कि १९३२ के अप्रैल महीने में दिल्ली में हुआ था । वह पुलिस की बड़ी भारी सतर्कता के बावजूद किया गया था, जिसने कि दिल्ली के रास्ते में ही बहुत से प्रतिनिधियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था । चादनीचौक के घटाघर पर यह अधिवेशन हुआ और पुलिस की सतर्कता के वावजूद लगभग ५०० प्रतिनिधि जैसे-तैसे सभा- स्थान पर जा पहुँचे थे। पुलिस इस सन्देह मे कि अधिवेशन के जगह का जो ऐलान किया गया है वह सिर्फ चाल है, प्रतिनिधियो को नई दिल्ली मे कही तलाश करती रही और कुछ पुलिस एक जगह अकालियो के जुलूस से निबटती रही। पेश्तर इसके कि वह घण्टाघर पर आये, काफी तादाद मे प्रतिनिधि एकत्र हुए और उन्होने कार्रवाई भी शुरू कर दी । अहमदावाद के सेठ रणछोडदास अमृतलाल, कहते है, उसके सभापति थे। उसमे काग्रेस की सालाना रिपोर्ट पेश हुई और चार प्रस्ताव स्वीकृत हुए। पहले प्रस्ताव में इस बात की ताईद की गई कि पूर्ण स्वाधीनता ही काग्रेस का लक्ष्य है, दूसरे में सविनय अवज्ञा के फिर से जारी होने का हार्दिक समर्थन किया गया, तीसरे मे गाधीजी के आवाहन पर राष्ट्र ने जो सुन्दर जवाब दिया उसके लिए उसे वधाई दी गई और महात्माजी के नेतृत्व में पूर्ण विश्वास प्रदर्शित किया गया, तथा चौथे में अहिंसा में अपने विश्वास की फिर से पुष्टि करते हुए कांग्रेस को, खासकर सीमाप्रान्त के बहादुर पठानों को, अधिकारियो की ओर से अधिक से अधिक उत्तेजना की करतूतें की जाने पर भी असिंहात्मक रहने पर बधाई दी गई। पं० मदनमोहन मालवीय दिल्ली-अधिवेशन के मनोनीत सभापति थे, लेकिन वह तो रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिये गये थे। वैसे इन तमाम समय काग्रेसियो मे उल्लेख-योग्य वही एकमात्र ऐसे नेता थे जो जेल से बाहर थे। अपनी वृद्धावस्था एव गिरे हुए स्वास्थ्य के बावजूद, गोलमेज परिषद् से लौटने के बाद वह कभी शान्ति से नही बैठे और अधिकारियो की ज्यादतियो का पर्दाफाश करनेवाले वक्तव्य-पर-वक्तव्य निकालकर अपने अथक उत्साह एव अद्भुत शक्ति से काग्रेस-कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करते रहे। जब भी कभी कोई सन्देह या कठिनाई का प्रसंग उपस्थित होता, काग्रेस कार्यकर्ता उन्हीकी ओर मुखातिब होते थे, और उन्होने कभी भी उन्हें निराश नहीं होने दिया । संग्राम फिर स्थगित गांधीजी का आमरण उपवास पाठको को याद होगा कि दूसरी गोलमेज परिषद् मे गांधीजी ने अपना यह निश्चय सुनाया था कि अस्पृश्यो को यदि हिन्दू जाति से अलग करने की चेष्टा की गई तो मैं उस चेष्टा का अपने प्राणो की वाजी लगाकर भी मुकाबला करूंगा। अब गावीजी के उस भीषण व्रत की परीक्षा का अवसर आ पहुँचा था। मताधिकार और निर्वाचन की सीटो का निर्णय करने के लिए, लोथियन-कमिटी, १७ जनवरी को भारत मे आ पहुँची थी । समय वीतता चला जा रहा था, रिपोर्ट तैयार हो जायगी। सरकार झटपट काम खतम करने मे दक्ष है ही, और हम लोग इसी तरह जवानी जमाखर्च करते रहेगे। इसलिए बहुत सोचने-समझने के वाद, गाधीजी ने भारत मंत्री सर सेम्युअल होर को ११ मार्च को पत्र लिखा, जिसमे उन्होने यह निश्चय प्रकट किया कि यदि सरकार ने अस्पृश्यों या दलित जातियो के लिए पृथक् निर्वाचन रक्खा तो मै आमरण उपवास करूंगा। सर सेम्युअल होर ने अपना उत्तर १३ अप्रैल १९३२ को भेजा। यह उत्तर वही पुरानी पत्थर की लकीर का उदाहरण था; लोथियन कमिटी की प्रतीक्षा की जा रही है; हा, उचित समय पर गांधीजी के विचारों पर भी ध्यान दिया जायगा । १७ अगस्त को मि० मैकडानल्ड का निश्चय, जिसे भूल से 'निर्णय' के नाम से पुकारा जाता है, सुनाया गया । (देखो परिशिष्ट ७) दलित-जातियो को पृथक् निर्वाचन का अधिकार तो मिला ही, साथ ही आम निर्वाचन में भी उम्मीदवारी करने और दुहरे वोट हासिल करने का भी अधिकार दिया गया। दोनों हाथो से उदारतापूर्वक दान दिया गया था । १८ अगस्त को गाधीजी ने अपना निश्चय किया और उस निश्चय से प्रधान मन्त्री को सूचित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि व्रत यानी उपवास २० सितम्बर (१९३२) को तीसरे पहर से शुरू होगा । मि० मैकडानल्ड ने बाराम के साथ ८ सितम्बर को उत्तर दिया और १२ सितम्बर को सारा पत्र-व्यवहार प्रकाशित कर दिया। प्रधान मंत्री ने गाधीजी को दलित जातियों के प्रति शत्रुता के भाव रखनेवाला व्यक्ति बताना उचित समझा। व्रत २० सितम्बर १९३२ को आरम्भ होनेवाला था । पत्र-व्यवहार के प्रकाशन और व्रत आरम्भ होने में एक सप्ताह का अन्तर था । यह सप्ताह देश ही क्या, संसार-भर के लिए क्षोभ, चिन्ता और हलचल का सप्ताह था । यह सप्ताह बड़े अवसाद का सप्ताह था, जिसमे व्यक्तियों और संस्थाओं ने, उस क्षण जो ठीक समझा किया। गाधीजी से भेंट करने की अनुमति मागी गई, पर न मिली। संसार के कोने-कोने से पूना को तार भेजे गये। गांधीजी का सकल्प छुड़ाने के लिए तरह-तरह की सलाहो और तर्कों से काम लिया गया। मित्र उनके प्राण बचाने के लिए चिन्तित थे और शत्रु उपहास पूर्ण कुतूहल के साथ सारा व्यापार देख रहे थे। जब रूस के महान् गिर्जे में आग लगी तो लोग टूटते और जलते हुए खम्भो और शहतीरों की तड़तड़ आवाज को सुनने के लिए दौड़े गये थे । अबसे आठ साल पहले इसी जेल मे गाधीजी अकस्मात् 'अपेण्डिसाइटिस' से बीमार पड़े थे । पर इस बार उन्होने अकस्मात् नही, स्वेच्छा से मृत्यु - शय्या का आलिंगन किया था और स्वेच्छा से ही व्रत आरम्भ किया था। इसलिए देश का स्तब्ध हो जाना स्वाभाविक ही था । प्रधान मंत्री का निश्चय तो रद होना ही चाहिए । वह स्वय तो ऐसा करेगे नही । इसलिए हिन्दुओ के आपसी समझौते के द्वारा उसका अन्त होना चाहिए। इसके लिए एक परिषद् करना आवश्यक है । परिषद् १९ को हो या २० को ? यही प्रश्न था । गाधीजी के जीवन की रक्षा करनी ही चाहिए। यह बड़ी अच्छी बात हुई कि दलितजातियों के ही एक नेता ने इस दिशा मे पैर बढाया। रावबहादुर एम० सी० राजा ने पृथक् निर्वाचन को धिक्कारा । सर सप्रू ने गाधीजी की रिहाई की माग पेश की। काग्रेस-वादियों ने भी स्वभावतः देश भर में संगठन करके समझौता कराने की चेष्टा की । पर मालवीयजी समय के अनुसार चला करते है। उन्होने तत्काल नेताओ की एक परिषद् बुलाने की बात सोची। इग्लैण्ड मे दीनबन्धु एण्डरूज, मि० पोलक और मि० लेन्सबरी ने स्थिति की गम्भीरता की ओर अग्रेज जनता का ध्यान आकर्पित जिसके कराना आरम्भ किया। एक अपील पर प्रभावशाली व्यक्तियों के हस्ताक्षर हुए, द्वारा इंग्लैण्ड-भर मे खास तौर से प्रार्थना करने को कहा गया । भारतवर्ष मे २० सितम्बर को उपवास और प्रार्थनायें की गई। इसमे शान्ति निकेतन ने भी भाग लिया । वैसे इस आन्दोलन का आरम्भ प्रधान मंत्री के निश्चय मे सशोधन कराने के लिए किया गया था, पर इस आन्दोलन को अस्पृश्यता निवारण के अधिक व्यापक आन्दोलन का रूप धारण करते देर न लगी। कलकत्ता, दिल्ली और अन्य स्थानो मे अस्पृश्यों के लिए मन्दिर खोले जाने लगे। यह आशा की जाती थी कि गांधीजी उपवास के आरम्भ होते ही छोड़ दिये जायेंगे । पर पता चला कि उनकी रिहाई तो क्या होगी उन्हें, किसी खास स्थान पर नजरबन्द कर दिया जायगा और उनकी गतिविधि पर भी रुकावट लगा दी जायगी। गांधीजी ने सरकार को लिखा कि "इस प्रकार स्थान परिवर्तन करके व्यर्थ खर्च और कष्ट क्यो उठाया जाय ? मुझसे किसी शर्त का पालन न हो सकेगा।" सरकार भी सजी हो गई और उसने गाधीजी को ऐसी व्यवस्था स्वीकार करने को मजबूर न किया जो उन्हें अरुचिकर लगती हो । पूना पैक्ट पूना पैक्ट जिन-जिन बातों का परिणाम है, उनके क्रम-विकास में पाठको को ले जाना हमारे लिए सम्भव नहीं है । परिषद् वम्बई मे आरम्भ हुई, पर शीघ्र ही पूना मे ले जाई गई। ( जो लोग इस सम्बन्ध में विस्तृत विवरण जानना चाहे उन्हे गावीजी के प्राइवेट सेक्रेटरी श्री प्यारेलाल की सुन्दर पुस्तक 'एपिक फास्ट' ( Epic Fast) और सस्ता साहित्य मण्डल द्वारा प्रकाशित 'हमारा कलंक' पढना चाहिए । ) डा० अम्बेडकर शीघ्र ही बातचीत में शामिल हो गये और श्री अमृतलाल ठक्कर, श्री राजगोपालाचार्यं, सर चुन्नीलाल मेहता, पण्डित मालवीय, विडलाजी, सरदार पटेल, श्रीमती सरोजिनी नायडू, श्री जयकर, डा० अम्बेडकर, रावबहादुर एम० सी० राजा, बावू राजेन्द्र प्रसाद, पण्डित हृदयनाथ कुजरू और अन्य सज्जनो की सहायता से एक योजना तैयार की गई, जिसे उपवास के पाचवे दिन सारे दलो ने स्वीकार कर लिया । दलित जातियो ने पृथक् निर्वाचन का अधिकार त्याग दिया और आम हिन्दू- निर्वाचनो से सन्तोप कर लिया । ( वैसे आम हिन्दू- निर्वाचनो मे वे सरकारी निर्णय के अनुसार भी शामिल थे ।) उच्च जातियों के हिन्दुओ ने महत्त्वपूर्ण सरक्षण प्रदान किये । उनमें से एक सरक्षण यह है कि सरकारी निर्णय के अनुसार आम निर्वाचनो मे जितनी जगहे दी गई है उनमे से १४८ दलित जातियों को दी जायँ । दूसरा यह है कि हरेक की सुरक्षित जगह के लिए दलित-जातिया चार उम्मीदवार चुनें और आम निर्वाचन मे उनमे से एक को चुन लिया जाय । पूरा समझौता उस समय तक कायम रहे जवतक सवकी सलाह से उसमे परिवर्तन न किया जाय । दलित-जातियो का प्रारम्भिक निर्वाचन दस साल तक जारी रहे । ब्रिटिश सरकार ने पूना पैक्ट को उस अश तक स्वीकार कर लिया जिस अश तक उसका प्रधान मन्त्री के निश्चय से सम्बन्ध था । जो-जो बाते साम्प्रदायिक निर्णय के बाहर जाती थी, उनपर निश्चय रोक रक्खा गया । दलित-जातियो के नेताओ को कृतज्ञ होना ही चाहिए था, क्योकि प्रधान मन्त्री के निश्चय के अनुसार उन्हें जितनी जगहें मिलनेवाली थी, अब उन्हें उनसे दुगुनी मिल गईं और उन्हें अपनी जन-सख्या से अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हो गया। दस वर्ष वाद जनमत स्थिर करने के प्रश्न पर अन्तिम समय फिर विवाद उठ खडा हुआ, पर गांधीजी ने अवधि घटाकर ५ वर्ष कर दी, क्योकि दस साल के लिए स्थगित करने से कही जनता यह न समझे कि डॉ० अम्बेडकर सवर्ण जातियो की नेक-नीयती को आज़माइश करना नही चाहते, बल्कि विरुद्ध जनमत देने के लिए दलित-जातियों को तैयार करने के लिए अवकाश चाहते है। गांधीजी ने अन्त मे उत्तर दिया- "मेरा जीवन या पांच वर्प" । । अन्त मे यह निश्चय किया गया कि इस प्रश्न को भविष्य में आपस के समझौते के द्वारा तय किया जाय । इसका नुस्खा श्री राजगोपालाचार्य ने सोच निकाला और गांधीजी ने कहा - "क्या खूब !" २६ तारीख को, ठीक जिस समय ब्रिटिश मंत्रिमण्डल द्वारा समझौते के स्वीकृत होने की खबर मिली, श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गांधीजी से भेंट की। २६ तारीख की सुबह को इंग्लैण्ड और भारत में एक-साथ घोषणा की गई कि पूना का समझौता स्वीकार कर लिया गया। मि० हेग ने वड़ी कौंसिल में वक्तव्य दिया, जिसमे निम्नलिखित वाते कही गईः-- (१) प्रधानमन्त्री के उस निश्चय के स्थान पर, जिसके द्वारा दलित जातियों को प्रान्तीय कौसिलों में पृथक् निर्वाचन का अधिकार दिया गया था, पार्लमेण्ट से सिफारिश करने के लिए उस व्यवस्था को स्वीकार किया जाता है जो यरवडा समझौते के मातहत स्थिर हुई है। (२) यरवडा - समझौते के द्वारा प्रान्तीय कौसिलो में दलित-जातियो को जितनी जगहे देना निश्चित हुआ है, उन्हें स्वीकार किया जाता है। (३) यरवडा के समझौते में दलित जातियों के हित की गारण्टी के सम्वन्ध मे जो कुछ कहा गया है वह सवर्ण हिन्दुओ द्वारा दलित जातियों को दिये गये निश्चित वचन के रूप में स्वीकार किया जाता है। (४) वड़ी कौसिल के लिए दलित जातियों के प्रतिनिधियों को चुनने की प्रणाली और मताधिकार की सीमा के सम्बन्ध में यह कहना है कि अभी सरकार यरवडा - समझौते की गर्तो को निश्चित रूप में मान्य नहीं कर सकती, क्योंकि अभी वड़ी कौंसिल के प्रतिनिधित्व और मताधिकार का प्रश्न विचाराधीन है, पर इतना अवश्य कहा जा सकता है कि सरकार समझौते के विरुद्ध नही है। ( ५ ) वडी कौंसिल में आम निर्वाचन के लिए खुली जगहों में से १८ जगहें दलित-जातियो के लिए सुरक्षित रक्खी जायँ, इस बात को सरकार दलित-जातियो और अन्य हिन्दुओ के पारस्परिक समझौते के रूप मे स्वीकार करती है ।
की ओर झुकना पड़ा। लेकिन इसमे भी साधारण, खुफिया और विशेष सब तरह की पुलिस के विस्तृत जाल से बचकर काम करने की शक्ति मे उन्होंने अपनेको पूरा पटु सावित किया । काग्रेस कार्यालयो के बने रहने और हस्तपत्रको के नियमित प्रकाशनद्वारा जनता व काग्रेसियो को नये-नये कार्यक्रमो की हिदायते पहुँचाते रहने का उल्लेख हम कर ही चुके है। सत्याग्रह के लिए यद्यपि वहुत बड़ी रकम की जरूरत नही, लेकिन इतने विस्तृत पैमाने पर होनेवाली लडाई के लिए तो वह भी चाहिए ही । यह सौभाग्य की बात है कि घनाभाव के कारण काम मे रुकावट पड़ने का मौका कभी उपस्थित नही हुआ । धन तो कही न कही से माता ही रहा। गुमनाम दानियो तक ने सहायता दी - और, कभी-कभी तो यह भी नहीं देखा कि किसे वह दान दे रहे है । यह मार्के की बात है कि ऐसी परिस्थिति में भी, जबकि सारा दफ्तर लोगो की जेवो मे ही रहता था, हिसाव किताव वडी कड़ाई के साथ रक्खा गया और प्राप्त सहायता का उपयोग सावधानी के साथ लड़ाई के लिए ही किया गया । इस वर्णन को खतम करने से पहले कांग्रेस के दिल्ली- अधिवेशन का भी वर्णन कर देना चाहिए जो कि एक हज़ार नौ सौ बत्तीस के अप्रैल महीने में दिल्ली में हुआ था । वह पुलिस की बड़ी भारी सतर्कता के बावजूद किया गया था, जिसने कि दिल्ली के रास्ते में ही बहुत से प्रतिनिधियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था । चादनीचौक के घटाघर पर यह अधिवेशन हुआ और पुलिस की सतर्कता के वावजूद लगभग पाँच सौ प्रतिनिधि जैसे-तैसे सभा- स्थान पर जा पहुँचे थे। पुलिस इस सन्देह मे कि अधिवेशन के जगह का जो ऐलान किया गया है वह सिर्फ चाल है, प्रतिनिधियो को नई दिल्ली मे कही तलाश करती रही और कुछ पुलिस एक जगह अकालियो के जुलूस से निबटती रही। पेश्तर इसके कि वह घण्टाघर पर आये, काफी तादाद मे प्रतिनिधि एकत्र हुए और उन्होने कार्रवाई भी शुरू कर दी । अहमदावाद के सेठ रणछोडदास अमृतलाल, कहते है, उसके सभापति थे। उसमे काग्रेस की सालाना रिपोर्ट पेश हुई और चार प्रस्ताव स्वीकृत हुए। पहले प्रस्ताव में इस बात की ताईद की गई कि पूर्ण स्वाधीनता ही काग्रेस का लक्ष्य है, दूसरे में सविनय अवज्ञा के फिर से जारी होने का हार्दिक समर्थन किया गया, तीसरे मे गाधीजी के आवाहन पर राष्ट्र ने जो सुन्दर जवाब दिया उसके लिए उसे वधाई दी गई और महात्माजी के नेतृत्व में पूर्ण विश्वास प्रदर्शित किया गया, तथा चौथे में अहिंसा में अपने विश्वास की फिर से पुष्टि करते हुए कांग्रेस को, खासकर सीमाप्रान्त के बहादुर पठानों को, अधिकारियो की ओर से अधिक से अधिक उत्तेजना की करतूतें की जाने पर भी असिंहात्मक रहने पर बधाई दी गई। पंशून्य मदनमोहन मालवीय दिल्ली-अधिवेशन के मनोनीत सभापति थे, लेकिन वह तो रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिये गये थे। वैसे इन तमाम समय काग्रेसियो मे उल्लेख-योग्य वही एकमात्र ऐसे नेता थे जो जेल से बाहर थे। अपनी वृद्धावस्था एव गिरे हुए स्वास्थ्य के बावजूद, गोलमेज परिषद् से लौटने के बाद वह कभी शान्ति से नही बैठे और अधिकारियो की ज्यादतियो का पर्दाफाश करनेवाले वक्तव्य-पर-वक्तव्य निकालकर अपने अथक उत्साह एव अद्भुत शक्ति से काग्रेस-कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करते रहे। जब भी कभी कोई सन्देह या कठिनाई का प्रसंग उपस्थित होता, काग्रेस कार्यकर्ता उन्हीकी ओर मुखातिब होते थे, और उन्होने कभी भी उन्हें निराश नहीं होने दिया । संग्राम फिर स्थगित गांधीजी का आमरण उपवास पाठको को याद होगा कि दूसरी गोलमेज परिषद् मे गांधीजी ने अपना यह निश्चय सुनाया था कि अस्पृश्यो को यदि हिन्दू जाति से अलग करने की चेष्टा की गई तो मैं उस चेष्टा का अपने प्राणो की वाजी लगाकर भी मुकाबला करूंगा। अब गावीजी के उस भीषण व्रत की परीक्षा का अवसर आ पहुँचा था। मताधिकार और निर्वाचन की सीटो का निर्णय करने के लिए, लोथियन-कमिटी, सत्रह जनवरी को भारत मे आ पहुँची थी । समय वीतता चला जा रहा था, रिपोर्ट तैयार हो जायगी। सरकार झटपट काम खतम करने मे दक्ष है ही, और हम लोग इसी तरह जवानी जमाखर्च करते रहेगे। इसलिए बहुत सोचने-समझने के वाद, गाधीजी ने भारत मंत्री सर सेम्युअल होर को ग्यारह मार्च को पत्र लिखा, जिसमे उन्होने यह निश्चय प्रकट किया कि यदि सरकार ने अस्पृश्यों या दलित जातियो के लिए पृथक् निर्वाचन रक्खा तो मै आमरण उपवास करूंगा। सर सेम्युअल होर ने अपना उत्तर तेरह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बत्तीस को भेजा। यह उत्तर वही पुरानी पत्थर की लकीर का उदाहरण था; लोथियन कमिटी की प्रतीक्षा की जा रही है; हा, उचित समय पर गांधीजी के विचारों पर भी ध्यान दिया जायगा । सत्रह अगस्त को मिशून्य मैकडानल्ड का निश्चय, जिसे भूल से 'निर्णय' के नाम से पुकारा जाता है, सुनाया गया । दलित-जातियो को पृथक् निर्वाचन का अधिकार तो मिला ही, साथ ही आम निर्वाचन में भी उम्मीदवारी करने और दुहरे वोट हासिल करने का भी अधिकार दिया गया। दोनों हाथो से उदारतापूर्वक दान दिया गया था । अट्ठारह अगस्त को गाधीजी ने अपना निश्चय किया और उस निश्चय से प्रधान मन्त्री को सूचित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि व्रत यानी उपवास बीस सितम्बर को तीसरे पहर से शुरू होगा । मिशून्य मैकडानल्ड ने बाराम के साथ आठ सितम्बर को उत्तर दिया और बारह सितम्बर को सारा पत्र-व्यवहार प्रकाशित कर दिया। प्रधान मंत्री ने गाधीजी को दलित जातियों के प्रति शत्रुता के भाव रखनेवाला व्यक्ति बताना उचित समझा। व्रत बीस सितम्बर एक हज़ार नौ सौ बत्तीस को आरम्भ होनेवाला था । पत्र-व्यवहार के प्रकाशन और व्रत आरम्भ होने में एक सप्ताह का अन्तर था । यह सप्ताह देश ही क्या, संसार-भर के लिए क्षोभ, चिन्ता और हलचल का सप्ताह था । यह सप्ताह बड़े अवसाद का सप्ताह था, जिसमे व्यक्तियों और संस्थाओं ने, उस क्षण जो ठीक समझा किया। गाधीजी से भेंट करने की अनुमति मागी गई, पर न मिली। संसार के कोने-कोने से पूना को तार भेजे गये। गांधीजी का सकल्प छुड़ाने के लिए तरह-तरह की सलाहो और तर्कों से काम लिया गया। मित्र उनके प्राण बचाने के लिए चिन्तित थे और शत्रु उपहास पूर्ण कुतूहल के साथ सारा व्यापार देख रहे थे। जब रूस के महान् गिर्जे में आग लगी तो लोग टूटते और जलते हुए खम्भो और शहतीरों की तड़तड़ आवाज को सुनने के लिए दौड़े गये थे । अबसे आठ साल पहले इसी जेल मे गाधीजी अकस्मात् 'अपेण्डिसाइटिस' से बीमार पड़े थे । पर इस बार उन्होने अकस्मात् नही, स्वेच्छा से मृत्यु - शय्या का आलिंगन किया था और स्वेच्छा से ही व्रत आरम्भ किया था। इसलिए देश का स्तब्ध हो जाना स्वाभाविक ही था । प्रधान मंत्री का निश्चय तो रद होना ही चाहिए । वह स्वय तो ऐसा करेगे नही । इसलिए हिन्दुओ के आपसी समझौते के द्वारा उसका अन्त होना चाहिए। इसके लिए एक परिषद् करना आवश्यक है । परिषद् उन्नीस को हो या बीस को ? यही प्रश्न था । गाधीजी के जीवन की रक्षा करनी ही चाहिए। यह बड़ी अच्छी बात हुई कि दलितजातियों के ही एक नेता ने इस दिशा मे पैर बढाया। रावबहादुर एमशून्य सीशून्य राजा ने पृथक् निर्वाचन को धिक्कारा । सर सप्रू ने गाधीजी की रिहाई की माग पेश की। काग्रेस-वादियों ने भी स्वभावतः देश भर में संगठन करके समझौता कराने की चेष्टा की । पर मालवीयजी समय के अनुसार चला करते है। उन्होने तत्काल नेताओ की एक परिषद् बुलाने की बात सोची। इग्लैण्ड मे दीनबन्धु एण्डरूज, मिशून्य पोलक और मिशून्य लेन्सबरी ने स्थिति की गम्भीरता की ओर अग्रेज जनता का ध्यान आकर्पित जिसके कराना आरम्भ किया। एक अपील पर प्रभावशाली व्यक्तियों के हस्ताक्षर हुए, द्वारा इंग्लैण्ड-भर मे खास तौर से प्रार्थना करने को कहा गया । भारतवर्ष मे बीस सितम्बर को उपवास और प्रार्थनायें की गई। इसमे शान्ति निकेतन ने भी भाग लिया । वैसे इस आन्दोलन का आरम्भ प्रधान मंत्री के निश्चय मे सशोधन कराने के लिए किया गया था, पर इस आन्दोलन को अस्पृश्यता निवारण के अधिक व्यापक आन्दोलन का रूप धारण करते देर न लगी। कलकत्ता, दिल्ली और अन्य स्थानो मे अस्पृश्यों के लिए मन्दिर खोले जाने लगे। यह आशा की जाती थी कि गांधीजी उपवास के आरम्भ होते ही छोड़ दिये जायेंगे । पर पता चला कि उनकी रिहाई तो क्या होगी उन्हें, किसी खास स्थान पर नजरबन्द कर दिया जायगा और उनकी गतिविधि पर भी रुकावट लगा दी जायगी। गांधीजी ने सरकार को लिखा कि "इस प्रकार स्थान परिवर्तन करके व्यर्थ खर्च और कष्ट क्यो उठाया जाय ? मुझसे किसी शर्त का पालन न हो सकेगा।" सरकार भी सजी हो गई और उसने गाधीजी को ऐसी व्यवस्था स्वीकार करने को मजबूर न किया जो उन्हें अरुचिकर लगती हो । पूना पैक्ट पूना पैक्ट जिन-जिन बातों का परिणाम है, उनके क्रम-विकास में पाठको को ले जाना हमारे लिए सम्भव नहीं है । परिषद् वम्बई मे आरम्भ हुई, पर शीघ्र ही पूना मे ले जाई गई। और सस्ता साहित्य मण्डल द्वारा प्रकाशित 'हमारा कलंक' पढना चाहिए । ) डाशून्य अम्बेडकर शीघ्र ही बातचीत में शामिल हो गये और श्री अमृतलाल ठक्कर, श्री राजगोपालाचार्यं, सर चुन्नीलाल मेहता, पण्डित मालवीय, विडलाजी, सरदार पटेल, श्रीमती सरोजिनी नायडू, श्री जयकर, डाशून्य अम्बेडकर, रावबहादुर एमशून्य सीशून्य राजा, बावू राजेन्द्र प्रसाद, पण्डित हृदयनाथ कुजरू और अन्य सज्जनो की सहायता से एक योजना तैयार की गई, जिसे उपवास के पाचवे दिन सारे दलो ने स्वीकार कर लिया । दलित जातियो ने पृथक् निर्वाचन का अधिकार त्याग दिया और आम हिन्दू- निर्वाचनो से सन्तोप कर लिया । उच्च जातियों के हिन्दुओ ने महत्त्वपूर्ण सरक्षण प्रदान किये । उनमें से एक सरक्षण यह है कि सरकारी निर्णय के अनुसार आम निर्वाचनो मे जितनी जगहे दी गई है उनमे से एक सौ अड़तालीस दलित जातियों को दी जायँ । दूसरा यह है कि हरेक की सुरक्षित जगह के लिए दलित-जातिया चार उम्मीदवार चुनें और आम निर्वाचन मे उनमे से एक को चुन लिया जाय । पूरा समझौता उस समय तक कायम रहे जवतक सवकी सलाह से उसमे परिवर्तन न किया जाय । दलित-जातियो का प्रारम्भिक निर्वाचन दस साल तक जारी रहे । ब्रिटिश सरकार ने पूना पैक्ट को उस अश तक स्वीकार कर लिया जिस अश तक उसका प्रधान मन्त्री के निश्चय से सम्बन्ध था । जो-जो बाते साम्प्रदायिक निर्णय के बाहर जाती थी, उनपर निश्चय रोक रक्खा गया । दलित-जातियो के नेताओ को कृतज्ञ होना ही चाहिए था, क्योकि प्रधान मन्त्री के निश्चय के अनुसार उन्हें जितनी जगहें मिलनेवाली थी, अब उन्हें उनसे दुगुनी मिल गईं और उन्हें अपनी जन-सख्या से अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हो गया। दस वर्ष वाद जनमत स्थिर करने के प्रश्न पर अन्तिम समय फिर विवाद उठ खडा हुआ, पर गांधीजी ने अवधि घटाकर पाँच वर्ष कर दी, क्योकि दस साल के लिए स्थगित करने से कही जनता यह न समझे कि डॉशून्य अम्बेडकर सवर्ण जातियो की नेक-नीयती को आज़माइश करना नही चाहते, बल्कि विरुद्ध जनमत देने के लिए दलित-जातियों को तैयार करने के लिए अवकाश चाहते है। गांधीजी ने अन्त मे उत्तर दिया- "मेरा जीवन या पांच वर्प" । । अन्त मे यह निश्चय किया गया कि इस प्रश्न को भविष्य में आपस के समझौते के द्वारा तय किया जाय । इसका नुस्खा श्री राजगोपालाचार्य ने सोच निकाला और गांधीजी ने कहा - "क्या खूब !" छब्बीस तारीख को, ठीक जिस समय ब्रिटिश मंत्रिमण्डल द्वारा समझौते के स्वीकृत होने की खबर मिली, श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गांधीजी से भेंट की। छब्बीस तारीख की सुबह को इंग्लैण्ड और भारत में एक-साथ घोषणा की गई कि पूना का समझौता स्वीकार कर लिया गया। मिशून्य हेग ने वड़ी कौंसिल में वक्तव्य दिया, जिसमे निम्नलिखित वाते कही गईः-- प्रधानमन्त्री के उस निश्चय के स्थान पर, जिसके द्वारा दलित जातियों को प्रान्तीय कौसिलों में पृथक् निर्वाचन का अधिकार दिया गया था, पार्लमेण्ट से सिफारिश करने के लिए उस व्यवस्था को स्वीकार किया जाता है जो यरवडा समझौते के मातहत स्थिर हुई है। यरवडा - समझौते के द्वारा प्रान्तीय कौसिलो में दलित-जातियो को जितनी जगहे देना निश्चित हुआ है, उन्हें स्वीकार किया जाता है। यरवडा के समझौते में दलित जातियों के हित की गारण्टी के सम्वन्ध मे जो कुछ कहा गया है वह सवर्ण हिन्दुओ द्वारा दलित जातियों को दिये गये निश्चित वचन के रूप में स्वीकार किया जाता है। वड़ी कौसिल के लिए दलित जातियों के प्रतिनिधियों को चुनने की प्रणाली और मताधिकार की सीमा के सम्बन्ध में यह कहना है कि अभी सरकार यरवडा - समझौते की गर्तो को निश्चित रूप में मान्य नहीं कर सकती, क्योंकि अभी वड़ी कौंसिल के प्रतिनिधित्व और मताधिकार का प्रश्न विचाराधीन है, पर इतना अवश्य कहा जा सकता है कि सरकार समझौते के विरुद्ध नही है। वडी कौंसिल में आम निर्वाचन के लिए खुली जगहों में से अट्ठारह जगहें दलित-जातियो के लिए सुरक्षित रक्खी जायँ, इस बात को सरकार दलित-जातियो और अन्य हिन्दुओ के पारस्परिक समझौते के रूप मे स्वीकार करती है ।
रहने के सर्वोत्तम स्थानों में से एक है बेलेक (तुर्की)। यात्रियों ने धूप, रेतीले समुद्र तटों और सुंदर समुद्र की बहुतायत का आनंद की तरह रिसोर्ट विवरण। लेकिन अगर वे वहाँ जाते हैं, आपको एहसास होगा कि इस जगह ज्यादा इस बारे में बात की तुलना में अधिक सुंदर है। तुर्की - एक देश सहारा है, जो मनोरंजन के लिए विभिन्न पर्यटन सुविधाओं की पेशकश कर सकते हैं। यह समुद्र तटों और ठाठ, और स्की अड्डों के लिए पहाड़ों, और ऐतिहासिक स्थलों, लुभावनी है। भूमध्य जलवायु बहुत आसानी से स्थानांतरित कर रहा है, और बुनियादी सुविधाओं के बहुत वांछित होने के लिए नहीं छोड़ता। लेकिन तुर्की के लोगों के आतिथ्य, त्रुटिहीन सेवा दुनिया में पौराणिक है। की लागत तुर्की में छुट्टियों काफी लोकतांत्रिक है, इसलिए इस क्षेत्र में तेजी से आय के एक औसत स्तर के साथ यात्रियों को चुन रहे हैं। कौन सा शहर चुनने के लिए? एक युवा और शोर कंपनी आदर्श बोडरम, Marmaris और Kemer के लिए। रात पार्टी के प्रशंसक एंटाल्या, Alanya, साइड में बहुत अच्छा लग रहा होगा। बच्चों के साथ परिवार के लिए यह बेलेक (तुर्की) में जाने के लिए बेहतर है। रिसोर्ट विवरण में कुछ शब्द व्यक्त कर सकते हैंः देवदार के जंगलों, महीन रेत, मिनी क्लब, के साथ समुद्र तटों जहां विशेष दरों, सभी उम्र के बच्चों के लिए आकर्षण। तुर्की में, आप किसी भी वर्ग और स्टार स्तर के होटल पा सकते हैं, तो आप एक विला, अपार्टमेंट, निजी क्षेत्र में रह सकते हैं। सत्ता के संस्थानों - पर्याप्त से अधिक है, और वे मांग palates की सराहना करेंगे। हालात तुर्की में करना है? आलसी समुद्र तट पर झूठ बोल रही है - यह सब है कि आप इस देश में खुद के साथ क्या कर सकते हैं नहीं है। वस्तुतः हर रिसॉर्ट एक नौका या नाव, स्कूटर या एक हेलीकाप्टर किराए पर, नीचे करने के लिए स्कूबा डाइविंग के साथ नीचे जाना छायादार जंगलों में जाने के लिए कार्य करता है। पर्यटन - यह सबसे करने के लिए दिलचस्प है, जो किसी भी होटल में आदेश दिया जा सकता है। प्रत्येक सहारा इसकी ऐतिहासिक और आधुनिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस्तांबुल में दौरे - प्रतियोगिता से बाहर। और, बेशक, खरीदारी! रंगीन बाजारों, सहायक विक्रेताओं, माल के सभी प्रकार के विशाल चयन यात्री की स्मृति में हमेशा के लिए रहेगा। Antalia तट - देश में जहां स्थित है और बेलेक (तुर्की) के इस भाग। रिसोर्ट विवरण, एक से अधिक मुद्रित पृष्ठ ले सकता है देखने के लिए कुछ न कुछ है क्योंकि वहाँ। क्षेत्र, हमारे साथी नागरिकों के बीच बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि है कि जहां देश में सर्वश्रेष्ठ समुद्र तटों केंद्रित कर रहे हैं। छुट्टियों के मौसम मई में शुरू होता है और अक्टूबर के अंतिम दिनों में खत्म। बेलेक एंटाल्या के भूमध्य सागर के तट पर सबसे महंगा शहर है। वह क्या बेलेक? तो, बेलेक (तुर्की)। रिसोर्ट विवरण सबसे महत्वपूर्ण साथ शुरू करना चाहिएः यह एक शांत जगह, एक आराम परिवार की छुट्टी के लिए एकदम सही है। यह एक आधुनिक रिसॉर्ट, जो सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है है। हाँ, वहाँ कोई ऐतिहासिक स्थलों और प्राचीन काल के स्मारकों है, लेकिन यह यहाँ यात्रा का परित्याग करने का कोई कारण नहीं है। सब के बाद, हर पर्यटक यहां खुद के लिए कुछ दिलचस्प खोजने के लिए और क्या से है का चयन करेंगे! पहले विश्व प्रसिद्ध गोल्फ कोर्स और सक्रिय मनोरंजन की बहुतायत है। दूसरे, यह, छायादार पेड़ों है जहां चीड़ और यूकेलिप्टस के पेड़। वे उन्नीसवीं सदी में सुल्तान के आदेश पर डाल दिया गया है, ताकि कटाव रेगिस्तान जगह के खिलाफ की रक्षा के लिए। तीसरा, एक बहुत ही हल्के जलवायु और लंबे समय से दिन के उजाले घंटे है। सहारा के आसपास के क्षेत्र की ओर, Aspendos, Perge, एक यात्रा पर जाने के लिए है जो की प्राचीन शहर है। और हाथ में एंटाल्या करने के लिए। और एक यात्रा के लायक Koprulu घाटी पार्क है, जो प्रकृति आरक्षित, बहुत दुर्लभ पक्षियों के लिए घर का प्रतिनिधित्व करता है। तो, आप बेलेक (तुर्की) की यात्रा करना चाहता था है? सहारा का विवरण है, जो की तस्वीरें हमारे लेख में पाया जा सकता है होटल व्यवसाय के विचार के बिना पूरा नहीं होगा। वह बहुत अच्छी तरह से विकसित की है। लगभग सभी स्कूलों पांच सितारों के धारकों और वीआईपी-ग्राहकों की निर्देशित रखरखाव कर रहे हैं। और अगर पर्यटक एक चार सितारा होटल मिलेगा, यह अभी भी सेवा की गुणवत्ता में यह उच्चतम स्तर पर किया जाएगा। बेलेक लक्जरी होटल, परिसरों हैं जहां सब कुछ नहीं है। प्रतिष्ठानों विशाल क्षेत्रों, और समुद्र तट के लिए निजी उपयोग, निजी गोल्फ कोर्स के मालिक थे। उनमें से कई साल भर खुली रहती हैं। घुड़सवारी और चलने के लिए रास्तों से जुड़े हुए एक इमारत के बीच। जैसा कि ऊपर उल्लेख, बेलेक क्षेत्र में सबसे आकर्षक और महंगे रिसॉर्ट है। यहाँ एक बहुत ही है सुंदर दृश्यों, और पाइन और नीलगिरी जंगलों हवा बहुत साफ है और उपयोगी बनाने, पूर्ण विश्राम को बढ़ावा देने के। शोर युवा कंपनियों यहाँ व्यावहारिक रूप से जाना नहीं हैः कीमतें अधिक हैं, और होटल की मनोरंजन के बाहर छोटा है। समुद्र तट के रूप में ज्यादा के रूप में बीस किलोमीटर से नीला समुद्र के साथ फैला है और महीन और कड़ा रेत के साथ कवर किया जाता है। लगभग पूरे तटीय क्षेत्र ब्लू फ्लैग से चिह्नित। स्थल छोटी से छोटी विस्तार करने के लिए बाहर सोचाः सनबेड, चेंजिंग रूम, छतरियां और बंगले। मुख्य समुद्र तट से आठ किलोमीटर की दूरी पर एक आधा सभ्य बजरी है। होटल "रॉबिन्सन क्लब" यह के सबसे करीब है। खाड़ी के उपयोग के साथ यह प्राचीन खूबसूरत जगह। बेलेक बीच क्षेत्र एक और खास हैः कभी कभी में समुद्र तट के लिए रात पर्यटकों प्रवेश द्वार निषिद्ध है। यहाँ आराम "सम्मानित मेहमानों" - जो सदियों से क्षेत्र में अपने अंडे देते हैं लुप्तप्राय प्रजातियों कछुए,। तो, आप पहले से ही बेलेक (तुर्की), रिसॉर्ट का वर्णन पसंद है? जलवायु एक समुद्र तट छुट्टी और उससे आगे के लिए एकदम सही है। इस शहर में आप जो महिलाओं के साथ बहुत लोकप्रिय है thalassotherapy केंद्र, यात्रा कर सकते हैं, लेकिन अभी भी अपने अलमारी भरने के लिए फायदेमंद हो सकता है। पारंपरिक ओरिएंटल बाज़ार अतातुर्क और Alidzhentikayya की सड़कों के बीच स्थित है। उच्चतम गुणवत्ता गहने की खरीद सस्ती गहने Aspendos आभूषण केंद्र और Kucukbelkis Koyu (Aspendius से अंताल्या के लिए सड़क पर) में हो सकता है। लेकिन यही सब कुछ नहीं है। और क्या बेलेक (तुर्की) में समृद्ध है? रिसोर्ट विवरण, यात्रा - कि कुछ भी नहीं है उत्साह शहर के मेहमानों के द्वारा महसूस की तुलना में। आधे से भी कम एक घंटे के सड़क पर खर्च किया जाना चाहिए प्राचीन शहरों में, रोमन टें्पल्स और amphitheatres के खंडहर का आनंद लें। वाटर पार्क "ट्रॉय" - बेलेक का एक और आकर्षण। यह एक विशेष डिजाइन की विशेषता है - के समय की शैली में ट्रोजन युद्ध, होमर द्वारा वर्णित। वहाँ पार्क में एक ट्रोजन हॉर्स, एक वॉचटॉवर जहाँ से अद्भुत waterslides उतर आते हैं। एक हेलमेट या प्राचीन काल, सबसे दिलचस्प आकर्षण का ढाल के रूप में सजावट के अलावा, वहाँ भी कुछ बहुत ही असामान्य मनोरंजन कर रहे हैं। निश्चित रूप से यात्रियों को कृत्रिम लहरें, जहां आप सर्फ़ कर, आनंद स्लाइड (शक्तिशाली धारा ऊपरी पूल में एक ढलान के माध्यम से आगंतुक बढ़ा देंगे, और फिर वापस गुना) उठाने। एक अतिरिक्त शुल्क के लिए आप dolphinarium जाएँ और इन जानवरों के प्रदर्शन का आनंद लें। और क्या करना है लोग हैं, जो बेलेक में छुट्टी करने के लिए पर्याप्त भाग्यशाली रहे हैं? उनमें से ज्यादातर का कहना है कि वे शहर को पसंद आया। यह मधुर रिसॉर्ट, सभी आधुनिक सुविधाओं की पेशकश की। समुद्र तटों को साफ और अच्छी तरह से बनाए, उत्कृष्ट बुनियादी सुविधाओं, सेवा कर रहे हैं - हमेशा सबसे ऊपर। रिच भ्रमण कार्यक्रम, की कमी भाषा बाधा (तुर्की में, कई लोगों को समझ में रूस), उचित मूल्य - और क्या एक सफल छुट्टी के लिए आवश्यक है? हालांकि, वहाँ असंतुष्ट यात्रियों, लेकिन होटल के लिए अपने दावे के लगभग सभी कर रहे हैं। हाँ, और इस तरह के पर्यटकों को अल्पसंख्यक, तो उनकी राय काफी व्यक्तिपरक हो सकता है।
रहने के सर्वोत्तम स्थानों में से एक है बेलेक । यात्रियों ने धूप, रेतीले समुद्र तटों और सुंदर समुद्र की बहुतायत का आनंद की तरह रिसोर्ट विवरण। लेकिन अगर वे वहाँ जाते हैं, आपको एहसास होगा कि इस जगह ज्यादा इस बारे में बात की तुलना में अधिक सुंदर है। तुर्की - एक देश सहारा है, जो मनोरंजन के लिए विभिन्न पर्यटन सुविधाओं की पेशकश कर सकते हैं। यह समुद्र तटों और ठाठ, और स्की अड्डों के लिए पहाड़ों, और ऐतिहासिक स्थलों, लुभावनी है। भूमध्य जलवायु बहुत आसानी से स्थानांतरित कर रहा है, और बुनियादी सुविधाओं के बहुत वांछित होने के लिए नहीं छोड़ता। लेकिन तुर्की के लोगों के आतिथ्य, त्रुटिहीन सेवा दुनिया में पौराणिक है। की लागत तुर्की में छुट्टियों काफी लोकतांत्रिक है, इसलिए इस क्षेत्र में तेजी से आय के एक औसत स्तर के साथ यात्रियों को चुन रहे हैं। कौन सा शहर चुनने के लिए? एक युवा और शोर कंपनी आदर्श बोडरम, Marmaris और Kemer के लिए। रात पार्टी के प्रशंसक एंटाल्या, Alanya, साइड में बहुत अच्छा लग रहा होगा। बच्चों के साथ परिवार के लिए यह बेलेक में जाने के लिए बेहतर है। रिसोर्ट विवरण में कुछ शब्द व्यक्त कर सकते हैंः देवदार के जंगलों, महीन रेत, मिनी क्लब, के साथ समुद्र तटों जहां विशेष दरों, सभी उम्र के बच्चों के लिए आकर्षण। तुर्की में, आप किसी भी वर्ग और स्टार स्तर के होटल पा सकते हैं, तो आप एक विला, अपार्टमेंट, निजी क्षेत्र में रह सकते हैं। सत्ता के संस्थानों - पर्याप्त से अधिक है, और वे मांग palates की सराहना करेंगे। हालात तुर्की में करना है? आलसी समुद्र तट पर झूठ बोल रही है - यह सब है कि आप इस देश में खुद के साथ क्या कर सकते हैं नहीं है। वस्तुतः हर रिसॉर्ट एक नौका या नाव, स्कूटर या एक हेलीकाप्टर किराए पर, नीचे करने के लिए स्कूबा डाइविंग के साथ नीचे जाना छायादार जंगलों में जाने के लिए कार्य करता है। पर्यटन - यह सबसे करने के लिए दिलचस्प है, जो किसी भी होटल में आदेश दिया जा सकता है। प्रत्येक सहारा इसकी ऐतिहासिक और आधुनिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इस्तांबुल में दौरे - प्रतियोगिता से बाहर। और, बेशक, खरीदारी! रंगीन बाजारों, सहायक विक्रेताओं, माल के सभी प्रकार के विशाल चयन यात्री की स्मृति में हमेशा के लिए रहेगा। Antalia तट - देश में जहां स्थित है और बेलेक के इस भाग। रिसोर्ट विवरण, एक से अधिक मुद्रित पृष्ठ ले सकता है देखने के लिए कुछ न कुछ है क्योंकि वहाँ। क्षेत्र, हमारे साथी नागरिकों के बीच बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि है कि जहां देश में सर्वश्रेष्ठ समुद्र तटों केंद्रित कर रहे हैं। छुट्टियों के मौसम मई में शुरू होता है और अक्टूबर के अंतिम दिनों में खत्म। बेलेक एंटाल्या के भूमध्य सागर के तट पर सबसे महंगा शहर है। वह क्या बेलेक? तो, बेलेक । रिसोर्ट विवरण सबसे महत्वपूर्ण साथ शुरू करना चाहिएः यह एक शांत जगह, एक आराम परिवार की छुट्टी के लिए एकदम सही है। यह एक आधुनिक रिसॉर्ट, जो सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है है। हाँ, वहाँ कोई ऐतिहासिक स्थलों और प्राचीन काल के स्मारकों है, लेकिन यह यहाँ यात्रा का परित्याग करने का कोई कारण नहीं है। सब के बाद, हर पर्यटक यहां खुद के लिए कुछ दिलचस्प खोजने के लिए और क्या से है का चयन करेंगे! पहले विश्व प्रसिद्ध गोल्फ कोर्स और सक्रिय मनोरंजन की बहुतायत है। दूसरे, यह, छायादार पेड़ों है जहां चीड़ और यूकेलिप्टस के पेड़। वे उन्नीसवीं सदी में सुल्तान के आदेश पर डाल दिया गया है, ताकि कटाव रेगिस्तान जगह के खिलाफ की रक्षा के लिए। तीसरा, एक बहुत ही हल्के जलवायु और लंबे समय से दिन के उजाले घंटे है। सहारा के आसपास के क्षेत्र की ओर, Aspendos, Perge, एक यात्रा पर जाने के लिए है जो की प्राचीन शहर है। और हाथ में एंटाल्या करने के लिए। और एक यात्रा के लायक Koprulu घाटी पार्क है, जो प्रकृति आरक्षित, बहुत दुर्लभ पक्षियों के लिए घर का प्रतिनिधित्व करता है। तो, आप बेलेक की यात्रा करना चाहता था है? सहारा का विवरण है, जो की तस्वीरें हमारे लेख में पाया जा सकता है होटल व्यवसाय के विचार के बिना पूरा नहीं होगा। वह बहुत अच्छी तरह से विकसित की है। लगभग सभी स्कूलों पांच सितारों के धारकों और वीआईपी-ग्राहकों की निर्देशित रखरखाव कर रहे हैं। और अगर पर्यटक एक चार सितारा होटल मिलेगा, यह अभी भी सेवा की गुणवत्ता में यह उच्चतम स्तर पर किया जाएगा। बेलेक लक्जरी होटल, परिसरों हैं जहां सब कुछ नहीं है। प्रतिष्ठानों विशाल क्षेत्रों, और समुद्र तट के लिए निजी उपयोग, निजी गोल्फ कोर्स के मालिक थे। उनमें से कई साल भर खुली रहती हैं। घुड़सवारी और चलने के लिए रास्तों से जुड़े हुए एक इमारत के बीच। जैसा कि ऊपर उल्लेख, बेलेक क्षेत्र में सबसे आकर्षक और महंगे रिसॉर्ट है। यहाँ एक बहुत ही है सुंदर दृश्यों, और पाइन और नीलगिरी जंगलों हवा बहुत साफ है और उपयोगी बनाने, पूर्ण विश्राम को बढ़ावा देने के। शोर युवा कंपनियों यहाँ व्यावहारिक रूप से जाना नहीं हैः कीमतें अधिक हैं, और होटल की मनोरंजन के बाहर छोटा है। समुद्र तट के रूप में ज्यादा के रूप में बीस किलोमीटर से नीला समुद्र के साथ फैला है और महीन और कड़ा रेत के साथ कवर किया जाता है। लगभग पूरे तटीय क्षेत्र ब्लू फ्लैग से चिह्नित। स्थल छोटी से छोटी विस्तार करने के लिए बाहर सोचाः सनबेड, चेंजिंग रूम, छतरियां और बंगले। मुख्य समुद्र तट से आठ किलोमीटर की दूरी पर एक आधा सभ्य बजरी है। होटल "रॉबिन्सन क्लब" यह के सबसे करीब है। खाड़ी के उपयोग के साथ यह प्राचीन खूबसूरत जगह। बेलेक बीच क्षेत्र एक और खास हैः कभी कभी में समुद्र तट के लिए रात पर्यटकों प्रवेश द्वार निषिद्ध है। यहाँ आराम "सम्मानित मेहमानों" - जो सदियों से क्षेत्र में अपने अंडे देते हैं लुप्तप्राय प्रजातियों कछुए,। तो, आप पहले से ही बेलेक , रिसॉर्ट का वर्णन पसंद है? जलवायु एक समुद्र तट छुट्टी और उससे आगे के लिए एकदम सही है। इस शहर में आप जो महिलाओं के साथ बहुत लोकप्रिय है thalassotherapy केंद्र, यात्रा कर सकते हैं, लेकिन अभी भी अपने अलमारी भरने के लिए फायदेमंद हो सकता है। पारंपरिक ओरिएंटल बाज़ार अतातुर्क और Alidzhentikayya की सड़कों के बीच स्थित है। उच्चतम गुणवत्ता गहने की खरीद सस्ती गहने Aspendos आभूषण केंद्र और Kucukbelkis Koyu में हो सकता है। लेकिन यही सब कुछ नहीं है। और क्या बेलेक में समृद्ध है? रिसोर्ट विवरण, यात्रा - कि कुछ भी नहीं है उत्साह शहर के मेहमानों के द्वारा महसूस की तुलना में। आधे से भी कम एक घंटे के सड़क पर खर्च किया जाना चाहिए प्राचीन शहरों में, रोमन टें्पल्स और amphitheatres के खंडहर का आनंद लें। वाटर पार्क "ट्रॉय" - बेलेक का एक और आकर्षण। यह एक विशेष डिजाइन की विशेषता है - के समय की शैली में ट्रोजन युद्ध, होमर द्वारा वर्णित। वहाँ पार्क में एक ट्रोजन हॉर्स, एक वॉचटॉवर जहाँ से अद्भुत waterslides उतर आते हैं। एक हेलमेट या प्राचीन काल, सबसे दिलचस्प आकर्षण का ढाल के रूप में सजावट के अलावा, वहाँ भी कुछ बहुत ही असामान्य मनोरंजन कर रहे हैं। निश्चित रूप से यात्रियों को कृत्रिम लहरें, जहां आप सर्फ़ कर, आनंद स्लाइड उठाने। एक अतिरिक्त शुल्क के लिए आप dolphinarium जाएँ और इन जानवरों के प्रदर्शन का आनंद लें। और क्या करना है लोग हैं, जो बेलेक में छुट्टी करने के लिए पर्याप्त भाग्यशाली रहे हैं? उनमें से ज्यादातर का कहना है कि वे शहर को पसंद आया। यह मधुर रिसॉर्ट, सभी आधुनिक सुविधाओं की पेशकश की। समुद्र तटों को साफ और अच्छी तरह से बनाए, उत्कृष्ट बुनियादी सुविधाओं, सेवा कर रहे हैं - हमेशा सबसे ऊपर। रिच भ्रमण कार्यक्रम, की कमी भाषा बाधा , उचित मूल्य - और क्या एक सफल छुट्टी के लिए आवश्यक है? हालांकि, वहाँ असंतुष्ट यात्रियों, लेकिन होटल के लिए अपने दावे के लगभग सभी कर रहे हैं। हाँ, और इस तरह के पर्यटकों को अल्पसंख्यक, तो उनकी राय काफी व्यक्तिपरक हो सकता है।
- लाखन सिंह मोहनिया (पी. एच. डी. स्कॉलर सस्य विज्ञान) - डॉ. जन्मेजय शर्मा (वैज्ञानिक सस्य विज्ञान) - डॉ. अमिता शर्मा (वैज्ञानिक कृषि वानिकी) 5 अप्रैल 2023, ग्रीष्म कालीन ग्वार की उन्नत खेती - ग्वार एक फलीदार (लेग्युमिनस) फसल है जिसके उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान अग्रणी राज्य है। फलीदार दलहनी फसल होने से मोठ नत्रजन के स्थिरीकरण द्वारा मृदा की उर्वराशक्ति को बढ़ाता है। ग्वार का शाब्दिक अर्थ गौ आहार है, अर्थात् प्राचीन काल में इसकी उपयोगिता केवल पशुओं के लिए पोष्टिक चारे एवं दाने के लिए थी। परन्तु बदलती परिस्थितियों के साथ इसका उपयोग हरी/सूखी सब्जी एवं हरी खाद के रूप में किया जाने लगा तथा इसके अतिरिक्त ग्वार से निकलने वाले गोंद का उपयोग उद्योगों में लिया जाता है। जमीन मे ग्वार की जड़ें गहरी जाने के कारण यह सूखा सहिष्णु पौधा कहलाता है, तथा कम सिंचाई में होने के कारण बारानी क्षेत्रों मे इससे अन्य फसलों की अपेक्षा ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। ग्वार एक उष्ण कटिबंधीय पौधा है। इसको गर्म मौसम की आवश्यकता होती है। बुवाई के समय 30 से 35 डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम अच्छे अंकुरण के लिये और 32 से 38 डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम पर वानस्पतिक वृद्धि अच्छी होती है। किन्तु फूल वाली अवस्था में अधिक तापक्रम के कारण फूल गिर जाते है। यह 45 से 46 डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम को सहन कर सकती है। इसकी खेती मध्यम से हल्की भूमि जिसका पीएच मान 7. 0 से 8. 5 तक हो सर्वोत्तम रहती है। खेत में पानी का ठहराव फसल को अधिक हानि पहुंचाता है। भारी दोमट भूमियां इसकी खेती के लिए अनुपयुक्त है। अधिक नमी वाले क्षेत्रों में ग्वार की वृद्धि रूक जाती है। रबी फसल काटने के पश्चात एक गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से या डिस्क हैरो से करें और उसके बाद में 1 से 2 बार देशी हल या कल्टीवेटर से कॉस जुताई कर खेत को खरपतवार रहित करने के उपरान्त पाटा चलाकर खेत को समतल करें। दाने व गोंद हेतु- एच जी- 365, एच जी- 563, आर जी सी- 1066 और आर जी सी- 1003 आदि। सब्जी हेतु- दुर्गा बहार, पूसा नवबहार और पूसा सदाबहार आदि। चारा हेतु- एच एफ जी- 119, एच एफ जी- 156 आदि। ग्वार की बुवाई का उपयुक्त समय 15 फरवरी से 15 मार्च तक की जानी चाहिए। बीज उत्पादन हेतु- 12 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर। सब्जी उत्पादन हेतु- 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर। चारा तथा हरी खाद उत्पादन हेतु- 40 से 45 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उचित रहता है। मिट्टी जनित रोगों से बचाव के लिए बीजों को 2 ग्राम थीरम व 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम या 3 ग्राम थीरम प्रति किलोग्राम की दर से शोधित करें। फफूंदनाशी दवा से उपचार के बाद बीज को राइजोबियम कल्चर की 600 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर के हिसाब से उपचारित करके बोयें। इसके लिये 250 ग्राम गुड़ को 1 लीटर पानी में घोलकर उस घोल में राइजोबियम कल्चर मिलाते हैं तथा इस घोल से बीजो को उपचारित करते हैं। पंक्ति से पंक्ति- 45 से 50 सेंटीमीटर (सामान्य), 30 सेंटीमीटर (एकल तना किस्म हेतु), पौध से पौध 10 से 15 सेंटीमीटर होना उचित है। दाने हेतु- नाइट्रोन 20 से 25 किलोग्राम, फास्फोरस 40 से 45 किलोग्राम, पोटाश 20 से 25 किलोग्राम, गंधक 20 से 25 किलोग्राम, जिंक 20 किलोग्राम दें। सब्जी हेतु- नाइट्रोन 25 से 30 किलोग्राम, फास्फोरस 45 से 50 किलोग्राम, पोटाश 20 से 25 किलोग्राम, गंधक 20 से 25 किलोग्राम, जिंक 20 किलोग्राम दें। चारा हेतु- नाइट्रोन 25 से 30 किलोग्राम, फास्फोरस 45 से 50 किलोग्राम, पोटाश 20 से 25 किलोग्राम दें। नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश उर्वरकों की पूरी मात्रा बुबाई के समय 5 से 10 सेंटीमीटर गहरी कुडों में आधार खाद के रूप में दें। फसल में फूल आने तथा फलियां बनने की अवस्था में सिंचाई करने से उत्पादन में वृद्धि की जा सकती हैं। ग्वार फसल, खेत में भरे पानी को सहन नहीं कर पाती है। ग्वार में प्रथम निराई-गुड़ाई 20 से 25 दिन पर व द्वितीय निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग 40 से 45 दिन बाद करें। यदि रसायनिक दवाओं का उपयोग करना हो तो ग्वार फसल में अंकुरण पूर्व पेण्डीमिथालीन 0. 75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्व और अंकुरण के पश्चात 20 से 25 दिन में इमेजाथायपर 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्व का 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करने पर सफलतापूर्वक खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता हैं। व्हील हो व हैन्ड हो से निराई-गुड़ाई करने पर लागत खर्च में कमी की जा सकती हैं। छिडक़ाव के लिए फ्लैट फेन नोजल पम्प का उपयोग करें। दाने हेतु- जब ग्वार के पौधों की पत्तियां सूख कर गिरने लगे और 50 प्रतिशत फलियां एकदम सूखकर भूरी हो जाये तब कटाई करें। कटाई के बाद फसल को धूप में सुखाकर श्रमिकों या थ्रेशर मशीन द्वारा उसकी थ्रेशिंग (मड़ाई) करें। दानों को अच्छी तरह धूप में सुखा कर उचित भण्डारण करें। सब्जी हेतु- सब्जी के लिए उगाई गई फसल से समय-समय पर लम्बी, मुलायम और अधपकी फलियाँ तोड़ते रहें। चारा हेतु- चारे के लिए उगायी गई फसल को फूल आने की अवस्था पर काट लें। इस अवस्था से देरी होने पर फसल के तनों में लिग्निन का उत्पादन होने लगता है, जिससे हरे चारे की पाचकता एवं पौष्टिकता घट जाती है। उपरोक्त उन्नत विधि से ग्वार की खेती करने पर 10 से 17 क्विंटल पैदावार प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है। चारे के लिए फसल के फूल आने पर या फलियाँ बनने की प्रारम्भिक अवस्था में (बुवाई के 50 से 85 दिन बाद) काटें। ग्वार की फसल से 250 से 300 क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। - हरी फलियों का सब्जी के रूप में उपयोग। - पशुओं के लिए हरा पौष्टिक चारा उपलब्ध। - हरी खाद के रूप में 40 से 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन प्राप्त होना। - भूमि में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण 25 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करती हैं। - भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। - गोंद प्राप्त होता है। - ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई तीन वर्ष में एक बार अवश्य करें। - बुवाई पूर्व बीजोपचार अवश्य करें। - पोषक तत्वों की मात्रा मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही दें। - पौध संरक्षण के लिये एकीकृत पौध संरक्षण के उपायों को अपनायें। - खरपतवार नियंत्रण अवश्य करें। राजस्थान- आरजीसी- 1033, 1066, 1055, 1038, 1003, 1002, 986, आर जी एम-112 और आर जी सी- 197 प्रमुख है। हरियाणा- एचजी- 75, 182, 258, 365, 563, 870, 884, 867, एच जी- 2-204 प्रमुख है। पंजाब- एजी- 112 और जल्दी पकने वाली हरियाणा राज्य की किस्में भी शामिल है। उत्तर प्रदेश- एचजी- 563 और एचजी- 365 प्रमुख है। मध्यप्रदेश- एचजी- 563 और एचजी- 365 प्रमुख है। गुजरात- जीसी- 1 और जीसी- 23 प्रमुख है। महाराष्ट्र- एचजी- 563, एचजी- 365 और आरजीसी- 9366 प्रमुख है। आंध्र प्रदेश- आरजीएम- 112, आरजीसी- 936, एचजी- 563, 365 प्रमुख किस्में है। रस चूसक कीट- जैसिड, एफिड, सफेद मक्खी इत्यादि फसल का रस चूसकर पौधों को कमजोर करते हैं तथा बीमारियों का संचार भी करते हैं। इनके नियंत्रण के लिये डायमिथोएट 30 ई सी, 1. 7 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोरोप्रिड, 0. 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें और दूसरा छिडक़ाव 10 से 12 दिन बाद करें। दीमक- यह भूमिगत कीट है, जो पौधे की जड़ों को काटकर नुकसान पहुँचाता है। जिससे प्रति हेक्टेयर पौध संख्या में कमी आ जाती है। - अच्छी प्रकार पकी हुई गोबर की खाद का ही उपयोग करें। - बीज को बुवाई पूर्व क्लोरोपायरीफॉस कीटनाशी से 2 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें। - अंतिम जुताई के समय क्लोरोपायरीफॉस चूर्ण 1. 5 प्रतिशत, 20 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में मिलायें। बैक्टीरियल ब्लाइट- खरीफ के मौसम में बैक्टीरियल ब्लाइट सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है। - रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का प्रयोग करें। - बैक्टीरियल ब्लाइट के प्रभावी नियंत्रण के लिए 56 डिग्री सेंटीग्रेट पर गरम पानी में 10 मिनट तक बीजोपचार करें या बीज को स्ट्रेप्टोसाइक्लिीन के 200 पीपीएम, 0. 2 ग्राम प्रति लीटर घोल में 3 घंटे भिगाकर रखें। - खड़ी फसल में कॉपर आक्सीक्लोराइड का 2. 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। - एन्ट्रेकनोज और एल्टरनेरिया लीफ स्पॉट- इन बीमारियों के नियंत्रण हेतु मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें, दोबारा यदि आवश्यकता हो तो 15 दिन के अंतराल पर पुनः छिडक़ाव करें।
- लाखन सिंह मोहनिया - डॉ. जन्मेजय शर्मा - डॉ. अमिता शर्मा पाँच अप्रैल दो हज़ार तेईस, ग्रीष्म कालीन ग्वार की उन्नत खेती - ग्वार एक फलीदार फसल है जिसके उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान अग्रणी राज्य है। फलीदार दलहनी फसल होने से मोठ नत्रजन के स्थिरीकरण द्वारा मृदा की उर्वराशक्ति को बढ़ाता है। ग्वार का शाब्दिक अर्थ गौ आहार है, अर्थात् प्राचीन काल में इसकी उपयोगिता केवल पशुओं के लिए पोष्टिक चारे एवं दाने के लिए थी। परन्तु बदलती परिस्थितियों के साथ इसका उपयोग हरी/सूखी सब्जी एवं हरी खाद के रूप में किया जाने लगा तथा इसके अतिरिक्त ग्वार से निकलने वाले गोंद का उपयोग उद्योगों में लिया जाता है। जमीन मे ग्वार की जड़ें गहरी जाने के कारण यह सूखा सहिष्णु पौधा कहलाता है, तथा कम सिंचाई में होने के कारण बारानी क्षेत्रों मे इससे अन्य फसलों की अपेक्षा ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। ग्वार एक उष्ण कटिबंधीय पौधा है। इसको गर्म मौसम की आवश्यकता होती है। बुवाई के समय तीस से पैंतीस डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम अच्छे अंकुरण के लिये और बत्तीस से अड़तीस डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम पर वानस्पतिक वृद्धि अच्छी होती है। किन्तु फूल वाली अवस्था में अधिक तापक्रम के कारण फूल गिर जाते है। यह पैंतालीस से छियालीस डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम को सहन कर सकती है। इसकी खेती मध्यम से हल्की भूमि जिसका पीएच मान सात. शून्य से आठ. पाँच तक हो सर्वोत्तम रहती है। खेत में पानी का ठहराव फसल को अधिक हानि पहुंचाता है। भारी दोमट भूमियां इसकी खेती के लिए अनुपयुक्त है। अधिक नमी वाले क्षेत्रों में ग्वार की वृद्धि रूक जाती है। रबी फसल काटने के पश्चात एक गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से या डिस्क हैरो से करें और उसके बाद में एक से दो बार देशी हल या कल्टीवेटर से कॉस जुताई कर खेत को खरपतवार रहित करने के उपरान्त पाटा चलाकर खेत को समतल करें। दाने व गोंद हेतु- एच जी- तीन सौ पैंसठ, एच जी- पाँच सौ तिरेसठ, आर जी सी- एक हज़ार छयासठ और आर जी सी- एक हज़ार तीन आदि। सब्जी हेतु- दुर्गा बहार, पूसा नवबहार और पूसा सदाबहार आदि। चारा हेतु- एच एफ जी- एक सौ उन्नीस, एच एफ जी- एक सौ छप्पन आदि। ग्वार की बुवाई का उपयुक्त समय पंद्रह फरवरी से पंद्रह मार्च तक की जानी चाहिए। बीज उत्पादन हेतु- बारह से पंद्रह किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर। सब्जी उत्पादन हेतु- पंद्रह किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर। चारा तथा हरी खाद उत्पादन हेतु- चालीस से पैंतालीस किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर उचित रहता है। मिट्टी जनित रोगों से बचाव के लिए बीजों को दो ग्राम थीरम व एक ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम या तीन ग्राम थीरम प्रति किलोग्राम की दर से शोधित करें। फफूंदनाशी दवा से उपचार के बाद बीज को राइजोबियम कल्चर की छः सौ ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर के हिसाब से उपचारित करके बोयें। इसके लिये दो सौ पचास ग्राम गुड़ को एक लीटरटर पानी में घोलकर उस घोल में राइजोबियम कल्चर मिलाते हैं तथा इस घोल से बीजो को उपचारित करते हैं। पंक्ति से पंक्ति- पैंतालीस से पचास सेंटीमीटर , तीस सेंटीमीटर , पौध से पौध दस से पंद्रह सेंटीमीटर होना उचित है। दाने हेतु- नाइट्रोन बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम, फास्फोरस चालीस से पैंतालीस किलोग्रामग्राम, पोटाश बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम, गंधक बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम, जिंक बीस किलोग्रामग्राम दें। सब्जी हेतु- नाइट्रोन पच्चीस से तीस किलोग्रामग्राम, फास्फोरस पैंतालीस से पचास किलोग्रामग्राम, पोटाश बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम, गंधक बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम, जिंक बीस किलोग्रामग्राम दें। चारा हेतु- नाइट्रोन पच्चीस से तीस किलोग्रामग्राम, फास्फोरस पैंतालीस से पचास किलोग्रामग्राम, पोटाश बीस से पच्चीस किलोग्रामग्राम दें। नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश उर्वरकों की पूरी मात्रा बुबाई के समय पाँच से दस सेंटीमीटर गहरी कुडों में आधार खाद के रूप में दें। फसल में फूल आने तथा फलियां बनने की अवस्था में सिंचाई करने से उत्पादन में वृद्धि की जा सकती हैं। ग्वार फसल, खेत में भरे पानी को सहन नहीं कर पाती है। ग्वार में प्रथम निराई-गुड़ाई बीस से पच्चीस दिन पर व द्वितीय निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग चालीस से पैंतालीस दिन बाद करें। यदि रसायनिक दवाओं का उपयोग करना हो तो ग्वार फसल में अंकुरण पूर्व पेण्डीमिथालीन शून्य. पचहत्तर किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्व और अंकुरण के पश्चात बीस से पच्चीस दिन में इमेजाथायपर चालीस ग्राम प्रति हेक्टेयर सक्रिय तत्व का छः सौ लीटरटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करने पर सफलतापूर्वक खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता हैं। व्हील हो व हैन्ड हो से निराई-गुड़ाई करने पर लागत खर्च में कमी की जा सकती हैं। छिडक़ाव के लिए फ्लैट फेन नोजल पम्प का उपयोग करें। दाने हेतु- जब ग्वार के पौधों की पत्तियां सूख कर गिरने लगे और पचास प्रतिशत फलियां एकदम सूखकर भूरी हो जाये तब कटाई करें। कटाई के बाद फसल को धूप में सुखाकर श्रमिकों या थ्रेशर मशीन द्वारा उसकी थ्रेशिंग करें। दानों को अच्छी तरह धूप में सुखा कर उचित भण्डारण करें। सब्जी हेतु- सब्जी के लिए उगाई गई फसल से समय-समय पर लम्बी, मुलायम और अधपकी फलियाँ तोड़ते रहें। चारा हेतु- चारे के लिए उगायी गई फसल को फूल आने की अवस्था पर काट लें। इस अवस्था से देरी होने पर फसल के तनों में लिग्निन का उत्पादन होने लगता है, जिससे हरे चारे की पाचकता एवं पौष्टिकता घट जाती है। उपरोक्त उन्नत विधि से ग्वार की खेती करने पर दस से सत्रह क्विंटल पैदावार प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है। चारे के लिए फसल के फूल आने पर या फलियाँ बनने की प्रारम्भिक अवस्था में काटें। ग्वार की फसल से दो सौ पचास से तीन सौ क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। - हरी फलियों का सब्जी के रूप में उपयोग। - पशुओं के लिए हरा पौष्टिक चारा उपलब्ध। - हरी खाद के रूप में चालीस से पचास किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन प्राप्त होना। - भूमि में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण पच्चीस से तीस किलोग्रामग्राम प्रति हेक्टेयर करती हैं। - भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। - गोंद प्राप्त होता है। - ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई तीन वर्ष में एक बार अवश्य करें। - बुवाई पूर्व बीजोपचार अवश्य करें। - पोषक तत्वों की मात्रा मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही दें। - पौध संरक्षण के लिये एकीकृत पौध संरक्षण के उपायों को अपनायें। - खरपतवार नियंत्रण अवश्य करें। राजस्थान- आरजीसी- एक हज़ार तैंतीस, एक हज़ार छयासठ, एक हज़ार पचपन, एक हज़ार अड़तीस, एक हज़ार तीन, एक हज़ार दो, नौ सौ छियासी, आर जी एम-एक सौ बारह और आर जी सी- एक सौ सत्तानवे प्रमुख है। हरियाणा- एचजी- पचहत्तर, एक सौ बयासी, दो सौ अट्ठावन, तीन सौ पैंसठ, पाँच सौ तिरेसठ, आठ सौ सत्तर, आठ सौ चौरासी, आठ सौ सरसठ, एच जी- दो-दो सौ चार प्रमुख है। पंजाब- एजी- एक सौ बारह और जल्दी पकने वाली हरियाणा राज्य की किस्में भी शामिल है। उत्तर प्रदेश- एचजी- पाँच सौ तिरेसठ और एचजी- तीन सौ पैंसठ प्रमुख है। मध्यप्रदेश- एचजी- पाँच सौ तिरेसठ और एचजी- तीन सौ पैंसठ प्रमुख है। गुजरात- जीसी- एक और जीसी- तेईस प्रमुख है। महाराष्ट्र- एचजी- पाँच सौ तिरेसठ, एचजी- तीन सौ पैंसठ और आरजीसी- नौ हज़ार तीन सौ छयासठ प्रमुख है। आंध्र प्रदेश- आरजीएम- एक सौ बारह, आरजीसी- नौ सौ छत्तीस, एचजी- पाँच सौ तिरेसठ, तीन सौ पैंसठ प्रमुख किस्में है। रस चूसक कीट- जैसिड, एफिड, सफेद मक्खी इत्यादि फसल का रस चूसकर पौधों को कमजोर करते हैं तथा बीमारियों का संचार भी करते हैं। इनके नियंत्रण के लिये डायमिथोएट तीस ई सी, एक. सात मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या इमिडाक्लोरोप्रिड, शून्य. दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें और दूसरा छिडक़ाव दस से बारह दिन बाद करें। दीमक- यह भूमिगत कीट है, जो पौधे की जड़ों को काटकर नुकसान पहुँचाता है। जिससे प्रति हेक्टेयर पौध संख्या में कमी आ जाती है। - अच्छी प्रकार पकी हुई गोबर की खाद का ही उपयोग करें। - बीज को बुवाई पूर्व क्लोरोपायरीफॉस कीटनाशी से दो मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें। - अंतिम जुताई के समय क्लोरोपायरीफॉस चूर्ण एक. पाँच प्रतिशत, बीस किलोग्रामग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में मिलायें। बैक्टीरियल ब्लाइट- खरीफ के मौसम में बैक्टीरियल ब्लाइट सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है। - रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का प्रयोग करें। - बैक्टीरियल ब्लाइट के प्रभावी नियंत्रण के लिए छप्पन डिग्री सेंटीग्रेट पर गरम पानी में दस मिनट तक बीजोपचार करें या बीज को स्ट्रेप्टोसाइक्लिीन के दो सौ पीपीएम, शून्य. दो ग्राम प्रति लीटर घोल में तीन घंटाटे भिगाकर रखें। - खड़ी फसल में कॉपर आक्सीक्लोराइड का दो. पाँच ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। - एन्ट्रेकनोज और एल्टरनेरिया लीफ स्पॉट- इन बीमारियों के नियंत्रण हेतु मेन्कोजेब दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें, दोबारा यदि आवश्यकता हो तो पंद्रह दिन के अंतराल पर पुनः छिडक़ाव करें।
हाल ही में एथनोलॉग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार हिंदी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन गयी है। वर्तमान में 637 मिलियन लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर चीनी मंदारिन भाषा है, इसे 1120 मिलियन लोग बोलते हैं। अंग्रेजी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, 1268 मिलियन लोग अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी भारत के प्रमुख भाषा है, देश की लगभग 40% जनसँख्या इस भाषा का उपयोग करती है। यह भारतीय-यूरोपीय भाषा परिवार की हिन्द-आर्य शाखा से सम्बंधित है। 2011 की जनसँख्या के अनुसार 43.63% भारतीय हिंदी भाषा का उपयोग मातृभाषा के रूप में करते हैं। भारत में हिंदी भाषा को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर बोला जाता है। इसके अलावा विश्व के कई अन्य देशों जैसे पाकिस्तान, मॉरिशस, त्रिनिदाद और सूरीनाम में भी हिंदी भाषा बोली जाती है। अंग्रेजी और फीजियन के साथ हिंदी फिजी की राष्ट्रीय भाषा भी है। फिजी में फिजी बात अथवा फिजी हिंदी बोली जाती है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने हिंदी अनुच्छेद 343 के तहत भारत की आधिकारिक भाषा चुना था, हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। संविधान में कुल 22 अनुसूचित भाषाएँ हैं। भारत में आधिकारिक रूप से हिंदी व अंग्रेजी को राजकीय कार्य के लिए उपयोग किया जाता है।
हाल ही में एथनोलॉग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार हिंदी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन गयी है। वर्तमान में छः सौ सैंतीस मिलियन लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर चीनी मंदारिन भाषा है, इसे एक हज़ार एक सौ बीस मिलियन लोग बोलते हैं। अंग्रेजी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, एक हज़ार दो सौ अड़सठ मिलियन लोग अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी भारत के प्रमुख भाषा है, देश की लगभग चालीस% जनसँख्या इस भाषा का उपयोग करती है। यह भारतीय-यूरोपीय भाषा परिवार की हिन्द-आर्य शाखा से सम्बंधित है। दो हज़ार ग्यारह की जनसँख्या के अनुसार तैंतालीस.तिरेसठ% भारतीय हिंदी भाषा का उपयोग मातृभाषा के रूप में करते हैं। भारत में हिंदी भाषा को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर बोला जाता है। इसके अलावा विश्व के कई अन्य देशों जैसे पाकिस्तान, मॉरिशस, त्रिनिदाद और सूरीनाम में भी हिंदी भाषा बोली जाती है। अंग्रेजी और फीजियन के साथ हिंदी फिजी की राष्ट्रीय भाषा भी है। फिजी में फिजी बात अथवा फिजी हिंदी बोली जाती है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष चौदह सितम्बर को मनाया जाता है। चौदह सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ उनचास को संविधान सभा ने हिंदी अनुच्छेद तीन सौ तैंतालीस के तहत भारत की आधिकारिक भाषा चुना था, हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। संविधान में कुल बाईस अनुसूचित भाषाएँ हैं। भारत में आधिकारिक रूप से हिंदी व अंग्रेजी को राजकीय कार्य के लिए उपयोग किया जाता है।
करने एवं बढ़ाने वाले हैं तथा जीवन-संग्राम करने में सदा तत्पर हैं। समाज या राष्ट्र को अपने मार्गों की अच्छी प्रकार रक्षा करनी चाहिए इससे यह स्पष्ट है । देवी यातायात यातायात कार्य एवं उनके साधनों के अभाव में सृष्टि का कार्य भी नहीं चल सकता अतः परमात्मा की इस अद्भुत सृष्टि से अद्भुत ढंग से यातायात कार्य चल रहा है । वायु, अग्नि (सूर्य) और जल ये त्रिदेव ही इस कार्य को कर रहे हैं । वायु एक स्थान के गन्ध, जल, रेत, मट्टी आदि को इधर से उधर ले जाता है। अग्निदेव भी को गतिशील करके अपने में पड़ी हुई आहुति को सर्वत्र प्रसारित कर देते हैं । जल भी अपने ऊपर एवं अपने साथ बहुत सा सामान एक स्थान से दूसरी ओर ले जाता है। परन्तु जब हम इन तीनों की शक्तियों का उपयोग यान, रथ, विमान, नावादि में यन्त्र द्वारा करते हैं तो हमें त्रिदेव की सम्मिलित शक्ति से अत्यन्त गति एवं शक्ति प्राप्त हो जाती है । सूर्य किरण रूपी अग्नि और वायु यदि पृथिवीस्थ जलों को समुद्र से ऊपर न ले जावें तो वर्षा ही न हो। सूर्य रश्मियाँ यदि सूर्य मण्डल से पृथिवी पर न आवें यहां अन्धकार का ही साम्राज्य बना रहेगा । चन्द्रमादि एक ही स्थिति में रह जावे तो तिथियों का क्षय एवं वृद्धि, शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष नहीं बन सकते । सृष्टि में कालचक्र भी अद्भुत प्रकार से सृष्टि के सब तत्त्वों को आगे ले जा रहा है और अनन्त काल के गर्भ में लुप्त कर देता है जिससे सृष्टि में उत्पत्ति होती है और विनाश भी चलता रहता है। श्राध्यात्मिक यातायात सृष्टि के इस अद्भुत रहस्य को देखकर जीवात्मा भी कह उठता है कि इस शरीर में रहते हुए सूर्य चन्द्र के प्रकाश होते हुए भी महान् प्रज्ञान का अन्धकार व्याप्त है । मैं चाहता हूं कि इस अन्धकार के पार जाऊं और जो एक दिव्य ज्योति है उसको पार करूं जैसा कि निम्न मन्त्र में वर्णन हैउद्वयं तमसस्परि स्वः पश्यन्त उत्तरम् । देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम् ।। ( यजुः २७।१० ) इसी प्रकार जीवन रूपी नदी को पार करने के लिए कहामन्ती रीयते स¨रगध्वमुत्तिष्ठत प्रतरता सखायः । ( यजुः ३५ १० ) अनेक विघ्न बाधाओं से पूर्ण जीवन रूपी नदी बह रही है। चेतो, उठो और पार करो । यह सब दिव्य यातायात एवं प्राध्यात्मिक यातायात से सम्बन्धित है । आध्यात्मिक यातायात के दो मार्ग हैं । देवयान एवं पितृयान । इन मार्गों से जीव सूक्ष्म शरीर सहित इस ब्रह्माण्ड में अपने-अपने नियत मार्ग में भ्रमण करके पुनः जन्म लेता है जैसा कि निम्न मन्त्र में वर्णित है - द्वेवं पितृगामहं देवानामुत मर्त्यानाम् । ( यजुः १६।४७ ) मैं पितृजनों के दो मार्ग सुनता हूं। एक ज्ञानी पितरों का, दूसरा साधारण कर्मशील पितरों का । इन्हीं दोनों मार्गों को उत्तरायण एवं दक्षिणायन, अचिमार्ग एवं धूम्रमार्ग भी कहते हैं । इसी प्रकार निम्न मन्त्र में इन मार्गों के द्वार का भी उल्लेख हैऋतस्य द्वारो मा मा सन्ताप्तम् । अध्वमामाध्वपते प्रमातिर स्वस्ति मेस्मिन्पथि देवयाने भूयात् ॥
करने एवं बढ़ाने वाले हैं तथा जीवन-संग्राम करने में सदा तत्पर हैं। समाज या राष्ट्र को अपने मार्गों की अच्छी प्रकार रक्षा करनी चाहिए इससे यह स्पष्ट है । देवी यातायात यातायात कार्य एवं उनके साधनों के अभाव में सृष्टि का कार्य भी नहीं चल सकता अतः परमात्मा की इस अद्भुत सृष्टि से अद्भुत ढंग से यातायात कार्य चल रहा है । वायु, अग्नि और जल ये त्रिदेव ही इस कार्य को कर रहे हैं । वायु एक स्थान के गन्ध, जल, रेत, मट्टी आदि को इधर से उधर ले जाता है। अग्निदेव भी को गतिशील करके अपने में पड़ी हुई आहुति को सर्वत्र प्रसारित कर देते हैं । जल भी अपने ऊपर एवं अपने साथ बहुत सा सामान एक स्थान से दूसरी ओर ले जाता है। परन्तु जब हम इन तीनों की शक्तियों का उपयोग यान, रथ, विमान, नावादि में यन्त्र द्वारा करते हैं तो हमें त्रिदेव की सम्मिलित शक्ति से अत्यन्त गति एवं शक्ति प्राप्त हो जाती है । सूर्य किरण रूपी अग्नि और वायु यदि पृथिवीस्थ जलों को समुद्र से ऊपर न ले जावें तो वर्षा ही न हो। सूर्य रश्मियाँ यदि सूर्य मण्डल से पृथिवी पर न आवें यहां अन्धकार का ही साम्राज्य बना रहेगा । चन्द्रमादि एक ही स्थिति में रह जावे तो तिथियों का क्षय एवं वृद्धि, शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष नहीं बन सकते । सृष्टि में कालचक्र भी अद्भुत प्रकार से सृष्टि के सब तत्त्वों को आगे ले जा रहा है और अनन्त काल के गर्भ में लुप्त कर देता है जिससे सृष्टि में उत्पत्ति होती है और विनाश भी चलता रहता है। श्राध्यात्मिक यातायात सृष्टि के इस अद्भुत रहस्य को देखकर जीवात्मा भी कह उठता है कि इस शरीर में रहते हुए सूर्य चन्द्र के प्रकाश होते हुए भी महान् प्रज्ञान का अन्धकार व्याप्त है । मैं चाहता हूं कि इस अन्धकार के पार जाऊं और जो एक दिव्य ज्योति है उसको पार करूं जैसा कि निम्न मन्त्र में वर्णन हैउद्वयं तमसस्परि स्वः पश्यन्त उत्तरम् । देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम् ।। इसी प्रकार जीवन रूपी नदी को पार करने के लिए कहामन्ती रीयते स¨रगध्वमुत्तिष्ठत प्रतरता सखायः । अनेक विघ्न बाधाओं से पूर्ण जीवन रूपी नदी बह रही है। चेतो, उठो और पार करो । यह सब दिव्य यातायात एवं प्राध्यात्मिक यातायात से सम्बन्धित है । आध्यात्मिक यातायात के दो मार्ग हैं । देवयान एवं पितृयान । इन मार्गों से जीव सूक्ष्म शरीर सहित इस ब्रह्माण्ड में अपने-अपने नियत मार्ग में भ्रमण करके पुनः जन्म लेता है जैसा कि निम्न मन्त्र में वर्णित है - द्वेवं पितृगामहं देवानामुत मर्त्यानाम् । मैं पितृजनों के दो मार्ग सुनता हूं। एक ज्ञानी पितरों का, दूसरा साधारण कर्मशील पितरों का । इन्हीं दोनों मार्गों को उत्तरायण एवं दक्षिणायन, अचिमार्ग एवं धूम्रमार्ग भी कहते हैं । इसी प्रकार निम्न मन्त्र में इन मार्गों के द्वार का भी उल्लेख हैऋतस्य द्वारो मा मा सन्ताप्तम् । अध्वमामाध्वपते प्रमातिर स्वस्ति मेस्मिन्पथि देवयाने भूयात् ॥
इराक़ की राजधानी बग़दाद के ग्रीन ज़ोन क्षेत्र में अमरीकी दूतावास पर कुछ घंटों के दौरान दूसरा राकेट हमला हुआ है। फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ की राजधानी बग़दाद के ग्रीन ज़ोन क्षेत्र में अमरीकी दूतावास पर आधी रात को कम से कम 4 राकेट दाग़े गये। कुछ घंटों के दौरान यह दूसरा राकेट हमला हुआ है। गुरुवार की रात भी अमरीकी दूतवास के निकट कैट्यूशा राकेट से हमला किया गया था। राकेट हमले के बाद ख़तरे के सायरन बजने लगे। अभी तक इस हमले में जानी नुक़सान के हवाले से कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कुछ दिन पहले भी अत्ताजी और अलबलद के अमरीकी सैन्य अड्डों के निकट राकेटों से हमला हुआ था। इराक़ी जनता, राजनैतिक और धार्मिक पार्टियां देश से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन की मांग कर रही हैं जबकि इराक़ी संसद ने भी देश से अमरीका आतंकी सैनिकों के निष्कासन का बिल बहुमत से पास किया है। (AK) ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए! हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
इराक़ की राजधानी बग़दाद के ग्रीन ज़ोन क्षेत्र में अमरीकी दूतावास पर कुछ घंटों के दौरान दूसरा राकेट हमला हुआ है। फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ की राजधानी बग़दाद के ग्रीन ज़ोन क्षेत्र में अमरीकी दूतावास पर आधी रात को कम से कम चार राकेट दाग़े गये। कुछ घंटों के दौरान यह दूसरा राकेट हमला हुआ है। गुरुवार की रात भी अमरीकी दूतवास के निकट कैट्यूशा राकेट से हमला किया गया था। राकेट हमले के बाद ख़तरे के सायरन बजने लगे। अभी तक इस हमले में जानी नुक़सान के हवाले से कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कुछ दिन पहले भी अत्ताजी और अलबलद के अमरीकी सैन्य अड्डों के निकट राकेटों से हमला हुआ था। इराक़ी जनता, राजनैतिक और धार्मिक पार्टियां देश से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन की मांग कर रही हैं जबकि इराक़ी संसद ने भी देश से अमरीका आतंकी सैनिकों के निष्कासन का बिल बहुमत से पास किया है। ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए! हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Uttar Pradesh Power Corporation Limited/UPPCL) में सहायक लेखाकार (बैकलॉग) और सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्तियाँ निकल रही हैं। सहायक लेखाकार के 33 पद और सहायक समीक्षा अधिकारी के 16 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upenergy. in पर देख सकते हैं। दोनों ही पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर 2020 से शुरू होगी और अप्लाई करके फीस भरने की आखिरी तारीख, 29 सितंबर, 2020 है। दोनों पदों के लिए परिक्षाएं अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आयोजित की जाएंगी! सभी उम्मीदवारों से अनुरोध है कि आवेदन करने से पहले विज्ञापन को अच्छे से पढ़ें। आज ही कैलेंडर पर तारीख चिह्नित कर लें और समय पर आवेदन करें! यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में सहायक लेखाकार और सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्तियाँ निकल रही हैं। सहायक लेखाकार के तैंतीस पद और सहायक समीक्षा अधिकारी के सोलह पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upenergy. in पर देख सकते हैं। दोनों ही पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया नौ सितंबर दो हज़ार बीस से शुरू होगी और अप्लाई करके फीस भरने की आखिरी तारीख, उनतीस सितंबर, दो हज़ार बीस है। दोनों पदों के लिए परिक्षाएं अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आयोजित की जाएंगी! सभी उम्मीदवारों से अनुरोध है कि आवेदन करने से पहले विज्ञापन को अच्छे से पढ़ें। आज ही कैलेंडर पर तारीख चिह्नित कर लें और समय पर आवेदन करें! यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia. com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो सात तीन तीन सात आठ पाँच चार दो दो दो पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India - one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:
विराट ने टेस्ट के दौरान स्विंग को कैंसिल करने के लिए गेंद को पहले खेलने की कोशिश की थी। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर को लगता है कि कोहली का यह फैसला उनके लिए मुसीबत बनकर उभरा और बैकफायर कर गया। विराट कोहली के बल्ले से रनों का सूखा जारी है। इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन टेस्ट में वह कोई खास पारी नहीं खेल पाए थे। पहली पारी में कोहली 11 रन और दूसरी पारी में 20 रन बनाकर आउट हुए थे। टेस्ट मैच में कोहली की बॉल को स्विंग से रोकने की खास तरह की रणनीति फ्लॉप साबित हुई। ऐसे में क्रिकेट जगत में उनकी काफी आलोचना भी हो रही है। विराट ने टेस्ट के दौरान स्विंग को कैंसिल करने के लिए गेंद को पहले खेलने की कोशिश की थी। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर को लगता है कि कोहली का यह फैसला उनके लिए मुसीबत बनकर उभरा और बैकफायर कर गया। गावस्कर ने कहा कि इंग्लैंड में खिलाड़ी जितनी देर से गेंद को खेलता है, उसे उतनी मदद मिलती है। कोहली फिलहाल शतकों के सूखे से भी जूझ रहे हैं और यह कारनामा करते हुए उन्हें तीन साल पूरे होने वाले हैं। गावस्कर ने कहा- इंग्लैंड में खेलने की तरकीब यही है कि जितना हो सके देर से खेलें। इस दौरान आप गेंद को अपना काम करने देते हैं और देरी से शॉट खेलते हैं। मैंने जो कुछ भी हाइलाइट्स में देखा है, उससे ऐसा लग रहा कि कोहली गेंद को जल्दी खेलने की कोशिश कर रहे थे। कोहली गेंद तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। गावस्कर ने बताया कि कोहली को 2018 में इंग्लैंड में सफलता मिली थी, क्योंकि वह काफी लेट खेल रहे थे और ऑफ-स्टंप के आसपास खेल रहे थे। गावस्कर को लगता है कि कोहली के इस नए स्ट्रेटजी की वजह उनका खराब फॉर्म रहा है। ऐसे समय में खिलाड़ी हर गेंद को खेलने की कोशिश करता है और यह अक्सर खतरे से भरा होता है। यह संभवतः एक कारण हो सकता है। जब आप फॉर्म में नहीं होते हैं, तो आप रन बनाने के लिए लगभग हर गेंद को खेलते हैं, उनमें से हर एक को हिट करने की कोशिश करते हैं। उन्हें इस पर गौर करना चाहिए। गावस्कर को यह भी लगता है कि कोहली की किस्मत भी उनका साथ नहीं दे रही है। उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि विराट बल्लेबाजी करते वक्त ध्यान दें कि गेंदबाज आगे क्या करने जा रहा है। कोहली एजबेस्टन टेस्ट में पहली पारी में मैथ्यू पॉट्स की गेंद पर आउट हुए थे, जबकि दूसरी पारी में बेन स्टोक्स ने उन्हें पवेलियन भेजा था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
विराट ने टेस्ट के दौरान स्विंग को कैंसिल करने के लिए गेंद को पहले खेलने की कोशिश की थी। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर को लगता है कि कोहली का यह फैसला उनके लिए मुसीबत बनकर उभरा और बैकफायर कर गया। विराट कोहली के बल्ले से रनों का सूखा जारी है। इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन टेस्ट में वह कोई खास पारी नहीं खेल पाए थे। पहली पारी में कोहली ग्यारह रन और दूसरी पारी में बीस रन बनाकर आउट हुए थे। टेस्ट मैच में कोहली की बॉल को स्विंग से रोकने की खास तरह की रणनीति फ्लॉप साबित हुई। ऐसे में क्रिकेट जगत में उनकी काफी आलोचना भी हो रही है। विराट ने टेस्ट के दौरान स्विंग को कैंसिल करने के लिए गेंद को पहले खेलने की कोशिश की थी। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर को लगता है कि कोहली का यह फैसला उनके लिए मुसीबत बनकर उभरा और बैकफायर कर गया। गावस्कर ने कहा कि इंग्लैंड में खिलाड़ी जितनी देर से गेंद को खेलता है, उसे उतनी मदद मिलती है। कोहली फिलहाल शतकों के सूखे से भी जूझ रहे हैं और यह कारनामा करते हुए उन्हें तीन साल पूरे होने वाले हैं। गावस्कर ने कहा- इंग्लैंड में खेलने की तरकीब यही है कि जितना हो सके देर से खेलें। इस दौरान आप गेंद को अपना काम करने देते हैं और देरी से शॉट खेलते हैं। मैंने जो कुछ भी हाइलाइट्स में देखा है, उससे ऐसा लग रहा कि कोहली गेंद को जल्दी खेलने की कोशिश कर रहे थे। कोहली गेंद तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। गावस्कर ने बताया कि कोहली को दो हज़ार अट्ठारह में इंग्लैंड में सफलता मिली थी, क्योंकि वह काफी लेट खेल रहे थे और ऑफ-स्टंप के आसपास खेल रहे थे। गावस्कर को लगता है कि कोहली के इस नए स्ट्रेटजी की वजह उनका खराब फॉर्म रहा है। ऐसे समय में खिलाड़ी हर गेंद को खेलने की कोशिश करता है और यह अक्सर खतरे से भरा होता है। यह संभवतः एक कारण हो सकता है। जब आप फॉर्म में नहीं होते हैं, तो आप रन बनाने के लिए लगभग हर गेंद को खेलते हैं, उनमें से हर एक को हिट करने की कोशिश करते हैं। उन्हें इस पर गौर करना चाहिए। गावस्कर को यह भी लगता है कि कोहली की किस्मत भी उनका साथ नहीं दे रही है। उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि विराट बल्लेबाजी करते वक्त ध्यान दें कि गेंदबाज आगे क्या करने जा रहा है। कोहली एजबेस्टन टेस्ट में पहली पारी में मैथ्यू पॉट्स की गेंद पर आउट हुए थे, जबकि दूसरी पारी में बेन स्टोक्स ने उन्हें पवेलियन भेजा था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
ममता ने कहा कि ये सब तरीके काम नहीं आएंगे, बंगाल में बंगाली ही राज करेगा, हम बीजेपी को हराकर रहेंगे। कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राज्य की 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए इस बार आठ चरणों में चुनाव होने हैं। कई जिलों में 2-3 चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं। ममता ने कहा कि ये सब तरीके काम नहीं आएंगे, बंगाल में बंगाली ही राज करेगा, हम बीजेपी को हराकर रहेंगे। उन्होंने कहा, 'बीजेपी ने चुनाव आयोग (Election commission news) का इस्तेमाल किया है। बीजेपी पूरे देश को बांट रही है और यही कोशिश वह पश्चिम बंगाल में भी करेगी। गृह मंत्री और पीएम अपनी ताकत का दुरुपयोग न करें। आखिर बंगाल में 8 चरणों में चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं? जो बीजेपी ने कहा, वही चुनाव आयोग ने किया। एक जिले में दो-तीन चरणों में चुनाव क्यों?' ममता ने कहा कि केंद्र अपनी ताकतों का इस तरह दुरुपयोग नहीं कर सकता। अगर केंद्र सरकार इस तरह अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करेगी तो यह बड़ी भूल होगी, उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा। हम आम लोग हैं और अपनी लड़ाई लड़ेंगे। मैं चुनाव आयोग से अपील करती हूं कि वह पैसे के दुरुपयोग को रोके, बीजेपी ने एजेंसियों के जरिए जिलों में पैसे भेजे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन राठौर ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, 'सुरक्षा के मद्देनजर इतने चरणों में चुनाव हो रहा है। जहां तक मेरा मानना है कि यह अब तक के इतिहास का राज्य में सबसे हिंसक चुनाव हो सकता है। केंद्र सरकार की योजनाओं पर चुनाव होने दीजिए, जनता तय कर ले कि वह किसे पसंद करती है।' सीपीआई नेता दिनेश वार्ष्णेय ने कहा, 'राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी ने 8 चरणों में इसीलिए चुनाव कराए हैं, ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके। एक जगह की चुनावी रैली का अगले चरण में इस्तेमाल किया जा सके, इसीलिए ये किया गया है।' बंगाल में कब चुनाव और मतगणना? राज्य में इस बार विधानसभा चुनाव 8 चरणों में होंगे। पहले चरण की अधिसूचना 2 मार्च को जारी होगी, पहले चरण में 30 सीटों पर 27 मार्च को मतदान होगा। राज्य में वोटों की गिनती 2 मई को होगी। 2016 में राज्य में 77,414 पोलिंग बूथ थे। इस साल पोलिंग बूथों में 31.65% की बढ़ोतरी हुई है और इस बार 1,01,916 पोलिंग बूथों पर वोट पड़ेंगे।
ममता ने कहा कि ये सब तरीके काम नहीं आएंगे, बंगाल में बंगाली ही राज करेगा, हम बीजेपी को हराकर रहेंगे। कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राज्य की दो सौ चौरानवे सीटों वाली विधानसभा के लिए इस बार आठ चरणों में चुनाव होने हैं। कई जिलों में दो-तीन चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं। ममता ने कहा कि ये सब तरीके काम नहीं आएंगे, बंगाल में बंगाली ही राज करेगा, हम बीजेपी को हराकर रहेंगे। उन्होंने कहा, 'बीजेपी ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया है। बीजेपी पूरे देश को बांट रही है और यही कोशिश वह पश्चिम बंगाल में भी करेगी। गृह मंत्री और पीएम अपनी ताकत का दुरुपयोग न करें। आखिर बंगाल में आठ चरणों में चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं? जो बीजेपी ने कहा, वही चुनाव आयोग ने किया। एक जिले में दो-तीन चरणों में चुनाव क्यों?' ममता ने कहा कि केंद्र अपनी ताकतों का इस तरह दुरुपयोग नहीं कर सकता। अगर केंद्र सरकार इस तरह अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करेगी तो यह बड़ी भूल होगी, उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा। हम आम लोग हैं और अपनी लड़ाई लड़ेंगे। मैं चुनाव आयोग से अपील करती हूं कि वह पैसे के दुरुपयोग को रोके, बीजेपी ने एजेंसियों के जरिए जिलों में पैसे भेजे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन राठौर ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, 'सुरक्षा के मद्देनजर इतने चरणों में चुनाव हो रहा है। जहां तक मेरा मानना है कि यह अब तक के इतिहास का राज्य में सबसे हिंसक चुनाव हो सकता है। केंद्र सरकार की योजनाओं पर चुनाव होने दीजिए, जनता तय कर ले कि वह किसे पसंद करती है।' सीपीआई नेता दिनेश वार्ष्णेय ने कहा, 'राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी ने आठ चरणों में इसीलिए चुनाव कराए हैं, ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके। एक जगह की चुनावी रैली का अगले चरण में इस्तेमाल किया जा सके, इसीलिए ये किया गया है।' बंगाल में कब चुनाव और मतगणना? राज्य में इस बार विधानसभा चुनाव आठ चरणों में होंगे। पहले चरण की अधिसूचना दो मार्च को जारी होगी, पहले चरण में तीस सीटों पर सत्ताईस मार्च को मतदान होगा। राज्य में वोटों की गिनती दो मई को होगी। दो हज़ार सोलह में राज्य में सतहत्तर,चार सौ चौदह पोलिंग बूथ थे। इस साल पोलिंग बूथों में इकतीस.पैंसठ% की बढ़ोतरी हुई है और इस बार एक,एक,नौ सौ सोलह पोलिंग बूथों पर वोट पड़ेंगे।
जहां भड़की हिंसा वहां 70 फीसदी मुसलमान, फिर नूंह में मुस्लिम व्यापारियों की एंट्री पर पाबंदी क्यों? नूंह में 10 दिन पहले भड़की हिंसा के बाद अब रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और झज्जर में 50 से अधिक पंचायतों की ओर से पत्र लिखकर मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है. हरियाणा के नूंह में 31 जुलाई को हिंदू संगठनों की ओर से निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान पथराव और फायरिंग के बाद से जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. हिंसा के बाद भले ही पूरे नूंह को छावनी में तब्दील कर शांति कायम करने की कोशिशें जारी हों लेकिन यहां की पंचायतें अपने फरमान से एक बार फिर नूंह में हिंसा की आग को भड़काने की कोशिशों में जुटी हैं. नूंह में 10 दिन पहले भड़की हिंसा के बाद अब रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और झज्जर में 50 से अधिक पंचायतों की ओर से पत्र लिखकर मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है. इसके साथ ही ये भी फरमान जारी किया गया है कि गांव में जो भी मुस्लिम परिवार हैं उन्हें अपने आईडी दस्तावेज पुलिस को सौंपने होंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में मुस्लिम व्यापारियों पर एंट्री पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है? पत्र को लेकर जब बुदपुर पंचायत की सरपंच मोनिका से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विशेष समुदाय के शरारती तत्व दिन में गांव में घूमते हैं और रात में चोरी की घटनाओ को अंजाम देते हैं. नूंह की घटना के बाद हमने ये चिट्ठी लिखी थी क्योंकि चोरी की इन घटनाओं में विशेष समुदाय के लोगों का ही नाम सामने आया है. महेंद्रगढ़ के सैदपुर के सरपंच विकास ने बताया कि मेवात में भले ही मुस्लिमों की आबादी बहुत ज्यादा हो लेकिन हमारे गांव में कुछ ही परिवार यहां पर रहते हैं. उन्होंने कहा कि नूंह हिंसा एक ट्रिगर था. हमारा इरादा किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है. हमारी कोशिश नूंह जैसी हिंसा को रोकना है. पड़ैयावास के सरपंच विजेंदर सिंह ने बताया कि नूंह की घटना को देखते हुए और गांव में शांति बनाए रखने के लिए चिट्ठी लिखी गई है. किसी समुदाय को नुकसान पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था. हमें मुस्लिमों से किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है. नूंह की घटना अब समाप्त हो गई है, जनता में आक्रोश भी नहीं है. हम अब चिट्ठी वापस ले रहे हैं. रेवाड़ी के जिलाधिकारी इमरान रजा ने कहा, ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ पंचायत के सरपंचों की ओर से विशेष समुदाय का बहिष्कार करने, मकान न देने या गांव में न घुसने देने की बात की गई है. जांच में पता चला है कि ग्राम सभा की ओर से कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है. इस मामले की जांच हो रही है, रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी. पंचायत के सरपंच सरकार का हिस्सा होते हैं इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी साथ ही ऐसी चिट्ठी लिखना संविधान के खिलाफ है इसलिए पुलिस की कार्रवाई भी होगी. हरियाणा के नूंह में 10 दिन पहले जहां पर सांप्रदायिक हिंसा भड़की वहां पर मुस्लिम आबादी 70 फीसदी है. यही नहीं नूंह के आसपास के इलाकों में भी मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी है. 2011 की जनगणना की बात करें तो नूंह के पड़ोसी जिले मेवात में 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है. पूरे हरियाणा की बात करें तो यहां पर 7.2 फीसदी मुस्लिम आबादी है.
जहां भड़की हिंसा वहां सत्तर फीसदी मुसलमान, फिर नूंह में मुस्लिम व्यापारियों की एंट्री पर पाबंदी क्यों? नूंह में दस दिन पहले भड़की हिंसा के बाद अब रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और झज्जर में पचास से अधिक पंचायतों की ओर से पत्र लिखकर मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है. हरियाणा के नूंह में इकतीस जुलाई को हिंदू संगठनों की ओर से निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान पथराव और फायरिंग के बाद से जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. हिंसा के बाद भले ही पूरे नूंह को छावनी में तब्दील कर शांति कायम करने की कोशिशें जारी हों लेकिन यहां की पंचायतें अपने फरमान से एक बार फिर नूंह में हिंसा की आग को भड़काने की कोशिशों में जुटी हैं. नूंह में दस दिन पहले भड़की हिंसा के बाद अब रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और झज्जर में पचास से अधिक पंचायतों की ओर से पत्र लिखकर मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है. इसके साथ ही ये भी फरमान जारी किया गया है कि गांव में जो भी मुस्लिम परिवार हैं उन्हें अपने आईडी दस्तावेज पुलिस को सौंपने होंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि सत्तर प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में मुस्लिम व्यापारियों पर एंट्री पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है? पत्र को लेकर जब बुदपुर पंचायत की सरपंच मोनिका से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विशेष समुदाय के शरारती तत्व दिन में गांव में घूमते हैं और रात में चोरी की घटनाओ को अंजाम देते हैं. नूंह की घटना के बाद हमने ये चिट्ठी लिखी थी क्योंकि चोरी की इन घटनाओं में विशेष समुदाय के लोगों का ही नाम सामने आया है. महेंद्रगढ़ के सैदपुर के सरपंच विकास ने बताया कि मेवात में भले ही मुस्लिमों की आबादी बहुत ज्यादा हो लेकिन हमारे गांव में कुछ ही परिवार यहां पर रहते हैं. उन्होंने कहा कि नूंह हिंसा एक ट्रिगर था. हमारा इरादा किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है. हमारी कोशिश नूंह जैसी हिंसा को रोकना है. पड़ैयावास के सरपंच विजेंदर सिंह ने बताया कि नूंह की घटना को देखते हुए और गांव में शांति बनाए रखने के लिए चिट्ठी लिखी गई है. किसी समुदाय को नुकसान पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था. हमें मुस्लिमों से किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है. नूंह की घटना अब समाप्त हो गई है, जनता में आक्रोश भी नहीं है. हम अब चिट्ठी वापस ले रहे हैं. रेवाड़ी के जिलाधिकारी इमरान रजा ने कहा, ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ पंचायत के सरपंचों की ओर से विशेष समुदाय का बहिष्कार करने, मकान न देने या गांव में न घुसने देने की बात की गई है. जांच में पता चला है कि ग्राम सभा की ओर से कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है. इस मामले की जांच हो रही है, रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी. पंचायत के सरपंच सरकार का हिस्सा होते हैं इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी साथ ही ऐसी चिट्ठी लिखना संविधान के खिलाफ है इसलिए पुलिस की कार्रवाई भी होगी. हरियाणा के नूंह में दस दिन पहले जहां पर सांप्रदायिक हिंसा भड़की वहां पर मुस्लिम आबादी सत्तर फीसदी है. यही नहीं नूंह के आसपास के इलाकों में भी मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी है. दो हज़ार ग्यारह की जनगणना की बात करें तो नूंह के पड़ोसी जिले मेवात में सत्तर फीसदी मुस्लिम आबादी है. पूरे हरियाणा की बात करें तो यहां पर सात.दो फीसदी मुस्लिम आबादी है.
LIC AAO Recruitment 2023: जीवन बीमा निगम(LIC) असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर((जनरलिस्ट)) भर्ती 2023 के लिए अप्लाई करने की आज यानी 31 जनवरी 2023 आखिरी तारीख है। इच्छुक कैंडिडेट्स जिन्होंने इसके लिए अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे सभी आज जल्द से जल्द ऑफिशियल वेबसाइट licindia. in पर जाकर आवेदन कर दें। जीवन बीमा निगम यानी LIC की इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के लिए आवेदन प्रकिया 15 जनवरी 2023 से शुरू हो गई थी, जो आज यानी मंगलावार को खत्म हो जाएगी। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से जीवन बीमा निगम (LIC) सहायक प्रशासनिक अधिकारी(AAO) के पद पर कुल 300 योग्य कैंडिडेट्स को भर्ती करेगा। इस भर्ती में अप्लाई करने के लिए सामान्य वर्ग, ओबीसी, वर्ग के कैंडिडेट्स को 700 रुपये का आवेदन शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। वहीं, SC, ST और PWD कैंडिडेट्स को 85 रुपये का आवेदन शुल्क देना होगा। - सबसे पहले उ्ममीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। - इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर Career टेब पर जाएं। - फिर आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। - इसके बाद Recruitment of Assistant Administrative Officer (Generalist)- 2023 के नीचे Apply Now पर क्लिक करें। - फिर आपके सामने स्क्रीन पर एक पेज खुल जाएगा। - इसके बाद आप जरूरी डिटेल्स दर्ज कर रजिस्ट्रेशन कर दें। - फिर आवेदन शुल्क का भुगतान कर दें। - आखिरी स्टेप में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंटआउट जरूर ले लें।
LIC AAO Recruitment दो हज़ार तेईस: जीवन बीमा निगम असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर) भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए अप्लाई करने की आज यानी इकतीस जनवरी दो हज़ार तेईस आखिरी तारीख है। इच्छुक कैंडिडेट्स जिन्होंने इसके लिए अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे सभी आज जल्द से जल्द ऑफिशियल वेबसाइट licindia. in पर जाकर आवेदन कर दें। जीवन बीमा निगम यानी LIC की इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के लिए आवेदन प्रकिया पंद्रह जनवरी दो हज़ार तेईस से शुरू हो गई थी, जो आज यानी मंगलावार को खत्म हो जाएगी। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से जीवन बीमा निगम सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कुल तीन सौ योग्य कैंडिडेट्स को भर्ती करेगा। इस भर्ती में अप्लाई करने के लिए सामान्य वर्ग, ओबीसी, वर्ग के कैंडिडेट्स को सात सौ रुपयापये का आवेदन शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। वहीं, SC, ST और PWD कैंडिडेट्स को पचासी रुपयापये का आवेदन शुल्क देना होगा। - सबसे पहले उ्ममीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। - इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर Career टेब पर जाएं। - फिर आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। - इसके बाद Recruitment of Assistant Administrative Officer - दो हज़ार तेईस के नीचे Apply Now पर क्लिक करें। - फिर आपके सामने स्क्रीन पर एक पेज खुल जाएगा। - इसके बाद आप जरूरी डिटेल्स दर्ज कर रजिस्ट्रेशन कर दें। - फिर आवेदन शुल्क का भुगतान कर दें। - आखिरी स्टेप में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंटआउट जरूर ले लें।
केंद्र सरकार द्वारा घरेलू गैस सिलेण्डरों के दामाें में वृद्धि करने और महंगाई को लेकर कांग्रेस के राज्य व्यापी आह्वान पर आज दोपहर बाद जिला महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी पटेल के नेतृत्व में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने किले के पास गैस सिलेंडरों सहित प्रदर्शन किया और नारेबाजी कर केंद्र सरकार से गैस सिलेण्डरों के मूल्यों में की गई वृद्धि वापिस लेने तथा महंगाई पर रोक लगाने की मांग की। पटेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जहां 5 सौ रुपये में घरेलू गैस सिलेण्डर मुहैया करवाने की घोषणा कर महिलाओं को राहत पहुंचाई है, वहीं केंद्र सरकार ने गैस सिलेण्डरों की कीमत बढ़ाकर महिलाओं के लिए मुसीबत खडी कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य महेश व्यास ने भी महिलाओं को संबोधित किया और गैस सिलेण्डरों के दाम बढ़ाने पर केंद्र सरकार की निंदा की। महिलाओं ने खाली गैस सिलेण्डरों के साथ प्रदर्शन किया। गैस सिलेण्डरों को फूल मालाएं पहनाई गईं थीं। महिलाएं गैस सिलेण्डरों के दाम कम करो-कम करो तथा मोदी महंगाई कम करो जैसे नारे लगा रही थी। प्रदर्शन में महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी पटेल, पीसीसी सदस्य महेश व्यास के अलावा बबिता पूर्व सरपंच कानासर, मुन्नीदेवी पूर्व प्रधान, मंगला बोहरा सरपंच मलार, जयश्री पुरोहित, पार्षद रोमीदेवी, रिंकिता जैन, रेखा थानवी, उर्मिला थानवी, रेखा भूरा व्यास तथा अनामिका, सोनू पुरोहित सहित काफी संख्या में महिलाएं हाजिर रहीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
केंद्र सरकार द्वारा घरेलू गैस सिलेण्डरों के दामाें में वृद्धि करने और महंगाई को लेकर कांग्रेस के राज्य व्यापी आह्वान पर आज दोपहर बाद जिला महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी पटेल के नेतृत्व में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने किले के पास गैस सिलेंडरों सहित प्रदर्शन किया और नारेबाजी कर केंद्र सरकार से गैस सिलेण्डरों के मूल्यों में की गई वृद्धि वापिस लेने तथा महंगाई पर रोक लगाने की मांग की। पटेल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जहां पाँच सौ रुपये में घरेलू गैस सिलेण्डर मुहैया करवाने की घोषणा कर महिलाओं को राहत पहुंचाई है, वहीं केंद्र सरकार ने गैस सिलेण्डरों की कीमत बढ़ाकर महिलाओं के लिए मुसीबत खडी कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य महेश व्यास ने भी महिलाओं को संबोधित किया और गैस सिलेण्डरों के दाम बढ़ाने पर केंद्र सरकार की निंदा की। महिलाओं ने खाली गैस सिलेण्डरों के साथ प्रदर्शन किया। गैस सिलेण्डरों को फूल मालाएं पहनाई गईं थीं। महिलाएं गैस सिलेण्डरों के दाम कम करो-कम करो तथा मोदी महंगाई कम करो जैसे नारे लगा रही थी। प्रदर्शन में महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी पटेल, पीसीसी सदस्य महेश व्यास के अलावा बबिता पूर्व सरपंच कानासर, मुन्नीदेवी पूर्व प्रधान, मंगला बोहरा सरपंच मलार, जयश्री पुरोहित, पार्षद रोमीदेवी, रिंकिता जैन, रेखा थानवी, उर्मिला थानवी, रेखा भूरा व्यास तथा अनामिका, सोनू पुरोहित सहित काफी संख्या में महिलाएं हाजिर रहीं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर ओपन चैलेंज दिया है। - रंगोली ने कहा कि कोई उनके चैलेंज को पूरा कर दे तो कंगना एक्टिंग छोड़ देगी। - रंगोली चंदेल ने बागी 3 के डायरेक्टर पर भी निशाना साधा था। मुंबई. कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल सोशल मीडिया पर अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहती हैं। अब रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर सभी एक्ट्रेस को ओपन चैलेंज दे दिया है कि अगर कोई भी एक्ट्रेस कंगना जैसा काम कर देगी तो वह एक्टिंग छोड़ देगी। रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर लिखा- मेरा फिल्म इंडस्ट्री को ओपन चैलेंज है, कंगना के अलावा आज के वक्त किसी भी एक्ट्रेस का नाम बता दें जो 60, 70, 80 और 100 करोड़ बजट की फिल्मों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले सकती हैं। रंगोली ने लिखा कि अगर ऐसा हुआ तो कंगना हमेशा के लिए एक्टिंग छोड़ देगी। रंगोली ने बागी 3 के डायरेक्ट अहमद खान के कमेंट के जवाब में ये ट्वीट किया है। अहमद खान ने कहा था कि कंगना ने मणिकर्णिका में पैसों की बर्बादी की है। रंगोली चंदेल ने बागी 3 के डायरेक्टर अहमद खान को जवाब दिया था। रंगोली ने लिखा था-'हा-हा अरे खान भाई साहब 155 करोड़ की फिल्म को फ्लॉप कहते हो। आपकी फिल्म बागी 3 ने 49 करोड़ का वीकेंड किया है। ' रंगोली लिखती हैं- 'मणिकर्णिका ने 45 करोड़ रुपए कलेक्शन किया। ज्यादा पीछे नही है आपसे। भारत में मणिकर्णिका की तरह 102 करोड़ रुपए कमाकर दिखाओ फिर बात करो। अभी तो आपके सितारे गर्दिश में हैं। ' अहमद खान ने इससे पहले कहा था कि कंगना बॉलीवुड की सबसे बड़ी बागी है। अगर उन्हें मौका मिला तो वह उनके साथ जरूर काम करना चाहेंगे। डायरेक्टर ने कहा कि मणिकर्णिका के फ्लॉप होने के बाद धाकड़ ठंडे बस्ते पर चली गई है। हालांकि, मेकर्स ने ट्वीट कर बताया कि धाकड़ जून में रिलीज होगी। वर्कफ्रंट की बात करें तो कंगना अब तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की बायोपिक थलाईवी में नजर आने वाली हैं। इसके अलावा कंगना फिल्म धाकड़ में भी नजर आएंगी। ये फिल्म दिवाली में रिलीज होगी। इसके अलावा कंगना फिल्म तेजस में भी नजर आने वाली हैं।
- रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर ओपन चैलेंज दिया है। - रंगोली ने कहा कि कोई उनके चैलेंज को पूरा कर दे तो कंगना एक्टिंग छोड़ देगी। - रंगोली चंदेल ने बागी तीन के डायरेक्टर पर भी निशाना साधा था। मुंबई. कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल सोशल मीडिया पर अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहती हैं। अब रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर सभी एक्ट्रेस को ओपन चैलेंज दे दिया है कि अगर कोई भी एक्ट्रेस कंगना जैसा काम कर देगी तो वह एक्टिंग छोड़ देगी। रंगोली चंदेल ने सोशल मीडिया पर लिखा- मेरा फिल्म इंडस्ट्री को ओपन चैलेंज है, कंगना के अलावा आज के वक्त किसी भी एक्ट्रेस का नाम बता दें जो साठ, सत्तर, अस्सी और एक सौ करोड़ बजट की फिल्मों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले सकती हैं। रंगोली ने लिखा कि अगर ऐसा हुआ तो कंगना हमेशा के लिए एक्टिंग छोड़ देगी। रंगोली ने बागी तीन के डायरेक्ट अहमद खान के कमेंट के जवाब में ये ट्वीट किया है। अहमद खान ने कहा था कि कंगना ने मणिकर्णिका में पैसों की बर्बादी की है। रंगोली चंदेल ने बागी तीन के डायरेक्टर अहमद खान को जवाब दिया था। रंगोली ने लिखा था-'हा-हा अरे खान भाई साहब एक सौ पचपन करोड़ की फिल्म को फ्लॉप कहते हो। आपकी फिल्म बागी तीन ने उनचास करोड़ का वीकेंड किया है। ' रंगोली लिखती हैं- 'मणिकर्णिका ने पैंतालीस करोड़ रुपए कलेक्शन किया। ज्यादा पीछे नही है आपसे। भारत में मणिकर्णिका की तरह एक सौ दो करोड़ रुपए कमाकर दिखाओ फिर बात करो। अभी तो आपके सितारे गर्दिश में हैं। ' अहमद खान ने इससे पहले कहा था कि कंगना बॉलीवुड की सबसे बड़ी बागी है। अगर उन्हें मौका मिला तो वह उनके साथ जरूर काम करना चाहेंगे। डायरेक्टर ने कहा कि मणिकर्णिका के फ्लॉप होने के बाद धाकड़ ठंडे बस्ते पर चली गई है। हालांकि, मेकर्स ने ट्वीट कर बताया कि धाकड़ जून में रिलीज होगी। वर्कफ्रंट की बात करें तो कंगना अब तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की बायोपिक थलाईवी में नजर आने वाली हैं। इसके अलावा कंगना फिल्म धाकड़ में भी नजर आएंगी। ये फिल्म दिवाली में रिलीज होगी। इसके अलावा कंगना फिल्म तेजस में भी नजर आने वाली हैं।
- 10 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 10 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण शादी के बंधन में बंधने के बाद सबसे पहले मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पर मत्था टेकने पहुंचने हैं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। दोनो साथ में काफी अच्छे लग रहे थे और पूरी तरह से आस्था में दिखाई दिए। उनके फैंस ने दोनो का साथ वहां भी नहीं छोड़ा बल्कि उनको देखने के लिए काफी ज्यादा भीड़ वहां पर जमा हो गई। दीपिका और रणवीर ने वहां खड़ी मीडिया को पोज दिए और आगे बढ़ गए। दीपिका-रणवीर ने शादी इटली के लेक कोमो में 14-15 नवंबर को रचाई थी। शादी दो रीति-रिवाजों से हुई है। 14 नवंबर को शादी जहां कोंकणी रीति-रिवाजों से की गई वहीं 15 नवंबर को सिंधी रीति-रिवाजों से हुई। रणवीर और दीपिका ने वापस आने के बाद रिसेप्शन पार्टी भी दी जिसमें जमकर धमाल हुआ है। रणवीर इस समय सिंबा को लेकर बिजी हैं जिस कारण उन्होने हनीमून का प्लान पोस्टपोन कर दिया है। खबर है कि सिंबा का टाइटल सॉंग शूट करना है जो कि शादी की वजह से अभी तक रुका हुआ था।
- दस hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - दस hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण शादी के बंधन में बंधने के बाद सबसे पहले मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पर मत्था टेकने पहुंचने हैं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। दोनो साथ में काफी अच्छे लग रहे थे और पूरी तरह से आस्था में दिखाई दिए। उनके फैंस ने दोनो का साथ वहां भी नहीं छोड़ा बल्कि उनको देखने के लिए काफी ज्यादा भीड़ वहां पर जमा हो गई। दीपिका और रणवीर ने वहां खड़ी मीडिया को पोज दिए और आगे बढ़ गए। दीपिका-रणवीर ने शादी इटली के लेक कोमो में चौदह-पंद्रह नवंबर को रचाई थी। शादी दो रीति-रिवाजों से हुई है। चौदह नवंबर को शादी जहां कोंकणी रीति-रिवाजों से की गई वहीं पंद्रह नवंबर को सिंधी रीति-रिवाजों से हुई। रणवीर और दीपिका ने वापस आने के बाद रिसेप्शन पार्टी भी दी जिसमें जमकर धमाल हुआ है। रणवीर इस समय सिंबा को लेकर बिजी हैं जिस कारण उन्होने हनीमून का प्लान पोस्टपोन कर दिया है। खबर है कि सिंबा का टाइटल सॉंग शूट करना है जो कि शादी की वजह से अभी तक रुका हुआ था।
Leslieganj (Palamu) : आपके अधिकार,आपकी सरकार,आपके द्वार कार्यक्रम के तहत नीलांबर पीतांबरपुर प्रखंड के कुराईनपतरा पंचायत में शुक्रवार को विशेष शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में अलग-अलग समस्याओं को लेकर करीब 700 लोगों ने अपना निबंधन कराया. जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी समस्याओं का समाधान संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया. मौके पर पंचायत के कई ग्रामीणों के बीच जीप अध्यक्ष प्रभादेवी, बीडीओ सच्चिदानंद महतो, प्रमुख रमेश राम के द्वारा कई तरह के परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इसमें मुख्य रूप से 36 समूहों के बीच 72 लाख के चेक वितरण किया गया. इसी तरह कई लाभुकों को धोती-साड़ी, पेंशन स्वीकृति पत्र, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड आदि का वितरण किया गया. दूसरी ओर शिविर में मासूम आर्ट ग्रुप के कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गयी. वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह नहीं करने का संदेश दिया गया. इसमें कलाकारों ने बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों अवगत कराया. कार्यक्रम का संचालन प्रभारी एमओ आलोक तिवारी ने किया. वहीं कार्यक्रम में बीपीओ मोतीलाल शर्मा, मुखिया बालदेव साव, बीपीआरओ विनय कुमार शर्मा, बीईईओ सच्चिदानंद सिंह समेत विभिन्न विभागों के संबंधित पदाधिकारी एवं प्रखंड कर्मी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण जनता उपस्थित थी.
Leslieganj : आपके अधिकार,आपकी सरकार,आपके द्वार कार्यक्रम के तहत नीलांबर पीतांबरपुर प्रखंड के कुराईनपतरा पंचायत में शुक्रवार को विशेष शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में अलग-अलग समस्याओं को लेकर करीब सात सौ लोगों ने अपना निबंधन कराया. जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी समस्याओं का समाधान संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया. मौके पर पंचायत के कई ग्रामीणों के बीच जीप अध्यक्ष प्रभादेवी, बीडीओ सच्चिदानंद महतो, प्रमुख रमेश राम के द्वारा कई तरह के परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इसमें मुख्य रूप से छत्तीस समूहों के बीच बहत्तर लाख के चेक वितरण किया गया. इसी तरह कई लाभुकों को धोती-साड़ी, पेंशन स्वीकृति पत्र, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड आदि का वितरण किया गया. दूसरी ओर शिविर में मासूम आर्ट ग्रुप के कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गयी. वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह नहीं करने का संदेश दिया गया. इसमें कलाकारों ने बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों अवगत कराया. कार्यक्रम का संचालन प्रभारी एमओ आलोक तिवारी ने किया. वहीं कार्यक्रम में बीपीओ मोतीलाल शर्मा, मुखिया बालदेव साव, बीपीआरओ विनय कुमार शर्मा, बीईईओ सच्चिदानंद सिंह समेत विभिन्न विभागों के संबंधित पदाधिकारी एवं प्रखंड कर्मी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण जनता उपस्थित थी.
चंदौली जिले के सकलडीहा ब्लॉक सभागार में जल जीवन मिशन के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें ब्लॉक प्रमुख अवधेश सिंह ने स्वच्छ जल के सेवन और जल संरक्षण पर जोर दिया। साथ ही केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही हर घर नल से जल योजना के खूबियों का जमकर बखान किया। दावा किया कि आने वाले समय में योजना के शत प्रतिशत लागू होने के बाद संक्रामक बीमारियों का प्रभाव कम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि हर घर नल जल योजना चलाकर सरकार ने लोगों के घरों तक स्वच्छ जल पहुंचाने का कार्य किया है। शुद्ध जल के सेवन से हम सभी को गंभीर और संक्रामक बीमारियों से निजात मिलेगी। क्योंकि दूषित जल से तमाम संक्रामक बीमारियां फैलती है। कहा कि हम सभी का यह दायित्व है कि पानी का दोहन न होने दें। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। बीडीओ अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि प्रधान व सचिव लोगों को स्वच्छ जल से होने वाले फायदों से आम लोगों को जागरूक करें। ताकि लोग दूषित जल के सेवन से बचें। कहा कि दूषित जल का सेवन शरीर में तमाम प्रकार की बीमारियों को जन्म देता है। इन बीमारियों के इलाज में लाखों रुपए के साथ ही समय की बर्बादी होती है। लिहाजा हम जागरूकता से इस पर रोक लगा सकते हैं। ज्वॉइंट बीडीओ केके सिंह ने पानी की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वरिष्ठ ट्रेनर नीलेश पाठक ने दूषित जल से होने वाली बीमारियों के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा कि हर साल लाखों की संख्या में बच्चों की मौत डायरिया जैसी बीमारी से होता है। वहीं, एक करोड़ से अधिक लोग कैंसर जैसी बीमारी से प्रभावित होते हैं। साथ ही दो करोड़ से अधिक लोग त्वचा रोग जैसी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। इस दौरान ग्राम प्रधान टुनटुन सिंह, मोनू सिंह, अमित सिंह, अर्जुन मौर्या, गुलाब मौर्या, आगनवाड़ी, आशा कार्यकत्री मौजूद रही। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चंदौली जिले के सकलडीहा ब्लॉक सभागार में जल जीवन मिशन के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें ब्लॉक प्रमुख अवधेश सिंह ने स्वच्छ जल के सेवन और जल संरक्षण पर जोर दिया। साथ ही केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही हर घर नल से जल योजना के खूबियों का जमकर बखान किया। दावा किया कि आने वाले समय में योजना के शत प्रतिशत लागू होने के बाद संक्रामक बीमारियों का प्रभाव कम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि हर घर नल जल योजना चलाकर सरकार ने लोगों के घरों तक स्वच्छ जल पहुंचाने का कार्य किया है। शुद्ध जल के सेवन से हम सभी को गंभीर और संक्रामक बीमारियों से निजात मिलेगी। क्योंकि दूषित जल से तमाम संक्रामक बीमारियां फैलती है। कहा कि हम सभी का यह दायित्व है कि पानी का दोहन न होने दें। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। बीडीओ अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि प्रधान व सचिव लोगों को स्वच्छ जल से होने वाले फायदों से आम लोगों को जागरूक करें। ताकि लोग दूषित जल के सेवन से बचें। कहा कि दूषित जल का सेवन शरीर में तमाम प्रकार की बीमारियों को जन्म देता है। इन बीमारियों के इलाज में लाखों रुपए के साथ ही समय की बर्बादी होती है। लिहाजा हम जागरूकता से इस पर रोक लगा सकते हैं। ज्वॉइंट बीडीओ केके सिंह ने पानी की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वरिष्ठ ट्रेनर नीलेश पाठक ने दूषित जल से होने वाली बीमारियों के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा कि हर साल लाखों की संख्या में बच्चों की मौत डायरिया जैसी बीमारी से होता है। वहीं, एक करोड़ से अधिक लोग कैंसर जैसी बीमारी से प्रभावित होते हैं। साथ ही दो करोड़ से अधिक लोग त्वचा रोग जैसी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। इस दौरान ग्राम प्रधान टुनटुन सिंह, मोनू सिंह, अमित सिंह, अर्जुन मौर्या, गुलाब मौर्या, आगनवाड़ी, आशा कार्यकत्री मौजूद रही। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भारत इस साल अपनी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है। जिसके उपलक्ष्य में केंद्र सरकार ने 75 हफ्ते पहले 12 मार्च 2021 को आज़ादी के अमृत महोत्सव मनाने की घोषणा की थी। जो कि आज़ादी के 75वें स्वतंत्रता दिवस के बाद 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। अमृत महोत्सव की शुरुआत गुजरात के साबरमती से की गई थी। जहां से बापू कहे जाने वाले महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी मार्च शुरु किया गया था। भारत में आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने की खुशी में जगह-जगह 'आज़ादी के अमृत महोत्सव' के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए केंद्र सरकार ने 259 सदस्यों की उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति का भी निर्माण किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2021 को आज़ादी के अमृत महोत्सव का गुजरात से श्रीगणेश किया था क्योंकि 12 मार्च 1930 को ही गांधी जी ने दांडी मार्च की शुरुआत गुजरात से की थी। इस दांडी मार्च में गांधी जी के साथ 78 अन्य लोगों 241 मील की यात्रा 6 अप्रैल 1930 तक पूरी की थी। "यह महोत्सव भारत के लोगों को समर्पित है, जिन्होंने न केवल भारत को अपनी विकासवादी यात्रा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत 2. 0 आत्मनिर्भर भारत को सक्रिय करने के दृष्टिकोण को सक्षम करने की शक्ति और क्षमता भी है। " - नरेंद्र मोदी (भारत के प्रधानमंत्री) "स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की तरह ही आजादी के बाद का 75 साल का सफर आम भारतीयों की मेहनत, नवोन्मेष, उद्यम का प्रतिबिंब है। देश हो या विदेश हम भारतीयों ने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया है। हमें अपने संविधान पर गर्व है। हमें अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं पर गर्व है। लोकतंत्र की जननी भारत आज भी लोकतंत्र को मजबूत कर आगे बढ़ रहा है। ज्ञान और विज्ञान से समृद्ध भारत मंगल से चंद्रमा पर अपनी छाप छोड़ रहा है। " - नरेंद्र मोदी (भारत के प्रधानमंत्री) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अप्रैल को अपने मन की बात कार्यक्रम में हर घर तिरंगा अभियान की घोषणा की। पीएम मोदी ने भारतियों से अपील की कि इस वर्ष आज़ादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाए जा रहे 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 13 अगस्त से लेकर 15 अगस्त तक हर तिरंगा जरूर फहराए।
भारत इस साल अपनी आज़ादी के पचहत्तर वर्ष पूरे करने जा रहा है। जिसके उपलक्ष्य में केंद्र सरकार ने पचहत्तर हफ्ते पहले बारह मार्च दो हज़ार इक्कीस को आज़ादी के अमृत महोत्सव मनाने की घोषणा की थी। जो कि आज़ादी के पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के बाद पंद्रह अगस्त दो हज़ार तेईस तक चलेगा। अमृत महोत्सव की शुरुआत गुजरात के साबरमती से की गई थी। जहां से बापू कहे जाने वाले महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी मार्च शुरु किया गया था। भारत में आज़ादी के पचहत्तर वर्ष पूरे होने की खुशी में जगह-जगह 'आज़ादी के अमृत महोत्सव' के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए केंद्र सरकार ने दो सौ उनसठ सदस्यों की उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति का भी निर्माण किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने बारह मार्च दो हज़ार इक्कीस को आज़ादी के अमृत महोत्सव का गुजरात से श्रीगणेश किया था क्योंकि बारह मार्च एक हज़ार नौ सौ तीस को ही गांधी जी ने दांडी मार्च की शुरुआत गुजरात से की थी। इस दांडी मार्च में गांधी जी के साथ अठहत्तर अन्य लोगों दो सौ इकतालीस मील की यात्रा छः अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तीस तक पूरी की थी। "यह महोत्सव भारत के लोगों को समर्पित है, जिन्होंने न केवल भारत को अपनी विकासवादी यात्रा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत दो. शून्य आत्मनिर्भर भारत को सक्रिय करने के दृष्टिकोण को सक्षम करने की शक्ति और क्षमता भी है। " - नरेंद्र मोदी "स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की तरह ही आजादी के बाद का पचहत्तर साल का सफर आम भारतीयों की मेहनत, नवोन्मेष, उद्यम का प्रतिबिंब है। देश हो या विदेश हम भारतीयों ने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया है। हमें अपने संविधान पर गर्व है। हमें अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं पर गर्व है। लोकतंत्र की जननी भारत आज भी लोकतंत्र को मजबूत कर आगे बढ़ रहा है। ज्ञान और विज्ञान से समृद्ध भारत मंगल से चंद्रमा पर अपनी छाप छोड़ रहा है। " - नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इकतीस अप्रैल को अपने मन की बात कार्यक्रम में हर घर तिरंगा अभियान की घोषणा की। पीएम मोदी ने भारतियों से अपील की कि इस वर्ष आज़ादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाए जा रहे पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तेरह अगस्त से लेकर पंद्रह अगस्त तक हर तिरंगा जरूर फहराए।
दो वर्ष पहले की तरह अब स्कूल सामान्य रूप से खुल गए हैं। ये दो साल शहर में रह रहे बच्चों के लिए बहुत उलझन भरे थे। उनका किसी दूसरे शहर, गांव आना-जाना प्रतिबंधित ही था। उनकी गतिविधियां घर के आसपास ही सीमित रही थीं। पिछले कुछ महीनों से जब बाजार खुलने लगे, तब बहुत से घरों में बच्चों की मांग के कारण अभिभावकों ने देशी-विदेशी नस्ल के कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, तोते, रंगीन मछलियां, चिड़ियां रखना शुरू किया। बच्चों में इन दिनों जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। हमारे बच्चों की भी लगातार मांग रही कि एक छोटा पिल्ला या बिल्ली रखें, लेकिन कई व्यावहारिक चुनौतियों के चलते अभी तक ऐसा नहीं हो सका। हमारी झिझक की एक वजह ग्रामीण पृष्ठभूमि भी हो सकती है, जहां उन दिनों हमारी प्राथमिकता में गाय, बैल, भैंस हुआ करते थे। हमारे बचपन में कुत्ते-बिल्ली घरों के बाहर ही रहते थे और उनको खटिया, चौकी, कुर्सी पर बिठाने का रिवाज नहीं था। कहते हैं न, जीवन में कभी सभी रास्ते बंद नहीं होते हैं। कोशिश करने से कोई न कोई रास्ता निकल आता है। तो, ऐसे ही हमारी बेटी ने एक घुमंतू बिल्ली के बच्चे से दोस्ती कर ली। वह उसके लिए कभी बिस्किट, तो कभी दूध ले जाने लगी। वह रोज शाम को उससे मिलने जाने लगी। उसका नाम उसने बेला रखा दिया। बेला दो अपार्टमेंट्स के बीच घूमती रहती थी, लेकिन शाम को वह भी एक नियत जगह पर कुहू का इंतजार करने लगी। हमारी बेटी को देखते ही दीवार से पूंछ हिलाते हुए, कूद कर उसके पैरों से चिपक जाती। बेला को जब वह दुलार लेती, उसकी पीठ सहला लेती, तब जाकर वह बिल्ली उसका लाया खाना खाती। कभी-कभी ऐसे में कुछ कुत्ते बेला की तरफ आने लगते। उनको देखते ही बेला झट से उछल कर दीवार के दूसरी तरफ कूद जाती। एक बार बेला मेरे पास आकर पैरों में लिपटने की कोशिश करने लगी, तो मैं झटके से पीछे हट गया। हमारी बिटिया को यह व्यवहार पसंद नहीं आया! बिल्लियों के साथ मेरा अपना अनुभव 'रक्षात्मक' रहा है। गांव में बिल्ली से भोजन, दूध-दही की सुरक्षा के लिए लोग 'सिकहुता' छींका रखते थे, जिसमें सामान ऐसे टांग दिया जाता था कि बिल्ली वहां तक पहुंच न सके। हमारे पुश्तैनी घर की रसोई में एक छोटी जाली वाली अलमारी होती थी, जिसमें दूध, दही आदि रख दिया जाता था। बिल्ली अलमारी न खोल पाती और उदास होकर चली जाती थी। गांव में, कभी-कभी बच्चे बिल्लियों के ऊपर पानी फेंक कर अपना मनोरंजन करते थे। हालांकि उन दिनों बिल्ली के बारे में कहा जाता था कि अगर सताने या मारने से वह मर गई तो दोषी व्यक्ति को उसके वजन बराबर सोने की बिल्ली दान करना पड़ेगा! ग्रामीण इलाके में बचपन बिताए अनेक लोगों की स्मृतियों में गाय, बैल, भैंस जैसे जानवर अधिक प्रभावी रहे हैं। गांव में बड़े-बड़े बैल रखे जाते थे, क्योंकि खेती में ट्रैक्टर का चलन बहुत सीमित था। बैलों के भी नाम होते थे, जैसे- भुअरा, डिलहवा, सफेदू आदि। परिवार के सदस्यों की तरह उनकी देखभाल होती थी। बैल अपने खेत-खलिहान और परिवार के सदस्यों को पहचानते थे। बच्चे उनकी ताकत के जोर से 'हेंगा' और बैलगाड़ी पर बैठने का आनंद लेते थे। बैल हल चलाने वाले की भाषा समझते थे। हफ्ते-दस दिन में बैलों को नहला कर उनकी सींगों पर तेल लगाया और उनको माला पहनाया जाता। गांव में गाय-बैलों को नियमित रूप से रात को रोटी दी जाती थी, जिसे 'कौरा' कहा जाता था। शायद यह एक तरह का आभार ज्ञापन भी रहा हो कि हम जो भोजन कर रहे हैं, उसमें उनकी मेहनत का महत्त्वपूर्ण योगदान है! अंतिम रोटी, कुत्ते को देने का रिवाज था। शहर में आकर अब गाय-बैल तो मिलते नहीं, लेकिन पूर्णबंदी के दौरान से हम चिड़ियों के लिए पानी-रोटी रखने लगे। बिटिया बेला को पाकर खुश थी। पर एक दिन शाम को बेला नहीं दिखी। उसको आवाज दिया, आसपास ढूंढ़ा, लेकिन वह नहीं मिली। मैं भी सुबह-शाम उधर जाता कि शायद वह दिख जाए। एक बिल्ली मिली, मैंने उसका फोटो ले लिया, लेकिन बेटी ने कहा, नहीं यह बेला नहीं है। वह थोड़ी उदास रहने लगी। बेला को लेकर अनिष्ट की आशंका घर करने लगी। मुझे भी थोड़ी उदासी हुई। दस-बारह दिन बेटी नीचे खेलने गई थी और दौड़ कर बताने आई कि बेला मिल गई! यह सुन कर संतोष हुआ। साथ ही, अपना बचपन और गाय-बैल न रहने से वीरान हो चुके खूंटे याद आए। घरों में बंद ताले आंखों के सामने प्रगट हो गए। यह सवाल जेहन में घूमता रहा कि हम लोग गांव से शहर तो आ गए, लेकिन क्या अब शहर में गांव ढूंढ़ रहे हैं?
दो वर्ष पहले की तरह अब स्कूल सामान्य रूप से खुल गए हैं। ये दो साल शहर में रह रहे बच्चों के लिए बहुत उलझन भरे थे। उनका किसी दूसरे शहर, गांव आना-जाना प्रतिबंधित ही था। उनकी गतिविधियां घर के आसपास ही सीमित रही थीं। पिछले कुछ महीनों से जब बाजार खुलने लगे, तब बहुत से घरों में बच्चों की मांग के कारण अभिभावकों ने देशी-विदेशी नस्ल के कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, तोते, रंगीन मछलियां, चिड़ियां रखना शुरू किया। बच्चों में इन दिनों जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। हमारे बच्चों की भी लगातार मांग रही कि एक छोटा पिल्ला या बिल्ली रखें, लेकिन कई व्यावहारिक चुनौतियों के चलते अभी तक ऐसा नहीं हो सका। हमारी झिझक की एक वजह ग्रामीण पृष्ठभूमि भी हो सकती है, जहां उन दिनों हमारी प्राथमिकता में गाय, बैल, भैंस हुआ करते थे। हमारे बचपन में कुत्ते-बिल्ली घरों के बाहर ही रहते थे और उनको खटिया, चौकी, कुर्सी पर बिठाने का रिवाज नहीं था। कहते हैं न, जीवन में कभी सभी रास्ते बंद नहीं होते हैं। कोशिश करने से कोई न कोई रास्ता निकल आता है। तो, ऐसे ही हमारी बेटी ने एक घुमंतू बिल्ली के बच्चे से दोस्ती कर ली। वह उसके लिए कभी बिस्किट, तो कभी दूध ले जाने लगी। वह रोज शाम को उससे मिलने जाने लगी। उसका नाम उसने बेला रखा दिया। बेला दो अपार्टमेंट्स के बीच घूमती रहती थी, लेकिन शाम को वह भी एक नियत जगह पर कुहू का इंतजार करने लगी। हमारी बेटी को देखते ही दीवार से पूंछ हिलाते हुए, कूद कर उसके पैरों से चिपक जाती। बेला को जब वह दुलार लेती, उसकी पीठ सहला लेती, तब जाकर वह बिल्ली उसका लाया खाना खाती। कभी-कभी ऐसे में कुछ कुत्ते बेला की तरफ आने लगते। उनको देखते ही बेला झट से उछल कर दीवार के दूसरी तरफ कूद जाती। एक बार बेला मेरे पास आकर पैरों में लिपटने की कोशिश करने लगी, तो मैं झटके से पीछे हट गया। हमारी बिटिया को यह व्यवहार पसंद नहीं आया! बिल्लियों के साथ मेरा अपना अनुभव 'रक्षात्मक' रहा है। गांव में बिल्ली से भोजन, दूध-दही की सुरक्षा के लिए लोग 'सिकहुता' छींका रखते थे, जिसमें सामान ऐसे टांग दिया जाता था कि बिल्ली वहां तक पहुंच न सके। हमारे पुश्तैनी घर की रसोई में एक छोटी जाली वाली अलमारी होती थी, जिसमें दूध, दही आदि रख दिया जाता था। बिल्ली अलमारी न खोल पाती और उदास होकर चली जाती थी। गांव में, कभी-कभी बच्चे बिल्लियों के ऊपर पानी फेंक कर अपना मनोरंजन करते थे। हालांकि उन दिनों बिल्ली के बारे में कहा जाता था कि अगर सताने या मारने से वह मर गई तो दोषी व्यक्ति को उसके वजन बराबर सोने की बिल्ली दान करना पड़ेगा! ग्रामीण इलाके में बचपन बिताए अनेक लोगों की स्मृतियों में गाय, बैल, भैंस जैसे जानवर अधिक प्रभावी रहे हैं। गांव में बड़े-बड़े बैल रखे जाते थे, क्योंकि खेती में ट्रैक्टर का चलन बहुत सीमित था। बैलों के भी नाम होते थे, जैसे- भुअरा, डिलहवा, सफेदू आदि। परिवार के सदस्यों की तरह उनकी देखभाल होती थी। बैल अपने खेत-खलिहान और परिवार के सदस्यों को पहचानते थे। बच्चे उनकी ताकत के जोर से 'हेंगा' और बैलगाड़ी पर बैठने का आनंद लेते थे। बैल हल चलाने वाले की भाषा समझते थे। हफ्ते-दस दिन में बैलों को नहला कर उनकी सींगों पर तेल लगाया और उनको माला पहनाया जाता। गांव में गाय-बैलों को नियमित रूप से रात को रोटी दी जाती थी, जिसे 'कौरा' कहा जाता था। शायद यह एक तरह का आभार ज्ञापन भी रहा हो कि हम जो भोजन कर रहे हैं, उसमें उनकी मेहनत का महत्त्वपूर्ण योगदान है! अंतिम रोटी, कुत्ते को देने का रिवाज था। शहर में आकर अब गाय-बैल तो मिलते नहीं, लेकिन पूर्णबंदी के दौरान से हम चिड़ियों के लिए पानी-रोटी रखने लगे। बिटिया बेला को पाकर खुश थी। पर एक दिन शाम को बेला नहीं दिखी। उसको आवाज दिया, आसपास ढूंढ़ा, लेकिन वह नहीं मिली। मैं भी सुबह-शाम उधर जाता कि शायद वह दिख जाए। एक बिल्ली मिली, मैंने उसका फोटो ले लिया, लेकिन बेटी ने कहा, नहीं यह बेला नहीं है। वह थोड़ी उदास रहने लगी। बेला को लेकर अनिष्ट की आशंका घर करने लगी। मुझे भी थोड़ी उदासी हुई। दस-बारह दिन बेटी नीचे खेलने गई थी और दौड़ कर बताने आई कि बेला मिल गई! यह सुन कर संतोष हुआ। साथ ही, अपना बचपन और गाय-बैल न रहने से वीरान हो चुके खूंटे याद आए। घरों में बंद ताले आंखों के सामने प्रगट हो गए। यह सवाल जेहन में घूमता रहा कि हम लोग गांव से शहर तो आ गए, लेकिन क्या अब शहर में गांव ढूंढ़ रहे हैं?
भारत ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डैशबोर्ड के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कोरोनोवायरस रोग के 89,706 नए मामले दर्ज किए, जो देश भर में 43,70,129 तक पहुंच गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मरने वालो की संख्या 1,115 से और बढ़ गयी, और टोटल संख्या 73,890 तक पहुंच गई। सक्रिय मामलों की संख्या में और वृद्धि हुई, पिछले 24 घंटों में 13,697 दर्ज किए गए। सक्रिय मामलों की कुल संख्या 8,97,394 है। सक्रिय मामलों की संख्या जल्द ही नौ लाख का आंकड़ा पार कर जाएगी। अधिक चिंताजनक स्थिति यह है कि इनमें से आधे मामले सिर्फ तीन राज्यों महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में हैं। भारत में अगस्त के महीने में मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है - पिछले महीने के तीसरे सप्ताह में, देश में रोजाना 4,024 सक्रिय मामले जुड़े। अब यह संख्या बढ़कर 14,273 दैनिक सक्रिय हो गई है। इस दर पर, भारत अगले सप्ताह तक एक लाख सक्रिय मामलों को देखेगा। सरकार द्वारा अधिक छूट दिए जाने के कारण चिंता है। मेट्रो सेवाएं चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू हो रही हैं, और आने वाले दिनों में फ़ुटफॉल बढ़ने की उम्मीद है, अधिकारियों को डर है कि मामलों की संख्या में और वृद्धि देखी जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के साथ उपरोक्त तीन राज्यों, देश में कोविद -19 के कारण लगभग 70 प्रतिशत मौतों का कारण है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि इन पांच राज्यों के अलावा, अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बीमारी के कारण 31.37 प्रतिशत मौतें होती हैं। Hand Sanitizer Alcohol Based 5 Litre can+Pack of 2(500 ML rub Spray Bottle) उन्होंने यह भी कहा कि उच्च मामलों के बावजूद, देश में प्रति मिलियन जनसंख्या पर कोविद19 मामलों की संख्या 3,102 है - जो दुनिया में सबसे कम है। भूषण ने कहा कि प्रति मिलियन जनसंख्या मामलों की संख्या के लिए वैश्विक औसत 3,527 है। उन्होंने यह भी कहा कि केस फैटलिटी रेट (सीएफआर) में लगातार गिरावट आ रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में यह 2.15 प्रतिशत था। भूषण ने कहा कि यह अब वैश्विक औसत 3.04 प्रतिशत की तुलना में 1.70 प्रतिशत है।
भारत ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डैशबोर्ड के अनुसार, पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोनोवायरस रोग के नवासी,सात सौ छः नए मामले दर्ज किए, जो देश भर में तैंतालीस,सत्तर,एक सौ उनतीस तक पहुंच गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मरने वालो की संख्या एक,एक सौ पंद्रह से और बढ़ गयी, और टोटल संख्या तिहत्तर,आठ सौ नब्बे तक पहुंच गई। सक्रिय मामलों की संख्या में और वृद्धि हुई, पिछले चौबीस घंटाटों में तेरह,छः सौ सत्तानवे दर्ज किए गए। सक्रिय मामलों की कुल संख्या आठ,सत्तानवे,तीन सौ चौरानवे है। सक्रिय मामलों की संख्या जल्द ही नौ लाख का आंकड़ा पार कर जाएगी। अधिक चिंताजनक स्थिति यह है कि इनमें से आधे मामले सिर्फ तीन राज्यों महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में हैं। भारत में अगस्त के महीने में मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है - पिछले महीने के तीसरे सप्ताह में, देश में रोजाना चार,चौबीस सक्रिय मामले जुड़े। अब यह संख्या बढ़कर चौदह,दो सौ तिहत्तर दैनिक सक्रिय हो गई है। इस दर पर, भारत अगले सप्ताह तक एक लाख सक्रिय मामलों को देखेगा। सरकार द्वारा अधिक छूट दिए जाने के कारण चिंता है। मेट्रो सेवाएं चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू हो रही हैं, और आने वाले दिनों में फ़ुटफॉल बढ़ने की उम्मीद है, अधिकारियों को डर है कि मामलों की संख्या में और वृद्धि देखी जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के साथ उपरोक्त तीन राज्यों, देश में कोविद -उन्नीस के कारण लगभग सत्तर प्रतिशत मौतों का कारण है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि इन पांच राज्यों के अलावा, अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बीमारी के कारण इकतीस.सैंतीस प्रतिशत मौतें होती हैं। Hand Sanitizer Alcohol Based पाँच Litre can+Pack of दो उन्होंने यह भी कहा कि उच्च मामलों के बावजूद, देश में प्रति मिलियन जनसंख्या पर कोविदउन्नीस मामलों की संख्या तीन,एक सौ दो है - जो दुनिया में सबसे कम है। भूषण ने कहा कि प्रति मिलियन जनसंख्या मामलों की संख्या के लिए वैश्विक औसत तीन,पाँच सौ सत्ताईस है। उन्होंने यह भी कहा कि केस फैटलिटी रेट में लगातार गिरावट आ रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में यह दो.पंद्रह प्रतिशत था। भूषण ने कहा कि यह अब वैश्विक औसत तीन.चार प्रतिशत की तुलना में एक.सत्तर प्रतिशत है।
Ceat Share Performance: शेयर बाज़ार में निवेश करना एक जोखिम भरा दांव हो सकता है लेकिन इससे भारी रिटर्न भी मिल सकता है. जहां पेशेवर व्यापारी छोटी अवधि के दांव पर अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं, वहीं व्यक्तिगत शौकिया व्यापारियों के लिए शेयर बाजार में दीर्घकालिक निवेश से अपार संपत्ति बन सकती है. आज हम आपको जिस स्टॉक के बारे में बताने जा रहे हैं, उसने अपने इन्वेस्टर्स को अच्छा खासा रिटर्न दिया है. बता दें कि इन्वेस्टर्स को कम समय में मोटा रिटर्न देने वाले शेयरों को मल्टीबैगर (Multibagger Stock) कहा जाता है. CEAT लिमिटेड ऐसा ही एक स्टॉक है जिसने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. CEAT एक मल्टीबैगर स्टॉक के रूप में उभरा है जिसने न केवल दीर्घकालिक वृद्धि दिखाई है बल्कि पिछले वर्ष में मजबूती से चढ़ा है. इस साल स्टॉक 120 प्रतिशत से अधिक ऊपर है. बता दें कि CEAT टायर बनाने वाली प्रमुख भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी है. 2024 में साल-दर-साल, CEAT स्टॉक लगभग 28 प्रतिशत बढ़ा है. हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों को काफी फायदा हुआ. 20 वर्षों में, स्टॉक की कीमत (4 जुलाई 2003) 39. 78 रुपये से बढ़कर (4 जुलाई 2023) 2042 रुपये पहुंच गई है. इसका मतलब है कि 20 साल पहले स्टॉक में किया गया सिर्फ 10,000 रुपये का निवेश अब लगभग 5. 13 लाख रुपये का हो गया होगा. यह 5,000 प्रतिशत से अधिक का बहुत बड़ा लाभ है. संस्थागत निवेशक सीएट के शेयर की भविष्य में और अधिक वृद्धि की उम्मीद दिखा रहे हैं. कंपनी 28 फीसदी हिस्सेदारी के साथ टू-व्हीलर सेगमेंट में मार्केट लीडर है. यात्री वाहन में इसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहनों में 7 प्रतिशत है. इसे क्रमशः 18-19 प्रतिशत और 11-12 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है. इसके अलावा, CEAT का लक्ष्य निर्यात राजस्व को 2,000 करोड़ रुपये से दोगुना कर 4000 करोड़ रुपये करना है. घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने 2,375 रुपये प्रति शेयर के लक्ष्य मूल्य के साथ CEAT पर 'बाए' रेटिंग बनाए रखी है. इसका मतलब है कि स्टॉक में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना के साथ अच्छा वादा है. .
Ceat Share Performance: शेयर बाज़ार में निवेश करना एक जोखिम भरा दांव हो सकता है लेकिन इससे भारी रिटर्न भी मिल सकता है. जहां पेशेवर व्यापारी छोटी अवधि के दांव पर अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं, वहीं व्यक्तिगत शौकिया व्यापारियों के लिए शेयर बाजार में दीर्घकालिक निवेश से अपार संपत्ति बन सकती है. आज हम आपको जिस स्टॉक के बारे में बताने जा रहे हैं, उसने अपने इन्वेस्टर्स को अच्छा खासा रिटर्न दिया है. बता दें कि इन्वेस्टर्स को कम समय में मोटा रिटर्न देने वाले शेयरों को मल्टीबैगर कहा जाता है. CEAT लिमिटेड ऐसा ही एक स्टॉक है जिसने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. CEAT एक मल्टीबैगर स्टॉक के रूप में उभरा है जिसने न केवल दीर्घकालिक वृद्धि दिखाई है बल्कि पिछले वर्ष में मजबूती से चढ़ा है. इस साल स्टॉक एक सौ बीस प्रतिशत से अधिक ऊपर है. बता दें कि CEAT टायर बनाने वाली प्रमुख भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी है. दो हज़ार चौबीस में साल-दर-साल, CEAT स्टॉक लगभग अट्ठाईस प्रतिशत बढ़ा है. हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों को काफी फायदा हुआ. बीस वर्षों में, स्टॉक की कीमत उनतालीस. अठहत्तर रुपयापये से बढ़कर दो हज़ार बयालीस रुपयापये पहुंच गई है. इसका मतलब है कि बीस साल पहले स्टॉक में किया गया सिर्फ दस,शून्य रुपयापये का निवेश अब लगभग पाँच. तेरह लाख रुपये का हो गया होगा. यह पाँच,शून्य प्रतिशत से अधिक का बहुत बड़ा लाभ है. संस्थागत निवेशक सीएट के शेयर की भविष्य में और अधिक वृद्धि की उम्मीद दिखा रहे हैं. कंपनी अट्ठाईस फीसदी हिस्सेदारी के साथ टू-व्हीलर सेगमेंट में मार्केट लीडर है. यात्री वाहन में इसकी हिस्सेदारी पंद्रह प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहनों में सात प्रतिशत है. इसे क्रमशः अट्ठारह-उन्नीस प्रतिशत और ग्यारह-बारह प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है. इसके अलावा, CEAT का लक्ष्य निर्यात राजस्व को दो,शून्य करोड़ रुपये से दोगुना कर चार हज़ार करोड़ रुपये करना है. घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने दो,तीन सौ पचहत्तर रुपयापये प्रति शेयर के लक्ष्य मूल्य के साथ CEAT पर 'बाए' रेटिंग बनाए रखी है. इसका मतलब है कि स्टॉक में लगभग पंद्रह प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना के साथ अच्छा वादा है. .
भगवान् श्रीकृष्णमें था । 'भगवान् मेरे परम पति हैं - यह स्वकीय माधुर्यभाव है; जैसे भगवान् श्रीकृष्ण में रुक्मिणीजीका था । 'भगवान् मेरे परम प्रियतम और सखा है' - यह परकीय विशुद्ध माधुर्यभाव है, जैसे राधाजी और गोपियोंका श्रीकृष्णमें था । अतः उपर्युक्त किसी भी भावसे भावित होकर हमें भगवान्के साथ अपना सम्बन्ध जोड़ लेना चाहिये । इस प्रकार परम श्रद्धा और भक्तिपूर्वक भगवान्के साथ किसी भी प्रकारका आत्मीय सम्बन्ध स्थिर हो जानेपर भगवान्में अनन्यप्रेम हो जाता है, फिर उसका किसी भी समय भगवान् से वियोग होना सम्भव नही; क्योंकि मनुष्यका जिस वस्तुके साथ सच्चा अपनापन होता है, उसमे अटूट अनुराग हो जाता है तथा वह वस्तु उसके हृदयसे कभी दूर नहीं होती; और उससे भिन्न वस्तुसे उसका चित्त स्वत. ही रागरहित हो जाता है । इसलिये उस साधकके चित्तमें भगवान्की प्रेमपूर्वक स्मृति निरन्तर बनी रहती है, जिसके फलस्वरूप उसको बहुत शीघ्र भगवान्की प्राप्ति हो जाती है । अतएव हमे उपर्युक्त प्रकारसे भगवान् से अनन्यप्रेम करना चाहिये तथा चातक ( पपीहे ) की भाँति अटूट नियम और एकनिष्ठ भक्ति रखते हुए भगवान्के दर्शनके लिये आतुर होना चाहिये । चातक अत्यन्त प्यासा होनेपर भी जमीनपर पड़े हुए जलको कभी नहीं छूता । आकाशमें बादलोंकी ओर देख-देखकर 'पीड-पीड' करता रहता है । वह जलहीन बादलको देखकर भी 'पीउ-पीउ' करने लगता है और उससे जलकी आशा लगाये रहता है । यदि बादल ओले भी बरसाता है और उससे उसके पंख भी टूट जाते हैं तो भी वह वर्षा - के जलके लिये व्याकुल हुआ बादलकी ओर ही ताकता रहता है, उसे अपने पंख टूटनेकी भी परवा नहीं रहती । श्री तुलसीदासजी कहते हैंउपल बरषि गरजत तरजि डारत कुलिस कठोर । चितव कि चातक मेघ तजि कबहुँ दूसरी ओर ॥ 'मेघ कड़क-कड़ककर गरजता हुआ ओले बरसाता है और कठोर विजली भी गिरा देता है, इतनेपर भी प्रेमी पपीहा मेघको छोड़कर क्या कभी किसी दूसरी ओर ताकता है ? " इसलियेजो धन बरसै समय सिर जौं भरि जनम उदास । तुलसी या चित चातकहि तऊ तिहारी आस । 'तुलसीदासजी कहते हैं कि हे रामरूपी मेघ ! चाहे तुम ठीक समयपर वरसो ( कृपाकी वृष्टि करो ) और चाहे जन्मभर उदासीन रहो, - कभी न वरसो, परंतु इस चित्तरूपी चातकको तो तुम्हारी ही आशा है ।" इसी प्रकार हमें भी भगवान्के दर्शनकी उत्कण्ठा, इच्छा और प्रतिक्षण आशाप्रतीक्षा करनी चाहिये । चाहे कितनी ही आपत्तियाँ आयें, चातकके एकमात्र वर्षाके लिये व्याकुल रहनेकी भाँति निर्भय होकर एकमात्र भगवान्के दर्शनकी ही लालसा रक्खें, अन्य किसीकी नहीं । मछली जिस प्रकार जलके बिना व्याकुल हो जाती है । थोड़ी देर भी जल न मिऴनेपर वह तड़प-तड़पकर प्राण त्याग कर देती है, इसी तरह भगवान्की विरह-व्याकुलतामे हमारी दशा हो जानी चाहिये । भगवान् के विरहकी व्याकुलतामे दर्शनकी अभिलाषा अत्यन्त तीव्र हो
भगवान् श्रीकृष्णमें था । 'भगवान् मेरे परम पति हैं - यह स्वकीय माधुर्यभाव है; जैसे भगवान् श्रीकृष्ण में रुक्मिणीजीका था । 'भगवान् मेरे परम प्रियतम और सखा है' - यह परकीय विशुद्ध माधुर्यभाव है, जैसे राधाजी और गोपियोंका श्रीकृष्णमें था । अतः उपर्युक्त किसी भी भावसे भावित होकर हमें भगवान्के साथ अपना सम्बन्ध जोड़ लेना चाहिये । इस प्रकार परम श्रद्धा और भक्तिपूर्वक भगवान्के साथ किसी भी प्रकारका आत्मीय सम्बन्ध स्थिर हो जानेपर भगवान्में अनन्यप्रेम हो जाता है, फिर उसका किसी भी समय भगवान् से वियोग होना सम्भव नही; क्योंकि मनुष्यका जिस वस्तुके साथ सच्चा अपनापन होता है, उसमे अटूट अनुराग हो जाता है तथा वह वस्तु उसके हृदयसे कभी दूर नहीं होती; और उससे भिन्न वस्तुसे उसका चित्त स्वत. ही रागरहित हो जाता है । इसलिये उस साधकके चित्तमें भगवान्की प्रेमपूर्वक स्मृति निरन्तर बनी रहती है, जिसके फलस्वरूप उसको बहुत शीघ्र भगवान्की प्राप्ति हो जाती है । अतएव हमे उपर्युक्त प्रकारसे भगवान् से अनन्यप्रेम करना चाहिये तथा चातक की भाँति अटूट नियम और एकनिष्ठ भक्ति रखते हुए भगवान्के दर्शनके लिये आतुर होना चाहिये । चातक अत्यन्त प्यासा होनेपर भी जमीनपर पड़े हुए जलको कभी नहीं छूता । आकाशमें बादलोंकी ओर देख-देखकर 'पीड-पीड' करता रहता है । वह जलहीन बादलको देखकर भी 'पीउ-पीउ' करने लगता है और उससे जलकी आशा लगाये रहता है । यदि बादल ओले भी बरसाता है और उससे उसके पंख भी टूट जाते हैं तो भी वह वर्षा - के जलके लिये व्याकुल हुआ बादलकी ओर ही ताकता रहता है, उसे अपने पंख टूटनेकी भी परवा नहीं रहती । श्री तुलसीदासजी कहते हैंउपल बरषि गरजत तरजि डारत कुलिस कठोर । चितव कि चातक मेघ तजि कबहुँ दूसरी ओर ॥ 'मेघ कड़क-कड़ककर गरजता हुआ ओले बरसाता है और कठोर विजली भी गिरा देता है, इतनेपर भी प्रेमी पपीहा मेघको छोड़कर क्या कभी किसी दूसरी ओर ताकता है ? " इसलियेजो धन बरसै समय सिर जौं भरि जनम उदास । तुलसी या चित चातकहि तऊ तिहारी आस । 'तुलसीदासजी कहते हैं कि हे रामरूपी मेघ ! चाहे तुम ठीक समयपर वरसो और चाहे जन्मभर उदासीन रहो, - कभी न वरसो, परंतु इस चित्तरूपी चातकको तो तुम्हारी ही आशा है ।" इसी प्रकार हमें भी भगवान्के दर्शनकी उत्कण्ठा, इच्छा और प्रतिक्षण आशाप्रतीक्षा करनी चाहिये । चाहे कितनी ही आपत्तियाँ आयें, चातकके एकमात्र वर्षाके लिये व्याकुल रहनेकी भाँति निर्भय होकर एकमात्र भगवान्के दर्शनकी ही लालसा रक्खें, अन्य किसीकी नहीं । मछली जिस प्रकार जलके बिना व्याकुल हो जाती है । थोड़ी देर भी जल न मिऴनेपर वह तड़प-तड़पकर प्राण त्याग कर देती है, इसी तरह भगवान्की विरह-व्याकुलतामे हमारी दशा हो जानी चाहिये । भगवान् के विरहकी व्याकुलतामे दर्शनकी अभिलाषा अत्यन्त तीव्र हो
शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर भर्ती निकाली हैं। ये भर्तियां श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के लिए निकाली गई हैं। इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 5 मार्च से शुरू हो गई है और आवेदन की अंतिम तिथि 20 मार्च निर्धारित की गई है। किन विषयों के लिए कितने पदों पर होगी भर्ती? शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए? असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) परीक्षा में सफल होना भी आवश्यक है। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने विदेश से Ph. D. डिग्री हासिल की है, वह भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क कितना जमा करना होगा? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा, वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को कोई आवेदन शुल्क नहीं देना होगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर आवेदन कैसे करें?
शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर भर्ती निकाली हैं। ये भर्तियां श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के लिए निकाली गई हैं। इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया पाँच मार्च से शुरू हो गई है और आवेदन की अंतिम तिथि बीस मार्च निर्धारित की गई है। किन विषयों के लिए कितने पदों पर होगी भर्ती? शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए? असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में पचपन प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद परीक्षा में सफल होना भी आवश्यक है। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने विदेश से Ph. D. डिग्री हासिल की है, वह भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क कितना जमा करना होगा? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों को पाँच सौ रुपयापये आवेदन शुल्क जमा करना होगा, वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को कोई आवेदन शुल्क नहीं देना होगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर आवेदन कैसे करें?
धीरज दुबे,कोरबा. युवा खून जब उबाल मारता है तो बदलाव तय है. डॉयलाग थोड़ा फिल्मी है, लेकिन बात है सोलह आने सच. कोरबा की राजनीति में बदलाव लाने की लहर के लिए अपने पक्ष में माहौल बनाने व अपने प्रत्याशी होने के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताने प्रचार के अभिनव प्रयोग उम्मीदवार कर रहे हैं. ताम झाम वाले व प्रचार के परंपरागत तरीकों से पृथक इस बार नई शुरुआत फ़्लैश मॉब के रूप में कोरबा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी विकास महतो ने की है. चुनाव के दौर में रैलियां, भाषण, पदयात्रा, रोड शो, ये सब तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन युवा प्रत्याशियों को ये अब रास नहीं आते. युवा उम्मीदवारों को नए ट्रेंड पता हैं जो जनता का ध्यान उसकी तरफ खींचते ही हैं, इसलिए उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए फ्लैश मॉब जैसे ट्रेंडी स्टाइल को अपनाया है. फ्लैश मॉब सोशल मैसेज देने का यंग जेनरेशन का अपना स्टाइल है जहां अचानक कुछ लोग एकजुट होकर गाने-बजाने या नाटक करने लगते हैं और अपनी बात कहकर फिर अलग हो जाते हैं. जिस तेजी से ये भीड़ में अचानक आते हैं, लोग भी हैरत या उत्सुकता से इन्हें सुनने पर मजबूर हो ही जाते हैं. महानगरीय शैली की तर्ज पर कोरबा में इसे चुनाव-प्रचार के लिए खूब उपयोग किया जा रहा हैं. वैसे भी राजनीति अब खालिस सियासी जोड़तोड़ भर नही है. दांव पेचों के अलावा तकनीक को इसमें शामिल किए बिना नहीं रह सकते. अर्थशास्त्र में एमए किए 42 वर्षीय विकास महतो की टीम में भी सारे नए चेहरे ही हैं. युवा सोच और तकनीकि का चुनाव प्रचार के नए तरीके के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो जनता से सीधे कनेक्ट करते हैं. मोबाइल, इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट का राजनीति में अब जमकर इस्तेमाल हो रहा है फिर भी ये युवा जानते हैं कि जनता से सीधी बात भी उतनी ही अहम है. यही वजह है कि विकास महतो जनसंपर्क में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. विकास के अलावा नई सोच के साथ मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी विशाल केलकर दिल्ली से नुक्कड़ नाटक की टीम बुला कर अपना प्रचार कर रहे हैं तो युवा प्रत्याशी अमरनाथ अग्रवाल जादूगर के जादू का सहारा ले रहे हैं. राजनीति रंग बदलती है सब जानतें हैं, लेकिन राजनीति का ढंग बहुत कम ही बदलता है और इसी ढर्रे की राजनीति को बदलने के लिए युवा नेता कोशिश में जुटे हैं. यह भी सच है कि परम्परा को भी साथ लेकर चलना जरूरी है.
धीरज दुबे,कोरबा. युवा खून जब उबाल मारता है तो बदलाव तय है. डॉयलाग थोड़ा फिल्मी है, लेकिन बात है सोलह आने सच. कोरबा की राजनीति में बदलाव लाने की लहर के लिए अपने पक्ष में माहौल बनाने व अपने प्रत्याशी होने के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताने प्रचार के अभिनव प्रयोग उम्मीदवार कर रहे हैं. ताम झाम वाले व प्रचार के परंपरागत तरीकों से पृथक इस बार नई शुरुआत फ़्लैश मॉब के रूप में कोरबा विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी विकास महतो ने की है. चुनाव के दौर में रैलियां, भाषण, पदयात्रा, रोड शो, ये सब तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन युवा प्रत्याशियों को ये अब रास नहीं आते. युवा उम्मीदवारों को नए ट्रेंड पता हैं जो जनता का ध्यान उसकी तरफ खींचते ही हैं, इसलिए उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए फ्लैश मॉब जैसे ट्रेंडी स्टाइल को अपनाया है. फ्लैश मॉब सोशल मैसेज देने का यंग जेनरेशन का अपना स्टाइल है जहां अचानक कुछ लोग एकजुट होकर गाने-बजाने या नाटक करने लगते हैं और अपनी बात कहकर फिर अलग हो जाते हैं. जिस तेजी से ये भीड़ में अचानक आते हैं, लोग भी हैरत या उत्सुकता से इन्हें सुनने पर मजबूर हो ही जाते हैं. महानगरीय शैली की तर्ज पर कोरबा में इसे चुनाव-प्रचार के लिए खूब उपयोग किया जा रहा हैं. वैसे भी राजनीति अब खालिस सियासी जोड़तोड़ भर नही है. दांव पेचों के अलावा तकनीक को इसमें शामिल किए बिना नहीं रह सकते. अर्थशास्त्र में एमए किए बयालीस वर्षीय विकास महतो की टीम में भी सारे नए चेहरे ही हैं. युवा सोच और तकनीकि का चुनाव प्रचार के नए तरीके के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो जनता से सीधे कनेक्ट करते हैं. मोबाइल, इंटरनेट, सोशल नेटवर्किंग साइट का राजनीति में अब जमकर इस्तेमाल हो रहा है फिर भी ये युवा जानते हैं कि जनता से सीधी बात भी उतनी ही अहम है. यही वजह है कि विकास महतो जनसंपर्क में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. विकास के अलावा नई सोच के साथ मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी विशाल केलकर दिल्ली से नुक्कड़ नाटक की टीम बुला कर अपना प्रचार कर रहे हैं तो युवा प्रत्याशी अमरनाथ अग्रवाल जादूगर के जादू का सहारा ले रहे हैं. राजनीति रंग बदलती है सब जानतें हैं, लेकिन राजनीति का ढंग बहुत कम ही बदलता है और इसी ढर्रे की राजनीति को बदलने के लिए युवा नेता कोशिश में जुटे हैं. यह भी सच है कि परम्परा को भी साथ लेकर चलना जरूरी है.
तिरूवनंतपुरम : भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने कहा है कि पिछले साल इंडियन प्रीमियर लीग में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा की वजह से उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट पर अधिक फोकस किया जिसका फायदा अब मिल रहा है। सिराज ने श्रीलंका के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे में 10 ओवर में 32 रन देकर चार विकेट लिए जिससे श्रीलंकाई टीम 22 ओवर में 73 रन पर आउट हो गई और भारत ने 317 रन से जीत दर्ज की। पिछले आईपीएल सत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर द्वारा टीम में बरकरार रखे गए सिराज ने 15 मैचों में सिर्फ 9 विकेट लिए थे। सिराज ने कहा कि बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने आईपीएल में नाकामी के बाद सफेद गेंद के क्रिकेट में लाइन और लैंग्थ पर फोकस किया। उन्होंने कहा, 'जब आईपीएल सत्र खराब गया तो मैने सफेद गेंद के क्रिकेट पर फोकस करना शुरू किया। मैने इस पर मेहनत की और मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। मैने अपने प्रदर्शन की चिंता करना छोड़ दिया। सिर्फ लाइन और लैंग्थ पर फोकस रखा। ' सिराज ने श्रीलंका के खिलाफ तीन वनडे में उन्होंने 9 विकेट लिए। उन्होंने कहा कि जब स्वाभाविक इनस्विंग नहीं मिल रही थी तो उन्होंने गेंद को आउटस्विंग कराना शुरू किया। उन्होंने कहा, 'इनस्विंग मुझे स्वाभाविक तौर पर मिलती थी लेकिन जब यह मिलना बंद हो गई तो मैने आउटस्विंग पर काम किया। इसे प्रभावी होने में समय लगा लेकिन इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। नेट पर जितनी ज्यादा गेंदबाजी की, उतना ही बेहतर होता गया। मैने आईपीएल में डेल स्टेन से भी इस पर बात की थी जिससे काफी मदद मिली। '
तिरूवनंतपुरम : भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने कहा है कि पिछले साल इंडियन प्रीमियर लीग में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा की वजह से उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट पर अधिक फोकस किया जिसका फायदा अब मिल रहा है। सिराज ने श्रीलंका के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे में दस ओवर में बत्तीस रन देकर चार विकेट लिए जिससे श्रीलंकाई टीम बाईस ओवर में तिहत्तर रन पर आउट हो गई और भारत ने तीन सौ सत्रह रन से जीत दर्ज की। पिछले आईपीएल सत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर द्वारा टीम में बरकरार रखे गए सिराज ने पंद्रह मैचों में सिर्फ नौ विकेट लिए थे। सिराज ने कहा कि बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने आईपीएल में नाकामी के बाद सफेद गेंद के क्रिकेट में लाइन और लैंग्थ पर फोकस किया। उन्होंने कहा, 'जब आईपीएल सत्र खराब गया तो मैने सफेद गेंद के क्रिकेट पर फोकस करना शुरू किया। मैने इस पर मेहनत की और मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। मैने अपने प्रदर्शन की चिंता करना छोड़ दिया। सिर्फ लाइन और लैंग्थ पर फोकस रखा। ' सिराज ने श्रीलंका के खिलाफ तीन वनडे में उन्होंने नौ विकेट लिए। उन्होंने कहा कि जब स्वाभाविक इनस्विंग नहीं मिल रही थी तो उन्होंने गेंद को आउटस्विंग कराना शुरू किया। उन्होंने कहा, 'इनस्विंग मुझे स्वाभाविक तौर पर मिलती थी लेकिन जब यह मिलना बंद हो गई तो मैने आउटस्विंग पर काम किया। इसे प्रभावी होने में समय लगा लेकिन इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। नेट पर जितनी ज्यादा गेंदबाजी की, उतना ही बेहतर होता गया। मैने आईपीएल में डेल स्टेन से भी इस पर बात की थी जिससे काफी मदद मिली। '
वर्तमान में, हर दूसरे घर एक इलेक्ट्रिक केतली है। रसोई उपकरणों की इस तरह की पहले से ही काफी परिचित, यहां तक कि आम हो गया है। हालांकि, यह सही मॉडल का चयन करने के लिए आसान है? आज भी, उच्च प्रौद्योगिकी के युग में, यह काफी मुश्किल एक अच्छा इलेक्ट्रिक केतली मिल रहा है। फिलिप्स - कुछ ब्रांडों कि अपने उत्पादों की उत्तम गुणवत्ता की गारंटी में से एक। कंपनी रसोई उपकरणों के निर्माण में केवल सबसे सुरक्षित सामग्री का उपयोग करता है, तो आप यकीन है कि एक सौ प्रतिशत है कि यह मानव स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता हो सकता है। इस ब्रांड dummies के कुछ लोकप्रिय मॉडल पर विचार करें। इलेक्ट्रिक केटल फिलिप्स HD 9300 काफी कम कीमत और उच्च गुणवत्ता के संयोजन के अन्य उपकरणों की तुलना में बाहर खड़ा है। 2400 W, जिससे पानी की 1. 5 लीटर समय की एक अपेक्षाकृत कम समय में उबला हुआ जा सकता है - हीटिंग तत्व की शक्ति। सैम एक छिपा हीटिंग तत्व प्रकार है। एक फ्लास्क के लिए प्रैक्टिकल स्टैंड, आप किसी भी दिशा, और एक विशेष उस पर स्थित डिब्बे में उसे घुमाने के लिए अनुमति देता है सुरक्षित रूप से केबल खाल, आकस्मिक पानी प्रवेश से यह रक्षा। उबलने बटन स्वतः बंद सक्रिय है, तो इस तकनीक को नजरअंदाज कर दिया और अन्य बातें करते जा सकता है। केटल फिलिप्स HD9300 एक मूल डिजाइन किसी भी रसोई घर के इंटीरियर के लिए एकदम सही है कि नहीं है। चढ़ाना सामग्री एक पर्याप्त मजबूत प्लास्टिक, जो जब गर्म नहीं स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव की वजह से विषाक्त पदार्थ का उत्सर्जन नहीं करता है से बनता है। टोंटी पर पानी छानने के लिए एक ग्रिड है। सुविधा के लिए, तरल की कुप्पी पैमाने मात्रा की ओर। इस मॉडल का नुकसान यह है कि कोई प्रदर्शन और तापमान नियंत्रक को छोड़कर शामिल हैं। दुकानों में केटल कीमत 1200 से 2500 रूबल है। आप उबलते पानी के लिए एक उपकरण का चयन करते हैं, के लिए HD 4646/00 मॉडल पर ध्यान देना। इन केटल्स फिलिप्स (मालिकों के केवल सकारात्मक समीक्षा) पूरी तरह से एक सरल और एक ही समय में मूल डिजाइन गठबंधन। धन्यवाद डिजाइन फैसले को, वे किसी भी इंटीरियर के लिए एक महान सजावट प्रदर्शन किया जाएगा। फ्लैट हीटिंग तत्व सेकंड में छुपा प्रकार 1,5 लीटर तरल फोड़े। बिजली की खपत - 2400 वाट। आवरण केतली एक गर्मी के लिए प्रतिरोधी गुणवत्ता पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक के होते हैं। तकनीकी उपकरण निम्नलिखित कार्यों के होते हैंः - बेकार शामिल किए जाने से सुरक्षा; - ढक्कन खोलने मनमाने ढंग से लॉक करें। जब एक परिवार छोटे बच्चों है अंतिम विकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। आवास की तरफ पैमाने कि केतली में पानी की मात्रा का आकलन करता है। नाक पर एक फिल्टर, उसे करने के लिए धन्यवाद, मैल कप में नहीं आता है। तार की लंबाई 0. 75 मीटर की दूरी पर यह आप आसानी से रसोई घर में केतली का उपयोग करने की अनुमति देता है,। वहाँ पावर कॉर्ड के लिए एक अतिरिक्त डिब्बे है। इस मॉडल की कीमत 1400 से 2500 रूबल के बीच है। केटल फिलिप्स HD 4681 एक मूल रंगीन डिजाइन है। विस्थापन को समायोजित पानी 1. 7 लीटर है। बिजली की खपत 2400 वाट। शरीर उच्च गुणवत्ता प्लास्टिक से बनाया गया है। बंद स्टेनलेस स्टील सर्पिल जल्दी से एक फोड़ा करने के लिए पानी ला सकता है। सुविधाजनक स्टैंड किसी भी स्थिति में केतली डाल करने के लिए अनुमति देता है। हीटिंग का तार स्टेनलेस स्टील से बना है। केतली कार्यों एक ऑडियो संकेत और उबलते में अक्षम सूचक शामिल हैं। पानी निस्पंदन जाल के लिए कुप्पी की वर्तमान टोंटी पर। केटल कीमत 1500 से 3000 रूबल के लिए सीमा। निर्माता फिलिप्स HD 4678/40 बहुमुखी प्रतिभा, ergonomics और असामान्य दिलचस्प डिजाइन अलग है। आसान भरने के लिए इस श्रृंखला में पानी के साथ केतली एक hinged ढक्कन एक बड़े कोण के लिए खुलती है प्रदान की है। शरीर के दोनों किनारों पर तरल पदार्थ की मात्रा का एक संकेतक। पानी फिल्टर शुद्ध के लिए डबल फिल्टर कुप्पी के गुणात्मक सामग्री की अनुमति देता है। केतली वहाँ एक कवर ताला प्रदान की जाती है के सुरक्षित उपयोग के लिए, रहने-शांत दीवार, पानी और चार चरण प्रणाली के बिना सर्पिल, सुरक्षा स्विचिंग बंद कर दिया। कुप्पी की मात्रा 1. 2 लीटर था। गर्मी प्रतिरोधी प्लास्टिक क्रीम रंग से बना केतली आवरण। पावर - 2400 वाट। 2,500 से 3,000 रूबल से मूल्य श्रेणी। केटल फिलिप्स HD 9310/93 2400 वाट की एक शक्ति है। क्षमता - 1. 6 लीटर। मामले उच्च गुणवत्ता गर्मी प्रतिरोधी प्लास्टिक से बना है। इसकी ख़ास विशेषता - एक असामान्य डिजाइन। यह इस तथ्य में निहित है कि अपनी काली शरीर है, जो मात्रा पैमाने के आसपास आवास के किनारों पर नीले रंग के मूल ड्राइंग से पूरित है में फिलिप्स के अन्य मॉडलों, के विपरीत है। बंद सर्पिल स्वास्थ्य को कोई नुकसान के बिना गर्मी और मिनट की बात में फोड़ा पानी के लिए अनुमति देता है और पहनने के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। इस्तेमाल में आसानी भी व्यापक रूप से शॉर्ट सर्किट के खिलाफ संरक्षण और एक मनमाना उबलते पानी, और क्षमता न केवल कवर के माध्यम से, लेकिन यह भी टोंटी के माध्यम से पानी के साथ केतली भरने के लिए ढक्कन, 4-घटक सुरक्षा प्रणाली खोलने केतली सूचक काम डिब्बे की हड्डी में प्रदान की जाती हैं के लिए। मापन पैमाने केतली शरीर के दोनों किनारों पर स्थापित किया जाएगा। 2500 रूबल - इस मॉडल की कीमत 1500।
वर्तमान में, हर दूसरे घर एक इलेक्ट्रिक केतली है। रसोई उपकरणों की इस तरह की पहले से ही काफी परिचित, यहां तक कि आम हो गया है। हालांकि, यह सही मॉडल का चयन करने के लिए आसान है? आज भी, उच्च प्रौद्योगिकी के युग में, यह काफी मुश्किल एक अच्छा इलेक्ट्रिक केतली मिल रहा है। फिलिप्स - कुछ ब्रांडों कि अपने उत्पादों की उत्तम गुणवत्ता की गारंटी में से एक। कंपनी रसोई उपकरणों के निर्माण में केवल सबसे सुरक्षित सामग्री का उपयोग करता है, तो आप यकीन है कि एक सौ प्रतिशत है कि यह मानव स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता हो सकता है। इस ब्रांड dummies के कुछ लोकप्रिय मॉडल पर विचार करें। इलेक्ट्रिक केटल फिलिप्स HD नौ हज़ार तीन सौ काफी कम कीमत और उच्च गुणवत्ता के संयोजन के अन्य उपकरणों की तुलना में बाहर खड़ा है। दो हज़ार चार सौ वाट, जिससे पानी की एक. पाँच लीटरटर समय की एक अपेक्षाकृत कम समय में उबला हुआ जा सकता है - हीटिंग तत्व की शक्ति। सैम एक छिपा हीटिंग तत्व प्रकार है। एक फ्लास्क के लिए प्रैक्टिकल स्टैंड, आप किसी भी दिशा, और एक विशेष उस पर स्थित डिब्बे में उसे घुमाने के लिए अनुमति देता है सुरक्षित रूप से केबल खाल, आकस्मिक पानी प्रवेश से यह रक्षा। उबलने बटन स्वतः बंद सक्रिय है, तो इस तकनीक को नजरअंदाज कर दिया और अन्य बातें करते जा सकता है। केटल फिलिप्स HDनौ हज़ार तीन सौ एक मूल डिजाइन किसी भी रसोई घर के इंटीरियर के लिए एकदम सही है कि नहीं है। चढ़ाना सामग्री एक पर्याप्त मजबूत प्लास्टिक, जो जब गर्म नहीं स्वास्थ्य के प्रतिकूल प्रभाव की वजह से विषाक्त पदार्थ का उत्सर्जन नहीं करता है से बनता है। टोंटी पर पानी छानने के लिए एक ग्रिड है। सुविधा के लिए, तरल की कुप्पी पैमाने मात्रा की ओर। इस मॉडल का नुकसान यह है कि कोई प्रदर्शन और तापमान नियंत्रक को छोड़कर शामिल हैं। दुकानों में केटल कीमत एक हज़ार दो सौ से दो हज़ार पाँच सौ रूबल है। आप उबलते पानी के लिए एक उपकरण का चयन करते हैं, के लिए HD चार हज़ार छः सौ छियालीस/शून्य मॉडल पर ध्यान देना। इन केटल्स फिलिप्स पूरी तरह से एक सरल और एक ही समय में मूल डिजाइन गठबंधन। धन्यवाद डिजाइन फैसले को, वे किसी भी इंटीरियर के लिए एक महान सजावट प्रदर्शन किया जाएगा। फ्लैट हीटिंग तत्व सेकंड में छुपा प्रकार एक,पाँच लीटरटर तरल फोड़े। बिजली की खपत - दो हज़ार चार सौ वाट। आवरण केतली एक गर्मी के लिए प्रतिरोधी गुणवत्ता पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक के होते हैं। तकनीकी उपकरण निम्नलिखित कार्यों के होते हैंः - बेकार शामिल किए जाने से सुरक्षा; - ढक्कन खोलने मनमाने ढंग से लॉक करें। जब एक परिवार छोटे बच्चों है अंतिम विकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। आवास की तरफ पैमाने कि केतली में पानी की मात्रा का आकलन करता है। नाक पर एक फिल्टर, उसे करने के लिए धन्यवाद, मैल कप में नहीं आता है। तार की लंबाई शून्य. पचहत्तर मीटर की दूरी पर यह आप आसानी से रसोई घर में केतली का उपयोग करने की अनुमति देता है,। वहाँ पावर कॉर्ड के लिए एक अतिरिक्त डिब्बे है। इस मॉडल की कीमत एक हज़ार चार सौ से दो हज़ार पाँच सौ रूबल के बीच है। केटल फिलिप्स HD चार हज़ार छः सौ इक्यासी एक मूल रंगीन डिजाइन है। विस्थापन को समायोजित पानी एक. सात लीटरटर है। बिजली की खपत दो हज़ार चार सौ वाट। शरीर उच्च गुणवत्ता प्लास्टिक से बनाया गया है। बंद स्टेनलेस स्टील सर्पिल जल्दी से एक फोड़ा करने के लिए पानी ला सकता है। सुविधाजनक स्टैंड किसी भी स्थिति में केतली डाल करने के लिए अनुमति देता है। हीटिंग का तार स्टेनलेस स्टील से बना है। केतली कार्यों एक ऑडियो संकेत और उबलते में अक्षम सूचक शामिल हैं। पानी निस्पंदन जाल के लिए कुप्पी की वर्तमान टोंटी पर। केटल कीमत एक हज़ार पाँच सौ से तीन हज़ार रूबल के लिए सीमा। निर्माता फिलिप्स HD चार हज़ार छः सौ अठहत्तर/चालीस बहुमुखी प्रतिभा, ergonomics और असामान्य दिलचस्प डिजाइन अलग है। आसान भरने के लिए इस श्रृंखला में पानी के साथ केतली एक hinged ढक्कन एक बड़े कोण के लिए खुलती है प्रदान की है। शरीर के दोनों किनारों पर तरल पदार्थ की मात्रा का एक संकेतक। पानी फिल्टर शुद्ध के लिए डबल फिल्टर कुप्पी के गुणात्मक सामग्री की अनुमति देता है। केतली वहाँ एक कवर ताला प्रदान की जाती है के सुरक्षित उपयोग के लिए, रहने-शांत दीवार, पानी और चार चरण प्रणाली के बिना सर्पिल, सुरक्षा स्विचिंग बंद कर दिया। कुप्पी की मात्रा एक. दो लीटरटर था। गर्मी प्रतिरोधी प्लास्टिक क्रीम रंग से बना केतली आवरण। पावर - दो हज़ार चार सौ वाट। दो,पाँच सौ से तीन,शून्य रूबल से मूल्य श्रेणी। केटल फिलिप्स HD नौ हज़ार तीन सौ दस/तिरानवे दो हज़ार चार सौ वाट की एक शक्ति है। क्षमता - एक. छः लीटरटर। मामले उच्च गुणवत्ता गर्मी प्रतिरोधी प्लास्टिक से बना है। इसकी ख़ास विशेषता - एक असामान्य डिजाइन। यह इस तथ्य में निहित है कि अपनी काली शरीर है, जो मात्रा पैमाने के आसपास आवास के किनारों पर नीले रंग के मूल ड्राइंग से पूरित है में फिलिप्स के अन्य मॉडलों, के विपरीत है। बंद सर्पिल स्वास्थ्य को कोई नुकसान के बिना गर्मी और मिनट की बात में फोड़ा पानी के लिए अनुमति देता है और पहनने के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। इस्तेमाल में आसानी भी व्यापक रूप से शॉर्ट सर्किट के खिलाफ संरक्षण और एक मनमाना उबलते पानी, और क्षमता न केवल कवर के माध्यम से, लेकिन यह भी टोंटी के माध्यम से पानी के साथ केतली भरने के लिए ढक्कन, चार-घटक सुरक्षा प्रणाली खोलने केतली सूचक काम डिब्बे की हड्डी में प्रदान की जाती हैं के लिए। मापन पैमाने केतली शरीर के दोनों किनारों पर स्थापित किया जाएगा। दो हज़ार पाँच सौ रूबल - इस मॉडल की कीमत एक हज़ार पाँच सौ।
Sahibganj : जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ करने समेत विभिन्न योजनाओं के संचालन में समन्वय बनाकर कार्य करने को लेकर डीसी रामनिवास यादव ने 17 मार्च को समाहरणालय सभागार में टास्क फोर्स की बैठक की. बैठक में एमआर अभियान की समीक्षा करते हुए कहा गया कि जिले में मिजिल्स व रूबेला के 18 मामले सामने आए हैं. इसकी रोकथाम के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम पर चर्चा की गई. आगामी 12 अप्रैल से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी. बच्चों को एक ही टीका लगेगा, जिससे दो बीमारियों की रोकथाम होगी. अभियान में 391707 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है. 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को टीका लगाया जाएगा. अभियान शुरू किए जाने से पूर्व विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत व प्रखंड स्तर पर अभिभावक-शिक्षक मीट का आयोजन किया जाएगा. बैठक में बच्चों के आंकड़े संग्रह करने, माइक्रो प्लान बनाने, स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच व एक दूसरे के बीच समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की गई. बैठक में कहा गया कि इन्फ्लूएंजा वायरस के सब वैरिएंट एच3एन2 व एच1एन1 के बढ़ते मामले देख जिला में जारी अलर्ट के तहत एडवाइजरी जारी कर दी गई है. संबंधित विभाग को इसपर निगरानी रखने तथा निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है. सभी प्रखंडों में 25 से 29 मार्च तक स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जाएगा. बैठक में डीडीसी प्रभात कुमार बरदियार, सीएस डॉ. रामदेव पासवान, एसडीओ राहुल जी आनंद जी, सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी समेत अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे.
Sahibganj : जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ करने समेत विभिन्न योजनाओं के संचालन में समन्वय बनाकर कार्य करने को लेकर डीसी रामनिवास यादव ने सत्रह मार्च को समाहरणालय सभागार में टास्क फोर्स की बैठक की. बैठक में एमआर अभियान की समीक्षा करते हुए कहा गया कि जिले में मिजिल्स व रूबेला के अट्ठारह मामले सामने आए हैं. इसकी रोकथाम के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम पर चर्चा की गई. आगामी बारह अप्रैल से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी. बच्चों को एक ही टीका लगेगा, जिससे दो बीमारियों की रोकथाम होगी. अभियान में तीन लाख इक्यानवे हज़ार सात सौ सात बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है. नौ माह से पंद्रह वर्ष तक के बच्चों को टीका लगाया जाएगा. अभियान शुरू किए जाने से पूर्व विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत व प्रखंड स्तर पर अभिभावक-शिक्षक मीट का आयोजन किया जाएगा. बैठक में बच्चों के आंकड़े संग्रह करने, माइक्रो प्लान बनाने, स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच व एक दूसरे के बीच समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की गई. बैठक में कहा गया कि इन्फ्लूएंजा वायरस के सब वैरिएंट एचतीनएनदो व एचएकएनएक के बढ़ते मामले देख जिला में जारी अलर्ट के तहत एडवाइजरी जारी कर दी गई है. संबंधित विभाग को इसपर निगरानी रखने तथा निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है. सभी प्रखंडों में पच्चीस से उनतीस मार्च तक स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जाएगा. बैठक में डीडीसी प्रभात कुमार बरदियार, सीएस डॉ. रामदेव पासवान, एसडीओ राहुल जी आनंद जी, सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी समेत अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे.
अंबाला - अखिल ब्राह्मण सभा की एक बैठक सेक्टर-एक स्थित कार्यालय में जिलाध्यक्ष कर्ण किशोर गौड़ की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शहर की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें अधिवक्ता अरविंद गौड़ को अंबाला शाखा का अध्यक्ष, मानिक शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संदीप शर्मा व रजनीश मेहता को उपाध्यक्ष, अधिवक्ता सुशांत शर्मा को सचिव, उमेश भार्गव को समन्वयक, रोहित शर्मा को युवाध्यक्ष व तन्मय शर्मा को युवा उपाध्यक्ष घोषित किया गया। जिलाध्यक्ष ने सभी पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र देकर पदभार दिया और उनसे समाज के विकास के लिए निरंतर कार्यरत रहने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह संगठन सामाजिक व धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगा। इस मौके पर रामेश्वर शर्मा, पर्व गौड़, अंकित शर्मा, हरदीप शर्मा, जसप्रीत शर्मा, विकास शर्मा, संजीव शर्मा, अनिकेत, अक्षय शर्मा, अश्विनी शर्मा, राजीव गौड़ समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मानिक शर्मा ने बताया कि गांव बलाना में हिसार रोड पर करीब दो कनाल भूमि पर भव्य परशुराम भवन व मंदिर का निर्माण जल्द हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को विधायक असीम गोयल की मौजूदगी में इसका शिलान्यास व भूमिपूजन किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस भवन की भूमि का इंतजाम हमारे संगठन के युवाध्यक्ष रोहित शर्मा बलाना के अथक प्रयासों से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से ही सरकार ने परशुराम भवन बनाने के लिए जमीन दी है, जिस पर भवन परशुराम भवन का निर्माण किया जाएगा।
अंबाला - अखिल ब्राह्मण सभा की एक बैठक सेक्टर-एक स्थित कार्यालय में जिलाध्यक्ष कर्ण किशोर गौड़ की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शहर की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें अधिवक्ता अरविंद गौड़ को अंबाला शाखा का अध्यक्ष, मानिक शर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संदीप शर्मा व रजनीश मेहता को उपाध्यक्ष, अधिवक्ता सुशांत शर्मा को सचिव, उमेश भार्गव को समन्वयक, रोहित शर्मा को युवाध्यक्ष व तन्मय शर्मा को युवा उपाध्यक्ष घोषित किया गया। जिलाध्यक्ष ने सभी पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र देकर पदभार दिया और उनसे समाज के विकास के लिए निरंतर कार्यरत रहने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह संगठन सामाजिक व धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगा। इस मौके पर रामेश्वर शर्मा, पर्व गौड़, अंकित शर्मा, हरदीप शर्मा, जसप्रीत शर्मा, विकास शर्मा, संजीव शर्मा, अनिकेत, अक्षय शर्मा, अश्विनी शर्मा, राजीव गौड़ समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मानिक शर्मा ने बताया कि गांव बलाना में हिसार रोड पर करीब दो कनाल भूमि पर भव्य परशुराम भवन व मंदिर का निर्माण जल्द हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को विधायक असीम गोयल की मौजूदगी में इसका शिलान्यास व भूमिपूजन किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस भवन की भूमि का इंतजाम हमारे संगठन के युवाध्यक्ष रोहित शर्मा बलाना के अथक प्रयासों से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से ही सरकार ने परशुराम भवन बनाने के लिए जमीन दी है, जिस पर भवन परशुराम भवन का निर्माण किया जाएगा।
॥ ओ३म् ॥ मैं यह छोटी सी पुस्तक अपने पूज्यपाद स्वर्गीय चचा श्रीयुत् लाला देवीदास जी विरमानी की पवित्र स्मृति में भेंट करता हूं । आप बड़े शुद्ध चित्त, सरल हृदय, सत्य प्रिय, उदार, गुणग्राही, निराभिमानी, सच्चरित्र, और स्पष्ट वक्ता थे। छल और कुचाल का तो आप में लेश मात्र भी न था। जब तक दान प्रणाली का सुधार न होगा, समाज और देश का सुधार होना असम्भव है। यही बात आप अपने व्याख्यानों में भी प्रायः कहा करते थे। आपका मेरे साथ घनिष्ठ स्नेह और उसी का स्मरण चिरस्थायी करने का इससे बढ़ कर और क्या उपाय हो सकता है कि यह निबन्ध मैं आपको पवित्र स्मृति में अर्पण करूं । यह आपके एक प्यारे पुत्र की स्नेहमयी भेंट है। विनीत - कृष्णचन्द्र विरमानी ।
॥ ओतीनम् ॥ मैं यह छोटी सी पुस्तक अपने पूज्यपाद स्वर्गीय चचा श्रीयुत् लाला देवीदास जी विरमानी की पवित्र स्मृति में भेंट करता हूं । आप बड़े शुद्ध चित्त, सरल हृदय, सत्य प्रिय, उदार, गुणग्राही, निराभिमानी, सच्चरित्र, और स्पष्ट वक्ता थे। छल और कुचाल का तो आप में लेश मात्र भी न था। जब तक दान प्रणाली का सुधार न होगा, समाज और देश का सुधार होना असम्भव है। यही बात आप अपने व्याख्यानों में भी प्रायः कहा करते थे। आपका मेरे साथ घनिष्ठ स्नेह और उसी का स्मरण चिरस्थायी करने का इससे बढ़ कर और क्या उपाय हो सकता है कि यह निबन्ध मैं आपको पवित्र स्मृति में अर्पण करूं । यह आपके एक प्यारे पुत्र की स्नेहमयी भेंट है। विनीत - कृष्णचन्द्र विरमानी ।
अब सवाल यह था कि यह कालिंग एटॅशन हमें कल मिला। उसमें यह था कि किसी पालीटिशन का लिंक तो इसके साथ नहीं है और उसमें हम ने यह देखा कि किसी एम० पी० साहब ने कोई खत किसी मिनिस्टर को तो नहीं लिखा है और हम ने देखा कि तीन खत हैं औौर श्री चन्द्रशेखर सिंह जी का खत हमारे पास इन आरिजनल मौजूद है, जिसका जवाब दिया हुआ है, हमारे मंत्री जी की तरफ से, ललित बाबू की तरफ से वह वहां पर रिकवर हुआ है। बाकी तफसील कब्ल-प्रज-वक्त होने के मेरे पास नहीं है और यह कहना कि बाकी जो डाकूमेंट्स हैं. श्री मधु लिमये मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं । कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य के बारे में जानकारी है लेकिन कांग्रेस के सदस्यों के बारे में कहते हैं कि इनके पास जानकारी नहीं है। इसमें गफूर मंत्रिमंडल के एक मिनिस्टर भी हैं। श्री मुहम्मद शफी कुरेगीं अब आपको हमदर्दी कम्युनिस्ट पार्टी से है । श्रो मधु लिमये मुझ को बिल्कुल नहीं है, : आप गलतफहमी में हैं। हम को हमदर्दी नहीं है न आपके ऊपर और न इनके ऊपर। अध्यक्ष महोदयः आप बीच में गुफ्तगू करने लगते हैं और न इधर होता है और न उधर । जो निकलेगा निकल जाएगा । चलने दो, कहीं छिपी रह सकती हैं ऐसी बातें । श्री मुहम्मद शको कुरेशो : जो डाकूमेंट्स जन्न किये गये हैं, उनकी तफसील बाकायदा हासिल कर के हाउस के सामने रख देंगे । मैं तो यह समझता था कि यह कालिंग एटॅशन इस गर्ज से उठाया गया है कि रेलवेज में जो चोरी होती हैं, उनको कम किया जाये और उनको कैसे रोका जाये, इसको देखें, लेकिन ऐसा लगता है कि आपकी इनमें दिलचस्पी कम है और गन्द उछालने में ज्यादा दिलचस्पी है। क्ष मधु लिलये मेरा प्वाइन्ट ग्राफ़ भार्डर है। मेरे जो प्रश्न थे, उनका उत्तर नहीं दिया और मेरे ऊपर अभियोग लगाया गया है। यह बेशर्मी की हद है। आप के संसद् सदस्य उसमे फंसे हुए हैं और प्राप बेशर्म हो कर मेरे ऊपर अभियोग लगाते SHRI B. R. BHAGAT (Shahabad): Sir, I rise on a point of order. MR. SPEAKER: No point of order on a Calling Attention. श्री जनेश्व मिश्र : उनका भी प्वाइन्ट आफ आर्डर सुन लीजिए । SHRI B. R. BHAGAT: It is not on the Calling Attention. I say that the House is being conducted against the rules. That is my basic point of order. You have to listen to this. MR. SPEAKER: How is it that the House is conducted against the rules? SHRI B. R. BHAGAT: How can I explain it unless you give me an opportunity ? As you know, I am not in the habit of getting up and raising point of order every now and then. So, I am sorry, you said "No". Rule 197, which deals with Calling Attention, says in sub-rule (2): "There shall be no debate on such statement at the time it is made." A member can only ask a question. SHRI JYOTIRMOY BOSU: Sir, are you allowing this point of order? In the past, we have many instances where brief speeches were made... (Interruptions) MR. SPEAKER: He is already on a point of order. I am not calling you. SHRI B. R. BHAGAT: The rule clearly says that a member can only ask a question with the permission of the Speaker. According to me, my hon. friend, Shri Madhu Limaye, did not ask a question. He made allegations against the whole party, the Congress party.... SHRI MADHU LIMAYE: Not against the whole party. SHRI B. R. BHAGAT: He said, there are two Congress Members, one Member from Bihar and one leader... (Interruptions) He was asked to give the names. He said, "I will not give the names." He was making allegations against the entire Congress party and, particularly, the Congress Members from Bihar... (Interruptions). My point of order is that in the garb of a question, an allegation is made. I am sorry to say that the Minister also ignores that. He does not answer whether it is a fact or not. So, a doubt has been cast on all the Congress Members of Bihar. You, Sir, as the Speaker also, keep silent about it. It is the duty of the Speaker to see that the honour and the conduct of Members is protected. Either this question must be cleared or Mr. Limaye should withdraw the allegations. SHRI JYOTIRMOY BOSU: Sir, to my utter distrust, I notice that a right which you have perpetually denied to Opposition spokesmen without exception almost, you have allowed that to a Congress Member. Not only that. In the name of a point of order. you have allowed him to make a speech. Let it go on record. I only want this to go on record, to my utter distrust, that in this House, no uniform standard is being practised by the Chair. MR. SPEAKER: Any other points against the Chair? You are welcome to do. Wagon Breaking 236 Racket (CA) श्री भगवत झा आजाद ( भागलपुर ) : जो वो ईमान होता है उनको द नया बेईमान नजर आती है । (Interruptions). MR. SPEAKER: Shri Bhagirath Bhanwar. SHRI B. R. BHAGAT: What about my point of order? MR. SPEAKER: I do not treat it as a point of order. We follow the practice. SHRI B. R. BHAGAT: Can any hon. Member make any allegation by way of putting a question? MR. SPEAKER: Nobody can make an allegation. He did not mention anybody's name. I asked him if he could give the names to me with any advance information. He keeps it for future. If he had mentioned anybody's name, that was different. I do not think he mentioned the party as a whole. SHRI B. R. BHAGAT: He mentioned Congress Members from Bihar. There are many Congress Members from Bihar. (Interruptions). अध्यक्ष महोदयः जब उन्होंने कहा कि दो मेम्बर हैं तो कहा गया है कि उनके नाम दें । He said that he would submit later on. There was nothing wrong about it. अब ख्वामख्वाह क्यो आप शोर करते हैं। अव्वल तो आपकी दाढ़ी नही है और जिसकी दाढ़ी में तिनका है वह बता दे । श्री दरबारा सिंह ( होशियारपुर) : वर्गर दाढ़ी वालों के शहतीर हो सकता है। श्री सतपाल कपूर (पटियाला) : क्या यह हक दाढ़ी वालों का है ? अध्यक्ष महोदयः मुझे तो किसी में नजर नहीं आ रहा है। अगर है तो धाप ही बता दें । श्री भागरथ घंवर (आबुधा) बिहार बहुत बदनाम हो रहा है। श्री चन्द्रशेखर सिंह की बात आई । कुछ ओर लोगों के नाम भी आए। रेलों को पहले से बहुत घाटा हो रहा है । समय समय पर रेलवे सलाहकार समिति में भी रेल मंत्री जी का ध्यान इन चोरियों की ओर खींचा जाता रहा है। यह केवल कोडरमा की बात नही है। देश के और हिस्सों में भी रेलों में इस प्रकार की चोरियां होती है जिन की चर्चा कभी कभी तो यहां हो जाती है और कई बार नहीं होती है। ये जो चोरियां हो रही हैं इसके सम्बन्ध में जो कुछ भी जांच हुई है या की जा रही है उस में क्या केवल रेलों के आर कों का हाथ है या रेलवे सुरक्षा दल के कुछ अधि कारियों का भी इन में हाथ है ? इस सम्बन्ध में जो जानकारी मंत्री जी को मिली वह भी उन्होंने सदन को नही दी। लिमये जी ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं का संसद सदस्यों का भी इस में हाथ है। उसकी भी जानकारी मंत्री जी को मिल गई है। लेकिन वह उसको देने के लिए तैयार नहीं है। मैं जानना चाहता हूं कि क्यों वह सदन से इन बातों को छिपाना चाहते हैं और क्यों नहीं जो चीज देश के तथा रेलों के हित में है वह सदन को देना चाहते हैं ? क्या वह अब भी पूरी जानकारी देगे ? चोरियों की रोकथाम करने के लिए ग्लो में सुरक्षा दल होता है । सब जगह चोरियां होती हैं, छुटपुट चोरियां तो हर जगह होती हैं । चूकि सुरक्षा दल इन को रोकने में असफ़ल सिद्ध हो रहा है इस वास्ते में जानना चाहता हूं कि क्या आप कुछ और व्यवस्था इनके सम्बन्ध में करने जा रहे हैं, क्या रेलवे सुरक्षा दल के माथ आप प्रान्तीय दल को नत्थी करेंगे या कोई और व्यवस्था करेंगे ताकि इन चोरियों को रोका सके ? बिहार में हालत बड़ी खराव है। वहां आन्दोलन चल रहा है । जे० पी० को बदनाम किया जा रहा है। अब जबकि हालत बहुत खराब हो गई है क्या सरकार सोचेगी कि बिहार की सरकार को हटा दिया जाए और कोई दूसरी व्यवस्था वहां की जाए ? इसके साथ साथ में यह जानना चाहूंगा कि मंत्री जी जो भी जांच कर रहे हैं, उसके बाद अगर कोई ऐसे नाम प्राप्त हों जो कि राजनीतिक पार्टी के लोग हों तो उनके नाम क्या सदन को बतायेंगे । और कब तक बतायेंगे ? श्री मुहम्मद शफी कुरेशी जैसा मैंने पहले कहा - पुलिस की तहकीकात में जो कागजात जब्त किए गए हैं या जो मालूमात उनको मिलेगी उसकी तमाम इत्तिला हाउस को दी जाएगी। इसमें पर्दा करने की, छिपाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन हमें अफ़सोस इस बात का है कि हर मामले को उल्टाकर पोलिटिकल रंग देकर असल मामले को भुला दिया जाता है। अगर आप चाहते हैं कि इस मामले में हमारी मदद करें तो मामनीय सदस्य के पास जो इत्तिला हैं वह हमें दे दे धौर हमारी मदद करें । जहां तक रेलवे में चोरी का सवाल है, इसमें रेलवे के कर्मचारी भी जरूर है, बाहर के लोग भी है और वे भी हैं जो चोरी के माल का इस्तेमाल करते है। इस चोरी क. रोकथाम के लिए इस किस्म की कार्यवाही की गई है। मुझे यकीन है कि माननीय सदस्य इसमें हमारा हाथ बंटायेंगे और जो इत्तिला उनके पाम है, उसे हमें देगे ताकि हमें इस काम में सहायता मिले । SHRI VASANT SATHE (Akola): I will not go into the question of these allegations and counter allegations of a political nature that were injected into the question by my friend... SHRI MADHU LIMAYE: Please read the Call Attention for a change, SHRI VASANT SATHE: Some political parties or persons may be involved or linked. It has been stated in the question itself, but to make allegations against members of a particular party.. AN HON. MEMBER: Wild allegations. SHRI N K P. SALVE (Betul): In violation of rules SHRI VASANT SATHE:...without naming them is not fair. He partiOcularly said that members of the ruling party and who are members of Parliament and from Bihar are involved but he does not name them But I am thankful to you that you have reduced the question only to those having beards. That at least reduces the area But I do not know how many persons from Bihar have beards SARDAR SWARAN SINGH SOKHI (Jamshedpur): roseSHRI DARBARA SINGH His beard cannot hide even a small thinka. MR SPEAKER: I think the gentleman at your back has offered his beard to be searched SHRI VASANT SATHE Therefore, I am also surprised when Shri Limaye named a big leader of Bihar who does not belong to any political party Now. I do not know which big leader he was referring to because he only said a 'Bada Neta ... SHRI MADHU LIMAYE: Why are you misquoting me ? I never said A Nırdaleeya Neta' भादत बुरी है और बहुत पुरानी है। इस भावत से ये बाज़ नही भायेंगे, यह हमे मालूम है। श्री वसन्त साठे : आप नाम लेते ही हैं कि कौन बड़ा नेता है, हम यह क्या समझे । मधु लिमये साहब की जो ग्रादत कि नाम न लेते हुए दोषारोपण करते जाना और हवा में छोड देना, और कहाँ भी जावर बैठ जायें, यह उनकी लेकिन मैं मिनिस्टर साबह से यह कहूंगा की सवाल दूसरा है। यहा इतने बड़े पैमाने पर चोरी हुई, मापने जो इशारा किया कि वह स्ट्राइक के दरम्यान, तो कुछ दादा लोग, मुंडे लोग जो भार० पी० एफ़० मे भी हैं और थे, प्रभी उन्होने कहा पहलवान, तो ऐसे गुडे मिलकर कही स्ट्राइक को मदद करने के लिए बोरी तो नही कर रहे थे ? इसकी भी जरा जांच कीजिए । स्ट्राइक के महान नेता कौन थे-जार्च फर्नान्डीज । वह किन पार्टी के थे इसी से यह सारा सिलसिला लग जाएगा। इसलिए इनका भी पता लगाना जरूरी है कौनसी पार्टी के लोग और किस नेता के अनुयायी रेलवे कर्मचारियो के साथ इस चोरी मे मिले थे ? मै यह भी जानना चाहूगा कि सारे देश मेट्राइक के दरम्यान कितनी चोरी हुई, कहाकहा हुई और कौन-कौन लोग उसमे इन्वाल्व्ड थे ? इसका भी क्या आप पता लगा कर हमे जानकारी देंगे ? श्री मुहम्मद शफी कुरेशो : दोनो बातें जो इन्होंने कही कि जो माल चोरी हुआ और इस माल से जो रूपया वसूल हुआ वह किस तरीके से इस्तेमाल किया गया इसकी भी जांच हो सकती है इसमें रूकावट नहीं है। जो टोटल चोरी रेलवे में होती है वह आापको मालूम है कि करीब 20 करड रुपए की चोरी हर साल होती है। लेकिन कुछ सैक्शन्न ऐसे है जहा चारी बढ़ती गई और चोरी के माल के खरीददार भी बढ़ते गए और गुडे भी बढ़ते गये है। हम इसकी पूरी जाच कर रहे है और इसके खिलाफ़ जो कार्यवाही करनी है, वह कर Statement by PHALGUNA 14, 1896 (SAKA) Statement by Shri Mohan Dharia Shri Mohan Dnaria PUBLIC ACCOUNTS COMMITTEE HUNDRED AND THIRTY-SEVENTH REPORT SHRI JYOTIRMOY BOSU (Diamond Harbour): Sir, I beg to present the Hundred and thirty-seventh Report of the Public Accounts Committee on paragraph 43 of the Report of the Comptroller and Auditor-General of India for the year 1972-73, Union Government (Civil) relating to the Department of Supply regarding Purchase of Blankets. श्री भोगन्सा ( जयनगर) : कालिंग अटैशन में जो मैटर उठाया गया, उसमें जो नाम लिया गया है और पार्टी के बारे मे जो बात कही गई हैं, मैं चाहूंगा कि उस का जवाब है । MR. SPEAKER: I have passed on to the next item STATEMENT BY SHRI MOHAN DHARIA ON HIS RESIGNATION FROM THE COUNCIL OF MR. SPEAKER: Mr. Mohan Dharia, earlier I received the gist and points of your speech, but I received this statement while sitting here and I I have not been able to see the statement, but you can read that. SHRI JYOTIRMOY BOSU (Diamond Harbour): I request that the same may be circulated to Members. MR. SPEAKER: It came to me while I was sitting here. Mr. Mohan Dharia. SHRI MOHAN DHARIA (Poona): Mr. Speaker, I rise to discharge a painful parliamentary duty which is cast upon me. It cannot be a pleasure to make this personal statement to explain the situation in which I resigned from the Central Council of Ministers. I am on my legs with full sense of responsibility and accountability towards this august House and to the people of the country. Sir, to make my statement explicit to the Hon'ble Members of this House, I reproduce from the Prime Minister's letter of March 1, 1975 received by me at 1.15 PM on March 2: 'I have been astonished to readnewspaper reports of some of your speeches and also your reply to the letter of the Maharashtra Pradesh Congress Committee. It is obvious that your views on this issue are not in conformity with the thinking of the Congress Party. If you had any doubts was it not your duty to convey them to me? In the circumstances it is not proper for you to continue in the Council of Ministers. I am informing the President accordingly.' After the receipt of this letter, I immediately sent my letter of resignation to Rashtrapatiji which is as follows: 'I have just received a letter from the Prime Minister, copy of which is attached herewith. Had the Prime Minister shown the courtsey of indicating me her intention, either directly or indirectly, I would have immediately and willingly tendered my resignation. This letter of mine may kindly be treated as my resignation from the Council of Ministers of the Government of India I will offer my comments in this matter either through a statement to be made in Lok Sabha or through a press conference.'
अब सवाल यह था कि यह कालिंग एटॅशन हमें कल मिला। उसमें यह था कि किसी पालीटिशन का लिंक तो इसके साथ नहीं है और उसमें हम ने यह देखा कि किसी एमशून्य पीशून्य साहब ने कोई खत किसी मिनिस्टर को तो नहीं लिखा है और हम ने देखा कि तीन खत हैं औौर श्री चन्द्रशेखर सिंह जी का खत हमारे पास इन आरिजनल मौजूद है, जिसका जवाब दिया हुआ है, हमारे मंत्री जी की तरफ से, ललित बाबू की तरफ से वह वहां पर रिकवर हुआ है। बाकी तफसील कब्ल-प्रज-वक्त होने के मेरे पास नहीं है और यह कहना कि बाकी जो डाकूमेंट्स हैं. श्री मधु लिमये मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं । कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य के बारे में जानकारी है लेकिन कांग्रेस के सदस्यों के बारे में कहते हैं कि इनके पास जानकारी नहीं है। इसमें गफूर मंत्रिमंडल के एक मिनिस्टर भी हैं। श्री मुहम्मद शफी कुरेगीं अब आपको हमदर्दी कम्युनिस्ट पार्टी से है । श्रो मधु लिमये मुझ को बिल्कुल नहीं है, : आप गलतफहमी में हैं। हम को हमदर्दी नहीं है न आपके ऊपर और न इनके ऊपर। अध्यक्ष महोदयः आप बीच में गुफ्तगू करने लगते हैं और न इधर होता है और न उधर । जो निकलेगा निकल जाएगा । चलने दो, कहीं छिपी रह सकती हैं ऐसी बातें । श्री मुहम्मद शको कुरेशो : जो डाकूमेंट्स जन्न किये गये हैं, उनकी तफसील बाकायदा हासिल कर के हाउस के सामने रख देंगे । मैं तो यह समझता था कि यह कालिंग एटॅशन इस गर्ज से उठाया गया है कि रेलवेज में जो चोरी होती हैं, उनको कम किया जाये और उनको कैसे रोका जाये, इसको देखें, लेकिन ऐसा लगता है कि आपकी इनमें दिलचस्पी कम है और गन्द उछालने में ज्यादा दिलचस्पी है। क्ष मधु लिलये मेरा प्वाइन्ट ग्राफ़ भार्डर है। मेरे जो प्रश्न थे, उनका उत्तर नहीं दिया और मेरे ऊपर अभियोग लगाया गया है। यह बेशर्मी की हद है। आप के संसद् सदस्य उसमे फंसे हुए हैं और प्राप बेशर्म हो कर मेरे ऊपर अभियोग लगाते SHRI B. R. BHAGAT : Sir, I rise on a point of order. MR. SPEAKER: No point of order on a Calling Attention. श्री जनेश्व मिश्र : उनका भी प्वाइन्ट आफ आर्डर सुन लीजिए । SHRI B. R. BHAGAT: It is not on the Calling Attention. I say that the House is being conducted against the rules. That is my basic point of order. You have to listen to this. MR. SPEAKER: How is it that the House is conducted against the rules? SHRI B. R. BHAGAT: How can I explain it unless you give me an opportunity ? As you know, I am not in the habit of getting up and raising point of order every now and then. So, I am sorry, you said "No". Rule एक सौ सत्तानवे, which deals with Calling Attention, says in sub-rule : "There shall be no debate on such statement at the time it is made." A member can only ask a question. SHRI JYOTIRMOY BOSU: Sir, are you allowing this point of order? In the past, we have many instances where brief speeches were made... MR. SPEAKER: He is already on a point of order. I am not calling you. SHRI B. R. BHAGAT: The rule clearly says that a member can only ask a question with the permission of the Speaker. According to me, my hon. friend, Shri Madhu Limaye, did not ask a question. He made allegations against the whole party, the Congress party.... SHRI MADHU LIMAYE: Not against the whole party. SHRI B. R. BHAGAT: He said, there are two Congress Members, one Member from Bihar and one leader... He was asked to give the names. He said, "I will not give the names." He was making allegations against the entire Congress party and, particularly, the Congress Members from Bihar... . My point of order is that in the garb of a question, an allegation is made. I am sorry to say that the Minister also ignores that. He does not answer whether it is a fact or not. So, a doubt has been cast on all the Congress Members of Bihar. You, Sir, as the Speaker also, keep silent about it. It is the duty of the Speaker to see that the honour and the conduct of Members is protected. Either this question must be cleared or Mr. Limaye should withdraw the allegations. SHRI JYOTIRMOY BOSU: Sir, to my utter distrust, I notice that a right which you have perpetually denied to Opposition spokesmen without exception almost, you have allowed that to a Congress Member. Not only that. In the name of a point of order. you have allowed him to make a speech. Let it go on record. I only want this to go on record, to my utter distrust, that in this House, no uniform standard is being practised by the Chair. MR. SPEAKER: Any other points against the Chair? You are welcome to do. Wagon Breaking दो सौ छत्तीस Racket श्री भगवत झा आजाद : जो वो ईमान होता है उनको द नया बेईमान नजर आती है । . MR. SPEAKER: Shri Bhagirath Bhanwar. SHRI B. R. BHAGAT: What about my point of order? MR. SPEAKER: I do not treat it as a point of order. We follow the practice. SHRI B. R. BHAGAT: Can any hon. Member make any allegation by way of putting a question? MR. SPEAKER: Nobody can make an allegation. He did not mention anybody's name. I asked him if he could give the names to me with any advance information. He keeps it for future. If he had mentioned anybody's name, that was different. I do not think he mentioned the party as a whole. SHRI B. R. BHAGAT: He mentioned Congress Members from Bihar. There are many Congress Members from Bihar. . अध्यक्ष महोदयः जब उन्होंने कहा कि दो मेम्बर हैं तो कहा गया है कि उनके नाम दें । He said that he would submit later on. There was nothing wrong about it. अब ख्वामख्वाह क्यो आप शोर करते हैं। अव्वल तो आपकी दाढ़ी नही है और जिसकी दाढ़ी में तिनका है वह बता दे । श्री दरबारा सिंह : वर्गर दाढ़ी वालों के शहतीर हो सकता है। श्री सतपाल कपूर : क्या यह हक दाढ़ी वालों का है ? अध्यक्ष महोदयः मुझे तो किसी में नजर नहीं आ रहा है। अगर है तो धाप ही बता दें । श्री भागरथ घंवर बिहार बहुत बदनाम हो रहा है। श्री चन्द्रशेखर सिंह की बात आई । कुछ ओर लोगों के नाम भी आए। रेलों को पहले से बहुत घाटा हो रहा है । समय समय पर रेलवे सलाहकार समिति में भी रेल मंत्री जी का ध्यान इन चोरियों की ओर खींचा जाता रहा है। यह केवल कोडरमा की बात नही है। देश के और हिस्सों में भी रेलों में इस प्रकार की चोरियां होती है जिन की चर्चा कभी कभी तो यहां हो जाती है और कई बार नहीं होती है। ये जो चोरियां हो रही हैं इसके सम्बन्ध में जो कुछ भी जांच हुई है या की जा रही है उस में क्या केवल रेलों के आर कों का हाथ है या रेलवे सुरक्षा दल के कुछ अधि कारियों का भी इन में हाथ है ? इस सम्बन्ध में जो जानकारी मंत्री जी को मिली वह भी उन्होंने सदन को नही दी। लिमये जी ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं का संसद सदस्यों का भी इस में हाथ है। उसकी भी जानकारी मंत्री जी को मिल गई है। लेकिन वह उसको देने के लिए तैयार नहीं है। मैं जानना चाहता हूं कि क्यों वह सदन से इन बातों को छिपाना चाहते हैं और क्यों नहीं जो चीज देश के तथा रेलों के हित में है वह सदन को देना चाहते हैं ? क्या वह अब भी पूरी जानकारी देगे ? चोरियों की रोकथाम करने के लिए ग्लो में सुरक्षा दल होता है । सब जगह चोरियां होती हैं, छुटपुट चोरियां तो हर जगह होती हैं । चूकि सुरक्षा दल इन को रोकने में असफ़ल सिद्ध हो रहा है इस वास्ते में जानना चाहता हूं कि क्या आप कुछ और व्यवस्था इनके सम्बन्ध में करने जा रहे हैं, क्या रेलवे सुरक्षा दल के माथ आप प्रान्तीय दल को नत्थी करेंगे या कोई और व्यवस्था करेंगे ताकि इन चोरियों को रोका सके ? बिहार में हालत बड़ी खराव है। वहां आन्दोलन चल रहा है । जेशून्य पीशून्य को बदनाम किया जा रहा है। अब जबकि हालत बहुत खराब हो गई है क्या सरकार सोचेगी कि बिहार की सरकार को हटा दिया जाए और कोई दूसरी व्यवस्था वहां की जाए ? इसके साथ साथ में यह जानना चाहूंगा कि मंत्री जी जो भी जांच कर रहे हैं, उसके बाद अगर कोई ऐसे नाम प्राप्त हों जो कि राजनीतिक पार्टी के लोग हों तो उनके नाम क्या सदन को बतायेंगे । और कब तक बतायेंगे ? श्री मुहम्मद शफी कुरेशी जैसा मैंने पहले कहा - पुलिस की तहकीकात में जो कागजात जब्त किए गए हैं या जो मालूमात उनको मिलेगी उसकी तमाम इत्तिला हाउस को दी जाएगी। इसमें पर्दा करने की, छिपाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन हमें अफ़सोस इस बात का है कि हर मामले को उल्टाकर पोलिटिकल रंग देकर असल मामले को भुला दिया जाता है। अगर आप चाहते हैं कि इस मामले में हमारी मदद करें तो मामनीय सदस्य के पास जो इत्तिला हैं वह हमें दे दे धौर हमारी मदद करें । जहां तक रेलवे में चोरी का सवाल है, इसमें रेलवे के कर्मचारी भी जरूर है, बाहर के लोग भी है और वे भी हैं जो चोरी के माल का इस्तेमाल करते है। इस चोरी क. रोकथाम के लिए इस किस्म की कार्यवाही की गई है। मुझे यकीन है कि माननीय सदस्य इसमें हमारा हाथ बंटायेंगे और जो इत्तिला उनके पाम है, उसे हमें देगे ताकि हमें इस काम में सहायता मिले । SHRI VASANT SATHE : I will not go into the question of these allegations and counter allegations of a political nature that were injected into the question by my friend... SHRI MADHU LIMAYE: Please read the Call Attention for a change, SHRI VASANT SATHE: Some political parties or persons may be involved or linked. It has been stated in the question itself, but to make allegations against members of a particular party.. AN HON. MEMBER: Wild allegations. SHRI N K P. SALVE : In violation of rules SHRI VASANT SATHE:...without naming them is not fair. He partiOcularly said that members of the ruling party and who are members of Parliament and from Bihar are involved but he does not name them But I am thankful to you that you have reduced the question only to those having beards. That at least reduces the area But I do not know how many persons from Bihar have beards SARDAR SWARAN SINGH SOKHI : roseSHRI DARBARA SINGH His beard cannot hide even a small thinka. MR SPEAKER: I think the gentleman at your back has offered his beard to be searched SHRI VASANT SATHE Therefore, I am also surprised when Shri Limaye named a big leader of Bihar who does not belong to any political party Now. I do not know which big leader he was referring to because he only said a 'Bada Neta ... SHRI MADHU LIMAYE: Why are you misquoting me ? I never said A Nırdaleeya Neta' भादत बुरी है और बहुत पुरानी है। इस भावत से ये बाज़ नही भायेंगे, यह हमे मालूम है। श्री वसन्त साठे : आप नाम लेते ही हैं कि कौन बड़ा नेता है, हम यह क्या समझे । मधु लिमये साहब की जो ग्रादत कि नाम न लेते हुए दोषारोपण करते जाना और हवा में छोड देना, और कहाँ भी जावर बैठ जायें, यह उनकी लेकिन मैं मिनिस्टर साबह से यह कहूंगा की सवाल दूसरा है। यहा इतने बड़े पैमाने पर चोरी हुई, मापने जो इशारा किया कि वह स्ट्राइक के दरम्यान, तो कुछ दादा लोग, मुंडे लोग जो भारशून्य पीशून्य एफ़शून्य मे भी हैं और थे, प्रभी उन्होने कहा पहलवान, तो ऐसे गुडे मिलकर कही स्ट्राइक को मदद करने के लिए बोरी तो नही कर रहे थे ? इसकी भी जरा जांच कीजिए । स्ट्राइक के महान नेता कौन थे-जार्च फर्नान्डीज । वह किन पार्टी के थे इसी से यह सारा सिलसिला लग जाएगा। इसलिए इनका भी पता लगाना जरूरी है कौनसी पार्टी के लोग और किस नेता के अनुयायी रेलवे कर्मचारियो के साथ इस चोरी मे मिले थे ? मै यह भी जानना चाहूगा कि सारे देश मेट्राइक के दरम्यान कितनी चोरी हुई, कहाकहा हुई और कौन-कौन लोग उसमे इन्वाल्व्ड थे ? इसका भी क्या आप पता लगा कर हमे जानकारी देंगे ? श्री मुहम्मद शफी कुरेशो : दोनो बातें जो इन्होंने कही कि जो माल चोरी हुआ और इस माल से जो रूपया वसूल हुआ वह किस तरीके से इस्तेमाल किया गया इसकी भी जांच हो सकती है इसमें रूकावट नहीं है। जो टोटल चोरी रेलवे में होती है वह आापको मालूम है कि करीब बीस करड रुपए की चोरी हर साल होती है। लेकिन कुछ सैक्शन्न ऐसे है जहा चारी बढ़ती गई और चोरी के माल के खरीददार भी बढ़ते गए और गुडे भी बढ़ते गये है। हम इसकी पूरी जाच कर रहे है और इसके खिलाफ़ जो कार्यवाही करनी है, वह कर Statement by PHALGUNA चौदह, एक हज़ार आठ सौ छियानवे Statement by Shri Mohan Dharia Shri Mohan Dnaria PUBLIC ACCOUNTS COMMITTEE HUNDRED AND THIRTY-SEVENTH REPORT SHRI JYOTIRMOY BOSU : Sir, I beg to present the Hundred and thirty-seventh Report of the Public Accounts Committee on paragraph तैंतालीस of the Report of the Comptroller and Auditor-General of India for the year एक हज़ार नौ सौ बहत्तर-तिहत्तर, Union Government relating to the Department of Supply regarding Purchase of Blankets. श्री भोगन्सा : कालिंग अटैशन में जो मैटर उठाया गया, उसमें जो नाम लिया गया है और पार्टी के बारे मे जो बात कही गई हैं, मैं चाहूंगा कि उस का जवाब है । MR. SPEAKER: I have passed on to the next item STATEMENT BY SHRI MOHAN DHARIA ON HIS RESIGNATION FROM THE COUNCIL OF MR. SPEAKER: Mr. Mohan Dharia, earlier I received the gist and points of your speech, but I received this statement while sitting here and I I have not been able to see the statement, but you can read that. SHRI JYOTIRMOY BOSU : I request that the same may be circulated to Members. MR. SPEAKER: It came to me while I was sitting here. Mr. Mohan Dharia. SHRI MOHAN DHARIA : Mr. Speaker, I rise to discharge a painful parliamentary duty which is cast upon me. It cannot be a pleasure to make this personal statement to explain the situation in which I resigned from the Central Council of Ministers. I am on my legs with full sense of responsibility and accountability towards this august House and to the people of the country. Sir, to make my statement explicit to the Hon'ble Members of this House, I reproduce from the Prime Minister's letter of March एक, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर received by me at एक.पंद्रह PM on March दो: 'I have been astonished to readnewspaper reports of some of your speeches and also your reply to the letter of the Maharashtra Pradesh Congress Committee. It is obvious that your views on this issue are not in conformity with the thinking of the Congress Party. If you had any doubts was it not your duty to convey them to me? In the circumstances it is not proper for you to continue in the Council of Ministers. I am informing the President accordingly.' After the receipt of this letter, I immediately sent my letter of resignation to Rashtrapatiji which is as follows: 'I have just received a letter from the Prime Minister, copy of which is attached herewith. Had the Prime Minister shown the courtsey of indicating me her intention, either directly or indirectly, I would have immediately and willingly tendered my resignation. This letter of mine may kindly be treated as my resignation from the Council of Ministers of the Government of India I will offer my comments in this matter either through a statement to be made in Lok Sabha or through a press conference.'
70 वर्षीय जी.के. नायर एयरफोर्स की सिविल विंग से रिटायर हो कर चाहते तो अपने गृह राज्य केरल वापस जा सकते थे, लेकिन लंबा वक्त एयरफोर्स में गुजारने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश में ही बस जाने का फैसला ले लिया था. इन दिनों वह अपनी 68 वर्षीय पत्नी गोमती नायर सहित भोपाल खजूरीकलां स्थित नर्मदा ग्रीन वैली कालोनी में डुप्लेक्स बंगले में रह रहे थे. इस कालोनी की गिनती भोपाल की पौश कालोनियों में होती है, जिस में संपन्न और संभ्रांत लोग रहते हैं. दूसरे रिटायर्ड मिलिट्री अफसरों की तरह जी.के. नायर का स्वभाव भी अनुशासनप्रिय था, जो आम लोगों को सख्त लगता था. उन के चेहरे पर छाया रौब और बातचीत का लहजा ही उन के एयरफोर्स अधिकारी होने का अहसास करा देता था. साल 2014 में जब वे पत्नी सहित नर्मदा ग्रीन वैली में आ कर रहने लगे थे, तभी से इस कालोनी के अधिकांश लोग उन के स्वभाव से परिचित हो गए थे. गोमती नायर ग्वालियर के मुरार अस्पताल में नर्स पद से रिटायर हुई थीं. पतिपत्नी दोनों को ही पेंशन मिलती थी. नौकरी में रहते ही नायर दंपति अपनी तीनों बेटियों की शादियां कर के अपनी इस जिम्मेदारी से मुक्त हो चुके थे. लिहाजा उन के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी. ग्वालियर से नायर दंपति का खास लगाव था, क्योंकि गोमती वहीं से रिटायर हुई थीं और इन की बड़ी बेटी प्रशुंभा नायर की शादी भी ग्वालियर में ही हुई थी. गोमती की एक बहन भी ग्वालियर में ही रहती थीं. जब भी इन दोनों का मन भोपाल से कहीं बाहर जाने का होता था तो उन की प्राथमिकता ग्वालियर ही होती थी.
सत्तर वर्षीय जी.के. नायर एयरफोर्स की सिविल विंग से रिटायर हो कर चाहते तो अपने गृह राज्य केरल वापस जा सकते थे, लेकिन लंबा वक्त एयरफोर्स में गुजारने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश में ही बस जाने का फैसला ले लिया था. इन दिनों वह अपनी अड़सठ वर्षीय पत्नी गोमती नायर सहित भोपाल खजूरीकलां स्थित नर्मदा ग्रीन वैली कालोनी में डुप्लेक्स बंगले में रह रहे थे. इस कालोनी की गिनती भोपाल की पौश कालोनियों में होती है, जिस में संपन्न और संभ्रांत लोग रहते हैं. दूसरे रिटायर्ड मिलिट्री अफसरों की तरह जी.के. नायर का स्वभाव भी अनुशासनप्रिय था, जो आम लोगों को सख्त लगता था. उन के चेहरे पर छाया रौब और बातचीत का लहजा ही उन के एयरफोर्स अधिकारी होने का अहसास करा देता था. साल दो हज़ार चौदह में जब वे पत्नी सहित नर्मदा ग्रीन वैली में आ कर रहने लगे थे, तभी से इस कालोनी के अधिकांश लोग उन के स्वभाव से परिचित हो गए थे. गोमती नायर ग्वालियर के मुरार अस्पताल में नर्स पद से रिटायर हुई थीं. पतिपत्नी दोनों को ही पेंशन मिलती थी. नौकरी में रहते ही नायर दंपति अपनी तीनों बेटियों की शादियां कर के अपनी इस जिम्मेदारी से मुक्त हो चुके थे. लिहाजा उन के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी. ग्वालियर से नायर दंपति का खास लगाव था, क्योंकि गोमती वहीं से रिटायर हुई थीं और इन की बड़ी बेटी प्रशुंभा नायर की शादी भी ग्वालियर में ही हुई थी. गोमती की एक बहन भी ग्वालियर में ही रहती थीं. जब भी इन दोनों का मन भोपाल से कहीं बाहर जाने का होता था तो उन की प्राथमिकता ग्वालियर ही होती थी.
मर्सिडीज-बेंज विजन AVTR वेंट्स के साथ मस्कुलर बोनट, एक्टिव कूलिंग शटर के साथ ग्रिल, फ्रंट बंपर में एयर वेंट्स और स्लीक हेडलाइट्स दिए गए हैं। लुक के मामले में यह काफी हद तक F1 रेसिंग गाड़ियों से प्रेरित है। इसके पॉवर ऑउट-पुट के बारे में कोई भी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इसमें पावरफुल बैटरी पैक और ड्यूल इलेक्ट्रिक पावरट्रेन सेटअप दिया जा सकता है। यह सिंगल चार्ज में 1,000 किलोमीटर की रेंज देने में सक्षम होगी। कार में बायोस्टील फाइबर से बना डैशबोर्ड दिया गया है। इसमें 47. 5-इंच 8K डिस्प्ले भी है, जो 3D नेविगेशन को सपोर्ट करता है। इसके केबिन को वेगन डाइनमिका लेदर और रीसाइकल मटीरियल का इस्तेमाल कर के बनाया गया है। मर्सिडीज-बेंज विजन AVTR की कीमत और उपलब्धता की जानकारी इसके लॉन्च के समय ही दी जायेगी। इस गाडी को खास 'अवतारः द वे आफ वाटर' को प्रमोट करने के लिए बनाया गया है।
मर्सिडीज-बेंज विजन AVTR वेंट्स के साथ मस्कुलर बोनट, एक्टिव कूलिंग शटर के साथ ग्रिल, फ्रंट बंपर में एयर वेंट्स और स्लीक हेडलाइट्स दिए गए हैं। लुक के मामले में यह काफी हद तक Fएक रेसिंग गाड़ियों से प्रेरित है। इसके पॉवर ऑउट-पुट के बारे में कोई भी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इसमें पावरफुल बैटरी पैक और ड्यूल इलेक्ट्रिक पावरट्रेन सेटअप दिया जा सकता है। यह सिंगल चार्ज में एक,शून्य किलोग्राममीटर की रेंज देने में सक्षम होगी। कार में बायोस्टील फाइबर से बना डैशबोर्ड दिया गया है। इसमें सैंतालीस. पाँच-इंच आठ केल्विन डिस्प्ले भी है, जो तीनD नेविगेशन को सपोर्ट करता है। इसके केबिन को वेगन डाइनमिका लेदर और रीसाइकल मटीरियल का इस्तेमाल कर के बनाया गया है। मर्सिडीज-बेंज विजन AVTR की कीमत और उपलब्धता की जानकारी इसके लॉन्च के समय ही दी जायेगी। इस गाडी को खास 'अवतारः द वे आफ वाटर' को प्रमोट करने के लिए बनाया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक स्थलों पर लोगों के बीच एक तय दूरी बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शनिवार को विशेष प्रयास किया है। नई दिल्ली के विभिन्न पार्कों और चौराहों पर जाकर पुलिसकर्मियों ने वहां बैठे लोगों को एक तय दूरी बनाने के लिए कहा है। पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, जनपथ और दूसरे विभिन्न मार्गों पर स्थित पार्कों में पुलिसकर्मी पहुंच रहे हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने कोरोना वायरस को हराने के लिए रविवार को सभी लोगों से सहयोग मांगा है। इसे 'जनता कर्फ्यू' का नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि भारतीयों को सतर्क रहने की जरूरत है। इस आपदा ने दुनिया भर के लोगों को संकट में डाल दिया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक स्थलों पर लोगों के बीच एक तय दूरी बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शनिवार को विशेष प्रयास किया है। नई दिल्ली के विभिन्न पार्कों और चौराहों पर जाकर पुलिसकर्मियों ने वहां बैठे लोगों को एक तय दूरी बनाने के लिए कहा है। पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, जनपथ और दूसरे विभिन्न मार्गों पर स्थित पार्कों में पुलिसकर्मी पहुंच रहे हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने कोरोना वायरस को हराने के लिए रविवार को सभी लोगों से सहयोग मांगा है। इसे 'जनता कर्फ्यू' का नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि भारतीयों को सतर्क रहने की जरूरत है। इस आपदा ने दुनिया भर के लोगों को संकट में डाल दिया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अमेरिका की ट्रंप सरकार के बाद अब ब्रिटेन की थेरेसा सरकार ने भी मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले लोगों पर कुछ पाबंदियां लगा दी हैं। ब्रिटेन सरकार ने छः मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले विमानों पर लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रोनिक उपकरणों पर पाबंदी लगाई है। इन देशों में तुर्की, लेबनान, इजिप्ट, जॉर्डन, ट्यूनिशिया और सउदी अरब शामिल हैं। आदेश के मुताबिक - कैबिन बैगेज में लेपटॉप, आईपैड, टैबलेट, डीवीडी प्लेयर और एक तय साइज़ के मोबाइल फोन लाने पर रोक रहेगी। ब्रिटेन की तरफ से जारी यह प्रतिबंध 14 एयरलाइंस पर लागू रहेगा, जो सीधे मुस्लिम बहुल देशों से होकर गुजरती हैं। हालांकि ब्रिटेन सरकार की ओर से अभी यह तय नहीं किया गया है कि यह पाबंदी स्थाई तौर पर लागू की गई है या इसकी कोई समय सीमा भी है। ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि ब्रिटेन सरकार के लिए उसके यात्रियों की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और उसके लिए सरकार कोई भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ी तो वो उठाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे यहां हवाई सुरक्षा के लिए इन फैसलों को बड़ी गंभीरता और सोच विचार करके लिए गया है। यात्रियों की सुरक्षा से हम कोई समझौता नहीं करेंगे और इसके लिए कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि इस फैसले से बाहरी यात्रियों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए हम अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ बातचीत करके नए नियमों पर विचार करेंगे। पाबंदी का यह खेल ब्रिटेन से पहले अमेरिका भी खेल चुका है। अमेरिका की ट्रंप सरकार बनते ही उसने मुस्लिम बहुल देशों से आ रही उड़ानों में यात्रियों पर नई पाबंदियां लगाई हैं, जिनमें इजिप्ट, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और यूएई से आर रहे यात्रियों को विमान में लैपटॉप, आईपैड, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर रोक है। ऐसा सुरक्षा सबंधी खतरे के मद्देनज़र किया गया है।
अमेरिका की ट्रंप सरकार के बाद अब ब्रिटेन की थेरेसा सरकार ने भी मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले लोगों पर कुछ पाबंदियां लगा दी हैं। ब्रिटेन सरकार ने छः मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले विमानों पर लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रोनिक उपकरणों पर पाबंदी लगाई है। इन देशों में तुर्की, लेबनान, इजिप्ट, जॉर्डन, ट्यूनिशिया और सउदी अरब शामिल हैं। आदेश के मुताबिक - कैबिन बैगेज में लेपटॉप, आईपैड, टैबलेट, डीवीडी प्लेयर और एक तय साइज़ के मोबाइल फोन लाने पर रोक रहेगी। ब्रिटेन की तरफ से जारी यह प्रतिबंध चौदह एयरलाइंस पर लागू रहेगा, जो सीधे मुस्लिम बहुल देशों से होकर गुजरती हैं। हालांकि ब्रिटेन सरकार की ओर से अभी यह तय नहीं किया गया है कि यह पाबंदी स्थाई तौर पर लागू की गई है या इसकी कोई समय सीमा भी है। ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि ब्रिटेन सरकार के लिए उसके यात्रियों की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और उसके लिए सरकार कोई भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ी तो वो उठाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे यहां हवाई सुरक्षा के लिए इन फैसलों को बड़ी गंभीरता और सोच विचार करके लिए गया है। यात्रियों की सुरक्षा से हम कोई समझौता नहीं करेंगे और इसके लिए कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि इस फैसले से बाहरी यात्रियों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए हम अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ बातचीत करके नए नियमों पर विचार करेंगे। पाबंदी का यह खेल ब्रिटेन से पहले अमेरिका भी खेल चुका है। अमेरिका की ट्रंप सरकार बनते ही उसने मुस्लिम बहुल देशों से आ रही उड़ानों में यात्रियों पर नई पाबंदियां लगाई हैं, जिनमें इजिप्ट, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और यूएई से आर रहे यात्रियों को विमान में लैपटॉप, आईपैड, कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर रोक है। ऐसा सुरक्षा सबंधी खतरे के मद्देनज़र किया गया है।
चेन्नई, 31 जनवरी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने रविवार को यहां घोषणा की कि कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों के सभी छात्रों के लिए तथा कक्षा नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के लिए आठ फरवरी से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि क्रिकेट समेत खेलों के लिए स्टेडियम में 50 फीसदी दर्शकों को आने की इजाजत है। चेन्नई में भारत और इंग्लैंड के बीच दो टेस्ट मैच होने हैं, जिनकी शुरुआत पांच फरवरी से होनी है। अधिकारी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि पहले टेस्ट मैच में दर्शकों को आने की इजाजत नहीं होगी। पलानीस्वामी ने कहा कि एक फरवरी से सभी तरह के फिल्म थिएटरों को 100 फीसदी क्षमता के साथ परिचालन की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री ने इन नयी रियायतों की घोषणा एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये की। इसमें कहा गया है कि तरणताल, प्रदर्शनी हॉल को खोलने की अनुमति है तथा जिलों में शिकायत निवारण कार्यक्रम और रामेश्वरम में होने वाले ' तीर्थमदुतल' को बिना किसी रोक के आयोजित करने की इजाजत है। साथ में पट्रोल पंपों को भी बिना किसी पाबंदी के कामकाज की अनुमति दे दी गई है। पहले पेट्रोल पंपों को रात 10 बजे तक ही खुले रहने की इजाजत थी। सरकार ने कहा कि कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 19 जनवरी से कक्षाएं शुरू हो गई हैं और उनके लिए छात्रवास की सुविधा भी इस महीने शुरू कर दी गई है जबकि कक्षा नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के लिए आठ फरवरी से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। कॉलेज, विश्वविद्यालय और स्कूली विद्यार्थियों के लिए छात्रवास की सुविधा भी शुरू होगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन व शैक्षिक कार्यक्रमों को शर्तों के साथ आयोजित करने की इजाजत दी गई है। एक फरवरी से इन कार्यक्रमों में स्थलों की कुल क्षमता के 50 फीसदी लोग या बंद सभागारों में अधिकतम 600 लोग हिस्सा ले सकते हैं। खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए अधिकतम 50 फीसदी की क्षमता वाला नियम लागू रहेगा। पलानीस्वामी ने कहा कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया पर अमल किया जाएगा। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे दूरी बनाने, मास्क लगाने और साबुन से हाथ धोने की अपील की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
चेन्नई, इकतीस जनवरी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने रविवार को यहां घोषणा की कि कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों के सभी छात्रों के लिए तथा कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों के लिए आठ फरवरी से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि क्रिकेट समेत खेलों के लिए स्टेडियम में पचास फीसदी दर्शकों को आने की इजाजत है। चेन्नई में भारत और इंग्लैंड के बीच दो टेस्ट मैच होने हैं, जिनकी शुरुआत पांच फरवरी से होनी है। अधिकारी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि पहले टेस्ट मैच में दर्शकों को आने की इजाजत नहीं होगी। पलानीस्वामी ने कहा कि एक फरवरी से सभी तरह के फिल्म थिएटरों को एक सौ फीसदी क्षमता के साथ परिचालन की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री ने इन नयी रियायतों की घोषणा एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये की। इसमें कहा गया है कि तरणताल, प्रदर्शनी हॉल को खोलने की अनुमति है तथा जिलों में शिकायत निवारण कार्यक्रम और रामेश्वरम में होने वाले ' तीर्थमदुतल' को बिना किसी रोक के आयोजित करने की इजाजत है। साथ में पट्रोल पंपों को भी बिना किसी पाबंदी के कामकाज की अनुमति दे दी गई है। पहले पेट्रोल पंपों को रात दस बजे तक ही खुले रहने की इजाजत थी। सरकार ने कहा कि कक्षा दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए उन्नीस जनवरी से कक्षाएं शुरू हो गई हैं और उनके लिए छात्रवास की सुविधा भी इस महीने शुरू कर दी गई है जबकि कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों के लिए आठ फरवरी से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। कॉलेज, विश्वविद्यालय और स्कूली विद्यार्थियों के लिए छात्रवास की सुविधा भी शुरू होगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन व शैक्षिक कार्यक्रमों को शर्तों के साथ आयोजित करने की इजाजत दी गई है। एक फरवरी से इन कार्यक्रमों में स्थलों की कुल क्षमता के पचास फीसदी लोग या बंद सभागारों में अधिकतम छः सौ लोग हिस्सा ले सकते हैं। खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए अधिकतम पचास फीसदी की क्षमता वाला नियम लागू रहेगा। पलानीस्वामी ने कहा कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया पर अमल किया जाएगा। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे दूरी बनाने, मास्क लगाने और साबुन से हाथ धोने की अपील की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
एक लुटेरा सेक्टर-22 स्थित करण ज्वेलर्स शॉप में फायरिंग कर 12 लाख के गहने लूट कर फरार हो गया और 30 कदम की दूरी पर पुलिस मुंह फाड़े रह गई। लुटेरा आराम से पैदल चलते हुए निकल गया और पुलिस सीसीटीवी फुटेज देखने और आसपास के घरों में झांकने की औपचारिक कर्रवाई करती रही। वारदात सोमवार सुबह सवा 11 और साढ़े 11 बजे के बीच हुई। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार तो मौके पर पहुंच गए मगर पुलिस को सूचना देकर बुलाना पड़ा। सेल्समैन परमजीत सिंह को गोली मारकर लुटेरे ने करीब तीन ट्रे से गहने समेट कर अपने बेग में डाले। चश्मदीद पड़ोसी दुकानदार इश्विंदर सिंह ने बताया कि फयरिंग की अवाज सुनकर देखने के लिए आए। चश्मदीद गवाह ने लुटेरे को सड़क क्रॉस कर सेक्टर 22-ए के मकानों के बीच गली से फरार होते हुए देखा। लुटेरे ने काले रंग की टोपी और टीशर्ट पहनी हुई थी और उसके चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी।
एक लुटेरा सेक्टर-बाईस स्थित करण ज्वेलर्स शॉप में फायरिंग कर बारह लाख के गहने लूट कर फरार हो गया और तीस कदम की दूरी पर पुलिस मुंह फाड़े रह गई। लुटेरा आराम से पैदल चलते हुए निकल गया और पुलिस सीसीटीवी फुटेज देखने और आसपास के घरों में झांकने की औपचारिक कर्रवाई करती रही। वारदात सोमवार सुबह सवा ग्यारह और साढ़े ग्यारह बजे के बीच हुई। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार तो मौके पर पहुंच गए मगर पुलिस को सूचना देकर बुलाना पड़ा। सेल्समैन परमजीत सिंह को गोली मारकर लुटेरे ने करीब तीन ट्रे से गहने समेट कर अपने बेग में डाले। चश्मदीद पड़ोसी दुकानदार इश्विंदर सिंह ने बताया कि फयरिंग की अवाज सुनकर देखने के लिए आए। चश्मदीद गवाह ने लुटेरे को सड़क क्रॉस कर सेक्टर बाईस-ए के मकानों के बीच गली से फरार होते हुए देखा। लुटेरे ने काले रंग की टोपी और टीशर्ट पहनी हुई थी और उसके चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल पूरे देश में 01 अगस्त को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा. इस त्योहार को हज़रत इब्राहिम की दी गई कुर्बानी की याद के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन मुसलमान ईदगाह या मस्जिद में सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़ते हैं और फिर घर पर जानवर की कुर्बानी देते हैं. इसके बाद कुर्बानी के गोश्त को गरीबों और यतीमों में बंटवां दिया जाता है. ईद की तरह ही बकरीद का त्योहार भी तीन दिन मनाया जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय संविधान बकरीद के मौके पर कुर्बानी की इजाज़त देता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 ने धार्मिक परम्पराओं को निर्बाध रूप से मानने की गांरटी दी है. इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 2015 और 2016 में बकरीद के मौके पर कुर्बानी को रोकने के लिए दाखिल की गई याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल पूरे देश में एक अगस्त को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा. इस त्योहार को हज़रत इब्राहिम की दी गई कुर्बानी की याद के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन मुसलमान ईदगाह या मस्जिद में सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़ते हैं और फिर घर पर जानवर की कुर्बानी देते हैं. इसके बाद कुर्बानी के गोश्त को गरीबों और यतीमों में बंटवां दिया जाता है. ईद की तरह ही बकरीद का त्योहार भी तीन दिन मनाया जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय संविधान बकरीद के मौके पर कुर्बानी की इजाज़त देता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद पच्चीस ने धार्मिक परम्पराओं को निर्बाध रूप से मानने की गांरटी दी है. इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सोलह में बकरीद के मौके पर कुर्बानी को रोकने के लिए दाखिल की गई याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था.
Don't Miss! VIDEO: जब सनी लियोन ने कहा- 'देखेगा राजा ट्रेलर.. की पिक्चर दिखा दूं' [म्यूजिक] 'मस्तीज़ादे' का नया गाना रिलीज कर दिया गया है। सनी लियोन, तुषार कपूर और वीर दास पर फिल्माये गये इस गाने की टाइटल है- 'देखेगा राजा ट्रेलर....' लिहाजा, अपने टाइटल की तरह यह गाना भी काफी हॉट है। गाने को आवाज दी है नेहा कक्कर ने। वहीं, इस गाने में आप सनी लियोन के दो अवतार देख सकते हैं। बता दें, फिल्म में सनी डबल रोल में नजर आने वाली हैं- लिली लेले, लैला लेले.. और इनके प्रेमी होंगे तुषार कपूर और वीर दास। रितेश देशमुख भी फिल्म में कैमियो करते नजर आएंगे। मिलाप झावेरी के निर्देशन में बनी सनी लियोनी की फिल्म 'मस्तीजादे' सेक्स कॉमेडी है, जहां आप जी खोलकर अश्लीलता देख सकते हैं। भूल कर भी अपनी गर्लफैंड के साथ यह फिल्म देखने न जाएं।
Don't Miss! VIDEO: जब सनी लियोन ने कहा- 'देखेगा राजा ट्रेलर.. की पिक्चर दिखा दूं' [म्यूजिक] 'मस्तीज़ादे' का नया गाना रिलीज कर दिया गया है। सनी लियोन, तुषार कपूर और वीर दास पर फिल्माये गये इस गाने की टाइटल है- 'देखेगा राजा ट्रेलर....' लिहाजा, अपने टाइटल की तरह यह गाना भी काफी हॉट है। गाने को आवाज दी है नेहा कक्कर ने। वहीं, इस गाने में आप सनी लियोन के दो अवतार देख सकते हैं। बता दें, फिल्म में सनी डबल रोल में नजर आने वाली हैं- लिली लेले, लैला लेले.. और इनके प्रेमी होंगे तुषार कपूर और वीर दास। रितेश देशमुख भी फिल्म में कैमियो करते नजर आएंगे। मिलाप झावेरी के निर्देशन में बनी सनी लियोनी की फिल्म 'मस्तीजादे' सेक्स कॉमेडी है, जहां आप जी खोलकर अश्लीलता देख सकते हैं। भूल कर भी अपनी गर्लफैंड के साथ यह फिल्म देखने न जाएं।
सर्वस्व समर्पक्ष चारुने अवम्भेमें आकर कहा-"जीजी और कौन ? मेरी जीजी । वे अभी तो यहीं थीं।" अवकी अमरनाथ समझ गया। उसने थोड़ी देर चुप रहकर कहा-"कहां ! यहां तो कोई नहीं था-तुम तो अकेली ही सो रही थी !" "तव शायद आपके आनेके पहले हो वे चली गयीं ।" "तुमने सपना देखा होगा । सिरमें दर्द भी है ? शायद यूडि-क्लोन लगाये हुई हो ?" "अव तो दर्द बहुत कम हो गया है-नहींके चरावर है। आप कहते हैं कि यहां जीजी नही थीं, मैंने सपना देखा है। यह देखिये, उन्होंने तो यह दवा लगा दी है, कितनी देरतक पङ्खा झलती रही हैं। तब कहीं जाकर दर्द कम हुआ है। नहीं, तो ऐसा दर्द था - ओह !" उधर दूसरे कमरेमें सुरमा चारुके ऊपर वेतरह नाराज़ हो रही थी। वह सोचती थी- "चारु तो बड़ी अजीब तरहकी औरत है ! पगली है क्या ? ओह ! मैं ही उसे मना करना भूल गयी !" अमरनाथने कहा - "खैर होगा। तुम थोड़ी देर और सो
सर्वस्व समर्पक्ष चारुने अवम्भेमें आकर कहा-"जीजी और कौन ? मेरी जीजी । वे अभी तो यहीं थीं।" अवकी अमरनाथ समझ गया। उसने थोड़ी देर चुप रहकर कहा-"कहां ! यहां तो कोई नहीं था-तुम तो अकेली ही सो रही थी !" "तव शायद आपके आनेके पहले हो वे चली गयीं ।" "तुमने सपना देखा होगा । सिरमें दर्द भी है ? शायद यूडि-क्लोन लगाये हुई हो ?" "अव तो दर्द बहुत कम हो गया है-नहींके चरावर है। आप कहते हैं कि यहां जीजी नही थीं, मैंने सपना देखा है। यह देखिये, उन्होंने तो यह दवा लगा दी है, कितनी देरतक पङ्खा झलती रही हैं। तब कहीं जाकर दर्द कम हुआ है। नहीं, तो ऐसा दर्द था - ओह !" उधर दूसरे कमरेमें सुरमा चारुके ऊपर वेतरह नाराज़ हो रही थी। वह सोचती थी- "चारु तो बड़ी अजीब तरहकी औरत है ! पगली है क्या ? ओह ! मैं ही उसे मना करना भूल गयी !" अमरनाथने कहा - "खैर होगा। तुम थोड़ी देर और सो
मोहाली, 27 मई(निसं) सिविल सर्जन डॉ. आदर्शपाल कौर ने सभी स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारियों को जिला में चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों और योजनाओं को बेहतर और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। विभिन्न प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं योजना के क्रियान्वयन में ढिलाई या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता से संबंधित कोई भी कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर सरकारी काम समय पर पूरा किया जाए और इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाए। यदि किसी आवेदन में कोई कमी है या अन्य कागजी कार्रवाई की आवश्यकता है, तो आवेदक को समय पर सूचित किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक आवेदन को निर्धारित समय के भीतर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ लापरवाही या अपने कत्र्तव्यों में अनुचित देरी के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सहायक सिविल सर्जन डा. रेणु सिंह, उप चिकित्सा आयुक्त डॉ. दलजीत सिंह प्रदेशी, जिला परिवार नियोजन अधिकारी डॉ. निधि कौशल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गिरीश डोगरा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष कुमार, जिला महामारी विज्ञानी अक्षय कुमार, डॉ. विक्रांत नागर हरमनदीप कौर, लेखाकार अजय कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मोहाली, सत्ताईस मई सिविल सर्जन डॉ. आदर्शपाल कौर ने सभी स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारियों को जिला में चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों और योजनाओं को बेहतर और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। विभिन्न प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं योजना के क्रियान्वयन में ढिलाई या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता से संबंधित कोई भी कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर सरकारी काम समय पर पूरा किया जाए और इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाए। यदि किसी आवेदन में कोई कमी है या अन्य कागजी कार्रवाई की आवश्यकता है, तो आवेदक को समय पर सूचित किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक आवेदन को निर्धारित समय के भीतर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ लापरवाही या अपने कत्र्तव्यों में अनुचित देरी के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सहायक सिविल सर्जन डा. रेणु सिंह, उप चिकित्सा आयुक्त डॉ. दलजीत सिंह प्रदेशी, जिला परिवार नियोजन अधिकारी डॉ. निधि कौशल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गिरीश डोगरा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष कुमार, जिला महामारी विज्ञानी अक्षय कुमार, डॉ. विक्रांत नागर हरमनदीप कौर, लेखाकार अजय कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर, 15 अक्टूबर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को राज्य के मेवाड़ क्षेत्र के दौरे के तहत राजसमंद के नाथद्वारा पहुंचे। गहलोत ने नाथद्वारा में श्रीनाथजी के मंदिर में दर्शन किए और सभी के अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, मंत्री उदयलाल आंजना भी उनके साथ थे। गहलोत ने गुड़ला गांव में राजकीय माध्यमिक विद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना सहित राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि राज्य सरकार ने अपने लगभग तीन साल के कार्यकाल में जनकल्याण व विकास के कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते दो साल में 123 कॉलेज खोले हैं जिनमें से 33 कॉलेज केवल लड़कियों के लिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा व बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दे रही है। गहलोत का 'सरकार गांवों/शहरों के संग' अभियान के तहत आयोजत शिविर का निरीक्षण करने का भी कार्यक्रम है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
जयपुर, पंद्रह अक्टूबर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को राज्य के मेवाड़ क्षेत्र के दौरे के तहत राजसमंद के नाथद्वारा पहुंचे। गहलोत ने नाथद्वारा में श्रीनाथजी के मंदिर में दर्शन किए और सभी के अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, मंत्री उदयलाल आंजना भी उनके साथ थे। गहलोत ने गुड़ला गांव में राजकीय माध्यमिक विद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना सहित राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि राज्य सरकार ने अपने लगभग तीन साल के कार्यकाल में जनकल्याण व विकास के कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते दो साल में एक सौ तेईस कॉलेज खोले हैं जिनमें से तैंतीस कॉलेज केवल लड़कियों के लिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा व बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दे रही है। गहलोत का 'सरकार गांवों/शहरों के संग' अभियान के तहत आयोजत शिविर का निरीक्षण करने का भी कार्यक्रम है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
चंडीगढ़ के सोशल मीडिया यूजर्स (नेटिजनों) और स्थानीय लोगों ने गुरुवार को छतों, बोनटों पर बैठकर, अपनी एसयूवी खिड़कियों से बाहर लटककर, वीडियो क्लिप बनाकर और इंस्टाग्राम पर रील (Reels) के रूप में अपलोड करके यातायात नियमों (Traffic Rules) का उल्लंघन करने पर तीन लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और चालान जारी करने के ट्रैफिक पुलिस के कदम की जमकर सराहना की। वीडियो क्लिप तब बनाए गए थे जब 24 जून को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेक्टर 34 प्रदर्शनी मैदान में भाजपा कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करने के लिए चंडीगढ़ में थे। इस बीच स्थानीय भाजपा नेताओं ने यातायात नियमों उल्लंघन करने वालों से दूरी बना ली। बीजेपी अध्यक्ष अरुण सूद कहते हैं, "वे बीजेपी कार्यकर्ता नहीं थे। उन्होंने मोहाली की तरफ से चंडीगढ़ में प्रवेश किया। मुझे पता चला कि मोहाली पुलिस ने भी उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की है। एक थार, एक फॉर्च्यूनर और एक स्कॉर्पियो सहित कई एसयूवी का गुरुवार को ट्रैफिक पुलिस की ओर से चालान किया गया था। इस बीच नेटिज़न्स ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चालान जारी करने के लिए चंडीगढ़ यूटी ट्रैफिक पुलिस के कदम के साथ रील साझा की और जमकर उनकी सराहना की।
चंडीगढ़ के सोशल मीडिया यूजर्स और स्थानीय लोगों ने गुरुवार को छतों, बोनटों पर बैठकर, अपनी एसयूवी खिड़कियों से बाहर लटककर, वीडियो क्लिप बनाकर और इंस्टाग्राम पर रील के रूप में अपलोड करके यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर तीन लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और चालान जारी करने के ट्रैफिक पुलिस के कदम की जमकर सराहना की। वीडियो क्लिप तब बनाए गए थे जब चौबीस जून को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सेक्टर चौंतीस प्रदर्शनी मैदान में भाजपा कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करने के लिए चंडीगढ़ में थे। इस बीच स्थानीय भाजपा नेताओं ने यातायात नियमों उल्लंघन करने वालों से दूरी बना ली। बीजेपी अध्यक्ष अरुण सूद कहते हैं, "वे बीजेपी कार्यकर्ता नहीं थे। उन्होंने मोहाली की तरफ से चंडीगढ़ में प्रवेश किया। मुझे पता चला कि मोहाली पुलिस ने भी उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की है। एक थार, एक फॉर्च्यूनर और एक स्कॉर्पियो सहित कई एसयूवी का गुरुवार को ट्रैफिक पुलिस की ओर से चालान किया गया था। इस बीच नेटिज़न्स ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चालान जारी करने के लिए चंडीगढ़ यूटी ट्रैफिक पुलिस के कदम के साथ रील साझा की और जमकर उनकी सराहना की।
इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली : हर कोई चाहता है कि उसका खुद का घर हो ऐसे ही कुछ सपने लिए देहरादून का जोशी परिवार भी इस सीरीज में दिखाई पड़ता है। जेब में भले ही पैसा काम है लेकिन आंखो में सपने काम नहीं होने चाहिए। सरला जोशी अपने सपनो को पूरा करने के लिए पिछले 20 साल से सेविंग्स कर रहा है वे स्कूल में वाइस प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत है। जबकि घर में पूरी तरह से प्रिंसिपल हैं मतलब सब उन्हीं की चसुनते हैं। इसमें दूसरे महोदय हैं उमेश जोशी जो पेशे से कविराज हैं सभी को कविताएं सुनाते हैं पर इनकी इतनी इनकम नहीं की वे घर का खर्च उठा सकें इसलिए वे अपनी कविताओं से ही लगों को प्रसन्न करने में लगा रहता है। उमेश जोशी के दो बच्चे हैं जिज्ञासा जोशी और नमन जोशी । अब ये पूरा परिवार अपने सपने पुरे करने निकल पड़ा है। ये रास्ता इतनी आसान भी नहीं है जितना दिखाई देती है इस सीरीज में स्ट्रगल है, सुविधा शुल्क वाला झोल है और घर का नाम क्या रखे जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलती है। कागज पर जब होम शांति के एक्टिंग डिपार्टमेंट का एनालिसिस किया गया तो वे काफी तगड़ा लगता है। लेकिन जैसे सभी किरदारों को दिखाया गया है उसमे हमें वो दम दिखाई नहीं देता, कही न कही कुछ मिसिंग लगता है। नमन जोशी के किरदार की बात करें तो सब कुछ ओवर द टॉप लगता प्रतीत होता है। ओवर एक्टिंग की भी महक आती है। बिना सैंस वाली ऐसी कंपनी भी है जिससे आप थोड़ा निराश भी हो सकते हैं। वहीं इस मामले में चकोरी द्विवेदी काफी आगे हैं। बड़ी बहन का रोल उन पर फिट बैठता है। सीरीज से यदि आप ज्यादा उम्मीद लगा रहे हैं तो आपके हाथ ज्यादा कुछ नहीं आने वाला है। शुरुआती तीन एपिसोड (Home Shanti Hotstar Series Season 1) तो बहुत ही बोरिंग से लगते हैं ऐसा लगता है जैसे जबरदस्ती ही थोप दिए गए हो । बेशक बाद में दोनों किरदारों ने ऑडियंस का मन जितने के लिए भरपूर प्रयास किया है। लेकिन ओवर ऑल इमपैक्ट इतना नहीं है जितना ट्रेलर से लगता है। सीरीज के छोटे किरदारों ने बढ़िया काम किया है हैप्पी रणजीत को ही ले लीजिए उन्होने ठेकेदार का रोल बहुत शानदार किया है।
इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली : हर कोई चाहता है कि उसका खुद का घर हो ऐसे ही कुछ सपने लिए देहरादून का जोशी परिवार भी इस सीरीज में दिखाई पड़ता है। जेब में भले ही पैसा काम है लेकिन आंखो में सपने काम नहीं होने चाहिए। सरला जोशी अपने सपनो को पूरा करने के लिए पिछले बीस साल से सेविंग्स कर रहा है वे स्कूल में वाइस प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत है। जबकि घर में पूरी तरह से प्रिंसिपल हैं मतलब सब उन्हीं की चसुनते हैं। इसमें दूसरे महोदय हैं उमेश जोशी जो पेशे से कविराज हैं सभी को कविताएं सुनाते हैं पर इनकी इतनी इनकम नहीं की वे घर का खर्च उठा सकें इसलिए वे अपनी कविताओं से ही लगों को प्रसन्न करने में लगा रहता है। उमेश जोशी के दो बच्चे हैं जिज्ञासा जोशी और नमन जोशी । अब ये पूरा परिवार अपने सपने पुरे करने निकल पड़ा है। ये रास्ता इतनी आसान भी नहीं है जितना दिखाई देती है इस सीरीज में स्ट्रगल है, सुविधा शुल्क वाला झोल है और घर का नाम क्या रखे जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलती है। कागज पर जब होम शांति के एक्टिंग डिपार्टमेंट का एनालिसिस किया गया तो वे काफी तगड़ा लगता है। लेकिन जैसे सभी किरदारों को दिखाया गया है उसमे हमें वो दम दिखाई नहीं देता, कही न कही कुछ मिसिंग लगता है। नमन जोशी के किरदार की बात करें तो सब कुछ ओवर द टॉप लगता प्रतीत होता है। ओवर एक्टिंग की भी महक आती है। बिना सैंस वाली ऐसी कंपनी भी है जिससे आप थोड़ा निराश भी हो सकते हैं। वहीं इस मामले में चकोरी द्विवेदी काफी आगे हैं। बड़ी बहन का रोल उन पर फिट बैठता है। सीरीज से यदि आप ज्यादा उम्मीद लगा रहे हैं तो आपके हाथ ज्यादा कुछ नहीं आने वाला है। शुरुआती तीन एपिसोड तो बहुत ही बोरिंग से लगते हैं ऐसा लगता है जैसे जबरदस्ती ही थोप दिए गए हो । बेशक बाद में दोनों किरदारों ने ऑडियंस का मन जितने के लिए भरपूर प्रयास किया है। लेकिन ओवर ऑल इमपैक्ट इतना नहीं है जितना ट्रेलर से लगता है। सीरीज के छोटे किरदारों ने बढ़िया काम किया है हैप्पी रणजीत को ही ले लीजिए उन्होने ठेकेदार का रोल बहुत शानदार किया है।
दिल्ली (Delhi) में 22 फरवरी (बुधवार) को मेयर का चुनाव (mayoral election) होगा. उपराज्यपाल (LG) ने दिल्ली सरकार के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी है. नगर निगम सदन (MCD) की पिछली तीन बैठकों में मेयर का चुनाव नहीं हो सका है. वहीं, अब 22 फरवरी को सुबह 11 बजे MCD सदन के बैठक बुलाने की मंजूरी दी गई है, इसी दिन मेयर का भी चुनाव होगा. सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) ने उपराज्यपाल को पत्र लिखा था. पत्र में उपराज्यपाल से 22 फरवरी को मेयर चुनाव कराने की बात कही गई थी. बता दें कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 के मुताबिक महापौर और उप महापौर का चुनाव एमसीडी चुनाव के बाद सदन की पहली बैठक में किया जाना चाहिए. पिछले साल चार दिसंबर को नगर निकाय चुनाव हुआ था और नतीजे आने के दो महीने बीत जाने के बावजूद अबतक महापौर नहीं चुना जा सका है. एमसीडी की अबतक हुई तीन बैठकों में मनोनीत सदस्यों के मताधिकार को लेकर आप और बीजेपी के बीच जारी गतिरोध के कारण महापौर का चुनाव नहीं हो सका. नगर निकाय चुनाव के बाद एमसीडी सदन की पहली बैठक छह जनवरी को आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी सदस्यों के बीच हंगामे की वजह से स्थगित कर दी गई थी. दिल्ली नगर निगम के 250 सदस्यीय सदन में आप को 134 पार्षदों के साथ बहुमत हासिल है। सदन में भाजपा के 104 सदस्य हैं. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मनोनीत सदस्यों को मताधिकार देकर जनादेश चुराना चाहती है.
दिल्ली में बाईस फरवरी को मेयर का चुनाव होगा. उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी है. नगर निगम सदन की पिछली तीन बैठकों में मेयर का चुनाव नहीं हो सका है. वहीं, अब बाईस फरवरी को सुबह ग्यारह बजे MCD सदन के बैठक बुलाने की मंजूरी दी गई है, इसी दिन मेयर का भी चुनाव होगा. सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल को पत्र लिखा था. पत्र में उपराज्यपाल से बाईस फरवरी को मेयर चुनाव कराने की बात कही गई थी. बता दें कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के मुताबिक महापौर और उप महापौर का चुनाव एमसीडी चुनाव के बाद सदन की पहली बैठक में किया जाना चाहिए. पिछले साल चार दिसंबर को नगर निकाय चुनाव हुआ था और नतीजे आने के दो महीने बीत जाने के बावजूद अबतक महापौर नहीं चुना जा सका है. एमसीडी की अबतक हुई तीन बैठकों में मनोनीत सदस्यों के मताधिकार को लेकर आप और बीजेपी के बीच जारी गतिरोध के कारण महापौर का चुनाव नहीं हो सका. नगर निकाय चुनाव के बाद एमसीडी सदन की पहली बैठक छह जनवरी को आम आदमी पार्टी और बीजेपी सदस्यों के बीच हंगामे की वजह से स्थगित कर दी गई थी. दिल्ली नगर निगम के दो सौ पचास सदस्यीय सदन में आप को एक सौ चौंतीस पार्षदों के साथ बहुमत हासिल है। सदन में भाजपा के एक सौ चार सदस्य हैं. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मनोनीत सदस्यों को मताधिकार देकर जनादेश चुराना चाहती है.
अगर कोई वास्तविक दवाव पड़ता है तो वह अपरिवर्तनवादियोका ही पड़ता है, क्योकि सविनय अवज्ञासे उनकी रूह काँपती है । सविनय अवज्ञाके लिए वे ही लोग सगठन कर सकते है जो उसीके लिए अपना सारा समय दे और उसीपर सारा व्यान लगाये । अगर अपरिवर्तनवादी और परिवर्तनवादी एक-दूसरेकी राहमे रोडा अटकाते है तो सरकार अवश्य ही प्रसन्न होगी। मै तो ऐसी किसी बातमे शामिल नही होऊँगा और मैं समझता हूँ कि ये दोनो दल भी इसमें शामिल नही होना चाहेगे। दोनो ही स्वराज्य हासिल करना चाहते है और जल्दीसे-जल्दी । इसलिए दोनो उसके लिए अपने-अपने ढगसे काम करेगे । लिवरल लोग चाहे स्वीकार करे या न करे, तथ्य यही है कि असहयोगियोके ही कार्यों के परिणामस्वरूप सरकारमे लिवरलोकी पूछ होने लगी है । देशमे अगर कोई प्रगतिशील दल कौसिलोके वाहरसे सरकारपर दवाव डाले तो उससे सुधारोके समर्थकोको सदा ही सहायता मिलेगी । मै तो यहाँतक कहता हूँ कि अगर पूर्ण वहिष्कारके सभी समर्थक खत्म हो जाये तो कौंसिलोमे कौसिलवालोकी स्थिति वडी ही दयनीय हो जायेगी। इसमे मै यह मानकर चल रहा हूँ कि सर्वसाधारण हिंसाका रास्ता कभी नहीं अपनायेगा। सभी निरकुश सरकारे जरूरी तौरपर जनशक्तिके उभारसे डरती है, खासतौरसे तव जब जनशक्तिका उभार अनुशासनबद्ध और गान्तिपूर्ण हो । वर्तमान सरकार, हिन्दुओ और मुसलमानोके वीच जो एकता वढ रही है, उससे डरती है और अगर खद्दरका कार्यक्रम कही सफल हो जाये, और जो जरूर ही होगा, तब तो उसके होश ही उड जायेगे । इससे सरकार जनताके दष्टिकोणको स्वीकार कर लेगी और एक ऐसी अत्यन्त शान्तिमय कान्ति घटित होगी जैमी ससारने कभी नहीं देखी । [ अग्रेजीसे ] हिन्दू, २-६-१९२४ ८४. वीसनगरके हिन्दू और मुसलमान इस बाबत मुझे ढेरो पत्र प्राप्त हुए है । पत्र लेखक भी इन सब पनीके प्रकाशित किये जानेकी आशा नहीं करते । यह वात उनकी उदारताकी परिचायक है और इसने यह भी मालूम होता है कि मैंने 'नवजीवन' पत्रके सचालनमें जो मार्ग अपनाया है वे उस मार्गकी कद्र करते हैं। जिस पत्रमे किसीपर आक्रमण किया गया हो उसे मैं कदापि प्रकाशित नही करूँगा । जिसमे कौमोमे परम्पर द्वेष फैले, मै ऐनी चीज भी नहीं छापूंगा । मै द्वेषभावसे तो एक अक्षर भी नही लिख सकता । यदि मैंने वीमनगरके कौमी तनातनीको लेकर कुछ लिखा है तो वह सिर्फ दोनो कोमोको शान्त करने, समझाने-बुझाने और उनका एक-दूसरेके प्रति क्या कर्त्तव्य हो यह सव बताने के लिए ही लिया है। उस दृष्टिने विचार करने पर मुझे जितने पत्र प्राप्त हुए हैं उनमे से एकको भी प्रकाशित करना जरूरी नहीं है। बहुत दिन पहले मेरे पास महानुभाई भी पत्र
अगर कोई वास्तविक दवाव पड़ता है तो वह अपरिवर्तनवादियोका ही पड़ता है, क्योकि सविनय अवज्ञासे उनकी रूह काँपती है । सविनय अवज्ञाके लिए वे ही लोग सगठन कर सकते है जो उसीके लिए अपना सारा समय दे और उसीपर सारा व्यान लगाये । अगर अपरिवर्तनवादी और परिवर्तनवादी एक-दूसरेकी राहमे रोडा अटकाते है तो सरकार अवश्य ही प्रसन्न होगी। मै तो ऐसी किसी बातमे शामिल नही होऊँगा और मैं समझता हूँ कि ये दोनो दल भी इसमें शामिल नही होना चाहेगे। दोनो ही स्वराज्य हासिल करना चाहते है और जल्दीसे-जल्दी । इसलिए दोनो उसके लिए अपने-अपने ढगसे काम करेगे । लिवरल लोग चाहे स्वीकार करे या न करे, तथ्य यही है कि असहयोगियोके ही कार्यों के परिणामस्वरूप सरकारमे लिवरलोकी पूछ होने लगी है । देशमे अगर कोई प्रगतिशील दल कौसिलोके वाहरसे सरकारपर दवाव डाले तो उससे सुधारोके समर्थकोको सदा ही सहायता मिलेगी । मै तो यहाँतक कहता हूँ कि अगर पूर्ण वहिष्कारके सभी समर्थक खत्म हो जाये तो कौंसिलोमे कौसिलवालोकी स्थिति वडी ही दयनीय हो जायेगी। इसमे मै यह मानकर चल रहा हूँ कि सर्वसाधारण हिंसाका रास्ता कभी नहीं अपनायेगा। सभी निरकुश सरकारे जरूरी तौरपर जनशक्तिके उभारसे डरती है, खासतौरसे तव जब जनशक्तिका उभार अनुशासनबद्ध और गान्तिपूर्ण हो । वर्तमान सरकार, हिन्दुओ और मुसलमानोके वीच जो एकता वढ रही है, उससे डरती है और अगर खद्दरका कार्यक्रम कही सफल हो जाये, और जो जरूर ही होगा, तब तो उसके होश ही उड जायेगे । इससे सरकार जनताके दष्टिकोणको स्वीकार कर लेगी और एक ऐसी अत्यन्त शान्तिमय कान्ति घटित होगी जैमी ससारने कभी नहीं देखी । [ अग्रेजीसे ] हिन्दू, दो जून एक हज़ार नौ सौ चौबीस चौरासी. वीसनगरके हिन्दू और मुसलमान इस बाबत मुझे ढेरो पत्र प्राप्त हुए है । पत्र लेखक भी इन सब पनीके प्रकाशित किये जानेकी आशा नहीं करते । यह वात उनकी उदारताकी परिचायक है और इसने यह भी मालूम होता है कि मैंने 'नवजीवन' पत्रके सचालनमें जो मार्ग अपनाया है वे उस मार्गकी कद्र करते हैं। जिस पत्रमे किसीपर आक्रमण किया गया हो उसे मैं कदापि प्रकाशित नही करूँगा । जिसमे कौमोमे परम्पर द्वेष फैले, मै ऐनी चीज भी नहीं छापूंगा । मै द्वेषभावसे तो एक अक्षर भी नही लिख सकता । यदि मैंने वीमनगरके कौमी तनातनीको लेकर कुछ लिखा है तो वह सिर्फ दोनो कोमोको शान्त करने, समझाने-बुझाने और उनका एक-दूसरेके प्रति क्या कर्त्तव्य हो यह सव बताने के लिए ही लिया है। उस दृष्टिने विचार करने पर मुझे जितने पत्र प्राप्त हुए हैं उनमे से एकको भी प्रकाशित करना जरूरी नहीं है। बहुत दिन पहले मेरे पास महानुभाई भी पत्र
"दस्तक दिल पर" गुलाबी सर्दी का अहसास हो रहा था।दिल मे धुकधुकी लगी थी कि कहीं देर हो जाने की वजह से वो मना न कर दे। मैं भी ये सोच कर असमंजस में था कि उसके पड़ोसी क्या कहेंगे। पशोपेश की स्तिथि थी ,तभी मेरा मोबाइल बजा। वही थी...पूछा "कहाँ हो?" मुझे कुछ पता होता तो बताता! उसने कहा "अब मत आना जाओ लौट जाओ".....दिल धक्क से बैठ गया, जैसे किसी ने ऊंची बिल्डिंग से फेंक दिया हो। मैंने हौले से कहा ठीक है, मेरी मरी मरी आवाज सुन उसने ऑटो वाले को फ़ोन देने को कहा। शायद उस ऑटो वाले को समझ आ गई थी उसकी गली! आख़िर मैं उसके मकान के सामने था! घड़ी पर नज़र डाली तो पूरे बारह बज चुके थे। मैने हौले से मैन गेट खोला तो उसने झाँक कर देखा और दरवाज़ा खोल दिया। नज़रें मिलीं और होंठ मुस्कुरा दिए! समझ न आया क्या कहूं??क्या न कहूँ.....?? शायद वो भी यही सोच रही थी। यूँ तो मैं नहा कर चला था पर कुछ न सूझा तो कह दिया "मैं नहाना चाहता हूँ! थका हूँ.. क्या व्यवस्था हो जाएगी?" वो मेरी तरफ अचंभे से देखने लगी और कमरे में वाशरूम की तरफ इशारा कर दिया। मैने तौलिया मांगा तो पकडा कर वापस ड्राइंग रूम में चली गई। यूँ तो नशा उड़न छू हो चुका था पर कोई ख़ुमारी सी चढ़ रही थी। मैं ड्राइंग रूम में वापस आया तो उसने पूछा..."तेल लगा दूँ बालों में?" "जी लगा दो" ....मैं उसके सामने ज़मीन पर बैठ गया और वो हल्के हाथों से सर पर तेल लगाने लगी। ऐसा लगा बरसों की थकान उतर गई हो! मैंने उसे कहना शुरू किया "कल एक ख़्वाब देखा, मैंने देखा मैं एक कटी हुई पतंग के पीछे दौड़ रहा हूँ। उस पतंग के लंबी डोर लटक रही थी। मैं दूर तक दौड़ कर उस पतंग को पकड़ लेता हूँ। पर वो पतंग मेरे हाथ में आते ही फट गई, ओह... पर मैंने उसकी डोर को समेट लिया था, उस डोर को मैंने अपने सीने के पास वाली जेब मे रख लिया ठीक दिल के पास। जब मैंने घर आकर डोर सम्भाली तो देखा, सारी डोर उलझ गए थी मैंने जैसे ही उसे सुलझाना चाहा वो और उलझती चली गई, मैं मायूस हो गया था इतने में जाग खुल गई.......सुनो क्या था वो सब?" वो कुछ नहीं बोली चुपचाप सुनती रही। उसे मेरे बाल बहुत पसंद थे। कहती थी 'मिलोगे तो उलझाऊंगी ,फिर सुलझाऊंगी।' कुछ देर तेल लगा वो मेरे बालों से खेलती रही। कितना सुखद अहसास था! अनोखा बालपन वाला अहसास! जी किया बोलूं कि ऐसा ही करती रहो। पर वो भी संयत हो गई शायद। "अब हो गया...उठिए।" मैं उठ कर सोफे पर बैठ गया, एक पूरी ज़िन्दगी जी के। मैं उसे भरपूर निगाहों से देखना चाहता था, पर देख नहीं पा रहा था। नज़र टिक नहीं रही थी और वो भी नज़रें मिलने पर असहज हो उठती थी। क्या करूँ... देख भी नहीं पा रहा रह भी नहीं पा रहा। उठ कर उसके नज़दीक आ गया। उसकी नज़रें कुछ और झुक गईं।ये क्या है... इतनी शर्म ? हौले से उस का हाथ अपने हाथ मे ले लिया । उसकी नज़रें उठीं..। हाथ छुड़ा कर बोली...चलो कॉफ़ी बनाती हूँ। सर्दी लग रही होगी तुम्हे। कॉफ़ी पी कर छत पर चलेंगे। झूले पर बैठेंगे कुछ देर। आज सुंदर चाँद खिला है आसमाँ पर। मैं हैरान था! क्या है ये सब ! एक बार उसने बताया था कि रात देर तक चाँद निहारना चाहती हूं। पर अकेले छत पर डर लगता है। मुझसे नहीं डरती ये! आधी रात गए दरवाज़ा खोल दिया और अब छत पर। लगा ये मुझे बहुत पहले से जानती है। संजय नायक"शिल्प"
"दस्तक दिल पर" गुलाबी सर्दी का अहसास हो रहा था।दिल मे धुकधुकी लगी थी कि कहीं देर हो जाने की वजह से वो मना न कर दे। मैं भी ये सोच कर असमंजस में था कि उसके पड़ोसी क्या कहेंगे। पशोपेश की स्तिथि थी ,तभी मेरा मोबाइल बजा। वही थी...पूछा "कहाँ हो?" मुझे कुछ पता होता तो बताता! उसने कहा "अब मत आना जाओ लौट जाओ".....दिल धक्क से बैठ गया, जैसे किसी ने ऊंची बिल्डिंग से फेंक दिया हो। मैंने हौले से कहा ठीक है, मेरी मरी मरी आवाज सुन उसने ऑटो वाले को फ़ोन देने को कहा। शायद उस ऑटो वाले को समझ आ गई थी उसकी गली! आख़िर मैं उसके मकान के सामने था! घड़ी पर नज़र डाली तो पूरे बारह बज चुके थे। मैने हौले से मैन गेट खोला तो उसने झाँक कर देखा और दरवाज़ा खोल दिया। नज़रें मिलीं और होंठ मुस्कुरा दिए! समझ न आया क्या कहूं??क्या न कहूँ.....?? शायद वो भी यही सोच रही थी। यूँ तो मैं नहा कर चला था पर कुछ न सूझा तो कह दिया "मैं नहाना चाहता हूँ! थका हूँ.. क्या व्यवस्था हो जाएगी?" वो मेरी तरफ अचंभे से देखने लगी और कमरे में वाशरूम की तरफ इशारा कर दिया। मैने तौलिया मांगा तो पकडा कर वापस ड्राइंग रूम में चली गई। यूँ तो नशा उड़न छू हो चुका था पर कोई ख़ुमारी सी चढ़ रही थी। मैं ड्राइंग रूम में वापस आया तो उसने पूछा..."तेल लगा दूँ बालों में?" "जी लगा दो" ....मैं उसके सामने ज़मीन पर बैठ गया और वो हल्के हाथों से सर पर तेल लगाने लगी। ऐसा लगा बरसों की थकान उतर गई हो! मैंने उसे कहना शुरू किया "कल एक ख़्वाब देखा, मैंने देखा मैं एक कटी हुई पतंग के पीछे दौड़ रहा हूँ। उस पतंग के लंबी डोर लटक रही थी। मैं दूर तक दौड़ कर उस पतंग को पकड़ लेता हूँ। पर वो पतंग मेरे हाथ में आते ही फट गई, ओह... पर मैंने उसकी डोर को समेट लिया था, उस डोर को मैंने अपने सीने के पास वाली जेब मे रख लिया ठीक दिल के पास। जब मैंने घर आकर डोर सम्भाली तो देखा, सारी डोर उलझ गए थी मैंने जैसे ही उसे सुलझाना चाहा वो और उलझती चली गई, मैं मायूस हो गया था इतने में जाग खुल गई.......सुनो क्या था वो सब?" वो कुछ नहीं बोली चुपचाप सुनती रही। उसे मेरे बाल बहुत पसंद थे। कहती थी 'मिलोगे तो उलझाऊंगी ,फिर सुलझाऊंगी।' कुछ देर तेल लगा वो मेरे बालों से खेलती रही। कितना सुखद अहसास था! अनोखा बालपन वाला अहसास! जी किया बोलूं कि ऐसा ही करती रहो। पर वो भी संयत हो गई शायद। "अब हो गया...उठिए।" मैं उठ कर सोफे पर बैठ गया, एक पूरी ज़िन्दगी जी के। मैं उसे भरपूर निगाहों से देखना चाहता था, पर देख नहीं पा रहा था। नज़र टिक नहीं रही थी और वो भी नज़रें मिलने पर असहज हो उठती थी। क्या करूँ... देख भी नहीं पा रहा रह भी नहीं पा रहा। उठ कर उसके नज़दीक आ गया। उसकी नज़रें कुछ और झुक गईं।ये क्या है... इतनी शर्म ? हौले से उस का हाथ अपने हाथ मे ले लिया । उसकी नज़रें उठीं..। हाथ छुड़ा कर बोली...चलो कॉफ़ी बनाती हूँ। सर्दी लग रही होगी तुम्हे। कॉफ़ी पी कर छत पर चलेंगे। झूले पर बैठेंगे कुछ देर। आज सुंदर चाँद खिला है आसमाँ पर। मैं हैरान था! क्या है ये सब ! एक बार उसने बताया था कि रात देर तक चाँद निहारना चाहती हूं। पर अकेले छत पर डर लगता है। मुझसे नहीं डरती ये! आधी रात गए दरवाज़ा खोल दिया और अब छत पर। लगा ये मुझे बहुत पहले से जानती है। संजय नायक"शिल्प"
लखनऊः कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद देश के कई राज्यों में अनलॉक कर दिया गया है। वहीं, जहां संक्रमण अधिक है वहां अभी भी पाबंदियां लागू है। अनलॉक के साथ ही कुछ राज्यों में स्कूलों को खोल दिया गया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्कूलों को खोलने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मिली जानकारी के अनुसार योगी सरकार ने प्रायमरी और सेकेंडरी स्कूलों को खोलने का फैसला लिया है। इस संबंध में सरकार ने निर्देश जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि कक्षा 6 से 8वीं 23 अगस्त से और कक्षा 1 से 5 वीं कक्षा के स्कूल एक सितंबर से खुलेंगे। फिलहाल स्कूल 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे। इससे पहले सरकार ने 16 अगस्त से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूल, विश्वविद्यालय, कॉलेज और कोचिंग संस्थान खोलने का फैसला किया था। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से शिक्षा अधिकारियों को पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
लखनऊः कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद देश के कई राज्यों में अनलॉक कर दिया गया है। वहीं, जहां संक्रमण अधिक है वहां अभी भी पाबंदियां लागू है। अनलॉक के साथ ही कुछ राज्यों में स्कूलों को खोल दिया गया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्कूलों को खोलने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मिली जानकारी के अनुसार योगी सरकार ने प्रायमरी और सेकेंडरी स्कूलों को खोलने का फैसला लिया है। इस संबंध में सरकार ने निर्देश जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि कक्षा छः से आठवीं तेईस अगस्त से और कक्षा एक से पाँच वीं कक्षा के स्कूल एक सितंबर से खुलेंगे। फिलहाल स्कूल पचास प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे। इससे पहले सरकार ने सोलह अगस्त से कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के स्कूल, विश्वविद्यालय, कॉलेज और कोचिंग संस्थान खोलने का फैसला किया था। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से शिक्षा अधिकारियों को पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं। जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हुआ और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्तासुर बना। गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- 'वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिवभक्त रहा है अत हे इंद्र! तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो। ' देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया। गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति छा गई। अतः प्रदोष व्रत हर शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं। जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हुआ और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्तासुर बना। गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- 'वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिवभक्त रहा है अत हे इंद्र! तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो। ' देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया। गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति छा गई। अतः प्रदोष व्रत हर शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए।
Rama Ekadashi 2022:हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस बार 21 अक्टूबर, शुक्रवार को रमा एकादशी का व्रत किया जाएगा। दीपावली से ठीक पहले आने से ये तिथि बहुत खास है। रमा एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप विधि-विधान से करें। मंत्र जाप के लिए तुलसी की माला का उपयोग करें। इस मंत्र के प्रभाव से आपको धन लाभ के योग बनने लगेंगे। मंत्र- ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नमः रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी का अभिषेक भी करना चाहिए। इस दिन गाय के दूध में केसर मिलाकर इसे दक्षिणावर्ती शंख में भर लें और इसी के माध्यम से अभिषेक करते रहें। इस दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप भी करते रहें। इससे आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी। एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम। एकादशी पर पहले भगवान को पीले फल जैसे केले, आम आदि का अधिक से अधिक संख्या में भोग लगाएं और बाद में इसे जरूरतमंदों को बांट दें। इससे गुरु ग्रह से संबंधित शुभ फल आपको मिल सकते हैं, साथ ही वैवाहिक जीवन भी सुखमय बना रह सकता है। आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्। माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्। । कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्। एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्। । अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णःदामोदरं वासुदेवं हरे। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे। ।
Rama Ekadashi दो हज़ार बाईस:हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस बार इक्कीस अक्टूबर, शुक्रवार को रमा एकादशी का व्रत किया जाएगा। दीपावली से ठीक पहले आने से ये तिथि बहुत खास है। रमा एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप विधि-विधान से करें। मंत्र जाप के लिए तुलसी की माला का उपयोग करें। इस मंत्र के प्रभाव से आपको धन लाभ के योग बनने लगेंगे। मंत्र- ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नमः रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी का अभिषेक भी करना चाहिए। इस दिन गाय के दूध में केसर मिलाकर इसे दक्षिणावर्ती शंख में भर लें और इसी के माध्यम से अभिषेक करते रहें। इस दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप भी करते रहें। इससे आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी। एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम। एकादशी पर पहले भगवान को पीले फल जैसे केले, आम आदि का अधिक से अधिक संख्या में भोग लगाएं और बाद में इसे जरूरतमंदों को बांट दें। इससे गुरु ग्रह से संबंधित शुभ फल आपको मिल सकते हैं, साथ ही वैवाहिक जीवन भी सुखमय बना रह सकता है। आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वद्र्धनम्। माया पूज निकासु ताप हरणं गौवद्र्धनोधरणम्। । कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्। एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्। । अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णःदामोदरं वासुदेवं हरे। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे। ।