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यदस्ति तस्य नाशोऽस्ति न कदाचन राघव । तस्मात् तन्नएमप्यन्तर्याजभूतं भवेद्भुदि ।। ६२ ।। स्मृतिबीजाच्चिदाकाशे पुनरुद्भूय दृश्यधीः । लोकशैलाम्बराकार दोपं वितनुतेऽतनुम् ।। ६३ ॥ इत्यनिर्मोक्षदोपः स्यात् न च तस्येह संभवः । यस्माद्देवपिंमुनयो दृश्यन्ते मुक्तिभाजनम् ॥ ६४ ॥ यदि स्याज्जगदादीदं तस्मान्मोक्षो न कस्यचित् । वाह्यस्थमस्तु हृत्स्थं वा दृश्यं नाशाय केवलम् ।। ६५ ।। परिणामवाद में दोष दिखलाते हैं - 'यद०' इत्यादिसे । हे राघव, जिस वस्तुका अस्तित्व है, उसका कदापि नाश नहीं हो सकता, इसलिए नष्ट हुआ भी वह बीजरूपसे हृदय में विद्यमान रहता है । भाव यह है कि परिणामवाद में उत्तर उत्तर अवस्थाओंसे पूर्व पूर्व अवस्थाओं का तिरोभावमात्र होता है, उच्छेद नहीं होता, कारण कि सत्का अभाव कभी नहीं हो सकता। ऐसी अवस्था में नाशरूप पष्ठ विकारसे तिरोहित द्वैतके चित्तमें अथवा प्रकृतिमें स्थित रहनेसे काम, कर्म, वासनारूप वीजसे पुनः उद्धवको कोई रोक नहीं सकता, अतः अनिर्मोक्ष प्रसङ्ग होगा ॥ ६२ ॥ दृश्यबुद्धि स्मृतिरूपी वीजसे चिदाकाश में फिर उत्पन्न होकर भुवन, पर्वत, आकाश आदि आकारवाले महान् दोपकी सृष्टि करती है ।। ६३ ।। इस प्रकार अनिर्मोक्षरूप दोप होगा, पर उसका यहाँपर सम्भव नहीं है, क्योंकि अनेक देवता, ऋषि, मुनि जीवन्मुक्त देखे जाते हैं ॥ ६४ ॥ यह चिदात्मा स्वभिन्न प्रधानमें स्थित दृश्यको अfadea अपने हृदय में स्थित देखता है, वही उसका यह संसार है। विवेकज्ञान के उदयसे पूर्वोक अविवेकजनित अभिमानकी निवृत्ति होनेपर बाह्य पदार्थों के रहनेपर भी मोक्ष हो जायगा, इस प्रकार सांख्य प्रक्रियाकी आशङ्का कर कहते हैं - 'यदि' इत्यादिसे । यदि इस जगत् आदिका अस्तित्व रहेगा, तो उससे किसीका भी मोक्ष नहीं होगा, वह ( दृश्य ) चाहे बाहर में स्थित हो, चाहे अन्तःकरण में स्थित हो पर वह केवल स्वरूपनाशके लिए ही होता है ।। ६५ ।
यदस्ति तस्य नाशोऽस्ति न कदाचन राघव । तस्मात् तन्नएमप्यन्तर्याजभूतं भवेद्भुदि ।। बासठ ।। स्मृतिबीजाच्चिदाकाशे पुनरुद्भूय दृश्यधीः । लोकशैलाम्बराकार दोपं वितनुतेऽतनुम् ।। तिरेसठ ॥ इत्यनिर्मोक्षदोपः स्यात् न च तस्येह संभवः । यस्माद्देवपिंमुनयो दृश्यन्ते मुक्तिभाजनम् ॥ चौंसठ ॥ यदि स्याज्जगदादीदं तस्मान्मोक्षो न कस्यचित् । वाह्यस्थमस्तु हृत्स्थं वा दृश्यं नाशाय केवलम् ।। पैंसठ ।। परिणामवाद में दोष दिखलाते हैं - 'यदशून्य' इत्यादिसे । हे राघव, जिस वस्तुका अस्तित्व है, उसका कदापि नाश नहीं हो सकता, इसलिए नष्ट हुआ भी वह बीजरूपसे हृदय में विद्यमान रहता है । भाव यह है कि परिणामवाद में उत्तर उत्तर अवस्थाओंसे पूर्व पूर्व अवस्थाओं का तिरोभावमात्र होता है, उच्छेद नहीं होता, कारण कि सत्का अभाव कभी नहीं हो सकता। ऐसी अवस्था में नाशरूप पष्ठ विकारसे तिरोहित द्वैतके चित्तमें अथवा प्रकृतिमें स्थित रहनेसे काम, कर्म, वासनारूप वीजसे पुनः उद्धवको कोई रोक नहीं सकता, अतः अनिर्मोक्ष प्रसङ्ग होगा ॥ बासठ ॥ दृश्यबुद्धि स्मृतिरूपी वीजसे चिदाकाश में फिर उत्पन्न होकर भुवन, पर्वत, आकाश आदि आकारवाले महान् दोपकी सृष्टि करती है ।। तिरेसठ ।। इस प्रकार अनिर्मोक्षरूप दोप होगा, पर उसका यहाँपर सम्भव नहीं है, क्योंकि अनेक देवता, ऋषि, मुनि जीवन्मुक्त देखे जाते हैं ॥ चौंसठ ॥ यह चिदात्मा स्वभिन्न प्रधानमें स्थित दृश्यको अfadea अपने हृदय में स्थित देखता है, वही उसका यह संसार है। विवेकज्ञान के उदयसे पूर्वोक अविवेकजनित अभिमानकी निवृत्ति होनेपर बाह्य पदार्थों के रहनेपर भी मोक्ष हो जायगा, इस प्रकार सांख्य प्रक्रियाकी आशङ्का कर कहते हैं - 'यदि' इत्यादिसे । यदि इस जगत् आदिका अस्तित्व रहेगा, तो उससे किसीका भी मोक्ष नहीं होगा, वह चाहे बाहर में स्थित हो, चाहे अन्तःकरण में स्थित हो पर वह केवल स्वरूपनाशके लिए ही होता है ।। पैंसठ ।
लॉकडाउन के दौरान भारतगंज क्षेत्र में पुलिस ने वाहनों की सघन जांच-पड़ताल की। इस दौरान बिना मास्क व बिना हेलमेट अनावश्यक सड़क पर निकले लोगों से जुर्माने भी वसूले गये। बुधवार को 10 मई तक लॉकडाउन बढ़ाये जाने के बाद चौकी प्रभारी भारतगंज आशीष कुमार राय हमराही सिपाहियों के साथ भारतगंज चौकी क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर चेकिंग लगाकर बिना मास्क व बिना हेलमेट अनावश्यक सड़क पर घूम रहे लोगों को रोककर जुर्माना वसूला और उन्हें चेतावनी दी। भारतगंज कस्बे के सभी व्यापारियों से उन्हांेने लॉकडाउन के नियमों के पालन करने की अपील करते हुये चेतावनी भी दी कि यदि नियम विरूद्व कोई भी दुकान खुली मिली, तो ऐसे दुकानदारों के खिलाफ महामारी अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्जकर कार्यवाई की जायेगी। बुधवार को मिर्जापुर-प्रयागराज राजमार्ग पर स्थित बसकड़ी, हेमपुर, पाली तथा भारतगंज बिहसड़़ा मार्ग पर स्थित पयागपुर रमगढ़वा मोड़ तथा भरारी-राजापुर तिराहे पर पुलिस ने सघन चेकिंग की।
लॉकडाउन के दौरान भारतगंज क्षेत्र में पुलिस ने वाहनों की सघन जांच-पड़ताल की। इस दौरान बिना मास्क व बिना हेलमेट अनावश्यक सड़क पर निकले लोगों से जुर्माने भी वसूले गये। बुधवार को दस मई तक लॉकडाउन बढ़ाये जाने के बाद चौकी प्रभारी भारतगंज आशीष कुमार राय हमराही सिपाहियों के साथ भारतगंज चौकी क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर चेकिंग लगाकर बिना मास्क व बिना हेलमेट अनावश्यक सड़क पर घूम रहे लोगों को रोककर जुर्माना वसूला और उन्हें चेतावनी दी। भारतगंज कस्बे के सभी व्यापारियों से उन्हांेने लॉकडाउन के नियमों के पालन करने की अपील करते हुये चेतावनी भी दी कि यदि नियम विरूद्व कोई भी दुकान खुली मिली, तो ऐसे दुकानदारों के खिलाफ महामारी अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्जकर कार्यवाई की जायेगी। बुधवार को मिर्जापुर-प्रयागराज राजमार्ग पर स्थित बसकड़ी, हेमपुर, पाली तथा भारतगंज बिहसड़़ा मार्ग पर स्थित पयागपुर रमगढ़वा मोड़ तथा भरारी-राजापुर तिराहे पर पुलिस ने सघन चेकिंग की।
कोरोना वायरस के प्रकोप में, हम औरतें कैसे, इस मुश्किल का सामना करते हुए भी, एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं? जानने के लिए चेक करें हमारी स्पेशल फीड! हरदम तलाशे गैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं खुद से मुलाकात ना हो जाए, ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, पुराने खुद की याद मुझे दिला जाएं। हरदम तलाशे ग़ैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं खुद से मुलाकात ना हो जाए, ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, पुराने खुद की याद मुझे दिला जाएं। हरदम तलाशे ग़ैर में रहते हैं सभी, डरते हैं कहीं ख़ुद से मुलाकात ना हो जाए। ये झूठे कह कहे लगते हैं भले, टूटे दिल का सच कहीं बाहर ना छलक जाए। ये रिश्ते तुम्हारे मेरे, देते हैं सुकून बहुत, कुछ देर को ही सही, पुराने ख़ुद की याद मुझे दिला जाएं। वो रिश्ते जो थे उम्मीदों से भरे, पढ़ सके नहीं इन लफ़्ज़ों को, हालत तुम्हारी मेरी लगती है एक ही मुझे, शायद तभी तो दिल से, ये दिल के तार हैं जुड़ पाए। क्यों ना फिर हों मुकम्मल हम खुद से ही, ये ज़रूरतों के सिलसिले, न बना ख़ुदा, तब तक किसी को अपना, कि जब तक वो तेरी दुआ पर ना पिघल जाए। विमेन्सवेब एक खुला मंच है, जो विविध विचारों को प्रकाशित करता है। इस लेख में प्रकट किये गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं जो ज़रुरी नहीं की इस मंच की सोच को प्रतिबिम्बित करते हो। यदि आपके संपूरक या भिन्न विचार हों तो आप भी विमेन्स वेब के लिए लिख सकते हैं।
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आरोप है कि रात में फरमीना ने चारों बच्चियों की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी और बाद में खुदकुशी की नीयत से अपने गले को भी चाकू से काटने का प्रयास किया। मंत्रालय को पूरी तरह से सैनिटाइज करने के बाद खोला जाएगा। 25 मार्च के बाद कोविड-19 संक्रमण के कारण रेल भवन अबतक कई बार सील हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी हैदराबाद पहुंचे और भारत बायोटेक के प्लांट का दौरा किया। कंपनी कोवाक्सिन नाम का टीका बना रही है। अगस्त से टीके के दूसरे चरण का ट्रायल शुरू हो गया है। साध्वी निरंजन ज्योति को सांस लेने में तकलीफ होने पर शुक्रवार देर रात एलएलआर हॉस्पिटल (हैलट) के मेडिसिन आइसीयू में भर्ती कराया गया था। दिल्ली के पासी पहुंचे पंजाब-हरियाणा और यूपी के किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। किसान आंदोलन के तीसरे दिन दिल्ली पहुंचे किसानों ने बुराडी मैदान में प्रदर्शन से इंकार करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि अब वे मेन हाईवे जाम करेंगे। सितंबर तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी 7. 5 फीसदी गिर गई, हालांकि जून तिमाही में 23. 9 फीसदी की गिरावट से यह बेहतर है। गत दिवस सुबह चार बजे से बर्फीला तूफान शुरू हुआ। पांच घंटे से ज्यादा पंचाचूली, राजरम्भा, हसलिंग, नागनी धुरा, छिपलाकेदार, मिलम, नंदा देवी सहित समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाएं चलती रहीं। किसानों को आखिर दिल्ली में प्रवेश करने और बुराड़ी इलाके में निरंकारी समागम मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति मिल गई है। दो दिन से चल रहे टकराव के हालात के बाद अब किसान दिल्ली में प्रदर्शन कर अपनी बात रख सकेंगे। शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिब्येंदु अधिकारी भी लोकसभा सांसद हैं। अगले साल बंगाल में विधानसभा के चुनाव हैं। शुभेंदु को नंदीग्राम आंदोलन का सूत्रधार माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक उनके प्रभाव में कम से कम 65 विधानसभा सीटें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, कि जुलूस निकाले जा रहे हैं। भीड़ जमा हो रही है। करीब 80 प्रतिशत लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं। बहुतों के मुंह पर मास्क लटके दिखते हैं। एसओपी और गाइडलाइंस हैं, लेकिन कोई इच्छाशक्ति नहीं है। लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि जमानत याचिका की सुनवाई की अगली तारीख 11 दिसंबर है। हमें निचली अदालत से लालू प्रसाद जी के आधे वाक्य से संबंधित रिकाॅर्ड लाने और अगली दलील से पहले सत्यापित करने का निर्देश दिया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग विचारधारा वाले गठबंधन आपके लिए काम करते हैं, क्या यह लव जिहाद नहीं है?
आरोप है कि रात में फरमीना ने चारों बच्चियों की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी और बाद में खुदकुशी की नीयत से अपने गले को भी चाकू से काटने का प्रयास किया। मंत्रालय को पूरी तरह से सैनिटाइज करने के बाद खोला जाएगा। पच्चीस मार्च के बाद कोविड-उन्नीस संक्रमण के कारण रेल भवन अबतक कई बार सील हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी हैदराबाद पहुंचे और भारत बायोटेक के प्लांट का दौरा किया। कंपनी कोवाक्सिन नाम का टीका बना रही है। अगस्त से टीके के दूसरे चरण का ट्रायल शुरू हो गया है। साध्वी निरंजन ज्योति को सांस लेने में तकलीफ होने पर शुक्रवार देर रात एलएलआर हॉस्पिटल के मेडिसिन आइसीयू में भर्ती कराया गया था। दिल्ली के पासी पहुंचे पंजाब-हरियाणा और यूपी के किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। किसान आंदोलन के तीसरे दिन दिल्ली पहुंचे किसानों ने बुराडी मैदान में प्रदर्शन से इंकार करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि अब वे मेन हाईवे जाम करेंगे। सितंबर तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी सात. पाँच फीसदी गिर गई, हालांकि जून तिमाही में तेईस. नौ फीसदी की गिरावट से यह बेहतर है। गत दिवस सुबह चार बजे से बर्फीला तूफान शुरू हुआ। पांच घंटे से ज्यादा पंचाचूली, राजरम्भा, हसलिंग, नागनी धुरा, छिपलाकेदार, मिलम, नंदा देवी सहित समुद्र तल से तीन हज़ार मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाएं चलती रहीं। किसानों को आखिर दिल्ली में प्रवेश करने और बुराड़ी इलाके में निरंकारी समागम मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति मिल गई है। दो दिन से चल रहे टकराव के हालात के बाद अब किसान दिल्ली में प्रदर्शन कर अपनी बात रख सकेंगे। शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिब्येंदु अधिकारी भी लोकसभा सांसद हैं। अगले साल बंगाल में विधानसभा के चुनाव हैं। शुभेंदु को नंदीग्राम आंदोलन का सूत्रधार माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक उनके प्रभाव में कम से कम पैंसठ विधानसभा सीटें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, कि जुलूस निकाले जा रहे हैं। भीड़ जमा हो रही है। करीब अस्सी प्रतिशत लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं। बहुतों के मुंह पर मास्क लटके दिखते हैं। एसओपी और गाइडलाइंस हैं, लेकिन कोई इच्छाशक्ति नहीं है। लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि जमानत याचिका की सुनवाई की अगली तारीख ग्यारह दिसंबर है। हमें निचली अदालत से लालू प्रसाद जी के आधे वाक्य से संबंधित रिकाॅर्ड लाने और अगली दलील से पहले सत्यापित करने का निर्देश दिया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ अलग-अलग विचारधारा वाले गठबंधन आपके लिए काम करते हैं, क्या यह लव जिहाद नहीं है?
दो शब्द हिन्दी के विकास और प्रसार के लिए शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में पुस्तकों के प्रकाशन की विभिन्न योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही है । हिन्दी में अभी तक ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र मे पर्याप्त साहित्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऐसे साहित्य के प्रकाशन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है । इस उद्देश्य से जो योजनाएं बनाई गई है, उनमें से एक योजना प्रकाशको के सहयोग से पुस्तकें प्रकाशित करने की है । इस योजना के अधीन भारत सरकार प्रकाशित पुस्तको निश्चित संख्या में प्रतिया खरीदकर उन्हें मदद पहुॅचाती है । प्रस्तुत पुस्तक इसी योजना के अन्तर्गत प्रकाशित की जा रही है । इसके अनुवाद और कापी राइट इत्यादि की व्यवस्था प्रकाशक ने स्वयं की है तथा इसमें शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत शब्दावली का उपयोग किया गया है । प्रस्तुत पुस्तक ब्लूमफील्ड कृत "लैग्वेज" नामक ग्रन्थ का अनुवाद है। यह ग्रंथ भाषा-विज्ञान के आधारभूत ग्रंथो मे गिना जाता है । यद्यपि इसकी रचना आज से तीन दशक पूर्व हुई थी फिर भी भाषाविज्ञान के मूल तत्वो की समझ के लिए इसकी उपयोगिता आज निर्विवाद है। सयोग है कि इस ग्रंथ का अनुवाद केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के भूतपूर्व निदेशक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली के भूतपूर्व अध्यक्ष और देश के जाने-माने भाषा वैज्ञानिक स्वर्गीय डा० विश्वनाथ प्रसाद के हाथो संपन्न हुआ। उनकी साधना और श्रमशीलता का परिचय स्थलस्थल पर मिलता है । आशा है इस विषय में रुचि रखने वाले विद्वान् और अध्येता इस अनुवाद का स्वागत करेंगे ।
दो शब्द हिन्दी के विकास और प्रसार के लिए शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में पुस्तकों के प्रकाशन की विभिन्न योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही है । हिन्दी में अभी तक ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र मे पर्याप्त साहित्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऐसे साहित्य के प्रकाशन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है । इस उद्देश्य से जो योजनाएं बनाई गई है, उनमें से एक योजना प्रकाशको के सहयोग से पुस्तकें प्रकाशित करने की है । इस योजना के अधीन भारत सरकार प्रकाशित पुस्तको निश्चित संख्या में प्रतिया खरीदकर उन्हें मदद पहुॅचाती है । प्रस्तुत पुस्तक इसी योजना के अन्तर्गत प्रकाशित की जा रही है । इसके अनुवाद और कापी राइट इत्यादि की व्यवस्था प्रकाशक ने स्वयं की है तथा इसमें शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत शब्दावली का उपयोग किया गया है । प्रस्तुत पुस्तक ब्लूमफील्ड कृत "लैग्वेज" नामक ग्रन्थ का अनुवाद है। यह ग्रंथ भाषा-विज्ञान के आधारभूत ग्रंथो मे गिना जाता है । यद्यपि इसकी रचना आज से तीन दशक पूर्व हुई थी फिर भी भाषाविज्ञान के मूल तत्वो की समझ के लिए इसकी उपयोगिता आज निर्विवाद है। सयोग है कि इस ग्रंथ का अनुवाद केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के भूतपूर्व निदेशक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली के भूतपूर्व अध्यक्ष और देश के जाने-माने भाषा वैज्ञानिक स्वर्गीय डाशून्य विश्वनाथ प्रसाद के हाथो संपन्न हुआ। उनकी साधना और श्रमशीलता का परिचय स्थलस्थल पर मिलता है । आशा है इस विषय में रुचि रखने वाले विद्वान् और अध्येता इस अनुवाद का स्वागत करेंगे ।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फीजी का एक लघु द्वीप एड्रियाटिक सागर का एक द्वीप समुई द्वीप, थाईलैंड संयुक्त राज्य के निचले सैरैनैक झील में एक द्वीप द्वीप स्थलखण्ड के एसे भाग होतें हैं, जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता हैं। आकार में द्वीप छोटे भी हो सकते हैं तथा बड़े भी। इनका आकार कुछ वर्ग मीटर से लेकर ह्ज़ारों वर्ग किलोमीटर तक पाया जाता हैं। . पूर्वी चीन सागर का नक़्शा जापान के क्यूशू द्वीप के नागासाकी प्रान्त में स्थित सासेबो शहर से पूर्वी चीन सागर में डूबता सूरज पूर्वी चीन सागर पूर्वी एशिया के पूर्व में स्थित एक समुद्र है। यह प्रशांत महासागर का हिस्सा है और इसका क्षेत्रफल क़रीब १२,४९,००० वर्ग किमी (यानि ७,५०,००० वर्ग मील) है। इसके पश्चिम में चीन है, पूर्व में जापान के क्यूशू और नानसेई द्वीप हैं और दक्षिण में ताईवान है। पूर्वी चीन सागर की सबसे अधिक गहराई लगभग ३,००० मीटर है। चीन की सबसे लम्बी नदी यांगत्सी क्यांग बहकर इसी सागर में मिल जाती है।, Michael Pollard, Evans Brothers, 2003, ISBN 978-0-237-52638-2 . द्वीप और पूर्वी चीन सागर आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): द्वीप। फीजी का एक लघु द्वीप एड्रियाटिक सागर का एक द्वीप समुई द्वीप, थाईलैंड संयुक्त राज्य के निचले सैरैनैक झील में एक द्वीप द्वीप स्थलखण्ड के एसे भाग होतें हैं, जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता हैं। आकार में द्वीप छोटे भी हो सकते हैं तथा बड़े भी। इनका आकार कुछ वर्ग मीटर से लेकर ह्ज़ारों वर्ग किलोमीटर तक पाया जाता हैं। . द्वीप 4 संबंध है और पूर्वी चीन सागर 16 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 5.00% है = 1 / (4 + 16)। यह लेख द्वीप और पूर्वी चीन सागर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फीजी का एक लघु द्वीप एड्रियाटिक सागर का एक द्वीप समुई द्वीप, थाईलैंड संयुक्त राज्य के निचले सैरैनैक झील में एक द्वीप द्वीप स्थलखण्ड के एसे भाग होतें हैं, जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता हैं। आकार में द्वीप छोटे भी हो सकते हैं तथा बड़े भी। इनका आकार कुछ वर्ग मीटर से लेकर ह्ज़ारों वर्ग किलोमीटर तक पाया जाता हैं। . पूर्वी चीन सागर का नक़्शा जापान के क्यूशू द्वीप के नागासाकी प्रान्त में स्थित सासेबो शहर से पूर्वी चीन सागर में डूबता सूरज पूर्वी चीन सागर पूर्वी एशिया के पूर्व में स्थित एक समुद्र है। यह प्रशांत महासागर का हिस्सा है और इसका क्षेत्रफल क़रीब बारह,उनचास,शून्य वर्ग किमी है। इसके पश्चिम में चीन है, पूर्व में जापान के क्यूशू और नानसेई द्वीप हैं और दक्षिण में ताईवान है। पूर्वी चीन सागर की सबसे अधिक गहराई लगभग तीन,शून्य मीटर है। चीन की सबसे लम्बी नदी यांगत्सी क्यांग बहकर इसी सागर में मिल जाती है।, Michael Pollard, Evans Brothers, दो हज़ार तीन, ISBN नौअठहत्तर शून्य दो सौ सैंतीस-बावन हज़ार छः सौ अड़तीस-दो . द्वीप और पूर्वी चीन सागर आम में एक बात है : द्वीप। फीजी का एक लघु द्वीप एड्रियाटिक सागर का एक द्वीप समुई द्वीप, थाईलैंड संयुक्त राज्य के निचले सैरैनैक झील में एक द्वीप द्वीप स्थलखण्ड के एसे भाग होतें हैं, जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता हैं। आकार में द्वीप छोटे भी हो सकते हैं तथा बड़े भी। इनका आकार कुछ वर्ग मीटर से लेकर ह्ज़ारों वर्ग किलोमीटर तक पाया जाता हैं। . द्वीप चार संबंध है और पूर्वी चीन सागर सोलह है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक पाँच.शून्य% है = एक / । यह लेख द्वीप और पूर्वी चीन सागर के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
नई दिल्लीः महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को संसद में जानकारी दी है कि महामारी के दौरान अनाथ हुए 3,855 बच्चों को अब तक 'पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन' योजना के तहत पात्र के रूप में स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी CPIM सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा राज्यसभा में किए गए एक सवाल के जवाब में दी। ब्रिटास ने सवाल किया था कि क्या सरकार या किसी एजेंसी ने कोरोना महामारी की वजह से अनाथ बच्चों की तादाद तैयार की है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उच्च सदन में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि योजना के तहत मदद के लिए प्राप्त कुल 6,624 आवेदनों में से 3,855 को स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय मंत्री द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 1,158 आवेदन महाराष्ट्र से हासिल हुए, इसके बाद यूपी में 768, मध्य प्रदेश में 739, तमिलनाडु में 496 और आंध्र प्रदेश में 479 आवेदन आए हैं। यह सवाल किए जाने पर कि बच्चों की सहायता के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं, मंत्रालय ने कहा कि वह बाल संरक्षण सेवा (CPS) योजना - मिशन वात्सल्य नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना प्रभावी कर रहा है, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश देखभाल की आवश्यकता होने और कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को मदद प्रदान करते हैं।
नई दिल्लीः महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को संसद में जानकारी दी है कि महामारी के दौरान अनाथ हुए तीन,आठ सौ पचपन बच्चों को अब तक 'पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन' योजना के तहत पात्र के रूप में स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी CPIM सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा राज्यसभा में किए गए एक सवाल के जवाब में दी। ब्रिटास ने सवाल किया था कि क्या सरकार या किसी एजेंसी ने कोरोना महामारी की वजह से अनाथ बच्चों की तादाद तैयार की है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उच्च सदन में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि योजना के तहत मदद के लिए प्राप्त कुल छः,छः सौ चौबीस आवेदनों में से तीन,आठ सौ पचपन को स्वीकृति दी गई है। केंद्रीय मंत्री द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा एक,एक सौ अट्ठावन आवेदन महाराष्ट्र से हासिल हुए, इसके बाद यूपी में सात सौ अड़सठ, मध्य प्रदेश में सात सौ उनतालीस, तमिलनाडु में चार सौ छियानवे और आंध्र प्रदेश में चार सौ उन्यासी आवेदन आए हैं। यह सवाल किए जाने पर कि बच्चों की सहायता के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं, मंत्रालय ने कहा कि वह बाल संरक्षण सेवा योजना - मिशन वात्सल्य नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना प्रभावी कर रहा है, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश देखभाल की आवश्यकता होने और कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को मदद प्रदान करते हैं।
क्वारंटाइन की वजह से हर कोई घर के अंदर कैद है। ऐसे में अगर आपको भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करें तो रश्मि देसाई की ये तस्वीरें सिर्फ आपके लिए हैं। रश्मि ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें वो पार्टी लुक में घर पर बैठी नजर आ रही हैं। आप भी चाहे तो मेकअप के अलग-अलग लुक घर पर ट्राई कर सकती हैं। ताकि जब क्वारंटाइन का समय खत्म हो जाए तो आप भी आसानी से इस लुक को कॉपी कर सकें। दरअसल, घर पर खाली बैठे-बैठे रश्मि अपनी तस्वीरें शेयर कर रही हैं। जिसमें पार्टी के लिए बिल्कुल रेडी दिख रही हैं। वैसे बता दें कि रश्मि देसाई अपने फैंस के लिए ही इन तस्वीरों को शेयर कर रही हैं और उनका इरादा किसी पार्टी में जाने का नहीं है। लेकिन मरून रंग की वेलवेटी टचवाली ड्रेस को पहने रश्मि बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। ड्रेस की थाई हाई स्लिट और वेवी कर्ल के साथ सिल्वर ईयररिरंग रश्मि के लुक को बेहद खूबसूरत बना रहे हैं। बिग बॉस 13 की कंटेस्टेंट रह चुकी रश्मि ने क्लोजअप में भी तस्वीर शेयर की है। जिसमें उनकी परफेक्ट शेप आइब्रो के साथ ब्लू लाइनर, पिंक लिप्स के साथ पिंक चिक्स और मेकअप बिल्कुल परफेक्ट है। आप चाहे तो खाली समय में ये लुक घर पर एक बार ट्राई कर सकती हैं। रश्मि अपने फैंस के लिए शानदार तस्वीरें शेयर करती नजर आ रही हैं। पीले रंग की वन शोल्डर शार्ट ड्रेस के साथ न्यूड हील्स और लो बन पार्टी नाइट के लिए बिल्कुल परफेक्ट दिख रहा है।
क्वारंटाइन की वजह से हर कोई घर के अंदर कैद है। ऐसे में अगर आपको भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करें तो रश्मि देसाई की ये तस्वीरें सिर्फ आपके लिए हैं। रश्मि ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें वो पार्टी लुक में घर पर बैठी नजर आ रही हैं। आप भी चाहे तो मेकअप के अलग-अलग लुक घर पर ट्राई कर सकती हैं। ताकि जब क्वारंटाइन का समय खत्म हो जाए तो आप भी आसानी से इस लुक को कॉपी कर सकें। दरअसल, घर पर खाली बैठे-बैठे रश्मि अपनी तस्वीरें शेयर कर रही हैं। जिसमें पार्टी के लिए बिल्कुल रेडी दिख रही हैं। वैसे बता दें कि रश्मि देसाई अपने फैंस के लिए ही इन तस्वीरों को शेयर कर रही हैं और उनका इरादा किसी पार्टी में जाने का नहीं है। लेकिन मरून रंग की वेलवेटी टचवाली ड्रेस को पहने रश्मि बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं। ड्रेस की थाई हाई स्लिट और वेवी कर्ल के साथ सिल्वर ईयररिरंग रश्मि के लुक को बेहद खूबसूरत बना रहे हैं। बिग बॉस तेरह की कंटेस्टेंट रह चुकी रश्मि ने क्लोजअप में भी तस्वीर शेयर की है। जिसमें उनकी परफेक्ट शेप आइब्रो के साथ ब्लू लाइनर, पिंक लिप्स के साथ पिंक चिक्स और मेकअप बिल्कुल परफेक्ट है। आप चाहे तो खाली समय में ये लुक घर पर एक बार ट्राई कर सकती हैं। रश्मि अपने फैंस के लिए शानदार तस्वीरें शेयर करती नजर आ रही हैं। पीले रंग की वन शोल्डर शार्ट ड्रेस के साथ न्यूड हील्स और लो बन पार्टी नाइट के लिए बिल्कुल परफेक्ट दिख रहा है।
रायपुर : आम तौर पर सरकारी स्कूलों की छवि ठीक नहीं मानी जाती। यही वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ाने से कतराते हैं। पब्लिक स्कूलों को तरजीह दी जाती है। आमजन की इस धारणा को बदलने के लिए छत्तीसगढ़ के दो अफसरों ने अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी बेटियों का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया है। इससे इन स्कूलों के शिक्षक तो उत्साहित हैं ही, स्कूल में पठन-पाठन का स्तर और बेहतर हो चला है। सबसे पहले बात करते हैं आइपीएस डी. रविशंकर की। एसआइटी रायपुर में बतौर एसपी पदस्थ रविशंकर ने अपनी बिटिया दिव्यांजलि का दाखिला रायपुर स्थित एक सरकारी स्कूल में कराया। दिव्यांजलि इस समय दूसरी में पढ़ रही है। बदलाव की बयार की तरह दिव्यांजलि इस स्कूल में आई। उनके आने से स्कूल का माहौल ही बदल गया। दिव्यांजलि घर में भले ही वातानुकूलित परिवेश में रह रही हो लेकिन वह यहां पंखे वाले स्कूल में अन्य बच्चियों के साथ टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करती है। मिड डे मील भी सबके साथ खाती है। आइपीएस की बेटी के स्कूल में दाखिला लेने के बाद यहां के दूसरे पालक भी गर्व महसूस कर रहे हैं। लोगों में स्कूल की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर भी विश्वास जागा है। दिव्यांजलि एक भी दिन स्कूल मिस नहीं करती। बलरामपुर के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने इस तरह की पहल सबसे पहले की। अपनी बच्ची का दाखिला उन्होंने सरकारी स्कूल में कराया है। उनकी पांच वर्षीय बेटी बेबिका बलरामपुर मुख्यालय स्थित प्राइमरी स्कूल में पढ़ रही है। ■ विधायक भी पीछे नहींः जशपुर जिले में पत्थलगांव से विधायक शिवशंकर साय पैकरा भी इसमें पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपनी दो बेटियों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया और अब एक बेटे कार्तिकेय का भी दाखिला कराया है।
रायपुर : आम तौर पर सरकारी स्कूलों की छवि ठीक नहीं मानी जाती। यही वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ाने से कतराते हैं। पब्लिक स्कूलों को तरजीह दी जाती है। आमजन की इस धारणा को बदलने के लिए छत्तीसगढ़ के दो अफसरों ने अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी बेटियों का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया है। इससे इन स्कूलों के शिक्षक तो उत्साहित हैं ही, स्कूल में पठन-पाठन का स्तर और बेहतर हो चला है। सबसे पहले बात करते हैं आइपीएस डी. रविशंकर की। एसआइटी रायपुर में बतौर एसपी पदस्थ रविशंकर ने अपनी बिटिया दिव्यांजलि का दाखिला रायपुर स्थित एक सरकारी स्कूल में कराया। दिव्यांजलि इस समय दूसरी में पढ़ रही है। बदलाव की बयार की तरह दिव्यांजलि इस स्कूल में आई। उनके आने से स्कूल का माहौल ही बदल गया। दिव्यांजलि घर में भले ही वातानुकूलित परिवेश में रह रही हो लेकिन वह यहां पंखे वाले स्कूल में अन्य बच्चियों के साथ टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करती है। मिड डे मील भी सबके साथ खाती है। आइपीएस की बेटी के स्कूल में दाखिला लेने के बाद यहां के दूसरे पालक भी गर्व महसूस कर रहे हैं। लोगों में स्कूल की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर भी विश्वास जागा है। दिव्यांजलि एक भी दिन स्कूल मिस नहीं करती। बलरामपुर के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने इस तरह की पहल सबसे पहले की। अपनी बच्ची का दाखिला उन्होंने सरकारी स्कूल में कराया है। उनकी पांच वर्षीय बेटी बेबिका बलरामपुर मुख्यालय स्थित प्राइमरी स्कूल में पढ़ रही है। ■ विधायक भी पीछे नहींः जशपुर जिले में पत्थलगांव से विधायक शिवशंकर साय पैकरा भी इसमें पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपनी दो बेटियों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया और अब एक बेटे कार्तिकेय का भी दाखिला कराया है।
रूस फ्रांसीसी Mistrals के समान दो सार्वभौमिक डॉक जहाज बिछाने के लिए खुद को सीमित करेगा, भविष्य में, श्रृंखला को जारी रखा जा सकता है। इसकी सूचना आरआईए ने दी है समाचार सैन्य-औद्योगिक परिसर में एक स्रोत के संदर्भ में। एजेंसी के वार्ताकार के अनुसार, फ्रांसीसी "मिस्ट्रल" के दो सार्वभौमिक डॉक-प्रकार के जहाजों को 2020 में केर्ल में नौसेना को नियोजित स्थानांतरण के साथ रखा जाएगा। बेड़ा 2025 और 2026 में आरएफ। इस श्रृंखला पर, श्रृंखला को सीमित करने का निर्णय लिया गया था, हालांकि यह संभव है कि भविष्य में डॉक जहाजों के निर्माण को जारी रखने के लिए एक निर्णय लिया जाएगा। जबकि निर्णय खुद को दो जहाजों तक सीमित करने के लिए किया गया है, भविष्य में श्रृंखला जारी रखी जा सकती है। - आरआईए नोवोस्ती ने वार्ताकार के शब्दों का उद्धरण दिया। इससे पहले यह बताया गया था कि रक्षा मंत्रालय ने आखिरकार यूडीसी की विशेषताओं पर निर्णय लिया। इस परियोजना के जहाज 20 से अधिक भारी हेलीकाप्टरों को ले जाने में सक्षम होंगे, वे लैंडिंग नौकाओं के लिए डॉकिंग चेंबर प्राप्त करेंगे और 900 लोगों के बारे में कुल समुद्री बल की दो प्रबलित बटालियनों को ले जाने में सक्षम होंगे। इसी समय, यूडीसी का विस्थापन पूर्व नियोजित की तुलना में अधिक होगा - एक्सएनयूएमएक्स हजार टन, एक्सएनयूएमएक्स नहीं। TASS के अनुसार, दो UDC को मई 2020 में गल्फ शिपयार्ड में रखा जाएगा। लीड जहाज वर्ष के 2027 द्वारा रूसी नौसेना का हिस्सा होगा, वर्ष का 2030 द्वारा पहला उत्पादन जहाज। प्रारंभ में, जहाजों का विस्थापन 15 हजार टन से अधिक नहीं होना चाहिए, और बोर्ड पर हेलीकाप्टरों की संख्या - दस से अधिक नहीं।
रूस फ्रांसीसी Mistrals के समान दो सार्वभौमिक डॉक जहाज बिछाने के लिए खुद को सीमित करेगा, भविष्य में, श्रृंखला को जारी रखा जा सकता है। इसकी सूचना आरआईए ने दी है समाचार सैन्य-औद्योगिक परिसर में एक स्रोत के संदर्भ में। एजेंसी के वार्ताकार के अनुसार, फ्रांसीसी "मिस्ट्रल" के दो सार्वभौमिक डॉक-प्रकार के जहाजों को दो हज़ार बीस में केर्ल में नौसेना को नियोजित स्थानांतरण के साथ रखा जाएगा। बेड़ा दो हज़ार पच्चीस और दो हज़ार छब्बीस में आरएफ। इस श्रृंखला पर, श्रृंखला को सीमित करने का निर्णय लिया गया था, हालांकि यह संभव है कि भविष्य में डॉक जहाजों के निर्माण को जारी रखने के लिए एक निर्णय लिया जाएगा। जबकि निर्णय खुद को दो जहाजों तक सीमित करने के लिए किया गया है, भविष्य में श्रृंखला जारी रखी जा सकती है। - आरआईए नोवोस्ती ने वार्ताकार के शब्दों का उद्धरण दिया। इससे पहले यह बताया गया था कि रक्षा मंत्रालय ने आखिरकार यूडीसी की विशेषताओं पर निर्णय लिया। इस परियोजना के जहाज बीस से अधिक भारी हेलीकाप्टरों को ले जाने में सक्षम होंगे, वे लैंडिंग नौकाओं के लिए डॉकिंग चेंबर प्राप्त करेंगे और नौ सौ लोगों के बारे में कुल समुद्री बल की दो प्रबलित बटालियनों को ले जाने में सक्षम होंगे। इसी समय, यूडीसी का विस्थापन पूर्व नियोजित की तुलना में अधिक होगा - एक्सएनयूएमएक्स हजार टन, एक्सएनयूएमएक्स नहीं। TASS के अनुसार, दो UDC को मई दो हज़ार बीस में गल्फ शिपयार्ड में रखा जाएगा। लीड जहाज वर्ष के दो हज़ार सत्ताईस द्वारा रूसी नौसेना का हिस्सा होगा, वर्ष का दो हज़ार तीस द्वारा पहला उत्पादन जहाज। प्रारंभ में, जहाजों का विस्थापन पंद्रह हजार टन से अधिक नहीं होना चाहिए, और बोर्ड पर हेलीकाप्टरों की संख्या - दस से अधिक नहीं।
आदरणीय साथिओ, Replies are closed for this discussion. आ. सुनील जी, "रोबोट" शीर्षक के साथ आपने आज की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत अच्छा व्यंग्य किया है. यह आपकी इस लघुकथा की सबसे अच्छी बात है. आज की शिक्षा व्यवस्था वाकई में केवल रोबोट ही तैयार कर रही है. बाकी गुणीजन कह ही चुके हैं. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. कथा पर गुनी जन कह ही चुकें है साथ आप भी अपना पक्ष रख चुकें सो कथा सहित आयोजन में सहभागिता के लिए ह्रदय से बधाई भाई सुनील वर्मा जी. हार्दिक बधाई आदरणीय सुनील जी ।बेहतरीन लघुकथा। विद्वत जनों की एक बहुत बड़ी सभा लगी थी जिसमें विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग एकत्र थे। चर्चा का मूल विषय यह था कि किसकी पवित्र पुस्तकें श्रेष्ठ हैं। "हमारी पुस्तक अपौरुषेय और श्रेष्ठ है। इसमें मानव जीवन के सभी पक्षों की सविस्तार चर्चा है।" "नहीं, आपके ग्रन्थ में बहुत कुछ मनुष्यों ने अपने से जोड़ा है। जबकि हमने उसका मूल रूप सुरक्षित रखा है। इसलिए पुस्तक तो केवल हमारी श्रेष्ठ है।" दूसरे प्रतिभागी ने पहले का प्रतिवाद करते हुए कहा। "अच्छा! पर पहले कौन सी पुस्तक आयी है? हमारी न। तो प्राचीनतम होने के कारण कौन श्रेष्ठ होगी?" "आपकी पुस्तक पहली है तो हमारी आख़िरी है। श्रेष्ठ पुस्तक कौन सी होती है? बाद के संस्करण वाली या पहली?" "मतलब ईश्वर ने जो सबसे पहले पुस्तक भेजी वह अपूर्ण थी। बाद में ईश्वर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने भूल-सुधार करते हुए उसके अन्य संस्करण निकाले। आप कहना क्या चाहते हैं? ईश्वर अपने प्रथम प्रयास में अक्षम था? वह पूर्ण है कि अपूर्ण?" "ईश्वर पूर्ण है, अपूर्ण तो आप और आपकी पुस्तकें हैं।" अब तक दोनों की बातें शान्ति से सुन रहे तीसरे विद्वान ने कहा। "यदि कालक्रम में हमारी पुस्तक बाद में आयी तो इसका यह अर्थ कहाँ से निकलता है कि वह अधम है? प्राचीनता अथवा नवीनता किसी पुस्तक को श्रेष्ठ नहीं बनाती। उसे श्रेष्ठ बनाती हैं उसमें कही गयी बातें, और इस सन्दर्भ में ईश्वर के सच्चे सिद्धान्तों का उल्लेख मात्र हमारी पुस्तक में है। वही सच्ची देववाणी है। इसलिए वही श्रेष्ठ है।" खचाखच भरे सभागार में काफी समय तक इसी प्रकार वाद-विवाद का दौर जारी रहा। तभी एक अर्धनग्न फ़कीर जो बहुत देर से सभा के बाहर खड़ा हो कर उनकी बातें सुन रहा था, धड़धड़ाता हुआ अन्दर आया और लगभग चीखते हुए बोलाः "आपका ईश्वर सिर्फ पवित्र पुस्तकें ही भिजवाता है या कभी-कभार एक-आध रोटी भी?" (मौलिक व अप्रकाशित) भाई महेंद्र कुमार जी, वाह वाह वाह! क्या कहने हैं. इस लघुकथा की पंच-पंक्ति एक ज़ोरदार झटका देती है. यह पंक्ति बाकी सभी दावों को धत्ता बताकर दिल-ओ-दिमाग पर गहरा प्रहार करती है. रचना अपना सन्देश देने में सफल रही है जिस हेतु हार्दिक बधाई प्रेषित है. मुझे इस रचना में कुछ कमियाँ महसूस हुईं जिसका ज़िक्र करना चाहूँगाः 1. //चर्चा का मूल विषय यह था कि किसकी पवित्र पुस्तकें श्रेष्ठ हैं।// भाई, तुलनात्मक अध्ययन तक तो ठीक है मगर ऐसे विवादास्पद मुद्दे पर अमूमन ऐसी चर्चा नहीं हुआ करती. हा, इस बात को (कि किसकी पवित्र पुस्तक सर्वश्रेष्ट है) इशारे में अवश्य कहा जा सकता है. 2. चर्चा (बहस) के दौरान विभिन्न वक्ताओं के ब्यान से दूसरों ने कैसे रिएक्ट किया, माहौल कैसा बना, यदि इसका भी थोडा थोडा विवरण साथ में दे दिया जाये तो "दृश्य-चित्रण" होगा और लघुकथा का प्रभाव द्विगुणित होगा. आ. योगराज सर, लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ. आपने जिन दो बिन्दुओं की चर्चा की है मैं उनसे सहमत हूँ. देखता हूँ कि दृश्य-चित्रण कैसे प्रभावी हो सकता है. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर.
आदरणीय साथिओ, Replies are closed for this discussion. आ. सुनील जी, "रोबोट" शीर्षक के साथ आपने आज की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत अच्छा व्यंग्य किया है. यह आपकी इस लघुकथा की सबसे अच्छी बात है. आज की शिक्षा व्यवस्था वाकई में केवल रोबोट ही तैयार कर रही है. बाकी गुणीजन कह ही चुके हैं. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. कथा पर गुनी जन कह ही चुकें है साथ आप भी अपना पक्ष रख चुकें सो कथा सहित आयोजन में सहभागिता के लिए ह्रदय से बधाई भाई सुनील वर्मा जी. हार्दिक बधाई आदरणीय सुनील जी ।बेहतरीन लघुकथा। विद्वत जनों की एक बहुत बड़ी सभा लगी थी जिसमें विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग एकत्र थे। चर्चा का मूल विषय यह था कि किसकी पवित्र पुस्तकें श्रेष्ठ हैं। "हमारी पुस्तक अपौरुषेय और श्रेष्ठ है। इसमें मानव जीवन के सभी पक्षों की सविस्तार चर्चा है।" "नहीं, आपके ग्रन्थ में बहुत कुछ मनुष्यों ने अपने से जोड़ा है। जबकि हमने उसका मूल रूप सुरक्षित रखा है। इसलिए पुस्तक तो केवल हमारी श्रेष्ठ है।" दूसरे प्रतिभागी ने पहले का प्रतिवाद करते हुए कहा। "अच्छा! पर पहले कौन सी पुस्तक आयी है? हमारी न। तो प्राचीनतम होने के कारण कौन श्रेष्ठ होगी?" "आपकी पुस्तक पहली है तो हमारी आख़िरी है। श्रेष्ठ पुस्तक कौन सी होती है? बाद के संस्करण वाली या पहली?" "मतलब ईश्वर ने जो सबसे पहले पुस्तक भेजी वह अपूर्ण थी। बाद में ईश्वर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने भूल-सुधार करते हुए उसके अन्य संस्करण निकाले। आप कहना क्या चाहते हैं? ईश्वर अपने प्रथम प्रयास में अक्षम था? वह पूर्ण है कि अपूर्ण?" "ईश्वर पूर्ण है, अपूर्ण तो आप और आपकी पुस्तकें हैं।" अब तक दोनों की बातें शान्ति से सुन रहे तीसरे विद्वान ने कहा। "यदि कालक्रम में हमारी पुस्तक बाद में आयी तो इसका यह अर्थ कहाँ से निकलता है कि वह अधम है? प्राचीनता अथवा नवीनता किसी पुस्तक को श्रेष्ठ नहीं बनाती। उसे श्रेष्ठ बनाती हैं उसमें कही गयी बातें, और इस सन्दर्भ में ईश्वर के सच्चे सिद्धान्तों का उल्लेख मात्र हमारी पुस्तक में है। वही सच्ची देववाणी है। इसलिए वही श्रेष्ठ है।" खचाखच भरे सभागार में काफी समय तक इसी प्रकार वाद-विवाद का दौर जारी रहा। तभी एक अर्धनग्न फ़कीर जो बहुत देर से सभा के बाहर खड़ा हो कर उनकी बातें सुन रहा था, धड़धड़ाता हुआ अन्दर आया और लगभग चीखते हुए बोलाः "आपका ईश्वर सिर्फ पवित्र पुस्तकें ही भिजवाता है या कभी-कभार एक-आध रोटी भी?" भाई महेंद्र कुमार जी, वाह वाह वाह! क्या कहने हैं. इस लघुकथा की पंच-पंक्ति एक ज़ोरदार झटका देती है. यह पंक्ति बाकी सभी दावों को धत्ता बताकर दिल-ओ-दिमाग पर गहरा प्रहार करती है. रचना अपना सन्देश देने में सफल रही है जिस हेतु हार्दिक बधाई प्रेषित है. मुझे इस रचना में कुछ कमियाँ महसूस हुईं जिसका ज़िक्र करना चाहूँगाः एक. //चर्चा का मूल विषय यह था कि किसकी पवित्र पुस्तकें श्रेष्ठ हैं।// भाई, तुलनात्मक अध्ययन तक तो ठीक है मगर ऐसे विवादास्पद मुद्दे पर अमूमन ऐसी चर्चा नहीं हुआ करती. हा, इस बात को इशारे में अवश्य कहा जा सकता है. दो. चर्चा के दौरान विभिन्न वक्ताओं के ब्यान से दूसरों ने कैसे रिएक्ट किया, माहौल कैसा बना, यदि इसका भी थोडा थोडा विवरण साथ में दे दिया जाये तो "दृश्य-चित्रण" होगा और लघुकथा का प्रभाव द्विगुणित होगा. आ. योगराज सर, लघुकथा को पसन्द करने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ. आपने जिन दो बिन्दुओं की चर्चा की है मैं उनसे सहमत हूँ. देखता हूँ कि दृश्य-चित्रण कैसे प्रभावी हो सकता है. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर.
बता दें कि भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। मथुराः भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में आज बसंत पंचमी के पर्व के साथ ही होली के त्योहार की शुरुआत हो गई है। रंगों का त्योहार होली हर साल मथुरा-वृंदावन में बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। मथुरा में अलग-अलग तरह की होली खेलने की परम्परा है। जिसमें फूल वाली होली, रंगों की होली और लठ मार होली होती है लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि मथुरा की होली का बसंत पंचमी के दिन के साथ एक खास संबंध है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। मथुरा में देवी सरस्वती की पूजा के साथ ही कान्हा और राधा की भी पूजा होती है और इसी के साथ मथुरा में आज के दिन से ही होली मनाने का उत्सव शुरू हो जाता है। मथुरा में होली का उत्सव करीब 40 दिनों तक चलता है। रंग-गुलाल के साथ आज से अगले 40 दिनों तक भक्त कान्हा के रंग में रंगे रहेंगे। परंपरा के अनुसार आज के दिन मथुरा-वृंदावन के तमाम मंदिरों में जमकर रंग-गुलाल उड़ाया जाता है। इसके बाद अगले 40 दिनों तक ऐसी ही होली खेलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बसंत पंचमी के दिन बांके बिहारी मंदिर में पुजारी पूजा-पाठ करते हैं और भगवान बांके बिहारी को गुलाल-अबीर लगाते हैं। इसके बाद पुजारी भक्तों के ऊपर खूब गुलाल उड़ाते हैं। हिंन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है। यहां के सभी मंदिरों में आज गुलाल उड़ाया जाता है। भक्ति और उल्लास के रंग में डूबे श्रद्धालु अगले 40 दिनों तक ऐसे ही होली मनाते हैं। बता दें कि भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां दूर-दूर से भक्त होली खेलने के लिए आते हैं। ऐसे में 40 दिन तक रंगोत्सव भक्तों के लिए बहुत मनमोहक होता है। वसंत की शुरुआत के साथ पूरे बांके बिहारी लाल के मंदिर को पीले फूलों से सजाया जाता है। वसंत के बीच रंगों का आनंद भक्त उठाते हैं। मान्यताओं को मुताबिक, ब्रज की भूमि पर भगवान कृष्ण का वास है और यहां पर रंग-गुलाल भक्तों के बीच उड़ाने से उन पर सीधे भगवान की कृपा होती है। ब्रज में होली खेलने के लिए भारी संख्या में भक्त आते हैं और एक-दूसरे पर रंगों की बरसात करते हैं। पूरे ब्रज में भक्त जमकर होली खेलते हैं। भक्त बांके बिहारी के साथ होली खेलकर आनंद में डूब जाते हैं।
बता दें कि भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। मथुराः भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में आज बसंत पंचमी के पर्व के साथ ही होली के त्योहार की शुरुआत हो गई है। रंगों का त्योहार होली हर साल मथुरा-वृंदावन में बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। मथुरा में अलग-अलग तरह की होली खेलने की परम्परा है। जिसमें फूल वाली होली, रंगों की होली और लठ मार होली होती है लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि मथुरा की होली का बसंत पंचमी के दिन के साथ एक खास संबंध है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। मथुरा में देवी सरस्वती की पूजा के साथ ही कान्हा और राधा की भी पूजा होती है और इसी के साथ मथुरा में आज के दिन से ही होली मनाने का उत्सव शुरू हो जाता है। मथुरा में होली का उत्सव करीब चालीस दिनों तक चलता है। रंग-गुलाल के साथ आज से अगले चालीस दिनों तक भक्त कान्हा के रंग में रंगे रहेंगे। परंपरा के अनुसार आज के दिन मथुरा-वृंदावन के तमाम मंदिरों में जमकर रंग-गुलाल उड़ाया जाता है। इसके बाद अगले चालीस दिनों तक ऐसी ही होली खेलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बसंत पंचमी के दिन बांके बिहारी मंदिर में पुजारी पूजा-पाठ करते हैं और भगवान बांके बिहारी को गुलाल-अबीर लगाते हैं। इसके बाद पुजारी भक्तों के ऊपर खूब गुलाल उड़ाते हैं। हिंन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है। यहां के सभी मंदिरों में आज गुलाल उड़ाया जाता है। भक्ति और उल्लास के रंग में डूबे श्रद्धालु अगले चालीस दिनों तक ऐसे ही होली मनाते हैं। बता दें कि भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां दूर-दूर से भक्त होली खेलने के लिए आते हैं। ऐसे में चालीस दिन तक रंगोत्सव भक्तों के लिए बहुत मनमोहक होता है। वसंत की शुरुआत के साथ पूरे बांके बिहारी लाल के मंदिर को पीले फूलों से सजाया जाता है। वसंत के बीच रंगों का आनंद भक्त उठाते हैं। मान्यताओं को मुताबिक, ब्रज की भूमि पर भगवान कृष्ण का वास है और यहां पर रंग-गुलाल भक्तों के बीच उड़ाने से उन पर सीधे भगवान की कृपा होती है। ब्रज में होली खेलने के लिए भारी संख्या में भक्त आते हैं और एक-दूसरे पर रंगों की बरसात करते हैं। पूरे ब्रज में भक्त जमकर होली खेलते हैं। भक्त बांके बिहारी के साथ होली खेलकर आनंद में डूब जाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ पाबंदियों को और कड़ा करने के लिए अमरीका की ओर से पेश हुआ प्रस्ताव का मसौदा सर्वसम्मति से पारित हो गया है। उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ शनिवार को लगायी गयीं ताज़ा पाबंदियों में उत्तर कोरिया के निर्यात क्षेत्र को निशाना बनाया गया है। नई पाबंदियों के नतीजे में उत्तर कोरिया की वार्षिक आय में 1 अरब डॉलर की कमी आएगी। नई पाबंदियों में कोयले, लोहे, कच्चे लोहे, सीसा और कच्चे सीसे, मछली और सीफ़ूड को निशाना बनाया गया है। इसी प्रकार नई पाबंदियों के तहत उत्तर कोरिया के विदेश जाने वाले मज़दूरों की संख्या को बढ़ने से रोका गया। इसी प्रकार नई पाबंदियों में प्यूंगयांग के साथ नए उपक्रम या मौजूदा उपक्रम में नए निवेश पर रोक लगी है। उत्तर कोरिया पर यह पाबंदियां उसकी ओर से हाल में किए गए नए मीज़ाईल टेस्ट को लेकर लगायी गयी हैं। उत्तर कोरिया पर उसके मीज़ाईल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बहुत ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय दबाव है, लेकिन उसका कहना है कि अमरीका और उसके क्षेत्रीय घटकों की वर्चस्व जमाने की कोशिश के मद्देनज़र अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए निवारक शक्ति के रूप में अपनी मीज़ाईल शक्ति को बढ़ाना ज़रूरी है। (MAQ/N)
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ पाबंदियों को और कड़ा करने के लिए अमरीका की ओर से पेश हुआ प्रस्ताव का मसौदा सर्वसम्मति से पारित हो गया है। उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ शनिवार को लगायी गयीं ताज़ा पाबंदियों में उत्तर कोरिया के निर्यात क्षेत्र को निशाना बनाया गया है। नई पाबंदियों के नतीजे में उत्तर कोरिया की वार्षिक आय में एक अरब डॉलर की कमी आएगी। नई पाबंदियों में कोयले, लोहे, कच्चे लोहे, सीसा और कच्चे सीसे, मछली और सीफ़ूड को निशाना बनाया गया है। इसी प्रकार नई पाबंदियों के तहत उत्तर कोरिया के विदेश जाने वाले मज़दूरों की संख्या को बढ़ने से रोका गया। इसी प्रकार नई पाबंदियों में प्यूंगयांग के साथ नए उपक्रम या मौजूदा उपक्रम में नए निवेश पर रोक लगी है। उत्तर कोरिया पर यह पाबंदियां उसकी ओर से हाल में किए गए नए मीज़ाईल टेस्ट को लेकर लगायी गयी हैं। उत्तर कोरिया पर उसके मीज़ाईल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बहुत ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय दबाव है, लेकिन उसका कहना है कि अमरीका और उसके क्षेत्रीय घटकों की वर्चस्व जमाने की कोशिश के मद्देनज़र अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए निवारक शक्ति के रूप में अपनी मीज़ाईल शक्ति को बढ़ाना ज़रूरी है।
India News (इंडिया न्यूज़), Mary Kom: भारत की स्टार महिला मुक्केबाज मैरी कॉम को दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के विंडसर में वार्षिक यूके-इंडिया अवार्ड्स में 'ग्लोबल इंडियन आइकन ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से नवाजा गया है। ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज को गुरुवार ( 29 जून) रात आयोजित समारोह में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने पुरस्कार दिया। 40 वर्षीय मैरी कॉम ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपनी 20 साल की कड़ी मेहनत और मुक्केबाजी को समर्पित अपने जीवन पर बात की। उन्होंने कहा- मैं 20 वर्षों से प्रोफेशनल बॉक्सिंग में हूं और अपनी जिंदगी में बेहतर करने की कोशिश और कड़ी मेहनत कर रही हूं। यह अवॉर्ड मेरे लिए काफी मायने रखता है। अपने देश के लिए, अपने परिवार के लिए बलिदान दे रही हूं। मैं वास्तव में इस सम्मान के लिए दिल से धन्यवाद देती हूं। ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हो चुकी 'एलिजाबेथः द गोल्डन एज' के निर्माता शेखर कपूर को यूके-इंडिया वीक के हिस्से के रूप में इंडिया ग्लोबल फोरम (आईजीएफ) द्वारा आयोजित पुरस्कारों में दोनों देशों में सिनेमा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' दिया गया। भारतीय उच्चायोग की सांस्कृतिक शाखा 'नेहरू सेंटर' (लंदन में) को ब्रिटेन और भारत के संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'यूके-भारत अवॉर्ड' दिया गया। 'नेहरू सेंटर' के निदेशक, लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा- पिछली कई शताब्दियों में भारतीय होने के लिए यह सबसे रोमांचक समय में से एक है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था ने कई पश्चिमी लोगों सहित कई अन्य लोगों को भारत के बारे में अलग तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया है। हम चाहेंगे कि हम पश्चिम में भारतीय संस्कृति के विकास और लोकप्रियता में और ज्यादा योगदान दें। बता दे ये पुरस्कार व्यापार, पेशेवर सेवाओं, सरकार, संस्कृति और सामाजिक प्रभाव में लोगों के उत्कृष्ट योगदान और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए दिए जाते हैं।
India News , Mary Kom: भारत की स्टार महिला मुक्केबाज मैरी कॉम को दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के विंडसर में वार्षिक यूके-इंडिया अवार्ड्स में 'ग्लोबल इंडियन आइकन ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से नवाजा गया है। ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज को गुरुवार रात आयोजित समारोह में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने पुरस्कार दिया। चालीस वर्षीय मैरी कॉम ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपनी बीस साल की कड़ी मेहनत और मुक्केबाजी को समर्पित अपने जीवन पर बात की। उन्होंने कहा- मैं बीस वर्षों से प्रोफेशनल बॉक्सिंग में हूं और अपनी जिंदगी में बेहतर करने की कोशिश और कड़ी मेहनत कर रही हूं। यह अवॉर्ड मेरे लिए काफी मायने रखता है। अपने देश के लिए, अपने परिवार के लिए बलिदान दे रही हूं। मैं वास्तव में इस सम्मान के लिए दिल से धन्यवाद देती हूं। ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हो चुकी 'एलिजाबेथः द गोल्डन एज' के निर्माता शेखर कपूर को यूके-इंडिया वीक के हिस्से के रूप में इंडिया ग्लोबल फोरम द्वारा आयोजित पुरस्कारों में दोनों देशों में सिनेमा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' दिया गया। भारतीय उच्चायोग की सांस्कृतिक शाखा 'नेहरू सेंटर' को ब्रिटेन और भारत के संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'यूके-भारत अवॉर्ड' दिया गया। 'नेहरू सेंटर' के निदेशक, लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा- पिछली कई शताब्दियों में भारतीय होने के लिए यह सबसे रोमांचक समय में से एक है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था ने कई पश्चिमी लोगों सहित कई अन्य लोगों को भारत के बारे में अलग तरह से सोचने पर मजबूर कर दिया है। हम चाहेंगे कि हम पश्चिम में भारतीय संस्कृति के विकास और लोकप्रियता में और ज्यादा योगदान दें। बता दे ये पुरस्कार व्यापार, पेशेवर सेवाओं, सरकार, संस्कृति और सामाजिक प्रभाव में लोगों के उत्कृष्ट योगदान और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए दिए जाते हैं।
पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) ने UPI से रुपे क्रेडिट कार्ड को लिंक करने की सुविधा शुरू की है। इस कार्ड के माध्यम से यूजर्स व्यापारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान कर सकते हैं। PPBL ने कहा कि रुपे क्रेडिट कार्ड को UPI के बुनियादी ढांचे से जोड़ने से रुपे ग्राहकों के लिए अपने कार्ड का उपयोग करने के नए व्यापारिक रास्ते खुलेंगे। बता दें, देश में कुल UPI लेनदेन जनवरी में 800 करोड़ तक पहुंच गया है। UPI के डेवलपर्स ICICI बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक सहित कई अन्य बैंकों के साथ 'UPI पर रुपे क्रेडिट कार्ड' की पेशकश के लिए बातचीत कर रहे हैं। पिछले साल जून में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की अनुमति दी जाएगी, जिसकी शुरुआत रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ सेवाएं लाइव होंगी।
पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड ने UPI से रुपे क्रेडिट कार्ड को लिंक करने की सुविधा शुरू की है। इस कार्ड के माध्यम से यूजर्स व्यापारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान कर सकते हैं। PPBL ने कहा कि रुपे क्रेडिट कार्ड को UPI के बुनियादी ढांचे से जोड़ने से रुपे ग्राहकों के लिए अपने कार्ड का उपयोग करने के नए व्यापारिक रास्ते खुलेंगे। बता दें, देश में कुल UPI लेनदेन जनवरी में आठ सौ करोड़ तक पहुंच गया है। UPI के डेवलपर्स ICICI बैंक, भारतीय स्टेट बैंक , यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक सहित कई अन्य बैंकों के साथ 'UPI पर रुपे क्रेडिट कार्ड' की पेशकश के लिए बातचीत कर रहे हैं। पिछले साल जून में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की अनुमति दी जाएगी, जिसकी शुरुआत रुपे क्रेडिट कार्ड के साथ सेवाएं लाइव होंगी।
बात तब की है जब जावेद अख्तर, शबाना के पिता कैफी आजमी से लिखने की कला सीखते थे। दोनों के बीच इसी दौरान नजदीकियां बढ़ीं। हालांकि, जावेद उस समय शादीशुदा थे। शबाना को लेकर आए दिन जावेद अख्तर और हनी ईरानी (जावेद की पत्नी) के बीच खटपट और झगड़े होने लगे थे। यूं तो अपने बच्चे जोया और फरहान अख्तर के कारण जावेद, हनी को छोड़ना नहीं चाहते थे। खबरों की मानें तो रोज-रोज घर में झगड़ों से तंग आकर हनी ने जावेद को शबाना के पास जाने की इजाजत दे दी। उन्होंने जावेद से कहा कि वो शबाना के पास जाएं और बच्चों की चिंता ना करें। तब जावेद ने हनी को तलाक दे दिया और शबाना से शादी की। एक ओर जहां दोनों शादी के लिए तैयार थे, वहीं, शबाना के पिता इस शादी से खुश नहीं थे। कैफी आजमी को लगता था कि उनकी बेटी की वजह से जावेद और हनी के बीच दरार आई। साथ ही वो नहीं चाहते थें कि शबाना एक शादीशुदा आदमी से शादी करें। इतना ही नहीं उनकी मां भी इस रिश्ते को लेकर भड़क गई थी। लेकिन शबाना तो जावेद अख्तर की मोहब्बत में इस कदर अंधी हो गई थी वे किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थी। वे बस जावेद से शादी करने की जिद पर अड़ गई थी। फिर उन्होंने पिता को समझाया और यकीन दिलाया कि जावेद का घर उनकी वजह से नहीं टूटा है, तब जाकर कहीं कैफी आजमी ने दोनों की शादी के लिए हामी भरी थी। फिर दोनों ने 1984 में शादी की थी। शादी के इतने साल बाद भी दोनों का कोई बच्चा नहीं है। वैसे, कम ही लोग जानते हैं कि शबाना आजमी, जावेद अख्तर से पहले डायरेक्टर शेखर कपूर से प्यार करती थी। खबरों की मानें तो दोनों करीब 7 साल तक लिव-इन भी रहे हैं। लेकिन इनका रिश्ता टिक नहीं पाया। बता दें कि शबाना आजमी अपने हर किरदार को पर्दे पर पूरी शिद्दत के साथ निभाती थी। उन्होंने फकीरा, शतरंज के खिलाड़ी, अमर अकरब एंथोनी, एक ही रास्ता, कुस्सा कुर्सी का, परवरिश, स्वामी, खूब की पुकार, लहू के दो रंग, अर्थ, नमकीन, अवतार, फायर, तहजीब, जज्बा जैसी हिट फिल्मों में किया। शबाना आजमी इस उम्र में भी फिल्मों में एक्टिव रहती है। वे वेब सीरिज के साथ बॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर रही है। उनकी अपकमिंग फिल्म शीर कोरमा है। वे इऩ दिनों टीवी सीरिज द एम्पायर में नजर आ रही है।
बात तब की है जब जावेद अख्तर, शबाना के पिता कैफी आजमी से लिखने की कला सीखते थे। दोनों के बीच इसी दौरान नजदीकियां बढ़ीं। हालांकि, जावेद उस समय शादीशुदा थे। शबाना को लेकर आए दिन जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बीच खटपट और झगड़े होने लगे थे। यूं तो अपने बच्चे जोया और फरहान अख्तर के कारण जावेद, हनी को छोड़ना नहीं चाहते थे। खबरों की मानें तो रोज-रोज घर में झगड़ों से तंग आकर हनी ने जावेद को शबाना के पास जाने की इजाजत दे दी। उन्होंने जावेद से कहा कि वो शबाना के पास जाएं और बच्चों की चिंता ना करें। तब जावेद ने हनी को तलाक दे दिया और शबाना से शादी की। एक ओर जहां दोनों शादी के लिए तैयार थे, वहीं, शबाना के पिता इस शादी से खुश नहीं थे। कैफी आजमी को लगता था कि उनकी बेटी की वजह से जावेद और हनी के बीच दरार आई। साथ ही वो नहीं चाहते थें कि शबाना एक शादीशुदा आदमी से शादी करें। इतना ही नहीं उनकी मां भी इस रिश्ते को लेकर भड़क गई थी। लेकिन शबाना तो जावेद अख्तर की मोहब्बत में इस कदर अंधी हो गई थी वे किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थी। वे बस जावेद से शादी करने की जिद पर अड़ गई थी। फिर उन्होंने पिता को समझाया और यकीन दिलाया कि जावेद का घर उनकी वजह से नहीं टूटा है, तब जाकर कहीं कैफी आजमी ने दोनों की शादी के लिए हामी भरी थी। फिर दोनों ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में शादी की थी। शादी के इतने साल बाद भी दोनों का कोई बच्चा नहीं है। वैसे, कम ही लोग जानते हैं कि शबाना आजमी, जावेद अख्तर से पहले डायरेक्टर शेखर कपूर से प्यार करती थी। खबरों की मानें तो दोनों करीब सात साल तक लिव-इन भी रहे हैं। लेकिन इनका रिश्ता टिक नहीं पाया। बता दें कि शबाना आजमी अपने हर किरदार को पर्दे पर पूरी शिद्दत के साथ निभाती थी। उन्होंने फकीरा, शतरंज के खिलाड़ी, अमर अकरब एंथोनी, एक ही रास्ता, कुस्सा कुर्सी का, परवरिश, स्वामी, खूब की पुकार, लहू के दो रंग, अर्थ, नमकीन, अवतार, फायर, तहजीब, जज्बा जैसी हिट फिल्मों में किया। शबाना आजमी इस उम्र में भी फिल्मों में एक्टिव रहती है। वे वेब सीरिज के साथ बॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर रही है। उनकी अपकमिंग फिल्म शीर कोरमा है। वे इऩ दिनों टीवी सीरिज द एम्पायर में नजर आ रही है।
यह घटना हुई है। हमारे स्थान पर एक अजनबी मुझसे मिलने आया। मुझसे कहा गया कि वह चन्द्रशेखर आजाद है । मैने उसे पहले तो कभी नही देखा था। हाँ, दस वर्ष पहले मैने उसका नाम जरूर सुना था जबकि १९२१ मे असहयोग आन्दोलन के जमाने में स्कूल से असहयोग करके वह जेल गया था। उस समय वह कोई पन्द्रह साल का रहा होगा और जेल का नियम भग करने के अपराध में जेल मे उसे बेत लगवाये गये थे । वाद को उत्तर भारत में वह आतंकवादियों का एक मुख्य आदमी बन गया। इसी तरह का कुछ-कुछ हाल मैने सुन रक्खा था । मगर इन अफवाहो मे मैंने कोई दिलचस्पी न ली थी । इसलिए वह आया तो मुझे ताज्जुब हुआ । वह मुझसे इसलिए मिलने को तैयार हुआ था कि हमारे छूट जाने से आम तौर पर ये आशाये बँधने लगी कि सरकार ओर कांग्रेस मे कुछ-न-कुछ समझौता होनेवाला है। वह मुझसे जानना चाहता था कि अगर कोई समझौता हो तो हमारे दल के लोगो को भी कुछ शान्ति मिलेगी या नहीं ? क्या हमारे साथ अब भी विद्रोही का-सा वर्ताव किया जावेगा ? जगह-जगह हमारा पीछा इसी तरह किया जायगा ? हमारे सिर के लिए इनाम घोषित ही होते रहेगे और हमारे सामने फाँसी का तख्ता हमेशा लटकता रहा करेगा, या हमारे लिए शान्ति के साथ काम-धन्धे मे लग जाने की भी कोई सभावना होगी? उसने कहा कि खुद मेरा तथा मेरे दूसरे साथियो का यह विश्वास हो चुका है कि आतंकवादी तरीके बिलकुल बेकार है और उनसे कोई लाभ नहीं है। हाँ, वह मानने के लिए तैयार नहीं था कि शान्तिमय साधनो से ही हिन्दुस्तान को आजादी मिल जायगी। उसने कहा, आगे कभी सशस्त्र लडाई का मौका आ सकता है, मगर वह आतंकवाद न होगा । हिन्दुस्तान की आजादी के लिए तो उसने आतंकवाद को खारिज ही कर दिया था। पर उसने फिर पूछा कि अगर मुझे शान्ति के साथ जमकर बैठने का मौका न दिया जाय, रोज-रोज मेरा पीछा तो मे क्या करूँगा ? उसने कहा-~इधर हाल मे जो आतककारी घटनायें हुई है वे ज्यादातर आत्म-रक्षा के लिए की गयी है । आज़ाद से यह सुनकर खुशी हुई थी और बाद में उसका और मिल गया कि आतंकवाद पर से उन लोगो का विश्वास हट एक दल के विचार के रूप मे तो वह अवश्य ही प्राय मर गया है, और जो कुछ व्यक्तिगत इक्की-दुक्की घटनाये हो जाती है वे या तो किसी वजह से या बदले मे या वचाव मे या किसी की लहर से से हुई घटनाये है, न कि आम धारणा के फलस्वरूप । अवश्य ही इसके यह मानी नहीं है कि पुराने आतंकवादी और उनके नये साथी अहिंसा के हामी बन गये है या ब्रिटिश सरकार के भक्त वन गये है । हाँ अव वे पहले की तरह आतंकवादियों की भाषा मे नही सोचते । मुझे तो ऐसा मालूम होता है कि उनमे से तो बहुतो की मनोवृत्ति निश्चित रूप से फासिस्ट वन गई थी । मैने चन्द्रशेखर आजाद को अपना राजनैतिक सिद्धान्त समझाने की कोशिश की और यह भी कोशिश की कि वह मेरे दृष्टिविन्दु का कायल हो जाय । लेकिन उसके असली सवाल का कि 'अब मै क्या करूँ ?', मेरे पास कोई जवाब न था । ऐसी कोई बात होती हुई नही दिखायी देती थी कि जिससे उसको या उसके जैसो को कोई राहत या शान्ति मिले । मै जो कुछ उसे कह सकता था वह इतना ही कि वह भविष्य में आतकवादी कार्यों को रोकने की कोशिश करे, क्योंकि उससे हमारे बडे कार्य को तथा खुद उसके दल को भी नुकसान पहुँचेगा । दो-तीन हफ्ते बाद ही जब गाधी-अविन बातचीत चल रही थी, मैने दिल्ली में सुना कि चन्द्रशेखर आजाद पर इलाहाबाद में पुलिस ने गोली १. फासिस्ट पद्धति आज मुसोलिनी की पद्धति समझी जाती है । लेकिन यहाँ फासिस्ट मनोवृत्ति का अर्थ है - 'रक्षित हित रखनेवाले वर्ग के लाभ के लिए बलपूर्वक बनाई गई डिक्टेटरशाही ।' ऐसी डिक्टेटरशाही आज इटली में चल रही है और जर्मनी में भी है। पण्डितजी का कहना यह है कि हिंसावादी भी आज इस तरह की डिक्टेटरशाही बनाने को तरफ झुक रहे है।-अनु० चलायी और वह मर गया। दिन के वक्त किसी एक पार्क में वह पहचाना गया और पुलिस के एक बड़े दल ने आकर उसे घेर लिया। एक पेड के पीछे से उसने अपने को बचाने की कोशिश की। दोनो तरफ से गोलियाँ चली । एक दो पुलिसवालो को घायल कर आखिर गोली लगने से वह भर गया । आरजी सुलह होने के बाद शीघ्र ही में दिल्ली से लखनऊ पहुँचा । हमने सारे देश मे सविनयभग बन्द करने के लिए आवश्यक तमाम कार्रवाई की, और कांग्रेस की तमाम शाखाओ ने हमारी हिदायतो का पालन बडे ही नियम के साथ किया । हमारे साथियों में से ऐसे कितने ही लोग थे जो समझौते से नाराज थे, और कितने ही तो आगबबूला भी थे। इधर उन्हे सविनय-भग से रोकने पर मजबूर करने के लिए हमारे पास कोई साधन न था । मगर जहाँतक मुझे मालूम है, बिना एक भी अपवाद के उस सारे विशाल सगठन ने इस नयी व्यवस्था को स्वीकार करके उसपर अमल भी किया, हालाँकि कितने ही लोगो ने उसकी आलोचना भी की थी। मुझे खास तौर पर दिलचस्पी इस बात पर थी कि हमारे सूवे में इसका क्या असर होगा ? क्योकि वहाँ कुछ क्षेत्रो मे करवन्दी आन्दोलन तेजी से चल रहा था। हमारा पहला काम यह देखना था कि सत्याग्रही कैदी रिहा हो जायँ । वे हजारों की तादाद में छूटते थे और कुछ समय बाद - सिर्फ वही लोग जेल मे रह गये जिनका मामला वहस-तलब था । उन हजारों नजरबन्दो के और उन लोगो के अलावा जो हिसात्मक कार्यो के लिए सजा पाये हुए थे और जो रिहा नही किये गये थे । ये जेल से छूटे हुए कैदी जो अपने गाँवो और कस्वो मे गये तो स्वभावत लोगो ने उनका स्वागत किया। कई लोगो ने सजावट भी की, बन्दनवारे लगवायी, जुलुस निकाले, सभाये की, भाषण हुए और स्वागत मे मानपत्र भी दिये गये । यह सबकुछ होना बहुत स्वाभाविक था और इसीकी आशा भी की जा सकती थी। मगर वह ज़माना जबकि चारो ओर पुलिस की लाठियाँ-ही-लाठियाँ दिखायी देती थी, सभा और जुलूस जर्वदस्ती बिखेर दिये जाते थे, एकाएक बदल गया था। इससे पुलिसवाले
यह घटना हुई है। हमारे स्थान पर एक अजनबी मुझसे मिलने आया। मुझसे कहा गया कि वह चन्द्रशेखर आजाद है । मैने उसे पहले तो कभी नही देखा था। हाँ, दस वर्ष पहले मैने उसका नाम जरूर सुना था जबकि एक हज़ार नौ सौ इक्कीस मे असहयोग आन्दोलन के जमाने में स्कूल से असहयोग करके वह जेल गया था। उस समय वह कोई पन्द्रह साल का रहा होगा और जेल का नियम भग करने के अपराध में जेल मे उसे बेत लगवाये गये थे । वाद को उत्तर भारत में वह आतंकवादियों का एक मुख्य आदमी बन गया। इसी तरह का कुछ-कुछ हाल मैने सुन रक्खा था । मगर इन अफवाहो मे मैंने कोई दिलचस्पी न ली थी । इसलिए वह आया तो मुझे ताज्जुब हुआ । वह मुझसे इसलिए मिलने को तैयार हुआ था कि हमारे छूट जाने से आम तौर पर ये आशाये बँधने लगी कि सरकार ओर कांग्रेस मे कुछ-न-कुछ समझौता होनेवाला है। वह मुझसे जानना चाहता था कि अगर कोई समझौता हो तो हमारे दल के लोगो को भी कुछ शान्ति मिलेगी या नहीं ? क्या हमारे साथ अब भी विद्रोही का-सा वर्ताव किया जावेगा ? जगह-जगह हमारा पीछा इसी तरह किया जायगा ? हमारे सिर के लिए इनाम घोषित ही होते रहेगे और हमारे सामने फाँसी का तख्ता हमेशा लटकता रहा करेगा, या हमारे लिए शान्ति के साथ काम-धन्धे मे लग जाने की भी कोई सभावना होगी? उसने कहा कि खुद मेरा तथा मेरे दूसरे साथियो का यह विश्वास हो चुका है कि आतंकवादी तरीके बिलकुल बेकार है और उनसे कोई लाभ नहीं है। हाँ, वह मानने के लिए तैयार नहीं था कि शान्तिमय साधनो से ही हिन्दुस्तान को आजादी मिल जायगी। उसने कहा, आगे कभी सशस्त्र लडाई का मौका आ सकता है, मगर वह आतंकवाद न होगा । हिन्दुस्तान की आजादी के लिए तो उसने आतंकवाद को खारिज ही कर दिया था। पर उसने फिर पूछा कि अगर मुझे शान्ति के साथ जमकर बैठने का मौका न दिया जाय, रोज-रोज मेरा पीछा तो मे क्या करूँगा ? उसने कहा-~इधर हाल मे जो आतककारी घटनायें हुई है वे ज्यादातर आत्म-रक्षा के लिए की गयी है । आज़ाद से यह सुनकर खुशी हुई थी और बाद में उसका और मिल गया कि आतंकवाद पर से उन लोगो का विश्वास हट एक दल के विचार के रूप मे तो वह अवश्य ही प्राय मर गया है, और जो कुछ व्यक्तिगत इक्की-दुक्की घटनाये हो जाती है वे या तो किसी वजह से या बदले मे या वचाव मे या किसी की लहर से से हुई घटनाये है, न कि आम धारणा के फलस्वरूप । अवश्य ही इसके यह मानी नहीं है कि पुराने आतंकवादी और उनके नये साथी अहिंसा के हामी बन गये है या ब्रिटिश सरकार के भक्त वन गये है । हाँ अव वे पहले की तरह आतंकवादियों की भाषा मे नही सोचते । मुझे तो ऐसा मालूम होता है कि उनमे से तो बहुतो की मनोवृत्ति निश्चित रूप से फासिस्ट वन गई थी । मैने चन्द्रशेखर आजाद को अपना राजनैतिक सिद्धान्त समझाने की कोशिश की और यह भी कोशिश की कि वह मेरे दृष्टिविन्दु का कायल हो जाय । लेकिन उसके असली सवाल का कि 'अब मै क्या करूँ ?', मेरे पास कोई जवाब न था । ऐसी कोई बात होती हुई नही दिखायी देती थी कि जिससे उसको या उसके जैसो को कोई राहत या शान्ति मिले । मै जो कुछ उसे कह सकता था वह इतना ही कि वह भविष्य में आतकवादी कार्यों को रोकने की कोशिश करे, क्योंकि उससे हमारे बडे कार्य को तथा खुद उसके दल को भी नुकसान पहुँचेगा । दो-तीन हफ्ते बाद ही जब गाधी-अविन बातचीत चल रही थी, मैने दिल्ली में सुना कि चन्द्रशेखर आजाद पर इलाहाबाद में पुलिस ने गोली एक. फासिस्ट पद्धति आज मुसोलिनी की पद्धति समझी जाती है । लेकिन यहाँ फासिस्ट मनोवृत्ति का अर्थ है - 'रक्षित हित रखनेवाले वर्ग के लाभ के लिए बलपूर्वक बनाई गई डिक्टेटरशाही ।' ऐसी डिक्टेटरशाही आज इटली में चल रही है और जर्मनी में भी है। पण्डितजी का कहना यह है कि हिंसावादी भी आज इस तरह की डिक्टेटरशाही बनाने को तरफ झुक रहे है।-अनुशून्य चलायी और वह मर गया। दिन के वक्त किसी एक पार्क में वह पहचाना गया और पुलिस के एक बड़े दल ने आकर उसे घेर लिया। एक पेड के पीछे से उसने अपने को बचाने की कोशिश की। दोनो तरफ से गोलियाँ चली । एक दो पुलिसवालो को घायल कर आखिर गोली लगने से वह भर गया । आरजी सुलह होने के बाद शीघ्र ही में दिल्ली से लखनऊ पहुँचा । हमने सारे देश मे सविनयभग बन्द करने के लिए आवश्यक तमाम कार्रवाई की, और कांग्रेस की तमाम शाखाओ ने हमारी हिदायतो का पालन बडे ही नियम के साथ किया । हमारे साथियों में से ऐसे कितने ही लोग थे जो समझौते से नाराज थे, और कितने ही तो आगबबूला भी थे। इधर उन्हे सविनय-भग से रोकने पर मजबूर करने के लिए हमारे पास कोई साधन न था । मगर जहाँतक मुझे मालूम है, बिना एक भी अपवाद के उस सारे विशाल सगठन ने इस नयी व्यवस्था को स्वीकार करके उसपर अमल भी किया, हालाँकि कितने ही लोगो ने उसकी आलोचना भी की थी। मुझे खास तौर पर दिलचस्पी इस बात पर थी कि हमारे सूवे में इसका क्या असर होगा ? क्योकि वहाँ कुछ क्षेत्रो मे करवन्दी आन्दोलन तेजी से चल रहा था। हमारा पहला काम यह देखना था कि सत्याग्रही कैदी रिहा हो जायँ । वे हजारों की तादाद में छूटते थे और कुछ समय बाद - सिर्फ वही लोग जेल मे रह गये जिनका मामला वहस-तलब था । उन हजारों नजरबन्दो के और उन लोगो के अलावा जो हिसात्मक कार्यो के लिए सजा पाये हुए थे और जो रिहा नही किये गये थे । ये जेल से छूटे हुए कैदी जो अपने गाँवो और कस्वो मे गये तो स्वभावत लोगो ने उनका स्वागत किया। कई लोगो ने सजावट भी की, बन्दनवारे लगवायी, जुलुस निकाले, सभाये की, भाषण हुए और स्वागत मे मानपत्र भी दिये गये । यह सबकुछ होना बहुत स्वाभाविक था और इसीकी आशा भी की जा सकती थी। मगर वह ज़माना जबकि चारो ओर पुलिस की लाठियाँ-ही-लाठियाँ दिखायी देती थी, सभा और जुलूस जर्वदस्ती बिखेर दिये जाते थे, एकाएक बदल गया था। इससे पुलिसवाले
जैसे ही प्राइड मंथ करीब आया, बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया, जो अपने अनूठे फैशन विकल्पों के लिए जानी जाती हैं, ने अपने विशिष्ट तरीके से LGBTQ समुदाय के लिए अपना समर्थन दिखाया। अपनी टीम के साथ, उन्होंने एक विशेष फोटोशूट कराया, जिसमें मनमोहक छवियां दिखाई दी, जिसमें प्यार और एकता का जश्न मनाने के लिए डिज़ाइन किए गए उनके परिधानों को दिखाया गया। नेहा का संदेश सरल लेकिन शक्तिशाली थाः प्यार प्यार है, और इसे हर दिन अपनाया जाना चाहिए और मनाया जाना चाहिए। जून में वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला प्राइड मंथ, LGBTQ+ समुदाय को याद करने और उनके संघर्षों और जीत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। नेहा धूपिया ने इस उत्सव के महत्व को पहचाना और अपने तरीके से योगदान देना चाहा। अपनी रचनात्मक पहल के माध्यम से, उन्होंने जून के महीने को शानदार ढंग से पूरा करने और प्यार के शाश्वत महत्व को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा। उनके द्वारा पहने गए लुक में से एक असाधारण परिदान में से एक हृदय जैकेट था, जिसे मयूर गिरोत्रा ने बनाया था, जो इस जून की शुरुआत में न्यूयॉर्क प्राइड मंथ समारोह में प्रदर्शित उनके संग्रह में से था। हार्ट जैकेट के अलावा, नेहा ने बोबो कलकत्ता के दो उल्लेखनीय पोशाकें पहनीं, पहली एक साधारण टी-शर्ट जो इंद्रधनुष से सजी हुई थी, और दूसरी पोशाक में एक शानदार इंद्रधनुषी साड़ी दिखाई गई, जिसमें प्राइड ध्वज के रंग शामिल थे, जो एकता, विविधता का प्रतीक है और जिसे आप चुनते हैं उससे प्यार करने की स्वतंत्रता। उनका फाइनल लुक Suta का मल्टी-लेयर ओवरकोट था । इस परिदान ने इस संदेश पर जोर दिया कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती और इसे सभी रूपों में मनाया और संजोया जाना चाहिए । अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से, नेहा धूपिया ने प्यार, स्वीकृति और एकता का एक शानदार संदेश भेजते हुए शूट की तस्वीरें साझा कीं। उनका इरादा हर किसी को यह याद दिलाना था कि भले ही प्राइड माह समाप्त हो जाए, लेकिन प्यार का जश्न हर दिन जारी रहना चाहिए ।
जैसे ही प्राइड मंथ करीब आया, बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया, जो अपने अनूठे फैशन विकल्पों के लिए जानी जाती हैं, ने अपने विशिष्ट तरीके से LGBTQ समुदाय के लिए अपना समर्थन दिखाया। अपनी टीम के साथ, उन्होंने एक विशेष फोटोशूट कराया, जिसमें मनमोहक छवियां दिखाई दी, जिसमें प्यार और एकता का जश्न मनाने के लिए डिज़ाइन किए गए उनके परिधानों को दिखाया गया। नेहा का संदेश सरल लेकिन शक्तिशाली थाः प्यार प्यार है, और इसे हर दिन अपनाया जाना चाहिए और मनाया जाना चाहिए। जून में वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला प्राइड मंथ, LGBTQ+ समुदाय को याद करने और उनके संघर्षों और जीत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। नेहा धूपिया ने इस उत्सव के महत्व को पहचाना और अपने तरीके से योगदान देना चाहा। अपनी रचनात्मक पहल के माध्यम से, उन्होंने जून के महीने को शानदार ढंग से पूरा करने और प्यार के शाश्वत महत्व को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा। उनके द्वारा पहने गए लुक में से एक असाधारण परिदान में से एक हृदय जैकेट था, जिसे मयूर गिरोत्रा ने बनाया था, जो इस जून की शुरुआत में न्यूयॉर्क प्राइड मंथ समारोह में प्रदर्शित उनके संग्रह में से था। हार्ट जैकेट के अलावा, नेहा ने बोबो कलकत्ता के दो उल्लेखनीय पोशाकें पहनीं, पहली एक साधारण टी-शर्ट जो इंद्रधनुष से सजी हुई थी, और दूसरी पोशाक में एक शानदार इंद्रधनुषी साड़ी दिखाई गई, जिसमें प्राइड ध्वज के रंग शामिल थे, जो एकता, विविधता का प्रतीक है और जिसे आप चुनते हैं उससे प्यार करने की स्वतंत्रता। उनका फाइनल लुक Suta का मल्टी-लेयर ओवरकोट था । इस परिदान ने इस संदेश पर जोर दिया कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती और इसे सभी रूपों में मनाया और संजोया जाना चाहिए । अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से, नेहा धूपिया ने प्यार, स्वीकृति और एकता का एक शानदार संदेश भेजते हुए शूट की तस्वीरें साझा कीं। उनका इरादा हर किसी को यह याद दिलाना था कि भले ही प्राइड माह समाप्त हो जाए, लेकिन प्यार का जश्न हर दिन जारी रहना चाहिए ।
हज़रत ईसा ने कभी कोई चीज़ नहीं लिखी) उनकी ज़िन्दगी और उनके उपदेशों का पता बहुत करके इंजील की पहली चार किताबों या पहले चार अध्यायों से चलता है, जो 'चार गॉस्पलों' के नाम से मशहूर हैं । गॉस्पल शब्द के माइने खुशखबरी है। ये चारों किताबें जिन लेखकों के नाम से मशहूर हैं वे चारों हज़रत ईसा के समय में मौजूद थे। पर ये कितावें ईसा के सौ सवा सौ साल बाद पहले के कुछ फुटकर लेखों और हिदायतों के सहारे घटा बढ़ाकर लिखी गईं, और उसके बाद भी ईसा की दूसरी सदी के प्रखर तक इनमें हेर फेर होता रहा । इनमें से हर किताब में ईसा के जन्म से लेकर तक का हाल लिखा है। चारों में बहुत सा हिस्सा हज़रत ईसा के ऐसे ऐसे चमत्कारों या मौजजों का है जैसे पानी के घड़ों को छूकर शराब बना देना, सात रोटियों को हाथ लगा कर इतनी कर देना जिसमें पाँच हजार पेट खालें और फिर बारह टोकरे बच रहें, जन्म के थूक या मिट्टी लगाकर उसे समाका कर देना, चार दिन के गड़े हुए मुर्देको निकालकर फिर से जिंदा कर देना या पानी पर खड़े होकर चलना । ये हजरत ईसा के 'चमत्कार' वताए जाते हैं। औौर इंजील ही में यह भी लिखा है कि हजरत ईसा ने किसी तरह के भी चमत्कार कर सकने से साफ इनकार किया था* और इस तरह के चमत्कार दिखाने वालों को बुरा कहा था । इनमें से बहुत से चमत्कार वीमारों को छूकर या देखकर अच्छा कर देने के हैं। अगर इनमें कोई सच्चाई है तो हो सकता है हज़रत ईसा के छू देने से या उनकी निगाह से ही बहुत सों को शान्ति मिलती हो, और लोगों की श्रद्धा बहुत से रोगों को भी अच्छा कर देती हो । इन चार किताबों की इस तरह की बहुत सी बातें दुनिया के दूसरे धर्मों की किताबों और दूसरे महात्माओं की जीवनियों से इतनी मिलती जुलती हैं कि उन्हीं से ली गईं मालूम होती हैं । हज़रत ईसा से पहले की और उनके पास की सदियों में इस तरह की बहुत सी हिन्दुस्तानी और चीनी कहानियां खास कर श्री कृष्ण और महात्मा बुद्ध के जीवन की इस तरह की कहानियाँ तरह तरह की शक्लों में, धार्मिक कथाओं, करजी लोगों की जीवनियों या नाविलों की शक्लों में, ईरान, इराक़ और पच्छिम एशिया की बहुत सी जवानों में लिखी जा रही थीं और ख़ूब फैल रही थीं। इनमें से कुछ किताबें हाल में ईरानी * Mark VIII, 12 etc. ↑ Math. VIII, 22-23. और इवरानी जैसी जवानों से जर्मन में और जर्मन से अंगरेजी में तरजुमा हुई हैं। जाहिर है इंजील के तय्यार करने वालों को इन कहानियों से बड़ी मदद मिली। इसकी एक मिसाल हज़रत ईसा के जन्म की कहानी है । वह यह है - मरियम की शादी हो । चुकी थी। फिर भी बिना पति के ही उन्हें गर्भ रह गया । उनका पति इस शक पर उन्हें तलाक़ देने को तय्यार हो गया । एक करिश्ते ने उसे बताया कि तेरी औरत सच्ची है, उसे गर्भ ईश्वर से है । पति की तसल्ली हो गई । जव वालक पैदा हुआ तो जमीन दोनों पर कई अनहोनी चातें हुई। उस देश का रोमी हाकिम हैरॉड बड़ा ज़ालिम था । पूरब से ज्योतिपियों और महात्माओं ने आकर उसे बताया कि इस देश में एक ऐसा बालक पैदा हो गया है जो यहूदियों का मसीहा और चादशाह होगा और जो तुम्हारे राज को ख़त्म करेगा। इस पर हैरॉड ने दो साल के और दो साल से कम के सब चालकों को पकड़ पकड़कर मरवा देना शुरू किया । फ़रिश्ते ने मरियम और उसके पति को आकर खबर दी और कहा कि तुम अपने बालक को लेकर मिस्र चले जाओ। वे दोनों चले गए। इस चीच हैरॉड ने लाखों बच्चे मरचा डाले। थोड़े दिनों में हैरॉड भी मर गया । फ़रिश्ते ने फिर मरियम को कर खवर दी कि हैरॉड सर गया. अब तुम अपने देश लौट । वे लौटे और इस चार उत्तर की तरफ एक दूसरे इलाके में ठहरे। इस कहानी को पढ़कर किसी भी हिन्दुस्तानी को कृष्ण और कंस का क़िस्सा याद या॑ जावेगा । कहा जाता है - हनुमान जी और कर्ण भी कुमारियों के ही पेट से पैदा हुए थे । ईश्वर से कुमारियों को गर्भ रह जाने की बात पुराने मिस्रवाले भी मानते थे। # इन क़िस्सों की वजह से ही यूरोप के बहुत से विद्वानों को इस बात का भी शक है कि ईसा नाम का कोई आदमी हुआ भी हैं या नहीं। लेकिन इस तरह के क़िस्से लगभग हर मज़हब के महापुरुषों के नाम के साथ उनके मरने के बाद जोड़े जाते रहे हैं। यह भी जाहिर है कि इन चारों कितावों के लिखने वालों या तयार करने वालों में से शायद कोई भी अपने ज़माने की राजकाजी दलवन्दी और हठधर्मी से ऊपर नहीं उठ सका । इन कितावों में जहां हज़रत ईसा के ऊँचे से ऊँचे खयाले इधर उधर मोतियों की तरह विखरे हुए हैं, वहां बहुत सी वातें ऐसी भी हैं जो इसलिये नहीं लिखी गईं कि महात्मा ईसा ने वैसा किया हो या कहा हो, वल्कि इस लिये कि लिखने वाले का छोटा दिल यह सुनना चाहता था या मानना चाहता था कि जैसा वह लिख रहा है वैसा ही हुआ होगा। कहीं कहीं तो प्रेम और हिंसा की मूर्ति हजरत ईसा में नकरत और हिंसा तक के भाव दिखा दिये गए हैं। क़ुदरती तौर पर एक दूसरे के खिलाफ़ वातें इन कितावों में मौजूद हैं। कम या ज्यादा यह वात दुनिया की बहुत सी पुरानी मजहवी किताबों में पाई जाती है। लेकिन इन सब बातों के होते हुए भी ये चारों किताबें * Herodotus III, 28 etc. दुनिया की ऊँची से ऊँची किताबों में से हैं। थोड़े से ध्यान और समझ के साथ देखने पर हज़रत ईसा के कामों और ख्यालों का इनसे खासा पता चल सकता है । वीच वीच में आदमी के दिल की बड़ी से बड़ी गहराइयों से निकले हुए वह अनमोल जवाहरात मौजूद हैं जिनसे दुनिया की करोड़ों को शान्ति और रोशनी मिली है और जिनकी दमक हज़ारों साल बीत जाने पर भी फीकी नहीं पड़ी और न पड़ सकती है जब तक कि आदमी इस जमीन पर और आखिरी मकसद को पूरा न कर ले। इञ्जील कहती है -- "जिस लिंसको जो तालीम मिली है वह उसी पर कायम रहे । हरेक का दिल जो मानता है वह उसी पर जमा रहे । जिन्होंने तुम्हें धर्म का रास्ता बताया है उन्हें याद रखो• • • जितनी ( बड़ी बड़ी ) धार्मिक या मज़हबी कितावें दुनिया में है सब ईश्वर अल्लाह से है । सच में फ़ायदा उठा सकता है । तालीम ले सकता है, बुराई से बच सकता है, अपने को सुधार सकता है, अपने इखलाक सदाचार को ऊँचा ले जा सकता है । इनमें से किसी भी किताब से ईश्वरह का बन सकता है और सब तरह के नेक काम करने के योग्य काबिल बन सकता है । * * इञ्जील, Timothy, 3. 16-17.
हज़रत ईसा ने कभी कोई चीज़ नहीं लिखी) उनकी ज़िन्दगी और उनके उपदेशों का पता बहुत करके इंजील की पहली चार किताबों या पहले चार अध्यायों से चलता है, जो 'चार गॉस्पलों' के नाम से मशहूर हैं । गॉस्पल शब्द के माइने खुशखबरी है। ये चारों किताबें जिन लेखकों के नाम से मशहूर हैं वे चारों हज़रत ईसा के समय में मौजूद थे। पर ये कितावें ईसा के सौ सवा सौ साल बाद पहले के कुछ फुटकर लेखों और हिदायतों के सहारे घटा बढ़ाकर लिखी गईं, और उसके बाद भी ईसा की दूसरी सदी के प्रखर तक इनमें हेर फेर होता रहा । इनमें से हर किताब में ईसा के जन्म से लेकर तक का हाल लिखा है। चारों में बहुत सा हिस्सा हज़रत ईसा के ऐसे ऐसे चमत्कारों या मौजजों का है जैसे पानी के घड़ों को छूकर शराब बना देना, सात रोटियों को हाथ लगा कर इतनी कर देना जिसमें पाँच हजार पेट खालें और फिर बारह टोकरे बच रहें, जन्म के थूक या मिट्टी लगाकर उसे समाका कर देना, चार दिन के गड़े हुए मुर्देको निकालकर फिर से जिंदा कर देना या पानी पर खड़े होकर चलना । ये हजरत ईसा के 'चमत्कार' वताए जाते हैं। औौर इंजील ही में यह भी लिखा है कि हजरत ईसा ने किसी तरह के भी चमत्कार कर सकने से साफ इनकार किया था* और इस तरह के चमत्कार दिखाने वालों को बुरा कहा था । इनमें से बहुत से चमत्कार वीमारों को छूकर या देखकर अच्छा कर देने के हैं। अगर इनमें कोई सच्चाई है तो हो सकता है हज़रत ईसा के छू देने से या उनकी निगाह से ही बहुत सों को शान्ति मिलती हो, और लोगों की श्रद्धा बहुत से रोगों को भी अच्छा कर देती हो । इन चार किताबों की इस तरह की बहुत सी बातें दुनिया के दूसरे धर्मों की किताबों और दूसरे महात्माओं की जीवनियों से इतनी मिलती जुलती हैं कि उन्हीं से ली गईं मालूम होती हैं । हज़रत ईसा से पहले की और उनके पास की सदियों में इस तरह की बहुत सी हिन्दुस्तानी और चीनी कहानियां खास कर श्री कृष्ण और महात्मा बुद्ध के जीवन की इस तरह की कहानियाँ तरह तरह की शक्लों में, धार्मिक कथाओं, करजी लोगों की जीवनियों या नाविलों की शक्लों में, ईरान, इराक़ और पच्छिम एशिया की बहुत सी जवानों में लिखी जा रही थीं और ख़ूब फैल रही थीं। इनमें से कुछ किताबें हाल में ईरानी * Mark VIII, बारह etc. ↑ Math. VIII, बाईस-तेईस. और इवरानी जैसी जवानों से जर्मन में और जर्मन से अंगरेजी में तरजुमा हुई हैं। जाहिर है इंजील के तय्यार करने वालों को इन कहानियों से बड़ी मदद मिली। इसकी एक मिसाल हज़रत ईसा के जन्म की कहानी है । वह यह है - मरियम की शादी हो । चुकी थी। फिर भी बिना पति के ही उन्हें गर्भ रह गया । उनका पति इस शक पर उन्हें तलाक़ देने को तय्यार हो गया । एक करिश्ते ने उसे बताया कि तेरी औरत सच्ची है, उसे गर्भ ईश्वर से है । पति की तसल्ली हो गई । जव वालक पैदा हुआ तो जमीन दोनों पर कई अनहोनी चातें हुई। उस देश का रोमी हाकिम हैरॉड बड़ा ज़ालिम था । पूरब से ज्योतिपियों और महात्माओं ने आकर उसे बताया कि इस देश में एक ऐसा बालक पैदा हो गया है जो यहूदियों का मसीहा और चादशाह होगा और जो तुम्हारे राज को ख़त्म करेगा। इस पर हैरॉड ने दो साल के और दो साल से कम के सब चालकों को पकड़ पकड़कर मरवा देना शुरू किया । फ़रिश्ते ने मरियम और उसके पति को आकर खबर दी और कहा कि तुम अपने बालक को लेकर मिस्र चले जाओ। वे दोनों चले गए। इस चीच हैरॉड ने लाखों बच्चे मरचा डाले। थोड़े दिनों में हैरॉड भी मर गया । फ़रिश्ते ने फिर मरियम को कर खवर दी कि हैरॉड सर गया. अब तुम अपने देश लौट । वे लौटे और इस चार उत्तर की तरफ एक दूसरे इलाके में ठहरे। इस कहानी को पढ़कर किसी भी हिन्दुस्तानी को कृष्ण और कंस का क़िस्सा याद या॑ जावेगा । कहा जाता है - हनुमान जी और कर्ण भी कुमारियों के ही पेट से पैदा हुए थे । ईश्वर से कुमारियों को गर्भ रह जाने की बात पुराने मिस्रवाले भी मानते थे। # इन क़िस्सों की वजह से ही यूरोप के बहुत से विद्वानों को इस बात का भी शक है कि ईसा नाम का कोई आदमी हुआ भी हैं या नहीं। लेकिन इस तरह के क़िस्से लगभग हर मज़हब के महापुरुषों के नाम के साथ उनके मरने के बाद जोड़े जाते रहे हैं। यह भी जाहिर है कि इन चारों कितावों के लिखने वालों या तयार करने वालों में से शायद कोई भी अपने ज़माने की राजकाजी दलवन्दी और हठधर्मी से ऊपर नहीं उठ सका । इन कितावों में जहां हज़रत ईसा के ऊँचे से ऊँचे खयाले इधर उधर मोतियों की तरह विखरे हुए हैं, वहां बहुत सी वातें ऐसी भी हैं जो इसलिये नहीं लिखी गईं कि महात्मा ईसा ने वैसा किया हो या कहा हो, वल्कि इस लिये कि लिखने वाले का छोटा दिल यह सुनना चाहता था या मानना चाहता था कि जैसा वह लिख रहा है वैसा ही हुआ होगा। कहीं कहीं तो प्रेम और हिंसा की मूर्ति हजरत ईसा में नकरत और हिंसा तक के भाव दिखा दिये गए हैं। क़ुदरती तौर पर एक दूसरे के खिलाफ़ वातें इन कितावों में मौजूद हैं। कम या ज्यादा यह वात दुनिया की बहुत सी पुरानी मजहवी किताबों में पाई जाती है। लेकिन इन सब बातों के होते हुए भी ये चारों किताबें * Herodotus III, अट्ठाईस etc. दुनिया की ऊँची से ऊँची किताबों में से हैं। थोड़े से ध्यान और समझ के साथ देखने पर हज़रत ईसा के कामों और ख्यालों का इनसे खासा पता चल सकता है । वीच वीच में आदमी के दिल की बड़ी से बड़ी गहराइयों से निकले हुए वह अनमोल जवाहरात मौजूद हैं जिनसे दुनिया की करोड़ों को शान्ति और रोशनी मिली है और जिनकी दमक हज़ारों साल बीत जाने पर भी फीकी नहीं पड़ी और न पड़ सकती है जब तक कि आदमी इस जमीन पर और आखिरी मकसद को पूरा न कर ले। इञ्जील कहती है -- "जिस लिंसको जो तालीम मिली है वह उसी पर कायम रहे । हरेक का दिल जो मानता है वह उसी पर जमा रहे । जिन्होंने तुम्हें धर्म का रास्ता बताया है उन्हें याद रखो• • • जितनी धार्मिक या मज़हबी कितावें दुनिया में है सब ईश्वर अल्लाह से है । सच में फ़ायदा उठा सकता है । तालीम ले सकता है, बुराई से बच सकता है, अपने को सुधार सकता है, अपने इखलाक सदाचार को ऊँचा ले जा सकता है । इनमें से किसी भी किताब से ईश्वरह का बन सकता है और सब तरह के नेक काम करने के योग्य काबिल बन सकता है । * * इञ्जील, Timothy, तीन. सोलह-सत्रह.
भाजपा की राज्य सरकार को अंततः दूध उत्पादकों की माँगों के सामने झुकना पड़ा है। सरकार की 25 रूपये प्रति लीटर दूध की घोषणा के बाद दूध उत्पादकों ने 4 दिन से चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया है। दूध में हुई प्रति लीटर 5 रू की वृद्धि 21 जुलाई से राज्य में प्रभावी होगी। इससे पहले सरकार ने तक़रीबन छह महीने पहले दूध उत्पादकों को प्रति लीटर 27 रूपये देने का वायदा किया था। सरकार के न्यूनतम 27 रू का वायदा करने के बाद किसान संगठनों और दूध उत्पादकों ने सरकार को कई बार आवेदन लिखा कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए लेकिन सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। सरकार को अपने वायदे से मुकरता देख दूध उत्पादकों ने पूरे राज्य में दूध आंदोलन करने का निर्णय लिया था जो सोमवार से शुरू हुआ था। आंदोलन के बाद किसानों ने सड़कों पर दूध की नदियाँ बहा दी थी। किसी ने दूध बहाकर तो किसी ने दूध से खूद या अपने मवेशी को नहलाकर सरकार के प्रति अपनी नाराज़गी दिखाई थी। दूध के टैंकर को पूने, मुंम्बई और नागपूर जैसे बड़े शहरों में जाने से रोकने की वजह से शहर में दूध की किल्लत शुरू हो गई थी। दूध उत्पादकों और किसानों की नाराजगी को देखते हुए न केवल राज्य बल्कि केंद्र सरकार भी हरकत में आई। केंद्र सरकार की ओर से परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वित मंत्री पीयूष गोयल व कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बैठक बुला कर इस मसले का समाधान निकालने पर विचार किया। दूध के निर्यात शुल्क में कटौती, केंद्र की ओर से डेयरी उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए 10 प्रतिशत प्रोतसाहन राशी व रेलवे स्टेशनों पर दूध आउटलेट खोलने की घोषणा की थी। सोमवार को महाराष्ट्र के किसान रविवार रात से दूध आंदोलन की शुरूआत की थी। राज्य सरकार के द्वारा 27 रू प्रति लीटर दूध पर देने की घोषणा के बाद भी किसान 17-20 रू पर बेचने को मज़बूर थे। इसी वायदे को पूरा करने के लिए स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के बैनर तले किसानों और उनसे जुड़े हुए संगठनों ने राज्य में दूध आंदोलन करने की घोषणा की थी। अखिल भारतीय किसान सभा के साथ-साथ 13 किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था। किसानों का आरोप था कि राज्य में दूध से ज़्यादा दामों पर पानी की बिक्री होती है। उनका यह भी कहना था कि शहरों में दूध 40-45 रू पर बिकता है जबकि हम 17-20 पर बेचने को मज़बूर हैं। दूध आंदोलन के खत्म होने से पहले राज्य के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में यह ऐलान किया था कि आंदोलन में शामिल दूध उत्पादकों के उपर जो भी मुकदमें दर्ज हुए हैं सरकार उन्हें वापस ले लेगी। जिस देश में पानी 20 रू या उससे अधिक में मिलता हो वहाँ किसानों के लिए 25 रू प्रति लीटर तय कर देना किस हद तक सही है? जबकि यह बात किसी से छुपी नहीं है कि वही दूध पैकेट में बंद कर फूल क्रीम के रूप में बहुराष्ट्रीय कंपनी 50 रू से अधिक पर बेचती हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
भाजपा की राज्य सरकार को अंततः दूध उत्पादकों की माँगों के सामने झुकना पड़ा है। सरकार की पच्चीस रूपये प्रति लीटर दूध की घोषणा के बाद दूध उत्पादकों ने चार दिन से चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया है। दूध में हुई प्रति लीटर पाँच रू की वृद्धि इक्कीस जुलाई से राज्य में प्रभावी होगी। इससे पहले सरकार ने तक़रीबन छह महीने पहले दूध उत्पादकों को प्रति लीटर सत्ताईस रूपये देने का वायदा किया था। सरकार के न्यूनतम सत्ताईस रू का वायदा करने के बाद किसान संगठनों और दूध उत्पादकों ने सरकार को कई बार आवेदन लिखा कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए लेकिन सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। सरकार को अपने वायदे से मुकरता देख दूध उत्पादकों ने पूरे राज्य में दूध आंदोलन करने का निर्णय लिया था जो सोमवार से शुरू हुआ था। आंदोलन के बाद किसानों ने सड़कों पर दूध की नदियाँ बहा दी थी। किसी ने दूध बहाकर तो किसी ने दूध से खूद या अपने मवेशी को नहलाकर सरकार के प्रति अपनी नाराज़गी दिखाई थी। दूध के टैंकर को पूने, मुंम्बई और नागपूर जैसे बड़े शहरों में जाने से रोकने की वजह से शहर में दूध की किल्लत शुरू हो गई थी। दूध उत्पादकों और किसानों की नाराजगी को देखते हुए न केवल राज्य बल्कि केंद्र सरकार भी हरकत में आई। केंद्र सरकार की ओर से परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वित मंत्री पीयूष गोयल व कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बैठक बुला कर इस मसले का समाधान निकालने पर विचार किया। दूध के निर्यात शुल्क में कटौती, केंद्र की ओर से डेयरी उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए दस प्रतिशत प्रोतसाहन राशी व रेलवे स्टेशनों पर दूध आउटलेट खोलने की घोषणा की थी। सोमवार को महाराष्ट्र के किसान रविवार रात से दूध आंदोलन की शुरूआत की थी। राज्य सरकार के द्वारा सत्ताईस रू प्रति लीटर दूध पर देने की घोषणा के बाद भी किसान सत्रह-बीस रू पर बेचने को मज़बूर थे। इसी वायदे को पूरा करने के लिए स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के बैनर तले किसानों और उनसे जुड़े हुए संगठनों ने राज्य में दूध आंदोलन करने की घोषणा की थी। अखिल भारतीय किसान सभा के साथ-साथ तेरह किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था। किसानों का आरोप था कि राज्य में दूध से ज़्यादा दामों पर पानी की बिक्री होती है। उनका यह भी कहना था कि शहरों में दूध चालीस-पैंतालीस रू पर बिकता है जबकि हम सत्रह-बीस पर बेचने को मज़बूर हैं। दूध आंदोलन के खत्म होने से पहले राज्य के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में यह ऐलान किया था कि आंदोलन में शामिल दूध उत्पादकों के उपर जो भी मुकदमें दर्ज हुए हैं सरकार उन्हें वापस ले लेगी। जिस देश में पानी बीस रू या उससे अधिक में मिलता हो वहाँ किसानों के लिए पच्चीस रू प्रति लीटर तय कर देना किस हद तक सही है? जबकि यह बात किसी से छुपी नहीं है कि वही दूध पैकेट में बंद कर फूल क्रीम के रूप में बहुराष्ट्रीय कंपनी पचास रू से अधिक पर बेचती हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
राजू श्रीवास्तव कहें या 'गजोधर भैय्या'। अपनी चुटीली बातों और गुदगुदाने वाले अंदाज से सबको खिलखिलाने वाले भारत के बेस्ट कॉमिडियन में से एक राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं हैं। बुधवार को उनका निधन हो गया। दिल्ली के एम्स में राजू श्रीवास्तव ने आखिरी सांस ली। जिम में वर्कआउट के दौरान 10 अगस्त को उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद से वह एम्स में भर्ती थे और जिंदगी से जंग लड़ रहे थे। बीच में कई बार उनकी सेहत में सुधार की खबरें आईं, लेकिन आखिरकार वह हम सबको छोड़कर चले गए हैं। राजू के निधन की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। भारत में ट्विटर पर RIP Legend ट्रेडिंग है। राजू श्रीवास्तव की फोटोज शेयर करके फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें याद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में राजू के कॉमेडी वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा वीडियो मशहूर कॉमेडी शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' से जुड़े हैं। साल 2005 में आए इसी टीवी शो से राजू को देश और दुनिया में पहचान मिली थी। इसी शो से वह गजोधर भैय्या के नाम से भी मशहूर हुए थे। राजू के फैंस उनके पुराने वीडियो शेयर कर उन्हें याद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में फैंस उनके स्टेज शोज से जुड़े वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। राजू जब भी किसी स्टेज परफॉर्मेंस का हिस्सा बनते थे, तो वह दर्शकों को हंसाने में कोई कमी नहीं छोड़ते थे। उनका व्यक्तित्व सामान्य था। स्टेज पर उनका आना लोगों को सुकून देता था। अपनी कुछ मिनटों की प्रस्तुति में ही वह लोगों को गुदगुदाने लगते थे। सोशल मीडिया पर यूजर्स मनोरंजन की दुनिया में राजू श्रीवास्तव के संघर्ष को भी याद कर रहे हैं। राजू ने अपनी पहचान बनाने के लिए काफी संघर्ष किया। वह फिल्म तेजाब में भी नजर आए थे। फिल्मों में एक कॉमिडियन के रूप में छाना उनकी ख्वाहिश थी, लेकिन कोई गॉडफादर नहीं होने से मुकाम पाने में कई साल लग गए। द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज शो ने कई लोगों को स्टार बनाया। राजू भी उन्हीं में से एक थे। इसके बाद उन्हें फिल्में और टीवी शोज मिलते रहे। स्टैंडअप कॉमेडी की दुनिया में राजू ने अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि ट्विटर समेत बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आज और अभी सिर्फ राजू की ही चर्चा है। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
राजू श्रीवास्तव कहें या 'गजोधर भैय्या'। अपनी चुटीली बातों और गुदगुदाने वाले अंदाज से सबको खिलखिलाने वाले भारत के बेस्ट कॉमिडियन में से एक राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं हैं। बुधवार को उनका निधन हो गया। दिल्ली के एम्स में राजू श्रीवास्तव ने आखिरी सांस ली। जिम में वर्कआउट के दौरान दस अगस्त को उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद से वह एम्स में भर्ती थे और जिंदगी से जंग लड़ रहे थे। बीच में कई बार उनकी सेहत में सुधार की खबरें आईं, लेकिन आखिरकार वह हम सबको छोड़कर चले गए हैं। राजू के निधन की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। भारत में ट्विटर पर RIP Legend ट्रेडिंग है। राजू श्रीवास्तव की फोटोज शेयर करके फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें याद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में राजू के कॉमेडी वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा वीडियो मशहूर कॉमेडी शो 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' से जुड़े हैं। साल दो हज़ार पाँच में आए इसी टीवी शो से राजू को देश और दुनिया में पहचान मिली थी। इसी शो से वह गजोधर भैय्या के नाम से भी मशहूर हुए थे। राजू के फैंस उनके पुराने वीडियो शेयर कर उन्हें याद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में फैंस उनके स्टेज शोज से जुड़े वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। राजू जब भी किसी स्टेज परफॉर्मेंस का हिस्सा बनते थे, तो वह दर्शकों को हंसाने में कोई कमी नहीं छोड़ते थे। उनका व्यक्तित्व सामान्य था। स्टेज पर उनका आना लोगों को सुकून देता था। अपनी कुछ मिनटों की प्रस्तुति में ही वह लोगों को गुदगुदाने लगते थे। सोशल मीडिया पर यूजर्स मनोरंजन की दुनिया में राजू श्रीवास्तव के संघर्ष को भी याद कर रहे हैं। राजू ने अपनी पहचान बनाने के लिए काफी संघर्ष किया। वह फिल्म तेजाब में भी नजर आए थे। फिल्मों में एक कॉमिडियन के रूप में छाना उनकी ख्वाहिश थी, लेकिन कोई गॉडफादर नहीं होने से मुकाम पाने में कई साल लग गए। द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज शो ने कई लोगों को स्टार बनाया। राजू भी उन्हीं में से एक थे। इसके बाद उन्हें फिल्में और टीवी शोज मिलते रहे। स्टैंडअप कॉमेडी की दुनिया में राजू ने अपनी अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि ट्विटर समेत बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आज और अभी सिर्फ राजू की ही चर्चा है। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स तीन सौ साठ एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
रामलला के वकील ने पांचों जजों के सामने पाञ्चजन्य के एक रिपोर्टर की एक रिपोर्ट को पढ़ा, उसके बाद कहा कि 6 दिसंबर 1992 में जब बाबरी का ढांचा गिराया गया था तो स्लैब वहां से गिर रही थी जिसमें संस्कृत भाषा में कुछ लिखा था। इन स्लैबों को पुलिस ने जब्त कर लिया था। रामलला के वकील के इस दावे पर जस्टिस बोबड़े ने उनसे पूछा कि वो स्लैब कहां से मिले थे? इसके तुरंत बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी स्लैब को लेकर पूछा कि क्या इस शिलालेख को कोई अभी तक चैलेंज किया है? इसपर सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि शिलालेख की प्रमाणिकता को चैलेंज नहीं किया जा सकता। बल्कि सवाल तो इसपर उठाया गया है कि स्लैब वहां से मिला भी है या नहीं। इसके बाद रामलला के वकील ने 1950 में खीची तस्वीरों को अदालत के सामने पेश किया। रामलला के वकील द्वारा पेश की जा रही दलीलों पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या ये सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था, इसपर रामलला के वकील ने कहा कि ASI काफी बाद में आई। उन्होने कहा कि मस्जिद को बनाने के लिए मंदिर तोड़ा गया था। ASI रिपोर्ट को लेकर बोलते हुए वैद्यनाथन ने कहा मगरमच्छ, कछुऔं का भी जिक्र किया और इनका मुसलमान कल्चर से मतलब नहीं था। रामलला के वकील वैद्यनाथन ने पुराने इतिहास की बात करते हुए कहा कि 1114 से लेकर 1155 तक साकेत मंडल का राजा गोविंदचंद्र था। अयोध्या इनकी राजधानी हुआ करती थी। रामलला के वकील ने बताया कि यहां भगवान विष्णु हरि का बड़ा मंदिर था जिसका उल्लेख पुरातत्वविदों ने भी व्यापक जानकारी इकट्ठा करते हुए इसकी पुष्टी की थी। सी. एस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वकील जमीन के नीचे किसी तरह के अवशेष की बात से सीधा इंकार किया। लेकिन बाद में उन्होने का कहा कि जमीन के नीचे जो ढांचा मिला है वह इस्लामिक ढांचा है। वहीं रामलला के वकील ने कहा कि पुरातत्व की रिपोर्ट के मुताबिक विवादित जमीन के नीचे मंदिर था, पुरातत्व की इस रिपोर्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी सहमत था। अयोध्या विवाद को लेकर जारी सुनवाई में रामलला विराजमान के वकील सी. एस वैद्यानाथन ने अपना तर्क रखना शुरू किया। उन्होंने तर्क के साथ साथ अदालत में पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले थे उसे पांचों जजों के सामने रखा।
रामलला के वकील ने पांचों जजों के सामने पाञ्चजन्य के एक रिपोर्टर की एक रिपोर्ट को पढ़ा, उसके बाद कहा कि छः दिसंबर एक हज़ार नौ सौ बानवे में जब बाबरी का ढांचा गिराया गया था तो स्लैब वहां से गिर रही थी जिसमें संस्कृत भाषा में कुछ लिखा था। इन स्लैबों को पुलिस ने जब्त कर लिया था। रामलला के वकील के इस दावे पर जस्टिस बोबड़े ने उनसे पूछा कि वो स्लैब कहां से मिले थे? इसके तुरंत बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी स्लैब को लेकर पूछा कि क्या इस शिलालेख को कोई अभी तक चैलेंज किया है? इसपर सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि शिलालेख की प्रमाणिकता को चैलेंज नहीं किया जा सकता। बल्कि सवाल तो इसपर उठाया गया है कि स्लैब वहां से मिला भी है या नहीं। इसके बाद रामलला के वकील ने एक हज़ार नौ सौ पचास में खीची तस्वीरों को अदालत के सामने पेश किया। रामलला के वकील द्वारा पेश की जा रही दलीलों पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या ये सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था, इसपर रामलला के वकील ने कहा कि ASI काफी बाद में आई। उन्होने कहा कि मस्जिद को बनाने के लिए मंदिर तोड़ा गया था। ASI रिपोर्ट को लेकर बोलते हुए वैद्यनाथन ने कहा मगरमच्छ, कछुऔं का भी जिक्र किया और इनका मुसलमान कल्चर से मतलब नहीं था। रामलला के वकील वैद्यनाथन ने पुराने इतिहास की बात करते हुए कहा कि एक हज़ार एक सौ चौदह से लेकर एक हज़ार एक सौ पचपन तक साकेत मंडल का राजा गोविंदचंद्र था। अयोध्या इनकी राजधानी हुआ करती थी। रामलला के वकील ने बताया कि यहां भगवान विष्णु हरि का बड़ा मंदिर था जिसका उल्लेख पुरातत्वविदों ने भी व्यापक जानकारी इकट्ठा करते हुए इसकी पुष्टी की थी। सी. एस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वकील जमीन के नीचे किसी तरह के अवशेष की बात से सीधा इंकार किया। लेकिन बाद में उन्होने का कहा कि जमीन के नीचे जो ढांचा मिला है वह इस्लामिक ढांचा है। वहीं रामलला के वकील ने कहा कि पुरातत्व की रिपोर्ट के मुताबिक विवादित जमीन के नीचे मंदिर था, पुरातत्व की इस रिपोर्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी सहमत था। अयोध्या विवाद को लेकर जारी सुनवाई में रामलला विराजमान के वकील सी. एस वैद्यानाथन ने अपना तर्क रखना शुरू किया। उन्होंने तर्क के साथ साथ अदालत में पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले थे उसे पांचों जजों के सामने रखा।
बोर्ड ने स्कूलों को 2 जनवरी से 14 फरवरी 2023 के बीच छात्रों के ग्रेड और नंबर्स को अपलोड करने का निर्देश जारी किया है। दसवीं कक्षा के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन कोई परीक्षक नियुक्त नहीं करेगा। एजुकेशन डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के लिए व्यावहारिक परीक्षा यानी प्रायोगिक परीक्षा की तारीखों का ऐलान कर दिया है। प्रायोगिक परीक्षा 1 जनवरी 2023 से शुरू होगी और यह 14 जनवरी 2023 को खत्म होगी। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा का डिटेल प्रोग्राम सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट www. cbse. gov. in पर उपलब्ध है। इसके अलावा, बोर्ड ने स्कूलों को 2 जनवरी से 14 फरवरी 2023 के बीच छात्रों के ग्रेड और नंबर्स को अपलोड करने का निर्देश जारी किया है। दसवीं कक्षा के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन कोई परीक्षक नियुक्त नहीं करेगा। बोर्ड के अनुसार, कोई छात्र 2022-23 सेशन की प्रायोगिक परीक्षा के लिए अनुपस्थित रहता है, तो ऑनलाइन सिस्टम में उसे अनुपस्थित मार्क किया जाएगा। हालांकि, अगर किसी वजह से परीक्षा के दिन छात्र की अनुपस्थिति के कारण प्रायोगिक परीक्षा अलग समय पर आयोजित की जानी है, तो उन्हें अनुपस्थित की जगह फिर से निर्धारित के तौर पर मार्क किया जाएगा। केवल उन्हीं छात्रों को स्कूल में ले जाने की अनुमति दी जाएगी, जिनकी प्रायोगिक परीक्षा ऊपर सूचीबद्ध समय के दौरान पुनर्निधारित के तौर पर मार्क की गई है। यही नहीं, सभी प्रायोगिक परीक्षाओं, प्रोजेक्ट, आतंरिक मूल्यांकन के नंबर एक साथ अपलोड किए जाएंगे। यह परीक्षा या मूल्यांकन के आयोजन की तारीख से शुरू माना जाएगा। बोर्ड की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, नंबर की अपलोडिंग संबंधित कक्षा की होने वाली परीक्षा की अंतिम तारीख तक पूरी हो जाएगी। बोर्ड द्वारा तारीखों के विस्तार पर विचार नहीं किया जाएगा। बता दें कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अभी तक 10वीं और 12वीं की थ्योरी परीक्षा डेटशीट या टाइम टेबल जारी नहीं की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2023 की डेटशीट या टाइम टेबल अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ही जारी करेगी। डेटशीट या टाइम टेबल एक बार जारी होने के बाद रजिस्टर्ड छात्र आधिकारिक वेबसाइट cbse. gov. in पर इसे देख सकते हैं। वहीं, छात्र और अभिभावक डेटशीट को वेबसाइट से कुछ आसान स्टेप्स फॉलो कर डाउनलोड कर सकते हैं।
बोर्ड ने स्कूलों को दो जनवरी से चौदह फरवरी दो हज़ार तेईस के बीच छात्रों के ग्रेड और नंबर्स को अपलोड करने का निर्देश जारी किया है। दसवीं कक्षा के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन कोई परीक्षक नियुक्त नहीं करेगा। एजुकेशन डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन ने शैक्षणिक सत्र दो हज़ार बाईस-दो हज़ार तेईस के लिए व्यावहारिक परीक्षा यानी प्रायोगिक परीक्षा की तारीखों का ऐलान कर दिया है। प्रायोगिक परीक्षा एक जनवरी दो हज़ार तेईस से शुरू होगी और यह चौदह जनवरी दो हज़ार तेईस को खत्म होगी। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा का डिटेल प्रोग्राम सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट www. cbse. gov. in पर उपलब्ध है। इसके अलावा, बोर्ड ने स्कूलों को दो जनवरी से चौदह फरवरी दो हज़ार तेईस के बीच छात्रों के ग्रेड और नंबर्स को अपलोड करने का निर्देश जारी किया है। दसवीं कक्षा के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन कोई परीक्षक नियुक्त नहीं करेगा। बोर्ड के अनुसार, कोई छात्र दो हज़ार बाईस-तेईस सेशन की प्रायोगिक परीक्षा के लिए अनुपस्थित रहता है, तो ऑनलाइन सिस्टम में उसे अनुपस्थित मार्क किया जाएगा। हालांकि, अगर किसी वजह से परीक्षा के दिन छात्र की अनुपस्थिति के कारण प्रायोगिक परीक्षा अलग समय पर आयोजित की जानी है, तो उन्हें अनुपस्थित की जगह फिर से निर्धारित के तौर पर मार्क किया जाएगा। केवल उन्हीं छात्रों को स्कूल में ले जाने की अनुमति दी जाएगी, जिनकी प्रायोगिक परीक्षा ऊपर सूचीबद्ध समय के दौरान पुनर्निधारित के तौर पर मार्क की गई है। यही नहीं, सभी प्रायोगिक परीक्षाओं, प्रोजेक्ट, आतंरिक मूल्यांकन के नंबर एक साथ अपलोड किए जाएंगे। यह परीक्षा या मूल्यांकन के आयोजन की तारीख से शुरू माना जाएगा। बोर्ड की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, नंबर की अपलोडिंग संबंधित कक्षा की होने वाली परीक्षा की अंतिम तारीख तक पूरी हो जाएगी। बोर्ड द्वारा तारीखों के विस्तार पर विचार नहीं किया जाएगा। बता दें कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अभी तक दसवीं और बारहवीं की थ्योरी परीक्षा डेटशीट या टाइम टेबल जारी नहीं की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई कक्षा दसवीं और कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा दो हज़ार तेईस की डेटशीट या टाइम टेबल अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ही जारी करेगी। डेटशीट या टाइम टेबल एक बार जारी होने के बाद रजिस्टर्ड छात्र आधिकारिक वेबसाइट cbse. gov. in पर इसे देख सकते हैं। वहीं, छात्र और अभिभावक डेटशीट को वेबसाइट से कुछ आसान स्टेप्स फॉलो कर डाउनलोड कर सकते हैं।
नियमोंका पालन करता है; जिसमें सत्य, दान, द्रोह न करना, सबके प्रति कोमल भाव रखना, लज्जा, दया और तप आदि सद्गुण देखे जाते हों, वह ब्राह्मण कहा गया है । जो युद्ध आदि कर्म करता और वेदोंके अध्ययनमें लगा रहता है, ब्राह्मणोंको दान देता और प्रजासे कर लेकर उसकी रक्षा करता है, उसको क्षत्रिय कहते हैं। इसी प्रकार जो वेदाध्ययनसे सम्पन्न होकर व्यापार, पशु-पालन और खेतीके काम करता है तथा दान देता और पवित्र रहता है, वह वैश्य कहलाता है। किंतु जो वेद और सदाचारका परित्याग करके सब कुछ खाता और सब तरहके काम करता है तथा सदा अपवित्र रहा करता है, वह शूद्र माना गया है । यदि ये ब्राह्मणोचित सत्यादि गुण शूद्र में दिखायी दें और ब्राह्मणमें न हों तो वह शूद्र शूद्र नहीं और वह ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं है । हरएक उपायसे लोभ और क्रोधको दबाना ही पवित्र ज्ञान और आत्मसंयम है । क्रोध तथा लोभ मनुष्यके कल्याणमें सदा ही बाधा पहुँचानेको उद्यत रहते हैं; अतः पूरी शक्ति लगाकर उनका दमन करना चाहिये । क्रोधसे सत्यकी महिमा, असत्यके दोष, दान भृगुजी कहते हैं - -मुने ! सत्य ही ब्रह्म है, सत्य ही तप है, सत्य ही प्रजाकी सृष्टि करता है, सत्यके हो आधारपर संसार टिका हुआ है और सत्यसे ही मनुष्य स्वर्ग प्राप्त करता है। असत्य अन्धकारका रूप है, वह नीचे गिराता है । अज्ञानान्धकारसे घिरे हुए मनुष्य ज्ञानका प्रकाश नहीं देख पाते । जो सत्य है वही धर्म है, जो धर्म है वही प्रकाश ( ज्ञान ) है और जो प्रकाश है वही सुख है । इसी प्रकार जो असत्य है वही अधर्म है, जो अधर्म है वही अन्धकार (अज्ञान) है और जो अन्धकार है वही दुःख है । संसारकी सृष्टि शारीरिक और मानसिक दुःखोंसे भरी हुई है, इसमें सुख भी वे ही हैं, जो परिणाममें दुःख देनेवाले हैं। यह जानकर विद्वान् पुरुष कभी मोहमें नहीं पड़ते । प्रत्येक बुद्धिमान्का यह कर्तव्य है कि वह दुःखोंसे छुटकारा पानेका उद्योग करे । असत्यसे तम ( अज्ञान ) की उत्पत्ति हुई है, तमोग्रस्त मनुष्य अधर्मके ही पीछे चलते हैं, धर्मका अनुसरण नहीं करते; अतः जो क्रोध, लोभ, हिंसा और असत्य आदिसे आच्छादित हैं, वे न तो इस लोकमें सुखी होते हैं और न परलोकमें ही सुख उठाते हैं। नाना प्रकारके रोग, व्याधि और तापसे संतप्त होते रहते हैं, वध और बन्धन आदिके क्लेश सहते हैं तथा भूख-प्यास और परिश्रमके कारण भी श्रीको, मात्सर्यसे तपको, मान-अपमानसे विद्याको और प्रमादसे अपनेको बचावे । जिसके सभी कार्य कामनाओंके बन्धनसे रहित होते हैं तथा जिसने त्यागकी आगमें सब कुछ होम दिया है, वही त्यागी और बुद्धिमान् है । किसी भी प्राणीकी हिंसा न करे, सबके साथ मैत्रीपूर्ण बर्ताव करे, स्त्रीपुत्र आदिकी ममता एवं आसक्तिको त्याग कर बुद्धिके द्वारा इन्द्रियोंको वशमें करे और उस स्थितिको प्राप्त करे, जो इहलोक और परलोकमें भी निर्भय तथा शोकरहित है । नित्य तप करे, मननशील होकर मन और इन्द्रियोंका संयम करे, आसक्तिके आश्रयभूत देह-गेह आदिमें आसक्त न होकर परमात्माको प्राप्त करनेकी इच्छा रक्खे । मनको प्राणमें और प्राणको ब्रह्ममें स्थापित करे । वैराग्यसे ही निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त होता है, उसे पाकर किसी अनात्मपदार्थका चिन्तन नहीं होता । ब्राह्मण संसारसे परवैराग्य होनेपर परब्रह्म परमात्माको अनायास ही प्राप्त कर लेता है । सर्वदा शौच और सदाचारका पालन करना तथा सम्पूर्ण प्राणियोंपर दया रखना - - यह ब्राह्मणका लक्षण है। आदिके फल और आश्रमधर्मोका वर्णन कष्ट भोगते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आँधी, पानी, सर्दी और गर्मीसे उत्पन्न हुए भय तथा शारीरिक कष्ट भी झेलने पड़ते हैं । बन्धु-बान्धवोंकी मृत्यु, धनके नाश और प्रेमीजनोंके बिछोहके कारण होनेवाले मानसिक शोकका भी शिकार होना पड़ता है। इसी प्रकार वे जरा और मृत्युके कारण भी बहुतसे दूसरे दूसरे क्लेश भोगते रहते हैं । भरद्वाजने पूछा--मुनिवर ! दान, धर्म, तप, स्वाध्याय और अग्निहोत्रका क्या फल है ? भृगुजीने कहा -- अग्निहोत्वसे पाप नष्ट होता है, स्वाध्यायसे उत्तम शान्ति मिलती है, दानसे भोगोंकी और तपसे स्वर्गकी प्राप्ति होती है । भरद्वाजने पूछा-ब्रह्माजीने जो चार आश्रम बनाये हैं, उनके अपने-अपने धर्म क्या हैं ? यह बताने की कृपा कीजिये । भृगुजीने कहा -- जगत्का कल्याण करनेवाले भगवान् ब्रह्माजीने धर्मकी रक्षाके लिये पूर्वकालमें हो चार आश्रमोंका उपदेश किया था। उनमें से ब्रह्मचर्यको पहला आश्रम कहते हैं, जिसमें शिष्यको गुरुके यहाँ रहकर वेदोंका स्वाध्याय करना पड़ता है। इसमें रहनेवाले ब्रह्मचारीको बाहरभीतरकी शुद्धि, वैदिक संस्कार तथा व्रत और नियमोंके पालनसे अपने मनको वशमें रखना चाहिये। सुबह और शाम - - दोनों समय संध्या, सूर्योपस्थान तथा अग्निहोत्रके द्वारा अग्निदेवकी उपासना करनी चाहिये । तन्द्रा और आलस्यको त्याग करके प्रतिदिन गुरुको प्रणाम करे, वेदोंका अध्ययन तथा उसके अर्थका अभ्यास करता रहे । इस प्रकारकी दिनचर्यासे अपने अन्तःकरणको पवित्र बनावे । सबेरे, शाम और दोपहर -- तीनों वक्त स्नान करे । ब्रह्मचर्यका पालन तथा अग्नि और गुरुकी सेवा करे, प्रतिदिन भिक्षा माँगकर लावे और वह सब गुरुको अर्पण कर दे । अपनी अन्तरात्माको भी गुरुके चरणोंमें निछावर किये रहे । गुरुजी जो कुछ कहें, जिसके लिये संकेत करें और जिस कार्यके निमित्त स्पष्ट आज्ञा दें, उसके विपरीत आचरण न करे । इस प्रकार गुरुको प्रसन्न करके उनकी कृपासे स्वाध्यायका अवसर मिलनेपर वेदाध्ययनमें प्रवृत्त होना चाहिये । इस विषय में एक श्लोक है (जिसका भाव इस प्रकार है-- ) 'जो द्विज गुरुकी आराधना करके वेदोंका ज्ञान प्राप्त करता है, उसे अन्तमें स्वर्गकी प्राप्ति होती है और उसका मानसिक संकल्प सिद्ध होता है।' सत्यकी महिमा, असत्यके दोष, दान आदिके फल और आश्रमधर्मोका वर्णन 'गार्हस्थ्य' को दूसरा आश्रम बतलाया जाता है । अब हम उसके द्वारा पालन करने योग्य आचरणोंकी व्याख्या करते हैं। जब सदाचारका पालन करनेवाला ब्रह्मचारी विद्या पढ़कर गुरुकुलमें रहनेकी अवधि पूरी कर ले और समावर्तन संस्कारके पश्चात् स्नातक हो जाय, उस समय यदि उसे पत्नीके साथ रहकर धर्मका आचरण करने तथा पुत्रादिरूप फल पानेकी इच्छा हो तो उसके लिये गृहस्थाश्रममें प्रवेशका विधान है; क्योंकि इसमें धर्म, अर्थ और काम तीनोंकी प्राप्ति होती है। इसलिये त्रिवर्ग-साधनकी इच्छासे गृहस्थको उत्तम कर्मके द्वारा धन-संग्रह करना चाहिये और उसीके द्वारा अपनी गृहस्थोका निर्वाह करना चाहिये । गृहस्थआश्रम सभी आश्रमोंका मूल कहलाता है । गुरुकुलमें वास करनेवाले ब्रह्मचारी, वनमें रहकर संकल्पके अनुसार व्रत, नियम तथा धर्मोंका पालन करनेवाले वानप्रस्थी और सब कुछ त्यागकर विचरनेवाले संन्यासीको भी गृहस्थाश्रमसे ही भिक्षा आदिकी प्राप्ति होती है । तात्पर्य यह कि अन्य सब आश्रमवालोंका निर्वाह गृहस्थाश्रमसे ही होता है । गृहस्थद्वारा किये जानेवाले अतिथि-सत्कारके विषयमें एक श्लोक है (जिसका भावार्थ इस प्रकार है -- ) 'जिस गृहस्थके दरवाजेसे कोई अतिथि भिक्षा न पानेके कारण निराश होकर लौट जाता है, वह उस गृहस्थको तो अपना पाप दे डालता है और स्वयं उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।' इसके सिवा, गृहस्थाश्रममें रहकर यज्ञ करनेसे देवता, श्राद्ध करनेसे पितर, शास्त्रोंके श्रवण, अभ्यास और धारणसे ऋषि तथा संतान उत्पन्न करनेसे प्रजापति प्रसन्न होते हैं । गृहस्थके कर्तव्यके विषयमें दो श्लोक और हैं, ( जिनका सारांश इस प्रकार है--) 'वाणी ऐसी बोलनी चाहिये, जिसमें सब प्राणियोंके प्रति स्नेह भरा हो तथा जो सुनते समय कानोंको मीठी लगे । दूसरोंको पीड़ा देना, मारना या कटुवचन सुनाना अच्छा नहीं है। किसीका अपमान करना, अहंकार रखना और ढोंग दिखाना - इन बातोंकी कड़ी निन्दा की गयी है । किसी भी जीवकी हिंसा न करना, सत्य बोलना और मनमें क्रोध न होने देना -- ये सभी आश्रमवालोंके लिये उपयोगी तप हैं। जिस पुरुषको गृहस्थाश्रममें सदा धर्म, अर्थ और कामके गुणोंकी सिद्धि होती रहती है, वह इस लोकमें सुखका अनुभव करके अन्तमें शिष्ट पुरुषोंकी गतिको प्राप्त करता है ।' तीसरा आश्रम है वानप्रस्थ । इसमें रहनेवाले मनुष्य धर्मका अनुसरण और तपका अनुष्ठान करते हुए पवित्र तीर्थोंमें, नदियोंके किनारे, झरनोंके आस-पास तथा मृग, भैंसे, सूअर, बनैले हाथी और सिंह-व्याघ्र आदि जन्तुओंसे भरे हुए एकान्त वनोंमें विचरते रहते हैं। गृहस्थोंके उपयोगमें आने योग्य सुन्दर वस्त्र, स्वादिष्ठ भोजन और विषय - भोगोंका परित्याग करके वे जंगली औषध, फल, मूल तथा पत्तोंका आहार करते हैं, वह भी बहुत थोड़ी मात्रामें और नियमानुकूल एक ही बार खाकर रहते हैं। नियत स्थानपर ही आसन बिछाकर बैठते हैं। जमीन, पत्थर, रेती, कँकरीली मिट्टी, बालू अथवा राखपर सोते हैं। कास या कुशको रस्सी, मृगचर्म अथवा पेड़ोंकी छालसे अपना शरीर ढँकते हैं । सिरके बाल, दाढ़ी-मूँछ, नख और रोम बढ़ाये रहते हैं । नियत समयपर स्नान, बलिवैश्वदेव तथा अग्निहोत्र आदि कर्मोंका अनुष्ठान करते हैं । सबेरे हवन-पूजनके लिये समिधा, कुशा और फूल आदिका संग्रह करके आश्रमको झाड़-बुहार लेनेके पश्चात् विश्राम करते हैं। सर्दी, गर्मी, वर्षा और हवाका वेग सहते-सहते उनके शरीरके चमड़े फट जाते हैं । नाना प्रकारके नियमोंका अनुष्ठान करते रहनेसे उनके रक्त और मांस सूख जाते हैं, शरीरकी जगह चामसे ढँकी हुई हड्डियोंका ढाँचामात्र रह जाता है; फिर भी धैर्य धारण करके अत्यन्त साहसके कारण शरीरको चलाये जाते हैं। जो पुरुष नियमके साथ रहकर ब्रह्मषियोंद्वारा आचरणमें लायी हुई इस योगचर्याका अनुष्ठान करता है, वह अग्निकी भाँति अपने दोषोंको दग्ध करके दुर्लभ लोकोंको प्राप्त कर लेता है । अब संन्यासियोंका आचरण बतलाया जाता है । संन्यास ( चौथा आश्रम है -- इस ) में प्रवेश करनेवाले पुरुष अग्निहोत्र, धन, स्त्री आदि परिवार तथा घरको सारी सामग्रीका त्याग करके विषयासक्तिके बन्धनको तोड़कर घरसे निकल जाते हैं । ढेले, पत्थर और सोनेको समान समझते हैं। धर्म, अर्थ और कामके सेवनमें अपनी बुद्धि नहीं फँसाते । शत्रु, मित्र तथा उदासीन -- सबके प्रति समान दृष्टि रखते हैं। स्थावर, अण्डज, पिण्डज, स्वेदज और उद्भिज्ज प्राणियों के प्रति मन, वाणी अथवा कर्मसे भी कभी द्रोह नहीं करते । कुटी या मठ बनाकर नहीं रहते। उन्हें चाहिये कि चारों ओर विचरते रहें और रातमें ठहरनेके लिये पर्वतकी गुफा, नदीका किनारा, वृक्षकी जड़, देवमन्दिर, ग्राम अथवा नगर आदि स्थानोंमें चले जाया करें। नगरमें पाँच रात और गाँवोंमें एक रातसे अधिक न रहें । प्राण धारण करनेके लिये गाँव या नगरमें प्रवेश करके अपने विशुद्ध धर्मोका पालन करनेवाले द्विजातियोंके घरोंपर जाकर खड़े हो जायँ । बिना माँगे ही पात्रमें जितनी भिक्षा आ जाय, उतनी ही स्वीकार करें । आचारकी विधि और युधिष्ठिरने पूछा-दादाजी ! अब मैं आपके मुखसे आचारकी विधि सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप सर्वज्ञ हैं । भीष्मजीने कहा- मनुष्यको सड़कपर, गौओंके बीचमें और अन्नके पौदोंसे हरेभरे खेतमें मल-मूत्रका त्याग नहीं करना चाहिये । आवश्यक शौच आदिसे निवृत्त होकर कुल्ला करनेके पश्चात् नदीमें स्नान करना चाहिये । इसके बाद (संध्योपासना और) देवता-पितरोंका तर्पण करना आवश्यक है। प्रतिदिन सूर्योपस्थान करे । सूर्योदयके समय कभी न सोये । सायं और प्रातः -- दोनों समय संध्या करके गायत्रीका जप करे। दोनों हाथ, दोनों पैर और मुँह - इन पाँच अङ्गोंको धोकर पूर्वकी ओर मुँह कर भोजन करने बैठे 1 भोजन के समय मौन रहे । भोजनके लिये परोसे हुए अन्नकी निन्दा न करे, उसे स्वादिष्ट मानकर प्रेमसे भोजन करे 1 भोजनके बाद हाथ धोकर उठे । रातको भीगे पैर न सोये । देवर्षि नारदजी इसीको आचार कहते हैं। यज्ञशाला आदि पवित्र स्थान, बैल, देवता, गोशाला, चौराहा, ब्राह्मण, धार्मिक मनुष्य तथा मन्दिरको सदा अपने दाहिने करके चले । घरमें अतिथियों, सेवकों और कुटुम्बीजनोंके लिये भी एक-सा ही भोजन बनवाना उत्तम माना गया है। शास्त्रमें मनुष्योंके लिये सबेरे और शाम - दो ही वक्त भोजन करनेका विधान काम, क्रोध, दर्प, लोभ, मोह, कृपणता, दम्भ, निन्दा, अभिमान तथा हिंसा आदिसे दूर रहें । इस विषय में कुछ श्लोक हैं, (जिनके भाव इस प्रकार हैं -- ) 'जो मुनि सब प्राणियोंको अभयदान देकर विचरता रहता है, उसे कहीं किसी भी जीवसे भय नहीं होता। जो अग्निहोत्रको अपने शरीरमें आरोपित करके शरीरस्थित अग्निके उद्देश्य से मुखमें भिक्षाप्राप्त हविष्यका होम करता है, वह अग्निहोत्रियोंको प्राप्त होनेवाले लोकोंमें जाता है । जो बुद्धिको संकल्परहित करके पवित्र होकर शास्त्रोक्त विधिके अनुसार संन्यासके नियमोंका पालन करता है, वह परम शान्त ज्योतिर्मय ब्रह्मलोकको प्राप्त होता है।' इस प्रकार वेदमें प्रतिपादित आश्रम-धर्मका मैंने संक्षेपसे वर्णन किया है। जो मनुष्य लोकके धर्म-अधर्मको जानता है, वह बुद्धिमान् है । भीष्मजी कहते हैं - महर्षि भृगुजीके इस प्रकार उपदेश देनेपर परम धर्मात्मा भरद्वाजने विस्मयविमुग्ध होकर उनका पूजन किया । अध्यात्मज्ञानका वर्णन है। बीचमें नहीं खाना चाहिये । ऐसा करनेसे मनुष्य उपवासी माना जाता है । होमके समय अग्निमें हवन और केवल ऋतु- स्नानके समय स्त्रीके साथ समागम करते हुए एक पत्नीव्रत धारण करनेवाला बुद्धिमान् गृहस्थ भी ब्रह्मचारी ही माना जाता है। ब्राह्मणके भोजनसे बचा हुआ ( यज्ञशिष्ट ) अन्न अमृतके तुल्य है; ऐसे अन्नको भोजन करनेवाले सत्पुरुष सत्यस्वरूप परमात्माको प्राप्त होते हैं । जो मिट्टीके ढेले फोड़ता, तिनके तोड़ता और दाँतोंसे नख चबाया करता है तथा जो सदा जूठे हाथ और जूठे मुँह रहा करता है, उसको बड़ी आयु नहीं मिलती । मनुष्य स्वदेशमें हो या परदेशमें, अपने पास आये हुए अतिथिको भूखा न रहने दे । जीविका के लिये किये हुए कार्यसे जो धन आदि प्राप्त हो, उसे माता-पिता आदि गुरुजनोंको निवेदन कर दे। गुरुजनोंके आनेपर उन्हें स्वयं आसन देकर बैठावे और सदा उनको प्रणाम किया करे । गुरुओंका सत्कार करनेसे आयु, यश और लक्ष्मीकी प्राप्ति होती है । उदयके समय सूर्यको न देखे, नंगी हुई परायी स्त्रीकी ओर दृष्टि न डाले और सदा धर्मानुसार ऋतुकालके समय एकान्त स्थानमें पत्नीके साथ समागम करे । परिचित मनुष्यसे जब-जब भेंट हो, उसका कुशल- समाचार पूछे । प्रतिदिन प्रातःकाल और संध्याके समय ब्राह्मणोंको प्रणाम करे -- ऐसी शास्त्रकी आज्ञा है। देवमन्दिरमें, गौओंके बीचमें, ब्राह्मणोंके यज्ञादि कर्मोमें, शास्त्रोंके स्वाध्यायकालमें और भोजन करते समय दाहिने हाथसे काम ले । प्रातः और संध्याके समय ब्राह्मणोंका विधिवत् पूजन करे । हजामतके समय, छींक आनेपर, स्नान और भोजनके समय तथा रुग्णावस्था में सबको चाहिये कि ब्राह्मणोंको प्रणाम करे; इससे आयु बढ़ती है। सूर्यकी ओर मुँह करके पेशाब न करे, अपनी विष्ठापर दृष्टि न डाले, स्त्रीके साथ एक आसनपर सोना और एक थालीमें भोजन करना छोड़ दे। अपनेसे बड़ोंको नाम लेकर या 'तू' कहकर न पुकारे । अपनेसे छोटे या समवयस्क पुरुषोंका नाम लेनेसे दोष नहीं लगता। आचारकी विधि और अध्यात्मज्ञानका वर्णन पापियोंका हृदय ही उनके पापोंको बता देता है; जो लोग जान-बूझकर किये हुए पापको महापुरुषोंसे छिपाते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं । जो मूर्ख हैं, वे ही जान-बूझकर किये हुए पापको छिपाते हैं । यद्यपि मनुष्य उस पापको नहीं देखते, तो भी देवता तो देखते ही हैं । पापी मनुष्यका छिपाया हुआ पाप उसे पुनः पापमें ही लगाता है और धर्मात्माका धर्मतः गुप्त रक्खा हुआ धर्म उसे पुनः धर्ममें ही प्रवृत्त करता है । मूर्ख मनुष्य पाप करके उसे भूल जाता है, किंतु वह पाप उसके पीछे ही लगा रहता है। किसी कामनाकी पूर्तिके लिये जो धन संचित करके रक्खा होता है, उसको अपने उपभोगमें खर्च करनेसे बड़ा क्लेश होता है । मगर समझदारलोग ऐसे धनकी प्रशंसा नहीं करते; क्योंकि मौत राह नहीं देखती (कामना पूरी हो या अधूरी, समयपर मृत्यु हो ही जाती है) । मनीषी पुरुषोंका कहना है कि सभी प्राणियोंका धर्म मानसिक है अर्थात् मनसे किया हुआ धर्म ही वास्तविक धर्म है; अतः मनसे समस्त जीवोंका कल्याण सोचता रहे । केवल वेदोक्त विधिका सहारा लेकर अकेले ही धर्मका आचरण करना चाहिये । इसमें दूसरेकी सहायताकी आवश्यकता नहीं है । धर्म ही मनुष्योंकी योनि है, धर्मही स्वर्गके देवताओंका अमृत है। धर्मात्मा मनुष्य मरनेके पश्चात् धर्मके ही बलसे सदा सुख भोगते हैं । ने सृष्टि और प्रलयकी व्याख्या के साथ ही अध्यात्मज्ञानका वर्णन किया है। उसे जान लेनेसे मनुष्यको प्रसन्नता और सुखकी प्राप्ति होती है। वह सम्पूर्ण भूतोंके लिये हितकारी है, जो उसे जानता है, उसकी सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं । पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि--ये पाँच महाभूत सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलयके स्थान हैं। जैसे लहरें समुद्रसे प्रकट होकर फिर उसीमें लीन हो जाती हैं, उसी प्रकार ये पाँच महाभूत भी जिस आनन्दस्वरूप परमात्मासे उत्पन्न हुए हैं, पुनः उसीमें लीन हो जाते हैं । शब्द, श्रोत और सम्पूर्ण छिद्र आकाशके कार्य हैं; स्पर्श, त्वचा और चेष्टा -- ये तीन वायुके; रूप, नेत्र और परिपाक -- ये तेजके; रस, जिह्वा और क्लेद जलके तथा गन्ध, नासिका और शरीर पृथ्वीके गुण हैं । इस प्रकार इस देहमें पाँच महाभूत तथा छठा मन हैं । इन्द्रियाँ और मन --ये जीवको विषयोंका ज्ञान कराते हैं। इन छः के अतिरिक्त सातवीं बुद्धि और आठवाँ क्षेत्रज्ञ है । इन्द्रियाँ विषयोंको ग्रहण करती हैं, मन संकल्प-विकल्प करता है और बुद्धि उसका ठीक-ठीक निश्चय करती है। क्षेत्रज्ञ (आत्मा) साक्षीकी भाँति स्थित रहता है । यह शरीरके भीतर और बाहर सर्वत्र व्याप्त है । पुरुषको अपनी इन्द्रियोंकी परीक्षा करके उनकी पूरी जानकारी रखनी चाहिये; क्योंकि सत्त्व, रज और तम-- ये तीनों गुण इन्द्रियोंका ही आश्रय लेकर रहते हैं। मनुष्य अपनी बुद्धिके बलसे जीवोंके आवागमनकी अवस्था जानकर धीरे-धीरे उसपर विचार करते रहनेसे परम शान्ति पा जाता है । यह चराचर जगत् बुद्धिके उदय होनेपर ही उत्पन्न होता और उसके लयके साथ ही लीन हो जाता है; इसलिये सबको बुद्धिमय कहा गया है । युधिष्ठिरने पूछा- पितामह ! शास्त्रमें पुरुषके लिये जो अध्यात्मज्ञानका चिन्तन बताया जाता है, वह अध्यात्म क्या है ? उसका स्वरूप कैसा है ? यह चराचर जगत् किससे उत्पन्न हुआ है और प्रलयके समय किसमें लीन होता है ? -- ये बातें मुझे बतानेकी कृपा करें । भीष्मजीने कहा -- कुन्तीनन्दन ! तुम मुझसे जिस अध्यात्मज्ञानके विषयमें पूछ रहे हो, उसकी व्याख्या करता हूँ । वह अत्यन्त कल्याणकारी और सुखस्वरूप है। आचार्योंबुद्धि ही जिसके द्वारा देखती है, उसे नेत्र कहते हैं; जिससे सुनती है, वह श्रोत्र कहलाता है और जिससे सूंघती है, उसे घ्राण कहा गया है। वही जिह्वाके द्वारा रसका और त्वचासे स्पर्शका अनुभव करती है । इस प्रकार बुद्धि ही विकारको प्राप्त होकर नाना रूपोंसे विषयोंको ग्रहण करती है । वह जिस द्वारसे किसी विषयको पाना चाहती है, मन उसीका आकार धारण कर लेता है । भिन्न-भिन्न विषयोंको ग्रहण करनेके लिये जो बुद्धिके पाँच अधिष्ठान हैं, उन्हींको पाँच इन्द्रियाँ कहते हैं। बुद्धिमान् पुरुषोंको चाहिये कि वे इन्द्रियोंको काबूमें रक्खें । सत्त्व, रज और तम - - ये तीन गुण सदा ही प्राणियों में स्थित रहते हैं और इनके कारण उनमें सात्त्विकी, राजसी तथा तामसी तीन तरहकी बुद्धि भी देखने में आती है। इनमें सत्त्वगुणसे सुख, रजोगुणसे दुःख और तमोगुणसे मोह उत्पन्न होता है । जब शरीर या मनमें किसी प्रकारसे भी प्रसन्नताका भाव हो, हर्ष बढ़ता हो, सुख और शान्तिका अनुभव हो रहा हो तो सत्त्वगुणकी वृद्धि समझनी चाहिये । जिस समय किसी कारणसे या बिना कारण ही असंतोष, शोक, संताप, लोभ और असहनशीलताके भाव दिखायी दें तो उन्हें रजोगुणके चिह्न जानने चाहिये । इसी प्रकार अपमान, मोह, प्रमाद, स्वप्न, निद्रा और आलस्य घेरते हों तो उन्हें तमोगुणके विविध रूप समझे । बुद्धि और आत्मा - - दोनों सूक्ष्म तत्त्व हैं, तथापि इनमें जो अन्तर है, उसपर दृष्टि डालो । इनमेंसे बुद्धि तो गुणोंकी सृष्टि करती है और आत्मा इन सब बातोंसे अलग रहता है। जैसे गूलरका फल और उसके भीतर रहनेवाले कीड़े - ये दोनों एक साथ रहते हुए भी एक-दूसरेसे भिन्न हैं, उसी प्रकार बुद्धि और आत्मा परस्पर मिले हुए प्रतीत होनेपर भी वास्तवमें अलग-अलग हैं। सत्त्व आदि गुण जड होनेके कारण आत्माको नहीं जानते, किंतु आत्मा चेतन है, इसलिये गुणोंको जानता है। जैसे घड़ेमें रक्खा हुआ दीपक घड़ेके छेदोंसे अपना प्रकाश फैलाकर वस्तुओंका ज्ञान कराता है, उसी प्रकार परमात्मा शरीरके भीतर स्थित होकर चेष्टा और ज्ञानसे शून्य इन्द्रियों तथा मन-बुद्धिके द्वारा सम्पूर्ण पदार्थोंका ज्ञान कराता है । बुद्धि गुणोंको उत्पन्न करती है और आत्मा केवल देखता है। बुद्धि और आत्माका यह सम्बन्ध अनादि है । जो संसारी कामोंसे मन हटाकर केवल ध्यानयोगका वर्णन और जपकी महिमा भीष्मजी कहते हैं-- कुन्तीनन्दन ! अब मैं तुमसे मैं ध्यानयोगका वर्णन कर रहा हूँ, जिसे जानकर महर्षिगण इस लोक में सनातन सिद्धिको प्राप्त हुए हैं। योगियोंको चाहिये कि वे सर्दी गर्यो आदि द्वन्द्वोंको सहन करते हुए नित्य सत्त्वगुणमें स्थित रहें और सब प्रकारकी आसक्तियोंसे मुक्त होकर शौचसंतोष आदि नियमोंका पालन करते हुए ऐसे स्थानोंपर ध्यान करें, जहाँ स्त्री आदिका संसर्ग तथा ध्यानविरोधी वस्तुएँ न हों, जहाँ मनमें पूर्णतया शान्ति बनी रहे । योगका साधक इन्द्रियोंको विषयोंकी ओरसे समेट कर काष्ठकी भाँति निश्चल होकर बैठ जाय और मनको एकाग्र करके परमात्मामें लगा दे। उस समय ध्यानमें इस प्रकार मग्न हो जाय कि कानों में कोई शब्द न सुनायी दे, त्वचासे स्पर्शका अनुभव न हो, आँखसे रूपका, जिह्वासे रसका तथा नासिकासे सुगन्धित वस्तुओंका पता न चले। पाँचों इन्द्रियोंको मोहमें डालनेवाले विषयोंकी इच्छा ही न हो। बुद्धिमान् योगी पहले आत्मामें ही अनुराग रखता और आत्मतत्त्वका ही मनन करता है, वह सब प्राणियोंका आत्मा हो जाता है और इस साधनासे उसको बड़ी उत्तम गति प्राप्त होती है । जैसे जलमें विचरनेवाला पंछी, उसमें रहकर भी पानीसे लिप्त नहीं होता, उसी तरह ज्ञानी पुरुष भी सम्पूर्ण प्राणियों में निर्लिप्त होकर विचरता है । निर्लेप होना ही आत्माका स्वरूप है, ऐसा अपनी बुद्धिसे निश्चय करके मनुष्य दुःख पड़नेपर शोक न करे और सुख मिलनेपर हर्षसे फूल न उठे 1 सब जीवोंके प्रति समान भाव रक्खे । जैसे मैले बदनवाले मनुष्य जलसे भरी हुई नदीमें नहा-धोकर साफ-सुथरे हो जाते हैं, उसी प्रकार इस ज्ञानमयी नदीमें अवगाहन करके मलिन हृदयवाले पुरुषभी शुद्ध एवं विद्वान् हो जाते हैं। यही विशुद्ध अध्यात्मज्ञान है । जो मनुष्य बुद्धिसे जीवोंके आवागमनंपर शनैः शनैः विचार करके इस उत्तम ज्ञानको प्राप्त कर लेता है, उसे अक्षय सुख मिलता है । जो धर्म, अर्थ और कामको ठीक-ठीक समझकर उसका परित्याग कर चुका है और योगयुक्त चित्तसे आत्मतत्त्वके अनुसंधानमें लग गया है, वही तत्त्वदर्शी है । उसे दूसरी कोई वस्तु जाननेकी उत्कण्ठा नहीं होती । उस परमात्माको जानकर ज्ञानी पुरुष अपनेको कृतार्थ मानते हैं । अज्ञानियोंको जिस संसारसे महान् भय बना रहता है, उसीसे ज्ञानियोंको तनिक भी भय नहीं होता । बतानेके लिये एक जापक ब्राह्मणकी कथा इन्द्रियोंको मनमें स्थिर करे, फिर पाँचों इन्द्रियोंसहित मनको ध्यानमें एकाग्र करे । इस प्रकार प्रयत्न करनेसे पहले तो कुछ देरके लिये इन्द्रियोंसहित मन स्थिर हो जाता है, किंतु फिर बादलोंमें चमकती हुई बिजलीकी तरह वह बारंबार विषयोंकी ओर जानेके लिये चञ्चल हो उठता है । जैसे पत्तेपर पड़ी हुई पानीकी बूँद सब ओरसे हिलती रहती है, उसी तरह ध्यानमार्ग में स्थित साधकका मन भी चलायमान होता रहता है । एकाग्र करनेपर कुछ देरतक तो वह ध्यानमें स्थिर रहता है, किंतु फिर नाडीमार्ग में प्रवेश करके वायुकी भाँति चञ्चल हो जाता है । ऐसे विक्षेपके समय ध्यानयोगको जाननेवाले साधकको खेद या चिन्ता नहीं करनी चाहिये; बल्कि आलस्य और मात्सर्यका त्याग करके ध्यानके द्वारा मनको पुनः एकाग्र करनेका प्रयत्न करना चाहिये । योगी जब ध्यानका आरम्भ करता है तो पहले उसके
नियमोंका पालन करता है; जिसमें सत्य, दान, द्रोह न करना, सबके प्रति कोमल भाव रखना, लज्जा, दया और तप आदि सद्गुण देखे जाते हों, वह ब्राह्मण कहा गया है । जो युद्ध आदि कर्म करता और वेदोंके अध्ययनमें लगा रहता है, ब्राह्मणोंको दान देता और प्रजासे कर लेकर उसकी रक्षा करता है, उसको क्षत्रिय कहते हैं। इसी प्रकार जो वेदाध्ययनसे सम्पन्न होकर व्यापार, पशु-पालन और खेतीके काम करता है तथा दान देता और पवित्र रहता है, वह वैश्य कहलाता है। किंतु जो वेद और सदाचारका परित्याग करके सब कुछ खाता और सब तरहके काम करता है तथा सदा अपवित्र रहा करता है, वह शूद्र माना गया है । यदि ये ब्राह्मणोचित सत्यादि गुण शूद्र में दिखायी दें और ब्राह्मणमें न हों तो वह शूद्र शूद्र नहीं और वह ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं है । हरएक उपायसे लोभ और क्रोधको दबाना ही पवित्र ज्ञान और आत्मसंयम है । क्रोध तथा लोभ मनुष्यके कल्याणमें सदा ही बाधा पहुँचानेको उद्यत रहते हैं; अतः पूरी शक्ति लगाकर उनका दमन करना चाहिये । क्रोधसे सत्यकी महिमा, असत्यके दोष, दान भृगुजी कहते हैं - -मुने ! सत्य ही ब्रह्म है, सत्य ही तप है, सत्य ही प्रजाकी सृष्टि करता है, सत्यके हो आधारपर संसार टिका हुआ है और सत्यसे ही मनुष्य स्वर्ग प्राप्त करता है। असत्य अन्धकारका रूप है, वह नीचे गिराता है । अज्ञानान्धकारसे घिरे हुए मनुष्य ज्ञानका प्रकाश नहीं देख पाते । जो सत्य है वही धर्म है, जो धर्म है वही प्रकाश है और जो प्रकाश है वही सुख है । इसी प्रकार जो असत्य है वही अधर्म है, जो अधर्म है वही अन्धकार है और जो अन्धकार है वही दुःख है । संसारकी सृष्टि शारीरिक और मानसिक दुःखोंसे भरी हुई है, इसमें सुख भी वे ही हैं, जो परिणाममें दुःख देनेवाले हैं। यह जानकर विद्वान् पुरुष कभी मोहमें नहीं पड़ते । प्रत्येक बुद्धिमान्का यह कर्तव्य है कि वह दुःखोंसे छुटकारा पानेका उद्योग करे । असत्यसे तम की उत्पत्ति हुई है, तमोग्रस्त मनुष्य अधर्मके ही पीछे चलते हैं, धर्मका अनुसरण नहीं करते; अतः जो क्रोध, लोभ, हिंसा और असत्य आदिसे आच्छादित हैं, वे न तो इस लोकमें सुखी होते हैं और न परलोकमें ही सुख उठाते हैं। नाना प्रकारके रोग, व्याधि और तापसे संतप्त होते रहते हैं, वध और बन्धन आदिके क्लेश सहते हैं तथा भूख-प्यास और परिश्रमके कारण भी श्रीको, मात्सर्यसे तपको, मान-अपमानसे विद्याको और प्रमादसे अपनेको बचावे । जिसके सभी कार्य कामनाओंके बन्धनसे रहित होते हैं तथा जिसने त्यागकी आगमें सब कुछ होम दिया है, वही त्यागी और बुद्धिमान् है । किसी भी प्राणीकी हिंसा न करे, सबके साथ मैत्रीपूर्ण बर्ताव करे, स्त्रीपुत्र आदिकी ममता एवं आसक्तिको त्याग कर बुद्धिके द्वारा इन्द्रियोंको वशमें करे और उस स्थितिको प्राप्त करे, जो इहलोक और परलोकमें भी निर्भय तथा शोकरहित है । नित्य तप करे, मननशील होकर मन और इन्द्रियोंका संयम करे, आसक्तिके आश्रयभूत देह-गेह आदिमें आसक्त न होकर परमात्माको प्राप्त करनेकी इच्छा रक्खे । मनको प्राणमें और प्राणको ब्रह्ममें स्थापित करे । वैराग्यसे ही निर्वाण प्राप्त होता है, उसे पाकर किसी अनात्मपदार्थका चिन्तन नहीं होता । ब्राह्मण संसारसे परवैराग्य होनेपर परब्रह्म परमात्माको अनायास ही प्राप्त कर लेता है । सर्वदा शौच और सदाचारका पालन करना तथा सम्पूर्ण प्राणियोंपर दया रखना - - यह ब्राह्मणका लक्षण है। आदिके फल और आश्रमधर्मोका वर्णन कष्ट भोगते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आँधी, पानी, सर्दी और गर्मीसे उत्पन्न हुए भय तथा शारीरिक कष्ट भी झेलने पड़ते हैं । बन्धु-बान्धवोंकी मृत्यु, धनके नाश और प्रेमीजनोंके बिछोहके कारण होनेवाले मानसिक शोकका भी शिकार होना पड़ता है। इसी प्रकार वे जरा और मृत्युके कारण भी बहुतसे दूसरे दूसरे क्लेश भोगते रहते हैं । भरद्वाजने पूछा--मुनिवर ! दान, धर्म, तप, स्वाध्याय और अग्निहोत्रका क्या फल है ? भृगुजीने कहा -- अग्निहोत्वसे पाप नष्ट होता है, स्वाध्यायसे उत्तम शान्ति मिलती है, दानसे भोगोंकी और तपसे स्वर्गकी प्राप्ति होती है । भरद्वाजने पूछा-ब्रह्माजीने जो चार आश्रम बनाये हैं, उनके अपने-अपने धर्म क्या हैं ? यह बताने की कृपा कीजिये । भृगुजीने कहा -- जगत्का कल्याण करनेवाले भगवान् ब्रह्माजीने धर्मकी रक्षाके लिये पूर्वकालमें हो चार आश्रमोंका उपदेश किया था। उनमें से ब्रह्मचर्यको पहला आश्रम कहते हैं, जिसमें शिष्यको गुरुके यहाँ रहकर वेदोंका स्वाध्याय करना पड़ता है। इसमें रहनेवाले ब्रह्मचारीको बाहरभीतरकी शुद्धि, वैदिक संस्कार तथा व्रत और नियमोंके पालनसे अपने मनको वशमें रखना चाहिये। सुबह और शाम - - दोनों समय संध्या, सूर्योपस्थान तथा अग्निहोत्रके द्वारा अग्निदेवकी उपासना करनी चाहिये । तन्द्रा और आलस्यको त्याग करके प्रतिदिन गुरुको प्रणाम करे, वेदोंका अध्ययन तथा उसके अर्थका अभ्यास करता रहे । इस प्रकारकी दिनचर्यासे अपने अन्तःकरणको पवित्र बनावे । सबेरे, शाम और दोपहर -- तीनों वक्त स्नान करे । ब्रह्मचर्यका पालन तथा अग्नि और गुरुकी सेवा करे, प्रतिदिन भिक्षा माँगकर लावे और वह सब गुरुको अर्पण कर दे । अपनी अन्तरात्माको भी गुरुके चरणोंमें निछावर किये रहे । गुरुजी जो कुछ कहें, जिसके लिये संकेत करें और जिस कार्यके निमित्त स्पष्ट आज्ञा दें, उसके विपरीत आचरण न करे । इस प्रकार गुरुको प्रसन्न करके उनकी कृपासे स्वाध्यायका अवसर मिलनेपर वेदाध्ययनमें प्रवृत्त होना चाहिये । इस विषय में एक श्लोक है 'जो द्विज गुरुकी आराधना करके वेदोंका ज्ञान प्राप्त करता है, उसे अन्तमें स्वर्गकी प्राप्ति होती है और उसका मानसिक संकल्प सिद्ध होता है।' सत्यकी महिमा, असत्यके दोष, दान आदिके फल और आश्रमधर्मोका वर्णन 'गार्हस्थ्य' को दूसरा आश्रम बतलाया जाता है । अब हम उसके द्वारा पालन करने योग्य आचरणोंकी व्याख्या करते हैं। जब सदाचारका पालन करनेवाला ब्रह्मचारी विद्या पढ़कर गुरुकुलमें रहनेकी अवधि पूरी कर ले और समावर्तन संस्कारके पश्चात् स्नातक हो जाय, उस समय यदि उसे पत्नीके साथ रहकर धर्मका आचरण करने तथा पुत्रादिरूप फल पानेकी इच्छा हो तो उसके लिये गृहस्थाश्रममें प्रवेशका विधान है; क्योंकि इसमें धर्म, अर्थ और काम तीनोंकी प्राप्ति होती है। इसलिये त्रिवर्ग-साधनकी इच्छासे गृहस्थको उत्तम कर्मके द्वारा धन-संग्रह करना चाहिये और उसीके द्वारा अपनी गृहस्थोका निर्वाह करना चाहिये । गृहस्थआश्रम सभी आश्रमोंका मूल कहलाता है । गुरुकुलमें वास करनेवाले ब्रह्मचारी, वनमें रहकर संकल्पके अनुसार व्रत, नियम तथा धर्मोंका पालन करनेवाले वानप्रस्थी और सब कुछ त्यागकर विचरनेवाले संन्यासीको भी गृहस्थाश्रमसे ही भिक्षा आदिकी प्राप्ति होती है । तात्पर्य यह कि अन्य सब आश्रमवालोंका निर्वाह गृहस्थाश्रमसे ही होता है । गृहस्थद्वारा किये जानेवाले अतिथि-सत्कारके विषयमें एक श्लोक है 'जिस गृहस्थके दरवाजेसे कोई अतिथि भिक्षा न पानेके कारण निराश होकर लौट जाता है, वह उस गृहस्थको तो अपना पाप दे डालता है और स्वयं उसका पुण्य लेकर चला जाता है ।' इसके सिवा, गृहस्थाश्रममें रहकर यज्ञ करनेसे देवता, श्राद्ध करनेसे पितर, शास्त्रोंके श्रवण, अभ्यास और धारणसे ऋषि तथा संतान उत्पन्न करनेसे प्रजापति प्रसन्न होते हैं । गृहस्थके कर्तव्यके विषयमें दो श्लोक और हैं, 'वाणी ऐसी बोलनी चाहिये, जिसमें सब प्राणियोंके प्रति स्नेह भरा हो तथा जो सुनते समय कानोंको मीठी लगे । दूसरोंको पीड़ा देना, मारना या कटुवचन सुनाना अच्छा नहीं है। किसीका अपमान करना, अहंकार रखना और ढोंग दिखाना - इन बातोंकी कड़ी निन्दा की गयी है । किसी भी जीवकी हिंसा न करना, सत्य बोलना और मनमें क्रोध न होने देना -- ये सभी आश्रमवालोंके लिये उपयोगी तप हैं। जिस पुरुषको गृहस्थाश्रममें सदा धर्म, अर्थ और कामके गुणोंकी सिद्धि होती रहती है, वह इस लोकमें सुखका अनुभव करके अन्तमें शिष्ट पुरुषोंकी गतिको प्राप्त करता है ।' तीसरा आश्रम है वानप्रस्थ । इसमें रहनेवाले मनुष्य धर्मका अनुसरण और तपका अनुष्ठान करते हुए पवित्र तीर्थोंमें, नदियोंके किनारे, झरनोंके आस-पास तथा मृग, भैंसे, सूअर, बनैले हाथी और सिंह-व्याघ्र आदि जन्तुओंसे भरे हुए एकान्त वनोंमें विचरते रहते हैं। गृहस्थोंके उपयोगमें आने योग्य सुन्दर वस्त्र, स्वादिष्ठ भोजन और विषय - भोगोंका परित्याग करके वे जंगली औषध, फल, मूल तथा पत्तोंका आहार करते हैं, वह भी बहुत थोड़ी मात्रामें और नियमानुकूल एक ही बार खाकर रहते हैं। नियत स्थानपर ही आसन बिछाकर बैठते हैं। जमीन, पत्थर, रेती, कँकरीली मिट्टी, बालू अथवा राखपर सोते हैं। कास या कुशको रस्सी, मृगचर्म अथवा पेड़ोंकी छालसे अपना शरीर ढँकते हैं । सिरके बाल, दाढ़ी-मूँछ, नख और रोम बढ़ाये रहते हैं । नियत समयपर स्नान, बलिवैश्वदेव तथा अग्निहोत्र आदि कर्मोंका अनुष्ठान करते हैं । सबेरे हवन-पूजनके लिये समिधा, कुशा और फूल आदिका संग्रह करके आश्रमको झाड़-बुहार लेनेके पश्चात् विश्राम करते हैं। सर्दी, गर्मी, वर्षा और हवाका वेग सहते-सहते उनके शरीरके चमड़े फट जाते हैं । नाना प्रकारके नियमोंका अनुष्ठान करते रहनेसे उनके रक्त और मांस सूख जाते हैं, शरीरकी जगह चामसे ढँकी हुई हड्डियोंका ढाँचामात्र रह जाता है; फिर भी धैर्य धारण करके अत्यन्त साहसके कारण शरीरको चलाये जाते हैं। जो पुरुष नियमके साथ रहकर ब्रह्मषियोंद्वारा आचरणमें लायी हुई इस योगचर्याका अनुष्ठान करता है, वह अग्निकी भाँति अपने दोषोंको दग्ध करके दुर्लभ लोकोंको प्राप्त कर लेता है । अब संन्यासियोंका आचरण बतलाया जाता है । संन्यास में प्रवेश करनेवाले पुरुष अग्निहोत्र, धन, स्त्री आदि परिवार तथा घरको सारी सामग्रीका त्याग करके विषयासक्तिके बन्धनको तोड़कर घरसे निकल जाते हैं । ढेले, पत्थर और सोनेको समान समझते हैं। धर्म, अर्थ और कामके सेवनमें अपनी बुद्धि नहीं फँसाते । शत्रु, मित्र तथा उदासीन -- सबके प्रति समान दृष्टि रखते हैं। स्थावर, अण्डज, पिण्डज, स्वेदज और उद्भिज्ज प्राणियों के प्रति मन, वाणी अथवा कर्मसे भी कभी द्रोह नहीं करते । कुटी या मठ बनाकर नहीं रहते। उन्हें चाहिये कि चारों ओर विचरते रहें और रातमें ठहरनेके लिये पर्वतकी गुफा, नदीका किनारा, वृक्षकी जड़, देवमन्दिर, ग्राम अथवा नगर आदि स्थानोंमें चले जाया करें। नगरमें पाँच रात और गाँवोंमें एक रातसे अधिक न रहें । प्राण धारण करनेके लिये गाँव या नगरमें प्रवेश करके अपने विशुद्ध धर्मोका पालन करनेवाले द्विजातियोंके घरोंपर जाकर खड़े हो जायँ । बिना माँगे ही पात्रमें जितनी भिक्षा आ जाय, उतनी ही स्वीकार करें । आचारकी विधि और युधिष्ठिरने पूछा-दादाजी ! अब मैं आपके मुखसे आचारकी विधि सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप सर्वज्ञ हैं । भीष्मजीने कहा- मनुष्यको सड़कपर, गौओंके बीचमें और अन्नके पौदोंसे हरेभरे खेतमें मल-मूत्रका त्याग नहीं करना चाहिये । आवश्यक शौच आदिसे निवृत्त होकर कुल्ला करनेके पश्चात् नदीमें स्नान करना चाहिये । इसके बाद देवता-पितरोंका तर्पण करना आवश्यक है। प्रतिदिन सूर्योपस्थान करे । सूर्योदयके समय कभी न सोये । सायं और प्रातः -- दोनों समय संध्या करके गायत्रीका जप करे। दोनों हाथ, दोनों पैर और मुँह - इन पाँच अङ्गोंको धोकर पूर्वकी ओर मुँह कर भोजन करने बैठे एक भोजन के समय मौन रहे । भोजनके लिये परोसे हुए अन्नकी निन्दा न करे, उसे स्वादिष्ट मानकर प्रेमसे भोजन करे एक भोजनके बाद हाथ धोकर उठे । रातको भीगे पैर न सोये । देवर्षि नारदजी इसीको आचार कहते हैं। यज्ञशाला आदि पवित्र स्थान, बैल, देवता, गोशाला, चौराहा, ब्राह्मण, धार्मिक मनुष्य तथा मन्दिरको सदा अपने दाहिने करके चले । घरमें अतिथियों, सेवकों और कुटुम्बीजनोंके लिये भी एक-सा ही भोजन बनवाना उत्तम माना गया है। शास्त्रमें मनुष्योंके लिये सबेरे और शाम - दो ही वक्त भोजन करनेका विधान काम, क्रोध, दर्प, लोभ, मोह, कृपणता, दम्भ, निन्दा, अभिमान तथा हिंसा आदिसे दूर रहें । इस विषय में कुछ श्लोक हैं, 'जो मुनि सब प्राणियोंको अभयदान देकर विचरता रहता है, उसे कहीं किसी भी जीवसे भय नहीं होता। जो अग्निहोत्रको अपने शरीरमें आरोपित करके शरीरस्थित अग्निके उद्देश्य से मुखमें भिक्षाप्राप्त हविष्यका होम करता है, वह अग्निहोत्रियोंको प्राप्त होनेवाले लोकोंमें जाता है । जो बुद्धिको संकल्परहित करके पवित्र होकर शास्त्रोक्त विधिके अनुसार संन्यासके नियमोंका पालन करता है, वह परम शान्त ज्योतिर्मय ब्रह्मलोकको प्राप्त होता है।' इस प्रकार वेदमें प्रतिपादित आश्रम-धर्मका मैंने संक्षेपसे वर्णन किया है। जो मनुष्य लोकके धर्म-अधर्मको जानता है, वह बुद्धिमान् है । भीष्मजी कहते हैं - महर्षि भृगुजीके इस प्रकार उपदेश देनेपर परम धर्मात्मा भरद्वाजने विस्मयविमुग्ध होकर उनका पूजन किया । अध्यात्मज्ञानका वर्णन है। बीचमें नहीं खाना चाहिये । ऐसा करनेसे मनुष्य उपवासी माना जाता है । होमके समय अग्निमें हवन और केवल ऋतु- स्नानके समय स्त्रीके साथ समागम करते हुए एक पत्नीव्रत धारण करनेवाला बुद्धिमान् गृहस्थ भी ब्रह्मचारी ही माना जाता है। ब्राह्मणके भोजनसे बचा हुआ अन्न अमृतके तुल्य है; ऐसे अन्नको भोजन करनेवाले सत्पुरुष सत्यस्वरूप परमात्माको प्राप्त होते हैं । जो मिट्टीके ढेले फोड़ता, तिनके तोड़ता और दाँतोंसे नख चबाया करता है तथा जो सदा जूठे हाथ और जूठे मुँह रहा करता है, उसको बड़ी आयु नहीं मिलती । मनुष्य स्वदेशमें हो या परदेशमें, अपने पास आये हुए अतिथिको भूखा न रहने दे । जीविका के लिये किये हुए कार्यसे जो धन आदि प्राप्त हो, उसे माता-पिता आदि गुरुजनोंको निवेदन कर दे। गुरुजनोंके आनेपर उन्हें स्वयं आसन देकर बैठावे और सदा उनको प्रणाम किया करे । गुरुओंका सत्कार करनेसे आयु, यश और लक्ष्मीकी प्राप्ति होती है । उदयके समय सूर्यको न देखे, नंगी हुई परायी स्त्रीकी ओर दृष्टि न डाले और सदा धर्मानुसार ऋतुकालके समय एकान्त स्थानमें पत्नीके साथ समागम करे । परिचित मनुष्यसे जब-जब भेंट हो, उसका कुशल- समाचार पूछे । प्रतिदिन प्रातःकाल और संध्याके समय ब्राह्मणोंको प्रणाम करे -- ऐसी शास्त्रकी आज्ञा है। देवमन्दिरमें, गौओंके बीचमें, ब्राह्मणोंके यज्ञादि कर्मोमें, शास्त्रोंके स्वाध्यायकालमें और भोजन करते समय दाहिने हाथसे काम ले । प्रातः और संध्याके समय ब्राह्मणोंका विधिवत् पूजन करे । हजामतके समय, छींक आनेपर, स्नान और भोजनके समय तथा रुग्णावस्था में सबको चाहिये कि ब्राह्मणोंको प्रणाम करे; इससे आयु बढ़ती है। सूर्यकी ओर मुँह करके पेशाब न करे, अपनी विष्ठापर दृष्टि न डाले, स्त्रीके साथ एक आसनपर सोना और एक थालीमें भोजन करना छोड़ दे। अपनेसे बड़ोंको नाम लेकर या 'तू' कहकर न पुकारे । अपनेसे छोटे या समवयस्क पुरुषोंका नाम लेनेसे दोष नहीं लगता। आचारकी विधि और अध्यात्मज्ञानका वर्णन पापियोंका हृदय ही उनके पापोंको बता देता है; जो लोग जान-बूझकर किये हुए पापको महापुरुषोंसे छिपाते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं । जो मूर्ख हैं, वे ही जान-बूझकर किये हुए पापको छिपाते हैं । यद्यपि मनुष्य उस पापको नहीं देखते, तो भी देवता तो देखते ही हैं । पापी मनुष्यका छिपाया हुआ पाप उसे पुनः पापमें ही लगाता है और धर्मात्माका धर्मतः गुप्त रक्खा हुआ धर्म उसे पुनः धर्ममें ही प्रवृत्त करता है । मूर्ख मनुष्य पाप करके उसे भूल जाता है, किंतु वह पाप उसके पीछे ही लगा रहता है। किसी कामनाकी पूर्तिके लिये जो धन संचित करके रक्खा होता है, उसको अपने उपभोगमें खर्च करनेसे बड़ा क्लेश होता है । मगर समझदारलोग ऐसे धनकी प्रशंसा नहीं करते; क्योंकि मौत राह नहीं देखती । मनीषी पुरुषोंका कहना है कि सभी प्राणियोंका धर्म मानसिक है अर्थात् मनसे किया हुआ धर्म ही वास्तविक धर्म है; अतः मनसे समस्त जीवोंका कल्याण सोचता रहे । केवल वेदोक्त विधिका सहारा लेकर अकेले ही धर्मका आचरण करना चाहिये । इसमें दूसरेकी सहायताकी आवश्यकता नहीं है । धर्म ही मनुष्योंकी योनि है, धर्मही स्वर्गके देवताओंका अमृत है। धर्मात्मा मनुष्य मरनेके पश्चात् धर्मके ही बलसे सदा सुख भोगते हैं । ने सृष्टि और प्रलयकी व्याख्या के साथ ही अध्यात्मज्ञानका वर्णन किया है। उसे जान लेनेसे मनुष्यको प्रसन्नता और सुखकी प्राप्ति होती है। वह सम्पूर्ण भूतोंके लिये हितकारी है, जो उसे जानता है, उसकी सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं । पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि--ये पाँच महाभूत सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलयके स्थान हैं। जैसे लहरें समुद्रसे प्रकट होकर फिर उसीमें लीन हो जाती हैं, उसी प्रकार ये पाँच महाभूत भी जिस आनन्दस्वरूप परमात्मासे उत्पन्न हुए हैं, पुनः उसीमें लीन हो जाते हैं । शब्द, श्रोत और सम्पूर्ण छिद्र आकाशके कार्य हैं; स्पर्श, त्वचा और चेष्टा -- ये तीन वायुके; रूप, नेत्र और परिपाक -- ये तेजके; रस, जिह्वा और क्लेद जलके तथा गन्ध, नासिका और शरीर पृथ्वीके गुण हैं । इस प्रकार इस देहमें पाँच महाभूत तथा छठा मन हैं । इन्द्रियाँ और मन --ये जीवको विषयोंका ज्ञान कराते हैं। इन छः के अतिरिक्त सातवीं बुद्धि और आठवाँ क्षेत्रज्ञ है । इन्द्रियाँ विषयोंको ग्रहण करती हैं, मन संकल्प-विकल्प करता है और बुद्धि उसका ठीक-ठीक निश्चय करती है। क्षेत्रज्ञ साक्षीकी भाँति स्थित रहता है । यह शरीरके भीतर और बाहर सर्वत्र व्याप्त है । पुरुषको अपनी इन्द्रियोंकी परीक्षा करके उनकी पूरी जानकारी रखनी चाहिये; क्योंकि सत्त्व, रज और तम-- ये तीनों गुण इन्द्रियोंका ही आश्रय लेकर रहते हैं। मनुष्य अपनी बुद्धिके बलसे जीवोंके आवागमनकी अवस्था जानकर धीरे-धीरे उसपर विचार करते रहनेसे परम शान्ति पा जाता है । यह चराचर जगत् बुद्धिके उदय होनेपर ही उत्पन्न होता और उसके लयके साथ ही लीन हो जाता है; इसलिये सबको बुद्धिमय कहा गया है । युधिष्ठिरने पूछा- पितामह ! शास्त्रमें पुरुषके लिये जो अध्यात्मज्ञानका चिन्तन बताया जाता है, वह अध्यात्म क्या है ? उसका स्वरूप कैसा है ? यह चराचर जगत् किससे उत्पन्न हुआ है और प्रलयके समय किसमें लीन होता है ? -- ये बातें मुझे बतानेकी कृपा करें । भीष्मजीने कहा -- कुन्तीनन्दन ! तुम मुझसे जिस अध्यात्मज्ञानके विषयमें पूछ रहे हो, उसकी व्याख्या करता हूँ । वह अत्यन्त कल्याणकारी और सुखस्वरूप है। आचार्योंबुद्धि ही जिसके द्वारा देखती है, उसे नेत्र कहते हैं; जिससे सुनती है, वह श्रोत्र कहलाता है और जिससे सूंघती है, उसे घ्राण कहा गया है। वही जिह्वाके द्वारा रसका और त्वचासे स्पर्शका अनुभव करती है । इस प्रकार बुद्धि ही विकारको प्राप्त होकर नाना रूपोंसे विषयोंको ग्रहण करती है । वह जिस द्वारसे किसी विषयको पाना चाहती है, मन उसीका आकार धारण कर लेता है । भिन्न-भिन्न विषयोंको ग्रहण करनेके लिये जो बुद्धिके पाँच अधिष्ठान हैं, उन्हींको पाँच इन्द्रियाँ कहते हैं। बुद्धिमान् पुरुषोंको चाहिये कि वे इन्द्रियोंको काबूमें रक्खें । सत्त्व, रज और तम - - ये तीन गुण सदा ही प्राणियों में स्थित रहते हैं और इनके कारण उनमें सात्त्विकी, राजसी तथा तामसी तीन तरहकी बुद्धि भी देखने में आती है। इनमें सत्त्वगुणसे सुख, रजोगुणसे दुःख और तमोगुणसे मोह उत्पन्न होता है । जब शरीर या मनमें किसी प्रकारसे भी प्रसन्नताका भाव हो, हर्ष बढ़ता हो, सुख और शान्तिका अनुभव हो रहा हो तो सत्त्वगुणकी वृद्धि समझनी चाहिये । जिस समय किसी कारणसे या बिना कारण ही असंतोष, शोक, संताप, लोभ और असहनशीलताके भाव दिखायी दें तो उन्हें रजोगुणके चिह्न जानने चाहिये । इसी प्रकार अपमान, मोह, प्रमाद, स्वप्न, निद्रा और आलस्य घेरते हों तो उन्हें तमोगुणके विविध रूप समझे । बुद्धि और आत्मा - - दोनों सूक्ष्म तत्त्व हैं, तथापि इनमें जो अन्तर है, उसपर दृष्टि डालो । इनमेंसे बुद्धि तो गुणोंकी सृष्टि करती है और आत्मा इन सब बातोंसे अलग रहता है। जैसे गूलरका फल और उसके भीतर रहनेवाले कीड़े - ये दोनों एक साथ रहते हुए भी एक-दूसरेसे भिन्न हैं, उसी प्रकार बुद्धि और आत्मा परस्पर मिले हुए प्रतीत होनेपर भी वास्तवमें अलग-अलग हैं। सत्त्व आदि गुण जड होनेके कारण आत्माको नहीं जानते, किंतु आत्मा चेतन है, इसलिये गुणोंको जानता है। जैसे घड़ेमें रक्खा हुआ दीपक घड़ेके छेदोंसे अपना प्रकाश फैलाकर वस्तुओंका ज्ञान कराता है, उसी प्रकार परमात्मा शरीरके भीतर स्थित होकर चेष्टा और ज्ञानसे शून्य इन्द्रियों तथा मन-बुद्धिके द्वारा सम्पूर्ण पदार्थोंका ज्ञान कराता है । बुद्धि गुणोंको उत्पन्न करती है और आत्मा केवल देखता है। बुद्धि और आत्माका यह सम्बन्ध अनादि है । जो संसारी कामोंसे मन हटाकर केवल ध्यानयोगका वर्णन और जपकी महिमा भीष्मजी कहते हैं-- कुन्तीनन्दन ! अब मैं तुमसे मैं ध्यानयोगका वर्णन कर रहा हूँ, जिसे जानकर महर्षिगण इस लोक में सनातन सिद्धिको प्राप्त हुए हैं। योगियोंको चाहिये कि वे सर्दी गर्यो आदि द्वन्द्वोंको सहन करते हुए नित्य सत्त्वगुणमें स्थित रहें और सब प्रकारकी आसक्तियोंसे मुक्त होकर शौचसंतोष आदि नियमोंका पालन करते हुए ऐसे स्थानोंपर ध्यान करें, जहाँ स्त्री आदिका संसर्ग तथा ध्यानविरोधी वस्तुएँ न हों, जहाँ मनमें पूर्णतया शान्ति बनी रहे । योगका साधक इन्द्रियोंको विषयोंकी ओरसे समेट कर काष्ठकी भाँति निश्चल होकर बैठ जाय और मनको एकाग्र करके परमात्मामें लगा दे। उस समय ध्यानमें इस प्रकार मग्न हो जाय कि कानों में कोई शब्द न सुनायी दे, त्वचासे स्पर्शका अनुभव न हो, आँखसे रूपका, जिह्वासे रसका तथा नासिकासे सुगन्धित वस्तुओंका पता न चले। पाँचों इन्द्रियोंको मोहमें डालनेवाले विषयोंकी इच्छा ही न हो। बुद्धिमान् योगी पहले आत्मामें ही अनुराग रखता और आत्मतत्त्वका ही मनन करता है, वह सब प्राणियोंका आत्मा हो जाता है और इस साधनासे उसको बड़ी उत्तम गति प्राप्त होती है । जैसे जलमें विचरनेवाला पंछी, उसमें रहकर भी पानीसे लिप्त नहीं होता, उसी तरह ज्ञानी पुरुष भी सम्पूर्ण प्राणियों में निर्लिप्त होकर विचरता है । निर्लेप होना ही आत्माका स्वरूप है, ऐसा अपनी बुद्धिसे निश्चय करके मनुष्य दुःख पड़नेपर शोक न करे और सुख मिलनेपर हर्षसे फूल न उठे एक सब जीवोंके प्रति समान भाव रक्खे । जैसे मैले बदनवाले मनुष्य जलसे भरी हुई नदीमें नहा-धोकर साफ-सुथरे हो जाते हैं, उसी प्रकार इस ज्ञानमयी नदीमें अवगाहन करके मलिन हृदयवाले पुरुषभी शुद्ध एवं विद्वान् हो जाते हैं। यही विशुद्ध अध्यात्मज्ञान है । जो मनुष्य बुद्धिसे जीवोंके आवागमनंपर शनैः शनैः विचार करके इस उत्तम ज्ञानको प्राप्त कर लेता है, उसे अक्षय सुख मिलता है । जो धर्म, अर्थ और कामको ठीक-ठीक समझकर उसका परित्याग कर चुका है और योगयुक्त चित्तसे आत्मतत्त्वके अनुसंधानमें लग गया है, वही तत्त्वदर्शी है । उसे दूसरी कोई वस्तु जाननेकी उत्कण्ठा नहीं होती । उस परमात्माको जानकर ज्ञानी पुरुष अपनेको कृतार्थ मानते हैं । अज्ञानियोंको जिस संसारसे महान् भय बना रहता है, उसीसे ज्ञानियोंको तनिक भी भय नहीं होता । बतानेके लिये एक जापक ब्राह्मणकी कथा इन्द्रियोंको मनमें स्थिर करे, फिर पाँचों इन्द्रियोंसहित मनको ध्यानमें एकाग्र करे । इस प्रकार प्रयत्न करनेसे पहले तो कुछ देरके लिये इन्द्रियोंसहित मन स्थिर हो जाता है, किंतु फिर बादलोंमें चमकती हुई बिजलीकी तरह वह बारंबार विषयोंकी ओर जानेके लिये चञ्चल हो उठता है । जैसे पत्तेपर पड़ी हुई पानीकी बूँद सब ओरसे हिलती रहती है, उसी तरह ध्यानमार्ग में स्थित साधकका मन भी चलायमान होता रहता है । एकाग्र करनेपर कुछ देरतक तो वह ध्यानमें स्थिर रहता है, किंतु फिर नाडीमार्ग में प्रवेश करके वायुकी भाँति चञ्चल हो जाता है । ऐसे विक्षेपके समय ध्यानयोगको जाननेवाले साधकको खेद या चिन्ता नहीं करनी चाहिये; बल्कि आलस्य और मात्सर्यका त्याग करके ध्यानके द्वारा मनको पुनः एकाग्र करनेका प्रयत्न करना चाहिये । योगी जब ध्यानका आरम्भ करता है तो पहले उसके
प्रधानमंत्री मोदी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में तीन दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन 2022 के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। गांधीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को चिकित्सा पर्यटन या इलाज के लिए भारत आने वाले पर्यटकों के लिए एक विशेष श्रेणी के आयुष वीजा शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने और उन्हें मान्यता देने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष उत्पादों के लिए एक विशेष हॉलमार्क प्रकार की ब्रांडिंग शुरू की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में तीन दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन 2022 के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा, भारत चिकित्सा पर्यटन के लिए एक बहुत ही आकर्षक गंतव्य है। हम इसके चिकित्सा उद्योग के कारण केरल के पर्यटन में वृद्धि के साक्षी रहे हैं। इस मॉडल को पूरे देश में भी दोहराया जा सकता है, जहां आयुर्वेद, युनानी, पारंपरिक चिकित्सा के सिद्ध रूप और स्वास्थ्य केंद्र बहुत लोकप्रिय हो सकते हैं। हमारी सरकार ने भारत में चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के इच्छुक विदेशी यात्रियों और चिकित्सा पर्यटकों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विशेष वीजा श्रेणी स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी घोषणा की है कि बीएसआई और आईएसआई चिह्नें की तरह, उच्चतम गुणवत्ता वाले आयुष उत्पादों को चिह्न्ति करने के लिए एक विशेष आयुष चिह्न् बनाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, यह वैश्विक उपभोक्ताओं को एक मान्यता प्राप्त और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित आयुष उत्पाद देगा। उन्होंने एक आयुष पार्क की स्थापना की भी घोषणा की जहां इसके उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा, यह पार्क भारत में आयुष उत्पादों के निर्माण को एक नई दिशा देगा। शिखर सम्मेलन के उद्घाटन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस घेब्रेयसस और मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री ने आयुष उत्पादों और सेवाओं से संबंधित विभिन्न सेवाओं और एप्लिकेशंस का भी उद्घाटन किया। इस दौरान इसके अनुसंधान और विकास के लिए कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में तीन दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन दो हज़ार बाईस के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। गांधीनगर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को चिकित्सा पर्यटन या इलाज के लिए भारत आने वाले पर्यटकों के लिए एक विशेष श्रेणी के आयुष वीजा शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने और उन्हें मान्यता देने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष उत्पादों के लिए एक विशेष हॉलमार्क प्रकार की ब्रांडिंग शुरू की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में तीन दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन दो हज़ार बाईस के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा, भारत चिकित्सा पर्यटन के लिए एक बहुत ही आकर्षक गंतव्य है। हम इसके चिकित्सा उद्योग के कारण केरल के पर्यटन में वृद्धि के साक्षी रहे हैं। इस मॉडल को पूरे देश में भी दोहराया जा सकता है, जहां आयुर्वेद, युनानी, पारंपरिक चिकित्सा के सिद्ध रूप और स्वास्थ्य केंद्र बहुत लोकप्रिय हो सकते हैं। हमारी सरकार ने भारत में चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के इच्छुक विदेशी यात्रियों और चिकित्सा पर्यटकों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विशेष वीजा श्रेणी स्थापित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी घोषणा की है कि बीएसआई और आईएसआई चिह्नें की तरह, उच्चतम गुणवत्ता वाले आयुष उत्पादों को चिह्न्ति करने के लिए एक विशेष आयुष चिह्न् बनाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा, यह वैश्विक उपभोक्ताओं को एक मान्यता प्राप्त और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित आयुष उत्पाद देगा। उन्होंने एक आयुष पार्क की स्थापना की भी घोषणा की जहां इसके उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा, यह पार्क भारत में आयुष उत्पादों के निर्माण को एक नई दिशा देगा। शिखर सम्मेलन के उद्घाटन में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस घेब्रेयसस और मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री ने आयुष उत्पादों और सेवाओं से संबंधित विभिन्न सेवाओं और एप्लिकेशंस का भी उद्घाटन किया। इस दौरान इसके अनुसंधान और विकास के लिए कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
Deoghar: झारखंड पारा चिकित्सा अनुबंध कर्मचारी संघ तथा झारखंड अनुबंध एनआरएचएम एएनएम जीएनएम कर्मचारी संघ के आवाह्न पर 17 जनवरी से आहूत राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन शुक्रवार को 39 वें दिन भी जारी रहा. आज सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष एएनएम जीएनएम संघ की जिलाध्यक्ष संगीता राजहंस की अध्यक्षता में आयोजित की गई. जिसमें भारी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. आज के कार्यक्रम के लिए भोजन का प्रबंध सामुदायिक स्वास्थ केंद्र मोहनपुर के कर्मचारियों द्वारा किया गया. आज के कार्यक्रम में झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अरुण कापरी सहित बबलू कुमार, सिकंदर कुमार आदि का योगदान रहा. कार्यक्रम में मुख्य रूप से कल 25 फरवरी को होने वाली विभागीय वार्ता को सफल होने की उम्मीद जताई गई. वार्ता असफल रहने की स्थिति में जोरदार आंदोलन का निर्णय लिया गया और 1 मार्च को विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने का निर्णय लिया गया. संघ का कहना है कि 39 दिन से हड़ताल रहने के कारण स्वास्थ्य चिकित्सा सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. नियमित कर्मचारियों को कई विभागों में काम करने के कारण उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई है. आंदोलन से टीकाकरण, बलगम जांच, ब्लड बैंक सहित एमबीए कार्यक्रम तथा अन्य सभी कार्यक्रमों पर प्रतिकूल असर पड़ा है. विधानसभा घेराव के बाद भी समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा. स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह ठप्प कर दिया जाएगा. आज एएनएम संघ की जिला सचिव संगीता राजहंस सहित सैकड़ों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया.
Deoghar: झारखंड पारा चिकित्सा अनुबंध कर्मचारी संघ तथा झारखंड अनुबंध एनआरएचएम एएनएम जीएनएम कर्मचारी संघ के आवाह्न पर सत्रह जनवरी से आहूत राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन शुक्रवार को उनतालीस वें दिन भी जारी रहा. आज सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष एएनएम जीएनएम संघ की जिलाध्यक्ष संगीता राजहंस की अध्यक्षता में आयोजित की गई. जिसमें भारी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. आज के कार्यक्रम के लिए भोजन का प्रबंध सामुदायिक स्वास्थ केंद्र मोहनपुर के कर्मचारियों द्वारा किया गया. आज के कार्यक्रम में झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अरुण कापरी सहित बबलू कुमार, सिकंदर कुमार आदि का योगदान रहा. कार्यक्रम में मुख्य रूप से कल पच्चीस फरवरी को होने वाली विभागीय वार्ता को सफल होने की उम्मीद जताई गई. वार्ता असफल रहने की स्थिति में जोरदार आंदोलन का निर्णय लिया गया और एक मार्च को विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने का निर्णय लिया गया. संघ का कहना है कि उनतालीस दिन से हड़ताल रहने के कारण स्वास्थ्य चिकित्सा सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. नियमित कर्मचारियों को कई विभागों में काम करने के कारण उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई है. आंदोलन से टीकाकरण, बलगम जांच, ब्लड बैंक सहित एमबीए कार्यक्रम तथा अन्य सभी कार्यक्रमों पर प्रतिकूल असर पड़ा है. विधानसभा घेराव के बाद भी समझौता नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा. स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह ठप्प कर दिया जाएगा. आज एएनएम संघ की जिला सचिव संगीता राजहंस सहित सैकड़ों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया.
Salman Khan torn shoes: 'किसी का भाई किसी की जान' एक्टर सलमान खान को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें ये बताया गया है कि वो सेट पर फटे हुए जूते पहनकर आते है। इस बात का खुलासा पलक तिवारी ने किया है। Palak Tiwari on Salman Khan: बॉलीवुड के भाईजान यानी सलमान खान इन दिनों अपनी फिल्म किसी का भाई किसी की जान की वजह से सुर्खियों में हैं। सलमान की इस मूवी का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह मूवी 21 अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है। सलमान खान की इस मूवी में कई नई कलाकार नजर आने वाले हैं। इसमें शहनाज गिल का भी नाम शामिल है। इस बीच बॉलीवुड के भाईजान को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि सलमान सेट पर फटे हुए जूते पहनते हैं। इस बात का खुलासा पलक तिवारी और जस्सी गिल ने किया है। दरअसल, किसी का भाई किसी की जान की स्टारकास्ट इस मूवी का प्रमोशन जोरो शोरों से कर रही हैं। हाल ही में पलक तिवारी और जस्सी गिल ने मीडिया से बातचीत की है जिसमें दोनों ने सलमान खान को लेकर कई खुलासे किए हैं। सलमान खान बहुत ग्राउंडेड रहते हैं। उनके साथ काम करने पर ऐसा नहीं लगता कि हम किसी सुपरस्टार के साथ काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं सेट पर सलमान चप्पल और शॉर्ट्स पहनकर आ जाते हैं। पलक तिवारी ने भाईजान को लेकर आगे कहा कि लोगों का मानना है कि सलमान इतने बड़े स्टार है उनके पास बहुत पैसा है फिर भी वो जमीन से जुड़े हुए है। कभी-कभी उनके जूतों में छेद होता है। जस्सी ने भी कहा कि सलमान को कई बार फटे हुए जूते में शूट करते हुए देखा गया है। बताते चलें कि सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान को लेकर लोग काफी एक्साइटेड हैं। इस फिल्म का अच्छा खासा बज बना हुआ है। एडवांस बुकिंग की बात करें तो इस मामले में फिल्म काफी अच्छा परफॉर्म कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म 100 करोड़ के बजट से बनी है। लोगों का मानना है कि सलमान खान की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने वाली है। इस साल सलमान खान की मोस्ट अवेटेड मूवी टाइगर 3 भी रिलीज होगी। इसमें सलमान के साथ कटरीना और इमरान हाशमी भी नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Salman Khan torn shoes: 'किसी का भाई किसी की जान' एक्टर सलमान खान को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें ये बताया गया है कि वो सेट पर फटे हुए जूते पहनकर आते है। इस बात का खुलासा पलक तिवारी ने किया है। Palak Tiwari on Salman Khan: बॉलीवुड के भाईजान यानी सलमान खान इन दिनों अपनी फिल्म किसी का भाई किसी की जान की वजह से सुर्खियों में हैं। सलमान की इस मूवी का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह मूवी इक्कीस अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है। सलमान खान की इस मूवी में कई नई कलाकार नजर आने वाले हैं। इसमें शहनाज गिल का भी नाम शामिल है। इस बीच बॉलीवुड के भाईजान को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि सलमान सेट पर फटे हुए जूते पहनते हैं। इस बात का खुलासा पलक तिवारी और जस्सी गिल ने किया है। दरअसल, किसी का भाई किसी की जान की स्टारकास्ट इस मूवी का प्रमोशन जोरो शोरों से कर रही हैं। हाल ही में पलक तिवारी और जस्सी गिल ने मीडिया से बातचीत की है जिसमें दोनों ने सलमान खान को लेकर कई खुलासे किए हैं। सलमान खान बहुत ग्राउंडेड रहते हैं। उनके साथ काम करने पर ऐसा नहीं लगता कि हम किसी सुपरस्टार के साथ काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं सेट पर सलमान चप्पल और शॉर्ट्स पहनकर आ जाते हैं। पलक तिवारी ने भाईजान को लेकर आगे कहा कि लोगों का मानना है कि सलमान इतने बड़े स्टार है उनके पास बहुत पैसा है फिर भी वो जमीन से जुड़े हुए है। कभी-कभी उनके जूतों में छेद होता है। जस्सी ने भी कहा कि सलमान को कई बार फटे हुए जूते में शूट करते हुए देखा गया है। बताते चलें कि सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान को लेकर लोग काफी एक्साइटेड हैं। इस फिल्म का अच्छा खासा बज बना हुआ है। एडवांस बुकिंग की बात करें तो इस मामले में फिल्म काफी अच्छा परफॉर्म कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म एक सौ करोड़ के बजट से बनी है। लोगों का मानना है कि सलमान खान की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने वाली है। इस साल सलमान खान की मोस्ट अवेटेड मूवी टाइगर तीन भी रिलीज होगी। इसमें सलमान के साथ कटरीना और इमरान हाशमी भी नजर आएंगे। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
माउंट मॉनगनुईः ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने रविवार को माउंट मॉनगनुई में खेले गए पहले वनडे में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को 6 विकेट से मात देकर इंटरनेशनल क्रिकेट में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम अब पुरुषों और महिलाओं दोनों क्रिकेट में सबसे ज्यादा लगातार वनडे मैच जीतने वाली टीम बन गई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दर्ज करने वाली ऑस्ट्रेलिया की यह लगातार 22वीं वनडे जीत थी। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने अपने देश की पुरुष टीम रिकी पोंटिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के 2003 साल में बनाए रिकॉर्ड को तोड़ा। बता दें कि रिकी पोंटिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलियाई पुरुष टीम ने लगातार 21 वनडे जीतने का कीर्तिमान स्थापित किया था। अब मेग लेनिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने इस रिकॉर्ड को तोड़ा। अक्टूबर 2017 में आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम को वनडे में शिकस्त मिली थी। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की वनडे जीत की शुरूआत 12 मार्च 2018 से हुई। सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया महिला ने भारत को 3-0 से मात दी। इसके बाद पाकिस्तान (3-0), न्यूजीलैंड (3-0), इंग्लैंड 3-0), वेस्टइंडीज 3-0), श्रीलंका (3-0), न्यूजीलैंड (3-0) और न्यूजीलैंड को मौजूदा सीरीज में 1-0 से मात दी। मैच की बात करें तो न्यूजीलैंड को पहले बल्लेबाजी का न्योता मिला और उसने ऑस्ट्रेलिया के सामने 213 रन का लक्ष्य रखा। न्यूजीलैंड की तरफ से लौरा डाउन ने 134 गेंदों में 90 रन बनाए और वह टीम की सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहीं। इसके अलावा कप्तान एमी सैथरवेट और एमिलिया कर ने क्रमशः 32 और 33 रन की पारी खेली। न्यूजीलैंड की टीम एक समय 37 ओवर में दो विकेट पर 159 रन बनाकर सुखद स्थिति में थी। हालांकि, कर के आउट होने के बाद न्यूजीलैंड की पारी लड़खड़ाई और पूरी टीम 48. 5 ओवर में 212 रन पर ऑलआउट हुई। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से मेगन शूट ने सबसे ज्यादा 4 विकेट चटकाए। 214 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरूआत अच्छी नहीं रही और रचेल हेंस (14) व मेग लेनिंग (5) जल्दी पवेलियन लौटे। एलिसा हीली ने 68 गेंदों में 65 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की स्थिति मजबूत रखी। एलिसा पैरी ने नाबाद 56 रन बनाए जबकि एश्ले गार्डनर ने तीन छक्के और चार चौके की मदद से 41 गेंदों में 53 रन की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया ने केवल 38. 3 ओवर में लक्ष्य हासिल किया।
माउंट मॉनगनुईः ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने रविवार को माउंट मॉनगनुई में खेले गए पहले वनडे में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को छः विकेट से मात देकर इंटरनेशनल क्रिकेट में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम अब पुरुषों और महिलाओं दोनों क्रिकेट में सबसे ज्यादा लगातार वनडे मैच जीतने वाली टीम बन गई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दर्ज करने वाली ऑस्ट्रेलिया की यह लगातार बाईसवीं वनडे जीत थी। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने अपने देश की पुरुष टीम रिकी पोंटिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के दो हज़ार तीन साल में बनाए रिकॉर्ड को तोड़ा। बता दें कि रिकी पोंटिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलियाई पुरुष टीम ने लगातार इक्कीस वनडे जीतने का कीर्तिमान स्थापित किया था। अब मेग लेनिंग के नेतृत्व वाली ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने इस रिकॉर्ड को तोड़ा। अक्टूबर दो हज़ार सत्रह में आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम को वनडे में शिकस्त मिली थी। ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की वनडे जीत की शुरूआत बारह मार्च दो हज़ार अट्ठारह से हुई। सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया महिला ने भारत को तीन-शून्य से मात दी। इसके बाद पाकिस्तान , न्यूजीलैंड , इंग्लैंड तीन-शून्य), वेस्टइंडीज तीन-शून्य), श्रीलंका , न्यूजीलैंड और न्यूजीलैंड को मौजूदा सीरीज में एक-शून्य से मात दी। मैच की बात करें तो न्यूजीलैंड को पहले बल्लेबाजी का न्योता मिला और उसने ऑस्ट्रेलिया के सामने दो सौ तेरह रन का लक्ष्य रखा। न्यूजीलैंड की तरफ से लौरा डाउन ने एक सौ चौंतीस गेंदों में नब्बे रन बनाए और वह टीम की सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहीं। इसके अलावा कप्तान एमी सैथरवेट और एमिलिया कर ने क्रमशः बत्तीस और तैंतीस रन की पारी खेली। न्यूजीलैंड की टीम एक समय सैंतीस ओवर में दो विकेट पर एक सौ उनसठ रन बनाकर सुखद स्थिति में थी। हालांकि, कर के आउट होने के बाद न्यूजीलैंड की पारी लड़खड़ाई और पूरी टीम अड़तालीस. पाँच ओवर में दो सौ बारह रन पर ऑलआउट हुई। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से मेगन शूट ने सबसे ज्यादा चार विकेट चटकाए। दो सौ चौदह रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरूआत अच्छी नहीं रही और रचेल हेंस व मेग लेनिंग जल्दी पवेलियन लौटे। एलिसा हीली ने अड़सठ गेंदों में पैंसठ रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की स्थिति मजबूत रखी। एलिसा पैरी ने नाबाद छप्पन रन बनाए जबकि एश्ले गार्डनर ने तीन छक्के और चार चौके की मदद से इकतालीस गेंदों में तिरेपन रन की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया ने केवल अड़तीस. तीन ओवर में लक्ष्य हासिल किया।
Bihar Board 10th Result 2023: बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड (BSEB) ने बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं के रिज़ल्ट घोषित कर दिया हैं. इस वर्ष बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा 2023 में एमडी रुम्मान अशरफ ने टॉप किया है. रुम्मान अशरफ ने 500 में से 489 अंक हासिल कर पूरे राज्य में टॉप किया. वह इस्मानिया हाई स्कूल, शेखपुरा के विद्यार्थी हैं. बता दें इस बार बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा में मोहम्मद रुम्मान अशरफ ने 489 अंक हासिल करके टॉप किया है. वहीं दूसरे जगह पर दो छात्राएं नम्रता कुमारी और ज्ञानी अनुपमा ने 486 अंक हासिल किए हैं. जबकि तीसरे जगह पर भी 484 अंक हासिल करने वाले तीन छात्र-छात्राएं संजू कुमारी, भावना कुमारी और जयनंदन कुमार पंडित हैं. बिहार बोर्ड 10वीं (मैट्रिक) परिणाम जारी हो गया है। बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मैट्रिक बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित किए हैं। कुल 81% स्टूडेंट्स परीक्षा में पास हुए हैं। परीक्षा में शामिल हुए 16,37,414 स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट डायरेक्ट लिंक से चेक कर सकते हैं. इस बार बिहार बोर्ड के 10वीं के परिणाम की 16 लाख 37 हजार से अधिक परीक्षाथी इन्तजार कर रहे हैं। इसमें 8 लाख 31 हजार से अधिक छात्राएं तो 8 लाख 3 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे. - बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं. - 'बीएसईबी बिहार बोर्ड 10वीं रिज़ल्ट 2023' डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें. - अब, बीएसईबी रोल कोड और रोल नंबर दर्ज करें. - विवरण प्रस्तुत करने के लिए "खोज" बटन पर क्लिक करें. - बीएसईबी 10वीं रिज़ल्ट 2023 स्क्रीन पर जारी होगा. - भविष्य के संदर्भ के लिए बिहार बोर्ड 10वीं रिज़ल्ट 2023 डाउनलोड करें. बिहार बोर्ड 10वीं परिणाम चेक रहे विद्यार्थियों को पासिंग मार्क्स का नियम भी जान लेना चाहिए. विद्यार्थियों को प्रत्येक संबंध में और कुल मिलाकर 30 फीसदी अंक चाहिए. यदि आपके किसी एक या दो संबंध में कम मार्क्स आ जाते हैं तो विद्यार्थियों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है. ऐसे विद्यार्थियों के लिए कंपार्टमेंट की परीक्षा आयोजित की जाएगी. ऐसे स्टूडेंट्स को लिए कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा आयोजित की जाती है.
Bihar Board दसth Result दो हज़ार तेईस: बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड ने बिहार बोर्ड कक्षा दसवीं के रिज़ल्ट घोषित कर दिया हैं. इस वर्ष बिहार बोर्ड दसवीं परीक्षा दो हज़ार तेईस में एमडी रुम्मान अशरफ ने टॉप किया है. रुम्मान अशरफ ने पाँच सौ में से चार सौ नवासी अंक हासिल कर पूरे राज्य में टॉप किया. वह इस्मानिया हाई स्कूल, शेखपुरा के विद्यार्थी हैं. बता दें इस बार बिहार बोर्ड कक्षा दसवीं की परीक्षा में मोहम्मद रुम्मान अशरफ ने चार सौ नवासी अंक हासिल करके टॉप किया है. वहीं दूसरे जगह पर दो छात्राएं नम्रता कुमारी और ज्ञानी अनुपमा ने चार सौ छियासी अंक हासिल किए हैं. जबकि तीसरे जगह पर भी चार सौ चौरासी अंक हासिल करने वाले तीन छात्र-छात्राएं संजू कुमारी, भावना कुमारी और जयनंदन कुमार पंडित हैं. बिहार बोर्ड दसवीं परिणाम जारी हो गया है। बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मैट्रिक बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित किए हैं। कुल इक्यासी% स्टूडेंट्स परीक्षा में पास हुए हैं। परीक्षा में शामिल हुए सोलह,सैंतीस,चार सौ चौदह स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट डायरेक्ट लिंक से चेक कर सकते हैं. इस बार बिहार बोर्ड के दसवीं के परिणाम की सोलह लाख सैंतीस हजार से अधिक परीक्षाथी इन्तजार कर रहे हैं। इसमें आठ लाख इकतीस हजार से अधिक छात्राएं तो आठ लाख तीन हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे. - बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline. bihar. gov. in पर जाएं. - 'बीएसईबी बिहार बोर्ड दसवीं रिज़ल्ट दो हज़ार तेईस' डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें. - अब, बीएसईबी रोल कोड और रोल नंबर दर्ज करें. - विवरण प्रस्तुत करने के लिए "खोज" बटन पर क्लिक करें. - बीएसईबी दसवीं रिज़ल्ट दो हज़ार तेईस स्क्रीन पर जारी होगा. - भविष्य के संदर्भ के लिए बिहार बोर्ड दसवीं रिज़ल्ट दो हज़ार तेईस डाउनलोड करें. बिहार बोर्ड दसवीं परिणाम चेक रहे विद्यार्थियों को पासिंग मार्क्स का नियम भी जान लेना चाहिए. विद्यार्थियों को प्रत्येक संबंध में और कुल मिलाकर तीस फीसदी अंक चाहिए. यदि आपके किसी एक या दो संबंध में कम मार्क्स आ जाते हैं तो विद्यार्थियों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है. ऐसे विद्यार्थियों के लिए कंपार्टमेंट की परीक्षा आयोजित की जाएगी. ऐसे स्टूडेंट्स को लिए कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा आयोजित की जाती है.
सारंगपुर बहुत पथरीली है डगर प्रभु मिलन की । हम बात कर रहे है सारंगपुर नगर के मुक्तिधाम की, जो संडावता मार्ग और श्री कपिलेश्वर तीर्थ पहुंच मार्ग के बीच स्थित है। जहां तक जाने की पक्की सड़क नही है। बरसात के समय किसी की मृत्यु हो जाए तो अर्थी को मुक्तिधाम तक ले जाने में कीचड़ युक्त और पथरीले मार्ग से काफी परेशानी के साथ गुजरना पड़ता है। हालात यह है कि बरसात के दिनो मे कई बार अतिवर्षा व कीचड़ के चलते नगर के मुक्ति धाम का मार्ग बंद होने के कारण शहर के समीप ग्रामीण क्षैत्र के मुक्तिधाम पर जाकर दह संस्कार करना पड़ता है। स्थानीय नगरीय प्रशासन को चाहिए कि जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अविलंब इस मार्ग का पक्का निर्माण करे। ऐसे समय मे ताकि लोगो को परेशानी से बचा जा सके ।
सारंगपुर बहुत पथरीली है डगर प्रभु मिलन की । हम बात कर रहे है सारंगपुर नगर के मुक्तिधाम की, जो संडावता मार्ग और श्री कपिलेश्वर तीर्थ पहुंच मार्ग के बीच स्थित है। जहां तक जाने की पक्की सड़क नही है। बरसात के समय किसी की मृत्यु हो जाए तो अर्थी को मुक्तिधाम तक ले जाने में कीचड़ युक्त और पथरीले मार्ग से काफी परेशानी के साथ गुजरना पड़ता है। हालात यह है कि बरसात के दिनो मे कई बार अतिवर्षा व कीचड़ के चलते नगर के मुक्ति धाम का मार्ग बंद होने के कारण शहर के समीप ग्रामीण क्षैत्र के मुक्तिधाम पर जाकर दह संस्कार करना पड़ता है। स्थानीय नगरीय प्रशासन को चाहिए कि जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अविलंब इस मार्ग का पक्का निर्माण करे। ऐसे समय मे ताकि लोगो को परेशानी से बचा जा सके ।
जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आफताब को यह संभावना थी कि पुलिस उस तक जरूर पहुंचेगी. इसके लिए उसने मृत शरीर ठिकाने लगाने से लेकर पकड़े जाने पर पुलिस एवं न्यायालय का सामना करने तक की तैयारी कर ली थी. उसने मृत शरीर को ठिकाने लगाने के लिए अमेरिकी वेब सीरीज और देहरादून के अनुपमा हत्याकांड से उपाय सीखा. गूगल के जरिए उसने यह सारी तैयारी की थी. वहीं, पकड़े जाने पर पुलिस और न्यायालय का उत्तर देने के लिए उसने हालीवुड अदाकार जॉनी डेप का ट्रायल देखा. दरअसल, साल 2018 में जॉनी डेप पर उसकी पूर्व पत्नी एम्बर हर्ड ने घरेलू हिंसा एवं शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. इस पर जॉनी डेप ने हर्ड पर 15 मिलियन $ का मानहानि का केस पंजीकृत किया था. इसमें करीब सौ घंटे तक जॉनी डेप ने न्यायालय के सामने स्वयं जिरह की थी. यह पूरी सीरीज इंटरनेट पर मौजूद है. आफताब ने जॉनी डेप की बहस को गंभीरता से देखा. इस मुकदमे में जॉनी डेप विजयी हुआ था. आफताब ने भी इसी तरह पुलिस और न्यायालय में उत्तर दिया था. बद्री के फ्लैट पर खोजा मृत शरीर के टुकड़े फेंकने का ठिकाना : जांच में सामने आया है कि श्रद्धा की मर्डर के बाद आफताब अपने दोस्त बद्री के फ्लैट पर गया था. फ्लैट की बालकनी पर टहलते हुए छतरपुर के जंगल को देखा था. तभी उसे श्रद्धा के मृत शरीर के टुकड़ों को जंगल में फेंकने का तरीका सूझा. शुरुआती जांच में आफताब ने बताया कि उसने 18 दिन में मृत शरीर के टुकड़ों को फेंका था, लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि चार माह के दौरान उसने इसे भिन्न-भिन्न स्थान पर ठिकाने लगाया था. अभी 14 दिन तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद आफताब अब कारागार में हैं.
जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आफताब को यह संभावना थी कि पुलिस उस तक जरूर पहुंचेगी. इसके लिए उसने मृत शरीर ठिकाने लगाने से लेकर पकड़े जाने पर पुलिस एवं न्यायालय का सामना करने तक की तैयारी कर ली थी. उसने मृत शरीर को ठिकाने लगाने के लिए अमेरिकी वेब सीरीज और देहरादून के अनुपमा हत्याकांड से उपाय सीखा. गूगल के जरिए उसने यह सारी तैयारी की थी. वहीं, पकड़े जाने पर पुलिस और न्यायालय का उत्तर देने के लिए उसने हालीवुड अदाकार जॉनी डेप का ट्रायल देखा. दरअसल, साल दो हज़ार अट्ठारह में जॉनी डेप पर उसकी पूर्व पत्नी एम्बर हर्ड ने घरेलू हिंसा एवं शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. इस पर जॉनी डेप ने हर्ड पर पंद्रह मिलियन $ का मानहानि का केस पंजीकृत किया था. इसमें करीब सौ घंटे तक जॉनी डेप ने न्यायालय के सामने स्वयं जिरह की थी. यह पूरी सीरीज इंटरनेट पर मौजूद है. आफताब ने जॉनी डेप की बहस को गंभीरता से देखा. इस मुकदमे में जॉनी डेप विजयी हुआ था. आफताब ने भी इसी तरह पुलिस और न्यायालय में उत्तर दिया था. बद्री के फ्लैट पर खोजा मृत शरीर के टुकड़े फेंकने का ठिकाना : जांच में सामने आया है कि श्रद्धा की मर्डर के बाद आफताब अपने दोस्त बद्री के फ्लैट पर गया था. फ्लैट की बालकनी पर टहलते हुए छतरपुर के जंगल को देखा था. तभी उसे श्रद्धा के मृत शरीर के टुकड़ों को जंगल में फेंकने का तरीका सूझा. शुरुआती जांच में आफताब ने बताया कि उसने अट्ठारह दिन में मृत शरीर के टुकड़ों को फेंका था, लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि चार माह के दौरान उसने इसे भिन्न-भिन्न स्थान पर ठिकाने लगाया था. अभी चौदह दिन तक पुलिस हिरासत में रहने के बाद आफताब अब कारागार में हैं.
अंतरिक्ष यात्री कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन (Jeremy Hansen), विक्टर ग्लोवर (Victor Glover), क्रिस्टीना कोच (Christina Koch) और नासा के रीड वाइसमैन (Reid Wiseman) हैं. सीएनएन ने बताया कि नासा ने पहली महिला का नाम लिया है, जो दुनिया की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री भी हैं और अंतरिक्ष यात्री के रूप में नियुक्त पहली अफ्रीकी अमेरिकी हैं, जिसने चंद्र मिशन को काफी खास बना दिया है. नासा के रीड वाइसमैन, एक 47 वर्षीय सुशोभित नौसैनिक एविएटर और टेस्ट पायलट को पहली बार 2009 में अंतरिक्ष संगठन के लिए एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया पोग. वह आर्टेमिस II मिशन के कमांडर के रूप में काम करेंगे. देखें वीडियोः हैनसेन, 47, एक फाइटर पायलट को 2009 में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के लिए कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा चुना गया था. विशेष रूप से, वह गहरे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले कनाडाई होंगे. 46 वर्षीय नेवी एविएटर, ग्लोवर ने 2021 में अंतरिक्ष में अपनी पहली यात्रा की, अपने दूसरे चालक दल के मिशन पर स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन को उड़ाया और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग छह महीने बिताए, सीएनएन ने रिपोर्ट किया. चौथा चालक दल का सदस्य कोच हैं. कोच, 44 द्वारा छह स्पेसवॉक पूरे किए गए हैं, जिसमें 2019 में पहली ऑल-फीमेल स्पेसवॉक भी शामिल है. अंतरिक्ष में 328 दिनों के साथ, वह एक महिला द्वारा सबसे लंबे समय तक सिंगल स्पेसफ्लाइट का रिकॉर्ड रखती है. आर्टेमिस II मिशन, आर्टेमिस I पर महत्वपूर्ण रूप से विस्तार करेगा, एक मानव रहित परीक्षण मिशन जो दिसंबर में समाप्त हुआ और चंद्रमा को दायरे में लेने के लिए 1. 4 मिलियन मील की यात्रा पर नासा के ओरियन कैप्सूल को ले गया.
अंतरिक्ष यात्री कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन , विक्टर ग्लोवर , क्रिस्टीना कोच और नासा के रीड वाइसमैन हैं. सीएनएन ने बताया कि नासा ने पहली महिला का नाम लिया है, जो दुनिया की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री भी हैं और अंतरिक्ष यात्री के रूप में नियुक्त पहली अफ्रीकी अमेरिकी हैं, जिसने चंद्र मिशन को काफी खास बना दिया है. नासा के रीड वाइसमैन, एक सैंतालीस वर्षीय सुशोभित नौसैनिक एविएटर और टेस्ट पायलट को पहली बार दो हज़ार नौ में अंतरिक्ष संगठन के लिए एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया पोग. वह आर्टेमिस II मिशन के कमांडर के रूप में काम करेंगे. देखें वीडियोः हैनसेन, सैंतालीस, एक फाइटर पायलट को दो हज़ार नौ में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के लिए कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा चुना गया था. विशेष रूप से, वह गहरे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले कनाडाई होंगे. छियालीस वर्षीय नेवी एविएटर, ग्लोवर ने दो हज़ार इक्कीस में अंतरिक्ष में अपनी पहली यात्रा की, अपने दूसरे चालक दल के मिशन पर स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन को उड़ाया और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग छह महीने बिताए, सीएनएन ने रिपोर्ट किया. चौथा चालक दल का सदस्य कोच हैं. कोच, चौंतालीस द्वारा छह स्पेसवॉक पूरे किए गए हैं, जिसमें दो हज़ार उन्नीस में पहली ऑल-फीमेल स्पेसवॉक भी शामिल है. अंतरिक्ष में तीन सौ अट्ठाईस दिनों के साथ, वह एक महिला द्वारा सबसे लंबे समय तक सिंगल स्पेसफ्लाइट का रिकॉर्ड रखती है. आर्टेमिस II मिशन, आर्टेमिस I पर महत्वपूर्ण रूप से विस्तार करेगा, एक मानव रहित परीक्षण मिशन जो दिसंबर में समाप्त हुआ और चंद्रमा को दायरे में लेने के लिए एक. चार मिलियन मील की यात्रा पर नासा के ओरियन कैप्सूल को ले गया.
2022 का साल और सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) जब भी इनका जिक्र होगा तो क्रिकेट का वह सुनहरा अध्याय निकलकर सामने आएगा, जिसे जानकर कोई भी दंग रह जाए। भले ही भारतीय टीम विश्वकप नहीं जीत पाई लेकिन सूर्यकुमार यादव ने फैंस का दिल जरूर जीता है। Suryakumar Yadav Most Runs T20. क्रिकेट की दुनिया में जब भी कोई बल्लेबाज हाफ सेंचुरी या सेंचुरी जड़ता है तो यह भी देखा जाता है कि उसने चौके-छक्के कितने जड़े हैं। टी20 क्रिकेट में तो सारा गेम ही चौके-छक्के पर डिपेंड होता है। 20 ओवर के मैच में किसी भी एक ओवर में 3 से ज्यादा बाउंड्री लगती हैं तो पूरे मैच की दिशा और दशा ही बदल जाती है। 2022 में टी20 इंटरनेशन मैचों में सूर्यकुमार यादव ने सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। यही कारण है कि वे आईसीसी की रैंकिंग में इस समय टी20 क्रिकेट के नंबर वन बैट्समैन बन गए हैं। एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले सूर्या ने तो मानों चौकों और छक्कों की बारिश ही कर डाली है। कैसे. . . बता रहे हैं यह आंकड़े। 2022 में सूर्यकुमार यादव का बल्ला खूब चला है। या यूं कहें कि सूर्या का बल्ला खूब गरजा है। इस साल में अभी तक सूर्यकुमार यादव ने कुल 1164 रन बना डाले हैं और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसमें 75 फीसदी से भी ज्यादा यानि 832 रन तो सिर्फ चौके-छक्के से बने हैं। कुल 1164 में से सिर्फ 332 रन ही ऐसे हैं जिसके लिए सूर्या को दौड़ लगानी पड़ी यानि सिंगल, डबल या ट्रिपल रन लेना पड़ा। बाकी के 832 रन तो लंबे-लंबे और अजीबोगरीब हिट्स से ही मिले हैं। सूर्या ने 2022 में कुल 31 मैच की 31 पारियों में 2 शतक और 9 अर्धशतक जमाए हैं। 2022 में सूर्यकुमार यादव ने 1164 में से 832 रन रन सिर्फ बाउंड्री के जरिए प्राप्त किए हैं। इसमें 68 गगनचुंबी छक्के और 106 झन्नाटेदार चौके शामिल हैं। यानि 408 रन तो सिर्फ छक्के से बनाए और 424 रन चौके मारकर बटोरे हैं। कुल 31 पारियों में दो बार सूर्या 0 पर ऑउट हुए हैं। भारत ने जितने मैच जीते हैं, उनमें सूर्या की भागीदारी 840 रनों की है। यानि जिस मैच में सूर्या का बल्ला चला, वह मैच भारत जरूर जीता है। टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में पाकिस्तानी बैट्समैन मोहम्मद रिजवान दूसरे पायदान पर हैं और उनके नाम 996 रन हैं। इसमें 10 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। तीसरे नंबर पर विराट कोहली हैं जिन्होंने 20 पारियों में 781 रन बनाए हैं। विराट के नाम 1 शतक और 8 अर्धशतक हैं।
दो हज़ार बाईस का साल और सूर्यकुमार यादव जब भी इनका जिक्र होगा तो क्रिकेट का वह सुनहरा अध्याय निकलकर सामने आएगा, जिसे जानकर कोई भी दंग रह जाए। भले ही भारतीय टीम विश्वकप नहीं जीत पाई लेकिन सूर्यकुमार यादव ने फैंस का दिल जरूर जीता है। Suryakumar Yadav Most Runs Tबीस. क्रिकेट की दुनिया में जब भी कोई बल्लेबाज हाफ सेंचुरी या सेंचुरी जड़ता है तो यह भी देखा जाता है कि उसने चौके-छक्के कितने जड़े हैं। टीबीस क्रिकेट में तो सारा गेम ही चौके-छक्के पर डिपेंड होता है। बीस ओवर के मैच में किसी भी एक ओवर में तीन से ज्यादा बाउंड्री लगती हैं तो पूरे मैच की दिशा और दशा ही बदल जाती है। दो हज़ार बाईस में टीबीस इंटरनेशन मैचों में सूर्यकुमार यादव ने सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। यही कारण है कि वे आईसीसी की रैंकिंग में इस समय टीबीस क्रिकेट के नंबर वन बैट्समैन बन गए हैं। एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले सूर्या ने तो मानों चौकों और छक्कों की बारिश ही कर डाली है। कैसे. . . बता रहे हैं यह आंकड़े। दो हज़ार बाईस में सूर्यकुमार यादव का बल्ला खूब चला है। या यूं कहें कि सूर्या का बल्ला खूब गरजा है। इस साल में अभी तक सूर्यकुमार यादव ने कुल एक हज़ार एक सौ चौंसठ रन बना डाले हैं और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसमें पचहत्तर फीसदी से भी ज्यादा यानि आठ सौ बत्तीस रन तो सिर्फ चौके-छक्के से बने हैं। कुल एक हज़ार एक सौ चौंसठ में से सिर्फ तीन सौ बत्तीस रन ही ऐसे हैं जिसके लिए सूर्या को दौड़ लगानी पड़ी यानि सिंगल, डबल या ट्रिपल रन लेना पड़ा। बाकी के आठ सौ बत्तीस रन तो लंबे-लंबे और अजीबोगरीब हिट्स से ही मिले हैं। सूर्या ने दो हज़ार बाईस में कुल इकतीस मैच की इकतीस पारियों में दो शतक और नौ अर्धशतक जमाए हैं। दो हज़ार बाईस में सूर्यकुमार यादव ने एक हज़ार एक सौ चौंसठ में से आठ सौ बत्तीस रन रन सिर्फ बाउंड्री के जरिए प्राप्त किए हैं। इसमें अड़सठ गगनचुंबी छक्के और एक सौ छः झन्नाटेदार चौके शामिल हैं। यानि चार सौ आठ रन तो सिर्फ छक्के से बनाए और चार सौ चौबीस रन चौके मारकर बटोरे हैं। कुल इकतीस पारियों में दो बार सूर्या शून्य पर ऑउट हुए हैं। भारत ने जितने मैच जीते हैं, उनमें सूर्या की भागीदारी आठ सौ चालीस रनों की है। यानि जिस मैच में सूर्या का बल्ला चला, वह मैच भारत जरूर जीता है। टीबीस क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में पाकिस्तानी बैट्समैन मोहम्मद रिजवान दूसरे पायदान पर हैं और उनके नाम नौ सौ छियानवे रन हैं। इसमें दस हाफ सेंचुरी शामिल हैं। तीसरे नंबर पर विराट कोहली हैं जिन्होंने बीस पारियों में सात सौ इक्यासी रन बनाए हैं। विराट के नाम एक शतक और आठ अर्धशतक हैं।
नालागढ़ में मां की ममता को शर्मसार करने का मामला सामने आया है। यहां नालागढ़ के वार्ड नंबर 7 में एमसी पार्क के नजदीक पानी की नाली में 7 माह का भ्रूण मिला हैं। भ्रूण मिलने से नालागढ़ शहर में सनसनी फैल गई है। सुबह लोगों ने नाली में पड़े भ्रूण को देखा और उसके बाद उसकी सूचना पुलिस विभाग को दी। पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंच गई और जांच में जुट गई है। सिटी चौकी इंचार्ज इंदरजीत सिंह ने बताया कि उनको सुबह फोन पर सूचना मिली थी कि नालागढ़ के वार्ड नंबर 7 में नाली में एक बच्चे का भ्रूण मिला है। पुलिस ने भ्रूण को कब्जे में ले लिया है और आसपास के सीसीटीवी कैमरे तथा लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। वही पर नालागढ़ सिविल अस्पताल डॉ साक्षी ने बताया कि उनके पास पुलिस एक भ्रूण लेकर आई है, जांच में पता लगा कि वो मेल भ्रूण है जो कि 7 माह का है, जो कि मृत पाया गया है। हम आपको बताते चलें कि बद्दी बरोटिवाला नालागढ़ में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन आज दिन तक वह सभी मामले अनसुलझी पहेली बन कर रह गए हैं। अब देखना यह होगा कि जो यह भ्रूण मिला है इसके अपराधी तक पुलिस कब तक पहुंच पाती है, या यह भी अनसुलझी पहेली बन कर रह जाएगा।
नालागढ़ में मां की ममता को शर्मसार करने का मामला सामने आया है। यहां नालागढ़ के वार्ड नंबर सात में एमसी पार्क के नजदीक पानी की नाली में सात माह का भ्रूण मिला हैं। भ्रूण मिलने से नालागढ़ शहर में सनसनी फैल गई है। सुबह लोगों ने नाली में पड़े भ्रूण को देखा और उसके बाद उसकी सूचना पुलिस विभाग को दी। पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंच गई और जांच में जुट गई है। सिटी चौकी इंचार्ज इंदरजीत सिंह ने बताया कि उनको सुबह फोन पर सूचना मिली थी कि नालागढ़ के वार्ड नंबर सात में नाली में एक बच्चे का भ्रूण मिला है। पुलिस ने भ्रूण को कब्जे में ले लिया है और आसपास के सीसीटीवी कैमरे तथा लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। वही पर नालागढ़ सिविल अस्पताल डॉ साक्षी ने बताया कि उनके पास पुलिस एक भ्रूण लेकर आई है, जांच में पता लगा कि वो मेल भ्रूण है जो कि सात माह का है, जो कि मृत पाया गया है। हम आपको बताते चलें कि बद्दी बरोटिवाला नालागढ़ में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन आज दिन तक वह सभी मामले अनसुलझी पहेली बन कर रह गए हैं। अब देखना यह होगा कि जो यह भ्रूण मिला है इसके अपराधी तक पुलिस कब तक पहुंच पाती है, या यह भी अनसुलझी पहेली बन कर रह जाएगा।
बीज अंकुरण के लिए अखबार विधि बहुत प्रभावी है। इस विधि के द्वारा बीज 2-3 दिनों के अंदर-अंदर ही अंकुरित हो जाते हैं। बाद में इन्हें खेत में लगाना और पानी देना आसान हो जाता है। अखबार को चार बार फोल्ड करें और फिर अखबार को पानी में डुबोयें। उसके बाद बीजों को अखबार के ऊपर कुछ दूरी पर रखें। और अखबार को लपेट दें और उसे धागे से बांध दें। जब इनकी जड़ें बननी शुरू हो जाएं, तब इन्हें मिट्टी में बो दें। देसी और उन्नत किस्मों का चयन करने के बाद बीजों की बिजाई से पहले दो बातों को ध्यान में रखना चाहिए। पहली बिजाई से पहले बीजों की जांच करें कि वे अंकुरण के लिए अच्छे हैं या नहीं और दूसरी, यदि बीज अच्छे हैं, तो बीज का उपचार करने के बाद बिजाई करें। अंकुरण की जांच : इसके लिए वही तरीका अपनाया जाता है जो घरों में दाल अंकुरण के लिए अपनाया जाता है। बीजों को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोयें (यह विधि मौसम और बीजों के अनुसार बदलती है, चने के बीजों को गर्मियों में 7-8 घंटे के लिए भिगोया जाता है। सर्दियों में यह अंकुरण के लिए ज्यादा समय लेगा। पतली परत वाले बीज अंकुरण के लिए कम समय लेते हैं)। उसके बाद बीजों को एक मोटे सूती कपड़े में रखें और एक अंधेरे कमरे, लेकिन हवादार स्थान पर रखें। नमी का स्तर बनाकर रखें। कम से कम 70-90 प्रतिशत अंकुरण जरूरी है नहीं तो बीजों को बदल दें। यदि बीजों को बदलना संभव ना हो, तो बीजों की संख्या बढ़ा दें। अंकुरण जांच का एक अन्य तरीका है अखबार को चार बार फोल्ड करें और उसे पानी में भिगोयें। चूने का प्रयोग किए बिना 50-100 बीज अखबार के ऊपर कुछ दूरी पर रखें और उसके बाद अखबार को फोल्ड कर दें। फिर अखबार के दोनों कोनों को धागा ढीला करके बंद करें और उसके बाद अखबार को दोबारा पानी में भिगोयें। अतिरिक्त पानी को निकाल दें। अतिरिक्त पानी निकालने के बाद अखबार को पॉलीथीन बैग में डालें और इसे घर के अंदर ही लटका दें। 3-4 दिनों के बाद अखबार को खोलें और अंकुरित बीजों की गिणती करें। बीज निरीक्षण प्रक्रिया बिजाई के 2-3 सप्ताह पहले की जानी चाहिए क्योंकि यदि बीजों को बदलने की जरूरत पड़े तो उन्हें समय पर बदला जा सके।
बीज अंकुरण के लिए अखबार विधि बहुत प्रभावी है। इस विधि के द्वारा बीज दो-तीन दिनों के अंदर-अंदर ही अंकुरित हो जाते हैं। बाद में इन्हें खेत में लगाना और पानी देना आसान हो जाता है। अखबार को चार बार फोल्ड करें और फिर अखबार को पानी में डुबोयें। उसके बाद बीजों को अखबार के ऊपर कुछ दूरी पर रखें। और अखबार को लपेट दें और उसे धागे से बांध दें। जब इनकी जड़ें बननी शुरू हो जाएं, तब इन्हें मिट्टी में बो दें। देसी और उन्नत किस्मों का चयन करने के बाद बीजों की बिजाई से पहले दो बातों को ध्यान में रखना चाहिए। पहली बिजाई से पहले बीजों की जांच करें कि वे अंकुरण के लिए अच्छे हैं या नहीं और दूसरी, यदि बीज अच्छे हैं, तो बीज का उपचार करने के बाद बिजाई करें। अंकुरण की जांच : इसके लिए वही तरीका अपनाया जाता है जो घरों में दाल अंकुरण के लिए अपनाया जाता है। बीजों को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोयें । उसके बाद बीजों को एक मोटे सूती कपड़े में रखें और एक अंधेरे कमरे, लेकिन हवादार स्थान पर रखें। नमी का स्तर बनाकर रखें। कम से कम सत्तर-नब्बे प्रतिशत अंकुरण जरूरी है नहीं तो बीजों को बदल दें। यदि बीजों को बदलना संभव ना हो, तो बीजों की संख्या बढ़ा दें। अंकुरण जांच का एक अन्य तरीका है अखबार को चार बार फोल्ड करें और उसे पानी में भिगोयें। चूने का प्रयोग किए बिना पचास-एक सौ बीज अखबार के ऊपर कुछ दूरी पर रखें और उसके बाद अखबार को फोल्ड कर दें। फिर अखबार के दोनों कोनों को धागा ढीला करके बंद करें और उसके बाद अखबार को दोबारा पानी में भिगोयें। अतिरिक्त पानी को निकाल दें। अतिरिक्त पानी निकालने के बाद अखबार को पॉलीथीन बैग में डालें और इसे घर के अंदर ही लटका दें। तीन-चार दिनों के बाद अखबार को खोलें और अंकुरित बीजों की गिणती करें। बीज निरीक्षण प्रक्रिया बिजाई के दो-तीन सप्ताह पहले की जानी चाहिए क्योंकि यदि बीजों को बदलने की जरूरत पड़े तो उन्हें समय पर बदला जा सके।
मे ईश्वर का म्यान ही प्रधान है और यही इसकी विशेषता है, जो कर्ममीमासा मे नही है ।' वेदान्त का अधिकारी - उत्तर मीमासा या वेदान्त की व्याख्या महाभारत मे जगह जगह हुई है। मोक्षवर्म, श्रीमद्भागवतगीता एव सनत्सुजातीय प्रकरण मे वेदान्त के बहुत ने सिद्धान्त गृहीत हुए हैं। उन प्रकरणो को उपनिषद के भाष्य एव वात्तिक के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। यह पहले ही कहा जा चुका है कि कर्मकाड का प्रथम उद्देश्य चित्तशुद्धि है। कर्म के द्वारा जब चित्त शुद्ध हो जाता है तो भगवान का स्वरूप जानने की इच्छा जागरूक होती है और उसी समय से जिज्ञासु व्यक्ति वेदान्त श्रवण का अधिकारी हो जाता है । शिष्य की भलीभांति परीक्षा करके ही आचार्य ब्रह्मविद्या का उपदेश देते थे, यह हम पहले ही अन्य प्रकरण मे बता चुके हैं। राग-द्वेष से विमुक्त एव ब्रह्मचारी ही ब्रह्मज्ञान का अधिकारी माना जाता है और ऐसे मनुष्य को दिया हुआ उपदेश ही फलता-फूलता है। ब्रह्मविद्याध्ययन गुरुकुल मे रहकर ही करना पड़ता था। इसके लिए बहुत त्याग की आवश्यकता पडती है । श्रवण, मनन और निदिध्यासन अध्यात्मतत्त्व समझने के लिये श्रवण, मनन और निदिध्यासन बहुत आवश्यक है । आत्मा का गूढ स्वरूप ध्यान के द्वारा ही बुद्धि मे प्रतिबिंधित होता है। श्रवण एव मनन के बाद स्थिर चित्त होकर ध्यान लगाने से योगी को उस परम ज्योतिस्वरूप भगवान के दर्शन हो जाते हैं। निवात, निष्कम्प दीपशिखा के समान निश्चल चित्त ही निदिध्यासन के उपयुक्त होता है । चित्त जब तक शात व स्थिर नही होगा, ध्यान नहीं लगाया जा सकता । अद्वैतवाद वगैरह - अद्वैतवादी, द्वैतवादी, विशिष्टाद्वैतवादी आदि सव सम्प्रदायो के आचार्यो ने महाभारत को ओर विशेषतया भगवद्गीता को बहुत श्रद्धा के १. मयि सर्वाणि कर्माणि सन्यस्याव्यात्मचेतसा । इत्यादि । भीष्म २७ ३० । भीष्म ३३।२७,२८ २. बुद्धौ विलीने मनसि प्रचिन्त्या, विद्या हि सा ब्रह्मचर्येण लम्या । इत्यादि । उद्योग ४४ । २ । उद्योग ४२१४६ ३. आचार्ययोनिमिह ये प्रविश्य । इत्यादि । उद्योग ४४१६ । शाति २४५ १६।२० । शाति ३२५ वा अध्याय । ४. एव सर्वेषु भूतेषु गूढात्मा न प्रकाशते । दृश्यते त्वग्रया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्दाशभि ॥ इत्यादि । शांति २४५॥
मे ईश्वर का म्यान ही प्रधान है और यही इसकी विशेषता है, जो कर्ममीमासा मे नही है ।' वेदान्त का अधिकारी - उत्तर मीमासा या वेदान्त की व्याख्या महाभारत मे जगह जगह हुई है। मोक्षवर्म, श्रीमद्भागवतगीता एव सनत्सुजातीय प्रकरण मे वेदान्त के बहुत ने सिद्धान्त गृहीत हुए हैं। उन प्रकरणो को उपनिषद के भाष्य एव वात्तिक के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। यह पहले ही कहा जा चुका है कि कर्मकाड का प्रथम उद्देश्य चित्तशुद्धि है। कर्म के द्वारा जब चित्त शुद्ध हो जाता है तो भगवान का स्वरूप जानने की इच्छा जागरूक होती है और उसी समय से जिज्ञासु व्यक्ति वेदान्त श्रवण का अधिकारी हो जाता है । शिष्य की भलीभांति परीक्षा करके ही आचार्य ब्रह्मविद्या का उपदेश देते थे, यह हम पहले ही अन्य प्रकरण मे बता चुके हैं। राग-द्वेष से विमुक्त एव ब्रह्मचारी ही ब्रह्मज्ञान का अधिकारी माना जाता है और ऐसे मनुष्य को दिया हुआ उपदेश ही फलता-फूलता है। ब्रह्मविद्याध्ययन गुरुकुल मे रहकर ही करना पड़ता था। इसके लिए बहुत त्याग की आवश्यकता पडती है । श्रवण, मनन और निदिध्यासन अध्यात्मतत्त्व समझने के लिये श्रवण, मनन और निदिध्यासन बहुत आवश्यक है । आत्मा का गूढ स्वरूप ध्यान के द्वारा ही बुद्धि मे प्रतिबिंधित होता है। श्रवण एव मनन के बाद स्थिर चित्त होकर ध्यान लगाने से योगी को उस परम ज्योतिस्वरूप भगवान के दर्शन हो जाते हैं। निवात, निष्कम्प दीपशिखा के समान निश्चल चित्त ही निदिध्यासन के उपयुक्त होता है । चित्त जब तक शात व स्थिर नही होगा, ध्यान नहीं लगाया जा सकता । अद्वैतवाद वगैरह - अद्वैतवादी, द्वैतवादी, विशिष्टाद्वैतवादी आदि सव सम्प्रदायो के आचार्यो ने महाभारत को ओर विशेषतया भगवद्गीता को बहुत श्रद्धा के एक. मयि सर्वाणि कर्माणि सन्यस्याव्यात्मचेतसा । इत्यादि । भीष्म सत्ताईस तीस । भीष्म तैंतीस।सत्ताईस,अट्ठाईस दो. बुद्धौ विलीने मनसि प्रचिन्त्या, विद्या हि सा ब्रह्मचर्येण लम्या । इत्यादि । उद्योग चौंतालीस । दो । उद्योग बयालीस हज़ार एक सौ छियालीस तीन. आचार्ययोनिमिह ये प्रविश्य । इत्यादि । उद्योग चार हज़ार चार सौ सोलह । शाति दो सौ पैंतालीस सोलह।बीस । शाति तीन सौ पच्चीस वा अध्याय । चार. एव सर्वेषु भूतेषु गूढात्मा न प्रकाशते । दृश्यते त्वग्रया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्दाशभि ॥ इत्यादि । शांति दो सौ पैंतालीस॥
अभिषेक मिश्रा,लखनऊ। भले ही कांग्रेस ने तीसरे चरण के मतदान के लिए कांग्रेस की सूची जारी कर दी है, लेकिन इतना तो तय है कि कांग्रेस के स्टार प्रचारक गांधी ही होंगे। इस सूची में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नाम शामिल है। कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के तृतीय चरण के मतदान को लेकर 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी गयी हैं। जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्घू स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं।
अभिषेक मिश्रा,लखनऊ। भले ही कांग्रेस ने तीसरे चरण के मतदान के लिए कांग्रेस की सूची जारी कर दी है, लेकिन इतना तो तय है कि कांग्रेस के स्टार प्रचारक गांधी ही होंगे। इस सूची में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नाम शामिल है। कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के तृतीय चरण के मतदान को लेकर चालीस स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी गयी हैं। जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्घू स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं।
सुशांत की आत्महत्या के लिए जहां फिल्म इंडस्ट्री में फैले नेपोटिज्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हैं वहीं, सिंगर सोनू निगम ने एक चौंकाने वाली बात कह दी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बॉलीवुड में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री में फैले माफिया राज को लेकर खुलकर बात कही। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि म्यूजिक इंडस्ट्री से भी आत्महत्याएं जैसी खबरें सामने आ सकती है। सोनू ने सीधा भूषण कुमार को निशाना साधते हुए कहा है, भूषण कुमार. . . अब तो तेरा नाम लेना ही पड़ेगा क्योंकि तुने गलत आदमी से पंगा ले लिया। मुंबई. सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में मूवी माफिया को लेकर चर्चाओं का दौर दिन-ब-दिन गर्माता जा रहा है। सुशांत की आत्महत्या के लिए जहां फिल्म इंडस्ट्री में फैले नेपोटिज्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हैं वहीं, सिंगर सोनू निगम ने एक चौंकाने वाली बात कह दी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बॉलीवुड में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री में फैले माफिया राज को लेकर खुलकर बात कही। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि म्यूजिक इंडस्ट्री से भी आत्महत्याएं जैसी खबरें सामने आ सकती है। इसके बाद से ही लगातार सोनू निगम सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे थे। सोनू सीधे तौर पर टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार को घेरा। उन्हें चेतावनी दी कि वो उनके मुंह न लगे नहीं तो वे कई खुलासे कर देंगे। सोनू ने कहा- लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। शराफत की बात सभी को समझ नहीं आती है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया था और बेहद प्यार से ये बात कही थी कि नए लोगों के साथ बेहद प्यार से पेश आएं क्योंकि सुसाइड होने के बाद में रोने से बेहतर हैं कि माहौल पहले ही सुधार लिया जाए। लेकिन माफिया है तो माफिया की चाल ही चलेगा। सोनू ने सीधा भूषण कुमार को निशाना साधते हुए कहा है, भूषण कुमार. . . अब तो तेरा नाम लेना ही पड़ेगा क्योंकि तुने गलत आदमी से पंगा ले लिया। जब तू मेरे घर आता था भाई-भाई मेरी एक एलबम कर दो, भाई दीवाना कर दो, भाई स्मिता ठाकरे से मिलवा दो, भाई बाल ठाकरे से मिलवा दो भाई अबू सलेम से बचा लो, याद है ना? सोनू के इस वीडियो पर भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार ने अपने इंस्टा से पोस्ट डालकर सफाई पेश की है और उनको पुराने दिनों की याद दिलाई है। दिव्या ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर लिखा है- आज की सच्चाई केवल यह है कि कौन कितना अच्छा कैंपेन चला सकता है। मैं देख सकती हूं कि लोग कैसे कैंपेन चलाकर झूठ बेच रहे हैं। सोनू निगम जैसे लोग दर्शकों के दिमाग से खेल रहे हैं। भगवान इस दुनिया को बचाए। सोनू जी टी-सीरीज ने आपको इंडस्ट्री में ब्रेक दिया। आपको इतना आगे बढ़ाया। अगर आपको इतनी ही खुंदस थी भूषण से तो पहले क्यों नहीं बोले ? आज पब्लिसिटी के लिए क्यों कर रहे हो ये सब।
सुशांत की आत्महत्या के लिए जहां फिल्म इंडस्ट्री में फैले नेपोटिज्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हैं वहीं, सिंगर सोनू निगम ने एक चौंकाने वाली बात कह दी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बॉलीवुड में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री में फैले माफिया राज को लेकर खुलकर बात कही। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि म्यूजिक इंडस्ट्री से भी आत्महत्याएं जैसी खबरें सामने आ सकती है। सोनू ने सीधा भूषण कुमार को निशाना साधते हुए कहा है, भूषण कुमार. . . अब तो तेरा नाम लेना ही पड़ेगा क्योंकि तुने गलत आदमी से पंगा ले लिया। मुंबई. सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में मूवी माफिया को लेकर चर्चाओं का दौर दिन-ब-दिन गर्माता जा रहा है। सुशांत की आत्महत्या के लिए जहां फिल्म इंडस्ट्री में फैले नेपोटिज्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हैं वहीं, सिंगर सोनू निगम ने एक चौंकाने वाली बात कह दी थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बॉलीवुड में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री में फैले माफिया राज को लेकर खुलकर बात कही। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि म्यूजिक इंडस्ट्री से भी आत्महत्याएं जैसी खबरें सामने आ सकती है। इसके बाद से ही लगातार सोनू निगम सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे थे। सोनू सीधे तौर पर टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार को घेरा। उन्हें चेतावनी दी कि वो उनके मुंह न लगे नहीं तो वे कई खुलासे कर देंगे। सोनू ने कहा- लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। शराफत की बात सभी को समझ नहीं आती है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया था और बेहद प्यार से ये बात कही थी कि नए लोगों के साथ बेहद प्यार से पेश आएं क्योंकि सुसाइड होने के बाद में रोने से बेहतर हैं कि माहौल पहले ही सुधार लिया जाए। लेकिन माफिया है तो माफिया की चाल ही चलेगा। सोनू ने सीधा भूषण कुमार को निशाना साधते हुए कहा है, भूषण कुमार. . . अब तो तेरा नाम लेना ही पड़ेगा क्योंकि तुने गलत आदमी से पंगा ले लिया। जब तू मेरे घर आता था भाई-भाई मेरी एक एलबम कर दो, भाई दीवाना कर दो, भाई स्मिता ठाकरे से मिलवा दो, भाई बाल ठाकरे से मिलवा दो भाई अबू सलेम से बचा लो, याद है ना? सोनू के इस वीडियो पर भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार ने अपने इंस्टा से पोस्ट डालकर सफाई पेश की है और उनको पुराने दिनों की याद दिलाई है। दिव्या ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर लिखा है- आज की सच्चाई केवल यह है कि कौन कितना अच्छा कैंपेन चला सकता है। मैं देख सकती हूं कि लोग कैसे कैंपेन चलाकर झूठ बेच रहे हैं। सोनू निगम जैसे लोग दर्शकों के दिमाग से खेल रहे हैं। भगवान इस दुनिया को बचाए। सोनू जी टी-सीरीज ने आपको इंडस्ट्री में ब्रेक दिया। आपको इतना आगे बढ़ाया। अगर आपको इतनी ही खुंदस थी भूषण से तो पहले क्यों नहीं बोले ? आज पब्लिसिटी के लिए क्यों कर रहे हो ये सब।
नई दिल्लीः बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस बीच, सीबीआई और एम्स की टीमें मामले की लगातार जांच कर रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या थी या हत्या, सीबीआई की टीम लगातार इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच, सीबीआई और एम्स टीम के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आज मंगलवार के लिए निर्धारित है। बैठक के दौरान, दोनों दल सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के विवरण पर चर्चा करेंगे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), जो अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच कर रहा है, मंगलवार को एम्स के मेडिकल बोर्ड के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेगा, आईएएनएस ने सोमवार को सूत्रों के हवाले से बताया। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान केंद्रीय जांच और सीएफएसएल टीमों द्वारा जांच के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी। सीबीआई की एक टीम मुंबई में सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच कर रही है। सूत्र ने कहा कि सीबीआई और सीएफएसएल एसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद, एम्स मेडिकल बोर्ड अपने अंतिम निष्कर्ष को साझा करेगा कि क्या अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में कोई सच्चाई छिपाई जा रही थी। सूत्र ने कहा कि सीबीआई एम्स की फॉरेंसिक टीम के साथ अपनी जांच साझा करेगी और उसके बाद अगली कार्रवाई का फैसला करेगी।
नई दिल्लीः बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस बीच, सीबीआई और एम्स की टीमें मामले की लगातार जांच कर रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या थी या हत्या, सीबीआई की टीम लगातार इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच, सीबीआई और एम्स टीम के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आज मंगलवार के लिए निर्धारित है। बैठक के दौरान, दोनों दल सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के विवरण पर चर्चा करेंगे। केंद्रीय जांच ब्यूरो , जो अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच कर रहा है, मंगलवार को एम्स के मेडिकल बोर्ड के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेगा, आईएएनएस ने सोमवार को सूत्रों के हवाले से बताया। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान केंद्रीय जांच और सीएफएसएल टीमों द्वारा जांच के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी। सीबीआई की एक टीम मुंबई में सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच कर रही है। सूत्र ने कहा कि सीबीआई और सीएफएसएल एसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद, एम्स मेडिकल बोर्ड अपने अंतिम निष्कर्ष को साझा करेगा कि क्या अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में कोई सच्चाई छिपाई जा रही थी। सूत्र ने कहा कि सीबीआई एम्स की फॉरेंसिक टीम के साथ अपनी जांच साझा करेगी और उसके बाद अगली कार्रवाई का फैसला करेगी।
"Svidomye" क्या है और इस शब्द का अनुवाद कैसे किया जाता है? "Svidomost" की अवधारणा व्यापक रूप से थीबीसवीं सदी के देर से अस्सी के दशक में प्रसार, विशेष रूप से राष्ट्रीय चेतना का तेजी से विकास की अवधि के दौरान - सोवियत संघ के गणराज्यों संघ के स्वदेशी आबादी के बीच (और आसान राष्ट्रवाद)। विशाल देश के असली संरक्षक, जिसका क्षेत्र के सबसे पियक्कड़ और idlers का निवास है - थोड़ा-थोड़ा, और कभी कभी काफी खुलकर Kazakhs, Moldovans, लिथुआनिया, उज़बेक, बेलारूसी और यूक्रेनियन भी विचार है कि वे instills। एक सामाजिक घटना के रूप में "svidomye Ukrainians" के बारे में, और चर्चा की जाएगी। किसी भी राष्ट्रवाद का सार काफी भीतर हैएक साधारण वाक्यांश है कि एक जातीय समूह के प्रतिनिधि के जन्म का केवल तथ्य वरीयता प्रदान करता है, बशर्ते कि यह अपने क्षेत्र में हुआ। रूसी साम्राज्य के अस्तित्व के दौरान, संस्कृतियों और जीनोटाइपों पर आपसी भेदभाव थे, लेकिन ये प्रक्रियाएं धीमी थीं। कुछ राष्ट्रीय प्रांतों ने इस तरह के व्यापक स्वायत्तता अधिकारों का आनंद लिया कि वे लगभग पूरी तरह से monoethnicity बनाए रखने में कामयाब रहे (उदाहरण पोलैंड और फिनलैंड हैं)। रूस के इतिहास में कोई भी देश, अपने क्षेत्र में रहने वाले, ने अपनी राष्ट्रीय विशेषताओं, भाषा और संस्कृति को खो दिया नहीं है, उदाहरण के लिए, ब्रिटेन - महान शक्ति के वर्षों में - कई गुलामों को नष्ट कर दिया। रूस में राष्ट्रवाद अधिकांश उपनगरों की पुरानी पिछड़ेपन और त्सारिस्ट सरकार द्वारा की गई खेती के लिए किए जा रहे भारी प्रयासों के कारण अलोकप्रिय था। तो "svidomye" क्या है और उत्पीड़ित लोगों के सचेत प्रतिनिधियों से कहाँ से आया? सोवियत यूक्रेन के निर्माण के बाद इसके क्षेत्र मेंउसी राष्ट्रीय नीति को पूरे यूएसएसआर में किया गया था। सोवियत काल में, जातीय होमोज़ाइजेशन की प्रक्रिया तेजी से बढ़ी, इस तथ्य के बावजूद कि राष्ट्रीय आत्म-चेतना के विकास के लिए सभी स्थितियां बनाई गई थीं। मार्क्सवादी सिद्धांत ने सभी लोगों के "फूल और अभिसरण" का अनुमान लगाया। क्षेत्र में, स्थानीय कैदियों में पारंपरिक कैडरों का पारंपरिक रूप से चयन किया गया है, स्कूलों में, गणराज्य की राज्य भाषाओं को अनिवार्य रूप से आदेश दिया गया था, लोक संगीत लगातार टेलीविजन और रेडियो पर प्रसारित किया गया था। औद्योगिक और पिछड़े क्षेत्रों की सहायता के लिए विशेषज्ञों और शिक्षकों को भेजा गया था। 1 9 3 9 में, यूक्रेन और इसकी आबादी का क्षेत्र पोलैंड से दूर फेंकने वाले पश्चिमी क्षेत्रों के कारण उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया। "Svidomye" क्या है इसके बारे में जानने के लिए पोल्स पहले थे। उन्हें सोवियत अधिकारियों के समक्ष लंबे समय से राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के संघर्ष की समस्या का सामना करना पड़ा। इन प्रक्रियाओं के साथ पारस्परिक संघर्ष और आतंक के साथ थे। यूक्रेनी भूमिगत का लक्ष्य पोलैंड को उत्पीड़न से मुक्त करना था, जिसमें भाषा (मसोव) और धार्मिक रूढ़िवादी संस्कारों का उत्पीड़न शामिल था। राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन ने पूर्व युद्ध की अवधि में एक भयंकर चरित्र हासिल किया और द्वितीय विश्व युद्ध में अपने अपॉजी पहुंचे, लगभग पूरे युद्ध-युद्ध के दशक को पकड़ लिया। एक ठेठ यूक्रेनी दिखने की तरह क्या करता है? अब उन लोगों को स्पष्ट करने का समय है जिनके पास स्वामित्व नहीं है"मूव", अनुवादित "svidomy" के रूप में। रूसी में इस शब्द का अर्थ है "जागरूक"। यह बाहरी रूपों सहित विभिन्न तरीकों से व्यक्त किया जाता है, जिसमें सबसे ज्वलंत राष्ट्रीय संकेत प्रकाश में आते हैं। ड्रेस शैली दो मुख्य रेखाओं पर जोर देती हैः यूरोपीय (आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं की एक जोड़ी) और यूक्रेनी (पैटर्न में काले और लाल रंगों के साथ कढ़ाई शर्ट, कढ़ाई)। मजबूत लिंग के प्रतिनिधियों ने अपने चेहरों को मूंछों से सजाने के लिए, जिनके किनारों को कम किया जाता है और कम बार-बार - एक ओसेलडेटेम द्वारा, जो एक लंबा चब है। लेकिन यह सब कुछ नहीं है - मुख्य बात नहीं। यूएसएसआर में, यूक्रेनी राष्ट्रवाद को दबा दिया गया था, लेकिन नहींहरा दिया। राष्ट्रपति Yushchenko के शासनकाल के दौरान, वह राज्य नीति के पद पर चढ़ाया गया था। यूक्रेन की राज्य संप्रभुता का अर्थ देश के दूसरे नेता, एलडी कुचमा की पुस्तक के शीर्षक में है - "यूक्रेन रूस नहीं है"।
"Svidomye" क्या है और इस शब्द का अनुवाद कैसे किया जाता है? "Svidomost" की अवधारणा व्यापक रूप से थीबीसवीं सदी के देर से अस्सी के दशक में प्रसार, विशेष रूप से राष्ट्रीय चेतना का तेजी से विकास की अवधि के दौरान - सोवियत संघ के गणराज्यों संघ के स्वदेशी आबादी के बीच । विशाल देश के असली संरक्षक, जिसका क्षेत्र के सबसे पियक्कड़ और idlers का निवास है - थोड़ा-थोड़ा, और कभी कभी काफी खुलकर Kazakhs, Moldovans, लिथुआनिया, उज़बेक, बेलारूसी और यूक्रेनियन भी विचार है कि वे instills। एक सामाजिक घटना के रूप में "svidomye Ukrainians" के बारे में, और चर्चा की जाएगी। किसी भी राष्ट्रवाद का सार काफी भीतर हैएक साधारण वाक्यांश है कि एक जातीय समूह के प्रतिनिधि के जन्म का केवल तथ्य वरीयता प्रदान करता है, बशर्ते कि यह अपने क्षेत्र में हुआ। रूसी साम्राज्य के अस्तित्व के दौरान, संस्कृतियों और जीनोटाइपों पर आपसी भेदभाव थे, लेकिन ये प्रक्रियाएं धीमी थीं। कुछ राष्ट्रीय प्रांतों ने इस तरह के व्यापक स्वायत्तता अधिकारों का आनंद लिया कि वे लगभग पूरी तरह से monoethnicity बनाए रखने में कामयाब रहे । रूस के इतिहास में कोई भी देश, अपने क्षेत्र में रहने वाले, ने अपनी राष्ट्रीय विशेषताओं, भाषा और संस्कृति को खो दिया नहीं है, उदाहरण के लिए, ब्रिटेन - महान शक्ति के वर्षों में - कई गुलामों को नष्ट कर दिया। रूस में राष्ट्रवाद अधिकांश उपनगरों की पुरानी पिछड़ेपन और त्सारिस्ट सरकार द्वारा की गई खेती के लिए किए जा रहे भारी प्रयासों के कारण अलोकप्रिय था। तो "svidomye" क्या है और उत्पीड़ित लोगों के सचेत प्रतिनिधियों से कहाँ से आया? सोवियत यूक्रेन के निर्माण के बाद इसके क्षेत्र मेंउसी राष्ट्रीय नीति को पूरे यूएसएसआर में किया गया था। सोवियत काल में, जातीय होमोज़ाइजेशन की प्रक्रिया तेजी से बढ़ी, इस तथ्य के बावजूद कि राष्ट्रीय आत्म-चेतना के विकास के लिए सभी स्थितियां बनाई गई थीं। मार्क्सवादी सिद्धांत ने सभी लोगों के "फूल और अभिसरण" का अनुमान लगाया। क्षेत्र में, स्थानीय कैदियों में पारंपरिक कैडरों का पारंपरिक रूप से चयन किया गया है, स्कूलों में, गणराज्य की राज्य भाषाओं को अनिवार्य रूप से आदेश दिया गया था, लोक संगीत लगातार टेलीविजन और रेडियो पर प्रसारित किया गया था। औद्योगिक और पिछड़े क्षेत्रों की सहायता के लिए विशेषज्ञों और शिक्षकों को भेजा गया था। एक नौ तीन नौ में, यूक्रेन और इसकी आबादी का क्षेत्र पोलैंड से दूर फेंकने वाले पश्चिमी क्षेत्रों के कारण उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया। "Svidomye" क्या है इसके बारे में जानने के लिए पोल्स पहले थे। उन्हें सोवियत अधिकारियों के समक्ष लंबे समय से राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के संघर्ष की समस्या का सामना करना पड़ा। इन प्रक्रियाओं के साथ पारस्परिक संघर्ष और आतंक के साथ थे। यूक्रेनी भूमिगत का लक्ष्य पोलैंड को उत्पीड़न से मुक्त करना था, जिसमें भाषा और धार्मिक रूढ़िवादी संस्कारों का उत्पीड़न शामिल था। राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन ने पूर्व युद्ध की अवधि में एक भयंकर चरित्र हासिल किया और द्वितीय विश्व युद्ध में अपने अपॉजी पहुंचे, लगभग पूरे युद्ध-युद्ध के दशक को पकड़ लिया। एक ठेठ यूक्रेनी दिखने की तरह क्या करता है? अब उन लोगों को स्पष्ट करने का समय है जिनके पास स्वामित्व नहीं है"मूव", अनुवादित "svidomy" के रूप में। रूसी में इस शब्द का अर्थ है "जागरूक"। यह बाहरी रूपों सहित विभिन्न तरीकों से व्यक्त किया जाता है, जिसमें सबसे ज्वलंत राष्ट्रीय संकेत प्रकाश में आते हैं। ड्रेस शैली दो मुख्य रेखाओं पर जोर देती हैः यूरोपीय और यूक्रेनी । मजबूत लिंग के प्रतिनिधियों ने अपने चेहरों को मूंछों से सजाने के लिए, जिनके किनारों को कम किया जाता है और कम बार-बार - एक ओसेलडेटेम द्वारा, जो एक लंबा चब है। लेकिन यह सब कुछ नहीं है - मुख्य बात नहीं। यूएसएसआर में, यूक्रेनी राष्ट्रवाद को दबा दिया गया था, लेकिन नहींहरा दिया। राष्ट्रपति Yushchenko के शासनकाल के दौरान, वह राज्य नीति के पद पर चढ़ाया गया था। यूक्रेन की राज्य संप्रभुता का अर्थ देश के दूसरे नेता, एलडी कुचमा की पुस्तक के शीर्षक में है - "यूक्रेन रूस नहीं है"।
मुंबई, (भाषा)। अपने खुद के घर में रहने के सपने को साकार करते हुए महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर आज बांदा के पैरी क्रास रोड स्थित भव्य बंगले में रहने चले गये। बांदा पश्चिम की ला मेर हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले तेंदुलकर 6000 वर्ग फीट से अधिक में फैले विला में रहने चले गये। तेंदुलकर ने आज यहां अपने विला के बाहर संवाददाताओं से कहा, सभी का सपना होता है कि उसका एक मकान हो। मेरा भी यह सपना था। मैं खुश हूं कि मैं इसे साकार करने में सफल रहा। मैं पहले जिस फ्लैट में रह रहा था वह मुझे खेल कोटे के अंतर्गत मिला था। मैंने अब वह जगह छोड़ दी है जिससे कि कोई और खिलाड़ी वहां रह सके। इस अनुभवी क्रिकेटर ने कहा, मेरे इंग्लैंड के लिए रवाना होने से पहले हमने 11 जून को गृह शांति और वास्तु पूजा कराई थी। इसके बाद मैं मुंबई नहीं जा पाया लेकिन अब मैं शहर में हूं और आज मैं अपनी मां को यह जगह दिखाने लाया हूं। उन्होंने कहा, मैं पूजा के बाद भी यहां रहा था लेकिन मैं अब तक बच्चों को यहां नहीं ला पाया हूं। तेंदुलकर ने यह मकान उस जमीन पर बनाया है जहां पहले एक पुराना बंगला था। उन्होंने 2007 में यह जमीन 39 करोड़ रुपये में खरीदी थी। जमीन के उढपर यह विला तीन मंजिला है जबकि कथित तौर पर इसमें दो बेसमेंट भी हैं। तेंदुलकर के करीबी सूत्रों ने बताया कि घर में स्थानांतरित होने की 90 प्रतिशत प्रक्रिया पूरी हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि के अपना बैडरूम उढपरी मंजिल पर रखने की संभावना है जबकि नीचे की दो मंजिल पर बेटे अर्जुन और बेटी सारा के कमरों के अलावा मेहमानों के लिए कमरा होगा। भूतल पर मंदिर, ड्राइंग रूम और डाइनिंग रूम के अलावा तेंदुलकर द्वारा जीते विभिन्न पुरस्कारों और ट्राफियों को रखने का इंतजाम होगा। पहले बेसमेंट में कर्मचारियों को रखने की व्यवस्था के अलावा निगरानी कक्ष होगा जबकि दूसरे बेसमेंट में तेंदुलकर की कारें को रखने की व्यवस्था होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा मकान की छत पर एक स्वीमिंग पूल भी है। तेंदुलकर फिलहाल पैर के अंगू"s की चोट के कारण क्रिकेट से दूर हैं। वह इंग्लैंड के खिलाफ पांच वनडे मैचों की श्रृंखला में नहीं खेल पाये जबकि मौजूदा चैम्पियन्स लीग में भी नहीं खेल रहे। चोटों की स्थिति के बारे में पूछने पर तेंदुलकर ने हालांकि कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। तेंदुलकर के मीडिया से बात करने से "ाrक पहले हालांकि अव्यवस्था छा गई जब उनकी एक झलक पाने के लिए उनके नये विला के बाहर बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई जिसमें पांच से आ" साल के स्कूली बच्चे भी शामिल थे। इसी अव्यवस्था के बीच कुछ बच्चों को हल्की चोटें भी लगी। इससे पहले सुबह महाराष्ट्र आवामी वेल्फेयर संघ और तेंदुलकर के विला के सामने की हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के बीच इस चैम्पियन क्रिकेट के स्वागत में बैनर लगाने को लेकर बहस भी हुई। बाद में हालांकि यह मामला सुलझा लिया गया और बैनर को लगाया गया।
मुंबई, । अपने खुद के घर में रहने के सपने को साकार करते हुए महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर आज बांदा के पैरी क्रास रोड स्थित भव्य बंगले में रहने चले गये। बांदा पश्चिम की ला मेर हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले तेंदुलकर छः हज़ार वर्ग फीट से अधिक में फैले विला में रहने चले गये। तेंदुलकर ने आज यहां अपने विला के बाहर संवाददाताओं से कहा, सभी का सपना होता है कि उसका एक मकान हो। मेरा भी यह सपना था। मैं खुश हूं कि मैं इसे साकार करने में सफल रहा। मैं पहले जिस फ्लैट में रह रहा था वह मुझे खेल कोटे के अंतर्गत मिला था। मैंने अब वह जगह छोड़ दी है जिससे कि कोई और खिलाड़ी वहां रह सके। इस अनुभवी क्रिकेटर ने कहा, मेरे इंग्लैंड के लिए रवाना होने से पहले हमने ग्यारह जून को गृह शांति और वास्तु पूजा कराई थी। इसके बाद मैं मुंबई नहीं जा पाया लेकिन अब मैं शहर में हूं और आज मैं अपनी मां को यह जगह दिखाने लाया हूं। उन्होंने कहा, मैं पूजा के बाद भी यहां रहा था लेकिन मैं अब तक बच्चों को यहां नहीं ला पाया हूं। तेंदुलकर ने यह मकान उस जमीन पर बनाया है जहां पहले एक पुराना बंगला था। उन्होंने दो हज़ार सात में यह जमीन उनतालीस करोड़ रुपये में खरीदी थी। जमीन के उढपर यह विला तीन मंजिला है जबकि कथित तौर पर इसमें दो बेसमेंट भी हैं। तेंदुलकर के करीबी सूत्रों ने बताया कि घर में स्थानांतरित होने की नब्बे प्रतिशत प्रक्रिया पूरी हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि के अपना बैडरूम उढपरी मंजिल पर रखने की संभावना है जबकि नीचे की दो मंजिल पर बेटे अर्जुन और बेटी सारा के कमरों के अलावा मेहमानों के लिए कमरा होगा। भूतल पर मंदिर, ड्राइंग रूम और डाइनिंग रूम के अलावा तेंदुलकर द्वारा जीते विभिन्न पुरस्कारों और ट्राफियों को रखने का इंतजाम होगा। पहले बेसमेंट में कर्मचारियों को रखने की व्यवस्था के अलावा निगरानी कक्ष होगा जबकि दूसरे बेसमेंट में तेंदुलकर की कारें को रखने की व्यवस्था होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा मकान की छत पर एक स्वीमिंग पूल भी है। तेंदुलकर फिलहाल पैर के अंगू"s की चोट के कारण क्रिकेट से दूर हैं। वह इंग्लैंड के खिलाफ पांच वनडे मैचों की श्रृंखला में नहीं खेल पाये जबकि मौजूदा चैम्पियन्स लीग में भी नहीं खेल रहे। चोटों की स्थिति के बारे में पूछने पर तेंदुलकर ने हालांकि कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। तेंदुलकर के मीडिया से बात करने से "ाrक पहले हालांकि अव्यवस्था छा गई जब उनकी एक झलक पाने के लिए उनके नये विला के बाहर बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई जिसमें पांच से आ" साल के स्कूली बच्चे भी शामिल थे। इसी अव्यवस्था के बीच कुछ बच्चों को हल्की चोटें भी लगी। इससे पहले सुबह महाराष्ट्र आवामी वेल्फेयर संघ और तेंदुलकर के विला के सामने की हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों के बीच इस चैम्पियन क्रिकेट के स्वागत में बैनर लगाने को लेकर बहस भी हुई। बाद में हालांकि यह मामला सुलझा लिया गया और बैनर को लगाया गया।
नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर ने दिल्ली में हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। गौतम गंभीर ने कहा है कि जिसने भी भड़काऊ बयान दिए हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी नेता कपिल मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ को भड़काने का ब यान दिया है। गौतम गंभीर से जब कपिल मिश्रा के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिसने भी भड़काने वाले बयान दिए हैं उनके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। चाहे वह कपिल मिश्रा हो या कोई और, किसी भी पार्टी से हो, अगर उसने कोई भड़काऊ भाषण देता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जो कार्रवाई होगी मैं उसके साथ हूं। दिल्ली के उत्तर पश्चिम क्षेत्र के कई इलाकों सोमवार से हिंसा की खबरें आ रही हैं, हिंसा में एक पुलिस कॉन्स्टेबल सहित 7 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में हिंसा से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल और सभी सांसदों को गृह मंत्रालय में बैठक के लिए बुलाया है।
नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर ने दिल्ली में हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। गौतम गंभीर ने कहा है कि जिसने भी भड़काऊ बयान दिए हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी नेता कपिल मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ को भड़काने का ब यान दिया है। गौतम गंभीर से जब कपिल मिश्रा के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "जिसने भी भड़काने वाले बयान दिए हैं उनके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। चाहे वह कपिल मिश्रा हो या कोई और, किसी भी पार्टी से हो, अगर उसने कोई भड़काऊ भाषण देता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जो कार्रवाई होगी मैं उसके साथ हूं। दिल्ली के उत्तर पश्चिम क्षेत्र के कई इलाकों सोमवार से हिंसा की खबरें आ रही हैं, हिंसा में एक पुलिस कॉन्स्टेबल सहित सात लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में हिंसा से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल और सभी सांसदों को गृह मंत्रालय में बैठक के लिए बुलाया है।
बांध जावे, उसे पसंद ही नहीं जब चाहती, तब वह रोना भी आरंभ कर देती थी । सभी बातों में उसका यही हाल था । जब कभी उसका मन प्रसन्न होता, तब उसे किसी बात को मानने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होती थी । उस समय वह माँ से लिपट कर बहुत अधिक मात्रा में प्यार प्रदर्शित करती हुई हँसकर बातें करती और उन्हें बहुत परेशान कर डालती थी । वास्तव में यह छोटी सी लड़की एक कठिन पहेली की भाँति थी । यह लड़की अपने बन्धन रहित हृदय के सम्पूर्ण वेग का प्रयोग करके मन ही मन ताराचंद को कोसने और मारने लगी । उसने माता-पिता को भी हर प्रकार से परेशान कर डाला । घर की नौकरानियों को मारने लगी । खाते समय रूठकर थाली फेंक देती । सभी बातों में बेमतलब शिकायत कर उठी । ताराचंद की विद्यायें अन्य जब लोगों का जितना मनोरंजन करतीं, उतना ही अधिक उसका गुस्सा बढ़ने लगता । चारुशशि को यह मानना उचित नहीं लगता था कि ताराचंद में कोई गुण है । ज्यों-ज्यों ताराचंद के गुणों का प्रमाण मिलता गया, त्यों-त्यों उसके मन का असंतोष भी बढ़ता चला गया । जिस दिन ताराचंद मे लव कुश का गीत गाया था उस दिन अन्नपूर्णा ने अपने मन में यह विचार किया था कि संगीत में वन के पशुओं को भी वश में कर लेने की शक्ति होती है, उसे सुनकर शायद आज मेरी लड़की का मन भी द्रवित हो गया होगा । यही विचार कर उन्होंने चारुशशि से पूछा- 'क्यों बिटिया ! तुम्हें यह गाना कैसा लगा ?" उनकी बात सुनकर चारु ने कोई स्पष्ट उत्तर न देकर जोर से अपना सिर हिला दिया । यदि उसके सिर हिलाने का भाषा में अनुवाद किया जाये तो निश्चित रूप से उससे यही मालूम होगा कि उसे वह संगीत न तो तनिक भी अच्छा लगा और न कभी लग ही सकता है ।
बांध जावे, उसे पसंद ही नहीं जब चाहती, तब वह रोना भी आरंभ कर देती थी । सभी बातों में उसका यही हाल था । जब कभी उसका मन प्रसन्न होता, तब उसे किसी बात को मानने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होती थी । उस समय वह माँ से लिपट कर बहुत अधिक मात्रा में प्यार प्रदर्शित करती हुई हँसकर बातें करती और उन्हें बहुत परेशान कर डालती थी । वास्तव में यह छोटी सी लड़की एक कठिन पहेली की भाँति थी । यह लड़की अपने बन्धन रहित हृदय के सम्पूर्ण वेग का प्रयोग करके मन ही मन ताराचंद को कोसने और मारने लगी । उसने माता-पिता को भी हर प्रकार से परेशान कर डाला । घर की नौकरानियों को मारने लगी । खाते समय रूठकर थाली फेंक देती । सभी बातों में बेमतलब शिकायत कर उठी । ताराचंद की विद्यायें अन्य जब लोगों का जितना मनोरंजन करतीं, उतना ही अधिक उसका गुस्सा बढ़ने लगता । चारुशशि को यह मानना उचित नहीं लगता था कि ताराचंद में कोई गुण है । ज्यों-ज्यों ताराचंद के गुणों का प्रमाण मिलता गया, त्यों-त्यों उसके मन का असंतोष भी बढ़ता चला गया । जिस दिन ताराचंद मे लव कुश का गीत गाया था उस दिन अन्नपूर्णा ने अपने मन में यह विचार किया था कि संगीत में वन के पशुओं को भी वश में कर लेने की शक्ति होती है, उसे सुनकर शायद आज मेरी लड़की का मन भी द्रवित हो गया होगा । यही विचार कर उन्होंने चारुशशि से पूछा- 'क्यों बिटिया ! तुम्हें यह गाना कैसा लगा ?" उनकी बात सुनकर चारु ने कोई स्पष्ट उत्तर न देकर जोर से अपना सिर हिला दिया । यदि उसके सिर हिलाने का भाषा में अनुवाद किया जाये तो निश्चित रूप से उससे यही मालूम होगा कि उसे वह संगीत न तो तनिक भी अच्छा लगा और न कभी लग ही सकता है ।
श्रीनगर, 8 फरवरी (आईएएनएस)। कश्मीर घाटी में बीती रात आसमान साफ रहने से न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई। वहीं, मौसम विभाग ने शुक्रवार तक मौसम की स्थिति में कोई परिवर्तन न होने की संभावना जताई है। मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, जम्मू एवं कश्मीर में अगले 24 घंटों तक मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 11 फरवरी की रात से बारिश व बर्फबारी हो सकती है। कश्मीर में इस बार मौसम शुष्क रहा है। राज्य में इस बार इस बात का डर बना हुआ है कि अगर इन सर्दियों के बाकी बचे दिनों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं होती तो गर्मियों के महीनों में राज्य को सूखे का सामना करना पड़ सकता है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से 1. 8 डिग्री नीचे जबकि पहलगाम में शून्य से 2. 2 डिग्री नीचे और गुलमर्ग में शून्य से 7. 1 नीचे डिग्री दर्ज किया गया। शून्य से 15 डिग्री कम तापमान के साथ कारगिल राज्य में सबसे ठंडा रहा। लेह का तापमान शून्य से 5. 8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ। जम्मू क्षेत्र में जम्मू शहर का तापमान 5. 6 डिग्री, कटरा में तापमान 6. 1 डिग्री, बटोटे में 2. 5 डिग्री, बनिहाल में शून्य से 0. 2 डिग्री नीचे, भदरवाह में 0. 8 डिग्री और उधमपुर में 1. 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
श्रीनगर, आठ फरवरी । कश्मीर घाटी में बीती रात आसमान साफ रहने से न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई। वहीं, मौसम विभाग ने शुक्रवार तक मौसम की स्थिति में कोई परिवर्तन न होने की संभावना जताई है। मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, जम्मू एवं कश्मीर में अगले चौबीस घंटाटों तक मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ग्यारह फरवरी की रात से बारिश व बर्फबारी हो सकती है। कश्मीर में इस बार मौसम शुष्क रहा है। राज्य में इस बार इस बात का डर बना हुआ है कि अगर इन सर्दियों के बाकी बचे दिनों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं होती तो गर्मियों के महीनों में राज्य को सूखे का सामना करना पड़ सकता है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से एक. आठ डिग्री नीचे जबकि पहलगाम में शून्य से दो. दो डिग्री नीचे और गुलमर्ग में शून्य से सात. एक नीचे डिग्री दर्ज किया गया। शून्य से पंद्रह डिग्री कम तापमान के साथ कारगिल राज्य में सबसे ठंडा रहा। लेह का तापमान शून्य से पाँच. आठ डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ। जम्मू क्षेत्र में जम्मू शहर का तापमान पाँच. छः डिग्री, कटरा में तापमान छः. एक डिग्री, बटोटे में दो. पाँच डिग्री, बनिहाल में शून्य से शून्य. दो डिग्री नीचे, भदरवाह में शून्य. आठ डिग्री और उधमपुर में एक. सात डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
झांसी में मुस्तरा-टांकोरी रोड पर मंगलवार रात को दो बाइकों की भिड़ंत में 3 युवकों की मौत हो गई। जबकि एक युवक घायल हो गया। हालत गंभीर देखते हुए उसको ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बता दें कि हादसे में दो घायलों की अस्पताल लाते वक्त मौत हो गई थी। जबकि तीसरे घायल ने बुधवार को ग्वालियर में दम तोड़ दिया। बड़ागांव के गांधीनगर निवासी लवकुश (26) कारीगर था। वह मंगलवार रात को अपनी साइट से काम पूरा कर बाइक से वापस लौट रहा था। रास्ते में उसे पहलगुवां निवासी कल्याण सिंह (44) मिल गया। वह उसके साथ बाइक पर सवार हो गया। जबकि, दूसरी बाइक से पालर निवासी प्रशांत (22) अपने बहनोई सुरेंद्र उर्फ सरकार (35) को छोड़ने जा रहा था। मुस्तरा-टांकोरी रोड पर दोनों बाइकों के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में चारों घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां लवकुश व प्रशांत को मृत घोषित कर दिया गया। हालत गंभीर होने पर कल्याण सिंह और सुरेंद्र को ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बुधवार को कल्याण सिंह की मौत हो गई। लवकुश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो साल पहले नैना से शादी हुई थी। उनके एक साल का बेटा कार्तिक है। उसकी मां पार्वती की 6 साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। जबकि 3 साल पहले उसके भाई ने आत्महत्या कर ली थी, जबकि दूसरे भाई की टीबी की बीमारी से मौत हो गई थी। लवकुश के पिता कोमल दिव्यांग है। लवकुश पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। सुरेंद्र गाय लेकर ससुराल पालर आए थे। मंगलवार को साला प्रशांत उनको बाइक से छोड़ने झांसी आ रहा था। रास्ते में हुए एक्सीडेंट में प्रशांत की मौत हो गई। प्रशांत के पिता घनाराम की करीब 4 माह पहले कैंसर की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। दो भाइयों में प्रशांत सबसे बड़ा था और मजदूरी करके परिवार का पालन कर रहा था। उसकी ढाई साल पहले जयंती से शादी हुई थी। उनकी एक साल की बेटी माही है। प्रशांत से छोटा भाई आकाश भी मजदूरी करता है। बुधवार को कल्याण की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। कल्याण मजदूरी करता था। वह बड़ी बेटी वंदना और बेटे अरुण की शादी कर चुके थे। सबसे छोटे रोहित की शादी तय हो गई थी। अगले साल उसकी शादी होनी थी। शादी से पहले पिता की मौत हो गई। ग्वालियर में पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंच गया। शव देखकर पत्नी अवधा बेसुध हो गईं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
झांसी में मुस्तरा-टांकोरी रोड पर मंगलवार रात को दो बाइकों की भिड़ंत में तीन युवकों की मौत हो गई। जबकि एक युवक घायल हो गया। हालत गंभीर देखते हुए उसको ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बता दें कि हादसे में दो घायलों की अस्पताल लाते वक्त मौत हो गई थी। जबकि तीसरे घायल ने बुधवार को ग्वालियर में दम तोड़ दिया। बड़ागांव के गांधीनगर निवासी लवकुश कारीगर था। वह मंगलवार रात को अपनी साइट से काम पूरा कर बाइक से वापस लौट रहा था। रास्ते में उसे पहलगुवां निवासी कल्याण सिंह मिल गया। वह उसके साथ बाइक पर सवार हो गया। जबकि, दूसरी बाइक से पालर निवासी प्रशांत अपने बहनोई सुरेंद्र उर्फ सरकार को छोड़ने जा रहा था। मुस्तरा-टांकोरी रोड पर दोनों बाइकों के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में चारों घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां लवकुश व प्रशांत को मृत घोषित कर दिया गया। हालत गंभीर होने पर कल्याण सिंह और सुरेंद्र को ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बुधवार को कल्याण सिंह की मौत हो गई। लवकुश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो साल पहले नैना से शादी हुई थी। उनके एक साल का बेटा कार्तिक है। उसकी मां पार्वती की छः साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। जबकि तीन साल पहले उसके भाई ने आत्महत्या कर ली थी, जबकि दूसरे भाई की टीबी की बीमारी से मौत हो गई थी। लवकुश के पिता कोमल दिव्यांग है। लवकुश पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। सुरेंद्र गाय लेकर ससुराल पालर आए थे। मंगलवार को साला प्रशांत उनको बाइक से छोड़ने झांसी आ रहा था। रास्ते में हुए एक्सीडेंट में प्रशांत की मौत हो गई। प्रशांत के पिता घनाराम की करीब चार माह पहले कैंसर की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। दो भाइयों में प्रशांत सबसे बड़ा था और मजदूरी करके परिवार का पालन कर रहा था। उसकी ढाई साल पहले जयंती से शादी हुई थी। उनकी एक साल की बेटी माही है। प्रशांत से छोटा भाई आकाश भी मजदूरी करता है। बुधवार को कल्याण की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। कल्याण मजदूरी करता था। वह बड़ी बेटी वंदना और बेटे अरुण की शादी कर चुके थे। सबसे छोटे रोहित की शादी तय हो गई थी। अगले साल उसकी शादी होनी थी। शादी से पहले पिता की मौत हो गई। ग्वालियर में पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंच गया। शव देखकर पत्नी अवधा बेसुध हो गईं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- "जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन ही लोकतंत्र है" अब्राहम लिंकन की यह प्रसिद्ध उक्ति लोकतंत्र की सबसे सरल और प्रचलित परिभाषा मानी जाती है। गौरतलब है कि लोकतंत्र की इस व्यवस्था में मालिकाना हक़ तो जनता का ही है लेकिन जिस तरह से जनता के प्रतिनिधि चुने जाते हैं उसे लेकर असंतोष ज़ाहिर किया जाता रहा है। - लोकतंत्र के महापर्व यानी चुनावों में यदि जनता को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आता हो फिर भी वह यह समझकर मतदान करता है कि दो बुरे उम्मीदवारों में से जो कम बुरा है उसके पक्ष में मतदान किया जाए तो निश्चित ही यह लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत नहीं है। - क्या हमारी व्यवस्था ऐसा उम्मीदवार नहीं दे सकती जो जनता के हित और कल्याण के लिये प्रतिबद्ध हो, मान लिया जाए कि किन्हीं परिस्थितियों में कोई भी सुयोग्य उम्मीदवार नज़र नहीं आता तो अब जनता क्या करे? इस सवाल को लेकर बहुत लम्बे समय तक बहस चलती रही। - अंततः नोटा (none of the above-NOTA) के रूप में इसका समाधान प्रस्तुत किया गया। लेकिन क्या नोटा लोकतंत्र में जनता के मालिकाना हक को कायम रखने में सफल रहा है, या सफल रहेगा? यह अभी भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है। अतः इस आलेख में नोटा की सम्भावनाओं के संबंध में चर्चा करना दिलचस्प होगा। क्या है नोटा? - भारत में नोटा पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 2013 में दिये गए एक आदेश के बाद शुरू हुआ, विदित हो कि पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ बनाम भारत सरकार मामले में शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया कि जनता को मतदान के लिये नोटा का भी विकल्प उपलब्ध कराया जाए। इस आदेश के बाद भारत नकारात्मक मतदान का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का 14वाँ देश बन गया। नोटा के तहत ईवीएम मशीन में नोटा (NONE OF THE ABOVE-NOTA) का गुलाबी बटन होता है। यदि पार्टियाँ ग़लत उम्मीदवार देती हैं तो नोटा का बटन दबाकर पार्टियों के प्रति जनता अपना विरोध दर्ज करा सकती है। - विदित हो कि नोटा के लागू होने के बाद से अब तक एक लोक सभा चुनाव और चार दौर के विधान सभा चुनाव हो चुके हैं फिर भी नोटा के तहत किये गए मतदान का प्रतिशत 2.02 से आगे नहीं बढ़ा है, दरअसल अभी भी लोगों में नोटा को लेकर जागरूकता का अभाव है। - नोटा लागू होने के उपरांत हुए लोक सभा और विधानसभा चुनावों के दौरान होने वाले कुल मतदान के आँकड़ों का अध्ययन करें तो कुछ दिलचस्प आँकड़े सामने आते हैं जैसे- नोटा के अंतर्गत मतदान का प्रतिशत उन जगहों में अधिक रहा है जो नक्सलवाद से प्रभावित इलाके हैं या फिर आरक्षित चुनाव क्षेत्र हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि चुनाव क्षेत्रों को आरक्षित करने के सन्दर्भ में अभी भी सामाजिक सहभागिता का अभाव है और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में राजनैतिक दलों को लेकर अभी भी उतनी दिलचस्पी नहीं पैदा हुई है। - एक और संकेत यह देखने को मिला है कि जहाँ केवल दो मुख्य राजनैतिक दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे वहाँ भी नोटा के तहत मतदान का प्रतिशत अधिक है। निष्कर्षतः हम कह सकते हैं, लोग चुनावों में क्षेत्रीय दलों को बड़ी भूमिका में देखना चाहते हैं। हालाँकि ये आँकड़े अभी तक एक से अधिक स्रोतों के माध्यम से नहीं आए हैं अतः यह देखना होगा कि नोटा के संबंध में भविष्य में आने वाले अन्य आँकड़ों का रुझान क्या है? नोटा आवश्यक क्यों? - विदित हो कि नोटा की माँग का उद्देश्य यह था कि लोकतंत्र में जनता के मालिकाना हक़ को सुनिश्चित किया जाए। यह जनप्रतिनिधियों को निरंकुश न होने, उन्हें उनके दायित्यों के प्रति ईमानदार बनाए रखने की कारगर व्यवस्था हो सकती है। जनता को उम्मीदवारों को नकारने का विकल्प देना इस बात का परिचायक है कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। - गौरतलब है कि बहुत से लोग किसी भी उम्मीदवार को सही नहीं मानते हुए मतदान नहीं करना चाहते फिर भी वे इसलिये ऐसा करते हैं कि कहीं उनकी जगह कोई दूसरा मतदान न कर दे, पहले उन्हें विवश होकर किसी न किसी को मत देना ही पड़ता था लेकिन नोटा आने के बाद ऐसे लोगों को विकल्प मिल गया है। नोटा होना न होना एक समान क्यों? - सैद्धांतिक तौर पर तो नोटा एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर यह वांछित परिणाम देने में उतना सफल प्रतीत नहीं हो रहा है। दरअसल, यदि नोटा के अंतर्गत पड़े मत का प्रतिशत, किसी अन्य उम्मीदवार को मिले मत के प्रतिशत से अधिक हो तब भी अन्य सभी उम्मीदवारों में जो सबसे आगे होगा वह विजयी घोषित कर दिया जाएगा। इस बिंदु पर कई विद्वान तो नोटा को लोकतंत्र के महापर्व में सिस्टम की तरफ से जनता को बाँटा गया झुनझुना तक की संज्ञा दे डालते हैं। - यदि लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करनी है तो चुनाव सुधार पहला प्रयास होना चाहिये। दरअसल, जनता यदि अपने प्रतिनिधियों से असंतुष्ट है तो अगले चुनावों में उन्हें सबक सिखा सकती है, चुनाव तो 5 साल में एक बार आते हैं अतः जनता के पास 'राईट तो रिकाल' के तहत उन्हें समय से पहले वापस बुलाने का भी अधिकार है, लेकिन समस्या यह है कि कई बार ऐसी परिस्थितियाँ बन जाती हैं जब जनता को लगता है कि सारे ही उम्मीदवार अयोग्य हैं, फिर भी किसी न किसी का जीतकर संसद या विधान भवन में पहुँच जाना निश्चित ही नोटा के मूल उद्देश्य के सापेक्ष नज़र नहीं आता। - हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को आवश्यक बनाए जाने के अपने आदेश में केवल इस पहलू पर गौर किया था कि यदि जनता को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आता है तो वह क्या करे। लेकिन यह सवाल भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि यदि नोटा को किसी भी उम्मीदवार से अधिक मत मिलने की सूरत में क्या किया जाए? मद्रास उच्च न्यायलय में नोटा के तहत सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। हालाँकि मसला केवल न्यायपालिका के ही दायित्व का नहीं है, विधायिका को भी नोटा को व्यवहारिक बनाए जाने के संबंध में प्रयास करना चाहिये। - विकास या बेहतरी में अवरोध उत्पन्न होते ही जनता बिदकती है और राजनैतिक दलों का किला ढहने लगता है लेकिन जाति और धर्म को मिलाकर बनाए गए सीमेंट से इस किले की मरम्मत कर दी जाती है। जागरूक मतदाता यह सोचता है कि वह किसी को भी मत नहीं देगा और वह नोटा का बटन दबा आता है, जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर इससे होता तो कुछ भी नहीं है, हाँ हमलोगों को यह निष्कर्ष निकालने का मौका ज़रूर मिल जाता है कि किसी स्थान विशेष पर नोटा के अंतर्गत हुए मतदान के निहितार्थ क्या हैं? नोटा की पृष्ठभूमि में यह सब कब तक चलता रहेगा? नोटा, स्वाभाविक तौर पर भी अपना अगला चरण तो तलाशेगा ही।
- "जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन ही लोकतंत्र है" अब्राहम लिंकन की यह प्रसिद्ध उक्ति लोकतंत्र की सबसे सरल और प्रचलित परिभाषा मानी जाती है। गौरतलब है कि लोकतंत्र की इस व्यवस्था में मालिकाना हक़ तो जनता का ही है लेकिन जिस तरह से जनता के प्रतिनिधि चुने जाते हैं उसे लेकर असंतोष ज़ाहिर किया जाता रहा है। - लोकतंत्र के महापर्व यानी चुनावों में यदि जनता को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आता हो फिर भी वह यह समझकर मतदान करता है कि दो बुरे उम्मीदवारों में से जो कम बुरा है उसके पक्ष में मतदान किया जाए तो निश्चित ही यह लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत नहीं है। - क्या हमारी व्यवस्था ऐसा उम्मीदवार नहीं दे सकती जो जनता के हित और कल्याण के लिये प्रतिबद्ध हो, मान लिया जाए कि किन्हीं परिस्थितियों में कोई भी सुयोग्य उम्मीदवार नज़र नहीं आता तो अब जनता क्या करे? इस सवाल को लेकर बहुत लम्बे समय तक बहस चलती रही। - अंततः नोटा के रूप में इसका समाधान प्रस्तुत किया गया। लेकिन क्या नोटा लोकतंत्र में जनता के मालिकाना हक को कायम रखने में सफल रहा है, या सफल रहेगा? यह अभी भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है। अतः इस आलेख में नोटा की सम्भावनाओं के संबंध में चर्चा करना दिलचस्प होगा। क्या है नोटा? - भारत में नोटा पहली बार सुप्रीम कोर्ट के दो हज़ार तेरह में दिये गए एक आदेश के बाद शुरू हुआ, विदित हो कि पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ बनाम भारत सरकार मामले में शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया कि जनता को मतदान के लिये नोटा का भी विकल्प उपलब्ध कराया जाए। इस आदेश के बाद भारत नकारात्मक मतदान का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का चौदहवाँ देश बन गया। नोटा के तहत ईवीएम मशीन में नोटा का गुलाबी बटन होता है। यदि पार्टियाँ ग़लत उम्मीदवार देती हैं तो नोटा का बटन दबाकर पार्टियों के प्रति जनता अपना विरोध दर्ज करा सकती है। - विदित हो कि नोटा के लागू होने के बाद से अब तक एक लोक सभा चुनाव और चार दौर के विधान सभा चुनाव हो चुके हैं फिर भी नोटा के तहत किये गए मतदान का प्रतिशत दो.दो से आगे नहीं बढ़ा है, दरअसल अभी भी लोगों में नोटा को लेकर जागरूकता का अभाव है। - नोटा लागू होने के उपरांत हुए लोक सभा और विधानसभा चुनावों के दौरान होने वाले कुल मतदान के आँकड़ों का अध्ययन करें तो कुछ दिलचस्प आँकड़े सामने आते हैं जैसे- नोटा के अंतर्गत मतदान का प्रतिशत उन जगहों में अधिक रहा है जो नक्सलवाद से प्रभावित इलाके हैं या फिर आरक्षित चुनाव क्षेत्र हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि चुनाव क्षेत्रों को आरक्षित करने के सन्दर्भ में अभी भी सामाजिक सहभागिता का अभाव है और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में राजनैतिक दलों को लेकर अभी भी उतनी दिलचस्पी नहीं पैदा हुई है। - एक और संकेत यह देखने को मिला है कि जहाँ केवल दो मुख्य राजनैतिक दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे वहाँ भी नोटा के तहत मतदान का प्रतिशत अधिक है। निष्कर्षतः हम कह सकते हैं, लोग चुनावों में क्षेत्रीय दलों को बड़ी भूमिका में देखना चाहते हैं। हालाँकि ये आँकड़े अभी तक एक से अधिक स्रोतों के माध्यम से नहीं आए हैं अतः यह देखना होगा कि नोटा के संबंध में भविष्य में आने वाले अन्य आँकड़ों का रुझान क्या है? नोटा आवश्यक क्यों? - विदित हो कि नोटा की माँग का उद्देश्य यह था कि लोकतंत्र में जनता के मालिकाना हक़ को सुनिश्चित किया जाए। यह जनप्रतिनिधियों को निरंकुश न होने, उन्हें उनके दायित्यों के प्रति ईमानदार बनाए रखने की कारगर व्यवस्था हो सकती है। जनता को उम्मीदवारों को नकारने का विकल्प देना इस बात का परिचायक है कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। - गौरतलब है कि बहुत से लोग किसी भी उम्मीदवार को सही नहीं मानते हुए मतदान नहीं करना चाहते फिर भी वे इसलिये ऐसा करते हैं कि कहीं उनकी जगह कोई दूसरा मतदान न कर दे, पहले उन्हें विवश होकर किसी न किसी को मत देना ही पड़ता था लेकिन नोटा आने के बाद ऐसे लोगों को विकल्प मिल गया है। नोटा होना न होना एक समान क्यों? - सैद्धांतिक तौर पर तो नोटा एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर यह वांछित परिणाम देने में उतना सफल प्रतीत नहीं हो रहा है। दरअसल, यदि नोटा के अंतर्गत पड़े मत का प्रतिशत, किसी अन्य उम्मीदवार को मिले मत के प्रतिशत से अधिक हो तब भी अन्य सभी उम्मीदवारों में जो सबसे आगे होगा वह विजयी घोषित कर दिया जाएगा। इस बिंदु पर कई विद्वान तो नोटा को लोकतंत्र के महापर्व में सिस्टम की तरफ से जनता को बाँटा गया झुनझुना तक की संज्ञा दे डालते हैं। - यदि लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करनी है तो चुनाव सुधार पहला प्रयास होना चाहिये। दरअसल, जनता यदि अपने प्रतिनिधियों से असंतुष्ट है तो अगले चुनावों में उन्हें सबक सिखा सकती है, चुनाव तो पाँच साल में एक बार आते हैं अतः जनता के पास 'राईट तो रिकाल' के तहत उन्हें समय से पहले वापस बुलाने का भी अधिकार है, लेकिन समस्या यह है कि कई बार ऐसी परिस्थितियाँ बन जाती हैं जब जनता को लगता है कि सारे ही उम्मीदवार अयोग्य हैं, फिर भी किसी न किसी का जीतकर संसद या विधान भवन में पहुँच जाना निश्चित ही नोटा के मूल उद्देश्य के सापेक्ष नज़र नहीं आता। - हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को आवश्यक बनाए जाने के अपने आदेश में केवल इस पहलू पर गौर किया था कि यदि जनता को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आता है तो वह क्या करे। लेकिन यह सवाल भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि यदि नोटा को किसी भी उम्मीदवार से अधिक मत मिलने की सूरत में क्या किया जाए? मद्रास उच्च न्यायलय में नोटा के तहत सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। हालाँकि मसला केवल न्यायपालिका के ही दायित्व का नहीं है, विधायिका को भी नोटा को व्यवहारिक बनाए जाने के संबंध में प्रयास करना चाहिये। - विकास या बेहतरी में अवरोध उत्पन्न होते ही जनता बिदकती है और राजनैतिक दलों का किला ढहने लगता है लेकिन जाति और धर्म को मिलाकर बनाए गए सीमेंट से इस किले की मरम्मत कर दी जाती है। जागरूक मतदाता यह सोचता है कि वह किसी को भी मत नहीं देगा और वह नोटा का बटन दबा आता है, जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर इससे होता तो कुछ भी नहीं है, हाँ हमलोगों को यह निष्कर्ष निकालने का मौका ज़रूर मिल जाता है कि किसी स्थान विशेष पर नोटा के अंतर्गत हुए मतदान के निहितार्थ क्या हैं? नोटा की पृष्ठभूमि में यह सब कब तक चलता रहेगा? नोटा, स्वाभाविक तौर पर भी अपना अगला चरण तो तलाशेगा ही।
अधिकारियों द्वारा बार-बार संकेत दिए जाने के बाद कि वे हथियारों का उपयोग कर सकते हैं, चीन और भारत में रूस के समर्थकों की मौन चेतावनी भी शुरू हो गई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ने की धमकी देने वाली योजना की घोषणा के तीन महीने बाद रूस ने बेलारूस को अपना पहला सामरिक परमाणु हथियार दिया है। "पहले परमाणु शुल्क बेलारूस के क्षेत्र में वितरित किए गए थे। लेकिन केवल पहला, "पुतिन ने शुक्रवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में कहा। "यह पहला भाग है। लेकिन गर्मियों के अंत तक, साल के अंत तक, हम इस काम को पूरा कर लेंगे। " ब्लिंकन ने वाशिंगटन में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमारे पास अपनी खुद की परमाणु मुद्रा को समायोजित करने का कोई कारण नहीं है। हमें ऐसा कोई संकेत नहीं दिखता है कि रूस परमाणु हथियार का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। " पुतिन ने मार्च में घोषणा की कि रूस अपने सहयोगी के क्षेत्र में सामरिक परमाणु हथियारों का आधार बनाएगा, जिसकी अमेरिका और यूरोपीय देशों ने आलोचना की थी। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से क्रेमलिन के अधिकारियों द्वारा बार-बार संकेत दिए जाने के बाद कि वे हथियारों का उपयोग कर सकते हैं, चीन और भारत में रूस के समर्थकों की मौन चेतावनी भी शुरू हो गई है।
अधिकारियों द्वारा बार-बार संकेत दिए जाने के बाद कि वे हथियारों का उपयोग कर सकते हैं, चीन और भारत में रूस के समर्थकों की मौन चेतावनी भी शुरू हो गई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ने की धमकी देने वाली योजना की घोषणा के तीन महीने बाद रूस ने बेलारूस को अपना पहला सामरिक परमाणु हथियार दिया है। "पहले परमाणु शुल्क बेलारूस के क्षेत्र में वितरित किए गए थे। लेकिन केवल पहला, "पुतिन ने शुक्रवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में कहा। "यह पहला भाग है। लेकिन गर्मियों के अंत तक, साल के अंत तक, हम इस काम को पूरा कर लेंगे। " ब्लिंकन ने वाशिंगटन में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमारे पास अपनी खुद की परमाणु मुद्रा को समायोजित करने का कोई कारण नहीं है। हमें ऐसा कोई संकेत नहीं दिखता है कि रूस परमाणु हथियार का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। " पुतिन ने मार्च में घोषणा की कि रूस अपने सहयोगी के क्षेत्र में सामरिक परमाणु हथियारों का आधार बनाएगा, जिसकी अमेरिका और यूरोपीय देशों ने आलोचना की थी। फरवरी दो हज़ार बाईस में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से क्रेमलिन के अधिकारियों द्वारा बार-बार संकेत दिए जाने के बाद कि वे हथियारों का उपयोग कर सकते हैं, चीन और भारत में रूस के समर्थकों की मौन चेतावनी भी शुरू हो गई है।
भोपाल (राज्य ब्यूरो)। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक व पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को सरकार के खर्च पर खाना खिलाने का मुद्दा उठाया। साथ ही गुजरात के जू में बाघ, घड़ियाल आदि भेजने और बदले में चिड़िया, भेड़ व बकरी खरीदने की बात कही। इस पर सदन में इतना हंगामा हुआ कि तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्यमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने पटवारी को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने उन्हें खेद जताने के लिए कहा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया और फिर पटवारी को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने इस कार्यवाही को विपक्ष की आवाज दबाने का कदम बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। पटवारी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में साढ़े सात हजार शस्त्र लाइसेंस देने, प्रदेश के ऊपर बढ़ते ऋण, ब्याज अदायगी में बड़ी राशि व्यय करने, किराए का विमान लेने में करोड़ों रुपये व्यय करने, शासकीय धन से भाजपा कार्यालय में चाय, नाश्ता व भोजन कराने, गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस के जू को पांच बाघ, पांच शेर, घड़ियाल, दो लोमड़़ी भेजने का मुद्दा उठाया। जू में वन्य प्राणी भेजने के बदले में छिपकली, चिड़िया, तोते लेने और भेड़-बकरी खरीदने की बात कही। साथ ही दूध के व्यवसाय से जुड़ी एक टिप्पणी भी की, जिसे बाद में विलोपित कर दिया गया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने आपत्ति की और दस्तावेज पटल पर रखने की बात कही। कहा कि प्रदेश में शेर है ही नहीं, ऐसी बातें कहकर पटवारी सदन को गुमराह कर रहे हैं। पहले भी इन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भोजन कराने की बात कही थी। इसके दस्तावेज रखवाए जाएं। हम इनके विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस देंगे। जब पटवारी ने आरोपों से संबंधित दस्तावेज पटल रखने के लिए सदन के अधिकारियों को दिए तो हंगामा हुआ और यह बढ़ता ही गया। इसके कारण तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। करीब एक घंटे कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब पुनः शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री ने पटवारी को सदन की शेष बैठकों के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद अध्यक्ष ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया और सदन की कार्यवाही शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। पटवारी के विरुद्ध हुई कार्यवाही के विरोध में कांग्रेस पूरी तरह से उनके साथ खड़ी हो गई। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के आवास पर विधायक दल की बैठक हुई। इसमें अध्यक्ष की कार्यवाही को अलोकतांत्रिक बताते हुए उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया। कमल नाथ ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आखिर सरकार सदन में चर्चा से क्यों भागना चाहती है। सदन को चलाने में इनकी कोई रुचि नहीं है। ये पहले से तय करके आए थे कि सदन नहीं चलने देना हैं। ये विपक्ष की आवाज घोंटना चाहते हैं। हम भ्रष्टाचार पर सवाल पूछेंगे, इसलिए सदन नहीं चलने देना चाहते हैं। प्रदेश के लिए यह दुख का दिन है। पटवारी ने जो प्रश्न पूछे वे सब रिकार्ड में हैं। भाजपा कार्यालय में खाना खिलाया गया, यह तो शासन के जवाब में है। नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने कहा कि भाजपा कार्यालय में खाना खिलाने उत्तर तो सरकार का है। इसे पटल पर रखा तो साजिश रचकर सदन न चलने दिया। अध्यक्ष ने भाजपा सरकार का मोहरा बनकर निर्णय दिया। पटवारी ने कहा कि मैंने जो भी बात कही, वह दस्तावेजों में है। हम सरकार के भ्रष्टाचार को यूं ही उठाते रहेंगे और मेरे बारे में जो भी निर्णय लेना है, वह पार्टी लेगी। सदन को हम लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं। पक्ष और विपक्ष को इसी से ताकत मिलती है पर पटवारी मिथ्या का सहारा लेकर पूरे प्रदेश को गुमराह कर रहे हैं। एक मामला पहले से विशेषाधिकार समिति में विचाराधीन है। आज भी उन्होंने असत्य बोला। वे लगातार झूठे आंकड़े और किस्से सुनाते रहे। इसे लेकर प्रस्ताव रखा था, जिस पर उन्हें अध्यक्ष ने बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया। - डा. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री संसदीय कार्य।
भोपाल । विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक व पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को सरकार के खर्च पर खाना खिलाने का मुद्दा उठाया। साथ ही गुजरात के जू में बाघ, घड़ियाल आदि भेजने और बदले में चिड़िया, भेड़ व बकरी खरीदने की बात कही। इस पर सदन में इतना हंगामा हुआ कि तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्यमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने पटवारी को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने उन्हें खेद जताने के लिए कहा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया और फिर पटवारी को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने इस कार्यवाही को विपक्ष की आवाज दबाने का कदम बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। पटवारी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में साढ़े सात हजार शस्त्र लाइसेंस देने, प्रदेश के ऊपर बढ़ते ऋण, ब्याज अदायगी में बड़ी राशि व्यय करने, किराए का विमान लेने में करोड़ों रुपये व्यय करने, शासकीय धन से भाजपा कार्यालय में चाय, नाश्ता व भोजन कराने, गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस के जू को पांच बाघ, पांच शेर, घड़ियाल, दो लोमड़़ी भेजने का मुद्दा उठाया। जू में वन्य प्राणी भेजने के बदले में छिपकली, चिड़िया, तोते लेने और भेड़-बकरी खरीदने की बात कही। साथ ही दूध के व्यवसाय से जुड़ी एक टिप्पणी भी की, जिसे बाद में विलोपित कर दिया गया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने आपत्ति की और दस्तावेज पटल पर रखने की बात कही। कहा कि प्रदेश में शेर है ही नहीं, ऐसी बातें कहकर पटवारी सदन को गुमराह कर रहे हैं। पहले भी इन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भोजन कराने की बात कही थी। इसके दस्तावेज रखवाए जाएं। हम इनके विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस देंगे। जब पटवारी ने आरोपों से संबंधित दस्तावेज पटल रखने के लिए सदन के अधिकारियों को दिए तो हंगामा हुआ और यह बढ़ता ही गया। इसके कारण तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। करीब एक घंटे कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब पुनः शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री ने पटवारी को सदन की शेष बैठकों के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद अध्यक्ष ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया और सदन की कार्यवाही शुक्रवार ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। पटवारी के विरुद्ध हुई कार्यवाही के विरोध में कांग्रेस पूरी तरह से उनके साथ खड़ी हो गई। सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के आवास पर विधायक दल की बैठक हुई। इसमें अध्यक्ष की कार्यवाही को अलोकतांत्रिक बताते हुए उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया। कमल नाथ ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आखिर सरकार सदन में चर्चा से क्यों भागना चाहती है। सदन को चलाने में इनकी कोई रुचि नहीं है। ये पहले से तय करके आए थे कि सदन नहीं चलने देना हैं। ये विपक्ष की आवाज घोंटना चाहते हैं। हम भ्रष्टाचार पर सवाल पूछेंगे, इसलिए सदन नहीं चलने देना चाहते हैं। प्रदेश के लिए यह दुख का दिन है। पटवारी ने जो प्रश्न पूछे वे सब रिकार्ड में हैं। भाजपा कार्यालय में खाना खिलाया गया, यह तो शासन के जवाब में है। नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने कहा कि भाजपा कार्यालय में खाना खिलाने उत्तर तो सरकार का है। इसे पटल पर रखा तो साजिश रचकर सदन न चलने दिया। अध्यक्ष ने भाजपा सरकार का मोहरा बनकर निर्णय दिया। पटवारी ने कहा कि मैंने जो भी बात कही, वह दस्तावेजों में है। हम सरकार के भ्रष्टाचार को यूं ही उठाते रहेंगे और मेरे बारे में जो भी निर्णय लेना है, वह पार्टी लेगी। सदन को हम लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं। पक्ष और विपक्ष को इसी से ताकत मिलती है पर पटवारी मिथ्या का सहारा लेकर पूरे प्रदेश को गुमराह कर रहे हैं। एक मामला पहले से विशेषाधिकार समिति में विचाराधीन है। आज भी उन्होंने असत्य बोला। वे लगातार झूठे आंकड़े और किस्से सुनाते रहे। इसे लेकर प्रस्ताव रखा था, जिस पर उन्हें अध्यक्ष ने बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया। - डा. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री संसदीय कार्य।
पिछले तीन दशक से भी अधिक समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में जनपक्षधरता की पत्रकारिता करने और लोकसंवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से स्वर देने वाले शब्दशिल्पी लक्ष्मी प्रसाद डिमरी को उत्तरजन टुडे ने ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार देने का फैसला किया है। डिमरी रुद्रप्रयाग जिले तिलवाड़ा से पत्रकार हैं। विवेक शुक्ला ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बतौर वीडियो कंटेंट राइटर एंड एंकर नई पारी की शुरूआत की है. विवेक शुक्ला एपीएन न्यूज चैनल में भी रहे हैं. यहां दो साल नौकरी करने के बाद विवेक ने सितंबर 2016 में हिन्दी खबर न्यूज चैनल ज्वॉइन किया. बीजेपी के सभी प्रवक्ताओं को कुछ दिन के लिये चैनल्स से दूरी बना लेनी चाहिए! हम कश्मीर क्यों दें कश्मीरियों को? टीवी चैनल public consent manufacture कर रहे हैं कि पाक से युद्ध होना चाहिए! बीड़ीवाली की कहानी हो गई वायरल! कई महीने से मैंने कोई टीवी न्यूज चैनल नहीं देखा! रवीश, बरखा, राजदीप, अभिसार के मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर गंदी-गंदी गालियां बरसा रहे हैं भक्त! हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर को फटकार लगाते हुए अविश्वसनीय अखबार कह दिया! अंजलि सिंह रजावत ने बतौर एंकर इंडिया वॉइस न्यूज़ चैनल के नोएडा आफिस में ज्वाइन कर लिया है. अंजलि इससे पहले साधना प्लस चैनल में एंकर के रूप में कार्यरत थीं. वे उससे पहले इंडिया वॉच चैनल में रही हैं जहां एक साल तक डिबेट शो होस्ट किया. 16 वर्षों में सेंसर बोर्ड ने 793 फ़िल्में बैन की! लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को दी गयी सूचना के अनुसार सेंसर बोर्ड, मुंबई ने 01 जनवरी 2000 से 31 मार्च 2016 के बीच कुल 793 फिल्मों को प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया. इनमे 586 भारतीय फ़िल्में तथा 207 विदेशी फ़िल्में थीं. The Gender and Ethics Council of the Delhi Union of Journalists expresses its shock and anger at the incessant trolling and doxxing of women journalists who are being repeatedly threatened on Facebook, Twitter and other social media. रवीश कुमार के फोन पर ट्रोल अटैक! ताज नगरी आगरा के जिला मुख्यालय पर देसी ब्वाय विनीत से विदेशी छोरी जैकलीन ने ब्याह रचाया. विदेशी छोरी को किस कदर देसी ब्वाय ने ट्रेंड किया है, यह तब पता चला जब विदेशी बाला 'लकड़ी की काठी. . ' और 'नानी तेरी मोरनी...' गा कर सुनाने लगी. दर्शकों को जहर परोसने वाले 'रिपब्लिक भारत' को खबरदार करना सरकार का दायित्व है! आतंकवाद से न अमेरिका लड़ पाया और न मोदी लड़ पाएंगे.... हमको-आपको इस्लामिक देशों की ताक़त का शायद अंदाज़ा नहीं है! इंडियन एक्सप्रेस से हार गया करोड़ीमल अखबार दैनिक जागरण! Atul Chaurasia : पुलवामा हमले के ठीक अगले रोज आए अखबारों का विश्लेषण करें. शोक और क्षोभ के बीच आज के करोड़ीमल अखबार दैनिक जागरण और दिल्ली-मुम्बई में बिकने वाले अदने अखबार इंडियन एक्सप्रेस का तुलनात्मक विश्लेषण पेश है. उत्तराखंड की हजारों एकड़ जमीन निगलते जा रहे हैं अडानी-अंबानी जैसे धनपशु! पुलवामा हमला : अब तो मान लीजिए मोदी सरकार फेल है! क्या कीमोथेरेपी जान ले लेती है? जबरदस्ती रुकवा गया पुण्य प्रसून के साथ शाह फैसल का इंटरव्यू... 2009 के आईएसएस टॉपर कश्मीर निवासी शाह फैसल दिल्ली के सम्राट होटल में ठहरे हुए हैं. यह होटल प्रधानमंत्री निवास से लगभग 50 मीटर की दूरी पर है. न्यूज स्टेट चैनल यूपी और उत्तराखंड का नंबर वन रीजनल चैनल बना हुआ है. दूसरे नंबर पर है न्यूज18 यूपी/यूके. इस चैनल का कभी नाम ईटीवी यूपी-यूके हुआ करता था. समाचार प्लस तीसरे नंबर पर है. थोड़े सी ही फासले से जी यूपी-यूके चौथे नंबर पर है. Yashwant Singh : आजकल पत्रकार होने का मतलब हो गया है चीखना, चिल्लाना, पढ़ने-लिखने से दूर-दूर तक वास्ता न रखना, अफसरों-नेताओं को देखते ही उनके चरणों में गिर जाना या मक्खन लगाने लगना.... पर असल पत्रकार ये नहीं होते... पत्रकार होने का मतलब है ज्ञानवान होना, विनम्र होना और कुशल टीम लीडर होना. टीवी टुडे समूह व आजतक न्यूज़ चैनल के ग्रुप न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद के बारे में मीडिया के बाहर के लोगों की तो छोड़िए, मीडिया के भीतर के भी लोग बहुत कम जानते हैं. ये इंटरव्यू काफी पहले का है, लगभग आठ साल पहले का, मार्च 2010 का. पुलवामा के शहीदों पर भास्कर परिशिष्ट निकाल कमाई में जुटा! Video दिल्ली के फाइव स्टार होटल 'पिकाडली' में बारातियों को जब मिला ठंडा खाना तो देखें आगे क्या हुआ.... कपिल सिब्बल एंड कंपनी ने तो चैनल का नाम ही चोरी कर लिया! खुशनशीब हूं कि मैं 'गे' पैदा हुआ हूं! टीवी9 ग्रुप के हिंदी चैनल की लांचिंग की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. सब कुछ अब बहुत तेजी के साथ किया जा रहा है. चैनल का नाम तय कर दिया गया है. 'टीवी9 भारतवर्ष' नाम से यह चैनल लांच होगा. चैनल का लोगो भी रिलीज किया जा चुका है. कोबरापोस्ट का Operation Karaoke : तीन दर्जन नामचीन चेहरों से हटेगा नकाब! Dear Friends, Cobrapost cordially invites you to an exclusive screening of its investigative documentary "Operation Karaoke" on Tuesday, February 19, 2019 at Press Club of India, Raisina Road, New Delhi, at 3:00 pm. The screening will be followed by a panel discussion. विशाल और प्रियंका की किताब 'नरक' के विमोचन के मौके पर भावुक हुईं अमृता राय! सहारा समूह दिन ब दिन मुश्किल हालात की ओर बढ़ रहा है. एजेंटों और निवेशकों का दबाव बढ़ता जा रहा है. ये अपना पैसा मांग रहे हैं. सहारा वाले उन्हें उनके पैसे को री-इनवेस्ट किए जाने का लालीपाप देकर भगा दे रहे हैं. अरनब गोस्वामी का हिंदी न्यूज चैनल रिपब्लिक भारत उर्फ आर भारत लांच होते ही टीआरपी दौड़ में छठें नंबर पर आ गया है. हिंदू-मुस्लिम एजेंडे पर पत्रकारिता करते हुए जी न्यूज और सुदर्शन न्यूज चैनल को मात देने वाले आर भारत चैनल ने लगातार कांट्रोवर्सियल मुद्दे उठाए या खुद कांट्रोवर्सी क्रिएट किए. 'करामाती' कपिल सिब्बल कांग्रेस की कलंक कथा लिख रहे! 'हिंदुस्तान' को रवीश कुमार ने कहा-'बेकार अखबार'! 'प्रियंका रोड शो' की खबर बेअसर करने को योगी सरकार ने फुल फ्रंट पेज एड दे मारा! रवीश कुमार ने आज फिर ली 'हिंदुस्तान' की क्लास! सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया. एक लाख का जुर्माना लगाया. कोर्ट उठने तक कोर्ट में ही बैठने की सज़ा दी. सीबीआई के इतिहास मे किसी अफ़सर की नहीं हुई इतनी बेइज़्ज़ती. वरिष्ठ पत्रकार समीर चटर्जी ने आजतक के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने टीवी टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल की टीम में बतौर कंसल्टिंग एडिटर ज्वाइन किया है। समीर वहां डिजिटल के स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। मुजफ्फरपुर बालिकागृह मामले में सीबीआई के पूर्व कार्यकारी निदेशक एम नागेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट से मांफी मांगी है। दुखद सूचना... इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार व अग्निबाण के क्राइम रिपोर्टर महेंद्र बाफना का एक्सीडेंट में निधन हो जाने की सूचना मिली है. इंदौर के एक चौराहे पर बाफनाजी का एक्सीडेंट हुआ. अमित शाह अगर चाणक्य तो प्रियंका भी चाचा चौधरी से कम नहीं! प्रियंका के आने से राहुल फ्लॉप हो जाएंगे! एक अख़बार ने दुनिया के सबसे धनी आदमी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की, जानिए आगे क्या हुआ! दुनिया के सबसे धनी आदमी जेफ़ बेज़ोस को एक अख़बार 'नेशनल इन्क्वायरर' ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की है। बेज़ोस अमेज़ॉन के सीईओ हैं और मशहूर अख़बार 'द वाशिंगटन पोस्ट' के मालिक हैं। उन्होंने ब्लैकमेल का पूरा ब्यौरा देते हुए ब्लॉग लिखा है। अभी 5 साल पहले माइक्रोमैक्स, कार्बन, लावा जैसी देसी मोबाइल कंपनियों का जलवा था। इस कदर जलवा कि सैमसंग जैसी दिग्गज कम्पनी भारत मे मोबाइल बना रही थी, फिर भी जमीन पर मुंह के बल गिरी पड़ी थी। नोकिया जैसी दिग्गज कम्पनी बिक ही गई। खबर है कि इंडिया टीवी के साथ वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल ने नई पारी की शुरुआत की है. उन्होंने चैनल में पोलिटिकल एडिटर के रूप में ज्वाइन किया है. जयंत घोषाल बतौर राजनीतिक विश्लेषक न्यूज चैनलों के एक्सपर्ट पैनल में बैठा करते थे. जहरीली शराब से मौतों के लिए योगी सरकार की शराब नीति जिम्मेदार! गोदी मीडिया की रिपोर्टिंग में जानबूझ कर तृणमूल के विकल्प के रूप में बीजेपी को पेश किया जा रहा! बिस्कुटिया चैनल की क्रांतिकारिता कब तक? बिस्कुटिया चैनल में बड़ा नाम... कहते है ना कि घूर के दिन भी फिरते हैं। क्या यह कहावत एक छोटे से चैनल सूर्या समाचार के साथ मीडिया जगत का बड़ा नाम पुण्य प्रसून वाजपेयी के जुड़ जाने के कारण चरितार्थ होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। सर्वेश तिवारी के ज्वाइन करने के बाद इंडिया न्यूज में दो-दो मैनेजिंग एडिटर हो गए! इंडिया न्यूज चैनल में दो-दो मैनेजिंग एडिटर हो गए हैं। राणा यशवन्त तो थे ही, अब सर्वेश तिवारी भी मैनेजिंग एडिटर बन कर आ गए हैं। राणा यशवन्त खराब स्वास्थ्य की वजह से कुछ समय से अवकाश पर चल रहे थे। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के नो-स्मोकिंग जोन में धुंआ उड़ाने वाली महुआ चटर्जी का वीडियो बनाना भड़ास संपादक यशवंत सिंह को महंगा पड़ गया। चुनाव जीतने के बाद महुआ ने अपने ही हस्ताक्षरों से भड़ास संपादक यशवन्त सिंह को इस 'अपराध' के लिए क्लब से निकाल बाहर किया। सुसाइड रोकने की दवाई अमेरिका ने बन ली! 13 रुपये में टॉइम्स ग्रुप TV देखने वाली महिला को बेटर MAN दे रहा है! अम्बानी के हित के लिए मोदीजी ने अमेरिका को भी नाराज कर दिया! डरी-सहमी और दरबारी पत्रकारिता को शर्मिंदगी से बचाने के लिए एन राम को शुक्रिया! रवीश ने 'हिंदुस्तान' की आज कर दी तगड़ी समीक्षा, शशिजी आप भी पढ़ लें! पुण्य प्रसून की 'सूर्या समाचार' संग आज शुरू हुई ये पारी कब तक चलेगी? नए नियम से टीवी केबल का बिल कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया! टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय कहिन- आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया! लाइव सिटीज खुद को बिहार का नम्बर-1 YouTube चैनल बताता है मगर बिहार के मीडिया के लोगों के बीच इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं. नयी दिल्ली : वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक और टीवी पेनलिस्ट श्री प्रदीप सरदाना ने चार दिनों में सर्वाधिक समय तक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल्स पर लाइव रहकर प्रतिष्ठित 'इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स' में अपना रिकॉर्ड दर्ज कराया है. नई दिल्ली। अम्बेडकरी आंदोलन की सजग प्रहरी बहुचर्चित मासिक पत्रिका 'दलित दस्तक' ने बाबासाहेब द्वारा निकाले गए पहले समाचार पत्र 'मूकनायक' के सौ वर्ष पूरा होने पर आगामी वर्ष 2020 में 31 जनवरी को भव्य कार्यक्रम करने का ऐलान किया है. दलित दस्तक इस दिन 'अम्बेडकरी पत्रकारिता के सौ वर्ष' का महा उत्सव मनाएगी. सवाल ये है कि 'दैनिक भास्कर' अब तक खामोश क्यों था और किन मुद्दों पर खामोश था? इस पाखंड में आरएसएस और विहिप जैसे संगठन भी फंस गए! यह लेख मैंने 2011 में लिखा गया था परन्तु आज मूर्तियों के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय के आलोक में और भी प्रासंगिक हो गया है. सुप्रीम कोर्ट का सुझाव- मूर्तियों पर खर्च हुआ जनता का पैसा मायावती को वापस लौटाना चाहिए! गौतम लाहिड़ी ने फेसबुक पर किया ऐलान- भड़ास वाले यशवंत को प्रेस क्लब आफ इंडिया से निकाल दिया गया! जी ग्रुप के अखबार डीएनए की किस्मत अच्छी नहीं चल रही. पता चला है कि इस अखबार का दिल्ली एडिशन आज से बंद हो गया. बताया जाता है कि प्रबंधन पहले ही कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुका था. यशवंत की घुमक्कड़ी : सतना स्टेशन पर भूखी महिलाओं से सामना, कुंभ में मच्छरों से संघर्ष! Arvind Kumar Singh : आजमगढ़ के वरिष्ठ फोटो पत्रकार एसके दत्ता की रैदोपुर स्थित स्टुडियो / दुकान में सेंध खोल कर लाखों का कैमरा आदि चोरी। आजमगढ़ के वरिष्ठ फोटो पत्रकार एसके दत्ता की रैदोपुर स्थित छायांकन स्टूडियों में नकब काट कर चोरी हो गई। बेशर्म हो चुके पैनलिस्ट खींसे निपोर कर बेइज्जत होना सीख लिए! क्या 'रिपब्लिक टीवी' अब 'रिपल्सिव टीवी' हो गया है? 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान 2018' श्री असगर वजाहत को दिया जाएगा। श्री उदयन वाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान किया जाएगा, युवा स्पंदन पुरस्कार श्री थवई थियाम को। मुरादाबाद से मजीठिया का दावा पेश करने वाले पहले क्रांतिकारी संतोष सिंह का केस अंतिम पड़ाव पर पहुंचा... हिन्दुस्तान मुरादाबाद में बतौर सिटी चीफ कार्य करने वाले संतोष सिंह को हिन्दुस्तान मुरादाबाद के सम्पादक मनीष मिश्रा के स्थानांतरण के बाद नवांगुत सूर्य कान्त द्ववेदी ने अपने पूर्व व्यक्तिगत द्वेष के चलते हाशिये पर डाल दिया. चित्रा त्रिपाठी के करियर का ग्राफ नई उंचाई पर, आजतक ज्वाइन करेंगी! खबर है कि हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के सीईओ पद से समीर कुमार को हटा दिया गया है. इस बाबत जानकारी एक आंतरिक मेल में दी गई है.
पिछले तीन दशक से भी अधिक समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में जनपक्षधरता की पत्रकारिता करने और लोकसंवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से स्वर देने वाले शब्दशिल्पी लक्ष्मी प्रसाद डिमरी को उत्तरजन टुडे ने ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार देने का फैसला किया है। डिमरी रुद्रप्रयाग जिले तिलवाड़ा से पत्रकार हैं। विवेक शुक्ला ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बतौर वीडियो कंटेंट राइटर एंड एंकर नई पारी की शुरूआत की है. विवेक शुक्ला एपीएन न्यूज चैनल में भी रहे हैं. यहां दो साल नौकरी करने के बाद विवेक ने सितंबर दो हज़ार सोलह में हिन्दी खबर न्यूज चैनल ज्वॉइन किया. बीजेपी के सभी प्रवक्ताओं को कुछ दिन के लिये चैनल्स से दूरी बना लेनी चाहिए! हम कश्मीर क्यों दें कश्मीरियों को? टीवी चैनल public consent manufacture कर रहे हैं कि पाक से युद्ध होना चाहिए! बीड़ीवाली की कहानी हो गई वायरल! कई महीने से मैंने कोई टीवी न्यूज चैनल नहीं देखा! रवीश, बरखा, राजदीप, अभिसार के मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर गंदी-गंदी गालियां बरसा रहे हैं भक्त! हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर को फटकार लगाते हुए अविश्वसनीय अखबार कह दिया! अंजलि सिंह रजावत ने बतौर एंकर इंडिया वॉइस न्यूज़ चैनल के नोएडा आफिस में ज्वाइन कर लिया है. अंजलि इससे पहले साधना प्लस चैनल में एंकर के रूप में कार्यरत थीं. वे उससे पहले इंडिया वॉच चैनल में रही हैं जहां एक साल तक डिबेट शो होस्ट किया. सोलह वर्षों में सेंसर बोर्ड ने सात सौ तिरानवे फ़िल्में बैन की! लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को दी गयी सूचना के अनुसार सेंसर बोर्ड, मुंबई ने एक जनवरी दो हज़ार से इकतीस मार्च दो हज़ार सोलह के बीच कुल सात सौ तिरानवे फिल्मों को प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया. इनमे पाँच सौ छियासी भारतीय फ़िल्में तथा दो सौ सात विदेशी फ़िल्में थीं. The Gender and Ethics Council of the Delhi Union of Journalists expresses its shock and anger at the incessant trolling and doxxing of women journalists who are being repeatedly threatened on Facebook, Twitter and other social media. रवीश कुमार के फोन पर ट्रोल अटैक! ताज नगरी आगरा के जिला मुख्यालय पर देसी ब्वाय विनीत से विदेशी छोरी जैकलीन ने ब्याह रचाया. विदेशी छोरी को किस कदर देसी ब्वाय ने ट्रेंड किया है, यह तब पता चला जब विदेशी बाला 'लकड़ी की काठी. . ' और 'नानी तेरी मोरनी...' गा कर सुनाने लगी. दर्शकों को जहर परोसने वाले 'रिपब्लिक भारत' को खबरदार करना सरकार का दायित्व है! आतंकवाद से न अमेरिका लड़ पाया और न मोदी लड़ पाएंगे.... हमको-आपको इस्लामिक देशों की ताक़त का शायद अंदाज़ा नहीं है! इंडियन एक्सप्रेस से हार गया करोड़ीमल अखबार दैनिक जागरण! Atul Chaurasia : पुलवामा हमले के ठीक अगले रोज आए अखबारों का विश्लेषण करें. शोक और क्षोभ के बीच आज के करोड़ीमल अखबार दैनिक जागरण और दिल्ली-मुम्बई में बिकने वाले अदने अखबार इंडियन एक्सप्रेस का तुलनात्मक विश्लेषण पेश है. उत्तराखंड की हजारों एकड़ जमीन निगलते जा रहे हैं अडानी-अंबानी जैसे धनपशु! पुलवामा हमला : अब तो मान लीजिए मोदी सरकार फेल है! क्या कीमोथेरेपी जान ले लेती है? जबरदस्ती रुकवा गया पुण्य प्रसून के साथ शाह फैसल का इंटरव्यू... दो हज़ार नौ के आईएसएस टॉपर कश्मीर निवासी शाह फैसल दिल्ली के सम्राट होटल में ठहरे हुए हैं. यह होटल प्रधानमंत्री निवास से लगभग पचास मीटर की दूरी पर है. न्यूज स्टेट चैनल यूपी और उत्तराखंड का नंबर वन रीजनल चैनल बना हुआ है. दूसरे नंबर पर है न्यूजअट्ठारह यूपी/यूके. इस चैनल का कभी नाम ईटीवी यूपी-यूके हुआ करता था. समाचार प्लस तीसरे नंबर पर है. थोड़े सी ही फासले से जी यूपी-यूके चौथे नंबर पर है. Yashwant Singh : आजकल पत्रकार होने का मतलब हो गया है चीखना, चिल्लाना, पढ़ने-लिखने से दूर-दूर तक वास्ता न रखना, अफसरों-नेताओं को देखते ही उनके चरणों में गिर जाना या मक्खन लगाने लगना.... पर असल पत्रकार ये नहीं होते... पत्रकार होने का मतलब है ज्ञानवान होना, विनम्र होना और कुशल टीम लीडर होना. टीवी टुडे समूह व आजतक न्यूज़ चैनल के ग्रुप न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद के बारे में मीडिया के बाहर के लोगों की तो छोड़िए, मीडिया के भीतर के भी लोग बहुत कम जानते हैं. ये इंटरव्यू काफी पहले का है, लगभग आठ साल पहले का, मार्च दो हज़ार दस का. पुलवामा के शहीदों पर भास्कर परिशिष्ट निकाल कमाई में जुटा! Video दिल्ली के फाइव स्टार होटल 'पिकाडली' में बारातियों को जब मिला ठंडा खाना तो देखें आगे क्या हुआ.... कपिल सिब्बल एंड कंपनी ने तो चैनल का नाम ही चोरी कर लिया! खुशनशीब हूं कि मैं 'गे' पैदा हुआ हूं! टीवीनौ ग्रुप के हिंदी चैनल की लांचिंग की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. सब कुछ अब बहुत तेजी के साथ किया जा रहा है. चैनल का नाम तय कर दिया गया है. 'टीवीनौ भारतवर्ष' नाम से यह चैनल लांच होगा. चैनल का लोगो भी रिलीज किया जा चुका है. कोबरापोस्ट का Operation Karaoke : तीन दर्जन नामचीन चेहरों से हटेगा नकाब! Dear Friends, Cobrapost cordially invites you to an exclusive screening of its investigative documentary "Operation Karaoke" on Tuesday, February उन्नीस, दो हज़ार उन्नीस at Press Club of India, Raisina Road, New Delhi, at तीन:शून्य pm. The screening will be followed by a panel discussion. विशाल और प्रियंका की किताब 'नरक' के विमोचन के मौके पर भावुक हुईं अमृता राय! सहारा समूह दिन ब दिन मुश्किल हालात की ओर बढ़ रहा है. एजेंटों और निवेशकों का दबाव बढ़ता जा रहा है. ये अपना पैसा मांग रहे हैं. सहारा वाले उन्हें उनके पैसे को री-इनवेस्ट किए जाने का लालीपाप देकर भगा दे रहे हैं. अरनब गोस्वामी का हिंदी न्यूज चैनल रिपब्लिक भारत उर्फ आर भारत लांच होते ही टीआरपी दौड़ में छठें नंबर पर आ गया है. हिंदू-मुस्लिम एजेंडे पर पत्रकारिता करते हुए जी न्यूज और सुदर्शन न्यूज चैनल को मात देने वाले आर भारत चैनल ने लगातार कांट्रोवर्सियल मुद्दे उठाए या खुद कांट्रोवर्सी क्रिएट किए. 'करामाती' कपिल सिब्बल कांग्रेस की कलंक कथा लिख रहे! 'हिंदुस्तान' को रवीश कुमार ने कहा-'बेकार अखबार'! 'प्रियंका रोड शो' की खबर बेअसर करने को योगी सरकार ने फुल फ्रंट पेज एड दे मारा! रवीश कुमार ने आज फिर ली 'हिंदुस्तान' की क्लास! सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया. एक लाख का जुर्माना लगाया. कोर्ट उठने तक कोर्ट में ही बैठने की सज़ा दी. सीबीआई के इतिहास मे किसी अफ़सर की नहीं हुई इतनी बेइज़्ज़ती. वरिष्ठ पत्रकार समीर चटर्जी ने आजतक के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने टीवी टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल की टीम में बतौर कंसल्टिंग एडिटर ज्वाइन किया है। समीर वहां डिजिटल के स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। मुजफ्फरपुर बालिकागृह मामले में सीबीआई के पूर्व कार्यकारी निदेशक एम नागेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट से मांफी मांगी है। दुखद सूचना... इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार व अग्निबाण के क्राइम रिपोर्टर महेंद्र बाफना का एक्सीडेंट में निधन हो जाने की सूचना मिली है. इंदौर के एक चौराहे पर बाफनाजी का एक्सीडेंट हुआ. अमित शाह अगर चाणक्य तो प्रियंका भी चाचा चौधरी से कम नहीं! प्रियंका के आने से राहुल फ्लॉप हो जाएंगे! एक अख़बार ने दुनिया के सबसे धनी आदमी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की, जानिए आगे क्या हुआ! दुनिया के सबसे धनी आदमी जेफ़ बेज़ोस को एक अख़बार 'नेशनल इन्क्वायरर' ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की है। बेज़ोस अमेज़ॉन के सीईओ हैं और मशहूर अख़बार 'द वाशिंगटन पोस्ट' के मालिक हैं। उन्होंने ब्लैकमेल का पूरा ब्यौरा देते हुए ब्लॉग लिखा है। अभी पाँच साल पहले माइक्रोमैक्स, कार्बन, लावा जैसी देसी मोबाइल कंपनियों का जलवा था। इस कदर जलवा कि सैमसंग जैसी दिग्गज कम्पनी भारत मे मोबाइल बना रही थी, फिर भी जमीन पर मुंह के बल गिरी पड़ी थी। नोकिया जैसी दिग्गज कम्पनी बिक ही गई। खबर है कि इंडिया टीवी के साथ वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल ने नई पारी की शुरुआत की है. उन्होंने चैनल में पोलिटिकल एडिटर के रूप में ज्वाइन किया है. जयंत घोषाल बतौर राजनीतिक विश्लेषक न्यूज चैनलों के एक्सपर्ट पैनल में बैठा करते थे. जहरीली शराब से मौतों के लिए योगी सरकार की शराब नीति जिम्मेदार! गोदी मीडिया की रिपोर्टिंग में जानबूझ कर तृणमूल के विकल्प के रूप में बीजेपी को पेश किया जा रहा! बिस्कुटिया चैनल की क्रांतिकारिता कब तक? बिस्कुटिया चैनल में बड़ा नाम... कहते है ना कि घूर के दिन भी फिरते हैं। क्या यह कहावत एक छोटे से चैनल सूर्या समाचार के साथ मीडिया जगत का बड़ा नाम पुण्य प्रसून वाजपेयी के जुड़ जाने के कारण चरितार्थ होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। सर्वेश तिवारी के ज्वाइन करने के बाद इंडिया न्यूज में दो-दो मैनेजिंग एडिटर हो गए! इंडिया न्यूज चैनल में दो-दो मैनेजिंग एडिटर हो गए हैं। राणा यशवन्त तो थे ही, अब सर्वेश तिवारी भी मैनेजिंग एडिटर बन कर आ गए हैं। राणा यशवन्त खराब स्वास्थ्य की वजह से कुछ समय से अवकाश पर चल रहे थे। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के नो-स्मोकिंग जोन में धुंआ उड़ाने वाली महुआ चटर्जी का वीडियो बनाना भड़ास संपादक यशवंत सिंह को महंगा पड़ गया। चुनाव जीतने के बाद महुआ ने अपने ही हस्ताक्षरों से भड़ास संपादक यशवन्त सिंह को इस 'अपराध' के लिए क्लब से निकाल बाहर किया। सुसाइड रोकने की दवाई अमेरिका ने बन ली! तेरह रुपयापये में टॉइम्स ग्रुप TV देखने वाली महिला को बेटर MAN दे रहा है! अम्बानी के हित के लिए मोदीजी ने अमेरिका को भी नाराज कर दिया! डरी-सहमी और दरबारी पत्रकारिता को शर्मिंदगी से बचाने के लिए एन राम को शुक्रिया! रवीश ने 'हिंदुस्तान' की आज कर दी तगड़ी समीक्षा, शशिजी आप भी पढ़ लें! पुण्य प्रसून की 'सूर्या समाचार' संग आज शुरू हुई ये पारी कब तक चलेगी? नए नियम से टीवी केबल का बिल कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया! टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय कहिन- आखिर कांग्रेस ने अपना चेहरा दिखा ही दिया! लाइव सिटीज खुद को बिहार का नम्बर-एक YouTube चैनल बताता है मगर बिहार के मीडिया के लोगों के बीच इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं. नयी दिल्ली : वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक और टीवी पेनलिस्ट श्री प्रदीप सरदाना ने चार दिनों में सर्वाधिक समय तक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल्स पर लाइव रहकर प्रतिष्ठित 'इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स' में अपना रिकॉर्ड दर्ज कराया है. नई दिल्ली। अम्बेडकरी आंदोलन की सजग प्रहरी बहुचर्चित मासिक पत्रिका 'दलित दस्तक' ने बाबासाहेब द्वारा निकाले गए पहले समाचार पत्र 'मूकनायक' के सौ वर्ष पूरा होने पर आगामी वर्ष दो हज़ार बीस में इकतीस जनवरी को भव्य कार्यक्रम करने का ऐलान किया है. दलित दस्तक इस दिन 'अम्बेडकरी पत्रकारिता के सौ वर्ष' का महा उत्सव मनाएगी. सवाल ये है कि 'दैनिक भास्कर' अब तक खामोश क्यों था और किन मुद्दों पर खामोश था? इस पाखंड में आरएसएस और विहिप जैसे संगठन भी फंस गए! यह लेख मैंने दो हज़ार ग्यारह में लिखा गया था परन्तु आज मूर्तियों के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय के आलोक में और भी प्रासंगिक हो गया है. सुप्रीम कोर्ट का सुझाव- मूर्तियों पर खर्च हुआ जनता का पैसा मायावती को वापस लौटाना चाहिए! गौतम लाहिड़ी ने फेसबुक पर किया ऐलान- भड़ास वाले यशवंत को प्रेस क्लब आफ इंडिया से निकाल दिया गया! जी ग्रुप के अखबार डीएनए की किस्मत अच्छी नहीं चल रही. पता चला है कि इस अखबार का दिल्ली एडिशन आज से बंद हो गया. बताया जाता है कि प्रबंधन पहले ही कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुका था. यशवंत की घुमक्कड़ी : सतना स्टेशन पर भूखी महिलाओं से सामना, कुंभ में मच्छरों से संघर्ष! Arvind Kumar Singh : आजमगढ़ के वरिष्ठ फोटो पत्रकार एसके दत्ता की रैदोपुर स्थित स्टुडियो / दुकान में सेंध खोल कर लाखों का कैमरा आदि चोरी। आजमगढ़ के वरिष्ठ फोटो पत्रकार एसके दत्ता की रैदोपुर स्थित छायांकन स्टूडियों में नकब काट कर चोरी हो गई। बेशर्म हो चुके पैनलिस्ट खींसे निपोर कर बेइज्जत होना सीख लिए! क्या 'रिपब्लिक टीवी' अब 'रिपल्सिव टीवी' हो गया है? 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान दो हज़ार अट्ठारह' श्री असगर वजाहत को दिया जाएगा। श्री उदयन वाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान किया जाएगा, युवा स्पंदन पुरस्कार श्री थवई थियाम को। मुरादाबाद से मजीठिया का दावा पेश करने वाले पहले क्रांतिकारी संतोष सिंह का केस अंतिम पड़ाव पर पहुंचा... हिन्दुस्तान मुरादाबाद में बतौर सिटी चीफ कार्य करने वाले संतोष सिंह को हिन्दुस्तान मुरादाबाद के सम्पादक मनीष मिश्रा के स्थानांतरण के बाद नवांगुत सूर्य कान्त द्ववेदी ने अपने पूर्व व्यक्तिगत द्वेष के चलते हाशिये पर डाल दिया. चित्रा त्रिपाठी के करियर का ग्राफ नई उंचाई पर, आजतक ज्वाइन करेंगी! खबर है कि हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के सीईओ पद से समीर कुमार को हटा दिया गया है. इस बाबत जानकारी एक आंतरिक मेल में दी गई है.
एक शख्स के पार्टनर ने सेक्स के दौरान गलती से काट लिया जिससे उसका इन्टिमेट पार्ट काला पड़ गया और सड़ने लगा. विजुअल जर्नल ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन में इस मामले का खुलासा हुआ है. असल में 43 साल का शख्स घटना के 5 दिन बाद हॉस्पिटल पहुंचा था. रिपोर्ट के मुताबिक, दर्द जब बढ़ने लगा और शख्स की हालत खराब होने लगी तो उसने हॉस्पिटल जाने का फैसला किया. अमेरिका के फोएनिक्स में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कॉलेज के डॉक्टर्स ने जांच के बाद पाया कि शख्स के इन्टिमेट पार्ट पर 3 सेमी का ब्लैक टिश्यू हो गया है. शख्स के इन्टिमेट पार्ट के टिश्यू डेड होने लगे थे. स्किन सड़ने लगी थी. मेडिकल जर्नल में बताया गया है कि पीड़ित शख्स के पार्टनर ने गलती से उसे काट लिया था. पीड़ित शख्स को हॉस्पिटल में सर्जरी की नौबत नहीं आई और एंटीबायोटिक्स से उसकी हालत में सुधार होने लगा. डॉ. मार्क जोस्की ने कहा कि पीड़ित ने घटना के तुरंत बाद मेडिकल सहायता नहीं ली थी जिसकी वजह से उसकी हालत खराब हो गई. डॉक्टर जोस्की ने कहा कि अक्सर इन्टिमेट पार्ट में काटे जाने के बाद मरीज तुरंत सहायता नहीं लेते हैं. कुछ मामलों में काटे जाने पर लोगों को गंभीर इन्फेक्शन का भी सामना करना पड़ता है जिससे मौत का खतरा भी रहता है. ऐसे मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है.
एक शख्स के पार्टनर ने सेक्स के दौरान गलती से काट लिया जिससे उसका इन्टिमेट पार्ट काला पड़ गया और सड़ने लगा. विजुअल जर्नल ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन में इस मामले का खुलासा हुआ है. असल में तैंतालीस साल का शख्स घटना के पाँच दिन बाद हॉस्पिटल पहुंचा था. रिपोर्ट के मुताबिक, दर्द जब बढ़ने लगा और शख्स की हालत खराब होने लगी तो उसने हॉस्पिटल जाने का फैसला किया. अमेरिका के फोएनिक्स में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कॉलेज के डॉक्टर्स ने जांच के बाद पाया कि शख्स के इन्टिमेट पार्ट पर तीन सेमी का ब्लैक टिश्यू हो गया है. शख्स के इन्टिमेट पार्ट के टिश्यू डेड होने लगे थे. स्किन सड़ने लगी थी. मेडिकल जर्नल में बताया गया है कि पीड़ित शख्स के पार्टनर ने गलती से उसे काट लिया था. पीड़ित शख्स को हॉस्पिटल में सर्जरी की नौबत नहीं आई और एंटीबायोटिक्स से उसकी हालत में सुधार होने लगा. डॉ. मार्क जोस्की ने कहा कि पीड़ित ने घटना के तुरंत बाद मेडिकल सहायता नहीं ली थी जिसकी वजह से उसकी हालत खराब हो गई. डॉक्टर जोस्की ने कहा कि अक्सर इन्टिमेट पार्ट में काटे जाने के बाद मरीज तुरंत सहायता नहीं लेते हैं. कुछ मामलों में काटे जाने पर लोगों को गंभीर इन्फेक्शन का भी सामना करना पड़ता है जिससे मौत का खतरा भी रहता है. ऐसे मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है.
तीसरे क्वार्टर में भारत ने बेल्जियम के अटैकर्स को आगे नहीं जाने दिया, लेकिन भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बने एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स। जिन्होंने 19वें, 49वें और 53वें मिनट में गोल करते हुए हैट्रिक पूरी की और भारत 2-5 से मुकाबला हार गया। खेल। 41 साल बाद भारतीय पुरुष टीम (India men's Hockey team) सेमीफाइनल (semifinal) में पहुंची थी। दशकों से आंखों में एक सपना संजोए मंगलवार को मैदान पर उतरी तो कोरोड़ों लोग टकटकी लगाए 60 मिनट तक दिल को थामें बस यही दुआ कर रहे थे कि किसी तरह से टीम बेल्जियम (Belgium) को हरा दे। लेकिन बेल्जियम जैसी मजबूत टीम को हराना शायद मुश्किल था। हालांकि, नीली जर्सी वालों का जलवा मैदान पर हर किसी ने देखा, चाहे वो देश के प्रधानमंत्री मोदी (Pm Modi) हों या आम जनता। भारतीय खिलाड़ियों (Indian Players) ने गजब का खेल दिखाया और बेल्जिमय को कड़ी टक्कर देते हुए उनके लिए जीत को मुश्किल बना दिया। दरअसल सेमीफाइनल में गोल दागने की शुरुआत पहले क्वार्टर से हो गई थी, 1. 04 सेकेंड पर बेल्जिमय को पहला पेनाल्टी कॉर्नर मिला और उन्होंने गोल कर दिया। फिलहाल दोनों टीमों की शुरुआत काफी अच्छी रही, अटैक और डिफेंस दोनों ही बेहतरीन था। शुरु के गोल के सहारे बेल्जियम ने दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। मैच के शुरु में लगभग 7 मिनट तक बेल्जियम ने गेम पर पकड़ बनाई लेकिन फिर तभी भारतीय प्लेयर्स ने अपना जौहर दिखाते हुए पेनाल्टी कॉर्नर मिलने पर गोल दाग दिया। वहीं टीम के लिए पहला गोल हरमनप्रीत ने किया। उसके अगले ही मिनट में मनदीप ने बेहतरीन बैकहैंड शॉट दिखाते हुए गोल किया और प्रतिद्वंदी टीम के होश उड़ा दिए। इसके बाद गेम भारत के पक्ष में था और स्कोर था 2-1। दूसरे क्वार्टर में भी कांटे की टक्कर जारी रही, 12वें मिनट में बेल्जियम को 5वां पेनल्टी कॉर्नर मिला जिसपर गोल करने में एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स बिल्कुल भी देरी नहीं की और गोल कर दिया। अब स्कोर 2-2 से बराबरी का हो चुका था। तीसरे क्वार्टर में भारत ने बेल्जियम के अटैकर्स को आगे नहीं जाने दिया, लेकिन भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बने एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स। जिन्होंने 19वें, 49वें और 53वें मिनट में गोल करते हुए हैट्रिक पूरी की और भारत 2-5 से मुकाबला हार गया। वहीं मैच के बाद प्रधानंत्री मोदी ने भारतीय पुरुष टीम की तारीफ करते हुए ट्वीट करते हुए लिखा, " 'जीत और हार तो जिंदगी का हिस्सा है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में हमारी भारतीय मेंस हॉकी टीम ने अपना बेस्ट दिया। " साथ ही पीएम मोदी ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को उनके अगले मुकाबले के लिए शुभकामनाएं भी दीं, और कहा कि भारत हमेशा अपने खिलाड़ियों पर गर्व करता है।
तीसरे क्वार्टर में भारत ने बेल्जियम के अटैकर्स को आगे नहीं जाने दिया, लेकिन भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बने एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स। जिन्होंने उन्नीसवें, उनचासवें और तिरेपनवें मिनट में गोल करते हुए हैट्रिक पूरी की और भारत दो-पाँच से मुकाबला हार गया। खेल। इकतालीस साल बाद भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी। दशकों से आंखों में एक सपना संजोए मंगलवार को मैदान पर उतरी तो कोरोड़ों लोग टकटकी लगाए साठ मिनट तक दिल को थामें बस यही दुआ कर रहे थे कि किसी तरह से टीम बेल्जियम को हरा दे। लेकिन बेल्जियम जैसी मजबूत टीम को हराना शायद मुश्किल था। हालांकि, नीली जर्सी वालों का जलवा मैदान पर हर किसी ने देखा, चाहे वो देश के प्रधानमंत्री मोदी हों या आम जनता। भारतीय खिलाड़ियों ने गजब का खेल दिखाया और बेल्जिमय को कड़ी टक्कर देते हुए उनके लिए जीत को मुश्किल बना दिया। दरअसल सेमीफाइनल में गोल दागने की शुरुआत पहले क्वार्टर से हो गई थी, एक. चार सेकेंड पर बेल्जिमय को पहला पेनाल्टी कॉर्नर मिला और उन्होंने गोल कर दिया। फिलहाल दोनों टीमों की शुरुआत काफी अच्छी रही, अटैक और डिफेंस दोनों ही बेहतरीन था। शुरु के गोल के सहारे बेल्जियम ने दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। मैच के शुरु में लगभग सात मिनट तक बेल्जियम ने गेम पर पकड़ बनाई लेकिन फिर तभी भारतीय प्लेयर्स ने अपना जौहर दिखाते हुए पेनाल्टी कॉर्नर मिलने पर गोल दाग दिया। वहीं टीम के लिए पहला गोल हरमनप्रीत ने किया। उसके अगले ही मिनट में मनदीप ने बेहतरीन बैकहैंड शॉट दिखाते हुए गोल किया और प्रतिद्वंदी टीम के होश उड़ा दिए। इसके बाद गेम भारत के पक्ष में था और स्कोर था दो-एक। दूसरे क्वार्टर में भी कांटे की टक्कर जारी रही, बारहवें मिनट में बेल्जियम को पाँचवां पेनल्टी कॉर्नर मिला जिसपर गोल करने में एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स बिल्कुल भी देरी नहीं की और गोल कर दिया। अब स्कोर दो-दो से बराबरी का हो चुका था। तीसरे क्वार्टर में भारत ने बेल्जियम के अटैकर्स को आगे नहीं जाने दिया, लेकिन भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बने एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स। जिन्होंने उन्नीसवें, उनचासवें और तिरेपनवें मिनट में गोल करते हुए हैट्रिक पूरी की और भारत दो-पाँच से मुकाबला हार गया। वहीं मैच के बाद प्रधानंत्री मोदी ने भारतीय पुरुष टीम की तारीफ करते हुए ट्वीट करते हुए लिखा, " 'जीत और हार तो जिंदगी का हिस्सा है। टोक्यो ओलंपिक दो हज़ार बीस में हमारी भारतीय मेंस हॉकी टीम ने अपना बेस्ट दिया। " साथ ही पीएम मोदी ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को उनके अगले मुकाबले के लिए शुभकामनाएं भी दीं, और कहा कि भारत हमेशा अपने खिलाड़ियों पर गर्व करता है।
Ranchi : सीधे मुठभेड़ के बजाय नई रणनीति से सुरक्षाबलों को माओवादी नुकसान पहुंचा रहे हैं. राज्य के भाकपा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों और माओवादी संगठन के कैडरों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं कम हुई हैं. कैडर और हथियारों की कमी से जूझ रहे भाकपा माओवादी अब सीधे मुठभेड़ के बजाय पुलिस बलों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. नक्सली अब लैंडमाइंस विस्फोट कर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. पिछले छह महीने के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में नक्सलियों के द्वारा किए लैंड माइंस विस्फोट में चार जवान शहीद हो गए, जबकि तीन ग्रामीणों की भी लैंड माइंस के चपेट में आकर मौत हो गई. इसके अलावा पांच सुरक्षाबल व ग्रामीण घायल हो गए. 14 जुलाईः गुमला जिले के कुरमगढ़ के सीमावर्ती जंगल मरवा केरागानी जंगल में लैंड माइंस विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गई. 13 जुलाईः गुमला के कुरुमगढ़ थाना क्षेत्र के मरवा जंगल में माओवादियों के द्वारा लगाए गए आइईडी की चपेट में आने से जवान घायल हो गया. घायल जवान को एयर लिफ्ट कर रांची लाया गया. 20 जून 2021: लोहरदगा के पेशरार थाना क्षेत्र के बुलबुल जंगल में नक्सलियों के बिछाए गए लैंडमाइंस की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत हो गई. 4 मार्चः चाईबासा जिले के टोकलो थाना क्षेत्र लांजी पहाड़ी पर नक्सलियों ने पुलिस जवानों पर अत्याधुनिक तरीके से हमला कर दिया था. डायरेक्शनल लैंडमाइन नक्सलियों द्वारा ब्लास्ट किया गया था. जिसमें तीन जवान शहीद हो गए थे. 25 फरवरीः गुमला जिले के कुरूमगढ़ थाना स्थित रोरेद जंगल में भाकपा माओवादियों द्वारा आईईडी बम ब्लास्ट किया गया था. जिससे छापामारी अभियान में निकले सीआरपीएफ के जवान रॉबिन्स कुमार घायल हो गये थे. 27 फरवरी 2021: जिला गुमला थाना क्षेत्र के मड़वा जंगल में आईईडी ब्लास्ट में एक ग्रामीण घायल हो गया. घायल ग्रामीण की पहचान महेंद्र महतो के रूप में हुई है. इसके बारे में बताया गया कि आईईडी की चपेट में आने से उसका एक पैर उड़ गया. 16 फरवरीः लोहरदगा जिले के घोर नक्सल प्रभावित पेशरार प्रखंड के सेरेंगदाग (गम्हरिया) थाना क्षेत्र के चपाल जंगल में आईईडी विस्फोट में पुलिस जवान दुलेश्वर पराश गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें हेलीकॉप्टर से रांची के मेडिका हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. 20 जनवरी 2021: चतरा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के कुल्हैया पंचायत अंतर्गत डुमरिया जंगल में नक्सलियों के लगाए गए आईईडी में हुए ब्लास्ट से एक युवक घायल हो गया. 16 जनवरी 2021: लातेहार-गुमला सीमा पर स्थित गारू थाना क्षेत्र के पंडरा जंगल में माओवादियों के द्वारा लगाए आईडी ब्लास्ट में एक महिला की मौत हो गई,जबकि एक महिला घायल हो गयी थी.
Ranchi : सीधे मुठभेड़ के बजाय नई रणनीति से सुरक्षाबलों को माओवादी नुकसान पहुंचा रहे हैं. राज्य के भाकपा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों और माओवादी संगठन के कैडरों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं कम हुई हैं. कैडर और हथियारों की कमी से जूझ रहे भाकपा माओवादी अब सीधे मुठभेड़ के बजाय पुलिस बलों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. नक्सली अब लैंडमाइंस विस्फोट कर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. पिछले छह महीने के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में नक्सलियों के द्वारा किए लैंड माइंस विस्फोट में चार जवान शहीद हो गए, जबकि तीन ग्रामीणों की भी लैंड माइंस के चपेट में आकर मौत हो गई. इसके अलावा पांच सुरक्षाबल व ग्रामीण घायल हो गए. चौदह जुलाईः गुमला जिले के कुरमगढ़ के सीमावर्ती जंगल मरवा केरागानी जंगल में लैंड माइंस विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गई. तेरह जुलाईः गुमला के कुरुमगढ़ थाना क्षेत्र के मरवा जंगल में माओवादियों के द्वारा लगाए गए आइईडी की चपेट में आने से जवान घायल हो गया. घायल जवान को एयर लिफ्ट कर रांची लाया गया. बीस जून दो हज़ार इक्कीस: लोहरदगा के पेशरार थाना क्षेत्र के बुलबुल जंगल में नक्सलियों के बिछाए गए लैंडमाइंस की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत हो गई. चार मार्चः चाईबासा जिले के टोकलो थाना क्षेत्र लांजी पहाड़ी पर नक्सलियों ने पुलिस जवानों पर अत्याधुनिक तरीके से हमला कर दिया था. डायरेक्शनल लैंडमाइन नक्सलियों द्वारा ब्लास्ट किया गया था. जिसमें तीन जवान शहीद हो गए थे. पच्चीस फरवरीः गुमला जिले के कुरूमगढ़ थाना स्थित रोरेद जंगल में भाकपा माओवादियों द्वारा आईईडी बम ब्लास्ट किया गया था. जिससे छापामारी अभियान में निकले सीआरपीएफ के जवान रॉबिन्स कुमार घायल हो गये थे. सत्ताईस फरवरी दो हज़ार इक्कीस: जिला गुमला थाना क्षेत्र के मड़वा जंगल में आईईडी ब्लास्ट में एक ग्रामीण घायल हो गया. घायल ग्रामीण की पहचान महेंद्र महतो के रूप में हुई है. इसके बारे में बताया गया कि आईईडी की चपेट में आने से उसका एक पैर उड़ गया. सोलह फरवरीः लोहरदगा जिले के घोर नक्सल प्रभावित पेशरार प्रखंड के सेरेंगदाग थाना क्षेत्र के चपाल जंगल में आईईडी विस्फोट में पुलिस जवान दुलेश्वर पराश गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें हेलीकॉप्टर से रांची के मेडिका हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. बीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस: चतरा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के कुल्हैया पंचायत अंतर्गत डुमरिया जंगल में नक्सलियों के लगाए गए आईईडी में हुए ब्लास्ट से एक युवक घायल हो गया. सोलह जनवरी दो हज़ार इक्कीस: लातेहार-गुमला सीमा पर स्थित गारू थाना क्षेत्र के पंडरा जंगल में माओवादियों के द्वारा लगाए आईडी ब्लास्ट में एक महिला की मौत हो गई,जबकि एक महिला घायल हो गयी थी.
लखनऊ। 'कह रहीम कैसे निभे, केर-बेर को संग', यह कहना है उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। योगी से यह पूछा गया था कि उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बढ़ रहीं नजदीकियों को वे किस रूप में देखते हैं? बसपा ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सपा उम्मीदवारों को समर्थन देने का मन बनाया है। योगी त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में भारतीय जनता पार्टी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद रविवार को यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। योगी ने कहा कि जिस तरह केर और बेर एकसाथ नहीं रह सकते, उसी तरह नजदीक आने का प्रदर्शन कर रहे दोनों दलों की दूरियां म नहीं हो सकतीं। जब उनसे पूछा गया कि इसमें कौन केर और कौन बेर है? तो उन्होंने कहा कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड किसने करवाया था? लखनऊ में बने स्मारकों को ध्वस्त करने की चेतावनी कौन दे रहा था? यह साफ है कि दोनों में एक केर है और एक बेर। केर और बेर एकसाथ नहीं रह सकते। (वार्ता)
लखनऊ। 'कह रहीम कैसे निभे, केर-बेर को संग', यह कहना है उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। योगी से यह पूछा गया था कि उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की बढ़ रहीं नजदीकियों को वे किस रूप में देखते हैं? बसपा ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सपा उम्मीदवारों को समर्थन देने का मन बनाया है। योगी त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में भारतीय जनता पार्टी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद रविवार को यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। योगी ने कहा कि जिस तरह केर और बेर एकसाथ नहीं रह सकते, उसी तरह नजदीक आने का प्रदर्शन कर रहे दोनों दलों की दूरियां म नहीं हो सकतीं। जब उनसे पूछा गया कि इसमें कौन केर और कौन बेर है? तो उन्होंने कहा कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड किसने करवाया था? लखनऊ में बने स्मारकों को ध्वस्त करने की चेतावनी कौन दे रहा था? यह साफ है कि दोनों में एक केर है और एक बेर। केर और बेर एकसाथ नहीं रह सकते।
विस्तास्वमिधाया जना नाम गयाऽयों योग्यते परः । स्यार्थादिकस्य च ।। अर्थात् जर्मिनस (रा) अपनाभरना धर्म नाहट जाती है तो दूसरा अधिक अर्थ माहित होता है. यह व्यंजना शक्ति का व्यापार है । अर्धपोतन की याद शक्ति शब्द में अर्थ में, प्रकृति, प्रत्यय आदि में रती है । स्त (शाम हो गई ) इतना कहने से बाध्य वर्थ का चौध हो गया। जब किसने किससे कहा इस बात का ध्यान करने से उन सामान्य में सहत के नए अर्थ निकवाक्य लेगे । यदि गुरु शिश्व से कहता है तो मतलव हुम्ला कि चलो सन्ध्या-पूजा का प्रबन्ध करो : यदि ग्वाल पपने साधी से कहता है तो जय है कि गायों को अब जागे बढ़ने से रोककर पीछे लेवा माँ से कहता है तो प्रयोजन है कि खाना : तैयार नहीं खाकर सो जाऊँ : यदि मालिक नौकर से कहता हे कि चिरावती ठीक करो : यदि टेनिसकोर्ट पर खड़ा बिलाड़ी कहता है तो प्रयोजन है कि खेल बन्द किया जाय और यदि होस्टेल में पढ़ने हुए छात्र से उसका साथी कहता है तो मतलब है कि भाई, किताव रख दो, चली थोड़ा धूम आएँ । इस प्रकार के कितने ही दूसरे अर्थ इस एक सामान्य वाक्य से फूट निकले । ऊपर प्रयोजनवती लक्षणा के जो उदाहरण दिए हैं, उनमें गंगा से शीतलता, पवित्रता आदि का अधिक अर्थ व्यंजना शक्ति से ही सिद्ध होता है, तथा 'हिमालय की चोटी' से जो गर्व आदि का बोध होता है, वह व्यंजना से ही। पिछले व्याख्यानों में प्रसंग के अंगों की मिसालों में कई एक में बड़ी सुन्दर व्यंजना है। दो एक और उदाहरण देखिए । काले वारिधराणामपतितया नैव शक्यते स्थातुम् । उत्कंठिताऽसि तरले नहि नहि सखि पिच्छलः पन्थाः ।। वारिश का मौसम है । दो सखियाँ चली जा रही हैं । एक कहती है - बादलों के समरहना शक्य है दूसरी पूछती है, हे चंचल नारि, क्या विरह बहुत सता रहा है ? पहली सखीतुरन्त जवाब देती है 'नहीं नहीं, सखी, रास्ता वड़ा फिसलाने वाला है' । इस पद्य में 'या' शब्द में श्लेष है । एक अर्थ है बिना फिसले, दूसरा विना पति के । कहनेवाली ने एक अर्थ में कहा, सुननेवाली ने दूसरा अर्थ लिया । पद्य से इसी अर्थ का संकेत होता है । पर वास्तविक वात यही है कि कहनेवाली को सचमुच विरह सता रहा था, मगर वह अपनी सखी से बात छिपा गई । यह वास्तविक अर्थ व्यंजना से ही प्रकट हो सकता है । अनुरागवती सन्ध्या दिवसस्तत्पुरःसरः । दैवगतिश्चित्रा तथापि न समागमः ।। "दिवस आगे है, उसका राग सन्ध्या में है । परमेश्वर की गति विचित्र हैं कि तब भी समागम नहीं हुआ।" इस पद्य में सन्ध्या में सीलिंग है और दिवस में पुलिंग । इसके आधार पर नायक-नायिका भावे का उन पर आरोप हुआ । राग का एक लालिमा है, जो दिवस और सन्ध्या में लगा, दूसरा प्रेम है, जो नायिका में, पुरःसर का एक अर्थ है आगे जानेवाला, दूसरा सामनेवाला । दिवस सन्ध्या के पहले चला जाता है, दूसरी ओर नायक सामने खड़ा है 1 अचरज की बात जरूर है कि नायिका में प्रेम हो और नायक सामने खड़ा हो, फिर भी दोनों का मेल न हो । यह सारा अर्थ व्यंजना से ही निकलता है । इन तीनों शक्तियों से अर्थ का वोध होता हैं । यहाँ इन शक्तियों की ओर केवल इशारा कर दिया है। विशेष विवरण काव्यप्रकाश आदि मूल ग्रन्थों में मिलेगा । हिन्दी में इसका ज्ञान प्राप्त करने के लिए पं० रामदहिन मिश्र का काव्यालोक अच्छा ग्रन्थ है । अर्थ के ऊपर इन शक्तियों के द्वारा प्रकाश पड़ता है । यद्यपि सिद्धान्त रूप से यह बात दिखाई गई है कि इन शक्तियों का व्यापार पद और पदांश में भी होता है पर सामान्य रूप से कह सकते हैं कि पदार्थ गौण हो जाता है, वाक्यार्थ ही मुख्य रहता है । विषं भुव आदि पदार्थ नितान्त तिरस्कृत है, यहाँ न तो तात्पर्य विष `से है न खाने से, तात्पर्य है निमन्त्रण अस्वीकार करने से । काकेभ्यो दधि रक्ष्यताम् ( कौओं से दही की रक्षा करना ) । इस वाक्य के कहने का यह मतलब नहीं कि कौओं से तो दही बचाओ मगर कुत्तेविल्लियों को खा लेने दो । अभिप्राय है कि सभी जीवों से दही को वचाओ से भी, कुत्तों, विल्लियों, गिलहरियों, चीटों, चींटियों सभी से । यहाँ 'कौओं से इस पद का अर्थ कितना गौण हो गया । 'भम धम्मित्र बीसद्धो' में विध्यात्मक (घूमो फिरो) अर्थ जो शब्दों से निकलता है वह है ही नहीं, है उसका विलकुल उल्टा । अन्योकि में भी बिलकुल भिन्न अर्थ निकलता है । बिहारी बोध कराना चाहते थे राजा को और बोले भौंरे से । इस तरह यह सिद्ध होता है कि पदार्थ या तो हेय है या बहुत गौण । मुख्य हे वाक्यार्थ वाक्यार्थ भी ऐसा जो यद्यपि पदों से कुछ मेल रखता है, तब भी मुख्य रूप से प्रसंग पर अवलम्बित है । मनुष्य जब परिश्रम करके आराम करने और गप लगाने के
विस्तास्वमिधाया जना नाम गयाऽयों योग्यते परः । स्यार्थादिकस्य च ।। अर्थात् जर्मिनस अपनाभरना धर्म नाहट जाती है तो दूसरा अधिक अर्थ माहित होता है. यह व्यंजना शक्ति का व्यापार है । अर्धपोतन की याद शक्ति शब्द में अर्थ में, प्रकृति, प्रत्यय आदि में रती है । स्त इतना कहने से बाध्य वर्थ का चौध हो गया। जब किसने किससे कहा इस बात का ध्यान करने से उन सामान्य में सहत के नए अर्थ निकवाक्य लेगे । यदि गुरु शिश्व से कहता है तो मतलव हुम्ला कि चलो सन्ध्या-पूजा का प्रबन्ध करो : यदि ग्वाल पपने साधी से कहता है तो जय है कि गायों को अब जागे बढ़ने से रोककर पीछे लेवा माँ से कहता है तो प्रयोजन है कि खाना : तैयार नहीं खाकर सो जाऊँ : यदि मालिक नौकर से कहता हे कि चिरावती ठीक करो : यदि टेनिसकोर्ट पर खड़ा बिलाड़ी कहता है तो प्रयोजन है कि खेल बन्द किया जाय और यदि होस्टेल में पढ़ने हुए छात्र से उसका साथी कहता है तो मतलब है कि भाई, किताव रख दो, चली थोड़ा धूम आएँ । इस प्रकार के कितने ही दूसरे अर्थ इस एक सामान्य वाक्य से फूट निकले । ऊपर प्रयोजनवती लक्षणा के जो उदाहरण दिए हैं, उनमें गंगा से शीतलता, पवित्रता आदि का अधिक अर्थ व्यंजना शक्ति से ही सिद्ध होता है, तथा 'हिमालय की चोटी' से जो गर्व आदि का बोध होता है, वह व्यंजना से ही। पिछले व्याख्यानों में प्रसंग के अंगों की मिसालों में कई एक में बड़ी सुन्दर व्यंजना है। दो एक और उदाहरण देखिए । काले वारिधराणामपतितया नैव शक्यते स्थातुम् । उत्कंठिताऽसि तरले नहि नहि सखि पिच्छलः पन्थाः ।। वारिश का मौसम है । दो सखियाँ चली जा रही हैं । एक कहती है - बादलों के समरहना शक्य है दूसरी पूछती है, हे चंचल नारि, क्या विरह बहुत सता रहा है ? पहली सखीतुरन्त जवाब देती है 'नहीं नहीं, सखी, रास्ता वड़ा फिसलाने वाला है' । इस पद्य में 'या' शब्द में श्लेष है । एक अर्थ है बिना फिसले, दूसरा विना पति के । कहनेवाली ने एक अर्थ में कहा, सुननेवाली ने दूसरा अर्थ लिया । पद्य से इसी अर्थ का संकेत होता है । पर वास्तविक वात यही है कि कहनेवाली को सचमुच विरह सता रहा था, मगर वह अपनी सखी से बात छिपा गई । यह वास्तविक अर्थ व्यंजना से ही प्रकट हो सकता है । अनुरागवती सन्ध्या दिवसस्तत्पुरःसरः । दैवगतिश्चित्रा तथापि न समागमः ।। "दिवस आगे है, उसका राग सन्ध्या में है । परमेश्वर की गति विचित्र हैं कि तब भी समागम नहीं हुआ।" इस पद्य में सन्ध्या में सीलिंग है और दिवस में पुलिंग । इसके आधार पर नायक-नायिका भावे का उन पर आरोप हुआ । राग का एक लालिमा है, जो दिवस और सन्ध्या में लगा, दूसरा प्रेम है, जो नायिका में, पुरःसर का एक अर्थ है आगे जानेवाला, दूसरा सामनेवाला । दिवस सन्ध्या के पहले चला जाता है, दूसरी ओर नायक सामने खड़ा है एक अचरज की बात जरूर है कि नायिका में प्रेम हो और नायक सामने खड़ा हो, फिर भी दोनों का मेल न हो । यह सारा अर्थ व्यंजना से ही निकलता है । इन तीनों शक्तियों से अर्थ का वोध होता हैं । यहाँ इन शक्तियों की ओर केवल इशारा कर दिया है। विशेष विवरण काव्यप्रकाश आदि मूल ग्रन्थों में मिलेगा । हिन्दी में इसका ज्ञान प्राप्त करने के लिए पंशून्य रामदहिन मिश्र का काव्यालोक अच्छा ग्रन्थ है । अर्थ के ऊपर इन शक्तियों के द्वारा प्रकाश पड़ता है । यद्यपि सिद्धान्त रूप से यह बात दिखाई गई है कि इन शक्तियों का व्यापार पद और पदांश में भी होता है पर सामान्य रूप से कह सकते हैं कि पदार्थ गौण हो जाता है, वाक्यार्थ ही मुख्य रहता है । विषं भुव आदि पदार्थ नितान्त तिरस्कृत है, यहाँ न तो तात्पर्य विष `से है न खाने से, तात्पर्य है निमन्त्रण अस्वीकार करने से । काकेभ्यो दधि रक्ष्यताम् । इस वाक्य के कहने का यह मतलब नहीं कि कौओं से तो दही बचाओ मगर कुत्तेविल्लियों को खा लेने दो । अभिप्राय है कि सभी जीवों से दही को वचाओ से भी, कुत्तों, विल्लियों, गिलहरियों, चीटों, चींटियों सभी से । यहाँ 'कौओं से इस पद का अर्थ कितना गौण हो गया । 'भम धम्मित्र बीसद्धो' में विध्यात्मक अर्थ जो शब्दों से निकलता है वह है ही नहीं, है उसका विलकुल उल्टा । अन्योकि में भी बिलकुल भिन्न अर्थ निकलता है । बिहारी बोध कराना चाहते थे राजा को और बोले भौंरे से । इस तरह यह सिद्ध होता है कि पदार्थ या तो हेय है या बहुत गौण । मुख्य हे वाक्यार्थ वाक्यार्थ भी ऐसा जो यद्यपि पदों से कुछ मेल रखता है, तब भी मुख्य रूप से प्रसंग पर अवलम्बित है । मनुष्य जब परिश्रम करके आराम करने और गप लगाने के
दो फिलाडेल्फिया हाई स्कूल के मुखर समूहों, पर्क्यूशन और सम्राटों के जुड़वां कोरों से बने, स्टाइलिस्टिक्स में सभी सदस्यों का मसौदा तैयार नहीं किया गया था या कॉलेज में नहीं जा रहा था। एक नए नाम के तहत जारी रखने के लिए अपने अंग्रेजी शिक्षक द्वारा प्रोत्साहित किया गया, उन्होंने जल्द ही स्थानीय निर्माता बिल पेरी का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने उन्हें अपने टूर मैनेजर और "गेट ए बिग गर्ल नाउ" नामक गिटारवादक द्वारा सह-लिखित गीत रिकॉर्ड किया था। भव्य प्रस्तुतियों से शैली में भिन्नता के लिए उन्हें जाना जाएगा, इसने एक बड़ा क्षेत्रीय प्रभाव बना दिया- लेकिन पेरी और उनके सेबिंग रिकॉर्ड्स के पास राष्ट्रीय स्तर पर यह देखने के लिए पैसा नहीं था। एवोको लेबल, जब उसने एक सुना तो हिट को जानकर, $ 10,000 के लिए रिकॉर्ड खरीदा (जिसमें से सभी बेरी माना जाता है) और इसे 1 9 71 में शीर्ष दस आर एंड बी हिट में बदल दिया। एवोको निर्माता थॉम बेल ने समूह को विकसित किया, कई गेंदबाजी तैयार की- सबसे अधिक लिंडा क्रीड द्वारा लिखी गई, एक सफेद महिला-शैली में वह पहले से ही "ला ला मीन्स आई लव यू" प्रसिद्धि के डेलफोनिक्स के साथ परिपूर्ण हो गया था। समूह के पहले एल्बम में "स्टॉप, लुक एंड सुनो (टू हार्ट हार्ट)", उनके अगले आर एंड बी स्मैश और पॉप के लिए उनके क्रॉसओवर समेत तीन से भी कम हिट सिंगल्स नहीं मिले, जिसका उल्लेख "बेचा बाय गॉली, वाह" था। स्टाइलिस्टिक्स ने सत्तर के दशक में पॉप (और विशेष रूप से आर एंड बी) चार्टों पर शासन किया, लेकिन रॉयल्टी के ऊपर एवोको और बेल के साथ गिरावट ने 1 9 74 तक समूह को उच्च और सूखा छोड़ दिया। उन्होंने नए उत्पादकों ह्यूगो और लुइगी, एवोको के साथ सोचा जो उनके सैम कुक के पॉप स्मैश के साथ चिह्नित करें, और इस नए लाइटर दृष्टिकोण ने उन्हें ब्रिटेन में चार्ट सफलता प्राप्त की। वे बढ़ते डिस्को बाजार में भी अर्द्ध सफल थे कि "फिली सोल" पैदा हुआ था। हालांकि, शुरुआती आठवें तक, और कोई हिट नहीं थी। थॉम्पकिन्स, लव, और मुरेल ने स्टाइलिस्टिक्स नाम के तहत दौरा किया; थॉमपकिंस, वोकल तनाव के वर्षों का हवाला देते हुए, 2000 में छोड़ दिया गया। 1 9 66 (फिलाडेल्फिया, पीए) रसेल थॉम्पकिन्स जूनियर (बी। 21 मार्च, 1 9 51, फिलाडेल्फिया, पीए): vocals (falsetto) एयर्रियन लव (बी। 8 अगस्त, 1 9 4 9, फिलाडेल्फिया, पीए): vocals (tenor) जेम्स स्मिथ (बी। 16 जून, 1 9 50, न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क): vocals (बास) हर्बी मुरेल (बी। 27 अप्रैल, 1 9 4 9, लेन, एससी): vocals (baritone) जेम्स डुन (बी। 4 फरवरी, 1 9 50, फिलाडेल्फिया, पीए): vocals (baritone) - वोकल ग्रुप हॉल ऑफ फेम (2004) - फिलाडेल्फिया वॉक ऑफ फेम (1 99 4) - "बेचा बाय गोली, वाह" (1 9 72) - "मैं स्टोन इन लव विद यू" (1 9 72) - "आप सब कुछ हैं" (1 9 72) - "ब्रेक अप टू मेक अप" (1 9 73) - "यू मेक मी महसूस करें ब्रांड न्यू" (1 9 74) - "तुम एक बड़ी लड़की अब हो" (1 9 71) - "स्टॉप, लुक, सुनो (टू हार्ट हार्ट)" (1 9 71) - "बेचा बाय गोली, वाह" (1 9 72) - "मैं स्टोन इन लव विद यू" (1 9 72) - "लोग मेक द वर्ल्ड गो राउंड" (1 9 72) - "आप सब कुछ हैं" (1 9 72) - "ब्रेक अप टू मेक अप" (1 9 73) - "रॉकिन रोल रोल बेबी" (1 9 73) - "आप कभी भी स्वर्ग तक नहीं पहुंच पाएंगे (यदि आप मेरा दिल तोड़ते हैं)" (1 9 73) - "हेवी फॉलिन आउट" (1 9 74) - "चलो इसे सब एक साथ रखो" (1 9 74) - "यू मेक मी महसूस करें ब्रांड न्यू" (1 9 74) - "धन्यवाद बेबी" (1 9 75) - द स्टाइलिस्टिक्स (1 9 72) - राउंड 2: द स्टाइलिस्टिक्स (1 9 73) - भारी (1 9 74) - चलो इसे सब एक साथ रखो (1 9 74) - रॉकिन रोल बेबी (1 9 74) - धन्यवाद बेबी (1 9 74) "गाओ बेबी सिंग," "ना ना इज द सद्देस्ट वर्ड," "7000 डॉलर और आप," "पीक-ए-बू," "सोलह बार्स," "आपको कुछ भी नहीं दे सकता (लेकिन मेरा प्यार)," फंकी वीकेंड, "" अरे गर्ल, आओ एंड गेट इट, "" स्टार ऑन ए टीवी शो, "" क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, लड़की, "" प्यार में गिरने में मदद नहीं कर सकता, "" तुम सुंदर हो, "" जल्दी करो यह रास्ता फिर से, "" रात के बच्चे, "" पहली छापें, "" पहली नजर में प्यार, "" जल्दी करो इस रास्ते, "" लव टॉक "
दो फिलाडेल्फिया हाई स्कूल के मुखर समूहों, पर्क्यूशन और सम्राटों के जुड़वां कोरों से बने, स्टाइलिस्टिक्स में सभी सदस्यों का मसौदा तैयार नहीं किया गया था या कॉलेज में नहीं जा रहा था। एक नए नाम के तहत जारी रखने के लिए अपने अंग्रेजी शिक्षक द्वारा प्रोत्साहित किया गया, उन्होंने जल्द ही स्थानीय निर्माता बिल पेरी का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने उन्हें अपने टूर मैनेजर और "गेट ए बिग गर्ल नाउ" नामक गिटारवादक द्वारा सह-लिखित गीत रिकॉर्ड किया था। भव्य प्रस्तुतियों से शैली में भिन्नता के लिए उन्हें जाना जाएगा, इसने एक बड़ा क्षेत्रीय प्रभाव बना दिया- लेकिन पेरी और उनके सेबिंग रिकॉर्ड्स के पास राष्ट्रीय स्तर पर यह देखने के लिए पैसा नहीं था। एवोको लेबल, जब उसने एक सुना तो हिट को जानकर, दस डॉलर,शून्य के लिए रिकॉर्ड खरीदा और इसे एक नौ इकहत्तर में शीर्ष दस आर एंड बी हिट में बदल दिया। एवोको निर्माता थॉम बेल ने समूह को विकसित किया, कई गेंदबाजी तैयार की- सबसे अधिक लिंडा क्रीड द्वारा लिखी गई, एक सफेद महिला-शैली में वह पहले से ही "ला ला मीन्स आई लव यू" प्रसिद्धि के डेलफोनिक्स के साथ परिपूर्ण हो गया था। समूह के पहले एल्बम में "स्टॉप, लुक एंड सुनो ", उनके अगले आर एंड बी स्मैश और पॉप के लिए उनके क्रॉसओवर समेत तीन से भी कम हिट सिंगल्स नहीं मिले, जिसका उल्लेख "बेचा बाय गॉली, वाह" था। स्टाइलिस्टिक्स ने सत्तर के दशक में पॉप चार्टों पर शासन किया, लेकिन रॉयल्टी के ऊपर एवोको और बेल के साथ गिरावट ने एक नौ चौहत्तर तक समूह को उच्च और सूखा छोड़ दिया। उन्होंने नए उत्पादकों ह्यूगो और लुइगी, एवोको के साथ सोचा जो उनके सैम कुक के पॉप स्मैश के साथ चिह्नित करें, और इस नए लाइटर दृष्टिकोण ने उन्हें ब्रिटेन में चार्ट सफलता प्राप्त की। वे बढ़ते डिस्को बाजार में भी अर्द्ध सफल थे कि "फिली सोल" पैदा हुआ था। हालांकि, शुरुआती आठवें तक, और कोई हिट नहीं थी। थॉम्पकिन्स, लव, और मुरेल ने स्टाइलिस्टिक्स नाम के तहत दौरा किया; थॉमपकिंस, वोकल तनाव के वर्षों का हवाला देते हुए, दो हज़ार में छोड़ दिया गया। एक नौ छयासठ रसेल थॉम्पकिन्स जूनियर : vocals एयर्रियन लव : vocals जेम्स स्मिथ : vocals हर्बी मुरेल : vocals जेम्स डुन : vocals - वोकल ग्रुप हॉल ऑफ फेम - फिलाडेल्फिया वॉक ऑफ फेम - "बेचा बाय गोली, वाह" - "मैं स्टोन इन लव विद यू" - "आप सब कुछ हैं" - "ब्रेक अप टू मेक अप" - "यू मेक मी महसूस करें ब्रांड न्यू" - "तुम एक बड़ी लड़की अब हो" - "स्टॉप, लुक, सुनो " - "बेचा बाय गोली, वाह" - "मैं स्टोन इन लव विद यू" - "लोग मेक द वर्ल्ड गो राउंड" - "आप सब कुछ हैं" - "ब्रेक अप टू मेक अप" - "रॉकिन रोल रोल बेबी" - "आप कभी भी स्वर्ग तक नहीं पहुंच पाएंगे " - "हेवी फॉलिन आउट" - "चलो इसे सब एक साथ रखो" - "यू मेक मी महसूस करें ब्रांड न्यू" - "धन्यवाद बेबी" - द स्टाइलिस्टिक्स - राउंड दो: द स्टाइलिस्टिक्स - भारी - चलो इसे सब एक साथ रखो - रॉकिन रोल बेबी - धन्यवाद बेबी "गाओ बेबी सिंग," "ना ना इज द सद्देस्ट वर्ड," "सात हज़ार डॉलर और आप," "पीक-ए-बू," "सोलह बार्स," "आपको कुछ भी नहीं दे सकता ," फंकी वीकेंड, "" अरे गर्ल, आओ एंड गेट इट, "" स्टार ऑन ए टीवी शो, "" क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, लड़की, "" प्यार में गिरने में मदद नहीं कर सकता, "" तुम सुंदर हो, "" जल्दी करो यह रास्ता फिर से, "" रात के बच्चे, "" पहली छापें, "" पहली नजर में प्यार, "" जल्दी करो इस रास्ते, "" लव टॉक "
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में अपराध का ग्राफ दिनों दिन बढ़ते ही जा रहा है। केवल हाथरस, बलरामपुर, बुलंदशहर और भदोही की ही घटनाएं दहला देने वाली नहीं हैं। राज्य में विगत 5 वर्षों में नाबालिग बच्चियों संग हुईं ताबड़तोड़ वारदात भी बेहद भयवाह हैं. यूपी विधानसभा में रखे गए नाबालिग बच्चियों के साथ हुए अपराध के आंकड़े बताते हैं कि प्रति 5 घंटे में एक नाबालिग की अस्मत लूटी जा रही है. वहीं, हर दो घंटे के अंदर एक नाबालिग का अपहरण किया जा रहा है. यही नहीं हर दो दिन में एक बच्ची का क़त्ल भी हो रहा है. हालांकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपराधों को रोकने के लिए निरंतर मशीनरी के पेच कसने के साथ ही उसमें परिवर्तन ला रहे हैं. दर्जनों एनकाउंटर किए जा चुके हैं, इसके बाद भी अपराधी काबू में नहीं आ रहे हैं. 17 दिसम्बर 2019 को यूपी के विधानसभा सत्र के दौरान भी राज्य में बच्चियों के साथ होने वाले अपराध का मामला उठा था. MLA सुषमा पटेल ने यह मुद्दा उठाया था. सुषमा द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में यूपी सरकार ने बच्चियों के साथ होने वाले अपराध के आंकड़े पेश किए थे. उन आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक जनवरी 2015 से 30 अक्टूबर, 2019 तक 18 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के अपहरण के 25,615 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं, 9703 बच्चियों को दुष्कर्म का शिकार बनाया गया था. इतना ही नहीं बीते 5 साल में 988 बच्चियों का क़त्ल भी हुआ था. ये आंकड़े उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश किए गए थे. बैंकों से बोलीं निर्मला सीतारमण- ऐसे अधिकारी तैयार करें, जो स्थानीय भाषा जानते हों . .
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में अपराध का ग्राफ दिनों दिन बढ़ते ही जा रहा है। केवल हाथरस, बलरामपुर, बुलंदशहर और भदोही की ही घटनाएं दहला देने वाली नहीं हैं। राज्य में विगत पाँच वर्षों में नाबालिग बच्चियों संग हुईं ताबड़तोड़ वारदात भी बेहद भयवाह हैं. यूपी विधानसभा में रखे गए नाबालिग बच्चियों के साथ हुए अपराध के आंकड़े बताते हैं कि प्रति पाँच घंटाटे में एक नाबालिग की अस्मत लूटी जा रही है. वहीं, हर दो घंटे के अंदर एक नाबालिग का अपहरण किया जा रहा है. यही नहीं हर दो दिन में एक बच्ची का क़त्ल भी हो रहा है. हालांकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपराधों को रोकने के लिए निरंतर मशीनरी के पेच कसने के साथ ही उसमें परिवर्तन ला रहे हैं. दर्जनों एनकाउंटर किए जा चुके हैं, इसके बाद भी अपराधी काबू में नहीं आ रहे हैं. सत्रह दिसम्बर दो हज़ार उन्नीस को यूपी के विधानसभा सत्र के दौरान भी राज्य में बच्चियों के साथ होने वाले अपराध का मामला उठा था. MLA सुषमा पटेल ने यह मुद्दा उठाया था. सुषमा द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में यूपी सरकार ने बच्चियों के साथ होने वाले अपराध के आंकड़े पेश किए थे. उन आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक जनवरी दो हज़ार पंद्रह से तीस अक्टूबर, दो हज़ार उन्नीस तक अट्ठारह वर्ष से कम आयु की बच्चियों के अपहरण के पच्चीस,छः सौ पंद्रह मामले दर्ज किए गए थे. वहीं, नौ हज़ार सात सौ तीन बच्चियों को दुष्कर्म का शिकार बनाया गया था. इतना ही नहीं बीते पाँच साल में नौ सौ अठासी बच्चियों का क़त्ल भी हुआ था. ये आंकड़े उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश किए गए थे. बैंकों से बोलीं निर्मला सीतारमण- ऐसे अधिकारी तैयार करें, जो स्थानीय भाषा जानते हों . .
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता मजीद मेमन ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक के स्कूलों में प्रवेश से पहले हिजाब हटाने वाले शिक्षकों ने इसके पीछे द्वेष दिखाया, जबकि छात्रों पर आपत्तियां बहस योग्य हो सकती हैं। मजीद मेमन ने कहा, कर्नाटक में स्कूलों में छात्राओं के हिजाब पहनने पर आपत्ति निर्धारित वर्दी के कारण बहस योग्य है। लेकिन हिजाब पहनने वाले शिक्षकों पर आपत्ति उन लोगों द्वारा इसके पीछे द्वेष को उजागर करती है जो इस विषय पर एक दृश्य बनाते हैं। प्रतिक्रिया कई वीडियो सामने आने के बाद आई है जिसमें कथित तौर पर दिखाया गया था कि छात्रों और शिक्षकों को स्कूल के गेट के बाहर हिजाब हटाने के लिए कहा गया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब विवाद के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। पिछले हफ्ते, उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक छात्रों को हिजाब या कोई अन्य धार्मिक पोशाक पहनने से रोक दिया था। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा, 10वीं कक्षा तक के स्कूल आज (सोमवार) फिर से खुल गए हैं। विभिन्न जिलों से कुछ घटनाओं की सूचना मिली है। मानक संचालन प्रक्रियाओं पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई जाएगी। स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और माता-पिता उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह उच्च न्यायालय के लिए अपना अंतिम निर्णय देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगा। हमें तब तक संयम बनाए रखना चाहिए। सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्ण एस. दीक्षित और न्यायमूर्ति खाजी जयबुन्नेसा मोहियुद्दीन की पीठ को बताया कि कॉलेज विकास समिति (सीडीसी) के पास वर्दी पर नियम बनाने के लिए कोई कानूनी वैधानिक आधार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, इस संबंध में सरकार का निर्णय बुद्धि की कमी को दर्शाता है और समिति का नेतृत्व करने वाला एक विधायक मौलिक अधिकारों पर फैसला करेगा। हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाना कानूनी नहीं है। कामत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी केंद्रीय स्कूल हिजाब पहनने की अनुमति दे रहे हैं और याचिकाकर्ता लंबे समय से उसी रंग का हिजाब पहन रहे हैं जो वर्दी में है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता मजीद मेमन ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक के स्कूलों में प्रवेश से पहले हिजाब हटाने वाले शिक्षकों ने इसके पीछे द्वेष दिखाया, जबकि छात्रों पर आपत्तियां बहस योग्य हो सकती हैं। मजीद मेमन ने कहा, कर्नाटक में स्कूलों में छात्राओं के हिजाब पहनने पर आपत्ति निर्धारित वर्दी के कारण बहस योग्य है। लेकिन हिजाब पहनने वाले शिक्षकों पर आपत्ति उन लोगों द्वारा इसके पीछे द्वेष को उजागर करती है जो इस विषय पर एक दृश्य बनाते हैं। प्रतिक्रिया कई वीडियो सामने आने के बाद आई है जिसमें कथित तौर पर दिखाया गया था कि छात्रों और शिक्षकों को स्कूल के गेट के बाहर हिजाब हटाने के लिए कहा गया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब विवाद के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। पिछले हफ्ते, उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक छात्रों को हिजाब या कोई अन्य धार्मिक पोशाक पहनने से रोक दिया था। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा, दसवीं कक्षा तक के स्कूल आज फिर से खुल गए हैं। विभिन्न जिलों से कुछ घटनाओं की सूचना मिली है। मानक संचालन प्रक्रियाओं पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई जाएगी। स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और माता-पिता उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह उच्च न्यायालय के लिए अपना अंतिम निर्णय देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगा। हमें तब तक संयम बनाए रखना चाहिए। सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्ण एस. दीक्षित और न्यायमूर्ति खाजी जयबुन्नेसा मोहियुद्दीन की पीठ को बताया कि कॉलेज विकास समिति के पास वर्दी पर नियम बनाने के लिए कोई कानूनी वैधानिक आधार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, इस संबंध में सरकार का निर्णय बुद्धि की कमी को दर्शाता है और समिति का नेतृत्व करने वाला एक विधायक मौलिक अधिकारों पर फैसला करेगा। हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाना कानूनी नहीं है। कामत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी केंद्रीय स्कूल हिजाब पहनने की अनुमति दे रहे हैं और याचिकाकर्ता लंबे समय से उसी रंग का हिजाब पहन रहे हैं जो वर्दी में है।
( स्वगतम ) अये । कदाचिदय पाप इदमनायं मयि सत्रामयेत् । भवतु, इतो गच्छामि । ( इति परिकामति । । ( शवार उपगम्य धारयति ।) दिन -पाप मामा स्प्राक्षी । अल या । गच्छाम्यहम् । शार अने वनन्दनेणिय शद ज्जैव मालियम दुशिन वहि पलाअशि ? अम्पद ईदिश हग्गे अपाधं पविदे। ( अरे । वसन्तुसना स्वयमव मारयित्वा माया त पलायम ? माम्यनुम्नाय प्राप्त) विट - अपध्वस्तोऽसि । अत्य शद देमि शुवण्णा दे कहावण दमि शवोडिअ दे। एथे दुशट्ठाण पलक्कमे सामागए मोडु महाआाण ॥ ४० ॥ ( अर्थम् गत ददामि व कापण ददामि सदोटिक तु । एवं दीपस्थान परामो में सामाको भवतु मनुष्याणाम ॥ ४० ॥ विहितम् पाप-पापतुल्यन सामान्यावस्पर्धेत भाव शहारेज, निपानानिर्दोपा पापरहिता, अथ च नगरस्य उज्जविया श्रीमा, लक्ष्मीत्यि, निपतिता- विनाशिता, इति भाव । पावकसनेम ' व दश्यदेशीयर ' (प। ५३६७) इतिप्रत्यय यंत्रमा पथ्यावक वृत्तम् ॥ ३२ ॥ अर्थ (अपन) यह पानी कहीं इस अपराध हो मरे नम अच्छा यहा म जाता हूँ । ( यह वह घुमता है। ) लेता है। विट-घर पापी । महुआ मत छुयो । तुम्हारा प्रयास न्यर्थ है। मैं जाता हूँ । शकार-~अरे वसतसेना वो अपने आप मारकर मुझ पर दर वहाँ भाग जा रह हो ? अब में ऐसा ना हो गया हूँ। दिन तुम पठित हो । यन्वय --( अहम्, ते शतम् ) सुवर्णम् अर्थम् ददामि, वे, वा चरणम् ददामि दोषस्थानम् मम एष पराश्रम मनुष्याणान् सामाय भन्तु ।। ४५ ॥ शब्दार्थ- ( वहम में शकार), वे तुम्हें दिको शतम्-सौ दुवम् सोना ( स्वणमय ), अर्थम् - घन, ददामि देता हूँ, दूंगा। ते तुम्हें मीडिवम्मोटियों के साथ वापतकालीन सोने का चित्रका, दशमिता, दूँगा, दापस्थानम्वरराव का स्थान यायय, मम पेरा, शहार का, एवं यह
अये । कदाचिदय पाप इदमनायं मयि सत्रामयेत् । भवतु, इतो गच्छामि । दिन -पाप मामा स्प्राक्षी । अल या । गच्छाम्यहम् । शार अने वनन्दनेणिय शद ज्जैव मालियम दुशिन वहि पलाअशि ? अम्पद ईदिश हग्गे अपाधं पविदे। विट - अपध्वस्तोऽसि । अत्य शद देमि शुवण्णा दे कहावण दमि शवोडिअ दे। एथे दुशट्ठाण पलक्कमे सामागए मोडु महाआाण ॥ चालीस ॥ इतिप्रत्यय यंत्रमा पथ्यावक वृत्तम् ॥ बत्तीस ॥ अर्थ यह पानी कहीं इस अपराध हो मरे नम अच्छा यहा म जाता हूँ । लेता है। विट-घर पापी । महुआ मत छुयो । तुम्हारा प्रयास न्यर्थ है। मैं जाता हूँ । शकार-~अरे वसतसेना वो अपने आप मारकर मुझ पर दर वहाँ भाग जा रह हो ? अब में ऐसा ना हो गया हूँ। दिन तुम पठित हो । यन्वय -- सुवर्णम् अर्थम् ददामि, वे, वा चरणम् ददामि दोषस्थानम् मम एष पराश्रम मनुष्याणान् सामाय भन्तु ।। पैंतालीस ॥ शब्दार्थ- , वे तुम्हें दिको शतम्-सौ दुवम् सोना , अर्थम् - घन, ददामि देता हूँ, दूंगा। ते तुम्हें मीडिवम्मोटियों के साथ वापतकालीन सोने का चित्रका, दशमिता, दूँगा, दापस्थानम्वरराव का स्थान यायय, मम पेरा, शहार का, एवं यह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो) ( Image Source : PTI ) Rajnath Singh On Surgical Strike: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर करारा हमला बोला. जम्मू में सोमवार (26 जून) को नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब पहले जैसा नहीं है और वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए उचित सैन्य कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगा. " राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत अब पहले जैसा भारत नहीं रह रहा है. भारत ताकत बनता जा रहा है. जरूरत पड़ी तो भारत सीमा के इस पार भी मार सकता है और जरूरत पड़ी तो उस पार भी जा सकता है. भारत अब वैसा बिल्कुल नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था. हमने दुनिया को दिखाया है कि जीरो टॉलरेंस का मतलब क्या होता है" साथ ही उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी चेतावनी दी. राजनाथ सिंह ने दिलाई सर्जिकल स्ट्राइक? राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने मोदी सरकार के तहत आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. साथ ही 2016 में सीमा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 बालाकोट हवाई हमले का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा, "पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शुरू की और पहली बार न केवल देश बल्कि दुनिया को भी पता चला कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का मतलब क्या है. " 'स्ट्राइक पर फैसला लेने में लगे सिर्फ 10 मिनट' उन्होंने कहा, "सर्जिकल स्ट्राइक पर फैसला लेने में पीएम मोदी को सिर्फ 10 मिनट लगे. पुलवामा और उरी दोनों दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं थीं. प्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला लेने में सिर्फ 10 मिनट का समय लिया, जो उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति को दर्शाता है. हमारी सेनाओं ने न केवल इस तरफ आतंकवादियों को मार गिराया, बल्कि सीमा पार भी गए. ये भी पढ़ेंः
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह Rajnath Singh On Surgical Strike: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान पर करारा हमला बोला. जम्मू में सोमवार को नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब पहले जैसा नहीं है और वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए उचित सैन्य कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगा. " राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत अब पहले जैसा भारत नहीं रह रहा है. भारत ताकत बनता जा रहा है. जरूरत पड़ी तो भारत सीमा के इस पार भी मार सकता है और जरूरत पड़ी तो उस पार भी जा सकता है. भारत अब वैसा बिल्कुल नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था. हमने दुनिया को दिखाया है कि जीरो टॉलरेंस का मतलब क्या होता है" साथ ही उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी चेतावनी दी. राजनाथ सिंह ने दिलाई सर्जिकल स्ट्राइक? राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने मोदी सरकार के तहत आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. साथ ही दो हज़ार सोलह में सीमा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और दो हज़ार उन्नीस बालाकोट हवाई हमले का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा, "पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शुरू की और पहली बार न केवल देश बल्कि दुनिया को भी पता चला कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का मतलब क्या है. " 'स्ट्राइक पर फैसला लेने में लगे सिर्फ दस मिनट' उन्होंने कहा, "सर्जिकल स्ट्राइक पर फैसला लेने में पीएम मोदी को सिर्फ दस मिनट लगे. पुलवामा और उरी दोनों दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं थीं. प्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला लेने में सिर्फ दस मिनट का समय लिया, जो उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति को दर्शाता है. हमारी सेनाओं ने न केवल इस तरफ आतंकवादियों को मार गिराया, बल्कि सीमा पार भी गए. ये भी पढ़ेंः
नवाजुद्दीन सिद्दीकी से एक बार बॉलिवुड के चार खान के बारे में पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है कि हम जिस चौथे खान के बारे में बात करेंगे तो वह सैफ अली खान होंगे?' नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा था कि मेरा इरफान खान के साथ कोई समीकरण या रिश्ता नहीं है। मेरे ऐक्टिंग का अलग तरीका है, उनका अपना अलग तरीका है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी से एक बार बॉलिवुड के चार खान के बारे में पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है कि हम जिस चौथे खान के बारे में बात करेंगे तो वह सैफ अली खान होंगे?' नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा था कि मेरा इरफान खान के साथ कोई समीकरण या रिश्ता नहीं है। मेरे ऐक्टिंग का अलग तरीका है, उनका अपना अलग तरीका है।
महासमुंद, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत बिल की राशि बकाया होने के कारण विच्छेदित बिजली कनेक्शन उपभोक्पाओं को राहत देते हुए वन टाईम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत विद्युत विच्छेदित उपभोक्पा विद्युत बिल की मूल राशि का भुगतान छह किश्तों में कर सकेंगे। इसके तहत निम्न दाब उपभोक्पाओं द्वारा विद्युत बिल की मूल राशि जमा करने पर सरचार्ज की समस्त राशि माफ की जा सकेगी। पाप्त जानकारी के अनुसार 16 अक्टूबर 2010 से 15 जनवरी 2011 तक तीन माह की अवधि के लिए लागू इस योजना में बिजली बिल बकायादार उपभोक्पा संबंधित वितरण केंद में निर्धारित पपत्र में आवेदन पस्तुत कर सकते हैं। इसके परीक्षण पश्चात् उनका पंजीयन किया जाएगा। विद्युत बकाया की पहली किश्त का भुगतान करने पर उनका विच्छेदित कनेक्शन जोड़ दिया जाएगा। साथ ही पूरी मूल राशि के भुगतान के बाद उनके द्वारा देय सरचार्ज की पूरी राशि माफ कर दी जाएगी। गौरतलब है कि उपभोक्पा की मृत्यु अथवा अनुपस्थिति में उनके वारिस अथवा अधिकृत पतिनिधि भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। महासमुंद संभाग के कार्यपालन यंत्री ए. आन. बुनकर ने बताया है कि योजना के संबंध में सभी वितरण केंदों को सूचित कर दिया गया है। बताया गया कि यह योजना केवल सीमित अवधि के लिए लागू है, जिसका लाभ लेकर बकायादार विद्युत उपभोक्पा बिजली सुविधा का लाभ लेने के अलावा सरचार्ज की छूट भी पाप्त कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि पंप उपभोक्पाओं के लिए इस योजना के तहत बकाया राशि का भुगतान करने पर भी शासन द्वारा पति पंप दी जाने वाली पति वर्ष छह हजार यूनिट बिजली छूट की सुविधा मिल सकेगी। बकायादारों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।
महासमुंद, । विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत बिल की राशि बकाया होने के कारण विच्छेदित बिजली कनेक्शन उपभोक्पाओं को राहत देते हुए वन टाईम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत विद्युत विच्छेदित उपभोक्पा विद्युत बिल की मूल राशि का भुगतान छह किश्तों में कर सकेंगे। इसके तहत निम्न दाब उपभोक्पाओं द्वारा विद्युत बिल की मूल राशि जमा करने पर सरचार्ज की समस्त राशि माफ की जा सकेगी। पाप्त जानकारी के अनुसार सोलह अक्टूबर दो हज़ार दस से पंद्रह जनवरी दो हज़ार ग्यारह तक तीन माह की अवधि के लिए लागू इस योजना में बिजली बिल बकायादार उपभोक्पा संबंधित वितरण केंद में निर्धारित पपत्र में आवेदन पस्तुत कर सकते हैं। इसके परीक्षण पश्चात् उनका पंजीयन किया जाएगा। विद्युत बकाया की पहली किश्त का भुगतान करने पर उनका विच्छेदित कनेक्शन जोड़ दिया जाएगा। साथ ही पूरी मूल राशि के भुगतान के बाद उनके द्वारा देय सरचार्ज की पूरी राशि माफ कर दी जाएगी। गौरतलब है कि उपभोक्पा की मृत्यु अथवा अनुपस्थिति में उनके वारिस अथवा अधिकृत पतिनिधि भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। महासमुंद संभाग के कार्यपालन यंत्री ए. आन. बुनकर ने बताया है कि योजना के संबंध में सभी वितरण केंदों को सूचित कर दिया गया है। बताया गया कि यह योजना केवल सीमित अवधि के लिए लागू है, जिसका लाभ लेकर बकायादार विद्युत उपभोक्पा बिजली सुविधा का लाभ लेने के अलावा सरचार्ज की छूट भी पाप्त कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि पंप उपभोक्पाओं के लिए इस योजना के तहत बकाया राशि का भुगतान करने पर भी शासन द्वारा पति पंप दी जाने वाली पति वर्ष छह हजार यूनिट बिजली छूट की सुविधा मिल सकेगी। बकायादारों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।
देश में रिजर्व बैंक ने दो हजार रुपए के नोट को चलन से बाहर करने की घोषणा हाल ही की है। लेकिन राजस्थान में चित्तौडग़ढ़ के सांवलियाजी के भंडार में लाखों रुपए का चढ़ावा दो हजार के नोट के रूप में अभी भी पहुंच रहा है। हाल ही हुई भंडार की गणना में भी 3939 नोट दो हजार रुपए के नोट निकले है। जो करीब 78. 78 लाख रुपए के है।
देश में रिजर्व बैंक ने दो हजार रुपए के नोट को चलन से बाहर करने की घोषणा हाल ही की है। लेकिन राजस्थान में चित्तौडग़ढ़ के सांवलियाजी के भंडार में लाखों रुपए का चढ़ावा दो हजार के नोट के रूप में अभी भी पहुंच रहा है। हाल ही हुई भंडार की गणना में भी तीन हज़ार नौ सौ उनतालीस नोट दो हजार रुपए के नोट निकले है। जो करीब अठहत्तर. अठहत्तर लाख रुपए के है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नमूनों द्वारा प्रदर्शित रासायनिक तत्व, जिन्हें परमाणु अंक से क्रमबद्ध किया गया है। इन रासायनिक तत्वों के बारे में अधिक जानकारी के लिये उनके लेखों पर जायें। . गैलिअम एक रासायनिक तत्व है। यह प्रकृति में शुद्ध रूप में नहीं मिलता लेकिन इसके यौगिक बॉक्साइट और जस्ते के खनिजों में अल्प-मात्रा में पाये जाते हैं। अपने शुद्ध रूप में यह एक मुलायम और चमकीली धातु है जिसका पिघलाव तापमान केवल २९.७६ °सेंटिग्रेड है, यानि यह अक्सर साधारण तापमान में पिघल जाता है। इसकी खोज सन् १८७५ में हुई थी और तब से इसका प्रयोग ऐसी मिश्र धातुओं को बनाने के लिये किया जाता है जो कम तापमान पर पिघल जाएँ। इसका इस्तेमाल अर्धचालकों (सेमिकन्डक्टरों) में भी होता है। . आवर्त सारणी के नमूने और गैलियम आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): रासायनिक तत्व, जस्ता। रासायनिक तत्वों की आवर्त सारणी रासायनिक तत्व (या केवल तत्व) ऐसे उन शुद्ध पदार्थों को कहते हैं जो केवल एक ही तरह के परमाणुओं से बने होते हैं। या जो ऐसे परमाणुओं से बने होते हैं जिनके नाभिक में समान संख्या में प्रोटॉन होते हैं। सभी रासायनिक पदार्थ तत्वों से ही मिलकर बने होते हैं। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, आक्सीजन, तथा सिलिकॉन आदि कुछ तत्व हैं। सन २००७ तक कुल ११७ तत्व खोजे या पाये जा चुके हैं जिसमें से ९४ तत्व धरती पर प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। कृत्रिम नाभिकीय अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप उच्च परमाणु क्रमांक वाले तत्व समय-समय पर खोजे जाते रहे हैं। . जस्ता या ज़िन्क एक रासायनिक तत्व है जो संक्रमण धातु समूह का एक सदस्य है। रासायनिक दृष्टि से इसके गुण मैगनीसियम से मिलते-जुलते हैं। मनुष्य जस्ते का प्रयोग प्राचीनकाल से करते आये हैं। कांसा, जो ताम्बे व जस्ते की मिश्र धातु है, १०वीं सदी ईसापूर्व से इस्तेमाल होने के चिन्ह छोड़ गया है। ९वीं शताब्दी ईपू से राजस्थान में शुद्ध जस्ता बनाये जाने के चिन्ह मिलते हैं और ६ठीं शताब्दी ईपू की एक जस्ते की खान भी राजस्थान में मिली है। लोहे पर जस्ता चढ़ाने से लोहा ज़ंग खाने से बचा रहता है और जस्ते का प्रयोग बैट्रियों में भी बहुत होता है। . आवर्त सारणी के नमूने 55 संबंध है और गैलियम 7 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 3.23% है = 2 / (55 + 7)। यह लेख आवर्त सारणी के नमूने और गैलियम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। नमूनों द्वारा प्रदर्शित रासायनिक तत्व, जिन्हें परमाणु अंक से क्रमबद्ध किया गया है। इन रासायनिक तत्वों के बारे में अधिक जानकारी के लिये उनके लेखों पर जायें। . गैलिअम एक रासायनिक तत्व है। यह प्रकृति में शुद्ध रूप में नहीं मिलता लेकिन इसके यौगिक बॉक्साइट और जस्ते के खनिजों में अल्प-मात्रा में पाये जाते हैं। अपने शुद्ध रूप में यह एक मुलायम और चमकीली धातु है जिसका पिघलाव तापमान केवल उनतीस.छिहत्तर °सेंटिग्रेड है, यानि यह अक्सर साधारण तापमान में पिघल जाता है। इसकी खोज सन् एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में हुई थी और तब से इसका प्रयोग ऐसी मिश्र धातुओं को बनाने के लिये किया जाता है जो कम तापमान पर पिघल जाएँ। इसका इस्तेमाल अर्धचालकों में भी होता है। . आवर्त सारणी के नमूने और गैलियम आम में दो बातें हैं : रासायनिक तत्व, जस्ता। रासायनिक तत्वों की आवर्त सारणी रासायनिक तत्व ऐसे उन शुद्ध पदार्थों को कहते हैं जो केवल एक ही तरह के परमाणुओं से बने होते हैं। या जो ऐसे परमाणुओं से बने होते हैं जिनके नाभिक में समान संख्या में प्रोटॉन होते हैं। सभी रासायनिक पदार्थ तत्वों से ही मिलकर बने होते हैं। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, आक्सीजन, तथा सिलिकॉन आदि कुछ तत्व हैं। सन दो हज़ार सात तक कुल एक सौ सत्रह तत्व खोजे या पाये जा चुके हैं जिसमें से चौरानवे तत्व धरती पर प्राकृतिक रूप से विद्यमान हैं। कृत्रिम नाभिकीय अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप उच्च परमाणु क्रमांक वाले तत्व समय-समय पर खोजे जाते रहे हैं। . जस्ता या ज़िन्क एक रासायनिक तत्व है जो संक्रमण धातु समूह का एक सदस्य है। रासायनिक दृष्टि से इसके गुण मैगनीसियम से मिलते-जुलते हैं। मनुष्य जस्ते का प्रयोग प्राचीनकाल से करते आये हैं। कांसा, जो ताम्बे व जस्ते की मिश्र धातु है, दसवीं सदी ईसापूर्व से इस्तेमाल होने के चिन्ह छोड़ गया है। नौवीं शताब्दी ईपू से राजस्थान में शुद्ध जस्ता बनाये जाने के चिन्ह मिलते हैं और छःठीं शताब्दी ईपू की एक जस्ते की खान भी राजस्थान में मिली है। लोहे पर जस्ता चढ़ाने से लोहा ज़ंग खाने से बचा रहता है और जस्ते का प्रयोग बैट्रियों में भी बहुत होता है। . आवर्त सारणी के नमूने पचपन संबंध है और गैलियम सात है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक तीन.तेईस% है = दो / । यह लेख आवर्त सारणी के नमूने और गैलियम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
नहीं हुई हैं तब तक यदि धर्माचरण करना हो तो करलो । अन्यथा वृद्धावस्था आजाने पर भी धर्म ध्यान नहीं कर सकोगे । इसी प्रकार शरीर में जब तक निरोगता है तब तक ही धर्माराधना कर सकते हो । बीमारी का प्रकोप हो जाने पर भी धर्माचरण से वंचित रह जाओगे और इंद्रियों में शिथिलता नहीं है तब तक जो भी धर्म प्रवृत्ति करना चाहो कर सकते हो । क्योंकि जब इंद्रियां ही काम नहीं करेगी तो धर्म-कार्य भी कैसे कर सकोगे। तो धर्माचरण केवल निरोग शरीर में ही किया जा सकता है । जैसे कोई व्यक्ति असाध्य बीमारी के प्रकोप से खाट पर पड़ा पड़ा कराह रहा है। यदि ऐसी परिस्थिति में कोई सज्जन, व्यक्ति उसे कहता है कि चलो । अपने शहर में मुनिराजों का शुभागमन हुआ है अतः दर्शन करो । परन्तु उस समय वह व्यक्ति यही उत्तर देगा कि तुम्हें तो दर्शनों की पड़ी है और मुझे तो अपने शरीर की चिंता है । कहिए ! क्या वह व्यक्ति ऐसी हालत में कभी दर्शन लाभ ले सकता है ? कदापि नहीं। यहां तक कि घर पर दर्शन देने के लिए. पधारे हुए मुनिराज को भी वह सविधि वन्दन नहीं कर सकता। अरे, जब इंन्द्रिएं हो काम नहीं करती तो वह धर्म लाभ कैसे ले सकता है ? तो अनन्त तीथकुरों ने भव्य प्राणियों को यही धर्मोपदेश दिया कि हे भव्यात्मीयों ! जब तक तुम्हें बुढ़ापा नहीं आया है, व्याधि उत्प नहीं हुई है और इंन्द्रियें बराबर काम कर रही हैं तब तक यदि इस मानव शरीर से धर्माचरण करना चाहते हो तो कर लो । अरे ! निरोग शरीर में रहते हुए और धर्माचरण करते हुए तुम स्वर्ग ही नहीं परन्तु • मोक्ष भी प्राप्त कर सकते हो । यह निरोग शरीर हो तुम्हें मोक्ष मन्दिर तक पहुँचा सकता है। अस्वस्थ शरीर से कोई भी धर्माचरण नहीं हो सकता । अतएव शरीर का निरोग रहनावश्यक है । :: सन्तोषो सदा सुखी श्रीमद् ठाणांगजी सूत्र में भी दस प्रकार के सुखों का वर्णन करते हुए शास्त्रकारों ने प्रथम सुख निरोग शरीर का होना बताया है । शरीर की निरोगता के साथ साथ मन की निरोगता भी होनी चाहिए। क्योंकि जब मन निरोग होगा तभो दानादि क्रिया हो सकती है। मन 'की अस्वस्थती में आप किसी को कितना ही देने के लिए आग्रह कीजिए परन्तु मनस्ताप वाला कभी कुछ नहीं दे सकता । क्योंकि उसे मन का रोग नहीं देने के लिए विवश कर रहा है। इसीलिए तीर्थकर भगवान ने फर्माया कि ऐ मानव ! पहिले तुझे शरीर और मन के रोग से स्वस्थ होना आवश्यक है। और जब शरीर तथा मन की निरोगता नहीं है तो आपके लिए धन भी किस काम का है ! क्योंकि शरीर की निरोगता के बिना उसका उपभोग भी नहीं किया जा सकता । दूसरा सुख शास्त्रकारों ने 'घर में माया' के बदले लम्बा आयुष्य होना बताया है। क्योंकि यदि आप लम्बा आयुष्य लेकर नहीं आए और जन्मते ही मर गए या बचपन में ही कलिका के खिलने से पूर्व ही तोड़ लिए गए तब भी मनुष्य शरीर की प्राप्ति का लाभ नहीं उठा सके.- धर्माचरण नहीं कर सके । इसलिए मनुष्य जीवन पाने के साथ साथ धर्माचरण करने के लिए लंबा आयुष्य प्राप्त होना दूसरा सुख माना गया है । तीसरा सुख रिद्धि की प्राप्ति का होना माना गया है। क्योंकि जीवन निर्वाह के लिए मकान, वस्त्र, जेवर, अन्न, बर्तनादि आवश्यक वस्तुओं की जरूरत होती है। जब ये चीजें प्रचुर प्रमाण में होती है तो मनस्ताप नहीं रहता और धर्म ध्यान करने में भी मन लगता है । यदि एक भूखे मनुष्य को कहा जाय कि धर्माचरण कर तो वह फौरन यही प्रत्युत्तर देगा कि- "भूखे भजन न होय गोपाला, यह लो कंठी
नहीं हुई हैं तब तक यदि धर्माचरण करना हो तो करलो । अन्यथा वृद्धावस्था आजाने पर भी धर्म ध्यान नहीं कर सकोगे । इसी प्रकार शरीर में जब तक निरोगता है तब तक ही धर्माराधना कर सकते हो । बीमारी का प्रकोप हो जाने पर भी धर्माचरण से वंचित रह जाओगे और इंद्रियों में शिथिलता नहीं है तब तक जो भी धर्म प्रवृत्ति करना चाहो कर सकते हो । क्योंकि जब इंद्रियां ही काम नहीं करेगी तो धर्म-कार्य भी कैसे कर सकोगे। तो धर्माचरण केवल निरोग शरीर में ही किया जा सकता है । जैसे कोई व्यक्ति असाध्य बीमारी के प्रकोप से खाट पर पड़ा पड़ा कराह रहा है। यदि ऐसी परिस्थिति में कोई सज्जन, व्यक्ति उसे कहता है कि चलो । अपने शहर में मुनिराजों का शुभागमन हुआ है अतः दर्शन करो । परन्तु उस समय वह व्यक्ति यही उत्तर देगा कि तुम्हें तो दर्शनों की पड़ी है और मुझे तो अपने शरीर की चिंता है । कहिए ! क्या वह व्यक्ति ऐसी हालत में कभी दर्शन लाभ ले सकता है ? कदापि नहीं। यहां तक कि घर पर दर्शन देने के लिए. पधारे हुए मुनिराज को भी वह सविधि वन्दन नहीं कर सकता। अरे, जब इंन्द्रिएं हो काम नहीं करती तो वह धर्म लाभ कैसे ले सकता है ? तो अनन्त तीथकुरों ने भव्य प्राणियों को यही धर्मोपदेश दिया कि हे भव्यात्मीयों ! जब तक तुम्हें बुढ़ापा नहीं आया है, व्याधि उत्प नहीं हुई है और इंन्द्रियें बराबर काम कर रही हैं तब तक यदि इस मानव शरीर से धर्माचरण करना चाहते हो तो कर लो । अरे ! निरोग शरीर में रहते हुए और धर्माचरण करते हुए तुम स्वर्ग ही नहीं परन्तु • मोक्ष भी प्राप्त कर सकते हो । यह निरोग शरीर हो तुम्हें मोक्ष मन्दिर तक पहुँचा सकता है। अस्वस्थ शरीर से कोई भी धर्माचरण नहीं हो सकता । अतएव शरीर का निरोग रहनावश्यक है । :: सन्तोषो सदा सुखी श्रीमद् ठाणांगजी सूत्र में भी दस प्रकार के सुखों का वर्णन करते हुए शास्त्रकारों ने प्रथम सुख निरोग शरीर का होना बताया है । शरीर की निरोगता के साथ साथ मन की निरोगता भी होनी चाहिए। क्योंकि जब मन निरोग होगा तभो दानादि क्रिया हो सकती है। मन 'की अस्वस्थती में आप किसी को कितना ही देने के लिए आग्रह कीजिए परन्तु मनस्ताप वाला कभी कुछ नहीं दे सकता । क्योंकि उसे मन का रोग नहीं देने के लिए विवश कर रहा है। इसीलिए तीर्थकर भगवान ने फर्माया कि ऐ मानव ! पहिले तुझे शरीर और मन के रोग से स्वस्थ होना आवश्यक है। और जब शरीर तथा मन की निरोगता नहीं है तो आपके लिए धन भी किस काम का है ! क्योंकि शरीर की निरोगता के बिना उसका उपभोग भी नहीं किया जा सकता । दूसरा सुख शास्त्रकारों ने 'घर में माया' के बदले लम्बा आयुष्य होना बताया है। क्योंकि यदि आप लम्बा आयुष्य लेकर नहीं आए और जन्मते ही मर गए या बचपन में ही कलिका के खिलने से पूर्व ही तोड़ लिए गए तब भी मनुष्य शरीर की प्राप्ति का लाभ नहीं उठा सके.- धर्माचरण नहीं कर सके । इसलिए मनुष्य जीवन पाने के साथ साथ धर्माचरण करने के लिए लंबा आयुष्य प्राप्त होना दूसरा सुख माना गया है । तीसरा सुख रिद्धि की प्राप्ति का होना माना गया है। क्योंकि जीवन निर्वाह के लिए मकान, वस्त्र, जेवर, अन्न, बर्तनादि आवश्यक वस्तुओं की जरूरत होती है। जब ये चीजें प्रचुर प्रमाण में होती है तो मनस्ताप नहीं रहता और धर्म ध्यान करने में भी मन लगता है । यदि एक भूखे मनुष्य को कहा जाय कि धर्माचरण कर तो वह फौरन यही प्रत्युत्तर देगा कि- "भूखे भजन न होय गोपाला, यह लो कंठी
राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान शिमला में महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया। प्राचार्य डाक्टर अनुपमा गर्ग ने बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस मौके पर प्राचार्य ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों की सांस्कृतिक व कलात्मक प्रतिभाओं को निखारने तथा आपसी संवाद में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा फाइनल के छात्रों द्वारा रैंप वॉक, जिसमें पीयूष और कुमारी मारीशा मिस्टर व मिस कोटशेरा चुने गए। ऋषभ और पारुल फस्र्ट रनरअप तथा रीतिज और शीतल सेकेंड रनरअप रहे। मुस्कान मिस गॉर्जियस और हिना मिस वाइवेशियस चुनी गईं। परीक्षित मिस्टर वाइब्रेंट और अभिषेक मिस्टर चार्मिंग चुने गए। इस प्रतियोगिता में प्राध्यापक डाक्टर अजीत ठाकुर, डाक्टर दिनेश सिंह कंवर और डॉ. अनुप्रिया निर्णायक रहे। समारोह के संयोजक डाक्टर गोपाल संघईक ने मुख्य अतिथि, प्राध्यापकों, स्टाफ, विद्यार्थियों व विशेषकर अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के बारे में बताया। समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आगाज मोहित और पंकज के लोक गायन से हुआ। उसके बाद दीपा और साक्षी ने पाश्चात्य नृत्य पेश किया। मुस्कान और नेहा तथा अनमोल व मोहित आर्यवंशी ने गायन से समा बांधा। नेहा ने अद्र्ध-शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। धर्मपाल व निक्का ने महासुई लोक गायन किया। मनीश ने हिप हॉप नृत्य तथा आदि व अद्वित ने रैप नृत्य प्रस्तुत किया। एनसीसी कैडेट्स चेतन, सौरभ व श्याम ने भांगड़ा तथा विज्ञान स्नातक की छात्राओं ने बालीवुड संगीत पर नृत्य किया। कला स्नातक के विद्यार्थियों ने रेट्रो डांस प्रस्तुति दी। वहीं, पल्लवी, सुनील, सुलक्षणा व आर्यन मेहता ने बेहतरीन मंच संचालन किया।
राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान शिमला में महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया। प्राचार्य डाक्टर अनुपमा गर्ग ने बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस मौके पर प्राचार्य ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों की सांस्कृतिक व कलात्मक प्रतिभाओं को निखारने तथा आपसी संवाद में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा फाइनल के छात्रों द्वारा रैंप वॉक, जिसमें पीयूष और कुमारी मारीशा मिस्टर व मिस कोटशेरा चुने गए। ऋषभ और पारुल फस्र्ट रनरअप तथा रीतिज और शीतल सेकेंड रनरअप रहे। मुस्कान मिस गॉर्जियस और हिना मिस वाइवेशियस चुनी गईं। परीक्षित मिस्टर वाइब्रेंट और अभिषेक मिस्टर चार्मिंग चुने गए। इस प्रतियोगिता में प्राध्यापक डाक्टर अजीत ठाकुर, डाक्टर दिनेश सिंह कंवर और डॉ. अनुप्रिया निर्णायक रहे। समारोह के संयोजक डाक्टर गोपाल संघईक ने मुख्य अतिथि, प्राध्यापकों, स्टाफ, विद्यार्थियों व विशेषकर अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के बारे में बताया। समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आगाज मोहित और पंकज के लोक गायन से हुआ। उसके बाद दीपा और साक्षी ने पाश्चात्य नृत्य पेश किया। मुस्कान और नेहा तथा अनमोल व मोहित आर्यवंशी ने गायन से समा बांधा। नेहा ने अद्र्ध-शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। धर्मपाल व निक्का ने महासुई लोक गायन किया। मनीश ने हिप हॉप नृत्य तथा आदि व अद्वित ने रैप नृत्य प्रस्तुत किया। एनसीसी कैडेट्स चेतन, सौरभ व श्याम ने भांगड़ा तथा विज्ञान स्नातक की छात्राओं ने बालीवुड संगीत पर नृत्य किया। कला स्नातक के विद्यार्थियों ने रेट्रो डांस प्रस्तुति दी। वहीं, पल्लवी, सुनील, सुलक्षणा व आर्यन मेहता ने बेहतरीन मंच संचालन किया।
बीएचयू प्रशासन ने विद्यार्थियों को कैंपस में होली खेलने से मना किया था। इसके विरोध में विद्यार्थियों ने कैंपस में डीजे लगाकर खूब होली खेली। होली से पहले उत्तर प्रदेश में मस्जिद-मजारों को ढकने का काम शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहजहाँपुर में 67 मस्जिद-मजार को तिरपाल से ढका जा रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और फोटोज सामने आ रहे हैं, जिसमें लड़कियों को अस्पताल में इलाज कराते हुए देखा जा सकता है। कर्नाटक हिजाब मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और कहा कि होली के बाद इसकी लिस्टिंग करेंगे। अपने ही देश को बदनाम करने में जुटे राहुल गाँधी ने कश्मीर को अशांत करने वाले पाकिस्तान का एक बार भी नाम नहीं लिया, उलटा भारत को कोसते रहे। पंजाब में हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को पंजाबी अभिनेत्री सोनिया मान ने जायज ठहराया है। दक्षिणपूर्व दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि आरोपित के खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी, स्नैचिंग और आर्म्स एक्ट के तहत 9 मामले पहले से दर्ज हैं। अतीक अहमद के इशारे पर काम करने वाला गुड्डू मुस्लिम बम बनाने में बेहद एक्सपर्ट है। वह चलती हुई बाइक में भी बम बना लेता था।
बीएचयू प्रशासन ने विद्यार्थियों को कैंपस में होली खेलने से मना किया था। इसके विरोध में विद्यार्थियों ने कैंपस में डीजे लगाकर खूब होली खेली। होली से पहले उत्तर प्रदेश में मस्जिद-मजारों को ढकने का काम शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहजहाँपुर में सरसठ मस्जिद-मजार को तिरपाल से ढका जा रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और फोटोज सामने आ रहे हैं, जिसमें लड़कियों को अस्पताल में इलाज कराते हुए देखा जा सकता है। कर्नाटक हिजाब मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और कहा कि होली के बाद इसकी लिस्टिंग करेंगे। अपने ही देश को बदनाम करने में जुटे राहुल गाँधी ने कश्मीर को अशांत करने वाले पाकिस्तान का एक बार भी नाम नहीं लिया, उलटा भारत को कोसते रहे। पंजाब में हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को पंजाबी अभिनेत्री सोनिया मान ने जायज ठहराया है। दक्षिणपूर्व दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि आरोपित के खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी, स्नैचिंग और आर्म्स एक्ट के तहत नौ मामले पहले से दर्ज हैं। अतीक अहमद के इशारे पर काम करने वाला गुड्डू मुस्लिम बम बनाने में बेहद एक्सपर्ट है। वह चलती हुई बाइक में भी बम बना लेता था।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मन्दिर में जा झोली भरले । बुत से याद खुदा की करले ॥ तपरस्त मत बन, पर बुत को अपना किल्ला मान । मूर्ति से भजले तू भगवान ।। ७१२ ॥ कर मत कभी मूर्ति का पूजन । किन्तु मूर्ति से कर प्रभु में मन । मूर्ति अमूर्ति समन्वय करके पाले धर्म महान । मूर्ति से भजले तू भगवान ॥ ७१३ ॥ पूजादिसमन्वय पूजा प्रेयर प्रार्थना सन्ध्या यज्ञ मानवता के पाठ को पढ़ने के सब साज ॥ ७१४ ॥ मन को आश्वासन मिळे पायें संयम ज्ञान । इसीलिये नाना तरह सब भजते भगवान ॥ ७१५ ॥ भाषाओं में भेद है देशकाल अनुसार रुचि रुचि के अनुसार हैं विधियाँ भिन्न प्रकार ॥ ७१६ ॥ जा अपव्यय है नहीं और न पापाचार । वे विधियाँ स्वीकारलो अवसर के अनुसार ॥ ७१७ ।। भजन करो या प्रार्थना अथवा पढ़ो नमाज । जब जैसा अवसर मिले करो उसीका साज ॥ ७१८ ॥ पूजा भजन नमाज के भिन्न भिन्न हैं ढंग । एक सत्य का रंग ॥ ७१९ ।। विधियों के उद्देश्य का रखो सर्वदा ध्यान । विधियों का हठ छोड़कर करो उचित सन्मान ॥ ७२० ॥ विधियाँ जो युगबाहय हो या अनिष्ट बेकार । मर्म समझ इठ छोड़ दो करलो पूर्ण सुधार ॥ ७२१ ॥ विश्वप्रेम का ध्यानकर छोड़ो हिंसक यज्ञ ।
मन्दिर में जा झोली भरले । बुत से याद खुदा की करले ॥ तपरस्त मत बन, पर बुत को अपना किल्ला मान । मूर्ति से भजले तू भगवान ।। सात सौ बारह ॥ कर मत कभी मूर्ति का पूजन । किन्तु मूर्ति से कर प्रभु में मन । मूर्ति अमूर्ति समन्वय करके पाले धर्म महान । मूर्ति से भजले तू भगवान ॥ सात सौ तेरह ॥ पूजादिसमन्वय पूजा प्रेयर प्रार्थना सन्ध्या यज्ञ मानवता के पाठ को पढ़ने के सब साज ॥ सात सौ चौदह ॥ मन को आश्वासन मिळे पायें संयम ज्ञान । इसीलिये नाना तरह सब भजते भगवान ॥ सात सौ पंद्रह ॥ भाषाओं में भेद है देशकाल अनुसार रुचि रुचि के अनुसार हैं विधियाँ भिन्न प्रकार ॥ सात सौ सोलह ॥ जा अपव्यय है नहीं और न पापाचार । वे विधियाँ स्वीकारलो अवसर के अनुसार ॥ सात सौ सत्रह ।। भजन करो या प्रार्थना अथवा पढ़ो नमाज । जब जैसा अवसर मिले करो उसीका साज ॥ सात सौ अट्ठारह ॥ पूजा भजन नमाज के भिन्न भिन्न हैं ढंग । एक सत्य का रंग ॥ सात सौ उन्नीस ।। विधियों के उद्देश्य का रखो सर्वदा ध्यान । विधियों का हठ छोड़कर करो उचित सन्मान ॥ सात सौ बीस ॥ विधियाँ जो युगबाहय हो या अनिष्ट बेकार । मर्म समझ इठ छोड़ दो करलो पूर्ण सुधार ॥ सात सौ इक्कीस ॥ विश्वप्रेम का ध्यानकर छोड़ो हिंसक यज्ञ ।
मालदीव में भारत विरोधी प्रदर्शन (Anti-India Protests in Maldives) की भारी कीमत चुकानी होगी. सत्ताधारी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) एक ऐसा बिल लेकर आ रही है, जिसके कानून बनते ही भारत के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन अपराध बन जाएगा. बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें मालदीव के लोग 'इंडिया आउट' (India Out) की टी-शर्ट पहने भारत सरकार के खिलाफ विरोध जताते नजर आ रहे हैं. MDP का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शनों से द्विपक्षीय रिश्ते प्रभावित होते हैं. इसलिए इन पर रोक लगाई जानी चाहिए. पूर्व राष्ट्रपति चला रहे अभियान 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव में चीन (China) समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन (Abdulla Yameen) की तरफ से भारत (India) के खिलाफ 'इंडिया आउट' अभियान चलाया जा रहा है. इस तरह के अभियानों को अवैध घोषित करने के लिए सरकार नया विधेयक लाने पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य एक संतुलित विदेशी नीति को अपनाना है, जो बाकी देशों के साथ उसके संबंधों को मजबूत बनाने में असरदार सिद्ध होगी.ऐसा है सजा का प्रावधाननए विधेयक के तहत भारत विरोधी नारे लगाने वालों से 20,000 मालदीवियन रुफिया का जुर्माना वसूला जाएगा. इसके साथ ही 6 माह की जेल या फिर 1 साल के लिए नजरबंद करने का भी प्रावधान है. MDP के एक नेता ने कहा, '87 सदस्यों वाली संसद में हमारे पास स्पष्ट बहुमत है. लिहाजा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन बिल का विरोध कर रहा है. हमें लगता है कि इस तरह का कठोर कानून बनाए जाने की जरूरत है,क्योंकि हमारी और भारत की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है'.Bill के विरोध में उठी आवाजेंहालांकि, इस बिल के विरोध में भी आवाजें उठ रही हैं. विरोधियों का कहना है कि ये विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है. बता दें कि जेल से छूटने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के 'इंडिया आउट' कैंपेन में और अधिक तेजी आई है. यामीन ने भारत पर देश की आंतरिक राजनीति में दखल देने और मालदीव की मौजूदा सरकार पर भारत के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है. वैसे यह पहली बार नहीं है जब मालदीव में भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं. ऐसा ही विरोध साल 2012 में हुआ था, जिसके बाद भारतीय एयरपोर्ट ऑपरेटर जीएमआर को उस वर्ष मालदीव छोड़ भारत लौटना पड़ा था.
मालदीव में भारत विरोधी प्रदर्शन की भारी कीमत चुकानी होगी. सत्ताधारी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी एक ऐसा बिल लेकर आ रही है, जिसके कानून बनते ही भारत के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन अपराध बन जाएगा. बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें मालदीव के लोग 'इंडिया आउट' की टी-शर्ट पहने भारत सरकार के खिलाफ विरोध जताते नजर आ रहे हैं. MDP का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शनों से द्विपक्षीय रिश्ते प्रभावित होते हैं. इसलिए इन पर रोक लगाई जानी चाहिए. पूर्व राष्ट्रपति चला रहे अभियान 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव में चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की तरफ से भारत के खिलाफ 'इंडिया आउट' अभियान चलाया जा रहा है. इस तरह के अभियानों को अवैध घोषित करने के लिए सरकार नया विधेयक लाने पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य एक संतुलित विदेशी नीति को अपनाना है, जो बाकी देशों के साथ उसके संबंधों को मजबूत बनाने में असरदार सिद्ध होगी.ऐसा है सजा का प्रावधाननए विधेयक के तहत भारत विरोधी नारे लगाने वालों से बीस,शून्य मालदीवियन रुफिया का जुर्माना वसूला जाएगा. इसके साथ ही छः माह की जेल या फिर एक साल के लिए नजरबंद करने का भी प्रावधान है. MDP के एक नेता ने कहा, 'सत्तासी सदस्यों वाली संसद में हमारे पास स्पष्ट बहुमत है. लिहाजा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन बिल का विरोध कर रहा है. हमें लगता है कि इस तरह का कठोर कानून बनाए जाने की जरूरत है,क्योंकि हमारी और भारत की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है'.Bill के विरोध में उठी आवाजेंहालांकि, इस बिल के विरोध में भी आवाजें उठ रही हैं. विरोधियों का कहना है कि ये विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है. बता दें कि जेल से छूटने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के 'इंडिया आउट' कैंपेन में और अधिक तेजी आई है. यामीन ने भारत पर देश की आंतरिक राजनीति में दखल देने और मालदीव की मौजूदा सरकार पर भारत के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है. वैसे यह पहली बार नहीं है जब मालदीव में भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं. ऐसा ही विरोध साल दो हज़ार बारह में हुआ था, जिसके बाद भारतीय एयरपोर्ट ऑपरेटर जीएमआर को उस वर्ष मालदीव छोड़ भारत लौटना पड़ा था.
जबलपुर, यशभारत। शहर का अग्रिशमन दल अपनी जान को जोखिम में डालकर शहर के नागरिकों की जान और माल की रक्षा करता है। हाल ही में मदनमहल टालों और गोदाम में लगी आग पर काबू पाने दमकल कर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। यह किसी देवदूत से कम नहीं। कम संसाधान और कर्मियों के बावजूद किसी भी अग्रिकांड को नियंत्रित करने का जिम्मा इनका है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए मदनमहल अग्रिकांड को समय रहते नियंत्रित कर, हजारों रहवासियों की जान बचाने वाले फायर मैन और वाहन चालकों को इस दौरान अनेक कठनाईयों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग और सूझबूझ के चलते बगैर रास्ता हुए भी वाहन पहुंचाकर आग पर काबू पाया गया। गौरतलब है कि महानद्दा क्षेत्र स्थित साहू कॉलोनी में जयेश पटेल का लकड़ी के टाल के साथ ही साथ एक साथ कई टाल और भी लगे हुए थे। शनिवार की रात तकरीबन साढ़े 11 बजे टाल में अचानक आग भड़क गई। स्थानीय लोगों ने आग को काबू करने के साथ ही नगर निगम के दमकल विभाग को सूचना दी। आग बढ़ते देख नगर निगम की सातों दमकलों को मौके पर भेजा गया। वहीं, सुबह आठ बजे तक करीब 80 से 100 चक्कर दमकलों ने लगा लिए थे। बताया गया कि मौके पर एक साथ चार से ज्यादा टाल थे। दोनों में आग लगने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। स्थानीय लोग भी घरों को छोड़कर बाहर आ गए। पूरे क्षेत्र में देर रात तक दहशत का माहौल रहा। वहीं अनेक घरों को खाली कराया गया था, ताकि आग लगने के बाद किसी प्रकार से जनहानि ना हो सके। नगर निगम के अनुसार महानद्दा तालाब के ठीक पीछे एक साथ कई टाल बने हुए हैं। आग ने अचानक से भीषण रूप रख लिया। आशंका को देखते हुए नजदीक के तीन घरों को खाली कराया गया। जिसके बाद रविवार सुबह करीब 8 बजे तक दमकल वाहन आग बुझाते रहे। राजेन्द्र पटैल सहायक अधीक्षक अग्रिशमन दल ने जानकारी देते हुए बताया कि टाल के समीप ही सैनिटाइजर और दवाओं का गोदाम है। इस कारण आग को काबू करने में ज्यादा मशक्कत करना पड़ी। वहीं, जहां आग लगी थी वहां अग्रिशमन दल के वाहनों का पहुंचपाना लगभग असंभव था, जिस कारण तुरंत जेसीबी लगाकर रास्ते के आसपास बने मकानों को आशिक तोड़कर रास्ता बनाया गया, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका। फायर मैन राजेश जैन ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार तुरंत फायर मैनों को अलर्ट किया गया। जिसके बाद ड्यूटी में तैनात फायर मैन आकाश श्रीवास्तव, महेश मलिक, ओमप्रकाश दुबे, शिवप्रसाद लोाधी, सुल्तान खान, दिलीप यादव, दीपू रंजन, ओमप्रकाश यादव को वाहनों सहित मौके पर भेजा गया तो वहीं हांका गैंग सहित 40 लोगों को इस काम में लगाया गया था। अमले ने जानकारी देते हुए बताया कि अग्रिकांड के सूचना के बाद तत्काल 7 वाहनों को मौके पर अमले के साथ भेजा गया था वहीं 3 वाटर टैंक लगाए गए थे। वाहन चालकों में संजय यादव, तरुण कनौजिया, मसूर आलम, सद्दाम हुसैन, अशोक तिवारी, दशरथ यादव, अजीत सोंधिया ने वाहनों की कमान सम्हाली। राजेन्द्र पटैल ने बताया कि फायर बिग्रेड को वाटर रिफिल करने के लिए फिलहाल अमले के पास केवल एक ही डेमलारी है। जिसकी क्षमता 12 हजार लीटर है, लेकिन एक के भरोसे अग्रिकांडों को नियंत्रित कर पाना मुश्किल होता है। अग्रिशमन दल को अभी तकरीबन 4 डेमलारी की आवश्यकता है। इसका प्रमुख कार्य होता है वाटर रिफिल करना। अब एक डेमलारी जब तक एक वाहन में रिफिल करती है, तब तक दूसरा वाहन खड़ा रहता है। जिससे अग्रिकांड को नियंत्रित करने में करीब करीब दोगुना समय लगता है। जिससे जनहानि होने की भी संभावना रहती है। राजेन्द्र पटैल सहायक अधीक्षक ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे पास फिलहाल लगभग 75-80 कर्मचारी है, उसमें ठेके और दैनिक वेतनभोगी के अलावा कुछ रेगुलर कर्मी है। जो 6 महिने की ट्रेनिंग के बाद अमले मे ंशामिल किए जाते है। फिलहाल व्यापम के माध्यम से रेगुलर कर्मी शामिल होते है, जिनकी समय -समय पर शासन वेकेंसी निकालता है। फायर मैन को ट्रेनिंग के लिए जबलपुर के अधारताल में ट्रेनिंग सेंटर है तो वहीं भोपाल बस स्टॉप नंबर 6 के पास सेंटर है। जिनसे ट्रेनिंग लिए हुए फायर मैन भर्ती किए जाते है। विभाग ने बताया कि फिलहाल 10-12 साल से विभाग में कर्मचारियों का टोटा है। विभाग मे ंइस समय करीब 30 फायर मैन और 15 वाहन चालक रेगुलर की कमी है। जिसकी जानकारी ननि के स्थापना शाखा को है। इतना ही नहीं शासन को अनेकों बार इस बात से भी अगवत कराया जा चुका है। राजेश जैन फायर मैन ने इस मौके पर यशभारत को बताया कि 6 महिने की कड़ी ट्रेनिंग और कोर्स के बाद फायर मैन का जिम्मा मिलता है। अपनी जान को जोखिम में डालने का हौसला और सूझबूझ के बाद किसी भी अग्रिकांड को नियंत्रित करना, अहम है। जिसमें बिना जान और माल की हानि हुए धधंकती आग को काबू में करना टेड़ी खीर होती है।
जबलपुर, यशभारत। शहर का अग्रिशमन दल अपनी जान को जोखिम में डालकर शहर के नागरिकों की जान और माल की रक्षा करता है। हाल ही में मदनमहल टालों और गोदाम में लगी आग पर काबू पाने दमकल कर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। यह किसी देवदूत से कम नहीं। कम संसाधान और कर्मियों के बावजूद किसी भी अग्रिकांड को नियंत्रित करने का जिम्मा इनका है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए मदनमहल अग्रिकांड को समय रहते नियंत्रित कर, हजारों रहवासियों की जान बचाने वाले फायर मैन और वाहन चालकों को इस दौरान अनेक कठनाईयों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग और सूझबूझ के चलते बगैर रास्ता हुए भी वाहन पहुंचाकर आग पर काबू पाया गया। गौरतलब है कि महानद्दा क्षेत्र स्थित साहू कॉलोनी में जयेश पटेल का लकड़ी के टाल के साथ ही साथ एक साथ कई टाल और भी लगे हुए थे। शनिवार की रात तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे टाल में अचानक आग भड़क गई। स्थानीय लोगों ने आग को काबू करने के साथ ही नगर निगम के दमकल विभाग को सूचना दी। आग बढ़ते देख नगर निगम की सातों दमकलों को मौके पर भेजा गया। वहीं, सुबह आठ बजे तक करीब अस्सी से एक सौ चक्कर दमकलों ने लगा लिए थे। बताया गया कि मौके पर एक साथ चार से ज्यादा टाल थे। दोनों में आग लगने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। स्थानीय लोग भी घरों को छोड़कर बाहर आ गए। पूरे क्षेत्र में देर रात तक दहशत का माहौल रहा। वहीं अनेक घरों को खाली कराया गया था, ताकि आग लगने के बाद किसी प्रकार से जनहानि ना हो सके। नगर निगम के अनुसार महानद्दा तालाब के ठीक पीछे एक साथ कई टाल बने हुए हैं। आग ने अचानक से भीषण रूप रख लिया। आशंका को देखते हुए नजदीक के तीन घरों को खाली कराया गया। जिसके बाद रविवार सुबह करीब आठ बजे तक दमकल वाहन आग बुझाते रहे। राजेन्द्र पटैल सहायक अधीक्षक अग्रिशमन दल ने जानकारी देते हुए बताया कि टाल के समीप ही सैनिटाइजर और दवाओं का गोदाम है। इस कारण आग को काबू करने में ज्यादा मशक्कत करना पड़ी। वहीं, जहां आग लगी थी वहां अग्रिशमन दल के वाहनों का पहुंचपाना लगभग असंभव था, जिस कारण तुरंत जेसीबी लगाकर रास्ते के आसपास बने मकानों को आशिक तोड़कर रास्ता बनाया गया, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका। फायर मैन राजेश जैन ने बताया कि जैसे ही सूचना मिली वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार तुरंत फायर मैनों को अलर्ट किया गया। जिसके बाद ड्यूटी में तैनात फायर मैन आकाश श्रीवास्तव, महेश मलिक, ओमप्रकाश दुबे, शिवप्रसाद लोाधी, सुल्तान खान, दिलीप यादव, दीपू रंजन, ओमप्रकाश यादव को वाहनों सहित मौके पर भेजा गया तो वहीं हांका गैंग सहित चालीस लोगों को इस काम में लगाया गया था। अमले ने जानकारी देते हुए बताया कि अग्रिकांड के सूचना के बाद तत्काल सात वाहनों को मौके पर अमले के साथ भेजा गया था वहीं तीन वाटर टैंक लगाए गए थे। वाहन चालकों में संजय यादव, तरुण कनौजिया, मसूर आलम, सद्दाम हुसैन, अशोक तिवारी, दशरथ यादव, अजीत सोंधिया ने वाहनों की कमान सम्हाली। राजेन्द्र पटैल ने बताया कि फायर बिग्रेड को वाटर रिफिल करने के लिए फिलहाल अमले के पास केवल एक ही डेमलारी है। जिसकी क्षमता बारह हजार लीटर है, लेकिन एक के भरोसे अग्रिकांडों को नियंत्रित कर पाना मुश्किल होता है। अग्रिशमन दल को अभी तकरीबन चार डेमलारी की आवश्यकता है। इसका प्रमुख कार्य होता है वाटर रिफिल करना। अब एक डेमलारी जब तक एक वाहन में रिफिल करती है, तब तक दूसरा वाहन खड़ा रहता है। जिससे अग्रिकांड को नियंत्रित करने में करीब करीब दोगुना समय लगता है। जिससे जनहानि होने की भी संभावना रहती है। राजेन्द्र पटैल सहायक अधीक्षक ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे पास फिलहाल लगभग पचहत्तर-अस्सी कर्मचारी है, उसमें ठेके और दैनिक वेतनभोगी के अलावा कुछ रेगुलर कर्मी है। जो छः महिने की ट्रेनिंग के बाद अमले मे ंशामिल किए जाते है। फिलहाल व्यापम के माध्यम से रेगुलर कर्मी शामिल होते है, जिनकी समय -समय पर शासन वेकेंसी निकालता है। फायर मैन को ट्रेनिंग के लिए जबलपुर के अधारताल में ट्रेनिंग सेंटर है तो वहीं भोपाल बस स्टॉप नंबर छः के पास सेंटर है। जिनसे ट्रेनिंग लिए हुए फायर मैन भर्ती किए जाते है। विभाग ने बताया कि फिलहाल दस-बारह साल से विभाग में कर्मचारियों का टोटा है। विभाग मे ंइस समय करीब तीस फायर मैन और पंद्रह वाहन चालक रेगुलर की कमी है। जिसकी जानकारी ननि के स्थापना शाखा को है। इतना ही नहीं शासन को अनेकों बार इस बात से भी अगवत कराया जा चुका है। राजेश जैन फायर मैन ने इस मौके पर यशभारत को बताया कि छः महिने की कड़ी ट्रेनिंग और कोर्स के बाद फायर मैन का जिम्मा मिलता है। अपनी जान को जोखिम में डालने का हौसला और सूझबूझ के बाद किसी भी अग्रिकांड को नियंत्रित करना, अहम है। जिसमें बिना जान और माल की हानि हुए धधंकती आग को काबू में करना टेड़ी खीर होती है।
मुंबई : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 4 दिवसीय अमेरिका (America) दौरे पर है। पीएम मोदी बीते मंगलवार को भारत से रवाना हुए थे। 22 जून, गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे। जहां राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बिडेन ने पीएम मोदी का गर्मजोशी के साथ वेलकम भी किया। व्हाइट हाउस में पीएम मोदी ने स्पीच भी दिया। वहीं अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें अफ्रीकी-अमेरिकी एक्ट्रेस और सिंगर मैरी मिलबेन (American Singer Mary Millben) वाशिंगटन डीसी के रोनाल्ड रीगन बिल्डिंग में भारतीय राष्ट्रगान गाती नजर आ रही हैं। सिंगर ने बड़ी ही सुरीली आवाज में 'जन-गण-मन' गाया। जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। मैरी मिलबेन ने राष्ट्रगान गाने के बाद पीएम मोदी के पैर छूने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी। पीएम मोदी ने उन्हें रोकते हुए उनसे हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया है। जिसमें पीएम मोदी सावधान मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गाते नजर आ रहे हैं। वहीं मैरी मिलबेन ने जैसे ही राष्ट्रगान गाकर पूरा किया पीएम मोदी ने तालियों के साथ उनका अभिवादन किया। बता दें कि सिंगर मैरी मिलबेन इससे पहले पीएम मोदी से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर पीएम मोदी के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित योग कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान मिली थीं। मैरी मिलबेन उस समय चर्चा में आई थीं जब उन्होंने भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रगान गाया था।
मुंबई : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय अमेरिका दौरे पर है। पीएम मोदी बीते मंगलवार को भारत से रवाना हुए थे। बाईस जून, गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे। जहां राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बिडेन ने पीएम मोदी का गर्मजोशी के साथ वेलकम भी किया। व्हाइट हाउस में पीएम मोदी ने स्पीच भी दिया। वहीं अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें अफ्रीकी-अमेरिकी एक्ट्रेस और सिंगर मैरी मिलबेन वाशिंगटन डीसी के रोनाल्ड रीगन बिल्डिंग में भारतीय राष्ट्रगान गाती नजर आ रही हैं। सिंगर ने बड़ी ही सुरीली आवाज में 'जन-गण-मन' गाया। जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। मैरी मिलबेन ने राष्ट्रगान गाने के बाद पीएम मोदी के पैर छूने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी। पीएम मोदी ने उन्हें रोकते हुए उनसे हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया है। जिसमें पीएम मोदी सावधान मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गाते नजर आ रहे हैं। वहीं मैरी मिलबेन ने जैसे ही राष्ट्रगान गाकर पूरा किया पीएम मोदी ने तालियों के साथ उनका अभिवादन किया। बता दें कि सिंगर मैरी मिलबेन इससे पहले पीएम मोदी से इक्कीस जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर पीएम मोदी के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित योग कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान मिली थीं। मैरी मिलबेन उस समय चर्चा में आई थीं जब उन्होंने भारत के चौहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रगान गाया था।
क्रिकेट की दुनिया के सरताज माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर को महंगी कारों का बड़ा शौक है और उनकी गैराज में फेरारी, पोर्शे और बीएमडब्ल्यू के साथ ही कई नामचीन कंपनियों की लग्जरी गाड़ियां हैं। अब उनकी गैराज में लैम्बोर्गिनी की नई एसयूवी भी आ गई है। जी हां, मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि सचिन तेंदुलकर ने अपने लिए नई लैम्बोर्गिनी उरुस एस सुपर एसयूवी खरीदी है, जिसकी एक्स शोरूम प्राइस 4. 18 करोड़ रुपये है। इस लग्जरी एसयूवी को हाल ही में भारतीय बाजार में पेश किया है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस में स्पोर्टी बम्पर और कूलिंग वेंट्स के साथ बोनट अटैच है। एयर सस्पेंशन सिस्टम से लैस इस एसयूवी में फिक्स्ड-कॉइल सेटअप दिया गया है, जो कि बेहतर हैंडलिंग के लिए है। उरुस एस एक 4. 0-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड वी8 इंजन दिया गया है, जो कि 666 पीएस की मैक्सिमम पावर और 850 न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इस पावरट्रेन के साथ लैम्बोर्गिनी उरुस एस महज 3. 5 सेकंड में 0-100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है। इस एसयूवी में 8 स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस की टॉप स्पीड 305kmph की है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस के फीचर्स की बात करें तो इसमें डुअल स्क्रीन डिस्प्ले, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, एंबिएंट लाइटिंग, वेंटिलेशन और मसाज फंक्शन से लैस पावर्ड फ्रंट सीट्स, 8 एयरबैग्स, इलेक्ट्रोनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल और अडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम समेत काफी सारी और भी खूबियां हैं। सचिन तेंदुलकर के पास नई लैम्बोर्गिनी उरुस एस के साथ ही पोर्श 911 टर्बो एस भी है, जिसके साथ वह अक्सर मुंबई में देखे गए हैं। उनके पास सबसे ज्यादा बीएमडब्ल्यू की गाड़ियां हैं, जिनमें बीएमडब्ल्यू 7-सीरीज, बीएमडब्ल्यू एक्स5एम, बीएमडब्ल्यू आई8 और बीएमडब्ल्यू 5-सीरीज प्रमुख हैं। सचिन के पास फेरारी कार भी है।
क्रिकेट की दुनिया के सरताज माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर को महंगी कारों का बड़ा शौक है और उनकी गैराज में फेरारी, पोर्शे और बीएमडब्ल्यू के साथ ही कई नामचीन कंपनियों की लग्जरी गाड़ियां हैं। अब उनकी गैराज में लैम्बोर्गिनी की नई एसयूवी भी आ गई है। जी हां, मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि सचिन तेंदुलकर ने अपने लिए नई लैम्बोर्गिनी उरुस एस सुपर एसयूवी खरीदी है, जिसकी एक्स शोरूम प्राइस चार. अट्ठारह करोड़ रुपये है। इस लग्जरी एसयूवी को हाल ही में भारतीय बाजार में पेश किया है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस में स्पोर्टी बम्पर और कूलिंग वेंट्स के साथ बोनट अटैच है। एयर सस्पेंशन सिस्टम से लैस इस एसयूवी में फिक्स्ड-कॉइल सेटअप दिया गया है, जो कि बेहतर हैंडलिंग के लिए है। उरुस एस एक चार. शून्य-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड वीआठ इंजन दिया गया है, जो कि छः सौ छयासठ पीएस की मैक्सिमम पावर और आठ सौ पचास न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इस पावरट्रेन के साथ लैम्बोर्गिनी उरुस एस महज तीन. पाँच सेकंड में शून्य-एक सौ kmph की रफ्तार पकड़ सकती है। इस एसयूवी में आठ स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलता है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस की टॉप स्पीड तीन सौ पाँचkmph की है। लैम्बोर्गिनी उरुस एस के फीचर्स की बात करें तो इसमें डुअल स्क्रीन डिस्प्ले, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, एंबिएंट लाइटिंग, वेंटिलेशन और मसाज फंक्शन से लैस पावर्ड फ्रंट सीट्स, आठ एयरबैग्स, इलेक्ट्रोनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल और अडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम समेत काफी सारी और भी खूबियां हैं। सचिन तेंदुलकर के पास नई लैम्बोर्गिनी उरुस एस के साथ ही पोर्श नौ सौ ग्यारह टर्बो एस भी है, जिसके साथ वह अक्सर मुंबई में देखे गए हैं। उनके पास सबसे ज्यादा बीएमडब्ल्यू की गाड़ियां हैं, जिनमें बीएमडब्ल्यू सात-सीरीज, बीएमडब्ल्यू एक्सपाँचएम, बीएमडब्ल्यू आईआठ और बीएमडब्ल्यू पाँच-सीरीज प्रमुख हैं। सचिन के पास फेरारी कार भी है।
गैलिना श्चेरबाकोवा - सोवियत और रूसी उपन्यासकार और पटकथा लेखक। वह यूक्रेन में ज़र्ज़िस्क में दोनेत्स्क क्षेत्र में पैदा हुआ था। कई स्कूल वर्ष, भविष्य लेखक जर्मन कब्जे में पारित कर दिया। गैलिना श्चेरबाकोवा रोस्तोव की स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया। बाद में, वह और उसके पति चेल्याबिंस्क में ले जाया गया, एक शैक्षणिक संस्थान में अनुवाद किया। यह पूरा करता है और स्कूल में रूसी साहित्य और भाषा के एक शिक्षक के रूप में काम शुरू होता है। इसके अलावा, उन्होंने अखबार में एक पत्रकार बन गया। बहरहाल, यह काम छोड़ रहा है, वह एक लेखक बनना चाहता था। पत्रकारिता, इसकी एकमात्र राय में, ओर करने के लिए एक व्यक्ति को जाता है। सत्तर के दशक तक गैलिना श्चेरबाकोवा ने लिखा है के रूप में वह गंभीर बातें कबूल कर लिया। यह एक महान गद्य वैश्विक दार्शनिक विषयों था। हालांकि, इन कार्यों सब प्रकाशित करने के लिए मना कर दिया। एक दिन वह प्यार के बारे में एक उपन्यास बनाने का फैसला किया। परिणाम एक कहानी हकदार था "तुम सपना नहीं कर सकते। " 1979 में, काम गिरावट में "युवा" पत्रिका प्रकाशित करने। कथा एक बड़ी सफलता है, जो लेखक के लिए एक पूर्ण आश्चर्य था। वह उत्साही पत्र की एक बड़ी संख्या में आने के लिए किया गया था। गैलिना श्चेरबाकोवा द्वारा प्रसिद्ध उपन्यास के अलावा वह उपन्यास और कहानियां सहित बीस से अधिक पुस्तकें लिखी गई है। हम अपने जीवन और कैरियर गैलिना श्चेरबाकोवा की शुरुआत के रूप में माना है। उसकी किताबें फिल्मों के आधार पर बाद में दिखाई देने लगे। कहानी "तुम सपना नहीं कर सकते" इसके प्रकाशन के बाद शीघ्र ही फिल्म के लिए इल्या फ्रेज़ का फैसला किया। जूलिया और रोमन के नाम पर प्राथमिक स्रोत में नायकों। कहानी सांस्कृतिक अभियान प्रदर्शन में शुरू होता है। यह "वेस्ट साइड स्टोरी" कहा जाता है और इस प्रकार "रोमियो और जूलियट" करने के लिए संकेत को रेखांकित किया। फिल्म की नायिका कैट्या नाम पर है। फाइनल नरम। पति गैलिना श्चेरबाकोवा - अलेक्जेंडर, लेखक, निबंधकार और पत्रकार। अलेक्जेंडर Rezhabek - लेखक का बेटा, इसराइल में 2013 में मृत्यु हो गई। बेटी - इकाटेरिना श्पिलर। उन्होंने कहा कि इसराइल में रहती है। पोती - ऐलिस स्पिलर। उन्होंने कहा कि मास्को में रहती है। गैलिना श्चेरबाकोवा उपन्यास बहुत बाद में कहानियों प्रकाशित किए गए थे। इनमें से पहला की "रोमांटिक और यथार्थवादियों", का कार्य 1997 में दिखाई दिया था। लेखक भी "उदगम", "महिलाओं", "हवा" के रूप में इस तरह के महान उपन्यास बनाया, "Lizonka और दूसरों", "यह किया गया है और है है," "लेबल लिलिथ", "तीन लव" और अन्य। द्वारा गैलिना श्चेरबाकोवा कोई कम दिलचस्प, उन के बीचः "आप, सपना नहीं कर सकते" "ठीक है, छोड़ दिया शहर," "ओह, मान्या," "मोलोटोव के बिस्तर", "Mitina Lyubov" "अभिनेत्री और पुलिस वाले", "स्पार्टन" " अन्ना नामित . . . "" तुम कौन हो, जनरल, लड़कियों के? "," कौन पिछले हंसते हुए कहते हैं, "" फुट की ऊंचाई पर "फूलों की मासूमियत" "" Utkomest "," लड़का और लड़की "," अलीना का वर्ष "," समय " "इतिहास है कि नहीं था" "मृत झील एंजल्स" "रैप", "दीवार" और अन्य। , "संगरोध" "व्यक्तिगत" मुझे मरने, हे प्रभु, करने दें "": लेखक इस परिदृश्य पर होगा। गैलिना श्चेरबाकोवा भी रोमांचक कहानियाँ, "लिविंग", "क्विर्क जीवन का एक बहुत बनाया। गोर्बाचेव के समय और उसके सामने "," रूस में उत्प्रवास, "" केवल "," शाम थी, "" चाचा क्लोरीन "," विवरण "," डरो मत! "कमाल अपने काम करता है, हे प्रभु . . . रहे हैं" "," आनन्द " ". . . यह सिलाई होना चाहिए . . . ", "Okelemene", "मेरे लिए कहानी", "पुनः प्रारंभ", "ट्रॉय", "दादी और स्टालिन", "आलिया और बांध" "unexpunged फिल्म", "बेटी, माँ ' "दरवाजा", "mallards से", "एक लेखक की भूमिका," "भावुक बाढ़", "नहीं था और हँसे", "वापसी", "औरत", "पहाड़" और दूसरों पर। लेखक, "चूहों पर प्रयोग" सहित तेजस्वी टुकड़े के एक नंबर लिखा है, "मैं एक कुत्ते का रक्षक हूँ", और दूसरों "की Vassa खेलते हैं"। "लव istory," "प्रेमी की सेना", "लकड़ी के पैर", "पत्थर एवोकैडो," "टोटल रिकॉल", "दरवाजा", "हताश शरद ऋतु", "घर", "Yashkin बच्चों", "रास्ताः यह भी निम्नलिखित काम करता है बनाता है Bodaibo पर "," Edda Murzavetskaya बिल्ली "," Kuzmenko के मामले में, "" कंकाल कोठरी में "," कैसे एक एक्मे कवर किया गया था "," मौत एक टैंगो लगता है की ", कीनू वर्ष" मुसीबत में हो जाएगा, ""। "
गैलिना श्चेरबाकोवा - सोवियत और रूसी उपन्यासकार और पटकथा लेखक। वह यूक्रेन में ज़र्ज़िस्क में दोनेत्स्क क्षेत्र में पैदा हुआ था। कई स्कूल वर्ष, भविष्य लेखक जर्मन कब्जे में पारित कर दिया। गैलिना श्चेरबाकोवा रोस्तोव की स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया। बाद में, वह और उसके पति चेल्याबिंस्क में ले जाया गया, एक शैक्षणिक संस्थान में अनुवाद किया। यह पूरा करता है और स्कूल में रूसी साहित्य और भाषा के एक शिक्षक के रूप में काम शुरू होता है। इसके अलावा, उन्होंने अखबार में एक पत्रकार बन गया। बहरहाल, यह काम छोड़ रहा है, वह एक लेखक बनना चाहता था। पत्रकारिता, इसकी एकमात्र राय में, ओर करने के लिए एक व्यक्ति को जाता है। सत्तर के दशक तक गैलिना श्चेरबाकोवा ने लिखा है के रूप में वह गंभीर बातें कबूल कर लिया। यह एक महान गद्य वैश्विक दार्शनिक विषयों था। हालांकि, इन कार्यों सब प्रकाशित करने के लिए मना कर दिया। एक दिन वह प्यार के बारे में एक उपन्यास बनाने का फैसला किया। परिणाम एक कहानी हकदार था "तुम सपना नहीं कर सकते। " एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में, काम गिरावट में "युवा" पत्रिका प्रकाशित करने। कथा एक बड़ी सफलता है, जो लेखक के लिए एक पूर्ण आश्चर्य था। वह उत्साही पत्र की एक बड़ी संख्या में आने के लिए किया गया था। गैलिना श्चेरबाकोवा द्वारा प्रसिद्ध उपन्यास के अलावा वह उपन्यास और कहानियां सहित बीस से अधिक पुस्तकें लिखी गई है। हम अपने जीवन और कैरियर गैलिना श्चेरबाकोवा की शुरुआत के रूप में माना है। उसकी किताबें फिल्मों के आधार पर बाद में दिखाई देने लगे। कहानी "तुम सपना नहीं कर सकते" इसके प्रकाशन के बाद शीघ्र ही फिल्म के लिए इल्या फ्रेज़ का फैसला किया। जूलिया और रोमन के नाम पर प्राथमिक स्रोत में नायकों। कहानी सांस्कृतिक अभियान प्रदर्शन में शुरू होता है। यह "वेस्ट साइड स्टोरी" कहा जाता है और इस प्रकार "रोमियो और जूलियट" करने के लिए संकेत को रेखांकित किया। फिल्म की नायिका कैट्या नाम पर है। फाइनल नरम। पति गैलिना श्चेरबाकोवा - अलेक्जेंडर, लेखक, निबंधकार और पत्रकार। अलेक्जेंडर Rezhabek - लेखक का बेटा, इसराइल में दो हज़ार तेरह में मृत्यु हो गई। बेटी - इकाटेरिना श्पिलर। उन्होंने कहा कि इसराइल में रहती है। पोती - ऐलिस स्पिलर। उन्होंने कहा कि मास्को में रहती है। गैलिना श्चेरबाकोवा उपन्यास बहुत बाद में कहानियों प्रकाशित किए गए थे। इनमें से पहला की "रोमांटिक और यथार्थवादियों", का कार्य एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में दिखाई दिया था। लेखक भी "उदगम", "महिलाओं", "हवा" के रूप में इस तरह के महान उपन्यास बनाया, "Lizonka और दूसरों", "यह किया गया है और है है," "लेबल लिलिथ", "तीन लव" और अन्य। द्वारा गैलिना श्चेरबाकोवा कोई कम दिलचस्प, उन के बीचः "आप, सपना नहीं कर सकते" "ठीक है, छोड़ दिया शहर," "ओह, मान्या," "मोलोटोव के बिस्तर", "Mitina Lyubov" "अभिनेत्री और पुलिस वाले", "स्पार्टन" " अन्ना नामित . . . "" तुम कौन हो, जनरल, लड़कियों के? "," कौन पिछले हंसते हुए कहते हैं, "" फुट की ऊंचाई पर "फूलों की मासूमियत" "" Utkomest "," लड़का और लड़की "," अलीना का वर्ष "," समय " "इतिहास है कि नहीं था" "मृत झील एंजल्स" "रैप", "दीवार" और अन्य। , "संगरोध" "व्यक्तिगत" मुझे मरने, हे प्रभु, करने दें "": लेखक इस परिदृश्य पर होगा। गैलिना श्चेरबाकोवा भी रोमांचक कहानियाँ, "लिविंग", "क्विर्क जीवन का एक बहुत बनाया। गोर्बाचेव के समय और उसके सामने "," रूस में उत्प्रवास, "" केवल "," शाम थी, "" चाचा क्लोरीन "," विवरण "," डरो मत! "कमाल अपने काम करता है, हे प्रभु . . . रहे हैं" "," आनन्द " ". . . यह सिलाई होना चाहिए . . . ", "Okelemene", "मेरे लिए कहानी", "पुनः प्रारंभ", "ट्रॉय", "दादी और स्टालिन", "आलिया और बांध" "unexpunged फिल्म", "बेटी, माँ ' "दरवाजा", "mallards से", "एक लेखक की भूमिका," "भावुक बाढ़", "नहीं था और हँसे", "वापसी", "औरत", "पहाड़" और दूसरों पर। लेखक, "चूहों पर प्रयोग" सहित तेजस्वी टुकड़े के एक नंबर लिखा है, "मैं एक कुत्ते का रक्षक हूँ", और दूसरों "की Vassa खेलते हैं"। "लव istory," "प्रेमी की सेना", "लकड़ी के पैर", "पत्थर एवोकैडो," "टोटल रिकॉल", "दरवाजा", "हताश शरद ऋतु", "घर", "Yashkin बच्चों", "रास्ताः यह भी निम्नलिखित काम करता है बनाता है Bodaibo पर "," Edda Murzavetskaya बिल्ली "," Kuzmenko के मामले में, "" कंकाल कोठरी में "," कैसे एक एक्मे कवर किया गया था "," मौत एक टैंगो लगता है की ", कीनू वर्ष" मुसीबत में हो जाएगा, ""। "
रूस गुरुवार को यूक्रेन में पहला हमला कर चुका है। इसके बाद अब वह दूसरे हमले की तैयारी में है। जिसे लेकर हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आने वाले कुछ घंटों में रूस, राजधानी कीएव पर हमला कर देगा। ऐसे में यहां पर फंसे हजारों भारतीयों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। रूस और भारत के आपसी संबंध अच्छे माने जाते हैं। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हमले को लेकर बातचीत की खबरे भी आई थी। जिसमें मुख्य रुप से पीएम मोदी ने वहां फंसे भारतीयों के सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था। इसी बीच यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों को यूक्रेन से बाहर निकालने में जुटी हुई है। इस अभियान के तहत 470 भारतीय छात्रों का पहला जत्था यूक्रेन से बाहर निकलकर रोमानिया की सीमा में पहुंच चुका है। कीएव में भारत के दूतावास की तरफ़ से बताया गया है कि भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने की ये प्रक्रिया रोमानिया, हंगरी और पोलैंड के भारतीय दूतावासों के संयुक्त प्रयासों से की जा रही है। वहीं, भारतीय छात्रों को पोलैंड में प्रवेश की अनुमति मिल सके इसलिए पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर भी तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं। भारत के दूतावास ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि आज दोपहर 470 से अधिक छात्र यूक्रेन से बाहर निकलेंगे और पोरबने-साइरेट सीमा के माध्यम से रोमानिया में प्रवेश करेंगे। हम सीमा पर स्थित भारतीयों को आगे की निकासी के लिए पड़ोसी देशों में ले जा रहे हैं। भीतरी इलाकों से आने वाले भारतीयों को स्थानांतरित करने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस से दो तरह के विचार सामने आए हैं। एक पक्ष का कहना है कि सरकार को संतुलन बनाए रखना चाहिए तो दूसरा पक्ष ये कह रहा है कि रूस की कार्रवाई की निंदा होनी चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने सरकार द्वारा उठाए कदमों पर ही ज़ोर दिया है। वहीं कांग्रेस के ही दूसरे वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी का तर्क है कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट रुख़ रखना चाहिए और रूस को बताना चाहिए कि ये हमला गलत है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कहना है कि भारत को रूस की कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए, क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों और यूएन चार्टर का उल्लंघन है।
रूस गुरुवार को यूक्रेन में पहला हमला कर चुका है। इसके बाद अब वह दूसरे हमले की तैयारी में है। जिसे लेकर हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आने वाले कुछ घंटों में रूस, राजधानी कीएव पर हमला कर देगा। ऐसे में यहां पर फंसे हजारों भारतीयों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। रूस और भारत के आपसी संबंध अच्छे माने जाते हैं। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हमले को लेकर बातचीत की खबरे भी आई थी। जिसमें मुख्य रुप से पीएम मोदी ने वहां फंसे भारतीयों के सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था। इसी बीच यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों को यूक्रेन से बाहर निकालने में जुटी हुई है। इस अभियान के तहत चार सौ सत्तर भारतीय छात्रों का पहला जत्था यूक्रेन से बाहर निकलकर रोमानिया की सीमा में पहुंच चुका है। कीएव में भारत के दूतावास की तरफ़ से बताया गया है कि भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने की ये प्रक्रिया रोमानिया, हंगरी और पोलैंड के भारतीय दूतावासों के संयुक्त प्रयासों से की जा रही है। वहीं, भारतीय छात्रों को पोलैंड में प्रवेश की अनुमति मिल सके इसलिए पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर भी तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं। भारत के दूतावास ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि आज दोपहर चार सौ सत्तर से अधिक छात्र यूक्रेन से बाहर निकलेंगे और पोरबने-साइरेट सीमा के माध्यम से रोमानिया में प्रवेश करेंगे। हम सीमा पर स्थित भारतीयों को आगे की निकासी के लिए पड़ोसी देशों में ले जा रहे हैं। भीतरी इलाकों से आने वाले भारतीयों को स्थानांतरित करने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस से दो तरह के विचार सामने आए हैं। एक पक्ष का कहना है कि सरकार को संतुलन बनाए रखना चाहिए तो दूसरा पक्ष ये कह रहा है कि रूस की कार्रवाई की निंदा होनी चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने सरकार द्वारा उठाए कदमों पर ही ज़ोर दिया है। वहीं कांग्रेस के ही दूसरे वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी का तर्क है कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट रुख़ रखना चाहिए और रूस को बताना चाहिए कि ये हमला गलत है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कहना है कि भारत को रूस की कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए, क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों और यूएन चार्टर का उल्लंघन है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
बीड़ को ऑपरेटिव टी फैक्ट्री के बंद हो जाने को लेकर सैंकड़ों लोग , छोट-छोटे टी प्लांटर बीड़ टी फैक्ट्री पहुंच गए । उन्होंने बहां पर जोरदार हंगामा किया । उनका कहना है कि अब उन्हें चिंता सताने लगी है कि अगर शीघ्र इस फैक्ट्री में दोबारा से काम शुरू नहीं हुआ तो कैसे बह अपने परिवारों का पालन पोषण करेंगे। क्योंकि पिछले कई सालों से बह इस फैक्ट्री में काम कर अपने परिवारों का पालन पोषण करते आ रहे हैं। कुछ का कहना था की अगर टी फैक्ट्री न चली तो किसे के बगीचों से पत्ती तोडऩे का काम करेंगे। कुछ का कहना था कि हमें यहां काम करते 20 साल हो गए मगर जो पिछले चार साल से यहां आए उन्हें सुपरबाएजर बना दिया गया। हमारे ओवर टाइम का पैसा नहीं मिल रहा है। इलाके की सबसे पुरानी इस बीड़ टी फैक्ट्री में बीड ही नही अलबता बैजनाथ, महालपट्ट, भट्टू संसाल ब आस पास क्षेत्रों के टी प्लांटर अपने बगीचों से चाय पत्ती बीड़ फैक्ट्री को सप्लाई करते हैं । साथ में इन बगीचों में सैंकड़ों लोग वर्षों से काम कर अपने परिवारों का जीवन यापन करते हैं। इस मौके पर मेन डिवीजन बैजनाथ से प्यार चंद सोनू सतीश कुमार अशोक सरला सपना , बगीचा अलीहलाल से रीना गीता रुको अंजू बगीचा श्यामला से गोगी रिता भादुरी ज्योति ,बीड़ बगीचा से माया सुभद्रा नागो बबली महालपट्ट से मालचंद , अमर ठाकुर लालचंद सनी कुमार राजेंद्र कुमार, सुरजीत कुमार धीरू राम जैसे सैकड़ों लोग मौजूद थे। इस बारे बीड़ टी फैक्ट्री के मैनेजर शशि दुबे का कहना है कि किसी के साथ कोई भेद भाव नहीं किया जा रहा है। पहले यहां कार्यरत मजदूर खुद काम पर नहीं लौटे। कंपनी के मालिक बीमारी के कारण बाहर गए हुए हैं । वह 2 या 3 अगस्त को लोटेंगे। उसके बाद ही फैक्ट्री को चलाने का निर्णय हो पाएगा।
बीड़ को ऑपरेटिव टी फैक्ट्री के बंद हो जाने को लेकर सैंकड़ों लोग , छोट-छोटे टी प्लांटर बीड़ टी फैक्ट्री पहुंच गए । उन्होंने बहां पर जोरदार हंगामा किया । उनका कहना है कि अब उन्हें चिंता सताने लगी है कि अगर शीघ्र इस फैक्ट्री में दोबारा से काम शुरू नहीं हुआ तो कैसे बह अपने परिवारों का पालन पोषण करेंगे। क्योंकि पिछले कई सालों से बह इस फैक्ट्री में काम कर अपने परिवारों का पालन पोषण करते आ रहे हैं। कुछ का कहना था की अगर टी फैक्ट्री न चली तो किसे के बगीचों से पत्ती तोडऩे का काम करेंगे। कुछ का कहना था कि हमें यहां काम करते बीस साल हो गए मगर जो पिछले चार साल से यहां आए उन्हें सुपरबाएजर बना दिया गया। हमारे ओवर टाइम का पैसा नहीं मिल रहा है। इलाके की सबसे पुरानी इस बीड़ टी फैक्ट्री में बीड ही नही अलबता बैजनाथ, महालपट्ट, भट्टू संसाल ब आस पास क्षेत्रों के टी प्लांटर अपने बगीचों से चाय पत्ती बीड़ फैक्ट्री को सप्लाई करते हैं । साथ में इन बगीचों में सैंकड़ों लोग वर्षों से काम कर अपने परिवारों का जीवन यापन करते हैं। इस मौके पर मेन डिवीजन बैजनाथ से प्यार चंद सोनू सतीश कुमार अशोक सरला सपना , बगीचा अलीहलाल से रीना गीता रुको अंजू बगीचा श्यामला से गोगी रिता भादुरी ज्योति ,बीड़ बगीचा से माया सुभद्रा नागो बबली महालपट्ट से मालचंद , अमर ठाकुर लालचंद सनी कुमार राजेंद्र कुमार, सुरजीत कुमार धीरू राम जैसे सैकड़ों लोग मौजूद थे। इस बारे बीड़ टी फैक्ट्री के मैनेजर शशि दुबे का कहना है कि किसी के साथ कोई भेद भाव नहीं किया जा रहा है। पहले यहां कार्यरत मजदूर खुद काम पर नहीं लौटे। कंपनी के मालिक बीमारी के कारण बाहर गए हुए हैं । वह दो या तीन अगस्त को लोटेंगे। उसके बाद ही फैक्ट्री को चलाने का निर्णय हो पाएगा।
शादी के बाद अक्सर लड़कियों का वजन बढ़ना शुरू हो जाता है, जिसके कई कारण हैं. शादी के बाद वजन बढ़ने का सबसे पहला कारण रूटीन का बिगड़ना है. शादी के बाद लड़की का रोजमर्रा का रूटीन बिगड़ जाता है, जिसका असर उसके शरीर पर पड़ता है. शादी के बाद कई महीनों तक घर आने वाले मेहमानों के चक्कर में डाइट भी काफी बिगड़ जाती है. मेहमानों के लिए खूब घी-तेल का खाना और मीठा रखा जाता है, जो नई दुल्हन खुद भी खाती है. शादी के बाद स्ट्रेस लेवल भी बढ़ जाता है, जो मोटापा बढ़ने का एक बड़ा कारण है. दरअसल, लड़कियों को नए घर में जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, जिस वजह से स्ट्रेस का लेवल ऊपर चला जाता है. शादी के बाद नई दुल्हन को खूब हाउज पार्टीज और फंक्शन में जाना पड़ता है. इन पार्टीज या फंक्शन में परोसे जाने वाला खानपान भी नई दुल्हन के वजन बढ़ाने में मदद करता है.
शादी के बाद अक्सर लड़कियों का वजन बढ़ना शुरू हो जाता है, जिसके कई कारण हैं. शादी के बाद वजन बढ़ने का सबसे पहला कारण रूटीन का बिगड़ना है. शादी के बाद लड़की का रोजमर्रा का रूटीन बिगड़ जाता है, जिसका असर उसके शरीर पर पड़ता है. शादी के बाद कई महीनों तक घर आने वाले मेहमानों के चक्कर में डाइट भी काफी बिगड़ जाती है. मेहमानों के लिए खूब घी-तेल का खाना और मीठा रखा जाता है, जो नई दुल्हन खुद भी खाती है. शादी के बाद स्ट्रेस लेवल भी बढ़ जाता है, जो मोटापा बढ़ने का एक बड़ा कारण है. दरअसल, लड़कियों को नए घर में जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, जिस वजह से स्ट्रेस का लेवल ऊपर चला जाता है. शादी के बाद नई दुल्हन को खूब हाउज पार्टीज और फंक्शन में जाना पड़ता है. इन पार्टीज या फंक्शन में परोसे जाने वाला खानपान भी नई दुल्हन के वजन बढ़ाने में मदद करता है.
वैदिक जीवन ( लेखक - मो० विश्वनाग विद्यालद्वार ) यह पुस्तक अथवेद के आधार पर लिखी है। इस में स्तुतिप्रार्थनोपासना वैयक्तिक जीवन की उच्चता, कर्मयोग, ब्रह्मचर्याश्रम गृहस्थाश्रम और गृहस्थव्यवहार, पारिवारिक व्यवहार, दानभाव, अतिधियज्ञ, राष्ट्रीयजीवन, अन्तर्राष्ट्रीय और विश्वप्रेम के भाव आदि उपयोगी विपयों के मन्त्र, मन्त्रार्थ और भावार्थ दिये हैं । पृष्ठसंख्या २३१, दाम III) मात्र । समाचार पत्रों ने इस पुस्तक की बहुत उत्तम आलोघना की है । यथा ( १ ) राज्यरत्न मास्टर आत्मागमजी "विज्ञापक बड़ौदा" में लिखते हैं कि - "इस पुग्नक में जीवनसम्बन्धी उपयोगी विषयों का ऐसा सारसंग्रह है मानो कि माली ने एक उत्तम सुगन्धित फूलों की माला तय्यार करदी है। प्रत्येक सनातनधमी तथा प्रार्थयन्धु को गह उपयोगी पुस्तक, जिससे वेदमन्त्रों का महत्व और जीवन को पैदिक बनाने के तुष्कल साधन मिलते हैं, अवश्य पढ़नी चाहिये । ( २ ) दैनिक "आज" काशी " इस पुस्तक में वैदिकजीवन विभिन्न श्रमों का विशद निरूपण है। इसमें वेदकालीन अन्तर्राष्ट्रीय आयनाथ, विश्वप्रेमसम्बन्धी विचारों, तथा राष्ट्रीय जीवन के प्रधान पकरणों का सुन्दर संग्रह है । इपे की बात है कि मन्त्रार्थों में स्प्रदायिकता की वृ वा व्यर्थ की खींचातानी नहीं । तीसरा, नवां र दसवां प्रकरण मुझे अधिक पसन्द आया । पुस्तक का दाम भी (३) साप्ताहिक "मतवाला" कलकत्ता." इस पुस्तक के लिखने में लेखक को अच्छी सफलता मिली है । भावार्य सुन्दर और सयालिक हैं । व्यर्थ की खींचातानी नहीं की गई। मूल्य सस्ता है । " ( ४ ) साप्ताहिक "मारवाड़ी" नागपुर स्वाध्यायप्रेमि (४) के लिये यह पुस्तक विशेष उपयोगी है और आर्य गृहस्थ की यह पुस्तक शोभा बढ़ा सकती है" । ५ ) मासिक "आर्य" लाहौर "" लेखक ने जो लिखा है सोच विचार कर पूर्णतया निश्चित रूप से लिखा है। मंत्रों के भावार्थी के विचार करने में अनुपम योग्यता का परिचय दिया है। वेदसम्बंधी जितने पुस्तक शताब्दी के समय प्रकाशित हुए हैं, उन सब में, इस दृष्टि से यह पुस्तक उत्तम हूँ" । ( ६ ) साप्ताहिक "Patriot" लखनऊ "Pt. Vishwa Nath has given a view or the synopsis of the Atharra Veda. The author has given beautiful explanations of the Veda mantras. The keen sight and the admirable learning of the author is quite evident from the exposition of the Veda mantras. He has given all etymological explanations that are very suggestive and instructive. The book is very cheap as well." ( ७ ) दैनिक "Tribune" लाहौर "This book comprises an analytical and comprehensive exposition of a large number of Vedic mantras bearing upon life in its different aspects. The book is designed to place before the reader a glimpse of the enormous treasure of the Vedas, and to induce him to dive into its depths. पुस्तक प्राप्ति का स्थान - सोमपुस्तकालय, कैसरगंज, अजमेर,
वैदिक जीवन यह पुस्तक अथवेद के आधार पर लिखी है। इस में स्तुतिप्रार्थनोपासना वैयक्तिक जीवन की उच्चता, कर्मयोग, ब्रह्मचर्याश्रम गृहस्थाश्रम और गृहस्थव्यवहार, पारिवारिक व्यवहार, दानभाव, अतिधियज्ञ, राष्ट्रीयजीवन, अन्तर्राष्ट्रीय और विश्वप्रेम के भाव आदि उपयोगी विपयों के मन्त्र, मन्त्रार्थ और भावार्थ दिये हैं । पृष्ठसंख्या दो सौ इकतीस, दाम III) मात्र । समाचार पत्रों ने इस पुस्तक की बहुत उत्तम आलोघना की है । यथा राज्यरत्न मास्टर आत्मागमजी "विज्ञापक बड़ौदा" में लिखते हैं कि - "इस पुग्नक में जीवनसम्बन्धी उपयोगी विषयों का ऐसा सारसंग्रह है मानो कि माली ने एक उत्तम सुगन्धित फूलों की माला तय्यार करदी है। प्रत्येक सनातनधमी तथा प्रार्थयन्धु को गह उपयोगी पुस्तक, जिससे वेदमन्त्रों का महत्व और जीवन को पैदिक बनाने के तुष्कल साधन मिलते हैं, अवश्य पढ़नी चाहिये । दैनिक "आज" काशी " इस पुस्तक में वैदिकजीवन विभिन्न श्रमों का विशद निरूपण है। इसमें वेदकालीन अन्तर्राष्ट्रीय आयनाथ, विश्वप्रेमसम्बन्धी विचारों, तथा राष्ट्रीय जीवन के प्रधान पकरणों का सुन्दर संग्रह है । इपे की बात है कि मन्त्रार्थों में स्प्रदायिकता की वृ वा व्यर्थ की खींचातानी नहीं । तीसरा, नवां र दसवां प्रकरण मुझे अधिक पसन्द आया । पुस्तक का दाम भी साप्ताहिक "मतवाला" कलकत्ता." इस पुस्तक के लिखने में लेखक को अच्छी सफलता मिली है । भावार्य सुन्दर और सयालिक हैं । व्यर्थ की खींचातानी नहीं की गई। मूल्य सस्ता है । " साप्ताहिक "मारवाड़ी" नागपुर स्वाध्यायप्रेमि के लिये यह पुस्तक विशेष उपयोगी है और आर्य गृहस्थ की यह पुस्तक शोभा बढ़ा सकती है" । पाँच ) मासिक "आर्य" लाहौर "" लेखक ने जो लिखा है सोच विचार कर पूर्णतया निश्चित रूप से लिखा है। मंत्रों के भावार्थी के विचार करने में अनुपम योग्यता का परिचय दिया है। वेदसम्बंधी जितने पुस्तक शताब्दी के समय प्रकाशित हुए हैं, उन सब में, इस दृष्टि से यह पुस्तक उत्तम हूँ" । साप्ताहिक "Patriot" लखनऊ "Pt. Vishwa Nath has given a view or the synopsis of the Atharra Veda. The author has given beautiful explanations of the Veda mantras. The keen sight and the admirable learning of the author is quite evident from the exposition of the Veda mantras. He has given all etymological explanations that are very suggestive and instructive. The book is very cheap as well." दैनिक "Tribune" लाहौर "This book comprises an analytical and comprehensive exposition of a large number of Vedic mantras bearing upon life in its different aspects. The book is designed to place before the reader a glimpse of the enormous treasure of the Vedas, and to induce him to dive into its depths. पुस्तक प्राप्ति का स्थान - सोमपुस्तकालय, कैसरगंज, अजमेर,
अभिनेता अक्षय कुमार ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में सीएम आवास पर मुलाकात की। इस दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई। सीएम धामी ने बताया कि अक्षय कुमार को यहां ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसे उन्होंने मान भी लिया है। इंटरनेशनल खिलाड़ी अक्षय कुमार निर्माता वासु भगनानी और रंजीत तिवारी के निर्देशन में बन रही साउथ फिल्म रत्सासन रीमेक की शूटिंग के लिए उत्तराखंड में हैं। इसकी शूटिंग मसूरी में हो रही है। फिल्म में अभिनेत्री रकुल प्रीत भी नजर आएंगी। अक्षय कुमार ने पहाड़ों की रानी मसूरी में फिल्म की शूटिंग के साथ ही स्नो फाल भी एंज्वाय किया। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेंटजार्ज कालेज, बार्लोगंज और ओकग्रोव स्कूल में बच्चों के साथ अक्षय कुमार की बातचीत के दृश्य फिल्माए गए। बता दें कि कि 12 फरवरी तक मसूरी के आसपास के क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग चलेगी। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
अभिनेता अक्षय कुमार ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में सीएम आवास पर मुलाकात की। इस दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई। सीएम धामी ने बताया कि अक्षय कुमार को यहां ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसे उन्होंने मान भी लिया है। इंटरनेशनल खिलाड़ी अक्षय कुमार निर्माता वासु भगनानी और रंजीत तिवारी के निर्देशन में बन रही साउथ फिल्म रत्सासन रीमेक की शूटिंग के लिए उत्तराखंड में हैं। इसकी शूटिंग मसूरी में हो रही है। फिल्म में अभिनेत्री रकुल प्रीत भी नजर आएंगी। अक्षय कुमार ने पहाड़ों की रानी मसूरी में फिल्म की शूटिंग के साथ ही स्नो फाल भी एंज्वाय किया। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेंटजार्ज कालेज, बार्लोगंज और ओकग्रोव स्कूल में बच्चों के साथ अक्षय कुमार की बातचीत के दृश्य फिल्माए गए। बता दें कि कि बारह फरवरी तक मसूरी के आसपास के क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग चलेगी। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
Sania Mirza crying after AUS open final भारत की स्टार महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम में खिताब जीतने से चूक गईं। सानिया अपना विदाई भाषण देते समय भावुक हो गईं और आंसू नहीं रोक पाईं। सानिया मिर्जा का वीडियो वायरल हो गया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा शुक्रवार को अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम इवेंट के बाद कोर्ट पर रो पड़ी। सानिया अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता में रनर्स-अप रहीं। ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिक्स्ड डबल्स इवेंट के फाइनल में भारत की सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी को ब्राजील की लुईस स्टेफनी व राफेल मातोस की जोड़ी से शिकस्त मिली। सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी को स्टेफनी-मातोस के हाथों सीधे सेटों में 6-7 और 2-6 के अंतर की शिकस्त मिली। पता हो कि ब्राजीलियाई जोड़ी अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता है। अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान जब सानिया मिर्जा का नाम लिया गया, तो दर्शकों ने काफी उत्साह के साथ अपनी चहेती सुपरस्टार का स्वागत किया। सानिया मिर्जा ने रोड लेवर एरीना पर भाषण देते समय कहा, 'अगर मैं रोई, तो यह खुशी के आंसू होंगे। मैं कुछ और टूर्नामेंट्स खेलने वाली हूं, लेकिन 2005 में मेलबर्न में मेरे करियर की शुरुआत हुई। माफ करना. . . . यहां सानिया फूट-फूटकर रोने लगीं। ' भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी ने खुद को संभाला और आगे अपनी बात जारी रखी। उन्होंने कहा, 'मैंने सेरेना विलियम्स का सामना किया। मुझे यहां बार-बार आने का मौका मिला और आप सभी के सामने खेला। आप लोगों में मुझे यहां घर जैसा महसूस कराया। रोड लेवर एरीना विशेष है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने बेटे के सामने यहां ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल सकूंगी। हां, ऐसा हुआ और मैंने फाइनल खेला। ' ऑस्ट्रेलियाई ओपन के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने सानिया का वीडियो पोस्ट करने के साथ ही लिखा, 'हम आपको प्यार करते हैं सानिया। ' भारतीय टेनिस स्टार का यह वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया है।
Sania Mirza crying after AUS open final भारत की स्टार महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम में खिताब जीतने से चूक गईं। सानिया अपना विदाई भाषण देते समय भावुक हो गईं और आंसू नहीं रोक पाईं। सानिया मिर्जा का वीडियो वायरल हो गया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा शुक्रवार को अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम इवेंट के बाद कोर्ट पर रो पड़ी। सानिया अपने आखिरी ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता में रनर्स-अप रहीं। ऑस्ट्रेलियन ओपन के मिक्स्ड डबल्स इवेंट के फाइनल में भारत की सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी को ब्राजील की लुईस स्टेफनी व राफेल मातोस की जोड़ी से शिकस्त मिली। सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी को स्टेफनी-मातोस के हाथों सीधे सेटों में छः-सात और दो-छः के अंतर की शिकस्त मिली। पता हो कि ब्राजीलियाई जोड़ी अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता है। अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान जब सानिया मिर्जा का नाम लिया गया, तो दर्शकों ने काफी उत्साह के साथ अपनी चहेती सुपरस्टार का स्वागत किया। सानिया मिर्जा ने रोड लेवर एरीना पर भाषण देते समय कहा, 'अगर मैं रोई, तो यह खुशी के आंसू होंगे। मैं कुछ और टूर्नामेंट्स खेलने वाली हूं, लेकिन दो हज़ार पाँच में मेलबर्न में मेरे करियर की शुरुआत हुई। माफ करना. . . . यहां सानिया फूट-फूटकर रोने लगीं। ' भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी ने खुद को संभाला और आगे अपनी बात जारी रखी। उन्होंने कहा, 'मैंने सेरेना विलियम्स का सामना किया। मुझे यहां बार-बार आने का मौका मिला और आप सभी के सामने खेला। आप लोगों में मुझे यहां घर जैसा महसूस कराया। रोड लेवर एरीना विशेष है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने बेटे के सामने यहां ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल सकूंगी। हां, ऐसा हुआ और मैंने फाइनल खेला। ' ऑस्ट्रेलियाई ओपन के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने सानिया का वीडियो पोस्ट करने के साथ ही लिखा, 'हम आपको प्यार करते हैं सानिया। ' भारतीय टेनिस स्टार का यह वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया है।
राज्य में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को प्रोत्साहन देने वाले उद्यमियों को पुरस्कृत करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से होटल क्लार्क्स आमेर में 'द इंडियन रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म स्टेट अवार्ड्स 2022-राजस्थान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को बढ़ावा देने वाले प्रतिभागियों को विभिन्न श्रेणियोें में पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़, पर्यटन विभाग की निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा, पर्यटन मंत्रालय के उत्तरी क्षेत्र के रीजनल डायरेक्टर अनिल ओरवा, होटल क्लार्क आमेर के प्रबंध निर्देशक अपूर्व कुमार और आउटलुक सीईओ के इंद्रनील राय ने ये पुरस्कार प्रदान किए। राजस्थानी लोक कलाकारों ने अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि यह अवॉर्ड समारोह साधारण से असाधारण बनने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 ने टूरिज्म इंडस्ट्री को बुरी तरह से प्रभावित किया था लेकिन राज्य सरकार की योजनाओं ने टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए संजीवनी का काम किया। इसी का परिणाम आज राजस्थान पर्यटन नई ऊंचाइयों को छू रहा है। घरेलू के साथ ही विदेशी पर्यटकों की की आवक में भी निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। द इंडियन टूरिज्म स्टेट अवॉर्ड 2022 उन्हें दिया गय, जो पर्यटन क्षेत्र में जमीन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह आने वाले समय में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए रोल मॉडल बनेगा । राठौड़ ने कहा कि पर्यटन विभाग का प्रयास है कि राज्य सरकार की टूरिज्म पॉलिसी के जरिए डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे आदिवासी व जनजाति क्षेत्रों में भी पर्यटको की आवाजाही बड़े और वहां के स्थानीय उत्पादों की पहचान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले। उन्होंने बताया कि राजस्थान पर्यटन विभाग राज्य की अर्थव्यवस्था में 13 प्रतिशत का योगदान देता है और नई टूरिज्म पॉलिसी के जरिए इसे और आगे बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे है। पर्यटन विभाग की निदेशक डॉ रश्मि शर्मा ने कहा कि" पर्यटकों की मानमनुहार करना राजस्थानियों की परंपरा है। इस परंपरा और विरासत को सहेजने का काम पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को पर्यटन क्षेत्र में जोड़कर उन्हें पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों में अविस्मरणीय अनुभव देने का काम करने में जुटा है। इस अवसर पर पर्यटन मंत्रालय के उत्तर क्षेत्र के रीजन डायरेक्टर अनिल ओरवा ने कहा कि द इंडियन रिस्पांसिबल टूरिज्म स्टेट अवॉर्ड 2022 रिस्पांसिबल टूरिज्म पर्यटन क्षेत्र से जुड़े छोटे बड़े उद्यमियों को इस क्षेत्र में और अधिक जिम्मेदार बनाएगा। क्लार्क्स आमेर के प्रबंध निदेशक अपूर्व कुमार ने इस अवार्ड समारोह के आयोजन पर खुशी जताई और लघु फिल्म के जरिए उन्होंने क्लार्क्स आमेर के सीएसआर के तहत किए गए कार्यों के बारे में बताएं। आउटलुक के इंद्रनील रॉय ने कहा कि उनकी संस्थान की ओर से यह अवॉर्ड पिछले 8 वर्षों से दिए जा रहे हैं। राजस्थान में इस तरह का प्रथम आयोजन किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राज्य में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को प्रोत्साहन देने वाले उद्यमियों को पुरस्कृत करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से होटल क्लार्क्स आमेर में 'द इंडियन रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म स्टेट अवार्ड्स दो हज़ार बाईस-राजस्थान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म को बढ़ावा देने वाले प्रतिभागियों को विभिन्न श्रेणियोें में पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़, पर्यटन विभाग की निदेशक डॉ. रश्मि शर्मा, पर्यटन मंत्रालय के उत्तरी क्षेत्र के रीजनल डायरेक्टर अनिल ओरवा, होटल क्लार्क आमेर के प्रबंध निर्देशक अपूर्व कुमार और आउटलुक सीईओ के इंद्रनील राय ने ये पुरस्कार प्रदान किए। राजस्थानी लोक कलाकारों ने अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि यह अवॉर्ड समारोह साधारण से असाधारण बनने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि कोविड-उन्नीस ने टूरिज्म इंडस्ट्री को बुरी तरह से प्रभावित किया था लेकिन राज्य सरकार की योजनाओं ने टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए संजीवनी का काम किया। इसी का परिणाम आज राजस्थान पर्यटन नई ऊंचाइयों को छू रहा है। घरेलू के साथ ही विदेशी पर्यटकों की की आवक में भी निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। द इंडियन टूरिज्म स्टेट अवॉर्ड दो हज़ार बाईस उन्हें दिया गय, जो पर्यटन क्षेत्र में जमीन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह आने वाले समय में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए रोल मॉडल बनेगा । राठौड़ ने कहा कि पर्यटन विभाग का प्रयास है कि राज्य सरकार की टूरिज्म पॉलिसी के जरिए डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे आदिवासी व जनजाति क्षेत्रों में भी पर्यटको की आवाजाही बड़े और वहां के स्थानीय उत्पादों की पहचान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले। उन्होंने बताया कि राजस्थान पर्यटन विभाग राज्य की अर्थव्यवस्था में तेरह प्रतिशत का योगदान देता है और नई टूरिज्म पॉलिसी के जरिए इसे और आगे बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे है। पर्यटन विभाग की निदेशक डॉ रश्मि शर्मा ने कहा कि" पर्यटकों की मानमनुहार करना राजस्थानियों की परंपरा है। इस परंपरा और विरासत को सहेजने का काम पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को पर्यटन क्षेत्र में जोड़कर उन्हें पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों में अविस्मरणीय अनुभव देने का काम करने में जुटा है। इस अवसर पर पर्यटन मंत्रालय के उत्तर क्षेत्र के रीजन डायरेक्टर अनिल ओरवा ने कहा कि द इंडियन रिस्पांसिबल टूरिज्म स्टेट अवॉर्ड दो हज़ार बाईस रिस्पांसिबल टूरिज्म पर्यटन क्षेत्र से जुड़े छोटे बड़े उद्यमियों को इस क्षेत्र में और अधिक जिम्मेदार बनाएगा। क्लार्क्स आमेर के प्रबंध निदेशक अपूर्व कुमार ने इस अवार्ड समारोह के आयोजन पर खुशी जताई और लघु फिल्म के जरिए उन्होंने क्लार्क्स आमेर के सीएसआर के तहत किए गए कार्यों के बारे में बताएं। आउटलुक के इंद्रनील रॉय ने कहा कि उनकी संस्थान की ओर से यह अवॉर्ड पिछले आठ वर्षों से दिए जा रहे हैं। राजस्थान में इस तरह का प्रथम आयोजन किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
IPL 2020 के लिए अलग थी MS Dhoni की तैयारी, पहले कभी नहीं देखा था ऐसा' सुरेश रैना ने कहा कि MS Dhoni इस आइपीएल में अलग रंग में नजर आते। नई दिल्ली, जेएनएन। MS Dhoni मैदान पर कब उतरेंगे इसका इंतजार बेसब्री के साथ क्रिकेट फैंस कर रहे हैं। अगर कोविड 19 महामारी का प्रकोप नहीं फैलता तो आइपीएल 2020 खत्म हो चुका होता, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता और धौनी का मैदान पर उतरने का इंतजार लंबा हो गया। वैसे लॉकडाउन से पहले धौनी ने प्रैक्टिस के लिए सीएसके का कैंप ज्वॉइन कर लिया था और जमकर प्रैक्टिस भी करने लगे थे। इस सीजन के लिए धौनी किस तरह से तैयारी कर रहे थे और वो कितनी अलग थी इसके बारे में उनके साथी खिलाड़ी सुरेश रैना ने स्टार स्पोर्ट्स के शो क्रिकेट कनेक्टेड पर बताया। उन्होंने कहा कि इस बार धौनी बिल्कुल ही अलग तरह से तैयारी कर रहे थे। माही जब प्रैक्टिस के लिए चेन्नई पहुंचे तो उनके साथ मैं, मुरली विजय व अंबाती रायुडू भी थे। हम सब एक ग्रुप में 2 से 4 घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे। धौनी के बारे में सबसे अलग बात ये थी कि वो इस बार बल्लेबाजी करते हुए बिल्कुल भी नहीं थक रहे थे। वो प्रतिदिन सुबह अपने जिम सेशन करते थे और फिर शाम में तीन घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे। उन्होंने कहा कि जब एक दिन पूरा आप जिम, बल्लेबाजी और फील्डिंग की प्रैक्टिस में बिताते हैं तो अगले दिन शरीर में कुछ खिंचाव महसूस होता है। 33 साल के रैना ने कहा कि मैंने धौनी के साथ इंटरनेशनल लेवल और आइपीएल दोनों में ही खूब खेला है, लेकिन इस बार वो जिस अंदाज में और जिस तरीके की तैयारी कर रहे थे वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था। अगर इस बार आइपीएल होता तो धौनी अपने फैंस को अलग अंदाज में ही नजर आते। हालांकि आइपीएल को लेकर ये कयास लगाया जा रहा है कि अगर इस साल टी20 वर्ल्ड कप स्थगित होता है तो अक्टूबर-नवंबर का वो विंडो बीसीसीआइ आइपीएल के लिए कर सकता है। हालांकि देखने वाली बात ये होगी कि आइसीसी टी20 वर्ल्ड कप को लेकर क्या फैसला करता है। इस बार ये टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया में खेला जाना है।
IPL दो हज़ार बीस के लिए अलग थी MS Dhoni की तैयारी, पहले कभी नहीं देखा था ऐसा' सुरेश रैना ने कहा कि MS Dhoni इस आइपीएल में अलग रंग में नजर आते। नई दिल्ली, जेएनएन। MS Dhoni मैदान पर कब उतरेंगे इसका इंतजार बेसब्री के साथ क्रिकेट फैंस कर रहे हैं। अगर कोविड उन्नीस महामारी का प्रकोप नहीं फैलता तो आइपीएल दो हज़ार बीस खत्म हो चुका होता, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता और धौनी का मैदान पर उतरने का इंतजार लंबा हो गया। वैसे लॉकडाउन से पहले धौनी ने प्रैक्टिस के लिए सीएसके का कैंप ज्वॉइन कर लिया था और जमकर प्रैक्टिस भी करने लगे थे। इस सीजन के लिए धौनी किस तरह से तैयारी कर रहे थे और वो कितनी अलग थी इसके बारे में उनके साथी खिलाड़ी सुरेश रैना ने स्टार स्पोर्ट्स के शो क्रिकेट कनेक्टेड पर बताया। उन्होंने कहा कि इस बार धौनी बिल्कुल ही अलग तरह से तैयारी कर रहे थे। माही जब प्रैक्टिस के लिए चेन्नई पहुंचे तो उनके साथ मैं, मुरली विजय व अंबाती रायुडू भी थे। हम सब एक ग्रुप में दो से चार घंटाटे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे। धौनी के बारे में सबसे अलग बात ये थी कि वो इस बार बल्लेबाजी करते हुए बिल्कुल भी नहीं थक रहे थे। वो प्रतिदिन सुबह अपने जिम सेशन करते थे और फिर शाम में तीन घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे। उन्होंने कहा कि जब एक दिन पूरा आप जिम, बल्लेबाजी और फील्डिंग की प्रैक्टिस में बिताते हैं तो अगले दिन शरीर में कुछ खिंचाव महसूस होता है। तैंतीस साल के रैना ने कहा कि मैंने धौनी के साथ इंटरनेशनल लेवल और आइपीएल दोनों में ही खूब खेला है, लेकिन इस बार वो जिस अंदाज में और जिस तरीके की तैयारी कर रहे थे वैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था। अगर इस बार आइपीएल होता तो धौनी अपने फैंस को अलग अंदाज में ही नजर आते। हालांकि आइपीएल को लेकर ये कयास लगाया जा रहा है कि अगर इस साल टीबीस वर्ल्ड कप स्थगित होता है तो अक्टूबर-नवंबर का वो विंडो बीसीसीआइ आइपीएल के लिए कर सकता है। हालांकि देखने वाली बात ये होगी कि आइसीसी टीबीस वर्ल्ड कप को लेकर क्या फैसला करता है। इस बार ये टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया में खेला जाना है।
कैसे हुई 'शक्तिमान' की मौत? मार्च महीने में बीजेपी के प्रदर्शन के दौरान घायल देहरादून पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' की मौत हो गई है. इस घोड़े को अमरीका से आया कृत्रिम पैर लगाया गया था. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिवानंद दाते ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को इस घोड़े के घायल पैर की पट्टी बदली जानी थी और इसके लिए उसे एनस्थीसिया (बेहोश करने के लिए) दिया गया था. इससे घोड़े को शॉक लगा और फिर वो नहीं उठा. मार्च महीने में इस घोड़े को कथित तौर पर एक बीजेपी विधायक ने ज़ख़्मी किया था. उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया लेकिन विधायक गणेश जोशी बाद में ज़मानत पर छूट गए थे. उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने शक्तिमान के लिए सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. इससे पहले, शक्तिमान के पैर को आपातकालीन जीवन रक्षक सर्जरी में काटना पड़ा था. उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने पैर काटने के फ़ैसले पर कहा था कि घोड़े के घायल पैर में ख़ून का पहुंचना बंद हो गया था और ऐसी हालत में अगर तत्काल टांग नहीं काटी जाती तो घो़ड़े में गैंगरीन फैल जाता. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
कैसे हुई 'शक्तिमान' की मौत? मार्च महीने में बीजेपी के प्रदर्शन के दौरान घायल देहरादून पुलिस के घोड़े 'शक्तिमान' की मौत हो गई है. इस घोड़े को अमरीका से आया कृत्रिम पैर लगाया गया था. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिवानंद दाते ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को इस घोड़े के घायल पैर की पट्टी बदली जानी थी और इसके लिए उसे एनस्थीसिया दिया गया था. इससे घोड़े को शॉक लगा और फिर वो नहीं उठा. मार्च महीने में इस घोड़े को कथित तौर पर एक बीजेपी विधायक ने ज़ख़्मी किया था. उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया लेकिन विधायक गणेश जोशी बाद में ज़मानत पर छूट गए थे. उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने शक्तिमान के लिए सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. इससे पहले, शक्तिमान के पैर को आपातकालीन जीवन रक्षक सर्जरी में काटना पड़ा था. उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने पैर काटने के फ़ैसले पर कहा था कि घोड़े के घायल पैर में ख़ून का पहुंचना बंद हो गया था और ऐसी हालत में अगर तत्काल टांग नहीं काटी जाती तो घो़ड़े में गैंगरीन फैल जाता.
जासं, रुद्रपुरः नैनीताल-यूएस नगर संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस पर्यवेक्षक व राजस्थान के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र यादव ने कहा कि टिकट की दावेदारी करने वालों में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। एक बार का सर्वें हो चुका है। दोबारा सर्वे चल रहा है। टिकट वितरण में युवाओं व महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाएगा। यह निर्णय पार्टी हाईकमान ने लिया है। पर्यवेक्षक राजेंद्र यादव ने बुधवार को नैनीताल रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों को बताया कि जिले के सभी विधानसभा सीटों पर टिकट की दावेदारी के लिए इच्छुक कार्यकर्ताओं से बुधवार को रायशुमारी की गई है। उनका बायडाटा लिया गया है और अलग अलग समस्याओं पर चर्चा की गई है। बाहरी व्यक्ति को टिकट न देने की मांग को लेकर धरना देने वाले किच्छा के सात दावेदारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अपनी बात कहने का सभी को अधिकार है। अभी किच्छा का नंबर नहीं आया है। जब नंबर आएगा तो वह अपनी बात व पीड़ा रायशुमारी के दौरान कह सकते हैं। जिसे हाईकमान तक पहुंचा दिया जाएगा। वह रायशुमारी करने आए हैं, इसलिए रायशुमारी कर रिपोर्ट हाईकमान को सौंप देंगे। टिकट वितरण के मामले में हाईकमान को फैसला लेना है। टिकट के लिए बाहर भीतर का सवाल नहीं है, टिकट मांगने का सभी कार्यकर्ता का अधिकार है। पार्टी में कोई अंदुरुनी कलह नहीं है। इस मौके पर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़, भुवन चंद्र कापड़ी, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, शिल्पी अरोरा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा आदि मौजूद थे।
जासं, रुद्रपुरः नैनीताल-यूएस नगर संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस पर्यवेक्षक व राजस्थान के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र यादव ने कहा कि टिकट की दावेदारी करने वालों में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। एक बार का सर्वें हो चुका है। दोबारा सर्वे चल रहा है। टिकट वितरण में युवाओं व महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाएगा। यह निर्णय पार्टी हाईकमान ने लिया है। पर्यवेक्षक राजेंद्र यादव ने बुधवार को नैनीताल रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों को बताया कि जिले के सभी विधानसभा सीटों पर टिकट की दावेदारी के लिए इच्छुक कार्यकर्ताओं से बुधवार को रायशुमारी की गई है। उनका बायडाटा लिया गया है और अलग अलग समस्याओं पर चर्चा की गई है। बाहरी व्यक्ति को टिकट न देने की मांग को लेकर धरना देने वाले किच्छा के सात दावेदारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अपनी बात कहने का सभी को अधिकार है। अभी किच्छा का नंबर नहीं आया है। जब नंबर आएगा तो वह अपनी बात व पीड़ा रायशुमारी के दौरान कह सकते हैं। जिसे हाईकमान तक पहुंचा दिया जाएगा। वह रायशुमारी करने आए हैं, इसलिए रायशुमारी कर रिपोर्ट हाईकमान को सौंप देंगे। टिकट वितरण के मामले में हाईकमान को फैसला लेना है। टिकट के लिए बाहर भीतर का सवाल नहीं है, टिकट मांगने का सभी कार्यकर्ता का अधिकार है। पार्टी में कोई अंदुरुनी कलह नहीं है। इस मौके पर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़, भुवन चंद्र कापड़ी, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, शिल्पी अरोरा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा आदि मौजूद थे।
संयुक्त राष्ट्र, दो फरवरी (एपी) संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को कहा कि हिंसाग्रस्त मध्य अफ्रीकी गणराज्य (सीएआर) में गंभीर मानवीय संकट पैदा होने के कारण लोग देश छोड़ने को मजबूर हो गए और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बाधित होना एक बड़ी समस्या बन गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि यह ऐसे समय में हो रहा है, जब 23 लाख लोगों के लिए पहले ही भोजन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक त्वरित मूल्यांकन में "हाल में विस्थापित लोगों के गंभीर रूप से कुपोषित होने" की बात सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को कहा कि गरीब देश से दो महीने के भीतर करीब दो लाख लोगों ने अपना घर छोड़ा है। दुजारिक ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों के अनुसार 92,000 शरणार्थी मध्य अफ्रीकी गणराज्य से कांगो गए और 13,200 से अधिक लोग कैमरून, चाड और कांगो गणराज्य गए। लोगों का पलायन अब भी जारी है। दुजारिक ने कहा कि वर्तमान में बिगड़ती मानवीय स्थिति का एक प्रमुख कारण कैमरून से जुड़ने वाली सड़क पर सुरक्षा की कमी है, जहां मध्य दिसम्बर से सीमा पर 1,600 ट्रक फंसे हैं, जिनमें से 500 ट्रक लोगों की जरूरतों के समान से लैस हैं। इस स्थिति से आपूर्ति निलंबित हो गई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र 2021 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य में 18. 4 लाख लोगों की सहायता के लिए 44. 47 करोड़ डॉलर की मदद की अपील करता है। संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों से जुड़े मामलों के प्रवक्ता बोरिस चेशिरकोव ने भी शुक्रवार को आगाह किया कि देश में हजारों शरणार्थियों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
संयुक्त राष्ट्र, दो फरवरी संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को कहा कि हिंसाग्रस्त मध्य अफ्रीकी गणराज्य में गंभीर मानवीय संकट पैदा होने के कारण लोग देश छोड़ने को मजबूर हो गए और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बाधित होना एक बड़ी समस्या बन गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि यह ऐसे समय में हो रहा है, जब तेईस लाख लोगों के लिए पहले ही भोजन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक त्वरित मूल्यांकन में "हाल में विस्थापित लोगों के गंभीर रूप से कुपोषित होने" की बात सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को कहा कि गरीब देश से दो महीने के भीतर करीब दो लाख लोगों ने अपना घर छोड़ा है। दुजारिक ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों के अनुसार बानवे,शून्य शरणार्थी मध्य अफ्रीकी गणराज्य से कांगो गए और तेरह,दो सौ से अधिक लोग कैमरून, चाड और कांगो गणराज्य गए। लोगों का पलायन अब भी जारी है। दुजारिक ने कहा कि वर्तमान में बिगड़ती मानवीय स्थिति का एक प्रमुख कारण कैमरून से जुड़ने वाली सड़क पर सुरक्षा की कमी है, जहां मध्य दिसम्बर से सीमा पर एक,छः सौ ट्रक फंसे हैं, जिनमें से पाँच सौ ट्रक लोगों की जरूरतों के समान से लैस हैं। इस स्थिति से आपूर्ति निलंबित हो गई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दो हज़ार इक्कीस में मध्य अफ्रीकी गणराज्य में अट्ठारह. चार लाख लोगों की सहायता के लिए चौंतालीस. सैंतालीस करोड़ डॉलर की मदद की अपील करता है। संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों से जुड़े मामलों के प्रवक्ता बोरिस चेशिरकोव ने भी शुक्रवार को आगाह किया कि देश में हजारों शरणार्थियों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
भुमिका / 29 शब्द का सदा एक ही अर्थ नहीं रहता, उसमें भाषा- विकास के अनुसार परिवर्तन होता रहता है। किसी शब्द के अर्थ का विस्तार, किसी का संकोच तथा किसी अर्थ की अन्यार्थ में प्रवृत्ति होती है। अर्थ की इसी परिवर्तनशीलता की ओर संकेत करते हुए पतंजलि कहते हैं कि एक शब्द के नाना अर्थ होते हैं। जिस तरह सभ्यता में विकास से इसमें परिवर्तन से, एक देश की सभ्यता-संस्कृति में अन्य देश को सस्ता संस्कृति के मेल-मिलाप से और समाज तथा जीवन में बड़ी-बड़ी घटना, दुर्घटना, नवजागरण, औद्योगिक क्रान्ति आदि की स्थितियों से समाज और जीवन में विकास या परिवर्तन आता है, वैसे ही भाषा में भी विकास या परिवर्तन होता देखा गया है। इस बात का पहले ही संकेत किया जा चुका है कि नाम और भाव के सम्बन्ध में जब भी परिवर्तन आता है, तब शब्द के अर्थ बदल जाते हैं। फिर भी तब तक परिवर्तित अर्थ प्रचलित नहीं होते जब तक उन्हें सामाजिक स्वीकृति नहीं मिल जाती, क्योंकि भाषा सामाजिक स्वीकृति पर आधत है। किसी शब्द के प्रचलित अर्थ में कोई व्यक्ति जान-बुझ कर अथवा अनजाने नया अर्थ जोड़ता है, और इस नए अर्थ के सम्बन्ध में समाज अथवा एक वर्ग बाद में स्वीकृति दे देता है तो ऐसी स्थिति में अर्थ परिवर्तन का रूप सामने आता है। शब्दार्थों के परीक्षण से यह स्पष्टतः ज्ञान होता है कि शब्द के अर्थ परिवर्तित होते हैं। यह परिवर्तन दो तरह का हो सकता है- पुराने नाम के साथ नया भाव जुड़ सकता है या पुराने भाव के साथ नया नाम आ जा सकता है। इसी के साथ-साथ यह भी संभव है कि पुराने नाम के साथ साथ उसके पुराने साव और नए भाग और नए भाव के साथ उसके पुराने नाम और नए नाम ही नल सकते है। इसको स्टीफन उनमान में निम्नतिभा द्वारा दिखायाः"-- भाक-याहवर्ग में नागरिवर्तन नाम साहवर्य से भाव-गरिनंग अर्थ में यह परिवर्तन कई कारणों से आता है। लेकिन, अनेक अवस्था और अनेक रूपों में यह देखा जाता है कि अर्थतन्त्र मानव-मन को लेकर चलता है। मानवमग बड़ा दुर्गम है। ऐसी स्थिति में भग की विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा घटित होने वाले अर्थ परिवर्तन के सम्बन्ध में कोई निश्चित कारण कोई निश्चित नियम निर्धारित करना कठिन होता है। अर्थ-परिवर्तन में मानसिक और सामाजिक, दोनो तन्त्र काम करते हैं। इनके अलावा भी यह अन्तर्वाचित कारणों में घटित होता है कि संख्याओं और प्रेणियों के माध्यम से टकरा रचिन नहीं जान पड़ता। संभवतः 1. एकनबन्दाबलः ।" 2. The Principles of Semantics, p. 176.
भुमिका / उनतीस शब्द का सदा एक ही अर्थ नहीं रहता, उसमें भाषा- विकास के अनुसार परिवर्तन होता रहता है। किसी शब्द के अर्थ का विस्तार, किसी का संकोच तथा किसी अर्थ की अन्यार्थ में प्रवृत्ति होती है। अर्थ की इसी परिवर्तनशीलता की ओर संकेत करते हुए पतंजलि कहते हैं कि एक शब्द के नाना अर्थ होते हैं। जिस तरह सभ्यता में विकास से इसमें परिवर्तन से, एक देश की सभ्यता-संस्कृति में अन्य देश को सस्ता संस्कृति के मेल-मिलाप से और समाज तथा जीवन में बड़ी-बड़ी घटना, दुर्घटना, नवजागरण, औद्योगिक क्रान्ति आदि की स्थितियों से समाज और जीवन में विकास या परिवर्तन आता है, वैसे ही भाषा में भी विकास या परिवर्तन होता देखा गया है। इस बात का पहले ही संकेत किया जा चुका है कि नाम और भाव के सम्बन्ध में जब भी परिवर्तन आता है, तब शब्द के अर्थ बदल जाते हैं। फिर भी तब तक परिवर्तित अर्थ प्रचलित नहीं होते जब तक उन्हें सामाजिक स्वीकृति नहीं मिल जाती, क्योंकि भाषा सामाजिक स्वीकृति पर आधत है। किसी शब्द के प्रचलित अर्थ में कोई व्यक्ति जान-बुझ कर अथवा अनजाने नया अर्थ जोड़ता है, और इस नए अर्थ के सम्बन्ध में समाज अथवा एक वर्ग बाद में स्वीकृति दे देता है तो ऐसी स्थिति में अर्थ परिवर्तन का रूप सामने आता है। शब्दार्थों के परीक्षण से यह स्पष्टतः ज्ञान होता है कि शब्द के अर्थ परिवर्तित होते हैं। यह परिवर्तन दो तरह का हो सकता है- पुराने नाम के साथ नया भाव जुड़ सकता है या पुराने भाव के साथ नया नाम आ जा सकता है। इसी के साथ-साथ यह भी संभव है कि पुराने नाम के साथ साथ उसके पुराने साव और नए भाग और नए भाव के साथ उसके पुराने नाम और नए नाम ही नल सकते है। इसको स्टीफन उनमान में निम्नतिभा द्वारा दिखायाः"-- भाक-याहवर्ग में नागरिवर्तन नाम साहवर्य से भाव-गरिनंग अर्थ में यह परिवर्तन कई कारणों से आता है। लेकिन, अनेक अवस्था और अनेक रूपों में यह देखा जाता है कि अर्थतन्त्र मानव-मन को लेकर चलता है। मानवमग बड़ा दुर्गम है। ऐसी स्थिति में भग की विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा घटित होने वाले अर्थ परिवर्तन के सम्बन्ध में कोई निश्चित कारण कोई निश्चित नियम निर्धारित करना कठिन होता है। अर्थ-परिवर्तन में मानसिक और सामाजिक, दोनो तन्त्र काम करते हैं। इनके अलावा भी यह अन्तर्वाचित कारणों में घटित होता है कि संख्याओं और प्रेणियों के माध्यम से टकरा रचिन नहीं जान पड़ता। संभवतः एक. एकनबन्दाबलः ।" दो. The Principles of Semantics, p. एक सौ छिहत्तर.
मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड, एमपीपीईबी मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती की प्रक्रिया 8 जनवरी से अपने ऑफिशियल पोर्टल - peb. mponline. gov. in - पर आरम्भ करेगी। इसके लिए पंजीकरण की अंतिम दिनांक 14 जनवरी है। वैसे तो पंजीकरण की प्रक्रिया 31 दिसंबर से आरम्भ होने वाली थी किन्तु जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अप्लीकेशन फॉर्म 8 जनवरी से उपलब्ध होगा। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से कॉन्सटेबल के पदों पर 4 हजार भर्तियां की जानी हैं। जिन अभ्यर्थियों की प्रोफाइल ऑफिशियल पोर्टल पर नहीं बनी है वे अपनी प्रोफाइल अभी बना सकते हैं। एमपीपीईबी के फॉर्म भरने से पहले प्रोफाइल पंजीकरण आवश्यक है। महत्वपूर्ण तिथियांः 6 मार्च से शुरू होगी आरभिंक परीक्षाः आरभिंक परीक्षा 6 मार्च से आरम्भ होगी। परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। पहली शिफ्ट प्रातः 9 बजे से 11 बजे के मध्य और दूसरी शिफ्ट शाम के तीन बजे से 5 बजे के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी। शैक्षणिक योग्यताः शैक्षणिक योग्यता में नियमानुसार भिन्न-भिन्न श्रेणियों के लिए अलग अलग है। कॉन्सटेबल जीडी पद पर आवेदन करने के लिए सामान्य, ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों को 10वीं पास होना चाहिए जबकि एसटी वर्ग के अभ्यर्थी को 8वीं पास होना चाहिए। आयुसीमाः अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष जबकि अधिकतम आयु 33 वर्ष होनी चाहिए। अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं, ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। आयु सीमा की गणना 1 अगस्त 2020 से की जाएगी।
मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड, एमपीपीईबी मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती की प्रक्रिया आठ जनवरी से अपने ऑफिशियल पोर्टल - peb. mponline. gov. in - पर आरम्भ करेगी। इसके लिए पंजीकरण की अंतिम दिनांक चौदह जनवरी है। वैसे तो पंजीकरण की प्रक्रिया इकतीस दिसंबर से आरम्भ होने वाली थी किन्तु जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अप्लीकेशन फॉर्म आठ जनवरी से उपलब्ध होगा। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के माध्यम से कॉन्सटेबल के पदों पर चार हजार भर्तियां की जानी हैं। जिन अभ्यर्थियों की प्रोफाइल ऑफिशियल पोर्टल पर नहीं बनी है वे अपनी प्रोफाइल अभी बना सकते हैं। एमपीपीईबी के फॉर्म भरने से पहले प्रोफाइल पंजीकरण आवश्यक है। महत्वपूर्ण तिथियांः छः मार्च से शुरू होगी आरभिंक परीक्षाः आरभिंक परीक्षा छः मार्च से आरम्भ होगी। परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। पहली शिफ्ट प्रातः नौ बजे से ग्यारह बजे के मध्य और दूसरी शिफ्ट शाम के तीन बजे से पाँच बजे के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा कुल एक सौ अंकों की होगी। शैक्षणिक योग्यताः शैक्षणिक योग्यता में नियमानुसार भिन्न-भिन्न श्रेणियों के लिए अलग अलग है। कॉन्सटेबल जीडी पद पर आवेदन करने के लिए सामान्य, ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों को दसवीं पास होना चाहिए जबकि एसटी वर्ग के अभ्यर्थी को आठवीं पास होना चाहिए। आयुसीमाः अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष जबकि अधिकतम आयु तैंतीस वर्ष होनी चाहिए। अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं, ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग को अधिकतम आयु सीमा में पाँच वर्ष की छूट दी जाएगी। आयु सीमा की गणना एक अगस्त दो हज़ार बीस से की जाएगी।
फरीदपुर। किशोरी मंगलवार सुबह घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोसी युवक ने उसे दबोच लिया। वह किशोरी को अपने घर की ओर खींचने लगा। किशोरी की चीख पुकार सुनकर गांव के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। दबंग मौके से भाग गया। किशोरी के पिता ने तहरीर दी। इंस्पेक्टर दया शंकर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
फरीदपुर। किशोरी मंगलवार सुबह घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोसी युवक ने उसे दबोच लिया। वह किशोरी को अपने घर की ओर खींचने लगा। किशोरी की चीख पुकार सुनकर गांव के तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। दबंग मौके से भाग गया। किशोरी के पिता ने तहरीर दी। इंस्पेक्टर दया शंकर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
Posted On: आजादी का अमृत महोत्सव- देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सप्ताह भर चलने वाले समारोह के हिस्से के रूप में 'प्रमुख तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों' पर एमजीबीएस में क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो द्वारा शहर में एक फोटो प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन संयुक्त पुलिस आयुक्त श्री रमेश रेड्डी ने शुक्रवार को किया। इस अवसर पर, श्री रमेश रेड्डी ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की गौरव गाथा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान हमारी विरासत का हिस्सा है जिन्हें आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है और इस संबंध में किए जा रहे प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं। उन्होंने कहा, "प्रमुख तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों के इन सभी पैनलों को देखने के बाद, मुझे ऐसा लग रहा है कि वे सभी स्वतंत्रता सेनानी इस समय मेरे आस-पास हैं, इस प्रयास से हम एक और युग में जा रहे हैं और यह मुझमें देशभक्ति का उत्साह भर रहा है।" संयुक्त पुलिस आयुक्त ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के युवाओं और छात्रों से सोशल मीडिया के माध्यम से गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में संदेश प्रसारित करने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो से उर्दू भाषा में भी इसी तरह की सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। श्री रमेश रेड्डी ने बताया कि हैदराबाद पुलिस विभाग के सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से व्यापक प्रसार के लिए तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों पर क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो की सामग्री साझा की जाएगी। पत्र सूचना कार्यालय और क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो की निदेशक श्रीमती श्रुति पाटिल ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय गुमनाम नायकों का जश्न मनाने वाले 'आजादी का अमृत महोत्सव' में नागरिकों को शामिल करना है। उन्होंने कहा कि 23-29 अगस्त के 'आइकॉनिक वीक' में क्षेत्रीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को उजागर करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की विभिन्न मीडिया इकाइयों की गतिविधियां शामिल हैं। प्रकाशन विभाग, हैदराबाद ने इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया है। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर प्रतिष्ठित प्रकाशनों को बिक्री के लिए आयोजन स्थल पर उपलब्ध कराया गया है। इस अवसर पर उप निदेशक श्री (डॉ.) मानस कृष्णकांत, सहायक निदेशक श्री हरिबाबू, श्रीमती भरत लक्ष्मी और श्रीमती वंदना और एनवाईके समन्वयक उपस्थित थे।
Posted On: आजादी का अमृत महोत्सव- देश की आजादी के पचहत्तर वर्ष पूरे होने के अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सप्ताह भर चलने वाले समारोह के हिस्से के रूप में 'प्रमुख तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों' पर एमजीबीएस में क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो द्वारा शहर में एक फोटो प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन संयुक्त पुलिस आयुक्त श्री रमेश रेड्डी ने शुक्रवार को किया। इस अवसर पर, श्री रमेश रेड्डी ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की गौरव गाथा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान हमारी विरासत का हिस्सा है जिन्हें आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है और इस संबंध में किए जा रहे प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं। उन्होंने कहा, "प्रमुख तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों के इन सभी पैनलों को देखने के बाद, मुझे ऐसा लग रहा है कि वे सभी स्वतंत्रता सेनानी इस समय मेरे आस-पास हैं, इस प्रयास से हम एक और युग में जा रहे हैं और यह मुझमें देशभक्ति का उत्साह भर रहा है।" संयुक्त पुलिस आयुक्त ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के युवाओं और छात्रों से सोशल मीडिया के माध्यम से गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में संदेश प्रसारित करने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो से उर्दू भाषा में भी इसी तरह की सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। श्री रमेश रेड्डी ने बताया कि हैदराबाद पुलिस विभाग के सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से व्यापक प्रसार के लिए तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों पर क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो की सामग्री साझा की जाएगी। पत्र सूचना कार्यालय और क्षेत्रीय आउटरीच ब्यूरो की निदेशक श्रीमती श्रुति पाटिल ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय गुमनाम नायकों का जश्न मनाने वाले 'आजादी का अमृत महोत्सव' में नागरिकों को शामिल करना है। उन्होंने कहा कि तेईस-उनतीस अगस्त के 'आइकॉनिक वीक' में क्षेत्रीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को उजागर करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की विभिन्न मीडिया इकाइयों की गतिविधियां शामिल हैं। प्रकाशन विभाग, हैदराबाद ने इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया है। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर प्रतिष्ठित प्रकाशनों को बिक्री के लिए आयोजन स्थल पर उपलब्ध कराया गया है। इस अवसर पर उप निदेशक श्री मानस कृष्णकांत, सहायक निदेशक श्री हरिबाबू, श्रीमती भरत लक्ष्मी और श्रीमती वंदना और एनवाईके समन्वयक उपस्थित थे।
जन्म किसी विधवा के अपमान का परिणाम था तो भी वे मुसलमान के घर में पत्ते थे । न तो उनको पत्थर पूजना पड़ता न पुनर्जन्म के फेर में पड़कर बन का रोझ होना पड़ता फिर उनके कहने का तात्पर्य क्या है ? हमारी धारणा है कि कबीर पर वैष्णाव-मत का प्रभाव इतना पर्याप्त पड़ चुका था कि उनका विश्वास अवतार में हो गया यह प्रभाव रामानंद का कहा जा सकता है, उनके राम इसी ढंग के थे । कबीर भली भाँति उनके प्रभाव में न आ सके कारण यह समझ पड़ता है कि उनका स्वर्गवास कबीर के बचपन में ही हो गया था। इतिहाल भी इसके प्रतिकूल नहीं है जब कबीर सयाने हुए और मूर्तिपूजा के रहस्य को समझ गए तब उसके महत्त्व को उन्होंने कुछ स्वीकार किया। उक्त कथन उस समय का प्रतीत होता है जब आप उसके प्रतिकूल प्रचार कर कुछ यक चते थे और इस लाभ की ओर से मुँह मोड़कर सुरति शब्द, नाद-बिंदु का प्रचार कर रहे थे 1 इस दशा में आपका यह कहना कि यदि 'सतगुर' की कृपा न होती तो आप भी पत्थर पूजते और उसके परिणाम स्वरूप निम्न कोटि की योनि में जन्म ग्रहण करते, स्वाभाविक ही है। इस पद्य के आधार पर हम इस प्रचलित प्रवाद को, कि कबीर रामानंद के शिष्य थे, असत्य नहीं कह सकते। परंपरा से लोग कबोर को स्वामीजी का शिष्य मानते आए } अस्तु, कबीर-ग्रंथावली के आधार पर भी उसको निराधार नहीं कह सकते। हौं, पुष्ट कर सकते हैं। यदि ग्रंथावली से वह कल्पित अथवा असत्य सिद्ध हो जाय तो हम सहर्ष स्वीकार करने को तत्पर हैं। कुछ लोगों, विशेषकर कबीर पंथी मुसलमानों की धारणा है कि कबीर मानिकपुर के शेख तकी के मुरीद थे । बहुत कम विद्वान हैं ? श्री 'हरिऔध' जी ( 1 ) कबीर-वचनावलो पृ० १२-१५ । कवीर का जीवन वृत्त शेख तकी त्रिपाठीजी ने इसका विवेचन जिस ढंग से किया है उससे इस मत की साधुता में सर्वथा संदेह हो जाता है। जो लोग शेख तकी को इनका पोर मानते हैं उनके पक्ष में यह प्रमाण कहा जाता है। "मानिकपुरहि कबीर बसेरी मदहति सुनि शेख तकि केरी । ऊजी सुनी जौनपुर थाना कैसी सुनि पोरन के नामा ।" इनके अतिरिक्त कबीर का संबंध शेख अकरदी और सकरदों से भी कहा गया है । इसका वर्णन आता है कि शेख अकरदों और सकरदों कबीर को लेकर स्वामी रामानंद की शरण में गए थे । प्रवाद है कि कबीर से भूसी के शेख तकी की कुछ लाग- डॉट भी हो गई थी। कबीर के साथ जहाँगश्त ने फकीर का संबंध भी कहा जाता है। कबीर-ग्रंथावली में केवल यह पद्य मिलता है "हज हमारी गोमती तोर । जहाँ बसहि पोतंबर पीर ।। वाहु वाहु क्या खूब गावता है । हरि का नाम मेरे मन भावता है {" यह ध्यान देने की बात है कि यह पद्य ग्रंथावली के परिशिष्ट अर्थात् ग्रंथ साहब का है। ग्रंथ साहब के 'पहले दर्सन मगहर पायो' वाले पद्य पर हम कुछ विचार कर चुके हैं। इस पथ में एक विशेष बात यह भी हैं कि पीतांबरजी एक अच्छे गायक हो गए हैं, तारक नहीं। यदि पीर शब्द के आधार पर उनका सूफी कहें तो पीतांबर-संज्ञा के अनु रोध से भक्त । पूरं पद पर विचार करने से पीतांवरजी भक्त उहरते हैं, सूफी नहीं । उनका 'हरि-नाम) कबीर को प्रिय लगता पीतांबर पोर से हम अभी तक अनभिज्ञ हैं हो सकता है कि ( १ ) हिंदुस्तानी तिमाही पत्रिका ११३२५० २०७-०८। २ ) हिंदी-साहित्य का इतिहास (रामचंद्र शुद्ध) १० ७३ । ( ३ ) कबीर एंड हिज फालोवर्स ०८ ( ४ ) कबीर-ग्रंथावली पृ० ३३० ।
जन्म किसी विधवा के अपमान का परिणाम था तो भी वे मुसलमान के घर में पत्ते थे । न तो उनको पत्थर पूजना पड़ता न पुनर्जन्म के फेर में पड़कर बन का रोझ होना पड़ता फिर उनके कहने का तात्पर्य क्या है ? हमारी धारणा है कि कबीर पर वैष्णाव-मत का प्रभाव इतना पर्याप्त पड़ चुका था कि उनका विश्वास अवतार में हो गया यह प्रभाव रामानंद का कहा जा सकता है, उनके राम इसी ढंग के थे । कबीर भली भाँति उनके प्रभाव में न आ सके कारण यह समझ पड़ता है कि उनका स्वर्गवास कबीर के बचपन में ही हो गया था। इतिहाल भी इसके प्रतिकूल नहीं है जब कबीर सयाने हुए और मूर्तिपूजा के रहस्य को समझ गए तब उसके महत्त्व को उन्होंने कुछ स्वीकार किया। उक्त कथन उस समय का प्रतीत होता है जब आप उसके प्रतिकूल प्रचार कर कुछ यक चते थे और इस लाभ की ओर से मुँह मोड़कर सुरति शब्द, नाद-बिंदु का प्रचार कर रहे थे एक इस दशा में आपका यह कहना कि यदि 'सतगुर' की कृपा न होती तो आप भी पत्थर पूजते और उसके परिणाम स्वरूप निम्न कोटि की योनि में जन्म ग्रहण करते, स्वाभाविक ही है। इस पद्य के आधार पर हम इस प्रचलित प्रवाद को, कि कबीर रामानंद के शिष्य थे, असत्य नहीं कह सकते। परंपरा से लोग कबोर को स्वामीजी का शिष्य मानते आए } अस्तु, कबीर-ग्रंथावली के आधार पर भी उसको निराधार नहीं कह सकते। हौं, पुष्ट कर सकते हैं। यदि ग्रंथावली से वह कल्पित अथवा असत्य सिद्ध हो जाय तो हम सहर्ष स्वीकार करने को तत्पर हैं। कुछ लोगों, विशेषकर कबीर पंथी मुसलमानों की धारणा है कि कबीर मानिकपुर के शेख तकी के मुरीद थे । बहुत कम विद्वान हैं ? श्री 'हरिऔध' जी कबीर-वचनावलो पृशून्य बारह-पंद्रह । कवीर का जीवन वृत्त शेख तकी त्रिपाठीजी ने इसका विवेचन जिस ढंग से किया है उससे इस मत की साधुता में सर्वथा संदेह हो जाता है। जो लोग शेख तकी को इनका पोर मानते हैं उनके पक्ष में यह प्रमाण कहा जाता है। "मानिकपुरहि कबीर बसेरी मदहति सुनि शेख तकि केरी । ऊजी सुनी जौनपुर थाना कैसी सुनि पोरन के नामा ।" इनके अतिरिक्त कबीर का संबंध शेख अकरदी और सकरदों से भी कहा गया है । इसका वर्णन आता है कि शेख अकरदों और सकरदों कबीर को लेकर स्वामी रामानंद की शरण में गए थे । प्रवाद है कि कबीर से भूसी के शेख तकी की कुछ लाग- डॉट भी हो गई थी। कबीर के साथ जहाँगश्त ने फकीर का संबंध भी कहा जाता है। कबीर-ग्रंथावली में केवल यह पद्य मिलता है "हज हमारी गोमती तोर । जहाँ बसहि पोतंबर पीर ।। वाहु वाहु क्या खूब गावता है । हरि का नाम मेरे मन भावता है {" यह ध्यान देने की बात है कि यह पद्य ग्रंथावली के परिशिष्ट अर्थात् ग्रंथ साहब का है। ग्रंथ साहब के 'पहले दर्सन मगहर पायो' वाले पद्य पर हम कुछ विचार कर चुके हैं। इस पथ में एक विशेष बात यह भी हैं कि पीतांबरजी एक अच्छे गायक हो गए हैं, तारक नहीं। यदि पीर शब्द के आधार पर उनका सूफी कहें तो पीतांबर-संज्ञा के अनु रोध से भक्त । पूरं पद पर विचार करने से पीतांवरजी भक्त उहरते हैं, सूफी नहीं । उनका 'हरि-नाम) कबीर को प्रिय लगता पीतांबर पोर से हम अभी तक अनभिज्ञ हैं हो सकता है कि हिंदुस्तानी तिमाही पत्रिका एक लाख तेरह हज़ार दो सौ पचास दो सौ सात-आठ। दो ) हिंदी-साहित्य का इतिहास दस तिहत्तर । कबीर एंड हिज फालोवर्स आठ कबीर-ग्रंथावली पृशून्य तीन सौ तीस ।
सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में शुरुआती चरणों से शुरू होता हैवैज्ञानिक विचारों का विकास विज्ञान में एक व्यवस्थित दृष्टिकोण के उद्भव के संबंध में, "सामाजिक प्रणाली" की अवधारणा वैज्ञानिक रूप से आधुनिक रूप से आधुनिक अर्थों में विकसित की गई है। "सिस्टम" की परिभाषाएं सामाजिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में 50 से अधिक हैं। सामान्यीकृत परिभाषा को निम्नानुसार तैयार किया जा सकता है। प्रणाली - विभिन्न तत्वों की कुलताइंटरकनेक्शन और एक पूरे पूरे बनाने में उसी समय, समाज समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में, जब नए रूप बनते हैं, पहले से ही विद्यमान मौजूदा संबंधों के संबंध में एक नया तत्व बन जाता है। इसलिए, प्रणाली कुछ स्वतंत्र है, और दूसरी ओर यह सभी तत्वों में प्रवेश करती है। सिस्टम कम्युनिकेशंस, जो कि समाज के तत्वों के बीच मौजूद है,एक बहुस्तरीय द्वारा विशेषता। वे एक प्रणाली के अलग-अलग तत्वों के बीच मौजूद होते हैं और सिस्टम के बीच एक संपूर्ण और प्रत्येक तत्व से अलग होते हैं। चूंकि सिस्टम में उप-प्रणालियों को शामिल किया जा सकता है, इसलिए यह उन में संभव कनेक्शन की संख्या को दोगुना करता है। सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में यह अखंडता की विशेषता है, केवल जब उसका अस्तित्व संभव है। यह एक विशिष्ट संरचना (तत्वों का एक दूसरे का संबंध है), इसकी गुणात्मक निश्चितता व्यक्त करते हैं। समाज की प्रणाली में संरचनात्मक लिंक पर निर्भर हैंएक निश्चित तत्व के स्थान, इसलिए समाज की संरचना का विकास माध्यमिक (उदाहरणः नेता और दल) के साथ अपने मूल तत्वों के संपर्क में व्यक्त किया गया है। तत्वों के विकास से प्रणालीगत कनेक्शन की संख्या में वृद्धि हुई है। इसका मतलब यह है कि संरचना में सभी बदलाव सिस्टम को स्वयं बदलते हैं। यह बदले में, तत्वों के माध्यम से संरचना को प्रभावित करता है, उनके विकास में योगदान या बाधा डालती है। इस प्रकार, समाज समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में हैविकास अनुमान। समाज में एक मौलिक श्रेणी हैसमाजशास्त्र विज्ञान विज्ञान में, उसके अधीन लोगों के व्यापक समुदाय है, साथ ही सामाजिक बंधन संयुक्त कार्रवाई और आम संस्कृति के आधार पर एक निश्चित एकता में व्यक्तियों और समूहों को एकजुट करने के रूप में समझते हैं। सभी शोधकर्ताओं को एक जटिल समग्र इकाई और सामाजिक जीव के रूप में समाज को पहचानते हैं। इस राय में कोई विसंगति नहीं है कि समाज के अध्ययन और विश्लेषण के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। और हां, समाज एक बहुत जटिल प्रणाली है,एक आंतरिक संरचना की विशेषता उदाहरण के लिए, सामूहिक, क्षेत्रीय समुदाय (शहर, गांव), जातीय समुदाय, सामाजिक वर्ग आदि का निर्माण। सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में मानव सार और प्रकृति द्वारा विशेषता है। यह मानव गतिविधि का एक क्षेत्र और उसके उत्पाद है। प्रणाली का प्रारंभिक तत्व है व्यक्तित्व। लोग एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं, जो उन्हें अलग-अलग व्यक्तियों से एक सामाजिक व्यवस्था में बदलते हैं। एक खुले और बंद समाज की अवधारणा बाहर खड़े हैं इन अवधारणाओं को सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और राजनीतिक व्यवस्था का वर्णन करने के लिए के.पॉपर द्वारा पेश किया गया जो विकास के कुछ चरणों में विभिन्न समाजों की विशेषता थी।
सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में शुरुआती चरणों से शुरू होता हैवैज्ञानिक विचारों का विकास विज्ञान में एक व्यवस्थित दृष्टिकोण के उद्भव के संबंध में, "सामाजिक प्रणाली" की अवधारणा वैज्ञानिक रूप से आधुनिक रूप से आधुनिक अर्थों में विकसित की गई है। "सिस्टम" की परिभाषाएं सामाजिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में पचास से अधिक हैं। सामान्यीकृत परिभाषा को निम्नानुसार तैयार किया जा सकता है। प्रणाली - विभिन्न तत्वों की कुलताइंटरकनेक्शन और एक पूरे पूरे बनाने में उसी समय, समाज समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में, जब नए रूप बनते हैं, पहले से ही विद्यमान मौजूदा संबंधों के संबंध में एक नया तत्व बन जाता है। इसलिए, प्रणाली कुछ स्वतंत्र है, और दूसरी ओर यह सभी तत्वों में प्रवेश करती है। सिस्टम कम्युनिकेशंस, जो कि समाज के तत्वों के बीच मौजूद है,एक बहुस्तरीय द्वारा विशेषता। वे एक प्रणाली के अलग-अलग तत्वों के बीच मौजूद होते हैं और सिस्टम के बीच एक संपूर्ण और प्रत्येक तत्व से अलग होते हैं। चूंकि सिस्टम में उप-प्रणालियों को शामिल किया जा सकता है, इसलिए यह उन में संभव कनेक्शन की संख्या को दोगुना करता है। सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में यह अखंडता की विशेषता है, केवल जब उसका अस्तित्व संभव है। यह एक विशिष्ट संरचना , इसकी गुणात्मक निश्चितता व्यक्त करते हैं। समाज की प्रणाली में संरचनात्मक लिंक पर निर्भर हैंएक निश्चित तत्व के स्थान, इसलिए समाज की संरचना का विकास माध्यमिक के साथ अपने मूल तत्वों के संपर्क में व्यक्त किया गया है। तत्वों के विकास से प्रणालीगत कनेक्शन की संख्या में वृद्धि हुई है। इसका मतलब यह है कि संरचना में सभी बदलाव सिस्टम को स्वयं बदलते हैं। यह बदले में, तत्वों के माध्यम से संरचना को प्रभावित करता है, उनके विकास में योगदान या बाधा डालती है। इस प्रकार, समाज समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में हैविकास अनुमान। समाज में एक मौलिक श्रेणी हैसमाजशास्त्र विज्ञान विज्ञान में, उसके अधीन लोगों के व्यापक समुदाय है, साथ ही सामाजिक बंधन संयुक्त कार्रवाई और आम संस्कृति के आधार पर एक निश्चित एकता में व्यक्तियों और समूहों को एकजुट करने के रूप में समझते हैं। सभी शोधकर्ताओं को एक जटिल समग्र इकाई और सामाजिक जीव के रूप में समाज को पहचानते हैं। इस राय में कोई विसंगति नहीं है कि समाज के अध्ययन और विश्लेषण के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। और हां, समाज एक बहुत जटिल प्रणाली है,एक आंतरिक संरचना की विशेषता उदाहरण के लिए, सामूहिक, क्षेत्रीय समुदाय , जातीय समुदाय, सामाजिक वर्ग आदि का निर्माण। सोसाइटी समाजशास्त्र में एक प्रणाली के रूप में मानव सार और प्रकृति द्वारा विशेषता है। यह मानव गतिविधि का एक क्षेत्र और उसके उत्पाद है। प्रणाली का प्रारंभिक तत्व है व्यक्तित्व। लोग एक-दूसरे के साथ बातचीत करते हैं, जो उन्हें अलग-अलग व्यक्तियों से एक सामाजिक व्यवस्था में बदलते हैं। एक खुले और बंद समाज की अवधारणा बाहर खड़े हैं इन अवधारणाओं को सांस्कृतिक-ऐतिहासिक और राजनीतिक व्यवस्था का वर्णन करने के लिए के.पॉपर द्वारा पेश किया गया जो विकास के कुछ चरणों में विभिन्न समाजों की विशेषता थी।
मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ (बैंड) शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मेगाडेथ vs. लेम्ब ऑफ़ गौड़ (बैंड) मेगाडेथ, सन् 1983 में गठित कैलिफ़ोर्निया के लॉस एंजिलिस स्थित एक अमेरिकी हेवी मेटल बैंड है। गिटारवादक/गायक डेव मुस्टेन और बासवादक डेविड एलेफ़सन द्वारा इसकी स्थापना की गई और मेटालिका से मुस्टेन की विदाई के बाद से इस बैंड ने बारह स्टूडियो एल्बम, छः लाइव एल्बम, दो EPs, छब्बीस एकल, बत्तीस संगीत वीडियो और तीन संकलन रिलीज़ किए हैं। अमेरिकी थ्रैश मेटल के चलन के अग्रणी के रूप में, मेगाडेथ ने सन् 1980 के दशक में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की और मेटालिका, स्लेयर और एंथ्रेक्स के साथ इसे भी एक "बिग फ़ोर ऑफ़ थ्रैश" के रूप में श्रेणीत किया गया जो थ्रैश मेटल की उप-शैली को निर्मित करने, विकसित करने और उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए विख्यात थे। मेगाडेथ की सदस्य-मंडली में कई बार परिवर्तन हुआ है जिसका कारण कुछ हद तक बैंड के कुछ सदस्यों द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन करने की बुरी लत भी थी। सन् 1983 से 2002 तक मुस्टेन और एलेफ़सन इस बैंड के एकमात्र अनवरत सदस्य थे। संयम प्राप्त करने और एक स्थायी सदस्य-मंडली की स्थापना होने के बाद मेगाडेथ, एक-के-बाद-एक प्लैटिनम और स्वर्ण एल्बमों को रिलीज़ करता चला गया जिनमें सन् 1990 की प्लैटिनम-बिक्री के लैंडमार्क वाला रस्ट इन पीस और सन् 1992 का ग्रेमी मनोनीत बहु-प्लैटिनम काउंटडाउन टु एक्सटिंक्शन भी शामिल था। मुस्टेन के बाएं हाथ की नस में बहुत गंभीर चोट लगने के बाद मेगाडेथ सन् 2002 में तितर-बितर हो गया। हालांकि, व्यापक भौतिक चिकित्सा के बाद मुस्टेन ने सन् 2004 में बैंड का पुनर्गठन किया और द सिस्टम हैज़ फेल्ड रिलीज़ किया और उसके बाद सन् 2007 में युनाइटेड ऐबोमिनेशंस को रिलीज़ किया; इन एल्बमों ने "बिलबोर्ड" टॉप 200 के चार्ट पर क्रमशः #18 और #8 पर शुरुआत की. लेम्ब ऑफ़ गौड़ एक अमेरिकन भारी धात्विक बैंड वर्जिनिया, रिचमंडसे 1994 में गठन हुआ। लेम्ब ऑफ़ गौड़ जायक रेंडी ब्लीथ, गिटारवादक मार्क मोर्टन और विल्ली एडलर, बास्सिस्ट जॉन केम्पबेल, और ड्रमर ख्रिस एडलर से युक्त है। बैंड को अमेरिकन भारी धात्विक के न्यू वेव के एक सदस्य माना जाता है। इसके गठन से लेकर, लेम्ब ऑफ़ गोंड ने छः स्टूडियो एलबम्स, एक जानदार एल्बम और तीन डीवीडी का विमोचन किया है। यूनाइटेड स्टेट्स में बैंड का जुड़ा हुआ विक्री दो मिलियन के बराबर है। उनका 2006 का एल्बम सेक्रामेन्ट के लिए 2007 में बैंड को एक ग्रेम्मी नामांकन प्राप्त हुआ लेम्ब ऑफ़ गोंड ने ओज्ज्फेस्ट के साथ दो बार दौरा किया है और 2006 में Slayer's का The Unhloy Alliance Tour पर प्रकट हुआ है। युके में डाउनलोड़ समारोह औअर सोनीस्फियर समारोह, सौंडवेव समारोह और गिगेनटुर को शामिल करते हुए उन्होंने दुनिया भर में अन्य प्रमुक समारोह पर भी भूमिका अदा किया है। हाल ही में, (2008-2009) उन्होंने मेटाल्लिका(वर्ल्ड मेग्नेटिक टुर) के साथ दौरा किया है। 2010 में लेम्ब ऑफ़ गौड़ रोंकस्टार मेय्हेम फेस्टिवल के मुख्य मंच पर होगा। . मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ (बैंड) आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। मेगाडेथ 34 संबंध है और लेम्ब ऑफ़ गौड़ (बैंड) 7 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (34 + 7)। यह लेख मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ (बैंड) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मेगाडेथ vs. लेम्ब ऑफ़ गौड़ मेगाडेथ, सन् एक हज़ार नौ सौ तिरासी में गठित कैलिफ़ोर्निया के लॉस एंजिलिस स्थित एक अमेरिकी हेवी मेटल बैंड है। गिटारवादक/गायक डेव मुस्टेन और बासवादक डेविड एलेफ़सन द्वारा इसकी स्थापना की गई और मेटालिका से मुस्टेन की विदाई के बाद से इस बैंड ने बारह स्टूडियो एल्बम, छः लाइव एल्बम, दो EPs, छब्बीस एकल, बत्तीस संगीत वीडियो और तीन संकलन रिलीज़ किए हैं। अमेरिकी थ्रैश मेटल के चलन के अग्रणी के रूप में, मेगाडेथ ने सन् एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की और मेटालिका, स्लेयर और एंथ्रेक्स के साथ इसे भी एक "बिग फ़ोर ऑफ़ थ्रैश" के रूप में श्रेणीत किया गया जो थ्रैश मेटल की उप-शैली को निर्मित करने, विकसित करने और उन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए विख्यात थे। मेगाडेथ की सदस्य-मंडली में कई बार परिवर्तन हुआ है जिसका कारण कुछ हद तक बैंड के कुछ सदस्यों द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन करने की बुरी लत भी थी। सन् एक हज़ार नौ सौ तिरासी से दो हज़ार दो तक मुस्टेन और एलेफ़सन इस बैंड के एकमात्र अनवरत सदस्य थे। संयम प्राप्त करने और एक स्थायी सदस्य-मंडली की स्थापना होने के बाद मेगाडेथ, एक-के-बाद-एक प्लैटिनम और स्वर्ण एल्बमों को रिलीज़ करता चला गया जिनमें सन् एक हज़ार नौ सौ नब्बे की प्लैटिनम-बिक्री के लैंडमार्क वाला रस्ट इन पीस और सन् एक हज़ार नौ सौ बानवे का ग्रेमी मनोनीत बहु-प्लैटिनम काउंटडाउन टु एक्सटिंक्शन भी शामिल था। मुस्टेन के बाएं हाथ की नस में बहुत गंभीर चोट लगने के बाद मेगाडेथ सन् दो हज़ार दो में तितर-बितर हो गया। हालांकि, व्यापक भौतिक चिकित्सा के बाद मुस्टेन ने सन् दो हज़ार चार में बैंड का पुनर्गठन किया और द सिस्टम हैज़ फेल्ड रिलीज़ किया और उसके बाद सन् दो हज़ार सात में युनाइटेड ऐबोमिनेशंस को रिलीज़ किया; इन एल्बमों ने "बिलबोर्ड" टॉप दो सौ के चार्ट पर क्रमशः #अट्ठारह और #आठ पर शुरुआत की. लेम्ब ऑफ़ गौड़ एक अमेरिकन भारी धात्विक बैंड वर्जिनिया, रिचमंडसे एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में गठन हुआ। लेम्ब ऑफ़ गौड़ जायक रेंडी ब्लीथ, गिटारवादक मार्क मोर्टन और विल्ली एडलर, बास्सिस्ट जॉन केम्पबेल, और ड्रमर ख्रिस एडलर से युक्त है। बैंड को अमेरिकन भारी धात्विक के न्यू वेव के एक सदस्य माना जाता है। इसके गठन से लेकर, लेम्ब ऑफ़ गोंड ने छः स्टूडियो एलबम्स, एक जानदार एल्बम और तीन डीवीडी का विमोचन किया है। यूनाइटेड स्टेट्स में बैंड का जुड़ा हुआ विक्री दो मिलियन के बराबर है। उनका दो हज़ार छः का एल्बम सेक्रामेन्ट के लिए दो हज़ार सात में बैंड को एक ग्रेम्मी नामांकन प्राप्त हुआ लेम्ब ऑफ़ गोंड ने ओज्ज्फेस्ट के साथ दो बार दौरा किया है और दो हज़ार छः में Slayer's का The Unhloy Alliance Tour पर प्रकट हुआ है। युके में डाउनलोड़ समारोह औअर सोनीस्फियर समारोह, सौंडवेव समारोह और गिगेनटुर को शामिल करते हुए उन्होंने दुनिया भर में अन्य प्रमुक समारोह पर भी भूमिका अदा किया है। हाल ही में, उन्होंने मेटाल्लिका के साथ दौरा किया है। दो हज़ार दस में लेम्ब ऑफ़ गौड़ रोंकस्टार मेय्हेम फेस्टिवल के मुख्य मंच पर होगा। . मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ आम में शून्य बातें हैं । मेगाडेथ चौंतीस संबंध है और लेम्ब ऑफ़ गौड़ सात है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख मेगाडेथ और लेम्ब ऑफ़ गौड़ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने बताया कि प्रशांत महासागर में सूनामी की चेतावनी जारी की गई है। न्यू कैलेडोनिया में शुक्रवार को भूकंप के जोरदार झटके लगे हैं। भूकंप के झटकों के बाद सूनामी की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बताया कि न्यू कैलेडोनिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित लॉयल्टी द्वीप पर भूकंप के झटके लगे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसकी जानकारी दी है। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप 10 किमी की गहराई में आया है। अमेरिकी सूनामी चेतावनी प्रणाली ने कहा कि न्यू कैलेडोनिया, फिजी और वानुअतु के क्षेत्रों के लिए सूनामी की चेतावनी जारी हुई है।
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि प्रशांत महासागर में सूनामी की चेतावनी जारी की गई है। न्यू कैलेडोनिया में शुक्रवार को भूकंप के जोरदार झटके लगे हैं। भूकंप के झटकों के बाद सूनामी की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बताया कि न्यू कैलेडोनिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित लॉयल्टी द्वीप पर भूकंप के झटके लगे हैं। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने इसकी जानकारी दी है। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप दस किमी की गहराई में आया है। अमेरिकी सूनामी चेतावनी प्रणाली ने कहा कि न्यू कैलेडोनिया, फिजी और वानुअतु के क्षेत्रों के लिए सूनामी की चेतावनी जारी हुई है।
बिहार। आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल में नौकरी के बदले जमीन केस के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की देशव्यापी रेड में यादव के छोटे बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत लालू की तीन बेटियों के पास से 70 लाख रुपए कैश, 2 किलोग्राम से ज्यादा सोना और 900 अमेरिकी डॉलर बरामद हुआ है। बरामद सोने में 1. 50 किलोग्राम जेवर हैं जबकि 540 ग्राम सोने का सिक्का है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर, बिहार और झारखंड के कुल 24 ठिकानों पर छापा मारा गया था। तेजस्वी यादव के अलावा लालू की तीन बेटियों रागिनी यादव, चंदा यादव और हेमा यादव के घर पर भी रेड डाला गया। पटना में लालू यादव के करीबी आरजेडी नेता अबु दुजाना के घर पर भी छापा मारा गया है। जॉब फॉर लैंड स्कैम में सोमवार को ही पटना में सीबीआई की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से पूछताछ की थी। राबड़ी से पूछताछ के अगले दिन दिल्ली में सांसद बेटी मीसा भारती के आवास पर सीबीआई की टीम ने पूर्व सीएम लालू यादव से भी इस केस में पूछताछ की थी। तेजस्वी यादव की पत्नी मां बनने वाली हैं और वो दिल्ली में अपनी पत्नी के साथ थे जब यह छापा पड़ा। लालू, राबड़ी और मीसा को इस केस में दिल्ली की अदालत में 15 मार्च को पेश भी होना है।
बिहार। आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल में नौकरी के बदले जमीन केस के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय की देशव्यापी रेड में यादव के छोटे बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत लालू की तीन बेटियों के पास से सत्तर लाख रुपए कैश, दो किलोग्रामग्राम से ज्यादा सोना और नौ सौ अमेरिकी डॉलर बरामद हुआ है। बरामद सोने में एक. पचास किलोग्रामग्राम जेवर हैं जबकि पाँच सौ चालीस ग्राम सोने का सिक्का है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर, बिहार और झारखंड के कुल चौबीस ठिकानों पर छापा मारा गया था। तेजस्वी यादव के अलावा लालू की तीन बेटियों रागिनी यादव, चंदा यादव और हेमा यादव के घर पर भी रेड डाला गया। पटना में लालू यादव के करीबी आरजेडी नेता अबु दुजाना के घर पर भी छापा मारा गया है। जॉब फॉर लैंड स्कैम में सोमवार को ही पटना में सीबीआई की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से पूछताछ की थी। राबड़ी से पूछताछ के अगले दिन दिल्ली में सांसद बेटी मीसा भारती के आवास पर सीबीआई की टीम ने पूर्व सीएम लालू यादव से भी इस केस में पूछताछ की थी। तेजस्वी यादव की पत्नी मां बनने वाली हैं और वो दिल्ली में अपनी पत्नी के साथ थे जब यह छापा पड़ा। लालू, राबड़ी और मीसा को इस केस में दिल्ली की अदालत में पंद्रह मार्च को पेश भी होना है।
दिल्ली पुलिस ने एक व्यापारी को फोन पर धमकी देने के आरोप में रोहित भारद्वाज नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिग लड़कों को भी पकड़ा है. व्यापारी ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे एक धमकी भरा फोन आया था और उससे 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी. व्यापारी के मुताबिक कॉलर ने कहा ,"नीरज बवानिया के गैंग से बोल रहा हू, तुरंत 10 लाख रुपयों का इंतजाम कर लो, नहीं तो शाम तक गोली मार दी जाएगी. " 1 जून को पंजाबी बाग थाने में व्यापारी ने यह शिकायत दी थी. व्यापारी ने कहा कि जो कॉल की गई थी वो इंटरनेट कॉल थी और कोई नंबर नहीं आया था. पंजाबी बाग पुलिस ने इस शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी. व्यपारी ने बताया कि जिस वक्त उन्हें फ़ोन आया वो अपने दफ्तर में बैठे थे. उन्होंने फ़ोन करने वालों से कहा कि उसके पास इतने रुपये नही हैं तो फ़ोन करने वाले ने धमकी दी और कहा कि शाम तक कहीं से भी रुपयों का इंतजाम हो जाना चाहिए. पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिये साइबर एक्पर्ट से मदद ली और फिर आरोपी रोहित भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही दो नाबालिग लड़कों को भी पकड़ा गया है. पुलिस ने कॉल करने के इस्तेमाल की गई डिवाईस को भी बरामद कर लिया है. पूछताछ में पता लगा कि दोनों नाबालिग, स्कूल के दोस्त हैं. दोनों ने मिलकर इंस्टाग्राम पर साहिल शूटर के नाम से प्रोफ़ाइल बना रखा था और इस प्रोफ़ाइल से ये गैंगस्टर को फ़ॉलो करते थे. इसी प्रोफाइल के जरिये कुछ ही दिन पहले ये रोहित भारद्वाज के सम्पर्क में आये और उसके साथ चैटिंग करने लगे थे. रोहित भारद्वाज ने ही इन्हें व्यापारी का डिटेल दिया था और कहा था कि इंटरनेट कालिंग करना और खुद को नीरज बवानिया गैंग का बताना. पुलिस ने इनके पास से चार मोबाइल फ़ोन और एक कार बरामद की है.
दिल्ली पुलिस ने एक व्यापारी को फोन पर धमकी देने के आरोप में रोहित भारद्वाज नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिग लड़कों को भी पकड़ा है. व्यापारी ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे एक धमकी भरा फोन आया था और उससे दस लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी. व्यापारी के मुताबिक कॉलर ने कहा ,"नीरज बवानिया के गैंग से बोल रहा हू, तुरंत दस लाख रुपयों का इंतजाम कर लो, नहीं तो शाम तक गोली मार दी जाएगी. " एक जून को पंजाबी बाग थाने में व्यापारी ने यह शिकायत दी थी. व्यापारी ने कहा कि जो कॉल की गई थी वो इंटरनेट कॉल थी और कोई नंबर नहीं आया था. पंजाबी बाग पुलिस ने इस शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी. व्यपारी ने बताया कि जिस वक्त उन्हें फ़ोन आया वो अपने दफ्तर में बैठे थे. उन्होंने फ़ोन करने वालों से कहा कि उसके पास इतने रुपये नही हैं तो फ़ोन करने वाले ने धमकी दी और कहा कि शाम तक कहीं से भी रुपयों का इंतजाम हो जाना चाहिए. पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिये साइबर एक्पर्ट से मदद ली और फिर आरोपी रोहित भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही दो नाबालिग लड़कों को भी पकड़ा गया है. पुलिस ने कॉल करने के इस्तेमाल की गई डिवाईस को भी बरामद कर लिया है. पूछताछ में पता लगा कि दोनों नाबालिग, स्कूल के दोस्त हैं. दोनों ने मिलकर इंस्टाग्राम पर साहिल शूटर के नाम से प्रोफ़ाइल बना रखा था और इस प्रोफ़ाइल से ये गैंगस्टर को फ़ॉलो करते थे. इसी प्रोफाइल के जरिये कुछ ही दिन पहले ये रोहित भारद्वाज के सम्पर्क में आये और उसके साथ चैटिंग करने लगे थे. रोहित भारद्वाज ने ही इन्हें व्यापारी का डिटेल दिया था और कहा था कि इंटरनेट कालिंग करना और खुद को नीरज बवानिया गैंग का बताना. पुलिस ने इनके पास से चार मोबाइल फ़ोन और एक कार बरामद की है.
Actress Not Married Yet: कहा जाता है कि वह लोग जो बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें प्यार की सौगात मिलती है क्योंकि सच्चा प्यार हर किसी के नसीब में नहीं होता है. खासकर ग्लैमर और चकाचौंध से गुलज़ार इंडस्ट्री में ऐसे सितारों की लंबी फेहरिस्त है. इस वजह से पर्दे की कई अभिनेत्रियों ने आज तक शादी नहीं की, जिनकी उम्र 40 पार है. सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) 46 साल की हो चुकी हैं और उनकी शादी को लेकर फैंस आज भी इंतजार करते हैं. काफी समय से रोहमन शॉल को एक्ट्रेस डेट कर रही थीं, जिसे लेकर लोग उम्मीद में थे कि जल्द दोनों शादी करेंगे. हालांकि कुछ समय पहले ही इस कपल का ब्रेकअप हुआ है. एक्ट्रेस फिल्हाल दो बच्चों की सिंगल मॉम हैं, जिन्हें उन्होंने गोद लिया था. अपनी पहली ही फिल्म से बॉलीवुड में तहलका मचाने वाली अभिनेत्री अमीषा पटेल (Ameesha Patel) 45 साल की हो गई हैं, बावजूद इसके उन्होंने अब तक शादी नहीं की. खुद एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह सिंगल रह कर खुश हैं. उन्हें किसी रिलेशनशिप में दिलचस्पी नहीं है. टीवी शो 'बड़े अच्छे लगते हैं' से काफी फेमस हुईं साक्षी तंवर (Sakshi Tanwar) जल्द अपनी उम्र की हाफ सेंच्यूरी पार कर लेंगी, लेकिन आज तक वो शादी के बंधन में नहीं बंधी हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें अब तक कोई ऐसा नहीं मिला जिससे वह शादी कर सकें. पर्दे की जानी मानी अभिनेत्री दिव्या दत्ता (Divya Dutta) ने उम्र के 44वें पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अब तक अपनी शादी को लेकर कुछ सोचा नहीं है. 47 की उम्र की एक्ट्रेस नगमा फिल्मी पर्दे का लोकप्रिय चेहरा रही हैं. रील लाइफ में नाम कमाने वाली एक्ट्रेस रियल लाइफ में आज भी तन्हा हैं. वहीं आशा पारेख बीते दौर की एक ऐसी अभिनेत्री हैं जो स्टारडम को हासिल करने के बाद भी मोहब्बत से महरूम रह गईं. बॉलीवुड में कई हिट फिल्में कर चुकी एक्ट्रेस तब्बू (Tabu) आज भी अपने पार्टनर का इंतजार कर रही हैं.
Actress Not Married Yet: कहा जाता है कि वह लोग जो बहुत खुशनसीब होते हैं जिन्हें प्यार की सौगात मिलती है क्योंकि सच्चा प्यार हर किसी के नसीब में नहीं होता है. खासकर ग्लैमर और चकाचौंध से गुलज़ार इंडस्ट्री में ऐसे सितारों की लंबी फेहरिस्त है. इस वजह से पर्दे की कई अभिनेत्रियों ने आज तक शादी नहीं की, जिनकी उम्र चालीस पार है. सुष्मिता सेन छियालीस साल की हो चुकी हैं और उनकी शादी को लेकर फैंस आज भी इंतजार करते हैं. काफी समय से रोहमन शॉल को एक्ट्रेस डेट कर रही थीं, जिसे लेकर लोग उम्मीद में थे कि जल्द दोनों शादी करेंगे. हालांकि कुछ समय पहले ही इस कपल का ब्रेकअप हुआ है. एक्ट्रेस फिल्हाल दो बच्चों की सिंगल मॉम हैं, जिन्हें उन्होंने गोद लिया था. अपनी पहली ही फिल्म से बॉलीवुड में तहलका मचाने वाली अभिनेत्री अमीषा पटेल पैंतालीस साल की हो गई हैं, बावजूद इसके उन्होंने अब तक शादी नहीं की. खुद एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह सिंगल रह कर खुश हैं. उन्हें किसी रिलेशनशिप में दिलचस्पी नहीं है. टीवी शो 'बड़े अच्छे लगते हैं' से काफी फेमस हुईं साक्षी तंवर जल्द अपनी उम्र की हाफ सेंच्यूरी पार कर लेंगी, लेकिन आज तक वो शादी के बंधन में नहीं बंधी हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्हें अब तक कोई ऐसा नहीं मिला जिससे वह शादी कर सकें. पर्दे की जानी मानी अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने उम्र के चौंतालीसवें पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अब तक अपनी शादी को लेकर कुछ सोचा नहीं है. सैंतालीस की उम्र की एक्ट्रेस नगमा फिल्मी पर्दे का लोकप्रिय चेहरा रही हैं. रील लाइफ में नाम कमाने वाली एक्ट्रेस रियल लाइफ में आज भी तन्हा हैं. वहीं आशा पारेख बीते दौर की एक ऐसी अभिनेत्री हैं जो स्टारडम को हासिल करने के बाद भी मोहब्बत से महरूम रह गईं. बॉलीवुड में कई हिट फिल्में कर चुकी एक्ट्रेस तब्बू आज भी अपने पार्टनर का इंतजार कर रही हैं.
फिल्म निमार्ता फराह खान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ एक सेल्फी साझा की है जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि यह कोविड -19 के लिए सकारात्मक परीक्षण से पहले ली गई थी। फराह और दीपिका 'कौन बनेगा करोड़पति 13' के स्पेशल एपिसोड में नजर आएंगे। इंस्टाग्राम तस्वीर में फरहा को शो के होस्ट अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ देखा जा सकता है। उन्होंने अमिताभ और दीपिका को टैग करते हुए इसे कैप्शन दिया, "आप जानते हैं कि यह वो बेस्ट दिन है जब सेल्फी खुद लीजेंड अमिताभ बच्चन द्वारा क्लिक गई थी। धन्यवाद मेरी प्यारी दीपिका पादुकोण, इस शिक्षक दिवस पर केबीसी के विशेष एपिसोड में मेरे साथ होने के लिए। " फराह ने यह भी स्पष्ट किया कि तस्वीर कोविड -19 के लिए सकारात्मक परीक्षण करने से पहले ली गई थी। उन्होंने कहा कि एपिसोड मेरा सकारात्मक परीक्षण आने से पहले शूट किया गया था और शुक्र है कि इस सेट पर सभी का नकारात्मक परीक्षण अया है।
फिल्म निमार्ता फराह खान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ एक सेल्फी साझा की है जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि यह कोविड -उन्नीस के लिए सकारात्मक परीक्षण से पहले ली गई थी। फराह और दीपिका 'कौन बनेगा करोड़पति तेरह' के स्पेशल एपिसोड में नजर आएंगे। इंस्टाग्राम तस्वीर में फरहा को शो के होस्ट अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ देखा जा सकता है। उन्होंने अमिताभ और दीपिका को टैग करते हुए इसे कैप्शन दिया, "आप जानते हैं कि यह वो बेस्ट दिन है जब सेल्फी खुद लीजेंड अमिताभ बच्चन द्वारा क्लिक गई थी। धन्यवाद मेरी प्यारी दीपिका पादुकोण, इस शिक्षक दिवस पर केबीसी के विशेष एपिसोड में मेरे साथ होने के लिए। " फराह ने यह भी स्पष्ट किया कि तस्वीर कोविड -उन्नीस के लिए सकारात्मक परीक्षण करने से पहले ली गई थी। उन्होंने कहा कि एपिसोड मेरा सकारात्मक परीक्षण आने से पहले शूट किया गया था और शुक्र है कि इस सेट पर सभी का नकारात्मक परीक्षण अया है।
पाकिस्तान में सेना के इशारे पर बड़े फैसले लिए जाना और यहां तक की तख्तापलट हो जाना कोई नई बात नहीं है। पड़ोसी मुल्क में सत्ताधारी सरकार ने सेना को लेकर एक ऐसा फैसला लिया, जिसके चलते उसे विपक्ष तो क्या अपनी ही पार्टी के नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने उस कानून को मंजूरी दे दी है जिसके तहत अगर अब कोई किसी भी तरह से सेना की आलोचना या उपहास करेगा तो उसे दो साल तक के लिए जेल हो सकती है। इसके अलावा पांच लाख रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों ही सजा दी जा सकती है। इस विवादास्पद बिल पर इमरान खान सरकार के मंत्री ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं, बुधवार को विपक्षी पार्टियों के कड़े विरोध के बावजूद पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी ऑन इंटीरियर ने इस बिल को मंजूरी दे दी। बता दें कि पाकिस्तानी दंड संहिता (पीपीसी) में संशोधन के उद्देश्य से लाए गए इस कानून को संसद में सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सांसद अमजद अली खान ने पेश किया। विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता सैयद आगा रफीउल्लाह समेत दूसरे विपक्षी नेताओं ने इस बिल को विरोध करते हुए इसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया। विपक्ष पाकिस्तान सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने का आरोप लगा रही है। पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने एक पत्रकार द्वारा किए गए ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस बिल को हास्यापद करार दिया।
पाकिस्तान में सेना के इशारे पर बड़े फैसले लिए जाना और यहां तक की तख्तापलट हो जाना कोई नई बात नहीं है। पड़ोसी मुल्क में सत्ताधारी सरकार ने सेना को लेकर एक ऐसा फैसला लिया, जिसके चलते उसे विपक्ष तो क्या अपनी ही पार्टी के नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने उस कानून को मंजूरी दे दी है जिसके तहत अगर अब कोई किसी भी तरह से सेना की आलोचना या उपहास करेगा तो उसे दो साल तक के लिए जेल हो सकती है। इसके अलावा पांच लाख रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों ही सजा दी जा सकती है। इस विवादास्पद बिल पर इमरान खान सरकार के मंत्री ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं, बुधवार को विपक्षी पार्टियों के कड़े विरोध के बावजूद पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी ऑन इंटीरियर ने इस बिल को मंजूरी दे दी। बता दें कि पाकिस्तानी दंड संहिता में संशोधन के उद्देश्य से लाए गए इस कानून को संसद में सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सांसद अमजद अली खान ने पेश किया। विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता सैयद आगा रफीउल्लाह समेत दूसरे विपक्षी नेताओं ने इस बिल को विरोध करते हुए इसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया। विपक्ष पाकिस्तान सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने का आरोप लगा रही है। पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने एक पत्रकार द्वारा किए गए ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस बिल को हास्यापद करार दिया।
Satyaprem Ki Katha फिल्म रिलीज हो गई है. फिलहाल फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. लेकिन सवाल ये उठता है कि पहले दिन ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कलेक्शन कर सकती है. इस फिल्म के जरिए कियारा और कार्तिक दूसरी बार स्क्रीन पर एक साथ नजर आ रहे हैं. Satyaprem ki Katha BO Collection: कियारा आडवाणी और कार्तिक आर्यन की फिल्म 'सत्यप्रेम की कथा' (Satyaprem KI Katha) सिनेमाघरों में 29 जून को रिलीज हो गई है. फिल्म को लेकर फैंस सोशल मीडिया पर पॉजिटिव रिएक्ट कर रहे हैं. जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि कार्तिक और कियारा की ये फिल्म दर्शकों की कसौटी पर खरी उतर रही है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ये फिल्म कितना कलेक्शन कर सकती है. ट्रेड एनालिस्ट के मुताबिक 'सत्यप्रेम की कथा' (Satyaprem KI Katha) फिल्म पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 8 से 9 करोड़ का कलेक्शन कर सकती है. हालांकि इस फिल्म को पैसे कमाने का एक और गोल्डन मौका मिला है. ईद-उल-अजहा के दिन ये फिल्म रिलीज हुई है. लिहाजा कई जगह इस दिन गस्टेड हॉलीडे होता है. ऐसे में गुरुवार को रिलीज करके मेकर्स ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की है. एक ओर गुरुवार तो दूसरी तरफ तीन दिन और...यानी कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार इस फिल्म के लिए गोल्डन मौका साबित हो सकता है. यानी इस फिल्म को पैसा कमाने के लिए रिलीज के साथ ही चार दिन का मौका है. खास बात है कि कार्तिक और कियारा इस फिल्म के जरिए दूसरी बार बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दे रहे हैं. इससे पहले 'भूल भुलैया 2' फिल्म में ये जोड़ी साथ नजर आई थी. उस वक्त पहले दिन फिल्म ने 14 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. इस फिल्म से कियारा और कार्तिक दोनों को ही काफी ज्यादा उम्मीदे हैं. इस साल कार्तिक की ये दूसरी फिल्म है जो रिलीज हो रही है. इससे पहले रिलीज हुई फिल्म 'शहजादा' फ्लॉप रहीं. जबकि कियारा की शादी के बाद रिलीज हो रही ये पहली फिल्म है.
Satyaprem Ki Katha फिल्म रिलीज हो गई है. फिलहाल फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. लेकिन सवाल ये उठता है कि पहले दिन ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कलेक्शन कर सकती है. इस फिल्म के जरिए कियारा और कार्तिक दूसरी बार स्क्रीन पर एक साथ नजर आ रहे हैं. Satyaprem ki Katha BO Collection: कियारा आडवाणी और कार्तिक आर्यन की फिल्म 'सत्यप्रेम की कथा' सिनेमाघरों में उनतीस जून को रिलीज हो गई है. फिल्म को लेकर फैंस सोशल मीडिया पर पॉजिटिव रिएक्ट कर रहे हैं. जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि कार्तिक और कियारा की ये फिल्म दर्शकों की कसौटी पर खरी उतर रही है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ये फिल्म कितना कलेक्शन कर सकती है. ट्रेड एनालिस्ट के मुताबिक 'सत्यप्रेम की कथा' फिल्म पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर आठ से नौ करोड़ का कलेक्शन कर सकती है. हालांकि इस फिल्म को पैसे कमाने का एक और गोल्डन मौका मिला है. ईद-उल-अजहा के दिन ये फिल्म रिलीज हुई है. लिहाजा कई जगह इस दिन गस्टेड हॉलीडे होता है. ऐसे में गुरुवार को रिलीज करके मेकर्स ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की है. एक ओर गुरुवार तो दूसरी तरफ तीन दिन और...यानी कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार इस फिल्म के लिए गोल्डन मौका साबित हो सकता है. यानी इस फिल्म को पैसा कमाने के लिए रिलीज के साथ ही चार दिन का मौका है. खास बात है कि कार्तिक और कियारा इस फिल्म के जरिए दूसरी बार बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दे रहे हैं. इससे पहले 'भूल भुलैया दो' फिल्म में ये जोड़ी साथ नजर आई थी. उस वक्त पहले दिन फिल्म ने चौदह करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. इस फिल्म से कियारा और कार्तिक दोनों को ही काफी ज्यादा उम्मीदे हैं. इस साल कार्तिक की ये दूसरी फिल्म है जो रिलीज हो रही है. इससे पहले रिलीज हुई फिल्म 'शहजादा' फ्लॉप रहीं. जबकि कियारा की शादी के बाद रिलीज हो रही ये पहली फिल्म है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया हिंदी भाषा को लेकर कांग्रेस पार्टी भड़क उठी है, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे सांस्कृतिक आतंकवाद बताया है, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं (यूनियन HM की टिप्पणी 'हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए')। यह सांस्कृतिक आतंकवाद है. अधीर रंजन से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ भाजपा पर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के खिलाफ "सांस्कृतिक आतंकवाद" के अपने एजेंडे को उजागर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बेंगलुरु में गुरुवार को कहा था कि हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा। अमित शाह के इस बयान का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है और हम इसे कभी होने भी नहीं देंगे। सिद्धारमैया ने कहा, "हिंदी को थोपना सहकारी संघवाद के बजाय जबरदस्त संघवाद का संकेत है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया हिंदी भाषा को लेकर कांग्रेस पार्टी भड़क उठी है, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे सांस्कृतिक आतंकवाद बताया है, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं । यह सांस्कृतिक आतंकवाद है. अधीर रंजन से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ भाजपा पर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के खिलाफ "सांस्कृतिक आतंकवाद" के अपने एजेंडे को उजागर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बेंगलुरु में गुरुवार को कहा था कि हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। संसदीय राजभाषा समिति की सैंतीसवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा। अमित शाह के इस बयान का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है और हम इसे कभी होने भी नहीं देंगे। सिद्धारमैया ने कहा, "हिंदी को थोपना सहकारी संघवाद के बजाय जबरदस्त संघवाद का संकेत है।