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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे मामले की सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से नियमित सुनवाई शुरू हो रही है. इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सुनवाई से 10 दिन पहले राममंदिर निर्माण को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी उत्सव के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी रास्ते से राम मंदिर का निर्माण जरूर होना चाहिए, इसके लिए सरकार को कानून लाना चाहिए.
संघ प्रमुख ने कहा कि राम सिर्फ हिंदुओं के नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं. हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए आदर्श हैं. संविधान की प्रति में भगवान राम का चित्र है. उन्होंने कहा कि किसी भी मार्ग से बने लेकिन उनका मंदिर बनना चाहिए. सरकार को इसके लिए कानून लाना चाहिए.
भागवत ने कहा कि अगर राम मंदिर बनता है तो देश में सद्भावना का माहौल बनेगा. उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि इनकी सत्ता है फिर भी मंदिर क्यों नहीं बना, वोटर सिर्फ एक ही दिन का राजा रहता है.
गुरुवार को संघ मुख्यालय नागपुर में आरएसएस की ओर से विजयादशमी उत्सव मनाया गया. इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख के राममंदिर को लेकर दिए गए बयान से साफ है कि संघ अब और लंबा इंतजार नहीं करना चाहता.
संघ प्रमुख ने सरकार और देश के लोगों को साफ संकेत दिए हैं कि राममंदिर किसी भी कीमत पर चाहिए. ऐसे में अगर सरकार राममंदिर के लिए कानून नहीं लाती है तो सबरीमाला मामले पर भागवत का ये कहना कि धर्म से जुड़े मामले पर धर्माचार्यों की राय के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए, वो बदलाव की बात को समझते हैं.
संघ प्रमुख ने कहा कि सबरीमाला में जिन्होंने याचिका डाली वो कभी मंदिर नहीं गए, जो महिलाएं कोर्ट के फैसले से असहमत होकर आंदोलन कर रही हैं वो आस्था को मानती हैं. कोर्ट के फैसले से वहां पर असंतोष पैदा हो गया है. महिलाएं ही इस परंपरा को मानती हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. इसी का नतीजा है कि महिलाएं भी विरोध कर रही हैं.
सबरीमाला मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों के साथ संघ प्रमुख के खड़े होने के पीछे भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. अयोध्या मामले में कोर्ट अगर किसी कारणवश राममंदिर के खिलाफ फैसला देता है तो हिंदू समाज उसके खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन कर सकता है.
राममंदिर मामले को लेकर साधु-संत पहले से ही सरकार पर दबाव बना रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई से महज 10 दिन पहले संघ प्रमुख ने राममंदिर के लिए कानून बनाने की बात कहकर और भी बड़ा दबाव सरकार पर बना दिया है.
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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे मामले की सुप्रीम कोर्ट में उनतीस अक्टूबर से नियमित सुनवाई शुरू हो रही है. इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सुनवाई से दस दिन पहले राममंदिर निर्माण को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी रास्ते से राम मंदिर का निर्माण जरूर होना चाहिए, इसके लिए सरकार को कानून लाना चाहिए. संघ प्रमुख ने कहा कि राम सिर्फ हिंदुओं के नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं. हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए आदर्श हैं. संविधान की प्रति में भगवान राम का चित्र है. उन्होंने कहा कि किसी भी मार्ग से बने लेकिन उनका मंदिर बनना चाहिए. सरकार को इसके लिए कानून लाना चाहिए. भागवत ने कहा कि अगर राम मंदिर बनता है तो देश में सद्भावना का माहौल बनेगा. उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि इनकी सत्ता है फिर भी मंदिर क्यों नहीं बना, वोटर सिर्फ एक ही दिन का राजा रहता है. गुरुवार को संघ मुख्यालय नागपुर में आरएसएस की ओर से विजयादशमी उत्सव मनाया गया. इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख के राममंदिर को लेकर दिए गए बयान से साफ है कि संघ अब और लंबा इंतजार नहीं करना चाहता. संघ प्रमुख ने सरकार और देश के लोगों को साफ संकेत दिए हैं कि राममंदिर किसी भी कीमत पर चाहिए. ऐसे में अगर सरकार राममंदिर के लिए कानून नहीं लाती है तो सबरीमाला मामले पर भागवत का ये कहना कि धर्म से जुड़े मामले पर धर्माचार्यों की राय के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए, वो बदलाव की बात को समझते हैं. संघ प्रमुख ने कहा कि सबरीमाला में जिन्होंने याचिका डाली वो कभी मंदिर नहीं गए, जो महिलाएं कोर्ट के फैसले से असहमत होकर आंदोलन कर रही हैं वो आस्था को मानती हैं. कोर्ट के फैसले से वहां पर असंतोष पैदा हो गया है. महिलाएं ही इस परंपरा को मानती हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. इसी का नतीजा है कि महिलाएं भी विरोध कर रही हैं. सबरीमाला मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों के साथ संघ प्रमुख के खड़े होने के पीछे भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. अयोध्या मामले में कोर्ट अगर किसी कारणवश राममंदिर के खिलाफ फैसला देता है तो हिंदू समाज उसके खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन कर सकता है. राममंदिर मामले को लेकर साधु-संत पहले से ही सरकार पर दबाव बना रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई से महज दस दिन पहले संघ प्रमुख ने राममंदिर के लिए कानून बनाने की बात कहकर और भी बड़ा दबाव सरकार पर बना दिया है.
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" सम्मान के लिए मौत" अथवा प्राणदंड अर्थात यदि अपने सम्मान पर किसी के कारण कोई आंच आती है,तो उत्तरदायी को मृत्युदंड देने का अधिकार उस परिवार या सम्बन्धित समाज को है. कितना आश्चर्यजनक सा लगता है,सुनने ,देखने में या पढने में कि परिवार के लोग अपने से रक्त सम्बन्धों से जुडी. प्यार से पालित पोषित पुत्री का इसलिए प्राणांत कर दें कि उसने विधर्मी,सगोत्री या दूसरी जाति के पुरुष से प्रेम करने के कारण विवाह कर लिया है,या करने का निर्णय लिया है. प्राय ये हत्याएं प्रेम सम्बन्धों के कारण होती हैं.
ये हत्याएं केवल भारत में होती हैं ऐसा नहीं है,उद्गम तो इनका अरब देशों से माना जाता है,क्योंकि पर्दे में रहने वाली तथा असंख्य प्रतिबंधों के रहते हुए जब भी कोई महिला इन बदिशों से स्वयं की रक्षा हेतु कहीं भी प्रेम कर बैठती रुढियों की बेड़ियों में जकड़ा परम्परावादी पुरुष समाज अपने सम्मान पर आंच आने के नाम पर उस महिला और उसके साथी को जघन्य दंड सार्वजनिक रूप से देकर अपने अहम् की तुष्ठी कर लेता. समाज के लिए विद्रूप कहा जाय कि पुरुष स्वयं तो चार पत्नी रखने का अधिकारी था और बिना कोई कारण बताये बस तलाक तलाक कह कर मुक्त . पुरुष के इस कृत्य से परिवार के सम्मान को ठेस नहीं पहुँचती थी क्यों कि समाज के नियमों का निर्माण पुरुषों के ही हित में रहा है. परन्तु स्त्री का स्वयं किया गया प्रेम या विवाह गुनाह था. प्रेम का अधिकार केवल पुरुष को था स्त्री को नहीं. इन सब व्यवस्थाओं की आलोचना करने वाला सभ्य समाज में धीरे धीरे इस सम्मान मृत्यु का प्रचलन बढ़ता गया और आज सम्पूर्ण विश्व में ऐसी घटनाओं की संख्या ५००० से अधिक प्रतिवर्ष रहती है. और ये हत्याएं प्राय विश्व के सभी देशों में हैं. पाश्चात्य देशों में घटित होने वाली ऐसी सम्मान हत्याएं प्राय वहीँ बसे मुस्लिम परिवारों में अधिक देखने को मिलती हैं. कबीलाई समाजों में भी ऐसी व्यवस्थाएं रही हैं.
. सम्मान के महत्व को नकारा नहीं जा सकता,चाहे वह व्यक्ति को हो ,धर्म का जाति का किसी अन्य संस्था या फिर राष्ट्र का. सम्मान निस्संदेह महत्वपूर्ण है. परन्तु यदि माता-पिता की इच्छा या परिवार के विपरीत जाकर कोई प्रेमी युगल विवाह रचाता है तो उसके लिए इतनी बड़ी सजा? प्रेम के बदले में सबके सामने नृशंस बनकर हत्या करना या करवा देना. ? हम आदिम युग में जी रहे हैं,या तथाकथित सभ्य समाज में? सम्मान किसका क्या परिवार की इच्छा के विपरीत जाना ही एक स्वरूप है गुनाह का लडकी के कृत्यों से ही परिवार के सम्मान को ठेस पहुँचती है,लड़कों के घृणित कृत्यों से परिवार का मान सम्मान बढ़ता है?
. प्राय फ़िल्मी कथानकों में देखने को मिलता था कि पारस्परिक विद्वेष या किसी अन्य पारिवारिक विवादों,राजघरानों या कुलीन परिवारों के पारस्परिक झगड़ों में इन प्रेम सम्बन्धों को मान्यता नहीं मिलती थी और हत्याओं का क्रम चलता रहता था जो खूनी रंजिश में बदल जाती थी और कई पीढी तक चलती थी. आज ये सम्मान हत्याएं व्यवहारिक रूप से सामान्य परिवारों में व्यवहार में आ रही हैं. मेरे विचार से इनका मुख्य कारण है,जाति,धर्म,सवर्ण -हरिजन,निर्धन-धनवान या फिर फतवे या फरमान . और इनसब से बढ़कर शिक्षा की कमी.
सगोत्र विवाहों ,अंतरजातीय विवाहों पर नित्य ही ऐसे फरमान या सामजिक आदेश अपनी संप्रभुता बनाये रखने के लिए कुछ समाजों या खापों आदि के द्वारा जारी किये जाते हैं. इनके न मानने पर जिन्दा जलाने,पेड़ पर लटकर या किसी अन्य रूप में सार्वजनिक रूप से फांसी देकर ये प्रदर्शित किया जाता है कि इस राह पर चलने वालों का अंत ऐसा या इससे भी भयंकर होगा. हमारे देश में ऐसे कृत्यों को सम्पादित करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है अवश्य परन्तु जिन प्रभावशाली लोगों द्वारा ये दंड निर्धारित किये जाते हैं या फिर जो इनके लिए उत्तरदायी हैं उनके समक्ष मुख खोलने का साहस कोई नहीं कर पाता और वो अपनी मूंछों पर ताव देते हुए पुनः मैदान में आ खड़े होते है और उनपर कोई नियंत्रण नहीं लग पाता. इस प्रकार के जातीय स्वरूप वाले समाज के उत्थान में अपनी भूमिका का निर्वाह भली भांति कर सकते हैं यदि . इन समूहों द्वारा दहेज़ लेने,के खिलाफ कठोरतम दंड दिया जाय, ,कन्या भ्रूण हत्याओं पर रोक लगाने का अभियान ल चलाया जाय, ,नारी शिक्षा को लागू किया जाय,. बलात्कारियों को मृत्यु दंड देने की संस्तुति की जाय. . समाज में सकारात्मक करने के लिए बहुत से कार्य हैं,जिनके करने पर इनका महत्व बढेगा परन्तु ऐसे नादिरशाही फरमान लागू करके नहीं.
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" सम्मान के लिए मौत" अथवा प्राणदंड अर्थात यदि अपने सम्मान पर किसी के कारण कोई आंच आती है,तो उत्तरदायी को मृत्युदंड देने का अधिकार उस परिवार या सम्बन्धित समाज को है. कितना आश्चर्यजनक सा लगता है,सुनने ,देखने में या पढने में कि परिवार के लोग अपने से रक्त सम्बन्धों से जुडी. प्यार से पालित पोषित पुत्री का इसलिए प्राणांत कर दें कि उसने विधर्मी,सगोत्री या दूसरी जाति के पुरुष से प्रेम करने के कारण विवाह कर लिया है,या करने का निर्णय लिया है. प्राय ये हत्याएं प्रेम सम्बन्धों के कारण होती हैं. ये हत्याएं केवल भारत में होती हैं ऐसा नहीं है,उद्गम तो इनका अरब देशों से माना जाता है,क्योंकि पर्दे में रहने वाली तथा असंख्य प्रतिबंधों के रहते हुए जब भी कोई महिला इन बदिशों से स्वयं की रक्षा हेतु कहीं भी प्रेम कर बैठती रुढियों की बेड़ियों में जकड़ा परम्परावादी पुरुष समाज अपने सम्मान पर आंच आने के नाम पर उस महिला और उसके साथी को जघन्य दंड सार्वजनिक रूप से देकर अपने अहम् की तुष्ठी कर लेता. समाज के लिए विद्रूप कहा जाय कि पुरुष स्वयं तो चार पत्नी रखने का अधिकारी था और बिना कोई कारण बताये बस तलाक तलाक कह कर मुक्त . पुरुष के इस कृत्य से परिवार के सम्मान को ठेस नहीं पहुँचती थी क्यों कि समाज के नियमों का निर्माण पुरुषों के ही हित में रहा है. परन्तु स्त्री का स्वयं किया गया प्रेम या विवाह गुनाह था. प्रेम का अधिकार केवल पुरुष को था स्त्री को नहीं. इन सब व्यवस्थाओं की आलोचना करने वाला सभ्य समाज में धीरे धीरे इस सम्मान मृत्यु का प्रचलन बढ़ता गया और आज सम्पूर्ण विश्व में ऐसी घटनाओं की संख्या पाँच हज़ार से अधिक प्रतिवर्ष रहती है. और ये हत्याएं प्राय विश्व के सभी देशों में हैं. पाश्चात्य देशों में घटित होने वाली ऐसी सम्मान हत्याएं प्राय वहीँ बसे मुस्लिम परिवारों में अधिक देखने को मिलती हैं. कबीलाई समाजों में भी ऐसी व्यवस्थाएं रही हैं. . सम्मान के महत्व को नकारा नहीं जा सकता,चाहे वह व्यक्ति को हो ,धर्म का जाति का किसी अन्य संस्था या फिर राष्ट्र का. सम्मान निस्संदेह महत्वपूर्ण है. परन्तु यदि माता-पिता की इच्छा या परिवार के विपरीत जाकर कोई प्रेमी युगल विवाह रचाता है तो उसके लिए इतनी बड़ी सजा? प्रेम के बदले में सबके सामने नृशंस बनकर हत्या करना या करवा देना. ? हम आदिम युग में जी रहे हैं,या तथाकथित सभ्य समाज में? सम्मान किसका क्या परिवार की इच्छा के विपरीत जाना ही एक स्वरूप है गुनाह का लडकी के कृत्यों से ही परिवार के सम्मान को ठेस पहुँचती है,लड़कों के घृणित कृत्यों से परिवार का मान सम्मान बढ़ता है? . प्राय फ़िल्मी कथानकों में देखने को मिलता था कि पारस्परिक विद्वेष या किसी अन्य पारिवारिक विवादों,राजघरानों या कुलीन परिवारों के पारस्परिक झगड़ों में इन प्रेम सम्बन्धों को मान्यता नहीं मिलती थी और हत्याओं का क्रम चलता रहता था जो खूनी रंजिश में बदल जाती थी और कई पीढी तक चलती थी. आज ये सम्मान हत्याएं व्यवहारिक रूप से सामान्य परिवारों में व्यवहार में आ रही हैं. मेरे विचार से इनका मुख्य कारण है,जाति,धर्म,सवर्ण -हरिजन,निर्धन-धनवान या फिर फतवे या फरमान . और इनसब से बढ़कर शिक्षा की कमी. सगोत्र विवाहों ,अंतरजातीय विवाहों पर नित्य ही ऐसे फरमान या सामजिक आदेश अपनी संप्रभुता बनाये रखने के लिए कुछ समाजों या खापों आदि के द्वारा जारी किये जाते हैं. इनके न मानने पर जिन्दा जलाने,पेड़ पर लटकर या किसी अन्य रूप में सार्वजनिक रूप से फांसी देकर ये प्रदर्शित किया जाता है कि इस राह पर चलने वालों का अंत ऐसा या इससे भी भयंकर होगा. हमारे देश में ऐसे कृत्यों को सम्पादित करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है अवश्य परन्तु जिन प्रभावशाली लोगों द्वारा ये दंड निर्धारित किये जाते हैं या फिर जो इनके लिए उत्तरदायी हैं उनके समक्ष मुख खोलने का साहस कोई नहीं कर पाता और वो अपनी मूंछों पर ताव देते हुए पुनः मैदान में आ खड़े होते है और उनपर कोई नियंत्रण नहीं लग पाता. इस प्रकार के जातीय स्वरूप वाले समाज के उत्थान में अपनी भूमिका का निर्वाह भली भांति कर सकते हैं यदि . इन समूहों द्वारा दहेज़ लेने,के खिलाफ कठोरतम दंड दिया जाय, ,कन्या भ्रूण हत्याओं पर रोक लगाने का अभियान ल चलाया जाय, ,नारी शिक्षा को लागू किया जाय,. बलात्कारियों को मृत्यु दंड देने की संस्तुति की जाय. . समाज में सकारात्मक करने के लिए बहुत से कार्य हैं,जिनके करने पर इनका महत्व बढेगा परन्तु ऐसे नादिरशाही फरमान लागू करके नहीं.
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PATNA: भारतीय लोक चेतना पार्टी बिहार विधान सभा चुनाव 2020 में 41 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यानंद प्रसाद दाँगी ने कहा कि "सम्पूर्ण सामाजिक न्याय के साथ सर्वांगिण विकास" के मूल-मंत्र के साथ पार्टी आगे बढ़ने के लिए संकल्पित है। विस चुनाव को लेकर प्रत्याशी के चयन की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसके साथ ही राष्ट्रीय कमिटी की सूची जारी की. कमेटी में 2 नेताओं को राष्ट्रीय संरक्षक बनाया गया है कि जबकि 3 लोगों को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव 4,3 राष्ट्रीय सचिव सहित कुल 12 राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नाम घोषित किये हैं.
प्रो0 वशिष्ठ नारायण सिंह,प्रदेश अध्यक्ष, बिहार इंटरमीडिएट शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ और जे0पी0 वर्मा,राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा को संरक्षक बनाया गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-प्रो0 कौशलेन्द्र कुमार और द्वारिका सिंह दाँगी और प्रमोद कुमार उर्फ गाँधी दाँगी को बनाया गया है। राष्ट्रीय महासचिव अशोक कश्यप,अखिलेश कुमार सिंह,प्रतिमा कुमारी,अधिवक्ता,मदन प्रसाद कुशवाहा को बनाया गया है. राष्ट्रीय सचिव- प्रोo मदन मोहन प्रo सिंह,राजेश कुशवाहा और अनिल कुमार दाँगी को बनाया गया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यानंद प्रसाद दाँगी ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश कमेटी की भी घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दल के साथ समझौता कर सकती है।
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PATNA: भारतीय लोक चेतना पार्टी बिहार विधान सभा चुनाव दो हज़ार बीस में इकतालीस सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यानंद प्रसाद दाँगी ने कहा कि "सम्पूर्ण सामाजिक न्याय के साथ सर्वांगिण विकास" के मूल-मंत्र के साथ पार्टी आगे बढ़ने के लिए संकल्पित है। विस चुनाव को लेकर प्रत्याशी के चयन की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसके साथ ही राष्ट्रीय कमिटी की सूची जारी की. कमेटी में दो नेताओं को राष्ट्रीय संरक्षक बनाया गया है कि जबकि तीन लोगों को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव चार,तीन राष्ट्रीय सचिव सहित कुल बारह राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नाम घोषित किये हैं. प्रोशून्य वशिष्ठ नारायण सिंह,प्रदेश अध्यक्ष, बिहार इंटरमीडिएट शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ और जेशून्यपीशून्य वर्मा,राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा को संरक्षक बनाया गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-प्रोशून्य कौशलेन्द्र कुमार और द्वारिका सिंह दाँगी और प्रमोद कुमार उर्फ गाँधी दाँगी को बनाया गया है। राष्ट्रीय महासचिव अशोक कश्यप,अखिलेश कुमार सिंह,प्रतिमा कुमारी,अधिवक्ता,मदन प्रसाद कुशवाहा को बनाया गया है. राष्ट्रीय सचिव- प्रोo मदन मोहन प्रo सिंह,राजेश कुशवाहा और अनिल कुमार दाँगी को बनाया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यानंद प्रसाद दाँगी ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश कमेटी की भी घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दल के साथ समझौता कर सकती है।
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Palamu: जिले के हरिहरगंज थाना क्षेत्र के बंजारी मुहल्ला निवासी सरफराज आलम के घर से चोरी किए गये जेवरात को पुलिस ने बरामद कर लिया है. साथ ही इस मामले में शामिल तीन चोरों को गिरफ्तार भी किया गया है. जिनकी पहचान हरिहरगंज के बंजारी मुहल्ला निवासी शबरे आलम, शाहबाज आलम उर्फ बबन तथा सतगावां टंडवा रोड निवासी वकील आलम के रुप में की गई है. जिनको गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया गया है. इस कार्रवाई में थाना प्रभारी के अलावे एसआई सुमित कुमार दास सोनू कुमार दास वरुण कुमार नीतीश कुमार सहित सशस्त्र बल के जवान शामिल थे.
इस संबंध में पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी सुदामा कुमार दास ने बताया कि, सरफराज आलम अपने परिवार के साथ इलाज कराने मेदिनीनगर गये थे. इसी बीच उनके घर से 15 लाख रुपए के जेवरात और 15 हजार रूपये नकदी की चोरी कर ली गई थी. जिसकी सूचना बीते 11 मई को थाने को दी गई थी. जिसके उपरांत 65/21 के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस संबंध में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त तीनों चोरों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही चोरों की निशानदेही पर चोरी के जेवर को भी बरामद किया गया है.
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Palamu: जिले के हरिहरगंज थाना क्षेत्र के बंजारी मुहल्ला निवासी सरफराज आलम के घर से चोरी किए गये जेवरात को पुलिस ने बरामद कर लिया है. साथ ही इस मामले में शामिल तीन चोरों को गिरफ्तार भी किया गया है. जिनकी पहचान हरिहरगंज के बंजारी मुहल्ला निवासी शबरे आलम, शाहबाज आलम उर्फ बबन तथा सतगावां टंडवा रोड निवासी वकील आलम के रुप में की गई है. जिनको गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेज दिया गया है. इस कार्रवाई में थाना प्रभारी के अलावे एसआई सुमित कुमार दास सोनू कुमार दास वरुण कुमार नीतीश कुमार सहित सशस्त्र बल के जवान शामिल थे. इस संबंध में पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी सुदामा कुमार दास ने बताया कि, सरफराज आलम अपने परिवार के साथ इलाज कराने मेदिनीनगर गये थे. इसी बीच उनके घर से पंद्रह लाख रुपए के जेवरात और पंद्रह हजार रूपये नकदी की चोरी कर ली गई थी. जिसकी सूचना बीते ग्यारह मई को थाने को दी गई थी. जिसके उपरांत पैंसठ/इक्कीस के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस संबंध में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त तीनों चोरों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही चोरों की निशानदेही पर चोरी के जेवर को भी बरामद किया गया है.
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नई दिल्ली. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद किसान क्रेडिट कार्ड (KCC- Kisan Credit Card Scheme) से अभी देश के करीब सात करोड़ किसान परिवार वंचित हैं. 24 फरवरी से चलाए गए विशेष अभियान के बाद भी सिर्फ 25 लाख और परिवारों को ही केसीसी जारी किया जा सका है. ये तो तब है जब देश के हर किसान पर औसतन 12,130 रुपये का कर्ज साहूकारों से ली गए रकम का है. आखिर इसकी वजह क्या है?
पहले किसान क्रेडिट कार्ड लेने पर किसानों पर जबरन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) थोप दी जाती थी. उन्हें न चाहते हुए भी मजबूरन इसका हिस्सा बनना पड़ता था. मोदी सरकार को लगा कि शायद इस बाध्यता की वजह से किसान केसीसी नहीं बनवा रहे. इसलिए कैबिनेट ने 19 फरवरी 2020 को PM-फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए किसान क्रेडिट कार्ड होल्डरों के लिए इसे स्वैच्छिक कर दिया.
फिर 24 फरवरी को पीएम-किसान स्कीम से इसे जोड़कर कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया. फिर भी सिर्फ 25 लाख लाभार्थी बढ़े. केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 31 जनवरी 2020 तक यूपी के 1. 27 करोड़, बिहार के 1. 32 करोड़, महाराष्ट्र के 82 लाख, केरल के 62 लाख और तमिलनाडु के 59 लाख किसान केसीसी कवरेज से बाहर थे.
बता दें कि साल 1998 में जब केसीसी की शुरुआत हुई तो देश में महज 7. 84 लाख कार्ड बने थे. इसके तहत 3 लाख रुपये तक का लोन सिर्फ 4 फीसदी की ब्याज दर पर मिलता है. कार्ड की वैलीडिटी पांच साल होती है.
केंद्र सरकार चाहती है कि साहूकारों के चंगुल से किसानों को बचाने के लिए सभी किसानों का कार्ड बने. ताकि उन्हें सिर्फ 4 फीसदी के रेट पर खेती-किसानी के लिए 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सके. लेकिन बैंक आसानी से कर्ज नहीं देते.
मोदी सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बैंक-वार और गांव-वार शिविर आयोजित करने की सलाह दी. ताकि पात्र किसानों को भटकना न पड़े. उन्हें केसीसी आवेदन पत्र गांव वालों से खुद लेकर संबंधित बैंक शाखा में जमा करने का आदेश है. बैंकों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन पूरा होने के 2 सप्ताह के भीतर केसीसी जारी करें. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति इसकी निगरानी करेगी. लेकिन जमीनी हालात इसके उलट हैं.
कार्ड होल्डर न बढ़ने की वजह क्या है?
राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद कहते हैं कि केसीसी योजना के फार्मेट में ही गलत है. किसानों के लिए यह योजना है लेकिन कृषि मत्रालय (Ministry of agriculture) की चलती नहीं. दूसरी ओर वित्तीय सिस्टम नहीं चाहता कि फार्मर को लोन मिले. उसे किसानों से न जाने क्यों डर लगता है. जब किसान कृषि लोन के लिए अप्लाई करता है तो संबंधित बैंक और किसान के बीच में बिचौलिए के रूप में नाबार्ड (NABARD) खड़ा हो जाता है. जबकि वो किसान को डायरेक्ट लोन नहीं देता. वो एक रेगुलेटरी बॉडी भर है.
एक जिले में नाबार्ड का एक डिस्ट्रक्ट डेवलपमेंट मैनेजर होता है. उसी के जरिए डिस्ट्रिक लेवल बैंकर कमेटी (DLBC) केसीसी लोन अप्रूव करती है. ऐसी बिचौलियों वाली व्यवस्था की जरूरत क्या है.
किसान क्रेडिट कार्ड के इच्छुक किसान नजदीकी बैंक जाकर इसके लिए अप्लीकेशन दे सकते हैं. अधिकारी फॉर्म भरने में बैंक अधिकारी की मदद लें. बाद में, लोन अधिकारी आवश्यक विवरण साझा करेगा और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करेगा. बैंक की साइट पर जाकर इसके लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है.
केसीसी बनवाने के लिए पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जमीन का रिकॉर्ड और फोटो देनी होगी. इतने में ही बैंक को केसीसी बनाना पड़ेगा. अगर आपको किसान सम्मान निधि स्कीम (pm kisan samman nidhi scheme) के तहत पैसा मिलता है तो यह काम और आसान हो सकता है. क्योंकि आपका पूरा डेटा केंद्र सरकार वेरीफाई कर चुकी है.
सरकार ने बैंकों (Bank) को सख्त आदेश दिए हैं. फिर भी अगर आपको कोई बैंक लोन नहीं दे रहा है तो उसकी लीड बैंक और डिस्ट्रिक्ट लेबल बैंकर्स कमेटी में शिकायत लगाईए. जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट लीड बैंक मैनेजर इसके लिए जवाबदेह है और राज्य स्तर पर राज्य की बैंकिंग कमेटी. यहां से भी बात न बने तो रिजर्व बैंक, वित्त और कृषि मंत्री से शिकायत करिए. अधिकारी को किसान क्रेडिट कार्ड बनाना ही पड़ेगा. अगर बैंक अधिकारी मना कर रहा है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है.
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नई दिल्ली. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद किसान क्रेडिट कार्ड से अभी देश के करीब सात करोड़ किसान परिवार वंचित हैं. चौबीस फरवरी से चलाए गए विशेष अभियान के बाद भी सिर्फ पच्चीस लाख और परिवारों को ही केसीसी जारी किया जा सका है. ये तो तब है जब देश के हर किसान पर औसतन बारह,एक सौ तीस रुपयापये का कर्ज साहूकारों से ली गए रकम का है. आखिर इसकी वजह क्या है? पहले किसान क्रेडिट कार्ड लेने पर किसानों पर जबरन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना थोप दी जाती थी. उन्हें न चाहते हुए भी मजबूरन इसका हिस्सा बनना पड़ता था. मोदी सरकार को लगा कि शायद इस बाध्यता की वजह से किसान केसीसी नहीं बनवा रहे. इसलिए कैबिनेट ने उन्नीस फरवरी दो हज़ार बीस को PM-फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए किसान क्रेडिट कार्ड होल्डरों के लिए इसे स्वैच्छिक कर दिया. फिर चौबीस फरवरी को पीएम-किसान स्कीम से इसे जोड़कर कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया. फिर भी सिर्फ पच्चीस लाख लाभार्थी बढ़े. केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इकतीस जनवरी दो हज़ार बीस तक यूपी के एक. सत्ताईस करोड़, बिहार के एक. बत्तीस करोड़, महाराष्ट्र के बयासी लाख, केरल के बासठ लाख और तमिलनाडु के उनसठ लाख किसान केसीसी कवरेज से बाहर थे. बता दें कि साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में जब केसीसी की शुरुआत हुई तो देश में महज सात. चौरासी लाख कार्ड बने थे. इसके तहत तीन लाख रुपये तक का लोन सिर्फ चार फीसदी की ब्याज दर पर मिलता है. कार्ड की वैलीडिटी पांच साल होती है. केंद्र सरकार चाहती है कि साहूकारों के चंगुल से किसानों को बचाने के लिए सभी किसानों का कार्ड बने. ताकि उन्हें सिर्फ चार फीसदी के रेट पर खेती-किसानी के लिए तीन लाख रुपये तक का लोन मिल सके. लेकिन बैंक आसानी से कर्ज नहीं देते. मोदी सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बैंक-वार और गांव-वार शिविर आयोजित करने की सलाह दी. ताकि पात्र किसानों को भटकना न पड़े. उन्हें केसीसी आवेदन पत्र गांव वालों से खुद लेकर संबंधित बैंक शाखा में जमा करने का आदेश है. बैंकों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन पूरा होने के दो सप्ताह के भीतर केसीसी जारी करें. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति इसकी निगरानी करेगी. लेकिन जमीनी हालात इसके उलट हैं. कार्ड होल्डर न बढ़ने की वजह क्या है? राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद कहते हैं कि केसीसी योजना के फार्मेट में ही गलत है. किसानों के लिए यह योजना है लेकिन कृषि मत्रालय की चलती नहीं. दूसरी ओर वित्तीय सिस्टम नहीं चाहता कि फार्मर को लोन मिले. उसे किसानों से न जाने क्यों डर लगता है. जब किसान कृषि लोन के लिए अप्लाई करता है तो संबंधित बैंक और किसान के बीच में बिचौलिए के रूप में नाबार्ड खड़ा हो जाता है. जबकि वो किसान को डायरेक्ट लोन नहीं देता. वो एक रेगुलेटरी बॉडी भर है. एक जिले में नाबार्ड का एक डिस्ट्रक्ट डेवलपमेंट मैनेजर होता है. उसी के जरिए डिस्ट्रिक लेवल बैंकर कमेटी केसीसी लोन अप्रूव करती है. ऐसी बिचौलियों वाली व्यवस्था की जरूरत क्या है. किसान क्रेडिट कार्ड के इच्छुक किसान नजदीकी बैंक जाकर इसके लिए अप्लीकेशन दे सकते हैं. अधिकारी फॉर्म भरने में बैंक अधिकारी की मदद लें. बाद में, लोन अधिकारी आवश्यक विवरण साझा करेगा और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करेगा. बैंक की साइट पर जाकर इसके लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है. केसीसी बनवाने के लिए पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जमीन का रिकॉर्ड और फोटो देनी होगी. इतने में ही बैंक को केसीसी बनाना पड़ेगा. अगर आपको किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत पैसा मिलता है तो यह काम और आसान हो सकता है. क्योंकि आपका पूरा डेटा केंद्र सरकार वेरीफाई कर चुकी है. सरकार ने बैंकों को सख्त आदेश दिए हैं. फिर भी अगर आपको कोई बैंक लोन नहीं दे रहा है तो उसकी लीड बैंक और डिस्ट्रिक्ट लेबल बैंकर्स कमेटी में शिकायत लगाईए. जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट लीड बैंक मैनेजर इसके लिए जवाबदेह है और राज्य स्तर पर राज्य की बैंकिंग कमेटी. यहां से भी बात न बने तो रिजर्व बैंक, वित्त और कृषि मंत्री से शिकायत करिए. अधिकारी को किसान क्रेडिट कार्ड बनाना ही पड़ेगा. अगर बैंक अधिकारी मना कर रहा है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है. ये भी पढ़ेंः देश के बासठ किसान संगठनों ने पीएम से की Unique farmer ID बनाने की मांग, होगा ये बड़ा फायदा! .
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मेरा नन्हा दोस्त चिंटू मेरे पास बैठा खेल रहा था और मैं कुछ लिख रहा था।
पीठ खुजलाते चिंटू बोला अंतल -अंतल मुझे लोलीपॉप चाहिए।
मैं ने कहा - मेले प्याले चिंटू मेले पास अभी थुल्ले पैसे नहीं हैं फिर कभी दिला दूंगा, जाओ अपने पापाजी से ले लो।
गिड़गिड़ाते हुए चिंटू अपने पापाजी के पास गया और बोला पापाजी-पापाजी मुझे एत लुपिया चाहिए।
चिंटू के पापा बोले भोले भोल एत लुपिया लेतर तिया तलोगे।
चिंटू लोलीपॉप लाऊंगा, चिंटू के पापा जी बोले अभी मेले पास भी थुल्ले पैसे नहीं हैं जाओ अपनी मम्मी से ले लो।
अब चिंटू लोलीपॉप के पैसे के लिए अपनी मम्मी के पास खड़ा था वो भी मुंह लटकाए।
अले मेले लाजा बेटा छुबह-छुबह तिया हुआ जो यूं इस तरह मुंह लटका रखा है?
धीमी आवाज में चिंटू बोला लोलीपॉप चाहिए एत लुपिया दे दो मां ने भी हाथ खड़े कर दिए तो वापस मेरे पास लौट आया और गुमसुम बैठ गया। कुछ देर तक गुमसुम ही बैठा रहा तो मैं ने कहा -बात बनी की नहीं, चिंटू कुछ न बोला।
ऐसा लगा जैसे बच्चे का दिल टूट गया है लिखना बंद किया और चिंटू का हाथ पकड़ तलो।
चिंटू कहां? मैं ने कहा दुतान चिंटू के खुशी का ठिकाना नहीं था उस दिन उसे एक साथ कई लोलीपॉप खरीद दिया।
चिंटू बहुत खुश हुआ। मैं फिर से लिखने बैठ गया और चिंटू लोलीपॉप खा रहा था।
एक बार फिर पीठ खुजलाते एक लोलीपॉप मेरी ओर बढ़ा दिया लो अंतल तुम भी थाओ।
मैं ने कहा -बड़े लोग लोलीपॉप नहीं थाते तुम्हीं थाओ।
चिंटू तो अंतल बले लोद तिया थाते हैं?
मैं ने कहा-बले लोद थाते नहीं पीते हैं।
चिंटू तिया पीते हैं, मैं ने कहा -जाओ अपने पापाजी से पूछ लो।
चिंटू दया और अपने पिता जी से पूछा पापाजी पापाजी बले लोद तिया पीते हैं अंतल बता रहे हैं कि बले लोद थाते नहीं पीते हैं, पिलिज बताइये ना तिया पीते हैं मैं भी पीऊंगा।
चिंटू के पिता जी के मन में आया बता दूं गांजा भांग बीड़ी सिगरेट दारू शराब कोल्डड्रिंक लेकिन संभल गये अभी बच्चा है। डांटते हुए बोले जाओ अभी थेलो जब बड़े हो जाओगे तब खुद पता चल जाएगा।
उदास होकर चिंटू फिर मेरे पास ही आकर बैठ गया और पीठ खुजलाते बोला मुझे अभी दाना सुनना है।
मैं ने कहा अभी नहीं सुनाऊंगा लिखने दो।
चिंटू तिया लिथते रहते हो मैं ने कहा-तुम्हारा किस्सा, कलम खोंसते हुए अभी थोलो, मुझे अभी दाना सुनना है। बाल हठ के आगे झुककर सुनाना ही पड़ा।
लदनी चिंरैंय्या लदन लेने जाय रे चिंटू ते तच्छा हवा में उड़ियाय रे गीत सुनकर चिंटू थाली पीट रहा था येह बहुत अच्छा बहुत अच्छा। वहीं पास के घर से ठंडी हवा का झोंका चलते हैं हल्के हल्के मोबाइल पर कोई भाई साहब थे जो सुन रहे थे।
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मेरा नन्हा दोस्त चिंटू मेरे पास बैठा खेल रहा था और मैं कुछ लिख रहा था। पीठ खुजलाते चिंटू बोला अंतल -अंतल मुझे लोलीपॉप चाहिए। मैं ने कहा - मेले प्याले चिंटू मेले पास अभी थुल्ले पैसे नहीं हैं फिर कभी दिला दूंगा, जाओ अपने पापाजी से ले लो। गिड़गिड़ाते हुए चिंटू अपने पापाजी के पास गया और बोला पापाजी-पापाजी मुझे एत लुपिया चाहिए। चिंटू के पापा बोले भोले भोल एत लुपिया लेतर तिया तलोगे। चिंटू लोलीपॉप लाऊंगा, चिंटू के पापा जी बोले अभी मेले पास भी थुल्ले पैसे नहीं हैं जाओ अपनी मम्मी से ले लो। अब चिंटू लोलीपॉप के पैसे के लिए अपनी मम्मी के पास खड़ा था वो भी मुंह लटकाए। अले मेले लाजा बेटा छुबह-छुबह तिया हुआ जो यूं इस तरह मुंह लटका रखा है? धीमी आवाज में चिंटू बोला लोलीपॉप चाहिए एत लुपिया दे दो मां ने भी हाथ खड़े कर दिए तो वापस मेरे पास लौट आया और गुमसुम बैठ गया। कुछ देर तक गुमसुम ही बैठा रहा तो मैं ने कहा -बात बनी की नहीं, चिंटू कुछ न बोला। ऐसा लगा जैसे बच्चे का दिल टूट गया है लिखना बंद किया और चिंटू का हाथ पकड़ तलो। चिंटू कहां? मैं ने कहा दुतान चिंटू के खुशी का ठिकाना नहीं था उस दिन उसे एक साथ कई लोलीपॉप खरीद दिया। चिंटू बहुत खुश हुआ। मैं फिर से लिखने बैठ गया और चिंटू लोलीपॉप खा रहा था। एक बार फिर पीठ खुजलाते एक लोलीपॉप मेरी ओर बढ़ा दिया लो अंतल तुम भी थाओ। मैं ने कहा -बड़े लोग लोलीपॉप नहीं थाते तुम्हीं थाओ। चिंटू तो अंतल बले लोद तिया थाते हैं? मैं ने कहा-बले लोद थाते नहीं पीते हैं। चिंटू तिया पीते हैं, मैं ने कहा -जाओ अपने पापाजी से पूछ लो। चिंटू दया और अपने पिता जी से पूछा पापाजी पापाजी बले लोद तिया पीते हैं अंतल बता रहे हैं कि बले लोद थाते नहीं पीते हैं, पिलिज बताइये ना तिया पीते हैं मैं भी पीऊंगा। चिंटू के पिता जी के मन में आया बता दूं गांजा भांग बीड़ी सिगरेट दारू शराब कोल्डड्रिंक लेकिन संभल गये अभी बच्चा है। डांटते हुए बोले जाओ अभी थेलो जब बड़े हो जाओगे तब खुद पता चल जाएगा। उदास होकर चिंटू फिर मेरे पास ही आकर बैठ गया और पीठ खुजलाते बोला मुझे अभी दाना सुनना है। मैं ने कहा अभी नहीं सुनाऊंगा लिखने दो। चिंटू तिया लिथते रहते हो मैं ने कहा-तुम्हारा किस्सा, कलम खोंसते हुए अभी थोलो, मुझे अभी दाना सुनना है। बाल हठ के आगे झुककर सुनाना ही पड़ा। लदनी चिंरैंय्या लदन लेने जाय रे चिंटू ते तच्छा हवा में उड़ियाय रे गीत सुनकर चिंटू थाली पीट रहा था येह बहुत अच्छा बहुत अच्छा। वहीं पास के घर से ठंडी हवा का झोंका चलते हैं हल्के हल्के मोबाइल पर कोई भाई साहब थे जो सुन रहे थे।
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Rewa MP News: पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित महिला बीती रात कुल्हाड़ी लेकर सिविल लाइंस थाना पहुंच गई। इस दौरान महिला ने न सिर्फ हंगामा प्रदर्शन किया बल्कि कुल्हाड़ी लेकर पुलिस वालों को दौड़ाया भी और अपशब्द भी कहे।
बताया गया है कि सिविल लाइंस थाना अंतर्गत दीनदयाल निवासी एक महिला का अपने पड़ोसियों से आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता है। महिला के अनुसार गत दिवस उसने पड़ोसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने में शिकायत भी की। लेकिन पुलिस ने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। जिससे आक्रोशित होकर महिला बीती रात कुल्हाड़ी लेकर थाने पहुंच गई। इस दौरान महिला ने थाना परिसर में हंगामा प्रदर्शन भी किया।
सिविल लाइंस पुलिस ने बताया कि महिला काफी आक्रोशित थी। मामले की संवदेनशीलता को परखते हुए महिला उप निरीक्षक रानू वर्मा, सूबेदार अंजली गुप्ता और एक महिला आरक्षक के साथ फरियादी महिला को उसके घर भेजा गया। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
'पड़ोसियों से विवाद के कारण महिला परेशान थी। बीती रात महिला कुल्हाड़ी लेकर थाने आ गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।'
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Rewa MP News: पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित महिला बीती रात कुल्हाड़ी लेकर सिविल लाइंस थाना पहुंच गई। इस दौरान महिला ने न सिर्फ हंगामा प्रदर्शन किया बल्कि कुल्हाड़ी लेकर पुलिस वालों को दौड़ाया भी और अपशब्द भी कहे। बताया गया है कि सिविल लाइंस थाना अंतर्गत दीनदयाल निवासी एक महिला का अपने पड़ोसियों से आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता है। महिला के अनुसार गत दिवस उसने पड़ोसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने में शिकायत भी की। लेकिन पुलिस ने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। जिससे आक्रोशित होकर महिला बीती रात कुल्हाड़ी लेकर थाने पहुंच गई। इस दौरान महिला ने थाना परिसर में हंगामा प्रदर्शन भी किया। सिविल लाइंस पुलिस ने बताया कि महिला काफी आक्रोशित थी। मामले की संवदेनशीलता को परखते हुए महिला उप निरीक्षक रानू वर्मा, सूबेदार अंजली गुप्ता और एक महिला आरक्षक के साथ फरियादी महिला को उसके घर भेजा गया। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ। 'पड़ोसियों से विवाद के कारण महिला परेशान थी। बीती रात महिला कुल्हाड़ी लेकर थाने आ गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।'
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रांचीः झारखंड राज्य में विधानसभा चुनाव 2019 के मतदान तिथि को संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में लोक प्रतिनिधितत्व अधिनियम 1951 की धारा-135 (ख) के प्रावधानों का अनुपालन किया जाना है. मुख्य मंत्रिमण्डल (निर्वाचन) विभाग, झारखंड रांची के पत्र के आलोक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची द्वारा निम्नांकित निदेश जारी किए गए हैं.
1. किसी कारोबार, व्यवसाय, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य स्थापन में नियोजित प्रत्येक व्यक्ति जिसे मतदान का अधिकार है, मतदान के दिन अवकाश मंजूर किया जायेगा.
2. लोक प्रतिनिधितत्व अधिनियम 1951 की धारा-135 (ख) की उपधारा (1) के अनुसार अवकाश मंजूर किये जाने के कारण ऐसे व्यक्ति की मजदूरी से कोई कटौती या कमी नहीं की जायेगी.
3. यादि कोई नियोजिक उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो ऐसा नियोजक जुर्माने से जो पांच सौ रुपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा.
4. यह धारा किसी ऐसे निर्वाचक को लागू नहीं होगी जिसकी अनुपस्थिति से उस नियोजन के संबंध में जिसमें वह लगा हुआ है, कोई खतरा हो सकता है.
5. दैनिक मजदूरी पर कार्यरत कर्मी एवं आकस्मिक कर्मी भी अवकाश एवं मजदूरी के हकदार होंगे.
आदेश का उल्लंघन कानून के सुसंगत धाराओं के अधीन दण्डनीय होगा.
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रांचीः झारखंड राज्य में विधानसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के मतदान तिथि को संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में लोक प्रतिनिधितत्व अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा-एक सौ पैंतीस के प्रावधानों का अनुपालन किया जाना है. मुख्य मंत्रिमण्डल विभाग, झारखंड रांची के पत्र के आलोक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची द्वारा निम्नांकित निदेश जारी किए गए हैं. एक. किसी कारोबार, व्यवसाय, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य स्थापन में नियोजित प्रत्येक व्यक्ति जिसे मतदान का अधिकार है, मतदान के दिन अवकाश मंजूर किया जायेगा. दो. लोक प्रतिनिधितत्व अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा-एक सौ पैंतीस की उपधारा के अनुसार अवकाश मंजूर किये जाने के कारण ऐसे व्यक्ति की मजदूरी से कोई कटौती या कमी नहीं की जायेगी. तीन. यादि कोई नियोजिक उपधारा और उपधारा के उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो ऐसा नियोजक जुर्माने से जो पांच सौ रुपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा. चार. यह धारा किसी ऐसे निर्वाचक को लागू नहीं होगी जिसकी अनुपस्थिति से उस नियोजन के संबंध में जिसमें वह लगा हुआ है, कोई खतरा हो सकता है. पाँच. दैनिक मजदूरी पर कार्यरत कर्मी एवं आकस्मिक कर्मी भी अवकाश एवं मजदूरी के हकदार होंगे. आदेश का उल्लंघन कानून के सुसंगत धाराओं के अधीन दण्डनीय होगा.
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काइसेरी मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका पुलिस टीमों ने कोविड -19 महामारी के खिलाफ लड़ाई के हिस्से के रूप में अपना निरीक्षण जारी रखा है। इस संदर्भ में, टीमों ने स्की सीज़न के उद्घाटन के साथ, दुनिया के कुछ स्की केंद्रों में से एक और तुर्की में इरसीज़ में अपना निरीक्षण शुरू किया।
महानगर महापौर डाॅ. मेमदुह बुयुक्किलिक के निर्देशों के साथ, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका पुलिस टीमें, जो महामारी से निपटने के दायरे में दिन-रात अपना निरीक्षण जारी रखती हैं, ने स्की सीजन के उद्घाटन के साथ एर्सियेस स्की सेंटर में अपना निरीक्षण जारी रखा। सफाई, मास्क और दूरी के नियमों का अनुपालन करने के लिए सावधानीपूर्वक काम करना जारी रखें, जो नियंत्रित सामाजिक जीवन अवधि के बुनियादी सिद्धांत हैं, साथ ही सभी व्यावसायिक लाइनों और रहने की जगहों के लिए निर्धारित उपायों का अनुपालन करने और महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफल होने के लिए, पुलिस टीमें इरसीज़ में सुरक्षित और स्वस्थ रहने की जगहों के लिए अपना निरीक्षण जारी रखेंगी, जिसे "सुरक्षित स्की सेंटर" प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है।
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काइसेरी मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका पुलिस टीमों ने कोविड -उन्नीस महामारी के खिलाफ लड़ाई के हिस्से के रूप में अपना निरीक्षण जारी रखा है। इस संदर्भ में, टीमों ने स्की सीज़न के उद्घाटन के साथ, दुनिया के कुछ स्की केंद्रों में से एक और तुर्की में इरसीज़ में अपना निरीक्षण शुरू किया। महानगर महापौर डाॅ. मेमदुह बुयुक्किलिक के निर्देशों के साथ, मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका पुलिस टीमें, जो महामारी से निपटने के दायरे में दिन-रात अपना निरीक्षण जारी रखती हैं, ने स्की सीजन के उद्घाटन के साथ एर्सियेस स्की सेंटर में अपना निरीक्षण जारी रखा। सफाई, मास्क और दूरी के नियमों का अनुपालन करने के लिए सावधानीपूर्वक काम करना जारी रखें, जो नियंत्रित सामाजिक जीवन अवधि के बुनियादी सिद्धांत हैं, साथ ही सभी व्यावसायिक लाइनों और रहने की जगहों के लिए निर्धारित उपायों का अनुपालन करने और महामारी के खिलाफ लड़ाई में सफल होने के लिए, पुलिस टीमें इरसीज़ में सुरक्षित और स्वस्थ रहने की जगहों के लिए अपना निरीक्षण जारी रखेंगी, जिसे "सुरक्षित स्की सेंटर" प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है।
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भावानगर - बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने भावानगर में बोर्ड प्रबंधन की मनमानी व कर्मचारी हित के फैसलों को लागू न करने के विरोध में रोष रैली व धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में करीब 150 कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी एकता के बैनर तले प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा की अध्यक्षता में बोर्ड प्रबंधन, वित्त सचिव व एमडी के विरोध में खुलकर नारेबाजी की गई। प्रदेशाध्यक्ष ने उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि गत् वर्ष मई महीने में सुंदरनगर में हुए यूनियन के महासम्मेलन में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिजली कर्मचारियों की 48 श्रेणियों की वेतन विसंगतियों को दो महीने में दूर करने की घोषणा की थी, परंतु वित्त सचिव व अतिरिक्त मुख्य सचिव की नाकामी के चलते इसे एक वर्ष दो महीने बाद भी लागू नहीं किया गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से दोनों कर्मचारी विरोधी उच्चाधिकारियों को उनके पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देते हुए आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने मांग की कि ठेकेदारी प्रथा को बंद कर आउटसोर्स कर्मियों के लिए ठोस नीति बना कर उन्हें बोर्ड में ही समायोजित किया जाए व करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए लंबित मामलों को जल्द निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि जनवरी, 2015 में संजय विद्युत परियोजना में आला प्रबंधन की लापरवाही के चलते आग लगी थी, जिससे बोर्ड का कमाऊपूत माना जाने वाला 120 मेगावाट का पावर हाउस जलकर राख हो गया था। संजय विद्युत परियोजना के निर्माण में 250 करोड़ का खर्च आया था, परंतु आगजनी के बाद बोर्ड को अभी तक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। प्रबंधन द्वारा अभी तक दोषियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, बल्कि लापरवाह व भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। क्षेत्र में नई बनने वाली परियोजनाओं बटसेरी, नोगली-टू व बड़ा कंबा परियोजनाएं बिजली बोर्ड को अलॉट किए गए हैं, जिसकी इन्वेस्टीगेशन पर बोर्ड द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द से जल्द कार्य शुरू किया जाए। इस मौके पर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कामेश्वर शर्मा व सुंदर जिस्टू, उपाध्यक्ष दौलत, रामानंद, भावा यूनिट के सचिव संजीव, उपाध्यक्ष दीनानाथ, मुख्य सलाहकार भूप सिंह, संजीव, यशवंत, जय प्रकाश व हेमराज सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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भावानगर - बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने भावानगर में बोर्ड प्रबंधन की मनमानी व कर्मचारी हित के फैसलों को लागू न करने के विरोध में रोष रैली व धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में करीब एक सौ पचास कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी एकता के बैनर तले प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा की अध्यक्षता में बोर्ड प्रबंधन, वित्त सचिव व एमडी के विरोध में खुलकर नारेबाजी की गई। प्रदेशाध्यक्ष ने उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि गत् वर्ष मई महीने में सुंदरनगर में हुए यूनियन के महासम्मेलन में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिजली कर्मचारियों की अड़तालीस श्रेणियों की वेतन विसंगतियों को दो महीने में दूर करने की घोषणा की थी, परंतु वित्त सचिव व अतिरिक्त मुख्य सचिव की नाकामी के चलते इसे एक वर्ष दो महीने बाद भी लागू नहीं किया गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से दोनों कर्मचारी विरोधी उच्चाधिकारियों को उनके पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देते हुए आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने मांग की कि ठेकेदारी प्रथा को बंद कर आउटसोर्स कर्मियों के लिए ठोस नीति बना कर उन्हें बोर्ड में ही समायोजित किया जाए व करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए लंबित मामलों को जल्द निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि जनवरी, दो हज़ार पंद्रह में संजय विद्युत परियोजना में आला प्रबंधन की लापरवाही के चलते आग लगी थी, जिससे बोर्ड का कमाऊपूत माना जाने वाला एक सौ बीस मेगावाट का पावर हाउस जलकर राख हो गया था। संजय विद्युत परियोजना के निर्माण में दो सौ पचास करोड़ का खर्च आया था, परंतु आगजनी के बाद बोर्ड को अभी तक हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। प्रबंधन द्वारा अभी तक दोषियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, बल्कि लापरवाह व भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। क्षेत्र में नई बनने वाली परियोजनाओं बटसेरी, नोगली-टू व बड़ा कंबा परियोजनाएं बिजली बोर्ड को अलॉट किए गए हैं, जिसकी इन्वेस्टीगेशन पर बोर्ड द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द से जल्द कार्य शुरू किया जाए। इस मौके पर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कामेश्वर शर्मा व सुंदर जिस्टू, उपाध्यक्ष दौलत, रामानंद, भावा यूनिट के सचिव संजीव, उपाध्यक्ष दीनानाथ, मुख्य सलाहकार भूप सिंह, संजीव, यशवंत, जय प्रकाश व हेमराज सहित अन्य लोग मौजूद थे। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
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UP Civic Body Election: यूपी निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग का गठन किया गया है। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से इससे संबंधित बयान जारी किया गया है। आयोग में 5 सदस्यों को स्थान मिली है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राम अवतार सिंह होंगे।
क्या था उच्च न्यायालय का आदेश?
बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को यूपी गवर्नमेंट की नगर निकाय चुनाव संबंधी मसौदा अधिसूचना को रद्द करते हुए राज्य में नगर निकाय चुनाव बिना ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के कराने का आदेश दिया था। इसके साथ ही पीठ ने राज्य गवर्नमेंट एवं राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया कि पिछड़ा वर्ग की सीटों को सामान्य श्रेणी की सीटें मानते हुए क्षेत्रीय निकाय चुनाव को 31 जनवरी, 2023 तक समापन करा लिया जाए।
इस निर्णय से राज्य में शहरी क्षेत्रीय निकाय चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि न्यायालय के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य गवर्नमेंट ने बोला कि इस मुद्दे में आयोग गठित कर 'ट्रिपल टेस्ट' के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नागरिकों को आरक्षण की सुविधा मौजूद कराई जाएगी और इसके उपरांत ही नगर निकाय चुनाव सम्पन्न कराया जाएगा। गवर्नमेंट की ओर बोला गया कि यदि महत्वपूर्ण हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में भी गवर्नमेंट अपील करेगी।
खंडपीठ ने अपने आदेश में बोला कि क्षेत्रीय निकाय चुनाव में अनुसूचित जाति, जनजाति और स्त्रियों को संविधान में प्रदत्त प्रबंध के अनुरूप आरक्षण प्रदान किया जाएगा जबकि गवर्नमेंट ने अभी तक इस चुनाव के लिए जो सीटें पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की थी उन्हें सीटें सामान्य श्रेणी के लिए मान कर अधिसूचना जारी की जाए।
राज्य गवर्नमेंट ने इस महीने की आरंभ में त्रिस्तरीय नगर निकाय चुनाव में 17 नगर निगमों के महापौरों, 200 नगर पालिका परिषदों के अध्यक्षों और 545 नगर पंचायतों के लिए आरक्षित सीटों की अनंतिम सूची जारी करते हुए सात दिनों के भीतर सुझाव/आपत्तियां मांगी थी और बोला था कि सुझाव/आपत्तियां मिलने के दो दिन बाद आखिरी सूची जारी की जाएगी।
राज्य गवर्नमेंट ने पांच दिसंबर के अपने मसौदे में नगर निगमों की चार महापौर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित की थीं, जिसमें अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन ओबीसी स्त्रियों के लिए और मेरठ एवं प्रयागराज ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। दो सौ नगर पालिका परिषदों में अध्यक्ष पद पर पिछड़ा वर्ग के लिए कुल 54 सीट आरक्षित की गई थीं जिसमें पिछड़ा वर्ग की स्त्री के लिए 18 सीट आरक्षित थीं। राज्य की 545 नगर पंचायतों में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गईं 147 सीट में इस वर्ग की स्त्रियों के लिए अध्यक्ष की 49 सीट आरक्षित की गई थीं।
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UP Civic Body Election: यूपी निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग का गठन किया गया है। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से इससे संबंधित बयान जारी किया गया है। आयोग में पाँच सदस्यों को स्थान मिली है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह होंगे। क्या था उच्च न्यायालय का आदेश? बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को यूपी गवर्नमेंट की नगर निकाय चुनाव संबंधी मसौदा अधिसूचना को रद्द करते हुए राज्य में नगर निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के कराने का आदेश दिया था। इसके साथ ही पीठ ने राज्य गवर्नमेंट एवं राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया कि पिछड़ा वर्ग की सीटों को सामान्य श्रेणी की सीटें मानते हुए क्षेत्रीय निकाय चुनाव को इकतीस जनवरी, दो हज़ार तेईस तक समापन करा लिया जाए। इस निर्णय से राज्य में शहरी क्षेत्रीय निकाय चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि न्यायालय के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य गवर्नमेंट ने बोला कि इस मुद्दे में आयोग गठित कर 'ट्रिपल टेस्ट' के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों को आरक्षण की सुविधा मौजूद कराई जाएगी और इसके उपरांत ही नगर निकाय चुनाव सम्पन्न कराया जाएगा। गवर्नमेंट की ओर बोला गया कि यदि महत्वपूर्ण हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में भी गवर्नमेंट अपील करेगी। खंडपीठ ने अपने आदेश में बोला कि क्षेत्रीय निकाय चुनाव में अनुसूचित जाति, जनजाति और स्त्रियों को संविधान में प्रदत्त प्रबंध के अनुरूप आरक्षण प्रदान किया जाएगा जबकि गवर्नमेंट ने अभी तक इस चुनाव के लिए जो सीटें पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की थी उन्हें सीटें सामान्य श्रेणी के लिए मान कर अधिसूचना जारी की जाए। राज्य गवर्नमेंट ने इस महीने की आरंभ में त्रिस्तरीय नगर निकाय चुनाव में सत्रह नगर निगमों के महापौरों, दो सौ नगर पालिका परिषदों के अध्यक्षों और पाँच सौ पैंतालीस नगर पंचायतों के लिए आरक्षित सीटों की अनंतिम सूची जारी करते हुए सात दिनों के भीतर सुझाव/आपत्तियां मांगी थी और बोला था कि सुझाव/आपत्तियां मिलने के दो दिन बाद आखिरी सूची जारी की जाएगी। राज्य गवर्नमेंट ने पांच दिसंबर के अपने मसौदे में नगर निगमों की चार महापौर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित की थीं, जिसमें अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन ओबीसी स्त्रियों के लिए और मेरठ एवं प्रयागराज ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। दो सौ नगर पालिका परिषदों में अध्यक्ष पद पर पिछड़ा वर्ग के लिए कुल चौवन सीट आरक्षित की गई थीं जिसमें पिछड़ा वर्ग की स्त्री के लिए अट्ठारह सीट आरक्षित थीं। राज्य की पाँच सौ पैंतालीस नगर पंचायतों में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गईं एक सौ सैंतालीस सीट में इस वर्ग की स्त्रियों के लिए अध्यक्ष की उनचास सीट आरक्षित की गई थीं।
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सप्ताहांत पर 25 हजार सैलानियों ने ताजमहल का दीदार किया। उमस भरी गर्मी से सैलानी बेहाल दिखे। लाइनों में लगने के बाद ताज के भीतर पेड़ों के नीचे बैठे नजर आए। एक सैलानी उमस के कारण ताज के भीतर बेहोश हो गया। उसे अस्पताल भेजा गया। अन्य स्मारकों में भी गर्मी से पर्यटक बेहाल दिखे।
दोपहर को पश्चिम बंगाल के सैलानी आशीष सरकार को ताज में रॉयल गेट के पास चक्कर आया और वह बेहोश हो गए। इसके बाद एएसआई कर्मचारियों ने उनके साथियों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया। साथियों ने बताया कि गर्मी से उनकी तबीयत बिगड़ गई। ताज के एसए प्रिंस ने बताया कि 24785 टिकटों की बिक्री की गई। उधर, आगरा किला पर भी पांच हजार से ज्यादा टूरिस्ट पहुंचे।
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सप्ताहांत पर पच्चीस हजार सैलानियों ने ताजमहल का दीदार किया। उमस भरी गर्मी से सैलानी बेहाल दिखे। लाइनों में लगने के बाद ताज के भीतर पेड़ों के नीचे बैठे नजर आए। एक सैलानी उमस के कारण ताज के भीतर बेहोश हो गया। उसे अस्पताल भेजा गया। अन्य स्मारकों में भी गर्मी से पर्यटक बेहाल दिखे। दोपहर को पश्चिम बंगाल के सैलानी आशीष सरकार को ताज में रॉयल गेट के पास चक्कर आया और वह बेहोश हो गए। इसके बाद एएसआई कर्मचारियों ने उनके साथियों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया। साथियों ने बताया कि गर्मी से उनकी तबीयत बिगड़ गई। ताज के एसए प्रिंस ने बताया कि चौबीस हज़ार सात सौ पचासी टिकटों की बिक्री की गई। उधर, आगरा किला पर भी पांच हजार से ज्यादा टूरिस्ट पहुंचे। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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Jammu 06 जुलाई . मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में आज यानि Thursday को दोपहर और शाम के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश तथा तूफान की भविष्यवाणी की है. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा 7 जुलाई को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, तूफान आने की संभावना है. उन्होंने कहा कि 8-9 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. Jammu क्षेत्र के मैदानी इलाकों में कुछ स्थानों पर सुबह के समय मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.
Srinagar में न्यूनतम तापमान 17. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, काजीगुंड में न्यूनतम तापमान 16. 0 डिग्री सेल्सियस, पहलगाम में न्यूनतम तापमान 12. 8 डिग्री सेल्सियस, कुपवाड़ा शहर में पारा 15. 6 डिग्री सेल्सियस, कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान 15. 6 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान 10. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
Jammu में पिछली रात के 22. 8 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले न्यूनतम तापमान 24. 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. बनिहाल में न्यूनतम तापमान 16. 1, बटोटे में 17. 2, कटरा में 22. 6 और भद्रवाह में 17. 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
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Jammu छः जुलाई . मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में आज यानि Thursday को दोपहर और शाम के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश तथा तूफान की भविष्यवाणी की है. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा सात जुलाई को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, तूफान आने की संभावना है. उन्होंने कहा कि आठ-नौ जुलाई को जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. Jammu क्षेत्र के मैदानी इलाकों में कुछ स्थानों पर सुबह के समय मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. Srinagar में न्यूनतम तापमान सत्रह. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, काजीगुंड में न्यूनतम तापमान सोलह. शून्य डिग्री सेल्सियस, पहलगाम में न्यूनतम तापमान बारह. आठ डिग्री सेल्सियस, कुपवाड़ा शहर में पारा पंद्रह. छः डिग्री सेल्सियस, कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान पंद्रह. छः डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान दस. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. Jammu में पिछली रात के बाईस. आठ डिग्री सेल्सियस के मुकाबले न्यूनतम तापमान चौबीस. पाँच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. बनिहाल में न्यूनतम तापमान सोलह. एक, बटोटे में सत्रह. दो, कटरा में बाईस. छः और भद्रवाह में सत्रह. शून्य डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
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ब्रेबोर्न स्टेडियम में यहां खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) ने सात विकेट से मैच अपने नाम कर लिया।
हैदराबाद की तरफ से राहुल त्रिपाठी ने सर्वाधिक 71 रन बनाए तो वहीं एडेन मार्करम 68 रन बनाकर नाबाद रहे, जो मैच को अंत तक ले गए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 94 रन की साझेदारी हुई। केकेआर ने आठ विकेट खोकर 175 रन बनाए थे। इस जीत को साथ हैदराबाद ने आईपीएल में यह तीसरी जीत हासिल की है। कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा दिए गए 176 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत खराब रही। गेंदबाज पैट कमिंस ने अपने पहले ओवर में ही बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (3) को चलता किया। शर्मा के बाद राहुल त्रिपाठी ने केन विलियमसन के साथ पारी का जिम्मा संभाला।
वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन ने इस मैच में एक खास उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने आईपीएल करियर के अपने 2000 रन पूरे कर लिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ गेंदबाज आंद्र रसेल ने अपना पहला विकेट विलियमसन के रूप में चटकाया और हैदराबाद ने अपना दूसरा विकेट खोया। विलियमसन ने 16 गेंदों में 17 रन की पारी खेली।
हालांकि, त्रिपाठी एक तरफ अपना मैच खेलने में लगे हुए थे और दूसरी तरफ कप्तान के आउट होने के बाद एडेम मार्करम क्रीज पर थे। दोनों बल्लेबाज ने मैच को अंत तक ले जाने की कोशिश की। वहीं, सात ओवर के बाद हैदराबाद का स्कोर दो विकेट पर 59 रन था।
वरुण चक्रवर्ती के पहले ओवर में राहुल त्रिपाठी ने रन बटोरे, जिसमें बल्लेबाज ने दो छक्के और एक चौके के साथ कुल 18 रन बटोरे। दोनों खिलाड़ी टीम के स्कोर को लक्ष्य की तरफ ले गए। वहीं, त्रिपाठी 64 रन बनाकर खेल रहे थे और मार्करम 22 पर थे। तीसरे विकेट के लिए दोनों बल्लेबाजों के बीच 94 रन की साझेदारी हुई।
हालांकि, रसेल ने हैदराबाद को एक और बड़ा झटका दिया, जिसमें उन्होंने टीम के बड़े स्कोरर त्रिपाठी को चलता किया। त्रिपाठी वेंकटेश अय्यर के हाथों कैच थमा बैठे। राहुल ने चार चौके और छह छक्के की मदद से 37 गेंदों में 71 रन की पारी खेली। उनके बाद निकोलस पूरन बल्लेबाजी के लिए आए और एडेन मार्करम के साथ मैच को समाप्त करने की योजना बनाई। वहीं, मार्करम ने अपना आईपीएल का दूसरा अर्धशतक लगाया। उन्होंने 31 गेंदों में अपने पचास रन पूरे किए। त्रिपाठी के सहयोग और मार्करम द्वारा अंत में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की वजह से टीम ने सीत विकेट से अपनी तीसरी जीत हासिल की।
मार्करम 36 गेंदों में चार छक्के और छह चौके की मदद से 68 रन की पारी खेलकर नाबाद रहे और पूरन पांच रन बनाकर नाबाद रहे। टीम ने 17. 5 ओवर में तीन विकेट खोकर 176 रन बना लिए। इस जीत के बाद एसआरएच ने आईपीएल में दो अंक हासिल किए हैं। गेंदबाज आंद्रे रसेल ने दो विकेट चटकाए तो वहीं, पैट कमिंस ने एक विकेट चटकाया।
बता दें, कोलकाता नाइट राइडर्स ने सनराइजर्स हैदराबाद के सामने जीत के लिए 176 रन का लक्ष्य रखा था। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता ने 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 175 रन बनाए थे। कोलकाता की तरफ से नितीश राणा ने 36 गेंदों में सर्वाधिक 54 रन बनाए तो वहीं आंद्रे रसेल 25 गेंदों में 49 रन बनाकर नाबाद रहे। हैदराबाद की तरफ से नटराजन ने सबसे अधिक तीन और उमरान मलिक ने दो विकेट झटके थे।
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ब्रेबोर्न स्टेडियम में यहां खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद ने सात विकेट से मैच अपने नाम कर लिया। हैदराबाद की तरफ से राहुल त्रिपाठी ने सर्वाधिक इकहत्तर रन बनाए तो वहीं एडेन मार्करम अड़सठ रन बनाकर नाबाद रहे, जो मैच को अंत तक ले गए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए चौरानवे रन की साझेदारी हुई। केकेआर ने आठ विकेट खोकर एक सौ पचहत्तर रन बनाए थे। इस जीत को साथ हैदराबाद ने आईपीएल में यह तीसरी जीत हासिल की है। कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा दिए गए एक सौ छिहत्तर रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत खराब रही। गेंदबाज पैट कमिंस ने अपने पहले ओवर में ही बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को चलता किया। शर्मा के बाद राहुल त्रिपाठी ने केन विलियमसन के साथ पारी का जिम्मा संभाला। वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन ने इस मैच में एक खास उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने आईपीएल करियर के अपने दो हज़ार रन पूरे कर लिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ गेंदबाज आंद्र रसेल ने अपना पहला विकेट विलियमसन के रूप में चटकाया और हैदराबाद ने अपना दूसरा विकेट खोया। विलियमसन ने सोलह गेंदों में सत्रह रन की पारी खेली। हालांकि, त्रिपाठी एक तरफ अपना मैच खेलने में लगे हुए थे और दूसरी तरफ कप्तान के आउट होने के बाद एडेम मार्करम क्रीज पर थे। दोनों बल्लेबाज ने मैच को अंत तक ले जाने की कोशिश की। वहीं, सात ओवर के बाद हैदराबाद का स्कोर दो विकेट पर उनसठ रन था। वरुण चक्रवर्ती के पहले ओवर में राहुल त्रिपाठी ने रन बटोरे, जिसमें बल्लेबाज ने दो छक्के और एक चौके के साथ कुल अट्ठारह रन बटोरे। दोनों खिलाड़ी टीम के स्कोर को लक्ष्य की तरफ ले गए। वहीं, त्रिपाठी चौंसठ रन बनाकर खेल रहे थे और मार्करम बाईस पर थे। तीसरे विकेट के लिए दोनों बल्लेबाजों के बीच चौरानवे रन की साझेदारी हुई। हालांकि, रसेल ने हैदराबाद को एक और बड़ा झटका दिया, जिसमें उन्होंने टीम के बड़े स्कोरर त्रिपाठी को चलता किया। त्रिपाठी वेंकटेश अय्यर के हाथों कैच थमा बैठे। राहुल ने चार चौके और छह छक्के की मदद से सैंतीस गेंदों में इकहत्तर रन की पारी खेली। उनके बाद निकोलस पूरन बल्लेबाजी के लिए आए और एडेन मार्करम के साथ मैच को समाप्त करने की योजना बनाई। वहीं, मार्करम ने अपना आईपीएल का दूसरा अर्धशतक लगाया। उन्होंने इकतीस गेंदों में अपने पचास रन पूरे किए। त्रिपाठी के सहयोग और मार्करम द्वारा अंत में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की वजह से टीम ने सीत विकेट से अपनी तीसरी जीत हासिल की। मार्करम छत्तीस गेंदों में चार छक्के और छह चौके की मदद से अड़सठ रन की पारी खेलकर नाबाद रहे और पूरन पांच रन बनाकर नाबाद रहे। टीम ने सत्रह. पाँच ओवर में तीन विकेट खोकर एक सौ छिहत्तर रन बना लिए। इस जीत के बाद एसआरएच ने आईपीएल में दो अंक हासिल किए हैं। गेंदबाज आंद्रे रसेल ने दो विकेट चटकाए तो वहीं, पैट कमिंस ने एक विकेट चटकाया। बता दें, कोलकाता नाइट राइडर्स ने सनराइजर्स हैदराबाद के सामने जीत के लिए एक सौ छिहत्तर रन का लक्ष्य रखा था। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता ने बीस ओवर में आठ विकेट खोकर एक सौ पचहत्तर रन बनाए थे। कोलकाता की तरफ से नितीश राणा ने छत्तीस गेंदों में सर्वाधिक चौवन रन बनाए तो वहीं आंद्रे रसेल पच्चीस गेंदों में उनचास रन बनाकर नाबाद रहे। हैदराबाद की तरफ से नटराजन ने सबसे अधिक तीन और उमरान मलिक ने दो विकेट झटके थे।
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मुजफ्फरनगर में शाहपुर क्षेत्र के गांव दुल्हेरा में हुई दो दोस्तों की हत्या में परिजन व ग्रामीण मर्डर के पीछे की वजह के बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। दीपक का मोबाइल गायब है, बुधवार सुबह 11 बजे उसने अपनी मां से बात की थी। इसके बाद शाम पांच बजे दीपक और पारस के शव मिल गए। इन छह घंटों के बीच उसकी किन से बात हुई, वे नलकूप पर कैसे पहुंचे, इसी से पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है। दीपक के गायब मोबाइल और उसकी कॉल डिटेल से पुलिस को अहम सुराग मिल सकते हैं। फिलहाल पुलिस 24 घंटे में खुलासे का दावा कर रही है।
थाना क्षेत्र के गांव दुल्हेरा निवासी घनिष्ठ दोस्त दीपक व पारस बचपन से ही एक साथ पढ़ते आए हैं और अब आईटीआई करते हुए सेना भर्ती की भी तैयारी कर रहे थे। मंगलवार शाम दोनों शाकंभरी देवी मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गए थे। वहां से लौटते हुए बुधवार सुबह 11 बजे दीपक की मां ने उससे मोबाइल पर बात की, जिसमें उन्होंने सहारनपुर के पास होने की जानकारी देते हुए दोपहर दो-ढाई बजे तक घर लौटने की बात कही। इसके बाद शाम करीब पांच बजे दोनों दोस्तों के शव गांव में माजरा मार्ग स्थित दीपक के नलकूप पर ही पड़े मिले।
बताया गया कि दोनों के शव मुख्य माजरा मार्ग पर ही नलकूप की दीवार के नीचे पड़े हुए थे, जिन्हें देख ग्रामीणों ने उनके परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों दोस्तों की हत्या से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। परिजन उनकी किसी से भी रंजिश या झगड़ा होने की बात से इनकार कर रहे हैं, जिसके चलते हत्या की वजह को लेकर पुलिस व परिजन पशोपेश में हैं।
गांव दुल्हेरा में दो दोस्तों की हत्या कहीं ओर करने के बाद उनके शवों को नलकूप पर लाकर डाले जाने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, दोनों युवकों की हत्या सीने में गोली मारकर की गई है, लेकिन घटनास्थल पर शवों के आसपास खून नहीं मिला है। घटनास्थल पर किसी तरह के संघर्ष के भी निशान नहीं मिले हैं। इसके साथ ही घटनास्थल गांव का मुख्य माजरा मार्ग स्थित नलकूप है, जहां दो युवकों को गोली मारने की घटना को अंजाम देना संभव नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दोनों युवकों को शाकंभरी देवी से लौटते समय कहीं रोकने के बाद उनकी हत्या कर शवों को घटनास्थल पर लाकर डाला गया है। पुलिस वारदात के खुलासे के लिए इस बिंदु पर भी काम कर रही है।
गांव दुल्हेरा निवासी दीपक किसान परिवार से है। उसके पिता किरणपाल के पास 35 बीघा जमीन है, जिसमें खेती-बाड़ी कर वे परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दीपक उनका इकलौता बेटा था, जिसकी हत्या ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है।
वहीं, पारस के परिवार में बड़ा भाई प्रिंस और पिता गोपाल हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पारस की मां की काफी समय पूर्व ही मौत हो चुकी है, जिसके बाद पिता गोपाल ने ही दोनों बेटों को पाला है। बड़ा बेटा प्रिंस कहीं बाहर रहकर काम करता है, जबकि पारस घर पर रहकर आईटीआई और सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था। दोनों दोस्तों की हत्या की इस वारदात ने दोनों के परिजनों को बुरी तरह तोड़कर रख दिया है और वे फिलहाल इस पर कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है।
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मुजफ्फरनगर में शाहपुर क्षेत्र के गांव दुल्हेरा में हुई दो दोस्तों की हत्या में परिजन व ग्रामीण मर्डर के पीछे की वजह के बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। दीपक का मोबाइल गायब है, बुधवार सुबह ग्यारह बजे उसने अपनी मां से बात की थी। इसके बाद शाम पांच बजे दीपक और पारस के शव मिल गए। इन छह घंटों के बीच उसकी किन से बात हुई, वे नलकूप पर कैसे पहुंचे, इसी से पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है। दीपक के गायब मोबाइल और उसकी कॉल डिटेल से पुलिस को अहम सुराग मिल सकते हैं। फिलहाल पुलिस चौबीस घंटाटे में खुलासे का दावा कर रही है। थाना क्षेत्र के गांव दुल्हेरा निवासी घनिष्ठ दोस्त दीपक व पारस बचपन से ही एक साथ पढ़ते आए हैं और अब आईटीआई करते हुए सेना भर्ती की भी तैयारी कर रहे थे। मंगलवार शाम दोनों शाकंभरी देवी मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गए थे। वहां से लौटते हुए बुधवार सुबह ग्यारह बजे दीपक की मां ने उससे मोबाइल पर बात की, जिसमें उन्होंने सहारनपुर के पास होने की जानकारी देते हुए दोपहर दो-ढाई बजे तक घर लौटने की बात कही। इसके बाद शाम करीब पांच बजे दोनों दोस्तों के शव गांव में माजरा मार्ग स्थित दीपक के नलकूप पर ही पड़े मिले। बताया गया कि दोनों के शव मुख्य माजरा मार्ग पर ही नलकूप की दीवार के नीचे पड़े हुए थे, जिन्हें देख ग्रामीणों ने उनके परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों दोस्तों की हत्या से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। परिजन उनकी किसी से भी रंजिश या झगड़ा होने की बात से इनकार कर रहे हैं, जिसके चलते हत्या की वजह को लेकर पुलिस व परिजन पशोपेश में हैं। गांव दुल्हेरा में दो दोस्तों की हत्या कहीं ओर करने के बाद उनके शवों को नलकूप पर लाकर डाले जाने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, दोनों युवकों की हत्या सीने में गोली मारकर की गई है, लेकिन घटनास्थल पर शवों के आसपास खून नहीं मिला है। घटनास्थल पर किसी तरह के संघर्ष के भी निशान नहीं मिले हैं। इसके साथ ही घटनास्थल गांव का मुख्य माजरा मार्ग स्थित नलकूप है, जहां दो युवकों को गोली मारने की घटना को अंजाम देना संभव नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दोनों युवकों को शाकंभरी देवी से लौटते समय कहीं रोकने के बाद उनकी हत्या कर शवों को घटनास्थल पर लाकर डाला गया है। पुलिस वारदात के खुलासे के लिए इस बिंदु पर भी काम कर रही है। गांव दुल्हेरा निवासी दीपक किसान परिवार से है। उसके पिता किरणपाल के पास पैंतीस बीघा जमीन है, जिसमें खेती-बाड़ी कर वे परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दीपक उनका इकलौता बेटा था, जिसकी हत्या ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। वहीं, पारस के परिवार में बड़ा भाई प्रिंस और पिता गोपाल हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पारस की मां की काफी समय पूर्व ही मौत हो चुकी है, जिसके बाद पिता गोपाल ने ही दोनों बेटों को पाला है। बड़ा बेटा प्रिंस कहीं बाहर रहकर काम करता है, जबकि पारस घर पर रहकर आईटीआई और सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था। दोनों दोस्तों की हत्या की इस वारदात ने दोनों के परिजनों को बुरी तरह तोड़कर रख दिया है और वे फिलहाल इस पर कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है।
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यदि आप टाइट कपड़े पहनते हैं, तो ऐसा करने से पेट और आंतों पर दबाव पड़ सकता है। इससे पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। टाइट कपड़ों की वजह से स्किन को भी नुकसान पहुंचता है। त्वचा पर जलन और झनझनाहट पैदा हो सकती है। अंडरआर्म्स या जांघों पर रैशेज पड़ सकते हैं।
कई बार सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़ों को पहनने से स्किन का शुद्ध हवा से संपर्क टूट जाता है, जिससे त्वचा प्रभावित होती है। ऐसे में स्किन में फंगल इन्फेक्शन का खतरा होता है। लोगों को खुजली जैसी बीमारी हो सकती है।
टाइट कपड़ों के कारण कुछ लोगों में मुंहासे भी देखे जाते हैं। टाइट कपड़ों के कारण स्किन के पोर्स बंद हो जाते हैं और फिर ये मुंहासे का कारण बनते हैं।
टाइट बेल्ट वाली पैंट/स्कर्ट पहनने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। इसके कारण कमर के चारों ओर निशान बन सकता है। चोली, ब्लाउज आदि टाइट पहले से शरीर में रक्त संचार भी प्रभावित होता है।
स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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यदि आप टाइट कपड़े पहनते हैं, तो ऐसा करने से पेट और आंतों पर दबाव पड़ सकता है। इससे पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। टाइट कपड़ों की वजह से स्किन को भी नुकसान पहुंचता है। त्वचा पर जलन और झनझनाहट पैदा हो सकती है। अंडरआर्म्स या जांघों पर रैशेज पड़ सकते हैं। कई बार सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़ों को पहनने से स्किन का शुद्ध हवा से संपर्क टूट जाता है, जिससे त्वचा प्रभावित होती है। ऐसे में स्किन में फंगल इन्फेक्शन का खतरा होता है। लोगों को खुजली जैसी बीमारी हो सकती है। टाइट कपड़ों के कारण कुछ लोगों में मुंहासे भी देखे जाते हैं। टाइट कपड़ों के कारण स्किन के पोर्स बंद हो जाते हैं और फिर ये मुंहासे का कारण बनते हैं। टाइट बेल्ट वाली पैंट/स्कर्ट पहनने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। इसके कारण कमर के चारों ओर निशान बन सकता है। चोली, ब्लाउज आदि टाइट पहले से शरीर में रक्त संचार भी प्रभावित होता है। स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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मोदी सरकार की ओर से हाल में उठाए गए एक कदम से विवाद पैदा हो सकता है। केंद्र ने कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों दिवंगत इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर गृह मंत्रालय की ओर से हिंदी दिवस पर दिए जाने वाले सालाना राजभाषा पुरस्कारों का नाम बदल दिया है। ये पुरस्कार सरकार में हिंदी के प्रगतिशील तरीके से उपयोग के लिए दिए जाते हैं।
ईटी के पास राजभाषा विभाग की ओर से जारी निर्देश की कॉपी है। 25 मार्च 2015 को जारी किए गए इस आदेश में दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कारों को बदल दिया गया है। 1986 में शुरू किया गया 'इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार' अब राजभाषा कीर्ति पुरस्कार के नाम से जाना जाएगा, जबकि 'राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार' को अब राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना कहा जाएगा।
मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी पूनम जुनेजा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नई पुरस्कार योजनाएं 2015-16 से शुरू की गई हैं और ये 1986 और 2005 में जारी पुराने निर्देश की जगह लेंगी। गृह मंत्रालय की ओर से यह निर्देश सभी राज्यों, मंत्रियों, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रपति सचिवालय, कैबिनेट सचिवालय और लोकसभा, राज्यसभा सचिवालयों को भेजा गया है। ये पुरस्कार राष्ट्रपति 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर मंत्रालयों, पीएसयू, केंद्र सरकार के अधिकारियों और प्राइवेट सिटीजंस को देते हैं।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी से कहा कि यह फैसला मंत्रालयों और जनता के बीच मौजूदा पुरस्कार योजनाओं को लेकर भ्रम को समाप्त करने के लिए लिया गया है क्योंकि इनमें बहुत से कंपोनेंट हैं। उनका कहना था, 'पुराने पुरस्कारों को नए पुरस्कारों में मिला दिया गया है। इसमें किसी राजनीतिक विवाद का कोण शामिल नहीं है क्योंकि पुरस्कार बीजेपी के किसी वरिष्ठ नेता या किसी हिंदी कवि के नाम पर नहीं दिए जा रहे। हालांकि, इस बारे में कुछ सुझाव मिले थे। इस प्रक्रिया पर पिछले वर्ष से काम हो रहा है। नए पुरस्कारों के तहत वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ाए गए हैं। '
ईटी के पास वह बुकलेट भी मौजूद है, जिसमें गृह मंत्रालय की '300 दिनों की उपलब्धियों' की जानकारी दी गई है। इसमें भी इस बदलाव की पुष्टि की गई है। हालांकि, इस बारे में मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी देने से मना कर दिया।
अभी तक इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार के तहत हिंदी का सबसे प्रगतिशील उपयोग करने वाले मंत्रालयों या सरकारी कंपनियों या बैंकों को पुरस्कार के तौर पर शील्ड दी जाती थी, जबकि हिंदी में सर्वश्रेष्ठ मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 40,000 रुपये से एक लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार मिलते थे। राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार के तहत विज्ञान आधारित विषयों पर हिंदी में किसी व्यक्ति की ओर से लिखी गई पुस्तकों को 10,000 रुपये से दो लाख रुपये तक के पुरस्कार दिए जाते थे।
अब राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के तहत मंत्रालयों, पीएसयू, ऑटोनॉमस बोर्ड्स और सरकारी बैंकों को 39 शील्ड्स दी जाएंगी। नई राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना के तहत ज्ञान और विज्ञान विषयों पर क्वॉलिटी वाली पुस्तकें लिखने वाले नागरिकों को 10,000 रुपये से दो लाख रुपये (पहले के समान) 13 पुरस्कार दिए जाएंगे। लेकिन हिंदी में मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 30,000 रुपये से एक लाख रुपये के चार नकद पुरस्कार दिए जाएंगे, जो राजीव गांधी के नाम पर दिए जाने वाले पिछले पुरस्कार के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा नकद रकम है।
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मोदी सरकार की ओर से हाल में उठाए गए एक कदम से विवाद पैदा हो सकता है। केंद्र ने कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों दिवंगत इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर गृह मंत्रालय की ओर से हिंदी दिवस पर दिए जाने वाले सालाना राजभाषा पुरस्कारों का नाम बदल दिया है। ये पुरस्कार सरकार में हिंदी के प्रगतिशील तरीके से उपयोग के लिए दिए जाते हैं। ईटी के पास राजभाषा विभाग की ओर से जारी निर्देश की कॉपी है। पच्चीस मार्च दो हज़ार पंद्रह को जारी किए गए इस आदेश में दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कारों को बदल दिया गया है। एक हज़ार नौ सौ छियासी में शुरू किया गया 'इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार' अब राजभाषा कीर्ति पुरस्कार के नाम से जाना जाएगा, जबकि 'राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार' को अब राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना कहा जाएगा। मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी पूनम जुनेजा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नई पुरस्कार योजनाएं दो हज़ार पंद्रह-सोलह से शुरू की गई हैं और ये एक हज़ार नौ सौ छियासी और दो हज़ार पाँच में जारी पुराने निर्देश की जगह लेंगी। गृह मंत्रालय की ओर से यह निर्देश सभी राज्यों, मंत्रियों, प्रधानमंत्री कार्यालय , राष्ट्रपति सचिवालय, कैबिनेट सचिवालय और लोकसभा, राज्यसभा सचिवालयों को भेजा गया है। ये पुरस्कार राष्ट्रपति चौदह सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर मंत्रालयों, पीएसयू, केंद्र सरकार के अधिकारियों और प्राइवेट सिटीजंस को देते हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी से कहा कि यह फैसला मंत्रालयों और जनता के बीच मौजूदा पुरस्कार योजनाओं को लेकर भ्रम को समाप्त करने के लिए लिया गया है क्योंकि इनमें बहुत से कंपोनेंट हैं। उनका कहना था, 'पुराने पुरस्कारों को नए पुरस्कारों में मिला दिया गया है। इसमें किसी राजनीतिक विवाद का कोण शामिल नहीं है क्योंकि पुरस्कार बीजेपी के किसी वरिष्ठ नेता या किसी हिंदी कवि के नाम पर नहीं दिए जा रहे। हालांकि, इस बारे में कुछ सुझाव मिले थे। इस प्रक्रिया पर पिछले वर्ष से काम हो रहा है। नए पुरस्कारों के तहत वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ाए गए हैं। ' ईटी के पास वह बुकलेट भी मौजूद है, जिसमें गृह मंत्रालय की 'तीन सौ दिनों की उपलब्धियों' की जानकारी दी गई है। इसमें भी इस बदलाव की पुष्टि की गई है। हालांकि, इस बारे में मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी देने से मना कर दिया। अभी तक इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार के तहत हिंदी का सबसे प्रगतिशील उपयोग करने वाले मंत्रालयों या सरकारी कंपनियों या बैंकों को पुरस्कार के तौर पर शील्ड दी जाती थी, जबकि हिंदी में सर्वश्रेष्ठ मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चालीस,शून्य रुपयापये से एक लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार मिलते थे। राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार के तहत विज्ञान आधारित विषयों पर हिंदी में किसी व्यक्ति की ओर से लिखी गई पुस्तकों को दस,शून्य रुपयापये से दो लाख रुपये तक के पुरस्कार दिए जाते थे। अब राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के तहत मंत्रालयों, पीएसयू, ऑटोनॉमस बोर्ड्स और सरकारी बैंकों को उनतालीस शील्ड्स दी जाएंगी। नई राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना के तहत ज्ञान और विज्ञान विषयों पर क्वॉलिटी वाली पुस्तकें लिखने वाले नागरिकों को दस,शून्य रुपयापये से दो लाख रुपये तेरह पुरस्कार दिए जाएंगे। लेकिन हिंदी में मौलिक पुस्तकें लिखने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तीस,शून्य रुपयापये से एक लाख रुपये के चार नकद पुरस्कार दिए जाएंगे, जो राजीव गांधी के नाम पर दिए जाने वाले पिछले पुरस्कार के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा नकद रकम है।
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Star engulfing Jupiter-sized planet: ब्रह्मांड में हर पल ऐसी करोड़ों-अरबों घटनाएं होती रहती हैं, जिसे इंसानों के लिए पूरी तरह समझ पाना, शायद संभव नहीं है। ग्रह, नक्षत्र और तारों की दुनिया में होने वाली अजीब खलोगीय घटनाएं, इंसानों का सिर चकरा कर रख देती हैं।
पहली बार, वैज्ञानिकों ने हमारी अपनी आकाशगंगा में एक ग्रह को निगलते हुए एक फूला हुआ तारा देखा है। ये नजारा अपने आप में दुर्लभ था, जब वैज्ञानिकों की टीम ने देखा, कि एक विशालकाय तारा, बृहस्पति के आकार के एक ग्रह को निगल रहा है।
वैज्ञानिकों की टीम ने पता लगाया है, कि तारे की ये दावत, हमारी पृथ्वी से लगभग 12,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ईगल-जैसे नक्षत्र अक्विला के पास हुई है।
वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है, कि सूर्य की तरह दिखने वाला तारा, जिसे ZTF SLRN-2020 के रूप में पहचाना गया है, ने गर्म गैस से भरे विशालकाय ग्रह को निगल लिया, जिसका आकार लगभग बृहस्पति के आकार का था।
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के साथ कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना को देखा है।
शोधकर्ताओं की टीम ने मई 2020 में पहली बार खोजी गई इस घटना के बाद, अब एक ग्रह की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों टीम अब इस ग्रह की मौत के बाद पृथ्वी की मौत की भी संभावनाओं पर नये सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है।
वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, कि जैसे ही तारों के पास ईंधन का खत्म होना शुरू होता है, वो फूलने लगते हैं, उनके आकार का विस्तार होने लगता है और एक तारा, अपने वास्तविक आकार से लाखों गुना ज्यादा फूल जाता है और इस दौरान वो अन्य ग्रहों के रास्ते में आ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि अतीत में ऐसे संकेत मिले थे, कि तारे, किसी ग्रह को निगल लेते हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है, कि इस वास्तविक घटना को देखा गया है।
नेचर में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में, वैज्ञानिकों ने वर्णन किया है, कि कैसे उन्होंने लगभग 12,000 प्रकाश-वर्ष दूर एक तारे के विस्फोट को अक्विला नक्षत्र के पास देखा। लुप्त होने से पहले दस दिनों में ही ये तारा 100 गुना से ज्यादा चमकीला हो गया।
वैज्ञानिकों का कहना है, कि ऐसा लगा कि तारे से बहुत बड़ा प्रकाश बाहर निकला है और ये तारा सौ गुना से ज्यादा चमकीला हो गया। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है, कि तारे से निकला ये फ्लैश कुछ और नहीं, बल्कि जिस वक्त ये तारा ग्रह को निगल रहा था, उस वक्त दोनों में हुई टक्कर से ये फ्लैश निकला था।
एमआईटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च के पोस्टडॉक लीड लेखक किशलय डे ने बताया, कि वैज्ञानिकों की टीम "निगलने की प्रक्रिया और उसके अंतिम चरण को देख रही थी। " किशलय डे ने कहा, कि बृहस्पती के आकार का गर्म ग्रह तारे के वातावरण में आ गया था और फिर उसका अंत हो गया।
क्या पृथ्वी भी होगी ऐसे ही खत्म?
भारतीय वैज्ञानिक किशलय, जो वैज्ञानिकों की टीम को लीड कर रहे थे, उन्होंने हमारी पृथ्वी की भी मौत को लेकर एक संभावना पर प्रकाश डाला है।
उन्होंने कहा, कि "करीब पांच अरब साल के बाद पृथ्वी के भी नसीब में ऐसा हो होगा, जब सूर्य फूलना शुरू कर देगा"। उन्होंने कहा, कि "सिर्फ पृथ्वी ही नहीं, हमारे सौरमंडल के ज्यादातर ग्रह भस्म हो जाएंगे। " किशलय डे ने कहा, कि अगर उस वक्त किसी और ग्रह से हमें, यानि पृथ्वी को देख रहा होगा, तो वो करीब 10 हजार प्रकाश वर्ष दूर से पृथ्वी को सूर्य को निगलते हुए देखेगा। उस वक्त सूर्य की चमक कई गुना और बढ़ जाएगी और सूर्य से कुछ पदार्थ बाहर निकलेगा और उसके बाद चारों तरफ सिर्फ धूल ही धूल फैल जाएगा। "
शोधकर्ताओं की टीम ने मई 2020 में Zwicky Transient Facility (ZTF) डेटा के माध्यम से खोज करके तारे में हुए विस्फोट की खोज की थी, जो तेजी से बदलते, सितारों के लिए आकाश में होने वाले गतिविधियों का विश्लेषण करता है। रिसर्च के दौरान, किशले डे को एक ऐसा तारा मिला, जो सिर्फ एक सप्ताह में 100 गुना ज्यादा चमकीला हो गया, इससे पहले उन्होंने किसी भी विस्फोट को नहीं देखा था।
आपको बता दें, इस दुर्लभ घटना की रिसर्च को लीड भारतीय वैज्ञानिक किशलय डे कर रहे थे, जिन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से साल 2016 में ग्रेजुएशन किया है और फिर उन्होंने 2021 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की।
कोलकाता के रहने वाले किशलय, नासा आइंस्टीन पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं और अमेरिका के प्रसिद्ध MIT कॉलेज में रिसर्च कर रहे हैं।
किशलय, आकाशगंगा और दूर के ब्रह्मांड में तारकीय बायनेरिज़ से लौकिक आतिशबाजी की खोज के लिए जमीन पर और अंतरिक्ष में विस्तृत क्षेत्र के इमेजिंग सर्वेक्षणों का काम करते हैं। तारों में होने वाले परिवर्तनों को समझने की कोशिश करते हैं और आकाशगंगा में गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव को समझने के लिए रिसर्च करते हैं।
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Star engulfing Jupiter-sized planet: ब्रह्मांड में हर पल ऐसी करोड़ों-अरबों घटनाएं होती रहती हैं, जिसे इंसानों के लिए पूरी तरह समझ पाना, शायद संभव नहीं है। ग्रह, नक्षत्र और तारों की दुनिया में होने वाली अजीब खलोगीय घटनाएं, इंसानों का सिर चकरा कर रख देती हैं। पहली बार, वैज्ञानिकों ने हमारी अपनी आकाशगंगा में एक ग्रह को निगलते हुए एक फूला हुआ तारा देखा है। ये नजारा अपने आप में दुर्लभ था, जब वैज्ञानिकों की टीम ने देखा, कि एक विशालकाय तारा, बृहस्पति के आकार के एक ग्रह को निगल रहा है। वैज्ञानिकों की टीम ने पता लगाया है, कि तारे की ये दावत, हमारी पृथ्वी से लगभग बारह,शून्य प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ईगल-जैसे नक्षत्र अक्विला के पास हुई है। वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है, कि सूर्य की तरह दिखने वाला तारा, जिसे ZTF SLRN-दो हज़ार बीस के रूप में पहचाना गया है, ने गर्म गैस से भरे विशालकाय ग्रह को निगल लिया, जिसका आकार लगभग बृहस्पति के आकार का था। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , हार्वर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के साथ कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना को देखा है। शोधकर्ताओं की टीम ने मई दो हज़ार बीस में पहली बार खोजी गई इस घटना के बाद, अब एक ग्रह की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों टीम अब इस ग्रह की मौत के बाद पृथ्वी की मौत की भी संभावनाओं पर नये सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, कि जैसे ही तारों के पास ईंधन का खत्म होना शुरू होता है, वो फूलने लगते हैं, उनके आकार का विस्तार होने लगता है और एक तारा, अपने वास्तविक आकार से लाखों गुना ज्यादा फूल जाता है और इस दौरान वो अन्य ग्रहों के रास्ते में आ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि अतीत में ऐसे संकेत मिले थे, कि तारे, किसी ग्रह को निगल लेते हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है, कि इस वास्तविक घटना को देखा गया है। नेचर में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में, वैज्ञानिकों ने वर्णन किया है, कि कैसे उन्होंने लगभग बारह,शून्य प्रकाश-वर्ष दूर एक तारे के विस्फोट को अक्विला नक्षत्र के पास देखा। लुप्त होने से पहले दस दिनों में ही ये तारा एक सौ गुना से ज्यादा चमकीला हो गया। वैज्ञानिकों का कहना है, कि ऐसा लगा कि तारे से बहुत बड़ा प्रकाश बाहर निकला है और ये तारा सौ गुना से ज्यादा चमकीला हो गया। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है, कि तारे से निकला ये फ्लैश कुछ और नहीं, बल्कि जिस वक्त ये तारा ग्रह को निगल रहा था, उस वक्त दोनों में हुई टक्कर से ये फ्लैश निकला था। एमआईटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च के पोस्टडॉक लीड लेखक किशलय डे ने बताया, कि वैज्ञानिकों की टीम "निगलने की प्रक्रिया और उसके अंतिम चरण को देख रही थी। " किशलय डे ने कहा, कि बृहस्पती के आकार का गर्म ग्रह तारे के वातावरण में आ गया था और फिर उसका अंत हो गया। क्या पृथ्वी भी होगी ऐसे ही खत्म? भारतीय वैज्ञानिक किशलय, जो वैज्ञानिकों की टीम को लीड कर रहे थे, उन्होंने हमारी पृथ्वी की भी मौत को लेकर एक संभावना पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा, कि "करीब पांच अरब साल के बाद पृथ्वी के भी नसीब में ऐसा हो होगा, जब सूर्य फूलना शुरू कर देगा"। उन्होंने कहा, कि "सिर्फ पृथ्वी ही नहीं, हमारे सौरमंडल के ज्यादातर ग्रह भस्म हो जाएंगे। " किशलय डे ने कहा, कि अगर उस वक्त किसी और ग्रह से हमें, यानि पृथ्वी को देख रहा होगा, तो वो करीब दस हजार प्रकाश वर्ष दूर से पृथ्वी को सूर्य को निगलते हुए देखेगा। उस वक्त सूर्य की चमक कई गुना और बढ़ जाएगी और सूर्य से कुछ पदार्थ बाहर निकलेगा और उसके बाद चारों तरफ सिर्फ धूल ही धूल फैल जाएगा। " शोधकर्ताओं की टीम ने मई दो हज़ार बीस में Zwicky Transient Facility डेटा के माध्यम से खोज करके तारे में हुए विस्फोट की खोज की थी, जो तेजी से बदलते, सितारों के लिए आकाश में होने वाले गतिविधियों का विश्लेषण करता है। रिसर्च के दौरान, किशले डे को एक ऐसा तारा मिला, जो सिर्फ एक सप्ताह में एक सौ गुना ज्यादा चमकीला हो गया, इससे पहले उन्होंने किसी भी विस्फोट को नहीं देखा था। आपको बता दें, इस दुर्लभ घटना की रिसर्च को लीड भारतीय वैज्ञानिक किशलय डे कर रहे थे, जिन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से साल दो हज़ार सोलह में ग्रेजुएशन किया है और फिर उन्होंने दो हज़ार इक्कीस में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की। कोलकाता के रहने वाले किशलय, नासा आइंस्टीन पोस्टडॉक्टोरल फेलो हैं और अमेरिका के प्रसिद्ध MIT कॉलेज में रिसर्च कर रहे हैं। किशलय, आकाशगंगा और दूर के ब्रह्मांड में तारकीय बायनेरिज़ से लौकिक आतिशबाजी की खोज के लिए जमीन पर और अंतरिक्ष में विस्तृत क्षेत्र के इमेजिंग सर्वेक्षणों का काम करते हैं। तारों में होने वाले परिवर्तनों को समझने की कोशिश करते हैं और आकाशगंगा में गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव को समझने के लिए रिसर्च करते हैं।
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करनाल। हरियाणा में करनाल जिला स्थित मिनी सचिवालय में किसान-प्रदर्शनकारियों का धरना प्रदर्शन जारी है। यहां पंजाब, हरियाणा और यूपी समेत कई राज्यों के हजारों लोग जुटे हैं। जिनमें महिला और बच्चे भी शामिल हैं। किसान संगठनों का कहना है कि, वे सरकार से समाधान चाहते हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता टिकैत बोले, "प्रशासन ने एसडीएम द्वारा किसानों के खिलाफ की गई पिछली कार्रवाई का स्पष्टीकरण देने की कोशिश की है। इधर, हम भी अपने आगे के प्लान पर काम करेंगे। अपने अगले कदम पर फैसला लेने के लिए किसानों की भी बैठक होगी। "
वहीं, भाकियू नेता ने करनाल महापंचायत के आयोजन के बारे में कहा कि, करनाल में बीते 28 अगस्त को किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए यह पंचायत आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि, हमारे किसान भाइयों ने ज़िला प्रशासन द्वारा घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवज़ा देने और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मिनी सचिवालय का घेराव किया गया है।
डीसी करनाल ने बताया कि, उपद्रव या किसी भी अनहोनी घटना से निपटने के लिए शहर का लगभग पूरा हिस्सा सील है। यहां पुलिस की तरफ से 18 नाके लगाए गए हैं। जीटी रोड से लघु सचिवालय तक आने वाले रास्ते और शहर से लघु सचिवालय तक पहुंचने वाले रास्तों को ब्लॉक किया जा चुका है। क्योंकि, किसान प्रदर्शनकारी इसी रूट से ज्यादा पहुंचने के आसार थे, इसलिए यह बंदोबस्त किया गया।
पुलिस ने रेत से भरे ट्रक भी नाकों पर अड़ाकर रास्ते ब्लॉक किए। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "सरकार द्वारा पैरामिल्ट्री फोर्स समेत सुरक्षाबलों की 40 कंपनियां तैनात की गई हैं। हरियाणा पुलिस की 30 कंपनियां नियुक्त की गई हैं। शहर के निकट पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां अलग से लगाई गई हैं। 5 एसपी और 25 एचपीएस कम डीएसपी की ड्यूटी भी लगाई है। इनके साथ वाटर कैनन और ड्रोन भी तैनात हैं।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के करीबी एक किसान नेता ने कहा कि, करनाल में किसान महांपचायत को बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित किया गया है। दरअसल, पिछले दिनों इसी टोल पर पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई थी। जिसमें काफी किसानों को चोटें आई थीं। कई के सिर से खून बहने लगा था। एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई थी। जिसके बाद अब करनाल में महांपचायत बुलाई गई है। किसान नेताओं का कहना है कि, किसान अनिश्चितकाल के लिए मिनी सचिवालय का घेराव किए हैं।
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करनाल। हरियाणा में करनाल जिला स्थित मिनी सचिवालय में किसान-प्रदर्शनकारियों का धरना प्रदर्शन जारी है। यहां पंजाब, हरियाणा और यूपी समेत कई राज्यों के हजारों लोग जुटे हैं। जिनमें महिला और बच्चे भी शामिल हैं। किसान संगठनों का कहना है कि, वे सरकार से समाधान चाहते हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता टिकैत बोले, "प्रशासन ने एसडीएम द्वारा किसानों के खिलाफ की गई पिछली कार्रवाई का स्पष्टीकरण देने की कोशिश की है। इधर, हम भी अपने आगे के प्लान पर काम करेंगे। अपने अगले कदम पर फैसला लेने के लिए किसानों की भी बैठक होगी। " वहीं, भाकियू नेता ने करनाल महापंचायत के आयोजन के बारे में कहा कि, करनाल में बीते अट्ठाईस अगस्त को किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए यह पंचायत आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि, हमारे किसान भाइयों ने ज़िला प्रशासन द्वारा घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवज़ा देने और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मिनी सचिवालय का घेराव किया गया है। डीसी करनाल ने बताया कि, उपद्रव या किसी भी अनहोनी घटना से निपटने के लिए शहर का लगभग पूरा हिस्सा सील है। यहां पुलिस की तरफ से अट्ठारह नाके लगाए गए हैं। जीटी रोड से लघु सचिवालय तक आने वाले रास्ते और शहर से लघु सचिवालय तक पहुंचने वाले रास्तों को ब्लॉक किया जा चुका है। क्योंकि, किसान प्रदर्शनकारी इसी रूट से ज्यादा पहुंचने के आसार थे, इसलिए यह बंदोबस्त किया गया। पुलिस ने रेत से भरे ट्रक भी नाकों पर अड़ाकर रास्ते ब्लॉक किए। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "सरकार द्वारा पैरामिल्ट्री फोर्स समेत सुरक्षाबलों की चालीस कंपनियां तैनात की गई हैं। हरियाणा पुलिस की तीस कंपनियां नियुक्त की गई हैं। शहर के निकट पैरामिलिट्री फोर्स की दस कंपनियां अलग से लगाई गई हैं। पाँच एसपी और पच्चीस एचपीएस कम डीएसपी की ड्यूटी भी लगाई है। इनके साथ वाटर कैनन और ड्रोन भी तैनात हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के करीबी एक किसान नेता ने कहा कि, करनाल में किसान महांपचायत को बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित किया गया है। दरअसल, पिछले दिनों इसी टोल पर पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई थी। जिसमें काफी किसानों को चोटें आई थीं। कई के सिर से खून बहने लगा था। एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई थी। जिसके बाद अब करनाल में महांपचायत बुलाई गई है। किसान नेताओं का कहना है कि, किसान अनिश्चितकाल के लिए मिनी सचिवालय का घेराव किए हैं।
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कोलकाता। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता कौस्तव बागची को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित रूप से टिप्पणियां करने के मामले में शुक्रवार देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शहर के बरतला पुलिस थाने के एक बड़े दल ने राज्य के उत्तर 24 परगना जिले में बैरकपुर स्थित बागची के आवास पर देर रात साढ़े तीन बजे छापा मारा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मुख्यमंत्री को लेकर कथित टिप्पणियों के लिए बागची के खिलाफ शुक्रवार को बरतला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई थी। अधिकारी ने कहा कि हमने कौस्तव बागची को बैरकपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। हम इस बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकते। हमारे अधिकारी उनसे बात कर रहे हैं।
बागची ने सागरदिघी उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी पर व्यक्तिगत हमले करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और उनकी कथित रूप से आलोचना की थी।
कई धाराओं में मामले : गिरफ्तार किए जाने के बाद बागची को बरतला पुलिस थाने लाया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। अधिकारी ने बताया कि बागची के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें 120-बी (आपराधिक साजिश), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 506 (आपराधिक धमकी) और अन्य धाराएं शामिल हैं।
कांग्रेस ने की निंदा : दूसरी ओर, राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार किसी की भी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छीन सकती। मैं बागची की गिरफ्तारी के लिए कोलकाता पुलिस की कड़ी निंदा करता हूं। सरकार को बागची को तत्काल रिहा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। (एजेंसी/वेबदुनिया)
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कोलकाता। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता कौस्तव बागची को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित रूप से टिप्पणियां करने के मामले में शुक्रवार देर रात उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शहर के बरतला पुलिस थाने के एक बड़े दल ने राज्य के उत्तर चौबीस परगना जिले में बैरकपुर स्थित बागची के आवास पर देर रात साढ़े तीन बजे छापा मारा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री को लेकर कथित टिप्पणियों के लिए बागची के खिलाफ शुक्रवार को बरतला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई थी। अधिकारी ने कहा कि हमने कौस्तव बागची को बैरकपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। हम इस बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकते। हमारे अधिकारी उनसे बात कर रहे हैं। बागची ने सागरदिघी उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी पर व्यक्तिगत हमले करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और उनकी कथित रूप से आलोचना की थी। कई धाराओं में मामले : गिरफ्तार किए जाने के बाद बागची को बरतला पुलिस थाने लाया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। अधिकारी ने बताया कि बागची के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें एक सौ बीस-बी , पाँच सौ चार , पाँच सौ छः और अन्य धाराएं शामिल हैं। कांग्रेस ने की निंदा : दूसरी ओर, राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार किसी की भी अभिव्यक्ति की आजादी नहीं छीन सकती। मैं बागची की गिरफ्तारी के लिए कोलकाता पुलिस की कड़ी निंदा करता हूं। सरकार को बागची को तत्काल रिहा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
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सुशांत सिंह डेथ के बाद से मामले ंमें एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। ड्रग्स एंगल से हो रही जांच के बाद कई सितारे भी केस में बोलते दिख रहे हैं। भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने भी बताया कि उन्हें भी ऐसे कुछ लोग मुंबई में मिले थे जो उनसे मनचाहा काम कराना चाहते थे और अपने तरीकों से चलाना चाहते थे। तो वहीं निरहुआ ने भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के उस बयान का समर्थन भी किया जिसमें उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि मुंबई हर हिंदुस्तानी की है।
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सुशांत सिंह डेथ के बाद से मामले ंमें एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। ड्रग्स एंगल से हो रही जांच के बाद कई सितारे भी केस में बोलते दिख रहे हैं। भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने भी बताया कि उन्हें भी ऐसे कुछ लोग मुंबई में मिले थे जो उनसे मनचाहा काम कराना चाहते थे और अपने तरीकों से चलाना चाहते थे। तो वहीं निरहुआ ने भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के उस बयान का समर्थन भी किया जिसमें उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि मुंबई हर हिंदुस्तानी की है।
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तारीख आज की ही थी लेकिन साल था 1999। जगह थी ओडिशा का क्योंझऱ जिला। इस दिन दुनिया भर में चर्चा थी सिर्फ बजरंग दल की। ये वो दल था जिसका गठन हिंदू धर्म की रक्षा के लिए हुआ था और उसने ही इंसानियत का कत्लेआम किया। मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा।
लखनऊ : तारीख आज की ही थी लेकिन साल था 1999। जगह थी ओडिशा का क्योंझऱ जिला। इस दिन दुनिया भर में चर्चा थी सिर्फ बजरंग दल की। ये वो दल था जिसका गठन हिंदू धर्म की रक्षा के लिए हुआ था और उसने ही इंसानियत का कत्लेआम किया। मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा। उस दिन जो कुछ भी हुआ वो भारत के आधुनिक इतिहास का सबसे काला अध्याय था. . जानिए क्या हुआ था उस दिन लेकिन उससे पहले बहुत कुछ है जानने के लिए।
ग्राहम स्टेंस 1941 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में पैदा हुए। उनकी ओडिशा के सांतनु सतपथी से दोस्ती हो गई। कुछ समय बाद सांतनु उनको भारत आने का आग्रह करते हैं। 1965 में स्टेंस भारत आए स्टेंस ने इवैंजेलिकल मिशनरी सोसायटी ऑफ मयूरभंज के साथ मिल कुष्ठरोगियों का इलाज करने लगे।
इसके बाद साल 1982 में उन्होंने मयूरभंज लेप्रसी होम की स्थापना की। ये उस समय की बात है जब कुष्ठ रोग को बड़ा रोग माना जाता था और रोगी का सामाजिक वहिष्कार कर दिया जाता था। इसी सबके दौरान स्टेंस की मुलाकात ग्लैडिस से होती है। वे भी कुष्ठरोगियों की सेवा में लगी थीं। साल 1983 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों के तीन बच्चे हुए। एक बेटी ईस्थर और दो बेटे फिलिप और टिमोथी। स्टेंस दिनों दिन लोकप्रिय हो रहे थे। यही वो दौर था जब चरमपंथी देश और इस राज्य में भी सिर उठा रहे थे। उन्हें स्टेंस की लोकप्रियता रास नहीं आ रही थी।
स्टेंस के दोनों बेटे फिलिप और टिमोथी एक 7 साल का दूसरा 10 साल का। ऊटी में पढ़ते थे। जाड़े की छुट्टी में घर आए थे। बच्चे पापा से घूमने चलने की जिद्द करते हैं। स्टेंस को को मयूरभंज में एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। तो वो दोनों बेटों के साथ लेते हैं। शाम को घर लौटने से पहले वे तीनों पिकनिक के लिए मनोहरपुर गांव के बाहर कैंप लगाते हैं। फिर अपनी कार में सो जाते हैं।
रात लगभग 12 बजे बजरंग दल नेता दारा सिंह अपने करीब 60 साथियों के साथ स्टेंस की कार को घेर लेते हैं। और हमला कर देते हैं। गाड़ी में तोड़फोड़ करने लगते है। स्टेंस हमलावरों के आगे रहम की भीख मांगते हैं। लेकिन हमलावर कुछ और ही सोच कर आए थे। तीनों को बुरी तरह बेरहमी से पीटते हैं। इसपर भी मन नहीं भरता तो पेट्रोल डाल कार को आग लगा देते हैं। कार जलने लगती है और इसमें ही एक बाप अपने दो बच्चों के साथ जल कर राख हो जाता है।
स्टेंस पर बजरंग दल के दारा सिंह और अन्य कट्टरपंथी धर्मांतरण का आरोप लगाते थे। उसके मुताबिक स्टेंस आदिवासी इलाकों में ईलाज के नाम पर धर्मांतरण करते थे।
हत्याकांड में पुलिस ने दारा सहित 13 के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। दुनिया भर में आलोचना हुई। केंद्र में अटल बिहारी की सरकार थी। देश के अंदर और बाहर आलोचना हो रही थी। आरोपियों के बजरंग दल, विहिप और आरएसएस से संबंध बताए जाने लगे। परेशान पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी जांच के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी घटनास्थल पर भेजी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कईयों को आरोपी बताया। जांच हुई। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। कोर्ट ने दारा सिंह को फांसी और महेंद्र हेमब्रोम को उम्रकैद आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया।
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तारीख आज की ही थी लेकिन साल था एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे। जगह थी ओडिशा का क्योंझऱ जिला। इस दिन दुनिया भर में चर्चा थी सिर्फ बजरंग दल की। ये वो दल था जिसका गठन हिंदू धर्म की रक्षा के लिए हुआ था और उसने ही इंसानियत का कत्लेआम किया। मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा। लखनऊ : तारीख आज की ही थी लेकिन साल था एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे। जगह थी ओडिशा का क्योंझऱ जिला। इस दिन दुनिया भर में चर्चा थी सिर्फ बजरंग दल की। ये वो दल था जिसका गठन हिंदू धर्म की रक्षा के लिए हुआ था और उसने ही इंसानियत का कत्लेआम किया। मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा। उस दिन जो कुछ भी हुआ वो भारत के आधुनिक इतिहास का सबसे काला अध्याय था. . जानिए क्या हुआ था उस दिन लेकिन उससे पहले बहुत कुछ है जानने के लिए। ग्राहम स्टेंस एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में पैदा हुए। उनकी ओडिशा के सांतनु सतपथी से दोस्ती हो गई। कुछ समय बाद सांतनु उनको भारत आने का आग्रह करते हैं। एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में स्टेंस भारत आए स्टेंस ने इवैंजेलिकल मिशनरी सोसायटी ऑफ मयूरभंज के साथ मिल कुष्ठरोगियों का इलाज करने लगे। इसके बाद साल एक हज़ार नौ सौ बयासी में उन्होंने मयूरभंज लेप्रसी होम की स्थापना की। ये उस समय की बात है जब कुष्ठ रोग को बड़ा रोग माना जाता था और रोगी का सामाजिक वहिष्कार कर दिया जाता था। इसी सबके दौरान स्टेंस की मुलाकात ग्लैडिस से होती है। वे भी कुष्ठरोगियों की सेवा में लगी थीं। साल एक हज़ार नौ सौ तिरासी में दोनों ने शादी कर ली। दोनों के तीन बच्चे हुए। एक बेटी ईस्थर और दो बेटे फिलिप और टिमोथी। स्टेंस दिनों दिन लोकप्रिय हो रहे थे। यही वो दौर था जब चरमपंथी देश और इस राज्य में भी सिर उठा रहे थे। उन्हें स्टेंस की लोकप्रियता रास नहीं आ रही थी। स्टेंस के दोनों बेटे फिलिप और टिमोथी एक सात साल का दूसरा दस साल का। ऊटी में पढ़ते थे। जाड़े की छुट्टी में घर आए थे। बच्चे पापा से घूमने चलने की जिद्द करते हैं। स्टेंस को को मयूरभंज में एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। तो वो दोनों बेटों के साथ लेते हैं। शाम को घर लौटने से पहले वे तीनों पिकनिक के लिए मनोहरपुर गांव के बाहर कैंप लगाते हैं। फिर अपनी कार में सो जाते हैं। रात लगभग बारह बजे बजरंग दल नेता दारा सिंह अपने करीब साठ साथियों के साथ स्टेंस की कार को घेर लेते हैं। और हमला कर देते हैं। गाड़ी में तोड़फोड़ करने लगते है। स्टेंस हमलावरों के आगे रहम की भीख मांगते हैं। लेकिन हमलावर कुछ और ही सोच कर आए थे। तीनों को बुरी तरह बेरहमी से पीटते हैं। इसपर भी मन नहीं भरता तो पेट्रोल डाल कार को आग लगा देते हैं। कार जलने लगती है और इसमें ही एक बाप अपने दो बच्चों के साथ जल कर राख हो जाता है। स्टेंस पर बजरंग दल के दारा सिंह और अन्य कट्टरपंथी धर्मांतरण का आरोप लगाते थे। उसके मुताबिक स्टेंस आदिवासी इलाकों में ईलाज के नाम पर धर्मांतरण करते थे। हत्याकांड में पुलिस ने दारा सहित तेरह के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। दुनिया भर में आलोचना हुई। केंद्र में अटल बिहारी की सरकार थी। देश के अंदर और बाहर आलोचना हो रही थी। आरोपियों के बजरंग दल, विहिप और आरएसएस से संबंध बताए जाने लगे। परेशान पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी जांच के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी घटनास्थल पर भेजी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कईयों को आरोपी बताया। जांच हुई। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। कोर्ट ने दारा सिंह को फांसी और महेंद्र हेमब्रोम को उम्रकैद आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया।
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अमरावती/दि. 28- विगत कुछ दिनों से अमरावती शहर सहित जिले में पारा तेजी से नीचे लुढकना शुरू हुआ और अच्छी-खासी ठंड पडने लगी. वहीं मौसम विभाग द्वारा जताई गई संभावना आज उस समय पूरी तरह से सही साबित हुई. जब आसमान पर काले-घरे बादल छाने के साथ ही जिले के कई इलाकों में पानी की हलकी बौछारे बरसी. वहीं जिले के कुछ इलाकों में ओले भी गिरे. जिससे मौसम और वातावरण पूरी तरह बदल गया था.
बता दें कि, आज दिन की शुरूआत तो काफी हद तक सामान्य ही रही और मौसम भी लगभग खुला हुआ था. वहीं सुबह हवा कुछ अधिक सर्द थी. ऐसे में सुबह के समय अपने कामकाज के लिए घर से बाहर निकलनेवाले लोगबाग स्वेटर-मफलर पहनकर ही घरों से बाहर निकले. दोपहर तक अच्छी-खासी धूप खिली हुई थी. किंतु दोपहर के बाद अचानक ही आसमान पर काले-घने बादल छाने शुरू हो गये. साथ ही साथ जिले में कई स्थानोें पर बारिश की हलकी फुहारे बरसने की खबरें सामने आने लगी. आसमान पर छाये बादलों की वजह से आज दोपहर बाद सूरज का दिखाई देना बंद हो गया और 5 बजते-बजते अंधेरा छाने की शुरूआत हो गई थी. जिले में कुछ स्थानों पर बारिश की हलकी फुहारे बरसने की वजह से हवा में नमी का प्रमाण बढ गया था और इसके चलते ठंड भी कुछ अधिक बढ गई थी.
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अमरावती/दि. अट्ठाईस- विगत कुछ दिनों से अमरावती शहर सहित जिले में पारा तेजी से नीचे लुढकना शुरू हुआ और अच्छी-खासी ठंड पडने लगी. वहीं मौसम विभाग द्वारा जताई गई संभावना आज उस समय पूरी तरह से सही साबित हुई. जब आसमान पर काले-घरे बादल छाने के साथ ही जिले के कई इलाकों में पानी की हलकी बौछारे बरसी. वहीं जिले के कुछ इलाकों में ओले भी गिरे. जिससे मौसम और वातावरण पूरी तरह बदल गया था. बता दें कि, आज दिन की शुरूआत तो काफी हद तक सामान्य ही रही और मौसम भी लगभग खुला हुआ था. वहीं सुबह हवा कुछ अधिक सर्द थी. ऐसे में सुबह के समय अपने कामकाज के लिए घर से बाहर निकलनेवाले लोगबाग स्वेटर-मफलर पहनकर ही घरों से बाहर निकले. दोपहर तक अच्छी-खासी धूप खिली हुई थी. किंतु दोपहर के बाद अचानक ही आसमान पर काले-घने बादल छाने शुरू हो गये. साथ ही साथ जिले में कई स्थानोें पर बारिश की हलकी फुहारे बरसने की खबरें सामने आने लगी. आसमान पर छाये बादलों की वजह से आज दोपहर बाद सूरज का दिखाई देना बंद हो गया और पाँच बजते-बजते अंधेरा छाने की शुरूआत हो गई थी. जिले में कुछ स्थानों पर बारिश की हलकी फुहारे बरसने की वजह से हवा में नमी का प्रमाण बढ गया था और इसके चलते ठंड भी कुछ अधिक बढ गई थी.
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पवित्र कर लिया, लेकिन तुम्हारे 'दिल महि कपटु निवाज गुजार" और नमाज पढ़ कर तुम समझते हो, कि बहिश्त पहुँच जाओगे, लेकिन यह भी तुम्हारी भूल है । ' 'मसीति सिरू नाए' करके भों तुम खुदा तक न पहुँच सकोगे । इस प्रकार बांग, वजू, नमाज और मस्जिद का विरोध करते हुए भी उसने कुरान का विरोध नहीं किया, अपितु कुरान पर विचार न करके मुर्गीमार मुल्ला को भ्रम में पड़ा हुआ बताया है। इतना ही नहीं, तसबीह ( माला ) और इबादत ( प्रार्थना ) के चक्कर में पड़े हुए मौलवी को धिक्कारा है, क्योंकि वहाँ पवित्र भावनाओं का ही महत्त्वपूर्ण स्थान है । धार्मिक कृत्यों की दृष्टि से 'काजी मह रमजाना" कह कर रमजान के महीने में उसके रोजा रखने का विरोध किया हैं, क्योंकि वह 'रोजा धपै निवाज गुजारै" लेकिन उस नमाज और रोजे का क्या महत्त्व जिसके बाद भी 'दिल महि कपटु बना रहे । इस प्रकार जोरोजा धरै मनावै लहु सुप्रादति जीव संघारै ।
थापा देखि प्रवर नहीं देखे काहे कउ भख मारै ॥
इतना स्वार्थी बना रहे, कि अपने स्वाद के लिए हिंसा करे, उसका रोजा अवश्य ही बेकार है । उससे पूछा है, जब तुम सबमें एक ही खुदा व्याप्न बताते हों, 'तउ किउ मुरगी मारै'" लेकिन इस 'हलालु' का उसके पास कोई उत्तर नहीं । तब कबीर ने उसे सतर्क किया है, कि अब तो तू जबरदस्ती जुलम करता है और उसे 'हलालु' बताता है, लेकिन जब - 'दफतर लेखा माँगिऐ तब हौइगो कउन हवालु ।' यम के यहाँ तो लेखा देना ही होगा । वह तो मुरगी कुरबान करके हज्ज करने चल पड़ा। लेकिन यह नहीं विचारा, कि इस हज्ज का प्रभाव 'कउ तक ढाओ' - कब तक रहेगा । " इसीलिए कबीर ने शेख को समझाया कि जब दिल ही साफ नहीं, तो 'किश्रा हज काबै जाइ ।"" क्योंकि वहाँ खुदा नहीं मिल सकता । कबीर ने कुरबानी । करनेवाले काजी को समझाया कि हज करने के लिए जाते हुए मुझे तो रास्ते में ही 'मिलि खुदाय और वह - 'साई मुझ सिउ लरि परिश्रा तुझे किन्हि फुरमाई गाइ ।* साईं मुझसे यह कह कर लड़ पड़ा कि, तुझे गोबध की आज्ञा किसने दी है ? इतना ही नही कबीर कई हज्ज पर गया लेकिन जब 'मुखहु न बोलै पीर । * तो कबीर पूछता है, कि आखिर मेरी खता (दोष) क्या है ? काजी यदि अभी दोष न समझ सके, तो कबीर का क्या दोष; जो 'दखन देस हरि का बासा " न समझ कर केवल 'पछिमि लह मुकामा' समझता है, उसे कबीर कहता है, कि - 'दिल महि खोजि दिले दिलि खोजहु एही ठउर मुकामा । "" दिल में ही उसे अनुभव
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पवित्र कर लिया, लेकिन तुम्हारे 'दिल महि कपटु निवाज गुजार" और नमाज पढ़ कर तुम समझते हो, कि बहिश्त पहुँच जाओगे, लेकिन यह भी तुम्हारी भूल है । ' 'मसीति सिरू नाए' करके भों तुम खुदा तक न पहुँच सकोगे । इस प्रकार बांग, वजू, नमाज और मस्जिद का विरोध करते हुए भी उसने कुरान का विरोध नहीं किया, अपितु कुरान पर विचार न करके मुर्गीमार मुल्ला को भ्रम में पड़ा हुआ बताया है। इतना ही नहीं, तसबीह और इबादत के चक्कर में पड़े हुए मौलवी को धिक्कारा है, क्योंकि वहाँ पवित्र भावनाओं का ही महत्त्वपूर्ण स्थान है । धार्मिक कृत्यों की दृष्टि से 'काजी मह रमजाना" कह कर रमजान के महीने में उसके रोजा रखने का विरोध किया हैं, क्योंकि वह 'रोजा धपै निवाज गुजारै" लेकिन उस नमाज और रोजे का क्या महत्त्व जिसके बाद भी 'दिल महि कपटु बना रहे । इस प्रकार जोरोजा धरै मनावै लहु सुप्रादति जीव संघारै । थापा देखि प्रवर नहीं देखे काहे कउ भख मारै ॥ इतना स्वार्थी बना रहे, कि अपने स्वाद के लिए हिंसा करे, उसका रोजा अवश्य ही बेकार है । उससे पूछा है, जब तुम सबमें एक ही खुदा व्याप्न बताते हों, 'तउ किउ मुरगी मारै'" लेकिन इस 'हलालु' का उसके पास कोई उत्तर नहीं । तब कबीर ने उसे सतर्क किया है, कि अब तो तू जबरदस्ती जुलम करता है और उसे 'हलालु' बताता है, लेकिन जब - 'दफतर लेखा माँगिऐ तब हौइगो कउन हवालु ।' यम के यहाँ तो लेखा देना ही होगा । वह तो मुरगी कुरबान करके हज्ज करने चल पड़ा। लेकिन यह नहीं विचारा, कि इस हज्ज का प्रभाव 'कउ तक ढाओ' - कब तक रहेगा । " इसीलिए कबीर ने शेख को समझाया कि जब दिल ही साफ नहीं, तो 'किश्रा हज काबै जाइ ।"" क्योंकि वहाँ खुदा नहीं मिल सकता । कबीर ने कुरबानी । करनेवाले काजी को समझाया कि हज करने के लिए जाते हुए मुझे तो रास्ते में ही 'मिलि खुदाय और वह - 'साई मुझ सिउ लरि परिश्रा तुझे किन्हि फुरमाई गाइ ।* साईं मुझसे यह कह कर लड़ पड़ा कि, तुझे गोबध की आज्ञा किसने दी है ? इतना ही नही कबीर कई हज्ज पर गया लेकिन जब 'मुखहु न बोलै पीर । * तो कबीर पूछता है, कि आखिर मेरी खता क्या है ? काजी यदि अभी दोष न समझ सके, तो कबीर का क्या दोष; जो 'दखन देस हरि का बासा " न समझ कर केवल 'पछिमि लह मुकामा' समझता है, उसे कबीर कहता है, कि - 'दिल महि खोजि दिले दिलि खोजहु एही ठउर मुकामा । "" दिल में ही उसे अनुभव
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सोई मुसलमान है भाई । नबी नाम हर दम लौ लाई । रोजा कर कर खून बिचारा । ये गुनाह नहिं बक्सनहारा ।। झूठा रोजा झूठ निवाजा । झूठा करै अवाजा । वो साहिब की राह न पाई। सब जहान में रहा समाई ।। सोरठा-सेख तकी सुनि बात, ज्वाब स्वाल बोले नहीं । धर्मा जैनी जाति, संग बात कीन्ही सही ।
धर्मा नाम जाति इक जैनी । उन सब सुनी हमारी कहनी ॥ धर्मा स्रावग कहै बिचारी । जैन मता है सब से भारी । मति आदि साध नहिं जानै । तैं मत झूठा बाद बखाने । चौबीसौ तीथंकर जानी । आदि नाथ हैं हमरे स्वामी ॥ तिनकी आदि कहा तुम जानौ । नाहक बेगुन बादि बखानौ । सोरठा - ह्रिदे कहै सुनु बात, जैन मता पुनि सब कहौं । सुनौ भेद बिख्यात, आदि अंत सब समझ के ॥
हिरदे कहै सुनौ हो भाई । आदिनाथ की आदि सुनाई । जो तुम सुनौ कहौं विधि नाना । हम सब कहें सुनौ दै काना प्रथम जुगल्या धर्म बिचारी । आई छींक भये सुत नारी ॥ होते छींक प्रान तेहि जाई । कन्या पुत्र भये तेहि ठाई ॥ ता पीछे कुलकर की बाता । चित दे सुनौ कहौं बिख्याता ॥ चौधा कुलकर भेद बखाना । ता में नभ राजा इक जाना ॥ मुरा देबि तेहि भाखौं भेवा । जाकर ऋषवराय भये देवा ॥ भागवत कहै ताहि अवतारा । तिन का सुनौ आदि निखारा 11 ता ने तप कीन्हौ निखाना । मुक्ति पाइ पुनि काल समाना ॥ ऐसे भये चौबीसा । पुनि पुनि आये मुक्ति पदई । और ईसा ता में प्रथम ऋषवदेव होई । भाखा तिन जग थापा सोई ॥
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सोई मुसलमान है भाई । नबी नाम हर दम लौ लाई । रोजा कर कर खून बिचारा । ये गुनाह नहिं बक्सनहारा ।। झूठा रोजा झूठ निवाजा । झूठा करै अवाजा । वो साहिब की राह न पाई। सब जहान में रहा समाई ।। सोरठा-सेख तकी सुनि बात, ज्वाब स्वाल बोले नहीं । धर्मा जैनी जाति, संग बात कीन्ही सही । धर्मा नाम जाति इक जैनी । उन सब सुनी हमारी कहनी ॥ धर्मा स्रावग कहै बिचारी । जैन मता है सब से भारी । मति आदि साध नहिं जानै । तैं मत झूठा बाद बखाने । चौबीसौ तीथंकर जानी । आदि नाथ हैं हमरे स्वामी ॥ तिनकी आदि कहा तुम जानौ । नाहक बेगुन बादि बखानौ । सोरठा - ह्रिदे कहै सुनु बात, जैन मता पुनि सब कहौं । सुनौ भेद बिख्यात, आदि अंत सब समझ के ॥ हिरदे कहै सुनौ हो भाई । आदिनाथ की आदि सुनाई । जो तुम सुनौ कहौं विधि नाना । हम सब कहें सुनौ दै काना प्रथम जुगल्या धर्म बिचारी । आई छींक भये सुत नारी ॥ होते छींक प्रान तेहि जाई । कन्या पुत्र भये तेहि ठाई ॥ ता पीछे कुलकर की बाता । चित दे सुनौ कहौं बिख्याता ॥ चौधा कुलकर भेद बखाना । ता में नभ राजा इक जाना ॥ मुरा देबि तेहि भाखौं भेवा । जाकर ऋषवराय भये देवा ॥ भागवत कहै ताहि अवतारा । तिन का सुनौ आदि निखारा ग्यारह ता ने तप कीन्हौ निखाना । मुक्ति पाइ पुनि काल समाना ॥ ऐसे भये चौबीसा । पुनि पुनि आये मुक्ति पदई । और ईसा ता में प्रथम ऋषवदेव होई । भाखा तिन जग थापा सोई ॥
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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केसरीसिंहपुर के वार्ड 11 की निवासी संतरो ने पति जेठाराम के खिलाफ थाने में शिकायत की थी। संतरो का आरोप था कि उसका पति उसके साथ शराब पीकर मारपीट करता है। इस पर थाने के चार स्टाफ को थानाधिकारी वेदप्रकाश लखोटिया ने जेठाराम को पकडक़र लाने का आदेश दिया। थाने में लाने के पुलिस ने जेठाराम से समझाइश करने के बजाय उसे पट्टों से बुरी तरह पीटा। लगातार पीटने से उसके शरीर की चमड़ी लाल हो गई। उसे बैठने-उठने में भी परेशानी हो रही है।
पीडि़त ने केसरीसिंहपुर थानाधिकारी वेदप्रकाश व अन्य स्टाफ के खिलाफ एसपी से शिकायत की। इस पर एसपी हरेंद्र कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए श्रीकरणपुर डीएसपी सुनील पंवार को जांच सौंपी। युवक के साथ पुलिस की बर्बता की जानकारी मिलने के बाद पुलिस जवाबदेह समिति भी हरकत में आ गई और मामले में जांच की बात कही है।
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केसरीसिंहपुर के वार्ड ग्यारह की निवासी संतरो ने पति जेठाराम के खिलाफ थाने में शिकायत की थी। संतरो का आरोप था कि उसका पति उसके साथ शराब पीकर मारपीट करता है। इस पर थाने के चार स्टाफ को थानाधिकारी वेदप्रकाश लखोटिया ने जेठाराम को पकडक़र लाने का आदेश दिया। थाने में लाने के पुलिस ने जेठाराम से समझाइश करने के बजाय उसे पट्टों से बुरी तरह पीटा। लगातार पीटने से उसके शरीर की चमड़ी लाल हो गई। उसे बैठने-उठने में भी परेशानी हो रही है। पीडि़त ने केसरीसिंहपुर थानाधिकारी वेदप्रकाश व अन्य स्टाफ के खिलाफ एसपी से शिकायत की। इस पर एसपी हरेंद्र कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए श्रीकरणपुर डीएसपी सुनील पंवार को जांच सौंपी। युवक के साथ पुलिस की बर्बता की जानकारी मिलने के बाद पुलिस जवाबदेह समिति भी हरकत में आ गई और मामले में जांच की बात कही है।
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- मनो०प्र०८] स्वानुभूतिसंस्कृतस्वल्पाक्षरा हिन्दीव्याख्यासहित
उसको देह में ही प्राप्त हो गई तथा शुद्ध स्वरूप ही उसकी देह ( मन बुद्धि ) हो गई, उसमें लीन हो गई ॥ ४४ ॥
अथ मनोविजयादि बिना वेषधारी को दुर्दशावर्णन प्र० ८ बन ते भागा बिहड़े परा, करहा अपनी बान । वेदन करहा कासो कहै, को करहा को जान ॥४५॥ सद्गुरूणामलाभेऽपि ये त्यजन्ति गृहादिकम् । लभन्ते न विवेकेन तेषां दौस्थ्यमिदं शृणु ॥ १ ॥ यथा सिंहभयात्कश्चित्करी वेगानाबहिः । गच्छन् व्याधकृते गर्ते कामेन पतति स्वयम् ॥ २ ॥ यद् दुःखं जायते तस्य तत्र स्वस्थाविवेकतः । कमयं तद् ब्रवीतु स्वं दुःखं कश्च शृणोति वा ॥ ३ ॥ तथा मृत्युमुखाद् भीतो गृहादेश्य विनिर्गतः । अविवेकी नरो मोहात्कामाद्वा याति संसृतौ ॥ ४ ॥ गर्भादौ मृत्युकाले वा वेदना याऽस्य जायते । तां को वाऽत्र विजानाति शृणोत्येवात्र कस्तथा ॥ ५ ॥ "प्रवृत्तिलक्षणो योगो ज्ञानं संन्यासलक्षणम् । तस्माज्ज्ञानं पुरस्कृत्य संन्यसेदिह बुद्धिमान्" ॥ ६ ॥४५॥
करहा ( करो हाथो ) सिंहादि के भय से बन से भागा । परन्तु अपनी कामादिरूप बान ( स्वभाव ) से बन के किनारे में व्याध से रचित हस्तिनी के चित्र को देखकर व्याघा से रचित गढ़हे में पड़ गया तो उस समय की • वेदना को वह किससे कहे और उसको कौन जानता है कि जो मुक्त करे । इसी प्रकार अविवेकी पूर्ण वैराग्य रहित मनुष्य यदि दैहिक दुःखादि के भय से ग्रहादि से भाग कर योगी आदि बनता है, फिर अपनी आदतवश प्रपञ्च में फँसता है तो वह कष्ट भोगता है, पश्चात्ताप करता है, उसके उद्धार के लिये भी किसी को उपाय नहीं सूझता है, अनधिकारी को वेषधारी योगी आदि नहीं होना चाहिये । प्रथम भी कहा गया है कि "अब हम भयली बाहर जल मीना । शब्द ४६" ॥ ४५ ॥
बहुत दिवस ते हींड़िया, शून्य समाधि लगाय । करहा पड़िया गाड़ में, दूरि परा पछताय ॥४६॥
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- मनोशून्यप्रआठ] स्वानुभूतिसंस्कृतस्वल्पाक्षरा हिन्दीव्याख्यासहित उसको देह में ही प्राप्त हो गई तथा शुद्ध स्वरूप ही उसकी देह हो गई, उसमें लीन हो गई ॥ चौंतालीस ॥ अथ मनोविजयादि बिना वेषधारी को दुर्दशावर्णन प्रशून्य आठ बन ते भागा बिहड़े परा, करहा अपनी बान । वेदन करहा कासो कहै, को करहा को जान ॥पैंतालीस॥ सद्गुरूणामलाभेऽपि ये त्यजन्ति गृहादिकम् । लभन्ते न विवेकेन तेषां दौस्थ्यमिदं शृणु ॥ एक ॥ यथा सिंहभयात्कश्चित्करी वेगानाबहिः । गच्छन् व्याधकृते गर्ते कामेन पतति स्वयम् ॥ दो ॥ यद् दुःखं जायते तस्य तत्र स्वस्थाविवेकतः । कमयं तद् ब्रवीतु स्वं दुःखं कश्च शृणोति वा ॥ तीन ॥ तथा मृत्युमुखाद् भीतो गृहादेश्य विनिर्गतः । अविवेकी नरो मोहात्कामाद्वा याति संसृतौ ॥ चार ॥ गर्भादौ मृत्युकाले वा वेदना याऽस्य जायते । तां को वाऽत्र विजानाति शृणोत्येवात्र कस्तथा ॥ पाँच ॥ "प्रवृत्तिलक्षणो योगो ज्ञानं संन्यासलक्षणम् । तस्माज्ज्ञानं पुरस्कृत्य संन्यसेदिह बुद्धिमान्" ॥ छः ॥पैंतालीस॥ करहा सिंहादि के भय से बन से भागा । परन्तु अपनी कामादिरूप बान से बन के किनारे में व्याध से रचित हस्तिनी के चित्र को देखकर व्याघा से रचित गढ़हे में पड़ गया तो उस समय की • वेदना को वह किससे कहे और उसको कौन जानता है कि जो मुक्त करे । इसी प्रकार अविवेकी पूर्ण वैराग्य रहित मनुष्य यदि दैहिक दुःखादि के भय से ग्रहादि से भाग कर योगी आदि बनता है, फिर अपनी आदतवश प्रपञ्च में फँसता है तो वह कष्ट भोगता है, पश्चात्ताप करता है, उसके उद्धार के लिये भी किसी को उपाय नहीं सूझता है, अनधिकारी को वेषधारी योगी आदि नहीं होना चाहिये । प्रथम भी कहा गया है कि "अब हम भयली बाहर जल मीना । शब्द छियालीस" ॥ पैंतालीस ॥ बहुत दिवस ते हींड़िया, शून्य समाधि लगाय । करहा पड़िया गाड़ में, दूरि परा पछताय ॥छियालीस॥
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एक तरफ एक्साइज विभाग सरकारी खजाना भरने के लिए शराब ठेकेदारों को हर गली मोहल्ले में ब्रांच खोलने की परमिशन दे रहा है। वहीं दूसरी तरफ लोग इन शराब ठेकों के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। ठेकों के बाहर धरने देने लगे हैं। गोल्डन एवेन्यू में पिछले करीब एक हफ्ते से महिलाओं का प्रदर्शन चल रहा है। पहले महिलाएं ठेके के बाहर आकर विरोध जताती थीं, नारे लगाती थीं, लेकिन आज महिलाएं ठेके के बाहर धरने पर ही बैठक गई हैं।
महिलाओं ने आज ठेका खुलने नहीं दिया। महिलाएं गोल्डन एवेन्यू के बाहर स्थित बाजार में दुकानदारों के पास गईं और सभी से ठेके के विरोध में दुकानें बंद करने के लिए कहा। महिलाओं ने सारा बाजार शराब ठेके की ख़िलाफत में बंद करवा दिया। महिलाओं का कहना है कि जब स्कूल, डिस्पेंसरी इत्यादि की मांग की जाती है तो वह सरकार से पूरी नहीं होती और नशे की दुकानें अपनी मर्जी से सरकार कहीं पर भी खोल देती है।
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि आज एक्साइज विभाग ने शराब के ठेके को बंद नहीं करवाया तो वह अगला धरना सड़क पर लगाएंगी। उन्होंने सड़क जाम करने का पूरा मन बना रखा है। उन्होंने प्रशासन से लेकर एक्साइज विभाग में सभी अधिकारियों तक पहुंच बनाई और उन्हें समझाया कि रिहायशी इलाका है। महिलाएं-बेटियां रोज जिस रास्ते से आती जाती हैं, उस रास्ते पर ठेका खोलना उचित नहीं है।
ठेका खुलने से हर समय यहां पर शराबियों की तांत लगा रहेगा और उनका घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। उन्हें हफ्ता भर विरोध करते हो चुका है। पुलिस भी मौके पर आई थी, लेकिन कोई उनकी बात को सुनता ही नहीं है। अब सरकार-प्रशासन के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए उन्हें संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। जब शहर की सड़कों पर जाम लगेगा, तब जाकर प्रशासन और सरकार की निद्रा टूटेगी।
जालंधर नगर निगम के तहत आने वाले शहरी एरिया में एक्साइज विभाग ने शराब ठेकेदारों को गली मोहल्लों में भी अपनी शाखाएं खोलने की अनुमति दी है। एक्साइज विभाग ने 13 शराब के ग्रुपों को 10-10 उप ठेके खोने, यानी 130 नए सब ठेके खोलने की अनुमति दी है। एक्साइज विभाग ने शराब ठेकेदारों से नया ठेका खोलने के लिए 2 लाख रुपए एक्साइज ड्यूटी लेकर खजाने में जमा भी करवा दी है।
जिस तरह से एक्साइज विभाग ने गली मोहल्लों में शराब के ठेके खोलने के लिए अनुमति दी है, इससे उसे विरोध झेलना पड़ सकता है। गोल्डन एवेन्यू के बाद मॉडल हाउस में भी खुले एक नए ठेके का विरोध शुरू हो गया है। धीरे-धीरे विरोध की यह आग पूरे शहर में फैल सकती है। आने वाले दिनों में लोग शराब ठेकों के विरोध में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि गोल्डन एवेन्यू में तो इसकी शुरुआत हो चुकी है।
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एक तरफ एक्साइज विभाग सरकारी खजाना भरने के लिए शराब ठेकेदारों को हर गली मोहल्ले में ब्रांच खोलने की परमिशन दे रहा है। वहीं दूसरी तरफ लोग इन शराब ठेकों के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। ठेकों के बाहर धरने देने लगे हैं। गोल्डन एवेन्यू में पिछले करीब एक हफ्ते से महिलाओं का प्रदर्शन चल रहा है। पहले महिलाएं ठेके के बाहर आकर विरोध जताती थीं, नारे लगाती थीं, लेकिन आज महिलाएं ठेके के बाहर धरने पर ही बैठक गई हैं। महिलाओं ने आज ठेका खुलने नहीं दिया। महिलाएं गोल्डन एवेन्यू के बाहर स्थित बाजार में दुकानदारों के पास गईं और सभी से ठेके के विरोध में दुकानें बंद करने के लिए कहा। महिलाओं ने सारा बाजार शराब ठेके की ख़िलाफत में बंद करवा दिया। महिलाओं का कहना है कि जब स्कूल, डिस्पेंसरी इत्यादि की मांग की जाती है तो वह सरकार से पूरी नहीं होती और नशे की दुकानें अपनी मर्जी से सरकार कहीं पर भी खोल देती है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि आज एक्साइज विभाग ने शराब के ठेके को बंद नहीं करवाया तो वह अगला धरना सड़क पर लगाएंगी। उन्होंने सड़क जाम करने का पूरा मन बना रखा है। उन्होंने प्रशासन से लेकर एक्साइज विभाग में सभी अधिकारियों तक पहुंच बनाई और उन्हें समझाया कि रिहायशी इलाका है। महिलाएं-बेटियां रोज जिस रास्ते से आती जाती हैं, उस रास्ते पर ठेका खोलना उचित नहीं है। ठेका खुलने से हर समय यहां पर शराबियों की तांत लगा रहेगा और उनका घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। उन्हें हफ्ता भर विरोध करते हो चुका है। पुलिस भी मौके पर आई थी, लेकिन कोई उनकी बात को सुनता ही नहीं है। अब सरकार-प्रशासन के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए उन्हें संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। जब शहर की सड़कों पर जाम लगेगा, तब जाकर प्रशासन और सरकार की निद्रा टूटेगी। जालंधर नगर निगम के तहत आने वाले शहरी एरिया में एक्साइज विभाग ने शराब ठेकेदारों को गली मोहल्लों में भी अपनी शाखाएं खोलने की अनुमति दी है। एक्साइज विभाग ने तेरह शराब के ग्रुपों को दस-दस उप ठेके खोने, यानी एक सौ तीस नए सब ठेके खोलने की अनुमति दी है। एक्साइज विभाग ने शराब ठेकेदारों से नया ठेका खोलने के लिए दो लाख रुपए एक्साइज ड्यूटी लेकर खजाने में जमा भी करवा दी है। जिस तरह से एक्साइज विभाग ने गली मोहल्लों में शराब के ठेके खोलने के लिए अनुमति दी है, इससे उसे विरोध झेलना पड़ सकता है। गोल्डन एवेन्यू के बाद मॉडल हाउस में भी खुले एक नए ठेके का विरोध शुरू हो गया है। धीरे-धीरे विरोध की यह आग पूरे शहर में फैल सकती है। आने वाले दिनों में लोग शराब ठेकों के विरोध में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि गोल्डन एवेन्यू में तो इसकी शुरुआत हो चुकी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कलाकार सैल्वाटोर गरौ (Salvatore Garau) द्वारा बनाई गई "आई एम" (I Am) नामक एक अदृश्य मूर्ति (invisible sculpture) बेच दी गई है। AS.com की रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तिकला को एक आर्ट-रीट नीलामी घर में €15,000 में बेचा गया है। अब चूंकि मूर्ति अदृश्य है, इसका कोई भौतिक यानी फिजिकल प्रतिनिधित्व नहीं है और नए खरीदार को खरीद की प्रामाणिकता के लिए भुगतान की रसीद दी गई है।
बता दें कि इतालवी कलाकार ने एक अदृश्य मूर्ति की नीलामी की थी जिसके लिए किसी ने €15,000 का भुगतान किया है। AS.com की रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तिकला की कीमत € 6000 और € 9000 के बीच होने की उम्मीद थी, लेकिन बोली लगाने के बाद, इसे € 15,000 में बेचा गया है। अब मूर्ती की फिजिकल मौजूदगी की पुष्टि करने का एकमात्र तरीका नए मालिक का प्रामाणिकता का प्रमाण पत्र है, जहां एनएफटी कला के साथ समानताएं खींची जा सकती हैं। दरअसल, मूर्तिकला "आई एम" एक अभौतिक स्कल्पचर है जो भौतिक रूप में मौजूद नहीं है बल्कि इसके निर्माता के दिमाग में बनाई गई है।
गरौ ने अपनी रचना के बारे में बात करते हुए कहा कि 'उन्होंने कुछ और नहीं, बल्कि एक वैक्यूम यानी खालीपन बेचा है'। आर्ट-रीट ऑक्शन हाउस वेबसाइट पर उनके इंटरव्यू के अनुसार, उन्होंने कहा कि वैक्यूम ऊर्जा से भरी गति से ज्यादा कुछ नहीं है, हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, जो कहता है कि "किसी चीज में भी वजन नहीं है"। एक कलाकार के रूप में उनके पास अंतर्ज्ञान था, जिसके लिए विज्ञान द्वारा आध्यात्म और अमूर्त का समर्थन किया जाता है। उन्होंने कहा कि 'इसमें एक ऊर्जा है जो संघनित होती है और कणों में बदल जाती है'।
नीलामी वेबसाइट पर कलाकार के इंटरव्यू के अनुसार, गरौ द्वारा बनाई गई अन्य अदृश्य मूर्ति मिलान में पियाज़ा डेला स्काला में रखी गई 'Buddha in contemplation' है। एनएफटी और अमूर्त मूर्तियां संबंधित लग सकती हैं, लेकिन कलाकार का दृष्टिकोण अलग है। कलाकार के अनुसार, वे पूरी तरह से अलग हैं क्योंकि एनएफटी दृश्यमान छवियां हैं, ऑटोग्राफ किए गए जेपीजी हैं जिन्हें आप इकट्ठा करते हैं और जिन्हें स्क्रीन पर देखा जा सकता है। लेकिन, अदृश्य मूर्तियां सबसे निरपेक्ष तरीके से अद्वितीय, अनदेखी और अप्रतिष्ठित हैं। उन्होंने आगे कहा कि 'एनएफटी के उत्पादन के लिए प्रोसेसर की प्रोसेसिंग पावर में वृद्धि की जरूरत होती है, जबकि उनकी मूर्तियां पर्यावरण पर शून्य प्रभाव के साथ बनाई जाती हैं'।
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कलाकार सैल्वाटोर गरौ द्वारा बनाई गई "आई एम" नामक एक अदृश्य मूर्ति बेच दी गई है। AS.com की रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तिकला को एक आर्ट-रीट नीलामी घर में पंद्रह यूरो,शून्य में बेचा गया है। अब चूंकि मूर्ति अदृश्य है, इसका कोई भौतिक यानी फिजिकल प्रतिनिधित्व नहीं है और नए खरीदार को खरीद की प्रामाणिकता के लिए भुगतान की रसीद दी गई है। बता दें कि इतालवी कलाकार ने एक अदृश्य मूर्ति की नीलामी की थी जिसके लिए किसी ने पंद्रह यूरो,शून्य का भुगतान किया है। AS.com की रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तिकला की कीमत छः हज़ार यूरो और नौ हज़ार यूरो के बीच होने की उम्मीद थी, लेकिन बोली लगाने के बाद, इसे पंद्रह यूरो,शून्य में बेचा गया है। अब मूर्ती की फिजिकल मौजूदगी की पुष्टि करने का एकमात्र तरीका नए मालिक का प्रामाणिकता का प्रमाण पत्र है, जहां एनएफटी कला के साथ समानताएं खींची जा सकती हैं। दरअसल, मूर्तिकला "आई एम" एक अभौतिक स्कल्पचर है जो भौतिक रूप में मौजूद नहीं है बल्कि इसके निर्माता के दिमाग में बनाई गई है। गरौ ने अपनी रचना के बारे में बात करते हुए कहा कि 'उन्होंने कुछ और नहीं, बल्कि एक वैक्यूम यानी खालीपन बेचा है'। आर्ट-रीट ऑक्शन हाउस वेबसाइट पर उनके इंटरव्यू के अनुसार, उन्होंने कहा कि वैक्यूम ऊर्जा से भरी गति से ज्यादा कुछ नहीं है, हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, जो कहता है कि "किसी चीज में भी वजन नहीं है"। एक कलाकार के रूप में उनके पास अंतर्ज्ञान था, जिसके लिए विज्ञान द्वारा आध्यात्म और अमूर्त का समर्थन किया जाता है। उन्होंने कहा कि 'इसमें एक ऊर्जा है जो संघनित होती है और कणों में बदल जाती है'। नीलामी वेबसाइट पर कलाकार के इंटरव्यू के अनुसार, गरौ द्वारा बनाई गई अन्य अदृश्य मूर्ति मिलान में पियाज़ा डेला स्काला में रखी गई 'Buddha in contemplation' है। एनएफटी और अमूर्त मूर्तियां संबंधित लग सकती हैं, लेकिन कलाकार का दृष्टिकोण अलग है। कलाकार के अनुसार, वे पूरी तरह से अलग हैं क्योंकि एनएफटी दृश्यमान छवियां हैं, ऑटोग्राफ किए गए जेपीजी हैं जिन्हें आप इकट्ठा करते हैं और जिन्हें स्क्रीन पर देखा जा सकता है। लेकिन, अदृश्य मूर्तियां सबसे निरपेक्ष तरीके से अद्वितीय, अनदेखी और अप्रतिष्ठित हैं। उन्होंने आगे कहा कि 'एनएफटी के उत्पादन के लिए प्रोसेसर की प्रोसेसिंग पावर में वृद्धि की जरूरत होती है, जबकि उनकी मूर्तियां पर्यावरण पर शून्य प्रभाव के साथ बनाई जाती हैं'।
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सिक्किम में मंगलवार को 95 और लोगों को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक-सह-सचिव डॉ. पेम्पा टी भूटिया ने कहा कि पूर्वी सिक्किम जिले में 58 नए मामले सामने आए, जबकि दक्षिण सिक्किम में संक्रमण के 37 ताजा मामले सामने आए।
उन्होंने बताया कि इन नये संक्रमणों के साथ ही राज्य में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या 483 हो गई है, जबकि 299 लोग बीमारी से ठीक हो चुके हैं और एक मरीज की मौत हो गई है।
अब राज्य में कोरोना संक्रमितों की की कुल संख्या 783 हो गई है। वहीं राज्य में अब तक 28,091 नमूनों की जांच हुई है।
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सिक्किम में मंगलवार को पचानवे और लोगों को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाया गया। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक-सह-सचिव डॉ. पेम्पा टी भूटिया ने कहा कि पूर्वी सिक्किम जिले में अट्ठावन नए मामले सामने आए, जबकि दक्षिण सिक्किम में संक्रमण के सैंतीस ताजा मामले सामने आए। उन्होंने बताया कि इन नये संक्रमणों के साथ ही राज्य में अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या चार सौ तिरासी हो गई है, जबकि दो सौ निन्यानवे लोग बीमारी से ठीक हो चुके हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अब राज्य में कोरोना संक्रमितों की की कुल संख्या सात सौ तिरासी हो गई है। वहीं राज्य में अब तक अट्ठाईस,इक्यानवे नमूनों की जांच हुई है।
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UP: लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के उद्घाटन के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि हम ब्रह्मोस (BrahMos) इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि दुनिया का कोई देश भारत की तरफ बुरी नजर उठाकर देखने की जुर्रत न कर सके। उन्होंने कहा कि 'हम ब्रह्मोस मिसाइल बना रहे हैं, रक्षा के दूसरे हथियार बना रहे हैं तो दुनिया के किसी देश पर आक्रमण करने के लिए नहीं बना रहे हैं।
PM Modi visits Mandi: बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिमचाल प्रदेश पहुंचते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मंत्रिमंडल में शामिल अन्य लोगों ने उनकी आवभगत किया। उन्होंने प्रदेश की जनता को विकसित करने की दिशा में 1100 करोड़ रूपए के सौगात भी तय किया हुआ है।
Piyush Jain : कैसी थी पीयूष जैन की दिनचर्या वहीं, पीयूष जैन की दिनचर्चा की बात करें, तो उसके आसपड़ोस के लोगों का कहना है कि वो बिल्कुल सामान्य लोगों की तरह रहता था। हमेशा अपने घऱ के अंदर ही रहता था। किसी के लिए यह पता लगा पाना मुश्किल था।
यूपी विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सत्तारूढ़ बीजेपी दोबारा सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरों को आगे कर दोबारा सत्ता हासिल करना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी 2014, 2017 और 2019 का सूखा खत्म करना चाहती है। बीएसपी की सुप्रीमो मायावती 2014, 2017 और 2019 के चुनावों में भी अच्छा नहीं कर सकीं।
Madhya Pradesh: बता दें कि रविवार को ग्वालियर में दीनदयाल नगर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए थे। दरअसल, कांग्रेस विधायक सतीश सिंह सिकरवार पिछले कुछ वक्त से लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रशंसा करने और उन्हें सम्मान देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
Omicron: ऐसी स्थिति में इस विकराल स्थिति का सामना करने के लिए केंद्र सरकार अपनी सारी कोशिशों को परवान चढ़ाने की तैयारियों में जुट चुकी है। केंद्र की मोदी सरकार अपने सभी चिकित्सकीय लाव लश्कर को दुरूस्त करने की तैयारियों में जुट चुकी है।
Chandigarh Municipal Corporation Election Result: नतीजे की बात करें तो अभी तक तो आंकड़े सामने आए है उसमें भाजपा और आप के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, जबकि देश की सबसे पुरानी पार्टी एक बार फिर इस चुनाव में काफी पीछे नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी के चुनान में आ जाने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय दिख रहा है।
UP Election 2022: बता दें कि साल 2017 में यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे। राकेश टिकैत का घर भी मुजफ्फरनगर के सिसौली में है। वहीं, ओवैसी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में घूम-घूमकर मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा भी उठा रहे हैं।
VIDEO: न्यूनतम तापमान श्रीनगर में 2. 2, पहलगाम में माइनस 4. 1 और गुलमर्ग में माइनस 6. 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। द्रास कस्बे में रात का न्यूनतम तापमान माइनस 12. 2, लेह में माइनस 8. 4 और कारगिल में माइनस 7. 3 रहा। जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 9. 6, कटरा में 7. 4, बटोटे में 6. 0, बनिहाल में 2. 2 और भद्रवाह में 1. 6 है।
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UP: लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के उद्घाटन के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि हम ब्रह्मोस इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि दुनिया का कोई देश भारत की तरफ बुरी नजर उठाकर देखने की जुर्रत न कर सके। उन्होंने कहा कि 'हम ब्रह्मोस मिसाइल बना रहे हैं, रक्षा के दूसरे हथियार बना रहे हैं तो दुनिया के किसी देश पर आक्रमण करने के लिए नहीं बना रहे हैं। PM Modi visits Mandi: बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिमचाल प्रदेश पहुंचते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मंत्रिमंडल में शामिल अन्य लोगों ने उनकी आवभगत किया। उन्होंने प्रदेश की जनता को विकसित करने की दिशा में एक हज़ार एक सौ करोड़ रूपए के सौगात भी तय किया हुआ है। Piyush Jain : कैसी थी पीयूष जैन की दिनचर्या वहीं, पीयूष जैन की दिनचर्चा की बात करें, तो उसके आसपड़ोस के लोगों का कहना है कि वो बिल्कुल सामान्य लोगों की तरह रहता था। हमेशा अपने घऱ के अंदर ही रहता था। किसी के लिए यह पता लगा पाना मुश्किल था। यूपी विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सत्तारूढ़ बीजेपी दोबारा सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरों को आगे कर दोबारा सत्ता हासिल करना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी दो हज़ार चौदह, दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार उन्नीस का सूखा खत्म करना चाहती है। बीएसपी की सुप्रीमो मायावती दो हज़ार चौदह, दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार उन्नीस के चुनावों में भी अच्छा नहीं कर सकीं। Madhya Pradesh: बता दें कि रविवार को ग्वालियर में दीनदयाल नगर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए थे। दरअसल, कांग्रेस विधायक सतीश सिंह सिकरवार पिछले कुछ वक्त से लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रशंसा करने और उन्हें सम्मान देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। Omicron: ऐसी स्थिति में इस विकराल स्थिति का सामना करने के लिए केंद्र सरकार अपनी सारी कोशिशों को परवान चढ़ाने की तैयारियों में जुट चुकी है। केंद्र की मोदी सरकार अपने सभी चिकित्सकीय लाव लश्कर को दुरूस्त करने की तैयारियों में जुट चुकी है। Chandigarh Municipal Corporation Election Result: नतीजे की बात करें तो अभी तक तो आंकड़े सामने आए है उसमें भाजपा और आप के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, जबकि देश की सबसे पुरानी पार्टी एक बार फिर इस चुनाव में काफी पीछे नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी के चुनान में आ जाने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय दिख रहा है। UP Election दो हज़ार बाईस: बता दें कि साल दो हज़ार सत्रह में यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे। राकेश टिकैत का घर भी मुजफ्फरनगर के सिसौली में है। वहीं, ओवैसी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में घूम-घूमकर मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा भी उठा रहे हैं। VIDEO: न्यूनतम तापमान श्रीनगर में दो. दो, पहलगाम में माइनस चार. एक और गुलमर्ग में माइनस छः. शून्य डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। द्रास कस्बे में रात का न्यूनतम तापमान माइनस बारह. दो, लेह में माइनस आठ. चार और कारगिल में माइनस सात. तीन रहा। जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान नौ. छः, कटरा में सात. चार, बटोटे में छः. शून्य, बनिहाल में दो. दो और भद्रवाह में एक. छः है।
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सबसे पहले जो लोग अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, उन लोगों को अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि अदरक भूख कम करता है, जो वजन कम करने में मदद करता है। तो अगर आप वजन बढ़ाना चाहते हैं तो इसका सेवन से आप पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
हीमोफीलिया से ग्रसित लोगों के लिए अदरक का सेवन जहर के समान होता है, क्योंकि अदरक खाने से खून पतला होने लगता है, जो उनके शरीर के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसे लोगों को अदरक से कोसों दूर रहना चाहिए।
प्रेग्नेंसी के शुरूआती दौर में महिलाओं के लिए अदरक का सेवन करना अच्छा होता है, क्योंकि यह मॉर्निंग सिकनेस और कमजोरी को दूर करने में मदद करता है। वहीं आखिरी तिमाही महीनों में प्रेग्नेंट महिलाओं को अदरक के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से प्रीमेच्योर डिलीवरी और लेबर का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
जो लोग रेगुलर दवाइयों पर रहते हैं, ऐसे लोगों को अदरक खाने से बचाव करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि दवाइयों में मौजूद ड्रग्स जैसे बेटा-ब्लॉकर्स, एंटीकोगुलैंट्स और इंसुलिन अदरक के साथ मिलकर खतरनाक मिश्रण बनाते हैं, जो शरीर को हानि पहुंचाते है।
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सबसे पहले जो लोग अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, उन लोगों को अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि अदरक भूख कम करता है, जो वजन कम करने में मदद करता है। तो अगर आप वजन बढ़ाना चाहते हैं तो इसका सेवन से आप पर नकारात्मक असर पड़ेगा। हीमोफीलिया से ग्रसित लोगों के लिए अदरक का सेवन जहर के समान होता है, क्योंकि अदरक खाने से खून पतला होने लगता है, जो उनके शरीर के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसे लोगों को अदरक से कोसों दूर रहना चाहिए। प्रेग्नेंसी के शुरूआती दौर में महिलाओं के लिए अदरक का सेवन करना अच्छा होता है, क्योंकि यह मॉर्निंग सिकनेस और कमजोरी को दूर करने में मदद करता है। वहीं आखिरी तिमाही महीनों में प्रेग्नेंट महिलाओं को अदरक के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से प्रीमेच्योर डिलीवरी और लेबर का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। जो लोग रेगुलर दवाइयों पर रहते हैं, ऐसे लोगों को अदरक खाने से बचाव करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि दवाइयों में मौजूद ड्रग्स जैसे बेटा-ब्लॉकर्स, एंटीकोगुलैंट्स और इंसुलिन अदरक के साथ मिलकर खतरनाक मिश्रण बनाते हैं, जो शरीर को हानि पहुंचाते है।
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यह्रञ्जष्ठङ्खन्क्त्र (छ्वहृहृ, 30 स्द्गश्चह्ल): कोटद्वार में ट्यूजडे को भड़के उपद्रव को रोकने में पुलिस अधिकारियों की तरफ से की गई कश्मीर घाटी जैसी कवायद वेडनसडे को रंग लाई। व्हाट्सएप एवं फेसबुक सरीखे सोशल मीडिया पर वायरल होकर माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे फर्जी मैसेज व फोटो रोकने के लिए पुलिस ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद करा दीं। इसके चलते वेडनसडे को कोटद्वार के माहौल में तनाव तो दिखाई दिया, लेकिन हालात सामान्य होने की दिशा में चल पड़े।
ट्यूजडे को उपद्रव के बाद सिरफिरे लोगों ने इसे दंगा साबित करने के लिए व्हाट्सएप व फेसबुक जैसी सोशल साइटों पर वीडियो और फोटो अपलोड कर दिए। नतीजा, नजीबाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों में भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दूर-दराज बैठे 'अपनों' के मोबाइल फोन पर जब ऐसे मैसेज पहुंचे तो वे 'अपनों' की खबर लेने को फोन खड़खड़ाने लगे।
सोशल मीडिया में हुए ऐसे भ्रामक प्रचार के चलते ट्यूजडे लेट नाइट में ही पुलिस अलर्ट हो गई व दूरसंचार कंपनियों से वार्ता कर क्षेत्र में मोबाइल फोन पर चल रही टू-जी व थ्री-जी इंटरनेट सेवाओं को बंद करने की गुजारिश कर दी। प्रयास रंग लाया व वेडनसडे दोपहर तक क्षेत्र में मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई।
पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने व सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर दिया। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने बताया कि सोशल मीडिया के चलते अराजकता फैलाने वालों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
ट्यूजडे को कोटद्वार में हुए बवाल का असर वेडनसडे को थोड़ा कम होता दिखा, लेकिन तनाव बरकरार रहा। पुलिस ने फ्लैग मार्च कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। शाम तक धीरे-धीरे बाजार भी खुलने लगे। क्षेत्र में धारा 144 दूसरे दिन भी जारी रही। वेडनसडे मॉर्निग में करीब दस बजे से भाजपा सहित अन्य ¨हदू संगठनों से जुड़े लोग तहसील परिसर में पहुंचे व पूरे मामले में डीएम चंद्रशेखर भट्ट व एसपी अजय जोशी से वार्ता की। वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने हंगामा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज न करने, तोड़फोड़ के आरोप में गिरफ्तार युवक को गिरफ्तार करने व महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। करीब पौन घंटे की बातचीत के बाद भाजपाइयों ने अनिश्चितकालीन बंद का एलान वापस ले लिया।
मंगलवार को नगर क्षेत्र में उपद्रव फैलाने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर लिया। कोतवाल विजय सिंह ने बताया कि मामले में दो-तीन सौ लोगों के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने, राजकीय कार्यों में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। बताया कि तोड़फोड़ के मामले में पदमपुर-सुखरो निवासी मोहित कुकरेती को गिरफ्तार किया गया।
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यह्रञ्जष्ठङ्खन्क्त्र : कोटद्वार में ट्यूजडे को भड़के उपद्रव को रोकने में पुलिस अधिकारियों की तरफ से की गई कश्मीर घाटी जैसी कवायद वेडनसडे को रंग लाई। व्हाट्सएप एवं फेसबुक सरीखे सोशल मीडिया पर वायरल होकर माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे फर्जी मैसेज व फोटो रोकने के लिए पुलिस ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद करा दीं। इसके चलते वेडनसडे को कोटद्वार के माहौल में तनाव तो दिखाई दिया, लेकिन हालात सामान्य होने की दिशा में चल पड़े। ट्यूजडे को उपद्रव के बाद सिरफिरे लोगों ने इसे दंगा साबित करने के लिए व्हाट्सएप व फेसबुक जैसी सोशल साइटों पर वीडियो और फोटो अपलोड कर दिए। नतीजा, नजीबाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों में भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दूर-दराज बैठे 'अपनों' के मोबाइल फोन पर जब ऐसे मैसेज पहुंचे तो वे 'अपनों' की खबर लेने को फोन खड़खड़ाने लगे। सोशल मीडिया में हुए ऐसे भ्रामक प्रचार के चलते ट्यूजडे लेट नाइट में ही पुलिस अलर्ट हो गई व दूरसंचार कंपनियों से वार्ता कर क्षेत्र में मोबाइल फोन पर चल रही टू-जी व थ्री-जी इंटरनेट सेवाओं को बंद करने की गुजारिश कर दी। प्रयास रंग लाया व वेडनसडे दोपहर तक क्षेत्र में मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने व सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर दिया। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने बताया कि सोशल मीडिया के चलते अराजकता फैलाने वालों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। ट्यूजडे को कोटद्वार में हुए बवाल का असर वेडनसडे को थोड़ा कम होता दिखा, लेकिन तनाव बरकरार रहा। पुलिस ने फ्लैग मार्च कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। शाम तक धीरे-धीरे बाजार भी खुलने लगे। क्षेत्र में धारा एक सौ चौंतालीस दूसरे दिन भी जारी रही। वेडनसडे मॉर्निग में करीब दस बजे से भाजपा सहित अन्य ¨हदू संगठनों से जुड़े लोग तहसील परिसर में पहुंचे व पूरे मामले में डीएम चंद्रशेखर भट्ट व एसपी अजय जोशी से वार्ता की। वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने हंगामा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज न करने, तोड़फोड़ के आरोप में गिरफ्तार युवक को गिरफ्तार करने व महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। करीब पौन घंटे की बातचीत के बाद भाजपाइयों ने अनिश्चितकालीन बंद का एलान वापस ले लिया। मंगलवार को नगर क्षेत्र में उपद्रव फैलाने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर लिया। कोतवाल विजय सिंह ने बताया कि मामले में दो-तीन सौ लोगों के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने, राजकीय कार्यों में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। बताया कि तोड़फोड़ के मामले में पदमपुर-सुखरो निवासी मोहित कुकरेती को गिरफ्तार किया गया।
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Ranchi : पंडरा ओपी क्षेत्र के बाजरा में गैराज में बस के अंदर फंदे से झूलता युवक का शव बरामद हुआ है. युवक की पहचान गुमला जिले रायडीह थाना क्षेत्र के केम्टे करंजटोली निवासी एरूस खलखो तिरुपति के रूप में हुई है. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की छानबीन में जुटी हुई है.
जानकारी के मुताबिक मृतक युवक गैरेज में पहले गार्ड का काम करता था, लॉक डाउन में वह अपने गांव चला गया था. शुक्रवार को वह गैरेज में काम करने के लिए आया था, लेकिन मालिक ने गार्ड के रूप में किसी और व्यक्ति को काम दे दिया था. जिसके कारण उसे काम नहीं मिला. गैरेज मालिक से आग्रह कर के वह रात को गैरेज में रुका था. इसी दौरान शनिवार की सुबह लोगो ने बस के अंदर उसका शव लटका हुआ देखा. आसपास के लोगों ने हत्या की आशंका जाहिर की है, क्योंकि बस की छत की ऊंचाई देखकर ऐसा नहीं लगता है की कोई उससे लटक कर आत्महत्या कर सकता है.
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Ranchi : पंडरा ओपी क्षेत्र के बाजरा में गैराज में बस के अंदर फंदे से झूलता युवक का शव बरामद हुआ है. युवक की पहचान गुमला जिले रायडीह थाना क्षेत्र के केम्टे करंजटोली निवासी एरूस खलखो तिरुपति के रूप में हुई है. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की छानबीन में जुटी हुई है. जानकारी के मुताबिक मृतक युवक गैरेज में पहले गार्ड का काम करता था, लॉक डाउन में वह अपने गांव चला गया था. शुक्रवार को वह गैरेज में काम करने के लिए आया था, लेकिन मालिक ने गार्ड के रूप में किसी और व्यक्ति को काम दे दिया था. जिसके कारण उसे काम नहीं मिला. गैरेज मालिक से आग्रह कर के वह रात को गैरेज में रुका था. इसी दौरान शनिवार की सुबह लोगो ने बस के अंदर उसका शव लटका हुआ देखा. आसपास के लोगों ने हत्या की आशंका जाहिर की है, क्योंकि बस की छत की ऊंचाई देखकर ऐसा नहीं लगता है की कोई उससे लटक कर आत्महत्या कर सकता है.
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झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi) से एक अनोखा मामला सामने आया है जहां शादी (Marriage) के महज 17 दिनों बाद ही दूल्हे ने दुल्हन (Bride) को उसके प्रेमी के हवाले कर दिया। इसके साथ ही पुलिस थाने में एक एग्रीमेंट भी किया गया।
दरअसल, शादी के 17 दिन बाद दुल्हन अपने पति को छोड़कर अपने प्रेमी के पास भाग गई। इसके बाद लड़के के घरवालों ने इसकी खबर दुल्हन के घरवालों को दी और शक के आधार पर घरवाले दुल्हन के प्रेमी के घर पर पहुंचे और लड़की वहीं मिली। जिसके बाद दोनों परिवारों ने लड़की को खूब समझाया लेकिन उसपर प्यार का इतना भूत चढ़ा था कि वो मानने को तैयार नहीं हुई और अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद करने लगी। जिसके बाद पति ने अपनी पत्नी को प्रेमी को सौंपने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों पक्ष के परिजनों ने फैसला लिया कि लड़की को उसके प्रेमी के साथ ही रहने दिया जाए। वहीं 20 जुलाई को लड़की के प्रेमी को रातू प्रखंड मुख्यालय परिसर में बुलाया गया। जहां प्रेमी-प्रेमिका और दूल्हा पक्ष की ओर से एक एग्रीमेंट पेपर तैयार कर पति ने पत्नी को उसके प्रेमी के हवाले कर दिया।
बता दें कि झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेवनगर में रहने वाली एक युवती की शादी नजदीक के चिपरा निवासी युवक से 3 जुलाई को हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही दुल्हन अपने पति से दूर-दूर रहने लगी. वहीं, शादी के 17 दिन वह घर से भागकर अपने प्रेमी के पास आ गई। वहीं प्रेमी ने बताया कि उनका प्रेम संबंध डेढ़ साल से था, इसकी जानकारी प्रेमिका के परिजनों को भी थी। उसकी मां सब जानती थी फिर भी उसने छिपाकर शादी कर दी। शादी के बाद भी प्रेमिका ससुराल में नहीं रहना चाहती थी। 19 जुलाई को भी उसके ससुराल वाले जबरदस्ती लेकर चले गए थे। लेकिन अब वह उसके पास आ गई है। एग्रीमेंट पर साइन करते हुए प्रेमी ने कहा कि वह अपने प्यार को हर हाल में निभायेगा।
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झारखंड की राजधानी रांची से एक अनोखा मामला सामने आया है जहां शादी के महज सत्रह दिनों बाद ही दूल्हे ने दुल्हन को उसके प्रेमी के हवाले कर दिया। इसके साथ ही पुलिस थाने में एक एग्रीमेंट भी किया गया। दरअसल, शादी के सत्रह दिन बाद दुल्हन अपने पति को छोड़कर अपने प्रेमी के पास भाग गई। इसके बाद लड़के के घरवालों ने इसकी खबर दुल्हन के घरवालों को दी और शक के आधार पर घरवाले दुल्हन के प्रेमी के घर पर पहुंचे और लड़की वहीं मिली। जिसके बाद दोनों परिवारों ने लड़की को खूब समझाया लेकिन उसपर प्यार का इतना भूत चढ़ा था कि वो मानने को तैयार नहीं हुई और अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद करने लगी। जिसके बाद पति ने अपनी पत्नी को प्रेमी को सौंपने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों पक्ष के परिजनों ने फैसला लिया कि लड़की को उसके प्रेमी के साथ ही रहने दिया जाए। वहीं बीस जुलाई को लड़की के प्रेमी को रातू प्रखंड मुख्यालय परिसर में बुलाया गया। जहां प्रेमी-प्रेमिका और दूल्हा पक्ष की ओर से एक एग्रीमेंट पेपर तैयार कर पति ने पत्नी को उसके प्रेमी के हवाले कर दिया। बता दें कि झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेवनगर में रहने वाली एक युवती की शादी नजदीक के चिपरा निवासी युवक से तीन जुलाई को हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही दुल्हन अपने पति से दूर-दूर रहने लगी. वहीं, शादी के सत्रह दिन वह घर से भागकर अपने प्रेमी के पास आ गई। वहीं प्रेमी ने बताया कि उनका प्रेम संबंध डेढ़ साल से था, इसकी जानकारी प्रेमिका के परिजनों को भी थी। उसकी मां सब जानती थी फिर भी उसने छिपाकर शादी कर दी। शादी के बाद भी प्रेमिका ससुराल में नहीं रहना चाहती थी। उन्नीस जुलाई को भी उसके ससुराल वाले जबरदस्ती लेकर चले गए थे। लेकिन अब वह उसके पास आ गई है। एग्रीमेंट पर साइन करते हुए प्रेमी ने कहा कि वह अपने प्यार को हर हाल में निभायेगा।
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बिहार में अगुवानी घाट-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन पुल का बड़ा हिस्सा रविवार की शाम गिरने की घटना के बाद निर्माणाधीन पुल के आसपास रेड जोन बना दिया गया है. पुल के दोनों ओर पांच सौ मीटर तक आने जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. पुल के आसपास नाव का परिचालन नहीं होगा. इसके लिए पुलिस बल के साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती की गयी है.
इधर, भागलपुर व खगड़िया प्रशासन के वरीय अधिकारी साेमवार को घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. वहीं, इस हादसे में लापता सुरक्षा गार्ड का सोमवार शाम तक कोई सुराग नहीं मिल पाया. हालांकि भागलपुर जिला प्रशासन ने कहा है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी अब तक नहीं है.
उधर, पुल के अधिकारी अब तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे हैं. बेस कैंप कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर आलोक कुमार झा ने बताया कि एक्सपर्ट टीम से जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो पायेगा. बैठक जारी है. एक्सपर्ट टीम के आने की तैयारी हो रही है. बैठक कर सभी बिंदुओं पर विस्तार से विचार विमर्श किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि खगड़िया-अगुवानी-सुल्तानगंज के निर्माणाधीन पुल के स्ट्रक्चर गिरने के मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. संपूर्ण क्रांति दिवस के मौके पर गांधी मैदान स्थित लोकनायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्माणाधीन पुल का स्ट्रक्चर एकबार पहले और गिरा था. उस समय भी हमने पूछा था कि ऐसा क्यों हुआ है. 2012 में ही इस पुल के निर्माण करने का निर्णय किया गया था. 2014 में इसकी शुरुआत हुई. जानकारी मिली कि फिर से इसका स्ट्रक्चर गिरा है, तुरंत हमने विभाग के सभी अधिकारियों को कहा कि जाकर देखिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कीजिए.
सीएम ने कहा कि पुल का निर्माण कार्य मजबूत तरीके से हो, इसको लेकर भी हमने अधिकारियों को निर्देश दिया है. विपक्षी पार्टियों द्वारा सरकार पर लगाए जा रहे आरोप से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लोग कुछ भी बोलते रहते हैं, उनका काम सिर्फ बोलना है. जो हमारे साथ पहले उप मुख्यमंत्री थे, उनको पार्टी ने कोई जगह नहीं दिया है तो कुछ न कुछ तो बोलना ही है. आज के कार्यक्रम में उनलोगों को भी आना चाहिए था. वे लोग भी जेपी मूवमेंट से जुड़े हुए थे.
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बिहार में अगुवानी घाट-सुलतानगंज के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन पुल का बड़ा हिस्सा रविवार की शाम गिरने की घटना के बाद निर्माणाधीन पुल के आसपास रेड जोन बना दिया गया है. पुल के दोनों ओर पांच सौ मीटर तक आने जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. पुल के आसपास नाव का परिचालन नहीं होगा. इसके लिए पुलिस बल के साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती की गयी है. इधर, भागलपुर व खगड़िया प्रशासन के वरीय अधिकारी साेमवार को घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. वहीं, इस हादसे में लापता सुरक्षा गार्ड का सोमवार शाम तक कोई सुराग नहीं मिल पाया. हालांकि भागलपुर जिला प्रशासन ने कहा है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी अब तक नहीं है. उधर, पुल के अधिकारी अब तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे हैं. बेस कैंप कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर आलोक कुमार झा ने बताया कि एक्सपर्ट टीम से जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो पायेगा. बैठक जारी है. एक्सपर्ट टीम के आने की तैयारी हो रही है. बैठक कर सभी बिंदुओं पर विस्तार से विचार विमर्श किया जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि खगड़िया-अगुवानी-सुल्तानगंज के निर्माणाधीन पुल के स्ट्रक्चर गिरने के मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. संपूर्ण क्रांति दिवस के मौके पर गांधी मैदान स्थित लोकनायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्माणाधीन पुल का स्ट्रक्चर एकबार पहले और गिरा था. उस समय भी हमने पूछा था कि ऐसा क्यों हुआ है. दो हज़ार बारह में ही इस पुल के निर्माण करने का निर्णय किया गया था. दो हज़ार चौदह में इसकी शुरुआत हुई. जानकारी मिली कि फिर से इसका स्ट्रक्चर गिरा है, तुरंत हमने विभाग के सभी अधिकारियों को कहा कि जाकर देखिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कीजिए. सीएम ने कहा कि पुल का निर्माण कार्य मजबूत तरीके से हो, इसको लेकर भी हमने अधिकारियों को निर्देश दिया है. विपक्षी पार्टियों द्वारा सरकार पर लगाए जा रहे आरोप से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लोग कुछ भी बोलते रहते हैं, उनका काम सिर्फ बोलना है. जो हमारे साथ पहले उप मुख्यमंत्री थे, उनको पार्टी ने कोई जगह नहीं दिया है तो कुछ न कुछ तो बोलना ही है. आज के कार्यक्रम में उनलोगों को भी आना चाहिए था. वे लोग भी जेपी मूवमेंट से जुड़े हुए थे.
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मंचीय दृष्टि से गढ़वाली रंगमंच के विशेष अंग हैं, 110 मंच, लोक रंगमंच (2) कथानक, (3) पात्र, 140 विशिष्ट पात्र, 050 भाषा, 060 लोक विनोद का सूचक हास्य, 170 संगीत, 180 अभिनय शैली, 190 चरित्र चित्रण और 1100 लोकवाणी गढ़वाली लोकधर्मी मंच की सीमित स्थिति और स्थानीय रंग की प्रचुरता के बावजूद भी इसमें चरिच - चित्रण कार्य कुशलता से निभाया मिलता है। रामलीला और पौराणिक नाटकां मैं उनके नायक- चरित्रों की जानीमानी विशेषताओं को प्रस्तुत किया जाता है। चूंकि इनके आंगिक और वाचिक अभिनय में झटकेदार अभिनय की अधिकता रहती है इसलिए इसमें सूक्ष्म मनोभाव और दशाओं की अभिव्यक्ति कम होती है। पात्र, सांकेतिक अभिनय, अथवा हाव भाव द्वारा, सम्बन्धित पात्र के चरित्र को प्रस्तुत करते हैं। स्त्रियां, प्रायः मंच पर नहीं आती हैं। पुरूष सभी पात्रों का अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इसमें स्त्रियोचित लालित्य, लावण्य और कमनीय भावाभिव्यक्तियों की कमी पायी जाती है। नायक, दुष्टों अथवा खलनायकों के चरित्र का बखान करते हैं। इस तरह नायक खलनायक के दुर्गुणों का बखान करके, जनता की अपने प्रति श्रद्धा की भावना अर्जित करता है। इन मंचों पर प्रस्तुत लोक नाट्य में स्थानीय विश्वास, रीतिरिवाज, धर्म और जीवन से सम्बद्ध मान्यताओं का पूरा चित्र होता है। इनकी भाषा लोक की भाषा और इनके कथानक, संवाद, पात्र, चरित्र, संगीत और मंचीय सज्जा पूरी तरह लोक विश्वासों की देन होती है। इसमें वही अभिव्यक्त होता है जो लोक के व्यक्त - अव्यक्त जीवन में जुड़ा हुआ मिलता है। इनकी भाषा में लोकोक्तियों और कहावतों का प्रयोग किया मिलता है। स्वाँगों में रहस्यपूर्ण ढंग से हँसाने वाले वाक्यों और बादी बादीण की फूहड़ अभिव्यक्तियों को सुनकर लोग मंद-मंद मुस्कुराते मुँह दबाये आनन्द लेते हैं। ये स्त्री पुरुष दर्शक) कुछ देर के लिए उन्हीं के रंग में रंग जाते है। इस तरह इनमें लोक मानस के हंसने-राने से लेकर सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र के सभी विश्वास, संगीत-नृत्य, गीत अभिव्यक्तियां अनुभूति की समस्त दशाएं हास- परिहास और सामूहिक रंग-उमंग से नैकट्य है। जो लोक है वही अभिव्यक्त हुआ है इन गढ़वाली मंच पर। अतः 'लोकवार्ता के अन्तर्गत जो कुछ भी होता है और हो सकता है, वह इन मंचों पर अभिव्यक्त मिलता है। अतः लोक प्रवृति के इस स्वरूप का जो नैकट्य यहाँ उपलब्ध है और अभिव्यक्त है, उसे ही हम लोक भावों का सम्पूर्ण समावेश कह सकते हैं।
। लोकनाट्य-रामलीला - गढ़वाली लोकनाट्य में रामलीला का सर्वाधिक महत्व है। यह जनपदीय लोक नाट्य मंच की एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति है। यह माना जाता है कि हिन्दी साहित्य के आदिकाल (1375) के राम कथा के सर्जक तुलसी की रामायण के बाद ही इसका सृजन हुआ होगा और
तभी से यह वीर चरित्र वीर पूजा के रूप में गढ़वाली लोक नाट्य मंच पर आये हैं। यह तो नहीं कहा जा सकता कि तुलसी के पूर्व राम कथा नहीं थी तो भी राम चरित तो बाल्मीकि की संस्कृत कृत का मूल आधार रहा है। राम चरित तो लोक पूजनीय और सर्वत्र व्याप्त ही था । तुलसीकृत रामायण राम चरित मानस के बाद तो निस्संदेह राम की यह कथा हिन्दी के साथ, अनेक भाषा भाषी और उपबोलियों के मंचों पर प्रस्तत होने लगी। राम कथा का यह रूप क्षेत्रीय परिस्थितियों और स्थानीय रंग में रंगा है। इस कथा को एक विशिष्ट मंच पर गढ़वाल में प्रस्तुत किया जाता है । मंच का यह विधान पूरे गढ़वाल में सार्वभौम रूप में एक ही तरह का मिलता है। मंच - यह मंच सामान्यतः 15 से 20 फुट चौड़ा, 20 से 30 फुट लम्बा और लगभग 20 फुट ऊंचा होता है। मंच तीनों ओर से ढंका मिलता है। इस प्रदेश के साधारण मंच परभी प्रथम तथा द्वितीय मंच की व्यवस्था होती है। द्वितीय मंच के पीछे अथवा बगल में साज-सज्जा गृह बनाया मिलता है। इस साज-सज्जा गृह में अभिनेता सजते - संवरते हैं। यह मंच यवनिकाओं द्वारा दो भागों में विभक्त होता है। मुख्य यवनिका के बाद प्रथम मंच पर और द्वितीय यवनिका तथा द्वितीय मंच के बाद, प्रथम यवनिका टांकी मिलती है। मुख्य यवनिका में दोनों ओर बगल में पखवाड़े लगाये जाते हैं। प्रथम मंच के आगे खुला रंग मंच अथवा रंगभूमि होती है। इसके ऊपर बड़ी चाँदनी (चन्दोया) से इसे ढक दिया जाता है। रंगभूमि में ज्यादातर युद्ध अथवा नाट्य प्रस्तुति में आने वाले बड़े दृश्य प्रस्तुत किये जाते हैं यथा धनुष- भंग, गंगापार, श्री राम-रावण युद्ध के साथ अन्य युद्धों और दरबारों के दृश्य । रंगभूमि के एक ओर वाद्य यंत्र वादक बैठते हैं तथा दूसरी ओर अशोक वाटिका बनायी मिलती है। खुले रंगमंच के दायें - बायें तथा सम्मुख दर्शकगण बैठते हैं। इसी मंच से कुछ दूरी पर लंका बनायी जाती है। पखवाड़ों पर दायें - बायें विभिन्न देवी देवताओं के चित्र टांके जाते हैं। मुख्य यवनिका के बाद द्वितीय यवनिका तथा प्रथम यवनिका पर राज दरबारतथा जंगल-दृश्य अंकित मिलते हैं। नाट्य परम्परा के बदले मंगलाचरण प्रस्तुत किया जाता है। बड़े दृश्य, विविध प्रकार के संवाद, युद्ध, सभाएं तथा सीताहरण और लंका के दृश्य, खुले रंगमंच पर प्रस्तुत किये जाते हैं। 'सीटी' के निर्देश पर मुख्य यवनिका खोली तथा बंद की जाती है। इसे 'सीन ड्राप कहते है जिसमें मुख्य यवनिका बंद रहती है। दृश्य के चलते रंगमंच पर प्रवेश वर्जित होता है। परिस्थिति के अनुकूल विविध प्रकार के पर्दों का उपयोग किया जाता है। लम्बे सम्वाद प्रायः खुले रंगमंच पर ही प्रस्तुत किये जाते हैं।
कथानकरामलीला में प्रायः राम चरित मानस का कथानक नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह कथानक पद्य में, गेय रूप में प्रस्तुत किया मिलता है। इसमें रावण की तपस्या, रामजन्म, राम विवाह, वनवास, भरत मितलाप, सीताहरण और राम-रावण युद्ध के उपरान्त राजगद्दी राज्याभिषेक तक की कथावस्तु
होती है। इस तरह रामजन्म से लेकर रावण-मरण और लंका दहन तथा पुनः राम के राज्याभिषेक तक लीला अभिनीत की जाती है। कथानक दर्शकों के मन में रचाबसा होता है इसलिए इसके घटनाक्रम और दर्शकों की अनुभूतियों का तारतम्य बना रहता है। दर्शक की उत्सुकता बनी रहती है। पात्र - प्रायः जाने-पहचाने और पूर्व परिचित होते हैं । यथा राम, लक्ष्मण, सीता, भरत, दशरथ कैकेई, रावण - कुम्भकरणः और मेघनाद। पात्रों के प्रति दर्शकों के मन में संचित श्रद्धा होती है। वे जितने राम के प्रति श्रद्धावान होते हैं उतने ही रावण के प्रति भी होते हैं। स्त्री पात्रों का अभिनय प्रायः पुरुष ही करते हैं। राम के मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप, सीता के जगत जननी पूजन स्वरूप और हनुमान की भक्ति तथा भरत के भ्रातृप्रेम की प्रभावी प्रस्तुत की जाती है। भले और बुरे दोनों ही प्रकार के चरित्रों की अमिट छाप जनमानस के हृदय में अभिव्यक्त मिलती है। कथोपकथन- कथानक, पद्यात्मक संवाद शैली में प्रस्तुत किये जाते हैं। गेयरूप में दोहा, चौपाई और रागरागिनी भी प्रस्तुत की जाती है। गद्य-संवादों का प्रायः अभाव मिलता है। पद्यात्मक गेयता में रागात्मक तारतम्य का मिश्रण पाया जाता है। कथोपकथनों की स्वरिक अभिव्यक्ति दृश्य और परिस्थिति के अनुकूल कठोर और करूण, लालित्यमय, वीभत्सता व रौद्रता लिए मिलती है। ये संवाद गेयता लिए पद्यात्मक कथन है। अभिनय- अभिनय में आंगिक और वाचिक दोनों ही प्रयुक्त हुये मिलते हैं। अभिनय में कथ्य के अनुरूप भावाभिव्यक्ति मिलती है। जैसा पात्र, वैसा अभिनय होता है। स्त्री पात्रों के अभिनय में पुरूष पात्र सूक्ष्म भावाभिव्यक्ति और संवेदनशीलता लानेकी चेष्टा करते हैं। इनके अभिनय में मार्मिक संवेदनशीलता होती है । परशुराम-लक्ष्मण संवाद में, पात्रोचित शूरता वीरता और शौर्य तथा रावण के अभिनय में अहंकार का अहं स्वरूप मिलता है। आगिक अभिनय में, अंगों के संचालन में काफी उछल-कूद होती है। लक्ष्मण-परशुराम संवाद में गुस्से की फड़फड़ाहट तो राम के अभिनय में शीलता और शालीनता का अद्भुत समन्वय मिलता है। भाषा- राम चरित मानस की भाषा में ही, रामलीला प्रस्तुत की जाती है। इसके दोहा, चौपाई, राग और रागनियों की भाषा मधुर और रसयुक्त लगती है। गढ़वाल में पं. राधेश्याम कृत रामायण को राधेश्यामी रामायण की तर्ज पर गाने की प्रथा है। पात्रोचित भाषा का प्रयोग होता है। गैर पढ़ा-लिखा समाज भी रामायणकी अवधी को खूब समझता है, इसे हृदयंगम करता है। संगीत संगीत के लिए हारमोनियम के साथ, तबला तथा ढोलक का अधिक उपयोग किया जाता है। राग-रागनिया, राधेश्याम तर्ज में संगीत के तालबद्ध नियमों से आबद्ध मिलती है। प्रस्तुतियां संगीत शास्त्र के नियमानुकूल प्रणीत होती है। विशेष पात्र - संस्कृत नाटकों के विदूषक की तरह तो नहीं लेकिन कुछ उसी तरह रामलीला का यह पात्र,
पात्र नहीं विशेष पात्र होता है। यह पात्र अंग्रेजी का प्रोस्टर, यहां का व्यवस्थापक वक्ता अथवा आगामी कार्यक्रम अथवा प्रस्तुति के बारे में बताने वाला और पिछली प्रस्तुति की आख्या प्रस्तुत करने वाला और आगे की लीला का परिचय दर्शकों को देने वाला व्यक्ति है। इसे हमने रामलीला का विशेष पात्र कहा है। विदूषक की तरह यह अभिनयपूर्व हंसाने का काम तो नहीं करता लेकिन आगे मंचित की जाने वाली लीला के बारे में सूचना अवश्य देता है। जब भी पात्र अपना कथोपकथन भूल जाते हैं तो यह विशेष पात्र, धीमी और दबी आवाज में पात्रों को उनके कथोपकथन बताता चलता है। इसकी वेशभूषा भी साधारण ढंग की होती ह, पात्रों जैसी नहीं और इसी के निर्देश पर मंच का परदा उठाया अथवा गिराया जाता है। मंगलाचरण - लीला का प्रारम्भ मंगलाचरण द्वारा आरती उतार कर किया जाता है। मंगलाचरण के बाद यह विशेष पात्र व्यक्ति अथवा व्यवस्थापक अथवा प्रौम्टर, दर्शकों के सामने पूर्व प्रस्तुत लीला के विषय में वार्तालाप करता हुआ, वर्तमान में प्रस्तुत की जाने वाली लीला का परिचय दर्शकों को देता है । वह बताता है कि अब वह लीला प्रस्तुत की जा रही है और इसके पश्चात् लीला प्रारम्भ हो जाती है। यह विशेष पात्र पद्य के स्थान पर प्रायः गद्य का उपयोग अपने वार्तालाप में करता है ।
साजसज्जा- वेशभूषालीला के सभी पात्र पात्रों की सामाजिक स्थिति के अनुरूप वस्त्र धारण करते हैं। श्रृंगार के लिए चौक, गेरूआ रंग, काला कोयला के साथ आधुनिक, क्रीम और पाउडर इस्तेमाल किये जाते हैं । खासतौर से राम, सीता, लक्ष्मण औरभरत - शत्रुघ्न के मुख मण्डलों पर विविध प्रकार के रंग-रंगोली का उपयोग किया जाता है। पात्र अपने चरित्र के अनुरूप वस्त्र तथा शस्त्र धारण करते हैं। रावण की सेना के लोग काले वस्त्र, नेकर, कमीज तथा मुख पर राक्षसी मुखौटे धारण करते हैं। स्त्री पात्र सुन्दर वस्त्रों के साथ आकर्षक आभूषण भी पहनते हैं। सुपात्रों के पहनावे में शालीनता और शिष्टता का विशेष ध्यान रखा जाता है। सज्जागृह में पात्रों को सजाया एवं संवारा जाता है तथा यहीं से 'सीन' (विशेष प्रकरण के पात्र ) मुख्य मंच अथवा रंगभूमि मैं आगमन करते हैं। मंचीय दृष्टि से लोकधर्मी नाट्य परम्परा का यह मंच अधिक उन्नत और पूर्ण मिलता है। इस रंगभूमि में विविध प्रकार के बड़े दृश्य, सुगमतापूर्वक प्रस्तुत किये जाते हैं। परदों के सहारे राज दरबार, राज भवन तथा वन के अन्य बड़े दृश्य प्रस्तुत किये जाते हैं। खुली रंगशाला में युद्ध जैसे दृश्य प्रस्तुत कर, रोमांच पैदा किया जाता है। आज तो यंत्रों की सहायता से दृश्य परिवर्तन एवं साज-सज्जा सम्बन्धी नवीन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है ।
पौराणिक लोकनाट्य मंचलोक रंगमंच की, पौराणिक लोक नाट्यों की प्रस्तुति, एक प्राचीन परम्परागत प्रस्तुति है। पौराणिक कथानकों को लेकर चलने वाले ये नाटक 110 कृष्णजन्म 120 हरिश्चन्द्र 130 अर्जुन) 40 जयद्रथ वध(5) अभिमन्यु नाटक प्रमुख हैं। ये नाटक भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितनी लोक मंच पर रामलीला है। ये उतने ही प्राचीन है जितना कि लोकनाट्य मंच है। इनके प्रस्तुतिकरण के निमित्त सामान्य रंगमंचीय व्यवस्था मिलती है। तख्तों से तैयार किये गये इस मंच को बीच में परदा डालकर दो भागों में बांटा जाता है। प्रायः सभी नाटकों की प्रस्तुति के लिए इस मंच का ही उपयोग किया जाता है। नाट्य के सभी दृश्य की प्रस्तुति इसी एक रंगमंचीय मंच पर होती है। पीछे साज-सज्जा गृह में पात्र सजते - संवरते हैं और आगे वे अभिनय प्रस्तुत करते हैं। मुख्य यवनिका के बाद इस मंच पर एक ही यवनिका होती है जिसके पीछे से अभिनेता मंच पर प्रवेश करते हैं। यह यवनिका विभिन्न दृश्यों के परिवर्तन की सूचक भी होती है। संगीत वादक मुख्य मंच पर ही बैठते हैं । लीला के मंच की खुली रंगशाला व्यवस्था इन नाटकों के मंचों पर नहीं होती है। साज-सज्जा और मंचीय व्यवस्थाओं में यह मंच, लीला मंच की तरह परिपूर्ण नहीं होता है। दर्शक इसमें मुख्य यवनिका के साथ ही चिपके रहते हैं। दृश्यों के प्रस्तुतिकरण के पश्चात् मंच पर आना निषेध होता है।
कथानक- नाटकों के पात्र पौराणिक पात्र ही होते हैं जो दर्शकों के जाने-पहचाने होते हैं । यथा हरिश्चन्द्र नाटक में शैव्या, विश्वामित्र, मरघट, कफन फरोस, डोम, इत्यादि । इसी तरह अन्य नाटकों के जाने-पहचाने चरित्र होते हैं। पात्रों की चरित्र विशेषताओं के साथ अभिनय प्रस्तुत किया मिलता है तथा उनकी खूबियों और उनके गुणों को उसी रूप में प्रस्तुत करके जन-जन के हृदय में तारतम्य स्थापित करने की चेष्टा की जाती है।
कथोपकथन- इन नाटकों के कथोपकथन प्रायः 110 गद्य तथा 120 पद्य, दोनों ही रूपों में उपलब्ध मिलते हैं। रामलीला की तरह नाटकों में भी नाटकों की राधेश्यामी तर्ज का उपयोग किया जाता है। पद्यात्मक कथोपकथनों को बुलन्द आवाज में प्रस्तुत किया जाता है। मुख्य पात्रों की भूमिका कुशल अभिनेताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती है।
अभिनय - मुख्य आंगिक और वाचिक होते हैं। जोश-खरोश के साथ अंगाभिव्यक्ति की जाती है। उछल-कूद के साथ शौर्य प्रदर्शन किया मिलता है। स्त्री पात्रों की भूमिका पुरूष पात्र प्रस्तुत करते हैं। स्त्रियोचित कोमलता के अभाव के बावजूद इनके अभिनय में शीलता और शालीनता का अभाव नहीं होता है। ये अपने
आंगिक और वाचिक अभिनय द्वारा लोगों को विमोहित करते हैं। इसलिए ये नाटक लोगों द्वारा बहुत चाहे जाते हैं।
भाषा- सभी लोकाभिव्यक्तियां हिन्दी में प्रस्तुत की जाती हैं। लोगों की मातृ-भाषा अलग होने पर भी लोग इसे खूब समझते हैं। संगीत - हारमोनियम के साथ तबला तथा ढोलक का उपयोग किया जाता है। राधेश्यामी तर्ज मैं राग-रागनियाँ प्रस्तुत की जाती है । गद्यात्मक संवादों में संगीत का उपयोग नहीं किया जाता है। साज-सज्जा - वेशभूषा - अभिनेता पात्रानुकूल वेशभूषा धारण करते हैं। प्रायः मुकुट धारण किये जाते हैं। मुख की कांति बढ़ाने के लिए 'क्रीम' तथा 'पावडर' का इस्तेमाल किया जाता है। देहातों में उपलब्ध सौंदर्य उपकरणों का भी प्रयोग होता है। स्त्रियां गहने पहनती हैं तथा नकली जटाएं धारण करती है। नाटक का शुभारम्भ मंगलाचरण से होता है। इन नाटकों में भी विशेष पात्र- 'प्रास्टर' पात्रों को संवाद धीमी आवाज मैं नाटक की प्रस्तुति के बीच बताता चलता है और वह पात्र उन कर्थ्यो को ऊंची आवाज में, जनता के सामने प्रस्तुत करता है
बच्चों के अनुकरणात्मक नाटक- लोकधर्मी नाट्य परम्परा में बच्चों के इन अनुकरणात्मक नाटकों का बड़ा महत्व है। रामलीला तथा नाटकों की प्रस्तुति के बाद बच्चे प्रायः 110 रामलीला का अनुकरणात्मक और (2) नाटकों की प्रस्तुति के अनुकरणात्मक नाटक प्रस्तुत करते हैं। बच्चों के ये अनुकरणात्मक नाटक जनपद में बहुत प्रसिद्ध हैं और जहां देखिये वहां बच्चे खेल-खेल में, इनकी प्रस्तुति करते मिलते हैं। इन दो अभिव्यक्तियों की अनुकरणात्मक अभिव्यक्ति के अलावा बच्चे 10 बादी - बाण के नृत्य और (2) स्वाँगों की नकल भी प्रस्तुत करते हैं। रामलीला, नाटकों तथा स्वाँर्गों के अनुकरण के निमित्त निर्मित इनका रंगमंच, जहाँ ये अपनी अनुकरणात्मक अभिव्यक्ति की प्रस्तुति करते हैं, वह कोई खुला खेत, खुला खलिहान, देवालय अथवा पंचायती चौक होता है। इस खुले मंच पर बच्चे एकत्र होते हैं। छोटी-मोटी लकड़ियां गाड़कर उसके ऊपर चद्दर तानकर उसे मंच का स्वरूप देते हैं। इस मंच के पास ही उनका परदे से ढका अथवा परदा डालकर बनाया गया सज्जागृह भी होता है। इसमें वे चौक, गेरू और अगारे की कालिख का उपयोग रूप सज् में करते हैं।
कथानक- ये बच्चे अनुकरण किये नाटक, स्वाँग अथवा रामलीला की पूरी कथा को नहीं लेते हैं। ये इनके बीच-बीच के प्रसंगों को लेकर रामलीला, नाटक अथवा स्वाँग खेलते हैं। इसमें तारतम्य कथा की दृष्टि से नहीं होता लेकिन प्रसंगगत एकरूपता होती है। घटनाओं और प्रसंगों को ये काट छांट कर अथवा इधर से
उधर पकड़ कर, प्रस्तुत करते हैं। इनके कथानक इतने छोटे होते हैं कि प्रायः एक-दो घण्टे में ही ये सम्पूर्ण लीला, नाटक अथवा स्वाँग प्रस्तुत कर लेते हैं और कभी -कभी ऐसा भी होता है कि एक ही प्रसंग की प्रस्तुति में पूरी लीला अथवा नाटक समाप्त हो जाता है। पात्र और पात्र - सज्जा - बच्चों के अनुकरणात्मक नाटकों, लीला और स्वाँगों के पात्र सभी लीला नाटक और स्वाँगों के परिचित पात्र ही होते हैं। कोई राम, कोई सीता तो कोई रावण, हनुमान, भरत और दशरथ बन जाते हैं। ये पात्र कागज अथवा पत्रों के मुकुों से अपने आपको सजाते हैं। वेशभूषा और रंग सज्जा में स्थानीय साधनों का ये खूब प्रयोग करते हैं। बांस और चाई के धनुष-बाण बनाये जाते हैं। स्त्री पात्र धोती, अंगिया पहनते हैं। राक्षसों के मुँह पर काला मोसा ( अंगारे की कालिख पोता जाता है। कभी-कभी बच्चे बाँस की जड़ों से निकलने वाले बड़े मोटे और मजबूत पत्तों का इस्तेमाल मुखौटों के रूप में भी करते हैं।
कथोपकथन तथा अभिनय - प्रायः पद्य में ही कथा प्रस्तुत की जाती है। दोहा, चौपाई और राग-रागिनियों में ही, लीला अथवा नाटकों की तरह उत्तर दिये जाते हैं। गाने के साथ आंगिक अभिनय- अंग प्रदर्शन झटके साथ किया जाता है। तो भी कहीं-कहीं और कभी-कभी पद्य के साथ गद्य में भी कथोपकथन प्रस्तुत किये मिलते हैं। हाथ फैला - फैलाकर और कदम आगे बढ़ा- बढ़ा कर एवं छाती पर हाथ से जोर से प्रहार कर शौर्य का प्रदर्शन किया जाता है। मार काट और युद्ध के दृश्यों की प्रस्तुति में बच्चे अच्छी खासी दिलचस्पी प्रदर्शित करते हैं और इन अवसरों में से एक दूसरे से खूब लड़ाई - भिड़ाई भी करते हैं। धनुष बाण से रावण और राम की लड़ाई के मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किये जाते हैं जो बहुत रोचक और दिलचस्प होते हैं।
भाषा हिन्दी और तर्ज राधेश्यामी राग-रागिनियों की होती है। प्रायः पद्य के साथ गद्य अंश भी हिन्दी में प्रस्तुतकिये जाते हैं। ये छोटे बच्चे भी इन राग-रागिनियों का अर्थ भली भांति समझते हैं। संगीत- ये मधुर ध्वनि के साथ दोहा, चौपाई, राग-रागिनियाँ प्रस्तुत करते हैं। रावण के वध पर कंटर (कनस्तर) पीट कर राम की विजय की घोषणा करते हैं। वाद्य मंत्रों में कनस्तर पीटना और टिन के टुकड़े बजाना ही मुख्य अभिव्यक्ति है। नाटकों में से गद्य अंशों का अधिक उपयोग करते हैं। स्वाँगों की अनुकृति मैं ता। ये पूरे स्वाँगी ही बन जाते हैं। बादीगण की तरह धोती पहनकर नाचते हैं। सजावट के लिए पत्तों अथवा कागज के मुकुट पहनते हैं। बादी और बादीण द्वारा प्रयोग किये गये व्यंग्यों की सही और सटीक नकल उतारते हैं। इन व्यंग्य भरे कथोपकथनों में सामाजिक ढांचे में व्याप्त अनाचार और अत्याचार के खिलाफ आवाज रहती है तथा उसका व्यंग्य भरी वाणी से माखौल उड़ाया जाता है।
विशेष मंच - कहीं-कहीं बच्चे लकड़ी के चार डंडे खड़ा करके उसके तीनों ओर चादर लपेट लेते हैं और सामने कोई अच्छी सी सफेद चादर डालकर उसे मंच का स्वरूप दे देते हैं। इस मंच के बीच में एक अलग चद्दर डालकर ये इसके दो भाग कर लेते हैं। इस तरह इस रंगमंच पर ये अपने नाटक प्रस्तुत करते हैं। प्रायः यह भी देखने को मिलता है कि गांव के स्त्री पुरुष बच्चों के इन नाटकों, स्वाँगों और लीलाओं को देखने एकत्र हो जाते हैं और इनका आनन्द । ठाते हैं। रोशनी के लिए लालटेन का उपयोग किया जाता है। इन प्रस्तुतियों के अनुकरण के अतिरिक्त बच्चे, पाण्डव नृत्यों की नकल भी उतारते हैं। इसमें आंगिक, वाचिक दोनों तरह की प्रस्तुतियाँ होती है। इन पर अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव आते हैं, ये उन्हीं के अनुरूप बोलते हुंकारते और किलकारी मारते अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इन प्रस्तुतियों में भी कनस्तर पीटकर वाद्य यंत्रों की कमी पूरी की जाती है। इन्हें देखकर भी गांव के लोग आनन्द उठाते हैं। बड़े-बूढ़ों और नक्कालां की नकल उतार कर भी ये अनुकरणात्मक अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इस अनुकरण अथवा नकलबाजी में बच्चों को खूब आनन्द आत है और गाँव के बड़े-बूढ़े भी इनमें भाग लते हैं तथा इनसे आनन्द उठाते हैं। व्यक्तिपरक अभिव्यक्तियांक्रियाएं और अभिव्यक्तियों जिनमें आंगिक रूप में नाटकीयता अथवा लोकधर्मी नाट्य परम्परा के दर्शन मिलते हैं वे हैं- (1) पाण्डव नृत्यान्तर्गत व्यक्तिपरक देव विशेष के बल पौरूष का अभिव्यक्तिकरण X20 नृत्यान्तर्गत बाजा मांगने की प्रवृत्ति तथा 13) बाजों में पाया जाने वाला व्यक्तिपरक देवविशेष के पौरूष बखान की प्रस्तुति का एक अंग कह सकते हैं। सामूहिक नृत्य प्रदर्शन में अभिनय के साथ कथोपकथन भी साथ चलते हैं। खुले मैदान में ये नाचते व संवाद बालते चलते हैं तथा दूसरा व्यक्ति भावानुकूल अभिनय प्रस्तुत करता हुआ निर्देश देता है यथा, छांटो छड़बड़ कदम मिलेकी, माई मर्द का चेला, लाठी निभिलाने मइ, और भनासी मर्दों इत्यादि । इसमें नाटकीयता व कथोपकथनों का प्रयोग होता है। व्यक्तिपरक अभिनय में अर्जुन, भीम और नकुल, सहदेव के बल और पौरूष की नाटकीय अभिव्यक्ति अभिनेता अथवा नर्तक द्वारा की जाती है। इन अभिव्यक्तियों का मंच मण्डाण होता है। भीम देवता वाले पुरूष का अभिनय दर्शकों को रिझा देता है जिससे दर्शक झूम उठते हैं। इस मण्डाण के बीच बाजा मांगने की अभिनयात्मक अभिव्यक्ति, नर्तक, अभिनेता द्वारा की जाती है। कानों पर अंगुली रखकर अभिनेता संवाद शैली में कथानक प्रस्तुत करता है। इसे स्थानीय बोली मैं बाजा मांगना कहा जाता है। इसमें आंगिक अभिनय की प्रचुरता रहती है। नर्तक के साथ आवजी (औजी) भी एक कान पर अंगुली रखे रहता है तथा दूसरे हाथ से धीरे-धीरे ढोल पर थाप देता है। तीसरे प्रकार के बाजे के साथ पायी जाने वाली व्यक्तिपरक अभिव्यक्ति, देव विशेष के पौरुष के बखान
की प्रस्तुति है। नरसिंह और भगवती के नर्तक आंगिक अभिनय के अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करके, दर्शकों को चकित कर देते हैं। दर्शकों को इससे संतोष और आनन्द की प्राप्ति होती है। नाटकीय प्रवृत्ति का प्रदर्शन, इन व्यक्तिपरक नृत्याभिव्यक्तियों के अतिरिक्त 10 दो महिलाओं के झगड़े और 120 औरतो तथा पुरूषों द्वारा नकल किये जाने में भी मिलती है। औरतों के झगड़े में आंगिक तथा वाचिक दोनों ही प्रकार के अभिनयों की प्रस्तुति होती है। 120 औरतों अथवा पुरूषों द्वारा नकल की प्रवृत्ति के फलस्वरूप भी, नाटकीय प्रदर्शन का अनोखा दृश्य दर्शकों के सामने उपस्थित हो उठता है। आंगिक और वाचिक प्रदर्शन द्वारा ये एक मनोरंजक नाट्य प्रस्तुत कर देते हैं।
लोक नाट्य परम्परा की स्वाँग शैली -
गढ़वाल में स्वाँग की एक विशेष शैली है। यह गढ़वाली लोक धर्मी रंगमंच की एक महत्वपूर्ण और प्रमुख इकाई है । लोक जीवन में इसका बड़ा महत्व तथा मान है। गढ़वाली की स्वाँग की परम्परा की शैली को हम दो भागों में बांटते हैं। व्यवसायी तथा 120 अव्यवसायी अव्यवसायी से तात्पर्य एक ऐसी परम्परागत शैली से हैं जिसमें समायानुसार लोग मिलकर, स्वाँग प्रस्तुत करते हैं। लोगों द्वारा 'जोकरिंग' के नाम से जाने जाते हैं। समाज इन जोकरिंग को सुनना और देखना चाहता है। प्रायः ये हास्य प्रस्तुतियाँ- 'जोकरिंग- रामलीला और पौराणिक नाटकों की प्रस्तुति के बीच दिखाये जाते हैं। रामलीला और नाटकों के प्रसंगों के बीच, दर्शकों के मनोरंजनार्थ 'जोकरिंग' नाम की अभिव्यक्तियों की प्रस्तुति की जाती है। इस तरह नाटकों तथा लीला के बीच मंच पर प्रस्तुत इन लोकाभिव्यक्तियों की स्थानीय शैली को ही अव्यवसायी स्वाँग परम्परा नाम दिया गया है। जोकरिंग- हास्य प्रस्तुतियों की समयावधि अधिक से अधिक 15 से 20 मिनट तक होती है। इनका उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना होता है। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य सामान्यतः व्यंग्य है, सामाजिक अधिविश्वासों और ढ़िवादी प्रवृत्तियों पर कटाक्ष करना है। लोगों को रूढ़िवादिता के खिलाफ जागरूक बनाना है, शिक्षित करना है। इनके अभिव्यक्तिकरण में आवश्यकता से अधिक अभिनेयता और एक्शन होता है। पात्र 3 से 4 अथवा कभी-कभी दो भी होते हैं। इनकी वेशभूषा आकर्षक होती है। मुकुट और मुखौटे धारण किये जाते हैं। काले, नीले, पीले और लाल रंग से वे चेहरों को पोतते है। बहुरंगियों की तरह ये लोगों का मनोरंजन करते हैं। अभिनय में उछल-कूद अधिक मिलती है। अपने इस अभिनय में मसखरापन लाने के लिए ये अजीबो गरीब, आंगिक और वाचिक अभिनय प्रस्तुत करते हैं। लीला और नाटकों के बीचलोगइन प्रसंगों को देखना पसंद करते हैं। कुछ प्रसिद्ध स्वाँग हैः- 110 भूत भगाने का स्वाँग 120 बूढ़े को पैसो के लोभ में लड़की बेचने का स्वाँग 130 वाक्या से रोग का निदान ढूढ़ने
का स्वॉग 140 पाखण्डी जोगियों के स्वाँग तथा सटक बाबा इत्यादि (5) शराब और उसकी बुराइयों के स्वाँग और 060 शिक्षा के महत्व को दर्शाने वाले स्वाँग । इनसे मनोरंजन के साथ जनता को शिक्षा भी मिलती है। इनकी भाषा प्रायः हिन्दी तथा कभी-कभी स्थानीय बोली भी होती है। पेशेगत कला के रूप में, स्वाँग लोक नाट्य मंच की एक ऐसी प्रस्तुति है जो कि आदिकाल से आज तक अपने मूलरूप में जीवित मिलती है। यद्यपि यह नहीं कहा जा सकता है कि इन स्वाँगों का आदि रूप ऐसा ही रहा होगा तो भी स्वर्गों के साथ 'औसर' शब्द की उपलब्धि इस बात का संकेत करती है कि अपने मूल रूप में यह प्रस्तुति किसी और रूप मैं रही होगी। 'औसर' के साथ आज अश्लीलता का पुट होने का जो संकेत है वह 'ओसर नाट्य' के नैतिक दृष्टि से नीचे स्तर का होने का संकेत करता है। यह कि इनमें हंसाने के लिए, मनोरंजन के लिए भोड़े, गंवारू और अश्लील शब्दों का प्रयोग होता था।
स्वॉग - शैली -
स्वाँग शैली ही गढ़वाली लोक धर्मी नाट्य परम्परा की मूल शैली है। इसका अपना रंगमंच है। अपनी भाषा है और अपने शैलीगत कथोपकथनों के साथ इसमें परम्परागत पेशेगत व्यवसायी प्रवृत्ति मिलती है। प्रत्येक वर्ष इस वर्ग और जाति के लोग इन नाट्यों का प्रदर्शन करते हैं। इन स्वाँगों के प्रदर्शन के पीछे धार्मिक आस्था और शिव जी के वरदान की बात, ये पेशेवर लोग करते हैं। स्वाँग मैं लोकोत्सव लाँग परम्परा अति प्राचीन है। वैदिक काल में जिस तरह अश्वमेघ और पुरुष मेघ यज्ञ की परम्परा थी, उसी तरह पार्वत्य प्रदेश में लॉग X वेदार्त, भडयाणा औसर - स्वाँग की ) यज्ञ द्वारा औंसर गायन ( इतिहास किया जाता था) द्वारा तत्कालीन समाज के हित चिन्तक, श्रेष्ठजनों की गाथायें और कालान्तर में प्राचीन नरेशों की शौर्य गाथाएं गाई जाती थी, उनका यश गान किया जाता था । मानव की इस आदिम अभिव्यक्ति जिसमें गीत, नृत्य, और अभिनय तीन एक रूप में प्रस्तुत हुये हैं, ने लोक नाट्य को जन्म दिया है और यह लोक नाट्य की परम्परा ही आधुनिक नाट्य कला की जनक मानी जाती है। इसका स्वरूप हमेशा लोक धर्मी रहा है इसलिए लोक जीवन से लोकोत्सव का अत्यन्त घनिष्ठ सम्बन्ध है और ये लोकोत्सव आज भी लोक जीवन से जुड़े हैं।
लाँग - लॉग लोकोत्सव में, नौ गांठ वाले बांस को, गांव के मध्य-स्थल (पंचयती चैक इत्यादि) पर गाड़ दिया जाता है। इस बांस के ऊपरी सिरे पर रस्सी इस तरह बांध दी जाती है कि लॉग उत्सव प्रस्तुतकर्ता, पेट के बल बाँस के ऊपरी हिस्से से चारों ओर घूम सके। इस खड़े बांस के डन्डे को लॉग ) कहीं-कहीं लाक भी कहा जाता है। 10 से 15 दिन और कहीं-कहीं महीने भर, ये लोकोत्सवकर्ता आम जनता का
मनोरंजन करते हैं। इस उत्सव के आयोजन के एक अथवा दो दिन पहले साये लोग, नृत्य और संगीत के साथ एक विशेष प्रकार की अभिनयात्मक प्रस्तुति का प्रस्तुतिकरण भी करते हैं। इसे औंसर कहा जाता है। औंसर की अभिनयात्मक प्रस्तुतियों में 10 महादेव पार्वती का स्वाँग 120 कुटनेटी का स्वाँग 130 बुढ़या का स्वाँग और 140 ढाकरिया का स्वॉग प्रमुख हैं। इन प्रस्तुतियों के साथ वर्तमान में जहां कहीं भी और जैसे भी इस उत्सव के आयोजन का मौका मिलता है, ये लोग सामाजिक समस्याओं, अंधविश्वासों और कुरीतियों पर भी तिलमिलाने वाला आघात करते हैं। वैसे अब इन लोकोत्सब का आयोजन प्रायः बंद जैसा हो गया है। इसका कारण समय के साथ, प्रस्तुति के समय, नर्तकों की ऊंचे डन्डे से गिरकर मौत होना अथवा रस्सी से फिसलकर, प्राणांत का भय भी रहा है, और है। औंसर स्वाँगों की प्रस्तुति के समय नायक-नायिकाएं अपने आपको वस्त्राभूषणों से सजाते-संवारते हैं। मुंह पर मुखौटे पहनते हैं। अपनी वेशभूषा और रूप आकर्षक बनाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं । अन्तिम दिन, जिस दिन कि लोकोत्सव लॉग की आकर्षक प्रस्तुति की जानी होती है, उससे एक दिन पूर्व ये महादेव का स्वाँग निकाल कर इस स्थान परआते हैं जहां बीस गाड़ा गया होता है और उक्त आकर्षक प्रस्तुति की तैयारी करते हैं। गढ़वाल में जिस प्रकार राम कथा मंच पर राम की लीलाएं प्रस्तुत की जाती है उसी तरह गढ़वाली लोक रंगमंच की स्वाँग परम्परा में, राम कथा मंचन से बहुत पहले, इन स्वाँगों में महादेव और पार्वती की कथाओं का मंचन होता था। इस तरह लोक रंगमंच की परम्परा में स्वाँगों में महादेव-पार्वती का चरित्र चित्रण और उनकी कथा का प्रस्तुतिकरण, रामकथा मंच के पूर्व ही, इसी मंच पर प्रतिष्ठित और प्रचलित था ।
लॉग वाले स्थान पर आकर ये लोग, महादेव और पार्वती की आरती उतारते हैं और मुखौटा तथा जटा जिसे कि प्रस्तुतकर्ता धारण करते हैं, उसे लॉग के पास स्थापित कर देते हैं। नाट्य प्रस्तुतकर्ता को स्नान कराया जाता है । जिस गांव में यह आयोजन होता है, उस गांव के 'प्रधान' को दान किया जाता है। इस उत्सव की यह विशेषता है कि जिस गांव में देवालय (मंदिर) होते हैं, वहां प्रस्तुतकर्ता रस्सी के सहारे काठ के घोड़े पर सवार होकर ऊपर से नीचे की ओर खिसकता हुआ, अपना खेल प्रदर्शित करता है। लेकिन ऐसे गांव, जहां देवालय नहीं होते, वहां ये लॉग (बांस का डन्डा ) पर चढ़कर उत्सव की प्रस्तुति करते हैं। लेकिन जिस प्रस्तुतिमें रस्सी के सहारे काठ की घोड़ी पर पेट के बल, टिक कर नीचे उतरना है उसे इस उत्सव की भाषा में 'कठवादी रणाया' जाना कहा जाता है। लाँग में प्रस्तुतकर्ता बाँस के डन्डे के ऊपरी शिरे पर चढ़ता है और पेट के बल, नाभि के बीचों बीच शरीर का संतुलन बनाकर चारों ओर घूमता है ॥ प्रस्तुतकर्ता द्वारा पेट के बल घूमने की इस क्रिया को 'खण्ड खेलना' कहा जाता है। पहला 'खण्ड' (चक्कर महादेव
के नाम का होता है । इसके बाद पंचनाम देवता और गांव के प्रधान के नाम 'खण्ड' खेलने का रिवाज है। वाद्य यंत्र खासतौर से, ढोल दमाऊं और ढोलक से संगीत की एक विचित्र रोमांचक स्थिति पैदा की जाती हैं। इससे दर्शकों के हृदय में अद्भुत रोमांच पैदा होता है। इस नाद को सुनकर और दृश्य को देखकर, दर्शक आत्मविभोर हो उठते हैं। खण्ड खेलने से पूर्व प्रस्तुतकर्ता लाँग के नीचे खड़े लोगों के सवालों का उत्तर भाले-भाले कहकर देता है। वाद्य यंत्रों को जोर-जोर से पीटते और ढोलक पर रामांचक स्थिति पैदा करने वाले वादक, इस लोकोत्सव लॉग की एक अजीब कथा सुनाते हैं। पार्वत्य प्रदेश की यह प्रस्तुति राजस्थान के तुर्रा और कलंगी का मिला जुला स्वरूप है जिसमें शिव और शक्ति पार्वती के उपासक, शिव पार्वती के यशोगान के माध्यम से नरेशों का यशगान करत है। इस लोकोत्सव में देवों और गांव प्रधान पंच नामदेवताओं, सती-सावित्रियों और भरों, नागराज, स्थानीय देवों के साथ दानी राजाओं - सामन्ती के यश का वर्णन करते हैं। दृष्टव्य है कथा का मूलपाठ - जब 'बरमा' के दरबार में बंटवारा हो रहा था तब वहां हर एक जाति के लोग थे। लेकिन वहां विधाधर बादी नहीं था। दूसरे जाति के लोगों को हिस्सा मिलता देखकर, विधाधर जाति का पुरूष दौड़ेकर शिव जी के पास गया और उनसे बोला 'महाराज मैं यहां आत्म हत्या करता हूँ क्योंकि मेरे पास कोई बांठा नहीं है। शिवजी के पास ही पार्वती बैठी थी। उन्होंने विधाधर की बात सुनकर महादेव जी से कहा 'इन्हें इनका हिस्सा दे दूं।" पार्वती जी की बात सुनकर महादेव जी ने कहा 'जाओ तेरा हिस्सा जमीन जोतने वालों किसानों की फसल से मिलेगा। तुम नौ गांठ की लाँग लगाना । उस पर चढ़कर अपने कर्तव्य दिखाना । फिर तुम्हें, तुम्हारा हिस्सा मिल जायेगा । उस दिन से किसानों के जिम्मे विधाधरों का हिस्सा लग गया। तभी से ये प्रस्तुतकर्ता विद्याधर भाले - भाले कह कर अपनी सहमति व्यक्त करता है।
उत्सव की समाप्ति का दृश्य भी रोमांचक होता है। प्रस्तुतकर्ता अपने प्रदर्शन के पश्चात् लाँग से उतरता है। लोग उसे घेर लेते है। उसकी आरती उतारते हैं और बारी-बारी से गांव के पंच हिस्सेदार विद्याधर के बालों को धोते हैं। बादी/ विधाधर) के ये बाल बहुत पवित्र माने जाते हैं। इसलिए अक्सर बालों को छूने मैं छीना-झपटी हो जाती है। और ऐसा भी देखा गया है कि बादी (विधाधर) लहूलुहान हो उठता है। लोग उसके विधाघर) बालों को नोच लेते हैं और उन्हें अपने पूजागृह में रखकर उनकी पूजा करते हैं।
ऐसा विश्वास है कि लाँग लोकोत्सव के आयोजन से महामारी और बीमारियाँ ठीक होती है। इसलिए विधाधर के बाल, पवित्र और रक्षक समझे गये हैं। कैप्टन ठाकुर शूरबीर सिंह पवार ने अपने लेख
"वडवार्त" में उल्लेख किया है कि ऐसे लोकोत्सव अकाल, महामारी तथा बीमारी जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं के निवारणार्थ किये जाते थे। जिनके उद्देश्य के बारे में अंग्रेज कमिश्नर मिस्टर मूर क्राफ्ट ने फरवरी 1820 में बच्चू बेड़ा से इन आपदाओं के निवारणार्थ किये गये आयोजन की उपयोगिता और उपादेयता के बारे में विचार-विमर्श किया था। देर-सबेर महाराज कीर्तिशाह ने सन् 1910 में "लांग" और "वडवार्त" पर प्रतिबंध लगाकर उसे बंद करा दिया था। इसी तरह सन् 1930 टिहरी राज्यान्तर्गत जौनपुर परगना के थत्यूड़ ग्राम में जनता द्वारा आयोजित लांग - वेडवार्त. टिहरी दरबार के आदेश से बंद की गयी थी। गांव के पंच और प्रधान तथा आम जनता जब विधाधर के बालों को छूती है तो विधाधर उन्हें जमीन के अपने हक की याद दिलाता है, उन्हें कसमें खिलाता है ताकि प्रत्येक फसल पर उसे अपना हक मिल सके। वाद्ययंत्रों की आकर्षक और उत्तेजना युक्त गर्जना के बीच, विधाधर लांग के ऊपर घूमता "भाले-भाले" कहता, खण्ड खेलता हुआ क्रम से निम्नांकित कविता का जोर-जोर से वाचन करता हैःखण्डबाजे हो खण्ड बाजे पंचनाग देवताओं को, खण्ड बाजे गांव की भगवती को, खण्ड बाजे नरसिंह नागराजा को, खण्ड बाजे भैरों, निरंकार को, खण्ड बाजे गांव के प्रधान को, खण्ड बाजे सतधर्मी नारियों को, खण्ड बाजे दानी राजाओं को, खण्ड बाजे
पंच हिस्सेदारों को, खण्ड बाजे।
और इस अंतिम प्रस्तुति के साथ समाप्त होता है, पार्वत्य प्रदेश का लोकोत्सव लांग और उसकी आकर्षक प्रस्तुति ।
कठबादी - लाँग की तरह ही कठबादी रड़ाया जाना लोक नाट्य की दूसरी प्रस्तुति है। जहां देवालय नहीं होते तात्पर्य जिस गांव में मन्दिर नहीं होते वहां विधाधर (बादी) काठ के घोड़े पर पेट के बल सवार होकर ऊँचे स्थान से नीचे स्थान की ओर लुढ़कता है। कठबादी रड़ाये जाने से सम्बद्ध शब्द हैंवर्त, काठी, और वर्तखूंटा । इस लोक नाट्य प्रस्तुति में भी 15 दिन से । माह तक औंसर- स्वांग निकाले
जाते थे। विषय वही होते हैं जो कि लाँग नाट्य की प्रस्तुति में स्वाँगों के होते हैं। वादी विधाधर) को
उसी तरह तैयार किया जाता है तथा सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किये जाने के बाद ही वादी काठ की काठी पर सवार होकर, ऊंचे स्थान के खूंटें से नीचे स्थान के खूंटे की ओर पेट के बल खिसकता है। वर्त, रस्सी मोटे बावड़ से बनायी जाती थी। इसे मजबूती से तैयार किया जाता था तथा इसे तेल से भिगोकर इतना चिकना बनाया जाता था कि काठ की काठी सुगमता से इसके ऊपर से ढाल की ओर कुशलतापूर्वक खिसक सके। काठी, काठ से निर्मित की जाती थी। इस पर बादी सवार होता था। इसे ऐसा बनाया जाता था कि यह कुशलता से रस्सी के ऊपर अपना "बैलेंस" बनाये रखकर, विधाधर सहित, सकुशल, जमीन में उतर सके। रस्सी को ऊपर तथा नीचे जिन खूंटों से बांधा जाता था उन्हें वर्ती खुंट कहते हैं। पार्वत्य प्रदेशों में माल्या वर्तखुंट और तल्या वर्तखुंट जैसे नाम प्रायः मिलते हैं। मल्वा वर्तखुंट से तात्पर्य उस ऊपरी खूंटे से था जिस पर वर्त का ऊपरी हिस्सा तथा तल्या वर्तखुंट से तात्पर्य उस नीचे के खूंटे से था जिस पर वर्त का निचला हिस्सा बांधा जाता था । नियत समय पर काठ पर सवार होकर बादी (विधाधर) ऊंचे पहाड़ के खूंटे से नीचे पहाड़ के खूंटे की ओर बढ़ता था। बादी के सकुशल नीचे उतरने पर उसकी आरती उतारी जाती थी और उसके केश को स्पर्श करने तथा लूटने की होड़ लोगों में लग जाती थी। कठवादी रड़ाये जाने का उद्देश्य भी महामारियों, भूख और अकाल तथा अन्य बीमारियों का शमन करना ही था। लेकिन कठवादी के साथ लॉंग के प्रस्तुतकर्ता वादी के साथ यदि ये बीच में लॉंग से अथवा काठ से गिर जाते थे तो गांव वाले, गांव के लिए इसे अपशकुन मानकर, वादी की गरदन तलवार से उड़ा देते थे। ऐसी प्राचीन प्रथा के इतिवृत्त मिलते हैं इसलिए कालान्तर में लॉंग तथा काठवादी रड़ाने पर सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था और इन प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया था। लाँग और कठवादी रड़ाये जाने सम्बन्धी कतिपय शब्द जो गढ़वाली लोकमंच पर व्यक्त होते रहे हैं- बेड़ा, एक जाति विशेष जिसे बेड़ा, वादी तथा विधाधर नाम से जाना जाता है। बेडवार्त, बेड़ाओं द्वारा आयोजित लाँग नाट्य, जिसके अन्तर्गत लाँ तथा समाजिक विषयों को लेकर अनेक प्रकार के व्यंग्य और कटाक्ष नाट्य रूप में प्रस्तुत किये जाते थे। लाँग, नौं पोरी नौं गांठ वाला बांस का लट्ठा जिसे प्रस्तुतकर्ता खेल के लिए उपयोग करता था और जिसके सिरे पर पेट के बल घूम कर बादी कलाकार खण्ड बाजे, कहकर घूमता था तथा भाले-भाले कहकर वादकों की बातें सुनता तथा उनका उत्तर देता था। वर्त, बाबड़ की घास की रस्सी होती है। इसे स्थानीय बोली में वर्त कहते हैं। यह वर्त कई लड़ों को जोड़कर बनाई जाती थी और काफी मजबूत होती थी ताकि बेड़ा के पेट के बल और काठी पर सवार होकर रणने फिसलने पर यह टूटे नहीं। इसे कई दिनों तक फिसलन बनाये रखने के लिए तेल में भिगोया जाता था। खूंट यह एक
प्रकार का खूंटा होता था जिस पर वर्त का ऊपरी तथा निचला हिस्सा मजबूती से बांधा जाता था। वर्तखुंट, वह खूंटा, जिस पर यह वर्त बाँधी जाती थी। ये स्थान प्रायः निश्चित होते थे और गांव की सीमा में एक ऊंचे तथा दूसरा ऊपर वाले की सीध में सीधा नीचे होता था। स्वांग, इसके बारे में लोक नाट्य लॉंग में विस्तृत रूप से लिखा गया है । औंसर, औंसर में अश्लीलता का भोंड़ापन होता था । अश्लीलता इनमें नंगी मिलती है जिसका आनन्द दर्शकगण (स्त्री-पुरूष शर्म महसूस करते मुंह और आंखे चुराकर लेते थे। प्राचीन काल में बादियों के ये औंसर स्वाँग प्रायः गांव के ओबरों (मकान की निचली मंजिल के कमरों में) होता था। यह भी सुविदित है कि इसमें प्रायः गांवों के उच्छृंखल नौजवान होते थे। बड़े बुजुर्ग प्रायः इन ओबरों में नहीं होते थे। सार्वजनिक रूप से चैत के महीने, फसल कटने पर, बादी नाच का गांवों में आयोजन करते हैं। इन आयोजनों में अश्लीलता अपने ढंके रूप में होती थी लेकिन लाँग लोकोत्सव अथवा कठबादी रणाये जाने के अवसर पर आयोजित, औंसर स्वाँग में, सार्वजनिक रूप में, इन लोगों द्वारा, अश्लीलता नँगे रूप से प्रदर्शित की जाती थी, जिसे नौजवान युवक चटकारे मारकर, नवयुवतियां आँखें नीचे करके, मन ही मन मुस्कुराती और बड़े-बूढ़े, स्त्री पुरुष मुंह को हार्थों से दाबे, दबी मुस्कराहट से आनन्द लेते थे और आज भी आनन्द लेते हैं ।
डडवार- फसल पकने और खेत खलिहानों से किसान के घर जाने पर, भूमि की, फसल के हिस्सेदार, बादी और औजी (वादक जाति) चैत के महीने किसानों के घर द्वार, गीत गाकर और नाच कर (औजीण द्वारा अथवा बादीण द्वारा अपना हिस्सा मांगते हैं। इसे यहां "डडवार" मांगना कहा जाता है। इस डडवार का सम्बन्ध बादियों के लिए उस कथा से है जिसमें शिव जी ने उन्हें जमींनदार किसान से) से फसल पर अपना हिस्सा उगाने से है। औजी, ढोल पर गीत गाकर, इन्हें यहां औजियों के गीत कहते हैं, डडवार मांगते हैं यह "भीख" नहीं है। वास्तव में डडवारों के पीछे, अधिकार पूर्ण कर वसूली जैसा भाव है जिसे अनिवार्यतया किसान को देना ही पड़ता है और औजी, साधिकार, अकड़ कर इसे लेता है। नांच, सामान्यतः बादियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य को, बादियों का नाच अथवा "नाच" कहते हैं। भड्याणा, बेड़ों का भड्याणा के पीछे प्रलाप जैसी बात तो नहीं है तो भी लाँग लोकोत्सव और कठवादी रणाये जाने के समय तथा औंसर और स्वाँगों में बादियों द्वारा स्थिति और परिस्थिति के अनुरूप, ऊपर लाँग पर झूलते बादी को विमोहित, प्रोत्साहित और रोमांचित करने के लिए तथा जनता को आश्चर्य में डालने के लिए जो भड्या - उच्चस्वर में कहा जाता है, कथा कही जाती है अथवा इतिहास दुहराया जाता है उसे ही, बेडों का भड़याणा कहा जाता है। खण्ड बाजे, लाँग लोकोत्सव में, बाँस की ऊपरी धुरी पर पेटके बल,
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मंचीय दृष्टि से गढ़वाली रंगमंच के विशेष अंग हैं, एक सौ दस मंच, लोक रंगमंच कथानक, पात्र, एक सौ चालीस विशिष्ट पात्र, पचास भाषा, साठ लोक विनोद का सूचक हास्य, एक सौ सत्तर संगीत, एक सौ अस्सी अभिनय शैली, एक सौ नब्बे चरित्र चित्रण और एक हज़ार एक सौ लोकवाणी गढ़वाली लोकधर्मी मंच की सीमित स्थिति और स्थानीय रंग की प्रचुरता के बावजूद भी इसमें चरिच - चित्रण कार्य कुशलता से निभाया मिलता है। रामलीला और पौराणिक नाटकां मैं उनके नायक- चरित्रों की जानीमानी विशेषताओं को प्रस्तुत किया जाता है। चूंकि इनके आंगिक और वाचिक अभिनय में झटकेदार अभिनय की अधिकता रहती है इसलिए इसमें सूक्ष्म मनोभाव और दशाओं की अभिव्यक्ति कम होती है। पात्र, सांकेतिक अभिनय, अथवा हाव भाव द्वारा, सम्बन्धित पात्र के चरित्र को प्रस्तुत करते हैं। स्त्रियां, प्रायः मंच पर नहीं आती हैं। पुरूष सभी पात्रों का अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इसमें स्त्रियोचित लालित्य, लावण्य और कमनीय भावाभिव्यक्तियों की कमी पायी जाती है। नायक, दुष्टों अथवा खलनायकों के चरित्र का बखान करते हैं। इस तरह नायक खलनायक के दुर्गुणों का बखान करके, जनता की अपने प्रति श्रद्धा की भावना अर्जित करता है। इन मंचों पर प्रस्तुत लोक नाट्य में स्थानीय विश्वास, रीतिरिवाज, धर्म और जीवन से सम्बद्ध मान्यताओं का पूरा चित्र होता है। इनकी भाषा लोक की भाषा और इनके कथानक, संवाद, पात्र, चरित्र, संगीत और मंचीय सज्जा पूरी तरह लोक विश्वासों की देन होती है। इसमें वही अभिव्यक्त होता है जो लोक के व्यक्त - अव्यक्त जीवन में जुड़ा हुआ मिलता है। इनकी भाषा में लोकोक्तियों और कहावतों का प्रयोग किया मिलता है। स्वाँगों में रहस्यपूर्ण ढंग से हँसाने वाले वाक्यों और बादी बादीण की फूहड़ अभिव्यक्तियों को सुनकर लोग मंद-मंद मुस्कुराते मुँह दबाये आनन्द लेते हैं। ये स्त्री पुरुष दर्शक) कुछ देर के लिए उन्हीं के रंग में रंग जाते है। इस तरह इनमें लोक मानस के हंसने-राने से लेकर सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र के सभी विश्वास, संगीत-नृत्य, गीत अभिव्यक्तियां अनुभूति की समस्त दशाएं हास- परिहास और सामूहिक रंग-उमंग से नैकट्य है। जो लोक है वही अभिव्यक्त हुआ है इन गढ़वाली मंच पर। अतः 'लोकवार्ता के अन्तर्गत जो कुछ भी होता है और हो सकता है, वह इन मंचों पर अभिव्यक्त मिलता है। अतः लोक प्रवृति के इस स्वरूप का जो नैकट्य यहाँ उपलब्ध है और अभिव्यक्त है, उसे ही हम लोक भावों का सम्पूर्ण समावेश कह सकते हैं। । लोकनाट्य-रामलीला - गढ़वाली लोकनाट्य में रामलीला का सर्वाधिक महत्व है। यह जनपदीय लोक नाट्य मंच की एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति है। यह माना जाता है कि हिन्दी साहित्य के आदिकाल के राम कथा के सर्जक तुलसी की रामायण के बाद ही इसका सृजन हुआ होगा और तभी से यह वीर चरित्र वीर पूजा के रूप में गढ़वाली लोक नाट्य मंच पर आये हैं। यह तो नहीं कहा जा सकता कि तुलसी के पूर्व राम कथा नहीं थी तो भी राम चरित तो बाल्मीकि की संस्कृत कृत का मूल आधार रहा है। राम चरित तो लोक पूजनीय और सर्वत्र व्याप्त ही था । तुलसीकृत रामायण राम चरित मानस के बाद तो निस्संदेह राम की यह कथा हिन्दी के साथ, अनेक भाषा भाषी और उपबोलियों के मंचों पर प्रस्तत होने लगी। राम कथा का यह रूप क्षेत्रीय परिस्थितियों और स्थानीय रंग में रंगा है। इस कथा को एक विशिष्ट मंच पर गढ़वाल में प्रस्तुत किया जाता है । मंच का यह विधान पूरे गढ़वाल में सार्वभौम रूप में एक ही तरह का मिलता है। मंच - यह मंच सामान्यतः पंद्रह से बीस फुट चौड़ा, बीस से तीस फुट लम्बा और लगभग बीस फुट ऊंचा होता है। मंच तीनों ओर से ढंका मिलता है। इस प्रदेश के साधारण मंच परभी प्रथम तथा द्वितीय मंच की व्यवस्था होती है। द्वितीय मंच के पीछे अथवा बगल में साज-सज्जा गृह बनाया मिलता है। इस साज-सज्जा गृह में अभिनेता सजते - संवरते हैं। यह मंच यवनिकाओं द्वारा दो भागों में विभक्त होता है। मुख्य यवनिका के बाद प्रथम मंच पर और द्वितीय यवनिका तथा द्वितीय मंच के बाद, प्रथम यवनिका टांकी मिलती है। मुख्य यवनिका में दोनों ओर बगल में पखवाड़े लगाये जाते हैं। प्रथम मंच के आगे खुला रंग मंच अथवा रंगभूमि होती है। इसके ऊपर बड़ी चाँदनी से इसे ढक दिया जाता है। रंगभूमि में ज्यादातर युद्ध अथवा नाट्य प्रस्तुति में आने वाले बड़े दृश्य प्रस्तुत किये जाते हैं यथा धनुष- भंग, गंगापार, श्री राम-रावण युद्ध के साथ अन्य युद्धों और दरबारों के दृश्य । रंगभूमि के एक ओर वाद्य यंत्र वादक बैठते हैं तथा दूसरी ओर अशोक वाटिका बनायी मिलती है। खुले रंगमंच के दायें - बायें तथा सम्मुख दर्शकगण बैठते हैं। इसी मंच से कुछ दूरी पर लंका बनायी जाती है। पखवाड़ों पर दायें - बायें विभिन्न देवी देवताओं के चित्र टांके जाते हैं। मुख्य यवनिका के बाद द्वितीय यवनिका तथा प्रथम यवनिका पर राज दरबारतथा जंगल-दृश्य अंकित मिलते हैं। नाट्य परम्परा के बदले मंगलाचरण प्रस्तुत किया जाता है। बड़े दृश्य, विविध प्रकार के संवाद, युद्ध, सभाएं तथा सीताहरण और लंका के दृश्य, खुले रंगमंच पर प्रस्तुत किये जाते हैं। 'सीटी' के निर्देश पर मुख्य यवनिका खोली तथा बंद की जाती है। इसे 'सीन ड्राप कहते है जिसमें मुख्य यवनिका बंद रहती है। दृश्य के चलते रंगमंच पर प्रवेश वर्जित होता है। परिस्थिति के अनुकूल विविध प्रकार के पर्दों का उपयोग किया जाता है। लम्बे सम्वाद प्रायः खुले रंगमंच पर ही प्रस्तुत किये जाते हैं। कथानकरामलीला में प्रायः राम चरित मानस का कथानक नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह कथानक पद्य में, गेय रूप में प्रस्तुत किया मिलता है। इसमें रावण की तपस्या, रामजन्म, राम विवाह, वनवास, भरत मितलाप, सीताहरण और राम-रावण युद्ध के उपरान्त राजगद्दी राज्याभिषेक तक की कथावस्तु होती है। इस तरह रामजन्म से लेकर रावण-मरण और लंका दहन तथा पुनः राम के राज्याभिषेक तक लीला अभिनीत की जाती है। कथानक दर्शकों के मन में रचाबसा होता है इसलिए इसके घटनाक्रम और दर्शकों की अनुभूतियों का तारतम्य बना रहता है। दर्शक की उत्सुकता बनी रहती है। पात्र - प्रायः जाने-पहचाने और पूर्व परिचित होते हैं । यथा राम, लक्ष्मण, सीता, भरत, दशरथ कैकेई, रावण - कुम्भकरणः और मेघनाद। पात्रों के प्रति दर्शकों के मन में संचित श्रद्धा होती है। वे जितने राम के प्रति श्रद्धावान होते हैं उतने ही रावण के प्रति भी होते हैं। स्त्री पात्रों का अभिनय प्रायः पुरुष ही करते हैं। राम के मर्यादा पुरूषोत्तम स्वरूप, सीता के जगत जननी पूजन स्वरूप और हनुमान की भक्ति तथा भरत के भ्रातृप्रेम की प्रभावी प्रस्तुत की जाती है। भले और बुरे दोनों ही प्रकार के चरित्रों की अमिट छाप जनमानस के हृदय में अभिव्यक्त मिलती है। कथोपकथन- कथानक, पद्यात्मक संवाद शैली में प्रस्तुत किये जाते हैं। गेयरूप में दोहा, चौपाई और रागरागिनी भी प्रस्तुत की जाती है। गद्य-संवादों का प्रायः अभाव मिलता है। पद्यात्मक गेयता में रागात्मक तारतम्य का मिश्रण पाया जाता है। कथोपकथनों की स्वरिक अभिव्यक्ति दृश्य और परिस्थिति के अनुकूल कठोर और करूण, लालित्यमय, वीभत्सता व रौद्रता लिए मिलती है। ये संवाद गेयता लिए पद्यात्मक कथन है। अभिनय- अभिनय में आंगिक और वाचिक दोनों ही प्रयुक्त हुये मिलते हैं। अभिनय में कथ्य के अनुरूप भावाभिव्यक्ति मिलती है। जैसा पात्र, वैसा अभिनय होता है। स्त्री पात्रों के अभिनय में पुरूष पात्र सूक्ष्म भावाभिव्यक्ति और संवेदनशीलता लानेकी चेष्टा करते हैं। इनके अभिनय में मार्मिक संवेदनशीलता होती है । परशुराम-लक्ष्मण संवाद में, पात्रोचित शूरता वीरता और शौर्य तथा रावण के अभिनय में अहंकार का अहं स्वरूप मिलता है। आगिक अभिनय में, अंगों के संचालन में काफी उछल-कूद होती है। लक्ष्मण-परशुराम संवाद में गुस्से की फड़फड़ाहट तो राम के अभिनय में शीलता और शालीनता का अद्भुत समन्वय मिलता है। भाषा- राम चरित मानस की भाषा में ही, रामलीला प्रस्तुत की जाती है। इसके दोहा, चौपाई, राग और रागनियों की भाषा मधुर और रसयुक्त लगती है। गढ़वाल में पं. राधेश्याम कृत रामायण को राधेश्यामी रामायण की तर्ज पर गाने की प्रथा है। पात्रोचित भाषा का प्रयोग होता है। गैर पढ़ा-लिखा समाज भी रामायणकी अवधी को खूब समझता है, इसे हृदयंगम करता है। संगीत संगीत के लिए हारमोनियम के साथ, तबला तथा ढोलक का अधिक उपयोग किया जाता है। राग-रागनिया, राधेश्याम तर्ज में संगीत के तालबद्ध नियमों से आबद्ध मिलती है। प्रस्तुतियां संगीत शास्त्र के नियमानुकूल प्रणीत होती है। विशेष पात्र - संस्कृत नाटकों के विदूषक की तरह तो नहीं लेकिन कुछ उसी तरह रामलीला का यह पात्र, पात्र नहीं विशेष पात्र होता है। यह पात्र अंग्रेजी का प्रोस्टर, यहां का व्यवस्थापक वक्ता अथवा आगामी कार्यक्रम अथवा प्रस्तुति के बारे में बताने वाला और पिछली प्रस्तुति की आख्या प्रस्तुत करने वाला और आगे की लीला का परिचय दर्शकों को देने वाला व्यक्ति है। इसे हमने रामलीला का विशेष पात्र कहा है। विदूषक की तरह यह अभिनयपूर्व हंसाने का काम तो नहीं करता लेकिन आगे मंचित की जाने वाली लीला के बारे में सूचना अवश्य देता है। जब भी पात्र अपना कथोपकथन भूल जाते हैं तो यह विशेष पात्र, धीमी और दबी आवाज में पात्रों को उनके कथोपकथन बताता चलता है। इसकी वेशभूषा भी साधारण ढंग की होती ह, पात्रों जैसी नहीं और इसी के निर्देश पर मंच का परदा उठाया अथवा गिराया जाता है। मंगलाचरण - लीला का प्रारम्भ मंगलाचरण द्वारा आरती उतार कर किया जाता है। मंगलाचरण के बाद यह विशेष पात्र व्यक्ति अथवा व्यवस्थापक अथवा प्रौम्टर, दर्शकों के सामने पूर्व प्रस्तुत लीला के विषय में वार्तालाप करता हुआ, वर्तमान में प्रस्तुत की जाने वाली लीला का परिचय दर्शकों को देता है । वह बताता है कि अब वह लीला प्रस्तुत की जा रही है और इसके पश्चात् लीला प्रारम्भ हो जाती है। यह विशेष पात्र पद्य के स्थान पर प्रायः गद्य का उपयोग अपने वार्तालाप में करता है । साजसज्जा- वेशभूषालीला के सभी पात्र पात्रों की सामाजिक स्थिति के अनुरूप वस्त्र धारण करते हैं। श्रृंगार के लिए चौक, गेरूआ रंग, काला कोयला के साथ आधुनिक, क्रीम और पाउडर इस्तेमाल किये जाते हैं । खासतौर से राम, सीता, लक्ष्मण औरभरत - शत्रुघ्न के मुख मण्डलों पर विविध प्रकार के रंग-रंगोली का उपयोग किया जाता है। पात्र अपने चरित्र के अनुरूप वस्त्र तथा शस्त्र धारण करते हैं। रावण की सेना के लोग काले वस्त्र, नेकर, कमीज तथा मुख पर राक्षसी मुखौटे धारण करते हैं। स्त्री पात्र सुन्दर वस्त्रों के साथ आकर्षक आभूषण भी पहनते हैं। सुपात्रों के पहनावे में शालीनता और शिष्टता का विशेष ध्यान रखा जाता है। सज्जागृह में पात्रों को सजाया एवं संवारा जाता है तथा यहीं से 'सीन' मुख्य मंच अथवा रंगभूमि मैं आगमन करते हैं। मंचीय दृष्टि से लोकधर्मी नाट्य परम्परा का यह मंच अधिक उन्नत और पूर्ण मिलता है। इस रंगभूमि में विविध प्रकार के बड़े दृश्य, सुगमतापूर्वक प्रस्तुत किये जाते हैं। परदों के सहारे राज दरबार, राज भवन तथा वन के अन्य बड़े दृश्य प्रस्तुत किये जाते हैं। खुली रंगशाला में युद्ध जैसे दृश्य प्रस्तुत कर, रोमांच पैदा किया जाता है। आज तो यंत्रों की सहायता से दृश्य परिवर्तन एवं साज-सज्जा सम्बन्धी नवीन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है । पौराणिक लोकनाट्य मंचलोक रंगमंच की, पौराणिक लोक नाट्यों की प्रस्तुति, एक प्राचीन परम्परागत प्रस्तुति है। पौराणिक कथानकों को लेकर चलने वाले ये नाटक एक सौ दस कृष्णजन्म एक सौ बीस हरिश्चन्द्र एक सौ तीस अर्जुन) चालीस जयद्रथ वध अभिमन्यु नाटक प्रमुख हैं। ये नाटक भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितनी लोक मंच पर रामलीला है। ये उतने ही प्राचीन है जितना कि लोकनाट्य मंच है। इनके प्रस्तुतिकरण के निमित्त सामान्य रंगमंचीय व्यवस्था मिलती है। तख्तों से तैयार किये गये इस मंच को बीच में परदा डालकर दो भागों में बांटा जाता है। प्रायः सभी नाटकों की प्रस्तुति के लिए इस मंच का ही उपयोग किया जाता है। नाट्य के सभी दृश्य की प्रस्तुति इसी एक रंगमंचीय मंच पर होती है। पीछे साज-सज्जा गृह में पात्र सजते - संवरते हैं और आगे वे अभिनय प्रस्तुत करते हैं। मुख्य यवनिका के बाद इस मंच पर एक ही यवनिका होती है जिसके पीछे से अभिनेता मंच पर प्रवेश करते हैं। यह यवनिका विभिन्न दृश्यों के परिवर्तन की सूचक भी होती है। संगीत वादक मुख्य मंच पर ही बैठते हैं । लीला के मंच की खुली रंगशाला व्यवस्था इन नाटकों के मंचों पर नहीं होती है। साज-सज्जा और मंचीय व्यवस्थाओं में यह मंच, लीला मंच की तरह परिपूर्ण नहीं होता है। दर्शक इसमें मुख्य यवनिका के साथ ही चिपके रहते हैं। दृश्यों के प्रस्तुतिकरण के पश्चात् मंच पर आना निषेध होता है। कथानक- नाटकों के पात्र पौराणिक पात्र ही होते हैं जो दर्शकों के जाने-पहचाने होते हैं । यथा हरिश्चन्द्र नाटक में शैव्या, विश्वामित्र, मरघट, कफन फरोस, डोम, इत्यादि । इसी तरह अन्य नाटकों के जाने-पहचाने चरित्र होते हैं। पात्रों की चरित्र विशेषताओं के साथ अभिनय प्रस्तुत किया मिलता है तथा उनकी खूबियों और उनके गुणों को उसी रूप में प्रस्तुत करके जन-जन के हृदय में तारतम्य स्थापित करने की चेष्टा की जाती है। कथोपकथन- इन नाटकों के कथोपकथन प्रायः एक सौ दस गद्य तथा एक सौ बीस पद्य, दोनों ही रूपों में उपलब्ध मिलते हैं। रामलीला की तरह नाटकों में भी नाटकों की राधेश्यामी तर्ज का उपयोग किया जाता है। पद्यात्मक कथोपकथनों को बुलन्द आवाज में प्रस्तुत किया जाता है। मुख्य पात्रों की भूमिका कुशल अभिनेताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती है। अभिनय - मुख्य आंगिक और वाचिक होते हैं। जोश-खरोश के साथ अंगाभिव्यक्ति की जाती है। उछल-कूद के साथ शौर्य प्रदर्शन किया मिलता है। स्त्री पात्रों की भूमिका पुरूष पात्र प्रस्तुत करते हैं। स्त्रियोचित कोमलता के अभाव के बावजूद इनके अभिनय में शीलता और शालीनता का अभाव नहीं होता है। ये अपने आंगिक और वाचिक अभिनय द्वारा लोगों को विमोहित करते हैं। इसलिए ये नाटक लोगों द्वारा बहुत चाहे जाते हैं। भाषा- सभी लोकाभिव्यक्तियां हिन्दी में प्रस्तुत की जाती हैं। लोगों की मातृ-भाषा अलग होने पर भी लोग इसे खूब समझते हैं। संगीत - हारमोनियम के साथ तबला तथा ढोलक का उपयोग किया जाता है। राधेश्यामी तर्ज मैं राग-रागनियाँ प्रस्तुत की जाती है । गद्यात्मक संवादों में संगीत का उपयोग नहीं किया जाता है। साज-सज्जा - वेशभूषा - अभिनेता पात्रानुकूल वेशभूषा धारण करते हैं। प्रायः मुकुट धारण किये जाते हैं। मुख की कांति बढ़ाने के लिए 'क्रीम' तथा 'पावडर' का इस्तेमाल किया जाता है। देहातों में उपलब्ध सौंदर्य उपकरणों का भी प्रयोग होता है। स्त्रियां गहने पहनती हैं तथा नकली जटाएं धारण करती है। नाटक का शुभारम्भ मंगलाचरण से होता है। इन नाटकों में भी विशेष पात्र- 'प्रास्टर' पात्रों को संवाद धीमी आवाज मैं नाटक की प्रस्तुति के बीच बताता चलता है और वह पात्र उन कर्थ्यो को ऊंची आवाज में, जनता के सामने प्रस्तुत करता है बच्चों के अनुकरणात्मक नाटक- लोकधर्मी नाट्य परम्परा में बच्चों के इन अनुकरणात्मक नाटकों का बड़ा महत्व है। रामलीला तथा नाटकों की प्रस्तुति के बाद बच्चे प्रायः एक सौ दस रामलीला का अनुकरणात्मक और नाटकों की प्रस्तुति के अनुकरणात्मक नाटक प्रस्तुत करते हैं। बच्चों के ये अनुकरणात्मक नाटक जनपद में बहुत प्रसिद्ध हैं और जहां देखिये वहां बच्चे खेल-खेल में, इनकी प्रस्तुति करते मिलते हैं। इन दो अभिव्यक्तियों की अनुकरणात्मक अभिव्यक्ति के अलावा बच्चे दस बादी - बाण के नृत्य और स्वाँगों की नकल भी प्रस्तुत करते हैं। रामलीला, नाटकों तथा स्वाँर्गों के अनुकरण के निमित्त निर्मित इनका रंगमंच, जहाँ ये अपनी अनुकरणात्मक अभिव्यक्ति की प्रस्तुति करते हैं, वह कोई खुला खेत, खुला खलिहान, देवालय अथवा पंचायती चौक होता है। इस खुले मंच पर बच्चे एकत्र होते हैं। छोटी-मोटी लकड़ियां गाड़कर उसके ऊपर चद्दर तानकर उसे मंच का स्वरूप देते हैं। इस मंच के पास ही उनका परदे से ढका अथवा परदा डालकर बनाया गया सज्जागृह भी होता है। इसमें वे चौक, गेरू और अगारे की कालिख का उपयोग रूप सज् में करते हैं। कथानक- ये बच्चे अनुकरण किये नाटक, स्वाँग अथवा रामलीला की पूरी कथा को नहीं लेते हैं। ये इनके बीच-बीच के प्रसंगों को लेकर रामलीला, नाटक अथवा स्वाँग खेलते हैं। इसमें तारतम्य कथा की दृष्टि से नहीं होता लेकिन प्रसंगगत एकरूपता होती है। घटनाओं और प्रसंगों को ये काट छांट कर अथवा इधर से उधर पकड़ कर, प्रस्तुत करते हैं। इनके कथानक इतने छोटे होते हैं कि प्रायः एक-दो घण्टे में ही ये सम्पूर्ण लीला, नाटक अथवा स्वाँग प्रस्तुत कर लेते हैं और कभी -कभी ऐसा भी होता है कि एक ही प्रसंग की प्रस्तुति में पूरी लीला अथवा नाटक समाप्त हो जाता है। पात्र और पात्र - सज्जा - बच्चों के अनुकरणात्मक नाटकों, लीला और स्वाँगों के पात्र सभी लीला नाटक और स्वाँगों के परिचित पात्र ही होते हैं। कोई राम, कोई सीता तो कोई रावण, हनुमान, भरत और दशरथ बन जाते हैं। ये पात्र कागज अथवा पत्रों के मुकुों से अपने आपको सजाते हैं। वेशभूषा और रंग सज्जा में स्थानीय साधनों का ये खूब प्रयोग करते हैं। बांस और चाई के धनुष-बाण बनाये जाते हैं। स्त्री पात्र धोती, अंगिया पहनते हैं। राक्षसों के मुँह पर काला मोसा पीट कर राम की विजय की घोषणा करते हैं। वाद्य मंत्रों में कनस्तर पीटना और टिन के टुकड़े बजाना ही मुख्य अभिव्यक्ति है। नाटकों में से गद्य अंशों का अधिक उपयोग करते हैं। स्वाँगों की अनुकृति मैं ता। ये पूरे स्वाँगी ही बन जाते हैं। बादीगण की तरह धोती पहनकर नाचते हैं। सजावट के लिए पत्तों अथवा कागज के मुकुट पहनते हैं। बादी और बादीण द्वारा प्रयोग किये गये व्यंग्यों की सही और सटीक नकल उतारते हैं। इन व्यंग्य भरे कथोपकथनों में सामाजिक ढांचे में व्याप्त अनाचार और अत्याचार के खिलाफ आवाज रहती है तथा उसका व्यंग्य भरी वाणी से माखौल उड़ाया जाता है। विशेष मंच - कहीं-कहीं बच्चे लकड़ी के चार डंडे खड़ा करके उसके तीनों ओर चादर लपेट लेते हैं और सामने कोई अच्छी सी सफेद चादर डालकर उसे मंच का स्वरूप दे देते हैं। इस मंच के बीच में एक अलग चद्दर डालकर ये इसके दो भाग कर लेते हैं। इस तरह इस रंगमंच पर ये अपने नाटक प्रस्तुत करते हैं। प्रायः यह भी देखने को मिलता है कि गांव के स्त्री पुरुष बच्चों के इन नाटकों, स्वाँगों और लीलाओं को देखने एकत्र हो जाते हैं और इनका आनन्द । ठाते हैं। रोशनी के लिए लालटेन का उपयोग किया जाता है। इन प्रस्तुतियों के अनुकरण के अतिरिक्त बच्चे, पाण्डव नृत्यों की नकल भी उतारते हैं। इसमें आंगिक, वाचिक दोनों तरह की प्रस्तुतियाँ होती है। इन पर अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव आते हैं, ये उन्हीं के अनुरूप बोलते हुंकारते और किलकारी मारते अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इन प्रस्तुतियों में भी कनस्तर पीटकर वाद्य यंत्रों की कमी पूरी की जाती है। इन्हें देखकर भी गांव के लोग आनन्द उठाते हैं। बड़े-बूढ़ों और नक्कालां की नकल उतार कर भी ये अनुकरणात्मक अभिनय प्रस्तुत करते हैं। इस अनुकरण अथवा नकलबाजी में बच्चों को खूब आनन्द आत है और गाँव के बड़े-बूढ़े भी इनमें भाग लते हैं तथा इनसे आनन्द उठाते हैं। व्यक्तिपरक अभिव्यक्तियांक्रियाएं और अभिव्यक्तियों जिनमें आंगिक रूप में नाटकीयता अथवा लोकधर्मी नाट्य परम्परा के दर्शन मिलते हैं वे हैं- पाण्डव नृत्यान्तर्गत व्यक्तिपरक देव विशेष के बल पौरूष का अभिव्यक्तिकरण Xबीस नृत्यान्तर्गत बाजा मांगने की प्रवृत्ति तथा तेरह) बाजों में पाया जाने वाला व्यक्तिपरक देवविशेष के पौरूष बखान की प्रस्तुति का एक अंग कह सकते हैं। सामूहिक नृत्य प्रदर्शन में अभिनय के साथ कथोपकथन भी साथ चलते हैं। खुले मैदान में ये नाचते व संवाद बालते चलते हैं तथा दूसरा व्यक्ति भावानुकूल अभिनय प्रस्तुत करता हुआ निर्देश देता है यथा, छांटो छड़बड़ कदम मिलेकी, माई मर्द का चेला, लाठी निभिलाने मइ, और भनासी मर्दों इत्यादि । इसमें नाटकीयता व कथोपकथनों का प्रयोग होता है। व्यक्तिपरक अभिनय में अर्जुन, भीम और नकुल, सहदेव के बल और पौरूष की नाटकीय अभिव्यक्ति अभिनेता अथवा नर्तक द्वारा की जाती है। इन अभिव्यक्तियों का मंच मण्डाण होता है। भीम देवता वाले पुरूष का अभिनय दर्शकों को रिझा देता है जिससे दर्शक झूम उठते हैं। इस मण्डाण के बीच बाजा मांगने की अभिनयात्मक अभिव्यक्ति, नर्तक, अभिनेता द्वारा की जाती है। कानों पर अंगुली रखकर अभिनेता संवाद शैली में कथानक प्रस्तुत करता है। इसे स्थानीय बोली मैं बाजा मांगना कहा जाता है। इसमें आंगिक अभिनय की प्रचुरता रहती है। नर्तक के साथ आवजी भी एक कान पर अंगुली रखे रहता है तथा दूसरे हाथ से धीरे-धीरे ढोल पर थाप देता है। तीसरे प्रकार के बाजे के साथ पायी जाने वाली व्यक्तिपरक अभिव्यक्ति, देव विशेष के पौरुष के बखान की प्रस्तुति है। नरसिंह और भगवती के नर्तक आंगिक अभिनय के अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करके, दर्शकों को चकित कर देते हैं। दर्शकों को इससे संतोष और आनन्द की प्राप्ति होती है। नाटकीय प्रवृत्ति का प्रदर्शन, इन व्यक्तिपरक नृत्याभिव्यक्तियों के अतिरिक्त दस दो महिलाओं के झगड़े और एक सौ बीस औरतो तथा पुरूषों द्वारा नकल किये जाने में भी मिलती है। औरतों के झगड़े में आंगिक तथा वाचिक दोनों ही प्रकार के अभिनयों की प्रस्तुति होती है। एक सौ बीस औरतों अथवा पुरूषों द्वारा नकल की प्रवृत्ति के फलस्वरूप भी, नाटकीय प्रदर्शन का अनोखा दृश्य दर्शकों के सामने उपस्थित हो उठता है। आंगिक और वाचिक प्रदर्शन द्वारा ये एक मनोरंजक नाट्य प्रस्तुत कर देते हैं। लोक नाट्य परम्परा की स्वाँग शैली - गढ़वाल में स्वाँग की एक विशेष शैली है। यह गढ़वाली लोक धर्मी रंगमंच की एक महत्वपूर्ण और प्रमुख इकाई है । लोक जीवन में इसका बड़ा महत्व तथा मान है। गढ़वाली की स्वाँग की परम्परा की शैली को हम दो भागों में बांटते हैं। व्यवसायी तथा एक सौ बीस अव्यवसायी अव्यवसायी से तात्पर्य एक ऐसी परम्परागत शैली से हैं जिसमें समायानुसार लोग मिलकर, स्वाँग प्रस्तुत करते हैं। लोगों द्वारा 'जोकरिंग' के नाम से जाने जाते हैं। समाज इन जोकरिंग को सुनना और देखना चाहता है। प्रायः ये हास्य प्रस्तुतियाँ- 'जोकरिंग- रामलीला और पौराणिक नाटकों की प्रस्तुति के बीच दिखाये जाते हैं। रामलीला और नाटकों के प्रसंगों के बीच, दर्शकों के मनोरंजनार्थ 'जोकरिंग' नाम की अभिव्यक्तियों की प्रस्तुति की जाती है। इस तरह नाटकों तथा लीला के बीच मंच पर प्रस्तुत इन लोकाभिव्यक्तियों की स्थानीय शैली को ही अव्यवसायी स्वाँग परम्परा नाम दिया गया है। जोकरिंग- हास्य प्रस्तुतियों की समयावधि अधिक से अधिक पंद्रह से बीस मिनट तक होती है। इनका उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना होता है। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य सामान्यतः व्यंग्य है, सामाजिक अधिविश्वासों और ढ़िवादी प्रवृत्तियों पर कटाक्ष करना है। लोगों को रूढ़िवादिता के खिलाफ जागरूक बनाना है, शिक्षित करना है। इनके अभिव्यक्तिकरण में आवश्यकता से अधिक अभिनेयता और एक्शन होता है। पात्र तीन से चार अथवा कभी-कभी दो भी होते हैं। इनकी वेशभूषा आकर्षक होती है। मुकुट और मुखौटे धारण किये जाते हैं। काले, नीले, पीले और लाल रंग से वे चेहरों को पोतते है। बहुरंगियों की तरह ये लोगों का मनोरंजन करते हैं। अभिनय में उछल-कूद अधिक मिलती है। अपने इस अभिनय में मसखरापन लाने के लिए ये अजीबो गरीब, आंगिक और वाचिक अभिनय प्रस्तुत करते हैं। लीला और नाटकों के बीचलोगइन प्रसंगों को देखना पसंद करते हैं। कुछ प्रसिद्ध स्वाँग हैः- एक सौ दस भूत भगाने का स्वाँग एक सौ बीस बूढ़े को पैसो के लोभ में लड़की बेचने का स्वाँग एक सौ तीस वाक्या से रोग का निदान ढूढ़ने का स्वॉग एक सौ चालीस पाखण्डी जोगियों के स्वाँग तथा सटक बाबा इत्यादि शराब और उसकी बुराइयों के स्वाँग और साठ शिक्षा के महत्व को दर्शाने वाले स्वाँग । इनसे मनोरंजन के साथ जनता को शिक्षा भी मिलती है। इनकी भाषा प्रायः हिन्दी तथा कभी-कभी स्थानीय बोली भी होती है। पेशेगत कला के रूप में, स्वाँग लोक नाट्य मंच की एक ऐसी प्रस्तुति है जो कि आदिकाल से आज तक अपने मूलरूप में जीवित मिलती है। यद्यपि यह नहीं कहा जा सकता है कि इन स्वाँगों का आदि रूप ऐसा ही रहा होगा तो भी स्वर्गों के साथ 'औसर' शब्द की उपलब्धि इस बात का संकेत करती है कि अपने मूल रूप में यह प्रस्तुति किसी और रूप मैं रही होगी। 'औसर' के साथ आज अश्लीलता का पुट होने का जो संकेत है वह 'ओसर नाट्य' के नैतिक दृष्टि से नीचे स्तर का होने का संकेत करता है। यह कि इनमें हंसाने के लिए, मनोरंजन के लिए भोड़े, गंवारू और अश्लील शब्दों का प्रयोग होता था। स्वॉग - शैली - स्वाँग शैली ही गढ़वाली लोक धर्मी नाट्य परम्परा की मूल शैली है। इसका अपना रंगमंच है। अपनी भाषा है और अपने शैलीगत कथोपकथनों के साथ इसमें परम्परागत पेशेगत व्यवसायी प्रवृत्ति मिलती है। प्रत्येक वर्ष इस वर्ग और जाति के लोग इन नाट्यों का प्रदर्शन करते हैं। इन स्वाँगों के प्रदर्शन के पीछे धार्मिक आस्था और शिव जी के वरदान की बात, ये पेशेवर लोग करते हैं। स्वाँग मैं लोकोत्सव लाँग परम्परा अति प्राचीन है। वैदिक काल में जिस तरह अश्वमेघ और पुरुष मेघ यज्ञ की परम्परा थी, उसी तरह पार्वत्य प्रदेश में लॉग X वेदार्त, भडयाणा औसर - स्वाँग की ) यज्ञ द्वारा औंसर गायन द्वारा तत्कालीन समाज के हित चिन्तक, श्रेष्ठजनों की गाथायें और कालान्तर में प्राचीन नरेशों की शौर्य गाथाएं गाई जाती थी, उनका यश गान किया जाता था । मानव की इस आदिम अभिव्यक्ति जिसमें गीत, नृत्य, और अभिनय तीन एक रूप में प्रस्तुत हुये हैं, ने लोक नाट्य को जन्म दिया है और यह लोक नाट्य की परम्परा ही आधुनिक नाट्य कला की जनक मानी जाती है। इसका स्वरूप हमेशा लोक धर्मी रहा है इसलिए लोक जीवन से लोकोत्सव का अत्यन्त घनिष्ठ सम्बन्ध है और ये लोकोत्सव आज भी लोक जीवन से जुड़े हैं। लाँग - लॉग लोकोत्सव में, नौ गांठ वाले बांस को, गांव के मध्य-स्थल पर गाड़ दिया जाता है। इस बांस के ऊपरी सिरे पर रस्सी इस तरह बांध दी जाती है कि लॉग उत्सव प्रस्तुतकर्ता, पेट के बल बाँस के ऊपरी हिस्से से चारों ओर घूम सके। इस खड़े बांस के डन्डे को लॉग ) कहीं-कहीं लाक भी कहा जाता है। दस से पंद्रह दिन और कहीं-कहीं महीने भर, ये लोकोत्सवकर्ता आम जनता का मनोरंजन करते हैं। इस उत्सव के आयोजन के एक अथवा दो दिन पहले साये लोग, नृत्य और संगीत के साथ एक विशेष प्रकार की अभिनयात्मक प्रस्तुति का प्रस्तुतिकरण भी करते हैं। इसे औंसर कहा जाता है। औंसर की अभिनयात्मक प्रस्तुतियों में दस महादेव पार्वती का स्वाँग एक सौ बीस कुटनेटी का स्वाँग एक सौ तीस बुढ़या का स्वाँग और एक सौ चालीस ढाकरिया का स्वॉग प्रमुख हैं। इन प्रस्तुतियों के साथ वर्तमान में जहां कहीं भी और जैसे भी इस उत्सव के आयोजन का मौका मिलता है, ये लोग सामाजिक समस्याओं, अंधविश्वासों और कुरीतियों पर भी तिलमिलाने वाला आघात करते हैं। वैसे अब इन लोकोत्सब का आयोजन प्रायः बंद जैसा हो गया है। इसका कारण समय के साथ, प्रस्तुति के समय, नर्तकों की ऊंचे डन्डे से गिरकर मौत होना अथवा रस्सी से फिसलकर, प्राणांत का भय भी रहा है, और है। औंसर स्वाँगों की प्रस्तुति के समय नायक-नायिकाएं अपने आपको वस्त्राभूषणों से सजाते-संवारते हैं। मुंह पर मुखौटे पहनते हैं। अपनी वेशभूषा और रूप आकर्षक बनाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं । अन्तिम दिन, जिस दिन कि लोकोत्सव लॉग की आकर्षक प्रस्तुति की जानी होती है, उससे एक दिन पूर्व ये महादेव का स्वाँग निकाल कर इस स्थान परआते हैं जहां बीस गाड़ा गया होता है और उक्त आकर्षक प्रस्तुति की तैयारी करते हैं। गढ़वाल में जिस प्रकार राम कथा मंच पर राम की लीलाएं प्रस्तुत की जाती है उसी तरह गढ़वाली लोक रंगमंच की स्वाँग परम्परा में, राम कथा मंचन से बहुत पहले, इन स्वाँगों में महादेव और पार्वती की कथाओं का मंचन होता था। इस तरह लोक रंगमंच की परम्परा में स्वाँगों में महादेव-पार्वती का चरित्र चित्रण और उनकी कथा का प्रस्तुतिकरण, रामकथा मंच के पूर्व ही, इसी मंच पर प्रतिष्ठित और प्रचलित था । लॉग वाले स्थान पर आकर ये लोग, महादेव और पार्वती की आरती उतारते हैं और मुखौटा तथा जटा जिसे कि प्रस्तुतकर्ता धारण करते हैं, उसे लॉग के पास स्थापित कर देते हैं। नाट्य प्रस्तुतकर्ता को स्नान कराया जाता है । जिस गांव में यह आयोजन होता है, उस गांव के 'प्रधान' को दान किया जाता है। इस उत्सव की यह विशेषता है कि जिस गांव में देवालय होते हैं, वहां प्रस्तुतकर्ता रस्सी के सहारे काठ के घोड़े पर सवार होकर ऊपर से नीचे की ओर खिसकता हुआ, अपना खेल प्रदर्शित करता है। लेकिन ऐसे गांव, जहां देवालय नहीं होते, वहां ये लॉग पर चढ़कर उत्सव की प्रस्तुति करते हैं। लेकिन जिस प्रस्तुतिमें रस्सी के सहारे काठ की घोड़ी पर पेट के बल, टिक कर नीचे उतरना है उसे इस उत्सव की भाषा में 'कठवादी रणाया' जाना कहा जाता है। लाँग में प्रस्तुतकर्ता बाँस के डन्डे के ऊपरी शिरे पर चढ़ता है और पेट के बल, नाभि के बीचों बीच शरीर का संतुलन बनाकर चारों ओर घूमता है ॥ प्रस्तुतकर्ता द्वारा पेट के बल घूमने की इस क्रिया को 'खण्ड खेलना' कहा जाता है। पहला 'खण्ड' के ये बाल बहुत पवित्र माने जाते हैं। इसलिए अक्सर बालों को छूने मैं छीना-झपटी हो जाती है। और ऐसा भी देखा गया है कि बादी लहूलुहान हो उठता है। लोग उसके विधाघर) बालों को नोच लेते हैं और उन्हें अपने पूजागृह में रखकर उनकी पूजा करते हैं। ऐसा विश्वास है कि लाँग लोकोत्सव के आयोजन से महामारी और बीमारियाँ ठीक होती है। इसलिए विधाधर के बाल, पवित्र और रक्षक समझे गये हैं। कैप्टन ठाकुर शूरबीर सिंह पवार ने अपने लेख "वडवार्त" में उल्लेख किया है कि ऐसे लोकोत्सव अकाल, महामारी तथा बीमारी जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं के निवारणार्थ किये जाते थे। जिनके उद्देश्य के बारे में अंग्रेज कमिश्नर मिस्टर मूर क्राफ्ट ने फरवरी एक हज़ार आठ सौ बीस में बच्चू बेड़ा से इन आपदाओं के निवारणार्थ किये गये आयोजन की उपयोगिता और उपादेयता के बारे में विचार-विमर्श किया था। देर-सबेर महाराज कीर्तिशाह ने सन् एक हज़ार नौ सौ दस में "लांग" और "वडवार्त" पर प्रतिबंध लगाकर उसे बंद करा दिया था। इसी तरह सन् एक हज़ार नौ सौ तीस टिहरी राज्यान्तर्गत जौनपुर परगना के थत्यूड़ ग्राम में जनता द्वारा आयोजित लांग - वेडवार्त. टिहरी दरबार के आदेश से बंद की गयी थी। गांव के पंच और प्रधान तथा आम जनता जब विधाधर के बालों को छूती है तो विधाधर उन्हें जमीन के अपने हक की याद दिलाता है, उन्हें कसमें खिलाता है ताकि प्रत्येक फसल पर उसे अपना हक मिल सके। वाद्ययंत्रों की आकर्षक और उत्तेजना युक्त गर्जना के बीच, विधाधर लांग के ऊपर घूमता "भाले-भाले" कहता, खण्ड खेलता हुआ क्रम से निम्नांकित कविता का जोर-जोर से वाचन करता हैःखण्डबाजे हो खण्ड बाजे पंचनाग देवताओं को, खण्ड बाजे गांव की भगवती को, खण्ड बाजे नरसिंह नागराजा को, खण्ड बाजे भैरों, निरंकार को, खण्ड बाजे गांव के प्रधान को, खण्ड बाजे सतधर्मी नारियों को, खण्ड बाजे दानी राजाओं को, खण्ड बाजे पंच हिस्सेदारों को, खण्ड बाजे। और इस अंतिम प्रस्तुति के साथ समाप्त होता है, पार्वत्य प्रदेश का लोकोत्सव लांग और उसकी आकर्षक प्रस्तुति । कठबादी - लाँग की तरह ही कठबादी रड़ाया जाना लोक नाट्य की दूसरी प्रस्तुति है। जहां देवालय नहीं होते तात्पर्य जिस गांव में मन्दिर नहीं होते वहां विधाधर काठ के घोड़े पर पेट के बल सवार होकर ऊँचे स्थान से नीचे स्थान की ओर लुढ़कता है। कठबादी रड़ाये जाने से सम्बद्ध शब्द हैंवर्त, काठी, और वर्तखूंटा । इस लोक नाट्य प्रस्तुति में भी पंद्रह दिन से । माह तक औंसर- स्वांग निकाले जाते थे। विषय वही होते हैं जो कि लाँग नाट्य की प्रस्तुति में स्वाँगों के होते हैं। वादी विधाधर) को उसी तरह तैयार किया जाता है तथा सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण किये जाने के बाद ही वादी काठ की काठी पर सवार होकर, ऊंचे स्थान के खूंटें से नीचे स्थान के खूंटे की ओर पेट के बल खिसकता है। वर्त, रस्सी मोटे बावड़ से बनायी जाती थी। इसे मजबूती से तैयार किया जाता था तथा इसे तेल से भिगोकर इतना चिकना बनाया जाता था कि काठ की काठी सुगमता से इसके ऊपर से ढाल की ओर कुशलतापूर्वक खिसक सके। काठी, काठ से निर्मित की जाती थी। इस पर बादी सवार होता था। इसे ऐसा बनाया जाता था कि यह कुशलता से रस्सी के ऊपर अपना "बैलेंस" बनाये रखकर, विधाधर सहित, सकुशल, जमीन में उतर सके। रस्सी को ऊपर तथा नीचे जिन खूंटों से बांधा जाता था उन्हें वर्ती खुंट कहते हैं। पार्वत्य प्रदेशों में माल्या वर्तखुंट और तल्या वर्तखुंट जैसे नाम प्रायः मिलते हैं। मल्वा वर्तखुंट से तात्पर्य उस ऊपरी खूंटे से था जिस पर वर्त का ऊपरी हिस्सा तथा तल्या वर्तखुंट से तात्पर्य उस नीचे के खूंटे से था जिस पर वर्त का निचला हिस्सा बांधा जाता था । नियत समय पर काठ पर सवार होकर बादी ऊंचे पहाड़ के खूंटे से नीचे पहाड़ के खूंटे की ओर बढ़ता था। बादी के सकुशल नीचे उतरने पर उसकी आरती उतारी जाती थी और उसके केश को स्पर्श करने तथा लूटने की होड़ लोगों में लग जाती थी। कठवादी रड़ाये जाने का उद्देश्य भी महामारियों, भूख और अकाल तथा अन्य बीमारियों का शमन करना ही था। लेकिन कठवादी के साथ लॉंग के प्रस्तुतकर्ता वादी के साथ यदि ये बीच में लॉंग से अथवा काठ से गिर जाते थे तो गांव वाले, गांव के लिए इसे अपशकुन मानकर, वादी की गरदन तलवार से उड़ा देते थे। ऐसी प्राचीन प्रथा के इतिवृत्त मिलते हैं इसलिए कालान्तर में लॉंग तथा काठवादी रड़ाने पर सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था और इन प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया था। लाँग और कठवादी रड़ाये जाने सम्बन्धी कतिपय शब्द जो गढ़वाली लोकमंच पर व्यक्त होते रहे हैं- बेड़ा, एक जाति विशेष जिसे बेड़ा, वादी तथा विधाधर नाम से जाना जाता है। बेडवार्त, बेड़ाओं द्वारा आयोजित लाँग नाट्य, जिसके अन्तर्गत लाँ तथा समाजिक विषयों को लेकर अनेक प्रकार के व्यंग्य और कटाक्ष नाट्य रूप में प्रस्तुत किये जाते थे। लाँग, नौं पोरी नौं गांठ वाला बांस का लट्ठा जिसे प्रस्तुतकर्ता खेल के लिए उपयोग करता था और जिसके सिरे पर पेट के बल घूम कर बादी कलाकार खण्ड बाजे, कहकर घूमता था तथा भाले-भाले कहकर वादकों की बातें सुनता तथा उनका उत्तर देता था। वर्त, बाबड़ की घास की रस्सी होती है। इसे स्थानीय बोली में वर्त कहते हैं। यह वर्त कई लड़ों को जोड़कर बनाई जाती थी और काफी मजबूत होती थी ताकि बेड़ा के पेट के बल और काठी पर सवार होकर रणने फिसलने पर यह टूटे नहीं। इसे कई दिनों तक फिसलन बनाये रखने के लिए तेल में भिगोया जाता था। खूंट यह एक प्रकार का खूंटा होता था जिस पर वर्त का ऊपरी तथा निचला हिस्सा मजबूती से बांधा जाता था। वर्तखुंट, वह खूंटा, जिस पर यह वर्त बाँधी जाती थी। ये स्थान प्रायः निश्चित होते थे और गांव की सीमा में एक ऊंचे तथा दूसरा ऊपर वाले की सीध में सीधा नीचे होता था। स्वांग, इसके बारे में लोक नाट्य लॉंग में विस्तृत रूप से लिखा गया है । औंसर, औंसर में अश्लीलता का भोंड़ापन होता था । अश्लीलता इनमें नंगी मिलती है जिसका आनन्द दर्शकगण होता था। यह भी सुविदित है कि इसमें प्रायः गांवों के उच्छृंखल नौजवान होते थे। बड़े बुजुर्ग प्रायः इन ओबरों में नहीं होते थे। सार्वजनिक रूप से चैत के महीने, फसल कटने पर, बादी नाच का गांवों में आयोजन करते हैं। इन आयोजनों में अश्लीलता अपने ढंके रूप में होती थी लेकिन लाँग लोकोत्सव अथवा कठबादी रणाये जाने के अवसर पर आयोजित, औंसर स्वाँग में, सार्वजनिक रूप में, इन लोगों द्वारा, अश्लीलता नँगे रूप से प्रदर्शित की जाती थी, जिसे नौजवान युवक चटकारे मारकर, नवयुवतियां आँखें नीचे करके, मन ही मन मुस्कुराती और बड़े-बूढ़े, स्त्री पुरुष मुंह को हार्थों से दाबे, दबी मुस्कराहट से आनन्द लेते थे और आज भी आनन्द लेते हैं । डडवार- फसल पकने और खेत खलिहानों से किसान के घर जाने पर, भूमि की, फसल के हिस्सेदार, बादी और औजी चैत के महीने किसानों के घर द्वार, गीत गाकर और नाच कर से फसल पर अपना हिस्सा उगाने से है। औजी, ढोल पर गीत गाकर, इन्हें यहां औजियों के गीत कहते हैं, डडवार मांगते हैं यह "भीख" नहीं है। वास्तव में डडवारों के पीछे, अधिकार पूर्ण कर वसूली जैसा भाव है जिसे अनिवार्यतया किसान को देना ही पड़ता है और औजी, साधिकार, अकड़ कर इसे लेता है। नांच, सामान्यतः बादियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य को, बादियों का नाच अथवा "नाच" कहते हैं। भड्याणा, बेड़ों का भड्याणा के पीछे प्रलाप जैसी बात तो नहीं है तो भी लाँग लोकोत्सव और कठवादी रणाये जाने के समय तथा औंसर और स्वाँगों में बादियों द्वारा स्थिति और परिस्थिति के अनुरूप, ऊपर लाँग पर झूलते बादी को विमोहित, प्रोत्साहित और रोमांचित करने के लिए तथा जनता को आश्चर्य में डालने के लिए जो भड्या - उच्चस्वर में कहा जाता है, कथा कही जाती है अथवा इतिहास दुहराया जाता है उसे ही, बेडों का भड़याणा कहा जाता है। खण्ड बाजे, लाँग लोकोत्सव में, बाँस की ऊपरी धुरी पर पेटके बल,
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टाटा समूह ( Image Source : PTI Photo )
Tata Group: दुनियाभर के कंपनियों में इस समय मंदी की आहट के चलते कड़े फैसले लिए जा रहे हैं, छंटनी से लेकर कर्मचारियों-एंप्लाइज की सैलरी में कटौती की खबरें आ रही हैं. ऐस में देश के टाटा ग्रुप ने अपने टॉप एग्जीक्यूटिव को शानदार सैलरी हाईक का तोहफा दिया है. देश के 22 लाख करोड़ रुपये के टाटा ग्रुप में टॉप एग्जीक्यूटिव की आय में 16-60 फीसदी तक का शानदार इजाफा देखा गया है.
टाटा ग्रुप के इंडियन होटल्स, (IHCL), टाटा पावर, ट्रेंट और टाटा कंज्यूमर जैसे हाई-ग्रोथ बिजनेस के टॉप एग्जीक्यूटिव को आय के मामले में देश के कई ग्रुप की तुलना में शानदार सैलरी हाईक मिला है. टाटा संस को देश के इतिहास में सबसे तेजी से ग्रोथ हासिल करने वाला ग्रुप बनाने के क्रम में 97 अरब डॉलर के सेल्स रेवेन्यू की ग्रोथ हासिल हुई है. साथ ही इसकी एंटिटीज में 20 फीसदी की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है. इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ये खबर निकलकर आई है.
सभी के लिए भी इस सैलरी हाईक के अंतर्गत टोटल पैकेज सैलरी, कमीशन और अन्य बेनेफिट्स के साथ-साथ प्रीक्व्जिट्स भी शामिल रहे हैं. कंपनी के कैश फ्लो में बढ़ोतरी के असर से इसमें इजाफा देखा गया है. टाटा ग्रुप के जिन टॉप एग्जीक्यूटिव्स को जबरदस्त सैलरी हाईक मिला है उनमें राजेश गोपीनाथन का भी नाम शामिल है जो टाटा कंसलटेंसी सर्विस (टीसीएस) के पूर्व सीईओ रहे हैं.
ट्रेंट के पी वेंकटेशलू की सैलरी में 62 फीसदी का शानदार इजाफा देखा गया है.
इंडियन होटल्स के पुनील चटवाल की आय में 37 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
टाटा कंज्यूमर के सुनील डीसूजा की सैलरी में 24 फीसदी का इजाफा देखा गया है.
टाटा कैमिकल्स के आर मुकुंदन की सैलरी में 16 फीसदी का इजाफा देखा गया है.
टाटा पावर के प्रवीर सिन्हा की सैलरी में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
टीसीएस के राजेश गोपीनाथन की सैलरी में 13 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है.
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टाटा समूह Tata Group: दुनियाभर के कंपनियों में इस समय मंदी की आहट के चलते कड़े फैसले लिए जा रहे हैं, छंटनी से लेकर कर्मचारियों-एंप्लाइज की सैलरी में कटौती की खबरें आ रही हैं. ऐस में देश के टाटा ग्रुप ने अपने टॉप एग्जीक्यूटिव को शानदार सैलरी हाईक का तोहफा दिया है. देश के बाईस लाख करोड़ रुपये के टाटा ग्रुप में टॉप एग्जीक्यूटिव की आय में सोलह-साठ फीसदी तक का शानदार इजाफा देखा गया है. टाटा ग्रुप के इंडियन होटल्स, , टाटा पावर, ट्रेंट और टाटा कंज्यूमर जैसे हाई-ग्रोथ बिजनेस के टॉप एग्जीक्यूटिव को आय के मामले में देश के कई ग्रुप की तुलना में शानदार सैलरी हाईक मिला है. टाटा संस को देश के इतिहास में सबसे तेजी से ग्रोथ हासिल करने वाला ग्रुप बनाने के क्रम में सत्तानवे अरब डॉलर के सेल्स रेवेन्यू की ग्रोथ हासिल हुई है. साथ ही इसकी एंटिटीज में बीस फीसदी की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है. इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ये खबर निकलकर आई है. सभी के लिए भी इस सैलरी हाईक के अंतर्गत टोटल पैकेज सैलरी, कमीशन और अन्य बेनेफिट्स के साथ-साथ प्रीक्व्जिट्स भी शामिल रहे हैं. कंपनी के कैश फ्लो में बढ़ोतरी के असर से इसमें इजाफा देखा गया है. टाटा ग्रुप के जिन टॉप एग्जीक्यूटिव्स को जबरदस्त सैलरी हाईक मिला है उनमें राजेश गोपीनाथन का भी नाम शामिल है जो टाटा कंसलटेंसी सर्विस के पूर्व सीईओ रहे हैं. ट्रेंट के पी वेंकटेशलू की सैलरी में बासठ फीसदी का शानदार इजाफा देखा गया है. इंडियन होटल्स के पुनील चटवाल की आय में सैंतीस फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. टाटा कंज्यूमर के सुनील डीसूजा की सैलरी में चौबीस फीसदी का इजाफा देखा गया है. टाटा कैमिकल्स के आर मुकुंदन की सैलरी में सोलह फीसदी का इजाफा देखा गया है. टाटा पावर के प्रवीर सिन्हा की सैलरी में सोलह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. टीसीएस के राजेश गोपीनाथन की सैलरी में तेरह फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है.
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अजीत मैंदोला, जयपुरः
Rajasthan Budget 2022-23 : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त सरकारी कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पहले की तरह पेंशन योजना लागू करने की ऐतिहासिक घोषणा कर सब को चोंका दिया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकारी कर्मचारियों को लुभाने के लिए पेंशन योजना बहाल करने की घोषणा की हुई। लेकिन गहलोत ने अपने राज्य में फैसला कर केंद्र और दूसरे राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है।
2004 में बीजेपी की अगुवाई में बनी सरकार ने 2004 से लगे कर्मचारियों की पेंशन योजना बन्द कर दी थी। कहा जाता है अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की हार का एक बड़ा कारण पेंशन योजना बन्द करना भी था। इससे देशभर के सरकारी कर्मचारी खासे नाराज हो गए थे, उसके बाद पेंशन योजना को लेकर कई बार फिर से बहाल करने को लेकर चर्चा हुई। लेकिन कोई सरकार फैसला नही कर पाई। मुख्यमंत्री गहलोत ने आज अपने बजट भाषण में पेंशन योजना बहाली की घोषणा कर बहुत बड़ा सन्देश दे दिया। (Rajasthan Budget 2022-23)
अब रिटायरमेंट के बाद पहले की तरह पूरी पेंशन मिलेगी। अंशदायी पेंशन योजना बन्द होगी इसमें कर्मचारी को पैसा देना होता था। इसके साथ अलग से कृषि बजट पेश कर नई शुरूआत की। गहलोत सरकार के कई फैसलों को कांग्रेस दूसरे राज्यों में तो मुद्दा बनाएगी ही साथ ही मोदी सरकार पर दबाव बना राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा भी बना सकती है।
पेंशन योजना ऐसा फैसला है जो देश भर लाखों कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है। किसानों पर कृषि बजट का असर पड़ेगा। गहलोत के बजट पर विपक्ष जो भी टिप्पणी करे, लेकिन इसे ऐतिहासिक बजट कहा जा सकता है। जिसका लाभ कांग्रेस को अगले साल होने वाले चुनाव में मिलेगा। दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस उपलब्धि बता लाभ लेगी।
घोषणाएं आम आदमी पर डालेंगी असर (Rajasthan Budget 2022-23)
गहलोत ने दर्जनों ऐसी घोषणाएं की हैं जो प्रदेश के आम आदमी पर तो असर डालेंगी ही। लेकिन दूसरे राज्यों को भी रास्ता दिखाया है। एक लाख सरकारी नोकरियों के लिए विभिन्न पदों में भर्ती होगी। कृषि पर अलग घोषणाएं कर किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आम आदमी के स्वास्थ्य से लेकर मूलभूत सुविधाओं पर पूरा ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री गहलोत ने वित्त मंत्री के रूप में वर्ष 2022-23(Rajasthan Budget 2022-23) का राज्य बजट पेश करते हुए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की है।
इनमें शहरी क्षेत्रों में रोजगार, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए, बिजली उपभोक्ताओं को छूट जैसी प्रमुख घोषणाएं की। मेट्रो का विस्तार,महिलाओं को स्मार्ट फोन इसके साथ शहरों में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करने की भी घोषणा की है। अगले साल से शहरी क्षेत्रों में मनरेगा की तर्ज पर मांगे जाने पर 100 दिन का रोजगार मिलेगा। इस पर 800 करोड़ खर्च होंगे।
मनरेगा में 100 दिन का रोजगार 125 दिन करने की घोषणा की है। इस पर 700 करोड़ खर्च होंगे। इसके साथ उपभोक्ता को 50 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 150 यूनिट तक 3 रुपए और 150 से 300 यूनिट तक 2 रुपए और इससे उपर के कंज्यूमर को भी स्लैब के हिसाब से लाभ। इस पर 4000 करोड़ का खर्च होगा। (Rajasthan Budget 2022-23)
कृषि बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं (Rajasthan Budget 2022-23)
- मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना का बजट 2 हजार करोड़ से बढाकर 5000 करोड़ किया गया। संभाग मुख्यालयों पर माइक्रो इरिगेशन का सेंटर आफ एक्सीलेंस बनेगा।
- राजस्थान आर्गेनिक फार्मिंग मिशन शुरू होगा। मुख्यमंत्री जैविक खेती मिशन शुरू करने की भी घोषणा की।
- इसके साथ राजस्थान में संरक्षित खेती मिशन शुरू होगा, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस में खेती के लिए टीएसपी क्षेत्र के किसानों को 25 फीसदी एक्सट्रा अनुदान मिलेगा। अगले 2 साल में 20 हजार किसानों को 400 करोड़ का अनुदान मिलेगा। पहले साल 10 हजार किसानों को फायदा होगा। मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट के लिए 40 करोड़ अनुदान मिलेगा। जोधपुर में बाजरे का सेंटर आफ एक्सीलेंस बनेगा।
- राजस्थान फसल सुरक्षा मिशन शुरू होगा। 35 हजार किसानों को खेतों की तारबंदी के लिए अनुदान मिलेगा।
- सभी जिलों में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली अनुदान मिलेगा। इस साल 20 हजार करोड़ के सहकारी फसली कर्ज बांटे जाएंगे, 5 लाख नए किसानों को फसली कर्ज दिए जाएंगे झ्र 1 लाख अकृषि परिवारों को भी कर्ज मिलेगा।
- किसानों के लिए ड्रोन खरीदेगी सरकार, ड्रोन से कीटनाश्कों का स्प्रे करवाया जाएगा। एफपीओ को ड्रोन दिए जांगें। एफपीओ से किसान ड्रोन किराए पर ले सकेंगे।
- जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए 600 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे।
- लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 20 करोड़ रुपये प्रावधान किया। निशुल्क बीज उपलब्ध कराने के लिए 30 करोड़ रुपये होंगे खर्च।
- नीलगाय और आवारा पशुओं से फसल बचाव के लिए तारबंदी की दरों में रियायत की घोषणा। किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंपों की खरीद पर सरकार की ओर से रियायत दी जायेगी।
- गहलोत ने अपने बजट में हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की है। युवा,किसान, महिलाओं,सरकारी कर्मचारियों से लेकर हर विधानसभा में कुछ ना कुछ देकर हर विधायक को खुश किया है। (Rajasthan Budget 2022-23)
सीएम ने शेर पढ़कर की ने बजट की शुरूआत (Rajasthan Budget 2022-23)
गहलोत ने शेर पढ़ते हुए कहा कि न पूछो मेरी मंजिल कहाँ है, अभी तो सफर का इरादा किया है। ना हारूंगा हौसला उम्र भर, ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है। शेर के माध्य्म से गहलोत ने विपक्ष और विरिधियों को बड़ा सन्देश दे जता दिया है कि वह दबाव में नही आते हैं।
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अजीत मैंदोला, जयपुरः Rajasthan Budget दो हज़ार बाईस-तेईस : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक जनवरी दो हज़ार चार और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त सरकारी कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पहले की तरह पेंशन योजना लागू करने की ऐतिहासिक घोषणा कर सब को चोंका दिया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकारी कर्मचारियों को लुभाने के लिए पेंशन योजना बहाल करने की घोषणा की हुई। लेकिन गहलोत ने अपने राज्य में फैसला कर केंद्र और दूसरे राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है। दो हज़ार चार में बीजेपी की अगुवाई में बनी सरकार ने दो हज़ार चार से लगे कर्मचारियों की पेंशन योजना बन्द कर दी थी। कहा जाता है अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की हार का एक बड़ा कारण पेंशन योजना बन्द करना भी था। इससे देशभर के सरकारी कर्मचारी खासे नाराज हो गए थे, उसके बाद पेंशन योजना को लेकर कई बार फिर से बहाल करने को लेकर चर्चा हुई। लेकिन कोई सरकार फैसला नही कर पाई। मुख्यमंत्री गहलोत ने आज अपने बजट भाषण में पेंशन योजना बहाली की घोषणा कर बहुत बड़ा सन्देश दे दिया। अब रिटायरमेंट के बाद पहले की तरह पूरी पेंशन मिलेगी। अंशदायी पेंशन योजना बन्द होगी इसमें कर्मचारी को पैसा देना होता था। इसके साथ अलग से कृषि बजट पेश कर नई शुरूआत की। गहलोत सरकार के कई फैसलों को कांग्रेस दूसरे राज्यों में तो मुद्दा बनाएगी ही साथ ही मोदी सरकार पर दबाव बना राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा भी बना सकती है। पेंशन योजना ऐसा फैसला है जो देश भर लाखों कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है। किसानों पर कृषि बजट का असर पड़ेगा। गहलोत के बजट पर विपक्ष जो भी टिप्पणी करे, लेकिन इसे ऐतिहासिक बजट कहा जा सकता है। जिसका लाभ कांग्रेस को अगले साल होने वाले चुनाव में मिलेगा। दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस उपलब्धि बता लाभ लेगी। घोषणाएं आम आदमी पर डालेंगी असर गहलोत ने दर्जनों ऐसी घोषणाएं की हैं जो प्रदेश के आम आदमी पर तो असर डालेंगी ही। लेकिन दूसरे राज्यों को भी रास्ता दिखाया है। एक लाख सरकारी नोकरियों के लिए विभिन्न पदों में भर्ती होगी। कृषि पर अलग घोषणाएं कर किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आम आदमी के स्वास्थ्य से लेकर मूलभूत सुविधाओं पर पूरा ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री गहलोत ने वित्त मंत्री के रूप में वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस का राज्य बजट पेश करते हुए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की है। इनमें शहरी क्षेत्रों में रोजगार, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना को पाँच लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपए, बिजली उपभोक्ताओं को छूट जैसी प्रमुख घोषणाएं की। मेट्रो का विस्तार,महिलाओं को स्मार्ट फोन इसके साथ शहरों में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करने की भी घोषणा की है। अगले साल से शहरी क्षेत्रों में मनरेगा की तर्ज पर मांगे जाने पर एक सौ दिन का रोजगार मिलेगा। इस पर आठ सौ करोड़ खर्च होंगे। मनरेगा में एक सौ दिन का रोजगार एक सौ पच्चीस दिन करने की घोषणा की है। इस पर सात सौ करोड़ खर्च होंगे। इसके साथ उपभोक्ता को पचास यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। सभी घरेलू उपभोक्ताओं को एक सौ पचास यूनिट तक तीन रुपयापए और एक सौ पचास से तीन सौ यूनिट तक दो रुपयापए और इससे उपर के कंज्यूमर को भी स्लैब के हिसाब से लाभ। इस पर चार हज़ार करोड़ का खर्च होगा। कृषि बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं - मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना का बजट दो हजार करोड़ से बढाकर पाँच हज़ार करोड़ किया गया। संभाग मुख्यालयों पर माइक्रो इरिगेशन का सेंटर आफ एक्सीलेंस बनेगा। - राजस्थान आर्गेनिक फार्मिंग मिशन शुरू होगा। मुख्यमंत्री जैविक खेती मिशन शुरू करने की भी घोषणा की। - इसके साथ राजस्थान में संरक्षित खेती मिशन शुरू होगा, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस में खेती के लिए टीएसपी क्षेत्र के किसानों को पच्चीस फीसदी एक्सट्रा अनुदान मिलेगा। अगले दो साल में बीस हजार किसानों को चार सौ करोड़ का अनुदान मिलेगा। पहले साल दस हजार किसानों को फायदा होगा। मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट के लिए चालीस करोड़ अनुदान मिलेगा। जोधपुर में बाजरे का सेंटर आफ एक्सीलेंस बनेगा। - राजस्थान फसल सुरक्षा मिशन शुरू होगा। पैंतीस हजार किसानों को खेतों की तारबंदी के लिए अनुदान मिलेगा। - सभी जिलों में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली अनुदान मिलेगा। इस साल बीस हजार करोड़ के सहकारी फसली कर्ज बांटे जाएंगे, पाँच लाख नए किसानों को फसली कर्ज दिए जाएंगे झ्र एक लाख अकृषि परिवारों को भी कर्ज मिलेगा। - किसानों के लिए ड्रोन खरीदेगी सरकार, ड्रोन से कीटनाश्कों का स्प्रे करवाया जाएगा। एफपीओ को ड्रोन दिए जांगें। एफपीओ से किसान ड्रोन किराए पर ले सकेंगे। - जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए छः सौ करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। - लघु एवं सीमांत किसानों के लिए बीस करोड़ रुपये प्रावधान किया। निशुल्क बीज उपलब्ध कराने के लिए तीस करोड़ रुपये होंगे खर्च। - नीलगाय और आवारा पशुओं से फसल बचाव के लिए तारबंदी की दरों में रियायत की घोषणा। किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंपों की खरीद पर सरकार की ओर से रियायत दी जायेगी। - गहलोत ने अपने बजट में हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की है। युवा,किसान, महिलाओं,सरकारी कर्मचारियों से लेकर हर विधानसभा में कुछ ना कुछ देकर हर विधायक को खुश किया है। सीएम ने शेर पढ़कर की ने बजट की शुरूआत गहलोत ने शेर पढ़ते हुए कहा कि न पूछो मेरी मंजिल कहाँ है, अभी तो सफर का इरादा किया है। ना हारूंगा हौसला उम्र भर, ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है। शेर के माध्य्म से गहलोत ने विपक्ष और विरिधियों को बड़ा सन्देश दे जता दिया है कि वह दबाव में नही आते हैं।
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फेसबुक पर इन दिनों एक बहादुर बच्चे का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लड़के के पिता ने अपलोड किया है। ऑस्टेलिया के क्वींसलैंड में रहने वाले 14 साल के ओली वार्डरोप को बचपन से ही सांप पकड़ने का शौक है। चाहे कितना ही बड़ा और जहरीला सांप हो, ओली के लिए उसे पकड़ना बाएं हाथ का खेल है। बताते हैं ओली पांच साल की उम्र से ही सांप पकड़ने का काम कर रहा है और इस काम की ट्रेनिंग उसके पिता ने उसे दी। ओली बिना किसी डर के अपने हाथों से सांप पकड लेता है।
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि यह लड़का आठ फुट के अजगर को अपने हाथों से पकड़कर एक गाड़ी के नीचे से बाहर निकालता है। पहले तो अजगर की पूंछ पकड़ में आती है लेकिन जब उसे खींचा जाता है तो अजगर का मुंह निकल आता है और ओली उसे अपने हाथों में दबा लेता है। फेसबुक पर पोस्ट किए गए इस वीडियो को अभी तक हजारों लोग देख चुके हैं।
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फेसबुक पर इन दिनों एक बहादुर बच्चे का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लड़के के पिता ने अपलोड किया है। ऑस्टेलिया के क्वींसलैंड में रहने वाले चौदह साल के ओली वार्डरोप को बचपन से ही सांप पकड़ने का शौक है। चाहे कितना ही बड़ा और जहरीला सांप हो, ओली के लिए उसे पकड़ना बाएं हाथ का खेल है। बताते हैं ओली पांच साल की उम्र से ही सांप पकड़ने का काम कर रहा है और इस काम की ट्रेनिंग उसके पिता ने उसे दी। ओली बिना किसी डर के अपने हाथों से सांप पकड लेता है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि यह लड़का आठ फुट के अजगर को अपने हाथों से पकड़कर एक गाड़ी के नीचे से बाहर निकालता है। पहले तो अजगर की पूंछ पकड़ में आती है लेकिन जब उसे खींचा जाता है तो अजगर का मुंह निकल आता है और ओली उसे अपने हाथों में दबा लेता है। फेसबुक पर पोस्ट किए गए इस वीडियो को अभी तक हजारों लोग देख चुके हैं।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट के मतदाताओं ने इस बार भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को नकार दिया और गठबंधन से सपा प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां पर भरोसा जताया।
रामपुर, (जेएनएन)। लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट के मतदाताओं ने इस बार भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को नकार दिया और गठबंधन से सपा प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां पर भरोसा जताया। रिकॉर्ड वोटो की बारिश की। आजम ने जयाप्रदा को 110152 मतों से पराजित किया और जीत का सेहरा अपने सिर पर बांध लिया। जयाप्रदा को 452035 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर को 35654 वोट मिले। इधर, आजम की जीत की घोषणा होते ही कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कई जगह मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं पटाखे छोड़े गए।
रामपुर लोकसभा सीट आजादी के बाद से ही सुर्खियों में रही है। सबसे पहले 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस के टिकट पर महान क्रांतिकारी मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रत्याशी थे। वह रामपुर के पहले सांसद चुने गए और देश के पहले शिक्षा मंत्री बने। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी रामपुर से सांसद चुने जा चुके हैं। वह देश के पहले ऐसे नेता है जो भाजपा के टिकट पर सबसे पहले लोकसभा सदस्य चुने गए । उनसे पहले कोई भी नेता भाजपा के टिकट पर सांसद नहीं बन सका था। रामपुर लोकसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य है । यहां करीब 52 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। इस कारण यहां ज्यादातर मुस्लिम सांसद ही बनते रहे हैं । इनके अलावा केवल राजेंद्र शर्मा, जयप्रदा और डॉक्टर नेपाल सिंह ही यहां से सांसद बन सके। जयप्रदा 2004 के चुनाव में यहां सपा के टिकट पर पहली बार मैदान में उतरीं और सांसद बनी ।
इसके बाद 2009 में भी वह सपा के टिकट पर रामपुर से ही सांसद चुनी गई, लेकिन इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान उनके मुकाबले में हैं। वह रामपुर शहर से नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं। वह राज्यसभा सदस्य रहने के साथ ही प्रदेश सरकार में चार बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव पहली बार लड़ रहे हैं । इस चुनाव में आजम खान विवादित बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहे। चुनाव आयोग ने दो बार उन पर पाबंदी लगाई, जबकि आचार संहिता उल्लंघन और आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में प्रशासन ने उनके खिलाफ एक माह के अंदर 14 मुकदमे दर्ज कराएं ।
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लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट के मतदाताओं ने इस बार भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को नकार दिया और गठबंधन से सपा प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां पर भरोसा जताया। रामपुर, । लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट के मतदाताओं ने इस बार भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को नकार दिया और गठबंधन से सपा प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां पर भरोसा जताया। रिकॉर्ड वोटो की बारिश की। आजम ने जयाप्रदा को एक लाख दस हज़ार एक सौ बावन मतों से पराजित किया और जीत का सेहरा अपने सिर पर बांध लिया। जयाप्रदा को चार लाख बावन हज़ार पैंतीस वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर को पैंतीस हज़ार छः सौ चौवन वोट मिले। इधर, आजम की जीत की घोषणा होते ही कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कई जगह मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं पटाखे छोड़े गए। रामपुर लोकसभा सीट आजादी के बाद से ही सुर्खियों में रही है। सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ बावन में हुए लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस के टिकट पर महान क्रांतिकारी मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रत्याशी थे। वह रामपुर के पहले सांसद चुने गए और देश के पहले शिक्षा मंत्री बने। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी रामपुर से सांसद चुने जा चुके हैं। वह देश के पहले ऐसे नेता है जो भाजपा के टिकट पर सबसे पहले लोकसभा सदस्य चुने गए । उनसे पहले कोई भी नेता भाजपा के टिकट पर सांसद नहीं बन सका था। रामपुर लोकसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य है । यहां करीब बावन फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। इस कारण यहां ज्यादातर मुस्लिम सांसद ही बनते रहे हैं । इनके अलावा केवल राजेंद्र शर्मा, जयप्रदा और डॉक्टर नेपाल सिंह ही यहां से सांसद बन सके। जयप्रदा दो हज़ार चार के चुनाव में यहां सपा के टिकट पर पहली बार मैदान में उतरीं और सांसद बनी । इसके बाद दो हज़ार नौ में भी वह सपा के टिकट पर रामपुर से ही सांसद चुनी गई, लेकिन इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान उनके मुकाबले में हैं। वह रामपुर शहर से नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं। वह राज्यसभा सदस्य रहने के साथ ही प्रदेश सरकार में चार बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव पहली बार लड़ रहे हैं । इस चुनाव में आजम खान विवादित बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहे। चुनाव आयोग ने दो बार उन पर पाबंदी लगाई, जबकि आचार संहिता उल्लंघन और आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में प्रशासन ने उनके खिलाफ एक माह के अंदर चौदह मुकदमे दर्ज कराएं ।
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BAREILLY:
नगर निगम एक ओर जहां करदाताओं के टैक्स न देने पर उन्हें गैर जिम्मेदार करार दे रहा। वहीं दूसरी ओर गलत बिलिंग बनाकर टैक्स जमा करने वाले करदाताओं को ही बेवजह दौड़ा रहा। निगम के टैक्स विभाग ने कई करदाताओं को आवासीय भवन पर कॉमर्शियल टैक्स पर रेट लगाकर बिल पकड़ा दिए हैं। इन भवनों के एक हिस्से में ही दुकान या ऑफिस खुला होने के बावजूद विभाग की ओर से पूरे भवन के कारपेट एरिया पर ही कॉमर्शियल रेट पर टैक्स लगा दिया। इससे परेशान होकर वेडनसडे को करदाता नगर निगम में मेयर डॉ। आईएस तोमर से मिले और बिल सही कराने की गुहार लगाई।
आईवीआरआई रोड में भुवनेन्द्र कुमार सारस्वत के भवन में शंकर लाल शर्मा का इंटीरियर डेकोरेशन का ऑफिस है। निगम ने 200 स्क्वॉयर फीट के ऑफिस की जगह पूरे भवन पर ही कॉमर्शियल टैक्स लगा कर बिल थमा दिया। पीडि़त सही बिल कराने को निगम के चक्कर काट रहा। पीडि़त करदाता नगर आयुक्त शीलधर यादव के ऑफिस का इंटीरियर डिजायन कर चुका है। लेकिन नगर आयुक्त का काम करने के बावजूद उसे निगम से राहत नहीं मिल रही। दूसरा मामला सिविल लाइंस में सर्किट हाउस चौराहा के पास स्थित योगेन्द्र आर्किटेक्ट का है। इनके भवन के बेसमेंट में बुटिक खुला हुआ है। लेकिन निगम ने पूरे भवन पर ही कॉमर्शियल टैक्स लगा 8 लाख का बकाया बिल थमा दिया। परेशान करदाता ने सही बिल के लिए मेयर से मदद मांगी।
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BAREILLY: नगर निगम एक ओर जहां करदाताओं के टैक्स न देने पर उन्हें गैर जिम्मेदार करार दे रहा। वहीं दूसरी ओर गलत बिलिंग बनाकर टैक्स जमा करने वाले करदाताओं को ही बेवजह दौड़ा रहा। निगम के टैक्स विभाग ने कई करदाताओं को आवासीय भवन पर कॉमर्शियल टैक्स पर रेट लगाकर बिल पकड़ा दिए हैं। इन भवनों के एक हिस्से में ही दुकान या ऑफिस खुला होने के बावजूद विभाग की ओर से पूरे भवन के कारपेट एरिया पर ही कॉमर्शियल रेट पर टैक्स लगा दिया। इससे परेशान होकर वेडनसडे को करदाता नगर निगम में मेयर डॉ। आईएस तोमर से मिले और बिल सही कराने की गुहार लगाई। आईवीआरआई रोड में भुवनेन्द्र कुमार सारस्वत के भवन में शंकर लाल शर्मा का इंटीरियर डेकोरेशन का ऑफिस है। निगम ने दो सौ स्क्वॉयर फीट के ऑफिस की जगह पूरे भवन पर ही कॉमर्शियल टैक्स लगा कर बिल थमा दिया। पीडि़त सही बिल कराने को निगम के चक्कर काट रहा। पीडि़त करदाता नगर आयुक्त शीलधर यादव के ऑफिस का इंटीरियर डिजायन कर चुका है। लेकिन नगर आयुक्त का काम करने के बावजूद उसे निगम से राहत नहीं मिल रही। दूसरा मामला सिविल लाइंस में सर्किट हाउस चौराहा के पास स्थित योगेन्द्र आर्किटेक्ट का है। इनके भवन के बेसमेंट में बुटिक खुला हुआ है। लेकिन निगम ने पूरे भवन पर ही कॉमर्शियल टैक्स लगा आठ लाख का बकाया बिल थमा दिया। परेशान करदाता ने सही बिल के लिए मेयर से मदद मांगी।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Jamshedpur : रेल डीजी अनिल पालटा के आदेश पर टाटानगर रेल पुलिस की ओर से शनिवार से यात्री ट्रेनों में गांजा तस्करी के खिलाफ जांच अभियान शुरू किया गया है. इस क्रम में रेल पुलिस की ओर से अलग से टीम बनायी गयी है. टीम में शामिल पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सभी यात्री ट्रेनों पर नजर रख रहे हैं. स्टेशन पर जांच करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग पर भी जांच करने के लिये कहा गया है.
रेल डीजी ने कहा था कि उन्हें सूचना मिली है कि रेल मार्ग से भी गांजा की तस्करी की जाती है. इसके बाद ही इस तरह का फैसला लिया गया है. इसके लिये रेल पुलिस के साथ-साथ आरपीएफ को भी ड्यूटी पर लगाया गया है. उन्हें इस दौरान खास दिशा-निर्देश भी दिये गये हैं.
इधर यह चर्चा हो रही है कि अगर गांजा की तस्करी ट्रेन के पार्सल कोच से होती है तो इसमें रेल अधिकारियों की भी मिली-भगत हो सकती है. रेल डीजी के आदेश पर सभी बिंदुओं पर गौर किया जा रहा है. इसके लिये टाटानगर पार्सल ऑफिस को भी दिशा-निर्देश दिये गये हैं. बीच-बीच में पार्सल ऑफिस में भी जांच अभियान चलाने को कहा गया है.
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Jamshedpur : रेल डीजी अनिल पालटा के आदेश पर टाटानगर रेल पुलिस की ओर से शनिवार से यात्री ट्रेनों में गांजा तस्करी के खिलाफ जांच अभियान शुरू किया गया है. इस क्रम में रेल पुलिस की ओर से अलग से टीम बनायी गयी है. टीम में शामिल पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सभी यात्री ट्रेनों पर नजर रख रहे हैं. स्टेशन पर जांच करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग पर भी जांच करने के लिये कहा गया है. रेल डीजी ने कहा था कि उन्हें सूचना मिली है कि रेल मार्ग से भी गांजा की तस्करी की जाती है. इसके बाद ही इस तरह का फैसला लिया गया है. इसके लिये रेल पुलिस के साथ-साथ आरपीएफ को भी ड्यूटी पर लगाया गया है. उन्हें इस दौरान खास दिशा-निर्देश भी दिये गये हैं. इधर यह चर्चा हो रही है कि अगर गांजा की तस्करी ट्रेन के पार्सल कोच से होती है तो इसमें रेल अधिकारियों की भी मिली-भगत हो सकती है. रेल डीजी के आदेश पर सभी बिंदुओं पर गौर किया जा रहा है. इसके लिये टाटानगर पार्सल ऑफिस को भी दिशा-निर्देश दिये गये हैं. बीच-बीच में पार्सल ऑफिस में भी जांच अभियान चलाने को कहा गया है.
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सिडनी। बेहतरीन फॉर्म में चल रहे कप्तान स्टीवन स्मिथ के सीरीज के चौथे शतक की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी सात विकेट पर 572 रन बनाकर घोषित करके भारत के खिलाफ दूसरे दिन चौथे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट पर शिकंजा कस दिया। स्मिथ ने अपने करियर का आठवां शतक जड़ते हुए 117 रन की पारी खेली और ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके अलावा शेन वॉटसन (81), शॉन मार्श (73) और जो बर्न्स (58) ने भी उम्दा पारियां खेली। भारतीय टीम के लिए यह एक और निराशाजनक दिन रहा। भारत ने इसके जवाब में सलामी बल्लेबाज मुरली विजय (0) का विकेट गंवाने के बाद दिन का खेल खत्म होने तक एक विकेट पर 71 रन बनाए। रोहित शर्मा 40 जबकि लोकेश राहुल 31 रन बनाकर खेल रहे हैं। भारत अब भी 501 रन से पीछे चल रहा है। पारी की तीसरी ही गेंद पर विजय का विकेट गंवाने के बाद रोहित और राहुल ने सतर्कता के साथ बल्लेबाजी की और दिन का खेल खत्म होने तक भारत को और झटके नहीं लगने दिए। विजय को मिशेल स्टार्क ने विकेटकीपर ब्रेड हैडिन के हाथों कैच कराया। रोहित ने हालांकि बीच-बीच में आक्रामक तेवर भी दिखाए। उन्होंने स्पिनर नेथन लायन पर दो छक्के मारे और राहुल के साथ मिलकर 19वें ओवर में टीम का स्कोर 50 रन के पार पहुंचाया। भारत को अब गुरुवार को इस जोड़ी से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
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सिडनी। बेहतरीन फॉर्म में चल रहे कप्तान स्टीवन स्मिथ के सीरीज के चौथे शतक की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी सात विकेट पर पाँच सौ बहत्तर रन बनाकर घोषित करके भारत के खिलाफ दूसरे दिन चौथे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट पर शिकंजा कस दिया। स्मिथ ने अपने करियर का आठवां शतक जड़ते हुए एक सौ सत्रह रन की पारी खेली और ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके अलावा शेन वॉटसन , शॉन मार्श और जो बर्न्स ने भी उम्दा पारियां खेली। भारतीय टीम के लिए यह एक और निराशाजनक दिन रहा। भारत ने इसके जवाब में सलामी बल्लेबाज मुरली विजय का विकेट गंवाने के बाद दिन का खेल खत्म होने तक एक विकेट पर इकहत्तर रन बनाए। रोहित शर्मा चालीस जबकि लोकेश राहुल इकतीस रन बनाकर खेल रहे हैं। भारत अब भी पाँच सौ एक रन से पीछे चल रहा है। पारी की तीसरी ही गेंद पर विजय का विकेट गंवाने के बाद रोहित और राहुल ने सतर्कता के साथ बल्लेबाजी की और दिन का खेल खत्म होने तक भारत को और झटके नहीं लगने दिए। विजय को मिशेल स्टार्क ने विकेटकीपर ब्रेड हैडिन के हाथों कैच कराया। रोहित ने हालांकि बीच-बीच में आक्रामक तेवर भी दिखाए। उन्होंने स्पिनर नेथन लायन पर दो छक्के मारे और राहुल के साथ मिलकर उन्नीसवें ओवर में टीम का स्कोर पचास रन के पार पहुंचाया। भारत को अब गुरुवार को इस जोड़ी से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
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क्या आपको लैंड रोवर रेंज रोवर वेलार या मर्सिडीज जीएलई खरीदनी चाहिए? जानिए कौनसी कार आपके लिए बेस्ट है - प्राइस, साइज, स्पेस, बूट स्पेस, सर्विस, माइलेज, फीचर्स, कलर्स और अन्य स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर दोनों मॉडल्स की तुलना करें। लैंड रोवर रेंज रोवर वेलार प्राइस आर-डायनामिक एस डीजल (डीजल) के लिए 89. 41 लाख एक्स शोरूम से शुरू हैं और मर्सिडीज जीएलई प्राइस 300डी (डीजल) के लिए 90 लाख एक्स शोरूम से शुरू है। रेंज रोवर वेलार में 1999 सीसी का इंजन (डीजल टॉप मॉडल) दिया गया है, वहीं जीएलई में 2999 सीसी का इंजन (पेट्रोल टॉप मॉडल) मिलता है। रेंज रोवर वेलार का (डीजल टॉप मॉडल) 15. 8 किमी/लीटर का माइलेज देता है, जबकि जीएलई का (डीजल टॉप मॉडल) 9. 7 किमी/लीटर का माइलेज देने में सक्षम है।
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आज सुबह से ही पंडित दयाराम महाराज के मन में कुछ बुरा होने वाला है ऐसी भावनाएं आ रही है । हालांकि आज ऐसा नहीं होना चाहिए । 3 दिन पहले ही उन्होंने विपरीत प्रक्रिया किया था और वह विपरीत क्रिया सफल भी हुआ है । देवी पितांबरी की आशीर्वाद से उनका कोई भी तंत्र क्रिया असफल नहीं होता । अगर सब कुछ ठीक रहा तो कल रात ही वह लड़की मर गई होगी । अर्थात आज से राहुल और आराध्या की सारी मुसीबत समाप्त हो जाएगी । लेकिन फिर भी सुबह से मन क्यों बौखलाया हुआ है । पंडित महाराज अपने घर में इसी उत्तेजना की वजह से इधर - उधर टहल रहे थे । उस वक्त सुबह के 8:00 बज रहे हैं । उसी वक्त उनका मोबाइल फोन बजने लगा ।
तुरंत ही उनके मन में एक बिजली दौड़ गई । कहीं कोई बुरा समाचार तो नहीं ? फोन रिसीव करते ही उधर से राहुल की उत्तेजित आवाज सुनाई दिया,
" हैलो पंडित महाराज , रिया अब जिन्दा नहीं हैं । वह मर गई । इस वक्त उसके फेसबुक पर थोड़ा इधर उधर करते हुए एक रिश्तेदार के पोस्ट से पता चला । "
पंडित महाराज को थोड़ी शांति हुई ।
" इसका मतलब विपरीत क्रिया ने अपना कार्य कर दिया है । "
लेकिन इसके बाद जो बातें राहुल ने बताई उसके लिए पंडित दयाराम तैयार नहीं थे ।
" लेकिन पंडित महाराज रिया की मौत कल नहीं हुई । लगभग देढ महीने पहले ही उसकी मौत हो गई थी । उसने अपने गले में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था । लेकिन यह कैसे संभव हुआ पंडित जी अगर रिया देढ महीने पहले ही मर गई है तो उसके योनि में वास करने वाला योनिनिशा भी खत्म हो जाना चाहिए था । वह इतने दिनों से यह सब कैसे कर रहा था ? "
यह सुनकर पंडित महाराज का सिर गर्म हो गया ।
उन्होंने पूछा ,
" राहुल तुम्हारी जननी माँ की कसम , सच-सच बताओ रिया के साथ रिश्ते में रहते वक्त तुमने कभी आराध्या के साथ शारीरिक संबंध बनाया था या नहीं ? "
इस प्रश्न को सुनकर राहुल एक बार फिर कुछ देर चुप रहा । फिर मिमियाते हुए बोला ,
" हाँ हुआ था पंडित महाराज लेकिन उस दिन शर्म के कारण मैंने आपसे झूठ बोला था । "
" कब और कहां तुम दोनों ने संबंध बनाया था ? "
" उसी रात जब मैं अपने रिश्तेदार के शादी में उससे मिला था । उस वक्त कुछ भी सीरियस नहीं था केवल एक दूसरे को पंसद करके और थोड़ा नशे में आउट ऑफ़ इंट्रेस्ट हम करीब आ गए और फिर वो सब..... "
शर्म के कारण राहुल ने अपनी बात को समाप्त नहीं कर पाया । अपने पिताजी से भी बड़े उम्र के आदमी जिसे उसके घरवाले बहुत सालों से जानते हैं उनसे यह बताते हुए संकोच से राहुल का दिल बैठ गया ।
" हे भगवान ! सब कुछ खत्म । अभी तुरंत आराध्या के घर पर जाना होगा । "
आराध्या के घर पर पहुंचने के बाद ही विशेष लाभ नहीं हुआ । कोई लाभ होता भी नहीं । जो कुछ भी होना था पहले ही हो चुका है । विपरीत प्रक्रिया के हिसाब से कल आधी रात को ही आराध्या योनिनिशा के काम भूख का शिकार हुई है । उसकी खून से लतपथ शरीर उसके कमरे में ही मिला । शरीर पर एक भी खरोच नहीं केवल उसके योनि से खून की बारिश हुई है ।
अब हालांकि पूरी बात पानी के जैसी स्पष्ट हो गई है । कहीं कोई भी संदेह नहीं । ,
को आराध्या ने अपनी योनि में स्थान दिया था । केवल और केवल राहुल को पाने के लिए । किसके माध्यम से व किसने इस क्रिया को पूर्ण किया था यह जानना अब सम्भव नहीं । लेकिन जिसने भी इस शैतानी क्रिया को किया था उसे अवश्य ही अपने अंदर से योनिनिशा को दुसरे की योनि में भेजकर बहुत शांति मिला होगा ।
जो भी हो पूरी कहानी का हिसाब साफ - साफ मिल रहा है ।
एक शादी के कार्यक्रम में अचानक आराध्या से राहुल मिला था । नशा या अचानक एक दूसरे को पसंद करने के कारण आपसी शारीरिक संबंध हो गया । इसके कारण आराध्या राहुल को पसंद करने लगी थी । लेकिन उस वक्त रिया और राहुल में सबकुछ सामान्य था दोनों एक दुसरे के प्यार में डूबे हुए थे । इसके बाद आराध्या ने जब बहुत कोशिश करके भी राहुल के दिल में जगह नहीं बना पाई । तब उसने अपने प्यार को पाने के लिए इस भयानक रास्ते को चुन लिया । उस दिन जब आराध्या के डरने के कारण राहु ल उसके घर गया था और आराध्या बहुत देर तक राहुल के सीने से लिपटी हुई थी । उसी वक्त शायद इस क्रिया में लगने वाले राहुल के सीने के बाल को उनसे चुपचाप संग्रह कर लिया था ।
रिया ने शायद राहुल के प्रति आराध्या के वासना को समझ लिया था । इसीलिए उसे पसंद नहीं करती थी । इस संसार में एक लड़की को किसी लड़की से ज्यादा कौन समझ सकता है । उपचार क्रिया समाप्त होते ही योनिनिशा ने अपना काम शुरू किया । रिया के साथ राहुल का रिश्ता धीरे-धीरे झगड़े के कारण कमजोर पड़ने लगा । सामान्य झगड़ा ने भी बड़ा रूप ले लिया और दोनों के बीच दरार पड़ गई । और इसी के दूसरी तरफ आराध्या के प्रति राहुल का मानसिक व शारीरिक आकर्षण बढ़ता ही गया । इसके फलस्वरुप राहुल जल्द ही आराध्या की प्यार में वशीभूत हो गया । यह प्यार है या किसी अलौकिक क्षमता के द्वारा घटित कोई मायावी नशा ? जो मनुष्य को सब कुछ भूलने के लिए विवश कर देता है । उसे भी जो अपने से ज्यादा उस आदमी को प्यार करती थी । इधर उस भयानक शैतान को सहन न कर पाने के कारण रिया आगरा छोड़कर अजमेर चली गई । उसने सोचा था कि वहां पर उसे शांति मिलेगी । लेकिन योनिनिशा इतनी आसानी से अपने शिकार को नहीं छोड़ती । इसीलिए उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा ।आगरा छोड़ने से पहले वह राहुल को एक बार समझाने आई थी । शायद वह समझ गई थी कि इसमें कोई अलौकिक शैतानी बात है । लेकिन राहुल ने उसकी बातों को नहीं सुना और सुनेगा भी कैसे वह तो उस वक्त पूरी तरह आराध्या के वश में था । रिया मर चुकी थी । राहुल ,आराध्या की मुट्ठी में..
ऐसे ही जब सब कुछ ठीक ही चल रहा था तभी कहानी में एक नया मोड़ आ गया । योनिनिशा के काम भोग से परेशान होकर आराध्या ने उसे रोकना शुरू कर दिया । लेकिन बेचारी लड़की शायद नहीं जानती थी कि इसका अंजाम कितना भयानक हो सकता है । योनिनिशा ने बाधा पाने के कारण आराध्या को भी ठीक वैसे ही सताता रहा जैसे वह अपने शिकार को करता है । आराध्या ने इस बात को छुपाने की बहुत कोशिश की लेकिन अंत में वह राहुल द्वारा पकड़ी गई । वैसे भी स्वाभाविक है इन चीजों को ज्यादा समय तक छुपाया नहीं जा सकता । इसके बाद वही पंडित महाराज के पास जाना और बाकी घटना समूह । केवल राहुल अगर एक बार पंडित महाराज से उस दिन बता देता कि आराध्या के साथ बहुत पहले ही उसने शारीरिक संबंध बना लिया था , तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता । क्योंकि पंडित महाराज ने शुरू से ही आराध्या पर ही शक किया था । क्योंकि नियमानुसार योनिनिशा को योनि में धारण करने से पहले जिसे वशीकरण करना है उसके साथ एक बार शारीरिक संबंध बनाना पड़ता है । उस दिन राहुल की बात पर पंडित महाराज ने भी विश्वास कर लिया था । जिसके फलस्वरूप आज आराध्या को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा । केवल छोटा सा एक झूठ , थोड़ी सी काम नशा मनुष्य के जीवन में कितना बड़ा मुसीबत बन सकता है यह मनुष्य समझ ही नहीं पाता । हालांकि अब राहुल को समझ आ गया है । यमुना नदी के किनारे बैठकर वह रो रहा है ।
आराध्या की शरीर को कुछ देर पहले ही विद्युत् शवदाह गृह में ले जाया गया है । जिस शरीर की तृप्ति के लिए इतना कुछ वही शरीर कुछ ही देर बाद राख बन जाएगा । फिर वह राख इस यमुना में कहीं मिल जाएगा ।
यमुना के किनारे यहां दूर से ही आराध्या के माता पिता के रोने की आवाज सुनाई दे रहा है ।
राहुल भी रो रहा है लेकिन किसके लिए ? आराध्या के लिए या रिया के लिए ? रिया जिसने उससे हमेशा प्यार किया था एवं अपने प्यार के फल में उसे निर्मम मृत्यु प्राप्त हुई । या वो रो रहा है आराध्या के लिए जिस आराध्या ने उससे दिल से प्यार किया था । लेकिन भूल गई थी कि जिससे हम प्यार करते हैं वह भी हमें प्यार करें ऐसा नहीं होता । कभी - कभी उसे अपनी तरह अच्छे से रहने देना चाहिए, उसके ख़ुशी में खुश होना चाहिए , यही तो सच्चे और स्वच्छ प्यार के लक्षण हैं ।
यमुना किनारे खड़े पंडित दयाराम महाराज अपने में बड़बड़ाते रहे ,
" हाय ! ये मनुष्य शरीर । हाय ! उसके अंदर की यह काम वासना की नशा । "
काम वासना ? काम वासना इस प्रवृति को अगर राहुल और आराध्या ने सही समय पर नियंत्रण कर लिया होता तो आज शायद तीन जीवन ऐसे नष्ट न होते । अनियंत्रित यह कामवासना मनुष्य के अंदर रहकर धीरे - धीरे अपने प्रभाव को बढ़ाता है । फिर क्रमशः दिमाग में रहने वाले वाली नैतिकता व समझ को खत्म करके उस पूरे मनुष्य को ही खत्म कर देता है । उसकी भूख भी कभी शांत नहीं होती । काम वासना से बड़ा क्या कोई योनिनिशा इस पृथ्वी पर है ?
काम वासना इस एक पर जिसने नियंत्रण कर लिया वह हमेशा एक आम मनुष्य से कई पायदान ऊपर होता है ।।
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आज सुबह से ही पंडित दयाराम महाराज के मन में कुछ बुरा होने वाला है ऐसी भावनाएं आ रही है । हालांकि आज ऐसा नहीं होना चाहिए । तीन दिन पहले ही उन्होंने विपरीत प्रक्रिया किया था और वह विपरीत क्रिया सफल भी हुआ है । देवी पितांबरी की आशीर्वाद से उनका कोई भी तंत्र क्रिया असफल नहीं होता । अगर सब कुछ ठीक रहा तो कल रात ही वह लड़की मर गई होगी । अर्थात आज से राहुल और आराध्या की सारी मुसीबत समाप्त हो जाएगी । लेकिन फिर भी सुबह से मन क्यों बौखलाया हुआ है । पंडित महाराज अपने घर में इसी उत्तेजना की वजह से इधर - उधर टहल रहे थे । उस वक्त सुबह के आठ:शून्य बज रहे हैं । उसी वक्त उनका मोबाइल फोन बजने लगा । तुरंत ही उनके मन में एक बिजली दौड़ गई । कहीं कोई बुरा समाचार तो नहीं ? फोन रिसीव करते ही उधर से राहुल की उत्तेजित आवाज सुनाई दिया, " हैलो पंडित महाराज , रिया अब जिन्दा नहीं हैं । वह मर गई । इस वक्त उसके फेसबुक पर थोड़ा इधर उधर करते हुए एक रिश्तेदार के पोस्ट से पता चला । " पंडित महाराज को थोड़ी शांति हुई । " इसका मतलब विपरीत क्रिया ने अपना कार्य कर दिया है । " लेकिन इसके बाद जो बातें राहुल ने बताई उसके लिए पंडित दयाराम तैयार नहीं थे । " लेकिन पंडित महाराज रिया की मौत कल नहीं हुई । लगभग देढ महीने पहले ही उसकी मौत हो गई थी । उसने अपने गले में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था । लेकिन यह कैसे संभव हुआ पंडित जी अगर रिया देढ महीने पहले ही मर गई है तो उसके योनि में वास करने वाला योनिनिशा भी खत्म हो जाना चाहिए था । वह इतने दिनों से यह सब कैसे कर रहा था ? " यह सुनकर पंडित महाराज का सिर गर्म हो गया । उन्होंने पूछा , " राहुल तुम्हारी जननी माँ की कसम , सच-सच बताओ रिया के साथ रिश्ते में रहते वक्त तुमने कभी आराध्या के साथ शारीरिक संबंध बनाया था या नहीं ? " इस प्रश्न को सुनकर राहुल एक बार फिर कुछ देर चुप रहा । फिर मिमियाते हुए बोला , " हाँ हुआ था पंडित महाराज लेकिन उस दिन शर्म के कारण मैंने आपसे झूठ बोला था । " " कब और कहां तुम दोनों ने संबंध बनाया था ? " " उसी रात जब मैं अपने रिश्तेदार के शादी में उससे मिला था । उस वक्त कुछ भी सीरियस नहीं था केवल एक दूसरे को पंसद करके और थोड़ा नशे में आउट ऑफ़ इंट्रेस्ट हम करीब आ गए और फिर वो सब..... " शर्म के कारण राहुल ने अपनी बात को समाप्त नहीं कर पाया । अपने पिताजी से भी बड़े उम्र के आदमी जिसे उसके घरवाले बहुत सालों से जानते हैं उनसे यह बताते हुए संकोच से राहुल का दिल बैठ गया । " हे भगवान ! सब कुछ खत्म । अभी तुरंत आराध्या के घर पर जाना होगा । " आराध्या के घर पर पहुंचने के बाद ही विशेष लाभ नहीं हुआ । कोई लाभ होता भी नहीं । जो कुछ भी होना था पहले ही हो चुका है । विपरीत प्रक्रिया के हिसाब से कल आधी रात को ही आराध्या योनिनिशा के काम भूख का शिकार हुई है । उसकी खून से लतपथ शरीर उसके कमरे में ही मिला । शरीर पर एक भी खरोच नहीं केवल उसके योनि से खून की बारिश हुई है । अब हालांकि पूरी बात पानी के जैसी स्पष्ट हो गई है । कहीं कोई भी संदेह नहीं । , को आराध्या ने अपनी योनि में स्थान दिया था । केवल और केवल राहुल को पाने के लिए । किसके माध्यम से व किसने इस क्रिया को पूर्ण किया था यह जानना अब सम्भव नहीं । लेकिन जिसने भी इस शैतानी क्रिया को किया था उसे अवश्य ही अपने अंदर से योनिनिशा को दुसरे की योनि में भेजकर बहुत शांति मिला होगा । जो भी हो पूरी कहानी का हिसाब साफ - साफ मिल रहा है । एक शादी के कार्यक्रम में अचानक आराध्या से राहुल मिला था । नशा या अचानक एक दूसरे को पसंद करने के कारण आपसी शारीरिक संबंध हो गया । इसके कारण आराध्या राहुल को पसंद करने लगी थी । लेकिन उस वक्त रिया और राहुल में सबकुछ सामान्य था दोनों एक दुसरे के प्यार में डूबे हुए थे । इसके बाद आराध्या ने जब बहुत कोशिश करके भी राहुल के दिल में जगह नहीं बना पाई । तब उसने अपने प्यार को पाने के लिए इस भयानक रास्ते को चुन लिया । उस दिन जब आराध्या के डरने के कारण राहु ल उसके घर गया था और आराध्या बहुत देर तक राहुल के सीने से लिपटी हुई थी । उसी वक्त शायद इस क्रिया में लगने वाले राहुल के सीने के बाल को उनसे चुपचाप संग्रह कर लिया था । रिया ने शायद राहुल के प्रति आराध्या के वासना को समझ लिया था । इसीलिए उसे पसंद नहीं करती थी । इस संसार में एक लड़की को किसी लड़की से ज्यादा कौन समझ सकता है । उपचार क्रिया समाप्त होते ही योनिनिशा ने अपना काम शुरू किया । रिया के साथ राहुल का रिश्ता धीरे-धीरे झगड़े के कारण कमजोर पड़ने लगा । सामान्य झगड़ा ने भी बड़ा रूप ले लिया और दोनों के बीच दरार पड़ गई । और इसी के दूसरी तरफ आराध्या के प्रति राहुल का मानसिक व शारीरिक आकर्षण बढ़ता ही गया । इसके फलस्वरुप राहुल जल्द ही आराध्या की प्यार में वशीभूत हो गया । यह प्यार है या किसी अलौकिक क्षमता के द्वारा घटित कोई मायावी नशा ? 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सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से कहा कि कुछ लोगों को गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं से दिक्कत है। सपा वालों ने इलेक्शन कमीशन को चिट्टी लिखी है कि ये टेबलेट, स्मार्टफोन का वितरण रोक दो। ये लोग अगला एप्लीकेशन देंगे कि गरीबों का राशन भी दो। योगी ने कहा कि ये दो लड़कों की जोड़ी एक दंगा कराने वाला एक दंगे का तमाशा देखने वाला है। हस्तिनापुर तो इसी मेरठ में हैं द्रोपदी के चीरहरण पर द्रोपदी ने भरी सभा में उस पाप का दोषी पहुंचा तो विदुर ने कहा था कि एक तिहाई आरोपी वो तमाशबीन भी है। योगी ने कहा कि दंगा नहीं होने देंगे, हमें तमाशबीन नहीं बनना है। मेरठ मलियाना में प्रभावी मतदाता संवाद में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोगों को परेशानी है कि भाजपा वाले गरीबों को निशुल्क बिजली, पानी, पेंशन, राशन देते है ंउनका शौचालय बनाते हैं। कहा कि हिमालय से मां गंगा, यमुना एक साथ निकलती है। मुझसे कुछ लोगों ने कहा कांवड़ यात्रा निकलेगी तो बवाल हो जाएगा। मैंने कहा अगर अराजकता फैलाएंगे, दंगा करेंगे तो बुलडोजर भी चलेगा। अपराध करेंगे तो हम सजा भी देंगे। योगी ने महिला सुरक्षा पर कहा कि आज बेटी स्कूल जा रही है।
योगी ने कहा कि 1987 में मेरठ में भयंकर दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों मारे गए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर में दंगे ही दंगे हुए। बुलंदशहर में बवाल हुआ। पश्चिम को अराजकता की आग में झोंका। कहा 'नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादीÓ। कहा कि दंगाइयों को नियंत्रण में रखने के लिए कैराना में पीएसी कैंप, देवबंद में एटीएस केंद्र खोला गया है। अब जो 'दंगा करेंगे तो संपत्ति जब्त होगी, बुल्डोजर भी चलेगा। कांग्रेस-सपा दोनों दल दंगाइयों के साथ रहे हैं।
योगी ने कहा कि चुनाव 80-20 का होगा, 80 भाजपा के पास होगा। जो लोग वैक्सीन नहीं लेने की शपथ ले रहे थे उनकी जान भी इसी वैक्सीन ने बचाई है। जो हमारे संकट का साथी होगा वो ही सच्चा साथी होगा बाकी सब अवसरवादी हैं। पहले दंगों, कफ्र्यू के कारण लोगों को तबाह किया, निर्दोष लोगों को मरवाया। डबल इंजन की सरकार को विक्ट्री का चिन्ह है। सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार थी मगर लोगों को न राशन मिलता था न दवाई, विकास का पैसा पहले इत्र वाले मित्र के घर चला जाता था। आज कफ्र्यू नहीं लगता, कांवड़ यात्रा निकलती है। सपा और कांग्रेस की सरकार में दंगा शुरू हो जाता था। व्यापारी, गरीब सब परेशान रहते थे।
सीएम योगी ने कांग्रेस-सपा पर कड़ा हमला बोला। कहा कि दोनों दल दंगाइयों के साथ रहे हैं। 1987 में मेरठ में भयंकर दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों मारे गए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर में दंगे ही दंगे हुए। बुलंदशहर में बवाल हुआ। पश्चिम को अराजकता की आग में झोंका। कहा 'नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादीÓ। कहा कि दंगाइयों को नियंत्रण में रखने के लिए कैराना में पीएसी कैंप, देवबंद में एटीएस केंद्र खोला गया है। आगाह किया कि 'दंगा करेंगे तो संपत्ति जब्त होगी, बुल्डोजर भी चलेगाÓ। हर बेटी को सुरक्षा मिलेगी।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से कहा कि कुछ लोगों को गरीबों को मिलने वाली सुविधाओं से दिक्कत है। सपा वालों ने इलेक्शन कमीशन को चिट्टी लिखी है कि ये टेबलेट, स्मार्टफोन का वितरण रोक दो। ये लोग अगला एप्लीकेशन देंगे कि गरीबों का राशन भी दो। योगी ने कहा कि ये दो लड़कों की जोड़ी एक दंगा कराने वाला एक दंगे का तमाशा देखने वाला है। हस्तिनापुर तो इसी मेरठ में हैं द्रोपदी के चीरहरण पर द्रोपदी ने भरी सभा में उस पाप का दोषी पहुंचा तो विदुर ने कहा था कि एक तिहाई आरोपी वो तमाशबीन भी है। योगी ने कहा कि दंगा नहीं होने देंगे, हमें तमाशबीन नहीं बनना है। मेरठ मलियाना में प्रभावी मतदाता संवाद में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोगों को परेशानी है कि भाजपा वाले गरीबों को निशुल्क बिजली, पानी, पेंशन, राशन देते है ंउनका शौचालय बनाते हैं। कहा कि हिमालय से मां गंगा, यमुना एक साथ निकलती है। मुझसे कुछ लोगों ने कहा कांवड़ यात्रा निकलेगी तो बवाल हो जाएगा। मैंने कहा अगर अराजकता फैलाएंगे, दंगा करेंगे तो बुलडोजर भी चलेगा। अपराध करेंगे तो हम सजा भी देंगे। योगी ने महिला सुरक्षा पर कहा कि आज बेटी स्कूल जा रही है। योगी ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में मेरठ में भयंकर दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों मारे गए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर में दंगे ही दंगे हुए। बुलंदशहर में बवाल हुआ। पश्चिम को अराजकता की आग में झोंका। कहा 'नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादीÓ। कहा कि दंगाइयों को नियंत्रण में रखने के लिए कैराना में पीएसी कैंप, देवबंद में एटीएस केंद्र खोला गया है। अब जो 'दंगा करेंगे तो संपत्ति जब्त होगी, बुल्डोजर भी चलेगा। कांग्रेस-सपा दोनों दल दंगाइयों के साथ रहे हैं। योगी ने कहा कि चुनाव अस्सी-बीस का होगा, अस्सी भाजपा के पास होगा। जो लोग वैक्सीन नहीं लेने की शपथ ले रहे थे उनकी जान भी इसी वैक्सीन ने बचाई है। जो हमारे संकट का साथी होगा वो ही सच्चा साथी होगा बाकी सब अवसरवादी हैं। पहले दंगों, कफ्र्यू के कारण लोगों को तबाह किया, निर्दोष लोगों को मरवाया। डबल इंजन की सरकार को विक्ट्री का चिन्ह है। सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार थी मगर लोगों को न राशन मिलता था न दवाई, विकास का पैसा पहले इत्र वाले मित्र के घर चला जाता था। आज कफ्र्यू नहीं लगता, कांवड़ यात्रा निकलती है। सपा और कांग्रेस की सरकार में दंगा शुरू हो जाता था। व्यापारी, गरीब सब परेशान रहते थे। सीएम योगी ने कांग्रेस-सपा पर कड़ा हमला बोला। कहा कि दोनों दल दंगाइयों के साथ रहे हैं। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में मेरठ में भयंकर दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों मारे गए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर में दंगे ही दंगे हुए। बुलंदशहर में बवाल हुआ। पश्चिम को अराजकता की आग में झोंका। कहा 'नाम समाजवादी, सोच परिवारवादी और काम दंगावादीÓ। कहा कि दंगाइयों को नियंत्रण में रखने के लिए कैराना में पीएसी कैंप, देवबंद में एटीएस केंद्र खोला गया है। आगाह किया कि 'दंगा करेंगे तो संपत्ति जब्त होगी, बुल्डोजर भी चलेगाÓ। हर बेटी को सुरक्षा मिलेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सीकर के प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर में 24 मई को शाम 5 बजे बाद ही भक्त बाबा श्याम के दर्शन कर पाएंगे। दरअसल इस दिन बाबा श्याम का तिलक और विशेष सेवा पूजा की जाएगी। ऐसे में मंदिर 18. 5 घंटे बंद रहेगा। मंदिर कमेटी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री श्याम सिंह चौहान ने आदेश जारी कर बताया है 24 मई को बाबा श्याम की विशेष सेवा पूजा और तिलक किया जाएगा। ऐसे में 23 मई की रात 10:30 बजे से ही मंदिर को दर्शनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। जो अगले दिन 24 मई को शाम 5 बजे खोला जाएगा।
गौरतलब है कि विशेष पर्वों, आयोजनों और अमावस्या के बाद बाबा श्याम का तिलक और श्रृंगार किया जाता है। वही सीकर के खाटू श्याम मंदिर में हर महीने लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। अब यहां भक्तों के लिए रींगस से खाटू तक 17 किलोमीटर का पैदल डेडिकेटेड मार्ग भी बनाया जा रहा है।
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सीकर के प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर में चौबीस मई को शाम पाँच बजे बाद ही भक्त बाबा श्याम के दर्शन कर पाएंगे। दरअसल इस दिन बाबा श्याम का तिलक और विशेष सेवा पूजा की जाएगी। ऐसे में मंदिर अट्ठारह. पाँच घंटाटे बंद रहेगा। मंदिर कमेटी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री श्याम सिंह चौहान ने आदेश जारी कर बताया है चौबीस मई को बाबा श्याम की विशेष सेवा पूजा और तिलक किया जाएगा। ऐसे में तेईस मई की रात दस:तीस बजे से ही मंदिर को दर्शनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। जो अगले दिन चौबीस मई को शाम पाँच बजे खोला जाएगा। गौरतलब है कि विशेष पर्वों, आयोजनों और अमावस्या के बाद बाबा श्याम का तिलक और श्रृंगार किया जाता है। वही सीकर के खाटू श्याम मंदिर में हर महीने लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। अब यहां भक्तों के लिए रींगस से खाटू तक सत्रह किलोग्राममीटर का पैदल डेडिकेटेड मार्ग भी बनाया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नाहन - शिशु विद्या निकेतन वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन ने अभिभावकों की सुविधा के लिए अपना मोबाइल ऐप लॉच किया। ऐप के बारे में जानकारी देते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य कुंदन ठाकुर ने बताया कि अब सभी अभिभावक मोबाइल ऐप के माध्यम से विद्यालय से सीधेतौर पर जुड़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि इस ऐप के लॉच होने से अभिभावकों को दैनिक गृह कार्य, टेस्ट, परीक्षाओं से संबंधित जानकारी, विद्यार्थी की उपस्थित, छुट्टी, कलेंडर, संदेश अधिसूचनाएं, फीस व बस आदि की संपूर्ण जानकारी घर बैठे ही मिल जाएगी। कुंदन ठाकुर ने बताया कि विद्यार्थी से संबंधित सभी प्रकार के आवश्यक सर्टिफिकेट के लिए अभिभावकों को विद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और अभिभावक अब मोबाइल ऐप के जरिए सभी आवश्यक सर्टिफिकेट घर बैठे ही डाउनलोड कर सकेंगे। प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय द्वारा कैशलेस होने के उद्देश्य से ऐप में ई-वैलेट की सुविधा सभी अभिभावकों को आगामी सत्र से उपलब्ध हो जाएगी, ताकि अभिभावक घर बैठे ही विद्यार्थी की फीस का भुगतान कर सकेंगे।
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नाहन - शिशु विद्या निकेतन वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन ने अभिभावकों की सुविधा के लिए अपना मोबाइल ऐप लॉच किया। ऐप के बारे में जानकारी देते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य कुंदन ठाकुर ने बताया कि अब सभी अभिभावक मोबाइल ऐप के माध्यम से विद्यालय से सीधेतौर पर जुड़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि इस ऐप के लॉच होने से अभिभावकों को दैनिक गृह कार्य, टेस्ट, परीक्षाओं से संबंधित जानकारी, विद्यार्थी की उपस्थित, छुट्टी, कलेंडर, संदेश अधिसूचनाएं, फीस व बस आदि की संपूर्ण जानकारी घर बैठे ही मिल जाएगी। कुंदन ठाकुर ने बताया कि विद्यार्थी से संबंधित सभी प्रकार के आवश्यक सर्टिफिकेट के लिए अभिभावकों को विद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और अभिभावक अब मोबाइल ऐप के जरिए सभी आवश्यक सर्टिफिकेट घर बैठे ही डाउनलोड कर सकेंगे। प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय द्वारा कैशलेस होने के उद्देश्य से ऐप में ई-वैलेट की सुविधा सभी अभिभावकों को आगामी सत्र से उपलब्ध हो जाएगी, ताकि अभिभावक घर बैठे ही विद्यार्थी की फीस का भुगतान कर सकेंगे।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम)
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन।
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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कनाडा के क्षेत्र में, यूक्रेन और कनाडा संयुक्त रूप से एक कॉस्मोड्रोम का निर्माण करेंगे। इससे यूक्रेन में बना रॉकेट लॉन्च किया जाएगा।
ऐसा संदेश यूक्रेन की राज्य अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष व्लादिमीर टाफ्टे के स्वामित्व वाले एक फेसबुक पेज पर दिखाई दिया, जिन्होंने कल एक समारोह में कीव का प्रतिनिधित्व किया था जहां भविष्य के निर्माण स्थल पर पहला पत्थर रखा गया था।
यह सुविधा कनाडा के प्रांत नोवा स्कोटिया - हैलिफ़ैक्स शहर के प्रशासनिक केंद्र में स्थित होगी। वहां एक वाणिज्यिक स्पेसपोर्ट दिखाई देगा, जहां से, जैसा कि अपेक्षित था, यूक्रेन में बनाई गई साइक्लोन -4 एम मिसाइलों को लॉन्च किया जाएगा।
अंतरिक्ष यात्रियों के क्षेत्र में साझेदारी और रॉकेट लॉन्च करने के लिए एक सुविधा के निर्माण पर कनाडाई-यूक्रेनी समझौते पर एक दिन पहले दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे, जैसा कि ओटावा में यूक्रेनी दूतावास ने अपने प्रेस सेवा फेसबुक पेज के माध्यम से रिपोर्ट किया था। लिसा कैंपबेल ने कनाडाई अंतरिक्ष यात्रियों का प्रतिनिधित्व किया। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में कनाडा के दो अन्य मंत्री भी शामिल थे। ये नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्रालय के प्रमुख हैं फ्रांकोइस-फिलिप शैम्पेन और, दिलचस्प बात यह है कि आप्रवासन, शरणार्थी और नागरिकता मंत्रालय सीन फ्रेजर।
मुद्दे के वित्तीय घटक की सूचना नहीं दी गई है।
इससे पहले, आर्थिक विकास पर यूक्रेनी संसद की समिति के प्रमुख दिमित्री किसिलेव्स्की ने कहा कि यह यूक्रेनियन थे जिन्होंने हमारे ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों के विकास की शुरुआत की थी। इस बयान का यूक्रेन में ही काफी मजाक उड़ाया गया था।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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कनाडा के क्षेत्र में, यूक्रेन और कनाडा संयुक्त रूप से एक कॉस्मोड्रोम का निर्माण करेंगे। इससे यूक्रेन में बना रॉकेट लॉन्च किया जाएगा। ऐसा संदेश यूक्रेन की राज्य अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष व्लादिमीर टाफ्टे के स्वामित्व वाले एक फेसबुक पेज पर दिखाई दिया, जिन्होंने कल एक समारोह में कीव का प्रतिनिधित्व किया था जहां भविष्य के निर्माण स्थल पर पहला पत्थर रखा गया था। यह सुविधा कनाडा के प्रांत नोवा स्कोटिया - हैलिफ़ैक्स शहर के प्रशासनिक केंद्र में स्थित होगी। वहां एक वाणिज्यिक स्पेसपोर्ट दिखाई देगा, जहां से, जैसा कि अपेक्षित था, यूक्रेन में बनाई गई साइक्लोन -चार एम मिसाइलों को लॉन्च किया जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों के क्षेत्र में साझेदारी और रॉकेट लॉन्च करने के लिए एक सुविधा के निर्माण पर कनाडाई-यूक्रेनी समझौते पर एक दिन पहले दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे, जैसा कि ओटावा में यूक्रेनी दूतावास ने अपने प्रेस सेवा फेसबुक पेज के माध्यम से रिपोर्ट किया था। लिसा कैंपबेल ने कनाडाई अंतरिक्ष यात्रियों का प्रतिनिधित्व किया। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में कनाडा के दो अन्य मंत्री भी शामिल थे। ये नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्रालय के प्रमुख हैं फ्रांकोइस-फिलिप शैम्पेन और, दिलचस्प बात यह है कि आप्रवासन, शरणार्थी और नागरिकता मंत्रालय सीन फ्रेजर। मुद्दे के वित्तीय घटक की सूचना नहीं दी गई है। इससे पहले, आर्थिक विकास पर यूक्रेनी संसद की समिति के प्रमुख दिमित्री किसिलेव्स्की ने कहा कि यह यूक्रेनियन थे जिन्होंने हमारे ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों के विकास की शुरुआत की थी। इस बयान का यूक्रेन में ही काफी मजाक उड़ाया गया था। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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टी20 वर्ल्ड कप 2022 का आगाज हो गया है, 23 अक्टूबर को भारत अपना पहला मैच चीर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेलेगा. Rohit Sharma की कप्तानी वाली भारतीय टीम में मुख्य गेंदबाज Jasprit Bumrah नहीं होंगे. स्टार तेज गेंदबाज बुमराह इंजरी की वजह से टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह 15-सदस्यीय टीम में तेज गेंदबाज Mohammad Shami को शामिल किया गया है. इस तरह टी20 वर्ल्ड कप 2022 में भारतीय पेस अटैक Mohammad Shami, Bhuvneshwar Kumar और Arshdeep Singh के जिम्में होगी. बीच में Hardik Pandya भी 1-2 ओवर डाल सकते हैं, इसलिए Harshal Patel की जरुरत नहीं पड़ेगी.
भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले पाकिस्तान से एक बड़ी प्रतिक्रिया आई है. पूर्व पाक तेज गेंदबाज Aaqib Javed ने कहा है कि पाक बल्लेबाजों को शमी और भुवनेश्वर के खिलाफ रन बनाना आसान नहीं होगा.
जावेद ने कहा कि Babar Azam और Mohammad Rizwan को रविवार को पावरप्ले में मेलबर्न के ट्रैक पर भुवनेश्वर के स्विंग और शमी के सीम का सामना करना होगा.
गौरतलब है कि भारतीय गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में खेले गए वार्मअप मैच में शानदार प्रदर्शन किया था और भारत को 6 रनों से रोमांचक जीत दिलाई थी. मैच में भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और हर्षल पटेल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था. जब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 11 रनों की जरुरत थी, शमी ने आखिरी ओवर में सिर्फ 5 रन देते हुए 3 विकेट चटकाए थे. उस ओवर में कुल 4 विकेट गिरे, 1 रन-आउट था.
बल्लेबाजी में KL Rahul और Suryakumar Yadav ने अर्धशतकीय पारी खेली थी. न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाला दूसरा वार्मअप मैच बारिश की वजह से रद्द हो गया था.
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टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस का आगाज हो गया है, तेईस अक्टूबर को भारत अपना पहला मैच चीर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेलेगा. Rohit Sharma की कप्तानी वाली भारतीय टीम में मुख्य गेंदबाज Jasprit Bumrah नहीं होंगे. स्टार तेज गेंदबाज बुमराह इंजरी की वजह से टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह पंद्रह-सदस्यीय टीम में तेज गेंदबाज Mohammad Shami को शामिल किया गया है. इस तरह टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस में भारतीय पेस अटैक Mohammad Shami, Bhuvneshwar Kumar और Arshdeep Singh के जिम्में होगी. बीच में Hardik Pandya भी एक-दो ओवर डाल सकते हैं, इसलिए Harshal Patel की जरुरत नहीं पड़ेगी. भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले पाकिस्तान से एक बड़ी प्रतिक्रिया आई है. पूर्व पाक तेज गेंदबाज Aaqib Javed ने कहा है कि पाक बल्लेबाजों को शमी और भुवनेश्वर के खिलाफ रन बनाना आसान नहीं होगा. जावेद ने कहा कि Babar Azam और Mohammad Rizwan को रविवार को पावरप्ले में मेलबर्न के ट्रैक पर भुवनेश्वर के स्विंग और शमी के सीम का सामना करना होगा. गौरतलब है कि भारतीय गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में खेले गए वार्मअप मैच में शानदार प्रदर्शन किया था और भारत को छः रनों से रोमांचक जीत दिलाई थी. मैच में भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और हर्षल पटेल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था. जब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए ग्यारह रनों की जरुरत थी, शमी ने आखिरी ओवर में सिर्फ पाँच रन देते हुए तीन विकेट चटकाए थे. उस ओवर में कुल चार विकेट गिरे, एक रन-आउट था. बल्लेबाजी में KL Rahul और Suryakumar Yadav ने अर्धशतकीय पारी खेली थी. न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाला दूसरा वार्मअप मैच बारिश की वजह से रद्द हो गया था.
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ही घसफल सिद्ध हो चुके थे, इसलिए मपने मतोतके अनुभव एवं पूर्वदर्शिता के धनुसार माना को मनुम यह निश्चय कर लेना चाहिए था कि मराठा प्रशासन के लिए दयारा भाई कौंसिलको जारी रखने में ही बुद्धिमानी की बात होगी। इस दिशा में कदम उठाने भोर भयोग्य सदस्योंके स्थान पर अपने विश्वसनीय व्यक्तियों को नियुक्त करने के बजाय, उसने धीरे-घोटे एक-एक करके सारे सदस्य हटा दिये और सम्पूर्ण शक्ति अपने हाथ में केन्द्रित कर ली। उसके दो सर्वोत्कृष्ट साथी सखाराम बापू मौर मरोवा फड़नीस अपने पदों से अलग कर दिये गये मोर राजद्रोहका मपराध लगाकर चंदशे बना लिये गये । धतुरंजनात्मक प्रवृत्ति ऐसे विषयों के लिए प्रत्यधिक प्रावश्यक थो। उससे पोतप्रोत होते हुए भी सखाराम बापू को परिस्थितियों के वश होकर सभी दलोंके साथ, यहां तक कि युद्ध कालमें शत्रुमों के साथ तक, अलग-अलग व्यवहार करनेके लिए बाध्य होना पड़ता था, जैसे उदाहरण के लिए राघोग निजाम, हंदरमली मोर अंग्रेजों के साथ । नाना ने दूध माचरण या राजद्रोहके रूप में इसका तिरस्कार किया, मोर उसे बन्दी करा लिया। यदि बापू मौर मरोवा दोनों को हटाना जरूरी ही था तो कम से कम उनकी जगह उसे नये सदस्य रख लेने चाहिए थे। पर दो वर्षो बाद सो यारा-भाई का नाम तक बाको नही दिखाई पड़ता है। उन दिनों राजद्रोह का एक विशेष मयं लगाया जाता था। निश्चय हो नारायणरावको हत्या राघोबा ने करवाई थी, तो भो पेशवा परिवार में वही धकेला जीवित बचा था, और सारे दोषों के रहते भी, मतीत में उसके द्वारा की गई सेवामोके लिए बहुत से लोगोके मनमें उसके प्रति एक प्रकारका मादर भाव था। कुछ हृदयहीन पारमापो को छोड़कर जो स्वर्गीय पेशवा के हत्यारोको कठोर दंड दिलाने पर उतारू थे, महाराष्ट्र में जनमतका एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा था जो उस घटना को अधिक सौम्यभाव से देखता और मनु रंजनात्मक नीतिका समर्थन करता था । बहुत से लोगोंको इससे कोई मतलबम या कि उनके कर राधोना शासन करे या नवजात शिशु वे निश्चय ही यह चाहते थे कि राघोवा को उसके पदके अनुरूप सुरूके सारे साधन उपलब्ध हों। भरने प्राय सापनों पर छोड़ दिये जाने पर मोर परिणामको चिन्ता किये बिना, राधोवा ने सो बहा कर, पपना एक मजबूत दल बना लिया। उसने ऐसे लोगों को विशेष रूप से अपनी तरफ़ मिला लिया जो पहले सचाईके साथ उसको सेवा कर चुके थे। धन परिस्थितियों में सखाराम धापू में विपतिजनक युद्धको रोकने और करने को
महादाजी सिन्धिया और नाना फड़नीस
नीति द्वारा साधारण प्रशासन की पुनः स्थापना करनेको भरसक चेष्टा को। ऐसा करने में वह इस बात पर जोर देता रहा कि हठी पेशवा के प्रति कठोर उपाय न व्रतें जायें । महादाजी सिंधिया और दूसरे लोग और सखाराम बापू तक राघोबा के विरुद्ध कठोर उपायोंका प्रयोग उचित न समझते थे। इसलिए ये लोग नाना को देशद्रोही और दंडके भागी जान पड़ते थे। महादाजीके मामलो में नाना मसहाय था, मन्यथा यदि उसके पास साधन होते, तो उसने उसे उसी तरहसे दंड दिया होता जैसे कि उसने सखाराम बापू को दिया था। प्रत्यक्ष रूप से यह नाना को राजनीतिज्ञता का दोष था। ऐसे मामलों में व्यावहारिक बुद्धिसे काम लेकर क्षमा कर देना ही अच्छा होता है। पर नाना दंड देनेको विधियों में निष्ठुर था। जब नारायणराव के पुत्र पैदा हो गया वन राघोबाके सारे बहाने खतम हो गये। उस समय उसे एक भगेड़ के रूप में भाग जाने देना चाहिए था। पर ऐसा न करके उसका लगातार पोछा किया गया मोर इच्छा न रहते हुए मी उसे भागकर अंग्रेजोंकी शरण में जाना पड़ा, जिसके कारण युद्ध छिड़ा, जिसमें मराठोंको प्रतिष्ठा को बहुत बड़ा धक्का पहुंचा। यहां पर वो वस इतना ही काफ़ो था कि उसकी शक्ति चूर-चूर कर दी जाती, जैसा कि १८५७ के विद्रोहके मामलेमें "रानीको घोषणा" ने किया था। यदि बारा-भाई ने एक घोषणा जारी करके लोगों से अपनी वृत्तियों में वापस लोट माने के लिए कहा होता भीर भगेड राघोडा के साथ सहानुभूति रखने के विरुद्ध उन्हें चेतावनी दी होती तो सम्भवतः सारे मामले चुपचाप तय हो जाते और राघोबा को बाहर कोई समर्थन न मिलता। बहुत से सरदारी और प्रभावशाली नेता मनी व्यक्तिगत रुवि को ध्यान में रखते हुए जब जैसी भावश्यक्ता हुई तब उस तरह से काम किया, भोर जिस पक्षसे उन्हें सबसे अधिक लाभ होता हुमा जान पड़ा उसीको ओोर हो गये। दूसरी ओोर नाना ने गुप्तचरोको सहायता से राघोबा के एक-एक अनुयायी को सारी बातों का पता लगा लिया, उसको सम्पत्ति भोर मकान जब्त कर लिये, भोर उनके घरवालों तथा रिश्तेदारों को सजाएँ दीं, जिसके कारण लोग वरसो के लिए इस बुरी तरह से भड़क उठे कि साधारण प्रशासनका काम एक तरह से रुक गया। घायद बापूको मनुरंजनात्मक नोति यहां पर अधिक उपयोगी सिद्ध हुई होती। उसने पेशवा के परिवार में स्नेह भावको पुनः स्थापना - कर दी होती, मौर स्थायी रूप से किसी प्रकार का मनोमालिन्य दोपन रह गया होता! सम्भवत. बाजीराव द्वितीय का रुख, बड़ा होते-होते, न केवल नाना के प्रति वरतू और सभी के प्रति जिसे बादको उसने बहला मेनेको चेष्टा को, फुद पर होहमा होना।
• इतिहासके छात्रो को नाना की नीति के इस मंगको मोर ध्यान देने की आवश्यकता है। (ब) उत्तर में अंग्रेजों के दबाव को न समझ पाना.
सालबाई की सन्धि करवाने में महादाजी ने जो प्रधानता पा ली उससे नाना को घड़ी कुढन हुई। वह इस बातको न समझ सका कि महादाजी उत्तर क्यों चला गया मौर दक्षिण की लड़ाई का भार दूसरोके ऊपर छोड़कर दूर देश मालवामे उसने भपने को क्यो जमा लिया। सैनिक मामलोसे परिचित न होने के कारण नाना इस बातको नहीं समझ सका कि भारतीय राजनीतिका केन्द्र तेजी के साथ दक्षिण से हट कर उत्तर में स्थापित हो रहा था । नाना अपने एजेन्टो और गुप्तचरोके जरिये सैकड़ो मील दूर पर होनेवाले मान्दोलनों मौर घटनामोंका रती रत्तो पता लगा सेने में तो चतुर था, पर वह उस भारी सैनिक दबावको न समझ सका, जिसे बढ़ती हुई मंग्रेजी दारित, उत्तर भौर पूर्वको मोर भारत के भविष्य पर डालने जा रही थी। अंग्रेजों ने वहां पर धीरे-धीरे मपनी स्थिति दृढ़ कर लो ताकि वे और मार्गे बढ़ सकें मोर उपयुक्त भव सर पाते हो मराठा शक्ति को अपने जाल में फंसा सकें। भारतीयोमँ केवल महादाजी ही से ऐसा था जिसने भग्रेजो की सैनिक संयारियो के व्यक्तिगत एवं व्यावहारिक अनुभव से इस दवावको समझ लिया। नाना बराबर महादाजी से दक्षिण लोट मानेका हठ कर रहा केवल इसलिए नहीं कि वह दक्खिन में राष्ट्रीय शत्रुमोके विरुद्ध युद्ध करे, वरन मुख्यरूपसे इसलिए कि वह स्वतंत्रताक कोई कदम न उठाने पाये। महादाजी ने यमुना नदीसे बुरहानपुर मोर वहां से सूरत तक अंग्रेजोको विजयपताका फहराती हुई जेनरल गोडाई (General Goddard ) की प्रसिद्ध सेना के मार्च को बड़े ध्यानसं देखा था। अंग्रेजोको विजयने बांस के टुकड़े की नाई पूरे उत्तरी भारत के दो बराबरबराबर सण्ड पर दिये । तेलीगांव (Talegaum) की लड़ाई में अंग्रेजी दूकोने जो प्रलय मचा दिया था मोर बेसोन तथा थाना (Thana ) के कार अविवार करके अंग्रेज लोग पश्चिमी समुद्रतट पर जिस पाराम के साथ पूर्वक पपनी स्थितिको
दृढ़ करने लगे, उनवा महादाजीके ऊपर बड़ा गहरा घमर पड़ा। तसितुलन कायम करने के विचारसे उमने भरनेवो दक्षिण से विस्कुल हटा लिया। यह यह जानता या कि पूना दरमें, जहां बम्बई को सरकारका जोर दुनियार था, जो साथ सौदा करनेको अपेक्षा यदि वह उत्तरमे उनके साथ महार करें तो उनके साथ अधिक के लिए सोच-विचार के बाद वह जो कदम उठाने जा रहा था उसमें वह सर्वोत्कृष्ट व
महादाजी सिन्धिया और नाना फड़नीस
प्राप्त कर सकता था। विषय के उपर होने वाले पर्याप्त पत्रव्यवहार से, जो इस समय प्रय है, यह पता लगता है कि महादाजी न इस बात पर जोर दिया कि यदि वह अपनी फौजोको दक्षिण में ले माया होता तो प्रग्रेजोंने एक ही चोटमें सम्राट्को अपने अधिकार में कर लिया होता और पूनामें मराठों के सामने मनमानी शर्तें रखी होतीं। मराठोंकी इस प्रकारको महा-विपत्ति, जिसे महादाजी बचाना चाहता था, नाना को समझने दाहरङ्गी चीज थी। इसके बाद हमेशा महादाजो जो भी योजना प्रारम्भ करता था जिस किसी चालका सुझाव रखता उसी में नाना को उसको प्रोर से केन्द्रीय मराठा सरकार के विरुद्ध राजद्रोह का सध्देह होता। उसने अपने एजेन्टोंको खुल्लमखुल्ला महादाजी का विरोध करने का प्रदेश दिया। दूसरी ओर, महादाजीने वारेन हेस्टिग्ज के प्रति सममौता करने की नीतिका अनुमरण किया, और बगाल, भवव, मध्यभारत तथा दिल्ली में भग्रेजों के अभिप्रायको विषल करने के लिए प्रत्यक्षरूपमे पूरी पूरी कोशिश को ऐसा करनेके लिए उसे बहुत दिनों तक मथुरा और ग्वालियर के बीच टिकना पड़ा, ताकि वह उनके ऊपर प्रत्यक्ष और तुरन्त रोक लगा सके । वास्तव में निश्चित रूप से, यह स्पष्ट हो जाता है कि नाना उत्तरको स्थितिको नहीं समभा, प्रोर नहीं इस बात का मनुभव कर पाया कि चतुर बूटनीतिको कितनी ही अधिक मात्रा उतनी प्रभावशाली नहीं हो सकी जितनी कि उसके साथ-साथ सैनिक बल । ज्यादा अच्छा होता कि वह स्वयं वहा जाता मोर उस भोषण संघर्ष में निहित खतरों और जिम्मेदारियोंमें महादाजी का हाथ बढावा । परन्तु स्वभाव से शत्रकी होने के कारण, नाना हमेशा अपनी जान के लिए डरता था, मोर घासानी से महादाजी के शिविर में जाने का साहस न करता था।
यदि नाना बालक पेशवा को उत्तर ले गया होता, मोर भपने निजी व्यक्तित्वको पृष्टभूमि में रखवर, उसने महादाजी को मुक्तहस्त होकर काम करने दिया होता, तो उस समय की मराठा राजनीतिने अमित बल प्राप्त कर लिया होना । यदि होनहार बालक पेशवा को १७८७ या ८८ के लगभग, जब वह चौदह वर्ष का उत्तरी प्रदेशों को देखने मौका दिया गया होता तो वह सपनी भावी जीवनवृत्तिके लिए मूल्यवान् ढंगसे प्रशिक्षित हो जाता। पेशवाप्रोके परिवारमें सभी लोग बारह वर्षके लगभग क्रियाशील जीवन मारम्भ करते थे और इस प्रकारका व्यावहारिक अनुभव उस जाति के लिए सबसे अधिक स्वस्य भोर प्रावश्यक सामग्री थी जिसके कार मराठा राज्य बना हुआ था। नानाको चाहिए था कि बाह्रो दुनिया को यह देखने का मौका देता कि पेशवाधोंके घराने में एक कमसिन स्वामी धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था। ऐसा करने से
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ही घसफल सिद्ध हो चुके थे, इसलिए मपने मतोतके अनुभव एवं पूर्वदर्शिता के धनुसार माना को मनुम यह निश्चय कर लेना चाहिए था कि मराठा प्रशासन के लिए दयारा भाई कौंसिलको जारी रखने में ही बुद्धिमानी की बात होगी। इस दिशा में कदम उठाने भोर भयोग्य सदस्योंके स्थान पर अपने विश्वसनीय व्यक्तियों को नियुक्त करने के बजाय, उसने धीरे-घोटे एक-एक करके सारे सदस्य हटा दिये और सम्पूर्ण शक्ति अपने हाथ में केन्द्रित कर ली। उसके दो सर्वोत्कृष्ट साथी सखाराम बापू मौर मरोवा फड़नीस अपने पदों से अलग कर दिये गये मोर राजद्रोहका मपराध लगाकर चंदशे बना लिये गये । धतुरंजनात्मक प्रवृत्ति ऐसे विषयों के लिए प्रत्यधिक प्रावश्यक थो। उससे पोतप्रोत होते हुए भी सखाराम बापू को परिस्थितियों के वश होकर सभी दलोंके साथ, यहां तक कि युद्ध कालमें शत्रुमों के साथ तक, अलग-अलग व्यवहार करनेके लिए बाध्य होना पड़ता था, जैसे उदाहरण के लिए राघोग निजाम, हंदरमली मोर अंग्रेजों के साथ । नाना ने दूध माचरण या राजद्रोहके रूप में इसका तिरस्कार किया, मोर उसे बन्दी करा लिया। यदि बापू मौर मरोवा दोनों को हटाना जरूरी ही था तो कम से कम उनकी जगह उसे नये सदस्य रख लेने चाहिए थे। पर दो वर्षो बाद सो यारा-भाई का नाम तक बाको नही दिखाई पड़ता है। उन दिनों राजद्रोह का एक विशेष मयं लगाया जाता था। निश्चय हो नारायणरावको हत्या राघोबा ने करवाई थी, तो भो पेशवा परिवार में वही धकेला जीवित बचा था, और सारे दोषों के रहते भी, मतीत में उसके द्वारा की गई सेवामोके लिए बहुत से लोगोके मनमें उसके प्रति एक प्रकारका मादर भाव था। कुछ हृदयहीन पारमापो को छोड़कर जो स्वर्गीय पेशवा के हत्यारोको कठोर दंड दिलाने पर उतारू थे, महाराष्ट्र में जनमतका एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा था जो उस घटना को अधिक सौम्यभाव से देखता और मनु रंजनात्मक नीतिका समर्थन करता था । बहुत से लोगोंको इससे कोई मतलबम या कि उनके कर राधोना शासन करे या नवजात शिशु वे निश्चय ही यह चाहते थे कि राघोवा को उसके पदके अनुरूप सुरूके सारे साधन उपलब्ध हों। भरने प्राय सापनों पर छोड़ दिये जाने पर मोर परिणामको चिन्ता किये बिना, राधोवा ने सो बहा कर, पपना एक मजबूत दल बना लिया। उसने ऐसे लोगों को विशेष रूप से अपनी तरफ़ मिला लिया जो पहले सचाईके साथ उसको सेवा कर चुके थे। धन परिस्थितियों में सखाराम धापू में विपतिजनक युद्धको रोकने और करने को महादाजी सिन्धिया और नाना फड़नीस नीति द्वारा साधारण प्रशासन की पुनः स्थापना करनेको भरसक चेष्टा को। ऐसा करने में वह इस बात पर जोर देता रहा कि हठी पेशवा के प्रति कठोर उपाय न व्रतें जायें । महादाजी सिंधिया और दूसरे लोग और सखाराम बापू तक राघोबा के विरुद्ध कठोर उपायोंका प्रयोग उचित न समझते थे। इसलिए ये लोग नाना को देशद्रोही और दंडके भागी जान पड़ते थे। महादाजीके मामलो में नाना मसहाय था, मन्यथा यदि उसके पास साधन होते, तो उसने उसे उसी तरहसे दंड दिया होता जैसे कि उसने सखाराम बापू को दिया था। प्रत्यक्ष रूप से यह नाना को राजनीतिज्ञता का दोष था। ऐसे मामलों में व्यावहारिक बुद्धिसे काम लेकर क्षमा कर देना ही अच्छा होता है। पर नाना दंड देनेको विधियों में निष्ठुर था। जब नारायणराव के पुत्र पैदा हो गया वन राघोबाके सारे बहाने खतम हो गये। उस समय उसे एक भगेड़ के रूप में भाग जाने देना चाहिए था। पर ऐसा न करके उसका लगातार पोछा किया गया मोर इच्छा न रहते हुए मी उसे भागकर अंग्रेजोंकी शरण में जाना पड़ा, जिसके कारण युद्ध छिड़ा, जिसमें मराठोंको प्रतिष्ठा को बहुत बड़ा धक्का पहुंचा। यहां पर वो वस इतना ही काफ़ो था कि उसकी शक्ति चूर-चूर कर दी जाती, जैसा कि एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विद्रोहके मामलेमें "रानीको घोषणा" ने किया था। यदि बारा-भाई ने एक घोषणा जारी करके लोगों से अपनी वृत्तियों में वापस लोट माने के लिए कहा होता भीर भगेड राघोडा के साथ सहानुभूति रखने के विरुद्ध उन्हें चेतावनी दी होती तो सम्भवतः सारे मामले चुपचाप तय हो जाते और राघोबा को बाहर कोई समर्थन न मिलता। बहुत से सरदारी और प्रभावशाली नेता मनी व्यक्तिगत रुवि को ध्यान में रखते हुए जब जैसी भावश्यक्ता हुई तब उस तरह से काम किया, भोर जिस पक्षसे उन्हें सबसे अधिक लाभ होता हुमा जान पड़ा उसीको ओोर हो गये। दूसरी ओोर नाना ने गुप्तचरोको सहायता से राघोबा के एक-एक अनुयायी को सारी बातों का पता लगा लिया, उसको सम्पत्ति भोर मकान जब्त कर लिये, भोर उनके घरवालों तथा रिश्तेदारों को सजाएँ दीं, जिसके कारण लोग वरसो के लिए इस बुरी तरह से भड़क उठे कि साधारण प्रशासनका काम एक तरह से रुक गया। घायद बापूको मनुरंजनात्मक नोति यहां पर अधिक उपयोगी सिद्ध हुई होती। उसने पेशवा के परिवार में स्नेह भावको पुनः स्थापना - कर दी होती, मौर स्थायी रूप से किसी प्रकार का मनोमालिन्य दोपन रह गया होता! सम्भवत. बाजीराव द्वितीय का रुख, बड़ा होते-होते, न केवल नाना के प्रति वरतू और सभी के प्रति जिसे बादको उसने बहला मेनेको चेष्टा को, फुद पर होहमा होना। • इतिहासके छात्रो को नाना की नीति के इस मंगको मोर ध्यान देने की आवश्यकता है। उत्तर में अंग्रेजों के दबाव को न समझ पाना. सालबाई की सन्धि करवाने में महादाजी ने जो प्रधानता पा ली उससे नाना को घड़ी कुढन हुई। वह इस बातको न समझ सका कि महादाजी उत्तर क्यों चला गया मौर दक्षिण की लड़ाई का भार दूसरोके ऊपर छोड़कर दूर देश मालवामे उसने भपने को क्यो जमा लिया। सैनिक मामलोसे परिचित न होने के कारण नाना इस बातको नहीं समझ सका कि भारतीय राजनीतिका केन्द्र तेजी के साथ दक्षिण से हट कर उत्तर में स्थापित हो रहा था । नाना अपने एजेन्टो और गुप्तचरोके जरिये सैकड़ो मील दूर पर होनेवाले मान्दोलनों मौर घटनामोंका रती रत्तो पता लगा सेने में तो चतुर था, पर वह उस भारी सैनिक दबावको न समझ सका, जिसे बढ़ती हुई मंग्रेजी दारित, उत्तर भौर पूर्वको मोर भारत के भविष्य पर डालने जा रही थी। अंग्रेजों ने वहां पर धीरे-धीरे मपनी स्थिति दृढ़ कर लो ताकि वे और मार्गे बढ़ सकें मोर उपयुक्त भव सर पाते हो मराठा शक्ति को अपने जाल में फंसा सकें। भारतीयोमँ केवल महादाजी ही से ऐसा था जिसने भग्रेजो की सैनिक संयारियो के व्यक्तिगत एवं व्यावहारिक अनुभव से इस दवावको समझ लिया। नाना बराबर महादाजी से दक्षिण लोट मानेका हठ कर रहा केवल इसलिए नहीं कि वह दक्खिन में राष्ट्रीय शत्रुमोके विरुद्ध युद्ध करे, वरन मुख्यरूपसे इसलिए कि वह स्वतंत्रताक कोई कदम न उठाने पाये। महादाजी ने यमुना नदीसे बुरहानपुर मोर वहां से सूरत तक अंग्रेजोको विजयपताका फहराती हुई जेनरल गोडाई की प्रसिद्ध सेना के मार्च को बड़े ध्यानसं देखा था। अंग्रेजोको विजयने बांस के टुकड़े की नाई पूरे उत्तरी भारत के दो बराबरबराबर सण्ड पर दिये । तेलीगांव की लड़ाई में अंग्रेजी दूकोने जो प्रलय मचा दिया था मोर बेसोन तथा थाना के कार अविवार करके अंग्रेज लोग पश्चिमी समुद्रतट पर जिस पाराम के साथ पूर्वक पपनी स्थितिको दृढ़ करने लगे, उनवा महादाजीके ऊपर बड़ा गहरा घमर पड़ा। तसितुलन कायम करने के विचारसे उमने भरनेवो दक्षिण से विस्कुल हटा लिया। यह यह जानता या कि पूना दरमें, जहां बम्बई को सरकारका जोर दुनियार था, जो साथ सौदा करनेको अपेक्षा यदि वह उत्तरमे उनके साथ महार करें तो उनके साथ अधिक के लिए सोच-विचार के बाद वह जो कदम उठाने जा रहा था उसमें वह सर्वोत्कृष्ट व महादाजी सिन्धिया और नाना फड़नीस प्राप्त कर सकता था। विषय के उपर होने वाले पर्याप्त पत्रव्यवहार से, जो इस समय प्रय है, यह पता लगता है कि महादाजी न इस बात पर जोर दिया कि यदि वह अपनी फौजोको दक्षिण में ले माया होता तो प्रग्रेजोंने एक ही चोटमें सम्राट्को अपने अधिकार में कर लिया होता और पूनामें मराठों के सामने मनमानी शर्तें रखी होतीं। मराठोंकी इस प्रकारको महा-विपत्ति, जिसे महादाजी बचाना चाहता था, नाना को समझने दाहरङ्गी चीज थी। इसके बाद हमेशा महादाजो जो भी योजना प्रारम्भ करता था जिस किसी चालका सुझाव रखता उसी में नाना को उसको प्रोर से केन्द्रीय मराठा सरकार के विरुद्ध राजद्रोह का सध्देह होता। उसने अपने एजेन्टोंको खुल्लमखुल्ला महादाजी का विरोध करने का प्रदेश दिया। दूसरी ओर, महादाजीने वारेन हेस्टिग्ज के प्रति सममौता करने की नीतिका अनुमरण किया, और बगाल, भवव, मध्यभारत तथा दिल्ली में भग्रेजों के अभिप्रायको विषल करने के लिए प्रत्यक्षरूपमे पूरी पूरी कोशिश को ऐसा करनेके लिए उसे बहुत दिनों तक मथुरा और ग्वालियर के बीच टिकना पड़ा, ताकि वह उनके ऊपर प्रत्यक्ष और तुरन्त रोक लगा सके । वास्तव में निश्चित रूप से, यह स्पष्ट हो जाता है कि नाना उत्तरको स्थितिको नहीं समभा, प्रोर नहीं इस बात का मनुभव कर पाया कि चतुर बूटनीतिको कितनी ही अधिक मात्रा उतनी प्रभावशाली नहीं हो सकी जितनी कि उसके साथ-साथ सैनिक बल । ज्यादा अच्छा होता कि वह स्वयं वहा जाता मोर उस भोषण संघर्ष में निहित खतरों और जिम्मेदारियोंमें महादाजी का हाथ बढावा । परन्तु स्वभाव से शत्रकी होने के कारण, नाना हमेशा अपनी जान के लिए डरता था, मोर घासानी से महादाजी के शिविर में जाने का साहस न करता था। यदि नाना बालक पेशवा को उत्तर ले गया होता, मोर भपने निजी व्यक्तित्वको पृष्टभूमि में रखवर, उसने महादाजी को मुक्तहस्त होकर काम करने दिया होता, तो उस समय की मराठा राजनीतिने अमित बल प्राप्त कर लिया होना । यदि होनहार बालक पेशवा को एक हज़ार सात सौ सत्तासी या अठासी के लगभग, जब वह चौदह वर्ष का उत्तरी प्रदेशों को देखने मौका दिया गया होता तो वह सपनी भावी जीवनवृत्तिके लिए मूल्यवान् ढंगसे प्रशिक्षित हो जाता। पेशवाप्रोके परिवारमें सभी लोग बारह वर्षके लगभग क्रियाशील जीवन मारम्भ करते थे और इस प्रकारका व्यावहारिक अनुभव उस जाति के लिए सबसे अधिक स्वस्य भोर प्रावश्यक सामग्री थी जिसके कार मराठा राज्य बना हुआ था। नानाको चाहिए था कि बाह्रो दुनिया को यह देखने का मौका देता कि पेशवाधोंके घराने में एक कमसिन स्वामी धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था। ऐसा करने से
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एमपी के श्योपुर जिले में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
श्योपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के श्योपुर जिले में बड़ी अनहोनी का खतरा मंडरा रहा है. भारी बारिश (Heavy Rain) की वजह से यहां का आवदा डैम ओवर फ्लो तो हो ही रहा है, उसमें दरारें भी पड़ गई हैं. इसे लेकर किसान और जनप्रतिनिधि प्रशासन के आगे चिंता जाहिर कर चुके हैं. बार-बार बताने के बावजूद अधिकारी मामले को अनसुना कर रहे हैं. इधर भारी बारिश की वजह से श्योपुर का ग्वालियर और शिवपुरी से संपर्क पूरी तरह कट गया है. गांवों में आवाजाही बंद हो गई है. घरों में पानी घुस गया है.
भारी बारिश की वजह से अपराल नदी भी उफान पर पहुंच गई है. इससे दर्जन भर के करीब गांवों का शहर से संपर्क कट गया है. कई घरों में पानी घुस गया है. ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. तेज बारिश के चलते कूनों नदी में आए उफान के बाद श्योपुर का ग्वालियर और शिवपुरी इलाकों से संपर्क कट गया है. कूनों नदी के दोनों किनारों पर वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं. जाम में फंसे हुए यात्री और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उधर सोंईकलां को भीखापुर, गिलास, मल्होत्रा, हनुमानखेड़ा, रामबाड़ी, चकडोलापुरा सहित दर्जन भर के करीब गांवों को जोड़ने बाला अमराल नदी पर बना रपटा भी पानी में डूबा हुआ है. नदी का जलस्तर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि रपटे पर 8-10 फीट के करीब पानी है.
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत डैम में आई दरारों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कलेक्टर के नाम पत्र लिख चुके हैं. उन्होंने पत्र में दरारों को दुरुस्त कराने की मांग की है. इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ नहीं किया. बता दें, जिले का विशालकाय आवदा डैम स्टेट के समय में बनाया गया था. इस डैम से आवदा से लेकर बड़ौदा इलाके के खेतों की सिंचाई होती है. इसके देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है. लेकिन, विभाग के अधिकारी डैम में आई कई दरारों को देखने के बाद भी मरम्मत नहीं करा रहे.
गौरतलब है कि इन दरारों से पानी का रिसाव होने लगा है. दूसरी ओर, भारी बारिश की वजह से डैम ओवरफ्लो भी है. लोगों को आशंका है कि कहीं डैम में आई दरारों की वजह से दीवार न टूट जाए. अगर ऐसा हुआ तो आफत आ जाएगी. इसे लेकर समाजसेवी नीरज जाट का कहना है कि आवदा डैम की दीवारों में दरारें आ गई हैं. इससे कभी भी कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है. अधिकारियों को इसे गंभीरता से लकर दरारों की मरम्मत करानी चाहिए ताकि, डैम को किसी भी तरह का नुकसान न हो. इस मामले को लेकर न्यूज 18 ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी बात करने की कोशिश की लेकिन, उनसे बात नहीं हो सकी है.
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एमपी के श्योपुर जिले में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. श्योपुर. मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बड़ी अनहोनी का खतरा मंडरा रहा है. भारी बारिश की वजह से यहां का आवदा डैम ओवर फ्लो तो हो ही रहा है, उसमें दरारें भी पड़ गई हैं. इसे लेकर किसान और जनप्रतिनिधि प्रशासन के आगे चिंता जाहिर कर चुके हैं. बार-बार बताने के बावजूद अधिकारी मामले को अनसुना कर रहे हैं. इधर भारी बारिश की वजह से श्योपुर का ग्वालियर और शिवपुरी से संपर्क पूरी तरह कट गया है. गांवों में आवाजाही बंद हो गई है. घरों में पानी घुस गया है. भारी बारिश की वजह से अपराल नदी भी उफान पर पहुंच गई है. इससे दर्जन भर के करीब गांवों का शहर से संपर्क कट गया है. कई घरों में पानी घुस गया है. ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. तेज बारिश के चलते कूनों नदी में आए उफान के बाद श्योपुर का ग्वालियर और शिवपुरी इलाकों से संपर्क कट गया है. कूनों नदी के दोनों किनारों पर वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं. जाम में फंसे हुए यात्री और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उधर सोंईकलां को भीखापुर, गिलास, मल्होत्रा, हनुमानखेड़ा, रामबाड़ी, चकडोलापुरा सहित दर्जन भर के करीब गांवों को जोड़ने बाला अमराल नदी पर बना रपटा भी पानी में डूबा हुआ है. नदी का जलस्तर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि रपटे पर आठ-दस फीट के करीब पानी है. प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत डैम में आई दरारों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कलेक्टर के नाम पत्र लिख चुके हैं. उन्होंने पत्र में दरारों को दुरुस्त कराने की मांग की है. इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ नहीं किया. बता दें, जिले का विशालकाय आवदा डैम स्टेट के समय में बनाया गया था. इस डैम से आवदा से लेकर बड़ौदा इलाके के खेतों की सिंचाई होती है. इसके देखरेख और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है. लेकिन, विभाग के अधिकारी डैम में आई कई दरारों को देखने के बाद भी मरम्मत नहीं करा रहे. गौरतलब है कि इन दरारों से पानी का रिसाव होने लगा है. दूसरी ओर, भारी बारिश की वजह से डैम ओवरफ्लो भी है. लोगों को आशंका है कि कहीं डैम में आई दरारों की वजह से दीवार न टूट जाए. अगर ऐसा हुआ तो आफत आ जाएगी. इसे लेकर समाजसेवी नीरज जाट का कहना है कि आवदा डैम की दीवारों में दरारें आ गई हैं. इससे कभी भी कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है. अधिकारियों को इसे गंभीरता से लकर दरारों की मरम्मत करानी चाहिए ताकि, डैम को किसी भी तरह का नुकसान न हो. इस मामले को लेकर न्यूज अट्ठारह ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी बात करने की कोशिश की लेकिन, उनसे बात नहीं हो सकी है. .
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भूखंड बेतुका की कगार पर है - कि फिल्म का एक विशिष्ट सुविधा "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" परियोजना में अभिनेता शुरू में काफी प्रसिद्ध आमंत्रित किया। बाद में, हालांकि, लगभग सभी जाने-माने उम्मीदवारों की पेशकश की भूमिका निभाने के लिए मना कर दिया। जो अंततः फिल्म तैमूर बेकममबेतोव में अभिनय किया? और निर्देशक अपने दर्शकों को इस बार हैरान कर दिया?
ऐसा लग रहा था इस तरह के एक विषय पहले से ही अपने आप समाप्त हो गया हैः हम खून suckers-खलनायक पर पिशाच संगीतकारों के इतिहास, रात और लोगों के राक्षसों के बीच एक प्रेम पता है। लेकिन कंपनी 20 वीं सेंचुरी फॉक्स से लेखकों आतंकवादियों उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कुछ पूरी तरह से नए और अभी तक बेतुका के साथ आया था। वे दक्षिणी बागान मालिकों परिसंघ bloodsuckers कर दिया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन - एक पिशाच शिकारी में।
परियोजना के निदेशक द्वारा किया गया था तैमूर बेकममबेतोव, जो कई वर्षों के लिए "ड्रीम फैक्टरी" में अपने कैरियर का निर्माण किया। रूस बेकममबेतोव गर्जना की, थिएटर पिशाच डायन dilogy "नाइट वॉच" और "डे वॉच" में रिलीज़ किया था। प्रवासी निदेशक सफलतापूर्वक शूटर "वांटेड" के साथ सामना किया है, और फिर 20 वीं सेंचुरी फॉक्स निगम के साथ सहयोग जारी रखा।
उदास, nuarny चित्रों के मास्टर - निर्माता "राष्ट्रपति लिंकन" परियोजना टिम बर्टन था। जल्दी 90-ies में। वह एक निर्देशक के रूप टेट्रालॉजी ले लिया "बैटमैन। " उन्होंने यह भी एक निर्देशक अच्छी तरह से नाटक के सभी के लिए जाना जाता है "एडवर्ड सिजरहैंड्स। " राष्ट्रपति लिंकन के बारे में असामान्य फिल्म, 2012 में जारी किया गया और 69 मिलियन के बजट के साथ 116 मिलियन $ की कमाई की गई थी।
Bendzhamin Uoker - अमेरिकी अभिनेता है जो सबसे अच्छा ब्रॉडवे और थिएटर प्रोडक्शंस पर संयुक्त राज्य अमेरिका में जाना जाता है। फिल्म में अनुभव वह छोटा हैः फिल्म 'किन्से "और खेल के नाटक में अभिनय करने में थोड़ा हिस्सा" समुद्र के दिल में। " बर्टन और बेकममबेतोव मूल फिल्म में अभिनय करने के लिए मशहूर हस्तियों से किसी को लेने के लिए योजना बनाई थी "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" अभिनेता टॉम हार्डी, Timoti Olifant और Edrian Broudi परियोजना के लिए आमंत्रित किया गया है। लेकिन वे इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। इसलिए, भूमिका बेंजामिन वाकर के पास गया।
कहानी के अनुसार चित्रकला, लिंकन के परिवार को एक जैक बार्ट्स के दायरे में रहती है। युवा अब्राहम और संघर्ष के क्रूर बार्ट्स मामले के बीच, जिसके बाद बोने की मशीन सचमुच मौत के लिए भविष्य अध्यक्ष की मां काट। तो यह पता चला है कि लिंकन वास्तव में पिशाच के साथ झगड़ा किया। इस घटना के बाद अब्राहम बुराई संग्रहीत विरोधी पिशाच हथियारों के उन्मूलन के लिए विचार पर आता है और कबीले के सिर की तलाश को खोलता है - एडम हैं।
रफ़स सेवेल ब्रिटिश टीवी श्रृंखला में फिल्माने के साथ 1991 में अपना कैरियर शुरू किया। पहले प्रसिद्धि बड़े परदे नाटक "ईमानदार वेश्या" के रिलीज के बाद उसके पास आया था। साजिश वास्तविक घटनाओं है कि XVI वीं सदी में वेनिस में जगह ले ली पर आधारित है। Rufus एक महान आदमी है जो एक वेनिस वेश्या से प्यार हो गया, कनेक्शन, जिसके साथ फिल्म उल्लेखनीय जुनून से भर गया में खेला। सेवेल भी Hitom Ledzherom विपरीत नाटक "अ नाइट्स टेल" में एक साथ एंटोनियो बैंडेरस के साथ में खेला और, "ज़ोरो के लीजेंड। " हाल ही में अभिनेता अधिक बार खलनायक दर्शाया गया है। एडम के - यहाँ और परियोजना "राष्ट्रपति लिंकन" में, वह पिशाच के नेता की भूमिका मिल गई।
फिल्म "अब्राहम लिंकनः वैम्पायर हंटर 'में और अभिनेताओं वाकर सेवेल खेला शपथ ली दुश्मन। सबसे पहले, लिंकन एक गुप्त एडम के minions लड़ाई का नेतृत्व किया। लेकिन तब लेखकों कहानी बदल गया के रूप में अगर अमेरिकी नागरिक युद्ध वास्तव में दक्षिणी राज्यों से पिशाच के साथ एक युद्ध था। Bloodsuckers चांदी को इस जोखिम के शोषण, लिंकन के नेतृत्व में Northerners सभी इकाइयों और खुद एडम नष्ट कर दिया।
मार्टन सोकास - न्यूजीलैंड अभिनेता। यह EIU एक्शन फिल्म में एक bloodthirsty जैक बार्ट्स की भूमिका की पेशकश की गई थी "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" अभिनेता Chokash और वाकर, कहानी के अनुसार, एक नीग्रो लड़का की वजह से झगड़ा किया। रिच बोने की मशीन लिंकन परिवार की मांग की है, ताकि वे तुरंत सभी ऋण दे दिया और अपनी संपत्ति छोड़ दिया, लेकिन इब्राहीम के पिता ऐसा करने के लिए मना कर दिया। तब बार्ट्स, लिंकन की मां की मौत हो गई जिससे सभी bloodsuckers की भविष्य अध्यक्ष की घृणा के दिल में instilling। मार्टन सोकास भी फिल्म "नूह," "बॉर्न सुप्रीमेसी 'और' एलिस इन वंडरलैंड में देखा जा सकता है। "
फिल्म, "अब्राहम लिंकनः वैम्पायर हंटर 'के अभिनेता - और यहां मैरी एलिजाबेथ विनस्टीड और डोमिनिक कुपर और Entoni माकी। Winstead, स्टार सेनानियों "हार्ड 4 मरो" और "हार्ड 5 मरो", उन्होंने राष्ट्रपति लिंकन की पत्नी की भूमिका मिल गई। डोमिनिक कुपर ( "सबसे पहले Avenger", "एजेंट कार्टर"), जो अपने भाई के खिलाफ लड़ता है एक पिशाच के रूप में एक दृश्य में दिखाई दिया।
कैसे सार्वजनिक पेंटिंग ": वैम्पायर हंटर अब्राहम लिंकन" माना जाता है? अभिनेता और फिल्म के कर्मचारियों उनकी फीस और रॉयल्टी क्योंकि बॉक्स में चित्र रंग लाए मिला है। राय दर्शकों दो शिविरों में विभाजितः एक मूल कथानक उपकरण का आकलन किया, दूसरों सोचा था कि वह क्या बोलना बकवास देखा। लेकिन वे दोनों सहमत थे कि अभिनेता Bendzhamin Uoker बहुत अच्छी तरह से उनकी भूमिका के साथ सामना नहीं कर रहा है, और फिल्म का मुख्य स्टार निकला Rufusa Syuella द्वारा एक पिशाच एडम किया जाना है। आलोचकों का कहना है नए सृजन Timura Bekmambetova बहुत मुश्किल करने के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विश्व के सभी केवल 35 समीक्षा की% की सकारात्मक समीक्षा कर रहे थे। साइट आईएमडीबी फिल्म रेटिंग केवल 5 अंक है।
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भूखंड बेतुका की कगार पर है - कि फिल्म का एक विशिष्ट सुविधा "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" परियोजना में अभिनेता शुरू में काफी प्रसिद्ध आमंत्रित किया। बाद में, हालांकि, लगभग सभी जाने-माने उम्मीदवारों की पेशकश की भूमिका निभाने के लिए मना कर दिया। जो अंततः फिल्म तैमूर बेकममबेतोव में अभिनय किया? और निर्देशक अपने दर्शकों को इस बार हैरान कर दिया? ऐसा लग रहा था इस तरह के एक विषय पहले से ही अपने आप समाप्त हो गया हैः हम खून suckers-खलनायक पर पिशाच संगीतकारों के इतिहास, रात और लोगों के राक्षसों के बीच एक प्रेम पता है। लेकिन कंपनी बीस वीं सेंचुरी फॉक्स से लेखकों आतंकवादियों उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कुछ पूरी तरह से नए और अभी तक बेतुका के साथ आया था। वे दक्षिणी बागान मालिकों परिसंघ bloodsuckers कर दिया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन - एक पिशाच शिकारी में। परियोजना के निदेशक द्वारा किया गया था तैमूर बेकममबेतोव, जो कई वर्षों के लिए "ड्रीम फैक्टरी" में अपने कैरियर का निर्माण किया। रूस बेकममबेतोव गर्जना की, थिएटर पिशाच डायन dilogy "नाइट वॉच" और "डे वॉच" में रिलीज़ किया था। प्रवासी निदेशक सफलतापूर्वक शूटर "वांटेड" के साथ सामना किया है, और फिर बीस वीं सेंचुरी फॉक्स निगम के साथ सहयोग जारी रखा। उदास, nuarny चित्रों के मास्टर - निर्माता "राष्ट्रपति लिंकन" परियोजना टिम बर्टन था। जल्दी नब्बे-ies में। वह एक निर्देशक के रूप टेट्रालॉजी ले लिया "बैटमैन। " उन्होंने यह भी एक निर्देशक अच्छी तरह से नाटक के सभी के लिए जाना जाता है "एडवर्ड सिजरहैंड्स। " राष्ट्रपति लिंकन के बारे में असामान्य फिल्म, दो हज़ार बारह में जारी किया गया और उनहत्तर मिलियन के बजट के साथ एक सौ सोलह मिलियन $ की कमाई की गई थी। Bendzhamin Uoker - अमेरिकी अभिनेता है जो सबसे अच्छा ब्रॉडवे और थिएटर प्रोडक्शंस पर संयुक्त राज्य अमेरिका में जाना जाता है। फिल्म में अनुभव वह छोटा हैः फिल्म 'किन्से "और खेल के नाटक में अभिनय करने में थोड़ा हिस्सा" समुद्र के दिल में। " बर्टन और बेकममबेतोव मूल फिल्म में अभिनय करने के लिए मशहूर हस्तियों से किसी को लेने के लिए योजना बनाई थी "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" अभिनेता टॉम हार्डी, Timoti Olifant और Edrian Broudi परियोजना के लिए आमंत्रित किया गया है। लेकिन वे इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। इसलिए, भूमिका बेंजामिन वाकर के पास गया। कहानी के अनुसार चित्रकला, लिंकन के परिवार को एक जैक बार्ट्स के दायरे में रहती है। युवा अब्राहम और संघर्ष के क्रूर बार्ट्स मामले के बीच, जिसके बाद बोने की मशीन सचमुच मौत के लिए भविष्य अध्यक्ष की मां काट। तो यह पता चला है कि लिंकन वास्तव में पिशाच के साथ झगड़ा किया। इस घटना के बाद अब्राहम बुराई संग्रहीत विरोधी पिशाच हथियारों के उन्मूलन के लिए विचार पर आता है और कबीले के सिर की तलाश को खोलता है - एडम हैं। रफ़स सेवेल ब्रिटिश टीवी श्रृंखला में फिल्माने के साथ एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में अपना कैरियर शुरू किया। पहले प्रसिद्धि बड़े परदे नाटक "ईमानदार वेश्या" के रिलीज के बाद उसके पास आया था। साजिश वास्तविक घटनाओं है कि XVI वीं सदी में वेनिस में जगह ले ली पर आधारित है। Rufus एक महान आदमी है जो एक वेनिस वेश्या से प्यार हो गया, कनेक्शन, जिसके साथ फिल्म उल्लेखनीय जुनून से भर गया में खेला। सेवेल भी Hitom Ledzherom विपरीत नाटक "अ नाइट्स टेल" में एक साथ एंटोनियो बैंडेरस के साथ में खेला और, "ज़ोरो के लीजेंड। " हाल ही में अभिनेता अधिक बार खलनायक दर्शाया गया है। एडम के - यहाँ और परियोजना "राष्ट्रपति लिंकन" में, वह पिशाच के नेता की भूमिका मिल गई। फिल्म "अब्राहम लिंकनः वैम्पायर हंटर 'में और अभिनेताओं वाकर सेवेल खेला शपथ ली दुश्मन। सबसे पहले, लिंकन एक गुप्त एडम के minions लड़ाई का नेतृत्व किया। लेकिन तब लेखकों कहानी बदल गया के रूप में अगर अमेरिकी नागरिक युद्ध वास्तव में दक्षिणी राज्यों से पिशाच के साथ एक युद्ध था। Bloodsuckers चांदी को इस जोखिम के शोषण, लिंकन के नेतृत्व में Northerners सभी इकाइयों और खुद एडम नष्ट कर दिया। मार्टन सोकास - न्यूजीलैंड अभिनेता। यह EIU एक्शन फिल्म में एक bloodthirsty जैक बार्ट्स की भूमिका की पेशकश की गई थी "अब्राहम लिंकनः। वैम्पायर हंटर" अभिनेता Chokash और वाकर, कहानी के अनुसार, एक नीग्रो लड़का की वजह से झगड़ा किया। रिच बोने की मशीन लिंकन परिवार की मांग की है, ताकि वे तुरंत सभी ऋण दे दिया और अपनी संपत्ति छोड़ दिया, लेकिन इब्राहीम के पिता ऐसा करने के लिए मना कर दिया। तब बार्ट्स, लिंकन की मां की मौत हो गई जिससे सभी bloodsuckers की भविष्य अध्यक्ष की घृणा के दिल में instilling। मार्टन सोकास भी फिल्म "नूह," "बॉर्न सुप्रीमेसी 'और' एलिस इन वंडरलैंड में देखा जा सकता है। " फिल्म, "अब्राहम लिंकनः वैम्पायर हंटर 'के अभिनेता - और यहां मैरी एलिजाबेथ विनस्टीड और डोमिनिक कुपर और Entoni माकी। Winstead, स्टार सेनानियों "हार्ड चार मरो" और "हार्ड पाँच मरो", उन्होंने राष्ट्रपति लिंकन की पत्नी की भूमिका मिल गई। डोमिनिक कुपर , जो अपने भाई के खिलाफ लड़ता है एक पिशाच के रूप में एक दृश्य में दिखाई दिया। कैसे सार्वजनिक पेंटिंग ": वैम्पायर हंटर अब्राहम लिंकन" माना जाता है? अभिनेता और फिल्म के कर्मचारियों उनकी फीस और रॉयल्टी क्योंकि बॉक्स में चित्र रंग लाए मिला है। राय दर्शकों दो शिविरों में विभाजितः एक मूल कथानक उपकरण का आकलन किया, दूसरों सोचा था कि वह क्या बोलना बकवास देखा। लेकिन वे दोनों सहमत थे कि अभिनेता Bendzhamin Uoker बहुत अच्छी तरह से उनकी भूमिका के साथ सामना नहीं कर रहा है, और फिल्म का मुख्य स्टार निकला Rufusa Syuella द्वारा एक पिशाच एडम किया जाना है। आलोचकों का कहना है नए सृजन Timura Bekmambetova बहुत मुश्किल करने के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विश्व के सभी केवल पैंतीस समीक्षा की% की सकारात्मक समीक्षा कर रहे थे। साइट आईएमडीबी फिल्म रेटिंग केवल पाँच अंक है।
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VIDEO: क्रिकेटर से बने सिंगर.. सुरेश रैना का पहला गाना रिलीज!
[म्यूजिक] इंतजार खत्म.. क्रिकेट के बाद सिंगिंग के क्षेत्र में हाथ आजमाने वाले सुरेश रैना का पहला गाना 'तू मिली, सब मिला और क्या मांगूं मैं' रिलीज हो गया है। बता दें, फैंस को रैना के इस गाने का बेसब्री से इंतजार था। आखिर रैना टीम इंडिया के स्टाइलिश बल्लेबाजों में एक हैं।
'मेरठिया गैंगस्टर्स' के इस गाने को सुरेश रैना ने काफी बेहतरीन ढ़ंग से गाया है। बता दें, यह फिल्म 18 सितंबर को रिलीज होगी। फिल्म के इस रोमांटिक गाने को सुरेश रैना ने करीब 4-5 घंटे में रिकॉर्ड किया। इस वक्त उनके साथ उनकी पत्नी प्रियंका भी मौजूद थीं।
यहां देखें गाने का वीडियो- (नीचे दी गई तस्वीर पर क्लिक करें)
The official videos of Tu Mili Sab Mila sung by Suresh Raina from Meeruthiya Gangsters.
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जल्द ही सनी देओल के एकलौते बेटे करण देओल शादी के बंधन में बंधने वाले हैं जिसके चलते बीती रात उनकी संगीत सेरेमनी भी होस्ट की गयी जिसमे तीनो देओल ब्रदर्स को स्पॉट किया गया। तीनो ही एक साथ काफी खुश नज़र आये।
शाहरुख़ के पूरे दुनिया में कितने दीवाने हैं ये तो सभी अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन उनके एक बोलने पर पूरी की पूरी स्विगी टीम उनके घर के बाहर आकर खड़ी हो जाये तो सोचिये कैसे ही होगा लेकिन ऐसा हुआ बीती रात।
हाल ही में बीते दिन आदिपुरुष के मेकर्स ने फिल्म का दमदार एक्शन ट्रेलर रिलीज किया जिसके बाद इसने फैंस के दिलो में जो कोहराम मचाया उसके तो क्या ही कहने इसी बीच लोग लंकेश के किरदार को काफी पसंद कर रहे हैं।
सोनी टीवी का मशहूर शो 'शार्क टैंक इंडिया' जल्द ही अपने नए सीजन के साथ टीवी पर वापसी करने के लिए बिलकुल तैयार हो चूका हैं जिसके रेजिस्ट्रेशन्स भी अब चालू करवाए जा चुके हैं आगे की जानकारी के लिए पढ़े आर्टिकल।
वेनिस में हुए बुलगारी इवेंट में प्रियंका चोपड़ा हॉलीवुड एक्ट्रेसेस ऐनी हैथवे और जेंडाया अपने ही स्टाइल में मुलाकात कर सुर्खियों को अपने नाम कर लिया है जिसके बाद से इनकी इस मीटिंग के वीडियो ने भी सोशल मीडिया पर हड़कंप मचाया हुआ हैं।
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जल्द ही सनी देओल के एकलौते बेटे करण देओल शादी के बंधन में बंधने वाले हैं जिसके चलते बीती रात उनकी संगीत सेरेमनी भी होस्ट की गयी जिसमे तीनो देओल ब्रदर्स को स्पॉट किया गया। तीनो ही एक साथ काफी खुश नज़र आये। शाहरुख़ के पूरे दुनिया में कितने दीवाने हैं ये तो सभी अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन उनके एक बोलने पर पूरी की पूरी स्विगी टीम उनके घर के बाहर आकर खड़ी हो जाये तो सोचिये कैसे ही होगा लेकिन ऐसा हुआ बीती रात। हाल ही में बीते दिन आदिपुरुष के मेकर्स ने फिल्म का दमदार एक्शन ट्रेलर रिलीज किया जिसके बाद इसने फैंस के दिलो में जो कोहराम मचाया उसके तो क्या ही कहने इसी बीच लोग लंकेश के किरदार को काफी पसंद कर रहे हैं। सोनी टीवी का मशहूर शो 'शार्क टैंक इंडिया' जल्द ही अपने नए सीजन के साथ टीवी पर वापसी करने के लिए बिलकुल तैयार हो चूका हैं जिसके रेजिस्ट्रेशन्स भी अब चालू करवाए जा चुके हैं आगे की जानकारी के लिए पढ़े आर्टिकल। वेनिस में हुए बुलगारी इवेंट में प्रियंका चोपड़ा हॉलीवुड एक्ट्रेसेस ऐनी हैथवे और जेंडाया अपने ही स्टाइल में मुलाकात कर सुर्खियों को अपने नाम कर लिया है जिसके बाद से इनकी इस मीटिंग के वीडियो ने भी सोशल मीडिया पर हड़कंप मचाया हुआ हैं।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली (Delhi) में विधानसभा चुनावों (Assembly Election) का ऐलान हो चुका है। दिल्ली की जनता 8 फरबरी को मतदान करने के लिए अपने घर से निकलेंगी और 11 फरबरी को चुनावों के परिणाम आएंगे। ऐसे में दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी आप (Aap) के साथ बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने भी कमर कस ली है। सभी राजनीतिक दल आम लोगों के पास जाकर अपनी-अपनी योजनाओं के बारे में उन्हें बता रहे हैं। इसी चुनावी महौल के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने नवोदया टाइम्स के साथ खास बात-चीत की है। जहां उन्होंने अपनी सरकार के 5 सालों के रिपोर्ट कार्ड पर चर्चा करने के साथ- साथ हमारे संवाददाता मुकेश गुप्ता के तीखे सवालों के जवाब दिए है।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है। दिल्ली की जनता आठ फरबरी को मतदान करने के लिए अपने घर से निकलेंगी और ग्यारह फरबरी को चुनावों के परिणाम आएंगे। ऐसे में दिल्ली में सत्ताधारी पार्टी आप के साथ बीजेपी और कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। सभी राजनीतिक दल आम लोगों के पास जाकर अपनी-अपनी योजनाओं के बारे में उन्हें बता रहे हैं। इसी चुनावी महौल के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नवोदया टाइम्स के साथ खास बात-चीत की है। जहां उन्होंने अपनी सरकार के पाँच सालों के रिपोर्ट कार्ड पर चर्चा करने के साथ- साथ हमारे संवाददाता मुकेश गुप्ता के तीखे सवालों के जवाब दिए है।
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यूएसएफडीए सहित किसी विदेशी विनियामक एजेंसी से प्राप्त चेतावनी पत्रों /आयात चेतावनियों को सीधे कंपनियों के पास भेजा जाता है। औषधियों के निर्यात के लिए भारतीय भेषज कंपनियों द्वारा आयातक देश के विनियामक प्रावधानों का अनुपालन किया जाना अपेक्षित है। औषधियों के मानक जिनका अनुपालन किया जाना होता है, तत्संबंधी भेषज कोष में विनिर्धारित किए गए हैं। इन मानकों का समय-समय पर निरंतर रूप से उन्नयन किया जाता है।
सरकार ने विहित किए गए गुणवत्ता मानदंडों के गैर अनुपालन के साथ-साथ औषधियों के विनिर्माण, आपूर्ति और विक्रय के मामलें में कठोर अभियोजन/शास्तियों के लिए सख्त प्रवर्तन व्यवस्था स्थापित करने के लिए निम्नलिखित उपाए किए हैं/ कर रही हैः
- नकली एवं मिलावटी दवाइयों के विनिर्माण हेतु सख्त दंड का प्रावधान करने के लिए औषध एवं प्रसाधन सामग्री (संशोधन) अधिनियम, 2008 के तहत औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 को संशोधित किया गया था। कुछ अपराधों को संज्ञेय व गैर-जमानती भी बनाया गया है। और विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं।
- शीघ्र निस्तारण हेतु औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत अपराधों के अभियोजन हेतु विशेष न्यायालयों की स्थापना करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से अनुरोध किया गया था। अब तक 22 राज्य नामित विशेष न्यायालयों की स्थापना कर चुके हैं।
- देश में नकली दवाइयों के चलन की पहचान करने में सतर्क सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा व्हिसल ब्लोअर स्कीम की घोषणा की गई हैं।
- औषध एंव प्रसाधन सामग्री (संशोधन) अधिनियम, 2008 के तहत बढ़ाए गए दंडों के परिप्रेक्ष्य में नकली घोषित या अवमानक गुणवत्ता वाली औषधियों के नमूनों पर कार्रवाई करने के लिए एक समान कार्यान्वयन हेतु राज्य औषध नियंत्रकों को दिशानिर्देश अग्रेषित किए गए थे।
- निरीक्षणालय कर्मचारियों को देश में चल रही औषधियों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सतर्कता रखने तथा जांच व विश्लेषण हेतु औषधियों के नमूने लेने का निदेश दिया गया है।
- केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) में स्वीकृत पदों की संख्या (वर्ष, 2008 में) 111 से बढ़ाकर (वर्ष 2017 में) 510 कर दी गयी है।
- सीडीएससीओ के अधीन केंद्रीय औषध परीक्षण प्रयोगशालाओं की परीक्षण क्षमताओं को सतत् रूप से बढ़ाया जा रहा है ताकि देश में औषधियों नमूनों के परीक्षण में तेजी लाई जा सके।
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यूएसएफडीए सहित किसी विदेशी विनियामक एजेंसी से प्राप्त चेतावनी पत्रों /आयात चेतावनियों को सीधे कंपनियों के पास भेजा जाता है। औषधियों के निर्यात के लिए भारतीय भेषज कंपनियों द्वारा आयातक देश के विनियामक प्रावधानों का अनुपालन किया जाना अपेक्षित है। औषधियों के मानक जिनका अनुपालन किया जाना होता है, तत्संबंधी भेषज कोष में विनिर्धारित किए गए हैं। इन मानकों का समय-समय पर निरंतर रूप से उन्नयन किया जाता है। सरकार ने विहित किए गए गुणवत्ता मानदंडों के गैर अनुपालन के साथ-साथ औषधियों के विनिर्माण, आपूर्ति और विक्रय के मामलें में कठोर अभियोजन/शास्तियों के लिए सख्त प्रवर्तन व्यवस्था स्थापित करने के लिए निम्नलिखित उपाए किए हैं/ कर रही हैः - नकली एवं मिलावटी दवाइयों के विनिर्माण हेतु सख्त दंड का प्रावधान करने के लिए औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, दो हज़ार आठ के तहत औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ चालीस को संशोधित किया गया था। कुछ अपराधों को संज्ञेय व गैर-जमानती भी बनाया गया है। और विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। - शीघ्र निस्तारण हेतु औषध एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत अपराधों के अभियोजन हेतु विशेष न्यायालयों की स्थापना करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से अनुरोध किया गया था। अब तक बाईस राज्य नामित विशेष न्यायालयों की स्थापना कर चुके हैं। - देश में नकली दवाइयों के चलन की पहचान करने में सतर्क सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा व्हिसल ब्लोअर स्कीम की घोषणा की गई हैं। - औषध एंव प्रसाधन सामग्री अधिनियम, दो हज़ार आठ के तहत बढ़ाए गए दंडों के परिप्रेक्ष्य में नकली घोषित या अवमानक गुणवत्ता वाली औषधियों के नमूनों पर कार्रवाई करने के लिए एक समान कार्यान्वयन हेतु राज्य औषध नियंत्रकों को दिशानिर्देश अग्रेषित किए गए थे। - निरीक्षणालय कर्मचारियों को देश में चल रही औषधियों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सतर्कता रखने तथा जांच व विश्लेषण हेतु औषधियों के नमूने लेने का निदेश दिया गया है। - केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन में स्वीकृत पदों की संख्या एक सौ ग्यारह से बढ़ाकर पाँच सौ दस कर दी गयी है। - सीडीएससीओ के अधीन केंद्रीय औषध परीक्षण प्रयोगशालाओं की परीक्षण क्षमताओं को सतत् रूप से बढ़ाया जा रहा है ताकि देश में औषधियों नमूनों के परीक्षण में तेजी लाई जा सके।
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धान पादप समूहों (जाती) का एक प्रमुख्य खाद्य फसल है, जो घास की प्रजाति ओरिजा सैटाइवा (एशियाई चावल) या ओरीजा ग्लोबेरिमा (अफ्रीकी चावल) का बीज है. अनाज के रूप में यह दुनिया की मानव आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए सबसे व्यापक रूप से खाया जाने वाला मुख्य भोजन है. यह पूरेे संसार की आधा प्रतिशत आबादी का मूल भोजन श्रोत है जो कुल फसलों के क्षेत्रफल का एक चैथाई क्षेत्र में लगाया जाता है.
धान के कुल उत्पादन में ९० प्रतिशत योगदान केवल एशिया महाद्वीप करता है. वर्तमान परिवेश में भारत धान की पैदावार में चाइना के बाद दूसरे स्थान पर सुशोभित है. भारत में धान को ४३८५५ हजार हेक्टेयर में लगाया जाता है, जिसके फलस्वरूप १०४७९८ हजार टन उत्पादन होता है. गन्ने (१. ९ बिलियन टन) और मक्का (१. 0 बिलियन टन) के बाद यह दुनिया भर में तीसरी सबसे ज्यादा उत्पादन वाली कृषि वस्तु है. मानव पोषण और कैलोरी सेवन के संबंध में चावल सबसे महत्वपूर्ण अनाज है, जो मनुष्यों द्वारा दुनिया भर में खपत कैलोरी का पांचवां हिस्सा प्रदान करता है. धान भारतवर्ष में मुख्यतः उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल , आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार राज्यों में लगाया जाता है. बिहार धान का उत्पादन करने वाले राज्यों में पांचवें स्थान पर आता है. , यहाँ धान को मुख्यतः वर्ष में एक बार ही लगाया जाता है.
चावल की खेती के लिए मानसून आने से पहले खेत को तैयार कर लेना चाहिए. सबसे पहले चावल के अंकुर को नर्सरी में तैयार करना चाहिए और इसके बाद लगभग ४० दिनों के पश्चात उसे खेत में प्रत्यारोपण कर देना चाहिए. भारत तथा विश्व के कुछ हिस्सों में चावल के बीज को सीधे खेत में भी बोया जाता है परंतु नर्सरी द्वारा किए जाने वाले चावल की खेती में ज्यादा उपज होती है.
चावल को पहले नर्सरी में इसलिए उगाया जाता है ताकि केवल अंकुरित बीज ही खेत में स्थापित हो सके और अधिक संख्या में पौधे उग सके. नर्सरी से केवल स्वस्थ पौधों के स्थानांतरण में मदद मिलती है. नर्सरी के लिए कम क्षेत्र की आवश्यकता होती है इसलिए इसमें मानसून आने से पहले बीज बो दिए जाते हैं और मुख्य मानसून के समय उसे खेत में प्रत्यारोपण कर दिया जाता है. खेत में धान की बुवाई से ठीक पहले पानी जमा कर दिया जाता है और सभी खरपतवार को निकाल दिया जाता है. जब नर्सरी से निकाल कर धान के पौधों की बुवाई की जाती है तो खरपतवार उसकी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें प्रारम्भ से अंकुरित होना पड़ेगा और धान पहले से नर्सरी में अंकुरित हो चुका होता है. रोपाई के बाद पानी भर दिया जाता है और इस तरह खेत के अधिकांश हिस्से में खरपतवार नहीं उगते हैं.
पारंपरिक प्रणाली में, अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए चावल की नर्सरी जुटाना और उचित समय पर रोपाई करना बहुत महत्वपूर्ण है. उत्तर भारत में मई के अंत से पहले चावल की नर्सरी लगाने की सिफारिश की जाती है, क्योंकि फिर जल्दी या देर से रोपाई से अधिक जीवाणु जैसे की झुलसा या बकेनिया रोग का खतरा होता है और कीटों के हमले में वृद्धि होती है. देरी से नर्सरी लगाने के कारण उत्पादित कर्नेल धान की कटाई के दौरान टूट जाता है. देरी से तैयार नर्सरी की रोपाई अंतिम उपज को कम करके पैदावार को कम करती है.
धान की फसल पर लगभग १४०० कीट ब्याधि का प्रकोप होता है, और संज्ञानतः १०० से ज्यादा कीट की प्रजातियाँ धान की अलग - अलग अवस्था पर आक्रमण करती है, जिनमे लगभग २० प्रजतियाँ धान को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाती है.
शोध से यह पता चला है की धान की कुल उत्पादन का २०. ७ प्रतिशत छति केवल कीड़ो के कारण होती है. धान में कीड़ो का प्रकोप नर्सरी अवस्था से हीं शुरू हो जाता है और धान के कटने तक विद्यमान रहता है.
यह कीट केवल धान के फसलों को ही क्षति पहुँचाता है. इस कीट की प्रौढ़ मादा पत्तियों के ऊपरी सिरे पर एक समूह में ५०-८० अंडे देती है, जो की हलके पीले रंग लिए हुए, अंडाकार या चपटी तथा बादामी रंग के बालों से ढकी होती है. इन अंडो से ५-१० दिनों में हलके पीले रंग की नई सुँढ़ियाँ बाहर निकलती है, जिसका शिर्ष गहरे भूरा रंग की होती है. इनके प्रौढ़ पतंगों के अगली पृष्ठों पर एक काला धब्बा प्रतीत होते है. इस कीट का कीटडिंभ अवस्था ही क्षतिकर होता है. इस कीट की सुँढ़ियाँ अंडो से बाहर निकलकर धान के नए पौधों के मध्य कलिकाओं की पत्तियों में अंदर घुस जाती है तथा अंदर हीं अंदर तने के पोषवाह को खाती है, जिसके परिणामस्वरूप पौधा सूख जाता है. जिसे वैज्ञानिक भाषा में डेड हार्ट कहा जाता है. इस कीट का प्रकोप बाली वाली अवस्था में हो तो बालियाँ सूख कर सफेद हो जाती है, तथा दाने नहीं बन पाते हैं.
१) धान की कटाई के बाद खेत में बचे हुए अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
२) इस कीट के प्रबंधन हेतु पौधों के ऊपरी भाग की पत्तियों को काट देना चाहिए जिससे अंडे नष्ट हो जाते है.
३) पौधों की रोपाई से पहले इसकी जड़ों को ४ से ५ घंटों के लिए १ मि ली क्लोरपाइरीफॉस २० इ सी नामक दवा को १ लीटर पानी में मिलकर डुबो कर रखें.
४) इस कीट से बचने के लिए प्रपंच (२० ट्रैप) प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार किया जा सकता है.
५ ) अंडा परजीवी ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम ५०,००० अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करना लाभकारी होता है.
६) अगर खेतों में ५ या उससे ज्यादा डेड हार्ट दिखाई दे तो रसायनिक प्रबंधन उपयोग में लाना चाहिए, जैसे ट्राइएजोफॉस ४० इ सी नामक दवा की १५० मि ली मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से ५० लीटर पानी के साथ मिलाकर छीड़काव करना चाहिए, अथवा कार्टप हाइड्रोक्लोराइड ४ जी २५ की ग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छीड़काव करना चाहिए.
ख) धान का पत्तर कटी कीट (स्वार्मिंग पिल्लू)
इस कीट के व्यसक गहरे भूरे रंग के होते है जबकि व्यसक नर कीट के पहले पैरों पर भूरे रंग की बाल होती है। इसकी प्रौढ़ मादा निशाचर होती है और सम्भोग के लगभग २४ घंटे बाद, धान या घास की पत्तियों पर २००- ३०० अंडे एक समूह में देती है. इस कीट के अधिक प्रकोप से ऐसा लगता है जैसे कोई मवेशी ने पूरे खेत को चर लिया हो। इस कीट के आक्रमण से धान की पैदावार में १० -२० प्रतिशत का नुकसान होता है.
१) इस कीट के प्रबंधन हेतु प्रकोप की शुरूआती अवस्था में गुच्छेदार अण्डों व सुँढ़ियों को हाथ से नष्ट कर देना चाहिए।
२) नर्सरी में अंकुर अवस्था में पानी डाले ताकि इनकी सुँढ़ियाँ पानी में गिर जाये तथा शिकारी चिड़ियों द्वारा इनका शिकार कर लिया जाये।
३) छोटे क्षेत्रो में बतखों को उस खेत में छोड़ा जा सकता है क्यूंकि बतख इनकी सुँढ़ियों को खा जाता है।
४) रसायनिक प्रबंधन हेतु क्लोरपैरिफॉस २० इ० सी० नामक दवा का १२५० मि० ली० लेकर ५०० से १००० लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
१) इस कीट के प्रबंधन हेतु धान लगी खेतों को एकान्तर सूखा और गीला करना चाहिए ताकी इसकी बढ़ती हुई संख्या को रोका जाये.
२) सघन खेती में इस कीट का प्रकोप ज्यादा होता है इसलिए धान की दो मोरियों के बीच २०×१५ से० मी० दुरी रखनी चाहिए.
३) कीट का प्रकोप शुरू होने पर १० दिन के अंतराल पर अंडा परजीवी क्रिप्टोरिनस लिविडिपेनिस का ५०-७५ अंडे प्रति मीटर क्षेत्रफल में प्रयोग करना चाहिए.
४) रसायनिक प्रबंधन हेतु इमिडाक्लोप्रिड २०० एस० एल० नामक दवा का १०० मि० ली० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से या क्वीनलफास २५ इ० सी० नामक दवा की २ ली० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए.
यह कीट सर्वव्यापी है और धान उगने वाली सभी क्षेत्रों में पाया जाता है. यह कीट ज्यादातर तराई वाले हिस्से में पाया जाता है, जहा पानी स्थिर अवस्था में रहता है. सामान्यतः इस कीट के द्वारा धान की पैदवार में ५-२० प्रतिशत तक नुकसान होता है. इस कीट की प्रौढ़ मादा धान की पत्तियों के निचली सतह पर लगभग ५० अंडे अकेले या ४ के समूह में देती है. इस कीट की नवजात सूंढ़ियाँ पत्तियों को मोड़कर एक बेलनाकार आवृति बनाकर रहती है, और २३-२८ दिनों में पूर्ण विकसित होकर व्यसक कीट निकलता है. यह कीट पत्तियों की ऊपरी सतह के उत्तको को खुरचकर खाता है, जिसके परिणामस्वरूप पत्तियों पर सफेद धब्बे बन जाते है. यह कीट अपनी बेलनाकार आकृति में पानी के उपर तैरती रहती है. इस कीट की सूंढ़ियाँ हीं मुख्य रूप से फसल को नुकसान पहुँचाती है. यह पत्तियों को किनारे से खाना शुरू करती है, और केवल मुख्य तने को छोड देती है. इस कीट के अधिक प्रकोप से पौधों का बढ़ना रूक जाता है और कभी-कभी पौधे सुख भी जाते है.
१) इस कीट के प्रबंधन हेतु खेतों से पानी को निकाल दे ताकि तैरती हुए सूंढ़ियाँ मर जाए.
२) खेतों के पानी में मिट्टी का तेल डालकर एक रस्सी के दोनों छोरों को पकड़ कर धान के पौधों को जोर से हिलाएं ताकि इस कीट की सूंढ़ियाँ नीचे गिरकर मर जाए.
३) रसायनिक नियंत्रण हेतु क्वीनलफॉस २५ इ० सी० नामक दवा की १. ४ ली० मात्रा २५० ली० पानी में मिलकर एक हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए. धान में प्रायः कुछ रोग भी लगते है, जिनका प्रबन्धन किफायती उपज प्राप्त करने के लिए आवशयक है.
यह रोग धान के सभी चरणों और पौधों के सभी भाग जो की मिटटी की सतह से ऊपर है उनको संक्रमित करता है. इस बीमारी के संक्रमण से पत्तियों पर छोटे छोटे धब्बे उत्पन हो जाते है और बाद में इन धब्बो का आकार बढ़ जाता है तथा धब्बो के मध्य में राख के रंग जैसा प्रतीत होता है. कभी कभी कुछ छोटे धब्बे मिल कर एक बड़े अनियमित आकार का धब्बा बना लेते है. यह धब्बे अक्सर आँखों के आकार के होते है.
सबसे पहले कैप्टान या कार्बेन्डाजिम या थिराम या ट्राईसाइक्लोजोल के साथ 2. 0 ग्राम प्रति कि ग्रा बीज लेकर बीज उपचार करें. धान के पौधे को नर्सरी से मुख्य खेत में लगाने से पहले उसके जड़ को लगभग ३० मिनट तक २. ५ किग्रा स्यूडोमोनास फ्लुओरोसेंट १०० लीटर पानी में डुबा कर रखें. मुख्य खेत में नाइट्रोजन उर्वरक का निर्धारित दर से ज्यादा उपयोग न करें. यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर ट्राईसाइक्लोजोल (१ ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ) या कार्बेन्डाजिम (१ ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ) या एडिफेनफोस ( १ मिलीलीटर प्रति १ लीटर पानी के साथ ) का छिड़काव करें.
धान की फसल में यह रोग नर्सरी तथा मुख्य खेत दोनों में ही लगता है. पत्तिओं पर बहुत छोटे भूरे रंग के धब्बे दिखाई पड़ते है जो बाद में लाल और भूरे रंग के गोलाकार तथा अंडाकार धब्बे बन जाते है. बहुत सारे धब्बे एक साथ संगठित होने लगते है और पत्तियाँ सूखने लगती है. यह रोग बीज से भी संक्रमित होते है तथा उनके ऊपर एक मखमली कवक की चादर दिखने लगती है. रोग से संक्रमित हुए बहुत सारे पौधों के समूह को उनके अलग रंग के कारण दूर से ही बड़ी सरलता से पहचाना जा सकता है. यह रोग फसल में ५० प्रतिशत से भी ज्यादा का नुकसान करने में सक्षम है.
बीज बोने से पहले उसे थिराम या कैप्टान (२ ग्राम प्रति १ किलोग्राम बीज के साथ) से उपचारित कर लें. यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. मुख्य खेत में मैंकोजेब (२ ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ) का छिड़काव करें.
धान का टुंग्रो विषाणु से संक्रमित पौधों का आकार बहुत ही छोटा हो जाता है तथा पत्तो की चैड़ाई भी कम हो जाती है. पत्तियों का रंग पीला या संतरी हो जाता है तथा जंग लगे प्रतीत होते है. इस प्रकार की विषमताए विषाणु से संक्रमित पोधो में प्रायः पत्तियों के बाहरी हिस्से से प्रारम्भ होकर अंदर की ओर होता है. यह विषाणु हरी पत्ती फुदक नामक कीट से फैलता है.
यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. पौधाशाला (नर्सरी) को दानेदार कीटनाशक से छिड़काव करना चाहिए. कीटो के निगरानी तथा नियंत्रण क लिए प्रकाश जाल लगाएं. पत्तिओ का पीलापन कम करने हेतु यूरिया ( २ प्रतिशत) का छिड़काव करें। संक्रमण दिखाई पड़ने पर कार्बोफुराण ( १ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ) का छिड़काव करें. कोई भी दानेदार दवाई के प्रयोग से मुख्य फसल में टुंग्रो विषाणु को फैलने से रोका जा सकता है.
इस रोग का प्रारम्भ में ही संक्रमण हो जाने से १०० प्रतिशत तक उपज में गिरावट हो जाती है. रोगजनक पौधों की जड़ तथा तने के पास घास के द्वारा पत्तियों में रंध्रो द्वारा प्रविष्ट होता है और संवहन तंत्र के भीतर बढ़ता है, इसलिए रोग के लक्षण प्रायः पत्तियों के ऊपरी भाग से आरम्भ होते हैं, जिसमें पीले या पुआल के रंग के लहरदार क्षतिग्रस्त स्थल पत्तियों के एक या दोनों किनारों के सिरे से प्रारम्भ होकर नीचे की ओर बढ़ते हैं और अन्त में पत्तियाँ सूख जाती हैं. यह रोग तेज वर्षा, सिंचाई के पानी तथा कीटों द्वारा तेजी से फैलता है. मृदा में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा होने से रोग की उग्रता बढ़ती है. रोग के जीवाणु फसल के अवशेषों तथा खरपतवारों पर आश्रय लिए रहते हैं.
रोग रोधी किस्में ही उगाएं. संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें तथा समय≤ पर पानी निकालते रहें. रोग के लक्षण प्रकट होने पर ७५ ग्राम एग्रीमाइसीन-१०० और ५०० ग्राम ब्लाइटाक्स का ५०० लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर छिड़काव करें, १० से १२ दिन के अंतर पर आवश्यकतानुसार दूसरा एवं तीसरा छिड़काव करें.
अक्सर बारिश के मौसम में धान के पौधे इस रोग की चपेट में आ जाते हैं. अधिक बुवाई की दर या घनिष्ठ पौधे की दूरी, मिट्टी में रोग, और उच्च उपज वाली उन्नत किस्मों का उपयोग भी रोग के विकास का पक्षधर है. रोग के प्रारम्भ में अंडाकार या दीर्घवृत्तीय हरे रंग के घाव जैसे प्रतीत होने वाले निशान, आमतौर पर पत्ती के म्यान पर १-३ सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जो शुरू में मिट्टी या पानी के स्तर से ऊपर होते हैं. अनुकूल परिस्थितियों में, ये प्रारंभिक घाव कई बार शीथ, पत्तियों के ऊपरी हिस्से तक भी फैल जाते हैं.
उर्वरक को उचित दर में ही उपयोग करें. बुवाई से पहले २ ग्राम प्रति किलोग्राम के दर से बीज को कार्बेन्डाजिम से उपचारित कर लें. १ ग्राम कार्बेन्डाजिम ५० डब्लूपी (५४० ग्राम प्रति एकड़) या २ ग्राम मैन्कोजेब ७५ डब्लूपी १ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.
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धान पादप समूहों का एक प्रमुख्य खाद्य फसल है, जो घास की प्रजाति ओरिजा सैटाइवा या ओरीजा ग्लोबेरिमा का बीज है. अनाज के रूप में यह दुनिया की मानव आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए सबसे व्यापक रूप से खाया जाने वाला मुख्य भोजन है. यह पूरेे संसार की आधा प्रतिशत आबादी का मूल भोजन श्रोत है जो कुल फसलों के क्षेत्रफल का एक चैथाई क्षेत्र में लगाया जाता है. धान के कुल उत्पादन में नब्बे प्रतिशत योगदान केवल एशिया महाद्वीप करता है. वर्तमान परिवेश में भारत धान की पैदावार में चाइना के बाद दूसरे स्थान पर सुशोभित है. भारत में धान को तैंतालीस हज़ार आठ सौ पचपन हजार हेक्टेयर में लगाया जाता है, जिसके फलस्वरूप एक लाख चार हज़ार सात सौ अट्ठानवे हजार टन उत्पादन होता है. गन्ने और मक्का के बाद यह दुनिया भर में तीसरी सबसे ज्यादा उत्पादन वाली कृषि वस्तु है. मानव पोषण और कैलोरी सेवन के संबंध में चावल सबसे महत्वपूर्ण अनाज है, जो मनुष्यों द्वारा दुनिया भर में खपत कैलोरी का पांचवां हिस्सा प्रदान करता है. धान भारतवर्ष में मुख्यतः उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल , आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार राज्यों में लगाया जाता है. बिहार धान का उत्पादन करने वाले राज्यों में पांचवें स्थान पर आता है. , यहाँ धान को मुख्यतः वर्ष में एक बार ही लगाया जाता है. चावल की खेती के लिए मानसून आने से पहले खेत को तैयार कर लेना चाहिए. सबसे पहले चावल के अंकुर को नर्सरी में तैयार करना चाहिए और इसके बाद लगभग चालीस दिनों के पश्चात उसे खेत में प्रत्यारोपण कर देना चाहिए. भारत तथा विश्व के कुछ हिस्सों में चावल के बीज को सीधे खेत में भी बोया जाता है परंतु नर्सरी द्वारा किए जाने वाले चावल की खेती में ज्यादा उपज होती है. चावल को पहले नर्सरी में इसलिए उगाया जाता है ताकि केवल अंकुरित बीज ही खेत में स्थापित हो सके और अधिक संख्या में पौधे उग सके. नर्सरी से केवल स्वस्थ पौधों के स्थानांतरण में मदद मिलती है. नर्सरी के लिए कम क्षेत्र की आवश्यकता होती है इसलिए इसमें मानसून आने से पहले बीज बो दिए जाते हैं और मुख्य मानसून के समय उसे खेत में प्रत्यारोपण कर दिया जाता है. खेत में धान की बुवाई से ठीक पहले पानी जमा कर दिया जाता है और सभी खरपतवार को निकाल दिया जाता है. जब नर्सरी से निकाल कर धान के पौधों की बुवाई की जाती है तो खरपतवार उसकी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें प्रारम्भ से अंकुरित होना पड़ेगा और धान पहले से नर्सरी में अंकुरित हो चुका होता है. रोपाई के बाद पानी भर दिया जाता है और इस तरह खेत के अधिकांश हिस्से में खरपतवार नहीं उगते हैं. पारंपरिक प्रणाली में, अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए चावल की नर्सरी जुटाना और उचित समय पर रोपाई करना बहुत महत्वपूर्ण है. उत्तर भारत में मई के अंत से पहले चावल की नर्सरी लगाने की सिफारिश की जाती है, क्योंकि फिर जल्दी या देर से रोपाई से अधिक जीवाणु जैसे की झुलसा या बकेनिया रोग का खतरा होता है और कीटों के हमले में वृद्धि होती है. देरी से नर्सरी लगाने के कारण उत्पादित कर्नेल धान की कटाई के दौरान टूट जाता है. देरी से तैयार नर्सरी की रोपाई अंतिम उपज को कम करके पैदावार को कम करती है. धान की फसल पर लगभग एक हज़ार चार सौ कीट ब्याधि का प्रकोप होता है, और संज्ञानतः एक सौ से ज्यादा कीट की प्रजातियाँ धान की अलग - अलग अवस्था पर आक्रमण करती है, जिनमे लगभग बीस प्रजतियाँ धान को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाती है. शोध से यह पता चला है की धान की कुल उत्पादन का बीस. सात प्रतिशत छति केवल कीड़ो के कारण होती है. धान में कीड़ो का प्रकोप नर्सरी अवस्था से हीं शुरू हो जाता है और धान के कटने तक विद्यमान रहता है. यह कीट केवल धान के फसलों को ही क्षति पहुँचाता है. इस कीट की प्रौढ़ मादा पत्तियों के ऊपरी सिरे पर एक समूह में पचास-अस्सी अंडे देती है, जो की हलके पीले रंग लिए हुए, अंडाकार या चपटी तथा बादामी रंग के बालों से ढकी होती है. इन अंडो से पाँच-दस दिनों में हलके पीले रंग की नई सुँढ़ियाँ बाहर निकलती है, जिसका शिर्ष गहरे भूरा रंग की होती है. इनके प्रौढ़ पतंगों के अगली पृष्ठों पर एक काला धब्बा प्रतीत होते है. इस कीट का कीटडिंभ अवस्था ही क्षतिकर होता है. इस कीट की सुँढ़ियाँ अंडो से बाहर निकलकर धान के नए पौधों के मध्य कलिकाओं की पत्तियों में अंदर घुस जाती है तथा अंदर हीं अंदर तने के पोषवाह को खाती है, जिसके परिणामस्वरूप पौधा सूख जाता है. जिसे वैज्ञानिक भाषा में डेड हार्ट कहा जाता है. इस कीट का प्रकोप बाली वाली अवस्था में हो तो बालियाँ सूख कर सफेद हो जाती है, तथा दाने नहीं बन पाते हैं. एक) धान की कटाई के बाद खेत में बचे हुए अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए। दो) इस कीट के प्रबंधन हेतु पौधों के ऊपरी भाग की पत्तियों को काट देना चाहिए जिससे अंडे नष्ट हो जाते है. तीन) पौधों की रोपाई से पहले इसकी जड़ों को चार से पाँच घंटाटों के लिए एक मि ली क्लोरपाइरीफॉस बीस इ सी नामक दवा को एक लीटरटर पानी में मिलकर डुबो कर रखें. चार) इस कीट से बचने के लिए प्रपंच प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार किया जा सकता है. पाँच ) अंडा परजीवी ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम पचास,शून्य अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करना लाभकारी होता है. छः) अगर खेतों में पाँच या उससे ज्यादा डेड हार्ट दिखाई दे तो रसायनिक प्रबंधन उपयोग में लाना चाहिए, जैसे ट्राइएजोफॉस चालीस इ सी नामक दवा की एक सौ पचास मि ली मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से पचास लीटरटर पानी के साथ मिलाकर छीड़काव करना चाहिए, अथवा कार्टप हाइड्रोक्लोराइड चार जी पच्चीस की ग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छीड़काव करना चाहिए. ख) धान का पत्तर कटी कीट इस कीट के व्यसक गहरे भूरे रंग के होते है जबकि व्यसक नर कीट के पहले पैरों पर भूरे रंग की बाल होती है। इसकी प्रौढ़ मादा निशाचर होती है और सम्भोग के लगभग चौबीस घंटाटे बाद, धान या घास की पत्तियों पर दो सौ- तीन सौ अंडे एक समूह में देती है. इस कीट के अधिक प्रकोप से ऐसा लगता है जैसे कोई मवेशी ने पूरे खेत को चर लिया हो। इस कीट के आक्रमण से धान की पैदावार में दस -बीस प्रतिशत का नुकसान होता है. एक) इस कीट के प्रबंधन हेतु प्रकोप की शुरूआती अवस्था में गुच्छेदार अण्डों व सुँढ़ियों को हाथ से नष्ट कर देना चाहिए। दो) नर्सरी में अंकुर अवस्था में पानी डाले ताकि इनकी सुँढ़ियाँ पानी में गिर जाये तथा शिकारी चिड़ियों द्वारा इनका शिकार कर लिया जाये। तीन) छोटे क्षेत्रो में बतखों को उस खेत में छोड़ा जा सकता है क्यूंकि बतख इनकी सुँढ़ियों को खा जाता है। चार) रसायनिक प्रबंधन हेतु क्लोरपैरिफॉस बीस इशून्य सीशून्य नामक दवा का एक हज़ार दो सौ पचास मिशून्य लीटरशून्य लेकर पाँच सौ से एक हज़ार लीटरटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। एक) इस कीट के प्रबंधन हेतु धान लगी खेतों को एकान्तर सूखा और गीला करना चाहिए ताकी इसकी बढ़ती हुई संख्या को रोका जाये. दो) सघन खेती में इस कीट का प्रकोप ज्यादा होता है इसलिए धान की दो मोरियों के बीच बीस×पंद्रह सेशून्य मीशून्य दुरी रखनी चाहिए. तीन) कीट का प्रकोप शुरू होने पर दस दिन के अंतराल पर अंडा परजीवी क्रिप्टोरिनस लिविडिपेनिस का पचास-पचहत्तर अंडे प्रति मीटर क्षेत्रफल में प्रयोग करना चाहिए. चार) रसायनिक प्रबंधन हेतु इमिडाक्लोप्रिड दो सौ एसशून्य एलशून्य नामक दवा का एक सौ मिशून्य लीटरशून्य मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से या क्वीनलफास पच्चीस इशून्य सीशून्य नामक दवा की दो लीटरशून्य मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए. यह कीट सर्वव्यापी है और धान उगने वाली सभी क्षेत्रों में पाया जाता है. यह कीट ज्यादातर तराई वाले हिस्से में पाया जाता है, जहा पानी स्थिर अवस्था में रहता है. सामान्यतः इस कीट के द्वारा धान की पैदवार में पाँच-बीस प्रतिशत तक नुकसान होता है. इस कीट की प्रौढ़ मादा धान की पत्तियों के निचली सतह पर लगभग पचास अंडे अकेले या चार के समूह में देती है. इस कीट की नवजात सूंढ़ियाँ पत्तियों को मोड़कर एक बेलनाकार आवृति बनाकर रहती है, और तेईस-अट्ठाईस दिनों में पूर्ण विकसित होकर व्यसक कीट निकलता है. यह कीट पत्तियों की ऊपरी सतह के उत्तको को खुरचकर खाता है, जिसके परिणामस्वरूप पत्तियों पर सफेद धब्बे बन जाते है. यह कीट अपनी बेलनाकार आकृति में पानी के उपर तैरती रहती है. इस कीट की सूंढ़ियाँ हीं मुख्य रूप से फसल को नुकसान पहुँचाती है. यह पत्तियों को किनारे से खाना शुरू करती है, और केवल मुख्य तने को छोड देती है. इस कीट के अधिक प्रकोप से पौधों का बढ़ना रूक जाता है और कभी-कभी पौधे सुख भी जाते है. एक) इस कीट के प्रबंधन हेतु खेतों से पानी को निकाल दे ताकि तैरती हुए सूंढ़ियाँ मर जाए. दो) खेतों के पानी में मिट्टी का तेल डालकर एक रस्सी के दोनों छोरों को पकड़ कर धान के पौधों को जोर से हिलाएं ताकि इस कीट की सूंढ़ियाँ नीचे गिरकर मर जाए. तीन) रसायनिक नियंत्रण हेतु क्वीनलफॉस पच्चीस इशून्य सीशून्य नामक दवा की एक. चार लीटरशून्य मात्रा दो सौ पचास लीटरशून्य पानी में मिलकर एक हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए. धान में प्रायः कुछ रोग भी लगते है, जिनका प्रबन्धन किफायती उपज प्राप्त करने के लिए आवशयक है. यह रोग धान के सभी चरणों और पौधों के सभी भाग जो की मिटटी की सतह से ऊपर है उनको संक्रमित करता है. इस बीमारी के संक्रमण से पत्तियों पर छोटे छोटे धब्बे उत्पन हो जाते है और बाद में इन धब्बो का आकार बढ़ जाता है तथा धब्बो के मध्य में राख के रंग जैसा प्रतीत होता है. कभी कभी कुछ छोटे धब्बे मिल कर एक बड़े अनियमित आकार का धब्बा बना लेते है. यह धब्बे अक्सर आँखों के आकार के होते है. सबसे पहले कैप्टान या कार्बेन्डाजिम या थिराम या ट्राईसाइक्लोजोल के साथ दो. शून्य ग्राम प्रति कि ग्रा बीज लेकर बीज उपचार करें. धान के पौधे को नर्सरी से मुख्य खेत में लगाने से पहले उसके जड़ को लगभग तीस मिनट तक दो. पाँच किग्रा स्यूडोमोनास फ्लुओरोसेंट एक सौ लीटरटर पानी में डुबा कर रखें. मुख्य खेत में नाइट्रोजन उर्वरक का निर्धारित दर से ज्यादा उपयोग न करें. यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर ट्राईसाइक्लोजोल या कार्बेन्डाजिम या एडिफेनफोस का छिड़काव करें. धान की फसल में यह रोग नर्सरी तथा मुख्य खेत दोनों में ही लगता है. पत्तिओं पर बहुत छोटे भूरे रंग के धब्बे दिखाई पड़ते है जो बाद में लाल और भूरे रंग के गोलाकार तथा अंडाकार धब्बे बन जाते है. बहुत सारे धब्बे एक साथ संगठित होने लगते है और पत्तियाँ सूखने लगती है. यह रोग बीज से भी संक्रमित होते है तथा उनके ऊपर एक मखमली कवक की चादर दिखने लगती है. रोग से संक्रमित हुए बहुत सारे पौधों के समूह को उनके अलग रंग के कारण दूर से ही बड़ी सरलता से पहचाना जा सकता है. यह रोग फसल में पचास प्रतिशत से भी ज्यादा का नुकसान करने में सक्षम है. बीज बोने से पहले उसे थिराम या कैप्टान से उपचारित कर लें. यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. मुख्य खेत में मैंकोजेब का छिड़काव करें. धान का टुंग्रो विषाणु से संक्रमित पौधों का आकार बहुत ही छोटा हो जाता है तथा पत्तो की चैड़ाई भी कम हो जाती है. पत्तियों का रंग पीला या संतरी हो जाता है तथा जंग लगे प्रतीत होते है. इस प्रकार की विषमताए विषाणु से संक्रमित पोधो में प्रायः पत्तियों के बाहरी हिस्से से प्रारम्भ होकर अंदर की ओर होता है. यह विषाणु हरी पत्ती फुदक नामक कीट से फैलता है. यदि संभव हो तो सहनशील किस्मो का ही उपयोग करें. पौधाशाला को दानेदार कीटनाशक से छिड़काव करना चाहिए. कीटो के निगरानी तथा नियंत्रण क लिए प्रकाश जाल लगाएं. पत्तिओ का पीलापन कम करने हेतु यूरिया का छिड़काव करें। संक्रमण दिखाई पड़ने पर कार्बोफुराण का छिड़काव करें. कोई भी दानेदार दवाई के प्रयोग से मुख्य फसल में टुंग्रो विषाणु को फैलने से रोका जा सकता है. इस रोग का प्रारम्भ में ही संक्रमण हो जाने से एक सौ प्रतिशत तक उपज में गिरावट हो जाती है. रोगजनक पौधों की जड़ तथा तने के पास घास के द्वारा पत्तियों में रंध्रो द्वारा प्रविष्ट होता है और संवहन तंत्र के भीतर बढ़ता है, इसलिए रोग के लक्षण प्रायः पत्तियों के ऊपरी भाग से आरम्भ होते हैं, जिसमें पीले या पुआल के रंग के लहरदार क्षतिग्रस्त स्थल पत्तियों के एक या दोनों किनारों के सिरे से प्रारम्भ होकर नीचे की ओर बढ़ते हैं और अन्त में पत्तियाँ सूख जाती हैं. यह रोग तेज वर्षा, सिंचाई के पानी तथा कीटों द्वारा तेजी से फैलता है. मृदा में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा होने से रोग की उग्रता बढ़ती है. रोग के जीवाणु फसल के अवशेषों तथा खरपतवारों पर आश्रय लिए रहते हैं. रोग रोधी किस्में ही उगाएं. संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें तथा समय≤ पर पानी निकालते रहें. रोग के लक्षण प्रकट होने पर पचहत्तर ग्राम एग्रीमाइसीन-एक सौ और पाँच सौ ग्राम ब्लाइटाक्स का पाँच सौ लीटरटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टर छिड़काव करें, दस से बारह दिन के अंतर पर आवश्यकतानुसार दूसरा एवं तीसरा छिड़काव करें. अक्सर बारिश के मौसम में धान के पौधे इस रोग की चपेट में आ जाते हैं. अधिक बुवाई की दर या घनिष्ठ पौधे की दूरी, मिट्टी में रोग, और उच्च उपज वाली उन्नत किस्मों का उपयोग भी रोग के विकास का पक्षधर है. रोग के प्रारम्भ में अंडाकार या दीर्घवृत्तीय हरे रंग के घाव जैसे प्रतीत होने वाले निशान, आमतौर पर पत्ती के म्यान पर एक-तीन सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जो शुरू में मिट्टी या पानी के स्तर से ऊपर होते हैं. अनुकूल परिस्थितियों में, ये प्रारंभिक घाव कई बार शीथ, पत्तियों के ऊपरी हिस्से तक भी फैल जाते हैं. उर्वरक को उचित दर में ही उपयोग करें. बुवाई से पहले दो ग्राम प्रति किलोग्राम के दर से बीज को कार्बेन्डाजिम से उपचारित कर लें. एक ग्राम कार्बेन्डाजिम पचास डब्लूपी या दो ग्राम मैन्कोजेब पचहत्तर डब्लूपी एक लीटरटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.
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तब उसे सहसा भान हुआ कि वह उसे नहीं चाहता, वह विस्मित रह गई । उसे अतीत में कही हुई उसकी सारी बातें याद
और दाकि कितनी निराशा पूर्वक वह उसे प्यार करता था, उसने स्वयं को अपमानित और क्रोधित समझा परन्तु उसमें एक तरह की जन्मजात वृष्टता थी, जो उसे पार ले जाती थी । फिलिप को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह उससे प्यार करती थी, क्योंकि वह नहीं करती थी । वह कभी-कभी उसे घृणा करती थी और वह उसका अपमान करना चाहती थी; पर उसने अपने को बिल्कुल शक्तिहीन पाया; वह समझ न सकी उसके साथ कैसे पेश आया जाय, वह उसके साथ थोड़ी घबराने लगी। एक दो बार वह रोई भी । एक दो बार उसने फिलपि के साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार किया; पर जब रात में सोते समय उसने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया तो थोड़ी देर में उसने कुछ बहाना बताकर अपना हाथ मुक्त कर लिया, जैसे उसके द्वारा हुआ जाना ही उसे नापसन्द हो । उसकी समझ में न आता । उसके ऊपर उसका केवल एक वश बच्ची का था, जिसको वह रोज-रोज अधिक से अधिक चाहने लगा था; बच्ची को एक तमाचा मार कर या धक्का देकर वह उसे बहुत क्रोधित कर सकती थी; और केवल उस समय पुरानी कोमल मुस्कान उसकी आँखों में वापस आती जब वह बच्ची को लेकर उसके पास खड़ी होती ।
वह यह सब सोचती और क्रोध पूर्वक स्वयं से कहती कि कभी वह उससे इस सबका बदला चुका लेगी । वह इस सत्य से स्वयं को मना न पाती कि अब वह उसकी परवाह नहीं करता था। वह उसे परवाह करना सिखा देगी । दर्पचूर्ण का उसे बड़ा मान था और कभी-कभी एक अजीब ढंग से वह फिलिप की लालसा करती। अब वह इतना उदासीन होगया था कि उसे चिढ़ लगी। वह उस प्रकार से हमेशा उसके बारे में सोचा करती। वह सोचती कि फिलिप उसके साथ बड़ा बुरा व्यवहार कर रहा है और समझ न पाती कि ऐसा पाने के लिये उसने क्या किया
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तब उसे सहसा भान हुआ कि वह उसे नहीं चाहता, वह विस्मित रह गई । उसे अतीत में कही हुई उसकी सारी बातें याद और दाकि कितनी निराशा पूर्वक वह उसे प्यार करता था, उसने स्वयं को अपमानित और क्रोधित समझा परन्तु उसमें एक तरह की जन्मजात वृष्टता थी, जो उसे पार ले जाती थी । फिलिप को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह उससे प्यार करती थी, क्योंकि वह नहीं करती थी । वह कभी-कभी उसे घृणा करती थी और वह उसका अपमान करना चाहती थी; पर उसने अपने को बिल्कुल शक्तिहीन पाया; वह समझ न सकी उसके साथ कैसे पेश आया जाय, वह उसके साथ थोड़ी घबराने लगी। एक दो बार वह रोई भी । एक दो बार उसने फिलपि के साथ बहुत ही अच्छा व्यवहार किया; पर जब रात में सोते समय उसने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया तो थोड़ी देर में उसने कुछ बहाना बताकर अपना हाथ मुक्त कर लिया, जैसे उसके द्वारा हुआ जाना ही उसे नापसन्द हो । उसकी समझ में न आता । उसके ऊपर उसका केवल एक वश बच्ची का था, जिसको वह रोज-रोज अधिक से अधिक चाहने लगा था; बच्ची को एक तमाचा मार कर या धक्का देकर वह उसे बहुत क्रोधित कर सकती थी; और केवल उस समय पुरानी कोमल मुस्कान उसकी आँखों में वापस आती जब वह बच्ची को लेकर उसके पास खड़ी होती । वह यह सब सोचती और क्रोध पूर्वक स्वयं से कहती कि कभी वह उससे इस सबका बदला चुका लेगी । वह इस सत्य से स्वयं को मना न पाती कि अब वह उसकी परवाह नहीं करता था। वह उसे परवाह करना सिखा देगी । दर्पचूर्ण का उसे बड़ा मान था और कभी-कभी एक अजीब ढंग से वह फिलिप की लालसा करती। अब वह इतना उदासीन होगया था कि उसे चिढ़ लगी। वह उस प्रकार से हमेशा उसके बारे में सोचा करती। वह सोचती कि फिलिप उसके साथ बड़ा बुरा व्यवहार कर रहा है और समझ न पाती कि ऐसा पाने के लिये उसने क्या किया
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करना कहाता है, वह ईक्षण है । इत्यादि संक्षिप्त विषय ही से सज्जन लोग बहुत विस्तरण कर लेंगे ।
अब संक्षेप से ईश्वर का विषय लिखकर वेद का विषय लिखते हैं
यस्मा॒दृधो॑ अ॒पात॑क्ष॒न्॒ यजुर्यस्मा॑द॒पाक॑षन् । सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑न्यथर्वाङ्गिरसो॒ मुख॑ स्क॒म्भन्तं ब्रूहि कत॒मः स्वि॑िदे॒व सः ॥
- अथर्व० कां० १० । प्रपा० २३ । अनु० ४ । मं० २० जिस परमात्मा से ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद प्रकाशित हुए हैं, वह कौन-सा देव है ?
इसका उत्तर - जो सबको उत्पन्न करके धारण कर रहा है, वह परमात्मा है।
स्व॑य॒म्भूर्या॑थातथ्य॒तोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समा॑भ्यः ॥
- -यजुः० अ० ४० । मं० ८ ॥ जो स्वयम्भू, सर्वव्यापक, शुद्ध, सनातन, निराकार परमेश्वर है, वह सनातन जीवरूप प्रजा के कल्याणार्थ यथावत् रीतिपूर्वक वेद द्वारा सब विद्याओं का उपदेश करता है ।
प्रश्न - परमेश्वर को आप निराकार मानते हो वा साकार ?
उत्तर - निराकार मानते हैं ।
प्रश्न - जब निराकार है तो वेदविद्या का उपदेश विना मुख के वर्णोच्चारण कैसे हो सका होगा ? क्योंकि वर्गों के उच्चारण में ताल्वादि स्थान, जिह्वा का प्रयत्न अवश्य होना चाहिये ।
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करना कहाता है, वह ईक्षण है । इत्यादि संक्षिप्त विषय ही से सज्जन लोग बहुत विस्तरण कर लेंगे । अब संक्षेप से ईश्वर का विषय लिखकर वेद का विषय लिखते हैं यस्मा॒दृधो॑ अ॒पात॑क्ष॒न्॒ यजुर्यस्मा॑द॒पाक॑षन् । सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑न्यथर्वाङ्गिरसो॒ मुख॑ स्क॒म्भन्तं ब्रूहि कत॒मः स्वि॑िदे॒व सः ॥ - अथर्वशून्य कांशून्य दस । प्रपाशून्य तेईस । अनुशून्य चार । मंशून्य बीस जिस परमात्मा से ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद प्रकाशित हुए हैं, वह कौन-सा देव है ? इसका उत्तर - जो सबको उत्पन्न करके धारण कर रहा है, वह परमात्मा है। स्व॑य॒म्भूर्या॑थातथ्य॒तोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समा॑भ्यः ॥ - -यजुःशून्य अशून्य चालीस । मंशून्य आठ ॥ जो स्वयम्भू, सर्वव्यापक, शुद्ध, सनातन, निराकार परमेश्वर है, वह सनातन जीवरूप प्रजा के कल्याणार्थ यथावत् रीतिपूर्वक वेद द्वारा सब विद्याओं का उपदेश करता है । प्रश्न - परमेश्वर को आप निराकार मानते हो वा साकार ? उत्तर - निराकार मानते हैं । प्रश्न - जब निराकार है तो वेदविद्या का उपदेश विना मुख के वर्णोच्चारण कैसे हो सका होगा ? क्योंकि वर्गों के उच्चारण में ताल्वादि स्थान, जिह्वा का प्रयत्न अवश्य होना चाहिये ।
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आर्मोरी चैम्बर ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के क्षेत्र में रूसी संघ की राजधानी में स्थित एक खजाना घर है। मॉस्को के सबसे खूबसूरत स्थानों में घूमते हुए , आप इस अद्वितीय संग्रहालय से गुजर नहीं सकते हैं। यह आर्किटेक्ट कॉन्स्टेंटिन टन द्वारा निर्मित 1851 की एक इमारत में स्थित है। मॉस्को में आर्मोरी चैम्बर, रूस का सबसे खूबसूरत शहर , अपनी दीवारों के गहने और प्राचीन वस्तुओं में इकट्ठा हुआ, जो सदियों से शाही खजाने में रखा गया था। अधिकांश आइटम क्रेमलिन की कार्यशालाओं में किए जाते हैं। लेकिन विभिन्न देशों के दूतावासों से उपहार भी प्रस्तुत किए जाते हैं। मॉस्को क्रेमलिन के आर्मोरी चेम्बर का नाम सबसे पुराना क्रेमलिन खजाने में से एक के कारण हुआ।
आर्मोरी चैम्बर का पहला उल्लेख 1547 के दस्तावेजों में परिलक्षित होता है। उस समय, यह हथियारों के लिए एक भंडार के रूप में कार्य किया। 17 वीं शताब्दी के दूसरे छमाही में क्रेमलिन आर्मोरी चैंबर रूसी जुर्माना और लागू कला का केंद्र है। इस अवधि के दौरान अपनी कार्यशालाओं में, उच्च कलात्मक मूल्यों की एक बड़ी संख्या का उत्पादन किया जाता है। हथियार और बैनर के उत्पादन के अलावा, स्वामी कार्बोनेरी करते हैं, लोहे और गिल्डिंग में नक्काशी करते हैं। इसके अलावा, आइकन पेंटिंग का एक अलग कक्ष है। 18 वीं शताब्दी में, पीटर I के डिक्री के अनुसार, उसे आर्मरी चैम्बर की कार्यशाला में सभी अपमानजनक और रोचक चीजों को सौंपने का आदेश दिया गया था। 1737 की आग के दौरान, ट्राफियों का हिस्सा जला दिया गया था।
184 9 में आर्मरी चैम्बर के लिए एक नई इमारत का निर्माण शुरू हुआ। परियोजना का मुख्य वास्तुकार कॉन्स्टेंटिन टन था।
वर्तमान में, क्रेमलिन के संग्रहालयों में, आर्मोरी चैंबर अपने समृद्ध और अद्वितीय प्रदर्शनी के कारण खड़ा है। संग्रहालय में राज्य के राजनेता, शाही कपड़े और राजद्रोह के लिए एक पोशाक, रूसी रूढ़िवादी चर्च के पदानुक्रमों के कपड़े शामिल हैं। इसके अलावा, रूसी शिल्पकारों, हथियार और घोड़े के गाड़ियां औपचारिक सजावट के तत्वों द्वारा बनाए गए चांदी और सोने से बने सामानों की एक बड़ी संख्या।
कुल मिलाकर, संग्रहालय प्रदर्शनी में चार हजार प्रदर्शन शामिल हैं। वे सभी चतुर्थ से लेकर XX शताब्दी की अवधि में रूस, यूरोपीय और पूर्वी देशों के कला और शिल्प के महत्वपूर्ण स्मारक हैं। और यह अपने अद्वितीय प्रदर्शन के लिए धन्यवाद है कि संग्रहालय पूरी दुनिया में जाना जाता है।
आर्मरी चैंबर के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक भ्रमण एक नई सेवा है जो संग्रहालय आगंतुकों को प्राप्त कर सकते हैं। अंतर्निहित मार्गदर्शिका वाला एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया पॉकेट कंप्यूटर आपको संग्रहालय के लेआउट को समझने में मदद करेगा। गाइड स्क्रीन पर भी आप सबसे बड़े मूल्य के प्रदर्शन की छवियां देख सकते हैं। यदि आप चाहते हैं, तो आप उनके बारे में एक ऐतिहासिक संदर्भ सुन सकते हैं, और शब्दों के शब्दकोश का उपयोग कर सकते हैं।
- संग्रहालय का प्रवेश सत्रों द्वारा किया जाता है। यह समझने के लिए कि कैसे शस्त्रागार में जाना है, याद रखें कि सत्र 10:00, 12:00, 14:30 और 16:30 बजे होते हैं। प्रवेश के लिए टिकट प्रत्येक सत्र से 45 मिनट पहले बिक्री शुरू करते हैं।
- आर्मरी चैम्बर के लिए एक पूर्ण टिकट की लागत 700 आर होगी।
- रूसी संघ के छात्र, छात्र और पेंशनभोगी 200 रूबल के लिए संग्रहालय में टिकट खरीद सकते हैं। यह विशेषाधिकार भी छात्रों और छात्रों के विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किया जा सकता है, जब वे एक अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्ड प्रदान करते हैं।
- कुछ नागरिक आर्मोरी के लिए एक मुफ्त यात्रा के अधिकार का उपयोग कर सकते हैं। ये 6 साल से कम आयु के बच्चे, विकलांग, दूसरे विश्व युद्ध में भाग लेने वाले, बड़े परिवार और संग्रहालय कर्मचारी हैं।
- इसके अलावा, हर महीने के तीसरे सोमवार को, 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को आर्मरी संग्रहालय में निःशुल्क पहुंच मिल सकती है।
- संग्रहालय के क्षेत्र में फोटो और वीडियो शूटिंग प्रतिबंधित है।
- आर्मरी चैम्बर का ऑपरेटिंग मोडः 9:30 से 16:30 तक। दिन बंद गुरुवार है।
- संदर्भ के लिए फोनः (4 9 5) 695-37-76।
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आर्मोरी चैम्बर ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस के क्षेत्र में रूसी संघ की राजधानी में स्थित एक खजाना घर है। मॉस्को के सबसे खूबसूरत स्थानों में घूमते हुए , आप इस अद्वितीय संग्रहालय से गुजर नहीं सकते हैं। यह आर्किटेक्ट कॉन्स्टेंटिन टन द्वारा निर्मित एक हज़ार आठ सौ इक्यावन की एक इमारत में स्थित है। मॉस्को में आर्मोरी चैम्बर, रूस का सबसे खूबसूरत शहर , अपनी दीवारों के गहने और प्राचीन वस्तुओं में इकट्ठा हुआ, जो सदियों से शाही खजाने में रखा गया था। अधिकांश आइटम क्रेमलिन की कार्यशालाओं में किए जाते हैं। लेकिन विभिन्न देशों के दूतावासों से उपहार भी प्रस्तुत किए जाते हैं। मॉस्को क्रेमलिन के आर्मोरी चेम्बर का नाम सबसे पुराना क्रेमलिन खजाने में से एक के कारण हुआ। आर्मोरी चैम्बर का पहला उल्लेख एक हज़ार पाँच सौ सैंतालीस के दस्तावेजों में परिलक्षित होता है। उस समय, यह हथियारों के लिए एक भंडार के रूप में कार्य किया। सत्रह वीं शताब्दी के दूसरे छमाही में क्रेमलिन आर्मोरी चैंबर रूसी जुर्माना और लागू कला का केंद्र है। इस अवधि के दौरान अपनी कार्यशालाओं में, उच्च कलात्मक मूल्यों की एक बड़ी संख्या का उत्पादन किया जाता है। हथियार और बैनर के उत्पादन के अलावा, स्वामी कार्बोनेरी करते हैं, लोहे और गिल्डिंग में नक्काशी करते हैं। इसके अलावा, आइकन पेंटिंग का एक अलग कक्ष है। अट्ठारह वीं शताब्दी में, पीटर I के डिक्री के अनुसार, उसे आर्मरी चैम्बर की कार्यशाला में सभी अपमानजनक और रोचक चीजों को सौंपने का आदेश दिया गया था। एक हज़ार सात सौ सैंतीस की आग के दौरान, ट्राफियों का हिस्सा जला दिया गया था। एक सौ चौरासी नौ में आर्मरी चैम्बर के लिए एक नई इमारत का निर्माण शुरू हुआ। परियोजना का मुख्य वास्तुकार कॉन्स्टेंटिन टन था। वर्तमान में, क्रेमलिन के संग्रहालयों में, आर्मोरी चैंबर अपने समृद्ध और अद्वितीय प्रदर्शनी के कारण खड़ा है। संग्रहालय में राज्य के राजनेता, शाही कपड़े और राजद्रोह के लिए एक पोशाक, रूसी रूढ़िवादी चर्च के पदानुक्रमों के कपड़े शामिल हैं। इसके अलावा, रूसी शिल्पकारों, हथियार और घोड़े के गाड़ियां औपचारिक सजावट के तत्वों द्वारा बनाए गए चांदी और सोने से बने सामानों की एक बड़ी संख्या। कुल मिलाकर, संग्रहालय प्रदर्शनी में चार हजार प्रदर्शन शामिल हैं। वे सभी चतुर्थ से लेकर XX शताब्दी की अवधि में रूस, यूरोपीय और पूर्वी देशों के कला और शिल्प के महत्वपूर्ण स्मारक हैं। और यह अपने अद्वितीय प्रदर्शन के लिए धन्यवाद है कि संग्रहालय पूरी दुनिया में जाना जाता है। आर्मरी चैंबर के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक भ्रमण एक नई सेवा है जो संग्रहालय आगंतुकों को प्राप्त कर सकते हैं। अंतर्निहित मार्गदर्शिका वाला एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया पॉकेट कंप्यूटर आपको संग्रहालय के लेआउट को समझने में मदद करेगा। गाइड स्क्रीन पर भी आप सबसे बड़े मूल्य के प्रदर्शन की छवियां देख सकते हैं। यदि आप चाहते हैं, तो आप उनके बारे में एक ऐतिहासिक संदर्भ सुन सकते हैं, और शब्दों के शब्दकोश का उपयोग कर सकते हैं। - संग्रहालय का प्रवेश सत्रों द्वारा किया जाता है। यह समझने के लिए कि कैसे शस्त्रागार में जाना है, याद रखें कि सत्र दस:शून्य, बारह:शून्य, चौदह:तीस और सोलह:तीस बजे होते हैं। प्रवेश के लिए टिकट प्रत्येक सत्र से पैंतालीस मिनट पहले बिक्री शुरू करते हैं। - आर्मरी चैम्बर के लिए एक पूर्ण टिकट की लागत सात सौ आर होगी। - रूसी संघ के छात्र, छात्र और पेंशनभोगी दो सौ रूबल के लिए संग्रहालय में टिकट खरीद सकते हैं। यह विशेषाधिकार भी छात्रों और छात्रों के विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किया जा सकता है, जब वे एक अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्ड प्रदान करते हैं। - कुछ नागरिक आर्मोरी के लिए एक मुफ्त यात्रा के अधिकार का उपयोग कर सकते हैं। ये छः साल से कम आयु के बच्चे, विकलांग, दूसरे विश्व युद्ध में भाग लेने वाले, बड़े परिवार और संग्रहालय कर्मचारी हैं। - इसके अलावा, हर महीने के तीसरे सोमवार को, अट्ठारह वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को आर्मरी संग्रहालय में निःशुल्क पहुंच मिल सकती है। - संग्रहालय के क्षेत्र में फोटो और वीडियो शूटिंग प्रतिबंधित है। - आर्मरी चैम्बर का ऑपरेटिंग मोडः नौ:तीस से सोलह:तीस तक। दिन बंद गुरुवार है। - संदर्भ के लिए फोनः छःपचानवे सैंतीस छिहत्तर।
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Dr. Mohit Srivastava सूरत के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वह सामान्य शल्यचिकित्सा के विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों व क्लीनिक में काम कर चुके Dr. Mohit Srivastava का अनुभव 23 साल से भी ज्यादा है। आजकल Dr. Mohit Srivastava Bombay Hospital, Mumbai, P S Medical College, JanSeva Hospital, Hair'N'Images, Sahara Hospital में काम कर रहे हैं। Dr. Mohit Srivastava Bombay Hospital, Mumbai, P S Medical College, JanSeva Hospital, Hair'N'Images, Sahara Hospital में अपनी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। Dr. Mohit Srivastava Graft, Hair Transplant Surgery, PRP Hair Transplantation, Laser therapy, Hair Disease, Permanent Hair Removal में विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों से जुड़े होने के साथ-साथ Dr. Mohit Srivastava अनेक मेडिकल संस्थानों के साथ भी सक्रिय हैं। Dr. Mohit Srivastava Association of Hair Restoration Surgeons (AHRS) के सदस्य रह चुके हैं। G R MEDICAL COLLEGE, GWALIOR से Dr. Mohit Srivastava ने अपनी MBBS डिग्री पूरी की है। इसके अलावा इन्होंने अपनी MS - General Surgery डिग्री G R MEDICAL COLLEGE, GWALIOR से पूरी की है।
Q: Dr. Mohit Srivastava की शैक्षिक क्वालिफिकेशन क्या हैं?
A: Dr. Mohit Srivastava के पास MBBS, MS - General Surgery डिग्री हैं। Dr. Mohit Srivastava की क्वालिफिकेशन की एक पूरी सूची के ऊपर दी गयी है।
Q: Dr. Mohit Srivastava को कितने वर्षों का अनुभव है?
A: सामान्य शल्यचिकित्सा में Dr. Mohit Srivastava को कुल 23 सालों का एक्सपीरियंस है।
Q: किस प्रकार के रोगी Dr. Mohit Srivastava के पास जाते हैं?
A: Dr. Mohit Srivastava के पास मरीज Graft, Hair Transplant Surgery, PRP Hair Transplantation के लिए जाते हैं। Dr. Mohit Srivastava द्वारा किए जाने वाले तमाम कार्यों की जानकारी ऊपर मौजूद है।
Q: Dr. Mohit Srivastava का अपॉइंटमेंट कैसे मिल सकता है?
A: Dr. Mohit Srivastava से ऑनलाइन बात करने या क्लिनिक में जा कर सलाह लेने के लिए आप myUpchar की मदद से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। इसके लिए ऊपर दिए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें।
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Dr. Mohit Srivastava सूरत के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। वह सामान्य शल्यचिकित्सा के विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों व क्लीनिक में काम कर चुके Dr. Mohit Srivastava का अनुभव तेईस साल से भी ज्यादा है। आजकल Dr. Mohit Srivastava Bombay Hospital, Mumbai, P S Medical College, JanSeva Hospital, Hair'N'Images, Sahara Hospital में काम कर रहे हैं। Dr. Mohit Srivastava Bombay Hospital, Mumbai, P S Medical College, JanSeva Hospital, Hair'N'Images, Sahara Hospital में अपनी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। Dr. Mohit Srivastava Graft, Hair Transplant Surgery, PRP Hair Transplantation, Laser therapy, Hair Disease, Permanent Hair Removal में विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों से जुड़े होने के साथ-साथ Dr. Mohit Srivastava अनेक मेडिकल संस्थानों के साथ भी सक्रिय हैं। Dr. Mohit Srivastava Association of Hair Restoration Surgeons के सदस्य रह चुके हैं। G R MEDICAL COLLEGE, GWALIOR से Dr. Mohit Srivastava ने अपनी MBBS डिग्री पूरी की है। इसके अलावा इन्होंने अपनी MS - General Surgery डिग्री G R MEDICAL COLLEGE, GWALIOR से पूरी की है। Q: Dr. Mohit Srivastava की शैक्षिक क्वालिफिकेशन क्या हैं? A: Dr. Mohit Srivastava के पास MBBS, MS - General Surgery डिग्री हैं। Dr. Mohit Srivastava की क्वालिफिकेशन की एक पूरी सूची के ऊपर दी गयी है। Q: Dr. Mohit Srivastava को कितने वर्षों का अनुभव है? A: सामान्य शल्यचिकित्सा में Dr. Mohit Srivastava को कुल तेईस सालों का एक्सपीरियंस है। Q: किस प्रकार के रोगी Dr. Mohit Srivastava के पास जाते हैं? A: Dr. Mohit Srivastava के पास मरीज Graft, Hair Transplant Surgery, PRP Hair Transplantation के लिए जाते हैं। Dr. Mohit Srivastava द्वारा किए जाने वाले तमाम कार्यों की जानकारी ऊपर मौजूद है। Q: Dr. Mohit Srivastava का अपॉइंटमेंट कैसे मिल सकता है? A: Dr. Mohit Srivastava से ऑनलाइन बात करने या क्लिनिक में जा कर सलाह लेने के लिए आप myUpchar की मदद से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। इसके लिए ऊपर दिए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें।
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नहीं रोक सकेगा । परन्तु कमसे कम यह २२ जूनका एक दिन तो ऐसा हो, जब हम साम्राज्यके आदर्शोपर अमल कर सकें • आगे फिर चाहे जो भी होता रहे । हमें निश्चय है कि नगर परिषदका यह व्यवहार सम्राट के प्रति वफादारीका एक ठोस प्रमाण होगा और जबानी वफादारीकी अपेक्षा सम्राट् जॉर्ज इससे कही अधिक खुश होंगे ।
पिछले युद्धके समय, मानो किसीने कोई जादू कर दिया हो, इस तरह लड़ाईके मैदानमें सारे भेदभाव अदृश्य हो गये थे । भारतीय डोलीवाहक जिस प्यालेसे पानी पीते, उसी प्याले या डिब्बेसे टॉमी सिपाही भी पानी पीते थे। वे भारतीयोंके साथसाथ एक ही तम्बूमे रहते और जो खाना उनके हिन्दुस्तानी भाई खाते वही आनन्दके साथ वे भी खाते । उनके बीच पूरा सख्य-भाव था । हमें मालूम है कि ऐसे अवसरोंपर युद्धके मैदानमे डटे हजारों भारतीयोंके हृदय किस तरह प्रफुल्लित हो जाते थे । 'पंच' के सम्पादक इन घटनाओंसे इतने प्रसन्न हुए थे कि उन्होंने अपने पत्र में लिखा : ' आखिर हम साम्राज्य - मातके सव हैं पुत्र सुजान । "२ हम यह भी जानते है कि लड़ाई समाप्त होते ही हमारे बीच फिर वही ईर्ष्या-द्वेष फैल गया । परन्तु युद्धके सबक एकदम भूल नही गये थे । जूलू विद्रोहके समय उन्हें फिर दोहराया गया । भारतीय आहत- सहायक दलके थोड़ेसे सैनिक उपनिवेशके नागरिक सिपाहियोंके साथ समानताके स्तरपर मिलने लगे। कैप्टन स्पार्क्स और दूसरे अधिकारियोंने दलकी सेवाओंकी सराहना की और भारतीय पुनः एक बार अनुभव करने लगे कि "आखिर हम साम्राज्य-मातके सब है पुत्र सुजान । " क्या पिछले दो अवसरोंपर हुए इन अनुभवोंको राजतिलकके दिन दोहराना एकदम असम्भव है ? हम दक्षिण आफ्रिकासे इसका जवाब देनेका अनुरोध करते है ।
८९. प्रीतिभोज
हॉस्केन समिति के सदस्योंको प्रीतिभोज देनेवालोंको उनकी शानदार सफलतापर हम बधाई देते हैं । हमे इसके सम्बन्ध प्राप्त सभी समाचारोंसे ज्ञात होता है कि पिछले समारोहोंकी भाँति यह समारोह भी बड़ा सफल रहा। स्वागत समिति द्वारा निमन्त्रित यूरोपीय मित्र भी अच्छी संख्या में आये थे । अपने यूरोपीय मित्रों तथा समर्थकोंके सम्मानमें आयोजित यह भोज तो समाजकी ओरसे दी गई एक बहुत ही छोटी वस्तु थी । शुरू-शुरूमें, जब कि हर व्यक्ति सत्याग्रहियोंका मजाक उड़ा रहा था, हमदर्द यूरोपीयोंके लिए हमारा साथ देना बहुत हिम्मत, साहस और त्यागका काम था । हम जानते हैं कि किस तरह व्यंगचित्रकारोंने श्री हॉस्केनको अपने चित्रोंका निशाना बना लिया था । और अपने क्लबों तथा गिरजाघरोंमे हमारे इन मित्रोंको
१. देखिए खण्ड ५ पृष्ठ ३७८-८३ ।
२. देखिए दक्षिण आफ्रिके सत्याग्रहका इतिहास, परिच्छेद ९ । ३. देखिए सामनेका व्यंग्य-चित्र ।
क्या-क्या सहना पड़ा होगा, उसकी तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते । सच तो यह है कि कभी-कभी इन्हें भी जेल जानेवाले हमारे भाइयोंसे अधिक नहीं, तो कमसेकम उतना ही कष्ट उठाना पड़ा होगा । फिर भी पिछले चार वर्षोमें, जबतक कि हमारी लड़ाई जारी रही, उन्होंने कभी अपना कदम पीछे नहीं हटाया । श्री डोकने एक बार कहा था कि सच्चे साम्राज्यवादी तो युरोपीय समितिके वे सदस्य और सत्याग्रही है जो जबरदस्त विरोधके मुकाबले में भी साम्राज्यके आदर्शोंकी रक्षाके लिए लड़े हैं । हम श्री डोकके कथनसे बिल्कुल सहमत हैं । हमें आशा है कि दक्षिण आफ्रिकामे भारतीयों और यूरोपीयोंके बीच जो सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध कायम हो गये है वे दोनों कौमोंको इसी प्रकार बाँधे रखेंगे, और इसके फलस्वरूप दोनोंमें एक-दूसरेके प्रति आदर और सहिष्णुताकी भावना बढ़ेगी। यदि ऐसा हुआ तो साम्राज्य के दूसरे भागोंके लिए दक्षिण आफ्रिका एक अनुकरणीय उदाहरण बन जायेगा ।
९० हॉस्केनका चित्र
इस अंकमें हम श्री हॉस्केनका चित्र दे रहे हैं। हमें विश्वास है कि हमारे पाठक उसको पसन्द करेंगे । यह चित्र पहले 'स्टार' में छपा था । हम उस पत्रके मालिकोंके सौजन्यसे इस चित्रको प्राप्त कर सके हैं। हम चाहते है कि हमारे पाठक इस चित्रको मढ़वाकर अपने कमरोंमें लगायें । हमने बहुत बार देखा है कि भारतीय अपने कमरों में शराब या तम्बाकूके चित्रमय विज्ञापन मढ़वाकर टाँगते हैं। कभी-कभी बिलकुल अर्थ - शून्य चित्र मह्ज झूठी सजावट के लिए चिपके या टाँगे होते हैं। बहुत बार लोग हमारी परीक्षा हमारे आसपासकी वस्तुओंसे करते हैं । हम आशा करते हैं कि प्रत्येक भारतीय अपने निवासस्थानमें केवल उन्हीं लोगोंके चित्र रखेंगे जिन्होंने हमपर उपकार किया है अथवा जिनके नाम हम स्मरण रखना चाहते है, और जिन दूसरी चीजोंको हम अपने आसपास रखना चाहे उन्हें भी विचारपूर्वक रखेंगे ।
९१. पत्र : गो० कृ० गोखलेको
यह पत्र आपको एक बहुत बड़े सत्याग्रही श्री सोराबजी शापुरजी अडाजानियाके हाथों मिलेगा। इस स्मरणीय संघर्षके दौरान मुझे जो बहुमूल्य अनुभव प्राप्त हुए हैं, उनमें श्री सोराबजी - जैसे लोगोंका प्राप्त हो जाना सबसे बड़ी चीज है। मुझे विश्वास है कि आप श्री सोराबजीसे मिलकर प्रसन्न होंगे । उनका विचार अगले वर्ष उस समय से पहले ही लौट आनेका है जब जनरल स्मट्स उस विधेयकको पेश करेंगे जिसके बारेमें उन्होंने वचन दे रखा है ।
गांधीजीके स्वाक्षरोंमें मूल अंग्रेजी प्रति ( जी० एन० २२४७ ) की फोटो-नकलसे । सौजन्य : सवेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी, पूना
९२. राज्याभिषेक
राज्याभिषेक - दिवसपर समस्त दक्षिण आफ्रिकासे हमारे देशभाइयोंने राज-दम्पतिको भक्तिपूर्ण शुभकामनाएँ भेजी हैं। किसी अनजान आदमीको शायद यह अटपटा मालूम हो कि दक्षिण आफ्रिकाके ब्रिटिश भारतीय उस सिंहासनके प्रति क्यों और कैसे अपनी भक्ति प्रकट करते हैं अथवा उस राज दम्पतिके राज्याभिषेकपर किस प्रकार खुशियाँ मना सकते है जिसके राज्यमे उन्हें एक आम आदमीको मिलनेवाले साधारण नागरिक अधिकार भी प्राप्त नहीं है । परन्तु यदि वह अजनवी ब्रिटिश संविधानको समझनेका यत्न करे तो फिर इसमें उसे कुछ भी अटपटा नहीं लगेगा। सिद्धान्ततः ब्रिटिश सम्राट् न्यायके क्षेत्र में समानता और पवित्रताके प्रतीक माने जाते हैं। अपनी तमाम प्रजाके साथ समान व्यवहार सम्राट् जॉर्ज का आदर्श है । प्रजाजनोंकी प्रसन्नता ही उनकी प्रसन्नताका आधार है। ब्रिटिश राजनयिक ईमानदारीसे इन आदर्शोंको प्राप्त करनेका यत्न करते रहते है । यह बिलकुल सही है कि इसमें वे प्रायः बुरी तरह असफल होते हैं । परन्तु प्रस्तुत प्रश्नसे इसका कोई सरोकार नहीं है। ब्रिटिश राजतन्त्र राजाके अधिकार सीमित है और वर्तमान परिस्थितिको देखते हुए यह अच्छा भी है। इसलिए जिन्हें ब्रिटिश झण्डेके नीचे रहनेमें सन्तोष है, वे अपनी अन्तरात्माके साथ बगैर किसी प्रकारकी ज्यादती किये इन शक्तिशाली अधि राज्योंके (डोमिनियन्स ) स्वामी ब्रिटिश सम्राट्के प्रति इस समय अपनी वफादारी प्रकट कर सकते हैं -- बल्कि उन्हें करना चाहिए भले ही हमारी तरह वे भी कठोर
नियंग्यताओमे पिसे जा रहे हो। बादशाहके प्रति अपनी वफादारी प्रकट करके तो हम केवल उपर्युक्त आदशंकि प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। हमारी वफादारी यही सूचित करती है कि हम हृदयसे इन आदर्शको प्राप्त करना चाहते है ।
ब्रिटिश सविधानकी खूबीका यही तकाजा है कि सम्राट्का प्रत्येक प्रजाजन किसी भी दूसरे प्रजाजनके समान स्वतन्त्र हो और यदि वह ऐसा नहीं है तो उसका कर्त्तव्य है कि वह इस स्वतन्त्रताकी माँग करे और इस बातका खयाल रखते हुए कि दूसरेको कोई हानि न पहुँचे, उसके लिए लड़े । इस संविधानमें भू-दासत्व और गुलामीके लिए कोई स्थान नहीं है, यद्यपि ये दोनों जोरोंसे प्रचलित हैं। परन्तु इसमें अधिकतर दोष स्वयं उन भूदासों और गुलामोंका है। ब्रिटिश संविधान के अन्दर ही आजादी प्राप्त करनेका एक बहुत अच्छा उपाय सुझाया गया है । परन्तु मानना पडता है कि उसका अमल आसान नहीं है। स्वाधीनताकी राह फूलोंसे भरी नही होती । ब्रिटिश कौम स्वयं इस स्थिति तक • जिसे वह भूलसे स्वतन्त्रता कहती है -- बहुत कष्टों - और मुसीबतोंका सामना करनेके बाद ही पहुँच सकी है। फिर भी वास्तविक स्वतआत्माकी स्वतन्त्रता से तो वे अभी तक अनजान है । परन्तु इससे वंचित रहने के लिए वे अपने संविधानको दोषी नहीं बताते -- और न बता सकते है । इसी - प्रकार हम भी अपनी निर्योग्यताओंके लिए उसे दोष नहीं दे सकते । और हमने तो क्या सच्ची क्या तथाकथित किसी भी प्रकारकी स्वतन्त्रताके लिए कभी अपना खून बहाया ही नही । परन्तु यदि हम ब्रिटिश सविधानकी भावनाको समझ ले तो यद्यपि हम इस उपमहाद्वीपमे निर्योग्यताओंसे पीड़ित हैं और यद्यपि अपनी जन्मभूमिम भी हम सुखसे कोसों दूर हैं -- हमें हृदयसे उद्घोष करना चाहिए - सम्राट् चिरजीवी हों।
[ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, २४-६-१९९१
९३. राज्याभिषेक
बादशाह जॉर्ज पंचमके राज्याभिषेकके अवसरपर उनके पूरे साम्राज्य में उत्सव मनाया गया। उस समय इस देशके भारतीयोंने बधाईके तार भेजकर अपनी राजभक्ति प्रकट की । अब देखते है कि कुछ भारतीय सवाल उठाते हैं कि हम राजभक्ति किसके प्रति और किसलिए करें ? हम उत्सवोंमे किस मुँहसे शामिल हों ? इस देश में हमारे ऊपर तो दुःखका पहाड़ टूट पड़ा है। हमारे अपने प्यारे देश में भी हमारी दशा कुछ खुशियाँ मनाने योग्य नहीं है। बादशाह राज्याभिषेक - उत्सव के लिए भारत जायेंगे, इसमें भी हर्षित होनेकी कोई बात नहीं है। उत्सवमे केवल पानीकी तरह पैसा बहाया जायेगा। इससे भारतकी तो और भी बरबादी होगी। ऐसे विचार उत्पन्न होना स्वाभाविक है । इनको छिपाकर रखना हानिकर है । इसलिए हमारा इन विचारोंको न्यायकी कसौटीपर कस लेना ठीक होगा।
हमारी मान्यता यह है कि जो लोग उपर्युक्त विचार प्रकट करते हैं और वफादार नहीं रह सकते उनको चाहिए कि वे अपनी बेवफादारी प्रकट करें और मैदानमे आये । यदि वे ऐसा नहीं करते है तो उनपर खोटेपन और नामर्दीका । आरोप लगेगा ।
किन्तु हमारा खयाल है कि अपने ऊपर असीम कष्टोंके बावजूद हम बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते हैं । हमे यहाँ जो कष्ट होते है उनके लिए यहाँके अधिकारी और विशेष रूपसे हम स्वयं उत्तरदायी हैं। यदि हम सच्चे बनकर, सच्चे रहकर, अपने आसुरी अंशके प्रति तिरस्कार प्रकट करें और इस प्रकार उसे अपने भीतरसे भगाकर अपने आचरणोंके स्वामी आप ही बन जायें तो हमे किसी भी कष्टका अनुभव नहीं हो । तब हम इस स्थितिम होंगे कि कह सकेगे, "अहा, बादशाह जॉर्ज पंचमके शासनमे हम कितने सुखी है !" अपने भीतर स्थित असुरको बिलकुल निकाल फेंकनेमे हम जितने अशक्त होंगे उतना ही हमे स्थानीय अधिकारियोंके सम्मुख गिड़गिड़ाना होगा और ऐसा करके शायद दुःखके देवताको थोड़ी देरके लिए हम शान्त कर सकेंगे। हम इन दोनों बातोंमें से एक भी न करें तो फिर बादशाह जॉर्जका क्या दोष है ? कोई उत्तरमे कह सकता है कि यह सब बादशाह जॉर्जके नामपर चलता है, इसलिए अच्छे और बुरेका यह यश-अपयश उन्हीको मिलेगा । हम ऊपर जो कुछ लिख चुके है, उससे यह भी रद हो जाता है। ब्रिटिश राजतन्त्र निरंकुश नही है। वह मर्यादाओंसे बँधा हुआ है और ब्रिटिश राजतन्त्रके सिद्धान्तके अनुसार मर्यादाकी आवश्यकता भी है। यदि बादशाह इस मर्यादाको त्याग दे तो वह तख्त से उतार दिया जायेगा ।
फिर, ब्रिटिश संविधानका उद्देश्य यह है कि उसके अन्तर्गत प्रत्येक मनुष्यको समान अधिकार और समान न्याय प्राप्त होना चाहिए। जिसे तदनुसार ये प्राप्त न हों उसे उनकी प्राप्ति के लिए लड़नेकी स्वतन्त्रता है; शर्त केवल यही है कि वह अपने संघर्षसे दूसरोंको हानि न पहुँचाये । इतना ही नहीं कि प्रत्येक ब्रिटिश प्रजाजनको इस प्रकार लड़नेकी स्वतन्त्रता है, बल्कि इस प्रकार लड़ना उसका कर्त्तव्य है। ऐसे संविधान के प्रति और उसके मुख्य अधिकारी बादशाहके प्रति भक्ति प्रकट करना कर्त्तव्य हो जाता है, क्योंकि इस भक्तिका आधार हमारी अपनी मर्दानगी है। गुलामकी भक्ति, भक्ति नहीं कही जायेगी । गुलाम तो चाकरी करता है। उसकी भक्ति लाचारीकी भक्ति हुई । स्वतन्त्र व्यक्तिकी भक्ति उसकी अपनी इच्छासे उद्भूत होती है।
यदि कोई ऐसी शंका करे कि इस दृष्टिसे तो दुष्ट राजा और दुष्ट संविधानके प्रति भी भक्ति रखी जा सकती है, तो यह उचित नहीं होगा। उदाहरणके रूपमे, लड़ाईसे पहलेके बोअर संविधान या उसके प्रधान क्रूगरके प्रति हमारे लिए स्वतन्त्र व्यक्तिकी हैसियतसे भक्ति रखनेकी गुंजाइश ही नहीं थी। क्योंकि उनके संविधानमें
यह कहा गया था, "काले और गोरेके बीच शासन और धर्म सम्बन्धी मामलोंमे समानता नही हो सकती ।" हम ऐसे संविधान के प्रति भक्त नहीं रह सकते या सकते । इस स्थितिमे तो हमें अधिकारी और उसके अधिकारके आधार, दोनोंके विरुद्ध
लड़ना चाहिए । यदि हम न लड़े तो हमारी गिनती मनुष्योंमे न होकर पशुओंम होगी । यदि ब्रिटिश संविधान बदल जाये और उसमे यह सम्मिलित कर लिया जाये कि गोरों और कालोंमें समानता नहीं हो सकती तो हम उस संविधानके प्रति भक्त नहीं रह सकेंगे, अर्थात् तब हमें उसका विरोध करना चाहिए। उस समय भी हम एक निश्चित सीमा तक बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते है। ब्रिटिश संविधानपद्धतिकी यही खूबी है। वह निश्चित सीमा कौन-सी है, यह विचार करनेकी आवश्यकता अभी नहीं है; क्योंकि यह प्रश्न फिलहाल उपस्थित नहीं होता ।
यह स्मरण रखना चाहिए कि ब्रिटेनके लोग स्वयं रक्तकी नदियाँ बहाने के बाद उस वस्तुको प्राप्त कर सके हैं जिसे वे स्वतन्त्रता कहते है । सच्ची स्वतन्त्रता तो उन्हें भी लेनी शेष है । पर हमने तो सच्ची या झूठी किसी भी प्रकारकी स्वतन्त्रताके लिए अपना रक्त नहीं बहाया और कष्ट नहीं सहे । कष्ट सहनेका कुछ आभास ट्रान्सवालके सत्याग्रहियोंको अपनी महान् लड़ाई में मिला है। किन्तु वह तो केवल सिन्धुमें बिन्दुके समान था । जब हम वैसा कष्ट और उससे भी करोड़ों गुना अधिक कष्ट सहनेके लिए तैयार हो जायेंगे, तभी हमें सच्ची स्वतन्त्रता मिल सकेगी । ब्रिटिश संविधान में उसको प्राप्त करनेकी छूट है। ब्रिटिश सिद्धान्त है कि ब्रिटिश बादशाहको ऐसी इच्छा करनी चाहिए कि सबको सच्ची स्वतन्त्रता मिले । और इस सिद्धान्तके अनुसार व्यवहार करनेका - - भले-बुरे तरीकेसे, किन्तु शुद्ध हृदयसे - -- प्रयत्न करनेवाले अंग्रेज मौजूद है। इसलिए कष्टके होते हुए भी हम ब्रिटिश बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते हैं और हमारा रहना उचित है ।
९४. एक सत्याग्रहीका सम्मान'
जब श्री हरिलाल गांधी भारत जाते हुए जंजीबारसे गुजरे तो वहाँ लोगोंने उन्हें पहचान लिया और फिर जंजीबारके भारतीयोंने उनका स्वागत किया। श्री हरिलालने आनाकानी की, परन्तु उनकी एक न चली । उनको श्री वली मुहम्मद नाजर अलीके मकानपर ले जाया गया और वहाँ उनकी बड़ी आवभगत की गई। सम्मानमें जोकुछ कहा गया, उसके उत्तरमें श्री हरिलाल गांधी ने कहा कि ट्रान्सवाल संघर्षने दिखा दिया है कि सत्याग्रह कैसा अचूक उपाय है । यदि अब फिर दगा दिया गया तो सत्याग्रही, चाहे वे संसारके किसी भी भागमें क्यों न हों, लौट पड़ेंगे और संघर्ष में शरीक हो जायेंगे, इत्यादि ।
१. यह लेख स्पष्ट ही हरिलाल गांधी द्वारा गांधीजीको लिखे पत्र में वर्णित घटनाओंपर आधारित है, देखिए " पत्र : हरिलाल गांधीको", पृष्ठ ११३-१४ ।
९५. पोलकका कार्य
श्री पोलकको लन्दन पहुॅचे अभी बहुत अरसा नहीं हुआ है, परन्तु इस बीच उन्होंने भारी काम उठा लिया है। वे कई सज्जनोंसे मिल चुके हैं और उन्होंने "लीग ऑफ ऑनर " की सभा तथा अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाषण दिये है । विलायतकी (द० आ० ब्रि० भा० ) समितिकी ओरसे जो निवेदन उपनिवेश सचिवको भेजा गया था, उसका मसविदा श्री पोलकने ही तैयार किया था। इस निवेदनमें कामकी सभी बातोंका जिक्र है। फीडडॉपके बाड़ोंके प्रश्नका यथोचित निरूपण किया है और स्वर्ण अधिनियमके परिणामकी ओर भी [ सरकारका ] पर्याप्त रूप से ध्यान आकृष्ट किया है । इससे स्पष्ट है कि श्री पोलक जहाँ-कहीं भी बैठे हों, एक ही कार्यमें तल्लीन हो जाते है । उन्हें दक्षिण आफ्रिकाके प्रश्नके अतिरिक्त और कोई प्रश्न सूझता ही नहीं । यह कोई ऐसी-वैसी बात नही है । मनुष्य अपने कर्त्तव्य में लीन हो जानेपर ही उसकी साधना कर सकता है। इस नियमको उन्होंने हृदयंगम कर लिया है और वे उसीके पालनमें तन्मय रहते है। अगर भारत में ऐसे अनेक व्यक्ति पैदा हो जाये तो भारत शीघ्र ही मुक्त हो जाये । श्री पोलक अपने कर्तव्यका पालन करके मानो हम सबको हमारे कर्त्तव्यकी याद दिला रहे है ।
इंडियन ओपिनियन, १-७-१९९१
९६. जोहानिसबर्गकी चिट्ठी
श्री पोलकका पत्र
श्री पोलकके विलायत पहुँचने के पश्चात् हमें उनके दो पत्र मिले हैं । वे लिखते है कि उन्होंने न्यायमूर्ति अमीर अलीसे मुलाकात की है; इंडिया आफिसके श्री गुप्तेसे
१. श्री पोलफ १ मई, १९९१को जोहानिसबर्ग से रवाना हुए थे और उसी महीनेके तीसरे सप्ताह में लन्दन पहुँचे थे ।
२. दक्षिण आफ्रिकावासी भारतीयोंकी स्थितिके सम्बन्ध में ।
३. देखिए परिशिष्ट ८
४. देखिए खण्ड १०, पृष्ठ ११४, पा० टि० १ ।
५. न्यायमूर्ति सैयद अमीर अली (१८४९-१९२८ ) ; सी० आई० ई०, बैरिस्टर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, १८९०-१९०४; सन् १९०९ में प्रीवी कौंसिलकी न्याय-समिति के प्रथम भारतीय सदस्य हुए; दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिके भी सदस्य रहे और अखिल भारतीय मुस्लिम लीगकी लन्दन शाखाके अध्यक्ष थे; स्पिरिट ऑफ इस्लाम तथा मुस्लिम कानूनपर अनेक पुस्तकोंके रचयिता ।
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नहीं रोक सकेगा । परन्तु कमसे कम यह बाईस जूनका एक दिन तो ऐसा हो, जब हम साम्राज्यके आदर्शोपर अमल कर सकें • आगे फिर चाहे जो भी होता रहे । हमें निश्चय है कि नगर परिषदका यह व्यवहार सम्राट के प्रति वफादारीका एक ठोस प्रमाण होगा और जबानी वफादारीकी अपेक्षा सम्राट् जॉर्ज इससे कही अधिक खुश होंगे । पिछले युद्धके समय, मानो किसीने कोई जादू कर दिया हो, इस तरह लड़ाईके मैदानमें सारे भेदभाव अदृश्य हो गये थे । भारतीय डोलीवाहक जिस प्यालेसे पानी पीते, उसी प्याले या डिब्बेसे टॉमी सिपाही भी पानी पीते थे। वे भारतीयोंके साथसाथ एक ही तम्बूमे रहते और जो खाना उनके हिन्दुस्तानी भाई खाते वही आनन्दके साथ वे भी खाते । उनके बीच पूरा सख्य-भाव था । हमें मालूम है कि ऐसे अवसरोंपर युद्धके मैदानमे डटे हजारों भारतीयोंके हृदय किस तरह प्रफुल्लित हो जाते थे । 'पंच' के सम्पादक इन घटनाओंसे इतने प्रसन्न हुए थे कि उन्होंने अपने पत्र में लिखा : ' आखिर हम साम्राज्य - मातके सव हैं पुत्र सुजान । "दो हम यह भी जानते है कि लड़ाई समाप्त होते ही हमारे बीच फिर वही ईर्ष्या-द्वेष फैल गया । परन्तु युद्धके सबक एकदम भूल नही गये थे । जूलू विद्रोहके समय उन्हें फिर दोहराया गया । भारतीय आहत- सहायक दलके थोड़ेसे सैनिक उपनिवेशके नागरिक सिपाहियोंके साथ समानताके स्तरपर मिलने लगे। कैप्टन स्पार्क्स और दूसरे अधिकारियोंने दलकी सेवाओंकी सराहना की और भारतीय पुनः एक बार अनुभव करने लगे कि "आखिर हम साम्राज्य-मातके सब है पुत्र सुजान । " क्या पिछले दो अवसरोंपर हुए इन अनुभवोंको राजतिलकके दिन दोहराना एकदम असम्भव है ? हम दक्षिण आफ्रिकासे इसका जवाब देनेका अनुरोध करते है । नवासी. प्रीतिभोज हॉस्केन समिति के सदस्योंको प्रीतिभोज देनेवालोंको उनकी शानदार सफलतापर हम बधाई देते हैं । हमे इसके सम्बन्ध प्राप्त सभी समाचारोंसे ज्ञात होता है कि पिछले समारोहोंकी भाँति यह समारोह भी बड़ा सफल रहा। स्वागत समिति द्वारा निमन्त्रित यूरोपीय मित्र भी अच्छी संख्या में आये थे । अपने यूरोपीय मित्रों तथा समर्थकोंके सम्मानमें आयोजित यह भोज तो समाजकी ओरसे दी गई एक बहुत ही छोटी वस्तु थी । शुरू-शुरूमें, जब कि हर व्यक्ति सत्याग्रहियोंका मजाक उड़ा रहा था, हमदर्द यूरोपीयोंके लिए हमारा साथ देना बहुत हिम्मत, साहस और त्यागका काम था । हम जानते हैं कि किस तरह व्यंगचित्रकारोंने श्री हॉस्केनको अपने चित्रोंका निशाना बना लिया था । और अपने क्लबों तथा गिरजाघरोंमे हमारे इन मित्रोंको एक. देखिए खण्ड पाँच पृष्ठ तीन सौ अठहत्तर-तिरासी । दो. देखिए दक्षिण आफ्रिके सत्याग्रहका इतिहास, परिच्छेद नौ । तीन. देखिए सामनेका व्यंग्य-चित्र । क्या-क्या सहना पड़ा होगा, उसकी तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते । सच तो यह है कि कभी-कभी इन्हें भी जेल जानेवाले हमारे भाइयोंसे अधिक नहीं, तो कमसेकम उतना ही कष्ट उठाना पड़ा होगा । फिर भी पिछले चार वर्षोमें, जबतक कि हमारी लड़ाई जारी रही, उन्होंने कभी अपना कदम पीछे नहीं हटाया । श्री डोकने एक बार कहा था कि सच्चे साम्राज्यवादी तो युरोपीय समितिके वे सदस्य और सत्याग्रही है जो जबरदस्त विरोधके मुकाबले में भी साम्राज्यके आदर्शोंकी रक्षाके लिए लड़े हैं । हम श्री डोकके कथनसे बिल्कुल सहमत हैं । हमें आशा है कि दक्षिण आफ्रिकामे भारतीयों और यूरोपीयोंके बीच जो सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध कायम हो गये है वे दोनों कौमोंको इसी प्रकार बाँधे रखेंगे, और इसके फलस्वरूप दोनोंमें एक-दूसरेके प्रति आदर और सहिष्णुताकी भावना बढ़ेगी। यदि ऐसा हुआ तो साम्राज्य के दूसरे भागोंके लिए दक्षिण आफ्रिका एक अनुकरणीय उदाहरण बन जायेगा । नब्बे हॉस्केनका चित्र इस अंकमें हम श्री हॉस्केनका चित्र दे रहे हैं। हमें विश्वास है कि हमारे पाठक उसको पसन्द करेंगे । यह चित्र पहले 'स्टार' में छपा था । हम उस पत्रके मालिकोंके सौजन्यसे इस चित्रको प्राप्त कर सके हैं। हम चाहते है कि हमारे पाठक इस चित्रको मढ़वाकर अपने कमरोंमें लगायें । हमने बहुत बार देखा है कि भारतीय अपने कमरों में शराब या तम्बाकूके चित्रमय विज्ञापन मढ़वाकर टाँगते हैं। कभी-कभी बिलकुल अर्थ - शून्य चित्र मह्ज झूठी सजावट के लिए चिपके या टाँगे होते हैं। बहुत बार लोग हमारी परीक्षा हमारे आसपासकी वस्तुओंसे करते हैं । हम आशा करते हैं कि प्रत्येक भारतीय अपने निवासस्थानमें केवल उन्हीं लोगोंके चित्र रखेंगे जिन्होंने हमपर उपकार किया है अथवा जिनके नाम हम स्मरण रखना चाहते है, और जिन दूसरी चीजोंको हम अपने आसपास रखना चाहे उन्हें भी विचारपूर्वक रखेंगे । इक्यानवे. पत्र : गोशून्य कृशून्य गोखलेको यह पत्र आपको एक बहुत बड़े सत्याग्रही श्री सोराबजी शापुरजी अडाजानियाके हाथों मिलेगा। इस स्मरणीय संघर्षके दौरान मुझे जो बहुमूल्य अनुभव प्राप्त हुए हैं, उनमें श्री सोराबजी - जैसे लोगोंका प्राप्त हो जाना सबसे बड़ी चीज है। मुझे विश्वास है कि आप श्री सोराबजीसे मिलकर प्रसन्न होंगे । उनका विचार अगले वर्ष उस समय से पहले ही लौट आनेका है जब जनरल स्मट्स उस विधेयकको पेश करेंगे जिसके बारेमें उन्होंने वचन दे रखा है । गांधीजीके स्वाक्षरोंमें मूल अंग्रेजी प्रति की फोटो-नकलसे । सौजन्य : सवेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी, पूना बानवे. राज्याभिषेक राज्याभिषेक - दिवसपर समस्त दक्षिण आफ्रिकासे हमारे देशभाइयोंने राज-दम्पतिको भक्तिपूर्ण शुभकामनाएँ भेजी हैं। किसी अनजान आदमीको शायद यह अटपटा मालूम हो कि दक्षिण आफ्रिकाके ब्रिटिश भारतीय उस सिंहासनके प्रति क्यों और कैसे अपनी भक्ति प्रकट करते हैं अथवा उस राज दम्पतिके राज्याभिषेकपर किस प्रकार खुशियाँ मना सकते है जिसके राज्यमे उन्हें एक आम आदमीको मिलनेवाले साधारण नागरिक अधिकार भी प्राप्त नहीं है । परन्तु यदि वह अजनवी ब्रिटिश संविधानको समझनेका यत्न करे तो फिर इसमें उसे कुछ भी अटपटा नहीं लगेगा। सिद्धान्ततः ब्रिटिश सम्राट् न्यायके क्षेत्र में समानता और पवित्रताके प्रतीक माने जाते हैं। अपनी तमाम प्रजाके साथ समान व्यवहार सम्राट् जॉर्ज का आदर्श है । प्रजाजनोंकी प्रसन्नता ही उनकी प्रसन्नताका आधार है। ब्रिटिश राजनयिक ईमानदारीसे इन आदर्शोंको प्राप्त करनेका यत्न करते रहते है । यह बिलकुल सही है कि इसमें वे प्रायः बुरी तरह असफल होते हैं । परन्तु प्रस्तुत प्रश्नसे इसका कोई सरोकार नहीं है। ब्रिटिश राजतन्त्र राजाके अधिकार सीमित है और वर्तमान परिस्थितिको देखते हुए यह अच्छा भी है। इसलिए जिन्हें ब्रिटिश झण्डेके नीचे रहनेमें सन्तोष है, वे अपनी अन्तरात्माके साथ बगैर किसी प्रकारकी ज्यादती किये इन शक्तिशाली अधि राज्योंके स्वामी ब्रिटिश सम्राट्के प्रति इस समय अपनी वफादारी प्रकट कर सकते हैं -- बल्कि उन्हें करना चाहिए भले ही हमारी तरह वे भी कठोर नियंग्यताओमे पिसे जा रहे हो। बादशाहके प्रति अपनी वफादारी प्रकट करके तो हम केवल उपर्युक्त आदशंकि प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। हमारी वफादारी यही सूचित करती है कि हम हृदयसे इन आदर्शको प्राप्त करना चाहते है । ब्रिटिश सविधानकी खूबीका यही तकाजा है कि सम्राट्का प्रत्येक प्रजाजन किसी भी दूसरे प्रजाजनके समान स्वतन्त्र हो और यदि वह ऐसा नहीं है तो उसका कर्त्तव्य है कि वह इस स्वतन्त्रताकी माँग करे और इस बातका खयाल रखते हुए कि दूसरेको कोई हानि न पहुँचे, उसके लिए लड़े । इस संविधानमें भू-दासत्व और गुलामीके लिए कोई स्थान नहीं है, यद्यपि ये दोनों जोरोंसे प्रचलित हैं। परन्तु इसमें अधिकतर दोष स्वयं उन भूदासों और गुलामोंका है। ब्रिटिश संविधान के अन्दर ही आजादी प्राप्त करनेका एक बहुत अच्छा उपाय सुझाया गया है । परन्तु मानना पडता है कि उसका अमल आसान नहीं है। स्वाधीनताकी राह फूलोंसे भरी नही होती । ब्रिटिश कौम स्वयं इस स्थिति तक • जिसे वह भूलसे स्वतन्त्रता कहती है -- बहुत कष्टों - और मुसीबतोंका सामना करनेके बाद ही पहुँच सकी है। फिर भी वास्तविक स्वतआत्माकी स्वतन्त्रता से तो वे अभी तक अनजान है । परन्तु इससे वंचित रहने के लिए वे अपने संविधानको दोषी नहीं बताते -- और न बता सकते है । इसी - प्रकार हम भी अपनी निर्योग्यताओंके लिए उसे दोष नहीं दे सकते । और हमने तो क्या सच्ची क्या तथाकथित किसी भी प्रकारकी स्वतन्त्रताके लिए कभी अपना खून बहाया ही नही । परन्तु यदि हम ब्रिटिश सविधानकी भावनाको समझ ले तो यद्यपि हम इस उपमहाद्वीपमे निर्योग्यताओंसे पीड़ित हैं और यद्यपि अपनी जन्मभूमिम भी हम सुखसे कोसों दूर हैं -- हमें हृदयसे उद्घोष करना चाहिए - सम्राट् चिरजीवी हों। [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, चौबीस जून एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे तिरानवे. राज्याभिषेक बादशाह जॉर्ज पंचमके राज्याभिषेकके अवसरपर उनके पूरे साम्राज्य में उत्सव मनाया गया। उस समय इस देशके भारतीयोंने बधाईके तार भेजकर अपनी राजभक्ति प्रकट की । अब देखते है कि कुछ भारतीय सवाल उठाते हैं कि हम राजभक्ति किसके प्रति और किसलिए करें ? हम उत्सवोंमे किस मुँहसे शामिल हों ? इस देश में हमारे ऊपर तो दुःखका पहाड़ टूट पड़ा है। हमारे अपने प्यारे देश में भी हमारी दशा कुछ खुशियाँ मनाने योग्य नहीं है। बादशाह राज्याभिषेक - उत्सव के लिए भारत जायेंगे, इसमें भी हर्षित होनेकी कोई बात नहीं है। उत्सवमे केवल पानीकी तरह पैसा बहाया जायेगा। इससे भारतकी तो और भी बरबादी होगी। ऐसे विचार उत्पन्न होना स्वाभाविक है । इनको छिपाकर रखना हानिकर है । इसलिए हमारा इन विचारोंको न्यायकी कसौटीपर कस लेना ठीक होगा। हमारी मान्यता यह है कि जो लोग उपर्युक्त विचार प्रकट करते हैं और वफादार नहीं रह सकते उनको चाहिए कि वे अपनी बेवफादारी प्रकट करें और मैदानमे आये । यदि वे ऐसा नहीं करते है तो उनपर खोटेपन और नामर्दीका । आरोप लगेगा । किन्तु हमारा खयाल है कि अपने ऊपर असीम कष्टोंके बावजूद हम बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते हैं । हमे यहाँ जो कष्ट होते है उनके लिए यहाँके अधिकारी और विशेष रूपसे हम स्वयं उत्तरदायी हैं। यदि हम सच्चे बनकर, सच्चे रहकर, अपने आसुरी अंशके प्रति तिरस्कार प्रकट करें और इस प्रकार उसे अपने भीतरसे भगाकर अपने आचरणोंके स्वामी आप ही बन जायें तो हमे किसी भी कष्टका अनुभव नहीं हो । तब हम इस स्थितिम होंगे कि कह सकेगे, "अहा, बादशाह जॉर्ज पंचमके शासनमे हम कितने सुखी है !" अपने भीतर स्थित असुरको बिलकुल निकाल फेंकनेमे हम जितने अशक्त होंगे उतना ही हमे स्थानीय अधिकारियोंके सम्मुख गिड़गिड़ाना होगा और ऐसा करके शायद दुःखके देवताको थोड़ी देरके लिए हम शान्त कर सकेंगे। हम इन दोनों बातोंमें से एक भी न करें तो फिर बादशाह जॉर्जका क्या दोष है ? कोई उत्तरमे कह सकता है कि यह सब बादशाह जॉर्जके नामपर चलता है, इसलिए अच्छे और बुरेका यह यश-अपयश उन्हीको मिलेगा । हम ऊपर जो कुछ लिख चुके है, उससे यह भी रद हो जाता है। ब्रिटिश राजतन्त्र निरंकुश नही है। वह मर्यादाओंसे बँधा हुआ है और ब्रिटिश राजतन्त्रके सिद्धान्तके अनुसार मर्यादाकी आवश्यकता भी है। यदि बादशाह इस मर्यादाको त्याग दे तो वह तख्त से उतार दिया जायेगा । फिर, ब्रिटिश संविधानका उद्देश्य यह है कि उसके अन्तर्गत प्रत्येक मनुष्यको समान अधिकार और समान न्याय प्राप्त होना चाहिए। जिसे तदनुसार ये प्राप्त न हों उसे उनकी प्राप्ति के लिए लड़नेकी स्वतन्त्रता है; शर्त केवल यही है कि वह अपने संघर्षसे दूसरोंको हानि न पहुँचाये । इतना ही नहीं कि प्रत्येक ब्रिटिश प्रजाजनको इस प्रकार लड़नेकी स्वतन्त्रता है, बल्कि इस प्रकार लड़ना उसका कर्त्तव्य है। ऐसे संविधान के प्रति और उसके मुख्य अधिकारी बादशाहके प्रति भक्ति प्रकट करना कर्त्तव्य हो जाता है, क्योंकि इस भक्तिका आधार हमारी अपनी मर्दानगी है। गुलामकी भक्ति, भक्ति नहीं कही जायेगी । गुलाम तो चाकरी करता है। उसकी भक्ति लाचारीकी भक्ति हुई । स्वतन्त्र व्यक्तिकी भक्ति उसकी अपनी इच्छासे उद्भूत होती है। यदि कोई ऐसी शंका करे कि इस दृष्टिसे तो दुष्ट राजा और दुष्ट संविधानके प्रति भी भक्ति रखी जा सकती है, तो यह उचित नहीं होगा। उदाहरणके रूपमे, लड़ाईसे पहलेके बोअर संविधान या उसके प्रधान क्रूगरके प्रति हमारे लिए स्वतन्त्र व्यक्तिकी हैसियतसे भक्ति रखनेकी गुंजाइश ही नहीं थी। क्योंकि उनके संविधानमें यह कहा गया था, "काले और गोरेके बीच शासन और धर्म सम्बन्धी मामलोंमे समानता नही हो सकती ।" हम ऐसे संविधान के प्रति भक्त नहीं रह सकते या सकते । इस स्थितिमे तो हमें अधिकारी और उसके अधिकारके आधार, दोनोंके विरुद्ध लड़ना चाहिए । यदि हम न लड़े तो हमारी गिनती मनुष्योंमे न होकर पशुओंम होगी । यदि ब्रिटिश संविधान बदल जाये और उसमे यह सम्मिलित कर लिया जाये कि गोरों और कालोंमें समानता नहीं हो सकती तो हम उस संविधानके प्रति भक्त नहीं रह सकेंगे, अर्थात् तब हमें उसका विरोध करना चाहिए। उस समय भी हम एक निश्चित सीमा तक बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते है। ब्रिटिश संविधानपद्धतिकी यही खूबी है। वह निश्चित सीमा कौन-सी है, यह विचार करनेकी आवश्यकता अभी नहीं है; क्योंकि यह प्रश्न फिलहाल उपस्थित नहीं होता । यह स्मरण रखना चाहिए कि ब्रिटेनके लोग स्वयं रक्तकी नदियाँ बहाने के बाद उस वस्तुको प्राप्त कर सके हैं जिसे वे स्वतन्त्रता कहते है । सच्ची स्वतन्त्रता तो उन्हें भी लेनी शेष है । पर हमने तो सच्ची या झूठी किसी भी प्रकारकी स्वतन्त्रताके लिए अपना रक्त नहीं बहाया और कष्ट नहीं सहे । कष्ट सहनेका कुछ आभास ट्रान्सवालके सत्याग्रहियोंको अपनी महान् लड़ाई में मिला है। किन्तु वह तो केवल सिन्धुमें बिन्दुके समान था । जब हम वैसा कष्ट और उससे भी करोड़ों गुना अधिक कष्ट सहनेके लिए तैयार हो जायेंगे, तभी हमें सच्ची स्वतन्त्रता मिल सकेगी । ब्रिटिश संविधान में उसको प्राप्त करनेकी छूट है। ब्रिटिश सिद्धान्त है कि ब्रिटिश बादशाहको ऐसी इच्छा करनी चाहिए कि सबको सच्ची स्वतन्त्रता मिले । और इस सिद्धान्तके अनुसार व्यवहार करनेका - - भले-बुरे तरीकेसे, किन्तु शुद्ध हृदयसे - -- प्रयत्न करनेवाले अंग्रेज मौजूद है। इसलिए कष्टके होते हुए भी हम ब्रिटिश बादशाहके प्रति राजभक्त रह सकते हैं और हमारा रहना उचित है । चौरानवे. एक सत्याग्रहीका सम्मान' जब श्री हरिलाल गांधी भारत जाते हुए जंजीबारसे गुजरे तो वहाँ लोगोंने उन्हें पहचान लिया और फिर जंजीबारके भारतीयोंने उनका स्वागत किया। श्री हरिलालने आनाकानी की, परन्तु उनकी एक न चली । उनको श्री वली मुहम्मद नाजर अलीके मकानपर ले जाया गया और वहाँ उनकी बड़ी आवभगत की गई। सम्मानमें जोकुछ कहा गया, उसके उत्तरमें श्री हरिलाल गांधी ने कहा कि ट्रान्सवाल संघर्षने दिखा दिया है कि सत्याग्रह कैसा अचूक उपाय है । यदि अब फिर दगा दिया गया तो सत्याग्रही, चाहे वे संसारके किसी भी भागमें क्यों न हों, लौट पड़ेंगे और संघर्ष में शरीक हो जायेंगे, इत्यादि । एक. यह लेख स्पष्ट ही हरिलाल गांधी द्वारा गांधीजीको लिखे पत्र में वर्णित घटनाओंपर आधारित है, देखिए " पत्र : हरिलाल गांधीको", पृष्ठ एक सौ तेरह-चौदह । पचानवे. पोलकका कार्य श्री पोलकको लन्दन पहुॅचे अभी बहुत अरसा नहीं हुआ है, परन्तु इस बीच उन्होंने भारी काम उठा लिया है। वे कई सज्जनोंसे मिल चुके हैं और उन्होंने "लीग ऑफ ऑनर " की सभा तथा अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाषण दिये है । विलायतकी समितिकी ओरसे जो निवेदन उपनिवेश सचिवको भेजा गया था, उसका मसविदा श्री पोलकने ही तैयार किया था। इस निवेदनमें कामकी सभी बातोंका जिक्र है। फीडडॉपके बाड़ोंके प्रश्नका यथोचित निरूपण किया है और स्वर्ण अधिनियमके परिणामकी ओर भी [ सरकारका ] पर्याप्त रूप से ध्यान आकृष्ट किया है । इससे स्पष्ट है कि श्री पोलक जहाँ-कहीं भी बैठे हों, एक ही कार्यमें तल्लीन हो जाते है । उन्हें दक्षिण आफ्रिकाके प्रश्नके अतिरिक्त और कोई प्रश्न सूझता ही नहीं । यह कोई ऐसी-वैसी बात नही है । मनुष्य अपने कर्त्तव्य में लीन हो जानेपर ही उसकी साधना कर सकता है। इस नियमको उन्होंने हृदयंगम कर लिया है और वे उसीके पालनमें तन्मय रहते है। अगर भारत में ऐसे अनेक व्यक्ति पैदा हो जाये तो भारत शीघ्र ही मुक्त हो जाये । श्री पोलक अपने कर्तव्यका पालन करके मानो हम सबको हमारे कर्त्तव्यकी याद दिला रहे है । इंडियन ओपिनियन, एक जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे छियानवे. जोहानिसबर्गकी चिट्ठी श्री पोलकका पत्र श्री पोलकके विलायत पहुँचने के पश्चात् हमें उनके दो पत्र मिले हैं । वे लिखते है कि उन्होंने न्यायमूर्ति अमीर अलीसे मुलाकात की है; इंडिया आफिसके श्री गुप्तेसे एक. श्री पोलफ एक मई, एक हज़ार नौ सौ इक्यानवेको जोहानिसबर्ग से रवाना हुए थे और उसी महीनेके तीसरे सप्ताह में लन्दन पहुँचे थे । दो. दक्षिण आफ्रिकावासी भारतीयोंकी स्थितिके सम्बन्ध में । तीन. देखिए परिशिष्ट आठ चार. देखिए खण्ड दस, पृष्ठ एक सौ चौदह, पाशून्य टिशून्य एक । पाँच. न्यायमूर्ति सैयद अमीर अली ; सीशून्य आईशून्य ईशून्य, बैरिस्टर, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, एक हज़ार आठ सौ नब्बे-एक हज़ार नौ सौ चार; सन् एक हज़ार नौ सौ नौ में प्रीवी कौंसिलकी न्याय-समिति के प्रथम भारतीय सदस्य हुए; दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समितिके भी सदस्य रहे और अखिल भारतीय मुस्लिम लीगकी लन्दन शाखाके अध्यक्ष थे; स्पिरिट ऑफ इस्लाम तथा मुस्लिम कानूनपर अनेक पुस्तकोंके रचयिता ।
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रांचीः आधुनिक युग में मंत्रियों और अधिकारियो को सूचना और प्रौद्योगिकी के नए साधनों से जोड़ने के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों को हाई कंफीग्रेशन वाला मोबाइल देने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले पर वित्त विभाग ने भी हरी झंडी दे दी है। बता दें कि सरकार के इस फैसले पर मंत्रिमंडल की पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मंत्रियों और उप मंत्रियों को अब राज्य सरकार की ओर से 40 हजार रुपए तक का मोबाइल फोन दिया जाएगा। वहीं, प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को जैसे मुख्य सचिव, आईजी, आयुक्त, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त, क्षेत्रीय महानिरीक्षककों को भी 40 हजार रुपए तक का मोबाइल दिया जाएगा।
वहीं, सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि इस मोबाइल के लिए प्रतिमाह मंत्रियों और बड़े अधिकारियों को रिचार्ज के लिए 3000 रुपए भी दिए जाएंगे। जबकि अधिसूचना के अनुसार विशेष सचिव स्तर के अधिकारी 35 हजार रुपए तक का मोबाइल फोन ले सकेंगे। वे 2 हजार रुपए तक रिचार्ज कूपन पर खर्च कर सकेंगे। उप सचिव, उप निदेशक और वरीय प्रधान आप्त सचिव को 25 हजार रुपए तक मोबाइल फोन मिलेगा और 500 रुपए प्रतिमाह रिचार्ज के लिए मिलेंगे।
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रांचीः आधुनिक युग में मंत्रियों और अधिकारियो को सूचना और प्रौद्योगिकी के नए साधनों से जोड़ने के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों को हाई कंफीग्रेशन वाला मोबाइल देने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले पर वित्त विभाग ने भी हरी झंडी दे दी है। बता दें कि सरकार के इस फैसले पर मंत्रिमंडल की पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मंत्रियों और उप मंत्रियों को अब राज्य सरकार की ओर से चालीस हजार रुपए तक का मोबाइल फोन दिया जाएगा। वहीं, प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को जैसे मुख्य सचिव, आईजी, आयुक्त, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त, क्षेत्रीय महानिरीक्षककों को भी चालीस हजार रुपए तक का मोबाइल दिया जाएगा। वहीं, सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि इस मोबाइल के लिए प्रतिमाह मंत्रियों और बड़े अधिकारियों को रिचार्ज के लिए तीन हज़ार रुपयापए भी दिए जाएंगे। जबकि अधिसूचना के अनुसार विशेष सचिव स्तर के अधिकारी पैंतीस हजार रुपए तक का मोबाइल फोन ले सकेंगे। वे दो हजार रुपए तक रिचार्ज कूपन पर खर्च कर सकेंगे। उप सचिव, उप निदेशक और वरीय प्रधान आप्त सचिव को पच्चीस हजार रुपए तक मोबाइल फोन मिलेगा और पाँच सौ रुपयापए प्रतिमाह रिचार्ज के लिए मिलेंगे।
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चच्चे पैदा हुए जो सब के सब स्त्री जाति के थे। दूसरी बार फिर इसी जोड़े से ग्यारह बच्चे पैदा हुए, वे भी सय नारी-जाति के थे.. इसके बाद मैं ने कुत्तों पर प्रयोग किया। दो कुत्तों के दाहिने - कोप ना० २ सितम्बर सन् १७८६ को काटे गए। इन कुत्तों को एक-एक कुतिया के साथ कमरों में अलग-अलग बन्द किया गया । बड़ी देखरेख की गई। तारीख ८ जनवरी सन् १७८७ को एक कुतिया ने ध्याठ बच्चे दिए, जो सब फीमय कुतियाएँ ही थी. कुमे नहीं थे। फिर सरगोशों को पाला और उन पर प्रयोग किया। सीन खरगोशों के दाहिने अण्डकोष काटकर मादा खरगोशों के साथ एक मकान में रक्या । प्रत्येक जोड़े से हर पाँचवें छठे समाह बच्चे पैदा होने लगे। ये बच्चे सपर्क सप स्त्री जाति के थे। अब नारी जाति पर प्रयोग करने की मेरी अपल इच्छा हुई, लेकिन यह कार्य सरा कठिन था; क्योंकि नारी जाति के अडफोप गर्भाशय में होते हैं। अन्य में पेट धीर पर
को काटा गया। बहुत से प्राणी मर गए किन्तु अन्त में दो कुतियाएँ जीवित रहीं। ७ अगल मन १७८८ को इनका पेट धीर कर अदको काटा गया । १६ अगस्त सन १७८८ को इनसे कुत्तों को मिलाया गया। १८ फरवरी
बच्चे पैदा हुए, जो सप नारी जाति के थे। इस प्रकार में अपने सिद्धान्त को सिद्ध करने में पूर्णतया कृतकाय हुआ ।
श्रीमद्भागरत में लिखा है-१३, १४,
१५, १६ रात्रि में छोड़ देना चाहिएः
गर्भ गए तो सकता है। परन्तु
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चच्चे पैदा हुए जो सब के सब स्त्री जाति के थे। दूसरी बार फिर इसी जोड़े से ग्यारह बच्चे पैदा हुए, वे भी सय नारी-जाति के थे.. इसके बाद मैं ने कुत्तों पर प्रयोग किया। दो कुत्तों के दाहिने - कोप नाशून्य दो सितम्बर सन् एक हज़ार सात सौ छियासी को काटे गए। इन कुत्तों को एक-एक कुतिया के साथ कमरों में अलग-अलग बन्द किया गया । बड़ी देखरेख की गई। तारीख आठ जनवरी सन् एक हज़ार सात सौ सत्तासी को एक कुतिया ने ध्याठ बच्चे दिए, जो सब फीमय कुतियाएँ ही थी. कुमे नहीं थे। फिर सरगोशों को पाला और उन पर प्रयोग किया। सीन खरगोशों के दाहिने अण्डकोष काटकर मादा खरगोशों के साथ एक मकान में रक्या । प्रत्येक जोड़े से हर पाँचवें छठे समाह बच्चे पैदा होने लगे। ये बच्चे सपर्क सप स्त्री जाति के थे। अब नारी जाति पर प्रयोग करने की मेरी अपल इच्छा हुई, लेकिन यह कार्य सरा कठिन था; क्योंकि नारी जाति के अडफोप गर्भाशय में होते हैं। अन्य में पेट धीर पर को काटा गया। बहुत से प्राणी मर गए किन्तु अन्त में दो कुतियाएँ जीवित रहीं। सात अगल मन एक हज़ार सात सौ अठासी को इनका पेट धीर कर अदको काटा गया । सोलह अगस्त सन एक हज़ार सात सौ अठासी को इनसे कुत्तों को मिलाया गया। अट्ठारह फरवरी बच्चे पैदा हुए, जो सप नारी जाति के थे। इस प्रकार में अपने सिद्धान्त को सिद्ध करने में पूर्णतया कृतकाय हुआ । श्रीमद्भागरत में लिखा है-तेरह, चौदह, पंद्रह, सोलह रात्रि में छोड़ देना चाहिएः गर्भ गए तो सकता है। परन्तु
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वाले घोंघे, झींगुर आदि जन्तुओं का विकास हुआ। फिर इनसे जल और स्थल दोनों जगह रहने वाले मेडक, मछली, छिपकली, तथा फिर कई लाखों सालों में सांप, गोह, मगरमच्छ आदि बने । इन से पीछे हाथी, घोड़े, और लंगूर आदि की सृष्टि हुई। लंगूर से बन्दर, बन्दर से बनमानुस और सब से अन्त में मनुष्य की सृष्टि हुई ।
मनुष्य की सृष्टि सब से अन्त में हुई । आज की अपेक्षा पहले जीवों के शरीर की रचना सरल थी और उनके अंग थोड़े थे तथा मस्तिष्क का तो नाम भी न था । पीछे से विकास होते होते जीवों के अंग बन गए और मस्तिष्क भी बढ़ता गया और अन्तिम जीव मनुष्य की रचना सब से पेचीदी और पूर्ण है उसका दिमाग भी अन्य जीवों की अपेक्षा बहुत अधिक विकसित हो चुका है।
ऊपर दिए हुए विकास के क्रम को बुद्धि एक दम नहीं मानती। परन्तु यदि हम प्रकृति के ढंग का सूक्ष्मता से अवलोकन करें तो इस के न मानने का कोई कारण नहीं रह जाता। आइए, ज़रा हम अपनी गाड़ियों की रचना का इतिहास देखें । सब से पहले बिना पहिए की गाड़ी की रचना मनुष्य ने की। अंग्रेजी में एक कहावत है कि
ही आविष्कार की जननी है। पहली गाड़ी तेज़ नहीं चल सकती थी और उसे खींचने मे बल भी बहुत लगता था । इस लिए गाड़ी में पहिए लगाए गए। उसके बाद पहिए पर स्प्रिंग और ग्रीज़ तथा बैठने के लिए गद्दे और छत लग गई। परन्तु यह गाड़ियाँ भी धीमी साबित हुई, इस लिए अपने आप ही रेल गाड़ी, मोटर का विकास हुआ। पानी में चलने के लिए स्टीमर और हवा में उड़ने के लिए हवाई जहाज़ तथा पहाड़ों जैसी ऊबड़ खाबड़ जगहों पर चलने के लिये टैंक बने ।
पहले वाहनों की अपेक्षा पिछले वाहन अधिक पंची और उपयोगी तथा पूर्ण बनते गए। गाड़ियों मे जो विकास हुए हैं, उनमें दो बातें मुख्य थीं । एक तो वे अधिक-अधिक पूर्ण अर्थात् उपयोगी बनते गए और दूसरा परिस्थितियों के अनुसार उनके अंगों में भेद होता गया अर्थात् जल स्थल, व श्राकाश मे जाने वाले वाहनों के अंगों का विकास अलग अलग ढंग से हुआ। आज भी बर्फ पर चलने वाली गाड़ी के पहिए नहीं है।
ठीक यही बात वैज्ञानिकों के मतानुसार प्राणियों के विकास में हुई। भिन्न भिन्न प्राणियों को जिन जिन परिस्थितियों में रहना पड़ा । उसो प्रकार उन के अंग विकसित होते गए। जल मे रहने वाले प्राणियों के पर और पूँछ, स्थलवासियों की टागे और आकाश में उड़ने वाले पक्षियों के पंखों का विकास हुआ । परिस्थितियों के अनुसार जिस अंग की आवश्यकता हुई, वह निकल आया और व्यर्थ अंग नष्ट होते गए ।
विकासवाद के जन्मदाता डार्विन है । हम पहले कह चुके हैं कि पानी के प्रवाह से चट्टाने टूट कर मिट्टी बनती गई और नीचे स्थानों मे भरती गई। एक के ऊपर दूसरी मिट्टी के तहे वनती गई । इन तहों मे खोदने पर पिछले जमाने के प्राणियों के अस्थि-पंजर मिलते हैं। नीचे की तहों मे पहले जीवों के अस्थिपंजर मिलते हैं और ऊपर की तहों से क्रमशः विकास पाए हुए जीवों की उत्पत्ति के प्रमाण मिलते हैं, यह पंजर हमारे लिए सृष्टि के इतिहास के पृष्ठ है तथा डार्विन के विकासवाद के मूर्त प्रमाण हैं ।
( १ ) विभिन्न जातियाँ.
पहले कभी संसार में एक ही मानव जाति रही होगी, लेकिन विभिन्न प्रदेशों में बस जाने के कारण बहुत समय बाद वह भिन्न भिन्न जातियों में बट गई । इस समय संसार के मनुष्य निम्न जातियों में बँटे हुए हैं।
हबशी - - ये लोग रेगिस्तान के दक्षिण मे अफ्रीका महाद्वीप में बसे हुए हैं। हबशी जाति के लोग मलय प्रायद्वीप, फिलीपाइन प्रायद्वीप, न्यूगिनी और आस्ट्रेलिया में पहुँच गए। जिन दिनों मे योरुप के लोगों ने गुलामों को बेचने का पेशा बना रखा था, उन दिनों में अफ्रीका के बहुत से लोग पकड़ लिए गए और नई दुनियाँ में बेच दिये गये । इस तरह लगभग तीन करोड़ हबशी लोग उत्तरी अमरीका के गरम भागों में बसे हुए हैं।
इस जाति के लोगों का सिर लम्बा होता है। उनकी नाक चपटी और चौड़ी होती है। उनके होंठ मोटे और मुड़े हुए होते है। उनकी आँखे बड़ी होती हैं। उनके बाल छोटे काले और ऊन के समान घूंघर दार होते हैं। उनका क़द लम्बा और गठीला होता है। रंग प्रायः काला होता है।
मंगोलियन या पीली इस जाति के लोगों का निवासस्थान 'हिमालय के उत्तर मे हैं। यहाँ से वे हिन्दु चीन (इण्डोचाइना) चीन, जापान, मलय प्रायद्वीप, तुर्किस्तान आदि में फैल गये। उनका. सिर छोटा और नाक बैठी हुई होती है। उनके होंठ पतले और आँखें तिरछी होती हैं। कहा जाता है कि इस्किमो और अमरीका के मूल
निवासी तुर्क और हँगरी के मेगायर लोग भी इसी जाति के हैं। रंग के अनुसार अमरीका के मूल निवासी लाल जाति मे गिने जाते हैं। लाल जाति के लोग प्रायः पीले होते हैं !
काकेशियन लोग - -गोरे होते हैं। ठंठ गोरं लोग रूप में बसे हुए हैं। पर ऐशिया के लोग काकेशियन जाति के होते हुए भी भूरे या गेहुए रंग वालों में गिने जाते हैं ।
इन वडी वडी जातियों की अनेक उपजातियाँ है । धर्मों के अनुसार योरुप और अमरीका के अधिकांश लोग ईसाई, पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के लोग मुसलमान, दक्षिणी पूर्वी एशिया के लोग बौद्ध, भारतवर्ष के हिन्दू है ।
अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि संसार के बहुत से भागा के लोग प्रकृति के उपासक हैं।
दूसरा अध्याय भौगोलिक परिचय
पांच महासागर
हम पिछले अध्याय में पढ़ आये हैं कि इस विशाल पृथ्वी और मानव प्राणी का जन्म कैसे हुआ । पृथ्वी के इस स्थूल रूप से आने के बाद भी उसमें समय समय पर परिवर्तन होते रहे । भूमि के अन्नवर्ती ज्वालामुखी, भूकम्प और पानी का बहाव आदि के कारण पृथ्वी मे भारी परिवर्तन हुए। जहाँ जल था, वहाँ बड़े बड़े विशालकाय पर्वत वन गये और जहाँ पहले बड़े बड़े पहाड़ थे, यहाँ व सागर हिलोरें मार रहा है। हिमालय, ऐल्पस आदि पहाड़ भी किसी समय समुद्र थे । संपूर्ण भारत और यूरोप का भारी भाग भी जल मग्न था । लाखों करोड़ों सालों के परिवर्तनों के बाद का यह
बना है और यह नहीं कहा जा सकता कि लाखों साल बाद क्या रूप होगा । आज कल समस्त भूमण्डल का नेत्रफल प्रायः १९ करोड़ २० लाख वर्ग मील है । इसमें स्थल भाग सिर्फ ५, ७०,००,००० वर्ग मील है, शेष विशाल भाग जल है। इस प्रकार पृथ्वी में ७१ फ़ीलही जल और २६ फ़ोसड़ी स्थल है। स्थल का सबसे बड़ा भाग उत्तरी गोलाई में है, पर ४० अक्षांश के दक्षिा में न्यूजीलैट टसमेनिया, तथा अन्य छोटे छोटे द्वीप और टिका प्रदेश को छोड़कर
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वाले घोंघे, झींगुर आदि जन्तुओं का विकास हुआ। फिर इनसे जल और स्थल दोनों जगह रहने वाले मेडक, मछली, छिपकली, तथा फिर कई लाखों सालों में सांप, गोह, मगरमच्छ आदि बने । इन से पीछे हाथी, घोड़े, और लंगूर आदि की सृष्टि हुई। लंगूर से बन्दर, बन्दर से बनमानुस और सब से अन्त में मनुष्य की सृष्टि हुई । मनुष्य की सृष्टि सब से अन्त में हुई । आज की अपेक्षा पहले जीवों के शरीर की रचना सरल थी और उनके अंग थोड़े थे तथा मस्तिष्क का तो नाम भी न था । पीछे से विकास होते होते जीवों के अंग बन गए और मस्तिष्क भी बढ़ता गया और अन्तिम जीव मनुष्य की रचना सब से पेचीदी और पूर्ण है उसका दिमाग भी अन्य जीवों की अपेक्षा बहुत अधिक विकसित हो चुका है। ऊपर दिए हुए विकास के क्रम को बुद्धि एक दम नहीं मानती। परन्तु यदि हम प्रकृति के ढंग का सूक्ष्मता से अवलोकन करें तो इस के न मानने का कोई कारण नहीं रह जाता। आइए, ज़रा हम अपनी गाड़ियों की रचना का इतिहास देखें । सब से पहले बिना पहिए की गाड़ी की रचना मनुष्य ने की। अंग्रेजी में एक कहावत है कि ही आविष्कार की जननी है। पहली गाड़ी तेज़ नहीं चल सकती थी और उसे खींचने मे बल भी बहुत लगता था । इस लिए गाड़ी में पहिए लगाए गए। उसके बाद पहिए पर स्प्रिंग और ग्रीज़ तथा बैठने के लिए गद्दे और छत लग गई। परन्तु यह गाड़ियाँ भी धीमी साबित हुई, इस लिए अपने आप ही रेल गाड़ी, मोटर का विकास हुआ। पानी में चलने के लिए स्टीमर और हवा में उड़ने के लिए हवाई जहाज़ तथा पहाड़ों जैसी ऊबड़ खाबड़ जगहों पर चलने के लिये टैंक बने । पहले वाहनों की अपेक्षा पिछले वाहन अधिक पंची और उपयोगी तथा पूर्ण बनते गए। गाड़ियों मे जो विकास हुए हैं, उनमें दो बातें मुख्य थीं । एक तो वे अधिक-अधिक पूर्ण अर्थात् उपयोगी बनते गए और दूसरा परिस्थितियों के अनुसार उनके अंगों में भेद होता गया अर्थात् जल स्थल, व श्राकाश मे जाने वाले वाहनों के अंगों का विकास अलग अलग ढंग से हुआ। आज भी बर्फ पर चलने वाली गाड़ी के पहिए नहीं है। ठीक यही बात वैज्ञानिकों के मतानुसार प्राणियों के विकास में हुई। भिन्न भिन्न प्राणियों को जिन जिन परिस्थितियों में रहना पड़ा । उसो प्रकार उन के अंग विकसित होते गए। जल मे रहने वाले प्राणियों के पर और पूँछ, स्थलवासियों की टागे और आकाश में उड़ने वाले पक्षियों के पंखों का विकास हुआ । परिस्थितियों के अनुसार जिस अंग की आवश्यकता हुई, वह निकल आया और व्यर्थ अंग नष्ट होते गए । विकासवाद के जन्मदाता डार्विन है । हम पहले कह चुके हैं कि पानी के प्रवाह से चट्टाने टूट कर मिट्टी बनती गई और नीचे स्थानों मे भरती गई। एक के ऊपर दूसरी मिट्टी के तहे वनती गई । इन तहों मे खोदने पर पिछले जमाने के प्राणियों के अस्थि-पंजर मिलते हैं। नीचे की तहों मे पहले जीवों के अस्थिपंजर मिलते हैं और ऊपर की तहों से क्रमशः विकास पाए हुए जीवों की उत्पत्ति के प्रमाण मिलते हैं, यह पंजर हमारे लिए सृष्टि के इतिहास के पृष्ठ है तथा डार्विन के विकासवाद के मूर्त प्रमाण हैं । विभिन्न जातियाँ. पहले कभी संसार में एक ही मानव जाति रही होगी, लेकिन विभिन्न प्रदेशों में बस जाने के कारण बहुत समय बाद वह भिन्न भिन्न जातियों में बट गई । इस समय संसार के मनुष्य निम्न जातियों में बँटे हुए हैं। हबशी - - ये लोग रेगिस्तान के दक्षिण मे अफ्रीका महाद्वीप में बसे हुए हैं। हबशी जाति के लोग मलय प्रायद्वीप, फिलीपाइन प्रायद्वीप, न्यूगिनी और आस्ट्रेलिया में पहुँच गए। जिन दिनों मे योरुप के लोगों ने गुलामों को बेचने का पेशा बना रखा था, उन दिनों में अफ्रीका के बहुत से लोग पकड़ लिए गए और नई दुनियाँ में बेच दिये गये । इस तरह लगभग तीन करोड़ हबशी लोग उत्तरी अमरीका के गरम भागों में बसे हुए हैं। इस जाति के लोगों का सिर लम्बा होता है। उनकी नाक चपटी और चौड़ी होती है। उनके होंठ मोटे और मुड़े हुए होते है। उनकी आँखे बड़ी होती हैं। उनके बाल छोटे काले और ऊन के समान घूंघर दार होते हैं। उनका क़द लम्बा और गठीला होता है। रंग प्रायः काला होता है। मंगोलियन या पीली इस जाति के लोगों का निवासस्थान 'हिमालय के उत्तर मे हैं। यहाँ से वे हिन्दु चीन चीन, जापान, मलय प्रायद्वीप, तुर्किस्तान आदि में फैल गये। उनका. सिर छोटा और नाक बैठी हुई होती है। उनके होंठ पतले और आँखें तिरछी होती हैं। कहा जाता है कि इस्किमो और अमरीका के मूल निवासी तुर्क और हँगरी के मेगायर लोग भी इसी जाति के हैं। रंग के अनुसार अमरीका के मूल निवासी लाल जाति मे गिने जाते हैं। लाल जाति के लोग प्रायः पीले होते हैं ! काकेशियन लोग - -गोरे होते हैं। ठंठ गोरं लोग रूप में बसे हुए हैं। पर ऐशिया के लोग काकेशियन जाति के होते हुए भी भूरे या गेहुए रंग वालों में गिने जाते हैं । इन वडी वडी जातियों की अनेक उपजातियाँ है । धर्मों के अनुसार योरुप और अमरीका के अधिकांश लोग ईसाई, पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के लोग मुसलमान, दक्षिणी पूर्वी एशिया के लोग बौद्ध, भारतवर्ष के हिन्दू है । अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि संसार के बहुत से भागा के लोग प्रकृति के उपासक हैं। दूसरा अध्याय भौगोलिक परिचय पांच महासागर हम पिछले अध्याय में पढ़ आये हैं कि इस विशाल पृथ्वी और मानव प्राणी का जन्म कैसे हुआ । पृथ्वी के इस स्थूल रूप से आने के बाद भी उसमें समय समय पर परिवर्तन होते रहे । भूमि के अन्नवर्ती ज्वालामुखी, भूकम्प और पानी का बहाव आदि के कारण पृथ्वी मे भारी परिवर्तन हुए। जहाँ जल था, वहाँ बड़े बड़े विशालकाय पर्वत वन गये और जहाँ पहले बड़े बड़े पहाड़ थे, यहाँ व सागर हिलोरें मार रहा है। हिमालय, ऐल्पस आदि पहाड़ भी किसी समय समुद्र थे । संपूर्ण भारत और यूरोप का भारी भाग भी जल मग्न था । लाखों करोड़ों सालों के परिवर्तनों के बाद का यह बना है और यह नहीं कहा जा सकता कि लाखों साल बाद क्या रूप होगा । आज कल समस्त भूमण्डल का नेत्रफल प्रायः उन्नीस करोड़ बीस लाख वर्ग मील है । इसमें स्थल भाग सिर्फ पाँच, सत्तर,शून्य,शून्य वर्ग मील है, शेष विशाल भाग जल है। इस प्रकार पृथ्वी में इकहत्तर फ़ीलही जल और छब्बीस फ़ोसड़ी स्थल है। स्थल का सबसे बड़ा भाग उत्तरी गोलाई में है, पर चालीस अक्षांश के दक्षिा में न्यूजीलैट टसमेनिया, तथा अन्य छोटे छोटे द्वीप और टिका प्रदेश को छोड़कर
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Manish Dubey : पुलिस नाम की व्यवस्था का ऐसा 'रैकेट' सुनने वालों के कानों में किलोल जरूर करता होगा. और, यदि नहीं करता तो आप निष्ठुर निष्क्रिय हैं. आज कोई और है, कल निश्चित आप ही होंगे.
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वर्दी में गुंडई (10) : जेल जाने पर पता चला- थाने में होता है चालीस हजार रुपये में धारा 376 हटाने का खेल!
वर्दी में गुंडई (9) : यांत्रिक ढंग से विवेचना के कारण सोशल एक्टिविस्ट को लंबे समय तक रहना पड़ा जेल में!
वर्दी में गुंडई (8) : RTI एक्टिविस्ट का खुलासा- एक नया फर्जी केस लगाकर मुझे दुबारा जेल भेजने की तैयारी थी!
वर्दी में गुंडई (6) : रैकेटबाज थानेदार मेरी पत्नी को देखकर चिल्लाया- 'इस भोसड़ी को बाहर निकालो! ' (सुनें टेप)
Yashwant Singh : दल्ले थानेदार के खिलाफ 4पीएम अखबार में लगातार दूसरे दिन भी खबर हुई प्रकाशित. सुपारी लेकर पहले छेड़छाड़ का फर्जी मुकदमा लिखता है. बाद में छेड़छाड़ को रेप में तब्दील कर देता है.
ये भाजपा जिलाध्यक्ष तो किशोर से कुकर्म का प्रयास करने वाले अपराधियों को बचाने में जुट गया! (देखें वीडियो)
बलिया में नाबालिग छात्र को अगवाकर दुष्कर्म करने की कोशिश के मामले में पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोपियों से समझौता करने के लिये दबाव डाला है. पीड़ित बच्चे के चाचा ने भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद शंकर दूबे पर आरोपियों से भाजपा कार्यालय में दबाव डालकर सुलह करवाने का आरोप लगा दिया. . पीड़ित के चाचा का आरोप है कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने भाजपा कार्यालय में बुलाकर आरोपियों से सुलह करने का दबाव बनाते हुए कहा कि सुलह कर लो नहीं तो कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, सरकार मेरी है. .
बलिया में डकैतों से खूब लड़ीं ये बहादुर महिलएं, पुलिस साबित हुई नपुंसक (देखें वीडियो)
यूपी में जंगलराज का सच सब जानते हैं लेकिन प्रदेश सरकार सब जान कर भी कान में तेल डाले बैठी है. भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यूपी पुलिस के अंदर की जांबाजी और बहादुरी गायब हो चुकी है. सबकी नजर सिर्फ वसूली और लेन-देन, गेटिंग-सेटिंग पर है. यही कारण है चोरों से लेकर बलात्कारी, डकैत, हत्यारे सरेआम वारदात कर रहे हैं और पुलिस नपुंसक बनी बैठी रहती है. अपराधियों के बुलंद हौसले और पस्त पुलिस का सीन बलिया में देखने को मिला.
बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने किया हमला (देखें वीडियो)
बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने हमला कर दिया. बेल्थरा रोड तहसील के वकीलों का एसडीएम पर आरोप है कि एसडीएम साहब बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते. वकीलों का आरोप यह भी था कि हर केस पर एसडीएम साहब पैसा लेने के लिए एजेंट रखे हुए हैं. इस सबको लेकर आज वकील काफ़ी गुस्से में थे.
बलिया में सिपाही ने की अवैध वसूली की शिकायत तो एसपी ने किया सस्पेंड, आहत सिपाही ने दिया इस्तीफा (देखें वीडियो)
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नरही थाने के पिकेट पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत करना एक सिपाही को महंगा पड़ गया. एसपी ने शिकायत करने वाले सिपाही को ही सस्पेंड कर दिया. इससे आहत निलम्बित सिपाही ने पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद को अपना त्याग पत्र भेज दिया है. उसने जान-माल की सुरक्षा की गुहार भी की है.
साहबो, जब-जब हम फ़ेसबुक पर आते हैं, हमें अपनी अज़ीज़ा गीताश्री का ख़याल हो आता है. ये क़िस्सा उन्हीं के मुतल्लिक़ है. और उनके हवाले से हमारी दो और दोस्तों से. जिन क़द्रदानों ने हमारे क़िस्सों पर नज़रसानी की है, वे इस बात से बख़ूबी वाक़िफ़ हो गये होंगे कि हमें बात चाहे ज़री-सी कहनी हो, मगर हमारी कोशिश यही रहती है कि वह मुन्नी-सी बात भी एक अदा से कही जाये जिससे हमारे सामयीन का दिल भी बहले और हमें भी कुछ तस्कीन हो कि हमने वक़्त ज़ाया नहीं किया.
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Manish Dubey : पुलिस नाम की व्यवस्था का ऐसा 'रैकेट' सुनने वालों के कानों में किलोल जरूर करता होगा. और, यदि नहीं करता तो आप निष्ठुर निष्क्रिय हैं. आज कोई और है, कल निश्चित आप ही होंगे. Tag: ballia, वर्दी में गुंडई : जेल जाने पर पता चला- थाने में होता है चालीस हजार रुपये में धारा तीन सौ छिहत्तर हटाने का खेल! वर्दी में गुंडई : यांत्रिक ढंग से विवेचना के कारण सोशल एक्टिविस्ट को लंबे समय तक रहना पड़ा जेल में! वर्दी में गुंडई : RTI एक्टिविस्ट का खुलासा- एक नया फर्जी केस लगाकर मुझे दुबारा जेल भेजने की तैयारी थी! वर्दी में गुंडई : रैकेटबाज थानेदार मेरी पत्नी को देखकर चिल्लाया- 'इस भोसड़ी को बाहर निकालो! ' Yashwant Singh : दल्ले थानेदार के खिलाफ चारपीएम अखबार में लगातार दूसरे दिन भी खबर हुई प्रकाशित. सुपारी लेकर पहले छेड़छाड़ का फर्जी मुकदमा लिखता है. बाद में छेड़छाड़ को रेप में तब्दील कर देता है. ये भाजपा जिलाध्यक्ष तो किशोर से कुकर्म का प्रयास करने वाले अपराधियों को बचाने में जुट गया! बलिया में नाबालिग छात्र को अगवाकर दुष्कर्म करने की कोशिश के मामले में पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोपियों से समझौता करने के लिये दबाव डाला है. पीड़ित बच्चे के चाचा ने भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद शंकर दूबे पर आरोपियों से भाजपा कार्यालय में दबाव डालकर सुलह करवाने का आरोप लगा दिया. . पीड़ित के चाचा का आरोप है कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने भाजपा कार्यालय में बुलाकर आरोपियों से सुलह करने का दबाव बनाते हुए कहा कि सुलह कर लो नहीं तो कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, सरकार मेरी है. . बलिया में डकैतों से खूब लड़ीं ये बहादुर महिलएं, पुलिस साबित हुई नपुंसक यूपी में जंगलराज का सच सब जानते हैं लेकिन प्रदेश सरकार सब जान कर भी कान में तेल डाले बैठी है. भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यूपी पुलिस के अंदर की जांबाजी और बहादुरी गायब हो चुकी है. सबकी नजर सिर्फ वसूली और लेन-देन, गेटिंग-सेटिंग पर है. यही कारण है चोरों से लेकर बलात्कारी, डकैत, हत्यारे सरेआम वारदात कर रहे हैं और पुलिस नपुंसक बनी बैठी रहती है. अपराधियों के बुलंद हौसले और पस्त पुलिस का सीन बलिया में देखने को मिला. बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने किया हमला बलिया के तहसील बेल्थरा रोड के एसडीएम प्रवरशील बरनवाल पर वकीलों ने हमला कर दिया. बेल्थरा रोड तहसील के वकीलों का एसडीएम पर आरोप है कि एसडीएम साहब बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते. वकीलों का आरोप यह भी था कि हर केस पर एसडीएम साहब पैसा लेने के लिए एजेंट रखे हुए हैं. इस सबको लेकर आज वकील काफ़ी गुस्से में थे. बलिया में सिपाही ने की अवैध वसूली की शिकायत तो एसपी ने किया सस्पेंड, आहत सिपाही ने दिया इस्तीफा उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नरही थाने के पिकेट पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत करना एक सिपाही को महंगा पड़ गया. एसपी ने शिकायत करने वाले सिपाही को ही सस्पेंड कर दिया. इससे आहत निलम्बित सिपाही ने पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद को अपना त्याग पत्र भेज दिया है. उसने जान-माल की सुरक्षा की गुहार भी की है. साहबो, जब-जब हम फ़ेसबुक पर आते हैं, हमें अपनी अज़ीज़ा गीताश्री का ख़याल हो आता है. ये क़िस्सा उन्हीं के मुतल्लिक़ है. और उनके हवाले से हमारी दो और दोस्तों से. जिन क़द्रदानों ने हमारे क़िस्सों पर नज़रसानी की है, वे इस बात से बख़ूबी वाक़िफ़ हो गये होंगे कि हमें बात चाहे ज़री-सी कहनी हो, मगर हमारी कोशिश यही रहती है कि वह मुन्नी-सी बात भी एक अदा से कही जाये जिससे हमारे सामयीन का दिल भी बहले और हमें भी कुछ तस्कीन हो कि हमने वक़्त ज़ाया नहीं किया.
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ॐ नमः वीतरागाय
श्री पं० दीपचन्दजी शाह काशलीवाल कृत आत्मावलोकन
दप्पणदसणेण य ससरुवं पस्सदि कोवि णरो । तह वीयरायायारं दिवा सयं राये तमहं हि ।१ दर्पणदर्शनेन चं स्वस्वरूपं पश्यति कोपि नरः । तथा वीतरागाकारं दृष्ट्वा स्वयं रागे तत् अहं हि ।१
यथा कोपि नरः दर्पणदर्शनेन स्वस्वरूपं पश्यति तथा रांगे सति च पुनः वीतरागाकारं विवं दृष्ट्वा तत् स्वयं अहं हि ।
अर्थ जैसे कोई पुरुष आरसी देखि करि अवरु (उसमें) अपने मुखका रूप निशंकपनै
देखे है । निश्चयेन (निश्चय से) तैप सराग विषे होते (भी) वीतराग प्रतिबिंबकौं देखि करि, ते (वह) ही वीतराग (अपने आपमें)
मैं ही हौं निस्संदेह, (ऐसा जाने ) । भावार्थ - आरसीके दृष्टान्त करि इहां इतनां भाव लेना जू आरसीका देखना अरु ( उसमें ) अपने मुखका देखना होइ है । सुइतना दृष्टान्त का भाव लेना । सोई ऐसा जु है दृष्टांत इस संसारके विषै कोई पुरुष आरसीकौं देखि करिअरु ( उसको) अपने मुखकी नीकी प्रतीत होड़ है । निस्संदेह पर्ने देखे हैं। इस दृष्टांत की नाई आसन्न भवि (निकट भव्य ) जीव भी, यह जु है जीव, जव जिसकाल विषै सर्वथा सर्वकालविषै (सर्व) प्रकारकरि वीतराग रूप परिणम्या, तब तिस कालविषै जैसैं एई जु हैं प्रतछि (प्रत्यक्ष ) पद्मासन अथवा काउसग्ग ( कायोत्सर्ग) आकार पाषाणकी सूर्तिका, न सिर कांपैं, न पलक भौंह नेत्र नासिका कांपै, न जीभ दांत होठ कांपै, न स्कंध (कंधा) भुजा हाथ अंगुली कांपै, न हीया पेट जांघ पींडी पाउ कांपै, न रोम फरकै, न नुह (नाखून) वधै, न वाल वधै, न हालै, न उठै, न बइठै । यहु प्रतछि जैसैं पाषाणकी सूरति देखिए है, तैसें ही जब यहु (यह ) जीव सर्वथा
वीतरागरूप परिणमैं, तब ही यहु देह परम उदारीक (परमौदारिक) उत्सर्ग (कायोत्सर्ग) अथवा पद्मासन आकार होइ जंगम ( चेतन ) प्रतिमा पाषाण प्रतिमासी होई । पाषाण अरु परम औदारिक प्रतिमाविषै भेद कछु न होइ, दोनों वज्र की मूरति हैं। ऐसी वीतराग जीवकी जंगम मूरति थापना मूरति इन दोनौंको आसन्न भवि देवि करि ऐसा मनमांहि लावे है-तिस समैं ऐसा विचार होइहै । सो विचार क्या होइ है ?वीतराग तो परमात्मदशा है- परमेश्वर है-तहां तो सर्वज्ञ है। बीतरागका अर्थ यहु-जु वीत कहिए गया है, राग कहिए रंजनां, भिदकर तइसा होनां, ऐसा भाव (हो) जाइ, तिसकौं कहिए है वीतराग । तिसतैं तो यहु जान्या गया-तिसकी पिछली अवस्थाविषै तो वहु पुरुष रागी था। क्यौं (कि कुछ ) गया तौ तब नाव पावै जो होइ, ऐसा नाव [नाम] न पावें । तिसतैं तिसकै राग था, जब राग गया तब वीतराग परमेश्वर कहाया ।
इहां एक विचार आया-जु जाइगा सोई वस्तुत्व करि निपज्या नहीं है, सो कोई वस्तुको दोष उपजाया है। अवरु जु वस्तुत्वकार निपज्या
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ॐ नमः वीतरागाय श्री पंशून्य दीपचन्दजी शाह काशलीवाल कृत आत्मावलोकन दप्पणदसणेण य ससरुवं पस्सदि कोवि णरो । तह वीयरायायारं दिवा सयं राये तमहं हि ।एक दर्पणदर्शनेन चं स्वस्वरूपं पश्यति कोपि नरः । तथा वीतरागाकारं दृष्ट्वा स्वयं रागे तत् अहं हि ।एक यथा कोपि नरः दर्पणदर्शनेन स्वस्वरूपं पश्यति तथा रांगे सति च पुनः वीतरागाकारं विवं दृष्ट्वा तत् स्वयं अहं हि । अर्थ जैसे कोई पुरुष आरसी देखि करि अवरु अपने मुखका रूप निशंकपनै देखे है । निश्चयेन तैप सराग विषे होते वीतराग प्रतिबिंबकौं देखि करि, ते ही वीतराग मैं ही हौं निस्संदेह, । भावार्थ - आरसीके दृष्टान्त करि इहां इतनां भाव लेना जू आरसीका देखना अरु अपने मुखका देखना होइ है । सुइतना दृष्टान्त का भाव लेना । सोई ऐसा जु है दृष्टांत इस संसारके विषै कोई पुरुष आरसीकौं देखि करिअरु अपने मुखकी नीकी प्रतीत होड़ है । निस्संदेह पर्ने देखे हैं। इस दृष्टांत की नाई आसन्न भवि जीव भी, यह जु है जीव, जव जिसकाल विषै सर्वथा सर्वकालविषै प्रकारकरि वीतराग रूप परिणम्या, तब तिस कालविषै जैसैं एई जु हैं प्रतछि पद्मासन अथवा काउसग्ग आकार पाषाणकी सूर्तिका, न सिर कांपैं, न पलक भौंह नेत्र नासिका कांपै, न जीभ दांत होठ कांपै, न स्कंध भुजा हाथ अंगुली कांपै, न हीया पेट जांघ पींडी पाउ कांपै, न रोम फरकै, न नुह वधै, न वाल वधै, न हालै, न उठै, न बइठै । यहु प्रतछि जैसैं पाषाणकी सूरति देखिए है, तैसें ही जब यहु जीव सर्वथा वीतरागरूप परिणमैं, तब ही यहु देह परम उदारीक उत्सर्ग अथवा पद्मासन आकार होइ जंगम प्रतिमा पाषाण प्रतिमासी होई । पाषाण अरु परम औदारिक प्रतिमाविषै भेद कछु न होइ, दोनों वज्र की मूरति हैं। ऐसी वीतराग जीवकी जंगम मूरति थापना मूरति इन दोनौंको आसन्न भवि देवि करि ऐसा मनमांहि लावे है-तिस समैं ऐसा विचार होइहै । सो विचार क्या होइ है ?वीतराग तो परमात्मदशा है- परमेश्वर है-तहां तो सर्वज्ञ है। बीतरागका अर्थ यहु-जु वीत कहिए गया है, राग कहिए रंजनां, भिदकर तइसा होनां, ऐसा भाव जाइ, तिसकौं कहिए है वीतराग । तिसतैं तो यहु जान्या गया-तिसकी पिछली अवस्थाविषै तो वहु पुरुष रागी था। क्यौं गया तौ तब नाव पावै जो होइ, ऐसा नाव [नाम] न पावें । तिसतैं तिसकै राग था, जब राग गया तब वीतराग परमेश्वर कहाया । इहां एक विचार आया-जु जाइगा सोई वस्तुत्व करि निपज्या नहीं है, सो कोई वस्तुको दोष उपजाया है। अवरु जु वस्तुत्वकार निपज्या
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वहीं वरुण धवन (Varun Dhawan) ने भी इंस्टाग्राम (Instagram) पर इन तस्वीरों को फैंस के साथ साझा करते हुए लिखा-'चेक-मेट, तुम तंग करती हो, अब नफरत मत करो, क्योंकि तुम शानदार हो।
सोशल मीडिया (social media) पर दोनों के इस पोस्ट को काफी पसंद किया जा रहा हैं। वरुण धवन (Varun Dhawan) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'कुली नं. 1' के प्रमोशन में व्यस्त है। इस फिल्म (film) में परेश रावल (Paresh Rawal) भी होंगे। फिल्म में वह सारा अली खान के पिता का किरदार निभाएंगे। फिल्म में जावेद जाफरी (Javed Jaffrey) भी अहम भूमिका में होंगे।
कॉमेडी फिल्म 'कुली नं. 1' का निर्देशन डेविड धवन (David Dhawan) ने किया है। यह फिल्म इसी साल क्रिसमस के मौके पर 25 दिसंबर को amazon prime video पर रिलीज होगी। यह फिल्म 1995 में आई गोविंदा और करिश्मा कपूर की 'कुली नं. 1' (Coolie no-1) का रीमेक है।
कॉमेडी फिल्म 'कुली नं. 1' का निर्देशन डेविड धवन (David Dhawan) ने किया है। यह फिल्म इसी साल क्रिसमस के मौके पर 25 दिसंबर को amazon prime video पर रिलीज होगी। यह फिल्म 1995 में आई गोविंदा और करिश्मा कपूर की 'कुली नं. 1' (Coolie no-1) का रीमेक है।
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वहीं वरुण धवन ने भी इंस्टाग्राम पर इन तस्वीरों को फैंस के साथ साझा करते हुए लिखा-'चेक-मेट, तुम तंग करती हो, अब नफरत मत करो, क्योंकि तुम शानदार हो। सोशल मीडिया पर दोनों के इस पोस्ट को काफी पसंद किया जा रहा हैं। वरुण धवन और सारा अली खान इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'कुली नं. एक' के प्रमोशन में व्यस्त है। इस फिल्म में परेश रावल भी होंगे। फिल्म में वह सारा अली खान के पिता का किरदार निभाएंगे। फिल्म में जावेद जाफरी भी अहम भूमिका में होंगे। कॉमेडी फिल्म 'कुली नं. एक' का निर्देशन डेविड धवन ने किया है। यह फिल्म इसी साल क्रिसमस के मौके पर पच्चीस दिसंबर को amazon prime video पर रिलीज होगी। यह फिल्म एक हज़ार नौ सौ पचानवे में आई गोविंदा और करिश्मा कपूर की 'कुली नं. एक' का रीमेक है। कॉमेडी फिल्म 'कुली नं. एक' का निर्देशन डेविड धवन ने किया है। यह फिल्म इसी साल क्रिसमस के मौके पर पच्चीस दिसंबर को amazon prime video पर रिलीज होगी। यह फिल्म एक हज़ार नौ सौ पचानवे में आई गोविंदा और करिश्मा कपूर की 'कुली नं. एक' का रीमेक है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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होटल सनशाइन, पर स्थित हैभूमध्य तट, एक असली तुर्की रिवेरा है। होटल परिसर केस्टेल के छोटे शहर के पास स्थित है, जो 7 किमी दूर अलान्या से दूर है और हवाई अड्डे से 135 किमी दूर है। यह 1 9 8 9 में बनाया गया था, और 2004 में बहाल किया गया। होटल का कुल क्षेत्र लगभग 12000 वर्ग मीटर है। इसके बगल में एक केला ग्रोव है। किसी भी होटल लॉजर, जो लंबे तट के साथ घूमते हैं, गांव में जाएंगे जहां आप स्थानीय बाजार जा सकते हैं।
होटल कॉम्प्लेक्स में 174 मानक हैंकमरे (18 वर्ग मीटर), जिनमें से प्रत्येक तीन लोगों तक समायोजित कर सकता है। 14 कमरे - परिवार, जहां एक अलग बेडरूम, एक बंक और एक डबल बेड है। 5 लोग रह सकते हैं, प्रत्येक का कुल क्षेत्र - 35 वर्ग मीटर। चौथे मंजिल पर स्थित लोगों को छोड़कर, सभी कमरों में फर्श कालीन के साथ रेखांकित किया गया है, जहां फर्श सिरेमिक टाइल्स है। कमरों को दैनिक साफ किया जाता है, बिस्तर लिनन सप्ताह में तीन बार बदल जाता है। एक छोटी सी फीस नौकरियों के लिए बिस्तर पर अद्भुत पैटर्न फैल गए। बिल्कुल सभी कमरों में पूरी तरह से या आंशिक रूप से समुद्र या केला ग्रोव, या पहाड़ों का दृश्य है। कमरों में एक टीवी, एयर कंडीशनिंग, टेलीफोन, एक पूर्ण मिनी बार (भुगतान की आवश्यकता है) है।
जैसा कि पर्यटकों ने उल्लेख किया है, यहां मुख्य व्यंजन -सब्जी, विभिन्न तरीकों से पकाया जाता है। मांस विशेष रूप से एक विधि द्वारा तैयार किया जाता है, मेनू सोया से व्यंजन में समृद्ध है। जो लोग मसालेदार भोजन पसंद करते हैं, स्थानीय व्यंजन स्वाद लेना होगा। रेस्तरां में मिठाई और पेस्ट्री का एक विशाल चयन है। फल बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन उन्हें बाजार में खरीदा जा सकता है, जिसे अक्सर होटल के सामने व्यवस्थित किया जाता है। रात के खाने के लिए, चिकन और मछली दोनों की सेवा करें। हॉलिडेमेकर नोट करते हैं कि रस और मादक पेय अक्सर पैदा होते हैं।
मेहमानों को न केवल काम के घंटों के दौरान मनोरंजन किया जाता हैएनिमेटरों। वयस्कों को विभिन्न प्रतियोगिताओं को पसंद करना है, उदाहरण के लिए, "सर्वश्रेष्ठ जोड़े" सनशाइन "," श्रीमान और श्रीमती होटल ", रोमांचक" महिला बनाम पुरुष "प्रतियोगिताओं, अग्नि प्रदर्शन और अग्नि-शो। होटल के कर्मचारी रूसी समेत कई भाषाओं बोलते हैं। कुछ एनिमेटर्स योग करते हैं। अक्सर संगठित पर्यटन, अलानिया शहर में डिस्को की यात्रा, नौका पर नाव यात्राएं।
होटल में एक रेस्तरां, 4 कैफे, एक अध्ययन हैडॉक्टर, एक टीवी रूम, नाई, पुस्तकालय, सम्मेलन कक्ष, कपड़े धोने। मेहमानों को एक कार किराए पर और दुकानों, क्षेत्र में स्थित में टहलने लेने के लिए विकल्प होता है। इसके अलावा, सभी उपलब्ध टेनिस, डार्ट्स। भुगतान सेवाओं की सूची में शामिल हैंः एक पेशेवर फोटोग्राफर और मालिश, एक सौना, एक इंटरनेट कैफे के लिए एक यात्रा, गेमिंग मशीनों की सेवा टेनिस के लिए रैकेट और गेंदों किराया, बिलियर्ड्स के खेल। होटल एक उत्कृष्ट स्विमिंग पूल है। आराम करें और साबुन मालिश से असली आनंद मिलता है एक तुर्की स्नान हो सकता है।
जैसे पर्यटक कहते हैं, बच्चों के लिए मनोरंजनयहां बहुत अच्छी तरह व्यवस्थित नहीं है। बच्चे प्रायः एनिमेटरों में व्यस्त होते हैं और दिन के दौरान, बच्चे पूल के चारों ओर नकली टैटू बना सकते हैं और बना सकते हैं। हालांकि, कोई बच्चों का पूल नहीं है।
एक सुखद और यादगार रहने के लिए!
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होटल सनशाइन, पर स्थित हैभूमध्य तट, एक असली तुर्की रिवेरा है। होटल परिसर केस्टेल के छोटे शहर के पास स्थित है, जो सात किमी दूर अलान्या से दूर है और हवाई अड्डे से एक सौ पैंतीस किमी दूर है। यह एक नौ आठ नौ में बनाया गया था, और दो हज़ार चार में बहाल किया गया। होटल का कुल क्षेत्र लगभग बारह हज़ार वर्ग मीटर है। इसके बगल में एक केला ग्रोव है। किसी भी होटल लॉजर, जो लंबे तट के साथ घूमते हैं, गांव में जाएंगे जहां आप स्थानीय बाजार जा सकते हैं। होटल कॉम्प्लेक्स में एक सौ चौहत्तर मानक हैंकमरे , जिनमें से प्रत्येक तीन लोगों तक समायोजित कर सकता है। चौदह कमरे - परिवार, जहां एक अलग बेडरूम, एक बंक और एक डबल बेड है। पाँच लोग रह सकते हैं, प्रत्येक का कुल क्षेत्र - पैंतीस वर्ग मीटर। चौथे मंजिल पर स्थित लोगों को छोड़कर, सभी कमरों में फर्श कालीन के साथ रेखांकित किया गया है, जहां फर्श सिरेमिक टाइल्स है। कमरों को दैनिक साफ किया जाता है, बिस्तर लिनन सप्ताह में तीन बार बदल जाता है। एक छोटी सी फीस नौकरियों के लिए बिस्तर पर अद्भुत पैटर्न फैल गए। बिल्कुल सभी कमरों में पूरी तरह से या आंशिक रूप से समुद्र या केला ग्रोव, या पहाड़ों का दृश्य है। कमरों में एक टीवी, एयर कंडीशनिंग, टेलीफोन, एक पूर्ण मिनी बार है। जैसा कि पर्यटकों ने उल्लेख किया है, यहां मुख्य व्यंजन -सब्जी, विभिन्न तरीकों से पकाया जाता है। मांस विशेष रूप से एक विधि द्वारा तैयार किया जाता है, मेनू सोया से व्यंजन में समृद्ध है। जो लोग मसालेदार भोजन पसंद करते हैं, स्थानीय व्यंजन स्वाद लेना होगा। रेस्तरां में मिठाई और पेस्ट्री का एक विशाल चयन है। फल बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन उन्हें बाजार में खरीदा जा सकता है, जिसे अक्सर होटल के सामने व्यवस्थित किया जाता है। रात के खाने के लिए, चिकन और मछली दोनों की सेवा करें। हॉलिडेमेकर नोट करते हैं कि रस और मादक पेय अक्सर पैदा होते हैं। मेहमानों को न केवल काम के घंटों के दौरान मनोरंजन किया जाता हैएनिमेटरों। वयस्कों को विभिन्न प्रतियोगिताओं को पसंद करना है, उदाहरण के लिए, "सर्वश्रेष्ठ जोड़े" सनशाइन "," श्रीमान और श्रीमती होटल ", रोमांचक" महिला बनाम पुरुष "प्रतियोगिताओं, अग्नि प्रदर्शन और अग्नि-शो। होटल के कर्मचारी रूसी समेत कई भाषाओं बोलते हैं। कुछ एनिमेटर्स योग करते हैं। अक्सर संगठित पर्यटन, अलानिया शहर में डिस्को की यात्रा, नौका पर नाव यात्राएं। होटल में एक रेस्तरां, चार कैफे, एक अध्ययन हैडॉक्टर, एक टीवी रूम, नाई, पुस्तकालय, सम्मेलन कक्ष, कपड़े धोने। मेहमानों को एक कार किराए पर और दुकानों, क्षेत्र में स्थित में टहलने लेने के लिए विकल्प होता है। इसके अलावा, सभी उपलब्ध टेनिस, डार्ट्स। भुगतान सेवाओं की सूची में शामिल हैंः एक पेशेवर फोटोग्राफर और मालिश, एक सौना, एक इंटरनेट कैफे के लिए एक यात्रा, गेमिंग मशीनों की सेवा टेनिस के लिए रैकेट और गेंदों किराया, बिलियर्ड्स के खेल। होटल एक उत्कृष्ट स्विमिंग पूल है। आराम करें और साबुन मालिश से असली आनंद मिलता है एक तुर्की स्नान हो सकता है। जैसे पर्यटक कहते हैं, बच्चों के लिए मनोरंजनयहां बहुत अच्छी तरह व्यवस्थित नहीं है। बच्चे प्रायः एनिमेटरों में व्यस्त होते हैं और दिन के दौरान, बच्चे पूल के चारों ओर नकली टैटू बना सकते हैं और बना सकते हैं। हालांकि, कोई बच्चों का पूल नहीं है। एक सुखद और यादगार रहने के लिए!
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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को केरल के कई हिस्सों में सड़कों पर उतरकर पार्टी सांसद राहुल गांधी (MP Rahul Gandhi) के समर्थन में प्रदर्शन किया। राहुल गांधी केरल में वायनाड लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूरत की एक अदालत (Surat court) द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए गए हैं।
केरल में कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरन (Congress state president K Sudhakaran) ने घोषणा की कि पार्टी वायनाड में उपचुनाव के लिए तैयार है। यूथ कांग्रेस और केरल छात्र संघ के सदस्यों सहित पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राजभवन तक मार्च निकाला। जब पुलिस ने मार्च को रोका और राजभवन की ओर जाने वाली सड़क पर बैरिकेड्स लगा दिए, तो कांग्रेस के लोगों ने विरोध करते हुए इसे पीछे खींचने की कोशिश की। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे पार्टी के कई कार्यकर्ता घायल हो गए।
वायनाड के जिला मुख्यालय कलपेट्टा में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और स्थानीय विधायक टी सिद्दीकी (local MLA T Siddique) के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला और BSNL कार्यालय का घेराव किया। वायनाड लोकसभा क्षेत्र के अन्य हिस्सों (सुल्तान बाथेरी, मनंतवाडी और मुक्कोम) में भी विरोध मार्च आयोजित किए गए, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़कों को भी जाम कर दिया। कोझिकोड में पार्टी कार्यकर्ताओं ने शाम में रेलवे स्टेशन तक मार्च निकाला।
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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को केरल के कई हिस्सों में सड़कों पर उतरकर पार्टी सांसद राहुल गांधी के समर्थन में प्रदर्शन किया। राहुल गांधी केरल में वायनाड लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए गए हैं। केरल में कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरन ने घोषणा की कि पार्टी वायनाड में उपचुनाव के लिए तैयार है। यूथ कांग्रेस और केरल छात्र संघ के सदस्यों सहित पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राजभवन तक मार्च निकाला। जब पुलिस ने मार्च को रोका और राजभवन की ओर जाने वाली सड़क पर बैरिकेड्स लगा दिए, तो कांग्रेस के लोगों ने विरोध करते हुए इसे पीछे खींचने की कोशिश की। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे पार्टी के कई कार्यकर्ता घायल हो गए। वायनाड के जिला मुख्यालय कलपेट्टा में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और स्थानीय विधायक टी सिद्दीकी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला और BSNL कार्यालय का घेराव किया। वायनाड लोकसभा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी विरोध मार्च आयोजित किए गए, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़कों को भी जाम कर दिया। कोझिकोड में पार्टी कार्यकर्ताओं ने शाम में रेलवे स्टेशन तक मार्च निकाला।
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कल इंस्टाग्राम पर अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा की एक फोटो पोस्ट की और लिखा कि अनुष्का ही उनकी असली ताकत हैं. विराट ने लिखा कि अनुष्का उन्हें सारी बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. अनुष्का ने उन्हें अंदर से बदल दिया है और सच्चे प्यार की शक्ति का एहसास कराया है. विराट का यह पोस्ट पढ़ अनुष्का कितनी खुश हुई होगी. अनुष्का के मायके के लोग कितने खुश हुए होंगे, पर सवाल यह है कि हर पति-पत्नी को यह खुशी क्यों नहीं मिल पाती. ऐसा क्यों होता है कि कई पति-पत्नी बस एक-दूसरे को झेलते हुए वैसे जिंदगी गुजारते रहते हैं, जैसे उम्र कैद की सजा काट रहे हो और इस जेल से बाहर निकलने का कोई रास्ता न हो.
रायपुर. शादी क्यों कई बार उम्रकैद की सजा जैसी बन जाती है. जिंदगी में कोई रस नहीं रहता. भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध के उन प्रवचनों के मुताबिक पतियों को यह बताया गया था कि वे कैसे अपनी पत्नी को खुश रख सकते हैं और जीवन में प्रेम बढ़ा सकते हैं. आज हम भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध के उन प्रवचनों को लेकर आए हैं, जो पत्नियों के लिए हैं. पत्नियां अगर इन बातों का ध्यान रखेंगी, तो उनके पति भी विराट कोहली की तरह पूरी दुनिया को बताएंगे कि मेरी पत्नी से अच्छी शायद ही इस दुनिया में कोई और हो. इससे परिवार में प्रेम बढ़ेगा. दोनों का जीवन सुखमय रहेगा.
पति घर आया. उसे जोरों की भूख लगी है. पत्नी ने खाना लगाया. पति आराम से खाने लगा. तभी पत्नी भी पास आकर बैठ गई और शुरू हो गई. एक के बाद एक शिकायतें. परेशानी. घर के दूसरे लोग कैसे उसके साथ बुरा व्यवहार करते हैं. पड़ोसी भी अच्छे नहीं हैं. बिजली भी बहुत जाती है. मच्छर भी बहुत है. गर्मी भी बहुत है. बेचारा पति क्या करेगा. कई पत्नियां ऐसा करती हैं. यह बहुत छोटी सी बात है, पर इस छोटी सी बात से घर का माहौल खराब होता है.
यूरोप के एक लेखक ने लिखा है कि पति और पत्नी के बीच तभी झगड़ा नहीं होगा, जब पति अंधा और पत्नी गूंगी, क्योंकि गूंगी पत्नी शिकायत नहीं करेगी और अंधा पति पत्नी में कमियां नहीं देखेगा, पर ऐसा नहीं है. अगर पत्नी पति को शिकायत पेटी न बनाए. समझदारी से काम लें, तो इस छोटी सी बात का ध्यान रख परिवार में प्रेम बढ़ सकता है.
रिंकी के पति कितने अच्छे हैं. लवली के पति कितने अच्छे हैं. मीता के पति के पास तो चार-चार गाड़ियां हैं. मेरी सहेली की अभी-अभी शादी हुई. क्या ससुराल है उसका. मेरी ही किस्मत फूटी थी. कई पत्नियां यही रोना लेकर बैठी रहती हैं. हो सकता है पत्नी मजाक में या पति को चिढ़ाने के लिए ही ऐसा कह रही हों, पर इससे पति के हृदय को बहुत ठेस पहुंचती है. वह बेचारा जो भी कर सकता है, आपके लिए करता है. अपने पति की प्रशंसा करना सीखिए. ध्यान से देखिए. उनमें बहुत खूबियां हैं. आपको दिख नहीं रहीं. उन्हें देखिए. महसूस कीजिए और प्रशंसा भी कीजिए. सच्ची प्रशंसा करना बहुत जरूरी है. यह चापलूसी नहीं है.
आप कितनी भी शिकायत कर लें. यह नहीं हो सकता कि अगले दिन से आपकी आमदनी पांच गुणी हो जाएगी. भगवान बुद्ध ने इस पर विशेष जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि पत्नी को घर ऐसे मैनेज करना चाहिए कि जितनी पति की आमदनी है, उसमें सब बेहतर तरीके से मैनेज हो जाएं. हद से ज्यादा खर्च या हद से ज्यादा बचत दोनों ही अच्छी नहीं है. कुछ पत्नियां बहुत ज्यादा खर्च कर देती हैं, तो अधिकांश को बचत की बीमारी होती है. वे इसी में लगी रहती हैं कि कैसे बचत हो जाए.
इस चक्कर में पत्नियां कई बार पति से झूठ बोलती हैं. कई बार पैसे होते हुए भी पति को पैसे देने से मना कर देती हैं. कई बार वैसी जगहों पर पैसे बचा लेती हैं, जहां खर्च करना जरूरी है. पत्नियों को यह बात समझनी चाहिए कि वे बचत किसके लिए कर रही हैं. परिवार के लिए ही ना, तो फिर कहीं ऐसा न हो जाए कि बचत करने के चक्कर में परिवार के लिए अपमानजनक स्थिति बन जाए या पति को परेशानी का सामना करना पड़ा.
भगवान बुद्ध कहते हैं कि इस दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है, जो किसी पुरुष के मन को स्त्री से ज्यादा लुभाने की शक्ति रखती हो. उसी तरह ऐसी भी कोई चीज नहीं बनी है, जो स्त्री को उसके प्रियतम से ज्यादा लुभाए. यह आकर्षण प्राकृतिक है. कई पत्नियों की आदत होती है कि वे बाहर तो खूब सज-संवर कर जाती है, पर घर में जैसे-तैसे रहती हैं. घर में भी अच्छे से तैयार रहें और जब पति घर आए, तो उसका स्वागत करें.
पति या पत्नी दोनों में से कोई एक या दोनों का व्यवहार अगर बुरा है. आदतें बुरी हैं, तो घर 24 घंटे के जेल में बदल जाएगा. नरक में बदल जाएगा और अगर दोनों का व्यवहार अच्छा है, तो उस घर से अच्छा स्वर्ग भी नहीं है. पत्नी में सचमुच यह शक्ति होती है कि वह पति के अवगुणों को दूर कर दे. पति को बदल कर रख दे. कमियों वाले पति को भी एक बेहतर इंसान में बदल देना एक काबिल पत्नी के लिए असंभव नहीं है. बस प्यार, धैर्य, प्रशंसा और आत्मविश्वास की जरूरत है. और हां, सिर्फ 24 घंटे प्रवचन देने से पति में बदलाव नहीं होगा. वह और चिड़िचिड़ा हो जाएगा. पत्नी को चाहिए कि जो गुण वह पति में देखना चाहती है, वह खुद उसका उदाहरण बनकर दिखाए.
एक पति घर पहुंचा, तो पत्नी को उसके शर्ट पर किसी औरत के बड़े-बड़े काले बाल मिले. शर्ट पर किसी औरत के बाल देखते ही पत्नी ने पति से झगड़ा शुरू कर दिया. पति सफाई देता रहा कि उसे कुछ नहीं पता कि यह बाल उसकी शर्ट पर कैसे आया. दूसरे दिन पति ने सोचा कि अगर आज फिर कहीं से उसकी शर्ट पर किसी औरत के काले बाल दिख गए, तो उसकी पत्नी फिर उससे झगड़ा करेगी, इसलिए उसने ऑफिस में अपनी जगह बदलवा ली और एक सफेद बालों वाली महिला के पास बैठ गया. वह खुशी-खुशी घर पहुंचा कि आज तो लड़ाई का कोई चांस नहीं है, पर पत्नी ने घर पहुंचने के बाद जब शर्ट देखा, तो फिर पति पर चिल्लाने लगी.
पति ने पूछा कि अब क्या हुआ, तो पत्नी ने कहा कि मैं जान चुकी हूं कि तुम्हारा अफेयर किसी उम्रदराज महिला के साथ चल रहा है. यह देखो, तुम्हारे शर्ट पर किसी महिला के पके हुए बाल हैं. पति परेशान. दूसरे दिन घर आने से पहले उसने अपने शर्ट को अच्छी तरह झाड़ लिया ताकि उसकी पत्नी को काले या उजले कोई बाल न मिले. वह खुशी-खुशी घर पहुंचा, पर पत्नी शर्ट देखकर फिर झगड़ा करने लगी. पत्नी कहने लगे कि मैं समझ गई हूं कि तुम्हारा अब किसी टकली (बिना बालों वाली) महिला के साथ अफेयर चल रहा है. कई पत्नियां ऐसा ही करती हैं. वे बिना मतलब पति पर शक करती हैं और इससे घर का माहौल बुरी तरह खराब हो जाता है. पति-पत्नी को एक-दूसरे पर भरोसा रखना ही चाहिए. भरोसे से ही रिश्ता चलेगा.
कई महिलाएं अपने पति से तो बहुत प्यार करती हैं. पति का तो बहुत ख्याल रखती हैं, पर पति के माता-पिता, भाई-बहन और दूसरे रिश्तेदारों को सम्मान नहीं देतीं. उनसे अच्छी तरह पेश नहीं आती. एक बहुत खतरनाक है. पत्नी का यह व्यवहार पति को बहुत दुखी करता है. पति तभी खुश रहेगा, जब पत्नी उसके परिजनों को सम्मान देगी.
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कल इंस्टाग्राम पर अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा की एक फोटो पोस्ट की और लिखा कि अनुष्का ही उनकी असली ताकत हैं. विराट ने लिखा कि अनुष्का उन्हें सारी बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. अनुष्का ने उन्हें अंदर से बदल दिया है और सच्चे प्यार की शक्ति का एहसास कराया है. विराट का यह पोस्ट पढ़ अनुष्का कितनी खुश हुई होगी. अनुष्का के मायके के लोग कितने खुश हुए होंगे, पर सवाल यह है कि हर पति-पत्नी को यह खुशी क्यों नहीं मिल पाती. ऐसा क्यों होता है कि कई पति-पत्नी बस एक-दूसरे को झेलते हुए वैसे जिंदगी गुजारते रहते हैं, जैसे उम्र कैद की सजा काट रहे हो और इस जेल से बाहर निकलने का कोई रास्ता न हो. रायपुर. शादी क्यों कई बार उम्रकैद की सजा जैसी बन जाती है. जिंदगी में कोई रस नहीं रहता. भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध के उन प्रवचनों के मुताबिक पतियों को यह बताया गया था कि वे कैसे अपनी पत्नी को खुश रख सकते हैं और जीवन में प्रेम बढ़ा सकते हैं. आज हम भगवान कृष्ण और भगवान बुद्ध के उन प्रवचनों को लेकर आए हैं, जो पत्नियों के लिए हैं. पत्नियां अगर इन बातों का ध्यान रखेंगी, तो उनके पति भी विराट कोहली की तरह पूरी दुनिया को बताएंगे कि मेरी पत्नी से अच्छी शायद ही इस दुनिया में कोई और हो. इससे परिवार में प्रेम बढ़ेगा. दोनों का जीवन सुखमय रहेगा. पति घर आया. उसे जोरों की भूख लगी है. पत्नी ने खाना लगाया. पति आराम से खाने लगा. तभी पत्नी भी पास आकर बैठ गई और शुरू हो गई. एक के बाद एक शिकायतें. परेशानी. घर के दूसरे लोग कैसे उसके साथ बुरा व्यवहार करते हैं. पड़ोसी भी अच्छे नहीं हैं. बिजली भी बहुत जाती है. मच्छर भी बहुत है. गर्मी भी बहुत है. बेचारा पति क्या करेगा. कई पत्नियां ऐसा करती हैं. यह बहुत छोटी सी बात है, पर इस छोटी सी बात से घर का माहौल खराब होता है. यूरोप के एक लेखक ने लिखा है कि पति और पत्नी के बीच तभी झगड़ा नहीं होगा, जब पति अंधा और पत्नी गूंगी, क्योंकि गूंगी पत्नी शिकायत नहीं करेगी और अंधा पति पत्नी में कमियां नहीं देखेगा, पर ऐसा नहीं है. अगर पत्नी पति को शिकायत पेटी न बनाए. समझदारी से काम लें, तो इस छोटी सी बात का ध्यान रख परिवार में प्रेम बढ़ सकता है. रिंकी के पति कितने अच्छे हैं. लवली के पति कितने अच्छे हैं. मीता के पति के पास तो चार-चार गाड़ियां हैं. मेरी सहेली की अभी-अभी शादी हुई. क्या ससुराल है उसका. मेरी ही किस्मत फूटी थी. कई पत्नियां यही रोना लेकर बैठी रहती हैं. हो सकता है पत्नी मजाक में या पति को चिढ़ाने के लिए ही ऐसा कह रही हों, पर इससे पति के हृदय को बहुत ठेस पहुंचती है. वह बेचारा जो भी कर सकता है, आपके लिए करता है. अपने पति की प्रशंसा करना सीखिए. ध्यान से देखिए. उनमें बहुत खूबियां हैं. आपको दिख नहीं रहीं. उन्हें देखिए. महसूस कीजिए और प्रशंसा भी कीजिए. सच्ची प्रशंसा करना बहुत जरूरी है. यह चापलूसी नहीं है. आप कितनी भी शिकायत कर लें. यह नहीं हो सकता कि अगले दिन से आपकी आमदनी पांच गुणी हो जाएगी. भगवान बुद्ध ने इस पर विशेष जोर दिया है. उन्होंने कहा है कि पत्नी को घर ऐसे मैनेज करना चाहिए कि जितनी पति की आमदनी है, उसमें सब बेहतर तरीके से मैनेज हो जाएं. हद से ज्यादा खर्च या हद से ज्यादा बचत दोनों ही अच्छी नहीं है. कुछ पत्नियां बहुत ज्यादा खर्च कर देती हैं, तो अधिकांश को बचत की बीमारी होती है. वे इसी में लगी रहती हैं कि कैसे बचत हो जाए. इस चक्कर में पत्नियां कई बार पति से झूठ बोलती हैं. कई बार पैसे होते हुए भी पति को पैसे देने से मना कर देती हैं. कई बार वैसी जगहों पर पैसे बचा लेती हैं, जहां खर्च करना जरूरी है. पत्नियों को यह बात समझनी चाहिए कि वे बचत किसके लिए कर रही हैं. परिवार के लिए ही ना, तो फिर कहीं ऐसा न हो जाए कि बचत करने के चक्कर में परिवार के लिए अपमानजनक स्थिति बन जाए या पति को परेशानी का सामना करना पड़ा. भगवान बुद्ध कहते हैं कि इस दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है, जो किसी पुरुष के मन को स्त्री से ज्यादा लुभाने की शक्ति रखती हो. उसी तरह ऐसी भी कोई चीज नहीं बनी है, जो स्त्री को उसके प्रियतम से ज्यादा लुभाए. यह आकर्षण प्राकृतिक है. कई पत्नियों की आदत होती है कि वे बाहर तो खूब सज-संवर कर जाती है, पर घर में जैसे-तैसे रहती हैं. घर में भी अच्छे से तैयार रहें और जब पति घर आए, तो उसका स्वागत करें. पति या पत्नी दोनों में से कोई एक या दोनों का व्यवहार अगर बुरा है. आदतें बुरी हैं, तो घर चौबीस घंटाटे के जेल में बदल जाएगा. नरक में बदल जाएगा और अगर दोनों का व्यवहार अच्छा है, तो उस घर से अच्छा स्वर्ग भी नहीं है. पत्नी में सचमुच यह शक्ति होती है कि वह पति के अवगुणों को दूर कर दे. पति को बदल कर रख दे. कमियों वाले पति को भी एक बेहतर इंसान में बदल देना एक काबिल पत्नी के लिए असंभव नहीं है. बस प्यार, धैर्य, प्रशंसा और आत्मविश्वास की जरूरत है. और हां, सिर्फ चौबीस घंटाटे प्रवचन देने से पति में बदलाव नहीं होगा. वह और चिड़िचिड़ा हो जाएगा. पत्नी को चाहिए कि जो गुण वह पति में देखना चाहती है, वह खुद उसका उदाहरण बनकर दिखाए. एक पति घर पहुंचा, तो पत्नी को उसके शर्ट पर किसी औरत के बड़े-बड़े काले बाल मिले. शर्ट पर किसी औरत के बाल देखते ही पत्नी ने पति से झगड़ा शुरू कर दिया. पति सफाई देता रहा कि उसे कुछ नहीं पता कि यह बाल उसकी शर्ट पर कैसे आया. दूसरे दिन पति ने सोचा कि अगर आज फिर कहीं से उसकी शर्ट पर किसी औरत के काले बाल दिख गए, तो उसकी पत्नी फिर उससे झगड़ा करेगी, इसलिए उसने ऑफिस में अपनी जगह बदलवा ली और एक सफेद बालों वाली महिला के पास बैठ गया. वह खुशी-खुशी घर पहुंचा कि आज तो लड़ाई का कोई चांस नहीं है, पर पत्नी ने घर पहुंचने के बाद जब शर्ट देखा, तो फिर पति पर चिल्लाने लगी. पति ने पूछा कि अब क्या हुआ, तो पत्नी ने कहा कि मैं जान चुकी हूं कि तुम्हारा अफेयर किसी उम्रदराज महिला के साथ चल रहा है. यह देखो, तुम्हारे शर्ट पर किसी महिला के पके हुए बाल हैं. पति परेशान. दूसरे दिन घर आने से पहले उसने अपने शर्ट को अच्छी तरह झाड़ लिया ताकि उसकी पत्नी को काले या उजले कोई बाल न मिले. वह खुशी-खुशी घर पहुंचा, पर पत्नी शर्ट देखकर फिर झगड़ा करने लगी. पत्नी कहने लगे कि मैं समझ गई हूं कि तुम्हारा अब किसी टकली महिला के साथ अफेयर चल रहा है. कई पत्नियां ऐसा ही करती हैं. वे बिना मतलब पति पर शक करती हैं और इससे घर का माहौल बुरी तरह खराब हो जाता है. पति-पत्नी को एक-दूसरे पर भरोसा रखना ही चाहिए. भरोसे से ही रिश्ता चलेगा. कई महिलाएं अपने पति से तो बहुत प्यार करती हैं. पति का तो बहुत ख्याल रखती हैं, पर पति के माता-पिता, भाई-बहन और दूसरे रिश्तेदारों को सम्मान नहीं देतीं. उनसे अच्छी तरह पेश नहीं आती. एक बहुत खतरनाक है. पत्नी का यह व्यवहार पति को बहुत दुखी करता है. पति तभी खुश रहेगा, जब पत्नी उसके परिजनों को सम्मान देगी.
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वर्ष 2022 तक देशभर में पैरा टीचर्स (शिक्षाकर्मी, शिक्षामित्र आदि) व्यवस्था को बंद कर दिया जाएगा। (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के प्रारूप का पेज-172)
प्रारूप में पैरा टीचर्स के समायोजन व सेवा शर्तों में सुधार की बात कहीं भी नहीं कही गयी है, जिसका मतलब है कि लाखों पैरा टीचर्स को स्कूलों से निकाला जा सकता है। उनकी जगह मुफ्त में पढ़ाने वालों का जुगाड़ भी प्रारूप में प्रस्तुत कर दिया गया है।
शिक्षा अनुदेशक, पैरा टीचर, स्वैच्छिक अध्यापक और वे छात्र जो बी.एड करेंगे, स्कूलों में जाकर मुफ्त में बच्चों को पढ़ाएंगे। यदि वे किसी तरह से अध्यापक के लिए सेलैक्ट कर लिए गये तो भी वे कम से कम 3 वर्ष तक प्रोबेशन काल में बहुत कम वेतन पर स्थाई नौकरी की उम्मीद में शिक्षण कार्य करेंगे।
कहा गया है कि यदि समुदाय का प्रत्येक साक्षर सदस्य किसी एक छात्र/व्यक्ति को पढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हो सकता है, तो इससे देश का परिदृश्य बहुत जल्दी बदल जाएगा।
जो बच्चे पढ़ने में पीछे रह जाएंगे तथा स्कूल में उपस्थित नहीं होंगे, उनकी सहायता के लिए रेमेडियल इन्सट्रक्संन एड्स प्रोगाम चलाने की सिफारिश की गयी है। इसके लिए स्थानीय समुदाय से स्नातक या इंटर पास सहायक अनुदेशकों की भर्ती की जाएगी। ये अनुदेशक स्कूल के समय के दौरान तथा लम्बे अवकाश के दिनों में विशेष कक्षाओं का आयोजन करेंगे। ये सहायक अनुदेशक अधिकांश महिलाएं होंगी।
प्रारूप में इन्हें वेतन आदि के भुगतान का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है तथा उनके आगे गाजर लटका दी गयी है। कहा गया है कि ये सहायक अनुदेशक यदि बीएड करना चाहते हैं तो उन्हें उचित प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके बाद अगर वो शिक्षक बनना चाहते हैं तो उन्हें अनुदेशक के रूप में किए गये कार्य के अनुभव को चुनाव में वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही आंगनबाड़ियों और पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में चाइल्डहुड एजुकेशन शिक्षक बनने के लिए भी इनको प्रशिक्षित किया जाएगा।
ये मुफ्त की महिला सहायक अनुदेशक बच्चों को स्कूल तक लाएंगी और पढाएंगी भी, परन्तु उन्हें इसके लिए कोई भी वेतन नहीं दिया जाएगा। कुछ समय काम करने के बाद यदि इनमें से किसी को नौकरी मिल भी गयी तो वह होगी आंगनबाड़ी वर्कर की, जिन्हें सरकार देश में न्यूनतम वेतन तक नहीं देती, जो कि बेहद कम मानदेय पर काम करने को विवश हैं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली हमारे देश की सरकारें महिलाओं का शोषण करने में नम्बर वन हैं। देश का निजी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि देश की केन्द्र व राज्य सरकारें भी महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे बेहद कम वेतन पर काम लेती हैं। इसका मुख्य कारण है कि हमारे देश में महिलाओं की आय को आज भी समाज व परिवारों में मुख्य नहीं, सहायक आय माना जाता है।
यह माना जाता है कि परिवार को चलाने के लिए के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी पुरुष की है। परिवार की आय में कुछ बढ़ोत्तरी हो जाए, इसके लिए महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बेहद कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार हो जाती हैं और इसी का फायदा सरकारें लगातार उठा रही हैं।
मध्याहन भोजन योजना के अंतर्गत खाना पकाने वाली भोजनमाताओं को सरकार मात्र 2 हजार रुपए का मासिक वेतन देती है, वह भी 11 माह का, जबकि सरकार ने न्यूनतम वेतन 8200 रुपए प्रतिमाह घोषित किया हुया है। यह काम केवल भाजपा की सरकारें ही नहीं कर रही हैं। कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा व आप जैसे सभी राजनीतिक दलों की सरकारें इस मामले में महिला कर्मचारियों का इसी तरह से शोषण करती हैं।
भोजन माता, आंगनबाड़ी कार्यकत्री व आशा वर्कर आदि आज भी न्यूनतम वेतन दिये जाने व स्वयं को सरकारी कर्मचारी घोषित किये जाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। सरकार ने इस शिक्षा नीति में मुफ्तखोरी के कई और भी इंतजाम किए हुए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके साथ वाले बच्चे जो बड़ी कक्षाओं में पढ़ते हैं, उन्हें भी नेशनल ट्यूटरस कार्यक्रम के तहत एक प्रमाणपत्र के बदले में पढ़ाने की योजना प्रस्तुत की गयी है।
कहा गया है कि स्वैच्छिक कार्यकर्ता- सेवानिवृत्त शिक्षक और सेना के अधिकारी, पड़ोसी स्कूल के योग्य छात्र इत्यादि भी बड़े पैमाने पर गैर लाभकारी तरीके से देश के लिए सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाएंगे।
प्रारूप में बताया गया है कि देश में शिक्षकों के 10 लाख पद रिक्त हैं, परन्तु इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की कोई भी कार्य योजना प्रस्तावित नहीं की गयी है।
प्रारूप में कहा गया है कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था, भर्ती और पदस्थापन प्रणाली, सेवा की शर्तें, पेशेवर विकास और कैरियर मैनेजमेंट की भूमिकाओं में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।
शिक्षण के लिए 4 वर्षीय लिबरल एकीकृत बीएड डिग्री न्यूनतम योग्यता शर्त निर्धारित की गयी है। जिनके पास किसी खास विषय से स्नातक डिग्री होगी उनके लिए दो वर्षीय बीएड का कोर्स उपलब्ध होगा। जिनके पास किसी एक विषय की स्नातकोत्तर डिग्री होगी और वह उस विशेष विषय का शिक्षक बनना चाहते हैं, उनके लिए एक वर्ष का बीएड कार्यक्रम उपलब्ध होगा।
बी. एड. डिग्री बहु अनुशासनिक/बहुविषयक संस्थानों द्वारा ही उपलब्ध कराई जाएंगी। देश में मौजूद एकल शिक्षक शिक्षा संस्थानों को जल्द से जल्द बंद कर दिने की बात कही गयी है। देश में इस तरह के संस्थानों की संख्या पेज 159 पर 17 हजार बतायी गयी है, जिसमें 92 प्रतिशत निजी स्वामित्व वाले संस्थान हैं।
बीएड करने के बाद अध्यापक बनने के लिए व्यक्ति को टीईटी (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट)की परीक्षा व एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेन्सी) की परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। कहा गया है कि लिखित परीक्षाओं से शिक्षक की स्थानीय भाषा व जोश और उत्साह को नहीं आंका जा सकता, इसलिए इच्छुक शिक्षक के लिए दूसरे चरण की स्क्रीनिंग (चयन प्रक्रिया) स्थापित की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत व्यक्ति को पहले साक्षात्कार देना होगा व कक्षा में जाकर शिक्षण प्रदर्शन (क्लास डेमो) करना होगा।
शिक्षकों को टेन्योर ट्रैक सिस्टम के तहत 3 वर्ष के लिए प्रोबेशन/कार्यकाल पर रखा जाएगा। इसके बाद उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर उनका स्थायीकरण किया जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के लिए प्रोबेशन की अवधि कम से कम 5 वर्ष निर्धारित की गयी है।
शिक्षक बनने के लिए उक्त प्रक्रिया निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा भी अपनायी जाएगी। प्रारूप में देश में चल रहे 17 हजार एकल शिक्षा संस्थानों के बारे में टिप्पणी की गयी है कि ये व्यावसायिक दुकानों की तरह काम कर रही हैं। जहां न्यूनतम पाठ्यक्रम और कार्यक्रम की जरुरतों की भी पूर्ति नहीं की जाती और यहां सिर्फ डिग्रियों की खरीद-फरोख्त होती है।
देश में ऐसा कौन सा निजी शिक्षण संस्थान है, जो व्यावसायिक दुकानों की तरह से काम नहीं करता। निश्चित ही देश में शिक्षा के नाम पर चल रहीं सभी व्यावसायिक दुकानें नहीं चलने देनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि यदि व्यक्ति बीमार है तो उसका इलाज करने की जगह उसकी हत्या कर दी जाए।
17 हजार शिक्षा संस्थान यदि बीमार हैं तो उन्हें बंद करना रास्ता नहीं है। रास्ता है सरकार उनको अधिग्रहित कर ले और उन्हें स्वयं चलाए, उनकी गुणवत्ता में सुधार करे। परन्तु सरकार ऐसा करेगी नहीं क्योंकि वह एक निर्णय ले चुकी है कि शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाने के लिए विदेशी संस्थानों को खुली छूट दी जाएगी। इसीलिए कहा जा रहा है कि शिक्षक शिक्षा मात्र बहुहुअनुशासनिक संस्थानों में ही दी जाएगी। ये सबकुछ देश के कोरपोरेट व साम्राज्यवादी लुटेरों के हितों के लिए किया जा रहा है। इसकी सच्चाई को समझने की जरूरत है।
(मुनीष कुमार समाजवादी लोक मंच के सह संयोजक हैं।)
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वर्ष दो हज़ार बाईस तक देशभर में पैरा टीचर्स व्यवस्था को बंद कर दिया जाएगा। प्रारूप में पैरा टीचर्स के समायोजन व सेवा शर्तों में सुधार की बात कहीं भी नहीं कही गयी है, जिसका मतलब है कि लाखों पैरा टीचर्स को स्कूलों से निकाला जा सकता है। उनकी जगह मुफ्त में पढ़ाने वालों का जुगाड़ भी प्रारूप में प्रस्तुत कर दिया गया है। शिक्षा अनुदेशक, पैरा टीचर, स्वैच्छिक अध्यापक और वे छात्र जो बी.एड करेंगे, स्कूलों में जाकर मुफ्त में बच्चों को पढ़ाएंगे। यदि वे किसी तरह से अध्यापक के लिए सेलैक्ट कर लिए गये तो भी वे कम से कम तीन वर्ष तक प्रोबेशन काल में बहुत कम वेतन पर स्थाई नौकरी की उम्मीद में शिक्षण कार्य करेंगे। कहा गया है कि यदि समुदाय का प्रत्येक साक्षर सदस्य किसी एक छात्र/व्यक्ति को पढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हो सकता है, तो इससे देश का परिदृश्य बहुत जल्दी बदल जाएगा। जो बच्चे पढ़ने में पीछे रह जाएंगे तथा स्कूल में उपस्थित नहीं होंगे, उनकी सहायता के लिए रेमेडियल इन्सट्रक्संन एड्स प्रोगाम चलाने की सिफारिश की गयी है। इसके लिए स्थानीय समुदाय से स्नातक या इंटर पास सहायक अनुदेशकों की भर्ती की जाएगी। ये अनुदेशक स्कूल के समय के दौरान तथा लम्बे अवकाश के दिनों में विशेष कक्षाओं का आयोजन करेंगे। ये सहायक अनुदेशक अधिकांश महिलाएं होंगी। प्रारूप में इन्हें वेतन आदि के भुगतान का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है तथा उनके आगे गाजर लटका दी गयी है। कहा गया है कि ये सहायक अनुदेशक यदि बीएड करना चाहते हैं तो उन्हें उचित प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके बाद अगर वो शिक्षक बनना चाहते हैं तो उन्हें अनुदेशक के रूप में किए गये कार्य के अनुभव को चुनाव में वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही आंगनबाड़ियों और पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में चाइल्डहुड एजुकेशन शिक्षक बनने के लिए भी इनको प्रशिक्षित किया जाएगा। ये मुफ्त की महिला सहायक अनुदेशक बच्चों को स्कूल तक लाएंगी और पढाएंगी भी, परन्तु उन्हें इसके लिए कोई भी वेतन नहीं दिया जाएगा। कुछ समय काम करने के बाद यदि इनमें से किसी को नौकरी मिल भी गयी तो वह होगी आंगनबाड़ी वर्कर की, जिन्हें सरकार देश में न्यूनतम वेतन तक नहीं देती, जो कि बेहद कम मानदेय पर काम करने को विवश हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली हमारे देश की सरकारें महिलाओं का शोषण करने में नम्बर वन हैं। देश का निजी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि देश की केन्द्र व राज्य सरकारें भी महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे बेहद कम वेतन पर काम लेती हैं। इसका मुख्य कारण है कि हमारे देश में महिलाओं की आय को आज भी समाज व परिवारों में मुख्य नहीं, सहायक आय माना जाता है। यह माना जाता है कि परिवार को चलाने के लिए के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी पुरुष की है। परिवार की आय में कुछ बढ़ोत्तरी हो जाए, इसके लिए महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बेहद कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार हो जाती हैं और इसी का फायदा सरकारें लगातार उठा रही हैं। मध्याहन भोजन योजना के अंतर्गत खाना पकाने वाली भोजनमाताओं को सरकार मात्र दो हजार रुपए का मासिक वेतन देती है, वह भी ग्यारह माह का, जबकि सरकार ने न्यूनतम वेतन आठ हज़ार दो सौ रुपयापए प्रतिमाह घोषित किया हुया है। यह काम केवल भाजपा की सरकारें ही नहीं कर रही हैं। कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा व आप जैसे सभी राजनीतिक दलों की सरकारें इस मामले में महिला कर्मचारियों का इसी तरह से शोषण करती हैं। भोजन माता, आंगनबाड़ी कार्यकत्री व आशा वर्कर आदि आज भी न्यूनतम वेतन दिये जाने व स्वयं को सरकारी कर्मचारी घोषित किये जाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। सरकार ने इस शिक्षा नीति में मुफ्तखोरी के कई और भी इंतजाम किए हुए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके साथ वाले बच्चे जो बड़ी कक्षाओं में पढ़ते हैं, उन्हें भी नेशनल ट्यूटरस कार्यक्रम के तहत एक प्रमाणपत्र के बदले में पढ़ाने की योजना प्रस्तुत की गयी है। कहा गया है कि स्वैच्छिक कार्यकर्ता- सेवानिवृत्त शिक्षक और सेना के अधिकारी, पड़ोसी स्कूल के योग्य छात्र इत्यादि भी बड़े पैमाने पर गैर लाभकारी तरीके से देश के लिए सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाएंगे। प्रारूप में बताया गया है कि देश में शिक्षकों के दस लाख पद रिक्त हैं, परन्तु इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की कोई भी कार्य योजना प्रस्तावित नहीं की गयी है। प्रारूप में कहा गया है कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था, भर्ती और पदस्थापन प्रणाली, सेवा की शर्तें, पेशेवर विकास और कैरियर मैनेजमेंट की भूमिकाओं में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे। शिक्षण के लिए चार वर्षीय लिबरल एकीकृत बीएड डिग्री न्यूनतम योग्यता शर्त निर्धारित की गयी है। जिनके पास किसी खास विषय से स्नातक डिग्री होगी उनके लिए दो वर्षीय बीएड का कोर्स उपलब्ध होगा। जिनके पास किसी एक विषय की स्नातकोत्तर डिग्री होगी और वह उस विशेष विषय का शिक्षक बनना चाहते हैं, उनके लिए एक वर्ष का बीएड कार्यक्रम उपलब्ध होगा। बी. एड. डिग्री बहु अनुशासनिक/बहुविषयक संस्थानों द्वारा ही उपलब्ध कराई जाएंगी। देश में मौजूद एकल शिक्षक शिक्षा संस्थानों को जल्द से जल्द बंद कर दिने की बात कही गयी है। देश में इस तरह के संस्थानों की संख्या पेज एक सौ उनसठ पर सत्रह हजार बतायी गयी है, जिसमें बानवे प्रतिशत निजी स्वामित्व वाले संस्थान हैं। बीएड करने के बाद अध्यापक बनने के लिए व्यक्ति को टीईटी की परीक्षा व एनटीए की परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। कहा गया है कि लिखित परीक्षाओं से शिक्षक की स्थानीय भाषा व जोश और उत्साह को नहीं आंका जा सकता, इसलिए इच्छुक शिक्षक के लिए दूसरे चरण की स्क्रीनिंग स्थापित की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत व्यक्ति को पहले साक्षात्कार देना होगा व कक्षा में जाकर शिक्षण प्रदर्शन करना होगा। शिक्षकों को टेन्योर ट्रैक सिस्टम के तहत तीन वर्ष के लिए प्रोबेशन/कार्यकाल पर रखा जाएगा। इसके बाद उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर उनका स्थायीकरण किया जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के लिए प्रोबेशन की अवधि कम से कम पाँच वर्ष निर्धारित की गयी है। शिक्षक बनने के लिए उक्त प्रक्रिया निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा भी अपनायी जाएगी। प्रारूप में देश में चल रहे सत्रह हजार एकल शिक्षा संस्थानों के बारे में टिप्पणी की गयी है कि ये व्यावसायिक दुकानों की तरह काम कर रही हैं। जहां न्यूनतम पाठ्यक्रम और कार्यक्रम की जरुरतों की भी पूर्ति नहीं की जाती और यहां सिर्फ डिग्रियों की खरीद-फरोख्त होती है। देश में ऐसा कौन सा निजी शिक्षण संस्थान है, जो व्यावसायिक दुकानों की तरह से काम नहीं करता। निश्चित ही देश में शिक्षा के नाम पर चल रहीं सभी व्यावसायिक दुकानें नहीं चलने देनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि यदि व्यक्ति बीमार है तो उसका इलाज करने की जगह उसकी हत्या कर दी जाए। सत्रह हजार शिक्षा संस्थान यदि बीमार हैं तो उन्हें बंद करना रास्ता नहीं है। रास्ता है सरकार उनको अधिग्रहित कर ले और उन्हें स्वयं चलाए, उनकी गुणवत्ता में सुधार करे। परन्तु सरकार ऐसा करेगी नहीं क्योंकि वह एक निर्णय ले चुकी है कि शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ाने के लिए विदेशी संस्थानों को खुली छूट दी जाएगी। इसीलिए कहा जा रहा है कि शिक्षक शिक्षा मात्र बहुहुअनुशासनिक संस्थानों में ही दी जाएगी। ये सबकुछ देश के कोरपोरेट व साम्राज्यवादी लुटेरों के हितों के लिए किया जा रहा है। इसकी सच्चाई को समझने की जरूरत है।
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द्रष्टा खप्ने च महीयमानश्चरति
स एष सुप्तः समस्तः सम्प्रसन्नः स्वमं न विजानात्येष आत्मेति
स्वाभिप्रेतमेव ।
। हुआ विचरता है वह जब सो जानेपर दर्शनवृत्तिसे रहित और अत्यन्त आनन्दित होकर खप्न नहीं देखता तो वही आत्मा है, यह अमृत और अभय है और यही ब्रह्म है' इस प्रकार प्रजापतिने अपना अभिप्राय ही बतलाया ।
मघवांस्तत्रापि दोषं ददर्श ।
कथम् 'नाह नैव सुषुप्तस्थोऽप्या- । त्मा खल्वयं सम्प्रति सम्यगिदानीं चात्मानं जानाति नैवं
किन्तु इन्द्रने उसमें भी दोष देखा। सो किस प्रकार ? - 'यह सुषुप्तस्थ आत्मा भी इस अवस्थामें निश्चय ही अपनेको इस प्रकार नहीं जानता । किस प्रकार नही जानता ? - कि 'मैं यह हूँ' और न यह अन्य भूतोंको ही जानता है; जैसा कि यह जाग्रत् और स्वप्न अवस्थाओमें जानता था । अतः यह मानो
जानाति । कथम् ? अयमहमस्मीति नो एवेमानि भूतानि चेति, यथा जाग्रति स्वप्ने वा ।
अतो विनाशमेव विनाशमिवेति विनाशको अपीत - प्राप्त हो जाता पूर्वत्रद्रष्टव्यम् । अपीतोऽपि गतो है; तात्पर्य यह है कि विनष्ट-सा हो जाता है । यहाँ पूर्ववत् भवति विनष्ट इव भवतीत्य - 'विनाशमेत्र' के स्थान में 'विनाशमिव ' भिप्रायः । ऐसा समझना चाहिये ।
ज्ञाने हि सति ज्ञातुः सद्भावोऽवगम्यते नासति ज्ञाने । न
च सुषुप्तस्य ज्ञानं दृश्यतेऽतो
विनष्ट इवेत्यभिप्रायः । न तु
ज्ञान होनेपर ही ज्ञाताकी सत्ता जानी जाती है, ज्ञान के अभावमें नही जानी जाती; और सुषुप्त पुरुषको ज्ञान होना देखा नहीं जाता। अतः तात्पर्य यह है कि उस समय यह नष्ट-सा हो जाता है । अमृत और
खण्ड ११ ]
विनाशमेवात्मनो मन्यतेऽमृता- । अभयवचनका प्रामाण्य चाहनेवाले इन्द्रदेव उस अवस्था में आत्माभयवचनस्य प्रामाण्य मिच्छन् । १ ।। का साक्षात् विनाश ही नहीं मानते ॥ १ ॥
स समित्पाणिः पुनरेयाय तह प्रजापतिरुवाच मघवन्यच्छान्तहृदयः प्रात्राजीः किमिच्छन्पुनरागम इति स होवाच नाह खल्वयं भगव एव सम्प्रत्यात्मानं जानात्ययमहमस्मीति नो एवेमानि भूतानि विनाशमेवापीतो भवति नाहमत्र भोग्यं पश्यामीति ॥ २ ॥
वे समित्पाणि होकर पुनः प्रजापतिके पास आये । उनसे प्रजापतिने कहा - ' इन्द्र ! तुम तो शान्तचित्तसे गये थे, अब किस इच्छासे तुम्हारा पुनः आगमन हुआ है ।' इन्द्रने कहा - 'भगवन् ! इस अवस्था - में तो निश्चय ही इसे यह भी ज्ञान नही होता कि 'यह मै हूँ' और न यह इन अन्य भूतोंको ही जानता है, यह विनाशको प्राप्त सा हो जाता है। इसमें मुझे इष्टफल दिखायी नहीं देता' ॥ २ ॥
पहलेहोके समान -
एवमेवैष मघवन्निति होवाचैतं त्वेव ते भूयोऽनुव्याख्यास्यामि नो एवान्यत्रैतस्माद्वसापराणि पञ्च वर्षाणीति
स हापराणि पञ्च वर्षाण्युवास तान्येकशत सम्पेदुरेतत्तद्यदाहुरेकशत ह वै वर्षाणि मघवान्प्रजापतौ ब्रह्मचर्यमुवास तस्मै होवाच ॥ ३ ॥
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द्रष्टा खप्ने च महीयमानश्चरति स एष सुप्तः समस्तः सम्प्रसन्नः स्वमं न विजानात्येष आत्मेति स्वाभिप्रेतमेव । । हुआ विचरता है वह जब सो जानेपर दर्शनवृत्तिसे रहित और अत्यन्त आनन्दित होकर खप्न नहीं देखता तो वही आत्मा है, यह अमृत और अभय है और यही ब्रह्म है' इस प्रकार प्रजापतिने अपना अभिप्राय ही बतलाया । मघवांस्तत्रापि दोषं ददर्श । कथम् 'नाह नैव सुषुप्तस्थोऽप्या- । त्मा खल्वयं सम्प्रति सम्यगिदानीं चात्मानं जानाति नैवं किन्तु इन्द्रने उसमें भी दोष देखा। सो किस प्रकार ? - 'यह सुषुप्तस्थ आत्मा भी इस अवस्थामें निश्चय ही अपनेको इस प्रकार नहीं जानता । किस प्रकार नही जानता ? - कि 'मैं यह हूँ' और न यह अन्य भूतोंको ही जानता है; जैसा कि यह जाग्रत् और स्वप्न अवस्थाओमें जानता था । अतः यह मानो जानाति । कथम् ? अयमहमस्मीति नो एवेमानि भूतानि चेति, यथा जाग्रति स्वप्ने वा । अतो विनाशमेव विनाशमिवेति विनाशको अपीत - प्राप्त हो जाता पूर्वत्रद्रष्टव्यम् । अपीतोऽपि गतो है; तात्पर्य यह है कि विनष्ट-सा हो जाता है । यहाँ पूर्ववत् भवति विनष्ट इव भवतीत्य - 'विनाशमेत्र' के स्थान में 'विनाशमिव ' भिप्रायः । ऐसा समझना चाहिये । ज्ञाने हि सति ज्ञातुः सद्भावोऽवगम्यते नासति ज्ञाने । न च सुषुप्तस्य ज्ञानं दृश्यतेऽतो विनष्ट इवेत्यभिप्रायः । न तु ज्ञान होनेपर ही ज्ञाताकी सत्ता जानी जाती है, ज्ञान के अभावमें नही जानी जाती; और सुषुप्त पुरुषको ज्ञान होना देखा नहीं जाता। अतः तात्पर्य यह है कि उस समय यह नष्ट-सा हो जाता है । अमृत और खण्ड ग्यारह ] विनाशमेवात्मनो मन्यतेऽमृता- । अभयवचनका प्रामाण्य चाहनेवाले इन्द्रदेव उस अवस्था में आत्माभयवचनस्य प्रामाण्य मिच्छन् । एक ।। का साक्षात् विनाश ही नहीं मानते ॥ एक ॥ स समित्पाणिः पुनरेयाय तह प्रजापतिरुवाच मघवन्यच्छान्तहृदयः प्रात्राजीः किमिच्छन्पुनरागम इति स होवाच नाह खल्वयं भगव एव सम्प्रत्यात्मानं जानात्ययमहमस्मीति नो एवेमानि भूतानि विनाशमेवापीतो भवति नाहमत्र भोग्यं पश्यामीति ॥ दो ॥ वे समित्पाणि होकर पुनः प्रजापतिके पास आये । उनसे प्रजापतिने कहा - ' इन्द्र ! तुम तो शान्तचित्तसे गये थे, अब किस इच्छासे तुम्हारा पुनः आगमन हुआ है ।' इन्द्रने कहा - 'भगवन् ! इस अवस्था - में तो निश्चय ही इसे यह भी ज्ञान नही होता कि 'यह मै हूँ' और न यह इन अन्य भूतोंको ही जानता है, यह विनाशको प्राप्त सा हो जाता है। इसमें मुझे इष्टफल दिखायी नहीं देता' ॥ दो ॥ पहलेहोके समान - एवमेवैष मघवन्निति होवाचैतं त्वेव ते भूयोऽनुव्याख्यास्यामि नो एवान्यत्रैतस्माद्वसापराणि पञ्च वर्षाणीति स हापराणि पञ्च वर्षाण्युवास तान्येकशत सम्पेदुरेतत्तद्यदाहुरेकशत ह वै वर्षाणि मघवान्प्रजापतौ ब्रह्मचर्यमुवास तस्मै होवाच ॥ तीन ॥
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ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी. गोस्वामी तुलसीदास ने बहुत पहले ही कह दिया था. रामायण में भी जगज्जननी सीता की अग्नि परीक्षा के बाद भी धोबी के द्वारा लांछना देने पर राजमहल से निर्वासित कर जंगल में भेज दिया गया, वह भी गर्भावस्था में. अहिल्या प्रकरण से भी हम सभी परिचित हैं. द्रौपदी के साथ क्या हुआ, हम सभी वाकिफ हैं. पुराणों के समय से महिलाओं और शूद्रों की अवहेलना होती रही है. इतिहास में भी महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है. इतिहास में भी महिलाओं के साथ बहुत भद्रता से पेश नहीं आया गया. सती प्रथा उन्मूलन, विधवा विवाह प्रारंभ और बाल विवाह उन्मूलन आदि कार्यक्रम महिलाओं की ख़राब स्थिति को देखते हुए ही चलाये किये गए. काफी वेश्याएं मजबूरीवश ही यह पेशा अपनाती हैं. कोठे पर जानेवाले तो शरीफ और खानदानी होते हैं. पर वेश्याओं को कभी भी अच्छी नजर से नहीं देखा गया. कमोबेश आज भी स्थिति वही है.
हालांकि पहले भी और आज भी महिलाएं सम्मान और सम्मानजनक पद भी पा चुकी है. पहले भी देवियाँ थी और आज भी वे पूज्य हैं. आज भी अनेकों महिलाएं कई सम्मानजनक पद को सुशोभित कर चुकी हैं. प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्य मंत्री से लेकर कई पार्टियों की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. इसके अलावा कई जिम्मेदार पदों पर रहकर अपनी भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन का रही हैं. प्रधान मंत्री रह चुकी इंदिरा गाँधी को विश्व की ताकतवर हस्तियों में गणना की जाती रही है. पर लांछन लगानेवाले उनके भी चरित्रहनन से बाज नहीं आये. सोनिया गाँधी पर भी खूब प्रहार किये गए. एक दिवंगत भाजपा नेता ने उनकी तुलना मोनिका लेवेस्की से कर दी थी. वर्तमान सरकार के मुखर मंत्री भी सोनिया गाँधी पर अमर्यादित टिप्पणी कर चुके हैं. महिला हैं, यह सब सुनना/सहना पड़ेगा. महिलाओं, वृद्धाओं, बच्चियों के साथ हो रहे घृणित कर्मों से समाचार पत्र भरे रहते हैं. निर्भया योजना, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ आदि योजनाओं के होते हुए भी महिलाओं पर ज्यादती हो रही है और कब तक होती रहेगी कहना मुश्किल है. भाजपा की वर्तमान सरकार की पूर्व मानव संशाधन विकास मंत्री (वर्तमान कपड़ा मंत्री) पर भी बीच-बीच में फब्तियां कसी जाती रही हैं. हालाँकि वे स्वयम मुखर हैं और वे अपना बचाव करती रही हैं.
वर्तमान सन्दर्भ है, मायावाती को भाजपा के उत्तर प्रदेश के पार्टी उपाध्यक्ष श्री दया शंकर सिंह ने उन्हें सार्वजनिक सभा में वेश्या कहा. मायावती ने इसका पुरजोर विरोध किया. संसद में खूब दहाड़ी और अपने कार्यकर्ताओं को भी एक तरह से ललकार दिया कि वे सड़कों पर उतर आयें और विरोध प्रदर्शन करें. हालाँकि दयाशंकर सिंह ने माफी मांग ली पर उनपर कई धाराएं लगाकर प्राथमिकी दर्ज कर दी गयी है. उन्हें गिरफ्तार करने के लिए यु पी पुलिस ढूंढ रही है, पर वे तो अंडरग्राउंड हो गए. हालाँकि एक प्रेस को उन्होंने साक्षात्कार भी इसी बीच दे दिया है और फिर से माफी मांग ली है और यह भी कहा है कि उनकी गलती की सजा उनकी पत्नी और बेटी को क्यों दी जा रही है? उल्लेखनीय है कि मायावती की शह पाकर बसपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने दयाशंकर की पत्नी और उनकी १२ वर्षीय बेटी को भी अपमान जनक शब्दों से नवाजा. दयाशंकर की बेटी सदमे में हैं और उनकी पत्नी स्वाति सिंह उत्तेजित. उन्होंने मायावती और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं. धरने पर बैठने की तैयारी में थी, पर शायद बेटी की तबीयत ज्यादा ख़राब हो गयी इसलिए फिलहाल धरने का कार्यक्रम टाल दिया है. पर मीडिया में वह भी मायावती पर खूब हमला कर रही है. स्वाति जी सुशिक्षित, LLB और पूर्व लेक्चरर भी हैं भाजपा प्रदेश के उपाद्ध्यक्ष की पत्नी हैं. इसलिए मायावती पर वह भी जमकर प्रहार कर रही हैं. उनका आक्रोश भी खूब झलक रहा है. वह मायावती और उनके कार्यकर्ताओं पर हमलावर हैं, पर अपने पति के द्वारा प्रयुक्त शब्द पर उनका जवाब रक्षात्मक ही है. कुछ लोग उनमें राजनीतिक नेत्री की छवि भीं देख रहे हैं. क्योंकि दयाशंकर के पार्टी से ६ साल के निष्कासन पर उनकी जगह वही भर सकती हैं और एक खास वर्ग के वोटों की हकदार हो सकती हैं.
रविवार, २४ जुलाई को मायावती का प्रेस कांफ्रेंस हुआ उसमें मायावती ने भाजपा पर जमकर प्रहार किया साथ ही दयाशंकर की माँ, बहन और पत्नी को भी दोहरी मानसिकता की शिकार बताया. जबकि बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी का बचाव करती नजर आयीं. मायावती के अनुसार नसीमुदीन ने कोई गलत शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था. वे तो दयाशंकर को पेश करने की मांग कर रहे थे. गुजरात के ऊना में दलितों के साथ हुए प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया. रोहित वेमुला केस को भी उन्होंने कुरेदा और यह अहसास करवाया कि भाजपा दलित विरोधी पार्टी है. बसपा एक राजनीतिक पार्टी के साथ एक सामाजिक परिवर्तन की भी पैरोकार है. मायावती ने सपा और भाजपा की मिलीभगत की तरफ भी इशारा किया. क्योंकि अब तक दयाशंकर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है? इस मामले में प्रधान मंत्री की चुप्पी भी विपक्ष को प्रश्न उठाने का मौका दे देता है.
जाहिर है मामला राजनीतिक है और इसे दोनों पार्टियाँ अपने-अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि मायावती खुद दलित विरोधी हैं और उन्हें चुनाव के समय ही दलितों की याद आती है. भाजपा भी दलितों के घर खाना खाकर, बाबा साहेब अम्बेडकर की १२५ जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम करके बसपा के वोट बैंक दलित समाज में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं. अब तो चुनाव परिणाम ही बताएगा कि दलित वोट किधर जाता है?
उधर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानुतल्ला खान को एक महिला की साथ बदसलूकी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. ख़बरों के अनुसार अबतक आम आदमी पार्टी के नौवें विधायक गिरफ्तार हो चुके हैं. शाम तक आम आदमी पार्टी के एक और विधायक नरेश यादव को भी पंजाब में विद्वेष फ़ैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. आम आदमी पार्टी पर कानून का शिकंजा शख्ती से लागू होता है. पर भाजपा के पदाधिकारी को पुलिस ढूढ़ ही नहीं पाती है. एक और बिहार भाजपा के पार्षद(एमएलसी) टुन्ना पाण्डेय पर किसी १२ वर्षीय लड़की के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ का आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. उसे भी भाजपा ने तत्काल पार्टी से निलंबित कर दिया. इससे यह जाहिर होता है कि भाजपा फिलहाल अपनी छवि को बेदाग रखना चाहती है.
अब थोड़ी चर्चा मानसून की कर ली जाय. इस साल पहले से ही अच्छे मानसून की भविष्यवाणी की जा रही थी. मानसून अच्छी हो भी रही है. कहीं-कहीं खासकर उत्तर भारत में अतिबृष्टि हो रही है. अतिबृष्टि से जान-माल का भी काफी नुकसान हो रहा है. बिहार झाड़खंड में देर से ही सही पर अभी अच्छी वर्षा हो रही है. खरीफ की अच्छी पैदावार की उम्मीद की जा सकती है. पर वर्तमान में दाल और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, इस पर सरकार का कोई खास नियंत्रण नहीं है. सब्जियों और खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण और रख-रखाव के मामले में भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है. किसानों को उनकी लागत के अनुसार दाम नहीं मिलते, इसलिए वे खेती-बारी की पेशा से दूर होते जा रहे हैं. उपजाऊ जमीन या तो बेकार हैं या वहाँ अब ऊंचे ऊंचे महल बन गए हैं. गाँव में भी शहर बसाये जा रहे हैं. विकास के दौर में कृषि का अपेक्षित विकास नहीं हो रहा है. भारत गांवों का देश है, अभी भी लगभग ७० प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है. कृषि और कृषि आधारित उनका पेशा है पर वे गरीब हैं. ऋण ग्रस्त हैं. इसलिए वे असंतोष की आग में आत्महत्या करने को भी मजबूर हैं. सच कहा जाय तो दलित और पिछड़ा वही हैं. कब मिलेगी उन्हें इस दलितपने और निर्धनपने से आजादी! पूरे देश को खाना खिलानेवाला वर्ग आज स्वयम भूखा नंगा है. खोखले वादों से तो कुछ भला नहीं होनेवाला. जमीनी स्तर पर काम होने चाहिए. सामाजिक समरसता और समान वितरण प्रणाली से ही सबका भला होगा. तभी होगा जय भारत और भारत माता की जय!
- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.
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ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी. गोस्वामी तुलसीदास ने बहुत पहले ही कह दिया था. रामायण में भी जगज्जननी सीता की अग्नि परीक्षा के बाद भी धोबी के द्वारा लांछना देने पर राजमहल से निर्वासित कर जंगल में भेज दिया गया, वह भी गर्भावस्था में. अहिल्या प्रकरण से भी हम सभी परिचित हैं. द्रौपदी के साथ क्या हुआ, हम सभी वाकिफ हैं. पुराणों के समय से महिलाओं और शूद्रों की अवहेलना होती रही है. इतिहास में भी महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है. इतिहास में भी महिलाओं के साथ बहुत भद्रता से पेश नहीं आया गया. सती प्रथा उन्मूलन, विधवा विवाह प्रारंभ और बाल विवाह उन्मूलन आदि कार्यक्रम महिलाओं की ख़राब स्थिति को देखते हुए ही चलाये किये गए. काफी वेश्याएं मजबूरीवश ही यह पेशा अपनाती हैं. कोठे पर जानेवाले तो शरीफ और खानदानी होते हैं. पर वेश्याओं को कभी भी अच्छी नजर से नहीं देखा गया. कमोबेश आज भी स्थिति वही है. हालांकि पहले भी और आज भी महिलाएं सम्मान और सम्मानजनक पद भी पा चुकी है. पहले भी देवियाँ थी और आज भी वे पूज्य हैं. आज भी अनेकों महिलाएं कई सम्मानजनक पद को सुशोभित कर चुकी हैं. प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्य मंत्री से लेकर कई पार्टियों की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. इसके अलावा कई जिम्मेदार पदों पर रहकर अपनी भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन का रही हैं. प्रधान मंत्री रह चुकी इंदिरा गाँधी को विश्व की ताकतवर हस्तियों में गणना की जाती रही है. पर लांछन लगानेवाले उनके भी चरित्रहनन से बाज नहीं आये. सोनिया गाँधी पर भी खूब प्रहार किये गए. एक दिवंगत भाजपा नेता ने उनकी तुलना मोनिका लेवेस्की से कर दी थी. वर्तमान सरकार के मुखर मंत्री भी सोनिया गाँधी पर अमर्यादित टिप्पणी कर चुके हैं. महिला हैं, यह सब सुनना/सहना पड़ेगा. महिलाओं, वृद्धाओं, बच्चियों के साथ हो रहे घृणित कर्मों से समाचार पत्र भरे रहते हैं. निर्भया योजना, महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ आदि योजनाओं के होते हुए भी महिलाओं पर ज्यादती हो रही है और कब तक होती रहेगी कहना मुश्किल है. भाजपा की वर्तमान सरकार की पूर्व मानव संशाधन विकास मंत्री पर भी बीच-बीच में फब्तियां कसी जाती रही हैं. हालाँकि वे स्वयम मुखर हैं और वे अपना बचाव करती रही हैं. वर्तमान सन्दर्भ है, मायावाती को भाजपा के उत्तर प्रदेश के पार्टी उपाध्यक्ष श्री दया शंकर सिंह ने उन्हें सार्वजनिक सभा में वेश्या कहा. मायावती ने इसका पुरजोर विरोध किया. संसद में खूब दहाड़ी और अपने कार्यकर्ताओं को भी एक तरह से ललकार दिया कि वे सड़कों पर उतर आयें और विरोध प्रदर्शन करें. हालाँकि दयाशंकर सिंह ने माफी मांग ली पर उनपर कई धाराएं लगाकर प्राथमिकी दर्ज कर दी गयी है. उन्हें गिरफ्तार करने के लिए यु पी पुलिस ढूंढ रही है, पर वे तो अंडरग्राउंड हो गए. हालाँकि एक प्रेस को उन्होंने साक्षात्कार भी इसी बीच दे दिया है और फिर से माफी मांग ली है और यह भी कहा है कि उनकी गलती की सजा उनकी पत्नी और बेटी को क्यों दी जा रही है? उल्लेखनीय है कि मायावती की शह पाकर बसपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने दयाशंकर की पत्नी और उनकी बारह वर्षीय बेटी को भी अपमान जनक शब्दों से नवाजा. दयाशंकर की बेटी सदमे में हैं और उनकी पत्नी स्वाति सिंह उत्तेजित. उन्होंने मायावती और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं. धरने पर बैठने की तैयारी में थी, पर शायद बेटी की तबीयत ज्यादा ख़राब हो गयी इसलिए फिलहाल धरने का कार्यक्रम टाल दिया है. पर मीडिया में वह भी मायावती पर खूब हमला कर रही है. स्वाति जी सुशिक्षित, LLB और पूर्व लेक्चरर भी हैं भाजपा प्रदेश के उपाद्ध्यक्ष की पत्नी हैं. इसलिए मायावती पर वह भी जमकर प्रहार कर रही हैं. उनका आक्रोश भी खूब झलक रहा है. वह मायावती और उनके कार्यकर्ताओं पर हमलावर हैं, पर अपने पति के द्वारा प्रयुक्त शब्द पर उनका जवाब रक्षात्मक ही है. कुछ लोग उनमें राजनीतिक नेत्री की छवि भीं देख रहे हैं. क्योंकि दयाशंकर के पार्टी से छः साल के निष्कासन पर उनकी जगह वही भर सकती हैं और एक खास वर्ग के वोटों की हकदार हो सकती हैं. रविवार, चौबीस जुलाई को मायावती का प्रेस कांफ्रेंस हुआ उसमें मायावती ने भाजपा पर जमकर प्रहार किया साथ ही दयाशंकर की माँ, बहन और पत्नी को भी दोहरी मानसिकता की शिकार बताया. जबकि बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी का बचाव करती नजर आयीं. मायावती के अनुसार नसीमुदीन ने कोई गलत शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था. वे तो दयाशंकर को पेश करने की मांग कर रहे थे. गुजरात के ऊना में दलितों के साथ हुए प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया. रोहित वेमुला केस को भी उन्होंने कुरेदा और यह अहसास करवाया कि भाजपा दलित विरोधी पार्टी है. बसपा एक राजनीतिक पार्टी के साथ एक सामाजिक परिवर्तन की भी पैरोकार है. मायावती ने सपा और भाजपा की मिलीभगत की तरफ भी इशारा किया. क्योंकि अब तक दयाशंकर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है? इस मामले में प्रधान मंत्री की चुप्पी भी विपक्ष को प्रश्न उठाने का मौका दे देता है. जाहिर है मामला राजनीतिक है और इसे दोनों पार्टियाँ अपने-अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि मायावती खुद दलित विरोधी हैं और उन्हें चुनाव के समय ही दलितों की याद आती है. भाजपा भी दलितों के घर खाना खाकर, बाबा साहेब अम्बेडकर की एक सौ पच्चीस जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम करके बसपा के वोट बैंक दलित समाज में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं. अब तो चुनाव परिणाम ही बताएगा कि दलित वोट किधर जाता है? उधर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानुतल्ला खान को एक महिला की साथ बदसलूकी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. ख़बरों के अनुसार अबतक आम आदमी पार्टी के नौवें विधायक गिरफ्तार हो चुके हैं. शाम तक आम आदमी पार्टी के एक और विधायक नरेश यादव को भी पंजाब में विद्वेष फ़ैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. आम आदमी पार्टी पर कानून का शिकंजा शख्ती से लागू होता है. पर भाजपा के पदाधिकारी को पुलिस ढूढ़ ही नहीं पाती है. एक और बिहार भाजपा के पार्षद टुन्ना पाण्डेय पर किसी बारह वर्षीय लड़की के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ का आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. उसे भी भाजपा ने तत्काल पार्टी से निलंबित कर दिया. इससे यह जाहिर होता है कि भाजपा फिलहाल अपनी छवि को बेदाग रखना चाहती है. अब थोड़ी चर्चा मानसून की कर ली जाय. इस साल पहले से ही अच्छे मानसून की भविष्यवाणी की जा रही थी. मानसून अच्छी हो भी रही है. कहीं-कहीं खासकर उत्तर भारत में अतिबृष्टि हो रही है. अतिबृष्टि से जान-माल का भी काफी नुकसान हो रहा है. बिहार झाड़खंड में देर से ही सही पर अभी अच्छी वर्षा हो रही है. खरीफ की अच्छी पैदावार की उम्मीद की जा सकती है. पर वर्तमान में दाल और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, इस पर सरकार का कोई खास नियंत्रण नहीं है. सब्जियों और खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण और रख-रखाव के मामले में भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है. किसानों को उनकी लागत के अनुसार दाम नहीं मिलते, इसलिए वे खेती-बारी की पेशा से दूर होते जा रहे हैं. उपजाऊ जमीन या तो बेकार हैं या वहाँ अब ऊंचे ऊंचे महल बन गए हैं. गाँव में भी शहर बसाये जा रहे हैं. विकास के दौर में कृषि का अपेक्षित विकास नहीं हो रहा है. भारत गांवों का देश है, अभी भी लगभग सत्तर प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है. कृषि और कृषि आधारित उनका पेशा है पर वे गरीब हैं. ऋण ग्रस्त हैं. इसलिए वे असंतोष की आग में आत्महत्या करने को भी मजबूर हैं. सच कहा जाय तो दलित और पिछड़ा वही हैं. कब मिलेगी उन्हें इस दलितपने और निर्धनपने से आजादी! पूरे देश को खाना खिलानेवाला वर्ग आज स्वयम भूखा नंगा है. खोखले वादों से तो कुछ भला नहीं होनेवाला. जमीनी स्तर पर काम होने चाहिए. सामाजिक समरसता और समान वितरण प्रणाली से ही सबका भला होगा. तभी होगा जय भारत और भारत माता की जय! - जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.
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आ समाज केवल एक बात से काँप उठता है - जब उसके नीचे किसी दूसरे समाज की ठठरियाँ हिलती हैं, जब दबा हुआ वर्ग गतिमान होने लगता है, तब ऊपरी वर्ग के पाॅॉव डगमगाते हैं, भविष्य की घोर आशंका मड़रा उठती है। यानी नींव हिलती है, इमारत का हर छोर कॉप उठता है।
जीवतराम मलकानी की आँखों के सामने कुछ घूमता है, उभरता है। आज तक तो ऐसा नहीं हुआ। क्या यह संभव है कि ये गंदे मजदूर विद्रोह कर दें ? क्या चलती हुई इन अधमरी छायाओं में इतनी शक्ति हो सकती है ?
नहीं ! मेरे हाथ में वह शक्ति है जो मनुष्य का गला दबाए रह सकती है, वह प्रवंचना है- हा हा हा ! जो जंजीर है। कोई छूट सकता है इससे ! विद्रोह करेगे, काम पर नहीं आयेगे, तो खायेगे क्या ? और खाने की शक्ति मरे हाथ मे बंद हैपू जी !
किन्तु यह सोचना व्यर्थ है। कौन कहता था, विद्रोह होगा, भूखे इन्सान काम नहीं करेगे ! मुन्शी - किन्तु नरेश ? वह ऐसा कर सकता है ? वह भड़कायेगा ? यह कैसे हो सकता है ? नरेश और संतोप मित्र हैं। क्या नरेश, संतोष के विरुद्ध, जीवतराम के विरुद्ध - एक ववंडर खड़ा करेगा। कौन उसकी बात मानेगा ?
यह सब भ्रम है !
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आ समाज केवल एक बात से काँप उठता है - जब उसके नीचे किसी दूसरे समाज की ठठरियाँ हिलती हैं, जब दबा हुआ वर्ग गतिमान होने लगता है, तब ऊपरी वर्ग के पाॅॉव डगमगाते हैं, भविष्य की घोर आशंका मड़रा उठती है। यानी नींव हिलती है, इमारत का हर छोर कॉप उठता है। जीवतराम मलकानी की आँखों के सामने कुछ घूमता है, उभरता है। आज तक तो ऐसा नहीं हुआ। क्या यह संभव है कि ये गंदे मजदूर विद्रोह कर दें ? क्या चलती हुई इन अधमरी छायाओं में इतनी शक्ति हो सकती है ? नहीं ! मेरे हाथ में वह शक्ति है जो मनुष्य का गला दबाए रह सकती है, वह प्रवंचना है- हा हा हा ! जो जंजीर है। कोई छूट सकता है इससे ! विद्रोह करेगे, काम पर नहीं आयेगे, तो खायेगे क्या ? और खाने की शक्ति मरे हाथ मे बंद हैपू जी ! किन्तु यह सोचना व्यर्थ है। कौन कहता था, विद्रोह होगा, भूखे इन्सान काम नहीं करेगे ! मुन्शी - किन्तु नरेश ? वह ऐसा कर सकता है ? वह भड़कायेगा ? यह कैसे हो सकता है ? नरेश और संतोप मित्र हैं। क्या नरेश, संतोष के विरुद्ध, जीवतराम के विरुद्ध - एक ववंडर खड़ा करेगा। कौन उसकी बात मानेगा ? यह सब भ्रम है !
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इंदौर। वंदे भारत मिशन के तहत लगातार दूसरे देशों से फ्लाइट का आवागमन जारी है। आज रात 8:30 बजे शारजाह से एयर इंडिया का विमान इंदौर पहुंचा। इस विमान में इंदौर के 45 यात्रियों सहित कुल 152 लोग हैं, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। इन यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच एयरपोर्ट पर की गई है और उसके बाद इंदौर के यात्रियों को जिंजर होटल में क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है। बाकी यात्रियों को उनके जिले के लिए रवाना कर दिया है।
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मुंबई इंडियंस के युवा तेज़ गेंदबाज आकाश मधवाल ने आईपीएल के इस सीजन में अपनी एक अलग पहचान बना ली है और इस पहचान के चलते ही उन्हें लोकल टूर्नामेंट्स से बैन कर दिया गया है।
आईपीएल 2023 के एलिमिनेटर मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 5 विकेट लेने वाले आकाश मधवाल लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हालांकि, गुजरात टाइटंस के खिलाफ उनसे एक बार फिर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। लखनऊ के खिलाफ 5 रन पर 5 विकेट लेने वाले मधवाल को लेकर उनके भाई आशीष मधवाल ने एक नया खुलासा किया है।
मधवाल के भाई आशीष ने खुलासा किया है कि एमआई के इस स्टार गेंदबाज को उनके गृहनगर में लोकल क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके पीछे की वजह आशीष ने ये बताई है कि लोगों का मानना है कि उन्हें खेलना इस समय बहुत खतरनाक हो गया है इसलिए उन्हें बैन किया गया है। इसके साथ ही आशीष ने मधवाल की सफलता के लिए मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा को श्रेय दिया।
आशीष ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में कहा, "रोहित भाई के साथ बात ये है कि वो खिलाड़ियों को मौके देते हैं। वो अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। एक नया खिलाड़ी हमेशा टीम में अपनी स्थिति को लेकर डरा हुआ रहता है। रोहित ने उस डर को दूर कर दिया है और आकाश अब अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। जब वो अपनी इंजीनियरिंग के बाद काम कर रहा था, तो लोग हर दिन आते थे और कहते थे कि आज काम पर मत जाओ, आओ हमारी टीम में खेलो और हम तुम्हें खेलने के पैसे देंगे। वहीं से उत्तराखंड में उन्होंने टेनिस बॉल से लेदर बॉल में स्विच किया।"
आशीष ने आगे बोलते हुए बताया कि आकाश ने टेनिस बॉल के साथ इतनी खतरनाक गेंदबाजी करनी शुरू कर दी थी कि उसे लोकल टूर्नामेंट में खेलने ही नहीं दिया गया।उन्होंने कहा, "किसी ने उसे यहां खेलने नहीं दिया। उसकी गेंदबाजी का उन्हें बहुत डर था। इसलिए, उसे स्थानीय टूर्नामेंटों से प्रतिबंधित कर दिया गया था। वहां डर का महौल था। इसीलिए आकाश रुड़की के बाहर जाकर खेलता था। लेकिन हां, उसके टेनिस बॉल के दिन पूरे हो गए। वो अभी बहुत खुश है।"
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मुंबई इंडियंस के युवा तेज़ गेंदबाज आकाश मधवाल ने आईपीएल के इस सीजन में अपनी एक अलग पहचान बना ली है और इस पहचान के चलते ही उन्हें लोकल टूर्नामेंट्स से बैन कर दिया गया है। आईपीएल दो हज़ार तेईस के एलिमिनेटर मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ पाँच विकेट लेने वाले आकाश मधवाल लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हालांकि, गुजरात टाइटंस के खिलाफ उनसे एक बार फिर से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। लखनऊ के खिलाफ पाँच रन पर पाँच विकेट लेने वाले मधवाल को लेकर उनके भाई आशीष मधवाल ने एक नया खुलासा किया है। मधवाल के भाई आशीष ने खुलासा किया है कि एमआई के इस स्टार गेंदबाज को उनके गृहनगर में लोकल क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके पीछे की वजह आशीष ने ये बताई है कि लोगों का मानना है कि उन्हें खेलना इस समय बहुत खतरनाक हो गया है इसलिए उन्हें बैन किया गया है। इसके साथ ही आशीष ने मधवाल की सफलता के लिए मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा को श्रेय दिया। आशीष ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में कहा, "रोहित भाई के साथ बात ये है कि वो खिलाड़ियों को मौके देते हैं। वो अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। एक नया खिलाड़ी हमेशा टीम में अपनी स्थिति को लेकर डरा हुआ रहता है। रोहित ने उस डर को दूर कर दिया है और आकाश अब अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। जब वो अपनी इंजीनियरिंग के बाद काम कर रहा था, तो लोग हर दिन आते थे और कहते थे कि आज काम पर मत जाओ, आओ हमारी टीम में खेलो और हम तुम्हें खेलने के पैसे देंगे। वहीं से उत्तराखंड में उन्होंने टेनिस बॉल से लेदर बॉल में स्विच किया।" आशीष ने आगे बोलते हुए बताया कि आकाश ने टेनिस बॉल के साथ इतनी खतरनाक गेंदबाजी करनी शुरू कर दी थी कि उसे लोकल टूर्नामेंट में खेलने ही नहीं दिया गया।उन्होंने कहा, "किसी ने उसे यहां खेलने नहीं दिया। उसकी गेंदबाजी का उन्हें बहुत डर था। इसलिए, उसे स्थानीय टूर्नामेंटों से प्रतिबंधित कर दिया गया था। वहां डर का महौल था। इसीलिए आकाश रुड़की के बाहर जाकर खेलता था। लेकिन हां, उसके टेनिस बॉल के दिन पूरे हो गए। वो अभी बहुत खुश है।"
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Russia Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के चलते चिप का संकट और गहरा सकता है। बीते करीब डेढ़ सालों से दुनिया चिप की कमी से जूझ रही है। अब यह संकट और गहराने से हालात भयावह हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पैलेडियम की सप्लाई में 44 फीसदी की हिस्सेदारी रूस की है। इसके अलावा नियोन की सप्लाई में 70 फीसदी के करीब हिस्सेदारी यूक्रेन की है। किसी भी चिप को तैयार करने के लिए ये दोनों ही जरूरी रॉ मैटीरियल हैं और यूक्रेन एवं रूस के बीच छिड़ी जंग ने इनकी सप्लाई को बाधित करना शुरू कर दिया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में चिप यानी सेमीकंडक्टर्स में कमी का असर पूरी दुनिया पर दिख सकता है।
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मार्केट के जानकारों का मानना है कि यह वैश्विक संकट जो कोरोना महामारी के बाद शुरू हुआ था, वह और बढ़ने जा रहा है। पैलाडियम और नियोन दो ऐसे रिसोर्स हैं, जिनका किसी भी चिप यानी सेमीकंडक्टर के निर्माण में इस्तेमाल होता है। ये सेमीकंडक्टर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक आइटम जैसे कार, मोबाइल फोन और अन्य उत्पादों में लगते हैं। इनके बिना इलेक्ट्रिक आइटम्स का चलना मुश्किल होता है। दरअसल ये बिजली के चालक और कुचालक के तौर पर काम करते हैं। ऐसे में सेमीकंडक्टर के बिना कार से लेकर मोबाइल तक बेकार हैं। यही वजह है कि इनकी सप्लाई चेन बाधित होने से पूरी दुनिया में संकट की स्थिति है। इसके चलते कार से लेकर मोबाइलों तक के उत्पादन पर असर पड़ा है।
संकट यहीं नहीं थमने वाला है बल्कि यूक्रेन पर आक्रमण के चलते भारत जैसे देश में भी महंगाई बढ़ने वाली है। दुनिया में कच्चे तेल की कीमत पर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ऐसे में अगले सप्ताह से भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश में 4 नवंबर के बाद से कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन एक बार फिर इनके दामों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के हवाले किया जा सकता है। मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के अलावा अन्य देश भले ही सप्लाई में इजाफा कर दें, लेकिन कीमतें उसके बाद भी कम नहीं होने वालीं।
मूडीज के मुताबिक दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति में रूस की 12 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा नैचुरल गैस की सप्लाई में उसकी 17 फीसदी, कोयले में 5. 2 फीसदी और तांबे की सप्लाई में 4. 3 फीसदी की हिस्सेदारी है। यह संकट यहीं खत्म नहीं होता। एल्युमिनियम, जिंक, गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम जैसी धातुओं की सप्लाई में भी रूस बड़ी हिस्सेदारी रखता है। गेहूं के निर्यात में भी रूस की 11 फीसदी की हिस्सेदारी है। साफ है कि यह संकट तेल, खाद्यान्न से लेकर धातुओं तक में बढ़ने वाला है। दूसरी तरफ यूक्रेन नियोन सप्लाई में 70 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है, जो संकट बढ़ा सकता है। इससे पहले 2014 में भी जब दोनों देशों के बीच जंग छिड़ी थी तो ऐसा ही संकट देखने को मिला था।
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Russia Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के चलते चिप का संकट और गहरा सकता है। बीते करीब डेढ़ सालों से दुनिया चिप की कमी से जूझ रही है। अब यह संकट और गहराने से हालात भयावह हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पैलेडियम की सप्लाई में चौंतालीस फीसदी की हिस्सेदारी रूस की है। इसके अलावा नियोन की सप्लाई में सत्तर फीसदी के करीब हिस्सेदारी यूक्रेन की है। किसी भी चिप को तैयार करने के लिए ये दोनों ही जरूरी रॉ मैटीरियल हैं और यूक्रेन एवं रूस के बीच छिड़ी जंग ने इनकी सप्लाई को बाधित करना शुरू कर दिया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में चिप यानी सेमीकंडक्टर्स में कमी का असर पूरी दुनिया पर दिख सकता है। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मार्केट के जानकारों का मानना है कि यह वैश्विक संकट जो कोरोना महामारी के बाद शुरू हुआ था, वह और बढ़ने जा रहा है। पैलाडियम और नियोन दो ऐसे रिसोर्स हैं, जिनका किसी भी चिप यानी सेमीकंडक्टर के निर्माण में इस्तेमाल होता है। ये सेमीकंडक्टर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक आइटम जैसे कार, मोबाइल फोन और अन्य उत्पादों में लगते हैं। इनके बिना इलेक्ट्रिक आइटम्स का चलना मुश्किल होता है। दरअसल ये बिजली के चालक और कुचालक के तौर पर काम करते हैं। ऐसे में सेमीकंडक्टर के बिना कार से लेकर मोबाइल तक बेकार हैं। यही वजह है कि इनकी सप्लाई चेन बाधित होने से पूरी दुनिया में संकट की स्थिति है। इसके चलते कार से लेकर मोबाइलों तक के उत्पादन पर असर पड़ा है। संकट यहीं नहीं थमने वाला है बल्कि यूक्रेन पर आक्रमण के चलते भारत जैसे देश में भी महंगाई बढ़ने वाली है। दुनिया में कच्चे तेल की कीमत पर एक सौ दस डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ऐसे में अगले सप्ताह से भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश में चार नवंबर के बाद से कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन एक बार फिर इनके दामों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के हवाले किया जा सकता है। मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के अलावा अन्य देश भले ही सप्लाई में इजाफा कर दें, लेकिन कीमतें उसके बाद भी कम नहीं होने वालीं। मूडीज के मुताबिक दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति में रूस की बारह फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा नैचुरल गैस की सप्लाई में उसकी सत्रह फीसदी, कोयले में पाँच. दो फीसदी और तांबे की सप्लाई में चार. तीन फीसदी की हिस्सेदारी है। यह संकट यहीं खत्म नहीं होता। एल्युमिनियम, जिंक, गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम जैसी धातुओं की सप्लाई में भी रूस बड़ी हिस्सेदारी रखता है। गेहूं के निर्यात में भी रूस की ग्यारह फीसदी की हिस्सेदारी है। साफ है कि यह संकट तेल, खाद्यान्न से लेकर धातुओं तक में बढ़ने वाला है। दूसरी तरफ यूक्रेन नियोन सप्लाई में सत्तर फीसदी की हिस्सेदारी रखता है, जो संकट बढ़ा सकता है। इससे पहले दो हज़ार चौदह में भी जब दोनों देशों के बीच जंग छिड़ी थी तो ऐसा ही संकट देखने को मिला था।
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PIB Fact Check (Photo Credit: @ani)
नई दिल्लीः
सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें वायरल होने लगी हैं तो सच से कोसों दूर होती हैं. दरअसल निगेटिव खबरें लोगों तक जंगल की आग ही तरह फैल रही हैं. इन दिनों डिजिटल फ्रॉड बहुत तेजी से बढ़ रहा है. डिजिटल धोखाधड़ी का ऐसा मामला वायरल हो रहा, जिसे पीआईबी यानि प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो सामने लेकर आया है. पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में इस खबर को पूरी तरह से फर्जी बताया है. इसके साथ ही लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है.
इस दौरान एक संदेश भी तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि प्राप्तकर्ता का योनो बैंक अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है. इसके अनब्लॉक करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करके पैन कार्ड अपलोड करना होगा. इस संदेश को पीआईबी ने फैक्ट चेक किया है. उसने इस मैसेज को फेक बताया है.
claims that the recipient's YONO account has been blocked#PIBFactCheck:
पीआईबी के अनुसार, अपने बैंकिंग विवरण को शेयर करने वाले ईमेल और एसएमएस का कभी जवाब न दें. यदि आपको किसी तरह का कोई संदेश प्राप्त होता है तो उसकी तुरंत 'report. phishing@sbi. co. in' पर जानकारी दें. हाल में मुद्रा लोन स्कीम के अंतर्गत लोन देने को लेकर ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिसमें कहा जा रहा था कि दो हजार रुपये देकर एक लाख रुपये का लो दिया जा रहा है. इस दावे को सत्यापित करने के लिए एक अप्रूवल लेटर भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया. इसे देखकर कोई भी भ्रम में पढ़ सकता है कि शायद इस तरह की योजना के तहत कोई लोन मिल रहा है.
इसके बाद पीआईबी ने इस झूठ को उजागर किया. उसने अप्रूवल लेटर की सच्चाई को ट्वीट के माध्यम से सामने रखा. पीआईबी का कहना है कि ये लेटर पूरी तरह से फेक है. वित्त मंत्रालय की ओर से इस तरह का कोई लेटर जारी नहीं किया गया है.
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PIB Fact Check नई दिल्लीः सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें वायरल होने लगी हैं तो सच से कोसों दूर होती हैं. दरअसल निगेटिव खबरें लोगों तक जंगल की आग ही तरह फैल रही हैं. इन दिनों डिजिटल फ्रॉड बहुत तेजी से बढ़ रहा है. डिजिटल धोखाधड़ी का ऐसा मामला वायरल हो रहा, जिसे पीआईबी यानि प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो सामने लेकर आया है. पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में इस खबर को पूरी तरह से फर्जी बताया है. इसके साथ ही लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है. इस दौरान एक संदेश भी तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि प्राप्तकर्ता का योनो बैंक अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है. इसके अनब्लॉक करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करके पैन कार्ड अपलोड करना होगा. इस संदेश को पीआईबी ने फैक्ट चेक किया है. उसने इस मैसेज को फेक बताया है. claims that the recipient's YONO account has been blocked#PIBFactCheck: पीआईबी के अनुसार, अपने बैंकिंग विवरण को शेयर करने वाले ईमेल और एसएमएस का कभी जवाब न दें. यदि आपको किसी तरह का कोई संदेश प्राप्त होता है तो उसकी तुरंत 'report. phishing@sbi. co. in' पर जानकारी दें. हाल में मुद्रा लोन स्कीम के अंतर्गत लोन देने को लेकर ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिसमें कहा जा रहा था कि दो हजार रुपये देकर एक लाख रुपये का लो दिया जा रहा है. इस दावे को सत्यापित करने के लिए एक अप्रूवल लेटर भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया. इसे देखकर कोई भी भ्रम में पढ़ सकता है कि शायद इस तरह की योजना के तहत कोई लोन मिल रहा है. इसके बाद पीआईबी ने इस झूठ को उजागर किया. उसने अप्रूवल लेटर की सच्चाई को ट्वीट के माध्यम से सामने रखा. पीआईबी का कहना है कि ये लेटर पूरी तरह से फेक है. वित्त मंत्रालय की ओर से इस तरह का कोई लेटर जारी नहीं किया गया है.
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देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मजदूरी कर लौट रहे एक मजदूर को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया। मजदूर का शव सड़क किनारे क्षत-विक्षत शव हालत में मिला। शव की पहचान पैंथर गांव निवासी मगन उम्र 35 के रूप में हुई है।
रविवार सुबह ब्रह्मखाल -मांड्यासारी मोटर मार्ग पर सड़क किनारे स्थानीय निवासियों ने एक शव पड़ा देखा। जिसकी सूचना ब्रह्मखाल पुलिस चौकी को दी गई। मृतक के गले को बुरी तरह से क्षत-विक्षत किया गया था, जिससे संभावना जताई जा रही है उक्त व्यक्ति की मौत गुलदार के हमले से हुई है।
चौकी प्रभारी शेखर नौटियाल ने बताया कि घटना की जानकारी परिजनों को दे दी गई है। शव का पंचनामा किया जा रहा है। वही वन क्षेत्राधिकारी धरासू रेंज एनएस रावत ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है।
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देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मजदूरी कर लौट रहे एक मजदूर को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया। मजदूर का शव सड़क किनारे क्षत-विक्षत शव हालत में मिला। शव की पहचान पैंथर गांव निवासी मगन उम्र पैंतीस के रूप में हुई है। रविवार सुबह ब्रह्मखाल -मांड्यासारी मोटर मार्ग पर सड़क किनारे स्थानीय निवासियों ने एक शव पड़ा देखा। जिसकी सूचना ब्रह्मखाल पुलिस चौकी को दी गई। मृतक के गले को बुरी तरह से क्षत-विक्षत किया गया था, जिससे संभावना जताई जा रही है उक्त व्यक्ति की मौत गुलदार के हमले से हुई है। चौकी प्रभारी शेखर नौटियाल ने बताया कि घटना की जानकारी परिजनों को दे दी गई है। शव का पंचनामा किया जा रहा है। वही वन क्षेत्राधिकारी धरासू रेंज एनएस रावत ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है।
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श्रीलंका के पूर्व कप्तान एंजेलो मैथ्यूज का मानना है कि विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करना है तो टीम को प्रेशर कंडीशन से निपटना सीखना होगा।
श्रीलंका की टीम ने पिछले साल जनवरी से अब तक 22 वनडे में से केवल छह मुकाबलों में ही जीत दर्ज की है। वनडे टीम के लिए दिमुथ करुणारत्ने को कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने पिछले दो साल से कोई वनडे मुकाबला तक नहीं खेला है। इसी सप्ताह वर्ल्ड कप के वार्मअप मैच में उन्होंने लंबे अंतराल के बाद वनडे मैच खेला।
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श्रीलंका के पूर्व कप्तान एंजेलो मैथ्यूज का मानना है कि विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करना है तो टीम को प्रेशर कंडीशन से निपटना सीखना होगा। श्रीलंका की टीम ने पिछले साल जनवरी से अब तक बाईस वनडे में से केवल छह मुकाबलों में ही जीत दर्ज की है। वनडे टीम के लिए दिमुथ करुणारत्ने को कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने पिछले दो साल से कोई वनडे मुकाबला तक नहीं खेला है। इसी सप्ताह वर्ल्ड कप के वार्मअप मैच में उन्होंने लंबे अंतराल के बाद वनडे मैच खेला।
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बहराइचः भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश में अगली परिवर्तन रैली बहराइच में 11 दिसंबर है। इस रैली के लिए 120 बीघा जमीन की जरूरत थी, लेकिन इतनी जमीन भी कम पड़ गई। तब बीजेपी के नेताओं ने किसानों से संपर्क किया और उनके सामने अपनी समस्या रखी। किसान रैली के लिए जमीन देने को तैयार हो गए। इसमें एक मुस्लिम किसान भी शामिल है, जिसका नाम सऊद है।
क्या कहना है किसानों का ?
किसानों का कहना है कि पीएम मोदी देश को दुरुस्त कर रहे है तो वो उनका स्वागत अपनी फसल दान करके करेंगे। देश दुरुस्त होगा तो फसल अगले साल फिर पैदा कर लेंगे। वहीं, मुस्लिम किसान सऊद के मुताबिक, "11 दिसम्बर को हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां आ रहे हैंं। जहां उनकी रैली है वहींं मेरा खेत है। इसमें अरहर की फसल लगी हुई थी। मोदी जी देश से भ्रष्टाचार और मंहगाई को मिटाने के लिए कमर कसे हुए हैं। ऐसे में वह अपनी चार बीघा अरहर की फसल उनके स्वागत के लिए क्यों नहीं कटवा सकते। यह बहराइच का सौभाग्य है कि मोदी जी आ रहे हैं, इसलिए हमने फसल कटवा दी है। "
पीएम की रैली नानपारा-बहराइच मार्ग पर बेगमपुर के निकट विश्वरिया गांव के मैदान में होगी। इस रैली स्थल को शासन ने भी हरी झंडी दे दी है। जिलाधिकारी, एसपी, डीआईजी भी रैली स्थल का मुआयना कर चुके हैं। करीब चार किसानों की जमीन रैली स्थल में शामिल की जा रही है।
कालेधन के खिलाफ हुई नोटबंदी के बाद बैंकों में हाय-तौबा मची है और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। पीएम मोदी देशवासियों से कैशलेस व्यवस्था का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की अपील कर रहे हैं। ऐसे में एक एक शादी के दौरान मोदी इफेक्ट साफ देखा गया। सीकरी के एक परिवार ने बेटी की शादी में सामान, मेहमानों के शगुन के साथ-साथ कन्यादान और पंडित जी की दक्षिणा का भी कैशलेस भुगतान कर मिसाल पेश की है।
फतेहपुर सीकरी के गांव दुल्हारा निवासी रेलवेकर्मी गोपाल सिंह फौजदार ने अपनी बेटी महिमा की शादी डा. रामवीर सिंह के पुत्र विवेक निवासी अजरुन नगर से शनिवार को आगरा में की।
इस शादी में आपसी सहमति से दूल्हे को दिए जाने वाले सामान व सगुन में दी जाने वाली नगदी के बदले चेक दिए गए। गोपाल सिंह ने बताया कि कैश था नहीं, शादी सर पर थी इसलिए आपसी सहमति से समस्या का यह समाधान निकाला। दोनो पक्षों के बुजुर्ग मुरारी सिंह व डा. रामवीर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद दोनों परिवारो ने बच्चों की शादी कैशलेस करने का निर्णय लिया।
शादी में आए रिश्तेदारों को जब कैशलेस शादी का पता चला तो उन्होंने भी नवदंपत्ति को गिफ्ट व शगुन में चेक ही दिए। शादी में आए मेहमानों और ग्रामीणों ने इस पहल को खूब सराहा। वहीँ बरात के स्वागत के वक्त दरवाजे की रस्म के दौरान जब नाइ को नगदी की जगह चेक दिया गया तो उसने इनकार कर दिया बोला की चेक का हम क्या करेंगे लेकिन बाद में समझाने बुझाने के बाद वो भी तैयार हो गया।
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बहराइचः भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश में अगली परिवर्तन रैली बहराइच में ग्यारह दिसंबर है। इस रैली के लिए एक सौ बीस बीघा जमीन की जरूरत थी, लेकिन इतनी जमीन भी कम पड़ गई। तब बीजेपी के नेताओं ने किसानों से संपर्क किया और उनके सामने अपनी समस्या रखी। किसान रैली के लिए जमीन देने को तैयार हो गए। इसमें एक मुस्लिम किसान भी शामिल है, जिसका नाम सऊद है। क्या कहना है किसानों का ? किसानों का कहना है कि पीएम मोदी देश को दुरुस्त कर रहे है तो वो उनका स्वागत अपनी फसल दान करके करेंगे। देश दुरुस्त होगा तो फसल अगले साल फिर पैदा कर लेंगे। वहीं, मुस्लिम किसान सऊद के मुताबिक, "ग्यारह दिसम्बर को हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां आ रहे हैंं। जहां उनकी रैली है वहींं मेरा खेत है। इसमें अरहर की फसल लगी हुई थी। मोदी जी देश से भ्रष्टाचार और मंहगाई को मिटाने के लिए कमर कसे हुए हैं। ऐसे में वह अपनी चार बीघा अरहर की फसल उनके स्वागत के लिए क्यों नहीं कटवा सकते। यह बहराइच का सौभाग्य है कि मोदी जी आ रहे हैं, इसलिए हमने फसल कटवा दी है। " पीएम की रैली नानपारा-बहराइच मार्ग पर बेगमपुर के निकट विश्वरिया गांव के मैदान में होगी। इस रैली स्थल को शासन ने भी हरी झंडी दे दी है। जिलाधिकारी, एसपी, डीआईजी भी रैली स्थल का मुआयना कर चुके हैं। करीब चार किसानों की जमीन रैली स्थल में शामिल की जा रही है। कालेधन के खिलाफ हुई नोटबंदी के बाद बैंकों में हाय-तौबा मची है और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। पीएम मोदी देशवासियों से कैशलेस व्यवस्था का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की अपील कर रहे हैं। ऐसे में एक एक शादी के दौरान मोदी इफेक्ट साफ देखा गया। सीकरी के एक परिवार ने बेटी की शादी में सामान, मेहमानों के शगुन के साथ-साथ कन्यादान और पंडित जी की दक्षिणा का भी कैशलेस भुगतान कर मिसाल पेश की है। फतेहपुर सीकरी के गांव दुल्हारा निवासी रेलवेकर्मी गोपाल सिंह फौजदार ने अपनी बेटी महिमा की शादी डा. रामवीर सिंह के पुत्र विवेक निवासी अजरुन नगर से शनिवार को आगरा में की। इस शादी में आपसी सहमति से दूल्हे को दिए जाने वाले सामान व सगुन में दी जाने वाली नगदी के बदले चेक दिए गए। गोपाल सिंह ने बताया कि कैश था नहीं, शादी सर पर थी इसलिए आपसी सहमति से समस्या का यह समाधान निकाला। दोनो पक्षों के बुजुर्ग मुरारी सिंह व डा. रामवीर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद दोनों परिवारो ने बच्चों की शादी कैशलेस करने का निर्णय लिया। शादी में आए रिश्तेदारों को जब कैशलेस शादी का पता चला तो उन्होंने भी नवदंपत्ति को गिफ्ट व शगुन में चेक ही दिए। शादी में आए मेहमानों और ग्रामीणों ने इस पहल को खूब सराहा। वहीँ बरात के स्वागत के वक्त दरवाजे की रस्म के दौरान जब नाइ को नगदी की जगह चेक दिया गया तो उसने इनकार कर दिया बोला की चेक का हम क्या करेंगे लेकिन बाद में समझाने बुझाने के बाद वो भी तैयार हो गया।
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रोहतक, 14 अगस्त (निस)
एलपीएस बोसार्ड द्वारा सेक्टर चार स्थित जिमखाना क्लब में प्रसिद्ध उद्योगपति राजेश जैन ने अहसाय लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए उपकरण उपलब्ध करवाए। समारोह का शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलित करके किया गया। समारोह में विकलांगों को इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा व छात्राओं को साइकिले व महिलाओं को सिलाई मशीनें और बच्चों को पढ़ाई के लिए टैब वितरित किए गए। इस अवसर पर पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर परिसर में पौधरोपण किया गया। समारोह में समृद्धि जैन, नवीन गुप्ता, डा. अनिल शर्मा, देवेन्द्र चहल, विजय खुराना, राजीव जैन, डॉ. अशोक, डॉ. सुरेश कादियान, योगेश अरोड़ा, मनोज बत्तरा, संजय खुराना, अश्विनी पाहवा, सतीश मोंगिया, वेदप्रकाश, भूपेश बत्तरा, देवेन्द्र शर्मा, नन्द किशोर, सन्नी निझावन, शीतल, सुभाष वधवा, हरिश दुआ व आशु गांधी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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रोहतक, चौदह अगस्त एलपीएस बोसार्ड द्वारा सेक्टर चार स्थित जिमखाना क्लब में प्रसिद्ध उद्योगपति राजेश जैन ने अहसाय लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए उपकरण उपलब्ध करवाए। समारोह का शुभारम्भ द्वीप प्रज्जवलित करके किया गया। समारोह में विकलांगों को इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा व छात्राओं को साइकिले व महिलाओं को सिलाई मशीनें और बच्चों को पढ़ाई के लिए टैब वितरित किए गए। इस अवसर पर पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर परिसर में पौधरोपण किया गया। समारोह में समृद्धि जैन, नवीन गुप्ता, डा. अनिल शर्मा, देवेन्द्र चहल, विजय खुराना, राजीव जैन, डॉ. अशोक, डॉ. सुरेश कादियान, योगेश अरोड़ा, मनोज बत्तरा, संजय खुराना, अश्विनी पाहवा, सतीश मोंगिया, वेदप्रकाश, भूपेश बत्तरा, देवेन्द्र शर्मा, नन्द किशोर, सन्नी निझावन, शीतल, सुभाष वधवा, हरिश दुआ व आशु गांधी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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भारतीय जनता पार्टी के बाद कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह बीते दो दिन से ताबड़तोड़ बैठकें कर रही हैं और अगले तीन दिन भी कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों के साथ पांच बैठकें कर चुनाव की रणनीति तय करेंगी।
कांग्रेस द्वारा जारी प्रदेशाध्यक्ष के कार्यक्रम के मुताबिक प्रतिभा सिंह राजीव भवन शिमला में चार्जशीट कमेटी, NSUI, अनुसूचित जाति विभाग, बुद्धिजीवी प्रकोष्ट को बूस्ट करेगी। इनमें सभी कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टास्क दिए जाएंगे।
इसी तरह एक और दो जून को कांग्रेस का शिमला में राज्य स्तरीय चिंतन शिविर होना है। इसमें राष्ट्रीय चिंतन शिविर में लिए गए निर्णय हर कार्यकर्ता तक पहुंचाने और आम जन से टूटे हुए संपर्क को फिर से बनाने को बोला जाएगा।
सूत्रों की माने तो चिंतन शिविर के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह सभी जिलों का दौरा कर चुनावी शंखनाद करेंगी और जिला स्तर पर रोड शो किए जा सकते है। इस दौरान सभी जिलों में वह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर सकती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष आज सुबह 11 बजे चार्जशीट कमेटी की बैठक लेगी। दोपहर बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष राजेश दलोठिया से चर्चा करेगी।
कल यानी 26 मई को सुबह 11 बजे हिमाचल प्रदेश अनुसूचित विभाग की बैठक लेंगी। दोपहर बाद 3 बजे प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश बुद्धिजीवी विभाग की बैठक लेंगे। 28 मई को सुबह 11 बजे युवा कांग्रेस की और 3 बजे NSUI की रिव्यू बैठक बुलाई गई है।
भाजपा दो महीने पहले ही जनसंपर्क अभियान शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ताबड़तोड़ उद्घाटन और शिलान्यास कर बड़ी बड़ी जनसभाएं कर रहे हैं। इसी तरह BJP के राष्ट्रीय नेता भी हिमाचल का रुख कर मिशन रिपीट के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन कांग्रेस अब जाकर सक्रिय हो रही है।
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भारतीय जनता पार्टी के बाद कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह बीते दो दिन से ताबड़तोड़ बैठकें कर रही हैं और अगले तीन दिन भी कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों के साथ पांच बैठकें कर चुनाव की रणनीति तय करेंगी। कांग्रेस द्वारा जारी प्रदेशाध्यक्ष के कार्यक्रम के मुताबिक प्रतिभा सिंह राजीव भवन शिमला में चार्जशीट कमेटी, NSUI, अनुसूचित जाति विभाग, बुद्धिजीवी प्रकोष्ट को बूस्ट करेगी। इनमें सभी कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टास्क दिए जाएंगे। इसी तरह एक और दो जून को कांग्रेस का शिमला में राज्य स्तरीय चिंतन शिविर होना है। इसमें राष्ट्रीय चिंतन शिविर में लिए गए निर्णय हर कार्यकर्ता तक पहुंचाने और आम जन से टूटे हुए संपर्क को फिर से बनाने को बोला जाएगा। सूत्रों की माने तो चिंतन शिविर के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह सभी जिलों का दौरा कर चुनावी शंखनाद करेंगी और जिला स्तर पर रोड शो किए जा सकते है। इस दौरान सभी जिलों में वह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर सकती है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष आज सुबह ग्यारह बजे चार्जशीट कमेटी की बैठक लेगी। दोपहर बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष राजेश दलोठिया से चर्चा करेगी। कल यानी छब्बीस मई को सुबह ग्यारह बजे हिमाचल प्रदेश अनुसूचित विभाग की बैठक लेंगी। दोपहर बाद तीन बजे प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश बुद्धिजीवी विभाग की बैठक लेंगे। अट्ठाईस मई को सुबह ग्यारह बजे युवा कांग्रेस की और तीन बजे NSUI की रिव्यू बैठक बुलाई गई है। भाजपा दो महीने पहले ही जनसंपर्क अभियान शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ताबड़तोड़ उद्घाटन और शिलान्यास कर बड़ी बड़ी जनसभाएं कर रहे हैं। इसी तरह BJP के राष्ट्रीय नेता भी हिमाचल का रुख कर मिशन रिपीट के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन कांग्रेस अब जाकर सक्रिय हो रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नैनीताल जिले के कालाढूंगी में आप कार्यकर्ताओं ने कोतवाली के समक्ष प्रदर्शन किया। साथ ही बेजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया गया कि बीजेपी कार्यकर्ता ने आप की महिला कार्यकर्ता को जंगल में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी है।
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष संतोष कबड़वाल के नेतृत्व में बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं नारेबाजी करते हुए कालाढूंगी कोतवाली पहुंचे। जहां उन्होंने पुलिस को तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली प्रति माह का राजनैतिक अभियान चल रहा है। इसके तहत आप कार्यकर्ता घर-घर जाकर इस योजना के तहत उपभोक्ताओं का मुफ्त रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं।
आरोप है कि खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले कुछ लोग इसका विरोध करते हुए हमारे कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। पार्टी की महिला कार्यकर्ता को जंगल में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी जा रही है। जिससे कार्यकर्ताओं में रोष पनप रहा है। धमोला दवाई फैक्ट्री के सामने आम आदमी पार्टी के अभियान में लगी एक स्विफ्ट कार संख्या यूके 04 टीए 5778 के टायरों की अराजक तत्वों ने हवा निकाल दी।
इस मामले में कबड़वाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ मिलकर हर चुनाव में ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेलने वाली भाजपा इस बार आम आदमी पार्टी की प्रदेश में जोरदार उपस्थिति से घबरा गयी है। प्रदेश की जनता के हितों की आम आदमी पार्टी की घोषणाएं भाजपा को अखर रही हैं। इस कारण भाजपा नकाब उतारकर अपने असली धमकाने वाले चरित्र पर उतर आयी है। आप कार्यकर्ता भाजपा की ऐसी कुत्सित कोशिशों का जनता के सहयोग से मुंहतोड़ जवाब देंगे। कोतवाली के समक्ष प्रदर्शन करने वालों में डिम्पल पाण्डे, हेमराज बिष्ट, यश आर्य, पूजा देवी, मौ. कैफ, सूरज कुमार, अफजल सलमानी, प्रदीप बेलवाल, गंगा देवी, पवन कुमार, कमलेश कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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नैनीताल जिले के कालाढूंगी में आप कार्यकर्ताओं ने कोतवाली के समक्ष प्रदर्शन किया। साथ ही बेजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया गया कि बीजेपी कार्यकर्ता ने आप की महिला कार्यकर्ता को जंगल में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी है। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष संतोष कबड़वाल के नेतृत्व में बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं नारेबाजी करते हुए कालाढूंगी कोतवाली पहुंचे। जहां उन्होंने पुलिस को तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली प्रति माह का राजनैतिक अभियान चल रहा है। इसके तहत आप कार्यकर्ता घर-घर जाकर इस योजना के तहत उपभोक्ताओं का मुफ्त रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। आरोप है कि खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले कुछ लोग इसका विरोध करते हुए हमारे कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। पार्टी की महिला कार्यकर्ता को जंगल में ले जाकर टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दी जा रही है। जिससे कार्यकर्ताओं में रोष पनप रहा है। धमोला दवाई फैक्ट्री के सामने आम आदमी पार्टी के अभियान में लगी एक स्विफ्ट कार संख्या यूके चार टीए पाँच हज़ार सात सौ अठहत्तर के टायरों की अराजक तत्वों ने हवा निकाल दी। इस मामले में कबड़वाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ मिलकर हर चुनाव में ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेलने वाली भाजपा इस बार आम आदमी पार्टी की प्रदेश में जोरदार उपस्थिति से घबरा गयी है। प्रदेश की जनता के हितों की आम आदमी पार्टी की घोषणाएं भाजपा को अखर रही हैं। इस कारण भाजपा नकाब उतारकर अपने असली धमकाने वाले चरित्र पर उतर आयी है। आप कार्यकर्ता भाजपा की ऐसी कुत्सित कोशिशों का जनता के सहयोग से मुंहतोड़ जवाब देंगे। कोतवाली के समक्ष प्रदर्शन करने वालों में डिम्पल पाण्डे, हेमराज बिष्ट, यश आर्य, पूजा देवी, मौ. कैफ, सूरज कुमार, अफजल सलमानी, प्रदीप बेलवाल, गंगा देवी, पवन कुमार, कमलेश कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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जानने का दोप किसी भी जिज्ञासु में नहीं है, प्रत्युत जानकारी के निरादर का दोप है, जो स्वयं जिज्ञासु का बनाया हुआ है । अपने बनाये हुए दोप के मिटाने में साधक सर्वथा स्वतन्त्र है ।
प्रत्येक दोषी को उसी दोप का अनुभव होता है, जिसका कारण वह स्वयं है, क्योंकि जिस निर्दोष तत्त्व से दोप का अनुभव होता है, उसका कभी अभाव नहीं होता। हाँ, यह अवश्य है कि दोप की आसक्कि निर्दोषता का प्रमाद उत्पन्न करती हे । ज्यों ज्यों जानकारी का आदर स्थायी होता जाता है, त्यो त्यो प्रमाद स्वयं मिटता जाता है । यह मली प्रकार समझ लो कि ज्ञान की उत्पत्ति नहीं होती, प्रत्युत प्रमाद की निवृत्ति होती है, क्योंकि जिसकी उत्पत्ति होती है, उसका विनाश अनिवार्य है। जिससे उत्पत्ति तथा विनाश जाना जाता है, वह उत्पत्ति-विनाशयुक्त कदापि नहीं हो सकता । इस दृष्टि से ज्ञान नित्य है । साधारण प्राणी केवल प्रमादवश 'ज्ञान होगा ऐसा अनुमान करने लगते हैं । अज्ञान काल में भी ज्ञान का अभाव नहीं होता, प्रत्युत ज्ञान की कमी को अज्ञान कहते हैं। ज्ञान की कमी की वेदना ज्यों ज्यों बढ़ती जाती है, त्यों त्यों जिज्ञासा स्थायी तथा सबल होती जाती है। जिस प्रकार सूर्य का उदय होते धन्धकार मिट जाता है, उसी प्रकार पूर्ण जिज्ञासा होते हो, तत्व-ज्ञान स्वतः हो जाता है, क्योंकि जिज्ञासा रूप अनि प्रमाद को भस्मीभूत कर देती है। यह नियम है कि काष्ठ का अन्त होते ही अग्नि अपने आप शान्त हो जाती है, उसी प्रकार प्रमाद
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जानने का दोप किसी भी जिज्ञासु में नहीं है, प्रत्युत जानकारी के निरादर का दोप है, जो स्वयं जिज्ञासु का बनाया हुआ है । अपने बनाये हुए दोप के मिटाने में साधक सर्वथा स्वतन्त्र है । प्रत्येक दोषी को उसी दोप का अनुभव होता है, जिसका कारण वह स्वयं है, क्योंकि जिस निर्दोष तत्त्व से दोप का अनुभव होता है, उसका कभी अभाव नहीं होता। हाँ, यह अवश्य है कि दोप की आसक्कि निर्दोषता का प्रमाद उत्पन्न करती हे । ज्यों ज्यों जानकारी का आदर स्थायी होता जाता है, त्यो त्यो प्रमाद स्वयं मिटता जाता है । यह मली प्रकार समझ लो कि ज्ञान की उत्पत्ति नहीं होती, प्रत्युत प्रमाद की निवृत्ति होती है, क्योंकि जिसकी उत्पत्ति होती है, उसका विनाश अनिवार्य है। जिससे उत्पत्ति तथा विनाश जाना जाता है, वह उत्पत्ति-विनाशयुक्त कदापि नहीं हो सकता । इस दृष्टि से ज्ञान नित्य है । साधारण प्राणी केवल प्रमादवश 'ज्ञान होगा ऐसा अनुमान करने लगते हैं । अज्ञान काल में भी ज्ञान का अभाव नहीं होता, प्रत्युत ज्ञान की कमी को अज्ञान कहते हैं। ज्ञान की कमी की वेदना ज्यों ज्यों बढ़ती जाती है, त्यों त्यों जिज्ञासा स्थायी तथा सबल होती जाती है। जिस प्रकार सूर्य का उदय होते धन्धकार मिट जाता है, उसी प्रकार पूर्ण जिज्ञासा होते हो, तत्व-ज्ञान स्वतः हो जाता है, क्योंकि जिज्ञासा रूप अनि प्रमाद को भस्मीभूत कर देती है। यह नियम है कि काष्ठ का अन्त होते ही अग्नि अपने आप शान्त हो जाती है, उसी प्रकार प्रमाद
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- चना करते हो, उन सबकी एक सूची बनाकर रख छोडिए और कुछ दिनो बाद उसे निकालकर देखिए । उनमे शायद ही वहुत थोडीसी ऐसी विपत्तियों होगी, जो वास्तवमे आपपर आई होगी । शेष सब विपत्तियों वास्तविक नही बल्कि केवल कल्पित ही होती है । किसी बड़े शहरमे जाकर देखिए । आपको सैकडो हजारो आदमी इधरसे उधर परे - शान और बदहवास घूमते हुए दिखाई देगे । उनकी आकृतिसे ही ऐसा जान पडेगा कि मानो सारे ससारकी चिन्ता उन्हीके सिर आकर पडी
है । यदि वे रेल गाडी या ट्राम गाडीमे बैठे होगे तो बार बार सिर बाहर निकालकर झोकते हुए दिखाई देंगे और अपना गन्तव्य स्थान सामने न देखकर ऐसी आकृति और चेष्टा करते हुए दिखाई देगे मानो वे उसकी गतिको और वढाना चाहते है । रास्तेमे वे ऐसे बदहवास होकर दौड़ते हुए दिखाई देगे कि उनके धक्कैसे कही कोई वालक गिर पडेगा तो कही किसी गरीबके सिरका बोझा । उनकी हर एक बातमे जल्दबाजी और चिन्ता दिखाई देगी और उनके चेरेपर बल पडे हुए होगे। ये सव लक्षण बहुत ही चिन्तापूर्ण और अस्वाभाविक जीवनके
। परन्तु हमारा जीवन वास्तवमे इस बुरी तरहसे व्यतीत होनेके लिए नही बनाया गया है । उसमे तो एक विशेष प्रकारकी निश्चिन्तता, एक विशेष प्रकारकी स्वाभाविकता, और एक विशेष प्रकारका सौन्दर्य होना चाहिए । परन्तु आजकल्के अधिकाश लोगोके जीवनमे ये वाते नामको भी नहीं पाई जाती और इसी लिए वे लोग उतना और वैसा काम भी नही कर सकते जितना और जैसा काम उन्हे करना चाहिए ।
काम करनेसे आज तक कोई नही मरा, परन्तु चिन्ताने हजारो लाखो आदमियोके प्राण ले लिए है । कोई काम करनेसे हमारी उतनी अधिक शारीरिक हानि नहीं होती जितनी अधिक उस
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- चना करते हो, उन सबकी एक सूची बनाकर रख छोडिए और कुछ दिनो बाद उसे निकालकर देखिए । उनमे शायद ही वहुत थोडीसी ऐसी विपत्तियों होगी, जो वास्तवमे आपपर आई होगी । शेष सब विपत्तियों वास्तविक नही बल्कि केवल कल्पित ही होती है । किसी बड़े शहरमे जाकर देखिए । आपको सैकडो हजारो आदमी इधरसे उधर परे - शान और बदहवास घूमते हुए दिखाई देगे । उनकी आकृतिसे ही ऐसा जान पडेगा कि मानो सारे ससारकी चिन्ता उन्हीके सिर आकर पडी है । यदि वे रेल गाडी या ट्राम गाडीमे बैठे होगे तो बार बार सिर बाहर निकालकर झोकते हुए दिखाई देंगे और अपना गन्तव्य स्थान सामने न देखकर ऐसी आकृति और चेष्टा करते हुए दिखाई देगे मानो वे उसकी गतिको और वढाना चाहते है । रास्तेमे वे ऐसे बदहवास होकर दौड़ते हुए दिखाई देगे कि उनके धक्कैसे कही कोई वालक गिर पडेगा तो कही किसी गरीबके सिरका बोझा । उनकी हर एक बातमे जल्दबाजी और चिन्ता दिखाई देगी और उनके चेरेपर बल पडे हुए होगे। ये सव लक्षण बहुत ही चिन्तापूर्ण और अस्वाभाविक जीवनके । परन्तु हमारा जीवन वास्तवमे इस बुरी तरहसे व्यतीत होनेके लिए नही बनाया गया है । उसमे तो एक विशेष प्रकारकी निश्चिन्तता, एक विशेष प्रकारकी स्वाभाविकता, और एक विशेष प्रकारका सौन्दर्य होना चाहिए । परन्तु आजकल्के अधिकाश लोगोके जीवनमे ये वाते नामको भी नहीं पाई जाती और इसी लिए वे लोग उतना और वैसा काम भी नही कर सकते जितना और जैसा काम उन्हे करना चाहिए । काम करनेसे आज तक कोई नही मरा, परन्तु चिन्ताने हजारो लाखो आदमियोके प्राण ले लिए है । कोई काम करनेसे हमारी उतनी अधिक शारीरिक हानि नहीं होती जितनी अधिक उस
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वृश्चिक एक आदमी हैः वह किस तरह की महिला को पसंद करती है, उसके पास क्या गुण हैं?
एक सपने में धूम्रपान करने के लिए - इसका क्या मतलब होगा?
क्यों आटा सपना करता है? क्यों आटा गूंध के बारे में सपना?
कैसे एक ऊर्जा पिशाच पहचान करने के लिए? ऊर्जा पिशाच का विरोध कैसे करें?
एक सपने में एक जूं को देखने के लिए - क्या?
क्या मिरान का क्या मतलब है?
स्वप्न व्याख्याः बल्लेबाजी वह सपना क्यों करती है?
एक सपने में साँप बिट वास्तविकता में क्यों रुको?
जादू में कब और कैसे सफ़ेद मोमबत्तियाँ होती हैं?
ड्रीम व्याख्याः समुद्र का सपना देखा क्यों?
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वृश्चिक एक आदमी हैः वह किस तरह की महिला को पसंद करती है, उसके पास क्या गुण हैं? एक सपने में धूम्रपान करने के लिए - इसका क्या मतलब होगा? क्यों आटा सपना करता है? क्यों आटा गूंध के बारे में सपना? कैसे एक ऊर्जा पिशाच पहचान करने के लिए? ऊर्जा पिशाच का विरोध कैसे करें? एक सपने में एक जूं को देखने के लिए - क्या? क्या मिरान का क्या मतलब है? स्वप्न व्याख्याः बल्लेबाजी वह सपना क्यों करती है? एक सपने में साँप बिट वास्तविकता में क्यों रुको? जादू में कब और कैसे सफ़ेद मोमबत्तियाँ होती हैं? ड्रीम व्याख्याः समुद्र का सपना देखा क्यों?
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बहुत शोर-शराबे और हो-हल्ले के बावजूद बंगले में लालू का दरबार सजना बंद नहीं हुआ है। रसूखवाले जेल मैनुअल का उल्लंघन कर जब चाहे मुलाक़ात भी कर रहे हैं। ताजा मामला झारखंड सरकार के मंत्री का है।
पटना (Bihar) । बिहार में जन्मा नटवरलाल (Natwar Lal) ठगी की दुनिया का बेताज बादशाह था। दुनियाभर के ठग आज भी उसे अपना गुरु मानते हैं। वो था ही इतना शातिर। उसने एक बार राष्ट्रपति भवन, दो बार लाल किला और तीन बार ताजमहल को विदेशियों के हाथ बेच दिया था। यहां तक कि संसद भवन को भी ऐसे समय में बेचा जब सारे सांसद वहीं मौजूद थे। बताते हैं कि एक बार उसने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद (President Rajendra Prasad) से मुलाकात में कहा था कि यदि आप एक बार कहें तो मैं भारत पर विदेशियों का पूरा कर्ज उतार सकता हूं और उन्हें भारत का कर्जदार बना सकता हूं। नटवरलाल के ऊपर ठगी के दर्जनों मामलों में केस चलें। इसमें उसे जो सजा सुनाई गई उसका जोड़ 113 साल था। आइए जानते हैं कि नटवर लाल की ठगी के अनसुने किस्से।
भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद लालू यादव (Lalu Yadav) की अनुपस्थिति में महागठबंधन की छोटी-छोटी पार्टियों की शर्तों के आगे आरजेडी (RJD) बुरी तरह परेशान है।
पटना (Bihar) । बिहार देशभर में अनूठे एकेडमिक्स की वजह से भी चर्चित है। आनंद कुमार ( Anand Kumar) ने गरीब बच्चों को आईआईटी (IIT) जैसे संस्थानों में भेजकर ऐसी लकीर खींच दी है कि पूरी दुनिया उनके काम को सलाम करती है। एक मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव (RK Srivastava) भी गज़ब तरीके से बच्चों को पढ़ाते हैं। आरके चुटकले और कबाड़ों के जरिए से खेल-खेल में बच्चों को गणित की मुश्किल पढ़ाई करवाते हैं। कबाड़ को जुगाड़ से खिलौने बनाकर प्रैक्टिकल में यूज करते हैं। वो सामाजिक सरोकार से गणित को जोड़कर, सवाल हल करना बताते हैं। आरके 52 तरीके से पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras theorem) को सिद्ध कर दुनिया को हैरान कर चुके हैं।
2 हजार 446 पदों के लिए होने वाली इस परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 23 सितंबर 2020 को जारी कर दिए जाएंगे। जिसे अभ्यर्थी बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे।
पटना। बिहार की सड़कों पर विधानसभा चुनाव (Bihar Polls 2020) से पहले गुमनाम पोस्टरों के जरिए लड़ाई चरम पर है। पिछले दिनों एक पर एक लालू परिवार को निशाना बनाते हुए परिवारवाद, जंगलराज, भ्रष्टाचार और राज्य में आरजेडी (RJD) के शासनकाल पर सवाल उठाए गए थे। अब गुमनाम पोस्टर (Anonymous Election poster in Bihar) से ही जवाब आया है। इस बार निशाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) हैं। पटना की सड़कों पर लगे दो पोस्टरों के जरिए नीतीश और बीजेपी (BJP) पर निशाना साधा गया है।
बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने रिटायरमेंट लेने के बाद कहा कि अभी राजनीति में आने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, आज की तारीख में मैं डीजीपी नहीं हूं। वो जो नियम कानून हैं जो सरकारी अधिकारी पर लागू होते हैं वो मुझ पर अब लागू नहीं होते। मैंने न कोई पॉलिटिकल पार्टी ज्वॉइन की है न ही मैं अभी कोई पॉलिटिल व्यक्ति हूं।
नीतीश (Nitish Kumar) के सामने नेतृत्व की चुनौती देते हुए एलजेपी चीफ चिराग पासवान भी विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत दे रहे हैं। चिराग के लड़ने की चर्चा संसदीय दल की वीडियो कान्फ्रेंसिंग मीटिंग में हुई।
पटना (Bihar) । बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय (DGP Gupteshwar Pandey) की स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) को बिहार सरकार (Bihar Government) ने मंजूरी दे दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव ( Bihar Assembly Elections) में बक्सर (Buxar) या भोजपुर (Bhojpur से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बता दें कि वे जिस गांव थे वहां के बच्चों को पढ़ने के लिए नदी नाला पार कर दूर के गांव जाना होता था। दूसरे गांव की स्कूल में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था कोई बेंच, डेस्क, कुर्सी नहीं थी। गुरु जी की बैठने के लिए चारपाई और छात्रों के लिए बोरा या जूट की टाट थी। पढ़ाई का मध्यम ठेठ भोजपुरी था। एक इंटरब्यू में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था कि मेरा कभी आईपीएस बनने का सपना नहीं था, क्योंकि दस साल की उम्र में उन्हें एक घटना से पुलिस वालों से नफरत हो गई थी।
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बहुत शोर-शराबे और हो-हल्ले के बावजूद बंगले में लालू का दरबार सजना बंद नहीं हुआ है। रसूखवाले जेल मैनुअल का उल्लंघन कर जब चाहे मुलाक़ात भी कर रहे हैं। ताजा मामला झारखंड सरकार के मंत्री का है। पटना । बिहार में जन्मा नटवरलाल ठगी की दुनिया का बेताज बादशाह था। दुनियाभर के ठग आज भी उसे अपना गुरु मानते हैं। वो था ही इतना शातिर। उसने एक बार राष्ट्रपति भवन, दो बार लाल किला और तीन बार ताजमहल को विदेशियों के हाथ बेच दिया था। यहां तक कि संसद भवन को भी ऐसे समय में बेचा जब सारे सांसद वहीं मौजूद थे। बताते हैं कि एक बार उसने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से मुलाकात में कहा था कि यदि आप एक बार कहें तो मैं भारत पर विदेशियों का पूरा कर्ज उतार सकता हूं और उन्हें भारत का कर्जदार बना सकता हूं। नटवरलाल के ऊपर ठगी के दर्जनों मामलों में केस चलें। इसमें उसे जो सजा सुनाई गई उसका जोड़ एक सौ तेरह साल था। आइए जानते हैं कि नटवर लाल की ठगी के अनसुने किस्से। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद लालू यादव की अनुपस्थिति में महागठबंधन की छोटी-छोटी पार्टियों की शर्तों के आगे आरजेडी बुरी तरह परेशान है। पटना । बिहार देशभर में अनूठे एकेडमिक्स की वजह से भी चर्चित है। आनंद कुमार ने गरीब बच्चों को आईआईटी जैसे संस्थानों में भेजकर ऐसी लकीर खींच दी है कि पूरी दुनिया उनके काम को सलाम करती है। एक मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव भी गज़ब तरीके से बच्चों को पढ़ाते हैं। आरके चुटकले और कबाड़ों के जरिए से खेल-खेल में बच्चों को गणित की मुश्किल पढ़ाई करवाते हैं। कबाड़ को जुगाड़ से खिलौने बनाकर प्रैक्टिकल में यूज करते हैं। वो सामाजिक सरोकार से गणित को जोड़कर, सवाल हल करना बताते हैं। आरके बावन तरीके से पाइथागोरस प्रमेय को सिद्ध कर दुनिया को हैरान कर चुके हैं। दो हजार चार सौ छियालीस पदों के लिए होने वाली इस परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड तेईस सितंबर दो हज़ार बीस को जारी कर दिए जाएंगे। जिसे अभ्यर्थी बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। पटना। बिहार की सड़कों पर विधानसभा चुनाव से पहले गुमनाम पोस्टरों के जरिए लड़ाई चरम पर है। पिछले दिनों एक पर एक लालू परिवार को निशाना बनाते हुए परिवारवाद, जंगलराज, भ्रष्टाचार और राज्य में आरजेडी के शासनकाल पर सवाल उठाए गए थे। अब गुमनाम पोस्टर से ही जवाब आया है। इस बार निशाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। पटना की सड़कों पर लगे दो पोस्टरों के जरिए नीतीश और बीजेपी पर निशाना साधा गया है। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने रिटायरमेंट लेने के बाद कहा कि अभी राजनीति में आने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, आज की तारीख में मैं डीजीपी नहीं हूं। वो जो नियम कानून हैं जो सरकारी अधिकारी पर लागू होते हैं वो मुझ पर अब लागू नहीं होते। मैंने न कोई पॉलिटिकल पार्टी ज्वॉइन की है न ही मैं अभी कोई पॉलिटिल व्यक्ति हूं। नीतीश के सामने नेतृत्व की चुनौती देते हुए एलजेपी चीफ चिराग पासवान भी विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत दे रहे हैं। चिराग के लड़ने की चर्चा संसदीय दल की वीडियो कान्फ्रेंसिंग मीटिंग में हुई। पटना । बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय की स्वैच्छिक सेवानिवृति को बिहार सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में बक्सर या भोजपुर का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बता दें कि वे जिस गांव थे वहां के बच्चों को पढ़ने के लिए नदी नाला पार कर दूर के गांव जाना होता था। दूसरे गांव की स्कूल में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था कोई बेंच, डेस्क, कुर्सी नहीं थी। गुरु जी की बैठने के लिए चारपाई और छात्रों के लिए बोरा या जूट की टाट थी। पढ़ाई का मध्यम ठेठ भोजपुरी था। एक इंटरब्यू में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था कि मेरा कभी आईपीएस बनने का सपना नहीं था, क्योंकि दस साल की उम्र में उन्हें एक घटना से पुलिस वालों से नफरत हो गई थी।
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भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा टोरे पैन पैसिफिक ओपन के फाइनल में पहुँच गई हैं. चेक गणराज्य की बारबरा स्ट्राइकोवा की जोड़ी में उन्होंने शुक्रवार को कनाडा की गैब्रिएला दाब्रोवस्की और स्पेन की मारिया जोस मार्टिना को हरा दिया हैं.
सानिया और स्ट्राइकोवा ने दाब्रोवस्की और मार्टिना को महिला डबल्स के मैच में 4-6, 6-3, 10-5 से हराया. इससे पहले दोनों क्वार्टर फाइनल में जापान की मियु काटो ओर चीन की यिफान शु की जोड़ी को 6-2, 6-2 से हरा चुकी थी.
सानिया और स्ट्राइकोवा फाइनल में चीन की चेन लियांग और झाओशुआन यांग तथा राक्वेल अटावो और अमेरिका की एबिगेल स्पीयर्स की तीसरी वरीय जोड़ी से मुकाबला होगा.
पिछले महीने इस जोड़ी ने सानिया की पूर्व जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस और कोको वांदेवेघे को हराकर सिनसिनाटी ओपन का खिताब जीता था.
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भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा टोरे पैन पैसिफिक ओपन के फाइनल में पहुँच गई हैं. चेक गणराज्य की बारबरा स्ट्राइकोवा की जोड़ी में उन्होंने शुक्रवार को कनाडा की गैब्रिएला दाब्रोवस्की और स्पेन की मारिया जोस मार्टिना को हरा दिया हैं. सानिया और स्ट्राइकोवा ने दाब्रोवस्की और मार्टिना को महिला डबल्स के मैच में चार-छः, छः-तीन, दस-पाँच से हराया. इससे पहले दोनों क्वार्टर फाइनल में जापान की मियु काटो ओर चीन की यिफान शु की जोड़ी को छः-दो, छः-दो से हरा चुकी थी. सानिया और स्ट्राइकोवा फाइनल में चीन की चेन लियांग और झाओशुआन यांग तथा राक्वेल अटावो और अमेरिका की एबिगेल स्पीयर्स की तीसरी वरीय जोड़ी से मुकाबला होगा. पिछले महीने इस जोड़ी ने सानिया की पूर्व जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस और कोको वांदेवेघे को हराकर सिनसिनाटी ओपन का खिताब जीता था.
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बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन और मिशेल का वीडियो जब से सामने आया है, इसने इंटरनेट पर काफ़ी हलचल पैदा कर दी है और प्रशंसक बेसब्री से गाना रिलीज़ होने का इंतजार कर रहे थे।
मिशेल मोरोन ने भारत में "मुड़ मुड़ के" के साथ डेब्यू किया है। यह एक फुल ऑन पेप्पी पार्टी नंबर है जहां जैकलीन गैंगस्टर को पकड़ने में पुलिस की मदद करती है जो मिशेल द्वारा अभिनीत है। दोनों साथ में काफी हॉट लग रहे हैं और इनकी केमेस्ट्री पर्दे पर आग लगा रही है। बेशक, जैकलीन के डांस मूव्स हमेशा की तरह बेहद ग्रेसफुल हैं।
जैकलीन ने अपने सोशल मीडिया पर गाने के रिलीज की घोषणा की है और लिखती हैं,"Finally it's here! #MudMudKe official music video with @iammichelemorroneofficial out now on @desimusicfactory official YouTube channel check out the crazy video and let me know your favourite part in the comments section" .
गाने को टोनी और नेहा कक्कड़ ने गाया है। जैकलीन फर्नांडीज के पास बहुत सारे प्रोजेक्ट हैं, उनकी अगले महीने अटैक और बच्चन पांडे जैसी दो बड़ी रिलीज़ हैं। इसके अलावा वह पहले ही सर्कस और राम सेतु की शूटिंग कर चुकी हैं। अब, रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह जल्द ही एएल विजय फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाली हैं।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन और मिशेल का वीडियो जब से सामने आया है, इसने इंटरनेट पर काफ़ी हलचल पैदा कर दी है और प्रशंसक बेसब्री से गाना रिलीज़ होने का इंतजार कर रहे थे। मिशेल मोरोन ने भारत में "मुड़ मुड़ के" के साथ डेब्यू किया है। यह एक फुल ऑन पेप्पी पार्टी नंबर है जहां जैकलीन गैंगस्टर को पकड़ने में पुलिस की मदद करती है जो मिशेल द्वारा अभिनीत है। दोनों साथ में काफी हॉट लग रहे हैं और इनकी केमेस्ट्री पर्दे पर आग लगा रही है। बेशक, जैकलीन के डांस मूव्स हमेशा की तरह बेहद ग्रेसफुल हैं। जैकलीन ने अपने सोशल मीडिया पर गाने के रिलीज की घोषणा की है और लिखती हैं,"Finally it's here! #MudMudKe official music video with @iammichelemorroneofficial out now on @desimusicfactory official YouTube channel check out the crazy video and let me know your favourite part in the comments section" . गाने को टोनी और नेहा कक्कड़ ने गाया है। जैकलीन फर्नांडीज के पास बहुत सारे प्रोजेक्ट हैं, उनकी अगले महीने अटैक और बच्चन पांडे जैसी दो बड़ी रिलीज़ हैं। इसके अलावा वह पहले ही सर्कस और राम सेतु की शूटिंग कर चुकी हैं। अब, रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह जल्द ही एएल विजय फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाली हैं।
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लखनऊ। प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में है और लखीमपुर खीरी मामले में एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही संवेदनशीलता देखने को मिली। गोरखपुर के दौरे पर योगी आदित्यनाथ को देर शाम जब घटना की सूचना मिली तो उन्होंने तत्काल ही प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों को एक्शन लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए और खुद पूरे मामले की मॉनीटरिंग करते रहे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए घटना के 24 घंटों के अंदर नामजद समेत सभी 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। जब पूरा देश सो रहा था, तब उत्तर प्रदेश पुलिस लखीमपुर खीरी में अपराधियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। आखिरकार सुबह सभी अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच गए। गौरतलब है कि बुधवार शाम को लखीमपुर जिले के थाना निघासन क्षेत्र में ग्राम तमोलिनपुरवा में 2 लड़कियों के शव पेड़ पर टंगे हुए पाए गए थे।
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि घटना में तत्काल लड़कियों की मां की तहरीर पर अभियोग पंजीकृत करते हुए वैज्ञानिक अन्वेषण के जरिए 6 अभियुक्तों (जुनैद, सुहैल, छोटे, हफीजुररहमान, करीमुद्दीन एवं छोटू) को गिरफ्तार किया गया है। इसमें मुख्य अभियुक्त जुनैद पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को सुबह 8.34 पर थाना क्षेत्र निघासन में स्थानीय निघासन पुलिस व स्वाट टीम के साथ मुठभेड़ में अभियुक्त जुनैद पुत्र इसराइल से एक 315 बोर का तमंचा व 2 जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद किया गया। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को भी बरामद कर लिया गया। मुठभेड़ के दौरान मौके से अन्य अभियुक्त सुहेल व हफीजुररहमान भी गिरफ्तार किए गए। इनसे पूछताछ में अन्य अभियुक्तों छोटे पुत्र मझले व करीमुद्दीन पुत्र कलामुद्दीन को भी गिरफ्तार किया गया। एफआईआर में नामजद अभियुक्त छोटू गौतम पुत्र चेतराम गौतम को भी स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मालूम हो कि घटना संज्ञान में आते ही पुलिस ने मृतक लड़कियों की मां की लिखित तहरीर पर देर रात एक बजे थाना निघासन में धारा 302, 323, 452, 376 व 3/4 पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज करने के बाद पूरी रात पुलिस ने सूचना के आधार पर अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। एक तरफ, जहां स्थानीय पुलिस पूरी रात दबिश पर दबिश दे रही थी तो दूसरी तरफ, प्रदेश के आला पुलिस अधिकारी भी पूरी रात जागकर मामले की मॉनीटरिंग कर रहे थे।
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अनुसार, देर शाम यह मामला पुलिस के संज्ञान में आया। उसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस तत्काल प्रभाव से सक्रिय हो गई। स्थानीय पुलिस के अलावा लखनऊ से आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह को फौरन घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। एसपी लखीमपुर संजीव सिन्हा की अगुवाई में त्वरित गति से कार्रवाई की गई। सभी फॉरेंसिक एविडेंस देखे गए। शवों का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के तहत किया गया है। शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं जिनका अंतिम संस्कार रीति-रिवाजों के जरिए किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे मामले की निगरानी करते रहे। गोरखपुर दौरे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्होंने देर शाम आला अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। इसके बाद बिना देरी किए पुलिस को मामले में एक्शन लेने की छूट दी। स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदेश की बेटियों के साथ हुई इस ह्दय विदारक घटना को अंजाम देने वाला कोई भी अपराधी बचना नहीं चाहिए। सभी को 24 घंटे के अंदर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने मृतक बेटियों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना भी जाहिर की। वो देर रात तक मामले में अधिकारियों से जानकारी लेते रहे।
लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2024 में उप्र में भाजपा के प्रत्याशी चयन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का असर देखने को मिलेगा। पार्टी ने कथनी और करनी को एक साबित करने के लिए 20 से 30 फीसदी तक महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की तैयारी की है। ऐसे में प्रदेश के कई दिग्गज सांसदों के टिकट कट जाएंगे।
लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा (NDA) ने 80 में 11 (13.75 प्रतिशत) सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। इनमें 10 भाजपा और एक अपना दल एस की प्रत्याशी थीं। प्रदेश में एनडीए के 66 लोकसभा सदस्यों में से 57 पुरुष और 9 महिला सांसद हैं। इनमें भाजपा की आठ व अपना दल एस की एक प्रत्याशी ने चुनाव जीता था।
इनमें अमेठी से भाजपा सांसद स्मृति ईरानी, फतेहपुर से भाजपा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति और मिर्जापुर से अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। संसद के दोनों सदनों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारी बहुमत से पारित होने के बाद भाजपा में चर्चा तेज है कि लोकसभा चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्या 20 से 25 तक हो सकती है।
सपा की ओर से 20 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की घोषणा के बाद भाजपा पर महिलाओं को ज्यादा टिकट देने का दबाव बनेगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रदेश में महिला प्रत्याशी बढ़ने से दस से पंद्रह मौजूदा दिग्गज सांसदों के टिकट कट सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक जातीय समीकरण के हिसाब से कमजोर मानी जाने वाली सीटों पर भी भाजपा महिला प्रत्याशी को उतारकर नारी शक्ति का दांव चल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के कारण जब पुरुष सांसदों के टिकट काटे जाएंगे तो वे अपनी सीट पर पत्नी या बेटी को टिकट देने का दबाव बनाएंगे। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की कड़ी परीक्षा होगी कि वह परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं या नए चेहरों को मौका देकर महिलाओं के बीच नया नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश करते हैं।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में NDA के सहयोगी अपना दल (एस), सुभासपा और निषाद पार्टी को भी सीटें मिलेंगी। ऐसे में भाजपा सहयोगी दलों के कोटे वाली सीटों पर भी महिला प्रत्याशी उतारने का दबाव बना सकती है।
वर्ष 2019 के चुनाव में एनडीए की सहयोगी अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से चुनाव जीती थीं। बदायूं से भाजपा की संघमित्रा मौर्या, मथुरा से हेमा मालिनी, फूलपुर से केसरी देवी पटेल, सुल्तानपुर से मेनका गांधी, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति,
धौरहरा से रेखा वर्मा, अमेठी से स्मृति ईरानी, प्रयागराज से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी सांसद चुनी गई थी। वहीं रामपुर से भाजपा प्रत्याशी फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा और लालगंज से नीलम सोनकर चुनाव हार गईं थीं।
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लखनऊ। प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में है और लखीमपुर खीरी मामले में एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही संवेदनशीलता देखने को मिली। गोरखपुर के दौरे पर योगी आदित्यनाथ को देर शाम जब घटना की सूचना मिली तो उन्होंने तत्काल ही प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों को एक्शन लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए और खुद पूरे मामले की मॉनीटरिंग करते रहे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए घटना के चौबीस घंटाटों के अंदर नामजद समेत सभी छः अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। जब पूरा देश सो रहा था, तब उत्तर प्रदेश पुलिस लखीमपुर खीरी में अपराधियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। आखिरकार सुबह सभी अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच गए। गौरतलब है कि बुधवार शाम को लखीमपुर जिले के थाना निघासन क्षेत्र में ग्राम तमोलिनपुरवा में दो लड़कियों के शव पेड़ पर टंगे हुए पाए गए थे। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि घटना में तत्काल लड़कियों की मां की तहरीर पर अभियोग पंजीकृत करते हुए वैज्ञानिक अन्वेषण के जरिए छः अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें मुख्य अभियुक्त जुनैद पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को सुबह आठ.चौंतीस पर थाना क्षेत्र निघासन में स्थानीय निघासन पुलिस व स्वाट टीम के साथ मुठभेड़ में अभियुक्त जुनैद पुत्र इसराइल से एक तीन सौ पंद्रह बोर का तमंचा व दो जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद किया गया। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को भी बरामद कर लिया गया। मुठभेड़ के दौरान मौके से अन्य अभियुक्त सुहेल व हफीजुररहमान भी गिरफ्तार किए गए। इनसे पूछताछ में अन्य अभियुक्तों छोटे पुत्र मझले व करीमुद्दीन पुत्र कलामुद्दीन को भी गिरफ्तार किया गया। एफआईआर में नामजद अभियुक्त छोटू गौतम पुत्र चेतराम गौतम को भी स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मालूम हो कि घटना संज्ञान में आते ही पुलिस ने मृतक लड़कियों की मां की लिखित तहरीर पर देर रात एक बजे थाना निघासन में धारा तीन सौ दो, तीन सौ तेईस, चार सौ बावन, तीन सौ छिहत्तर व तीन/चार पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज करने के बाद पूरी रात पुलिस ने सूचना के आधार पर अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। एक तरफ, जहां स्थानीय पुलिस पूरी रात दबिश पर दबिश दे रही थी तो दूसरी तरफ, प्रदेश के आला पुलिस अधिकारी भी पूरी रात जागकर मामले की मॉनीटरिंग कर रहे थे। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अनुसार, देर शाम यह मामला पुलिस के संज्ञान में आया। उसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस तत्काल प्रभाव से सक्रिय हो गई। स्थानीय पुलिस के अलावा लखनऊ से आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह को फौरन घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। एसपी लखीमपुर संजीव सिन्हा की अगुवाई में त्वरित गति से कार्रवाई की गई। सभी फॉरेंसिक एविडेंस देखे गए। शवों का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के तहत किया गया है। शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं जिनका अंतिम संस्कार रीति-रिवाजों के जरिए किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे मामले की निगरानी करते रहे। गोरखपुर दौरे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्होंने देर शाम आला अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। इसके बाद बिना देरी किए पुलिस को मामले में एक्शन लेने की छूट दी। स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदेश की बेटियों के साथ हुई इस ह्दय विदारक घटना को अंजाम देने वाला कोई भी अपराधी बचना नहीं चाहिए। सभी को चौबीस घंटाटे के अंदर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने मृतक बेटियों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना भी जाहिर की। वो देर रात तक मामले में अधिकारियों से जानकारी लेते रहे। लखनऊ। लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौबीस में उप्र में भाजपा के प्रत्याशी चयन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का असर देखने को मिलेगा। पार्टी ने कथनी और करनी को एक साबित करने के लिए बीस से तीस फीसदी तक महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की तैयारी की है। ऐसे में प्रदेश के कई दिग्गज सांसदों के टिकट कट जाएंगे। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस में भाजपा ने अस्सी में ग्यारह सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। इनमें दस भाजपा और एक अपना दल एस की प्रत्याशी थीं। प्रदेश में एनडीए के छयासठ लोकसभा सदस्यों में से सत्तावन पुरुष और नौ महिला सांसद हैं। इनमें भाजपा की आठ व अपना दल एस की एक प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। इनमें अमेठी से भाजपा सांसद स्मृति ईरानी, फतेहपुर से भाजपा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति और मिर्जापुर से अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। संसद के दोनों सदनों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारी बहुमत से पारित होने के बाद भाजपा में चर्चा तेज है कि लोकसभा चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्या बीस से पच्चीस तक हो सकती है। सपा की ओर से बीस फीसदी महिलाओं को टिकट देने की घोषणा के बाद भाजपा पर महिलाओं को ज्यादा टिकट देने का दबाव बनेगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रदेश में महिला प्रत्याशी बढ़ने से दस से पंद्रह मौजूदा दिग्गज सांसदों के टिकट कट सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक जातीय समीकरण के हिसाब से कमजोर मानी जाने वाली सीटों पर भी भाजपा महिला प्रत्याशी को उतारकर नारी शक्ति का दांव चल सकती है। सूत्रों के मुताबिक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के कारण जब पुरुष सांसदों के टिकट काटे जाएंगे तो वे अपनी सीट पर पत्नी या बेटी को टिकट देने का दबाव बनाएंगे। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की कड़ी परीक्षा होगी कि वह परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं या नए चेहरों को मौका देकर महिलाओं के बीच नया नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश करते हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में NDA के सहयोगी अपना दल , सुभासपा और निषाद पार्टी को भी सीटें मिलेंगी। ऐसे में भाजपा सहयोगी दलों के कोटे वाली सीटों पर भी महिला प्रत्याशी उतारने का दबाव बना सकती है। वर्ष दो हज़ार उन्नीस के चुनाव में एनडीए की सहयोगी अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से चुनाव जीती थीं। बदायूं से भाजपा की संघमित्रा मौर्या, मथुरा से हेमा मालिनी, फूलपुर से केसरी देवी पटेल, सुल्तानपुर से मेनका गांधी, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति, धौरहरा से रेखा वर्मा, अमेठी से स्मृति ईरानी, प्रयागराज से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी सांसद चुनी गई थी। वहीं रामपुर से भाजपा प्रत्याशी फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा और लालगंज से नीलम सोनकर चुनाव हार गईं थीं।
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मऊ में आयोजित सम्राट पृथ्वीराज चौहान जनस्वाभिमान रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि चौहान समाज से समाजवादियों का पुराना रिश्ता है। पृथ्वीराज चौहान जिस रास्ते से दिल्ली गये थे आज भी कन्नौज में उस सड़क का नाम समाजवादियों ने नहीं बदला। चौहान समाज के लोगों ने देश को सम्राट दिया लेकिन दिल्ली में आज वो गरीब हैं। जो आर्थिक और सामाजिक सम्मान चौहान समाज को नही मिल पाया उसे समाजवादी दिलाने का काम करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार आने पर देश की जो सबसे बड़ी सड़क बन रही है उस पर पहला स्मारक पृथ्वीराज चौहान का कन्नौज में बनेगा। दूसरा स्मारक चौहान समाज के संयोजक संजय चौहान के सुझाव पर बनाया जाएगा। चौहान समाज को जगाने में ऐसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे चौहान समाज में जोश और उत्साह बढ़ेगा।
अखिलेश ने कहा कि चुनाव परिणाम यह बता रहे है कि जनता भाजपा को पसंद नहीं कर रही है। भोली-भाली जनता 15-15 लाख रूपये का इंतजार करते थक गयी है। केन्द्र की भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में बेरोजगारी बढ़ी है, छात्रो-नौजवानों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। चौहान समाज में कितने लोगों को भाजपा सरकार में नौकरी मिली? इसका जवाब सामने आना चाहिये।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है। किसानों को धान की सही कीमत नहीं मिली। आलू का किसान आत्महत्या कर रहा है। गन्ना किसानों का भुगतान नहीं हो रहा है। किसानों के जरूरत की हर वस्तु भाजपा सरकार ने मंहगा कर दिया है। किसान नोटबंदी से परेशान है। व्यापारी नोटबंदी-जीएसटी से बर्बाद हो गया है। समाजवादी लोग लोकसभा चुनाव में जीत के बाद रास्ता निकालेंगे कि कैसे जीएसटी के सरलीकरण से फायदा हो?
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मऊ में आयोजित सम्राट पृथ्वीराज चौहान जनस्वाभिमान रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि चौहान समाज से समाजवादियों का पुराना रिश्ता है। पृथ्वीराज चौहान जिस रास्ते से दिल्ली गये थे आज भी कन्नौज में उस सड़क का नाम समाजवादियों ने नहीं बदला। चौहान समाज के लोगों ने देश को सम्राट दिया लेकिन दिल्ली में आज वो गरीब हैं। जो आर्थिक और सामाजिक सम्मान चौहान समाज को नही मिल पाया उसे समाजवादी दिलाने का काम करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार आने पर देश की जो सबसे बड़ी सड़क बन रही है उस पर पहला स्मारक पृथ्वीराज चौहान का कन्नौज में बनेगा। दूसरा स्मारक चौहान समाज के संयोजक संजय चौहान के सुझाव पर बनाया जाएगा। चौहान समाज को जगाने में ऐसे आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे चौहान समाज में जोश और उत्साह बढ़ेगा। अखिलेश ने कहा कि चुनाव परिणाम यह बता रहे है कि जनता भाजपा को पसंद नहीं कर रही है। भोली-भाली जनता पंद्रह-पंद्रह लाख रूपये का इंतजार करते थक गयी है। केन्द्र की भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में बेरोजगारी बढ़ी है, छात्रो-नौजवानों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। चौहान समाज में कितने लोगों को भाजपा सरकार में नौकरी मिली? इसका जवाब सामने आना चाहिये। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है। किसानों को धान की सही कीमत नहीं मिली। आलू का किसान आत्महत्या कर रहा है। गन्ना किसानों का भुगतान नहीं हो रहा है। किसानों के जरूरत की हर वस्तु भाजपा सरकार ने मंहगा कर दिया है। किसान नोटबंदी से परेशान है। व्यापारी नोटबंदी-जीएसटी से बर्बाद हो गया है। समाजवादी लोग लोकसभा चुनाव में जीत के बाद रास्ता निकालेंगे कि कैसे जीएसटी के सरलीकरण से फायदा हो?
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