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भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को अगले कुछ दिनों में भारत के कई हिस्सों में बारिश होने की चेतावनी दी है। मौसम विज्ञान विभाग (आईमडी) के मुताबिक, निम्न दबाव का क्षेत्र उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तटों से पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। इसके कारण गुजरात, पूर्वी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भारी वर्षा होने की संभावना है, वहीं आईएमडी ने यह भी कहा है कि ये बारिश 4-5 दिनों तक लगातार जारी रह सकती है। हालांकि आईएमडी ने कहा है कि फिलहाल राजधानी दिल्ली और उससे सटे इलाकों के लोगों को अभी गर्मी से राहत मिलती नहीं दिख रही है। यहां बारिश की कोई संभावना नहीं है।
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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को अगले कुछ दिनों में भारत के कई हिस्सों में बारिश होने की चेतावनी दी है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, निम्न दबाव का क्षेत्र उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तटों से पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। इसके कारण गुजरात, पूर्वी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भारी वर्षा होने की संभावना है, वहीं आईएमडी ने यह भी कहा है कि ये बारिश चार-पाँच दिनों तक लगातार जारी रह सकती है। हालांकि आईएमडी ने कहा है कि फिलहाल राजधानी दिल्ली और उससे सटे इलाकों के लोगों को अभी गर्मी से राहत मिलती नहीं दिख रही है। यहां बारिश की कोई संभावना नहीं है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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लाभ और अजवाइन के नुकसान क्या हैं?
अजवाइन महारानी कैथरीन द्वितीय के शासनकाल के दौरान रूस में दिखाई दिया। काफी समय यह एक सजावटी के रूप में माना जाता था और कभी कभी एक दवा के रूप में इस्तेमाल किया। लेकिन धीरे-धीरे लाभ और अजवाइन के नुकसान अध्ययन किया गया, और यह एक खेती पौधे के रूप में विकसित करने के लिए शुरू कर दिया।
आज प्रजनक के काम के लिए धन्यवाद एक रूट के रूप में ली गई है, और उपजी, पत्तेदार किस्मों रहे हैं। यह सब्जी पूरी तरह से खाद्य है। भोजन के लिए, आप जड़, डंठल, पत्ते, बीज और उपयोग कर सकते हैं अजवाइन। लाभ और इस संस्कृति के नुकसान से स्वतंत्र हैं।
इस पौधे की जड़ बहुत, सुगंधित निविदा और तालु लुगदी पर रसदार है। अद्वितीय पदार्थों कि अजवाइन का हिस्सा हैं का विस्तृत समूह उसे जिनसेंग की उपचारात्मक गुणों के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए अधिकार देता है।
कैलोरी जड़ प्रति 100 ग्राम केवल 32 किलो कैलोरी, संयंत्र की हरी भागों में - प्रति 100 ग्राम 12 किलो कैलोरी। अजवाइन - dieters के लिए एक बहुत ही उपयोगी वनस्पति संस्कृति। अतिरिक्त वजन कम करने की प्रक्रिया के बारे में उनकी नियमित रूप से उपयोग के साथ तेजी से होता है। क्या अन्य रूप में उपयोग कर सकते हैं अजवाइन? रस, लाभ और हानि विस्तार, कई dieters का नियमित उपयोग में अध्ययन किया है। इसके अलावा, संयंत्र फाइबर का एक बहुत कुछ शामिल है और कब्ज में दिखाया गया है।
तंत्रिका तंत्र पर अजवाइन सकारात्मक प्रभाव। इसकी संरचना में पदार्थ, "तनाव हार्मोन" मानव रक्त में की मात्रा को कम।
लाभ और अजवाइन के नुकसान अच्छी तरह से चिकित्सा के लिए जाना जाता है, यह कई रोगों और बीमारियों के लिए संयंत्र का उपयोग करने की अनुमति देता है। जड़ चयापचय संबंधी विकार, हृदय रोग और रक्त वाहिकाओं के लिए सिफारिश की है, atherosclerosis की रोकथाम के लिए। यह भी हृदय की मांसपेशी को उत्तेजित करता है, रक्तचाप कम करती है, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत।
पुरुषों पुरानी prostatitis का मुकाबला करने के उपायों का एक परिसर में अजवाइन खाने के लिए सलाह दी जाती है। इस मामले में जड़ों से पता चलता है और उपजी है। इसके अलावा, संयंत्र एक शक्तिशाली कामोद्दीपक है और अच्छी तरह से कामेच्छा और शक्ति पर प्रभावित करता है। Polyacetylenes और phthalides कि इस सब्जी में मौजूद हैं, कार्सिनोजन के हानिकारक प्रभावों को बेअसर।
कई उपयोगी पदार्थों अजवाइन में निहितः विटामिन बी, ई, सी, ए, कश्मीर, लोहा, पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम।
लाभ और अजवाइन के नुकसान इसके उपयोग और खाना पकाने की विधि पर निर्भर करते हैं। असाधारण स्वाद और इस वनस्पति की सुगंध के कारण कई ने पसंद किया है। लेकिन खाते में दैनिक खपत दर है, जो 150 ग्राम है रखना चाहिए। बड़ी मात्रा में अजवाइन कमजोर पाचन को नुकसान, गुर्दे सकता है। यह रात के लिए एक सब्जी का उपयोग करने के अवांछनीय है, के रूप में यह मानव शरीर पर एक invigorating प्रभाव पड़ता है। वैरिकाज़ नसों की खपत दर प्रतिदिन 70-80 ग्राम तक कम किया जाना चाहिए।
अजवाइन - एक अद्भुत मसालेदार मसाला है, जो सब्जियों में से किसी से तैयार किया जा सकता। यह एक थोड़ा कड़वा स्वाद है और मछली, मांस, मशरूम और सब्जियों के लिए प्रयोग किया जाता है। अजवाइन जड़ों की सेवा घटक सलाद और सूप सॉस, सूप, अंडा व्यंजन का हिस्सा हैं।
इस अनूठी स्पष्ट सब्जी अपने लाभ और दैनिक मूल्य से अधिक अजवाइन के नुकसान केवल मनाया जाता है जब यह शुद्ध रूप में प्रयोग किया जाता है की नियमित भोजन के साथ। टमाटर, बीन्स, गाजर, आलू, बैंगन, गोभीः यह अन्य सब्जियों के साथ गठबंधन करने के लिए बेहतर है।
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लाभ और अजवाइन के नुकसान क्या हैं? अजवाइन महारानी कैथरीन द्वितीय के शासनकाल के दौरान रूस में दिखाई दिया। काफी समय यह एक सजावटी के रूप में माना जाता था और कभी कभी एक दवा के रूप में इस्तेमाल किया। लेकिन धीरे-धीरे लाभ और अजवाइन के नुकसान अध्ययन किया गया, और यह एक खेती पौधे के रूप में विकसित करने के लिए शुरू कर दिया। आज प्रजनक के काम के लिए धन्यवाद एक रूट के रूप में ली गई है, और उपजी, पत्तेदार किस्मों रहे हैं। यह सब्जी पूरी तरह से खाद्य है। भोजन के लिए, आप जड़, डंठल, पत्ते, बीज और उपयोग कर सकते हैं अजवाइन। लाभ और इस संस्कृति के नुकसान से स्वतंत्र हैं। इस पौधे की जड़ बहुत, सुगंधित निविदा और तालु लुगदी पर रसदार है। अद्वितीय पदार्थों कि अजवाइन का हिस्सा हैं का विस्तृत समूह उसे जिनसेंग की उपचारात्मक गुणों के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए अधिकार देता है। कैलोरी जड़ प्रति एक सौ ग्राम केवल बत्तीस किलो कैलोरी, संयंत्र की हरी भागों में - प्रति एक सौ ग्राम बारह किलो कैलोरी। अजवाइन - dieters के लिए एक बहुत ही उपयोगी वनस्पति संस्कृति। अतिरिक्त वजन कम करने की प्रक्रिया के बारे में उनकी नियमित रूप से उपयोग के साथ तेजी से होता है। क्या अन्य रूप में उपयोग कर सकते हैं अजवाइन? रस, लाभ और हानि विस्तार, कई dieters का नियमित उपयोग में अध्ययन किया है। इसके अलावा, संयंत्र फाइबर का एक बहुत कुछ शामिल है और कब्ज में दिखाया गया है। तंत्रिका तंत्र पर अजवाइन सकारात्मक प्रभाव। इसकी संरचना में पदार्थ, "तनाव हार्मोन" मानव रक्त में की मात्रा को कम। लाभ और अजवाइन के नुकसान अच्छी तरह से चिकित्सा के लिए जाना जाता है, यह कई रोगों और बीमारियों के लिए संयंत्र का उपयोग करने की अनुमति देता है। जड़ चयापचय संबंधी विकार, हृदय रोग और रक्त वाहिकाओं के लिए सिफारिश की है, atherosclerosis की रोकथाम के लिए। यह भी हृदय की मांसपेशी को उत्तेजित करता है, रक्तचाप कम करती है, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत। पुरुषों पुरानी prostatitis का मुकाबला करने के उपायों का एक परिसर में अजवाइन खाने के लिए सलाह दी जाती है। इस मामले में जड़ों से पता चलता है और उपजी है। इसके अलावा, संयंत्र एक शक्तिशाली कामोद्दीपक है और अच्छी तरह से कामेच्छा और शक्ति पर प्रभावित करता है। Polyacetylenes और phthalides कि इस सब्जी में मौजूद हैं, कार्सिनोजन के हानिकारक प्रभावों को बेअसर। कई उपयोगी पदार्थों अजवाइन में निहितः विटामिन बी, ई, सी, ए, कश्मीर, लोहा, पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम। लाभ और अजवाइन के नुकसान इसके उपयोग और खाना पकाने की विधि पर निर्भर करते हैं। असाधारण स्वाद और इस वनस्पति की सुगंध के कारण कई ने पसंद किया है। लेकिन खाते में दैनिक खपत दर है, जो एक सौ पचास ग्राम है रखना चाहिए। बड़ी मात्रा में अजवाइन कमजोर पाचन को नुकसान, गुर्दे सकता है। यह रात के लिए एक सब्जी का उपयोग करने के अवांछनीय है, के रूप में यह मानव शरीर पर एक invigorating प्रभाव पड़ता है। वैरिकाज़ नसों की खपत दर प्रतिदिन सत्तर-अस्सी ग्राम तक कम किया जाना चाहिए। अजवाइन - एक अद्भुत मसालेदार मसाला है, जो सब्जियों में से किसी से तैयार किया जा सकता। यह एक थोड़ा कड़वा स्वाद है और मछली, मांस, मशरूम और सब्जियों के लिए प्रयोग किया जाता है। अजवाइन जड़ों की सेवा घटक सलाद और सूप सॉस, सूप, अंडा व्यंजन का हिस्सा हैं। इस अनूठी स्पष्ट सब्जी अपने लाभ और दैनिक मूल्य से अधिक अजवाइन के नुकसान केवल मनाया जाता है जब यह शुद्ध रूप में प्रयोग किया जाता है की नियमित भोजन के साथ। टमाटर, बीन्स, गाजर, आलू, बैंगन, गोभीः यह अन्य सब्जियों के साथ गठबंधन करने के लिए बेहतर है।
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बिलासपुर जिला में कई स्थानों पर नशे के तस्कर दबोचे जा रहे हैं। बिलासपुर जिला में नशे का कारोबार थमने के स्थान प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस ने दो विभिन्न स्थानों पर 19. 07 ग्राम चिट्टा बरामद करने में सफलता हासिल की है।
संवाद सहयोगी, बिलासपुरः बिलासपुर जिला में नशे का कारोबार थमने के स्थान प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हालात यह हैं कि बिलासपुर जिला में कई स्थानों पर नशे के तस्कर दबोचे जा रहे हैं तो कहीं नशे से जुड़े तस्करों को दूसरी जगह से गिरफ्तार किया जा रहा है।
इसी कड़ी में बिलासपुर पुलिस ने दो विभिन्न स्थानों पर 19. 07 ग्राम चिट्टा बरामद करने में सफलता हासिल की है। पहले मामले में बिलासपुर पुलिस की एसआइयू टीम ने मंगलवार सुबह गश्त के दौरान स्वारघाट से चार किलोमीटर दूर पुलाचड़ में 12. 71 ग्राम चिट्टा बरामद किया।
आरोपित काफी समय से चिट्टे के गोरखधंधे को बिलासपुर शहर के डियारा सेक्टर में अंजाम दे रहा था तथा काफी समय से एसआइयू टीम की राडार पर था। आरोपित 35 वर्षीय नदीम मोहम्मद निवासी डियारा सेक्टर बिलासपुर को एसआइयू टीम ने मंगलवार सुबह करीब नौ बजे पुलाचड़ में बनी वर्षाशालिका के बाहर गिरफ्तार किया।
आरोपित वहां पर गाडी का इंतजार कर रहा था। पुलिस टीम को सामने देखकर घबरा गया। पुलिस टीम ने जब इसकी तलाशी ली तो यह चिट्टा बरामद किया। आरोपित के विरुद्ध थाना स्वारघाट में मामला दर्ज कर लिया गया है।
दूसरे मामले में थाना कोट कहलूर पुलिस ने लखाला के पास बिलासपुर शहर के निहाल सेक्टर के ही एक अन्य युवक को 6. 36 ग्राम चिट्टे के सहित गिरफ्तार किया है। आरोपित मुकेश कुमार निवासी निहाल सेक्टर बिलासपुर लखाला के पास रेन शेल्टर के पास बैठा था। पुलिस को देखकर आरोपित घबरा गया।
पुलिस को आरोपित पर शक हुआ तथा तलाशी के दौरान यह चिट्टा बरामद किया। आरोपित के विरुद्ध थाना कोट कहलूर में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस प्रवक्ता एवं डीएसपी बिलासपुर राज कुमार ने बताया कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है।
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बिलासपुर जिला में कई स्थानों पर नशे के तस्कर दबोचे जा रहे हैं। बिलासपुर जिला में नशे का कारोबार थमने के स्थान प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस ने दो विभिन्न स्थानों पर उन्नीस. सात ग्राम चिट्टा बरामद करने में सफलता हासिल की है। संवाद सहयोगी, बिलासपुरः बिलासपुर जिला में नशे का कारोबार थमने के स्थान प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हालात यह हैं कि बिलासपुर जिला में कई स्थानों पर नशे के तस्कर दबोचे जा रहे हैं तो कहीं नशे से जुड़े तस्करों को दूसरी जगह से गिरफ्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में बिलासपुर पुलिस ने दो विभिन्न स्थानों पर उन्नीस. सात ग्राम चिट्टा बरामद करने में सफलता हासिल की है। पहले मामले में बिलासपुर पुलिस की एसआइयू टीम ने मंगलवार सुबह गश्त के दौरान स्वारघाट से चार किलोमीटर दूर पुलाचड़ में बारह. इकहत्तर ग्राम चिट्टा बरामद किया। आरोपित काफी समय से चिट्टे के गोरखधंधे को बिलासपुर शहर के डियारा सेक्टर में अंजाम दे रहा था तथा काफी समय से एसआइयू टीम की राडार पर था। आरोपित पैंतीस वर्षीय नदीम मोहम्मद निवासी डियारा सेक्टर बिलासपुर को एसआइयू टीम ने मंगलवार सुबह करीब नौ बजे पुलाचड़ में बनी वर्षाशालिका के बाहर गिरफ्तार किया। आरोपित वहां पर गाडी का इंतजार कर रहा था। पुलिस टीम को सामने देखकर घबरा गया। पुलिस टीम ने जब इसकी तलाशी ली तो यह चिट्टा बरामद किया। आरोपित के विरुद्ध थाना स्वारघाट में मामला दर्ज कर लिया गया है। दूसरे मामले में थाना कोट कहलूर पुलिस ने लखाला के पास बिलासपुर शहर के निहाल सेक्टर के ही एक अन्य युवक को छः. छत्तीस ग्राम चिट्टे के सहित गिरफ्तार किया है। आरोपित मुकेश कुमार निवासी निहाल सेक्टर बिलासपुर लखाला के पास रेन शेल्टर के पास बैठा था। पुलिस को देखकर आरोपित घबरा गया। पुलिस को आरोपित पर शक हुआ तथा तलाशी के दौरान यह चिट्टा बरामद किया। आरोपित के विरुद्ध थाना कोट कहलूर में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस प्रवक्ता एवं डीएसपी बिलासपुर राज कुमार ने बताया कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है।
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Share Market में तीन मंथ में 4,672 करोड़ का अवैध कारोबार करने का आरोपी शेयर ब्रोकर अरेस्ट सावधान होकर पूरी बात समझना जाने पूरी डिटेल्स। बताया जा रहा है कि एक बड़ी सफलता में मुंबई पुलिस ने गुरुवार को अवैध डब्बा ट्रेडिंग में शामिल होने के आरोप में एक 45 वर्षीय शेयर ब्रोकर को गिरफ्तार किया। जतिन सुरेशभाई मेहता के रूप में पहचाने गए आरोपी पर आरोप है कि उसने इस अवैध प्रथा के माध्यम से तीन मंथ की अवधि में ₹4,672 करोड़ की राशि के लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है।
हमारे देश के व्यवसायिक राजधानी मुंबई से एक और मेहता को गिरफ्तार किया गया है। जिसने महज 3 मंथ में 4672 करोड़ों रुपए का डब्बा ट्रेडिंग कर दिया। जिसमे खास बात यह रही कि इस ट्रेडर ने देखते ही देखते भारत सरकार को 1. 95 करोड़ रुपए का टैक्स में चूना लगा दिया।
अब ये डब्बा ट्रेडिंग का तात्पर्य विनियमित स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के बाहर शेयरों के व्यापार की अनधिकृत प्रथा से है। अब ऐसा माना जाता है कि मेहता ने सुरक्षा लेनदेन कर, पूंजीगत लाभ कर, राज्य सरकार स्टांप शुल्क शुल्क, सेबी टर्नओवर शुल्क और स्टॉक एक्सचेंज टर्नओवर राजस्व सहित विभिन्न करों की चोरी की जिससे सरकार को ₹1. 95 करोड़ से अधिक की वित्तीय हानि हुई।
- बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस ने अवैध 'डब्बा ट्रेडिंग' में शामिल शेयर ब्रोकर जतिन सुरेशभाई मेहता को गिरफ्तार किया है।
- मेहता ने तीन महीने की अवधि में ₹4,672 करोड़ की राशि के लेनदेन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गयी है।
- अधिकारियों ने मेहता के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान ₹50,000 नकद, पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, एक पेपर श्रेडर, एक पेन ड्राइव और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।
- बताया जा रहा है। कि ब्रोकर ने विभिन्न करों और शुल्कों की चोरी की है। जिससे सरकार को ₹1. 95 करोड़ से अधिक की वित्तीय हानि हुई है।
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Share Market में तीन मंथ में चार,छः सौ बहत्तर करोड़ का अवैध कारोबार करने का आरोपी शेयर ब्रोकर अरेस्ट सावधान होकर पूरी बात समझना जाने पूरी डिटेल्स। बताया जा रहा है कि एक बड़ी सफलता में मुंबई पुलिस ने गुरुवार को अवैध डब्बा ट्रेडिंग में शामिल होने के आरोप में एक पैंतालीस वर्षीय शेयर ब्रोकर को गिरफ्तार किया। जतिन सुरेशभाई मेहता के रूप में पहचाने गए आरोपी पर आरोप है कि उसने इस अवैध प्रथा के माध्यम से तीन मंथ की अवधि में चार रुपया,छः सौ बहत्तर करोड़ की राशि के लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है। हमारे देश के व्यवसायिक राजधानी मुंबई से एक और मेहता को गिरफ्तार किया गया है। जिसने महज तीन मंथ में चार हज़ार छः सौ बहत्तर करोड़ों रुपए का डब्बा ट्रेडिंग कर दिया। जिसमे खास बात यह रही कि इस ट्रेडर ने देखते ही देखते भारत सरकार को एक. पचानवे करोड़ रुपए का टैक्स में चूना लगा दिया। अब ये डब्बा ट्रेडिंग का तात्पर्य विनियमित स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के बाहर शेयरों के व्यापार की अनधिकृत प्रथा से है। अब ऐसा माना जाता है कि मेहता ने सुरक्षा लेनदेन कर, पूंजीगत लाभ कर, राज्य सरकार स्टांप शुल्क शुल्क, सेबी टर्नओवर शुल्क और स्टॉक एक्सचेंज टर्नओवर राजस्व सहित विभिन्न करों की चोरी की जिससे सरकार को एक रुपया. पचानवे करोड़ से अधिक की वित्तीय हानि हुई। - बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस ने अवैध 'डब्बा ट्रेडिंग' में शामिल शेयर ब्रोकर जतिन सुरेशभाई मेहता को गिरफ्तार किया है। - मेहता ने तीन महीने की अवधि में चार रुपया,छः सौ बहत्तर करोड़ की राशि के लेनदेन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गयी है। - अधिकारियों ने मेहता के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान पचास रुपया,शून्य नकद, पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, एक पेपर श्रेडर, एक पेन ड्राइव और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। - बताया जा रहा है। कि ब्रोकर ने विभिन्न करों और शुल्कों की चोरी की है। जिससे सरकार को एक रुपया. पचानवे करोड़ से अधिक की वित्तीय हानि हुई है।
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नहीं समझी जाती। ये नीची श्रेणी के धार्मिक हैं। गरुड़पुराण और वाबा रघुनाथदास के विश्रामसागर में जो यमपुरी का वर्णन है वह ऐसे ही लोगों के लिए है। रामचरितमानस के उत्तरकांड का वह प्रकरण जिसमें "हरिगुरु - निंदक दादुर होई" इत्यादि है, भावुक भक्तो के लिए नहीं है ।
जिस प्रकार पालन के फल का लोभ और उल्लंघन के दंड का भय दिखा कर धर्म का शासन-पक्ष आज्ञा करता है कि 'ऐसा करो; ऐसा न करो' उसी प्रकार धर्म का बुद्धि-क्षेत्र विवेक को सम्बोधन करके समझाता है कि " ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए; ऐसा करना उचित है और ऐसा करना अनुचित " । शुष्क धार्मिकों में से कुछ लोग तो शासनक्षेत्र ही तक रह जाते हैं और कुछ लोग थोड़ा और आगे बढ़ कर बुद्धिपक्ष का अवलंबन करते है। इन दोनो प्रकार के शुष्क धार्मिको से भक्त धार्मिक श्रेष्ठ होते हैं जो धर्म के रसात्मक स्वरूप का साक्षात्कार करते है। शब्दावलंबी शासन पक्ष-दर्शी शुष्क धार्मिक के लिए धर्म राजा है जिसके सामने वह प्रजा की तरह बड़े
अदब कायदे के साथ - नियम और विधि के पूरे पालन के साथ-डरता डरता जाता है। बुद्धिपक्ष-दर्शी के लिए धर्म गुरु या आचार्य्य है जिसके सामने वह विनीत शिष्य के रूप में शंकासमाधान करता पाया जाता है। पर भक्त धार्मिक के लिए धर्म
प्यार से पुकारनेवाला पिता है।
उसके सामने वह भोले भाले
छोटे बच्चे की तरह जाता है; कभी उसके ऊपर लोटता है, कभी
सिर पर चढ़ता है, यहाँ तक कि कभी कभी दाढ़ी भी पकड़ लेता है । वह धर्म को प्यार करता है; धर्म उसे अच्छा लगता है। उसका आनन्दलोक भी शुष्क धार्मिको के स्वर्ग से ऊपर है । वह प्रिय या उपास्य का सामीप्य है ।
धर्म के इस अन्तिम रसात्मक पक्ष तक मनुष्य का हृदय उपास्य के स्वरूप की उन्नत भावना के उपरान्त पहुॅचा है। असभ्य दशा में पड़ी हुई जातियों के बीच देवता एक ऐसा शासक था जो पूजा से तुष्ट हो कर ही रक्षा और कल्याण करता था और पूजा न पाने पर रुष्ट हो कर अनिष्ट करता था। उनकी पूजा भय और लोभ की प्रेरणा से ही की जाती थी । वनदेवता, ग्रामदेवता, कुलदेवता इसी प्रकार के उपास्य थे । जो प्राचीन जातियाँ सभ्य दशा में थीं उन्होने सूर्य, चन्द्र, अग्नि, वायु इत्यादि प्राकृतिक शक्तियों को उपास्य ठहराया था जो बराबर उपकार ही किया करती थीं, पर रुष्ट होने पर अनिष्ट भी करती थी । अतः सामान्यतः उपकार में तत्पर ऐसी शक्तियों की पूजा में कृतज्ञता का भाव भी कुछ रहता था जो भय और लोभ से उन्नत भाव था । अत. ऐसे ' देवताओं की उपासना में धर्म के स्वरूप का आभास मिलता है । उपास्य के इस उपकारी स्वरूप के भीतर अखिल विश्व के पालक और रक्षक भगवान् के व्यापक स्वरूप की भावना का अंकुर छिपा था ।
इस भवसागर में वहता हुआ मनुष्य आदिम काल से ही कभी सुख की तरंगो में उछलता और कभी दुःख के भँवर में चक्कर
खाता चला आ रहा है। प्रयत्न उसका बरावर से यही रहा है कि सुख की तरंगों में उछले और दुःख के भँवर में पड़ने से बचे। पर कभी तो वह लाख प्रयत्न - शारीरिक और मानसिक दोनो प्रकार के - करने पर भी दुःख के आवर्त्त में पड़ ही जाता और कभी अनायास अपने को सुख के शिखर पर पाता । इस दशा में इतनी बुद्धि का उदय तो अनिवार्य था कि सुख की प्राप्ति और दुःख की निवृत्ति-चाले संयोग सर्वथा अपने प्रयत्न के अधीन नहीं हैं । इसके आगे उसकी समझ के लिए दो रास्ते थे । या तो ऐसे संयोग यों ही हो जाया करते हैं अथवा कुछ परोक्ष शक्तियों के द्वारा उपस्थित किए जाते हैं। पहली बात तो आदिम मनुष्य के मन में न धँसी। दूसरी बात को ले कर ही उसने वनदेवता, ग्रामदेवता, कुलदेवता इत्यादि की पूजा को अपने बाह्य जीवन का एक अंग बनाया । जो आदिम जातियाँ असभ्य या वन्यदशा में थी उनकी परिमित भावना स्थानबद्ध या कुलबद्ध देवी-देवताओ तक ही रहती थी। वे इससे बड़े देवता की व्यापक भावना नहीं रखती थी । सभ्य जातियों में भी जो ज्ञान की बहुत नीची श्रेणी के लोग हैं वे अपने योगक्षेम के लिए ग्रामदेवता, कुलदेवता आदि का ही अनुग्रह प्राप्त करने का उद्योग करते हैं। जिन जातियों में कुलदेवता में ही पूर्ण ऐश्वर्य का आरोप करके पीछे एकेश्वरवाद चला उनमें उसका स्वरूप कुछ संकुचित रहा ।
'यहा' पहले प्राचीन यहूदी जाति की एक शाखा का साधारण कुलदेवता था जिसे इसराईल के वंशवाले बलि चढ़ाया करते थे ।
उसकी शक्ति और उसका ज्ञान परिमित था । जब मिस्रदेश के राजा ने इसराईलवंश वालो को बहुत सताया तब उन्होंने उस कुलदेवता की दुहाई दी । यहा ने आकाशवाणी द्वारा कहा "अच्छा आज रात को मैं बहुत से मिस्रियों का नाश करूंगा । पर एक काम करना । वलिदान करके पहचान के लिए अपने अपने दरवाजों पर रक्त का छापा लगा देना जिसमें उन घरों को मैं बचा जाऊँ"। पीछे हज़रत मूसा पैगंबर द्वारा उसी 'यहा' पर सर्वशक्तिमत्ता और सर्वज्ञता का किया गया
और वह जमीन और आसमान का बनानेवाला खुदा हुआ । इस प्रकार प्राचीन काल में लाल समुद्र के आसपास बसनेवाली जातियों में कुलदेवता की भावना 'एकेश्वरवाद' ( Monotheism ) तक पहुॅचाई गई।
प्राचीन आर्य जाति ने आरम्भ हो से सम्पूर्ण जगत् में कार्य करनेवाली प्राकृतिक शक्तियों को देवरूप में ग्रहण किया था। आगे चल कर उन सब देवताओ का तत्त्वदृष्टि से एक में समाहार करके 'ब्रह्मवाद' ( Monism ) की प्रतिष्ठा हुई । मंत्रकाल में ही अग्नि, वायु, वरुण, इन्द्र इत्यादि एक ही ब्रह्म के नाना रूप माने जा चुके थे --
इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यस्स सुपर्णो गरुत्मान् । एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्नि, यमं, मातरिश्वानमाहुः । ( ऋग्वेद १ - २ । १६४-६४ ) उपनिषत्काल में एक ब्रह्म की भावना पूर्णता को पहुॅची और "सर्व
खल्विदं ब्रह्म ", "नेह नानास्ति किञ्चन", "तत्त्वमसि " इत्यादि महावाक्यों का पूरा प्रचार हुआ। इसी रीति से बाबुल की प्राचीन खाल्दी ( Chaldeans ) जाति के बीच एक ईश्वर की भावना का विकास हुआ था । बाबुल के खंडहरों में मिले ईसा से २००० वर्ष पूर्व के एक लेख में वहाँ के भिन्न भिन्न देवता एक ही प्रधान देवता मर्दुक के भिन्न भिन्न रूप कहे गए हैंनर्गल युद्ध का मटुक है । बेल राजसत्ता का मर्दुक है । शम्श धर्म का मर्दुक है । अदुवर्षा का मर्दुक है । मनुष्य जाति में देवभावना के उपर्युक्त दो प्राचीन रूप थे । असभ्य दशा से न निकली हुई जातियाँ तो अपने देवताओं की वृत्ति अपनी वृत्ति से ऊँची नहीं समझती थीं। वे यही मानती थीं कि देवता केवल पूजा से प्रसन्न होने पर ही भलाई करते हैं और पूजा न पाने पर घोर अष्टि करते हैं । सभ्य जातियाँ उन प्राकृतिक शक्तियों की उपासना करती थीं जिनकी उपकारी प्रवृत्ति से जीवन की रक्षा और निर्वाह होता था, जैसे, सूर्य्य, इन्द्र, अग्नि, चायु, पृथ्वी इत्यादि । वे प्रत्यक्ष अनुभव करती थीं कि इनके द्वारा जगत् में प्रकाश फैलता है, पृथ्वी शीतल और धनधान्यपूर्ण होती है, शीत और पशुभय दूर होता है। अतः दैत्यों और दस्युओं का पराभव भी वे उन्हीं के परोक्ष प्रभाव से समझती थीं । साथ ही अतिवृष्टि, अनावृष्टि, गोधन का क्षय इत्यादि का कारण भी उन्हीं का कोप समझा जाता था। इस प्रकार अत्यन्त प्राचीन काल के
मनुष्यों में देवता ऐसे शासक के रूप में थे जिनकी प्रसन्नता और अप्रसन्नता का सम्बन्ध पूजा के साथ ही था, मनुष्य के शील या आचरण के साथ नहीं। इसी के अनुरूप पूजा का उद्देश्य भी अपना सुख रहता था। पहले तो सुख इसी लोक का सुख या 'अभ्युदय' था । पर आगे चल कर जब परलोक की भावना हुई तब परलोक के सुख या 'निःश्रेयस' की कामना भी होने लगी । इस निःश्रेयस की भावना के साथ ही पूजा का विधान अधिक वृहत् होने लगा और उसमें लोकहित-साधन का भी कुछ समावेश हुआ । बड़े बड़े यज्ञ होने लगे जिनमें सैकड़ों गाएँ तथा और बहुत तरह के सामान ब्राह्मणों को दान दिए जाते थे । दान की योजना द्वारा पूजा का स्वरूप कुछ अवश्य परिष्कृत और उन्नत हुआ, उसमें लोकोपकार का अवयव आ गया ।
इतना होने पर भी प्राचीन देवपूजा में देवताओं के ये ही दो कार्य्य लक्षण कहे जा सकते हैं - (१) देवता केवल पूजा पाने पर ही उपकार करते हैं, न पाने पर अनिष्ट करते हैं । (२) देवता यों तो बराबर उपकार किया ही करते हैं पर पूजा पाने पर विशेष उपकार करते हैं । इस दशा में अत्यन्त प्राचीन काल के मनुष्यों में देवता के प्रति तीन भाव हो सकते थे - भय, लोभ और कृतज्ञता । इन तीनो भावों में मन सुख की ओर ही उन्मुख रहता है, देवता की ओर नहीं । कृतज्ञता कुछ उदात्त वृत्ति है, भी ध्यान मुख्यतः 'कृत' या किए हुए उपकार पर ही रहता है, उपकार करनेवाले पर नहीं । कृतज्ञ 'कृत' के स्वरूप में के
अनुरक्त रहता है; कर्त्ता के स्वरूप में नहीं । लोभ, भय और कृतज्ञता इन तीनो भावों का प्रकाश विनीत वचन, स्तुति और उत्तम द्रव्यों की भेंट द्वारा पूरी तरह से हो जाता है। इन तीनो भावों की प्रेरणा 'पूजा' तक ही पहुँचती है। प्राचीन यज्ञ, जिन्हें 'द्रव्ययज्ञ' कहते हैं, इसी पूजा के विधान हैं। इस विधान में मानस पक्ष या हृदय-पक्ष का पूज्य के साथ पूरा योग नहीं था । मंत्रकाल या वैदिक काल में सामान्य प्रवृत्ति इसी 'द्रव्ययज्ञ' की थी । यज्ञ की ठीक सामग्री इकट्ठी करके विधि का ठीक ठीक पालन कर देने ही से ऐसे यज्ञ सम्पन्न हुआ करते थे ।
'द्रव्ययज्ञ' का सामान्य प्रचार होते हुए भी वैदिक काल में ही विशिष्ट जनों में मननशीलता और भावुकता दोनों की प्रवृत्ति भी अवश्य थी । मनन और चिन्तन द्वारा ही मंत्रकाल में सब देवों की उस एकत्व भावना का प्रादुर्भाव हुआ था जो उपनित्काल में पूर्णता को पहुॅची । जिन देवताओं के निमित्त बड़े बड़े काम्य और नैमित्तिक यज्ञ किए जाते थे, जिन्हें यज्ञों में भाग मिलता था, उनकी स्तुति के अतिरिक्त बहुत से मंत्रों में नदियों, उषा इत्यादि के सम्बन्ध में सौन्दर्य - भावना और शुद्ध अनुराग द्वारा प्रेरित रमणीय उक्तियाँ भी हैं जो भावुकता का पता देती हैं। ऋग्वेद के पुरुषसूक्त में ईश्वर की भावना पुरुष के रूप में है। नराकार- भावना ( Anthropomorphic Conception ) का यह उदय-गीत माना जाता है, इसी से इस सूक्त का पाठ
वैष्णव मन्दिरों में प्रायः हुआ करता है* । शतपथ ब्राह्मण में सहृदयता और भावुकता का कुछ विशेष आभास उपास्य के स्वरूप के साथ साथ धर्म के स्वरूप में भी पाया जाता है। उसमें एक
स्थल ( १२ । ३ - ४ ) पर कहा गया है कि 'पुरुप नारायण' ने यज्ञ करके वसुओं, रुद्रों और आदित्यों को इधर उधर सब दिशाओं में भेजा और आप जहाँ के तहाँ स्थिर रहे। इसके आगे एक दूसरे स्थान पर ( १३ । ६ - १ ) यह भी आता है कि 'पुरुष नारायण' ने ऐश्वर्य और सर्वत्व की प्राप्ति करानेवाले पाचरात्र सत्र ( पाँच दिनों का एक यज्ञ ) की विधि चलाई । इससे स्पष्ट है कि सगुण परमेश्वर का 'नारायण' ( नर-समष्टि का आश्रय ) नाम ब्राह्मणकाल में ही प्रसिद्ध हो गया था । नारायण सगुण ब्रह्म का वह रूप है जिसकी अभिव्यक्ति जगत् में नर या मनुष्य के रूप में हुई ।
इस 'नारायण' स्वरूप तक उपासना किस ढंग से पहुॅची है, इसे भी थोड़ा देखना चाहिए । उपनिषद् में हमें मिलता है कि ब्रह्म की उपासना 'अन्न, प्राण, मन, ज्ञान और आनन्द', इन. रूपों में करनी चाहिए। अन्नोपासना ब्रह्म को अपनी
* यही भावना लेकर भागवत में कहा गया है -
जगृहे पौरुषं रूपं भगवान्महदादिभिः ।
सम्भूतं षोडशकलमादौ लोक-सिसृक्षया । ( १-३-१ )
१ [ अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात् । प्राणो ब्रह्मेति व्यजानात् । मनो व्रह्मेति व्यजानात् । विज्ञानं ब्रह्मेति व्यजानात् । श्रानन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् । -तैत्तिरीयोपनिषद्, भृगुवल्ली ।।
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नहीं समझी जाती। ये नीची श्रेणी के धार्मिक हैं। गरुड़पुराण और वाबा रघुनाथदास के विश्रामसागर में जो यमपुरी का वर्णन है वह ऐसे ही लोगों के लिए है। रामचरितमानस के उत्तरकांड का वह प्रकरण जिसमें "हरिगुरु - निंदक दादुर होई" इत्यादि है, भावुक भक्तो के लिए नहीं है । जिस प्रकार पालन के फल का लोभ और उल्लंघन के दंड का भय दिखा कर धर्म का शासन-पक्ष आज्ञा करता है कि 'ऐसा करो; ऐसा न करो' उसी प्रकार धर्म का बुद्धि-क्षेत्र विवेक को सम्बोधन करके समझाता है कि " ऐसा करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए; ऐसा करना उचित है और ऐसा करना अनुचित " । शुष्क धार्मिकों में से कुछ लोग तो शासनक्षेत्र ही तक रह जाते हैं और कुछ लोग थोड़ा और आगे बढ़ कर बुद्धिपक्ष का अवलंबन करते है। इन दोनो प्रकार के शुष्क धार्मिको से भक्त धार्मिक श्रेष्ठ होते हैं जो धर्म के रसात्मक स्वरूप का साक्षात्कार करते है। शब्दावलंबी शासन पक्ष-दर्शी शुष्क धार्मिक के लिए धर्म राजा है जिसके सामने वह प्रजा की तरह बड़े अदब कायदे के साथ - नियम और विधि के पूरे पालन के साथ-डरता डरता जाता है। बुद्धिपक्ष-दर्शी के लिए धर्म गुरु या आचार्य्य है जिसके सामने वह विनीत शिष्य के रूप में शंकासमाधान करता पाया जाता है। पर भक्त धार्मिक के लिए धर्म प्यार से पुकारनेवाला पिता है। उसके सामने वह भोले भाले छोटे बच्चे की तरह जाता है; कभी उसके ऊपर लोटता है, कभी सिर पर चढ़ता है, यहाँ तक कि कभी कभी दाढ़ी भी पकड़ लेता है । वह धर्म को प्यार करता है; धर्म उसे अच्छा लगता है। उसका आनन्दलोक भी शुष्क धार्मिको के स्वर्ग से ऊपर है । वह प्रिय या उपास्य का सामीप्य है । धर्म के इस अन्तिम रसात्मक पक्ष तक मनुष्य का हृदय उपास्य के स्वरूप की उन्नत भावना के उपरान्त पहुॅचा है। असभ्य दशा में पड़ी हुई जातियों के बीच देवता एक ऐसा शासक था जो पूजा से तुष्ट हो कर ही रक्षा और कल्याण करता था और पूजा न पाने पर रुष्ट हो कर अनिष्ट करता था। उनकी पूजा भय और लोभ की प्रेरणा से ही की जाती थी । वनदेवता, ग्रामदेवता, कुलदेवता इसी प्रकार के उपास्य थे । जो प्राचीन जातियाँ सभ्य दशा में थीं उन्होने सूर्य, चन्द्र, अग्नि, वायु इत्यादि प्राकृतिक शक्तियों को उपास्य ठहराया था जो बराबर उपकार ही किया करती थीं, पर रुष्ट होने पर अनिष्ट भी करती थी । अतः सामान्यतः उपकार में तत्पर ऐसी शक्तियों की पूजा में कृतज्ञता का भाव भी कुछ रहता था जो भय और लोभ से उन्नत भाव था । अत. ऐसे ' देवताओं की उपासना में धर्म के स्वरूप का आभास मिलता है । उपास्य के इस उपकारी स्वरूप के भीतर अखिल विश्व के पालक और रक्षक भगवान् के व्यापक स्वरूप की भावना का अंकुर छिपा था । इस भवसागर में वहता हुआ मनुष्य आदिम काल से ही कभी सुख की तरंगो में उछलता और कभी दुःख के भँवर में चक्कर खाता चला आ रहा है। प्रयत्न उसका बरावर से यही रहा है कि सुख की तरंगों में उछले और दुःख के भँवर में पड़ने से बचे। पर कभी तो वह लाख प्रयत्न - शारीरिक और मानसिक दोनो प्रकार के - करने पर भी दुःख के आवर्त्त में पड़ ही जाता और कभी अनायास अपने को सुख के शिखर पर पाता । इस दशा में इतनी बुद्धि का उदय तो अनिवार्य था कि सुख की प्राप्ति और दुःख की निवृत्ति-चाले संयोग सर्वथा अपने प्रयत्न के अधीन नहीं हैं । इसके आगे उसकी समझ के लिए दो रास्ते थे । या तो ऐसे संयोग यों ही हो जाया करते हैं अथवा कुछ परोक्ष शक्तियों के द्वारा उपस्थित किए जाते हैं। पहली बात तो आदिम मनुष्य के मन में न धँसी। दूसरी बात को ले कर ही उसने वनदेवता, ग्रामदेवता, कुलदेवता इत्यादि की पूजा को अपने बाह्य जीवन का एक अंग बनाया । जो आदिम जातियाँ असभ्य या वन्यदशा में थी उनकी परिमित भावना स्थानबद्ध या कुलबद्ध देवी-देवताओ तक ही रहती थी। वे इससे बड़े देवता की व्यापक भावना नहीं रखती थी । सभ्य जातियों में भी जो ज्ञान की बहुत नीची श्रेणी के लोग हैं वे अपने योगक्षेम के लिए ग्रामदेवता, कुलदेवता आदि का ही अनुग्रह प्राप्त करने का उद्योग करते हैं। जिन जातियों में कुलदेवता में ही पूर्ण ऐश्वर्य का आरोप करके पीछे एकेश्वरवाद चला उनमें उसका स्वरूप कुछ संकुचित रहा । 'यहा' पहले प्राचीन यहूदी जाति की एक शाखा का साधारण कुलदेवता था जिसे इसराईल के वंशवाले बलि चढ़ाया करते थे । उसकी शक्ति और उसका ज्ञान परिमित था । जब मिस्रदेश के राजा ने इसराईलवंश वालो को बहुत सताया तब उन्होंने उस कुलदेवता की दुहाई दी । यहा ने आकाशवाणी द्वारा कहा "अच्छा आज रात को मैं बहुत से मिस्रियों का नाश करूंगा । पर एक काम करना । वलिदान करके पहचान के लिए अपने अपने दरवाजों पर रक्त का छापा लगा देना जिसमें उन घरों को मैं बचा जाऊँ"। पीछे हज़रत मूसा पैगंबर द्वारा उसी 'यहा' पर सर्वशक्तिमत्ता और सर्वज्ञता का किया गया और वह जमीन और आसमान का बनानेवाला खुदा हुआ । इस प्रकार प्राचीन काल में लाल समुद्र के आसपास बसनेवाली जातियों में कुलदेवता की भावना 'एकेश्वरवाद' तक पहुॅचाई गई। प्राचीन आर्य जाति ने आरम्भ हो से सम्पूर्ण जगत् में कार्य करनेवाली प्राकृतिक शक्तियों को देवरूप में ग्रहण किया था। आगे चल कर उन सब देवताओ का तत्त्वदृष्टि से एक में समाहार करके 'ब्रह्मवाद' की प्रतिष्ठा हुई । मंत्रकाल में ही अग्नि, वायु, वरुण, इन्द्र इत्यादि एक ही ब्रह्म के नाना रूप माने जा चुके थे -- इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यस्स सुपर्णो गरुत्मान् । एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्नि, यमं, मातरिश्वानमाहुः । उपनिषत्काल में एक ब्रह्म की भावना पूर्णता को पहुॅची और "सर्व खल्विदं ब्रह्म ", "नेह नानास्ति किञ्चन", "तत्त्वमसि " इत्यादि महावाक्यों का पूरा प्रचार हुआ। इसी रीति से बाबुल की प्राचीन खाल्दी जाति के बीच एक ईश्वर की भावना का विकास हुआ था । बाबुल के खंडहरों में मिले ईसा से दो हज़ार वर्ष पूर्व के एक लेख में वहाँ के भिन्न भिन्न देवता एक ही प्रधान देवता मर्दुक के भिन्न भिन्न रूप कहे गए हैंनर्गल युद्ध का मटुक है । बेल राजसत्ता का मर्दुक है । शम्श धर्म का मर्दुक है । अदुवर्षा का मर्दुक है । मनुष्य जाति में देवभावना के उपर्युक्त दो प्राचीन रूप थे । असभ्य दशा से न निकली हुई जातियाँ तो अपने देवताओं की वृत्ति अपनी वृत्ति से ऊँची नहीं समझती थीं। वे यही मानती थीं कि देवता केवल पूजा से प्रसन्न होने पर ही भलाई करते हैं और पूजा न पाने पर घोर अष्टि करते हैं । सभ्य जातियाँ उन प्राकृतिक शक्तियों की उपासना करती थीं जिनकी उपकारी प्रवृत्ति से जीवन की रक्षा और निर्वाह होता था, जैसे, सूर्य्य, इन्द्र, अग्नि, चायु, पृथ्वी इत्यादि । वे प्रत्यक्ष अनुभव करती थीं कि इनके द्वारा जगत् में प्रकाश फैलता है, पृथ्वी शीतल और धनधान्यपूर्ण होती है, शीत और पशुभय दूर होता है। अतः दैत्यों और दस्युओं का पराभव भी वे उन्हीं के परोक्ष प्रभाव से समझती थीं । साथ ही अतिवृष्टि, अनावृष्टि, गोधन का क्षय इत्यादि का कारण भी उन्हीं का कोप समझा जाता था। इस प्रकार अत्यन्त प्राचीन काल के मनुष्यों में देवता ऐसे शासक के रूप में थे जिनकी प्रसन्नता और अप्रसन्नता का सम्बन्ध पूजा के साथ ही था, मनुष्य के शील या आचरण के साथ नहीं। इसी के अनुरूप पूजा का उद्देश्य भी अपना सुख रहता था। पहले तो सुख इसी लोक का सुख या 'अभ्युदय' था । पर आगे चल कर जब परलोक की भावना हुई तब परलोक के सुख या 'निःश्रेयस' की कामना भी होने लगी । इस निःश्रेयस की भावना के साथ ही पूजा का विधान अधिक वृहत् होने लगा और उसमें लोकहित-साधन का भी कुछ समावेश हुआ । बड़े बड़े यज्ञ होने लगे जिनमें सैकड़ों गाएँ तथा और बहुत तरह के सामान ब्राह्मणों को दान दिए जाते थे । दान की योजना द्वारा पूजा का स्वरूप कुछ अवश्य परिष्कृत और उन्नत हुआ, उसमें लोकोपकार का अवयव आ गया । इतना होने पर भी प्राचीन देवपूजा में देवताओं के ये ही दो कार्य्य लक्षण कहे जा सकते हैं - देवता केवल पूजा पाने पर ही उपकार करते हैं, न पाने पर अनिष्ट करते हैं । देवता यों तो बराबर उपकार किया ही करते हैं पर पूजा पाने पर विशेष उपकार करते हैं । इस दशा में अत्यन्त प्राचीन काल के मनुष्यों में देवता के प्रति तीन भाव हो सकते थे - भय, लोभ और कृतज्ञता । इन तीनो भावों में मन सुख की ओर ही उन्मुख रहता है, देवता की ओर नहीं । कृतज्ञता कुछ उदात्त वृत्ति है, भी ध्यान मुख्यतः 'कृत' या किए हुए उपकार पर ही रहता है, उपकार करनेवाले पर नहीं । कृतज्ञ 'कृत' के स्वरूप में के अनुरक्त रहता है; कर्त्ता के स्वरूप में नहीं । लोभ, भय और कृतज्ञता इन तीनो भावों का प्रकाश विनीत वचन, स्तुति और उत्तम द्रव्यों की भेंट द्वारा पूरी तरह से हो जाता है। इन तीनो भावों की प्रेरणा 'पूजा' तक ही पहुँचती है। प्राचीन यज्ञ, जिन्हें 'द्रव्ययज्ञ' कहते हैं, इसी पूजा के विधान हैं। इस विधान में मानस पक्ष या हृदय-पक्ष का पूज्य के साथ पूरा योग नहीं था । मंत्रकाल या वैदिक काल में सामान्य प्रवृत्ति इसी 'द्रव्ययज्ञ' की थी । यज्ञ की ठीक सामग्री इकट्ठी करके विधि का ठीक ठीक पालन कर देने ही से ऐसे यज्ञ सम्पन्न हुआ करते थे । 'द्रव्ययज्ञ' का सामान्य प्रचार होते हुए भी वैदिक काल में ही विशिष्ट जनों में मननशीलता और भावुकता दोनों की प्रवृत्ति भी अवश्य थी । मनन और चिन्तन द्वारा ही मंत्रकाल में सब देवों की उस एकत्व भावना का प्रादुर्भाव हुआ था जो उपनित्काल में पूर्णता को पहुॅची । जिन देवताओं के निमित्त बड़े बड़े काम्य और नैमित्तिक यज्ञ किए जाते थे, जिन्हें यज्ञों में भाग मिलता था, उनकी स्तुति के अतिरिक्त बहुत से मंत्रों में नदियों, उषा इत्यादि के सम्बन्ध में सौन्दर्य - भावना और शुद्ध अनुराग द्वारा प्रेरित रमणीय उक्तियाँ भी हैं जो भावुकता का पता देती हैं। ऋग्वेद के पुरुषसूक्त में ईश्वर की भावना पुरुष के रूप में है। नराकार- भावना का यह उदय-गीत माना जाता है, इसी से इस सूक्त का पाठ वैष्णव मन्दिरों में प्रायः हुआ करता है* । शतपथ ब्राह्मण में सहृदयता और भावुकता का कुछ विशेष आभास उपास्य के स्वरूप के साथ साथ धर्म के स्वरूप में भी पाया जाता है। उसमें एक स्थल पर कहा गया है कि 'पुरुप नारायण' ने यज्ञ करके वसुओं, रुद्रों और आदित्यों को इधर उधर सब दिशाओं में भेजा और आप जहाँ के तहाँ स्थिर रहे। इसके आगे एक दूसरे स्थान पर यह भी आता है कि 'पुरुष नारायण' ने ऐश्वर्य और सर्वत्व की प्राप्ति करानेवाले पाचरात्र सत्र की विधि चलाई । इससे स्पष्ट है कि सगुण परमेश्वर का 'नारायण' नाम ब्राह्मणकाल में ही प्रसिद्ध हो गया था । नारायण सगुण ब्रह्म का वह रूप है जिसकी अभिव्यक्ति जगत् में नर या मनुष्य के रूप में हुई । इस 'नारायण' स्वरूप तक उपासना किस ढंग से पहुॅची है, इसे भी थोड़ा देखना चाहिए । उपनिषद् में हमें मिलता है कि ब्रह्म की उपासना 'अन्न, प्राण, मन, ज्ञान और आनन्द', इन. रूपों में करनी चाहिए। अन्नोपासना ब्रह्म को अपनी * यही भावना लेकर भागवत में कहा गया है - जगृहे पौरुषं रूपं भगवान्महदादिभिः । सम्भूतं षोडशकलमादौ लोक-सिसृक्षया । एक [ अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात् । प्राणो ब्रह्मेति व्यजानात् । मनो व्रह्मेति व्यजानात् । विज्ञानं ब्रह्मेति व्यजानात् । श्रानन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् । -तैत्तिरीयोपनिषद्, भृगुवल्ली ।।
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बढ़ते कोरोना मामलों और मौत की रिपोर्ट के बीच, तेलंगाना से एक राहत भरी खबर आई। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा कि रक्षा विमान के साथ राज्य सरकार ओडिशा राज्य में तरल ऑक्सीजन संयंत्रों के लिए आठ ऑक्सीजन टैंकरों को ले जाए। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने भी इस योजना का प्रस्ताव दिया है और यह पहली बार आपूर्ति के लिए राज्य एयरलिफ्ट ऑक्सीजन है। ध्यान दिया जाए कि इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी की समस्या को भी काफी हद तक हल करने में मदद मिलेगी।
यह पहला उदाहरण है जब ऑक्सीजन टैंकरों को एयरलिफ्ट किया गया है। इस संबंध में, स्वास्थ्य मंत्री और परिवार कल्याण ईटाला राजेंदर, मुख्य सचिव, सोमेश कुमार, आईएएस, और अन्य अधिकारियों के साथ आज बेगमपेट हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से एयरलिफ्टिंग कार्यों की देखरेख करने के लिए मौजूद थे। विंग कमांडर चैतन्य और विंग कमांडर निझावन द्वारा कमान के लिए भारतीय वायु सेना के दो सी 17 विमान तैनात किए गए थे।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि टैंकरों के एयरलिफ्टिंग के साथ, यात्रा का समय तीन दिनों तक कम हो जाता है और यह देखने में भी लंबा रास्ता तय करना होगा कि कोविद 19 रोगियों के लिए ऑक्सीजन की कमी को कम से कम कुछ दिनों के लिए दूर कर देगा। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ऐसा करने के लिए विशेष मुख्य सचिव परिवहन आरएंडबी सुनील शर्मा, सचिव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण रिजवी, सरफराज अहमद, डॉ। प्रीति मीणा, और अन्य अधिकारियों ने इसे बनाने के लिए चौबीसों घंटे काम किया है।
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बढ़ते कोरोना मामलों और मौत की रिपोर्ट के बीच, तेलंगाना से एक राहत भरी खबर आई। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा कि रक्षा विमान के साथ राज्य सरकार ओडिशा राज्य में तरल ऑक्सीजन संयंत्रों के लिए आठ ऑक्सीजन टैंकरों को ले जाए। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने भी इस योजना का प्रस्ताव दिया है और यह पहली बार आपूर्ति के लिए राज्य एयरलिफ्ट ऑक्सीजन है। ध्यान दिया जाए कि इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी की समस्या को भी काफी हद तक हल करने में मदद मिलेगी। यह पहला उदाहरण है जब ऑक्सीजन टैंकरों को एयरलिफ्ट किया गया है। इस संबंध में, स्वास्थ्य मंत्री और परिवार कल्याण ईटाला राजेंदर, मुख्य सचिव, सोमेश कुमार, आईएएस, और अन्य अधिकारियों के साथ आज बेगमपेट हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से एयरलिफ्टिंग कार्यों की देखरेख करने के लिए मौजूद थे। विंग कमांडर चैतन्य और विंग कमांडर निझावन द्वारा कमान के लिए भारतीय वायु सेना के दो सी सत्रह विमान तैनात किए गए थे। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि टैंकरों के एयरलिफ्टिंग के साथ, यात्रा का समय तीन दिनों तक कम हो जाता है और यह देखने में भी लंबा रास्ता तय करना होगा कि कोविद उन्नीस रोगियों के लिए ऑक्सीजन की कमी को कम से कम कुछ दिनों के लिए दूर कर देगा। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ऐसा करने के लिए विशेष मुख्य सचिव परिवहन आरएंडबी सुनील शर्मा, सचिव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण रिजवी, सरफराज अहमद, डॉ। प्रीति मीणा, और अन्य अधिकारियों ने इसे बनाने के लिए चौबीसों घंटे काम किया है।
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अमेजन प्राइम वीडियो ने अपने आगामी सीरियल 'बंदिश बैंडिट्स' का ट्रेलर रिलीज कर दिया है. इसे देखकर इतना तो तय हो गया है कि आगामी दिनों में एंटरटेनमेंट के भारी भरकम डोज के साथ ऑडियंस का खूब मनोरंजन किया जाएगा. यह शो चारा अगस्त से प्रारंभ होने जा रहा है.
आनंद तिवारी,अमृतपाल सिंह बिंद्रा द्वारा डायरेक्ट इस रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा सीरीज में ऋत्विक भौमिक और श्रेया चौधरी लीड किरदार में हैं. इसके अलावा दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह,शीबा चड्ढा, अतुल कुलकर्णी, कुणाल रॉय कपूर और राजेश तैलंग भी अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे. शो 'बंदिश बैंडिट्स' में राधे और तमन्ना नाम की करैक्टर की कहानी से रुबरू करवाया जाएगा. राधे एक क्लासिकल गयक है जो अपने दादा के शास्त्रीय गाने के कदम पर चलना चाहता है. इसके अलावा, तमन्ना भारत की पहली अंतर्राष्ट्रीय पॉप सितारा बनने के सपने के साथ एक उभरती पॉप सेंसेशन हैं. लेकिन, तमन्ना के प्यार में पड़ने के बाद राधे की पूरी दुनिया उथल पुथल हो जाती है.
आपको बता दें की तमन्ना को स्टारडम हासिल करवाने और अपने सिंगिंग व अपने फैमिली की विरासत को पूरा करने के बीच फंसे राधे, क्या अपने पास मौजूद हर चीज को खोने के जोखिम में दोनों का सामना करने में सफल हो पाएगा? इन दो किरदारों की जिंदगी को दिखाती है बंदिश बैंडिट्स. फिलहाल फैंस इस शो का ट्रेलर देखकर इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे है. बता दें की इस शो में 10 एपिसोड्स देखने को मिलेंगे. म्यूजिक करियर पर बने इस शो में शंक-एहसान-लॉय का ओरिजिनल साउंड ट्रैक सुनने को मिलने वाला है. वहीं, सुरों की दुनिया के इन 3 बादशाहों का यह डिजिटल डेब्यू है.
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अमेजन प्राइम वीडियो ने अपने आगामी सीरियल 'बंदिश बैंडिट्स' का ट्रेलर रिलीज कर दिया है. इसे देखकर इतना तो तय हो गया है कि आगामी दिनों में एंटरटेनमेंट के भारी भरकम डोज के साथ ऑडियंस का खूब मनोरंजन किया जाएगा. यह शो चारा अगस्त से प्रारंभ होने जा रहा है. आनंद तिवारी,अमृतपाल सिंह बिंद्रा द्वारा डायरेक्ट इस रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा सीरीज में ऋत्विक भौमिक और श्रेया चौधरी लीड किरदार में हैं. इसके अलावा दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह,शीबा चड्ढा, अतुल कुलकर्णी, कुणाल रॉय कपूर और राजेश तैलंग भी अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे. शो 'बंदिश बैंडिट्स' में राधे और तमन्ना नाम की करैक्टर की कहानी से रुबरू करवाया जाएगा. राधे एक क्लासिकल गयक है जो अपने दादा के शास्त्रीय गाने के कदम पर चलना चाहता है. इसके अलावा, तमन्ना भारत की पहली अंतर्राष्ट्रीय पॉप सितारा बनने के सपने के साथ एक उभरती पॉप सेंसेशन हैं. लेकिन, तमन्ना के प्यार में पड़ने के बाद राधे की पूरी दुनिया उथल पुथल हो जाती है. आपको बता दें की तमन्ना को स्टारडम हासिल करवाने और अपने सिंगिंग व अपने फैमिली की विरासत को पूरा करने के बीच फंसे राधे, क्या अपने पास मौजूद हर चीज को खोने के जोखिम में दोनों का सामना करने में सफल हो पाएगा? इन दो किरदारों की जिंदगी को दिखाती है बंदिश बैंडिट्स. फिलहाल फैंस इस शो का ट्रेलर देखकर इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे है. बता दें की इस शो में दस एपिसोड्स देखने को मिलेंगे. म्यूजिक करियर पर बने इस शो में शंक-एहसान-लॉय का ओरिजिनल साउंड ट्रैक सुनने को मिलने वाला है. वहीं, सुरों की दुनिया के इन तीन बादशाहों का यह डिजिटल डेब्यू है.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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ग्रेटर नोएडा। सोसाइटी से निकलने वाले कूड़े का उचित प्रबंधन न करने पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग ने सेक्टर-16 स्थित रॉयल कोर्ट पर 20,400 रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने यह रकम तीन कार्यदिवस में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
ग्रेटर नोएडा में सॉलिड वेस्ट नियम 2016 लागू है। सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को कूडे़ का निस्तारण खुद से प्रबंधन करना होता है। प्राधिकरण सिर्फ इनर्ट वेस्ट ही उठाता है। प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग की टीम सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों की साइट का मुआयना करती है। इसी के तहत जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेक्टर-16 स्थित रॉयल कोर्ट सोसाइटी का निरीक्षण किया। सोसाइटी के कूड़े का उचित प्रबंधन नहीं हो रहा था। इस पर टीम ने 20,400 रुपये का जुर्माना लगा दिया है। जुर्माने की रकम को तीन कार्य दिवस में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलिल यादव का कहना है कि कूड़े का प्रबंधन न करने वाले सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों के खिलाफ प्राधिकरण की तरफ से कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने सभी ग्रेटर नोएडावासियों से शहर को स्वच्छ रखने मेें सहयोग की अपील की है।
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ग्रेटर नोएडा। सोसाइटी से निकलने वाले कूड़े का उचित प्रबंधन न करने पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग ने सेक्टर-सोलह स्थित रॉयल कोर्ट पर बीस,चार सौ रुपयापये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने यह रकम तीन कार्यदिवस में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। ग्रेटर नोएडा में सॉलिड वेस्ट नियम दो हज़ार सोलह लागू है। सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को कूडे़ का निस्तारण खुद से प्रबंधन करना होता है। प्राधिकरण सिर्फ इनर्ट वेस्ट ही उठाता है। प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग की टीम सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों की साइट का मुआयना करती है। इसी के तहत जनस्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेक्टर-सोलह स्थित रॉयल कोर्ट सोसाइटी का निरीक्षण किया। सोसाइटी के कूड़े का उचित प्रबंधन नहीं हो रहा था। इस पर टीम ने बीस,चार सौ रुपयापये का जुर्माना लगा दिया है। जुर्माने की रकम को तीन कार्य दिवस में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलिल यादव का कहना है कि कूड़े का प्रबंधन न करने वाले सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों के खिलाफ प्राधिकरण की तरफ से कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने सभी ग्रेटर नोएडावासियों से शहर को स्वच्छ रखने मेें सहयोग की अपील की है।
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मिस्र में कई पांच सितारा होटलों के अलावा, देखते हैं होटल रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * (शर्म अल शेख, एल पाशा बे), लाल सागर से कम से कम 200 मीटर की दूरी पहली पंक्ति पर और दूरी पर अल पाशा खाड़ी की खाड़ी के तट पर स्थित ।
इसलिए नामा बे, 8 किमी की खाड़ी के दिल को सहारा। एक पूरी तरह से प्राकृतिक गतिविधि - शाम को अतिथियों को मिस्र के लास वेगास के लिए जाने के लिए के लिए। जॉली रात का जीवन देश के फिरौन, सभी अपनी गतिशीलता, अपने स्वयं के विशेष अमीर, कुछ काफी अरब शैली और आकर्षण के साथ। हालांकि, एक और भी अधिक पर्यटक आकर्षण, मोड शान्ति लाल सागर के अद्वितीय, अमीर पशुवर्ग और वनस्पति के प्राचीन और समृद्ध पानी के नीचे दुनिया के ऐतिहासिक अवशेष दिखाई देता है तो दोनों प्रागैतिहासिक काल में करने की क्षमता है।
होटल के परिसर काफी नई है (यह 2007 में बनाया गया था) और शेखों की खाड़ी के रेतीले समुद्र तटों की एक पट्टी में स्थित है। ये स्वर्गीय स्थानों सालाना फिरौन देश के सभी मेहमानों का लगभग 65% प्राप्त करते हैं। पानी पार्क, रेस्तरां, डिस्को, मनोरंजन, पानी के खेल केंद्र की दुनिया में अच्छी तरह से ज्ञात के साथ विभिन्न बुनियादी सुविधाओं के दिग्गज सहारा स्वाभाविक रूप से यहां किसी भी होटल, रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा सहित के रिसॉर्ट संभावित का पूरक है।
उन्होंने कहा कि एक परिवार के रूप में होटल रिसॉर्ट के कारोबार में खुद को स्थापित किया। यहाँ हम अपने बच्चों, कर्मचारियों की परिवार भावना और अपनी छुट्टी के आराम के लिए एक प्रभावी देखभाल के प्रशासन के साथ आराम से आराम करने के लिए आते हैं। होटल के परिसर "रीफ ओएसिस", यह में छुट्टियां मनाने के मेहमानों के अनुसार एक उच्च रेटिंग है। यह वास्तव में उद्धृत किया गया है।
इंटर कॉन्टिनेंटल होटल समूह (यूके), Wyndham होटल समूह (यूएसए), मैरियट इंटरनेशनल (यूएसए), हिल्टन होटल (अमरीका), एक्कोर समूह (फ्रांस): बेशक, यह सिर्फ होटल प्रमुख दुनिया में नेटवर्क परिसरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा है। हालांकि, इसके बाद के संस्करण आइटम के अलावा अगर आतिथ्य उद्योग के लिए सूचक "मूल्य गुणवत्ता", जगह होटल माना कहीं अधिक होने को जोड़ने के लिए, रेटिंग के अलावा, यह भी। सब के बाद, 8 दिनों के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * (शर्म अल शेख) में दौरे के वर्तमान न्यूनतम कीमत क्रमशः 7 रातों पहले से ही उड़ान की लागत की गणना की, खानपान सभी समावेशी, और चिकित्सा बीमा हस्तांतरण $ 1,100 है। एक ही समय में, हम ध्यान देंः प्रवाहित को भी ध्यान में एक वीजा लागत की खरीद लेना चाहिए - प्रति व्यक्ति $ 25। इन बयानों से यह स्पष्ट है क्यों गर्मियों आगंतुकों हैं एक धारणा है कि होटल श्रृंखला रीफ ओएसिस मिस्र में सर्वश्रेष्ठ में से एक है वहाँ है।
शैली मेहराब और कॉलम के साथ दो मंजिला इमारतों अनुवात (दक्षिण-पश्चिम) के करीब अर्धवृत्त, मुख्य पूल के व्यापक क्षेत्रः होटल में ही सुरुचिपूर्ण कम वृद्धि "पूर्व" परियोजना पर बनाया गया है। जटिल पूल अद्वितीय है। के लिए मस्ती भरा अवकाश मेहमानों रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट 5 * (शर्म अल शेख) बनाया एक कृत्रिम तालाब के बहुत प्रपत्र एक स्याही दाग की रूपरेखा जैसा दिखता है। और पूल आदि तैराकी, डाइविंग, वाटर पोलो, के लिए डिज़ाइन किया गया है, और बाकी के लिएः . . "Blots" पंखुड़ियों को पार केंद्र में पुलों खजूर के पेड़, जहां आप भी कैटवॉक पर प्राप्त कर सकते हैं के साथ "द्वीप" है। इधर, हॉलिडे के लिए खुशी के लिए, यह स्लाइड के साथ अपने स्वयं के होटल पानी पार्क है।
होटल और जो विश्राम के लिए कार्य करता है अन्य पूल, है। सबसे पसंदीदा - रीफ ओएसिस ब्लू Baoy Resrt 5 * (शर्म अल शेख) के मेहमानों के लिए एक जगह है। कुछ लोग तो समुद्र करने के लिए यहाँ से नीचे जाने के लिए परेशान नहीं है। दरअसल, यही कारण है कि, अगर 11-00 से छूट पूल क्षेत्र 15-00 काम करने के लिए ऊपर आराम से पूल बार - शीतल पेय, नाश्ता और मुफ्त slaboalkogolkoy मिस्र के उत्पादन के साथ "16 के लिए" एक बार। वहाँ एक जगह अनुकूल कंपनी को चुना है, जबकि एक लाउंज वातावरण में दूर छुट्टी का समय। विशेष रूप से पूल क्षेत्र में जर्मनी से छुट्टियां मनाने सेवानिवृत्त होना चाहते। सनबेड और छतरियों यहां छुट्टियां मनाने के लिए एक पर्याप्त संख्या में धीरे-धीरे जगह पर एक फैंसी लग सकता है।
होटल के परिसर के पूरे क्षेत्र बहुत खूबसूरती से रात में प्रकाशित किया जाता है। एक पेशेवर परिदृश्य डिजाइन तैयार की छाप आगे इस तरह की एक रचनात्मक सौंदर्य दृष्टिकोण से बढ़ जाती है।
रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा के क्षेत्र खजूर के पेड़ और लॉन सिंचाई के साथ प्राकृतिक दृश्यों से पर्याप्त रूप से बड़े हैं। इसकी साफ सड़कों के साथ सुखद शाम टहलने।
समुद्र तट होटल से कुछ स्तरों में कम है। उसे करने के लिए हॉलिडे विशेष लिफ्ट उतर आते हैं। तुम भी निः शुल्क आवागमन busom होटल उपयोग कर सकते हैं। समुद्र तट बड़े और आरामदायक है, सभी हॉलिडे पर्याप्त क्षेत्र, धूप आरामकुर्सियां और छतरियां की है। बार, इस पर काम कर, में सीमा नाश्ता, फास्ट फूड, नरम और शराबी प्रदान करता है - रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * में (पिछले मीटर) पेय यात्रियों। रीफ की समीक्षा, समुद्र तट के जल में स्थित है, वहाँ अधिक जानकारी के कर रहे हैं।
सबसे अमीर पानी के नीचे वनस्पतियों और पूरे खाड़ी शेख में चट्टानों की श्रृंखला में जीव-जंतुओं में से एक - यह वह जगह है। उन्होंने कहा कि - गोताखोरों के लिए एक लोकप्रिय स्थान। यह कोई संयोग नहीं है अपने समुद्र तट पर मेहमानों, मनोरंजन है, लगभग हमेशा के पास तट कुछ नावों कि सड़कों पर देख सकते हैं।
यह होटल के परिसर के नाम पर कोई दुर्घटना शब्द "चट्टान" और "नखलिस्तान" देखते हैं है।
प्रशासन लगातार हिस्साः एक (यह एक विशेष केंद्र एक होटल के परिसर पर काम में किया जाता है) मुक्त करने के लिए अतिथि के लिए इच्छुक किसी के लिए डाइविंग गोता देता है। यह शायद ही पैसे की बर्बादी कहा जा सकता है। आंकड़ों के आधार पर सुझाव के रूप में, बार-बार करते हैं करने के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * से, पहले से ही भुगतान किया गोता, के बारे में 80% "aktsionnikov" को तैयार हैं। समीक्षा, सक्रिय आराम के इस तरह के प्रेमियों से लक्जरी gorgonovyh भित्तियों की पानी के नीचे दुनिया के विवरण - इंटरनेट पर पर्यटक स्थलों पर होटल के पन्नों के एक असली सजावट। हमारे समय में एक दुर्लभ वस्तु बहुत एक जीवित चट्टान, यहां तक कि नौसिखिया तैराकों के लिए सुलभ के तट के करीब है। लक्जरी gorgonovyh मूंगा, नीले और गुलाबी का एक बहुत ही सुखद रंगों, चल रंगीन मछली सैकड़ों हजारों के बीच में।
नहीं संयोग से प्रसिद्ध एक्सप्लोरर जाक-IV Kusto, पानी के भीतर दुनिया के शीर्ष दस paradises की एक सूची बनाने दुनिया के, दिया है स्थानों में से एक इन स्थानों है। अतिथि समीक्षाएँ, वन्यजीव फोटोग्राफी पनडुब्बी पानी के भीतर फोटोग्राफी से भरा तोता मछली; तितली मछली; plataksov, एक विशाल angelfish की तरह; मछली सर्जन। वहाँ मछली की बहुरंगी शोल्स, यहाँ नेपच्यून के राज्य चेतन है। अधिक अनुभवी गोताखोरों अधिक गहराई और पानी के नीचे गुफाओं, को पूरा करने के लिए उत्सुक की खोज (जाहिर है, बहुत दूर) मोरे ईल, मान्ता रे के साथ।
यहाँ पर्यटकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोताखोर का एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक संभावना है। होटल इमारतों डाइविंग स्कूल दोनों शुरुआती और अनुभवी एथलीटों के लिए बनाया गया विशेष पाठ्यक्रम प्रदान करता है। कुछ पाठकों देखेंगे कि पानी के नीचे दुनिया स्नोर्कल पंख तो प्रशंसा कर सकते हैं और स्कूबा गियर के बिना, और केवल एक मुखौटा का उपयोग कर,। Snorkling - तथाकथित इस व्यवसाय नहीं हैं और उन छापों का 20% है, जो छुट्टी डाइविंग देता है। गोताखोरों गाइड हॉलिडे, शिक्षण डाइविंग और यादगार यात्रा के आयोजन किया।
छह रेस्तरां और ग्यारह बार में रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट 5 * पर फ़ीड मेहमानों। मुख्य रेस्तरां बे देखें और सी ब्रीज के अलावा, सभी समावेशी प्रणाली के भाग के रूप में बफेट के सिद्धांत पर काम कर रहे, रिकॉर्डिंग के लिए पर्यटकों को तीन विशेषता रेस्तरां खिलायाः समुद्री भोजन, फ्रांसीसी भोजन "ला रोमांटिक", "अल डांटे" इतालवी भोजन, बिना रुके रेस्तरां और बिस्टरो (नाश्ता फ्रेंच प्रकार)।
नोट इस लेख के पाठकों होटल रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * Sharmelsheikh की खानपान इकाइयों के घंटे का प्रतिनिधित्व करते हैं। होटल के अतिथि समीक्षा हमें अपने भोजन के घंटे निर्धारित करने के लिए अनुमति दी। पहले मुख्य बे व्यू रेस्तरां में वे 8-00 बजे से 11-00 के लिए नाश्ता खाने; और 18-00 से 22-00 बजे तक रात का खाना। 7. 00 बजे से 10. 00 बजे के लिए;: दूसरा मुख्य रेस्तरां में, सी ब्रीज नाश्ता की सुविधा के लिए यह एक घंटे पहले ले जाया जाता है के रूप में दोपहर के भोजन के दोपहर से 15:00 तक किया जाता है।
होटल के परिसर पर रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * Sharmelsheikh एसए 11 बार हैं। पूल में और समुद्र तट पर सलाखों में समीक्षा ग्राहकों के अनुसार आप कोई अन्य ज्यादातर तीन सितारा होटल के रेस्तरां में से भी बदतर खा सकते हैं।
रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा - एक बड़े क्लब प्रकार होटल, उस में 696 कमरे हैं। यह दौर खरीदना, पर्यटक आवास के प्रकार का चयन करता है। उनमें से कईः
- मानक (समीक्षा के लिए -, बड़े उज्ज्वल, आरामदायक);
- प्रोमो ( "लॉटरी", आप ब्रह्मांड में परिभाषित संख्या के प्रकार के);
- बेहतर (सुपीरियर मानक);
- डीलक्स (समुद्र दृश्य के साथ बेहतर कमरा);
- ekzikyutiv (दो बाथरूम के साथ सुइट्स);
- परिवार कक्ष (दो बेडरूम और लिविंग रूम के साथ सूट);
- हनीमून स्वीट (डबल सुपीरियर सुइट)।
क्रम में रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * रहने की स्थिति के संबंध में पाठक उन्मुख करने के लिए में, हम मानक कमरे के लिए होटल की समीक्षा प्रस्तुत करते हैं। सबसे पहले, संख्या बहुत अधिक है - 40 से अधिक वर्ग मीटर। बच्चे - यह जोड़ों और एकल के लिए एक बहुत विशाल डबल बेड है। तेजी से चार रूसी टीवी चैनलों सहित एयर कंडीशनिंग, प्लाज्मा टीवी सेट काम कर रहे। सफाई और लिनन दैनिक बदल जाते हैं।
एक आरामदायक स्नान के साथ बाथरूम अतिरिक्त शैम्पू, कंडीशनर, साबुन, जेल, टूथब्रश और पेस्ट मशीनों और साथ सुसज्जित शेविंग फोम, जेल "आफ़्टरशेव। " स्टाफ उस समय खाली बोतल या ट्यूब को बदलने के लिए सुनिश्चित करता है।
कमरे में एक शौचालय और एक bidet के साथ एक विशाल निजी बाथरूम है।
मिनी बार रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पर - यह एक निरंतर सकारात्मक है! उन्होंने कहा कि, बच्चों, दैनिक मंगाया के लिए खुशी के लिए - न केवल पानी पर भी पेप्सी, और कोका कोला। एक इलेक्ट्रिक केतली और चाय बैग, कॉफी, चीनीः कमरा "चाय और कॉफी जगह" पर एक रेफ्रिजरेटर है। एक ही समय में इन बैग दैनिक मंगाया जाता है के रूप में।
बे शेख बच्चों में परिवार यात्रा आराम होटल एहसान। माता-पिता का अपने बच्चों पर नियंत्रण आराम कर सकते हैं, जब वे समुदाय एनिमेटरों में कर रहे हैं - खाने से पहले और रात के खाने के बाद कुछ घंटों। पर उत्साह मस्ती के साथ चार से चौदह वर्ष के बीच आयु वर्ग के बच्चों पानी स्लाइड और खेल के मैदानों, मज़ा प्रतियोगिताओं और रिले दौड़ में भाग लेते हैं। और प्रतियोगिता के विजेताओं सावधानी (मनोवैज्ञानिक तौर पर हारे समर्थन करने के लिए), और एक सुखद वातावरण में पुरस्कार है कि वे जाहिर है, प्रसन्न और प्रेरित करती है प्रोत्साहित किया।
21-00 के बच्चों के लिए 23-00 डिस्को शाम।
हम अच्छी तरह से अतिथि से परिचित दर्शनीय स्थलों की यात्रा पर रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट SpaSharmelsheikh समीक्षा। होटल के मेहमान के रूप में अच्छी तरह से शहरी ट्रैवल एजेंसियों के रूप में, उनके होटल गाइड पर खरीद रहे हैं। राजाओं की अंत्येष्टि परिसर के लिए एक यात्रा के साथ काहिरा (काहिरा राष्ट्रीय संग्रहालय और गीज़ा के पिरामिड), लक्सर के लिए लोकप्रिय यात्रा कर रहे हैं, नाव पानी के नीचे और सतह यात्राएं।
पर्यटक अक्सर ईसाई और यहूदी पवित्र स्थलों के दौरे के साथ यरूशलेम को दो दिवसीय यात्रा खरीदे जाते हैं।
लोकप्रियता में पहली जगह में की एक भ्रमण-सैर के लायक है नामा बे, जो मिस्र के लास वेगास कहा जाता है। लगभग तुरंत पहुंचने वाले पर्यटकों की भाग जाता है। यह आगमन के दिन है के लिए, वे शुल्क मुक्त सेवित वहाँ शुल्क मुक्त स्थित दुकान के हकदार हैं।
पर्यटकों को पुराने शहर में क्लासिक प्राच्य बाजार, शॉपिंग सेंटर को देखने के लिए अवसर है "1000 और एक नाइट्स। " एक सुपरमार्केट और सार्वजनिक तय «कैरेफोर» कीमतें, मेहमानों के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा 5 * के साथ बहुत लोकप्रिय है। समीक्षा का सुझाव है कि यहाँ शीतल पेय और फलों को खरीदने के लिए लाभदायक है। हालांकि, पर इमारत में जाना जाता क्लब में स्थित हार्ड रॉक , कैफे की दुकानों और रेस्तरां का दौरा करने की सलाह नहीं देते क्योंकि वे अटकलों के खिलाफ नहीं हैं।
इसके अलावा सैर के साथ क्लब लिटिल बुद्ध, फास्ट फूड की दुकानों, प्रसिद्ध कैफे (महंगा) "पैनोरमा" बियांका कैफे, रेस्तरां कैमल बार कर रहा है। दिलचस्प रेस्टोरेंट दूर आईबेरोटेल लीडो 4 *, पोंटून पर सुसज्जित है। इधर, शाम में, जब रोशनी पानी की सतह के बाहर जाने के विदेशी मछली के एक मेजबान बढ़ जाता है।
भ्रमण होटल समुद्र तटों में से सैर पर समाप्त होता है। वहाँ शांत और विदेशी हुक्का कैफे के एक बहुत हैं।
यथायोग्य पर्यटकों होटल के परिसर रीफ ओएसिस ब्लू Baoy Resrt स्पा 5 * के साथ लोकप्रिय। अतिथि समीक्षा अद्भुत पानी के नीचे दुनिया अनुकरणीय डिबग भोजन, दिलचस्प और आकर्षक एनीमेशन के तैराकों समुद्र तट पानी की आँखों में सीधे खुलती की अद्भुत समुद्र तट दिखा। होटल के परिसर के कमरों अच्छी संख्या।
होटल - सफल। और यह निष्ठा है, जो मेहमानों के संबंध में किया जाता है के दूर-दृष्टि वाले नीति पर प्रकाश डाला गया। केक और फल - न्यूलिवेड्स, संरक्षक, शादी की सालगिरह का जश्न मना जोड़ों प्रशासन की ओर से उपहार और एक रोमांटिक डिनर के रूप में महाराज, और जन्मदिन प्राप्त करते हैं। नियमित रूप से ग्राहकों को याद किया और,, बैठक एक बेहतर कमरे में लॉज के आने के बाद कर रहे हैं।
सब के पीछे यह काम होटल के परिसर के कर्मचारियों के अनुकूल और सफल टीम महसूस किया है।
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मिस्र में कई पांच सितारा होटलों के अलावा, देखते हैं होटल रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * , लाल सागर से कम से कम दो सौ मीटर की दूरी पहली पंक्ति पर और दूरी पर अल पाशा खाड़ी की खाड़ी के तट पर स्थित । इसलिए नामा बे, आठ किमी की खाड़ी के दिल को सहारा। एक पूरी तरह से प्राकृतिक गतिविधि - शाम को अतिथियों को मिस्र के लास वेगास के लिए जाने के लिए के लिए। जॉली रात का जीवन देश के फिरौन, सभी अपनी गतिशीलता, अपने स्वयं के विशेष अमीर, कुछ काफी अरब शैली और आकर्षण के साथ। हालांकि, एक और भी अधिक पर्यटक आकर्षण, मोड शान्ति लाल सागर के अद्वितीय, अमीर पशुवर्ग और वनस्पति के प्राचीन और समृद्ध पानी के नीचे दुनिया के ऐतिहासिक अवशेष दिखाई देता है तो दोनों प्रागैतिहासिक काल में करने की क्षमता है। होटल के परिसर काफी नई है और शेखों की खाड़ी के रेतीले समुद्र तटों की एक पट्टी में स्थित है। ये स्वर्गीय स्थानों सालाना फिरौन देश के सभी मेहमानों का लगभग पैंसठ% प्राप्त करते हैं। पानी पार्क, रेस्तरां, डिस्को, मनोरंजन, पानी के खेल केंद्र की दुनिया में अच्छी तरह से ज्ञात के साथ विभिन्न बुनियादी सुविधाओं के दिग्गज सहारा स्वाभाविक रूप से यहां किसी भी होटल, रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा सहित के रिसॉर्ट संभावित का पूरक है। उन्होंने कहा कि एक परिवार के रूप में होटल रिसॉर्ट के कारोबार में खुद को स्थापित किया। यहाँ हम अपने बच्चों, कर्मचारियों की परिवार भावना और अपनी छुट्टी के आराम के लिए एक प्रभावी देखभाल के प्रशासन के साथ आराम से आराम करने के लिए आते हैं। होटल के परिसर "रीफ ओएसिस", यह में छुट्टियां मनाने के मेहमानों के अनुसार एक उच्च रेटिंग है। यह वास्तव में उद्धृत किया गया है। इंटर कॉन्टिनेंटल होटल समूह , Wyndham होटल समूह , मैरियट इंटरनेशनल , हिल्टन होटल , एक्कोर समूह : बेशक, यह सिर्फ होटल प्रमुख दुनिया में नेटवर्क परिसरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा है। हालांकि, इसके बाद के संस्करण आइटम के अलावा अगर आतिथ्य उद्योग के लिए सूचक "मूल्य गुणवत्ता", जगह होटल माना कहीं अधिक होने को जोड़ने के लिए, रेटिंग के अलावा, यह भी। सब के बाद, आठ दिनों के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * में दौरे के वर्तमान न्यूनतम कीमत क्रमशः सात रातों पहले से ही उड़ान की लागत की गणना की, खानपान सभी समावेशी, और चिकित्सा बीमा हस्तांतरण एक डॉलर,एक सौ है। एक ही समय में, हम ध्यान देंः प्रवाहित को भी ध्यान में एक वीजा लागत की खरीद लेना चाहिए - प्रति व्यक्ति पच्चीस डॉलर। इन बयानों से यह स्पष्ट है क्यों गर्मियों आगंतुकों हैं एक धारणा है कि होटल श्रृंखला रीफ ओएसिस मिस्र में सर्वश्रेष्ठ में से एक है वहाँ है। शैली मेहराब और कॉलम के साथ दो मंजिला इमारतों अनुवात के करीब अर्धवृत्त, मुख्य पूल के व्यापक क्षेत्रः होटल में ही सुरुचिपूर्ण कम वृद्धि "पूर्व" परियोजना पर बनाया गया है। जटिल पूल अद्वितीय है। के लिए मस्ती भरा अवकाश मेहमानों रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट पाँच * बनाया एक कृत्रिम तालाब के बहुत प्रपत्र एक स्याही दाग की रूपरेखा जैसा दिखता है। और पूल आदि तैराकी, डाइविंग, वाटर पोलो, के लिए डिज़ाइन किया गया है, और बाकी के लिएः . . "Blots" पंखुड़ियों को पार केंद्र में पुलों खजूर के पेड़, जहां आप भी कैटवॉक पर प्राप्त कर सकते हैं के साथ "द्वीप" है। इधर, हॉलिडे के लिए खुशी के लिए, यह स्लाइड के साथ अपने स्वयं के होटल पानी पार्क है। होटल और जो विश्राम के लिए कार्य करता है अन्य पूल, है। सबसे पसंदीदा - रीफ ओएसिस ब्लू Baoy Resrt पाँच * के मेहमानों के लिए एक जगह है। कुछ लोग तो समुद्र करने के लिए यहाँ से नीचे जाने के लिए परेशान नहीं है। दरअसल, यही कारण है कि, अगर ग्यारह-शून्य से छूट पूल क्षेत्र पंद्रह-शून्य काम करने के लिए ऊपर आराम से पूल बार - शीतल पेय, नाश्ता और मुफ्त slaboalkogolkoy मिस्र के उत्पादन के साथ "सोलह के लिए" एक बार। वहाँ एक जगह अनुकूल कंपनी को चुना है, जबकि एक लाउंज वातावरण में दूर छुट्टी का समय। विशेष रूप से पूल क्षेत्र में जर्मनी से छुट्टियां मनाने सेवानिवृत्त होना चाहते। सनबेड और छतरियों यहां छुट्टियां मनाने के लिए एक पर्याप्त संख्या में धीरे-धीरे जगह पर एक फैंसी लग सकता है। होटल के परिसर के पूरे क्षेत्र बहुत खूबसूरती से रात में प्रकाशित किया जाता है। एक पेशेवर परिदृश्य डिजाइन तैयार की छाप आगे इस तरह की एक रचनात्मक सौंदर्य दृष्टिकोण से बढ़ जाती है। रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा के क्षेत्र खजूर के पेड़ और लॉन सिंचाई के साथ प्राकृतिक दृश्यों से पर्याप्त रूप से बड़े हैं। इसकी साफ सड़कों के साथ सुखद शाम टहलने। समुद्र तट होटल से कुछ स्तरों में कम है। उसे करने के लिए हॉलिडे विशेष लिफ्ट उतर आते हैं। तुम भी निः शुल्क आवागमन busom होटल उपयोग कर सकते हैं। समुद्र तट बड़े और आरामदायक है, सभी हॉलिडे पर्याप्त क्षेत्र, धूप आरामकुर्सियां और छतरियां की है। बार, इस पर काम कर, में सीमा नाश्ता, फास्ट फूड, नरम और शराबी प्रदान करता है - रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * में पेय यात्रियों। रीफ की समीक्षा, समुद्र तट के जल में स्थित है, वहाँ अधिक जानकारी के कर रहे हैं। सबसे अमीर पानी के नीचे वनस्पतियों और पूरे खाड़ी शेख में चट्टानों की श्रृंखला में जीव-जंतुओं में से एक - यह वह जगह है। उन्होंने कहा कि - गोताखोरों के लिए एक लोकप्रिय स्थान। यह कोई संयोग नहीं है अपने समुद्र तट पर मेहमानों, मनोरंजन है, लगभग हमेशा के पास तट कुछ नावों कि सड़कों पर देख सकते हैं। यह होटल के परिसर के नाम पर कोई दुर्घटना शब्द "चट्टान" और "नखलिस्तान" देखते हैं है। प्रशासन लगातार हिस्साः एक मुक्त करने के लिए अतिथि के लिए इच्छुक किसी के लिए डाइविंग गोता देता है। यह शायद ही पैसे की बर्बादी कहा जा सकता है। आंकड़ों के आधार पर सुझाव के रूप में, बार-बार करते हैं करने के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * से, पहले से ही भुगतान किया गोता, के बारे में अस्सी% "aktsionnikov" को तैयार हैं। समीक्षा, सक्रिय आराम के इस तरह के प्रेमियों से लक्जरी gorgonovyh भित्तियों की पानी के नीचे दुनिया के विवरण - इंटरनेट पर पर्यटक स्थलों पर होटल के पन्नों के एक असली सजावट। हमारे समय में एक दुर्लभ वस्तु बहुत एक जीवित चट्टान, यहां तक कि नौसिखिया तैराकों के लिए सुलभ के तट के करीब है। लक्जरी gorgonovyh मूंगा, नीले और गुलाबी का एक बहुत ही सुखद रंगों, चल रंगीन मछली सैकड़ों हजारों के बीच में। नहीं संयोग से प्रसिद्ध एक्सप्लोरर जाक-IV Kusto, पानी के भीतर दुनिया के शीर्ष दस paradises की एक सूची बनाने दुनिया के, दिया है स्थानों में से एक इन स्थानों है। अतिथि समीक्षाएँ, वन्यजीव फोटोग्राफी पनडुब्बी पानी के भीतर फोटोग्राफी से भरा तोता मछली; तितली मछली; plataksov, एक विशाल angelfish की तरह; मछली सर्जन। वहाँ मछली की बहुरंगी शोल्स, यहाँ नेपच्यून के राज्य चेतन है। अधिक अनुभवी गोताखोरों अधिक गहराई और पानी के नीचे गुफाओं, को पूरा करने के लिए उत्सुक की खोज मोरे ईल, मान्ता रे के साथ। यहाँ पर्यटकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोताखोर का एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक संभावना है। होटल इमारतों डाइविंग स्कूल दोनों शुरुआती और अनुभवी एथलीटों के लिए बनाया गया विशेष पाठ्यक्रम प्रदान करता है। कुछ पाठकों देखेंगे कि पानी के नीचे दुनिया स्नोर्कल पंख तो प्रशंसा कर सकते हैं और स्कूबा गियर के बिना, और केवल एक मुखौटा का उपयोग कर,। Snorkling - तथाकथित इस व्यवसाय नहीं हैं और उन छापों का बीस% है, जो छुट्टी डाइविंग देता है। गोताखोरों गाइड हॉलिडे, शिक्षण डाइविंग और यादगार यात्रा के आयोजन किया। छह रेस्तरां और ग्यारह बार में रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट पाँच * पर फ़ीड मेहमानों। मुख्य रेस्तरां बे देखें और सी ब्रीज के अलावा, सभी समावेशी प्रणाली के भाग के रूप में बफेट के सिद्धांत पर काम कर रहे, रिकॉर्डिंग के लिए पर्यटकों को तीन विशेषता रेस्तरां खिलायाः समुद्री भोजन, फ्रांसीसी भोजन "ला रोमांटिक", "अल डांटे" इतालवी भोजन, बिना रुके रेस्तरां और बिस्टरो । नोट इस लेख के पाठकों होटल रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * Sharmelsheikh की खानपान इकाइयों के घंटे का प्रतिनिधित्व करते हैं। होटल के अतिथि समीक्षा हमें अपने भोजन के घंटे निर्धारित करने के लिए अनुमति दी। पहले मुख्य बे व्यू रेस्तरां में वे आठ-शून्य बजे से ग्यारह-शून्य के लिए नाश्ता खाने; और अट्ठारह-शून्य से बाईस-शून्य बजे तक रात का खाना। सात. शून्य बजे से दस. शून्य बजे के लिए;: दूसरा मुख्य रेस्तरां में, सी ब्रीज नाश्ता की सुविधा के लिए यह एक घंटे पहले ले जाया जाता है के रूप में दोपहर के भोजन के दोपहर से पंद्रह:शून्य तक किया जाता है। होटल के परिसर पर रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * Sharmelsheikh एसए ग्यारह बार हैं। पूल में और समुद्र तट पर सलाखों में समीक्षा ग्राहकों के अनुसार आप कोई अन्य ज्यादातर तीन सितारा होटल के रेस्तरां में से भी बदतर खा सकते हैं। रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा - एक बड़े क्लब प्रकार होटल, उस में छः सौ छियानवे कमरे हैं। यह दौर खरीदना, पर्यटक आवास के प्रकार का चयन करता है। उनमें से कईः - मानक ; - प्रोमो ; - बेहतर ; - डीलक्स ; - ekzikyutiv ; - परिवार कक्ष ; - हनीमून स्वीट । क्रम में रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * रहने की स्थिति के संबंध में पाठक उन्मुख करने के लिए में, हम मानक कमरे के लिए होटल की समीक्षा प्रस्तुत करते हैं। सबसे पहले, संख्या बहुत अधिक है - चालीस से अधिक वर्ग मीटर। बच्चे - यह जोड़ों और एकल के लिए एक बहुत विशाल डबल बेड है। तेजी से चार रूसी टीवी चैनलों सहित एयर कंडीशनिंग, प्लाज्मा टीवी सेट काम कर रहे। सफाई और लिनन दैनिक बदल जाते हैं। एक आरामदायक स्नान के साथ बाथरूम अतिरिक्त शैम्पू, कंडीशनर, साबुन, जेल, टूथब्रश और पेस्ट मशीनों और साथ सुसज्जित शेविंग फोम, जेल "आफ़्टरशेव। " स्टाफ उस समय खाली बोतल या ट्यूब को बदलने के लिए सुनिश्चित करता है। कमरे में एक शौचालय और एक bidet के साथ एक विशाल निजी बाथरूम है। मिनी बार रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पर - यह एक निरंतर सकारात्मक है! उन्होंने कहा कि, बच्चों, दैनिक मंगाया के लिए खुशी के लिए - न केवल पानी पर भी पेप्सी, और कोका कोला। एक इलेक्ट्रिक केतली और चाय बैग, कॉफी, चीनीः कमरा "चाय और कॉफी जगह" पर एक रेफ्रिजरेटर है। एक ही समय में इन बैग दैनिक मंगाया जाता है के रूप में। बे शेख बच्चों में परिवार यात्रा आराम होटल एहसान। माता-पिता का अपने बच्चों पर नियंत्रण आराम कर सकते हैं, जब वे समुदाय एनिमेटरों में कर रहे हैं - खाने से पहले और रात के खाने के बाद कुछ घंटों। पर उत्साह मस्ती के साथ चार से चौदह वर्ष के बीच आयु वर्ग के बच्चों पानी स्लाइड और खेल के मैदानों, मज़ा प्रतियोगिताओं और रिले दौड़ में भाग लेते हैं। और प्रतियोगिता के विजेताओं सावधानी , और एक सुखद वातावरण में पुरस्कार है कि वे जाहिर है, प्रसन्न और प्रेरित करती है प्रोत्साहित किया। इक्कीस-शून्य के बच्चों के लिए तेईस-शून्य डिस्को शाम। हम अच्छी तरह से अतिथि से परिचित दर्शनीय स्थलों की यात्रा पर रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट SpaSharmelsheikh समीक्षा। होटल के मेहमान के रूप में अच्छी तरह से शहरी ट्रैवल एजेंसियों के रूप में, उनके होटल गाइड पर खरीद रहे हैं। राजाओं की अंत्येष्टि परिसर के लिए एक यात्रा के साथ काहिरा , लक्सर के लिए लोकप्रिय यात्रा कर रहे हैं, नाव पानी के नीचे और सतह यात्राएं। पर्यटक अक्सर ईसाई और यहूदी पवित्र स्थलों के दौरे के साथ यरूशलेम को दो दिवसीय यात्रा खरीदे जाते हैं। लोकप्रियता में पहली जगह में की एक भ्रमण-सैर के लायक है नामा बे, जो मिस्र के लास वेगास कहा जाता है। लगभग तुरंत पहुंचने वाले पर्यटकों की भाग जाता है। यह आगमन के दिन है के लिए, वे शुल्क मुक्त सेवित वहाँ शुल्क मुक्त स्थित दुकान के हकदार हैं। पर्यटकों को पुराने शहर में क्लासिक प्राच्य बाजार, शॉपिंग सेंटर को देखने के लिए अवसर है "एक हज़ार और एक नाइट्स। " एक सुपरमार्केट और सार्वजनिक तय «कैरेफोर» कीमतें, मेहमानों के लिए रीफ ओएसिस ब्लू बे रिज़ॉर्ट स्पा पाँच * के साथ बहुत लोकप्रिय है। समीक्षा का सुझाव है कि यहाँ शीतल पेय और फलों को खरीदने के लिए लाभदायक है। हालांकि, पर इमारत में जाना जाता क्लब में स्थित हार्ड रॉक , कैफे की दुकानों और रेस्तरां का दौरा करने की सलाह नहीं देते क्योंकि वे अटकलों के खिलाफ नहीं हैं। इसके अलावा सैर के साथ क्लब लिटिल बुद्ध, फास्ट फूड की दुकानों, प्रसिद्ध कैफे "पैनोरमा" बियांका कैफे, रेस्तरां कैमल बार कर रहा है। दिलचस्प रेस्टोरेंट दूर आईबेरोटेल लीडो चार *, पोंटून पर सुसज्जित है। इधर, शाम में, जब रोशनी पानी की सतह के बाहर जाने के विदेशी मछली के एक मेजबान बढ़ जाता है। भ्रमण होटल समुद्र तटों में से सैर पर समाप्त होता है। वहाँ शांत और विदेशी हुक्का कैफे के एक बहुत हैं। यथायोग्य पर्यटकों होटल के परिसर रीफ ओएसिस ब्लू Baoy Resrt स्पा पाँच * के साथ लोकप्रिय। अतिथि समीक्षा अद्भुत पानी के नीचे दुनिया अनुकरणीय डिबग भोजन, दिलचस्प और आकर्षक एनीमेशन के तैराकों समुद्र तट पानी की आँखों में सीधे खुलती की अद्भुत समुद्र तट दिखा। होटल के परिसर के कमरों अच्छी संख्या। होटल - सफल। और यह निष्ठा है, जो मेहमानों के संबंध में किया जाता है के दूर-दृष्टि वाले नीति पर प्रकाश डाला गया। केक और फल - न्यूलिवेड्स, संरक्षक, शादी की सालगिरह का जश्न मना जोड़ों प्रशासन की ओर से उपहार और एक रोमांटिक डिनर के रूप में महाराज, और जन्मदिन प्राप्त करते हैं। नियमित रूप से ग्राहकों को याद किया और,, बैठक एक बेहतर कमरे में लॉज के आने के बाद कर रहे हैं। सब के पीछे यह काम होटल के परिसर के कर्मचारियों के अनुकूल और सफल टीम महसूस किया है।
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लखनऊ। उप्र के विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) व इसके अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के रिश्ते सपा मुखिया अखिलेश यादव से लगातार ख़राब होते जा रहे हैं।
कई मौकों पर अखिलेश यादव की आलोचना कर चुके ओमप्रकाश राजभर अब राष्ट्रपति चुनाव को लेकर हुई बैठक में न बुलाए जाने पर नाराज हैं। हालांकि उनकी ये नाराजगी एमएलसी चुनाव के बाद से ही है।
इसी क्रम में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने आज शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में वह राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेंगे। राजभर ने कहा सुभासपा के सभी 6 विधायक राष्ट्रपति चुनाव में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी के साथ जाएँगे और द्रौपदी मुर्मू को वोट देंगे।
हालांकि राजभर ने यह भी कहा कि वो अभी भी अखिलेश के साथ हैं और गठबंधन में जब तक वो हैं तब तक हम रहेंगे। उन्होंने कहा कि वो अखिलेश के साथ वोट देने के लिए तैयार थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक और झटका उनके चाचा और पार्टी विधायक शिवपाल सिंह यादव की तरफ से भी लगा है। शिवपाल ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा की है।
दरअसल, ओपी राजभर और अखिलेश के बीच विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही विवाद शुरू हुआ था। यहां तक कि राजभर ने सार्वजनिक रूप से कई बार अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। दरअसल राजभर अपने बेटे अरविंद राजभर को विधान परिषद भेजना चाहते थे, लेकिन अखिलेश ने ऐसा किया नहीं और दोनों के बीच खटास यहीं से ज्यादा बढ़ गई।
लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता (ATS) ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है।
आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरोपी शैलेश पूर्व में 8-9 माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है।
सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही।
इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल 2023 से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
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लखनऊ। उप्र के विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी व इसके अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के रिश्ते सपा मुखिया अखिलेश यादव से लगातार ख़राब होते जा रहे हैं। कई मौकों पर अखिलेश यादव की आलोचना कर चुके ओमप्रकाश राजभर अब राष्ट्रपति चुनाव को लेकर हुई बैठक में न बुलाए जाने पर नाराज हैं। हालांकि उनकी ये नाराजगी एमएलसी चुनाव के बाद से ही है। इसी क्रम में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने आज शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में वह राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेंगे। राजभर ने कहा सुभासपा के सभी छः विधायक राष्ट्रपति चुनाव में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी के साथ जाएँगे और द्रौपदी मुर्मू को वोट देंगे। हालांकि राजभर ने यह भी कहा कि वो अभी भी अखिलेश के साथ हैं और गठबंधन में जब तक वो हैं तब तक हम रहेंगे। उन्होंने कहा कि वो अखिलेश के साथ वोट देने के लिए तैयार थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक और झटका उनके चाचा और पार्टी विधायक शिवपाल सिंह यादव की तरफ से भी लगा है। शिवपाल ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा की है। दरअसल, ओपी राजभर और अखिलेश के बीच विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही विवाद शुरू हुआ था। यहां तक कि राजभर ने सार्वजनिक रूप से कई बार अखिलेश यादव पर निशाना साधा। हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। दरअसल राजभर अपने बेटे अरविंद राजभर को विधान परिषद भेजना चाहते थे, लेकिन अखिलेश ने ऐसा किया नहीं और दोनों के बीच खटास यहीं से ज्यादा बढ़ गई। लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है। आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी शैलेश पूर्व में आठ-नौ माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है। सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही। इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल दो हज़ार तेईस से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों पर गर्भवती का उपचार नहीं करने के कारण बच्चे की गर्भ में मौत होने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही खून की जांच भी गलत करने का आरोप है और इसकी शिकायत सीएमओ से की गई है।
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों पर गर्भवती का उपचार नहीं करने के कारण बच्चे की गर्भ में मौत होने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही खून की जांच भी गलत करने का आरोप है और इसकी शिकायत सीएमओ से की गई है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड मेडल जीतने के बाद बॉक्सर अमित पंघाल आज रोहतक पहुंचे। रोहतक पहुंचने पर तिलयार पर्यटन केंद्र पर अमित पंघाल का स्वागत किया गया। यहां से अमित पंघाल को विजय जुलूस के साथ घर तक लेकर गया।
अमित पंघाल ने कहा कि अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में मेडल लेकर आता है। ओलंपिक की तैयारी करेंगे। ताकि देश को मेडल दिला पाएं। इसके लिए वे अपने खेल की रणनीति में बदलाव करेंगे। जिसके तहत उनका मुख्य कदम यह रहेगा कि वे अपने पंचों की रफ्तार तेज करेंगे और ताकत को भी बढ़ाएंगे। जिससे की प्रतिद्वंद्वी को रिंग में मात दी जा सके।
सम्मान समारोह में कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल भी पहुंचें। कृषि मंत्री ने तिलयार पर्यटन केंद्र पर अमित पंघाल का स्वागत किया। साथ ही अमित पंघाल का हौसला बढ़ाते हुए दूसरों को भी उनसे प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित होने का आह्वान किया।
रोहतक के गांव मायना में जन्मे अमित पंचाल ने बॉक्सिंग में बड़ों-बड़ों को धूल चटाकर अपनी अलग ही पहचान बनाई है। अमित पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम 2022 में गोल्ड मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 2018 में हुए एशियन गेम में गोल्ड मेडल, कॉमनवेल्थ गेम 2018 में सिल्वर मेडल हासिल किए हैं। एशियन चैंपियनशिप 2017 में ब्रॉन्ज मेडल, 2019 में गोल्ड मेडल और 2021 में सिल्वर मेडल जीता है।
बॉक्सर अमित पंघाल जब भी रिंग में उतरते हैं तो उससे पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। उनका मानना है कि माता-पिता के आशीर्वाद के साथ उन्हें जीत मिलती है। इसलिए वे हर मुकाबले में जाने से पहले माता-पिता से बात करना का उनका नियम हैं।
कॉमनवेल्थ मुकाबलों के दौरान उन्होंने हमेशा ही अपने मां-बाप का आशीर्वाद लेने के बाद रिंग में पहुंचे हैं। अमित ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल तक के सफर को पूरा किया है। जीत के बाद खुशी का माहौल है।
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कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड मेडल जीतने के बाद बॉक्सर अमित पंघाल आज रोहतक पहुंचे। रोहतक पहुंचने पर तिलयार पर्यटन केंद्र पर अमित पंघाल का स्वागत किया गया। यहां से अमित पंघाल को विजय जुलूस के साथ घर तक लेकर गया। अमित पंघाल ने कहा कि अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में मेडल लेकर आता है। ओलंपिक की तैयारी करेंगे। ताकि देश को मेडल दिला पाएं। इसके लिए वे अपने खेल की रणनीति में बदलाव करेंगे। जिसके तहत उनका मुख्य कदम यह रहेगा कि वे अपने पंचों की रफ्तार तेज करेंगे और ताकत को भी बढ़ाएंगे। जिससे की प्रतिद्वंद्वी को रिंग में मात दी जा सके। सम्मान समारोह में कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल भी पहुंचें। कृषि मंत्री ने तिलयार पर्यटन केंद्र पर अमित पंघाल का स्वागत किया। साथ ही अमित पंघाल का हौसला बढ़ाते हुए दूसरों को भी उनसे प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित होने का आह्वान किया। रोहतक के गांव मायना में जन्मे अमित पंचाल ने बॉक्सिंग में बड़ों-बड़ों को धूल चटाकर अपनी अलग ही पहचान बनाई है। अमित पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम दो हज़ार बाईस में गोल्ड मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, दो हज़ार अट्ठारह में हुए एशियन गेम में गोल्ड मेडल, कॉमनवेल्थ गेम दो हज़ार अट्ठारह में सिल्वर मेडल हासिल किए हैं। एशियन चैंपियनशिप दो हज़ार सत्रह में ब्रॉन्ज मेडल, दो हज़ार उन्नीस में गोल्ड मेडल और दो हज़ार इक्कीस में सिल्वर मेडल जीता है। बॉक्सर अमित पंघाल जब भी रिंग में उतरते हैं तो उससे पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। उनका मानना है कि माता-पिता के आशीर्वाद के साथ उन्हें जीत मिलती है। इसलिए वे हर मुकाबले में जाने से पहले माता-पिता से बात करना का उनका नियम हैं। कॉमनवेल्थ मुकाबलों के दौरान उन्होंने हमेशा ही अपने मां-बाप का आशीर्वाद लेने के बाद रिंग में पहुंचे हैं। अमित ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल तक के सफर को पूरा किया है। जीत के बाद खुशी का माहौल है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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[भाग II - खण्ड 3 (i)]
If a Departmental Promotion Committee exists what is its composition
नई दिल्ली, 30 अगस्त, 2018
सा.का.नि. 283. - निकेन्द्रीय सरकार, सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 (2007 का 53 ) की धारा 155 की उप-धारा (2) के खंड (क) एवं (ग) के साथ पठित उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और सशस्त्र सीमा बल समूह 'ग' योधक (अराजपत्रित) परा-पशुचिकित्सा पद भर्ती नियम, 2011 को उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है या करने का लोप किया गया है, गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र सीमा बल, योधक परा-पशुचिकित्सा पद समूह 'ग' पदों पर भर्ती की पद्धति का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :
ELP OF Mur
Circumstances in which Union Public Service Commission is to be consulted in making recruitment
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ - (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम सशस्त्र सीमा बल, समूह 'ग' योधक (अराजपत्रित) परा-पशुचिकित्सा पद भर्ती नियम, 2018 है।
(2) ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
पदों की संख्या, वर्गीकरण और वेतन मैट्रिक्स में स्तर - पदों की संख्या, उसका वर्गीकरण और वेतन मैट्रिक्स में स्तर वे होंगे, जो इन नियमों से उपाबद्ध अनुसूची के स्तंभ ( 2 ) से स्तंभ (4) में विनिर्दिष्ट हैं।
भर्ती की पद्धति, आयु सीमा, अर्हताएं आदि - भर्ती की पद्धति, आयु सीमा, अर्हताएं और उससे संबंधित अन्य बातें वे होंगी जो उक्त अनुसूची के स्तंभ ( 5 ) से ( 13 ) में विनिर्दिष्ट हैं 1
निरर्हता. - वह व्यक्ति, -
(क) जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित हैं, विवाह किया है; या
(ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है,
AJAY KUMAR SINGH, Under Secy.
उक्त पदों पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगाः
परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह उस व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी।
चिकित्सक दृष्टया योग्यता - इन नियमों में किसी बात के होते हुए भी, केवल वे व्यक्ति जो चिकित्सा प्रर्वग शेप-1 में हैं, इन नियमों के उपबंधों के अधीन नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।
मनोवैज्ञानिक श्रवण शक्ति उपांग (अपैन्डेजेस) शारीरिक क्षमता दृष्टि शक्ति
स्पष्टीकरण.-इस नियम के प्रयोजन के लिए "शेप-1" से निम्नवत् परिभाषित चिकित्सा प्रर्वग अभिप्रेत है :(i) कोड अक्षर शेप (एस. एच. ए. पी.ई.), जो निम्नलिखित कृत्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, द्वारा उपदर्षित विद्यमान घटकों के अधीन अधिकारी की उपयुक्तता निर्धारित करने के पश्चात् चिकित्सा अधिकारी द्वारा किया गया चिकित्सा वर्गीकरण :(ii) प्रत्येक घटक के अधीन, किसी अधिकारी की कार्यक्षमता प्रत्येक कोड अक्षर के सामने अंक 1 से 5 गिरती कार्यक्षमता उपदर्शित करते हुए दर्शाई जाएगी और कोड अक्षर के पश्चात् अंक लिखे जाएंगे सिवाय उसके द्वारा जहां कोई अधिकारी सभी घटकों में श्रेणी-1 में है, वहाँ उसका प्रवर्ग एस1, एच1, ए1, पी1, ई1 लिखने के बजाय, शेप - 1 लिखकर दर्शाया जा सकेगा। इन अंको का साधारण मूल्यांकन निम्नानुसार है :भारत में कहीं भी सभी कर्तव्यों के लिए योग्य ।
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[भाग II - खण्ड तीन ] If a Departmental Promotion Committee exists what is its composition नई दिल्ली, तीस अगस्त, दो हज़ार अट्ठारह सा.का.नि. दो सौ तिरासी. - निकेन्द्रीय सरकार, सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, दो हज़ार सात की धारा एक सौ पचपन की उप-धारा के खंड एवं के साथ पठित उप-धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और सशस्त्र सीमा बल समूह 'ग' योधक परा-पशुचिकित्सा पद भर्ती नियम, दो हज़ार ग्यारह को उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है या करने का लोप किया गया है, गृह मंत्रालय के अधीन सशस्त्र सीमा बल, योधक परा-पशुचिकित्सा पद समूह 'ग' पदों पर भर्ती की पद्धति का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् : ELP OF Mur Circumstances in which Union Public Service Commission is to be consulted in making recruitment संक्षिप्त नाम और प्रारंभ - इन नियमों का संक्षिप्त नाम सशस्त्र सीमा बल, समूह 'ग' योधक परा-पशुचिकित्सा पद भर्ती नियम, दो हज़ार अट्ठारह है। ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे। पदों की संख्या, वर्गीकरण और वेतन मैट्रिक्स में स्तर - पदों की संख्या, उसका वर्गीकरण और वेतन मैट्रिक्स में स्तर वे होंगे, जो इन नियमों से उपाबद्ध अनुसूची के स्तंभ से स्तंभ में विनिर्दिष्ट हैं। भर्ती की पद्धति, आयु सीमा, अर्हताएं आदि - भर्ती की पद्धति, आयु सीमा, अर्हताएं और उससे संबंधित अन्य बातें वे होंगी जो उक्त अनुसूची के स्तंभ से में विनिर्दिष्ट हैं एक निरर्हता. - वह व्यक्ति, - जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित हैं, विवाह किया है; या जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है, AJAY KUMAR SINGH, Under Secy. उक्त पदों पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगाः परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह उस व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी। चिकित्सक दृष्टया योग्यता - इन नियमों में किसी बात के होते हुए भी, केवल वे व्यक्ति जो चिकित्सा प्रर्वग शेप-एक में हैं, इन नियमों के उपबंधों के अधीन नियुक्ति के लिए पात्र होंगे। मनोवैज्ञानिक श्रवण शक्ति उपांग शारीरिक क्षमता दृष्टि शक्ति स्पष्टीकरण.-इस नियम के प्रयोजन के लिए "शेप-एक" से निम्नवत् परिभाषित चिकित्सा प्रर्वग अभिप्रेत है : कोड अक्षर शेप , जो निम्नलिखित कृत्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, द्वारा उपदर्षित विद्यमान घटकों के अधीन अधिकारी की उपयुक्तता निर्धारित करने के पश्चात् चिकित्सा अधिकारी द्वारा किया गया चिकित्सा वर्गीकरण : प्रत्येक घटक के अधीन, किसी अधिकारी की कार्यक्षमता प्रत्येक कोड अक्षर के सामने अंक एक से पाँच गिरती कार्यक्षमता उपदर्शित करते हुए दर्शाई जाएगी और कोड अक्षर के पश्चात् अंक लिखे जाएंगे सिवाय उसके द्वारा जहां कोई अधिकारी सभी घटकों में श्रेणी-एक में है, वहाँ उसका प्रवर्ग एसएक, एचएक, एएक, पीएक, ईएक लिखने के बजाय, शेप - एक लिखकर दर्शाया जा सकेगा। इन अंको का साधारण मूल्यांकन निम्नानुसार है :भारत में कहीं भी सभी कर्तव्यों के लिए योग्य ।
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संपर्क - सबसे अधिक मांग की नकदी प्रणालीअनुवाद। इसके लिए धन्यवाद, आप दुनिया में कहीं भी जल्दी और सुरक्षित रूप से पैसा भेज सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में 85,000 शाखाएं हैं, जो निकट और दूर के क्षेत्र में स्थित हैं। साथ ही, कई नागरिक इस बारे में सोच रहे हैं कि कौन सा बैंक "संपर्क" हस्तांतरण प्राप्त कर सकता है और इसके लिए क्या आवश्यक है।
रिश्तेदारों या दोस्तों को पैसे भेजने के लिए, आपको यह करना होगाः
- एक वित्तीय कंपनी के कार्यालय पर जाएं जो संपर्क प्रणाली के माध्यम से धन हस्तांतरण करता है।
- कंपनी के एक कर्मचारी को पासपोर्ट प्रस्तुत करें।
- प्राप्तकर्ता के बारे में जानकारी के साथ वित्तीय कंपनी विशेषज्ञ प्रदान करेंः पूरा नाम, प्रेषण का देश, मुद्रा प्राप्त करना, भेजने की राशि और संपर्क विवरण।
- निधि के हस्तांतरण के लिए आवेदन पर हस्ताक्षर करें, पहले सभी व्यक्तिगत जानकारी की जांच करें, कैशियर में धन जमा करें और चेक प्राप्त करें।
- स्थानान्तरण जारी करने के निकटतम बिंदु पर जाएं। इस भुगतान प्रणाली की टोल-फ्री हॉटलाइन को कॉल करके, आप यह पता लगा सकते हैं कि आप किस बैंक में "संपर्क" स्थानांतरण प्राप्त कर सकते हैं।
- एक पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज दिखाएं जो पहचान दस्तावेजों के यकृत में शामिल है।
- वित्तीय कंपनी कोड और हस्तांतरण की सही राशि के कर्मचारी को आवाज उठाने के लिए।
- आवेदन और व्यय आदेश पर हस्ताक्षर करें।
- हाथ पर नकद प्राप्त करें।
रूसी संघ के पूरे क्षेत्र में अधिकतम स्थानांतरण नहीं है। विदेशी मुद्रा के लिए, सिस्टम यहां प्रतिबंध स्थापित करता है - एक दिन में $ 5,000 से अधिक नहीं।
धन हस्तांतरण भेजना रूबल समकक्ष में किया जाता है। इस मामले में, प्रेषक रूपांतरण कर सकता है और प्राप्त मुद्रा को निर्दिष्ट कर सकता है।
आयोग के बारे में मत भूलना, जो प्रेषक को लगाया जाता है। कमीशन का आकार मौद्रिक प्रणाली के टैरिफ द्वारा निर्धारित और निर्धारित किया जाता है, और इसका आकार सीधे हस्तांतरण की मात्रा पर निर्भर करता है।
स्थानांतरण करना 5 मिनट से अधिक नहीं लेता है। प्राप्तकर्ता भेजने के तुरंत बाद किसी भी निकटतम शाखा से संपर्क कर सकते हैं और पैसा प्राप्त कर सकते हैं।
मॉस्को में, इस भुगतान प्रणाली में स्थानान्तरणबहुत लोकप्रिय हैं। मॉस्को में 3 9 6 अंक हैं जहां आप दोनों भेज और प्राप्त कर सकते हैं। सिस्टम की सेवाओं का उपयोग निम्नलिखित वित्तीय संस्थानों में किया जा सकता हैः मेट्रोपोल बैंक, यूआरएएलएसआईबी, ग्लोबबेक बैंक, बिनबैंक, शिक्षा, और लोको बैंक।
भुगतान प्रणाली की शर्तों के अनुसार, यदि30 दिनों के भीतर नकद प्राप्त नहीं होता है, भुगतान प्रेषक के बैंक को वापस कर दिया जाता है। उसी समय हस्तांतरण शुल्क वापस ले लिया जाता है। एक नियम के रूप में, स्थानांतरण निम्नलिखित कारणों से लौटाए जाते हैंः
- प्राप्तकर्ता को यह पता नहीं होता है कि किस बैंक से "संपर्क" अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है।
- भेजते समय, व्यक्तिगत डेटा में एक त्रुटि हुई थी, और प्रेषक उन्हें ठीक करने के लिए बैंक शाखा में दिखाई नहीं दिया था।
यदि स्थानांतरण भेजते समय कोई त्रुटि हुई थी,आपको उचित परिवर्तन करना चाहिए, अन्यथा प्राप्तकर्ता भेजे गए धन को लेने में सक्षम नहीं होगा। परिवर्तन करने के लिए, आपको पासपोर्ट के साथ वित्तीय कंपनी कर्मचारी प्रदान करना होगा, ट्रांसफर नंबर पर कॉल करना होगा और एक आवेदन लिखना होगा। बयान में विस्तार से संकेत होना चाहिए कि क्या परिवर्तन आवश्यक हैं।
संशोधन के बाद, प्राप्तकर्ता तुरंत शाखा से संपर्क कर सकता है, जो इस भुगतान प्रणाली के साथ सहयोग करता है, और धन प्राप्त करता है।
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संपर्क - सबसे अधिक मांग की नकदी प्रणालीअनुवाद। इसके लिए धन्यवाद, आप दुनिया में कहीं भी जल्दी और सुरक्षित रूप से पैसा भेज सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में पचासी,शून्य शाखाएं हैं, जो निकट और दूर के क्षेत्र में स्थित हैं। साथ ही, कई नागरिक इस बारे में सोच रहे हैं कि कौन सा बैंक "संपर्क" हस्तांतरण प्राप्त कर सकता है और इसके लिए क्या आवश्यक है। रिश्तेदारों या दोस्तों को पैसे भेजने के लिए, आपको यह करना होगाः - एक वित्तीय कंपनी के कार्यालय पर जाएं जो संपर्क प्रणाली के माध्यम से धन हस्तांतरण करता है। - कंपनी के एक कर्मचारी को पासपोर्ट प्रस्तुत करें। - प्राप्तकर्ता के बारे में जानकारी के साथ वित्तीय कंपनी विशेषज्ञ प्रदान करेंः पूरा नाम, प्रेषण का देश, मुद्रा प्राप्त करना, भेजने की राशि और संपर्क विवरण। - निधि के हस्तांतरण के लिए आवेदन पर हस्ताक्षर करें, पहले सभी व्यक्तिगत जानकारी की जांच करें, कैशियर में धन जमा करें और चेक प्राप्त करें। - स्थानान्तरण जारी करने के निकटतम बिंदु पर जाएं। इस भुगतान प्रणाली की टोल-फ्री हॉटलाइन को कॉल करके, आप यह पता लगा सकते हैं कि आप किस बैंक में "संपर्क" स्थानांतरण प्राप्त कर सकते हैं। - एक पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज दिखाएं जो पहचान दस्तावेजों के यकृत में शामिल है। - वित्तीय कंपनी कोड और हस्तांतरण की सही राशि के कर्मचारी को आवाज उठाने के लिए। - आवेदन और व्यय आदेश पर हस्ताक्षर करें। - हाथ पर नकद प्राप्त करें। रूसी संघ के पूरे क्षेत्र में अधिकतम स्थानांतरण नहीं है। विदेशी मुद्रा के लिए, सिस्टम यहां प्रतिबंध स्थापित करता है - एक दिन में पाँच डॉलर,शून्य से अधिक नहीं। धन हस्तांतरण भेजना रूबल समकक्ष में किया जाता है। इस मामले में, प्रेषक रूपांतरण कर सकता है और प्राप्त मुद्रा को निर्दिष्ट कर सकता है। आयोग के बारे में मत भूलना, जो प्रेषक को लगाया जाता है। कमीशन का आकार मौद्रिक प्रणाली के टैरिफ द्वारा निर्धारित और निर्धारित किया जाता है, और इसका आकार सीधे हस्तांतरण की मात्रा पर निर्भर करता है। स्थानांतरण करना पाँच मिनट से अधिक नहीं लेता है। प्राप्तकर्ता भेजने के तुरंत बाद किसी भी निकटतम शाखा से संपर्क कर सकते हैं और पैसा प्राप्त कर सकते हैं। मॉस्को में, इस भुगतान प्रणाली में स्थानान्तरणबहुत लोकप्रिय हैं। मॉस्को में तीन नौ छः अंक हैं जहां आप दोनों भेज और प्राप्त कर सकते हैं। सिस्टम की सेवाओं का उपयोग निम्नलिखित वित्तीय संस्थानों में किया जा सकता हैः मेट्रोपोल बैंक, यूआरएएलएसआईबी, ग्लोबबेक बैंक, बिनबैंक, शिक्षा, और लोको बैंक। भुगतान प्रणाली की शर्तों के अनुसार, यदितीस दिनों के भीतर नकद प्राप्त नहीं होता है, भुगतान प्रेषक के बैंक को वापस कर दिया जाता है। उसी समय हस्तांतरण शुल्क वापस ले लिया जाता है। एक नियम के रूप में, स्थानांतरण निम्नलिखित कारणों से लौटाए जाते हैंः - प्राप्तकर्ता को यह पता नहीं होता है कि किस बैंक से "संपर्क" अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है। - भेजते समय, व्यक्तिगत डेटा में एक त्रुटि हुई थी, और प्रेषक उन्हें ठीक करने के लिए बैंक शाखा में दिखाई नहीं दिया था। यदि स्थानांतरण भेजते समय कोई त्रुटि हुई थी,आपको उचित परिवर्तन करना चाहिए, अन्यथा प्राप्तकर्ता भेजे गए धन को लेने में सक्षम नहीं होगा। परिवर्तन करने के लिए, आपको पासपोर्ट के साथ वित्तीय कंपनी कर्मचारी प्रदान करना होगा, ट्रांसफर नंबर पर कॉल करना होगा और एक आवेदन लिखना होगा। बयान में विस्तार से संकेत होना चाहिए कि क्या परिवर्तन आवश्यक हैं। संशोधन के बाद, प्राप्तकर्ता तुरंत शाखा से संपर्क कर सकता है, जो इस भुगतान प्रणाली के साथ सहयोग करता है, और धन प्राप्त करता है।
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बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पटना के गांधी मैदान के बाहर पिछले शुक्रवार को मची भगदड़ में घायल लोगों के इलाज का जायजा लेने रविवार शाम पटना मेडिकल कालेज अस्पताल (पीएमसीएच) पहुंचे और वहां की व्यवस्था को असंतोषजनक पाया.
अस्पताल के हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, 'इस पर विचार के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. '
मांझी ने कहा कि यहां मरीजों को करीब 80 प्रतिशत दवाइयां बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही हैं. अस्पताल में मरीजों को केवल इंजेक्शन उपलब्ध कराया जाता है.
विभिन्न वार्डों का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने पाया कि नियम के अनुसार मरीजों के बेडशीट नहीं बदले जा रहे हैं. कहीं 15 दिन, तो कहीं एक सप्ताह में, कहीं तीन दिन में बेडशीट बदले जाते हैं.
उन्होंने कहा कि इमरजेंसी वार्ड के शौचालय की स्थिति बहुत खराब है, वहां न तो पानी है और न ही सफाई है.
मांझी ने कहा कि कोई एचओडी तक यहां उपस्थित नहीं हैं. सभी एचओडी कहीं बाहर गए हुए हैं. पीएमसीएच के अधीक्षक लखेंद्र प्रसाद भी कहीं गए हुए हैं.
उन्होंने बताया कि यहां केवल पीएमसीएच के प्राचार्य और उपाधीक्षक उपस्थित थे. उनके साथ सर्जिकल, यूरोलॉजी, आथरे वार्ड का निरीक्षण किया गया. स्थिति बहुत ही असंतोषजनक है.
मांझी ने कहा कि यहां एक से डेढ़ महीने से रोगी भर्ती हैं और उन्हें डाक्टर नहीं देख रहे हैं. डॉक्टर नियमित राउण्ड नहीं लगाते हैं. कभी-कभार डॉक्टर रोगी को देखकर चले जाते हैं.
उन्होंने कहा कि पीएमसीएच की स्थिति बहुत ही असंतोषजनक है. इस पर विचारोपरांत आवश्यक कार्रवाई करेंगे.
गौरतलब है कि भगदड के बाद मुख्यमंत्री रात में करीब डेढ़ बजे पीएमसीएच जाकर घायलों से मिले थे और उनके इलाज को लेकर अस्पताल के अधीक्षक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे.
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बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पटना के गांधी मैदान के बाहर पिछले शुक्रवार को मची भगदड़ में घायल लोगों के इलाज का जायजा लेने रविवार शाम पटना मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचे और वहां की व्यवस्था को असंतोषजनक पाया. अस्पताल के हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, 'इस पर विचार के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. ' मांझी ने कहा कि यहां मरीजों को करीब अस्सी प्रतिशत दवाइयां बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही हैं. अस्पताल में मरीजों को केवल इंजेक्शन उपलब्ध कराया जाता है. विभिन्न वार्डों का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने पाया कि नियम के अनुसार मरीजों के बेडशीट नहीं बदले जा रहे हैं. कहीं पंद्रह दिन, तो कहीं एक सप्ताह में, कहीं तीन दिन में बेडशीट बदले जाते हैं. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी वार्ड के शौचालय की स्थिति बहुत खराब है, वहां न तो पानी है और न ही सफाई है. मांझी ने कहा कि कोई एचओडी तक यहां उपस्थित नहीं हैं. सभी एचओडी कहीं बाहर गए हुए हैं. पीएमसीएच के अधीक्षक लखेंद्र प्रसाद भी कहीं गए हुए हैं. उन्होंने बताया कि यहां केवल पीएमसीएच के प्राचार्य और उपाधीक्षक उपस्थित थे. उनके साथ सर्जिकल, यूरोलॉजी, आथरे वार्ड का निरीक्षण किया गया. स्थिति बहुत ही असंतोषजनक है. मांझी ने कहा कि यहां एक से डेढ़ महीने से रोगी भर्ती हैं और उन्हें डाक्टर नहीं देख रहे हैं. डॉक्टर नियमित राउण्ड नहीं लगाते हैं. कभी-कभार डॉक्टर रोगी को देखकर चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच की स्थिति बहुत ही असंतोषजनक है. इस पर विचारोपरांत आवश्यक कार्रवाई करेंगे. गौरतलब है कि भगदड के बाद मुख्यमंत्री रात में करीब डेढ़ बजे पीएमसीएच जाकर घायलों से मिले थे और उनके इलाज को लेकर अस्पताल के अधीक्षक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे.
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शहर के स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। स्कूल के पचास मीटर दायरे में चल रही दुकानों को बंद किया जाए, जिससे बच्चों को नशे से बचाया जा सके।
भोपाल। शहर के स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। स्कूल के पचास मीटर दायरे में चल रही दुकानों को बंद किया जाए, जिससे बच्चों को नशे से बचाया जा सके। इसके लेकर धारा-144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाएंगे। यह बात गुरुवार को कलेक्टर आशीष सिंह ने नशा मुक्त अभियान 2. 0 को लेकर समीक्षा बैठक रखी।
कलेक्टर नशा मुक्त भारत अभियान एनएमबीए एप से सभी विभाग और प्राइवेट संस्थाएं भी जन जागरूकता करें और एप पर जानकारी भी अपलोड करें। कलेक्टर ने स्कूल के बच्चों में नशा के संबंध में जागरूकता लाने की बात कही। बैठक में डीसीपी विनीत कपूर ने जिले में पुलिस ने जारी अंकुश नारको हेल्पलाइन नम्बर 7587628290 के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी नागरिक अपनी पहचान बताए बिना इस नम्बर पर फोन कर मादक पदार्थों के प्रयोग, परिवहन का विक्रय के बारे में सूचना दे सकते हैं और आरोपियों पर कार्रवाई करवा सकते हैं।
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शहर के स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। स्कूल के पचास मीटर दायरे में चल रही दुकानों को बंद किया जाए, जिससे बच्चों को नशे से बचाया जा सके। भोपाल। शहर के स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। स्कूल के पचास मीटर दायरे में चल रही दुकानों को बंद किया जाए, जिससे बच्चों को नशे से बचाया जा सके। इसके लेकर धारा-एक सौ चौंतालीस के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाएंगे। यह बात गुरुवार को कलेक्टर आशीष सिंह ने नशा मुक्त अभियान दो. शून्य को लेकर समीक्षा बैठक रखी। कलेक्टर नशा मुक्त भारत अभियान एनएमबीए एप से सभी विभाग और प्राइवेट संस्थाएं भी जन जागरूकता करें और एप पर जानकारी भी अपलोड करें। कलेक्टर ने स्कूल के बच्चों में नशा के संबंध में जागरूकता लाने की बात कही। बैठक में डीसीपी विनीत कपूर ने जिले में पुलिस ने जारी अंकुश नारको हेल्पलाइन नम्बर सात पाँच आठ सात छः दो आठ दो नौ शून्य के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी नागरिक अपनी पहचान बताए बिना इस नम्बर पर फोन कर मादक पदार्थों के प्रयोग, परिवहन का विक्रय के बारे में सूचना दे सकते हैं और आरोपियों पर कार्रवाई करवा सकते हैं।
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ALLAHABAD: डिस्ट्रिक्ट चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन जिला स्तरीय कॉम्पिटीशन का आयोजन करने जा रहा है। इस सिलसिले में जानकारी देते हुए सेक्रेट्री आशीष कुमार द्विवेदी ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट लेवल यह कॉम्पिटीशन आठ अप्रैल को वशिष्ठ वात्सल्य पब्लिक स्कूल में ऑर्गनाइज होगा। कॉम्पिटीशन के लिए सिटी के चार प्लेयर्स का सेलेक्शन डिस्ट्रिक्ट टीम में किया गया है। सेलेक्टेड चारों प्लेयर्स लखनऊ में आगामी क्8 अप्रैल को होने वाले यूपी चेस कॉम्पिटीशन में पार्टिसिपेट करेंगे। कॉम्पिटीशन में शामिल होने वाले चारों प्लेयर्स को टीए डीए प्रदान किया जाएगा।
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ALLAHABAD: डिस्ट्रिक्ट चेस स्पोर्ट्स एसोसिएशन जिला स्तरीय कॉम्पिटीशन का आयोजन करने जा रहा है। इस सिलसिले में जानकारी देते हुए सेक्रेट्री आशीष कुमार द्विवेदी ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट लेवल यह कॉम्पिटीशन आठ अप्रैल को वशिष्ठ वात्सल्य पब्लिक स्कूल में ऑर्गनाइज होगा। कॉम्पिटीशन के लिए सिटी के चार प्लेयर्स का सेलेक्शन डिस्ट्रिक्ट टीम में किया गया है। सेलेक्टेड चारों प्लेयर्स लखनऊ में आगामी क्आठ अप्रैल को होने वाले यूपी चेस कॉम्पिटीशन में पार्टिसिपेट करेंगे। कॉम्पिटीशन में शामिल होने वाले चारों प्लेयर्स को टीए डीए प्रदान किया जाएगा।
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öबहन अस्पताल में भर्ती भाई को पुलिस ने किया गिरफ्तार वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। पहाड़गंज इलाके में एक युवक ने अपनी ही शादीशुदा बहन को सरेआम चाकू मारकर मारने की कोशिश की जिसकी अस्पताल में हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी भाई को गिरफ्तार करके वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया है। बताया जाता है कि वारदात सुबह पहाड़गंज के राम गली लड्डू घाटी इलाके में हुई। असल में पहाड़गंज के नेहरू विहार में सुभाष परिवार के साथ रहता है। उसकी बहन चंद्रावती (18) ने 29 नवम्बर 2010 को प्रेम विवाह घर वालों की बिना मर्जी से किया था। इस शादी से घर वाले तो काफी हद तक बाद में राजी हो गए गए पर सुभाष को यह बात पसंद नहीं थी। इस कारण घर में भी काफी झगड़ा हुआ था। उसने चंद्रावती को मारने की भी बात कह डाली थी। सुबह उसे मालूम पड़ा कि चंद्रावती लड्डू घाटी में आएगी तभी वह इलाके में गया और उसको देखते ही किचन चाकू से वार करके घायल कर दिया। लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सूचित किया तथा खून से लथपथावस्था में पड़ी चंद्रावती को नजदीक के लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती करवाया जहां डाक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई।
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öबहन अस्पताल में भर्ती भाई को पुलिस ने किया गिरफ्तार वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। पहाड़गंज इलाके में एक युवक ने अपनी ही शादीशुदा बहन को सरेआम चाकू मारकर मारने की कोशिश की जिसकी अस्पताल में हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी भाई को गिरफ्तार करके वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया है। बताया जाता है कि वारदात सुबह पहाड़गंज के राम गली लड्डू घाटी इलाके में हुई। असल में पहाड़गंज के नेहरू विहार में सुभाष परिवार के साथ रहता है। उसकी बहन चंद्रावती ने उनतीस नवम्बर दो हज़ार दस को प्रेम विवाह घर वालों की बिना मर्जी से किया था। इस शादी से घर वाले तो काफी हद तक बाद में राजी हो गए गए पर सुभाष को यह बात पसंद नहीं थी। इस कारण घर में भी काफी झगड़ा हुआ था। उसने चंद्रावती को मारने की भी बात कह डाली थी। सुबह उसे मालूम पड़ा कि चंद्रावती लड्डू घाटी में आएगी तभी वह इलाके में गया और उसको देखते ही किचन चाकू से वार करके घायल कर दिया। लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सूचित किया तथा खून से लथपथावस्था में पड़ी चंद्रावती को नजदीक के लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती करवाया जहां डाक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई।
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[ से० - श्री अगरचन्द नाहटा ]
अन्य प्रान्तोंकी अपेक्षा बंगालप्रान्तमें शिक्षाप्रचार अत्यधिक है । साहित्य के प्रत्येक क्षेत्र में बंगीय विद्वानोंने जैसा उत्तम और अधिक कार्य किया है वह सचमुच ही बंगालके लिए गौरवकी वस्तु है । विश्वकवि-रवीन्द्रनाथ, महान् उपन्यासकार स्वर्गीय बङ्किमचन्द्र चटर्जी और शरत बाबू, पुरातत्त्व विद सर श्री जदुनाथ सरकार; महान् वैज्ञानिक सर जगदीशचन्द्र वसु, प्राचार्य प्रफुल्लचंद्रराय और मेघनाद शाह, महायोगी स्वर्गीय रामकृष्ण, विवेकानन्द और अरविन्द घोष, त्यागवीर स्वर्गीय देशबन्धु चितरञ्जनदास, देशसेवक भूत पूर्व राष्ट्रपति सुभाषचन्द्र बोस, महान् कानूनवेत्ता रासविहारी घोष, परमसंगीतज्ञ तिमिरवर्ण, गिरिजाशंकर चक्रवर्त्ती, भीष्मदेव चटर्जी, ज्ञानेन्द्र गोस्वामी; ललित नृत्यकार विश्चमुग्धकर उदयशंकर भट्ट; समाज संस्कारक राजा राममोहनराय, केशवचन्द्रसेन और ईश्वरचन्द्र विद्या सागर इत्यादि नररत्नोंने अपनी साधारण प्रतिभाद्वारा विश्व में बंगभूमिको गौरवान्वित कर दिया है। केवल बंगाल ही क्यों समस्त भारतभूमि इन महापुरुषोंको जन्म देकर सौभाग्यवती हुई है । विश्व इन महापुरुषोंके कार्य कलापों द्वारा चकित एवं मुग्ध है।
दार्शनिक चिन्तामें भी अंगीय विद्वानोंने अपनी बौद्धिक शक्तिका अच्छा परिचय दिया है । जैनदर्शन भारतीय दर्शनोंमें प्रधान और मननीय उत्कृष्ट दर्शन है। श्रतः बंगीय विद्वानोंका इस ओर ध्यान देना सर्वथा उपयुक्त है। किन्तु साधनाभाव के कारण उनकी ज्ञानपिपासाने प्रचलरूप धारण नहीं किया। इसबार कलकचेमें मुझे अनेक विद्वानोंसे साक्षात्कार होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । उन लोगोंसे वार्त्तालाप होनेपर सभीने एक स्वरसे यही कहा कि "जैनदर्शनके सूक्ष्म तत्त्वों को जानने की हमें बड़ी उत्कण्ठा है पर क्या करें १ साधन नहीं मिलते !" इन शब्दोंको श्रवण कर मेरे हृदय में गहरी चोट लगी पर करता क्या १ बंगीय जैनसमाजने अभी तक एक भी ऐसा प्रायोजन नहीं किया कि जिसके द्वारा साहित्यिक सामग्री जुटाता और उसे लेजाकर बंगीय विद्वानोंको देता, जिससे वे अपनी जिज्ञासा की प्यासको बुझाने, अस्तु ।
अब मैं उन बंगीय विद्वानों के विषय में लिखता हूँ जिन्होंने समुचित साधन नहीं मिलने पर भी अपनी श्रपूर्व कर्मठवृत्ति द्वारा जैनसाहित्य में अच्छे अच्छे कार्य किये हैं। ये विद्वान जैनधर्म के पूर्ण अनुरागी है। इनके विषय में मैंने जो कुछ खोज की है, जिन जिनसे व्यक्तिगत वार्त्तालाप हुआ और उनके कार्यका परिचय मिला है उसीके आधार पर संक्षेप में इस विषय में लिख रहा हूँ ।
१ श्रीयुत हरिसत्य भट्टाचार्य M. A. B.L., वकील हवड़ाकोर्ट( पता नं० १ कैलाशबोस लेन; हबड़ा ) जैनसाहित्यसेवी बंगाली विद्वानों में आपका स्थान सर्वोच्च है। आपकी दार्शनिक श्रालोचनाकी शैली बड़ी ही हृदयग्राही और गंभीर है। भारतीय दर्शनों के प्रति
[मार्गशीर्ष, वीर निर्वाण सं०२४३६
निदर्शनमें जो उद्गार प्रगट किये हैं उनमेंसे आवश्यक अंश नीचे उद्धृत किया जाता हैरिक्त पाश्चात्य दर्शनोंके सम्बन्ध में श्रापका शान बहुत विशाल है अतएव श्रापका लेखन तुलनात्मक और तलस्पर्शी होता है। आपके लिखे हुए भारतीय दर्शनसमूहे जैनदर्शनेर स्थान, ईश्वर, जीव, कर्म, षड् द्रव्य - धर्म अधर्म, पुद्गल, काल, आकाश इत्यादि निबंध इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। आपके इन निबन्धोंर्मेसे प्रथम निबंधका गुजराती अनुवाद जब मेरे अवलोकन में आया तभी से मिलकर आपके लिखे अन्य सब निबंधोंको प्राप्त करनेकी उत्कंठा हुई; पर पता ज्ञात न होनेसे वैसा शीघ्र ही न बन सका। बहुत प्रयत्न करने पर बाबू छोटेलालजी जैनसे आपका पता ज्ञात हुआ और मैं बाबू हरषचन्द्रजी बोथराके साथ आपसे मिला । वार्त्तालाप होनेपर ज्ञात हुआ कि करीब २५ वर्ष पूर्वसे श्राप जैनग्रंथका अध्ययन व लेखन कार्य कर रहे हैं, पर उनके लिखित ग्रंथों के प्रकाशनकी कोई सुव्यवस्था न होने से इधर कई वर्षोंसे उन्हें लिखना बंद कर देना पड़ा। जैन समाजके लिये यह कितने दुखका विषय है कि ऐसे तुलनात्मक गंभीर लेखकको प्रकाशन प्रबन्ध न होनेसे लिखना बंद करना पड़ा, निरुत्साह होना पड़ा ! भट्टाचार्यजीसे वार्तालाप होनेपर ज्ञात हुआ कि उनको जैनधर्म के प्रति हार्दिक श्रादर व भक्ति भाव है, उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि प्रबन्ध किया जा सके तो मेरा विचार तो पाश्चात्य देशों में घूम घूमकर जैनधर्म के प्रचार में करनेका है। एक बंगाली विद्वानके इतने उच्च हार्दिक विचार सुनकर किसे श्रानन्द न होगा ? मेरे हृदय में तो हमारे समाजकी उपेक्षाको स्मरण कर बड़ी ही गहरी चोट पहुँची। क्या जैनसमाज अब भी आँखें नहीं खोलेगा ?
श्रीयुत भट्टाचार्य जीके तलस्पर्शी गहन अध्ययन व लेखन के विषय में पं० सुखलालजीने "जिनवाणी" ग्रंथके
"श्रीयुक्त हरिसत्य भट्टाचार्य घणां वर्ष अगाऊ श्रोरीएटल कॉन्फरेन्सना प्रथम अधिवेशन प्रसंगे पनामां मलेलातेवखतेज तेमना परिचयथी मारा उपर एटली छाप पडेली के एक बंगाली अने ते पण जैनेतर होवा छताँ जैनसाहित्य विषे जे अनन्य रस धरावे छे ते नवयुगनी जिज्ञासानुं जीवतुं प्रमाण छे । तेमणे "रत्नाकरावतारिका" नो अँग्रेज़ी करैलो तेने तपासी ने छुपावी देवो एवी एमनी इच्छा हती, ए अनुवाद मे छपावी तो न शक्या पण मारी एटली खात्री थइ के भट्टाचार्यजीए श्रा अनुवाद माँ खूब महेनत करी छे । श्रने ते द्वारा तेमने जैनशास्त्रना हृदयनो स्पर्श करवानी एक सरस तक मली छे । त्यारबाद एटलो वर्षे ज्यारे तेमना बंगाली लेखोना अनुवादों में वांच्यां त्यारे ते वखते भट्टाचार्यजी विषे में जे धारणा बांधेली ते वधारे पाकी थई ने साची पण मिद्ध थइ । श्रीयुक्त भट्टाचार्य जी ए जैनशास्त्र नु वांचन ने परिशीलन लांचा बखत लगी चलावेलु ऐना परिपाक रुपेज तेमना या लेखो के एम कहवु जोइए, जन्म अने बातावरण थी जैनेतर होवाछतां तेमना लेखो माँ जे अनेकविध जैन विगतो नी यथार्थं माहितीछे अने जैन विचारसरणीनो जे वास्तदिक स्पर्श छे, ते तेमना अभ्यासी अने चोकसाई प्रधान मानसनी साबीती पुरी पाडे छे । पूर्वीय तेमज पश्चिमीय तत्त्वाचितनन् विशालवाचन एमनी M. A. डीग्रीने शोभावे तेवुं छे अने एमनु दलिलपूर्वक निरुपण एमनी वकीली वुद्धिनी साक्षी मा पे छ । भट्टाचार्य जीनी श्रा सेवामात्र जैन जनता मांज नहीं परन्तु जैनदर्शनना जिशासु जैन- जैनेतर सामान्य जगत मां चिरस्मरणीय बनी रहथे।
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[ सेशून्य - श्री अगरचन्द नाहटा ] अन्य प्रान्तोंकी अपेक्षा बंगालप्रान्तमें शिक्षाप्रचार अत्यधिक है । साहित्य के प्रत्येक क्षेत्र में बंगीय विद्वानोंने जैसा उत्तम और अधिक कार्य किया है वह सचमुच ही बंगालके लिए गौरवकी वस्तु है । विश्वकवि-रवीन्द्रनाथ, महान् उपन्यासकार स्वर्गीय बङ्किमचन्द्र चटर्जी और शरत बाबू, पुरातत्त्व विद सर श्री जदुनाथ सरकार; महान् वैज्ञानिक सर जगदीशचन्द्र वसु, प्राचार्य प्रफुल्लचंद्रराय और मेघनाद शाह, महायोगी स्वर्गीय रामकृष्ण, विवेकानन्द और अरविन्द घोष, त्यागवीर स्वर्गीय देशबन्धु चितरञ्जनदास, देशसेवक भूत पूर्व राष्ट्रपति सुभाषचन्द्र बोस, महान् कानूनवेत्ता रासविहारी घोष, परमसंगीतज्ञ तिमिरवर्ण, गिरिजाशंकर चक्रवर्त्ती, भीष्मदेव चटर्जी, ज्ञानेन्द्र गोस्वामी; ललित नृत्यकार विश्चमुग्धकर उदयशंकर भट्ट; समाज संस्कारक राजा राममोहनराय, केशवचन्द्रसेन और ईश्वरचन्द्र विद्या सागर इत्यादि नररत्नोंने अपनी साधारण प्रतिभाद्वारा विश्व में बंगभूमिको गौरवान्वित कर दिया है। केवल बंगाल ही क्यों समस्त भारतभूमि इन महापुरुषोंको जन्म देकर सौभाग्यवती हुई है । विश्व इन महापुरुषोंके कार्य कलापों द्वारा चकित एवं मुग्ध है। दार्शनिक चिन्तामें भी अंगीय विद्वानोंने अपनी बौद्धिक शक्तिका अच्छा परिचय दिया है । जैनदर्शन भारतीय दर्शनोंमें प्रधान और मननीय उत्कृष्ट दर्शन है। श्रतः बंगीय विद्वानोंका इस ओर ध्यान देना सर्वथा उपयुक्त है। किन्तु साधनाभाव के कारण उनकी ज्ञानपिपासाने प्रचलरूप धारण नहीं किया। इसबार कलकचेमें मुझे अनेक विद्वानोंसे साक्षात्कार होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । उन लोगोंसे वार्त्तालाप होनेपर सभीने एक स्वरसे यही कहा कि "जैनदर्शनके सूक्ष्म तत्त्वों को जानने की हमें बड़ी उत्कण्ठा है पर क्या करें एक साधन नहीं मिलते !" इन शब्दोंको श्रवण कर मेरे हृदय में गहरी चोट लगी पर करता क्या एक बंगीय जैनसमाजने अभी तक एक भी ऐसा प्रायोजन नहीं किया कि जिसके द्वारा साहित्यिक सामग्री जुटाता और उसे लेजाकर बंगीय विद्वानोंको देता, जिससे वे अपनी जिज्ञासा की प्यासको बुझाने, अस्तु । अब मैं उन बंगीय विद्वानों के विषय में लिखता हूँ जिन्होंने समुचित साधन नहीं मिलने पर भी अपनी श्रपूर्व कर्मठवृत्ति द्वारा जैनसाहित्य में अच्छे अच्छे कार्य किये हैं। ये विद्वान जैनधर्म के पूर्ण अनुरागी है। इनके विषय में मैंने जो कुछ खोज की है, जिन जिनसे व्यक्तिगत वार्त्तालाप हुआ और उनके कार्यका परिचय मिला है उसीके आधार पर संक्षेप में इस विषय में लिख रहा हूँ । एक श्रीयुत हरिसत्य भट्टाचार्य M. A. B.L., वकील हवड़ाकोर्ट जैनसाहित्यसेवी बंगाली विद्वानों में आपका स्थान सर्वोच्च है। आपकी दार्शनिक श्रालोचनाकी शैली बड़ी ही हृदयग्राही और गंभीर है। भारतीय दर्शनों के प्रति [मार्गशीर्ष, वीर निर्वाण संदो हज़ार चार सौ छत्तीस निदर्शनमें जो उद्गार प्रगट किये हैं उनमेंसे आवश्यक अंश नीचे उद्धृत किया जाता हैरिक्त पाश्चात्य दर्शनोंके सम्बन्ध में श्रापका शान बहुत विशाल है अतएव श्रापका लेखन तुलनात्मक और तलस्पर्शी होता है। आपके लिखे हुए भारतीय दर्शनसमूहे जैनदर्शनेर स्थान, ईश्वर, जीव, कर्म, षड् द्रव्य - धर्म अधर्म, पुद्गल, काल, आकाश इत्यादि निबंध इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। आपके इन निबन्धोंर्मेसे प्रथम निबंधका गुजराती अनुवाद जब मेरे अवलोकन में आया तभी से मिलकर आपके लिखे अन्य सब निबंधोंको प्राप्त करनेकी उत्कंठा हुई; पर पता ज्ञात न होनेसे वैसा शीघ्र ही न बन सका। बहुत प्रयत्न करने पर बाबू छोटेलालजी जैनसे आपका पता ज्ञात हुआ और मैं बाबू हरषचन्द्रजी बोथराके साथ आपसे मिला । वार्त्तालाप होनेपर ज्ञात हुआ कि करीब पच्चीस वर्ष पूर्वसे श्राप जैनग्रंथका अध्ययन व लेखन कार्य कर रहे हैं, पर उनके लिखित ग्रंथों के प्रकाशनकी कोई सुव्यवस्था न होने से इधर कई वर्षोंसे उन्हें लिखना बंद कर देना पड़ा। जैन समाजके लिये यह कितने दुखका विषय है कि ऐसे तुलनात्मक गंभीर लेखकको प्रकाशन प्रबन्ध न होनेसे लिखना बंद करना पड़ा, निरुत्साह होना पड़ा ! भट्टाचार्यजीसे वार्तालाप होनेपर ज्ञात हुआ कि उनको जैनधर्म के प्रति हार्दिक श्रादर व भक्ति भाव है, उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि प्रबन्ध किया जा सके तो मेरा विचार तो पाश्चात्य देशों में घूम घूमकर जैनधर्म के प्रचार में करनेका है। एक बंगाली विद्वानके इतने उच्च हार्दिक विचार सुनकर किसे श्रानन्द न होगा ? मेरे हृदय में तो हमारे समाजकी उपेक्षाको स्मरण कर बड़ी ही गहरी चोट पहुँची। क्या जैनसमाज अब भी आँखें नहीं खोलेगा ? श्रीयुत भट्टाचार्य जीके तलस्पर्शी गहन अध्ययन व लेखन के विषय में पंशून्य सुखलालजीने "जिनवाणी" ग्रंथके "श्रीयुक्त हरिसत्य भट्टाचार्य घणां वर्ष अगाऊ श्रोरीएटल कॉन्फरेन्सना प्रथम अधिवेशन प्रसंगे पनामां मलेलातेवखतेज तेमना परिचयथी मारा उपर एटली छाप पडेली के एक बंगाली अने ते पण जैनेतर होवा छताँ जैनसाहित्य विषे जे अनन्य रस धरावे छे ते नवयुगनी जिज्ञासानुं जीवतुं प्रमाण छे । तेमणे "रत्नाकरावतारिका" नो अँग्रेज़ी करैलो तेने तपासी ने छुपावी देवो एवी एमनी इच्छा हती, ए अनुवाद मे छपावी तो न शक्या पण मारी एटली खात्री थइ के भट्टाचार्यजीए श्रा अनुवाद माँ खूब महेनत करी छे । श्रने ते द्वारा तेमने जैनशास्त्रना हृदयनो स्पर्श करवानी एक सरस तक मली छे । त्यारबाद एटलो वर्षे ज्यारे तेमना बंगाली लेखोना अनुवादों में वांच्यां त्यारे ते वखते भट्टाचार्यजी विषे में जे धारणा बांधेली ते वधारे पाकी थई ने साची पण मिद्ध थइ । श्रीयुक्त भट्टाचार्य जी ए जैनशास्त्र नु वांचन ने परिशीलन लांचा बखत लगी चलावेलु ऐना परिपाक रुपेज तेमना या लेखो के एम कहवु जोइए, जन्म अने बातावरण थी जैनेतर होवाछतां तेमना लेखो माँ जे अनेकविध जैन विगतो नी यथार्थं माहितीछे अने जैन विचारसरणीनो जे वास्तदिक स्पर्श छे, ते तेमना अभ्यासी अने चोकसाई प्रधान मानसनी साबीती पुरी पाडे छे । पूर्वीय तेमज पश्चिमीय तत्त्वाचितनन् विशालवाचन एमनी M. A. डीग्रीने शोभावे तेवुं छे अने एमनु दलिलपूर्वक निरुपण एमनी वकीली वुद्धिनी साक्षी मा पे छ । भट्टाचार्य जीनी श्रा सेवामात्र जैन जनता मांज नहीं परन्तु जैनदर्शनना जिशासु जैन- जैनेतर सामान्य जगत मां चिरस्मरणीय बनी रहथे।
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Ajay Maken: वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस विधायक लाल बैरवा गेट से बाहर जाते हुए दिख रहे है। वीडियो अजय माकन के दफ्तर का बताया जा रहा है। जिसमें वो कह रहे है कि अभी और संख्या बढ़ती जाएगी। उनकी ये बात सुनकर मौके पर मौजूद नेता जोर-जोर से हंसाने लगाते है। वहीं माकन के सामने बैठा एक शख्स कहता है कि अशोक गहलोत की ओवर स्मार्टनेस ने भारत जोड़ो यात्रा जो आपकी चल रही है उसमें. . . ।
Rajasthan: मांग की जा रही थी कि कांग्रेस की कमान किसी नए ऐसे के हाथ सौंपी जाए जो इसमें नई जान फूंक सके। अब जैसे-तैसे अध्यक्ष पद के लिए चुनाव का ऐलान हुआ तो इस पद के लिए पार्टी के अपने ही एक दूसरे के खिलाफ होते नजर आ रहे हैं।
Rajasthan Political Crisis: ऐसे में देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी के अंदर गहलोत को अध्यक्ष पद को लेकर एक आम राय नहीं दिखाई दे रही है। राजस्थान में सियासी उठापठक के बाद अशोक गहलोत के तमाम नजदीकी विधायकों के इस फैसले के बाद उनके अध्यक्ष पद के चुनाव की लड़ाई को लेकर भी असमंजस है।
Rajasthan Political Crisis: दरअसल शांति धारीवाल ने पार्टी हाईकमान की क्लास लगाते हुए कहा, आज पार्टी हाईकमान में बैठा हुआ कोई आदमी ये बता दें कि अशोक गहलोत के पास ऐसे कौन से दो पदें है। जो आप उनका इस्तीफा मांग रहे हो। कुल मिलाकर उनके पास एक ही पद है मुख्यमंत्री का। जब दूसरे पद मिल जाए, तब जाकर बात उठेगी। आज क्या बात हो गई जो आप इस्तीफा मांगने के लिए तैयार रहे हो।
सचिन पायलट के मामले में, यह कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे, जिन्होंने तत्कालीन राजस्थान के उपमुख्यमंत्री द्वारा बगावत के पहले दिन चार विधायकों की वापसी कराने में कामयाबी हासिल की थी।
इससे पहले पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, मगर सभी की निगाहें 10 जनपथ पर हैं, जो पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का आधिकारिक निवास है।
कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर फिर से पार्टी में वापस आएंगे। वैसे भी पायलट ने स्पष्ट कर दिया था कि वह भाजपा में शामिल नहीं होंगे और पार्टी में रहकर ही अपनी आवाज उठाएंगे।
राजस्थान संकट पर पार्टी की रणनीति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्यपाल की शर्तों को लेकर पार्टी में दो राय है। कुछ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार को अपनी शर्तों पर कायम रहना चाहिए।
राजस्थान में सियासी संग्राम फिर थमते दिखाई नहीं दे रहा है। विधानसभा सत्र के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस विधायकों ने राजस्थान में राजभवन में धरना दिया था। जिसके बाद अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का बयान सामने आया है।
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Ajay Maken: वीडियो में देखा जा सकता है कि कांग्रेस विधायक लाल बैरवा गेट से बाहर जाते हुए दिख रहे है। वीडियो अजय माकन के दफ्तर का बताया जा रहा है। जिसमें वो कह रहे है कि अभी और संख्या बढ़ती जाएगी। उनकी ये बात सुनकर मौके पर मौजूद नेता जोर-जोर से हंसाने लगाते है। वहीं माकन के सामने बैठा एक शख्स कहता है कि अशोक गहलोत की ओवर स्मार्टनेस ने भारत जोड़ो यात्रा जो आपकी चल रही है उसमें. . . । Rajasthan: मांग की जा रही थी कि कांग्रेस की कमान किसी नए ऐसे के हाथ सौंपी जाए जो इसमें नई जान फूंक सके। अब जैसे-तैसे अध्यक्ष पद के लिए चुनाव का ऐलान हुआ तो इस पद के लिए पार्टी के अपने ही एक दूसरे के खिलाफ होते नजर आ रहे हैं। Rajasthan Political Crisis: ऐसे में देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी के अंदर गहलोत को अध्यक्ष पद को लेकर एक आम राय नहीं दिखाई दे रही है। राजस्थान में सियासी उठापठक के बाद अशोक गहलोत के तमाम नजदीकी विधायकों के इस फैसले के बाद उनके अध्यक्ष पद के चुनाव की लड़ाई को लेकर भी असमंजस है। Rajasthan Political Crisis: दरअसल शांति धारीवाल ने पार्टी हाईकमान की क्लास लगाते हुए कहा, आज पार्टी हाईकमान में बैठा हुआ कोई आदमी ये बता दें कि अशोक गहलोत के पास ऐसे कौन से दो पदें है। जो आप उनका इस्तीफा मांग रहे हो। कुल मिलाकर उनके पास एक ही पद है मुख्यमंत्री का। जब दूसरे पद मिल जाए, तब जाकर बात उठेगी। आज क्या बात हो गई जो आप इस्तीफा मांगने के लिए तैयार रहे हो। सचिन पायलट के मामले में, यह कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे, जिन्होंने तत्कालीन राजस्थान के उपमुख्यमंत्री द्वारा बगावत के पहले दिन चार विधायकों की वापसी कराने में कामयाबी हासिल की थी। इससे पहले पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, मगर सभी की निगाहें दस जनपथ पर हैं, जो पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी का आधिकारिक निवास है। कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर फिर से पार्टी में वापस आएंगे। वैसे भी पायलट ने स्पष्ट कर दिया था कि वह भाजपा में शामिल नहीं होंगे और पार्टी में रहकर ही अपनी आवाज उठाएंगे। राजस्थान संकट पर पार्टी की रणनीति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्यपाल की शर्तों को लेकर पार्टी में दो राय है। कुछ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार को अपनी शर्तों पर कायम रहना चाहिए। राजस्थान में सियासी संग्राम फिर थमते दिखाई नहीं दे रहा है। विधानसभा सत्र के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस विधायकों ने राजस्थान में राजभवन में धरना दिया था। जिसके बाद अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का बयान सामने आया है।
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाव मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। जिसके बाद से राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई. देर शाम मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शरद पवार से मलुकात की.
मलिक पर अंडरवर्ल्ड के लोगों के साथ अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। ईडी की एक टीम आज सुबह से ही नवाब मलिक से पूछताछ कर रही थी। जिसके बाद आज दोपहर को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी अब कोर्ट से नवाब मलिक को 7 दिन के रिमांड पर रखने की मांग की है.
नवाब मलिक के गिरफ्तारी के बाद से विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने केन्द्र सरकार पर हमला बोल दिया है. एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि मलिक केन्द्र सरकार के खिलाफ बोलने की सजा मिली है. शिवसेना नेता संजय राउत ने भी केन्द्र सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार अपने निजी बदले के लिए सरकारी संस्थानों का गलत इस्तमाल कर रही है.
बता दें कि मलिक के गिरफ्तारी के बाद एनसीपी के कार्यकर्त्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय के कार्यलय के बाहर जमकर हंगामा किया. एनसीपी कार्यकर्त्ताओं ने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की है.
वहीं अपनी गिरफ्तारी से कुछ देर पहले नवाब मलिक के ट्वीटर पर लिखा कि ना डरेंगे, ना झुकेंगे, 2024 के लिए तैयार रहें.
गौरतलब है कि, 15 फरवरी को ईडी ने अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों, संपत्ति की अवैध रूप से कथित खरीद-फरोख्त और हवाला लेनदेन के संबंध में छापेमारी की थी. साथ ही मलिक के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया था. ईडी ने बताया कि, नवाब मलिक के संबंध अंडरवर्ल्ड और उससे जुड़े लोगों से हैं, मलिक ने इन लोगों के साथ मिलकर गैरकानूनी काम को अंजाम दिया है. ईडी ने आगे कहा कि मलिक से 'धन शोधन निवारण अधिनियम' अंतर्गत पूछताछ हो रही है.
बता दें कि नवाब मलिक पर दाऊद इब्राहिम के गुर्गे सरदार शाहवली खान और हसीना पारकर के बॉडीगार्ड सलीम पटेल के साथ हुई डील की भी जांच पहले से चल रही है.
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाव मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। जिसके बाद से राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई. देर शाम मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शरद पवार से मलुकात की. मलिक पर अंडरवर्ल्ड के लोगों के साथ अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। ईडी की एक टीम आज सुबह से ही नवाब मलिक से पूछताछ कर रही थी। जिसके बाद आज दोपहर को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी अब कोर्ट से नवाब मलिक को सात दिन के रिमांड पर रखने की मांग की है. नवाब मलिक के गिरफ्तारी के बाद से विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने केन्द्र सरकार पर हमला बोल दिया है. एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि मलिक केन्द्र सरकार के खिलाफ बोलने की सजा मिली है. शिवसेना नेता संजय राउत ने भी केन्द्र सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार अपने निजी बदले के लिए सरकारी संस्थानों का गलत इस्तमाल कर रही है. बता दें कि मलिक के गिरफ्तारी के बाद एनसीपी के कार्यकर्त्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय के कार्यलय के बाहर जमकर हंगामा किया. एनसीपी कार्यकर्त्ताओं ने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की है. वहीं अपनी गिरफ्तारी से कुछ देर पहले नवाब मलिक के ट्वीटर पर लिखा कि ना डरेंगे, ना झुकेंगे, दो हज़ार चौबीस के लिए तैयार रहें. गौरतलब है कि, पंद्रह फरवरी को ईडी ने अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों, संपत्ति की अवैध रूप से कथित खरीद-फरोख्त और हवाला लेनदेन के संबंध में छापेमारी की थी. साथ ही मलिक के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया था. ईडी ने बताया कि, नवाब मलिक के संबंध अंडरवर्ल्ड और उससे जुड़े लोगों से हैं, मलिक ने इन लोगों के साथ मिलकर गैरकानूनी काम को अंजाम दिया है. ईडी ने आगे कहा कि मलिक से 'धन शोधन निवारण अधिनियम' अंतर्गत पूछताछ हो रही है. बता दें कि नवाब मलिक पर दाऊद इब्राहिम के गुर्गे सरदार शाहवली खान और हसीना पारकर के बॉडीगार्ड सलीम पटेल के साथ हुई डील की भी जांच पहले से चल रही है.
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विदेश से इलाज कराकर लौटे वित्त मंत्री अरुण जेटली आज रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड को संबोधित करेंगे. अपने संबोधन में वित्त मंत्री अंतरिम बजट के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालेंगे.
मिली जानकारी के मुताबिक इस इसके साथ ही बैठक में जेटली राजकोषीय मजबूती की रूपरेखा के बारे में भी बताएंगे. सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सरकार को चालू वित्त वर्ष में किए जाने वाले अंतरिम लाभांश के भुगतान पर भी चर्चा होगी.
केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति के हिसाब से सरकार 2018-19 में 28,000 करोड़ रुपये के अंतरिम लाभांश की उम्मीद कर रही है. पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक ने केंद्र को 10,000 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश दिया था. बजट पेश होने के बाद आयोजित यह परंपरागत बैठक ऐसे समय हो रही है जब चालू वित्त वर्ष में सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने में असफल रहने की आशंका है.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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विदेश से इलाज कराकर लौटे वित्त मंत्री अरुण जेटली आज रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड को संबोधित करेंगे. अपने संबोधन में वित्त मंत्री अंतरिम बजट के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालेंगे. मिली जानकारी के मुताबिक इस इसके साथ ही बैठक में जेटली राजकोषीय मजबूती की रूपरेखा के बारे में भी बताएंगे. सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सरकार को चालू वित्त वर्ष में किए जाने वाले अंतरिम लाभांश के भुगतान पर भी चर्चा होगी. केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति के हिसाब से सरकार दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में अट्ठाईस,शून्य करोड़ रुपये के अंतरिम लाभांश की उम्मीद कर रही है. पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक ने केंद्र को दस,शून्य करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश दिया था. बजट पेश होने के बाद आयोजित यह परंपरागत बैठक ऐसे समय हो रही है जब चालू वित्त वर्ष में सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने में असफल रहने की आशंका है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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जानिए सीरम और मॉइस्चराइजर क्रीम में क्या अंतर है?
सीरम त्वचा को अंदर से बाहर तक ठीक करके क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। यह पिंपल्स, झुर्रियां और त्वचा की रंजकता को भी रोकता है। इसके नियमित प्रयोग से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है।
एक बड़ा चम्मच विटामिन सी तेल, 1 बड़ा चम्मच ग्लिसरीन और 1 बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल अच्छी तरह मिला लें। फिर इसे किसी बोतल में भरकर सीरम की तरह इस्तेमाल करें।
मॉइस्चराइजर क्रीम न केवल त्वचा को हाइड्रेट करती है बल्कि क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत भी करती है। यह त्वचा में नमी बनाए रखता है और सर्दियों में सूखता नहीं है।
इसके लिए मलाई में शहद मिलाकर चेहरे पर अच्छे से मसाज करें और थोड़ी देर बाद ताजे पानी से धो लें, इससे त्वचा में नमी बनी रहेगी। मॉइस्चराइजर को त्वचा पर लगाने से पहले 10 मिनट के लिए फ्रीजर में छोड़ दें। यह इसे और अधिक प्रभावी बना देगा।
फेशियल, क्लींजर के बाद सीरम या मॉइस्चराइजर लगाया जाता है। हालांकि आप मेकअप से पहले सीरम भी लगा सकती हैं लेकिन मॉइस्चराइजर नहीं। दोनों चीजें त्वचा को हाइड्रेट रखती हैं।
सीरम त्वचा के एपिडर्मिस की तह तक जाता है और त्वचा की गहराई तक आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। जबकि मॉइस्चराइजर त्वचा की बाहरी परत को हाइड्रेशन और मिनिएचराइजेशन देता है।
सीरम का इस्तेमाल त्वचा को नमीयुक्त बनाए रखने के लिए किया जाता है। जबकि मॉइस्चराइजर त्वचा के रूखेपन को कम कर उसे हाइड्रेट करता है।
सीरम का इस्तेमाल तभी करें जब आपकी त्वचा तैलीय हो। मॉइस्चराइज़र विशेष रूप से शुष्क और संयोजन त्वचा के लिए हैं।
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जानिए सीरम और मॉइस्चराइजर क्रीम में क्या अंतर है? सीरम त्वचा को अंदर से बाहर तक ठीक करके क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। यह पिंपल्स, झुर्रियां और त्वचा की रंजकता को भी रोकता है। इसके नियमित प्रयोग से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है। एक बड़ा चम्मच विटामिन सी तेल, एक बड़ा चम्मच ग्लिसरीन और एक बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल अच्छी तरह मिला लें। फिर इसे किसी बोतल में भरकर सीरम की तरह इस्तेमाल करें। मॉइस्चराइजर क्रीम न केवल त्वचा को हाइड्रेट करती है बल्कि क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत भी करती है। यह त्वचा में नमी बनाए रखता है और सर्दियों में सूखता नहीं है। इसके लिए मलाई में शहद मिलाकर चेहरे पर अच्छे से मसाज करें और थोड़ी देर बाद ताजे पानी से धो लें, इससे त्वचा में नमी बनी रहेगी। मॉइस्चराइजर को त्वचा पर लगाने से पहले दस मिनट के लिए फ्रीजर में छोड़ दें। यह इसे और अधिक प्रभावी बना देगा। फेशियल, क्लींजर के बाद सीरम या मॉइस्चराइजर लगाया जाता है। हालांकि आप मेकअप से पहले सीरम भी लगा सकती हैं लेकिन मॉइस्चराइजर नहीं। दोनों चीजें त्वचा को हाइड्रेट रखती हैं। सीरम त्वचा के एपिडर्मिस की तह तक जाता है और त्वचा की गहराई तक आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। जबकि मॉइस्चराइजर त्वचा की बाहरी परत को हाइड्रेशन और मिनिएचराइजेशन देता है। सीरम का इस्तेमाल त्वचा को नमीयुक्त बनाए रखने के लिए किया जाता है। जबकि मॉइस्चराइजर त्वचा के रूखेपन को कम कर उसे हाइड्रेट करता है। सीरम का इस्तेमाल तभी करें जब आपकी त्वचा तैलीय हो। मॉइस्चराइज़र विशेष रूप से शुष्क और संयोजन त्वचा के लिए हैं।
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नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया के अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज मैथ्यू हेडन का मानना है कि बड़े स्कोर बनाने की अपनी काबिलियत के कारण शुभमन गिल का अगले एक दशक में विश्व क्रिकेट में दबदबा रहेगा।
इस 23 वर्षीय अभी तक टेस्ट मैचों में दो, वनडे में चार और टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक शतक लगा चुके हैं। उनकी 49 गेंदों पर खेली गई 67 रन की शानदार पारी से गुजरात टाइटंस ने गुरुवार को इंडियन प्रीमियर लीग में पंजाब किंग्स को छह विकेट से हराया।
हेडन उन कई लोगों में शामिल हैं जो गिल के खेल पर नियंत्रण बनाए रखने के कौशल से प्रभावित हैं। हेडन ने कहा, 'गुजरात टाइटंस को पंजाब किंग्स के अच्छे गेंदबाजी आक्रमण के सामने लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो जिम्मेदारी संभालकर आखिर तक टिका रहे और शुभमन गिल ने यह भूमिका अच्छी तरह से निभाई। ' उन्होंने कहा, 'उसके कुछ शॉट ने आंखों को सुकून पहुंचाया। वह इतना अच्छा खिलाड़ी है के अगले एक दशक में विश्व क्रिकेट में उसका दबदबा रहने वाला है। '
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नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया के अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज मैथ्यू हेडन का मानना है कि बड़े स्कोर बनाने की अपनी काबिलियत के कारण शुभमन गिल का अगले एक दशक में विश्व क्रिकेट में दबदबा रहेगा। इस तेईस वर्षीय अभी तक टेस्ट मैचों में दो, वनडे में चार और टी-बीस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक शतक लगा चुके हैं। उनकी उनचास गेंदों पर खेली गई सरसठ रन की शानदार पारी से गुजरात टाइटंस ने गुरुवार को इंडियन प्रीमियर लीग में पंजाब किंग्स को छह विकेट से हराया। हेडन उन कई लोगों में शामिल हैं जो गिल के खेल पर नियंत्रण बनाए रखने के कौशल से प्रभावित हैं। हेडन ने कहा, 'गुजरात टाइटंस को पंजाब किंग्स के अच्छे गेंदबाजी आक्रमण के सामने लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो जिम्मेदारी संभालकर आखिर तक टिका रहे और शुभमन गिल ने यह भूमिका अच्छी तरह से निभाई। ' उन्होंने कहा, 'उसके कुछ शॉट ने आंखों को सुकून पहुंचाया। वह इतना अच्छा खिलाड़ी है के अगले एक दशक में विश्व क्रिकेट में उसका दबदबा रहने वाला है। '
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एपल ने 9 जनवरी 2001 में iTunes सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था. 21वीं शताब्दी में लोगों को डिजिटल म्यूजिक से जोड़ने में इसका बड़ा योगदान रहा है.
नई दिल्लीः म्यूजिक, मूवी और टीवी लवर्स के बीच काफी पसंद किए जाने वाले एप iTunes को जल्द ही बंद किया जाएगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक iPhones, Macs और iPads निर्माता कंपनी एपल iTunes एप को बंद करने जा रही है. कंपनी 3 जून को होने जा रही डिवेलपर कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एप को शट डाउन कर देगी.
एपल को-फाउंडर और स्टीव जॉब्स ने मैकवर्ल्ड एक्सपो 2001 में 9 जनवरी कंपनी का iTunes सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था. इसे खास एपल यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया. कंपनी के इस प्रॉडक्ट ने म्यूजिक के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए थे. 21वीं शताब्दी में आईट्यून के जरिए ही लोगों तक डिजिटल म्यूजिक पहुंचाया गया. इस सॉफ्टवेयर को लॉन्च हुए 18 साल हो चुके हैं और अब कंपनी इस एप को बंद करने का फैसला लिया है.
iTunes का सबसे बड़ा योगदान म्यूजिक इंडस्ट्री में पाइरेसी रोकने के लिए रहा. इसकी वजह से म्यूजिक इंडस्ट्री में दुनिया भर में काफी ग्रोथ देखने मिली. रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री असोसिएशन ऑफ अमेरिका की 2018 की इयर एंड रिपोर्ट के मुताबिक यूएस के म्यूजिक इंडस्ट्री के रेवेन्यू में म्यूजिक स्ट्रीमिंग 75 फीसदी रही.
पिछले काफी समय से iTunes को बंद करने की बातें चल रही थीं. वजह ये है कि अब कई सब्सक्रिप्शन बेस्ड म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस उपलब्ध हैं. इसमें एपल म्यूजिक भी शामिल है. इन सर्विसेज के चलते iTunes की डाउनलोडिंग कम हुई है. कंपनी iTunes को ऐपल म्यूजिक, ऐपल टीवी और पॉडकास्ट इन तीन अलग अलग मीडिया फॉर्म्स में लाएगी.
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एपल ने नौ जनवरी दो हज़ार एक में iTunes सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था. इक्कीसवीं शताब्दी में लोगों को डिजिटल म्यूजिक से जोड़ने में इसका बड़ा योगदान रहा है. नई दिल्लीः म्यूजिक, मूवी और टीवी लवर्स के बीच काफी पसंद किए जाने वाले एप iTunes को जल्द ही बंद किया जाएगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक iPhones, Macs और iPads निर्माता कंपनी एपल iTunes एप को बंद करने जा रही है. कंपनी तीन जून को होने जा रही डिवेलपर कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एप को शट डाउन कर देगी. एपल को-फाउंडर और स्टीव जॉब्स ने मैकवर्ल्ड एक्सपो दो हज़ार एक में नौ जनवरी कंपनी का iTunes सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था. इसे खास एपल यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया. कंपनी के इस प्रॉडक्ट ने म्यूजिक के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए थे. इक्कीसवीं शताब्दी में आईट्यून के जरिए ही लोगों तक डिजिटल म्यूजिक पहुंचाया गया. इस सॉफ्टवेयर को लॉन्च हुए अट्ठारह साल हो चुके हैं और अब कंपनी इस एप को बंद करने का फैसला लिया है. iTunes का सबसे बड़ा योगदान म्यूजिक इंडस्ट्री में पाइरेसी रोकने के लिए रहा. इसकी वजह से म्यूजिक इंडस्ट्री में दुनिया भर में काफी ग्रोथ देखने मिली. रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री असोसिएशन ऑफ अमेरिका की दो हज़ार अट्ठारह की इयर एंड रिपोर्ट के मुताबिक यूएस के म्यूजिक इंडस्ट्री के रेवेन्यू में म्यूजिक स्ट्रीमिंग पचहत्तर फीसदी रही. पिछले काफी समय से iTunes को बंद करने की बातें चल रही थीं. वजह ये है कि अब कई सब्सक्रिप्शन बेस्ड म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस उपलब्ध हैं. इसमें एपल म्यूजिक भी शामिल है. इन सर्विसेज के चलते iTunes की डाउनलोडिंग कम हुई है. कंपनी iTunes को ऐपल म्यूजिक, ऐपल टीवी और पॉडकास्ट इन तीन अलग अलग मीडिया फॉर्म्स में लाएगी.
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संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने अब तक स्पुतनिक टीके की कितनी यूनिट आयात की हैं। भारत ने स्पुतनिक टीके की पहली खुराक की 31. 5 लाख यूनिट और स्पुतनिक टीके की दूसरी खुराक की 4. 5 लाख यूनिट का आयात किया है।
नई दिल्ली, एएनआइ। संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने अब तक स्पुतनिक टीके की कितनी यूनिट आयात की हैं। भारत ने स्पुतनिक टीके की पहली खुराक की 31. 5 लाख यूनिट और स्पुतनिक टीके की दूसरी खुराक की 4. 5 लाख यूनिट का आयात किया है। कोरोना की दूसरी लहर के संकट के दौरान जो दवाइयां उस समय भारत में उपलब्ध नहीं थी। तब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कोरोना की दवाओं और उपकरणों के लिए एकजुटता और सहायता के प्रस्तावों के साथ आगे आया था।
राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने आगे बताया कि अब तक 52 देशों से विदेशी सामग्री प्राप्त की जा चुकी है, जिसमें सरकार से सरकार, प्राइवेट से सरकार, प्राइवेट से प्राइवेट, भारतीय समुदाय सहायता और कंपनियां शामिल हैं। अंतर मंत्रिस्तरीय समिति के माध्यम से दान को मंजूरी दी गई जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, नीति आयोग, डीपीआइआइटी, एमएचए, एनओएचएफडब्लू के प्रतिनिधि शामिल हैं।
कोरोना महामारी जब अपने चरम सीमा पर थी, उस दौरान सभी देशों ने एक साथ मिल कर काम किया और कोरोना से मचे कोहराम को कम करने में एक दूसरे की मदद की। गौरतलब है कि देश में टीके की कमी से कई स्थानों पर टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा हैं। विदेशी सहायता ने कोरोना से लड़ने में अहम भुमिका निभाई है। कोरोना के टीकों का आयात अधिक से अधिक हो सकें इसलिए भारत सरकार ने नियमों में ढील दी थी।
भारत में इस समय कोविशील्ड, कोवैक्सीन, स्पूतनिक और मॉडर्ना कंपनी के टीके उपलब्ध हैं। स्पुतनिक-वी वैक्सीन रूस की कंपनी है। भारत सरकार और कंपनी के करार के तहत कंपनी वैक्सीन की 12. 5 करोड़ खुराक भारत को बेचेगी। कोरोना के महासंकट के बीच यह एक राहत की खबर है। स्पुतनिक टीके 91. 6 फीसदी तक कोरोना के खिलाफ सफल है, यह आंकड़े कंपनी ने अपने ट्रायल में जारी किया था।
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संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने अब तक स्पुतनिक टीके की कितनी यूनिट आयात की हैं। भारत ने स्पुतनिक टीके की पहली खुराक की इकतीस. पाँच लाख यूनिट और स्पुतनिक टीके की दूसरी खुराक की चार. पाँच लाख यूनिट का आयात किया है। नई दिल्ली, एएनआइ। संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया कि भारत ने अब तक स्पुतनिक टीके की कितनी यूनिट आयात की हैं। भारत ने स्पुतनिक टीके की पहली खुराक की इकतीस. पाँच लाख यूनिट और स्पुतनिक टीके की दूसरी खुराक की चार. पाँच लाख यूनिट का आयात किया है। कोरोना की दूसरी लहर के संकट के दौरान जो दवाइयां उस समय भारत में उपलब्ध नहीं थी। तब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कोरोना की दवाओं और उपकरणों के लिए एकजुटता और सहायता के प्रस्तावों के साथ आगे आया था। राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने आगे बताया कि अब तक बावन देशों से विदेशी सामग्री प्राप्त की जा चुकी है, जिसमें सरकार से सरकार, प्राइवेट से सरकार, प्राइवेट से प्राइवेट, भारतीय समुदाय सहायता और कंपनियां शामिल हैं। अंतर मंत्रिस्तरीय समिति के माध्यम से दान को मंजूरी दी गई जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, नीति आयोग, डीपीआइआइटी, एमएचए, एनओएचएफडब्लू के प्रतिनिधि शामिल हैं। कोरोना महामारी जब अपने चरम सीमा पर थी, उस दौरान सभी देशों ने एक साथ मिल कर काम किया और कोरोना से मचे कोहराम को कम करने में एक दूसरे की मदद की। गौरतलब है कि देश में टीके की कमी से कई स्थानों पर टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा हैं। विदेशी सहायता ने कोरोना से लड़ने में अहम भुमिका निभाई है। कोरोना के टीकों का आयात अधिक से अधिक हो सकें इसलिए भारत सरकार ने नियमों में ढील दी थी। भारत में इस समय कोविशील्ड, कोवैक्सीन, स्पूतनिक और मॉडर्ना कंपनी के टीके उपलब्ध हैं। स्पुतनिक-वी वैक्सीन रूस की कंपनी है। भारत सरकार और कंपनी के करार के तहत कंपनी वैक्सीन की बारह. पाँच करोड़ खुराक भारत को बेचेगी। कोरोना के महासंकट के बीच यह एक राहत की खबर है। स्पुतनिक टीके इक्यानवे. छः फीसदी तक कोरोना के खिलाफ सफल है, यह आंकड़े कंपनी ने अपने ट्रायल में जारी किया था।
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आंतरिक अंगों के लिए केशिका फैलती हैऑक्सीजन और पोषक तत्व। रक्त वाहिकाओं की दीवारें सूक्ष्म होती हैं और जब वे निचोड़ जाते हैं, तो रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। ऐसा होता है कि एक व्यक्ति दो घंटे से अधिक नहीं चलता है। इस मामले में, रक्त का प्रवाह पूरी तरह से बंद हो जाता है। यह प्रक्रिया मुलायम ऊतक नेक्रोसिस की घटना को उत्तेजित करती है।
यदि आप एंटी-डिक्यूबिटस का उपयोग नहीं करते हैं, तोनेक्रोसिस सभी परतों में मांसपेशी और हड्डी को प्रभावित करता है। नेक्रोसिस की डिग्री पैथोलॉजिकल प्रक्रिया की गहराई से निर्धारित होती है। कुल मिलाकर, घाव के चार चरण हैं।
शरीर के कौन से हिस्से अक्सर प्रभावित होते हैं?
त्वचा के नेक्रोसिस की जगह रोगी की मुद्रा पर निर्भर करती है।
अक्सर, शरीर के निम्नलिखित क्षेत्रों में दबाव घाव दिखाई देते हैंः
- नाप, कंधे, रंप और ऊँची एड़ी के जूते। इस मामले में, रोगी उसकी पीठ पर निहित है।
- अंगों के flexion का क्षेत्र, क्योंकि इन क्षेत्रों में त्वचा सूक्ष्म है।
- जब मरीज पक्ष में होता है तो घुटने टेकना।
इस मामले में कैसे मदद करें और रोकेंगहरे नुकसान का विकास? सबसे पहले, रोगजनक प्रक्रिया का कारण निर्धारित करना आवश्यक है, उत्तेजक कारकों पर ध्यान देना, और, निश्चित रूप से, विशेष एंटी-डिक्यूबिटस एजेंट (मलम, क्रीम, जैल, ड्रेसिंग) का चयन करें जो बीमार व्यक्ति के लिए त्वचा की देखभाल को बढ़ावा देते हैं।
- पहली डिग्री यह त्वचा की संरचना को परेशान किए बिना थोड़ा सा लालसा में प्रकट होता है। हल्की मालिश या शरीर की मुद्रा में परिवर्तन के बाद, यह गुजरता है।
- दूसरी डिग्री यह लाली का कारण बनता है, जो मुद्रा को बदलने के बाद भी दूर नहीं जाता है। शायद दर्दनाक अल्सर, छाले, क्षरण, vesicles, सतही वृद्धि की उपस्थिति। त्वचा की संरचना क्षतिग्रस्त है।
- तीसरी डिग्री गहरी हार में व्यक्त की जाती है।त्वचा। इस स्तर पर, त्वचा की सभी परतें सूजन हो जाती हैं। चरणों को सूजन, अल्सर और तीव्र लाली के साथ अल्सर द्वारा विशेषता है। अल्सर पीले या लाल granulation से भरे हुए हैं। घाव एक अप्रिय गंध exude।
- चौथी डिग्री एक मृत त्वचा है जिसमें काले त्वचा से भरे अल्सर की बहुतायत होती है।
ऊतक परिगलन के मुख्य कारणों में शामिल हैंः
- लंबे समय तक एक लापरवाह स्थिति में एक व्यक्ति की उपस्थिति (रोगियों को जो एक स्ट्रोक, दिल का दौरा, रीढ़ की हड्डी में चोट, आदि का सामना करना पड़ा है);
- मूत्र और मल की असंयम;
- पसीने में वृद्धि;
- गंदा और नम बिस्तर;
- खराब त्वचा की स्वच्छता;
- शीट पर सिलवटों की उपस्थिति, कपड़े पर बटन, बिस्तर में crumbs;
- रक्त वाहिकाओं और दिल की बीमारियां;
- मधुमेह की उपस्थिति।
परिगलन के कुछ महत्वपूर्ण कारणों में शामिल हैंः
- एक बेड रोगी की लापरवाही से संभालना।
- तेजी से पलटना।
- सनी के दुर्लभ परिवर्तन।
- पोत द्वारा त्वचा को निचोड़ना, जिसके दौरान सबसे छोटी केशिकाएं फट जाती हैं। इन क्षेत्रों में रक्त का प्रवाह तेजी से परेशान है।
फार्मेसियों मोगिलेव में एंटी-डयूबिटस दवाएंदबाव अल्सर से पीड़ित रोगियों के लिए विभिन्न मलहम ड्रेसिंग और क्रीम की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रतिनिधित्व किया। साधन त्वचा ऊतक परिगलन की प्रक्रिया को गिरफ्तार करने और रोगी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में सक्षम हैं।
मुख्य कार्य जो मनुष्य का सामना करता हैबेडरेस्ट की देखभाल, यह त्वचा के परिगलन को रोकने में मदद करने के लिए निवारक उपाय है। बेडरेस एक व्यक्ति को दर्द पहुंचाते हैं और उपचारों को लागू करना बहुत मुश्किल होता है। किसी प्रियजन को अत्यधिक पीड़ा और दीर्घकालिक चिकित्सा की निंदा करने की तुलना में निवारक प्रक्रियाओं को अंजाम देना हमेशा आसान होता है।
परिगलन की रोकथाम में कई शामिल हैंघटनाओं को लगातार आयोजित किया जाता है। मुख्य नियम पर जोर दिया जाना चाहिएः रोगी की त्वचा की सावधानीपूर्वक देखभाल में दैनिक पोंछना और धुलाई शामिल होना चाहिए।
रोगनिरोधी उद्देश्यों के लिए, निम्नलिखित एंटी-डीकुबिटस दवाओं का उपयोग किया जाता हैः
- मलहम;
- जैल;
- ड्रेसिंग;
- गद्दे;
- कुशन;
- रबर की अंगूठी;
- सिलिका-आधारित विकिरणक।
पहली और दूसरी डिग्री की पैथोलॉजिकल प्रक्रियाएंटी-डयूबिटल डिसइंफेक्टेंट जैसे टूल की मदद से घर पर ही इसे खत्म किया जा सकता है और उपचार में लंबा समय लगता है। लेकिन परिणाम इसके लायक है। थर्ड और फोर्थ डिग्री बेडर्स केवल अस्पताल में ही खत्म हो जाते हैं।
त्वचा के परिगलन के थेरेपी में दो चरण शामिल हैंः
- क्षतिग्रस्त क्षेत्र में रक्त के प्रवाह की बहाली;
- मवाद और नेक्रोटिक समावेशन से घाव को साफ करना।
रोगी के शरीर की स्थिति को बदलते हुए, गद्दे, मालिश की मदद से रक्त परिसंचरण की बहाली संभव है।
नेक्रोटिक घाव और उनके उत्थान को साफ करने के लिए, विशेष ड्रेसिंग प्रदान की जाती हैं।
क्षतिग्रस्त क्षेत्र पर प्रभाव के प्रकार के अनुसार, बेडोरस से ड्रेसिंग को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया हैः
- सफाई। वे मवाद को बाहर निकालते हैं और बाहर निकालते हैं।
- हीलिंग। इस तरह के फंड ऊतक पुनर्जनन को बढ़ावा देते हैं।
विभाजन सशर्त है, क्योंकि सभी ड्रेसिंग त्वचा की संरचना को बहाल करने में मदद करते हैं।
बिस्तरों के खिलाफ ड्रेसिंग अलग आकार में आते हैंः
- मानव शरीर के आसानी से सुलभ क्षेत्रों में परिगलन को रोकने के लिए उपयोग किए जाने वाले एंटी-डीकिटस स्वच्छता उत्पाद। आमतौर पर एक वर्ग या आयत के रूप में उपयोग किए जाने वाले उत्पाद।
- त्रिकास्थि क्षेत्र के उपचार के लिए डिज़ाइन की गई पट्टियाँ। वे तितली या दिल के आकार के होते हैं।
- ऊँची एड़ी के जूते पर बेडसोर के उन्मूलन के लिए उत्पाद। एक पट्टी लागू करें, जिसमें एक तितली या ट्रेफ़िल का आकार होता है।
से ड्रेसिंग का सबसे आम मॉडलबेडसोर एक सफाई प्रभाव वाले उत्पाद हैं। तिथि करने के लिए, दक्षता की एक उच्च डिग्री में "हाइड्रोकोल", "हाइड्रोसोरब", "टेंडरवीट एक्टिविट" का उपयोग होता है।
"हाइड्रोकल" ड्रेसिंग 3-8 दिनों के लिए प्रभावित क्षेत्र पर लागू होती है। यह घाव को साफ करने में मदद करता है, शुद्ध सामग्री को अवशोषित करता है, इसे जेल जैसी स्थिति में बदल देता है।
ड्रेसिंग "हाइड्रोसोरब" घाव में एक नम वातावरण बनाने में मदद करता है, मृत ऊतक की अस्वीकृति और इसके उपचार को उत्तेजित करता है।
TenderVet Activiti द्वारा Armbands बनाया गया हैमुलायम पैड के आकार का। वे रिंगर के रेखापुंज के साथ गर्भवती हैं, जो 24 घंटे के लिए घाव के लगातार धुलाई का प्रभाव बनाता है। वे नेक्रोटिक ऊतक को अस्वीकार करते हैं और क्षतिग्रस्त त्वचा क्षेत्र के उत्थान को बढ़ावा देते हैं।
एंटी-डीकुबिटस उत्पाद क्या हैं? एक्सयूडेट और मवाद की उपस्थिति के साथ गहरे बेडसोर्स के लिए गणना किए गए प्रकार विविध हैं। उनमें से "सॉर्बेलगन" और "पार्मफ़ॉर्म" पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
"सोरबल्गोना" का आधार बाँझ हैसामग्री जो व्यापक बेडोर के अवकाश में प्रवेश करती है। सामग्री मवाद को अवशोषित करने में मदद करती है, घाव के नीचे को साफ करती है, जम जाती है और फिर घाव से आसानी से निकल जाती है। यदि बेडसोर के नीचे साफ है, तो कपास सामग्री एक जेल का रूप लेती है, घाव को कीटाणुरहित करती है और उसमें से स्वयं बहती है।
पट्टी "पर्मफॉर्म" एक मैट्रिक्स-आधारित स्पंज है। यह मवाद को भी अवशोषित करता है और बाहर निकालता है। बिना दर्द के निकाल दिया। यह एक ऐसे माध्यम को छोड़ देता है जो परिगलन के उपचार को बढ़ावा देता है।
ड्रेसिंग के रूप में सबसे आम साधनों में "अत्रुमान" और "ब्रानोलिंड" शामिल हैं। इन एंटी-डीकुबिटस उत्पादों में क्या विशेषताएं हैं?
ड्रेसिंग "अत्रुमान" में एक मेष आधार है। यह चांदी और हाइड्रोफिलिक मरहम की एक पतली परत के साथ कवर किया गया है। उपकरण में एक जीवाणुनाशक संपत्ति है, घाव कीटाणुशोधन प्रदान करता है और क्षतिग्रस्त क्षेत्र के शीघ्र पुनर्जनन में योगदान देता है।
बैंडेज "ब्रानोलिंड" में एक जाली भी होती है, जो पेरू बाल्सम के साथ गर्भवती है। उपकरण में एक एंटीसेप्टिक और उपचार प्रभाव होता है।
एंटी-डयूबिटस उत्पादों को विभिन्न जैल के एक विस्तृत खंड द्वारा दर्शाया जाता है। त्वचा परिगलन का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले क्रीमों के ब्रांडों में, निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाना चाहिएः
- जेल "आर्गोसल्फान"। उत्पाद का सक्रिय आधार सल्फ़ैथियाज़ोल है। यह रोगजनकों के विकास और प्रजनन को रोकता है। सहायक पदार्थ चांदी के आयन हैं। वे सल्फेट के चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाते हैं, साथ ही बैक्टीरिया के वनस्पतियों के विकास को रोकने में योगदान करते हैं। एजेंट के हाइड्रोफिलिक आधार में एक एनाल्जेसिक प्रभाव होता है, घाव को मॉइस्चराइज करता है और इसके उत्थान की प्रक्रिया को तेज करता है। क्रीम के आधार की एकाग्रता में विषाक्त प्रभाव नहीं होता है। आर्गोसल्फान क्रीम के साथ गठित बेडोरस का उपचार एक खुली विधि द्वारा किया जा सकता है या एक ओसीसीक्लोर ड्रेसिंग के साथ समानांतर में उपयोग किया जा सकता है। दवा को कीटाणुरहित घाव की पूरी सतह पर 2-3 मिमी की मोटाई के साथ दिन में दो या तीन बार लागू किया जाना चाहिए। उपचार का कोर्स 2 महीने है। मीन्स को रोजाना लगाया जाता है। एंटिडेकूबिटल एजेंटों जैसे कि सल्फ़रगिन और डर्माज़िन का समान प्रभाव पड़ता है।
- क्रीम "इरुक्सोल"। रचना में कोलेजनैस क्लोरैम्फेनिकॉल और संबंधित एंजाइम शामिल हैं। एंजाइमैटिक साधन दबाव घावों की सफाई प्रदान करता है, नेक्रोसिस से प्रभावित ऊतकों के विघटन को रोकता है, पोषक माध्यम के बैक्टीरिया से वंचित करता है, एक जीवाणुरोधी प्रभाव होता है। कीटाणुरहित त्वचा पर क्रीम लागू करें, दवा क्षतिग्रस्त ऊतकों की तेजी से चिकित्सा प्रदान करती है।
- मरहम "लेवोसिन वी।" दवा का आधार लेवोमाइसेटिन है, जिसमें रोगाणुरोधी प्रभाव होता है। इसके अलावा उपकरण में शामिल है सल्फाडीमेथोक्सिन, जो घाव भरने, मेथिल्यूरसिल और स्थानीय संवेदनाहारी, ट्राइमेकेन को बढ़ावा देता है। मरहम का त्वरित चिकित्सीय प्रभाव है। यह मवाद से बिस्तर को साफ करने और बुझाने में मदद करता है, साथ ही प्रभावित सतह को ठीक करने में मदद करता है। इसे रोजाना लगाया जाता है। कीटाणुरहित सतह पर लागू करें और एक पट्टी के साथ कवर किया गया। शायद सिरिंज के माध्यम से मवाद के साथ गुहा में इसकी शुरूआत।
- "लेवोमकोल" का अर्थ है। मिथाइलुरैसिल के अलावा, रचना में क्लोरैमफेनिकॉल शामिल हैं। यह उपाय घाव भरने को बढ़ावा देता है। इसका उपयोग दबाव घावों और संक्रमणों की उपस्थिति में किया जाता है, साथ ही नेक्रोटिक प्रक्रिया के शुद्ध चरण में भी किया जाता है।
- मेट्रोनिडाजोल क्रीम। इसका आधार एक जीवाणुरोधी पदार्थ है। जेल ड्रेसिंग के लिए एक सामग्री के साथ लागू किया जाता है और घावों से अप्रिय गंध को खत्म करने में मदद करता है। मवाद या प्रचुर मात्रा में निर्वहन के साथ दबाव घावों की उपस्थिति में, मेट्रोनिडाजोल के साथ फोम पर आधारित ड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है। शुष्क बेडोरस की उपस्थिति में हाइड्रोजेल के साथ ड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है।
- IntraWite हाइड्रोजेल त्वचा की सफाई प्रदान करता हैनेक्रोटिक ऊतक के बारे में, धीरे से त्वचा की देखभाल करता है। हाइड्रोजेल का उपयोग बाहरी ड्रेसिंग के साथ किया जाता है, जिसकी आवृत्ति घाव की स्थिति पर निर्भर करती है। उपकरण प्रभावित ऊतक की एक त्वरित सफाई प्रदान करता है, क्योंकि इसके प्रभाव के तहत एक्सयूडेट और मवाद फैला है। इंट्रासाइट एक शुद्ध अमोर्फ जेल युक्त पानी, प्रोपलीन ग्लाइकॉल और एक संशोधित कार्बोक्सिमिथाइलसेलुलोज पॉलीमर है।
ऊँची एड़ी के जूते के लिए एंटी-डयूबिटस एजेंटों को एक विस्तृत श्रृंखला द्वारा दर्शाया गया है। उनमें से, उत्पाद विशेष रूप से लोकप्रिय है।"आरामदेह"। यह पैर पर फिक्सिंग के लिए विशेष "कान" से सुसज्जित है। तकिया में एक गोल एर्गोनोमिक आकार होता है जो एड़ी की आकृति का अनुसरण करता है। इसका उपयोग नेक्रोसिस संक्रमण के लक्षणों के बिना एड़ी की सतह पर साफ घावों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
यदि घाव में एक्सयूडेट या मवाद के परिगलन होते हैं, तो एड़ी पर एंटीडेक्यूबिटल साधन लागू होते हैं घावों को साफ करने और भड़काऊ प्रक्रिया को राहत देने में योगदान। उनमें से "प्रोटीन-टीएम" पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उत्पाद प्रभावित त्वचा की तेजी से चिकित्सा को बढ़ावा देता है।
"कॉम्फिल प्लस" ड्रेसिंग हैउन्नत मॉडल। उत्पाद का लाभ विशेष बैकिंग रिंग की उपस्थिति में है। वे उत्पाद के बाहर और अंदर स्थित होते हैं, ड्रेसिंग के केंद्र से शुरू करके एक-एक करके निकाला जाता है।
प्रदान किए गए वांछित आकार का चयन करने के लिएविशेष लोचदार "कान", एड़ी क्षेत्र में पट्टी के विश्वसनीय निर्धारण के लिए अनुमति देता है। उपकरण तेजी से घाव भरने प्रदान करता है, ऊतक पुनर्जनन की प्रक्रिया को तेज करता है, बेडसोर माध्यमिक संक्रमण में प्रवेश को रोकता है। 2-6 दिनों के लिए एक लीज पर्याप्त है। एक दुर्लभ परिवर्तन एक घाव की तेजी से चिकित्सा के लिए उपयोगी है, और रोगी को आराम भी प्रदान करता है।
ड्रेसिंग के मुख्य लाभः
- उत्पाद में कोमलता और लोच है;
- दर्द को दूर करने में सक्षम;
- तंत्रिका अंत और सूजन ऊतक शोषक जेल के साथ अच्छी तरह से संरक्षित हैं;
- पट्टी चोट का कारण नहीं बनती है, जब बदलते समय दर्द नहीं होता है, एलर्जी का कारण नहीं बनता है;
- अतिरिक्त ड्रेसिंग की उपस्थिति के बिना चिपकने वाला किनारे द्वारा उत्पाद का विश्वसनीय निर्धारण सुनिश्चित किया जाता है।
उपयोग करने से पहले अनुशंसितएड़ी की सतह को साफ करें। इस प्रयोजन के लिए, "फुरसिलिन" या "रिवनॉल" जैसे एजेंट का उपयोग किया जा सकता है। घाव के आसपास की त्वचा सूख जाती है। ड्रेसिंग का आकार घाव के आकार से 2 सेमी बड़ा होना चाहिए। पट्टी को सूजन वाली त्वचा पर लगाया जाता है और "कान" के माध्यम से स्वस्थ त्वचा पर तय किया जाता है। छल्ले को हटा दिया जाता है जब तक कि उत्पाद एड़ी को लोड करना बंद नहीं करता है। जैसे ही मवाद और एक्सयूडेट अवशोषित हो जाता है, पट्टी अपना रंग बदल लेती है। यह पारदर्शी हो जाता है। इस मामले में, एक बदलाव की आवश्यकता है।
घावों और घाव की जेब के साथ गहरे बेडोरस के लिए एंटी-डीकिटस ड्रग्स (पट्टियाँ) का उपयोग नहीं किया जाता है। नेक्रोसिस संक्रमण के लिए भी उपयोग नहीं किया जाता है।
एंटी-डीकुबिटस उत्पाद (क्रीम, जैल,ड्रेसिंग) कई के अनुसार, त्वचा की नेक्रोटिक प्रक्रिया को रोकने में उच्च स्तर की प्रभावशीलता होती है। उत्पाद उपयोग करने के लिए बहुत सुविधाजनक हैं। रोगी को असुविधा न पहुँचाएँ। और सबसे महत्वपूर्ण बात, कम से कम संभव समय में 1 या 2 चरण में त्वचा के घावों के मुख्य लक्षणों को हटा सकते हैं।
एंटी-डयूबिटस उत्पाद, जिसकी समीक्षासबसे अच्छा, सूजन और दर्द से छुटकारा, बेडसोर से पीब और मवाद को खत्म करना, रोगाणुरोधी प्रभाव पड़ता है, माध्यमिक संक्रमण के विकास को रोकता है।
अधिकारी द्वारा प्रस्तावित साधनों के अतिरिक्तचिकित्सा, लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कई व्यंजन हैं। वे प्राकृतिक अवयवों पर आधारित होते हैं जो त्वचा पर एक विरोधी भड़काऊ और सुखदायक प्रभाव डालते हैं।
एंटी-डीकुबिटस उत्पादों को खुद कैसे बनाएं? लोक व्यंजनों अलग हैं।
निम्नलिखित कुछ सबसे आम हैंः
कांच के बर्तन में ईथर की 5 बूंदें रखी जाती हैं।लोहबान, कैमोमाइल और चाय के पेड़ के तेल। मिश्रण में 2 बड़े चम्मच जोड़ा जाता है। एल। जोजोबा तेल और लैवेंडर तेल की 12 बूंदें। मिश्रण अच्छी तरह से मिलाया जाता है और एक अंधेरी जगह में रखा जाता है। घाव पर 2-6 बूंदों के लिए दवा ड्रिप करें, और फिर एक सूखी पट्टी के साथ कवर किया गया। इसे दिन में दो बार लगाने की सलाह दी जाती है। उपयोग से पहले हिलाएं। इस तरह के नुस्खे से दर्द को दूर किया जा सकता है, संक्रमण, सूजन, और नेक्रोसिस से एक अप्रिय गंध को खत्म किया जा सकता है।
निम्नलिखित नुस्खा त्वचा को पवित्रता और ताजगी का एहसास देता है। बच्चों के लिए 100 ग्राम कपूर अल्कोहल और शैम्पू लिया जाता है। घटकों को अच्छी तरह से मिलाया जाता है। परिणामस्वरूप मिश्रण को साफ किया जाता है।
कैलेंडुला फूलों के आधार पर मरहम। इसे 20 ग्राम सूखे फूल लेना चाहिए और उन्हें कॉफी की चक्की में पीसना चाहिए। 50 ग्राम पेट्रोलियम जेली पाउडर में मिलाया जाता है। सब कुछ अच्छी तरह से मिश्रित है। मिश्रण को दिन में 2-3 बार घाव पर लगाया जाता है।
निम्नलिखित उपाय दर्द और सूजन से छुटकारा दिलाता है,नेक्रोसिस में संक्रामक प्रक्रिया को समाप्त करता है। आपको 100 ग्राम सूरजमुखी तेल लेना चाहिए और 30 ग्राम चुकंदर डालना चाहिए। सब कुछ अच्छी तरह से मिश्रित और ठंडा है। मरहम लुब्रिकेटेड सूजन वाली त्वचा।
यह नुस्खा सरल और प्रभावी है। दो प्याज को पीसने के लिए आवश्यक है, परिणामस्वरूप द्रव्यमान 2 बड़े चम्मच में जोड़ें। एल। वनस्पति तेल। प्याज 20 मिनट के लिए तामचीनी बर्तन में पकाया जाता है, फिर एक कोलंडर के माध्यम से फ़िल्टर किया जाता है। शेष तेल में चर्च की मोमबत्ती का 1/4 भाग पिघल जाना चाहिए। नेक्रोसिस को दिन में दो बार इस मलहम के साथ लिटाया जाता है। मिश्रण को रेफ्रिजरेटर में बंद जार में संग्रहित किया जाता है।
बेडसोर त्वचा संरचना का उल्लंघन है।कवर किया। केशिकाओं को निचोड़कर प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सबसे आम रोग विकृति रोगियों में देखी गई है। परिगलन की रोकथाम के लिए निवारक उपायों को करने की सलाह दी जाती है। मुख्य स्थिति स्वच्छता उपाय है।
पैथोलॉजी के मामले में, प्रस्तुत करना संभव हैशुरुआती चरणों में ही घर पर रोगी की मदद करें। इस प्रयोजन के लिए, विभिन्न एंटी-डीकुबिटस एजेंटों का उपयोग किया जाता है (मलहम, ड्रेसिंग, क्रीम और जैल) विरोधी भड़काऊ प्रभाव। आधुनिक दवाओं में उच्च स्तर की प्रभावशीलता होती है।
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आंतरिक अंगों के लिए केशिका फैलती हैऑक्सीजन और पोषक तत्व। रक्त वाहिकाओं की दीवारें सूक्ष्म होती हैं और जब वे निचोड़ जाते हैं, तो रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। ऐसा होता है कि एक व्यक्ति दो घंटे से अधिक नहीं चलता है। इस मामले में, रक्त का प्रवाह पूरी तरह से बंद हो जाता है। यह प्रक्रिया मुलायम ऊतक नेक्रोसिस की घटना को उत्तेजित करती है। यदि आप एंटी-डिक्यूबिटस का उपयोग नहीं करते हैं, तोनेक्रोसिस सभी परतों में मांसपेशी और हड्डी को प्रभावित करता है। नेक्रोसिस की डिग्री पैथोलॉजिकल प्रक्रिया की गहराई से निर्धारित होती है। कुल मिलाकर, घाव के चार चरण हैं। शरीर के कौन से हिस्से अक्सर प्रभावित होते हैं? त्वचा के नेक्रोसिस की जगह रोगी की मुद्रा पर निर्भर करती है। अक्सर, शरीर के निम्नलिखित क्षेत्रों में दबाव घाव दिखाई देते हैंः - नाप, कंधे, रंप और ऊँची एड़ी के जूते। इस मामले में, रोगी उसकी पीठ पर निहित है। - अंगों के flexion का क्षेत्र, क्योंकि इन क्षेत्रों में त्वचा सूक्ष्म है। - जब मरीज पक्ष में होता है तो घुटने टेकना। इस मामले में कैसे मदद करें और रोकेंगहरे नुकसान का विकास? सबसे पहले, रोगजनक प्रक्रिया का कारण निर्धारित करना आवश्यक है, उत्तेजक कारकों पर ध्यान देना, और, निश्चित रूप से, विशेष एंटी-डिक्यूबिटस एजेंट का चयन करें जो बीमार व्यक्ति के लिए त्वचा की देखभाल को बढ़ावा देते हैं। - पहली डिग्री यह त्वचा की संरचना को परेशान किए बिना थोड़ा सा लालसा में प्रकट होता है। हल्की मालिश या शरीर की मुद्रा में परिवर्तन के बाद, यह गुजरता है। - दूसरी डिग्री यह लाली का कारण बनता है, जो मुद्रा को बदलने के बाद भी दूर नहीं जाता है। शायद दर्दनाक अल्सर, छाले, क्षरण, vesicles, सतही वृद्धि की उपस्थिति। त्वचा की संरचना क्षतिग्रस्त है। - तीसरी डिग्री गहरी हार में व्यक्त की जाती है।त्वचा। इस स्तर पर, त्वचा की सभी परतें सूजन हो जाती हैं। चरणों को सूजन, अल्सर और तीव्र लाली के साथ अल्सर द्वारा विशेषता है। अल्सर पीले या लाल granulation से भरे हुए हैं। घाव एक अप्रिय गंध exude। - चौथी डिग्री एक मृत त्वचा है जिसमें काले त्वचा से भरे अल्सर की बहुतायत होती है। ऊतक परिगलन के मुख्य कारणों में शामिल हैंः - लंबे समय तक एक लापरवाह स्थिति में एक व्यक्ति की उपस्थिति ; - मूत्र और मल की असंयम; - पसीने में वृद्धि; - गंदा और नम बिस्तर; - खराब त्वचा की स्वच्छता; - शीट पर सिलवटों की उपस्थिति, कपड़े पर बटन, बिस्तर में crumbs; - रक्त वाहिकाओं और दिल की बीमारियां; - मधुमेह की उपस्थिति। परिगलन के कुछ महत्वपूर्ण कारणों में शामिल हैंः - एक बेड रोगी की लापरवाही से संभालना। - तेजी से पलटना। - सनी के दुर्लभ परिवर्तन। - पोत द्वारा त्वचा को निचोड़ना, जिसके दौरान सबसे छोटी केशिकाएं फट जाती हैं। इन क्षेत्रों में रक्त का प्रवाह तेजी से परेशान है। फार्मेसियों मोगिलेव में एंटी-डयूबिटस दवाएंदबाव अल्सर से पीड़ित रोगियों के लिए विभिन्न मलहम ड्रेसिंग और क्रीम की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रतिनिधित्व किया। साधन त्वचा ऊतक परिगलन की प्रक्रिया को गिरफ्तार करने और रोगी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में सक्षम हैं। मुख्य कार्य जो मनुष्य का सामना करता हैबेडरेस्ट की देखभाल, यह त्वचा के परिगलन को रोकने में मदद करने के लिए निवारक उपाय है। बेडरेस एक व्यक्ति को दर्द पहुंचाते हैं और उपचारों को लागू करना बहुत मुश्किल होता है। किसी प्रियजन को अत्यधिक पीड़ा और दीर्घकालिक चिकित्सा की निंदा करने की तुलना में निवारक प्रक्रियाओं को अंजाम देना हमेशा आसान होता है। परिगलन की रोकथाम में कई शामिल हैंघटनाओं को लगातार आयोजित किया जाता है। मुख्य नियम पर जोर दिया जाना चाहिएः रोगी की त्वचा की सावधानीपूर्वक देखभाल में दैनिक पोंछना और धुलाई शामिल होना चाहिए। रोगनिरोधी उद्देश्यों के लिए, निम्नलिखित एंटी-डीकुबिटस दवाओं का उपयोग किया जाता हैः - मलहम; - जैल; - ड्रेसिंग; - गद्दे; - कुशन; - रबर की अंगूठी; - सिलिका-आधारित विकिरणक। पहली और दूसरी डिग्री की पैथोलॉजिकल प्रक्रियाएंटी-डयूबिटल डिसइंफेक्टेंट जैसे टूल की मदद से घर पर ही इसे खत्म किया जा सकता है और उपचार में लंबा समय लगता है। लेकिन परिणाम इसके लायक है। थर्ड और फोर्थ डिग्री बेडर्स केवल अस्पताल में ही खत्म हो जाते हैं। त्वचा के परिगलन के थेरेपी में दो चरण शामिल हैंः - क्षतिग्रस्त क्षेत्र में रक्त के प्रवाह की बहाली; - मवाद और नेक्रोटिक समावेशन से घाव को साफ करना। रोगी के शरीर की स्थिति को बदलते हुए, गद्दे, मालिश की मदद से रक्त परिसंचरण की बहाली संभव है। नेक्रोटिक घाव और उनके उत्थान को साफ करने के लिए, विशेष ड्रेसिंग प्रदान की जाती हैं। क्षतिग्रस्त क्षेत्र पर प्रभाव के प्रकार के अनुसार, बेडोरस से ड्रेसिंग को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया हैः - सफाई। वे मवाद को बाहर निकालते हैं और बाहर निकालते हैं। - हीलिंग। इस तरह के फंड ऊतक पुनर्जनन को बढ़ावा देते हैं। विभाजन सशर्त है, क्योंकि सभी ड्रेसिंग त्वचा की संरचना को बहाल करने में मदद करते हैं। बिस्तरों के खिलाफ ड्रेसिंग अलग आकार में आते हैंः - मानव शरीर के आसानी से सुलभ क्षेत्रों में परिगलन को रोकने के लिए उपयोग किए जाने वाले एंटी-डीकिटस स्वच्छता उत्पाद। आमतौर पर एक वर्ग या आयत के रूप में उपयोग किए जाने वाले उत्पाद। - त्रिकास्थि क्षेत्र के उपचार के लिए डिज़ाइन की गई पट्टियाँ। वे तितली या दिल के आकार के होते हैं। - ऊँची एड़ी के जूते पर बेडसोर के उन्मूलन के लिए उत्पाद। एक पट्टी लागू करें, जिसमें एक तितली या ट्रेफ़िल का आकार होता है। से ड्रेसिंग का सबसे आम मॉडलबेडसोर एक सफाई प्रभाव वाले उत्पाद हैं। तिथि करने के लिए, दक्षता की एक उच्च डिग्री में "हाइड्रोकोल", "हाइड्रोसोरब", "टेंडरवीट एक्टिविट" का उपयोग होता है। "हाइड्रोकल" ड्रेसिंग तीन-आठ दिनों के लिए प्रभावित क्षेत्र पर लागू होती है। यह घाव को साफ करने में मदद करता है, शुद्ध सामग्री को अवशोषित करता है, इसे जेल जैसी स्थिति में बदल देता है। ड्रेसिंग "हाइड्रोसोरब" घाव में एक नम वातावरण बनाने में मदद करता है, मृत ऊतक की अस्वीकृति और इसके उपचार को उत्तेजित करता है। TenderVet Activiti द्वारा Armbands बनाया गया हैमुलायम पैड के आकार का। वे रिंगर के रेखापुंज के साथ गर्भवती हैं, जो चौबीस घंटाटे के लिए घाव के लगातार धुलाई का प्रभाव बनाता है। वे नेक्रोटिक ऊतक को अस्वीकार करते हैं और क्षतिग्रस्त त्वचा क्षेत्र के उत्थान को बढ़ावा देते हैं। एंटी-डीकुबिटस उत्पाद क्या हैं? एक्सयूडेट और मवाद की उपस्थिति के साथ गहरे बेडसोर्स के लिए गणना किए गए प्रकार विविध हैं। उनमें से "सॉर्बेलगन" और "पार्मफ़ॉर्म" पर ध्यान दिया जाना चाहिए। "सोरबल्गोना" का आधार बाँझ हैसामग्री जो व्यापक बेडोर के अवकाश में प्रवेश करती है। सामग्री मवाद को अवशोषित करने में मदद करती है, घाव के नीचे को साफ करती है, जम जाती है और फिर घाव से आसानी से निकल जाती है। यदि बेडसोर के नीचे साफ है, तो कपास सामग्री एक जेल का रूप लेती है, घाव को कीटाणुरहित करती है और उसमें से स्वयं बहती है। पट्टी "पर्मफॉर्म" एक मैट्रिक्स-आधारित स्पंज है। यह मवाद को भी अवशोषित करता है और बाहर निकालता है। बिना दर्द के निकाल दिया। यह एक ऐसे माध्यम को छोड़ देता है जो परिगलन के उपचार को बढ़ावा देता है। ड्रेसिंग के रूप में सबसे आम साधनों में "अत्रुमान" और "ब्रानोलिंड" शामिल हैं। इन एंटी-डीकुबिटस उत्पादों में क्या विशेषताएं हैं? ड्रेसिंग "अत्रुमान" में एक मेष आधार है। यह चांदी और हाइड्रोफिलिक मरहम की एक पतली परत के साथ कवर किया गया है। उपकरण में एक जीवाणुनाशक संपत्ति है, घाव कीटाणुशोधन प्रदान करता है और क्षतिग्रस्त क्षेत्र के शीघ्र पुनर्जनन में योगदान देता है। बैंडेज "ब्रानोलिंड" में एक जाली भी होती है, जो पेरू बाल्सम के साथ गर्भवती है। उपकरण में एक एंटीसेप्टिक और उपचार प्रभाव होता है। एंटी-डयूबिटस उत्पादों को विभिन्न जैल के एक विस्तृत खंड द्वारा दर्शाया जाता है। त्वचा परिगलन का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले क्रीमों के ब्रांडों में, निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाना चाहिएः - जेल "आर्गोसल्फान"। उत्पाद का सक्रिय आधार सल्फ़ैथियाज़ोल है। यह रोगजनकों के विकास और प्रजनन को रोकता है। सहायक पदार्थ चांदी के आयन हैं। वे सल्फेट के चिकित्सीय प्रभाव को बढ़ाते हैं, साथ ही बैक्टीरिया के वनस्पतियों के विकास को रोकने में योगदान करते हैं। एजेंट के हाइड्रोफिलिक आधार में एक एनाल्जेसिक प्रभाव होता है, घाव को मॉइस्चराइज करता है और इसके उत्थान की प्रक्रिया को तेज करता है। क्रीम के आधार की एकाग्रता में विषाक्त प्रभाव नहीं होता है। आर्गोसल्फान क्रीम के साथ गठित बेडोरस का उपचार एक खुली विधि द्वारा किया जा सकता है या एक ओसीसीक्लोर ड्रेसिंग के साथ समानांतर में उपयोग किया जा सकता है। दवा को कीटाणुरहित घाव की पूरी सतह पर दो-तीन मिमी की मोटाई के साथ दिन में दो या तीन बार लागू किया जाना चाहिए। उपचार का कोर्स दो महीने है। मीन्स को रोजाना लगाया जाता है। एंटिडेकूबिटल एजेंटों जैसे कि सल्फ़रगिन और डर्माज़िन का समान प्रभाव पड़ता है। - क्रीम "इरुक्सोल"। रचना में कोलेजनैस क्लोरैम्फेनिकॉल और संबंधित एंजाइम शामिल हैं। एंजाइमैटिक साधन दबाव घावों की सफाई प्रदान करता है, नेक्रोसिस से प्रभावित ऊतकों के विघटन को रोकता है, पोषक माध्यम के बैक्टीरिया से वंचित करता है, एक जीवाणुरोधी प्रभाव होता है। कीटाणुरहित त्वचा पर क्रीम लागू करें, दवा क्षतिग्रस्त ऊतकों की तेजी से चिकित्सा प्रदान करती है। - मरहम "लेवोसिन वी।" दवा का आधार लेवोमाइसेटिन है, जिसमें रोगाणुरोधी प्रभाव होता है। इसके अलावा उपकरण में शामिल है सल्फाडीमेथोक्सिन, जो घाव भरने, मेथिल्यूरसिल और स्थानीय संवेदनाहारी, ट्राइमेकेन को बढ़ावा देता है। मरहम का त्वरित चिकित्सीय प्रभाव है। यह मवाद से बिस्तर को साफ करने और बुझाने में मदद करता है, साथ ही प्रभावित सतह को ठीक करने में मदद करता है। इसे रोजाना लगाया जाता है। कीटाणुरहित सतह पर लागू करें और एक पट्टी के साथ कवर किया गया। शायद सिरिंज के माध्यम से मवाद के साथ गुहा में इसकी शुरूआत। - "लेवोमकोल" का अर्थ है। मिथाइलुरैसिल के अलावा, रचना में क्लोरैमफेनिकॉल शामिल हैं। यह उपाय घाव भरने को बढ़ावा देता है। इसका उपयोग दबाव घावों और संक्रमणों की उपस्थिति में किया जाता है, साथ ही नेक्रोटिक प्रक्रिया के शुद्ध चरण में भी किया जाता है। - मेट्रोनिडाजोल क्रीम। इसका आधार एक जीवाणुरोधी पदार्थ है। जेल ड्रेसिंग के लिए एक सामग्री के साथ लागू किया जाता है और घावों से अप्रिय गंध को खत्म करने में मदद करता है। मवाद या प्रचुर मात्रा में निर्वहन के साथ दबाव घावों की उपस्थिति में, मेट्रोनिडाजोल के साथ फोम पर आधारित ड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है। शुष्क बेडोरस की उपस्थिति में हाइड्रोजेल के साथ ड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है। - IntraWite हाइड्रोजेल त्वचा की सफाई प्रदान करता हैनेक्रोटिक ऊतक के बारे में, धीरे से त्वचा की देखभाल करता है। हाइड्रोजेल का उपयोग बाहरी ड्रेसिंग के साथ किया जाता है, जिसकी आवृत्ति घाव की स्थिति पर निर्भर करती है। उपकरण प्रभावित ऊतक की एक त्वरित सफाई प्रदान करता है, क्योंकि इसके प्रभाव के तहत एक्सयूडेट और मवाद फैला है। इंट्रासाइट एक शुद्ध अमोर्फ जेल युक्त पानी, प्रोपलीन ग्लाइकॉल और एक संशोधित कार्बोक्सिमिथाइलसेलुलोज पॉलीमर है। ऊँची एड़ी के जूते के लिए एंटी-डयूबिटस एजेंटों को एक विस्तृत श्रृंखला द्वारा दर्शाया गया है। उनमें से, उत्पाद विशेष रूप से लोकप्रिय है।"आरामदेह"। यह पैर पर फिक्सिंग के लिए विशेष "कान" से सुसज्जित है। तकिया में एक गोल एर्गोनोमिक आकार होता है जो एड़ी की आकृति का अनुसरण करता है। इसका उपयोग नेक्रोसिस संक्रमण के लक्षणों के बिना एड़ी की सतह पर साफ घावों को ठीक करने के लिए किया जाता है। यदि घाव में एक्सयूडेट या मवाद के परिगलन होते हैं, तो एड़ी पर एंटीडेक्यूबिटल साधन लागू होते हैं घावों को साफ करने और भड़काऊ प्रक्रिया को राहत देने में योगदान। उनमें से "प्रोटीन-टीएम" पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उत्पाद प्रभावित त्वचा की तेजी से चिकित्सा को बढ़ावा देता है। "कॉम्फिल प्लस" ड्रेसिंग हैउन्नत मॉडल। उत्पाद का लाभ विशेष बैकिंग रिंग की उपस्थिति में है। वे उत्पाद के बाहर और अंदर स्थित होते हैं, ड्रेसिंग के केंद्र से शुरू करके एक-एक करके निकाला जाता है। प्रदान किए गए वांछित आकार का चयन करने के लिएविशेष लोचदार "कान", एड़ी क्षेत्र में पट्टी के विश्वसनीय निर्धारण के लिए अनुमति देता है। उपकरण तेजी से घाव भरने प्रदान करता है, ऊतक पुनर्जनन की प्रक्रिया को तेज करता है, बेडसोर माध्यमिक संक्रमण में प्रवेश को रोकता है। दो-छः दिनों के लिए एक लीज पर्याप्त है। एक दुर्लभ परिवर्तन एक घाव की तेजी से चिकित्सा के लिए उपयोगी है, और रोगी को आराम भी प्रदान करता है। ड्रेसिंग के मुख्य लाभः - उत्पाद में कोमलता और लोच है; - दर्द को दूर करने में सक्षम; - तंत्रिका अंत और सूजन ऊतक शोषक जेल के साथ अच्छी तरह से संरक्षित हैं; - पट्टी चोट का कारण नहीं बनती है, जब बदलते समय दर्द नहीं होता है, एलर्जी का कारण नहीं बनता है; - अतिरिक्त ड्रेसिंग की उपस्थिति के बिना चिपकने वाला किनारे द्वारा उत्पाद का विश्वसनीय निर्धारण सुनिश्चित किया जाता है। उपयोग करने से पहले अनुशंसितएड़ी की सतह को साफ करें। इस प्रयोजन के लिए, "फुरसिलिन" या "रिवनॉल" जैसे एजेंट का उपयोग किया जा सकता है। घाव के आसपास की त्वचा सूख जाती है। ड्रेसिंग का आकार घाव के आकार से दो सेमी बड़ा होना चाहिए। पट्टी को सूजन वाली त्वचा पर लगाया जाता है और "कान" के माध्यम से स्वस्थ त्वचा पर तय किया जाता है। छल्ले को हटा दिया जाता है जब तक कि उत्पाद एड़ी को लोड करना बंद नहीं करता है। जैसे ही मवाद और एक्सयूडेट अवशोषित हो जाता है, पट्टी अपना रंग बदल लेती है। यह पारदर्शी हो जाता है। इस मामले में, एक बदलाव की आवश्यकता है। घावों और घाव की जेब के साथ गहरे बेडोरस के लिए एंटी-डीकिटस ड्रग्स का उपयोग नहीं किया जाता है। नेक्रोसिस संक्रमण के लिए भी उपयोग नहीं किया जाता है। एंटी-डीकुबिटस उत्पाद कई के अनुसार, त्वचा की नेक्रोटिक प्रक्रिया को रोकने में उच्च स्तर की प्रभावशीलता होती है। उत्पाद उपयोग करने के लिए बहुत सुविधाजनक हैं। रोगी को असुविधा न पहुँचाएँ। और सबसे महत्वपूर्ण बात, कम से कम संभव समय में एक या दो चरण में त्वचा के घावों के मुख्य लक्षणों को हटा सकते हैं। एंटी-डयूबिटस उत्पाद, जिसकी समीक्षासबसे अच्छा, सूजन और दर्द से छुटकारा, बेडसोर से पीब और मवाद को खत्म करना, रोगाणुरोधी प्रभाव पड़ता है, माध्यमिक संक्रमण के विकास को रोकता है। अधिकारी द्वारा प्रस्तावित साधनों के अतिरिक्तचिकित्सा, लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कई व्यंजन हैं। वे प्राकृतिक अवयवों पर आधारित होते हैं जो त्वचा पर एक विरोधी भड़काऊ और सुखदायक प्रभाव डालते हैं। एंटी-डीकुबिटस उत्पादों को खुद कैसे बनाएं? लोक व्यंजनों अलग हैं। निम्नलिखित कुछ सबसे आम हैंः कांच के बर्तन में ईथर की पाँच बूंदें रखी जाती हैं।लोहबान, कैमोमाइल और चाय के पेड़ के तेल। मिश्रण में दो बड़े चम्मच जोड़ा जाता है। एल। जोजोबा तेल और लैवेंडर तेल की बारह बूंदें। मिश्रण अच्छी तरह से मिलाया जाता है और एक अंधेरी जगह में रखा जाता है। घाव पर दो-छः बूंदों के लिए दवा ड्रिप करें, और फिर एक सूखी पट्टी के साथ कवर किया गया। इसे दिन में दो बार लगाने की सलाह दी जाती है। उपयोग से पहले हिलाएं। इस तरह के नुस्खे से दर्द को दूर किया जा सकता है, संक्रमण, सूजन, और नेक्रोसिस से एक अप्रिय गंध को खत्म किया जा सकता है। निम्नलिखित नुस्खा त्वचा को पवित्रता और ताजगी का एहसास देता है। बच्चों के लिए एक सौ ग्राम कपूर अल्कोहल और शैम्पू लिया जाता है। घटकों को अच्छी तरह से मिलाया जाता है। परिणामस्वरूप मिश्रण को साफ किया जाता है। कैलेंडुला फूलों के आधार पर मरहम। इसे बीस ग्राम सूखे फूल लेना चाहिए और उन्हें कॉफी की चक्की में पीसना चाहिए। पचास ग्राम पेट्रोलियम जेली पाउडर में मिलाया जाता है। सब कुछ अच्छी तरह से मिश्रित है। मिश्रण को दिन में दो-तीन बार घाव पर लगाया जाता है। निम्नलिखित उपाय दर्द और सूजन से छुटकारा दिलाता है,नेक्रोसिस में संक्रामक प्रक्रिया को समाप्त करता है। आपको एक सौ ग्राम सूरजमुखी तेल लेना चाहिए और तीस ग्राम चुकंदर डालना चाहिए। सब कुछ अच्छी तरह से मिश्रित और ठंडा है। मरहम लुब्रिकेटेड सूजन वाली त्वचा। यह नुस्खा सरल और प्रभावी है। दो प्याज को पीसने के लिए आवश्यक है, परिणामस्वरूप द्रव्यमान दो बड़े चम्मच में जोड़ें। एल। वनस्पति तेल। प्याज बीस मिनट के लिए तामचीनी बर्तन में पकाया जाता है, फिर एक कोलंडर के माध्यम से फ़िल्टर किया जाता है। शेष तेल में चर्च की मोमबत्ती का एक/चार भाग पिघल जाना चाहिए। नेक्रोसिस को दिन में दो बार इस मलहम के साथ लिटाया जाता है। मिश्रण को रेफ्रिजरेटर में बंद जार में संग्रहित किया जाता है। बेडसोर त्वचा संरचना का उल्लंघन है।कवर किया। केशिकाओं को निचोड़कर प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सबसे आम रोग विकृति रोगियों में देखी गई है। परिगलन की रोकथाम के लिए निवारक उपायों को करने की सलाह दी जाती है। मुख्य स्थिति स्वच्छता उपाय है। पैथोलॉजी के मामले में, प्रस्तुत करना संभव हैशुरुआती चरणों में ही घर पर रोगी की मदद करें। इस प्रयोजन के लिए, विभिन्न एंटी-डीकुबिटस एजेंटों का उपयोग किया जाता है विरोधी भड़काऊ प्रभाव। आधुनिक दवाओं में उच्च स्तर की प्रभावशीलता होती है।
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इंडिया न्यूज, देहरादून (Uttrakhand)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने प्रदेशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने नववर्ष के मौके पर सभी की सुख, शांति और मृद्धि की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार आमजन के सहयोग से प्रदेश को नई ऊंचाइयों में पहुंचने का कार्य करेगी। सीएम धामी ने कहा कि नए साल पर उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू करने का फैसला लिया गया है।
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इंडिया न्यूज, देहरादून । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने प्रदेशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने नववर्ष के मौके पर सभी की सुख, शांति और मृद्धि की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार आमजन के सहयोग से प्रदेश को नई ऊंचाइयों में पहुंचने का कार्य करेगी। सीएम धामी ने कहा कि नए साल पर उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू करने का फैसला लिया गया है।
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कोलकाता, (भाषा)। पश्चिम बंगाल सरकार को सिंगूर में किसानों को भूमि लौटाने का अधिकार देने वाले एक विधेयक को राज्य विधानसभा ने विपक्षी वाम मोर्चा के सदस्यों के बहिर्गमन के बीच आज पारित कर दिया। सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास विधेयक, 2011 को सरकार की ओर से लाए गए कुछ संशोधनों के साथ ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। जब विधानसभा अध्यक्ष विमान बंदोपाध्याय ने विधेयक को मतदान के लिए रखा तो वाम मोर्चा के विधायक विधेयक में कानूनी विसंगतियों का हवाला देकर सदन से बाहर चले गए। विधेयक के बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इसे किसानों के साथ हुए अन्याय को खत्म करने के लिए लाया गया है। इन किसानों की भूमि का 2006 में टाटा मोटर्स की नैनो कार उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए जबरन अधिग्रहण किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इच्छुक और अनिच्छुक किसानों के तौर पर विभाजन नहीं करना चाहती थी लेकिन हालात ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया। बनर्जी ने कहा कि अगर किसान इच्छुक नहीं होंगे तो यह भूमि उन्हें लौटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वामपंथी सदस्य विधेयक में तकनीकी मुद्दों को उठा सकते हैं। उन्होंने वाम मोर्चा सदस्यों पर आरोप लगाया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान भूमि लौटाने का काम नहीं कर सके। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह वामपंथी सदस्यों से पूछना चाहती हैं कि वे इतनी जल्दी धैर्य क्यों खो रहे हैं।
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कोलकाता, । पश्चिम बंगाल सरकार को सिंगूर में किसानों को भूमि लौटाने का अधिकार देने वाले एक विधेयक को राज्य विधानसभा ने विपक्षी वाम मोर्चा के सदस्यों के बहिर्गमन के बीच आज पारित कर दिया। सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास विधेयक, दो हज़ार ग्यारह को सरकार की ओर से लाए गए कुछ संशोधनों के साथ ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। जब विधानसभा अध्यक्ष विमान बंदोपाध्याय ने विधेयक को मतदान के लिए रखा तो वाम मोर्चा के विधायक विधेयक में कानूनी विसंगतियों का हवाला देकर सदन से बाहर चले गए। विधेयक के बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इसे किसानों के साथ हुए अन्याय को खत्म करने के लिए लाया गया है। इन किसानों की भूमि का दो हज़ार छः में टाटा मोटर्स की नैनो कार उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए जबरन अधिग्रहण किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इच्छुक और अनिच्छुक किसानों के तौर पर विभाजन नहीं करना चाहती थी लेकिन हालात ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया। बनर्जी ने कहा कि अगर किसान इच्छुक नहीं होंगे तो यह भूमि उन्हें लौटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वामपंथी सदस्य विधेयक में तकनीकी मुद्दों को उठा सकते हैं। उन्होंने वाम मोर्चा सदस्यों पर आरोप लगाया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान भूमि लौटाने का काम नहीं कर सके। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह वामपंथी सदस्यों से पूछना चाहती हैं कि वे इतनी जल्दी धैर्य क्यों खो रहे हैं।
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शादी के बाद राखी सावंत का फैसला- "बोल्ड सीन्स और रिवीलिंग ड्रेस नहीं पहनूंगी, पति को पसंद नहीं"
अपनी हॉट और बोल्ड अदाओं के लिए पॉपुलर राखी सावंत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि शादी के बाद वो बोल्ड सीन्स नहीं करेंगी। जी हां, पिछले दिनों राखी सावंत ने अपनी शादी की घोषणा की, हालांकि अब तक उनके पति को किसी ने नहीं देखा है। लेकिन राखी का कहना है कि अब वो ऑन स्क्रीन स्मूचिंग, बोल्ड सीन्स और रिविलींग ड्रेस नहीं पहनने वाली हैं क्योंकि उनके पति को यह पसंद नहीं है।
अपनी तस्वीरों और बयानों से विवादों में रहने वाली राखी सावंत ने एक वेबसाइट को दिये इंटरव्यू में बताया कि शादी के बाद वो काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वो लंदन में अपने पति के साथ रह रही हैं और हाल ही में उन्होंने नया घर खरीदा है। यहां उनके नए घर के गृह प्रवेश की पूजा थी। इतना ही नहीं आजकल वो खाना बनाना भी सीख रही है।
'हाउसफुल 4' का नया पोस्टर रिलीज- 600 साल की कहानी के लिए तैयार हो जाएं फैंस !
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इंस्टाग्राम ने गुरुवार को अपना नया लोगो लॉन्च कर दिया। नए डिजाइन वाले लोगो के साथ ही इंस्टाग्राम ने आीफोन व एंड्रॉयड यूजर के लिए अपडेट भी जारी किया है। नए लोगो को ज्यादा वाइब्रेंट और रंगीन दिखने के विजन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहीं नए अपडेट के साथ तस्वीरें और वीडियो को पहले से ज्यादा सादा डिजाइन के साथ हाइलाइट करने की कोशिश की गई है।
पर उपलब्ध हैं। सबसे पहले बात फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम के नए लोगो की, कंपनी ने पुराने लोगो के पीछे के मकसद को नए लोगो में भी जिंदा रखा है। नए लोगो में भी कैमरा और रेनबो देखा जा सकता है। नया लोगो पहले से ज्यादा रंगीन है और पुराना ब्राउन कलर वाला कैमरा ऐप से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह बैकग्राउंड में रेनबो ने कैमरे की एक व्हाइट आउटलाइन के साथ ले ली है।
में स्पष्ट किया कि कंपनी को लोगो बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके मुताबिक, "अहसास की शुरुआत, अच्छा. . . कम्युनिटी की छाप नहीं और हमनेसोचा कि हम इसे और ज्यादा बैहतर बना सकते हैं। "
एंड्रॉयड व आईफोन ऐप के इंटरफेस का डिजाइन में भी बड़े बदलाव हुए हैं। इंस्टाग्राम अब सिर्फ ब्लू कलर से मुक्ति मिल गई है और अब ऐप में व्हाइट और ब्लैक कलर का कब्जा है। ऊपर की तरफ ब्लू बार में दायीं तरफ दिखने वाला डायरेक्ट मैसेज आइकन और नीचे ब्लैक बार (नेविगेशन विकल्प) अब व्हाइट हो गए हैं। फॉन्ट पूरी तरह से सॉलिट ब्लैक कलर के हैं जबकि बैकग्राउंड स्टार्क व्हाइट है।
नेविगेशन में कोई बदलाव नहीं है, इसलिए ऐप के जरिए ब्राउज़िंग में कोई फर्क नहीं पड़ा है। ब्लैक और व्हाइट थीम को इंस्टाग्राम ने यूजर को तस्वीरें और वीडियो पर यूजर का ध्यान ज्यादा फोकस करने का एक कोशिश बताया है।
2010 में लॉन्च होने के बाद से इंस्टाग्राम काफी लोकप्रिय हुआ है। दुनिया भर में हर रोज 80 मिलियन से ज्यादा तस्वीरें और वीडियो इस सोशल ऐप पर हर रोज अपलोड किए जाते हैं।
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इंस्टाग्राम ने गुरुवार को अपना नया लोगो लॉन्च कर दिया। नए डिजाइन वाले लोगो के साथ ही इंस्टाग्राम ने आीफोन व एंड्रॉयड यूजर के लिए अपडेट भी जारी किया है। नए लोगो को ज्यादा वाइब्रेंट और रंगीन दिखने के विजन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहीं नए अपडेट के साथ तस्वीरें और वीडियो को पहले से ज्यादा सादा डिजाइन के साथ हाइलाइट करने की कोशिश की गई है। पर उपलब्ध हैं। सबसे पहले बात फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम के नए लोगो की, कंपनी ने पुराने लोगो के पीछे के मकसद को नए लोगो में भी जिंदा रखा है। नए लोगो में भी कैमरा और रेनबो देखा जा सकता है। नया लोगो पहले से ज्यादा रंगीन है और पुराना ब्राउन कलर वाला कैमरा ऐप से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह बैकग्राउंड में रेनबो ने कैमरे की एक व्हाइट आउटलाइन के साथ ले ली है। में स्पष्ट किया कि कंपनी को लोगो बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके मुताबिक, "अहसास की शुरुआत, अच्छा. . . कम्युनिटी की छाप नहीं और हमनेसोचा कि हम इसे और ज्यादा बैहतर बना सकते हैं। " एंड्रॉयड व आईफोन ऐप के इंटरफेस का डिजाइन में भी बड़े बदलाव हुए हैं। इंस्टाग्राम अब सिर्फ ब्लू कलर से मुक्ति मिल गई है और अब ऐप में व्हाइट और ब्लैक कलर का कब्जा है। ऊपर की तरफ ब्लू बार में दायीं तरफ दिखने वाला डायरेक्ट मैसेज आइकन और नीचे ब्लैक बार अब व्हाइट हो गए हैं। फॉन्ट पूरी तरह से सॉलिट ब्लैक कलर के हैं जबकि बैकग्राउंड स्टार्क व्हाइट है। नेविगेशन में कोई बदलाव नहीं है, इसलिए ऐप के जरिए ब्राउज़िंग में कोई फर्क नहीं पड़ा है। ब्लैक और व्हाइट थीम को इंस्टाग्राम ने यूजर को तस्वीरें और वीडियो पर यूजर का ध्यान ज्यादा फोकस करने का एक कोशिश बताया है। दो हज़ार दस में लॉन्च होने के बाद से इंस्टाग्राम काफी लोकप्रिय हुआ है। दुनिया भर में हर रोज अस्सी मिलियन से ज्यादा तस्वीरें और वीडियो इस सोशल ऐप पर हर रोज अपलोड किए जाते हैं।
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शिवपुरी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान की रविवार को विधिवत राज्य की राजनीति में लांचिंग हो गई। उन्होंने पिता के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के बाहर पहली बार एक जनसभा को संबोधित किया। कार्तिकेय ने अपने पिता और उनकी सरकार का गुणगान किया। मुख्यमंत्री के बेटे ने शिवपुरी जिले के कोलारस में धाकड़ समाज के सम्मेलन में हिस्सा लिया। इससे ये अटकले शुरू हो गई हैं कि होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उन्हें अहम भूमिका मिल सकती है।
बता दें इस क्षेत्र में जल्द ही विधानसभा उपचुनाव होना है। यह क्षेत्र कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आता है। सिंधिया का तीन दिवसीय दौरा रविवार को ही खत्म हुआ है।
सांसद सिंधिया ने शनिवार को कोलारस में हुई एक जनसभा में मुख्यमंत्री शिवराज और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को 'कौरव' बताया था और उन्हें सत्ता से भगाने की बात कही थी।
कोलारस का उपचुनाव भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए अहम है। मतदान की तारीख की घोषणा हालांकि अभी नहीं हुई है, मगर भाजपा संगठन और सरकार प्रचार अभियान में पूरा जोर लगाए हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस की तरफ से सिंधिया अकेले मोर्चा संभाले हुए हैं।
कार्तिकेय ने सजातीय लोगों से कहा, "भाजपा ने हमेशा विकास की राजनीति की है। कोलारस में होने वाले उपचुनाव में प्रत्याशी की बजाय आपलोग मेरे पिता शिवराज को देखकर वोट दें। " उन्होंने पिता के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का हालांकि दावा है कि पार्टी में न तो वंशवाद चलता है और न ही 'जाति' की राजनीति की जाती है।
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शिवपुरी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान की रविवार को विधिवत राज्य की राजनीति में लांचिंग हो गई। उन्होंने पिता के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के बाहर पहली बार एक जनसभा को संबोधित किया। कार्तिकेय ने अपने पिता और उनकी सरकार का गुणगान किया। मुख्यमंत्री के बेटे ने शिवपुरी जिले के कोलारस में धाकड़ समाज के सम्मेलन में हिस्सा लिया। इससे ये अटकले शुरू हो गई हैं कि होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उन्हें अहम भूमिका मिल सकती है। बता दें इस क्षेत्र में जल्द ही विधानसभा उपचुनाव होना है। यह क्षेत्र कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आता है। सिंधिया का तीन दिवसीय दौरा रविवार को ही खत्म हुआ है। सांसद सिंधिया ने शनिवार को कोलारस में हुई एक जनसभा में मुख्यमंत्री शिवराज और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को 'कौरव' बताया था और उन्हें सत्ता से भगाने की बात कही थी। कोलारस का उपचुनाव भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए अहम है। मतदान की तारीख की घोषणा हालांकि अभी नहीं हुई है, मगर भाजपा संगठन और सरकार प्रचार अभियान में पूरा जोर लगाए हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस की तरफ से सिंधिया अकेले मोर्चा संभाले हुए हैं। कार्तिकेय ने सजातीय लोगों से कहा, "भाजपा ने हमेशा विकास की राजनीति की है। कोलारस में होने वाले उपचुनाव में प्रत्याशी की बजाय आपलोग मेरे पिता शिवराज को देखकर वोट दें। " उन्होंने पिता के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का हालांकि दावा है कि पार्टी में न तो वंशवाद चलता है और न ही 'जाति' की राजनीति की जाती है।
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नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के आदेश पर रोक लगा दी है।
इस आदेश में Hotel और Restaurant को खाने पर Service Charge वसूलने पर रोक लगा दी गई थी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने यह आदेश जारी किया। यह याचिका द नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने दायर की थी।
वकील नीना गुप्ता और अनन्या मारवाह के जरिए दायर याचिका में कहा गया था कि 04 जुलाई को CCPA ने आदेश जारी कर होटलों और रेस्टोरेंट को सर्विस चार्ज वसूलने पर रोक लगा दिया है। याचिका में इस आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है तीन तरह के रेस्टोरेंट हैं। पहला वे जो सर्विस चार्ज नहीं वसूलते हैं। दूसरे जो बिना ग्राहक की सहमति के सर्विस चार्ज वसूलते हैं।
और तीसरे वे जो सर्विस चार्ज को मेन्यू में प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि सर्विस चार्ज स्टाफ के लिए होता है।
उन्होंने कहा कि हास्पिटैलिटी सेक्टर (Hospitality Sector) में सर्विस चार्ज वसूलने की परंपरा पिछले 80 साल से चली आ रही है।
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नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश में Hotel और Restaurant को खाने पर Service Charge वसूलने पर रोक लगा दी गई थी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने यह आदेश जारी किया। यह याचिका द नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दायर की थी। वकील नीना गुप्ता और अनन्या मारवाह के जरिए दायर याचिका में कहा गया था कि चार जुलाई को CCPA ने आदेश जारी कर होटलों और रेस्टोरेंट को सर्विस चार्ज वसूलने पर रोक लगा दिया है। याचिका में इस आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है तीन तरह के रेस्टोरेंट हैं। पहला वे जो सर्विस चार्ज नहीं वसूलते हैं। दूसरे जो बिना ग्राहक की सहमति के सर्विस चार्ज वसूलते हैं। और तीसरे वे जो सर्विस चार्ज को मेन्यू में प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि सर्विस चार्ज स्टाफ के लिए होता है। उन्होंने कहा कि हास्पिटैलिटी सेक्टर में सर्विस चार्ज वसूलने की परंपरा पिछले अस्सी साल से चली आ रही है।
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खाने मे पडे हुए परमहस के दुख देखे । लेकिन वे उसे छुटकारा नही दिला सकी । मन की एक स्त्री प्रवृति ने मोह पुत्र को जन्म दिया जो जगत मे चारो ओर निडर होकर फिरने लगा ।
सो मोह सगलो संसार, धन कुटुम्ब माड्यो पसार ।
गति चार मे फिराव सोई, घाल जाल न निकसै कोई ॥४७॥
मन की दूसरी स्त्री निवृत्ति थी । उसने 'विवेक' नाम के पुत्र को जन्म दिया । विवेक अपनी नीति के अनुसार काम करने लगा ।
सव जीवन फु दे उपदेश, जिह थे नास रोग क्लेस ।
कह विवेक सु बात विचार, सुलह इंछा सुख ससार ।
मन राजा अपने पिता परमहस को छोड कर माया के साथ रहने लगा । एक दिन माया ने मन से कह कर विवेक को भी वन्दी गृह में डाल दिया क्योकि उससे भी माया को डर लगने लग गया था । निवृत्ति ने अपने श्वसुर परमहस को सारी स्थिति समय और विवेक को छुडाने के लिये जोर देने लगी । परमहस ने अपनी असमर्थता प्रकट की।
परमहंस जपै सुन बहु, एह परपंच माया का सहु ।
निसर्च परन छ चेतना, तिह के पास जाहु तंखोना ।।६२ ।।
निवृत्ति रानी चेतना के पास गई और उससे विवेक पुत्र छोडने की प्रार्थना करने लगी । प्रवृत्ति रानी ने इसका विरोध किया और मन राजा से निम्न प्रकार निवेदन करने लगी ।
मोह पुत्र थारो वर वीर, मात पिता को सेवक घोर । स्वामी देई मोह दे राज, सोरो सव तुम्हारो काज ।
मन भी प्रवृत्ति रानी के बहकावे मे आ गया और उसने मोह को अपना उत्तराधिकारी घोपित कर दिया । मोह ने अपनी नगरी वसाई और निम्न साथियो के साथ राज्य करने लगा
पुरी ज्ञान कोट चढ़ पास, त्रिसना खाई सोत्र तास । च्यारू गति दरवाजा बण्या, दोसै तहां विषै मन धरणां ॥७२॥
मिथ्या दरसन मंत्री तास, सेवक आठ करम को वास । क्रोध मान डभ परचंड, लोभ सहत तिहा निवस पंच ॥७३॥
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खाने मे पडे हुए परमहस के दुख देखे । लेकिन वे उसे छुटकारा नही दिला सकी । मन की एक स्त्री प्रवृति ने मोह पुत्र को जन्म दिया जो जगत मे चारो ओर निडर होकर फिरने लगा । सो मोह सगलो संसार, धन कुटुम्ब माड्यो पसार । गति चार मे फिराव सोई, घाल जाल न निकसै कोई ॥सैंतालीस॥ मन की दूसरी स्त्री निवृत्ति थी । उसने 'विवेक' नाम के पुत्र को जन्म दिया । विवेक अपनी नीति के अनुसार काम करने लगा । सव जीवन फु दे उपदेश, जिह थे नास रोग क्लेस । कह विवेक सु बात विचार, सुलह इंछा सुख ससार । मन राजा अपने पिता परमहस को छोड कर माया के साथ रहने लगा । एक दिन माया ने मन से कह कर विवेक को भी वन्दी गृह में डाल दिया क्योकि उससे भी माया को डर लगने लग गया था । निवृत्ति ने अपने श्वसुर परमहस को सारी स्थिति समय और विवेक को छुडाने के लिये जोर देने लगी । परमहस ने अपनी असमर्थता प्रकट की। परमहंस जपै सुन बहु, एह परपंच माया का सहु । निसर्च परन छ चेतना, तिह के पास जाहु तंखोना ।।बासठ ।। निवृत्ति रानी चेतना के पास गई और उससे विवेक पुत्र छोडने की प्रार्थना करने लगी । प्रवृत्ति रानी ने इसका विरोध किया और मन राजा से निम्न प्रकार निवेदन करने लगी । मोह पुत्र थारो वर वीर, मात पिता को सेवक घोर । स्वामी देई मोह दे राज, सोरो सव तुम्हारो काज । मन भी प्रवृत्ति रानी के बहकावे मे आ गया और उसने मोह को अपना उत्तराधिकारी घोपित कर दिया । मोह ने अपनी नगरी वसाई और निम्न साथियो के साथ राज्य करने लगा पुरी ज्ञान कोट चढ़ पास, त्रिसना खाई सोत्र तास । च्यारू गति दरवाजा बण्या, दोसै तहां विषै मन धरणां ॥बहत्तर॥ मिथ्या दरसन मंत्री तास, सेवक आठ करम को वास । क्रोध मान डभ परचंड, लोभ सहत तिहा निवस पंच ॥तिहत्तर॥
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मुंबईः आज किस डे है. बॉलीवुड की हर फिल्म में किसिंग सीन होना लगभग अनिवार्य होता है. लेकिन पहले ऐसा नहीं था. किसिंग सीन को झाड़ियों और फूलों की आड़ में फिल्माया जाता था. बॉलीवुड में आज भी इंटिमेट और किसिंग सीन काफी बवाल मचाते हैं. कई फिल्मों में तो इन सीन पर सेंसर बोर्ड की कैंची चल जाती है. वहीं कई किसिंग सीन पर काफी हो-हल्ला हुआ.
दीपिका और रणबीर की 'तमाशा' में स्टीमी किस सीन था.
'बैंड बजा बारात' फिल्म में दोनों ने काफी लंबा किस दिया था. रणवीर और अनुष्का की केमिस्ट्री ने काफी धमाल मचाया.
फिल्म 'की एंड का' में अर्जुन और करीना की अनोखी केमिस्ट्री देखने को मिली. करीना ने अपनी नो किसिंग पॉलिसी को इस फिल्म के लिए तोड़ दिया था. फिल्म में इंटिमेट सीन्स भी हैं.
शाहरुख़ ने अपने फिल्मी करियर में कभी भी किसी हीरोइन को किस नहीं किया लेकिन यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'जब तक जान' फिल्म में शाहरुख ने कटरीना को 'किस' किया था.
ऐश्वर्या और ॠतिक के किस से बच्चन खानदान में काफी हलचल मच गई थी.
बॉलीवुड के सीरियल किसर इमरान ने तो हर फिल्म में ताबड़तोड़ किस किए हैं. लेकिन आशिक बनाया आपने के सीन ने तो सबके होश उड़ा दिए.
मल्लिका ने फिल्म 'ख्वाहिश' में अपने को स्टार को 17 किस किए थे.
जॉन और बिपाशा ने जिस्म में सारी हदों को पार कर दिया था. किस सीन हो या उनके इंटिमेट सीन बिपाशा और जॉन ने शानदार परफॉरमेंस दी.
आमिर और करिश्मा का बारिश वाला किसिंग सीन कोई कैसे भूल सकता हैं. इस सीन ने उस समय काफी सनसनी मचा दी थी.
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मुंबईः आज किस डे है. बॉलीवुड की हर फिल्म में किसिंग सीन होना लगभग अनिवार्य होता है. लेकिन पहले ऐसा नहीं था. किसिंग सीन को झाड़ियों और फूलों की आड़ में फिल्माया जाता था. बॉलीवुड में आज भी इंटिमेट और किसिंग सीन काफी बवाल मचाते हैं. कई फिल्मों में तो इन सीन पर सेंसर बोर्ड की कैंची चल जाती है. वहीं कई किसिंग सीन पर काफी हो-हल्ला हुआ. दीपिका और रणबीर की 'तमाशा' में स्टीमी किस सीन था. 'बैंड बजा बारात' फिल्म में दोनों ने काफी लंबा किस दिया था. रणवीर और अनुष्का की केमिस्ट्री ने काफी धमाल मचाया. फिल्म 'की एंड का' में अर्जुन और करीना की अनोखी केमिस्ट्री देखने को मिली. करीना ने अपनी नो किसिंग पॉलिसी को इस फिल्म के लिए तोड़ दिया था. फिल्म में इंटिमेट सीन्स भी हैं. शाहरुख़ ने अपने फिल्मी करियर में कभी भी किसी हीरोइन को किस नहीं किया लेकिन यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 'जब तक जान' फिल्म में शाहरुख ने कटरीना को 'किस' किया था. ऐश्वर्या और ॠतिक के किस से बच्चन खानदान में काफी हलचल मच गई थी. बॉलीवुड के सीरियल किसर इमरान ने तो हर फिल्म में ताबड़तोड़ किस किए हैं. लेकिन आशिक बनाया आपने के सीन ने तो सबके होश उड़ा दिए. मल्लिका ने फिल्म 'ख्वाहिश' में अपने को स्टार को सत्रह किस किए थे. जॉन और बिपाशा ने जिस्म में सारी हदों को पार कर दिया था. किस सीन हो या उनके इंटिमेट सीन बिपाशा और जॉन ने शानदार परफॉरमेंस दी. आमिर और करिश्मा का बारिश वाला किसिंग सीन कोई कैसे भूल सकता हैं. इस सीन ने उस समय काफी सनसनी मचा दी थी.
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बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बिग बॉस 12, 1 अक्टूबर एपिसोड 16 सलमान खान का सबसे विवादित शो बिग बॉस सीजन 12 लगातार सुर्खियों में छाया हुआ है. बिग बॉस 12 की चर्चित जोड़ी अनूप जलोटा और जललीन मथारू के बीच टास्क के दौरान ऐसा कुछ हुआ है, जिसे देखकर न सिर्फ घरवाले बल्कि खुद अनूप जलोटा भी हैरान हैं. दरअसल, बिग बॉस के घर में आज नॉमिनेशन टास्क खेला जाएगा, जिसमें जोड़ियां सिगंल्स के साथ बिड़ती हुई नजर आएंगी. इस बीच अनूप जलोटा और जसलीन मथारू की टक्कर दीपिका कक्कड़ से होती. टास्क के दौरान दीपिका अनूप जलोटा को नॉमिनेशन से बचाने के लिए कुछ ऐसा करने के लिए कहती हैं, जिस जसलीन मना कर देती है. जसलीन के इस बर्ताव को देखकर अनूप जलोटा भी हैरान हैं.
वहीं दूसरी ओर वीडियो में जसलीन मथारू भी बेहद दुखी नजर आ रही हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्य़ा अनूप जलोटा को नॉमिनेशन से बचाने के लिए जसलीन मथारू अपने बालों और कपड़ों की कुर्बानी देती हैं या फिर इसे लेकर आ जाएगा जसलीन मथारू और अनूप जलोटा के रिश्तों में दरार.
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बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. बिग बॉस बारह, एक अक्टूबर एपिसोड सोलह सलमान खान का सबसे विवादित शो बिग बॉस सीजन बारह लगातार सुर्खियों में छाया हुआ है. बिग बॉस बारह की चर्चित जोड़ी अनूप जलोटा और जललीन मथारू के बीच टास्क के दौरान ऐसा कुछ हुआ है, जिसे देखकर न सिर्फ घरवाले बल्कि खुद अनूप जलोटा भी हैरान हैं. दरअसल, बिग बॉस के घर में आज नॉमिनेशन टास्क खेला जाएगा, जिसमें जोड़ियां सिगंल्स के साथ बिड़ती हुई नजर आएंगी. इस बीच अनूप जलोटा और जसलीन मथारू की टक्कर दीपिका कक्कड़ से होती. टास्क के दौरान दीपिका अनूप जलोटा को नॉमिनेशन से बचाने के लिए कुछ ऐसा करने के लिए कहती हैं, जिस जसलीन मना कर देती है. जसलीन के इस बर्ताव को देखकर अनूप जलोटा भी हैरान हैं. वहीं दूसरी ओर वीडियो में जसलीन मथारू भी बेहद दुखी नजर आ रही हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्य़ा अनूप जलोटा को नॉमिनेशन से बचाने के लिए जसलीन मथारू अपने बालों और कपड़ों की कुर्बानी देती हैं या फिर इसे लेकर आ जाएगा जसलीन मथारू और अनूप जलोटा के रिश्तों में दरार.
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: सहारा को पछाड़ कर टॉप टेन में पहुंचा डीडी न्यूज : टैम ने छठवें सप्ताह की टीआरपी जारी कर दी है. इस सप्ताह नंबरिंग में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है. पर आजतक इस सप्ताह नम्बर वन होने के साथ इंडिया टीवी को बहुत ज्यादा पीछे छोड़ दिया है. इंडिया टीवी को इस सप्ताह 1. 2 रेटिंग प्वाइंट का नुकसान हुआ है. इसके बाद भी ये चैनल दूसरे पायदान पर बना हुआ है. हालांकि एबीपी न्यूज इस चैनल के नजदीक पहुंच गया है. जी न्यूज इस बार भी चौथे पायदान पर काबिज है.
इसके बाद क्रमशः न्यूज24, आईबीएन7 एनडीटीवी इंडिया, पी7 न्यूज एवं तेज का नम्बर है. इस बार डीडी ने समय को पछाड़ते हुए टॉप टेन में अपना कब्जा जमा लिया है. बाकी सभी चैनल लगभग अपने पिछले ही पायदान पर खड़े हैं. ये सभी आंकड़े टीजी सीएस 15 प्लस श्रेणी के हैं. नीचे चैनलों की टीआरपी रेटिंग.
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: सहारा को पछाड़ कर टॉप टेन में पहुंचा डीडी न्यूज : टैम ने छठवें सप्ताह की टीआरपी जारी कर दी है. इस सप्ताह नंबरिंग में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है. पर आजतक इस सप्ताह नम्बर वन होने के साथ इंडिया टीवी को बहुत ज्यादा पीछे छोड़ दिया है. इंडिया टीवी को इस सप्ताह एक. दो रेटिंग प्वाइंट का नुकसान हुआ है. इसके बाद भी ये चैनल दूसरे पायदान पर बना हुआ है. हालांकि एबीपी न्यूज इस चैनल के नजदीक पहुंच गया है. जी न्यूज इस बार भी चौथे पायदान पर काबिज है. इसके बाद क्रमशः न्यूजचौबीस, आईबीएनसात एनडीटीवी इंडिया, पीसात न्यूज एवं तेज का नम्बर है. इस बार डीडी ने समय को पछाड़ते हुए टॉप टेन में अपना कब्जा जमा लिया है. बाकी सभी चैनल लगभग अपने पिछले ही पायदान पर खड़े हैं. ये सभी आंकड़े टीजी सीएस पंद्रह प्लस श्रेणी के हैं. नीचे चैनलों की टीआरपी रेटिंग.
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कल लॉन्च होगा Poco C51 ( Image Source : Flipkart )
Poco C51 Price In India: अगर आप अपने लिए 10 से लेकर 12,000 रुपये की रेंज में एक नया मोबाइल फोन खरीदने पर विचार कर रहे हैं तो कल एक बढ़िया बजट सेगमेंट का स्मार्टफोन पोको लॉन्च करने वाला है. पोको कल Poco C51 स्मार्टफोन को लॉन्च करेगा जिसमें आपको 7GB तक रैम सपोर्ट मिलेगा. लॉन्च से पहले मोबाइल फोन के स्पेसिफिकेशन सामने आ चुके हैं. आइए जानते हैं इस बारे में.
Poco C51 स्मार्टफोन में आपको 6. 5 इंच की डिस्प्ले मिलेगी जो 120hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी. ये मोबाइल फोन 4GB रैम के साथ आएगा जिसे आप 7GB तक एक्सपेंड कर पाएंगे. स्मार्टफोन MediaTek Helio G36 प्रोसेसर के साथ आएगा और इसमें 5000 एमएएच की बैटरी 10 वॉट के चार्जर के साथ मिलेगी. फोटोग्राफी के लिए मोबाइल फोन में 8 मेगापिक्सल का ड्यूल AI कैमरा और फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का कैमरा मिलेगा. इस फोन में पोको 2 साल तक आपको सिक्योरिटी अपडेट प्रदान करेगा. मोबाइल फोन एंड्राइड 13 पर काम करता है.
The POCO C51 is here with all the upgrades that really matter.
पोको के 4GB रैम और 64GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 10,000 रुपये के आस-पास हो सकती है. सटीक जानकारी के लिए अभी आपको थोड़ा इंतजार और करना होगा. स्मार्टफोन को आप ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट के माध्यम से ऑर्डर कर पाएंगे.
वनप्लस ने हाल ही में अपना अफॉर्डेबल फोन OnePlus Nord CE 3 Lite 5G को लॉन्च किया है. मोबाइल फोन की सेल 11 अप्रैल से शुरू होगी जिसे आप ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन और वनप्लस के आधिकारिक स्टोर के माध्यम से खरीद पाएंगे. इसके अलावा OnePlus Nord Buds 2 की सेल भी 11 तारीख से शुरू होगी. मोबाइल फोन की कीमत 19,999 रुपये से शुरू है जबकि बड्स की कीमत 2,999 रुपये है.
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कल लॉन्च होगा Poco Cइक्यावन Poco Cइक्यावन Price In India: अगर आप अपने लिए दस से लेकर बारह,शून्य रुपयापये की रेंज में एक नया मोबाइल फोन खरीदने पर विचार कर रहे हैं तो कल एक बढ़िया बजट सेगमेंट का स्मार्टफोन पोको लॉन्च करने वाला है. पोको कल Poco Cइक्यावन स्मार्टफोन को लॉन्च करेगा जिसमें आपको सातGB तक रैम सपोर्ट मिलेगा. लॉन्च से पहले मोबाइल फोन के स्पेसिफिकेशन सामने आ चुके हैं. आइए जानते हैं इस बारे में. Poco Cइक्यावन स्मार्टफोन में आपको छः. पाँच इंच की डिस्प्ले मिलेगी जो एक सौ बीसhz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी. ये मोबाइल फोन चारGB रैम के साथ आएगा जिसे आप सातGB तक एक्सपेंड कर पाएंगे. स्मार्टफोन MediaTek Helio Gछत्तीस प्रोसेसर के साथ आएगा और इसमें पाँच हज़ार एमएएच की बैटरी दस वॉट के चार्जर के साथ मिलेगी. फोटोग्राफी के लिए मोबाइल फोन में आठ मेगापिक्सल का ड्यूल AI कैमरा और फ्रंट में पाँच मेगापिक्सल का कैमरा मिलेगा. इस फोन में पोको दो साल तक आपको सिक्योरिटी अपडेट प्रदान करेगा. मोबाइल फोन एंड्राइड तेरह पर काम करता है. The POCO Cइक्यावन is here with all the upgrades that really matter. पोको के चारGB रैम और चौंसठGB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत दस,शून्य रुपयापये के आस-पास हो सकती है. सटीक जानकारी के लिए अभी आपको थोड़ा इंतजार और करना होगा. स्मार्टफोन को आप ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट के माध्यम से ऑर्डर कर पाएंगे. वनप्लस ने हाल ही में अपना अफॉर्डेबल फोन OnePlus Nord CE तीन Lite पाँचG को लॉन्च किया है. मोबाइल फोन की सेल ग्यारह अप्रैल से शुरू होगी जिसे आप ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन और वनप्लस के आधिकारिक स्टोर के माध्यम से खरीद पाएंगे. इसके अलावा OnePlus Nord Buds दो की सेल भी ग्यारह तारीख से शुरू होगी. मोबाइल फोन की कीमत उन्नीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से शुरू है जबकि बड्स की कीमत दो,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है.
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हिन्दू धर्म में महिलाओं को देवी क दर्जा दिया जाता हैं। मान्यता हैं उस घर में हमेशा दरिद्रता रहती हैं जहाँ महिलाओ का सम्मान नही किया जाता है। आज हम आपको भगवान की सबसे खुबसुरत रचनाओं में से एक स्त्री की शारीरिक रचना के बारे में बतायेगे, जिसके बारे में आपको शायद ही पता होगा। स्त्री के शरीर के कुछ ऐसे अंग होते हैं जिनके बड़ा होना उस स्त्री के लिए भाग्य का प्रतीक हैं और ऐसी स्त्री दरिद्रता में नही रहती हैं। आइये जानते है कैसी स्त्रियां होती है लक्ष्मी स्वरूप....
जिनके पैरो में कमल और चक्र शंख होते हैं :
जिस स्त्री के गालो में पड़ते है डिम्पल :
दाए गल पर तिल वाली स्त्री :
जिसकी आँखे हिरणी के जैसी हो :
जिस स्त्री की जीभ लाल होती हैं :
जिस स्त्री के नाग के अगले हिस्से पर तिल होता हैं :
जिस स्त्री के नाक के अगले हिस्से पर तिल होता हैं ऐसी स्त्री के बारे में शस्त्र कहते हैं की वह कभी दरिद्र नही रहती और सभी सुख सुविधाओं से भरा जीवन वय्तित करती हैं।
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हिन्दू धर्म में महिलाओं को देवी क दर्जा दिया जाता हैं। मान्यता हैं उस घर में हमेशा दरिद्रता रहती हैं जहाँ महिलाओ का सम्मान नही किया जाता है। आज हम आपको भगवान की सबसे खुबसुरत रचनाओं में से एक स्त्री की शारीरिक रचना के बारे में बतायेगे, जिसके बारे में आपको शायद ही पता होगा। स्त्री के शरीर के कुछ ऐसे अंग होते हैं जिनके बड़ा होना उस स्त्री के लिए भाग्य का प्रतीक हैं और ऐसी स्त्री दरिद्रता में नही रहती हैं। आइये जानते है कैसी स्त्रियां होती है लक्ष्मी स्वरूप.... जिनके पैरो में कमल और चक्र शंख होते हैं : जिस स्त्री के गालो में पड़ते है डिम्पल : दाए गल पर तिल वाली स्त्री : जिसकी आँखे हिरणी के जैसी हो : जिस स्त्री की जीभ लाल होती हैं : जिस स्त्री के नाग के अगले हिस्से पर तिल होता हैं : जिस स्त्री के नाक के अगले हिस्से पर तिल होता हैं ऐसी स्त्री के बारे में शस्त्र कहते हैं की वह कभी दरिद्र नही रहती और सभी सुख सुविधाओं से भरा जीवन वय्तित करती हैं।
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Gautam Adani news : गौतम अडानी ने कहा कि उनके लिए निवेशकों का हित सबसे बड़ा है और बाकी चीजें इसके बाद आती हैं। अडानी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि अपने 40 वर्षों के कारोबारी जीवन में उन्हें अपने सभी हितधारकों खासकर निवेशकों से उन्हें अगाध समर्थन मिला है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में आई है भारी गिरावट।
लोगों के भरोसे ने दी मुझे सफलता-अडानीउन्होंने कहा, 'पूरी तरह से सब्सक्राइब किए गए FPO के बाद इसे वापस लेने के फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया होगा। लेकिन बाजार में आज के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, बोर्ड ने दृढ़ता से महसूस किया कि FPO के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा। यह स्वीकार करना मेरे लिए जरूरी है कि जीवन में मैंने जो भी थोड़ा बहुत हासिल किया है वह लोगों के भरोसे के चलते ही है। मेरी सभी सफलता इन लोगों की ऋणी है। '
'आगे पूंजी मार्केट की रणनीति की समीक्षा करेंगे'उन्होंने कहा, 'मेरे लिए निवेशकों का हित सबसे बड़ा है। इसके बाद ही सभी चीजें आती हैं। इसलिए संभावित नुकसान से निवेशकों को बचाने के लिए हमने एफपीओ वापस लेने का फैसला किया है। ' समूह के एफपीओ वापस लेने के फैसले के बारे में अडानी ने कहा कि इससे कंपनी के मौजूदा कामकाज एवं भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह परियोजनाओं को समय पर पूरा करते रहेंगे। अडानी ने कहा, 'हमारी कंपनी के आधार मजबूत है। हमारे बैलेंश शीट में कोई खोट नहीं है और हमारी संपत्तियां ठोस हैं। बाजार के एक बार स्थिर हो जाने पर हम अपनी पूंजी मार्केट की रणनीति की समीक्षा करेंगे। '
20 हजार करोड़ जुटाने के लिए एफपीओ जारी किया थागत 27 जनवरी को गौतम अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने 20 हजार करोड़ जुटाने के लिए एफपीओ जारी किया था। कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस जानकारी में बताया गया है कि 1 फरवरी को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई,जिसमें शेलर सेल को वापस लेने का फैसला लिया गया। कंपनी ने कहा है कि वो निवेशकों के पैसे को वापस कर देगी। कंपनी का यह अब तक का सबसे बड़ा फॉलो-ऑप-ऑफर था।
सिर्फ 'टाइगर' ही खोज पाएगा Egg की भीड़ में Ego, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'सुल्तान'
Final Prime Time: आसमान से आफत. . बेबस हुई जिंदगियां !
Opinion India Ka: 'तिलकधारी' राहुल का अधूरा ज्ञान. . बड़ा बवाल !
Opinion India Ka : मुस्लिम पक्ष की अर्जी. . . 'फट' गई पर्ची !
2024 Loksabha Election से Pok का क्या है कनेक्शन ?
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Gautam Adani news : गौतम अडानी ने कहा कि उनके लिए निवेशकों का हित सबसे बड़ा है और बाकी चीजें इसके बाद आती हैं। अडानी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा कि अपने चालीस वर्षों के कारोबारी जीवन में उन्हें अपने सभी हितधारकों खासकर निवेशकों से उन्हें अगाध समर्थन मिला है। अडानी ग्रुप के शेयरों में आई है भारी गिरावट। लोगों के भरोसे ने दी मुझे सफलता-अडानीउन्होंने कहा, 'पूरी तरह से सब्सक्राइब किए गए FPO के बाद इसे वापस लेने के फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया होगा। लेकिन बाजार में आज के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, बोर्ड ने दृढ़ता से महसूस किया कि FPO के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा। यह स्वीकार करना मेरे लिए जरूरी है कि जीवन में मैंने जो भी थोड़ा बहुत हासिल किया है वह लोगों के भरोसे के चलते ही है। मेरी सभी सफलता इन लोगों की ऋणी है। ' 'आगे पूंजी मार्केट की रणनीति की समीक्षा करेंगे'उन्होंने कहा, 'मेरे लिए निवेशकों का हित सबसे बड़ा है। इसके बाद ही सभी चीजें आती हैं। इसलिए संभावित नुकसान से निवेशकों को बचाने के लिए हमने एफपीओ वापस लेने का फैसला किया है। ' समूह के एफपीओ वापस लेने के फैसले के बारे में अडानी ने कहा कि इससे कंपनी के मौजूदा कामकाज एवं भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह परियोजनाओं को समय पर पूरा करते रहेंगे। अडानी ने कहा, 'हमारी कंपनी के आधार मजबूत है। हमारे बैलेंश शीट में कोई खोट नहीं है और हमारी संपत्तियां ठोस हैं। बाजार के एक बार स्थिर हो जाने पर हम अपनी पूंजी मार्केट की रणनीति की समीक्षा करेंगे। ' बीस हजार करोड़ जुटाने के लिए एफपीओ जारी किया थागत सत्ताईस जनवरी को गौतम अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने बीस हजार करोड़ जुटाने के लिए एफपीओ जारी किया था। कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस जानकारी में बताया गया है कि एक फरवरी को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई,जिसमें शेलर सेल को वापस लेने का फैसला लिया गया। कंपनी ने कहा है कि वो निवेशकों के पैसे को वापस कर देगी। कंपनी का यह अब तक का सबसे बड़ा फॉलो-ऑप-ऑफर था। सिर्फ 'टाइगर' ही खोज पाएगा Egg की भीड़ में Ego, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'सुल्तान' Final Prime Time: आसमान से आफत. . बेबस हुई जिंदगियां ! Opinion India Ka: 'तिलकधारी' राहुल का अधूरा ज्ञान. . बड़ा बवाल ! Opinion India Ka : मुस्लिम पक्ष की अर्जी. . . 'फट' गई पर्ची ! दो हज़ार चौबीस Loksabha Election से Pok का क्या है कनेक्शन ?
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Bigg Boss OTT 2 Set Photos : बिग बॉस ओटीटी अपने दूसरे सीजन के धमाकेदार शुरुआत के लिए तैयार है. शो का सेट तैयार है, जिसकी थीम पिछले सीजन से काफी अलग और शानदार है. घर की इनसाइड फोटोज देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका दूसरा सीजन कितना दिलचस्प होने वाला है. 'बिग बॉस ओटीटी 2' को सलमान खान होस्ट करेंगे.
नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी 2' (Bigg Boss OTT 2) का सेट बहुत शानदार है, जिसे मशहूर आर्ट डायरेक्टर ओमंग कुमार (Omung Kumar) ने तैयार किया है. वे बिग बॉस की प्रोडक्शन टीम का कई सालों से हिस्सा हैं. शो का दूसरा सीजन अपने अलग अंदाज और फॉरमेट से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है. आप भी देखें सेट की मोहक तस्वीरें.
'बिग बॉस' की टीम हर बार कुछ अलग परोसने के मकसद से कुछ नया लेकर आई है. शो को सलमान खान होस्ट करेंगे, जिसमें मशहूर एक्टर्स और सितारे बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लेने जा रहे हैं.
'बिग बॉस ओटीटी 2' का सेट कंटेस्टेंट के साथ-साथ दर्शकों के लिए किसी सरप्राइज पैकेज से कम नहीं है, जिसमें हर एक कमरा एक अलग कहानी और थीम बयां करता है.
'बिग बॉस ओटीटी 2' का सेट देखकर लगता है कि कंटेस्टेंट के लिए चुनौतियां पहले से काफी मुश्किल होंगी.
सलमान खान शो के प्रोमो वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं, 'मैं लेकर आ रहा हूं, बिग बॉस ओटीटी. देखता जाए इंडिया. 'बिग बॉस ओटीटी 2' 17 जून से अपनी शानदार शुरुआत के लिए तैयार है. '
नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी 2' (Bigg Boss OTT 2) का सेट बहुत शानदार है, जिसे मशहूर आर्ट डायरेक्टर ओमंग कुमार (Omung Kumar) ने तैयार किया है. वे बिग बॉस की प्रोडक्शन टीम का कई सालों से हिस्सा हैं. शो का दूसरा सीजन अपने अलग अंदाज और फॉरमेट से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है. आप भी देखें सेट की मोहक तस्वीरें.
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Bigg Boss OTT दो Set Photos : बिग बॉस ओटीटी अपने दूसरे सीजन के धमाकेदार शुरुआत के लिए तैयार है. शो का सेट तैयार है, जिसकी थीम पिछले सीजन से काफी अलग और शानदार है. घर की इनसाइड फोटोज देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका दूसरा सीजन कितना दिलचस्प होने वाला है. 'बिग बॉस ओटीटी दो' को सलमान खान होस्ट करेंगे. नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी दो' का सेट बहुत शानदार है, जिसे मशहूर आर्ट डायरेक्टर ओमंग कुमार ने तैयार किया है. वे बिग बॉस की प्रोडक्शन टीम का कई सालों से हिस्सा हैं. शो का दूसरा सीजन अपने अलग अंदाज और फॉरमेट से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है. आप भी देखें सेट की मोहक तस्वीरें. 'बिग बॉस' की टीम हर बार कुछ अलग परोसने के मकसद से कुछ नया लेकर आई है. शो को सलमान खान होस्ट करेंगे, जिसमें मशहूर एक्टर्स और सितारे बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लेने जा रहे हैं. 'बिग बॉस ओटीटी दो' का सेट कंटेस्टेंट के साथ-साथ दर्शकों के लिए किसी सरप्राइज पैकेज से कम नहीं है, जिसमें हर एक कमरा एक अलग कहानी और थीम बयां करता है. 'बिग बॉस ओटीटी दो' का सेट देखकर लगता है कि कंटेस्टेंट के लिए चुनौतियां पहले से काफी मुश्किल होंगी. सलमान खान शो के प्रोमो वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं, 'मैं लेकर आ रहा हूं, बिग बॉस ओटीटी. देखता जाए इंडिया. 'बिग बॉस ओटीटी दो' सत्रह जून से अपनी शानदार शुरुआत के लिए तैयार है. ' नई दिल्लीः 'बिग बॉस ओटीटी दो' का सेट बहुत शानदार है, जिसे मशहूर आर्ट डायरेक्टर ओमंग कुमार ने तैयार किया है. वे बिग बॉस की प्रोडक्शन टीम का कई सालों से हिस्सा हैं. शो का दूसरा सीजन अपने अलग अंदाज और फॉरमेट से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है. आप भी देखें सेट की मोहक तस्वीरें.
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सेलिब्रिटीज को आपने अक्सर किसी न किसी ब्रांड को प्रमोट करते हुए देखा होगा। साल 2018 की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें सभी स्टार्स की ब्रांड वैल्यू के तौर पर लिस्ट निकाली गई है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में इंडियन टीम के कप्तान विराट कोहली ने सभी स्टार्स को मात दे दी है।
इस बात का खुलासा 'डफ एंड फेल्प्स' की 'द बोल्ड एंड द बिर्लिएंट' नामक सेलिब्रिटी ब्रैंड वैल्यूशन रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में विराट कोहली की ब्रांड वेल्यू 1200 करोड़ रुपए रही। इस लिस्ट में विराट कोहली ने ब्रांड वैल्यू के मामले में फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े स्टार्स को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट में विराट कोहली के बाद जिस सेलिब्रिटी का नाम है वह दीपिका पादुकोण हैं।
इस लिस्ट में 20 बॉलीवुड स्टार्स का नाम शामिल है जिन्हें क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों ने भी कड़ी टक्कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पहले नंबर पर विराट कोहली, दूसरे नंबर पर दीपिका पादुकोण, तीसरे नंबर पर अक्षय कुमार, चौथे नंबर पर रणवीर सिंह, पांचवें नंबर पर शाहरुख खान, छठे नंबर पर सलमान खान का नाम है। वहीं अमिताभ बच्चन सातवें नंबर पर, आठवें नंबर पर आलिया भट्ट, नौवें नंबर पर वरुण धवन और 10वें नंबर पर ऋतिक रोशन का नाम है।
इस लिस्ट के अनुसार विराट कोहली की ब्रांड वैल्यू पिछले साल की तुलना में करीब 18 फीसदी बढ़ी। आपको बता दें, साल 2018 नवंबर में विराट कोहली ने करीब 24 अलग-अलग ब्रांड को प्रमोट किया तो वहीं पत्नी अनुष्का के साथ कुल 40 ब्रांड को प्रमोट किया। जबकि दीपिका पादुकोण ने नवंबर साल 2018 में करीब 21 ब्रांड को प्रमोट किया।
रिपोर्ट के मुताबिक सूची के शीर्ष 20 सेलिब्रिटीज की ब्रांड वैल्यू तकरीबन 62 हजार करोड़ रही। इसमें टॉप-10 सेलिब्रिटीज की हिस्सदेारी करीब 75 फीसदी रही। विराट कोहली तो पहले स्थान पर काबिज हैं ही, उनके साथ सचिन तेंदुलकर, एम एस धोनी, पीवी सिंधु की कुल ब्रांड वैल्यू 1700 करोड़ रुपए है। यह टॉप 20 सेलिब्रिटीज की कुल ब्रांड वैल्यू का 27 फीसदी है।
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सेलिब्रिटीज को आपने अक्सर किसी न किसी ब्रांड को प्रमोट करते हुए देखा होगा। साल दो हज़ार अट्ठारह की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें सभी स्टार्स की ब्रांड वैल्यू के तौर पर लिस्ट निकाली गई है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में इंडियन टीम के कप्तान विराट कोहली ने सभी स्टार्स को मात दे दी है। इस बात का खुलासा 'डफ एंड फेल्प्स' की 'द बोल्ड एंड द बिर्लिएंट' नामक सेलिब्रिटी ब्रैंड वैल्यूशन रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल दो हज़ार अट्ठारह में विराट कोहली की ब्रांड वेल्यू एक हज़ार दो सौ करोड़ रुपए रही। इस लिस्ट में विराट कोहली ने ब्रांड वैल्यू के मामले में फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े स्टार्स को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट में विराट कोहली के बाद जिस सेलिब्रिटी का नाम है वह दीपिका पादुकोण हैं। इस लिस्ट में बीस बॉलीवुड स्टार्स का नाम शामिल है जिन्हें क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों ने भी कड़ी टक्कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पहले नंबर पर विराट कोहली, दूसरे नंबर पर दीपिका पादुकोण, तीसरे नंबर पर अक्षय कुमार, चौथे नंबर पर रणवीर सिंह, पांचवें नंबर पर शाहरुख खान, छठे नंबर पर सलमान खान का नाम है। वहीं अमिताभ बच्चन सातवें नंबर पर, आठवें नंबर पर आलिया भट्ट, नौवें नंबर पर वरुण धवन और दसवें नंबर पर ऋतिक रोशन का नाम है। इस लिस्ट के अनुसार विराट कोहली की ब्रांड वैल्यू पिछले साल की तुलना में करीब अट्ठारह फीसदी बढ़ी। आपको बता दें, साल दो हज़ार अट्ठारह नवंबर में विराट कोहली ने करीब चौबीस अलग-अलग ब्रांड को प्रमोट किया तो वहीं पत्नी अनुष्का के साथ कुल चालीस ब्रांड को प्रमोट किया। जबकि दीपिका पादुकोण ने नवंबर साल दो हज़ार अट्ठारह में करीब इक्कीस ब्रांड को प्रमोट किया। रिपोर्ट के मुताबिक सूची के शीर्ष बीस सेलिब्रिटीज की ब्रांड वैल्यू तकरीबन बासठ हजार करोड़ रही। इसमें टॉप-दस सेलिब्रिटीज की हिस्सदेारी करीब पचहत्तर फीसदी रही। विराट कोहली तो पहले स्थान पर काबिज हैं ही, उनके साथ सचिन तेंदुलकर, एम एस धोनी, पीवी सिंधु की कुल ब्रांड वैल्यू एक हज़ार सात सौ करोड़ रुपए है। यह टॉप बीस सेलिब्रिटीज की कुल ब्रांड वैल्यू का सत्ताईस फीसदी है।
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नई दिल्लीः अयोध्या के राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में आज से सुप्रीम कोर्ट में दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू होगी. ये पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ का गठन किया है. जिसमें जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर का नाम शामिल हैं.
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल 2010 में विवादित स्थल के 2. 77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था.
कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का हल आपसी बातचीत के जरिए निकालने की बात कही थी, साथ में यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी मध्यस्थता करने के लिए तैयार है. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया.
विवादित ढांचा मामले पर शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि वो उस जमीन पर दावा छोड़ सकते हैं बशर्ते उन्हें मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह जमीन दे. शिया वक्फ बोर्ड ने अपने हलफनामे में ये भी कहा कि 2011 में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक जमीन के एक तिहाई हिस्से पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का नहीं बल्कि उनका हक है क्योंकि ये मस्जिद मीर बांकी ने बनाई थी, जो एक शिया थे.
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नई दिल्लीः अयोध्या के राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में आज से सुप्रीम कोर्ट में दोपहर दो बजे से सुनवाई शुरू होगी. ये पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ का गठन किया है. जिसमें जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर का नाम शामिल हैं. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल दो हज़ार दस में विवादित स्थल के दो. सतहत्तर एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था. कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का हल आपसी बातचीत के जरिए निकालने की बात कही थी, साथ में यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी मध्यस्थता करने के लिए तैयार है. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया. विवादित ढांचा मामले पर शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि वो उस जमीन पर दावा छोड़ सकते हैं बशर्ते उन्हें मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह जमीन दे. शिया वक्फ बोर्ड ने अपने हलफनामे में ये भी कहा कि दो हज़ार ग्यारह में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक जमीन के एक तिहाई हिस्से पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का नहीं बल्कि उनका हक है क्योंकि ये मस्जिद मीर बांकी ने बनाई थी, जो एक शिया थे.
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जिसको हर हाल में मुस्कुराना आ गया उसे जिन्दगी जीना आ गया।
समस्या को समस्या मान लेना ही समस्या है ।
जिंदगी है उत्सव उत्साह से मनाइए,
वक्त के संग कदम मिला दिल से मुस्कराइए।
संघर्ष से जीवन का श्रृंगार होता है।
हौसलों की कोंपलों को मुरझाने मत देना,सफलता का वृक्ष अपने आप बड़ा हो जाएगा।
आगे बढ़ना है तो सपनों को जिन्दा रखो।
वह माँ-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ आया,अपने भविष्य की नींव रख आया।
जज्बातों और ख्यालों से पेट नहीं भरते।
मुश्किलों से कभी घबराना नहीं ऐ दिल,सबकी किस्मत में नहीं होता गुलाब होना।
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जिसको हर हाल में मुस्कुराना आ गया उसे जिन्दगी जीना आ गया। समस्या को समस्या मान लेना ही समस्या है । जिंदगी है उत्सव उत्साह से मनाइए, वक्त के संग कदम मिला दिल से मुस्कराइए। संघर्ष से जीवन का श्रृंगार होता है। हौसलों की कोंपलों को मुरझाने मत देना,सफलता का वृक्ष अपने आप बड़ा हो जाएगा। आगे बढ़ना है तो सपनों को जिन्दा रखो। वह माँ-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ आया,अपने भविष्य की नींव रख आया। जज्बातों और ख्यालों से पेट नहीं भरते। मुश्किलों से कभी घबराना नहीं ऐ दिल,सबकी किस्मत में नहीं होता गुलाब होना।
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नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव तेजी से नजदीक आ रहे है और आज चुनाव आयोग कई राज्यों में चुनावों की तारीखों की भी घोषणा करने जा रहा है। ऐसे में देश की तमाम राजनैतिक पार्टियों ने भी इन चुनावों को लेकर अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी विपक्ष की एकता रैली के लिए कई विपक्षी पार्टियों को न्योता भेज दिया है।
आगामी चुनावों के मद्देनजर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्ष की पकड़ मजबूत करने के लिए आयोजित इस रैली के लिए अगले साल 19 जनवरी के दिन को निर्धारित किया है। इस रैली का आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकत्ता में ही किया जायेगा। इस रैली के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश की तक़रीबन सभी विपक्षी पार्टियों को न्योता भेजा था। ममता के इस न्योते को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने स्वीकार भी कर लिया है।
इस बात की पुष्टि खुद ममता बनर्जी ने हाल ही में आयोजित की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बाते करते हुए कही है। इस दौरान उन्होंने बीएसपी चीफ मायावती द्वारा कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन न बनाने के बयान को लेकर भी बात की। इस मामले में उन्होंने कहा कि वे मायावती के इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती लेकिन वे 19 जनवरी को होने वाली रैली के लिए कांग्रेस और बीएसपी को न्योता जरूर देना चाहेगी।
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नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव तेजी से नजदीक आ रहे है और आज चुनाव आयोग कई राज्यों में चुनावों की तारीखों की भी घोषणा करने जा रहा है। ऐसे में देश की तमाम राजनैतिक पार्टियों ने भी इन चुनावों को लेकर अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी विपक्ष की एकता रैली के लिए कई विपक्षी पार्टियों को न्योता भेज दिया है। आगामी चुनावों के मद्देनजर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्ष की पकड़ मजबूत करने के लिए आयोजित इस रैली के लिए अगले साल उन्नीस जनवरी के दिन को निर्धारित किया है। इस रैली का आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकत्ता में ही किया जायेगा। इस रैली के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश की तक़रीबन सभी विपक्षी पार्टियों को न्योता भेजा था। ममता के इस न्योते को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने स्वीकार भी कर लिया है। इस बात की पुष्टि खुद ममता बनर्जी ने हाल ही में आयोजित की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बाते करते हुए कही है। इस दौरान उन्होंने बीएसपी चीफ मायावती द्वारा कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन न बनाने के बयान को लेकर भी बात की। इस मामले में उन्होंने कहा कि वे मायावती के इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती लेकिन वे उन्नीस जनवरी को होने वाली रैली के लिए कांग्रेस और बीएसपी को न्योता जरूर देना चाहेगी।
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सूर्य था, न चन्द्रमा था, न तारे थें, न अग्नि थी, न दिन था और न रात्रि थी । जैसे चन्द्रमा, सूर्य और तारों का प्रकाश होता है, तैसे ही सब अपने प्रकाश से प्रकाशते थे । उनको देखकर मैं आगे और सृष्टि में गया तो वहाँ क्या देखा कि आकाश ही से जीव उत्पन्न होकर आकाश ही में लीन होते हैं और इकट्ठे ही सब उपजते और इकट्ठे ही सब लीन हो जाते हैं, न वहाँ मनुष्य हैं; न देवता हैं, न वेद हैं; न शाख हैं; न. जगत् है - इनसे विलक्षण ही प्रकार है । हे राजन् ! इस प्रकार मैंने कई सृष्टियाँ देखी हैं जो मुझको स्मरण आती हैं। आगे और सृष्टि में गया तो वहाँ क्या देखा कि सब जीव एक ही समान हैं; न किसी को रोग है और न किसी को दुःख है-सब एक से गङ्गा के तीर पर बैठे हैं। हे राजन् ! एक और आश्चर्य मैंने देखा है सो भी सुनो । एक सृष्टि में मैं गया तो वहाँ क्षीरसमुद्र मन्दराचल से मथा जाता था 1. एक ओर विष्णु भगवान् और देवता थे और मन्दराचल पर्वत रत्नों से जड़ा हुआ शेषनाग से रस्सी की नाई लपिटा हुआ था; मथने के निमित्त दूसरी ओर दैत्य लगे थे और बड़ा सुन्दर शब्द होता था। वहाँ वह कौतुक देखकर मैं. आगे गया तो एक और सृष्टि देखी जहाँ मनुष्य आकाश में उड़ते फिरते थे और देवता मनुष्य की नाई पृथ्वी पर विचरते और वेदशास्त्र जानते थे । हे राजन् ! एक और आश्चर्य मैंने देखा सो भी सुनो । एक सृष्टि में मैं जा निकला तो वहाँ मन्दराचल पर्वत पर कल्पतरु का वन था और उसमें मदनका नाम एक अप्सरा रहती थी । वहाँ जाकर मैं सो रहा तो ज्यों ही रात्रि का समय आया कि वह अप्सरा मेरे कण्ठ में आ लगी । तब मैंने जागकर उसको देखा और कहा कि हे सुन्दरी !. तूने मुझको किस निमित्त जगाया ? मैं तो सुख से सो रहा था । तब उस अप्सरा ने कहा कि हे राजन् ! मैंने इस निमित्त तुझको जगाया है कि चन्द्रमा उदय हुआ है और चन्द्रकान्तमणि चन्द्रमा को देखकर स्रवेगी और नदी की नाई प्रवाह चलेगा; ऐसा न हो कि उसमें तू वह जावे । हे राजन्, दशरथ ! इस प्रकार उसने कहा ही था कि नदी का प्रवाह चलने लगा । तब वह अप्सरा उस प्रवाह को देखकर मुझे आकाश
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सूर्य था, न चन्द्रमा था, न तारे थें, न अग्नि थी, न दिन था और न रात्रि थी । जैसे चन्द्रमा, सूर्य और तारों का प्रकाश होता है, तैसे ही सब अपने प्रकाश से प्रकाशते थे । उनको देखकर मैं आगे और सृष्टि में गया तो वहाँ क्या देखा कि आकाश ही से जीव उत्पन्न होकर आकाश ही में लीन होते हैं और इकट्ठे ही सब उपजते और इकट्ठे ही सब लीन हो जाते हैं, न वहाँ मनुष्य हैं; न देवता हैं, न वेद हैं; न शाख हैं; न. जगत् है - इनसे विलक्षण ही प्रकार है । हे राजन् ! इस प्रकार मैंने कई सृष्टियाँ देखी हैं जो मुझको स्मरण आती हैं। आगे और सृष्टि में गया तो वहाँ क्या देखा कि सब जीव एक ही समान हैं; न किसी को रोग है और न किसी को दुःख है-सब एक से गङ्गा के तीर पर बैठे हैं। हे राजन् ! एक और आश्चर्य मैंने देखा है सो भी सुनो । एक सृष्टि में मैं गया तो वहाँ क्षीरसमुद्र मन्दराचल से मथा जाता था एक. एक ओर विष्णु भगवान् और देवता थे और मन्दराचल पर्वत रत्नों से जड़ा हुआ शेषनाग से रस्सी की नाई लपिटा हुआ था; मथने के निमित्त दूसरी ओर दैत्य लगे थे और बड़ा सुन्दर शब्द होता था। वहाँ वह कौतुक देखकर मैं. आगे गया तो एक और सृष्टि देखी जहाँ मनुष्य आकाश में उड़ते फिरते थे और देवता मनुष्य की नाई पृथ्वी पर विचरते और वेदशास्त्र जानते थे । हे राजन् ! एक और आश्चर्य मैंने देखा सो भी सुनो । एक सृष्टि में मैं जा निकला तो वहाँ मन्दराचल पर्वत पर कल्पतरु का वन था और उसमें मदनका नाम एक अप्सरा रहती थी । वहाँ जाकर मैं सो रहा तो ज्यों ही रात्रि का समय आया कि वह अप्सरा मेरे कण्ठ में आ लगी । तब मैंने जागकर उसको देखा और कहा कि हे सुन्दरी !. तूने मुझको किस निमित्त जगाया ? मैं तो सुख से सो रहा था । तब उस अप्सरा ने कहा कि हे राजन् ! मैंने इस निमित्त तुझको जगाया है कि चन्द्रमा उदय हुआ है और चन्द्रकान्तमणि चन्द्रमा को देखकर स्रवेगी और नदी की नाई प्रवाह चलेगा; ऐसा न हो कि उसमें तू वह जावे । हे राजन्, दशरथ ! इस प्रकार उसने कहा ही था कि नदी का प्रवाह चलने लगा । तब वह अप्सरा उस प्रवाह को देखकर मुझे आकाश
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
अंधा युग, धर्मवीर भारती द्वारा रचित हिंदी काव्य नाटक है। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। इसमें युद्ध और उसके बाद की समस्याओं और मानवीय महत्वकांक्षा को प्रस्तुत किया गया है। . व्यास सम्मान भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद दूसरा सबसे बड़ा साहित्य-सम्मान है। इस पुरस्कार को १९९१ में के के बिड़ला फाउंडेशन ने प्रारंभ किया था। इस पुरस्कार में ३ लाख रुपए नकद प्रदान किए जाते हैं। १० वर्षों के भीतर प्रकाशित हिन्दी की कोई भी साहित्यिक कृति इस पुरस्कार की पात्र हो सकती है। अज्ञेय, कुंवर नारायण तथा केदार नाथ सिंह को भी इस पुरस्कार से अलंकृत किया जा चुका है। .
अंधा युग और व्यास सम्मान आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): धर्मवीर भारती।
धर्मवीर भारती (२५ दिसंबर, १९२६- ४ सितंबर, १९९७) आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे। डॉ धर्मवीर भारती को १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास गुनाहों का देवता सदाबहार रचना मानी जाती है। सूरज का सातवां घोड़ा को कहानी कहने का अनुपम प्रयोग माना जाता है, जिस श्याम बेनेगल ने इसी नाम की फिल्म बनायी, अंधा युग उनका प्रसिद्ध नाटक है।। इब्राहीम अलकाजी, राम गोपाल बजाज, अरविन्द गौड़, रतन थियम, एम के रैना, मोहन महर्षि और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है। .
अंधा युग 7 संबंध है और व्यास सम्मान 40 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 2.13% है = 1 / (7 + 40)।
यह लेख अंधा युग और व्यास सम्मान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अंधा युग, धर्मवीर भारती द्वारा रचित हिंदी काव्य नाटक है। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। इसमें युद्ध और उसके बाद की समस्याओं और मानवीय महत्वकांक्षा को प्रस्तुत किया गया है। . व्यास सम्मान भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद दूसरा सबसे बड़ा साहित्य-सम्मान है। इस पुरस्कार को एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में के के बिड़ला फाउंडेशन ने प्रारंभ किया था। इस पुरस्कार में तीन लाख रुपए नकद प्रदान किए जाते हैं। दस वर्षों के भीतर प्रकाशित हिन्दी की कोई भी साहित्यिक कृति इस पुरस्कार की पात्र हो सकती है। अज्ञेय, कुंवर नारायण तथा केदार नाथ सिंह को भी इस पुरस्कार से अलंकृत किया जा चुका है। . अंधा युग और व्यास सम्मान आम में एक बात है : धर्मवीर भारती। धर्मवीर भारती आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। वे एक समय की प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे। डॉ धर्मवीर भारती को एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास गुनाहों का देवता सदाबहार रचना मानी जाती है। सूरज का सातवां घोड़ा को कहानी कहने का अनुपम प्रयोग माना जाता है, जिस श्याम बेनेगल ने इसी नाम की फिल्म बनायी, अंधा युग उनका प्रसिद्ध नाटक है।। इब्राहीम अलकाजी, राम गोपाल बजाज, अरविन्द गौड़, रतन थियम, एम के रैना, मोहन महर्षि और कई अन्य भारतीय रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है। . अंधा युग सात संबंध है और व्यास सम्मान चालीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक दो.तेरह% है = एक / । यह लेख अंधा युग और व्यास सम्मान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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Ric Flair & Becky Lynch: WWE सुपरस्टार सैथ रॉलिंस (Seth Rollins) ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी बैकी लिंच (Becky Lynch) और 16 बार के वर्ल्ड चैंपियन रिक फ्लेयर (Ric Flair) के बीच चल रही अनबन खत्म हो गई है। उन्होंने चीज़ों को सुलझा दिया है।
Pat McAfee Show शो पर सैथ रॉलिंस नज़र आए थे। इसी बीच उन्होंने बताया कि रिक फ्लेयर और बैकी लिंच के बीच असल जीवन चल रही अनबन अब खत्म हो गई है। उन्होंने इसी विषय पर बात करते हुए कहा,
"रिक फ्लेयर और बैकी लिंच के बीच की लड़ाई खत्म हो गई है। मैं इस चीज़ को अभी सामने रख रहा हूँ। रिक और बैकी की अनबन एन्ड हो चुकी है। ईमानदारी से बताऊं, तो मेरी पत्नी (बैकी लिंच) को कभी रिक से दिक्कत नहीं थी। रिक को उनसे दिक्कत थी और उन्होंने आकर मुझसे और बैकी से माफी भी मांगी। मुझे लगता है कि यह शानदार चीज़ रही क्योंकि मुझे रिक फ्लेयर बहुत पसंद हैं और मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है। अच्छी बात यह है कि उन्होंने अपना अभिमान अलग रखा और बात की। Raw XXX में हमारे बीच एक अच्छा पल देखने को मिला। वो नेचर बॉय हैं। वो इतिहास के सबसे महान स्टार्स में से एक हैं और वो किसी भी रेसलिंग लिस्ट के माउंट रशमोर में रहेंगे। "
आप नीचे पूरी वीडियो क्लिप देख सकते हैंः
बैकी लिंच ने कुछ सालों पहले अपने कैरेक्टर में बड़ा बदलाव किया था और इसके बाद वो फैन फेवरेट बन गई थीं। उन्होंने यहां से अपना निकनेम 'द मैन' रख लिया था। हालांकि, यह निकनेम WWE हॉल ऑफ फेमर रिक फ्लेयर का था। इसी कारण उन्होंने लिंच पर बिना अनुमति के नाम को इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते सही नहीं थे। हालांकि, अच्छी चीज़ यह है कि फ्लेयर और लिंच को एक-दूसरे से अब कोई दिक्कत नहीं है।
WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
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Ric Flair & Becky Lynch: WWE सुपरस्टार सैथ रॉलिंस ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी बैकी लिंच और सोलह बार के वर्ल्ड चैंपियन रिक फ्लेयर के बीच चल रही अनबन खत्म हो गई है। उन्होंने चीज़ों को सुलझा दिया है। Pat McAfee Show शो पर सैथ रॉलिंस नज़र आए थे। इसी बीच उन्होंने बताया कि रिक फ्लेयर और बैकी लिंच के बीच असल जीवन चल रही अनबन अब खत्म हो गई है। उन्होंने इसी विषय पर बात करते हुए कहा, "रिक फ्लेयर और बैकी लिंच के बीच की लड़ाई खत्म हो गई है। मैं इस चीज़ को अभी सामने रख रहा हूँ। रिक और बैकी की अनबन एन्ड हो चुकी है। ईमानदारी से बताऊं, तो मेरी पत्नी को कभी रिक से दिक्कत नहीं थी। रिक को उनसे दिक्कत थी और उन्होंने आकर मुझसे और बैकी से माफी भी मांगी। मुझे लगता है कि यह शानदार चीज़ रही क्योंकि मुझे रिक फ्लेयर बहुत पसंद हैं और मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है। अच्छी बात यह है कि उन्होंने अपना अभिमान अलग रखा और बात की। Raw XXX में हमारे बीच एक अच्छा पल देखने को मिला। वो नेचर बॉय हैं। वो इतिहास के सबसे महान स्टार्स में से एक हैं और वो किसी भी रेसलिंग लिस्ट के माउंट रशमोर में रहेंगे। " आप नीचे पूरी वीडियो क्लिप देख सकते हैंः बैकी लिंच ने कुछ सालों पहले अपने कैरेक्टर में बड़ा बदलाव किया था और इसके बाद वो फैन फेवरेट बन गई थीं। उन्होंने यहां से अपना निकनेम 'द मैन' रख लिया था। हालांकि, यह निकनेम WWE हॉल ऑफ फेमर रिक फ्लेयर का था। इसी कारण उन्होंने लिंच पर बिना अनुमति के नाम को इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते सही नहीं थे। हालांकि, अच्छी चीज़ यह है कि फ्लेयर और लिंच को एक-दूसरे से अब कोई दिक्कत नहीं है। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
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कृषि राज्य मंत्री श्री हरीश रावत ने आज 'इंडो-आसियान एक्सपोर्ट पोटेंशियल ऑफ एग्रिक्लचर प्रोडक्ट्स - ग्रोथ पोटेंशियल एंड वे फॉरवर्ड' पर संगोष्ठी का उद्धाटन किया। इस संगोष्ठी का आयोजन आसियान-भारत कृषि एवं वन्य मंत्रियों की दूसरी बैठक (17-19 अक्तूबर, 2012) के साथ हुआ है।
आसियान देशों और भारत के बीच सहयोग की संभावनाओं के बारे में श्री हरीश रावत ने कहा कि कई आसियान सदस्य देश ऐसी जिंसों का उत्पादन करते हैं, जिन्हें भारत बड़ी मात्रा में आयात करता है। आसियान देश जिन जिंसों को आयात करता है, उनके लिए भारत एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि आसियान देश और भारत कृषि जिंसों के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लाभान्वित हो सकते हैं।
संगोष्ठी को आसियान देशों के मंत्रियों, योजना आयोग के सदस्य श्री अभिजित सेन और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एस. अय्यप्पन ने भी संबोधित किया।
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कृषि राज्य मंत्री श्री हरीश रावत ने आज 'इंडो-आसियान एक्सपोर्ट पोटेंशियल ऑफ एग्रिक्लचर प्रोडक्ट्स - ग्रोथ पोटेंशियल एंड वे फॉरवर्ड' पर संगोष्ठी का उद्धाटन किया। इस संगोष्ठी का आयोजन आसियान-भारत कृषि एवं वन्य मंत्रियों की दूसरी बैठक के साथ हुआ है। आसियान देशों और भारत के बीच सहयोग की संभावनाओं के बारे में श्री हरीश रावत ने कहा कि कई आसियान सदस्य देश ऐसी जिंसों का उत्पादन करते हैं, जिन्हें भारत बड़ी मात्रा में आयात करता है। आसियान देश जिन जिंसों को आयात करता है, उनके लिए भारत एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि आसियान देश और भारत कृषि जिंसों के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लाभान्वित हो सकते हैं। संगोष्ठी को आसियान देशों के मंत्रियों, योजना आयोग के सदस्य श्री अभिजित सेन और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एस. अय्यप्पन ने भी संबोधित किया।
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कानपुर। महिलाओं को वोटिंग का अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश न्यूजीलैंड है। न्यूजीलैंड सरकार की एक आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 28 नवंबर, 1893 को न्यूजीलैंड ने महिलाओं को पहली बार मतदान करने का अधिकार दिया था। बता दें कि महिलाओं को यह अधिकार दिलवाने में केट शेफर्ड नाम की एक सोशल एक्टिविस्ट ने बड़ी भूमिका निभाई थी। केट ने 1891, 1892 और 1893 में वोटिंग के लिए आंदोलन किये थे। काफी संघर्षों और प्रदर्शन के बाद न्यूजीलैंड की सरकार को केट की मांगे पूरी करनी पड़ी और इसी तरह वहां की महिलाओं को मतदान करने का अधिकार मिला गया।
न्यूजीलैंड में 1893 में महिलाओं ने वोट डालने का अधिकार तो पा लिया था लेकिन चुनावों में बतौर उम्मीदवार खड़े होने के लिए उन्हे 1919 में अनुमति मिली थी। बता दें कि न्यूजीलैंड से पहले कुछ देशों ने महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार दे दिया था लेकिन उसके साथ कुछ शर्तें भी रख दी थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो शर्तें ये थीं कि चुनाव में वही महिलाएं वोटिंग कर सकती हैं, जिनके पास अधिक संपत्ति हो। इसका मतलब है कि सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मतदान करने का अधिकार मिला, जो संपत्ति वालीं थीं। न्यूजीलैंड पहला ऐसा देश बना, जिसनें सभी महिलाओं को वोटिंग करने की आजादी दी।
भारत में आजादी के साथ ही ऐसा अधिकारइसके बाद धीरे-धीरे दूसरे देशों ने भी इस रास्ते को अपनाया। न्यूजीलैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया ने 1902 में महिलाओं को ऐसे अधिकार दिए। उसके बाद फिनलैंड ने 1906 में इसकी शुरुआत की, जबकि नॉर्वे ने 1913 में महिलाओं को मताधिकार दिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि अमेरिका जैसे देश में भी पहले महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार नहीं था, वहां 1919 में ऐसा कानून लागू किया गया। अगर भारत की बात करें तो, यहां आजादी मिलने के बाद से ही महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार दे दिया गया था।
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कानपुर। महिलाओं को वोटिंग का अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश न्यूजीलैंड है। न्यूजीलैंड सरकार की एक आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, अट्ठाईस नवंबर, एक हज़ार आठ सौ तिरानवे को न्यूजीलैंड ने महिलाओं को पहली बार मतदान करने का अधिकार दिया था। बता दें कि महिलाओं को यह अधिकार दिलवाने में केट शेफर्ड नाम की एक सोशल एक्टिविस्ट ने बड़ी भूमिका निभाई थी। केट ने एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे, एक हज़ार आठ सौ बानवे और एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में वोटिंग के लिए आंदोलन किये थे। काफी संघर्षों और प्रदर्शन के बाद न्यूजीलैंड की सरकार को केट की मांगे पूरी करनी पड़ी और इसी तरह वहां की महिलाओं को मतदान करने का अधिकार मिला गया। न्यूजीलैंड में एक हज़ार आठ सौ तिरानवे में महिलाओं ने वोट डालने का अधिकार तो पा लिया था लेकिन चुनावों में बतौर उम्मीदवार खड़े होने के लिए उन्हे एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में अनुमति मिली थी। बता दें कि न्यूजीलैंड से पहले कुछ देशों ने महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार दे दिया था लेकिन उसके साथ कुछ शर्तें भी रख दी थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो शर्तें ये थीं कि चुनाव में वही महिलाएं वोटिंग कर सकती हैं, जिनके पास अधिक संपत्ति हो। इसका मतलब है कि सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मतदान करने का अधिकार मिला, जो संपत्ति वालीं थीं। न्यूजीलैंड पहला ऐसा देश बना, जिसनें सभी महिलाओं को वोटिंग करने की आजादी दी। भारत में आजादी के साथ ही ऐसा अधिकारइसके बाद धीरे-धीरे दूसरे देशों ने भी इस रास्ते को अपनाया। न्यूजीलैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया ने एक हज़ार नौ सौ दो में महिलाओं को ऐसे अधिकार दिए। उसके बाद फिनलैंड ने एक हज़ार नौ सौ छः में इसकी शुरुआत की, जबकि नॉर्वे ने एक हज़ार नौ सौ तेरह में महिलाओं को मताधिकार दिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि अमेरिका जैसे देश में भी पहले महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार नहीं था, वहां एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में ऐसा कानून लागू किया गया। अगर भारत की बात करें तो, यहां आजादी मिलने के बाद से ही महिलाओं को वोटिंग करने का अधिकार दे दिया गया था।
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आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' पर शनिवार को दूसरे दिन राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक की कई दिग्गज हस्तियां शिरकत की. सबसे पहले एजेंडा आजतक के मंच पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पहुंचे. उन्होंने राज्य में होने वाले चुनाव को लेकर अपनी बात रखी. इसके अलावा राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा. इसके बाद एक्टर आयुष शर्मा ने अपनी फिल्म अंतिम और एक्टर कार्तिक आर्यन ने धमाका के बारे में जानकारी दी. फिर महबूबा मुफ्ती से लेकर अश्विनी वैष्णव तक कई दिग्गजों ने अपने विचार रखे.
एजेंडा आजतक पर आज 15 दिग्गजों ने अपने विचार रखे. राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत तक, कई हस्तियों ने बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी. दिन की शुरुआत पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से हुई. चन्नी के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला. इसके बाद वीर सावरकर पर बहस हुई और कई इतिहासकारों ने अपने विचार रखे. राजनीति मंथऩ के बाद मनोरंजन जगत से अंतिम के आयुष शर्मा ने दस्तक दी. फिल्म पर तो बात की ही, सलमान खान संग रिश्तों पर भी रोशनी डाली. आयुष के बाद एजेंडा आजतक पर कार्तिक आर्यन का भी धमाका देखने को मिला जिन्होंने ना सिर्फ अपनी फिल्म पर बात की, बल्कि खूब मौज-मस्ती भी करते दिख गए. बाद में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने दस्तक दी और उनकी अयोध्या वाली किताब पर बहस हुई. मुख्तार अब्बास नकवी ने भी उनकी हर सफाई पर सवाल उठाए और तीखा प्रहार किया.
इस तीखी बहस के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी अपने विचार रखे. न्याय को लेकर सरकार की योजनाएं बताईं और जजों की नियुक्ति पर भी सफाई पेश की. इसके बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा और फिर उन्हीं के आरोपों क जवाब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिए. इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे का भविष्य बताया और बुलेट ट्रेन पर भी बात की. इन राजनीतिक चर्चाओं के बीच सारा अली खान ने भी अपनी फिल्म अतरंगी रे को प्रमोट किया. सबसे आखिर में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनावी मौसम में अपनी पार्टी की रणनीति बताई और विपक्ष पर भी निशाना साधा.
यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी अध्यक्ष ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि आगामी चुनाव में बीजेपी की 300 से ज्यादा सीटें आने वाली हैं. उन्होंने सीएम योगी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा है कि ये जीत एकतरफा होने वाली है और पूरे विपक्ष का सूपड़ा साफ हो जाएगा.
यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी की सक्रियता पर जेपी नड्डा ने तंज कसा है. उनके मुताबिक चुनाव में आने का सभी को अधिकार है. अच्छी बात है कि प्रियंका गांधी भी प्रचार कर रही हैं. लेकिन उनके मुताबिक लिखे हुए भाषणों से राजनीति नहीं की जा सकती. जोर देकर कहा गया है कि प्रियंका रीडर हैं,लीडर नहीं.
किसान आंदोलन पर जेपी नड्डा ने कहा है कि उनकी सरकार समझाने में पूरी तरह सक्षम है. लेकिन उन्हें ये ही नहीं पता किसान क्या समझना चाहते हैं. कई बार उनसे पूछा गया था कि कौन से क्लॉज में उन्हें दिक्कत है, उन्हें क्या समझ नहीं आ रहा है. लेकिन किसान सिर्फ कानून वापसी पर अटक गए थे.
किसान आंदोलन पर बीजेपी अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि इसका चुनाव पर कोई असर नहीं होने वाला है. उनके मुताबिक ये कोई पूरे भारत का आंदोलन नहीं था. सिर्फ एक वर्ग प्रदर्शन कर रहा था. बीजेपी अध्यक्ष ने ये भी कहा है कि किसानों की मांग पर मंथन किया जाएगा. कमेटी बनी हुई है, वहां पर बातचीत की जाएगी.
जिन्ना विवाद पर जेपी नड्डा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि ऐसी बयानबाजी सपा प्रमुख की मानसिकता दिखता है. उनके मुताबिक बीजेपी के लिए अखिलेश यादव कोई चैलेंज नहीं हैं. लेकिन उनकी मानसिकता जरूर चैलेंज है. वो मानसिकता का ही हम विरोध करते हैं और इसे चुनाव में चैलेंज भी करेंगे.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि कोरोना काल में सिर्फ बीजेपी के कार्यकर्ता ही जमीन पर दिखे. पूरा विपक्ष गायब हो गया था और लोगों की मदद करने के लिए भाजपा के लाखों कार्यकर्ता आगे आए थे. हर तरह की मदद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुश्किल समय में की थी.
एक्ट्रेस सारा अली खान की फिल्म अतरंगी रे रिलीज होने जा रही है. फिल्म में सारा अली खान, अक्षय कुमार और धनुष संग काम कर रही हैं. सारा मानती हैं कि दोनों अक्षय और धनुष बड़े स्टार हैं. एक अगर साउथ का थलाइवी है तो दूसरा दक्षिण का थलाइवी है. उनके मुताबिक धनुष संग उन्होंने काफी मजा किया, वहीं अक्षय की डेडिकेशन ने उन्हें इंप्रेस किया.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि रेलवे को बेचने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि ऐसा सवाल पूछना ही गलत है क्योंकि ये कभी नहीं होगा. उन्होंने सभी को गारंटी देते हुए कह दिया है कि निजीकरण का मतलब ये नहीं कि रेलवे को बेच दिया जाएगा.
मोदी सरकार के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से बात की है. उनके मुताबिक काम तेजी से हो रहा है लेकिन अभी तक महाराष्ट्र में जमीन अधिकरण को लेकर दिक्कत है. वहीं जापानी कंपनियों की कार्यशैली की वजह से भी देरी हो रही है. वे सबकुछ रेडी चाहते हैं, उसके बाद ही कुछ काम शुरू किया जाएगा. उम्मीद जताई गई है कि 2026 तक लोग बुलेट ट्रेन से ट्रैवल कर पाएंगे.
बॉलीवुड में कैंसिल कल्चर काफी चलता है. कभी कोई एक्टर विवादों में आ जाए तो प्रोजेक्ट हाथ से चले जाते हैं. अब इस कल्चर पर रवीना टंडन ने कहा है कि उन्हें इस इंडस्ट्री में तीस साल हो गए हैं. आज तक कोई उन्हें काम करने से नहीं रोक पाया है. वे यहां तक कह गई हैं कि आगे भी उन्हें कोई काम करने से नहीं रोक सकता. वे मानती हैं कि बोलने का हक सभी को है और किसी के काम को ऐसे ही नहीं छीना जा सकता.
एक्टर आशुतोष राणा ने अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ा बयान दे दिया है. उनके मुताबिक बोलना तो इंसान दो साल की उम्र में ही सीख जाता है, लेकिन ये समझने में पूरी जिंदगी बीत जाती है कि क्या बोलना चाहिए, कितना बोलना चाहिए, कब बोलना चाहिए.
जब ओम बिरला से सवाल पूछा गया कि क्या सदन में राहुल गांधी को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जाता, इस पर लोकसभा स्पीकर ने दो टूक जवाब दे दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि कांग्रेस नेता को हर बार बोलने का पूरा मौका दिया गया है. उनके मुताबिक कई बार लिस्ट में उनका नाम नहीं होता, लेकिन फिर भी बात रखने का अवसर दिया जाता है. विपक्ष के नेता खुद बोलते हैं कि बोलने का पूरा मौका दिया जाता है. हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर घंटों मंथन होता है.
जब से राज्यसभा से 12 सासंदों को निलंबित किया गया है, ये विवाद बढ़ता जा रहा है और विपक्ष लगातार अपना विरोध कर रहा है. अब जब ये सवाल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से पूछा गया तो उन्होंने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया. उनके मुताबिक कुछ नियम होते हैं और वे उन्हें नहीं तोड़ सकते. दूसरे सदन में क्या हो रहा है, क्या किया जा रहा है, इसकी चर्चा कभी भी लोकसभा में नहीं की जा सकती.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बनने जा रहे नए संसद भवन को काफी अहम माना है. उनके मुताबिक अगले 100 साल को ध्यान में रखते हुए इसका निर्माण हो रहा है जहां पर हर नए सदस्य के लिए बैठने का भी इंतजाम रहेगा और सभी खुलकर अपने विचार रखेंगे. उनके मुताबिक भारत का नया संसद भवन आजादी का भी प्रतीक होने वाला है. वो संसद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ताकत दिखाएगा.
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में जो किलिंग होती हैं, वो गलत है. उसकी कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए. हर हमले का मुंहतोड़ जवाब भी दिया जाएगा. लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया एक ऐसा इकोसिस्टम भी सक्रिय है जो ऐसी किलिंग को बढ़ावा देना चाहिए. जो ऐसा काम कर रहे हैं, वो ज्यादा बड़े दोषी हैं, उनसे ज्यादा खतरा है.
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने साफ कर दिया है कि नए भारत में सिर्फ उन्हीं लोगों से बात की जाएगी जिनकी आस्था भारत के तिरंगे में रहेगी. जोर देकर कहा गया कि सॉफ्ट सेपरेटिज्म का जमाना लद चुका है. उनके मुताबिक जो भारत के हक की, कश्मीर के हक की बात करेगा, उनके सुझाव माने जाएंगे. उन्होंने ये भी कहा कि हमारी सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए काफी काम कर रही है. अगले तीन महीने में सभी को जमीन पर उसर दिखने लगेगा.
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि पिछले दो सालों में घाटी का काफी विकास किया गया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए सड़कों का जाल बिछाया गया है. अब यहां पर निवेश होता है. लेकिन जिनका चश्मा कमजोर है, उन्हें विकास दिखाई नहीं देता है. लेकिन हम लोग सिर्फ आम कश्मीरी के लिए काम करते हैं. विकास वहीं सही है जो अंजाम तक पहुंचता है.
पीडीप प्रमुख ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि वर्तमान सरकार ने घाटी के लोगों का भरोसा तोड़ा है. उनकी माने तो 370 हटने के बाद भी कश्मीर में कुछ नहीं बदला है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कश्मीर आज भारत का हिस्सा है, तो उसमें बड़ा हाथ जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी जैसे बड़े नेताओं का है. उन्होंने उस समय के और भी कई कांग्रेस नेताओं को इसका श्रेय दिया है. वे मानती हैं कि अगर आज के नेता तब होते तो शायद कश्मीर, पाकिस्तान में होता.
महबूबा मुफ्ती ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये सरकार गोडसे वाला कश्मीर बनाना चाहती है. ये हमारा गांधी वाला हिंदुस्तान नहीं है. लेकिन आज की सरकार ने अपनी राजनीति के लिए कश्मीर को कुर्बान कर दिया. मुफ्ती की माने तो पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के समय जरूर कश्मीर समस्या पर काम हुआ था. पाकिस्तान से बात हुई थी, हुर्रियत के साथ मंथन हुआ था, सीज फायर लागू किया गया था. लेकिन अब कश्मीर की कोई नहीं सुनता.
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि वर्तमान सरकार ने कश्मीर के लिए कुछ नहीं किया. देश की एक मुस्लिम मेजोरिटी स्टेट थी, लेकिन अब उसे भी नहीं बचाया गया. मुफ्ती के मुताबिक ये सरकार गोडसे वाला कश्मीर बनाना चाहती है. ये गांधी का हिंदुस्तान नहीं है. ये नया जरूर है लेकिन आदर्शों वाला नहीं है.
जवानों के साथ दिवाली मनाने के सवाल पर किरन रिजिजू ने कहा, मैं उन लोगों के साथ दिवाली मनाता हूं, जो अपने परिवार से साथ कभी दिवाली नहीं मनाते. रिजिजू ने कहा, ऐसा मै सिर्फ अपनी देश के प्रति सेवा के लिए करता हूं. हालांकि, मेरे बच्चे हमेशा कहते हैं कि पापा आप हमारे साथ दिवाली क्यों नहीं मनाते.
रिजिजू ने कहा, लोगों की समस्याओं का हल निकालना ही हमारी प्राथमिकता है. जब मुझसे कोई जज, वकील या आम आदमी मिलना चाहता है, तो बहुत ओपन माइंड से उनसे मिलता हूं. ताकि लोगों की बात सुनकर सरल तरीके से उनका हल निकाल सकूं. जहां भी मैंने काम किया, जहां मंत्रालय में रहा, मैं इसी तरह से काम करता हूं.
सलमान खुर्शीद ने कहा, संविधान सभी धर्मों को एक मानता है. अयोध्या के फैसले से पहले हम सबने कहा था कि इसे स्वीकार करेंगे. मेरी किताब कहती है कि अयोध्या के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समझे के ये फैसला सही है. मैं याद दिला दूं कि यह फैसला सिर्फ मंदिर पर नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक मंदिर बनेगा और एक मस्जिद बनेगी. मेरा घर किसने जलाया, कोई इसका जवाब दे दे. क्या ये लोग बोको हरम से आए थे. आईएसआईएस के थे. या फिर हिंदुत्व वाले थे. कोई जवाब दे दे.
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, हिंदुत्व हिंदुस्तान की आत्मा है और इसी संस्कृति और संस्कार का नतीजा है कि जब हिंदुस्तान बंटा तो एक भारत बना और एक पाकिस्तान. हिंदुस्तान की संसद में वसुधैव कुटुम्बकम लिखा है. भारत की संस्कृति का ही नतीजा है कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना. लेकिन पाकिस्तान धार्मिक कट्टरपंथ बना. जिस समय पाकिस्तान बना, वहां 26% अल्पसंख्यक थे, आज 2% बजे हैं. भारत में 8% अल्पसंख्यक थे. आज ये बढ़कर 28% तक पहुंच गया है. यानी भारत की संस्कृति की वजह से किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को नुकसान नहीं पहुंचाया गया.
उन्होंने कहा, अयोध्या पर फैसला आया. सभी ने स्वीकार किया. किसी ने खुशी नहीं मनाई और किसी ने दुख नहीं जताया. इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि अगर अयोध्या को लेकर इस तरह की बात फैलाई जा रही है, तो यह सब साजिश के तहत किया जा रहा है.
धर्मयुद्ध सेशन में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, आग लगी है, उसे बुझाना है. इसलिए ये किताब लिखी. अगर हिंदू धर्म के लोगों को नहीं पता कि सूर्य का उदय क्या होता है, तो दुख की बात है. मैंने एक उदय की बात की. मैंने सूर्यास्त की बात नहीं. किताब को पढ़िए तो बात समझ आ जाएगी. खुर्शीद ने कहा, हिंदुत्व के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जीने का तरीका है. उन्होंने कहा, धर्म में परिवर्तन नहीं हो सकता. लेकिन जीने के तरीकों में परिवर्तन हो सकता है. पहले भी हुए हैं. इसलिए मैंने कहा, कुछ लोग हिंदुत्व में परिवर्तन कर रहे हैं. ये अच्छी बात नहीं है. इसलिए मैंने सामान कहा. उन जैसा, किस बात पर मिलता है कि धर्म का दुरुपयोग उन्होंने भी किया, इन्होंने भी किया है. ये कहना मेरा कर्तव्य है.
आयुष शर्मा ने बताया कि उन्हें पहली बार एक विज्ञापन के लिए 15 हजार रुपए मिले थे. इसमें भी 3000 रुपए काट लिए गए थे. जब उन्होंने इस बारे में अपने पिता को बताया कि उन्हें इतने पैसे मिले हैं. तो आयुष शर्मा के पिता ने कहा, सिद्धिविनायक मंदिर में दान कर दो.
आयुष ने बताया कि सलीम खान ने एक फिल्म में लिखा था, मैं फेंके हुए पैसे नहीं उठाता. ऐसे ही उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम भले ही राजनीति से जुड़े पार्टी से हो. लेकिन जब तुम खुद कमाओगे तो उसका मजा ही अलग होगा. उन्होंने बताया था कि भले ही मैंने वो डायलॉग फिल्म में लिखा, लेकिन वह रियल था. तुम कभी किसी के पैसे मत उठाना. ये बात मेरे लिए काफी अहम रही.
एजेंडा आजतक में अभिनेता आयुष शर्मा पहुंचे. उन्होंने अपनी फिल्म अंतिम के बारे में बात की. इसके अलावा उन्होंने बताया कि कैसे अर्पिता को लेकर उन्होंने सलमान खान से बात की थी. आयुष शर्मा ने कहा, वे मुंबई में पढ़ाई करने आए थे. लेकिन साथ ही उन्होंने एक्टर बनने का फैसला किया. उसी दौरान उनकी मुलाकात अर्पिता से हुई. अर्पिता से दोस्ती हो गई. बाद में जब वे सलमान खान से जब मिलने गए थे, तो वे बड़ी आसानी से मान गए. आयुष ने कहा, मैं सलमान खान से मिलने गया, उन्हें बताया कि मेरा नाम आयुष है. इसके बाद हमारी कुछ बातें हुईं. उन्होंने मुझसे कुछ सवाल पूछे, मैंने सीधे सीधे उत्तर दिया. उन्हें ये बात काफी अच्छी लगी.
तेजस्वी यादव ने कहा, सरकार का मन बढ़ा हुआ है. अगर विपक्ष और मीडिया कमजोर होती है, तो लोकतंत्र के लिए ये अच्छा नहीं है. सीएम नीतीश कुमार को ए, बी, सी, डी, क, ख, ग, घ की भी जानकारी नहीं रहती. उन्हें कुछ पता नहीं रहता. कुछ भी पूछ लो, नीति आयोग की रिपोर्ट देखी, नहीं. कुछ भी पूछो पता नहीं. देखा नहीं.
तेजस्वी यादव ने कहा, जो लोग रोजगार मांगते हैं, उनपर लाठी चलाते हैं. जो किसानों की बात करते हैं, उनपर लाठी चलाते हैं. जो महंगाई की बात करते हैं, उन पर लाठी चलाते हैं. लोग अधिकार की बात सीएम, पीएम से ही मांगेंगे. लेकिन आज एक नया ट्रेंड चल रहा है कि सिर्फ विपक्ष से सवाल किया जाता है. सरकार से कोई कुछ नहीं पूछना चाहता. हर चीज का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया जाता है.
बिहार में कितनी बहार सेशन में बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार विधानसभा में हमारी हार में भी जीत थी. क्योंकि हम जनता के बीच असली मुद्दे लेकर गए थे. इसे जनता ने स्वीकार किया. लेकिन मैं हमेशा ये कहता हूं कि ये सरकार पिछले दरवाजे की सरकार है. हमारे गठबंधन को एनडीए गठबंधन से सिर्फ 12000 कम वोट मिले. जनता ने कुछ ओर नतीजे दिए थे और चुनाव आयोग ने कुछ और नतीजे दिखाए. तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार में बहार नहीं, बिहार बर्बाद है. क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार हैं.
विक्रम सम्पत ने कहा, हिंदुत्व की परिकल्पना 1923 में रत्नागिरी की जेल में रह कर की. उस वक्त 'खिलाफत' आंदोलन चला. पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे. इसके काउंटर के लिए उन्होंने हिंदुत्व क्या है, के बारे में लिखा. बाद में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने. उन्होंने हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की. कौन हिंदू है. ये धर्म से जुड़ा नहीं है, यह सांस्कृतिक और राष्ट्र से जुड़ा हुआ. जो अपने देश में विश्वास रखता, न की टर्की में. हिंदू राष्ट्र में सब कुछ एक समान होंगे. कानून के दायरे में सब एक जैसे हैं. कोई बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक नहीं होगा. किसी को कोई विशेष अधिकार नहीं मिलेंगे. धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र, राजनीति से कैसे अलग रखा जा सकता है. इसके बारे में उन्होंने लिखा. सावरकर आरएसएस के हिस्सा नहीं थे. उनके रिश्ते ऊपर नीचे होते रहते. गोवलकर के संघ प्रमुख रहने पर दोनों के रिश्ते भी अच्छे नहीं रहे.
चमन लाल ने कहा, मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए उनके हिंदुत्व में कोई जगह नहीं थी. सावरकर और महात्मा गांधी के रिश्ते भी अच्छे नहीं रहे.
इतिहासकार विक्रम संपत ने कहा, सावरकर 1911 में पहली बार अंडमान के जेल में गए थे. वहां कैदियों के मानवाधिकारों का हनन होता था. वहां उनके साथ बर्बर व्यवहार किया गया. साल में एक बार पत्र लिखने की छूट थी. डेढ़ साल में एक बार परिवार के लोगों से मिल सकते थे. वे अच्छे वकील थे. वे लिखते थे कि हमारी स्थिति स्पष्ट कीजिए कि हम क्यों जेल में बंद हैं. अगर हम भारतीय जेल में हैं, तो हमें और राहत मिल सकती है. तो सभी कैदियों की स्थिति स्पष्ट करें. मेरे नाम के जुड़ने से और कैदी रिहा नहीं हो रहे, तो मुझे रहने दीजिए बाकियों को रिहा कर दीजिए, इससे मुझसे खुशी होगी.
रंजीत सावरकर ने कहा, वे ऐसे राष्ट्रभक्त थे, जो सिर्फ यही सोचते थे कि अगर ये देश के लिए सही है, तो मुझे करना है और गलत है तो नहीं करना है. उनका विचार था, कोई भी विचार स्थल काल और परिस्थिति के हिसाब से बदलता है. जो आज के समय में उपयुक्त है, वो मुझे करना है. विक्रम संपत ने कहा, सावरकर प्रखर राष्ट्रभक्त थे. एक क्रांतिकारी, समाजसुधारक देश के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले वीर थे. वहीं, चमन लाल ने कहा, विनायक दामोदर सावरकर हिंदुस्तान की आजादी की तीन धाराओं में से एक का प्रतिनिधित्व करते थे. जो धर्म आधारित विचारधारा थी.
आजतक एजेंडा में 'सावरकर के नाम पर' सेशन शुरू हो गया. इसमें रंजीत सावरकर, विक्रम संपत और चमन लाल अपनी बात रख रहे हैं.
भारत और पाकिस्तान कभी एक थे. भारत और पाकिस्तान के लोगों में प्यार है. कई लोगों की राजनीति हैं. लेकिन राजनीति के चलते आज ऐसी स्थिति है कि दोनों देशों एक दूसरे के बारे में बुरा सोचते हैं. हमारी संस्कृति में नफरत नहीं है. पड़ोसी से अच्छे रिश्ते रखना हमारी परंपरा रही. हमे सिखाया जाता है, कि हम सबके साथ प्यार रखें. लेकिन जब हमें कोई दबाएगा, तो हम सक्षम हैं उसे जवाब देने के लिए.
सीएम चन्नी ने कहा, नवजोत सिंह सिद्धू हमारे अध्यक्ष हैं. अध्यक्ष को पार्टी की लाइन पर काम करना होता है. जब पार्टी अध्यक्ष कुछ कहते हैं, तो हम उस लाइन पर काम करते हैं. जब कुछ रह जाता है, तो वे फिर कहते हैं, हम फिर करने में जुट जाते हैं. ये आलोचना काफी जरूरी है. कोई भी लोग राजनीति में आया है, उसकी सोच होती है, आगे बढ़ने की. सीएम से लेकर पीएम बनने की. अगर आपमे सोच नहीं है, तो काम नहीं कर पाएंगे. अगर नवजोत सिंह सिद्धू की सीएम बनने की सोच है, तो उसमें क्या बुरा है. चुनाव में जनता, पार्टी आलाकमान और विधायक तय करेंगे कि कौन सीएम बनेगा.
चन्नी से जब पूछा गया कि वे आने वाले चुनाव में भी पंजाब के कप्तान हैं. तो इस सवाल पर उन्होंने कहा, ये टीम वर्क है. मैं कप्तान नहीं हूं. सिर्फ प्लेयर हूं. चुनाव में हम सबको मेहनत करनी है.
पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी एजेंडा आजतक के दूसरे दिन मंच पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे जब उन्हें पता चला कि वे पंजाब के सीएम बनने वाले हैं, तो रोने लगे थे. चरणजीत सिंह ने कहा, राहुल गांधी का फोन आया था. उन्होंने कहा, आप सीएम बनने वाले हैं. तो मैंने कहा, ये क्या कर रहे हो, किसी और को सीएम बना दो, मैं इसके काबिल नहीं हूं और मैं ये कहकर रोने लगा था.
आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' पर शुक्रवार को पहले दिन राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की. इस दौरान दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की तो वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. इसके अलावा किसान नेता राकेश टिकैत और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अलग अलग सेशन के दौरान मंच पर कृषि कानून वापसी बात चर्चा की.
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आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' पर शनिवार को दूसरे दिन राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक की कई दिग्गज हस्तियां शिरकत की. सबसे पहले एजेंडा आजतक के मंच पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पहुंचे. उन्होंने राज्य में होने वाले चुनाव को लेकर अपनी बात रखी. इसके अलावा राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा. इसके बाद एक्टर आयुष शर्मा ने अपनी फिल्म अंतिम और एक्टर कार्तिक आर्यन ने धमाका के बारे में जानकारी दी. फिर महबूबा मुफ्ती से लेकर अश्विनी वैष्णव तक कई दिग्गजों ने अपने विचार रखे. एजेंडा आजतक पर आज पंद्रह दिग्गजों ने अपने विचार रखे. राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत तक, कई हस्तियों ने बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी. दिन की शुरुआत पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से हुई. चन्नी के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला. इसके बाद वीर सावरकर पर बहस हुई और कई इतिहासकारों ने अपने विचार रखे. राजनीति मंथऩ के बाद मनोरंजन जगत से अंतिम के आयुष शर्मा ने दस्तक दी. फिल्म पर तो बात की ही, सलमान खान संग रिश्तों पर भी रोशनी डाली. आयुष के बाद एजेंडा आजतक पर कार्तिक आर्यन का भी धमाका देखने को मिला जिन्होंने ना सिर्फ अपनी फिल्म पर बात की, बल्कि खूब मौज-मस्ती भी करते दिख गए. बाद में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने दस्तक दी और उनकी अयोध्या वाली किताब पर बहस हुई. मुख्तार अब्बास नकवी ने भी उनकी हर सफाई पर सवाल उठाए और तीखा प्रहार किया. इस तीखी बहस के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी अपने विचार रखे. न्याय को लेकर सरकार की योजनाएं बताईं और जजों की नियुक्ति पर भी सफाई पेश की. इसके बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा और फिर उन्हीं के आरोपों क जवाब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिए. इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे का भविष्य बताया और बुलेट ट्रेन पर भी बात की. इन राजनीतिक चर्चाओं के बीच सारा अली खान ने भी अपनी फिल्म अतरंगी रे को प्रमोट किया. सबसे आखिर में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनावी मौसम में अपनी पार्टी की रणनीति बताई और विपक्ष पर भी निशाना साधा. यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी अध्यक्ष ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि आगामी चुनाव में बीजेपी की तीन सौ से ज्यादा सीटें आने वाली हैं. उन्होंने सीएम योगी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा है कि ये जीत एकतरफा होने वाली है और पूरे विपक्ष का सूपड़ा साफ हो जाएगा. यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी की सक्रियता पर जेपी नड्डा ने तंज कसा है. उनके मुताबिक चुनाव में आने का सभी को अधिकार है. अच्छी बात है कि प्रियंका गांधी भी प्रचार कर रही हैं. लेकिन उनके मुताबिक लिखे हुए भाषणों से राजनीति नहीं की जा सकती. जोर देकर कहा गया है कि प्रियंका रीडर हैं,लीडर नहीं. किसान आंदोलन पर जेपी नड्डा ने कहा है कि उनकी सरकार समझाने में पूरी तरह सक्षम है. लेकिन उन्हें ये ही नहीं पता किसान क्या समझना चाहते हैं. कई बार उनसे पूछा गया था कि कौन से क्लॉज में उन्हें दिक्कत है, उन्हें क्या समझ नहीं आ रहा है. लेकिन किसान सिर्फ कानून वापसी पर अटक गए थे. किसान आंदोलन पर बीजेपी अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि इसका चुनाव पर कोई असर नहीं होने वाला है. उनके मुताबिक ये कोई पूरे भारत का आंदोलन नहीं था. सिर्फ एक वर्ग प्रदर्शन कर रहा था. बीजेपी अध्यक्ष ने ये भी कहा है कि किसानों की मांग पर मंथन किया जाएगा. कमेटी बनी हुई है, वहां पर बातचीत की जाएगी. जिन्ना विवाद पर जेपी नड्डा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि ऐसी बयानबाजी सपा प्रमुख की मानसिकता दिखता है. उनके मुताबिक बीजेपी के लिए अखिलेश यादव कोई चैलेंज नहीं हैं. लेकिन उनकी मानसिकता जरूर चैलेंज है. वो मानसिकता का ही हम विरोध करते हैं और इसे चुनाव में चैलेंज भी करेंगे. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि कोरोना काल में सिर्फ बीजेपी के कार्यकर्ता ही जमीन पर दिखे. पूरा विपक्ष गायब हो गया था और लोगों की मदद करने के लिए भाजपा के लाखों कार्यकर्ता आगे आए थे. हर तरह की मदद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुश्किल समय में की थी. एक्ट्रेस सारा अली खान की फिल्म अतरंगी रे रिलीज होने जा रही है. फिल्म में सारा अली खान, अक्षय कुमार और धनुष संग काम कर रही हैं. सारा मानती हैं कि दोनों अक्षय और धनुष बड़े स्टार हैं. एक अगर साउथ का थलाइवी है तो दूसरा दक्षिण का थलाइवी है. उनके मुताबिक धनुष संग उन्होंने काफी मजा किया, वहीं अक्षय की डेडिकेशन ने उन्हें इंप्रेस किया. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि रेलवे को बेचने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि ऐसा सवाल पूछना ही गलत है क्योंकि ये कभी नहीं होगा. उन्होंने सभी को गारंटी देते हुए कह दिया है कि निजीकरण का मतलब ये नहीं कि रेलवे को बेच दिया जाएगा. मोदी सरकार के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से बात की है. उनके मुताबिक काम तेजी से हो रहा है लेकिन अभी तक महाराष्ट्र में जमीन अधिकरण को लेकर दिक्कत है. वहीं जापानी कंपनियों की कार्यशैली की वजह से भी देरी हो रही है. वे सबकुछ रेडी चाहते हैं, उसके बाद ही कुछ काम शुरू किया जाएगा. उम्मीद जताई गई है कि दो हज़ार छब्बीस तक लोग बुलेट ट्रेन से ट्रैवल कर पाएंगे. बॉलीवुड में कैंसिल कल्चर काफी चलता है. कभी कोई एक्टर विवादों में आ जाए तो प्रोजेक्ट हाथ से चले जाते हैं. अब इस कल्चर पर रवीना टंडन ने कहा है कि उन्हें इस इंडस्ट्री में तीस साल हो गए हैं. आज तक कोई उन्हें काम करने से नहीं रोक पाया है. वे यहां तक कह गई हैं कि आगे भी उन्हें कोई काम करने से नहीं रोक सकता. वे मानती हैं कि बोलने का हक सभी को है और किसी के काम को ऐसे ही नहीं छीना जा सकता. एक्टर आशुतोष राणा ने अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ा बयान दे दिया है. उनके मुताबिक बोलना तो इंसान दो साल की उम्र में ही सीख जाता है, लेकिन ये समझने में पूरी जिंदगी बीत जाती है कि क्या बोलना चाहिए, कितना बोलना चाहिए, कब बोलना चाहिए. जब ओम बिरला से सवाल पूछा गया कि क्या सदन में राहुल गांधी को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जाता, इस पर लोकसभा स्पीकर ने दो टूक जवाब दे दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि कांग्रेस नेता को हर बार बोलने का पूरा मौका दिया गया है. उनके मुताबिक कई बार लिस्ट में उनका नाम नहीं होता, लेकिन फिर भी बात रखने का अवसर दिया जाता है. विपक्ष के नेता खुद बोलते हैं कि बोलने का पूरा मौका दिया जाता है. हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर घंटों मंथन होता है. जब से राज्यसभा से बारह सासंदों को निलंबित किया गया है, ये विवाद बढ़ता जा रहा है और विपक्ष लगातार अपना विरोध कर रहा है. अब जब ये सवाल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से पूछा गया तो उन्होंने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया. उनके मुताबिक कुछ नियम होते हैं और वे उन्हें नहीं तोड़ सकते. दूसरे सदन में क्या हो रहा है, क्या किया जा रहा है, इसकी चर्चा कभी भी लोकसभा में नहीं की जा सकती. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बनने जा रहे नए संसद भवन को काफी अहम माना है. उनके मुताबिक अगले एक सौ साल को ध्यान में रखते हुए इसका निर्माण हो रहा है जहां पर हर नए सदस्य के लिए बैठने का भी इंतजाम रहेगा और सभी खुलकर अपने विचार रखेंगे. उनके मुताबिक भारत का नया संसद भवन आजादी का भी प्रतीक होने वाला है. वो संसद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ताकत दिखाएगा. एलजी मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में जो किलिंग होती हैं, वो गलत है. उसकी कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए. हर हमले का मुंहतोड़ जवाब भी दिया जाएगा. लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया एक ऐसा इकोसिस्टम भी सक्रिय है जो ऐसी किलिंग को बढ़ावा देना चाहिए. जो ऐसा काम कर रहे हैं, वो ज्यादा बड़े दोषी हैं, उनसे ज्यादा खतरा है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने साफ कर दिया है कि नए भारत में सिर्फ उन्हीं लोगों से बात की जाएगी जिनकी आस्था भारत के तिरंगे में रहेगी. जोर देकर कहा गया कि सॉफ्ट सेपरेटिज्म का जमाना लद चुका है. उनके मुताबिक जो भारत के हक की, कश्मीर के हक की बात करेगा, उनके सुझाव माने जाएंगे. उन्होंने ये भी कहा कि हमारी सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए काफी काम कर रही है. अगले तीन महीने में सभी को जमीन पर उसर दिखने लगेगा. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि पिछले दो सालों में घाटी का काफी विकास किया गया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए सड़कों का जाल बिछाया गया है. अब यहां पर निवेश होता है. लेकिन जिनका चश्मा कमजोर है, उन्हें विकास दिखाई नहीं देता है. लेकिन हम लोग सिर्फ आम कश्मीरी के लिए काम करते हैं. विकास वहीं सही है जो अंजाम तक पहुंचता है. पीडीप प्रमुख ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि वर्तमान सरकार ने घाटी के लोगों का भरोसा तोड़ा है. उनकी माने तो तीन सौ सत्तर हटने के बाद भी कश्मीर में कुछ नहीं बदला है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कश्मीर आज भारत का हिस्सा है, तो उसमें बड़ा हाथ जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी जैसे बड़े नेताओं का है. उन्होंने उस समय के और भी कई कांग्रेस नेताओं को इसका श्रेय दिया है. वे मानती हैं कि अगर आज के नेता तब होते तो शायद कश्मीर, पाकिस्तान में होता. महबूबा मुफ्ती ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये सरकार गोडसे वाला कश्मीर बनाना चाहती है. ये हमारा गांधी वाला हिंदुस्तान नहीं है. लेकिन आज की सरकार ने अपनी राजनीति के लिए कश्मीर को कुर्बान कर दिया. मुफ्ती की माने तो पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के समय जरूर कश्मीर समस्या पर काम हुआ था. पाकिस्तान से बात हुई थी, हुर्रियत के साथ मंथन हुआ था, सीज फायर लागू किया गया था. लेकिन अब कश्मीर की कोई नहीं सुनता. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि वर्तमान सरकार ने कश्मीर के लिए कुछ नहीं किया. देश की एक मुस्लिम मेजोरिटी स्टेट थी, लेकिन अब उसे भी नहीं बचाया गया. मुफ्ती के मुताबिक ये सरकार गोडसे वाला कश्मीर बनाना चाहती है. ये गांधी का हिंदुस्तान नहीं है. ये नया जरूर है लेकिन आदर्शों वाला नहीं है. जवानों के साथ दिवाली मनाने के सवाल पर किरन रिजिजू ने कहा, मैं उन लोगों के साथ दिवाली मनाता हूं, जो अपने परिवार से साथ कभी दिवाली नहीं मनाते. रिजिजू ने कहा, ऐसा मै सिर्फ अपनी देश के प्रति सेवा के लिए करता हूं. हालांकि, मेरे बच्चे हमेशा कहते हैं कि पापा आप हमारे साथ दिवाली क्यों नहीं मनाते. रिजिजू ने कहा, लोगों की समस्याओं का हल निकालना ही हमारी प्राथमिकता है. जब मुझसे कोई जज, वकील या आम आदमी मिलना चाहता है, तो बहुत ओपन माइंड से उनसे मिलता हूं. ताकि लोगों की बात सुनकर सरल तरीके से उनका हल निकाल सकूं. जहां भी मैंने काम किया, जहां मंत्रालय में रहा, मैं इसी तरह से काम करता हूं. सलमान खुर्शीद ने कहा, संविधान सभी धर्मों को एक मानता है. अयोध्या के फैसले से पहले हम सबने कहा था कि इसे स्वीकार करेंगे. मेरी किताब कहती है कि अयोध्या के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समझे के ये फैसला सही है. मैं याद दिला दूं कि यह फैसला सिर्फ मंदिर पर नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक मंदिर बनेगा और एक मस्जिद बनेगी. मेरा घर किसने जलाया, कोई इसका जवाब दे दे. क्या ये लोग बोको हरम से आए थे. आईएसआईएस के थे. या फिर हिंदुत्व वाले थे. कोई जवाब दे दे. केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, हिंदुत्व हिंदुस्तान की आत्मा है और इसी संस्कृति और संस्कार का नतीजा है कि जब हिंदुस्तान बंटा तो एक भारत बना और एक पाकिस्तान. हिंदुस्तान की संसद में वसुधैव कुटुम्बकम लिखा है. भारत की संस्कृति का ही नतीजा है कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना. लेकिन पाकिस्तान धार्मिक कट्टरपंथ बना. जिस समय पाकिस्तान बना, वहां छब्बीस% अल्पसंख्यक थे, आज दो% बजे हैं. भारत में आठ% अल्पसंख्यक थे. आज ये बढ़कर अट्ठाईस% तक पहुंच गया है. यानी भारत की संस्कृति की वजह से किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को नुकसान नहीं पहुंचाया गया. उन्होंने कहा, अयोध्या पर फैसला आया. सभी ने स्वीकार किया. किसी ने खुशी नहीं मनाई और किसी ने दुख नहीं जताया. इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि अगर अयोध्या को लेकर इस तरह की बात फैलाई जा रही है, तो यह सब साजिश के तहत किया जा रहा है. धर्मयुद्ध सेशन में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, आग लगी है, उसे बुझाना है. इसलिए ये किताब लिखी. अगर हिंदू धर्म के लोगों को नहीं पता कि सूर्य का उदय क्या होता है, तो दुख की बात है. मैंने एक उदय की बात की. मैंने सूर्यास्त की बात नहीं. किताब को पढ़िए तो बात समझ आ जाएगी. खुर्शीद ने कहा, हिंदुत्व के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जीने का तरीका है. उन्होंने कहा, धर्म में परिवर्तन नहीं हो सकता. लेकिन जीने के तरीकों में परिवर्तन हो सकता है. पहले भी हुए हैं. इसलिए मैंने कहा, कुछ लोग हिंदुत्व में परिवर्तन कर रहे हैं. ये अच्छी बात नहीं है. इसलिए मैंने सामान कहा. उन जैसा, किस बात पर मिलता है कि धर्म का दुरुपयोग उन्होंने भी किया, इन्होंने भी किया है. ये कहना मेरा कर्तव्य है. आयुष शर्मा ने बताया कि उन्हें पहली बार एक विज्ञापन के लिए पंद्रह हजार रुपए मिले थे. इसमें भी तीन हज़ार रुपयापए काट लिए गए थे. जब उन्होंने इस बारे में अपने पिता को बताया कि उन्हें इतने पैसे मिले हैं. तो आयुष शर्मा के पिता ने कहा, सिद्धिविनायक मंदिर में दान कर दो. आयुष ने बताया कि सलीम खान ने एक फिल्म में लिखा था, मैं फेंके हुए पैसे नहीं उठाता. ऐसे ही उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम भले ही राजनीति से जुड़े पार्टी से हो. लेकिन जब तुम खुद कमाओगे तो उसका मजा ही अलग होगा. उन्होंने बताया था कि भले ही मैंने वो डायलॉग फिल्म में लिखा, लेकिन वह रियल था. तुम कभी किसी के पैसे मत उठाना. ये बात मेरे लिए काफी अहम रही. एजेंडा आजतक में अभिनेता आयुष शर्मा पहुंचे. उन्होंने अपनी फिल्म अंतिम के बारे में बात की. इसके अलावा उन्होंने बताया कि कैसे अर्पिता को लेकर उन्होंने सलमान खान से बात की थी. आयुष शर्मा ने कहा, वे मुंबई में पढ़ाई करने आए थे. लेकिन साथ ही उन्होंने एक्टर बनने का फैसला किया. उसी दौरान उनकी मुलाकात अर्पिता से हुई. अर्पिता से दोस्ती हो गई. बाद में जब वे सलमान खान से जब मिलने गए थे, तो वे बड़ी आसानी से मान गए. आयुष ने कहा, मैं सलमान खान से मिलने गया, उन्हें बताया कि मेरा नाम आयुष है. इसके बाद हमारी कुछ बातें हुईं. उन्होंने मुझसे कुछ सवाल पूछे, मैंने सीधे सीधे उत्तर दिया. उन्हें ये बात काफी अच्छी लगी. तेजस्वी यादव ने कहा, सरकार का मन बढ़ा हुआ है. अगर विपक्ष और मीडिया कमजोर होती है, तो लोकतंत्र के लिए ये अच्छा नहीं है. सीएम नीतीश कुमार को ए, बी, सी, डी, क, ख, ग, घ की भी जानकारी नहीं रहती. उन्हें कुछ पता नहीं रहता. कुछ भी पूछ लो, नीति आयोग की रिपोर्ट देखी, नहीं. कुछ भी पूछो पता नहीं. देखा नहीं. तेजस्वी यादव ने कहा, जो लोग रोजगार मांगते हैं, उनपर लाठी चलाते हैं. जो किसानों की बात करते हैं, उनपर लाठी चलाते हैं. जो महंगाई की बात करते हैं, उन पर लाठी चलाते हैं. लोग अधिकार की बात सीएम, पीएम से ही मांगेंगे. लेकिन आज एक नया ट्रेंड चल रहा है कि सिर्फ विपक्ष से सवाल किया जाता है. सरकार से कोई कुछ नहीं पूछना चाहता. हर चीज का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया जाता है. बिहार में कितनी बहार सेशन में बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार विधानसभा में हमारी हार में भी जीत थी. क्योंकि हम जनता के बीच असली मुद्दे लेकर गए थे. इसे जनता ने स्वीकार किया. लेकिन मैं हमेशा ये कहता हूं कि ये सरकार पिछले दरवाजे की सरकार है. हमारे गठबंधन को एनडीए गठबंधन से सिर्फ बारह हज़ार कम वोट मिले. जनता ने कुछ ओर नतीजे दिए थे और चुनाव आयोग ने कुछ और नतीजे दिखाए. तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार में बहार नहीं, बिहार बर्बाद है. क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार हैं. विक्रम सम्पत ने कहा, हिंदुत्व की परिकल्पना एक हज़ार नौ सौ तेईस में रत्नागिरी की जेल में रह कर की. उस वक्त 'खिलाफत' आंदोलन चला. पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे. इसके काउंटर के लिए उन्होंने हिंदुत्व क्या है, के बारे में लिखा. बाद में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने. उन्होंने हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की. कौन हिंदू है. ये धर्म से जुड़ा नहीं है, यह सांस्कृतिक और राष्ट्र से जुड़ा हुआ. जो अपने देश में विश्वास रखता, न की टर्की में. हिंदू राष्ट्र में सब कुछ एक समान होंगे. कानून के दायरे में सब एक जैसे हैं. कोई बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक नहीं होगा. किसी को कोई विशेष अधिकार नहीं मिलेंगे. धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र, राजनीति से कैसे अलग रखा जा सकता है. इसके बारे में उन्होंने लिखा. सावरकर आरएसएस के हिस्सा नहीं थे. उनके रिश्ते ऊपर नीचे होते रहते. गोवलकर के संघ प्रमुख रहने पर दोनों के रिश्ते भी अच्छे नहीं रहे. चमन लाल ने कहा, मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए उनके हिंदुत्व में कोई जगह नहीं थी. सावरकर और महात्मा गांधी के रिश्ते भी अच्छे नहीं रहे. इतिहासकार विक्रम संपत ने कहा, सावरकर एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में पहली बार अंडमान के जेल में गए थे. वहां कैदियों के मानवाधिकारों का हनन होता था. वहां उनके साथ बर्बर व्यवहार किया गया. साल में एक बार पत्र लिखने की छूट थी. डेढ़ साल में एक बार परिवार के लोगों से मिल सकते थे. वे अच्छे वकील थे. वे लिखते थे कि हमारी स्थिति स्पष्ट कीजिए कि हम क्यों जेल में बंद हैं. अगर हम भारतीय जेल में हैं, तो हमें और राहत मिल सकती है. तो सभी कैदियों की स्थिति स्पष्ट करें. मेरे नाम के जुड़ने से और कैदी रिहा नहीं हो रहे, तो मुझे रहने दीजिए बाकियों को रिहा कर दीजिए, इससे मुझसे खुशी होगी. रंजीत सावरकर ने कहा, वे ऐसे राष्ट्रभक्त थे, जो सिर्फ यही सोचते थे कि अगर ये देश के लिए सही है, तो मुझे करना है और गलत है तो नहीं करना है. उनका विचार था, कोई भी विचार स्थल काल और परिस्थिति के हिसाब से बदलता है. जो आज के समय में उपयुक्त है, वो मुझे करना है. विक्रम संपत ने कहा, सावरकर प्रखर राष्ट्रभक्त थे. एक क्रांतिकारी, समाजसुधारक देश के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले वीर थे. वहीं, चमन लाल ने कहा, विनायक दामोदर सावरकर हिंदुस्तान की आजादी की तीन धाराओं में से एक का प्रतिनिधित्व करते थे. जो धर्म आधारित विचारधारा थी. आजतक एजेंडा में 'सावरकर के नाम पर' सेशन शुरू हो गया. इसमें रंजीत सावरकर, विक्रम संपत और चमन लाल अपनी बात रख रहे हैं. भारत और पाकिस्तान कभी एक थे. भारत और पाकिस्तान के लोगों में प्यार है. कई लोगों की राजनीति हैं. लेकिन राजनीति के चलते आज ऐसी स्थिति है कि दोनों देशों एक दूसरे के बारे में बुरा सोचते हैं. हमारी संस्कृति में नफरत नहीं है. पड़ोसी से अच्छे रिश्ते रखना हमारी परंपरा रही. हमे सिखाया जाता है, कि हम सबके साथ प्यार रखें. लेकिन जब हमें कोई दबाएगा, तो हम सक्षम हैं उसे जवाब देने के लिए. सीएम चन्नी ने कहा, नवजोत सिंह सिद्धू हमारे अध्यक्ष हैं. अध्यक्ष को पार्टी की लाइन पर काम करना होता है. जब पार्टी अध्यक्ष कुछ कहते हैं, तो हम उस लाइन पर काम करते हैं. जब कुछ रह जाता है, तो वे फिर कहते हैं, हम फिर करने में जुट जाते हैं. ये आलोचना काफी जरूरी है. कोई भी लोग राजनीति में आया है, उसकी सोच होती है, आगे बढ़ने की. सीएम से लेकर पीएम बनने की. अगर आपमे सोच नहीं है, तो काम नहीं कर पाएंगे. अगर नवजोत सिंह सिद्धू की सीएम बनने की सोच है, तो उसमें क्या बुरा है. चुनाव में जनता, पार्टी आलाकमान और विधायक तय करेंगे कि कौन सीएम बनेगा. चन्नी से जब पूछा गया कि वे आने वाले चुनाव में भी पंजाब के कप्तान हैं. तो इस सवाल पर उन्होंने कहा, ये टीम वर्क है. मैं कप्तान नहीं हूं. सिर्फ प्लेयर हूं. चुनाव में हम सबको मेहनत करनी है. पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी एजेंडा आजतक के दूसरे दिन मंच पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे जब उन्हें पता चला कि वे पंजाब के सीएम बनने वाले हैं, तो रोने लगे थे. चरणजीत सिंह ने कहा, राहुल गांधी का फोन आया था. उन्होंने कहा, आप सीएम बनने वाले हैं. तो मैंने कहा, ये क्या कर रहे हो, किसी और को सीएम बना दो, मैं इसके काबिल नहीं हूं और मैं ये कहकर रोने लगा था. आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' पर शुक्रवार को पहले दिन राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की. इस दौरान दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की तो वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. इसके अलावा किसान नेता राकेश टिकैत और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अलग अलग सेशन के दौरान मंच पर कृषि कानून वापसी बात चर्चा की.
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नगरोटा बगवां - नशा खोरी के लिए पहले से ही तल्ख तेवर अपनाने वाले सरोत्री के लोगों को अपनी पंचायत क्षेत्र में कहीं भी शराब का ठेका मंजूर नहीं । नगरोटा बगवां विस क्षेत्र की सरोत्री पंचायत के लोगों ने ग्राम सभा की बैठक में बाकायदा प्रस्ताव डाल कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं । ग्राम पंचायत प्रधान उमा कांत ने बताया कि क्षेत्र के लोगों की मांग है कि उनकी पंचायत में शराब के ठेके को किसी भी स्थान पर खोलना सैकड़ों लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ होगा तथा प्रशासन इस प्रक्रिया को शीघ्र रद्द करें । ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से गांव का माहौल अशांत हुआ है तथा घर-घर में तनाव, कलह तथा अशांति की वजह रही शराब की बिक्री को पूर्ण रूप से बंद किया जाना क्षेत्र की जरूरत बन गई है । उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपनी जमीन में भी ठेका शुरू करती है, तो भी उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा । ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सरकार ने पंचायतों की सहमति के बिना शराब के ठेके खोलने में दिखाई तत्त्परता से यह साबित कर दिया है कि सरकार का नशामुक्ति अभियान मात्र एक ढकोसला है ।
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नगरोटा बगवां - नशा खोरी के लिए पहले से ही तल्ख तेवर अपनाने वाले सरोत्री के लोगों को अपनी पंचायत क्षेत्र में कहीं भी शराब का ठेका मंजूर नहीं । नगरोटा बगवां विस क्षेत्र की सरोत्री पंचायत के लोगों ने ग्राम सभा की बैठक में बाकायदा प्रस्ताव डाल कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं । ग्राम पंचायत प्रधान उमा कांत ने बताया कि क्षेत्र के लोगों की मांग है कि उनकी पंचायत में शराब के ठेके को किसी भी स्थान पर खोलना सैकड़ों लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ होगा तथा प्रशासन इस प्रक्रिया को शीघ्र रद्द करें । ग्रामीणों का कहना है कि शराब की वजह से गांव का माहौल अशांत हुआ है तथा घर-घर में तनाव, कलह तथा अशांति की वजह रही शराब की बिक्री को पूर्ण रूप से बंद किया जाना क्षेत्र की जरूरत बन गई है । उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपनी जमीन में भी ठेका शुरू करती है, तो भी उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा । ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सरकार ने पंचायतों की सहमति के बिना शराब के ठेके खोलने में दिखाई तत्त्परता से यह साबित कर दिया है कि सरकार का नशामुक्ति अभियान मात्र एक ढकोसला है ।
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दो. (चनमाला) प्राणदान ढातार तुम, श्रम क्यों तजो निराश । दासी की यह विनति, चलू साथ वनवास ।।
छं ( बनमाला) है दुःख विरह का अतुल, यह मुझमे सहा नहीं जायगा । याद कर कर यापकी यह, मन मेरा चवरायगा ।। सीता की सेवा मैं कम्गी, तुम करो श्रीराम की । सोचलें मन में जरा, मैं तो हू साथिन जान की । बोले अनुजय भामिनी ! ज्यादा न हट अब कीजिये । वापिसी में साथ लेंगें मन को तसही दीजिये ।। समझाय वनमाला को लक्ष्मण, राम आगे को चले। थकती जहा सीता वहा विश्राग लेते द्रुम तने ।। बन खण्ड से आगे बढे, मांजल पुर पास । उद्यान देख कहने लगे, मिला दृश्य यह खाम ॥ थे बाग जलाशय स्वाभाविक, अद्भुत ही रग दिखाते है । क्या यही स्वर्ग का टुकडा है, जो कवि कथन कथ गाते है ।। उसी जगह विश्राम किया, फल फूल अनुज कुछ लाले है । फिर संस्कार किया सीताने, सियाराम अनुजने खाये है ॥ जब आहार किया फल फूलों का, नही अन्न की दरकार रही। तब देख देख खुश होते है, नही मिला दृश्य यह और कही ।। फिर अनुज राम की आज्ञा पा, नगरी की सैर सिधाया है। नृप शत्रु दमन की प्रतिज्ञा का, भेद अनुज ने पाया है । भेद सब एक, मनुष्य से श्री अनुज ने पूछा तभी । वृत्तान्त यह उस पुरुषने, लक्ष्मण को समझाया सभी ।। शत्रु दमन राजा यहा, शक्ति का न कोई पार है । भूप आधीन कई, सबका यही सरदार है ।।
है जित पद्मा पद्मनी, प्रत्यक्ष पुत्री भूप की । तुलना न कर सकता कोई, उस पुण्य रूप अनूप की ।। मेरी शक्ति का वार अपने, तन पे सह लेगा कोई । जित पद्मा मेरी पुत्री को, फिर विवाहेगा वही ॥ आज तक आया न कोई, सहे न को शक्ति भूप की । मौत के बदले कोई, करता न चाहना रूप की । सुन अनुज लाई चाट, धौंसे पर करी न वार है । फिर वहा पहुंचे लगा था, खास जहां दरबार है । देखी शोभा अनुज की, बांकी का जवान है । शत्रु दमन कहने लगा, मुझ को बता तू कौन है । कहे लखन दूत मैं भरत का, स्वामी के आया काम हूं । प्रतिज्ञा पूरी करने तेरी, आ गया इस धाम हू ।
दो.- क्रोध भूप को आगया सुना दूत का नाम । राजपुत्र बिन और को, विवाहना अनुचित काम ।। यह होकर दूत भरत का, मेरी पुत्री व्याहने आया है । तो समझ लिया मैंने अब इसको, काल शीस पर छाया है । अब मारू एक तान शक्ति इसको, परभव पहुचा देऊं । जो शक्ति इसका नास करे, पहिले वह इसे दिखा देऊ ।।
दो ( शत्रु द ) - जो शक्ति सहनी पडे, उसको जरा पहिचान । परभव को पहुचायगी, जिस दम भारी तान ॥
दो ( लक्ष्मण ) - सह सकता हूं पाच मैं, कौन चीज है एक । परीक्षा कर लीजिये, खडा सामने देख्न ।।
चौ. - फिरोधातुर हो अति भूपने, शक्ति हाथ उठाई है । और देख सूरत उस लक्ष्मरण की जनता सव घबराई है ॥
यह देख वार्ता एकदम सब, लक्ष्मणजी को समझाते है । और बोली उधर पद्मा पितासे, क्यों इसकी जान गवाते है ।। बस यही हो चुका पति मेरा, इसके सग शादी कर डीजे । न व्याहू और किसी को भी, यह शक्ति हाथ से धर दीजे ।। जैसे घी डाला अग्नि में, भूपाल को ऐसे क्रोध चढा । निज शक्ति लाकर सभी, अनुज पर गजाने प्रहार जड़ा ।। किये ढो प्रहार भुजाओं पर, और दो हाथों पर मारे है । लख आश्चर्य में भूप हुआ, हैरान सभासद सारे है । सोचा कि कहता दूत किन्तु यह दूत नजर नहीं आता है । यह शक्ति में वलवीर अतुल, जो तनिक नहीं घबराता है । मन ही मन में भूपको आश्चर्य हुआ छापार । और मुस्काता हुआ इस तरह, वोला वचन उचार ॥ प्रहार पांचवा अय लड़के, हम तुझे माफ फर्माते है । तब बोले अनुज क्यो मेरे, क्षत्रापन को बट्टा लाते है । महार पाचवे की नृपने, फिर सरपे चोट लगाई है । कुछ असर नही हुआ लक्ष्मण पर, यह देख सभा हर्पाई है ।। राज कुमारी ने तुरत, पहिनाई वरमाल । परो पुत्री मेरी, यो वोले भूपाल ।। अनुज कहे उद्यान में, वैठे है श्रीराम । सेवक हूं रघुवीर का, करूं बताया काम ।। चौ. - श्रीराम सिया लक्ष्मण है, सुनकर राजा मन में हर्पाया । फिर विनय सहित तीनों को अपने महलो के अन्दर लाया ।। अति प्रेम से भोजन करवा कर, भूपति ने प्रेम बढाया है । फिर आज्ञाले श्री रामचद्रजी, आगे को चल धाया है ।
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दो. प्राणदान ढातार तुम, श्रम क्यों तजो निराश । दासी की यह विनति, चलू साथ वनवास ।। छं है दुःख विरह का अतुल, यह मुझमे सहा नहीं जायगा । याद कर कर यापकी यह, मन मेरा चवरायगा ।। सीता की सेवा मैं कम्गी, तुम करो श्रीराम की । सोचलें मन में जरा, मैं तो हू साथिन जान की । बोले अनुजय भामिनी ! ज्यादा न हट अब कीजिये । वापिसी में साथ लेंगें मन को तसही दीजिये ।। समझाय वनमाला को लक्ष्मण, राम आगे को चले। थकती जहा सीता वहा विश्राग लेते द्रुम तने ।। बन खण्ड से आगे बढे, मांजल पुर पास । उद्यान देख कहने लगे, मिला दृश्य यह खाम ॥ थे बाग जलाशय स्वाभाविक, अद्भुत ही रग दिखाते है । क्या यही स्वर्ग का टुकडा है, जो कवि कथन कथ गाते है ।। उसी जगह विश्राम किया, फल फूल अनुज कुछ लाले है । फिर संस्कार किया सीताने, सियाराम अनुजने खाये है ॥ जब आहार किया फल फूलों का, नही अन्न की दरकार रही। तब देख देख खुश होते है, नही मिला दृश्य यह और कही ।। फिर अनुज राम की आज्ञा पा, नगरी की सैर सिधाया है। नृप शत्रु दमन की प्रतिज्ञा का, भेद अनुज ने पाया है । भेद सब एक, मनुष्य से श्री अनुज ने पूछा तभी । वृत्तान्त यह उस पुरुषने, लक्ष्मण को समझाया सभी ।। शत्रु दमन राजा यहा, शक्ति का न कोई पार है । भूप आधीन कई, सबका यही सरदार है ।। है जित पद्मा पद्मनी, प्रत्यक्ष पुत्री भूप की । तुलना न कर सकता कोई, उस पुण्य रूप अनूप की ।। मेरी शक्ति का वार अपने, तन पे सह लेगा कोई । जित पद्मा मेरी पुत्री को, फिर विवाहेगा वही ॥ आज तक आया न कोई, सहे न को शक्ति भूप की । मौत के बदले कोई, करता न चाहना रूप की । सुन अनुज लाई चाट, धौंसे पर करी न वार है । फिर वहा पहुंचे लगा था, खास जहां दरबार है । देखी शोभा अनुज की, बांकी का जवान है । शत्रु दमन कहने लगा, मुझ को बता तू कौन है । कहे लखन दूत मैं भरत का, स्वामी के आया काम हूं । प्रतिज्ञा पूरी करने तेरी, आ गया इस धाम हू । दो.- क्रोध भूप को आगया सुना दूत का नाम । राजपुत्र बिन और को, विवाहना अनुचित काम ।। यह होकर दूत भरत का, मेरी पुत्री व्याहने आया है । तो समझ लिया मैंने अब इसको, काल शीस पर छाया है । अब मारू एक तान शक्ति इसको, परभव पहुचा देऊं । जो शक्ति इसका नास करे, पहिले वह इसे दिखा देऊ ।। दो - जो शक्ति सहनी पडे, उसको जरा पहिचान । परभव को पहुचायगी, जिस दम भारी तान ॥ दो - सह सकता हूं पाच मैं, कौन चीज है एक । परीक्षा कर लीजिये, खडा सामने देख्न ।। चौ. - फिरोधातुर हो अति भूपने, शक्ति हाथ उठाई है । और देख सूरत उस लक्ष्मरण की जनता सव घबराई है ॥ यह देख वार्ता एकदम सब, लक्ष्मणजी को समझाते है । और बोली उधर पद्मा पितासे, क्यों इसकी जान गवाते है ।। बस यही हो चुका पति मेरा, इसके सग शादी कर डीजे । न व्याहू और किसी को भी, यह शक्ति हाथ से धर दीजे ।। जैसे घी डाला अग्नि में, भूपाल को ऐसे क्रोध चढा । निज शक्ति लाकर सभी, अनुज पर गजाने प्रहार जड़ा ।। किये ढो प्रहार भुजाओं पर, और दो हाथों पर मारे है । लख आश्चर्य में भूप हुआ, हैरान सभासद सारे है । सोचा कि कहता दूत किन्तु यह दूत नजर नहीं आता है । यह शक्ति में वलवीर अतुल, जो तनिक नहीं घबराता है । मन ही मन में भूपको आश्चर्य हुआ छापार । और मुस्काता हुआ इस तरह, वोला वचन उचार ॥ प्रहार पांचवा अय लड़के, हम तुझे माफ फर्माते है । तब बोले अनुज क्यो मेरे, क्षत्रापन को बट्टा लाते है । महार पाचवे की नृपने, फिर सरपे चोट लगाई है । कुछ असर नही हुआ लक्ष्मण पर, यह देख सभा हर्पाई है ।। राज कुमारी ने तुरत, पहिनाई वरमाल । परो पुत्री मेरी, यो वोले भूपाल ।। अनुज कहे उद्यान में, वैठे है श्रीराम । सेवक हूं रघुवीर का, करूं बताया काम ।। चौ. - श्रीराम सिया लक्ष्मण है, सुनकर राजा मन में हर्पाया । फिर विनय सहित तीनों को अपने महलो के अन्दर लाया ।। अति प्रेम से भोजन करवा कर, भूपति ने प्रेम बढाया है । फिर आज्ञाले श्री रामचद्रजी, आगे को चल धाया है ।
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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र में पांच साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया था। इस घटना ने सब को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद अख्तर के तौर पर हुई है, जो 2 शादियां कर चुका है। उसके पास से एक पिस्टल, दो मोबाइल फोन और दो खाली कारतूस बरामद किया गया है।
10 मार्च की देर शाम बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। उसे अगवा कर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इसके बाद लडकी को लावारिस हालत में छोड दिया गया था। पास के रहने वाले एक व्यक्ति ने उसे देखा तो सुबह घर पहुंचाया। साथ ही पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। वहीं दूसरी तरफ लडकी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने भी खुलासा किया कि, उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है।
इस मामले में पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए आरोपी को पकडने की कोशिश में जुट गई। इसी दौरान पुलिस को रेप के आरोपी के बारे में जानकारी मिली। वह शाहबाद डेयरी के पास चोरी की मोटरसाइकिल के साथ पहुंचने वाला है। जानकारी के आधार पर पुलिस ने एक टीम बनाई। जब वह क्षेत्र में आया तो पुलिस ने उसको रुकने का इशारा किया। लेकिन आरोपी ने पुलिस पर गोली चला दी। पुलिस की जवाबी गोलिबारी में आरोपी के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र में पांच साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया था। इस घटना ने सब को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद अख्तर के तौर पर हुई है, जो दो शादियां कर चुका है। उसके पास से एक पिस्टल, दो मोबाइल फोन और दो खाली कारतूस बरामद किया गया है। दस मार्च की देर शाम बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। उसे अगवा कर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इसके बाद लडकी को लावारिस हालत में छोड दिया गया था। पास के रहने वाले एक व्यक्ति ने उसे देखा तो सुबह घर पहुंचाया। साथ ही पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। वहीं दूसरी तरफ लडकी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने भी खुलासा किया कि, उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए आरोपी को पकडने की कोशिश में जुट गई। इसी दौरान पुलिस को रेप के आरोपी के बारे में जानकारी मिली। वह शाहबाद डेयरी के पास चोरी की मोटरसाइकिल के साथ पहुंचने वाला है। जानकारी के आधार पर पुलिस ने एक टीम बनाई। जब वह क्षेत्र में आया तो पुलिस ने उसको रुकने का इशारा किया। लेकिन आरोपी ने पुलिस पर गोली चला दी। पुलिस की जवाबी गोलिबारी में आरोपी के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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निर्देशक सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी और अभिनेत्री अदा शर्मा अभिनीत फिल्म 'द केरल स्टोरी' ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करते हुए शानदार कमाई की। फिल्म को मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी। तमाम विवादों के बाद भी फिल्म की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ा। नसीरुद्दीन शाह और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकारों ने फिल्म को प्रोपेगेंडा बताया था। आलोचना के बावजूद फिल्म ने दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की। अब अदा शर्मा ने 'द केरल स्टोरी' के बारे में नसीरुद्दीन और कमल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है।
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निर्देशक सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी और अभिनेत्री अदा शर्मा अभिनीत फिल्म 'द केरल स्टोरी' ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करते हुए शानदार कमाई की। फिल्म को मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी। तमाम विवादों के बाद भी फिल्म की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ा। नसीरुद्दीन शाह और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकारों ने फिल्म को प्रोपेगेंडा बताया था। आलोचना के बावजूद फिल्म ने दुनिया भर में तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की। अब अदा शर्मा ने 'द केरल स्टोरी' के बारे में नसीरुद्दीन और कमल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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हमारे पूर्वजों ने आनुवंशिक रूप से विविध फसल कैसे विकसित की?
जौ ( होर्डियम वल्गार एसएसपी। वल्गार ) मानव द्वारा पालतू और सबसे पुरानी फसलों में से एक थी। वर्तमान में, पुरातात्विक और अनुवांशिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि जौ कम से कम पांच क्षेत्रों में कई आबादी से विकसित मोज़ेक फसल हैः मेसोपोटामिया, उत्तरी और दक्षिणी लेवेंट, सीरियाई रेगिस्तान और पूर्व में 1,500-3,000 किलोमीटर (900-1,800 मील), विशाल तिब्बती पठार में। पहली बार पूर्व-पोटरी नियोलिथिक ए के दौरान दक्षिण-पश्चिम एशिया के बारे में 10,500 कैलेंडर साल पहले था, लेकिन जौ की मोज़ेक स्थिति ने इस प्रक्रिया की हमारी समझ में एक रिंच फेंक दिया है।
उपजाऊ क्रिसेंट में, जौ को क्लासिक आठ संस्थापक फसलों में से एक माना जाता है ।
सभी बार्ली के जंगली प्रजननकर्ता को होर्डियम स्पोंटेनियम (एल। ) माना जाता है, जो शीतकालीन-अंकुरित प्रजातियां है जो इराक़ में टिग्रीस और यूफ्रेट्स नदी प्रणाली से यूरेशिया के पश्चिमी इलाके तक यूरेशिया के एक बहुत व्यापक क्षेत्र के मूल निवासी हैं। चीन में यांग्त्ज़ी नदी। इज़राइल में ओहलो II जैसे ऊपरी पालीओलिथिक साइटों के सबूतों के आधार पर, घरेलू होने से कम से कम 10,000 साल पहले जंगली जौ की कटाई की गई थी।
गेहूं , चावल और मक्का के बाद आज दुनिया में जौ चौथी सबसे महत्वपूर्ण फसल है। पूरी तरह से जौ हाशिए और तनाव-प्रवण वातावरण के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित है, और क्षेत्रों में गेहूं या चावल की तुलना में अधिक विश्वसनीय संयंत्र है जो ऊंचाई में ठंडा या उच्च है।
जंगली जौ में जंगली पौधे के लिए कई विशेषताएं उपयोगी होती हैं जो मनुष्यों के लिए इतनी उपयोगी नहीं होती हैं।
एक भंगुर रैचिस (वह भाग जो पौधे को बीज धारण करता है) जो बीजों को पके हुए होते हैं, उन्हें हवाओं में बिखराते हैं; और बीज को थोड़ी सी बीज वाली दो पंक्तियों में स्पाइक पर व्यवस्थित किया जाता है। जंगली जौ हमेशा अपने बीज की रक्षा करने में एक कठिन हलचल है; पतवार-कम रूप (जिसे नग्न जौ कहा जाता है) केवल घरेलू किस्मों पर पाया जाता है।
घरेलू रूप में एक गैर-भंगुर रैची और अधिक बीज होते हैं, जो छः पंक्ति वाली स्पाइक में व्यवस्थित होते हैं।
दोनों घिरे हुए और नग्न बीज के रूप पालतू पालतू जौ में पाए जाते हैंः नियोलिथिक काल के दौरान, दोनों रूपों को उगाया जाता था, लेकिन निकट पूर्व में, 5000 साल पहले चॉकिलिथिक / कांस्य युग में नग्न जौ की खेती शुरू हो गई थी। नंगे बार्ली, जबकि फसल और प्रक्रिया के लिए आसान, कीट हमले और परजीवी बीमारी के लिए अधिक संवेदनशील हैं। हुलड बार्ली की उच्च पैदावार होती है; तो वैसे भी पूर्व के भीतर, हलचल रखना एक चुनिंदा गुण था।
हाल ही में (जोन्स और सहकर्मियों 2012) यूरोप के उत्तरी हिस्सों और अल्पाइन क्षेत्र में जौ के फाईलोगोग्राफिक विश्लेषण में पाया गया कि आधुनिक जौ भूमिगत क्षेत्रों में ठंड अनुकूली जीन उत्परिवर्तन पहचानने योग्य थे। अनुकूलन में एक प्रकार शामिल था जो दिन की लंबाई के लिए गैर-प्रतिक्रियाशील था (यानी, फूलों में देरी नहीं हुई जब तक पौधे दिन के दौरान सूरज की रोशनी के कुछ घंटों तक नहीं पहुंच जाता): और वह फार्म पूर्वोत्तर यूरोप और उच्च ऊंचाई स्थानों में पाया जाता है ।
वैकल्पिक रूप से, भूमध्य क्षेत्र में लैंड्रेस मुख्य रूप से दिन की लंबाई के लिए उत्तरदायी थे। मध्य यूरोप में, हालांकि, दिन की लंबाई एक विशेषता नहीं है जो (स्पष्ट रूप से) के लिए चुना गया था।
जोन्स और सहयोगी संभावित बाधाओं के कार्यों को रद्द करने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन सुझाव दिया कि अस्थायी जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र में फसल की अनुकूलता के आधार पर, विभिन्न क्षेत्रों के लिए लक्षणों का चयन प्रभावित हो सकता है, जौ के फैलाव में देरी हो सकती है या इसे तेज किया जा सकता है। ।
कितने पालतू घटनाक्रम ! ?
पालतू जानवरों की कम से कम पांच अलग-अलग लोकी के लिए साक्ष्य मौजूद हैः उपजाऊ क्रिसेंट में कम से कम तीन स्थान, सीरियाई रेगिस्तान में से एक और तिब्बती पठार में से एक। जोन्स एट अल। 2013 अतिरिक्त सबूत बताते हैं कि उपजाऊ क्रिसेंट के क्षेत्र में, एशियाई जंगली जौ की चार अलग-अलग घरेलू घटनाएं हो सकती हैं।
समूह एडी के भीतर अंतर एलील की उपस्थिति पर आधारित होते हैं जो अलग-अलग दिन की लंबाई में अनुकूलित होते हैं; और विभिन्न प्रकार के स्थानों में जौ की अनुकूली क्षमता बढ़ने की क्षमता। यह हो सकता है कि विभिन्न क्षेत्रों के जौ प्रकारों के संयोजन ने सूखे प्रतिरोध और अन्य फायदेमंद गुणों को बढ़ाया।
2015 में रिपोर्ट किए गए डीएनए विश्लेषण (कवियों एट अल। ) ने एशियाई और उपजाऊ क्रिसेंट बार्ली में सीरियाई रेगिस्तान विविधता से एक जीनोम सेगमेंट की पहचान की; और पश्चिमी और एशियाई बार्ली में उत्तरी मेसोपोटामिया में एक सेगमेंट। हम नहीं जानते, एलाबी एक साथ निबंध में कहते हैं, कैसे हमारे पूर्वजों ने आनुवंशिक रूप से विविध फसलों का उत्पादन कियाः लेकिन अध्ययन सामान्य रूप से एक बेहतर समझ घरेलू प्रक्रियाओं की दिशा में एक दिलचस्प अवधि को दूर करना चाहिए।
2016 में चीन में यांगशाओ नियोलिथिक (सीए 5000 साल पहले) के रूप में जौ बियर बनाने के लिए साक्ष्य की सूचना मिली थी; ऐसा लगता है कि तिब्बती पठार से होने की संभावना है, लेकिन अभी तक यह निर्धारित नहीं किया गया है।
- > यह आलेख प्लांट डोमेस्टिकेशन , और पुरातत्व के शब्दकोश के लिए गाइड गाइड का एक हिस्सा है।
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- > बदर ए, मुलर के, शाफर-प्रीग्ल आर, एल राबे एच, एफ़जेन एस, इब्राहिम एचएच, पॉज़ज़ी सी, रोहडे डब्ल्यू, और सलामीनी एफ 2000. जौ (होर्डियम वल्गेर) के मूल और पालतू इतिहास पर। आण्विक जीवविज्ञान और विकास 17 (4): 49 9-510।
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- > झाओ जेड 2011. चीन में कृषि की उत्पत्ति के अध्ययन के लिए नया आर्कियोबोटैनिक डेटा। वर्तमान मानव विज्ञान 52 (एस 4): एस 2 9 5-एस 306।
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हमारे पूर्वजों ने आनुवंशिक रूप से विविध फसल कैसे विकसित की? जौ मानव द्वारा पालतू और सबसे पुरानी फसलों में से एक थी। वर्तमान में, पुरातात्विक और अनुवांशिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि जौ कम से कम पांच क्षेत्रों में कई आबादी से विकसित मोज़ेक फसल हैः मेसोपोटामिया, उत्तरी और दक्षिणी लेवेंट, सीरियाई रेगिस्तान और पूर्व में एक,पाँच सौ-तीन,शून्य किलोग्राममीटर , विशाल तिब्बती पठार में। पहली बार पूर्व-पोटरी नियोलिथिक ए के दौरान दक्षिण-पश्चिम एशिया के बारे में दस,पाँच सौ कैलेंडर साल पहले था, लेकिन जौ की मोज़ेक स्थिति ने इस प्रक्रिया की हमारी समझ में एक रिंच फेंक दिया है। उपजाऊ क्रिसेंट में, जौ को क्लासिक आठ संस्थापक फसलों में से एक माना जाता है । सभी बार्ली के जंगली प्रजननकर्ता को होर्डियम स्पोंटेनियम माना जाता है, जो शीतकालीन-अंकुरित प्रजातियां है जो इराक़ में टिग्रीस और यूफ्रेट्स नदी प्रणाली से यूरेशिया के पश्चिमी इलाके तक यूरेशिया के एक बहुत व्यापक क्षेत्र के मूल निवासी हैं। चीन में यांग्त्ज़ी नदी। इज़राइल में ओहलो II जैसे ऊपरी पालीओलिथिक साइटों के सबूतों के आधार पर, घरेलू होने से कम से कम दस,शून्य साल पहले जंगली जौ की कटाई की गई थी। गेहूं , चावल और मक्का के बाद आज दुनिया में जौ चौथी सबसे महत्वपूर्ण फसल है। पूरी तरह से जौ हाशिए और तनाव-प्रवण वातावरण के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित है, और क्षेत्रों में गेहूं या चावल की तुलना में अधिक विश्वसनीय संयंत्र है जो ऊंचाई में ठंडा या उच्च है। जंगली जौ में जंगली पौधे के लिए कई विशेषताएं उपयोगी होती हैं जो मनुष्यों के लिए इतनी उपयोगी नहीं होती हैं। एक भंगुर रैचिस जो बीजों को पके हुए होते हैं, उन्हें हवाओं में बिखराते हैं; और बीज को थोड़ी सी बीज वाली दो पंक्तियों में स्पाइक पर व्यवस्थित किया जाता है। जंगली जौ हमेशा अपने बीज की रक्षा करने में एक कठिन हलचल है; पतवार-कम रूप केवल घरेलू किस्मों पर पाया जाता है। घरेलू रूप में एक गैर-भंगुर रैची और अधिक बीज होते हैं, जो छः पंक्ति वाली स्पाइक में व्यवस्थित होते हैं। दोनों घिरे हुए और नग्न बीज के रूप पालतू पालतू जौ में पाए जाते हैंः नियोलिथिक काल के दौरान, दोनों रूपों को उगाया जाता था, लेकिन निकट पूर्व में, पाँच हज़ार साल पहले चॉकिलिथिक / कांस्य युग में नग्न जौ की खेती शुरू हो गई थी। नंगे बार्ली, जबकि फसल और प्रक्रिया के लिए आसान, कीट हमले और परजीवी बीमारी के लिए अधिक संवेदनशील हैं। हुलड बार्ली की उच्च पैदावार होती है; तो वैसे भी पूर्व के भीतर, हलचल रखना एक चुनिंदा गुण था। हाल ही में यूरोप के उत्तरी हिस्सों और अल्पाइन क्षेत्र में जौ के फाईलोगोग्राफिक विश्लेषण में पाया गया कि आधुनिक जौ भूमिगत क्षेत्रों में ठंड अनुकूली जीन उत्परिवर्तन पहचानने योग्य थे। अनुकूलन में एक प्रकार शामिल था जो दिन की लंबाई के लिए गैर-प्रतिक्रियाशील था : और वह फार्म पूर्वोत्तर यूरोप और उच्च ऊंचाई स्थानों में पाया जाता है । वैकल्पिक रूप से, भूमध्य क्षेत्र में लैंड्रेस मुख्य रूप से दिन की लंबाई के लिए उत्तरदायी थे। मध्य यूरोप में, हालांकि, दिन की लंबाई एक विशेषता नहीं है जो के लिए चुना गया था। जोन्स और सहयोगी संभावित बाधाओं के कार्यों को रद्द करने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन सुझाव दिया कि अस्थायी जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र में फसल की अनुकूलता के आधार पर, विभिन्न क्षेत्रों के लिए लक्षणों का चयन प्रभावित हो सकता है, जौ के फैलाव में देरी हो सकती है या इसे तेज किया जा सकता है। । कितने पालतू घटनाक्रम ! ? पालतू जानवरों की कम से कम पांच अलग-अलग लोकी के लिए साक्ष्य मौजूद हैः उपजाऊ क्रिसेंट में कम से कम तीन स्थान, सीरियाई रेगिस्तान में से एक और तिब्बती पठार में से एक। जोन्स एट अल। दो हज़ार तेरह अतिरिक्त सबूत बताते हैं कि उपजाऊ क्रिसेंट के क्षेत्र में, एशियाई जंगली जौ की चार अलग-अलग घरेलू घटनाएं हो सकती हैं। समूह एडी के भीतर अंतर एलील की उपस्थिति पर आधारित होते हैं जो अलग-अलग दिन की लंबाई में अनुकूलित होते हैं; और विभिन्न प्रकार के स्थानों में जौ की अनुकूली क्षमता बढ़ने की क्षमता। यह हो सकता है कि विभिन्न क्षेत्रों के जौ प्रकारों के संयोजन ने सूखे प्रतिरोध और अन्य फायदेमंद गुणों को बढ़ाया। दो हज़ार पंद्रह में रिपोर्ट किए गए डीएनए विश्लेषण ने एशियाई और उपजाऊ क्रिसेंट बार्ली में सीरियाई रेगिस्तान विविधता से एक जीनोम सेगमेंट की पहचान की; और पश्चिमी और एशियाई बार्ली में उत्तरी मेसोपोटामिया में एक सेगमेंट। हम नहीं जानते, एलाबी एक साथ निबंध में कहते हैं, कैसे हमारे पूर्वजों ने आनुवंशिक रूप से विविध फसलों का उत्पादन कियाः लेकिन अध्ययन सामान्य रूप से एक बेहतर समझ घरेलू प्रक्रियाओं की दिशा में एक दिलचस्प अवधि को दूर करना चाहिए। दो हज़ार सोलह में चीन में यांगशाओ नियोलिथिक के रूप में जौ बियर बनाने के लिए साक्ष्य की सूचना मिली थी; ऐसा लगता है कि तिब्बती पठार से होने की संभावना है, लेकिन अभी तक यह निर्धारित नहीं किया गया है। - > यह आलेख प्लांट डोमेस्टिकेशन , और पुरातत्व के शब्दकोश के लिए गाइड गाइड का एक हिस्सा है। - > एलाबी आरजी। दो हज़ार पंद्रह. जौ पालतू पशुः केंद्रीय सिद्धांत का अंत? जीनोम जीवविज्ञान सोलह : एक सौ छिहत्तर। - > बदर ए, मुलर के, शाफर-प्रीग्ल आर, एल राबे एच, एफ़जेन एस, इब्राहिम एचएच, पॉज़ज़ी सी, रोहडे डब्ल्यू, और सलामीनी एफ दो हज़ार. जौ के मूल और पालतू इतिहास पर। आण्विक जीवविज्ञान और विकास सत्रह : उनचास नौ-पाँच सौ दस। - > दाई एफ, चेन जेएच, वांग एक्स, ली जेड, जिन जी, वू डी, काई एस, वांग एन, वू एफ, नेवो ई एट अल। दो हज़ार चौदह. ट्रांसक्रिप्शन प्रोफाइलिंग आधुनिक खेती की जौ की मोज़ेक जीनोमिक उत्पत्ति का खुलासा करता है। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही एक सौ ग्यारह : तेरह हज़ार चार सौ तीन-तेरह हज़ार चार सौ आठ। - > जोन्स जी, चार्ल्स एमपी, जोन्स एमके, कोलेज एस, लेघ एफजे, लिस्टर डीए, स्मिथ एलएमजे, पॉवेल डब्ल्यू, ब्राउन टीए, और जोन्स एचएल। दो हज़ार तेरह. पश्चिमी एशिया में फैले हुए पालतू जानवरों के बाद यूरोप में जौ के कई परिचय के लिए डीएनए सबूत। पुरातनता सत्तासी : सात सौ एक-सात सौ तेरह। - > जोन्स जी, जोन्स एच, चार्ल्स एमपी, जोन्स एमके, कोलेज एस, लेघ एफजे, लिस्टर डीए, स्मिथ एलएमजे, पॉवेल डब्ल्यू, और ब्राउन टीए। दो हज़ार बारह. यूरोप के माध्यम से नियोलिथिक कृषि के प्रसार के सबूत के रूप में जौ डीएनए के Phylogeographic विश्लेषण। पुरातत्व विज्ञान जर्नल तीन नौ : तीन हज़ार दो सौ तीस-तीन हज़ार दो सौ अड़तीस। - > मोरेल पीएल, और क्लेग एमटी। दो हज़ार सात. उपजाऊ क्रिसेंट के पूर्व में जौ के दूसरे पालतू जानवर के लिए अनुवांशिक सबूत। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की कार्यवाही एक सौ चार: तीन हज़ार दो सौ नवासी-बत्तीस नौ चार। - > कवियों एएम, फेंग जेड, क्लेग एमटी, और मोरेल पीएल। दो हज़ार पंद्रह. जौ लैंडराइसेस भौगोलिक दृष्टि से विषम जीनोमिक उत्पत्ति द्वारा विशेषता है। जीनोम जीवविज्ञान सोलह : एक-ग्यारह। - > रिहल एस, ज़ीदी एम, और कॉनर्ड एनजे। दो हज़ार तेरह. ईरान के ज़ाग्रोस पहाड़ों की तलहटी में कृषि का उद्भव। विज्ञान तीन सौ इकतालीस: पैंसठ-सरसठ। - > रिहल एस, पस्तोवॉयटोव के, वीपर्ट एच, क्लेट एस, और होल एफ। दो हज़ार चौदह. जौ अनाज में डेल्टा तेरह सी द्वारा प्रमाणित प्राचीन पूर्वी कृषि प्रणालियों में सूखा तनाव परिवर्तनशीलता। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही एक सौ ग्यारह : बारह हज़ार तीन सौ अड़तालीस-बारह हज़ार तीन सौ तिरेपन। - > वांग जे, लियू एल, बॉल टी, यू एल, ली वाई, और ज़िंग एफ दो हज़ार सोलह। चीन में चार,शून्य-वर्षीय बियर रेसिपी का खुलासा। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज अर्ली संस्करण की कार्यवाही । - > झाओ जेड दो हज़ार ग्यारह. चीन में कृषि की उत्पत्ति के अध्ययन के लिए नया आर्कियोबोटैनिक डेटा। वर्तमान मानव विज्ञान बावन : एस दो नौ पाँच-एस तीन सौ छः।
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पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जी दरअसल वह लगातार भारत के खिलाफ किसी न किसी रूप में साजिश रचने की कोशिश में दिखाई दे रहा है। इन सभी के बीच उसके एक और मोहरे का पर्दाफाश किया गया है। जी दरअसल राजस्थान इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान (Pakistan) से आए एक हिंदू शरणार्थी को जासूसी के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है आरोपी ने 6 साल पहले भारत की नागरिकता ली थी। आपको बता दें कि इस मामले में पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) उमेश मिश्रा ने बताया कि 46 वर्षीय भागचंद तीन-चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और उन्हें भारतीय मोबाइल नंबर एवं सिम कार्ड उपलब्ध करा रहा था। केवल यही नहीं बल्कि उन्होंने तो यह भी बताया कि आरोपी जासूसी की एवज में पेटीएम (Paytm) के जरिए धनराशि प्राप्त करता था।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि जासूसी के मामले में भीलवाड़ा से 27 साल के नारायण लाल गाडरी को 14 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि गाडरी विभिन्न मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड जारी करवाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को उपलब्ध कराता, जिनकी मदद से वे सोशल मीडिया अकाउंट चलाते थे। इस मामले में DGP ने बताया कि नारायण लाल गाडरी ने पूछताछ के दौरान अपने साथी दिल्ली निवासी भागचंद के बारे में बताया। गाडरी द्वारा जारी करवाए गए सिम कार्ड को भागचंद ने दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड स्थित खान मार्केट ट्रैवल्स ऑफिस में मंगावाया और प्राप्त किया था।
इसके अलावा पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर से मिली रकम से भागचंद ने भाटी माइंस से कीपैड वाला एक पुराना मोबाइल फोन खरीदा और नारायण द्वारा भेजे गए सिम कार्ड की मदद से OTP साझाा करके पाकिस्तान में भारतीय मोबाइल नंबर से सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने के लिए व्हाट्सएप एवं सिगनल एप डाउनलोड करवाएं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि बाद में भागचंद ने उन सिम कार्ड को बच्चों के कपड़ों एवं एमडीएच मसाले के पैकेट में छिपाकर पार्सल से मुंबई भेजे थे। इस मामले में डीजीपी ने बताया कि, 'भागचंद का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और 22 साल की उम्र में 1998 में भारत का वीजा प्राप्त करके वह पूरे परिवार से साथ दिल्ली आ गया था। '
आगे उन्होंने बताया, 'यहां उसे 2016 में भारत की नागरिकता मिल गई और वह दिल्ली में ही टैक्सी चलाने व मजदूरी का कार्य करने लगा, जबकि उसके रिश्तेदार और अन्य परिजन पाकिस्तान में रहते हैं, जिनके माध्यम से वह तीन-चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। '
न्यूड फोटोशूट केसः पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस के समक्ष पेश नहीं होंगे रणवीर सिंह !
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पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जी दरअसल वह लगातार भारत के खिलाफ किसी न किसी रूप में साजिश रचने की कोशिश में दिखाई दे रहा है। इन सभी के बीच उसके एक और मोहरे का पर्दाफाश किया गया है। जी दरअसल राजस्थान इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान से आए एक हिंदू शरणार्थी को जासूसी के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है आरोपी ने छः साल पहले भारत की नागरिकता ली थी। आपको बता दें कि इस मामले में पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि छियालीस वर्षीय भागचंद तीन-चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और उन्हें भारतीय मोबाइल नंबर एवं सिम कार्ड उपलब्ध करा रहा था। केवल यही नहीं बल्कि उन्होंने तो यह भी बताया कि आरोपी जासूसी की एवज में पेटीएम के जरिए धनराशि प्राप्त करता था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि जासूसी के मामले में भीलवाड़ा से सत्ताईस साल के नारायण लाल गाडरी को चौदह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि गाडरी विभिन्न मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड जारी करवाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को उपलब्ध कराता, जिनकी मदद से वे सोशल मीडिया अकाउंट चलाते थे। इस मामले में DGP ने बताया कि नारायण लाल गाडरी ने पूछताछ के दौरान अपने साथी दिल्ली निवासी भागचंद के बारे में बताया। गाडरी द्वारा जारी करवाए गए सिम कार्ड को भागचंद ने दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड स्थित खान मार्केट ट्रैवल्स ऑफिस में मंगावाया और प्राप्त किया था। इसके अलावा पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर से मिली रकम से भागचंद ने भाटी माइंस से कीपैड वाला एक पुराना मोबाइल फोन खरीदा और नारायण द्वारा भेजे गए सिम कार्ड की मदद से OTP साझाा करके पाकिस्तान में भारतीय मोबाइल नंबर से सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने के लिए व्हाट्सएप एवं सिगनल एप डाउनलोड करवाएं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि बाद में भागचंद ने उन सिम कार्ड को बच्चों के कपड़ों एवं एमडीएच मसाले के पैकेट में छिपाकर पार्सल से मुंबई भेजे थे। इस मामले में डीजीपी ने बताया कि, 'भागचंद का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और बाईस साल की उम्र में एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में भारत का वीजा प्राप्त करके वह पूरे परिवार से साथ दिल्ली आ गया था। ' आगे उन्होंने बताया, 'यहां उसे दो हज़ार सोलह में भारत की नागरिकता मिल गई और वह दिल्ली में ही टैक्सी चलाने व मजदूरी का कार्य करने लगा, जबकि उसके रिश्तेदार और अन्य परिजन पाकिस्तान में रहते हैं, जिनके माध्यम से वह तीन-चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। ' न्यूड फोटोशूट केसः पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस के समक्ष पेश नहीं होंगे रणवीर सिंह !
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औरैया। प्रदेश सरकार के निर्देश पर बीती 5 जनवरी से प्रारंभ हुए सड़क सुरक्षा माह को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें परिवहन विभाग ने बुधवार को शहर के इटावा रोड पर पेट्रोल पंप के समीप अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने बिना हेलमेट तथा बिना सीट बेल्ट लगाए चालकों के चालान काटे।
बुधवार को शहर के इटावा रोड पर परिवहन विभाग की पीटीओ रेहाना बानो के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा माह के तहत अभियान चलाया गया। जिसमें दो पहिया वाहनों के चालकों को हेलमेट लगाकर चलने की नसीहत दी गई जबकि चार पहिया वाहनों के चालकों से सीट बेल्ट का प्रयोग किए जाने की बात कही गई। रेहाना बानो ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को इस अभियान के दौरान 4 वाहनों के चालान काटे गए। उन्होंने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि वह लोग वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करें इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। वहीं उन्होंने सभी से यातायात नियमों का पालन किए जाने की भी अपील की। वहीं कुछ लोग अपने वाहन पर हेलमेट लेकर जा रहे थे तो उन्हें रोककर उनको हेलमेट भी पहनाए गए। अभियान चलता देख वाहन चालकों में हड़कंप मचा हुआ था।
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औरैया। प्रदेश सरकार के निर्देश पर बीती पाँच जनवरी से प्रारंभ हुए सड़क सुरक्षा माह को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें परिवहन विभाग ने बुधवार को शहर के इटावा रोड पर पेट्रोल पंप के समीप अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने बिना हेलमेट तथा बिना सीट बेल्ट लगाए चालकों के चालान काटे। बुधवार को शहर के इटावा रोड पर परिवहन विभाग की पीटीओ रेहाना बानो के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा माह के तहत अभियान चलाया गया। जिसमें दो पहिया वाहनों के चालकों को हेलमेट लगाकर चलने की नसीहत दी गई जबकि चार पहिया वाहनों के चालकों से सीट बेल्ट का प्रयोग किए जाने की बात कही गई। रेहाना बानो ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को इस अभियान के दौरान चार वाहनों के चालान काटे गए। उन्होंने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि वह लोग वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करें इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। वहीं उन्होंने सभी से यातायात नियमों का पालन किए जाने की भी अपील की। वहीं कुछ लोग अपने वाहन पर हेलमेट लेकर जा रहे थे तो उन्हें रोककर उनको हेलमेट भी पहनाए गए। अभियान चलता देख वाहन चालकों में हड़कंप मचा हुआ था।
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नादौन - हिमाचल प्रदेश मिल्कफेडरेशन दूध, दही, घी, मिठाइयां आदि तो बेच ही रहा है अब आचार,चटनी व मुरब्बा बनाएगा और बेचेगा भी। इससे जहां लोगों को अच्छी किस्म के विभिन्न प्रकार के आचार, चटनी व मुरब्बा आदि उपलब्ध होगा। वहीं किसानों व बागबानों को भी इसका भरपूर लाभ होगा, क्योंकि आचार,चटनी व मुरब्बा के लिए आम,नींबू, गलगल, जिमींकद, आंवला, हरड, शिमला मिर्च, हरि मिर्च, टमाटर व आचार चटनी आदि में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद किसानों व बागबानों से मिल्कफेड खरीदेगा। यह बात हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के बीओडी के मेंबर एवं अग्रणी किसान ठाकुर चंद किशोर ने कही। उनके साथ समाज सेवी इंजीनियर ठाकुर प्रकाश चंद भी उपस्थित थे। उन्होंने किसान व वागबान कड़ी मेहनत करके जैसे तैसे फलदार अन्य नगदी फसलें जो आचार चटनी व मुरब्बे में इस्तेमाल की जा सकती, लेकिन उन्हें सही मार्किट न मिलने की वजह से किसान बागवान को काफी निराशा होती है। उन्होंने बताया कि फैडरेशन उनसे यह सब उत्पाद खरीद कर उन्हें उचित मूल्य देगा, जिससे किसानों व बागबानों का उत्थान होगा और फेडरेशन की भी आमदन बढ़ेगी। कई लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा। ठाकुर चंद किशोर ने कहा कि इस बारे मिल्कफेड की बोर्ड ऑफ डायरेकटर की हाल ही में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए अनेकों योजनाएं शुरू की हैं। बीते रोज मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में किसानों को कई प्रकार की राहत दी है। छोटे किसानों को सालाना छह हजार रुपए उनके खाते में सरकार द्वारा डाले जाएंगे। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी।
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नादौन - हिमाचल प्रदेश मिल्कफेडरेशन दूध, दही, घी, मिठाइयां आदि तो बेच ही रहा है अब आचार,चटनी व मुरब्बा बनाएगा और बेचेगा भी। इससे जहां लोगों को अच्छी किस्म के विभिन्न प्रकार के आचार, चटनी व मुरब्बा आदि उपलब्ध होगा। वहीं किसानों व बागबानों को भी इसका भरपूर लाभ होगा, क्योंकि आचार,चटनी व मुरब्बा के लिए आम,नींबू, गलगल, जिमींकद, आंवला, हरड, शिमला मिर्च, हरि मिर्च, टमाटर व आचार चटनी आदि में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद किसानों व बागबानों से मिल्कफेड खरीदेगा। यह बात हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के बीओडी के मेंबर एवं अग्रणी किसान ठाकुर चंद किशोर ने कही। उनके साथ समाज सेवी इंजीनियर ठाकुर प्रकाश चंद भी उपस्थित थे। उन्होंने किसान व वागबान कड़ी मेहनत करके जैसे तैसे फलदार अन्य नगदी फसलें जो आचार चटनी व मुरब्बे में इस्तेमाल की जा सकती, लेकिन उन्हें सही मार्किट न मिलने की वजह से किसान बागवान को काफी निराशा होती है। उन्होंने बताया कि फैडरेशन उनसे यह सब उत्पाद खरीद कर उन्हें उचित मूल्य देगा, जिससे किसानों व बागबानों का उत्थान होगा और फेडरेशन की भी आमदन बढ़ेगी। कई लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिलेगा। ठाकुर चंद किशोर ने कहा कि इस बारे मिल्कफेड की बोर्ड ऑफ डायरेकटर की हाल ही में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए अनेकों योजनाएं शुरू की हैं। बीते रोज मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में किसानों को कई प्रकार की राहत दी है। छोटे किसानों को सालाना छह हजार रुपए उनके खाते में सरकार द्वारा डाले जाएंगे। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी।
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राजद के पूर्व मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्धीकी ने कहा है कि अगर बिहार विधानसभा चुनाव के समय लालू यादव जेल से बाहर होते तो बिहार की तस्वीर अभी दूसरी होती. उन्होंने यह भी कहा है कि अब जब चुनाव परिणआम आ गया है तो किसी पर आरोप प्रत्यारोप करने का कोई फायदा नहीं है.
आपको बता दें कि राजद कुछ ही दिनों में बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार को लेकर समीक्षा बैठक करने वाला है. राजद की समक्षा बैठक से ठीक पहले अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा है कि आज राजद में लालू प्रसाद यादव की नीति और सिद्धांत को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है, कोई दूसरा व्यक्ति लालू यादव नहीं हो सकता है. लालू यादव की तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है.
आपको बता दें कि अब्दुल बारी सिद्दीकी पार्टी के शिर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं. इतना ही नहीं पिछले दिनों मीडिया में यह खबरें भी चल रही थी कि सिद्दीकी जदयू की सदस्यता भी ले सकते हैं. हालांकि अभी तक इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं. सिद्दिकी के इस बयान पर कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा कहते हैं कि राजद की समिक्षा बैठक उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है. हर पार्टी चुनाव के बाद समीक्षा करती है और राजद भी कर रही है. JDU ने राजद की समीक्षा बैठक पर चुटकी ली है. JDU प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं कि अगर राजद चिराग़ पासवान का सहारा नहीं लेता और तुक्का नहीं लगता तो राजद को इतनी सीट कभी नहीं आती.
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राजद के पूर्व मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्धीकी ने कहा है कि अगर बिहार विधानसभा चुनाव के समय लालू यादव जेल से बाहर होते तो बिहार की तस्वीर अभी दूसरी होती. उन्होंने यह भी कहा है कि अब जब चुनाव परिणआम आ गया है तो किसी पर आरोप प्रत्यारोप करने का कोई फायदा नहीं है. आपको बता दें कि राजद कुछ ही दिनों में बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार को लेकर समीक्षा बैठक करने वाला है. राजद की समक्षा बैठक से ठीक पहले अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा है कि आज राजद में लालू प्रसाद यादव की नीति और सिद्धांत को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है, कोई दूसरा व्यक्ति लालू यादव नहीं हो सकता है. लालू यादव की तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है. आपको बता दें कि अब्दुल बारी सिद्दीकी पार्टी के शिर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं. इतना ही नहीं पिछले दिनों मीडिया में यह खबरें भी चल रही थी कि सिद्दीकी जदयू की सदस्यता भी ले सकते हैं. हालांकि अभी तक इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं. सिद्दिकी के इस बयान पर कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा कहते हैं कि राजद की समिक्षा बैठक उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है. हर पार्टी चुनाव के बाद समीक्षा करती है और राजद भी कर रही है. JDU ने राजद की समीक्षा बैठक पर चुटकी ली है. JDU प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं कि अगर राजद चिराग़ पासवान का सहारा नहीं लेता और तुक्का नहीं लगता तो राजद को इतनी सीट कभी नहीं आती.
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सविशेष-प्रतीतियुक्त दृष्टिगोचर होती है; अथवा माया ही परिच्छिन्न होने पर संसार और अपरिच्छिन्न-अवस्थामें ब्रह्म है; अथवा ब्रह्म-विम्ब है तथा जगत् - प्रतिबिम्ब है; अथवा सबकुछ जीवका भ्रम है - जीवके भ्रमसे ही निर्विशेष-ब्रह्ममें जीव और जगत्की भ्रान्ति होती है। किसी-किसीका कहना है - 'स्वभावतः ईश्वर - एक है, जीव - एक है और जगत् या प्रपञ्च एक तत्त्व होने पर भी ये सभी नित्य स्वतंत्ररूपसे पृथक्-पृथक् हैं; अथवा ईश्वर - विशेष्य हैं, जीव और जगत् उस विशेष्यके विशेषण हैं, इस प्रकार विशेषणयुक्त विशेष्य - विशिष्टाद्वैत ब्रह्म ही परतत्त्व है । कतिपय विचारकोंका ऐसा भी मानना है कि परतत्त्व, कभी-कभी अचिन्त्य - शक्तिके प्रभावसे अद्वैत और कभी-कभी द्वैत- इन दोनों रूपोंमें प्रतिभात होते हैं, ये दोनों प्रतीतियाँ ही सत्य हैं। किन्हीं विचारकोंके सिद्धान्तके अनुसार शक्तिरहित अद्वैतवादी-निरर्थक और अयुक्तिसंगत हैं; अतएव ब्रह्म - शुद्धशक्तियुक्त नित्यशुद्ध अद्वैततत्त्व है । ये सारे मतवाद वेदोंसे ही वेदान्तसूत्रका अवलम्बन कर प्रसूत हुए हैं। ये मतवाद- समूह वेदोंके सार्वदेशिक सत्य-सिद्धान्त नहीं होने पर भी इनमें वेदोंका एकदेशीय सत्य अवश्य ही समाहित है। वेद - विरुद्ध - सांख्य, पातञ्जल, न्याय और वैशेषिक एवं वेदांशसम्मत केवल कर्मकाण्ड - प्रिय पूर्व मीमांसा आदि मतवादोंकी बात अलग रहे, बाह्यतः वेदान्तका अवलम्बन करके ही पूर्वोक्त अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैताद्वैत, शुद्धाद्वैत और शुद्ध-द्वैत आदि मतवाद- समूह उत्पन्न हुए हैं। हे ब्रह्मन् ! इन वेदके एकदेशीय वादोंको छोड़कर तुम और तुम्हारा शुद्ध- सम्प्रदाय, वेदोंके सर्वदेशीय पूर्णसिद्धान्त - अचिन्त्यभेदाभेद रूप परम तत्त्वको ग्रहण करो । ऐसा होने पर ही तुम शुद्धभक्त हो सकोगे । सार तात्पर्य यह है कि यह चर जगत् जीवमय है तथा अचर-जगत्- जड़मय है। उनमेंसे जीवसमुदायको मेरी पराशक्तिने तटस्थ-विक्रम (प्रभाव ) से प्रकट किया है तथा जड़ - जगत्को मेरी अपरा शक्तिने प्रकट किया है। मैं - इन सबका बीज हूँ अर्थात् उस प्रकृति शक्तिसे अभिन्नरूपसे अपनी इच्छाशक्ति द्वारा मैं उन सबका नियमन करता हूँ। उन-उन शक्तियोंके परिणामस्वरूप 'प्रधान', 'प्रकृति' और 'पुरुष' हुए हैं। अतएव शक्तित्वमें मैं ही 'प्रधान', 'प्रकृति' और 'पुरुष' होकर भी शक्तिमान-तत्त्वके रूपमें इन सबसे नित्य ही पृथक् हूँ। मेरी अविचिन्त्य शक्तिके प्रभावसे ही इस प्रकार सर्वाङ्गपूर्ण युगपत् भेदाभेद- तत्त्व प्रकाशित हुआ है। अतएव अचिन्त्य-भेदाभेद-तत्त्वमूलक 'जीव', 'जड़' और 'कृष्ण' - इन तीनों के परस्पर
श्लोक - ६२
सम्बन्ध - ज्ञानसे पूर्ण शुद्धभक्ति योगके द्वारा कृष्ण- प्रेमको प्राप्त करना ही तुम्हारी सम्प्रदाय - परम्पराका आम्नाय - उपदेश बना रहे अर्थात् तुम्हारी श्रीब्रह्म सम्प्रदायके अनुयायीजन भी इस शुद्धभक्तिकी विचारधाराको अपनाकर संसारका कल्याण करते रहें ॥ ६२ ॥
वृत्तिर्जीवाशय-प्रकाशिनी । सुरभीकुञ्जवासिना ॥
कृता भक्तिविनोदेन
अर्थात् श्रीजीव गोस्वामीजीके अभिप्रायको प्रकाश करनेवाली तथा जीवोंको अभयप्रदान करनेवाली यह प्रकाशिका वृत्ति सुरभिकुञ्ज निवासी श्रीसच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुरके द्वारा प्रकाशित की गयी है।
इति श्रीब्रह्मसंहिताया भगवत्सिद्धान्त - संग्रहे मूल सूत्राख्य पञ्चम अध्यायकी 'प्रकाशिनी' नामक 'गौड़ीय वृत्ति' समाप्त ।।
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सविशेष-प्रतीतियुक्त दृष्टिगोचर होती है; अथवा माया ही परिच्छिन्न होने पर संसार और अपरिच्छिन्न-अवस्थामें ब्रह्म है; अथवा ब्रह्म-विम्ब है तथा जगत् - प्रतिबिम्ब है; अथवा सबकुछ जीवका भ्रम है - जीवके भ्रमसे ही निर्विशेष-ब्रह्ममें जीव और जगत्की भ्रान्ति होती है। किसी-किसीका कहना है - 'स्वभावतः ईश्वर - एक है, जीव - एक है और जगत् या प्रपञ्च एक तत्त्व होने पर भी ये सभी नित्य स्वतंत्ररूपसे पृथक्-पृथक् हैं; अथवा ईश्वर - विशेष्य हैं, जीव और जगत् उस विशेष्यके विशेषण हैं, इस प्रकार विशेषणयुक्त विशेष्य - विशिष्टाद्वैत ब्रह्म ही परतत्त्व है । कतिपय विचारकोंका ऐसा भी मानना है कि परतत्त्व, कभी-कभी अचिन्त्य - शक्तिके प्रभावसे अद्वैत और कभी-कभी द्वैत- इन दोनों रूपोंमें प्रतिभात होते हैं, ये दोनों प्रतीतियाँ ही सत्य हैं। किन्हीं विचारकोंके सिद्धान्तके अनुसार शक्तिरहित अद्वैतवादी-निरर्थक और अयुक्तिसंगत हैं; अतएव ब्रह्म - शुद्धशक्तियुक्त नित्यशुद्ध अद्वैततत्त्व है । ये सारे मतवाद वेदोंसे ही वेदान्तसूत्रका अवलम्बन कर प्रसूत हुए हैं। ये मतवाद- समूह वेदोंके सार्वदेशिक सत्य-सिद्धान्त नहीं होने पर भी इनमें वेदोंका एकदेशीय सत्य अवश्य ही समाहित है। वेद - विरुद्ध - सांख्य, पातञ्जल, न्याय और वैशेषिक एवं वेदांशसम्मत केवल कर्मकाण्ड - प्रिय पूर्व मीमांसा आदि मतवादोंकी बात अलग रहे, बाह्यतः वेदान्तका अवलम्बन करके ही पूर्वोक्त अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैताद्वैत, शुद्धाद्वैत और शुद्ध-द्वैत आदि मतवाद- समूह उत्पन्न हुए हैं। हे ब्रह्मन् ! इन वेदके एकदेशीय वादोंको छोड़कर तुम और तुम्हारा शुद्ध- सम्प्रदाय, वेदोंके सर्वदेशीय पूर्णसिद्धान्त - अचिन्त्यभेदाभेद रूप परम तत्त्वको ग्रहण करो । ऐसा होने पर ही तुम शुद्धभक्त हो सकोगे । सार तात्पर्य यह है कि यह चर जगत् जीवमय है तथा अचर-जगत्- जड़मय है। उनमेंसे जीवसमुदायको मेरी पराशक्तिने तटस्थ-विक्रम से प्रकट किया है तथा जड़ - जगत्को मेरी अपरा शक्तिने प्रकट किया है। मैं - इन सबका बीज हूँ अर्थात् उस प्रकृति शक्तिसे अभिन्नरूपसे अपनी इच्छाशक्ति द्वारा मैं उन सबका नियमन करता हूँ। उन-उन शक्तियोंके परिणामस्वरूप 'प्रधान', 'प्रकृति' और 'पुरुष' हुए हैं। अतएव शक्तित्वमें मैं ही 'प्रधान', 'प्रकृति' और 'पुरुष' होकर भी शक्तिमान-तत्त्वके रूपमें इन सबसे नित्य ही पृथक् हूँ। मेरी अविचिन्त्य शक्तिके प्रभावसे ही इस प्रकार सर्वाङ्गपूर्ण युगपत् भेदाभेद- तत्त्व प्रकाशित हुआ है। अतएव अचिन्त्य-भेदाभेद-तत्त्वमूलक 'जीव', 'जड़' और 'कृष्ण' - इन तीनों के परस्पर श्लोक - बासठ सम्बन्ध - ज्ञानसे पूर्ण शुद्धभक्ति योगके द्वारा कृष्ण- प्रेमको प्राप्त करना ही तुम्हारी सम्प्रदाय - परम्पराका आम्नाय - उपदेश बना रहे अर्थात् तुम्हारी श्रीब्रह्म सम्प्रदायके अनुयायीजन भी इस शुद्धभक्तिकी विचारधाराको अपनाकर संसारका कल्याण करते रहें ॥ बासठ ॥ वृत्तिर्जीवाशय-प्रकाशिनी । सुरभीकुञ्जवासिना ॥ कृता भक्तिविनोदेन अर्थात् श्रीजीव गोस्वामीजीके अभिप्रायको प्रकाश करनेवाली तथा जीवोंको अभयप्रदान करनेवाली यह प्रकाशिका वृत्ति सुरभिकुञ्ज निवासी श्रीसच्चिदानन्द भक्तिविनोद ठाकुरके द्वारा प्रकाशित की गयी है। इति श्रीब्रह्मसंहिताया भगवत्सिद्धान्त - संग्रहे मूल सूत्राख्य पञ्चम अध्यायकी 'प्रकाशिनी' नामक 'गौड़ीय वृत्ति' समाप्त ।।
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भिलाई। अमृत मिशन योजना के तहत भिलाई निगम क्षेत्र के लगे 23 हजार वाटर मीटर कंडम होने की स्थिति में आ गए हैं। कई मीटरों में टूट फूट हो गए हैं। बता दें कि भिलाई निगम ने यह वाटर मीटर इसलिए लगाया था कि ताकि मीटर रीडिंग के हिसाब से जलकर लिया जा सके।
वहीं इससे पानी की बर्बादी भी रोकने में काफी मदद मिलती। लेकिन, अमृत मिशन योजना अभी पूर्ण रूप से शुरू भी नहीं हो पाया है और वाटर मीटर खराब होने लगे हैं।
बता दें कि 2016-17 में अमृत मिशन योजना का काम शुरू हुआ था। डोर टू डोर पाइप लाइन विस्तारीकरण के दौरान यह तय किया गया था कि घर-घर वाटर मीटर लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव को मंजूरी के बाद 2019 में घर-घर वाटर मीटर लगाने का काम शुरू हुआ था।
भिलाई निगम ने 2019-20 में तकरीबन 23 हजार घरों में वाटर मीटर लगा भी दिया था। दरअसल इसके पीछे भिलाई निगम प्रशासन की दो मंशा थी, एक वाटर मीटर के रीडिंग के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करने वाले हितग्राहियों से जल कर लेना, ताकि भिलाई निगम के राजस्व में वृद्धि हो सके। दूसरा वाटर मीटर लगाए जाने से जल का दुरुपयोग भी काफी हद तक कम होता।
बताया जा रहा है कि 23 हजार घरों में लगे वाटर मीटर लगभग कंडम होने की स्थित में आ गए हैं। ज्यादातर लोगों ने पैसे बचाने के फेर में वाटर मीटर का इस्तेमाल ही नहीं गिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रही कि भिलाई निगम का जलकार्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी कभी वाटर मीटर की मानिटरिंग ही नहीं कर सके। दूसरी तरफ लोगों की यह भी शिकायत थी कि पानी ठीक से आता नहीं है, तो वाटर मीटर का इस्तेमाल क्यों करें व टैक्स क्यों दे। फिलहाल भिलाई निगम पुराने ढर्रे पर ही जलकर वसूल रहा है।
एक वाटर मीटर की कीतम 12 सौ रुपये है। 23 हजार वाटर मीटर भिलाई के विभिन्ना घरों में लगाया गया है। यानी 2 करोड़ 76 लाख रुपये का वाटर मीटर शहर में लगा है। अब यह कंडम होने की स्थित में है। राजस्व में वृद्धि होने की योजना बनाकर चल रहे भिलाई निगम प्रशासन को उलटे नुकसान हो गया।
-राम नगर एरिया में तो प्रेशर ही नहीं आता, बड़ी मुश्किल से पानी भर पाते हैं, तो फिर काहे का वाटर मीटर और जलकर।
-वाटर मीटर तो बहुत पहले ही खराब हो चुका है, तब से बंद पड़ा है। कम से कम अधिकारियों को निरीक्षण करना चाहिए।
-वाटर मीटर सिर्फ नाम का है। ज्यादातर लोग इस्तेमाल नहीं करते। कोई देखने वाला भी नहीं है।
-पानी तो ठीक से आता नहीं, तो किस बात का वाटर मीटर के हिसाब से जलकर दें। वैसे भी वाटर मीटर खराब ही पड़ा है।
वाटर मीटर तो सभी घरों में लगाया जाना है। पहले लगे वाटर मीटर का लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या खराब हो रहे हैं तो इसे चेक कराया जाएगा।
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भिलाई। अमृत मिशन योजना के तहत भिलाई निगम क्षेत्र के लगे तेईस हजार वाटर मीटर कंडम होने की स्थिति में आ गए हैं। कई मीटरों में टूट फूट हो गए हैं। बता दें कि भिलाई निगम ने यह वाटर मीटर इसलिए लगाया था कि ताकि मीटर रीडिंग के हिसाब से जलकर लिया जा सके। वहीं इससे पानी की बर्बादी भी रोकने में काफी मदद मिलती। लेकिन, अमृत मिशन योजना अभी पूर्ण रूप से शुरू भी नहीं हो पाया है और वाटर मीटर खराब होने लगे हैं। बता दें कि दो हज़ार सोलह-सत्रह में अमृत मिशन योजना का काम शुरू हुआ था। डोर टू डोर पाइप लाइन विस्तारीकरण के दौरान यह तय किया गया था कि घर-घर वाटर मीटर लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव को मंजूरी के बाद दो हज़ार उन्नीस में घर-घर वाटर मीटर लगाने का काम शुरू हुआ था। भिलाई निगम ने दो हज़ार उन्नीस-बीस में तकरीबन तेईस हजार घरों में वाटर मीटर लगा भी दिया था। दरअसल इसके पीछे भिलाई निगम प्रशासन की दो मंशा थी, एक वाटर मीटर के रीडिंग के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करने वाले हितग्राहियों से जल कर लेना, ताकि भिलाई निगम के राजस्व में वृद्धि हो सके। दूसरा वाटर मीटर लगाए जाने से जल का दुरुपयोग भी काफी हद तक कम होता। बताया जा रहा है कि तेईस हजार घरों में लगे वाटर मीटर लगभग कंडम होने की स्थित में आ गए हैं। ज्यादातर लोगों ने पैसे बचाने के फेर में वाटर मीटर का इस्तेमाल ही नहीं गिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रही कि भिलाई निगम का जलकार्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी कभी वाटर मीटर की मानिटरिंग ही नहीं कर सके। दूसरी तरफ लोगों की यह भी शिकायत थी कि पानी ठीक से आता नहीं है, तो वाटर मीटर का इस्तेमाल क्यों करें व टैक्स क्यों दे। फिलहाल भिलाई निगम पुराने ढर्रे पर ही जलकर वसूल रहा है। एक वाटर मीटर की कीतम बारह सौ रुपये है। तेईस हजार वाटर मीटर भिलाई के विभिन्ना घरों में लगाया गया है। यानी दो करोड़ छिहत्तर लाख रुपये का वाटर मीटर शहर में लगा है। अब यह कंडम होने की स्थित में है। राजस्व में वृद्धि होने की योजना बनाकर चल रहे भिलाई निगम प्रशासन को उलटे नुकसान हो गया। -राम नगर एरिया में तो प्रेशर ही नहीं आता, बड़ी मुश्किल से पानी भर पाते हैं, तो फिर काहे का वाटर मीटर और जलकर। -वाटर मीटर तो बहुत पहले ही खराब हो चुका है, तब से बंद पड़ा है। कम से कम अधिकारियों को निरीक्षण करना चाहिए। -वाटर मीटर सिर्फ नाम का है। ज्यादातर लोग इस्तेमाल नहीं करते। कोई देखने वाला भी नहीं है। -पानी तो ठीक से आता नहीं, तो किस बात का वाटर मीटर के हिसाब से जलकर दें। वैसे भी वाटर मीटर खराब ही पड़ा है। वाटर मीटर तो सभी घरों में लगाया जाना है। पहले लगे वाटर मीटर का लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या खराब हो रहे हैं तो इसे चेक कराया जाएगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की आपतकाल सेवा यूपी-112 और महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की 1090 सेवा के साथ तकनीकी सेवाओं के कार्यों की मंगलवार को समीक्षा की। उन्होंने आकस्मिक हेल्पलाइन नंबरों पर प्राप्त होने वाली हर सूचना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं में क्विक रिस्पॉन्स जरूरी है। इसके लिए 112 का रिस्पॉन्स और बेहतर करें। साथ ही प्रदेश के सभी थानों को सीसीटीवी से लैस करें और हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करें।
यूपी और यहां आने वाले लोगों को कभी न कभी आकस्मिक परिस्थितियों में कहीं भी कभी भी पुलिस की त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में यूपी 112 सेवा उपयोगी सिद्ध हुई है। कुशल और समर्पित पुलिसकर्मियों ने यूपी 112 को लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप एक प्रोफेशनल सेवा के रूप में प्रस्तुत किया है। 112 के साथ 101, 108, 1090 और 181 आदि सेवाओं के एकीकरण, जीपीएस, रेडियो वायरलेस, मोबाइल/वेब एप जैसी तकनीक के प्रयोग ने इस सेवा को अत्यधिक व्यावहारिक बनाया है।
इस सेवा से जुड़े सभी पीआरवी कर्मी, ड्राइवर, तकनीकी सेवाएं दे रहे प्रोफेशनल्स, कॉल सेंटर कार्मिकों, सिविल पुलिस के कार्मिक व अधिकारी बधाई के पात्र हैं। 112 जैसी आकस्मिक सेवाओं की उपयोगिता उसके क्विक रिस्पॉन्स पर निर्भर करती है। पीड़ित के फोन कॉल करने और पीआरवी द्वारा उस तक मदद पहुंचाने में वर्ष 2016 में जहां औसतन 01 घंटे का समय लगता था, आज इसे 9:44 मिनट तक लाने में सफलता मिली है।
रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए वाहनों की संख्या और कार्मिकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। हर पीआरवी वाहन को जीपीएस डिवाइस से लैस किया जाए। बॉडी वॉर्न कैमरे मुहैया कराए जाएं। 112 पर कॉल रिसीव करने की क्षमता को और बढ़ाया जाए।
जून 2016 से आज तक 112 पर मिली सूचनाओं में से 84 प्रतिशत का तत्काल घटनास्थल पर ही निराकरण कर दिया गया। पीआरवी वाहनों के खड़े होने की जगह स्थानीय जरूरतों के अनुसार तय की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 1758 थानों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाए। यह कार्य प्राथमिकता के साथ तत्काल पूरा किया जाना चाहिए।
तकनीक के बदलते दौर में पुलिस संचार प्रणाली को भी अपडेट किया जाना चाहिए।
तकनीक की मदद से आज मोबाइल फोन वायरलेस सेट के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। मोबाइल फोन और वायरलेस सेट के बीच संचार प्रणाली को अपनाया जाना चाहिए। उनके निर्देश पर यह तकनीक प्रारंभिक चरण में बाराबंकी पुलिस में लागू होगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की आपतकाल सेवा यूपी-एक सौ बारह और महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की एक हज़ार नब्बे सेवा के साथ तकनीकी सेवाओं के कार्यों की मंगलवार को समीक्षा की। उन्होंने आकस्मिक हेल्पलाइन नंबरों पर प्राप्त होने वाली हर सूचना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं में क्विक रिस्पॉन्स जरूरी है। इसके लिए एक सौ बारह का रिस्पॉन्स और बेहतर करें। साथ ही प्रदेश के सभी थानों को सीसीटीवी से लैस करें और हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करें। यूपी और यहां आने वाले लोगों को कभी न कभी आकस्मिक परिस्थितियों में कहीं भी कभी भी पुलिस की त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में यूपी एक सौ बारह सेवा उपयोगी सिद्ध हुई है। कुशल और समर्पित पुलिसकर्मियों ने यूपी एक सौ बारह को लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप एक प्रोफेशनल सेवा के रूप में प्रस्तुत किया है। एक सौ बारह के साथ एक सौ एक, एक सौ आठ, एक हज़ार नब्बे और एक सौ इक्यासी आदि सेवाओं के एकीकरण, जीपीएस, रेडियो वायरलेस, मोबाइल/वेब एप जैसी तकनीक के प्रयोग ने इस सेवा को अत्यधिक व्यावहारिक बनाया है। इस सेवा से जुड़े सभी पीआरवी कर्मी, ड्राइवर, तकनीकी सेवाएं दे रहे प्रोफेशनल्स, कॉल सेंटर कार्मिकों, सिविल पुलिस के कार्मिक व अधिकारी बधाई के पात्र हैं। एक सौ बारह जैसी आकस्मिक सेवाओं की उपयोगिता उसके क्विक रिस्पॉन्स पर निर्भर करती है। पीड़ित के फोन कॉल करने और पीआरवी द्वारा उस तक मदद पहुंचाने में वर्ष दो हज़ार सोलह में जहां औसतन एक घंटाटे का समय लगता था, आज इसे नौ:चौंतालीस मिनट तक लाने में सफलता मिली है। रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए वाहनों की संख्या और कार्मिकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। हर पीआरवी वाहन को जीपीएस डिवाइस से लैस किया जाए। बॉडी वॉर्न कैमरे मुहैया कराए जाएं। एक सौ बारह पर कॉल रिसीव करने की क्षमता को और बढ़ाया जाए। जून दो हज़ार सोलह से आज तक एक सौ बारह पर मिली सूचनाओं में से चौरासी प्रतिशत का तत्काल घटनास्थल पर ही निराकरण कर दिया गया। पीआरवी वाहनों के खड़े होने की जगह स्थानीय जरूरतों के अनुसार तय की जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी एक हज़ार सात सौ अट्ठावन थानों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाए। यह कार्य प्राथमिकता के साथ तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। तकनीक के बदलते दौर में पुलिस संचार प्रणाली को भी अपडेट किया जाना चाहिए। तकनीक की मदद से आज मोबाइल फोन वायरलेस सेट के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। मोबाइल फोन और वायरलेस सेट के बीच संचार प्रणाली को अपनाया जाना चाहिए। उनके निर्देश पर यह तकनीक प्रारंभिक चरण में बाराबंकी पुलिस में लागू होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आशीष कुमार गुप्ता-बतौली। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पहली बारिश के साथ ही गाज गिरने से पांच बैलों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना बतौली थाना क्षेत्र का है।
पहली ही बारिश में ही गाज का कहर देखने को मिला। दरअसल, बतौली ब्लाक के ग्राम पहाड़ चिरगा घण्टाडीह में पेड़ के नीचे खड़े पांच बैल आकाशीय बिजली की चपेट में आ गए। इससे किसानों पर भी मुसीबतों का पहाड़ गिर गया। घंटाडीह के किसान हरी राम, धनी राम, शंकर पैकरा, अजय और रामेश्वर के एक-एक बैल की मौत हो गई। इस मामले में बतौली तहसीलदार ईश्वर चंद्र यादव ने क्षतिपूर्ति का आश्वासन दिया है।
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आशीष कुमार गुप्ता-बतौली। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पहली बारिश के साथ ही गाज गिरने से पांच बैलों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना बतौली थाना क्षेत्र का है। पहली ही बारिश में ही गाज का कहर देखने को मिला। दरअसल, बतौली ब्लाक के ग्राम पहाड़ चिरगा घण्टाडीह में पेड़ के नीचे खड़े पांच बैल आकाशीय बिजली की चपेट में आ गए। इससे किसानों पर भी मुसीबतों का पहाड़ गिर गया। घंटाडीह के किसान हरी राम, धनी राम, शंकर पैकरा, अजय और रामेश्वर के एक-एक बैल की मौत हो गई। इस मामले में बतौली तहसीलदार ईश्वर चंद्र यादव ने क्षतिपूर्ति का आश्वासन दिया है।
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दम्भ को भेजकर वनारसको अपना सुदृढ गढ बनाया । वहाँ दम्भका पितामह अहङ्कार भी उससे आ मिला । भौतिक चावकिने भी मोहका समर्थन किया। श्रद्धाकी पुत्री शान्तिका क्रोध-द्वारा निग्रह कराया गया। और - मिथ्यादृष्टिको उपनिषद् और श्रद्धाको पृथक् रखनेका आदेश दिया गया ( अक २ ) । शान्ति अपनी सखी करुणा के साथ आती है । उसे अपनी माता श्रद्धा के वियोगका दुख है जिससे वह आत्मघात करनेका विचार करती है। किन्तु करुणा उसे ऐसा करने से रोकती है । तब वह दिगम्बर जैन धर्ममें, वौद्ध धर्ममे, सोमविधि अर्थात् कापालिक मतमे उसकी खोज करती है । ये प्रत्येक धर्म अपनी पत्नीको श्रद्धा वतलाते है, किन्तु शान्ति उन विकृतियोमे अपनी सात्त्विकी माताको नहीं पाती। वौद्ध और जैनधर्म परस्पर कलह करते है । कापालिक आकर उन्हें पान-मत्त बना देता है, और उन्हे बतला देता है कि श्रद्धा और धर्म अब विष्णु-भक्ति के साथ महात्माओके हृदयमे है । कापालिक उनके अपहरणके लिए महाभैरवी विद्याको भेजता है और शान्ति व करुणा उसकी रक्षा के लिए जाती है ( अफ ३ ) 1 श्रद्धाका एक राक्षसी ( महाभैरवी ) अपहरण करना चाहती है, किन्तु विष्णु-भक्तिने उसको रक्षा को । फिर वह विवेकके पास जाती है। विवेक अपने साथी वस्तु - विचार, क्षमा, सन्तोष आदिसे काम, क्रोध, लोभादि मोहके महाभटोको जीतने के सम्बन्धमे परामर्श करके अपनी सेना सहित बनारस पहुँचता है ( अक ४ ) । युद्ध हुआ । मोह और उसकी सन्तान पराजित व छिन्नभिन्न हो गये, जिससे मन बहुत खेद - खिन्न होकर सकल्पको चिता बनानेका आदेश देता है। तव व्यासको सरस्वतीने आकर उसका सम्बोधन किया । अव उसने अपनी उस उपेक्षिता पत्नी निवृत्ति, शम, दमादि पुत्रो, च यम-नियमादि अमात्यो के साथ रहनेका निश्चय किया ( अक ५ ) । उधर विवेक महामोह द्वारा छोडी हुई मधुमती विद्या व नाना उपसर्गोंके प्रभावसे अब भी मोहग्रस्त है और अपनी पत्नी उपनिषत्को चिन्ता नही करता । किन्तु उसका मित्र तर्क उसे अपनी भूलका बोध कराता है और वह उस मोहके अनुयायियोको मार भगाता है । शान्ति उपनिषत्को लाकर उसका विवेकसे मेल कराती है, उपनिषत् यज्ञविद्या, मीमासा, तर्कविद्या, साख्य आदिके साथ अपनी दुर्दशा की कहानी भी सुनाती है और पुरुपको अपने परमात्मत्वका बोध कराती है। विष्णु-भक्तिका उपनिपत्को आदेश मिलता है कि वह अपने गर्भ से प्रवोधोदयको जन्म देकर विवेक को समर्पित कर दे और फिर उससे जा मिले । पुरुष और प्रवोधका मेल होता है और पुरुष द्वारा विश्वशान्तिकी प्रार्थना के साथ नाटक समाप्त होता है ( अक ६ ) 1
इस प्रकार यह नाटक दार्शनिक भावी और विचारोके सघर्प व विवेचनको मूर्तिमान् व्यक्तियोके चरित्र की कथाके समान दृष्यमान रूपमे उपस्थित करता है ।
इस शैलीका एक जैन-नाटक मोहराजपराजय मोढ वैश्य वशके धनदेव और रुक्मिणोके पुत्र यश पालद्वारा अभयदेवके राज्य ( सन् १२२९ - ३२ ई० ) में लिखा गया तथा थारापद्रमे कुमारपाल द्वारा निर्माणित कुमार बिहार में महावीरोत्सव के समय खेला गया था। यह नाटक ५ अकोमे समाप्त हुआ है, और नायक कुमारपाल, उनके गुरु हेमचन्द्र तथा विदूषकको छोड़ उसके समस्त पात्र भावात्मक है। तीर्थंकर ऋषभ, पार्व और महावोरकी वन्दना रूप नान्दी तथा सूत्रधार व नटीके बीच वार्तालापके पश्चात् राजा कुमारपाल और विदूषक रंग मंचपर उपस्थित होते है। ज्ञानदर्पण गुप्तचर आकर उन्हें सूचित करता है कि मोहराजने मनोनगरपर आक्रमण कर वहाँके राजा विवेकचन्द्रको उनकी पत्नी शान्ति तथा पुत्री कृपासुन्दरी सहित बहाँसे मार भगाया है। गुप्तचरने यह भी सूचना दी कि वह सम्यकचारित्र और नीतिकी पुत्री कीर्तिमञ्जरीसे भी मिल चुका है। कीर्तिमञ्जरीका विवाह कुमारपालसे हो चुका है, किन्तु उसकी शिकायत है कि महाराज एक जैन मुनिके प्रभावमे आकर उससे तथा उसके भ्राता प्रतापसे विमुख हो रहे है । इस कारण कोर्तिमञ्जरीने मोहकी सहायता माँगी है और वह कुमारपालपर आक्रमणको तैयारी कर रहा है। गुप्तचरने कीर्तिमञ्जरीको सचेत कर दिया है कि युद्धमे मोहका ही पराजय होगा । इस वातसे कीर्तिमञ्जरीको कुछ निराशा हुई है । कुमारपालने मोहराजको परास्त करनेका निश्चय कर लिया ( अक १ ) ।
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दम्भ को भेजकर वनारसको अपना सुदृढ गढ बनाया । वहाँ दम्भका पितामह अहङ्कार भी उससे आ मिला । भौतिक चावकिने भी मोहका समर्थन किया। श्रद्धाकी पुत्री शान्तिका क्रोध-द्वारा निग्रह कराया गया। और - मिथ्यादृष्टिको उपनिषद् और श्रद्धाको पृथक् रखनेका आदेश दिया गया । शान्ति अपनी सखी करुणा के साथ आती है । उसे अपनी माता श्रद्धा के वियोगका दुख है जिससे वह आत्मघात करनेका विचार करती है। किन्तु करुणा उसे ऐसा करने से रोकती है । तब वह दिगम्बर जैन धर्ममें, वौद्ध धर्ममे, सोमविधि अर्थात् कापालिक मतमे उसकी खोज करती है । ये प्रत्येक धर्म अपनी पत्नीको श्रद्धा वतलाते है, किन्तु शान्ति उन विकृतियोमे अपनी सात्त्विकी माताको नहीं पाती। वौद्ध और जैनधर्म परस्पर कलह करते है । कापालिक आकर उन्हें पान-मत्त बना देता है, और उन्हे बतला देता है कि श्रद्धा और धर्म अब विष्णु-भक्ति के साथ महात्माओके हृदयमे है । कापालिक उनके अपहरणके लिए महाभैरवी विद्याको भेजता है और शान्ति व करुणा उसकी रक्षा के लिए जाती है एक श्रद्धाका एक राक्षसी अपहरण करना चाहती है, किन्तु विष्णु-भक्तिने उसको रक्षा को । फिर वह विवेकके पास जाती है। विवेक अपने साथी वस्तु - विचार, क्षमा, सन्तोष आदिसे काम, क्रोध, लोभादि मोहके महाभटोको जीतने के सम्बन्धमे परामर्श करके अपनी सेना सहित बनारस पहुँचता है । युद्ध हुआ । मोह और उसकी सन्तान पराजित व छिन्नभिन्न हो गये, जिससे मन बहुत खेद - खिन्न होकर सकल्पको चिता बनानेका आदेश देता है। तव व्यासको सरस्वतीने आकर उसका सम्बोधन किया । अव उसने अपनी उस उपेक्षिता पत्नी निवृत्ति, शम, दमादि पुत्रो, च यम-नियमादि अमात्यो के साथ रहनेका निश्चय किया । उधर विवेक महामोह द्वारा छोडी हुई मधुमती विद्या व नाना उपसर्गोंके प्रभावसे अब भी मोहग्रस्त है और अपनी पत्नी उपनिषत्को चिन्ता नही करता । किन्तु उसका मित्र तर्क उसे अपनी भूलका बोध कराता है और वह उस मोहके अनुयायियोको मार भगाता है । शान्ति उपनिषत्को लाकर उसका विवेकसे मेल कराती है, उपनिषत् यज्ञविद्या, मीमासा, तर्कविद्या, साख्य आदिके साथ अपनी दुर्दशा की कहानी भी सुनाती है और पुरुपको अपने परमात्मत्वका बोध कराती है। विष्णु-भक्तिका उपनिपत्को आदेश मिलता है कि वह अपने गर्भ से प्रवोधोदयको जन्म देकर विवेक को समर्पित कर दे और फिर उससे जा मिले । पुरुष और प्रवोधका मेल होता है और पुरुष द्वारा विश्वशान्तिकी प्रार्थना के साथ नाटक समाप्त होता है एक इस प्रकार यह नाटक दार्शनिक भावी और विचारोके सघर्प व विवेचनको मूर्तिमान् व्यक्तियोके चरित्र की कथाके समान दृष्यमान रूपमे उपस्थित करता है । इस शैलीका एक जैन-नाटक मोहराजपराजय मोढ वैश्य वशके धनदेव और रुक्मिणोके पुत्र यश पालद्वारा अभयदेवके राज्य में लिखा गया तथा थारापद्रमे कुमारपाल द्वारा निर्माणित कुमार बिहार में महावीरोत्सव के समय खेला गया था। यह नाटक पाँच अकोमे समाप्त हुआ है, और नायक कुमारपाल, उनके गुरु हेमचन्द्र तथा विदूषकको छोड़ उसके समस्त पात्र भावात्मक है। तीर्थंकर ऋषभ, पार्व और महावोरकी वन्दना रूप नान्दी तथा सूत्रधार व नटीके बीच वार्तालापके पश्चात् राजा कुमारपाल और विदूषक रंग मंचपर उपस्थित होते है। ज्ञानदर्पण गुप्तचर आकर उन्हें सूचित करता है कि मोहराजने मनोनगरपर आक्रमण कर वहाँके राजा विवेकचन्द्रको उनकी पत्नी शान्ति तथा पुत्री कृपासुन्दरी सहित बहाँसे मार भगाया है। गुप्तचरने यह भी सूचना दी कि वह सम्यकचारित्र और नीतिकी पुत्री कीर्तिमञ्जरीसे भी मिल चुका है। कीर्तिमञ्जरीका विवाह कुमारपालसे हो चुका है, किन्तु उसकी शिकायत है कि महाराज एक जैन मुनिके प्रभावमे आकर उससे तथा उसके भ्राता प्रतापसे विमुख हो रहे है । इस कारण कोर्तिमञ्जरीने मोहकी सहायता माँगी है और वह कुमारपालपर आक्रमणको तैयारी कर रहा है। गुप्तचरने कीर्तिमञ्जरीको सचेत कर दिया है कि युद्धमे मोहका ही पराजय होगा । इस वातसे कीर्तिमञ्जरीको कुछ निराशा हुई है । कुमारपालने मोहराजको परास्त करनेका निश्चय कर लिया ।
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विशेष रूप से, दिल्ली (Delhi) के सीएम और एलजी के बीच आखिरी मुलाकात 12 अगस्त को हुई थी, लेकिन वे 19 अगस्त को नहीं मिले, जिस दिन सीबीआई ने शराब नीति में एक कथित घोटाले को लेकर सिसोदिया के घर पर छापा मारा और अगले शुक्रवार, AAP प्रमुख चुनाव प्रचार के लिए गुजरात गए थे।
बैठक में आज नियमित प्रशासनिक मामलों पर चर्चा होनी थी। सीबीआई ने वीके सक्सेना की सिफारिश पर मनीष सिसोदिया के घर पर छापा मारा और दावा किया कि सिसोदिया ने निविदाएं दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसों को वित्तीय लाभ दिया और इस तरह राजकोष को भारी नुकसान हुआ।
2021 में घातक डेल्टा कोविड-19 महामारी के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली मंत्रिमंडल में आबकारी नीति पारित की गई थी। हालांकि, दिल्ली सरकार का तर्क है कि नीति इष्टतम राजस्व की पीढ़ी सुनिश्चित करने और उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार के अलावा, दिल्ली में नकली शराब या गैर-शुल्क भुगतान वाली शराब की बिक्री को खत्म करने के लिए तैयार की गई थी।
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विशेष रूप से, दिल्ली के सीएम और एलजी के बीच आखिरी मुलाकात बारह अगस्त को हुई थी, लेकिन वे उन्नीस अगस्त को नहीं मिले, जिस दिन सीबीआई ने शराब नीति में एक कथित घोटाले को लेकर सिसोदिया के घर पर छापा मारा और अगले शुक्रवार, AAP प्रमुख चुनाव प्रचार के लिए गुजरात गए थे। बैठक में आज नियमित प्रशासनिक मामलों पर चर्चा होनी थी। सीबीआई ने वीके सक्सेना की सिफारिश पर मनीष सिसोदिया के घर पर छापा मारा और दावा किया कि सिसोदिया ने निविदाएं दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसों को वित्तीय लाभ दिया और इस तरह राजकोष को भारी नुकसान हुआ। दो हज़ार इक्कीस में घातक डेल्टा कोविड-उन्नीस महामारी के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली मंत्रिमंडल में आबकारी नीति पारित की गई थी। हालांकि, दिल्ली सरकार का तर्क है कि नीति इष्टतम राजस्व की पीढ़ी सुनिश्चित करने और उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार के अलावा, दिल्ली में नकली शराब या गैर-शुल्क भुगतान वाली शराब की बिक्री को खत्म करने के लिए तैयार की गई थी।
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सुरंगानी - सलूणी उपमंडल की ब्याना पंचायत में गर्मियों के शुरुआती दौर में भी ही पानी का संकट गहराने से ग्रामीणों में हाहाकार मच गया है। पंचायत के दो गांवों में पिछले चार-पांच दिन से पानी की आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों को करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर अपनी और मवेशियों की प्यास बुझाने के अलावा घरेलू कामकाज निपटाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक आईपीएच विभाग की ओर से लड़खड़ाई पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीण दलीप सिंह, प्यार चंद, पान चंद, चैन लाल, रमेश कुमार, किशन चंद, पानो, विनोद, विवेक, रोहित, मनीष राजपूत व संतोष ने बताया कि पंचायत के बनवाली व कैला गांवों के अलावा मंजीर, में पानी की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। पेयजल आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आईपीएच विभाग से जल्द पेयजल व्यवस्था को सुचारू करके राहत पहुंचाने की गुहार लगाई है। उधर, आईपीएच विभाग सलूणी मंडल के एक्सईएन हेमंत पुरी का कहना है कि इन गांवों में पेयजल समस्या को लेकर फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अगर गांवों में पेयजल की किल्लत चल रही है तो जल्द स्टाफ भेजकर समस्या का हल कर दिया जाएगा।
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सुरंगानी - सलूणी उपमंडल की ब्याना पंचायत में गर्मियों के शुरुआती दौर में भी ही पानी का संकट गहराने से ग्रामीणों में हाहाकार मच गया है। पंचायत के दो गांवों में पिछले चार-पांच दिन से पानी की आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों को करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर अपनी और मवेशियों की प्यास बुझाने के अलावा घरेलू कामकाज निपटाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक आईपीएच विभाग की ओर से लड़खड़ाई पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। ग्रामीण दलीप सिंह, प्यार चंद, पान चंद, चैन लाल, रमेश कुमार, किशन चंद, पानो, विनोद, विवेक, रोहित, मनीष राजपूत व संतोष ने बताया कि पंचायत के बनवाली व कैला गांवों के अलावा मंजीर, में पानी की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। पेयजल आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आईपीएच विभाग से जल्द पेयजल व्यवस्था को सुचारू करके राहत पहुंचाने की गुहार लगाई है। उधर, आईपीएच विभाग सलूणी मंडल के एक्सईएन हेमंत पुरी का कहना है कि इन गांवों में पेयजल समस्या को लेकर फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अगर गांवों में पेयजल की किल्लत चल रही है तो जल्द स्टाफ भेजकर समस्या का हल कर दिया जाएगा।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में पिछले काफी समय से भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव बना हुआ है। ऐसे में दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहे हैं। इसी बीच वायुसेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया (RKS Bhadauria) का बड़ा बयान सामने आया है, उन्होंने कहा है कि भारत दोनों फ्रंट पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है।
वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा है कि भारतीय वायुसेना पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ एक साथ युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। वह कहते हैं हमारी सेना हर मोर्चे पर दुश्मन सेना के खिलाफ बीस साबित होगी। चीन तवान पर उन्होंने कहा है कि इसका फायदा पाकिस्तान उठाने में लगा हुआ है।
इसी मौके पर बोलते हुए वायुसेना चीफ ने राफेल की बात करते हुए कहा है कि राफेल के आने से दुश्मनों में खौफ है। इससे हमें ताकत मिली है। इससे आगे हम अपने दुश्मनों पर ठोस कार्यवाही कर पाएंगे। इससे भारतीय वायुसेना और भी ताकतवर हो जाएगी।
#MahatmaGandhi: जब बापू पर चली थीं गोलियां, जानें कौन मिलना चाहता था गोडसे से?
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्वी लद्दाख में पिछले काफी समय से भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव बना हुआ है। ऐसे में दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहे हैं। इसी बीच वायुसेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया का बड़ा बयान सामने आया है, उन्होंने कहा है कि भारत दोनों फ्रंट पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा है कि भारतीय वायुसेना पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ एक साथ युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। वह कहते हैं हमारी सेना हर मोर्चे पर दुश्मन सेना के खिलाफ बीस साबित होगी। चीन तवान पर उन्होंने कहा है कि इसका फायदा पाकिस्तान उठाने में लगा हुआ है। इसी मौके पर बोलते हुए वायुसेना चीफ ने राफेल की बात करते हुए कहा है कि राफेल के आने से दुश्मनों में खौफ है। इससे हमें ताकत मिली है। इससे आगे हम अपने दुश्मनों पर ठोस कार्यवाही कर पाएंगे। इससे भारतीय वायुसेना और भी ताकतवर हो जाएगी। #MahatmaGandhi: जब बापू पर चली थीं गोलियां, जानें कौन मिलना चाहता था गोडसे से? Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
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डायबिटीज हेरेडिटरी प्रॉब्लम : चार लाख परिवारEffect of diabetesआंखें- डायबिटीज रोगियों को अपनी आंखों की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए, क्योंकि डायबिटीज में सफेद मोतिया की समस्या, थकान, पर्दे कमजोर होने से धुंधला दिखना शुरू हो जाता है। कई बार तो डायबिटीज से अंधे होने का खतरा भी हो जाता है।
पैर- डायबिटीज में अक्सर पैरों की नसों को नुकसान होता है। रोगी को चोट लगने के बाद उसमें कोई असर नहीं पड़ता। यही नहीं खून का भी सधीमा हो जाता है। इससे पैर की चोट जल्द ठीक नहीं होती. पैरों में इंफेक्शन बहुत जल्दी होता है और कई बार ये इतना फैल जाता है कि रोगी के पैर भी खराब हो जाते हैं। अगर पैरों में दर्द और सूजन हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
गुर्दे- डायबिटीज में मरीज को गुर्दे की समस्या भी हो जाती है। गुर्दा काम करना बंद कर देता है। ऐसे में रोगियों को यूरीन टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। टेस्ट के जरिए यूरीन में प्रोटीन व खून के रिसाव के बारे में पता किया जाता है। अगर यूरीन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो तो किडनी फेल होने का खतरा रहता है।
हार्ट- डायबिटीज में खान-पान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। इसमें हार्ट प्रॉब्लम्स होने की भी संभावनाएं होती है। फैट वाले खाने से कोलेस्ट्रोल बढ़ जाता है, जो दिल के लिए खतरनाक है। इससे हार्टअटैक या हार्ट फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम का एक साथ होना काफी घातक होता है।
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डायबिटीज हेरेडिटरी प्रॉब्लम : चार लाख परिवारEffect of diabetesआंखें- डायबिटीज रोगियों को अपनी आंखों की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए, क्योंकि डायबिटीज में सफेद मोतिया की समस्या, थकान, पर्दे कमजोर होने से धुंधला दिखना शुरू हो जाता है। कई बार तो डायबिटीज से अंधे होने का खतरा भी हो जाता है। पैर- डायबिटीज में अक्सर पैरों की नसों को नुकसान होता है। रोगी को चोट लगने के बाद उसमें कोई असर नहीं पड़ता। यही नहीं खून का भी सधीमा हो जाता है। इससे पैर की चोट जल्द ठीक नहीं होती. पैरों में इंफेक्शन बहुत जल्दी होता है और कई बार ये इतना फैल जाता है कि रोगी के पैर भी खराब हो जाते हैं। अगर पैरों में दर्द और सूजन हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। गुर्दे- डायबिटीज में मरीज को गुर्दे की समस्या भी हो जाती है। गुर्दा काम करना बंद कर देता है। ऐसे में रोगियों को यूरीन टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। टेस्ट के जरिए यूरीन में प्रोटीन व खून के रिसाव के बारे में पता किया जाता है। अगर यूरीन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो तो किडनी फेल होने का खतरा रहता है। हार्ट- डायबिटीज में खान-पान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। इसमें हार्ट प्रॉब्लम्स होने की भी संभावनाएं होती है। फैट वाले खाने से कोलेस्ट्रोल बढ़ जाता है, जो दिल के लिए खतरनाक है। इससे हार्टअटैक या हार्ट फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम का एक साथ होना काफी घातक होता है।
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वित्तमंत्री अरुण जेटली के पिटारे में महिलाओं के लिए क्या?
वित्तमंत्री अरुण जेटली वित्तवर्ष 2018-19 के लिए बजट पेश किया. जिसमें महिलाओं के लिए कई बड़ी योजनाओं का एलान किया गया.
महिलाओं के लिए हुई क्या-क्या घोषणाएंः
- उज्ज्वला योजना के तहत तीन करोड़ नए मुफ़्त गैस कनेक्शन दिए जाने की घोषणा की गई.
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत छह करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ शौचालयों के निर्माण की योजना.
- ग़रीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 लाख नए आवासों की घोषणा.
- महिलाओं के लिए शुरुआती तीन सालों के लिए ईपीएफ़ में शामिल होने के लिए ज़रूरी मूल वेतन का 12 फ़ीसदी योगदान घटाकर 8 फ़ीसदी किया गया, इससे प्रतिमाह हाथ में आने वाली आमदनी बढ़ेगी.
- स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करते हुए 1. 5 लाख मेडिकल सेंटर खोलने का एलान.
- सुकन्या समृद्धि में अच्छी सफलता को देखते हुए इसे और बढ़ाने पर ज़ोर.
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वित्तमंत्री अरुण जेटली के पिटारे में महिलाओं के लिए क्या? वित्तमंत्री अरुण जेटली वित्तवर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए बजट पेश किया. जिसमें महिलाओं के लिए कई बड़ी योजनाओं का एलान किया गया. महिलाओं के लिए हुई क्या-क्या घोषणाएंः - उज्ज्वला योजना के तहत तीन करोड़ नए मुफ़्त गैस कनेक्शन दिए जाने की घोषणा की गई. - स्वच्छ भारत मिशन के तहत छह करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ शौचालयों के निर्माण की योजना. - ग़रीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इक्यावन लाख नए आवासों की घोषणा. - महिलाओं के लिए शुरुआती तीन सालों के लिए ईपीएफ़ में शामिल होने के लिए ज़रूरी मूल वेतन का बारह फ़ीसदी योगदान घटाकर आठ फ़ीसदी किया गया, इससे प्रतिमाह हाथ में आने वाली आमदनी बढ़ेगी. - स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करते हुए एक. पाँच लाख मेडिकल सेंटर खोलने का एलान. - सुकन्या समृद्धि में अच्छी सफलता को देखते हुए इसे और बढ़ाने पर ज़ोर.
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देकर अपने हाथों से सोने के कटोरे में उसे खीर खिलाई । प्रातः काल मन्दिर के पट खुलने पर देखा गया कि भगवान् का सोने का कटोरा लुप्त हो गया है। राजा ने यह समाचार जब सुकरा उरांव को सुनाया तो उसने बताया कि रात्रि को जगन्नाथजी ने उसे सोने के कटोरे में खीर खिलाई थी और वह कटोरा उसने पीछे बाड़ी में फेंक दिया था। कटोरा बाड़ी में मिल जाने पर राजा एवं पण्डा लोगों ने उसे पहचान लिया। सभी ने आनन्द विस्मित होकर कहा - 'हमने तो मात्र काष्ठ मूर्ति के दर्शन किए, सच्चे जगन्नाथजी का दर्शन तो आपको ही हुआ है।' भगवान् जगन्नाथ ने स्वप्न में राजा ऐनीनाथ शाहदेव को प्रेरणा दी कि राँची लौटने पर वह धुर्वा, बड़कागढ़ (जगन्नाथपुर) में श्री जगन्नाथजी का मन्दिर स्थापित करें ताकि निर्धन वनवासी वहीं पर रथ-यात्रा का दर्शन कर पुण्य लाभ कर सकें।
एक उरांव वनवासी सेवक की ईश्वर भक्ति के चमत्कार से ही राजा ऐनीनाथ शाहदेव को मंदिर स्थापना की सत्प्रेरणा हुई, इसलिये जगन्नाथपुर मंदिर झारखंड के वनवासी बन्धुओं का भी सर्वोच्च महातीर्थ बन गया।
बिरसा भगवान् ने इसी मंदिर में श्री जगन्नाथ महाप्रभु के सामने स्वदेश एवं स्वधर्म की रक्षा हेतु पापी पादरियों से धर्म - युद्ध का संकल्प किया था और इसी हेतु अपने प्राण भी न्योछावर कर दिये ।
विदेशों में रथ-यात्रा
जापान एवं कोरिया में अभी तक इसी आषाढ़ शुक्ला द्वितीया के दिन विशाल रथ-यात्रा निकलती है। बौद्ध देश होने के कारण रथ में बुद्ध, तारा एवं कालभैरव की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित होती हैं। भारत के समान ही लकड़ी के रथ, लकड़ी के चक्के, खींचने वाले भक्त, वर्षा की रिम-झिम । सभी कुछ पुरीधाम जैसा ही होता है।
थाई देश, कम्बुज, चम्पा आदि में भी प्राचीन काल से रथ-यात्रा की परम्परा चली आ रही है। मलेशिया, सिंगापुर की रथ यात्रा में इसी दिन भगवान् कार्तिकेय (सुब्रह्मण्यम स्वामी, मुरूगन स्वामी) के बड़े भव्य रथ निकाले जाते हैं। यह परम्परा दक्षिण भारत से आयी है। जिस प्रकार भक्तजन जगन्नाथ स्वामी का रथ खींचने में अपने को कष्ट में डालने तथा स्वयं बलिदान तक हो जाने में गौरव मानते हैं, उसी प्रकार दक्षिण भारतीय भक्त दक्षिण भारत में तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में बसे हुए कावड़ उठाते हैं। अपने शरीर के मुख, कंधे के भीतर से सूआ पिरोकर, उससे रस्सी बांध, देवता के रथ को खींचते हैं।
इंडोनेशिया का बाली द्वीप लगभग 100 प्रतिशत हिन्दू द्वीप है। वहाँ की रथ यात्रा में विष्णु (जगन्नाथजी) विराजते हैं तथा इंडोनेशिया के शेष द्वीपों में बुद्ध, तारा एवं कालभैरव की त्रिमूर्ति है।
रथ यात्रा : जगती के आंगन में भारतीय संस्कृति के महारथ के अमिट पद - चिह्न 119
अमरीका एवं पश्चिमी देशों में आज जो विराट् रथ यात्रा महोत्सव मनाए जा रहे हैं, वे सब पूज्य श्री भक्तिवेदान्त स्वामीजी की तपस्या का ही सुफल है। श्री चैतन्य गोड़ीय मठ के भक्त डॉ. अभय चरण कोलकाता में डॉक्टर थे। उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु की इस वाणी को पढ़ा कि एक दिन सारे विश्व में श्रीकृष्ण नाम गूंजना चाहिए। वे संन्यास लेकर भक्तिवेदान्त स्वामी नाम धारणकर सन् 1966 में एक भगवद्गीता, एक करताल एवं आठ डालर की विदेशी मुद्रा लेकर अमरीका जा पहुँचे। उन्होंने एक अमरीकी के साथ रहकर गीता व्याख्यान एवं संकीर्तन प्रारम्भ किया। धीरे-धीरे प्रभुपाद के दिव्य विचारों से अमरीका में ही 14,000 से अधिक अमरीकन घर गृहस्थी त्याग कर, मांस- शराब त्यागकर, शिखा - सूत्र, तिलक धारणकर, 'हरे-कृष्ण आंदोलन' में जीवनदानी संन्यासी बन चुके हैं। दुनिया में 150 से अधिक श्रीकृष्ण मन्दिर स्थापित हो चुके हैं तथा अमरीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड के प्रत्येक बड़े नगर में विराट् एवं विशाल रथ-यात्रा महोत्सव हो रहे हैं।
अमरीका में न्यू वृन्दावन एवं नवीन पुरी नगर स्थापित हो चुके हैं तथा बोस्टन, लंदन, न्यूयॉर्क एवं बर्लिन की गलियों में कीर्तन गूंज रहा है। इस प्रकार जगती के आंगन में जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा के बहाने भारतीय संस्कृति की दिग्विजय के महारथ के चरण-चिह्न स्थापित हो रहे हैं ।
मुझे फिक्र है कि हमारे देशवासी कल-कारखानों और मशीनी तकनीक से बलवान बनकर अपनी-अपनी दौलत और ऐश के फेर में पड़कर कहीं अपने ही को खो न बैठें। अगर ऐसा हुआ, तो यह बड़े दुःख की बात होगी, क्योंकि इसके माने ये होंगे कि भारत युगों से जिन आदर्शों पर चलता आया है, और इस जमाने में गांधीजी ने जिनकी मिसाल कायम की है, उन सबको भुला देगा। शक्ति जरूरी है, पर ज्ञान उससे भी ज्यादा जरूरी है। जिस शक्ति को ज्ञान का सहारा हो वही शक्ति अच्छी होती है।
- पंडित नेहरू
120 भारतीय परम्परा में उत्सव
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देकर अपने हाथों से सोने के कटोरे में उसे खीर खिलाई । प्रातः काल मन्दिर के पट खुलने पर देखा गया कि भगवान् का सोने का कटोरा लुप्त हो गया है। राजा ने यह समाचार जब सुकरा उरांव को सुनाया तो उसने बताया कि रात्रि को जगन्नाथजी ने उसे सोने के कटोरे में खीर खिलाई थी और वह कटोरा उसने पीछे बाड़ी में फेंक दिया था। कटोरा बाड़ी में मिल जाने पर राजा एवं पण्डा लोगों ने उसे पहचान लिया। सभी ने आनन्द विस्मित होकर कहा - 'हमने तो मात्र काष्ठ मूर्ति के दर्शन किए, सच्चे जगन्नाथजी का दर्शन तो आपको ही हुआ है।' भगवान् जगन्नाथ ने स्वप्न में राजा ऐनीनाथ शाहदेव को प्रेरणा दी कि राँची लौटने पर वह धुर्वा, बड़कागढ़ में श्री जगन्नाथजी का मन्दिर स्थापित करें ताकि निर्धन वनवासी वहीं पर रथ-यात्रा का दर्शन कर पुण्य लाभ कर सकें। एक उरांव वनवासी सेवक की ईश्वर भक्ति के चमत्कार से ही राजा ऐनीनाथ शाहदेव को मंदिर स्थापना की सत्प्रेरणा हुई, इसलिये जगन्नाथपुर मंदिर झारखंड के वनवासी बन्धुओं का भी सर्वोच्च महातीर्थ बन गया। बिरसा भगवान् ने इसी मंदिर में श्री जगन्नाथ महाप्रभु के सामने स्वदेश एवं स्वधर्म की रक्षा हेतु पापी पादरियों से धर्म - युद्ध का संकल्प किया था और इसी हेतु अपने प्राण भी न्योछावर कर दिये । विदेशों में रथ-यात्रा जापान एवं कोरिया में अभी तक इसी आषाढ़ शुक्ला द्वितीया के दिन विशाल रथ-यात्रा निकलती है। बौद्ध देश होने के कारण रथ में बुद्ध, तारा एवं कालभैरव की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित होती हैं। भारत के समान ही लकड़ी के रथ, लकड़ी के चक्के, खींचने वाले भक्त, वर्षा की रिम-झिम । सभी कुछ पुरीधाम जैसा ही होता है। थाई देश, कम्बुज, चम्पा आदि में भी प्राचीन काल से रथ-यात्रा की परम्परा चली आ रही है। मलेशिया, सिंगापुर की रथ यात्रा में इसी दिन भगवान् कार्तिकेय के बड़े भव्य रथ निकाले जाते हैं। यह परम्परा दक्षिण भारत से आयी है। जिस प्रकार भक्तजन जगन्नाथ स्वामी का रथ खींचने में अपने को कष्ट में डालने तथा स्वयं बलिदान तक हो जाने में गौरव मानते हैं, उसी प्रकार दक्षिण भारतीय भक्त दक्षिण भारत में तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में बसे हुए कावड़ उठाते हैं। अपने शरीर के मुख, कंधे के भीतर से सूआ पिरोकर, उससे रस्सी बांध, देवता के रथ को खींचते हैं। इंडोनेशिया का बाली द्वीप लगभग एक सौ प्रतिशत हिन्दू द्वीप है। वहाँ की रथ यात्रा में विष्णु विराजते हैं तथा इंडोनेशिया के शेष द्वीपों में बुद्ध, तारा एवं कालभैरव की त्रिमूर्ति है। रथ यात्रा : जगती के आंगन में भारतीय संस्कृति के महारथ के अमिट पद - चिह्न एक सौ उन्नीस अमरीका एवं पश्चिमी देशों में आज जो विराट् रथ यात्रा महोत्सव मनाए जा रहे हैं, वे सब पूज्य श्री भक्तिवेदान्त स्वामीजी की तपस्या का ही सुफल है। श्री चैतन्य गोड़ीय मठ के भक्त डॉ. अभय चरण कोलकाता में डॉक्टर थे। उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु की इस वाणी को पढ़ा कि एक दिन सारे विश्व में श्रीकृष्ण नाम गूंजना चाहिए। वे संन्यास लेकर भक्तिवेदान्त स्वामी नाम धारणकर सन् एक हज़ार नौ सौ छयासठ में एक भगवद्गीता, एक करताल एवं आठ डालर की विदेशी मुद्रा लेकर अमरीका जा पहुँचे। उन्होंने एक अमरीकी के साथ रहकर गीता व्याख्यान एवं संकीर्तन प्रारम्भ किया। धीरे-धीरे प्रभुपाद के दिव्य विचारों से अमरीका में ही चौदह,शून्य से अधिक अमरीकन घर गृहस्थी त्याग कर, मांस- शराब त्यागकर, शिखा - सूत्र, तिलक धारणकर, 'हरे-कृष्ण आंदोलन' में जीवनदानी संन्यासी बन चुके हैं। दुनिया में एक सौ पचास से अधिक श्रीकृष्ण मन्दिर स्थापित हो चुके हैं तथा अमरीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड के प्रत्येक बड़े नगर में विराट् एवं विशाल रथ-यात्रा महोत्सव हो रहे हैं। अमरीका में न्यू वृन्दावन एवं नवीन पुरी नगर स्थापित हो चुके हैं तथा बोस्टन, लंदन, न्यूयॉर्क एवं बर्लिन की गलियों में कीर्तन गूंज रहा है। इस प्रकार जगती के आंगन में जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा के बहाने भारतीय संस्कृति की दिग्विजय के महारथ के चरण-चिह्न स्थापित हो रहे हैं । मुझे फिक्र है कि हमारे देशवासी कल-कारखानों और मशीनी तकनीक से बलवान बनकर अपनी-अपनी दौलत और ऐश के फेर में पड़कर कहीं अपने ही को खो न बैठें। अगर ऐसा हुआ, तो यह बड़े दुःख की बात होगी, क्योंकि इसके माने ये होंगे कि भारत युगों से जिन आदर्शों पर चलता आया है, और इस जमाने में गांधीजी ने जिनकी मिसाल कायम की है, उन सबको भुला देगा। शक्ति जरूरी है, पर ज्ञान उससे भी ज्यादा जरूरी है। जिस शक्ति को ज्ञान का सहारा हो वही शक्ति अच्छी होती है। - पंडित नेहरू एक सौ बीस भारतीय परम्परा में उत्सव
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inextlive के साथ रहिए खबरों की दुनिया से जुड़े। यहां पढ़िए Octavio Zegarra से जुड़ी हिन्दी न्यूज़ Octavio Zegarra Hindi News और ताजा खबरें Octavio Zegarra Latest News। देखिए Octavio Zegarra संबंधी ताजा वीडियो। साथ ही Octavio Zegarra की ताजा तस्वीरें। Octavio Zegarra से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज, वीडियो व फोटो एक साथ एक जगह। पाइए Octavio Zegarra से जुड़ी जानकारी जिसमें है आपकी रुचि या जो आ सकती है आपके काम। Octavio Zegarra से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को छूने वाली नवीनतम जानकारी, खबरें, वीडियो व तस्वीरें। राजनीति से लेकर टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट व संस्कृति जगत की ताजा हलचल के लिए बने रहिए inextlive के साथ.
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जशपुर। जिले के आरा क्षेत्र में कट्टे की नोक पर एक व्यापारी से 80 लाख रूपए से ज्यादा की रकम लूट लिए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि आरा के साप्ताहिक बाजार में यह घटना हुई है। दिनदहाड़े हुई इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बाद अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का दावा है कि मामले की छानबीन जारी है, पुलिस आरोपियों की पतासाजी में जुटी है, लेकिन अभी तक लूटेरे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
जानकारी के मुताबिक, शिवपूजन गुप्ता उर्फ़ पप्पू गल्ला व्यापारी है, जिसके साथ हाथापाई, मारपीट और कट्टे को लहराते हुए बदमाशों ने 80 हजार से ज्यादा रकम लूट ले गए। इस वक़्त वहां मौजूद व्यापारियों ने पत्थर फेंक कर बदमाशों को रोकने की कोशिश की, लेकिन बेखौफ बदमाशों ने बेझिझक और दबंगई के साथ इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया। इस घटना से न सिर्फ बाजार में बल्कि आसपास के मोहल्ले, बस्ती और कॉलोनियों में अफरा-तफरी मच गयी।
पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ सही। पुलिस अधीक्षक एलएल बघेल के अनुसार, व्यापारी की रिपोर्ट पर पुलिस चौकी आरा में अपराध दर्ज किया गया है।
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जशपुर। जिले के आरा क्षेत्र में कट्टे की नोक पर एक व्यापारी से अस्सी लाख रूपए से ज्यादा की रकम लूट लिए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि आरा के साप्ताहिक बाजार में यह घटना हुई है। दिनदहाड़े हुई इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बाद अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का दावा है कि मामले की छानबीन जारी है, पुलिस आरोपियों की पतासाजी में जुटी है, लेकिन अभी तक लूटेरे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जानकारी के मुताबिक, शिवपूजन गुप्ता उर्फ़ पप्पू गल्ला व्यापारी है, जिसके साथ हाथापाई, मारपीट और कट्टे को लहराते हुए बदमाशों ने अस्सी हजार से ज्यादा रकम लूट ले गए। इस वक़्त वहां मौजूद व्यापारियों ने पत्थर फेंक कर बदमाशों को रोकने की कोशिश की, लेकिन बेखौफ बदमाशों ने बेझिझक और दबंगई के साथ इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया। इस घटना से न सिर्फ बाजार में बल्कि आसपास के मोहल्ले, बस्ती और कॉलोनियों में अफरा-तफरी मच गयी। पुलिस अभी तक आरोपियों को नहीं पकड़ सही। पुलिस अधीक्षक एलएल बघेल के अनुसार, व्यापारी की रिपोर्ट पर पुलिस चौकी आरा में अपराध दर्ज किया गया है।
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Ranchi : भारत विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है. दुनिया में सबसे अलग भारत की पहचान है. भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने कोरोनावायरस के दौरान चार स्वदेशी वैक्सीन विकसित किया है. उन व्यक्तियों के बदौलत ही आज हम सभी एक साथ मिलकर दीक्षांत समारोह में उपस्थित हो पाए हैं यह जश्न में हमारे देश का अहम योगदान रहा है यह बातें रांची विश्वविद्यालय के 35 वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेश बैस ने विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा.
राज्यपाल ने तमाम डिग्री धारी विद्यार्थियों को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की. उन्होंने लगभग 12 मिनट के संबोधन में रांची विश्वविद्यालय की कार्यशैली और विद्यार्थियों के अथक मेहनत की चर्चाएं की उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रम एवं योजनाओं से जुड़ी कक्षाएं मिलती है. विद्यार्थियों के अंदर संस्कृति और शिक्षा का ज्ञान का भंडार शिक्षा से ही संपन्न हो पाता है.
रांची विश्वविद्यालय में एक ऐसा वातावरण विकसित हो जिससे बाहर के राज्यों से रांची पढ़ने विद्यार्थी पहुंचे. रांची एजुकेशन हब बन चुका है. अब एजुकेशन के साथ रोजगार से जुड़ी कोर्सेज समय की मांग है. वही वाइस चांसलर कामिनी कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रांची विश्वविद्यालय बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की दिशा में बेहतर काम कर रही हैं. रांची विश्वविद्यालय में पिछले 5 वर्षों से बेटियों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम किया है और सबसे अधिक गोल्ड मेडल उन्हें मिले हैं. इस बात दीक्षांत समारोह में भी 79 गोल्ड मेडलिस्ट 2 में से 49 गोल्ड मेडलिस्ट महिलाएं हैं और इसके अलावा 30 गोल्ड मेडल पुरुषों को मिला है.
वही ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन का मेडल निर्मला कॉलेज की छात्रा अंजली कुमारी को दिया गया. बेस्ट ओवरऑल ग्रेजुएशन वोकेशनल कोर्स में निर्मला कॉलेज की छात्रा शिफा आफरीन को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया. ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन इन आर्ट्स में आस्था भारद्वाज को सम्मानित किया गया. इसके अलावा बेस्ट ओवरऑल कॉमर्स में जागृति सिंह, बेस्ट ओवरऑल ग्रेजुएशन इन संगीत में कुमार दास, ग्रेजुएशन बेस्ट टीचर ट्रेनिंग में दीपिका शर्मा, ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन इन इंजीनियरिंग में किरण कुमारी, पीजी हिस्ट्री में वसुंधरा में एंथ्रोपोलॉजी में मोनिका बैग, जोग्राफी में प्रिया कुमारी इसके अलावा अन्य कई विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. कॉल 24372 डिग्रियां 35 वें दीक्षांत समारोह में बांटी गई है.
साइकोलॉजी डिपार्टमेंट कि गोल्ड मेडलिस्ट त्रिशा शर्मा ने बताया कि 79 गोल्ड में लिस्ट में से 49 गोल्ड मेडल महिलाओं के हिस्से आया है. महिलाएं जितना सशक्त होगी उतना ही परिवार सशक्त होगा. गोल्ड मेडल पाकर आगे का रास्ता खुल गया है. पहले से अधिक मेहनत करने की जरूरत है. और तभी लक्ष्य प्राप्त हो पाएगा.
केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की गोल्ड मेडलिस्ट कुमारी प्रियंका ने बताया कि कोरोनावायरस के बीच यह दीक्षांत समारोह हमें ऊर्जा प्रदान कर रहा है. हम आगे जाकर प्रोफेसर बनेंगे. इसके लिए हमें और अधिक मेहनत करने की जरूरत है. दीक्षांत समारोह के माध्यम से हमें काफी ऊर्जा प्राप्त हुई है. यह सम्मान जीवन भर याद रहेगा.
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Ranchi : भारत विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है. दुनिया में सबसे अलग भारत की पहचान है. भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने कोरोनावायरस के दौरान चार स्वदेशी वैक्सीन विकसित किया है. उन व्यक्तियों के बदौलत ही आज हम सभी एक साथ मिलकर दीक्षांत समारोह में उपस्थित हो पाए हैं यह जश्न में हमारे देश का अहम योगदान रहा है यह बातें रांची विश्वविद्यालय के पैंतीस वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेश बैस ने विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा. राज्यपाल ने तमाम डिग्री धारी विद्यार्थियों को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की. उन्होंने लगभग बारह मिनट के संबोधन में रांची विश्वविद्यालय की कार्यशैली और विद्यार्थियों के अथक मेहनत की चर्चाएं की उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रम एवं योजनाओं से जुड़ी कक्षाएं मिलती है. विद्यार्थियों के अंदर संस्कृति और शिक्षा का ज्ञान का भंडार शिक्षा से ही संपन्न हो पाता है. रांची विश्वविद्यालय में एक ऐसा वातावरण विकसित हो जिससे बाहर के राज्यों से रांची पढ़ने विद्यार्थी पहुंचे. रांची एजुकेशन हब बन चुका है. अब एजुकेशन के साथ रोजगार से जुड़ी कोर्सेज समय की मांग है. वही वाइस चांसलर कामिनी कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रांची विश्वविद्यालय बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की दिशा में बेहतर काम कर रही हैं. रांची विश्वविद्यालय में पिछले पाँच वर्षों से बेटियों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम किया है और सबसे अधिक गोल्ड मेडल उन्हें मिले हैं. इस बात दीक्षांत समारोह में भी उन्यासी गोल्ड मेडलिस्ट दो में से उनचास गोल्ड मेडलिस्ट महिलाएं हैं और इसके अलावा तीस गोल्ड मेडल पुरुषों को मिला है. वही ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन का मेडल निर्मला कॉलेज की छात्रा अंजली कुमारी को दिया गया. बेस्ट ओवरऑल ग्रेजुएशन वोकेशनल कोर्स में निर्मला कॉलेज की छात्रा शिफा आफरीन को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया. ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन इन आर्ट्स में आस्था भारद्वाज को सम्मानित किया गया. इसके अलावा बेस्ट ओवरऑल कॉमर्स में जागृति सिंह, बेस्ट ओवरऑल ग्रेजुएशन इन संगीत में कुमार दास, ग्रेजुएशन बेस्ट टीचर ट्रेनिंग में दीपिका शर्मा, ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएशन इन इंजीनियरिंग में किरण कुमारी, पीजी हिस्ट्री में वसुंधरा में एंथ्रोपोलॉजी में मोनिका बैग, जोग्राफी में प्रिया कुमारी इसके अलावा अन्य कई विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. कॉल चौबीस हज़ार तीन सौ बहत्तर डिग्रियां पैंतीस वें दीक्षांत समारोह में बांटी गई है. साइकोलॉजी डिपार्टमेंट कि गोल्ड मेडलिस्ट त्रिशा शर्मा ने बताया कि उन्यासी गोल्ड में लिस्ट में से उनचास गोल्ड मेडल महिलाओं के हिस्से आया है. महिलाएं जितना सशक्त होगी उतना ही परिवार सशक्त होगा. गोल्ड मेडल पाकर आगे का रास्ता खुल गया है. पहले से अधिक मेहनत करने की जरूरत है. और तभी लक्ष्य प्राप्त हो पाएगा. केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की गोल्ड मेडलिस्ट कुमारी प्रियंका ने बताया कि कोरोनावायरस के बीच यह दीक्षांत समारोह हमें ऊर्जा प्रदान कर रहा है. हम आगे जाकर प्रोफेसर बनेंगे. इसके लिए हमें और अधिक मेहनत करने की जरूरत है. दीक्षांत समारोह के माध्यम से हमें काफी ऊर्जा प्राप्त हुई है. यह सम्मान जीवन भर याद रहेगा.
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मुंबई : बॉलीवुड (Bollywood) एक्ट्रेस (Actress) सनी लियोन (Sunny Leone) अपने सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो अक्सर अपने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं। फैंस भी उनके पोस्ट का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं।
उनके इंस्टाग्राम पर प्रशंसकों की बड़ी तगड़ी फैन फॉलोइंग हैं। अभिनेत्री के इंस्टाग्राम पर 53. 4 मिलियन फैन फॉलोअर्स हैं। सनी लियोन हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ ग्लैमरस तस्वीरें शेयर की हैं।
जिसमें वो पिंक और ब्लू कलर का फुल स्लीव शार्ट ड्रेस पहने नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस कानों में स्टाइलिश इअरिंग्स पहनी हैं। वो अपने लुक को पूरा करते हुए अपने बालों को भी खुला रखी हैं और वो कैमरे के सामने कई पोज देती दिखाई दे रही हैं। वो काफी खुश भी नजर आ रही हैं।
फैंस उनकी इन तस्वीरों के दीवाने हो रहे हैं। वो उनकी इन तस्वीरों से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे हैं। अब तक उनके इन तस्वीरों को एक लाख से अधिक लोग लाइक कर चुके हैं।
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मुंबई : बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोन अपने सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो अक्सर अपने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं। फैंस भी उनके पोस्ट का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनके इंस्टाग्राम पर प्रशंसकों की बड़ी तगड़ी फैन फॉलोइंग हैं। अभिनेत्री के इंस्टाग्राम पर तिरेपन. चार मिलियन फैन फॉलोअर्स हैं। सनी लियोन हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ ग्लैमरस तस्वीरें शेयर की हैं। जिसमें वो पिंक और ब्लू कलर का फुल स्लीव शार्ट ड्रेस पहने नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस कानों में स्टाइलिश इअरिंग्स पहनी हैं। वो अपने लुक को पूरा करते हुए अपने बालों को भी खुला रखी हैं और वो कैमरे के सामने कई पोज देती दिखाई दे रही हैं। वो काफी खुश भी नजर आ रही हैं। फैंस उनकी इन तस्वीरों के दीवाने हो रहे हैं। वो उनकी इन तस्वीरों से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे हैं। अब तक उनके इन तस्वीरों को एक लाख से अधिक लोग लाइक कर चुके हैं।
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प्राप्त कर रहे हैं । परिवार प्रमुख इण्टर तक शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी फिरोजाबाद के है ।
हरिश्चन्द्र जैन सुपुत्र भामण्डलदास जैन, ५८ मालगंज इन्दौर ( इन्दौर )
इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा तीन स्त्री वर्ग में कुल छ सदस्य । एक लड़का तथा एक लड़की अविवाहित हैं और विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख मैट्रिक तक शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी रिसालका बास के हैं।
सुपुत्र हुण्डीलाल जैन, तिजारी गली सियागंज इन्दौर (इन्दौर)
इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा चार स्त्री वर्ग में कुल सात सदस्य हैं । एक लड़का तथा दो लड़की अविवाहित हैं और प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं और व्यापार करते हैं । मूल निवासी टूण्डला के हैं ।
नगर-राऊ ( इन्दौर)
इस परिवार में चार पुरुष वर्ग में तथा दो स्त्री वर्ग में कुल छ सदस्य हैं। तीन लड़के तथा दो लड़की अविवाहित हैं और विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं तथा सर्विस करते हैं । मूल निवावी एटा (उत्तर प्रदेश ) के हैं ।
ब्रजकिशोर जैन सुपुत्र हुव्बलाल जैन, राऊ ( इन्दौर)
जैनपाल जैन सुपुत्र राजमल जैन, खाराकुआँ उज्जन ( उज्जैन)
जिला उज्जैन नगर-उज्जैन
इस परिवार में छ पुरुष वर्ग में तथा तीन स्त्री वर्ग में कुल नौ सदस्य हैं। एक लड़का तथा दो लड़की अविवाहित हैं और प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी धामन्दा के हैं।
प्रेमचन्द जैन सुपुत्र बनारसीदास जैन, विनोदालय, विनोदमिल्स उज्जैन (उज्जैन)
इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा एक स्त्री वर्ग में कुल चार सदस्य हैं। दो लड़के बाल्यावस्था में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख शिक्षित हैं तथा प्रिण्टिंग मास्टर हैं। मूल निवासी पालेज के हैं।
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प्राप्त कर रहे हैं । परिवार प्रमुख इण्टर तक शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी फिरोजाबाद के है । हरिश्चन्द्र जैन सुपुत्र भामण्डलदास जैन, अट्ठावन मालगंज इन्दौर इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा तीन स्त्री वर्ग में कुल छ सदस्य । एक लड़का तथा एक लड़की अविवाहित हैं और विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख मैट्रिक तक शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी रिसालका बास के हैं। सुपुत्र हुण्डीलाल जैन, तिजारी गली सियागंज इन्दौर इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा चार स्त्री वर्ग में कुल सात सदस्य हैं । एक लड़का तथा दो लड़की अविवाहित हैं और प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं और व्यापार करते हैं । मूल निवासी टूण्डला के हैं । नगर-राऊ इस परिवार में चार पुरुष वर्ग में तथा दो स्त्री वर्ग में कुल छ सदस्य हैं। तीन लड़के तथा दो लड़की अविवाहित हैं और विभिन्न कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं तथा सर्विस करते हैं । मूल निवावी एटा के हैं । ब्रजकिशोर जैन सुपुत्र हुव्बलाल जैन, राऊ जैनपाल जैन सुपुत्र राजमल जैन, खाराकुआँ उज्जन जिला उज्जैन नगर-उज्जैन इस परिवार में छ पुरुष वर्ग में तथा तीन स्त्री वर्ग में कुल नौ सदस्य हैं। एक लड़का तथा दो लड़की अविवाहित हैं और प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख साधारण शिक्षित हैं और सर्विस करते हैं । मूल निवासी धामन्दा के हैं। प्रेमचन्द जैन सुपुत्र बनारसीदास जैन, विनोदालय, विनोदमिल्स उज्जैन इस परिवार में तीन पुरुष वर्ग में तथा एक स्त्री वर्ग में कुल चार सदस्य हैं। दो लड़के बाल्यावस्था में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवार प्रमुख शिक्षित हैं तथा प्रिण्टिंग मास्टर हैं। मूल निवासी पालेज के हैं।
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( ३ ) धर्मरुचि अणगार
तर्जमुनिवर धर्मरुचरिख व ॥ र ।।
मव भव पाप निकाचित सचित, दुरमत दूर निकंदू हो
॥ मुनि ।।
चम्पानगर निरूपम सुन्दर, उठे धर्मरूची रिख आया । मास पारणे गुरु आज्ञा ले, गोचरियां सिधाया हो
॥ मुनि १ ॥
नीची दृष्टि धरण सू राखे, मुनिवर गुणभंडारे । सिक्षा श्रटन करतां आनागसिरी घर द्वारे
खारो तूचो जहर हलाहल, मुनिवर ने बहरावे । सहज उकरड़ी आई हम घर, बाहिर कहो कुण जावे हो
॥ मुनिं ३ ।।
पूरण जाणने पाछा किरिया, गुरु आगे श्राय घरियो । कुण दातार मिल्यो रिख तोने, पूरण पातर भरियो हो
॥ मुनि ४ ॥
नाना करतां मुझने बहरायो, भाव उलट मन आणी । चाखी ने गुरु निरणों कीधो, जहर इलाहल जागी हो
॥ सुनि ५ । ।
श्री रत्नपत्र पर मुक्तावली
भसज्ज' भमोज कुल्फ सम सागे, जो मुनिचर तू सामी ।
निर्बत फोठो मदर इलाहल, भकाले मरजानी हां
॥ मुनि• ६ ॥
माझा से परेठणन चाम्या, निग्मय ठोर रिखी भाषे
हिन्दू एक परठतो ऊपर, धड़यो बहु मरजाये हो
अन्य आदार थी एहमी हिंसा, सर्वधी मनरथ जारी परम समपरम भार उल भरो, कोड़ियां री करुणा भासीही ।। सुनि० ८ ॥
देह पचवां दया नीपजे, वो मोटो उपधरा ।
खीर खांडसम जाम्सी माननर, सत्क्षिय फरगया आहारो हो
प्रवस्त पीड़ शरीर में साली, भामस्य सर्गात याकी, । पायोगमन कियो संधारो, समता रडता राखी दो
सर्वार्थ सिद्ध पहुँचा शुभ यागे, महा रमणीक निमास्य । पोसठ मम को मोती लटफ, करी ने प्रमासदा
।। मन. ११ 1 १ - भय २ - की बाजी की तरह कर समारा करन
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धर्मरुचि अणगार तर्जमुनिवर धर्मरुचरिख व ॥ र ।। मव भव पाप निकाचित सचित, दुरमत दूर निकंदू हो ॥ मुनि ।। चम्पानगर निरूपम सुन्दर, उठे धर्मरूची रिख आया । मास पारणे गुरु आज्ञा ले, गोचरियां सिधाया हो ॥ मुनि एक ॥ नीची दृष्टि धरण सू राखे, मुनिवर गुणभंडारे । सिक्षा श्रटन करतां आनागसिरी घर द्वारे खारो तूचो जहर हलाहल, मुनिवर ने बहरावे । सहज उकरड़ी आई हम घर, बाहिर कहो कुण जावे हो ॥ मुनिं तीन ।। पूरण जाणने पाछा किरिया, गुरु आगे श्राय घरियो । कुण दातार मिल्यो रिख तोने, पूरण पातर भरियो हो ॥ मुनि चार ॥ नाना करतां मुझने बहरायो, भाव उलट मन आणी । चाखी ने गुरु निरणों कीधो, जहर इलाहल जागी हो ॥ सुनि पाँच । । श्री रत्नपत्र पर मुक्तावली भसज्ज' भमोज कुल्फ सम सागे, जो मुनिचर तू सामी । निर्बत फोठो मदर इलाहल, भकाले मरजानी हां ॥ मुनि• छः ॥ माझा से परेठणन चाम्या, निग्मय ठोर रिखी भाषे हिन्दू एक परठतो ऊपर, धड़यो बहु मरजाये हो अन्य आदार थी एहमी हिंसा, सर्वधी मनरथ जारी परम समपरम भार उल भरो, कोड़ियां री करुणा भासीही ।। सुनिशून्य आठ ॥ देह पचवां दया नीपजे, वो मोटो उपधरा । खीर खांडसम जाम्सी माननर, सत्क्षिय फरगया आहारो हो प्रवस्त पीड़ शरीर में साली, भामस्य सर्गात याकी, । पायोगमन कियो संधारो, समता रडता राखी दो सर्वार्थ सिद्ध पहुँचा शुभ यागे, महा रमणीक निमास्य । पोसठ मम को मोती लटफ, करी ने प्रमासदा ।। मन. ग्यारह एक एक - भय दो - की बाजी की तरह कर समारा करन
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अजमेर। कोई भूखा ना सोए की सोच को साकार करने की दिशा में रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजस्थान में 512वीं इंदिरा रसोई का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री गहलोत ने नगर निगम अजमेर के वार्ड 62 में जयपुर रोड स्थित पुरानी चुंगी चौकी ऑफिस में स्थापित इंदिरा रसोई साथ ही कल्याणीपुरा के देवनारायण मंदिर पर भी इंदिरा रसोई शुरू करने पर खुशी जताई। संभागीय आयुक्त बीएल मेहरा व कलेक्टर अंशदीप ने फीता काटकर रसोई का शुभारंभ किया। संभागीय आयुक्त मेहरा ने जनप्रतिनिधियों व समाजसेवी संस्थाओं से जरूरतमंदों को इंदिरा रसोई से लाभान्वित करने के लिए अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विधायक वासुदेव देवनानी, नगर निगम आयुक्त उपायुक्त सीता वर्मा, सचिव पवन मीणा, विजय जैन, शिव कुमार बंसल, पार्षद द्रोपदी कोली, नरेंद्र सत्यावना, नौरत गुर्जर, सर्वेश पारीक, नरेंद्र तुनवाल, श्याम प्रजापति, गजेंद्र सिंह रलावता, मुनव्वर खान कायमखानी, मनीष सेठी, पूर्व पार्षद अजय तेंगौर, मंजू बलाई सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं जरूरतमंद उपस्थित थे। वार्ड 62 के क्षेत्रीय पार्षद नरेंद्र तुनवाल ने अतिथियों की अगवानी की एवं गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया।
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अजमेर। कोई भूखा ना सोए की सोच को साकार करने की दिशा में रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजस्थान में पाँच सौ बारहवीं इंदिरा रसोई का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री गहलोत ने नगर निगम अजमेर के वार्ड बासठ में जयपुर रोड स्थित पुरानी चुंगी चौकी ऑफिस में स्थापित इंदिरा रसोई साथ ही कल्याणीपुरा के देवनारायण मंदिर पर भी इंदिरा रसोई शुरू करने पर खुशी जताई। संभागीय आयुक्त बीएल मेहरा व कलेक्टर अंशदीप ने फीता काटकर रसोई का शुभारंभ किया। संभागीय आयुक्त मेहरा ने जनप्रतिनिधियों व समाजसेवी संस्थाओं से जरूरतमंदों को इंदिरा रसोई से लाभान्वित करने के लिए अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर विधायक वासुदेव देवनानी, नगर निगम आयुक्त उपायुक्त सीता वर्मा, सचिव पवन मीणा, विजय जैन, शिव कुमार बंसल, पार्षद द्रोपदी कोली, नरेंद्र सत्यावना, नौरत गुर्जर, सर्वेश पारीक, नरेंद्र तुनवाल, श्याम प्रजापति, गजेंद्र सिंह रलावता, मुनव्वर खान कायमखानी, मनीष सेठी, पूर्व पार्षद अजय तेंगौर, मंजू बलाई सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं जरूरतमंद उपस्थित थे। वार्ड बासठ के क्षेत्रीय पार्षद नरेंद्र तुनवाल ने अतिथियों की अगवानी की एवं गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया।
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RBI Digital Rupee: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 दिसंबर से खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के लिए एक घोषणा की। डिजिटल रुपया एक डिजिटल टोकन के रूप में होगा जो लीगल टेंडर होगा। इस पाइलट प्रोजेक्ट के लिए कुल 8 बैंकों की पहचान की गई है इसके पहले चरण में कुल चार बैंक शामिल होंगे इनमे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं।
डिजिटल रुपया जैसे कागजी नोट जारी किये जाते थे, वैसे ही जारी किए जाएंगे। यह बैंकों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। रिज़र्व बैंक ने यह भी कहा कि उपयोगकर्ता संग्रहीत डिजिटल वॉलेट के माध्यम से डिजिटल रुपये के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे।
वहीं आरबीआई ने बताया कि लेन-देन पर्सन टू पर्सन (P2P) और पर्सन टू मर्चेंट (P2M) दोनों हो सकते हैं। व्यापारिक स्थानों पर लगे क्यूआर कोड का उपयोग करके व्यापारियों को भुगतान किया जा सकता है।
क्या है Digital Rupees?
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) या डिजिटल रुपया RBI द्वारा जारी करेंसी नोटों का एक डिजिटल रूप है। डिजिटल करेंसी या रुपया पैसे का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जिसका उपयोग कांटेक्ट रहित लेनदेन में किया जा सकता है। केंद्रीय बजट 2022 पेश करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले घोषणा की थी कि केंद्रीय बैंक जल्द ही अपनी डिजिटल मुद्रा शुरू करेगा।
इस प्रोजेक्ट के लिए आठ बैंकों को चुना गया है। पहला चरण में चार बैंकों हैं। इनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं। वहीं इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक इसमें शामिल होंगे।
यह प्रोजेक्ट शुरुआत में चार शहरों को कवर करेगा। मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद इस पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोचीन, लखनऊ, पटना और शिमला में होगा। इस प्रोजेक्ट का विस्तार धीरे-धीरे अन्य बैंकों के बीच भी होगा।
अगर आप चाहेंगे तो इसे कागजी नोट में भी हासिल कर सकेंगे। रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी को दो कैटेगरी CBDC-W और CBDC-R में बांटा है. । CBDC-W मतलब होलसेल करेंसी और CBDC-R का मतलब रिटेल करेंसी से है हालांकि इनपर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
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RBI Digital Rupee: भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक दिसंबर से खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के लिए एक घोषणा की। डिजिटल रुपया एक डिजिटल टोकन के रूप में होगा जो लीगल टेंडर होगा। इस पाइलट प्रोजेक्ट के लिए कुल आठ बैंकों की पहचान की गई है इसके पहले चरण में कुल चार बैंक शामिल होंगे इनमे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं। डिजिटल रुपया जैसे कागजी नोट जारी किये जाते थे, वैसे ही जारी किए जाएंगे। यह बैंकों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। रिज़र्व बैंक ने यह भी कहा कि उपयोगकर्ता संग्रहीत डिजिटल वॉलेट के माध्यम से डिजिटल रुपये के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे। वहीं आरबीआई ने बताया कि लेन-देन पर्सन टू पर्सन और पर्सन टू मर्चेंट दोनों हो सकते हैं। व्यापारिक स्थानों पर लगे क्यूआर कोड का उपयोग करके व्यापारियों को भुगतान किया जा सकता है। क्या है Digital Rupees? सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी या डिजिटल रुपया RBI द्वारा जारी करेंसी नोटों का एक डिजिटल रूप है। डिजिटल करेंसी या रुपया पैसे का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जिसका उपयोग कांटेक्ट रहित लेनदेन में किया जा सकता है। केंद्रीय बजट दो हज़ार बाईस पेश करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले घोषणा की थी कि केंद्रीय बैंक जल्द ही अपनी डिजिटल मुद्रा शुरू करेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए आठ बैंकों को चुना गया है। पहला चरण में चार बैंकों हैं। इनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं। वहीं इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक इसमें शामिल होंगे। यह प्रोजेक्ट शुरुआत में चार शहरों को कवर करेगा। मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद इस पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोचीन, लखनऊ, पटना और शिमला में होगा। इस प्रोजेक्ट का विस्तार धीरे-धीरे अन्य बैंकों के बीच भी होगा। अगर आप चाहेंगे तो इसे कागजी नोट में भी हासिल कर सकेंगे। रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी को दो कैटेगरी CBDC-W और CBDC-R में बांटा है. । CBDC-W मतलब होलसेल करेंसी और CBDC-R का मतलब रिटेल करेंसी से है हालांकि इनपर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
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आशा भोंसले और लता मंगेशकर दोनों ही Bollywood की बहुत जानी मानी singers हैं। उनकी आवाज़ का जादु हर भारतीय ने experience किया है। पर कैसे बनीं आशा भोंसले इतनी बड़ी singer, कैसे उनकी सुरीली आवाज़ ने चलाया लोगों पर अपना जादु ? जानिए बॉलीवुड किस्से केआज के episode में।
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आशा भोंसले और लता मंगेशकर दोनों ही Bollywood की बहुत जानी मानी singers हैं। उनकी आवाज़ का जादु हर भारतीय ने experience किया है। पर कैसे बनीं आशा भोंसले इतनी बड़ी singer, कैसे उनकी सुरीली आवाज़ ने चलाया लोगों पर अपना जादु ? जानिए बॉलीवुड किस्से केआज के episode में।
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बहिरात्मा के स्वरूप को समझें तथा उसी अवस्था में परमात्मा के स्वरूप का दर्शन करें । यह अन्तरात्मा एक दृष्टि से गुरुपद का कार्य करने में समर्थ हो सकती है । शास्त्रकारों ने बड़े रूप मे देव, गुरु एव धर्म का स्वरूप बताया है, लेकिन गुरु पद का काटा भाडा टेढा हो जाता है तो उससे देव एव धर्म के स्वरूप पर भी प्राच आती है । इस कारण गुरु पद का विशिष्ट महत्त्व है तथा उसी दृष्टिकोण से अन्तरात्मा का भी विशिष्ट महत्त्व है । अन्तरात्मा जब सजग और सतर्क बन जाती है तो सारा जीवन सत्य एव अहिंसामय हो जाता है ।
प्रत्रात्मा की ज्योति को अपनी साधना से निखारिये :
पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन चल रहा है - पाठशाला चल पड़ी है तो इसमें प्रशिक्षण भी लें और अन्तरात्मा को सम्पूर्ण जीवन की स्वामिनी बनाने वाली साधना भी करें । एक ही समय मे दो काम बने इस लाभ को बुद्धिमान व्यक्ति कभी नही छोडते हैं । व्याख्यान श्रवण हो ही रहा है तो इसके साथ दो सामायिक भी हो सकती हैं । स्वाध्याय के कार्यक्रम मे भी सम्मिलित हुआ जा सकता है । भगवान् ने कहा है - 'सज्झाएग मते ! जीवे कि जोई ? सज्झाएग नाणावरगिज्ज कम्म खवेई' - अर्थात् स्वाध्याय करने से ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होता है । जितनी बहुविध साधना श्राप करेंगे, उतनी ही श्रन्तरात्मा को ज्योति निखरती हुई चली जायगी । उसका प्रकाश घना वनता
जायगा ।
तत्त्ववेत्ता कहते हैं कि समयशील प्रात्मा पतित हो जाती है, पतः आपके मन मे किसी भी प्रकार का सशय उत्पन्न हो तो उसका समाधान लेलें भौर फिर चिन्तन तथा साधना मे अपने को एकाग्र बनालें ताकि अन्तरात्मा का स्वरूप स्वच्छ निकलने लगे, उज्ज्यल बने शोर परमात्म-स्वरूप की दिशा मे गमन करें । शकाग्रो का समाधान सत्य के निकट ले जाता है इसलिये मन को कभी भी काग्रस्त न रखें । अन्तरात्मा को सदा सत्य मे सलग्न बनाये हुए चलें ताकि उसके स्वरूप की पहिचान ही नही - उसके स्वरूप का साक्षाकार भी हो जाये ।
सर्वश्रेष्ठ बल : आत्मबल
पद्म प्रभु जिन तुज मुज घातरू रे...
भव्य जनों के मन्त करण मे जब विवेकपूर्वक प्रात्म-विकास का दृढ़ सकल्प जागृत होता है तो वे अपने उस प्रात्म-वल पर अपने जीवन को द्रुतगति से धागे वदा लेते है । मात्म-बल को माधार बना कर गति करने वाला व्यक्ति सामान्य जीवन से विशिष्ट जोवन में प्रवेश करता है । वह धीरे २ विशिष्ट जीवन से भी उपर उठकर प्रात्म-साक्षात्कार से परमात्म स्वरूप के वरण तक पहुच जाता है । घात्मा घोर परमात्मा के बीच की खाई को भी वह पाट लेता है । ऐसा शुभ परिवतन धात्म तत्व मे घटूट विश्वास रखने से तथा तदनुरूप गति पर से समय है ।
वीतराग वाणी के भाधार पर ऐसे पुरुषों के मन मस्तिष्क में प्रात्मज्ञान को जिस दिव्यता का प्रादुर्भाव होता है, वही उसके मार्ग दर्शक का काम करता है । प्रात्म-ज्ञान के प्रकाश में साघव देख लेता है कि इस मानव जीवन के परातल पर बड़ा होकर हो मानव ऊचा से ऊचा धात्म विकास सम्पादित मर सरता है । वह मानव जीवन की महत्ता को समझ लेता है, श्रात्मा के मूल स्वरूप को पहिचान जाता है एव प्रात्म-चल को विशिष्टता को उपसध्यवर मेता है । इस प्रात्म-वेल को जिसने पा लिया, समझिये कि उसमें सम्पूर्णतियों से सफल सघर्ष करने की सम्पूर्ण क्षमता उत्पन्न हो गई है । सेको तराइस एक तरफ हो घोर एक तरफ केवल ग्रात्मवत हो हो पर उनपर देने में दिये पर्याप्त होता है। पात्म- चली प्रात्म-वली दिशाको दृष्टि से होता है ।
प्रत्यक्ष से भी उत्तम मनोरथ पूरक मानव जीवन :
हीररूप देउता है
कि वह जो भी अपना इच्छित लक्ष्य निर्धारित करेगा, उसको पा ही लगा । इस जीवन मे यदि प्रमाद का अवकाश नही हुधा, समय रहते जीवन की क्षमता का विकास कर लिया तथा सामर्थ्य के सद्भाव मे उत्तम कार्य को प्रारंभ कर दिया तो प्रात्म-बल का प्रवाह ऐसी दिशा मे मुड जायगा जिसके द्वारा भव्य जीवन का निर्माण किया जा सकता है । यही प्रात्म-बल सर्वोच्च विकास को प्राप्त करके श्रेष्ठ सत्य को एवं अखूट प्रानन्द को प्राप्त कर लेता है ।
इस मानवीय जीवन को एक दृष्टि से ऐसी भूमि की उपमा दी जा सकती है, जिसकी मिट्टी में स्निग्धता हो, उत्पादकता हो तथा जल बिन्दुप्रो को अपने अन्दर समा लेने की क्षमता हो । ऐसी ही भूमि पर खेती करके किसान इच्छित फसल पैदा कर लेता है । ऐसी भूमि पर वह चाहता है तो गेहू की फसल, गन्ने की फसल या कोई भी अच्छी से अच्छी फसल ले सकता उसकी अपनी इच्छा पर फल प्राप्ति निर्भर रहती है । वह चाहे तो उसी भूमि से गन्ने की फसल लेकर मीठा रस प्राप्त कर सकता है और भाल्हादित हो सकता है और वह चाहे तो उसी भूमि पर प्रफीम की फसल उगा कर अपने मुह को कडुग्रा बना सकता है तथा ससार मे विषवृद्धि कर सकता है । उपजाऊ भूमि की स्निग्ध मिट्टी मे कृपक इच्छानुसार फसल पैदा कर सकता है, जो कल्पवृक्ष से भी बढ़कर होती है । इसका कारण है कि कृपक अपने पुरुपायं से फसल लेता है जबकि एक कल्पवृक्ष से बिना किसी पुरुषार्थ के फल मिलता है । पुरुषार्थ से प्राप्त किया हुआा फल श्रेष्ठतर होता है ।
इस रूपक को इस मानव जीवन पर लागू करें। मानव जीवन की पृष्ठभूमि भी इतनी फलदाई होती है कि इस पर पुरुषार्थ करने वाला चाहिये । इस मानव जीवन की भूमि पर यदि माध्यात्मिक जल का सिचन मिल जाय, वीतरागवाणी के प्रति श्रद्धा का बीज बो दिया जाय तथा आत्मा का विवेक युक्त हट सक्ल्पमय पुरुषार्थ नियोजित हो जाय तो कल्पनातीत अवस्था की प्राप्ति के रूप में अनुपम फल प्राप्त हो सकता है । कल्पवृक्ष या भूमि तो सीमित पदार्थों का ही उत्पादन करती है, लेकिन मानव जीवन के धरातल पर यह श्रात्मा सोम, प्रद्वितीय थोर अलोकिक प्रकाश, श्रानन्द एव शान्ति प्राप्त कर सक्ती है । इसलिये यह मानव जीवन कल्पवृक्ष से भी अधिक उत्तम है जिसमे सर्वोच्च मनोरथ को भी पूर्ण कर सकते हैं ।
ऐसी सर्वश्रेष्ठ क्षमता इस मानव जीवन मे रही हुई है, जो भन्य रिमो जीवन में प्राप्त नहीं होती है । ऐसे ग्रमूल्य जीवन का कहना ही क्या ? भावश्यता इसी बात की है कि इस जीवन का पूर्ण सदुपयोग किया जाय । यह
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बहिरात्मा के स्वरूप को समझें तथा उसी अवस्था में परमात्मा के स्वरूप का दर्शन करें । यह अन्तरात्मा एक दृष्टि से गुरुपद का कार्य करने में समर्थ हो सकती है । शास्त्रकारों ने बड़े रूप मे देव, गुरु एव धर्म का स्वरूप बताया है, लेकिन गुरु पद का काटा भाडा टेढा हो जाता है तो उससे देव एव धर्म के स्वरूप पर भी प्राच आती है । इस कारण गुरु पद का विशिष्ट महत्त्व है तथा उसी दृष्टिकोण से अन्तरात्मा का भी विशिष्ट महत्त्व है । अन्तरात्मा जब सजग और सतर्क बन जाती है तो सारा जीवन सत्य एव अहिंसामय हो जाता है । प्रत्रात्मा की ज्योति को अपनी साधना से निखारिये : पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन चल रहा है - पाठशाला चल पड़ी है तो इसमें प्रशिक्षण भी लें और अन्तरात्मा को सम्पूर्ण जीवन की स्वामिनी बनाने वाली साधना भी करें । एक ही समय मे दो काम बने इस लाभ को बुद्धिमान व्यक्ति कभी नही छोडते हैं । व्याख्यान श्रवण हो ही रहा है तो इसके साथ दो सामायिक भी हो सकती हैं । स्वाध्याय के कार्यक्रम मे भी सम्मिलित हुआ जा सकता है । भगवान् ने कहा है - 'सज्झाएग मते ! जीवे कि जोई ? सज्झाएग नाणावरगिज्ज कम्म खवेई' - अर्थात् स्वाध्याय करने से ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होता है । जितनी बहुविध साधना श्राप करेंगे, उतनी ही श्रन्तरात्मा को ज्योति निखरती हुई चली जायगी । उसका प्रकाश घना वनता जायगा । तत्त्ववेत्ता कहते हैं कि समयशील प्रात्मा पतित हो जाती है, पतः आपके मन मे किसी भी प्रकार का सशय उत्पन्न हो तो उसका समाधान लेलें भौर फिर चिन्तन तथा साधना मे अपने को एकाग्र बनालें ताकि अन्तरात्मा का स्वरूप स्वच्छ निकलने लगे, उज्ज्यल बने शोर परमात्म-स्वरूप की दिशा मे गमन करें । शकाग्रो का समाधान सत्य के निकट ले जाता है इसलिये मन को कभी भी काग्रस्त न रखें । अन्तरात्मा को सदा सत्य मे सलग्न बनाये हुए चलें ताकि उसके स्वरूप की पहिचान ही नही - उसके स्वरूप का साक्षाकार भी हो जाये । सर्वश्रेष्ठ बल : आत्मबल पद्म प्रभु जिन तुज मुज घातरू रे... भव्य जनों के मन्त करण मे जब विवेकपूर्वक प्रात्म-विकास का दृढ़ सकल्प जागृत होता है तो वे अपने उस प्रात्म-वल पर अपने जीवन को द्रुतगति से धागे वदा लेते है । मात्म-बल को माधार बना कर गति करने वाला व्यक्ति सामान्य जीवन से विशिष्ट जोवन में प्रवेश करता है । वह धीरे दो विशिष्ट जीवन से भी उपर उठकर प्रात्म-साक्षात्कार से परमात्म स्वरूप के वरण तक पहुच जाता है । घात्मा घोर परमात्मा के बीच की खाई को भी वह पाट लेता है । ऐसा शुभ परिवतन धात्म तत्व मे घटूट विश्वास रखने से तथा तदनुरूप गति पर से समय है । वीतराग वाणी के भाधार पर ऐसे पुरुषों के मन मस्तिष्क में प्रात्मज्ञान को जिस दिव्यता का प्रादुर्भाव होता है, वही उसके मार्ग दर्शक का काम करता है । प्रात्म-ज्ञान के प्रकाश में साघव देख लेता है कि इस मानव जीवन के परातल पर बड़ा होकर हो मानव ऊचा से ऊचा धात्म विकास सम्पादित मर सरता है । वह मानव जीवन की महत्ता को समझ लेता है, श्रात्मा के मूल स्वरूप को पहिचान जाता है एव प्रात्म-चल को विशिष्टता को उपसध्यवर मेता है । इस प्रात्म-वेल को जिसने पा लिया, समझिये कि उसमें सम्पूर्णतियों से सफल सघर्ष करने की सम्पूर्ण क्षमता उत्पन्न हो गई है । सेको तराइस एक तरफ हो घोर एक तरफ केवल ग्रात्मवत हो हो पर उनपर देने में दिये पर्याप्त होता है। पात्म- चली प्रात्म-वली दिशाको दृष्टि से होता है । प्रत्यक्ष से भी उत्तम मनोरथ पूरक मानव जीवन : हीररूप देउता है कि वह जो भी अपना इच्छित लक्ष्य निर्धारित करेगा, उसको पा ही लगा । इस जीवन मे यदि प्रमाद का अवकाश नही हुधा, समय रहते जीवन की क्षमता का विकास कर लिया तथा सामर्थ्य के सद्भाव मे उत्तम कार्य को प्रारंभ कर दिया तो प्रात्म-बल का प्रवाह ऐसी दिशा मे मुड जायगा जिसके द्वारा भव्य जीवन का निर्माण किया जा सकता है । यही प्रात्म-बल सर्वोच्च विकास को प्राप्त करके श्रेष्ठ सत्य को एवं अखूट प्रानन्द को प्राप्त कर लेता है । इस मानवीय जीवन को एक दृष्टि से ऐसी भूमि की उपमा दी जा सकती है, जिसकी मिट्टी में स्निग्धता हो, उत्पादकता हो तथा जल बिन्दुप्रो को अपने अन्दर समा लेने की क्षमता हो । ऐसी ही भूमि पर खेती करके किसान इच्छित फसल पैदा कर लेता है । ऐसी भूमि पर वह चाहता है तो गेहू की फसल, गन्ने की फसल या कोई भी अच्छी से अच्छी फसल ले सकता उसकी अपनी इच्छा पर फल प्राप्ति निर्भर रहती है । वह चाहे तो उसी भूमि से गन्ने की फसल लेकर मीठा रस प्राप्त कर सकता है और भाल्हादित हो सकता है और वह चाहे तो उसी भूमि पर प्रफीम की फसल उगा कर अपने मुह को कडुग्रा बना सकता है तथा ससार मे विषवृद्धि कर सकता है । उपजाऊ भूमि की स्निग्ध मिट्टी मे कृपक इच्छानुसार फसल पैदा कर सकता है, जो कल्पवृक्ष से भी बढ़कर होती है । इसका कारण है कि कृपक अपने पुरुपायं से फसल लेता है जबकि एक कल्पवृक्ष से बिना किसी पुरुषार्थ के फल मिलता है । पुरुषार्थ से प्राप्त किया हुआा फल श्रेष्ठतर होता है । इस रूपक को इस मानव जीवन पर लागू करें। मानव जीवन की पृष्ठभूमि भी इतनी फलदाई होती है कि इस पर पुरुषार्थ करने वाला चाहिये । इस मानव जीवन की भूमि पर यदि माध्यात्मिक जल का सिचन मिल जाय, वीतरागवाणी के प्रति श्रद्धा का बीज बो दिया जाय तथा आत्मा का विवेक युक्त हट सक्ल्पमय पुरुषार्थ नियोजित हो जाय तो कल्पनातीत अवस्था की प्राप्ति के रूप में अनुपम फल प्राप्त हो सकता है । कल्पवृक्ष या भूमि तो सीमित पदार्थों का ही उत्पादन करती है, लेकिन मानव जीवन के धरातल पर यह श्रात्मा सोम, प्रद्वितीय थोर अलोकिक प्रकाश, श्रानन्द एव शान्ति प्राप्त कर सक्ती है । इसलिये यह मानव जीवन कल्पवृक्ष से भी अधिक उत्तम है जिसमे सर्वोच्च मनोरथ को भी पूर्ण कर सकते हैं । ऐसी सर्वश्रेष्ठ क्षमता इस मानव जीवन मे रही हुई है, जो भन्य रिमो जीवन में प्राप्त नहीं होती है । ऐसे ग्रमूल्य जीवन का कहना ही क्या ? भावश्यता इसी बात की है कि इस जीवन का पूर्ण सदुपयोग किया जाय । यह
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रायगढ़, चित्रा पटेल। रायगढ़ शहर के थाना चक्रधरनगर अन्तर्गत जामगांव स्थित एमएसपी प्लांट में करंट लगने से एक श्रमिक की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में इलेक्ट्रीकल विभाग के जनरल मैनेजर रमाशंकर सिंह को गिरफ्तार कर न्यायलय में पेश किया जहां उसे न्यायधीश ने जेल भेज दिया। थाना चक्रधरनगर के प्रभारी विवेक पाटले ने बताया कि श्रमिक रोहित कुमार केवट की लेबर क्वाटर में करंट लगने से मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि एमएसपी प्लांट में श्रमिकों को रहने दिया गया था।
वहां की विद्युत व्यवस्था को दुरस्त नहीं किया गया और एक श्रमिक की मौत हो गई। इस प्रकरण में सेफ्टी इंचार्ज/ हाउसिंग मैनेजमेंट के फिरोज अहमद को 24 जुलाई को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा जा चुका है। इस मामले की मुख्य आरोपी प्लांट के इलेक्ट्रीकल विभाग के जनरल मैनेजर रमाशंकर सिंह पिता सूरज सिंह (53 साल) बोईरदादर थाना चक्रधरनगर जिला रायगढ़ को आज मुखबिर सूचना पर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां उसे न्यायधीश ने जेल भेज दिया।
इस मामले को लेकर थाना चक्रधरनगर में एमएसपी प्लांट के प्रबंधक बीके सिंह, एचआर प्रभारी राकेश कुमार सिंह, कम्पनी के अधिकारी एजीएम एचआर राकेश त्रिपाठी, सुरक्षा अधिकारी पीके सरकार एवं एमएसपी स्टील एण्ड पावर लिमि. जामगांव कम्पनी के निदेशक व अन्य को भी आरोपी बनाया गया है।
इस मामले में चक्रधरनगर थाना प्रभारी निरीक्षक विवेक पाटले ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सारे आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होंगे।
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रायगढ़, चित्रा पटेल। रायगढ़ शहर के थाना चक्रधरनगर अन्तर्गत जामगांव स्थित एमएसपी प्लांट में करंट लगने से एक श्रमिक की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में इलेक्ट्रीकल विभाग के जनरल मैनेजर रमाशंकर सिंह को गिरफ्तार कर न्यायलय में पेश किया जहां उसे न्यायधीश ने जेल भेज दिया। थाना चक्रधरनगर के प्रभारी विवेक पाटले ने बताया कि श्रमिक रोहित कुमार केवट की लेबर क्वाटर में करंट लगने से मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि एमएसपी प्लांट में श्रमिकों को रहने दिया गया था। वहां की विद्युत व्यवस्था को दुरस्त नहीं किया गया और एक श्रमिक की मौत हो गई। इस प्रकरण में सेफ्टी इंचार्ज/ हाउसिंग मैनेजमेंट के फिरोज अहमद को चौबीस जुलाई को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा जा चुका है। इस मामले की मुख्य आरोपी प्लांट के इलेक्ट्रीकल विभाग के जनरल मैनेजर रमाशंकर सिंह पिता सूरज सिंह बोईरदादर थाना चक्रधरनगर जिला रायगढ़ को आज मुखबिर सूचना पर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां उसे न्यायधीश ने जेल भेज दिया। इस मामले को लेकर थाना चक्रधरनगर में एमएसपी प्लांट के प्रबंधक बीके सिंह, एचआर प्रभारी राकेश कुमार सिंह, कम्पनी के अधिकारी एजीएम एचआर राकेश त्रिपाठी, सुरक्षा अधिकारी पीके सरकार एवं एमएसपी स्टील एण्ड पावर लिमि. जामगांव कम्पनी के निदेशक व अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। इस मामले में चक्रधरनगर थाना प्रभारी निरीक्षक विवेक पाटले ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सारे आरोपी पुलिस के गिरफ्त में होंगे।
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कर्नाटक में हिजाब के बाद अब हलाल को लेकर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने हलाल को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसके बाद देश में नई बहस शुरू हो गई है। हलाल इकॉनमी को लेकर बीजेपी नेता ने कहा कि ये आर्थिक जिहाद है। इस वीडियो के जरिये आइए समझते हैं कि हलाल इकॉनमी क्या है और दुनिया में इसका कितना बड़ा बाजार है ।
Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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कर्नाटक में हिजाब के बाद अब हलाल को लेकर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने हलाल को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसके बाद देश में नई बहस शुरू हो गई है। हलाल इकॉनमी को लेकर बीजेपी नेता ने कहा कि ये आर्थिक जिहाद है। इस वीडियो के जरिये आइए समझते हैं कि हलाल इकॉनमी क्या है और दुनिया में इसका कितना बड़ा बाजार है । Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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1 पर हब्ते दे पेहले रोजे सै बड़ी ब्यागा ही उना सुगंधित चिजां जो जड़ियां उना तैयार कितियां थियां, लेईकरी कबरां पर आईयां। 2 कने उना दिखया की कबरा दे दरबाजे ला पथर पेहले ला ही हटया होया है, 3 कने सै अंदर गियां कने दिखया पर यीशुऐ दी लाश ओथु नी थी। 4 जालू सै इसा गल्ला ने हेरान थियां तां दिखा, दो माणु चिट्टे चमकीले कपड़े पायो उना बखे खड़ोतयो थे। 5 जालू सै डरी गियां, कने उना मु धरतिया पासे हेठ करी दिते; तां उना स्वर्गदूतां जनानिया ने बोलया, "तुसां जिन्दया जो मरयां चे कजो तोपदे न?" 6 "सै ऐथू नी है, पर जिन्दा होई गिया है। याद कर उनी गलील प्रदेशे च रेंदे बेले तुसां ने बोलया था, 7 की जरूरी हे, की मैं, माणुऐ दा पुत्र पापियां दे हथे पकड़या जा, कने सूली पर चड़ाया जाऐ, कने तिजे दिने मरयां चे जिन्दा होई जाऐ।" 8 तालू यीशुऐ दियां गल्लां उना जो याद आईयां। 9 कने कबरा ला बापस आई करी उना गयारां चेलयां जो, कने बाकियां सबना जो, ऐ सारियां गल्लां सुणाई दीतियां। 10 जिना प्रेरितां ऐ गल्लां बोलियां, सै मरियम मगदलीनी कने योअन्ना कने याकूबे दी मां मरियम कने उना सोगी दियां सारियां जनानिया भी थियां। 11 पर उना दियां गल्लां उना जो कहाणियां सांई लगियां, कने चेलयां उना दा भरोसा नी किता। 12 तालू पतरस उठी करी दोड़ी करी यीशुऐ दिया कबरा पर गिया, कने निठे होईकरी अंदर दिखया ओथु उनी सिर्फ बस कपड़े पियो दिखे, कने जड़ा होया उसला हेरान होईकरी बापस घरे चली गिया।
13 उसी रोजे यीशु दे दो चेले इम्माऊस नाऐ दे इक ग्रांऐ जो चलयो थे, जड़ा यरूशलेम शेहरे ला कोई गयारा किलो मीटर दूर था। 14 कने सै इना सारियां गल्लां पर अपु चे गल्ल बात करा दे थे, जड़ियां होईयां थियां। 15 कने सै जालू अपु चे गल्ल बात कने पूछताछ करा दे थे, तां यीशु अपु आई करी उना सोगी चलणा लग्गा। 16 पर परमेश्वरे उना जो यीशुऐ जो पछेणने ला रोकी रखया था, ताकि सै उसयो पछेणी नी सकन।
26 "ऐ जरूरी था, की मसीह ऐ सारे दुख झेले कने फिरी करी अपणिया महिमा च प्रवेश करे।" 27 तालू यीशुऐ उना जो पुरे पबित्र शास्त्रां चे, उनी मूसा ला शुरू करिके सारे परमेश्वरे दा संदेश देणेबालयां जितणियां गल्लां उदे बारे च बोलियां दियां, सै उना जो समजाइयां।* 24:27 (यूह. 1:45, लूका 24:44, व्य. 18:15)
33 सै उसी बेले उठी करी यरूशलेम शेहरे जो बापस चली गे, कने उना गयारां चेलयां कने उदे साथियां जो गिठे दिखया। 34 जड़े गिठे होयो थे सै ऐ बोला दे थे, "प्रभु सची जिन्दा होई गिया है, कने शमौने जो मिलया है।" 35 तालू उना रस्ते दियां गल्लां उना जो दसियां कने ऐ भी बोलया की जालू सै रोटी तोड़ा दा था तां उना उसयो पछेणी लिया की सै यीशु है।
40 ऐ बोली करी उनी उना जो अपणे हथ पैर दस्से। 41 जालू खुशिया दे मारे उना जो भरोसा नी होया की यीशु जिन्दा है, कने हेरान होआ दे थे, तां यीशुऐ उना ला पुछया, "क्या ऐथू तुहाड़े बाल कुछ खाणे जो है?" 42 उना उसयो भुनियो मछिया दा टुकड़ा दिता। 43 यीशुऐ सै मछिया दा टुकड़ा लेईकरी उना दे सामणे खादा।
50 तालू सै उना जो बैतनिय्याह ग्रांऐ दीकर शेहर ला बाहर लेई गिया, कने उना जो हथ चुकी करी आशीष दिती; 51 कने उना आशीष दिन्दे ही उना ला लग होई गिया कने स्वर्गे जो चली गिया।‡ 24:51 (प्रेरि. 1:9, भज. 47:5)
52 कने सै उसयो दण्डवत करिके बड़िया खुशिया ने यरूशलेम शेहरे जो बापस चली गे। 53 कने सै लगातार मंदरे च जाई करी परमेश्वरे दी स्तुति करदे थे।
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एक पर हब्ते दे पेहले रोजे सै बड़ी ब्यागा ही उना सुगंधित चिजां जो जड़ियां उना तैयार कितियां थियां, लेईकरी कबरां पर आईयां। दो कने उना दिखया की कबरा दे दरबाजे ला पथर पेहले ला ही हटया होया है, तीन कने सै अंदर गियां कने दिखया पर यीशुऐ दी लाश ओथु नी थी। चार जालू सै इसा गल्ला ने हेरान थियां तां दिखा, दो माणु चिट्टे चमकीले कपड़े पायो उना बखे खड़ोतयो थे। पाँच जालू सै डरी गियां, कने उना मु धरतिया पासे हेठ करी दिते; तां उना स्वर्गदूतां जनानिया ने बोलया, "तुसां जिन्दया जो मरयां चे कजो तोपदे न?" छः "सै ऐथू नी है, पर जिन्दा होई गिया है। याद कर उनी गलील प्रदेशे च रेंदे बेले तुसां ने बोलया था, सात की जरूरी हे, की मैं, माणुऐ दा पुत्र पापियां दे हथे पकड़या जा, कने सूली पर चड़ाया जाऐ, कने तिजे दिने मरयां चे जिन्दा होई जाऐ।" आठ तालू यीशुऐ दियां गल्लां उना जो याद आईयां। नौ कने कबरा ला बापस आई करी उना गयारां चेलयां जो, कने बाकियां सबना जो, ऐ सारियां गल्लां सुणाई दीतियां। दस जिना प्रेरितां ऐ गल्लां बोलियां, सै मरियम मगदलीनी कने योअन्ना कने याकूबे दी मां मरियम कने उना सोगी दियां सारियां जनानिया भी थियां। ग्यारह पर उना दियां गल्लां उना जो कहाणियां सांई लगियां, कने चेलयां उना दा भरोसा नी किता। बारह तालू पतरस उठी करी दोड़ी करी यीशुऐ दिया कबरा पर गिया, कने निठे होईकरी अंदर दिखया ओथु उनी सिर्फ बस कपड़े पियो दिखे, कने जड़ा होया उसला हेरान होईकरी बापस घरे चली गिया। तेरह उसी रोजे यीशु दे दो चेले इम्माऊस नाऐ दे इक ग्रांऐ जो चलयो थे, जड़ा यरूशलेम शेहरे ला कोई गयारा किलो मीटर दूर था। चौदह कने सै इना सारियां गल्लां पर अपु चे गल्ल बात करा दे थे, जड़ियां होईयां थियां। पंद्रह कने सै जालू अपु चे गल्ल बात कने पूछताछ करा दे थे, तां यीशु अपु आई करी उना सोगी चलणा लग्गा। सोलह पर परमेश्वरे उना जो यीशुऐ जो पछेणने ला रोकी रखया था, ताकि सै उसयो पछेणी नी सकन। छब्बीस "ऐ जरूरी था, की मसीह ऐ सारे दुख झेले कने फिरी करी अपणिया महिमा च प्रवेश करे।" सत्ताईस तालू यीशुऐ उना जो पुरे पबित्र शास्त्रां चे, उनी मूसा ला शुरू करिके सारे परमेश्वरे दा संदेश देणेबालयां जितणियां गल्लां उदे बारे च बोलियां दियां, सै उना जो समजाइयां।* चौबीस:सत्ताईस तैंतीस सै उसी बेले उठी करी यरूशलेम शेहरे जो बापस चली गे, कने उना गयारां चेलयां कने उदे साथियां जो गिठे दिखया। चौंतीस जड़े गिठे होयो थे सै ऐ बोला दे थे, "प्रभु सची जिन्दा होई गिया है, कने शमौने जो मिलया है।" पैंतीस तालू उना रस्ते दियां गल्लां उना जो दसियां कने ऐ भी बोलया की जालू सै रोटी तोड़ा दा था तां उना उसयो पछेणी लिया की सै यीशु है। चालीस ऐ बोली करी उनी उना जो अपणे हथ पैर दस्से। इकतालीस जालू खुशिया दे मारे उना जो भरोसा नी होया की यीशु जिन्दा है, कने हेरान होआ दे थे, तां यीशुऐ उना ला पुछया, "क्या ऐथू तुहाड़े बाल कुछ खाणे जो है?" बयालीस उना उसयो भुनियो मछिया दा टुकड़ा दिता। तैंतालीस यीशुऐ सै मछिया दा टुकड़ा लेईकरी उना दे सामणे खादा। पचास तालू सै उना जो बैतनिय्याह ग्रांऐ दीकर शेहर ला बाहर लेई गिया, कने उना जो हथ चुकी करी आशीष दिती; इक्यावन कने उना आशीष दिन्दे ही उना ला लग होई गिया कने स्वर्गे जो चली गिया।‡ चौबीस:इक्यावन बावन कने सै उसयो दण्डवत करिके बड़िया खुशिया ने यरूशलेम शेहरे जो बापस चली गे। तिरेपन कने सै लगातार मंदरे च जाई करी परमेश्वरे दी स्तुति करदे थे।
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नई दिल्लीः टीम इंडिया ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दर्ज की, जहां उसने सभी विपदाओं को पीछे छोड़कर अपना कद बढ़ाया और मौका पड़ने पर अपनी बादशाहत साबित की। यह जीत इसलिए भी ज्यादा विशेष रही क्योंकि मैच के हीरो टीम इंडिया के युवा खिलाड़ी बने, जिनके पास बेहद कम अंतरराष्ट्रीय अनुभव था। जहां विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर पहले मैच के बाद घर लौटे, वहीं सीनियर खिलाड़ी रविचंद्रन अश्वि, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, रवींद्र जडेजा आदि चोटिल हो गए।
मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर, शुभमन गिल और रिषभ पंत जैसे युवा कंधे मजबूत साबित हुए, जिन्होंने विरोधी खेमे की धज्जियां उड़ा दी। युवाओं के सफल होने के बाद टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ की जमकर सराहना हुई। ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया की ऐतिहासिक सीरीज जीत का श्रेय द्रविड़ को भी दिया जा रहा है। द्रविड़ ट्विटर पर काफी ट्रेंड में भी रहे। बता दें कि राहुल द्रविड़ इस समय भारतीय अंडर-19 और ए टीम के कोच हैं। बेहतरीन खिलाड़ी और पूर्व कप्तान द्रविड़ ने अपने प्रयासों से युवा पीढ़ी को क्रिकेट का अच्छा ज्ञान दिया और उन्हें बड़े मंच के लिए तैयार किया।
हाल ही में द्रविड़ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत का श्रेय युवाओं को दिया जाना चाहिए और उन्हें फालतू में इसका श्रेय मिल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में द्रविड़ ने कहा, 'हा, हा, गैरजरूरी श्रेय, युवा लड़के तारीफ के पूरे हकदार। '
पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता जतिन परांजपे का मानना है कि द्रविड़ अपने मूल्यवान इनपुट ए स्तर के खिलाड़ियों को देते हैं, जहां रणजी ट्रॉफी भी खेला जाता है। इसने खिलाड़ियों में काफी फर्क पैदा किया है। उन्होंने साथ ही कहा कि राहुल द्रविड़ जिस स्तर पर खिलाड़ियों की कोचिंग कर रहे हैं और उसके बाद वह रवि शास्त्री के हाथों में जा रहे हैं तो यह बदलाव बड़ी आसानी से हो रहा है।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच डब्ल्यूवी रमन ने कहा कि द्रविड़ युवाओं को मैच के नतीजे से ज्यादा एक्पोजर देने पर विश्वास रखते हैं, जिससे इतने अच्छे क्रिकेटर अब भारत को मिल रहे हैं।
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नई दिल्लीः टीम इंडिया ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दर्ज की, जहां उसने सभी विपदाओं को पीछे छोड़कर अपना कद बढ़ाया और मौका पड़ने पर अपनी बादशाहत साबित की। यह जीत इसलिए भी ज्यादा विशेष रही क्योंकि मैच के हीरो टीम इंडिया के युवा खिलाड़ी बने, जिनके पास बेहद कम अंतरराष्ट्रीय अनुभव था। जहां विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर पहले मैच के बाद घर लौटे, वहीं सीनियर खिलाड़ी रविचंद्रन अश्वि, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, रवींद्र जडेजा आदि चोटिल हो गए। मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर, शुभमन गिल और रिषभ पंत जैसे युवा कंधे मजबूत साबित हुए, जिन्होंने विरोधी खेमे की धज्जियां उड़ा दी। युवाओं के सफल होने के बाद टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ की जमकर सराहना हुई। ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया की ऐतिहासिक सीरीज जीत का श्रेय द्रविड़ को भी दिया जा रहा है। द्रविड़ ट्विटर पर काफी ट्रेंड में भी रहे। बता दें कि राहुल द्रविड़ इस समय भारतीय अंडर-उन्नीस और ए टीम के कोच हैं। बेहतरीन खिलाड़ी और पूर्व कप्तान द्रविड़ ने अपने प्रयासों से युवा पीढ़ी को क्रिकेट का अच्छा ज्ञान दिया और उन्हें बड़े मंच के लिए तैयार किया। हाल ही में द्रविड़ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत का श्रेय युवाओं को दिया जाना चाहिए और उन्हें फालतू में इसका श्रेय मिल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में द्रविड़ ने कहा, 'हा, हा, गैरजरूरी श्रेय, युवा लड़के तारीफ के पूरे हकदार। ' पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता जतिन परांजपे का मानना है कि द्रविड़ अपने मूल्यवान इनपुट ए स्तर के खिलाड़ियों को देते हैं, जहां रणजी ट्रॉफी भी खेला जाता है। इसने खिलाड़ियों में काफी फर्क पैदा किया है। उन्होंने साथ ही कहा कि राहुल द्रविड़ जिस स्तर पर खिलाड़ियों की कोचिंग कर रहे हैं और उसके बाद वह रवि शास्त्री के हाथों में जा रहे हैं तो यह बदलाव बड़ी आसानी से हो रहा है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच डब्ल्यूवी रमन ने कहा कि द्रविड़ युवाओं को मैच के नतीजे से ज्यादा एक्पोजर देने पर विश्वास रखते हैं, जिससे इतने अच्छे क्रिकेटर अब भारत को मिल रहे हैं।
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जिस देश में दोषी ठहराए जा चुके अपराधियों को भी पुलिस के साथ चलते हुए या अदालतों से बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढंकने की इजाज़त है, वहां उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उन नागरिकों को सरेआम अपराधियों के रूप में चिन्हित और बदनाम करने की कार्रवाई अत्यंत क्रूर है, जो कि संभव है किसी अपराध के दोषी हों या नहीं भी हों.
यूपी की भाजपा सरकार ने पिछले सप्ताह लखनऊ में बड़े आकार के पोस्टर और होर्डिंग लगाए हैं जिन पर सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों के नाम, पते और फोटो प्रदर्शित हैं. इन लोगों को 'दंगाई' बताते हुए कहा गया है कि दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन करते हुए कथित रूप से सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के कारण उन्हें प्रशासन को मुआवज़ा चुकाना पड़ेगा. पोस्टर में नामित 53 लोगों- जिनमें एक वकील, एक महिला कार्यकर्ता-नेता और एक पूर्व आईपीएस अधिकारी शामिल हैं - में एक को भी किसी कानून के तहत दोषी नहीं ठहराया गया है. इन लोगों में एक अवयस्क भी है.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो जजों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए रविवार की सुनवाई में राज्य सरकार के कदम को 'बेहद अन्यायपूर्ण' और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का 'सरासर अतिक्रमण' करार दिया.
पुलिस आमतौर पर 'वांटेड' पोस्टरों में किसी अपराध के आरोपी या दोषी व्यक्तियों के फोटो या स्केच का इस्तेमाल करती है. इन प्रकरणों में कथित अपराधियों की पहचान या ठिकाने का पता नहीं होने के कारण जनता की सहायता लेने के लिए पुलिस ऐसा करती है. पर आदित्यनाथ सरकार के पास उन सभी 53 व्यक्तियों के बारे में पूरी जानकारी है जिनको उसने सार्वजनिक रूप से चिन्हित और बदनाम किया है. तो फिर किस उद्देश्य से ये पोस्टर लगाए गए हैं?
जर्मनी में 1943 में यहूदीवाद विरोधी दुष्प्रचार के तहत लगाए गए पोस्टरों में यहूदियों को दोषी ठहराते हुए कहा गया थाः Der ist Schuld am Kriege! - युद्ध इनके कारण हुआ है!
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
लखनऊ में लगाए गए पोस्टर उन्मादियों को हमले के लिए उकसाते हैं- जैसे कि गौरी लंकेश को निशाना बनाया गया था, जिनके हत्यारे को अभी तक सज़ा नहीं मिली है.
इसमें एक संदेश सरकार से असहमत जमात के लिए भी हैः 'तुम हमारे खिलाफ गए तो हमले के लिए हम दीवारों को तुम्हारी तस्वीरों से पाट देंगे. हम तुम्हें तंग करेंगे, तुम्हारे पीछे पड़ जाएंगे'.
विगत कुछ वर्षों में यदि कोई बात स्पष्ट हुई है तो वो ये कि भारत में दंगाइयों के लिए कोई कानून नहीं है. भीड़ द्वारा पिटाई या हत्या के मामलों में न सिर्फ किसी को सज़ा मिलेगी, बल्कि अपराधियों को फूलों के माले पहनाए जाएंगे और उनका नायकों जैसा सम्मान किया जाएगा.
क्या आदित्यनाथ सरकार इस बात की गारंटी देती है कि बिना किसी अदालती कार्यवाही के उसके द्वारा 'दोषी' ठहराए गए 53 लोगों पर गैरकानूनी भीड़ या आरएसएस से संबद्ध कानून अपने हाथ में लेने वाले और सच्चे संस्कारी भारतीय का तमगा बांटने वाले बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों के हमले नहीं होंगे? क्या सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी जबकि खूंखार अपराधियों को भी सरकारी सुरक्षा का हक़ है? क्या उन्हें वाई+ सुरक्षा दी जाएगी जैसा कि नफ़रत फैलाने वाले भाषण देकर दिल्ली में दंगे भड़काने के आरोपी कपिल मिश्रा को दी गई है?
सार्वजनिक रूप से लोगों को चिन्हित और बदनाम करने का कदम कोई नया नहीं है. मार्च 2018 में नरेंद्र मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय ने इरादतन कर्ज नहीं चुकाने वालों के नाम और तस्वीर अखबारों में छपवाने के लिए बैंकों को निर्देश जारी किया था. उससे पहले जनवरी 2017 में, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने यौन अपराधियों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर बनाए जाने की मांग उठाई थी, जिसमें बलात्कार के दोषियों के नाम और अन्य जानकारियों को शामिल किया जाए. पहले भी ये मांग कर चुकीं मंत्री ने पूर्व में बलात्कार का दोषी ठहराए जा चुके एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद इस आशय का बयान दिया था.
यहां तक कि लोग सोशल मीडिया पर नाम सार्वजनिक कर 'यौन अपराधियों' को बदनाम करने भी लगे. यौन उत्पीड़न के आरोपी पुरुषों की कई 'सूचियां' फेसबुक पर लगाई जा चुकी हैं.
अक्सर कानून की विफलता के कारण शायद आम आदमी इस तरह के उपायों पर उतर आते हों, लेकिन तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को तिलांजलि देकर लोगों की जान खतरे में डालने के पीछे सरकार के पास क्या बहाना है?
हालांकि ये होर्डिंग महज कुछ लोगों को निशाना बनाने की कवायद भर नहीं है, जो कि आदित्यनाथ सरकार का पसंदीदा कार्य है. 'एंटी-रोमियो स्क्वाड' का विचार इस बात पर आधारित था कि लोग अपनी मर्ज़ी से उन लड़कों और पुरुषों को निशाना बनाएं जो महिलाओं को परेशान करते हों और छेड़खानी में लिप्त हों. इसी तरह 'लव जिहाद' के विरोधियों ने अंतरधार्मिक युगलों को निशाना बनाया जिन्हें वे विश्वासघाती मुसलमानों द्वारा इस्लामी खिलाफ़त के बड़े उद्देश्य के खातिर भोली-भाली हिंदू लड़कियों को बहलाए-फुसलाए जाने का परिणाम मानते हैं.
भाजपा ने लोगों की भारतीय, गैर-भारतीय या भारत-विरोधी के रूप में 'पहचान करने' और लिस्ट बनाने को लेकर एक कुटिल उत्साह का प्रदर्शन किया है. वास्तव में, होर्डिंग पर नामों की लिस्ट प्रदर्शित किए जाने को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनसीआर) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) जैसी सूचियों का एक नमूना मानते हुए ये समझा जा सकता है कि इनको लेकर लोगों में डर क्यों व्याप्त है. इस तरह की सूचियां त्रुटिहीन नहीं होती हैं. अंततः इनमें यही होता है कि आम लोगों को उनके सामान्य ज़िंदगी से बाहर निकाल कर उन पर 'सही' नहीं होने का ठप्पा लगा दिया जाता है.
इस तरह आदित्यनाथ सरकार ने इस व्यावहारिक उदाहरण के ज़रिए ये दिखा दिया है कि सीएए के विरोधियों की चिंता किस बात को लेकर है - 'भारतीय' नहीं होने के नाम लोगों को चिन्हित और अपमानित करना.
मानो 'शहरी नक्सल', 'दीमक' और 'राष्ट्र-विरोधी' की उपमा ही पर्याप्त नहीं थी, जो अब नागरिकों की तस्वीरों और व्यक्तिगत विवरणों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का विचार अपनाया गया है. ये एक दुःस्वप्न है कि कैसे सरकार लोगों की निजता का उल्लंघन कर सकती है- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ऐसा ही कुछ कहा है. इसके अलावा असहमत लोगों को भाषणों, सोशल मीडिया और अब पोस्टरों और होर्डिंग के माध्यम से लगातार निशाना बनाए जाने से भारत की छवि उस लोकतंत्र की नहीं रह जाती है, जिसका आम नागरिक तथा प्रधानमंत्री मोदी समेत राजनीतिक वर्ग दम भरते हैं, खास कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने.
सीएए आंदोलन को लेकर भाजपा का रवैया बिल्कुल गलत है. सीएए का विरोध शांत नहीं पड़ने में खुद पार्टी और इसकी सरकारों की ही भूमिका है. सीएए के खिलाफ बोलने वाले कार्यकर्ताओं और नागरिकों को खतरनाक साबित करने की कोशिशों से प्रदर्शनकारियों की बात ही सही साबित होती है कि सरकार अपनी जनता के खिलाफ ही खड़ी है.
भाजपा सरकार मानती है कि नागरिकों से संबंधित सभी मामलों में निर्णय का अंतिम अधिकार उसी को है- जबकि लोकतंत्र की पूरी अवधारणा ही जनता द्वारा, जनता के लिए एवं जनता के शासन पर टिकी हुई है. हालांकि हमारा लोकतंत्र गौरी लंकेश जैसों को उनके हाल पर छोड़ देता है. आज यह लखनऊ की दीवारों पर प्रदर्शित लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है.
(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
(लेखिका एक राजनीतिक प्रेक्षक हैं. व्यक्त विचार उनके निजी हैं. )
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जिस देश में दोषी ठहराए जा चुके अपराधियों को भी पुलिस के साथ चलते हुए या अदालतों से बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढंकने की इजाज़त है, वहां उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उन नागरिकों को सरेआम अपराधियों के रूप में चिन्हित और बदनाम करने की कार्रवाई अत्यंत क्रूर है, जो कि संभव है किसी अपराध के दोषी हों या नहीं भी हों. यूपी की भाजपा सरकार ने पिछले सप्ताह लखनऊ में बड़े आकार के पोस्टर और होर्डिंग लगाए हैं जिन पर सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों के नाम, पते और फोटो प्रदर्शित हैं. इन लोगों को 'दंगाई' बताते हुए कहा गया है कि दिसंबर दो हज़ार उन्नीस में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन करते हुए कथित रूप से सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के कारण उन्हें प्रशासन को मुआवज़ा चुकाना पड़ेगा. पोस्टर में नामित तिरेपन लोगों- जिनमें एक वकील, एक महिला कार्यकर्ता-नेता और एक पूर्व आईपीएस अधिकारी शामिल हैं - में एक को भी किसी कानून के तहत दोषी नहीं ठहराया गया है. इन लोगों में एक अवयस्क भी है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो जजों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए रविवार की सुनवाई में राज्य सरकार के कदम को 'बेहद अन्यायपूर्ण' और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का 'सरासर अतिक्रमण' करार दिया. पुलिस आमतौर पर 'वांटेड' पोस्टरों में किसी अपराध के आरोपी या दोषी व्यक्तियों के फोटो या स्केच का इस्तेमाल करती है. इन प्रकरणों में कथित अपराधियों की पहचान या ठिकाने का पता नहीं होने के कारण जनता की सहायता लेने के लिए पुलिस ऐसा करती है. पर आदित्यनाथ सरकार के पास उन सभी तिरेपन व्यक्तियों के बारे में पूरी जानकारी है जिनको उसने सार्वजनिक रूप से चिन्हित और बदनाम किया है. तो फिर किस उद्देश्य से ये पोस्टर लगाए गए हैं? जर्मनी में एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में यहूदीवाद विरोधी दुष्प्रचार के तहत लगाए गए पोस्टरों में यहूदियों को दोषी ठहराते हुए कहा गया थाः Der ist Schuld am Kriege! - युद्ध इनके कारण हुआ है! हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. लखनऊ में लगाए गए पोस्टर उन्मादियों को हमले के लिए उकसाते हैं- जैसे कि गौरी लंकेश को निशाना बनाया गया था, जिनके हत्यारे को अभी तक सज़ा नहीं मिली है. इसमें एक संदेश सरकार से असहमत जमात के लिए भी हैः 'तुम हमारे खिलाफ गए तो हमले के लिए हम दीवारों को तुम्हारी तस्वीरों से पाट देंगे. हम तुम्हें तंग करेंगे, तुम्हारे पीछे पड़ जाएंगे'. विगत कुछ वर्षों में यदि कोई बात स्पष्ट हुई है तो वो ये कि भारत में दंगाइयों के लिए कोई कानून नहीं है. भीड़ द्वारा पिटाई या हत्या के मामलों में न सिर्फ किसी को सज़ा मिलेगी, बल्कि अपराधियों को फूलों के माले पहनाए जाएंगे और उनका नायकों जैसा सम्मान किया जाएगा. क्या आदित्यनाथ सरकार इस बात की गारंटी देती है कि बिना किसी अदालती कार्यवाही के उसके द्वारा 'दोषी' ठहराए गए तिरेपन लोगों पर गैरकानूनी भीड़ या आरएसएस से संबद्ध कानून अपने हाथ में लेने वाले और सच्चे संस्कारी भारतीय का तमगा बांटने वाले बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों के हमले नहीं होंगे? क्या सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी जबकि खूंखार अपराधियों को भी सरकारी सुरक्षा का हक़ है? क्या उन्हें वाई+ सुरक्षा दी जाएगी जैसा कि नफ़रत फैलाने वाले भाषण देकर दिल्ली में दंगे भड़काने के आरोपी कपिल मिश्रा को दी गई है? सार्वजनिक रूप से लोगों को चिन्हित और बदनाम करने का कदम कोई नया नहीं है. मार्च दो हज़ार अट्ठारह में नरेंद्र मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय ने इरादतन कर्ज नहीं चुकाने वालों के नाम और तस्वीर अखबारों में छपवाने के लिए बैंकों को निर्देश जारी किया था. उससे पहले जनवरी दो हज़ार सत्रह में, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने यौन अपराधियों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर बनाए जाने की मांग उठाई थी, जिसमें बलात्कार के दोषियों के नाम और अन्य जानकारियों को शामिल किया जाए. पहले भी ये मांग कर चुकीं मंत्री ने पूर्व में बलात्कार का दोषी ठहराए जा चुके एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद इस आशय का बयान दिया था. यहां तक कि लोग सोशल मीडिया पर नाम सार्वजनिक कर 'यौन अपराधियों' को बदनाम करने भी लगे. यौन उत्पीड़न के आरोपी पुरुषों की कई 'सूचियां' फेसबुक पर लगाई जा चुकी हैं. अक्सर कानून की विफलता के कारण शायद आम आदमी इस तरह के उपायों पर उतर आते हों, लेकिन तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को तिलांजलि देकर लोगों की जान खतरे में डालने के पीछे सरकार के पास क्या बहाना है? हालांकि ये होर्डिंग महज कुछ लोगों को निशाना बनाने की कवायद भर नहीं है, जो कि आदित्यनाथ सरकार का पसंदीदा कार्य है. 'एंटी-रोमियो स्क्वाड' का विचार इस बात पर आधारित था कि लोग अपनी मर्ज़ी से उन लड़कों और पुरुषों को निशाना बनाएं जो महिलाओं को परेशान करते हों और छेड़खानी में लिप्त हों. इसी तरह 'लव जिहाद' के विरोधियों ने अंतरधार्मिक युगलों को निशाना बनाया जिन्हें वे विश्वासघाती मुसलमानों द्वारा इस्लामी खिलाफ़त के बड़े उद्देश्य के खातिर भोली-भाली हिंदू लड़कियों को बहलाए-फुसलाए जाने का परिणाम मानते हैं. भाजपा ने लोगों की भारतीय, गैर-भारतीय या भारत-विरोधी के रूप में 'पहचान करने' और लिस्ट बनाने को लेकर एक कुटिल उत्साह का प्रदर्शन किया है. वास्तव में, होर्डिंग पर नामों की लिस्ट प्रदर्शित किए जाने को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जैसी सूचियों का एक नमूना मानते हुए ये समझा जा सकता है कि इनको लेकर लोगों में डर क्यों व्याप्त है. इस तरह की सूचियां त्रुटिहीन नहीं होती हैं. अंततः इनमें यही होता है कि आम लोगों को उनके सामान्य ज़िंदगी से बाहर निकाल कर उन पर 'सही' नहीं होने का ठप्पा लगा दिया जाता है. इस तरह आदित्यनाथ सरकार ने इस व्यावहारिक उदाहरण के ज़रिए ये दिखा दिया है कि सीएए के विरोधियों की चिंता किस बात को लेकर है - 'भारतीय' नहीं होने के नाम लोगों को चिन्हित और अपमानित करना. मानो 'शहरी नक्सल', 'दीमक' और 'राष्ट्र-विरोधी' की उपमा ही पर्याप्त नहीं थी, जो अब नागरिकों की तस्वीरों और व्यक्तिगत विवरणों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का विचार अपनाया गया है. ये एक दुःस्वप्न है कि कैसे सरकार लोगों की निजता का उल्लंघन कर सकती है- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ऐसा ही कुछ कहा है. इसके अलावा असहमत लोगों को भाषणों, सोशल मीडिया और अब पोस्टरों और होर्डिंग के माध्यम से लगातार निशाना बनाए जाने से भारत की छवि उस लोकतंत्र की नहीं रह जाती है, जिसका आम नागरिक तथा प्रधानमंत्री मोदी समेत राजनीतिक वर्ग दम भरते हैं, खास कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने. सीएए आंदोलन को लेकर भाजपा का रवैया बिल्कुल गलत है. सीएए का विरोध शांत नहीं पड़ने में खुद पार्टी और इसकी सरकारों की ही भूमिका है. सीएए के खिलाफ बोलने वाले कार्यकर्ताओं और नागरिकों को खतरनाक साबित करने की कोशिशों से प्रदर्शनकारियों की बात ही सही साबित होती है कि सरकार अपनी जनता के खिलाफ ही खड़ी है. भाजपा सरकार मानती है कि नागरिकों से संबंधित सभी मामलों में निर्णय का अंतिम अधिकार उसी को है- जबकि लोकतंत्र की पूरी अवधारणा ही जनता द्वारा, जनता के लिए एवं जनता के शासन पर टिकी हुई है. हालांकि हमारा लोकतंत्र गौरी लंकेश जैसों को उनके हाल पर छोड़ देता है. आज यह लखनऊ की दीवारों पर प्रदर्शित लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है.
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युवावस्था में कदम रखने जा रहे शरीफ तबेबोर्डबार ने पिता जफर को फुटबॉल खेलने में तकलीफ झेलते हुए देखा। धीरे-धीरे वे बाइक चलाने में अक्षम होने लगे। हालांकि इन लक्षणों की शुरुआत तो शरीफ के 1986 में पैदा होने के वक्त ही शुरू हो चुकी थी। पिता की मांसपेशियां दिन ब दिन कमजोर होती जा रही थी। आखिर एक दिन वे व्हीलचेयर पर आ गए। कोई नहीं बता पा रहा था कि आखिर बीमारी क्या है। बेटे शरीफ ने उसी वक्त फैसला कर लिया कि वे इस बीमारी का इलाज खोजकर रहेंगे।
उनकी इसी जिद ने ऐसी खोज को जन्म दिया, जो जीन थेरैपी में क्रांति ला सकती है, एक ऐसा उपचार जो टारगेटेड जीन पर काम करता है। इससे मासंपेशियों से जुड़े तकरीबन हर आनुवांशिक दोष दूर किए जा सकते हैं। इनमें मस्कुलर डिस्ट्रॉफी भी शामिल है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. जेफरी चेम्बरलेन कहते हैं कि डॉ. शरीफ की नई थेरेपी शोधकर्ताओं को सहूलियत देती है कि वो मस्तिष्क समेत किसी भी टिशू को सटीक तौर पर टारगेट कर सकेंगे।
इससे पहले बीमार कोशिकाओं को ठीक करने के लिए वैज्ञानिक एडिनो एसोसिएटेड यानी अक्षम वायरस (एएवी) का इस्तेमाल करते हैं। इससे सभी मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है साथ ही लिवर को भी नुकसान पहुंचता है। दरअसल शरीर का 40% हिस्सा मांसपेशियों का बना होता है। इन मांसपेशियों में वायरस लाने के लिए दवा की भारी खुराक देनी होती है। ज्यादातर वायरस लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। कभी-कभी मरीज की जान भी ले लेते हैं।
ईरान मूल के डॉ. शरीफ ने देश की सबसे कठिन मेडिकल परीक्षा पास की। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पर काम कर रहे श्रेष्ठ संस्थानों में डॉक्टरेट के लिए आवेदन किए। ताकि कुछ ऐसा मिल सके जो पिता के काम आ सके। हार्वर्ड की डॉ. वैगर्स लैब में शरीफ ने जीन एडिटिंग तकनीक क्रिस्पर से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पर काम किया।
एएवी के जरिए क्रिस्पर एंजाइम्स को मांसपेशियों तक ले गए, जहां ये म्यूटेशन ठीक कर सकते थे। शरीफ कहते हैं,'वैज्ञानिक होने के नाते जानता हूं, 'मैं 100 प्रयोग करूंगा, 95 काम नहीं करेंगे। लेकिन यह जुनून अनिवार्य है। मन में लगने लगता है कि सफलता नहीं मिलेगी। यही प्रवृत्ति धैर्यवान बनाती है। सफल होने के लिए इसी धैर्य का होना बहुत जरूरी है।
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युवावस्था में कदम रखने जा रहे शरीफ तबेबोर्डबार ने पिता जफर को फुटबॉल खेलने में तकलीफ झेलते हुए देखा। धीरे-धीरे वे बाइक चलाने में अक्षम होने लगे। हालांकि इन लक्षणों की शुरुआत तो शरीफ के एक हज़ार नौ सौ छियासी में पैदा होने के वक्त ही शुरू हो चुकी थी। पिता की मांसपेशियां दिन ब दिन कमजोर होती जा रही थी। आखिर एक दिन वे व्हीलचेयर पर आ गए। कोई नहीं बता पा रहा था कि आखिर बीमारी क्या है। बेटे शरीफ ने उसी वक्त फैसला कर लिया कि वे इस बीमारी का इलाज खोजकर रहेंगे। उनकी इसी जिद ने ऐसी खोज को जन्म दिया, जो जीन थेरैपी में क्रांति ला सकती है, एक ऐसा उपचार जो टारगेटेड जीन पर काम करता है। इससे मासंपेशियों से जुड़े तकरीबन हर आनुवांशिक दोष दूर किए जा सकते हैं। इनमें मस्कुलर डिस्ट्रॉफी भी शामिल है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. जेफरी चेम्बरलेन कहते हैं कि डॉ. शरीफ की नई थेरेपी शोधकर्ताओं को सहूलियत देती है कि वो मस्तिष्क समेत किसी भी टिशू को सटीक तौर पर टारगेट कर सकेंगे। इससे पहले बीमार कोशिकाओं को ठीक करने के लिए वैज्ञानिक एडिनो एसोसिएटेड यानी अक्षम वायरस का इस्तेमाल करते हैं। इससे सभी मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ता है साथ ही लिवर को भी नुकसान पहुंचता है। दरअसल शरीर का चालीस% हिस्सा मांसपेशियों का बना होता है। इन मांसपेशियों में वायरस लाने के लिए दवा की भारी खुराक देनी होती है। ज्यादातर वायरस लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। कभी-कभी मरीज की जान भी ले लेते हैं। ईरान मूल के डॉ. शरीफ ने देश की सबसे कठिन मेडिकल परीक्षा पास की। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पर काम कर रहे श्रेष्ठ संस्थानों में डॉक्टरेट के लिए आवेदन किए। ताकि कुछ ऐसा मिल सके जो पिता के काम आ सके। हार्वर्ड की डॉ. वैगर्स लैब में शरीफ ने जीन एडिटिंग तकनीक क्रिस्पर से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पर काम किया। एएवी के जरिए क्रिस्पर एंजाइम्स को मांसपेशियों तक ले गए, जहां ये म्यूटेशन ठीक कर सकते थे। शरीफ कहते हैं,'वैज्ञानिक होने के नाते जानता हूं, 'मैं एक सौ प्रयोग करूंगा, पचानवे काम नहीं करेंगे। लेकिन यह जुनून अनिवार्य है। मन में लगने लगता है कि सफलता नहीं मिलेगी। यही प्रवृत्ति धैर्यवान बनाती है। सफल होने के लिए इसी धैर्य का होना बहुत जरूरी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दिन ठीक वैसे नहीं कटते थे। मेरा विश्वास है कि प्राचीन काल के तपोवन का अन्वेषण करने पर हमारे जैसे लड़के न मिलते ऐसी बात नहीं है, वह सब-के-सब बहुत अच्छे-भले लड़के थे इसका कोई प्रमाण नहीं है । शारद्वत और शागंरव की उम्र जब दस-बारह साल की थी तब उन्होंने केवल वेद-मंत्र का उच्चारण करके अग्नि में आहुति डालते हुए दिन काटे थे, यह बात अगर किसी पुराण में लिखी हो तो उस पर आदि से अंत तक विश्वास करने के लिए हम वाध्य नही हैं - क्योकि शिशु-चरित्र नामक पुराण सव पुराणों से अधिक पुराना है। उसके समान प्रामाणिक शास्त्र किसी भाषा में लिखा नहीं गया।
नूतन ब्राह्मण होने के बाद गायत्री मंत्र का जाप करने की एक अजब सनक मन में सवार हुई। में विशेष यत्न से एकाग्र मन होकर वह मंत्र जपने की चेप्टा करता । मंत्र ऐसा नहीं था कि उस उम्र में मै उसका तात्पर्य ठीक से ग्रहण कर सकता । मुझे अच्छी तरह याद है में 'भूर्भुव स्वः' इस अंश को लेकर अपने मन को खूव दौड़ाने की चेष्टा करता । क्या समझता, क्या सोचता यह स्पष्ट रूप से बतलाना कठिन है; लेकिन इसमें सदेह नही कि बात का मतलब समझना आदमी के लिए सबसे बड़ी चीज नहीं है। शिक्षा का सबसे बड़ा अंग समझा देना नहीं है, मन पर चोट लगाना है । इस आघात के भीतर से जो चीज बज उठती है उसकी व्याख्या करने के लिए अगर किसी लड़के को कहा जाय तो वह बिलकुल बच्चोंजैसी कोई बात होगी। लेकिन वह मुँह से जो कुछ कह पा रहा है उसके कही अधिक उसके मन में बज रहा है जो लोग विद्यालय की शिक्षकता करके केवल परीक्षा के द्वारा फल का निर्णय करना चाहते हैं उन्हें इस चीज की कोई खबर नहीं होती ! मुझे याद आता है, बचपन में में बहुत सी चीजें नही समझता था, लेकिन उनमे मेरे मन में बड़ी हलचल-मी पैदा हो जाती थी। मैं जब बहुत छोटा था मूलाजोड़ में गंगा के किनारे बागीचे में बादलों के छाये होने के समय बड़े दादा छत पर एक दिन 'मेघदूत' का पाठ कर रहे थे, उसको समझने की मुझको जरूरत नही हुई और गमझना संभव भी नहीं था - उनका आनंदमय आवेगपूर्ण छंद-उच्चारण हो मेरे लिए काफी था। बचपन में जब में अग्रेजी नहीं के बराबर जानता था तब बहुतमो तस्योरो वाली एक किताब Old Cuniosity Shop लेकर मैंने आदि से अत तर पट्टो थो। पन्द्रह आना बात मैं समझ नही सका था - बिलकुल धुँधली-सी न जाने कंमी एक तस्वीर मन के विविध रंगों से रेंगकर मैने खड़ी को थी। अगर मैं परीक्षक के हाथ में पड़ता तो निश्चय ही बड़ा-सा एक सुन्ना मुझे मिलता ।
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दिन ठीक वैसे नहीं कटते थे। मेरा विश्वास है कि प्राचीन काल के तपोवन का अन्वेषण करने पर हमारे जैसे लड़के न मिलते ऐसी बात नहीं है, वह सब-के-सब बहुत अच्छे-भले लड़के थे इसका कोई प्रमाण नहीं है । शारद्वत और शागंरव की उम्र जब दस-बारह साल की थी तब उन्होंने केवल वेद-मंत्र का उच्चारण करके अग्नि में आहुति डालते हुए दिन काटे थे, यह बात अगर किसी पुराण में लिखी हो तो उस पर आदि से अंत तक विश्वास करने के लिए हम वाध्य नही हैं - क्योकि शिशु-चरित्र नामक पुराण सव पुराणों से अधिक पुराना है। उसके समान प्रामाणिक शास्त्र किसी भाषा में लिखा नहीं गया। नूतन ब्राह्मण होने के बाद गायत्री मंत्र का जाप करने की एक अजब सनक मन में सवार हुई। में विशेष यत्न से एकाग्र मन होकर वह मंत्र जपने की चेप्टा करता । मंत्र ऐसा नहीं था कि उस उम्र में मै उसका तात्पर्य ठीक से ग्रहण कर सकता । मुझे अच्छी तरह याद है में 'भूर्भुव स्वः' इस अंश को लेकर अपने मन को खूव दौड़ाने की चेष्टा करता । क्या समझता, क्या सोचता यह स्पष्ट रूप से बतलाना कठिन है; लेकिन इसमें सदेह नही कि बात का मतलब समझना आदमी के लिए सबसे बड़ी चीज नहीं है। शिक्षा का सबसे बड़ा अंग समझा देना नहीं है, मन पर चोट लगाना है । इस आघात के भीतर से जो चीज बज उठती है उसकी व्याख्या करने के लिए अगर किसी लड़के को कहा जाय तो वह बिलकुल बच्चोंजैसी कोई बात होगी। लेकिन वह मुँह से जो कुछ कह पा रहा है उसके कही अधिक उसके मन में बज रहा है जो लोग विद्यालय की शिक्षकता करके केवल परीक्षा के द्वारा फल का निर्णय करना चाहते हैं उन्हें इस चीज की कोई खबर नहीं होती ! मुझे याद आता है, बचपन में में बहुत सी चीजें नही समझता था, लेकिन उनमे मेरे मन में बड़ी हलचल-मी पैदा हो जाती थी। मैं जब बहुत छोटा था मूलाजोड़ में गंगा के किनारे बागीचे में बादलों के छाये होने के समय बड़े दादा छत पर एक दिन 'मेघदूत' का पाठ कर रहे थे, उसको समझने की मुझको जरूरत नही हुई और गमझना संभव भी नहीं था - उनका आनंदमय आवेगपूर्ण छंद-उच्चारण हो मेरे लिए काफी था। बचपन में जब में अग्रेजी नहीं के बराबर जानता था तब बहुतमो तस्योरो वाली एक किताब Old Cuniosity Shop लेकर मैंने आदि से अत तर पट्टो थो। पन्द्रह आना बात मैं समझ नही सका था - बिलकुल धुँधली-सी न जाने कंमी एक तस्वीर मन के विविध रंगों से रेंगकर मैने खड़ी को थी। अगर मैं परीक्षक के हाथ में पड़ता तो निश्चय ही बड़ा-सा एक सुन्ना मुझे मिलता ।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो।
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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JAMSHEDPUR: गर्मी की अभी ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है और मानगो में लोगों की प्यास नहीं मिट रही है। इलाके में दिन भर में महज 15 मिनट ही सप्लाई हो रही है। मानगो जलापूर्ति ट्रीटमेंट प्लांट का एक पंप जल गया है। पंप जल जाने से मानगो जलापूर्ति के प्लांट में कम पानी जमा हो पा रहा है। इस वजह से मानगो की टंकियों में पानी नहीं चढ़ पा रहा। इसी वजह से मानगो में जल संकट शुरू हो गया है।
मानगो जलापूर्ति योजना के पंप खराब हैं। गर्मी में हर साल ये पंप खराब हो जाते हैं। इस साल भी गर्मी की शुरुआत में ही पंप जल गया है। इस वजह से मानगो के जवाहरनगर, जाकिर नगर, ओल्ड पुरुलिया रोड, कुमरुम बस्ती, आजाद बस्ती, मुंशी मोहल्ला, सर्वोदय पथ, डिमना रोड आदि इलाके में सुबह 10 से 15 मिनट ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। जिन घरों में मोटर है वहां तो ठीक है। लेकिन, कई लोगों ने जल कनेक्शन लेने के बाद मोटर हटा दी हैं। कई लोगों ने मोटर खराब होने पर ठीक नहीं कराई। अब इन लोगों को पानी के लिए जगह-जगह भटकना पड़ रहा है।
जलापूर्ति योजना का खराब हुआ पंप आज बनाया जाएगा। ये पंप कई दिनों से खराब है। लेकिन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने अब तक पंप ठीक कराने का प्रयास नहीं किया है। पंप खराब होने से लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को पंप की मरम्मत का काम ढंग से कराना चाहिए था।
प्रदेश के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सरयू राय ने पिछले साल मानगो जलापूर्ति प्लांट का औचक निरीक्षण किया था। यहां काफी खामी नजर आई थीं। इसके बाद मंत्री ने रांची में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव के साथ बैठक की थी। लेकिन, इसके बाद भी मसले का हल नहीं निकल सका।
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JAMSHEDPUR: गर्मी की अभी ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है और मानगो में लोगों की प्यास नहीं मिट रही है। इलाके में दिन भर में महज पंद्रह मिनट ही सप्लाई हो रही है। मानगो जलापूर्ति ट्रीटमेंट प्लांट का एक पंप जल गया है। पंप जल जाने से मानगो जलापूर्ति के प्लांट में कम पानी जमा हो पा रहा है। इस वजह से मानगो की टंकियों में पानी नहीं चढ़ पा रहा। इसी वजह से मानगो में जल संकट शुरू हो गया है। मानगो जलापूर्ति योजना के पंप खराब हैं। गर्मी में हर साल ये पंप खराब हो जाते हैं। इस साल भी गर्मी की शुरुआत में ही पंप जल गया है। इस वजह से मानगो के जवाहरनगर, जाकिर नगर, ओल्ड पुरुलिया रोड, कुमरुम बस्ती, आजाद बस्ती, मुंशी मोहल्ला, सर्वोदय पथ, डिमना रोड आदि इलाके में सुबह दस से पंद्रह मिनट ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। जिन घरों में मोटर है वहां तो ठीक है। लेकिन, कई लोगों ने जल कनेक्शन लेने के बाद मोटर हटा दी हैं। कई लोगों ने मोटर खराब होने पर ठीक नहीं कराई। अब इन लोगों को पानी के लिए जगह-जगह भटकना पड़ रहा है। जलापूर्ति योजना का खराब हुआ पंप आज बनाया जाएगा। ये पंप कई दिनों से खराब है। लेकिन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने अब तक पंप ठीक कराने का प्रयास नहीं किया है। पंप खराब होने से लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को पंप की मरम्मत का काम ढंग से कराना चाहिए था। प्रदेश के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सरयू राय ने पिछले साल मानगो जलापूर्ति प्लांट का औचक निरीक्षण किया था। यहां काफी खामी नजर आई थीं। इसके बाद मंत्री ने रांची में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव के साथ बैठक की थी। लेकिन, इसके बाद भी मसले का हल नहीं निकल सका।
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32 वर्षीय दक्षिण भारतीय सुंदरी दीपिका बॉलीवुड की सबसे प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक है और बॉलीवुड के साथ साथ उन्होंने हॉलीवुड में भी कदम रखा है। वह अपने व्यस्त दिनचर्या के साथ अपनी फिटनेस पर भी ध्यान देती हैं। दीपिका अपनी खूबसूरती के साथ अपने फिट शरीर के लिए भी जानी जाती हैं। आइये इस लेख के माध्यम से उनके स्किन केयर और वर्कआउट के बारे में और गहराई से जाने।
दीपिका ज्यादातर पिलाटे करती हैं, लेकिन एक मजबूत एथलेटिक बॉडी के लिए माइंडफुलनेस और वेट/स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए योग भी शामिल करती हैं। दीपिका कहती है कि वे, "मैं पिलेट्स या स्ट्रेचिंग रूटीन के बीच में 10 से 20 रेप्स के साथ बहुत सारे फ्रीहैंड वेट और चार से पांच सेट स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करती हूं। में दौड़ना विशेष रूप से पसंद नहीं है, इसलिए मैं बहुत सारे पारंपरिक जिम व्यायाम नहीं करता। मैं जितनी बार हो सके कोशिश करता हूं और व्यायाम करता हूं, लेकिन जब मैं यात्रा या शूटिंग कर रहा होता हूं, मैं इसे दिनों के अंत तक छोड़ देती हूं।
जब वह यात्रा कर रही होती है तो उसे छोड़कर शायद ही कभी कोई कसरत छोड़ती है। हालाँकि, वह हर दिन ध्यान करने के लिए समय निकालती हैं। वह अपने दिन की शुरुआत योग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से करती हैं- यह उन्हें स्फूर्तिवान, ऊर्जावान महसूस करने में मदद करता है और मन और शरीर को शांत करता है, यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी निकालता है। वह सुबह और शाम आधा घंटा टहलना भी पसंद करती हैं।
1- प्लैंक (Plank) - यह आपके कोर के लिए अब तक का सबसे अच्छा व्यायाम है क्योंकि यह स्थिति कोर के सभी मांसपेशियों के घटकों को संलग्न करती है।
2- माउंटेन क्लीम्बर्स (Mountain climbers) - यह एक ऐसी चाल है जो आपके पेट को जोड़ेगी।
3- उठक-बैठक (Sit-ups) - हर समय पसंदीदा, यह चाल आपके पेट को लक्षित करती है।
4- साइकिल क्रंच (Bicycle crunches) - यह मूल रूप से एक सामान्य क्रंच है, सिवाय इसके कि आप बारी-बारी से अपने घुटनों को अपनी छाती की ओर लाएं और अपने एब्स का उपयोग करके, अपनी कोहनी को अपने घुटनों की ओर ले जाएं।
5- टक जंप (Tuck jumps) - यह चाल आपके कोर को मजबूत करने के लिए एक अविश्वसनीय व्यायाम है क्योंकि यह आपके पूरे निचले कोर और आपके ऊपरी निचले शरीर को संलग्न करता है।
"मिंडफुल्नेस्स इस द की"
सुंदरता वह नहीं है जो आप हमेशा बाहर से देखते हैं। बेहतर त्वचा और बालों के लिए, दीपिका ध्यान, योग और ध्यान का अभ्यास करना सुनिश्चित करती हैं जो उनके चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक लाता है।
जलयोजन (Hydration)
कोई भी उत्पाद आपको वह चमक नहीं दे सकता जो बहुत सारा पानी पीने से मिल सकती है। जूस से लेकर सूप और नारियल पानी तक, अपने शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट करें।
नो-मेकअप नींद (No-makeup sleep)
रात होने से पहले दीपिका अपना मेकअप उतारने में कभी नहीं चूकती हैं। वह अपने चेहरे से सारा मेकअप, गंदगी और प्रदूषण हटाना पसंद करती हैं।
रात का स्किनकेयर रूटीन (Nighttime skincare routine)
दीपिका एक नाइटटाइम स्किनकेयर रूटीन का पालन करती हैं। वह अपनी त्वचा को सभी पोषण देने के लिए एक अच्छा सीरम, नाइट क्रीम और यहां तक कि एक आई क्रीम का उपयोग करना पसंद करती हैं।
त्वचा रोलर्स (Skin rollers)
फेमिना की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादों में बेहतर तरीके से घुसने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने के लिए दीपिका अपनी त्वचा पर रोलर्स या फेस टूल्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं।
चेहरे का योग (Facial Yoga)
दीपिका, इसकी कसम। वह पूरी तरह से फेस योगा करना पसंद करती हैं, जो फाइन लाइन्स को कम करने और त्वचा को टाइट रखने में मदद करता है।
अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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बत्तीस वर्षीय दक्षिण भारतीय सुंदरी दीपिका बॉलीवुड की सबसे प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक है और बॉलीवुड के साथ साथ उन्होंने हॉलीवुड में भी कदम रखा है। वह अपने व्यस्त दिनचर्या के साथ अपनी फिटनेस पर भी ध्यान देती हैं। दीपिका अपनी खूबसूरती के साथ अपने फिट शरीर के लिए भी जानी जाती हैं। आइये इस लेख के माध्यम से उनके स्किन केयर और वर्कआउट के बारे में और गहराई से जाने। दीपिका ज्यादातर पिलाटे करती हैं, लेकिन एक मजबूत एथलेटिक बॉडी के लिए माइंडफुलनेस और वेट/स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए योग भी शामिल करती हैं। दीपिका कहती है कि वे, "मैं पिलेट्स या स्ट्रेचिंग रूटीन के बीच में दस से बीस रेप्स के साथ बहुत सारे फ्रीहैंड वेट और चार से पांच सेट स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करती हूं। में दौड़ना विशेष रूप से पसंद नहीं है, इसलिए मैं बहुत सारे पारंपरिक जिम व्यायाम नहीं करता। मैं जितनी बार हो सके कोशिश करता हूं और व्यायाम करता हूं, लेकिन जब मैं यात्रा या शूटिंग कर रहा होता हूं, मैं इसे दिनों के अंत तक छोड़ देती हूं। जब वह यात्रा कर रही होती है तो उसे छोड़कर शायद ही कभी कोई कसरत छोड़ती है। हालाँकि, वह हर दिन ध्यान करने के लिए समय निकालती हैं। वह अपने दिन की शुरुआत योग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से करती हैं- यह उन्हें स्फूर्तिवान, ऊर्जावान महसूस करने में मदद करता है और मन और शरीर को शांत करता है, यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी निकालता है। वह सुबह और शाम आधा घंटा टहलना भी पसंद करती हैं। एक- प्लैंक - यह आपके कोर के लिए अब तक का सबसे अच्छा व्यायाम है क्योंकि यह स्थिति कोर के सभी मांसपेशियों के घटकों को संलग्न करती है। दो- माउंटेन क्लीम्बर्स - यह एक ऐसी चाल है जो आपके पेट को जोड़ेगी। तीन- उठक-बैठक - हर समय पसंदीदा, यह चाल आपके पेट को लक्षित करती है। चार- साइकिल क्रंच - यह मूल रूप से एक सामान्य क्रंच है, सिवाय इसके कि आप बारी-बारी से अपने घुटनों को अपनी छाती की ओर लाएं और अपने एब्स का उपयोग करके, अपनी कोहनी को अपने घुटनों की ओर ले जाएं। पाँच- टक जंप - यह चाल आपके कोर को मजबूत करने के लिए एक अविश्वसनीय व्यायाम है क्योंकि यह आपके पूरे निचले कोर और आपके ऊपरी निचले शरीर को संलग्न करता है। "मिंडफुल्नेस्स इस द की" सुंदरता वह नहीं है जो आप हमेशा बाहर से देखते हैं। बेहतर त्वचा और बालों के लिए, दीपिका ध्यान, योग और ध्यान का अभ्यास करना सुनिश्चित करती हैं जो उनके चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक लाता है। जलयोजन कोई भी उत्पाद आपको वह चमक नहीं दे सकता जो बहुत सारा पानी पीने से मिल सकती है। जूस से लेकर सूप और नारियल पानी तक, अपने शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट करें। नो-मेकअप नींद रात होने से पहले दीपिका अपना मेकअप उतारने में कभी नहीं चूकती हैं। वह अपने चेहरे से सारा मेकअप, गंदगी और प्रदूषण हटाना पसंद करती हैं। रात का स्किनकेयर रूटीन दीपिका एक नाइटटाइम स्किनकेयर रूटीन का पालन करती हैं। वह अपनी त्वचा को सभी पोषण देने के लिए एक अच्छा सीरम, नाइट क्रीम और यहां तक कि एक आई क्रीम का उपयोग करना पसंद करती हैं। त्वचा रोलर्स फेमिना की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादों में बेहतर तरीके से घुसने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने के लिए दीपिका अपनी त्वचा पर रोलर्स या फेस टूल्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। चेहरे का योग दीपिका, इसकी कसम। वह पूरी तरह से फेस योगा करना पसंद करती हैं, जो फाइन लाइन्स को कम करने और त्वचा को टाइट रखने में मदद करता है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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( योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, तीन नवंबर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा की प्राचीन प्रणाली, आयुर्वेद एक बहुत ही प्रभावी विज्ञान है और एक ऐसी प्रणाली है जिसका आध्यात्मिक विस्तार बहुत मजबूत और आत्मनिरीक्षण से संबंधित है। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत ने ये बातें कही हैं।
न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने आयुर्वेद दिवस 2021 के अवसर पर मंगलवार को 'आयुर्वेद इन एवरीडे लाइफ' शीर्षक से पैनल चर्चा का आयोजन किया।
लेखक एवं 'एलिमेंट्स ट्रफल्स' के सह-संस्थापक कुशाल चोकसी द्वारा संचालित चर्चा में 'शंकरा नैचुरल्स' के सीईओ भूषण देवधर, 'एलीमेंट्स ट्रफल्स' के सह-संस्थापक अलक वासा और 'द वेल' की सह-संस्थापक और सीईओ रेबेका पारेख शामिल हुए।
जायसवाल ने इस बात का खास तौर पर जिक्र किया कि आयुर्वेद भारतीय पारंपरिक चिकित्सा की एक प्राचीन प्रणाली है और आधुनिक समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेद पर बहुत कुछ किया जा रहा है - एरिज़ोना में शोध संस्थानों से लेकर भारत में शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों तक सक्रियता बरकरार है ।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद "ऐसी प्रणाली है जिसका आध्यात्मिक विस्तार बहुत मजबूत है। यह आत्म विश्लेषण के बारे में है। यही वजह है कि आयुर्वेद हर व्यक्ति को एक व्यक्ति विशेष के तौर पर देखता है" जो चिकित्सा की अन्य शाखाओं में देखने को नहीं मिलता है।
उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही गतिशील विज्ञान है। " साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया भर के कई लोगों के लिए आयुर्वेद एक "जिया हुआ अनुभव" है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्रकृति के साथ मजबूत सह-संबंध है और यह बहुत गहराई से उसे आत्मसात करता है।
जायसवाल ने रेखांकित किया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेद और पारंपरिक दवाओं की प्रणालियों का महत्व बढ़ रहा है। इसके समर्थन में उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पारंपरिक और पूरक दवाओं पर राष्ट्रीय नीतियां बनाने वाले देशों की संख्या 1998 में 25 थी जो बढ़कर 2018 में 98 हो गई। पारंपरिक और पूरक दवाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर वाले देश 2012 में 37 थे जो 2018 में 45 हो गए।
वासा ने कहा कि उनके लिए आयुर्वेद की समझ किसी पाठ या पुस्तक में नहीं थी बल्कि यह एक "महसूस किया गया अनुभव" था।
देवधर ने कहा कि आयुर्वेद के बारे में एक बात यह है कि "यह बहुत ही व्यक्तिगत है। "
नई दिल्ली में, केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के पंचकुला में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) अधीनस्थ केंद्र के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 260 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की।
राजस्थान के जयपुर में स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित छठे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने घोषणा की कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) के पंचकूला में बन रहे नये सेटेलाइट सेंटर के लिए केंद्र सरकार ने 260 करोड़ रूपये दिए है।
सोनोवाल ने कहा "आयुर्वेदिक इलाज के मामले में भारत का अद्वितीय इतिहास रहा है । भारत को आज आयुर्वेद विज्ञान की युगों पुरानी क्षमता का उपयोग कर दुनिया में एक आदर्श स्थापित करने की जरूरत है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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न्यूयॉर्क, तीन नवंबर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा की प्राचीन प्रणाली, आयुर्वेद एक बहुत ही प्रभावी विज्ञान है और एक ऐसी प्रणाली है जिसका आध्यात्मिक विस्तार बहुत मजबूत और आत्मनिरीक्षण से संबंधित है। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत ने ये बातें कही हैं। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने आयुर्वेद दिवस दो हज़ार इक्कीस के अवसर पर मंगलवार को 'आयुर्वेद इन एवरीडे लाइफ' शीर्षक से पैनल चर्चा का आयोजन किया। लेखक एवं 'एलिमेंट्स ट्रफल्स' के सह-संस्थापक कुशाल चोकसी द्वारा संचालित चर्चा में 'शंकरा नैचुरल्स' के सीईओ भूषण देवधर, 'एलीमेंट्स ट्रफल्स' के सह-संस्थापक अलक वासा और 'द वेल' की सह-संस्थापक और सीईओ रेबेका पारेख शामिल हुए। जायसवाल ने इस बात का खास तौर पर जिक्र किया कि आयुर्वेद भारतीय पारंपरिक चिकित्सा की एक प्राचीन प्रणाली है और आधुनिक समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेद पर बहुत कुछ किया जा रहा है - एरिज़ोना में शोध संस्थानों से लेकर भारत में शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों तक सक्रियता बरकरार है । उन्होंने कहा कि आयुर्वेद "ऐसी प्रणाली है जिसका आध्यात्मिक विस्तार बहुत मजबूत है। यह आत्म विश्लेषण के बारे में है। यही वजह है कि आयुर्वेद हर व्यक्ति को एक व्यक्ति विशेष के तौर पर देखता है" जो चिकित्सा की अन्य शाखाओं में देखने को नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही गतिशील विज्ञान है। " साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया भर के कई लोगों के लिए आयुर्वेद एक "जिया हुआ अनुभव" है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्रकृति के साथ मजबूत सह-संबंध है और यह बहुत गहराई से उसे आत्मसात करता है। जायसवाल ने रेखांकित किया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेद और पारंपरिक दवाओं की प्रणालियों का महत्व बढ़ रहा है। इसके समर्थन में उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पारंपरिक और पूरक दवाओं पर राष्ट्रीय नीतियां बनाने वाले देशों की संख्या एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में पच्चीस थी जो बढ़कर दो हज़ार अट्ठारह में अट्ठानवे हो गई। पारंपरिक और पूरक दवाओं के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर वाले देश दो हज़ार बारह में सैंतीस थे जो दो हज़ार अट्ठारह में पैंतालीस हो गए। वासा ने कहा कि उनके लिए आयुर्वेद की समझ किसी पाठ या पुस्तक में नहीं थी बल्कि यह एक "महसूस किया गया अनुभव" था। देवधर ने कहा कि आयुर्वेद के बारे में एक बात यह है कि "यह बहुत ही व्यक्तिगत है। " नई दिल्ली में, केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के पंचकुला में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान अधीनस्थ केंद्र के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए दो सौ साठ करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की। राजस्थान के जयपुर में स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित छठे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने घोषणा की कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के पंचकूला में बन रहे नये सेटेलाइट सेंटर के लिए केंद्र सरकार ने दो सौ साठ करोड़ रूपये दिए है। सोनोवाल ने कहा "आयुर्वेदिक इलाज के मामले में भारत का अद्वितीय इतिहास रहा है । भारत को आज आयुर्वेद विज्ञान की युगों पुरानी क्षमता का उपयोग कर दुनिया में एक आदर्श स्थापित करने की जरूरत है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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भारतीय सैनिकों के साथ जारी पाकिस्तान की बर्बरता से मथुरा के हुतात्मा हेमराज की मां मीना देवी का गुस्सा फूट पड़ा है । उन्होंने पूछा है कि, सरकार आखिर कब तक सिर कटवाती रहेगी ? हम कब तक चुप बैठे रहेंगे ?
मथुरा में मीना देवी ने कहा, पहले हमारे हेमराज का सिर काट लिया था । हमारे यहां सुषमा स्वराज आई थीं । जिन्होंने कहा था कि, हम एक सिर के बदले १० सिर लाएंगे । फिर अब दोबारा हमला कर दिया । सरकार कब तक सिर कटवाती रहेगी ? अब सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए । हम कब तक चुप बैठे रहेंगे ? इस पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए । कब तक बेटे हुतात्मा होते रहेंगे ? हुतात्मा के परिवार पर क्या बीतती है यह तो हम ही जानते हैं । सरकार को इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए ।
वहीं हुतात्मा हेमराज के छोटे भाई जय सिंह ने कहा कि, पाकिस्तान ने जो कायराना हरकत की है जो क्रूरता की है, इसका सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए । पहले मेरे भाई के साथ ऐसा किया था । अब फिर दो जवानों के सिर काट लिए । ऐसे सरकार कब तक चुप बैठी रहेगी ? इसमें सभी राजनीतिक पार्टियों को एक साथ होकर मोदी जी और सरकार का साथ देना चाहिए और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए ।
हुतात्मा लांस नायक हेमराज मथुरा के ही रहने वाले थे । ६ जनवरी २००१ में सेना में भर्ती हुए थे । वह जम्मू कश्मीर के मेंढर सेक्टर में तैनात थे, जहां पाकिस्तान ने उनके साथ कायराना हरकत की थी । ये घटना ८ जनवरी २०१६ की है ।
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भारतीय सैनिकों के साथ जारी पाकिस्तान की बर्बरता से मथुरा के हुतात्मा हेमराज की मां मीना देवी का गुस्सा फूट पड़ा है । उन्होंने पूछा है कि, सरकार आखिर कब तक सिर कटवाती रहेगी ? हम कब तक चुप बैठे रहेंगे ? मथुरा में मीना देवी ने कहा, पहले हमारे हेमराज का सिर काट लिया था । हमारे यहां सुषमा स्वराज आई थीं । जिन्होंने कहा था कि, हम एक सिर के बदले दस सिर लाएंगे । फिर अब दोबारा हमला कर दिया । सरकार कब तक सिर कटवाती रहेगी ? अब सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए । हम कब तक चुप बैठे रहेंगे ? इस पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए । कब तक बेटे हुतात्मा होते रहेंगे ? हुतात्मा के परिवार पर क्या बीतती है यह तो हम ही जानते हैं । सरकार को इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए । वहीं हुतात्मा हेमराज के छोटे भाई जय सिंह ने कहा कि, पाकिस्तान ने जो कायराना हरकत की है जो क्रूरता की है, इसका सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए । पहले मेरे भाई के साथ ऐसा किया था । अब फिर दो जवानों के सिर काट लिए । ऐसे सरकार कब तक चुप बैठी रहेगी ? इसमें सभी राजनीतिक पार्टियों को एक साथ होकर मोदी जी और सरकार का साथ देना चाहिए और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए । हुतात्मा लांस नायक हेमराज मथुरा के ही रहने वाले थे । छः जनवरी दो हज़ार एक में सेना में भर्ती हुए थे । वह जम्मू कश्मीर के मेंढर सेक्टर में तैनात थे, जहां पाकिस्तान ने उनके साथ कायराना हरकत की थी । ये घटना आठ जनवरी दो हज़ार सोलह की है ।
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धर्मशाला (निस) : कांगड़ा पुलिस थाना के लंबा गांव में महिला कार चालक ने एक राहगीर को टक्कर मार दी जिससे राहगीर गंभीर घायल हो गया। अस्पताल में भर्ती घायल ने बाद में दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार पुलिस थाना लंबागांव के तहत आने वाली रिट पंचायत के बस स्टाप के पास रविवार सुबह लंबागांव से शिवनगर की ओर जा रही कार ने सड़क किनारे पैदल चल रहे व्यक्ति को पीछे से टक्कर मार दी जिससे घालय हो गया। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरा लाया गया, लेकिन व्यक्ति ने घावों का ताव ना सहते हुए दम तोड़ दिया। मृतक व्यक्ति की पहचान 67 वर्षीय श्रवण चौधरी गांव व डाकघर रिट के रूप में हुई है। कार राजकुमारी पत्नी अजय शर्मा गांव व डाकघर सकोह चला रही थी। पुलिस ने महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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धर्मशाला : कांगड़ा पुलिस थाना के लंबा गांव में महिला कार चालक ने एक राहगीर को टक्कर मार दी जिससे राहगीर गंभीर घायल हो गया। अस्पताल में भर्ती घायल ने बाद में दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार पुलिस थाना लंबागांव के तहत आने वाली रिट पंचायत के बस स्टाप के पास रविवार सुबह लंबागांव से शिवनगर की ओर जा रही कार ने सड़क किनारे पैदल चल रहे व्यक्ति को पीछे से टक्कर मार दी जिससे घालय हो गया। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरा लाया गया, लेकिन व्यक्ति ने घावों का ताव ना सहते हुए दम तोड़ दिया। मृतक व्यक्ति की पहचान सरसठ वर्षीय श्रवण चौधरी गांव व डाकघर रिट के रूप में हुई है। कार राजकुमारी पत्नी अजय शर्मा गांव व डाकघर सकोह चला रही थी। पुलिस ने महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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हैदराबाद की नामचीन डॉक्टर Dr. S. Anita प्रसूति एवं स्त्री रोग में विशेषज्ञ हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में Dr. S. Anita को काम करने का 15 साल से अधिक अनुभव है। वर्तमान में Dr. S. Anita Esteem Clinic में काम कर रही हैं। Dr. S. Anita Hysterectomy (Abdominal/Vaginal), Essure System, In-Vitro Fertilization (IVF), Dysmenorrhea Treatment, Cervical Cerclage, Adiana System में विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों से जुड़े होने के अलावा Dr. S. Anita कई अन्य मेडिकल संस्थानों से भी जुड़ी हुई हैं। Indian Medical Association (IMA) की मेम्बर भी हैं Dr. S. Anita। Dr. S. Anita ने Osmania Medical College, Hyderabad से MBBS हासिल की है। Osmania Medical College, Hyderabad से MD - Obstetrics & Gynaecology की डिग्री Dr. S. Anita ने हासिल की है।
Q: Dr. S. Anita के पास कौन-कौन सी डिग्री हैं?
A: Dr. S. Anita ने MBBS व MD - Obstetrics & Gynaecology की डिग्री प्राप्त की हुई हैं, इनकी डिग्रीज की संपूर्ण जानकारी के लिए ऊपर देखें।
Q: Dr. S. Anita को कितने वर्षों का अनुभव है?
A: Dr. S. Anita को प्रसूति एवं स्त्री रोग होने का 15 सालों का अनुभव है।
Q: रोगी Dr. S. Anita के पास किन-किन उपचार के लिए जाते हैं?
A: मरीज Hysterectomy (Abdominal/Vaginal), Essure System, In-Vitro Fertilization (IVF) के लिए Dr. S. Anita के पास जाते हैं। Dr. S. Anita द्वारा दी जाने वाली सारी सेवाओं की पूरी सूची ऊपर दी गई है।
Q: Dr. S. Anita से परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट कैसे ले सकते हैं?
A: आप ऑनलाइन परामर्श या क्लिनिक में मिलने के लिए myUpchar के माध्यम से Dr. S. Anita के साथ अपॉइंटमेंट ले सकते हैं - ऊपर दिए गए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें और आसानी से अपॉइंटमेंट बुक करें!
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हैदराबाद की नामचीन डॉक्टर Dr. S. Anita प्रसूति एवं स्त्री रोग में विशेषज्ञ हैं। कई क्लीनिक और अस्पतालों में Dr. S. Anita को काम करने का पंद्रह साल से अधिक अनुभव है। वर्तमान में Dr. S. Anita Esteem Clinic में काम कर रही हैं। Dr. S. Anita Hysterectomy , Essure System, In-Vitro Fertilization , Dysmenorrhea Treatment, Cervical Cerclage, Adiana System में विशेषज्ञ हैं। कई अस्पतालों से जुड़े होने के अलावा Dr. S. Anita कई अन्य मेडिकल संस्थानों से भी जुड़ी हुई हैं। Indian Medical Association की मेम्बर भी हैं Dr. S. Anita। Dr. S. Anita ने Osmania Medical College, Hyderabad से MBBS हासिल की है। Osmania Medical College, Hyderabad से MD - Obstetrics & Gynaecology की डिग्री Dr. S. Anita ने हासिल की है। Q: Dr. S. Anita के पास कौन-कौन सी डिग्री हैं? A: Dr. S. Anita ने MBBS व MD - Obstetrics & Gynaecology की डिग्री प्राप्त की हुई हैं, इनकी डिग्रीज की संपूर्ण जानकारी के लिए ऊपर देखें। Q: Dr. S. Anita को कितने वर्षों का अनुभव है? A: Dr. S. Anita को प्रसूति एवं स्त्री रोग होने का पंद्रह सालों का अनुभव है। Q: रोगी Dr. S. Anita के पास किन-किन उपचार के लिए जाते हैं? A: मरीज Hysterectomy , Essure System, In-Vitro Fertilization के लिए Dr. S. Anita के पास जाते हैं। Dr. S. Anita द्वारा दी जाने वाली सारी सेवाओं की पूरी सूची ऊपर दी गई है। Q: Dr. S. Anita से परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट कैसे ले सकते हैं? A: आप ऑनलाइन परामर्श या क्लिनिक में मिलने के लिए myUpchar के माध्यम से Dr. S. Anita के साथ अपॉइंटमेंट ले सकते हैं - ऊपर दिए गए बटन "अपॉइंटमेंट बुक करें" पर क्लिक करें और आसानी से अपॉइंटमेंट बुक करें!
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संडीला में एक युवक को चाकू मारकर घायल करने का मामला सामने आया है। सीएचसी के डॉक्टरों ने घायल युवक को गम्भीर हालात में ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार कासिमपुर थाना क्षेत्र के औरामऊ गांव निवासी भोलई के पेट में चाकू मारकर गांव के ही धर्मेंद्र कुशवाहा ने घायल कर दिया है। घायल के भाई बुद्धा पुत्र रघुराई ने थाना कासिमपुर में दी गयी तहरीर में बताया है कि गांव के ही धर्मेंद्र कुशवाहा पुत्र शिव प्रसाद कुशवाहा ने पुरानी रंजिश के चलते उसके भाई के पेट में चाकू मार दी है। जिससे वह गंभीर घायल हो गया है।
घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहन्दर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत को देखते हुए एम्बुलेंस से लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया है। थाना प्रभारी हरिशंकर प्रजापति ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर विपक्षी के विरुद्ध मु. अ. स. 118/22 धारा 307 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। तथा मामले की जांच की जा रही है।
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संडीला में एक युवक को चाकू मारकर घायल करने का मामला सामने आया है। सीएचसी के डॉक्टरों ने घायल युवक को गम्भीर हालात में ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार कासिमपुर थाना क्षेत्र के औरामऊ गांव निवासी भोलई के पेट में चाकू मारकर गांव के ही धर्मेंद्र कुशवाहा ने घायल कर दिया है। घायल के भाई बुद्धा पुत्र रघुराई ने थाना कासिमपुर में दी गयी तहरीर में बताया है कि गांव के ही धर्मेंद्र कुशवाहा पुत्र शिव प्रसाद कुशवाहा ने पुरानी रंजिश के चलते उसके भाई के पेट में चाकू मार दी है। जिससे वह गंभीर घायल हो गया है। घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहन्दर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत को देखते हुए एम्बुलेंस से लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया है। थाना प्रभारी हरिशंकर प्रजापति ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर विपक्षी के विरुद्ध मु. अ. स. एक सौ अट्ठारह/बाईस धारा तीन सौ सात आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। तथा मामले की जांच की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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किन्ही कारणो से, जब उस ऊष्मा की मात्रा अधिक होती है, तो शरीर का ताप बढ जाता है । इस बढे हुए ताप का ही नाम ज्वर है । इस प्रकार ज्वर एक अलग रोग है, जिसमे तापवृद्धि के साथ शारीरिक एवं मानसिक विकृतियाँ हो जाती हैं ।
चरक ने कहा है कि ज्वर एक प्रकार का होता है और सन्ताप उत्पन्न करना जिसका लक्षण है । अन्यत्र उसे देह, इन्द्रिय एव मन को सतप्त करनेवाला कहा गया है ।
सुश्रुत के अनुसार स्वेद का अवरोध, सन्ताप और सर्वाङ्ग मे पीडा, ये लक्षण एक साथ जिस रोग मे हो, उसे 'ज्वर' कहते हैं ।
स्वेवावरोध - आमरस के कारण या रक्त मे ज्वर जन्य विष की प्रचुरता से स्वेद - ग्रन्थियो से स्वेद का निकलना बाधित हो जाता है। स्वेद शब्द स्रावसामान्य का उपलक्षण ( बोधक) है, अत स्वेदावरोध से मुख, आमाशय, अन्त्र, वृक्क तथा अन्य ग्रन्थियो के स्राव का कम होना या बन्द होना, यह अर्थ भी समझना चाहिए । रक्त मे परिभ्रमण करनेवाले ज्वर-जनक विषो के कारण तापनियन्त्रक केन्द्र के अक्रियाशील हो जाने से परिसरीय केशिकाओ का विस्फार नही होने पाता । इस प्रकार भोजनाभाव तथा विषो एव आमदोष की प्रचुरता के कारण स्वेद-प्रन्थियो का कार्य अवरुद्ध हो जाता है।
सन्ताप - ताप या ऊष्मा उत्पन्न करना पित्त का गुण है, जब पित्त की वृद्धि होती है, तभी सन्ताप होता है । इसलिये सामान्यत सभी ज्वरो मे पित्त का अनुवन्ध मानकर उनमे पित्त शमन करनेवाली चिकित्सा का उपदेश किया गया है। शरीर मे ताप की वृद्धि होने पर त्वचा के स्पर्श द्वारा उसका अनुभव होता है । इन्द्रियों मे सन्ताप होने पर उनकी क्रिया अवरुद्ध हो जाती है और मन सन्ताप होने पर चित्त का न लगना, बेचैनी एव ग्लानि होती है ।
शरीर मे सन्ताप या तापवृद्धि होना शरीर की प्रतिक्रियात्मक शक्ति का निदर्शक है । तापवृद्धि का होना शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए एक उपयोगी क्रिया है । ताप की अभिकता के दो लाभ हैं- प्रथम ताप बढने पर जीवाणुओ की वृद्धि रुक जाती है और दूसरा लाभ यह है कि तापवृद्धि होने से हृदय की गति तीव्र हो जाती है, जिससे विकृति के निराकरण के लिए रक्त प्रचुर मात्रा मे विकृत स्थान मे पहुँच जाता है।
सर्वाङ्ग ग्रहण - यह लक्षण प्रमुख रूप से सर्वाङ्गवात विकार में होता है, किन्तु जब स्वेदावरोध तथा सन्ताप के साथ सर्वाङ्गग्रहण ( सर्वाङ्ग पीडा ) होता है, नो ये तीनो ज्वर के परिचायक लक्षण हो जाते हैं ।
१ देहेन्द्रियमनस्तापी
२ स्वेदावरोध सन्ताप सर्वाग्रहण तथा । युगपद् यत्र रोगे च स ज्वरो व्यपदिश्यते ॥ सु० उ० ३९ ३ ऊष्मा पित्तावृते नास्ति ज्वरो नास्त्यूष्मणा विना । तस्मात् पित्तविरुद्धानि त्यजेत् पित्ताधिकेऽधिकम् ॥
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किन्ही कारणो से, जब उस ऊष्मा की मात्रा अधिक होती है, तो शरीर का ताप बढ जाता है । इस बढे हुए ताप का ही नाम ज्वर है । इस प्रकार ज्वर एक अलग रोग है, जिसमे तापवृद्धि के साथ शारीरिक एवं मानसिक विकृतियाँ हो जाती हैं । चरक ने कहा है कि ज्वर एक प्रकार का होता है और सन्ताप उत्पन्न करना जिसका लक्षण है । अन्यत्र उसे देह, इन्द्रिय एव मन को सतप्त करनेवाला कहा गया है । सुश्रुत के अनुसार स्वेद का अवरोध, सन्ताप और सर्वाङ्ग मे पीडा, ये लक्षण एक साथ जिस रोग मे हो, उसे 'ज्वर' कहते हैं । स्वेवावरोध - आमरस के कारण या रक्त मे ज्वर जन्य विष की प्रचुरता से स्वेद - ग्रन्थियो से स्वेद का निकलना बाधित हो जाता है। स्वेद शब्द स्रावसामान्य का उपलक्षण है, अत स्वेदावरोध से मुख, आमाशय, अन्त्र, वृक्क तथा अन्य ग्रन्थियो के स्राव का कम होना या बन्द होना, यह अर्थ भी समझना चाहिए । रक्त मे परिभ्रमण करनेवाले ज्वर-जनक विषो के कारण तापनियन्त्रक केन्द्र के अक्रियाशील हो जाने से परिसरीय केशिकाओ का विस्फार नही होने पाता । इस प्रकार भोजनाभाव तथा विषो एव आमदोष की प्रचुरता के कारण स्वेद-प्रन्थियो का कार्य अवरुद्ध हो जाता है। सन्ताप - ताप या ऊष्मा उत्पन्न करना पित्त का गुण है, जब पित्त की वृद्धि होती है, तभी सन्ताप होता है । इसलिये सामान्यत सभी ज्वरो मे पित्त का अनुवन्ध मानकर उनमे पित्त शमन करनेवाली चिकित्सा का उपदेश किया गया है। शरीर मे ताप की वृद्धि होने पर त्वचा के स्पर्श द्वारा उसका अनुभव होता है । इन्द्रियों मे सन्ताप होने पर उनकी क्रिया अवरुद्ध हो जाती है और मन सन्ताप होने पर चित्त का न लगना, बेचैनी एव ग्लानि होती है । शरीर मे सन्ताप या तापवृद्धि होना शरीर की प्रतिक्रियात्मक शक्ति का निदर्शक है । तापवृद्धि का होना शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए एक उपयोगी क्रिया है । ताप की अभिकता के दो लाभ हैं- प्रथम ताप बढने पर जीवाणुओ की वृद्धि रुक जाती है और दूसरा लाभ यह है कि तापवृद्धि होने से हृदय की गति तीव्र हो जाती है, जिससे विकृति के निराकरण के लिए रक्त प्रचुर मात्रा मे विकृत स्थान मे पहुँच जाता है। सर्वाङ्ग ग्रहण - यह लक्षण प्रमुख रूप से सर्वाङ्गवात विकार में होता है, किन्तु जब स्वेदावरोध तथा सन्ताप के साथ सर्वाङ्गग्रहण होता है, नो ये तीनो ज्वर के परिचायक लक्षण हो जाते हैं । एक देहेन्द्रियमनस्तापी दो स्वेदावरोध सन्ताप सर्वाग्रहण तथा । युगपद् यत्र रोगे च स ज्वरो व्यपदिश्यते ॥ सुशून्य उशून्य उनतालीस तीन ऊष्मा पित्तावृते नास्ति ज्वरो नास्त्यूष्मणा विना । तस्मात् पित्तविरुद्धानि त्यजेत् पित्ताधिकेऽधिकम् ॥
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बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला प्रशासन किसानों व आम लोगों की समस्या के निराकरण में कितनी बेपरवाही कर रहा है इसका अंदाजा राजस्व प्रकरणों की बढ़ती पेंडेंसी से लगाया जा सकता है। बिलासपुर संभाग में राजस्व से संबंधित करीब 80 हजार मामले तहसीलदार व नायब तहसीलदार के कोर्ट में लंबित हैं।
किसान से लेकर जरूरतमंद कोर्ट के चक्कर काटकर थक गए हैं। जब सुनवाई की तिथि आती है तब इसे आगे बढ़ा दिया जाता है। सीमांकन और बटांकन जैसे मामलों को भी जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। संभाग में अविवादित बटांकन के दो हजार 906 व विवादित बटांकन के आठ हजार 61, सीमांकन के आठ हजार 127, अविवादित नामांतरण के 60 हजार 455 प्रकरण कोर्ट में लंबित हैं।
राजस्व से संबंधित प्रकरणों के निराकरण में प्रशासन फिसड्डी साबित हो रहा है। इसका खामियाजा जरूरतमंदों को भुगतना पड़ रहा है। सीमांकन और बटांकन जैसे मामलों का तय समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है। जिन मामलों में विवाद की स्थिति है वह तो लंबित है साथ ही ऐसे प्रकरण जिसमें दोनों पक्षों की सहमति है और आपसी राजीनामा से मामलों का निपटारा चाहते हैं उनको भी राजस्व न्यायालयों का चक्कर काटना पड़ रहा है।
अविवादित प्रकरणों की भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। बीते दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्व प्रकरणों की पेंडेंसी को लेकर प्रदेशभर के कलेक्टरों को जमकर फटकार लगाई थी। प्रकरणों के निराकरण के लिए जरूरी व्यवस्था के निर्देश भी दिए थे। मुख्यमंत्री की नाराजगी का असर भी दिखाई दिया।
बीते दिनों कलेक्टर सौरभ कुमार ने राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर लंबित प्रकरणों की जानकारी मांगी। बिलासपुर तहसीलदार कृष्ण कुमार जायसवाल के कोर्ट में विवादित नामांतरण के 98 मामले लंबित मिले। नाराज कलेक्टर ने शोकाज नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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बिलासपुर। जिला प्रशासन किसानों व आम लोगों की समस्या के निराकरण में कितनी बेपरवाही कर रहा है इसका अंदाजा राजस्व प्रकरणों की बढ़ती पेंडेंसी से लगाया जा सकता है। बिलासपुर संभाग में राजस्व से संबंधित करीब अस्सी हजार मामले तहसीलदार व नायब तहसीलदार के कोर्ट में लंबित हैं। किसान से लेकर जरूरतमंद कोर्ट के चक्कर काटकर थक गए हैं। जब सुनवाई की तिथि आती है तब इसे आगे बढ़ा दिया जाता है। सीमांकन और बटांकन जैसे मामलों को भी जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। संभाग में अविवादित बटांकन के दो हजार नौ सौ छः व विवादित बटांकन के आठ हजार इकसठ, सीमांकन के आठ हजार एक सौ सत्ताईस, अविवादित नामांतरण के साठ हजार चार सौ पचपन प्रकरण कोर्ट में लंबित हैं। राजस्व से संबंधित प्रकरणों के निराकरण में प्रशासन फिसड्डी साबित हो रहा है। इसका खामियाजा जरूरतमंदों को भुगतना पड़ रहा है। सीमांकन और बटांकन जैसे मामलों का तय समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है। जिन मामलों में विवाद की स्थिति है वह तो लंबित है साथ ही ऐसे प्रकरण जिसमें दोनों पक्षों की सहमति है और आपसी राजीनामा से मामलों का निपटारा चाहते हैं उनको भी राजस्व न्यायालयों का चक्कर काटना पड़ रहा है। अविवादित प्रकरणों की भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। बीते दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्व प्रकरणों की पेंडेंसी को लेकर प्रदेशभर के कलेक्टरों को जमकर फटकार लगाई थी। प्रकरणों के निराकरण के लिए जरूरी व्यवस्था के निर्देश भी दिए थे। मुख्यमंत्री की नाराजगी का असर भी दिखाई दिया। बीते दिनों कलेक्टर सौरभ कुमार ने राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर लंबित प्रकरणों की जानकारी मांगी। बिलासपुर तहसीलदार कृष्ण कुमार जायसवाल के कोर्ट में विवादित नामांतरण के अट्ठानवे मामले लंबित मिले। नाराज कलेक्टर ने शोकाज नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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