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Ind w vs Eng w: रेणुका सिंह ने झटके 5 विकेट . BCCI TWITTER) नई दिल्लीः भारतीय महिला टीम और इंग्लैंड वूमेंस टीम के बीच आज (18 फरवरी) को टी20 विश्व कप का 14वां मैच खेला गया. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और इंग्लैंड को 151 रनों पर रोका. टीम इंडिया की बेहतरीन गेंदबाज रेणुका ठाकुर सिंह ने 5 विकेट झटके. लेकिन उनका यह शानदार प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए काम नहीं आया. टीम इंडिया को इस मुकाबले में 11 रनों से हार का सामना करना पड़ा. रेणुका ने शुरुआत से ही विकेट चटकाने शुरू किए. उन्होंने ओपनर बैटर सोफिया डंकली और डेनियल वायट का विकेट चटकाया. तीसरे नंबर पर बैटिंग करने उतरी एलिस कैप्सी को रेणुका ने मात्र 3 रन बनाने दिए और बोल्ड कर दिया. इसके अलावा रेणुका ने विकेटकीपर एमी जोन्स का विकेट लिया और कैथरीन ब्रंट को शून्य पर चलता किया. वूमेंस एशिया कप 2022 के फाइनल मुकाबले में भी रेणुका ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 3 विकेट चटकाए थे और मैच को भारत की झोली में डाल दिया था. एशिया कप के फाइनल में वह प्लेयर ऑफ द मैच भी रही थी. रेणुका सिंह ने भारत के लिए कुल 30 टी20 मैचों में हिस्सा लिया है. दौरान उन्होंने 30 विकेट लिए हैं. वही वनडे मैचों की बात करे तो उन्होंने 7 मैचों में 18 विकेट चटकाए है. .
Ind w vs Eng w: रेणुका सिंह ने झटके पाँच विकेट . BCCI TWITTER) नई दिल्लीः भारतीय महिला टीम और इंग्लैंड वूमेंस टीम के बीच आज को टीबीस विश्व कप का चौदहवां मैच खेला गया. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और इंग्लैंड को एक सौ इक्यावन रनों पर रोका. टीम इंडिया की बेहतरीन गेंदबाज रेणुका ठाकुर सिंह ने पाँच विकेट झटके. लेकिन उनका यह शानदार प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए काम नहीं आया. टीम इंडिया को इस मुकाबले में ग्यारह रनों से हार का सामना करना पड़ा. रेणुका ने शुरुआत से ही विकेट चटकाने शुरू किए. उन्होंने ओपनर बैटर सोफिया डंकली और डेनियल वायट का विकेट चटकाया. तीसरे नंबर पर बैटिंग करने उतरी एलिस कैप्सी को रेणुका ने मात्र तीन रन बनाने दिए और बोल्ड कर दिया. इसके अलावा रेणुका ने विकेटकीपर एमी जोन्स का विकेट लिया और कैथरीन ब्रंट को शून्य पर चलता किया. वूमेंस एशिया कप दो हज़ार बाईस के फाइनल मुकाबले में भी रेणुका ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ तीन विकेट चटकाए थे और मैच को भारत की झोली में डाल दिया था. एशिया कप के फाइनल में वह प्लेयर ऑफ द मैच भी रही थी. रेणुका सिंह ने भारत के लिए कुल तीस टीबीस मैचों में हिस्सा लिया है. दौरान उन्होंने तीस विकेट लिए हैं. वही वनडे मैचों की बात करे तो उन्होंने सात मैचों में अट्ठारह विकेट चटकाए है. .
दूध सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, दूध से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है। मार्केट में कई प्रकार के पैकेट बंद दूध उपलब्ध होते हैं, जिनमें फुल क्रीम, डबल टोंड मिल्क लेकिन इनकी खासियत क्या है? फुल क्रीम दूध फैट से भरपूर होता है और इसमें गाढ़ी मलाई होती है। हानिकारक कीटाणुओं को मारने के लिए इसे पास्चुरीकरण किया जाता है। फुल क्रीम मिल्क खासकर बच्चे, युवा और बॉडी बिल्डर्स के लिए फायदेमंद साबित होता है। एक गिलास फुल क्रीम दूध में लगभग 150 कैलोरी होती है। सिंगल टोंड मिल्क, पानी और स्किम्ड मिल्क पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। सिंगल टोंड मिल्क के एक गिलास मात्रा में लगभग 120 कैलोरी होती है। डबल टोंड मिल्क को स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाकर बनाया जाता है। यह दूध वजन कम करने में कारगर होता है, क्योंकि यह दूध कैलोरी को नियंत्रित रखता है। स्किम्ड मिल्क में दूध में पाए जाने वाले सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। स्किम्ड मिल्क में फुल क्रीम मिल्क की आधी यानि 75 कैलोरी मौजूद होती है।
दूध सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, दूध से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है। मार्केट में कई प्रकार के पैकेट बंद दूध उपलब्ध होते हैं, जिनमें फुल क्रीम, डबल टोंड मिल्क लेकिन इनकी खासियत क्या है? फुल क्रीम दूध फैट से भरपूर होता है और इसमें गाढ़ी मलाई होती है। हानिकारक कीटाणुओं को मारने के लिए इसे पास्चुरीकरण किया जाता है। फुल क्रीम मिल्क खासकर बच्चे, युवा और बॉडी बिल्डर्स के लिए फायदेमंद साबित होता है। एक गिलास फुल क्रीम दूध में लगभग एक सौ पचास कैलोरी होती है। सिंगल टोंड मिल्क, पानी और स्किम्ड मिल्क पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। सिंगल टोंड मिल्क के एक गिलास मात्रा में लगभग एक सौ बीस कैलोरी होती है। डबल टोंड मिल्क को स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाकर बनाया जाता है। यह दूध वजन कम करने में कारगर होता है, क्योंकि यह दूध कैलोरी को नियंत्रित रखता है। स्किम्ड मिल्क में दूध में पाए जाने वाले सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। स्किम्ड मिल्क में फुल क्रीम मिल्क की आधी यानि पचहत्तर कैलोरी मौजूद होती है।
18 मई 2019 को नौसेनाध्यक्ष ने पश्चिमी बेड़े का पोतारोहण किया। सीएनएस की विदाई स्वरूप बेड़े के ग्यारह पोतों और दो पनडुब्बियों और चार फ्लोटिला पोतों द्वारा शानदार स्टीम-पास्ट बाय के साथ-साथ फ्लीट एयर आर्म के विमान द्वारा फ्लाई-पास्ट का पारंपरिक सम्मान उन्हें प्रदान किया गया। सभी पोतों का संचालन 'मैन एंड चीयर शिप' के लिए कर्मियों द्वारा किया गया। प्रमुख पोत भा नौ पो विक्रमादित्य पर सवारी करते हुए, सीएनएस ने समुद्र में सभी कर्मियों का संबोधन किया और बाराखाना के दौरान उनके साथ बातचीत की। उन्होंने 40 वर्ष के दौरान भारतीय नौसेना का हिस्सा बनने पर अपार संतुष्टि गर्व व्यक्त किया। इसके अलावा, एडमिरल ने दोपहर की चाय के दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के सभी अधिकारियों और नाविकों के साथ बातचीत करते हुए नौसेना की उपलब्धियों का वर्णन किया और इसके भविष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक प्रगति की जानकारी दी।
अट्ठारह मई दो हज़ार उन्नीस को नौसेनाध्यक्ष ने पश्चिमी बेड़े का पोतारोहण किया। सीएनएस की विदाई स्वरूप बेड़े के ग्यारह पोतों और दो पनडुब्बियों और चार फ्लोटिला पोतों द्वारा शानदार स्टीम-पास्ट बाय के साथ-साथ फ्लीट एयर आर्म के विमान द्वारा फ्लाई-पास्ट का पारंपरिक सम्मान उन्हें प्रदान किया गया। सभी पोतों का संचालन 'मैन एंड चीयर शिप' के लिए कर्मियों द्वारा किया गया। प्रमुख पोत भा नौ पो विक्रमादित्य पर सवारी करते हुए, सीएनएस ने समुद्र में सभी कर्मियों का संबोधन किया और बाराखाना के दौरान उनके साथ बातचीत की। उन्होंने चालीस वर्ष के दौरान भारतीय नौसेना का हिस्सा बनने पर अपार संतुष्टि गर्व व्यक्त किया। इसके अलावा, एडमिरल ने दोपहर की चाय के दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के सभी अधिकारियों और नाविकों के साथ बातचीत करते हुए नौसेना की उपलब्धियों का वर्णन किया और इसके भविष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक प्रगति की जानकारी दी।
Dexamethasone injection in hindi डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। यह शरीर में होने वाली एलर्जी को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह सांस संबंधी समस्याओं में भी इस्तेमाल होता है। आइये इस ड्रग के बारे में और अधिक विस्तार से बात करते हैं कि यह कहाँ इस्तेमाल होता है, कैसे काम करता है और इसके क्या क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं। नीचे Dexamethasone injection की जानकारी, लाभ, फायदे, उपयोग करने का तरीका, प्रयोग डोज, साइड इफेक्ट्स, नुकसान, दुष्प्रभाव और सावधानियां के बारें में। डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। आइये जानते हैं कि इस इंजेक्शन का इस्तेमाल और किन किन समस्याओं के लिए किया जा सकता है। (और पढ़े - क्या आँखों की इन बीमारियों को जानते हैं आप) डेक्सामेथासोन इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से आपको कई सारे साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं लेकिन ये साइड इफेक्ट्स आपको हमेशा महसूस नहीं होंगे। जब भी आपको नीचे बताये गये साइड इफेक्ट्स महसूस हों तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। (और पढ़े - उल्टी और मतली को रोकने के उपाय) - डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। यह एलर्जी करने वाले केमिकल को रिलीज होने से रोकता है। अगर आप डेक्सामेथासोन इंजेक्शन के साथ कोई अन्य दूसरी ड्रग लेना चाहते हैं तो हो सकता है कि इसके साइड इफेक्ट्स बढ़ जाएं या फिर इसका प्रभाव कुछ कम हो जाए। अगर इसके इस्तेमाल से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है तो आप तुरंत डॉक्टर से सलाह लें जिससे कि आपको कोई गंभीर समस्या ना हो। निम्नलिखित ड्रग के साथ इसकी पारस्परिक क्रिया हो सकती है। - एल्कोहल (Alcohol) - एस्प्रिन (Asprin) - साइक्लोस्पोरिन (cyclosporine) - डाईयूरेटिक (Diuretic) - अगर आपको इसमें मौजूद सामग्री से एलर्जी है तो इसका इस्तेमाल ना करें या फिर डॉक्टर से सलाह लें। - स्तनपान के समय इस दवा का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - प्रेगनेंसी के दौरान इसका इस्तेमाल करने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - अगर आप पहले से ही कोई विटामिन ले रहें हैं तो इस ड्रग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। - अगर आप एल्कोहल का सेवन करते हैं तो इस ड्रग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। 1- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन(Dexamethasone injection) को डायबिटीज में इस्तेमाल कर सकते हैं? जी नहीं इस ड्रग को डायबिटीज में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। बेहतर यह होगा कि आप डॉक्टर की सलाह लें। 2- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन(Dexamethasone injection) का इस्तेमाल एलर्जी के दौरान कर सकते हैं? जी हाँ आप इसका इस्तेमाल एलर्जी आदि में कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 3- क्या Dexamethasone injection का इस्तेमाल स्तनपान के दौरान कर सकते हैं? अगर आप इस दवा को स्तनपान के दौरान इस्तेमाल करते हैं तो हो सकता है कि यह आपके दूध में स्रावित हो जाए। इसलिए ऐसा करने से पहले आप डॉक्टर से जरूर पूछें। 4- क्या Dexamethasone injection का इस्तेमाल अस्थमा में कर सकते हैं? जी हाँ आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार Dexamethasone injection को अस्थमा में इस्तेमाल कर सकते हैं। 5- क्या Dexamethasone injection को खाली पेट इस्तेमाल किया जा सकता है? जी नहीं, अगर आप इस ड्रग को खाली पेट इस्तेमाल करना चाहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। 6- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन को प्रेगनेंसी में इस्तेमाल कर सकते हैं? प्रेगनेंसी के समय Dexamethasone injection का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत ना हो।
Dexamethasone injection in hindi डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। यह शरीर में होने वाली एलर्जी को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह सांस संबंधी समस्याओं में भी इस्तेमाल होता है। आइये इस ड्रग के बारे में और अधिक विस्तार से बात करते हैं कि यह कहाँ इस्तेमाल होता है, कैसे काम करता है और इसके क्या क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं। नीचे Dexamethasone injection की जानकारी, लाभ, फायदे, उपयोग करने का तरीका, प्रयोग डोज, साइड इफेक्ट्स, नुकसान, दुष्प्रभाव और सावधानियां के बारें में। डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। आइये जानते हैं कि इस इंजेक्शन का इस्तेमाल और किन किन समस्याओं के लिए किया जा सकता है। डेक्सामेथासोन इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से आपको कई सारे साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं लेकिन ये साइड इफेक्ट्स आपको हमेशा महसूस नहीं होंगे। जब भी आपको नीचे बताये गये साइड इफेक्ट्स महसूस हों तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। - डेक्सामेथासोन डेक्सामेथासोन इंजेक्शन एक तरह का कॉर्टिकोस्टेरॉयड है। यह एलर्जी करने वाले केमिकल को रिलीज होने से रोकता है। अगर आप डेक्सामेथासोन इंजेक्शन के साथ कोई अन्य दूसरी ड्रग लेना चाहते हैं तो हो सकता है कि इसके साइड इफेक्ट्स बढ़ जाएं या फिर इसका प्रभाव कुछ कम हो जाए। अगर इसके इस्तेमाल से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है तो आप तुरंत डॉक्टर से सलाह लें जिससे कि आपको कोई गंभीर समस्या ना हो। निम्नलिखित ड्रग के साथ इसकी पारस्परिक क्रिया हो सकती है। - एल्कोहल - एस्प्रिन - साइक्लोस्पोरिन - डाईयूरेटिक - अगर आपको इसमें मौजूद सामग्री से एलर्जी है तो इसका इस्तेमाल ना करें या फिर डॉक्टर से सलाह लें। - स्तनपान के समय इस दवा का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - प्रेगनेंसी के दौरान इसका इस्तेमाल करने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - अगर आप पहले से ही कोई विटामिन ले रहें हैं तो इस ड्रग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। - अगर आप एल्कोहल का सेवन करते हैं तो इस ड्रग का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। एक- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन को डायबिटीज में इस्तेमाल कर सकते हैं? जी नहीं इस ड्रग को डायबिटीज में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। बेहतर यह होगा कि आप डॉक्टर की सलाह लें। दो- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन का इस्तेमाल एलर्जी के दौरान कर सकते हैं? जी हाँ आप इसका इस्तेमाल एलर्जी आदि में कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह जरूर लें। तीन- क्या Dexamethasone injection का इस्तेमाल स्तनपान के दौरान कर सकते हैं? अगर आप इस दवा को स्तनपान के दौरान इस्तेमाल करते हैं तो हो सकता है कि यह आपके दूध में स्रावित हो जाए। इसलिए ऐसा करने से पहले आप डॉक्टर से जरूर पूछें। चार- क्या Dexamethasone injection का इस्तेमाल अस्थमा में कर सकते हैं? जी हाँ आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार Dexamethasone injection को अस्थमा में इस्तेमाल कर सकते हैं। पाँच- क्या Dexamethasone injection को खाली पेट इस्तेमाल किया जा सकता है? जी नहीं, अगर आप इस ड्रग को खाली पेट इस्तेमाल करना चाहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। छः- क्या डेक्सामेथासोन इंजेक्शन को प्रेगनेंसी में इस्तेमाल कर सकते हैं? प्रेगनेंसी के समय Dexamethasone injection का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत ना हो।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जनवरी से शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही 875 लोगों का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। भारत (India) में कोरोना (Coronavirus) के मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। पहले उपराष्ट्रपति (Vice President M Venkaiah Naidu) के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सामने आई, वहीं अब बजट सत्र (Budget Session) से पहले संसद के कर्मचारियों में भी कोरोना फैल रहा है। अब तक 875 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जनवरी से शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही 875 लोगों का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। इसी महीने में 500 से ज्यादा कोरोना के मरीज संसद से रिपोर्ट हुए थे। वहीं अभी तक राज्यसभा सचिवालय के 271 से ज्यादा स्टाफ को कोरोना हो चुका है। जबकि दूसरी तरफ रविवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अभी हैदराबाद में हैं। उन्होंने एक हफ्ते तक सेल्फ आइसोलेशन में रहने का फैसला किया है। भारत के उपराष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी गई है। ट्वीट कर लिखा गया कि मेरे संपर्क में आए सभी लोग खुद को आइसोलेट कर लें और टेस्ट कराने की सलाह दी है। इससे पहले रविवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। नायडू ने इंडिया गेट पर बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के प्रति नेताजी के अदम्य साहस का सम्मान करते हुए हम इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हैं। स्वतंत्रता संग्राम में बोस की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए राष्ट्र उनका ऋणी है। देश में बढ़ते कोरोना कहर के बीच रविवार को अब तक कोरोना वायरस के 3,37,704 नए मामले सामने आ चुके हैं और 488 मरीजों की मौत संक्रमण की वजह से हो चुकी है। वहीं, कोरोना के सबसे तेजी से फैलने वाले वेरिएंट ओमिक्रॉन के मामले भी बढ़ रहे हैं। रविवार तक ओमिक्रॉन के 10 हजार से ज्यादा मामले देश में दर्ज हो चुके हैं। जबकि डेली सकारात्मकता दर अब 17. 22 है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इकतीस जनवरी से शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही आठ सौ पचहत्तर लोगों का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। भारत में कोरोना के मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। पहले उपराष्ट्रपति के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सामने आई, वहीं अब बजट सत्र से पहले संसद के कर्मचारियों में भी कोरोना फैल रहा है। अब तक आठ सौ पचहत्तर लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इकतीस जनवरी से शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही आठ सौ पचहत्तर लोगों का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। इसी महीने में पाँच सौ से ज्यादा कोरोना के मरीज संसद से रिपोर्ट हुए थे। वहीं अभी तक राज्यसभा सचिवालय के दो सौ इकहत्तर से ज्यादा स्टाफ को कोरोना हो चुका है। जबकि दूसरी तरफ रविवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अभी हैदराबाद में हैं। उन्होंने एक हफ्ते तक सेल्फ आइसोलेशन में रहने का फैसला किया है। भारत के उपराष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी गई है। ट्वीट कर लिखा गया कि मेरे संपर्क में आए सभी लोग खुद को आइसोलेट कर लें और टेस्ट कराने की सलाह दी है। इससे पहले रविवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सुभाष चंद्र बोस की एक सौ पच्चीसवीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। नायडू ने इंडिया गेट पर बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के प्रति नेताजी के अदम्य साहस का सम्मान करते हुए हम इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हैं। स्वतंत्रता संग्राम में बोस की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए राष्ट्र उनका ऋणी है। देश में बढ़ते कोरोना कहर के बीच रविवार को अब तक कोरोना वायरस के तीन,सैंतीस,सात सौ चार नए मामले सामने आ चुके हैं और चार सौ अठासी मरीजों की मौत संक्रमण की वजह से हो चुकी है। वहीं, कोरोना के सबसे तेजी से फैलने वाले वेरिएंट ओमिक्रॉन के मामले भी बढ़ रहे हैं। रविवार तक ओमिक्रॉन के दस हजार से ज्यादा मामले देश में दर्ज हो चुके हैं। जबकि डेली सकारात्मकता दर अब सत्रह. बाईस है।
विशोधित कर याकृत पित्तकी उत्पत्ति करते हैं । अघरा महासिराओंमें छोड़ दिया जाता है। यह विशोधित रक्त वाहिनियों द्वारा एकत्र होकर वृक्कोंमें भी रक्तशुद्धि इसी क्रमसे होती है । इस प्रकार रक्तके अनुधावनके चार चक्र प्रदर्शित किये जाते हैं । प्रथम कायिक चक्र', जिसमें रक्त हृदय ( नाम निलय ) से निकल सर्वाङ्गको पुष्ट करता हुआ पुनः हृदय ( दक्षिण अलिन्द ) में भाता है । द्वितीय फौप्फुस चक्र जिसमें रक्त हृदय ( दक्षिण निलय ) से निकल फुप्फुसोंमें ना पुनः हृदय ( चाम अलिन्द) में आता है। तृतीय से पूर्वोक्त याकृत चक्र तथा चतुर्थ वृक्की चक्र कायिकचक्रगत रक्त में, धातुपाकचश उत्पन्न भङ्गाराम्ल वायु अधिकांश सोडावाईकार्व ( सर्जक्षार -खानेका सोडा ) के रूपमें होता है। कारण, अङ्गाराम्ल एक अम्ल है और जैसा कि कहा जा चुका है, अम्ल शरीरमें एक अत्यल्प मात्रा में ही रह सकते हैं। अतः प्रकृति इसे सोडाबाईकार्बके रूप में परिणत कर देती है। सोडाबाईकार्य एक क्षार' है । स्लीहा - रक्तोत्पत्तिके विषय में प्राचीनों और नवीनोंका मत पहले देख आये हैं । वहाँ निर्दिष्ट प्लीहा आमाशयके वाम पार्श्व में स्थित होती है। इसके कर्म निम्न हैंः १ - यह रक्तका संग्रहस्थान है, और आपत्कालमें काम आता है । । २~~ रसग्रन्थियोंके समान यह लिम्फोसाइट नामक क्षत्र कणोंको उत्पन्न कर रुधिरमें प्लीहाको शास्त्रकर्म द्वारा निकाल दिया जाय तो कोई क्षति नहीं होती लिये रसग्रन्थियोंकी आकार वृद्धि हो जाती है । रक्तकण उत्पन्न करती है । इन प्राणियों में प्लीहा निकाल दी जानेपर अस्थियोंमें लोहित मज्जाकी प्रमाणवृद्धि हो जाती है । ४ - यह निर्जीव रक्तकणके विघटनका कार्य करती है । विषमज्वर में रक्तकणोंका अतिशय विनाश होनेपर उनके विघटनका अतिभार लोहापर आ पड़ता है । विघटित रक्तकण प्लीहामें सञ्चित हो जाते हैं, जिससे उसकी ( प्लीहाकी ) वृद्धि हो जाती है । इस प्रकार विषमज्वर प्लीहाकी वृद्धि करता है और ठीहा रक्तकणोंका विघटन कर पित्त उत्पन्न करती है, जो स्वय जीर्णज्वरका हेतु है । जीर्णज्वरोंमें इसीलिये सचित पित्तका शोधन और शमन करके प्लीहाको सङ्कुचित करना ( बैठाना ) आवश्यक होता है । ५- प्लीहा प्रोटीनोंके नाइट्रोजनका विश्लेषण कर, विशेषतः मुत्राम्ल' ॰ का निर्माण करती है । ६ -शरीरकी जीवाणुओंसे रक्षा करनेमें यह भाग लेती है । १ - Systemic or greater onculation -सिस्टमिक सक्र्युलेशन या ग्रेटर सर्क्युलेशन । २~~Pulmonary or lesser cuculation-पल्मोनरी सर्क्युलेशन या लेसर सर्क्युलेशन । ३ - →Portal circulation - पोर्टल सर्क्युलेशन । ४ - Renal circul&tion - रीनल सर्क्युलेशन । ५ - Alkali-आलकाली । ७ - आयुर्वेद में यकृत् को भी रक्तका सग्रहस्थान 'सु० शा० ४~-१०' वचन तथा उसका अर्थ । ९-Malarma - मैलेरिया । ६-Spleen स्प्लीन । कहा है। देखिये - इसी अध्याय में वृत ८- Overgiowth-ओवरग्रोथ । १० - Uric acid - यूरिक एसिड ।
विशोधित कर याकृत पित्तकी उत्पत्ति करते हैं । अघरा महासिराओंमें छोड़ दिया जाता है। यह विशोधित रक्त वाहिनियों द्वारा एकत्र होकर वृक्कोंमें भी रक्तशुद्धि इसी क्रमसे होती है । इस प्रकार रक्तके अनुधावनके चार चक्र प्रदर्शित किये जाते हैं । प्रथम कायिक चक्र', जिसमें रक्त हृदय से निकल सर्वाङ्गको पुष्ट करता हुआ पुनः हृदय में भाता है । द्वितीय फौप्फुस चक्र जिसमें रक्त हृदय से निकल फुप्फुसोंमें ना पुनः हृदय में आता है। तृतीय से पूर्वोक्त याकृत चक्र तथा चतुर्थ वृक्की चक्र कायिकचक्रगत रक्त में, धातुपाकचश उत्पन्न भङ्गाराम्ल वायु अधिकांश सोडावाईकार्व के रूपमें होता है। कारण, अङ्गाराम्ल एक अम्ल है और जैसा कि कहा जा चुका है, अम्ल शरीरमें एक अत्यल्प मात्रा में ही रह सकते हैं। अतः प्रकृति इसे सोडाबाईकार्बके रूप में परिणत कर देती है। सोडाबाईकार्य एक क्षार' है । स्लीहा - रक्तोत्पत्तिके विषय में प्राचीनों और नवीनोंका मत पहले देख आये हैं । वहाँ निर्दिष्ट प्लीहा आमाशयके वाम पार्श्व में स्थित होती है। इसके कर्म निम्न हैंः एक - यह रक्तका संग्रहस्थान है, और आपत्कालमें काम आता है । । दो~~ रसग्रन्थियोंके समान यह लिम्फोसाइट नामक क्षत्र कणोंको उत्पन्न कर रुधिरमें प्लीहाको शास्त्रकर्म द्वारा निकाल दिया जाय तो कोई क्षति नहीं होती लिये रसग्रन्थियोंकी आकार वृद्धि हो जाती है । रक्तकण उत्पन्न करती है । इन प्राणियों में प्लीहा निकाल दी जानेपर अस्थियोंमें लोहित मज्जाकी प्रमाणवृद्धि हो जाती है । चार - यह निर्जीव रक्तकणके विघटनका कार्य करती है । विषमज्वर में रक्तकणोंका अतिशय विनाश होनेपर उनके विघटनका अतिभार लोहापर आ पड़ता है । विघटित रक्तकण प्लीहामें सञ्चित हो जाते हैं, जिससे उसकी वृद्धि हो जाती है । इस प्रकार विषमज्वर प्लीहाकी वृद्धि करता है और ठीहा रक्तकणोंका विघटन कर पित्त उत्पन्न करती है, जो स्वय जीर्णज्वरका हेतु है । जीर्णज्वरोंमें इसीलिये सचित पित्तका शोधन और शमन करके प्लीहाको सङ्कुचित करना आवश्यक होता है । पाँच- प्लीहा प्रोटीनोंके नाइट्रोजनका विश्लेषण कर, विशेषतः मुत्राम्ल' ॰ का निर्माण करती है । छः -शरीरकी जीवाणुओंसे रक्षा करनेमें यह भाग लेती है । एक - Systemic or greater onculation -सिस्टमिक सक्र्युलेशन या ग्रेटर सर्क्युलेशन । दो~~Pulmonary or lesser cuculation-पल्मोनरी सर्क्युलेशन या लेसर सर्क्युलेशन । तीन - →Portal circulation - पोर्टल सर्क्युलेशन । चार - Renal circul&tion - रीनल सर्क्युलेशन । पाँच - Alkali-आलकाली । सात - आयुर्वेद में यकृत् को भी रक्तका सग्रहस्थान 'सुशून्य शाशून्य चार~-दस' वचन तथा उसका अर्थ । नौ-Malarma - मैलेरिया । छः-Spleen स्प्लीन । कहा है। देखिये - इसी अध्याय में वृत आठ- Overgiowth-ओवरग्रोथ । दस - Uric acid - यूरिक एसिड ।
नेवल डॉकयार्ड, मुंबई ने अप्रेंटिस के पदों को भरने के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। कुल 933 पदों पर भर्तियां की जाएंगी। ये नियुक्तियां विभिन्न ट्रेडों के लिए होंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन पत्र स्वीकार करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर 2018 है। रिक्त पदों, योग्यता, चयन और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित अधिक जानकारी इस प्रकार है : अप्रेंटिस, कुल पद : 933 (अनारक्षित- 556) एक वर्षीय ट्रेनिंग वाले पदों का विवरण : (रिक्तियों के अनुसार पदों का वर्गीकरण) फिटर, पद : 141 (अनारक्षित-83) मशीनिस्ट, पद : 60 (अनारक्षित-36) वेल्डर (गैस एंड इलेक्ट्रिक), पद : 65 (अनारक्षित-39) शीट मेटल वर्कर, पद : 08 (अनारक्षित-04) टेलर (जी), पद : 13 (अनारक्षित-08) मेकेनिक मशीन टूल्स लिमिटेड, पद : 59 (अनारक्षित-35) मेकेनिक रेफ्रिजरेटर एंड एयर कंडीशनिंग, पद : 39 (अनारक्षित-24) मेकेनिक डीजल, पद : 73 (अनारक्षित-44) पेंटर (जनरल), पद : 34 (अनारक्षित-21) पावर इलेक्ट्रिशियन, पद : 198 (अनारक्षित-117) इंस्ट्रूमेंट मेकेनिक, पद : 24 (अनारक्षित-15) इलेक्ट्रोप्लेटर, पद : 06 (अनारक्षित-04) फाउंड्रीमैन, पद : 07 (अनारक्षित-04) पाइप फिटर, पद : 56 (अनारक्षित-33) शिपराइट (वुड), पद : 63 (अनारक्षित-37) पैटर्न मेकर, पद : 09 (अनारक्षित-05) दो वर्षीय ट्रेनिंग वाले पदों का विवरण : (रिक्तियों के अनुसार पदों का वर्गीकरण) शिपराइट (स्टील), पद : 34 (अनारक्षित-21) रिगर, पद : 41 (अनारक्षित-24) फोर्जर एंड हीट ट्रीटर, पद : 03 (अनारक्षित-02) योग्यता (उपरोक्त सभी पद) : - मान्यता प्राप्त स्कूली शिक्षा बोर्ड से दसवीं की परीक्षा न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना चाहिए। - इसके साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में एक या दो वर्षीय आईटीआई प्रमाण पत्र प्राप्त होना चाहिए। आयु सीमा : उम्मीदवार का जन्म 01 अप्रैल 1999 और 31 मार्च 2006 के बीच हुआ होना चाहिए। स्टाइपेंड : नियमानुसार दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया : योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा/इंटरव्यू/स्किल टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा। - सबसे पहले लिखित परीक्षा होगा। इसमें पास होने वाले उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार कर उन्हें इंटरव्यू/स्किल टेस्ट के लिए आमंत्रित किया जाएगा। आवेदन शुल्क : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। आवेदन प्रक्रिया : - उम्मीदवारों को वेबसाइट ( www. bhartiseva. com) पर लॉगइन करना होगा। होमपेज खुलने पर ऊपर की ओर दिख रहे अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग आप्शन पर क्लिक करें। - क्लिक करते ही एक नया वेबपेज खुल जाएगा। यहां पर इंपोर्टेंट नोटिफिकेशन सेक्शन में ENROLMENT FOR APPRENTICESHIP TRAINING IN DESIGNATED TRADES (IT-23) शीर्षक दिया गया है। - इस शीर्षक के नीचे मौजूद एडवर्टाइजमेंट ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करते ही रिक्तियों से संबंधित विस्तृत विज्ञापन खुल जाएगा। - इस विज्ञापन को अच्छी तरह से पढ़ें और पदों के अनुसार अपनी योग्यता की जांच कर लें। अब आवेदन करने के लिए पुनः वेबपेज पर आएं। - इसके बाद एडवर्टाइजमेंट के नीचे दिए गए क्लिक हियर टू अप्लाई ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। - अब खुलने वाले नए पेज पर न्यू रजिस्ट्रेशन ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करने पर रजिस्ट्रेशन पेज खुल जाएगा। - यहां पर मांगी गई सभी जानकारियों को अच्छी तरह से पढ़कर दर्ज करें और सबसे नीचे दिए गए कंटीन्यू ऑप्शन पर क्लिक करें। - अब आपके द्वारा दर्ज किए गए मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर लॉगइन आईडी व पासवर्ड प्राप्त होगा। - इस आईडी और पासवर्ड की सहायता से लॉगइन करें और आवेदन पत्र खोलें। इसके बाद दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें। महत्वपूर्ण तिथि : अधिक जानकारी यहां :
नेवल डॉकयार्ड, मुंबई ने अप्रेंटिस के पदों को भरने के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। कुल नौ सौ तैंतीस पदों पर भर्तियां की जाएंगी। ये नियुक्तियां विभिन्न ट्रेडों के लिए होंगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन पत्र स्वीकार करने की अंतिम तिथि बीस सितंबर दो हज़ार अट्ठारह है। रिक्त पदों, योग्यता, चयन और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित अधिक जानकारी इस प्रकार है : अप्रेंटिस, कुल पद : नौ सौ तैंतीस एक वर्षीय ट्रेनिंग वाले पदों का विवरण : फिटर, पद : एक सौ इकतालीस मशीनिस्ट, पद : साठ वेल्डर , पद : पैंसठ शीट मेटल वर्कर, पद : आठ टेलर , पद : तेरह मेकेनिक मशीन टूल्स लिमिटेड, पद : उनसठ मेकेनिक रेफ्रिजरेटर एंड एयर कंडीशनिंग, पद : उनतालीस मेकेनिक डीजल, पद : तिहत्तर पेंटर , पद : चौंतीस पावर इलेक्ट्रिशियन, पद : एक सौ अट्ठानवे इंस्ट्रूमेंट मेकेनिक, पद : चौबीस इलेक्ट्रोप्लेटर, पद : छः फाउंड्रीमैन, पद : सात पाइप फिटर, पद : छप्पन शिपराइट , पद : तिरेसठ पैटर्न मेकर, पद : नौ दो वर्षीय ट्रेनिंग वाले पदों का विवरण : शिपराइट , पद : चौंतीस रिगर, पद : इकतालीस फोर्जर एंड हीट ट्रीटर, पद : तीन योग्यता : - मान्यता प्राप्त स्कूली शिक्षा बोर्ड से दसवीं की परीक्षा न्यूनतम पचास फीसदी अंकों के साथ पास होना चाहिए। - इसके साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में एक या दो वर्षीय आईटीआई प्रमाण पत्र प्राप्त होना चाहिए। आयु सीमा : उम्मीदवार का जन्म एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे और इकतीस मार्च दो हज़ार छः के बीच हुआ होना चाहिए। स्टाइपेंड : नियमानुसार दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया : योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा/इंटरव्यू/स्किल टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा। - सबसे पहले लिखित परीक्षा होगा। इसमें पास होने वाले उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार कर उन्हें इंटरव्यू/स्किल टेस्ट के लिए आमंत्रित किया जाएगा। आवेदन शुल्क : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। आवेदन प्रक्रिया : - उम्मीदवारों को वेबसाइट पर लॉगइन करना होगा। होमपेज खुलने पर ऊपर की ओर दिख रहे अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग आप्शन पर क्लिक करें। - क्लिक करते ही एक नया वेबपेज खुल जाएगा। यहां पर इंपोर्टेंट नोटिफिकेशन सेक्शन में ENROLMENT FOR APPRENTICESHIP TRAINING IN DESIGNATED TRADES शीर्षक दिया गया है। - इस शीर्षक के नीचे मौजूद एडवर्टाइजमेंट ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करते ही रिक्तियों से संबंधित विस्तृत विज्ञापन खुल जाएगा। - इस विज्ञापन को अच्छी तरह से पढ़ें और पदों के अनुसार अपनी योग्यता की जांच कर लें। अब आवेदन करने के लिए पुनः वेबपेज पर आएं। - इसके बाद एडवर्टाइजमेंट के नीचे दिए गए क्लिक हियर टू अप्लाई ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। - अब खुलने वाले नए पेज पर न्यू रजिस्ट्रेशन ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करने पर रजिस्ट्रेशन पेज खुल जाएगा। - यहां पर मांगी गई सभी जानकारियों को अच्छी तरह से पढ़कर दर्ज करें और सबसे नीचे दिए गए कंटीन्यू ऑप्शन पर क्लिक करें। - अब आपके द्वारा दर्ज किए गए मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर लॉगइन आईडी व पासवर्ड प्राप्त होगा। - इस आईडी और पासवर्ड की सहायता से लॉगइन करें और आवेदन पत्र खोलें। इसके बाद दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें। महत्वपूर्ण तिथि : अधिक जानकारी यहां :
सफलता का सपना लिए हर दिन एक नया चेहरा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपना भाग्य आजमाने आता है। कुछ को कामयाबी मिल भी जाती है, तो वहीं कुछ अधूरे सपने लिए भटकते रहते हैं तो कुछ वापस लौट जाते हैं। लेकिन इन सबमें कुछ ऐसे चेहरे होते हैं, जो दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर अपनी एक अलग छाप छोड़ जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं इफ्तेखार। इनके चाहने वालों के जहन में आज भी उनकी छवि पुलिस की वर्दी में जिंदा होगी। दरअसल, उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में पुलिस इंस्पेक्टर और कमिश्नर का रोल सबसे अधिक निभाया। पुलिस कमिश्नर की भूमिका संख्या में कुछ ज्यादा है। उनके फैंस जब भी उन्हें याद करते हैं, पुलिस वर्दी पहने पलती-दुबली काठी वाले इफ्तेखार की तस्वीर उनके दिमाग तरोताजा हो जाती है। इफ्तेखार का पूरा नाम सैयदना इफ्तेखार अहमद शरीफ था। उनका जन्म 22 फरवरी 1922 में ब्रिटिश भारत के पंजाब के जालंधर में हुआ था। वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनका जन्म तो जलंधर में हुआ था, लेकिन बचपन उत्तरप्रदेश के कानपुर में गुजरा। वे पेंटिंग और गायिकी के बड़े शौकीन थे। इसलिए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद लखनऊ आर्ट कॉलेज से पेंटिंग में डिप्लोमा किया था। इफ्तेखार को गाने का भी बड़ा शौक था। वे कुंदनलाल सहगल से बड़ा प्रभावित थे। जब वे 20 साल के हुए तो म्यूजिक कंपोजर कमलदास गुप्ता के एक ऑडिशन के लिए कलकत्ता चले गए थे। कमलदास उनसे प्रभावित हो गए और उन्हें एमपी प्रोडक्शन में अभिनय का मौका दे डाला। इफ्तेखार ने 1944 में फिल्म 'तकरार' से अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म आर्ट फिल्म कोलकाता के बैनर तले बनी थी। बता दें कि बंटवारे के समय उनके ज्यादातर रिश्तेदार और दोस्त यहां तक कि माता-पिता भी पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उन्होंने भारत को चुना। हालांकि उन्हें पत्नी और बच्चियों को लेकर कलकत्ता छोड़ने के लिए दवाब बनाया गया। तब वे इनके साथ बॉम्बे चले गए थे। यहां पहुंचकर उन्होंने जी तोड़ संघर्ष किया।
सफलता का सपना लिए हर दिन एक नया चेहरा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपना भाग्य आजमाने आता है। कुछ को कामयाबी मिल भी जाती है, तो वहीं कुछ अधूरे सपने लिए भटकते रहते हैं तो कुछ वापस लौट जाते हैं। लेकिन इन सबमें कुछ ऐसे चेहरे होते हैं, जो दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर अपनी एक अलग छाप छोड़ जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं इफ्तेखार। इनके चाहने वालों के जहन में आज भी उनकी छवि पुलिस की वर्दी में जिंदा होगी। दरअसल, उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में पुलिस इंस्पेक्टर और कमिश्नर का रोल सबसे अधिक निभाया। पुलिस कमिश्नर की भूमिका संख्या में कुछ ज्यादा है। उनके फैंस जब भी उन्हें याद करते हैं, पुलिस वर्दी पहने पलती-दुबली काठी वाले इफ्तेखार की तस्वीर उनके दिमाग तरोताजा हो जाती है। इफ्तेखार का पूरा नाम सैयदना इफ्तेखार अहमद शरीफ था। उनका जन्म बाईस फरवरी एक हज़ार नौ सौ बाईस में ब्रिटिश भारत के पंजाब के जालंधर में हुआ था। वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनका जन्म तो जलंधर में हुआ था, लेकिन बचपन उत्तरप्रदेश के कानपुर में गुजरा। वे पेंटिंग और गायिकी के बड़े शौकीन थे। इसलिए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद लखनऊ आर्ट कॉलेज से पेंटिंग में डिप्लोमा किया था। इफ्तेखार को गाने का भी बड़ा शौक था। वे कुंदनलाल सहगल से बड़ा प्रभावित थे। जब वे बीस साल के हुए तो म्यूजिक कंपोजर कमलदास गुप्ता के एक ऑडिशन के लिए कलकत्ता चले गए थे। कमलदास उनसे प्रभावित हो गए और उन्हें एमपी प्रोडक्शन में अभिनय का मौका दे डाला। इफ्तेखार ने एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में फिल्म 'तकरार' से अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म आर्ट फिल्म कोलकाता के बैनर तले बनी थी। बता दें कि बंटवारे के समय उनके ज्यादातर रिश्तेदार और दोस्त यहां तक कि माता-पिता भी पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उन्होंने भारत को चुना। हालांकि उन्हें पत्नी और बच्चियों को लेकर कलकत्ता छोड़ने के लिए दवाब बनाया गया। तब वे इनके साथ बॉम्बे चले गए थे। यहां पहुंचकर उन्होंने जी तोड़ संघर्ष किया।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 13 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, 13 लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल २३,४५६ बार देखा गया है। पॉलिएस्टर, विशेष रूप से 100% पॉलिएस्टर के कपड़ों को डाई करना बहुत मुश्किल है। यह पेट्रोलियम से बनाया हुआ एक सिंथेटिक फैब्रिक है और उत्पादन प्रक्रिया की वजह से मूल रूप से प्लास्टिक है।[१] X रिसर्च सोर्स इसलिए पॉलिएस्टर हाइड्रोफोबिक है और उसमें आयनिक गुण नहीं होते हैं।[२] X रिसर्च सोर्स किन्तु कुछ चीजें हैं जिनसे पॉलिएस्टर और उसके ब्लेंड्स को डाई कर सकते हैं। विधि 1 का 2: - ध्यान रखें कि बहुत हल्के या बहुत गहरे रंग के कपड़ों को डाई करने के लिए आपको एक और बोतल की आवश्यकता होगी। - पॉलिएस्टर की सिंथेटिक बनावट की वजह से उसके लिए डाईमोर की दूसरी बोतल की ज़रूरत हो सकती है। - अंत में आप जितना गहरा रंग लाना चाहते हैं उसके अनुसार आपको ज्यादा डाई की आवश्यकता होगी। - छोटे कपड़े जैसे स्कार्फ्स और छोटी आस्तीन वाली शर्ट्स को सिंक या छोटे टब में धोएं। - भारी कपड़े जैसे लम्बी आस्तीन वाली शर्ट्स, जैकेट्स और पैन्ट्स के लिए बड़ी बालटी या टब इस्तेमाल करें। 3अगर आप कपड़े को टाई डाई करना चाहते हैं तो उसे टाई करेंः इस प्रकार आप भिन्न पैटर्न्स जैसे रोसेट्स (rosettes), सनबर्स्ट्स (sunbursts), स्वर्ल्स (swirls) आदि बना सकते हैं। शुरू करने के लिए यहाँ पर कुछ उपाय बताये गए हैं : - एक सरल, क्रम्प्ल्ड लुक (crumpled look) के लिए अपने कपड़े को मरोड़कर एक गोला बनायें और उसे कुछ बड़े रबर बैंड्स से टाई करें। - बैंडिड इफ्फेक्ट (banded effect) के लिए अपने कपड़े को घुमाकर रस्सी जैसे बनायें और उसके चारोंओर रबर बैंड्स टाई करें। रबर बैंड्स को एक दूसरे से कई इंच दूर रखें। - एक सनबर्स्ट या स्वर्ल बनाने के लिए अपने कपड़े का बीच का हिस्सा चुटकी में उठायें (जैसे शर्ट या रुमाल) और उसे घुमाएं। कपड़े को घुमाते जाएँ जबतक वह एक सिनमन रोल (cinnamon roll) के आकार का हो जाये। फिर उसे रबर बैंड्स से टाई करें। - पात्र में 11.36 लीटर (3 गैलन) पानी भरने के बाद उसे ढक दें और आँच को हाई रखेंः पानी को करीब करीब उबालें। - एक कुकिंग थर्मामीटर इस्तेमाल करें क्योंकि डाई करने की प्रक्रिया को 180० F (82.3० C) के स्थिर तापमान की ज़रूरत होगी। थर्मामीटर से आप यह पक्का कर सकते हैं कि पानी का इतना तापमान रहे। - अगर आपका सफेद कपड़ा है और आप उसे हल्का, पेस्टल रंगना चाहते हैं तो पहले डाईमोर की आधी बोतल डालें। बाद में और डाई डालना आसान है। - अगर आप अपने कपड़े को एक से ज्यादा रंगों में डाई करने की सोच रहे हैं तो सबसे हलका रंग पहले उँडेलें। आपको दूसरे रंग (रंगों) के लिए अलग डाई का घोल बनाना पड़ेगा। - रंग बहुत हल्का हो तो मिश्रण में थोड़ा और डाई मिलाएं। आपको डाईमोर की एक और बोतल डालनी पड़ सकती है। एक दूसरे सफेद सूती कपड़े के टुकड़े पर रंग जाँचें। - ज़्यादा गहरा रंग हो तो और पानी मिलाएं। फिर से एक दूसरे सफेद सूती कपड़े के टुकड़े पर रंग जाँचें। - दूसरी बोतल को भी डालने से पहले अच्छी तरह से हिलाएं। 7कपड़े को डाई के घोल में डुबोएंः[८] X रिसर्च सोर्स डाई के घोल में कपड़े को धीरे धीरे 30 मिनट के लिए लगातार चलायें। पॉलिएस्टर के कपड़े पर ठीक से रंग चढ़ने में कम से कम इतना समय लगेगा। कपड़े को पात्र में उठाने और खिसकाने के लिए चिमटा इस्तेमाल करें। यह करते समय रबर ग्लव्स पहनें ताकि आप अपनी त्वचा को न डाई करें। - अगर आप अपने कपड़े को पूरी तरह से डाई करना चाहते हैं तो उसे डाई के घोल में पूरा डुबोएं। - अगर आप कपड़े का सिर्फ एक हिस्सा डाई करना चाहते हैं तो केवल उस हिस्से को डुबोएं और बाकी कपड़े को कंटेनर के किनारे पर रखें। - यदि 30 मिनट से पहले आपके कपड़े पर, आपकी पसंद का रंग चढ़ जाये तब भी कपड़े को डाई के घोल में 30 मिनट रखें। कपड़े पर रंग को सेट होने के लिए पर्याप्त समय नहीं देंगे तो वह धुलाई में निकल जायेगा और जितना आप चाहते हैं उससे हल्का हो जायेगा। - अगर आप कपड़े में और रंग लगाना चाहते हैं तो उसे रिंस करने के बाद दूसरे डाई के घोल में डाल सकते हैं। हर डाई के घोल में डालने के बाद जरुर से रिंस करें। 10कपड़े को फिर से साबुन के, गर्म पानी में धोएंः[१२] X रिसर्च सोर्स इससे बचा हुआ ज़्यादा डाई निकल जायेगा। 11ज़्यादा नमी हटाने के लिए उसे एक पुराने तौलिये में लपेटेंः जमीन पर एक पुराना तौलिया बिछाएं और कपड़े के नीचे का हिस्सा तौलिये के नीचे के हिस्से के साथ मिलाकर रखें। कपड़े और तौलिये को साथ में एक ट्यूब जैसे लपेटें। तौलिये के ट्यूब को हल्के से दबाएं और निचोड़ें। जितना ज़्यादा हो सके उतनी नमी हटायें। - अगर आपका कपड़ा बहुत बड़ा और भारी है तो आपको इस तरह कई बार दूसरे तौलियों के साथ करना पड़ेगा। भारी कपड़े, हल्के कपड़ों से ज्यादा पानी सोखते हैं। 12कपड़े को सूखने के लिए टांग देंः हैंगर को छज्जे जैसी किसी जगह पर टांगें जहाँ खूब हवा चलती हो। नहीं तो उसे बाथरूम में टांगकर पंखा चलायें। कपड़े के नीचे कुछ अखबार या पुराने तौलिये जरुर रखें ताकि पानी उनके ऊपर टपके। संभव है कि कपड़े में थोड़ा डाई रह गया हो। - शर्ट्स और जैकेट्स के लिए सामान्य हैंगर का उपयोग करें। - पैन्ट्स, शर्ट्स, स्कार्फ्स और रुमालों के लिए पैन्ट्स का हैंगर या क्लिप्स के साथ हैंगर इस्तेमाल करें। सूखते समय कपड़े को किसी चीज पर ड्रेप न करें। विधि 2 का 2: 1कपड़े को साफ करके डाई करने के लिए तैयार करेंः[१३] X रिसर्च सोर्स साफ करना ज़रूरी है ताकि कपड़ा डिसपर्स डाइज़ को सोख सके। यह करने के दो तरीके हैं। - कपड़े को वॉशिंग मशीन में सबसे गर्म सेटिंग के एक साइकिल में 1/2 छोटा चम्मच सोडा ऐश (soda ash) और 1/2 छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल (Synthrapol) के साथ धोएं। सिन्थ्रापोल कपड़े को साफ करने और डाई के लिए तैयार करने में सहायता करता है। - कपड़े को 1/2 छोटा चम्मच सोडा ऐश और 1/2 छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल के साथ स्टोवटॉप पर हाथ से धोएं। 2अगर आप टाई डाई करना चाहते हैं तो कपड़े को रबर बैंड्स से टाई करेंः इस प्रकार आप भिन्न पैटर्न्स जैसे रोसेट्स (rosettes), सनबर्स्ट्स (sunbursts), स्वर्ल्स (swirls) आदि बना सकते हैं। शुरू करने के लिए यहाँ पर कुछ उपाय बताये गए हैं : - एक सरल, रिप्पल्ड लुक (rippled look) के लिए अपने कपड़े को मरोड़कर एक गोला बनायें और उसे कुछ बड़े रबर बैंड्स से टाई करें। - बैंडिड इफ्फेक्ट (banded effect) के लिए अपने कपड़े को घुमाकर रस्सी जैसे बनायें और उसके चारोंओर रबर बैंड्स टाई करें। रबर बैंड्स को एक दूसरे से कई इंच दूर रखें। - एक सनबर्स्ट या स्वर्ल बनाने के लिए अपने कपड़े का बीच का हिस्सा चुटकी में उठायें (जैसे शर्ट या रुमाल) और उसे घुमाएं। कपड़े को घुमाते जाएँ जबतक वह एक सिनमन रोल (cinnamon roll) के आकार का हो जाये। उस "बन" को ठहराने के लिए उसके चारोंओर रबर बैंड्स लपेटें। 41 प्याला उबलते हुए पानी में 2 बड़े चम्मच डाई कैरीअर मिलाएंः गहरा रंग लाने के लिए डाई कैरीअर ज़रूरी है, पर हल्के और मध्यम रंग के लिए आप इच्छानुसार कर सकते हैं। [१५] X रिसर्च सोर्स आप बाद में इस पानी में मिलाये हुए डाई कैरीअर को डाई के घोल में मिलायेंगे। 5एक बड़े पात्र में 7.57 लीटर (2 गैलन) पानी भरें और उसे स्टोवटॉप पर 120० F (48.89० C) तक गर्म करेंः [१६] X रिसर्च सोर्स पानी सही तापमान तक पहूँच जाये तब नीचे दी गयी सामग्री इसी क्रम के अनुसार डालें। हर एक चीज़ डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह से चलायें। - 1 छोटा चम्मच सिट्रिक एसिड या 11 छोटे चम्मच डिस्टिल्ड वाइट विनेगर। 6(पहले से) धुला हुआ कपड़ा डाई के घोल में डालेंः [१७] X रिसर्च सोर्स कपड़े को डालने से पहले पूरे मिश्रण को एक बार फिर चलायें। 7डाई के घोल को अच्छी तरह उबालेंः उबलते समय मिश्रण को लगातार चलाते रहें। [१८] X रिसर्च सोर्स यह काम संभालकर करें और कपड़े में ज्यादा चुनटें न पड़ने दें। नहीं तो वह बराबर से डाई नहीं होगा। 8जब डाई का घोल उबलने लगे तो उसे 30-45 मिनट सिम्मर करने दें और बीच बीच में चलाते रहेंः आप उसे जितनी देर रहने देंगे उतना गहरा रंग होगा। आएगा और बीच बीच में चलाते रहें। धीरे से चलायें ताकि कपड़े में चुनट न पड़े और सब जगह बराबर से रंग चढ़ सके। - यह पक्का कर लें कि 180० F (82.3० C) तापमान हो नहीं तो कपड़े पर एक अजीब गंध और अवशेष (residue) रह जायेगा। - कपड़े को पानी में पूरी तरह से डुबोकर रिंस करें। 10डाई के घोल को निकाल दें और पात्र को फिर से 160० F (71.2० C) गर्म पानी से भरेंः [२०] X रिसर्च सोर्स सूखने से पहले कपड़े को एक बार फिर से धोने के लिए आप एक मिश्रण बनायेंगे। - पानी में 1/2 छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल मिलाएं। - रंगे हुए कपड़े को रिंस करने के पात्र से निकालकर इस पात्र में डालें। बीच बीच में 5-10 मिनट के लिए चलायें। 11कपड़े को गर्म पानी में अच्छी तरह रिंस करेंः [२१] X रिसर्च सोर्स जब साफ पानी निकले, कपड़े को एक तौलिये में लपेटें या निचोड़कर ज़्यादा नमी हटायें। - रिंस करने और निचोड़ने के बाद कपड़े को सूँघ कर देखें। यदि उसमें डाई कैरीअर की गंध आये तो उसे हटाने के लिए 7 और 8 स्टेप्स को दोहराएँ। - कपड़े में गंध न हो तो उसे सूखने के लिए टांग दें। - अगर आपने टाई डाई करने के लिए कपड़े पर रबर बैंड्स लपेटें हैं तो रिंस करने से पहले रबर बैंड्स को काटकर हटा दें। - डाई करते समय सुरक्षित रहने के लिए आप रबर ग्लव्स (rubber gloves) के अतिरिक्त पुराने कपड़े, एक एप्रन (apron), और गॉगल्स (goggles) पहन सकते हैं। विधि 2 के लिए एक फेस मास्क (face mask) पहनना अच्छा है ताकि आप डिसपर्स डाई को साँस के साथ अंदर न लें और हानि से बचे रहें। - जहाँ पर आप कपड़ों को डाई करेंगे वहाँ की खिड़कियाँ खोल दें। इससे डाई में से निकलने वाली धूम कमरे से बाहर निकल जाएगी। - कपड़ों को स्टेनलेस स्टील (stainless steel) या एनैमल (enamel) के पात्र में ही डाई करें। अन्य पदार्थों के बने पात्रों में दाग पड़ जायेगा और वे खराब हो जायेंगे। चिमटा और चलाने के बर्तन भी स्टेनलेस स्टील के होने चाहिए। - जिन कपड़ों पर "ड्राई क्लीन ओनली" (dry clean only) अंकित हो उनको डाई करनी की कोशिश न करें। वे बेकार हो जायेंगे। - कपड़ों को डाई करने के लिए जो पात्र इस्तेमाल करते हैं उन्हें खाना पकाने के लिए कभी न इस्तेमाल करें। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो २३,४५६ बार पढ़ा गया है।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, तेरह लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को पूरा करने में और इसकी गुणवत्ता को सुधारने में समय समय पर, तेरह लोगों ने और कुछ गुमनाम लोगों ने कार्य किया। यह आर्टिकल तेईस,चार सौ छप्पन बार देखा गया है। पॉलिएस्टर, विशेष रूप से एक सौ% पॉलिएस्टर के कपड़ों को डाई करना बहुत मुश्किल है। यह पेट्रोलियम से बनाया हुआ एक सिंथेटिक फैब्रिक है और उत्पादन प्रक्रिया की वजह से मूल रूप से प्लास्टिक है।[एक] X रिसर्च सोर्स इसलिए पॉलिएस्टर हाइड्रोफोबिक है और उसमें आयनिक गुण नहीं होते हैं।[दो] X रिसर्च सोर्स किन्तु कुछ चीजें हैं जिनसे पॉलिएस्टर और उसके ब्लेंड्स को डाई कर सकते हैं। विधि एक का दो: - ध्यान रखें कि बहुत हल्के या बहुत गहरे रंग के कपड़ों को डाई करने के लिए आपको एक और बोतल की आवश्यकता होगी। - पॉलिएस्टर की सिंथेटिक बनावट की वजह से उसके लिए डाईमोर की दूसरी बोतल की ज़रूरत हो सकती है। - अंत में आप जितना गहरा रंग लाना चाहते हैं उसके अनुसार आपको ज्यादा डाई की आवश्यकता होगी। - छोटे कपड़े जैसे स्कार्फ्स और छोटी आस्तीन वाली शर्ट्स को सिंक या छोटे टब में धोएं। - भारी कपड़े जैसे लम्बी आस्तीन वाली शर्ट्स, जैकेट्स और पैन्ट्स के लिए बड़ी बालटी या टब इस्तेमाल करें। तीनअगर आप कपड़े को टाई डाई करना चाहते हैं तो उसे टाई करेंः इस प्रकार आप भिन्न पैटर्न्स जैसे रोसेट्स , सनबर्स्ट्स , स्वर्ल्स आदि बना सकते हैं। शुरू करने के लिए यहाँ पर कुछ उपाय बताये गए हैं : - एक सरल, क्रम्प्ल्ड लुक के लिए अपने कपड़े को मरोड़कर एक गोला बनायें और उसे कुछ बड़े रबर बैंड्स से टाई करें। - बैंडिड इफ्फेक्ट के लिए अपने कपड़े को घुमाकर रस्सी जैसे बनायें और उसके चारोंओर रबर बैंड्स टाई करें। रबर बैंड्स को एक दूसरे से कई इंच दूर रखें। - एक सनबर्स्ट या स्वर्ल बनाने के लिए अपने कपड़े का बीच का हिस्सा चुटकी में उठायें और उसे घुमाएं। कपड़े को घुमाते जाएँ जबतक वह एक सिनमन रोल के आकार का हो जाये। फिर उसे रबर बैंड्स से टाई करें। - पात्र में ग्यारह दशमलव छत्तीस लीटरटर पानी भरने के बाद उसे ढक दें और आँच को हाई रखेंः पानी को करीब करीब उबालें। - एक कुकिंग थर्मामीटर इस्तेमाल करें क्योंकि डाई करने की प्रक्रिया को एक हज़ार आठ सौ F के स्थिर तापमान की ज़रूरत होगी। थर्मामीटर से आप यह पक्का कर सकते हैं कि पानी का इतना तापमान रहे। - अगर आपका सफेद कपड़ा है और आप उसे हल्का, पेस्टल रंगना चाहते हैं तो पहले डाईमोर की आधी बोतल डालें। बाद में और डाई डालना आसान है। - अगर आप अपने कपड़े को एक से ज्यादा रंगों में डाई करने की सोच रहे हैं तो सबसे हलका रंग पहले उँडेलें। आपको दूसरे रंग के लिए अलग डाई का घोल बनाना पड़ेगा। - रंग बहुत हल्का हो तो मिश्रण में थोड़ा और डाई मिलाएं। आपको डाईमोर की एक और बोतल डालनी पड़ सकती है। एक दूसरे सफेद सूती कपड़े के टुकड़े पर रंग जाँचें। - ज़्यादा गहरा रंग हो तो और पानी मिलाएं। फिर से एक दूसरे सफेद सूती कपड़े के टुकड़े पर रंग जाँचें। - दूसरी बोतल को भी डालने से पहले अच्छी तरह से हिलाएं। सातकपड़े को डाई के घोल में डुबोएंः[आठ] X रिसर्च सोर्स डाई के घोल में कपड़े को धीरे धीरे तीस मिनट के लिए लगातार चलायें। पॉलिएस्टर के कपड़े पर ठीक से रंग चढ़ने में कम से कम इतना समय लगेगा। कपड़े को पात्र में उठाने और खिसकाने के लिए चिमटा इस्तेमाल करें। यह करते समय रबर ग्लव्स पहनें ताकि आप अपनी त्वचा को न डाई करें। - अगर आप अपने कपड़े को पूरी तरह से डाई करना चाहते हैं तो उसे डाई के घोल में पूरा डुबोएं। - अगर आप कपड़े का सिर्फ एक हिस्सा डाई करना चाहते हैं तो केवल उस हिस्से को डुबोएं और बाकी कपड़े को कंटेनर के किनारे पर रखें। - यदि तीस मिनट से पहले आपके कपड़े पर, आपकी पसंद का रंग चढ़ जाये तब भी कपड़े को डाई के घोल में तीस मिनट रखें। कपड़े पर रंग को सेट होने के लिए पर्याप्त समय नहीं देंगे तो वह धुलाई में निकल जायेगा और जितना आप चाहते हैं उससे हल्का हो जायेगा। - अगर आप कपड़े में और रंग लगाना चाहते हैं तो उसे रिंस करने के बाद दूसरे डाई के घोल में डाल सकते हैं। हर डाई के घोल में डालने के बाद जरुर से रिंस करें। दसकपड़े को फिर से साबुन के, गर्म पानी में धोएंः[बारह] X रिसर्च सोर्स इससे बचा हुआ ज़्यादा डाई निकल जायेगा। ग्यारहज़्यादा नमी हटाने के लिए उसे एक पुराने तौलिये में लपेटेंः जमीन पर एक पुराना तौलिया बिछाएं और कपड़े के नीचे का हिस्सा तौलिये के नीचे के हिस्से के साथ मिलाकर रखें। कपड़े और तौलिये को साथ में एक ट्यूब जैसे लपेटें। तौलिये के ट्यूब को हल्के से दबाएं और निचोड़ें। जितना ज़्यादा हो सके उतनी नमी हटायें। - अगर आपका कपड़ा बहुत बड़ा और भारी है तो आपको इस तरह कई बार दूसरे तौलियों के साथ करना पड़ेगा। भारी कपड़े, हल्के कपड़ों से ज्यादा पानी सोखते हैं। बारहकपड़े को सूखने के लिए टांग देंः हैंगर को छज्जे जैसी किसी जगह पर टांगें जहाँ खूब हवा चलती हो। नहीं तो उसे बाथरूम में टांगकर पंखा चलायें। कपड़े के नीचे कुछ अखबार या पुराने तौलिये जरुर रखें ताकि पानी उनके ऊपर टपके। संभव है कि कपड़े में थोड़ा डाई रह गया हो। - शर्ट्स और जैकेट्स के लिए सामान्य हैंगर का उपयोग करें। - पैन्ट्स, शर्ट्स, स्कार्फ्स और रुमालों के लिए पैन्ट्स का हैंगर या क्लिप्स के साथ हैंगर इस्तेमाल करें। सूखते समय कपड़े को किसी चीज पर ड्रेप न करें। विधि दो का दो: एककपड़े को साफ करके डाई करने के लिए तैयार करेंः[तेरह] X रिसर्च सोर्स साफ करना ज़रूरी है ताकि कपड़ा डिसपर्स डाइज़ को सोख सके। यह करने के दो तरीके हैं। - कपड़े को वॉशिंग मशीन में सबसे गर्म सेटिंग के एक साइकिल में एक/दो छोटा चम्मच सोडा ऐश और एक/दो छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल के साथ धोएं। सिन्थ्रापोल कपड़े को साफ करने और डाई के लिए तैयार करने में सहायता करता है। - कपड़े को एक/दो छोटा चम्मच सोडा ऐश और एक/दो छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल के साथ स्टोवटॉप पर हाथ से धोएं। दोअगर आप टाई डाई करना चाहते हैं तो कपड़े को रबर बैंड्स से टाई करेंः इस प्रकार आप भिन्न पैटर्न्स जैसे रोसेट्स , सनबर्स्ट्स , स्वर्ल्स आदि बना सकते हैं। शुरू करने के लिए यहाँ पर कुछ उपाय बताये गए हैं : - एक सरल, रिप्पल्ड लुक के लिए अपने कपड़े को मरोड़कर एक गोला बनायें और उसे कुछ बड़े रबर बैंड्स से टाई करें। - बैंडिड इफ्फेक्ट के लिए अपने कपड़े को घुमाकर रस्सी जैसे बनायें और उसके चारोंओर रबर बैंड्स टाई करें। रबर बैंड्स को एक दूसरे से कई इंच दूर रखें। - एक सनबर्स्ट या स्वर्ल बनाने के लिए अपने कपड़े का बीच का हिस्सा चुटकी में उठायें और उसे घुमाएं। कपड़े को घुमाते जाएँ जबतक वह एक सिनमन रोल के आकार का हो जाये। उस "बन" को ठहराने के लिए उसके चारोंओर रबर बैंड्स लपेटें। इकतालीस प्याला उबलते हुए पानी में दो बड़े चम्मच डाई कैरीअर मिलाएंः गहरा रंग लाने के लिए डाई कैरीअर ज़रूरी है, पर हल्के और मध्यम रंग के लिए आप इच्छानुसार कर सकते हैं। [पंद्रह] X रिसर्च सोर्स आप बाद में इस पानी में मिलाये हुए डाई कैरीअर को डाई के घोल में मिलायेंगे। पाँचएक बड़े पात्र में सात दशमलव सत्तावन लीटरटर पानी भरें और उसे स्टोवटॉप पर एक हज़ार दो सौ F तक गर्म करेंः [सोलह] X रिसर्च सोर्स पानी सही तापमान तक पहूँच जाये तब नीचे दी गयी सामग्री इसी क्रम के अनुसार डालें। हर एक चीज़ डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह से चलायें। - एक छोटा चम्मच सिट्रिक एसिड या ग्यारह छोटे चम्मच डिस्टिल्ड वाइट विनेगर। छः धुला हुआ कपड़ा डाई के घोल में डालेंः [सत्रह] X रिसर्च सोर्स कपड़े को डालने से पहले पूरे मिश्रण को एक बार फिर चलायें। सातडाई के घोल को अच्छी तरह उबालेंः उबलते समय मिश्रण को लगातार चलाते रहें। [अट्ठारह] X रिसर्च सोर्स यह काम संभालकर करें और कपड़े में ज्यादा चुनटें न पड़ने दें। नहीं तो वह बराबर से डाई नहीं होगा। आठजब डाई का घोल उबलने लगे तो उसे तीस-पैंतालीस मिनट सिम्मर करने दें और बीच बीच में चलाते रहेंः आप उसे जितनी देर रहने देंगे उतना गहरा रंग होगा। आएगा और बीच बीच में चलाते रहें। धीरे से चलायें ताकि कपड़े में चुनट न पड़े और सब जगह बराबर से रंग चढ़ सके। - यह पक्का कर लें कि एक हज़ार आठ सौ F तापमान हो नहीं तो कपड़े पर एक अजीब गंध और अवशेष रह जायेगा। - कपड़े को पानी में पूरी तरह से डुबोकर रिंस करें। दसडाई के घोल को निकाल दें और पात्र को फिर से एक हज़ार छः सौ F गर्म पानी से भरेंः [बीस] X रिसर्च सोर्स सूखने से पहले कपड़े को एक बार फिर से धोने के लिए आप एक मिश्रण बनायेंगे। - पानी में एक/दो छोटा चम्मच सिन्थ्रापोल मिलाएं। - रंगे हुए कपड़े को रिंस करने के पात्र से निकालकर इस पात्र में डालें। बीच बीच में पाँच-दस मिनट के लिए चलायें। ग्यारहकपड़े को गर्म पानी में अच्छी तरह रिंस करेंः [इक्कीस] X रिसर्च सोर्स जब साफ पानी निकले, कपड़े को एक तौलिये में लपेटें या निचोड़कर ज़्यादा नमी हटायें। - रिंस करने और निचोड़ने के बाद कपड़े को सूँघ कर देखें। यदि उसमें डाई कैरीअर की गंध आये तो उसे हटाने के लिए सात और आठ स्टेप्स को दोहराएँ। - कपड़े में गंध न हो तो उसे सूखने के लिए टांग दें। - अगर आपने टाई डाई करने के लिए कपड़े पर रबर बैंड्स लपेटें हैं तो रिंस करने से पहले रबर बैंड्स को काटकर हटा दें। - डाई करते समय सुरक्षित रहने के लिए आप रबर ग्लव्स के अतिरिक्त पुराने कपड़े, एक एप्रन , और गॉगल्स पहन सकते हैं। विधि दो के लिए एक फेस मास्क पहनना अच्छा है ताकि आप डिसपर्स डाई को साँस के साथ अंदर न लें और हानि से बचे रहें। - जहाँ पर आप कपड़ों को डाई करेंगे वहाँ की खिड़कियाँ खोल दें। इससे डाई में से निकलने वाली धूम कमरे से बाहर निकल जाएगी। - कपड़ों को स्टेनलेस स्टील या एनैमल के पात्र में ही डाई करें। अन्य पदार्थों के बने पात्रों में दाग पड़ जायेगा और वे खराब हो जायेंगे। चिमटा और चलाने के बर्तन भी स्टेनलेस स्टील के होने चाहिए। - जिन कपड़ों पर "ड्राई क्लीन ओनली" अंकित हो उनको डाई करनी की कोशिश न करें। वे बेकार हो जायेंगे। - कपड़ों को डाई करने के लिए जो पात्र इस्तेमाल करते हैं उन्हें खाना पकाने के लिए कभी न इस्तेमाल करें। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो तेईस,चार सौ छप्पन बार पढ़ा गया है।
अनूप जलोटा की गर्लफ्रेंड जसलीन मथारू के साथ रिलेश्नशिप में होने की बात को गायक सुखविंदर सिंह ने पूरी तरह से झूठा करार दिया है। यहां तक की वह खुद इन सब बातों को सुनने के बाद काफी हैरान है। अपनी बात में उन्होंने जसलीन मथारू को अपना काफी अच्छा दोस्त बताया है। साथ ही इन सब बातों को मानने से इनकार कर दिया है। इस सभी बातों पर जवाब देते सुखविंदर सिंह ने कहा हम पिछले छह साल से एक दूसरे के अच्छे दोस्त रहे हैं। जसलीन मुझे बबलू बुलाती है। वह मेरे शो के लिए मेरे साथ जाया करती है और उसका परिवार भी मेरे करीब है। असल में, बिग बॉस जाने से एक दिन पहले जसलीन की माँ, पिता और दोस्त मेरे घर आए थे। उस समय हमने केक काट था और काफी अच्छा समय बिताया था। जसलीन मथारू को सुखविंदर सिंह के साथ कुछ तस्वीरों में देखाया गया है। असल में, वह संगीत समारोह और संगीत कार्यक्रमों में भी उनके साथ मौजूद रही है। दोनों की एक साथ तस्वीर भी जसलीन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर मौजूद है। वैसे देखा जाए इससे यह साफ होता है कि बिग बॉस ही नहीं जसलीन को लेकर घर के बाहर भी अजीब बवाल मचा हुआ है जहां सुखविंदर ने उन्हें डेट करने से इनकार करते हुए अपनी बात कहीं तो वहीं अनुप ने जसलीन को दृढ़ विश्वास से बताया कि वह उनके बारे में सब जानते हैं। फिलहाल बिग बॉस के घर में अब तक कई सदस्यों के जीवन से जुड़े राज खुल चुकें हैं।
अनूप जलोटा की गर्लफ्रेंड जसलीन मथारू के साथ रिलेश्नशिप में होने की बात को गायक सुखविंदर सिंह ने पूरी तरह से झूठा करार दिया है। यहां तक की वह खुद इन सब बातों को सुनने के बाद काफी हैरान है। अपनी बात में उन्होंने जसलीन मथारू को अपना काफी अच्छा दोस्त बताया है। साथ ही इन सब बातों को मानने से इनकार कर दिया है। इस सभी बातों पर जवाब देते सुखविंदर सिंह ने कहा हम पिछले छह साल से एक दूसरे के अच्छे दोस्त रहे हैं। जसलीन मुझे बबलू बुलाती है। वह मेरे शो के लिए मेरे साथ जाया करती है और उसका परिवार भी मेरे करीब है। असल में, बिग बॉस जाने से एक दिन पहले जसलीन की माँ, पिता और दोस्त मेरे घर आए थे। उस समय हमने केक काट था और काफी अच्छा समय बिताया था। जसलीन मथारू को सुखविंदर सिंह के साथ कुछ तस्वीरों में देखाया गया है। असल में, वह संगीत समारोह और संगीत कार्यक्रमों में भी उनके साथ मौजूद रही है। दोनों की एक साथ तस्वीर भी जसलीन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर मौजूद है। वैसे देखा जाए इससे यह साफ होता है कि बिग बॉस ही नहीं जसलीन को लेकर घर के बाहर भी अजीब बवाल मचा हुआ है जहां सुखविंदर ने उन्हें डेट करने से इनकार करते हुए अपनी बात कहीं तो वहीं अनुप ने जसलीन को दृढ़ विश्वास से बताया कि वह उनके बारे में सब जानते हैं। फिलहाल बिग बॉस के घर में अब तक कई सदस्यों के जीवन से जुड़े राज खुल चुकें हैं।
शिमला,(एजेंसी/वार्ता): हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्यभर की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात करवाने का निर्णय लिया है। श्री सुक्खू ने कहा कि इस बात पर गंभीरता से विचार करने की सख्त जरूरत है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर विभिन्न सरकारी विभागों की सेवाओं को कैसे तेज किया जा सकता है? इससे बड़े पैमाने पर लोगों को भी लाभ होगा। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। श्री सुक्खू ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रसार के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि प्रत्याशित परिणाम भी सुनिश्चित होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े पैमाने पर उन्नत प्रौद्योगिकी के युग में प्रवेश कर चुकी है। यह समय की मांग है कि सरकार सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास और दक्षता के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाए। राज्य सरकार भविष्य में नयी तकनीक जोड़कर राज्य के लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ें :- सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है बाजरा, जानें इसके स्वास्थ्य लाभ!
शिमला,: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्यभर की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात करवाने का निर्णय लिया है। श्री सुक्खू ने कहा कि इस बात पर गंभीरता से विचार करने की सख्त जरूरत है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर विभिन्न सरकारी विभागों की सेवाओं को कैसे तेज किया जा सकता है? इससे बड़े पैमाने पर लोगों को भी लाभ होगा। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। श्री सुक्खू ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रसार के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि प्रत्याशित परिणाम भी सुनिश्चित होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े पैमाने पर उन्नत प्रौद्योगिकी के युग में प्रवेश कर चुकी है। यह समय की मांग है कि सरकार सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास और दक्षता के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाए। राज्य सरकार भविष्य में नयी तकनीक जोड़कर राज्य के लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। - यह भी पढ़ें :- सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है बाजरा, जानें इसके स्वास्थ्य लाभ!
"इहै तो गलत करत रहे। अमूल का तो कभी न लेना चाहिये। वह तो खूब घोल कर दूध में से ताकत खींच लेता है। बचा दूध जो देता है, उसमें कौन सेहत बनेगी?" - मंगत जी ने वह ज्ञान मुझे दिया जो अमूमन गांवदेहात में चल जाता है। फुलबारी में उन्हें अपने लिये लॉज तलाशनी पड़ी। "पांच सौ रुपये में रात गुजारने का कमरा मिला भईया। थाली का रेट पूछा तो माथा घूम गया। तीन सौ रुपये की थाली। मैने तो अलग अलग आईटम ले कर डेढ़ सौ में रात का भोजन किया।
"इहै तो गलत करत रहे। अमूल का तो कभी न लेना चाहिये। वह तो खूब घोल कर दूध में से ताकत खींच लेता है। बचा दूध जो देता है, उसमें कौन सेहत बनेगी?" - मंगत जी ने वह ज्ञान मुझे दिया जो अमूमन गांवदेहात में चल जाता है। फुलबारी में उन्हें अपने लिये लॉज तलाशनी पड़ी। "पांच सौ रुपये में रात गुजारने का कमरा मिला भईया। थाली का रेट पूछा तो माथा घूम गया। तीन सौ रुपये की थाली। मैने तो अलग अलग आईटम ले कर डेढ़ सौ में रात का भोजन किया।
- #India Vs AustraliaIND vs Aus: भारत के लिए बोझ बना यह क्रिकेटर, फ्लॉप प्रदर्शन से सभी को किया निराश, टीम से छुट्टी तय! - #India Vs Australiaटेस्ट कप्तानीः रोहित को एक और मौका, 40 दिन बाद क्या धोनी की तरह ले पाएंगे विदाई? ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में खराब फॉर्म में चल रहे भारत के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल को टीम से बाहर किए जाने की मांग पूर्व कोच रवि शास्त्री ने उठाई है। रवि शास्त्री का कहना है कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी दो टेस्ट मैचों में केएल राहुल की जगह शुभमन गिल को खिलाया जाना चाहिए। आपको बता दें कि टीम मैनेजमेंट ने शुरुआती दो टेस्ट मैचों में अनुभवी केएल राहुल को मौका दिया था, जो लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। ऐसे में शुभमन गिल की मैनेजमेंट ने अनदेखी की। गिल ने इस सीरीज से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ व्हाइट बॉल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था। गिल को मौका दिए जाने पर क्या बोले रवि शास्त्री? केएल राहुल के खराब फॉर्म को देखते हुए अब यह माना जा रहा है कि शुभमन गिल आखिरी दो टेस्ट में जरूर खेलेंगे। गिल को मौका दिए जाने को लेकर रवि शास्त्री ने कहा है कि इस युवा खिलाड़ी को तीसरे टेस्ट के लिए टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में वापस बुलाया जाना चाहिए, इससे टीम का संतुलन अच्छा होगा। भारत का लक्ष्य जून में होने वाले WTC फाइनल में जगह बनाना है और इसके लिए ऑस्ट्रेलिया का क्लीन स्विप करना होगा। 'फॉर्म के आधार पर गिल को मिलना चाहिए मौका' रवि शास्त्री ने कहा है कि गिल इस वक्त शानदार फॉर्म में हैं, जिस तरह से उसने अभी तक बल्लेबाजी की है हर कोई यह सोच रहा होगा कि आखिरी उसे बाहर क्यों बिठाया हुआ है। रवि शास्त्री ने कहा है कि गिल का समय बहुत अच्छा चल रहा है, वो स्कोर करे या ना करे लेकिन फॉर्म और योग्यता के आधार पर वो एक मौके के हकदार हैं। रवि शास्त्री ने कहा कि जब आपके पास गिल जैसा खिलाड़ी होता है तो आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होना चाहिए। आपको बता दें कि शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले महीने वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 350 रन बनाए थे, जिसमें 208 रनों की उनकी बेहतरीन पारी भी शामिल है। उससे पहले गिल ने बांग्लादेश के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा था। 2023 के पहले दो महीने में ही गिल ने चार इंटरनेशनल शतक जड़कर टीम में अपनी जगह पक्की करने की दावेदारी मजबूत कर ली थी।
- #India Vs AustraliaIND vs Aus: भारत के लिए बोझ बना यह क्रिकेटर, फ्लॉप प्रदर्शन से सभी को किया निराश, टीम से छुट्टी तय! - #India Vs Australiaटेस्ट कप्तानीः रोहित को एक और मौका, चालीस दिन बाद क्या धोनी की तरह ले पाएंगे विदाई? ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में खराब फॉर्म में चल रहे भारत के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल को टीम से बाहर किए जाने की मांग पूर्व कोच रवि शास्त्री ने उठाई है। रवि शास्त्री का कहना है कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी दो टेस्ट मैचों में केएल राहुल की जगह शुभमन गिल को खिलाया जाना चाहिए। आपको बता दें कि टीम मैनेजमेंट ने शुरुआती दो टेस्ट मैचों में अनुभवी केएल राहुल को मौका दिया था, जो लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। ऐसे में शुभमन गिल की मैनेजमेंट ने अनदेखी की। गिल ने इस सीरीज से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ व्हाइट बॉल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था। गिल को मौका दिए जाने पर क्या बोले रवि शास्त्री? केएल राहुल के खराब फॉर्म को देखते हुए अब यह माना जा रहा है कि शुभमन गिल आखिरी दो टेस्ट में जरूर खेलेंगे। गिल को मौका दिए जाने को लेकर रवि शास्त्री ने कहा है कि इस युवा खिलाड़ी को तीसरे टेस्ट के लिए टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में वापस बुलाया जाना चाहिए, इससे टीम का संतुलन अच्छा होगा। भारत का लक्ष्य जून में होने वाले WTC फाइनल में जगह बनाना है और इसके लिए ऑस्ट्रेलिया का क्लीन स्विप करना होगा। 'फॉर्म के आधार पर गिल को मिलना चाहिए मौका' रवि शास्त्री ने कहा है कि गिल इस वक्त शानदार फॉर्म में हैं, जिस तरह से उसने अभी तक बल्लेबाजी की है हर कोई यह सोच रहा होगा कि आखिरी उसे बाहर क्यों बिठाया हुआ है। रवि शास्त्री ने कहा है कि गिल का समय बहुत अच्छा चल रहा है, वो स्कोर करे या ना करे लेकिन फॉर्म और योग्यता के आधार पर वो एक मौके के हकदार हैं। रवि शास्त्री ने कहा कि जब आपके पास गिल जैसा खिलाड़ी होता है तो आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होना चाहिए। आपको बता दें कि शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले महीने वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने तीन सौ पचास रन बनाए थे, जिसमें दो सौ आठ रनों की उनकी बेहतरीन पारी भी शामिल है। उससे पहले गिल ने बांग्लादेश के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा था। दो हज़ार तेईस के पहले दो महीने में ही गिल ने चार इंटरनेशनल शतक जड़कर टीम में अपनी जगह पक्की करने की दावेदारी मजबूत कर ली थी।
तो, अगला अभ्यास औसत ( average) का पता लगाना है। तो, हमारे पास दो उद्देश्य थे एक हम स्थानीय ताप परिवहन गुणांक (local heat transport coefficient) का पता लगाते हैं, हम औसत ताप परिवहन गुणांक ( average heat transport coefficient) खोजना चाहते हैं और वह केवल one by L h into dx है। तो, वह one by L integral होगा। तो, नुसेल्ट संख्या (Nusselt number) से हम वास्तव में उस अभिव्यक्ति (expression) का उपयोग कर सकते हैं। तो, हम यह पता लगा सकते हैं कि स्थानीय ताप परिवहन गुणांक (local heat transport coefficient) क्या है। तो, वह Grashof number by 4 to the power of 1 by 4 into gPr into k f by x into dr होगा। तो, यह स्थानीय ताप परिवहन गुणांक (local heat transport coefficient) है और यह 1 by 4 g times eta Ts minus Tinfinity by nu square होगा। अतः ये सभी x के फलन (function) नहीं हैं। इसलिए, हम उन्हें बाहर निकाल सकते हैं g p x, x का फलन नहीं है, हम उन्हें बाहर निकाल सकते हैं, kf, x का फलन नहीं है जिसे निकाला जा सकता है। तो, यह integral of that to the power of 1 by 4 होगा। तो, यह x to the power of 3 by 4 divided by x into dx and that will be kf by 1 g beta Ts minus Tinfinity 4 nu square one by 4 होगा। यह integral क्या है? 0 to L 4 by 3, यह 4 by 3 into x to the power of 3 by 4, L to the power of 3 by 4 है । तो, यह और कुछ नहीं, बल्कि integral of x to the power of minus one by 4 into d x है । इसलिए, आप डेटा 4 by 3 को एकीकृत (integrate) करते हैं जो कि integration I to the power of 3 by four आता है। तो, यह kf by L 4 by 3 into Grashof number होता है, जो length to the power of 1 by 4 multiplied by the function of prandtl number के आधार पर है। तो, यहाँ से हम जो देखते हैं वह यह है कि औसत नुसेल्ट संख्या लंबाई के आधार पर है जो 4 by 3 times the Nusselt number है। स्थानीय नुसेल्ट संख्या (local Nusselt number) लंबाई के आधार पर है। यह बहुत कुछ वैसा ही है जैसा हमें फ्लैट प्लेट के मामले में मिला था, जहां औसत नुसेल्ट संख्या (average Nusselt number) स्थानीय नुसेल्ट संख्या (local Nusselt number) के कुछ कार्य या कुछ स्थिर मॉड्यूलो स्थिरांक (constant modulo constant) है। इसलिए, हम वास्तव में कह सकते हैं कि किसी भी स्थान पर औसत नुसेल्ट संख्या जो उस स्थान तक, फ्लैट प्लेट में उस स्थान तक ले जाने
तो, अगला अभ्यास औसत का पता लगाना है। तो, हमारे पास दो उद्देश्य थे एक हम स्थानीय ताप परिवहन गुणांक का पता लगाते हैं, हम औसत ताप परिवहन गुणांक खोजना चाहते हैं और वह केवल one by L h into dx है। तो, वह one by L integral होगा। तो, नुसेल्ट संख्या से हम वास्तव में उस अभिव्यक्ति का उपयोग कर सकते हैं। तो, हम यह पता लगा सकते हैं कि स्थानीय ताप परिवहन गुणांक क्या है। तो, वह Grashof number by चार to the power of एक by चार into gPr into k f by x into dr होगा। तो, यह स्थानीय ताप परिवहन गुणांक है और यह एक by चार ग्राम times eta Ts minus Tinfinity by nu square होगा। अतः ये सभी x के फलन नहीं हैं। इसलिए, हम उन्हें बाहर निकाल सकते हैं g p x, x का फलन नहीं है, हम उन्हें बाहर निकाल सकते हैं, kf, x का फलन नहीं है जिसे निकाला जा सकता है। तो, यह integral of that to the power of एक by चार होगा। तो, यह x to the power of तीन by चार divided by x into dx and that will be kf by एक ग्राम beta Ts minus Tinfinity चार nu square one by चार होगा। यह integral क्या है? शून्य to L चार by तीन, यह चार by तीन into x to the power of तीन by चार, L to the power of तीन by चार है । तो, यह और कुछ नहीं, बल्कि integral of x to the power of minus one by चार into d x है । इसलिए, आप डेटा चार by तीन को एकीकृत करते हैं जो कि integration I to the power of तीन by four आता है। तो, यह kf by L चार by तीन into Grashof number होता है, जो length to the power of एक by चार multiplied by the function of prandtl number के आधार पर है। तो, यहाँ से हम जो देखते हैं वह यह है कि औसत नुसेल्ट संख्या लंबाई के आधार पर है जो चार by तीन times the Nusselt number है। स्थानीय नुसेल्ट संख्या लंबाई के आधार पर है। यह बहुत कुछ वैसा ही है जैसा हमें फ्लैट प्लेट के मामले में मिला था, जहां औसत नुसेल्ट संख्या स्थानीय नुसेल्ट संख्या के कुछ कार्य या कुछ स्थिर मॉड्यूलो स्थिरांक है। इसलिए, हम वास्तव में कह सकते हैं कि किसी भी स्थान पर औसत नुसेल्ट संख्या जो उस स्थान तक, फ्लैट प्लेट में उस स्थान तक ले जाने
Samastipur : समस्तीपुर में एक बड़ा नाव हादसा हुआ है. कल्याणपुर के नामापुर में हुए नाव हादसे में 4 लोगों के शव बरामद हुए हैं जबकि 5 से 7 लोग अब भी लापता हैं. गोताखोरों की मदद से सभी लापता लोगों की तलाश जारी है. बता दें नाव पर लगभग 15 से 20 लोग सवार थे जो शाम के वक्त बाज़ार से खरीदारी कर लौट रहे थे. उनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं जो मवेशी का चारा लेकर लौट रही थीं. अचानक तेज हवा के कारण नाव असंतुलित होकर पलट गयी. कुछ लोग तैर कर बाहर निकल गये. नाव हादसे की खबर जैसे ही फैली पूरे इलाके में कोहराम मच गया. घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दी जिसके बाद स्थानीय थाने की पुलिस और अंचल अधिकारी मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं. गोताखोरों की मदद से पांच शवों को पानी से निकाला गया है और लापता लोगों की तालाश जारी है.
Samastipur : समस्तीपुर में एक बड़ा नाव हादसा हुआ है. कल्याणपुर के नामापुर में हुए नाव हादसे में चार लोगों के शव बरामद हुए हैं जबकि पाँच से सात लोग अब भी लापता हैं. गोताखोरों की मदद से सभी लापता लोगों की तलाश जारी है. बता दें नाव पर लगभग पंद्रह से बीस लोग सवार थे जो शाम के वक्त बाज़ार से खरीदारी कर लौट रहे थे. उनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं जो मवेशी का चारा लेकर लौट रही थीं. अचानक तेज हवा के कारण नाव असंतुलित होकर पलट गयी. कुछ लोग तैर कर बाहर निकल गये. नाव हादसे की खबर जैसे ही फैली पूरे इलाके में कोहराम मच गया. घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने प्रशासन को दी जिसके बाद स्थानीय थाने की पुलिस और अंचल अधिकारी मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं. गोताखोरों की मदद से पांच शवों को पानी से निकाला गया है और लापता लोगों की तालाश जारी है.
वर्षा दीदी दूर देश में रहकर आई आठ महीने शरमाती, मुस्काती छम् छम् वर्षा दीदी सोने की पायल छनकाती देखा आँखें चमकीं सबकी खिल गए चेहरे हवा हिंडोलों में झूले गाएँ गीत पखेरू- पीपल मोर पपीहा श्यामा कोयल ** ithun झन् झन् झींगुर टर्टर् मेंढक उमड़े नदी तलैया धूल नहाती गौरैया लेके आए 'सूरज भैया' चढ़कर 'पछुआ' मेल तरस रही थी धरती मैया गले लगाया आकुल होकर आँखें भर आई बरसे आँसू टप्... टप्...टप्.... ओहो ! संग में दूल्हा बादल! डाले हैं आँखों में काजल
वर्षा दीदी दूर देश में रहकर आई आठ महीने शरमाती, मुस्काती छम् छम् वर्षा दीदी सोने की पायल छनकाती देखा आँखें चमकीं सबकी खिल गए चेहरे हवा हिंडोलों में झूले गाएँ गीत पखेरू- पीपल मोर पपीहा श्यामा कोयल ** ithun झन् झन् झींगुर टर्टर् मेंढक उमड़े नदी तलैया धूल नहाती गौरैया लेके आए 'सूरज भैया' चढ़कर 'पछुआ' मेल तरस रही थी धरती मैया गले लगाया आकुल होकर आँखें भर आई बरसे आँसू टप्... टप्...टप्.... ओहो ! संग में दूल्हा बादल! डाले हैं आँखों में काजल
नई दिल्लीः महाराष्ट्र के पालघर में हुई मॉब लिंचिंग की दुखद घटना सामने आई है, इस घटना की बॉलीवुड और टीवी स्टार्स ने कड़ी निंदा की है। इस मामले में अब टीवी की द्रौपदी का रोल निभाने वाली रूपा गांगुली (Rupa Ganguly) का बयान सामने आया है। रूप ने इससे जुड़ा एक किस्सा भी शेयर किया है। रूपा गांगुली ने बताया कि किस तरह एक बार वो भी भीड़ का शिकार हो गई थीं। रूपा गांगुली ने ट्वीट करके बताया कि एक बार उन्हें करीब 17-18 लोगों ने गाड़ी से उतारकर पीटा और गाड़ी भी तोड़ दी। रूपा ने ट्वीट में लिखा है 'मुझे कुछ दिनों से याद आ रहा है. . . 22मई 2016 डायमंड हार्बर की एक घटना 17-18 लोग, पुलिस को साथ लेकर. . . मुझे गाड़ी से उतारकर रास्ते पर पटक पटक कर मारा था, गाड़ी भी तोड़ दी थी. . . दो ब्रेन हैम्रेज झेलने पड़े। बस, मैं मरी नहीं थी, रैली ड्राइवर हूं, निकल कर आ गई. . . पालघर के बारे में बहुत दुख हो रहा है। ' रूपा ने साथ में महाभारत के द्रौपदी चीर-हरण का वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है- 'हे कृष्ण, हे कृष्ण, हे कृष्ण। ' इसी महाभारत सीरियल में रूपा गांगुली ने द्रौपदी की भूमिका निभाई है। दरअसल, रूपा गांगुली इस घटना को द्रौपदी की घटना से भी जोड़ रही हैं। खैर उस वक्त तो कृष्ण जी ने बचा लिया था लेकिन पालघर में गुरुवार रात को रात एक गाड़ी में जा रहे तीन लोगों को रोका और फिर चोरी के शक में उन्हें इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। इस वक्त लॉकडाउन की वजह से दूरदर्शन ने अपने कई पुराने सीरियल्स को दोबारा टेलीकास्ट करने का फैसला किया है, महाभारत भी उसमें से एक है। महाभारत डीडी भारती पर प्रसारित किया जाता है, जिसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं।
नई दिल्लीः महाराष्ट्र के पालघर में हुई मॉब लिंचिंग की दुखद घटना सामने आई है, इस घटना की बॉलीवुड और टीवी स्टार्स ने कड़ी निंदा की है। इस मामले में अब टीवी की द्रौपदी का रोल निभाने वाली रूपा गांगुली का बयान सामने आया है। रूप ने इससे जुड़ा एक किस्सा भी शेयर किया है। रूपा गांगुली ने बताया कि किस तरह एक बार वो भी भीड़ का शिकार हो गई थीं। रूपा गांगुली ने ट्वीट करके बताया कि एक बार उन्हें करीब सत्रह-अट्ठारह लोगों ने गाड़ी से उतारकर पीटा और गाड़ी भी तोड़ दी। रूपा ने ट्वीट में लिखा है 'मुझे कुछ दिनों से याद आ रहा है. . . बाईसमई दो हज़ार सोलह डायमंड हार्बर की एक घटना सत्रह-अट्ठारह लोग, पुलिस को साथ लेकर. . . मुझे गाड़ी से उतारकर रास्ते पर पटक पटक कर मारा था, गाड़ी भी तोड़ दी थी. . . दो ब्रेन हैम्रेज झेलने पड़े। बस, मैं मरी नहीं थी, रैली ड्राइवर हूं, निकल कर आ गई. . . पालघर के बारे में बहुत दुख हो रहा है। ' रूपा ने साथ में महाभारत के द्रौपदी चीर-हरण का वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है- 'हे कृष्ण, हे कृष्ण, हे कृष्ण। ' इसी महाभारत सीरियल में रूपा गांगुली ने द्रौपदी की भूमिका निभाई है। दरअसल, रूपा गांगुली इस घटना को द्रौपदी की घटना से भी जोड़ रही हैं। खैर उस वक्त तो कृष्ण जी ने बचा लिया था लेकिन पालघर में गुरुवार रात को रात एक गाड़ी में जा रहे तीन लोगों को रोका और फिर चोरी के शक में उन्हें इतना मारा गया कि उनकी मौत हो गई। इस वक्त लॉकडाउन की वजह से दूरदर्शन ने अपने कई पुराने सीरियल्स को दोबारा टेलीकास्ट करने का फैसला किया है, महाभारत भी उसमें से एक है। महाभारत डीडी भारती पर प्रसारित किया जाता है, जिसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं।
ये लोग कर सकते हैं धारण (Who Can Wear Opal Stone) वैदिक ज्योतिष अनुसार वृष और तुला राशि पर शुक्र ग्रह का आधिपत्य होता है। इसलिए इन राशि के जातक ओपल रत्न धारण कर सकते हैं। वहीं कुंभ और मकर राशि के जातक भी ओपल पहन सकते हैं। क्योंकि इन राशियों पर शनि देव का आधिपत्य है और शनि देव, शुक्र में मित्रता का भाव है। वहीं जो लोग फिल्म, फैशन डिजाइनिंग, कला और मीडिया के क्षेत्र से जुड़े लोग भी धारण कर सकते हैं। साथ ही जिन व्यक्तियों की कुंडली में शुक्र देव यानी स्थित हों तो वह धारण कर सकते हैं। लेकिन ओपल रत्न के साथ माणिक्य, मोती और मूंगा पहनने से बचना चाहिए। ओपल रत्न पहनने के लाभ (Benefits Of Opal Stone) ओपल रत्न धारण करने से व्यक्तित्व में निखार आता है। साथ ही जिन पति-पत्नी में मनमुटाव चल रहा हो उनको ओपल धारण करना चाहिए। वहीं ओपल धारण करने से व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है साथ ही उसका जीवन खुशियों से भर जाता है। साथ ही जो लोग हीरा नहीं धारण कर सकते क्योंकि हीरा मंहगा आता है। तो वो लोग भी ओपल पहन सकते हैं। वहीं ओपल पहनने से व्यक्ति को भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। ओपल रत्न हीरा के मुकाबले सस्ता ही मिल जाता है। इसलिए ओपल को बाजार से कम से कम सवा 8 से 9 रत्ती का खरीदना चाहिए। साथ ही ओपल रत्न को चांदी के धातु में जड़वाकर धारण कर सकते हैं। इसको शुक्रवार के दिन पहन सकते हैं। ओपल की अंगूठी पहनने से पहले इसे कच्चे दूध और गंगाजल में डालकर शुद्ध करें। इसके बाद इसे धारण कर लें।
ये लोग कर सकते हैं धारण वैदिक ज्योतिष अनुसार वृष और तुला राशि पर शुक्र ग्रह का आधिपत्य होता है। इसलिए इन राशि के जातक ओपल रत्न धारण कर सकते हैं। वहीं कुंभ और मकर राशि के जातक भी ओपल पहन सकते हैं। क्योंकि इन राशियों पर शनि देव का आधिपत्य है और शनि देव, शुक्र में मित्रता का भाव है। वहीं जो लोग फिल्म, फैशन डिजाइनिंग, कला और मीडिया के क्षेत्र से जुड़े लोग भी धारण कर सकते हैं। साथ ही जिन व्यक्तियों की कुंडली में शुक्र देव यानी स्थित हों तो वह धारण कर सकते हैं। लेकिन ओपल रत्न के साथ माणिक्य, मोती और मूंगा पहनने से बचना चाहिए। ओपल रत्न पहनने के लाभ ओपल रत्न धारण करने से व्यक्तित्व में निखार आता है। साथ ही जिन पति-पत्नी में मनमुटाव चल रहा हो उनको ओपल धारण करना चाहिए। वहीं ओपल धारण करने से व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है साथ ही उसका जीवन खुशियों से भर जाता है। साथ ही जो लोग हीरा नहीं धारण कर सकते क्योंकि हीरा मंहगा आता है। तो वो लोग भी ओपल पहन सकते हैं। वहीं ओपल पहनने से व्यक्ति को भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। ओपल रत्न हीरा के मुकाबले सस्ता ही मिल जाता है। इसलिए ओपल को बाजार से कम से कम सवा आठ से नौ रत्ती का खरीदना चाहिए। साथ ही ओपल रत्न को चांदी के धातु में जड़वाकर धारण कर सकते हैं। इसको शुक्रवार के दिन पहन सकते हैं। ओपल की अंगूठी पहनने से पहले इसे कच्चे दूध और गंगाजल में डालकर शुद्ध करें। इसके बाद इसे धारण कर लें।
ओर से बहिरा था। आज भी तो बहिरा ही हूँ । तप और छाब में अन्तर यह है कि वास्तविकता और कूटनीतिज्ञता से परि चित हो चला हैं, किन्तु उसे अपना स्वभाव नहीं बना पाया हूँ । बाहर का तुमुल कोलाहल मेरे कान के परदों से टकरा कर बाहर ही लौट जाता है, वह भीतर नहीं प्रवेश कर पाता । आज की मेरी मनःस्थिति तो ऐसी ही है, कल की प्रभु जानें ! समाधि के भीतर जैसे कभी-कभी बाहर की भी भनक पहुँच जाती है, वैसे ही मेरे वधिर कानों में संसार का नगाड़ा भी गूँज उठता है ।..... 'छायावाद की कविता जब अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच रही थी तब प्रगतिवाद का ढोल सुनाई पड़ा। मेरा भूखाप्यासा शरीर उस पर लुब्ध नहीं हो सका, क्योंकि उसमें अन्तः स्पर्श नहीं था, सत्त्वोद्रेक नहीं था; था एक तामसिक विद्वेष, राजनीतिक राग-द्वेष । प्रगतिवाद तो बाङ्मय में आ गया, किन्तु शासन में अपना स्थान नहीं बना सका। देखते-देखते देश में कांग्रेसी सरकारें स्थापित हो गई । अब एक और आवाज सुनाई देने लगी। यह आवाज थी द्विवेदी-युग तथा छायावाद-युग के साहित्यकारों की । उन्होंने कहा- शासन साहित्यिकों की उपेक्षा कर रहा है 1 साहित्यिकों का महत्त्व राजनीतिज्ञों से अधिक है।... इस तरह की बातें सुन कर मुझे तो प्रसन्न होना चाहिये था, क्योंकि यह साहित्यिकों के स्वाभिमान का उद्घोष था; किन्तु सस्ती प्रसन्नता के पीछे मैं नहीं दौड़ता। मुझे ऐसा लगा कि इन बाहर की आवाज में गहराई नहीं है, ये केवल वैयक्तिक प्रतिक्रियाएँ हैं, जिन्हें स्वार्थों की गुटबन्दी के लिए सामूहिक रूप दे दिया गया है। * अब कुछ साहित्यक व्यक्तियों को केन्द्रीय और प्रान्तीय कांग्रेसी शासन में स्थान मिल गया है।
ओर से बहिरा था। आज भी तो बहिरा ही हूँ । तप और छाब में अन्तर यह है कि वास्तविकता और कूटनीतिज्ञता से परि चित हो चला हैं, किन्तु उसे अपना स्वभाव नहीं बना पाया हूँ । बाहर का तुमुल कोलाहल मेरे कान के परदों से टकरा कर बाहर ही लौट जाता है, वह भीतर नहीं प्रवेश कर पाता । आज की मेरी मनःस्थिति तो ऐसी ही है, कल की प्रभु जानें ! समाधि के भीतर जैसे कभी-कभी बाहर की भी भनक पहुँच जाती है, वैसे ही मेरे वधिर कानों में संसार का नगाड़ा भी गूँज उठता है ।..... 'छायावाद की कविता जब अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच रही थी तब प्रगतिवाद का ढोल सुनाई पड़ा। मेरा भूखाप्यासा शरीर उस पर लुब्ध नहीं हो सका, क्योंकि उसमें अन्तः स्पर्श नहीं था, सत्त्वोद्रेक नहीं था; था एक तामसिक विद्वेष, राजनीतिक राग-द्वेष । प्रगतिवाद तो बाङ्मय में आ गया, किन्तु शासन में अपना स्थान नहीं बना सका। देखते-देखते देश में कांग्रेसी सरकारें स्थापित हो गई । अब एक और आवाज सुनाई देने लगी। यह आवाज थी द्विवेदी-युग तथा छायावाद-युग के साहित्यकारों की । उन्होंने कहा- शासन साहित्यिकों की उपेक्षा कर रहा है एक साहित्यिकों का महत्त्व राजनीतिज्ञों से अधिक है।... इस तरह की बातें सुन कर मुझे तो प्रसन्न होना चाहिये था, क्योंकि यह साहित्यिकों के स्वाभिमान का उद्घोष था; किन्तु सस्ती प्रसन्नता के पीछे मैं नहीं दौड़ता। मुझे ऐसा लगा कि इन बाहर की आवाज में गहराई नहीं है, ये केवल वैयक्तिक प्रतिक्रियाएँ हैं, जिन्हें स्वार्थों की गुटबन्दी के लिए सामूहिक रूप दे दिया गया है। * अब कुछ साहित्यक व्यक्तियों को केन्द्रीय और प्रान्तीय कांग्रेसी शासन में स्थान मिल गया है।
सर्दियों के इस सीज़न में जब आप नहाकर निकलते होंगे तो कुछ ही देर में आपको अपनी त्वचार रूखी सी नज़र आने लगती है। चेहरे की त्वचा में कुछ खिंचाव होने लगता है मगर अब चिंता की कोई जरूरत नहीं है। यदि आप इस परेशानी से बचने के लिए कोई कोल्ड क्रीम नहीं लगाना चाहती हैं तो कोई बात नहीं आप अपने घर में ही पैट्रोलियम जैली जैसा तत्व बना सकती हैं। दरअसल नींबू के साथ ग्लिसरीन और गुलाबजल के उपयोग से आप पैट्रोलियम जैली जैसा साॅल्युशन तैयार कर सकते हैं जो कि बहुत उपयोगी होता है। आप दो से तीन बूंद ग्लिसरीन और दो से तीन बूंद नींबू का रस लीजिए इसके साथ में आप गुलाबजल कुछ ही मात्रा में डालिए। जो साॅल्युशन तैयार होगा उसे त्वचा पर लगा लीजिए। आपको ठंड में खुष्क हो चुकी त्वचा को निखारने में लाभ मिलेगा।
सर्दियों के इस सीज़न में जब आप नहाकर निकलते होंगे तो कुछ ही देर में आपको अपनी त्वचार रूखी सी नज़र आने लगती है। चेहरे की त्वचा में कुछ खिंचाव होने लगता है मगर अब चिंता की कोई जरूरत नहीं है। यदि आप इस परेशानी से बचने के लिए कोई कोल्ड क्रीम नहीं लगाना चाहती हैं तो कोई बात नहीं आप अपने घर में ही पैट्रोलियम जैली जैसा तत्व बना सकती हैं। दरअसल नींबू के साथ ग्लिसरीन और गुलाबजल के उपयोग से आप पैट्रोलियम जैली जैसा साॅल्युशन तैयार कर सकते हैं जो कि बहुत उपयोगी होता है। आप दो से तीन बूंद ग्लिसरीन और दो से तीन बूंद नींबू का रस लीजिए इसके साथ में आप गुलाबजल कुछ ही मात्रा में डालिए। जो साॅल्युशन तैयार होगा उसे त्वचा पर लगा लीजिए। आपको ठंड में खुष्क हो चुकी त्वचा को निखारने में लाभ मिलेगा।
४४३ । हरिकृष्ण प्रेमी भावुक प्रारणी । उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकतो कि वह दुनियादार हो जायेगा . और अपने साहित्य की कीमत का हिसाब किताब रख सकेगा । प्रकाशक उसकी इस दुर्बलता का ही तो लाभ उठाता है और उसकी मेहनत का मीठा फल चाहता है । प्रकाश की पत्नी यह समझती है कि आज की छल-छन्द की दुनिया में भोलेपन से काम नहीं चल सकता । जब तक हम किसी ऐसे समाज की कल्पना साकार नहीं कर लेते, जिसमें खून को पसीना बनाने वाले मज़दूर को, चाहे उसके हाथ में कलम हो या फावड़ा, यह इतमीनान पक्के ढंग से नहीं हो जाता कि अपनी मेहनत का लाभ उठाने का उसका अधिकार धरा हुआ है तब तक साहित्यकार को व्यवहार ज्ञान की चिन्ता करनी ही पड़ेगी । लेकिन प्रेमी जी इस समाधान के कायल नहीं हैं। उनका आदर्शवाद यह स्वीकार नहीं कर पाता कि साहित्यकार को हिसाबी हो जाना चाहिए। इससे जैसा कि डॉ० नगेन्द्र ने कहा समस्या के प्रति एक काव्यगत भावपूर्ण प्रतिक्रिया के कारण वह अपनी सारी खीझ रुपये पर उतारते हुए कहते हैं- 'रुपये को अपने सर न चढ़ने दो मनुष्यो ! रुपये को मनुष्य का सुख न छीनने दो मनुष्यो ! रुपये को मनुष्य का अपमान न करने दो मनुष्यो ।" नाटककार शायद यही समझता है कि सारे अनर्थों की जड़ है रुपया । इसके लोभ के कारण प्रकाशक साहित्य की नातेदारी में आ कर भी साहित्यकार का गला टोपता है और इसी रुपये के अभाव में, साहित्यकार को अपने किसी दुर्बल क्षरण में हिसाबी बनने की बात सोचनी पड़ती है । तो दूषित है - यह रुपया ही । प्रोमी जी ने 'छाया' में समस्या का जो समाधान प्रस्तुत किया है, वह कितना अवास्तविक है, यह सहज ही विदित है । खून का स्वाद जिसके मुँह में लगा हो, उससे अहिंसा का व्रती होने की आशा जैसी प्रसार होती है, वैसी ही प्रेमो जी की यह आशा भी है कि प्रकाशक साहित्यकार का शोषण करना छोड़ देगा । साहित्यकार के घर तिजोरी में रुपये भरे पड़े हुए हों, इसकी आशा बाँधना एक बात है और उसके भरण-पोषरण के लिए पर्याप्त सुविधा हो - यह दूसरी बात है । प्रेमी जी का भावुक नायक प्रकाश इन दोनों के अन्तर को भी पहचान नहीं पाता - यही तो उसकी लोक व्यवहार के प्रति अकुशलता है । 'वारणी-मन्दिर' शीर्षक अपने एकांकी में भी प्रोमी जी ने इसी समस्या को उठाया है । संसार को अमृत देने के के लिए स्वयं विष का घूंट पीने वाला कवि कुमार भी 'छाया' के प्रकाश के ही गोत्र का है । उसके घर में भी स्थिति यह है कि अन्न का एक दाना नही, पास में एक पैसा नदारद है और भूखी नन्हीं दूध के लिए आकुल तड़प रही है। पति-परायण पत्नी और उस छोटी सी उम्र में ही इतनी समझदार उसकी गुड़ियासी बेटी ऐसी दुर्घटनाओं के प्रति अभ्यस्त हो गयी हैं । भूखे पेट सो १. आधुनिक हिन्दी नाटक - डॉ० नगेन्द्र - पृ० ६४ २. आधुनिक एकांकी संग्रह में संकलित एकांकी - वाणी मन्दिर - ह० कृ० प्रेमी बैकुन्ठनाथ दास-पृ०६८
चार सौ तैंतालीस । हरिकृष्ण प्रेमी भावुक प्रारणी । उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकतो कि वह दुनियादार हो जायेगा . और अपने साहित्य की कीमत का हिसाब किताब रख सकेगा । प्रकाशक उसकी इस दुर्बलता का ही तो लाभ उठाता है और उसकी मेहनत का मीठा फल चाहता है । प्रकाश की पत्नी यह समझती है कि आज की छल-छन्द की दुनिया में भोलेपन से काम नहीं चल सकता । जब तक हम किसी ऐसे समाज की कल्पना साकार नहीं कर लेते, जिसमें खून को पसीना बनाने वाले मज़दूर को, चाहे उसके हाथ में कलम हो या फावड़ा, यह इतमीनान पक्के ढंग से नहीं हो जाता कि अपनी मेहनत का लाभ उठाने का उसका अधिकार धरा हुआ है तब तक साहित्यकार को व्यवहार ज्ञान की चिन्ता करनी ही पड़ेगी । लेकिन प्रेमी जी इस समाधान के कायल नहीं हैं। उनका आदर्शवाद यह स्वीकार नहीं कर पाता कि साहित्यकार को हिसाबी हो जाना चाहिए। इससे जैसा कि डॉशून्य नगेन्द्र ने कहा समस्या के प्रति एक काव्यगत भावपूर्ण प्रतिक्रिया के कारण वह अपनी सारी खीझ रुपये पर उतारते हुए कहते हैं- 'रुपये को अपने सर न चढ़ने दो मनुष्यो ! रुपये को मनुष्य का सुख न छीनने दो मनुष्यो ! रुपये को मनुष्य का अपमान न करने दो मनुष्यो ।" नाटककार शायद यही समझता है कि सारे अनर्थों की जड़ है रुपया । इसके लोभ के कारण प्रकाशक साहित्य की नातेदारी में आ कर भी साहित्यकार का गला टोपता है और इसी रुपये के अभाव में, साहित्यकार को अपने किसी दुर्बल क्षरण में हिसाबी बनने की बात सोचनी पड़ती है । तो दूषित है - यह रुपया ही । प्रोमी जी ने 'छाया' में समस्या का जो समाधान प्रस्तुत किया है, वह कितना अवास्तविक है, यह सहज ही विदित है । खून का स्वाद जिसके मुँह में लगा हो, उससे अहिंसा का व्रती होने की आशा जैसी प्रसार होती है, वैसी ही प्रेमो जी की यह आशा भी है कि प्रकाशक साहित्यकार का शोषण करना छोड़ देगा । साहित्यकार के घर तिजोरी में रुपये भरे पड़े हुए हों, इसकी आशा बाँधना एक बात है और उसके भरण-पोषरण के लिए पर्याप्त सुविधा हो - यह दूसरी बात है । प्रेमी जी का भावुक नायक प्रकाश इन दोनों के अन्तर को भी पहचान नहीं पाता - यही तो उसकी लोक व्यवहार के प्रति अकुशलता है । 'वारणी-मन्दिर' शीर्षक अपने एकांकी में भी प्रोमी जी ने इसी समस्या को उठाया है । संसार को अमृत देने के के लिए स्वयं विष का घूंट पीने वाला कवि कुमार भी 'छाया' के प्रकाश के ही गोत्र का है । उसके घर में भी स्थिति यह है कि अन्न का एक दाना नही, पास में एक पैसा नदारद है और भूखी नन्हीं दूध के लिए आकुल तड़प रही है। पति-परायण पत्नी और उस छोटी सी उम्र में ही इतनी समझदार उसकी गुड़ियासी बेटी ऐसी दुर्घटनाओं के प्रति अभ्यस्त हो गयी हैं । भूखे पेट सो एक. आधुनिक हिन्दी नाटक - डॉशून्य नगेन्द्र - पृशून्य चौंसठ दो. आधुनिक एकांकी संग्रह में संकलित एकांकी - वाणी मन्दिर - हशून्य कृशून्य प्रेमी बैकुन्ठनाथ दास-पृअड़सठ
The Fact India: नेपाल के विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से 11 किलोग्राम सोना गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रह रहा है। सोमवार को नेपाली संसद में इस मसले को उठाया गया। नेपाली कांग्रेस के सांसद प्रदीप पौडेल ने कहा कि इस मामले की जांच पार्लियामेंट्री कमेटी को करनी चाहिए। जांच के नाम पर लीपापोती नहीं होनी चाहिए। इसकी वजह से देश की बदनामी हो रही है। भ्रष्टाचार को किसी भी तौर पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। मंदिर से कुछ दिन पहले सोना गायब होने की शिकायत पर रविवार को एंटी करप्शन यूनिट ने जांच की थी। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए मंदिर बंद कर दिया गया। जांच एजेंसी की टीम शाम 6 बजे मंदिर के अंदर गई और रात 2 बजे तक हर पहलू की जांच की। यह मामला 2021 का है। उस दौरान केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे। तब मंदिर में स्थापित शिवलिंग के नीचे गोल्ड बेस बनाया गया था। स्थानीय भाषा में इसे झालारी कहा जाता है। यह सोना मंदिर की प्रॉपर्टी था। इसी में से 11 किलोग्राम सोना गायब हो गया। संसद में उठे इस मुद्दे पर सांसद पौडेल ने कहा कि हमने दो साल पहले भी यह सवाल संसद में उठाया था। कितनी हैरानी की बात है कि मेरा उस वक्त का सवाल संसद के रिकॉर्ड से भी गायब कर दिया गया। आज हम सब शर्मिंदा हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब दो साल पहले ही एंटी करप्शन एजेंसी के पास शिकायत पहुंच गई थी तो जांच क्यों नहीं हुई? हमारी मांग है कि अब एक संसदीय समिति बनाई जाए और वही इस मामले की जांच करे। एक और सांसद ने कहा कि सवाल ये है कि अगर 2021 में ही इसका पता लग गया था तो दो साल तक जांच क्यों नहीं हुई? आखिर किसको बचाने की कोशिश हो रही थी? जांच इतनी देरी से शुरू होना ही इस बात का सबूत है कि कोई तो है, जो नहीं चाहता कि मामला देश के सामने आए। इस मामले को आप चोरी कहें या करप्शन, लेकिन जो भी हुआ उससे हम शर्मसार हैं। पशुपतिनाथ एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, 2021 झालारी बनाने के लिए 103 किलोग्राम सोना रखा गया था। इसमें से 11 किलोग्राम बेस रिंग के लिए था। यही गोल्ड गायब है।
The Fact India: नेपाल के विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से ग्यारह किलोग्रामग्राम सोना गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रह रहा है। सोमवार को नेपाली संसद में इस मसले को उठाया गया। नेपाली कांग्रेस के सांसद प्रदीप पौडेल ने कहा कि इस मामले की जांच पार्लियामेंट्री कमेटी को करनी चाहिए। जांच के नाम पर लीपापोती नहीं होनी चाहिए। इसकी वजह से देश की बदनामी हो रही है। भ्रष्टाचार को किसी भी तौर पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। मंदिर से कुछ दिन पहले सोना गायब होने की शिकायत पर रविवार को एंटी करप्शन यूनिट ने जांच की थी। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए मंदिर बंद कर दिया गया। जांच एजेंसी की टीम शाम छः बजे मंदिर के अंदर गई और रात दो बजे तक हर पहलू की जांच की। यह मामला दो हज़ार इक्कीस का है। उस दौरान केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे। तब मंदिर में स्थापित शिवलिंग के नीचे गोल्ड बेस बनाया गया था। स्थानीय भाषा में इसे झालारी कहा जाता है। यह सोना मंदिर की प्रॉपर्टी था। इसी में से ग्यारह किलोग्रामग्राम सोना गायब हो गया। संसद में उठे इस मुद्दे पर सांसद पौडेल ने कहा कि हमने दो साल पहले भी यह सवाल संसद में उठाया था। कितनी हैरानी की बात है कि मेरा उस वक्त का सवाल संसद के रिकॉर्ड से भी गायब कर दिया गया। आज हम सब शर्मिंदा हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब दो साल पहले ही एंटी करप्शन एजेंसी के पास शिकायत पहुंच गई थी तो जांच क्यों नहीं हुई? हमारी मांग है कि अब एक संसदीय समिति बनाई जाए और वही इस मामले की जांच करे। एक और सांसद ने कहा कि सवाल ये है कि अगर दो हज़ार इक्कीस में ही इसका पता लग गया था तो दो साल तक जांच क्यों नहीं हुई? आखिर किसको बचाने की कोशिश हो रही थी? जांच इतनी देरी से शुरू होना ही इस बात का सबूत है कि कोई तो है, जो नहीं चाहता कि मामला देश के सामने आए। इस मामले को आप चोरी कहें या करप्शन, लेकिन जो भी हुआ उससे हम शर्मसार हैं। पशुपतिनाथ एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, दो हज़ार इक्कीस झालारी बनाने के लिए एक सौ तीन किलोग्रामग्राम सोना रखा गया था। इसमें से ग्यारह किलोग्रामग्राम बेस रिंग के लिए था। यही गोल्ड गायब है।
मुंबई। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है और अब 15 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताबडतोड रैलियों से बौखलाई शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक बार फिर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उसने भाजपा का राज्य में असली दुश्मन बताया है। सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेज पार्टी (राकांपा) मरी हुई पार्टियां हैं, असली सत्रु तो भाजपा है। शिवसेना ने यह भी कहा कि सत्ता के लोभ की दुविधा में बहककर भाजपा ने 25 साल पुराना रिश्ता तोडा है। शिवसेना की ओर से मराठी अस्मितता का मुद्दा उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की गई है। शिवसेना ने कहा है कि मराठी हित की दुहाई देकर वोट मांग रहे भाजपा के नेता येदियुरप्पा और मनोहर पर्रिकर जैसे नेता से चुनाव प्रचार करवा रहे थे। कर्नाटक के मराठी भाषियों पर अत्याचार करने वाले येदियुरप्पा को प्रचार में उतारा गया है। संपादकीय में कहा गया है कि मनोहर पर्रिकर ने गोवा में मराठी भाषा को राजभाषा का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन उससे मुकर गए। अब ये लोग किस मुंह से महाराष्ट्र में मराठी हित की बात कर रहे हैं। महाराष्ट्र में रह रहे गुजराती भाइयों को बहकाया जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के गुजराती भाइयों की निष्ठा महाराष्ट्र और बाला साहेब ठाकरे पर है। उन्होंने यह भी लिखा है कि भाजपा मुलायम-लालू की तरह जातिवाद और प्रांतवाद की राजनीति कर रही है। शिवसेना ने कहा है कि बाला साहेब ठाकरे का महाराष्ट्र कभी भी गलत कदम नहीं उठाएगा। सामना में लिखा है कि भाजपा ने महाराष्ट्र चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री मोदी और उनके पूरे मंत्रिमंडल ने शिवसेना को हराने का बीडा उठाया है। इसमें कहा गया है कि भाजपा को पाकिस्तान को हराने के लिए केंद्र में बिठाया गया था, लेकिन वह खुद पाक विरोधियों की जड खोदने में लग गई है। राज्यों के भाजपा सांसदों और मंत्रियों को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है। खुद देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और केंद्रीय मंत्रीमंडल की फौज महाराष्ट्र में उतरी है और शिवसेना को हराने का बीडा उठाया है। गौरतलब है कि जबसे शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूटा है तबसे सामना में लगातार बीजेपी और पीएम मोदी पर हमला किया जा रहा है।
मुंबई। महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है और अब पंद्रह अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताबडतोड रैलियों से बौखलाई शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक बार फिर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उसने भाजपा का राज्य में असली दुश्मन बताया है। सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेज पार्टी मरी हुई पार्टियां हैं, असली सत्रु तो भाजपा है। शिवसेना ने यह भी कहा कि सत्ता के लोभ की दुविधा में बहककर भाजपा ने पच्चीस साल पुराना रिश्ता तोडा है। शिवसेना की ओर से मराठी अस्मितता का मुद्दा उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की गई है। शिवसेना ने कहा है कि मराठी हित की दुहाई देकर वोट मांग रहे भाजपा के नेता येदियुरप्पा और मनोहर पर्रिकर जैसे नेता से चुनाव प्रचार करवा रहे थे। कर्नाटक के मराठी भाषियों पर अत्याचार करने वाले येदियुरप्पा को प्रचार में उतारा गया है। संपादकीय में कहा गया है कि मनोहर पर्रिकर ने गोवा में मराठी भाषा को राजभाषा का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन उससे मुकर गए। अब ये लोग किस मुंह से महाराष्ट्र में मराठी हित की बात कर रहे हैं। महाराष्ट्र में रह रहे गुजराती भाइयों को बहकाया जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के गुजराती भाइयों की निष्ठा महाराष्ट्र और बाला साहेब ठाकरे पर है। उन्होंने यह भी लिखा है कि भाजपा मुलायम-लालू की तरह जातिवाद और प्रांतवाद की राजनीति कर रही है। शिवसेना ने कहा है कि बाला साहेब ठाकरे का महाराष्ट्र कभी भी गलत कदम नहीं उठाएगा। सामना में लिखा है कि भाजपा ने महाराष्ट्र चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री मोदी और उनके पूरे मंत्रिमंडल ने शिवसेना को हराने का बीडा उठाया है। इसमें कहा गया है कि भाजपा को पाकिस्तान को हराने के लिए केंद्र में बिठाया गया था, लेकिन वह खुद पाक विरोधियों की जड खोदने में लग गई है। राज्यों के भाजपा सांसदों और मंत्रियों को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है। खुद देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और केंद्रीय मंत्रीमंडल की फौज महाराष्ट्र में उतरी है और शिवसेना को हराने का बीडा उठाया है। गौरतलब है कि जबसे शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूटा है तबसे सामना में लगातार बीजेपी और पीएम मोदी पर हमला किया जा रहा है।
दिल्ली में गौरक्षक होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने 40 वर्षीय युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि 6 घायल हुए हैं। घायलों में से 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के द्वारका के छावला इलाके का है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, छावला इलाके में स्थित फार्महाउस में 40 वर्षीय मृतक राजाराम केयरटेकर था। रविवार रात 10 से 15 लोगों ने गोहत्या के आरोप में राजाराम और अन्य 6 लोगों की बुरी तरह पिटाई कर दी। घटना के बाद सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां राजाराम ने सोमवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने कहा कि एक घायल शख्स और कुछ स्थानीय लोगों की ओर से अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। कथित गोहत्या के आरोप में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि हत्या और मारपीट के मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। राजाराम के परिवार ने उनके खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें बिना किसी कारण के स्थानीय लोगों द्वारा निशाना बनाया गया। वहीं, FIR के अनुसार, राजाराम के घायल सहयोगियों में से एक ने कहा कि उन्हें राजाराम ने मांस के लिए गायों को मारने के लिए बुलाया था। एसपी ने बताया कि पहली प्राथमिकी में घायलों में से एक ने आरोप लगाया कि उसे और उसके दोस्तों को अक्सर राजाराम गायों को मारने के लिए बुलाता था। जिसके बदले उसे लगभग 500-1,000 रुपये मिलते थे। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों और कथित गोरक्षकों ने रात को गोकशी की सूचना के बाद फार्महाउस पर हमला बोल दिया था। इस दौरान भीड़ ने गोकशी का आरोप लगाकर यहां मौजूद लोगों को जमकर पीटा। छावला जिला पुलिस उपायुक्त शंकर चौधरी ने बताया कि छावला इलाके में शनि मंदिर के पास सुनसान स्थान पर एक फार्म हाउस है। इस तरह की बात सामने आई थी कि फार्म हाउस के भीतर गोकशी कर रहे थे। इसकी सूचना पर ग्रामीणों के अलावा गोरक्षक दल के लोगों ने भी हमला बोल दिया।
दिल्ली में गौरक्षक होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने चालीस वर्षीय युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि छः घायल हुए हैं। घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के द्वारका के छावला इलाके का है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, छावला इलाके में स्थित फार्महाउस में चालीस वर्षीय मृतक राजाराम केयरटेकर था। रविवार रात दस से पंद्रह लोगों ने गोहत्या के आरोप में राजाराम और अन्य छः लोगों की बुरी तरह पिटाई कर दी। घटना के बाद सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां राजाराम ने सोमवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं दो की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने कहा कि एक घायल शख्स और कुछ स्थानीय लोगों की ओर से अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। कथित गोहत्या के आरोप में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि हत्या और मारपीट के मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। राजाराम के परिवार ने उनके खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें बिना किसी कारण के स्थानीय लोगों द्वारा निशाना बनाया गया। वहीं, FIR के अनुसार, राजाराम के घायल सहयोगियों में से एक ने कहा कि उन्हें राजाराम ने मांस के लिए गायों को मारने के लिए बुलाया था। एसपी ने बताया कि पहली प्राथमिकी में घायलों में से एक ने आरोप लगाया कि उसे और उसके दोस्तों को अक्सर राजाराम गायों को मारने के लिए बुलाता था। जिसके बदले उसे लगभग पाँच सौ-एक,शून्य रुपयापये मिलते थे। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों और कथित गोरक्षकों ने रात को गोकशी की सूचना के बाद फार्महाउस पर हमला बोल दिया था। इस दौरान भीड़ ने गोकशी का आरोप लगाकर यहां मौजूद लोगों को जमकर पीटा। छावला जिला पुलिस उपायुक्त शंकर चौधरी ने बताया कि छावला इलाके में शनि मंदिर के पास सुनसान स्थान पर एक फार्म हाउस है। इस तरह की बात सामने आई थी कि फार्म हाउस के भीतर गोकशी कर रहे थे। इसकी सूचना पर ग्रामीणों के अलावा गोरक्षक दल के लोगों ने भी हमला बोल दिया।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार कोरोना महामारी के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का रोका गया 18 माह का डीए उन्हें नहीं देगी। इसकी जानकारी लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दी। पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते की तीन किस्तों का बकाया दिए जाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2020, एक जुलाई 2020 और एक जनवरी 2021 को जारी महंगाई भत्ते को रोकने का फैसला कोरोना महामारी से पैदा हुए आर्थिक मुश्किलों के चलते लिया गया था, जिससे सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने डीए के जरिए 34,402 करोड़ रुपए की धनराशि बचाई थी। सरकार की इस घोषणा के बाद कर्मचारियों को काफी बड़ा झटका लगा है। कोरोना के समय में सरकार ने डीए को होल्ड कर दिया था। जब कोरोना महामारी को लेकर पांबदियां हटी, तो कर्मचारी अपने बकाया डीए की राशि वापस मिलने की उम्मीद में थे। कर्मचारी लंबे समय से अपने बकाया डीए राशि का इंतजार कर रहे थे। लेकिर अब वित्त राज्यमंत्री के जवाब ने सरकार का रुख साफ कर दिया है और केंद्रीय कर्मचारियों की उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। क्या होता है मंहगाई भत्ता ? महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर का एक हिस्सा है। सरकार इसे सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ- साथ पेंशनभोगियों को भी देती है। हर छह महीने पर केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में बदलाव किया जाता है। बीते साल सितंबर 2022 में मोदी सरकार ने कर्मचारियों को 4 प्रतिशत डीए पर हाईक दिया था। इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 34 फीसदी से बढ़कर 38 फीसदी हो गया था।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार कोरोना महामारी के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का रोका गया अट्ठारह माह का डीए उन्हें नहीं देगी। इसकी जानकारी लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दी। पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते की तीन किस्तों का बकाया दिए जाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी दो हज़ार बीस, एक जुलाई दो हज़ार बीस और एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस को जारी महंगाई भत्ते को रोकने का फैसला कोरोना महामारी से पैदा हुए आर्थिक मुश्किलों के चलते लिया गया था, जिससे सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने डीए के जरिए चौंतीस,चार सौ दो करोड़ रुपए की धनराशि बचाई थी। सरकार की इस घोषणा के बाद कर्मचारियों को काफी बड़ा झटका लगा है। कोरोना के समय में सरकार ने डीए को होल्ड कर दिया था। जब कोरोना महामारी को लेकर पांबदियां हटी, तो कर्मचारी अपने बकाया डीए की राशि वापस मिलने की उम्मीद में थे। कर्मचारी लंबे समय से अपने बकाया डीए राशि का इंतजार कर रहे थे। लेकिर अब वित्त राज्यमंत्री के जवाब ने सरकार का रुख साफ कर दिया है और केंद्रीय कर्मचारियों की उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। क्या होता है मंहगाई भत्ता ? महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर का एक हिस्सा है। सरकार इसे सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ- साथ पेंशनभोगियों को भी देती है। हर छह महीने पर केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में बदलाव किया जाता है। बीते साल सितंबर दो हज़ार बाईस में मोदी सरकार ने कर्मचारियों को चार प्रतिशत डीए पर हाईक दिया था। इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का महंगाई भत्ता चौंतीस फीसदी से बढ़कर अड़तीस फीसदी हो गया था।
युग निर्माण योजना नवनिर्माण की अभिनव योजना है, जिसकी संकल्पना पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा मथुरा में आयोजित सन 1958 के सहस्रकुंडीय गायत्री महायज्ञ के समय की गई थी। व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज समाज निर्माण का लक्ष्य लेकर यह अभियान वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने सन 1962 में गायत्री तपोभूमि, मथुरा से आरंभ किया। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन एवं सभ्य समाज की अभिनव रचना का लक्ष्य पूरा करने के लिए विगत कई दशकों से संचालित यह आंदोलन पूरे संसार में चलाया जा रहा है। नवनिर्माण का यह अभियान समय की एक अत्यंत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण पुकार है। प्रत्येक विचारशील व्यक्ति के लिए यह योजना अपनाएं जाने योग्य है। व्यक्ति के परिवर्तन से ही समाज, विश्व एवं युग का परिवर्तन संभव है। इस धरती पर स्वर्गीय वातावरण का सृजन करने केलिए हमें जनमानस का स्तर बदलना होगा। . 4 संबंधोंः देव संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा, राम शर्मा, अखिल भारतीय गायत्री परिवार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में स्थित है। इस संस्थान की स्थापना गायत्री परिवार के पितृपुरुष पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा 11 अप्रैल 2002 में की गयी। . मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। . पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य (२० सितम्बर १९११ - ०२ जून १९९०) भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे जिन्होने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना की। उनने अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। . अखिल विश्व गायत्री परिवार एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। इसके संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य थे। .
युग निर्माण योजना नवनिर्माण की अभिनव योजना है, जिसकी संकल्पना पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा मथुरा में आयोजित सन एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन के सहस्रकुंडीय गायत्री महायज्ञ के समय की गई थी। व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज समाज निर्माण का लक्ष्य लेकर यह अभियान वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने सन एक हज़ार नौ सौ बासठ में गायत्री तपोभूमि, मथुरा से आरंभ किया। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन एवं सभ्य समाज की अभिनव रचना का लक्ष्य पूरा करने के लिए विगत कई दशकों से संचालित यह आंदोलन पूरे संसार में चलाया जा रहा है। नवनिर्माण का यह अभियान समय की एक अत्यंत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण पुकार है। प्रत्येक विचारशील व्यक्ति के लिए यह योजना अपनाएं जाने योग्य है। व्यक्ति के परिवर्तन से ही समाज, विश्व एवं युग का परिवर्तन संभव है। इस धरती पर स्वर्गीय वातावरण का सृजन करने केलिए हमें जनमानस का स्तर बदलना होगा। . चार संबंधोंः देव संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा, राम शर्मा, अखिल भारतीय गायत्री परिवार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में स्थित है। इस संस्थान की स्थापना गायत्री परिवार के पितृपुरुष पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा ग्यारह अप्रैल दो हज़ार दो में की गयी। . मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। . पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे जिन्होने अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना की। उनने अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। . अखिल विश्व गायत्री परिवार एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। इसके संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य थे। .
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार देर रात जीटीबी अस्पताल, जग प्रवेश चंद्र और अरुणा आसफ अली अस्पताल का औचक दौरा किया। इस दौरान अस्पतालों में कई वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी से नदारद मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को मरीजों के इलाज और जांच के लिए सीधे बड़े अस्पतालों में रेफर करने की परिपाटी से बचने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को अनावश्यक तरीके से बड़े अस्पतालों में रेफर करने के बजाय अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर भी छोटे अस्पतालों में अच्छे इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश करें। स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा- दिल्ली के छोटे अस्पताल भी प्राइवेट लैब में मरीजों को एमआरआई, सीटी स्कैन, रेडियो न्यूक्लोटाइड स्कैन सहित अन्य टेस्ट के लिए भेज सकते हैं। डाक के तहत ये सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। भारद्वाज ने बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आदेश है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इलाज और मेडिकल जांच के लिए दर-दर न भटकना पड़े। सौरभ भारद्वाज ने अस्पतालों के विभिन्न वार्डों में मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अस्पतालों में कई वरिष्ठ डॉक्टर नदारद मिले, इस पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य ने अनुपस्थित डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि अस्पतालों में कई मरीजों की बैडशीट नहीं बदली गई थी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गंदी बैडशीट पर लेटने से मरीजों में संक्रमण की संभावना बनी रहना लाजिमी है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिको-लीगल मामलों में कानूनी प्रक्रिया तुरंत पूरा होते ही मरीजों को तत्परता से राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल प्रशासन को अव्यवस्थाओं को दूर कर मरीजों को किफायती व गुणावत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने और साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले आहार की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार देर रात जीटीबी अस्पताल, जग प्रवेश चंद्र और अरुणा आसफ अली अस्पताल का औचक दौरा किया। इस दौरान अस्पतालों में कई वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी से नदारद मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को मरीजों के इलाज और जांच के लिए सीधे बड़े अस्पतालों में रेफर करने की परिपाटी से बचने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को अनावश्यक तरीके से बड़े अस्पतालों में रेफर करने के बजाय अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर भी छोटे अस्पतालों में अच्छे इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश करें। स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा- दिल्ली के छोटे अस्पताल भी प्राइवेट लैब में मरीजों को एमआरआई, सीटी स्कैन, रेडियो न्यूक्लोटाइड स्कैन सहित अन्य टेस्ट के लिए भेज सकते हैं। डाक के तहत ये सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। भारद्वाज ने बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आदेश है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इलाज और मेडिकल जांच के लिए दर-दर न भटकना पड़े। सौरभ भारद्वाज ने अस्पतालों के विभिन्न वार्डों में मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अस्पतालों में कई वरिष्ठ डॉक्टर नदारद मिले, इस पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य ने अनुपस्थित डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि अस्पतालों में कई मरीजों की बैडशीट नहीं बदली गई थी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गंदी बैडशीट पर लेटने से मरीजों में संक्रमण की संभावना बनी रहना लाजिमी है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिको-लीगल मामलों में कानूनी प्रक्रिया तुरंत पूरा होते ही मरीजों को तत्परता से राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल प्रशासन को अव्यवस्थाओं को दूर कर मरीजों को किफायती व गुणावत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने और साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले आहार की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
पद्धर - 14 साल के वनवास के बाद एक बार फिर शुरू होगा द्रंग का वरबाड़ी मेला। पद्धर मंडी जिला के सर्वश्रेष्ठ युवा एकता मंडल (द्रंग) ने 14 साल से बंद पड़े बरवाड़ी मेले को देव अजयपाल के आदेशानुसार 25-26 अप्रैल को पुनःशुरू करने का निर्णय लिया है। देव अजयपाल काशला को समर्पित इस मेले का आयोजन इससे पहले हिंदोस्तान साल्ट लिमिटेड नमक खान द्रंग करवाता आ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे नमक खान का कार्य बंद होता गया, द्रंग के बरवाड़ी मेले का आयोजन भी बंद हो गया। अब युवा एकता मंडल द्रंग ने इस मेले को दोबारा चलाने की मुहिम छेड़ी है और इनके सहयोग से एक बार द्रंग के भटौग में चलने वाला बरवाड़ी मेला युवाओं व स्थानीय लोगों के सहयोग शुरू हो रहा है। टांडू पंचायत के भटोग गांव में मेले के आयोजन के लिए मेला कमेटी भी गठित हो चुकी है। मेले के संदर्भ में युवा एकता मंडल एवं बरवाड़ी मेला कमेटी के अध्यक्ष शुभम शर्मा ने बताया कि मेले की दिनांक देवी देवताओं की अनुमति से तय की गई है। मेले को लेकर पूरे गांव ने युवा एकता मंडल के साथ तैयारी शुरू कर दी है । इस मेले में नागनी माता मेहड़, देव पाइंदल डोलरा, चामुंडा भगवती द्रंग सहित क्षेत्र के देवी-देवता मेले की शोभा बढ़ाएंगे। टांडू पंचायत के लोग, हिंदोस्तान साल्ट लिमिटेड तथा अनेक समाजसेवियों, महिला मंडलों और युवा मंडलों ने भी मेले के सफल आयोजन में सहयोग का आश्वासन दिया है । शुभम ने आशा जताते हुए कहा है कि जिस तरह से भगवान पुरुषोत्तम राम का 14 साल के वनवास के बाद स्वागत हुआ था, उसी तर्ज पर बरवाड़ी मेले को भी सजाया जाएगा। शुभम ने बताया कि मेले के शुभारंभ के लिए द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर एवं समापन समारोह के लिए सांसद रामस्वरूप शर्मा को बुलाया जाएगा ।
पद्धर - चौदह साल के वनवास के बाद एक बार फिर शुरू होगा द्रंग का वरबाड़ी मेला। पद्धर मंडी जिला के सर्वश्रेष्ठ युवा एकता मंडल ने चौदह साल से बंद पड़े बरवाड़ी मेले को देव अजयपाल के आदेशानुसार पच्चीस-छब्बीस अप्रैल को पुनःशुरू करने का निर्णय लिया है। देव अजयपाल काशला को समर्पित इस मेले का आयोजन इससे पहले हिंदोस्तान साल्ट लिमिटेड नमक खान द्रंग करवाता आ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे नमक खान का कार्य बंद होता गया, द्रंग के बरवाड़ी मेले का आयोजन भी बंद हो गया। अब युवा एकता मंडल द्रंग ने इस मेले को दोबारा चलाने की मुहिम छेड़ी है और इनके सहयोग से एक बार द्रंग के भटौग में चलने वाला बरवाड़ी मेला युवाओं व स्थानीय लोगों के सहयोग शुरू हो रहा है। टांडू पंचायत के भटोग गांव में मेले के आयोजन के लिए मेला कमेटी भी गठित हो चुकी है। मेले के संदर्भ में युवा एकता मंडल एवं बरवाड़ी मेला कमेटी के अध्यक्ष शुभम शर्मा ने बताया कि मेले की दिनांक देवी देवताओं की अनुमति से तय की गई है। मेले को लेकर पूरे गांव ने युवा एकता मंडल के साथ तैयारी शुरू कर दी है । इस मेले में नागनी माता मेहड़, देव पाइंदल डोलरा, चामुंडा भगवती द्रंग सहित क्षेत्र के देवी-देवता मेले की शोभा बढ़ाएंगे। टांडू पंचायत के लोग, हिंदोस्तान साल्ट लिमिटेड तथा अनेक समाजसेवियों, महिला मंडलों और युवा मंडलों ने भी मेले के सफल आयोजन में सहयोग का आश्वासन दिया है । शुभम ने आशा जताते हुए कहा है कि जिस तरह से भगवान पुरुषोत्तम राम का चौदह साल के वनवास के बाद स्वागत हुआ था, उसी तर्ज पर बरवाड़ी मेले को भी सजाया जाएगा। शुभम ने बताया कि मेले के शुभारंभ के लिए द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर एवं समापन समारोह के लिए सांसद रामस्वरूप शर्मा को बुलाया जाएगा ।
भीष्म पर्व में कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए सन्नद्ध दोनों पक्षों की सेनाओं में युद्धसम्बन्धी नियमों का निर्णय, संजय द्वारा धृतराष्ट्र को भूमि का महत्त्व बतलाते हुए जम्बूखण्ड के द्वीपों का वर्णन, शाकद्वीप तथा राहु, सूर्य और चन्द्रमा का प्रमाण, दोनों पक्षों की सेनाओं का आमने-सामने होना, अर्जुन के युद्ध-विषयक विषाद तथा व्याहमोह को दूर करने के लिए उन्हें उपदेश (श्रीमद्भगवद्गीता), उभय पक्ष के योद्धाओं में भीषण युद्ध तथा भीष्म के वध और शरशय्या पर लेटकर प्राणत्याग के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा करने आदि का निरूपण है। कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों-पांडवों की सेनाएँ आमने-सामने आ डटीं। कौरवों की सेना के आगे भीष्म थे तथा पांडवों की सेना का संचालन कर रहे थे- अर्जुन। अर्जुन ने जब देखा कि उसे अपने गुरु, पितामह, भाई-बंधु और सगे-संबंधियों से युद्ध करना है तो उसका हृदय काँप उठा। उसने सोचा कि वे ऐसे राज्य को लेकर क्या करेंगे, जो उन्हें अपने प्रियजनों को मारकर प्राप्त होगा। अर्जुन के मोह तथा भ्रम को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने कर्मयोग का उपदेश दिया, जो श्रीमद्भगवद गीता के रूप में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि होनी पहले हो चुकी है, तुम्हें तो केवल क्षत्रिय धर्म के अनुसार चलना है। धर्म पालन के लिए युद्ध करना ही चाहिए। कृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाते हुए कहा कि अधर्म के कारण कौरवों का नाश हो चुका है। अर्जुन ने देखा कि समस्त कौरव श्रीकृष्ण के मुख में समा रहे हैं। अर्जुन का मोह दूर हो गया तथा वे युद्ध के लिए तैयार हो गए। युद्ध प्रारंभ होने से पूर्व युधिष्ठिर रथ से उतरकर पैदल ही पितामह भीष्म के पास गए तथा उनके चरणस्पर्श करके उन्हें प्रणाम किया। इसी प्रकार युधिष्ठिर ने कृपाचार्य और द्रोणाचार्य को भी प्रणाम किया तथा विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया। युधिष्ठिर की धर्म-नीति को देखकर धृतराष्ट्र का पुत्र युयुत्सु इतना प्रभावित हुआ कि कौरन-सेना छोड़कर पांडवों से जा मिला। अर्जुन ने युद्ध प्रारंभ किया। देखते-ही देखते घमासान युद्ध छिड़ गया। भीष्म के सामने पांडव-सेना थर्रा उठी। अभिमन्यु ने भीष्म को रोका तथा उनकी ध्वजा को काट दिया। भीष्म पितामह अभिमन्यु के रण-कौशल को देखकर चकित थे। इस दिन के युद्ध में विराट पुत्र उत्तर कुमार को वीरगति प्राप्त हुई। संध्या होते ही युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई। पहले दिन के युद्ध से दुर्योधन बहुत प्रसन्न था। युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि आज के युद्ध से पितामह की अजेयता सिद्ध हो गई है। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को ढाँढ़स बँधाया। दूसरे दिन भीष्म ने नेतृत्व में कौरव-सेना ने पांडवों पर आक्रमण किया, जिससे पांडवों की सेना तितर-बितर हो गई। अर्जुन के कहने पर श्रीकृष्ण उनके रथ को भीष्म के सामने ले गए। अर्जुन और भीष्म में भयंकर युद्ध छिड़ गया। भीष्म साक्षात यमराज की तरह पांडव-सेना को काट रहे थे। भीष्म अर्जुन से लड़ना छोड़ भीम की तरफ भागे। सात्यकि के एक बाण से भीष्म का सारथी घायल होकर गिर पड़ा। उसके गिरते ही रथ के घोड़े भाग खड़े हुए जिससे पांडव सेना में उत्साह का संचार हुआ। संध्या हो गई थी, दोनों ओर के सेनापतियों ने युद्ध बंद होने का शंख बजाया। तीसरे दिन भी पांडव-सेना के सामने कौरवों की एक न चली। भीम के एक बाण से दुर्योधन अचेत हो गया। दुर्योधन का सारथी उन्हें युद्ध-भूमि से हटा ले गया। कौरवों ने समझा कि दुर्योधन युद्ध-क्षेत्र से भाग खड़े हुए हैं। सैनिकों में भगदड़ मच गई। तभी भीम ने सैकड़ों सैनिकों को मार डाला। संध्या के समय युद्ध बंद होने पर दुर्योधन भीष्म के शिविर में गया तथा कहा कि आप जी (मन) लगाकर युद्ध नहीं करते। भीष्म यह सुनकर क्रोधित हो उठे और बोले कि पांडव अजेय हैं, फिर भी मैं प्रयास करूँगा। चौथे दिन भीष्म ने प्रबल वेग से पांडवों पर आक्रमण किया। पांडव सेना में हाहाकार मच गया। आज अर्जुन का वश भी उनके सामने नहीं चल रहा था। पाँचवें, छठे और सातवें दिन भी भयंकर युद्ध चलता रहा। आठवें दिन का युद्ध घनघोर था। इस दिन अर्जुन की दूसरी पत्नी उलूपी से उत्पन्न पुत्र महारथी इरावान मारा गया। उसकी मृत्यु से अर्जुन बहुत क्षुब्ध हो उठे। उन्होंने कौरवों की अपार सेना नष्ट कर दी। आज का भीषण युद्ध देखकर दुर्योधन कर्ण के पास गया। कर्ण ने उसे सांत्वना दी कि भीष्म का अंत होने पर वह अपने दिव्यस्त्रों से पांडव का अंत कर देगा। दुर्योधन भीष्म पितामह के भी पास गया और बोला पितामह, लगता है आप जी लगाकर नहीं लड़ रहे। यदि आप भीतर-ही-भीतर पांडवों का समर्थन कर रहे हों तो आज्ञा दीजिए मैं कर्ण को सेनापति बना दूँ। भीष्म पितामह ने दुर्योधन से कहा कि योद्धा अंत तक युद्ध करता है। कर्ण की वीरता तुम विराट नगर में देख चुके हो। कल के युद्ध में मैं कुछ कसर न छोडूँगा। नौवें दिन के युद्ध में भीष्म के बाणों से अर्जुन भी घायल हो गए। कृष्ण के अंग भी जर्जर हो गए। श्रीकृष्ण अपनी प्रतिज्ञा भूलकर रथ का एक चक्र उठाकर भीष्म को मारने के लिए दौड़े। अर्जुन भी रथ से कूदे और कृष्ण के पैरों से लिपट पड़े। संध्या हुई और युद्ध बंद हुआ। रात्रि के समय युधिष्ठिर ने कृष्ण से मंत्रणा की। कृष्ण ने कहा कि क्यों न हम भीष्म से ही उन पर विजय प्राप्त करने का उपाय पूछें। श्रीकृष्ण और पांडव भीष्म के पास पहुँचे। भीष्म ने कहा कि जब तक मैं जीवित हूँ तब तक कौरव पक्ष अजेय है। भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु का रहस्य बता दिया। द्रुपद का बेटा शिखंडी पूर्वजन्म का स्त्री है। मेरे वध के लिए उसने शिव की तपस्या की थी। द्रुपद के घर वह कन्या के रूप में पैदा हुआ, लेकिन दानव के वर से फिर पुरुष बन गया। यदि उसे सामने करके अर्जुन मुझ पर तीर बरसाएगा, तो मैं अस्त्र नहीं चलाऊँगा। दसवें दिन के युद्ध में शिखंडी पांडवों की ओर से भीष्म पितामह के सामने आकर डट गया, जिसे देखते ही भीष्म ने अस्त्र परित्याग कर दिया। कृष्ण के कहने पर शिखंडी की आड़ लेकर अर्जुन ने अपने बाणों से भीष्म को जर्जर कर दिया तथा वे रथ से नीचे गिर पड़े, पर पृथ्वी पर नहीं, तीरों की शय्या पर पड़े रहे। भीष्म के गिरते ही दोनों पक्षों में हाहाकार मच गया। कौरवों तथा पांडव दोनों शोक मनाने लगे। भीष्म ने कहा, मेरा सिर लटक रहा है, इसका उपाय करो। दुर्योधन एक तकिया लाया, पर अर्जुन ने तीन बाण भीष्म के सिर के नीचे ऐसे मारे कि वे सिर का आधार बन गए। फिर भीष्म ने कहा, प्यास लगी है। दुर्योधन ने सोने के पात्र में जल मँगाया, पर भीष्म ने अर्जुन की तरफ फिर देखा। अर्जुन ने एक बाण पृथ्वी पर ऐसा मारा कि स्वच्छ जल-धारा फूटकर भीष्म के मुहँ पर गिरने लगी। पानी पीकर भीष्म ने कौरव-पांडवों को जाने की आज्ञा दी और कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने पर मैं प्राण त्याग करूँगा। भीष्म शरशय्या पर गिरने का समाचार सुनकर कर्ण अपनी शत्रुता भूलकर भीष्म से मिलने गया। उसने पितामह को प्रणाम किया। भीष्म ने कर्ण को आशीर्वाद दिया और समझाया कि यदि तुम चाहो तो युद्ध रुक सकता है। दुर्योधन समझता है कि तुम्हारी सहायता से वह विजयी होगा, पर अर्जुन को जीतना संभव नहीं। तुम दुर्योधन को समझाओ। तुम पांडवों के भाई तथा कुंती के पुत्र हो। तुम दोनों पक्षों में शांति स्थापित करो। कर्ण ने कहा,पितामह अब संघर्ष दूर तक पहुँच गया है। मैं तो अब सूत अधिरथ का ही पुत्र हूँ, जिसने मेरा पालन-पोषण किया है। यह कहकर कर्ण अपने शिविर में लौट आया। - जम्बूखण्डविनिर्माण पर्व, - भूमि पर्व, - श्रीमद्भगवद्गीता पर्व, - भीष्मवध पर्व।
भीष्म पर्व में कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए सन्नद्ध दोनों पक्षों की सेनाओं में युद्धसम्बन्धी नियमों का निर्णय, संजय द्वारा धृतराष्ट्र को भूमि का महत्त्व बतलाते हुए जम्बूखण्ड के द्वीपों का वर्णन, शाकद्वीप तथा राहु, सूर्य और चन्द्रमा का प्रमाण, दोनों पक्षों की सेनाओं का आमने-सामने होना, अर्जुन के युद्ध-विषयक विषाद तथा व्याहमोह को दूर करने के लिए उन्हें उपदेश , उभय पक्ष के योद्धाओं में भीषण युद्ध तथा भीष्म के वध और शरशय्या पर लेटकर प्राणत्याग के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा करने आदि का निरूपण है। कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों-पांडवों की सेनाएँ आमने-सामने आ डटीं। कौरवों की सेना के आगे भीष्म थे तथा पांडवों की सेना का संचालन कर रहे थे- अर्जुन। अर्जुन ने जब देखा कि उसे अपने गुरु, पितामह, भाई-बंधु और सगे-संबंधियों से युद्ध करना है तो उसका हृदय काँप उठा। उसने सोचा कि वे ऐसे राज्य को लेकर क्या करेंगे, जो उन्हें अपने प्रियजनों को मारकर प्राप्त होगा। अर्जुन के मोह तथा भ्रम को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने कर्मयोग का उपदेश दिया, जो श्रीमद्भगवद गीता के रूप में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि होनी पहले हो चुकी है, तुम्हें तो केवल क्षत्रिय धर्म के अनुसार चलना है। धर्म पालन के लिए युद्ध करना ही चाहिए। कृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाते हुए कहा कि अधर्म के कारण कौरवों का नाश हो चुका है। अर्जुन ने देखा कि समस्त कौरव श्रीकृष्ण के मुख में समा रहे हैं। अर्जुन का मोह दूर हो गया तथा वे युद्ध के लिए तैयार हो गए। युद्ध प्रारंभ होने से पूर्व युधिष्ठिर रथ से उतरकर पैदल ही पितामह भीष्म के पास गए तथा उनके चरणस्पर्श करके उन्हें प्रणाम किया। इसी प्रकार युधिष्ठिर ने कृपाचार्य और द्रोणाचार्य को भी प्रणाम किया तथा विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया। युधिष्ठिर की धर्म-नीति को देखकर धृतराष्ट्र का पुत्र युयुत्सु इतना प्रभावित हुआ कि कौरन-सेना छोड़कर पांडवों से जा मिला। अर्जुन ने युद्ध प्रारंभ किया। देखते-ही देखते घमासान युद्ध छिड़ गया। भीष्म के सामने पांडव-सेना थर्रा उठी। अभिमन्यु ने भीष्म को रोका तथा उनकी ध्वजा को काट दिया। भीष्म पितामह अभिमन्यु के रण-कौशल को देखकर चकित थे। इस दिन के युद्ध में विराट पुत्र उत्तर कुमार को वीरगति प्राप्त हुई। संध्या होते ही युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई। पहले दिन के युद्ध से दुर्योधन बहुत प्रसन्न था। युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि आज के युद्ध से पितामह की अजेयता सिद्ध हो गई है। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को ढाँढ़स बँधाया। दूसरे दिन भीष्म ने नेतृत्व में कौरव-सेना ने पांडवों पर आक्रमण किया, जिससे पांडवों की सेना तितर-बितर हो गई। अर्जुन के कहने पर श्रीकृष्ण उनके रथ को भीष्म के सामने ले गए। अर्जुन और भीष्म में भयंकर युद्ध छिड़ गया। भीष्म साक्षात यमराज की तरह पांडव-सेना को काट रहे थे। भीष्म अर्जुन से लड़ना छोड़ भीम की तरफ भागे। सात्यकि के एक बाण से भीष्म का सारथी घायल होकर गिर पड़ा। उसके गिरते ही रथ के घोड़े भाग खड़े हुए जिससे पांडव सेना में उत्साह का संचार हुआ। संध्या हो गई थी, दोनों ओर के सेनापतियों ने युद्ध बंद होने का शंख बजाया। तीसरे दिन भी पांडव-सेना के सामने कौरवों की एक न चली। भीम के एक बाण से दुर्योधन अचेत हो गया। दुर्योधन का सारथी उन्हें युद्ध-भूमि से हटा ले गया। कौरवों ने समझा कि दुर्योधन युद्ध-क्षेत्र से भाग खड़े हुए हैं। सैनिकों में भगदड़ मच गई। तभी भीम ने सैकड़ों सैनिकों को मार डाला। संध्या के समय युद्ध बंद होने पर दुर्योधन भीष्म के शिविर में गया तथा कहा कि आप जी लगाकर युद्ध नहीं करते। भीष्म यह सुनकर क्रोधित हो उठे और बोले कि पांडव अजेय हैं, फिर भी मैं प्रयास करूँगा। चौथे दिन भीष्म ने प्रबल वेग से पांडवों पर आक्रमण किया। पांडव सेना में हाहाकार मच गया। आज अर्जुन का वश भी उनके सामने नहीं चल रहा था। पाँचवें, छठे और सातवें दिन भी भयंकर युद्ध चलता रहा। आठवें दिन का युद्ध घनघोर था। इस दिन अर्जुन की दूसरी पत्नी उलूपी से उत्पन्न पुत्र महारथी इरावान मारा गया। उसकी मृत्यु से अर्जुन बहुत क्षुब्ध हो उठे। उन्होंने कौरवों की अपार सेना नष्ट कर दी। आज का भीषण युद्ध देखकर दुर्योधन कर्ण के पास गया। कर्ण ने उसे सांत्वना दी कि भीष्म का अंत होने पर वह अपने दिव्यस्त्रों से पांडव का अंत कर देगा। दुर्योधन भीष्म पितामह के भी पास गया और बोला पितामह, लगता है आप जी लगाकर नहीं लड़ रहे। यदि आप भीतर-ही-भीतर पांडवों का समर्थन कर रहे हों तो आज्ञा दीजिए मैं कर्ण को सेनापति बना दूँ। भीष्म पितामह ने दुर्योधन से कहा कि योद्धा अंत तक युद्ध करता है। कर्ण की वीरता तुम विराट नगर में देख चुके हो। कल के युद्ध में मैं कुछ कसर न छोडूँगा। नौवें दिन के युद्ध में भीष्म के बाणों से अर्जुन भी घायल हो गए। कृष्ण के अंग भी जर्जर हो गए। श्रीकृष्ण अपनी प्रतिज्ञा भूलकर रथ का एक चक्र उठाकर भीष्म को मारने के लिए दौड़े। अर्जुन भी रथ से कूदे और कृष्ण के पैरों से लिपट पड़े। संध्या हुई और युद्ध बंद हुआ। रात्रि के समय युधिष्ठिर ने कृष्ण से मंत्रणा की। कृष्ण ने कहा कि क्यों न हम भीष्म से ही उन पर विजय प्राप्त करने का उपाय पूछें। श्रीकृष्ण और पांडव भीष्म के पास पहुँचे। भीष्म ने कहा कि जब तक मैं जीवित हूँ तब तक कौरव पक्ष अजेय है। भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु का रहस्य बता दिया। द्रुपद का बेटा शिखंडी पूर्वजन्म का स्त्री है। मेरे वध के लिए उसने शिव की तपस्या की थी। द्रुपद के घर वह कन्या के रूप में पैदा हुआ, लेकिन दानव के वर से फिर पुरुष बन गया। यदि उसे सामने करके अर्जुन मुझ पर तीर बरसाएगा, तो मैं अस्त्र नहीं चलाऊँगा। दसवें दिन के युद्ध में शिखंडी पांडवों की ओर से भीष्म पितामह के सामने आकर डट गया, जिसे देखते ही भीष्म ने अस्त्र परित्याग कर दिया। कृष्ण के कहने पर शिखंडी की आड़ लेकर अर्जुन ने अपने बाणों से भीष्म को जर्जर कर दिया तथा वे रथ से नीचे गिर पड़े, पर पृथ्वी पर नहीं, तीरों की शय्या पर पड़े रहे। भीष्म के गिरते ही दोनों पक्षों में हाहाकार मच गया। कौरवों तथा पांडव दोनों शोक मनाने लगे। भीष्म ने कहा, मेरा सिर लटक रहा है, इसका उपाय करो। दुर्योधन एक तकिया लाया, पर अर्जुन ने तीन बाण भीष्म के सिर के नीचे ऐसे मारे कि वे सिर का आधार बन गए। फिर भीष्म ने कहा, प्यास लगी है। दुर्योधन ने सोने के पात्र में जल मँगाया, पर भीष्म ने अर्जुन की तरफ फिर देखा। अर्जुन ने एक बाण पृथ्वी पर ऐसा मारा कि स्वच्छ जल-धारा फूटकर भीष्म के मुहँ पर गिरने लगी। पानी पीकर भीष्म ने कौरव-पांडवों को जाने की आज्ञा दी और कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने पर मैं प्राण त्याग करूँगा। भीष्म शरशय्या पर गिरने का समाचार सुनकर कर्ण अपनी शत्रुता भूलकर भीष्म से मिलने गया। उसने पितामह को प्रणाम किया। भीष्म ने कर्ण को आशीर्वाद दिया और समझाया कि यदि तुम चाहो तो युद्ध रुक सकता है। दुर्योधन समझता है कि तुम्हारी सहायता से वह विजयी होगा, पर अर्जुन को जीतना संभव नहीं। तुम दुर्योधन को समझाओ। तुम पांडवों के भाई तथा कुंती के पुत्र हो। तुम दोनों पक्षों में शांति स्थापित करो। कर्ण ने कहा,पितामह अब संघर्ष दूर तक पहुँच गया है। मैं तो अब सूत अधिरथ का ही पुत्र हूँ, जिसने मेरा पालन-पोषण किया है। यह कहकर कर्ण अपने शिविर में लौट आया। - जम्बूखण्डविनिर्माण पर्व, - भूमि पर्व, - श्रीमद्भगवद्गीता पर्व, - भीष्मवध पर्व।
जनज्वार। समाचार वेबसाइट द कश्मीरियत की टीम ने मंगलवार 27 अगस्त को अपने संपादक काजी शिबली को खोजने के लिए मीडिया से मदद मांगी है। द कश्मीरियत न्यूज वेबसाइट की टीम ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से अपील की है कि 'हमारे संपादक क़ाज़ी शिबली को 25 जुलाई 2019 के दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। 'द कश्मीरियत' की टीम को 25 जुलाई को पुलिस थाने से कॉल आया था, और हमें किसी तरह की पूछताछ के लिए थाने पर पहुंचने को कहा गया। दिन ख़तम होने पर टीम के बाकी सदस्यों को तो वापस जाने को कहा गया, पर क़ाज़ी शिब्ली से और भी पूछताछ के सिलसिले में रुकने को कहा गया। इसके बाद वो 7-8 दिन हिरासत में थे। जब हमने इसकी वजह जानना चाही तो हमें कोई जवाब नहीं मिला। आख़िरकार, पुलिस ने क़ाज़ी शिबली के परिवार को कहा की उन्हें 5 अगस्त को छोड़ दिया जाएगा। उनके भाई क़ाज़ी उमैर का कहना है, "मैं उन्हें दोपहर का खाना देने पुलिस थाने गया था, तब मेरे भाई ने मुझे पानी की बोतल लेने के लिए भेज दिया। जब मैं बोतल के साथ वापस गया तो वो गायब था। मैंने पुलिस वाले से पूछा तो उसने बताया की मेरे भाई को मुख़्य पुलिस थाना (सदर) में भेज दिया गया है। फिर मैं सदर पुलिस थाना गया, पर वो वहां भी नहीं मिले। तब से अब तक 'द कश्मीरियत' टीम और उनका परिवार उनको ढूंढ़ रहा है, पर हमें कोई भी ठोस जानकारी नहीं दी गयी है। हमें सिर्फ इतना ही पता है कि उनके पास बिलकुल पैसे नहीं हैं, और कपड़े भी नहीं हैं। हमें पुलिस थाने के अंदर भी जाने नहीं दिया जाता। उनके भाई ने फेसबुक पर लिखा, "लोगों का कहना है कि उन्हें आगरा जेल भेज दिया गया है। उनके पास बिलकुल भी पैसे और कपड़े नहीं हैं, क्योंकि उनको यहाँ से बाहर ले जाते वक्त हमें जानकारी नहीं दी गयी थी। मैं पिछले 3 हफ़्तों से उनका ठिकाना ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, पर कुछ हासिल नहीं हुआ। कल मैंने आगरा पुलिस थाने को फ़ोन किया, जहाँ उस व्यक्ति ने कहा कि "उनके पास कोई जानकारी नहीं है।" मैं अपने भाई के ठिकाने और ख़ैरियत को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित और परेशान हूँ।" द कश्मीरियत न्यूज वेबसाइट की टीम ने अपील की है, हम आप सबसे गुज़ारिश करते हैं कि हमें कोई भी जानकारी मिलने में मदद करें। गौरतलब है कि काजी शिबली को पिछले महीने 25 जुलाई को जम्मू कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान प्रेमी कहते हुए और राज्य में सेना की तैनाती के सम्बन्ध में आधिकारिक जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कहा गया कि उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से कुछ ऐसे ट्वीट किये हैं जो देश की जानकारियां लीक करने वाले हैं। (अनुवाद : कश्मीर खबर टीम)
जनज्वार। समाचार वेबसाइट द कश्मीरियत की टीम ने मंगलवार सत्ताईस अगस्त को अपने संपादक काजी शिबली को खोजने के लिए मीडिया से मदद मांगी है। द कश्मीरियत न्यूज वेबसाइट की टीम ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से अपील की है कि 'हमारे संपादक क़ाज़ी शिबली को पच्चीस जुलाई दो हज़ार उन्नीस के दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। 'द कश्मीरियत' की टीम को पच्चीस जुलाई को पुलिस थाने से कॉल आया था, और हमें किसी तरह की पूछताछ के लिए थाने पर पहुंचने को कहा गया। दिन ख़तम होने पर टीम के बाकी सदस्यों को तो वापस जाने को कहा गया, पर क़ाज़ी शिब्ली से और भी पूछताछ के सिलसिले में रुकने को कहा गया। इसके बाद वो सात-आठ दिन हिरासत में थे। जब हमने इसकी वजह जानना चाही तो हमें कोई जवाब नहीं मिला। आख़िरकार, पुलिस ने क़ाज़ी शिबली के परिवार को कहा की उन्हें पाँच अगस्त को छोड़ दिया जाएगा। उनके भाई क़ाज़ी उमैर का कहना है, "मैं उन्हें दोपहर का खाना देने पुलिस थाने गया था, तब मेरे भाई ने मुझे पानी की बोतल लेने के लिए भेज दिया। जब मैं बोतल के साथ वापस गया तो वो गायब था। मैंने पुलिस वाले से पूछा तो उसने बताया की मेरे भाई को मुख़्य पुलिस थाना में भेज दिया गया है। फिर मैं सदर पुलिस थाना गया, पर वो वहां भी नहीं मिले। तब से अब तक 'द कश्मीरियत' टीम और उनका परिवार उनको ढूंढ़ रहा है, पर हमें कोई भी ठोस जानकारी नहीं दी गयी है। हमें सिर्फ इतना ही पता है कि उनके पास बिलकुल पैसे नहीं हैं, और कपड़े भी नहीं हैं। हमें पुलिस थाने के अंदर भी जाने नहीं दिया जाता। उनके भाई ने फेसबुक पर लिखा, "लोगों का कहना है कि उन्हें आगरा जेल भेज दिया गया है। उनके पास बिलकुल भी पैसे और कपड़े नहीं हैं, क्योंकि उनको यहाँ से बाहर ले जाते वक्त हमें जानकारी नहीं दी गयी थी। मैं पिछले तीन हफ़्तों से उनका ठिकाना ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, पर कुछ हासिल नहीं हुआ। कल मैंने आगरा पुलिस थाने को फ़ोन किया, जहाँ उस व्यक्ति ने कहा कि "उनके पास कोई जानकारी नहीं है।" मैं अपने भाई के ठिकाने और ख़ैरियत को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित और परेशान हूँ।" द कश्मीरियत न्यूज वेबसाइट की टीम ने अपील की है, हम आप सबसे गुज़ारिश करते हैं कि हमें कोई भी जानकारी मिलने में मदद करें। गौरतलब है कि काजी शिबली को पिछले महीने पच्चीस जुलाई को जम्मू कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान प्रेमी कहते हुए और राज्य में सेना की तैनाती के सम्बन्ध में आधिकारिक जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कहा गया कि उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से कुछ ऐसे ट्वीट किये हैं जो देश की जानकारियां लीक करने वाले हैं।
सीकर में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच घने कोहरे में 6 वाहन आपस में टकरा गए। जिसमें रोडवेज बस के कंडक्टर की मौत हो गई और 5 सवारी घायल हो गई। एक के बाद एक वाहनों के टकराने से 8 किमी का जाम लग गया। हादसा फतेहपुर में देवास रोड पर मंगलवार सुबह करीब 7. 30 बजे हुआ। फतेहपुर में देवास रोड पर आज सुबह सरकारी कॉलेज के पास होटल से एक ट्रक सड़क की तरफ घूम रहा था। ट्रक के पीछे रोडवेज बस, उसके पीछे दो पिकअप, एक रोडवेज और एक कार चल रही थी। सड़क पर कोहरा छाने से थोड़ी दूरी पर देख पाना भी मुश्किल था। ऐसे में ट्रक के पीछे चल रही रोडवेज टकरा गई। टक्कर के बाद रोडवेज के रूकते ही पीछे चल रही दोनों पिकअप और एक कार आपस में टकरा गई। सुबह- सुबह हाईवे पर एक के बाद 6 वाहनों के आपस में टकराने से तेज धमाके जैसे आवाज हुई। सबसे आगे चल रहे ट्रक और रोडवेज की टक्कर इतनी तेज थी कि बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसा इतना भयानक था कि बस कंडक्टर सांवरमल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं ड्राइवर विजय सिंह बुरी तरह फंस गया था। पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे बाद ड्राइवर को बाहर निकाला। वहीं सवारी उस्मान अली निवासी उत्तर प्रदेश, निशा निवासी चूरू, प्रेम सिंह निवासी बीकानेर, राजेंद्र सिंह निवासी रामगढ़ घायल हो गए। फिलहाल घायलों का इलाज जारी है। हादसे के बाद हाईवे पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। करीब 8 किमी तक का जाम लग गया। सूचना पर तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायलों और शव को धानुका हॉस्पिटल में भेजा। पीछे की गाड़ियों के लोगों को मामूली चोट आई। पुलिस ने गाड़ियों को हटवाकर जाम हटवाया। जिसमें करीब 2 घंटे लग गए। कंडक्टर के परिजनों को सूचना दी गई है। उनके आने पर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। हाईवे के पास फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र पर आज सुबह कोहरा न के बराबर था। वहीं कुछ दूरी आगे देवास रोड पर घने कोहरे के चलते विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम थी। इस कारण वाहन आपस में टकरा गए। सीकर के कृषि अनुसंधान केंद्र फतेहपुर पर आज न्यूनतम तापमान माइनस 1. 7 डिग्री दर्ज किया है। शीतलहर के असर के चलते सीकर में लगातार दूसरे दिन भी सीजन की सबसे सर्द रात रिकॉर्ड की गई है। खेतों में बर्फ जमी हुई देखने को मिली। सुबह फतेहपुर समेत आसपास के कई इलाकों में कोहरा भी हवा के वेग के असर से छाया रहा। मौसम विशेषज्ञों की माने तो सीकर में कल भी शीतलहर का असर रहेगा। जिससे कड़ाके की सर्दी का एहसास होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सीकर में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच घने कोहरे में छः वाहन आपस में टकरा गए। जिसमें रोडवेज बस के कंडक्टर की मौत हो गई और पाँच सवारी घायल हो गई। एक के बाद एक वाहनों के टकराने से आठ किमी का जाम लग गया। हादसा फतेहपुर में देवास रोड पर मंगलवार सुबह करीब सात. तीस बजे हुआ। फतेहपुर में देवास रोड पर आज सुबह सरकारी कॉलेज के पास होटल से एक ट्रक सड़क की तरफ घूम रहा था। ट्रक के पीछे रोडवेज बस, उसके पीछे दो पिकअप, एक रोडवेज और एक कार चल रही थी। सड़क पर कोहरा छाने से थोड़ी दूरी पर देख पाना भी मुश्किल था। ऐसे में ट्रक के पीछे चल रही रोडवेज टकरा गई। टक्कर के बाद रोडवेज के रूकते ही पीछे चल रही दोनों पिकअप और एक कार आपस में टकरा गई। सुबह- सुबह हाईवे पर एक के बाद छः वाहनों के आपस में टकराने से तेज धमाके जैसे आवाज हुई। सबसे आगे चल रहे ट्रक और रोडवेज की टक्कर इतनी तेज थी कि बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसा इतना भयानक था कि बस कंडक्टर सांवरमल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं ड्राइवर विजय सिंह बुरी तरह फंस गया था। पुलिस ने करीब डेढ़ घंटे बाद ड्राइवर को बाहर निकाला। वहीं सवारी उस्मान अली निवासी उत्तर प्रदेश, निशा निवासी चूरू, प्रेम सिंह निवासी बीकानेर, राजेंद्र सिंह निवासी रामगढ़ घायल हो गए। फिलहाल घायलों का इलाज जारी है। हादसे के बाद हाईवे पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। करीब आठ किमी तक का जाम लग गया। सूचना पर तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायलों और शव को धानुका हॉस्पिटल में भेजा। पीछे की गाड़ियों के लोगों को मामूली चोट आई। पुलिस ने गाड़ियों को हटवाकर जाम हटवाया। जिसमें करीब दो घंटाटे लग गए। कंडक्टर के परिजनों को सूचना दी गई है। उनके आने पर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। हाईवे के पास फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र पर आज सुबह कोहरा न के बराबर था। वहीं कुछ दूरी आगे देवास रोड पर घने कोहरे के चलते विजिबिलिटी पचास मीटर से भी कम थी। इस कारण वाहन आपस में टकरा गए। सीकर के कृषि अनुसंधान केंद्र फतेहपुर पर आज न्यूनतम तापमान माइनस एक. सात डिग्री दर्ज किया है। शीतलहर के असर के चलते सीकर में लगातार दूसरे दिन भी सीजन की सबसे सर्द रात रिकॉर्ड की गई है। खेतों में बर्फ जमी हुई देखने को मिली। सुबह फतेहपुर समेत आसपास के कई इलाकों में कोहरा भी हवा के वेग के असर से छाया रहा। मौसम विशेषज्ञों की माने तो सीकर में कल भी शीतलहर का असर रहेगा। जिससे कड़ाके की सर्दी का एहसास होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोलकाता, 28 फरवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को यूक्रेन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की और उनसे आग्रह किया कि वे देश के साथ तालमेल बिठाने के लिए राष्ट्रीय संकल्प के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार करें। अंतरराष्ट्रीय शांति और गैर-आक्रामकता के लिए लंबे समय से खड़ा है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में, बनर्जी ने दोहराया कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने और विशेष रूप से "संकट में हमारे छात्रों को त्वरित हाथ" देने के संबंध में देश एकजुट है। ममता के तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया है, "मैं आपसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान मेरे बिना शर्त समर्थन को स्वीकार करने और इस पर विचार करने का अनुरोध करूंगा कि क्या आप संकट से बाहर निकलने के हमारे राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने के लिए अब एक सर्वदलीय बैठक करना चाहेंगे। " . बनर्जी ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, भारत को दुनिया को शांतिपूर्ण समाधान देने के लिए आगे आना चाहिए और हमें इसे बिना किसी हिचकिचाहट के पेश करना चाहिए।
कोलकाता, अट्ठाईस फरवरी : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को यूक्रेन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की और उनसे आग्रह किया कि वे देश के साथ तालमेल बिठाने के लिए राष्ट्रीय संकल्प के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार करें। अंतरराष्ट्रीय शांति और गैर-आक्रामकता के लिए लंबे समय से खड़ा है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में, बनर्जी ने दोहराया कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने और विशेष रूप से "संकट में हमारे छात्रों को त्वरित हाथ" देने के संबंध में देश एकजुट है। ममता के तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया है, "मैं आपसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान मेरे बिना शर्त समर्थन को स्वीकार करने और इस पर विचार करने का अनुरोध करूंगा कि क्या आप संकट से बाहर निकलने के हमारे राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने के लिए अब एक सर्वदलीय बैठक करना चाहेंगे। " . बनर्जी ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, भारत को दुनिया को शांतिपूर्ण समाधान देने के लिए आगे आना चाहिए और हमें इसे बिना किसी हिचकिचाहट के पेश करना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे (Ashwini Choubey) के काफिले पर गुरुवार की शाम बक्सर में पत्थरबाजी हो गई। दरअसल, घटना बक्सर बनारपुर गांव की है। बता दें कि पिछले दिनों पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों पर लाठियां बरसाने, नाबालिग बच्चों के पकड़े जाने को लेकर लोग आक्रोशित थे। MSP गारंटी और बिजली कानून की वापसी पर किसान आंदोलन एक बार फिर उग्र हो सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बावजूद आंदोलन खत्म करने के मूड में दिखाई नहीं दे रहा है। BIG BREAKING : प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को Repeal करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे।
केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे के काफिले पर गुरुवार की शाम बक्सर में पत्थरबाजी हो गई। दरअसल, घटना बक्सर बनारपुर गांव की है। बता दें कि पिछले दिनों पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों पर लाठियां बरसाने, नाबालिग बच्चों के पकड़े जाने को लेकर लोग आक्रोशित थे। MSP गारंटी और बिजली कानून की वापसी पर किसान आंदोलन एक बार फिर उग्र हो सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बावजूद आंदोलन खत्म करने के मूड में दिखाई नहीं दे रहा है। BIG BREAKING : प्रधानमंत्री ने कहा कि आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को Repeal करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे।
काबुल : ईद उल अजहा (बकरीद) के मौके पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन को रॉकेट को निशाना बनाया गया। गनीमत ये रही कि ये रॉकेट अपने निशाना चूक गए। राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाकर जिस समय हमले हुए उस समय बकरीद की नमाज पढ़ी जा रही थी। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। रायटर्स न्यूज एजेंसी ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से कहा कि यह साफ नहीं हो सका है कि इस हमल के पीछे कौन है। स्थानीय टीवी फुटेज में दिखाया गया कि जिस समय रॉकेट से हमले और धमाके हो रहे थे उस समय राष्ट्रपति अशरफ ने नमाज पढ़ना जारी रखा। राष्ट्रपति भवन के पास रॉकेट से ये हमले सुबह आठ बजे के करीब हुए। राष्ट्रपति भवन के आस-पास का इलाका ग्रीन जोन में स्थित है और यहां अमेरिका सहित कई देशों के दूतावास स्थित हैं। नमाज पढ़ने के बाद राष्ट्रपति घनि ने वहां भाषण भी दिया जिसे स्थानीय टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया। अफगानिस्तान में मंगलवार से बकरीद की छुट्टियां शुरू हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति भवन के पास एक के बाद एक तीन रॉकेट गिरे। रॉकेट विस्फोट की आवाज दूर तक सुनाई पड़ी। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइज स्तनेकजई ने कहा, 'आज अफगानिस्तान के दुश्मनों ने काबुल शहर के कई हिस्सों में रॉकेट से हमले किए। ये तीनों रॉकेट अलग-अलग हिस्सों में गिरे। अभी जो शुरुआती जांच रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ' यह पहली बार नहीं है जब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाया गया है। इसके पहले भी इसे निशाना बनाते हुए हमले हो चुके हैं। राष्ट्रपति भवन पर पिछला हमला गत दिसंबर में हुआ था। राष्ट्रपति भवन के पास रॉकेट के हमले ऐसे समय हुए हैं जब कई प्रांतों में अफगान सुरक्षाबलों और तालिबान के बीच संघर्ष चल रहा है। अमेरिकी और नाटो बलों की वापसी शुरू होने के बाद तालिबान ने देश के बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण कर लिया है। देश में शांति स्थापित करने को लेकर तालिबान की अफगान सरकार के साथ दोहा में दो दौर की असफल वार्ता हुई है। दुनिया के करीब 15 देशों ने बकरीद के मौके पर तालिबान से सीजफायर करने की अपील की है।
काबुल : ईद उल अजहा के मौके पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन को रॉकेट को निशाना बनाया गया। गनीमत ये रही कि ये रॉकेट अपने निशाना चूक गए। राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाकर जिस समय हमले हुए उस समय बकरीद की नमाज पढ़ी जा रही थी। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। रायटर्स न्यूज एजेंसी ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से कहा कि यह साफ नहीं हो सका है कि इस हमल के पीछे कौन है। स्थानीय टीवी फुटेज में दिखाया गया कि जिस समय रॉकेट से हमले और धमाके हो रहे थे उस समय राष्ट्रपति अशरफ ने नमाज पढ़ना जारी रखा। राष्ट्रपति भवन के पास रॉकेट से ये हमले सुबह आठ बजे के करीब हुए। राष्ट्रपति भवन के आस-पास का इलाका ग्रीन जोन में स्थित है और यहां अमेरिका सहित कई देशों के दूतावास स्थित हैं। नमाज पढ़ने के बाद राष्ट्रपति घनि ने वहां भाषण भी दिया जिसे स्थानीय टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया। अफगानिस्तान में मंगलवार से बकरीद की छुट्टियां शुरू हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति भवन के पास एक के बाद एक तीन रॉकेट गिरे। रॉकेट विस्फोट की आवाज दूर तक सुनाई पड़ी। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइज स्तनेकजई ने कहा, 'आज अफगानिस्तान के दुश्मनों ने काबुल शहर के कई हिस्सों में रॉकेट से हमले किए। ये तीनों रॉकेट अलग-अलग हिस्सों में गिरे। अभी जो शुरुआती जांच रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ' यह पहली बार नहीं है जब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाया गया है। इसके पहले भी इसे निशाना बनाते हुए हमले हो चुके हैं। राष्ट्रपति भवन पर पिछला हमला गत दिसंबर में हुआ था। राष्ट्रपति भवन के पास रॉकेट के हमले ऐसे समय हुए हैं जब कई प्रांतों में अफगान सुरक्षाबलों और तालिबान के बीच संघर्ष चल रहा है। अमेरिकी और नाटो बलों की वापसी शुरू होने के बाद तालिबान ने देश के बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण कर लिया है। देश में शांति स्थापित करने को लेकर तालिबान की अफगान सरकार के साथ दोहा में दो दौर की असफल वार्ता हुई है। दुनिया के करीब पंद्रह देशों ने बकरीद के मौके पर तालिबान से सीजफायर करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मंगलवार को उनके 55 साल पूरे होने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने उनके दीर्घायु रहने और स्वस्थ जीवन की कामना की। प्रधानमंत्री ने शाह को ट्वीट के जरिए बधाई दी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मंगलवार को उनके पचपन साल पूरे होने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने उनके दीर्घायु रहने और स्वस्थ जीवन की कामना की। प्रधानमंत्री ने शाह को ट्वीट के जरिए बधाई दी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी इन दिनों अपनी फिल्म 'जॉली एलएलबी 2' के प्रमोशन में जुटी हैं। हाल ही उन्होंने एक न्यूज़ वेबसाइट से बातचीत करते हुए फिल्म में निभाए अपने किरदार के बारे में जानकारी दी है। हुमा का कहना है कि फिल्म 'जॉली एलएलबी 2' में वे एक ऐसी बीवी का रोल निभा रही हैं जो बहुत डिमांडिंग है। वह अपने पति से खाना बनवाती है और अपने पैर भी दबवाती है। इसके बाद हुमा मजाकिया लहज़े में कहती है कि बस असल जिंदगी में भी उन्हें ऐसा ही पति चाहिए जो पैर दबाएऔर घर का सारा काम करे। अभिनेत्री आगे बताती है कि फिल्म में मेरे किरदार का नाम पुष्पा पांडे है। जो कि बॉस टाइप की डिमांडिंग बीवी है। हर समय अपने हस्बैंड से अलग-अलग तरह की डिमांड करती है और पति काम भी करता है। वे आगे कहती हैं कि मुझे असल जिंदगी में भी ऐसा ही पति चाहिए जो मेरे लिए खाना बनाए, घर का सारा काम करे, गुस्सा हो जाऊं तो मेरी डांट और गालियां खाए, पैसे कमाए, मेरे पैर दबाए और मेरी खूब सेवा करे। ऊंचे कद का और गोरा पति चाहिए मुझे। अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी स्टारर फिल्म 'जॉली एलएलबी 2' 10 फरवरी को रिलीज होगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी इन दिनों अपनी फिल्म 'जॉली एलएलबी दो' के प्रमोशन में जुटी हैं। हाल ही उन्होंने एक न्यूज़ वेबसाइट से बातचीत करते हुए फिल्म में निभाए अपने किरदार के बारे में जानकारी दी है। हुमा का कहना है कि फिल्म 'जॉली एलएलबी दो' में वे एक ऐसी बीवी का रोल निभा रही हैं जो बहुत डिमांडिंग है। वह अपने पति से खाना बनवाती है और अपने पैर भी दबवाती है। इसके बाद हुमा मजाकिया लहज़े में कहती है कि बस असल जिंदगी में भी उन्हें ऐसा ही पति चाहिए जो पैर दबाएऔर घर का सारा काम करे। अभिनेत्री आगे बताती है कि फिल्म में मेरे किरदार का नाम पुष्पा पांडे है। जो कि बॉस टाइप की डिमांडिंग बीवी है। हर समय अपने हस्बैंड से अलग-अलग तरह की डिमांड करती है और पति काम भी करता है। वे आगे कहती हैं कि मुझे असल जिंदगी में भी ऐसा ही पति चाहिए जो मेरे लिए खाना बनाए, घर का सारा काम करे, गुस्सा हो जाऊं तो मेरी डांट और गालियां खाए, पैसे कमाए, मेरे पैर दबाए और मेरी खूब सेवा करे। ऊंचे कद का और गोरा पति चाहिए मुझे। अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी स्टारर फिल्म 'जॉली एलएलबी दो' दस फरवरी को रिलीज होगी।
नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने शनिवार को कहा कि सीमा शुल्क विभाग खिलौनों के आयात पर करीब से नजर रख रहा है और गुणवत्ता नियंत्रण एवं सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने के लिए अपनाए गए नए तरीकों से लगातार निपट रहा है। सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि बीआईएस गुणवत्ता चिह्न नहीं होने और फर्जी लाइसेंस का इस्तेमाल करने के मामलों में पिछले एक महीने के दौरान भारत भर के हवाई अड्डों और मॉल में छापेमारी की गई। इस छापेमारी के दौरान हैमलेज और आर्चीज सहित प्रमुख खुदरा दुकानों से 18,600 खिलौने जब्त किए गए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड ने एक ट्वीट में कहा कि सीमा शुल्क विभाग गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा जांच को दरकिनार करने के प्रयासों को विफल करने के लिए बीआईएस और डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) दोनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि खिलौनों के आयात में बरती जाने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। सीबीआईसी ने एक व्यक्ति के उस ट्वीट का जवाब भी दिया जिसमें सवाल किया गया था कि जिन खिलौनों पर बीआईएस गुणवत्ता का निशान नहीं था, फिर उनके आयात के दौरान सीमा शुल्क मंजूरी कैसे प्राप्त की गई। सीबीआईसी ने इसके जवाब में कहा कि 1 जनवरी, 2021 से सरकार ने खिलौनों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की ओर निर्दिष्ट सुरक्षा मानदंडों के अनुरूप होना अनिवार्य कर दिया है, जो एक राष्ट्रीय मानक सेटिंग निकाय है। पिछले एक महीने में जब्त किए गए 18,500 से अधिक खिलौने स्थानीय रूप से निर्मित होने के साथ-साथ आयातित भी थे। कुछ खिलौनों पर बीआईएस गुणवत्ता का अनिवार्य निशान नहीं था, कुछ पर फर्जी बीआईएस लाइसेंस नंबर था और कुछ खिलौने अन्य देशों में बने थे। सीबीआईसी ने बताया कि देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों और मॉल में स्थित हैमलेज, आर्चीज, डब्ल्यूएच स्मिथ, किड्स जोन और कोकोकार्ट सहित प्रमुख खुदरा दुकानों में छापे मारे गए। गाजियाबाद के पैसिफिक मॉल में आर्चीज स्टोर, हैदराबाद और दिल्ली हवाई अड्डों पर डब्ल्यूएच स्मिथ स्टोर, मुंबई और गुजरात हवाई अड्डों पर कोकोकार्ट स्टोर और चेन्नई हवाई अड्डे पर टियारा टॉयज जोन से खिलौने भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता संरक्षण नियामक सीसीपीए ने खिलौनों में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के कथित उल्लंघन के मामले में तीन प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील को भी नोटिस जारी किया है। Share:
नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड ने शनिवार को कहा कि सीमा शुल्क विभाग खिलौनों के आयात पर करीब से नजर रख रहा है और गुणवत्ता नियंत्रण एवं सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने के लिए अपनाए गए नए तरीकों से लगातार निपट रहा है। सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि बीआईएस गुणवत्ता चिह्न नहीं होने और फर्जी लाइसेंस का इस्तेमाल करने के मामलों में पिछले एक महीने के दौरान भारत भर के हवाई अड्डों और मॉल में छापेमारी की गई। इस छापेमारी के दौरान हैमलेज और आर्चीज सहित प्रमुख खुदरा दुकानों से अट्ठारह,छः सौ खिलौने जब्त किए गए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड ने एक ट्वीट में कहा कि सीमा शुल्क विभाग गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा जांच को दरकिनार करने के प्रयासों को विफल करने के लिए बीआईएस और डीजीएफटी दोनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि खिलौनों के आयात में बरती जाने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। सीबीआईसी ने एक व्यक्ति के उस ट्वीट का जवाब भी दिया जिसमें सवाल किया गया था कि जिन खिलौनों पर बीआईएस गुणवत्ता का निशान नहीं था, फिर उनके आयात के दौरान सीमा शुल्क मंजूरी कैसे प्राप्त की गई। सीबीआईसी ने इसके जवाब में कहा कि एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से सरकार ने खिलौनों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो की ओर निर्दिष्ट सुरक्षा मानदंडों के अनुरूप होना अनिवार्य कर दिया है, जो एक राष्ट्रीय मानक सेटिंग निकाय है। पिछले एक महीने में जब्त किए गए अट्ठारह,पाँच सौ से अधिक खिलौने स्थानीय रूप से निर्मित होने के साथ-साथ आयातित भी थे। कुछ खिलौनों पर बीआईएस गुणवत्ता का अनिवार्य निशान नहीं था, कुछ पर फर्जी बीआईएस लाइसेंस नंबर था और कुछ खिलौने अन्य देशों में बने थे। सीबीआईसी ने बताया कि देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों और मॉल में स्थित हैमलेज, आर्चीज, डब्ल्यूएच स्मिथ, किड्स जोन और कोकोकार्ट सहित प्रमुख खुदरा दुकानों में छापे मारे गए। गाजियाबाद के पैसिफिक मॉल में आर्चीज स्टोर, हैदराबाद और दिल्ली हवाई अड्डों पर डब्ल्यूएच स्मिथ स्टोर, मुंबई और गुजरात हवाई अड्डों पर कोकोकार्ट स्टोर और चेन्नई हवाई अड्डे पर टियारा टॉयज जोन से खिलौने भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता संरक्षण नियामक सीसीपीए ने खिलौनों में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के कथित उल्लंघन के मामले में तीन प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील को भी नोटिस जारी किया है। Share:
भगोड़े इस्लामिक धर्मगुरू जाकिर नाईक (Zakir Naik) ने एक बार फिर से जहर उगलते हुए पाकिस्तान के खैबर पख़्तूनख़्वा में हिंदू मंदिर में हुई तोड़फोड़ का समर्थन किया है। जाकिर नाईक ने कहा कि इस्लामिक देशों में मंदिर नहीं होने चाहिए अगर मंदिर हैं तो उन्हें तोड़ दिया जाना चाहिए। जाकिर नाईक द्वारा मंदिरों और मूर्ति पूजा पर दिया गया ये शर्मनाक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जाकिर नाईक ने कहा कि इस्लाम में कोई भी मूर्ति बनाना मना है फिर चाहे वो पेंटिंग हो, ड्राइंग हो या फिर किसी जीवित पशु पक्षी की मूर्तिकारी हो या फिर इंसानों की मूर्ति हो या फिर कीड़ों की। ये सब कुछ इस्लाम में मना है और इसके कई सारे सबूत हैं। उसने अपनी बात साबित करने के लिए पैगंबर मोहम्मद का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोहम्मद काबा में लौटे, तो उन्होंने लगभग 360 मूर्तियों को तोड़ दिया जो काबा में थीं। इस्लामी देश में, मूर्ति नहीं बननी चाहिए या अगर है, तो उसे तोड़ दिया जाना चाहिए। एक मूर्ति इस्लामी देश में कहीं भी नहीं होनी चाहिए। और अगर यह कहीं है तो इसे तोड़ दिया जाना चाहिए। बता दें कि पिछले साल जुलाई में जाकिर नाईक ने इस्लामाबाद में एक कृष्ण मंदिर के निर्माण की परमिशन देने पर इमरान खान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि ऐसा करना पाप है। उसने कहा था कि शरियत के अनुसार, एक इस्लामिक राष्ट्र के लिए एक गैर-मुस्लिम के पूजा घर में भुगतान या दान करना हराम है। बता दें कि पाकिस्तान में धार्मिक उन्माद अपने चरम पर है। हिंदू मंदिरों और लड़कियों को निशाना बनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत के कोहाट में बुधवार को स्थानीय मौलवियों के नेतृत्व में बेकाबू भीड़ ने एक हिंदू मंदिर (Hindu Temple) में जमकर तोड़फोड़ की। जब इतने से भी कट्टरपंथियों का मन नहीं भरा, तो मंदिर को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे भी लगाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इस वीडियों में उन्मादी भीड़ मंदिर की छत और दीवारें ढहाती दिखाई दे रही है। देश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ इस घटना पर कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक पाकिस्तानी पत्रकार मुबाशिर जैदी ने लिखा है-ब्रेकिंग...स्थानीय मौलानाओं की अगुवाई वाली भीड़ ने खैबर पख्तुनख्वाह के करक जिले में मंदिर को नष्ट कर दिया है। हिंदुओं ने इस मंदिर के लिए स्थानीय प्रशासन से इजाजत ली थी लेकिन स्थानीय धर्मगुरुओं ने इसके खिलाफ भीड़ इकट्ठा कर मंदिर को ढहा दिया। पुलिस प्रशासन सिर्फ मूक-दर्शक की भूमिका में बना रहा। ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
भगोड़े इस्लामिक धर्मगुरू जाकिर नाईक ने एक बार फिर से जहर उगलते हुए पाकिस्तान के खैबर पख़्तूनख़्वा में हिंदू मंदिर में हुई तोड़फोड़ का समर्थन किया है। जाकिर नाईक ने कहा कि इस्लामिक देशों में मंदिर नहीं होने चाहिए अगर मंदिर हैं तो उन्हें तोड़ दिया जाना चाहिए। जाकिर नाईक द्वारा मंदिरों और मूर्ति पूजा पर दिया गया ये शर्मनाक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जाकिर नाईक ने कहा कि इस्लाम में कोई भी मूर्ति बनाना मना है फिर चाहे वो पेंटिंग हो, ड्राइंग हो या फिर किसी जीवित पशु पक्षी की मूर्तिकारी हो या फिर इंसानों की मूर्ति हो या फिर कीड़ों की। ये सब कुछ इस्लाम में मना है और इसके कई सारे सबूत हैं। उसने अपनी बात साबित करने के लिए पैगंबर मोहम्मद का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोहम्मद काबा में लौटे, तो उन्होंने लगभग तीन सौ साठ मूर्तियों को तोड़ दिया जो काबा में थीं। इस्लामी देश में, मूर्ति नहीं बननी चाहिए या अगर है, तो उसे तोड़ दिया जाना चाहिए। एक मूर्ति इस्लामी देश में कहीं भी नहीं होनी चाहिए। और अगर यह कहीं है तो इसे तोड़ दिया जाना चाहिए। बता दें कि पिछले साल जुलाई में जाकिर नाईक ने इस्लामाबाद में एक कृष्ण मंदिर के निर्माण की परमिशन देने पर इमरान खान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि ऐसा करना पाप है। उसने कहा था कि शरियत के अनुसार, एक इस्लामिक राष्ट्र के लिए एक गैर-मुस्लिम के पूजा घर में भुगतान या दान करना हराम है। बता दें कि पाकिस्तान में धार्मिक उन्माद अपने चरम पर है। हिंदू मंदिरों और लड़कियों को निशाना बनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट में बुधवार को स्थानीय मौलवियों के नेतृत्व में बेकाबू भीड़ ने एक हिंदू मंदिर में जमकर तोड़फोड़ की। जब इतने से भी कट्टरपंथियों का मन नहीं भरा, तो मंदिर को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे भी लगाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इस वीडियों में उन्मादी भीड़ मंदिर की छत और दीवारें ढहाती दिखाई दे रही है। देश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ इस घटना पर कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक पाकिस्तानी पत्रकार मुबाशिर जैदी ने लिखा है-ब्रेकिंग...स्थानीय मौलानाओं की अगुवाई वाली भीड़ ने खैबर पख्तुनख्वाह के करक जिले में मंदिर को नष्ट कर दिया है। हिंदुओं ने इस मंदिर के लिए स्थानीय प्रशासन से इजाजत ली थी लेकिन स्थानीय धर्मगुरुओं ने इसके खिलाफ भीड़ इकट्ठा कर मंदिर को ढहा दिया। पुलिस प्रशासन सिर्फ मूक-दर्शक की भूमिका में बना रहा। This website uses cookies.
भाग III --खण्ड 1] भारत का राजपत, अक्तूबर 22, 1977 (आश्विन 30,1899 ) प्ररूप प्राई० टी० एन० एस०. मायकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43 ) की धारा 269 ष ( 1 ) के अधीन सूचना कार्यालय, सहायक मायकर प्रायुक्त (मिरीक्षण) अर्जन रेंज, भटिडा भटिडा, दिनांक 28 सितम्बर यत, मुझे पी० एन० मलिक । प्रायकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43 ) (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'उफ्त अधिनियम' कहा गया है) की धारा 269के अधीन सक्षम प्राधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर सम्पत्ति, जिसका उचित बाजार मूल्य 25,000/- रुपये से अधिक है और जिसकी स० जैमा कि अनुसूची मे है तथा जो मोगा महिला सिंह मे स्थित है (और इससे उपाबद्ध अनुसूची मे और पूर्ण रूप में वर्णित है ), रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय, मोगा में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16 ) के अधीन, तारीख 28/3/1977 को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए प्रन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य, उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृश्यमान प्रतिफल का पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है मौर अन्तरफ (अन्तरकों) और मन्तरिती (अन्तरितियो) के बीच ऐसे मन्तरण के लिए तय पाया गया प्रतिफल निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त मन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नही किया गया है ( क ) प्रस्तरण से हुई किसी माय की बाबत, उक्त अधि नियम, के अधीन कर देने के अन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; भौर / या ( ख ) ऐसे किसी प्राय या किसी घन या धम्य पास्तियों को, जिन्हें भारतीय प्रायकर अधिनियम, 1922 (1922 का 11 ) या उक्त अधिनियम, या धनकर अधिनियम 1957 (1957 का 27 ) के प्रयोजनार्थ भन्तरिती द्वारा प्रकट नहीं किया गया था या किया जाना चाहिए था, छिपाने में सुविधा के लिए; अतः अब, उक्त अधिनियम की धारा 2690 के प्रमुसरण में, में, उक्त अधिनियम की धारा 269 ष की उपधारा ( 1 ) के प्रधीन, निम्नलिखित व्यक्तियों अर्थात्ः4737 ( 1 ) श्री अर्जन सिंह पुत्र प्रताप सिंह पुत्र चुहर सिंह वासी मोगा महिला सिंह । ( 2 ) मीनाक्षी फिल्मस कारपोरेशन मोगा द्वारा श्री प्रशोत्तम लाल पुत्र श्री प्रकाश चन्द मोगा जैसा कि नं० दो मे है ( वह व्यक्ति, जिसके अधिभोग में सम्पत्ति है ) । जो व्यक्ति सम्पत्ति में रुचि रखता है (यह व्यक्ति, जिनके बारे में प्रधोहस्ताक्षरी जानता है कि वह सम्पत्ति में हितबद्ध है ) । को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के सर्जन के लिए कार्यवाहियां करता हूं । उक्त सम्पत्ति के मर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेपइस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन की अवधि या तत्सम्बन्धी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से 30 दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियो मे से किसी व्यक्ति द्वारा; ( ख ) इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन के भीतर उक्त स्थावर सम्पत्ति में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रधोहस्ताक्षरी के पास लिखित में किये जा सकेंगे । स्पष्टीकरण -- इसमें प्रयुक्त शब्दी और पदो का, जो उक्त मधिनियम के अध्याय 20क में परिभाषित है, वही मर्थ होगा जो उस अध्याय में दिया गया है । एक प्लाट एक कनाल छः मरले और 28 वर्ग फुट मोगा महिला सिंह मे जैसा कि रजिस्ट्री न० 7313 तारीख 28/3/77 मे है । पी० एन० मलिक सक्षम प्राधिकारी, सहायक आयकर आयुक्त ( निरीक्षण ) अर्जन रेंज, भटिंडा
भाग III --खण्ड एक] भारत का राजपत, अक्तूबर बाईस, एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर प्ररूप प्राईशून्य टीशून्य एनशून्य एसशून्य. मायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो सौ उनहत्तर ष के अधीन सूचना कार्यालय, सहायक मायकर प्रायुक्त अर्जन रेंज, भटिडा भटिडा, दिनांक अट्ठाईस सितम्बर यत, मुझे पीशून्य एनशून्य मलिक । प्रायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो सौ उनहत्तरके अधीन सक्षम प्राधिकारी को यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर सम्पत्ति, जिसका उचित बाजार मूल्य पच्चीस,शून्य/- रुपये से अधिक है और जिसकी सशून्य जैमा कि अनुसूची मे है तथा जो मोगा महिला सिंह मे स्थित है , रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय, मोगा में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ आठ के अधीन, तारीख अट्ठाईस मार्च एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए प्रन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य, उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृश्यमान प्रतिफल का पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है मौर अन्तरफ और मन्तरिती के बीच ऐसे मन्तरण के लिए तय पाया गया प्रतिफल निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त मन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नही किया गया है प्रस्तरण से हुई किसी माय की बाबत, उक्त अधि नियम, के अधीन कर देने के अन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; भौर / या ऐसे किसी प्राय या किसी घन या धम्य पास्तियों को, जिन्हें भारतीय प्रायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ बाईस या उक्त अधिनियम, या धनकर अधिनियम एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के प्रयोजनार्थ भन्तरिती द्वारा प्रकट नहीं किया गया था या किया जाना चाहिए था, छिपाने में सुविधा के लिए; अतः अब, उक्त अधिनियम की धारा दो हज़ार छः सौ नब्बे के प्रमुसरण में, में, उक्त अधिनियम की धारा दो सौ उनहत्तर ष की उपधारा के प्रधीन, निम्नलिखित व्यक्तियों अर्थात्ःचार हज़ार सात सौ सैंतीस श्री अर्जन सिंह पुत्र प्रताप सिंह पुत्र चुहर सिंह वासी मोगा महिला सिंह । मीनाक्षी फिल्मस कारपोरेशन मोगा द्वारा श्री प्रशोत्तम लाल पुत्र श्री प्रकाश चन्द मोगा जैसा कि नंशून्य दो मे है । जो व्यक्ति सम्पत्ति में रुचि रखता है । को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के सर्जन के लिए कार्यवाहियां करता हूं । उक्त सम्पत्ति के मर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेपइस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन की अवधि या तत्सम्बन्धी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से तीस दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियो मे से किसी व्यक्ति द्वारा; इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर उक्त स्थावर सम्पत्ति में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रधोहस्ताक्षरी के पास लिखित में किये जा सकेंगे । स्पष्टीकरण -- इसमें प्रयुक्त शब्दी और पदो का, जो उक्त मधिनियम के अध्याय बीसक में परिभाषित है, वही मर्थ होगा जो उस अध्याय में दिया गया है । एक प्लाट एक कनाल छः मरले और अट्ठाईस वर्ग फुट मोगा महिला सिंह मे जैसा कि रजिस्ट्री नशून्य सात हज़ार तीन सौ तेरह तारीख अट्ठाईस मार्च सतहत्तर मे है । पीशून्य एनशून्य मलिक सक्षम प्राधिकारी, सहायक आयकर आयुक्त अर्जन रेंज, भटिंडा
हाथरस के चंदपा कांड के चारों आरोपी इन दिनों काफी परेशान हैं। चारों आरोपी हत्या और दुष्कर्म के आरोप में सीबीआई की ओर से चार्जशीट दायर किये जाने के बाद से तनाव में हैं। वहीं इस बीच चारों की हालत देखते हुए कारागार प्रशासन ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है। इस बीच उन चारों को अलग-अलग बैरक में रखने की तैयारी भी चल रही है। आपको बता दें कि हाथरस कांड में सीबीआई ने 69 दिन तक की जांच के बाद शुक्रवार को आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। यह खबर शुक्रवार को ही मीडिया को लग गयी जिसके बाद देर रात तक आरोपियों को इस बारे में जानकारी मिल गयी। खबर मिलने के बाद से ही सभी के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार उनका खाने-पीने में भी मन नहीं लग रहा है। उन्होंने एक दूसरे से बातचीत तक बंद कर दी है। वहीं कारागार अधिकारियों को इस बारे में जानकारी मिलने के बाद उनकी निगरानी बढ़ा दी गयी है।
हाथरस के चंदपा कांड के चारों आरोपी इन दिनों काफी परेशान हैं। चारों आरोपी हत्या और दुष्कर्म के आरोप में सीबीआई की ओर से चार्जशीट दायर किये जाने के बाद से तनाव में हैं। वहीं इस बीच चारों की हालत देखते हुए कारागार प्रशासन ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है। इस बीच उन चारों को अलग-अलग बैरक में रखने की तैयारी भी चल रही है। आपको बता दें कि हाथरस कांड में सीबीआई ने उनहत्तर दिन तक की जांच के बाद शुक्रवार को आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। यह खबर शुक्रवार को ही मीडिया को लग गयी जिसके बाद देर रात तक आरोपियों को इस बारे में जानकारी मिल गयी। खबर मिलने के बाद से ही सभी के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार उनका खाने-पीने में भी मन नहीं लग रहा है। उन्होंने एक दूसरे से बातचीत तक बंद कर दी है। वहीं कारागार अधिकारियों को इस बारे में जानकारी मिलने के बाद उनकी निगरानी बढ़ा दी गयी है।
Long Range Electric Scooters की मौजूद रेंज में जान लीजिए TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की हर छोटी बड़ी डिटेल। Long Range Electric Scooters की मौजूद रेंज में जान लीजिए TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की हर छोटी बड़ी डिटेल। Maruti Baleno Zeta की शुरुआती कीमत 8,26,000 रुपये है। ऑन रोड होने पर ये कीमत 9,35,946 रुपये हो जाती है। Top 4 Mid Range Sedan Cars जिनमें मिलता है 480 लीटर तक का बड़ा बूट स्पेस। यहां जानें कंप्लीट डिटेल।
Long Range Electric Scooters की मौजूद रेंज में जान लीजिए TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की हर छोटी बड़ी डिटेल। Long Range Electric Scooters की मौजूद रेंज में जान लीजिए TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की हर छोटी बड़ी डिटेल। Maruti Baleno Zeta की शुरुआती कीमत आठ,छब्बीस,शून्य रुपयापये है। ऑन रोड होने पर ये कीमत नौ,पैंतीस,नौ सौ छियालीस रुपयापये हो जाती है। Top चार Mid Range Sedan Cars जिनमें मिलता है चार सौ अस्सी लीटरटर तक का बड़ा बूट स्पेस। यहां जानें कंप्लीट डिटेल।
आपको बता दें कि आज हम जिस बाल कलाकार की बात करने वाले है वह बाल कलाकार कोई और नही बल्कि टुनिशा शर्मा है। बचपन के दिनों में छोटी और बेहद ही मासूम सी दिखने वाली यह बच्ची आज उम्र में काफी बड़ी हो चुकी है। बड़ी होने के साथ ही आज उनकी लुक में काफी ज्यादा बदलाब आ चुका है। आपको बता दें कि बहुत छोटी सी उम्र में काफी ज्यादा प्रसिद्धि पाने वाली टुनिशा शर्मा के पास आज काम की कोई कमी नहीं है। उनकी अभिनय को लोग के द्वारा काफी ज्यादा पसंद किया जाता है यही वजह है कि लोग उन्हें काफी ज्यादा चाहते भी हैं। अब तक बॉलीवुड पर्दे पर आई कई सारी फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम कर चुकी टुनिशा शर्मा बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ पर्दे पर आई फिल्म फितूर में अपने अभिनय का प्रदर्शन कर चुकी है। बॉलीवुड के साथ-साथ वह आज तक TV पर आने वाले कई सारे सीरियल में भी अपने अभिनय का प्रदर्शन कर चुकी है। आपको बता दें कि जिन TV सीरियल में उन्होंने काम किया है वह TV सीरियल आज लोगों के बीच काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। उनके कुछ बेहतरीन TV सीरियल्स की लिस्ट में भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप, चक्रवर्ती अशोक सम्राट, गब्बर पूछ वाला और शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह नमक सीरियल शामिल है। आज टुनिशा शर्मा की उम्र लगभग 16 साल है। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने अभिनय के बदौलत इस मुकाम को हासिल किया है जहां तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है। आपको बता दें कि टुनिशा शर्मा सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर काफी ज्यादा एक्टिव नजर आती है। एक्टिव होने की वजह से वह आए दिन अपने प्रशंसकों के बीच अपनी कुछ बेहद ही खूबसूरत तस्वीरें भी साझा किया करती है। आज उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर दो लाख की संख्या में फॉलोवर्स मौजूद है। 16 साल की उम्र में इतने ज्यादा लोगों के द्वारा फॉलो की जाने वाली टुनिशा शर्मा को देखकर ऐसा लगता है मानो आने वाले वक्त में उनकी गिनती बॉलीवुड जगत की टॉप अभिनेत्रियों में की जाएगी। आपको बता दें कि आज टुनिशा शर्मा दिखने में बेहद ही खूबसूरत नजर आती है। आप उनकी खूबसूरती का अंदाजा उनकी सोशल मीडिया साइट पर अपलोड की गई तस्वीरों से ही लगा सकते हैं। उनकी तस्वीरों को देखने के बाद आपने पहले ही नजर में उन्हें अपना दिल दे बैठेंगे।
आपको बता दें कि आज हम जिस बाल कलाकार की बात करने वाले है वह बाल कलाकार कोई और नही बल्कि टुनिशा शर्मा है। बचपन के दिनों में छोटी और बेहद ही मासूम सी दिखने वाली यह बच्ची आज उम्र में काफी बड़ी हो चुकी है। बड़ी होने के साथ ही आज उनकी लुक में काफी ज्यादा बदलाब आ चुका है। आपको बता दें कि बहुत छोटी सी उम्र में काफी ज्यादा प्रसिद्धि पाने वाली टुनिशा शर्मा के पास आज काम की कोई कमी नहीं है। उनकी अभिनय को लोग के द्वारा काफी ज्यादा पसंद किया जाता है यही वजह है कि लोग उन्हें काफी ज्यादा चाहते भी हैं। अब तक बॉलीवुड पर्दे पर आई कई सारी फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम कर चुकी टुनिशा शर्मा बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ पर्दे पर आई फिल्म फितूर में अपने अभिनय का प्रदर्शन कर चुकी है। बॉलीवुड के साथ-साथ वह आज तक TV पर आने वाले कई सारे सीरियल में भी अपने अभिनय का प्रदर्शन कर चुकी है। आपको बता दें कि जिन TV सीरियल में उन्होंने काम किया है वह TV सीरियल आज लोगों के बीच काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। उनके कुछ बेहतरीन TV सीरियल्स की लिस्ट में भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप, चक्रवर्ती अशोक सम्राट, गब्बर पूछ वाला और शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह नमक सीरियल शामिल है। आज टुनिशा शर्मा की उम्र लगभग सोलह साल है। महज सोलह साल की उम्र में उन्होंने अपने अभिनय के बदौलत इस मुकाम को हासिल किया है जहां तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है। आपको बता दें कि टुनिशा शर्मा सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर काफी ज्यादा एक्टिव नजर आती है। एक्टिव होने की वजह से वह आए दिन अपने प्रशंसकों के बीच अपनी कुछ बेहद ही खूबसूरत तस्वीरें भी साझा किया करती है। आज उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर दो लाख की संख्या में फॉलोवर्स मौजूद है। सोलह साल की उम्र में इतने ज्यादा लोगों के द्वारा फॉलो की जाने वाली टुनिशा शर्मा को देखकर ऐसा लगता है मानो आने वाले वक्त में उनकी गिनती बॉलीवुड जगत की टॉप अभिनेत्रियों में की जाएगी। आपको बता दें कि आज टुनिशा शर्मा दिखने में बेहद ही खूबसूरत नजर आती है। आप उनकी खूबसूरती का अंदाजा उनकी सोशल मीडिया साइट पर अपलोड की गई तस्वीरों से ही लगा सकते हैं। उनकी तस्वीरों को देखने के बाद आपने पहले ही नजर में उन्हें अपना दिल दे बैठेंगे।
ऑल्ट बालाजी एक बार फिर दर्शकों के सामने एक्टर राम कपूर और एक्ट्रेस साक्षी तंवर की जोड़ी साथ लेकर आने वाला है। वेब सीरीज करले तू भी मोहब्बत सीजन 3 का पहला लुक जारी कर दिया गया है। वेब सीरीज के पहले लुक में साक्षी तंवर और राम कपूर को एक साथ दिखाया गया है। जहां साक्षी ने एक मासूम बच्ची का हाथ पकड़ा हुआ है। तो वहीं, राम कपूर गुस्से में नजर आ रहे हैं। कर ले तू भी मोहब्बत का तीसरा सीजन 2 अप्रैल से शुरु होने वाला है। कर ले तू भी मोहब्बत वेब सीरीज में एक्टर राम कपूर और साक्षी तंवर के अलावा हितेश तेजवानी और करिश्मा तन्ना लीड रोल में नजर आएंगे। एक्टर संदीप बसवाना और वत्सल सेठ भी इस वेब सीरीज में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। वत्सल इस सीरीज में आर्यन खान का रोल निभाएंगे। इसके साथ ही संदीप का भी इस वेब सीरीज में अहम रोल होने वाला है। कर ले तू भी मोहब्बत सीजन 3 का पहला लुक एकता कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। शेयर किए गए पोस्ट में उन्होंने इस वेब सीरीज से संबंधित सभी जानकारी दर्शकों को दी है। इस सीरीज की कहानी ऐसे दो किरदार पर आधारित जो एक दूसरे से है तो बेहद ही अलग लेकिन प्यार बहुत करते हैं। कर ले तू भी मोहब्बत का पहला सीजन साल 2017 में शुरू हुआ था। ये वेब सीरीज एकता कपूर ने बनाई है जो दो बिल्कुल अलग लोगों के एक दूसरे के प्यार में पड़ने की कहानी बताती है। इससे पहले राम कपूर और साक्षी तंवर टेलीविजन सीरियल बडे अच्छे लगाते में भी नजर आए थे। इस सीरियल में दोनों की कैमेस्ट्री को काफी पसंद किया गया था, जिसके बाद से ये जोड़ी लोगों के बीच में छाई हुई है।
ऑल्ट बालाजी एक बार फिर दर्शकों के सामने एक्टर राम कपूर और एक्ट्रेस साक्षी तंवर की जोड़ी साथ लेकर आने वाला है। वेब सीरीज करले तू भी मोहब्बत सीजन तीन का पहला लुक जारी कर दिया गया है। वेब सीरीज के पहले लुक में साक्षी तंवर और राम कपूर को एक साथ दिखाया गया है। जहां साक्षी ने एक मासूम बच्ची का हाथ पकड़ा हुआ है। तो वहीं, राम कपूर गुस्से में नजर आ रहे हैं। कर ले तू भी मोहब्बत का तीसरा सीजन दो अप्रैल से शुरु होने वाला है। कर ले तू भी मोहब्बत वेब सीरीज में एक्टर राम कपूर और साक्षी तंवर के अलावा हितेश तेजवानी और करिश्मा तन्ना लीड रोल में नजर आएंगे। एक्टर संदीप बसवाना और वत्सल सेठ भी इस वेब सीरीज में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे। वत्सल इस सीरीज में आर्यन खान का रोल निभाएंगे। इसके साथ ही संदीप का भी इस वेब सीरीज में अहम रोल होने वाला है। कर ले तू भी मोहब्बत सीजन तीन का पहला लुक एकता कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। शेयर किए गए पोस्ट में उन्होंने इस वेब सीरीज से संबंधित सभी जानकारी दर्शकों को दी है। इस सीरीज की कहानी ऐसे दो किरदार पर आधारित जो एक दूसरे से है तो बेहद ही अलग लेकिन प्यार बहुत करते हैं। कर ले तू भी मोहब्बत का पहला सीजन साल दो हज़ार सत्रह में शुरू हुआ था। ये वेब सीरीज एकता कपूर ने बनाई है जो दो बिल्कुल अलग लोगों के एक दूसरे के प्यार में पड़ने की कहानी बताती है। इससे पहले राम कपूर और साक्षी तंवर टेलीविजन सीरियल बडे अच्छे लगाते में भी नजर आए थे। इस सीरियल में दोनों की कैमेस्ट्री को काफी पसंद किया गया था, जिसके बाद से ये जोड़ी लोगों के बीच में छाई हुई है।
बीबीएन - हिमाचल की आर्थिक राजधानी के तौर पर उभरे बीबीएन को लेकर कई सपने थे। उम्मीद थी कि औद्योगिकीकरण की बहती बयार के बीच यह सीमांत क्षेत्र ट्राइसिटी चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित होगा और प्रदेश की पहली ट्राइसिटी का तमगा हासिल कर लेगा, लेकिन निवेश के लिहाज से उद्यमियों की पहली पसंद बनने के बावजूद इस क्षेत्र को ट्राइसिटी की तर्ज पर विकसित करना तो दूर प्रदेश की सरकारें आधारभूत ढांचे व विकास के लिहाज से बड़े शहरों के आसपास भी खड़ा नहीं कर सकी। यही वजह है कि आज बीबीएन में उम्मीदों की लहर उतार पर है. . और ये बेतरतीब सी खड़ी इमारतें किसी टूटे हुए ख्वाब की रुआंसी सी तस्वीर बन कर ही रह गई है। या यूं कहें कि बीबीएन उद्योगों की नगरी तो बन गया, मगर आधुनिक शहरों की तरह सुविधाएं नहीं जुटा सका। दरअसल औद्योगिकीकरण के दौर में बीबीएन में सुविधाएं जुटाने व सुनियोजित विकास करवाने की बजाय उद्योगों को लगवाने की जल्दबाजी रही ...और यही जल्दबाजी आखिरकार महंगी पड़ गई है। प्रदेश की इंडस्ट्रियल ट्राइसिटी बीबीएन में क्नेक्टिविटी, अधोसंरचना, शहरी सुविधाएं, माकूल आवास व्यवस्था तथा जमीन की आसान उपलब्धता न होने से निवेशकों का संयम टूट रहा है। न अच्छी सड़कें, न एयर क्नेक्टिविटी, न रेल लाइन, न रहने-खाने के लिए ढंग के ठिकाने, न मनोरंजन के साधन और साथ में स्तरीय स्वास्थ्य व शिक्षण सेवाओं का भी टोटा है । हालात यह है कि 15 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश बटोरने के बाद भी बीबीएन बड़े महानगरों सरीखी सुविधाएं नहीं जुटा सका । 35 किलोमीटर क्षेत्र में फैले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ की अनुमानित आबादी करीब पांच लाख है, लेकिन इसके बावजूद रोजगार कमाने आए हजारों लोग यहां रहना पसंद नहीं करते। रिहायश के लिए वे पंचकूला, चंडीगढ़, पिंजौर, कालका, जीरकपुर का रुख करते है। क्योंकि यहां की व्यवस्था की कंगाली शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की तंगहाली के बीच उन्हें यही लगता है कि बसेरा चंडीगढ़ या पंचकूला में बसाना ही बेहतर होगा। बीबीएन में आज हालात यह है कि न यहां सुरक्षा की गारंटी है, न ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाआें की। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस इलाके के दम पर पड़ोसी राज्यों के शहरों ने हाउसिंग सेक्टर में जबरदस्त निवेश बटोर लिया, लेकिन बीबीएन ने प्लानिंग और विकासात्मक सोच की कमी से यह अवसर भी गंवा दिया। बीबीएन में शॉपिंग के नाम पर इक्का-दुक्का काम चलाऊ मॉल हैं, ब्रांडेड खरीददारी का विकल्प आज भी पड़ोसी राज्यों के शहरों में ही मौजूद है। शिक्षण सुविधाओं के नाम पर पांच नामी यूनिवर्सिटी इस इलाके में है, मगर श्रेष्ठ स्कूलों के लिहाज से स्थानीय स्कूलों पर ट्राइसिटी के स्कूल भारी पड़े हैं। सफाई व्यवस्था, बेतरतीब निर्माण, यहां-वहां स्थापित उद्योग, झुग्गी-झोंपडि़यों की भरमार ने औद्योगिक नगरी को अर्श से फर्श पर ला दिया है। यहां की आबोहवा में घुलता जहर भी किसी से छिपा नहीं है। घर से निकलते ही कपड़े धूल से अट जाते हैं, हवा में तैरता जहरीला धुआं किसी भी स्वस्थ इनसान को बीमार करने के लिए काफी है। यही नहीं, बीबीएन के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में अपना बस स्टैंड तक नहीं है, जो है, वे किराए पर चल रहे हैं। बीबीएन में 72 हजार से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं,लेकिन पार्किंग की व्यवस्था मात्र 200 वाहनों के लिए है। इतना जरूर है कि बद्दी के संडोली में दस करोड़ से ओडिटोरियम, बद्दी में 9. 57 करोड़ की लागत से स्किल डिवेलपमेंट सेंटर, बद्दी में ट्रेड सेंटर कम क्लब हाउस, शीतलपुर में 53 करोड़ की लागत से कंटेनर डिपो, बद्दी में प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया जा रहा है। बद्दी के संडोली में प्लास्टिक इंजीनियरिंग इंस्टीच्यूट, मल्लपुर में वेयर हाउस व कंटेनर पार्किंग का निर्माण, दवा उद्योगों की सहूलियत के लिए 8. 09 करोड़ की लागत से कंपोजिट टेस्टिंग लैब,केंदूवाल में सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट प्रोजेक्ट, बद्दी में व नालागढ़ में सीवरेज परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा इंडियन ऑयल और अदानी गैस लिमिटेड कंपनी बीबीएन क्षेत्र के उद्योगों व घरों तक पाइप के जरिए नैचुरल गैस मुहैया करवाने की कवायद में है। इस सब के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन दशकों से रेल लिंक से जुड़ने की राह ताक रहा है, लेकिन अभी तक यह सपना हकीकत नहीं बन सका है। चंडीगढ़-बद्दी रेल लिंक के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, फिलवक्त भूमि अधिग्रहण की कवायद चल रहीं है। बद्दी-नालागढ़ को फोरलेन से जोड़ने की भी कवायद जोर शोर से चल रही है। बीबीएनडीए के सीईओ ललित जैन ले कहा कि बीबीएन विकास प्राधिकरण ने बीबीएन क्षेत्र को सुनियोजित तरीके से विकसित करने की कवायद शुरू की है। इसके तहत मॉडल रोड, चौक, हरे-भरे पार्क, ऑडिटोरियम व पार्किंग स्थल विक सित किए जा रहे हैं। प्राधिकरण की स्थापना के समय इसके पास फंड का अभाव था, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा अब 100 करोड़ का फंड मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा बीबीएन क्षेत्र के सुनियोजित व समुचित विकास के लिए मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है। प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले बीबीएन से विभिन्न मदों के तहत सालाना 2200 करोड़ से ज्यादा का टैक्स सरकारी खजाने में जाता है, अकेले राजस्व विभाग 1600 करोड़ से ज्यादा का राजस्व उद्योगों व अन्य कारोबारियों से जुटा रहा है। बीबीएन के उद्योग सालाना दो लाख करोड़ का कारोबार कर रहे हैं, जबकि बीबीएन क्षेत्र से लगभग पांच हजार करोड़ के उत्पादों का सालाना निर्यात किया जा रहा है। इस समय बीबीएन में साढ़े पांच हजार बीघा से अधिक भूमि पर विकसित औद्योगिक कॉरिडोर में 2260 औद्योगिक इकाइयां 15690 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश से स्थापित हैं । प्रदेश में मीडियम, लार्ज सेक्टर में हुए कुल निवेश का 81 फीसदी निवेश बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र में हुआ है। प्रदेश को वर्ष 2002 में मिले विशेष औद्योगिक पैकेज के बाद बीबीएन निवेशकों का पसंदीदा स्थल बनकर उभरा। बीबीएन जहां एशिया के फार्मा हब बन चुका है, वहीं कई नामी टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग यूनिटों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
बीबीएन - हिमाचल की आर्थिक राजधानी के तौर पर उभरे बीबीएन को लेकर कई सपने थे। उम्मीद थी कि औद्योगिकीकरण की बहती बयार के बीच यह सीमांत क्षेत्र ट्राइसिटी चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित होगा और प्रदेश की पहली ट्राइसिटी का तमगा हासिल कर लेगा, लेकिन निवेश के लिहाज से उद्यमियों की पहली पसंद बनने के बावजूद इस क्षेत्र को ट्राइसिटी की तर्ज पर विकसित करना तो दूर प्रदेश की सरकारें आधारभूत ढांचे व विकास के लिहाज से बड़े शहरों के आसपास भी खड़ा नहीं कर सकी। यही वजह है कि आज बीबीएन में उम्मीदों की लहर उतार पर है. . और ये बेतरतीब सी खड़ी इमारतें किसी टूटे हुए ख्वाब की रुआंसी सी तस्वीर बन कर ही रह गई है। या यूं कहें कि बीबीएन उद्योगों की नगरी तो बन गया, मगर आधुनिक शहरों की तरह सुविधाएं नहीं जुटा सका। दरअसल औद्योगिकीकरण के दौर में बीबीएन में सुविधाएं जुटाने व सुनियोजित विकास करवाने की बजाय उद्योगों को लगवाने की जल्दबाजी रही ...और यही जल्दबाजी आखिरकार महंगी पड़ गई है। प्रदेश की इंडस्ट्रियल ट्राइसिटी बीबीएन में क्नेक्टिविटी, अधोसंरचना, शहरी सुविधाएं, माकूल आवास व्यवस्था तथा जमीन की आसान उपलब्धता न होने से निवेशकों का संयम टूट रहा है। न अच्छी सड़कें, न एयर क्नेक्टिविटी, न रेल लाइन, न रहने-खाने के लिए ढंग के ठिकाने, न मनोरंजन के साधन और साथ में स्तरीय स्वास्थ्य व शिक्षण सेवाओं का भी टोटा है । हालात यह है कि पंद्रह हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश बटोरने के बाद भी बीबीएन बड़े महानगरों सरीखी सुविधाएं नहीं जुटा सका । पैंतीस किलोग्राममीटर क्षेत्र में फैले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ की अनुमानित आबादी करीब पांच लाख है, लेकिन इसके बावजूद रोजगार कमाने आए हजारों लोग यहां रहना पसंद नहीं करते। रिहायश के लिए वे पंचकूला, चंडीगढ़, पिंजौर, कालका, जीरकपुर का रुख करते है। क्योंकि यहां की व्यवस्था की कंगाली शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की तंगहाली के बीच उन्हें यही लगता है कि बसेरा चंडीगढ़ या पंचकूला में बसाना ही बेहतर होगा। बीबीएन में आज हालात यह है कि न यहां सुरक्षा की गारंटी है, न ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाआें की। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस इलाके के दम पर पड़ोसी राज्यों के शहरों ने हाउसिंग सेक्टर में जबरदस्त निवेश बटोर लिया, लेकिन बीबीएन ने प्लानिंग और विकासात्मक सोच की कमी से यह अवसर भी गंवा दिया। बीबीएन में शॉपिंग के नाम पर इक्का-दुक्का काम चलाऊ मॉल हैं, ब्रांडेड खरीददारी का विकल्प आज भी पड़ोसी राज्यों के शहरों में ही मौजूद है। शिक्षण सुविधाओं के नाम पर पांच नामी यूनिवर्सिटी इस इलाके में है, मगर श्रेष्ठ स्कूलों के लिहाज से स्थानीय स्कूलों पर ट्राइसिटी के स्कूल भारी पड़े हैं। सफाई व्यवस्था, बेतरतीब निर्माण, यहां-वहां स्थापित उद्योग, झुग्गी-झोंपडि़यों की भरमार ने औद्योगिक नगरी को अर्श से फर्श पर ला दिया है। यहां की आबोहवा में घुलता जहर भी किसी से छिपा नहीं है। घर से निकलते ही कपड़े धूल से अट जाते हैं, हवा में तैरता जहरीला धुआं किसी भी स्वस्थ इनसान को बीमार करने के लिए काफी है। यही नहीं, बीबीएन के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में अपना बस स्टैंड तक नहीं है, जो है, वे किराए पर चल रहे हैं। बीबीएन में बहत्तर हजार से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं,लेकिन पार्किंग की व्यवस्था मात्र दो सौ वाहनों के लिए है। इतना जरूर है कि बद्दी के संडोली में दस करोड़ से ओडिटोरियम, बद्दी में नौ. सत्तावन करोड़ की लागत से स्किल डिवेलपमेंट सेंटर, बद्दी में ट्रेड सेंटर कम क्लब हाउस, शीतलपुर में तिरेपन करोड़ की लागत से कंटेनर डिपो, बद्दी में प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया जा रहा है। बद्दी के संडोली में प्लास्टिक इंजीनियरिंग इंस्टीच्यूट, मल्लपुर में वेयर हाउस व कंटेनर पार्किंग का निर्माण, दवा उद्योगों की सहूलियत के लिए आठ. नौ करोड़ की लागत से कंपोजिट टेस्टिंग लैब,केंदूवाल में सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट प्रोजेक्ट, बद्दी में व नालागढ़ में सीवरेज परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा इंडियन ऑयल और अदानी गैस लिमिटेड कंपनी बीबीएन क्षेत्र के उद्योगों व घरों तक पाइप के जरिए नैचुरल गैस मुहैया करवाने की कवायद में है। इस सब के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन दशकों से रेल लिंक से जुड़ने की राह ताक रहा है, लेकिन अभी तक यह सपना हकीकत नहीं बन सका है। चंडीगढ़-बद्दी रेल लिंक के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, फिलवक्त भूमि अधिग्रहण की कवायद चल रहीं है। बद्दी-नालागढ़ को फोरलेन से जोड़ने की भी कवायद जोर शोर से चल रही है। बीबीएनडीए के सीईओ ललित जैन ले कहा कि बीबीएन विकास प्राधिकरण ने बीबीएन क्षेत्र को सुनियोजित तरीके से विकसित करने की कवायद शुरू की है। इसके तहत मॉडल रोड, चौक, हरे-भरे पार्क, ऑडिटोरियम व पार्किंग स्थल विक सित किए जा रहे हैं। प्राधिकरण की स्थापना के समय इसके पास फंड का अभाव था, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा अब एक सौ करोड़ का फंड मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा बीबीएन क्षेत्र के सुनियोजित व समुचित विकास के लिए मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है। प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले बीबीएन से विभिन्न मदों के तहत सालाना दो हज़ार दो सौ करोड़ से ज्यादा का टैक्स सरकारी खजाने में जाता है, अकेले राजस्व विभाग एक हज़ार छः सौ करोड़ से ज्यादा का राजस्व उद्योगों व अन्य कारोबारियों से जुटा रहा है। बीबीएन के उद्योग सालाना दो लाख करोड़ का कारोबार कर रहे हैं, जबकि बीबीएन क्षेत्र से लगभग पांच हजार करोड़ के उत्पादों का सालाना निर्यात किया जा रहा है। इस समय बीबीएन में साढ़े पांच हजार बीघा से अधिक भूमि पर विकसित औद्योगिक कॉरिडोर में दो हज़ार दो सौ साठ औद्योगिक इकाइयां पंद्रह हज़ार छः सौ नब्बे करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश से स्थापित हैं । प्रदेश में मीडियम, लार्ज सेक्टर में हुए कुल निवेश का इक्यासी फीसदी निवेश बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र में हुआ है। प्रदेश को वर्ष दो हज़ार दो में मिले विशेष औद्योगिक पैकेज के बाद बीबीएन निवेशकों का पसंदीदा स्थल बनकर उभरा। बीबीएन जहां एशिया के फार्मा हब बन चुका है, वहीं कई नामी टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग यूनिटों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
जन्नती का सबक लेने वाला वाकिआ बयान किया गया है। शुरू की दस आयतों में चन्द बातें ख़ास तौर पर काबिले ज़िक्र हैं। (1) أولئك لهم رزق معلومه इसका लफ़्ज़ी तर्जुमा यह है "उन्हीं लोगों के लिये ऐसा रिज़्क है जिसका हाल मालूम है ।" मुफस्सिरीन ने इसके विभिन्न मतलब बताये हैं। कुछ हज़रात का कहना यह है कि इससे जन्नती ग़िज़ाओं की उन तफसीली सिफ्तों की तरफ इशारा है जो अनेक सूरतों में बयान की गई हैं। चुनाँचे खुलासा- ए-तफ़सीर में हकीमुल उम्मत हज़रत थानवी रह. ने इसी तफ़सीर को इख़्तियार फ़रमाया है। कुछ हज़रात ने फरमाया कि "रिज़्के मालूम" से मुराद यह है कि उसके वक़्त मुतैयन और मालूम हैं यानी वह सुबह शाम पाबन्दी के साथ अता किया जायेगा, जैसा कि एक दूसरी आयत में 'बुक्रतंव्-व अशिय्या ( सुबह व शाम) के अलफाज़ स्पष्ट रूप से आये हैं। एक तीसरी तफ़सीर और है और वह यह है कि "रिज़्के मालूम" का मतलब यह है कि वह यकीनी और हमेशा के लिये होगा, दुनिया की तरह नहीं कि कोई शख़्स यक़ीन के साथ नहीं कह सकता कि कल मुझे क्या और कितना रिज़्क मिलने वाला है। और न किसी को यह इल्म है कि जितना रिज़्क मुझे हासिल है वह कब तक मेरे पास रहेगा। हर इनसान को हर वक़्त धड़का लगा हुआ है कि जो नेमतें मुझे इस वक़्त हासिल हैं वो शायद कल मेरे पास न रहें, जन्नत में यह ख़तरा नहीं होगा बल्कि वहाँ का रिज़्क यक़ीनी भी होगा और हमेशा के लिये भी । (तफ़सीरे कुर्तुबी वगैरह ) इस लफ्ज़ के ज़रिये क़ुरआन ने जन्नत के रिज़्क की खुद तफसीर फरमा दी है कि वह रिज़्क मेवों पर मुश्तमिल होगा। फवाकिहु फाकि हतुन की जमा (बहुवचन) है और अरबी में फाकि हतुन हर उस चीज़ को कहते हैं जो भूख की ज़रूरत पूरी करने के लिये नहीं बल्कि लज्ज़त हासिल करने के लिये खाई जाये, उर्दू में इसका तर्जुमा "मेवा" इसलिये कर दिया जाता है कि मेवा भी लज्ज़त हासिल करने के लिये खाया जाता है, वरना हकीकृत में "फाकि हतुन" का मरहूम मेवे के मफ्हूम से ज़्यादा आम है। इमाम राज़ी रह. ने इसी फाकि हतुन के लफ़्ज़ से यह नुक्ता निकाला है कि जन्नत में जितनी ग़िज़ायें दी जायेंगी वो सब लज्ज़त बख्शने के लिये दी जायेंगी, भूख की ज़रूरत दूर करने के लिये नहीं। इसलिये कि जन्नत में इनसान को किसी चीज़ की हाजत नहीं होगी वहाँ उसे अपनी ज़िन्दगी बरकरार रखने या सेहत की हिफाज़त के लिये भी किसी ग़िज़ा की ज़रूरत नहीं होगी, हाँ इच्छा होगी उस इच्छा के पूरे होने से लज्ज़त हासिल होगी और जन्नत की तमाम नेमतों का मकसद लज़्ज़त अता करना होगा । (तफ़सीरे कबीर पेज 98 जिल्द 7 ) (۳) وهم مكرمونه यह कलिमा कहकर बता दिया गया कि जन्नत वालों को यह रिज़्क पूरे सम्मान व इज़्ज़त के साथ दिया जायेगा, क्योंकि सम्मान व इज़्ज़त न हो तो लज़ीज़ से लज़ीज़ ग़िज़ा भी बेमज़ा हो जाती है। इसी से यह भी मालूम हुआ कि मेहमान का हक सिर्फ खाना खिलाने से पूरा नहीं होता बल्कि उसका सम्मान व इकराम भी उसके हुक्रूक में दाखिल है।
जन्नती का सबक लेने वाला वाकिआ बयान किया गया है। शुरू की दस आयतों में चन्द बातें ख़ास तौर पर काबिले ज़िक्र हैं। أولئك لهم رزق معلومه इसका लफ़्ज़ी तर्जुमा यह है "उन्हीं लोगों के लिये ऐसा रिज़्क है जिसका हाल मालूम है ।" मुफस्सिरीन ने इसके विभिन्न मतलब बताये हैं। कुछ हज़रात का कहना यह है कि इससे जन्नती ग़िज़ाओं की उन तफसीली सिफ्तों की तरफ इशारा है जो अनेक सूरतों में बयान की गई हैं। चुनाँचे खुलासा- ए-तफ़सीर में हकीमुल उम्मत हज़रत थानवी रह. ने इसी तफ़सीर को इख़्तियार फ़रमाया है। कुछ हज़रात ने फरमाया कि "रिज़्के मालूम" से मुराद यह है कि उसके वक़्त मुतैयन और मालूम हैं यानी वह सुबह शाम पाबन्दी के साथ अता किया जायेगा, जैसा कि एक दूसरी आयत में 'बुक्रतंव्-व अशिय्या के अलफाज़ स्पष्ट रूप से आये हैं। एक तीसरी तफ़सीर और है और वह यह है कि "रिज़्के मालूम" का मतलब यह है कि वह यकीनी और हमेशा के लिये होगा, दुनिया की तरह नहीं कि कोई शख़्स यक़ीन के साथ नहीं कह सकता कि कल मुझे क्या और कितना रिज़्क मिलने वाला है। और न किसी को यह इल्म है कि जितना रिज़्क मुझे हासिल है वह कब तक मेरे पास रहेगा। हर इनसान को हर वक़्त धड़का लगा हुआ है कि जो नेमतें मुझे इस वक़्त हासिल हैं वो शायद कल मेरे पास न रहें, जन्नत में यह ख़तरा नहीं होगा बल्कि वहाँ का रिज़्क यक़ीनी भी होगा और हमेशा के लिये भी । इस लफ्ज़ के ज़रिये क़ुरआन ने जन्नत के रिज़्क की खुद तफसीर फरमा दी है कि वह रिज़्क मेवों पर मुश्तमिल होगा। फवाकिहु फाकि हतुन की जमा है और अरबी में फाकि हतुन हर उस चीज़ को कहते हैं जो भूख की ज़रूरत पूरी करने के लिये नहीं बल्कि लज्ज़त हासिल करने के लिये खाई जाये, उर्दू में इसका तर्जुमा "मेवा" इसलिये कर दिया जाता है कि मेवा भी लज्ज़त हासिल करने के लिये खाया जाता है, वरना हकीकृत में "फाकि हतुन" का मरहूम मेवे के मफ्हूम से ज़्यादा आम है। इमाम राज़ी रह. ने इसी फाकि हतुन के लफ़्ज़ से यह नुक्ता निकाला है कि जन्नत में जितनी ग़िज़ायें दी जायेंगी वो सब लज्ज़त बख्शने के लिये दी जायेंगी, भूख की ज़रूरत दूर करने के लिये नहीं। इसलिये कि जन्नत में इनसान को किसी चीज़ की हाजत नहीं होगी वहाँ उसे अपनी ज़िन्दगी बरकरार रखने या सेहत की हिफाज़त के लिये भी किसी ग़िज़ा की ज़रूरत नहीं होगी, हाँ इच्छा होगी उस इच्छा के पूरे होने से लज्ज़त हासिल होगी और जन्नत की तमाम नेमतों का मकसद लज़्ज़त अता करना होगा । وهم مكرمونه यह कलिमा कहकर बता दिया गया कि जन्नत वालों को यह रिज़्क पूरे सम्मान व इज़्ज़त के साथ दिया जायेगा, क्योंकि सम्मान व इज़्ज़त न हो तो लज़ीज़ से लज़ीज़ ग़िज़ा भी बेमज़ा हो जाती है। इसी से यह भी मालूम हुआ कि मेहमान का हक सिर्फ खाना खिलाने से पूरा नहीं होता बल्कि उसका सम्मान व इकराम भी उसके हुक्रूक में दाखिल है।
Quick links: कोरोना (COVID-19) के बढ़ते मामलों की रफ्तार को धीमी होते हुए देख अब महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Govt) ने कोविड प्रतिबंधों (COVID Restrictions) में कुछ हद तक छूट देने का ऐलान किया है। इस ढील के अंदर नेशनल पार्क, सफारी और सभी पर्यटन स्थल नियमित समय के अनुसार खुल रहे हैं। साथ ही स्पा, स्विमिंग पूल, मनोरंजन / वाटर पार्क को 50% क्षमता के साथ संचालित करने की अनुमति दी गई है और अंतिम संस्कार में लोगों की संख्या पर प्रतिबंध हटा दिया है। बता दें कि, मुंबई सहित 11 जिलों को भी छूट दी गई है, जहां 90% से अधिक वयस्क आबादी को पहली खुराक से टीका लगाया गया है और 70% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। मुंबई, पुणे, रायगढ़ और आठ अन्य जिलों में दी ये छूटः - राज्य में ऑनलाइन टिकटिंग के साथ सभी राष्ट्रीय उद्यान और सफारी नियमित समय के अनुसार खुले रहेंगे। सभी आगंतुकों को अनिवार्य रूप से पूरी तरह से टीका लगाया जाएगा। - प्रदेश में ऑनलाइन टिकटिंग के साथ सभी पर्यटन स्थल नियमित समय के अनुसार खुले रहेंगे। - ब्यूटी सैलून और हेयर सैलून के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के अधीन स्पा 50% क्षमता के साथ चालू रह सकता है। - अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की कोई सीमा नहीं। - स्विमिंग पूल, वाटर-पार्क 50% क्षमता के साथ खुले रहेंगे। - रेस्तरां, थिएटर, नाट्यगृह 50% क्षमता के साथ डीडीएमए द्वारा तय किए जाने वाले समय के अनुसार चालू रह सकते हैं। - शादियों में खुले मैदान और बैंक्वेट हॉल की क्षमता का 25% या 200 जो भी कम मेहमान हो सकते हैं। - डीडीएमए रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक आवाजाही पर प्रतिबंध के बारे में फैसला कर सकता है। - डीडीएमए प्रतिस्पर्धी खेलों और घुड़दौड़ सहित ऐसी अन्य गतिविधियों में 25% दर्शकों की अनुमति दे सकते है। - डीडीएमए स्थानीय पर्यटन स्थलों को उचित प्रतिबंधों के साथ खोल सकता है। - डीडीएमए साप्ताहिक बाजार खोलने की अनुमति दे सकता है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि, महाराष्ट्र ने सोमवार को 15,140 COVID-19 मामले दर्ज किए है। वहीं एक दिन पहले की तुलना में 7,304 कम और मुंबई में 26 सहित 39 मौतें हुई है। इसमें कहा गया है कि नए परिवर्धन ने राज्य के कुल केसलोएड को 77,21,109 और मरने वालों की संख्या 1,42,611 कर दी है। महाराष्ट्र में कुल स्वस्थ होने वालों की संख्या बढ़कर 73,67,259 हो गई है। इसके अलावा सोमवार को 35,453 मरीजों को छुट्टी दे दी गई।
Quick links: कोरोना के बढ़ते मामलों की रफ्तार को धीमी होते हुए देख अब महाराष्ट्र सरकार ने कोविड प्रतिबंधों में कुछ हद तक छूट देने का ऐलान किया है। इस ढील के अंदर नेशनल पार्क, सफारी और सभी पर्यटन स्थल नियमित समय के अनुसार खुल रहे हैं। साथ ही स्पा, स्विमिंग पूल, मनोरंजन / वाटर पार्क को पचास% क्षमता के साथ संचालित करने की अनुमति दी गई है और अंतिम संस्कार में लोगों की संख्या पर प्रतिबंध हटा दिया है। बता दें कि, मुंबई सहित ग्यारह जिलों को भी छूट दी गई है, जहां नब्बे% से अधिक वयस्क आबादी को पहली खुराक से टीका लगाया गया है और सत्तर% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। मुंबई, पुणे, रायगढ़ और आठ अन्य जिलों में दी ये छूटः - राज्य में ऑनलाइन टिकटिंग के साथ सभी राष्ट्रीय उद्यान और सफारी नियमित समय के अनुसार खुले रहेंगे। सभी आगंतुकों को अनिवार्य रूप से पूरी तरह से टीका लगाया जाएगा। - प्रदेश में ऑनलाइन टिकटिंग के साथ सभी पर्यटन स्थल नियमित समय के अनुसार खुले रहेंगे। - ब्यूटी सैलून और हेयर सैलून के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के अधीन स्पा पचास% क्षमता के साथ चालू रह सकता है। - अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की कोई सीमा नहीं। - स्विमिंग पूल, वाटर-पार्क पचास% क्षमता के साथ खुले रहेंगे। - रेस्तरां, थिएटर, नाट्यगृह पचास% क्षमता के साथ डीडीएमए द्वारा तय किए जाने वाले समय के अनुसार चालू रह सकते हैं। - शादियों में खुले मैदान और बैंक्वेट हॉल की क्षमता का पच्चीस% या दो सौ जो भी कम मेहमान हो सकते हैं। - डीडीएमए रात ग्यारह बजे से सुबह पाँच बजे तक आवाजाही पर प्रतिबंध के बारे में फैसला कर सकता है। - डीडीएमए प्रतिस्पर्धी खेलों और घुड़दौड़ सहित ऐसी अन्य गतिविधियों में पच्चीस% दर्शकों की अनुमति दे सकते है। - डीडीएमए स्थानीय पर्यटन स्थलों को उचित प्रतिबंधों के साथ खोल सकता है। - डीडीएमए साप्ताहिक बाजार खोलने की अनुमति दे सकता है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि, महाराष्ट्र ने सोमवार को पंद्रह,एक सौ चालीस COVID-उन्नीस मामले दर्ज किए है। वहीं एक दिन पहले की तुलना में सात,तीन सौ चार कम और मुंबई में छब्बीस सहित उनतालीस मौतें हुई है। इसमें कहा गया है कि नए परिवर्धन ने राज्य के कुल केसलोएड को सतहत्तर,इक्कीस,एक सौ नौ और मरने वालों की संख्या एक,बयालीस,छः सौ ग्यारह कर दी है। महाराष्ट्र में कुल स्वस्थ होने वालों की संख्या बढ़कर तिहत्तर,सरसठ,दो सौ उनसठ हो गई है। इसके अलावा सोमवार को पैंतीस,चार सौ तिरेपन मरीजों को छुट्टी दे दी गई।
Don't Miss! बॉलीवुड इंडस्ट्री में ऐसी कई सारी हसीनाएं रही है जिन्होंने 80 और 90 के दशक में अपनी एक्टिंग से हर किसी के दिलों में जगह बनाई. उन्हीं में से एक एक्ट्रेस ऐसी भी थी जो कि हर किसी के दिलो-दिमाग पर छा गई थी. हम बात कर रहे हैं किमी काटकर की. जिन्होंने बहुत कम वक्त में इंडस्ट्री में एक अच्छा खासा मुकाम को हासिल कर लिया था. आज के वक्त में एक्ट्रेस को लोग 'टार्जन गर्ल' के नाम से जाना करते हैं. कुछ खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने 20 साल की उम्र से ही बॉलीवुड में डेब्यू कर लिया और उनकी पहली फिल्म थी 'पत्थर दिल'. जिसे दर्शकों से भी काफी प्यार मिला. हेलो की एक्ट्रेस ने इस फिल्म में काफी छोटा रोल निभाया था. लेकिन एक्ट्रेस ने 1985 में रिलीज हुई 'एडवेंचर ऑफ टार्जन' फिल्म में काम किया और उन्हें असल मायनों में इसी फिल्म से पहचान प्राप्त हुई थी. इस फिल्म में किमी काटकर के एक से बढ़कर एक बोल्ड सीन दर्शाए गए थे. यहां तक कि एक्ट्रेस के इस फिल्म में इतने ज्यादा बोल्ड सींस है कि शायद आप अपने परिवार के साथ में इस फिल्म को बैठकर देख नहीं सकते हैं. जैसे ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई वैसे ही एक्ट्रेस की पॉपुलैरिटी भी बढ़ती चली गई. जिसके बाद में किमी काटकर ने 1991 में रिलीज हुई 'हम' फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ 'जुम्मा चुम्मा' गाने में भी काम किया. अमिताभ बच्चन की फिल्म 'हम' को दर्शकों द्वारा काफी प्यार मिला था. लेकिन सबसे ज्यादा किमी काटकर और अमिताभ बच्चन द्वारा फिल्माया गया गाना 'जुम्मा-चुम्मा' खासा लोकप्रिय हो गया था. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद में किमी काटकर को 'जुम्मा चुम्मा गर्ल' के नाम से भी जाना जाने लगा. जिसके बाद में 1992 में किमी काटकर ने इंडस्ट्री के सबसे मशहूर फोटोग्राफर और फिल्ममेकर शांतनु शौरी के साथ में शादी रचा ली. जिसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ अपने परिवार को संभालने का जिम्मा लिया. अब एक्ट्रेस अपने परिवार के साथ गोवा में रहती हैं.
Don't Miss! बॉलीवुड इंडस्ट्री में ऐसी कई सारी हसीनाएं रही है जिन्होंने अस्सी और नब्बे के दशक में अपनी एक्टिंग से हर किसी के दिलों में जगह बनाई. उन्हीं में से एक एक्ट्रेस ऐसी भी थी जो कि हर किसी के दिलो-दिमाग पर छा गई थी. हम बात कर रहे हैं किमी काटकर की. जिन्होंने बहुत कम वक्त में इंडस्ट्री में एक अच्छा खासा मुकाम को हासिल कर लिया था. आज के वक्त में एक्ट्रेस को लोग 'टार्जन गर्ल' के नाम से जाना करते हैं. कुछ खबरों की मानें तो एक्ट्रेस ने बीस साल की उम्र से ही बॉलीवुड में डेब्यू कर लिया और उनकी पहली फिल्म थी 'पत्थर दिल'. जिसे दर्शकों से भी काफी प्यार मिला. हेलो की एक्ट्रेस ने इस फिल्म में काफी छोटा रोल निभाया था. लेकिन एक्ट्रेस ने एक हज़ार नौ सौ पचासी में रिलीज हुई 'एडवेंचर ऑफ टार्जन' फिल्म में काम किया और उन्हें असल मायनों में इसी फिल्म से पहचान प्राप्त हुई थी. इस फिल्म में किमी काटकर के एक से बढ़कर एक बोल्ड सीन दर्शाए गए थे. यहां तक कि एक्ट्रेस के इस फिल्म में इतने ज्यादा बोल्ड सींस है कि शायद आप अपने परिवार के साथ में इस फिल्म को बैठकर देख नहीं सकते हैं. जैसे ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई वैसे ही एक्ट्रेस की पॉपुलैरिटी भी बढ़ती चली गई. जिसके बाद में किमी काटकर ने एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में रिलीज हुई 'हम' फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ 'जुम्मा चुम्मा' गाने में भी काम किया. अमिताभ बच्चन की फिल्म 'हम' को दर्शकों द्वारा काफी प्यार मिला था. लेकिन सबसे ज्यादा किमी काटकर और अमिताभ बच्चन द्वारा फिल्माया गया गाना 'जुम्मा-चुम्मा' खासा लोकप्रिय हो गया था. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद में किमी काटकर को 'जुम्मा चुम्मा गर्ल' के नाम से भी जाना जाने लगा. जिसके बाद में एक हज़ार नौ सौ बानवे में किमी काटकर ने इंडस्ट्री के सबसे मशहूर फोटोग्राफर और फिल्ममेकर शांतनु शौरी के साथ में शादी रचा ली. जिसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ अपने परिवार को संभालने का जिम्मा लिया. अब एक्ट्रेस अपने परिवार के साथ गोवा में रहती हैं.
घने जंगलों के बीच छिपे हुए और वीडियो में गन लहराकर हिंदुस्तान को चुनौती देने का दुस्साहस करने वाले आंतकियों के दिन अब गिनती के रह जाएंगे. सुरक्षा बलों को मिलने वाली है अब एक ऐसी आंख जो इस तरह के आतंकियों पर हर पल और हर जगह निगाह रखेंगी. और निगाह में आए हुए इन आतंकियों को सुरक्षाबलों की गोलियां आखिरी अंजाम तक पहुंचा देंगी. अब आप जान लीजिए ये सुरक्षा बलों की ये तीसरी आंख कौन सी है. फोलिएज पैनिट्रेटिंग रडार यानि ऐसा रडारयुक्त कैमरा जो घने जंगलों में छिपे हुए आतंकियों को पल भर में खोज लेगा. आतंकियों के खिलाफ इस तरह के रडार का इस्तेमाल पश्चिमी देशों में और इजरायल में काफी कामयाब रहा है. इसी के बाद एनएसए अजीत डोभाल ने सुरक्षा बलों के इस रडार के इस्तेमाल का निर्देश दिया. और पाकिस्तान के साथ एलओसी पर इस रडार के सहारे एक ऐसी अभेद्य दीवार खड़ी की जा रही है जिसको लांघ कर आतंकी घाटी में किसी वारदात को अंजाम देने से पहले सुरक्षा बलों के निशाने पर आ जाएं. इस रडार को इजरायल से खरीदा जा रहा है. इसके लिए हिंदुस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की एक टीम अगस्त केआखिरी सप्ताह में इजरायल जा रहा है. 1. रडार को अलग-अलग लोकेशन पर फिट किया जाएगा. 2. रडार को एक सेन्ट्रल मॉनिटिरीग कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा. 3. रडार किसी भी मूवमेंट को पकड़ने के साथ ही उस जगह की इमेज और वीडियो बना कर सीधा कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा. 4. इस तकनीक के सहारे आतंकियों की लोकेशन और संख्या के साथ साथ उनके पास मौजूद हथियार और गोला बारूद की जानकारी भी कंट्रोल रूम को देगा. आतंकी बुरहान के एनकाउंटर के बाद घाटी में बदले हालात को देखते हुए इस रडार की खरीद में तेजी लाई गई है. पूर्व गृहसचिव मधुकर गुप्ता के नेतृत्व में एक कमेटी ने भी एलओसी और इंटरनेशनल बॉर्डर पर इलेक्ट्रानिक सर्विलांस बढ़ाने की सिफारिश की थी. इन रडार की खरीद इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस तकनीक में महारथ हासिल करने के लिए सुरक्षा बलों की एक टीम इजरायल में ट्रैनिंग लेने के लिए जल्दी ही रवाना होगी. घने जंगलों का सहारा लेकर सुरक्षा बलों को गच्चा दे रहे आतंकियों को अब तीसरी आंख के सहारे माकूल जवाब देने की तैयारी हो चुकी है. एनएसए अजीत डोभाल खुद इस प्रोजेक्ट को जल्दी से जल्दी पूरा करने पर जोर दे रहे है. एनएएसए की ये कोशिश आतंक के आका हाफिज सईद के आतंकियों को जल्दी से जल्दी उनके अंजाम तक पहुंचाने की है.
घने जंगलों के बीच छिपे हुए और वीडियो में गन लहराकर हिंदुस्तान को चुनौती देने का दुस्साहस करने वाले आंतकियों के दिन अब गिनती के रह जाएंगे. सुरक्षा बलों को मिलने वाली है अब एक ऐसी आंख जो इस तरह के आतंकियों पर हर पल और हर जगह निगाह रखेंगी. और निगाह में आए हुए इन आतंकियों को सुरक्षाबलों की गोलियां आखिरी अंजाम तक पहुंचा देंगी. अब आप जान लीजिए ये सुरक्षा बलों की ये तीसरी आंख कौन सी है. फोलिएज पैनिट्रेटिंग रडार यानि ऐसा रडारयुक्त कैमरा जो घने जंगलों में छिपे हुए आतंकियों को पल भर में खोज लेगा. आतंकियों के खिलाफ इस तरह के रडार का इस्तेमाल पश्चिमी देशों में और इजरायल में काफी कामयाब रहा है. इसी के बाद एनएसए अजीत डोभाल ने सुरक्षा बलों के इस रडार के इस्तेमाल का निर्देश दिया. और पाकिस्तान के साथ एलओसी पर इस रडार के सहारे एक ऐसी अभेद्य दीवार खड़ी की जा रही है जिसको लांघ कर आतंकी घाटी में किसी वारदात को अंजाम देने से पहले सुरक्षा बलों के निशाने पर आ जाएं. इस रडार को इजरायल से खरीदा जा रहा है. इसके लिए हिंदुस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की एक टीम अगस्त केआखिरी सप्ताह में इजरायल जा रहा है. एक. रडार को अलग-अलग लोकेशन पर फिट किया जाएगा. दो. रडार को एक सेन्ट्रल मॉनिटिरीग कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा. तीन. रडार किसी भी मूवमेंट को पकड़ने के साथ ही उस जगह की इमेज और वीडियो बना कर सीधा कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा. चार. इस तकनीक के सहारे आतंकियों की लोकेशन और संख्या के साथ साथ उनके पास मौजूद हथियार और गोला बारूद की जानकारी भी कंट्रोल रूम को देगा. आतंकी बुरहान के एनकाउंटर के बाद घाटी में बदले हालात को देखते हुए इस रडार की खरीद में तेजी लाई गई है. पूर्व गृहसचिव मधुकर गुप्ता के नेतृत्व में एक कमेटी ने भी एलओसी और इंटरनेशनल बॉर्डर पर इलेक्ट्रानिक सर्विलांस बढ़ाने की सिफारिश की थी. इन रडार की खरीद इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस तकनीक में महारथ हासिल करने के लिए सुरक्षा बलों की एक टीम इजरायल में ट्रैनिंग लेने के लिए जल्दी ही रवाना होगी. घने जंगलों का सहारा लेकर सुरक्षा बलों को गच्चा दे रहे आतंकियों को अब तीसरी आंख के सहारे माकूल जवाब देने की तैयारी हो चुकी है. एनएसए अजीत डोभाल खुद इस प्रोजेक्ट को जल्दी से जल्दी पूरा करने पर जोर दे रहे है. एनएएसए की ये कोशिश आतंक के आका हाफिज सईद के आतंकियों को जल्दी से जल्दी उनके अंजाम तक पहुंचाने की है.
जल्द ही आप आसानी से अपने प्रीपेड मोबाइल नंबर को पोस्टपेड या पोस्टपेड नंबर को प्रीपेड में बदल सकेंगे। इसके लिए आपको केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करनी होगी। बस एक ओटीपी से ही आपका काम हो जाएगा। दूरसंचार विभाग ने सोमवार को इसे बारे में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
जल्द ही आप आसानी से अपने प्रीपेड मोबाइल नंबर को पोस्टपेड या पोस्टपेड नंबर को प्रीपेड में बदल सकेंगे। इसके लिए आपको केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करनी होगी। बस एक ओटीपी से ही आपका काम हो जाएगा। दूरसंचार विभाग ने सोमवार को इसे बारे में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पारस देख रहा था कि आरव का मन खाने से अधिक अपने फोन पर था। वह बार बार मैसेज चेक कर रहा था। सिर्फ दो रोटी खाकर वह प्लेट किचन में रखने के लिए उठा तो पारस ने टोंक दिया। "खाना तो ढंग से खाओ। जल्दी किस बात की है तुम्हें।" "बस पापा मेरा पेट भर गया।" कहते हुए वह प्लेट किचन में रख अपने कमरे में चला गया। पारस का मन भी खाने से उचट गया। उसने प्लेट की रोटी खत्म की और प्लेट किचन में रख आया। बचा हुआ खाना फ्रिज में रख कर वह भी अपने कमरे में चला गया। लैपटॉप खोल कर वह ऑफिस का काम करने लगा। पर काम में उसका मन नही लग रहा था। वह आरव के विषय में सोच रहा था। उसने महसूस किया था कि पिछले कुछ महीनों में आरव के बर्ताव में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले डिनर का समय खाने के साथ साथ आपसी बातचीत का भी होता था। आरव उसे स्कूल में क्या हुआ इसका पूरा ब्यौरा देता था। किंतु जबसे उसने कॉलेज जाना शुरू किया है तब से बहुत कम बात करता है। इधर कुछ दिनों से तो उसका ध्यान ही जैसे घर में नही रहता था। पारस सोचने लगा। उम्र का तकाज़ा है। उन्नीस साल का हो गया है अब वह। नए दोस्त नया माहौल इस सब में उसने अपनी अलग दुनिया बसा ली है। उसके मन ने तर्क किया। वह भी तो इस उम्र से गुज़र चुका है। उसके भी यार दोस्त थे। पर ऐसी बेखयाली तो नही थी। शायद आज की पीढ़ी ही ऐसी है। काम में मन तो लग नही रहा था। उसने लैपटॉप बंद कर दिया। पानी पीने के लिए जब वह बाहर आया तो देखा कि आरव बॉलकनी में खड़ा किसी से फोन पर बात कर रहा था। जो कुछ भी उसके कान में पड़ा उससे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे दूसरी तरफ कोई लड़की बात कर रही थी। इस तरह बेटे की बात सुनना उसे अच्छा नही लगा। वह अपने कमरे में आ गया। बिस्तर पर लेटे हुए उसे शिवानी की याद आ गई। दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका वाला प्यार नही हुआ। उनकी अरेंज्ड मैरिज थी। लेकिन दोनों के बीच प्यार अवश्य था। आरंभ के दो साल सिर्फ वही दोनों थे। बेफिक्री के दिन थे। बस सैर सपाटा, फिल्में और रेस्टोरेंट में डिनर। तभी एक दिन शिवानी ने उसके कान में किसी तीसरे प्राणी के आने की खबर सुनाई। जिम्मेदारियों ने दस्तक दे दी थी। सैर सपाटे की जगह डॉक्टर की क्लीनिक के चक्कर लगने लगे। आने वाले के स्वागत की तैयारियां होने लगीं। और नौ माह बाद आरव उनके जीवन में आया। वह दोनों बहुत खुश थे। उसे याद है जब आरव छह महीने का था तो एक पूरी रात दोनों पति पत्नी ने उसके सुखद भविष्य के सपने देखने में ही काट दी थी। आरव ने प्ले स्कूल जाना शुरू कर दिया था। एक दिन कूरियर से शिवानी की सबसे अच्छी सहेली की शादी का कार्ड आया। शिवानी शादी में जाने के लिए बहुत उत्साहित थी। पारस ने सुझाव दिया कि वह तो वहाँ किसी को जानता नही है। इसलिए शिवानी अकेली ही शादी में चली जाए। आरव को वह संभाल लेगा। पहले तो वह कुछ पशोपश में रही फिर मान गई। विदा होते समय आरव को देख कर वह कुछ भावुक हो गई। लेकिन पारस ने उसे तसल्ली दे कर समझा दिया। लौटते समय उसका फोन आया था। उसने बताया था कि वह ट्रेन में बैठ चुकी है और कल सुबह तक पहुँच जाएगी। अगले दिन शिवानी की जगह वह मनहूस खबर आई। रात के करीब ढाई बजे ट्रेन के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। बहुत से लोग मारे गए। उनमें से एक शिवानी भी थी। पारस की दुनिया उजड़ गई। घर वालों ने दूसरी शादी का सुझाव दिया "अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है। पूरी ज़िंदगी पड़ी है। फिर आरव को भी एक माँ मिल जाएगी।" पारस भावनात्मक रूप से इस सब के लिए तैयार नही था। उसने साफ इंकार कर दिया। पिता ने भी समझाया "अभी हो सकता है तुम्हें किसी के साथ की आवश्यक्ता महसूस ना हो। लेकिन उम्र बीतने पर जब आरव बड़ा हो कर अपनी दुनिया में रम जाएगा तब तुम अकेलापन महसूस करोगे।" आज पारस को अपने पिता की कही बात का मतलब समझ आ रहा था। वह आरव की परवरिश में मशगूल हो गया। घर ऑफिस और आरव की जिम्मेदारियों में अपने लिए उसके पास बहुत कम समय बचता था। कभी कभी वह सोचता भी था कि उसकी जरूरतों के लिए भी कोई होता। लेकिन आरव के जीवन में कोई प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े यह सोच कर स्वयं को संभाल लेता था। आरव के कुछ दोस्त कॉलेज की तरफ से ट्रिप पर जा रहे थे। वह भी ज़िद करके उनके साथ चला गया। पारस अब पहले से भी अधिक अकेलापन महसूस करने लगा था। कभी कभी वह सोचता कि जिसके लिए उसने इतना कुछ सहा उसे भी उसकी कोई परवाह नही है। उसने अपने आप को खुद में ही समेट लिया। आरव भी जब से ट्रिप से लौटा था उसे महसूस हो रहा था कि उसके पापा किसी बात पर आहत हैं। पारस का चुप चुप रहना उसे भी पीड़ा पहुँचा रहा था। उसने पूंछने का प्रयास किया लेकिन पारस ने टाल दिया। आरव के लिए भी एक एक दिन कठिन हो रहा था। उसने तय कर लिया था कि आज पापा के मन की बात जानकर ही रहेगा। वह पारस के कमरे में जाकर बोला "पापा आज मैं आपके पास सोऊंगा।" यह कह कर वह उसके बिस्तर पर बैठ गया। "यह क्या है। तुम क्या छोटे बच्चे हो। अपने कमरे में जाओ।" पारस कुछ गुस्से से बोला। "बड़ा हुआ तो क्या हुआ। आज भी मैं आपका वही आरव हूँ।" "सच" पारस शिकायती लहजे में बोला। "हाँ बिल्कुल सच है पापा। मैं देख रहा हूँ कि आपके मन में कोई बात है। पर आप बता नही रहे हैं। प्लीज़ पापा बताइए ना क्या बात है।" आरव ने पारस का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लिया। पारस कुछ देर तक आरव को देखता रहा फिर बोला "मैं और तुम दो बिंदु थे जो एक दूसरे से जुड़े थे। हमारे बीच आपसी प्यार और विश्वास की रेखा थी। लेकिन अब एक नया बिंदु आ गया है। तुम उससे जुड़ गए हो। मैं अलग थलग पड़ गया हूँ।" अपने पापा का दर्द आरव समझ गया। कुछ रुक कर बोला "पापा बचपन में आप मुझे ज्योमेट्री पढ़ाते थे। आपने मुझे सर्कल के बारे में बताया था। उसकी परिधि का हर बिंदु समान रूप से केंद्र से जुड़ा होता है। अगर केंद्र से ज़रा भी इधर उधर हो तो उसका आकार बिगड़ जाता है। मेरी ज़िंदगी का केंद्र बिंदु हैं आप। मैं सदा आपसे जुड़ा रहूँगा।" आरव पारस को गले लगा कर रोने लगा। पारस की आँखों से भी आंसू झरने लगे। अब पारस का मन हल्का हो गया था। उसका आरव समझदार हो गया था।
पारस देख रहा था कि आरव का मन खाने से अधिक अपने फोन पर था। वह बार बार मैसेज चेक कर रहा था। सिर्फ दो रोटी खाकर वह प्लेट किचन में रखने के लिए उठा तो पारस ने टोंक दिया। "खाना तो ढंग से खाओ। जल्दी किस बात की है तुम्हें।" "बस पापा मेरा पेट भर गया।" कहते हुए वह प्लेट किचन में रख अपने कमरे में चला गया। पारस का मन भी खाने से उचट गया। उसने प्लेट की रोटी खत्म की और प्लेट किचन में रख आया। बचा हुआ खाना फ्रिज में रख कर वह भी अपने कमरे में चला गया। लैपटॉप खोल कर वह ऑफिस का काम करने लगा। पर काम में उसका मन नही लग रहा था। वह आरव के विषय में सोच रहा था। उसने महसूस किया था कि पिछले कुछ महीनों में आरव के बर्ताव में बहुत परिवर्तन आ गया है। पहले डिनर का समय खाने के साथ साथ आपसी बातचीत का भी होता था। आरव उसे स्कूल में क्या हुआ इसका पूरा ब्यौरा देता था। किंतु जबसे उसने कॉलेज जाना शुरू किया है तब से बहुत कम बात करता है। इधर कुछ दिनों से तो उसका ध्यान ही जैसे घर में नही रहता था। पारस सोचने लगा। उम्र का तकाज़ा है। उन्नीस साल का हो गया है अब वह। नए दोस्त नया माहौल इस सब में उसने अपनी अलग दुनिया बसा ली है। उसके मन ने तर्क किया। वह भी तो इस उम्र से गुज़र चुका है। उसके भी यार दोस्त थे। पर ऐसी बेखयाली तो नही थी। शायद आज की पीढ़ी ही ऐसी है। काम में मन तो लग नही रहा था। उसने लैपटॉप बंद कर दिया। पानी पीने के लिए जब वह बाहर आया तो देखा कि आरव बॉलकनी में खड़ा किसी से फोन पर बात कर रहा था। जो कुछ भी उसके कान में पड़ा उससे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे दूसरी तरफ कोई लड़की बात कर रही थी। इस तरह बेटे की बात सुनना उसे अच्छा नही लगा। वह अपने कमरे में आ गया। बिस्तर पर लेटे हुए उसे शिवानी की याद आ गई। दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका वाला प्यार नही हुआ। उनकी अरेंज्ड मैरिज थी। लेकिन दोनों के बीच प्यार अवश्य था। आरंभ के दो साल सिर्फ वही दोनों थे। बेफिक्री के दिन थे। बस सैर सपाटा, फिल्में और रेस्टोरेंट में डिनर। तभी एक दिन शिवानी ने उसके कान में किसी तीसरे प्राणी के आने की खबर सुनाई। जिम्मेदारियों ने दस्तक दे दी थी। सैर सपाटे की जगह डॉक्टर की क्लीनिक के चक्कर लगने लगे। आने वाले के स्वागत की तैयारियां होने लगीं। और नौ माह बाद आरव उनके जीवन में आया। वह दोनों बहुत खुश थे। उसे याद है जब आरव छह महीने का था तो एक पूरी रात दोनों पति पत्नी ने उसके सुखद भविष्य के सपने देखने में ही काट दी थी। आरव ने प्ले स्कूल जाना शुरू कर दिया था। एक दिन कूरियर से शिवानी की सबसे अच्छी सहेली की शादी का कार्ड आया। शिवानी शादी में जाने के लिए बहुत उत्साहित थी। पारस ने सुझाव दिया कि वह तो वहाँ किसी को जानता नही है। इसलिए शिवानी अकेली ही शादी में चली जाए। आरव को वह संभाल लेगा। पहले तो वह कुछ पशोपश में रही फिर मान गई। विदा होते समय आरव को देख कर वह कुछ भावुक हो गई। लेकिन पारस ने उसे तसल्ली दे कर समझा दिया। लौटते समय उसका फोन आया था। उसने बताया था कि वह ट्रेन में बैठ चुकी है और कल सुबह तक पहुँच जाएगी। अगले दिन शिवानी की जगह वह मनहूस खबर आई। रात के करीब ढाई बजे ट्रेन के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। बहुत से लोग मारे गए। उनमें से एक शिवानी भी थी। पारस की दुनिया उजड़ गई। घर वालों ने दूसरी शादी का सुझाव दिया "अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है। पूरी ज़िंदगी पड़ी है। फिर आरव को भी एक माँ मिल जाएगी।" पारस भावनात्मक रूप से इस सब के लिए तैयार नही था। उसने साफ इंकार कर दिया। पिता ने भी समझाया "अभी हो सकता है तुम्हें किसी के साथ की आवश्यक्ता महसूस ना हो। लेकिन उम्र बीतने पर जब आरव बड़ा हो कर अपनी दुनिया में रम जाएगा तब तुम अकेलापन महसूस करोगे।" आज पारस को अपने पिता की कही बात का मतलब समझ आ रहा था। वह आरव की परवरिश में मशगूल हो गया। घर ऑफिस और आरव की जिम्मेदारियों में अपने लिए उसके पास बहुत कम समय बचता था। कभी कभी वह सोचता भी था कि उसकी जरूरतों के लिए भी कोई होता। लेकिन आरव के जीवन में कोई प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े यह सोच कर स्वयं को संभाल लेता था। आरव के कुछ दोस्त कॉलेज की तरफ से ट्रिप पर जा रहे थे। वह भी ज़िद करके उनके साथ चला गया। पारस अब पहले से भी अधिक अकेलापन महसूस करने लगा था। कभी कभी वह सोचता कि जिसके लिए उसने इतना कुछ सहा उसे भी उसकी कोई परवाह नही है। उसने अपने आप को खुद में ही समेट लिया। आरव भी जब से ट्रिप से लौटा था उसे महसूस हो रहा था कि उसके पापा किसी बात पर आहत हैं। पारस का चुप चुप रहना उसे भी पीड़ा पहुँचा रहा था। उसने पूंछने का प्रयास किया लेकिन पारस ने टाल दिया। आरव के लिए भी एक एक दिन कठिन हो रहा था। उसने तय कर लिया था कि आज पापा के मन की बात जानकर ही रहेगा। वह पारस के कमरे में जाकर बोला "पापा आज मैं आपके पास सोऊंगा।" यह कह कर वह उसके बिस्तर पर बैठ गया। "यह क्या है। तुम क्या छोटे बच्चे हो। अपने कमरे में जाओ।" पारस कुछ गुस्से से बोला। "बड़ा हुआ तो क्या हुआ। आज भी मैं आपका वही आरव हूँ।" "सच" पारस शिकायती लहजे में बोला। "हाँ बिल्कुल सच है पापा। मैं देख रहा हूँ कि आपके मन में कोई बात है। पर आप बता नही रहे हैं। प्लीज़ पापा बताइए ना क्या बात है।" आरव ने पारस का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लिया। पारस कुछ देर तक आरव को देखता रहा फिर बोला "मैं और तुम दो बिंदु थे जो एक दूसरे से जुड़े थे। हमारे बीच आपसी प्यार और विश्वास की रेखा थी। लेकिन अब एक नया बिंदु आ गया है। तुम उससे जुड़ गए हो। मैं अलग थलग पड़ गया हूँ।" अपने पापा का दर्द आरव समझ गया। कुछ रुक कर बोला "पापा बचपन में आप मुझे ज्योमेट्री पढ़ाते थे। आपने मुझे सर्कल के बारे में बताया था। उसकी परिधि का हर बिंदु समान रूप से केंद्र से जुड़ा होता है। अगर केंद्र से ज़रा भी इधर उधर हो तो उसका आकार बिगड़ जाता है। मेरी ज़िंदगी का केंद्र बिंदु हैं आप। मैं सदा आपसे जुड़ा रहूँगा।" आरव पारस को गले लगा कर रोने लगा। पारस की आँखों से भी आंसू झरने लगे। अब पारस का मन हल्का हो गया था। उसका आरव समझदार हो गया था।
Cyrus Mistry Death: टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन और उद्योगपति साइरस मिस्त्री की मौत के बाद सड़क सुरक्षा पर बहस शुरू हो गई है. एक्सपर्ट्स ने कार में पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए सीट बेल्ट जरूरी, ओवरस्पीडिंग की चेकिंग और सड़कों की डिजाइन में बदलाव करने की मांग की है. साइरस मिस्त्री का रविवार को सड़क हादसे में निधन हो गया था. वो अहमदाबाद से मुंबई आ रहे थे. इस कार में चार लोग सवार थे. कार को गायनेकोलॉजिस्ट अनाहिता पंडोले चला रही थीं. कार में चार लोग सवार थे. ड्राइविंग सीट के बगल में अनाहिता के पति डेरियस पंडोले बैठे थे. पीछे की सीट पर साइरस मिस्त्री और जहांगीर दिनशॉ पंडोले बैठे थे. पुलिस ने बताया कि पीछे की सीट पर बैठे साइरस मिस्त्री और जहांगीर ने सीट बेल्ट नहीं लगाया था. कार भी ओवरस्पीड में चल रही थी. कार ने सामने वाली कार को ओवरटेक करने की कोशिश भी की थी. नतीजतन कार आउट ऑफ कंट्रोल हो गई और डिवाइडर से जा टकराई. ये हादसा मुंबई से तकरीबन 100 किलोमीटर दूर पालघर के पास हुआ. एक्सपर्ट ने तेज स्पीड में चल रही गाड़ियों पर नजर रखने और पीछे बैठे यात्रियों के लिए सीट बेल्ट जरूरी करने पर जोर दिया. साथ ही एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि एक्सीडेंट को रोकने के लिए सड़कों को बेहतर तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए. नई दिल्ली स्थित सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के चीफ साइंटिस्ट एस वेलमुरुगन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि राजधानी दिल्ली में कुछ इलाकों में सड़कें सही तरह से डिजाइन नहीं हैं. उदाहरण के लिए, 6 लेन रोड कुछ जगहों पर 4 लेन में सिकुड़ गई है तो कहीं पर सतह बराबर नहीं है. इससे खतरा बढ़ता है और इसे ठीक किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि रविवार की घटना से तीन बड़ी बातें सामने आईं हैं. पहला ये कि सड़कों को, खासतौर से हाईवे की सड़कों को ठीक तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है. दूसरा- साइन बोर्ड सही तरीके से लगाने होंगे और तीसरा- लोगों को जागरूक करना होगा कि पीठे बैठे होने पर भी सीट बेल्ट लगाना कितना जरूरी है. क्या बदलाव किए जाने जरूरी? - वेलमुरुगन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जिन जगहों पर सही तरह से साइन बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां इन्हें ठीक तरह से लगाना होगा. - उन्होंने कहा कि पीछे बैठने पर सीट बेल्ट न लगाने और ओवरस्पीडिंग के मामलों में कानून को सख्ती से लागू करना होगा. - उन्होंने कहा कि राजधानी की सड़कों पर रात के समय या कम ट्रैफिक होने पर लोग स्पीड में गाड़ी चलाते हैं, इसलिए कानून का उल्लंघन करने वालों को रोकने के लिए मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए. साथ ही ट्रैफिक पुलिस को पीछे बैठने वाले यात्री के सीट बेल्ट नहीं पहनने पर चालान काटना चाहिए. डिजाइन, साइन बोर्ड की कमी, कैसे बनी हादसे की वजह? - रविवार को मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर बने सूर्या रिवर ब्रिज पर ये हादसा हुआ था. ये हाईवे तीन लेन का है, लेकिन ब्रिज पर दो लेन का हो जाता है. इसके अलावा यहां साइन बोर्ड की भी कमी है. कासा पुलिस इस हादसे के कारणों की जांच कर रही है. - एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहले सड़क तीन लेन की है और पुल पर दो लेन की बनी है. कार डिवाइडर से टकरा गई और रुक गई. पुल के नीचे सूर्या नदी है. उन्होंने कहा कि सड़क संकरी होने के साथ-साथ गलत साइड से ओवरटेक करने की वजह से ये दुर्घटना हो सकती है. - पुलिस ओवरस्पीडिंग और ओवरटेक को दुर्घटना का संभावित कारण बता रही है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां खतरे की चेतावनी देने वाले साइनबोर्ड का अभाव है. इसके अलावा सड़क की खराब डिजाइन की वजह से भी यहां हादसे होते हैं. - पुलिस ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर कुछ स्ट्रीट लाइट की वजह से रात में सफर करना और खतरनाक हो जाता है. गाड़ियों की तेज बीम लाइट से सामने से आ रही गाड़ी के ड्राइवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इससे खतरनाक हादसा हो जाता है. ऐसे में कई ड्राइवर संतुलन खो देते हैं फ्लाईओवर से फिसलकर नदी में गिर जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तीन लेन की सड़क फ्लाईओवर पर दो लेन की हो जाती है. - एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पालघर में मानोर और गुजरात के अचाड़ में 52 किमी लंबी सड़क पर कई एक्सीडेंटल स्पॉट है. उन्होंने बताया कि 18 महीनों में सड़क हादसों में 106 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग हमेशा के लिए बिस्तर पर आ गए हैं. साइरस मिस्त्री की मौत कैसे हुई? साइरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई आ रहे थे. वो जिस कार से आ रहे थे, उसमें उनके अलावा अनाहिता पंडोले, उनके पति डेरियस पंडोले और भाई जहांगीर दिनशा पंडोले सवार थे. इस कार को अनाहिता पंडोले चला रही थीं. वो जानी-मानीं गाइनेकोलॉजिस्ट थीं. इस हादसे में साइरस मिस्त्री और जहांगीर दिनशा की मौत हो गई. जबकि, पंडोले दंपति को गंभीर चोटें आईं हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार ओवरस्पीड थी. कार ने दूसरे वाहन को गलत साइड (लेफ्ट साइड) से ओवरटेक करने की कोशिश भी की थी. इसी दौरान कारन ने नियंत्रण खो दिया और डिवाइडर से जा टकराई. हादसे के बाद साइरस मिस्त्री को कासा के सरकारी अस्पताल लाया गया था. यहां के डॉक्टर शुभम सिंह ने बताया कि साइरस मिस्त्री की मौत सिर पर चोट लगने से हुई है. वहीं, जहांगीर को बाएं पैर में फ्रैक्चर और सिर पर चोट लगी थी. अस्पताल पहुंचने से पहले ही दोनों की मौत हो गई थी. कानूनन सीट बेल्ट लगाना जरूरी है. 2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया था. इसके बाद सभी के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी कर दिया गया है. पहले 14 साल से कम उम्र के लोगों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी नहीं था, पर अब है. हालांकि, अब भी लोग सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं. सड़क और परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में सीट बेल्ट नहीं लगाने से 15,146 लोगों की मौत हो गई थी. यानी, हर दिन औसतन 41 मौत. इनमें से 7,810 मौत ड्राइवर की हुई थी, जबकि 7,336 मौतें यात्रियों की हुई थी. इसी तरह टू-व्हीलर में 4 साल से ऊपर के लोगों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है, लेकिन लोग इसकी भी अनदेखी करते हैं. 2020 में हेलमेट नहीं पहनने से 39,589 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से 27,310 लोग ऐसे थे जो गाड़ी चला रहे थे. जबकि 12,279 लोग पीछे बैठे थे.
Cyrus Mistry Death: टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन और उद्योगपति साइरस मिस्त्री की मौत के बाद सड़क सुरक्षा पर बहस शुरू हो गई है. एक्सपर्ट्स ने कार में पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए सीट बेल्ट जरूरी, ओवरस्पीडिंग की चेकिंग और सड़कों की डिजाइन में बदलाव करने की मांग की है. साइरस मिस्त्री का रविवार को सड़क हादसे में निधन हो गया था. वो अहमदाबाद से मुंबई आ रहे थे. इस कार में चार लोग सवार थे. कार को गायनेकोलॉजिस्ट अनाहिता पंडोले चला रही थीं. कार में चार लोग सवार थे. ड्राइविंग सीट के बगल में अनाहिता के पति डेरियस पंडोले बैठे थे. पीछे की सीट पर साइरस मिस्त्री और जहांगीर दिनशॉ पंडोले बैठे थे. पुलिस ने बताया कि पीछे की सीट पर बैठे साइरस मिस्त्री और जहांगीर ने सीट बेल्ट नहीं लगाया था. कार भी ओवरस्पीड में चल रही थी. कार ने सामने वाली कार को ओवरटेक करने की कोशिश भी की थी. नतीजतन कार आउट ऑफ कंट्रोल हो गई और डिवाइडर से जा टकराई. ये हादसा मुंबई से तकरीबन एक सौ किलोग्राममीटर दूर पालघर के पास हुआ. एक्सपर्ट ने तेज स्पीड में चल रही गाड़ियों पर नजर रखने और पीछे बैठे यात्रियों के लिए सीट बेल्ट जरूरी करने पर जोर दिया. साथ ही एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि एक्सीडेंट को रोकने के लिए सड़कों को बेहतर तरीके से डिजाइन किया जाना चाहिए. नई दिल्ली स्थित सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के चीफ साइंटिस्ट एस वेलमुरुगन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि राजधानी दिल्ली में कुछ इलाकों में सड़कें सही तरह से डिजाइन नहीं हैं. उदाहरण के लिए, छः लेन रोड कुछ जगहों पर चार लेन में सिकुड़ गई है तो कहीं पर सतह बराबर नहीं है. इससे खतरा बढ़ता है और इसे ठीक किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि रविवार की घटना से तीन बड़ी बातें सामने आईं हैं. पहला ये कि सड़कों को, खासतौर से हाईवे की सड़कों को ठीक तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है. दूसरा- साइन बोर्ड सही तरीके से लगाने होंगे और तीसरा- लोगों को जागरूक करना होगा कि पीठे बैठे होने पर भी सीट बेल्ट लगाना कितना जरूरी है. क्या बदलाव किए जाने जरूरी? - वेलमुरुगन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जिन जगहों पर सही तरह से साइन बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां इन्हें ठीक तरह से लगाना होगा. - उन्होंने कहा कि पीछे बैठने पर सीट बेल्ट न लगाने और ओवरस्पीडिंग के मामलों में कानून को सख्ती से लागू करना होगा. - उन्होंने कहा कि राजधानी की सड़कों पर रात के समय या कम ट्रैफिक होने पर लोग स्पीड में गाड़ी चलाते हैं, इसलिए कानून का उल्लंघन करने वालों को रोकने के लिए मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए. साथ ही ट्रैफिक पुलिस को पीछे बैठने वाले यात्री के सीट बेल्ट नहीं पहनने पर चालान काटना चाहिए. डिजाइन, साइन बोर्ड की कमी, कैसे बनी हादसे की वजह? - रविवार को मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर बने सूर्या रिवर ब्रिज पर ये हादसा हुआ था. ये हाईवे तीन लेन का है, लेकिन ब्रिज पर दो लेन का हो जाता है. इसके अलावा यहां साइन बोर्ड की भी कमी है. कासा पुलिस इस हादसे के कारणों की जांच कर रही है. - एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहले सड़क तीन लेन की है और पुल पर दो लेन की बनी है. कार डिवाइडर से टकरा गई और रुक गई. पुल के नीचे सूर्या नदी है. उन्होंने कहा कि सड़क संकरी होने के साथ-साथ गलत साइड से ओवरटेक करने की वजह से ये दुर्घटना हो सकती है. - पुलिस ओवरस्पीडिंग और ओवरटेक को दुर्घटना का संभावित कारण बता रही है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां खतरे की चेतावनी देने वाले साइनबोर्ड का अभाव है. इसके अलावा सड़क की खराब डिजाइन की वजह से भी यहां हादसे होते हैं. - पुलिस ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर कुछ स्ट्रीट लाइट की वजह से रात में सफर करना और खतरनाक हो जाता है. गाड़ियों की तेज बीम लाइट से सामने से आ रही गाड़ी के ड्राइवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इससे खतरनाक हादसा हो जाता है. ऐसे में कई ड्राइवर संतुलन खो देते हैं फ्लाईओवर से फिसलकर नदी में गिर जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तीन लेन की सड़क फ्लाईओवर पर दो लेन की हो जाती है. - एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पालघर में मानोर और गुजरात के अचाड़ में बावन किमी लंबी सड़क पर कई एक्सीडेंटल स्पॉट है. उन्होंने बताया कि अट्ठारह महीनों में सड़क हादसों में एक सौ छः लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि उनचास लोग हमेशा के लिए बिस्तर पर आ गए हैं. साइरस मिस्त्री की मौत कैसे हुई? साइरस मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई आ रहे थे. वो जिस कार से आ रहे थे, उसमें उनके अलावा अनाहिता पंडोले, उनके पति डेरियस पंडोले और भाई जहांगीर दिनशा पंडोले सवार थे. इस कार को अनाहिता पंडोले चला रही थीं. वो जानी-मानीं गाइनेकोलॉजिस्ट थीं. इस हादसे में साइरस मिस्त्री और जहांगीर दिनशा की मौत हो गई. जबकि, पंडोले दंपति को गंभीर चोटें आईं हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार ओवरस्पीड थी. कार ने दूसरे वाहन को गलत साइड से ओवरटेक करने की कोशिश भी की थी. इसी दौरान कारन ने नियंत्रण खो दिया और डिवाइडर से जा टकराई. हादसे के बाद साइरस मिस्त्री को कासा के सरकारी अस्पताल लाया गया था. यहां के डॉक्टर शुभम सिंह ने बताया कि साइरस मिस्त्री की मौत सिर पर चोट लगने से हुई है. वहीं, जहांगीर को बाएं पैर में फ्रैक्चर और सिर पर चोट लगी थी. अस्पताल पहुंचने से पहले ही दोनों की मौत हो गई थी. कानूनन सीट बेल्ट लगाना जरूरी है. दो हज़ार उन्नीस में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया था. इसके बाद सभी के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी कर दिया गया है. पहले चौदह साल से कम उम्र के लोगों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी नहीं था, पर अब है. हालांकि, अब भी लोग सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं. सड़क और परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, दो हज़ार बीस में सीट बेल्ट नहीं लगाने से पंद्रह,एक सौ छियालीस लोगों की मौत हो गई थी. यानी, हर दिन औसतन इकतालीस मौत. इनमें से सात,आठ सौ दस मौत ड्राइवर की हुई थी, जबकि सात,तीन सौ छत्तीस मौतें यात्रियों की हुई थी. इसी तरह टू-व्हीलर में चार साल से ऊपर के लोगों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है, लेकिन लोग इसकी भी अनदेखी करते हैं. दो हज़ार बीस में हेलमेट नहीं पहनने से उनतालीस,पाँच सौ नवासी लोगों की मौत हुई थी. इनमें से सत्ताईस,तीन सौ दस लोग ऐसे थे जो गाड़ी चला रहे थे. जबकि बारह,दो सौ उन्यासी लोग पीछे बैठे थे.
इस प्रकार कवि ने सैकड़ों पूर्वप्रचलित सुभाषितों को तोड़-मरोड़कर अथवा उसको वर्तमान संदर्भ से जोड़कर समाज के विभिन्न वर्गों की व्यवस्था पर अथवा राजनीति के विविध पक्षों पर करारी चोट की है। इस काव्य पर उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी का विशेष पुरस्कार प्राप्त हुआ। कोमलकण्टकावलिः- कवि प्रशस्य मित्र की यह रचना १६६० में प्रकाशित हुई। काव्य का विभाजन कण्टकों में किया गया है। प्रथम से लेकर नवम कण्टक तक नौ प्रकरणों का विषय-विभाजन इस प्रकार से किया गया है- राजनीति -प्रकरण, दाम्पत्य-प्रकरण, प्रेमिका-प्रकरण, विद्यालय प्रकरण, न्यायालय प्रकरण, आपण-प्रकरण, माणवक -प्रकरण, यात्रा - प्रकरण एवं विप्रकीर्ण प्रकरण । मनुष्य के सामाजिक जीवन के इन विविध प्रकरणों में विभिन्न रूपों में कवि ने हास्य के विविध प्रसङ्ग उपस्थापित किये हैं। पर इससे भी अधिक तीव्रतर है कवि का व्यङ्ग्य प्रयोग, जिससे वह समाज के दूषित पक्षों पर प्रहार करता है। पहली ही कविता 'सत्यमेव जयते' में कवि ने आज की खोखली, आडम्बरपूर्ण एवं मिथ्याचारमयी राजनीति का पर्दाफाश किया है। किस तरह झूठ की नींव पर यह राजनीति का भवन खड़ा है जिसमें आचार संहिता का नितान्त अभाव है। इसका वर्णन करते हुए 'द्वौ करौ मन्त्रिणामिमौ' शीर्षक के अन्तर्गत कवि कहता हैजनानां तु यथाऽन्येषां द्वौ करौ भवतस्तथा, मन्त्रिणामपि वर्तेते द्वौ करौ भारते परम् । करेणैकेन रक्षन्ति निजकुर्सी प्रयत्नतः, परेषां कम्पयन्ते च कुर्सीम् अन्यकरेण ते ।। प्राचीन संस्कृत साहित्य में हास्य का जो अभाव मिलता है, अर्वाचीन साहित्य के इन कवियों ने उस अभाव को अब पर्याप्त मात्रा में दूर कर दिया है और हास्य के साथ-साथ व्यङ्ग्य और अधिक्षेप को अत्यधिक अपना लिया है। कविवर प्रशस्य मित्र के काव्य-सर्जन ने इस हास्य-व्यङ्ग्य विधा को इस दशक में साहित्य में पूर्ण प्रतिष्ठित पद दिलवाया है। इस विधा का उन्नयन बीसवीं शती के नवम दशक के संस्कृत साहित्य की एक उपलब्धि है। हरिनारायण दीक्षित- दीक्षित जी का जन्म १६३६ में उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में हुआ था। उनका कर्मक्षेत्र नैनीताल रहा और कुमायूँ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में वे अध्यापक एवं आचार्य पद पर प्रतिष्ठित रहे। उन्होंने कई विधाओं में काव्य लिखे, जिनमें 'भीष्मचरितम्' महाकाव्य पर साहित्य अकादेमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ। 'श्रीहनुमदूतम्' दीक्षित जी का १६८७ में प्रकाशित सन्देशकाव्य है, जिसमें लङ्कापुरी में राक्षसराज रावण द्वारा बन्दी बनाई गई सीता का हनुमान जैसे निपुण दूत द्वारा राम को प्रेषित किये जाने वाले सन्देश का वर्णन है। सीता की खोज कर, अनेक राक्षसों का संहार कर, लङ्का को जलकर जब हनुमान राम के पास लौटने लगते हैं तो सीता उन्हें अपना विरह सन्देश देती हैं। वे विरह कातर हो राम से बार-बार अपने को इन राक्षसों के जाल से शीघ्र मुक्त कराने
इस प्रकार कवि ने सैकड़ों पूर्वप्रचलित सुभाषितों को तोड़-मरोड़कर अथवा उसको वर्तमान संदर्भ से जोड़कर समाज के विभिन्न वर्गों की व्यवस्था पर अथवा राजनीति के विविध पक्षों पर करारी चोट की है। इस काव्य पर उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी का विशेष पुरस्कार प्राप्त हुआ। कोमलकण्टकावलिः- कवि प्रशस्य मित्र की यह रचना एक हज़ार छः सौ साठ में प्रकाशित हुई। काव्य का विभाजन कण्टकों में किया गया है। प्रथम से लेकर नवम कण्टक तक नौ प्रकरणों का विषय-विभाजन इस प्रकार से किया गया है- राजनीति -प्रकरण, दाम्पत्य-प्रकरण, प्रेमिका-प्रकरण, विद्यालय प्रकरण, न्यायालय प्रकरण, आपण-प्रकरण, माणवक -प्रकरण, यात्रा - प्रकरण एवं विप्रकीर्ण प्रकरण । मनुष्य के सामाजिक जीवन के इन विविध प्रकरणों में विभिन्न रूपों में कवि ने हास्य के विविध प्रसङ्ग उपस्थापित किये हैं। पर इससे भी अधिक तीव्रतर है कवि का व्यङ्ग्य प्रयोग, जिससे वह समाज के दूषित पक्षों पर प्रहार करता है। पहली ही कविता 'सत्यमेव जयते' में कवि ने आज की खोखली, आडम्बरपूर्ण एवं मिथ्याचारमयी राजनीति का पर्दाफाश किया है। किस तरह झूठ की नींव पर यह राजनीति का भवन खड़ा है जिसमें आचार संहिता का नितान्त अभाव है। इसका वर्णन करते हुए 'द्वौ करौ मन्त्रिणामिमौ' शीर्षक के अन्तर्गत कवि कहता हैजनानां तु यथाऽन्येषां द्वौ करौ भवतस्तथा, मन्त्रिणामपि वर्तेते द्वौ करौ भारते परम् । करेणैकेन रक्षन्ति निजकुर्सी प्रयत्नतः, परेषां कम्पयन्ते च कुर्सीम् अन्यकरेण ते ।। प्राचीन संस्कृत साहित्य में हास्य का जो अभाव मिलता है, अर्वाचीन साहित्य के इन कवियों ने उस अभाव को अब पर्याप्त मात्रा में दूर कर दिया है और हास्य के साथ-साथ व्यङ्ग्य और अधिक्षेप को अत्यधिक अपना लिया है। कविवर प्रशस्य मित्र के काव्य-सर्जन ने इस हास्य-व्यङ्ग्य विधा को इस दशक में साहित्य में पूर्ण प्रतिष्ठित पद दिलवाया है। इस विधा का उन्नयन बीसवीं शती के नवम दशक के संस्कृत साहित्य की एक उपलब्धि है। हरिनारायण दीक्षित- दीक्षित जी का जन्म एक हज़ार छः सौ छत्तीस में उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में हुआ था। उनका कर्मक्षेत्र नैनीताल रहा और कुमायूँ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में वे अध्यापक एवं आचार्य पद पर प्रतिष्ठित रहे। उन्होंने कई विधाओं में काव्य लिखे, जिनमें 'भीष्मचरितम्' महाकाव्य पर साहित्य अकादेमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ। 'श्रीहनुमदूतम्' दीक्षित जी का एक हज़ार छः सौ सत्तासी में प्रकाशित सन्देशकाव्य है, जिसमें लङ्कापुरी में राक्षसराज रावण द्वारा बन्दी बनाई गई सीता का हनुमान जैसे निपुण दूत द्वारा राम को प्रेषित किये जाने वाले सन्देश का वर्णन है। सीता की खोज कर, अनेक राक्षसों का संहार कर, लङ्का को जलकर जब हनुमान राम के पास लौटने लगते हैं तो सीता उन्हें अपना विरह सन्देश देती हैं। वे विरह कातर हो राम से बार-बार अपने को इन राक्षसों के जाल से शीघ्र मुक्त कराने
दो लड़कियां दोनों ही सुन्दर , उम्र थी सत्रह से कम । वस्त्र तन पर बहुत सीमित, दिखाते ज्यादा छुपाते कम । झांकते यौवन ने उनके । ध्यान था सबका बटोरा । और एक के हाथ में ! खाली कटोरा । जिस पर यकीं न हो सहसा । ऐसा ही हो गया था हादसा । एक सुहानी शाम , नहीं था कोई काम । मैं , खुद में ही मगन । निहारता हुआ गगन । चला जा रहा था, मस्ती में चूर । तभी दिखीं दो वालाएँ । यौवन से भरपूर । एक उर्वशी एक रम्भा । मगर बड़ा ही अचम्भा । भीख मांग रहीं थीं । इठलाती हुई । वल खाती हुई । जिस दुकान में जाती । कुछ न कुछ ले आतीं । मेरी भी नजर गढ़ी थी। तभी देखा मेरे सामने , एक बुडिया खढी थी । अपनी झोली फैला कर । आंख्नो में आंसू ला कर । बोली बेटा, मैं बहुत दुखी हूँ । कल से भूंखी हूँ । मेरे लिए तो जमाना कड़का है । मगर तू तो भला लड़का है । मुझे खाना खिला दे । एक कप चाय पिला दे । फिर बोली , आजकल कौन देखता है मन । उनके (लड़कियों के ) , पास है यौवन । मिल जाता है धन । क्या तू जानता है ? आजकल भीख देने के लिए भी, लोग देखते है तन। मुकेश जी सादर प्रणाम ! आजकल भीख देने के लिए भी, लोग देखते है तन। आदरणीय मुकेश जी, समाज में व्याप्त विद्रूपताओं और क्रूर कटु यथार्थ को अपनी सहज किन्तु प्रवाहमयी भाषा में आपने बखूबी उजागर किया है। बधाईयां! aadarniya, mukesh ji, sadar , bilkul vastvik chitran aaj ke samaj ka, sundar prastuti ke sath. badhai. यथार्थ के गहन दर्शन का समावेश करती रचना पर बधाई स्वीकार करें. आदरणीय मुकेश जी, समाज में व्याप्त विद्रूपताओं और क्रूर कटु यथार्थ को अपनी सहज किन्तु प्रवाहमयी भाषा में आपने बखूबी उजागर किया है। बधाईयां! //झांकते यौवन ने उनके । ध्यान था सबका बटोरा । और एक के हाथ में ! //आजकल कौन देखता है मन । उनके पास है यौवन । मिल जाता है धन । क्या तू जानता है ? आजकल भीख देने के लिए भी, भाई मुकेश कुमार जी ! उत्तम प्रवाह से युक्त आपकी दोनों ही रचनाएँ मर्मस्थल पर सीधा वार करती हैं ! बहुत-बहुत बधाई मित्र !
दो लड़कियां दोनों ही सुन्दर , उम्र थी सत्रह से कम । वस्त्र तन पर बहुत सीमित, दिखाते ज्यादा छुपाते कम । झांकते यौवन ने उनके । ध्यान था सबका बटोरा । और एक के हाथ में ! खाली कटोरा । जिस पर यकीं न हो सहसा । ऐसा ही हो गया था हादसा । एक सुहानी शाम , नहीं था कोई काम । मैं , खुद में ही मगन । निहारता हुआ गगन । चला जा रहा था, मस्ती में चूर । तभी दिखीं दो वालाएँ । यौवन से भरपूर । एक उर्वशी एक रम्भा । मगर बड़ा ही अचम्भा । भीख मांग रहीं थीं । इठलाती हुई । वल खाती हुई । जिस दुकान में जाती । कुछ न कुछ ले आतीं । मेरी भी नजर गढ़ी थी। तभी देखा मेरे सामने , एक बुडिया खढी थी । अपनी झोली फैला कर । आंख्नो में आंसू ला कर । बोली बेटा, मैं बहुत दुखी हूँ । कल से भूंखी हूँ । मेरे लिए तो जमाना कड़का है । मगर तू तो भला लड़का है । मुझे खाना खिला दे । एक कप चाय पिला दे । फिर बोली , आजकल कौन देखता है मन । उनके , पास है यौवन । मिल जाता है धन । क्या तू जानता है ? आजकल भीख देने के लिए भी, लोग देखते है तन। मुकेश जी सादर प्रणाम ! आजकल भीख देने के लिए भी, लोग देखते है तन। आदरणीय मुकेश जी, समाज में व्याप्त विद्रूपताओं और क्रूर कटु यथार्थ को अपनी सहज किन्तु प्रवाहमयी भाषा में आपने बखूबी उजागर किया है। बधाईयां! aadarniya, mukesh ji, sadar , bilkul vastvik chitran aaj ke samaj ka, sundar prastuti ke sath. badhai. यथार्थ के गहन दर्शन का समावेश करती रचना पर बधाई स्वीकार करें. आदरणीय मुकेश जी, समाज में व्याप्त विद्रूपताओं और क्रूर कटु यथार्थ को अपनी सहज किन्तु प्रवाहमयी भाषा में आपने बखूबी उजागर किया है। बधाईयां! //झांकते यौवन ने उनके । ध्यान था सबका बटोरा । और एक के हाथ में ! //आजकल कौन देखता है मन । उनके पास है यौवन । मिल जाता है धन । क्या तू जानता है ? आजकल भीख देने के लिए भी, भाई मुकेश कुमार जी ! उत्तम प्रवाह से युक्त आपकी दोनों ही रचनाएँ मर्मस्थल पर सीधा वार करती हैं ! बहुत-बहुत बधाई मित्र !
सेन्द्रिय खादों की व्यावहारिक बातें राख के गुण और उनके उपयोग १०५. अब उपर्युक्त सेन्द्रिय खादों की फेहरिइत में दूसरा नम्बर राख का आता है। यह चीज ऐसी है कि वगैर सड़ाये, यों ही पाटी जा सकती है । थोड़ा-सा पानी मिलने पर वह फौरन ही कान देने लगती है। उसका उपयोग पोषक रूप मे भी है और पेड़पौधों को रोगों से और हानिकारक कीड़ों से बचाने छुडाने के काम के लिए भी है । १०६. लकडी की राख में पोषक तत्त्व "पोटैशियम" । उसकी मात्रा दस से पंद्रह फी सैकड़ा तक रहती है। फुनगियों को राख में उसकी मान्ना अधिक रहती है और तनों की राख मे कमः क्योंकि पेड-पौधों के क्षार उनकी नयी रचना के लिए वरावर फुनगियों की ओर विशेष रूप से जुटते रहते है । १०७. पर गोबर की राख का हाल कुछ अलग ही है । पश्चिमी मुल्कों में तो वह बनती हो नहीं है । इस कारण उसका विश्लेषण कहीं किया हुआ मिलता नहीं है । उसके बारे में ज कुछ जानकारी हासिल है, वह इस प्रकार है : ( १ ) पशुओं की देह से मल-मूत्र के रूप में जो पोषकतत्त्व विसर्जित होते हैं, उनके पोटैशियम-तत्त्व का करीब ९७% हिम्स उनके मूत्र मे ही रहता है और वही हिस्सा अधिन-से-अधिक ग्रुपच भी रहता है; क्योंकि वह हिस्सा गलकर द्रवरूप में परिवर्तित हुआ रहता है। शेप जो ३% हिस्सा बचता है, वह शरीर के विघटक रसों के बावजूद गला नहीं रहता और स्थूल रूप में गोधर के साथ निकलता है । (२) फॉस्फरस-तत्त्व सबका सब उनके गोवर में रहता है जब कि-( ३ ) नत्रजन का ३०% हिस्सा, जो कि दुप्पच होता है, वह उनके गोवर में निकलता है और ७०% सुपच हिस्सा गोमूत्र मे निकलता रहता है ।
सेन्द्रिय खादों की व्यावहारिक बातें राख के गुण और उनके उपयोग एक सौ पाँच. अब उपर्युक्त सेन्द्रिय खादों की फेहरिइत में दूसरा नम्बर राख का आता है। यह चीज ऐसी है कि वगैर सड़ाये, यों ही पाटी जा सकती है । थोड़ा-सा पानी मिलने पर वह फौरन ही कान देने लगती है। उसका उपयोग पोषक रूप मे भी है और पेड़पौधों को रोगों से और हानिकारक कीड़ों से बचाने छुडाने के काम के लिए भी है । एक सौ छः. लकडी की राख में पोषक तत्त्व "पोटैशियम" । उसकी मात्रा दस से पंद्रह फी सैकड़ा तक रहती है। फुनगियों को राख में उसकी मान्ना अधिक रहती है और तनों की राख मे कमः क्योंकि पेड-पौधों के क्षार उनकी नयी रचना के लिए वरावर फुनगियों की ओर विशेष रूप से जुटते रहते है । एक सौ सात. पर गोबर की राख का हाल कुछ अलग ही है । पश्चिमी मुल्कों में तो वह बनती हो नहीं है । इस कारण उसका विश्लेषण कहीं किया हुआ मिलता नहीं है । उसके बारे में ज कुछ जानकारी हासिल है, वह इस प्रकार है : पशुओं की देह से मल-मूत्र के रूप में जो पोषकतत्त्व विसर्जित होते हैं, उनके पोटैशियम-तत्त्व का करीब सत्तानवे% हिम्स उनके मूत्र मे ही रहता है और वही हिस्सा अधिन-से-अधिक ग्रुपच भी रहता है; क्योंकि वह हिस्सा गलकर द्रवरूप में परिवर्तित हुआ रहता है। शेप जो तीन% हिस्सा बचता है, वह शरीर के विघटक रसों के बावजूद गला नहीं रहता और स्थूल रूप में गोधर के साथ निकलता है । फॉस्फरस-तत्त्व सबका सब उनके गोवर में रहता है जब कि- नत्रजन का तीस% हिस्सा, जो कि दुप्पच होता है, वह उनके गोवर में निकलता है और सत्तर% सुपच हिस्सा गोमूत्र मे निकलता रहता है ।
राज्यसभा सांसद व बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद मिश्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ब्रह्म हत्या हो रही है। चुन चुन कर मारा जा रहा है। किसी को गोलियों से भून दिया। सपा व भाजपा का एक चेहरा है। दोनों वोट की राजनीति करतीं हैं। जागरण संवाददाता, वाराणसी। राज्यसभा सांसद व बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ब्रह्म हत्या हो रही है। चुन चुन कर मारा जा रहा है। किसी को गोलियों से भून दिया। सपा व भाजपा का एक चेहरा है। दोनों वोट की राजनीति करतीं हैं। इसके बाद ब्राह्मणों को दरकिनार कर देते हैं। प्रदेश में जब बनी थी सपा व भाजपा की सरकार तो शून्य पर आ गए थे ब्राह्मण। पूरे प्रदेश में ब्राम्हण विधायकों की संख्या पांच भी नहीं रह गई थी। उस वक्त मैंने काशी से ही भाईचारा कमेटी बनाकर ब्राह्मणों को बसपा से जोड़ने का प्रयास किया। परिणाम सभी के सामने आया। प्रदेश में बसपा की सरकार बनी। ब्राह्मणों को सम्मान मिला। 15 विधायक मंत्री बने। विधान परिषद अध्यक्ष भी ब्राह्मण ही बने। अब फिर से आ गया वह वक्त, जब दलित, अल्पसंख्यक व ब्राम्हण बनाएंगे सरकार। वह बसपा ही थी जिसमें 85 ब्राम्हण उम्मीदवारों को टिकट मिला था। 45 ने जीत दर्ज की थी। 15 एमएलसी, पांच सांसद सहित डीजीपी, मुख्य सचिव आदि पदों पर आसीन था यह समाज। कॉरिडोर के नाम पर तोड़े जा रहे मंदिर, चुप क्यों हैं काशी के ब्राम्हण : सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर मंदिर तोड़े जा रहे हैं। नजरों साल पुराना आस्था का केंद्र वट वृक्ष काट दिया गया। जिस शिव शंकर से मिलने के लिए मां गंगा ने अपना मार्ग बदला और काशी की ओर रुख कर चंद्राकार आकार लिया, उसे भी नष्ट किया जा रहा है। वीआईपी कल्चर के लिए गंगा के किनारों को पाटा जा रहा है। मणिकर्णिका घाट के धार्मिक मान्यताओं को खत्म किया जा रहा है। यहां के लंका थाने में प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग रखा गया है। हैरानी इस बात की है कि यहां के ब्राह्मण चुप क्यों हैं। वे जिम्मददारों से सवाल क्यों नहीं करते। माना कि पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकती है लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ व उनके साथ आये जिम्मेदारों से सवाल क्यों नहीं करते। यहां के जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं घेरते। श्रीराम मंदिर के लिए पहले नहीं लाया कानून, जब कोर्ट ने दिया फैसला तो चल दिये भूमि पूजने : सतीश चंद मिश्र ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले कानून नहीं लाया। जब कोर्ट ने फैसला दिया तो श्रेय लेते हुए भूमि पूजन करने चल दिये। पांच ईंटें भी रख दी लेकिन डेढ़ साल का दिन बीतने को है और मंदिर के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। भूमि पूजन के पांच ईंट भी अब नहीं रखे। किसी बक्से में बंद कर दिया या फिर सरयू नदी में फेंक दिया। कहा, मंदिर निर्माण के नाम पर वर्ष 1993 से धन संग्रह कर रहे हैं। यह धन कहा गया, पूछने पर भी नहीं बताते हैं।
राज्यसभा सांसद व बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद मिश्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ब्रह्म हत्या हो रही है। चुन चुन कर मारा जा रहा है। किसी को गोलियों से भून दिया। सपा व भाजपा का एक चेहरा है। दोनों वोट की राजनीति करतीं हैं। जागरण संवाददाता, वाराणसी। राज्यसभा सांसद व बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ब्रह्म हत्या हो रही है। चुन चुन कर मारा जा रहा है। किसी को गोलियों से भून दिया। सपा व भाजपा का एक चेहरा है। दोनों वोट की राजनीति करतीं हैं। इसके बाद ब्राह्मणों को दरकिनार कर देते हैं। प्रदेश में जब बनी थी सपा व भाजपा की सरकार तो शून्य पर आ गए थे ब्राह्मण। पूरे प्रदेश में ब्राम्हण विधायकों की संख्या पांच भी नहीं रह गई थी। उस वक्त मैंने काशी से ही भाईचारा कमेटी बनाकर ब्राह्मणों को बसपा से जोड़ने का प्रयास किया। परिणाम सभी के सामने आया। प्रदेश में बसपा की सरकार बनी। ब्राह्मणों को सम्मान मिला। पंद्रह विधायक मंत्री बने। विधान परिषद अध्यक्ष भी ब्राह्मण ही बने। अब फिर से आ गया वह वक्त, जब दलित, अल्पसंख्यक व ब्राम्हण बनाएंगे सरकार। वह बसपा ही थी जिसमें पचासी ब्राम्हण उम्मीदवारों को टिकट मिला था। पैंतालीस ने जीत दर्ज की थी। पंद्रह एमएलसी, पांच सांसद सहित डीजीपी, मुख्य सचिव आदि पदों पर आसीन था यह समाज। कॉरिडोर के नाम पर तोड़े जा रहे मंदिर, चुप क्यों हैं काशी के ब्राम्हण : सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर मंदिर तोड़े जा रहे हैं। नजरों साल पुराना आस्था का केंद्र वट वृक्ष काट दिया गया। जिस शिव शंकर से मिलने के लिए मां गंगा ने अपना मार्ग बदला और काशी की ओर रुख कर चंद्राकार आकार लिया, उसे भी नष्ट किया जा रहा है। वीआईपी कल्चर के लिए गंगा के किनारों को पाटा जा रहा है। मणिकर्णिका घाट के धार्मिक मान्यताओं को खत्म किया जा रहा है। यहां के लंका थाने में प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग रखा गया है। हैरानी इस बात की है कि यहां के ब्राह्मण चुप क्यों हैं। वे जिम्मददारों से सवाल क्यों नहीं करते। माना कि पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकती है लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ व उनके साथ आये जिम्मेदारों से सवाल क्यों नहीं करते। यहां के जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं घेरते। श्रीराम मंदिर के लिए पहले नहीं लाया कानून, जब कोर्ट ने दिया फैसला तो चल दिये भूमि पूजने : सतीश चंद मिश्र ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले कानून नहीं लाया। जब कोर्ट ने फैसला दिया तो श्रेय लेते हुए भूमि पूजन करने चल दिये। पांच ईंटें भी रख दी लेकिन डेढ़ साल का दिन बीतने को है और मंदिर के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। भूमि पूजन के पांच ईंट भी अब नहीं रखे। किसी बक्से में बंद कर दिया या फिर सरयू नदी में फेंक दिया। कहा, मंदिर निर्माण के नाम पर वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से धन संग्रह कर रहे हैं। यह धन कहा गया, पूछने पर भी नहीं बताते हैं।
अभी तक की अगर बात करें तो OnePlus 6 स्मार्टफोन इस साल का बहुप्रतीक्षित डिवाइस है। इस स्मार्टफोन को लेकर अभी तक कई लीक और रुमर भी सामने आ चुके हैं। अभी तक की अगर बात करें तो OnePlus 6 स्मार्टफोन इस साल का बहुप्रतीक्षित डिवाइस है। इस स्मार्टफोन को लेकर अभी तक कई लीक और रुमर भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में इस स्मार्टफोन को लेकर सामने आया एक लीक इस स्मार्टफोन के बेंचमार्क आदि से पर्दा उठाता है। इसके अलावा इस बेंचमार्क साईट पर स्कोर्स के अलावा इसके स्पेक्स आदि भी सामने आये हैं। GizmoChina की एक रिपोर्ट की मानें तो यह स्मार्टफोन Geekbench पर देखा गया है, यहाँ से इस स्मार्टफोन के बारे में यह सामने आ रहा है कि इसका मॉडल नंबर NS NS P7819 होगा। यह एंड्राइड 8.1 Oreo पर काम करने वाला है। इसके अलावा ऐसा भी सामने आ रहा है कि स्मार्टफोन में क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 845 के साथ साथ 6GB की रैम होने वाली है। इसके बेंचमार्क स्कोर्स की चर्चा करें तो इसे सिंगल कोर में 2535 और मल्टी-कोर में 8632 स्कोर प्राप्त हुए हैं। यह स्कोर Xiaomi Mi MIX 2s स्मार्टफोन से काफी मेल खाते हैं, इस स्मार्टफोन को आज ही चीन में क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 845 के साथ लॉन्च किया गया है। हालाँकि इनके स्कोर आपस में काफी मिलते जुलते हैं, लेकिन इसके अलावा भी यह स्मार्टफोन Oppo F7 और Vivo V9 से डिजाईन के मामले में काफी मेल खाता है, इस स्मार्टफोन में iPhone X जैसा Notch डिजाईन होने वाला है, यह डिजाईन इन अन्य दो स्मार्टफोंस में भी देखा जा सकता है। OnePlus 6 स्मार्टफोन की चर्चा को आगे बढ़ाये तो आपको बता देते हैं कि इसमें एक 6.28-इंच की AMOLED डिस्प्ले 2280×1080 पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ आने वाली है। ऐसा लग रहा है कि Oppo R15 स्मार्टफोन में कुछ बदलाव करके एक बार फिर से पेश किया जाने वाला है। इस स्मार्टफोन में एक 19:9 आस्पेक्ट रेश्यो वाली स्क्रीन होने के भी आसार हैं। इसके अलावा ऐसा भी सामने आ रहा है कि स्मार्टफोन में 6GB की रैम के साथ 128GB की इंटरनल स्टोरेज होने वाली है। साथ ही इसका एक बड़ा वैरिएंट भी हो सकता है, जो 8GB रैम के साथ 256GB स्टोरेज के साथ लॉन्च किया जा सकता है। फोन में एक 20-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा f/2.0 अपर्चर के साथ लॉन्च किया जा सकता है, इसके अलावा इसके रियर में फोटोग्राफी के लिए एक 20-मेगापिक्सल और 16-मेगापिक्सल का कैमरा कॉम्बो होने के आसार हैं।
अभी तक की अगर बात करें तो OnePlus छः स्मार्टफोन इस साल का बहुप्रतीक्षित डिवाइस है। इस स्मार्टफोन को लेकर अभी तक कई लीक और रुमर भी सामने आ चुके हैं। अभी तक की अगर बात करें तो OnePlus छः स्मार्टफोन इस साल का बहुप्रतीक्षित डिवाइस है। इस स्मार्टफोन को लेकर अभी तक कई लीक और रुमर भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में इस स्मार्टफोन को लेकर सामने आया एक लीक इस स्मार्टफोन के बेंचमार्क आदि से पर्दा उठाता है। इसके अलावा इस बेंचमार्क साईट पर स्कोर्स के अलावा इसके स्पेक्स आदि भी सामने आये हैं। GizmoChina की एक रिपोर्ट की मानें तो यह स्मार्टफोन Geekbench पर देखा गया है, यहाँ से इस स्मार्टफोन के बारे में यह सामने आ रहा है कि इसका मॉडल नंबर NS NS Pसात हज़ार आठ सौ उन्नीस होगा। यह एंड्राइड आठ.एक Oreo पर काम करने वाला है। इसके अलावा ऐसा भी सामने आ रहा है कि स्मार्टफोन में क्वालकॉम स्नेपड्रैगन आठ सौ पैंतालीस के साथ साथ छःGB की रैम होने वाली है। इसके बेंचमार्क स्कोर्स की चर्चा करें तो इसे सिंगल कोर में दो हज़ार पाँच सौ पैंतीस और मल्टी-कोर में आठ हज़ार छः सौ बत्तीस स्कोर प्राप्त हुए हैं। यह स्कोर Xiaomi Mi MIX दो सेकंड स्मार्टफोन से काफी मेल खाते हैं, इस स्मार्टफोन को आज ही चीन में क्वालकॉम स्नेपड्रैगन आठ सौ पैंतालीस के साथ लॉन्च किया गया है। हालाँकि इनके स्कोर आपस में काफी मिलते जुलते हैं, लेकिन इसके अलावा भी यह स्मार्टफोन Oppo Fसात और Vivo Vनौ से डिजाईन के मामले में काफी मेल खाता है, इस स्मार्टफोन में iPhone X जैसा Notch डिजाईन होने वाला है, यह डिजाईन इन अन्य दो स्मार्टफोंस में भी देखा जा सकता है। OnePlus छः स्मार्टफोन की चर्चा को आगे बढ़ाये तो आपको बता देते हैं कि इसमें एक छः.अट्ठाईस-इंच की AMOLED डिस्प्ले दो हज़ार दो सौ अस्सी×एक हज़ार अस्सी पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ आने वाली है। ऐसा लग रहा है कि Oppo Rपंद्रह स्मार्टफोन में कुछ बदलाव करके एक बार फिर से पेश किया जाने वाला है। इस स्मार्टफोन में एक उन्नीस:नौ आस्पेक्ट रेश्यो वाली स्क्रीन होने के भी आसार हैं। इसके अलावा ऐसा भी सामने आ रहा है कि स्मार्टफोन में छःGB की रैम के साथ एक सौ अट्ठाईसGB की इंटरनल स्टोरेज होने वाली है। साथ ही इसका एक बड़ा वैरिएंट भी हो सकता है, जो आठGB रैम के साथ दो सौ छप्पनGB स्टोरेज के साथ लॉन्च किया जा सकता है। फोन में एक बीस-मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा f/दो.शून्य अपर्चर के साथ लॉन्च किया जा सकता है, इसके अलावा इसके रियर में फोटोग्राफी के लिए एक बीस-मेगापिक्सल और सोलह-मेगापिक्सल का कैमरा कॉम्बो होने के आसार हैं।
राजधानी रायपुर में एक लोहा कारोबारी के साथ एक करोड़ से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार लोहा खरीदकर भुगतान नहीं करने वाले दो कारोबारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना मे लिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने भुगतान के नाम पर बंद हो चुके बैंक खाता का चेक लोहा कारोबारी को दिया था। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित की शिकायत सही पाए जाने के बाद जैन बंधुओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि रायपुर के ग्राम तेंदुआ स्थित रामा टीएमटी प्लांट से दिल्ली के आरसीसी इंफ्रावेचर लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर रवि जैन और लव जैन ने जुलाई 2018 मे 217 टन सरिया खरीदा था इसके लिए उन्होंने चेक से इसका भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने समय पर भुगतान नहीं किया। बताया जा रहा है कि आरोपी लगातार आश्वासन देते रहे कि पेमेंट आने पर जल्द भुगतान कर देंगे. इस बीच लोहा कारोबारी के दबाव बनाने पर आरोपियों ने 1 करोड़ 12 लाख 67 हजार 459 रुपए का चेक दिया था। जब चेक को भुगतान के लिए लगाया तो वह बाउंस हो गया। पीड़ित ने जब जैन बंधुओं से इस भुगतान राशि की मांग की गई तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया. पीड़ित की शिकायत पर आमानाका पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर विवेचना मे लिया है।
राजधानी रायपुर में एक लोहा कारोबारी के साथ एक करोड़ से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार लोहा खरीदकर भुगतान नहीं करने वाले दो कारोबारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना मे लिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने भुगतान के नाम पर बंद हो चुके बैंक खाता का चेक लोहा कारोबारी को दिया था। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित की शिकायत सही पाए जाने के बाद जैन बंधुओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि रायपुर के ग्राम तेंदुआ स्थित रामा टीएमटी प्लांट से दिल्ली के आरसीसी इंफ्रावेचर लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर रवि जैन और लव जैन ने जुलाई दो हज़ार अट्ठारह मे दो सौ सत्रह टन सरिया खरीदा था इसके लिए उन्होंने चेक से इसका भुगतान करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने समय पर भुगतान नहीं किया। बताया जा रहा है कि आरोपी लगातार आश्वासन देते रहे कि पेमेंट आने पर जल्द भुगतान कर देंगे. इस बीच लोहा कारोबारी के दबाव बनाने पर आरोपियों ने एक करोड़ बारह लाख सरसठ हजार चार सौ उनसठ रुपयापए का चेक दिया था। जब चेक को भुगतान के लिए लगाया तो वह बाउंस हो गया। पीड़ित ने जब जैन बंधुओं से इस भुगतान राशि की मांग की गई तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया. पीड़ित की शिकायत पर आमानाका पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर विवेचना मे लिया है।
नई दिल्ली। हरियाणा के जींद जिले से हैरान कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां धनोरी गांव में एक शख्स ने अपने भाई की गोली मारकर हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि उसने लड्डू चुराकर खाए थे। मृतक के पिता ने पुलिस को बताया कि तरसेम और विकास की दादी मंगलवार को एक शादी समारोह में गई थी। वहां से वो लड्डू लेकर आई थीं। दादी ने लड्डू एक संदूक में ताला लगा कर रखा था। यह बात जब 20 साल के तरसेम को पता चली तो उसने ताला खोलकर लड्डू चुरा लिए। जब तसमेर के चचेरे भाई विकास को पता चला तो वो गुस्से से आगबबूला हो गया और दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। दोनों झगड़ते हुए खेत में चले गए जहां तैश में आकर विकास ने तमसेर के सीने में गोली मार दी। उसके बाद परिवार के सदस्यों ने विकास को गंभीर हालत में स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक तरसेम के पिता मिट्ठू लाल की शिकायत के आधार पर आरोपी विकास के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि हत्या के पीछे कोई और भी वजह हो सकती है जिसकी जांच की जा रही है। अयोध्या। प्रभु श्रीराम जी नगरी अयोध्या में राम की पैड़ी पर दीपावली के शुभ अवसर पर 24 लाख दीये प्रज्ज्वलित होंगे। इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने कमर कस ली है। कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने बताया कि राम की पैड़ी के सभी घाटों व चौधरी चरण सिंह घाट के सभी चिह्नित स्थानों पर 24 लाख दीये 25 हजार स्वयंसेवकों की मदद से प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए 21 समितियां बना दी गई हैं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (GBoWR) में नाम दर्ज करने की कवायद की जा रही है। कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर संयोजकों, सह-संयोजकों व अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में कुलपति ने तैयारियों का खाका खींचा व जानकारी प्राप्त की। प्रो. प्रतिभा गोयल ने बताया कि राम की पैड़ी पर शासन द्वारा 11 नवंबर को 21 लाख दीये जलाने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती पर कार्य शुरू कर दिया गया है। इस संबन्ध में आवासीय परिसर, सम्बद्ध महाविद्यालयों व इंटर कॉलेजों के प्राचार्यों से घाट समन्वयक व स्वयंसेवकों की सूची मांगी जा रही है। कुलपति ने बताया कि राम की पैड़ी के सभी घाटों एवं चौधरी चरण सिंह घाट के सभी चिह्नित स्थानों पर 24 लाख दीये 25 हजार स्वयंसेवकों की मदद से सजेंगे। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए 21 समितियां बना दी गई। सभी समिति एक दूसरे से सामंजस्य बनाते हुए पिछला रिकार्ड तोड़कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करेगी। बैठक में वित्त अधिकारी पुणेंदू शुक्ल, कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र, परीक्षा नियंत्रक उमानाथ, मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. चयन कुमार मिश्र, डॉ. विजयेंदु चतुर्वेदी, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. त्रिलोकी यादव सहित अन्य मौजूद रहे। दीपोत्सव नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने अयोध्या के प्रान्तीयकृत दीपोत्सव पर पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि राम की पैड़ी के स्थलों का जिला प्रशासन के समन्वय में निरीक्षण किया गया है। शीघ्र ही मैपिंग का खाका खींच लिया जायेगा। इस बार 47 घाटों पर दीये सजाने व प्रज्ज्वलित करने का कार्य किया जायेगा। सभी समितियां शीघ्र ही कार्यों को अंतिम रूप देना शुरू कर देंगी।
नई दिल्ली। हरियाणा के जींद जिले से हैरान कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां धनोरी गांव में एक शख्स ने अपने भाई की गोली मारकर हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि उसने लड्डू चुराकर खाए थे। मृतक के पिता ने पुलिस को बताया कि तरसेम और विकास की दादी मंगलवार को एक शादी समारोह में गई थी। वहां से वो लड्डू लेकर आई थीं। दादी ने लड्डू एक संदूक में ताला लगा कर रखा था। यह बात जब बीस साल के तरसेम को पता चली तो उसने ताला खोलकर लड्डू चुरा लिए। जब तसमेर के चचेरे भाई विकास को पता चला तो वो गुस्से से आगबबूला हो गया और दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। दोनों झगड़ते हुए खेत में चले गए जहां तैश में आकर विकास ने तमसेर के सीने में गोली मार दी। उसके बाद परिवार के सदस्यों ने विकास को गंभीर हालत में स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक तरसेम के पिता मिट्ठू लाल की शिकायत के आधार पर आरोपी विकास के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि हत्या के पीछे कोई और भी वजह हो सकती है जिसकी जांच की जा रही है। अयोध्या। प्रभु श्रीराम जी नगरी अयोध्या में राम की पैड़ी पर दीपावली के शुभ अवसर पर चौबीस लाख दीये प्रज्ज्वलित होंगे। इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने कमर कस ली है। कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने बताया कि राम की पैड़ी के सभी घाटों व चौधरी चरण सिंह घाट के सभी चिह्नित स्थानों पर चौबीस लाख दीये पच्चीस हजार स्वयंसेवकों की मदद से प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए इक्कीस समितियां बना दी गई हैं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की कवायद की जा रही है। कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर संयोजकों, सह-संयोजकों व अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में कुलपति ने तैयारियों का खाका खींचा व जानकारी प्राप्त की। प्रो. प्रतिभा गोयल ने बताया कि राम की पैड़ी पर शासन द्वारा ग्यारह नवंबर को इक्कीस लाख दीये जलाने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती पर कार्य शुरू कर दिया गया है। इस संबन्ध में आवासीय परिसर, सम्बद्ध महाविद्यालयों व इंटर कॉलेजों के प्राचार्यों से घाट समन्वयक व स्वयंसेवकों की सूची मांगी जा रही है। कुलपति ने बताया कि राम की पैड़ी के सभी घाटों एवं चौधरी चरण सिंह घाट के सभी चिह्नित स्थानों पर चौबीस लाख दीये पच्चीस हजार स्वयंसेवकों की मदद से सजेंगे। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए इक्कीस समितियां बना दी गई। सभी समिति एक दूसरे से सामंजस्य बनाते हुए पिछला रिकार्ड तोड़कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करेगी। बैठक में वित्त अधिकारी पुणेंदू शुक्ल, कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र, परीक्षा नियंत्रक उमानाथ, मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. चयन कुमार मिश्र, डॉ. विजयेंदु चतुर्वेदी, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. त्रिलोकी यादव सहित अन्य मौजूद रहे। दीपोत्सव नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने अयोध्या के प्रान्तीयकृत दीपोत्सव पर पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि राम की पैड़ी के स्थलों का जिला प्रशासन के समन्वय में निरीक्षण किया गया है। शीघ्र ही मैपिंग का खाका खींच लिया जायेगा। इस बार सैंतालीस घाटों पर दीये सजाने व प्रज्ज्वलित करने का कार्य किया जायेगा। सभी समितियां शीघ्र ही कार्यों को अंतिम रूप देना शुरू कर देंगी।
नई दिल्लीः 'द कपिल शर्मा शो' छोड़ने के बाद सुनील ग्रोवर शो को मिस तो कर रहे होंगे, लेकिन कपिल से हुए विवाद के बाद वो इस शो में वापस नहीं लौटना चाहते। अगर आप सब कपिल के शो में सुनील को मिस कर रहे हैं तो आप सब के लिए खुशखबरी है। जी हां, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के लिए सुनील ग्रोवर इस शो में लौट रहे हैं। इस रविवार सोनी टीवी में 'द कपिल शर्मा शो' की जगह सोनी टीवी एक खास शो ऑनएयर करेगा, जिसका नाम होगा 'सुपरनाइट विद ट्यूबलाइट'। कहा जा रहा है कि इस एपिसोड में कपिल शर्मा नजर नहीं आएंगे, बल्कि सुनील ग्रोवर यह एपिसोड होस्ट करेंगे। सुनील के साथ अली असगर, चंदन प्रभाकर और सुगंधा मिश्रा भी इस स्पेशल एपिसोड में नजर आएंगे। सुनील ने सलमान के साथ ये स्पेशल एपिसोड शूट भी कर लिया है। शो में सलमान के साथ अभिनेता सोहेल खान भी पहुंचे थे। सुनील ग्रोवर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, "मैं सोनी में वापस सिर्फ एक खास शख्स सलमान खान के लिए आया हूं। यह एक स्पेशल शो होगा जो उनकी नई फिल्म 'ट्यूबलाइट' को डेडीकेट किया जाएगा। (कपिल शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं, कृष्णा अभिषेक ने मिलाया सुनील ग्रोवर से हाथ)
नई दिल्लीः 'द कपिल शर्मा शो' छोड़ने के बाद सुनील ग्रोवर शो को मिस तो कर रहे होंगे, लेकिन कपिल से हुए विवाद के बाद वो इस शो में वापस नहीं लौटना चाहते। अगर आप सब कपिल के शो में सुनील को मिस कर रहे हैं तो आप सब के लिए खुशखबरी है। जी हां, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के लिए सुनील ग्रोवर इस शो में लौट रहे हैं। इस रविवार सोनी टीवी में 'द कपिल शर्मा शो' की जगह सोनी टीवी एक खास शो ऑनएयर करेगा, जिसका नाम होगा 'सुपरनाइट विद ट्यूबलाइट'। कहा जा रहा है कि इस एपिसोड में कपिल शर्मा नजर नहीं आएंगे, बल्कि सुनील ग्रोवर यह एपिसोड होस्ट करेंगे। सुनील के साथ अली असगर, चंदन प्रभाकर और सुगंधा मिश्रा भी इस स्पेशल एपिसोड में नजर आएंगे। सुनील ने सलमान के साथ ये स्पेशल एपिसोड शूट भी कर लिया है। शो में सलमान के साथ अभिनेता सोहेल खान भी पहुंचे थे। सुनील ग्रोवर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, "मैं सोनी में वापस सिर्फ एक खास शख्स सलमान खान के लिए आया हूं। यह एक स्पेशल शो होगा जो उनकी नई फिल्म 'ट्यूबलाइट' को डेडीकेट किया जाएगा।
तुलना किससे की जा सकती है? आठ दुष्ट कर्मोका संहार करनेवाले उन महामुनिको केवलज्ञान उत्पन्न हो गया है। इस प्रकार ध्यानपूर्वक वह उत्तम सिद्धक्षेत्र नगरके लिए कूच कर गये हैं ।।१-५॥ इस प्रकार स्वयंभूदेवसे किसी प्रकार बच्चे हुए, पद्मचरितकं शेषमागमें त्रिभुवन स्वयंभू द्वारा रचित रामके और उनके परिवारके पूर्वभोका कपन शीर्षक पर्व समाप्त हुआ। वन्दइके आश्रित, स्वयंभू पुत्र द्वारा रचित, पण्डितोंके मनको अच्छा लगनेबाला यह चौरासीवाँ सर्ग समाप्त हुआ। फिर भी विभीषण ने पूछा, "हे आदरणीय, कृपया कामदेवको भी विकार उत्पन्न करनेवाले सीतादेवीके दोनों पुत्रोंके जन्मान्तरोंको बताइए।" [१] यह शब्द सुनकर जगरूपी भवनके आभूषण सकलभूषण मुनिवरने कहना प्रारम्भ किया। उन्होंने कहा, "सुनो, बताता हूँ। जगमें प्रसिद्ध और देवताओंको सन्तुष्ट करनेवाले महान नगर काकंदोपुरमें वामदेव नामका एक प्रसिद्ध ब्राह्मण था। उसकी सहायिका उसकी पत्नी श्यामली थी। उससे उसे वसुदेव और सुदेव नामक दो विलक्षण पुत्र थे। उनकी अत्यन्त निर्मल चित्तकी दो पत्नियाँ थीं, उनकी आँखें खिले हुए कमलोंके समान थीं। उनके नाम थे - विषया और प्रियंगु । एक दिन उन
तुलना किससे की जा सकती है? आठ दुष्ट कर्मोका संहार करनेवाले उन महामुनिको केवलज्ञान उत्पन्न हो गया है। इस प्रकार ध्यानपूर्वक वह उत्तम सिद्धक्षेत्र नगरके लिए कूच कर गये हैं ।।एक-पाँच॥ इस प्रकार स्वयंभूदेवसे किसी प्रकार बच्चे हुए, पद्मचरितकं शेषमागमें त्रिभुवन स्वयंभू द्वारा रचित रामके और उनके परिवारके पूर्वभोका कपन शीर्षक पर्व समाप्त हुआ। वन्दइके आश्रित, स्वयंभू पुत्र द्वारा रचित, पण्डितोंके मनको अच्छा लगनेबाला यह चौरासीवाँ सर्ग समाप्त हुआ। फिर भी विभीषण ने पूछा, "हे आदरणीय, कृपया कामदेवको भी विकार उत्पन्न करनेवाले सीतादेवीके दोनों पुत्रोंके जन्मान्तरोंको बताइए।" [एक] यह शब्द सुनकर जगरूपी भवनके आभूषण सकलभूषण मुनिवरने कहना प्रारम्भ किया। उन्होंने कहा, "सुनो, बताता हूँ। जगमें प्रसिद्ध और देवताओंको सन्तुष्ट करनेवाले महान नगर काकंदोपुरमें वामदेव नामका एक प्रसिद्ध ब्राह्मण था। उसकी सहायिका उसकी पत्नी श्यामली थी। उससे उसे वसुदेव और सुदेव नामक दो विलक्षण पुत्र थे। उनकी अत्यन्त निर्मल चित्तकी दो पत्नियाँ थीं, उनकी आँखें खिले हुए कमलोंके समान थीं। उनके नाम थे - विषया और प्रियंगु । एक दिन उन
थोड़ा नीचे लाने की आवश्यकता है, जिसे हम कुछ मामलों में धुंधला या धुंध कंप्यूटिंग (fogging or fog computing) कहते हैं। लोग इसेएज कंप्यूटिंग (edge computing) के रूप में भी कहते हैं, या चीजों का एक वितरित घटना है। कुछ विशेषताएं हैं, जो हमने क्लाउड (cloud) में देखा है, उसे यहां पर रखा जाना चाहिए, जैसे स्केलेबिलिटी अनंत स्केलिंग या स्केलिंग पे जैसे कि आप मॉडल या मीट्रिक सेवाओं ( scalability infinite scaling or scaling pay as you go model or metered services) पर जाते हैं और बुनियादी सुविधाओं को बुनियादी चीजों की तरह चीजों की स्थिति और कई अन्य विशेषताओं या क्लाउड (cloud) को प्रदान करना चाहते थे, क्लाउड (cloud) की तरफ बढ़ने की औसत प्रेरणा को भी धुंध (fog) द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए। तो, यही चीजों की ज़रूरत है और ऐसा नहीं है, कि सभी को एक विशेष आवेदन दिया गया है, चीजों के किनारे पर सब कुछ डाला जाना चाहिए, हम क्लाउड (cloud) एंड पर आंशिक रूप से इंटरमीडिएट या नेटवर्क के किनारे पर साकेत हैं। इसलिए, यह विभिन्न प्रकार की चुनौतियों को लाएगा जो, हम आज की बातों में देखने की कोशिश करेंगे कि, विभिन्न प्रकार की चीजें क्या हैं । धुंध (fog) क्या हैं। धुंध (fog) उपकरण इतने संसाधन तक नहीं पहुंचते हैं, जैसे कि वे इंटरमीडिएट रूटर जैसे डिवाइस हैं, या समय पर सेंसिंग डिवाइस या बनाम तैनाती के उस विशेष सेंसर परिनियोजन सिंक नोड की सिंक जो वास्तव में नहीं है। तो, क्लाउड (cloud) पर ठंडा नहीं है, क्योंकि यह बैकएंड उच्च संसाधन क्लाउड (cloud) पर ठंडा था। इसलिए, संसाधन प्रबंधन इस प्रकार की घटना की सफलता के एक बड़े तरीके से आता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 04:44) तो, अब हम धुंध कंप्यूटिंग (fog computing) के बारे में बात करेंगे। तो, हम क्या देखते हैं कि क्लाउड कंप्यूटिंग (cloud computing) स्केलेबल, स्केलेबिलिटी संसाधन प्रावधान प्रदान करने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में डेटा से खुफिया प्रदान करके आईओटी उपकरणों (IoT devices) या आईओटी (IoT) की क्षमता को साकार करने में मदद करने में सक्षम है। तो, एक स्केलेबिलिटी संसाधन प्रावधान है और दूसरा अंत यह मूल रूप से आंकड़ों से डेटा खनन करने के लिए, कुछ प्रकार है, जो डेटा खनन कर सकता है, जो बैकएंड पर है। हम यहाँ मशीन लरनिंग एल्गोरिदम (machine learning algorithms) का प्रकार चला सकतें हैं। लेकिन क्लाउड में विशेष रूप से रीयल टाइम विलंबता के संदर्भ में कुछ सीमाएं हैं, सही, सेकेंड या मिलीसेकंड में आवश्यक प्रतिक्रिया या माइक्रोसॉड संवेदनशील अनुप्रयोगों को इसके अनुप्रयोग दुर्घटना के मामले में पसंद है। अगर कार की टक्कर हो रही है और यदि ऐसी कारें बुद्धिमान कार हैं, तो हम क्या कहते हैं, कि नियमित विज्ञापन नेटवर्क या चीजें हैं । अगर हमें क्लाउड पर इस नीति और संबंधित जानकारी को पुष (push) करना है, तो इसे परिष्कृत करें और आस-पास के क्लाउड से स्थान इत्यादि को ढूंढें, शायद उस समय तक, कुछ और अधिक आवेदकों की दुर्घटना हो सकती है। इसलिए, यह एक बहुत ही स्थानीय तरीके से किया जा सकता था, जहां क्लाउड को ले जाने और प्रसंस्करण करने के बजाय मैं, स्थानीय और असंभव तरीके से इसे कर सकता था। तो, इस तरह के वास्तविक समय अनुप्रयोगों; जहां यह दुर्घटना प्रबंधन या कुछ अन्य प्रकार के अनुप्रयोगों को हम देखते हैं, कि ऐसा करने की एक संभावित घटना हो सकती है। तो, वास्तविक समय विलंबता संवेदनशील अनुप्रयोगों को तेजी से सेवा देने के लिए धुंध कंप्यूटिंग (fog computing) का निर्माण किया गया है। यह वास्तविक समय की सेवा के लिए बनाया गया है और यह तेज है। धुंध कंप्यूटिंग (fog computing), धुंध के लिए उपलब्ध डेटा के स्थानीय ज्ञान का लाभ उठाती है और तेजी से अनुप्रयोग प्रदान करके डेटा से अंतर्दृष्टि खींचती है। तो, सबसे पहले वास्तविक समय विलंबता या वास्तविक समय अनुप्रयोगों को सेवा देने का आदेश है, या जो समय संवेदनशील अनुप्रयोग हैं और यह भी लाभान्वित है। नोड के लिए उपलब्ध स्थानीय स्तर पर डेटा का, स्थानीय ज्ञान और तेजी से प्रतिक्रिया से डेटा से अंतर्दृष्टि खींचता है। तो, यह वास्तव में उस धुंध के पर्यावरण को देखने की कोशिश करता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 07:22) अब, हमने इस तस्वीर को पहले धुंध पर हमारी चर्चा में देखा है, जैसे कि हमारे पास इनमें से एक सेंसर और मोबाइल डिवाइस में क्लाउड (cloud) में से एक है, जो डेटा इंटरमीडिएट डिवाइस में योगदान देने के लिए हैं, वह इस धुंध का निर्माण कर सकता है। इसलिए, यह उस अधिकार के लिए, विशेष रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता है। इसलिए, हम राउटर या गेटवे कुछ सिस्टम (routers or gateways) और अन्य डिवाइस कह रहे हैं, जो मूल रूप से संचार कर रहे हैं, जिसका मूल रूप से क्लाउड को संवेदी डेटा (sensed data) के मध्यवर्ती संचार के लिए उपयोग किया जाता है। इसलिए, वे एक स्टोर के रूप में काम करने के कुछ प्रकार के रूप में संचारित होते हैं और वहां से आगे बढ़ते हैं, कि क्या हम स्टोर प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और कुछ स्थानीय चीजों को दूसरे स्तर पर, उच्च स्तर के लिए अग्रेषित करने की आवश्यकता है, चीज़ों या शायद एक बड़े भौगोलिक स्थान पर एकत्रीकरण जब चीजें से अलग सेंसर आते हैं, फिर भी हम स्थानीय स्तर पर डेटा का उपयोग करने के बारे में एक स्थानीय घटना बना सकते हैं। तो, हम क्या देखते हैं, कि अधिक कंप्यूटिंग शक्ति तो, अंत में अधिक भंडारण है। इसलिए, जो अनुप्रयोग अधिक कंप्यूटिंग गहन हैं, उन्हें दूसरे छोर पर पुष (push) किया जा सकता है, जबकि अधिक इंटरैक्टिव या अधिक प्रतिक्रियाशील निचले सिरे पर हो सकते हैं। तो, ये चीजों के 2 पक्ष हैं। तो, मध्यवर्ती में, हमारे पास धुंध हैं, या यहां तक कि कुछ मामलों में, इन इंटर फ्रंटेंड (inter frontend devices) डिवाइस कुछ प्रकार की गणना कर सकते हैं और डेटा को एकत्र कर सकते हैं और चीजों के साथ भी यही कर सकते हैं । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 09:10) इसलिए, यदि आप क्लाउड और धुंध के बीच तुलना करने या विपरीत करने की कोशिश करते हैं, तो हमने देखा है कि, जैसे हमने पहले व्याख्यान में चर्चा की है, कि ये प्रतिस्पर्धी माध्यम नहीं हैं, इस अर्थ में वे एक को प्रतिस्थापित नहीं कर रहे हैं। तो, यह क्या करने की कोशिश कर रहा है, यह एक तरीका है, एक साथी मोड में है, कुछ चीजें जिन्हें क्लाउड में बेहतर किया जा सकता है और वहां किया जाना चाहिए और धुंध उन चीजों के उचित ऑर्केस्ट्रेशन (orchestration) में करना चाहिए ताकि ऑर्केस्ट्रेशन (orchestration) की आवश्यकता हो। इसलिए, अगर हम क्लाउड और धुंध की आवश्यकता को देखते हैं। तो, अगर हम विलंबता कहते हैं। तो, क्लाउड में यह जादा या धुंध में कम है। इसलिए, विलंबता एक उच्च देरी जिटर (jitter) निश्चित रूप से तब कहती है कि उच्च आमतौर पर उच्च होता है और यह धुंध में बहुत कम होता है, इंटरनेट के भीतर सर्वर नोड्स का स्थान होता है, जबकि स्थानीय नेटवर्क के किनारे पर है। इसलिए, जहां क्लाउड के मामले में सर्वर नोड्स स्थित हैं, यह इंटरनेट पर है, तो आपको वास्तव में यह नहीं पता कि सेवाओ को अमेज़न या Google या माइक्रोसॉफ्ट या आईबीएम (Amazon or Google or Microsoft or IBM) में, या कहां दिया जाता है। तो, खेल या और कुछ भी तो, हम क्या करें? हम मूल रूप से अपने पोर्टल या लिंक से जुड़ते हैं और हमें वास्तव में यह नहीं पता कि आपका आवेदन कहां किया जा रहा है। ऐसा नहीं है, कि आप नहीं जानते, आप जानते हैं, लेकिन फिर भी, वे अपने संसाधन प्रबंधन और प्रावधान और चीज़ के प्रकार पर करते हैं। तो, इंटरनेट पर हम यही कहते हैं, जबकि यदि आप उस धुंध के परिदृश्य को देखते हैं। तो, यह स्थानीय नेटवर्क के किनारे पर अधिक है, जैसे कि मैं तापमान संवेदना का एकत्रीकरण और इस विशेष कमरे का डिज़ाइन ले रहा हूं, जिसके साथ 10 विषम सेंसर कह रहे हैं, तो मैं जो कर रहा हूं, वह मूल रूप से स्थानीय रूप से है और मुझे पता है कि इस विशेष कमरे में सर्वर उस चीजों के लिए काम कर रहा है या सर्वर जो इस विशेष कमरे के लिए सेवा कर रहा है, चीजों पर काम कर रहा है, कभी-कभी उपयोगी होता है, क्योंकि अगर आप कुछ भीड़ या चीजों में कुछ समस्या देख सकते हैं। चीजों को संबोधित करते समय कई चुनौतियां होती हैं, यह एक सुरक्षा छेड़छाड़ भी हो सकती है, क्योंकि आप जानते हैं, अगर तापमान सर्वर द्वारा महसूस किया जा रहा है और यह चीजों को भेज रहा है और यदि आवास में यह विशेष प्रयोगशाला या कमरा महत्वपूर्ण अन्य सिस्टम है। तो, मैं मूल रूप से उस सर्वर पर हमला कर सकता हूं और कह सकता हूं, कि कुछ विनिर्माण, यहां तक कि तापमान या साधन पर्यावरण संवेदना कुछ अनुमति दे रहा है, मैं कहता हूं, कि उस तरह की चीज़ पर सब कुछ ठीक हो रहा है। तो, गिरावट और चीजों की आवश्यकता है और दूसरा, इसे उन अनुप्रयोगों के प्रकार को पूरा करने के लिए संसाधन होना चाहिए जिन्हें, मैं करने की कोशिश कर रहा हूं। आमतौर पर क्लाउड कंप्यूटिंग (cloud computing) के मामले में क्लाइंट और सर्वर के बीच की दूरी मल्टी हॉप (multi hop) है। आप क्लाउड के मामले में, आम तौर पर इस मानक नेटवर्किंग का उपयोग कर रहे हैं। एक धुंध के मामले में यह एक हॉप (one hop) हो सकता है। तो, वे क्लाइंट से सर्वर पर एक हॉप दूरी पर है। क्लाउड कंप्यूटिंग (cloud computing) 1 के मामले में सुरक्षा; 1 तर्क यह अपरिभाषित है, यह इस अर्थ में अपरिभाषित है, कि उपयोगकर्ता और मेरे पास चीजों पर अधिक नियंत्रण नहीं है। तो, यह उस अर्थ में है, यह अपरिभाषित है, जबकि यहां यह परिभाषित किया जा सकता है, कि आपके पास स्थानीय चीजें हैं, जिन पर चीज पर आप कुछ नियंत्रण कर सकते हैं। इसलिए, आप इन विशेष उपकरणों पर कुछ नियंत्रण रख सकते हैं या संगठन डिवाइस पर नियंत्रण रख सकता है और कुछ सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकता जैसे कि मैं यातायात प्रकाश कहता हूं। तो, एक विशेष शहर के, तो किसी विशेष क्षेत्र के उस सर्वर में यातायात प्रकाश प्रबंधन उस शहर के यातायात प्राधिकरण के तहत है। इसलिए, उनके पास क्लाउड पर पूरी तरह से नियंत्रण था। इसलिए, आप नहीं जानते कि डेटा या एप्लिकेशन क्या कर रहे हैं, जो कि उस सेवा प्रदाता पर आधारित है। डेटा एनरोटर (enrooter) पर हमला हुआ। तो, एनरोट (enrooter)डेटा में क्या, क्लाउड के मामले में हमले कई हॉप हैं। इसलिए, बहुत अधिक समझौता होने का मौका है, जहां धुंध के मामले में, यदि यह एक ही हॉप है, तो समझौता करने वाली चीजें कम हो रही हैं। इसलिए, क्लाउड कंप्यूटिंग के मामले में आपके स्थान पर जागरूकता के बारे में थोड़ा अधिक नियंत्रण है, जबकि किनारे धुंध कंप्यूटिंग (fog computing) स्थान से अवगत है। मुख्य रूप से, हम जो यहाँ कर रहे हैं, वह स्थान जागरूक प्रकार की चीजें हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 14:24) इसलिए, क्लाउड के मामले में भौगोलिक वितरण जैसी अन्य चीजें हैं, जो इसे केंद्रीकृत महसूस से अधिक है। इसलिए, इसमें तर्कसंगत केंद्रीकृत (logically centralized) चीजें हैं और धुंध के मामले में इसे सर्वर नोड्स की सही संख्या वितरित की जाती है, क्योंकि क्लाउडिंग पर आमतौर पर सर्वर बेहद संसाधनपूर्ण होते हैं। हालांकि, प्रकाशनों के लिए आवश्यक नोड्स की संख्या या धुंध के मामले में चीजों का प्रकार बहुत कम है। जैसा कि आप पदानुक्रम (hierarchy) के नीचे बढ़ते हैं, तो नोड्स की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है। तो, वे शहरी नोड्स की बहुत बड़ी संख्या हैं। क्लाउड के मामले में गतिशीलता के लिए समर्थन सीमित है, यदि आप मोबाइल एप्लिकेशन से आगे बढ़ते हैं, जिसे इसे अलग-अलग इंटरमीडिएट डिवाइसों पर स्विच करने की आवश्यकता होती है। अब, एक बार जब आप दूसरे पाथ (path) पर जाते हैं, तो उसे एक पाथ (path) से कहा जाता है। जबकि, धुंध के मामले में गतिशीलता में कुछ प्रकार का समर्थन होता है, क्योंकि यह स्थानीय सौदों और अन्य चीजें लेता है। यह एक प्राथमिक चीजें जानता है, वे जहां नियंत्रण के तहत और बहुत कम स्तर पर स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। रीयल टाइम एप्लिकेशन या रीयल टाइम इंटरैक्शन क्लाउड द्वारा निश्चित रूप से समर्थित हैं और निश्चित रूप से, यह धुंध (fog) द्वारा समर्थित है, जो कि धुंध कंप्यूटिंग परिदृश्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रमुख प्रेरणा है और जहाँ कि अंतिम मील कनेक्टिविटी (last mile connectivity) का प्रकार आमतौर पर नापसंद होता है। तो, क्लाउड के मामले में केबल लाइन होता है, जबकि आमतौर पर धुंध के मामले में वायरलेस होता है। यह कोई कठोर और तेज़ (hard and fast type of things) चीज नहीं हैं, ये वास्तविकता में सामान्य मानक प्रक्रियाएं हैं। तो, यहाँ प्रौस और काउंस (pros and cons) हैं। जैसे की, ऐसा हो सकता है कि, हम धुंध पर चर्चा कर रहे हैं। तो, यह धुंध की ओर थोड़ा और अधिक सहायक है, यह क्यों है और, लेकिन फिर भी दोनों के लिए महत्व और उचित है, इस धुंध और बादल के बीच एक सिंक्रनाइज़ेशन ऑर्केस्ट्रेशन (synchronization orchestration) होने से पूरी चीज वास्तविकता में बदल जाती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 16:50) तो, कई प्रयोग मामले हैं, या कई परिदृश्य हैं, जहाँ धुंध बहुत अधिक लागू होताहै। जैसे, कि वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों या इमारतों और निकास मार्ग योजना आदि के बारे में किसी भी आपदा या आपदा वास्तविक समय की जानकारी के लिए, आपातकालीन निकासी प्रणाली है। इसलिए, अगर यहाँ बाहर निकलने के लिए कई मार्ग पथों के साथ एक बड़ी इमारत है, तो अगर आग या भूकंप या कुछ जैसी कुछ आपदाएं आयें, तो या डिफ़ॉल्ट पाथ लॉक हो जाता है, या यह संभव नहीं हो पाता हैं। तो, आपको क्या करने की ज़रूरत है? आपको प्रत्येक स्तर या प्रत्येक व्यक्तिगत कमरे, इत्यादि पर बाहर निकलने की उपलब्धता के आधार पर ऐसा करने की आवश्यकता है, हमें पाथ की योजना बनाने की आवश्यकता है। इसलिए, हमें इसे गतिशील रूप से प्रतिलिपि बनाने या, इसे फिर से शुरू करने की आवश्यकता है और कुछ स्थानीय डीएसएम (DSM) से अधिक उपयोगी प्राकृतिक आपदा प्रबंधन हो सकते हैं। इसलिए, संभावित प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन फ्लैश बाढ़ (about landslides flash flood) के बारे में वास्तविक समय अधिसूचना होती है। तो, यह एक आवश्यकता है। तो, जब हम प्राकृतिक आपदा प्रबंधन कर रहे हैं। इसलिए, रीयल टाइम अधिसूचना चीजें और वहां कभी-कभी रुचि के किसी विशेष क्षेत्र के लिए बहुत स्थानीय स्थान दिया जाता है, जहां चीजें चल रही हैं और उपयोगी तरीके हो सकती हैं, यदि हमारे पास इस स्थान को धुंध स्तर पर जागरूक जानकारी है। इसलिए, बड़े सेंसर परिनियोजन बहुत सारे डेटा उत्पन्न करते हैं, जिन्हें प्रीप्रोसेस्ड, संक्षेप (preprocessed, summarized) में और फिर मध्यवर्ती नेटवर्क में भीड़ को कम करने के लिए क्लाउड को भेजने के लिए, किया जा सकता है। तो, यह धुंध की एक और आवश्यकता है। यह प्राकृतिक आपदा प्रबंधन या प्राकृतिक आपदाओं या खतरे नहीं भी हो सकते है, लेकिन दूसरी बात यह है, कि हमारे पास सेंसर की विशाल तैनाती है, जो बहुत अधिक डेटा उत्पन्न कर सकती है और यदि आप सभी कच्चे डेटा को क्लाउड में भेजते हैं, तो बहुत सारी बैंडविड्थ होती है और वह उन्हें भीड़ में ले जाती है। इसलिए, जो एकत्रित डेटा और निश्चित रूप से, चीजों का इंटरनेट, चलने वाले वाहन स्मार्ट शहरों वायरलेस सेंसर नेटवर्क, एक्ट्यूएटर, नेटवर्क (wireless sensor network, actuators, networks) और उन लोगों के बड़े डेटा अनुप्रयोगों के आधार पर आगे बढ़कर कम किया जा सकता है। इसलिए, ये सभी अलग-अलग हैं, जिन चीजों के पहलुओं को हम इंटरनेट चीजों के परिदृश्य में देख सकते हैं, जो फिर से बहुत सारे डेटा और पूरे ढांचे में और हर बार है, जब यह महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है कि वैश्विक डीएसएम (DSM) और चीजों के प्रकार की तुलना में स्थानीय डीएसएम अधिक महत्वपूर्ण हो । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 19:45) और यदि हम प्रयोज्यता को देखते हैं। तो, यहां कुछ ऐसा हैं, जो वहां और सौ हो सकता हैं। तो, स्मार्ट यातायात प्रकाश शायद एक आवेदन, जुड़े वाहन, पाठ्यक्रम के स्मार्ट ग्रिड, सेंसर नेटवर्क, चीजों का इंटरनेट और सॉफ्टवेयर परिभाषित नेटवर्क है ( application, connected vehicles, smart grids of course, sensor network, internet of things and software defined network)। ये इन अनुप्रयोगों के बैकबोन की तरह है, जो इन्हें ठीक से काम करने में मदत करते हैं । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 20:07 ] इसलिए, अगर हम कनेक्ट किए गए वाहन परिनियोजन को देखते हैं, तो कार से कनेक्टिविटी कार के समृद्ध परिदृश्य को प्रदर्शित करता है और कार या अन्य चीजों तक पहुंचने के लिए है। तो, जब हम वाहन परिसंचरण के बारे में बात करते हैं, तो हम क्या देखते हैं, हमारे पास सड़क पर विभिन्न चलती कारें हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 20:46) तो, ये अलग-अलग वाहन हैं और निश्चित रूप से, विभिन्न आधारभूत संरचनाएं हैं। इसलिए, हमारे पास इस वाहन के बीच वाहन या कनेक्टिविटी है, जो हम वी 2 वी या वी 2 आई, आई 2 आई कहते हैं। इसलिए, ये अलग-अलग बुनियादी ढांचे हैं, जो इन विभिन्न वाहनों के आसपास घूम रहे हैं और कनेक्टिविटी दे रहे हैं। इसलिए, इस तरह की चीजें विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोग हैं। जैसे, एक सुरक्षा संबंधी अनुप्रयोग हैं, दूसरा इंफोटेमेंट सूचना से संबंधित अनुप्रयोग (infotainment information related application) पर जानकारी देता है और अन्य चीजें जैसे अलर्ट और शीर्षक के आधार पर अन्य प्रकार की चीजें हैं। इसलिए, वे जानकारी हैं, जो वहां होंगी और सी (c) में एक समग्र क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है, जहां सभी सही तरीके से संवाद कर सकते थे और यह एक डीजल लेता है और जानकारी के प्रकार वापस भेजता है। अब यह कहता है, कि इस विशेष वाहन में एक संघर्ष है, यदि कोई संघर्ष है, तो इस वाहन के पास आने वाले अन्य वाहन अब इसके माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बल्कि, यह स्थानीय रूप से किया जा सकता था। अगर, मैं इस तरह की चीजों के आसपास एक प्रकार का धुंध स्थापित कर सकता हूं। तो, मैं यहाँ स्थानीय डीजल ले सकता,क्योंकि यहां दुर्घटना कुछ शहरों में कहीं भी जा रही कुछ सड़क के साथ कुछ भी नहीं हो सकती है और यहां तक कि उसी शहर में भी कुछ अन्य चीज है। अब, यहां इस प्रकार के कनेक्टेड वाहन घटनाएं या हम जो अवधारणा कह रहे हैं वह आ रही है, या यह पहले से ही वे वैनेट वाहन ऐढोक नेटवर्क हैं (VANET vehicular ad hoc network)। तो, यह संभवतः यह इस धुंध के अनुप्रयोगों में से एक को सफल बनाने के लिए है। तो, फिर से स्मार्ट सिटी लाइटिंग जैसा कि हम देखते हैं, कि यदि कोई ट्रैफिक भीड़ इत्यादि है, तो उस विशेष स्थानीयक चीजों के भीतर बैठे सामान के भीतर है। इसलिए धुंध में कई विशेषताएं हैं, जो इन्फोटेशन सुरक्षा यातायात समर्थन और भौगोलिक वितरण, गतिशीलता, स्थान जागरूकता, कम विलंबता, विषमता (infotainment safety traffic support and analytics like geo distribution, mobility, location awareness, low latency, heterogeneity) और इतने आगे जैसे विश्लेषण प्रदान करने में कनेक्टेड वाहन के लिए निष्क्रिय मंच बनाती हैं। तो, यहाँ बहुत सारे आवेदन हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 23:15) तो, हम देखते हैं, कि विभिन्न वाहन बैकएंड पर चल हैं। इसलिए, हम कहते है, की पहुंच बिंदु (access points) या बुनियादी ढांचे है, जो कभी सड़क पक्ष इकाई या आरएसयू (road side unit or RSUs) के नाम से भी जाना जाता है। तो, ये कुछ इकाइयां हैं, यहाँ अन्य यातायात रोशनी भी हैं। तो, इस भीड़ इत्यादि के आधार पर यह यातायात प्रकाश बुद्धिमान हो सकता है। यह, रोकने के लिए समय देता है और चीजों के प्रकार और भीड़ स्तर के आधार पर यह भिन्न हो सकता है। इसलिए, बैकएंड में हमारे पास वह क्लाउड है, जो बड़ी एनालिटिक्स समस्याओं (analytics problems) को लेता है, जिसके लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता होती है और हमें एक धुंध ऑर्केस्ट्रेशन (fog orchestration) और नेटवर्क प्रबंधन परत की आवश्यकता होती है, जो इस सिंक्रनाइज़ेशन (synchronization) या धुंध की ऑर्केस्ट्रेशन (fog orchestration) और बैकएंड क्लाउड (cloud) के साथ ऑर्केस्ट्रेशन का ख्याल रखती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 24:17 ) तो, यह एक प्रणाली है। तो, हम यह देखने का प्रयास करते हैं, कि यह धुंध स्थानीय निर्णय लेता है, जबकि बड़े विश्लेषण को क्लाउड पर्यावरण पर धक्का दिया जा सकता है। इसलिए, यह निश्चित रूप से परिदृश्यों में से एक है, अगर हम अधिक से अधिक इन्टरनेट (internet) की चीजों को देखते हैं। इसलिए, निचले सिरे पर हमने एम्बेडेड सिस्टम और सेंसर लगाए (embedded systems and sensors ) हैं, फिर बहु सेवा किनारे (multi service edge) है, जो निष्कर्षों में वितरित होते हैं, जहां धुंध एक भूमिका निभा सकते हैं और फिर हमारे पास एक कोर नेटवर्क है, जिसका उपयोग ऊपरी क्लाउड (cloud) पर चीजों को धक्का देने के लिए किया जाता है। तो, यह इंटरनेट की चीजों को देखने का सामान्य तरीका है। जहां हम देखते हैं, कि धुंध परत विलंबता को कम करने और बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद कर सकता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 24:51 ) और यद्यपि, यह हमारे देश में अत्यधिक प्रबल नहीं हो सकता है, या यह बड़े पैमाने पर उपयोग में नहीं है, लेकिन यह स्मार्ट ग्रिड ( smart grid) की तरह आने वाला है। इसलिए, प्रत्येक घर में एक स्मार्ट मीटर (smart meter) होगा और घर के स्तर से लेकर, घर की इकाई से घर के क्षेत्र में चीजों के उपयोग के आधार पर क्षेत्र स्तर और सबसे बड़ा राज्य स्तर समग्र प्रबंधन हो सकता है। इसलिए, मेरे पास एक स्मार्ट ग्रिड (smart grid) है, जो न केवल घरों और कार्यालयों को शक्ति प्रदान करता है और प्रतिष्ठान की भी प्रतिक्रिया लेता है और उन चीजों के आधार पर कॉल करता है, कि बिजली उपयोग कैसे होते हैं। यह बिजली संयंत्र से जुड़ा हुआ है और देश भर में या, पूरे भौगोलिक अंतरिक्ष में पूरे क्षेत्र में, समग्र बिजली प्रबंधन इस तरह की चीजों से प्रबंधित किया जा सकता है। तो, यहां भी धुंध एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि, मैं यह सब कुछ देख रहा हूं, तो इसे क्लाउड (cloud) में पुष (push) इसे किया जा सकता है और यह कॉल कर सकता है। हालांकि, मान लीजिए कि मैं, आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) पर विचार करता हूं। अगर घरों में स्मार्ट मीटर हैं, तो मैं स्थानीय निर्णय ले सकता था, कि बिजली और चीजों के प्रकार का समग्र उपयोग क्या है और मैं बैकएंड क्लाउड को एक समेकित जानकारी भेजता हूं। इसलिए, जो अधिक समेकित जानकारी को लेता है और एनालिटिक्स (analytics) लेता है, अधिक समय के दौरान या दिन के महीनों के लिए, तो चीजें कैसे भिन्न होती हैं और कॉल करती हैं, कि चीजों के आधार पर बिजली का प्रावधान कैसे करना है। इसलिए, इस तरह की चीजें उपयोगी हैं, जहां हमारे पास बिजली के उपकरणों या उपभोक्ता है, तो हमारे पास एक धुंध बुनियादी ढांचा है जहां माइक्रो ब्लीड (micro bleeds) और अन्य चीजें हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 26:55) और फिर हमारे पास एक माइक्रो स्टेशन (micro station) है और क्लाउड पर्यावरण के प्रकार में, इसे बड़े पैमाने पर पुष (push) किया जाता है। और जैसा कि हम सब देखते हैं, जो हम कहते हैं कि फॉर्म के आकर्षक या सुनहरे पक्ष में कुछ निश्चित रूप से चुनौतियां हैं, या इन सभी उपकरणों में से पहले एक प्राप्ति की अच्छी चुनौतियां हैं या नहीं, वे क्लाउड या क्लाउड सर्वर, आदि के रूप में पूर्ण संसाधन नहीं हैं। तो, वह दे सकता है, जिसे हम कम से कम चीजों को समर्थन देने के लिए कहते हैं। तो, अगर ऐसा कोई एप्लीकेशन है, जिसके लिए बहुत बड़ी चीज की आवश्यकता है? तो, आपको उसे सबसे बड़े और तदनुसार, सही विभाजित करने की जरूरत है। तो, यह धुंध उपकरणों में या, इन उपकरणों के कुछ भाग और कुछ क्लाउड पर हो सकता है और जब भी हम ऐसा करते हैं, तो चीजों के सिंक्रनाइज़ेशन ऑर्केस्ट्रेशन (synchronization orchestration) की बहुत आवश्यकता होती है। क्योंकि, न केवल डेटा आवेदन को विभाजित किया जाता है, यहाँ प्रक्रिया भी विभाजित कि जाती है। तो, कहीं भी इस डेटा और प्रक्रियाओं के इस एकत्रीकरण की आवश्यकता है। तो, यह चुनौतियों में से एक है। अन्य चुनौतियां भी है, जैसे कि धुंध में संसाधन प्रबंधन। मान लीजिए कि अगर धुंध डिवाइस में से एक ओवरलोड हो गया है, तो क्या मैं इस एप्लिकेशन को चीजों पर माइग्रेट कर सकता हूं, कि क्या मैं इसे लाइफ (life) निष्पादित करने वाली चीजों में माइग्रेट कर सकता हूं। इसलिए, अगर हमें चीजों को देखने की ज़रूरत है और ये गंभीर चुनौतियां हैं। तो, आइए कुछ चीजें देखें। इसलिए, धुंध कंप्यूटिंग सिस्टम सेवाओं के अंत में विलंबता को समाप्त करने के दौरान अनुप्रयोगों के बीच उचित संसाधन आवंटन के मुद्दे से पीड़ित है। तो, हम विलंबता और चुनौतियों को समाप्त करने के अंत में क्या करना चाहते हैं, धुंध कंप्यूटिंग (fog computing) नेटवर्क के फेस संसाधन प्रबंधन ( face resource management) को संबोधित किया जाना चाहिए, ताकि सिस्टम थ्रूपुट (throughput) उच्च उपलब्धता के साथ-साथ स्केलेबिलिटी सुनिश्चित कर सके। तो, धुंध की मूल घटना और आखिरकार, जैसे कि विभिन्न भौगोलिक जगहों पर वितरित किया जाता है, विभिन्न अधिकारियों के साथ हो सकता है। फिर इस एप्लिकेशन की सुरक्षा और डेटा और चीजों के प्रकार के बारे में क्या होगा जो, चीजों के लिए स्रोत बन जाए। इसलिए, सुरक्षा पहलुओं पर हमने अंतिम व्याख्यान या धुंध पर आखिरी चर्चा की है, कि यह एक गंभीर चुनौती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 2 9: 14) तो, धुंध नेटवर्क में संसाधन प्रबंधन; इसलिए, अलग-अलग पहलू के लिए निष्क्रिय धुंध नोड्स (fog nodes) का उपयोग करने के विभिन्न पहलू हैं, या यहाँ संभव है, कि कुछ धुंध नोड्स हैं और यह मूल रूप से कुछ नोड्स को अन्य समानांतर संचालनों से अधिक लोड किया जाता है, जिससे लोड संतुलन मीटिंग को संभालने के लिए समानांतर संचालन उत्पन्न होते हैं और वास्तविक समय अनुप्रयोगों की देरी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। तो, यदि आपके पास वास्तविक समय के अनुप्रयोग हैं, जैसे,यह प्रावधान कैसे गलत तरीके से क्रैश गलती सहिष्णु (crash fault tolerant )और चीजों के प्रकार का प्रावधान हो सकता है। तो, जैसा कि मैं कह सकता हूं, कि अगर धुंध नोड नीचे जाता है, तो उन अनुप्रयोगों और डेटा के साथ क्या होगा और जो कि धुंध नोड्स पर चल रहे हैं, उन डेटा को माइग्रेट करने के तरीके को कैसे संभालें, चाहे मुझे पहले आवेदन की आवश्यकता हो, भले ही नीचे दूसरा उठाएगा और उन सभी चीजों को संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता होती है, और लागत और इतनी आगे बढ़ती है। अधिक स्केलेबल सिस्टम (scalable systems); इसलिए, स्केलेबिलिटी पर पूरी चीज का हमारा मूल सही स्केलेबिलिटी क्लाउड के प्रमुख पहलुओं में से एक है, जिससे हम सेवा धुंध कंप्यूटिंग (service fog computing) करतें हैं, तो, बेहतर स्केलेबल सिस्टम कैसे बनायें । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 30:22) तो, यदि हम थोड़ा nitty-gritty डेटा देखते हैं, जो निष्पादन धुंध नोड पर उपलब्ध नहीं है। इसलिए, एप्लिकेशन वहां,मौजूद नोड नहीं हो सकता है। इसलिए, आवश्यक सेंसर या डेटा स्रोत (required sensor or data source) से डेटा लाने की आवश्यकता है। तो, यह एक चरण साइकिल चालक है, जो उनके निष्पादन नोड भारी वर्कलोड के कारण उत्तरदायी नहीं हो सकता है। जो विलंबता के समझौता एक माइक्रो सेवा निष्पादन माइग्रेशन के मामले में एक नया नोड चुनने का मुद्दा हो सकता है। इसलिए, प्रतिक्रिया समय समाप्त हो जाता है, भले ही मेरे पास माइग्रेशन का कोई तरीका हो, भले ही मैं एक माइक्रो सेवा एक विशेष नोड पर चल रहा हो, या सेवा का छोटा या कट संस्करण या कटा हुआ सेवा या विभाजन सेवा चल रहा हो, अगर मैं माइग्रेट करने में सक्षम हूं, तो भी मुझे लगता है, कि यह नोड नीचे जा रहा है। तो, अब मुझे क्या करना चाहिए, मुझे किसी चीज़ पर नोड कैसे ढूंढना चाहिए। इसलिए, कुछ एल्गोरिदम (algorithms)चलेंगे और चीजों के प्रकार और कुछ प्रकार के प्रबंधन निष्पादित करने की अनुपलब्धता के कारण वहां उपयोग में आएंगे, आंशिक रूप से प्रसंस्कृत लगातार डेटा को नए नोड में माइग्रेट करने की आवश्यकता है। तो, यह हाफ-कप (half-cup) चीज माइग्रेट करने की जरूरत है। तो, यह एक और आवश्यकता है, अंतिम परिणाम क्लाइंट या एक्ट्यूएटर (client or actuator) को कम करने के क्रम में कम समय के भीतर स्थानांतरित किया जाना है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 31:31) इसलिए, मुझे अलग-अलग धुंध नोड्स में एक अनुप्रयोग घटकों को तैनात करने के समय खोना नहीं चाहिए, जिससे घटकों की विलंबता आवश्यकताओं को सुनिश्चित किया जा सके, कई अनुप्रयोग एक ही धुंध नोड में सकते हैं। इसलिए, डेटा एक आवेदन दूसरे द्वारा समझौता किया जा सकता है। इसलिए, ऐसा हो सकता है, कि एक ही डेटा सुरक्षा में एक से अधिक आवेदन और व्यक्तिगत आवेदन और संसाधन आवेदन की अखंडता सुनिश्चित की जानी चाहिए। तो, हम क्लाउड में बहु किरायेदारी की समस्या को देखते हैं, कि धुंध और धुंध में समस्या का प्रकार कम संसाधन देता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 32:19) तो, यह समस्या और अधिक बढाई जा सकती है और ऐसे कई दृष्टिकोण हैं, जो लोग निकटतम नोड पर माइग्रेशन निष्पादित करने जैसे प्रयास करने के लिए करते हैं। तो, निकटतम नोड जो मुफ़्त है, सबसे उपयुक्त नहीं हो सकता है, लेकिन उपलब्ध नोड प्रकार कार्बन फूट-प्रिंट (carbon footprint) या वीडियो चीज को कम करने का मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि उस ऊर्जा या कार्बन फूट-प्रिंट (carbon footprint) को कम करने के लिए संसाधन भविष्यवाणी पर जोर दिया जाए कि क्या मेरे पास दृष्टिकोण, भविष्यवाणी, संसाधन अनुमान, आरक्षण, उन्नत आरक्षण के साथ-साथ नए आईओटी आवेदन की कीमत (approaches, prediction, resource estimation, reservation, advanced reservation as well as pricing of the new IoT application) हो, ताकि हम चीजों का प्राथमिक अनुमान कर सकें। एक और सेवा है, जिसे हम डॉकर (Docker) को तैनात करने के लिए, एक एज कंप्यूटिंग प्लेटफार्म (edge computing platform) के रूप में डॉकर (Docker)कहते हैं, यह तेजी से तैनाती लोचदारी अच्छा प्रदर्शन की सुविधा दे सकता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 33:06) इसलिए, संसाधन प्रबंधन संसाधनों की उतार-चढ़ाव की संभावनाओं के आधार पर संसाधन प्रबंधन हैं। लोग इस बात का पालन करते हैं, कि बेस स्टेशन एसोसिएशन कार्यों के वितरण वर्चुअल मशीन प्लेसमेंट (virtual machine placement) का अध्ययन करने जैसी अन्य चीजें हैं और इसलिए एक और समस्या के दृष्टिकोण के लिए हेरिस्टिक एल्गोरिदम (heuristics algorithm) लागू करने वाली चीज़ को अनुकूलित करने के लिए एलपी फॉर्मूलेशन (LP formulation) तैयार करना है। इसलिए, ये विभिन्न प्रकार के दृष्टिकोण हैं, जो लोग करने की कोशिश कर रहे हैं और आप देख सकते हैं, की यहां बहुत सारे शोध प्रेरणा हैं और बहुत सारे शोध चल रहे हैं और जो लोग दिलचस्पी रखते हैं, वह इन प्रकार के पहलुओं पर काम कर सकते हैं, यह देखने के लिए एक और आगामी क्षेत्र है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 34:05) और पहले से ही सुरक्षा मुद्दों पर हमने चर्चा की है, इसलिए मैं इसे दोहरा नहीं रहा हूं। इसलिए, जो हम यहां सुरक्षा पर जोर देने की कोशिश करते हैं, वह भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कम संसाधन के कारण आप संसाधन पूल नहीं चला सकते हैं। या, जो हम संसाधन भूख सुरक्षा अनुप्रयोगों है उन्हें भी नहीं चला पाते क्यूंकि, इन्हें चलाने के लिए, आपको इस धुंध प्रकार के धुंध उपकरणों को उचित रूप से आकार देने की आवश्यकता है। इसलिए, सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा है, न केवल इस डेटा को धुंध से समझौता किया जा सकता है, यह उपकरण भी एक हमले के अनुकरण के लिए, एक मंच हो सकता है। इसलिए, क्योंकि इसे वितरित किया जाता है। अब चीजें इस केंद्रीकृत क्लाउड और आईएसपी (centralized cloud and ISP) पर कम नियंत्रण वितरित की जाती हैं। इसलिए, इसका शोषण होने का एक मौका है। इसलिए, चीजों में ध्यान देने की जरूरत है, कि यह धुंध उपकरण कितना सुरक्षित या कितना मजबूत है। यह भी एक बड़ी चुनौती है। लोग इस पर काम कर रहे हैं। तो, हमने आज चर्चा की धुंध के महत्व पर, धुंध और क्लाउड का समामेलन,यह एक तकनीक के माध्यम से ऐसा नहीं है, वहां चीजें हैं, बल्कि उनके बीच उचित सिंक्रनाइज़ेशन और ऑर्केस्ट्रेशन (synchronization and orchestration) एक असली तरीका है, इस ढांचे को एक सफल कार्यान्वयन बनाने के लिए। धन्यवाद । क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud प्रोफेसरः सौम्य कांती घोष कंप्यूटर विभाग विज्ञान और इंजीनियरिंग भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर व्याख्यान - 35 Geospatial Cloud (भू-स्थानिक क्लाउड ) हैलो। हम क्लाउड कंप्यूटिंग (cloud computing) पर हमारी चर्चा जारी रखेंगे और आज हम स्थानिक क्लाउड (spatial cloud) के एक सामान्य उपयोग मामले या अधिक विशेष रूप से भू-स्थानिक क्लाउड (geospatial cloud) के बारे में बात करेंगे। तो, इस भू-स्थानिक डेटा (geospatial data) और जानकारी और चीजों के प्रकार से हमारा क्या मतलब है। तो, हम इन दिनों क्या देखते हैं, कि पृथ्वी की सतह के बारे में यह स्थानिक जानकारी और समन्वित प्रणाली के साथ दोनों, स्थान आधारित जानकारी के साथ ही बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं। हम सभी आज कल इन सेवाओं का जादा तर उपयोग करते है, जिससे हम स्थानिय सेवाओं या नेविगेशन सेवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रैजेक्टोरियों को खोज सकें। इसलिए, ये सभी संभव हैं। क्योंकि, ऐसे कई स्थानिक डेटा हैं, जिन्हें विभिन्न संगठनों द्वारा बनाए रखा जा रहा है। जैसे डेटा अधिक भारी हो रहा है और कई संगठन इस डेटा को संग्रहीत करते हैं। इसलिए, निर्णय लेने के उद्देश्य के लिए इस डेटा को एकीकृत करने की आवश्यकता है। एक नेविगेशन शायद उन चीजों में से एक है, जो कई अन्य निर्णय लेने के लिए विशेष रूप से सरकार और सरकारी एजेंसियों या राज्य एजेंसियों के विभिन्न विकास कार्यक्रम और चीजों के प्रकार की आवश्यकता है। जमीन के स्तर की जानकारी को एकीकृत करने के लिए किसी प्रकार की आवश्यकता होती है। तो, यह देखने का एक तरीका है, कि मैं डेटा को केंद्रीय स्थान पर संग्रहीत करता हूं और फिर चीजों को देखने के बाद सवाल करता हूं। लेकिन, यदि डेटा के कई हितधारकों या इस डेटा के कई प्रदाता हैं, तो ये इसे बनाते हैं। एक केंद्रीय भंडार कभी-कभी चुनौती बन जाता है। यदि विशेषज्ञता हो तो सभी डेटा पहले ही गहन लागत में हैं और वहां जनशक्ति है, जिसमें डेटा संग्रह और रख-रखाव में संग्रह शामिल है। तो, एक बार जब आप डेटा किसी अन्य जगह पर डाल देते हैं, तो पूरी चीज एक अलग प्रकार के प्रबंधन के लिए जाती है। दूसरा, डेटा की मात्रा बहुत बड़ी है। इसलिए, चीजों पर डेटा को स्थानांतरित करने का यह प्रकार बेहद मुश्किल हो सकता है। तो, इस स्थानिक विज्ञान या स्थानिक प्रबंधन और चीजों के समाधान में से एक क्या है। यह देखकर कि क्या हम क्लाउड में माइग्रेट कर सकते हैं, है ना ? यह किसी प्रकार का क्लाउड (cloud) का बुनियादी ढांचा है जो इस मंच पर प्रदान किया जा सकता है। इसलिए, दुनिया भर में बहुत सारे काम इस पर चल रहें हैं और हम यह देखना चाहते हैं, कि व्यवहार्यता क्या है और यहां किस प्रकार की चीजें हैं। आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur ) भी हमारे पास एक छोटा समूह है,जो इस तरह की गतिविधियों पर काम कर रहें हैं। इसलिए, हम यह देखने का प्रयास करेंगे कि क्लाउड (cloud) पर जा रहे इस तरह के डोमेन स्थानिक डोमेन (domains spatial domain) की व्यवहार्यता क्या है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 03:31) तो, यदि आप देखते हैं। तो, यह सब हम लंबे समय सेचर्चा कर रहे हैं, जैसे क्लाउड ऑन डिमांड सेवा सर्वव्यापी पहुंच संसाधन पूलिंग स्थान आजादी तेजी से लोचदारता मापा सेवाओं (demand service ubiquitous access resource pooling location independence rapid elasticity measured services), क्लाउड साइड का एक हिस्सा है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 03:47 ) यदि आप भौगोलिक सूचना पक्ष (geographic information side) या जानकारी स्थानिक जानकारी (information spatial information) या भू-स्थानिक सूचना (geospatial information) पक्ष देखते हैं,तो स्पष्ट रूप से पृथ्वी की सतह पर स्थान से जुड़ी जानकारी, हम मुख्य रूप से स्थानिक डेटा को देख रहे हैं, जो विशेष रूप से पृथ्वी की सतह पर दिख रहा है। तो, यह एक कोड भोजन संचालित (code dine driven) चीज है। इसलिए, प्रत्येक डेटा में हर जगह एक स्थान होता है। यदि, आप देखते हैं, कि एक रिपोर्ट थी कि हमारे डेटा के नब्बे प्रतिशत से अधिक कुछ अन्य स्थान से संबंधित हैं। मान लीजिए कि अगर मैं यहां, हमारे छात्र डेटा देखता हूं। इसलिए, कई अन्य चीजों के साथ यह कहता है कि वह कौन सा हॉल रह रहा है, वह कौन सा विभाग पढ़ रहा है, जहां वह या उसके घर का अधिकार है। तो, उन सभी चीजों में पीओआई (PoI ) पृथ्वी की सतह पर एक स्थान है। तो, इस स्थानिक जानकारी के साथ कहीं और अंतर्निहित है, या यह हमारे पूरे दिन में, जीवन में है और हमारे अधिकांश डेटाबेस में भी है, जिसका हम उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर वहां पिन कोड है, तो वहां है कहता है, तो वह किस क्षेत्र का जिक्र कर रहा है। इसलिए, यह स्पष्ट रूप से पृथ्वी की सतह, भौगोलिक जानकारी स्थिर या गतिशील की तरह गतिशील हो सकती है। हम समय के साथ बदलते नहीं हैं, या लंबे समय तक परिवर्तन नहीं करते हैं। जैसे, कि यह किसी राज्य की सीमा या जिले की सीमा या कभी-कभी पार्क झील इत्यादि, में वे बाहर G-day (दिन) नहीं बदल रहे हैं। यह कुछ गतिशील यातायात आंदोलन या किसी विशेष शहर की आबादी की तरह गतिशील हो सकते हैं। जो समय के साथ बदलता है। लोगों के डेटा में और चीजों के प्रकार के दौरान में बहुत अधिक प्रवाह होता है, यदि मैं इस विशेष इमारत को देखता हूं, जहां हम अभी बैठे हैं। तो यह है, कि यदि आप बिल्डिंग के अनुसार देखते हैं, तो यह स्थिर है, या हम कह सकते हैं, कि छद्म स्थिर यह दिन बदल नहीं रहा है। लेकिन, यदि आप उस इमारत पर उस खाद्य गिरने को देखते हैं, जो बदल रहा है, या यहां तक कि बिजली की जरूरत भी बदल रही है। इसलिए, कुछ डेटा स्टैटिक(static) हो सकते हैं। कुछ चीजें गतिशील हो सकती हैं और एक सामान्य बात यह है, कि यह भौगोलिक डेटा पैमाने पर भिन्न होता है। इसलिए, अगर मैं इंगित करना चाहता हूं। तो, जानकारी कुछ डेटा से मीटर तक ग्लोब तक हो सकती है, इसे एक मीटर पैमाने पर कहने की ज़रूरत है, कि यह पता लगाएं कि, लैंपपोस्ट (lamppost) का सही स्थान क्या है। लेकिन, यह मूल रूप से उच्च हो सकता है, किसी देश का मानचित्र या किसी जिले का मानचित्र या राज्य का मानचित्र बहुत बड़ा हो सकता है। इसलिए विस्तृत बनाम विस्तार और पारिस्थितिकीय असंतोष (scale versus detail and ecological fallacies) जैसी चीजें यहाँ हैं। इसलिए, पैमाने के साथ चीजें बदलती जा रही हैं, जैसे कि मैं आकाश से या उचाई से एक इमारत को देखता हूं तो यह एक बिंदु है।लेकिन, अगर मैं बंद करता हूं तो यह बहुभुज बन जाता है और पैमाने के साथ समग्र प्रकृति बदल सकती है। तो, ये आंकड़ों की कुछ विशेषताएं हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 06:55) और यदि आप उस सामान्य भौगोलिक डेटा को देखते हैं, तो जो कुछ भी हैं, वह कुछ कानूनी डेटा हो सकता है। जो इन सीमाओं आदि स्थान पर राजनीतिक मानचित्र, सांस्कृतिक, जलवायु, कुछ आर्थिक, इत्यादि हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 07:14 ) तो, इस तरह की संरचना की संख्या हो सकती है और ऐसी विभिन्न एजेंसियां हो सकती हैं, जो आंकड़ों को एकत्र कर रहे हैं या जो डेटा बनाए रख रहे हैं। जो, कुछ प्रकार के सामाजिक सर्वेक्षण हो सकते हैं, जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षण भारत के नक्शे का सर्वेक्षण है, इत्यादि कुछ दूरस्थ रूप से सेंसर बिट्स चीजें (remotely sense sensor bits things)या सेंसर डेटा हो सकता है। जैसे, कि मैं हवा या उपग्रह छवियों से ली गई एयर फोटो दूरस्थ रूप से महसूस कर सकता हूं। यहां तक कि जीपीएस और नक्शा अंकन (GPS and map marking) द्वारा एकत्रित मौसम स्टेशनों द्वारा रिपोर्टिंग कुछ विशेषता ब्याज से जुड़े वहां चीजों में प्रदूषण सेंसर हो सकते हैं, जो उन स्थानों के साथ डेटा देता है, जहां चीजें हैं। वायु गुणवत्ता नियंत्रण प्रदूषण सेंसर तापमान सेंसर और अन्य प्रकार के वायुमंडलीय सेंसर स्विच डेटा प्रदान कर सकते हैं। इसलिए, ये डेटा घटना के विभिन्न स्रोत हैं, इन आंकड़ों को विभिन्न स्वामित्व वाली प्रकृति द्वारा विभिन्न संगठन द्वारा बनाए रखा जाता है और जब मैं एक बार ऐसे डेटा से पूछताछ करना चाहता जिसे मुझे डेटा देखने के बीच या इंटरऑपरेट (interoperate) करने की आवश्यकता हो, तो हमें यह देखने की ज़रूरत है, कि यह क्लाउड इसका उपयोग कहां करेगा। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 08:26) इसलिए, अगर हम कुछ औपचारिक परिभाषाओं को कैप्चरिंग (capturing) के लिए देखते हैं। तो,यह एक कैप्चरिंग संग्रह है, जो भू-स्थानिक डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली या टूल या प्लेटफ़ॉर्म (geospatial data geographic information system or tools or platform) का विश्लेषण करने और प्रदर्शित करने के लिए कवेरिंग (querying) को संग्रहीत करता है। जो आपको स्थानिक डेटा जानकारी से संबंधित करने की अनुमति देता है, उस सतह के लिए स्पष्ट रूप से या निहित रूप से। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 08:48) तो, हम यह दिखाने के लिए गहरे चीजों में नहीं जा रहे हैं, कि क्यों इस तरह के डेटा का सिर्फ एक विचार होना चाहिए और इसमें हार्डवेयर की आवश्यकता हो सकती है। हार्डवेयर सॉफ्टवेयर डेटा प्रबंधन एक प्रमुख हिस्सा स्थानिक डेटा है, जिसमें वॉल्यूम वाइज अर्थपूर्ण और चीजों के प्रकार (volume wise meaning wise and type of things ) दोनों की एक अलग प्रकार की विशेषताएं होती हैं और आपको विशेष डेटा की आवश्यकता होती है, जो इस डेटा पर काम कर सकते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 09:16) तो, यही वह लोग है, जो उन चीजों पर काम कर सकते हैं। इसलिए, ये अलग-अलग घटक हैं और इस तरह के विशाल स्थानिक आंकड़ों का सामना करने वाली प्रमुख चुनौतियां क्या हैं। जो, डेटा गहन है, यह गहन गणना है, अगर मैं ए से बी (a to b) तक का सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता हूं, जहां सड़कों इत्यादि की संख्या जैसे मैं ग्राफ़ के रूप में प्रतिनिधि नेटवर्क के रूप में प्रतिनिधि को देखता हूं। इसलिए, तब इस ग्राफ की चीजों की विशाल मात्रा बेहद संगणकीय रूप से गहन नहीं है, कि अगर मैं किसी प्रकार की ओवरलेइंग (overlaying) प्रकार की चीज़ों को जानना चाहता हूं, तो यह कम्प्यूटेशनल रूप से गहन है। इसलिए, जीआईएस सर्वर (GIS server) पर परिवर्तनीय भार संसाधनों से बाहर गतिशील स्केलिंग इन और स्केलिंग आउट (dynamic scaling in and scaling out) की मांग करता है और एक और दिलचस्प बात, ऐसा नहीं है, कि हमेशा आप यहकर रहे हैं। इसलिए, जब भी क्वेरी ( query) आती है, तो डेटा वहां होता है और यह चीजों के आधार पर भिन्न हो सकता है। इसलिए, हमें संसाधनों में स्केलिंग इन और स्केलिंग आउट (scaling in and scaling out) की आवश्यकता हो सकती है। तो, यह फायदेमंद होगा, कि जब मेरे पास बड़ी गणना होती है। तो, मुझे आवश्यकता होती है और जब मुझे आवश्यकता नहीं होती है, तो मैं उन संसाधनों की चीजों को छोड़ देता हूं। इसलिए, यहां इस प्रकार की यूटिलिटी आधारित कंप्यूटिंग या क्लाउड सॉर्टिंग कंप्यूटिंग (utility based computing or cloud sort of computing) होने का मौका है और नेटवर्क की गहन वेब सेवाओं का उपयोग करने के समय की संख्या का उपयोग करता है। क्योंकि, हमने वेब सेवाओं पर चर्चा की है, जो सेवाएं, इस सेवा उन्मुख वास्तुकला (service oriented architecture) पर आधारित हैं और डेटा की बजाय संचालित हमारे पास एक सेवा संचालित है। इसलिए, हम स्थानिक वेब सेवाओं के बारे में बात कर रहे हैं, जो स्थानिक डेटा प्रकार की चीजों का ख्याल रखते हैं। इसलिए, यह बेहद नेटवर्क गहन है। क्योंकि, विभिन्न संगठनों द्वारा बनाए गए स्थान पर डेटा और आपको नेटवर्क गहन चीज़ की आवश्यकता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 11:02 ) तो, अगर हम जमीन के एक ठेठ बैच (typical batch) को देखते हैं। तो, यदि आप स्थानिक डेटा देखते हैं। तो, वहां हाइड्रोलॉजिकल डेटा (hydrological data) हो सकता है। वहां ऊंचाई डेटा या मिट्टी डेटा आधारभूत संरचना (elevation data, soil data infrastructure) एक ही स्थान पर हो सकती है और हमें एक संदर्भ प्रणाली, साधन आधारित या प्रसिद्ध संदर्भ प्रणाली की आवश्यकता होती है। जो, हम अपने स्कूल के दिनों से समझते हैं लैट-लांग(lat-long), यह अन्य संदर्भ प्रणाली भी हो सकती है, जो मूल रूप से किसी विशेष स्थान पर डेटा पिन करने का प्रयास करती है । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 11:28 ) और यदि यह स्थानिक डेटा के लिए केवल सत्य नहीं है, तो किसी भी प्रकार के डेटा रिपोजिटरी के लिए यह सच है, कि हमारे पास परिचालन डेटा है। फिर स्कीम (schema) बनाने के बाद स्कीम (schema) की मेटाडेटा जानकारी सारांशित करता है, जिसमें न केवल स्कीम (schema) जानकारी होती है, बल्कि कई अन्य चीजें भी पता होती हैं। व्यवसाय नियम भी हैं, जो आखिरकार अंतिम उपयोगकर्ता चाहते हैं। जैसे कि मैं, खड़गपुर स्थान से जानना चाहता हूं की आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) से आईआईटी चेन्नई (IIT Chennai)जाना है। तो, कोलकाता (Kolkata) में कोई जगह या रूट, आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) से क्या होना चाहिए। इसलिए, मै इस बात से परेशान नहीं हूं, कि डेटा को कैसे रखा जाता है, मैं इस बारे में अधिक परेशान हूं कि मेरा मार्ग क्या होना चाहिए और पथ में पीओआई (Pols) या रुचि के बिंदु क्या हैं और क्या है। मुझे कैसे स्थानांतरित करना चाहिए और उन चीज़ों तक पहुंचने के लिए अपेक्षित समय क्या हो सकता है और उसमे भीड़ स्तर कितना हो सकता हैं। इसलिए, मैं वास्तविक डेटा के बजाय सेवा में अधिक रुचि रखता हूं। तो, ये आवश्यक हैं। तो, यह मेरा व्यवसाय नियम है, कि मैं सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता हूं। मैं चीजों का एक विशेष गलियारा ढूंढना चाहूंगा । जैसे, कि अगर कोई एक नहर बनाता है, तो मैं कहता हूं, की इसका पकड़ क्षेत्र क्या होना चाहिए यह कितना हल करेगा? तो, यह कहता है कि अगर नहर है। तो, बहुत बहने वाला पानी वहां है, तो मैं साधन देखना चाहता हूं अगर नियम यह है। तो, यह कहता है कि दोनों तरफ 2 किलोमीटर बफर पकड़ क्षेत्र होगा जहां, वह पानी भेजा जा सकता है। तो, इस 2 किलोमीटर में से कितनी आबादी को यह पानी दिया जा सकता है और कितने कृषि भूमि को पानी दिया गया है। इसका तरीका हो सकता है, या यह साधन मेरी गणना हो सकती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 13:32 ) तो, यह मेरा व्यवसाय है। इसलिए, अंतिम उपयोगकर्ता यहाँ सबसे ऊपर माना जाता है और यह बात सभी प्रकार के डेटा के लिए सच है और हमारे पास डेटा सुरक्षा जैसे कुछ वर्टिकल है, जो अंत में हैं। सेवा की गुणवत्ता कितनी भरोसेमंद है, कि प्रबंधन सेवाएं हो सकती हैं और विभिन्न अन्य वर्टिकल है, जो विभिन्न पहलुओं से जाते हैं और विशेष रूप से भूगर्भीय डेटा (geospatial data) के इस प्रकार के स्थानिक डेटा (spatial data) के मामले में देखने के लिए हम क्या प्रयास करते हैं। हम इसे अलग-अलग तरीके से देखने के लिए, एक तरह का एक समान तरीका चाहते हैं। जब मैं क्वेरी करता हूं। तो, डेटा उस को रखता है और मुझे उनकी एक ही प्रकार के साधनों के रूप में आवश्यकता होती है। यहाँ समान प्रकार से मेरा मतलब है, वाक्य रचनात्मक और अर्थपूर्ण बुद्धिमानी (syntactic and semantic),अन्यथा मैं उन डेटा पर सवाल नहीं कर सकता इसलिए, कुछ संदर्भ प्रणाली अलग हैं। तो, यदि डेटा स्केल अलग हैं, तो मैं डेटा पर खदान नहीं कर सकता हूं। तो, मैं डेटा से सवाल नहीं कर सकता हूं। इसलिए, हमें समेकित डेटा विवरण जैसे मुद्दों को हल करने की आवश्यकता है। मुझे डेटा साझाकरण के डेटा मानक तंत्र के मानक एन्कोडिंग (standard encoding) को समझना चाहिए। तो, यह सब कुछ यह, कहता है, कि कुछ प्रकार की कंप्यूटिंग केंद्रीकृत कंप्यूटिंग सुविधा (computing centralized computing facility ) हैं । जो, क्लाउड प्रकार की चीजों की तरह हैं और जो चीजों के लिए सहायक हो सकती हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 14:30) तो, हालांकि मेरे पास अलग-अलग प्रकार के डेटा हो सकते हैं। जैसे, यह सड़क निर्माण वनस्पति (street building vegetation) का कुछ डेटा हो सकता है। लेकिन, कुछ प्रकार के एक समान एकीकृत डेटा मैं, देख रहा हूं, क्योंकि मुझे इस डेटा पर पूछताछ की आवश्यकता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 14:44) और हमने देखा है कि प्रवृत्ति अब परियोजना मोड से शुरू हो रही है। एक और सामाजिक मोड (societal mode) का मतलब है, डेटा हर किसी के लिए उपलब्ध है। क्योंकि, यह करदाता (taxpayer's) का ही पैसे है इसलिए, विचार नीति प्रतिभूतियों, इत्यादि के आधार पर हैं, लेकिन यह कहीं भी सर्वव्यापी उपलब्ध होना चाहिए। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 15:10 ) तो, यहाँ क्लाउड एक समाधान हो सकता है। एक और अवधारणा सामने आई है, जो अग्रिम देशो में बहुत लोकप्रिय हो है और यह हमारे देश में भी लोकप्रिय हो रहा है। यह एक आवश्यकता बन रही है। यह एक स्थानिक डेटा बुनियादी ढांचा बना रहा है। तो, एक बुनियादी ढांचे के रूप में डेटा देख रहे हैं। इसलिए, जब भी मैं डेटा पर पूछताछ करना चाहता हूं, मैं इस आधारभूत संरचना में सही हूं। तो, यह एक बुनियादी ढांचा है। तो, कुछ तरह के समान मैं देख सकता हूं। जैसे, कि हम अपने दूरसंचार बुनियादी ढांचे को देख सकते हैं, जहाँ आपके पास अलग-अलग हितधारकों (stakeholders) हैं और विभिन्न प्रकार की कहानियां या योजनाएं इत्यादि हैं।लेकिन मेरे पास एक और संचार बुनियादी ढांचा है, जब मैं कुछ और चीजों में हुक करता हूं। जैसे, कि मेरे पास विशेष योजना वाला सिम कार्ड है। तो, मैं फिर से आईपी (IP) के आधार पर ध्वनि डेटा और मल्टीमीडिया (voice data and multimedia) प्रकार की चीजों तक पहुंच सकता हूं। इसलिए, इस तरह के दूरसंचार (telecommunication) बुनियादी ढांचे है। तो, अगर मेरे पास एक स्थानिक डेटा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (spatial data energy infrastructure) हो सकता है, तो मैं कई चीजें कर सकता हूं। जैसे, कि मैं योजना बना सकता हूं, की कुछ स्कूलों में कुछ आपदा प्रबंधनों के लिए बैठे एक विशेष क्षेत्र के विकास के लिए विकास योजना की बात कहने के लिए क्या टिप्पणी है, अन्यथा आपको हमेशा कहीं भी डेटा एकत्र करने और इसे करने की आवश्यकता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 16:38 ) तो, इस तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत है और यह धीरे-धीरे हमारे देश में भी आ रहा है। इसलिए, दूसरे अर्थ में हमें डेटा तक पहुंचने के लिए अलग-अलग तरीके की आवश्यकता हो सकती है, वहां भंडारों के विभिन्न उदाहरण हो सकते हैं। तो, हम यहां हार्वेस्ट (harvest) करते हैं, वह एक वेब सेवाएं या स्थानिक वेब सेवाएं है। जो, यहां से अनुरोध ले सकती हैं और डेटाबेस में वापस बात कर सकती हैं और इसे सही तरीके से सेवा दे सकती हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 17:05) तो, हम देखते हैं कि डेटा और मेटाडाटा (metadata) की बड़ी मात्रा में सेवाओं और सेवा ऑर्केस्टेशन (orchestration) की आवश्यकता है। क्योंकि, यदि मेरा व्यवसाय नियम सिर्फ एक छोटा रास्ता नहीं ढूंढ सकता है। तो, मेरे पास कुछ चीजें हो सकती हैं। जिसमें सेवाओं की एक श्रृंखला है या प्रसंस्करण सेवा शुरू की जा रही है। मानक और नीतियों को भूगर्भ की आवश्यकता है, इसे मूल रूप से स्थानिक क्लाउड(spatial cloud) या भू-स्थानिक क्लाउड (geospatial cloud) की आवश्यकता हो सकती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 17:32 ) तो, जैसा कि हमने पहले ही इस पर चर्चा की है। इसलिए, निजी सार्वजनिक संगठन अपने स्थानिक डेटा (spatial data) का साझा करना चाहता है। इसलिए, डेटा वॉल्यूम (data volume ) के आधार पर स्थानिक डेटा स्पेस नेटवर्क बैंडविड्थ (spatial data space network bandwidth), इत्यादि के लिए अलग-अलग आवश्यकताएं चीजों को साझा करने वाली अन्य चीजों से लाभ प्राप्त करती हैं। कम बुनियादी ढांचे और स्थानिक सेवा विशेषज्ञता (spatial service expertise) की आवश्यकता होती है। यह एक और महत्वपूर्ण बात है। तो, अगर मैं स्टोर करना चाहता हूं और अगर मैं डेटा एकत्र करने और संग्रह करने का एक संगठन हूं। इसलिए, मुझे वहां स्टोर करने के लिए एक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। डेटा डेटा वॉल्यूम (data volume) है, जिसके लिए डेटा को एक अलग प्रकार की बैंडविड्थ इत्यादि की आवश्यकता होती है और मुझे एक प्रसंस्करण की आवश्यकता होती है और न केवल इसके लिए मुझे मानव शक्ति पर अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसलिए, यदि यह मेरे पास है और जैसा कि हम समझते हैं, कि प्रत्येक आधारभूत संरचना बंद हो जाती है। या इस अर्थ में हर 3 से 5 वर्षों में नवीनीकरण की आवश्यकता होती है। इसलिए, इन चीजों की स्थिरता बेहद मुश्किल कहलाती है। इसलिए, अगर मैं अपने उद्देश्य के लिए बुनियादी ढांचा किराए पर लेता हूं, तो यह एक और अधिक फायदेमंद चीज हो सकता है। इसलिए, कभी-कभी हमारे संगठन की कमी होती है, जो बुनियादी डेटा को बनाए रखने में स्थानिक डेटा की कमी में अधिक विशिष्ट हैं और जीआईएस निर्णयों (GIS decisions) का उपयोग विभिन्न सरकारी और निजी चीजों में सर्वव्यापी रूप से किया जाता है, जब हम इस स्थानिक क्लाउड भू-स्थानिक क्लाउड (spatial cloud geospatial cloud ) को देखते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 18:58) तो, यह साझा संसाधन पूलिंग (shared resource pooling) का समर्थन करता है। जो भाग लेने वाले संगठन कॉमन्स या साझा लक्ष्यों के लिए उपयोगी है। क्योंकि, हम दो स्लाइडों पर चर्चा कर रहे हैं, कि यह आवश्यकता को कमजोर कर सकता है। इसका मतलब है, मुझे अपने संसाधनों पर स्केल डाउन करने की आवश्यकता है। तो, यह एक साझा संसाधन पूलिंग (resource pooling) होगा और बेस सूट संगठन (base suit organization) की आवश्यकता के लिए, विभिन्न तैनाती सेवा व्यवसाय मॉडल की पसंद प्रबंधित सेवा डेटा को रोकने और लगातार आउटेज इत्यादि से कार्य हानि को रोकती है। तो, अगर यह और अधिक है। तो, कई सेवा और मेरी वित्तीय बाधा को कम कर सकती हैं और यह क्लाउड के उच्च सुरक्षा प्रावधान के साथ डेटा साझा करने में नियंत्रण प्रदान करती है। क्योंकि, क्लाउड सुरक्षा सुविधाओं आक्रामक तरीके से देखता है। इसलिए, सुरक्षा हमेशा बहुत अधिक लागत के साथ आती है। इसलिए, हम सभी चीजों पर लाभ उठा सकते हैं और यह उन चीजों का उपयोग करने के लिए आर्थिक होता है। जो, हम चाहते हैं और संगठन उनकी आवश्यकता के अनुसार वेब सेवा स्थान प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, अगर मुझे केवल इस तरह की स्थानिक सेवाओं की ज़रूरत है। तो, मैं केवल उन सेवाओं को हारवेस्ट (harvest) करूंगा। मुझे अगर इस प्रकार के डेटा की ज़रूरत है, तो मैं केवल इस डेटा को देखता हूं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 20:18) तो, यह बुनियादी ढांचे आवश्यकता के आधार पर अनुकूलित किये गए हैं। यह एनआईएसटी (NIST) परिभाषा है, जिसे मैंने अभी दोहराया है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 20:23) तो, पहले से ही हम जानते हैं और हमें क्लाउड के फायदे भी, ज्ञात हैं कि मांग पर मापनीयता आईटी संसाधनों (IT resources) को व्यावसायिक प्रक्रियाओं में सुधार को कम करती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 20:33) और ये सभी फायदे स्टार्टअप लागत खपत बेस बिल्डिंग को कम करते हैं, या भुगतान मॉडल हैं, क्योंकि आप अपने पैमाने की मॉडल अर्थव्यवस्था में जाते हैं। ग्रीन कंप्यूटिंग (green computing) इन सभी स्थानिक डेटा बुनियादी ढांचे या स्थानिक डेटा प्रबंधन (spatial data infrastructure or spatial data management )की आवश्यकता होती है। तो, भू-स्थानिक डेटा (geospatial data ) बुनियादी ढांचा इस तरह की चीजों के लिए उपयुक्त है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 21:00) और हमने यह भी देखा है, कि क्लाउड एक्टर्स (cloud actors) कौन हैं। जिनके पास क्लाउड सर्विस सीएसपी या ब्रोकर (cloud service CSP or broker)है, ग्राहक दूसरे अंत वार्ताकार वैकल्पिक हैं, जो क्लाउड और सुरक्षा लेखा परीक्षक (security auditor) के एसएलए मैनेजर (SLA manager) के बीच बातचीत कर सकते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 21:18) इसलिए, यदि आप उन सभी चीजों पर विचार करते हैं और यदि हम भू-स्थानिक डेटा (geospatial data) के लिए सामान्य क्लाउड आर्किटेक्चर देखते हैं। तो, यह आर्किटेक्चर किसी अन्य प्रकार की अन्य सेवाओं के लिए सच हो सकता है। लेकिन, यदि हम भू-स्थानिक डेटा (geospatial data) देखते हैं, या भू-स्थानिक या स्थानिक सेवाओं (geospatial or spatial services) को जगह में रखा जाता है। तो, ये समग्र चीजें प्रयोग में आती हैं। तो, एक बार एक ग्राहक या उपयोगकर्ता या एक सेवा उपभोक्ता प्रयोगमें आता है। इसलिए, एक वार्ताकार है, जहां ब्रोकरों (brokers) की संख्या हो सकती है, जहां मूल रूप से ब्रोकर अलग-अलग डेटा या डेटा के अलग-अलग सेट के लिए एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है। वहां 2 रिपॉजिटरीज़ (repositories) में एक ही डेटा को संभाला जा सकता है और हमारे पास अलग-अलग डेटा सेंटर हो सकते हैं, जो वीएम (VM) देता है और ऐसे विभिन्न संगठन हैं, जो इस वीएम (VM) पर अपने डेटा और सेवाओं को लॉन्च करते हैं। और, इनके साथ बातचीत की जा रही है और यह अंत उपयोगकर्ता से जुड़ा हुआ है, इसके अलावा हमें एसएलए मैनेजर (SLA manager) की आवश्यकता है, ताकि यह देख सकें की एसएलए (SLA) या सर्वेक्षण स्तर समझौते हैं और इनक उलंघन नहीं हो रहा है । यह देखने के लिए एक लेखा परीक्षक हो सकता है, कि एसएलए के मामले में इस तरह की नीतियां, इस प्रकार की स्थिति में सुरक्षा लेखा परीक्षकों की सुरक्षा नीतियां आदि रखी जा सकती हैं। इसलिए, मुझे एक ब्रोकिंग सेवा की आवश्यकता है, जो इन चीजों के लिए कार्य कर सकता है। वहां विभिन्न डेटा केंद्र हैं, जो विभिन्न संगठनों के इस स्थानिक डेटा को होस्ट करते हैं और एसएलए (SLA) प्रबंधक और लेखा परीक्षक होगा जो, समग्र प्रबंधन चीजों का ख्याल रखता है। यहाँ हो सकता है, की चीज के अन्य घटक अन्य विभिन्न घटकों में अलग ऑडिटिंग सेवाएं, इत्यादि हो सकती हैं। लेकिन, यह समग्र व्यापक आधारभूत संरचना है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 23:19) इसलिए, अगर मैं किसी प्रकार का इंटरफ़ेस जीआईएस (interface GIS) देखता हूं या हम इस एसडीआई (SDI) के किसी प्रकार की प्राप्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो स्थानिक सेवाएं देता है। तो, इस इंटरफ़ेस जीआईएस (interface GIS) द्वारा आपका क्या मतलब है। इसका अपना डेटा नहीं है, लेकिन यह मूल रूप से उपभोक्ता या ग्राहक को विभिन्न सेवा प्रदाता से जुड़ने की अनुमति देता है। तो, यह किसी प्रकार का क्लाउड या कुछ प्रकार का मध्यम टायर (middle tire) है, जो उन चीजों को जोड़ता है। इसलिए, संसाधन सेवा या संसाधन आवंटन मैनिपुलेशनया या डेटा सेवाओं और इंटरफ़ेस सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 24:02) और हम देख सकते हैं कि हमारे पास एक विशिष्ट संरचना है, जिसके हमारे पास अलग-अलग उदाहरण हैं। तो, यह मेरा बैक-बोन हार्डवेयर है, जहां हमारे पास यह हाइपरवाइजर (hypervisor) है, जो अतिथि ओएस (guest OS) में अलग-अलग आभासी मशीनों (virtual machines) का अनुकरण कर सकता है। इस पर मेरे पास इस स्थानिक क्लाउड (spatial cloud) के विभिन्न प्रकार, उदाहरण या इन स्थानिक वेब सेवाओं (spatial web services) के उदाहरण हो सकते हैं। इसलिए, मैं कह सकता हूं, कि यदि ऐसा कहा जाता है, कि किसी विशेष संगठन के लिए स्थानिक वेब सेवाएं (spatial web services) विशेष स्थिति हो सकती हैं। तो, विशेष जिला सही चीजों पर तत्काल हो सकता है और फिर मैं इस बात पर काम करता हूं। जैसे कि अगर आप कुछ देखने की कोशिश करते हैं। तो, समानता का प्रकार बहुत अच्छा सादृश्य नहीं हो सकता है। इसलिए, अगर मैं कहता हूं, कि अगर मैं क्लाउड पर कुछ हद तक प्रसंस्करण सेवा का उपयोग कर रहा हूं। तो, Google डॉक्स (Google docs) कहता है। तो, हम जो कर रहे हैं, हम मूल रूप से उस विशेष Google दस्तावेज़ पर अपने डोमेन को तुरंत चालू कर रहे हैं, किसी और को फिर से तत्काल चीजें चाहिये, लेकिन पिछली तरफ, यह मूल रूप से Google आधारभूत संरचना है, जिसका उपयोग हम कर रहे हैं, जहां हाइपरवाइजर (hypervisor) और यह मूल रूप से एक सेवा के रूप में सॉफ्टवेयर है। तो, हम बहुत उच्च स्तर पर हैं, लेकिन यह मेरी बात को तुरंत शुरु कर रहा है। तो, यहां मेरे पास, मेरे विशेष काम के लिए तत्काल सेवा हो सकती है या नहीं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 25:28) इसलिए, यदि हम भू-स्थानिक क्लाउड मॉडल (geospatial cloud model) देखते हैं। इसलिए, वेब सेवाएं यहां डेटा को एकीकृत करने के लिए स्थानिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है और विषम बैक एंड डेटा (heterogeneous back end data) सेवा सेट की जा सकती है, डेटा सेवा क्लाउड के अंदर या बाहर हो सकती है। यह हो सकता है, कि कुछ सेवाएं बाहर की जा सकती हैं PaaS का उपयोग कर Paas सेवा मॉडल के माध्यम से लोड संतुलन इत्यादि बनाता है। हम स्केलिंग पारदर्शी बना सकते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 25:55) तो, यह देखने का एक तरीका है, कि एक विशिष्ट परिदृश्य जहां विभिन्न संगठन हैं और मेरे पास एक समन्वय क्लाउड (coordinating cloud) है, जिसमें केंद्रीय भंडार है। जो संगठन की देखभाल करता है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 26:10) वे कैसे काम कर रहे हैं और चीजों के प्रकार, जहां डेटा है। इसलिए, हमने पहले से ही एक एकीकृत प्रारूप या समरूपता में डेटा को एकीकृत करने की आवश्यकता पर विचार किया है, इसके बजाए इसे प्रदर्शन या मेट्रिक (metric) गणना नेटवर्क नेटवर्क इत्यादि के बजाय इंटरऑपरेट ( interoperat) किया जाना चाहिए और यहाँ विभिन्न डेटा स्रोत हो सकते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 26:29) हमने अभी कुछ स्नैपशॉट देखा है, कि हमने इसे प्रयोगात्मक भू-स्थानिक क्लाउड (experimental geospatial cloud) बनाया है। जो मुझे कहना चाहिए की आईआईटी केजीपी (IIT Kgp) का अपना प्रयोगात्मक क्लाउड (experimental cloud) पर मेघामाला (Meghamala) है। जहां हमने देखा है, कि ओपन स्टैक ओपन सोर्स क्लाउड प्लेटफॉर्म (open stack open source cloud platform) पर थे और यह घर के क्लाउड में आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के लिए एक निजी क्लाउड था और इसके बाद हमने कुछ प्रयोग किया है। इसलिए, जैसा कि हम कुछ प्रदर्शन नहीं दिखा रहे हैं, लेकिन यह दिखाते हुए कि किस तरह की चीजें हो सकती हैं (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 27:01 ) तो, यह एक विशेष क्षेत्र है, जो बांकुरा (Bankura) जिलों का एक क्षेत्र है, जो पश्चिम बंगाल (West Bengal) का एक जिला है। इसलिए, अगर मेरे पास राजमार्ग है, जो राजमार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाता है और दूसरी ओर यदि मेरे पास स्थानीय सड़क नेटवर्क है, जो राज्य या जिला प्राधिकरण द्वारा अधिक संभालता है। तो, फिर कुछ पूछताछ कैसे करें यदि यह इसमें शामिल है। यद्यपि, छवि स्पष्ट नहीं हो सकती है, कि यह अलग-अलग वीएम (VM) में चल रहा है। यह कुछ 1 डॉट 74 है, फ्लाई (fly) पर 1 डॉट 75, मैं एक प्रसंस्करण सेवा चाहता हूं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 27:37 ) तो, यह 2 लेते हुए, मुझे मूल रूप से एक विलयित सड़क नेटवर्क मिला है, या दूसरी तरफ मेरे पास सड़क की 2 सेवाएं हैं। मैं खींच रहा हूं और विलय (merged) कर रहा हूं या राष्ट्रीय राजमार्ग वह और वहां हम मूल रूप से क्या कर सकते हैं । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 27:52) अब, इन चीजों पर सबसे कम पथ के लिए पूछताछ करें, जो इन राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्ग दोनों की देखभाल करता है। जैसे, कि यह मेरा 2 स्थान है और फिर मैं इसे सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता जो इस गठबंधन चीजों पर बना है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 28:02) इसलिए, यद्यपि आवेदन छोटा हो सकता है, हालांकि यह मामूली नहीं हो सकता है। लेकिन, यह 2 अलग-अलग भंडारों को देख सकता है, जो हम एक सेवा मोड पर खींच सकते हैं और जो 2 अलग-अलग वीएम (VM) पर चल रहे हैं और एक सेवा मोड खींचें और मूल रूप से मेरा व्यवसाय नियम सबसे छोटा रास्ता ढूंढ रहा है।मुझे पश्चिम बंगाल के पूरे डेटा या सड़क डेटा में दिलचस्पी नहीं है, मुझे उस सबसे छोटे रास्ते और उन स्थानों में दिलचस्पी है (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 28:44 ) तो, यह एक तरह की चीज है। तो, दूसरी बात यह है कि मेरे पास दो प्रकार का डेटा हो सकता है। जहां मेरे पास एक ही नहर प्रकार की चीजें हैं, जो एक ही बांकुरा (Bankura) जिले और एक नदी का डेटा है और जो एक अलग चीज़ में हो सकती है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 28:55 ) अब, मैं एक विलय वाला पानी नेटवर्क (merged water network) चाहता हूं, जो इस नहर को फिर से नदी के साथ एकीकृत करता है। ये 2 अलग-अलग वीएम (VMs) या अलग क्लाउड (cloud) उदाहरणों में हैं। मेरे पास एक विलय डेटा (merged data) है और मैं बफर करना चाहता हूं यह विलय डेटा(merged data)। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 29:9 ) तो, यह देखने की कोशिश करें कि भारी बारिश या बाढ़ के दौरान, चीजें क्या हैं । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 29:13) यदि व्यापार नियम यह है, कि 500 मीटर के भीतर यह कमजोर होता है। तो, इस विशेष बफर जोन का कमजोर क्षेत्र क्या है। इसलिए फिर से मेरे पास 2 अलग-अलग डेटा उदाहरण हैं। जो, फ्लाई (fly) पर एकीकृत हैं और यह क्वेरी देता है। तो, यहां हमने एक प्रयोगात्मक भू-स्थानिक क्लाउड (experimental geospatial cloud) पर प्रयोग किया है, हमने इसे अपनी मेघामाला (Meghamala) चीज़ पर स्थापित किया (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 29:39) इसलिए, यहां कई चुनौतियां हैं। जो आम तौर पर स्थानिक डेटा (spatial data) में नहीं होते हैं और अन्य प्रकार के गैर स्थानिक डेटा प्रकार की चीजों में भी नहीं होते हैं । (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 29:55) इसलिए, स्थानिक डेटाबेस (spatial database) को कार्यान्वयन करना एक चुनौती है। इसके लिए केवल स्पेसियल डाटाबेस ( (spatial database) के डाटा सेमेन्टिक्स ऑर्डर स्केलिंग (data semantics order scaling) को समझने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, यहाँ बहु किरायेदार नीति प्रबंधन की आवश्यकता है। इन अलग-अलग किरायेदारों में से भौगोलिक रूप से स्थित बैकअप यदि आप डेटा सुरक्षा रखना चाहते हैं, तो कुछ चैनल भी अन्य प्रकार की चीजों के लिए हैं, कुछ आम तौर पर इस प्रकार के स्थानिक के लिए होते हैं। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 30:24) और हमारे पास डेटा लेवल पर इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability)की एक बड़ी चुनौती है। जैसे एक डेटा दूसरे के साथ मिलना चाहिए। जबकि हम कर रहे हैं की बफरिंग प्रकार की चीजें हैं और यह एक सेवा स्तर की अक्षमता हो सकती है। जैसे 2 सेवाएं इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability) में एक दूसरे के सुरक्षा स्तर से बात कर सकती हैं। जब मेरे पास अलग-अलग डेटा सेट पर अलग-अलग नीतियां होती हैं। तो सुरक्षा स्तर अंतर अंतःक्रियाशीलता क्या होनी चाहिए। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 30:49) इसलिए, प्रमुख सुरक्षा चिंता यह है कि बहु किरायेदारी पहले से ही अन्य चीजों के लिए है और डेटा के एप्लिकेशन सेवाओं के पूर्ण नियंत्रण की कमी है। (स्लाइडसमय का संदर्भ लेंः 30:59 ) क्लाउड पर संपत्तियां तैनात की जाने वाली कई अन्य चिंताओं हैं, इन संपत्तियों का मूल्य क्या है, इस संपत्ति से समझौता किया जा सकता है। इसलिए, विभिन्न प्रकार की अन्य चिंताओं हैं। जिन्हें, हमें देखने की आवश्यकता है। अगर हम समग्र स्पेक्ट्रम को देखते हैं। इसलिए, इस स्थानिक या भू-स्थानिक डोमेन (spatial or geospatial domain) को इस तरह की क्लाउड चीज़ पर तत्काल प्रयोज्यता या भारी उपयोगिता मिलती है। इसलिए, अच्छे उपयोग के मामलों में से एक जो न केवल विभिन्न देशों में विभिन्न संगठनों में हमारे देश में विभिन्न प्रकार के नागरिक केंद्रित विकास योजना और विनाशकारी प्रबंधन (disastrous management)के लिए एक दूसरे के साथ इस विषम डेटा की बात कैसे करना है, विशेष रूप से लोकप्रिय
थोड़ा नीचे लाने की आवश्यकता है, जिसे हम कुछ मामलों में धुंधला या धुंध कंप्यूटिंग कहते हैं। लोग इसेएज कंप्यूटिंग के रूप में भी कहते हैं, या चीजों का एक वितरित घटना है। कुछ विशेषताएं हैं, जो हमने क्लाउड में देखा है, उसे यहां पर रखा जाना चाहिए, जैसे स्केलेबिलिटी अनंत स्केलिंग या स्केलिंग पे जैसे कि आप मॉडल या मीट्रिक सेवाओं पर जाते हैं और बुनियादी सुविधाओं को बुनियादी चीजों की तरह चीजों की स्थिति और कई अन्य विशेषताओं या क्लाउड को प्रदान करना चाहते थे, क्लाउड की तरफ बढ़ने की औसत प्रेरणा को भी धुंध द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए। तो, यही चीजों की ज़रूरत है और ऐसा नहीं है, कि सभी को एक विशेष आवेदन दिया गया है, चीजों के किनारे पर सब कुछ डाला जाना चाहिए, हम क्लाउड एंड पर आंशिक रूप से इंटरमीडिएट या नेटवर्क के किनारे पर साकेत हैं। इसलिए, यह विभिन्न प्रकार की चुनौतियों को लाएगा जो, हम आज की बातों में देखने की कोशिश करेंगे कि, विभिन्न प्रकार की चीजें क्या हैं । धुंध क्या हैं। धुंध उपकरण इतने संसाधन तक नहीं पहुंचते हैं, जैसे कि वे इंटरमीडिएट रूटर जैसे डिवाइस हैं, या समय पर सेंसिंग डिवाइस या बनाम तैनाती के उस विशेष सेंसर परिनियोजन सिंक नोड की सिंक जो वास्तव में नहीं है। तो, क्लाउड पर ठंडा नहीं है, क्योंकि यह बैकएंड उच्च संसाधन क्लाउड पर ठंडा था। इसलिए, संसाधन प्रबंधन इस प्रकार की घटना की सफलता के एक बड़े तरीके से आता है। तो, अब हम धुंध कंप्यूटिंग के बारे में बात करेंगे। तो, हम क्या देखते हैं कि क्लाउड कंप्यूटिंग स्केलेबल, स्केलेबिलिटी संसाधन प्रावधान प्रदान करने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में डेटा से खुफिया प्रदान करके आईओटी उपकरणों या आईओटी की क्षमता को साकार करने में मदद करने में सक्षम है। तो, एक स्केलेबिलिटी संसाधन प्रावधान है और दूसरा अंत यह मूल रूप से आंकड़ों से डेटा खनन करने के लिए, कुछ प्रकार है, जो डेटा खनन कर सकता है, जो बैकएंड पर है। हम यहाँ मशीन लरनिंग एल्गोरिदम का प्रकार चला सकतें हैं। लेकिन क्लाउड में विशेष रूप से रीयल टाइम विलंबता के संदर्भ में कुछ सीमाएं हैं, सही, सेकेंड या मिलीसेकंड में आवश्यक प्रतिक्रिया या माइक्रोसॉड संवेदनशील अनुप्रयोगों को इसके अनुप्रयोग दुर्घटना के मामले में पसंद है। अगर कार की टक्कर हो रही है और यदि ऐसी कारें बुद्धिमान कार हैं, तो हम क्या कहते हैं, कि नियमित विज्ञापन नेटवर्क या चीजें हैं । अगर हमें क्लाउड पर इस नीति और संबंधित जानकारी को पुष करना है, तो इसे परिष्कृत करें और आस-पास के क्लाउड से स्थान इत्यादि को ढूंढें, शायद उस समय तक, कुछ और अधिक आवेदकों की दुर्घटना हो सकती है। इसलिए, यह एक बहुत ही स्थानीय तरीके से किया जा सकता था, जहां क्लाउड को ले जाने और प्रसंस्करण करने के बजाय मैं, स्थानीय और असंभव तरीके से इसे कर सकता था। तो, इस तरह के वास्तविक समय अनुप्रयोगों; जहां यह दुर्घटना प्रबंधन या कुछ अन्य प्रकार के अनुप्रयोगों को हम देखते हैं, कि ऐसा करने की एक संभावित घटना हो सकती है। तो, वास्तविक समय विलंबता संवेदनशील अनुप्रयोगों को तेजी से सेवा देने के लिए धुंध कंप्यूटिंग का निर्माण किया गया है। यह वास्तविक समय की सेवा के लिए बनाया गया है और यह तेज है। धुंध कंप्यूटिंग , धुंध के लिए उपलब्ध डेटा के स्थानीय ज्ञान का लाभ उठाती है और तेजी से अनुप्रयोग प्रदान करके डेटा से अंतर्दृष्टि खींचती है। तो, सबसे पहले वास्तविक समय विलंबता या वास्तविक समय अनुप्रयोगों को सेवा देने का आदेश है, या जो समय संवेदनशील अनुप्रयोग हैं और यह भी लाभान्वित है। नोड के लिए उपलब्ध स्थानीय स्तर पर डेटा का, स्थानीय ज्ञान और तेजी से प्रतिक्रिया से डेटा से अंतर्दृष्टि खींचता है। तो, यह वास्तव में उस धुंध के पर्यावरण को देखने की कोशिश करता है। अब, हमने इस तस्वीर को पहले धुंध पर हमारी चर्चा में देखा है, जैसे कि हमारे पास इनमें से एक सेंसर और मोबाइल डिवाइस में क्लाउड में से एक है, जो डेटा इंटरमीडिएट डिवाइस में योगदान देने के लिए हैं, वह इस धुंध का निर्माण कर सकता है। इसलिए, यह उस अधिकार के लिए, विशेष रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता है। इसलिए, हम राउटर या गेटवे कुछ सिस्टम और अन्य डिवाइस कह रहे हैं, जो मूल रूप से संचार कर रहे हैं, जिसका मूल रूप से क्लाउड को संवेदी डेटा के मध्यवर्ती संचार के लिए उपयोग किया जाता है। इसलिए, वे एक स्टोर के रूप में काम करने के कुछ प्रकार के रूप में संचारित होते हैं और वहां से आगे बढ़ते हैं, कि क्या हम स्टोर प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और कुछ स्थानीय चीजों को दूसरे स्तर पर, उच्च स्तर के लिए अग्रेषित करने की आवश्यकता है, चीज़ों या शायद एक बड़े भौगोलिक स्थान पर एकत्रीकरण जब चीजें से अलग सेंसर आते हैं, फिर भी हम स्थानीय स्तर पर डेटा का उपयोग करने के बारे में एक स्थानीय घटना बना सकते हैं। तो, हम क्या देखते हैं, कि अधिक कंप्यूटिंग शक्ति तो, अंत में अधिक भंडारण है। इसलिए, जो अनुप्रयोग अधिक कंप्यूटिंग गहन हैं, उन्हें दूसरे छोर पर पुष किया जा सकता है, जबकि अधिक इंटरैक्टिव या अधिक प्रतिक्रियाशील निचले सिरे पर हो सकते हैं। तो, ये चीजों के दो पक्ष हैं। तो, मध्यवर्ती में, हमारे पास धुंध हैं, या यहां तक कि कुछ मामलों में, इन इंटर फ्रंटेंड डिवाइस कुछ प्रकार की गणना कर सकते हैं और डेटा को एकत्र कर सकते हैं और चीजों के साथ भी यही कर सकते हैं । इसलिए, यदि आप क्लाउड और धुंध के बीच तुलना करने या विपरीत करने की कोशिश करते हैं, तो हमने देखा है कि, जैसे हमने पहले व्याख्यान में चर्चा की है, कि ये प्रतिस्पर्धी माध्यम नहीं हैं, इस अर्थ में वे एक को प्रतिस्थापित नहीं कर रहे हैं। तो, यह क्या करने की कोशिश कर रहा है, यह एक तरीका है, एक साथी मोड में है, कुछ चीजें जिन्हें क्लाउड में बेहतर किया जा सकता है और वहां किया जाना चाहिए और धुंध उन चीजों के उचित ऑर्केस्ट्रेशन में करना चाहिए ताकि ऑर्केस्ट्रेशन की आवश्यकता हो। इसलिए, अगर हम क्लाउड और धुंध की आवश्यकता को देखते हैं। तो, अगर हम विलंबता कहते हैं। तो, क्लाउड में यह जादा या धुंध में कम है। इसलिए, विलंबता एक उच्च देरी जिटर निश्चित रूप से तब कहती है कि उच्च आमतौर पर उच्च होता है और यह धुंध में बहुत कम होता है, इंटरनेट के भीतर सर्वर नोड्स का स्थान होता है, जबकि स्थानीय नेटवर्क के किनारे पर है। इसलिए, जहां क्लाउड के मामले में सर्वर नोड्स स्थित हैं, यह इंटरनेट पर है, तो आपको वास्तव में यह नहीं पता कि सेवाओ को अमेज़न या Google या माइक्रोसॉफ्ट या आईबीएम में, या कहां दिया जाता है। तो, खेल या और कुछ भी तो, हम क्या करें? हम मूल रूप से अपने पोर्टल या लिंक से जुड़ते हैं और हमें वास्तव में यह नहीं पता कि आपका आवेदन कहां किया जा रहा है। ऐसा नहीं है, कि आप नहीं जानते, आप जानते हैं, लेकिन फिर भी, वे अपने संसाधन प्रबंधन और प्रावधान और चीज़ के प्रकार पर करते हैं। तो, इंटरनेट पर हम यही कहते हैं, जबकि यदि आप उस धुंध के परिदृश्य को देखते हैं। तो, यह स्थानीय नेटवर्क के किनारे पर अधिक है, जैसे कि मैं तापमान संवेदना का एकत्रीकरण और इस विशेष कमरे का डिज़ाइन ले रहा हूं, जिसके साथ दस विषम सेंसर कह रहे हैं, तो मैं जो कर रहा हूं, वह मूल रूप से स्थानीय रूप से है और मुझे पता है कि इस विशेष कमरे में सर्वर उस चीजों के लिए काम कर रहा है या सर्वर जो इस विशेष कमरे के लिए सेवा कर रहा है, चीजों पर काम कर रहा है, कभी-कभी उपयोगी होता है, क्योंकि अगर आप कुछ भीड़ या चीजों में कुछ समस्या देख सकते हैं। चीजों को संबोधित करते समय कई चुनौतियां होती हैं, यह एक सुरक्षा छेड़छाड़ भी हो सकती है, क्योंकि आप जानते हैं, अगर तापमान सर्वर द्वारा महसूस किया जा रहा है और यह चीजों को भेज रहा है और यदि आवास में यह विशेष प्रयोगशाला या कमरा महत्वपूर्ण अन्य सिस्टम है। तो, मैं मूल रूप से उस सर्वर पर हमला कर सकता हूं और कह सकता हूं, कि कुछ विनिर्माण, यहां तक कि तापमान या साधन पर्यावरण संवेदना कुछ अनुमति दे रहा है, मैं कहता हूं, कि उस तरह की चीज़ पर सब कुछ ठीक हो रहा है। तो, गिरावट और चीजों की आवश्यकता है और दूसरा, इसे उन अनुप्रयोगों के प्रकार को पूरा करने के लिए संसाधन होना चाहिए जिन्हें, मैं करने की कोशिश कर रहा हूं। आमतौर पर क्लाउड कंप्यूटिंग के मामले में क्लाइंट और सर्वर के बीच की दूरी मल्टी हॉप है। आप क्लाउड के मामले में, आम तौर पर इस मानक नेटवर्किंग का उपयोग कर रहे हैं। एक धुंध के मामले में यह एक हॉप हो सकता है। तो, वे क्लाइंट से सर्वर पर एक हॉप दूरी पर है। क्लाउड कंप्यूटिंग एक के मामले में सुरक्षा; एक तर्क यह अपरिभाषित है, यह इस अर्थ में अपरिभाषित है, कि उपयोगकर्ता और मेरे पास चीजों पर अधिक नियंत्रण नहीं है। तो, यह उस अर्थ में है, यह अपरिभाषित है, जबकि यहां यह परिभाषित किया जा सकता है, कि आपके पास स्थानीय चीजें हैं, जिन पर चीज पर आप कुछ नियंत्रण कर सकते हैं। इसलिए, आप इन विशेष उपकरणों पर कुछ नियंत्रण रख सकते हैं या संगठन डिवाइस पर नियंत्रण रख सकता है और कुछ सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकता जैसे कि मैं यातायात प्रकाश कहता हूं। तो, एक विशेष शहर के, तो किसी विशेष क्षेत्र के उस सर्वर में यातायात प्रकाश प्रबंधन उस शहर के यातायात प्राधिकरण के तहत है। इसलिए, उनके पास क्लाउड पर पूरी तरह से नियंत्रण था। इसलिए, आप नहीं जानते कि डेटा या एप्लिकेशन क्या कर रहे हैं, जो कि उस सेवा प्रदाता पर आधारित है। डेटा एनरोटर पर हमला हुआ। तो, एनरोट डेटा में क्या, क्लाउड के मामले में हमले कई हॉप हैं। इसलिए, बहुत अधिक समझौता होने का मौका है, जहां धुंध के मामले में, यदि यह एक ही हॉप है, तो समझौता करने वाली चीजें कम हो रही हैं। इसलिए, क्लाउड कंप्यूटिंग के मामले में आपके स्थान पर जागरूकता के बारे में थोड़ा अधिक नियंत्रण है, जबकि किनारे धुंध कंप्यूटिंग स्थान से अवगत है। मुख्य रूप से, हम जो यहाँ कर रहे हैं, वह स्थान जागरूक प्रकार की चीजें हैं। इसलिए, क्लाउड के मामले में भौगोलिक वितरण जैसी अन्य चीजें हैं, जो इसे केंद्रीकृत महसूस से अधिक है। इसलिए, इसमें तर्कसंगत केंद्रीकृत चीजें हैं और धुंध के मामले में इसे सर्वर नोड्स की सही संख्या वितरित की जाती है, क्योंकि क्लाउडिंग पर आमतौर पर सर्वर बेहद संसाधनपूर्ण होते हैं। हालांकि, प्रकाशनों के लिए आवश्यक नोड्स की संख्या या धुंध के मामले में चीजों का प्रकार बहुत कम है। जैसा कि आप पदानुक्रम के नीचे बढ़ते हैं, तो नोड्स की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है। तो, वे शहरी नोड्स की बहुत बड़ी संख्या हैं। क्लाउड के मामले में गतिशीलता के लिए समर्थन सीमित है, यदि आप मोबाइल एप्लिकेशन से आगे बढ़ते हैं, जिसे इसे अलग-अलग इंटरमीडिएट डिवाइसों पर स्विच करने की आवश्यकता होती है। अब, एक बार जब आप दूसरे पाथ पर जाते हैं, तो उसे एक पाथ से कहा जाता है। जबकि, धुंध के मामले में गतिशीलता में कुछ प्रकार का समर्थन होता है, क्योंकि यह स्थानीय सौदों और अन्य चीजें लेता है। यह एक प्राथमिक चीजें जानता है, वे जहां नियंत्रण के तहत और बहुत कम स्तर पर स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। रीयल टाइम एप्लिकेशन या रीयल टाइम इंटरैक्शन क्लाउड द्वारा निश्चित रूप से समर्थित हैं और निश्चित रूप से, यह धुंध द्वारा समर्थित है, जो कि धुंध कंप्यूटिंग परिदृश्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रमुख प्रेरणा है और जहाँ कि अंतिम मील कनेक्टिविटी का प्रकार आमतौर पर नापसंद होता है। तो, क्लाउड के मामले में केबल लाइन होता है, जबकि आमतौर पर धुंध के मामले में वायरलेस होता है। यह कोई कठोर और तेज़ चीज नहीं हैं, ये वास्तविकता में सामान्य मानक प्रक्रियाएं हैं। तो, यहाँ प्रौस और काउंस हैं। जैसे की, ऐसा हो सकता है कि, हम धुंध पर चर्चा कर रहे हैं। तो, यह धुंध की ओर थोड़ा और अधिक सहायक है, यह क्यों है और, लेकिन फिर भी दोनों के लिए महत्व और उचित है, इस धुंध और बादल के बीच एक सिंक्रनाइज़ेशन ऑर्केस्ट्रेशन होने से पूरी चीज वास्तविकता में बदल जाती है। तो, कई प्रयोग मामले हैं, या कई परिदृश्य हैं, जहाँ धुंध बहुत अधिक लागू होताहै। जैसे, कि वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों या इमारतों और निकास मार्ग योजना आदि के बारे में किसी भी आपदा या आपदा वास्तविक समय की जानकारी के लिए, आपातकालीन निकासी प्रणाली है। इसलिए, अगर यहाँ बाहर निकलने के लिए कई मार्ग पथों के साथ एक बड़ी इमारत है, तो अगर आग या भूकंप या कुछ जैसी कुछ आपदाएं आयें, तो या डिफ़ॉल्ट पाथ लॉक हो जाता है, या यह संभव नहीं हो पाता हैं। तो, आपको क्या करने की ज़रूरत है? आपको प्रत्येक स्तर या प्रत्येक व्यक्तिगत कमरे, इत्यादि पर बाहर निकलने की उपलब्धता के आधार पर ऐसा करने की आवश्यकता है, हमें पाथ की योजना बनाने की आवश्यकता है। इसलिए, हमें इसे गतिशील रूप से प्रतिलिपि बनाने या, इसे फिर से शुरू करने की आवश्यकता है और कुछ स्थानीय डीएसएम से अधिक उपयोगी प्राकृतिक आपदा प्रबंधन हो सकते हैं। इसलिए, संभावित प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन फ्लैश बाढ़ के बारे में वास्तविक समय अधिसूचना होती है। तो, यह एक आवश्यकता है। तो, जब हम प्राकृतिक आपदा प्रबंधन कर रहे हैं। इसलिए, रीयल टाइम अधिसूचना चीजें और वहां कभी-कभी रुचि के किसी विशेष क्षेत्र के लिए बहुत स्थानीय स्थान दिया जाता है, जहां चीजें चल रही हैं और उपयोगी तरीके हो सकती हैं, यदि हमारे पास इस स्थान को धुंध स्तर पर जागरूक जानकारी है। इसलिए, बड़े सेंसर परिनियोजन बहुत सारे डेटा उत्पन्न करते हैं, जिन्हें प्रीप्रोसेस्ड, संक्षेप में और फिर मध्यवर्ती नेटवर्क में भीड़ को कम करने के लिए क्लाउड को भेजने के लिए, किया जा सकता है। तो, यह धुंध की एक और आवश्यकता है। यह प्राकृतिक आपदा प्रबंधन या प्राकृतिक आपदाओं या खतरे नहीं भी हो सकते है, लेकिन दूसरी बात यह है, कि हमारे पास सेंसर की विशाल तैनाती है, जो बहुत अधिक डेटा उत्पन्न कर सकती है और यदि आप सभी कच्चे डेटा को क्लाउड में भेजते हैं, तो बहुत सारी बैंडविड्थ होती है और वह उन्हें भीड़ में ले जाती है। इसलिए, जो एकत्रित डेटा और निश्चित रूप से, चीजों का इंटरनेट, चलने वाले वाहन स्मार्ट शहरों वायरलेस सेंसर नेटवर्क, एक्ट्यूएटर, नेटवर्क और उन लोगों के बड़े डेटा अनुप्रयोगों के आधार पर आगे बढ़कर कम किया जा सकता है। इसलिए, ये सभी अलग-अलग हैं, जिन चीजों के पहलुओं को हम इंटरनेट चीजों के परिदृश्य में देख सकते हैं, जो फिर से बहुत सारे डेटा और पूरे ढांचे में और हर बार है, जब यह महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है कि वैश्विक डीएसएम और चीजों के प्रकार की तुलना में स्थानीय डीएसएम अधिक महत्वपूर्ण हो । और यदि हम प्रयोज्यता को देखते हैं। तो, यहां कुछ ऐसा हैं, जो वहां और सौ हो सकता हैं। तो, स्मार्ट यातायात प्रकाश शायद एक आवेदन, जुड़े वाहन, पाठ्यक्रम के स्मार्ट ग्रिड, सेंसर नेटवर्क, चीजों का इंटरनेट और सॉफ्टवेयर परिभाषित नेटवर्क है । ये इन अनुप्रयोगों के बैकबोन की तरह है, जो इन्हें ठीक से काम करने में मदत करते हैं । तो, ये अलग-अलग वाहन हैं और निश्चित रूप से, विभिन्न आधारभूत संरचनाएं हैं। इसलिए, हमारे पास इस वाहन के बीच वाहन या कनेक्टिविटी है, जो हम वी दो वी या वी दो आई, आई दो आई कहते हैं। इसलिए, ये अलग-अलग बुनियादी ढांचे हैं, जो इन विभिन्न वाहनों के आसपास घूम रहे हैं और कनेक्टिविटी दे रहे हैं। इसलिए, इस तरह की चीजें विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोग हैं। जैसे, एक सुरक्षा संबंधी अनुप्रयोग हैं, दूसरा इंफोटेमेंट सूचना से संबंधित अनुप्रयोग पर जानकारी देता है और अन्य चीजें जैसे अलर्ट और शीर्षक के आधार पर अन्य प्रकार की चीजें हैं। इसलिए, वे जानकारी हैं, जो वहां होंगी और सी में एक समग्र क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है, जहां सभी सही तरीके से संवाद कर सकते थे और यह एक डीजल लेता है और जानकारी के प्रकार वापस भेजता है। अब यह कहता है, कि इस विशेष वाहन में एक संघर्ष है, यदि कोई संघर्ष है, तो इस वाहन के पास आने वाले अन्य वाहन अब इसके माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बल्कि, यह स्थानीय रूप से किया जा सकता था। अगर, मैं इस तरह की चीजों के आसपास एक प्रकार का धुंध स्थापित कर सकता हूं। तो, मैं यहाँ स्थानीय डीजल ले सकता,क्योंकि यहां दुर्घटना कुछ शहरों में कहीं भी जा रही कुछ सड़क के साथ कुछ भी नहीं हो सकती है और यहां तक कि उसी शहर में भी कुछ अन्य चीज है। अब, यहां इस प्रकार के कनेक्टेड वाहन घटनाएं या हम जो अवधारणा कह रहे हैं वह आ रही है, या यह पहले से ही वे वैनेट वाहन ऐढोक नेटवर्क हैं । तो, यह संभवतः यह इस धुंध के अनुप्रयोगों में से एक को सफल बनाने के लिए है। तो, फिर से स्मार्ट सिटी लाइटिंग जैसा कि हम देखते हैं, कि यदि कोई ट्रैफिक भीड़ इत्यादि है, तो उस विशेष स्थानीयक चीजों के भीतर बैठे सामान के भीतर है। इसलिए धुंध में कई विशेषताएं हैं, जो इन्फोटेशन सुरक्षा यातायात समर्थन और भौगोलिक वितरण, गतिशीलता, स्थान जागरूकता, कम विलंबता, विषमता और इतने आगे जैसे विश्लेषण प्रदान करने में कनेक्टेड वाहन के लिए निष्क्रिय मंच बनाती हैं। तो, यहाँ बहुत सारे आवेदन हैं। तो, हम देखते हैं, कि विभिन्न वाहन बैकएंड पर चल हैं। इसलिए, हम कहते है, की पहुंच बिंदु या बुनियादी ढांचे है, जो कभी सड़क पक्ष इकाई या आरएसयू के नाम से भी जाना जाता है। तो, ये कुछ इकाइयां हैं, यहाँ अन्य यातायात रोशनी भी हैं। तो, इस भीड़ इत्यादि के आधार पर यह यातायात प्रकाश बुद्धिमान हो सकता है। यह, रोकने के लिए समय देता है और चीजों के प्रकार और भीड़ स्तर के आधार पर यह भिन्न हो सकता है। इसलिए, बैकएंड में हमारे पास वह क्लाउड है, जो बड़ी एनालिटिक्स समस्याओं को लेता है, जिसके लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता होती है और हमें एक धुंध ऑर्केस्ट्रेशन और नेटवर्क प्रबंधन परत की आवश्यकता होती है, जो इस सिंक्रनाइज़ेशन या धुंध की ऑर्केस्ट्रेशन और बैकएंड क्लाउड के साथ ऑर्केस्ट्रेशन का ख्याल रखती है। तो, यह एक प्रणाली है। तो, हम यह देखने का प्रयास करते हैं, कि यह धुंध स्थानीय निर्णय लेता है, जबकि बड़े विश्लेषण को क्लाउड पर्यावरण पर धक्का दिया जा सकता है। इसलिए, यह निश्चित रूप से परिदृश्यों में से एक है, अगर हम अधिक से अधिक इन्टरनेट की चीजों को देखते हैं। इसलिए, निचले सिरे पर हमने एम्बेडेड सिस्टम और सेंसर लगाए हैं, फिर बहु सेवा किनारे है, जो निष्कर्षों में वितरित होते हैं, जहां धुंध एक भूमिका निभा सकते हैं और फिर हमारे पास एक कोर नेटवर्क है, जिसका उपयोग ऊपरी क्लाउड पर चीजों को धक्का देने के लिए किया जाता है। तो, यह इंटरनेट की चीजों को देखने का सामान्य तरीका है। जहां हम देखते हैं, कि धुंध परत विलंबता को कम करने और बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद कर सकता है। और यद्यपि, यह हमारे देश में अत्यधिक प्रबल नहीं हो सकता है, या यह बड़े पैमाने पर उपयोग में नहीं है, लेकिन यह स्मार्ट ग्रिड की तरह आने वाला है। इसलिए, प्रत्येक घर में एक स्मार्ट मीटर होगा और घर के स्तर से लेकर, घर की इकाई से घर के क्षेत्र में चीजों के उपयोग के आधार पर क्षेत्र स्तर और सबसे बड़ा राज्य स्तर समग्र प्रबंधन हो सकता है। इसलिए, मेरे पास एक स्मार्ट ग्रिड है, जो न केवल घरों और कार्यालयों को शक्ति प्रदान करता है और प्रतिष्ठान की भी प्रतिक्रिया लेता है और उन चीजों के आधार पर कॉल करता है, कि बिजली उपयोग कैसे होते हैं। यह बिजली संयंत्र से जुड़ा हुआ है और देश भर में या, पूरे भौगोलिक अंतरिक्ष में पूरे क्षेत्र में, समग्र बिजली प्रबंधन इस तरह की चीजों से प्रबंधित किया जा सकता है। तो, यहां भी धुंध एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि, मैं यह सब कुछ देख रहा हूं, तो इसे क्लाउड में पुष इसे किया जा सकता है और यह कॉल कर सकता है। हालांकि, मान लीजिए कि मैं, आईआईटी खड़गपुर पर विचार करता हूं। अगर घरों में स्मार्ट मीटर हैं, तो मैं स्थानीय निर्णय ले सकता था, कि बिजली और चीजों के प्रकार का समग्र उपयोग क्या है और मैं बैकएंड क्लाउड को एक समेकित जानकारी भेजता हूं। इसलिए, जो अधिक समेकित जानकारी को लेता है और एनालिटिक्स लेता है, अधिक समय के दौरान या दिन के महीनों के लिए, तो चीजें कैसे भिन्न होती हैं और कॉल करती हैं, कि चीजों के आधार पर बिजली का प्रावधान कैसे करना है। इसलिए, इस तरह की चीजें उपयोगी हैं, जहां हमारे पास बिजली के उपकरणों या उपभोक्ता है, तो हमारे पास एक धुंध बुनियादी ढांचा है जहां माइक्रो ब्लीड और अन्य चीजें हैं। और फिर हमारे पास एक माइक्रो स्टेशन है और क्लाउड पर्यावरण के प्रकार में, इसे बड़े पैमाने पर पुष किया जाता है। और जैसा कि हम सब देखते हैं, जो हम कहते हैं कि फॉर्म के आकर्षक या सुनहरे पक्ष में कुछ निश्चित रूप से चुनौतियां हैं, या इन सभी उपकरणों में से पहले एक प्राप्ति की अच्छी चुनौतियां हैं या नहीं, वे क्लाउड या क्लाउड सर्वर, आदि के रूप में पूर्ण संसाधन नहीं हैं। तो, वह दे सकता है, जिसे हम कम से कम चीजों को समर्थन देने के लिए कहते हैं। तो, अगर ऐसा कोई एप्लीकेशन है, जिसके लिए बहुत बड़ी चीज की आवश्यकता है? तो, आपको उसे सबसे बड़े और तदनुसार, सही विभाजित करने की जरूरत है। तो, यह धुंध उपकरणों में या, इन उपकरणों के कुछ भाग और कुछ क्लाउड पर हो सकता है और जब भी हम ऐसा करते हैं, तो चीजों के सिंक्रनाइज़ेशन ऑर्केस्ट्रेशन की बहुत आवश्यकता होती है। क्योंकि, न केवल डेटा आवेदन को विभाजित किया जाता है, यहाँ प्रक्रिया भी विभाजित कि जाती है। तो, कहीं भी इस डेटा और प्रक्रियाओं के इस एकत्रीकरण की आवश्यकता है। तो, यह चुनौतियों में से एक है। अन्य चुनौतियां भी है, जैसे कि धुंध में संसाधन प्रबंधन। मान लीजिए कि अगर धुंध डिवाइस में से एक ओवरलोड हो गया है, तो क्या मैं इस एप्लिकेशन को चीजों पर माइग्रेट कर सकता हूं, कि क्या मैं इसे लाइफ निष्पादित करने वाली चीजों में माइग्रेट कर सकता हूं। इसलिए, अगर हमें चीजों को देखने की ज़रूरत है और ये गंभीर चुनौतियां हैं। तो, आइए कुछ चीजें देखें। इसलिए, धुंध कंप्यूटिंग सिस्टम सेवाओं के अंत में विलंबता को समाप्त करने के दौरान अनुप्रयोगों के बीच उचित संसाधन आवंटन के मुद्दे से पीड़ित है। तो, हम विलंबता और चुनौतियों को समाप्त करने के अंत में क्या करना चाहते हैं, धुंध कंप्यूटिंग नेटवर्क के फेस संसाधन प्रबंधन को संबोधित किया जाना चाहिए, ताकि सिस्टम थ्रूपुट उच्च उपलब्धता के साथ-साथ स्केलेबिलिटी सुनिश्चित कर सके। तो, धुंध की मूल घटना और आखिरकार, जैसे कि विभिन्न भौगोलिक जगहों पर वितरित किया जाता है, विभिन्न अधिकारियों के साथ हो सकता है। फिर इस एप्लिकेशन की सुरक्षा और डेटा और चीजों के प्रकार के बारे में क्या होगा जो, चीजों के लिए स्रोत बन जाए। इसलिए, सुरक्षा पहलुओं पर हमने अंतिम व्याख्यान या धुंध पर आखिरी चर्चा की है, कि यह एक गंभीर चुनौती है। तो, धुंध नेटवर्क में संसाधन प्रबंधन; इसलिए, अलग-अलग पहलू के लिए निष्क्रिय धुंध नोड्स का उपयोग करने के विभिन्न पहलू हैं, या यहाँ संभव है, कि कुछ धुंध नोड्स हैं और यह मूल रूप से कुछ नोड्स को अन्य समानांतर संचालनों से अधिक लोड किया जाता है, जिससे लोड संतुलन मीटिंग को संभालने के लिए समानांतर संचालन उत्पन्न होते हैं और वास्तविक समय अनुप्रयोगों की देरी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। तो, यदि आपके पास वास्तविक समय के अनुप्रयोग हैं, जैसे,यह प्रावधान कैसे गलत तरीके से क्रैश गलती सहिष्णु और चीजों के प्रकार का प्रावधान हो सकता है। तो, जैसा कि मैं कह सकता हूं, कि अगर धुंध नोड नीचे जाता है, तो उन अनुप्रयोगों और डेटा के साथ क्या होगा और जो कि धुंध नोड्स पर चल रहे हैं, उन डेटा को माइग्रेट करने के तरीके को कैसे संभालें, चाहे मुझे पहले आवेदन की आवश्यकता हो, भले ही नीचे दूसरा उठाएगा और उन सभी चीजों को संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता होती है, और लागत और इतनी आगे बढ़ती है। अधिक स्केलेबल सिस्टम ; इसलिए, स्केलेबिलिटी पर पूरी चीज का हमारा मूल सही स्केलेबिलिटी क्लाउड के प्रमुख पहलुओं में से एक है, जिससे हम सेवा धुंध कंप्यूटिंग करतें हैं, तो, बेहतर स्केलेबल सिस्टम कैसे बनायें । तो, यदि हम थोड़ा nitty-gritty डेटा देखते हैं, जो निष्पादन धुंध नोड पर उपलब्ध नहीं है। इसलिए, एप्लिकेशन वहां,मौजूद नोड नहीं हो सकता है। इसलिए, आवश्यक सेंसर या डेटा स्रोत से डेटा लाने की आवश्यकता है। तो, यह एक चरण साइकिल चालक है, जो उनके निष्पादन नोड भारी वर्कलोड के कारण उत्तरदायी नहीं हो सकता है। जो विलंबता के समझौता एक माइक्रो सेवा निष्पादन माइग्रेशन के मामले में एक नया नोड चुनने का मुद्दा हो सकता है। इसलिए, प्रतिक्रिया समय समाप्त हो जाता है, भले ही मेरे पास माइग्रेशन का कोई तरीका हो, भले ही मैं एक माइक्रो सेवा एक विशेष नोड पर चल रहा हो, या सेवा का छोटा या कट संस्करण या कटा हुआ सेवा या विभाजन सेवा चल रहा हो, अगर मैं माइग्रेट करने में सक्षम हूं, तो भी मुझे लगता है, कि यह नोड नीचे जा रहा है। तो, अब मुझे क्या करना चाहिए, मुझे किसी चीज़ पर नोड कैसे ढूंढना चाहिए। इसलिए, कुछ एल्गोरिदम चलेंगे और चीजों के प्रकार और कुछ प्रकार के प्रबंधन निष्पादित करने की अनुपलब्धता के कारण वहां उपयोग में आएंगे, आंशिक रूप से प्रसंस्कृत लगातार डेटा को नए नोड में माइग्रेट करने की आवश्यकता है। तो, यह हाफ-कप चीज माइग्रेट करने की जरूरत है। तो, यह एक और आवश्यकता है, अंतिम परिणाम क्लाइंट या एक्ट्यूएटर को कम करने के क्रम में कम समय के भीतर स्थानांतरित किया जाना है। इसलिए, मुझे अलग-अलग धुंध नोड्स में एक अनुप्रयोग घटकों को तैनात करने के समय खोना नहीं चाहिए, जिससे घटकों की विलंबता आवश्यकताओं को सुनिश्चित किया जा सके, कई अनुप्रयोग एक ही धुंध नोड में सकते हैं। इसलिए, डेटा एक आवेदन दूसरे द्वारा समझौता किया जा सकता है। इसलिए, ऐसा हो सकता है, कि एक ही डेटा सुरक्षा में एक से अधिक आवेदन और व्यक्तिगत आवेदन और संसाधन आवेदन की अखंडता सुनिश्चित की जानी चाहिए। तो, हम क्लाउड में बहु किरायेदारी की समस्या को देखते हैं, कि धुंध और धुंध में समस्या का प्रकार कम संसाधन देता है। तो, यह समस्या और अधिक बढाई जा सकती है और ऐसे कई दृष्टिकोण हैं, जो लोग निकटतम नोड पर माइग्रेशन निष्पादित करने जैसे प्रयास करने के लिए करते हैं। तो, निकटतम नोड जो मुफ़्त है, सबसे उपयुक्त नहीं हो सकता है, लेकिन उपलब्ध नोड प्रकार कार्बन फूट-प्रिंट या वीडियो चीज को कम करने का मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि उस ऊर्जा या कार्बन फूट-प्रिंट को कम करने के लिए संसाधन भविष्यवाणी पर जोर दिया जाए कि क्या मेरे पास दृष्टिकोण, भविष्यवाणी, संसाधन अनुमान, आरक्षण, उन्नत आरक्षण के साथ-साथ नए आईओटी आवेदन की कीमत हो, ताकि हम चीजों का प्राथमिक अनुमान कर सकें। एक और सेवा है, जिसे हम डॉकर को तैनात करने के लिए, एक एज कंप्यूटिंग प्लेटफार्म के रूप में डॉकर कहते हैं, यह तेजी से तैनाती लोचदारी अच्छा प्रदर्शन की सुविधा दे सकता है। इसलिए, संसाधन प्रबंधन संसाधनों की उतार-चढ़ाव की संभावनाओं के आधार पर संसाधन प्रबंधन हैं। लोग इस बात का पालन करते हैं, कि बेस स्टेशन एसोसिएशन कार्यों के वितरण वर्चुअल मशीन प्लेसमेंट का अध्ययन करने जैसी अन्य चीजें हैं और इसलिए एक और समस्या के दृष्टिकोण के लिए हेरिस्टिक एल्गोरिदम लागू करने वाली चीज़ को अनुकूलित करने के लिए एलपी फॉर्मूलेशन तैयार करना है। इसलिए, ये विभिन्न प्रकार के दृष्टिकोण हैं, जो लोग करने की कोशिश कर रहे हैं और आप देख सकते हैं, की यहां बहुत सारे शोध प्रेरणा हैं और बहुत सारे शोध चल रहे हैं और जो लोग दिलचस्पी रखते हैं, वह इन प्रकार के पहलुओं पर काम कर सकते हैं, यह देखने के लिए एक और आगामी क्षेत्र है। और पहले से ही सुरक्षा मुद्दों पर हमने चर्चा की है, इसलिए मैं इसे दोहरा नहीं रहा हूं। इसलिए, जो हम यहां सुरक्षा पर जोर देने की कोशिश करते हैं, वह भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कम संसाधन के कारण आप संसाधन पूल नहीं चला सकते हैं। या, जो हम संसाधन भूख सुरक्षा अनुप्रयोगों है उन्हें भी नहीं चला पाते क्यूंकि, इन्हें चलाने के लिए, आपको इस धुंध प्रकार के धुंध उपकरणों को उचित रूप से आकार देने की आवश्यकता है। इसलिए, सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा है, न केवल इस डेटा को धुंध से समझौता किया जा सकता है, यह उपकरण भी एक हमले के अनुकरण के लिए, एक मंच हो सकता है। इसलिए, क्योंकि इसे वितरित किया जाता है। अब चीजें इस केंद्रीकृत क्लाउड और आईएसपी पर कम नियंत्रण वितरित की जाती हैं। इसलिए, इसका शोषण होने का एक मौका है। इसलिए, चीजों में ध्यान देने की जरूरत है, कि यह धुंध उपकरण कितना सुरक्षित या कितना मजबूत है। यह भी एक बड़ी चुनौती है। लोग इस पर काम कर रहे हैं। तो, हमने आज चर्चा की धुंध के महत्व पर, धुंध और क्लाउड का समामेलन,यह एक तकनीक के माध्यम से ऐसा नहीं है, वहां चीजें हैं, बल्कि उनके बीच उचित सिंक्रनाइज़ेशन और ऑर्केस्ट्रेशन एक असली तरीका है, इस ढांचे को एक सफल कार्यान्वयन बनाने के लिए। धन्यवाद । क्लाउड कंप्यूटिंग हैलो। हम क्लाउड कंप्यूटिंग पर हमारी चर्चा जारी रखेंगे और आज हम स्थानिक क्लाउड के एक सामान्य उपयोग मामले या अधिक विशेष रूप से भू-स्थानिक क्लाउड के बारे में बात करेंगे। तो, इस भू-स्थानिक डेटा और जानकारी और चीजों के प्रकार से हमारा क्या मतलब है। तो, हम इन दिनों क्या देखते हैं, कि पृथ्वी की सतह के बारे में यह स्थानिक जानकारी और समन्वित प्रणाली के साथ दोनों, स्थान आधारित जानकारी के साथ ही बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं। हम सभी आज कल इन सेवाओं का जादा तर उपयोग करते है, जिससे हम स्थानिय सेवाओं या नेविगेशन सेवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रैजेक्टोरियों को खोज सकें। इसलिए, ये सभी संभव हैं। क्योंकि, ऐसे कई स्थानिक डेटा हैं, जिन्हें विभिन्न संगठनों द्वारा बनाए रखा जा रहा है। जैसे डेटा अधिक भारी हो रहा है और कई संगठन इस डेटा को संग्रहीत करते हैं। इसलिए, निर्णय लेने के उद्देश्य के लिए इस डेटा को एकीकृत करने की आवश्यकता है। एक नेविगेशन शायद उन चीजों में से एक है, जो कई अन्य निर्णय लेने के लिए विशेष रूप से सरकार और सरकारी एजेंसियों या राज्य एजेंसियों के विभिन्न विकास कार्यक्रम और चीजों के प्रकार की आवश्यकता है। जमीन के स्तर की जानकारी को एकीकृत करने के लिए किसी प्रकार की आवश्यकता होती है। तो, यह देखने का एक तरीका है, कि मैं डेटा को केंद्रीय स्थान पर संग्रहीत करता हूं और फिर चीजों को देखने के बाद सवाल करता हूं। लेकिन, यदि डेटा के कई हितधारकों या इस डेटा के कई प्रदाता हैं, तो ये इसे बनाते हैं। एक केंद्रीय भंडार कभी-कभी चुनौती बन जाता है। यदि विशेषज्ञता हो तो सभी डेटा पहले ही गहन लागत में हैं और वहां जनशक्ति है, जिसमें डेटा संग्रह और रख-रखाव में संग्रह शामिल है। तो, एक बार जब आप डेटा किसी अन्य जगह पर डाल देते हैं, तो पूरी चीज एक अलग प्रकार के प्रबंधन के लिए जाती है। दूसरा, डेटा की मात्रा बहुत बड़ी है। इसलिए, चीजों पर डेटा को स्थानांतरित करने का यह प्रकार बेहद मुश्किल हो सकता है। तो, इस स्थानिक विज्ञान या स्थानिक प्रबंधन और चीजों के समाधान में से एक क्या है। यह देखकर कि क्या हम क्लाउड में माइग्रेट कर सकते हैं, है ना ? यह किसी प्रकार का क्लाउड का बुनियादी ढांचा है जो इस मंच पर प्रदान किया जा सकता है। इसलिए, दुनिया भर में बहुत सारे काम इस पर चल रहें हैं और हम यह देखना चाहते हैं, कि व्यवहार्यता क्या है और यहां किस प्रकार की चीजें हैं। आईआईटी खड़गपुर भी हमारे पास एक छोटा समूह है,जो इस तरह की गतिविधियों पर काम कर रहें हैं। इसलिए, हम यह देखने का प्रयास करेंगे कि क्लाउड पर जा रहे इस तरह के डोमेन स्थानिक डोमेन की व्यवहार्यता क्या है। तो, यदि आप देखते हैं। तो, यह सब हम लंबे समय सेचर्चा कर रहे हैं, जैसे क्लाउड ऑन डिमांड सेवा सर्वव्यापी पहुंच संसाधन पूलिंग स्थान आजादी तेजी से लोचदारता मापा सेवाओं , क्लाउड साइड का एक हिस्सा है। यदि आप भौगोलिक सूचना पक्ष या जानकारी स्थानिक जानकारी या भू-स्थानिक सूचना पक्ष देखते हैं,तो स्पष्ट रूप से पृथ्वी की सतह पर स्थान से जुड़ी जानकारी, हम मुख्य रूप से स्थानिक डेटा को देख रहे हैं, जो विशेष रूप से पृथ्वी की सतह पर दिख रहा है। तो, यह एक कोड भोजन संचालित चीज है। इसलिए, प्रत्येक डेटा में हर जगह एक स्थान होता है। यदि, आप देखते हैं, कि एक रिपोर्ट थी कि हमारे डेटा के नब्बे प्रतिशत से अधिक कुछ अन्य स्थान से संबंधित हैं। मान लीजिए कि अगर मैं यहां, हमारे छात्र डेटा देखता हूं। इसलिए, कई अन्य चीजों के साथ यह कहता है कि वह कौन सा हॉल रह रहा है, वह कौन सा विभाग पढ़ रहा है, जहां वह या उसके घर का अधिकार है। तो, उन सभी चीजों में पीओआई पृथ्वी की सतह पर एक स्थान है। तो, इस स्थानिक जानकारी के साथ कहीं और अंतर्निहित है, या यह हमारे पूरे दिन में, जीवन में है और हमारे अधिकांश डेटाबेस में भी है, जिसका हम उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर वहां पिन कोड है, तो वहां है कहता है, तो वह किस क्षेत्र का जिक्र कर रहा है। इसलिए, यह स्पष्ट रूप से पृथ्वी की सतह, भौगोलिक जानकारी स्थिर या गतिशील की तरह गतिशील हो सकती है। हम समय के साथ बदलते नहीं हैं, या लंबे समय तक परिवर्तन नहीं करते हैं। जैसे, कि यह किसी राज्य की सीमा या जिले की सीमा या कभी-कभी पार्क झील इत्यादि, में वे बाहर G-day नहीं बदल रहे हैं। यह कुछ गतिशील यातायात आंदोलन या किसी विशेष शहर की आबादी की तरह गतिशील हो सकते हैं। जो समय के साथ बदलता है। लोगों के डेटा में और चीजों के प्रकार के दौरान में बहुत अधिक प्रवाह होता है, यदि मैं इस विशेष इमारत को देखता हूं, जहां हम अभी बैठे हैं। तो यह है, कि यदि आप बिल्डिंग के अनुसार देखते हैं, तो यह स्थिर है, या हम कह सकते हैं, कि छद्म स्थिर यह दिन बदल नहीं रहा है। लेकिन, यदि आप उस इमारत पर उस खाद्य गिरने को देखते हैं, जो बदल रहा है, या यहां तक कि बिजली की जरूरत भी बदल रही है। इसलिए, कुछ डेटा स्टैटिक हो सकते हैं। कुछ चीजें गतिशील हो सकती हैं और एक सामान्य बात यह है, कि यह भौगोलिक डेटा पैमाने पर भिन्न होता है। इसलिए, अगर मैं इंगित करना चाहता हूं। तो, जानकारी कुछ डेटा से मीटर तक ग्लोब तक हो सकती है, इसे एक मीटर पैमाने पर कहने की ज़रूरत है, कि यह पता लगाएं कि, लैंपपोस्ट का सही स्थान क्या है। लेकिन, यह मूल रूप से उच्च हो सकता है, किसी देश का मानचित्र या किसी जिले का मानचित्र या राज्य का मानचित्र बहुत बड़ा हो सकता है। इसलिए विस्तृत बनाम विस्तार और पारिस्थितिकीय असंतोष जैसी चीजें यहाँ हैं। इसलिए, पैमाने के साथ चीजें बदलती जा रही हैं, जैसे कि मैं आकाश से या उचाई से एक इमारत को देखता हूं तो यह एक बिंदु है।लेकिन, अगर मैं बंद करता हूं तो यह बहुभुज बन जाता है और पैमाने के साथ समग्र प्रकृति बदल सकती है। तो, ये आंकड़ों की कुछ विशेषताएं हैं। और यदि आप उस सामान्य भौगोलिक डेटा को देखते हैं, तो जो कुछ भी हैं, वह कुछ कानूनी डेटा हो सकता है। जो इन सीमाओं आदि स्थान पर राजनीतिक मानचित्र, सांस्कृतिक, जलवायु, कुछ आर्थिक, इत्यादि हैं। तो, इस तरह की संरचना की संख्या हो सकती है और ऐसी विभिन्न एजेंसियां हो सकती हैं, जो आंकड़ों को एकत्र कर रहे हैं या जो डेटा बनाए रख रहे हैं। जो, कुछ प्रकार के सामाजिक सर्वेक्षण हो सकते हैं, जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षण भारत के नक्शे का सर्वेक्षण है, इत्यादि कुछ दूरस्थ रूप से सेंसर बिट्स चीजें या सेंसर डेटा हो सकता है। जैसे, कि मैं हवा या उपग्रह छवियों से ली गई एयर फोटो दूरस्थ रूप से महसूस कर सकता हूं। यहां तक कि जीपीएस और नक्शा अंकन द्वारा एकत्रित मौसम स्टेशनों द्वारा रिपोर्टिंग कुछ विशेषता ब्याज से जुड़े वहां चीजों में प्रदूषण सेंसर हो सकते हैं, जो उन स्थानों के साथ डेटा देता है, जहां चीजें हैं। वायु गुणवत्ता नियंत्रण प्रदूषण सेंसर तापमान सेंसर और अन्य प्रकार के वायुमंडलीय सेंसर स्विच डेटा प्रदान कर सकते हैं। इसलिए, ये डेटा घटना के विभिन्न स्रोत हैं, इन आंकड़ों को विभिन्न स्वामित्व वाली प्रकृति द्वारा विभिन्न संगठन द्वारा बनाए रखा जाता है और जब मैं एक बार ऐसे डेटा से पूछताछ करना चाहता जिसे मुझे डेटा देखने के बीच या इंटरऑपरेट करने की आवश्यकता हो, तो हमें यह देखने की ज़रूरत है, कि यह क्लाउड इसका उपयोग कहां करेगा। इसलिए, अगर हम कुछ औपचारिक परिभाषाओं को कैप्चरिंग के लिए देखते हैं। तो,यह एक कैप्चरिंग संग्रह है, जो भू-स्थानिक डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली या टूल या प्लेटफ़ॉर्म का विश्लेषण करने और प्रदर्शित करने के लिए कवेरिंग को संग्रहीत करता है। जो आपको स्थानिक डेटा जानकारी से संबंधित करने की अनुमति देता है, उस सतह के लिए स्पष्ट रूप से या निहित रूप से। तो, हम यह दिखाने के लिए गहरे चीजों में नहीं जा रहे हैं, कि क्यों इस तरह के डेटा का सिर्फ एक विचार होना चाहिए और इसमें हार्डवेयर की आवश्यकता हो सकती है। हार्डवेयर सॉफ्टवेयर डेटा प्रबंधन एक प्रमुख हिस्सा स्थानिक डेटा है, जिसमें वॉल्यूम वाइज अर्थपूर्ण और चीजों के प्रकार दोनों की एक अलग प्रकार की विशेषताएं होती हैं और आपको विशेष डेटा की आवश्यकता होती है, जो इस डेटा पर काम कर सकते हैं। तो, यही वह लोग है, जो उन चीजों पर काम कर सकते हैं। इसलिए, ये अलग-अलग घटक हैं और इस तरह के विशाल स्थानिक आंकड़ों का सामना करने वाली प्रमुख चुनौतियां क्या हैं। जो, डेटा गहन है, यह गहन गणना है, अगर मैं ए से बी तक का सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता हूं, जहां सड़कों इत्यादि की संख्या जैसे मैं ग्राफ़ के रूप में प्रतिनिधि नेटवर्क के रूप में प्रतिनिधि को देखता हूं। इसलिए, तब इस ग्राफ की चीजों की विशाल मात्रा बेहद संगणकीय रूप से गहन नहीं है, कि अगर मैं किसी प्रकार की ओवरलेइंग प्रकार की चीज़ों को जानना चाहता हूं, तो यह कम्प्यूटेशनल रूप से गहन है। इसलिए, जीआईएस सर्वर पर परिवर्तनीय भार संसाधनों से बाहर गतिशील स्केलिंग इन और स्केलिंग आउट की मांग करता है और एक और दिलचस्प बात, ऐसा नहीं है, कि हमेशा आप यहकर रहे हैं। इसलिए, जब भी क्वेरी आती है, तो डेटा वहां होता है और यह चीजों के आधार पर भिन्न हो सकता है। इसलिए, हमें संसाधनों में स्केलिंग इन और स्केलिंग आउट की आवश्यकता हो सकती है। तो, यह फायदेमंद होगा, कि जब मेरे पास बड़ी गणना होती है। तो, मुझे आवश्यकता होती है और जब मुझे आवश्यकता नहीं होती है, तो मैं उन संसाधनों की चीजों को छोड़ देता हूं। इसलिए, यहां इस प्रकार की यूटिलिटी आधारित कंप्यूटिंग या क्लाउड सॉर्टिंग कंप्यूटिंग होने का मौका है और नेटवर्क की गहन वेब सेवाओं का उपयोग करने के समय की संख्या का उपयोग करता है। क्योंकि, हमने वेब सेवाओं पर चर्चा की है, जो सेवाएं, इस सेवा उन्मुख वास्तुकला पर आधारित हैं और डेटा की बजाय संचालित हमारे पास एक सेवा संचालित है। इसलिए, हम स्थानिक वेब सेवाओं के बारे में बात कर रहे हैं, जो स्थानिक डेटा प्रकार की चीजों का ख्याल रखते हैं। इसलिए, यह बेहद नेटवर्क गहन है। क्योंकि, विभिन्न संगठनों द्वारा बनाए गए स्थान पर डेटा और आपको नेटवर्क गहन चीज़ की आवश्यकता है। तो, अगर हम जमीन के एक ठेठ बैच को देखते हैं। तो, यदि आप स्थानिक डेटा देखते हैं। तो, वहां हाइड्रोलॉजिकल डेटा हो सकता है। वहां ऊंचाई डेटा या मिट्टी डेटा आधारभूत संरचना एक ही स्थान पर हो सकती है और हमें एक संदर्भ प्रणाली, साधन आधारित या प्रसिद्ध संदर्भ प्रणाली की आवश्यकता होती है। जो, हम अपने स्कूल के दिनों से समझते हैं लैट-लांग, यह अन्य संदर्भ प्रणाली भी हो सकती है, जो मूल रूप से किसी विशेष स्थान पर डेटा पिन करने का प्रयास करती है । और यदि यह स्थानिक डेटा के लिए केवल सत्य नहीं है, तो किसी भी प्रकार के डेटा रिपोजिटरी के लिए यह सच है, कि हमारे पास परिचालन डेटा है। फिर स्कीम बनाने के बाद स्कीम की मेटाडेटा जानकारी सारांशित करता है, जिसमें न केवल स्कीम जानकारी होती है, बल्कि कई अन्य चीजें भी पता होती हैं। व्यवसाय नियम भी हैं, जो आखिरकार अंतिम उपयोगकर्ता चाहते हैं। जैसे कि मैं, खड़गपुर स्थान से जानना चाहता हूं की आईआईटी खड़गपुर से आईआईटी चेन्नई जाना है। तो, कोलकाता में कोई जगह या रूट, आईआईटी खड़गपुर से क्या होना चाहिए। इसलिए, मै इस बात से परेशान नहीं हूं, कि डेटा को कैसे रखा जाता है, मैं इस बारे में अधिक परेशान हूं कि मेरा मार्ग क्या होना चाहिए और पथ में पीओआई या रुचि के बिंदु क्या हैं और क्या है। मुझे कैसे स्थानांतरित करना चाहिए और उन चीज़ों तक पहुंचने के लिए अपेक्षित समय क्या हो सकता है और उसमे भीड़ स्तर कितना हो सकता हैं। इसलिए, मैं वास्तविक डेटा के बजाय सेवा में अधिक रुचि रखता हूं। तो, ये आवश्यक हैं। तो, यह मेरा व्यवसाय नियम है, कि मैं सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता हूं। मैं चीजों का एक विशेष गलियारा ढूंढना चाहूंगा । जैसे, कि अगर कोई एक नहर बनाता है, तो मैं कहता हूं, की इसका पकड़ क्षेत्र क्या होना चाहिए यह कितना हल करेगा? तो, यह कहता है कि अगर नहर है। तो, बहुत बहने वाला पानी वहां है, तो मैं साधन देखना चाहता हूं अगर नियम यह है। तो, यह कहता है कि दोनों तरफ दो किलोग्राममीटर बफर पकड़ क्षेत्र होगा जहां, वह पानी भेजा जा सकता है। तो, इस दो किलोग्राममीटर में से कितनी आबादी को यह पानी दिया जा सकता है और कितने कृषि भूमि को पानी दिया गया है। इसका तरीका हो सकता है, या यह साधन मेरी गणना हो सकती है। तो, यह मेरा व्यवसाय है। इसलिए, अंतिम उपयोगकर्ता यहाँ सबसे ऊपर माना जाता है और यह बात सभी प्रकार के डेटा के लिए सच है और हमारे पास डेटा सुरक्षा जैसे कुछ वर्टिकल है, जो अंत में हैं। सेवा की गुणवत्ता कितनी भरोसेमंद है, कि प्रबंधन सेवाएं हो सकती हैं और विभिन्न अन्य वर्टिकल है, जो विभिन्न पहलुओं से जाते हैं और विशेष रूप से भूगर्भीय डेटा के इस प्रकार के स्थानिक डेटा के मामले में देखने के लिए हम क्या प्रयास करते हैं। हम इसे अलग-अलग तरीके से देखने के लिए, एक तरह का एक समान तरीका चाहते हैं। जब मैं क्वेरी करता हूं। तो, डेटा उस को रखता है और मुझे उनकी एक ही प्रकार के साधनों के रूप में आवश्यकता होती है। यहाँ समान प्रकार से मेरा मतलब है, वाक्य रचनात्मक और अर्थपूर्ण बुद्धिमानी ,अन्यथा मैं उन डेटा पर सवाल नहीं कर सकता इसलिए, कुछ संदर्भ प्रणाली अलग हैं। तो, यदि डेटा स्केल अलग हैं, तो मैं डेटा पर खदान नहीं कर सकता हूं। तो, मैं डेटा से सवाल नहीं कर सकता हूं। इसलिए, हमें समेकित डेटा विवरण जैसे मुद्दों को हल करने की आवश्यकता है। मुझे डेटा साझाकरण के डेटा मानक तंत्र के मानक एन्कोडिंग को समझना चाहिए। तो, यह सब कुछ यह, कहता है, कि कुछ प्रकार की कंप्यूटिंग केंद्रीकृत कंप्यूटिंग सुविधा हैं । जो, क्लाउड प्रकार की चीजों की तरह हैं और जो चीजों के लिए सहायक हो सकती हैं। तो, हालांकि मेरे पास अलग-अलग प्रकार के डेटा हो सकते हैं। जैसे, यह सड़क निर्माण वनस्पति का कुछ डेटा हो सकता है। लेकिन, कुछ प्रकार के एक समान एकीकृत डेटा मैं, देख रहा हूं, क्योंकि मुझे इस डेटा पर पूछताछ की आवश्यकता है। और हमने देखा है कि प्रवृत्ति अब परियोजना मोड से शुरू हो रही है। एक और सामाजिक मोड का मतलब है, डेटा हर किसी के लिए उपलब्ध है। क्योंकि, यह करदाता का ही पैसे है इसलिए, विचार नीति प्रतिभूतियों, इत्यादि के आधार पर हैं, लेकिन यह कहीं भी सर्वव्यापी उपलब्ध होना चाहिए। तो, यहाँ क्लाउड एक समाधान हो सकता है। एक और अवधारणा सामने आई है, जो अग्रिम देशो में बहुत लोकप्रिय हो है और यह हमारे देश में भी लोकप्रिय हो रहा है। यह एक आवश्यकता बन रही है। यह एक स्थानिक डेटा बुनियादी ढांचा बना रहा है। तो, एक बुनियादी ढांचे के रूप में डेटा देख रहे हैं। इसलिए, जब भी मैं डेटा पर पूछताछ करना चाहता हूं, मैं इस आधारभूत संरचना में सही हूं। तो, यह एक बुनियादी ढांचा है। तो, कुछ तरह के समान मैं देख सकता हूं। जैसे, कि हम अपने दूरसंचार बुनियादी ढांचे को देख सकते हैं, जहाँ आपके पास अलग-अलग हितधारकों हैं और विभिन्न प्रकार की कहानियां या योजनाएं इत्यादि हैं।लेकिन मेरे पास एक और संचार बुनियादी ढांचा है, जब मैं कुछ और चीजों में हुक करता हूं। जैसे, कि मेरे पास विशेष योजना वाला सिम कार्ड है। तो, मैं फिर से आईपी के आधार पर ध्वनि डेटा और मल्टीमीडिया प्रकार की चीजों तक पहुंच सकता हूं। इसलिए, इस तरह के दूरसंचार बुनियादी ढांचे है। तो, अगर मेरे पास एक स्थानिक डेटा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है, तो मैं कई चीजें कर सकता हूं। जैसे, कि मैं योजना बना सकता हूं, की कुछ स्कूलों में कुछ आपदा प्रबंधनों के लिए बैठे एक विशेष क्षेत्र के विकास के लिए विकास योजना की बात कहने के लिए क्या टिप्पणी है, अन्यथा आपको हमेशा कहीं भी डेटा एकत्र करने और इसे करने की आवश्यकता है। तो, इस तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत है और यह धीरे-धीरे हमारे देश में भी आ रहा है। इसलिए, दूसरे अर्थ में हमें डेटा तक पहुंचने के लिए अलग-अलग तरीके की आवश्यकता हो सकती है, वहां भंडारों के विभिन्न उदाहरण हो सकते हैं। तो, हम यहां हार्वेस्ट करते हैं, वह एक वेब सेवाएं या स्थानिक वेब सेवाएं है। जो, यहां से अनुरोध ले सकती हैं और डेटाबेस में वापस बात कर सकती हैं और इसे सही तरीके से सेवा दे सकती हैं। तो, हम देखते हैं कि डेटा और मेटाडाटा की बड़ी मात्रा में सेवाओं और सेवा ऑर्केस्टेशन की आवश्यकता है। क्योंकि, यदि मेरा व्यवसाय नियम सिर्फ एक छोटा रास्ता नहीं ढूंढ सकता है। तो, मेरे पास कुछ चीजें हो सकती हैं। जिसमें सेवाओं की एक श्रृंखला है या प्रसंस्करण सेवा शुरू की जा रही है। मानक और नीतियों को भूगर्भ की आवश्यकता है, इसे मूल रूप से स्थानिक क्लाउड या भू-स्थानिक क्लाउड की आवश्यकता हो सकती है। तो, जैसा कि हमने पहले ही इस पर चर्चा की है। इसलिए, निजी सार्वजनिक संगठन अपने स्थानिक डेटा का साझा करना चाहता है। इसलिए, डेटा वॉल्यूम के आधार पर स्थानिक डेटा स्पेस नेटवर्क बैंडविड्थ , इत्यादि के लिए अलग-अलग आवश्यकताएं चीजों को साझा करने वाली अन्य चीजों से लाभ प्राप्त करती हैं। कम बुनियादी ढांचे और स्थानिक सेवा विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यह एक और महत्वपूर्ण बात है। तो, अगर मैं स्टोर करना चाहता हूं और अगर मैं डेटा एकत्र करने और संग्रह करने का एक संगठन हूं। इसलिए, मुझे वहां स्टोर करने के लिए एक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। डेटा डेटा वॉल्यूम है, जिसके लिए डेटा को एक अलग प्रकार की बैंडविड्थ इत्यादि की आवश्यकता होती है और मुझे एक प्रसंस्करण की आवश्यकता होती है और न केवल इसके लिए मुझे मानव शक्ति पर अलग विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसलिए, यदि यह मेरे पास है और जैसा कि हम समझते हैं, कि प्रत्येक आधारभूत संरचना बंद हो जाती है। या इस अर्थ में हर तीन से पाँच वर्षों में नवीनीकरण की आवश्यकता होती है। इसलिए, इन चीजों की स्थिरता बेहद मुश्किल कहलाती है। इसलिए, अगर मैं अपने उद्देश्य के लिए बुनियादी ढांचा किराए पर लेता हूं, तो यह एक और अधिक फायदेमंद चीज हो सकता है। इसलिए, कभी-कभी हमारे संगठन की कमी होती है, जो बुनियादी डेटा को बनाए रखने में स्थानिक डेटा की कमी में अधिक विशिष्ट हैं और जीआईएस निर्णयों का उपयोग विभिन्न सरकारी और निजी चीजों में सर्वव्यापी रूप से किया जाता है, जब हम इस स्थानिक क्लाउड भू-स्थानिक क्लाउड को देखते हैं। तो, यह साझा संसाधन पूलिंग का समर्थन करता है। जो भाग लेने वाले संगठन कॉमन्स या साझा लक्ष्यों के लिए उपयोगी है। क्योंकि, हम दो स्लाइडों पर चर्चा कर रहे हैं, कि यह आवश्यकता को कमजोर कर सकता है। इसका मतलब है, मुझे अपने संसाधनों पर स्केल डाउन करने की आवश्यकता है। तो, यह एक साझा संसाधन पूलिंग होगा और बेस सूट संगठन की आवश्यकता के लिए, विभिन्न तैनाती सेवा व्यवसाय मॉडल की पसंद प्रबंधित सेवा डेटा को रोकने और लगातार आउटेज इत्यादि से कार्य हानि को रोकती है। तो, अगर यह और अधिक है। तो, कई सेवा और मेरी वित्तीय बाधा को कम कर सकती हैं और यह क्लाउड के उच्च सुरक्षा प्रावधान के साथ डेटा साझा करने में नियंत्रण प्रदान करती है। क्योंकि, क्लाउड सुरक्षा सुविधाओं आक्रामक तरीके से देखता है। इसलिए, सुरक्षा हमेशा बहुत अधिक लागत के साथ आती है। इसलिए, हम सभी चीजों पर लाभ उठा सकते हैं और यह उन चीजों का उपयोग करने के लिए आर्थिक होता है। जो, हम चाहते हैं और संगठन उनकी आवश्यकता के अनुसार वेब सेवा स्थान प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, अगर मुझे केवल इस तरह की स्थानिक सेवाओं की ज़रूरत है। तो, मैं केवल उन सेवाओं को हारवेस्ट करूंगा। मुझे अगर इस प्रकार के डेटा की ज़रूरत है, तो मैं केवल इस डेटा को देखता हूं। तो, यह बुनियादी ढांचे आवश्यकता के आधार पर अनुकूलित किये गए हैं। यह एनआईएसटी परिभाषा है, जिसे मैंने अभी दोहराया है। तो, पहले से ही हम जानते हैं और हमें क्लाउड के फायदे भी, ज्ञात हैं कि मांग पर मापनीयता आईटी संसाधनों को व्यावसायिक प्रक्रियाओं में सुधार को कम करती है। और ये सभी फायदे स्टार्टअप लागत खपत बेस बिल्डिंग को कम करते हैं, या भुगतान मॉडल हैं, क्योंकि आप अपने पैमाने की मॉडल अर्थव्यवस्था में जाते हैं। ग्रीन कंप्यूटिंग इन सभी स्थानिक डेटा बुनियादी ढांचे या स्थानिक डेटा प्रबंधन की आवश्यकता होती है। तो, भू-स्थानिक डेटा बुनियादी ढांचा इस तरह की चीजों के लिए उपयुक्त है। और हमने यह भी देखा है, कि क्लाउड एक्टर्स कौन हैं। जिनके पास क्लाउड सर्विस सीएसपी या ब्रोकर है, ग्राहक दूसरे अंत वार्ताकार वैकल्पिक हैं, जो क्लाउड और सुरक्षा लेखा परीक्षक के एसएलए मैनेजर के बीच बातचीत कर सकते हैं। इसलिए, यदि आप उन सभी चीजों पर विचार करते हैं और यदि हम भू-स्थानिक डेटा के लिए सामान्य क्लाउड आर्किटेक्चर देखते हैं। तो, यह आर्किटेक्चर किसी अन्य प्रकार की अन्य सेवाओं के लिए सच हो सकता है। लेकिन, यदि हम भू-स्थानिक डेटा देखते हैं, या भू-स्थानिक या स्थानिक सेवाओं को जगह में रखा जाता है। तो, ये समग्र चीजें प्रयोग में आती हैं। तो, एक बार एक ग्राहक या उपयोगकर्ता या एक सेवा उपभोक्ता प्रयोगमें आता है। इसलिए, एक वार्ताकार है, जहां ब्रोकरों की संख्या हो सकती है, जहां मूल रूप से ब्रोकर अलग-अलग डेटा या डेटा के अलग-अलग सेट के लिए एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है। वहां दो रिपॉजिटरीज़ में एक ही डेटा को संभाला जा सकता है और हमारे पास अलग-अलग डेटा सेंटर हो सकते हैं, जो वीएम देता है और ऐसे विभिन्न संगठन हैं, जो इस वीएम पर अपने डेटा और सेवाओं को लॉन्च करते हैं। और, इनके साथ बातचीत की जा रही है और यह अंत उपयोगकर्ता से जुड़ा हुआ है, इसके अलावा हमें एसएलए मैनेजर की आवश्यकता है, ताकि यह देख सकें की एसएलए या सर्वेक्षण स्तर समझौते हैं और इनक उलंघन नहीं हो रहा है । यह देखने के लिए एक लेखा परीक्षक हो सकता है, कि एसएलए के मामले में इस तरह की नीतियां, इस प्रकार की स्थिति में सुरक्षा लेखा परीक्षकों की सुरक्षा नीतियां आदि रखी जा सकती हैं। इसलिए, मुझे एक ब्रोकिंग सेवा की आवश्यकता है, जो इन चीजों के लिए कार्य कर सकता है। वहां विभिन्न डेटा केंद्र हैं, जो विभिन्न संगठनों के इस स्थानिक डेटा को होस्ट करते हैं और एसएलए प्रबंधक और लेखा परीक्षक होगा जो, समग्र प्रबंधन चीजों का ख्याल रखता है। यहाँ हो सकता है, की चीज के अन्य घटक अन्य विभिन्न घटकों में अलग ऑडिटिंग सेवाएं, इत्यादि हो सकती हैं। लेकिन, यह समग्र व्यापक आधारभूत संरचना है। इसलिए, अगर मैं किसी प्रकार का इंटरफ़ेस जीआईएस देखता हूं या हम इस एसडीआई के किसी प्रकार की प्राप्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो स्थानिक सेवाएं देता है। तो, इस इंटरफ़ेस जीआईएस द्वारा आपका क्या मतलब है। इसका अपना डेटा नहीं है, लेकिन यह मूल रूप से उपभोक्ता या ग्राहक को विभिन्न सेवा प्रदाता से जुड़ने की अनुमति देता है। तो, यह किसी प्रकार का क्लाउड या कुछ प्रकार का मध्यम टायर है, जो उन चीजों को जोड़ता है। इसलिए, संसाधन सेवा या संसाधन आवंटन मैनिपुलेशनया या डेटा सेवाओं और इंटरफ़ेस सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। और हम देख सकते हैं कि हमारे पास एक विशिष्ट संरचना है, जिसके हमारे पास अलग-अलग उदाहरण हैं। तो, यह मेरा बैक-बोन हार्डवेयर है, जहां हमारे पास यह हाइपरवाइजर है, जो अतिथि ओएस में अलग-अलग आभासी मशीनों का अनुकरण कर सकता है। इस पर मेरे पास इस स्थानिक क्लाउड के विभिन्न प्रकार, उदाहरण या इन स्थानिक वेब सेवाओं के उदाहरण हो सकते हैं। इसलिए, मैं कह सकता हूं, कि यदि ऐसा कहा जाता है, कि किसी विशेष संगठन के लिए स्थानिक वेब सेवाएं विशेष स्थिति हो सकती हैं। तो, विशेष जिला सही चीजों पर तत्काल हो सकता है और फिर मैं इस बात पर काम करता हूं। जैसे कि अगर आप कुछ देखने की कोशिश करते हैं। तो, समानता का प्रकार बहुत अच्छा सादृश्य नहीं हो सकता है। इसलिए, अगर मैं कहता हूं, कि अगर मैं क्लाउड पर कुछ हद तक प्रसंस्करण सेवा का उपयोग कर रहा हूं। तो, Google डॉक्स कहता है। तो, हम जो कर रहे हैं, हम मूल रूप से उस विशेष Google दस्तावेज़ पर अपने डोमेन को तुरंत चालू कर रहे हैं, किसी और को फिर से तत्काल चीजें चाहिये, लेकिन पिछली तरफ, यह मूल रूप से Google आधारभूत संरचना है, जिसका उपयोग हम कर रहे हैं, जहां हाइपरवाइजर और यह मूल रूप से एक सेवा के रूप में सॉफ्टवेयर है। तो, हम बहुत उच्च स्तर पर हैं, लेकिन यह मेरी बात को तुरंत शुरु कर रहा है। तो, यहां मेरे पास, मेरे विशेष काम के लिए तत्काल सेवा हो सकती है या नहीं। इसलिए, यदि हम भू-स्थानिक क्लाउड मॉडल देखते हैं। इसलिए, वेब सेवाएं यहां डेटा को एकीकृत करने के लिए स्थानिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है और विषम बैक एंड डेटा सेवा सेट की जा सकती है, डेटा सेवा क्लाउड के अंदर या बाहर हो सकती है। यह हो सकता है, कि कुछ सेवाएं बाहर की जा सकती हैं PaaS का उपयोग कर Paas सेवा मॉडल के माध्यम से लोड संतुलन इत्यादि बनाता है। हम स्केलिंग पारदर्शी बना सकते हैं। तो, यह देखने का एक तरीका है, कि एक विशिष्ट परिदृश्य जहां विभिन्न संगठन हैं और मेरे पास एक समन्वय क्लाउड है, जिसमें केंद्रीय भंडार है। जो संगठन की देखभाल करता है। वे कैसे काम कर रहे हैं और चीजों के प्रकार, जहां डेटा है। इसलिए, हमने पहले से ही एक एकीकृत प्रारूप या समरूपता में डेटा को एकीकृत करने की आवश्यकता पर विचार किया है, इसके बजाए इसे प्रदर्शन या मेट्रिक गणना नेटवर्क नेटवर्क इत्यादि के बजाय इंटरऑपरेट किया जाना चाहिए और यहाँ विभिन्न डेटा स्रोत हो सकते हैं। हमने अभी कुछ स्नैपशॉट देखा है, कि हमने इसे प्रयोगात्मक भू-स्थानिक क्लाउड बनाया है। जो मुझे कहना चाहिए की आईआईटी केजीपी का अपना प्रयोगात्मक क्लाउड पर मेघामाला है। जहां हमने देखा है, कि ओपन स्टैक ओपन सोर्स क्लाउड प्लेटफॉर्म पर थे और यह घर के क्लाउड में आईआईटी खड़गपुर के लिए एक निजी क्लाउड था और इसके बाद हमने कुछ प्रयोग किया है। इसलिए, जैसा कि हम कुछ प्रदर्शन नहीं दिखा रहे हैं, लेकिन यह दिखाते हुए कि किस तरह की चीजें हो सकती हैं तो, यह एक विशेष क्षेत्र है, जो बांकुरा जिलों का एक क्षेत्र है, जो पश्चिम बंगाल का एक जिला है। इसलिए, अगर मेरे पास राजमार्ग है, जो राजमार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाता है और दूसरी ओर यदि मेरे पास स्थानीय सड़क नेटवर्क है, जो राज्य या जिला प्राधिकरण द्वारा अधिक संभालता है। तो, फिर कुछ पूछताछ कैसे करें यदि यह इसमें शामिल है। यद्यपि, छवि स्पष्ट नहीं हो सकती है, कि यह अलग-अलग वीएम में चल रहा है। यह कुछ एक डॉट चौहत्तर है, फ्लाई पर एक डॉट पचहत्तर, मैं एक प्रसंस्करण सेवा चाहता हूं। तो, यह दो लेते हुए, मुझे मूल रूप से एक विलयित सड़क नेटवर्क मिला है, या दूसरी तरफ मेरे पास सड़क की दो सेवाएं हैं। मैं खींच रहा हूं और विलय कर रहा हूं या राष्ट्रीय राजमार्ग वह और वहां हम मूल रूप से क्या कर सकते हैं । अब, इन चीजों पर सबसे कम पथ के लिए पूछताछ करें, जो इन राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्ग दोनों की देखभाल करता है। जैसे, कि यह मेरा दो स्थान है और फिर मैं इसे सबसे छोटा रास्ता खोजना चाहता जो इस गठबंधन चीजों पर बना है। इसलिए, यद्यपि आवेदन छोटा हो सकता है, हालांकि यह मामूली नहीं हो सकता है। लेकिन, यह दो अलग-अलग भंडारों को देख सकता है, जो हम एक सेवा मोड पर खींच सकते हैं और जो दो अलग-अलग वीएम पर चल रहे हैं और एक सेवा मोड खींचें और मूल रूप से मेरा व्यवसाय नियम सबसे छोटा रास्ता ढूंढ रहा है।मुझे पश्चिम बंगाल के पूरे डेटा या सड़क डेटा में दिलचस्पी नहीं है, मुझे उस सबसे छोटे रास्ते और उन स्थानों में दिलचस्पी है तो, यह एक तरह की चीज है। तो, दूसरी बात यह है कि मेरे पास दो प्रकार का डेटा हो सकता है। जहां मेरे पास एक ही नहर प्रकार की चीजें हैं, जो एक ही बांकुरा जिले और एक नदी का डेटा है और जो एक अलग चीज़ में हो सकती है। अब, मैं एक विलय वाला पानी नेटवर्क चाहता हूं, जो इस नहर को फिर से नदी के साथ एकीकृत करता है। ये दो अलग-अलग वीएम या अलग क्लाउड उदाहरणों में हैं। मेरे पास एक विलय डेटा है और मैं बफर करना चाहता हूं यह विलय डेटा। तो, यह देखने की कोशिश करें कि भारी बारिश या बाढ़ के दौरान, चीजें क्या हैं । यदि व्यापार नियम यह है, कि पाँच सौ मीटर के भीतर यह कमजोर होता है। तो, इस विशेष बफर जोन का कमजोर क्षेत्र क्या है। इसलिए फिर से मेरे पास दो अलग-अलग डेटा उदाहरण हैं। जो, फ्लाई पर एकीकृत हैं और यह क्वेरी देता है। तो, यहां हमने एक प्रयोगात्मक भू-स्थानिक क्लाउड पर प्रयोग किया है, हमने इसे अपनी मेघामाला चीज़ पर स्थापित किया इसलिए, यहां कई चुनौतियां हैं। जो आम तौर पर स्थानिक डेटा में नहीं होते हैं और अन्य प्रकार के गैर स्थानिक डेटा प्रकार की चीजों में भी नहीं होते हैं । इसलिए, स्थानिक डेटाबेस को कार्यान्वयन करना एक चुनौती है। इसके लिए केवल स्पेसियल डाटाबेस के डाटा सेमेन्टिक्स ऑर्डर स्केलिंग को समझने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, यहाँ बहु किरायेदार नीति प्रबंधन की आवश्यकता है। इन अलग-अलग किरायेदारों में से भौगोलिक रूप से स्थित बैकअप यदि आप डेटा सुरक्षा रखना चाहते हैं, तो कुछ चैनल भी अन्य प्रकार की चीजों के लिए हैं, कुछ आम तौर पर इस प्रकार के स्थानिक के लिए होते हैं। और हमारे पास डेटा लेवल पर इंटरऑपरेबिलिटी की एक बड़ी चुनौती है। जैसे एक डेटा दूसरे के साथ मिलना चाहिए। जबकि हम कर रहे हैं की बफरिंग प्रकार की चीजें हैं और यह एक सेवा स्तर की अक्षमता हो सकती है। जैसे दो सेवाएं इंटरऑपरेबिलिटी में एक दूसरे के सुरक्षा स्तर से बात कर सकती हैं। जब मेरे पास अलग-अलग डेटा सेट पर अलग-अलग नीतियां होती हैं। तो सुरक्षा स्तर अंतर अंतःक्रियाशीलता क्या होनी चाहिए। इसलिए, प्रमुख सुरक्षा चिंता यह है कि बहु किरायेदारी पहले से ही अन्य चीजों के लिए है और डेटा के एप्लिकेशन सेवाओं के पूर्ण नियंत्रण की कमी है। क्लाउड पर संपत्तियां तैनात की जाने वाली कई अन्य चिंताओं हैं, इन संपत्तियों का मूल्य क्या है, इस संपत्ति से समझौता किया जा सकता है। इसलिए, विभिन्न प्रकार की अन्य चिंताओं हैं। जिन्हें, हमें देखने की आवश्यकता है। अगर हम समग्र स्पेक्ट्रम को देखते हैं। इसलिए, इस स्थानिक या भू-स्थानिक डोमेन को इस तरह की क्लाउड चीज़ पर तत्काल प्रयोज्यता या भारी उपयोगिता मिलती है। इसलिए, अच्छे उपयोग के मामलों में से एक जो न केवल विभिन्न देशों में विभिन्न संगठनों में हमारे देश में विभिन्न प्रकार के नागरिक केंद्रित विकास योजना और विनाशकारी प्रबंधन के लिए एक दूसरे के साथ इस विषम डेटा की बात कैसे करना है, विशेष रूप से लोकप्रिय
बताया गया है कि आरोपितों ने लायसेंसी 12 बोर बंदूक से बनोला (सेल) में फायर किया जो जमीन से टकराकर छर्रे शादी सेल में उपस्थित लोगों को लगे जिससे वह घायल हो गए। रतलाम। मध्य प्रदेश में रतलाम जिले के सैलाना में बीती रात एक विवाह समारोह के दौरान हर्ष फायर करने से छः लोग घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां अब उनकी हालत ठीक है। पुलिस ने आरोपित पप्पु पुत्र रामचंद्र पाटीदार, हीरालाल पुत्र भगवान पाटीदार दोनों निवासी जूनावास के खिलाफ धारा 336, 188 भादवि 29,30 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। बताया गया है कि आरोपितों ने लायसेंसी 12 बोर बंदूक से बनोला (सेल) में फायर किया जो जमीन से टकराकर छर्रे शादी सेल में उपस्थित लोगों को लगे जिससे वह घायल हो गए। इस दौरान डीएम की शर्तों का उल्लंघन किया गया। छर्रे लगने से वहां उपस्थित चेतनदास बैरागी, धर्मेन्द्र दास बैरागी, कान्हा दायमा, निलेश पाटीदार, चंदा पाटीदार, दीपिका पाटीदार सभी निवासी सैलाना घायल हो गए।
बताया गया है कि आरोपितों ने लायसेंसी बारह बोर बंदूक से बनोला में फायर किया जो जमीन से टकराकर छर्रे शादी सेल में उपस्थित लोगों को लगे जिससे वह घायल हो गए। रतलाम। मध्य प्रदेश में रतलाम जिले के सैलाना में बीती रात एक विवाह समारोह के दौरान हर्ष फायर करने से छः लोग घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां अब उनकी हालत ठीक है। पुलिस ने आरोपित पप्पु पुत्र रामचंद्र पाटीदार, हीरालाल पुत्र भगवान पाटीदार दोनों निवासी जूनावास के खिलाफ धारा तीन सौ छत्तीस, एक सौ अठासी भादवि उनतीस,तीस आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। बताया गया है कि आरोपितों ने लायसेंसी बारह बोर बंदूक से बनोला में फायर किया जो जमीन से टकराकर छर्रे शादी सेल में उपस्थित लोगों को लगे जिससे वह घायल हो गए। इस दौरान डीएम की शर्तों का उल्लंघन किया गया। छर्रे लगने से वहां उपस्थित चेतनदास बैरागी, धर्मेन्द्र दास बैरागी, कान्हा दायमा, निलेश पाटीदार, चंदा पाटीदार, दीपिका पाटीदार सभी निवासी सैलाना घायल हो गए।
Jamshedpur (Anand Mishra) : भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से आयोजित इंस्पायर अवार्ड-मानक स्कीम प्रतियोगिता में जिला स्तर पर चयनित छात्र-छात्राएं अब राज्य स्तर पर होनेवाली प्रतियोगिता में शामिल होंगे. राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन आगामी 3 मई से राजधानी रांची स्थित झारखंड अधिविद्य परिषद मैदान में किया गया है. प्रतियोगिता में राज्य भर से जिला स्तर पर चयनित 189 छात्र-छात्राएं एवं उनके स्कॉट शिक्षक शामिल होंगे. जबकि कोल्हान के तीनों जिला पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां से जिला स्तर पर चयनित 22 छात्र-छात्राएं एवं उनके चार स्कॉट शिक्षक प्रतियोगिता में शामिल होंगे. कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम से चयनित छात्र-छात्राओं की संख्या 16, पश्चिमी सिंहभूम से 3 तथा सरायकेला-खरसावां जिले से 3 है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक सह इंस्पायर अवार्ड की नोडल पदाधिकारी पुष्पा कुजूर ने इस संबंध में पत्र के माध्यम से जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित निर्देश दिया है. साथ ही 3 मई को प्रतियोगिता के आयोजन स्थल पर दोपहर 3 बजे तक पहुंच कर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है. रजिस्ट्रेशन 4 मई की सुबह 8 बजे तक किया जायेगा. उसके बाद 9 बजे से प्रतियोगिता आरंभ होगी, जिसमें प्रतिभागी अपने प्रोजेक्ट मॉडल प्रस्तुत करेंगे. शाम 5 बजे समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जायेगा.
Jamshedpur : भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से आयोजित इंस्पायर अवार्ड-मानक स्कीम प्रतियोगिता में जिला स्तर पर चयनित छात्र-छात्राएं अब राज्य स्तर पर होनेवाली प्रतियोगिता में शामिल होंगे. राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन आगामी तीन मई से राजधानी रांची स्थित झारखंड अधिविद्य परिषद मैदान में किया गया है. प्रतियोगिता में राज्य भर से जिला स्तर पर चयनित एक सौ नवासी छात्र-छात्राएं एवं उनके स्कॉट शिक्षक शामिल होंगे. जबकि कोल्हान के तीनों जिला पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां से जिला स्तर पर चयनित बाईस छात्र-छात्राएं एवं उनके चार स्कॉट शिक्षक प्रतियोगिता में शामिल होंगे. कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम से चयनित छात्र-छात्राओं की संख्या सोलह, पश्चिमी सिंहभूम से तीन तथा सरायकेला-खरसावां जिले से तीन है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक सह इंस्पायर अवार्ड की नोडल पदाधिकारी पुष्पा कुजूर ने इस संबंध में पत्र के माध्यम से जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित निर्देश दिया है. साथ ही तीन मई को प्रतियोगिता के आयोजन स्थल पर दोपहर तीन बजे तक पहुंच कर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है. रजिस्ट्रेशन चार मई की सुबह आठ बजे तक किया जायेगा. उसके बाद नौ बजे से प्रतियोगिता आरंभ होगी, जिसमें प्रतिभागी अपने प्रोजेक्ट मॉडल प्रस्तुत करेंगे. शाम पाँच बजे समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जायेगा.
६४. पुर-रक्षकआप चाहें तो उन्हें पुरपाल भी कह सकते हैं। आजकी भाषामें कहना हो तो उन्हें पुलिस वहना पड़ेगा, किन्तु अयोध्या में उनके कार्य और कर्तव्य ? जिस नगरमें चोरी या अपराधकी गन्ध भी किसीके मनमें प्रवेश नहीं पाती, जहाँका बालक तक नहीं जानता किं भय कहते किसे हैं, जहाँ अनुनय पूर्वक अर्पित करने पर भी कोई किसीकी वस्तु कदाचित आवेदक पर असीम अनुकम्पा हो तभी स्वीकार करेगा, वहाँ पुर रक्षक क्यों ? सतर्कता, सावधानी ? भटक गये आप । किससे सावधानी ? किसी सामग्री की रक्षा के लिए ? सुर भी जिनकी स्पृहा करें वे दिव्य मणियाँ जहाँ शिशुओंके क्रीडनक हों, वहाँ कैसी सुरक्षाकी सावधानी और कोई आततायी अकस्मात आ जाय, ब्रह्मर्षि वशिष्ठका प्रचण्ड प्रताप उसे त्रिभुवनमें पलायनको स्थान नहीं रहने देगा । फिर यम, काल और स्वयं देवन्द्र क्या अपने महान मित्र महाराज दशरथको पुरीकी ओर दृष्टि उठाने वालेको क्षमा कर देंगे ? और अब तो अयोध्या त्रिभुवनके स्वामीकी पुरी है । उसके पथों में स्वयं मुण्डमाली वेश बदले घूमते-फिरते हैं और त्रिपुर सुन्दरीको ही वहाँ अब अन्यत्र रहना प्रिय लगता है। भगवान गङ्गाधरको सेवाका कोई अवसर मिल जाय, उनका त्रिशूल प्रमाद करेगा ? अयोध्या में यातायात नियन्त्रित नहीं करना पड़ता । वहाँ अश्व वायु- वेगसे चलते हुए भी स्वतः सावधान रहते हैं । वहाँके सूत या हस्तिपोंको निर्दोष बने रहनेको अपेक्षा नहीं होती । इतने पर भी पुर रक्षक तो हैं अवध में ! बालकोंको सहायता आवश्यक होती है यदाकदा पथ-पार करने में । आगत अतिथियों को अभीष्ट पथ सूचित करना पड़ता है और प्रायः उन्हें पहुँचा देना पड़ता है गन्तव्य तक । नागरिकों पर दृष्टि रखनी पड़ती है, क्योंकि वे स्वयं कभी सूचित नहीं करेंगे कि उन्हें क्या कष्ट है, क्या असुविधा है, शासन उनकी क्या सेवा कर सकता है। इसका अत्यन्त सावधानीसे पता लगाते रहना पड़ता है । कल प्रातः महाराजाधिराज पधार रहे हैं। सभी उनका दर्शन सर्वप्रथम करना चाहेंगे । नागरिक और अतिथि अभ्यागत, भीड़के बाहुल्यका अनुमान सहज किया जा सकता है । नियन्त्रणका प्रश्न नहीं हैं, सहायताका प्रश्न है । बालक, वृद्ध,
चौंसठ. पुर-रक्षकआप चाहें तो उन्हें पुरपाल भी कह सकते हैं। आजकी भाषामें कहना हो तो उन्हें पुलिस वहना पड़ेगा, किन्तु अयोध्या में उनके कार्य और कर्तव्य ? जिस नगरमें चोरी या अपराधकी गन्ध भी किसीके मनमें प्रवेश नहीं पाती, जहाँका बालक तक नहीं जानता किं भय कहते किसे हैं, जहाँ अनुनय पूर्वक अर्पित करने पर भी कोई किसीकी वस्तु कदाचित आवेदक पर असीम अनुकम्पा हो तभी स्वीकार करेगा, वहाँ पुर रक्षक क्यों ? सतर्कता, सावधानी ? भटक गये आप । किससे सावधानी ? किसी सामग्री की रक्षा के लिए ? सुर भी जिनकी स्पृहा करें वे दिव्य मणियाँ जहाँ शिशुओंके क्रीडनक हों, वहाँ कैसी सुरक्षाकी सावधानी और कोई आततायी अकस्मात आ जाय, ब्रह्मर्षि वशिष्ठका प्रचण्ड प्रताप उसे त्रिभुवनमें पलायनको स्थान नहीं रहने देगा । फिर यम, काल और स्वयं देवन्द्र क्या अपने महान मित्र महाराज दशरथको पुरीकी ओर दृष्टि उठाने वालेको क्षमा कर देंगे ? और अब तो अयोध्या त्रिभुवनके स्वामीकी पुरी है । उसके पथों में स्वयं मुण्डमाली वेश बदले घूमते-फिरते हैं और त्रिपुर सुन्दरीको ही वहाँ अब अन्यत्र रहना प्रिय लगता है। भगवान गङ्गाधरको सेवाका कोई अवसर मिल जाय, उनका त्रिशूल प्रमाद करेगा ? अयोध्या में यातायात नियन्त्रित नहीं करना पड़ता । वहाँ अश्व वायु- वेगसे चलते हुए भी स्वतः सावधान रहते हैं । वहाँके सूत या हस्तिपोंको निर्दोष बने रहनेको अपेक्षा नहीं होती । इतने पर भी पुर रक्षक तो हैं अवध में ! बालकोंको सहायता आवश्यक होती है यदाकदा पथ-पार करने में । आगत अतिथियों को अभीष्ट पथ सूचित करना पड़ता है और प्रायः उन्हें पहुँचा देना पड़ता है गन्तव्य तक । नागरिकों पर दृष्टि रखनी पड़ती है, क्योंकि वे स्वयं कभी सूचित नहीं करेंगे कि उन्हें क्या कष्ट है, क्या असुविधा है, शासन उनकी क्या सेवा कर सकता है। इसका अत्यन्त सावधानीसे पता लगाते रहना पड़ता है । कल प्रातः महाराजाधिराज पधार रहे हैं। सभी उनका दर्शन सर्वप्रथम करना चाहेंगे । नागरिक और अतिथि अभ्यागत, भीड़के बाहुल्यका अनुमान सहज किया जा सकता है । नियन्त्रणका प्रश्न नहीं हैं, सहायताका प्रश्न है । बालक, वृद्ध,
इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः Electric Scooters Fire Incidents : पिछले सप्ताह ओला, ओकीनावा और प्योर कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लगी आग चर्चा का विषय बनी हुई है। 25 मार्च के बाद देश में करीब चार जगह चार इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। उधर मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटना के जांच के आदेश दे दिए हैं। तो आइए जानते हैं इलेक्ट्रिक स्कूटरों में क्या है आग लगने की वजह। किन ई-स्कूटरों में लगी आग? (Electric Scooters Fire Incidents) - ओला, ओकीनावा और प्योर कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की वास्तविक वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। इन स्कूटरों से जुड़ी कंपनियों ने कहा है कि वे मामले की जांच कर रही हैं। - तमिलनाडु में ओकीनावा के ई-स्कूटर में आग लगने के बाद कंपनी ने कहा कि उसके प्राथमिक आकलन मुताबिक, स्कूटर में आग लगने की वजह चार्जिंग में लापरवाही के कारण हुआ शॉर्ट-सर्किट है। वहीं ई-स्कूटरों में आग लगने की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, बाहरी डैमेज या इटर में कमी से इन बैटरियों में आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है। - इलेक्ट्रिक वाहनों के निमार्ता इन बैटरियों को बड़ी संख्या में चीन से आयात करते हैं, जहां से खराब इटर क्वॉलिटी वाली बैटरियां आती हैं, जिससे बैटरियां में आग लगने समेत कई दिक्कतें आती हैं। एक रिपोर्ट मुताबिक, चीन 2021 में दुनिया में लिथियम-आॅयन बैटरियों का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर था और इस दौरान दुनिया की 79 फीसदी लिथियम-आॅयन बैटरियां चीन में बनाई गईं। - कहा जाता है इसकी वजह थर्मल रनअवे है। थर्मल रनअवे प्रक्रिया बैटरी में ज्यादा तापमान की वजह से शुरू होती है। ये तब होती है, जब बैटरी के अंदर पैदा हुआ टेंपरेचर उसके आसपास के टेंपरेचर से ज्यादा हो जाता है, इससे और एनर्जी रिलीज होती है जो टेंपरेचर को और बढ़ा देती है, जिससे बैटरी में आग लग जाती है। इन जगहों पर ई-स्कूटरों पर लगी आग (Electric Scooters Fire Incidents) - पहली घटनाः 25 मार्च को तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में हुई, जब ओकीनावा कंपनी के ई-स्कूटर को रात में चार्जिंग के लिए छोड़ देने के बाद अचानक उसमें आग लग गई। इससे एक 45 वर्षीय व्यक्ति और उसकी 13 वर्षीय बेटी की दम घुटने से मौत हो गई। पुलिस ने शुरूआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट को बताया। - दूसरी घटनाः 26 मार्च को पुणे में हुई, जहां ओला के एस1 प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक आग लग गई, इसका वीडियो आनलाइन वायरल हुआ था। ओला र1 प्रो को कंपनी ने पिछले साल लॉन्च किया था। - तीसरी घटनाः 28 मार्च को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मणप्पराई में हुई, जहां ओकीनावा के ई-स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई। - चौथी घटनाः 30 मार्च को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हुई, जहां हैदराबाद के स्टार्टअप प्योर के लाल रंग के ई-स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई। क्यों लगी ई-स्कूटरों में आग? - भारत जैसे देश में जहां तापमान 45 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है, वहां थर्मल रनअवे की वजह से बैटरियों का टेंपरेचर 90-100 डिग्री तक पहुंच सकता है, जिससे आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। भारत के मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं करने और विदेशों से आयात बैटरियों की वजह से आग लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। - वहीं अभी तक इन ई-स्कूटरों में आग लगने की वजह नहीं पता चल पायी है, लेकिन रिपोर्ट्स मुताबिक, इसकी सबसे प्रमुख वजह है इन स्कूटरों की बैटरियां। दरअसल, इनमें से ज्यादा ई-स्कूटरों में आग लगने के बाद उनकी बैटरियों से धुएं के उठते गुबार ने बैटरी की वजह से आग लगने की आशंकाओं को बल दिया। ई-स्कूटरों में कौन सी बैटरियां लगती हैं? (Electric Scooters Fire Incidents) - ई-स्कूटरों में लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल होता है। आजकल दुनियाभर में स्मार्टफोन से लेकर लैपटॉप और इलेक्ट्रिक कार से लेकर स्मार्टवॉच तक में इन्हीं बैटरियों का इस्तेमाल हो रहा है। ये बैटरियां अन्य बैटरियों की तुलना में ज्यादा ताकतवर और हल्की माना जाती हैं। हालांकि, इन बैटरियों से आग लगने का भी खतरा रहता है, जैसा कि ई-स्कूटरों में हाल के दिनों में नजर आया है। - बताया जाता है कि लिथियम-आयन बैटरियों को अन्य बैटरियों की तुलना में बेहतर बनाती हैं, वे हैं उसका हल्का होना, हाई एनर्जी डेंसिटी और रिचार्ज करने की क्षमता। इसके साथ ही लिथियम-आयन बैटरियां लेड एसिड बैटरियों की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक चलती हैं। एक लिथियम-आयन बैटरी आमतौर पर 150 वॉट-आवर्स प्रति किलोग्राम स्टोर कर सकती है जबकि लेड-एसिड बैटरी आमतौर पर करीब 25 वॉट-आवर्स प्रति किलोग्राम स्टोर कर सकती है। बैटरी में स्टोर हो सकने वाली एनर्जी को उसकी पावर कैपेसिटी कहते हैं। इससे बैटरी की क्षमता मापते हैं। इस पावर को आमतौर पर वॉट-ऑवर में व्यक्त करते हैं। - आप अगर वॉट-ऑवर को सीधे शब्दों में समझें तो एक लीथियम-आॅयन की एक किलोग्राम बैटरी में 150 वॉट-आवर की इलेक्ट्रिसिटी स्टोर हो सकती है। वहीं एक लेड-एसिड बैटरी की एक किलोग्राम बैटरी 25 वॉट-आॅवर की इलेक्ट्रिसिटी ही स्टोर कर सकती है। यानी जितनी इलेक्ट्रिसिटी 1 किलोग्राम की लिथियम-आर्यन बैटरी स्टोर कर सकती है, उतनी एनर्जी के लिए एसिड-लेड बैटरी की 6 किलोग्राम बैटरी की जरूरत पड़ेगी। - इसका मतलब है कि लिथियम-आर्यन बैटरियां अन्य बैटरियों की तुलना में ज्यादा एफिशिएंट होती हैं। यानी लिथियम-आर्यन बैटरियों से लैस इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को ज्यादा समय तक ड्राइव किया जा सकता है। वहीं, स्मार्टफोन में इन बैटरियों के इस्तेमाल से उसकी बैटरी लगभग पूरे दिन टिकेगी। (Electric Scooters Fire Incidents) - लिथियम-आर्यन बैटरियों की सबसे बड़ी खासियत हाई एनर्जी डेंसिटी है, यानी आम बैटरियों से ज्यादा एनर्जी। लेकिन यही बैटरी में खराबी की वजह भी हो सकती है। इन बैटरियों की हाई एनर्जी डेंसिटी का मतलब है कि ये सेल कुछ परिस्थितियों में अस्थिर हो सकते हैं, जो इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। - एक्सपर्ट्स का मानना है कि लिथियम-आर्यन बैटरियां एक सुरक्षित आॅपरेटिंग लिमिट के अंदर सबसे अच्छे से काम करती हैं। इन बैटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस होता है। बीएमएस क्या है? (Electric Scooters Fire Incidents) - बीएमएस एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जो लिथियम-आयन बैटरी पैक में हर सेल से जुड़ा होता है। बीएमएस लगातार बैटरी के वोल्टेज और उसमें फ्लो होने वाले करंट को मापता रहता है। साथ ही बीएमएस कई टेंपरेचर सेंसर से लैस होता है, जो इसे बैटरी पैक के विभिन्न सेक्शन में टेंपरेचर के बारे में जानकारी देता है। यह सारा डेटा बीएमएस को बैटरी पैक के अन्य पैरामीटर्स की कैलकुलेशन में मदद करता है, जैसे चार्जिंग और डिस्चार्जिंग रेट, बैटरी लाइफ साइकिल और एफिशिएंसी। बीएमएस अगर ठीक से काम न करे तो बैटरी में आग लगने जैसी घटनाएं संभव हैं। इस तरह रखें ई-व्हीकल का ध्यान? कुछ बातों का ख्याल रखकर कंज्यूमर्स काफी हद तक आग लगने जैसे खतरे टाल सकते हैं। नमी चार्जर और बैटरी दोनों के लिए खतरनाक है, इसलिए अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल को इससे बचाएं। इलेक्ट्रिक व्हीकल को केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकर की ओर से रेकमेंड चार्जर से ही चार्ज करें। अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल को बहुत देर तक धूप में पार्क न करें। चार्जिंग के समय सावधान रहें, पहली बार चार्जिंग से पहले प्रॉसेस समझने के लिए एक्सपर्ट की मदद लें। इलेक्ट्रिक व्हीकल की ओवरचार्जिंग से बचें। चार्जिंग के लिए अच्छे सॉकेट और प्लग का इस्तेमाल करें। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल की मार्केट स्थिति ? सरकार ने साल 2012 में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 लान्च किया था। देश में 2020-21 में बिकी कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा 1. 3 फीसदी था। 2021-22 में बिकी कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा बढ़कर 1. 7 फीसदी हो गया। अब सरकार की 2030 तक आटो इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा 30 फीसदी तक करने की योजना है। READ ALSO: Plastic in Human Blood जानिए, लोगों के खून तक कैसे पहुंच रहा प्लास्टिक, इससे कौन सी बीमारियों का है डर?
इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः Electric Scooters Fire Incidents : पिछले सप्ताह ओला, ओकीनावा और प्योर कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लगी आग चर्चा का विषय बनी हुई है। पच्चीस मार्च के बाद देश में करीब चार जगह चार इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। उधर मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटना के जांच के आदेश दे दिए हैं। तो आइए जानते हैं इलेक्ट्रिक स्कूटरों में क्या है आग लगने की वजह। किन ई-स्कूटरों में लगी आग? - ओला, ओकीनावा और प्योर कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की वास्तविक वजह का अभी पता नहीं चल पाया है। इन स्कूटरों से जुड़ी कंपनियों ने कहा है कि वे मामले की जांच कर रही हैं। - तमिलनाडु में ओकीनावा के ई-स्कूटर में आग लगने के बाद कंपनी ने कहा कि उसके प्राथमिक आकलन मुताबिक, स्कूटर में आग लगने की वजह चार्जिंग में लापरवाही के कारण हुआ शॉर्ट-सर्किट है। वहीं ई-स्कूटरों में आग लगने की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, बाहरी डैमेज या इटर में कमी से इन बैटरियों में आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है। - इलेक्ट्रिक वाहनों के निमार्ता इन बैटरियों को बड़ी संख्या में चीन से आयात करते हैं, जहां से खराब इटर क्वॉलिटी वाली बैटरियां आती हैं, जिससे बैटरियां में आग लगने समेत कई दिक्कतें आती हैं। एक रिपोर्ट मुताबिक, चीन दो हज़ार इक्कीस में दुनिया में लिथियम-आॅयन बैटरियों का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर था और इस दौरान दुनिया की उन्यासी फीसदी लिथियम-आॅयन बैटरियां चीन में बनाई गईं। - कहा जाता है इसकी वजह थर्मल रनअवे है। थर्मल रनअवे प्रक्रिया बैटरी में ज्यादा तापमान की वजह से शुरू होती है। ये तब होती है, जब बैटरी के अंदर पैदा हुआ टेंपरेचर उसके आसपास के टेंपरेचर से ज्यादा हो जाता है, इससे और एनर्जी रिलीज होती है जो टेंपरेचर को और बढ़ा देती है, जिससे बैटरी में आग लग जाती है। इन जगहों पर ई-स्कूटरों पर लगी आग - पहली घटनाः पच्चीस मार्च को तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में हुई, जब ओकीनावा कंपनी के ई-स्कूटर को रात में चार्जिंग के लिए छोड़ देने के बाद अचानक उसमें आग लग गई। इससे एक पैंतालीस वर्षीय व्यक्ति और उसकी तेरह वर्षीय बेटी की दम घुटने से मौत हो गई। पुलिस ने शुरूआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट को बताया। - दूसरी घटनाः छब्बीस मार्च को पुणे में हुई, जहां ओला के एसएक प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक आग लग गई, इसका वीडियो आनलाइन वायरल हुआ था। ओला रएक प्रो को कंपनी ने पिछले साल लॉन्च किया था। - तीसरी घटनाः अट्ठाईस मार्च को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मणप्पराई में हुई, जहां ओकीनावा के ई-स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई। - चौथी घटनाः तीस मार्च को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हुई, जहां हैदराबाद के स्टार्टअप प्योर के लाल रंग के ई-स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई। क्यों लगी ई-स्कूटरों में आग? - भारत जैसे देश में जहां तापमान पैंतालीस डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है, वहां थर्मल रनअवे की वजह से बैटरियों का टेंपरेचर नब्बे-एक सौ डिग्री तक पहुंच सकता है, जिससे आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। भारत के मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं करने और विदेशों से आयात बैटरियों की वजह से आग लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। - वहीं अभी तक इन ई-स्कूटरों में आग लगने की वजह नहीं पता चल पायी है, लेकिन रिपोर्ट्स मुताबिक, इसकी सबसे प्रमुख वजह है इन स्कूटरों की बैटरियां। दरअसल, इनमें से ज्यादा ई-स्कूटरों में आग लगने के बाद उनकी बैटरियों से धुएं के उठते गुबार ने बैटरी की वजह से आग लगने की आशंकाओं को बल दिया। ई-स्कूटरों में कौन सी बैटरियां लगती हैं? - ई-स्कूटरों में लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल होता है। आजकल दुनियाभर में स्मार्टफोन से लेकर लैपटॉप और इलेक्ट्रिक कार से लेकर स्मार्टवॉच तक में इन्हीं बैटरियों का इस्तेमाल हो रहा है। ये बैटरियां अन्य बैटरियों की तुलना में ज्यादा ताकतवर और हल्की माना जाती हैं। हालांकि, इन बैटरियों से आग लगने का भी खतरा रहता है, जैसा कि ई-स्कूटरों में हाल के दिनों में नजर आया है। - बताया जाता है कि लिथियम-आयन बैटरियों को अन्य बैटरियों की तुलना में बेहतर बनाती हैं, वे हैं उसका हल्का होना, हाई एनर्जी डेंसिटी और रिचार्ज करने की क्षमता। इसके साथ ही लिथियम-आयन बैटरियां लेड एसिड बैटरियों की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक चलती हैं। एक लिथियम-आयन बैटरी आमतौर पर एक सौ पचास वॉट-आवर्स प्रति किलोग्राम स्टोर कर सकती है जबकि लेड-एसिड बैटरी आमतौर पर करीब पच्चीस वॉट-आवर्स प्रति किलोग्राम स्टोर कर सकती है। बैटरी में स्टोर हो सकने वाली एनर्जी को उसकी पावर कैपेसिटी कहते हैं। इससे बैटरी की क्षमता मापते हैं। इस पावर को आमतौर पर वॉट-ऑवर में व्यक्त करते हैं। - आप अगर वॉट-ऑवर को सीधे शब्दों में समझें तो एक लीथियम-आॅयन की एक किलोग्राम बैटरी में एक सौ पचास वॉट-आवर की इलेक्ट्रिसिटी स्टोर हो सकती है। वहीं एक लेड-एसिड बैटरी की एक किलोग्राम बैटरी पच्चीस वॉट-आॅवर की इलेक्ट्रिसिटी ही स्टोर कर सकती है। यानी जितनी इलेक्ट्रिसिटी एक किलोग्रामग्राम की लिथियम-आर्यन बैटरी स्टोर कर सकती है, उतनी एनर्जी के लिए एसिड-लेड बैटरी की छः किलोग्रामग्राम बैटरी की जरूरत पड़ेगी। - इसका मतलब है कि लिथियम-आर्यन बैटरियां अन्य बैटरियों की तुलना में ज्यादा एफिशिएंट होती हैं। यानी लिथियम-आर्यन बैटरियों से लैस इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को ज्यादा समय तक ड्राइव किया जा सकता है। वहीं, स्मार्टफोन में इन बैटरियों के इस्तेमाल से उसकी बैटरी लगभग पूरे दिन टिकेगी। - लिथियम-आर्यन बैटरियों की सबसे बड़ी खासियत हाई एनर्जी डेंसिटी है, यानी आम बैटरियों से ज्यादा एनर्जी। लेकिन यही बैटरी में खराबी की वजह भी हो सकती है। इन बैटरियों की हाई एनर्जी डेंसिटी का मतलब है कि ये सेल कुछ परिस्थितियों में अस्थिर हो सकते हैं, जो इसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। - एक्सपर्ट्स का मानना है कि लिथियम-आर्यन बैटरियां एक सुरक्षित आॅपरेटिंग लिमिट के अंदर सबसे अच्छे से काम करती हैं। इन बैटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस होता है। बीएमएस क्या है? - बीएमएस एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जो लिथियम-आयन बैटरी पैक में हर सेल से जुड़ा होता है। बीएमएस लगातार बैटरी के वोल्टेज और उसमें फ्लो होने वाले करंट को मापता रहता है। साथ ही बीएमएस कई टेंपरेचर सेंसर से लैस होता है, जो इसे बैटरी पैक के विभिन्न सेक्शन में टेंपरेचर के बारे में जानकारी देता है। यह सारा डेटा बीएमएस को बैटरी पैक के अन्य पैरामीटर्स की कैलकुलेशन में मदद करता है, जैसे चार्जिंग और डिस्चार्जिंग रेट, बैटरी लाइफ साइकिल और एफिशिएंसी। बीएमएस अगर ठीक से काम न करे तो बैटरी में आग लगने जैसी घटनाएं संभव हैं। इस तरह रखें ई-व्हीकल का ध्यान? कुछ बातों का ख्याल रखकर कंज्यूमर्स काफी हद तक आग लगने जैसे खतरे टाल सकते हैं। नमी चार्जर और बैटरी दोनों के लिए खतरनाक है, इसलिए अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल को इससे बचाएं। इलेक्ट्रिक व्हीकल को केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकर की ओर से रेकमेंड चार्जर से ही चार्ज करें। अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल को बहुत देर तक धूप में पार्क न करें। चार्जिंग के समय सावधान रहें, पहली बार चार्जिंग से पहले प्रॉसेस समझने के लिए एक्सपर्ट की मदद लें। इलेक्ट्रिक व्हीकल की ओवरचार्जिंग से बचें। चार्जिंग के लिए अच्छे सॉकेट और प्लग का इस्तेमाल करें। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल की मार्केट स्थिति ? सरकार ने साल दो हज़ार बारह में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान दो हज़ार बीस लान्च किया था। देश में दो हज़ार बीस-इक्कीस में बिकी कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा एक. तीन फीसदी था। दो हज़ार इक्कीस-बाईस में बिकी कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा बढ़कर एक. सात फीसदी हो गया। अब सरकार की दो हज़ार तीस तक आटो इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल का हिस्सा तीस फीसदी तक करने की योजना है। READ ALSO: Plastic in Human Blood जानिए, लोगों के खून तक कैसे पहुंच रहा प्लास्टिक, इससे कौन सी बीमारियों का है डर?
बहुत से निश्चितता के साथ कहना संभव है कि कईउनकी विशेषताओं से घरेलू वाइन स्टोर अलमारियों पर खड़े लोगों की तुलना में बेहतर हैं। सबसे पसंदीदा वाइन में से एक ब्लैककुरेंट पेय है। कठिन रूबी रंग, सुखद अद्वितीय स्वाद - इसकी तुलना लाल चमक से भी की जा सकती है। यद्यपि पारंपरिक शराब रस से बना है, घर में currant से शराब, जिसकी नुस्खा नीचे वर्णित है, कुछ अलग तरीके से किया जाता है। यदि आप इसे सामान्य तरीके से बनाते हैं, तो यह बहुत संतृप्त और आकर्षक हो जाएगा, तदनुसार, वास्तविक आनंद नहीं लाएगा। इसलिए, घर पर currants से एक अच्छी शराब प्राप्त करने के लिए, नुस्खा मनाया जाना चाहिए। 20 लीटर की एक बोतल के बारे में 2 की आवश्यकता हैकाला currant किलो किलो। बेरीज धोना जरूरी नहीं है, छोटे गोबर और अपरिपक्व बेरीज को हटाने के लिए इसे हल करना आवश्यक है। फिर currant एक बोतल में डाला जाता है और मीठे और गर्म पानी के साथ डाला जाता है। तो, एक तीन लीटर कंटेनर में, एक किलोग्राम चीनी को कवर किया जाना चाहिए और गैर-संक्षारक पानी के साथ डाला जाना चाहिए, पूरी तरह से भंग होने तक मिश्रित, जिसके बाद currant भरने के लिए। प्रक्रिया को 4 बार दोहराया जाना चाहिए। अंत में, हमारे पास ¾ 20 लीटर क्षमता है। उसके बाद, बोतल को पानी की मुहर के नीचे रखा जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि ऑक्सीजन घर में currant से उत्पादित शराब को प्रभावित नहीं करता है। नुस्खा आपको सिरका के साथ खत्म करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। कमरे का तापमान, कहाँ होगाकिण्वन की प्रक्रिया 22-24 डिग्री गर्मी होनी चाहिए। यदि यह कम है, तो वहां थोड़ा किण्वन होगा या यह बिल्कुल नहीं होगा, और यदि अधिक हो - तो शराब जल्दी से जीत जाएगा और किले हासिल नहीं करेगा। आवश्यक तापमान व्यवस्था के साथ, किण्वन 24 दिनों के लिए समाप्त होना चाहिए। एक ट्यूब में शराब की किण्वन के दौरान, जिसमें से एक छोर पानी के साथ एक कंटेनर में रखा जाता है, भागने वाली गैस के बुलबुले दिखाई देंगे। किण्वन के दौरान, शराब की एक बोतल प्रतिदिन हिलना चाहिए, इसे स्विंग करना। 2-3 दिनों के भीतर किण्वन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 10-15 वें दिन, किण्वन का सबसे सक्रिय चरण, धीरे-धीरे लुप्त होना, देखा जा सकता है। यदि आप फिजी वाइन चाहते हैं, तो पूरी तरह से किण्वित होने तक प्रतीक्षा न करें, आपको इसे देखना होगा। लगभग 15-20 मिनट में लगभग एक बार गैस बुलबुले को पानी में रखी ट्यूब छोड़नी चाहिए। यदि आप गैस के साथ शराब के लिए आकर्षित नहीं हैं, तो आपको इसे खत्म करने की जरूरत है। कभी-कभी इस तरह के पेय को एक क्रीम से शराब के रूप में तैयार करना मुश्किल हो सकता है, जिसमें नुस्खा में कई संशोधन होते हैं। हालांकि, एक गुणवत्ता उत्पाद प्राप्त करने के लिए, सभी जिम्मेदारी के साथ तैयारी प्रक्रिया से संपर्क करना आवश्यक है। आपके शराब को निर्धारित करने के बादतैयार है, इसे खमीर से हटा दिया जाना चाहिए, यानी बोतल के नीचे गिरने वाली बेरीज शराब से हटाना चाहिए। यह काफी सरल है। दूसरी समान क्षमता लें, जो साफ और सूखी होनी चाहिए, और जिस शराब स्थित है उस क्षमता से नीचे सेट करें। धीरे-धीरे, इसलिए लेने के लिए और तलछट पकड़ने के लिए नहीं, शराब को एक साफ बोतल में पंप करने के लिए ट्यूब का उपयोग करें। इसे एक कमरे में स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां तापमान +10 डिग्री से अधिक न हो (अधिमानतः, निश्चित रूप से, तहखाने में), और फिर पानी की मुहर के नीचे डाल दिया जाए। Currant से शराब के लिए नुस्खा अंततः किण्वन को रोकने के लिए, साथ ही नीचे तलछट को कम करने के लिए यह प्रदान करता है। 2 सप्ताह के बाद छोटे कंटेनर पर पेय डालना आवश्यक है। इस उद्देश्य के लिए, प्लास्टिक की बोतलें उपयुक्त हैं, हालांकि इन्हें लंबे भंडारण के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता है। लंबी अवधि के भंडारण के लिए, शराब कांच के बने पदार्थ में डाला जाता है और कसकर सील कर दिया जाता है। फिर आप घर पर currants से शराब के रूप में इस तरह के एक पेय के दीर्घकालिक भंडारण पर भरोसा कर सकते हैं।
बहुत से निश्चितता के साथ कहना संभव है कि कईउनकी विशेषताओं से घरेलू वाइन स्टोर अलमारियों पर खड़े लोगों की तुलना में बेहतर हैं। सबसे पसंदीदा वाइन में से एक ब्लैककुरेंट पेय है। कठिन रूबी रंग, सुखद अद्वितीय स्वाद - इसकी तुलना लाल चमक से भी की जा सकती है। यद्यपि पारंपरिक शराब रस से बना है, घर में currant से शराब, जिसकी नुस्खा नीचे वर्णित है, कुछ अलग तरीके से किया जाता है। यदि आप इसे सामान्य तरीके से बनाते हैं, तो यह बहुत संतृप्त और आकर्षक हो जाएगा, तदनुसार, वास्तविक आनंद नहीं लाएगा। इसलिए, घर पर currants से एक अच्छी शराब प्राप्त करने के लिए, नुस्खा मनाया जाना चाहिए। बीस लीटरटर की एक बोतल के बारे में दो की आवश्यकता हैकाला currant किलो किलो। बेरीज धोना जरूरी नहीं है, छोटे गोबर और अपरिपक्व बेरीज को हटाने के लिए इसे हल करना आवश्यक है। फिर currant एक बोतल में डाला जाता है और मीठे और गर्म पानी के साथ डाला जाता है। तो, एक तीन लीटर कंटेनर में, एक किलोग्राम चीनी को कवर किया जाना चाहिए और गैर-संक्षारक पानी के साथ डाला जाना चाहिए, पूरी तरह से भंग होने तक मिश्रित, जिसके बाद currant भरने के लिए। प्रक्रिया को चार बार दोहराया जाना चाहिए। अंत में, हमारे पास ¾ बीस लीटरटर क्षमता है। उसके बाद, बोतल को पानी की मुहर के नीचे रखा जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि ऑक्सीजन घर में currant से उत्पादित शराब को प्रभावित नहीं करता है। नुस्खा आपको सिरका के साथ खत्म करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। कमरे का तापमान, कहाँ होगाकिण्वन की प्रक्रिया बाईस-चौबीस डिग्री गर्मी होनी चाहिए। यदि यह कम है, तो वहां थोड़ा किण्वन होगा या यह बिल्कुल नहीं होगा, और यदि अधिक हो - तो शराब जल्दी से जीत जाएगा और किले हासिल नहीं करेगा। आवश्यक तापमान व्यवस्था के साथ, किण्वन चौबीस दिनों के लिए समाप्त होना चाहिए। एक ट्यूब में शराब की किण्वन के दौरान, जिसमें से एक छोर पानी के साथ एक कंटेनर में रखा जाता है, भागने वाली गैस के बुलबुले दिखाई देंगे। किण्वन के दौरान, शराब की एक बोतल प्रतिदिन हिलना चाहिए, इसे स्विंग करना। दो-तीन दिनों के भीतर किण्वन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। दस-पंद्रह वें दिन, किण्वन का सबसे सक्रिय चरण, धीरे-धीरे लुप्त होना, देखा जा सकता है। यदि आप फिजी वाइन चाहते हैं, तो पूरी तरह से किण्वित होने तक प्रतीक्षा न करें, आपको इसे देखना होगा। लगभग पंद्रह-बीस मिनट में लगभग एक बार गैस बुलबुले को पानी में रखी ट्यूब छोड़नी चाहिए। यदि आप गैस के साथ शराब के लिए आकर्षित नहीं हैं, तो आपको इसे खत्म करने की जरूरत है। कभी-कभी इस तरह के पेय को एक क्रीम से शराब के रूप में तैयार करना मुश्किल हो सकता है, जिसमें नुस्खा में कई संशोधन होते हैं। हालांकि, एक गुणवत्ता उत्पाद प्राप्त करने के लिए, सभी जिम्मेदारी के साथ तैयारी प्रक्रिया से संपर्क करना आवश्यक है। आपके शराब को निर्धारित करने के बादतैयार है, इसे खमीर से हटा दिया जाना चाहिए, यानी बोतल के नीचे गिरने वाली बेरीज शराब से हटाना चाहिए। यह काफी सरल है। दूसरी समान क्षमता लें, जो साफ और सूखी होनी चाहिए, और जिस शराब स्थित है उस क्षमता से नीचे सेट करें। धीरे-धीरे, इसलिए लेने के लिए और तलछट पकड़ने के लिए नहीं, शराब को एक साफ बोतल में पंप करने के लिए ट्यूब का उपयोग करें। इसे एक कमरे में स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां तापमान +दस डिग्री से अधिक न हो , और फिर पानी की मुहर के नीचे डाल दिया जाए। Currant से शराब के लिए नुस्खा अंततः किण्वन को रोकने के लिए, साथ ही नीचे तलछट को कम करने के लिए यह प्रदान करता है। दो सप्ताह के बाद छोटे कंटेनर पर पेय डालना आवश्यक है। इस उद्देश्य के लिए, प्लास्टिक की बोतलें उपयुक्त हैं, हालांकि इन्हें लंबे भंडारण के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता है। लंबी अवधि के भंडारण के लिए, शराब कांच के बने पदार्थ में डाला जाता है और कसकर सील कर दिया जाता है। फिर आप घर पर currants से शराब के रूप में इस तरह के एक पेय के दीर्घकालिक भंडारण पर भरोसा कर सकते हैं।
- 54 min ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! - Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही? फिल्म के लिए उन्होंने 'लार्ड ऑफ द रिंग्स' के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली है। उनका कहना है कि यह फिल्म स्पेशल इफेक्ट के मामले में फिल्म 'कृष' को भी मात दे देगी। बावेजा ने आईएएनएस से एक विशेष भेंटवार्ता में बताया, "आज का दर्शक मल्टीप्लेक्स मे जाने वाला बुद्धिमान दर्शक है वह तगड़ शरीर वाले सुगठित जंगली आदमी को नहीं देखना चाहता। " उन्होंने कहा, "फिल्म के रिलीज के बाद बालीवुड की लगभग दर्जन भर फिल्में इस विषय पर केंद्रित होंगी। दर्शकों को भी स्पेशल इफेक्ट वाली फिल्में ज्यादा प्रभावित करती हैं। यह भविष्य की भारतीय सिनेमा को एक आधार प्रदान करने वाली फिल्म होगी। " गौरतलब है कि फिल्म में अलग-अलग समय के दो युगों को समेटा गया है और बावेजा इस फिल्म से अपने बेटे हरमन बावेजा को लांच कर रहे हैं। सर्विस।
- चौवन मिनट ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! - Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही? फिल्म के लिए उन्होंने 'लार्ड ऑफ द रिंग्स' के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली है। उनका कहना है कि यह फिल्म स्पेशल इफेक्ट के मामले में फिल्म 'कृष' को भी मात दे देगी। बावेजा ने आईएएनएस से एक विशेष भेंटवार्ता में बताया, "आज का दर्शक मल्टीप्लेक्स मे जाने वाला बुद्धिमान दर्शक है वह तगड़ शरीर वाले सुगठित जंगली आदमी को नहीं देखना चाहता। " उन्होंने कहा, "फिल्म के रिलीज के बाद बालीवुड की लगभग दर्जन भर फिल्में इस विषय पर केंद्रित होंगी। दर्शकों को भी स्पेशल इफेक्ट वाली फिल्में ज्यादा प्रभावित करती हैं। यह भविष्य की भारतीय सिनेमा को एक आधार प्रदान करने वाली फिल्म होगी। " गौरतलब है कि फिल्म में अलग-अलग समय के दो युगों को समेटा गया है और बावेजा इस फिल्म से अपने बेटे हरमन बावेजा को लांच कर रहे हैं। सर्विस।
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर कर विधायक बायरन बिस्वास की विधायकी तत्काल रद्द करने की मांग की गई। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा है। तीन महीने पहले मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में बिस्वास को वाम मोर्चा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुना गया था। हालांकि, पिछले सप्ताह ही वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। जनहित याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय की वरिष्ठ वकील सौम्या शुभ्रा रॉय ने दायर की है। उन्होंने इसी मांग के साथ 1 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमन बंदोपाध्याय और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालयों को पत्र भेजा था। अंत में दोनों कार्यालयों में से किसी से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। जनहित याचिका में रॉय ने तर्क दिया है कि चूंकि सागरदिघी के अधिकांश मतदाताओं ने बिस्वास को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुना था, इसलिए उन्होंने तृणमूल में शामिल होकर उनकी भावनाओं को धोखा दिया और इसलिए उनके विधायक बने रहने का कोई आधार नहीं है। इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। हालाँकि, बिस्वास दावा कर रहे हैं कि चूंकि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कांग्रेस के अकेले प्रतिनिधि थे, इसलिए दल-बदल कानून उनके लिए लागू नहीं होता है। साथ ही, यदि इस्तीफा भी देना पड़े तो उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में सागरदिघी से फिर से जीत का भरोसा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दिग्गज पार्टी सांसद अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया था कि अगर उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में अपनी जीत का भरोसा है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और फिर से चुनाव लड़ना चाहिए।
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर कर विधायक बायरन बिस्वास की विधायकी तत्काल रद्द करने की मांग की गई। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा है। तीन महीने पहले मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में बिस्वास को वाम मोर्चा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुना गया था। हालांकि, पिछले सप्ताह ही वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। जनहित याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय की वरिष्ठ वकील सौम्या शुभ्रा रॉय ने दायर की है। उन्होंने इसी मांग के साथ एक जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमन बंदोपाध्याय और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालयों को पत्र भेजा था। अंत में दोनों कार्यालयों में से किसी से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। जनहित याचिका में रॉय ने तर्क दिया है कि चूंकि सागरदिघी के अधिकांश मतदाताओं ने बिस्वास को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुना था, इसलिए उन्होंने तृणमूल में शामिल होकर उनकी भावनाओं को धोखा दिया और इसलिए उनके विधायक बने रहने का कोई आधार नहीं है। इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। हालाँकि, बिस्वास दावा कर रहे हैं कि चूंकि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कांग्रेस के अकेले प्रतिनिधि थे, इसलिए दल-बदल कानून उनके लिए लागू नहीं होता है। साथ ही, यदि इस्तीफा भी देना पड़े तो उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में सागरदिघी से फिर से जीत का भरोसा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और दिग्गज पार्टी सांसद अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया था कि अगर उन्हें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में अपनी जीत का भरोसा है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और फिर से चुनाव लड़ना चाहिए।
अब आप अपने मोबाइल से ही अपने बैंक खाते से पैसे किसी को भी ट्रांसफर करेंगे। आईसीआईसीआई के अलावा एचडीएफसी बैंक ने भी अपनी मोबाइल बैंकिंग सेवा की शुरुआत कर दी है। बैंक अब मोबाइल कामर्स नेटवर्क एनजीपे के जरिए अपने ग्राहकों को फंड ट्रांसफर की सुविधा मुहैया कराएगा। बैंक का दावा है कि एक ही प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग के जरिए सभी बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने वाला वह पहला बैंक है। इसमें बैंक खातों के लेनदेन के अलावा, शॉपिंग, टिकटिंग और पेमेंन्ट भी मोबाइल के जरिए ही किए जा सकेंगे। इसके लिए ग्राहक को एनजीपे का इस्तेमाल करना होगा जो एक तरह का सॉफ्टवेयर है जिसे मोबाइल में डाउनलोड करना होगा। एनजीपे सभी के लिए मुफ्त है और इसे एंट्री लेवल के जीपीआरएस मोबाइल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल एचडीएफसी के वो ग्राहक कर सकेंगे जिन्होने नेट बैंकिंग सेवा के तहत इस सुविधा के लिए खुद को पंजीकृत किया है। ऐसे ग्राहक इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर तुरंत ही पैसा ट्रांसफर करना शुरू कर सकते हैं। एचडीएफसी बैंक के ही किसी खाते में पैसा ट्रांसफर रियल टाइम में यानी हाथोहाथ हो जाएगा जबकि दूसरे किसी बैंक के खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए 48 घंटे का समय लग सकता है। एचडीएफसी बैंक ने पिछले साल से ही एनजीपीएवाई के साथ मिलकर अपने ग्राहकों को हवाई, रेलवे और मूवी टिकट उपलब्ध करवा रहा है। अगले महीने के प्रारंभ से अब इस बैंक के उपभोक्ता इसी के जरिए विभिन्न म्युचुअल फंडों की खरीद बिक्री भी कर थी।
अब आप अपने मोबाइल से ही अपने बैंक खाते से पैसे किसी को भी ट्रांसफर करेंगे। आईसीआईसीआई के अलावा एचडीएफसी बैंक ने भी अपनी मोबाइल बैंकिंग सेवा की शुरुआत कर दी है। बैंक अब मोबाइल कामर्स नेटवर्क एनजीपे के जरिए अपने ग्राहकों को फंड ट्रांसफर की सुविधा मुहैया कराएगा। बैंक का दावा है कि एक ही प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग के जरिए सभी बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने वाला वह पहला बैंक है। इसमें बैंक खातों के लेनदेन के अलावा, शॉपिंग, टिकटिंग और पेमेंन्ट भी मोबाइल के जरिए ही किए जा सकेंगे। इसके लिए ग्राहक को एनजीपे का इस्तेमाल करना होगा जो एक तरह का सॉफ्टवेयर है जिसे मोबाइल में डाउनलोड करना होगा। एनजीपे सभी के लिए मुफ्त है और इसे एंट्री लेवल के जीपीआरएस मोबाइल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल एचडीएफसी के वो ग्राहक कर सकेंगे जिन्होने नेट बैंकिंग सेवा के तहत इस सुविधा के लिए खुद को पंजीकृत किया है। ऐसे ग्राहक इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर तुरंत ही पैसा ट्रांसफर करना शुरू कर सकते हैं। एचडीएफसी बैंक के ही किसी खाते में पैसा ट्रांसफर रियल टाइम में यानी हाथोहाथ हो जाएगा जबकि दूसरे किसी बैंक के खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए अड़तालीस घंटाटे का समय लग सकता है। एचडीएफसी बैंक ने पिछले साल से ही एनजीपीएवाई के साथ मिलकर अपने ग्राहकों को हवाई, रेलवे और मूवी टिकट उपलब्ध करवा रहा है। अगले महीने के प्रारंभ से अब इस बैंक के उपभोक्ता इसी के जरिए विभिन्न म्युचुअल फंडों की खरीद बिक्री भी कर थी।
संगरूर। पंजाब के संगरूर जिले के कस्बा लौंगोवाल में स्कूल से बच्चों को घर छोड़ने जा रही वैन में आग लगने से चार बच्चों के जिंदा जल जाने का दर्दनाक मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। वहीं मृत बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बदहवासी की हालत में हैं। जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रही एक वैन में अचानक आग लग गई। बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग दौड़े आए और उन्होंने बच्चों को स्कूल वैन से बाहर निकालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरी वैन को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में कई बच्चे झुलस गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। खबर मिलते ही फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची, तब तक लोग बच्चों को बाहर निकाल चुके थे। बताया जा रहा है कि वैन में 12 बच्चे सवार थे। मृतकों की उम्र चार से पांच साल के बीच थी। स्कूल वैन में आग लगने से जिंदा जलने से चार बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शोक जताया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है। मृत बच्चों के परिजनों के दर्द का अंदाजा में लगा सकता हूं। मैंने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, दोषियों को सजा जरूर दी जाएगी। किस स्तर पर कैसी लापरवाही बरती गई, इसकी पूरी जांच करके न्याय दिलाया जाएगा।
संगरूर। पंजाब के संगरूर जिले के कस्बा लौंगोवाल में स्कूल से बच्चों को घर छोड़ने जा रही वैन में आग लगने से चार बच्चों के जिंदा जल जाने का दर्दनाक मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। वहीं मृत बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बदहवासी की हालत में हैं। जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रही एक वैन में अचानक आग लग गई। बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग दौड़े आए और उन्होंने बच्चों को स्कूल वैन से बाहर निकालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरी वैन को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में कई बच्चे झुलस गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। खबर मिलते ही फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची, तब तक लोग बच्चों को बाहर निकाल चुके थे। बताया जा रहा है कि वैन में बारह बच्चे सवार थे। मृतकों की उम्र चार से पांच साल के बीच थी। स्कूल वैन में आग लगने से जिंदा जलने से चार बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शोक जताया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है। मृत बच्चों के परिजनों के दर्द का अंदाजा में लगा सकता हूं। मैंने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, दोषियों को सजा जरूर दी जाएगी। किस स्तर पर कैसी लापरवाही बरती गई, इसकी पूरी जांच करके न्याय दिलाया जाएगा।
मेरठ छावनी के लालकुर्ती फव्वारा चौक बाजार में जलभराव की समस्या से व्यापार चौपट हो गया है। व्यापारी ने कई बार मनोनीत सदस्य व छावनी के अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। सोमवार को फव्वारा चौक की 72 दुकानें बंद कर धरना दिया। व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे छावनी परिषद के मनोनीत सदस्य डॉ सतीश चंद्र शर्मा के घर के बाहर बैठकर धरना देंगे। लालकुर्ती फव्वारा चौक के व्यापार संघ के महामंत्री कुलदीप बत्रा ने बताया कि छावनी में पानी की निकासी की समस्या की वजह से जलभराव हो जाता है। नालियों में बह रहे गंदे पानी की वजह से ग्राहक बाजार नहीं आते है। जलभराव की समस्या से व्यापारियों ने छावनी परिषद के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया था। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर समस्या के निदान का आश्वासन दिया था। लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद समाधान नहीं हो सका। छावनी परिषद की अनदेखी के चलते सोमवार को 72 दुकानें बंद कर व्यापारियों ने धरना दिया। फव्वारा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष योगेश यादव ने बताया, " बाजार में हलवाई, ज्वैलर्स, हार्डवेयर, सैलून, मेडिकल स्टोर समेत कपड़ों की दुकान है। प्रतिदिन एक दुकानदार सामान्य दिनों में दो से 5000 रुपये कमाता है। लेकिन जलभराव की समस्या से कमाई आधी हो गई है। " व्यापारी नेता सतीश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर सतीश चंद शर्मा छावनी परिषद के मनोनीत सदस्य हैं। उन्हें भी समस्या से अवगत कराया गया। लेकिन उन्होंने भी आश्वासन देकर व्यापारियों को टरका दिया। धरना स्थल पर जब सतीश चंद शर्मा पहुंचे तो व्यापारियों ने उनका विरोध किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मेरठ छावनी के लालकुर्ती फव्वारा चौक बाजार में जलभराव की समस्या से व्यापार चौपट हो गया है। व्यापारी ने कई बार मनोनीत सदस्य व छावनी के अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। सोमवार को फव्वारा चौक की बहत्तर दुकानें बंद कर धरना दिया। व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे छावनी परिषद के मनोनीत सदस्य डॉ सतीश चंद्र शर्मा के घर के बाहर बैठकर धरना देंगे। लालकुर्ती फव्वारा चौक के व्यापार संघ के महामंत्री कुलदीप बत्रा ने बताया कि छावनी में पानी की निकासी की समस्या की वजह से जलभराव हो जाता है। नालियों में बह रहे गंदे पानी की वजह से ग्राहक बाजार नहीं आते है। जलभराव की समस्या से व्यापारियों ने छावनी परिषद के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया था। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर समस्या के निदान का आश्वासन दिया था। लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद समाधान नहीं हो सका। छावनी परिषद की अनदेखी के चलते सोमवार को बहत्तर दुकानें बंद कर व्यापारियों ने धरना दिया। फव्वारा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष योगेश यादव ने बताया, " बाजार में हलवाई, ज्वैलर्स, हार्डवेयर, सैलून, मेडिकल स्टोर समेत कपड़ों की दुकान है। प्रतिदिन एक दुकानदार सामान्य दिनों में दो से पाँच हज़ार रुपयापये कमाता है। लेकिन जलभराव की समस्या से कमाई आधी हो गई है। " व्यापारी नेता सतीश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर सतीश चंद शर्मा छावनी परिषद के मनोनीत सदस्य हैं। उन्हें भी समस्या से अवगत कराया गया। लेकिन उन्होंने भी आश्वासन देकर व्यापारियों को टरका दिया। धरना स्थल पर जब सतीश चंद शर्मा पहुंचे तो व्यापारियों ने उनका विरोध किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वायनाड (केरल), 11 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने राज्य में आई भयानक बाढ़ से अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक शख्स के परिजन को चार लाख रुपये मुआवाजा देने की शनिवार को घोषणा की। बुधवार से हो रही भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से अभी तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। ये मौतें इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम जिलों में हुई है। विजयन ने पिछले चार दिनों में भारी बारिश के कारण हुई हानि और विनाश पर चर्चा के लिए यहां आयोजित एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इससे पहले विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला, मुख्य सचिव टॉम जोस और पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के साथ सर्वाधिक प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। इडुक्की में उतरने में विफल रहने के बाद यह दल वायनाड पहुंचा, जहां एक बैठक में उन्होंने अपना घर खोने वाले सभी लोगों को भी चार लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। साथ ही अपना घर और अन्य संपत्तियां खोने वालों को 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। विजयन ने कहा, राहत शिविरों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 3,800 रुपये दिए जाएंगे। चेन्निथला ने वायनाड में बैठक के बाद मीडिया से कहा कि समय की जरूरत चिकित्सा शिविर हैं। वायनाड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है। जिले के करीब 10 हजार लोग 200 राहत शिविरों में रह रहे हैं। विजयन और उनकी टीम ने शिविरों का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें सभी तरह की मदद व समर्थन का वादा किया। वायनाड से विजयन और उनकी टीम कोच्चि रवाना हुई।
वायनाड , ग्यारह अगस्त । केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने राज्य में आई भयानक बाढ़ से अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक शख्स के परिजन को चार लाख रुपये मुआवाजा देने की शनिवार को घोषणा की। बुधवार से हो रही भारी बारिश के कारण आई बाढ़ से अभी तक सत्ताईस लोगों की मौत हो चुकी है। ये मौतें इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम जिलों में हुई है। विजयन ने पिछले चार दिनों में भारी बारिश के कारण हुई हानि और विनाश पर चर्चा के लिए यहां आयोजित एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इससे पहले विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला, मुख्य सचिव टॉम जोस और पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के साथ सर्वाधिक प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। इडुक्की में उतरने में विफल रहने के बाद यह दल वायनाड पहुंचा, जहां एक बैठक में उन्होंने अपना घर खोने वाले सभी लोगों को भी चार लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। साथ ही अपना घर और अन्य संपत्तियां खोने वालों को दस लाख रुपये देने की घोषणा की। विजयन ने कहा, राहत शिविरों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को तीन,आठ सौ रुपयापये दिए जाएंगे। चेन्निथला ने वायनाड में बैठक के बाद मीडिया से कहा कि समय की जरूरत चिकित्सा शिविर हैं। वायनाड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है। जिले के करीब दस हजार लोग दो सौ राहत शिविरों में रह रहे हैं। विजयन और उनकी टीम ने शिविरों का दौरा किया और लोगों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें सभी तरह की मदद व समर्थन का वादा किया। वायनाड से विजयन और उनकी टीम कोच्चि रवाना हुई।
अथ हैन श्रोत्रमुवाच यदहः संपदस्मि त्वं तत्संपदसीत्यथ हैनं मन उवाच यदहमायतनमस्मि त्वं तदायतनमसीति ॥ १४ ॥ फिर उस श्रोत्र ने कहा कि 'मैं जो सम्पद्' (श्रेष्ठ सम्पत्ति) हूँ, सो वह सम्पद् आप ही हैं। (इसके बाद) उस मुख्य प्राण से मन ने कहा- 'मैं जो आयतन (आश्रय) हूँ, वह आश्रय आप ही हैं ॥ १४ ॥ न वै वाचो न चक्षूषि न श्रोत्राणि न मनासीत्याचक्षते प्राणा इत्येवाचक्षते प्राणो ह्येवैतानि सर्वाणि भवति ॥ १५ ॥ इसलिए लोक में वाक् आदि समस्त इन्द्रियों को न वाणी, न नेत्र, न श्रोत्र और न ही मन; बल्कि सबको 'प्राण' नाम से ही सम्बोधित करते हैं, क्योंकि ये सभी प्राण ही हैं ॥ १५ ॥ स होवाच किं मेऽन्नं भविष्यतीति यत्किंचिदिदमा श्वभ्य आ शकुनिभ्य इति होचुस्तद्वा एतदनस्यान्नमनो ह वै नाम प्रत्यक्षं न ह वा एवंविदि किंचनानन्नं भवतीति ॥ १ ॥ उस मुख्य प्राण ने प्रश्न किया कि मेरा अन्न क्या होगा ? तब वाक् आदि इन्द्रियों ने उत्तर देते हुए कहा'कुत्तों और पक्षियों से लेकर सभी प्राणियों का यह जो कुछ भी अन्न है, वह सब तुम्हारा ही है। 'अन्' यह प्राण का नाम प्रसिद्ध है। इस प्रकार जानने वाले के लिए कुछ भी अभक्ष्य नहीं होता है ॥ १ ॥ [ प्राणियों में जब तक प्राण रहते हैं, तभी तक उन्हें अन्न की आवश्यकता पड़ती है। प्राण जाते ही अन्न की माँग समाप्त हो जाती है, इसीलिए सारे अन्न प्राण के लिए ही हैं । ] स होवाच किं मे वासो भविष्यतीत्याप इति होचुस्तस्माद्वा एतदशिष्यन्तः पुरस्ताच्चोपरिष्टाच्चाद्भिः परिदधति लम्भुको ह वासो भवत्यननो ह भवति ॥ २ ॥ उस मुख्य प्राण ने पुनः प्रश्न किया कि 'मेरा वास (वस्त्र ) क्या होगा ?' तब वाक् आदि इन्द्रियों ने कहा -'जल'। (प्राण को) भोजन करने से पूर्व और पश्चात् आच्छादित करते हैं । ( ऐसा करने से ) वह वस्त्र धारण करने वाला और अनग्न होता है ॥ २ ॥ तद्वैतत्सत्यकामो जाबालो गोश्रुतये वैयाघ्रपद्यायोक्त्वोवाच यद्यप्येतच्छुष्काय स्थाणवे ब्रूयाज्जायेरन्नेवास्मिञ्छाखाः प्ररोहेयुः पलाशानीति ॥ ३॥ इस प्राणोपासना पद्धति का विवरण सत्यकाम जाबाल ने व्याघ्रपद के पुत्र गोश्रुति नामक वैयाघ्रपद को सुनाया- 'यदि कोई इस प्राणोपासना को शुष्क ठूंठ से भी कहेगा, तो उसमें भी शाखाएँ उत्पन्न हो जाएँगी और पत्ते प्रस्फुटित हो आएँगे ।" ॥ ३ ॥ मन्त्र क्र० १ में प्राण प्रक्रिया को जानने वाले तथा क्र०३ में सुनने वाले को असाधारण लाभ प्राप्त होने की बात कही गयी है। उस काल में जानने का अर्थ उस प्राण प्रक्रिया को चलाने की क्षमता होना तथा सुनने का अर्थ उस प्राण प्रक्रिया को आत्मसात् करना ही रहा होगा। उसी स्थिति में किसी अन्न से पोषण पाने तथा सूखे ठूंठ में भी नये प्राण का संचार होने की बात सिद्ध होती है। ] अथ यदि महज्जिगमिषेदमावास्यायां दीक्षित्वा पौर्णमास्याः रात्रौ सर्वौषधस्य मन्थं दधिमधुनोरुपमथ्य ज्येष्ठाय श्रेष्ठाय स्वाहेत्यनावाज्यस्य हुत्वा मन्थे संपातमवनयेत् ॥ ४ ॥
अथ हैन श्रोत्रमुवाच यदहः संपदस्मि त्वं तत्संपदसीत्यथ हैनं मन उवाच यदहमायतनमस्मि त्वं तदायतनमसीति ॥ चौदह ॥ फिर उस श्रोत्र ने कहा कि 'मैं जो सम्पद्' हूँ, सो वह सम्पद् आप ही हैं। उस मुख्य प्राण से मन ने कहा- 'मैं जो आयतन हूँ, वह आश्रय आप ही हैं ॥ चौदह ॥ न वै वाचो न चक्षूषि न श्रोत्राणि न मनासीत्याचक्षते प्राणा इत्येवाचक्षते प्राणो ह्येवैतानि सर्वाणि भवति ॥ पंद्रह ॥ इसलिए लोक में वाक् आदि समस्त इन्द्रियों को न वाणी, न नेत्र, न श्रोत्र और न ही मन; बल्कि सबको 'प्राण' नाम से ही सम्बोधित करते हैं, क्योंकि ये सभी प्राण ही हैं ॥ पंद्रह ॥ स होवाच किं मेऽन्नं भविष्यतीति यत्किंचिदिदमा श्वभ्य आ शकुनिभ्य इति होचुस्तद्वा एतदनस्यान्नमनो ह वै नाम प्रत्यक्षं न ह वा एवंविदि किंचनानन्नं भवतीति ॥ एक ॥ उस मुख्य प्राण ने प्रश्न किया कि मेरा अन्न क्या होगा ? तब वाक् आदि इन्द्रियों ने उत्तर देते हुए कहा'कुत्तों और पक्षियों से लेकर सभी प्राणियों का यह जो कुछ भी अन्न है, वह सब तुम्हारा ही है। 'अन्' यह प्राण का नाम प्रसिद्ध है। इस प्रकार जानने वाले के लिए कुछ भी अभक्ष्य नहीं होता है ॥ एक ॥ [ प्राणियों में जब तक प्राण रहते हैं, तभी तक उन्हें अन्न की आवश्यकता पड़ती है। प्राण जाते ही अन्न की माँग समाप्त हो जाती है, इसीलिए सारे अन्न प्राण के लिए ही हैं । ] स होवाच किं मे वासो भविष्यतीत्याप इति होचुस्तस्माद्वा एतदशिष्यन्तः पुरस्ताच्चोपरिष्टाच्चाद्भिः परिदधति लम्भुको ह वासो भवत्यननो ह भवति ॥ दो ॥ उस मुख्य प्राण ने पुनः प्रश्न किया कि 'मेरा वास क्या होगा ?' तब वाक् आदि इन्द्रियों ने कहा -'जल'। भोजन करने से पूर्व और पश्चात् आच्छादित करते हैं । वह वस्त्र धारण करने वाला और अनग्न होता है ॥ दो ॥ तद्वैतत्सत्यकामो जाबालो गोश्रुतये वैयाघ्रपद्यायोक्त्वोवाच यद्यप्येतच्छुष्काय स्थाणवे ब्रूयाज्जायेरन्नेवास्मिञ्छाखाः प्ररोहेयुः पलाशानीति ॥ तीन॥ इस प्राणोपासना पद्धति का विवरण सत्यकाम जाबाल ने व्याघ्रपद के पुत्र गोश्रुति नामक वैयाघ्रपद को सुनाया- 'यदि कोई इस प्राणोपासना को शुष्क ठूंठ से भी कहेगा, तो उसमें भी शाखाएँ उत्पन्न हो जाएँगी और पत्ते प्रस्फुटित हो आएँगे ।" ॥ तीन ॥ मन्त्र क्रशून्य एक में प्राण प्रक्रिया को जानने वाले तथा क्रतीन में सुनने वाले को असाधारण लाभ प्राप्त होने की बात कही गयी है। उस काल में जानने का अर्थ उस प्राण प्रक्रिया को चलाने की क्षमता होना तथा सुनने का अर्थ उस प्राण प्रक्रिया को आत्मसात् करना ही रहा होगा। उसी स्थिति में किसी अन्न से पोषण पाने तथा सूखे ठूंठ में भी नये प्राण का संचार होने की बात सिद्ध होती है। ] अथ यदि महज्जिगमिषेदमावास्यायां दीक्षित्वा पौर्णमास्याः रात्रौ सर्वौषधस्य मन्थं दधिमधुनोरुपमथ्य ज्येष्ठाय श्रेष्ठाय स्वाहेत्यनावाज्यस्य हुत्वा मन्थे संपातमवनयेत् ॥ चार ॥
ताजनगरी में चमत्कार हो गया। यहां चिकित्सकों ने ट्रांसजेंडर का आपरेशन कर बिटिया का रूप दे दिया गया। छह घंटे तक चले इस बेहद जटिल आपरेशन के बाद डाक्टरों को कामयाबी मिली। आगरा में इस चमत्कार को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। खास तौर पर तब, जब दिल्ली के बड़े और महंगे हास्पिटलों से निराश होकर दंपति आगरा आया था। कमला नगर के गीता मेडिकेयर सेंटर पर तीन महीने पहले पड़ोसी जिले के दंपति डेढ़ साल के बच्चे को लेकर आए थे। बच्चा स्वस्थ था, बीमारी पूछी तो झिझकते हुए दंपति ने डाक्टरों को असलियत बताई, बच्चा ट्रांसजेंडर था। पीडियाट्रिक सर्जन डा. विक्रम अग्रवाल ने बच्चे का परीक्षण किया तो बच्चेदानी, योनि मार्ग, लिंग (अविकसित) मिला। डाक्टर ने दंपति के सामने बेटी के रूप में सफलता मिलने की बात रखी। हामी मिलते ही डाक्टर ने आपरेशन की तैयारियां शुरू कर दी। एक्सेर-अल्ट्रासाउंड, रक्त समेत तमाम जांच के बाद आपरेशन का दिन तय हुआ। सात दिन पहले डा. विक्रम और उनकी टीम ने आपरेशन कर बिटिया का रूप दिया। अब दंपति तो खुश हैं, डाक्टरों के चेहरे पर भी विजयी मुस्कान देखते ही बन रही है। डा. विक्रम बताते हैं, परीक्षण से पता चला कि बच्चे का वजाइना पांच सेमी अंदर था। अमूमन अभी तक हुए आपरेशन में ये स्थिति 2-3 सेमी तक ही रही। अन्य वरिष्ठ सर्जनों से चर्चा की, जिसमें खतरा भी बताया। दंपति के विश्वास से हौसला मिला और नतीजा सामने है। डा. विक्रम बताते हैं कि आपरेशन के बाद बच्ची सामान्य जीवन जी सकेगी। वैवाहिक संबंध भी सामान्य रहेंगे। यहां तक कि प्राकृतिक रूप से मासिक धर्म भी होगा। आपरेशन के बाद दंपति ने डाक्टर को भगवान मानते हुए कोटि-कोटि आभार जताया। भावुक मां बताती हैं कि किस तरह डेढ़ साल गुजारे, पूछिए मत। मोहल्ले-पड़ोसी छोड़ो अपनों तक से छिपाकर रखा। रिश्तेदारी तक छूट गई। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
ताजनगरी में चमत्कार हो गया। यहां चिकित्सकों ने ट्रांसजेंडर का आपरेशन कर बिटिया का रूप दे दिया गया। छह घंटे तक चले इस बेहद जटिल आपरेशन के बाद डाक्टरों को कामयाबी मिली। आगरा में इस चमत्कार को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। खास तौर पर तब, जब दिल्ली के बड़े और महंगे हास्पिटलों से निराश होकर दंपति आगरा आया था। कमला नगर के गीता मेडिकेयर सेंटर पर तीन महीने पहले पड़ोसी जिले के दंपति डेढ़ साल के बच्चे को लेकर आए थे। बच्चा स्वस्थ था, बीमारी पूछी तो झिझकते हुए दंपति ने डाक्टरों को असलियत बताई, बच्चा ट्रांसजेंडर था। पीडियाट्रिक सर्जन डा. विक्रम अग्रवाल ने बच्चे का परीक्षण किया तो बच्चेदानी, योनि मार्ग, लिंग मिला। डाक्टर ने दंपति के सामने बेटी के रूप में सफलता मिलने की बात रखी। हामी मिलते ही डाक्टर ने आपरेशन की तैयारियां शुरू कर दी। एक्सेर-अल्ट्रासाउंड, रक्त समेत तमाम जांच के बाद आपरेशन का दिन तय हुआ। सात दिन पहले डा. विक्रम और उनकी टीम ने आपरेशन कर बिटिया का रूप दिया। अब दंपति तो खुश हैं, डाक्टरों के चेहरे पर भी विजयी मुस्कान देखते ही बन रही है। डा. विक्रम बताते हैं, परीक्षण से पता चला कि बच्चे का वजाइना पांच सेमी अंदर था। अमूमन अभी तक हुए आपरेशन में ये स्थिति दो-तीन सेमी तक ही रही। अन्य वरिष्ठ सर्जनों से चर्चा की, जिसमें खतरा भी बताया। दंपति के विश्वास से हौसला मिला और नतीजा सामने है। डा. विक्रम बताते हैं कि आपरेशन के बाद बच्ची सामान्य जीवन जी सकेगी। वैवाहिक संबंध भी सामान्य रहेंगे। यहां तक कि प्राकृतिक रूप से मासिक धर्म भी होगा। आपरेशन के बाद दंपति ने डाक्टर को भगवान मानते हुए कोटि-कोटि आभार जताया। भावुक मां बताती हैं कि किस तरह डेढ़ साल गुजारे, पूछिए मत। मोहल्ले-पड़ोसी छोड़ो अपनों तक से छिपाकर रखा। रिश्तेदारी तक छूट गई। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
शिखर धवन ने कहा है कि वर्ल्ड कप 2023 में रोहित शर्मा पर नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने 2019 में भारत के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। शिखर धवन (Shikhar Dhawan) 2019 में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए टीम का हिस्सा थे। हालांकि इस साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिए वो टीम में नहीं होंगे इस बात की पूरी संभावना है। वहीं अब धवन ने अपनी साथ बल्लेबाज और भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा पर सभी की नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने 2019 में भारत के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। शिखर धवन ने कहा कि, "वास्तव में यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि शुभमन गिल वर्ल्ड कप में कैसा प्रदर्शन करते हैं। एक और बल्लेबाज जिस पर नजर रहेगी वह रोहित शर्मा होंगे क्योंकि उन्होंने पिछले वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया था।" रोहित 2019 में इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप पर थे। उन्होंने 9 मैचों में 81 की औसत से 648 रन अपने खाते में जोड़े है। इस दौरान उनके बल्ले से 5 शतक और एक अर्धशतक देखने को मिला है। श्रेयस अय्यर की फिटनेस पर सवालिया निशान के साथ, वर्ल्ड कप से पहले भारतीय वनडे सेट-अप में नंबर चार की पोजीशन पर सवाल उठ रहे हैं। रोहित ने भी इस बात को माना है। नंबर 4 पर सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन दावेदार हैं जबकि रविचंद्रन अश्विन को लगता है कि युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा उस पोजीशन पर एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इस चीज पर शिखर ने कहा कि, "मैं चौथे नंबर पर सूर्या के साथ जाऊंगा क्योंकि वह एक अनुभवी खिलाड़ी है और वह कुछ समय से इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे है।" वर्ल्ड कप में भारत की चांसेस पर उन्होंने कहा, "हमें एक बहुत अच्छी टीम मिली है जिसमें अनुभव और युवाओं का सही मिक्सचर है। हमें घरेलू फायदा मिलेगा। हम मैदान और पिचों को जानते हैं और यह बहुत काम आने वाला है।"
शिखर धवन ने कहा है कि वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस में रोहित शर्मा पर नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने दो हज़ार उन्नीस में भारत के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। शिखर धवन दो हज़ार उन्नीस में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए टीम का हिस्सा थे। हालांकि इस साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिए वो टीम में नहीं होंगे इस बात की पूरी संभावना है। वहीं अब धवन ने अपनी साथ बल्लेबाज और भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा पर सभी की नजरें रहेंगी क्योंकि उन्होंने दो हज़ार उन्नीस में भारत के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। शिखर धवन ने कहा कि, "वास्तव में यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि शुभमन गिल वर्ल्ड कप में कैसा प्रदर्शन करते हैं। एक और बल्लेबाज जिस पर नजर रहेगी वह रोहित शर्मा होंगे क्योंकि उन्होंने पिछले वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया था।" रोहित दो हज़ार उन्नीस में इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप पर थे। उन्होंने नौ मैचों में इक्यासी की औसत से छः सौ अड़तालीस रन अपने खाते में जोड़े है। इस दौरान उनके बल्ले से पाँच शतक और एक अर्धशतक देखने को मिला है। श्रेयस अय्यर की फिटनेस पर सवालिया निशान के साथ, वर्ल्ड कप से पहले भारतीय वनडे सेट-अप में नंबर चार की पोजीशन पर सवाल उठ रहे हैं। रोहित ने भी इस बात को माना है। नंबर चार पर सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन दावेदार हैं जबकि रविचंद्रन अश्विन को लगता है कि युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा उस पोजीशन पर एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इस चीज पर शिखर ने कहा कि, "मैं चौथे नंबर पर सूर्या के साथ जाऊंगा क्योंकि वह एक अनुभवी खिलाड़ी है और वह कुछ समय से इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे है।" वर्ल्ड कप में भारत की चांसेस पर उन्होंने कहा, "हमें एक बहुत अच्छी टीम मिली है जिसमें अनुभव और युवाओं का सही मिक्सचर है। हमें घरेलू फायदा मिलेगा। हम मैदान और पिचों को जानते हैं और यह बहुत काम आने वाला है।"
वीवो ने भारत में वीवो Y36 स्मार्टफोन को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस फोन को 8GB रैम, 5000 एमएएच की बैटरी, स्नैपड्रैगन 680 प्रोसेसर, 50 मेगापिक्सल रियर कैमरा जैसी खूबियों से पैक किया है. डिजाइन के मामले में भी फोन आकर्षक नजर आता है. इसमें 2. 5D कर्व्ड बॉडी डिजाइन और फ्लैट फ्रेम इस्तेमाल हुआ है. फोन को सिंगल रैम और स्टोरेज ऑप्शन में लाया गया है. आइए जानते हैं Vivo Y36 के दाम और अन्य खूबियां. Vivo Y36 की भारत में कीमत Vivo Y36 ने अपने इस फोन को भारत में 16,999 रुपये की कीमत के साथ पेश किया है. वीवो के इस फोन को यूजर्स कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट , Flipkart और ऑफिशियल रिटेल पार्टनर स्टोर से खरीद सकते हैं. Vivo Y36 स्मार्टफोन के डिजाइन की बात करें यह स्लिम बॉडी और 2. 5D कर्व्ड डिजाइन के साथ आता है. वीवो का यह फोन फ्लैट फ्रेम के साथ आता है, जो इसे प्रीमियम लुक ऑफर करता है. रियर पैनल की बात करें तो कंपनी ने इसमें स्टायलिश ग्लासबैक दिया है. रियर कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में डायनेमिक डुअल रिंग दिया गया है. इसके साथ ही फोन में साइड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है. क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स? डुअल सिम सपोर्ट वाला Vivo Y36 स्मार्टफोन Android 13 पर बेस्ड Funtouch OS 13 पर काम करता है. इसमें 6. 64-inch का Full HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट के साथ आता है. हैंडसेट Qualcomm Snapdragon 680 प्रोसेसर पर काम करता है, जो 8GB RAM के साथ आता है. फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, जिसका मेन लेंस 50MP का है. इसके अलावा यूजर्स को 2MP का बुके लेंस मिलता है. फ्रंट में कंपनी ने 16MP का सेल्फी कैमरा दिया है. इसमें कई कैमरा मोड्स मिलते हैं. डिवाइस 128GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसे आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से एक्सपैंड कर सकते हैं. स्मार्टफोन में 5000mAh की बैटरी दी गई है, जो 44W की चार्जिंग सपोर्ट करती है. फोन 15 मिनट में जीरो से 30 परसेंट तक चार्ज हो सकता है. सिक्योरिटी के लिए फोन में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है.
वीवो ने भारत में वीवो Yछत्तीस स्मार्टफोन को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस फोन को आठGB रैम, पाँच हज़ार एमएएच की बैटरी, स्नैपड्रैगन छः सौ अस्सी प्रोसेसर, पचास मेगापिक्सल रियर कैमरा जैसी खूबियों से पैक किया है. डिजाइन के मामले में भी फोन आकर्षक नजर आता है. इसमें दो. पाँचD कर्व्ड बॉडी डिजाइन और फ्लैट फ्रेम इस्तेमाल हुआ है. फोन को सिंगल रैम और स्टोरेज ऑप्शन में लाया गया है. आइए जानते हैं Vivo Yछत्तीस के दाम और अन्य खूबियां. Vivo Yछत्तीस की भारत में कीमत Vivo Yछत्तीस ने अपने इस फोन को भारत में सोलह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत के साथ पेश किया है. वीवो के इस फोन को यूजर्स कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट , Flipkart और ऑफिशियल रिटेल पार्टनर स्टोर से खरीद सकते हैं. Vivo Yछत्तीस स्मार्टफोन के डिजाइन की बात करें यह स्लिम बॉडी और दो. पाँचD कर्व्ड डिजाइन के साथ आता है. वीवो का यह फोन फ्लैट फ्रेम के साथ आता है, जो इसे प्रीमियम लुक ऑफर करता है. रियर पैनल की बात करें तो कंपनी ने इसमें स्टायलिश ग्लासबैक दिया है. रियर कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में डायनेमिक डुअल रिंग दिया गया है. इसके साथ ही फोन में साइड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है. क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स? डुअल सिम सपोर्ट वाला Vivo Yछत्तीस स्मार्टफोन Android तेरह पर बेस्ड Funtouch OS तेरह पर काम करता है. इसमें छः. चौंसठ-inch का Full HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो नब्बे हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट और दो सौ चालीस हर्ट्ज़ टच सैंपलिंग रेट के साथ आता है. हैंडसेट Qualcomm Snapdragon छः सौ अस्सी प्रोसेसर पर काम करता है, जो आठGB RAM के साथ आता है. फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है, जिसका मेन लेंस पचासMP का है. इसके अलावा यूजर्स को दोMP का बुके लेंस मिलता है. फ्रंट में कंपनी ने सोलहMP का सेल्फी कैमरा दिया है. इसमें कई कैमरा मोड्स मिलते हैं. डिवाइस एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज के साथ आता है, जिसे आप माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से एक्सपैंड कर सकते हैं. स्मार्टफोन में पाँच हज़ारmAh की बैटरी दी गई है, जो चौंतालीस वाट की चार्जिंग सपोर्ट करती है. फोन पंद्रह मिनट में जीरो से तीस परसेंट तक चार्ज हो सकता है. सिक्योरिटी के लिए फोन में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है.
हे आत्मा ! आनंद मान कि ऐसा उत्तम समय तुके प्रात हुआ है। इस अवस्था मे तू जो धारे वह कर सका है। भोज्ञ में यहां से सीवा नहीं जा सत्ता तो एकावतारी होने के लिये तू स्वयं शक्तिमान है, नाना प्रकार की अनंत बेदनाएं मिटाने में समर्थ है, तो प्रयन्न कर। उत्कृष्ट मार्ग स्वीकार । धात्म प्रदेश निकलते समय का और स्नेही जनके अंतिम समय का दृश्य तेरे नेत्रों के आगे ला और चेव । समय का मृत्य आंख मूंदकर खोलने में अस्यात समय निकल जाते हैं, उनमें से " एक समय भी हे गौतम ! तू व्यर्थ मत खो" ! ऐसी आज्ञा श्री महावीर मनुने अपने भिवतम् शिष्य गौतम को दी है । तो हे घात्मा ! अगर तू महावीर स्वामी का छोटा, प्रिय, अनुवाची बनने की इच्छा रखता है, तो गौतम जैसा यन। मिनटों को तेरी आयु चारों तरफ से लुट जाने वाली है। दुख, मृत्यु औराभवतदशा के दावानल में रहकर भी तू तेरी फोनली शक्ति पर निर्भर रह कर छुपा है ? एक समय को भी जहां प्रभु के शासन में कीमत कृवी गई है वहां तू मिनटों और घंटों निद्रा में, बातों में प्रसाद में सोने की किस प्रकार कर सका है ? सैकड़ों भव याद तुम्हे फिर ऐसा अवसर प्राप्त होगा। ऐसा मालूम होता है ? तेरी मिनटों को आयु होते भी तेरा पुरुषार्थ मुझे कूड़े में से रन देगा परन्तु इतना पराकून फोड़ कुंड में से रन लेने की तेरी इच्छा कहां है ? पासर ! बैठ
हे आत्मा ! आनंद मान कि ऐसा उत्तम समय तुके प्रात हुआ है। इस अवस्था मे तू जो धारे वह कर सका है। भोज्ञ में यहां से सीवा नहीं जा सत्ता तो एकावतारी होने के लिये तू स्वयं शक्तिमान है, नाना प्रकार की अनंत बेदनाएं मिटाने में समर्थ है, तो प्रयन्न कर। उत्कृष्ट मार्ग स्वीकार । धात्म प्रदेश निकलते समय का और स्नेही जनके अंतिम समय का दृश्य तेरे नेत्रों के आगे ला और चेव । समय का मृत्य आंख मूंदकर खोलने में अस्यात समय निकल जाते हैं, उनमें से " एक समय भी हे गौतम ! तू व्यर्थ मत खो" ! ऐसी आज्ञा श्री महावीर मनुने अपने भिवतम् शिष्य गौतम को दी है । तो हे घात्मा ! अगर तू महावीर स्वामी का छोटा, प्रिय, अनुवाची बनने की इच्छा रखता है, तो गौतम जैसा यन। मिनटों को तेरी आयु चारों तरफ से लुट जाने वाली है। दुख, मृत्यु औराभवतदशा के दावानल में रहकर भी तू तेरी फोनली शक्ति पर निर्भर रह कर छुपा है ? एक समय को भी जहां प्रभु के शासन में कीमत कृवी गई है वहां तू मिनटों और घंटों निद्रा में, बातों में प्रसाद में सोने की किस प्रकार कर सका है ? सैकड़ों भव याद तुम्हे फिर ऐसा अवसर प्राप्त होगा। ऐसा मालूम होता है ? तेरी मिनटों को आयु होते भी तेरा पुरुषार्थ मुझे कूड़े में से रन देगा परन्तु इतना पराकून फोड़ कुंड में से रन लेने की तेरी इच्छा कहां है ? पासर ! बैठ
मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों (Central Employees) और पेंशनर्स (Pensioners) को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में 4% की बढ़ोत्तरी को मंजूरी दे दी है। अब महंगाई भत्ता 38 फीसद से बढ़कर 42 फीसदी हो गया है। DA और DR में यह बढ़ोत्तरी जनवरी 2023 से लागू होगी। मोदी सरकार की कैबिनेट ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के पक्ष में बड़ा निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ते में 4 फीसदी का इजाफा किया है। बढ़ी हुई दर जनवरी 2023 से लागू होंगी। इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनधारियों को एरियर भी दिया जाएगा। मोदी सरकार के इस ऐलान के बाद हर साल 12,815 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा। मोदी सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार के करीब 47.58 लाख सरकारी कर्मचारियों और 69.76 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। डीए में यह बढ़ोत्तरी 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th Central Pay Commission) की सिफ़ारिशों के बाद की गई है। केंद्र सरकार द्वारा सालाना डीए/डीआर में बढ़ोत्तरी जनवरी की शुरुआत से जुलाई महीने के अंत में की जाती रही है। हालांकि पिच्छले कुछ साल में इसमें देरी हुई है। पिछली छमाही में सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 4% का इजाफा किया था। तब कर्मचारियों का डीए 34 प्रतिशत था, जो बढ़कर 38 फीसदी हो गया था। सैलरी के हिसाब से देखें तो यदि किसी केंद्रीय कर्मचारी का बेसिक-पे 1,8000 रुपए है, तो 38 फीसदी के हिसाब से 6,840 रुपये का महंगाई भत्ता बनता है. वहीं अब डीए 42 फीसदी होने के बाद कर्मचारी का डीए बढ़कर 7,560 रुपये हो जाएगा. अधिकतम बेसिक-पे के हिसाब से देखा जाए, तो 56,000 रुपये के आधार पर महंगाई भत्ता 21,280 रुपये बनता है. अब इसमें चार फीसदी की बढ़ोत्तरी के हिसाब से देखा जाए, तो ये उछलकर 23,520 रुपये हो जाएगा. ऐसे में मिनिमम बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को हर महीने 720 रुपये और सालाना 8,640 रुपये का लाभ होगा.
मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार% की बढ़ोत्तरी को मंजूरी दे दी है। अब महंगाई भत्ता अड़तीस फीसद से बढ़कर बयालीस फीसदी हो गया है। DA और DR में यह बढ़ोत्तरी जनवरी दो हज़ार तेईस से लागू होगी। मोदी सरकार की कैबिनेट ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के पक्ष में बड़ा निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ते में चार फीसदी का इजाफा किया है। बढ़ी हुई दर जनवरी दो हज़ार तेईस से लागू होंगी। इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनधारियों को एरियर भी दिया जाएगा। मोदी सरकार के इस ऐलान के बाद हर साल बारह,आठ सौ पंद्रह करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा। मोदी सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार के करीब सैंतालीस.अट्ठावन लाख सरकारी कर्मचारियों और उनहत्तर.छिहत्तर लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। डीए में यह बढ़ोत्तरी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफ़ारिशों के बाद की गई है। केंद्र सरकार द्वारा सालाना डीए/डीआर में बढ़ोत्तरी जनवरी की शुरुआत से जुलाई महीने के अंत में की जाती रही है। हालांकि पिच्छले कुछ साल में इसमें देरी हुई है। पिछली छमाही में सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार% का इजाफा किया था। तब कर्मचारियों का डीए चौंतीस प्रतिशत था, जो बढ़कर अड़तीस फीसदी हो गया था। सैलरी के हिसाब से देखें तो यदि किसी केंद्रीय कर्मचारी का बेसिक-पे एक,आठ हज़ार रुपयापए है, तो अड़तीस फीसदी के हिसाब से छः,आठ सौ चालीस रुपयापये का महंगाई भत्ता बनता है. वहीं अब डीए बयालीस फीसदी होने के बाद कर्मचारी का डीए बढ़कर सात,पाँच सौ साठ रुपयापये हो जाएगा. अधिकतम बेसिक-पे के हिसाब से देखा जाए, तो छप्पन,शून्य रुपयापये के आधार पर महंगाई भत्ता इक्कीस,दो सौ अस्सी रुपयापये बनता है. अब इसमें चार फीसदी की बढ़ोत्तरी के हिसाब से देखा जाए, तो ये उछलकर तेईस,पाँच सौ बीस रुपयापये हो जाएगा. ऐसे में मिनिमम बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को हर महीने सात सौ बीस रुपयापये और सालाना आठ,छः सौ चालीस रुपयापये का लाभ होगा.
देवबंद। एक छप्पर नुमा मकान में बीती देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में भयंकर आग लग गई। आग लगने से मकान में बंधे कई मवेशी आग में झुलस गए और एक मवेशी की मौत हो गई। आग से मकान में खडी एक मोटर साइकिल व एक साइकिल आग लगने से जलकर खाक हो गई। आग लगने से पीड़ित व्यक्ति का लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया। जानकारी के अनुसार बीती रात करीब डेढ-दो बजे देवबंद के नगर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में एक छप्पर नुमा मकान में आग लग गई। आग लगने से कई मवेशी गंभीर रूप से झुलस गए और एक मवेशी की मौत हो गई। वहीं मकान में खड़ी एक बाइक व साइकिल भी जलकर राख हो गई। जैसे ही ग्रामीणों को मकान में आग लगने की सूचना मिली तो सभी लोग उधर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया। जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल सका।
देवबंद। एक छप्पर नुमा मकान में बीती देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में भयंकर आग लग गई। आग लगने से मकान में बंधे कई मवेशी आग में झुलस गए और एक मवेशी की मौत हो गई। आग से मकान में खडी एक मोटर साइकिल व एक साइकिल आग लगने से जलकर खाक हो गई। आग लगने से पीड़ित व्यक्ति का लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया। जानकारी के अनुसार बीती रात करीब डेढ-दो बजे देवबंद के नगर थाना क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में एक छप्पर नुमा मकान में आग लग गई। आग लगने से कई मवेशी गंभीर रूप से झुलस गए और एक मवेशी की मौत हो गई। वहीं मकान में खड़ी एक बाइक व साइकिल भी जलकर राख हो गई। जैसे ही ग्रामीणों को मकान में आग लगने की सूचना मिली तो सभी लोग उधर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया। जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल सका।
वेंकटरामा पंडित कृष्णमूर्ति (ವಿ.)(ವೆಂಕಟರಾಮಾ ಪಂಡಿತ್ ಕೃಷ್ಣಮೂರ್ತಿ) (२६ नवम्बर १९२३ - ०७ अप्रैल २०१४) दादा साहब फाल्के सम्मान प्राप्त करने वाले प्रथम सिनेमाटोग्राफर (चलचित्रकार) थे। ७ अप्रैल २०१४ को उनका निधन हो गया। . 6 संबंधोंः द हिन्दू, दादा साहब फाल्के सम्मान, बंगलौर, मैसूर, मैसूर का साम्राज्य, गुरु दत्त। द हिन्दू (द हिन्दू) भारत में प्रकाशित होने वाला एक दैनिक अंग्रेज़ी समाचार पत्र है। इसका मुख्यालय चेन्नई में है और इसका साप्ताहिक पत्रिका के रूप में प्रकाशन वर्ष 1878 में आरम्भ हुआ। यह दैनिक के रूप में वर्ष 1889 में आरम्भ हुआ। यह भारत के शीर्ष दैनिक अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में से एक है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण के 2014 के अनुसार यह भारत में पढ़े जाने वाले अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में तीसरे स्थान पर है। पहले दो स्थानों पर द टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स पाये गये। द हिन्दू मुख्य रूप से दक्षिण भारत में पढ़ा जाता है और केरल एवं तमिलनाडु में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अंग्रेज़ी दैनिक समाचार पत्र है। वर्ष २०१० के आँकड़ों के अनुसार इस उद्यम में 1,600 से अधिक लोगों को काम दिया गया है और इसकी वार्षिक आय $200 मिलियन से अधिक है। इसकी आय के मुख्य स्रोतों में अंशदान और विज्ञापन प्रमुख हैं। वर्ष 1995 में अपना ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध करवाने वाला, द हिन्दू प्रथम भारतीय समाचार पत्र है। नवम्बर 2015 के अनुसार, यह भारत के नौ राज्यों में 18 स्थानों से प्रकाशित होता हैः बंगलौर, चेन्नई, हैदराबाद, तिरुवनन्तपुरम, विजयवाड़ा, कोलकाता, मुम्बई, कोयंबतूर, मदुरै, नोएडा, विशाखपट्नम, कोच्चि, मैंगलूर, तिरुचिरापल्ली, हुबली, मोहाली, लखनऊ, इलाहाबाद और मलप्पुरम। . दादा साहब फाल्के सम्मान सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला वार्षिक सम्मान है। इसकी स्थापना वर्ष १९६९ में की गई थी।RAJAT KUSHWAH . कर्नाटक का उच्च न्यायालय बंगलौर (अन्य वर्तनीः बेंगलुरु) (कन्नड़ः ಬೆಂಗಳೂರು; उच्चारण) भारत के राज्य कर्नाटक की राजधानी है। बेंगलुरु शहर की जनसंख्या ८४ लाख है और इसके महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या ८९ लाख है, और यह भारत गणराज्य का तीसरा सबसे बड़ा शहर और पांचवा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र है। दक्षिण भारत में दक्कन के पठारीय क्षेत्र में ९०० मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित यह नगर अपने साल भर के सुहाने मौसम के लिए जाना जाता है। भारत के मुख्य शहरों में इसकी ऊंचाई सबसे ज़्यादा है। वर्ष २००६ में बेंगलूर के स्थानीय निकाय बृहत् बेंगलूर महानगर पालिकबी बी एम पी) ने एक प्रस्ताव के माध्यम से शहर के नाम की अंग्रेज़ी भाषा की वर्तनी को Bangalore से Bengaluru में परिवर्तित करने का निवेदन राज्य सरकार को भेजा। राज्य और केंद्रीय सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव १ नवंबर २०१४ से प्रभावी हो गया है। . मैसूर भारत के कर्नाटक प्रान्त का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह प्रदेश की राजधानी बंगलौर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दक्षिण में तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है। . विजय नगर राज्य के समय में ही 1612 ई0 में ओडियार नामक राजा ने मैसूर राज्य की स्थापना की इस मैसूर राज्य में आगे चलकर दो प्रमुख शासक हुए-हैदर अली एवं टीपू। इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष जारी रखा। टीपू, हैदर अली दक्षिण भारत का पहला शासक था जिसे अंग्रेजों को पराजित करने में सफलता मिली। दक्षिण में मैसूर राज्य और अंग्रेजों के बीच कुल चार युद्ध हुए। इन युद्धों की एक खास विशेषता यह थी कि इसमें मराठे और हैदराबाद के निजाम अंग्रेजों द्वारा बनाये गये त्रिगुट में शामिल थे। श्रेणीःभारत के साम्राज्य श्रेणीःदक्षिण भारत का इतिहास श्रेणीःमैसूर राज्य. गुरु दत्त (वास्तविक नामः वसन्त कुमार शिवशंकर पादुकोणे, जन्मः 9 जुलाई, 1925 बैंगलौर, निधनः 10 अक्टूबर, 1964 बम्बई) हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता,निर्देशक एवं फ़िल्म निर्माता थे। उन्होंने 1950वें और 1960वें दशक में कई उत्कृष्ट फ़िल्में बनाईं जैसे प्यासा,कागज़ के फूल,साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चाँद। विशेष रूप से, प्यासा और काग़ज़ के फूल को टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों की सूचि में शामिल किया गया है और साइट एन्ड साउंड आलोचकों और निर्देशकों के सर्वेक्षण द्वारा, दत्त खुद भी सबसे बड़े फ़िल्म निर्देशकों की सूचि में शामिल हैं। उन्हें कभी कभी "भारत का ऑर्सन वेल्स" (Orson Welles) भी कहा जाता है। 2010 में, उनका नाम सीएनएन के "सर्व श्रेष्ठ 25 एशियाई अभिनेताओं" के सूचि में भी शामिल किया गया। गुरु दत्त 1950वें दशक के लोकप्रिय सिनेमा के प्रसंग में, काव्यात्मक और कलात्मक फ़िल्मों के व्यावसायिक चलन को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी फ़िल्मों को जर्मनी, फ्रांस और जापान में अब भी प्रकाशित करने पर सराहा जाता है। .
वेंकटरामा पंडित कृष्णमूर्ति दादा साहब फाल्के सम्मान प्राप्त करने वाले प्रथम सिनेमाटोग्राफर थे। सात अप्रैल दो हज़ार चौदह को उनका निधन हो गया। . छः संबंधोंः द हिन्दू, दादा साहब फाल्के सम्मान, बंगलौर, मैसूर, मैसूर का साम्राज्य, गुरु दत्त। द हिन्दू भारत में प्रकाशित होने वाला एक दैनिक अंग्रेज़ी समाचार पत्र है। इसका मुख्यालय चेन्नई में है और इसका साप्ताहिक पत्रिका के रूप में प्रकाशन वर्ष एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर में आरम्भ हुआ। यह दैनिक के रूप में वर्ष एक हज़ार आठ सौ नवासी में आरम्भ हुआ। यह भारत के शीर्ष दैनिक अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में से एक है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण के दो हज़ार चौदह के अनुसार यह भारत में पढ़े जाने वाले अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में तीसरे स्थान पर है। पहले दो स्थानों पर द टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स पाये गये। द हिन्दू मुख्य रूप से दक्षिण भारत में पढ़ा जाता है और केरल एवं तमिलनाडु में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अंग्रेज़ी दैनिक समाचार पत्र है। वर्ष दो हज़ार दस के आँकड़ों के अनुसार इस उद्यम में एक,छः सौ से अधिक लोगों को काम दिया गया है और इसकी वार्षिक आय दो सौ डॉलर मिलियन से अधिक है। इसकी आय के मुख्य स्रोतों में अंशदान और विज्ञापन प्रमुख हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे में अपना ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध करवाने वाला, द हिन्दू प्रथम भारतीय समाचार पत्र है। नवम्बर दो हज़ार पंद्रह के अनुसार, यह भारत के नौ राज्यों में अट्ठारह स्थानों से प्रकाशित होता हैः बंगलौर, चेन्नई, हैदराबाद, तिरुवनन्तपुरम, विजयवाड़ा, कोलकाता, मुम्बई, कोयंबतूर, मदुरै, नोएडा, विशाखपट्नम, कोच्चि, मैंगलूर, तिरुचिरापल्ली, हुबली, मोहाली, लखनऊ, इलाहाबाद और मलप्पुरम। . दादा साहब फाल्के सम्मान सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला वार्षिक सम्मान है। इसकी स्थापना वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में की गई थी।RAJAT KUSHWAH . कर्नाटक का उच्च न्यायालय बंगलौर भारत के राज्य कर्नाटक की राजधानी है। बेंगलुरु शहर की जनसंख्या चौरासी लाख है और इसके महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या नवासी लाख है, और यह भारत गणराज्य का तीसरा सबसे बड़ा शहर और पांचवा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र है। दक्षिण भारत में दक्कन के पठारीय क्षेत्र में नौ सौ मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित यह नगर अपने साल भर के सुहाने मौसम के लिए जाना जाता है। भारत के मुख्य शहरों में इसकी ऊंचाई सबसे ज़्यादा है। वर्ष दो हज़ार छः में बेंगलूर के स्थानीय निकाय बृहत् बेंगलूर महानगर पालिकबी बी एम पी) ने एक प्रस्ताव के माध्यम से शहर के नाम की अंग्रेज़ी भाषा की वर्तनी को Bangalore से Bengaluru में परिवर्तित करने का निवेदन राज्य सरकार को भेजा। राज्य और केंद्रीय सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद यह बदलाव एक नवंबर दो हज़ार चौदह से प्रभावी हो गया है। . मैसूर भारत के कर्नाटक प्रान्त का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह प्रदेश की राजधानी बंगलौर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दक्षिण में तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है। . विजय नगर राज्य के समय में ही एक हज़ार छः सौ बारह ईशून्य में ओडियार नामक राजा ने मैसूर राज्य की स्थापना की इस मैसूर राज्य में आगे चलकर दो प्रमुख शासक हुए-हैदर अली एवं टीपू। इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष जारी रखा। टीपू, हैदर अली दक्षिण भारत का पहला शासक था जिसे अंग्रेजों को पराजित करने में सफलता मिली। दक्षिण में मैसूर राज्य और अंग्रेजों के बीच कुल चार युद्ध हुए। इन युद्धों की एक खास विशेषता यह थी कि इसमें मराठे और हैदराबाद के निजाम अंग्रेजों द्वारा बनाये गये त्रिगुट में शामिल थे। श्रेणीःभारत के साम्राज्य श्रेणीःदक्षिण भारत का इतिहास श्रेणीःमैसूर राज्य. गुरु दत्त हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता,निर्देशक एवं फ़िल्म निर्माता थे। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ पचासवें और एक हज़ार नौ सौ साठवें दशक में कई उत्कृष्ट फ़िल्में बनाईं जैसे प्यासा,कागज़ के फूल,साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चाँद। विशेष रूप से, प्यासा और काग़ज़ के फूल को टाइम पत्रिका के एक सौ सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों की सूचि में शामिल किया गया है और साइट एन्ड साउंड आलोचकों और निर्देशकों के सर्वेक्षण द्वारा, दत्त खुद भी सबसे बड़े फ़िल्म निर्देशकों की सूचि में शामिल हैं। उन्हें कभी कभी "भारत का ऑर्सन वेल्स" भी कहा जाता है। दो हज़ार दस में, उनका नाम सीएनएन के "सर्व श्रेष्ठ पच्चीस एशियाई अभिनेताओं" के सूचि में भी शामिल किया गया। गुरु दत्त एक हज़ार नौ सौ पचासवें दशक के लोकप्रिय सिनेमा के प्रसंग में, काव्यात्मक और कलात्मक फ़िल्मों के व्यावसायिक चलन को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी फ़िल्मों को जर्मनी, फ्रांस और जापान में अब भी प्रकाशित करने पर सराहा जाता है। .
मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ बुधवार को दिल्ली दौरे पर थे। बताया जा रहा है कि नाथ दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे से मिले। इस दौरान उनके साथ प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल भी थे। नाथ के दिल्ली पहुंचने के बाद ही इधर इंदौर में शहर कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। वहीं कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि देर सबेर ही सही लेकिन जब भी शहर अध्यक्ष की घोषणा होगी उसमें इंदौर की कमान अरविंद बागड़ी या गोलू अग्निहोत्री में से किसी एक को मिलने की चर्चाएं हैं। इंदौर कांग्रेस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कांग्रेस नेताओं में चल रही गुटबाजी के कारण किसी नेता को अपना मिलता हुआ पद छोड़ना पड़ा हो। 22 जनवरी 2023 को भी आपसी गुटबाजी की वजह से अरविंद बागड़ी को भी शहर अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ गया था। लेकिन अब बुधवार को कमल नाथ के दिल्ली पहुंचने से शहर अध्यक्ष की घोषणा को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो शहर अध्यक्ष को लेकर नाम लगभग तय हो चुका है, जिसकी जल्द ही घोषणा हो जाएगी। वहीं इंदौर शहर अध्यक्ष के मामले में दोनों ग्रामीण विधायक जीतू पटवारी और विशाल पटेल के साथ ही शहरी विधायक संजय शुक्ला किसी भी प्रकार की बात करने से बच रहे हैं। कांग्रेस पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार आलाकमान शहर अध्यक्ष के साथ ही तीन से चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त करेगा। कार्यकारी अध्यक्ष के लिए अमन बजाज का नाम यूथ कांग्रेस की तरफ से आगे बढ़ाया गया है। 2017 में भी यूथ कांग्रेस ने अमन का नाम भेजा था। इसी तरह देवेंद्र यादव के लिए महेंद्र जोशी और शोभा ओझा ने लॉबिंग की है। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष के लिए एक नाम लच्छू मिमरोट का भी बताया जा रहा है। जिसकी लॉबिंग विशाल पटेल और स्वप्निल कोठारी की ओर से की जा रही है। हालांकि इस नाम पर अभी सहमति होना बाकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अरविंद बागड़ी का नाम राहुल गांधी के यहां से फाइनल हुआ था। इसलिए कमलनाथ अब तक उनकी जगह कोई नए नाम की घोषणा नहीं कर पाए हैं। जबकि कमलनाथ चाहते हैं कि गोलू अग्निहोत्री या अन्य किसी के नाम पर भी विचार किया जाना चाहिए। इंदौर शहर कांग्रेस से विनय बाकलीवाल को 21 जनवरी को हटाकर उनके स्थान पर अरविंद बागड़ी को अध्यक्ष बना दूसरे ही दिन कमलनाथ ने उनको होल्ड कर दिया था। लगभग 6 महीने से शहर कांग्रेस अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है। तब से ही इंदौर कांग्रेस का पूरा काम काम प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। वहीं इंदौर आने वाला कांग्रेस का हर बड़ा नेता इंदौर कांग्रेस के दावेदारों और कार्यकर्ताओं को दिलासा और तारीख देकर आगे बढ़ जाते हैं। विनय बाकलीवाल भी अध्यक्ष बनने के लिए ताकत लगा रहे हैं। एक समय कमलनाथ के खास रहे बाकलीवाल अब दिग्विजय सिंह को साधने में लगे हुए हैं। लेकिन अरविंद बागड़ी को अध्यक्ष बनाने के बाद गांधी भवन पर प्रदर्शन में उनके समर्थकों द्वारा अरविंद का पुतला दहन उन्हें भारी पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान कमलनाथ मुर्दाबाद के भी नारे लगे थे। ये वीडियो पूरे शहर में खूब वायरल हुए थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ बुधवार को दिल्ली दौरे पर थे। बताया जा रहा है कि नाथ दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे से मिले। इस दौरान उनके साथ प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल भी थे। नाथ के दिल्ली पहुंचने के बाद ही इधर इंदौर में शहर कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। वहीं कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि देर सबेर ही सही लेकिन जब भी शहर अध्यक्ष की घोषणा होगी उसमें इंदौर की कमान अरविंद बागड़ी या गोलू अग्निहोत्री में से किसी एक को मिलने की चर्चाएं हैं। इंदौर कांग्रेस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कांग्रेस नेताओं में चल रही गुटबाजी के कारण किसी नेता को अपना मिलता हुआ पद छोड़ना पड़ा हो। बाईस जनवरी दो हज़ार तेईस को भी आपसी गुटबाजी की वजह से अरविंद बागड़ी को भी शहर अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ गया था। लेकिन अब बुधवार को कमल नाथ के दिल्ली पहुंचने से शहर अध्यक्ष की घोषणा को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो शहर अध्यक्ष को लेकर नाम लगभग तय हो चुका है, जिसकी जल्द ही घोषणा हो जाएगी। वहीं इंदौर शहर अध्यक्ष के मामले में दोनों ग्रामीण विधायक जीतू पटवारी और विशाल पटेल के साथ ही शहरी विधायक संजय शुक्ला किसी भी प्रकार की बात करने से बच रहे हैं। कांग्रेस पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार आलाकमान शहर अध्यक्ष के साथ ही तीन से चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त करेगा। कार्यकारी अध्यक्ष के लिए अमन बजाज का नाम यूथ कांग्रेस की तरफ से आगे बढ़ाया गया है। दो हज़ार सत्रह में भी यूथ कांग्रेस ने अमन का नाम भेजा था। इसी तरह देवेंद्र यादव के लिए महेंद्र जोशी और शोभा ओझा ने लॉबिंग की है। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष के लिए एक नाम लच्छू मिमरोट का भी बताया जा रहा है। जिसकी लॉबिंग विशाल पटेल और स्वप्निल कोठारी की ओर से की जा रही है। हालांकि इस नाम पर अभी सहमति होना बाकी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अरविंद बागड़ी का नाम राहुल गांधी के यहां से फाइनल हुआ था। इसलिए कमलनाथ अब तक उनकी जगह कोई नए नाम की घोषणा नहीं कर पाए हैं। जबकि कमलनाथ चाहते हैं कि गोलू अग्निहोत्री या अन्य किसी के नाम पर भी विचार किया जाना चाहिए। इंदौर शहर कांग्रेस से विनय बाकलीवाल को इक्कीस जनवरी को हटाकर उनके स्थान पर अरविंद बागड़ी को अध्यक्ष बना दूसरे ही दिन कमलनाथ ने उनको होल्ड कर दिया था। लगभग छः महीने से शहर कांग्रेस अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है। तब से ही इंदौर कांग्रेस का पूरा काम काम प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। वहीं इंदौर आने वाला कांग्रेस का हर बड़ा नेता इंदौर कांग्रेस के दावेदारों और कार्यकर्ताओं को दिलासा और तारीख देकर आगे बढ़ जाते हैं। विनय बाकलीवाल भी अध्यक्ष बनने के लिए ताकत लगा रहे हैं। एक समय कमलनाथ के खास रहे बाकलीवाल अब दिग्विजय सिंह को साधने में लगे हुए हैं। लेकिन अरविंद बागड़ी को अध्यक्ष बनाने के बाद गांधी भवन पर प्रदर्शन में उनके समर्थकों द्वारा अरविंद का पुतला दहन उन्हें भारी पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान कमलनाथ मुर्दाबाद के भी नारे लगे थे। ये वीडियो पूरे शहर में खूब वायरल हुए थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कैटरीना कैफ और सलमान खान द्वारा स्टारर अली अब्बास ज़फर की भारत 5 जून को रिलीज़ के लिए तैयार है और अब फिल्म के प्रोड्यूसर अतुल अग्निहोत्री ने पहली बार फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि वह कभी चाहते ही नहीं थे कि फिल्म में प्रियंका चोपड़ा हों और फिल्म के लिए पहले ही दिन से उनकी पसंद कैटरीना कैफ ही थी. दूसरी ओर खबर है कि इस फिल्म के डायरेक्टर अली अब्बास ज़फर फिल्म में प्रियंका चोपड़ा को हे लेना चाहते थे और प्रियंका को फिल्म में ले भी लिया गया था, अपने शादी के कारण प्रियंका ने इस फिल्म को छोड़ दिया था, बाद में इसके लिए कैटरीना को चुना गया. गौरतलब है कि भारत पहले प्रियंका चोपड़ा के हिस्से में हे आई थी लेकिन फिर प्रियंका ने शादी का बहाना नानकर इस फिल्म को बे कह दिया. लेकिन बाद में सलमान ने एक प्रेस इंटरव्यू में इस बात की जानकारी दी थी कि मैंने प्रियंका को कहा भी कि शादी तो 10- 15 दिन की बात है और हर कोई करता है. लेकिन प्रियंका को मेरे साथ फिल्म करने में दिलचस्पी नही थी. वहीं इसके बाद एक बार फिर से कैटरीना और सलमान के जोड़ी जमी. साथ ही बता दें कि फिल्म के ट्रेलर में कैटरीना को देखने के बाद तय है कि फिल्म में वो होश उड़ाने वाली हैं. अजय-सलमान को लेकर यह क्या बोल गई तब्बू, कहा- उनके साथ मेरा रिश्ता. . . '
कैटरीना कैफ और सलमान खान द्वारा स्टारर अली अब्बास ज़फर की भारत पाँच जून को रिलीज़ के लिए तैयार है और अब फिल्म के प्रोड्यूसर अतुल अग्निहोत्री ने पहली बार फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि वह कभी चाहते ही नहीं थे कि फिल्म में प्रियंका चोपड़ा हों और फिल्म के लिए पहले ही दिन से उनकी पसंद कैटरीना कैफ ही थी. दूसरी ओर खबर है कि इस फिल्म के डायरेक्टर अली अब्बास ज़फर फिल्म में प्रियंका चोपड़ा को हे लेना चाहते थे और प्रियंका को फिल्म में ले भी लिया गया था, अपने शादी के कारण प्रियंका ने इस फिल्म को छोड़ दिया था, बाद में इसके लिए कैटरीना को चुना गया. गौरतलब है कि भारत पहले प्रियंका चोपड़ा के हिस्से में हे आई थी लेकिन फिर प्रियंका ने शादी का बहाना नानकर इस फिल्म को बे कह दिया. लेकिन बाद में सलमान ने एक प्रेस इंटरव्यू में इस बात की जानकारी दी थी कि मैंने प्रियंका को कहा भी कि शादी तो दस- पंद्रह दिन की बात है और हर कोई करता है. लेकिन प्रियंका को मेरे साथ फिल्म करने में दिलचस्पी नही थी. वहीं इसके बाद एक बार फिर से कैटरीना और सलमान के जोड़ी जमी. साथ ही बता दें कि फिल्म के ट्रेलर में कैटरीना को देखने के बाद तय है कि फिल्म में वो होश उड़ाने वाली हैं. अजय-सलमान को लेकर यह क्या बोल गई तब्बू, कहा- उनके साथ मेरा रिश्ता. . . '
सावन (Sawan) का महीना भगवान शिव को समर्पित है. सावन को श्रावण (Shrawan 2021) भी कहा जाता है मान्यता है कि इस मास में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. सावन का मास बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. आज सावन का दूसरा सोमवार है. सावन के महीने में भोले अपने भक्तों से प्रसन्न रहते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं की भोलेनाथ के गले में नागराज क्यों विराजमान है. भोलेनाथ के गले में आभूषण के स्वरूप में नाग क्यों हैं? चलिए जानते है. आपको बता दें, भगवान भोलेनाथ के गले में इसलिए नागराज वासुकी है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि वासुकी को नागलोक का राजा माना जाता है. वह भोलेनाथ के परम भक्त थे. वहीं शिवलिंग की पूजा अर्चना करने का प्रचलन भी नाग जाति के लोगों ने ही आरंभ किया था. शिवजी वासुकी की श्रद्धा और भक्ति देख भोलेनाथ काफी ज्यादा खुश हुए थे. जिसकी वजह से उन्होंने वासुकी को अपने गणों में शामिल कर लिया. मान्यताओं के अनुसार, नागों के देवता वासुकी की भक्ति से भगवान शिव बेहद खुश थे. ये इसलिए क्योंकि वो हमेशा की शंकर जी की भक्ति में लीन रहते थे. ऐसा कहा जाता है उस समय प्रसन्न होकर शिवजी ने वासुकी को उनके गले में लिपटे रहने का वरदान दिया था. जिसकी वजह से नागराज अमर हो गए थे. नागराज वासुकी की एक कथा भी काफी ज्यादा प्रचलित है. कथा में ऐसा बताया जाता है की समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को मेरू पर्वत के चारों ओर रस्सी की तरह लपेटकर मंथन किया गया था. जिसकी वजह से उस समय एक तरफ उन्हें देवताओं ने पकड़ा था तो एक तरफ दानवों ने. उनका शरीर पूरा लहूलुहान हो गया. इससे शिव शंकर बहुत खुश हो गए थे. इसी के साथ जब वासुदेव कंस के डर से भगवान श्री कृष्ण को जेल से गोकुल ले जा रहे थे तब रास्ते में बारिश हुई थी. उस समय भी वासुकी नाग ने ही श्री कृष्ण की रक्षा की थी. ऐसी मान्यता है कि वासुकी के सिर पर ही नागमणि विराजित है. ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. सावन को श्रावण भी कहा जाता है मान्यता है कि इस मास में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. सावन का मास बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. आज सावन का दूसरा सोमवार है. सावन के महीने में भोले अपने भक्तों से प्रसन्न रहते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं की भोलेनाथ के गले में नागराज क्यों विराजमान है. भोलेनाथ के गले में आभूषण के स्वरूप में नाग क्यों हैं? चलिए जानते है. आपको बता दें, भगवान भोलेनाथ के गले में इसलिए नागराज वासुकी है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि वासुकी को नागलोक का राजा माना जाता है. वह भोलेनाथ के परम भक्त थे. वहीं शिवलिंग की पूजा अर्चना करने का प्रचलन भी नाग जाति के लोगों ने ही आरंभ किया था. शिवजी वासुकी की श्रद्धा और भक्ति देख भोलेनाथ काफी ज्यादा खुश हुए थे. जिसकी वजह से उन्होंने वासुकी को अपने गणों में शामिल कर लिया. मान्यताओं के अनुसार, नागों के देवता वासुकी की भक्ति से भगवान शिव बेहद खुश थे. ये इसलिए क्योंकि वो हमेशा की शंकर जी की भक्ति में लीन रहते थे. ऐसा कहा जाता है उस समय प्रसन्न होकर शिवजी ने वासुकी को उनके गले में लिपटे रहने का वरदान दिया था. जिसकी वजह से नागराज अमर हो गए थे. नागराज वासुकी की एक कथा भी काफी ज्यादा प्रचलित है. कथा में ऐसा बताया जाता है की समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को मेरू पर्वत के चारों ओर रस्सी की तरह लपेटकर मंथन किया गया था. जिसकी वजह से उस समय एक तरफ उन्हें देवताओं ने पकड़ा था तो एक तरफ दानवों ने. उनका शरीर पूरा लहूलुहान हो गया. इससे शिव शंकर बहुत खुश हो गए थे. इसी के साथ जब वासुदेव कंस के डर से भगवान श्री कृष्ण को जेल से गोकुल ले जा रहे थे तब रास्ते में बारिश हुई थी. उस समय भी वासुकी नाग ने ही श्री कृष्ण की रक्षा की थी. ऐसी मान्यता है कि वासुकी के सिर पर ही नागमणि विराजित है. This website uses cookies.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
हजार दिये । लुई ने १००००; क्यूलम्बर्ग ने ३००००; वाण्डेन बर्ग ने ३००००; आरेज की माँ ने भी १० हजार दिये । आज अपना सब कुछ बेच-बाचकर जुआरी की तरह दाव नहीं लगा रहा था । ठण्डे हृदय का राजनीतिज्ञ विलियम ऑरेज अच्छी तरह सोच-समझकर कदम बढ़ा रहा था । एल्वा को चुप चाप उठा लाने और त्रसेल्स पर अधिकार जमा लेने का एक बड़े उत्साह का प्रयत्न हाल ही मे निष्फल हो चुका था । रेकी राय थी कि नेदरलैण्ड पर खुलमखुल्ला तीन तरफ से हमला किया जाय । ऑरे स्वय चौथी तरफ से हमला करने के इरादे से क्लीन्स में जा डटा । एक सेना फ्रान्स की सीमा के निकट एट्रोयज की तरफ से घुसने वाली थी। दूसरी ह्यूग्सट्रेटन की अध्यक्षता में मियूज़ और राइन नदी के बीच में लड़ने वाली थी। तीसरी लुई की अध्यक्षता मे श्रीसलैण्ड मे झडा उठाने वाली थी । परन्तु पहले दोनो स्थानो पर देशभक्तो की सेना को बुरी तरह हार खानी पड़ी। पहले स्थान पर १८ जुलाई को देशभक्तों के २५०० सैनिको ने हमला किया परन्तु प्रायः सत्र खप गये; केवल ३०० किसी तरह जान बचाकर भाग आये । दूसरे स्थान पर ह्यूग्सट्रेटन के बजाय विलर्स नामी एक मनुष्य को सरदार बना दिया गया था। इसने ३००० सैनिकों को लेकर रोयरमोंडे नगर पर अधि कार करके नेदरलैण्ड मे पैर जमा लेने का प्रयत्न किया। परन्तु, नगर वाले क्रान्ति के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने उसे घुसने नही दिया । स्पेन की सेना ने आकर विलर्स की सारी सेना छौंट डाली और उसे कैद कर लिया। विलर्स ने फांसी से बच जाने के लोभ से बड़ी नीचता का काम किया । विलियम ऑरेज के सब इरादे और उसकी फौज का नशा दुश्मन को घता दिया । यद्यपि इतनी नीचता करने पर भी उसकी जान न वची । लुई अपने छोटे भाई एडोल्फस के साथ फ्रोसलैण्ड में झएडा उड़ाता हुआ घुसा। झंडे पर लिखा था 'स्वदेश और स्वधर्म के लिए' । घुसते हो उसने प्रान्त के सूबेदार परेल्वर्ग के किले के बेड़े पर छापा मारकर अधिकार जमा लिया। देखते-देखते ही डैम और स्लोचटेरेन पर भी लुई का झंडा फहराने लगा । चारो ओर से लोग आकर उसके झडे के नीचे एकत्र होने लगे। मोनिंजन नगर के लोगों से लुई ने कुछ रुपया भी वसूल किया जिससे वह अपने दल का खर्च चला सका। परन्तु एल्वा भी तो नहीं रहा था । उसे सग हाल मालूम था । परम्पर्ग के फ्रान्स से लौटते ही मल्वा ने उसे फौज लेकर इधर रवाना किया। एरम्बर्ग के साथ ४ हजार छटे हुए जवान थे। सरदार मेघम ने भी उससे आगे मिल जाने का वादा किया था। डैम के निकट होलीगरली नाम का एक मठ था । यह मठ एक ऊँचे स्थान पर था । और चारो 'ओर नीचे खेत थे । खेतों में से घास खोद-खोदकर जलाने के लिए निकाल लो गई थी। इसलिए उनमें गहरे गड्ढे हो गये थे। गड्ढों में पानी भरा रहता था। पानी की सतह पर एक प्रकार की हरी फफूँदी घास की तरह उगी दीखती थी। लोग फफूँदी को घास समझकर धोका खाकर गड्ढों में गिर सकते थे । लुई ने युद्ध के लिए यह स्थान चुनने में बड़ी होशयारो की थी। स्वयं तो अच्छी ऊँची जगह पर जा डटा था। आक्रमण करने वाले शत्रु के लिए यह धोखे की टट्टियों से भरा हुआ मैदान छोड़ दिया था। एरवर्ग अपनी सेना के साथ यहाँ पहुँच२५३ कर रुक गया । वह स्वयं नेदरलैण्ड का निवासी था और इसी प्रान्त का सूबेदार था । इसलिए वह इस स्थान से खूब परिचित था । उसने सोचा कि मेघम एक दो दिन मे आ पहुँचेगा । तबतक शत्रु पर आक्रमण नही करना चाहिए । परन्तु स्पेन के सिपाही हाल की जीतों के नशे में चूर थे । और तुरन्त हमला करके शत्रुको छाँट डालने के लिए पागल हो उठे । लोग परम्बर्ग पर फिकरे कसने लगे कि 'कायर है; आगे बढ़ने की हिम्मत नही होती! घबराता है।' एरम्बर्ग अच्छी तरह जानता था कि इस मैदान मे कूदना जान-बूझकर मौत के मुँह में कूदना है। परन्तु वह भी वीर था, गठिया के दर्द मे चारपाई से उठकर लड़ने आया था । एरम्बर्ग से स्पेन वालों के ताने न सुने गये । उसके स्वाभिमाना को चोट लगी। उसने सोचा कि यदि स्पेन के सिपाही मौत के मुँह में कूदने को उत्सुक हैं तो नेदरलैण्ड के सेनापति को उन्हें वहां ले चलने मे आगा-पीछा करने की क्या जरूरत है ? लुई बड़ी शांन्ति से मौका देख रहा था । एक दिन पहले ही उसके सिपाहियो में वेतन न मिलने से बलवा होते होते बच गया थी । परन्तु लुई ने बहुत समझा-बुझाकर सैनिको को शान्त कर लिया था । और आज वह सब सैनिक जी-जान से लुई के लिए लड़ने को तैयार थे । परम्बर्ग की फौज ने आगे बढ़कर देशभक्तो पर गोलाबारी शुरू की । लुई की सेना शत्रु को धोखा देने के लिए इधर-उधर भाग उठी। शत्रु को फँसाने के लिए लुई ने यह चाल चली थी । लुई की सेना को भागती देख स्पेन वाले अपने को काबू में न रख सके। अपने नायक का हुक्म न मानकर शत्रु की तरफ दौड़े। दौड़ते ही सब के सब दलदल और गड्ढों में जा फँसे । जब वे गड्ढों से निकलने का प्रयत्न कर रहे वे थे, लुई की सेना ने निकलकर ऊँचे स्थान पर खड़े होकर स्पेन वालों को भूनना शुरू कर दिया। जो गड्ढों से निकलकर भागने लगे उन्हें दूसरी तरफ से एक टुकड़ी ने निकलकर छाँट डाला फिर दलदल में भगाकर कुत्तों की तरह मारना शुरू किया । देखते-देखते स्पेन को सेना नष्ट हो गई । युद्ध में परम्वर्ग और एडोल्फस का सामना हुआ था । एडोल्फम ने परम्वर्ग पर पिस्तौल चलाई । परम्बर्ग के गोली लगी परन्तु उसने झपटकर एडोल्फस को मार डाला । परम्बर्ग का घोड़ा मरकर गिर पड़ा था। फिर भी वह घावों से भरपूर शरीर की चिन्ता न करके महाभारत के योद्धाओं की तरह अन्त तक खड़ा खड़ा लड़ता रहा। स्पेन के जिस कर्नल ने एरम्घर्ग को कायर कहकर ताना मारा था, सबसे पहले वही भाग खड़ा हुआ । सरदार मेघम युद्ध-स्थल के बहुत निकट आ पहुँचा था । परन्तु जब उसने इस सर्वनाश की खबर सुनी तो उलटे पाँव मोनिंजन लौट गया । प्रोनिजन नगर युद्ध की दृष्टि से प्रान्त की कुञ्जी था । देश-भक्त लुई ने विजय ो प्राप्त कर ली थी परन्तु यह शुष्क विजय थी । तन्नाजी जैसे सिंह को खोकर शिवाजी को सिंहगढ़ की विजय पर अधिक उल्लास नहीं हुआ था । एडोल्फस की आहुति देकर लुई और ऑरेंज भी हीलीगरली की विजय पर आनन्द न मना सके परन्तु हृदय का दुःख हृदय में ही रख लुई ने आगे बढ़कर शत्रु का पीछा किया। प्रोनिंजन के पास पहुँचकर मैदान में खाइयां खोदकर अपना डेरा डाल दिया। इस विजय का यह असर अवश्य हुआ कि नेदरलैण्ड वालों का यह विश्वास कि स्पेन की २५५
हजार दिये । लुई ने दस हज़ार; क्यूलम्बर्ग ने तीस हज़ार; वाण्डेन बर्ग ने तीस हज़ार; आरेज की माँ ने भी दस हजार दिये । आज अपना सब कुछ बेच-बाचकर जुआरी की तरह दाव नहीं लगा रहा था । ठण्डे हृदय का राजनीतिज्ञ विलियम ऑरेज अच्छी तरह सोच-समझकर कदम बढ़ा रहा था । एल्वा को चुप चाप उठा लाने और त्रसेल्स पर अधिकार जमा लेने का एक बड़े उत्साह का प्रयत्न हाल ही मे निष्फल हो चुका था । रेकी राय थी कि नेदरलैण्ड पर खुलमखुल्ला तीन तरफ से हमला किया जाय । ऑरे स्वय चौथी तरफ से हमला करने के इरादे से क्लीन्स में जा डटा । एक सेना फ्रान्स की सीमा के निकट एट्रोयज की तरफ से घुसने वाली थी। दूसरी ह्यूग्सट्रेटन की अध्यक्षता में मियूज़ और राइन नदी के बीच में लड़ने वाली थी। तीसरी लुई की अध्यक्षता मे श्रीसलैण्ड मे झडा उठाने वाली थी । परन्तु पहले दोनो स्थानो पर देशभक्तो की सेना को बुरी तरह हार खानी पड़ी। पहले स्थान पर अट्ठारह जुलाई को देशभक्तों के दो हज़ार पाँच सौ सैनिको ने हमला किया परन्तु प्रायः सत्र खप गये; केवल तीन सौ किसी तरह जान बचाकर भाग आये । दूसरे स्थान पर ह्यूग्सट्रेटन के बजाय विलर्स नामी एक मनुष्य को सरदार बना दिया गया था। इसने तीन हज़ार सैनिकों को लेकर रोयरमोंडे नगर पर अधि कार करके नेदरलैण्ड मे पैर जमा लेने का प्रयत्न किया। परन्तु, नगर वाले क्रान्ति के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने उसे घुसने नही दिया । स्पेन की सेना ने आकर विलर्स की सारी सेना छौंट डाली और उसे कैद कर लिया। विलर्स ने फांसी से बच जाने के लोभ से बड़ी नीचता का काम किया । विलियम ऑरेज के सब इरादे और उसकी फौज का नशा दुश्मन को घता दिया । यद्यपि इतनी नीचता करने पर भी उसकी जान न वची । लुई अपने छोटे भाई एडोल्फस के साथ फ्रोसलैण्ड में झएडा उड़ाता हुआ घुसा। झंडे पर लिखा था 'स्वदेश और स्वधर्म के लिए' । घुसते हो उसने प्रान्त के सूबेदार परेल्वर्ग के किले के बेड़े पर छापा मारकर अधिकार जमा लिया। देखते-देखते ही डैम और स्लोचटेरेन पर भी लुई का झंडा फहराने लगा । चारो ओर से लोग आकर उसके झडे के नीचे एकत्र होने लगे। मोनिंजन नगर के लोगों से लुई ने कुछ रुपया भी वसूल किया जिससे वह अपने दल का खर्च चला सका। परन्तु एल्वा भी तो नहीं रहा था । उसे सग हाल मालूम था । परम्पर्ग के फ्रान्स से लौटते ही मल्वा ने उसे फौज लेकर इधर रवाना किया। एरम्बर्ग के साथ चार हजार छटे हुए जवान थे। सरदार मेघम ने भी उससे आगे मिल जाने का वादा किया था। डैम के निकट होलीगरली नाम का एक मठ था । यह मठ एक ऊँचे स्थान पर था । और चारो 'ओर नीचे खेत थे । खेतों में से घास खोद-खोदकर जलाने के लिए निकाल लो गई थी। इसलिए उनमें गहरे गड्ढे हो गये थे। गड्ढों में पानी भरा रहता था। पानी की सतह पर एक प्रकार की हरी फफूँदी घास की तरह उगी दीखती थी। लोग फफूँदी को घास समझकर धोका खाकर गड्ढों में गिर सकते थे । लुई ने युद्ध के लिए यह स्थान चुनने में बड़ी होशयारो की थी। स्वयं तो अच्छी ऊँची जगह पर जा डटा था। आक्रमण करने वाले शत्रु के लिए यह धोखे की टट्टियों से भरा हुआ मैदान छोड़ दिया था। एरवर्ग अपनी सेना के साथ यहाँ पहुँचदो सौ तिरेपन कर रुक गया । वह स्वयं नेदरलैण्ड का निवासी था और इसी प्रान्त का सूबेदार था । इसलिए वह इस स्थान से खूब परिचित था । उसने सोचा कि मेघम एक दो दिन मे आ पहुँचेगा । तबतक शत्रु पर आक्रमण नही करना चाहिए । परन्तु स्पेन के सिपाही हाल की जीतों के नशे में चूर थे । और तुरन्त हमला करके शत्रुको छाँट डालने के लिए पागल हो उठे । लोग परम्बर्ग पर फिकरे कसने लगे कि 'कायर है; आगे बढ़ने की हिम्मत नही होती! घबराता है।' एरम्बर्ग अच्छी तरह जानता था कि इस मैदान मे कूदना जान-बूझकर मौत के मुँह में कूदना है। परन्तु वह भी वीर था, गठिया के दर्द मे चारपाई से उठकर लड़ने आया था । एरम्बर्ग से स्पेन वालों के ताने न सुने गये । उसके स्वाभिमाना को चोट लगी। उसने सोचा कि यदि स्पेन के सिपाही मौत के मुँह में कूदने को उत्सुक हैं तो नेदरलैण्ड के सेनापति को उन्हें वहां ले चलने मे आगा-पीछा करने की क्या जरूरत है ? लुई बड़ी शांन्ति से मौका देख रहा था । एक दिन पहले ही उसके सिपाहियो में वेतन न मिलने से बलवा होते होते बच गया थी । परन्तु लुई ने बहुत समझा-बुझाकर सैनिको को शान्त कर लिया था । और आज वह सब सैनिक जी-जान से लुई के लिए लड़ने को तैयार थे । परम्बर्ग की फौज ने आगे बढ़कर देशभक्तो पर गोलाबारी शुरू की । लुई की सेना शत्रु को धोखा देने के लिए इधर-उधर भाग उठी। शत्रु को फँसाने के लिए लुई ने यह चाल चली थी । लुई की सेना को भागती देख स्पेन वाले अपने को काबू में न रख सके। अपने नायक का हुक्म न मानकर शत्रु की तरफ दौड़े। दौड़ते ही सब के सब दलदल और गड्ढों में जा फँसे । जब वे गड्ढों से निकलने का प्रयत्न कर रहे वे थे, लुई की सेना ने निकलकर ऊँचे स्थान पर खड़े होकर स्पेन वालों को भूनना शुरू कर दिया। जो गड्ढों से निकलकर भागने लगे उन्हें दूसरी तरफ से एक टुकड़ी ने निकलकर छाँट डाला फिर दलदल में भगाकर कुत्तों की तरह मारना शुरू किया । देखते-देखते स्पेन को सेना नष्ट हो गई । युद्ध में परम्वर्ग और एडोल्फस का सामना हुआ था । एडोल्फम ने परम्वर्ग पर पिस्तौल चलाई । परम्बर्ग के गोली लगी परन्तु उसने झपटकर एडोल्फस को मार डाला । परम्बर्ग का घोड़ा मरकर गिर पड़ा था। फिर भी वह घावों से भरपूर शरीर की चिन्ता न करके महाभारत के योद्धाओं की तरह अन्त तक खड़ा खड़ा लड़ता रहा। स्पेन के जिस कर्नल ने एरम्घर्ग को कायर कहकर ताना मारा था, सबसे पहले वही भाग खड़ा हुआ । सरदार मेघम युद्ध-स्थल के बहुत निकट आ पहुँचा था । परन्तु जब उसने इस सर्वनाश की खबर सुनी तो उलटे पाँव मोनिंजन लौट गया । प्रोनिजन नगर युद्ध की दृष्टि से प्रान्त की कुञ्जी था । देश-भक्त लुई ने विजय ो प्राप्त कर ली थी परन्तु यह शुष्क विजय थी । तन्नाजी जैसे सिंह को खोकर शिवाजी को सिंहगढ़ की विजय पर अधिक उल्लास नहीं हुआ था । एडोल्फस की आहुति देकर लुई और ऑरेंज भी हीलीगरली की विजय पर आनन्द न मना सके परन्तु हृदय का दुःख हृदय में ही रख लुई ने आगे बढ़कर शत्रु का पीछा किया। प्रोनिंजन के पास पहुँचकर मैदान में खाइयां खोदकर अपना डेरा डाल दिया। इस विजय का यह असर अवश्य हुआ कि नेदरलैण्ड वालों का यह विश्वास कि स्पेन की दो सौ पचपन
भारतीय कार बाजार में जहां अगले साल कई नई गाड़ियां लॉन्च होने जा रही हैं वहीं, अप्रैल 2023 से भारत में गाड़ियों के लिए नए उत्सर्जन नियम (Emission Norms) लागू होने जा रहे हैं, जिन्हें रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन नॉर्म्स यानी RDE के नाम से जाना जाएगा, खास बात यह है कि इसे BS6 एमिशन नॉर्म्स का फेस 2 भी बताया जा रहा है। अब इस नियम के आने से कई कार कंपनियों को अपनी डीजल गाड़ियों को बंद करना पड़ेगा। लेकिन पेट्रोल कारों में भी कुछ बदलाव होंगे। जो भी मॉडल्स इन नियमों के अनुरूप नहीं होंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। इस नियम के प्रभावी होने के बाद कई लोकप्रिय गाड़ियां बंद हो जाएंगी। इस रिपोर्ट में हम आपको उन 17 कारों की पूरी लिस्ट बता रहे हैं जो अप्रैल 2023 से बंद हो जाएंगी। अगर आप चाहें तो इन गाड़ियों को अभी खरीद सकते हैं.... जानिये क्या है रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन (RDE)? जानकारी के लिए आपको बता दें कि देश में अभी तक कारों के उत्सर्जन स्तर को लैब में टेस्ट किया जाता था । लेकिन यह पाया गया कि जब गाड़ी का वास्तविक जीवन में इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका उत्सर्जन लेवल बढ़ जाता है। अब ऐसे में सरकार ने फोर-व्हीलर पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियों का उत्सर्जन लेवल लगातार चेक करने का नियम बनाया है । इसके लिए वाहनों में डिवाइस लगाने होंगे। - Hyundai Verna Diesel,
भारतीय कार बाजार में जहां अगले साल कई नई गाड़ियां लॉन्च होने जा रही हैं वहीं, अप्रैल दो हज़ार तेईस से भारत में गाड़ियों के लिए नए उत्सर्जन नियम लागू होने जा रहे हैं, जिन्हें रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन नॉर्म्स यानी RDE के नाम से जाना जाएगा, खास बात यह है कि इसे BSछः एमिशन नॉर्म्स का फेस दो भी बताया जा रहा है। अब इस नियम के आने से कई कार कंपनियों को अपनी डीजल गाड़ियों को बंद करना पड़ेगा। लेकिन पेट्रोल कारों में भी कुछ बदलाव होंगे। जो भी मॉडल्स इन नियमों के अनुरूप नहीं होंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। इस नियम के प्रभावी होने के बाद कई लोकप्रिय गाड़ियां बंद हो जाएंगी। इस रिपोर्ट में हम आपको उन सत्रह कारों की पूरी लिस्ट बता रहे हैं जो अप्रैल दो हज़ार तेईस से बंद हो जाएंगी। अगर आप चाहें तो इन गाड़ियों को अभी खरीद सकते हैं.... जानिये क्या है रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन ? जानकारी के लिए आपको बता दें कि देश में अभी तक कारों के उत्सर्जन स्तर को लैब में टेस्ट किया जाता था । लेकिन यह पाया गया कि जब गाड़ी का वास्तविक जीवन में इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका उत्सर्जन लेवल बढ़ जाता है। अब ऐसे में सरकार ने फोर-व्हीलर पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियों का उत्सर्जन लेवल लगातार चेक करने का नियम बनाया है । इसके लिए वाहनों में डिवाइस लगाने होंगे। - Hyundai Verna Diesel,
इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। सभी टीमें जोर-शोर से तैयारियों में लगी हुई हैं। इसी बीच दो साल के बाद वापसी कर रही दो बार की आईपीएल चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स भी चेपॉक स्टेडियम में तैयारी में लगी हुई है और इन तैयारियों के बीच सीएसके के दो दिग्गज आज यानि 1 अप्रैल को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इन दो दिग्गजों में से एक हैं भारतीय टीम और चेन्नई सुपर किंग्स के सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और दूसरे चेन्नई सुपर किंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग एक साथ आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के लिए एक साथ अपने दो बड़े दिग्गजों का जन्मदिन होने पर जश्न का एक बड़ा मौका हाथ लगा है। चेन्नई सुपर किंग्स के सलामी बल्लेबाज और भारत के टेस्ट बल्लेबाज मुरली विजय का जन्म 1 अप्रैल 1984 को तमिलनाडू की राजधानी चेन्नई में हुआ था। मुरली विजय ने आज अपने जीवन के 34 बरस पूरे कर लिए हैं। मुरली विजय इन दिनों आईपीएल को लेकर अपनी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अभ्यास में लगे हुए हैं और वो अपना जन्मदिन अपने सीएसके के साथियों के साथ मना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर न्यूजीलैंड के पूर्व दिग्गज कप्तान और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने आज अपने जीवन के 45 साल पूरे कर लिए हैं। स्टीफन फ्लेमिंग का जन्म 1 अप्रैल 1973 को न्यूजीलैंड के क्राइसचर्च शहर में हुआ था। फ्लेमिंग इन दिनों आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स को कोचिंग दे रहे हैं और वो अपनी टीम के साथ पसीना बहा रहे हैं। चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम के दो खास दिग्गजों के जन्मदिन को लेकर बहुत ही उत्सुक हैं और उन्होंने अपने इन दोनों दिग्गजों मुरली विजय और स्टीफन फ्लेमिंग को खास अंदाज में अपने ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट पर जन्मदिन की बधाई दी। अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। सभी टीमें जोर-शोर से तैयारियों में लगी हुई हैं। इसी बीच दो साल के बाद वापसी कर रही दो बार की आईपीएल चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स भी चेपॉक स्टेडियम में तैयारी में लगी हुई है और इन तैयारियों के बीच सीएसके के दो दिग्गज आज यानि एक अप्रैल को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इन दो दिग्गजों में से एक हैं भारतीय टीम और चेन्नई सुपर किंग्स के सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और दूसरे चेन्नई सुपर किंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग एक साथ आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के लिए एक साथ अपने दो बड़े दिग्गजों का जन्मदिन होने पर जश्न का एक बड़ा मौका हाथ लगा है। चेन्नई सुपर किंग्स के सलामी बल्लेबाज और भारत के टेस्ट बल्लेबाज मुरली विजय का जन्म एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ चौरासी को तमिलनाडू की राजधानी चेन्नई में हुआ था। मुरली विजय ने आज अपने जीवन के चौंतीस बरस पूरे कर लिए हैं। मुरली विजय इन दिनों आईपीएल को लेकर अपनी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अभ्यास में लगे हुए हैं और वो अपना जन्मदिन अपने सीएसके के साथियों के साथ मना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर न्यूजीलैंड के पूर्व दिग्गज कप्तान और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने आज अपने जीवन के पैंतालीस साल पूरे कर लिए हैं। स्टीफन फ्लेमिंग का जन्म एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को न्यूजीलैंड के क्राइसचर्च शहर में हुआ था। फ्लेमिंग इन दिनों आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स को कोचिंग दे रहे हैं और वो अपनी टीम के साथ पसीना बहा रहे हैं। चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम के दो खास दिग्गजों के जन्मदिन को लेकर बहुत ही उत्सुक हैं और उन्होंने अपने इन दोनों दिग्गजों मुरली विजय और स्टीफन फ्लेमिंग को खास अंदाज में अपने ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट पर जन्मदिन की बधाई दी। अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आए तो प्लीज इसे लाइक और शेयर करें।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
ALLAHABAD: चाहे रात दिन काम करना पड़े, काम करिए और नवंबर की टाइमलाइन भूल जाइए। जिन कार्यो को पूरा करने की तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है, उन्हें इसी अवधि में करना है। कार्य अवशेष रहने पर अथवा किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। यह बात कमिश्नर डॉ। आशीष गोयल ने कुंभ कार्यो की समीक्षा बैठक में कही। इस दौरान पीडब्ल्यूडी ने सभी कार्यो के समय रहते पूरा करने की आश्वासन दिया। कमिश्नर ने एकलव्य चौराहा से हाईकोर्ट फ्लाईओवर के पास की सड़क के दोनाें छोर पर बनी पटरी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया। साथ ही नगर की सभी सड़कों को रात-दिन काम करके 31 अक्टूबर तक पूरा करने को कहा। निर्माण कार्यो की समयबद्ध प्रगति और गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए अपर कमिश्नर की अध्यक्षता में मंडलीय अधिकारियों की समिति भी बनाई गई। बैठक में रेलवे अंडरपास के चौड़ीकरण के कार्य को भी तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। सडकों की खुदाई की मरम्मत पर धीमी कार्रवाई पर गंगा प्रदूषण इकाई एवं नगर निगम के पेंच कसे और घरों में सीवर कनेक्शन की पिछली माह की प्रगति एवं अवशेष कार्यो की बिन्दुवार जानकारी ली। कमिश्नर ने खुदी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने के सम्बन्ध मे समयबद्ध कार्य पूरा कराने की तिथियां निर्धारित करवाई और अवशेष कनेक्शन एवं क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की साथ-साथ मरम्मत करते चलने के लिए बेहद कडे़ स्वर में अधिकारियों को हिदायत दी।
ALLAHABAD: चाहे रात दिन काम करना पड़े, काम करिए और नवंबर की टाइमलाइन भूल जाइए। जिन कार्यो को पूरा करने की तिथि इकतीस अक्टूबर निर्धारित है, उन्हें इसी अवधि में करना है। कार्य अवशेष रहने पर अथवा किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। यह बात कमिश्नर डॉ। आशीष गोयल ने कुंभ कार्यो की समीक्षा बैठक में कही। इस दौरान पीडब्ल्यूडी ने सभी कार्यो के समय रहते पूरा करने की आश्वासन दिया। कमिश्नर ने एकलव्य चौराहा से हाईकोर्ट फ्लाईओवर के पास की सड़क के दोनाें छोर पर बनी पटरी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया। साथ ही नगर की सभी सड़कों को रात-दिन काम करके इकतीस अक्टूबर तक पूरा करने को कहा। निर्माण कार्यो की समयबद्ध प्रगति और गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए अपर कमिश्नर की अध्यक्षता में मंडलीय अधिकारियों की समिति भी बनाई गई। बैठक में रेलवे अंडरपास के चौड़ीकरण के कार्य को भी तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। सडकों की खुदाई की मरम्मत पर धीमी कार्रवाई पर गंगा प्रदूषण इकाई एवं नगर निगम के पेंच कसे और घरों में सीवर कनेक्शन की पिछली माह की प्रगति एवं अवशेष कार्यो की बिन्दुवार जानकारी ली। कमिश्नर ने खुदी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने के सम्बन्ध मे समयबद्ध कार्य पूरा कराने की तिथियां निर्धारित करवाई और अवशेष कनेक्शन एवं क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की साथ-साथ मरम्मत करते चलने के लिए बेहद कडे़ स्वर में अधिकारियों को हिदायत दी।
मोयनाः पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मोयना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बूथ अध्यक्ष बिजयकृष्ण भूनिया की कथित हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को पहली गिरफ्तारी की। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के पूर्व मेदिनीपुर जिले के सद्दामपुर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी के अनुसार भूनिया के परिवार ने मोयना थाने में हत्या के मामले में 34 लोगों के खिलाफ शिकायत की है जिसमें गिरफ्तार आरोपी का भी नाम है। पूर्व मेदिनीपुर जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह हत्या राजनीतिक रंजिश का परिणाम है और बुधवार और बृहस्पतिवार की दरमियानी रात को सद्दामपुर में एक घर पर छापा मारकर आरोपी को पकड़ा गया जिसकी पहचान एक राजनीतिक दल के स्थानीय नेता के रूप में की गयी है। भाजपा का दावा है कि भूनिया को 'तृणमूल कांग्रेस के गुंडों' ने सोमवार शाम को उस वक्त उनकी पत्नी के सामने पीटा था जब वह घर लौट रहे थे। आरोप हैं कि हमलावर उन्हें मोटरसाइकल पर जबरदस्ती अपने साथ ले गये। भूनिया का शव सोमवार देर रात उनके घर से कुछ दूरी पर मिला और उनके सिर पर चोट का निशान था। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को 'निराधार' बताया और कहा कि यह मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश है। इस बीच, भूनिया के शव को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दूसरी 'ऑटोप्सी' के लिए बृहस्पतिवार सुबह मोयना अस्पताल से कोलकाता के कमांड अस्पताल लाया गया।
मोयनाः पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मोयना में भारतीय जनता पार्टी के बूथ अध्यक्ष बिजयकृष्ण भूनिया की कथित हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को पहली गिरफ्तारी की। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के पूर्व मेदिनीपुर जिले के सद्दामपुर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी के अनुसार भूनिया के परिवार ने मोयना थाने में हत्या के मामले में चौंतीस लोगों के खिलाफ शिकायत की है जिसमें गिरफ्तार आरोपी का भी नाम है। पूर्व मेदिनीपुर जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह हत्या राजनीतिक रंजिश का परिणाम है और बुधवार और बृहस्पतिवार की दरमियानी रात को सद्दामपुर में एक घर पर छापा मारकर आरोपी को पकड़ा गया जिसकी पहचान एक राजनीतिक दल के स्थानीय नेता के रूप में की गयी है। भाजपा का दावा है कि भूनिया को 'तृणमूल कांग्रेस के गुंडों' ने सोमवार शाम को उस वक्त उनकी पत्नी के सामने पीटा था जब वह घर लौट रहे थे। आरोप हैं कि हमलावर उन्हें मोटरसाइकल पर जबरदस्ती अपने साथ ले गये। भूनिया का शव सोमवार देर रात उनके घर से कुछ दूरी पर मिला और उनके सिर पर चोट का निशान था। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को 'निराधार' बताया और कहा कि यह मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश है। इस बीच, भूनिया के शव को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दूसरी 'ऑटोप्सी' के लिए बृहस्पतिवार सुबह मोयना अस्पताल से कोलकाता के कमांड अस्पताल लाया गया।
फिरोजपुर। गांव कालिये वाला में एक व्यक्ति ने कस्सी से हमला कर अपने दोस्त की हत्या कर दी। हवेली में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात कैद हो गई। आरोपी मौके से फरार है। थाना तलवंडी भाई पुलिस ने आरोपी नछत्तर सिंह निवासी कालिये वाला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रताप सिंह ने पुलिस को बताया कि नछत्तर सिंह और बख्शीश सिंह निवासी हरदियाले वाला उनके घर और खेतों में कामकाज करते थे। दोनों ही रात के समय उनकी हवेली के प्रांगण में सोते थे। 16 जुलाई की रात दोनों सोए हुए थे और जब सुबह उठ कर देखा तो खून से लथपथ बख्शीश की लाश चारपाई पर पड़ी थी। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सीसीटीवी कैमरा चेक किया तो सामने आया कि नछत्तर ने कस्सी से बख्शीश पर हमला कर उसकी हत्या की है। खून से सनी कस्सी भी वहीं पर पड़ी हुई थी। जांच अधिकारी बीरबल सिंह का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
फिरोजपुर। गांव कालिये वाला में एक व्यक्ति ने कस्सी से हमला कर अपने दोस्त की हत्या कर दी। हवेली में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात कैद हो गई। आरोपी मौके से फरार है। थाना तलवंडी भाई पुलिस ने आरोपी नछत्तर सिंह निवासी कालिये वाला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रताप सिंह ने पुलिस को बताया कि नछत्तर सिंह और बख्शीश सिंह निवासी हरदियाले वाला उनके घर और खेतों में कामकाज करते थे। दोनों ही रात के समय उनकी हवेली के प्रांगण में सोते थे। सोलह जुलाई की रात दोनों सोए हुए थे और जब सुबह उठ कर देखा तो खून से लथपथ बख्शीश की लाश चारपाई पर पड़ी थी। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सीसीटीवी कैमरा चेक किया तो सामने आया कि नछत्तर ने कस्सी से बख्शीश पर हमला कर उसकी हत्या की है। खून से सनी कस्सी भी वहीं पर पड़ी हुई थी। जांच अधिकारी बीरबल सिंह का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
निमिश कुमार गर्ग खुर्जा/नगर में आम आदमी पार्टी ने अपनी रैली आयोजित की । नगर के पॉलिटेक्निक मैदान में आम आदमी के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में संदेष व झाडू लेकर नगर में भी आम आदमी पार्टी होने के लिए अपना पूरा दम खम दिखाया जिला संयोजक विकास षर्मा ने कहा कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य देष से भ्रश्ट राजनीति को उखाड़ फेंकना है वहीं कोशाध्यक्ष अतुल मित्तल ने कहा कि आगामी समय राजनीति में ईमानदारी का होगा यही आप का उद्देष्य है इसके अलावा अन्य वक्ताओं द्वारा भी रैली को सम्बोधित किया गया रैली नगर के पॉलिटेक्निक से पारम्भ होकर दाताराम चौक पर जाकर समाप्त की गयी । रैली में दुर्गेष गुप्ता, एम0पी0 सिंह, रामकुमार षर्मा, मनोज सिंह, रवि षर्मा, राजकुमार षर्मा, धर्मेन्द हुड्डा, कैलाष गौतम, मनी सलूजा, नन्दकिषोर गुप्ता, पं0 नित्यानन्द मिश्र, पुरूशोत्तम चौहान, नरेष भारद्वाज, मोनिका षर्मा, अंजलि चौधरी, सुनीता गौतम, डॉ0 अनुराधा व विभा कंसल आदि काफी कार्यकर्ता मौजूद रहे । वहीं दूसरी तरफ राश्ट्रवादी पताप सेना ने आप के नेता पषान्त भूशण की ब्यानबाजी को लेकर सेना के पदेष कार्यकारिणी सदस्य योगेष सिंह चौहान के नेतृत्व में एक रैली निकाली तथा आप के नेता पषान्त भूशण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी तथा कहा गया कि यह पार्टी कांग्रेस पार्टी का दूसरा चेहरा है । तो भारत देष का हित नहीं चाहती है यह पार्टी विदेषों से चन्दा इकट्"ा कर रही है जो देष की विचारधारा के खिलाफ है आम आदमी पार्टी विदेष नीति पर काम कर रही है लेकिन हमारी सेना इनके मनसूबों को कामयाब नहीं होने देगी । राश्ट्रवादी पताप सेना की रैली में वीरेन्द सिंह, बादल राघव, अजय पुण्डीर, डॉ0 राजबहादुर सिंह, भानुपताप तौमर, सुनील गुप्ता, योगेष षर्मा, श्रीनिवास जादौन, नरेष जादौन, धीरेन्द सिंह राघव आदि मौजूद रहे ।
निमिश कुमार गर्ग खुर्जा/नगर में आम आदमी पार्टी ने अपनी रैली आयोजित की । नगर के पॉलिटेक्निक मैदान में आम आदमी के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में संदेष व झाडू लेकर नगर में भी आम आदमी पार्टी होने के लिए अपना पूरा दम खम दिखाया जिला संयोजक विकास षर्मा ने कहा कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य देष से भ्रश्ट राजनीति को उखाड़ फेंकना है वहीं कोशाध्यक्ष अतुल मित्तल ने कहा कि आगामी समय राजनीति में ईमानदारी का होगा यही आप का उद्देष्य है इसके अलावा अन्य वक्ताओं द्वारा भी रैली को सम्बोधित किया गया रैली नगर के पॉलिटेक्निक से पारम्भ होकर दाताराम चौक पर जाकर समाप्त की गयी । रैली में दुर्गेष गुप्ता, एमशून्यपीशून्य सिंह, रामकुमार षर्मा, मनोज सिंह, रवि षर्मा, राजकुमार षर्मा, धर्मेन्द हुड्डा, कैलाष गौतम, मनी सलूजा, नन्दकिषोर गुप्ता, पंशून्य नित्यानन्द मिश्र, पुरूशोत्तम चौहान, नरेष भारद्वाज, मोनिका षर्मा, अंजलि चौधरी, सुनीता गौतम, डॉशून्य अनुराधा व विभा कंसल आदि काफी कार्यकर्ता मौजूद रहे । वहीं दूसरी तरफ राश्ट्रवादी पताप सेना ने आप के नेता पषान्त भूशण की ब्यानबाजी को लेकर सेना के पदेष कार्यकारिणी सदस्य योगेष सिंह चौहान के नेतृत्व में एक रैली निकाली तथा आप के नेता पषान्त भूशण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी तथा कहा गया कि यह पार्टी कांग्रेस पार्टी का दूसरा चेहरा है । तो भारत देष का हित नहीं चाहती है यह पार्टी विदेषों से चन्दा इकट्"ा कर रही है जो देष की विचारधारा के खिलाफ है आम आदमी पार्टी विदेष नीति पर काम कर रही है लेकिन हमारी सेना इनके मनसूबों को कामयाब नहीं होने देगी । राश्ट्रवादी पताप सेना की रैली में वीरेन्द सिंह, बादल राघव, अजय पुण्डीर, डॉशून्य राजबहादुर सिंह, भानुपताप तौमर, सुनील गुप्ता, योगेष षर्मा, श्रीनिवास जादौन, नरेष जादौन, धीरेन्द सिंह राघव आदि मौजूद रहे ।
देश की आजादी और फिर राज्य का गठन जैसी घटनाओं का साक्ष्य इतिहास के रूप में हमारे सामने उपस्थित रहा है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। कल, आज और कल के पूरे परिदृश्य में जल प्रत्येक जीव की पहली जरूरत रही है। कालांतर में ग्रामीण आबादी की पेयजल व्यवस्था के स्रोत कुआं, बावड़ी, तालाब, पोखर और नदियां जरूर रहे हैं, लेकिन परिवार की जल व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारी आधी आबादी (महिलाओं) पर ही रही है। पानी के स्रोत कितनी भी दूर हों और मौसम कैसा भी दुष्कर हो, पानी लाने का काम मां, बहन, बहू और बेटियों को ही करना होता था। मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना (एक नवंबर, 1956) के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का गठन वर्ष 1969 में हुआ। विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल प्रदाय की योजनाएं तैयार कर क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में जहां पेयजल के स्रोत नहीं थे, वहाँ पर केलिक्स-रिंग मशीन द्वारा हैण्डपंप स्थापित कर आम जनता को शीघ्र पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती रही है। इस व्यवस्था के लिए करीब 5 लाख 55 हजार हैण्डपंप की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में की गई थी, जो लगातार क्रियाशील है। पेयजल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्रदाय के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन सहित पेयजल स्रोतों की जल-गुणवत्ता की निगरानी और अनुश्रवण सहित सहायक गतिविधियों का संचालन भी निरंतर हो रहा है। केन्द्र सरकार से शत-प्रतिशत अनुदान आधारित गतिवर्धित ग्रामीण जल-प्रदाय कार्यक्रम पर वर्ष 1972 से अमल शुरू हुआ। इसमें 40 लीटर प्रति व्यक्ति, प्रति दिन के मान से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के कार्य किए गए। त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के बाद वर्ष 1995 में नगरीय क्षेत्रों में पेयजल प्रदाय के संचालन और संधारण का कार्य संबंधित नगरीय निकायों को सौंपा गया। इसके बाद से ही पीएचई विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता पूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के दायित्व का निर्वहन कर रहा है। प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के लिए समय के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता और सुगमता को देखते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री पेयजल योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के कार्य प्रारंभ किये गये। इनमें ग्रामीण आबादी के घरों में नल कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध करवाने का कार्य हुआ। केंद्र, राज्य और वित्तीय संस्थाओं के सहयोग से अप्रैल 2020 तक 17 लाख 72 हजार ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन से जल पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश की ग्रामीण आबादी के लिए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ऐसा वरदान है, जो उनकी पेयजल की कठिनाइयों को पूरी तरह दूर कर देगा। आजादी के बाद मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ग्रामीण परिवारों की पेयजल व्यवस्था की बड़ी कठिनाई को समझा, उस पर गंभीरता से चिंतन किया और निदान के लिए जल जीवन मिशन की घोषणा कर उसे मूर्तरूप दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की करीब सवा पांच करोड़ ग्रामीण आबादी के लिए जल जीवन मिशन में तत्काल कार्य प्रारंभ करवाये। मिशन को सरकार की प्राथमिकता में रख कर निरंतर प्रगति की समीक्षा करते हुए जल प्रदाय योजनाओं के कार्य गुणवत्तापूर्ण और जल्दी पूरा करने के लिए विभागीय अमले से संवाद कर उन्हें प्रेरित किया। जून 2020 में मिशन के कार्य जब प्रारंभ हुए तो देश के साथ मध्य प्रदेश भी कोविड-19 के लॉकडाउन से गुजर रहा था। कोविड-19 और दो वर्षा काल के बाबजूद 20 लाख से अधिक वार्षिक लक्ष्य वाले 12 बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश ने अपना अच्छा स्थान लगातार बनाये रखा है। मिशन में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर को देश का शत-प्रतिशत "हर घर जल" सर्टिफाइड जिला होने का प्रथम पुरस्कार राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से प्राप्त हुआ है। अब तक प्रदेश के 6 हजार 783 ग्राम शत-प्रतिशत "हर घर जल" युक्त हो चुके हैं, इनमें से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सर्वाधिक सर्टिफाइड घोषित ग्रामों की संख्या मध्य प्रदेश की ही है। अब तक प्रदेश के 53 लाख 97 हजार 911 ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाया जा चुका है। इसी शृंखला में ग्रामीण क्षेत्र में संचालित 41 हजार 271 आंगनवाड़ियों और 71 हजार 92 शालाओं में नल कनेक्शन से जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की गई है। शेष शालाओं एवं आंगनवाड़ियों में भी नल कनेक्शन के कार्य निरंतर जारी हैं। हमारा प्रदेश 12 बड़े राज्यों में सर्वाधिक ग्रामों को शत-प्रतिशत "हर घर जल" उपलब्ध करवाने में दूसरे पायदान पर है। विभाग की मिशन की व्यूह-रचना में प्रदेश के करीब एक करोड़ 20 लाख लक्षित ग्रामीण परिवारों में से शेष रहे परिवारों को केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित वर्ष 2024 की समय-सीमा में नल कनेक्शन से जल पहुंचाना है। विभागीय सर्वेक्षण में 10 हजार 409 ग्राम स्रोत विहीन पाये गये हैं। राज्य शासन ने इन ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के लिए जल-स्त्रोत आकलन समिति गठित की है, जो वैकल्पिक स्रोत के संबंध में सूक्ष्म परीक्षण कर रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर जल-संरचनाओं के निर्माण के कार्य प्रारंभ किए जा सकेंगे। केन्द्र और राज्य सरकार के 50-50 प्रतिशत व्यय भार से संचालित जल जीवन मिशन में अब तक 49 हजार 776 करोड़ रुपये लागत की जल-प्रदाय योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें 36 हजार 464 करोड़ की समूह और 13 हजार 312 करोड़ की एकल जल-प्रदाय योजनाएं शामिल हैं। मिशन में प्रदेश के लक्षित 51 हजार 548 ग्रामों में से 41 हजार 139 में जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। शेष जल-स्रोत विहीन ग्रामों के संबंध में राज्य स्तरीय समिति आकलन का कार्य कर रही हैं। प्रदेश के 23 हजार से अधिक ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य 60 से 90 प्रतिशत प्रगतिरत हैं। जल-स्रोत विहीन ग्रामों का सर्वे कार्य शुरू किया जा चुका है। मिशन में लक्ष्य से भी बड़े अपने हौंसले के साथ हम निश्चित ही अपेक्षित और सकारात्मक परिणाम हासिल करेंगे। आने वाला कल प्रदेश के हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य की पूर्ति का साक्षी होगा। (लेखक, मप्र शासन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री है। )
देश की आजादी और फिर राज्य का गठन जैसी घटनाओं का साक्ष्य इतिहास के रूप में हमारे सामने उपस्थित रहा है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। कल, आज और कल के पूरे परिदृश्य में जल प्रत्येक जीव की पहली जरूरत रही है। कालांतर में ग्रामीण आबादी की पेयजल व्यवस्था के स्रोत कुआं, बावड़ी, तालाब, पोखर और नदियां जरूर रहे हैं, लेकिन परिवार की जल व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारी आधी आबादी पर ही रही है। पानी के स्रोत कितनी भी दूर हों और मौसम कैसा भी दुष्कर हो, पानी लाने का काम मां, बहन, बहू और बेटियों को ही करना होता था। मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का गठन वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में हुआ। विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल प्रदाय की योजनाएं तैयार कर क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में जहां पेयजल के स्रोत नहीं थे, वहाँ पर केलिक्स-रिंग मशीन द्वारा हैण्डपंप स्थापित कर आम जनता को शीघ्र पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती रही है। इस व्यवस्था के लिए करीब पाँच लाख पचपन हजार हैण्डपंप की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में की गई थी, जो लगातार क्रियाशील है। पेयजल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्रदाय के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन सहित पेयजल स्रोतों की जल-गुणवत्ता की निगरानी और अनुश्रवण सहित सहायक गतिविधियों का संचालन भी निरंतर हो रहा है। केन्द्र सरकार से शत-प्रतिशत अनुदान आधारित गतिवर्धित ग्रामीण जल-प्रदाय कार्यक्रम पर वर्ष एक हज़ार नौ सौ बहत्तर से अमल शुरू हुआ। इसमें चालीस लीटरटर प्रति व्यक्ति, प्रति दिन के मान से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के कार्य किए गए। त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के बाद वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे में नगरीय क्षेत्रों में पेयजल प्रदाय के संचालन और संधारण का कार्य संबंधित नगरीय निकायों को सौंपा गया। इसके बाद से ही पीएचई विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता पूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के दायित्व का निर्वहन कर रहा है। प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के लिए समय के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता और सुगमता को देखते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री पेयजल योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के कार्य प्रारंभ किये गये। इनमें ग्रामीण आबादी के घरों में नल कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध करवाने का कार्य हुआ। केंद्र, राज्य और वित्तीय संस्थाओं के सहयोग से अप्रैल दो हज़ार बीस तक सत्रह लाख बहत्तर हजार ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन से जल पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश की ग्रामीण आबादी के लिए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ऐसा वरदान है, जो उनकी पेयजल की कठिनाइयों को पूरी तरह दूर कर देगा। आजादी के बाद मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ग्रामीण परिवारों की पेयजल व्यवस्था की बड़ी कठिनाई को समझा, उस पर गंभीरता से चिंतन किया और निदान के लिए जल जीवन मिशन की घोषणा कर उसे मूर्तरूप दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की करीब सवा पांच करोड़ ग्रामीण आबादी के लिए जल जीवन मिशन में तत्काल कार्य प्रारंभ करवाये। मिशन को सरकार की प्राथमिकता में रख कर निरंतर प्रगति की समीक्षा करते हुए जल प्रदाय योजनाओं के कार्य गुणवत्तापूर्ण और जल्दी पूरा करने के लिए विभागीय अमले से संवाद कर उन्हें प्रेरित किया। जून दो हज़ार बीस में मिशन के कार्य जब प्रारंभ हुए तो देश के साथ मध्य प्रदेश भी कोविड-उन्नीस के लॉकडाउन से गुजर रहा था। कोविड-उन्नीस और दो वर्षा काल के बाबजूद बीस लाख से अधिक वार्षिक लक्ष्य वाले बारह बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश ने अपना अच्छा स्थान लगातार बनाये रखा है। मिशन में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर को देश का शत-प्रतिशत "हर घर जल" सर्टिफाइड जिला होने का प्रथम पुरस्कार राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से प्राप्त हुआ है। अब तक प्रदेश के छः हजार सात सौ तिरासी ग्राम शत-प्रतिशत "हर घर जल" युक्त हो चुके हैं, इनमें से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सर्वाधिक सर्टिफाइड घोषित ग्रामों की संख्या मध्य प्रदेश की ही है। अब तक प्रदेश के तिरेपन लाख सत्तानवे हजार नौ सौ ग्यारह ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाया जा चुका है। इसी शृंखला में ग्रामीण क्षेत्र में संचालित इकतालीस हजार दो सौ इकहत्तर आंगनवाड़ियों और इकहत्तर हजार बानवे शालाओं में नल कनेक्शन से जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की गई है। शेष शालाओं एवं आंगनवाड़ियों में भी नल कनेक्शन के कार्य निरंतर जारी हैं। हमारा प्रदेश बारह बड़े राज्यों में सर्वाधिक ग्रामों को शत-प्रतिशत "हर घर जल" उपलब्ध करवाने में दूसरे पायदान पर है। विभाग की मिशन की व्यूह-रचना में प्रदेश के करीब एक करोड़ बीस लाख लक्षित ग्रामीण परिवारों में से शेष रहे परिवारों को केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित वर्ष दो हज़ार चौबीस की समय-सीमा में नल कनेक्शन से जल पहुंचाना है। विभागीय सर्वेक्षण में दस हजार चार सौ नौ ग्राम स्रोत विहीन पाये गये हैं। राज्य शासन ने इन ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के लिए जल-स्त्रोत आकलन समिति गठित की है, जो वैकल्पिक स्रोत के संबंध में सूक्ष्म परीक्षण कर रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर जल-संरचनाओं के निर्माण के कार्य प्रारंभ किए जा सकेंगे। केन्द्र और राज्य सरकार के पचास-पचास प्रतिशत व्यय भार से संचालित जल जीवन मिशन में अब तक उनचास हजार सात सौ छिहत्तर करोड़ रुपये लागत की जल-प्रदाय योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें छत्तीस हजार चार सौ चौंसठ करोड़ की समूह और तेरह हजार तीन सौ बारह करोड़ की एकल जल-प्रदाय योजनाएं शामिल हैं। मिशन में प्रदेश के लक्षित इक्यावन हजार पाँच सौ अड़तालीस ग्रामों में से इकतालीस हजार एक सौ उनतालीस में जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। शेष जल-स्रोत विहीन ग्रामों के संबंध में राज्य स्तरीय समिति आकलन का कार्य कर रही हैं। प्रदेश के तेईस हजार से अधिक ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य साठ से नब्बे प्रतिशत प्रगतिरत हैं। जल-स्रोत विहीन ग्रामों का सर्वे कार्य शुरू किया जा चुका है। मिशन में लक्ष्य से भी बड़े अपने हौंसले के साथ हम निश्चित ही अपेक्षित और सकारात्मक परिणाम हासिल करेंगे। आने वाला कल प्रदेश के हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य की पूर्ति का साक्षी होगा।
जौनपुरः जौनपुर जिले की केराकत क्षेत्र में रविवार को एक ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) शैलेंद्र सिंह ने यहां बताया कि जौनपुर के बक्सा क्षेत्र निवासी शिवजीत (28) और सुजीत कुमार (26) आजमगढ़ में किसी विवाह समारोह में शामिल होने के बाद मोटरसाइकिल से अपने घर लौट रहे थे। तड़के लगभग तीन बजे केराकत चौराहे पर जौनपुर से केराकत की तरफ जा रहे एक ट्रक से उनकी मोटरसाइकिल जा टकराई और उसी में फंसी रह गई। उन्होंने बताया कि इस घटना में शिवजीत की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि सुजीत ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था। सिंह ने बताया कि पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और ट्रक को कब्जे में ले लिया है।
जौनपुरः जौनपुर जिले की केराकत क्षेत्र में रविवार को एक ट्रक की चपेट में आने से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने यहां बताया कि जौनपुर के बक्सा क्षेत्र निवासी शिवजीत और सुजीत कुमार आजमगढ़ में किसी विवाह समारोह में शामिल होने के बाद मोटरसाइकिल से अपने घर लौट रहे थे। तड़के लगभग तीन बजे केराकत चौराहे पर जौनपुर से केराकत की तरफ जा रहे एक ट्रक से उनकी मोटरसाइकिल जा टकराई और उसी में फंसी रह गई। उन्होंने बताया कि इस घटना में शिवजीत की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि सुजीत ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था। सिंह ने बताया कि पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और ट्रक को कब्जे में ले लिया है।
दरभंगा। देवेन्द्र कुमार ठाकुर। आरक्षी उप महानिरीक्षक क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के अंदर विभिन्न मामले में लगभग 223 अपराधियों की गिरफ्तारी की गयी तथा यातायात के उल्लघंन के मामले में 2 लाख 65 हजार 7 सौ रूपये की जुर्माने के रूप में वसूली की गयी। शुक्रवार को अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए दरभंगा प्रक्षेत्र के डीआईजी विनोद कुमार ने कहा। उन्होने साप्ताहिक उपलब्धि की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शराब का अवैध धंधा करने के मामले में 1 जनवरी 2018 से लेकर 30 नवम्बर 2018 तक दरभंगा अब तक 539 दो पहिया, 18 तीन पहिया तथा 204 चार पहिया वाहन की जब्ती की गयी। डीआईजी श्री कुमार ने बताया कि इसके अलावे शराब का अवैध धंधा करने वाले कुल 77 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी। 3346.74 लीटर देसी शराब एवं 8476.05 लीटर विदेशी शराब की बरामदगी करने के साथ पिछले सप्ताह में 3 देसी पिस्टल, 1 कारतूस, 1 ट्रक, 13 दो पहिया वाहन, 5 चार पहिया, 1 मिनी ट्रक, 1 मोबाइल के साथ 4 लाख 12 हजार रुपये बरामद किये गए। बताया कि समस्तीपुर जिले के विद्यापति नगर थाना क्षेत्र के घटकों स्थित सड़क पर10 क्विंटल मुर्गा एवं एक पिकअप वैन की लूट हुई थी। पुलिस ने मुर्गा सहित पिकअप वैन को बरामद कर लिया। समस्तीपुर जिले के पटोरी मोहनपुर में हत्या के मामले में दो अभियुक्तों में से एक अभियुक्त की गिरफ्तारी की गयी। जबकि भूमि विवाद में थाना एवं अंचलाधिकारी के द्वारा अब प्रक्षेत्र में 68 मामले मे से 51 मामले का निपटारा किया गया। दरभंगा जिले से अप्राप्त प्रतिवेदन के लिए वरीय आरक्षी अधीक्षक को थानेवार सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
दरभंगा। देवेन्द्र कुमार ठाकुर। आरक्षी उप महानिरीक्षक क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के अंदर विभिन्न मामले में लगभग दो सौ तेईस अपराधियों की गिरफ्तारी की गयी तथा यातायात के उल्लघंन के मामले में दो लाख पैंसठ हजार सात सौ रूपये की जुर्माने के रूप में वसूली की गयी। शुक्रवार को अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए दरभंगा प्रक्षेत्र के डीआईजी विनोद कुमार ने कहा। उन्होने साप्ताहिक उपलब्धि की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शराब का अवैध धंधा करने के मामले में एक जनवरी दो हज़ार अट्ठारह से लेकर तीस नवम्बर दो हज़ार अट्ठारह तक दरभंगा अब तक पाँच सौ उनतालीस दो पहिया, अट्ठारह तीन पहिया तथा दो सौ चार चार पहिया वाहन की जब्ती की गयी। डीआईजी श्री कुमार ने बताया कि इसके अलावे शराब का अवैध धंधा करने वाले कुल सतहत्तर अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी। तीन हज़ार तीन सौ छियालीस दशमलव चौहत्तर लीटरटर देसी शराब एवं आठ हज़ार चार सौ छिहत्तर दशमलव पाँच लीटरटर विदेशी शराब की बरामदगी करने के साथ पिछले सप्ताह में तीन देसी पिस्टल, एक कारतूस, एक ट्रक, तेरह दो पहिया वाहन, पाँच चार पहिया, एक मिनी ट्रक, एक मोबाइल के साथ चार लाख बारह हजार रुपये बरामद किये गए। बताया कि समस्तीपुर जिले के विद्यापति नगर थाना क्षेत्र के घटकों स्थित सड़क परदस क्विंटल मुर्गा एवं एक पिकअप वैन की लूट हुई थी। पुलिस ने मुर्गा सहित पिकअप वैन को बरामद कर लिया। समस्तीपुर जिले के पटोरी मोहनपुर में हत्या के मामले में दो अभियुक्तों में से एक अभियुक्त की गिरफ्तारी की गयी। जबकि भूमि विवाद में थाना एवं अंचलाधिकारी के द्वारा अब प्रक्षेत्र में अड़सठ मामले मे से इक्यावन मामले का निपटारा किया गया। दरभंगा जिले से अप्राप्त प्रतिवेदन के लिए वरीय आरक्षी अधीक्षक को थानेवार सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
आधुनिक बच्चों की कंप्यूटर कुर्सियां एक ऐसे बच्चे के लिए फर्नीचर का एक अनिवार्य टुकड़ा है जो अध्ययन करते समय लैपटॉप या पीसी पर बहुत समय बिताती है। वे आराम प्रदान करते हैं, पीठ में तनाव से छुटकारा पाते हैं और सही मुद्रा के गठन के लिए जरूरी हैं। बच्चे की रीढ़ की हड्डी का गठन किया जा रहा है, इसलिए घर के बच्चों के कंप्यूटर कुर्सियों को स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। वे आमतौर पर कई समायोजन प्रणालियों से लैस होते हैं। नवीनतम एर्गोनोमिक विकास ने ऑर्थोपेडिक कंप्यूटर बच्चों की कुर्सी बनाने की अनुमति दी, जो रीढ़ की हड्डी का अधिकतम समर्थन करता है। यह कुर्सी कक्षाओं के दौरान बच्चे के सही स्थान को सुनिश्चित करेगी और बिना चिकनी और विकृतियों के चिकनी और स्वस्थ पीठ के विकास की नींव रखेगी। उनके पास कोई armrests, समायोज्य वापस और सीट नहीं है, पीछे के कोण को बदलना संभव है। स्कूली लड़के के लिए बढ़ते बच्चों की कंप्यूटर कुर्सी विशेष रूप से लोकप्रिय थी। यह एक विशेष तंत्र से लैस है जो ऊंचाई को नियंत्रित करता है। बच्चे के विकास के आधार पर प्रत्येक मॉडल को व्यक्तिगत विशेषताओं में उठाया और समायोजित किया जा सकता है। सुविधाजनक लीवर और हैंडल त्वरित और आसान समायोजन प्रदान करते हैं। और जब कोई बच्चा बड़ा हो जाता है, तो उसे उसे नया फर्नीचर खरीदने की ज़रूरत नहीं होती है, उसके साथ कुर्सी बढ़ सकती है। ऐसा ट्रांसफॉर्मर कई वर्षों तक कुर्सी चुनने की समस्या को हल करने में मदद करेगा। इसके अलावा, कुर्सियों के cladding के हंसमुख उज्ज्वल और रंगीन रंगों का एक बड़ा चयन pleases, जिससे कोई भी अपने लिए एक पसंदीदा विषय चुन सकते हैं। बच्चों के फर्नीचर - कंप्यूटर डेस्क, कुर्सियां, अध्ययन और अध्ययन के लिए बच्चे को आरामदायक कोने से लैस करने में मदद करेंगी। जितना अधिक आरामदायक और आरामदायक बच्चा होगा, उतना ही कम हो जाएगा और जानकारी को अवशोषित करने में बेहतर सक्षम होगा।
आधुनिक बच्चों की कंप्यूटर कुर्सियां एक ऐसे बच्चे के लिए फर्नीचर का एक अनिवार्य टुकड़ा है जो अध्ययन करते समय लैपटॉप या पीसी पर बहुत समय बिताती है। वे आराम प्रदान करते हैं, पीठ में तनाव से छुटकारा पाते हैं और सही मुद्रा के गठन के लिए जरूरी हैं। बच्चे की रीढ़ की हड्डी का गठन किया जा रहा है, इसलिए घर के बच्चों के कंप्यूटर कुर्सियों को स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। वे आमतौर पर कई समायोजन प्रणालियों से लैस होते हैं। नवीनतम एर्गोनोमिक विकास ने ऑर्थोपेडिक कंप्यूटर बच्चों की कुर्सी बनाने की अनुमति दी, जो रीढ़ की हड्डी का अधिकतम समर्थन करता है। यह कुर्सी कक्षाओं के दौरान बच्चे के सही स्थान को सुनिश्चित करेगी और बिना चिकनी और विकृतियों के चिकनी और स्वस्थ पीठ के विकास की नींव रखेगी। उनके पास कोई armrests, समायोज्य वापस और सीट नहीं है, पीछे के कोण को बदलना संभव है। स्कूली लड़के के लिए बढ़ते बच्चों की कंप्यूटर कुर्सी विशेष रूप से लोकप्रिय थी। यह एक विशेष तंत्र से लैस है जो ऊंचाई को नियंत्रित करता है। बच्चे के विकास के आधार पर प्रत्येक मॉडल को व्यक्तिगत विशेषताओं में उठाया और समायोजित किया जा सकता है। सुविधाजनक लीवर और हैंडल त्वरित और आसान समायोजन प्रदान करते हैं। और जब कोई बच्चा बड़ा हो जाता है, तो उसे उसे नया फर्नीचर खरीदने की ज़रूरत नहीं होती है, उसके साथ कुर्सी बढ़ सकती है। ऐसा ट्रांसफॉर्मर कई वर्षों तक कुर्सी चुनने की समस्या को हल करने में मदद करेगा। इसके अलावा, कुर्सियों के cladding के हंसमुख उज्ज्वल और रंगीन रंगों का एक बड़ा चयन pleases, जिससे कोई भी अपने लिए एक पसंदीदा विषय चुन सकते हैं। बच्चों के फर्नीचर - कंप्यूटर डेस्क, कुर्सियां, अध्ययन और अध्ययन के लिए बच्चे को आरामदायक कोने से लैस करने में मदद करेंगी। जितना अधिक आरामदायक और आरामदायक बच्चा होगा, उतना ही कम हो जाएगा और जानकारी को अवशोषित करने में बेहतर सक्षम होगा।
साइंटिस्ट नंबी नारायणन को कथित रूप से 1994 ISRO जासूसी मामले में फंसाने वाले चार आरोपी पुलिस अफसरों की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। मामले में केरल हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत का आदेश दिया था, उसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने जमानत याचिकाओं को केरल हाईकोर्ट को वापस दे दिया है। साथ ही चार हफ्ते के भीतर मामले पर नए सिरे से फैसला करने को कहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पांच हफ्तों तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं करने का फैसला दिया है। चार आरोपी जिन्हें केरल हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी, उनमें गुजरात के पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार, केरल के पूर्व DGP सिबी मैथ्यूज समेत दो पूर्व पुलिस अधिकारी एस विजयन और थम्पी एस शामिल हैं। मामले में CBI ने केरल हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। CBI ने कहा था कि जमानत देने से मामले की जांच पटरी से उतर सकती है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 1994 ISRO जासूसी मामले में नंबी नारायणन को पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से फंसाया था। उनके साथ भारत के अन्य पांच लोगों समेत मालदीव की दो महिला और दो वैज्ञानिकों पर स्पेस प्रोग्राम के सीक्रेट डॉक्यूमेंट को विदेशों में ट्रांसफर करने का आरोप लगा था। इससे पहले CBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्हें जांच में पता चला है कि मामले में कुछ वैज्ञानिकों को प्रताड़ित किया गया और फंसाया गया है। इसके कारण क्रायोजेनिक इंजन के डेवलपमेंट पर असर पड़ा था। इसके चलते देश का स्पेस प्रोग्राम लगभग एक से दो दशक पीछे चला गया था। आरोपियों की जमानत के विरोध में CBI ने कहा था कि यह बहुत गंभीर मामला है। विदेशी एजेंट के इशारों पर कोई बड़ी साजिश हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है। साथ ही दावा किया कि आरोपी एक ऐसी टीम का हिस्सा थे, जिसका मकसद क्रायोजेनिक इंजन के निर्माण को नाकाम करना था। CBI ने पहले 1996 में नारायणन को क्लीन चिट दी थी और कहा था कि केरल पुलिस ने मामले को मनगढ़ंत तरीके से बनाया है। जांच एजेंसी ने मामले में सच का पता लगाया। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। 1998 में खुद के बेगुनाह साबित होने के बाद नारायणन ने उन्हें फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। 14 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। साथ ही केरल सरकार को निर्देश दिया था कि वह नारायणन को 50 लाख रुपए का मुआवजा दें। नारायणन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को साइको-पैथोलॉजिकल ट्रीटमेंट करार देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपियों ने उनके मानवाधिकारों के साथ ही उनकी स्वतंत्रता और गरिमा को खतरे में डाला था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
साइंटिस्ट नंबी नारायणन को कथित रूप से एक हज़ार नौ सौ चौरानवे ISRO जासूसी मामले में फंसाने वाले चार आरोपी पुलिस अफसरों की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। मामले में केरल हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत का आदेश दिया था, उसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने जमानत याचिकाओं को केरल हाईकोर्ट को वापस दे दिया है। साथ ही चार हफ्ते के भीतर मामले पर नए सिरे से फैसला करने को कहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पांच हफ्तों तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं करने का फैसला दिया है। चार आरोपी जिन्हें केरल हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी, उनमें गुजरात के पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार, केरल के पूर्व DGP सिबी मैथ्यूज समेत दो पूर्व पुलिस अधिकारी एस विजयन और थम्पी एस शामिल हैं। मामले में CBI ने केरल हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। CBI ने कहा था कि जमानत देने से मामले की जांच पटरी से उतर सकती है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अट्ठाईस नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे ISRO जासूसी मामले में नंबी नारायणन को पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से फंसाया था। उनके साथ भारत के अन्य पांच लोगों समेत मालदीव की दो महिला और दो वैज्ञानिकों पर स्पेस प्रोग्राम के सीक्रेट डॉक्यूमेंट को विदेशों में ट्रांसफर करने का आरोप लगा था। इससे पहले CBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्हें जांच में पता चला है कि मामले में कुछ वैज्ञानिकों को प्रताड़ित किया गया और फंसाया गया है। इसके कारण क्रायोजेनिक इंजन के डेवलपमेंट पर असर पड़ा था। इसके चलते देश का स्पेस प्रोग्राम लगभग एक से दो दशक पीछे चला गया था। आरोपियों की जमानत के विरोध में CBI ने कहा था कि यह बहुत गंभीर मामला है। विदेशी एजेंट के इशारों पर कोई बड़ी साजिश हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है। साथ ही दावा किया कि आरोपी एक ऐसी टीम का हिस्सा थे, जिसका मकसद क्रायोजेनिक इंजन के निर्माण को नाकाम करना था। CBI ने पहले एक हज़ार नौ सौ छियानवे में नारायणन को क्लीन चिट दी थी और कहा था कि केरल पुलिस ने मामले को मनगढ़ंत तरीके से बनाया है। जांच एजेंसी ने मामले में सच का पता लगाया। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में खुद के बेगुनाह साबित होने के बाद नारायणन ने उन्हें फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। चौदह सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। साथ ही केरल सरकार को निर्देश दिया था कि वह नारायणन को पचास लाख रुपए का मुआवजा दें। नारायणन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को साइको-पैथोलॉजिकल ट्रीटमेंट करार देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपियों ने उनके मानवाधिकारों के साथ ही उनकी स्वतंत्रता और गरिमा को खतरे में डाला था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Udaipur. Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायाधीपति डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा है कि पक्षकारों के न्याय दिलाने में और बार और बेंच के संबंधों को सकारात्मक रखने में अधिवक्ता की भूमिका कृष्ण के रूप में है और यह भूमिका न्याय व्यवस्था के लिए अधिवक्ता को सशक्त बनाती है. डॉ भाटी ने तकनीक के साथ बेहतर तैयारी करने पर आह्वान किया. बार एसोसिएशन Udaipur के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डॉ पुष्पेंद्र भाटी ने कहा कि उनका Udaipur से गहरा लगाव है और वह Udaipur को बचपन से पसंद करते आए हैं doctor भाटी ने कहा कि सीनियर अधिवक्ताओं से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है और मेवाड़ के सीनियर अधिवक्ताओं ने न केवल Udaipur में वर्णन Rajasthan और देश में न्याय व्यवस्था में कई बड़े पदों पर रहकर Udaipur का गौरव बढ़ाया है और और उनसे उन्हें इस न्याय व्यवस्था में बहुत कुछ सीखने को मिला है. डॉ भाटी ने कहा कि देश की आजादी से लेकर आज तक अधिवक्ता पक्षकारों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा है और उसकी भूमिका न्याय के हित में उसे समाज में बेहतर रूप से स्थापित करती है उन्होंने सीनियर अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं को इस प्रोफेशन में ठहराव के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित करें और उनके लिए शैक्षणिक सत्र के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षित भी करें. उन्होंने देश की आजादी में अधिवक्ताओं के रूप में महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू एवं पाकिस्तान के जिन्ना का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे बेहतरीन अधिवक्ता रहे जिन्होंने आजादी की लड़ाई को अपने तरीके से लड़कर पक्षकारों के लिए अच्छी वकालत की. उन्होंने अधिवक्ताओं को मानवीय संवेदना ओं को रखकर भी पक्षकारों को सकारात्मक न्याय दिलाने के लिए प्रेरित किया उन्होंने अपने मित्र कुलदीप माथुर के साथ 30 वर्ष के संस्करण भी सुनाएं. Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायाधश पति कुलदीप माथुर ने कहा कि वह Udaipur में दूसरी बार आए हैं और दोनों ही बार वह doctor पुष्पेंद्र भाटी के साथ ही आए हैं उन्होंने कहा कि Udaipur बार में बढ़ती अधिवक्ताओं की संख्या को देखकर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार करना होगा ताकि एक ही छत के नीचे अधिवक्ताओं पक्षकारों को सभी सुख सुविधाएं मिल सके और वह बेहतर महसूस कर सकें उन्होंने Jodhpur में Rajasthan उच्च न्यायालय बिल्डिंग के बाहर बनने के दौरान किए गए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका विरोध जारी ही रहते हुए भी जब Rajasthan उच्च न्यायालय बनकर तैयार हो गया तो आज पक्ष कार और अधिवक्ताओं को एक ही छत के नीचे पार्किंग लिटिगेट सेंड वकीलों के लिए चेंबर कैंटीन सब सुविधाएं मिल रही है जिससे बाहर से आने वाला अधिवक्ता भी पक्षकार भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है. माथुर ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष से कहा कि उन्हें इस दिशा में भी विचार करके शीघ्र निर्णय लेना चाहिए. माथुर ने अधिवक्ताओं द्वारा की जा रही हड़ताल का पक्ष लेते हुए कहा कि वह हड़ताल के विरोध में नहीं है लेकिन उन्होंने आह्वान किया कि अधिवक्ता को जो भी हड़ताल करनी है वह गौरव मैं वह गरिमा में रहकर ही करनी होगी जिससे वह इस प्रोफेशन की गरिमा को भी बनाकर रख सकें और अपनी बात संबंधित व्यक्ति नेता विभाग तक पहुंचा सके. समारोह में Rajasthan उच्च न्यायालय की judge भर्ती डॉ श्रीमती नूपुर भाटी ने कहां की देश में महिलाओं की 50% की भागीदारी है लेकिन न्याय व्यवस्था में वर्तमान में 66% महिलाओं की भागीदारी होने से सीनियर अधिवक्ताओं की यह जिम्मेदारी है कि वह महिला अधिवक्ताओं को इस व्यवसाय में ठहराव के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें हर संभव मदद करें उन्होंने महिलाओं से अपने प्रकरणों की वस्तुस्थिति को गंभीरता से लेने सशक्त वकालत करने और आने वाले समय को देखकर पेपर लेस वर्क करने के लिए तकनीक का भी उपयोग करने का आह्वान किया. समारोह में बतौर गेस्ट आए महापौर जी एस्टार्क व नगर निगम के उपमहापौर पारस सिंघवी भी मौजूद रहे जीएस टाक के चले जाने के बाद उपमहापौर भारत सिंह जी ने कहा कि नगर निगम जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और अधिवक्ताओं के साथ सदैव सकारात्मक काम करता आया है उन्होंने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की मांग पर Monday से दो सफाई कर्मी नियमित लगाने और आने वाले समय में महिला व पुरुष अधिवक्ताओं के साथ पक्षकारों के लिए अत्याधुनिक सुलभ सुविधा कंपलेक्स बनाने की घोषणा की है. समारोह में बार काउंसिल ऑफ Rajasthan के को चेयरमैन राम रतन सिंह ने कहा कि मेवाड़ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से यहां पक्ष कार सस्ता सुलभ न्याय से वंचित है गरीबी के कारण वह न्याय प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में Rajasthan उच्च न्यायालय के अतिथियों से उन्होंने Udaipur में Rajasthan उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित होने से पूर्व तक सर्किट बेंच भिलाई जाने की मांग की है उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए अधिवक्ताओं के वेलफेयर के लिए भी आजीवन सदस्यता नहीं लेने पर वार्षिक सदस्यता लेने पर जोर दिया. समारोह में आमंत्रित जिला एवं सत्र judge चंचल मिश्रा के Jodhpur में किसी कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए चले जाने पर उनके प्रतिनिधि के रूप में आई कमर्शियल कोर्ट की जज शिवानी जोहरी भटनागर ने कहा कि Udaipur में कई प्रतिष्ठित अधिवक्ता रहे हैं इनसे उन्हें सिविल और फौजदारी मामलों में एक बेहतरीन सीखने को भी मिला है उन्होंने यहां के अधिवक्ताओं को जूनियर अधिवक्ताओं को अच्छी तरीके से प्रशिक्षण देने पर जोर दिया. नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश मोगरा ने अपनी कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष योगेंद्र दशोरा महासचिव शिव कुमार उपाध्याय सचिव चेतन प्रकाश पालीवाल वित्त सचिव हरीश सेन एवं पुस्तकालय सचिव राकेश आचार्य के साथ आमंत्रित सदस्य के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता धन सिंह जाला मनोज अग्रवाल गणेश लाल तेली जयवर्धन सिंह निर्भय सिंह दुलावत चेतन चौधरी श्रीमती उलेमा मंसूरी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई और वर्ष पर्यंत बार और अधिवक्ताओं के हित में कार्य करने का आग्रह किया. समारोह में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश मोगरा एवं महासचिव शिव कुमार उपाध्याय ने अपनी कार्यकारिणी के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद जी बख्शी एवं शकुंतला जोशी एवं नीता जैन के साथ अतिथि डॉ पुष्पेंद्र भाटी कुलदीप माथुर नूपुर भाटी पारस सिंघवी राम रतन सिंह एवं शिवानी जोहरी का ऊपर ना उड़ा कर माला पहना कर प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया. इस दौरान कुलदीप माथुर की पत्नी नीता माथुर का भी अभिवादन किया गया. समारोह में नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश मोगरा की दादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय सवाई लाल मोगरा की पत्नी ने तीसरी पीढ़ी के रूप में वकालत कर रहे अपने पोते राकेश मोगरा का सार्वजनिक मंच पर आकर माला उड़ाकर शाल पहनाकर आशीर्वाद देकर सम्मानित किया इस दौरान पूरे सदन ने उठकर भावविभोर होकर अभिवादन किया. उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि राकेश उनके परिवार का तीसरी पीढ़ी का अधिवक्ता होकर अध्यक्ष बना है दादी ने पोते से कहा कि वह अधिवक्ताओं के स्थाई विकास के लिए कोई सकारात्मक कदम उठाएं. समारोह में Banswara प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़ सलूंबर नाथद्वारा राजसमंद Bhilwara और Jodhpur के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने भी Udaipur पहुंच कर अतिथियों का प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया वही नवनिर्वाचित इन बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी पदाधिकारियों का बार एसोसिएशन Udaipur के पदाधिकारियों ने भी सम्मान किया. समारोह में बार एसोसिएशन Udaipur के वरिष्ठ अधिवक्ता महिला अधिवक्ता सहित चित्तौड़ Bhilwara मावली सलूंबर नाथद्वारा प्रतापगढ़ Jodhpur सहित विभिन्न बार से आए अधिवक्ताओं न्यायिक अधिकारी गण सहित आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया. समारोह का संचालन एडवोकेट बृजेंद्र सेठ ने किया वहीं धन्यवाद की रस्म महासचिव शिव कुमार उपाध्याय ने अदा की समारोह में सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे. समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ.
Udaipur. Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायाधीपति डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा है कि पक्षकारों के न्याय दिलाने में और बार और बेंच के संबंधों को सकारात्मक रखने में अधिवक्ता की भूमिका कृष्ण के रूप में है और यह भूमिका न्याय व्यवस्था के लिए अधिवक्ता को सशक्त बनाती है. डॉ भाटी ने तकनीक के साथ बेहतर तैयारी करने पर आह्वान किया. बार एसोसिएशन Udaipur के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डॉ पुष्पेंद्र भाटी ने कहा कि उनका Udaipur से गहरा लगाव है और वह Udaipur को बचपन से पसंद करते आए हैं doctor भाटी ने कहा कि सीनियर अधिवक्ताओं से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है और मेवाड़ के सीनियर अधिवक्ताओं ने न केवल Udaipur में वर्णन Rajasthan और देश में न्याय व्यवस्था में कई बड़े पदों पर रहकर Udaipur का गौरव बढ़ाया है और और उनसे उन्हें इस न्याय व्यवस्था में बहुत कुछ सीखने को मिला है. डॉ भाटी ने कहा कि देश की आजादी से लेकर आज तक अधिवक्ता पक्षकारों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा है और उसकी भूमिका न्याय के हित में उसे समाज में बेहतर रूप से स्थापित करती है उन्होंने सीनियर अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वह जूनियर अधिवक्ताओं को इस प्रोफेशन में ठहराव के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित करें और उनके लिए शैक्षणिक सत्र के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षित भी करें. उन्होंने देश की आजादी में अधिवक्ताओं के रूप में महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू एवं पाकिस्तान के जिन्ना का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे बेहतरीन अधिवक्ता रहे जिन्होंने आजादी की लड़ाई को अपने तरीके से लड़कर पक्षकारों के लिए अच्छी वकालत की. उन्होंने अधिवक्ताओं को मानवीय संवेदना ओं को रखकर भी पक्षकारों को सकारात्मक न्याय दिलाने के लिए प्रेरित किया उन्होंने अपने मित्र कुलदीप माथुर के साथ तीस वर्ष के संस्करण भी सुनाएं. Rajasthan उच्च न्यायालय के न्यायाधश पति कुलदीप माथुर ने कहा कि वह Udaipur में दूसरी बार आए हैं और दोनों ही बार वह doctor पुष्पेंद्र भाटी के साथ ही आए हैं उन्होंने कहा कि Udaipur बार में बढ़ती अधिवक्ताओं की संख्या को देखकर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार करना होगा ताकि एक ही छत के नीचे अधिवक्ताओं पक्षकारों को सभी सुख सुविधाएं मिल सके और वह बेहतर महसूस कर सकें उन्होंने Jodhpur में Rajasthan उच्च न्यायालय बिल्डिंग के बाहर बनने के दौरान किए गए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका विरोध जारी ही रहते हुए भी जब Rajasthan उच्च न्यायालय बनकर तैयार हो गया तो आज पक्ष कार और अधिवक्ताओं को एक ही छत के नीचे पार्किंग लिटिगेट सेंड वकीलों के लिए चेंबर कैंटीन सब सुविधाएं मिल रही है जिससे बाहर से आने वाला अधिवक्ता भी पक्षकार भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है. माथुर ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष से कहा कि उन्हें इस दिशा में भी विचार करके शीघ्र निर्णय लेना चाहिए. माथुर ने अधिवक्ताओं द्वारा की जा रही हड़ताल का पक्ष लेते हुए कहा कि वह हड़ताल के विरोध में नहीं है लेकिन उन्होंने आह्वान किया कि अधिवक्ता को जो भी हड़ताल करनी है वह गौरव मैं वह गरिमा में रहकर ही करनी होगी जिससे वह इस प्रोफेशन की गरिमा को भी बनाकर रख सकें और अपनी बात संबंधित व्यक्ति नेता विभाग तक पहुंचा सके. समारोह में Rajasthan उच्च न्यायालय की judge भर्ती डॉ श्रीमती नूपुर भाटी ने कहां की देश में महिलाओं की पचास% की भागीदारी है लेकिन न्याय व्यवस्था में वर्तमान में छयासठ% महिलाओं की भागीदारी होने से सीनियर अधिवक्ताओं की यह जिम्मेदारी है कि वह महिला अधिवक्ताओं को इस व्यवसाय में ठहराव के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें हर संभव मदद करें उन्होंने महिलाओं से अपने प्रकरणों की वस्तुस्थिति को गंभीरता से लेने सशक्त वकालत करने और आने वाले समय को देखकर पेपर लेस वर्क करने के लिए तकनीक का भी उपयोग करने का आह्वान किया. समारोह में बतौर गेस्ट आए महापौर जी एस्टार्क व नगर निगम के उपमहापौर पारस सिंघवी भी मौजूद रहे जीएस टाक के चले जाने के बाद उपमहापौर भारत सिंह जी ने कहा कि नगर निगम जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और अधिवक्ताओं के साथ सदैव सकारात्मक काम करता आया है उन्होंने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की मांग पर Monday से दो सफाई कर्मी नियमित लगाने और आने वाले समय में महिला व पुरुष अधिवक्ताओं के साथ पक्षकारों के लिए अत्याधुनिक सुलभ सुविधा कंपलेक्स बनाने की घोषणा की है. समारोह में बार काउंसिल ऑफ Rajasthan के को चेयरमैन राम रतन सिंह ने कहा कि मेवाड़ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से यहां पक्ष कार सस्ता सुलभ न्याय से वंचित है गरीबी के कारण वह न्याय प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में Rajasthan उच्च न्यायालय के अतिथियों से उन्होंने Udaipur में Rajasthan उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित होने से पूर्व तक सर्किट बेंच भिलाई जाने की मांग की है उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए अधिवक्ताओं के वेलफेयर के लिए भी आजीवन सदस्यता नहीं लेने पर वार्षिक सदस्यता लेने पर जोर दिया. समारोह में आमंत्रित जिला एवं सत्र judge चंचल मिश्रा के Jodhpur में किसी कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए चले जाने पर उनके प्रतिनिधि के रूप में आई कमर्शियल कोर्ट की जज शिवानी जोहरी भटनागर ने कहा कि Udaipur में कई प्रतिष्ठित अधिवक्ता रहे हैं इनसे उन्हें सिविल और फौजदारी मामलों में एक बेहतरीन सीखने को भी मिला है उन्होंने यहां के अधिवक्ताओं को जूनियर अधिवक्ताओं को अच्छी तरीके से प्रशिक्षण देने पर जोर दिया. नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश मोगरा ने अपनी कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष योगेंद्र दशोरा महासचिव शिव कुमार उपाध्याय सचिव चेतन प्रकाश पालीवाल वित्त सचिव हरीश सेन एवं पुस्तकालय सचिव राकेश आचार्य के साथ आमंत्रित सदस्य के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता धन सिंह जाला मनोज अग्रवाल गणेश लाल तेली जयवर्धन सिंह निर्भय सिंह दुलावत चेतन चौधरी श्रीमती उलेमा मंसूरी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई और वर्ष पर्यंत बार और अधिवक्ताओं के हित में कार्य करने का आग्रह किया. समारोह में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश मोगरा एवं महासचिव शिव कुमार उपाध्याय ने अपनी कार्यकारिणी के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद जी बख्शी एवं शकुंतला जोशी एवं नीता जैन के साथ अतिथि डॉ पुष्पेंद्र भाटी कुलदीप माथुर नूपुर भाटी पारस सिंघवी राम रतन सिंह एवं शिवानी जोहरी का ऊपर ना उड़ा कर माला पहना कर प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया. इस दौरान कुलदीप माथुर की पत्नी नीता माथुर का भी अभिवादन किया गया. समारोह में नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश मोगरा की दादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय सवाई लाल मोगरा की पत्नी ने तीसरी पीढ़ी के रूप में वकालत कर रहे अपने पोते राकेश मोगरा का सार्वजनिक मंच पर आकर माला उड़ाकर शाल पहनाकर आशीर्वाद देकर सम्मानित किया इस दौरान पूरे सदन ने उठकर भावविभोर होकर अभिवादन किया. उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि राकेश उनके परिवार का तीसरी पीढ़ी का अधिवक्ता होकर अध्यक्ष बना है दादी ने पोते से कहा कि वह अधिवक्ताओं के स्थाई विकास के लिए कोई सकारात्मक कदम उठाएं. समारोह में Banswara प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़ सलूंबर नाथद्वारा राजसमंद Bhilwara और Jodhpur के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने भी Udaipur पहुंच कर अतिथियों का प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया वही नवनिर्वाचित इन बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी पदाधिकारियों का बार एसोसिएशन Udaipur के पदाधिकारियों ने भी सम्मान किया. समारोह में बार एसोसिएशन Udaipur के वरिष्ठ अधिवक्ता महिला अधिवक्ता सहित चित्तौड़ Bhilwara मावली सलूंबर नाथद्वारा प्रतापगढ़ Jodhpur सहित विभिन्न बार से आए अधिवक्ताओं न्यायिक अधिकारी गण सहित आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया. समारोह का संचालन एडवोकेट बृजेंद्र सेठ ने किया वहीं धन्यवाद की रस्म महासचिव शिव कुमार उपाध्याय ने अदा की समारोह में सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे. समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ.
राष्ट्रीय स्तर पर ORKA कबड्डी लीग का सलेक्शन प्रोसेस का पहला फेज खत्म हो चुका है। इस पहले फेज में हिमाचल के अब तक 4 युवाओं का सलेक्शन हुआ है। सलेक्शन प्रोसेस का दुसरा फेज फरवरी में होगा। जिसमें हिमाचल के ओर युवाओं को मौका मिल सकता है। बता दें ORKA कबड्डी लीग भारत में मई महिने ने खेली जाएगी। जिसमें इनाम राशि 8 करोड़ रुपए रखी गई है। मई महिने में होने वाली इस लीग में पूरे देश से कुल 24 टीमें भाग लेंगी। जिसमें 12 पुरूष और 12 महिला वर्ग होगा। संजय ठाकुर जिनका चुनाव पहले ही दौर मैं बतौर रेडर हो चुका है। उन्होंने बताया की उनके साथ 3 और खिलाड़ी सलेक्ट हुए हैं जिनमें से 2 डिफेंडर और 2 रेडर हैं। उन्होंने बताया की 'HEY KABBADI' इसका थीम रखा गया है और इस लीग को लेकर युवाओं में काफी जोश है।
राष्ट्रीय स्तर पर ORKA कबड्डी लीग का सलेक्शन प्रोसेस का पहला फेज खत्म हो चुका है। इस पहले फेज में हिमाचल के अब तक चार युवाओं का सलेक्शन हुआ है। सलेक्शन प्रोसेस का दुसरा फेज फरवरी में होगा। जिसमें हिमाचल के ओर युवाओं को मौका मिल सकता है। बता दें ORKA कबड्डी लीग भारत में मई महिने ने खेली जाएगी। जिसमें इनाम राशि आठ करोड़ रुपए रखी गई है। मई महिने में होने वाली इस लीग में पूरे देश से कुल चौबीस टीमें भाग लेंगी। जिसमें बारह पुरूष और बारह महिला वर्ग होगा। संजय ठाकुर जिनका चुनाव पहले ही दौर मैं बतौर रेडर हो चुका है। उन्होंने बताया की उनके साथ तीन और खिलाड़ी सलेक्ट हुए हैं जिनमें से दो डिफेंडर और दो रेडर हैं। उन्होंने बताया की 'HEY KABBADI' इसका थीम रखा गया है और इस लीग को लेकर युवाओं में काफी जोश है।
शराब के दुकान के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते नरायनपुर के वाशिंदे। मीरजापुर।(आशीष तिवारी) नरायनपुर विकास खण्ड के गंगाघाट कालोनी में अवैध शराब खुलने का मामला शुक्रवार को डीएम दरबार में गूंजा। इससे पूर्व भारी संख्या में नरायनपुर क्षेत्र के निजामुद्दीनपुर आये पुरूष व महिलाओं के साथ बच्चे शामिल रहे। हुए प्रदर्शन के दौरान सम्बोधित करती हुई महिलाओं ने कहा कि वहां बार-बार हुए विरोध प्रदर्शन के बावजूद दुकानदार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कहा कि आबादी के बीच शराब की दुकान खुलवाया जाना कहां तक न्यायोचित है। महिलाओं ने कहा कि गंगाघाट कालोनी के आसपास जहां धार्मिक स्थल हैं वहीं स्कूल आदि स्थापित हैं। महिलाओं ने कहा कि शराब की दुकान खुलने से क्षेत्र में अमन व चैन का माहौल प्रभावित होगा। कहा कि विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थानीय पुलिस चैकी प्रभारी व शराब माफियाओं के बीच सांठगांठ है। विरोध करने वालों के घर रात मंे पहुंच कर गायब कराने की धमकियां तक दी जा रही हैं। महिलाओं ने कहा कि उनके घर वालो को पुलिस वाले फर्जी मुकदमो में फंसाये जाने की धौंस दे जुबान बंद करायी जा रही है। कहा कि यदि समय रहते जिला प्रशासन शराब की दुकान का फैसला करते हुए बस्ती से न हटाया गया तो अब चूप बैठने वाले नहीं आंदोलन तेज किया जायेगा। इस मौके पर भारी संख्या में पुरूष, महिलाएं व बच्चे मौजूद रहे।
शराब के दुकान के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते नरायनपुर के वाशिंदे। मीरजापुर। नरायनपुर विकास खण्ड के गंगाघाट कालोनी में अवैध शराब खुलने का मामला शुक्रवार को डीएम दरबार में गूंजा। इससे पूर्व भारी संख्या में नरायनपुर क्षेत्र के निजामुद्दीनपुर आये पुरूष व महिलाओं के साथ बच्चे शामिल रहे। हुए प्रदर्शन के दौरान सम्बोधित करती हुई महिलाओं ने कहा कि वहां बार-बार हुए विरोध प्रदर्शन के बावजूद दुकानदार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। कहा कि आबादी के बीच शराब की दुकान खुलवाया जाना कहां तक न्यायोचित है। महिलाओं ने कहा कि गंगाघाट कालोनी के आसपास जहां धार्मिक स्थल हैं वहीं स्कूल आदि स्थापित हैं। महिलाओं ने कहा कि शराब की दुकान खुलने से क्षेत्र में अमन व चैन का माहौल प्रभावित होगा। कहा कि विरोध प्रदर्शन के बावजूद स्थानीय पुलिस चैकी प्रभारी व शराब माफियाओं के बीच सांठगांठ है। विरोध करने वालों के घर रात मंे पहुंच कर गायब कराने की धमकियां तक दी जा रही हैं। महिलाओं ने कहा कि उनके घर वालो को पुलिस वाले फर्जी मुकदमो में फंसाये जाने की धौंस दे जुबान बंद करायी जा रही है। कहा कि यदि समय रहते जिला प्रशासन शराब की दुकान का फैसला करते हुए बस्ती से न हटाया गया तो अब चूप बैठने वाले नहीं आंदोलन तेज किया जायेगा। इस मौके पर भारी संख्या में पुरूष, महिलाएं व बच्चे मौजूद रहे।