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वडोदरा/नई दिल्ली (एजेंसी) । लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा के प्रस्तावित निर्माण के लिए रविवार को देशभर में हजारों लोग दौड़े। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस दौड़ को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा "इस दौड़ का आयोजन लोगों गांवों और देश को एकजुट करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह देशभक्ति क प्रतीक है। " उन्होंने कहा "यह सभी भारतीयों के सपने और आकांक्षाएं पूरी करने का एक प्रयास है। कृपया इसे राजनीति की नजर से न देखा जाए। " भाजपा के अनुसार सरदार वल्लभभाई पटेल की 63वीं पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में 1 1०० स्थानों पर लोग एक समय में एक साथ दौड़े। ज्ञात हो कि गुजरात में नर्मदा बांध के समीप 'एकता की प्रतिमा' नाम से सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने युवाओं से देश की खातिर उठ खड़े होने का आह्वान करते हुए दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इससे पहले पार्टी के दिल्ली कार्यालय में राजनाथ ने कहा "देश के युवाओं को जागृत होने की जरूरत है...युवाओं में इतनी शक्ति है कि हमारे सामने दुनिया की कोई ताकत टिक नहीं सकती। " इस दौड़ के बाद भाजपा लौहपुरुष की प्रतिमा के लिए लोहा एकत्र करने का देशव्यापी अभियान भी चलाएगी। लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर रविवार को आयोजित 'रन फॉर युनिटी' के तहत उत्तर प्रदेश में 9० से ज्यादा जगहों पर दौड़ का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता कार्यकर्ताओं के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शिरकत की। सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के आ"ान पर देश के विभिन्न हिस्सों की तरह उत्तर प्रदेश में भी रन फॉर युनिटी दौड़ का आयोजन किया गया। लखनऊ में दौड़ का नेतृत्व भाजपा महासचिव मुरलीधर राव ने किया जो सरदार पटेल प्रतिमा (हजरतगंज) से शुरू होकर शहीद पथ पर समाप्त हुई। दौड़ में करीब पांच हजार लोग शामिल थे। वरिष्ठ भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि समाज के हर वर्ग ने दौड़ में हिस्सा लेकर एकता के इस अभियान को पूरा समर्थन दिया। दौड़ अपने उद्देश्य में अपेक्षा से अधिक सफल रही। उन्होंने कहा कि रन फॉर युनिटी को राजनीति से न जोड़ा जाए। सिंह ने कहा कि अब तक विश्व में एक समय एक साथ और एक उद्देश्य के लिए कभी इतनी बड़ी संख्या में लोग कभी नहीं दौड़े। ये अपने आप में एक रिकार्ड है। चित्रकूट वाराणसी और अयोध्या में साधु-संतों ने दौड़ की अगुआई की। वहीं भाजपा के योगी आदित्यनाथ मुख्तार अब्बास नकवी लक्ष्मीकांत वाजपेयी और विनय कटियार ने क्रमशः गोरखपुर गाजियाबाद वाराणसी और कानपुर शहरों में दौड़ का नेतृत्व किया। रन फॉर युनिटी के आयोजन के बाद गुजरात में पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रदेश में लोहा एकत्र करने का अभियान शुरू होगा।
वडोदरा/नई दिल्ली । लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की एक सौ बयासी मीटर ऊंची प्रतिमा के प्रस्तावित निर्माण के लिए रविवार को देशभर में हजारों लोग दौड़े। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस दौड़ को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। मोदी ने कहा "इस दौड़ का आयोजन लोगों गांवों और देश को एकजुट करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह देशभक्ति क प्रतीक है। " उन्होंने कहा "यह सभी भारतीयों के सपने और आकांक्षाएं पूरी करने का एक प्रयास है। कृपया इसे राजनीति की नजर से न देखा जाए। " भाजपा के अनुसार सरदार वल्लभभाई पटेल की तिरेसठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में एक एक सौ स्थानों पर लोग एक समय में एक साथ दौड़े। ज्ञात हो कि गुजरात में नर्मदा बांध के समीप 'एकता की प्रतिमा' नाम से सरदार पटेल की एक सौ बयासी मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने युवाओं से देश की खातिर उठ खड़े होने का आह्वान करते हुए दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इससे पहले पार्टी के दिल्ली कार्यालय में राजनाथ ने कहा "देश के युवाओं को जागृत होने की जरूरत है...युवाओं में इतनी शक्ति है कि हमारे सामने दुनिया की कोई ताकत टिक नहीं सकती। " इस दौड़ के बाद भाजपा लौहपुरुष की प्रतिमा के लिए लोहा एकत्र करने का देशव्यापी अभियान भी चलाएगी। लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर रविवार को आयोजित 'रन फॉर युनिटी' के तहत उत्तर प्रदेश में नब्बे से ज्यादा जगहों पर दौड़ का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शिरकत की। सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के आ"ान पर देश के विभिन्न हिस्सों की तरह उत्तर प्रदेश में भी रन फॉर युनिटी दौड़ का आयोजन किया गया। लखनऊ में दौड़ का नेतृत्व भाजपा महासचिव मुरलीधर राव ने किया जो सरदार पटेल प्रतिमा से शुरू होकर शहीद पथ पर समाप्त हुई। दौड़ में करीब पांच हजार लोग शामिल थे। वरिष्ठ भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि समाज के हर वर्ग ने दौड़ में हिस्सा लेकर एकता के इस अभियान को पूरा समर्थन दिया। दौड़ अपने उद्देश्य में अपेक्षा से अधिक सफल रही। उन्होंने कहा कि रन फॉर युनिटी को राजनीति से न जोड़ा जाए। सिंह ने कहा कि अब तक विश्व में एक समय एक साथ और एक उद्देश्य के लिए कभी इतनी बड़ी संख्या में लोग कभी नहीं दौड़े। ये अपने आप में एक रिकार्ड है। चित्रकूट वाराणसी और अयोध्या में साधु-संतों ने दौड़ की अगुआई की। वहीं भाजपा के योगी आदित्यनाथ मुख्तार अब्बास नकवी लक्ष्मीकांत वाजपेयी और विनय कटियार ने क्रमशः गोरखपुर गाजियाबाद वाराणसी और कानपुर शहरों में दौड़ का नेतृत्व किया। रन फॉर युनिटी के आयोजन के बाद गुजरात में पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रदेश में लोहा एकत्र करने का अभियान शुरू होगा।
वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण करने की अपनी इच्छा की पुष्टि अमेरिका से की है. साथ ही पोम्पिओ ने इस बात पर जोर दिया कि 12 जून को सिंगापुर में होने वाली बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी "खराब सौदे" पर राजी नहीं होंगे. विदेश मंत्री का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग - उन के बीच बैठक के दौरान होने वाले किसी भी समझौते को पुष्टि के लिए कांग्रेस के समक्ष रखा जाएगा. समझौते पर संसद की मंजूरी इसलिए मांगी जाएगी ताकि भविष्य में आने वाली सरकारें उसे पलट ना सकें. व्हाइट हाउस के संवाददाता सम्मेलन में पोम्पिओ ने कहा, "बैठक की तैयारियों के लिए अमेरिका और उत्तर कोरिया सीधी बातचीत कर रहे हैं. उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर अपनी इच्छा की अमेरिका से पुष्टि भी की है. " उन्होंने कहा कि ट्रंप इस संबंध में प्रत्येक सूचना पर करीब से नजर रख रहे हैं और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से रोजाना इस संबंध में जानकारी लेते हैं. वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि अमेरिका के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता से पहले उत्तर कोरिया को राजनीतिक कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए और उसे विश्व निकाय के साथ मिलकर मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करना चाहिए. पिछले महीने उत्तर कोरिया की ओर से तीन अमेरिकी नागरिकों को रिहा किये जाने का स्वागत करते हुए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) में मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत तोमस ओजिया क्विंताना ने यह टिप्पणी की. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है. जिनेवा में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान क्विंताना ने उत्तर कोरिया में मनमाने तरीके से कैद किये गए लोगों की रिहाई के बारे में शासन को ठोस संकेत देने की अपील की. क्विंताना ने कहा, "यह एक क्रमिक प्रक्रिया हो सकती है. ऐसा नहीं, कि मैं कह रहा हूं कि आप इन सभी कारागारों खोल दें और कैदियों को रिहा कर दीजिए क्योंकि मैं एक जिम्मेदार विशेषज्ञ हूं. मैं यह कह रहा हूं कि अमेरिकी कैदियों की रिहाई के बाद एक क्रमिक प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है. " उत्तर कोरिया में कैद किये गए राजनीतिक कैदियों की संख्या के बारे में जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन ऐसा अनुमान है कि इसकी संख्या 80 हजार से अधिक है.
वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण करने की अपनी इच्छा की पुष्टि अमेरिका से की है. साथ ही पोम्पिओ ने इस बात पर जोर दिया कि बारह जून को सिंगापुर में होने वाली बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी "खराब सौदे" पर राजी नहीं होंगे. विदेश मंत्री का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग - उन के बीच बैठक के दौरान होने वाले किसी भी समझौते को पुष्टि के लिए कांग्रेस के समक्ष रखा जाएगा. समझौते पर संसद की मंजूरी इसलिए मांगी जाएगी ताकि भविष्य में आने वाली सरकारें उसे पलट ना सकें. व्हाइट हाउस के संवाददाता सम्मेलन में पोम्पिओ ने कहा, "बैठक की तैयारियों के लिए अमेरिका और उत्तर कोरिया सीधी बातचीत कर रहे हैं. उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर अपनी इच्छा की अमेरिका से पुष्टि भी की है. " उन्होंने कहा कि ट्रंप इस संबंध में प्रत्येक सूचना पर करीब से नजर रख रहे हैं और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से रोजाना इस संबंध में जानकारी लेते हैं. वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि अमेरिका के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता से पहले उत्तर कोरिया को राजनीतिक कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए और उसे विश्व निकाय के साथ मिलकर मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करना चाहिए. पिछले महीने उत्तर कोरिया की ओर से तीन अमेरिकी नागरिकों को रिहा किये जाने का स्वागत करते हुए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोरिया में मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत तोमस ओजिया क्विंताना ने यह टिप्पणी की. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोरिया उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है. जिनेवा में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान क्विंताना ने उत्तर कोरिया में मनमाने तरीके से कैद किये गए लोगों की रिहाई के बारे में शासन को ठोस संकेत देने की अपील की. क्विंताना ने कहा, "यह एक क्रमिक प्रक्रिया हो सकती है. ऐसा नहीं, कि मैं कह रहा हूं कि आप इन सभी कारागारों खोल दें और कैदियों को रिहा कर दीजिए क्योंकि मैं एक जिम्मेदार विशेषज्ञ हूं. मैं यह कह रहा हूं कि अमेरिकी कैदियों की रिहाई के बाद एक क्रमिक प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है. " उत्तर कोरिया में कैद किये गए राजनीतिक कैदियों की संख्या के बारे में जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन ऐसा अनुमान है कि इसकी संख्या अस्सी हजार से अधिक है.
से कहते हैं । वह प्रसिद्ध अज्ञान स्वप्न में भी अज्ञात नहीं रह सकता और ज्ञान भी सभी अवस्थाओं में सदा ही स्वयं प्रकाशमान रहता है । चूँकि अज्ञान सदा ही साक्षी द्वारा भासित होता है, ज्ञान स्वयंप्रकाश होने से स्वतः ही प्रकाशमान रहता है और इन दोनों का वैधर्म्य अनुभव से ही प्रस्फुरित है, इसलिए ज्ञानअज्ञान का विवेक हो जाने से आत्मज्ञानरूप योग सरल है, प्राणनिरोधरूप योग वैसा न होने से दुष्कर है, यह भाव है ॥९॥ प्रशस्त देश, काल, विषय आदि बाह्य हेतुओं की अपेक्षा होने से भी योग दुष्कर है, यों कहते हैं। चूँकि, यह प्राणसंरोधरूप योग धारणादेश (बाह्य पर्वत - शिखर, चन्द्र, तारा आदि देश और आन्तर हृदय, कण्ठ, तालुमूल, भ्रूमध्य आदि देश), आसन- देश (सम, पवित्र, कंकड़, अग्नि और बालुका से वर्जित; कलकल ध्वनि, जलाश्रय आदि से शून्य; मनोहर; चक्षु में पीडा न पहुँचानेवाला आदि विशेषणों से श्रुतिस्मृति में वर्णित आसनदेश) आदि से साध्य है, अतः सुख साध्य नहीं हो सकता। (निरुत्साह, मूढबुद्धि, मूर्ख कापुरुषों की नाईं पण्डित, समर्थ और प्रयत्नशील अधिकारी पुरुष को शास्त्रीय साधनों में सुखसाध्यत्व और कष्टसाध्यत्व का विकल्प कर चिन्ता करना उचित नहीं, इस आशय से कहते हैं।) श्रीरामजी, अथवा आपके लिए सुखसाध्यत्व और कष्टसाध्यत्व का विचार करना उचित नहीं है ॥१०॥ इस प्रकार अवान्तर प्रश्न का (बीच में आये हुए 'कतरः शोभनः' वाले प्रश्न का) निरास कर पहले प्रश्न का उत्तर देने के लिए उपक्रम करते हैं । हे रघुवीर, ज्ञान और योग - ये दोनों ही उपाय शास्त्रों में कहे गये हैं। उन दोनों में से आत्मपदार्थरूप ज्ञेय को निर्मल करनेवाला सब ज्ञानों से परे स्थित आत्मज्ञान आपको बतलाया गया ॥११॥ हे साधो, अब आप यह योग सुनिए जो कि प्राण और अपान की समतारूप से प्रसिद्ध है, दृढ़ देहरूपी गुहा का आश्रय करनेवाला है, सिद्धि की इच्छा करनेवालों को खेचरत्व आदि अनन्त सिद्धियों को देनेवाला है और ज्ञान की इच्छा करनेवालों को आत्मसाक्षात्कार करानेवाला है, सुनिये ॥१२॥ समाधिसुख में विश्रान्तिरूप फल के कथन द्वारा भी प्रशंसा कर रहे महर्षि वसिष्ठजी वही योग श्रीरामचन्द्रजी से कहते हैं । हे राजपुत्र श्रीरामभद्र, प्रयत्नशील चित्त से प्राण-गति के निरोध से होनेवाली निष्ठा को प्राप्त होकर यदि आप चित्तवृत्ति निरोध के अभ्यास से प्रत्यग्रूप, अक्षय, परमपद में भली प्रकार स्थिरता प्राप्त कर लेंगे, तो वाणी और मन के अगोचर, निरतिशय आनन्दस्वरूप होकर आप स्थित रहेंगे ॥१३॥ तेरहवाँ सर्ग समाप्त चौदहवाँ सर्ग देवसभा में विख्यात वायसराज काकभुशुण्डजी को देखने के लिए महाराज वसिष्ठ का मेरुपर्वत पर गमन और मेरु तथा उसके शिखर का वर्णन । काकभुशुण्डजी की उक्ति के द्वारा प्राणायाम आदि प्रस्तुत योगक्रम का विस्तारपूर्वक वर्णन करने की इच्छा करनेवाले महाराज वसिष्ठजी भुशुण्डकथानक आरम्भ करते हैं । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, योगियों के विश्रान्तिस्थानरूप से वर्णित उस निःसीम परम पद के किसी एक प्रदेश में (अविद्या से आवृत प्रदेश में), मरुभूमि में मृग तृष्णा की नाईं, ब्रह्माण्डाकार यह विवर्त प्रसिद्ध है ॥१॥ उस ब्रह्माण्ड में मनु, प्रजापति आदि की उत्पत्ति में कारणता को प्राप्त तथा प्राणियों के समूहरूप भ्रम को उत्पन्न करनेवाले कमलयोनि ब्रह्मा पितामहरूप से स्थित है ।।२।। उस पितामह ब्रह्मदेव का मैं सदाचार सम्पन्न वसिष्ठ नाम का मानस हूँ। और ध्रुवजी द्वारा धारण किये गये सप्तर्षिलोक में वैवस्वत मन्वन्तर तक निवास करता हूँ ॥३॥ महाराज इन्द्रदेव की सभा में बैठे हुए मैंने किसी समय स्वर्गलोक में महर्षि नारदजी से अधिक दीर्घकाल तक जी रहे प्राणियों की कथा सुनी थी ॥४॥ चिरंजीवियों की कथाओं में किसी एक कथा के प्रसंग में मितभाषी, सम्माननीय तथा निखिल शास्त्रों में पारंगत विशाल बुद्धि महामुनि शातातप बोले ॥५॥ मुनि ने जो कुछ कहा, उसे बतलाते हैं। मेरुपर्वत के ईशानकोण में स्थित पद्यरागमणि के सदृश चमकीले शिखर पर गगनचुम्बी एक शोभायमान आम्र विशेष नामक प्रसिद्ध कल्पतरू वृक्ष है ॥६॥ उस कल्पतरु के ऊपर सुवर्ण और रजतमय कल्पलताओं से घने दाहिने तने के खोड़रे में एक घोंसला है ।७।। उस घोंसले में ऐश्वर्यशाली वीतराग भुशुण्डनामक कौआ उस प्रकार निवास करता है, जिस प्रकार विशाल कोशवाले अपने कमल में ब्रह्माजी ॥८॥ हे देवगण, जगत के इस कोश में वह वायसराज भुशुण्ड जिस प्रकार चिरकाल से जी रहा है, उस प्रकार चिरकाल से जी रहा कोई भी इस स्वर्गलोक में न हुआ और न होगा ही ॥९॥ वह (भुशुण्ड) दीर्घायु है, वह रागरहित है, वह ऐश्वर्ययुक्त है, वह विशाल- बुद्धि है, वह स्थिर - बुद्धि है और शान्त है एवं कमनीय और समयगति जाननेवाला है ।।१०।। वह पक्षी (भुशुण्ड) जिस प्रकार दीर्घकाल से जी रहा है, उस प्रकार यदि कोई प्राणी यहाँ अपना दीर्घजीवन व्यतीत करे, तो उसका वह दीर्घजीवन साधनदशा में पुण्यमय और फलदशा में परमपुरुषार्थ रूप अभ्युदयसम्पन्न ही होगा ॥११॥ श्रीरामजी, कुछ समय के अनन्तर मैंने भुशुण्ड के विषय में फिर भी शातातप मुनि से पूछा था, द्वितीय बार पूछे गये उन मुनिराज ने उसी प्रकार से (जिस प्रकार से देवताओं की सभा में उसका वर्णन किया था, उसी प्रकार से) इस भुशुण्ड का वर्णन किया । इससे मालूम पड़ा कि भुशुण्ड के विषय में जो कुछ उन्होंने कहा था, वह सत्य ही कहा था, उनके कथन का तात्पर्य केवल प्रशंसा में ही नहीं था ॥१२॥ श्रीरामजी, कथा का अवसर समाप्त हुआ और देवतागण अपने-अपने निवासस्थान पर चले गये । तदनन्तर मैं अत्यन्त उत्कण्ठा से भुशुण्डपक्षी को देखने के लिए चला ॥१३॥ जहाँ भुशुण्डपक्षी की स्थिति थी, उस मेरुपर्वत के पद्मरागमणि की तरह चमकीले सुन्दर एवं विस्तृत शिखर पर मैं क्षणभर में ही पहुँच गया ॥१४॥ वह शिखर मधुर आसव से जनित मद की नाईं अग्नि के सदृश वर्चस्व रखने वाले पद्मराग आदि रत्न एवं गेरुमिश्रित सुवर्ण धातुओं के कमनीय तेज से दिशारूपी रमणियों को रक्तिम बना रहा था ।।१५॥ उसकी शोभा प्रलयकालीन अग्नि की पिण्डीभूत ज्वालाओं के पर्वत-सी प्रतीत होती थी, शिखा के सदृश ऊपर को उठी हुई इन्द्रनील मणि की प्रभा ही उसका धुआँ था, उसके लाल प्रकाश से समस्त आकाश - मण्डल लालिमा प्राप्त किये था ॥१६॥ मेरुपर्वत के ऊपर समस्त लालिमाओं का एक ढेर - सा होकर वह अवस्थित था या यों कहिए कि निखिल प्राणियों की दर्शनाभिलाषाओं का एक पिण्ड बनकर वह स्थित था और निखिल सन्ध्याकालीन अभ्रजालों का घनीभूत एक आकर-सा प्रतीत होता था ॥१७॥ सुषुम्ना-नाड़ी से उत्क्रान्ति नामक योग-साधन के द्वारा ब्रह्मरन्ध्र का भेदन कर निकलने की इच्छा कर रहे मेरुपर्वत के उदर से निकला हुआ शिरः प्रदेश में प्राप्त बडवाग्नि के सदृश मानों जठराग्नि ही स्थित था ॥१८॥ वह लीला से आकाश में स्थित चन्द्रमा को पकड़ने के लिए लाक्षारस से (महावर से) रंजित शिखा के सदृश मिली हुई - मानों सुमेरु पर्वत की वनदेवी के द्वारा प्रसारित करांगुलियाँ ही थी ॥१९॥ वह जड़ी गयी सोपान- पंक्तियों के सदृश अरुण ज्वालाओं के द्वारा मानों आकाश में जाने के लिए प्रवृत्त अतएव पर्वत पर चढ़ा हुआ दुग्धाहुति संपन्न मुखवाला ब्राह्मणसम्बन्धी अध्वाराग्नि की नाईं दीख रहा था ॥२०॥ वह रत्नों के किरणों से चमक रहे नखाग्रों से युक्त तीन शिखराग्रभागरूपी अंगुलियों से अश्विनी आदि नक्षत्र मण्डलों को स्पर्श कर मानों गिनने के लिए आकाश को व्याप्त-सा करता हुआ उन्नत होकर स्थित था ॥२१॥ वहाँ मेघरूप मृदंग आदि वाद्य बज रहे थे, वह वनभूमि से पुष्ट हुई वन-लक्ष्मियों का एक तरह से नृत्य - मंडप था, खिले हुए पुष्पगुच्छों से परिपूर्ण था और भ्रमर-समूहों से गुंजित था ॥२२॥ वह परिहास से विकसित हो रही दन्तपंक्तियों के सदृश विकसित ताल पत्रों की पंक्तियों से अत्यन्त सुहावना लगता था । वहाँ झूलों पर झूल रहीं चंचल अप्सराएँ थीं और सभी प्राणियों का उन्माद और अभिलाषाएँ नवीनरूपता धारण किये हुई थीं, वहाँ की शिलाओं पर देवता विश्रान्ति ले रहे थे, उसकी गुफाओं का देवताओं के जोड़ों ने आश्रय किया था ॥२३॥ अब उस शिखर की तापसरूप से उत्प्रक्षा करते हैं । उसने सुन्दर आकाशरूपी मृगचर्म धारण किया था, शुभ्र गंगारूप यज्ञोपवीत से अलंकृत था और वह बाँसरूपी दण्ड धारण करने के कारण पीले वर्ण के तपस्वी की नाईं स्थित प्रतीत होता था ॥२४॥ वहाँ पर गंगाजी के झरनों की कलकल ध्वनि हो रही थी, उसके लताकुंजों में देवता विराजित थे, गन्धर्वों के गीतों से रमणीय लगता था और वहाँ मधुर मनोहर सुगन्धित वायु बह रहा था ॥२५॥ हे श्रीरामचन्द्रजी, आकाश में ऊँचाई की परम सीमास्वरूप उस प्रकार के पीले वर्ण के उस मेरुपर्वत के सिर पर मैं पहुँचा, वह तारारूपी रत्नों से विभूषित और विकसित स्वर्णकमलरूपी कर्णपूर से रमणीय था॥२६॥ श्रीरामजी, (मैं इसका अधिक वर्णन क्या करूँ !) वह प्रतिदिन श्वेत, हरित, पीत, रक्त एवं धवलवर्ण कानन के कुसुम-समूह रूपी नवीन रंगों से आकाश में मानों निर्दुष्ट चित्र खींचा करता था और देवताओं का वह क्रीडापर्वत था ॥ २७॥ चौदहवाँ सर्ग समाप्त पन्द्रहवाँ सर्ग उस मेरुपर्वत के शिखर पर स्थित चूतनामक कल्पतरु और उसकी शाखा पर विद्यमान पुष्प, पक्षी आदि संपत्तियों, कौओं तथा भुशुण्ड का वर्णन। महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, प्रलयकालीन मेघरूपी कुसुमों से व्याप्त केशोंवाले उस शिखर के सिर पर प्राणियों के वांछित अर्थ की पूर्ति के लिए उत्पन्न हुए शाखा आदि अवयवों से युक्त चूतनामक वृक्ष को मैंने शाखाचक्र-सा (चारों ओर समरूप से फैली हुई शाखाओं के कारण शाखाचक्रसर्ग - १५] सा) देखा ॥१॥ श्रीरामजी, चारों ओर से वह वृक्ष फूलों के परागों से धूसरित था, वह रत्नसदृश पुष्पगुच्छों से दन्तुर था, उसने अपनी ऊँचाई से आकाश को मात कर दिया था, वह पूर्ववर्णित मेरुशिखर के ऊपर रखे हुए दूसरे शिखर के सदृश प्रतीत होता था ॥२॥ उसने केवल अपनी ऊँचाई से ही आकाश को मात नहीं कर दिया था, किन्तु तारा आदि मिलाकर द्विगुणित पुष्प आदि धारण करने के कारण भी उसने आकाश को मात कर दिया था, यों कहते हैं । उसने ताराओं को मिलाकर द्विगुणित पुष्प धारण किये थे, मेघरूप पल्लवों को मिलाकर द्विगुणित पल्लव धारण किये थे, किरणों को मिलाकर द्विगुणित पुष्परेणुरूप मेघ धारण किये थे बिजली को मिलाकर द्विगुणित मंजरियाँ धारण की थीं ॥३॥ वहाँ शाखा - प्रदेश में किन्नर युवतियों के गीतों को लेकर द्विगुणित भ्रमरों की गुंजार ध्वनि हो रही थी, उसने झूलों पर आरूढ़ चंचल अप्सराओं के होठ, हाथ एवं पदरूप पल्लवों को लेकर दूने पल्लव धारण किये थे ॥४॥ वांछितरूपों को धारण करने की शक्ति से संपन्न होने के कारण स्वच्छन्द विहार करने के लिए कल्पित विहंगम वेषवाले सिद्धों एवं गन्धर्वों के समूहों को मिलाकर द्विगुण विहंगम उस पर विद्यमान थे, उसने रत्नकान्ति के सदृश स्वच्छ हिमकणों को लेकर दूने हुए त्वचारूपी वस्त्र पहने थे ॥५॥ अधिक ऊँचाई के कारण जनित चन्द्रबिम्ब के सम्बन्ध से मानों अमत-रस की पूर्ति होने के कारण द्विगुणित अंगोंवाले बड़े-बड़े फल उसमें लगे थे, तनों के मूल भागों में संलग्न कल्पभ्रमों से मानों द्विगुणित हुए उसके पोर थे ॥६॥ उसके तनों पर देवताओं ने आश्रय किया था, पत्रों पर किन्नर विश्रान्ति ले रहे थे, उसके लताकुंजों में मेघ समूह प्रविष्ट हुए थे, जलप्राय कोटर-प्रदेश में देवता आदि सोये हुए थे ।।७।। उसका अपना निजीस्वरूप अत्यन्त विस्तृत था, उसके फूलों का भीतरी रस अपने कंकणों के क्वणितों से बाह्य भ्रमरों को हटाकर अप्सरारूपी भ्रमरियों ने चूस लिया था IICII श्रेष्ठदेव, किन्नर, गन्धर्व एवं विद्याधरों से वह समन्वित था, ब्रह्माण्ड की नाईं विस्तृत और असीम दस दिशाओं तथा आकाश को व्याप्त किये था ॥९॥ कलियों के समूहों से वह भरा हुआ था, मृदु पल्लवों से भरा हुआ था, खिले हुए पुष्पों से परिपूर्ण था और वनमालाओं से भी वेष्टित था ।॥१०॥ उसके ऊपर घनीभूत मंजरीयाँ थीं, घनीभूत मणिरूप गुच्छे थे, घनीभूत रत्नरूपी परिधानीय दिव्य वस्त्रों से आद्य था अर्थात् अर्थियों की इच्छापूर्ति करनेवाला था, लताओं के नृत्य से व्याप्त था ॥११॥ श्रीरामजी, चारों ओर फूलों की बाढ़ से सर्वत्र फल और पल्लवों से तथा सभी का दिल बहला करनेवाले पुष्पपरागों के समूहों से अत्यन्त विचित्रता को प्राप्त हुए उस चूतनामक कल्पतरू को मैंने देखा ।।१२।। हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर उपर्युक्त विशेषणों से युक्त उस वृक्ष के तने, शाखा आदि की सन्धियों में, लता से आवृत शाखाग्रभागों में, लतापत्रों में, पोरों या ग्रन्थियों में और पुष्पों में घोंसले बनाकर उसमें स्थित हुए पक्षियों को मैंने देखा ॥१३॥ पक्षियों में विशेष बतलाते हैं । श्रीरामजी, (वहाँ) मृणाल के टुकड़ों की नाईं चंद्रमा की कला के खण्डों से वर्धित और शुभ्र कमलिनीकन्दों को खानेवाले ब्रह्मदेव के वाहनभूत हंसपक्षी मैंने देखें ॥१४।। बाद में रहस्यभूत अर्थों के पर्यालोचन में सहायक होने के कारण प्रणव और वेद के मित्रभूत ब्रह्मदेव के वाहन हंसों के बच्चे, जो कि सामवेद का गान कर रहे थे एवं पर-अपर ब्रह्मविद्या का गुरुमुख से विधिवत् अध्ययन किये हुए थे ( मैंने देखें ) ॥१५॥ वहाँ निवास कर रहे अग्नि के वाहनभूत शुकों का वर्णन करते हैं। तदनन्तर मैंने अग्निदेव के वाहन शुक देखे, वे मन्त्र-समूह पढ़ रहे थे, उनके शब्द स्वाहाकार के समान थे । उनकी उपमा शंख, बिजलियों के अनेक समूह और नील मेघों के वर्गों से थी, देवता नित्य उनका दर्शन करते थे । यज्ञवेदियों में बिछाये गये हरित कुश-लताओं के दलों की नाईं वे हरे थे। (अब मयूरों के बच्चों का वर्णन करते हैं।) अनन्तर (मैंने) मयूरों के बच्चे (देखे ) । अग्नि की शिखा की नाईं देदीप्यमान उनकी शिखाएँ थीं । जगज्जननी पार्वती से (जूड़े में पहनने के लिए) रक्षित उनके परों का समूह था, स्वामी कार्तिकेय द्वारा विस्तारित अशेष शिवसम्बन्धी विज्ञान में वे पण्डित थे ॥१६-१८॥ आकाश में ही उत्पन्न होकर वहीं पर नष्ट हो जानेवाले अर्थात् मरणपर्यन्त भूमि पर न उतरनेवाले और अधिक बलवान होने से महान इसीलिए व्योमपक्षी नाम से प्रसिद्ध पक्षियों को-जो कि नित्य-क्रीड़ा में सहायक होने से बन्धु थे, अपने अपने घोंसले बनाकर स्थित थे एवं शरत्कालीन मेघों के समान शुभ्र आकृतिवाले थे (मैंने देखा) ॥१९॥ ब्रह्मदेव के वाहन हंस से उत्पन्न और भी दूसरे हंसों को, अग्नि के वाहन शुक से उत्पन्न शुकों को, कुमार कार्तिकेय के वाहन मयूर से उत्पन्न और दूसरे मयूरों को तथा इनसे भिन्न भी अन्य आकाश पक्षियों से उत्पन्न पक्षियों को (मैंने देखा) ॥२०॥ श्रीरामजी, वहाँ ( मैंने ) दो चोंचवाले भरद्वाजनामक पक्षियों को, सुवर्ण की शिखावाले पक्षियों को तथा गौरैया, कौआ, गीध, कोयल, क्रौंच (कुराँकुल) और मुर्गा-इन पक्षियों को (मैंने देखा) ।।२१।। हे राघव, उस कल्पतरु पर शकुन्तपक्षी, नीलकण्ठपक्षी, बलाकपक्षी (बकविशेष) आदि और भी अनेक पक्षियों को, जगत में विविध प्राणियों की नाईं मैंने देखा ।।२२।। इसके बाद आकाश में स्थित हुए मैंने अत्यन्त दूर-प्रदेशस्थ घने पत्तोंवाले उस कल्पवृक्ष के दाहिने तने की शाखापर, उस शाखा को देखने के बाद, लोकालोकपर्वत के अरण्य में प्रलयकालीन मेघ-समूह की नाईं स्थित, मंजरीसमूह से वेष्टित द्रोण कौओं का मण्डल मैंने देखा ॥२३,२४॥ ज्यों ही मैंने वहाँ दृष्टि डाली, त्यों ही देखा कि एकान्त में स्थित दाहिने तने के उस कोटर पर जिसमें चित्र-विचित्र फूल बिछे हुए थे, अनेक प्रकार के सुगन्धों से जो सुगन्धित था तथा पुण्यात्माओं द्वारा उपभोग्य अप्सराओं के उपभोगों के योग्य स्वर्गस्वरूप था - सभा में शान्ति आदि गुणों से संपन्न होने के कारण अक्षुब्ध आकृतिवाले, पवन के द्वारा समभाग से छेदन कर कोटर में प्रवेशित किये गये मेघों की नाईं, मनोहर कुसुमगुच्छों से वासित कौए स्थित हैं और उनके बीच ऐश्वर्यशाली एवं अत्यन्त उन्नत शरीरवाला वायसराज भुशुण्ड बैठा है ॥२५-२७॥ वह भुशुण्ड सभा में उस प्रकार उन्नतरूप से स्थित था, जिस प्रकार काँच के टुकड़ों के बीच उन्नतरूप से इन्द्रनीलमणि स्थित हो । वह आत्मज्ञान से परिपूर्ण मनवाला, मान्य, समदर्शी एवं सर्वांग सुन्दर था ।।२८।। वह प्राणक्रिया के निरोध से नित्य अन्तर्मुखवृत्तिवाला, सुखी और प्रसिद्धतम चिरजीवी होने से 'चिरंजीवी' नाम से प्रसिद्ध था ।।२९।। जगत में विदित दीर्घायुवाला भुशुण्ड नाम से प्रसिद्ध वह वायसराज युगों की उत्पत्ति और विनाश की दशा के दर्शन से प्रौढ़मन था ।।३०।। वह प्रत्येक कल्प में ईशान, इन्द्र और अग्नि आदि लोकपालों के जन्मों की चक्रपरम्परा को गिनता हुआ खिन्न होकर अवस्थित था ॥३१॥ वह सुदूर भूतकालीन सुर, असुर एवं राजाओं का भली प्रकार स्मरण करनेवाला, प्रसन्न और गंभीर मन से युक्त, श्री योगवासिष्ठ महारामायण चतुर तथा स्निग्ध एवं मुग्ध वाणीवाला था ॥३२॥ वह भली प्रकार ज्ञाता होने के कारण सूक्ष्मतम अर्थों को विस्पष्टकर कहनेवाला, ममता तथा अहंकार से रहित, मृत्यु का पुत्र की नाईं परमप्रिय, बुद्धि में बृहस्पति से भी बड़ा, प्राणिमात्र का सुहृद, बन्धु एवं मित्र था । (सब प्राणियों का वह सुहृद आदिरूप क्यों था ? इस शंका पर कहते हैं । ) चूँकि यह सबके वर्णन प्रसंग में प्राणीमात्र के निखिल आरोपों का अधिष्ठानरूप हो जाने के कारण सब प्रकार से भी सर्वदा सर्वात्मक सत्यस्वरूप ही परिगणित होता था यानी वह सर्वात्मक और सत्यस्वरूप ही सर्वसंगत था, अतः सुहृद आदिरूप था ॥३३॥ जिस प्रकार सरोवर सौम्य, स्वच्छ मधुर जल से युक्त, मनोहर और भीतर से अखण्ड शीतल, मध्य कमल के आधारभूत कुहर से युक्त, पक्षियों की विश्रान्ति को जाननेवाला एवं निर्मलतम होने से प्रकटित भीतरी शोभावाला रहता है, उसी प्रकार सौम्य, प्रसन्न, मधुर, ब्रह्मरस से युक्त, मनोहर, भीतरी अखण्ड शान्ति से युक्त, हृदयाकाशरूप, सब व्यवहारों को जाननेवाला यह महात्मा भुशुण्ड भी गांभीर्य को न छोड़ता हुआ अन्तःकरण की शोभा महत्ता को प्रकटित कर अवस्थित था ।।३४।। पन्द्रहवाँ सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग सामने उपस्थित हुए तथा आसन आदि से पूजित हुए महाराज वसिष्ठजी द्वारा किये गये भुशुण्ड के जन्म, कर्म आदि के प्रश्नों का वर्णन। महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, तदनन्तर मैं उस भुशुण्ड के सामने उस प्रकार गिरा (उतरा), जिस प्रकार पर्वत पर आकाश से नक्षत्र गिरता हो । मेरा शरीर अत्यन्त कान्तियुक्त था, गिरने पर मैंने सभा में कुछ हलचल भी पैदा कर दी ॥१॥ जिस प्रकार भूकम्प से सागर विक्षुब्ध हो जाता है, उस प्रकार मेरे पतन से जनित मन्द पवन से कौओं की सभा, जो नील कमलों के तालाब के सदृश थी, विक्षुब्ध हो गई ॥२॥ अनन्तर त्रिकालदर्शी होने के कारण उस भुशुण्ड ने देखने से ही - यद्यपि वहाँ मेरा जाना अतर्किक था, तथापि वहाँ गये 'हुए मुझको - 'यह वसिष्ठ आये हुए हैं', यों जाना ॥३॥ तदनन्तर जिस प्रकार पर्वत से छोटा मेघ उठे, उस प्रकार वह पत्तों के ढेर से उठ खड़ा हुआ और 'हे मुनिराज, आपका स्वागत हो', यों मधुरवाणी बोला ।।४।। स्वागत वचनों के साथ ही साथ दोनों हाथों से अपने संकल्पमात्र से उत्पादित पुष्पांजलि भरकर मेरे ऊपर उस प्रकार बरसाई, जिस प्रकार मेघ हिम की महावृष्टि करता हो ॥५॥ तदनन्तर आपके बिराजने के लिए यह आसन है, यों कहकर वह कौओं का अधिपति भुशुण्ड आसन लाने के लिए चाकरवर्ग का परित्याग कर स्वयं खड़ा हुआ और कल्पवृक्ष का नवीन पत्ररूप आसन लाया । तदनन्तर मैं भुशुण्ड के साथ उस कल्पवृक्ष की लताओं से बने हुए आसनपर बैठ गया । भुशुण्ड के चारों ओर पक्षियों का समूह था मननशील मुझे उस आसन पर आसीन देखकर अपने कान्तिमण्डल से प्रसरणशील पंखोंवाले उक्त सभा के कौए अपने-अपने आसनों की ओर दृष्टि डालने लगे । भुशुण्ड ने अर्ध्य, पाद्य आदि सम्पादन कर मेरा सत्कार किया । महान तेजस्वी वह भुशुण्ड अत्यन्त प्रसन्नचित्त होकर सुन्दर, सौहार्द से मधुर वचन मुझसे कहने लगा ॥६-९॥ भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, बड़े सौभाग्य का विषय है कि दीर्घकाल के अनन्तर आज हम लोगों के ऊपर आपने अनुग्रह दर्शाया, क्योंकि आपके दर्शनामृतरूपी सिंचन से सिंचे गये हम लोग आज, पुण्यवृक्ष के सदृश, अत्यन्त पवित्र बन गये ।।१०।। हे मुने, दीर्घकालिक मेरे पुण्य की राशि से प्रेरित तथा मान्यों में एकमात्र मान्यतम आपका इस समय किस प्रदेश से शुभ आगमन हुआ ? ॥११॥ महाराज, मूलभूत माया से बने इस जगत में दीर्घकाल से विचरण कर रहे आपके पावनतम चित्त में अखंडित समदर्शिता बिराजती तो है न ? ॥१२॥ महाराज, आज आने का कष्ट उठाकर आपने अपनी आत्मा को क्यों दुःख पहुँचाया ? आज्ञादायी वचनों के श्रवण में उत्कण्ठा रखनेवाले हम लोगों को आज्ञा देने के लिए आप सर्वथा योग्य हैं ॥१३॥ हे मुनिवर, आपके चरणों के दर्शन से ही मैंने सब कुछ जान लिया, आपने अपने आगमन के पुण्यों से हम लोगों को दबा दिया है ।।१४।। 'सब कुछ जान लिया' यह जो पहले कहा गया था, उसीका स्पष्टीकरण करते हैं । इन्द्रसभा में चिरंजीवियों के विषयों में हुई विचारणाओं के कारण ही आपके स्मृतिपथ में हम आये और उसी से यह स्थान आपके चरणों का आस्पद हुआ, सचमुच आपने इस प्राणी को पवित्र बना दिया ॥१५॥ हे मुने, यद्यपि यहाँ आपके आने का प्रयोजन मैंने पहले से ही जान लिया, तथापि आपके वाक्यामृतरसास्वाद की अभिलाषा बढ़ रही है, अतः आपसे मैं पूछता हूँ ॥१६॥ तीनों कालों में निर्मल ज्ञान रखनेवाला चिरंजीवी इस भुशुण्ड ने जब वैसे कहा, तब वहाँ मैंने यह कहा ।।१७।। हे पक्षियों के स्वामिन्, जो कुछ यह कह रहे हो, वह सब यथार्थ में सत्य ही है, चिरंजीवी केवल तुम्हें ही आज मैं देखने के लिये आया हूँ ॥१८॥ हे पक्षीराज, महान भाग्य से तुम्हारे अन्तःकरण में चारों ओर से शान्ति का राज्य है, तुम कुशल हो, ज्ञाततत्त्व होने के कारण तुम इस भयंकर जगज्जाल में प्रविष्ट नहीं हुए हो ॥१९॥ प्राणियों की उत्पत्ति, विनाश, गति, आगति, विद्या एवं अविद्या को जाननेवाले हे पक्षिराज, तुम मेरे इस संशय का सत्यरूप से छेदन कर दो कि किस कुल में तुम उत्पन्न हुए हो और किस प्रकार तुमने तत्त्व पहचान लिया ।।२०।। हे साधो, तुम्हारी कितनी आयु है, तुम अपना कौन-सा इतिवृत्त (विगत कल्पान्तचरित्र) जानते हो और किस महानुभाव ने दीर्घदर्शी तुम्हारे लिए निवासस्थान रूप से इस वृक्ष को निश्चित किया है ? ॥२१॥ भुशुण्ड ने कहा : हे मुने, आप जो मुझसे पुछ रहे हैं, उस सबका मैं यह वर्णन (उत्तर) कर रहा हूँ । आप महानुभाव उद्विग्न न होकर प्रयत्नपूर्वक कथा का श्रवण कीजिए ।।२२।। हे महानुभाव, तीनों लोकों के नियन्ता और परम पूज्य आपके सदृश उदारबुद्धि महात्मा जिस वृत्तान्त का श्रवण करते हैं, उस वृत्तान्त का भलीप्रकार कथन करने से वक्ता और श्रोता दोनों का पाप उस प्रकार विनष्ट हो जाता है, जिस प्रकार मेघावलम्बित वृष्टि, छाया, अरण्य आदि वैभवों से सूर्य का ताप विनष्ट हो जाता है ॥२३॥ सोलहवाँ सर्ग समाप्त सत्रहवाँ सर्ग जीवन्मुक्तों के उपयोगी गुणों से पूछे गये अर्थ का वर्णन कर पक्षियों का स्वामी भुशुण्ड पुनः उसी को सविस्तार कहने के लिए प्रवृत्त हुआ, यह वर्णन । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, तदनन्तर वह पक्षीराज भुशुण्ड वक्ष्यमाण रीति से कहने लगा । वह अभीष्ट लाभ से न तो प्रसन्न होनेवाला था और न क्रूरमति था । वह सभी अंगों से सुन्दर और वर्षाकालीन मेघों के सदृश श्यामवर्ण था ॥१॥ उसके वचन स्नेहपूर्ण और गम्भीर थे। उसके अभिभाषण के पहले स्मित होता था । हाथ में बिल्व फल की नाईं तीनों जगत की इयत्ता (सीमा) उसे निश्चित रूप से विदित थी ॥२॥ समस्त भोगों को उसने तिनके की तरह तुच्छ समझ रक्खा था, इच्छित विषयों की ओर लोगों की दौड़-धूप का फल एकमात्र संसार ही है - यह रहस्य उसने भली प्रकार जान लिया था, वह परापर ब्रह्म का ज्ञाता था ॥३॥ उसका महान आकार धीर और स्थिर था। उसने विश्रान्ति तो उस प्रकार धारण की थी, जिस प्रकार मन्थन के अनन्तर मन्दराचल के चले जाने के बाद क्षीर-समुद्र ने धारण की थी । उसका मन मनोरथों से परिपूर्ण था और विशुद्ध था ॥४॥ बाहर से उसकी चारों ओर से बुद्धि में विश्रान्ति थी, वह शान्त था, भीतर से परमानन्द परिपूर्ण था, उसे संसार में जन्मधारी जीवों के आविर्भाव और तिरोभाव में हेतुभूत मायातत्त्व और आत्मतत्त्व का भली प्रकार ज्ञान था ॥५॥ प्रिय और मधुर सुनने योग्य वीणा -गान की नाईं मनोहर उसके वाक्य थे। दर्शनमात्र से संपूर्ण भयों का अपहरण करनेवाले स्वयं ब्रह्मा ने ही मानों अपना यह नवीन भुशुण्डशरीर धारण किया हो, ऐसा वह प्रतीत होता था, अतएव वह स्वाभाविक आनन्द से युक्त और प्रश्नों का उत्तर देने के लिए किये गये उद्योगयुक्त मुख के कारण अत्यन्त सुन्दर लगता था ।।६।। उस प्रकार का पक्षियों का अधिराज भुशुण्ड शुद्ध, अमृतमय, परिपूर्ण स्व-स्वरूप का क्रमशः बोध कराने के लिए - निर्मल वाणी से उस तरह मेरे प्रति आगे का वृत्तान्त कहने लगा, जिस तरह सुन्दर मेघ अपनी गर्जना से मकरन्द ( पुष्परस के) पान में रसिक भ्रमर के प्रति वही वृत्तान्त कहता हो । तात्पर्य यह हुआ कि पहले से ही प्रबुद्ध ब्रह्मानन्द में रसिक मेरे प्रति भुशुण्ड की उक्ति अनुवाद मात्र थी, न कि उपदेश ।।७।। सत्रहवाँ सर्ग समाप्त अठारहवाँ सर्ग अपना जन्म कहने के लिए पहले महादेवजी, उनके गण, मातृका तथा उनके पानोत्सव आदि का भुशुण्ड के द्वारा वर्णन । 'किस कुल में तुम उत्पन्न हुए हो' इस प्रथम प्रश्न का उत्तर देने के लिए पहले भूमिका बाँधते हैं। भुशुण्ड ने कहाः महाराज वसिष्ठजी, इस जगत में समस्त स्वर्गवासी देवताओं में श्रेष्ठ (ज्ञान, ऐश्वर्य, बल आदि गुणों से सर्वोत्कृष्ट), देवताओं के भी पूजनीय एवं उपासनीय, देवाधिदेव महादेवजी हैं, जो बड़े-बड़े देवों के देव ब्रह्मादि देवताओं के द्वारा भी अभिवन्दित और चारों ओर से पूजित हैं। (इस श्लोक में उपर्युक्त तीन विशेषणों से सर्वांश में महादेवजी के ही उत्कर्ष की परमावधि बतलाई गई है, इससे वक्ष्यमाण ब्रह्मविद्या के आरम्भ में मंगल भी पक्षिराज भुशुण्ड ने कर दिया यह अर्थतः सिद्ध हो जाता है, यह जानना चाहिए ) ॥१॥ आम्रवृक्ष की नाईं उनके देहार्ध में भ्रमर- पंक्तियों के सदृश नेत्रोंवाली तथा उन्नत पुष्प गुच्छों के सदृश स्तनधारिणी लता शोभित है ।।२।। उनके एक गंगारूपी कुसुम - मालिका है, जो हिम और हार की नाईं अत्यन्त धवल लहरीरूपी पुष्पों से गुम्फित (गूँथी गई ) है और जिसने जटाजूट को वेष्टित कर रक्खा है ।॥३॥ क्षीर-सागर से उत्पन्न हुआ और अमृत का झरना बहानेवाला अत्यन्त कान्तियुक्त चन्द्रमा उनका दर्पणभूत चूड़ामणि (शिरोभूषणमणि) है ॥४॥ निरन्तर मस्तक में स्थित चन्द्रमा के अमृतप्रवाह से जिसकी विषशक्ति निकल गई है और जिसमें संजीवनशक्ति प्राप्त हुई है, ऐसा इन्द्रनील मणि की नाइँ कालकूट महाविष उनके कण्ठ का भूषण है ।।५।। जगत के प्रलय में हेतुभूत अपने चक्षुरूपी स्वच्छ अग्नि से उत्पन्न हुई, धूलियों की पंक्तिरूप बड़े-बड़े प्रलयकालीन झंझावातों की उत्पादक, परमाणुमय (स्थूल महाभूतों का सूक्ष्म-सूक्ष्म भूतों में प्रवेश - क्रम से परम सूक्ष्म अव्यक्तमात्र का परिशेष होने के कारण परमाणुमय), अतिशुभ्र एवं ज्ञानजलात्मक (उसके साक्षी चैतन्यस्वरूप जल से प्लावित होने के कारण ज्ञानजलात्मक) मायारूप भस्म उन मायाशबल महादेवजी का भूषण है ॥६॥ अत्यन्त निर्मल, तेजस्वी चन्द्रमा का भी तिरस्कार कर देनेवाली, मणियों के सदृश सानपर चढ़ाकर विशोधित की गई, माला आदि के आकार में गँथी गई, संपूर्ण शरीरों में मनोरम ब्रह्मा आदि के शरीरों की विकारभूत हड्डियाँ ही उनके शोभाकारक रत्न हैं ।७।। सुधाकर चन्द्रमा की सुधाधारा से प्रक्षालित, नीलमेघरूपी पल्लवों से युक्त तथा तारारूपी बिन्दुओं से समन्वित आकाश यानी दिशाएँ ही उनके वस्त्र हैं ।।८।। चक्कर काट रही लोमड़ियों, परिपक्व नरमांसों और बलि के ओदनों से (भात से) व्याप्त; गाँवों और नगरों से दूर, हिम के सदृश धवल श्मशान ही उनका घर है। (प्रकृत श्लोक में 'भ्रमच्छिवांगना०' और 'बहिर्भूतम्' से दो पद श्लिष्ट होने से कल्याणकारी वेष-भूषा को धारण कर इधर-उधर घूम रही रमणियों द्वारा पकाये गये प्रशस्ततम मांस, भात आदि भोज्य पदार्थों से व्याप्त तथा सब प्रकार के दोषों से रहित - इस अर्थ की कल्पना की जा सकती है।)॥९॥ जिसने कपाल-मालाएँ धारण की है, रक्त और चर्बी का आसव (मद्य) पान किया है, एवं जो आँतरूपी मालासूत्र से वेष्टित है, ऐसा वक्ष्यमाण मातृकागण उनका नृत्यादि में सदा सहायक बन्धुवर्ग है ।।१०।। क्रमशः तत्-तत् अंगों के भूषण के लिए संचरणशील, सर्वांग से चिकने, प्रस्फुरित हो रही मस्तकमणियों से राजित तथा सुवर्ण के सदृश दीप्तिसम्पन्न कान्तिवाले सर्प उनके भुजा के कंकण हैं ॥११॥ दृष्टिपातमात्र से शैलेन्द्र हिमराज को दग्ध कर देनेवाला, जगत का ग्रास करने में लालायित तथा क्रीडामात्र से असुरों को त्रस्त कर देनेवाला भयंकर उनका चरित्र है ।।१२।। महाराज, सत्यसंकल्प होने के कारण उनका अन्तःकरण एकमात्र कल्याण की भावना से ही जगत-समूह को अपनी प्रकृति में रखने के लिए समाधि में स्थित है। कदाचित समाधि का आकस्मिक भंग हो जाने पर उत्पन्न हुआ उनके हाथ का स्पन्दन असुरों के बड़े-बड़े नगरों को, असुरों के साथ, विनष्ट कर डालता है ॥१३॥ समाधिकाल में महादेवजी की जो प्रसिद्धतम एकाग्रता है, वह पृथ्वी, पर्वत आदिरूप उनकी मूर्तियों में विस्पष्टरूप से दिखाई पड़ती है, इस आशय से कहते हैं। स्नेह, राग, द्वेष आदि सर्वविध दोषों से शून्य, रसयुक्त होते हुए भी ( पृथ्वी और जल से युक्त होते हुए भी) नीरस, उत्तम भोजन करने के कारण भली-प्रकार तृप्त हुए जनों के सदृश खान-पान आदि तृष्णाओं से शून्य प्रसिद्ध मेरु, हिमालय आदि पर्वत ही उनकी एकाग्रता ध्यान की मूर्तियाँ हैं ॥१४॥ अब सर्वांगों में समस्त शक्तियों से परिपूर्ण उनके गणों का वर्णन करते हैं । जिनके मस्तक खुर की शक्तियाँ रखते हैं यानी दौड़ने-कूदने की शक्तियाँ रखते हैं, खुर हाथों की शक्तियाँ रखते हैं यानी चित्र विचित्र शिल्पआदि निर्माण - शक्तियाँ रखते हैं, हाथ दाँत, मुख और उदर की शक्तियाँ रखते हैं यानी चवर्ण, भक्षण आदि शक्तियाँ रखते हैं तथा जिनके भालू, ऊँट, बकरी और सर्प के सदृश मुख हैं, ऐसे प्रमथों का गण उन महादेवजी के क्रीडन में सहायक है ॥१५॥ तीन नेत्रों के कारण चमक रहे मुखवाले उन महादेवजी के जिस प्रकार सर्वागों में सर्वविध शक्तियों से समन्वित प्रमथगण क्रीडा सहायक परिवार है, उसी प्रकार सर्वागों में सर्वशक्तिसमन्वित निर्मल कान्तिवाली दूसरी-दूसरी नाना प्रकार की आकृति और मुखवाली माताएँ भी क्रीडा में सहायक परिवार हैं ॥१६॥ भूतगणों के ऊपर आधिपत्य रखने के कारण उनसे ( भूतगणों से) नमस्कृत तथा चौदह भुवनों में उत्पन्न होनेवाले असंख्य प्राणियों का ही भोजन करने वाली मातृकाएँ उस देवाधिदेव के सामने नृत्य करती हैं ॥१७॥ उन मातृकाओं के मुखों की गदहे और ऊँटों के मुखों के सदृश आकृतियाँ है, रक्त, मेद और चर्बी उनका आसव के सदृश सर्वदा पेयपदार्थ है। चारों दिशाओं में वे विहार करती हैं और शव के हाथ, पैर आदि की मालाएँ पहनती हैं ॥१८॥ ये मातृकाएँ पहाड़ों की चोटियों पर, आकाश में, अन्य लोकों में, गर्तों में भी प्राणियों के शरीरों में निवास करती हैं ॥१९॥ जया, विजया, जयन्ती, अपराजिता, सिद्धा, रक्ता, अलम्बुसा और उत्पला- ये आठ मातृदेवियाँ सभी माताओं में मुख्य हैं। अन्य माताएँ इन्हीं आठों का अनुगमन करती हैं और उनका अनुगमन करनेवाली अन्य मातृदेवियों का और दूसरी माताएँ अनुगमन करती हैं ॥२०,२१॥ हे मानद मुनिनायक, महामहिमशाली उस मातृगण के बीच में 'अलम्बुसा' नामक सातवीं माता अत्यन्त विख्यात है ॥२२॥ वैष्णवी-शक्ति के वाहन गरुड़ की नाईं उस 'अलम्बुसा - शक्ति' का वाहन कौआ है, यह इन्द्रनील पर्वत के सदृश नीला है, इसका मुख वज्रतुल्य हड्डी से बना है तथा नाम है - चण्ड ॥ २३॥ किसी समय विहारवश भयंकर चेष्टाकारिणी, अष्टसिद्धियों से संपन्न वे सब माताएँ आकाश में इकट्ठी हुई ।।२४।। वाममार्ग में प्रतिपादित पराशक्ति के आराधनप्रकार में निष्ठा रखनेवाली इन आठ मातृदेवियों ने तुम्बुरुनामक रुद्रमूर्ति का आराध्यरूप से आश्रय लेकर एकाग्रचित्त से समाधि में परमार्थभूत स्व-स्वरूप का प्रकाशन करनेवाला उत्तम पानोत्सव मनाया ॥२५॥ वे माताएँ, समस्त जगत के पूज्य तुम्बुरु और भैरवनामक देवताओं का पूजन अर्चन कर मदिरामद से सन्तुष्ट होती हुई आपस में चित्र-विचित्र अर्थों से पूर्ण वार्तालाप करने लगीं ॥२६॥ तदनन्तर उनकी कथाओं के प्रसंग से यह एक बात उठी कि भगवान उमापति हम लोगों को क्यों तिरस्कारपूर्वक देखा करते हैं ।।२७।। इसलिए महादेवजी को हम लोग अपना वह प्रभाव दिखलाएँ, जिससे कि हम लोगों की महाशक्ति देखकर वे हमारी अवहेलना न करेंगे ।।२८।। यों निश्चय कर परस्पर अभिनन्दित उन देवियों ने रूपान्तर में परिणत किये गये मुख आदि अंगोवाली रुद्रशक्ति उमा को अपने अधीन बनाकर, यज्ञ में पशु की नाईं, मन्त्रसहित जल से प्रोक्षित (बलि के संस्कार से युक्त) किया ॥२९॥ अनन्तर उन देवियों ने महादेवजी के अंश से माया द्वारा चुराई गई तथा मातृदेवियों के बीच में प्राप्त हुई चंचल केशवाली उमा को ओदनरूप (सबके भक्ष्य, भोज्य, लेह्य और पेयरूप) बनाने के लिए मानों अभिशाप दिया ॥३०॥ जिस दिन पार्वतीजी का प्रोक्षण किया, उस दिन वहाँ उन सब देवियों ने नृत्य, गेय आदि से मनोहर महान उत्सव मनाया ॥३१॥ अत्यन्त आनन्द और उन्नत घोष से युक्त आकाश-मण्डल ही उस समय जगमगाने लगा तथा उन देवियों की जंघा और उदर दीर्घ अंगों के उच्चावच प्रक्षेप से विकसित होने लगे ॥३२॥ पर्वत और अरण्यों को शब्दित कर रही कुछ अन्य देवियाँ करताल और सिंहनाद के कारण उद्दाम घनीभूत शब्द के उच्चार तथा कान्तियुक्त अंगों के विकारपूर्वक हँसने लगीं ॥३३॥ जगत-मण्डल की गुहा में मद्यपान से अतितृप्त हुई कुछ मातृकाएँ पर्वत एवं घरों को ध्वनियुक्त बनाती हुई, चन्द्र के उदयरागसे रंजित अतएव शब्दयुक्त हुए समुद्र, जल के सदृश, गर्जना करने लगीं ॥३४॥ लीला से जनित घुरघुर शब्दों से आकाश के कोने में कुछ देवियाँ मस्तक से लेकर खुरपर्यन्त अंगों को रक्त, चर्बी, आसव आदि से पुष्ट करने के लिए मद्यपान कर रही थीं ॥३५॥ उनके कुछ उन्मत्त वृत्तान्तों का कथन करते हुए प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं। कुछ देवियाँ पेय पदार्थ पीने लगीं, कुछ तो उच्च स्वर से गर्जने लगीं, कुछ जल्दी से जाने लगीं, कुछ बोलने लगीं, कुछ हँसने लगीं, कुछ परस्पर रक्षा करने लगीं, कुछ एक दूसरे के मुख में या अग्नि में होमने लगीं, कुछ गिरने लगीं, कुछ ऊँचे से बड़बड़ाने लगीं, कुछ निरन्तर नाचने लगीं, कुछ स्वादु मांस खाने लगीं, यों उन्होंने उन्मत्त आचरण होकर त्रिभुवन को अपने व्यापार से सद्वर्तन से रहित कर दिया ॥३६॥ अठारहवाँ सर्ग समाप्त उन्नीसवाँ सर्ग ब्रह्माणी की हंसी में चण्डनामक कौए के सम्बन्ध से भाईयों के साथ अपनी (भुशुण्ड की) उत्पत्ति, उसी ब्राह्मशक्ति के प्रसाद से ज्ञान और पिता के स्थान की प्राप्ति का वर्णन । वायसराज भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन, जब उन मातृकाओं का उत्सव चल रहा था, तब उनके उत्तम वाहनरूप चण्ड आदि भी उसी प्रकार उन्मत्त होकर हँसते थे, नाचते थे और रुधिर का पान भी करते थे ।।१।। उस उत्सव में मद्यपान से उन्मत्त हुई कुछ ब्राह्मीशक्ति के रथ में जुतनेवाली हँसियाँ और 'अलम्बुसा' देवी का वाहन चण्डनामक कौआ - ये सब आकाश प्रदेश में इकट्ठे होकर नाचने लगे ॥२॥ समुद्रतट की समथल भूमि में भली प्रकार नृत्य और मद्यपान कर रही उन हँसियों को पुरुष-विषयक अनुराग उत्पन्न हुआ। (इस श्लोक में 'अब्धितटानां तले' इससे उद्दीपन विभाव का कथन किया गया है, यह जानना चाहिए ।) ॥३॥ तदनन्तर उस समय उत्पन्न-रति वे सभी हँसियाँ उन्मत्त होकर क्रमशः निकृष्टजातीय भी कौए के साथ रमण करने लगीं, क्योंकि वे मत्त ही तो थीं। (ऊँची जाति की हँसियों की रति अपने से निकृष्ट जाति कौए के साथ यद्यपि अनुचित है, तथापि उसके होने में एकमात्र कारण उन्माद ही है, यह सूचन करने के लिए इस श्लोक में 'अपि' शब्द का प्रयोग किया है।)॥४॥ सात कुलहँसियों के वल्लभ इस चण्डनामक कौए ने क्रम से एक-एक हँसी के साथ तब तक रमण किया, जब तक कि एक दूसरे की इच्छा पर्याप्तरूप से शान्त नहीं हुई ॥५॥ रति से तृप्त हुई उन हँसियों ने गर्भधारण किया और वे देवियाँ उत्सव-कार्य सम्पादित हो जाने के अनन्तर अपनी ही माया का विलास समझकर क्रोध न करनेवाले महादेवजी के पास पहुँची ॥६॥ और उन देवियों ने भोजन के लिए शूलपाणि महादेवजी को प्रिय उमा समर्पित की, जो ओदनरूपता (भात) को प्राप्त हुई थी ।।७।। भोजन में मेरी प्रिया ही दी गई है, यों जानकर जब महादेवजी मातृकाओं के प्रति रुष्ट हुए, तब उन्होंने अपने-अपने अंगों से सिर आदि एक-एक अवयव की कल्पना द्वारा पार्वती का पुनः उत्पादन कर महादेवजी को फिर पाणिग्रहण विधि से उसे समर्पित किया ॥८, ९॥ अनन्तर देवियाँ, महादेवजी और उनका परिवार - ये सब सन्तुष्टमन होकर अपनी-अपनी दिशा की ओर चल दिये ।।१०।। हे मुनीश्वर, वे ब्राह्मीशक्ति के रथ की हँसियाँ गर्भवती हुई थीं, उन्होंने ब्राह्मी देवी के समीप में अपना यथास्थित वृत्तान्त कह दिया ॥११॥ ब्राह्मीशक्ति ने कहाः पुत्रियों, इस समय गर्भवती तुम सब मेरे रथकार्य के लिए असमर्थ हो, इसलिए अब यथेष्ट विचरण करो ॥१२॥ गर्भ से अलसाई हुई उन हँसियों को वैसा कहकर दयालु ब्राह्मी देवी - उनके ऊपर अनुग्रह के लिए विहार छोड़करनिर्विकल्प समाधि में ही सुखपूर्वक स्थित हुई ॥१३॥ हे मुनीश्वर, गर्भधारण से अलसाई हुई वे राजहँसियाँ भगवान विष्णु के नाभिकमल के मूल में ब्रह्मा के कमल की उत्पत्ति- स्थान में विचरण करने लगीं ॥१४॥ तदनन्तर उस प्रकार विचरण करती हुई उन राजहँसियों का गर्भ परिपक्व हो गया । उन्होंने नाभिकमल के कोमल पल्लव में उस प्रकार मुलायम अण्डे दिये, जिस प्रकार वल्लियाँ अंकुर देती हैं ॥१५॥ अनन्तर समय पाकर उन्होंने इक्कीस अण्डे दिये और यथासमय भीतरी गर्भ पक जाने पर हँसियों के पग के प्रहार द्वारा वे उस प्रकार द्विधा विभक्त हो गये, जिस प्रकार सारयुक्त ब्रह्माण्ड सुवर्ण और चाँदी के खप्परों द्वारा द्विधा विभक्त हो जाता है ॥१६॥ हे मुने, उस प्रकार उन अण्डों के द्वारा ये हम चण्ड के पुत्र इक्कीस भाई कौए की जाति में उत्पन्न हुए ।।१७।। उस कमल के पल्लव के ऊपर हुए वे हम क्रमशः बड़े हुए, हम लोगों को पंख आए और आकाश में उड़ने में समर्थ भी हुए ॥१८॥ तुमने तत्त्व कैसे जाना ? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उपक्रम करते हैं । महर्षे, हम लोगों ने अपनी माता हँसियों के साथ दीर्घकाल तक समाधि से विरत हुई भगवती ब्राह्मीदेवी की भलीप्रकार आराधना की ॥१९॥ अनन्तर उपयुक्त समय आने पर प्रसाद करने में तत्पर हुई भगवती ब्राह्मी ने स्वयं ही हम लोगों के ऊपर तत्त्वसाक्षात्काररूप फल के द्वारा वैसा अनुग्रह किया, जिससे हम लोग जीवन्मुक्त होकर स्थित हैं ।।२०।। हम लोगों का मन विलीन हो गया, इसलिए 'एकान्त प्रदेश में उपद्रवशून्य होकर समाधि में ही स्थित रहें' ऐसा निश्चय करके हम लोग अपने पिताजी के पास विन्ध्य-प्रदेश में गये ॥२१॥ वहाँ पिताजी ने हम लोगों का आलिंगन किया और तदनन्तर हम सबने भगवती अलम्बुसा की पूजा की । प्रसन्नतापूर्वक उस देवी के द्वारा देखे गये हम लोग विनय आदि सद्गुणों से नियन्त्रित होकर वहाँ रहने लगे ॥२२॥ पिता चण्ड ने कहा : 'हे पुत्रों, क्या तुम लोग इस संसाररूपी जाल से, जो असीम वासनारूपी तन्तुओं से गुँथी गयी है, मुक्त हो चुके हो ? यदि नहीं, तो उससे छुटकारा पाने के लिए सेवकवत्सल इस भगवती अलम्बुसा की हम प्रार्थना करें, जिससे तुम सब ज्ञान में पारंगत हो जाओगे ॥२३, २४॥ कौओं ने कहा : हे पिताजी, ब्राह्मीदेवी के प्रसाद से हम लोगों ने ज्ञातव्य विषय का भली-भाँति ज्ञान कर लिया है, किन्तु एकान्त में वास करने योग्य उत्तम स्थान की हम लोगों को अभिलाषा है ॥२५॥ पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्रों, एक मेरुनामक अत्यन्त ऊँचा पर्वत है, वह भाँति-भाँति के अनेक रत्नों का आधार है, उसका संपूर्ण देवता आश्रय करते हैं ॥२६॥ प्रकाशमान चन्द्र और सूर्यरूपी दीपक से युक्त अनेकविध प्राणियों के कारण विस्तृत हुए कुटुम्ब से परिवेष्टित ब्रह्माण्डरूपी घर का वह सुवर्णनिर्मित मध्यस्तंभ है ।।२७।। वह पृथ्वी के द्वारा ऊपर को उठाया गया मानों एक हाथ है । उस हाथ में किंपुरुष आदि देश ही चन्द्राकृति सुवर्ण निर्मित केयूर हैं, रत्नरूप अँगूठियों से सुशोभित शिखर ही अंगुलियाँ है और शब्द कर रहे द्वीप और समुद्र ही कंकण हैं ।।२८।। वह पर्वतों का राजा है, उसके चारों ओर हिमालय आदि सात कुलपर्वत सामन्तरूप से विराजित हैं; वह जम्बूद्वीप सिंहासन के ऊपर विराजमान है और पर्वतों की सभा में चन्द्र एवं सूर्यरूपी नेत्रों से दृष्टिपात करता है। तारावली (तारकाओं की पंक्ति) ही उसकी मालती-माला है, दिशारूपी पल्लवों से सुशोभित आकाश ही उसका एकमात्र वस्त्र है, वह सर्प और हाथी-इन दोनों का आश्रय- स्थान है, इन्द्र, उपेन्द्र आदि देवराज ही उसके आभूषण हैं ॥२९, ३०॥ कमनीय दिशारूपी कामिनियाँ उसके चारों ओर जल की धारा युक्त शीतल अंगभूषण मेघरूप नील, श्वेत आदि चामर डुलाती हैं ॥३१॥ इसके पैर सोलह हजार योजन नीचे पृथ्वी में अवस्थित हैं, जिनकी नाग, असुर और बड़े-बड़े सर्प पूजा करते हैं ।।३२।। इसकी देह सूर्य और चन्द्ररूप लोचनों से युक्त तथा अस्सी हजार योजन ऊँची स्वर्ग-स्थान तक पहुँची है, वहाँ देवता, गन्धर्व एवं किन्नर उसकी पूजा करते हैं ॥३३॥ इस पर्वतराज का आश्रय लेकर ब्रह्मर्षि, देवर्षि, राजर्षि, देव, पितर, गन्धर्व, किन्नर, अप्सराएँ, विद्याधर, यक्ष, राक्षस, प्रमथ, गुह्यक और नाग-ये चौदह प्रकार के प्राणी उस प्रकार जीवन निर्वाह करते हैं, जिस प्रकार प्रधान गृहपति का आश्रय कर इतर बन्धुगण जीवन निर्वाह करते हैं । यह इतना बड़ा विस्तृत है कि वे एकत्र रहने पर भी एकदूसरे का नगर या स्थान नहीं देख पाते ॥३४॥ इसके ईशानकोण में माणिक का बना हुआ एक विशाल शिखर है, जिसे देखने से ऐसा प्रतीत होता है मानों दूसरा उदित हुआ सूर्य ही हो ॥३५॥ इसके पृष्ठभाग में अनेकविध प्राणियों से परिवृत एक महान कल्पवृक्ष स्थित है, जो कि शिखररूपी विद्रुम-दर्पण में जगत के प्रतिबिम्ब की नाईं प्रतीत होता है ॥३६॥ उसके दक्षिण तने पर एक शाखा है, जिसमें कनक के सदृश पीले पल्लव लगे हुए हैं, रत्नों के सदृश चमकीले पुष्पगुच्छों के कारण तनिक भी अवकाश नहीं है और चन्द्रबिम्ब के सदृश प्रकाशमान फल भरे पड़े हैं ॥३७॥ हे पुत्रों, पहले जिस समय भगवती अलम्बुसादेवी ध्यान में आसीन थीं, उस समय मैंने चमकीली मणियों से जड़ा हुआ उस शाखा के ऊपर एक घोंसला बनाया और उसमें विलास किया ॥३८॥ वह घोंसला रत्नसदृश चमकीले पुष्पों की पँखुड़ियों से ढँका हुआ है, अमृत के समान स्वादु फलों से परिपूर्ण है और चिन्तामणि की शलाकाओं से उसके बाहरी दरवाजों की रचना की गई है ॥३९॥ वह (घोंसला) विचारपूर्वक व्यवहार करनेवाले कौओं के पुत्रों से व्याप्त है तथा भीतर से अत्यन्त शीतल, मनोहारी और भाँति-भाँति के पुष्पों से पूरित है ॥४०॥ हे प्यारे बच्चों, देवताओं से भी दुर्गम उस सुन्दर घोंसले पर तुम लोग जाओ, वहाँ निवास किये हुए तुम लोग निर्विघ्न एवं पर्याप्तरूप से भोग और मोक्ष दोनों को प्राप्त करोगे ॥४१॥ इस प्रकार कहकर हमारे पिता ने हम लोगों का चुम्बन और आलिंगन किया तथा भगवती के पास जो मांस लाया गया था, उसे भी हमें दिया ॥४२॥ उसे खाकर भगवती और पिताजी के चरणों में अभिवन्दन कर अलम्बुसा के निवासस्थान उस विन्ध्यप्रदेश से हम उड़ गये ॥४३॥ क्रमशः आकाश का उल्लंघन कर, मेघों के कोटरों से निकल कर, पवन-लोक प्राप्त कर हम लोगों ने व्योमचारी देवताओं को प्रणाम किया ॥४४॥ हे मुनीश्वर, (इसके बाद हम लोग) सूर्य-मण्डल का अतिक्रमण कर स्वर्ग के अमरावती नगर में पहुँचे। स्वर्ग का अतिक्रमण कर ब्रह्मलोक में पहुँचे ॥४५॥ वहाँ पहुँचकर (हम लोगों ने) तत्क्षण ही माता और भगवती ब्राह्मीदेवी को प्रणामपूर्वक पिता द्वारा कथित अशेष वृत्तान्त अक्षरशः कह सुनाया ।।४६।। उन्होंने स्नेहपूर्वक हम लोगों का आलिंगन किया और 'जाओ' यों आज्ञा तथा आर्शीवाद देकर उत्साहित किया । अनन्तर उन्हें प्रणाम कर हम लोग ब्रह्मलोक से चल पड़े ॥४७॥ आकाश-विहार में निपुण, अतिचपल हम लोग वायुलोक में गमन करते हुए सूर्य के सदृश देदीप्यमान लोकपालों की नगरियों का अतिक्रमण कर इस कल्पतरु पर आये और अपने घोंसले में प्रविष्ट हुए । हे मुने, यहाँ पर हम लोगों से समस्त बाधाएँ दूर रहती हैं और हम सदा समाधि में अवस्थित रहते हैं ॥४८, ४९॥ कहे गये वृत्तान्त का उपसंहार करते हैं। हे महानुभाव, 'तुम किस कुल में उत्पन्न हुए ?' 'किस तरह ज्ञातज्ञेय हुए ?' और 'तुम्हें यह निवास कैसे प्राप्त हुआ ?'- ये जो तीन प्रश्न आपने पहले किये थे, उसके उत्तर में जिस प्रकार हम उत्पन्न हुए, जिस प्रकार यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर हम लोग शान्त-बुद्धि होकर स्थित हुए एवं इस नीड में जिस रीति से हम लोग आये, यह सब वृत्तान्त आपको अविकलरूप से भली प्रकार कह सुनाया, इसके बाद 'तुम्हारी कितनी आयु है ?' और 'क्या अतीत वृत्तान्त जानते हो ?' - इन दो प्रश्नों के उत्तररूप से यदि आप कहने के लिए हमें आज्ञा देंगे, तो उसे भी मैं आपसे कहूँगा ॥५०॥ उन्नीसवाँ सर्ग समाप्त बीसवाँ सर्ग प्रत्येक कल्प में जगत की समता, भाईयों की मृत्यु और प्रलयकाल में भी अपने चित्त की स्थिरता का भुशुण्ड द्वारा वर्णन । 'वृत्तं स्मरसि किंच वा', इस प्रश्न का विस्तार से उत्तर देने की इच्छावाला और 'इमं कल्पतरुं प्राप्य निजं नीडं प्रविश्य च' इत्यादि वृत्तान्त में पूर्वापर विरोध की शंका न हो जाय, इसलिए प्रत्येक कल्प में अवयवों की समता होने के कारण कल्पवृक्ष, मेरु आदि की एकता कही जाती है आशय बतलाते हैं । भुशुण्ड ने कहा ः महाराज वसिष्ठजी, हम लोगों के जन्मनिमित्त कल्प में चिरकाल तक जो कुछ पदार्थसमूहात्मक जगत स्थित था, वह सब अवयवसंस्थान आदि आकृति-विशेषों से इस कल्प के पदार्थों के सदृश ही था, अतः वह आज भी अभेद आरोप से सन्निहित ही है, इसलिए बुद्धिपूर्वक ही 'इमं कल्पतरूम्' इत्यादि निर्देश किया गया है ।।१।। इसलिए हे मुनीन्द्र, यद्यपि यह वृत्तान्त भूतकालीन है, तथापि 'जगत भ्रान्तिमात्र है' यों अभ्यास होने के कारण पूर्वजन्म की समता देखनेवाले मैंने बोध के लिए उसका, वर्तमान जगत के साथ एकता मानकर ही, वर्णन किया है ॥२॥ अब, लम्बी कथा का उपक्रम करने पर पूजा में विलम्ब न हो जाय, इसलिए पहले पूजन - स्वीकार की प्रार्थना करने के लिए स्तुति द्वारा महर्षि को अभिमुख करते हैं । हे मुने, चूँकि दीर्घकाल से संचित किये गये मेरे पुण्य आज सफल हो गये, इसीलिए निर्विघ्नतापूर्वक आपका मैं दर्शन कर रहा हूँ ॥३॥ मुनिवर ! यह नीड़, यह शाखा, यह मैं, यह कल्पवृक्ष - ये सब आज आपके दर्शन से अत्यंत पवित्र हो गये ।।४।। मुनिवर, विहंगों (पक्षियों) द्वारा समर्पित इस अर्ध्य और पाद्य का स्वीकार कर एवं हम लोगों को पवित्र बनाकर आप अवशिष्ट सेवा के निमित्त कुछ और प्रश्न कहने के लिए आज्ञा दीजिए ॥५॥ वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, दूसरी बार स्वयं उस भुशुण्ड पक्षी के द्वारा अर्घ्य, पाद्य देने पर मैंने यह कहा ॥६॥ हे पक्षिराज, वैसे बली और महाबुद्धिमान तुम्हारे वे भाई यहाँ क्यों नहीं दिखाई देते, तुम अकेले ही क्यों दिखाई देते हो ? ।।७।। भुशुण्ड ने कहा : मुनिवर, हम लोगों को यहाँ रहते महान काल बीत गया । हे अनघ, दिवस - पंक्तियों की नाईं युगों की पंक्तियाँ क्षीण हो गई ॥८॥ इतना लम्बा काल होने के कारण सभी मेरे भाई, तृण के सदृश, शरीर छोड़कर शिवपद में परिणत हो गये ॥९॥ ब्रह्मन्, यद्यपि दीर्घायु हों, महान हों, सज्जन हों, बलवान हों, सभी को यह अलक्षितस्वरूपवाला काल अपने उदर में समा लेता है ॥१०॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : प्रिय पक्षिराज, माला की नाईं अपने कन्धे पर बारह सूर्य और चन्द्रमा को ढोनेवाले तथा प्रवह आदि वातस्कन्धों का अतिक्रमण करनेवाले प्रलय- वायुओं के अविरत बहने पर क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥११॥ भुशुण्डजी, चिरकाल से अत्यन्त आसन्न उदयाचल और अस्ताचल के अरण्यों को दग्ध कर देनेवाले सूर्य-किरणों से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥१२॥ वायसराज, जल को पाषाण के सदृश कठोर बना देनेवाले शीतल चन्द्रकिरणों और निकट प्रलय के लिए हो रहे पाषाण के पतनों से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥१३॥ प्रियवर, मेरु - शिखर पर विश्रान्ति किये प्रलयकालीन मेघ-मण्डलों से तथा परशु की धारा को भी क्षत कर देनेवाले शिलासदृश घनीभूत कुहरे से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥१४॥ अत्यन्त ऊँचे स्थान पर स्थित हुआ यह उन्नत कल्पवृक्ष जगत के विषम क्षोभों से क्यों क्षुब्ध नहीं होता ? ॥१५॥ कठिन समय आने पर जब बड़े-बड़े लोगों को भी क्षोभ हो सकता है, तब पक्षी जैसी अधम योनि में उत्पन्न हुए मेरी तो बात ही क्या ? तथापि विवेक की सामर्थ्य से खेद नहीं होता, यों कहने के लिए दूसरों के जीवन की अपेक्षा अपनी जाति के पक्षियों के जीवन की क्षुद्रता बतलाते हैं। भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन्, आकाश में आश्रित और सभी लोगों से तिरस्कृत यह पक्षियों का जीवन सब प्राणियों में अत्यन्त तुच्छ है ॥१६॥ ऐसी तुच्छ योनियों के लिए भी विधाता ने झरनों, वनों और शून्यसदृश आकाश में प्रीतिपूर्वक जो जीविका की कल्पना की है, यह अत्यन्त आश्चर्य का विषय है ॥१७॥ भगवन्, इस तुच्छ जाति में उत्पन्न, चिरकाल से जीवन बीता रहा और आशारूपी पाशों से निरन्तर बद्ध एक पक्षी किस तरह शोकवर्जित हो सकता है ? ॥१८॥ भगवन्, तथापि हम अपनी आत्मा में ही सदा सन्तोष मानकर अवस्थित हैं, इसलिए उत्पन्न हुए विभ्रमों से कभी भी परमार्थसत्ता से रहित इस जगत में मुग्ध नहीं होते ॥१९॥ ब्रह्मन्, हम लोग अपने सत्तास्वभाव में ही सन्तुष्ट रहते हैं, कष्ट पहुँचानेवाले परपीडन-व्यापारों से निर्मुक्त होकर अपने निवासस्थान इस घोंसले में रहते हुए केवल कालयापन करते हैं ॥२०॥ महाराज, हम लोग अपने जीवन से न देह की ऐहिक या आमुष्मिक फल के लिए कोई क्रिया चाहते हैं और मरण से न देह का विनाश ही चाहते हैं। जिस तरह वर्तमान में नित्यसिद्ध निरतिशयात्मरूप से पूर्णकाम होकर स्थित रहते हैं, उसी तरह आगे भी स्थित रहेंगे ॥२१॥ महर्षे, हमने प्राणियों की जन्म, मरण आदि अनर्थ - दशाएँ देख लीं और मिथ्यात्व-निर्णायक स्वप्न आदि दृष्टान्त दृष्टियाँ भी देख ली तथा हमारे मनने अपना चंचल स्वरूप भी सदा के लिए भली प्रकार त्याग दिया है ।।२२।। कल्पवृक्ष के प्रभाव से ही कल्प- समाप्ति तक हम लोगों को खेद नहीं होता, यह कहते हैं । निरन्तर शान्ति देनेवाले अविनाशी स्व-स्वरूप प्रकाश में स्थित होकर मैं इस कल्पवृक्ष के ऊपर सदा काल की कलन गति जानता रहता हूँ ॥२३॥ प्रकाश अधिक होने के कारण जब दिन और रात का विभाग ही ज्ञात नहीं हो सकता, तब यहाँ स्थित होकर तुम काल की कलनगति कैसे जानते हो ? इस प्रश्न पर कहते हैं । चमकीले रत्नों के प्रकाश से पूर्ण कल्पलता- गृह में उपस्थित होकर मैं प्राणायाम के प्रवाह से यानी स्वरोदयशास्त्र में बतलाये गये उपाय से अखण्डित कल्प जान लेता हूँ ॥२४॥ मुनिवर, दिन और रात जाने बिना ही इस उन्नत शिखर पर अपनी बुद्धि से ही लोकों के कालक्रम की स्थिति जानता रहता हूँ ।।२५।। मन की स्थिरता के बल से मुझे खेद नहीं प्रतीत होता, इस आशय से कहते हैं । मुनिवर, यह सारभूत वस्तु है और यह असारभूत वस्तु है, इस प्रकार के विवेकयुक्त बोध से उत्तम शान्ति को प्राप्त हुआ मेरा मन चंचलताशून्य, शान्त और भली प्रकार स्थिर है ॥२६॥ सांसारिक व्यवहारों से जनित असद्रूप आशारूपी पाशों से जिस प्रकार अल्पध्वनियों से प्राकृत काक भयग्रस्त हो जाता है, उस प्रकार मैं भयग्रस्त नहीं होता ॥२७॥ धैर्य के कारण भी हमें खेद प्राप्त नहीं होता, यों कहते हैं । निरतिशय शान्ति पहुँचानेवाली और आत्मप्रकाश से शीतल हुई बुद्धि से जगत की माया देख रहे हम लोग धीरता को प्राप्त हुए हैं ॥२८॥ हे महाबुद्धे, दशाक्रम के अनुसार भयंकर दशाएँ भी प्राप्त हो जाय, तथापि स्थिर बुद्धिवाले हम, निश्चल पत्थर के सदृश, स्थिराकृति होकर अवस्थित रहते हैं ॥२९॥ जगत-तत्त्व के पुनः विमर्शबल से भी खेद नहीं होता, यों कहते हैं । प्रारम्भ में रमणीय दीख पड़नेवाली, तरल इस संसार स्थिति का बार-बार परामर्श किया जा चुका है, अतः वह हमें कुछ बाधा नहीं पहुँचाती ॥३०॥ 'जातस्य ही ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च' (उत्पन्न हुआ निश्चित मरता है दुःख अपरिहार्य है, यों निश्चय होने के कारण भी भयप्राप्ति नहीं होती, यों कहते हैं । भगवन्, सभी प्राणी व्यवहारदृष्टि से आते हैं और जाते हैं अथवा परमार्थदृष्टि से न आते हैं और न जाते हैं, इसलिए हम लोगों को यहाँ भय ही क्या ॥३१॥ तत्त्वज्ञस्वरूप अपने में तटस्थता, समस्त भूतों के संसार का द्रष्टृत्व और संसार के प्रति आदर का अभाव होने से भी भय की प्रसक्ति नहीं है, ऐसा कहते हैं । कालसागर में प्रवेश कर रही, प्राणि-समूह तरंगों से युक्त संसार-सरिता के तटपर अवस्थित हुए भी हम लोग उसमें आदर नहीं करते ॥३२॥ महर्षे, इस वृक्ष पर उपस्थित हुए हम लोग प्राप्त वस्तुओं का न परित्याग करते हैं, एवं न अप्राप्त वस्तु के ग्रहण की चेष्टा ही करते हैं; व्यवहार दृष्टि से स्थित हैं एवं परमार्थदृष्टि से स्थित नहीं भी हैं। हम लोग एकमात्र व्यवहार की सिद्धि के लिए, कण्टकाकीर्ण भूमि की नाईं, सावधानी से चलने के कारण कोमल पगवाले हैं और तत्त्वदृष्टि से संसार का उच्छेदन कर देने के कारण क्रूर भी हैं ॥३३॥ बड़े लोगों के अनुग्रह से भी हम लोगों को खेद-प्राप्ति नहीं होती, ऐसा कहते हैं । शोक, भय और आयास से वर्जित आपके सदृश सन्तुष्ट उत्तम पुरुष हम लोगों पर सदा अनुग्रह करते हैं, इसलिए भी हम लोग सदा दुःखों से निर्मुक्त होकर अवस्थित हैं ॥३४॥ भगवन्, व्यवहार चलाने के लिए इधर-उधर प्रेरित हुआ भी हम लोगों का मन राग आदि वृत्तियों में निमग्न और तत्त्व विचार से शून्य कभी भी नहीं रहता ॥३५॥ अपनी आत्मा के निर्विकार, क्षोभशून्य और शान्त हो जाने के कारण चिद्रूप ( चारों ओर से ब्रह्माकार वृत्तिरूप चन्द्रमा का उदय होने पर उत्कट हुए बोधस्वरूप) तरंगवाले हम लोग, पूर्णिमा आदि पर्वकाल में समुद्र की नाईं, प्रबुद्ध हो गये हैं ॥३६॥ भगवन्, जिस अमृत के लिए मन्दराचल द्वारा सर्वांगों से क्षुब्ध हुए क्षीर-सागर का मंथन किया जाता है, आपके उसी अमृतरूपा आगमन से हम लोग अत्यन्त प्रसन्नचित्त हो गये हैं ।।३७ ।। समस्त एषणाओं की तिलांजलि देनेवाले सन्त, महात्मा अपने आगमन आदि से हम पर जो अनुग्रह करते हैं, मैं अपनी आत्मा का इससे अधिक दूसरा कुशल नहीं मानता ॥३८॥ ऊपर-ऊपर से रमणीय दिखाई पड़नेवाले विषय-भोगों से क्या प्राप्त होता है ? अर्थात् कुछ भी नहीं। सत्संगरूपी चिन्तामणि से तो समस्त सारभूत ज्ञानवस्तु प्राप्त होती है ॥३९॥ हे मुनिवर, स्नेहपूर्ण, गम्भीर, मधुर, उदार और धीर वाणीवाले एकमात्र आप ही इस त्रिभुवनरूपी कमल की कली में भ्रमर के सदृश हैं ॥४०॥ साधो, यद्यपि मैंने परमात्मा को जान लिया है और आपके दर्शन से मेरे समस्त पाप नष्ट हो चुके, तथापि चूँकि महात्माओं का समागम भयों का अपहरण करनेवाला है इसलिए, यहाँ आज मेरा जन्म सफल (निरतिशय आनन्दरूप फल से युक्त) हुआ, ऐसा मैं मानता हूँ ॥४१॥ बीसवाँ सर्ग समाप्त इक्कीसवाँ सर्ग कल्पवृक्ष का माहात्म्य, प्रलय में वारुणी आदि धारणाओं द्वारा अपनी स्थिति, ईश्वरीय नियमिका शक्ति और अनेक चित्र-विचित्र अर्थों के स्मरण का वर्णन। अपने आश्रय कल्पवृक्ष के माहात्म्य वर्णनप्रसंग में युगविनाश काल में जनित उपद्रवों से अपने को क्लेश की प्राप्ति नहीं होती, यों कहते हुए 'वृत्तं स्मरसि किं च वा' इत्यादि प्रश्न का उत्तर देने के लिए पक्षिराज भुशुण्ड वक्तव्य का उपक्रम करते हैं । भुशुण्ड ने कहाः महाराज वसिष्ठजी, युग समाप्ति के महान उपद्रवों में और भयंकर महापवनों में भी यह कल्पवृक्ष अत्यन्त स्थिर रहता है, कभी भी कम्पित नहीं होता ॥१॥ हे साधो, अन्य लोकों में विहार करनेवाले सभी प्राणियों का यह अत्यन्त अगम्य स्थान है, अतः यहाँ हम लोग अत्यन्त सुखपूर्वक रहते हैं ।।२।। मुनिवर, जिस समय हिरण्याक्ष ने सात द्वीपों से वेष्टित इस पृथ्वी का वेगपूर्वक अपहरण किया था, उस समय पृथ्वी पर स्थित होने के कारण इसके भी हरण, कम्पन आदि की संभावना अवश्य थी, तथापि दिव्यप्रभाव की सामर्थ्य से इस कल्पवृक्ष में तनिक भी कम्पन नहीं हुआ ॥३॥ (वराह भगवान द्वारा किये गये पृथ्वी के उद्धार के समय ) खम्भे की आधारभूत शिला की नाईं चारों ओर से समता के लिये आधाररूप से दिये गये पर्वतों से युक्त मेरुपर्वत जब कम्पित हुआ, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ॥४।। दो भुजाओं के अवष्टम्भ ( पकड़) से मेरु को दबाकर जब चतुर्भुज भगवान नारायण ने इतर दो हाथों द्वारा समुद्र से मन्दराचल का उद्धार किया, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।५।। जब देवासुर संग्राम के कारण चन्द्र-मण्डल और सूर्य-मण्डल गिर गया था तथा जगत में अत्यन्त क्षोभ पैदा हो गया था, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।६।। जब पर्वतराज की शिलाओं का उन्मूलन कर देनेवाले और मेरुपर्वत के अन्यान्य वृक्षों को कम्पित कर देनेवाले प्रलय-कालीन वायु बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ॥७॥ क्षीर-सागर में चंचल हुए मन्दराचल की गुहाओं के वायुओं से मानों कम्पित हुई कल्पान्त की मेघपंक्तियाँ जब संचरण कर रही थी, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।८।। जब (तारकासुर युद्ध में) कालनेमि की भुजाओं में मेरु पर्वत चारों ओर से उन्मूलित होकर अवस्थित था, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ था ।।९।। जिनके कारण बड़े-बड़े सिद्ध गिर रहे थे, ऐसे पक्षिराज गरुड (4) के पंखों के पवन जब अमृत हरण के युद्ध में बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष गिरा नहीं ॥१०॥ आज भी जिसकी पृथ्वी धारणरूप चेष्टा समाप्त नहीं हुई है, ऐसी शेषाकृति को संकर्षण रुद्र जब प्राप्त हुए, तब और जब गरुड़जी पृथ्वी से उड़कर ब्रह्माण्ड को गये, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।११॥ प्रलयकाल में जब शेष ने फणाओं से, शैल, सागर एवं समस्त प्राणियों से सही न जानेवाली प्रलयाग्नि शिखाएँ बाहर निकालीं तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ। (पुराण में यह बात प्रसिद्ध है कि अन्त में प्रलय संकर्षण की मुखाग्नि से ही होता है ।) ॥१२॥ हे मुनियों में सिंहरूप महाराज वसिष्ठजी, इस प्रकार के उत्तम वृक्ष पर निवास कर रहे हम लोगों को आपत्तियाँ कहाँ से हो सकती हैं, क्योंकि वे आपत्तियाँ दुष्टस्थान में निवास के कारण ही आती हैं ॥१३॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे महाबुद्धि पक्षिराज, कल्पान्त हेतु उत्पातवायुओं के, जो चन्द्रमा, नक्षत्र और सूर्य को गिरा देते हैं, बहने पर तुम चिन्तानिर्मुक्त होकर कैसे रहते हो ? (क्योंकि उस समय प्रलय में भूलोकपर्यन्त सबका दाह होने से मेरु, कल्पवृक्ष आदि से कभी भी परित्राण नहीं हो सकता ।) ॥१४॥ भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, जब सहस्र महायुगों के अन्त में जगत की अवस्था में व्यवहार गिर जाता है, तब सन्मित्र का परित्याग कर देनेवाले कृतघ्न की नाईं मैं इस घोंसले का परित्याग कर देता हूँ ।।१५।। ( उस समय मैं) समस्त कल्पनाओं का परित्याग कर और निश्चल स्वभाववाले अंगों से (4) गरुडस्य जातमात्रस्य सर्वे लोकाः प्रकम्पिताः । प्रकम्पिता मही सर्वा सप्तद्वीपाश्च कम्पिताः ॥ तदुत्पातान्निमज्जन्तीं भुवं नावमिवाऽम्भसि । दधौ सहस्रैः शिरसां संकर्षणवपुर्हरः ।। 'उत्पन्नमात्र गरुड को देखकर सब लोक कम्पित हुए, भूमि और सातों द्वीप काँपने लगे । इन उत्पातों से, जल में नाव की नाईं, डूब रही पृथ्वी का संकर्षण शरीर महादेवजी ने हजारों मस्तकों से धारण किया' इस कथा के अनुसार कहते हैं । युक्त होकर एकमात्र आकाश में ही, वासनाशून्य मन की नाईं स्थित रहता हूँ ॥१६॥ सामान्यतः कथित आकाश स्थिति का धारणा भेदों से विशेष उल्लेख करते हैं। महाराज वसिष्ठजी, प्रलय के समय में जब पर्वतों को खण्ड-खण्ड कर देनेवाले बारह आदित्य तपते हैं, तब मैं वरुणसम्बन्धी धारणा बाँधकर निश्चिंत होकर स्थित रहता हूँ। (तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार जल के बीच रहनेवाले वरुण बाहर के ताप से जनित संताप का अनुभव नहीं करते, उसी प्रकार भुशुण्ड भी 'अत्यन्त शीतल समस्त दिग्मण्डल में व्यापी अपरिच्छिन्न जल स्वरूप वरुण ही मैं हूँ' इस प्रकार चित्त में निरन्तर वरुण भावना के द्वारा वरुणरूपताको प्राप्त होकर बाहर के सूर्यादि-तापजनित संताप का अनुभव नहीं करते थे) ॥१७॥ जब प्रलयकाल में बड़े-बड़े पर्वतराजों को मर्दित कर देनेवाले प्रलयकालीन वायु बहते हैं, तब मैं पर्वतसम्बन्धिनी धारणा बाँधकर आकाश-मण्डल में अचल होकर स्थित रहता हूँ (तात्पर्य यह है कि प्रलयकाल में पृथ्वी पर स्थित पर्वतों के विनाशी होने के कारण उन्हीं पर प्रलयकालीन वायुओं का आघात होता है, इसलिए प्रलयकालीन वायुओं से होनेवाले आघात के अविषय ब्रह्माण्ड के बहिर्भूत आकाश में साधारण वायु से भी क्षोभ न होने के लिए पर्वतसम्बन्धिनी धारणा बाँधकर मैं स्थित रहता हूँ) ॥१८॥ जब प्रलयकाल में जगत, जिसमें मेरु आदि पर्वत गल जाते हैं, एक समुद्रस्वरूप हो जाता है, तब वायुसम्बन्धिनी धारणा बाँधकर एकमात्र वायु में ही तादात्म्य भाव करता हुआ निश्चित-बुद्धि होकर ऊपर तैरता रहता हूँ ॥१९॥ 'उस प्रकार कितने समय तक तैरते रहते हो ?' इस शंका पर कहते हैं । महाराज, ब्रह्माण्ड के पार को यानी स्थूल, सूक्ष्म और समष्टिरूप ब्रह्माण्ड के परम अवधिस्वरूप अव्याकृत को प्राप्त कर समस्त पदार्थों के अन्तभूत एवं निर्मल आत्मपद में निश्चलात्मक सुषुप्ति के सदृश एकरस निर्विकल्प समाधि-अवस्था से मैं तब तक स्थित रहता हूँ, जब तक कमलोद्भव ब्रह्मदेव पुनः अपने सृष्टिकर्म में प्रवृत्त नहीं होते । पुनः सृष्टिरूप व्यापार के होने पर ब्रह्माण्ड में प्रवेशकर इस कल्पवृक्ष के स्थानापन्न मैं अपने आलय में फिर स्थित हो जाता हूँ ॥२०, २१॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहाः हे पक्षीन्द्र, प्रलयकाल में तत्-तत् धारणाओं के द्वारा अखण्डित होकर जैसे तुम स्थित रहते हो, वैसे दूसरे योगी क्योंकर स्थित नहीं रहते, क्यों वे शरीर त्यागकर मुक्ति प्राप्त करते हैं ? ॥२२॥ इस विषय में तत्-तत् प्रबल प्रारब्ध का अनुसरण करनेवाली सत्यसंकल्प स्वरूपा ईश्वरनियति ही व्यवस्थापक है, दूसरा कोई नहीं; ऐसा कहते हैं । भुशुण्ड ने कहा ः हे ब्रह्मन्, चूँकि इस परमेश्वरीय नियामिका शक्ति का कोई भी उल्लंघन नहीं कर सकता, इसलिए हम इस प्रकार कल्पान्तों में स्थित रहते हैं और दूसरे (योगी) शरीरों का त्यागकर मुक्त हो जाते हैं ॥२३॥ महाराज, जो अवश्य भवितव्यता है, उसका बुद्धि से 'इदम् - इत्थमेव' इस प्रकार अवधारण नहीं कर सकते। जिस तरह के प्रारब्ध से जो जैसा प्राप्त होता है, वह वैसा ही रहता है । यह नियतिरूप स्वभाव का निश्चय है ॥२४॥ प्रत्येक कल्प में इस कल्पवृक्ष के निर्माण में भी भोगजनक अदृष्ट में हेतुभूत मेरा संकल्प ही कारण है, ऐसा कहते हैं। कल्प-कल्प में बार-बार एकमात्र मेरे संकल्प से ही मेरुपर्वत के इसी शिखर पर इस तरह का यह कल्पवृक्ष उत्पन्न होता है ॥२५॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, तुम्हारी आयु मोक्ष के सदृश अत्यन्त अपरिच्छिन्न है, तुम सुदूर भूतकालीन पदार्थों का निर्देशन करने में सबसे बढ़-चढ़कर हो । तुम मोक्षहेतु तत्त्वज्ञान और लौकिक समस्त शास्त्रादि विज्ञानों से परिपूर्ण हो, धीर हो और तुम्हारे मनोव्यापार आत्मयोग में पर्याप्त रूप से योग्य हो चुके हैं। तुमने तरह-तरह की असंख्य सृष्टियों की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय देखे हैं, इसलिए मैं तुमसे पूछता हूँ कि तुम्हारे द्वारा देखे गये जगत मण्डल में आश्चर्यकारी किस-किस जगत-क्रम का तुम स्मरण करते हो ॥२६, २७॥ भुशुण्ड ने कहाः हे श्रेष्ठतर, इस पृथ्वी के विषय में मुझे स्मरण है कि एक समय इसमें शिला और वृक्ष कुछ नहीं थे; तृण, लता आदि कुछ भी उत्पन्न नहीं हुए थे, पर्वत, अरण्य और भाँति-भाँति के वृक्ष कुछ भी नहीं थे तथा यह पृथ्वी मेरु के नीचे स्थित थी ॥२८॥ मुझे भलीभाँति स्मरण है कि मेरुपर्वत के नीचे यह पृथ्वी ग्यारह हजार वर्षों तक भस्म-सार के भार से व्याप्त थी ॥२९॥ पहले मेरुपर्वत के नीचे पृथ्वी पर न सूर्य उत्पन्न हुआ था, न इसमें चन्द्र-मण्डल का भान ही होता था और न तो दिवस का हेतुभूत प्रकाश सुमेरुपर्वत के प्रकाश से विभक्त था-इसका भी मुझे भली प्रकार से स्मरण है ॥३०॥ सुमेरुपर्वत के रत्नों के तलप्रकाशों से इस पृथ्वी का आधा कोटर प्रकाशित होता था तथा इस पर कहीं-कहीं प्रकाशयुक्त पर्वत भी विद्यमान थे, इसलिए यह लोकालोक पर्वत के सदृश प्रतीत होती थी - इसका भी ठीक-ठीक स्मरण है ॥३१॥ यहाँ बल, ऐश्वर्य आदि से परिपुष्ट असुरों का संग्राम होने पर जब इस पृथ्वी का भीतरी भाग क्षीण हो गया था, तब यह पलायनमान जनों से व्याप्त हो गई थी - इसका भी मुझे अच्छी तरह से स्मरण है ।।३२।। चार युगों तक मद-मत्त ऐश्वर्यशाली असुरों के द्वारा आक्रान्त हुई यह पृथ्वी उनके (असुरों के) अन्तःपुर रूपता को प्राप्त हो गई थी- इसका भी स्मरण करता हूँ ॥३३॥ एक समय इस जगतरूपी कुटिया में मेरु को छोड़कर दूसरे सब देश समुद्र ने अंत तक आच्छादित कर दिये थे और उस समय इस मेरुपर्वत पर अविनाशी ब्रह्मा, विष्णु और शिव, ये देवत्रयी विराज रही थी - इसका भी मुझे ठीक स्मरण है ।।३४।। दो युगों तक तो यह (पृथ्वी) जंगली वृक्षों से निबिड़ थी और इसमें उन्हें (वृक्षों को) छोड़ दूसरे किसी का निर्माण ही नहीं हुआ था इसे भी स्मरण करता हूँ ।।३५।। एक समय यह पृथ्वी चार युगों से अधिक काल तक निबिड़ पर्वतों से व्याप्त थी; उसमें मनुष्यों का संचरण भी नहीं होता था - इसका भी मुझे स्मरण है ॥३६॥ दस हजार वर्षों तक तो यह मृत दैत्यों के अस्थिपर्वतों से चारों ओर से व्याप्त एवं परिपूर्ण थी - इसका भी मैं भली-भाँति स्मरण करता हूँ ।।३७।। एक समय अन्तरिक्ष आदि लोकों में भय के कारण समस्त विमानगामी देवता आदि तिरोहित हो गये थे और यह (पृथ्वी) सब वृक्षों से वर्जित होकर अन्धकार प्रचुर हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है ॥३८॥ महाराज, एक समय मेरु-स्पर्धा से विन्ध्यमहापर्वत के बढ़ने पर दक्षिण दिशा से अगस्त्य महामुनि चले गये और यह जगत-रूपी कुटिया मलय, दर्दुर, सह्याद्रि आदि विभाजक पर्वतों के अभाव से एकपर्वतरूपता को प्राप्त हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है ॥३९॥ ये और इनसे पृथक दूसरे भी बहुत वृत्तान्त हैं, जिनका मुझे संस्मरण है, परन्तु उनके विषय में अधिक कहने से क्या फल ? केवल सारभूत वस्तु का संक्षेप से श्रवण कीजिए ॥४०॥ हे ब्रह्मन्, सैकड़ों असंख्य मनु बीत गये, ये सब प्रभाव के आधिक्य से परिपूर्ण थे एवं सैकड़ों चतुर्युग भी बीत गये - इसका भी मुझे स्मरण है ॥४१॥ दूसरा आश्चर्य कहते हैं। एक समय यानी जब ब्रह्माण्डशरीर विराट् उत्पन्न होकर अपने स्वरूप का आलोचन करने के लिए कुछ काल तक समाहित चित्त हुए थे, उस समय पुरुष एवं असुरों से वर्जित, स्वतःशुद्ध, प्रकाशस्वभाव तैजस पदार्थों का समष्टिरूप एक ही ब्रह्माण्ड था - इसका मुझे स्मरण है ॥४२॥ कलियुग की सृष्टि-स्थिति का स्मरण कर रहे पक्षिराज भुशुण्ड कहते हैं । एक समय ऐसी उन्मत्त सृष्टि थी कि जिसमें ब्राह्मण लोग मद्य पीते थे, देवताओं की निन्दा करनेवाले असत्-शूद्र रहते थे, स्त्रियों के अनेक पति होते थे - इसका मुझे स्मरण है ॥४३॥ आश्चर्यान्तर कहते हैं। महाराज, मुझे किसी एक ऐसी सृष्टि का स्मरण है कि जिसमें यह भूपीठ वृक्षों से घनीभूत था, महासमुद्र की कल्पना भी नहीं की गई थी और स्त्री-पुरुष के सम्बन्ध के बिना अपने आप भृगु आदि मानस पुरुष उत्पन्न हुए थे (समुद्र के सर्जक प्रियव्रत की उत्पत्ति के पहले यह मानस-सृष्टि हुई थी, यह प्रसिद्ध है) ॥४४॥ जल में पृथिवी के निमग्न हो जाने पर जनलोक आदि प्रकाश प्रचुर लोकों के व्यवहारों से उपलक्षित हुए काल में जो सृष्टि-स्थिति थी, उसका स्मरण कर रहे पक्षीन्द्र भुशुण्ड कहते हैं । एक समय ऐसी सृष्टि थी जिसमें पर्वत और पृथिवी का नामशेष ही नहीं था, देवता और योगसिद्ध पुरुष आकाश में ही रहते थे तथा चन्द्र एवं सूर्य के अभाव में भी परिपूर्ण प्रकाश था - इसका मुझे स्मरण है॥४५॥ महाराज, एक समय की सृष्टि में न इन्द्र था, न कोई राजा था, न उत्तम, मध्यम एवं अधम का भेद था, सब एकरूप था तथा समस्त दिक्-चक्र अन्धकार से व्याप्त था - इसका मुझे स्मरण है ॥४६॥ इस कल्प के वृतान्त का तो इस कल्प तक की आयुवाले बहुत से लोगों को स्मरण है, यों प्रपंच कर रहे पक्षिराज भुशुण्ड कहते हैं । महाराज, पहले सृष्टि के उत्पादन के लिए सृष्टि का संकल्प हुआ। उसके बाद तीन लोकों में द्वीप आदि अवान्तर प्रदेशों का विभाग हुआ । उसके बाद सात कुलपर्वतों के लिए योग्य स्थान की कल्पना हुई । उसके बाद पृथक् स्थित हुए जम्बूद्वीप में प्रवेश कर स्रष्टा ने ब्राह्मण आदि वर्ण, उनके धर्म एवं उन-उनके लिए योग्य विद्याविशेषों की सृष्टि की। उसके बाद मण्डलरूप में पृथ्वी का विभाग किया, तदनन्तर नक्षत्र-चक्र का उपयोगी संस्थान एवं ध्रुव-मण्डल का निर्माण किया (मेरी अपेक्षा अत्यन्त स्वल्प आयुवाले आपके सदृश इस कल्प के मनुष्य भी इन सबका स्मरण कर सकते हैं।) ॥४७,४८॥ उसके बाद चन्द्रमा और सूर्य का निर्माण हुआ । तदनन्तर इन्द्र एवं उपेन्द्र की व्यवस्था हुई । बाद में हिरण्याक्ष ने पृथ्वी का अपहरण किया। बाद में उसका वराहरूपधारी भगवान ने उद्धार किया ॥४९॥ बाद में देव, दानव, मनुष्य आदि प्रत्येक में राजाओं की कल्पना की गई । पश्चात् मत्स्यरूप ग्रहण कर भगवान वेद लाये । मन्दराचल का उन्मूलन किया गया । अमृत के लिए क्षीर-सागर का मंथन हुआ । बाद में अजातपक्ष गरुड़ और समुद्रों की उत्पत्ति हुई - इत्यादि स्वल्प अतीत जगत्क्रम की जो स्मृतियाँ हैं, उनका मेरी अपेक्षा अल्प-आयुवाले वर्तमान काल में उत्पन्न आपके सदृश प्राणी भी स्मरण करते हैं, इसलिए उनमें आदर ही क्या ॥५०,५१॥ कल्पान्तरों में अपने द्वारा देखे गये अन्यान्य आश्चर्यों का कथन करते हुए तत्त्ववेत्ता भुशुण्डजी प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं। दीर्घजीविता को प्राप्त हुए मैंने किसी समय यह रहस्य देखा - इस कल्प में प्रसिद्ध गरुडवाहन श्रीविष्णु, हंसवाहन चतुर्मुख ब्रह्मा बनकर देव, दैत्य आदि की सृष्टिरूप कार्य का सम्पादन करते थे, हंसवाहन ब्रह्माजी वृषभवाहन रुद्र बनकर संहार करते थे तथा वृषभवाहन महादेवजी विष्णु शरीर बनकर सृष्टि का पालन करते थे ॥५२॥ इक्कीसवाँ सर्ग समाप्त बाईसवाँ सर्ग पुनः देखे गये वसिष्ठ के अष्टम जन्म आदि का, सम और अर्धसम सृष्टि का तथा क्षीर-सागर के मंथन आदि का वर्णन । भुशुण्ड ने कहाः भगवन्, (जब मुझे अनेक युगों की आश्चर्यजनक घटनाओं का वैसा अभ्रान्त स्मरण है, तब उनके बाद (कुछ पहले या आज के सर्ग में) उत्पन्न हुए आपको लेकर भरद्वाज, पुलस्त्य, अत्रि, नारद, इन्द्र और मरिचि इनके विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? यानी उनके विस्मरण की तो सम्भावना कभी हो ही नहीं सकती, यह भाव है (5) ) ॥१॥ पुलह, उद्दालक आदि तथा क्रतु, भृगु, अंगिरा आदि सिद्ध-ऋषि, सनत्कुमार आदि ब्रह्मर्षि एवं भृंगीश, स्कन्द, गजवदन आदि शिवजी के पार्षदों के विषय में तो स्मरण की गणना ही क्या ? ॥२॥ गौरी, सरस्वती, लक्ष्मी, गायत्री आदि अनेक उनकी शक्तियों तथा सुमेरु, मन्दर, कैलास, हिमालय, दर्दुर आदि पर्वतों के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥३॥ हयग्रीव आदि दानवों; हिरण्याक्ष, कालनेमि, बल, हिरण्यकशिपु क्राथ, बलि, प्रह्लाद आदि दैत्यों के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥४॥ शिबि, न्यंकु, पृथु, उलाख्य, वैन्य, नाभाग, केलि, नल, मान्धाता, सगर, दिलीप, नहुष आदि राजाओं के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥५॥ आत्रेय, व्यास, वाल्मीकि, शुक, वात्स्यान आदि तथा उपमन्यु, मणीमंकि, भगीरथ, शुक आदि के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥६॥ जो स्वल्पतर भूतकाल में उत्पन्न हैं, जो कोई कुछ दूर के हैं तथा जो आज के कल्प में उत्पन्न हैं, उनके विषय में स्मरण की गणना ही क्या ? यानी पूर्वोक्त सभी लोगों के विषय में विस्मरण हो ही नहीं सकता, यह भाव है ।।७।। हे मुने, ब्रह्माजी के पुत्र आपका यह आठवाँ जन्म है । उस आठवें जन्म में आपकी और मेरी संगति हुई - इसका मैं पहले से स्मरण करता हूँ ॥८॥ 'आठों जन्मों में क्या मैं ब्रह्माजी का ही पुत्र रहा ?' महाराज वसिष्ठ के इस प्रश्न पर पक्षीन्द्र भुशुण्डजी 'नहीं' यों उत्तर देते हैं। हे मुने, आप किसी समय आकाश से उत्पन्न होते हैं, किसी समय जल से उत्पन्न होते हैं, किसी समय वायु से उत्पन्न होते हैं, तो किसी समय पर्वत और अग्नि से उत्पन्न होते हैं ॥९॥ समस्त कल्पों में तत्-तत् अधिकारी पुरुषों के नाम और स्वरूप एक से होने पर भी सब पदार्थों के (5) सप्तम श्लोकस्थ क्रिया के साथ सब सप्तम्यन्तों का सम्बन्ध है। सब अवयव और आचरण एक ही होने चाहिए, यह नियम नहीं है, किन्तु काकतालीयन्याय से किसी समय एक-से ही हो जाते हैं, इस आशय से कहते हैं । महाराज वसिष्ठजी, यह सर्ग जैसा है, इसका जिस प्रकार आचरण है, इसके जिस प्रकार के अवयव संस्थान तथा दिशागण हैं, ठीक इसी तरह के तीन सर्ग पहले हो चुके हैं - इसका मुझे स्मरण है ।।१०।। मुनिवर, मुझे ऐसे दस सर्गों का स्मरण है-जिनमें देवताओं के निखिल आचरण तथा अवयव - गठन एकरूप थे, उनकी आयु समान थी एवं अपने नियत तत् तत् अधिकारपदों में उनकी स्थिति असुरों द्वारा चालित नहीं हुई थी ॥११॥ आचारों की समानता बतलाकर अब उनकी विषमता बतलाते हैं । हे मुने, जल में डूबकर तिरोहित हुई पृथ्वी का समुद्र से भगवान कूर्म ने ही, न कि वराह ने, पाँच सर्गों में पाँच बार उद्धार किया ॥१२॥ हे महाराज, मन्दराचल के आकर्षण के लिए किये गये भारी प्रयत्न के कारण व्याकुल हुए देवता एवं दानवों से युक्त यह अमृतार्थ समुद्र मन्थन बारहवाँ हुआ- ऐसा मुझे स्मरण है ॥१३॥ महाराज, पहले स्वर्गस्थ समस्त देवताओं से कर लेनेवाला, हिरण्याक्ष तीन बार समस्त औषधियों तथा रसों से परिपूर्ण इस पृथ्वी को पाताल में ले गया ॥१४॥ रेणुका के उदर से जन्म लेकर भगवान नारायण ने, परशुराम-अवतार से शून्य अनेक सर्गों के व्यवधान से भी, यह छठी बार क्षत्रियविनाश किया ।।१५।। हे मुनिश्रेष्ठ, सौ कलियुग हुए और कीकटदेश के राजारूप से यानी महाराज शुद्धोधन के पुत्ररूप से भगवान नारायण ने सौ बार बुद्धदशा प्राप्त की - इसका मुझे स्मरण है ॥१६॥ महाराज, चन्द्रमौलि महादेवजी ने कल्पों में तीस बार त्रिपुरों का विनाश किया, दो बार यानी प्रत्येक कल्प में स्वायंभुव और चाक्षुष मन्वन्तर में दक्षप्रजापति के यज्ञों का विध्वंस किया तथा अपराधी दस इन्द्रों को दण्ड दिया (उनके पदों से उन्हें च्युतकर पर्वत की गुफाओं में बन्दी बनाया अथवा वज्रसहित उनके हाथों का स्तम्भन किया ) - इसका मुझे स्मरण है ॥१७॥ मुनिवर, बाणासुर के लिए माहेश्वर एवं वैष्णवनामक ज्वरों और प्रमथगणों को शौर्य उत्साह बढ़ाकर प्रवृत्त करानेवाले तथा देवताओं की सेनाओं को प्रचुरमात्रा में क्षुब्ध करनेवाले हरि और हर के आठ संग्राम हुए-इसका मुझे स्मरण है ॥१८॥ मुने, मैं युग-युग में अध्येता पुरुषों की बुद्धियों के न्यूनाधिकभाव के कारण क्रियाओं की (ब्रह्मचर्य, गुरुसेवा, भूमिशयन आदि क्रियाओं की), अंगों की (शिक्षा, कल्प आदि अंगों की) एवं पाठों की (अवधानपूर्वक स्वर, वर्ण आदि के उच्चारण रूप पाठों की) न्यूनाधिकप्रयुक्त विचित्रतता से युक्त वेदों का भी स्मरण करता हूँ ॥१९॥ हे पापशून्य, युग-युग में प्रत्येक द्वापर के अंत में निर्माताओं के भेद से अनेक पाठवाले, एकार्थक तथा अत्यंत विस्तारयुक्त पुराण प्रवृत्त होते हैं - इसका मुझे स्मरण है ॥२०॥ मुने, युग-युग में वेद आदि शास्त्रों के विद्वान व्यास, वाल्मीकि आदि महर्षियों द्वारा विरचित उन्हीं महाभारत, रामायण आदि इतिहासों एवं दूसरे इतिहासों का भी मैं स्मरण करता हूँ ॥२१॥ महाराज, मैं आश्चर्यजनक महती घटनाओं से परिपूर्ण, प्रसिद्ध रामायण से भिन्न दूसरे रामायणनामक लक्षश्लोकात्मक ज्ञानशास्त्र का, जो ब्रह्मदेव द्वारा वसिष्ठ, विश्वामित्र आदि को उपदिष्ट था, स्मरण करता हूँ ॥२२॥ उस ज्ञानशास्त्र में मनोयोग देनेवाले महानुभावों के अन्तःकरण में हाथ में फल के सदृश, 'श्रीरामजी की नाईं व्यवहार करना चाहिए और रावण के विलास की नाईं विलास नहीं करना चाहिए' यह ज्ञान समर्पित किया गया है ॥२३॥ उक्त ज्ञानशास्त्र के निर्माता महर्षि वाल्मीकि हैं और अब उनके द्वारा वसिष्ठ राम-संवादरूप दूसरे बत्तीस हजार श्लोकात्मक महारामायणरूप ज्ञानशास्त्र की जो रचना की जायेगी, उसका भी दिव्यज्ञान की सामर्थ्य से मैं स्मरण करता हूँ, आप भी समय आनेपर उसे जान जायेंगे ॥२४॥ महाराज वसिष्ठजी, इस भावी वसिष्ठ- राम-संवादरूप ज्ञानशास्त्र की पूर्वकल्प के अथवा दूसरे किसी और वाल्मीकिनामक जीव के द्वारा यद्यपि पहले ही रचना की गई थी, तथापि कल्प के अन्त में व्यवहारकर्ताओं की परम्पराओं के उठ जाने से वह उच्छेद को प्राप्त हो गया था, अतः वर्तमान में उसकी पुनः बारहवीं बार रचना की जायेगी ।।२५।। महाराज, इसी ज्ञानशास्त्र के बराबर दूसरा ज्ञानशास्त्र था, जिसकी 'महाभारत' इस नाम से प्रसिद्धि थी एवं प्राक्तन व्यासजी के द्वारा रचना की गई थी और जो इस समय जगत में विस्मृति को प्राप्त हो चुका है- मैं उसका स्मरण करता हूँ ॥२६॥ उसी (पूर्वकल्प के) अथवा दूसरे किसी और व्यासनामक जीव के द्वारा किये गये तथा कल्पान्त में विस्मृति को प्राप्त हुए उस महाभारत की सातवीं बार रचना की जायेगी ॥२७॥ हे मुनिराज, युग-युग में प्रवृत्त हुए अनेक आख्यानों एवं शास्त्रों का, जो चित्र-विचित्र घटना-सन्निवेशों से परिपूर्ण थे, मैं स्मरण करता हूँ ॥२८॥ हे साधो, युग-युग में पुनः पुनः उन्हीं-उन्हीं पदार्थों को तथा दूसरे-दूसरे पदार्थों को मैं जानता हूँ-इसका भी मुझे स्मरण है ।।२९।। भगवन्, राक्षसों का विनाश करने के लिए पृथ्वी में अवतार ग्रहण करनेवाले महिमाशाली विष्णु का निकटवर्ती त्रेतायुग में ग्यारहवीं बार 'राम' इस नाम से जन्म होगा ॥३०॥ हे महर्षे, नृसिंहस्वरूप शरीर से भगवान ने हिरण्यकशिपु का, हाथी का मृगेन्द्र सिंह की नाईं, तीन बार हनन किया ॥३१॥ हे मुनीश्वर, पृथ्वी के भार की निवृत्ति करने के लिए भगवान विष्णु का सोलहवीं बार वसुदेवजी के घर में निकट द्वापर के अन्त में जन्म होगा ॥३२॥ बाहर यह उत्पन्न होता है, यह भ्रान्ति है, इस आशय से कहते हैं । महाराज, जगद्रूपा इस भ्रान्ति का कभी भी ( कल्पान्त में) अस्तित्व नहीं है, जल में बुद्बुदों की नाई स्थित हुई यह किसी समय ही ( कल्पान्त में) अज्ञानवश अस्तित्व रखती हुई-सी प्रतीत होती है ॥ ३३॥ जल में तरंगों की नाईं अति चपल, आत्मा के अन्दर रहनेवाली यह अनित्य दृश्य पदार्थों की भ्रान्ति संवित्-स्वरूप आत्मा में ही उत्पन्न और तत्क्षण लीन हो जाती है ।।३४।। प्रत्येक सर्ग में भूलोक आदि की अवयवों से समानता का जो नियम है, वह भी औत्सर्गिक है, यों कहते हैं। महाराज, ये तीनों जगत किसी कल्प में समान अवयव - सन्निवेश (आकार) वाले थे, किसी कल्प में अत्यन्त विषम थे तथा किसी समय आधे समानरूप थे - इसका मुझे स्मरण है ॥३५॥ मनु आदि अधिकारी पुरुषों के आकारों और चरित्रों की समता भी औत्सर्गिक ही है, ऐसा कहते हैं । महाराज, किसी एक कल्प में जो प्राणी जिस रूप के जो आचार-व्यवहार करते थे, ठीक उसी रूप के वे ही प्राणी तत्परवर्ती कल्प में भी आचार-व्यवहार करते देखे गये तथा दूसरे प्राणी उन्हीं के आचार-व्यवहार करते देखे गये - इसका मुझे वर्तमान में स्मरण है ॥३६॥ ब्रह्मन्, प्रत्येक मन्वन्तर में जगत-क्रम का विपर्यास हो जाने पर, अवयव सन्निवेश का परिवर्तन हो जाने पर और प्रख्यात जनों का प्रलय हो जाने पर मेरे दूसरे ही मित्र दूसरे ही बान्धव, दूसरे नवीन
से कहते हैं । वह प्रसिद्ध अज्ञान स्वप्न में भी अज्ञात नहीं रह सकता और ज्ञान भी सभी अवस्थाओं में सदा ही स्वयं प्रकाशमान रहता है । चूँकि अज्ञान सदा ही साक्षी द्वारा भासित होता है, ज्ञान स्वयंप्रकाश होने से स्वतः ही प्रकाशमान रहता है और इन दोनों का वैधर्म्य अनुभव से ही प्रस्फुरित है, इसलिए ज्ञानअज्ञान का विवेक हो जाने से आत्मज्ञानरूप योग सरल है, प्राणनिरोधरूप योग वैसा न होने से दुष्कर है, यह भाव है ॥नौ॥ प्रशस्त देश, काल, विषय आदि बाह्य हेतुओं की अपेक्षा होने से भी योग दुष्कर है, यों कहते हैं। चूँकि, यह प्राणसंरोधरूप योग धारणादेश , आसन- देश आदि से साध्य है, अतः सुख साध्य नहीं हो सकता। श्रीरामजी, अथवा आपके लिए सुखसाध्यत्व और कष्टसाध्यत्व का विचार करना उचित नहीं है ॥दस॥ इस प्रकार अवान्तर प्रश्न का निरास कर पहले प्रश्न का उत्तर देने के लिए उपक्रम करते हैं । हे रघुवीर, ज्ञान और योग - ये दोनों ही उपाय शास्त्रों में कहे गये हैं। उन दोनों में से आत्मपदार्थरूप ज्ञेय को निर्मल करनेवाला सब ज्ञानों से परे स्थित आत्मज्ञान आपको बतलाया गया ॥ग्यारह॥ हे साधो, अब आप यह योग सुनिए जो कि प्राण और अपान की समतारूप से प्रसिद्ध है, दृढ़ देहरूपी गुहा का आश्रय करनेवाला है, सिद्धि की इच्छा करनेवालों को खेचरत्व आदि अनन्त सिद्धियों को देनेवाला है और ज्ञान की इच्छा करनेवालों को आत्मसाक्षात्कार करानेवाला है, सुनिये ॥बारह॥ समाधिसुख में विश्रान्तिरूप फल के कथन द्वारा भी प्रशंसा कर रहे महर्षि वसिष्ठजी वही योग श्रीरामचन्द्रजी से कहते हैं । हे राजपुत्र श्रीरामभद्र, प्रयत्नशील चित्त से प्राण-गति के निरोध से होनेवाली निष्ठा को प्राप्त होकर यदि आप चित्तवृत्ति निरोध के अभ्यास से प्रत्यग्रूप, अक्षय, परमपद में भली प्रकार स्थिरता प्राप्त कर लेंगे, तो वाणी और मन के अगोचर, निरतिशय आनन्दस्वरूप होकर आप स्थित रहेंगे ॥तेरह॥ तेरहवाँ सर्ग समाप्त चौदहवाँ सर्ग देवसभा में विख्यात वायसराज काकभुशुण्डजी को देखने के लिए महाराज वसिष्ठ का मेरुपर्वत पर गमन और मेरु तथा उसके शिखर का वर्णन । काकभुशुण्डजी की उक्ति के द्वारा प्राणायाम आदि प्रस्तुत योगक्रम का विस्तारपूर्वक वर्णन करने की इच्छा करनेवाले महाराज वसिष्ठजी भुशुण्डकथानक आरम्भ करते हैं । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, योगियों के विश्रान्तिस्थानरूप से वर्णित उस निःसीम परम पद के किसी एक प्रदेश में , मरुभूमि में मृग तृष्णा की नाईं, ब्रह्माण्डाकार यह विवर्त प्रसिद्ध है ॥एक॥ उस ब्रह्माण्ड में मनु, प्रजापति आदि की उत्पत्ति में कारणता को प्राप्त तथा प्राणियों के समूहरूप भ्रम को उत्पन्न करनेवाले कमलयोनि ब्रह्मा पितामहरूप से स्थित है ।।दो।। उस पितामह ब्रह्मदेव का मैं सदाचार सम्पन्न वसिष्ठ नाम का मानस हूँ। और ध्रुवजी द्वारा धारण किये गये सप्तर्षिलोक में वैवस्वत मन्वन्तर तक निवास करता हूँ ॥तीन॥ महाराज इन्द्रदेव की सभा में बैठे हुए मैंने किसी समय स्वर्गलोक में महर्षि नारदजी से अधिक दीर्घकाल तक जी रहे प्राणियों की कथा सुनी थी ॥चार॥ चिरंजीवियों की कथाओं में किसी एक कथा के प्रसंग में मितभाषी, सम्माननीय तथा निखिल शास्त्रों में पारंगत विशाल बुद्धि महामुनि शातातप बोले ॥पाँच॥ मुनि ने जो कुछ कहा, उसे बतलाते हैं। मेरुपर्वत के ईशानकोण में स्थित पद्यरागमणि के सदृश चमकीले शिखर पर गगनचुम्बी एक शोभायमान आम्र विशेष नामक प्रसिद्ध कल्पतरू वृक्ष है ॥छः॥ उस कल्पतरु के ऊपर सुवर्ण और रजतमय कल्पलताओं से घने दाहिने तने के खोड़रे में एक घोंसला है ।सात।। उस घोंसले में ऐश्वर्यशाली वीतराग भुशुण्डनामक कौआ उस प्रकार निवास करता है, जिस प्रकार विशाल कोशवाले अपने कमल में ब्रह्माजी ॥आठ॥ हे देवगण, जगत के इस कोश में वह वायसराज भुशुण्ड जिस प्रकार चिरकाल से जी रहा है, उस प्रकार चिरकाल से जी रहा कोई भी इस स्वर्गलोक में न हुआ और न होगा ही ॥नौ॥ वह दीर्घायु है, वह रागरहित है, वह ऐश्वर्ययुक्त है, वह विशाल- बुद्धि है, वह स्थिर - बुद्धि है और शान्त है एवं कमनीय और समयगति जाननेवाला है ।।दस।। वह पक्षी जिस प्रकार दीर्घकाल से जी रहा है, उस प्रकार यदि कोई प्राणी यहाँ अपना दीर्घजीवन व्यतीत करे, तो उसका वह दीर्घजीवन साधनदशा में पुण्यमय और फलदशा में परमपुरुषार्थ रूप अभ्युदयसम्पन्न ही होगा ॥ग्यारह॥ श्रीरामजी, कुछ समय के अनन्तर मैंने भुशुण्ड के विषय में फिर भी शातातप मुनि से पूछा था, द्वितीय बार पूछे गये उन मुनिराज ने उसी प्रकार से इस भुशुण्ड का वर्णन किया । इससे मालूम पड़ा कि भुशुण्ड के विषय में जो कुछ उन्होंने कहा था, वह सत्य ही कहा था, उनके कथन का तात्पर्य केवल प्रशंसा में ही नहीं था ॥बारह॥ श्रीरामजी, कथा का अवसर समाप्त हुआ और देवतागण अपने-अपने निवासस्थान पर चले गये । तदनन्तर मैं अत्यन्त उत्कण्ठा से भुशुण्डपक्षी को देखने के लिए चला ॥तेरह॥ जहाँ भुशुण्डपक्षी की स्थिति थी, उस मेरुपर्वत के पद्मरागमणि की तरह चमकीले सुन्दर एवं विस्तृत शिखर पर मैं क्षणभर में ही पहुँच गया ॥चौदह॥ वह शिखर मधुर आसव से जनित मद की नाईं अग्नि के सदृश वर्चस्व रखने वाले पद्मराग आदि रत्न एवं गेरुमिश्रित सुवर्ण धातुओं के कमनीय तेज से दिशारूपी रमणियों को रक्तिम बना रहा था ।।पंद्रह॥ उसकी शोभा प्रलयकालीन अग्नि की पिण्डीभूत ज्वालाओं के पर्वत-सी प्रतीत होती थी, शिखा के सदृश ऊपर को उठी हुई इन्द्रनील मणि की प्रभा ही उसका धुआँ था, उसके लाल प्रकाश से समस्त आकाश - मण्डल लालिमा प्राप्त किये था ॥सोलह॥ मेरुपर्वत के ऊपर समस्त लालिमाओं का एक ढेर - सा होकर वह अवस्थित था या यों कहिए कि निखिल प्राणियों की दर्शनाभिलाषाओं का एक पिण्ड बनकर वह स्थित था और निखिल सन्ध्याकालीन अभ्रजालों का घनीभूत एक आकर-सा प्रतीत होता था ॥सत्रह॥ सुषुम्ना-नाड़ी से उत्क्रान्ति नामक योग-साधन के द्वारा ब्रह्मरन्ध्र का भेदन कर निकलने की इच्छा कर रहे मेरुपर्वत के उदर से निकला हुआ शिरः प्रदेश में प्राप्त बडवाग्नि के सदृश मानों जठराग्नि ही स्थित था ॥अट्ठारह॥ वह लीला से आकाश में स्थित चन्द्रमा को पकड़ने के लिए लाक्षारस से रंजित शिखा के सदृश मिली हुई - मानों सुमेरु पर्वत की वनदेवी के द्वारा प्रसारित करांगुलियाँ ही थी ॥उन्नीस॥ वह जड़ी गयी सोपान- पंक्तियों के सदृश अरुण ज्वालाओं के द्वारा मानों आकाश में जाने के लिए प्रवृत्त अतएव पर्वत पर चढ़ा हुआ दुग्धाहुति संपन्न मुखवाला ब्राह्मणसम्बन्धी अध्वाराग्नि की नाईं दीख रहा था ॥बीस॥ वह रत्नों के किरणों से चमक रहे नखाग्रों से युक्त तीन शिखराग्रभागरूपी अंगुलियों से अश्विनी आदि नक्षत्र मण्डलों को स्पर्श कर मानों गिनने के लिए आकाश को व्याप्त-सा करता हुआ उन्नत होकर स्थित था ॥इक्कीस॥ वहाँ मेघरूप मृदंग आदि वाद्य बज रहे थे, वह वनभूमि से पुष्ट हुई वन-लक्ष्मियों का एक तरह से नृत्य - मंडप था, खिले हुए पुष्पगुच्छों से परिपूर्ण था और भ्रमर-समूहों से गुंजित था ॥बाईस॥ वह परिहास से विकसित हो रही दन्तपंक्तियों के सदृश विकसित ताल पत्रों की पंक्तियों से अत्यन्त सुहावना लगता था । वहाँ झूलों पर झूल रहीं चंचल अप्सराएँ थीं और सभी प्राणियों का उन्माद और अभिलाषाएँ नवीनरूपता धारण किये हुई थीं, वहाँ की शिलाओं पर देवता विश्रान्ति ले रहे थे, उसकी गुफाओं का देवताओं के जोड़ों ने आश्रय किया था ॥तेईस॥ अब उस शिखर की तापसरूप से उत्प्रक्षा करते हैं । उसने सुन्दर आकाशरूपी मृगचर्म धारण किया था, शुभ्र गंगारूप यज्ञोपवीत से अलंकृत था और वह बाँसरूपी दण्ड धारण करने के कारण पीले वर्ण के तपस्वी की नाईं स्थित प्रतीत होता था ॥चौबीस॥ वहाँ पर गंगाजी के झरनों की कलकल ध्वनि हो रही थी, उसके लताकुंजों में देवता विराजित थे, गन्धर्वों के गीतों से रमणीय लगता था और वहाँ मधुर मनोहर सुगन्धित वायु बह रहा था ॥पच्चीस॥ हे श्रीरामचन्द्रजी, आकाश में ऊँचाई की परम सीमास्वरूप उस प्रकार के पीले वर्ण के उस मेरुपर्वत के सिर पर मैं पहुँचा, वह तारारूपी रत्नों से विभूषित और विकसित स्वर्णकमलरूपी कर्णपूर से रमणीय था॥छब्बीस॥ श्रीरामजी, वह प्रतिदिन श्वेत, हरित, पीत, रक्त एवं धवलवर्ण कानन के कुसुम-समूह रूपी नवीन रंगों से आकाश में मानों निर्दुष्ट चित्र खींचा करता था और देवताओं का वह क्रीडापर्वत था ॥ सत्ताईस॥ चौदहवाँ सर्ग समाप्त पन्द्रहवाँ सर्ग उस मेरुपर्वत के शिखर पर स्थित चूतनामक कल्पतरु और उसकी शाखा पर विद्यमान पुष्प, पक्षी आदि संपत्तियों, कौओं तथा भुशुण्ड का वर्णन। महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, प्रलयकालीन मेघरूपी कुसुमों से व्याप्त केशोंवाले उस शिखर के सिर पर प्राणियों के वांछित अर्थ की पूर्ति के लिए उत्पन्न हुए शाखा आदि अवयवों से युक्त चूतनामक वृक्ष को मैंने शाखाचक्र-सा देखा ॥एक॥ श्रीरामजी, चारों ओर से वह वृक्ष फूलों के परागों से धूसरित था, वह रत्नसदृश पुष्पगुच्छों से दन्तुर था, उसने अपनी ऊँचाई से आकाश को मात कर दिया था, वह पूर्ववर्णित मेरुशिखर के ऊपर रखे हुए दूसरे शिखर के सदृश प्रतीत होता था ॥दो॥ उसने केवल अपनी ऊँचाई से ही आकाश को मात नहीं कर दिया था, किन्तु तारा आदि मिलाकर द्विगुणित पुष्प आदि धारण करने के कारण भी उसने आकाश को मात कर दिया था, यों कहते हैं । उसने ताराओं को मिलाकर द्विगुणित पुष्प धारण किये थे, मेघरूप पल्लवों को मिलाकर द्विगुणित पल्लव धारण किये थे, किरणों को मिलाकर द्विगुणित पुष्परेणुरूप मेघ धारण किये थे बिजली को मिलाकर द्विगुणित मंजरियाँ धारण की थीं ॥तीन॥ वहाँ शाखा - प्रदेश में किन्नर युवतियों के गीतों को लेकर द्विगुणित भ्रमरों की गुंजार ध्वनि हो रही थी, उसने झूलों पर आरूढ़ चंचल अप्सराओं के होठ, हाथ एवं पदरूप पल्लवों को लेकर दूने पल्लव धारण किये थे ॥चार॥ वांछितरूपों को धारण करने की शक्ति से संपन्न होने के कारण स्वच्छन्द विहार करने के लिए कल्पित विहंगम वेषवाले सिद्धों एवं गन्धर्वों के समूहों को मिलाकर द्विगुण विहंगम उस पर विद्यमान थे, उसने रत्नकान्ति के सदृश स्वच्छ हिमकणों को लेकर दूने हुए त्वचारूपी वस्त्र पहने थे ॥पाँच॥ अधिक ऊँचाई के कारण जनित चन्द्रबिम्ब के सम्बन्ध से मानों अमत-रस की पूर्ति होने के कारण द्विगुणित अंगोंवाले बड़े-बड़े फल उसमें लगे थे, तनों के मूल भागों में संलग्न कल्पभ्रमों से मानों द्विगुणित हुए उसके पोर थे ॥छः॥ उसके तनों पर देवताओं ने आश्रय किया था, पत्रों पर किन्नर विश्रान्ति ले रहे थे, उसके लताकुंजों में मेघ समूह प्रविष्ट हुए थे, जलप्राय कोटर-प्रदेश में देवता आदि सोये हुए थे ।।सात।। उसका अपना निजीस्वरूप अत्यन्त विस्तृत था, उसके फूलों का भीतरी रस अपने कंकणों के क्वणितों से बाह्य भ्रमरों को हटाकर अप्सरारूपी भ्रमरियों ने चूस लिया था IICII श्रेष्ठदेव, किन्नर, गन्धर्व एवं विद्याधरों से वह समन्वित था, ब्रह्माण्ड की नाईं विस्तृत और असीम दस दिशाओं तथा आकाश को व्याप्त किये था ॥नौ॥ कलियों के समूहों से वह भरा हुआ था, मृदु पल्लवों से भरा हुआ था, खिले हुए पुष्पों से परिपूर्ण था और वनमालाओं से भी वेष्टित था ।॥दस॥ उसके ऊपर घनीभूत मंजरीयाँ थीं, घनीभूत मणिरूप गुच्छे थे, घनीभूत रत्नरूपी परिधानीय दिव्य वस्त्रों से आद्य था अर्थात् अर्थियों की इच्छापूर्ति करनेवाला था, लताओं के नृत्य से व्याप्त था ॥ग्यारह॥ श्रीरामजी, चारों ओर फूलों की बाढ़ से सर्वत्र फल और पल्लवों से तथा सभी का दिल बहला करनेवाले पुष्पपरागों के समूहों से अत्यन्त विचित्रता को प्राप्त हुए उस चूतनामक कल्पतरू को मैंने देखा ।।बारह।। हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर उपर्युक्त विशेषणों से युक्त उस वृक्ष के तने, शाखा आदि की सन्धियों में, लता से आवृत शाखाग्रभागों में, लतापत्रों में, पोरों या ग्रन्थियों में और पुष्पों में घोंसले बनाकर उसमें स्थित हुए पक्षियों को मैंने देखा ॥तेरह॥ पक्षियों में विशेष बतलाते हैं । श्रीरामजी, मृणाल के टुकड़ों की नाईं चंद्रमा की कला के खण्डों से वर्धित और शुभ्र कमलिनीकन्दों को खानेवाले ब्रह्मदेव के वाहनभूत हंसपक्षी मैंने देखें ॥चौदह।। बाद में रहस्यभूत अर्थों के पर्यालोचन में सहायक होने के कारण प्रणव और वेद के मित्रभूत ब्रह्मदेव के वाहन हंसों के बच्चे, जो कि सामवेद का गान कर रहे थे एवं पर-अपर ब्रह्मविद्या का गुरुमुख से विधिवत् अध्ययन किये हुए थे ॥पंद्रह॥ वहाँ निवास कर रहे अग्नि के वाहनभूत शुकों का वर्णन करते हैं। तदनन्तर मैंने अग्निदेव के वाहन शुक देखे, वे मन्त्र-समूह पढ़ रहे थे, उनके शब्द स्वाहाकार के समान थे । उनकी उपमा शंख, बिजलियों के अनेक समूह और नील मेघों के वर्गों से थी, देवता नित्य उनका दर्शन करते थे । यज्ञवेदियों में बिछाये गये हरित कुश-लताओं के दलों की नाईं वे हरे थे। अनन्तर मयूरों के बच्चे । अग्नि की शिखा की नाईं देदीप्यमान उनकी शिखाएँ थीं । जगज्जननी पार्वती से रक्षित उनके परों का समूह था, स्वामी कार्तिकेय द्वारा विस्तारित अशेष शिवसम्बन्धी विज्ञान में वे पण्डित थे ॥सोलह-अट्ठारह॥ आकाश में ही उत्पन्न होकर वहीं पर नष्ट हो जानेवाले अर्थात् मरणपर्यन्त भूमि पर न उतरनेवाले और अधिक बलवान होने से महान इसीलिए व्योमपक्षी नाम से प्रसिद्ध पक्षियों को-जो कि नित्य-क्रीड़ा में सहायक होने से बन्धु थे, अपने अपने घोंसले बनाकर स्थित थे एवं शरत्कालीन मेघों के समान शुभ्र आकृतिवाले थे ॥उन्नीस॥ ब्रह्मदेव के वाहन हंस से उत्पन्न और भी दूसरे हंसों को, अग्नि के वाहन शुक से उत्पन्न शुकों को, कुमार कार्तिकेय के वाहन मयूर से उत्पन्न और दूसरे मयूरों को तथा इनसे भिन्न भी अन्य आकाश पक्षियों से उत्पन्न पक्षियों को ॥बीस॥ श्रीरामजी, वहाँ दो चोंचवाले भरद्वाजनामक पक्षियों को, सुवर्ण की शिखावाले पक्षियों को तथा गौरैया, कौआ, गीध, कोयल, क्रौंच और मुर्गा-इन पक्षियों को ।।इक्कीस।। हे राघव, उस कल्पतरु पर शकुन्तपक्षी, नीलकण्ठपक्षी, बलाकपक्षी आदि और भी अनेक पक्षियों को, जगत में विविध प्राणियों की नाईं मैंने देखा ।।बाईस।। इसके बाद आकाश में स्थित हुए मैंने अत्यन्त दूर-प्रदेशस्थ घने पत्तोंवाले उस कल्पवृक्ष के दाहिने तने की शाखापर, उस शाखा को देखने के बाद, लोकालोकपर्वत के अरण्य में प्रलयकालीन मेघ-समूह की नाईं स्थित, मंजरीसमूह से वेष्टित द्रोण कौओं का मण्डल मैंने देखा ॥तेईस,चौबीस॥ ज्यों ही मैंने वहाँ दृष्टि डाली, त्यों ही देखा कि एकान्त में स्थित दाहिने तने के उस कोटर पर जिसमें चित्र-विचित्र फूल बिछे हुए थे, अनेक प्रकार के सुगन्धों से जो सुगन्धित था तथा पुण्यात्माओं द्वारा उपभोग्य अप्सराओं के उपभोगों के योग्य स्वर्गस्वरूप था - सभा में शान्ति आदि गुणों से संपन्न होने के कारण अक्षुब्ध आकृतिवाले, पवन के द्वारा समभाग से छेदन कर कोटर में प्रवेशित किये गये मेघों की नाईं, मनोहर कुसुमगुच्छों से वासित कौए स्थित हैं और उनके बीच ऐश्वर्यशाली एवं अत्यन्त उन्नत शरीरवाला वायसराज भुशुण्ड बैठा है ॥पच्चीस-सत्ताईस॥ वह भुशुण्ड सभा में उस प्रकार उन्नतरूप से स्थित था, जिस प्रकार काँच के टुकड़ों के बीच उन्नतरूप से इन्द्रनीलमणि स्थित हो । वह आत्मज्ञान से परिपूर्ण मनवाला, मान्य, समदर्शी एवं सर्वांग सुन्दर था ।।अट्ठाईस।। वह प्राणक्रिया के निरोध से नित्य अन्तर्मुखवृत्तिवाला, सुखी और प्रसिद्धतम चिरजीवी होने से 'चिरंजीवी' नाम से प्रसिद्ध था ।।उनतीस।। जगत में विदित दीर्घायुवाला भुशुण्ड नाम से प्रसिद्ध वह वायसराज युगों की उत्पत्ति और विनाश की दशा के दर्शन से प्रौढ़मन था ।।तीस।। वह प्रत्येक कल्प में ईशान, इन्द्र और अग्नि आदि लोकपालों के जन्मों की चक्रपरम्परा को गिनता हुआ खिन्न होकर अवस्थित था ॥इकतीस॥ वह सुदूर भूतकालीन सुर, असुर एवं राजाओं का भली प्रकार स्मरण करनेवाला, प्रसन्न और गंभीर मन से युक्त, श्री योगवासिष्ठ महारामायण चतुर तथा स्निग्ध एवं मुग्ध वाणीवाला था ॥बत्तीस॥ वह भली प्रकार ज्ञाता होने के कारण सूक्ष्मतम अर्थों को विस्पष्टकर कहनेवाला, ममता तथा अहंकार से रहित, मृत्यु का पुत्र की नाईं परमप्रिय, बुद्धि में बृहस्पति से भी बड़ा, प्राणिमात्र का सुहृद, बन्धु एवं मित्र था । चूँकि यह सबके वर्णन प्रसंग में प्राणीमात्र के निखिल आरोपों का अधिष्ठानरूप हो जाने के कारण सब प्रकार से भी सर्वदा सर्वात्मक सत्यस्वरूप ही परिगणित होता था यानी वह सर्वात्मक और सत्यस्वरूप ही सर्वसंगत था, अतः सुहृद आदिरूप था ॥तैंतीस॥ जिस प्रकार सरोवर सौम्य, स्वच्छ मधुर जल से युक्त, मनोहर और भीतर से अखण्ड शीतल, मध्य कमल के आधारभूत कुहर से युक्त, पक्षियों की विश्रान्ति को जाननेवाला एवं निर्मलतम होने से प्रकटित भीतरी शोभावाला रहता है, उसी प्रकार सौम्य, प्रसन्न, मधुर, ब्रह्मरस से युक्त, मनोहर, भीतरी अखण्ड शान्ति से युक्त, हृदयाकाशरूप, सब व्यवहारों को जाननेवाला यह महात्मा भुशुण्ड भी गांभीर्य को न छोड़ता हुआ अन्तःकरण की शोभा महत्ता को प्रकटित कर अवस्थित था ।।चौंतीस।। पन्द्रहवाँ सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग सामने उपस्थित हुए तथा आसन आदि से पूजित हुए महाराज वसिष्ठजी द्वारा किये गये भुशुण्ड के जन्म, कर्म आदि के प्रश्नों का वर्णन। महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, तदनन्तर मैं उस भुशुण्ड के सामने उस प्रकार गिरा , जिस प्रकार पर्वत पर आकाश से नक्षत्र गिरता हो । मेरा शरीर अत्यन्त कान्तियुक्त था, गिरने पर मैंने सभा में कुछ हलचल भी पैदा कर दी ॥एक॥ जिस प्रकार भूकम्प से सागर विक्षुब्ध हो जाता है, उस प्रकार मेरे पतन से जनित मन्द पवन से कौओं की सभा, जो नील कमलों के तालाब के सदृश थी, विक्षुब्ध हो गई ॥दो॥ अनन्तर त्रिकालदर्शी होने के कारण उस भुशुण्ड ने देखने से ही - यद्यपि वहाँ मेरा जाना अतर्किक था, तथापि वहाँ गये 'हुए मुझको - 'यह वसिष्ठ आये हुए हैं', यों जाना ॥तीन॥ तदनन्तर जिस प्रकार पर्वत से छोटा मेघ उठे, उस प्रकार वह पत्तों के ढेर से उठ खड़ा हुआ और 'हे मुनिराज, आपका स्वागत हो', यों मधुरवाणी बोला ।।चार।। स्वागत वचनों के साथ ही साथ दोनों हाथों से अपने संकल्पमात्र से उत्पादित पुष्पांजलि भरकर मेरे ऊपर उस प्रकार बरसाई, जिस प्रकार मेघ हिम की महावृष्टि करता हो ॥पाँच॥ तदनन्तर आपके बिराजने के लिए यह आसन है, यों कहकर वह कौओं का अधिपति भुशुण्ड आसन लाने के लिए चाकरवर्ग का परित्याग कर स्वयं खड़ा हुआ और कल्पवृक्ष का नवीन पत्ररूप आसन लाया । तदनन्तर मैं भुशुण्ड के साथ उस कल्पवृक्ष की लताओं से बने हुए आसनपर बैठ गया । भुशुण्ड के चारों ओर पक्षियों का समूह था मननशील मुझे उस आसन पर आसीन देखकर अपने कान्तिमण्डल से प्रसरणशील पंखोंवाले उक्त सभा के कौए अपने-अपने आसनों की ओर दृष्टि डालने लगे । भुशुण्ड ने अर्ध्य, पाद्य आदि सम्पादन कर मेरा सत्कार किया । महान तेजस्वी वह भुशुण्ड अत्यन्त प्रसन्नचित्त होकर सुन्दर, सौहार्द से मधुर वचन मुझसे कहने लगा ॥छः-नौ॥ भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, बड़े सौभाग्य का विषय है कि दीर्घकाल के अनन्तर आज हम लोगों के ऊपर आपने अनुग्रह दर्शाया, क्योंकि आपके दर्शनामृतरूपी सिंचन से सिंचे गये हम लोग आज, पुण्यवृक्ष के सदृश, अत्यन्त पवित्र बन गये ।।दस।। हे मुने, दीर्घकालिक मेरे पुण्य की राशि से प्रेरित तथा मान्यों में एकमात्र मान्यतम आपका इस समय किस प्रदेश से शुभ आगमन हुआ ? ॥ग्यारह॥ महाराज, मूलभूत माया से बने इस जगत में दीर्घकाल से विचरण कर रहे आपके पावनतम चित्त में अखंडित समदर्शिता बिराजती तो है न ? ॥बारह॥ महाराज, आज आने का कष्ट उठाकर आपने अपनी आत्मा को क्यों दुःख पहुँचाया ? आज्ञादायी वचनों के श्रवण में उत्कण्ठा रखनेवाले हम लोगों को आज्ञा देने के लिए आप सर्वथा योग्य हैं ॥तेरह॥ हे मुनिवर, आपके चरणों के दर्शन से ही मैंने सब कुछ जान लिया, आपने अपने आगमन के पुण्यों से हम लोगों को दबा दिया है ।।चौदह।। 'सब कुछ जान लिया' यह जो पहले कहा गया था, उसीका स्पष्टीकरण करते हैं । इन्द्रसभा में चिरंजीवियों के विषयों में हुई विचारणाओं के कारण ही आपके स्मृतिपथ में हम आये और उसी से यह स्थान आपके चरणों का आस्पद हुआ, सचमुच आपने इस प्राणी को पवित्र बना दिया ॥पंद्रह॥ हे मुने, यद्यपि यहाँ आपके आने का प्रयोजन मैंने पहले से ही जान लिया, तथापि आपके वाक्यामृतरसास्वाद की अभिलाषा बढ़ रही है, अतः आपसे मैं पूछता हूँ ॥सोलह॥ तीनों कालों में निर्मल ज्ञान रखनेवाला चिरंजीवी इस भुशुण्ड ने जब वैसे कहा, तब वहाँ मैंने यह कहा ।।सत्रह।। हे पक्षियों के स्वामिन्, जो कुछ यह कह रहे हो, वह सब यथार्थ में सत्य ही है, चिरंजीवी केवल तुम्हें ही आज मैं देखने के लिये आया हूँ ॥अट्ठारह॥ हे पक्षीराज, महान भाग्य से तुम्हारे अन्तःकरण में चारों ओर से शान्ति का राज्य है, तुम कुशल हो, ज्ञाततत्त्व होने के कारण तुम इस भयंकर जगज्जाल में प्रविष्ट नहीं हुए हो ॥उन्नीस॥ प्राणियों की उत्पत्ति, विनाश, गति, आगति, विद्या एवं अविद्या को जाननेवाले हे पक्षिराज, तुम मेरे इस संशय का सत्यरूप से छेदन कर दो कि किस कुल में तुम उत्पन्न हुए हो और किस प्रकार तुमने तत्त्व पहचान लिया ।।बीस।। हे साधो, तुम्हारी कितनी आयु है, तुम अपना कौन-सा इतिवृत्त जानते हो और किस महानुभाव ने दीर्घदर्शी तुम्हारे लिए निवासस्थान रूप से इस वृक्ष को निश्चित किया है ? ॥इक्कीस॥ भुशुण्ड ने कहा : हे मुने, आप जो मुझसे पुछ रहे हैं, उस सबका मैं यह वर्णन कर रहा हूँ । आप महानुभाव उद्विग्न न होकर प्रयत्नपूर्वक कथा का श्रवण कीजिए ।।बाईस।। हे महानुभाव, तीनों लोकों के नियन्ता और परम पूज्य आपके सदृश उदारबुद्धि महात्मा जिस वृत्तान्त का श्रवण करते हैं, उस वृत्तान्त का भलीप्रकार कथन करने से वक्ता और श्रोता दोनों का पाप उस प्रकार विनष्ट हो जाता है, जिस प्रकार मेघावलम्बित वृष्टि, छाया, अरण्य आदि वैभवों से सूर्य का ताप विनष्ट हो जाता है ॥तेईस॥ सोलहवाँ सर्ग समाप्त सत्रहवाँ सर्ग जीवन्मुक्तों के उपयोगी गुणों से पूछे गये अर्थ का वर्णन कर पक्षियों का स्वामी भुशुण्ड पुनः उसी को सविस्तार कहने के लिए प्रवृत्त हुआ, यह वर्णन । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, तदनन्तर वह पक्षीराज भुशुण्ड वक्ष्यमाण रीति से कहने लगा । वह अभीष्ट लाभ से न तो प्रसन्न होनेवाला था और न क्रूरमति था । वह सभी अंगों से सुन्दर और वर्षाकालीन मेघों के सदृश श्यामवर्ण था ॥एक॥ उसके वचन स्नेहपूर्ण और गम्भीर थे। उसके अभिभाषण के पहले स्मित होता था । हाथ में बिल्व फल की नाईं तीनों जगत की इयत्ता उसे निश्चित रूप से विदित थी ॥दो॥ समस्त भोगों को उसने तिनके की तरह तुच्छ समझ रक्खा था, इच्छित विषयों की ओर लोगों की दौड़-धूप का फल एकमात्र संसार ही है - यह रहस्य उसने भली प्रकार जान लिया था, वह परापर ब्रह्म का ज्ञाता था ॥तीन॥ उसका महान आकार धीर और स्थिर था। उसने विश्रान्ति तो उस प्रकार धारण की थी, जिस प्रकार मन्थन के अनन्तर मन्दराचल के चले जाने के बाद क्षीर-समुद्र ने धारण की थी । उसका मन मनोरथों से परिपूर्ण था और विशुद्ध था ॥चार॥ बाहर से उसकी चारों ओर से बुद्धि में विश्रान्ति थी, वह शान्त था, भीतर से परमानन्द परिपूर्ण था, उसे संसार में जन्मधारी जीवों के आविर्भाव और तिरोभाव में हेतुभूत मायातत्त्व और आत्मतत्त्व का भली प्रकार ज्ञान था ॥पाँच॥ प्रिय और मधुर सुनने योग्य वीणा -गान की नाईं मनोहर उसके वाक्य थे। दर्शनमात्र से संपूर्ण भयों का अपहरण करनेवाले स्वयं ब्रह्मा ने ही मानों अपना यह नवीन भुशुण्डशरीर धारण किया हो, ऐसा वह प्रतीत होता था, अतएव वह स्वाभाविक आनन्द से युक्त और प्रश्नों का उत्तर देने के लिए किये गये उद्योगयुक्त मुख के कारण अत्यन्त सुन्दर लगता था ।।छः।। उस प्रकार का पक्षियों का अधिराज भुशुण्ड शुद्ध, अमृतमय, परिपूर्ण स्व-स्वरूप का क्रमशः बोध कराने के लिए - निर्मल वाणी से उस तरह मेरे प्रति आगे का वृत्तान्त कहने लगा, जिस तरह सुन्दर मेघ अपनी गर्जना से मकरन्द पान में रसिक भ्रमर के प्रति वही वृत्तान्त कहता हो । तात्पर्य यह हुआ कि पहले से ही प्रबुद्ध ब्रह्मानन्द में रसिक मेरे प्रति भुशुण्ड की उक्ति अनुवाद मात्र थी, न कि उपदेश ।।सात।। सत्रहवाँ सर्ग समाप्त अठारहवाँ सर्ग अपना जन्म कहने के लिए पहले महादेवजी, उनके गण, मातृका तथा उनके पानोत्सव आदि का भुशुण्ड के द्वारा वर्णन । 'किस कुल में तुम उत्पन्न हुए हो' इस प्रथम प्रश्न का उत्तर देने के लिए पहले भूमिका बाँधते हैं। भुशुण्ड ने कहाः महाराज वसिष्ठजी, इस जगत में समस्त स्वर्गवासी देवताओं में श्रेष्ठ , देवताओं के भी पूजनीय एवं उपासनीय, देवाधिदेव महादेवजी हैं, जो बड़े-बड़े देवों के देव ब्रह्मादि देवताओं के द्वारा भी अभिवन्दित और चारों ओर से पूजित हैं। ॥एक॥ आम्रवृक्ष की नाईं उनके देहार्ध में भ्रमर- पंक्तियों के सदृश नेत्रोंवाली तथा उन्नत पुष्प गुच्छों के सदृश स्तनधारिणी लता शोभित है ।।दो।। उनके एक गंगारूपी कुसुम - मालिका है, जो हिम और हार की नाईं अत्यन्त धवल लहरीरूपी पुष्पों से गुम्फित है और जिसने जटाजूट को वेष्टित कर रक्खा है ।॥तीन॥ क्षीर-सागर से उत्पन्न हुआ और अमृत का झरना बहानेवाला अत्यन्त कान्तियुक्त चन्द्रमा उनका दर्पणभूत चूड़ामणि है ॥चार॥ निरन्तर मस्तक में स्थित चन्द्रमा के अमृतप्रवाह से जिसकी विषशक्ति निकल गई है और जिसमें संजीवनशक्ति प्राप्त हुई है, ऐसा इन्द्रनील मणि की नाइँ कालकूट महाविष उनके कण्ठ का भूषण है ।।पाँच।। जगत के प्रलय में हेतुभूत अपने चक्षुरूपी स्वच्छ अग्नि से उत्पन्न हुई, धूलियों की पंक्तिरूप बड़े-बड़े प्रलयकालीन झंझावातों की उत्पादक, परमाणुमय , अतिशुभ्र एवं ज्ञानजलात्मक मायारूप भस्म उन मायाशबल महादेवजी का भूषण है ॥छः॥ अत्यन्त निर्मल, तेजस्वी चन्द्रमा का भी तिरस्कार कर देनेवाली, मणियों के सदृश सानपर चढ़ाकर विशोधित की गई, माला आदि के आकार में गँथी गई, संपूर्ण शरीरों में मनोरम ब्रह्मा आदि के शरीरों की विकारभूत हड्डियाँ ही उनके शोभाकारक रत्न हैं ।सात।। सुधाकर चन्द्रमा की सुधाधारा से प्रक्षालित, नीलमेघरूपी पल्लवों से युक्त तथा तारारूपी बिन्दुओं से समन्वित आकाश यानी दिशाएँ ही उनके वस्त्र हैं ।।आठ।। चक्कर काट रही लोमड़ियों, परिपक्व नरमांसों और बलि के ओदनों से व्याप्त; गाँवों और नगरों से दूर, हिम के सदृश धवल श्मशान ही उनका घर है। ॥नौ॥ जिसने कपाल-मालाएँ धारण की है, रक्त और चर्बी का आसव पान किया है, एवं जो आँतरूपी मालासूत्र से वेष्टित है, ऐसा वक्ष्यमाण मातृकागण उनका नृत्यादि में सदा सहायक बन्धुवर्ग है ।।दस।। क्रमशः तत्-तत् अंगों के भूषण के लिए संचरणशील, सर्वांग से चिकने, प्रस्फुरित हो रही मस्तकमणियों से राजित तथा सुवर्ण के सदृश दीप्तिसम्पन्न कान्तिवाले सर्प उनके भुजा के कंकण हैं ॥ग्यारह॥ दृष्टिपातमात्र से शैलेन्द्र हिमराज को दग्ध कर देनेवाला, जगत का ग्रास करने में लालायित तथा क्रीडामात्र से असुरों को त्रस्त कर देनेवाला भयंकर उनका चरित्र है ।।बारह।। महाराज, सत्यसंकल्प होने के कारण उनका अन्तःकरण एकमात्र कल्याण की भावना से ही जगत-समूह को अपनी प्रकृति में रखने के लिए समाधि में स्थित है। कदाचित समाधि का आकस्मिक भंग हो जाने पर उत्पन्न हुआ उनके हाथ का स्पन्दन असुरों के बड़े-बड़े नगरों को, असुरों के साथ, विनष्ट कर डालता है ॥तेरह॥ समाधिकाल में महादेवजी की जो प्रसिद्धतम एकाग्रता है, वह पृथ्वी, पर्वत आदिरूप उनकी मूर्तियों में विस्पष्टरूप से दिखाई पड़ती है, इस आशय से कहते हैं। स्नेह, राग, द्वेष आदि सर्वविध दोषों से शून्य, रसयुक्त होते हुए भी नीरस, उत्तम भोजन करने के कारण भली-प्रकार तृप्त हुए जनों के सदृश खान-पान आदि तृष्णाओं से शून्य प्रसिद्ध मेरु, हिमालय आदि पर्वत ही उनकी एकाग्रता ध्यान की मूर्तियाँ हैं ॥चौदह॥ अब सर्वांगों में समस्त शक्तियों से परिपूर्ण उनके गणों का वर्णन करते हैं । जिनके मस्तक खुर की शक्तियाँ रखते हैं यानी दौड़ने-कूदने की शक्तियाँ रखते हैं, खुर हाथों की शक्तियाँ रखते हैं यानी चित्र विचित्र शिल्पआदि निर्माण - शक्तियाँ रखते हैं, हाथ दाँत, मुख और उदर की शक्तियाँ रखते हैं यानी चवर्ण, भक्षण आदि शक्तियाँ रखते हैं तथा जिनके भालू, ऊँट, बकरी और सर्प के सदृश मुख हैं, ऐसे प्रमथों का गण उन महादेवजी के क्रीडन में सहायक है ॥पंद्रह॥ तीन नेत्रों के कारण चमक रहे मुखवाले उन महादेवजी के जिस प्रकार सर्वागों में सर्वविध शक्तियों से समन्वित प्रमथगण क्रीडा सहायक परिवार है, उसी प्रकार सर्वागों में सर्वशक्तिसमन्वित निर्मल कान्तिवाली दूसरी-दूसरी नाना प्रकार की आकृति और मुखवाली माताएँ भी क्रीडा में सहायक परिवार हैं ॥सोलह॥ भूतगणों के ऊपर आधिपत्य रखने के कारण उनसे नमस्कृत तथा चौदह भुवनों में उत्पन्न होनेवाले असंख्य प्राणियों का ही भोजन करने वाली मातृकाएँ उस देवाधिदेव के सामने नृत्य करती हैं ॥सत्रह॥ उन मातृकाओं के मुखों की गदहे और ऊँटों के मुखों के सदृश आकृतियाँ है, रक्त, मेद और चर्बी उनका आसव के सदृश सर्वदा पेयपदार्थ है। चारों दिशाओं में वे विहार करती हैं और शव के हाथ, पैर आदि की मालाएँ पहनती हैं ॥अट्ठारह॥ ये मातृकाएँ पहाड़ों की चोटियों पर, आकाश में, अन्य लोकों में, गर्तों में भी प्राणियों के शरीरों में निवास करती हैं ॥उन्नीस॥ जया, विजया, जयन्ती, अपराजिता, सिद्धा, रक्ता, अलम्बुसा और उत्पला- ये आठ मातृदेवियाँ सभी माताओं में मुख्य हैं। अन्य माताएँ इन्हीं आठों का अनुगमन करती हैं और उनका अनुगमन करनेवाली अन्य मातृदेवियों का और दूसरी माताएँ अनुगमन करती हैं ॥बीस,इक्कीस॥ हे मानद मुनिनायक, महामहिमशाली उस मातृगण के बीच में 'अलम्बुसा' नामक सातवीं माता अत्यन्त विख्यात है ॥बाईस॥ वैष्णवी-शक्ति के वाहन गरुड़ की नाईं उस 'अलम्बुसा - शक्ति' का वाहन कौआ है, यह इन्द्रनील पर्वत के सदृश नीला है, इसका मुख वज्रतुल्य हड्डी से बना है तथा नाम है - चण्ड ॥ तेईस॥ किसी समय विहारवश भयंकर चेष्टाकारिणी, अष्टसिद्धियों से संपन्न वे सब माताएँ आकाश में इकट्ठी हुई ।।चौबीस।। वाममार्ग में प्रतिपादित पराशक्ति के आराधनप्रकार में निष्ठा रखनेवाली इन आठ मातृदेवियों ने तुम्बुरुनामक रुद्रमूर्ति का आराध्यरूप से आश्रय लेकर एकाग्रचित्त से समाधि में परमार्थभूत स्व-स्वरूप का प्रकाशन करनेवाला उत्तम पानोत्सव मनाया ॥पच्चीस॥ वे माताएँ, समस्त जगत के पूज्य तुम्बुरु और भैरवनामक देवताओं का पूजन अर्चन कर मदिरामद से सन्तुष्ट होती हुई आपस में चित्र-विचित्र अर्थों से पूर्ण वार्तालाप करने लगीं ॥छब्बीस॥ तदनन्तर उनकी कथाओं के प्रसंग से यह एक बात उठी कि भगवान उमापति हम लोगों को क्यों तिरस्कारपूर्वक देखा करते हैं ।।सत्ताईस।। इसलिए महादेवजी को हम लोग अपना वह प्रभाव दिखलाएँ, जिससे कि हम लोगों की महाशक्ति देखकर वे हमारी अवहेलना न करेंगे ।।अट्ठाईस।। यों निश्चय कर परस्पर अभिनन्दित उन देवियों ने रूपान्तर में परिणत किये गये मुख आदि अंगोवाली रुद्रशक्ति उमा को अपने अधीन बनाकर, यज्ञ में पशु की नाईं, मन्त्रसहित जल से प्रोक्षित किया ॥उनतीस॥ अनन्तर उन देवियों ने महादेवजी के अंश से माया द्वारा चुराई गई तथा मातृदेवियों के बीच में प्राप्त हुई चंचल केशवाली उमा को ओदनरूप बनाने के लिए मानों अभिशाप दिया ॥तीस॥ जिस दिन पार्वतीजी का प्रोक्षण किया, उस दिन वहाँ उन सब देवियों ने नृत्य, गेय आदि से मनोहर महान उत्सव मनाया ॥इकतीस॥ अत्यन्त आनन्द और उन्नत घोष से युक्त आकाश-मण्डल ही उस समय जगमगाने लगा तथा उन देवियों की जंघा और उदर दीर्घ अंगों के उच्चावच प्रक्षेप से विकसित होने लगे ॥बत्तीस॥ पर्वत और अरण्यों को शब्दित कर रही कुछ अन्य देवियाँ करताल और सिंहनाद के कारण उद्दाम घनीभूत शब्द के उच्चार तथा कान्तियुक्त अंगों के विकारपूर्वक हँसने लगीं ॥तैंतीस॥ जगत-मण्डल की गुहा में मद्यपान से अतितृप्त हुई कुछ मातृकाएँ पर्वत एवं घरों को ध्वनियुक्त बनाती हुई, चन्द्र के उदयरागसे रंजित अतएव शब्दयुक्त हुए समुद्र, जल के सदृश, गर्जना करने लगीं ॥चौंतीस॥ लीला से जनित घुरघुर शब्दों से आकाश के कोने में कुछ देवियाँ मस्तक से लेकर खुरपर्यन्त अंगों को रक्त, चर्बी, आसव आदि से पुष्ट करने के लिए मद्यपान कर रही थीं ॥पैंतीस॥ उनके कुछ उन्मत्त वृत्तान्तों का कथन करते हुए प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं। कुछ देवियाँ पेय पदार्थ पीने लगीं, कुछ तो उच्च स्वर से गर्जने लगीं, कुछ जल्दी से जाने लगीं, कुछ बोलने लगीं, कुछ हँसने लगीं, कुछ परस्पर रक्षा करने लगीं, कुछ एक दूसरे के मुख में या अग्नि में होमने लगीं, कुछ गिरने लगीं, कुछ ऊँचे से बड़बड़ाने लगीं, कुछ निरन्तर नाचने लगीं, कुछ स्वादु मांस खाने लगीं, यों उन्होंने उन्मत्त आचरण होकर त्रिभुवन को अपने व्यापार से सद्वर्तन से रहित कर दिया ॥छत्तीस॥ अठारहवाँ सर्ग समाप्त उन्नीसवाँ सर्ग ब्रह्माणी की हंसी में चण्डनामक कौए के सम्बन्ध से भाईयों के साथ अपनी उत्पत्ति, उसी ब्राह्मशक्ति के प्रसाद से ज्ञान और पिता के स्थान की प्राप्ति का वर्णन । वायसराज भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन, जब उन मातृकाओं का उत्सव चल रहा था, तब उनके उत्तम वाहनरूप चण्ड आदि भी उसी प्रकार उन्मत्त होकर हँसते थे, नाचते थे और रुधिर का पान भी करते थे ।।एक।। उस उत्सव में मद्यपान से उन्मत्त हुई कुछ ब्राह्मीशक्ति के रथ में जुतनेवाली हँसियाँ और 'अलम्बुसा' देवी का वाहन चण्डनामक कौआ - ये सब आकाश प्रदेश में इकट्ठे होकर नाचने लगे ॥दो॥ समुद्रतट की समथल भूमि में भली प्रकार नृत्य और मद्यपान कर रही उन हँसियों को पुरुष-विषयक अनुराग उत्पन्न हुआ। ॥तीन॥ तदनन्तर उस समय उत्पन्न-रति वे सभी हँसियाँ उन्मत्त होकर क्रमशः निकृष्टजातीय भी कौए के साथ रमण करने लगीं, क्योंकि वे मत्त ही तो थीं। ॥चार॥ सात कुलहँसियों के वल्लभ इस चण्डनामक कौए ने क्रम से एक-एक हँसी के साथ तब तक रमण किया, जब तक कि एक दूसरे की इच्छा पर्याप्तरूप से शान्त नहीं हुई ॥पाँच॥ रति से तृप्त हुई उन हँसियों ने गर्भधारण किया और वे देवियाँ उत्सव-कार्य सम्पादित हो जाने के अनन्तर अपनी ही माया का विलास समझकर क्रोध न करनेवाले महादेवजी के पास पहुँची ॥छः॥ और उन देवियों ने भोजन के लिए शूलपाणि महादेवजी को प्रिय उमा समर्पित की, जो ओदनरूपता को प्राप्त हुई थी ।।सात।। भोजन में मेरी प्रिया ही दी गई है, यों जानकर जब महादेवजी मातृकाओं के प्रति रुष्ट हुए, तब उन्होंने अपने-अपने अंगों से सिर आदि एक-एक अवयव की कल्पना द्वारा पार्वती का पुनः उत्पादन कर महादेवजी को फिर पाणिग्रहण विधि से उसे समर्पित किया ॥आठ, नौ॥ अनन्तर देवियाँ, महादेवजी और उनका परिवार - ये सब सन्तुष्टमन होकर अपनी-अपनी दिशा की ओर चल दिये ।।दस।। हे मुनीश्वर, वे ब्राह्मीशक्ति के रथ की हँसियाँ गर्भवती हुई थीं, उन्होंने ब्राह्मी देवी के समीप में अपना यथास्थित वृत्तान्त कह दिया ॥ग्यारह॥ ब्राह्मीशक्ति ने कहाः पुत्रियों, इस समय गर्भवती तुम सब मेरे रथकार्य के लिए असमर्थ हो, इसलिए अब यथेष्ट विचरण करो ॥बारह॥ गर्भ से अलसाई हुई उन हँसियों को वैसा कहकर दयालु ब्राह्मी देवी - उनके ऊपर अनुग्रह के लिए विहार छोड़करनिर्विकल्प समाधि में ही सुखपूर्वक स्थित हुई ॥तेरह॥ हे मुनीश्वर, गर्भधारण से अलसाई हुई वे राजहँसियाँ भगवान विष्णु के नाभिकमल के मूल में ब्रह्मा के कमल की उत्पत्ति- स्थान में विचरण करने लगीं ॥चौदह॥ तदनन्तर उस प्रकार विचरण करती हुई उन राजहँसियों का गर्भ परिपक्व हो गया । उन्होंने नाभिकमल के कोमल पल्लव में उस प्रकार मुलायम अण्डे दिये, जिस प्रकार वल्लियाँ अंकुर देती हैं ॥पंद्रह॥ अनन्तर समय पाकर उन्होंने इक्कीस अण्डे दिये और यथासमय भीतरी गर्भ पक जाने पर हँसियों के पग के प्रहार द्वारा वे उस प्रकार द्विधा विभक्त हो गये, जिस प्रकार सारयुक्त ब्रह्माण्ड सुवर्ण और चाँदी के खप्परों द्वारा द्विधा विभक्त हो जाता है ॥सोलह॥ हे मुने, उस प्रकार उन अण्डों के द्वारा ये हम चण्ड के पुत्र इक्कीस भाई कौए की जाति में उत्पन्न हुए ।।सत्रह।। उस कमल के पल्लव के ऊपर हुए वे हम क्रमशः बड़े हुए, हम लोगों को पंख आए और आकाश में उड़ने में समर्थ भी हुए ॥अट्ठारह॥ तुमने तत्त्व कैसे जाना ? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उपक्रम करते हैं । महर्षे, हम लोगों ने अपनी माता हँसियों के साथ दीर्घकाल तक समाधि से विरत हुई भगवती ब्राह्मीदेवी की भलीप्रकार आराधना की ॥उन्नीस॥ अनन्तर उपयुक्त समय आने पर प्रसाद करने में तत्पर हुई भगवती ब्राह्मी ने स्वयं ही हम लोगों के ऊपर तत्त्वसाक्षात्काररूप फल के द्वारा वैसा अनुग्रह किया, जिससे हम लोग जीवन्मुक्त होकर स्थित हैं ।।बीस।। हम लोगों का मन विलीन हो गया, इसलिए 'एकान्त प्रदेश में उपद्रवशून्य होकर समाधि में ही स्थित रहें' ऐसा निश्चय करके हम लोग अपने पिताजी के पास विन्ध्य-प्रदेश में गये ॥इक्कीस॥ वहाँ पिताजी ने हम लोगों का आलिंगन किया और तदनन्तर हम सबने भगवती अलम्बुसा की पूजा की । प्रसन्नतापूर्वक उस देवी के द्वारा देखे गये हम लोग विनय आदि सद्गुणों से नियन्त्रित होकर वहाँ रहने लगे ॥बाईस॥ पिता चण्ड ने कहा : 'हे पुत्रों, क्या तुम लोग इस संसाररूपी जाल से, जो असीम वासनारूपी तन्तुओं से गुँथी गयी है, मुक्त हो चुके हो ? यदि नहीं, तो उससे छुटकारा पाने के लिए सेवकवत्सल इस भगवती अलम्बुसा की हम प्रार्थना करें, जिससे तुम सब ज्ञान में पारंगत हो जाओगे ॥तेईस, चौबीस॥ कौओं ने कहा : हे पिताजी, ब्राह्मीदेवी के प्रसाद से हम लोगों ने ज्ञातव्य विषय का भली-भाँति ज्ञान कर लिया है, किन्तु एकान्त में वास करने योग्य उत्तम स्थान की हम लोगों को अभिलाषा है ॥पच्चीस॥ पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्रों, एक मेरुनामक अत्यन्त ऊँचा पर्वत है, वह भाँति-भाँति के अनेक रत्नों का आधार है, उसका संपूर्ण देवता आश्रय करते हैं ॥छब्बीस॥ प्रकाशमान चन्द्र और सूर्यरूपी दीपक से युक्त अनेकविध प्राणियों के कारण विस्तृत हुए कुटुम्ब से परिवेष्टित ब्रह्माण्डरूपी घर का वह सुवर्णनिर्मित मध्यस्तंभ है ।।सत्ताईस।। वह पृथ्वी के द्वारा ऊपर को उठाया गया मानों एक हाथ है । उस हाथ में किंपुरुष आदि देश ही चन्द्राकृति सुवर्ण निर्मित केयूर हैं, रत्नरूप अँगूठियों से सुशोभित शिखर ही अंगुलियाँ है और शब्द कर रहे द्वीप और समुद्र ही कंकण हैं ।।अट्ठाईस।। वह पर्वतों का राजा है, उसके चारों ओर हिमालय आदि सात कुलपर्वत सामन्तरूप से विराजित हैं; वह जम्बूद्वीप सिंहासन के ऊपर विराजमान है और पर्वतों की सभा में चन्द्र एवं सूर्यरूपी नेत्रों से दृष्टिपात करता है। तारावली ही उसकी मालती-माला है, दिशारूपी पल्लवों से सुशोभित आकाश ही उसका एकमात्र वस्त्र है, वह सर्प और हाथी-इन दोनों का आश्रय- स्थान है, इन्द्र, उपेन्द्र आदि देवराज ही उसके आभूषण हैं ॥उनतीस, तीस॥ कमनीय दिशारूपी कामिनियाँ उसके चारों ओर जल की धारा युक्त शीतल अंगभूषण मेघरूप नील, श्वेत आदि चामर डुलाती हैं ॥इकतीस॥ इसके पैर सोलह हजार योजन नीचे पृथ्वी में अवस्थित हैं, जिनकी नाग, असुर और बड़े-बड़े सर्प पूजा करते हैं ।।बत्तीस।। इसकी देह सूर्य और चन्द्ररूप लोचनों से युक्त तथा अस्सी हजार योजन ऊँची स्वर्ग-स्थान तक पहुँची है, वहाँ देवता, गन्धर्व एवं किन्नर उसकी पूजा करते हैं ॥तैंतीस॥ इस पर्वतराज का आश्रय लेकर ब्रह्मर्षि, देवर्षि, राजर्षि, देव, पितर, गन्धर्व, किन्नर, अप्सराएँ, विद्याधर, यक्ष, राक्षस, प्रमथ, गुह्यक और नाग-ये चौदह प्रकार के प्राणी उस प्रकार जीवन निर्वाह करते हैं, जिस प्रकार प्रधान गृहपति का आश्रय कर इतर बन्धुगण जीवन निर्वाह करते हैं । यह इतना बड़ा विस्तृत है कि वे एकत्र रहने पर भी एकदूसरे का नगर या स्थान नहीं देख पाते ॥चौंतीस॥ इसके ईशानकोण में माणिक का बना हुआ एक विशाल शिखर है, जिसे देखने से ऐसा प्रतीत होता है मानों दूसरा उदित हुआ सूर्य ही हो ॥पैंतीस॥ इसके पृष्ठभाग में अनेकविध प्राणियों से परिवृत एक महान कल्पवृक्ष स्थित है, जो कि शिखररूपी विद्रुम-दर्पण में जगत के प्रतिबिम्ब की नाईं प्रतीत होता है ॥छत्तीस॥ उसके दक्षिण तने पर एक शाखा है, जिसमें कनक के सदृश पीले पल्लव लगे हुए हैं, रत्नों के सदृश चमकीले पुष्पगुच्छों के कारण तनिक भी अवकाश नहीं है और चन्द्रबिम्ब के सदृश प्रकाशमान फल भरे पड़े हैं ॥सैंतीस॥ हे पुत्रों, पहले जिस समय भगवती अलम्बुसादेवी ध्यान में आसीन थीं, उस समय मैंने चमकीली मणियों से जड़ा हुआ उस शाखा के ऊपर एक घोंसला बनाया और उसमें विलास किया ॥अड़तीस॥ वह घोंसला रत्नसदृश चमकीले पुष्पों की पँखुड़ियों से ढँका हुआ है, अमृत के समान स्वादु फलों से परिपूर्ण है और चिन्तामणि की शलाकाओं से उसके बाहरी दरवाजों की रचना की गई है ॥उनतालीस॥ वह विचारपूर्वक व्यवहार करनेवाले कौओं के पुत्रों से व्याप्त है तथा भीतर से अत्यन्त शीतल, मनोहारी और भाँति-भाँति के पुष्पों से पूरित है ॥चालीस॥ हे प्यारे बच्चों, देवताओं से भी दुर्गम उस सुन्दर घोंसले पर तुम लोग जाओ, वहाँ निवास किये हुए तुम लोग निर्विघ्न एवं पर्याप्तरूप से भोग और मोक्ष दोनों को प्राप्त करोगे ॥इकतालीस॥ इस प्रकार कहकर हमारे पिता ने हम लोगों का चुम्बन और आलिंगन किया तथा भगवती के पास जो मांस लाया गया था, उसे भी हमें दिया ॥बयालीस॥ उसे खाकर भगवती और पिताजी के चरणों में अभिवन्दन कर अलम्बुसा के निवासस्थान उस विन्ध्यप्रदेश से हम उड़ गये ॥तैंतालीस॥ क्रमशः आकाश का उल्लंघन कर, मेघों के कोटरों से निकल कर, पवन-लोक प्राप्त कर हम लोगों ने व्योमचारी देवताओं को प्रणाम किया ॥चौंतालीस॥ हे मुनीश्वर, सूर्य-मण्डल का अतिक्रमण कर स्वर्ग के अमरावती नगर में पहुँचे। स्वर्ग का अतिक्रमण कर ब्रह्मलोक में पहुँचे ॥पैंतालीस॥ वहाँ पहुँचकर तत्क्षण ही माता और भगवती ब्राह्मीदेवी को प्रणामपूर्वक पिता द्वारा कथित अशेष वृत्तान्त अक्षरशः कह सुनाया ।।छियालीस।। उन्होंने स्नेहपूर्वक हम लोगों का आलिंगन किया और 'जाओ' यों आज्ञा तथा आर्शीवाद देकर उत्साहित किया । अनन्तर उन्हें प्रणाम कर हम लोग ब्रह्मलोक से चल पड़े ॥सैंतालीस॥ आकाश-विहार में निपुण, अतिचपल हम लोग वायुलोक में गमन करते हुए सूर्य के सदृश देदीप्यमान लोकपालों की नगरियों का अतिक्रमण कर इस कल्पतरु पर आये और अपने घोंसले में प्रविष्ट हुए । हे मुने, यहाँ पर हम लोगों से समस्त बाधाएँ दूर रहती हैं और हम सदा समाधि में अवस्थित रहते हैं ॥अड़तालीस, उनचास॥ कहे गये वृत्तान्त का उपसंहार करते हैं। हे महानुभाव, 'तुम किस कुल में उत्पन्न हुए ?' 'किस तरह ज्ञातज्ञेय हुए ?' और 'तुम्हें यह निवास कैसे प्राप्त हुआ ?'- ये जो तीन प्रश्न आपने पहले किये थे, उसके उत्तर में जिस प्रकार हम उत्पन्न हुए, जिस प्रकार यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर हम लोग शान्त-बुद्धि होकर स्थित हुए एवं इस नीड में जिस रीति से हम लोग आये, यह सब वृत्तान्त आपको अविकलरूप से भली प्रकार कह सुनाया, इसके बाद 'तुम्हारी कितनी आयु है ?' और 'क्या अतीत वृत्तान्त जानते हो ?' - इन दो प्रश्नों के उत्तररूप से यदि आप कहने के लिए हमें आज्ञा देंगे, तो उसे भी मैं आपसे कहूँगा ॥पचास॥ उन्नीसवाँ सर्ग समाप्त बीसवाँ सर्ग प्रत्येक कल्प में जगत की समता, भाईयों की मृत्यु और प्रलयकाल में भी अपने चित्त की स्थिरता का भुशुण्ड द्वारा वर्णन । 'वृत्तं स्मरसि किंच वा', इस प्रश्न का विस्तार से उत्तर देने की इच्छावाला और 'इमं कल्पतरुं प्राप्य निजं नीडं प्रविश्य च' इत्यादि वृत्तान्त में पूर्वापर विरोध की शंका न हो जाय, इसलिए प्रत्येक कल्प में अवयवों की समता होने के कारण कल्पवृक्ष, मेरु आदि की एकता कही जाती है आशय बतलाते हैं । भुशुण्ड ने कहा ः महाराज वसिष्ठजी, हम लोगों के जन्मनिमित्त कल्प में चिरकाल तक जो कुछ पदार्थसमूहात्मक जगत स्थित था, वह सब अवयवसंस्थान आदि आकृति-विशेषों से इस कल्प के पदार्थों के सदृश ही था, अतः वह आज भी अभेद आरोप से सन्निहित ही है, इसलिए बुद्धिपूर्वक ही 'इमं कल्पतरूम्' इत्यादि निर्देश किया गया है ।।एक।। इसलिए हे मुनीन्द्र, यद्यपि यह वृत्तान्त भूतकालीन है, तथापि 'जगत भ्रान्तिमात्र है' यों अभ्यास होने के कारण पूर्वजन्म की समता देखनेवाले मैंने बोध के लिए उसका, वर्तमान जगत के साथ एकता मानकर ही, वर्णन किया है ॥दो॥ अब, लम्बी कथा का उपक्रम करने पर पूजा में विलम्ब न हो जाय, इसलिए पहले पूजन - स्वीकार की प्रार्थना करने के लिए स्तुति द्वारा महर्षि को अभिमुख करते हैं । हे मुने, चूँकि दीर्घकाल से संचित किये गये मेरे पुण्य आज सफल हो गये, इसीलिए निर्विघ्नतापूर्वक आपका मैं दर्शन कर रहा हूँ ॥तीन॥ मुनिवर ! यह नीड़, यह शाखा, यह मैं, यह कल्पवृक्ष - ये सब आज आपके दर्शन से अत्यंत पवित्र हो गये ।।चार।। मुनिवर, विहंगों द्वारा समर्पित इस अर्ध्य और पाद्य का स्वीकार कर एवं हम लोगों को पवित्र बनाकर आप अवशिष्ट सेवा के निमित्त कुछ और प्रश्न कहने के लिए आज्ञा दीजिए ॥पाँच॥ वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, दूसरी बार स्वयं उस भुशुण्ड पक्षी के द्वारा अर्घ्य, पाद्य देने पर मैंने यह कहा ॥छः॥ हे पक्षिराज, वैसे बली और महाबुद्धिमान तुम्हारे वे भाई यहाँ क्यों नहीं दिखाई देते, तुम अकेले ही क्यों दिखाई देते हो ? ।।सात।। भुशुण्ड ने कहा : मुनिवर, हम लोगों को यहाँ रहते महान काल बीत गया । हे अनघ, दिवस - पंक्तियों की नाईं युगों की पंक्तियाँ क्षीण हो गई ॥आठ॥ इतना लम्बा काल होने के कारण सभी मेरे भाई, तृण के सदृश, शरीर छोड़कर शिवपद में परिणत हो गये ॥नौ॥ ब्रह्मन्, यद्यपि दीर्घायु हों, महान हों, सज्जन हों, बलवान हों, सभी को यह अलक्षितस्वरूपवाला काल अपने उदर में समा लेता है ॥दस॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : प्रिय पक्षिराज, माला की नाईं अपने कन्धे पर बारह सूर्य और चन्द्रमा को ढोनेवाले तथा प्रवह आदि वातस्कन्धों का अतिक्रमण करनेवाले प्रलय- वायुओं के अविरत बहने पर क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥ग्यारह॥ भुशुण्डजी, चिरकाल से अत्यन्त आसन्न उदयाचल और अस्ताचल के अरण्यों को दग्ध कर देनेवाले सूर्य-किरणों से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥बारह॥ वायसराज, जल को पाषाण के सदृश कठोर बना देनेवाले शीतल चन्द्रकिरणों और निकट प्रलय के लिए हो रहे पाषाण के पतनों से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥तेरह॥ प्रियवर, मेरु - शिखर पर विश्रान्ति किये प्रलयकालीन मेघ-मण्डलों से तथा परशु की धारा को भी क्षत कर देनेवाले शिलासदृश घनीभूत कुहरे से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ? ॥चौदह॥ अत्यन्त ऊँचे स्थान पर स्थित हुआ यह उन्नत कल्पवृक्ष जगत के विषम क्षोभों से क्यों क्षुब्ध नहीं होता ? ॥पंद्रह॥ कठिन समय आने पर जब बड़े-बड़े लोगों को भी क्षोभ हो सकता है, तब पक्षी जैसी अधम योनि में उत्पन्न हुए मेरी तो बात ही क्या ? तथापि विवेक की सामर्थ्य से खेद नहीं होता, यों कहने के लिए दूसरों के जीवन की अपेक्षा अपनी जाति के पक्षियों के जीवन की क्षुद्रता बतलाते हैं। भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन्, आकाश में आश्रित और सभी लोगों से तिरस्कृत यह पक्षियों का जीवन सब प्राणियों में अत्यन्त तुच्छ है ॥सोलह॥ ऐसी तुच्छ योनियों के लिए भी विधाता ने झरनों, वनों और शून्यसदृश आकाश में प्रीतिपूर्वक जो जीविका की कल्पना की है, यह अत्यन्त आश्चर्य का विषय है ॥सत्रह॥ भगवन्, इस तुच्छ जाति में उत्पन्न, चिरकाल से जीवन बीता रहा और आशारूपी पाशों से निरन्तर बद्ध एक पक्षी किस तरह शोकवर्जित हो सकता है ? ॥अट्ठारह॥ भगवन्, तथापि हम अपनी आत्मा में ही सदा सन्तोष मानकर अवस्थित हैं, इसलिए उत्पन्न हुए विभ्रमों से कभी भी परमार्थसत्ता से रहित इस जगत में मुग्ध नहीं होते ॥उन्नीस॥ ब्रह्मन्, हम लोग अपने सत्तास्वभाव में ही सन्तुष्ट रहते हैं, कष्ट पहुँचानेवाले परपीडन-व्यापारों से निर्मुक्त होकर अपने निवासस्थान इस घोंसले में रहते हुए केवल कालयापन करते हैं ॥बीस॥ महाराज, हम लोग अपने जीवन से न देह की ऐहिक या आमुष्मिक फल के लिए कोई क्रिया चाहते हैं और मरण से न देह का विनाश ही चाहते हैं। जिस तरह वर्तमान में नित्यसिद्ध निरतिशयात्मरूप से पूर्णकाम होकर स्थित रहते हैं, उसी तरह आगे भी स्थित रहेंगे ॥इक्कीस॥ महर्षे, हमने प्राणियों की जन्म, मरण आदि अनर्थ - दशाएँ देख लीं और मिथ्यात्व-निर्णायक स्वप्न आदि दृष्टान्त दृष्टियाँ भी देख ली तथा हमारे मनने अपना चंचल स्वरूप भी सदा के लिए भली प्रकार त्याग दिया है ।।बाईस।। कल्पवृक्ष के प्रभाव से ही कल्प- समाप्ति तक हम लोगों को खेद नहीं होता, यह कहते हैं । निरन्तर शान्ति देनेवाले अविनाशी स्व-स्वरूप प्रकाश में स्थित होकर मैं इस कल्पवृक्ष के ऊपर सदा काल की कलन गति जानता रहता हूँ ॥तेईस॥ प्रकाश अधिक होने के कारण जब दिन और रात का विभाग ही ज्ञात नहीं हो सकता, तब यहाँ स्थित होकर तुम काल की कलनगति कैसे जानते हो ? इस प्रश्न पर कहते हैं । चमकीले रत्नों के प्रकाश से पूर्ण कल्पलता- गृह में उपस्थित होकर मैं प्राणायाम के प्रवाह से यानी स्वरोदयशास्त्र में बतलाये गये उपाय से अखण्डित कल्प जान लेता हूँ ॥चौबीस॥ मुनिवर, दिन और रात जाने बिना ही इस उन्नत शिखर पर अपनी बुद्धि से ही लोकों के कालक्रम की स्थिति जानता रहता हूँ ।।पच्चीस।। मन की स्थिरता के बल से मुझे खेद नहीं प्रतीत होता, इस आशय से कहते हैं । मुनिवर, यह सारभूत वस्तु है और यह असारभूत वस्तु है, इस प्रकार के विवेकयुक्त बोध से उत्तम शान्ति को प्राप्त हुआ मेरा मन चंचलताशून्य, शान्त और भली प्रकार स्थिर है ॥छब्बीस॥ सांसारिक व्यवहारों से जनित असद्रूप आशारूपी पाशों से जिस प्रकार अल्पध्वनियों से प्राकृत काक भयग्रस्त हो जाता है, उस प्रकार मैं भयग्रस्त नहीं होता ॥सत्ताईस॥ धैर्य के कारण भी हमें खेद प्राप्त नहीं होता, यों कहते हैं । निरतिशय शान्ति पहुँचानेवाली और आत्मप्रकाश से शीतल हुई बुद्धि से जगत की माया देख रहे हम लोग धीरता को प्राप्त हुए हैं ॥अट्ठाईस॥ हे महाबुद्धे, दशाक्रम के अनुसार भयंकर दशाएँ भी प्राप्त हो जाय, तथापि स्थिर बुद्धिवाले हम, निश्चल पत्थर के सदृश, स्थिराकृति होकर अवस्थित रहते हैं ॥उनतीस॥ जगत-तत्त्व के पुनः विमर्शबल से भी खेद नहीं होता, यों कहते हैं । प्रारम्भ में रमणीय दीख पड़नेवाली, तरल इस संसार स्थिति का बार-बार परामर्श किया जा चुका है, अतः वह हमें कुछ बाधा नहीं पहुँचाती ॥तीस॥ 'जातस्य ही ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च' तरंगवाले हम लोग, पूर्णिमा आदि पर्वकाल में समुद्र की नाईं, प्रबुद्ध हो गये हैं ॥छत्तीस॥ भगवन्, जिस अमृत के लिए मन्दराचल द्वारा सर्वांगों से क्षुब्ध हुए क्षीर-सागर का मंथन किया जाता है, आपके उसी अमृतरूपा आगमन से हम लोग अत्यन्त प्रसन्नचित्त हो गये हैं ।।सैंतीस ।। समस्त एषणाओं की तिलांजलि देनेवाले सन्त, महात्मा अपने आगमन आदि से हम पर जो अनुग्रह करते हैं, मैं अपनी आत्मा का इससे अधिक दूसरा कुशल नहीं मानता ॥अड़तीस॥ ऊपर-ऊपर से रमणीय दिखाई पड़नेवाले विषय-भोगों से क्या प्राप्त होता है ? अर्थात् कुछ भी नहीं। सत्संगरूपी चिन्तामणि से तो समस्त सारभूत ज्ञानवस्तु प्राप्त होती है ॥उनतालीस॥ हे मुनिवर, स्नेहपूर्ण, गम्भीर, मधुर, उदार और धीर वाणीवाले एकमात्र आप ही इस त्रिभुवनरूपी कमल की कली में भ्रमर के सदृश हैं ॥चालीस॥ साधो, यद्यपि मैंने परमात्मा को जान लिया है और आपके दर्शन से मेरे समस्त पाप नष्ट हो चुके, तथापि चूँकि महात्माओं का समागम भयों का अपहरण करनेवाला है इसलिए, यहाँ आज मेरा जन्म सफल हुआ, ऐसा मैं मानता हूँ ॥इकतालीस॥ बीसवाँ सर्ग समाप्त इक्कीसवाँ सर्ग कल्पवृक्ष का माहात्म्य, प्रलय में वारुणी आदि धारणाओं द्वारा अपनी स्थिति, ईश्वरीय नियमिका शक्ति और अनेक चित्र-विचित्र अर्थों के स्मरण का वर्णन। अपने आश्रय कल्पवृक्ष के माहात्म्य वर्णनप्रसंग में युगविनाश काल में जनित उपद्रवों से अपने को क्लेश की प्राप्ति नहीं होती, यों कहते हुए 'वृत्तं स्मरसि किं च वा' इत्यादि प्रश्न का उत्तर देने के लिए पक्षिराज भुशुण्ड वक्तव्य का उपक्रम करते हैं । भुशुण्ड ने कहाः महाराज वसिष्ठजी, युग समाप्ति के महान उपद्रवों में और भयंकर महापवनों में भी यह कल्पवृक्ष अत्यन्त स्थिर रहता है, कभी भी कम्पित नहीं होता ॥एक॥ हे साधो, अन्य लोकों में विहार करनेवाले सभी प्राणियों का यह अत्यन्त अगम्य स्थान है, अतः यहाँ हम लोग अत्यन्त सुखपूर्वक रहते हैं ।।दो।। मुनिवर, जिस समय हिरण्याक्ष ने सात द्वीपों से वेष्टित इस पृथ्वी का वेगपूर्वक अपहरण किया था, उस समय पृथ्वी पर स्थित होने के कारण इसके भी हरण, कम्पन आदि की संभावना अवश्य थी, तथापि दिव्यप्रभाव की सामर्थ्य से इस कल्पवृक्ष में तनिक भी कम्पन नहीं हुआ ॥तीन॥ खम्भे की आधारभूत शिला की नाईं चारों ओर से समता के लिये आधाररूप से दिये गये पर्वतों से युक्त मेरुपर्वत जब कम्पित हुआ, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ॥चार।। दो भुजाओं के अवष्टम्भ से मेरु को दबाकर जब चतुर्भुज भगवान नारायण ने इतर दो हाथों द्वारा समुद्र से मन्दराचल का उद्धार किया, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।पाँच।। जब देवासुर संग्राम के कारण चन्द्र-मण्डल और सूर्य-मण्डल गिर गया था तथा जगत में अत्यन्त क्षोभ पैदा हो गया था, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।छः।। जब पर्वतराज की शिलाओं का उन्मूलन कर देनेवाले और मेरुपर्वत के अन्यान्य वृक्षों को कम्पित कर देनेवाले प्रलय-कालीन वायु बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ॥सात॥ क्षीर-सागर में चंचल हुए मन्दराचल की गुहाओं के वायुओं से मानों कम्पित हुई कल्पान्त की मेघपंक्तियाँ जब संचरण कर रही थी, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।आठ।। जब कालनेमि की भुजाओं में मेरु पर्वत चारों ओर से उन्मूलित होकर अवस्थित था, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ था ।।नौ।। जिनके कारण बड़े-बड़े सिद्ध गिर रहे थे, ऐसे पक्षिराज गरुड के पंखों के पवन जब अमृत हरण के युद्ध में बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष गिरा नहीं ॥दस॥ आज भी जिसकी पृथ्वी धारणरूप चेष्टा समाप्त नहीं हुई है, ऐसी शेषाकृति को संकर्षण रुद्र जब प्राप्त हुए, तब और जब गरुड़जी पृथ्वी से उड़कर ब्रह्माण्ड को गये, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ ।।ग्यारह॥ प्रलयकाल में जब शेष ने फणाओं से, शैल, सागर एवं समस्त प्राणियों से सही न जानेवाली प्रलयाग्नि शिखाएँ बाहर निकालीं तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ। ॥बारह॥ हे मुनियों में सिंहरूप महाराज वसिष्ठजी, इस प्रकार के उत्तम वृक्ष पर निवास कर रहे हम लोगों को आपत्तियाँ कहाँ से हो सकती हैं, क्योंकि वे आपत्तियाँ दुष्टस्थान में निवास के कारण ही आती हैं ॥तेरह॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे महाबुद्धि पक्षिराज, कल्पान्त हेतु उत्पातवायुओं के, जो चन्द्रमा, नक्षत्र और सूर्य को गिरा देते हैं, बहने पर तुम चिन्तानिर्मुक्त होकर कैसे रहते हो ? ॥चौदह॥ भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, जब सहस्र महायुगों के अन्त में जगत की अवस्था में व्यवहार गिर जाता है, तब सन्मित्र का परित्याग कर देनेवाले कृतघ्न की नाईं मैं इस घोंसले का परित्याग कर देता हूँ ।।पंद्रह।। समस्त कल्पनाओं का परित्याग कर और निश्चल स्वभाववाले अंगों से गरुडस्य जातमात्रस्य सर्वे लोकाः प्रकम्पिताः । प्रकम्पिता मही सर्वा सप्तद्वीपाश्च कम्पिताः ॥ तदुत्पातान्निमज्जन्तीं भुवं नावमिवाऽम्भसि । दधौ सहस्रैः शिरसां संकर्षणवपुर्हरः ।। 'उत्पन्नमात्र गरुड को देखकर सब लोक कम्पित हुए, भूमि और सातों द्वीप काँपने लगे । इन उत्पातों से, जल में नाव की नाईं, डूब रही पृथ्वी का संकर्षण शरीर महादेवजी ने हजारों मस्तकों से धारण किया' इस कथा के अनुसार कहते हैं । युक्त होकर एकमात्र आकाश में ही, वासनाशून्य मन की नाईं स्थित रहता हूँ ॥सोलह॥ सामान्यतः कथित आकाश स्थिति का धारणा भेदों से विशेष उल्लेख करते हैं। महाराज वसिष्ठजी, प्रलय के समय में जब पर्वतों को खण्ड-खण्ड कर देनेवाले बारह आदित्य तपते हैं, तब मैं वरुणसम्बन्धी धारणा बाँधकर निश्चिंत होकर स्थित रहता हूँ। ॥सत्रह॥ जब प्रलयकाल में बड़े-बड़े पर्वतराजों को मर्दित कर देनेवाले प्रलयकालीन वायु बहते हैं, तब मैं पर्वतसम्बन्धिनी धारणा बाँधकर आकाश-मण्डल में अचल होकर स्थित रहता हूँ ॥अट्ठारह॥ जब प्रलयकाल में जगत, जिसमें मेरु आदि पर्वत गल जाते हैं, एक समुद्रस्वरूप हो जाता है, तब वायुसम्बन्धिनी धारणा बाँधकर एकमात्र वायु में ही तादात्म्य भाव करता हुआ निश्चित-बुद्धि होकर ऊपर तैरता रहता हूँ ॥उन्नीस॥ 'उस प्रकार कितने समय तक तैरते रहते हो ?' इस शंका पर कहते हैं । महाराज, ब्रह्माण्ड के पार को यानी स्थूल, सूक्ष्म और समष्टिरूप ब्रह्माण्ड के परम अवधिस्वरूप अव्याकृत को प्राप्त कर समस्त पदार्थों के अन्तभूत एवं निर्मल आत्मपद में निश्चलात्मक सुषुप्ति के सदृश एकरस निर्विकल्प समाधि-अवस्था से मैं तब तक स्थित रहता हूँ, जब तक कमलोद्भव ब्रह्मदेव पुनः अपने सृष्टिकर्म में प्रवृत्त नहीं होते । पुनः सृष्टिरूप व्यापार के होने पर ब्रह्माण्ड में प्रवेशकर इस कल्पवृक्ष के स्थानापन्न मैं अपने आलय में फिर स्थित हो जाता हूँ ॥बीस, इक्कीस॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहाः हे पक्षीन्द्र, प्रलयकाल में तत्-तत् धारणाओं के द्वारा अखण्डित होकर जैसे तुम स्थित रहते हो, वैसे दूसरे योगी क्योंकर स्थित नहीं रहते, क्यों वे शरीर त्यागकर मुक्ति प्राप्त करते हैं ? ॥बाईस॥ इस विषय में तत्-तत् प्रबल प्रारब्ध का अनुसरण करनेवाली सत्यसंकल्प स्वरूपा ईश्वरनियति ही व्यवस्थापक है, दूसरा कोई नहीं; ऐसा कहते हैं । भुशुण्ड ने कहा ः हे ब्रह्मन्, चूँकि इस परमेश्वरीय नियामिका शक्ति का कोई भी उल्लंघन नहीं कर सकता, इसलिए हम इस प्रकार कल्पान्तों में स्थित रहते हैं और दूसरे शरीरों का त्यागकर मुक्त हो जाते हैं ॥तेईस॥ महाराज, जो अवश्य भवितव्यता है, उसका बुद्धि से 'इदम् - इत्थमेव' इस प्रकार अवधारण नहीं कर सकते। जिस तरह के प्रारब्ध से जो जैसा प्राप्त होता है, वह वैसा ही रहता है । यह नियतिरूप स्वभाव का निश्चय है ॥चौबीस॥ प्रत्येक कल्प में इस कल्पवृक्ष के निर्माण में भी भोगजनक अदृष्ट में हेतुभूत मेरा संकल्प ही कारण है, ऐसा कहते हैं। कल्प-कल्प में बार-बार एकमात्र मेरे संकल्प से ही मेरुपर्वत के इसी शिखर पर इस तरह का यह कल्पवृक्ष उत्पन्न होता है ॥पच्चीस॥ महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, तुम्हारी आयु मोक्ष के सदृश अत्यन्त अपरिच्छिन्न है, तुम सुदूर भूतकालीन पदार्थों का निर्देशन करने में सबसे बढ़-चढ़कर हो । तुम मोक्षहेतु तत्त्वज्ञान और लौकिक समस्त शास्त्रादि विज्ञानों से परिपूर्ण हो, धीर हो और तुम्हारे मनोव्यापार आत्मयोग में पर्याप्त रूप से योग्य हो चुके हैं। तुमने तरह-तरह की असंख्य सृष्टियों की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय देखे हैं, इसलिए मैं तुमसे पूछता हूँ कि तुम्हारे द्वारा देखे गये जगत मण्डल में आश्चर्यकारी किस-किस जगत-क्रम का तुम स्मरण करते हो ॥छब्बीस, सत्ताईस॥ भुशुण्ड ने कहाः हे श्रेष्ठतर, इस पृथ्वी के विषय में मुझे स्मरण है कि एक समय इसमें शिला और वृक्ष कुछ नहीं थे; तृण, लता आदि कुछ भी उत्पन्न नहीं हुए थे, पर्वत, अरण्य और भाँति-भाँति के वृक्ष कुछ भी नहीं थे तथा यह पृथ्वी मेरु के नीचे स्थित थी ॥अट्ठाईस॥ मुझे भलीभाँति स्मरण है कि मेरुपर्वत के नीचे यह पृथ्वी ग्यारह हजार वर्षों तक भस्म-सार के भार से व्याप्त थी ॥उनतीस॥ पहले मेरुपर्वत के नीचे पृथ्वी पर न सूर्य उत्पन्न हुआ था, न इसमें चन्द्र-मण्डल का भान ही होता था और न तो दिवस का हेतुभूत प्रकाश सुमेरुपर्वत के प्रकाश से विभक्त था-इसका भी मुझे भली प्रकार से स्मरण है ॥तीस॥ सुमेरुपर्वत के रत्नों के तलप्रकाशों से इस पृथ्वी का आधा कोटर प्रकाशित होता था तथा इस पर कहीं-कहीं प्रकाशयुक्त पर्वत भी विद्यमान थे, इसलिए यह लोकालोक पर्वत के सदृश प्रतीत होती थी - इसका भी ठीक-ठीक स्मरण है ॥इकतीस॥ यहाँ बल, ऐश्वर्य आदि से परिपुष्ट असुरों का संग्राम होने पर जब इस पृथ्वी का भीतरी भाग क्षीण हो गया था, तब यह पलायनमान जनों से व्याप्त हो गई थी - इसका भी मुझे अच्छी तरह से स्मरण है ।।बत्तीस।। चार युगों तक मद-मत्त ऐश्वर्यशाली असुरों के द्वारा आक्रान्त हुई यह पृथ्वी उनके अन्तःपुर रूपता को प्राप्त हो गई थी- इसका भी स्मरण करता हूँ ॥तैंतीस॥ एक समय इस जगतरूपी कुटिया में मेरु को छोड़कर दूसरे सब देश समुद्र ने अंत तक आच्छादित कर दिये थे और उस समय इस मेरुपर्वत पर अविनाशी ब्रह्मा, विष्णु और शिव, ये देवत्रयी विराज रही थी - इसका भी मुझे ठीक स्मरण है ।।चौंतीस।। दो युगों तक तो यह जंगली वृक्षों से निबिड़ थी और इसमें उन्हें छोड़ दूसरे किसी का निर्माण ही नहीं हुआ था इसे भी स्मरण करता हूँ ।।पैंतीस।। एक समय यह पृथ्वी चार युगों से अधिक काल तक निबिड़ पर्वतों से व्याप्त थी; उसमें मनुष्यों का संचरण भी नहीं होता था - इसका भी मुझे स्मरण है ॥छत्तीस॥ दस हजार वर्षों तक तो यह मृत दैत्यों के अस्थिपर्वतों से चारों ओर से व्याप्त एवं परिपूर्ण थी - इसका भी मैं भली-भाँति स्मरण करता हूँ ।।सैंतीस।। एक समय अन्तरिक्ष आदि लोकों में भय के कारण समस्त विमानगामी देवता आदि तिरोहित हो गये थे और यह सब वृक्षों से वर्जित होकर अन्धकार प्रचुर हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है ॥अड़तीस॥ महाराज, एक समय मेरु-स्पर्धा से विन्ध्यमहापर्वत के बढ़ने पर दक्षिण दिशा से अगस्त्य महामुनि चले गये और यह जगत-रूपी कुटिया मलय, दर्दुर, सह्याद्रि आदि विभाजक पर्वतों के अभाव से एकपर्वतरूपता को प्राप्त हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है ॥उनतालीस॥ ये और इनसे पृथक दूसरे भी बहुत वृत्तान्त हैं, जिनका मुझे संस्मरण है, परन्तु उनके विषय में अधिक कहने से क्या फल ? केवल सारभूत वस्तु का संक्षेप से श्रवण कीजिए ॥चालीस॥ हे ब्रह्मन्, सैकड़ों असंख्य मनु बीत गये, ये सब प्रभाव के आधिक्य से परिपूर्ण थे एवं सैकड़ों चतुर्युग भी बीत गये - इसका भी मुझे स्मरण है ॥इकतालीस॥ दूसरा आश्चर्य कहते हैं। एक समय यानी जब ब्रह्माण्डशरीर विराट् उत्पन्न होकर अपने स्वरूप का आलोचन करने के लिए कुछ काल तक समाहित चित्त हुए थे, उस समय पुरुष एवं असुरों से वर्जित, स्वतःशुद्ध, प्रकाशस्वभाव तैजस पदार्थों का समष्टिरूप एक ही ब्रह्माण्ड था - इसका मुझे स्मरण है ॥बयालीस॥ कलियुग की सृष्टि-स्थिति का स्मरण कर रहे पक्षिराज भुशुण्ड कहते हैं । एक समय ऐसी उन्मत्त सृष्टि थी कि जिसमें ब्राह्मण लोग मद्य पीते थे, देवताओं की निन्दा करनेवाले असत्-शूद्र रहते थे, स्त्रियों के अनेक पति होते थे - इसका मुझे स्मरण है ॥तैंतालीस॥ आश्चर्यान्तर कहते हैं। महाराज, मुझे किसी एक ऐसी सृष्टि का स्मरण है कि जिसमें यह भूपीठ वृक्षों से घनीभूत था, महासमुद्र की कल्पना भी नहीं की गई थी और स्त्री-पुरुष के सम्बन्ध के बिना अपने आप भृगु आदि मानस पुरुष उत्पन्न हुए थे ॥चौंतालीस॥ जल में पृथिवी के निमग्न हो जाने पर जनलोक आदि प्रकाश प्रचुर लोकों के व्यवहारों से उपलक्षित हुए काल में जो सृष्टि-स्थिति थी, उसका स्मरण कर रहे पक्षीन्द्र भुशुण्ड कहते हैं । एक समय ऐसी सृष्टि थी जिसमें पर्वत और पृथिवी का नामशेष ही नहीं था, देवता और योगसिद्ध पुरुष आकाश में ही रहते थे तथा चन्द्र एवं सूर्य के अभाव में भी परिपूर्ण प्रकाश था - इसका मुझे स्मरण है॥पैंतालीस॥ महाराज, एक समय की सृष्टि में न इन्द्र था, न कोई राजा था, न उत्तम, मध्यम एवं अधम का भेद था, सब एकरूप था तथा समस्त दिक्-चक्र अन्धकार से व्याप्त था - इसका मुझे स्मरण है ॥छियालीस॥ इस कल्प के वृतान्त का तो इस कल्प तक की आयुवाले बहुत से लोगों को स्मरण है, यों प्रपंच कर रहे पक्षिराज भुशुण्ड कहते हैं । महाराज, पहले सृष्टि के उत्पादन के लिए सृष्टि का संकल्प हुआ। उसके बाद तीन लोकों में द्वीप आदि अवान्तर प्रदेशों का विभाग हुआ । उसके बाद सात कुलपर्वतों के लिए योग्य स्थान की कल्पना हुई । उसके बाद पृथक् स्थित हुए जम्बूद्वीप में प्रवेश कर स्रष्टा ने ब्राह्मण आदि वर्ण, उनके धर्म एवं उन-उनके लिए योग्य विद्याविशेषों की सृष्टि की। उसके बाद मण्डलरूप में पृथ्वी का विभाग किया, तदनन्तर नक्षत्र-चक्र का उपयोगी संस्थान एवं ध्रुव-मण्डल का निर्माण किया ॥सैंतालीस,अड़तालीस॥ उसके बाद चन्द्रमा और सूर्य का निर्माण हुआ । तदनन्तर इन्द्र एवं उपेन्द्र की व्यवस्था हुई । बाद में हिरण्याक्ष ने पृथ्वी का अपहरण किया। बाद में उसका वराहरूपधारी भगवान ने उद्धार किया ॥उनचास॥ बाद में देव, दानव, मनुष्य आदि प्रत्येक में राजाओं की कल्पना की गई । पश्चात् मत्स्यरूप ग्रहण कर भगवान वेद लाये । मन्दराचल का उन्मूलन किया गया । अमृत के लिए क्षीर-सागर का मंथन हुआ । बाद में अजातपक्ष गरुड़ और समुद्रों की उत्पत्ति हुई - इत्यादि स्वल्प अतीत जगत्क्रम की जो स्मृतियाँ हैं, उनका मेरी अपेक्षा अल्प-आयुवाले वर्तमान काल में उत्पन्न आपके सदृश प्राणी भी स्मरण करते हैं, इसलिए उनमें आदर ही क्या ॥पचास,इक्यावन॥ कल्पान्तरों में अपने द्वारा देखे गये अन्यान्य आश्चर्यों का कथन करते हुए तत्त्ववेत्ता भुशुण्डजी प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं। दीर्घजीविता को प्राप्त हुए मैंने किसी समय यह रहस्य देखा - इस कल्प में प्रसिद्ध गरुडवाहन श्रीविष्णु, हंसवाहन चतुर्मुख ब्रह्मा बनकर देव, दैत्य आदि की सृष्टिरूप कार्य का सम्पादन करते थे, हंसवाहन ब्रह्माजी वृषभवाहन रुद्र बनकर संहार करते थे तथा वृषभवाहन महादेवजी विष्णु शरीर बनकर सृष्टि का पालन करते थे ॥बावन॥ इक्कीसवाँ सर्ग समाप्त बाईसवाँ सर्ग पुनः देखे गये वसिष्ठ के अष्टम जन्म आदि का, सम और अर्धसम सृष्टि का तथा क्षीर-सागर के मंथन आदि का वर्णन । भुशुण्ड ने कहाः भगवन्, उत्पन्न हुए आपको लेकर भरद्वाज, पुलस्त्य, अत्रि, नारद, इन्द्र और मरिचि इनके विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? यानी उनके विस्मरण की तो सम्भावना कभी हो ही नहीं सकती, यह भाव है ) ॥एक॥ पुलह, उद्दालक आदि तथा क्रतु, भृगु, अंगिरा आदि सिद्ध-ऋषि, सनत्कुमार आदि ब्रह्मर्षि एवं भृंगीश, स्कन्द, गजवदन आदि शिवजी के पार्षदों के विषय में तो स्मरण की गणना ही क्या ? ॥दो॥ गौरी, सरस्वती, लक्ष्मी, गायत्री आदि अनेक उनकी शक्तियों तथा सुमेरु, मन्दर, कैलास, हिमालय, दर्दुर आदि पर्वतों के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥तीन॥ हयग्रीव आदि दानवों; हिरण्याक्ष, कालनेमि, बल, हिरण्यकशिपु क्राथ, बलि, प्रह्लाद आदि दैत्यों के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥चार॥ शिबि, न्यंकु, पृथु, उलाख्य, वैन्य, नाभाग, केलि, नल, मान्धाता, सगर, दिलीप, नहुष आदि राजाओं के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥पाँच॥ आत्रेय, व्यास, वाल्मीकि, शुक, वात्स्यान आदि तथा उपमन्यु, मणीमंकि, भगीरथ, शुक आदि के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ? ॥छः॥ जो स्वल्पतर भूतकाल में उत्पन्न हैं, जो कोई कुछ दूर के हैं तथा जो आज के कल्प में उत्पन्न हैं, उनके विषय में स्मरण की गणना ही क्या ? यानी पूर्वोक्त सभी लोगों के विषय में विस्मरण हो ही नहीं सकता, यह भाव है ।।सात।। हे मुने, ब्रह्माजी के पुत्र आपका यह आठवाँ जन्म है । उस आठवें जन्म में आपकी और मेरी संगति हुई - इसका मैं पहले से स्मरण करता हूँ ॥आठ॥ 'आठों जन्मों में क्या मैं ब्रह्माजी का ही पुत्र रहा ?' महाराज वसिष्ठ के इस प्रश्न पर पक्षीन्द्र भुशुण्डजी 'नहीं' यों उत्तर देते हैं। हे मुने, आप किसी समय आकाश से उत्पन्न होते हैं, किसी समय जल से उत्पन्न होते हैं, किसी समय वायु से उत्पन्न होते हैं, तो किसी समय पर्वत और अग्नि से उत्पन्न होते हैं ॥नौ॥ समस्त कल्पों में तत्-तत् अधिकारी पुरुषों के नाम और स्वरूप एक से होने पर भी सब पदार्थों के सप्तम श्लोकस्थ क्रिया के साथ सब सप्तम्यन्तों का सम्बन्ध है। सब अवयव और आचरण एक ही होने चाहिए, यह नियम नहीं है, किन्तु काकतालीयन्याय से किसी समय एक-से ही हो जाते हैं, इस आशय से कहते हैं । महाराज वसिष्ठजी, यह सर्ग जैसा है, इसका जिस प्रकार आचरण है, इसके जिस प्रकार के अवयव संस्थान तथा दिशागण हैं, ठीक इसी तरह के तीन सर्ग पहले हो चुके हैं - इसका मुझे स्मरण है ।।दस।। मुनिवर, मुझे ऐसे दस सर्गों का स्मरण है-जिनमें देवताओं के निखिल आचरण तथा अवयव - गठन एकरूप थे, उनकी आयु समान थी एवं अपने नियत तत् तत् अधिकारपदों में उनकी स्थिति असुरों द्वारा चालित नहीं हुई थी ॥ग्यारह॥ आचारों की समानता बतलाकर अब उनकी विषमता बतलाते हैं । हे मुने, जल में डूबकर तिरोहित हुई पृथ्वी का समुद्र से भगवान कूर्म ने ही, न कि वराह ने, पाँच सर्गों में पाँच बार उद्धार किया ॥बारह॥ हे महाराज, मन्दराचल के आकर्षण के लिए किये गये भारी प्रयत्न के कारण व्याकुल हुए देवता एवं दानवों से युक्त यह अमृतार्थ समुद्र मन्थन बारहवाँ हुआ- ऐसा मुझे स्मरण है ॥तेरह॥ महाराज, पहले स्वर्गस्थ समस्त देवताओं से कर लेनेवाला, हिरण्याक्ष तीन बार समस्त औषधियों तथा रसों से परिपूर्ण इस पृथ्वी को पाताल में ले गया ॥चौदह॥ रेणुका के उदर से जन्म लेकर भगवान नारायण ने, परशुराम-अवतार से शून्य अनेक सर्गों के व्यवधान से भी, यह छठी बार क्षत्रियविनाश किया ।।पंद्रह।। हे मुनिश्रेष्ठ, सौ कलियुग हुए और कीकटदेश के राजारूप से यानी महाराज शुद्धोधन के पुत्ररूप से भगवान नारायण ने सौ बार बुद्धदशा प्राप्त की - इसका मुझे स्मरण है ॥सोलह॥ महाराज, चन्द्रमौलि महादेवजी ने कल्पों में तीस बार त्रिपुरों का विनाश किया, दो बार यानी प्रत्येक कल्प में स्वायंभुव और चाक्षुष मन्वन्तर में दक्षप्रजापति के यज्ञों का विध्वंस किया तथा अपराधी दस इन्द्रों को दण्ड दिया - इसका मुझे स्मरण है ॥सत्रह॥ मुनिवर, बाणासुर के लिए माहेश्वर एवं वैष्णवनामक ज्वरों और प्रमथगणों को शौर्य उत्साह बढ़ाकर प्रवृत्त करानेवाले तथा देवताओं की सेनाओं को प्रचुरमात्रा में क्षुब्ध करनेवाले हरि और हर के आठ संग्राम हुए-इसका मुझे स्मरण है ॥अट्ठारह॥ मुने, मैं युग-युग में अध्येता पुरुषों की बुद्धियों के न्यूनाधिकभाव के कारण क्रियाओं की , अंगों की एवं पाठों की न्यूनाधिकप्रयुक्त विचित्रतता से युक्त वेदों का भी स्मरण करता हूँ ॥उन्नीस॥ हे पापशून्य, युग-युग में प्रत्येक द्वापर के अंत में निर्माताओं के भेद से अनेक पाठवाले, एकार्थक तथा अत्यंत विस्तारयुक्त पुराण प्रवृत्त होते हैं - इसका मुझे स्मरण है ॥बीस॥ मुने, युग-युग में वेद आदि शास्त्रों के विद्वान व्यास, वाल्मीकि आदि महर्षियों द्वारा विरचित उन्हीं महाभारत, रामायण आदि इतिहासों एवं दूसरे इतिहासों का भी मैं स्मरण करता हूँ ॥इक्कीस॥ महाराज, मैं आश्चर्यजनक महती घटनाओं से परिपूर्ण, प्रसिद्ध रामायण से भिन्न दूसरे रामायणनामक लक्षश्लोकात्मक ज्ञानशास्त्र का, जो ब्रह्मदेव द्वारा वसिष्ठ, विश्वामित्र आदि को उपदिष्ट था, स्मरण करता हूँ ॥बाईस॥ उस ज्ञानशास्त्र में मनोयोग देनेवाले महानुभावों के अन्तःकरण में हाथ में फल के सदृश, 'श्रीरामजी की नाईं व्यवहार करना चाहिए और रावण के विलास की नाईं विलास नहीं करना चाहिए' यह ज्ञान समर्पित किया गया है ॥तेईस॥ उक्त ज्ञानशास्त्र के निर्माता महर्षि वाल्मीकि हैं और अब उनके द्वारा वसिष्ठ राम-संवादरूप दूसरे बत्तीस हजार श्लोकात्मक महारामायणरूप ज्ञानशास्त्र की जो रचना की जायेगी, उसका भी दिव्यज्ञान की सामर्थ्य से मैं स्मरण करता हूँ, आप भी समय आनेपर उसे जान जायेंगे ॥चौबीस॥ महाराज वसिष्ठजी, इस भावी वसिष्ठ- राम-संवादरूप ज्ञानशास्त्र की पूर्वकल्प के अथवा दूसरे किसी और वाल्मीकिनामक जीव के द्वारा यद्यपि पहले ही रचना की गई थी, तथापि कल्प के अन्त में व्यवहारकर्ताओं की परम्पराओं के उठ जाने से वह उच्छेद को प्राप्त हो गया था, अतः वर्तमान में उसकी पुनः बारहवीं बार रचना की जायेगी ।।पच्चीस।। महाराज, इसी ज्ञानशास्त्र के बराबर दूसरा ज्ञानशास्त्र था, जिसकी 'महाभारत' इस नाम से प्रसिद्धि थी एवं प्राक्तन व्यासजी के द्वारा रचना की गई थी और जो इस समय जगत में विस्मृति को प्राप्त हो चुका है- मैं उसका स्मरण करता हूँ ॥छब्बीस॥ उसी अथवा दूसरे किसी और व्यासनामक जीव के द्वारा किये गये तथा कल्पान्त में विस्मृति को प्राप्त हुए उस महाभारत की सातवीं बार रचना की जायेगी ॥सत्ताईस॥ हे मुनिराज, युग-युग में प्रवृत्त हुए अनेक आख्यानों एवं शास्त्रों का, जो चित्र-विचित्र घटना-सन्निवेशों से परिपूर्ण थे, मैं स्मरण करता हूँ ॥अट्ठाईस॥ हे साधो, युग-युग में पुनः पुनः उन्हीं-उन्हीं पदार्थों को तथा दूसरे-दूसरे पदार्थों को मैं जानता हूँ-इसका भी मुझे स्मरण है ।।उनतीस।। भगवन्, राक्षसों का विनाश करने के लिए पृथ्वी में अवतार ग्रहण करनेवाले महिमाशाली विष्णु का निकटवर्ती त्रेतायुग में ग्यारहवीं बार 'राम' इस नाम से जन्म होगा ॥तीस॥ हे महर्षे, नृसिंहस्वरूप शरीर से भगवान ने हिरण्यकशिपु का, हाथी का मृगेन्द्र सिंह की नाईं, तीन बार हनन किया ॥इकतीस॥ हे मुनीश्वर, पृथ्वी के भार की निवृत्ति करने के लिए भगवान विष्णु का सोलहवीं बार वसुदेवजी के घर में निकट द्वापर के अन्त में जन्म होगा ॥बत्तीस॥ बाहर यह उत्पन्न होता है, यह भ्रान्ति है, इस आशय से कहते हैं । महाराज, जगद्रूपा इस भ्रान्ति का कभी भी अस्तित्व नहीं है, जल में बुद्बुदों की नाई स्थित हुई यह किसी समय ही अज्ञानवश अस्तित्व रखती हुई-सी प्रतीत होती है ॥ तैंतीस॥ जल में तरंगों की नाईं अति चपल, आत्मा के अन्दर रहनेवाली यह अनित्य दृश्य पदार्थों की भ्रान्ति संवित्-स्वरूप आत्मा में ही उत्पन्न और तत्क्षण लीन हो जाती है ।।चौंतीस।। प्रत्येक सर्ग में भूलोक आदि की अवयवों से समानता का जो नियम है, वह भी औत्सर्गिक है, यों कहते हैं। महाराज, ये तीनों जगत किसी कल्प में समान अवयव - सन्निवेश वाले थे, किसी कल्प में अत्यन्त विषम थे तथा किसी समय आधे समानरूप थे - इसका मुझे स्मरण है ॥पैंतीस॥ मनु आदि अधिकारी पुरुषों के आकारों और चरित्रों की समता भी औत्सर्गिक ही है, ऐसा कहते हैं । महाराज, किसी एक कल्प में जो प्राणी जिस रूप के जो आचार-व्यवहार करते थे, ठीक उसी रूप के वे ही प्राणी तत्परवर्ती कल्प में भी आचार-व्यवहार करते देखे गये तथा दूसरे प्राणी उन्हीं के आचार-व्यवहार करते देखे गये - इसका मुझे वर्तमान में स्मरण है ॥छत्तीस॥ ब्रह्मन्, प्रत्येक मन्वन्तर में जगत-क्रम का विपर्यास हो जाने पर, अवयव सन्निवेश का परिवर्तन हो जाने पर और प्रख्यात जनों का प्रलय हो जाने पर मेरे दूसरे ही मित्र दूसरे ही बान्धव, दूसरे नवीन
पारंपरिक चिकित्सा लंबे विभिन्न रोगों के उपचार के लिए सन बीज का उपयोग किया गया है। इस उपकरण की लोकप्रियता पोषक तत्वों इसमें मौजूद की भर्ती के माध्यम से प्राप्त कर लिया। कभी हिप्पोक्रेट्स के निर्धारित समय के बाद से पेट के रोगों में उपयोग करने के लिए शुरू कर दिया है सन बीज। मतभेद इस अवधि में इस संयंत्र का उपयोग करने के अच्छी तरह से जांच नहीं की है। आज, संयंत्र व्यापक रूप से उपचार और विभिन्न रोगों की रोकथाम के लिए प्रयोग किया जाता है। लाभ और हानि की सन बीज धीरे-धीरे विशेषज्ञों द्वारा पता चला है। इसलिए आज हम सही ढंग से उपयोगी और प्राकृतिक प्राकृतिक चिकित्सा आवेदन कर सकते हैं। यह संस्कृति मानव शरीर पर लाभकारी प्रभाव की एक संख्या हैः - जीवाणुरोधी; - immunostimulant; - नरम; - सफाई; - जीवाणुनाशक; - घेर; - एंटीवायरस। लाभकारी प्रभाव की बड़ी संख्या के बावजूद, खुद को नुकसान पहुँचा सकते हैं, सन बीज का उपयोग। मतभेद नीचे सूचीबद्ध हैं। जटिल मूल्यवान पदार्थों प्राकृतिक औषधियों की प्रभावकारिता प्रदान करता है। सन बीज की संरचना निम्नलिखित घटक शामिल हैंः - पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, बेहतर ओमेगा 3, 6 और 9 के रूप में जाना वे सामान्य मानव जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का सही संतुलन के लिए जिम्मेदार हैं। - अमीनो एसिड। वे एक उच्च पोषण मूल्य की है। - सब्जी फाइबर। यह मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कैंसर की रोकथाम है। - पॉलिसैक्राइड। इन यौगिकों एक जीवाणुनाशक और घेर प्रभाव प्रदान करते हैं। - Lignans। वे एंटीऑक्सीडेंट है, जो कैंसर के विकास को रोकने के हैं। - विटामिनः ए, ई, बी, एफ सन की अपनी सामग्री (बीज) के कारण व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। आवेदन सौंदर्य प्रसाधन की एक किस्म में पाए जाते हैं। - सेलेनियम। यह तत्व, ट्यूमर के गठन को रोकता दृष्टि को बेहतर बनाता है, मस्तिष्क गतिविधि को उत्तेजित करता है। - लेसिथिन। किन रोगों सन बीज का इस्तेमाल किया? के उपचार के लिए संयंत्र का उपयोग करेंः - पेट के रोगों; - जिल्द की सूजन; - हृदय प्रणाली के रोगों; - ऑन्कोलॉजी; - श्वसन रोगों; - मधुमेह; - अंतः स्रावी रोगों; - पाचन तंत्र के रोगों; - भड़काऊ रोगों। सन बीज आहार पोषण के लिए किया जाता है। आज, इस संयंत्र के उपयोग के साथ वजन घटाने के लिए कई व्यंजनों हैं। मूल प्रारूप (पूरे या कटा हुआ) में प्रयोग किया जाता बीज के उपचार के लिए। उन्हें काढ़े, चाय, टिंचर तैयार करें। इसके अलावा स्थानिक पाउडर और तेल संयंत्रों लागू होता है। - प्राप्त करने वाले व्यक्ति जिगर में अप्रिय अनुभूतियां का अनुभव करता है, सन बीज की बहुत छोटी मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। - दवाओं के लिए मतभेद मौजूद हैं कि अगर कोई व्यक्ति बीमार पित्ताशय है। - पित्ताशय और गुर्दे में पथरी - भी विपरीत संकेत, के रूप में सन बीज उन्हें शरीर से हटाने में सक्षम है, और यह चिकित्सा पर्यवेक्षण के बिना खतरनाक है। - पेट और आंतों की सूजन सन बीज का उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती है। - गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। - एलर्जी की पहचान करने में सन बीज के उपयोग को रोकने के लिए की जरूरत है। यह भी मधुमेह, थायराइड रोग, अस्थमा, गरीब रक्त के थक्के, के लिए दवा का उपयोग करने के लिए अनुशंसित नहीं है गर्भाशय फाइब्रॉएड और प्रोस्टेट। इससे पहले सन बीज के उपयोग यह एक डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।
पारंपरिक चिकित्सा लंबे विभिन्न रोगों के उपचार के लिए सन बीज का उपयोग किया गया है। इस उपकरण की लोकप्रियता पोषक तत्वों इसमें मौजूद की भर्ती के माध्यम से प्राप्त कर लिया। कभी हिप्पोक्रेट्स के निर्धारित समय के बाद से पेट के रोगों में उपयोग करने के लिए शुरू कर दिया है सन बीज। मतभेद इस अवधि में इस संयंत्र का उपयोग करने के अच्छी तरह से जांच नहीं की है। आज, संयंत्र व्यापक रूप से उपचार और विभिन्न रोगों की रोकथाम के लिए प्रयोग किया जाता है। लाभ और हानि की सन बीज धीरे-धीरे विशेषज्ञों द्वारा पता चला है। इसलिए आज हम सही ढंग से उपयोगी और प्राकृतिक प्राकृतिक चिकित्सा आवेदन कर सकते हैं। यह संस्कृति मानव शरीर पर लाभकारी प्रभाव की एक संख्या हैः - जीवाणुरोधी; - immunostimulant; - नरम; - सफाई; - जीवाणुनाशक; - घेर; - एंटीवायरस। लाभकारी प्रभाव की बड़ी संख्या के बावजूद, खुद को नुकसान पहुँचा सकते हैं, सन बीज का उपयोग। मतभेद नीचे सूचीबद्ध हैं। जटिल मूल्यवान पदार्थों प्राकृतिक औषधियों की प्रभावकारिता प्रदान करता है। सन बीज की संरचना निम्नलिखित घटक शामिल हैंः - पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड, बेहतर ओमेगा तीन, छः और नौ के रूप में जाना वे सामान्य मानव जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का सही संतुलन के लिए जिम्मेदार हैं। - अमीनो एसिड। वे एक उच्च पोषण मूल्य की है। - सब्जी फाइबर। यह मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कैंसर की रोकथाम है। - पॉलिसैक्राइड। इन यौगिकों एक जीवाणुनाशक और घेर प्रभाव प्रदान करते हैं। - Lignans। वे एंटीऑक्सीडेंट है, जो कैंसर के विकास को रोकने के हैं। - विटामिनः ए, ई, बी, एफ सन की अपनी सामग्री के कारण व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। आवेदन सौंदर्य प्रसाधन की एक किस्म में पाए जाते हैं। - सेलेनियम। यह तत्व, ट्यूमर के गठन को रोकता दृष्टि को बेहतर बनाता है, मस्तिष्क गतिविधि को उत्तेजित करता है। - लेसिथिन। किन रोगों सन बीज का इस्तेमाल किया? के उपचार के लिए संयंत्र का उपयोग करेंः - पेट के रोगों; - जिल्द की सूजन; - हृदय प्रणाली के रोगों; - ऑन्कोलॉजी; - श्वसन रोगों; - मधुमेह; - अंतः स्रावी रोगों; - पाचन तंत्र के रोगों; - भड़काऊ रोगों। सन बीज आहार पोषण के लिए किया जाता है। आज, इस संयंत्र के उपयोग के साथ वजन घटाने के लिए कई व्यंजनों हैं। मूल प्रारूप में प्रयोग किया जाता बीज के उपचार के लिए। उन्हें काढ़े, चाय, टिंचर तैयार करें। इसके अलावा स्थानिक पाउडर और तेल संयंत्रों लागू होता है। - प्राप्त करने वाले व्यक्ति जिगर में अप्रिय अनुभूतियां का अनुभव करता है, सन बीज की बहुत छोटी मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। - दवाओं के लिए मतभेद मौजूद हैं कि अगर कोई व्यक्ति बीमार पित्ताशय है। - पित्ताशय और गुर्दे में पथरी - भी विपरीत संकेत, के रूप में सन बीज उन्हें शरीर से हटाने में सक्षम है, और यह चिकित्सा पर्यवेक्षण के बिना खतरनाक है। - पेट और आंतों की सूजन सन बीज का उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती है। - गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। - एलर्जी की पहचान करने में सन बीज के उपयोग को रोकने के लिए की जरूरत है। यह भी मधुमेह, थायराइड रोग, अस्थमा, गरीब रक्त के थक्के, के लिए दवा का उपयोग करने के लिए अनुशंसित नहीं है गर्भाशय फाइब्रॉएड और प्रोस्टेट। इससे पहले सन बीज के उपयोग यह एक डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।
भारत की जी20 अध्यक्षता के अंतर्गत ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जी20 कार्य समूह की दूसरी बैठक के हिस्से के रूप में, भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, खान मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय ने आज गांधीनगर, गुजरात में आधिकारिक सह-कार्यक्रम "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" की मेजबानी की। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के लिए मूल्य श्रृंखलाओं में चक्रीयता को बढ़ावा देने समेत नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और इन्हें सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव श्री भूपिंदर सिंह भल्ला ने अपने मुख्य भाषण में कहा, "भारत अपनी जी20 अध्यक्षता के तहत राजनेताओं, विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, ऊर्जा क्षेत्र को वित्त उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और अन्य प्रमुख हितधारकों की मेजबानी करने में गर्व महसूस करता है, ताकि वे विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं और विनिर्माण के वितरण-आधारित विस्तार के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े लागत प्रभावी और जोखिम-रहित पैमाने के विस्तार की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित कर सकें। हम आशा करते हैं और हमें उम्मीद है कि आज के विचार-विमर्श सामूहिक परिवर्तन के घटकों की पहचान करने में मदद करेंगे, जो दुनिया को अक्षय ऊर्जा के तेजी से विस्तार के मार्ग पर आगे बढ़ाएगा और लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य तथा जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।" श्री भल्ला ने कहा कि आर्थिक व्यवधानों की एक श्रृंखला ने दुनिया को उन जोखिमों के सामने ला खड़ा किया है, जो विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की प्रक्रिया की गति को धीमा कर रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा रहे हैं। श्री भूपिंदर सिंह भल्ला, सचिव, एमएनआरई 3 अप्रैल 2023 को गांधीनगर, गुजरात में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जी20 कार्य समूह की दूसरी बैठक के सह- कार्यक्रम, "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" में मुख्य भाषण देते हुए। बैठक के लिए संदर्भ विषय के बारे में खान मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि अधिकांश महत्वपूर्ण खनिज भंडार 15 देशों में हैं। "मानव जाति ने कई संकटों का मुकाबला किया है - चाहे ओजोन परत का क्षरण हो, कोविड महामारी हो या 1970 के दशक का ऊर्जा संकट हो। मुझे यकीन है कि हम खनिजों की अहमियत से जुड़े समाधान निकालने में भी सक्षम होंगे। भारत सरकार देश को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। खान मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज 3 अप्रैल 2023 को गांधीनगर, गुजरात में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जी20 कार्य समूह की दूसरी बैठक के सह- कार्यक्रम, "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" में मुख्य भाषण देते हुए। गुजरात सरकार के ऊर्जा और पेट्रो-रसायन विभाग की प्रधान सचिव सुश्री ममता वर्मा ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में गुजरात की भूमिका के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "गुजरात अपनी नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों और विनिर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाने में विशेष ध्यान दे रहा है। हमें आपूर्ति श्रृंखलाओं, एक मजबूत आर एंड डी व्यवस्था एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों को मजबूत करने के लिए एक अच्छी रूपरेखा बनाने की आवश्यकता है, ताकि नए विनिर्माण केंद्र विकसित हो सकें। सीईईडब्ल्यू के सीईओ डॉ. अरुणाभ घोष ने जोर देकर कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक त्वरित, सहनीय और समावेशी परिवर्तन तभी संभव होगा, जब देश प्रमुख प्रौद्योगिकियों की निर्बाध और किफायती आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा, "अपनी जी20 अध्यक्षता के माध्यम से, भारत विस्तार और विविधीकरण रणनीतियों की जानकारी देने तथा व्यापार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक आरई विनिर्माण क्षमता और व्यापार प्रवाह की व्यापक निगरानी को बढ़ावा दे सकता है।" इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा और नीति-निर्माण से क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में दो रिपोर्ट लॉन्च की गयीं - सीईईडब्ल्यू की 'विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के लिए सहनीय अक्षय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास करना', और सीईईडब्ल्यू, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए), इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन स्टडीज यूसी डेविस और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्यूआरआईआई) की रिपोर्ट "महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला की कमियों का समाधान करना।" इसमें नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुनिश्चित करने एवं उत्पादन और चक्रीयता को बढ़ाकर खनिज मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर दो पैनल चर्चाएँ भी शामिल थीं। पैनल 1: नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुनिश्चित करना (बाएं से दाएंः अरुणाभ घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू, डॉ. वी अनबुमोझी, निदेशक, अनुसंधान रणनीति और नवाचार, ईआरआईए, श्री भूपिंदर सिंह भल्ला, सचिव, एमएनआरई, डॉ. अजय माथुर, महानिदेशक, आईएसए, डॉ. ब्रायन मदरवे, प्रमुख, ऊर्जा दक्षता प्रभाग, आईईए और डॉ. प्रदीप थराकन, निदेशक, ऊर्जा संक्रमण, एडीबी) पैनल 2: उत्पादन और चक्रीयता को बढ़ाकर खनिज मूल्य श्रृंखला को मजबूत को मजबूत करना (बाएँ से दाएँः श्री ऋषभ जैन, सीईईडब्ल्यू, श्री आरआर मिश्रा, सह-अध्यक्ष, सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन पावर, और एमडी, अप्रावा एनर्जी लिमिटेड, श्री विवेक भारद्वाज, सचिव, खान मंत्रालय; सुश्री गौरी सिंह, उप महानिदेशक, आईआरईएनए, श्री राजर्षि गुप्ता, प्रबंध निदेशक, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड, श्री मयंक चौधरी, यूनिट हेड फॉर साउथ एशिया, प्राइवेट सेक्टर ऑपरेशंस, एडीबी।) डॉ. वीना कुमारी डी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय और श्री दिनेश डी जगदाले, संयुक्त सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने समापन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने आगे के रास्ते, संसाधनों के सावधानीपूर्वक उपयोग, सहनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रौद्योगिकियां सुनिश्चित किये जाने के बारे में बात की। वक्ताओं में श्री केनिची योकोयामा, महानिदेशक, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय विभाग, एशियाई विकास बैंक (एडीबी), डॉ. ब्रायन मदरवे, प्रमुख, ऊर्जा दक्षता प्रभाग, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए), डॉ. अजय माथुर, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), श्री ऋषभ जैन, सीनियर प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू, सुश्री गौरी सिंह, उप महानिदेशक, आईआरईएनए, श्री राजर्षि गुप्ता, प्रबंध निदेशक, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड, श्री राजीव रंजन मिश्रा, सह-अध्यक्ष, सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन पावर और एमडी, अप्रावा एनर्जी लिमिटेड, श्री मयंक चौधरी, यूनिट हेड फॉर साउथ एशिया, प्राइवेट सेक्टर ऑपरेशंस, एडीबी, डॉ वी अनबुमोझी, निदेशक, अनुसंधान रणनीति और नवाचार, आसियान और पूर्वी एशिया के लिए आर्थिक अनुसंधान संस्थान (ईआरआईए) और डॉ प्रदीप थराकन, निदेशक, एनर्जी ट्रांजीशन, एडीबी शामिल थे। सम्मेलन का वीडियो यहां उपलब्ध है।
भारत की जीबीस अध्यक्षता के अंतर्गत ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जीबीस कार्य समूह की दूसरी बैठक के हिस्से के रूप में, भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, खान मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय ने आज गांधीनगर, गुजरात में आधिकारिक सह-कार्यक्रम "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" की मेजबानी की। एशियाई विकास बैंक और ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के लिए मूल्य श्रृंखलाओं में चक्रीयता को बढ़ावा देने समेत नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और इन्हें सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री भूपिंदर सिंह भल्ला ने अपने मुख्य भाषण में कहा, "भारत अपनी जीबीस अध्यक्षता के तहत राजनेताओं, विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, ऊर्जा क्षेत्र को वित्त उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और अन्य प्रमुख हितधारकों की मेजबानी करने में गर्व महसूस करता है, ताकि वे विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं और विनिर्माण के वितरण-आधारित विस्तार के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े लागत प्रभावी और जोखिम-रहित पैमाने के विस्तार की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित कर सकें। हम आशा करते हैं और हमें उम्मीद है कि आज के विचार-विमर्श सामूहिक परिवर्तन के घटकों की पहचान करने में मदद करेंगे, जो दुनिया को अक्षय ऊर्जा के तेजी से विस्तार के मार्ग पर आगे बढ़ाएगा और लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य तथा जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।" श्री भल्ला ने कहा कि आर्थिक व्यवधानों की एक श्रृंखला ने दुनिया को उन जोखिमों के सामने ला खड़ा किया है, जो विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की प्रक्रिया की गति को धीमा कर रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा रहे हैं। श्री भूपिंदर सिंह भल्ला, सचिव, एमएनआरई तीन अप्रैल दो हज़ार तेईस को गांधीनगर, गुजरात में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जीबीस कार्य समूह की दूसरी बैठक के सह- कार्यक्रम, "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" में मुख्य भाषण देते हुए। बैठक के लिए संदर्भ विषय के बारे में खान मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि अधिकांश महत्वपूर्ण खनिज भंडार पंद्रह देशों में हैं। "मानव जाति ने कई संकटों का मुकाबला किया है - चाहे ओजोन परत का क्षरण हो, कोविड महामारी हो या एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक का ऊर्जा संकट हो। मुझे यकीन है कि हम खनिजों की अहमियत से जुड़े समाधान निकालने में भी सक्षम होंगे। भारत सरकार देश को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। खान मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज तीन अप्रैल दो हज़ार तेईस को गांधीनगर, गुजरात में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जीबीस कार्य समूह की दूसरी बैठक के सह- कार्यक्रम, "ऊर्जा स्रोतों में बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना" में मुख्य भाषण देते हुए। गुजरात सरकार के ऊर्जा और पेट्रो-रसायन विभाग की प्रधान सचिव सुश्री ममता वर्मा ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में गुजरात की भूमिका के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "गुजरात अपनी नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों और विनिर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाने में विशेष ध्यान दे रहा है। हमें आपूर्ति श्रृंखलाओं, एक मजबूत आर एंड डी व्यवस्था एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों को मजबूत करने के लिए एक अच्छी रूपरेखा बनाने की आवश्यकता है, ताकि नए विनिर्माण केंद्र विकसित हो सकें। सीईईडब्ल्यू के सीईओ डॉ. अरुणाभ घोष ने जोर देकर कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक त्वरित, सहनीय और समावेशी परिवर्तन तभी संभव होगा, जब देश प्रमुख प्रौद्योगिकियों की निर्बाध और किफायती आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा, "अपनी जीबीस अध्यक्षता के माध्यम से, भारत विस्तार और विविधीकरण रणनीतियों की जानकारी देने तथा व्यापार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक आरई विनिर्माण क्षमता और व्यापार प्रवाह की व्यापक निगरानी को बढ़ावा दे सकता है।" इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा और नीति-निर्माण से क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में दो रिपोर्ट लॉन्च की गयीं - सीईईडब्ल्यू की 'विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के लिए सहनीय अक्षय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास करना', और सीईईडब्ल्यू, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी , इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन स्टडीज यूसी डेविस और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया की रिपोर्ट "महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला की कमियों का समाधान करना।" इसमें नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुनिश्चित करने एवं उत्पादन और चक्रीयता को बढ़ाकर खनिज मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर दो पैनल चर्चाएँ भी शामिल थीं। पैनल एक: नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुनिश्चित करना पैनल दो: उत्पादन और चक्रीयता को बढ़ाकर खनिज मूल्य श्रृंखला को मजबूत को मजबूत करना डॉ. वीना कुमारी डी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय और श्री दिनेश डी जगदाले, संयुक्त सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने समापन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने आगे के रास्ते, संसाधनों के सावधानीपूर्वक उपयोग, सहनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रौद्योगिकियां सुनिश्चित किये जाने के बारे में बात की। वक्ताओं में श्री केनिची योकोयामा, महानिदेशक, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय विभाग, एशियाई विकास बैंक , डॉ. ब्रायन मदरवे, प्रमुख, ऊर्जा दक्षता प्रभाग, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी , डॉ. अजय माथुर, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन , श्री ऋषभ जैन, सीनियर प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू, सुश्री गौरी सिंह, उप महानिदेशक, आईआरईएनए, श्री राजर्षि गुप्ता, प्रबंध निदेशक, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड, श्री राजीव रंजन मिश्रा, सह-अध्यक्ष, सीआईआई नेशनल कमेटी ऑन पावर और एमडी, अप्रावा एनर्जी लिमिटेड, श्री मयंक चौधरी, यूनिट हेड फॉर साउथ एशिया, प्राइवेट सेक्टर ऑपरेशंस, एडीबी, डॉ वी अनबुमोझी, निदेशक, अनुसंधान रणनीति और नवाचार, आसियान और पूर्वी एशिया के लिए आर्थिक अनुसंधान संस्थान और डॉ प्रदीप थराकन, निदेशक, एनर्जी ट्रांजीशन, एडीबी शामिल थे। सम्मेलन का वीडियो यहां उपलब्ध है।
पूर्वक जिंदगी बितानी है तो मुझे झूठी गवाही देनी ही पड़ेगी। इसके सिवा मेरे सामने दूसरा कोई उपाय नहीं है!" प्रसून ने स्पष्ट शब्दों में कहा । नौकर ने जाकर दीपक को प्रसून की बातें सुनाई, दीपक बड़ा प्रसन्न हुआ । दूसरे दिन की संध्या को प्रसून को एक बार और समझाने के ख्याल से दीपक उसके घर गया। घर के भीतर मैनाक की पत्नी प्रसून से विनती कर रही थी- "बाबू साहब! मेरे पति की रक्षा आप ही को करनी है। उन्होंने तो कोई अपराध नहीं किया है। उनको अगर सज़ा मिल गई तो में और मेरे बच्चे अनाथ हो जायेंगे।" प्रसून का उत्तर सुनने के ख्याल से दीपक घर के बाहर ही खड़ा रह गया। मुझे माफ़ कर दो, बहन ! में दीपक का नौकर हूँ। उनके हित में ही मेरा हित है। " प्रसून ने जवाब दिया। इस पर वह औरत प्रसून की निंदा करके अपने घर चली गई। इसके बाद दीपक ने घर के भीतर जाकर प्रसून की तारीफ़ की। प्रसून के प्रति दीपक के मन में गहरा विश्वास जम गया। इसके दूसरे दिन ही राजा ने मैनाक की सुनवाई की। मैनाक ने राजा से निवेदन किया-"महाराज ! में बिलकुल निर्दोष में बिलकुल निर्दोष । जिस वक्त हत्या हुई थी, उस वक़्त प्रसून भी वहाँ पर थे। उन्होंने अपनी आँखों से इस हत्या के होते देख लिया है। राजा ने प्रसून को आदेश दिया कि वह वास्तविक बात सच सच बता दे । "महाराज ! दीपक ने ही हत्या की है। उस हत्या के साथ मैनाक का कोई संबंध नहीं है।" प्रसून ने कहा । फिर क्या था, दीपक ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। राजा ने दीपक को मृत्यु दण्ड सुनाकर मैनाक को मुक्त कर दिया । बेताल ने यह कहानी सुनाकर कहा"राजन ! प्रसून "राजन ! प्रसून पहले झूठी गवाही देने को क्यों तैयार हो गया ? क्या अपने मालिक के प्रति स्वामिभक्ति के कारण से, या दीपक द्वारा प्राप्त होनेवाले धन के लोभ के कारण? फिर ऐसा व्यक्ति राजा के सामने बिना कारण के अपने विचार को बदलकर सच क्यों बोला ? उसके मुँह से सत्य के निकलते ही दीपक ने अपने अपराध को क्यों स्वीकार कर लिया ? इन संदेहों का समाधान जानते हुए भी न दोगे तो तुम्हारा सिर टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा! इस पर विक्रमार्क ने कहा-"प्रसून ने अपना विचार नहीं बदला ! यह बात स्पष्ट है कि वह स्वभाव से ही सत्यवादी है। लेकिन दीपक ने उसको जाँच करने के लिए अपने नौकर को भेजा, एक बार और उसे स्पष्ट करने के लिए वह स्वयं उसके घर गया। अब प्रसून के द्वारा सच बताने की बात को छिपाने के कई कारण हैं। यदि उसके द्वारा सच बताने की बात प्रकट हो जाएगी तो दीपक अपने अपराध से बचने के अनेक प्रयत्न कर सकता है। इसलिए दीपक का उस पर विश्वास पैदा करना अत्यंत आवश्यक है । अलावा इसके उसके मन में यह लोभ भी नहीं है कि वह ईमानदार और सत्यवती है, इस बात को सारा समाज जान ले। वह मैनाक की पत्नी की किसी भी प्रकार से सहायता करने जा रहा है, ऐसी हालत में इस बात को पहले ही प्रकट करने से उसका कोई विशेष उपकार भी होनेवाला नहीं है । अब दीपक के द्वारा अपराध को स्वीकार करने का कारण यह है कि सच्चाई को जाननेवाले अनेक नौकर भी हैं। प्रसून पर उसका पूर्ण विश्वास था कि वह ज़रूर उसके अनुकूल गवाही देगा, उसीने उसके विरुद्ध गवाही दी तो उसका यह विश्वास हिल गया कि क्षुद्र नौकर उसे बचा नहीं सकते। इस कारण से उसने सच्चाई को स्वीकार कर लिया।' राजा के इस प्रकार मौन भंग होते ही बेताल शव के साथ गायब हो पेड़ पर जा बैठा । (कल्पित) शीतलपुर का जमीन्दार नगेन्द्र कलाप्रिय थे। वे चित्रकार, संगीतकार, नर्तक तथा कवियों का सम्मान किया करते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनका पुत्र वीरेन्द्र ज़मीन्दार बना। वह कला-प्रिय था, परंतु मल्लविद्या में निपुण व्यक्तियों का वह आदर-सम्मान किया करता था । नगेन्द्र के ज़माने में जो कलाकार शीतलपुर में आये थे, उनका अब समान तो नहीं हुआ, बल्कि उन्हें साधारण तौर पर जो भेंट व पुरस्कार मिलते थे, वे भी बंद कर दिये गये। साथ ही दरबारी कवि कुशारी से वीरेन्द्र द्वेष भाव रखता था। कुशारी सहज प्रतिभा के धनी थे । इसलिए नगेन्द्र ने उन्हें बुलवाकर जागीरी ही न दी, बल्कि वार्षिक शुल्क भी देकर उनको अपने दरबारी कवि नियुक्त किया। इस पर कुशारी ने नगेन्द्र चरित तथा उसके पूर्वजों कवि की चातुरी का इतहास भी पाँच भागों में रचा। ये पाँचों भाग राजमहल के ग्रंथालय में सुरक्षित रखे गये थे। दशहरा के बाद दो महीनों तक उन भागों का पारायण होता था । जमीन्दार के इलाके के सभी युवक आकर उनका श्रवण करते थे । वीरेन्द्र जब ज़मीन्दार बना, तब कुशारी को दरबार में बुलवाकर कहा- "कवि महोदय, आप को अपने दरबारी कवि का मोहदा बचाये रखने के लिए एक मौक़ा दे रहा हूँ। वैसे में कविता करनेवालों को दान देना नहीं चाहता, फिर भी मेरे पिता ने आप की कविता की प्रतिभा पर प्रसन्न हो आप को दरबारी कवि नियुक्त किया है, इसलिए में आप के प्रति अन्याय करना नहीं चाहता। यदि आप मेरे संबंध में एक और जिल्द न रचेंगे तो आप को अपने इस पद से हटाना पड़ेगा। ए. सी. सरकार, जादूगर ये बातें कवि कुशारी को अत्यंत अपमानजनक प्रतीत हुई, परंतु वह कुछ बोल नहीं पाया । उसने छठी जिल्द की • रचना करने को मान लिया और कहा"हुजूर! में पाँचवाँ भाग अपने घर ले जाऊँगा, उसे पुनः पढ़कर उसी शैली में छठे भाग की रचना करूंगा । वीरेन्द्र ने कुशारी को अनुमति दी । कुशारी पाँचवाँ भाग अपने घर ले गया और लेखन का काम शुरू किया। एक महीने के भीतर आधा भाग तैयार हो गया। वीरेन्द्र ने दरबार में अपने प्रशंसकों के बीच छठे भाग का आधा अंश पाठ कराया। सब ने कुशारी की कविता की तारीफ़ की । वह प्रसन्न हो घर लौट आया। दिन-रात बैठकर छठे भाग की पूर्ति की । मगर दुर्भाग्य कुशारी का पीछा कर रहा था। उस रात को उसके घर आग लग गई और उसके छठे भाग के साथ पाँचवाँ भाग भी जलकर राख हो गया । कुशारी ने भाँप लिया कि अब वीरेन्द्र उसे क्षमा नहीं करेगा । उसके विचार के अनुसार वीरेन्द्र के सेवक आकर कुशारी को दरबार में बुला ले गये । पाँचव भाग अब कैसे प्राप्त होगा ?" वीरेन्द्र ने कुशारी से गरजकर पूछा। "उसकी रचना तो मैंने ही की है । में पुनः उसे लिखूंगा, पहले की अपेक्षा और अच्छा लिखूंगा।" कुशारी ने जवाब दिया। "यह तो असंभव है। वह पहले जैसा कभी रचा नहीं जा सकता । पाँचव भाग उसी रूप में फिर से लिखा नहीं जा सकता । घर के जलने में आप की असावधानी है। इसके लिए आप को दण्ड भोगना पड़ेगा। यह दण्ड क्या हो, इसका निर्णय में तीन दिन के अन्दर कर लूंगा । अब आप जा सकते हैं। " वीरेन्द्र ने कड़क कर कहा ।
पूर्वक जिंदगी बितानी है तो मुझे झूठी गवाही देनी ही पड़ेगी। इसके सिवा मेरे सामने दूसरा कोई उपाय नहीं है!" प्रसून ने स्पष्ट शब्दों में कहा । नौकर ने जाकर दीपक को प्रसून की बातें सुनाई, दीपक बड़ा प्रसन्न हुआ । दूसरे दिन की संध्या को प्रसून को एक बार और समझाने के ख्याल से दीपक उसके घर गया। घर के भीतर मैनाक की पत्नी प्रसून से विनती कर रही थी- "बाबू साहब! मेरे पति की रक्षा आप ही को करनी है। उन्होंने तो कोई अपराध नहीं किया है। उनको अगर सज़ा मिल गई तो में और मेरे बच्चे अनाथ हो जायेंगे।" प्रसून का उत्तर सुनने के ख्याल से दीपक घर के बाहर ही खड़ा रह गया। मुझे माफ़ कर दो, बहन ! में दीपक का नौकर हूँ। उनके हित में ही मेरा हित है। " प्रसून ने जवाब दिया। इस पर वह औरत प्रसून की निंदा करके अपने घर चली गई। इसके बाद दीपक ने घर के भीतर जाकर प्रसून की तारीफ़ की। प्रसून के प्रति दीपक के मन में गहरा विश्वास जम गया। इसके दूसरे दिन ही राजा ने मैनाक की सुनवाई की। मैनाक ने राजा से निवेदन किया-"महाराज ! में बिलकुल निर्दोष में बिलकुल निर्दोष । जिस वक्त हत्या हुई थी, उस वक़्त प्रसून भी वहाँ पर थे। उन्होंने अपनी आँखों से इस हत्या के होते देख लिया है। राजा ने प्रसून को आदेश दिया कि वह वास्तविक बात सच सच बता दे । "महाराज ! दीपक ने ही हत्या की है। उस हत्या के साथ मैनाक का कोई संबंध नहीं है।" प्रसून ने कहा । फिर क्या था, दीपक ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। राजा ने दीपक को मृत्यु दण्ड सुनाकर मैनाक को मुक्त कर दिया । बेताल ने यह कहानी सुनाकर कहा"राजन ! प्रसून "राजन ! प्रसून पहले झूठी गवाही देने को क्यों तैयार हो गया ? क्या अपने मालिक के प्रति स्वामिभक्ति के कारण से, या दीपक द्वारा प्राप्त होनेवाले धन के लोभ के कारण? फिर ऐसा व्यक्ति राजा के सामने बिना कारण के अपने विचार को बदलकर सच क्यों बोला ? उसके मुँह से सत्य के निकलते ही दीपक ने अपने अपराध को क्यों स्वीकार कर लिया ? इन संदेहों का समाधान जानते हुए भी न दोगे तो तुम्हारा सिर टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा! इस पर विक्रमार्क ने कहा-"प्रसून ने अपना विचार नहीं बदला ! यह बात स्पष्ट है कि वह स्वभाव से ही सत्यवादी है। लेकिन दीपक ने उसको जाँच करने के लिए अपने नौकर को भेजा, एक बार और उसे स्पष्ट करने के लिए वह स्वयं उसके घर गया। अब प्रसून के द्वारा सच बताने की बात को छिपाने के कई कारण हैं। यदि उसके द्वारा सच बताने की बात प्रकट हो जाएगी तो दीपक अपने अपराध से बचने के अनेक प्रयत्न कर सकता है। इसलिए दीपक का उस पर विश्वास पैदा करना अत्यंत आवश्यक है । अलावा इसके उसके मन में यह लोभ भी नहीं है कि वह ईमानदार और सत्यवती है, इस बात को सारा समाज जान ले। वह मैनाक की पत्नी की किसी भी प्रकार से सहायता करने जा रहा है, ऐसी हालत में इस बात को पहले ही प्रकट करने से उसका कोई विशेष उपकार भी होनेवाला नहीं है । अब दीपक के द्वारा अपराध को स्वीकार करने का कारण यह है कि सच्चाई को जाननेवाले अनेक नौकर भी हैं। प्रसून पर उसका पूर्ण विश्वास था कि वह ज़रूर उसके अनुकूल गवाही देगा, उसीने उसके विरुद्ध गवाही दी तो उसका यह विश्वास हिल गया कि क्षुद्र नौकर उसे बचा नहीं सकते। इस कारण से उसने सच्चाई को स्वीकार कर लिया।' राजा के इस प्रकार मौन भंग होते ही बेताल शव के साथ गायब हो पेड़ पर जा बैठा । शीतलपुर का जमीन्दार नगेन्द्र कलाप्रिय थे। वे चित्रकार, संगीतकार, नर्तक तथा कवियों का सम्मान किया करते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनका पुत्र वीरेन्द्र ज़मीन्दार बना। वह कला-प्रिय था, परंतु मल्लविद्या में निपुण व्यक्तियों का वह आदर-सम्मान किया करता था । नगेन्द्र के ज़माने में जो कलाकार शीतलपुर में आये थे, उनका अब समान तो नहीं हुआ, बल्कि उन्हें साधारण तौर पर जो भेंट व पुरस्कार मिलते थे, वे भी बंद कर दिये गये। साथ ही दरबारी कवि कुशारी से वीरेन्द्र द्वेष भाव रखता था। कुशारी सहज प्रतिभा के धनी थे । इसलिए नगेन्द्र ने उन्हें बुलवाकर जागीरी ही न दी, बल्कि वार्षिक शुल्क भी देकर उनको अपने दरबारी कवि नियुक्त किया। इस पर कुशारी ने नगेन्द्र चरित तथा उसके पूर्वजों कवि की चातुरी का इतहास भी पाँच भागों में रचा। ये पाँचों भाग राजमहल के ग्रंथालय में सुरक्षित रखे गये थे। दशहरा के बाद दो महीनों तक उन भागों का पारायण होता था । जमीन्दार के इलाके के सभी युवक आकर उनका श्रवण करते थे । वीरेन्द्र जब ज़मीन्दार बना, तब कुशारी को दरबार में बुलवाकर कहा- "कवि महोदय, आप को अपने दरबारी कवि का मोहदा बचाये रखने के लिए एक मौक़ा दे रहा हूँ। वैसे में कविता करनेवालों को दान देना नहीं चाहता, फिर भी मेरे पिता ने आप की कविता की प्रतिभा पर प्रसन्न हो आप को दरबारी कवि नियुक्त किया है, इसलिए में आप के प्रति अन्याय करना नहीं चाहता। यदि आप मेरे संबंध में एक और जिल्द न रचेंगे तो आप को अपने इस पद से हटाना पड़ेगा। ए. सी. सरकार, जादूगर ये बातें कवि कुशारी को अत्यंत अपमानजनक प्रतीत हुई, परंतु वह कुछ बोल नहीं पाया । उसने छठी जिल्द की • रचना करने को मान लिया और कहा"हुजूर! में पाँचवाँ भाग अपने घर ले जाऊँगा, उसे पुनः पढ़कर उसी शैली में छठे भाग की रचना करूंगा । वीरेन्द्र ने कुशारी को अनुमति दी । कुशारी पाँचवाँ भाग अपने घर ले गया और लेखन का काम शुरू किया। एक महीने के भीतर आधा भाग तैयार हो गया। वीरेन्द्र ने दरबार में अपने प्रशंसकों के बीच छठे भाग का आधा अंश पाठ कराया। सब ने कुशारी की कविता की तारीफ़ की । वह प्रसन्न हो घर लौट आया। दिन-रात बैठकर छठे भाग की पूर्ति की । मगर दुर्भाग्य कुशारी का पीछा कर रहा था। उस रात को उसके घर आग लग गई और उसके छठे भाग के साथ पाँचवाँ भाग भी जलकर राख हो गया । कुशारी ने भाँप लिया कि अब वीरेन्द्र उसे क्षमा नहीं करेगा । उसके विचार के अनुसार वीरेन्द्र के सेवक आकर कुशारी को दरबार में बुला ले गये । पाँचव भाग अब कैसे प्राप्त होगा ?" वीरेन्द्र ने कुशारी से गरजकर पूछा। "उसकी रचना तो मैंने ही की है । में पुनः उसे लिखूंगा, पहले की अपेक्षा और अच्छा लिखूंगा।" कुशारी ने जवाब दिया। "यह तो असंभव है। वह पहले जैसा कभी रचा नहीं जा सकता । पाँचव भाग उसी रूप में फिर से लिखा नहीं जा सकता । घर के जलने में आप की असावधानी है। इसके लिए आप को दण्ड भोगना पड़ेगा। यह दण्ड क्या हो, इसका निर्णय में तीन दिन के अन्दर कर लूंगा । अब आप जा सकते हैं। " वीरेन्द्र ने कड़क कर कहा ।
- just now ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - 22 min ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! भले ही आलोचकों ने साजिद खान की फिल्म 'हमशकल्स' को बोकस और बकवास करार दिया हो लेकिन जनता ने फिल्म को गले से लगा लिया है जिसकी वजह से फिल्म की पूरी स्टारकास्ट काफी खुश है। फिल्म के निर्माता ने इसी कारण फिल्म 'हमशकल्स' की सक्सेस पार्टी रखी थी और जमकर अपने कलाकारों को फिल्म के लिए बधाई दी और तहे दिल से जनता को धन्यवाद दिया। फिल्म 'हमशकल्स' के निर्माता वाशु भगनानी ने साजिद खान निर्देशित फिल्म 'हमशकल्स' के बारे में कहा कि लोगों ने इस फिल्म के बारे में गलत प्रचार किया। इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने खुद को साबित किया। आपको बता दें कि सैफ अली खान, रितेश देशमुख, राम कपूर, बिपाशा बसु, ईशा गुप्ता और तमन्ना भाटिया अभिनीत इस फिल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। हालांकि सोशल नेटवर्किं ग साइटों पर इस फिल्म को बकवास कहा गया। भगनानी ने 20 जून को रिलीज होने के बाद चार दिनों के अंदर फिल्म द्वारा 76 करोड़ के व्यापार का दावा किया है। वे इससे बेहद खुश हैं। भगनानी ने कहा, "बहुत-बहुत धन्यवाद। कुछ लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइटों पर इस फिल्म को बेकार कहा। लेकिन दर्शकों ने साबित कर दिया कि फिल्म अच्छी है। " फिल्म आलोचकों से फिल्म को बेहतर प्रतिक्रिया न मिलने पर भागनानी ने कहा, "आलोचनाओं पर हम कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि हमें इंडस्ट्री में ही रहना है। यह उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है। हमलोग फिल्म दर्शकों के लिए बनाते हैं और अच्छे परिणाम से हम बेहद खुश हैं। " कैसी थी यह सक्सेस पार्टी इसको जानने के लिए आप नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये।
- just now ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! - बाईस मिनट ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! भले ही आलोचकों ने साजिद खान की फिल्म 'हमशकल्स' को बोकस और बकवास करार दिया हो लेकिन जनता ने फिल्म को गले से लगा लिया है जिसकी वजह से फिल्म की पूरी स्टारकास्ट काफी खुश है। फिल्म के निर्माता ने इसी कारण फिल्म 'हमशकल्स' की सक्सेस पार्टी रखी थी और जमकर अपने कलाकारों को फिल्म के लिए बधाई दी और तहे दिल से जनता को धन्यवाद दिया। फिल्म 'हमशकल्स' के निर्माता वाशु भगनानी ने साजिद खान निर्देशित फिल्म 'हमशकल्स' के बारे में कहा कि लोगों ने इस फिल्म के बारे में गलत प्रचार किया। इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने खुद को साबित किया। आपको बता दें कि सैफ अली खान, रितेश देशमुख, राम कपूर, बिपाशा बसु, ईशा गुप्ता और तमन्ना भाटिया अभिनीत इस फिल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। हालांकि सोशल नेटवर्किं ग साइटों पर इस फिल्म को बकवास कहा गया। भगनानी ने बीस जून को रिलीज होने के बाद चार दिनों के अंदर फिल्म द्वारा छिहत्तर करोड़ के व्यापार का दावा किया है। वे इससे बेहद खुश हैं। भगनानी ने कहा, "बहुत-बहुत धन्यवाद। कुछ लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइटों पर इस फिल्म को बेकार कहा। लेकिन दर्शकों ने साबित कर दिया कि फिल्म अच्छी है। " फिल्म आलोचकों से फिल्म को बेहतर प्रतिक्रिया न मिलने पर भागनानी ने कहा, "आलोचनाओं पर हम कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि हमें इंडस्ट्री में ही रहना है। यह उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है। हमलोग फिल्म दर्शकों के लिए बनाते हैं और अच्छे परिणाम से हम बेहद खुश हैं। " कैसी थी यह सक्सेस पार्टी इसको जानने के लिए आप नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये।
लोकोमोटिव कोयला सामग्री की 5 वस्तुओं की खरीद के लिए सार्वजनिक खरीद कानून संख्या 4734 के अनुच्छेद 19 के अनुसार खुली निविदा प्रक्रिया द्वारा निविदा दी जाएगी। नीलामी के बारे में विस्तृत जानकारी नीचे पाई जा सकती हैः विस्तृत जानकारी ईकेएपी में निविदा दस्तावेज में निहित प्रशासनिक विनिर्देश से प्राप्त की जा सकती है। सी) डिलीवरी की तारीखः पूरे अनुबंध को हस्ताक्षर की तारीख से 45 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा। हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित निविदा सूचनाएं केवल सूचना के उद्देश्य से हैं और मूल दस्तावेज को प्रतिस्थापित नहीं करती हैं।
लोकोमोटिव कोयला सामग्री की पाँच वस्तुओं की खरीद के लिए सार्वजनिक खरीद कानून संख्या चार हज़ार सात सौ चौंतीस के अनुच्छेद उन्नीस के अनुसार खुली निविदा प्रक्रिया द्वारा निविदा दी जाएगी। नीलामी के बारे में विस्तृत जानकारी नीचे पाई जा सकती हैः विस्तृत जानकारी ईकेएपी में निविदा दस्तावेज में निहित प्रशासनिक विनिर्देश से प्राप्त की जा सकती है। सी) डिलीवरी की तारीखः पूरे अनुबंध को हस्ताक्षर की तारीख से पैंतालीस दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा। हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित निविदा सूचनाएं केवल सूचना के उद्देश्य से हैं और मूल दस्तावेज को प्रतिस्थापित नहीं करती हैं।
कान्त - किन्तु मैंने सुना कि बलबीर बाहर बैठा था । शोर न मचाया उसने ? रस्नी - बलबीर ने चोरबत्ती जलाई थी और उसके प्रकाश मे मैंने देखा - दस-बाहर आदमी सिरों पर मुँड़ासे बाँधे या रहे हैं। उनकी कृतियाँ मॅड़ासों के कारण दिखाई न देती थीं। आगे-आगे चलने वालों के हाथों से बन्दूके थी । उनमें से एक ने फायर किया । मैंने बन्द कर लीं- दूसरे क्षण मैंने देखा - बलबीर की मुश्के कसी हुई हैं। सहसा सब कुछ मेरी समझ में आ गया । मैं भाग कर मामी के कमरे मे गई, किन्तु इससे पहले कि मैं मामी से कुछ कहती डाकू आ गये । कान्त - मामी ने शोर न मचया ? रत्नी - उनके पास बन्दूके थीं । "किसी ने चूँ भी की तो उसे गोली मार दी जायगी" उन्होंने कहा और बन्दूक दिखाकर चाबियाँ माँगी । मामी ने कहा, "हमारे पुरुष चाबियाँ ले गये हैं। हमारे पास चाबियाँ कहाँ ?" तब डाकू बँधे हुए वलबीर को ले और उसे धरती पर लिटा दिया - इससे पहले कि डाकू बन्दूक उठाते, मामी ने चाबियाँ फेक दीं । - चार लड़कियों के बाद तरसत्तरस कर पाया हुआ बेटा" इसे कुछ न कहो, जो लेना है ले जाओो" मामी ने कहा और दोनों हाथो से चेहरा ढक लिया । गैरेज से डाकुओ ने मोटर निकाली और सामान लूटने लगे । एक डाकू बन्दूक लेकर हमारे सामने खड़ा रहा - नाटा - सा कद, मैला फटा तहबन्द और कमीज - मैं समझती थी - डाकू बहुत भयानक, लम्बे, तगडे, राक्षसों से डरावने होते होंगे, किन्तु उसे देखकर तो मुझे निराशा हुई । एक-दो बार मेरे जी मे आई कि एक ही बार उछलकर उसे गले से पकड़ लूँ और उसका गला इतना घोटॅ, इतना घोटॅ कि
कान्त - किन्तु मैंने सुना कि बलबीर बाहर बैठा था । शोर न मचाया उसने ? रस्नी - बलबीर ने चोरबत्ती जलाई थी और उसके प्रकाश मे मैंने देखा - दस-बाहर आदमी सिरों पर मुँड़ासे बाँधे या रहे हैं। उनकी कृतियाँ मॅड़ासों के कारण दिखाई न देती थीं। आगे-आगे चलने वालों के हाथों से बन्दूके थी । उनमें से एक ने फायर किया । मैंने बन्द कर लीं- दूसरे क्षण मैंने देखा - बलबीर की मुश्के कसी हुई हैं। सहसा सब कुछ मेरी समझ में आ गया । मैं भाग कर मामी के कमरे मे गई, किन्तु इससे पहले कि मैं मामी से कुछ कहती डाकू आ गये । कान्त - मामी ने शोर न मचया ? रत्नी - उनके पास बन्दूके थीं । "किसी ने चूँ भी की तो उसे गोली मार दी जायगी" उन्होंने कहा और बन्दूक दिखाकर चाबियाँ माँगी । मामी ने कहा, "हमारे पुरुष चाबियाँ ले गये हैं। हमारे पास चाबियाँ कहाँ ?" तब डाकू बँधे हुए वलबीर को ले और उसे धरती पर लिटा दिया - इससे पहले कि डाकू बन्दूक उठाते, मामी ने चाबियाँ फेक दीं । - चार लड़कियों के बाद तरसत्तरस कर पाया हुआ बेटा" इसे कुछ न कहो, जो लेना है ले जाओो" मामी ने कहा और दोनों हाथो से चेहरा ढक लिया । गैरेज से डाकुओ ने मोटर निकाली और सामान लूटने लगे । एक डाकू बन्दूक लेकर हमारे सामने खड़ा रहा - नाटा - सा कद, मैला फटा तहबन्द और कमीज - मैं समझती थी - डाकू बहुत भयानक, लम्बे, तगडे, राक्षसों से डरावने होते होंगे, किन्तु उसे देखकर तो मुझे निराशा हुई । एक-दो बार मेरे जी मे आई कि एक ही बार उछलकर उसे गले से पकड़ लूँ और उसका गला इतना घोटॅ, इतना घोटॅ कि
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अब समर्पण की मुद्रा में आ गए हैं। वे कल तक विधायकों के इस्तीफे को लेकर अड़े हुए थे। विधायकों को पहले छुड़ाने की मांग कर रहे थे। मगर अब वे फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी दी। नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अब समर्पण की मुद्रा में आ गए हैं। वे कल तक विधायकों के इस्तीफे को लेकर अड़े हुए थे। विधायकों को पहले छुड़ाने की मांग कर रहे थे। मगर अब वे फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी दी। कमलनाथ ने उन्हें चिट्ठी लिखकर साफ कहा कि 16 तारीख से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। वह इसी सत्र में फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी की साजिश का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्यपाल को सौंपी अपनी चिट्ठी में 3-4 मार्च और 8 मार्च की दो तारीखों का ज़िक्र किया। कमलनाथ के मुताबिक इन तारीखों में उन्हें प्रलोभन देकर बैंगलोर ले जाया गया। उन्हें बंदी बनाकर रखा गया है। उधर फ्लोर टेस्ट की सूरत में बीजेपी का गणित खासा मजबूत है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं, जिसमें से दो सीटें खाली हो जाने के बाद कुल 228 सीटे हैं। बहुमत के लिए 115 सीटों की जरुरत थी। कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद सियासी गणित बदल गया है। अगर इन विधायकों का इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो कुल विधायकों की संख्या 206 रह जाएगी, जिसके बाद बहुमत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी जिसमें कांग्रेस के पास विधायक घटकर मात्र 92 रह जाएंगे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अब समर्पण की मुद्रा में आ गए हैं। वे कल तक विधायकों के इस्तीफे को लेकर अड़े हुए थे। विधायकों को पहले छुड़ाने की मांग कर रहे थे। मगर अब वे फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी दी। नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अब समर्पण की मुद्रा में आ गए हैं। वे कल तक विधायकों के इस्तीफे को लेकर अड़े हुए थे। विधायकों को पहले छुड़ाने की मांग कर रहे थे। मगर अब वे फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी दी। कमलनाथ ने उन्हें चिट्ठी लिखकर साफ कहा कि सोलह तारीख से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। वह इसी सत्र में फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी की साजिश का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्यपाल को सौंपी अपनी चिट्ठी में तीन-चार मार्च और आठ मार्च की दो तारीखों का ज़िक्र किया। कमलनाथ के मुताबिक इन तारीखों में उन्हें प्रलोभन देकर बैंगलोर ले जाया गया। उन्हें बंदी बनाकर रखा गया है। उधर फ्लोर टेस्ट की सूरत में बीजेपी का गणित खासा मजबूत है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल दो सौ तीस सीटें हैं, जिसमें से दो सीटें खाली हो जाने के बाद कुल दो सौ अट्ठाईस सीटे हैं। बहुमत के लिए एक सौ पंद्रह सीटों की जरुरत थी। कांग्रेस के बाईस विधायकों के इस्तीफा देने के बाद सियासी गणित बदल गया है। अगर इन विधायकों का इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो कुल विधायकों की संख्या दो सौ छः रह जाएगी, जिसके बाद बहुमत के लिए एक सौ चार विधायकों की जरूरत होगी जिसमें कांग्रेस के पास विधायक घटकर मात्र बानवे रह जाएंगे।
पुणेः दुर्लभ प्रजाति पेंगोलिन को बेचने के लिए बेलगांव से लाने वाले एक आरोपी को भारती विद्यापीठ पुलिस ने हिरासत में लिया है. आरोपी के पास 6 लाख 40 हजार रुपए कीमत के पैंगोलिन बरामद किए गए हैं. 27 वर्षीय आरोपी युवक विनायक सुरेश पाऊसकर, बेलगांव का रहने वाला बताया जा रहा है. उसके खिलाफ भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है. शुक्रवार की दोपहर गश्त करते समय खबरी द्वारा पुलिस सिपाही अभिजीत रत्नपारखी को सूचना दी गई थी. इसके बाद खबर मिली कि दो से तीन लोग कात्रज में दुर्लभ वन्यजीव पेंगोलिन को बेचने के लिए आने वाले हैं. उसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर छानबीन शुरू की और कात्रज दूध डेयरी चौक के पीछे काले रंग की बोरी लेकर एक संदिग्ध शख्स को घूमते हुए देखा. उस व्यक्ति की तलाशी लेने पर उसकी बोरी से पेंगोलिन बरामद हुए. हर पेंगोलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से है. ब्रिकी करने के लिए इन दुर्लभ जीवों को एसटी बस से बेलगांव से पुणे आया था. पुलिस द्वारा पेंगोलिन का वजन करने पर 4 किलो 560 ग्राम पाया गया. इस बारे में वनविभाग को भी सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने बताया है कि इस पेंगोलिन की कीमत 6 लाख 84 हजार रुपए है.
पुणेः दुर्लभ प्रजाति पेंगोलिन को बेचने के लिए बेलगांव से लाने वाले एक आरोपी को भारती विद्यापीठ पुलिस ने हिरासत में लिया है. आरोपी के पास छः लाख चालीस हजार रुपए कीमत के पैंगोलिन बरामद किए गए हैं. सत्ताईस वर्षीय आरोपी युवक विनायक सुरेश पाऊसकर, बेलगांव का रहने वाला बताया जा रहा है. उसके खिलाफ भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है. शुक्रवार की दोपहर गश्त करते समय खबरी द्वारा पुलिस सिपाही अभिजीत रत्नपारखी को सूचना दी गई थी. इसके बाद खबर मिली कि दो से तीन लोग कात्रज में दुर्लभ वन्यजीव पेंगोलिन को बेचने के लिए आने वाले हैं. उसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर छानबीन शुरू की और कात्रज दूध डेयरी चौक के पीछे काले रंग की बोरी लेकर एक संदिग्ध शख्स को घूमते हुए देखा. उस व्यक्ति की तलाशी लेने पर उसकी बोरी से पेंगोलिन बरामद हुए. हर पेंगोलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से है. ब्रिकी करने के लिए इन दुर्लभ जीवों को एसटी बस से बेलगांव से पुणे आया था. पुलिस द्वारा पेंगोलिन का वजन करने पर चार किलो पाँच सौ साठ ग्राम पाया गया. इस बारे में वनविभाग को भी सूचित कर दिया गया है. पुलिस ने बताया है कि इस पेंगोलिन की कीमत छः लाख चौरासी हजार रुपए है.
भोपाल। करोड़ों रुपए की जल आवर्धन योजना इस साल भी पूरी नहीं होगी। योजना पांच साल में पूरी होनी थी। लेकिन समयावधि हर छह माह में बढ़ रही है। दोशियान कंपनी ने दावा किया था हर हाल में जनवरी 2016 तक पानी शहर को मिल जाएगा। अब जिला प्रशासन ने कंपनी पर शिकंजा कसा है। ठेका कंपनी को नोटिस जारी किया है। कलेक्टर का सख्त पत्र इटारसी नगरपालिका को मिला है। अगर 14 मार्च तक कंपनी कार्य पूरा नहीं करती है तो उस पर एफआईआर दर्ज करवाई जाए। दूसरी ओर होशंगाबाद कलेक्टर का कहना है 28 फरवरी तक समय दिया है। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ही नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज होगी। गर्मियों में शहर की वॉटर सप्लाई धोखेड़ा पंप पर ही निर्भर रहेगी। सड़क खोदकर टंकियों तक अंडरग्राउंड पाइप ले जाने का काम अधूरा है। कहीं सड़क खोद दी, पाइप नहीं बिछे। जहां पाइप बिछ गए वहां बैंड लगाकर आपस में कनेक्ट नहीं किए। गर्मी में योजना पूरी होने के आसार नहीं दिखने पर लाइन एरिया में जल संकट गहराने के पहले सड़क पर पाइप लाइन डालकर ट्यूबवेल आपस में जोड़े जा रहे हैं। रहवासियों की शिकायत है कि पुरानी भूमिगत पाइप लाइन लीकेज होने से घरों में दूषित पानी आ रहा है। यह यूआईडीएसएसएमटी की योजना है। पिछले साल 31 जुलाई की डेडलाइन तक काम फाइनल न होने पर प्रेसिडेंट इन कौंसिल की बैठक में यह मुद्दा उठा था। छह महीने पहले तक कंपनी यह मान रही थी कि मेहराघाट जल संयंत्र का 25 फीसदी काम बाकी है। इसे पूरा होने में चार महीने लगेंगे। योजना की धीमी रफ्तार को देखते हुए खुद कलेक्टर ने मेहराघाट पहुंचकर दिसंबर तक अधूरा कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया था।
भोपाल। करोड़ों रुपए की जल आवर्धन योजना इस साल भी पूरी नहीं होगी। योजना पांच साल में पूरी होनी थी। लेकिन समयावधि हर छह माह में बढ़ रही है। दोशियान कंपनी ने दावा किया था हर हाल में जनवरी दो हज़ार सोलह तक पानी शहर को मिल जाएगा। अब जिला प्रशासन ने कंपनी पर शिकंजा कसा है। ठेका कंपनी को नोटिस जारी किया है। कलेक्टर का सख्त पत्र इटारसी नगरपालिका को मिला है। अगर चौदह मार्च तक कंपनी कार्य पूरा नहीं करती है तो उस पर एफआईआर दर्ज करवाई जाए। दूसरी ओर होशंगाबाद कलेक्टर का कहना है अट्ठाईस फरवरी तक समय दिया है। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ही नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज होगी। गर्मियों में शहर की वॉटर सप्लाई धोखेड़ा पंप पर ही निर्भर रहेगी। सड़क खोदकर टंकियों तक अंडरग्राउंड पाइप ले जाने का काम अधूरा है। कहीं सड़क खोद दी, पाइप नहीं बिछे। जहां पाइप बिछ गए वहां बैंड लगाकर आपस में कनेक्ट नहीं किए। गर्मी में योजना पूरी होने के आसार नहीं दिखने पर लाइन एरिया में जल संकट गहराने के पहले सड़क पर पाइप लाइन डालकर ट्यूबवेल आपस में जोड़े जा रहे हैं। रहवासियों की शिकायत है कि पुरानी भूमिगत पाइप लाइन लीकेज होने से घरों में दूषित पानी आ रहा है। यह यूआईडीएसएसएमटी की योजना है। पिछले साल इकतीस जुलाई की डेडलाइन तक काम फाइनल न होने पर प्रेसिडेंट इन कौंसिल की बैठक में यह मुद्दा उठा था। छह महीने पहले तक कंपनी यह मान रही थी कि मेहराघाट जल संयंत्र का पच्चीस फीसदी काम बाकी है। इसे पूरा होने में चार महीने लगेंगे। योजना की धीमी रफ्तार को देखते हुए खुद कलेक्टर ने मेहराघाट पहुंचकर दिसंबर तक अधूरा कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया था।
भोपाल/आगर मालवा। गिरीश सक्सेना। भोपाल लोकसभा से बीजेपी त्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है। उनके इस बयान से बवाल खड़ा हो गया। गुरूवार को प्रज्ञा ने आगर मालवा में रोड शो के दौरान कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें आतंकी बोलते हैं वह पहले अपनी गिरेबान में झांके। बता दें आगर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में वह रोड शो करने आई थी। दरअसल, हाल ही में एक्टर और नेता कमल हासन ने नाथूराम गोडसे को पहला हिंदू आतंवादी करार दिया था। जब साध्वी से इस मामला पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चुनाव में जवाब दिया जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने साध्वी पर हमला बोलते हुए कहा कि, जो राष्ट्रपित के हत्यारे को देशभक्त बताए और उसके पक्ष में बयान दे इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनको राष्ट्रभक्ति की समझ ही नहीं है। कांग्रेस उनके इस बयान की कड़ी निंदा करती है। वहीं, साध्वी के बयान के बाद मचे बवाल पर बीजेपी मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने भी बयान जारी किया है। उन्होंंने कहा कि पार्टी साध्वी से स्पष्टीकरण लेगी। यही नहीं बीजेपी ने साध्वी के बयान से एक बार फिर किनारा कर लिया है। इससे पहले भी बीजेपी ने शहीद हेमंत करकरे पर दिए साध्वे के बयान को उनका व्यक्तिगत बताया था और उस बयान को पार्टी का समर्थन नहीं देने की बात कही थी।
भोपाल/आगर मालवा। गिरीश सक्सेना। भोपाल लोकसभा से बीजेपी त्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है। उनके इस बयान से बवाल खड़ा हो गया। गुरूवार को प्रज्ञा ने आगर मालवा में रोड शो के दौरान कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें आतंकी बोलते हैं वह पहले अपनी गिरेबान में झांके। बता दें आगर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में वह रोड शो करने आई थी। दरअसल, हाल ही में एक्टर और नेता कमल हासन ने नाथूराम गोडसे को पहला हिंदू आतंवादी करार दिया था। जब साध्वी से इस मामला पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चुनाव में जवाब दिया जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने साध्वी पर हमला बोलते हुए कहा कि, जो राष्ट्रपित के हत्यारे को देशभक्त बताए और उसके पक्ष में बयान दे इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनको राष्ट्रभक्ति की समझ ही नहीं है। कांग्रेस उनके इस बयान की कड़ी निंदा करती है। वहीं, साध्वी के बयान के बाद मचे बवाल पर बीजेपी मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने भी बयान जारी किया है। उन्होंंने कहा कि पार्टी साध्वी से स्पष्टीकरण लेगी। यही नहीं बीजेपी ने साध्वी के बयान से एक बार फिर किनारा कर लिया है। इससे पहले भी बीजेपी ने शहीद हेमंत करकरे पर दिए साध्वे के बयान को उनका व्यक्तिगत बताया था और उस बयान को पार्टी का समर्थन नहीं देने की बात कही थी।
पचीस साल के बाद औरान से लौट रहा हूँ ' ! लेकिन फिर सोचा, हटाओ भी ! यह तो अब बिल्कुल बूढ़ा, ज़अफ हो चुका है। अमेठते हुए, कहीं टूटकर कान हाथ ही में न आ जाय ! मेरा नाम सुनकर वह हैरान रह गया । लेकिन तुरंत, ठठाकर हँसते हुअ असने कहा, ' अच्छा ? तो आप हैं दासोपंत देव ! देखिये साइच ! मैं भी कैसा बेवकूफ हूँ । बरार से अधेड़ अम्रवाले एक साहब हर साल हमारे यहाँ आते हैं । अनकी और आपकी सूरत अिस कदर मिलती जुलती है कि क्या कहूँ ! कैसा अजीब आदमी है यह मैनेजर ! ये महाशय खुद बूढ़े हो चुके हैं, और जिसी से जिन्हें और लोग अधेड़ अम्र के दिखाओ देने लगे हैं । अशोक के नाम अक टेलिग्रैम लिखकर मैं ने उसके पास दे दिया और सीधा अपरवाले मेरे कमरे में जा पहुँचा । कमरे की खिड़की में खड़े होने पर बाहर का दृश्य बड़ा ही सुहावना दिखाओ दे रहा था । देखिये न, सिर्फ पच्चीस साल में लोगों के रहन सहन में कितना फर्क पड़ जाता है । अन दिनों नौकरी की तलाश में मैं बंबसी आया था, लेकिन तब भी मेरे सिर के बाल वही पुराने ढंग के थे और मैं ने सिर पर चुटिया रखी थी । लेकिन अब अिस बंबअ के रास्ते से होकर, नंगे सर गुजरने वाले भले आदमियों में से किसी अंक के सिर पर क़सम खाने के लिये भी चुटिया दिखाओ नहीं देती है। अच्छे घर की, लगभग चालीस से भी ज्यादा अम्रवाली औरतें नये फैशन्स से, बिना कच्छ की धोती पहने रास्ते से अिठलाती हुऔं जाती दिखाओ दे रही हैं । अिसे घोर कलजुग नहीं तो क्या कहा जाय ! खैर ! मुझे क्या मतलब है दुनिया के लोगों से । श्रीमतीजी वैसे कोभी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है । अच्छे भद्र परिवार की लड़की है । लड़की के मौसाजी ने तसवीर भेजी थी और असे सिर्फ देखते ही मैं भाँप गया कि लड़की बड़ी ही विनम्र स्वभाव की मालूम होती है । सोचा, शुभस्य शीघ्रम् ! लड़की को देखने, पसंद करने के तमाशे की ज़रूरत ही क्या है ? वहीं से मैं ने मेरी स्वीकृति लिख कर भेज दी । किसी ने बाहर से दरवाजा खटखटाया । दरवाजा खोलकर देखता तो हमारी होनेवाली श्रीमतीजी के मौसाजी बाहर खड़े दिखाओ दिये । अन्हों ने मुझे लड़की के हाथ की लिखी चिट्ठी दिखाओ । लिखा था, मैं खुशी से ब्याह के लिये राजी हूँ' । खैर ! यह तो अच्छा ही हुआ । वरना ब्याह के बाद कोअी कंबख्त झूठमूठ ही कुछ का कुछ कहकर असका दिल मोटा कर देता । पत्र यहीं छोड़कर कुछ देर के बाद जनाब मौसाजी तो चले गये । लेकिन अब किसी तरह मेरा वक्त कटते नहीं कट रहा था । अस बेचैनी को दूर करने के लिये, यूँ ही संदूक खोला और लड़की की तसवीर निकालकर असे गौर से देखने लगा । सुशीला ! नाम तो भञ्जी, क्या खूब रखा है लड़की के माता-पिताने । ब्याह के बाद मैं भी श्रीमतीजी का वही नाम बहल रखूँगा । आजकल लड़कियों के नाम सिनेमा की अभिनेत्रियों के या अमरकोश के नामों जैसे रखने की सनक लोगों पर सवार है । अिम्तिहान पास करनेवाली लड़कियों और नव दंपति की, समाचार पत्रों में छपनेवाली तसवीरों के नीचे छपे नाम की ओर अंक नज़र डालिये ! कांचनमाला - सुवर्णप्रभा - हेमलता ! कोअी कहेगा ये लड़कियों के नाम नहीं - ये तो विभिन्न भस्मों ही के नाम हैं ! संदूक में अशोक की बचपन की अंक तसवीर थी । असे निकाल कर, मेज़ पर सुशीला की तसवीर के निकट रख दिया । यूँ तो मैं कोअी कवि नहीं । लेकिन अन दोनों तसवीरों की ओर निगाह जाते ही, बचपन में याद किये शाकुंतल के गीत की अंक पंक्ति सहसा याद हो आयी ! वृक्षलता अिन दोनों की जोड़ी यह कितनी सुंदर !' और दूसरे ही क्षण मैंने सोचा, क्या कालिदास और क्या अनके चचा शेक्स्पीअर ! अिन सब के सिरस्पर युवक-युवती की ही जोड़ी लगाने की सनक सवार रहती है। लेकिन क्या युवक-युवति की या पति-पत्नी की जोड़ी के समान माता और असका नन्हामुन्ना तथा पिता और असकी अबोध बालिका की भी जोड़ी देखकर मन प्रसन्नता से झूम नहीं अठता ? मैं हैरान हूँ कि यह बात अिन कवियों के दिमाग में क्यों नहीं आती ? दिल चाहने लगा कि कालिदास की वृक्षलतावाली अस काव्यपंक्ति में अचित संशोधन करूँ । सुशीला और अशोक की तसवीरों की ओर गौर से देखते हुओ हलकी आवाज में मैं गुनगुनाने लगा ' पुष्पलता अिन दोनों की जोड़ी यह कितनी सुंदर ! मैनेजर ने समाचार पत्रों का ढेर का ढेर लाकर कमरे में पटक दिया । अशोक की तसवीर मेज ही पर पड़ी रहने दी और मैं समाचार पत्र पढ़ने लगा । यूँ तो सुशीला की भी तसवीर मेज़ पर पड़ी रहती तो कोअी हर्ज नहीं था । लेकिन सोचा कि कहीं मुलाक़ातियों में से कोओ आकर, पूछ न बैठे कि यह तसवीर किसकी है ? और तबयहाँ के लगभग सभी अखबार आजकल भविष्य वाणी छापने लगे हैं । ओरान में जिस तरह भविष्य के पीछे लोग पागल नहीं थे । लेकिन मैं जानता था कि यहाँ किसी न किसी दिन वह होकर ही रहेगा । जिस वक्त औरान गया, तब समाचार पत्रों के संपादक और अपने आप को बुद्धिमान कहलानेवाले, पढ़े लिखे लोगों को बकते हुअ मैंने सुना था - 'भविष्यवाणी तो एक पागलपन है, सनक है । ग्रहराशी आदि सब झूट हैं' । जान पड़ता है कि अब अिन साहबों ने शनिदेवता के कोप का प्रसाद चख लिया है । अिन संपादकों से कहना, कि ' देवी देवता झूट हैं', धर्म प्रलाप है ' कहकर, अग्रलेखों में, गला फाड़कर चाहे जितना चीखते रहो, लेकिन मेरे भाभियो तुम्हें मानना ही पड़ेगा कि अब समाचार पत्रों में भविष्यवाणी को बिना स्थान दिये कोओ चारा ही नहीं है । अक अंक समाचार पत्र अठाकर मेरा राशीफल मैं देखने लगा । पहले भविष्य का आरंभ ही काव्य की अिस पंक्ति से हुआ था । * प्रेमावांचुनि सर्व सुनें जग भासे बापुडवाणें ! मेरी समझ में नहीं आया कि भविष्य लिखनेवाला कवि है या ज्योतिषी । हरञेक राशी के लिये अक अक कविता - पंक्ति प्रयुक्त की गयी थी । लेकिन जितना तो ज़रूर मानना पड़ेगा कि अस भविष्य में कुछ कुछ सचायी जरूर थी । जान पड़ता है कि मेरे मन का भाव ज्योतिषीजीने सही सही भाँप लिया था । * 'प्यार बिना जीवन सूना सूना है सब संसार !...
पचीस साल के बाद औरान से लौट रहा हूँ ' ! लेकिन फिर सोचा, हटाओ भी ! यह तो अब बिल्कुल बूढ़ा, ज़अफ हो चुका है। अमेठते हुए, कहीं टूटकर कान हाथ ही में न आ जाय ! मेरा नाम सुनकर वह हैरान रह गया । लेकिन तुरंत, ठठाकर हँसते हुअ असने कहा, ' अच्छा ? तो आप हैं दासोपंत देव ! देखिये साइच ! मैं भी कैसा बेवकूफ हूँ । बरार से अधेड़ अम्रवाले एक साहब हर साल हमारे यहाँ आते हैं । अनकी और आपकी सूरत अिस कदर मिलती जुलती है कि क्या कहूँ ! कैसा अजीब आदमी है यह मैनेजर ! ये महाशय खुद बूढ़े हो चुके हैं, और जिसी से जिन्हें और लोग अधेड़ अम्र के दिखाओ देने लगे हैं । अशोक के नाम अक टेलिग्रैम लिखकर मैं ने उसके पास दे दिया और सीधा अपरवाले मेरे कमरे में जा पहुँचा । कमरे की खिड़की में खड़े होने पर बाहर का दृश्य बड़ा ही सुहावना दिखाओ दे रहा था । देखिये न, सिर्फ पच्चीस साल में लोगों के रहन सहन में कितना फर्क पड़ जाता है । अन दिनों नौकरी की तलाश में मैं बंबसी आया था, लेकिन तब भी मेरे सिर के बाल वही पुराने ढंग के थे और मैं ने सिर पर चुटिया रखी थी । लेकिन अब अिस बंबअ के रास्ते से होकर, नंगे सर गुजरने वाले भले आदमियों में से किसी अंक के सिर पर क़सम खाने के लिये भी चुटिया दिखाओ नहीं देती है। अच्छे घर की, लगभग चालीस से भी ज्यादा अम्रवाली औरतें नये फैशन्स से, बिना कच्छ की धोती पहने रास्ते से अिठलाती हुऔं जाती दिखाओ दे रही हैं । अिसे घोर कलजुग नहीं तो क्या कहा जाय ! खैर ! मुझे क्या मतलब है दुनिया के लोगों से । श्रीमतीजी वैसे कोभी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है । अच्छे भद्र परिवार की लड़की है । लड़की के मौसाजी ने तसवीर भेजी थी और असे सिर्फ देखते ही मैं भाँप गया कि लड़की बड़ी ही विनम्र स्वभाव की मालूम होती है । सोचा, शुभस्य शीघ्रम् ! लड़की को देखने, पसंद करने के तमाशे की ज़रूरत ही क्या है ? वहीं से मैं ने मेरी स्वीकृति लिख कर भेज दी । किसी ने बाहर से दरवाजा खटखटाया । दरवाजा खोलकर देखता तो हमारी होनेवाली श्रीमतीजी के मौसाजी बाहर खड़े दिखाओ दिये । अन्हों ने मुझे लड़की के हाथ की लिखी चिट्ठी दिखाओ । लिखा था, मैं खुशी से ब्याह के लिये राजी हूँ' । खैर ! यह तो अच्छा ही हुआ । वरना ब्याह के बाद कोअी कंबख्त झूठमूठ ही कुछ का कुछ कहकर असका दिल मोटा कर देता । पत्र यहीं छोड़कर कुछ देर के बाद जनाब मौसाजी तो चले गये । लेकिन अब किसी तरह मेरा वक्त कटते नहीं कट रहा था । अस बेचैनी को दूर करने के लिये, यूँ ही संदूक खोला और लड़की की तसवीर निकालकर असे गौर से देखने लगा । सुशीला ! नाम तो भञ्जी, क्या खूब रखा है लड़की के माता-पिताने । ब्याह के बाद मैं भी श्रीमतीजी का वही नाम बहल रखूँगा । आजकल लड़कियों के नाम सिनेमा की अभिनेत्रियों के या अमरकोश के नामों जैसे रखने की सनक लोगों पर सवार है । अिम्तिहान पास करनेवाली लड़कियों और नव दंपति की, समाचार पत्रों में छपनेवाली तसवीरों के नीचे छपे नाम की ओर अंक नज़र डालिये ! कांचनमाला - सुवर्णप्रभा - हेमलता ! कोअी कहेगा ये लड़कियों के नाम नहीं - ये तो विभिन्न भस्मों ही के नाम हैं ! संदूक में अशोक की बचपन की अंक तसवीर थी । असे निकाल कर, मेज़ पर सुशीला की तसवीर के निकट रख दिया । यूँ तो मैं कोअी कवि नहीं । लेकिन अन दोनों तसवीरों की ओर निगाह जाते ही, बचपन में याद किये शाकुंतल के गीत की अंक पंक्ति सहसा याद हो आयी ! वृक्षलता अिन दोनों की जोड़ी यह कितनी सुंदर !' और दूसरे ही क्षण मैंने सोचा, क्या कालिदास और क्या अनके चचा शेक्स्पीअर ! अिन सब के सिरस्पर युवक-युवती की ही जोड़ी लगाने की सनक सवार रहती है। लेकिन क्या युवक-युवति की या पति-पत्नी की जोड़ी के समान माता और असका नन्हामुन्ना तथा पिता और असकी अबोध बालिका की भी जोड़ी देखकर मन प्रसन्नता से झूम नहीं अठता ? मैं हैरान हूँ कि यह बात अिन कवियों के दिमाग में क्यों नहीं आती ? दिल चाहने लगा कि कालिदास की वृक्षलतावाली अस काव्यपंक्ति में अचित संशोधन करूँ । सुशीला और अशोक की तसवीरों की ओर गौर से देखते हुओ हलकी आवाज में मैं गुनगुनाने लगा ' पुष्पलता अिन दोनों की जोड़ी यह कितनी सुंदर ! मैनेजर ने समाचार पत्रों का ढेर का ढेर लाकर कमरे में पटक दिया । अशोक की तसवीर मेज ही पर पड़ी रहने दी और मैं समाचार पत्र पढ़ने लगा । यूँ तो सुशीला की भी तसवीर मेज़ पर पड़ी रहती तो कोअी हर्ज नहीं था । लेकिन सोचा कि कहीं मुलाक़ातियों में से कोओ आकर, पूछ न बैठे कि यह तसवीर किसकी है ? और तबयहाँ के लगभग सभी अखबार आजकल भविष्य वाणी छापने लगे हैं । ओरान में जिस तरह भविष्य के पीछे लोग पागल नहीं थे । लेकिन मैं जानता था कि यहाँ किसी न किसी दिन वह होकर ही रहेगा । जिस वक्त औरान गया, तब समाचार पत्रों के संपादक और अपने आप को बुद्धिमान कहलानेवाले, पढ़े लिखे लोगों को बकते हुअ मैंने सुना था - 'भविष्यवाणी तो एक पागलपन है, सनक है । ग्रहराशी आदि सब झूट हैं' । जान पड़ता है कि अब अिन साहबों ने शनिदेवता के कोप का प्रसाद चख लिया है । अिन संपादकों से कहना, कि ' देवी देवता झूट हैं', धर्म प्रलाप है ' कहकर, अग्रलेखों में, गला फाड़कर चाहे जितना चीखते रहो, लेकिन मेरे भाभियो तुम्हें मानना ही पड़ेगा कि अब समाचार पत्रों में भविष्यवाणी को बिना स्थान दिये कोओ चारा ही नहीं है । अक अंक समाचार पत्र अठाकर मेरा राशीफल मैं देखने लगा । पहले भविष्य का आरंभ ही काव्य की अिस पंक्ति से हुआ था । * प्रेमावांचुनि सर्व सुनें जग भासे बापुडवाणें ! मेरी समझ में नहीं आया कि भविष्य लिखनेवाला कवि है या ज्योतिषी । हरञेक राशी के लिये अक अक कविता - पंक्ति प्रयुक्त की गयी थी । लेकिन जितना तो ज़रूर मानना पड़ेगा कि अस भविष्य में कुछ कुछ सचायी जरूर थी । जान पड़ता है कि मेरे मन का भाव ज्योतिषीजीने सही सही भाँप लिया था । * 'प्यार बिना जीवन सूना सूना है सब संसार !...
मोदी कैबिनेट ने तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कानून वापसी के प्रस्ताव को संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में पारित करवाया जाएगा. इसके बाद तीनों कृषि कानून खत्म हो जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच दिन पहले तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था. पीएम ने कहा था कि हम कानून किसानों के हित में लाए थे पर कुछ किसानों को समझाने में नाकाम रहे. वहीं, दूसरी ओर किसान नेता राकेश टिकैत आज गाजियाबाद के सदरपुर गांव में किसानों के धरना स्थल पर पहुंचे और उनका समर्थन किया. उनका कहना है कि एक समान मुआवजे की मांग को लेकर यहां किसान संघर्ष कर रहे हैं जो उंन्हे मिलना चाहिए. देखिए ये रिपोर्ट. The Union Cabinet on Wednesday approved the central government's proposal to repeal the three contentious farm laws in the cabinet meeting held by Prime Minister Modi. While on the other hand, Farmer leader Rakesh Tikait reached the protest site of farmers in Sadarpur village of Ghaziabad. Watch.
मोदी कैबिनेट ने तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कानून वापसी के प्रस्ताव को संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में पारित करवाया जाएगा. इसके बाद तीनों कृषि कानून खत्म हो जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच दिन पहले तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था. पीएम ने कहा था कि हम कानून किसानों के हित में लाए थे पर कुछ किसानों को समझाने में नाकाम रहे. वहीं, दूसरी ओर किसान नेता राकेश टिकैत आज गाजियाबाद के सदरपुर गांव में किसानों के धरना स्थल पर पहुंचे और उनका समर्थन किया. उनका कहना है कि एक समान मुआवजे की मांग को लेकर यहां किसान संघर्ष कर रहे हैं जो उंन्हे मिलना चाहिए. देखिए ये रिपोर्ट. The Union Cabinet on Wednesday approved the central government's proposal to repeal the three contentious farm laws in the cabinet meeting held by Prime Minister Modi. While on the other hand, Farmer leader Rakesh Tikait reached the protest site of farmers in Sadarpur village of Ghaziabad. Watch.
बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला की 23वीं डोली रथयात्रा 11 मई से हरिद्वार से शुरू होगी। 30 दिवसीय यह रथयात्रा उत्तराखंड के सभी 13 जिलों से गुजरेगी। इसका समापन आगामी नौ जून को स्वामी रामतीर्थ की तपस्थली टिहरी के भिलंगना ब्लॉक स्थित विशोन पर्वत स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर में गंगा दशहरा के दिन होगा। बुधवार को यहां एक बारातघर में पत्रकार वार्ता में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं रथयात्रा संयोजक मंत्रीप्रसाद नैथानी ने यह जानकारी दी। नैथानी ने बताया कि रथयात्रा 30 दिनों में 10 हजार पांच सौ किमी की दूरी तय करेगी। इसका उद्देश्य विश्वशांति, उत्तराखंड में हजार धाम चिह्नीकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन, बंजर भूमि को उपयोगी बनाने के लिए उद्यानीकरण, जड़ी बूटी को प्रोत्साहन, संस्कृत भाषा उन्नयन, पवित्र धामों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध के लिए जनजागरण करना है। दस मई को बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला की डोली हरिद्वार लाई जाएगी। 11 मई को हरिद्वार से महामंडलेश्वर निरंजनी अखाड़ा स्वामी ललितानंद गिरि रथयात्रा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। 30 मई को हल्द्वानी के श्री सत्यनारायण मंदिर में रथयात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके समापन पर विशोन पर्वत पर जागर गायिका रामेश्वरी भट्ट की प्रस्तुति होगी। यात्रा समन्वयक डॉ. केदार पलड़िया, पूर्व ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, दिनेश भट्ट, महेन्द्र सिंह, प्रदीप नेगी, दिनेश जोशी, विकास गुणवंत, चिराग फत्र्याल आदि इस मौके पर मौजूद रहे।
बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला की तेईसवीं डोली रथयात्रा ग्यारह मई से हरिद्वार से शुरू होगी। तीस दिवसीय यह रथयात्रा उत्तराखंड के सभी तेरह जिलों से गुजरेगी। इसका समापन आगामी नौ जून को स्वामी रामतीर्थ की तपस्थली टिहरी के भिलंगना ब्लॉक स्थित विशोन पर्वत स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर में गंगा दशहरा के दिन होगा। बुधवार को यहां एक बारातघर में पत्रकार वार्ता में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं रथयात्रा संयोजक मंत्रीप्रसाद नैथानी ने यह जानकारी दी। नैथानी ने बताया कि रथयात्रा तीस दिनों में दस हजार पांच सौ किमी की दूरी तय करेगी। इसका उद्देश्य विश्वशांति, उत्तराखंड में हजार धाम चिह्नीकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन, बंजर भूमि को उपयोगी बनाने के लिए उद्यानीकरण, जड़ी बूटी को प्रोत्साहन, संस्कृत भाषा उन्नयन, पवित्र धामों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध के लिए जनजागरण करना है। दस मई को बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला की डोली हरिद्वार लाई जाएगी। ग्यारह मई को हरिद्वार से महामंडलेश्वर निरंजनी अखाड़ा स्वामी ललितानंद गिरि रथयात्रा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। तीस मई को हल्द्वानी के श्री सत्यनारायण मंदिर में रथयात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके समापन पर विशोन पर्वत पर जागर गायिका रामेश्वरी भट्ट की प्रस्तुति होगी। यात्रा समन्वयक डॉ. केदार पलड़िया, पूर्व ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, दिनेश भट्ट, महेन्द्र सिंह, प्रदीप नेगी, दिनेश जोशी, विकास गुणवंत, चिराग फत्र्याल आदि इस मौके पर मौजूद रहे।
प्रयागराज (ब्यूरो)। महासचिव जयशंकर कुमार ने कहा कि अब लेखा परीक्षा विभाग व्यवस्था में शासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसलिए, लेखापरीक्षा को अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और नई चुनौतियों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने ऑडिट के दायरे को बढ़ाने के लिए डीपीसी एक्ट में बदलाव, सूचना प्रौद्योगिकी ऑडिट के लिए तैयार करने की आवश्यकता और ऑडिट कर्मचारियों की स्थिति में सुधार जैसे कई सुझावों की ओर इशारा किया। मुख्य संरक्षक अरुण कुमार ने कहा कि प्रशासन और संघ दोनों को राष्ट्रहित में काम करना है। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ सेवानिवृत्त साथियों का अभिनंदन किया गया। दिवंगत आत्माओं की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
प्रयागराज । महासचिव जयशंकर कुमार ने कहा कि अब लेखा परीक्षा विभाग व्यवस्था में शासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसलिए, लेखापरीक्षा को अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और नई चुनौतियों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने ऑडिट के दायरे को बढ़ाने के लिए डीपीसी एक्ट में बदलाव, सूचना प्रौद्योगिकी ऑडिट के लिए तैयार करने की आवश्यकता और ऑडिट कर्मचारियों की स्थिति में सुधार जैसे कई सुझावों की ओर इशारा किया। मुख्य संरक्षक अरुण कुमार ने कहा कि प्रशासन और संघ दोनों को राष्ट्रहित में काम करना है। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ सेवानिवृत्त साथियों का अभिनंदन किया गया। दिवंगत आत्माओं की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
सम्पत्तिमान् वैश्यों ने बढ़ाई है, वहाँ शश्वत-हिमधारी सर्वो पर्वतराज हिमालय, गुणकारी विविध औषधियों और बहु. मूल्य वनस्पतियों के वन, मनोहर मानसरोवर और शुभ्रसलिला सुरसरिता भी उस की अनुपम असीम शोभा और अद्वितीय दिव्यता के कम कारण नहीं हैं। इस समय अगणितगुणगरिष्ठा गंगामाता और उसका पुण्यक्षेत्र आर्यावर्त में अव तरण वा आगमन ही इन पंक्तियों का विषय है। यूँ तो विस्तृत भारतवर्ष में बहुत सी विपुल जल धरा सततप्रवाहा नदियाँ विद्यमान हैं, पर गंगा माता की गुणगरिमा और महिमा उन से कोसों दूर है। माता का महामहिम पद गङ्गा के लिए ही व्यवहृत है और सुरसरिता वा देवधुनी भी वही कहलाती है। यह बात बड़े हेतुओं के बिना नहीं है। वैसे तो अन्य देशों के निवासी भी अपने उपकारी जलथल आदि पदार्थों में अपने पालक पोषक सम्बन्धियों का आरोप उपचार वा लक्षणा वृत्ति से करते हैं। अरब निवासी अपने सर्वोपकारक खजूर तरुका फूफीजान कहते हैं। अंग्रेज़ Thames नदी को Father Thames वा पिता टेम्स कह कर आदर देते हैं। पर माताका सर्वातिशायी मानास्पद पद गङ्गा के लिए ही प्रयुक्त है। माता सन्तान का जो लालन पालन करती है, सुतों में उसका जो असीम स्नेह होता है, वह दूसरे सम्बन्धियों से अशक्य और दुर्लभ है। उसीप्रकार गङ्गाके अगण्यगुणगणसमन्वित सलिलसे गङ्गा-तीर-निवासी जनों का जैसा लालन, पालन और स्वास्थ्य संपादन होता है, वैसा अन्य अलाशयों से कदापि संभव नहीं है अतः गङ्गा में मातृत्व का भारोप सर्वथा समुचित और युक्तियुक्त है। मातृकृत लालन पालन के मुख्य गुणों को लेकर कविताकी भूमि भारत में पौराणिक षडानन
सम्पत्तिमान् वैश्यों ने बढ़ाई है, वहाँ शश्वत-हिमधारी सर्वो पर्वतराज हिमालय, गुणकारी विविध औषधियों और बहु. मूल्य वनस्पतियों के वन, मनोहर मानसरोवर और शुभ्रसलिला सुरसरिता भी उस की अनुपम असीम शोभा और अद्वितीय दिव्यता के कम कारण नहीं हैं। इस समय अगणितगुणगरिष्ठा गंगामाता और उसका पुण्यक्षेत्र आर्यावर्त में अव तरण वा आगमन ही इन पंक्तियों का विषय है। यूँ तो विस्तृत भारतवर्ष में बहुत सी विपुल जल धरा सततप्रवाहा नदियाँ विद्यमान हैं, पर गंगा माता की गुणगरिमा और महिमा उन से कोसों दूर है। माता का महामहिम पद गङ्गा के लिए ही व्यवहृत है और सुरसरिता वा देवधुनी भी वही कहलाती है। यह बात बड़े हेतुओं के बिना नहीं है। वैसे तो अन्य देशों के निवासी भी अपने उपकारी जलथल आदि पदार्थों में अपने पालक पोषक सम्बन्धियों का आरोप उपचार वा लक्षणा वृत्ति से करते हैं। अरब निवासी अपने सर्वोपकारक खजूर तरुका फूफीजान कहते हैं। अंग्रेज़ Thames नदी को Father Thames वा पिता टेम्स कह कर आदर देते हैं। पर माताका सर्वातिशायी मानास्पद पद गङ्गा के लिए ही प्रयुक्त है। माता सन्तान का जो लालन पालन करती है, सुतों में उसका जो असीम स्नेह होता है, वह दूसरे सम्बन्धियों से अशक्य और दुर्लभ है। उसीप्रकार गङ्गाके अगण्यगुणगणसमन्वित सलिलसे गङ्गा-तीर-निवासी जनों का जैसा लालन, पालन और स्वास्थ्य संपादन होता है, वैसा अन्य अलाशयों से कदापि संभव नहीं है अतः गङ्गा में मातृत्व का भारोप सर्वथा समुचित और युक्तियुक्त है। मातृकृत लालन पालन के मुख्य गुणों को लेकर कविताकी भूमि भारत में पौराणिक षडानन
कि सुबह जब सूर्य उगता है तब सारी प्रकृति में ही रूपांतरण नहीं होता, आपके शरीर में भी... क्योंकि आपका शरीर प्रकृति का एक हिस्सा है। तब आकाश ही नहीं बदलता; आपके भीतर का आकाश भी बदलता है। तब पक्षी ही गीत नहीं गाते, तब पृथ्वी ही प्रफुल्लित नहीं हो जाती, तब वृक्ष ही फूल नहीं खिलाते; आपके भीतर वह जो मिट्टी है वह भी प्रफुल्लित हो जाती है। क्योंकि वह उस मिट्टी का हिस्सा है, वह कोई अलग चीज नहीं है। तब सागर में ही आंदोलन, फर्क नहीं पड़ते; आपके भीतर भी जो जल है, उसमें भी फर्क पड़ते और आप जानकर हैरान होंगे कि आपके भीतर जो जल है वह ठीक वैसा है जैसा सागर में है। उसमें नमक की उतनी ही मात्रा है जितनी सागर के जल में है। और आपके शरीर में थोड़ा बहुत जल नहीं है कोई पच्चासी प्रतिशत पानी है। वैज्ञानिक अब कहते -जब सागर के पास आपको अच्छा लगता है तो अच्छा लगने का कारण आपके भीतर पच्चासी प्रतिशत सागर का होना है। और वह जो पच्चासी प्रतिशत सागर है आपके भीतर, वह बाहर के विराट सागर से आंदोलित हो जाता है। एक हार्मनी, एक रिजोनेंस, एक प्रतिध्वनि उसमें होनी शुरू हो जाती है। जब आपको जंगल में जाकर हरियाली को देखकर बहुत अच्छा लगता है, तो उसका कारण आप नहीं हैं, आपके शरीर का कण-कण जंगल की हरियाली रह चुका है। वह रेजोनेंट होता है। वह हरे वृक्ष के नीचे जाकर कंपित होने लगता है। वह उससे संबंधित है, वह उसका हिस्सा है। इसलिए प्रकृति के पास जाकर आपको जितना अच्छा लगता है, उतनी आदमी की बनायी हुई चीजों के पास जाकर अच्छा नहीं लगता। क्योंकि वहां कोई रिजोनेंस पैदा नहीं होता। बम्बई की सीमेंट की सड़क पर उतना अच्छा नहीं लग सकता, जितना सोंधी मिट्टी की गंध आ रही हो और आप मिट्टी पर चल रहे हों और आपके पैर धूल को छू रहे हों। तब आपके शरीर और मिट्टी के बीच एक संगीत प्रवाहित होना शुरू हो जाता है। जब सुबह सूरज निकलता है तो आपके भीतर भी बहुत कुछ घटित होता है, संक्रमण की बेला है। उसको भारत के लोगों ने संध्या कहा है। संध्या का अर्थ होता है - दि पीरियड आफ ट्रांजीशन, बदलाहट का वक्त बदलाहट के वक्त में आपके भीतर आपको जो व्यवस्थित धारणाएं हैं उनको बदलना आसान है। बदलाहट के वक्त में व्यवस्थित धारणाओं को बदलना आसान है क्योंकि सब अराजक हो जाता है। भीतर सब बदलाहट हो गयी होती है, सब अस्त-व्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमने संध्या को स्मरण का क्षण बनाया संध्या - प्रार्थना, भजन, धुन, स्मरण, ध्यान का क्षण है। उस क्षण में आसानी से आप स्मरण कर सकते हैं। सुबह और सांझ कीमती वक्त है। रात्रि बारह बजे, जब रात्रि पूरी तरह सघन हो जाती है और सूर्य हमसे सर्वाधिक दूर होता है, तब भी एक बहुत उपयोगी क्षण है। तांत्रिकों ने उसका बहुत उपयोग किया है। महावीर रात-रातभर जाग कर खड़े रहे। महावीर ने उसका बहुत उपयोग किया । आधी रात जब सूरज आपसे सर्वाधिक दूर होता है तब भी आपकी स्थिति बहुत अनूठी होती है। आपके भीतर सब शांत हो गया होता है, जैसे प्रकृति में सब शांत हो गया होता है। वृक्ष झुक कर सो गए होते हैं, जमीन भी सो गयी होती है - सब सो गया होता है, आपके शरीर में भी सब सो गया होता है। इस सोए हुए क्षण का भी आप उपयोग कर सकते हैं। शरीर जिद्द नहीं करेगा, आपके विरोध में, राजी हो जाएगा। जैसे आप कहेंगे- मैं शरीर नहीं हूं तो शरीर नहीं कहेगा कि हूं। शरीर सोया हुआ है। इस क्षण में आप कहेंगे कि मैं शरीर नहीं हूं तो शरीर कोई रेसिस्टेंस, कोई प्रतिरोध खड़ा नहीं करेगा। इसलिए आधी रात का क्षण कीमती रहा है। या फिर आपके - जब आप रात सोते हैं-जागने से जब आप सोने में जाते हैं, तब आपके भीतर गियर बदलता है। आपने कभी खयाल किया है कार में गियर बदलते हुए? जब आप एक गियर से दूसरे गियर में गाड़ी को डालते हैं तो बीच में न्यूट्रल से गुजरते हैं,
कि सुबह जब सूर्य उगता है तब सारी प्रकृति में ही रूपांतरण नहीं होता, आपके शरीर में भी... क्योंकि आपका शरीर प्रकृति का एक हिस्सा है। तब आकाश ही नहीं बदलता; आपके भीतर का आकाश भी बदलता है। तब पक्षी ही गीत नहीं गाते, तब पृथ्वी ही प्रफुल्लित नहीं हो जाती, तब वृक्ष ही फूल नहीं खिलाते; आपके भीतर वह जो मिट्टी है वह भी प्रफुल्लित हो जाती है। क्योंकि वह उस मिट्टी का हिस्सा है, वह कोई अलग चीज नहीं है। तब सागर में ही आंदोलन, फर्क नहीं पड़ते; आपके भीतर भी जो जल है, उसमें भी फर्क पड़ते और आप जानकर हैरान होंगे कि आपके भीतर जो जल है वह ठीक वैसा है जैसा सागर में है। उसमें नमक की उतनी ही मात्रा है जितनी सागर के जल में है। और आपके शरीर में थोड़ा बहुत जल नहीं है कोई पच्चासी प्रतिशत पानी है। वैज्ञानिक अब कहते -जब सागर के पास आपको अच्छा लगता है तो अच्छा लगने का कारण आपके भीतर पच्चासी प्रतिशत सागर का होना है। और वह जो पच्चासी प्रतिशत सागर है आपके भीतर, वह बाहर के विराट सागर से आंदोलित हो जाता है। एक हार्मनी, एक रिजोनेंस, एक प्रतिध्वनि उसमें होनी शुरू हो जाती है। जब आपको जंगल में जाकर हरियाली को देखकर बहुत अच्छा लगता है, तो उसका कारण आप नहीं हैं, आपके शरीर का कण-कण जंगल की हरियाली रह चुका है। वह रेजोनेंट होता है। वह हरे वृक्ष के नीचे जाकर कंपित होने लगता है। वह उससे संबंधित है, वह उसका हिस्सा है। इसलिए प्रकृति के पास जाकर आपको जितना अच्छा लगता है, उतनी आदमी की बनायी हुई चीजों के पास जाकर अच्छा नहीं लगता। क्योंकि वहां कोई रिजोनेंस पैदा नहीं होता। बम्बई की सीमेंट की सड़क पर उतना अच्छा नहीं लग सकता, जितना सोंधी मिट्टी की गंध आ रही हो और आप मिट्टी पर चल रहे हों और आपके पैर धूल को छू रहे हों। तब आपके शरीर और मिट्टी के बीच एक संगीत प्रवाहित होना शुरू हो जाता है। जब सुबह सूरज निकलता है तो आपके भीतर भी बहुत कुछ घटित होता है, संक्रमण की बेला है। उसको भारत के लोगों ने संध्या कहा है। संध्या का अर्थ होता है - दि पीरियड आफ ट्रांजीशन, बदलाहट का वक्त बदलाहट के वक्त में आपके भीतर आपको जो व्यवस्थित धारणाएं हैं उनको बदलना आसान है। बदलाहट के वक्त में व्यवस्थित धारणाओं को बदलना आसान है क्योंकि सब अराजक हो जाता है। भीतर सब बदलाहट हो गयी होती है, सब अस्त-व्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमने संध्या को स्मरण का क्षण बनाया संध्या - प्रार्थना, भजन, धुन, स्मरण, ध्यान का क्षण है। उस क्षण में आसानी से आप स्मरण कर सकते हैं। सुबह और सांझ कीमती वक्त है। रात्रि बारह बजे, जब रात्रि पूरी तरह सघन हो जाती है और सूर्य हमसे सर्वाधिक दूर होता है, तब भी एक बहुत उपयोगी क्षण है। तांत्रिकों ने उसका बहुत उपयोग किया है। महावीर रात-रातभर जाग कर खड़े रहे। महावीर ने उसका बहुत उपयोग किया । आधी रात जब सूरज आपसे सर्वाधिक दूर होता है तब भी आपकी स्थिति बहुत अनूठी होती है। आपके भीतर सब शांत हो गया होता है, जैसे प्रकृति में सब शांत हो गया होता है। वृक्ष झुक कर सो गए होते हैं, जमीन भी सो गयी होती है - सब सो गया होता है, आपके शरीर में भी सब सो गया होता है। इस सोए हुए क्षण का भी आप उपयोग कर सकते हैं। शरीर जिद्द नहीं करेगा, आपके विरोध में, राजी हो जाएगा। जैसे आप कहेंगे- मैं शरीर नहीं हूं तो शरीर नहीं कहेगा कि हूं। शरीर सोया हुआ है। इस क्षण में आप कहेंगे कि मैं शरीर नहीं हूं तो शरीर कोई रेसिस्टेंस, कोई प्रतिरोध खड़ा नहीं करेगा। इसलिए आधी रात का क्षण कीमती रहा है। या फिर आपके - जब आप रात सोते हैं-जागने से जब आप सोने में जाते हैं, तब आपके भीतर गियर बदलता है। आपने कभी खयाल किया है कार में गियर बदलते हुए? जब आप एक गियर से दूसरे गियर में गाड़ी को डालते हैं तो बीच में न्यूट्रल से गुजरते हैं,
तेलांगना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन (TSBIE) आज यानी 9 मई को तेलंगाना राज्य बोर्ड के इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी करने वाला है। ऐसे में 9 लाख उम्मीदवारों का इंतजार आज खत्म होने वाला है। 12वीं के छात्र अपना रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट tsbie. cgg. gov. in पर जाकर देख सकते है। खबरों के अनुसार, TSBIE टीएस इंटर पहले और दूसरे साल (TS Board Inter Result 2023 for 1st & 2nd Year) के नतीजे आज सुबह 11 बजे जारी कर देगा। रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र ऑफिशियल साइट पर नजर बनाए रखें। इस साल, तेलंगान बोर्ड इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर की परीक्षाएं 15 मार्च से लेकर 3 मार्च 2023 तक हुई थीं। जबकि सेकेंड ईयर की परीक्षाएं 16 मार्च से लेकर 4 अप्रैल 2023 तक हुई थीं। टीएस इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 9 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन किया था। बता दें कि टीएस बोर्ड इंटर परीक्षा के नतीजे प्रेस कांफ्रेंस में जारी किए जाएंगे। प्रेस कांफ्रेंस में एग्जाम का पासिंग पर्सेंटेड, टॉपर्स के नाम और बाकी डिटेल्स की घोषणा की जाएगी।
तेलांगना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन आज यानी नौ मई को तेलंगाना राज्य बोर्ड के इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी करने वाला है। ऐसे में नौ लाख उम्मीदवारों का इंतजार आज खत्म होने वाला है। बारहवीं के छात्र अपना रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट tsbie. cgg. gov. in पर जाकर देख सकते है। खबरों के अनुसार, TSBIE टीएस इंटर पहले और दूसरे साल के नतीजे आज सुबह ग्यारह बजे जारी कर देगा। रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र ऑफिशियल साइट पर नजर बनाए रखें। इस साल, तेलंगान बोर्ड इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर की परीक्षाएं पंद्रह मार्च से लेकर तीन मार्च दो हज़ार तेईस तक हुई थीं। जबकि सेकेंड ईयर की परीक्षाएं सोलह मार्च से लेकर चार अप्रैल दो हज़ार तेईस तक हुई थीं। टीएस इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए नौ लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन किया था। बता दें कि टीएस बोर्ड इंटर परीक्षा के नतीजे प्रेस कांफ्रेंस में जारी किए जाएंगे। प्रेस कांफ्रेंस में एग्जाम का पासिंग पर्सेंटेड, टॉपर्स के नाम और बाकी डिटेल्स की घोषणा की जाएगी।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और राज्य की डीएमके सरकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें गेट आउट रवि लिखा गया है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि टि्वटर पर यह हैशटैग नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है। बता दें कि सोमवार को तमिलनाडु की विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ था और राज्यपाल ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें स्पीकर से कहा गया था कि वह राज्यपाल के अभिभाषण के उसी हिस्से को रिकॉर्ड पर लें जिसे राज्य सरकार ने तैयार किया है और उस हिस्से को रिकॉर्ड से निकाल दें या छोड़ दें, जिसे राज्यपाल ने अपने आप जोड़ा है। इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद राज्यपाल आरएन रवि नाराज हो गए थे और विधानसभा से बाहर चले गए। एनडीटीवी के मुताबिक, राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई स्पीच के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था। इस हिस्से में सेकुलरिज्म, तमिलनाडु को हेवन ऑफ पीस बताना, पेरियार, बीआर अंबेडकर, के. कामराज, सीएन अन्नादुरई और करुणानिधि जैसे बड़े नेताओं का उल्लेख था। राज्यपाल ने द्रविड़ियन मॉडल के संदर्भ वाले हिस्से को भी छोड़ दिया था। राज्यपाल के द्वारा ऐसा करने के बाद मुख्यमंत्री स्टालिन ने यह प्रस्ताव पेश किया था। स्टालिन ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि राज्यपाल आरएन रवि ने जो किया, वह विधानसभा की परंपराओं के खिलाफ है। उस दौरान राज्यपाल के खिलाफ विधानसभा में तमिलनाडु छोड़ो के नारे भी लगे थे। विधायकों ने नारे लगाए थे कि बीजेपी आरएसएस की विचारधारा को हम पर ना थोपा जाए। इधर, राज्यपाल के एक नए कदम से राज्य सरकार और राजभवन के बीच चल रही लड़ाई और तेज हो गई है। राज्यपाल ने राजभवन में पोंगल के त्योहार के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्टालिन को तमिल भाषा में जो निमंत्रण पत्र भेजा था उसमें तमिलनाडु के बजाय थमिझगम शब्द का प्रयोग किया था। इसके अलावा राज्य सरकार के प्रतीक चिन्ह को भी निमंत्रण पत्र में जगह नहीं दी गई थी और केवल भारत सरकार के प्रतीक चिन्ह को दिखाया गया था। हालांकि अंग्रेजी में जो निमंत्रण पत्र भेजा गया था उसमें तमिलनाडु शब्द का प्रयोग किया गया था। तमिलनाडु और थमिझगम शब्द में अंतर यह है कि तमिलनाडु का अर्थ है तमिल भूमि या तमिल देश जबकि थमिझगम का अर्थ है तमिल लोगों की भूमि और यह इस क्षेत्र का पुराना नाम है। इसे लेकर सीपीएम के सांसद वेंकटेशन ने कहा है कि राज्यपाल को उसी रफ्तार के साथ राज्य से बाहर चले जाना चाहिए जिस रफ्तार से वह बीते दिन विधानसभा से बाहर निकले थे। उन्होंने मांग की है कि राज्यपाल को हटा दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले भी राज्यपाल ने तमिलनाडु के लिए थमिझगम नाम को अधिक उपयुक्त बताया था। राज्यपाल ने पिछले हफ्ते राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में काशी-तमिल संगमम के आयोजकों को सम्मानित करते हुए कहा था कि तमिलनाडु में इस तरह की राजनीति रही जिसमें यह बताया गया कि हम द्रविड़ियन हैं और संविधान के आधार पर हमें एक साथ लाया गया। उन्होंने कहा था कि एक अलग तरह का नैरेटिव गढ़ा गया और इसे लेकर कई झूठे शोध और घटिया उपन्यास लिखे गए। राज्यपाल ने कहा था कि इसे खत्म किया जाना चाहिए और सच सामने आना चाहिए। राज्यपाल ने कहा था कि वास्तव में तमिलनाडु वह जमीन है जो भारत की आत्मा है और यही भारत की पहचान है इसलिए इसे इसके लिए थमिझगम शब्द उपयुक्त होगा। इसे लेकर बीते दिन विधानसभा में डीएमके और सहयोगी दलों के विधायकों ने राज्यपाल द्वारा थमिझगम शब्द का उपयोग करने का विरोध किया था। डीएमके के सांसद टीआर बालू ने राज्यपाल की आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें तमिलनाडु बीजेपी के दूसरे अध्यक्ष की तरह बात नहीं करनी चाहिए। डीएमके ने पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मांग की थी कि राज्यपाल आरएन रवि को उनके पद से हटा दिया जाए। डीएमके ने पत्र में लिखा था कि राज्यपाल लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के कामकाज में रुकावट पैदा कर रहे हैं और सांप्रदायिक नफरत भड़का रहे हैं। डीएमके ने कहा था कि आरएन रवि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के योग्य नहीं हैं। राज्यपालों का विपक्षी दलों की सरकारों के साथ टकराव का सवाल पिछले साल भर मीडिया और सियासत के गलियारों में गूंजता रहा। तमिलनाडु के अलावा केरल की विजयन सरकार का राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ टकराव जारी है। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा था कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान आरएसएस के एक टूल के रूप में काम कर रहे हैं और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। टकराव वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल, पंजाब, झारखंड के राज्यपालों के साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और राज्य की डीएमके सरकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें गेट आउट रवि लिखा गया है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि टि्वटर पर यह हैशटैग नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है। बता दें कि सोमवार को तमिलनाडु की विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ था और राज्यपाल ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें स्पीकर से कहा गया था कि वह राज्यपाल के अभिभाषण के उसी हिस्से को रिकॉर्ड पर लें जिसे राज्य सरकार ने तैयार किया है और उस हिस्से को रिकॉर्ड से निकाल दें या छोड़ दें, जिसे राज्यपाल ने अपने आप जोड़ा है। इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद राज्यपाल आरएन रवि नाराज हो गए थे और विधानसभा से बाहर चले गए। एनडीटीवी के मुताबिक, राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई स्पीच के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था। इस हिस्से में सेकुलरिज्म, तमिलनाडु को हेवन ऑफ पीस बताना, पेरियार, बीआर अंबेडकर, के. कामराज, सीएन अन्नादुरई और करुणानिधि जैसे बड़े नेताओं का उल्लेख था। राज्यपाल ने द्रविड़ियन मॉडल के संदर्भ वाले हिस्से को भी छोड़ दिया था। राज्यपाल के द्वारा ऐसा करने के बाद मुख्यमंत्री स्टालिन ने यह प्रस्ताव पेश किया था। स्टालिन ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि राज्यपाल आरएन रवि ने जो किया, वह विधानसभा की परंपराओं के खिलाफ है। उस दौरान राज्यपाल के खिलाफ विधानसभा में तमिलनाडु छोड़ो के नारे भी लगे थे। विधायकों ने नारे लगाए थे कि बीजेपी आरएसएस की विचारधारा को हम पर ना थोपा जाए। इधर, राज्यपाल के एक नए कदम से राज्य सरकार और राजभवन के बीच चल रही लड़ाई और तेज हो गई है। राज्यपाल ने राजभवन में पोंगल के त्योहार के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्टालिन को तमिल भाषा में जो निमंत्रण पत्र भेजा था उसमें तमिलनाडु के बजाय थमिझगम शब्द का प्रयोग किया था। इसके अलावा राज्य सरकार के प्रतीक चिन्ह को भी निमंत्रण पत्र में जगह नहीं दी गई थी और केवल भारत सरकार के प्रतीक चिन्ह को दिखाया गया था। हालांकि अंग्रेजी में जो निमंत्रण पत्र भेजा गया था उसमें तमिलनाडु शब्द का प्रयोग किया गया था। तमिलनाडु और थमिझगम शब्द में अंतर यह है कि तमिलनाडु का अर्थ है तमिल भूमि या तमिल देश जबकि थमिझगम का अर्थ है तमिल लोगों की भूमि और यह इस क्षेत्र का पुराना नाम है। इसे लेकर सीपीएम के सांसद वेंकटेशन ने कहा है कि राज्यपाल को उसी रफ्तार के साथ राज्य से बाहर चले जाना चाहिए जिस रफ्तार से वह बीते दिन विधानसभा से बाहर निकले थे। उन्होंने मांग की है कि राज्यपाल को हटा दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले भी राज्यपाल ने तमिलनाडु के लिए थमिझगम नाम को अधिक उपयुक्त बताया था। राज्यपाल ने पिछले हफ्ते राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में काशी-तमिल संगमम के आयोजकों को सम्मानित करते हुए कहा था कि तमिलनाडु में इस तरह की राजनीति रही जिसमें यह बताया गया कि हम द्रविड़ियन हैं और संविधान के आधार पर हमें एक साथ लाया गया। उन्होंने कहा था कि एक अलग तरह का नैरेटिव गढ़ा गया और इसे लेकर कई झूठे शोध और घटिया उपन्यास लिखे गए। राज्यपाल ने कहा था कि इसे खत्म किया जाना चाहिए और सच सामने आना चाहिए। राज्यपाल ने कहा था कि वास्तव में तमिलनाडु वह जमीन है जो भारत की आत्मा है और यही भारत की पहचान है इसलिए इसे इसके लिए थमिझगम शब्द उपयुक्त होगा। इसे लेकर बीते दिन विधानसभा में डीएमके और सहयोगी दलों के विधायकों ने राज्यपाल द्वारा थमिझगम शब्द का उपयोग करने का विरोध किया था। डीएमके के सांसद टीआर बालू ने राज्यपाल की आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें तमिलनाडु बीजेपी के दूसरे अध्यक्ष की तरह बात नहीं करनी चाहिए। डीएमके ने पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मांग की थी कि राज्यपाल आरएन रवि को उनके पद से हटा दिया जाए। डीएमके ने पत्र में लिखा था कि राज्यपाल लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के कामकाज में रुकावट पैदा कर रहे हैं और सांप्रदायिक नफरत भड़का रहे हैं। डीएमके ने कहा था कि आरएन रवि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के योग्य नहीं हैं। राज्यपालों का विपक्षी दलों की सरकारों के साथ टकराव का सवाल पिछले साल भर मीडिया और सियासत के गलियारों में गूंजता रहा। तमिलनाडु के अलावा केरल की विजयन सरकार का राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ टकराव जारी है। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा था कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान आरएसएस के एक टूल के रूप में काम कर रहे हैं और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। टकराव वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल, पंजाब, झारखंड के राज्यपालों के साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं।
एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि तीसरे समन में सुकन्या मंडल को 12 अप्रैल को पेश होने को कहा गया है। उनके पिता अनुब्रत मंडल तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सुकन्या मंडल तीसरे समन का जवाब देंगी या नहीं। पिछली बार जब ईडी ने उन्हें नई दिल्ली बुलाया था, तो एजेंसी के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि वह नहीं आती हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्हें पहली बार 15 मार्च को नई दिल्ली बुलाया गया था। हर बार उन्होंने ईडी को बताया कि स्वास्थ्य कारणों से वह नहीं दिल्ली नहीं जा सकेंगी। (आईएएनएस)
एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि तीसरे समन में सुकन्या मंडल को बारह अप्रैल को पेश होने को कहा गया है। उनके पिता अनुब्रत मंडल तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सुकन्या मंडल तीसरे समन का जवाब देंगी या नहीं। पिछली बार जब ईडी ने उन्हें नई दिल्ली बुलाया था, तो एजेंसी के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि वह नहीं आती हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्हें पहली बार पंद्रह मार्च को नई दिल्ली बुलाया गया था। हर बार उन्होंने ईडी को बताया कि स्वास्थ्य कारणों से वह नहीं दिल्ली नहीं जा सकेंगी।
जेरौन। जेरौन महोत्सव के समापन पर रविवार को संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। आयोजन समिति ने सहयोग के लिए जहां पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों का आभार जताया। वहीं जेरौन सहित क्षेत्र के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त क. . . madhya pradeshSun, 05 Feb 2017 10:35 PM (IST) भाटापारा नाका नं. एक यज्ञ स्थल में रविवार श्री पंचमुखी यज्ञ आयोजन समिति भाटापारा द्वारा लक्ष होमात्मक महारूद्र यज्ञ एवं संत समागम 29 जनवरी से 8 फरवरी तक आयोजन के विषय मे बैठक रखी गई। chhattisgarhTue, 10 Jan 2017 12:28 AM (IST) जबलपुर। स्वच्छता में शहर को प्रथम स्थान दिलाने रविवार को 251 विवाहितों जोड़ों ने एक साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और सुंदरकांड का पाठ किया। महापौर के शासकीय आवास में आयोजित सामूहिक सुंदरकांड के पाठ में बड़ी संख्या में शह. . . madhya pradeshMon, 09 Jan 2017 03:54 AM (IST) लखनादौन। हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह के बेटे और लखनादौन विधायक योगेन्द्र सिंह के अनुज धर्मेन्द्र सिंह का आकस्मिक निधन 10 दिसंबर को इंदौर में हो गया था। 9 जनवरी को घूरवाड़ा गांव में अध्यात्मिक श्रद्धांजलि . . . madhya pradeshMon, 09 Jan 2017 12:09 AM (IST) दतिया। लंबित मांगों को लेकर 10 दिन से अनामय आश्रम पर धरना दे रहे सरपंच सचिवों ने अपनी सामूहिक हड़ताल के तहत शनिवार को शिवराज सरकार की सद्बुद्घि के लिए सुंदरकांड का पाठ किया। जिससे शासन शीघ्र उनकी मांगों को मान ले साथ ही इ. . . madhya pradeshSat, 07 Jan 2017 10:38 PM (IST) अशोकनगर (नवदुनिया न्यूज)। सरपंच सचिव संगठन अशोकनगर द्वारा हड़ताल के सातवे दिन तुलसी सरोवर के समीप स्थित हनुमान मंदिर पर सुंदरकांड का पाठ कराया और हनुमानजी महाराज से मुख्यमंत्री को सदबुद्घि देने की प्रार्थना की। इस दौरान . . . madhya pradeshWed, 04 Jan 2017 04:13 AM (IST) बल्देवगढ़। सरपंच एवं सचिव अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं, आंदोलन के सातवें दिन सरपंच व सचिवों ने मुख्यमंत्री एवं पंचायत ग्रामीण विकास के मुख्य सचिव आरएस जुलानिया के सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड का पा. . . madhya pradeshTue, 03 Jan 2017 11:58 PM (IST) धरमपुरी। नगर के युवाओं ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अनूठी पहल की। शनिवार को सराफा बाजार स्थित श्री चैतन्य हनुमान मंदिर प्रांगण में रात 10 बजे संगीतमयी सुंदरकांड पाठ का आयोजन बालाजी ग्रुप द्वारा किया गया। प्रवीण भावसार, क. . . madhya pradeshMon, 02 Jan 2017 04:01 AM (IST) फोटो 5 टिमरनी। विधायक शाह को ज्ञापन सौंपते पंचायत सचिव। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर किया सुंदरकांड का पाठ सचिव - सरपंचों के धरना स्थल पहुंचे विधायक को सौंपा ज्ञापन टिमरनी। नवदुनिया न्यूज जनपद पंचायत कार्यालय के साम. . . madhya pradeshSun, 01 Jan 2017 04:17 AM (IST) मुलताई। नगर में नववर्ष के अवसर पर दुर्गा मठ और ताप्ती के टापू पर सुंदरकांड का आयोजन किया गया। हनि सरदार ने बताया कि नववर्ष सभी के लिए मंगलमय रहे, इसी भावना के साथ सुंदरकांड का आयोजन किया गया है। जिसमें सैकड़ों की संख्या म. . . madhya pradeshSun, 01 Jan 2017 04:14 AM (IST)
जेरौन। जेरौन महोत्सव के समापन पर रविवार को संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। आयोजन समिति ने सहयोग के लिए जहां पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों का आभार जताया। वहीं जेरौन सहित क्षेत्र के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त क. . . madhya pradeshSun, पाँच फ़रवरी दो हज़ार सत्रह दस:पैंतीस PM भाटापारा नाका नं. एक यज्ञ स्थल में रविवार श्री पंचमुखी यज्ञ आयोजन समिति भाटापारा द्वारा लक्ष होमात्मक महारूद्र यज्ञ एवं संत समागम उनतीस जनवरी से आठ फरवरी तक आयोजन के विषय मे बैठक रखी गई। chhattisgarhTue, दस जनवरी दो हज़ार सत्रह बारह:अट्ठाईस AM जबलपुर। स्वच्छता में शहर को प्रथम स्थान दिलाने रविवार को दो सौ इक्यावन विवाहितों जोड़ों ने एक साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और सुंदरकांड का पाठ किया। महापौर के शासकीय आवास में आयोजित सामूहिक सुंदरकांड के पाठ में बड़ी संख्या में शह. . . madhya pradeshMon, नौ जनवरी दो हज़ार सत्रह तीन:चौवन AM लखनादौन। हिमाचल प्रदेश की पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह के बेटे और लखनादौन विधायक योगेन्द्र सिंह के अनुज धर्मेन्द्र सिंह का आकस्मिक निधन दस दिसंबर को इंदौर में हो गया था। नौ जनवरी को घूरवाड़ा गांव में अध्यात्मिक श्रद्धांजलि . . . madhya pradeshMon, नौ जनवरी दो हज़ार सत्रह बारह:नौ AM दतिया। लंबित मांगों को लेकर दस दिन से अनामय आश्रम पर धरना दे रहे सरपंच सचिवों ने अपनी सामूहिक हड़ताल के तहत शनिवार को शिवराज सरकार की सद्बुद्घि के लिए सुंदरकांड का पाठ किया। जिससे शासन शीघ्र उनकी मांगों को मान ले साथ ही इ. . . madhya pradeshSat, सात जनवरी दो हज़ार सत्रह दस:अड़तीस PM अशोकनगर । सरपंच सचिव संगठन अशोकनगर द्वारा हड़ताल के सातवे दिन तुलसी सरोवर के समीप स्थित हनुमान मंदिर पर सुंदरकांड का पाठ कराया और हनुमानजी महाराज से मुख्यमंत्री को सदबुद्घि देने की प्रार्थना की। इस दौरान . . . madhya pradeshWed, चार जनवरी दो हज़ार सत्रह चार:तेरह AM बल्देवगढ़। सरपंच एवं सचिव अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं, आंदोलन के सातवें दिन सरपंच व सचिवों ने मुख्यमंत्री एवं पंचायत ग्रामीण विकास के मुख्य सचिव आरएस जुलानिया के सद्बुद्धि के लिए सुंदरकांड का पा. . . madhya pradeshTue, तीन जनवरी दो हज़ार सत्रह ग्यारह:अट्ठावन PM धरमपुरी। नगर के युवाओं ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अनूठी पहल की। शनिवार को सराफा बाजार स्थित श्री चैतन्य हनुमान मंदिर प्रांगण में रात दस बजे संगीतमयी सुंदरकांड पाठ का आयोजन बालाजी ग्रुप द्वारा किया गया। प्रवीण भावसार, क. . . madhya pradeshMon, दो जनवरी दो हज़ार सत्रह चार:एक AM फोटो पाँच टिमरनी। विधायक शाह को ज्ञापन सौंपते पंचायत सचिव। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर किया सुंदरकांड का पाठ सचिव - सरपंचों के धरना स्थल पहुंचे विधायक को सौंपा ज्ञापन टिमरनी। नवदुनिया न्यूज जनपद पंचायत कार्यालय के साम. . . madhya pradeshSun, एक जनवरी दो हज़ार सत्रह चार:सत्रह AM मुलताई। नगर में नववर्ष के अवसर पर दुर्गा मठ और ताप्ती के टापू पर सुंदरकांड का आयोजन किया गया। हनि सरदार ने बताया कि नववर्ष सभी के लिए मंगलमय रहे, इसी भावना के साथ सुंदरकांड का आयोजन किया गया है। जिसमें सैकड़ों की संख्या म. . . madhya pradeshSun, एक जनवरी दो हज़ार सत्रह चार:चौदह AM
- हादसे के बाद मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली तस्वीर शेयर की है। - उन्होंने अपनी टीम, डॉक्टरों और अन्य लोगों सहित उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद किया। बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा के फैंस तब परेशान हो गए जब कुछ दिन पहले उन्हें ये खबर मिली कि मलाइका की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है जिसमें एक्ट्रेस घायल हो गई हैं। इस एक्सीडेंट के बाद उन्हें एक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। लेकिन अच्छी खबर यह मिली की इस हादसे में उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई थी और अगले ही दिन एक्ट्रेस को छुट्टी मिल गई थी। इस एक्सीडेंट के बाद अब मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली तस्वीर शेयर की है। यह पहली बार है जब अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर अपने फैस को एक्सीडेंट के बारे में बताया है। मलाइका ने बताया है कि उनके जीवन के सबसे कठिन समय के दौरान उनके दोस्त और परिवार उनके साथ कैसे थे। उन्होंने लंबे नोट के जरिए अपनी टीम, डॉक्टरों और अन्य लोगों सहित उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद किया है। जेनिफर लोपेज-बेन एफ्लेक ने 20 साल बाद फिर की सगाई, क्या इस बार दोनों करेंगे शादी? इस तस्वीर में मलाइका अरोड़ा खिड़की के बाहर झाकती नजर आ रही हैं। तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है कि - 'पिछले कुछ दिन और उनकी घटनाएं काफी अविश्वसनीय रही हैं। इसके बारे में पीछे मुड़कर देखने पर ऐसा लगता है कि यह किसी फिल्म का एक सीन है, न कि वास्तव में हुआ कुछ था। शुक्र है, कि एक्सीडेंट के तुरंत बाद मुझे ये एहसास हुआ कि मैं बहुत सारे एंजल्स की देखभाल में हूं, फिर चाहे वह मेरे कर्मचारी हों, या फिर अस्पताल तक पहुंचने में मेरी मदद करने वाले लोग हों, मेरा परिवार जो इस दौरान में मेरे साथ खड़ा रहा और अद्भुत अस्पताल कर्मचारी। उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे डॉक्टरों ने मेरी सुरक्षा को सबसे अधिक सुनिश्चित किया हर कदम पर मेरा ख्याल रखा। उन्होंने मुझे सेफ और सिक्योर महसूस करवाया और मैं इसके लिए बहुत आभारी हूं, और आखिर में मेरे दोस्तों, परिवार, मेरी टीम और मेरे इंस्टा फैंस से जो प्यार मिला, वो मेरे लिए आश्वासन से भरा था। इस तरह के पल आपको याद दिलाते हैं कि हमें हमेशा उन लोगों का आभार व्यक्त करना चाहिए, जो उस समय आपको ढेर सारा प्यार देते हैं, जब आपको उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आप सभी का तहे दिल से धन्यवाद, मैं इससे नए जोश के साथ बाहर आ गई हूं। अब मैं ठीक होने की राह पर हूं और मैं आपको विश्वास दिलाती हूं, मैं एक योद्धा हूं। '
- हादसे के बाद मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली तस्वीर शेयर की है। - उन्होंने अपनी टीम, डॉक्टरों और अन्य लोगों सहित उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद किया। बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा के फैंस तब परेशान हो गए जब कुछ दिन पहले उन्हें ये खबर मिली कि मलाइका की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है जिसमें एक्ट्रेस घायल हो गई हैं। इस एक्सीडेंट के बाद उन्हें एक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। लेकिन अच्छी खबर यह मिली की इस हादसे में उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई थी और अगले ही दिन एक्ट्रेस को छुट्टी मिल गई थी। इस एक्सीडेंट के बाद अब मलाइका अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली तस्वीर शेयर की है। यह पहली बार है जब अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर अपने फैस को एक्सीडेंट के बारे में बताया है। मलाइका ने बताया है कि उनके जीवन के सबसे कठिन समय के दौरान उनके दोस्त और परिवार उनके साथ कैसे थे। उन्होंने लंबे नोट के जरिए अपनी टीम, डॉक्टरों और अन्य लोगों सहित उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद किया है। जेनिफर लोपेज-बेन एफ्लेक ने बीस साल बाद फिर की सगाई, क्या इस बार दोनों करेंगे शादी? इस तस्वीर में मलाइका अरोड़ा खिड़की के बाहर झाकती नजर आ रही हैं। तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है कि - 'पिछले कुछ दिन और उनकी घटनाएं काफी अविश्वसनीय रही हैं। इसके बारे में पीछे मुड़कर देखने पर ऐसा लगता है कि यह किसी फिल्म का एक सीन है, न कि वास्तव में हुआ कुछ था। शुक्र है, कि एक्सीडेंट के तुरंत बाद मुझे ये एहसास हुआ कि मैं बहुत सारे एंजल्स की देखभाल में हूं, फिर चाहे वह मेरे कर्मचारी हों, या फिर अस्पताल तक पहुंचने में मेरी मदद करने वाले लोग हों, मेरा परिवार जो इस दौरान में मेरे साथ खड़ा रहा और अद्भुत अस्पताल कर्मचारी। उन्होंने आगे लिखा, 'मेरे डॉक्टरों ने मेरी सुरक्षा को सबसे अधिक सुनिश्चित किया हर कदम पर मेरा ख्याल रखा। उन्होंने मुझे सेफ और सिक्योर महसूस करवाया और मैं इसके लिए बहुत आभारी हूं, और आखिर में मेरे दोस्तों, परिवार, मेरी टीम और मेरे इंस्टा फैंस से जो प्यार मिला, वो मेरे लिए आश्वासन से भरा था। इस तरह के पल आपको याद दिलाते हैं कि हमें हमेशा उन लोगों का आभार व्यक्त करना चाहिए, जो उस समय आपको ढेर सारा प्यार देते हैं, जब आपको उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आप सभी का तहे दिल से धन्यवाद, मैं इससे नए जोश के साथ बाहर आ गई हूं। अब मैं ठीक होने की राह पर हूं और मैं आपको विश्वास दिलाती हूं, मैं एक योद्धा हूं। '
इतिहास में बोल्ड और आत्मविश्वास वाले लोगमानवता हमेशा सफल रहा है उन्होंने इसे विभिन्न तरीकों से किया था ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सफलता में विश्वास ने उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और प्रेरणा को लंबे समय तक रखने की अनुमति दी। और यह सब करने के लिए अंततः प्रसिद्धि, समृद्धि और आत्मसम्मान के लिए अपना रास्ता खोजने के लिए। वांछित हासिल करने का एक संभावित तरीकाहमेशा एक वैश्विक बाजार रहा है स्टॉक - इसकी उच्च अस्थिरता और मुद्रा के कारण - विश्लेषण और पूर्वानुमान की सादगी के कारण। सबसे सफल व्यापारियों ने दोनों प्रकार के बाजारों के साथ काम करना सीख लिया। जवाब बहुत सरल हैः क्योंकि हर व्यक्ति में कोई खुद को महसूस करने की छिपी या स्पष्ट इच्छा है बचपन में हर बच्चे की झुकाव होती है जो केवल अगर वह कोशिश करता है और प्रयोग करते हैं तो पता चला जा सकता है आशावाद जीवन के माध्यम से आगे बढ़ने के साथ, वह अपने परीक्षणों और गलतियों से सीखेंगे नैतिक यह हैः आप कोशिश नहीं करेंगे - आपको नहीं पता होगा! तदनुसार, सवाल का उत्तर अब आसान और आसान हैः फिर, इसे बनने के लिए, अगर यह मामला आपकी पसंद के लिए है। विदेशी मुद्रा बाजार सट्टा है हालांकि, नकारात्मक इन शब्दों में सुना है केवल तभी प्रकट होता है जब धन आपके जीवन को नियंत्रित करते हैं जब वे भावनाओं से काफी निकटता से संबंधित होते हैं। हालांकि वास्तव में ये केवल कागज के टुकड़े हैं, और उन्हें प्रबंधित करना सीखते हैं और गुणा केवल उस व्यक्ति के रूप में ही हो सकते हैं जो खुद को पैसा नियंत्रित करते हैं, लेकिन उनका पालन नहीं करते हैं। सबसे पहले, आपको संरचना से खुद को परिचित करना चाहिएविनिमय "विदेशी मुद्रा" यह मुद्राओं के इंटरबैंक एक्सचेंज के लिए बाजार है, जिनमें से मुख्य खिलाड़ी वाणिज्यिक बैंक हैं, देश के केंद्रीय वित्तीय संस्थान हैं, साथ ही बड़े फंड के प्रबंधकों व्यक्ति विदेशी मुद्रा बाजार में भी व्यापार कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अपना स्वयं का दलाल होना चाहिए, जो मुद्राओं को खरीदने या बेचने के लिए आदेश को अंजाम देंगे। ऐसा एक "एडमिरल मार्केट्स", एक विदेशी मुद्रा ब्रोकर है जो बाजार में 15 वर्षों से अधिक समय तक रहा है और सफलतापूर्वक अपने ग्राहकों के साथ इस आर्थिक रूप से अस्थिर दुनिया में सफलता का रास्ता पार करता है। कंपनी का जीवनकाल क्यों हैमहत्वपूर्ण है? विशेष रूप से क्योंकि यह संगठन की स्थिरता का संकेतक है। "एडमिरल मार्केट्स" ("फॉरेक्स") समीक्षाओं पर समीक्षा बहुत अलग हो सकती है, लेकिन कुछ भी इसलिए आत्मविश्वास को बढ़ाता है क्योंकि कम सफल कंपनियां गंभीर बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते दिवालिया हो जाती हैं। सिर्फ इसलिए कि यह खोजना मुश्किल हैकंपनी "विदेशी मुद्रा" "एडमिरल मार्केट्स" बाजार पर है। खाता खोलने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्या मुद्रा जोड़े चुनने के लिए? इन सभी सवालों का उत्तर सक्षम सलाहकारों द्वारा दिया जाएगा। कंपनी अपने खर्च पर व्यापार और व्यापार टर्मिनलों की मूल बातें में प्रशिक्षण प्रदान करती है। यह वेबिनार और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की मदद से किया जाता है, जो कंपनी के सर्वोत्तम व्यापारियों का नेतृत्व करता है। "एडमिरल मार्केट्स" - एक विदेशी मुद्रा दलाल जोअपने ग्राहकों का ख्याल रखता है। इस तथ्य के बावजूद कि कंपनी ब्रिटेन में पंजीकृत है, उसके पास रूस में एक प्रतिनिधि कार्यालय है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूसी भाषा तकनीकी सहायता की उपलब्धता की गारंटी देता है, यदि आवश्यक हो, तो मुश्किल स्थिति में मदद मिलेगी। यह आसान है। "एडमिरल मार्केट्स" एक विदेशी मुद्रा दलाल है जो अन्य समान कंपनियों के समान कमाता है। संगठन को एक प्रसार, बोली के बीच अंतर और मूल्य पूछता है। उनकी आय सीधे इस बात पर निर्भर करती है कि एक व्यापारी कितना अनुभवी है और वह अपने दलाल के माध्यम से कितनी बार वित्तीय साधनों का कारोबार करता है। यही कारण है कि कंपनी अपने ग्राहकों को उनके साथ कमाई करने के लिए व्यापार में प्रशिक्षित करने के लिए लाभदायक है। यह संभव है, लेकिन यह प्रतिकूल होगा, क्योंकि सक्षम तकनीकी और मौलिक विश्लेषण के ज्ञान के बिना किसी विशेष वित्तीय साधन के लिए मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करना मुश्किल होगा। अब हर व्यापारी के पास इंटरनेट है, औरकिसी ऑब्जेक्ट का अध्ययन करने की संभावनाएं लगभग असीमित हैं। खुली पहुंच में विशिष्ट विषयों पर सैकड़ों मुद्रित और वीडियो सामग्री हैं। विश्व व्यापी वेब की विशालता में लोग अपने अनुभव और विचार साझा करते हैं। हालांकि, इस विषय के अध्ययन में बहुत गहराई से गोता लगाएँ मत। चूंकि अभ्यास के बिना ज्ञान आपको राजस्व नहीं लाएगा, इसलिए सिद्धांत और उसके आवेदन के बीच सर्वोत्तम संतुलन खोजना बुद्धिमानी है। और उस व्यक्ति के साथ क्या करना है जो बचपन से नहीं हो रहा हैसटीक विज्ञान के साथ? यह समस्या भी हल करने योग्य है, क्योंकि प्रत्येक सफल ब्रोकर अपने बाजार विश्लेषण को जारी करता है। यह लगभग किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध है। यह एडमिरल मार्केट्स, एक प्रसिद्ध विदेशी मुद्रा दलाल द्वारा किया जाता है, जो मुख्य रूप से इसके सटीक पूर्वानुमान और गुणात्मक विश्लेषण के कारण होता है। बहुत सारे फायदे हैं। तो एडमिरल मार्केट्स की समीक्षा के बारे में क्या? ब्रोकर के बारे में व्यापारियों की समीक्षा पहला फायदा है। उनमें दर्जनों और सैकड़ों व्यक्तिगत मूल्यांकन मानदंड शामिल हैं, लेकिन आम और अपरिवर्तित ऐसे हैं, उदाहरण के लिए, व्यापार टर्मिनल की सुविधा। "एडमिरल मार्केट्स" मंच के साथ काम करता है"मेटाट्रेडर 4"। वह इसे निर्माता के लाइसेंस के तहत उपयोग करता है, जिसे वह खुद भुगतान करता है। यही है, कंपनी इन लागतों के बोझ को अपने ग्राहकों को बदलने की कोशिश नहीं करती है और टर्मिनल को मुफ्त में प्रदान करती है। आपको बस साइट के किसी निश्चित पृष्ठ पर जाना होगा और फिर आवश्यक फ़ाइल डाउनलोड करने और इसे अपने कंप्यूटर पर चलाने के लिए अपना ऑपरेटिंग सिस्टम चुनें। उद्धरण "एडमिरल मार्केट्स" भी निः शुल्क प्रदान करता है। यह सब ग्राहकों की सुविधा के लिए किया जाता है, क्योंकि यह एक साधारण व्यापारी के लिए अनुकूल स्थितियां बनाता है। व्यापारी अक्सर ऐसे प्रश्न पूछते हैं। हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ब्रोकर इंटरबैंक बाजार में आपके लेनदेन को जारी करता है, क्योंकि इससे किसी भी तरह से औसत व्यापारी के लाभ को प्रभावित नहीं होता है। दोनों सफल व्यापार के लिए जानना महत्वपूर्ण है, दोनोंयह आपके बैंक खाते में अर्जित धन की वापसी की समयबद्धता है। सीधे शब्दों में कहें, ऐसे प्रश्न केवल बड़े खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो लाखों डॉलर की मात्रा में परिचालन करते हैं। यह एक दिलचस्प सवाल है, क्योंकि समर्थकतकनीकी विश्लेषण तर्क देगा कि उनकी विधि मौलिक है। यह बाजार को समझने के लिए सबसे अच्छा उपकरण है। एक ही मौलिक विश्लेषण के समर्थक चिल्लाएंगे कि महत्वपूर्ण संकेतक, नीतियां और विश्व अर्थव्यवस्था वित्तीय उपकरणों की कीमतों को आकार देने में कितनी महत्वपूर्ण है। हकीकत में, यह पता चला है कि दोनों दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं। अनुभवी व्यापारी तकनीकी और मौलिक विश्लेषण दोनों का उपयोग करते हैं, जो कि किसी एक विधि के पक्ष में अधिक मुनाफा कमाते हैं। कई व्यापारियों के पास भी एक सवाल है कि ब्रोकर के बारे में समीक्षाओं पर भरोसा करना उचित है या नहीं। सबसे पहले, आपको उन स्रोतों को समझने की आवश्यकता है, जहां अनुभवी व्यापारियों का बड़ा हिस्सा जानकारी लेता है। एडमिरल मार्केट्स के बारे में समीक्षा मिल सकती हैआधिकारिक वेबसाइट। सकारात्मक टिप्पणियां हैं, जहां लोग अपना आभार व्यक्त करते हैं, और रचनात्मक आलोचना करते हैं। कई उपयोगकर्ता सभी ग्राहक संदेशों को प्रशासन की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हैं। यदि कोई समस्या है, तो कंपनी के कर्मचारी इसे जल्द से जल्द हल करते हैं। शुरुआती व्यापारियों ने ध्यान दिया कि अंदरसबसे सफल संगठनों की संख्या एडमिरल मार्केट्स (विदेशी मुद्रा) है। ब्रोकर समीक्षा बहुत मिलती है। वे व्यापारियों के लिए कई स्वतंत्र मंचों में पाए जा सकते हैं, जहां पेशेवर एक निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से अपना अनुभव साझा करते हैं। उपयोगकर्ता सहमत हैं कि आम तौर पर यह लायक हैएक लंबा इतिहास के साथ इस तरह सफल कंपनियों पर भरोसा है, एडमिरल बाजार के रूप में। विदेशी मुद्रा पर ब्रोकर सेवाएं अब कंपनियों, जिनमें से कई के लिए खाते में नहीं है की एक किस्म है, और अपने अस्तित्व के तीन साल के इतिहास प्रदान करता है। अनुभव बताता है कि ऐसी परियोजनाओं (दिवालिया), के रूप में वहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता है अस्तित्व के लिए वर्ष की अगले कुछ में जैसे ही बहुमत संघर्ष में हैं। उन है कि जीवित "एडमिरल बाजार" के रूप में के रूप में सफल हो सकता है। "विदेशी मुद्रा" - बाजार है, जो इस संबंध में ब्रोकरेज फर्मों के लिए पर्याप्त कठोर है। शुरू करने के लिए, आपको सिद्धांत पर ध्यान देना चाहिएडॉव। इसके मुख्य डाकू तकनीकी विश्लेषण के लगभग पूरे सार को प्रकट करते हैं, जो इसे यथासंभव संक्षिप्त और स्पष्ट बनाते हैं। इलियट लहर सिद्धांत कुछ वित्तीय उपकरणों की कीमत गतिशीलता को महारत हासिल करने में अगला कदम होना चाहिए। इसके अलावा, आपको मूल्य आंदोलन के पर्याप्त और उचित पूर्वानुमान के लिए फाइबोनैकी स्तरों को लागू करने का तरीका सीखना चाहिए। यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी संकेतक केवल कीमत के डेरिवेटिव हैं, और बदले में, यह प्राथमिक है। हाँ, यह संभव है। ऐसे उद्देश्यों के लिए, विशेष व्यापार प्रणाली विकसित की गई है। वे बहुत बढ़ने के सिद्धांत पर काम करते हैं, लेकिन केवल जोखिम में वृद्धि से आप लाभ में वृद्धि को छोटे जमा से प्राप्त कर सकते हैं। एक काम खोजने के लिए एक कठिन काम हैव्यापार प्रणाली, जो कई वर्षों तक व्यापारी के लिए स्थिर आय लाएगी। इस स्थिति से आउटपुट दो हो सकते हैंः तकनीकी और मौलिक विश्लेषण के क्षेत्र से ज्ञान का उपयोग करके अपनी खुद की व्यापार योजना तैयार करना, साथ ही तैयार तैयार प्रणाली खरीदना। तैयार व्यापार प्रणाली खुद में भालूकुछ जोखिम, लेकिन यह कुछ तत्वों को समायोजित करके अपना खुद का संस्करण बनाने की प्रक्रिया में एक अच्छी मदद हो सकता है, उदाहरण के लिए, धन प्रबंधन या सूचक अवधि।
इतिहास में बोल्ड और आत्मविश्वास वाले लोगमानवता हमेशा सफल रहा है उन्होंने इसे विभिन्न तरीकों से किया था ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सफलता में विश्वास ने उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और प्रेरणा को लंबे समय तक रखने की अनुमति दी। और यह सब करने के लिए अंततः प्रसिद्धि, समृद्धि और आत्मसम्मान के लिए अपना रास्ता खोजने के लिए। वांछित हासिल करने का एक संभावित तरीकाहमेशा एक वैश्विक बाजार रहा है स्टॉक - इसकी उच्च अस्थिरता और मुद्रा के कारण - विश्लेषण और पूर्वानुमान की सादगी के कारण। सबसे सफल व्यापारियों ने दोनों प्रकार के बाजारों के साथ काम करना सीख लिया। जवाब बहुत सरल हैः क्योंकि हर व्यक्ति में कोई खुद को महसूस करने की छिपी या स्पष्ट इच्छा है बचपन में हर बच्चे की झुकाव होती है जो केवल अगर वह कोशिश करता है और प्रयोग करते हैं तो पता चला जा सकता है आशावाद जीवन के माध्यम से आगे बढ़ने के साथ, वह अपने परीक्षणों और गलतियों से सीखेंगे नैतिक यह हैः आप कोशिश नहीं करेंगे - आपको नहीं पता होगा! तदनुसार, सवाल का उत्तर अब आसान और आसान हैः फिर, इसे बनने के लिए, अगर यह मामला आपकी पसंद के लिए है। विदेशी मुद्रा बाजार सट्टा है हालांकि, नकारात्मक इन शब्दों में सुना है केवल तभी प्रकट होता है जब धन आपके जीवन को नियंत्रित करते हैं जब वे भावनाओं से काफी निकटता से संबंधित होते हैं। हालांकि वास्तव में ये केवल कागज के टुकड़े हैं, और उन्हें प्रबंधित करना सीखते हैं और गुणा केवल उस व्यक्ति के रूप में ही हो सकते हैं जो खुद को पैसा नियंत्रित करते हैं, लेकिन उनका पालन नहीं करते हैं। सबसे पहले, आपको संरचना से खुद को परिचित करना चाहिएविनिमय "विदेशी मुद्रा" यह मुद्राओं के इंटरबैंक एक्सचेंज के लिए बाजार है, जिनमें से मुख्य खिलाड़ी वाणिज्यिक बैंक हैं, देश के केंद्रीय वित्तीय संस्थान हैं, साथ ही बड़े फंड के प्रबंधकों व्यक्ति विदेशी मुद्रा बाजार में भी व्यापार कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अपना स्वयं का दलाल होना चाहिए, जो मुद्राओं को खरीदने या बेचने के लिए आदेश को अंजाम देंगे। ऐसा एक "एडमिरल मार्केट्स", एक विदेशी मुद्रा ब्रोकर है जो बाजार में पंद्रह वर्षों से अधिक समय तक रहा है और सफलतापूर्वक अपने ग्राहकों के साथ इस आर्थिक रूप से अस्थिर दुनिया में सफलता का रास्ता पार करता है। कंपनी का जीवनकाल क्यों हैमहत्वपूर्ण है? विशेष रूप से क्योंकि यह संगठन की स्थिरता का संकेतक है। "एडमिरल मार्केट्स" समीक्षाओं पर समीक्षा बहुत अलग हो सकती है, लेकिन कुछ भी इसलिए आत्मविश्वास को बढ़ाता है क्योंकि कम सफल कंपनियां गंभीर बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते दिवालिया हो जाती हैं। सिर्फ इसलिए कि यह खोजना मुश्किल हैकंपनी "विदेशी मुद्रा" "एडमिरल मार्केट्स" बाजार पर है। खाता खोलने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्या मुद्रा जोड़े चुनने के लिए? इन सभी सवालों का उत्तर सक्षम सलाहकारों द्वारा दिया जाएगा। कंपनी अपने खर्च पर व्यापार और व्यापार टर्मिनलों की मूल बातें में प्रशिक्षण प्रदान करती है। यह वेबिनार और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की मदद से किया जाता है, जो कंपनी के सर्वोत्तम व्यापारियों का नेतृत्व करता है। "एडमिरल मार्केट्स" - एक विदेशी मुद्रा दलाल जोअपने ग्राहकों का ख्याल रखता है। इस तथ्य के बावजूद कि कंपनी ब्रिटेन में पंजीकृत है, उसके पास रूस में एक प्रतिनिधि कार्यालय है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूसी भाषा तकनीकी सहायता की उपलब्धता की गारंटी देता है, यदि आवश्यक हो, तो मुश्किल स्थिति में मदद मिलेगी। यह आसान है। "एडमिरल मार्केट्स" एक विदेशी मुद्रा दलाल है जो अन्य समान कंपनियों के समान कमाता है। संगठन को एक प्रसार, बोली के बीच अंतर और मूल्य पूछता है। उनकी आय सीधे इस बात पर निर्भर करती है कि एक व्यापारी कितना अनुभवी है और वह अपने दलाल के माध्यम से कितनी बार वित्तीय साधनों का कारोबार करता है। यही कारण है कि कंपनी अपने ग्राहकों को उनके साथ कमाई करने के लिए व्यापार में प्रशिक्षित करने के लिए लाभदायक है। यह संभव है, लेकिन यह प्रतिकूल होगा, क्योंकि सक्षम तकनीकी और मौलिक विश्लेषण के ज्ञान के बिना किसी विशेष वित्तीय साधन के लिए मूल्य आंदोलन की भविष्यवाणी करना मुश्किल होगा। अब हर व्यापारी के पास इंटरनेट है, औरकिसी ऑब्जेक्ट का अध्ययन करने की संभावनाएं लगभग असीमित हैं। खुली पहुंच में विशिष्ट विषयों पर सैकड़ों मुद्रित और वीडियो सामग्री हैं। विश्व व्यापी वेब की विशालता में लोग अपने अनुभव और विचार साझा करते हैं। हालांकि, इस विषय के अध्ययन में बहुत गहराई से गोता लगाएँ मत। चूंकि अभ्यास के बिना ज्ञान आपको राजस्व नहीं लाएगा, इसलिए सिद्धांत और उसके आवेदन के बीच सर्वोत्तम संतुलन खोजना बुद्धिमानी है। और उस व्यक्ति के साथ क्या करना है जो बचपन से नहीं हो रहा हैसटीक विज्ञान के साथ? यह समस्या भी हल करने योग्य है, क्योंकि प्रत्येक सफल ब्रोकर अपने बाजार विश्लेषण को जारी करता है। यह लगभग किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध है। यह एडमिरल मार्केट्स, एक प्रसिद्ध विदेशी मुद्रा दलाल द्वारा किया जाता है, जो मुख्य रूप से इसके सटीक पूर्वानुमान और गुणात्मक विश्लेषण के कारण होता है। बहुत सारे फायदे हैं। तो एडमिरल मार्केट्स की समीक्षा के बारे में क्या? ब्रोकर के बारे में व्यापारियों की समीक्षा पहला फायदा है। उनमें दर्जनों और सैकड़ों व्यक्तिगत मूल्यांकन मानदंड शामिल हैं, लेकिन आम और अपरिवर्तित ऐसे हैं, उदाहरण के लिए, व्यापार टर्मिनल की सुविधा। "एडमिरल मार्केट्स" मंच के साथ काम करता है"मेटाट्रेडर चार"। वह इसे निर्माता के लाइसेंस के तहत उपयोग करता है, जिसे वह खुद भुगतान करता है। यही है, कंपनी इन लागतों के बोझ को अपने ग्राहकों को बदलने की कोशिश नहीं करती है और टर्मिनल को मुफ्त में प्रदान करती है। आपको बस साइट के किसी निश्चित पृष्ठ पर जाना होगा और फिर आवश्यक फ़ाइल डाउनलोड करने और इसे अपने कंप्यूटर पर चलाने के लिए अपना ऑपरेटिंग सिस्टम चुनें। उद्धरण "एडमिरल मार्केट्स" भी निः शुल्क प्रदान करता है। यह सब ग्राहकों की सुविधा के लिए किया जाता है, क्योंकि यह एक साधारण व्यापारी के लिए अनुकूल स्थितियां बनाता है। व्यापारी अक्सर ऐसे प्रश्न पूछते हैं। हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ब्रोकर इंटरबैंक बाजार में आपके लेनदेन को जारी करता है, क्योंकि इससे किसी भी तरह से औसत व्यापारी के लाभ को प्रभावित नहीं होता है। दोनों सफल व्यापार के लिए जानना महत्वपूर्ण है, दोनोंयह आपके बैंक खाते में अर्जित धन की वापसी की समयबद्धता है। सीधे शब्दों में कहें, ऐसे प्रश्न केवल बड़े खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो लाखों डॉलर की मात्रा में परिचालन करते हैं। यह एक दिलचस्प सवाल है, क्योंकि समर्थकतकनीकी विश्लेषण तर्क देगा कि उनकी विधि मौलिक है। यह बाजार को समझने के लिए सबसे अच्छा उपकरण है। एक ही मौलिक विश्लेषण के समर्थक चिल्लाएंगे कि महत्वपूर्ण संकेतक, नीतियां और विश्व अर्थव्यवस्था वित्तीय उपकरणों की कीमतों को आकार देने में कितनी महत्वपूर्ण है। हकीकत में, यह पता चला है कि दोनों दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं। अनुभवी व्यापारी तकनीकी और मौलिक विश्लेषण दोनों का उपयोग करते हैं, जो कि किसी एक विधि के पक्ष में अधिक मुनाफा कमाते हैं। कई व्यापारियों के पास भी एक सवाल है कि ब्रोकर के बारे में समीक्षाओं पर भरोसा करना उचित है या नहीं। सबसे पहले, आपको उन स्रोतों को समझने की आवश्यकता है, जहां अनुभवी व्यापारियों का बड़ा हिस्सा जानकारी लेता है। एडमिरल मार्केट्स के बारे में समीक्षा मिल सकती हैआधिकारिक वेबसाइट। सकारात्मक टिप्पणियां हैं, जहां लोग अपना आभार व्यक्त करते हैं, और रचनात्मक आलोचना करते हैं। कई उपयोगकर्ता सभी ग्राहक संदेशों को प्रशासन की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हैं। यदि कोई समस्या है, तो कंपनी के कर्मचारी इसे जल्द से जल्द हल करते हैं। शुरुआती व्यापारियों ने ध्यान दिया कि अंदरसबसे सफल संगठनों की संख्या एडमिरल मार्केट्स है। ब्रोकर समीक्षा बहुत मिलती है। वे व्यापारियों के लिए कई स्वतंत्र मंचों में पाए जा सकते हैं, जहां पेशेवर एक निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से अपना अनुभव साझा करते हैं। उपयोगकर्ता सहमत हैं कि आम तौर पर यह लायक हैएक लंबा इतिहास के साथ इस तरह सफल कंपनियों पर भरोसा है, एडमिरल बाजार के रूप में। विदेशी मुद्रा पर ब्रोकर सेवाएं अब कंपनियों, जिनमें से कई के लिए खाते में नहीं है की एक किस्म है, और अपने अस्तित्व के तीन साल के इतिहास प्रदान करता है। अनुभव बताता है कि ऐसी परियोजनाओं , के रूप में वहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता है अस्तित्व के लिए वर्ष की अगले कुछ में जैसे ही बहुमत संघर्ष में हैं। उन है कि जीवित "एडमिरल बाजार" के रूप में के रूप में सफल हो सकता है। "विदेशी मुद्रा" - बाजार है, जो इस संबंध में ब्रोकरेज फर्मों के लिए पर्याप्त कठोर है। शुरू करने के लिए, आपको सिद्धांत पर ध्यान देना चाहिएडॉव। इसके मुख्य डाकू तकनीकी विश्लेषण के लगभग पूरे सार को प्रकट करते हैं, जो इसे यथासंभव संक्षिप्त और स्पष्ट बनाते हैं। इलियट लहर सिद्धांत कुछ वित्तीय उपकरणों की कीमत गतिशीलता को महारत हासिल करने में अगला कदम होना चाहिए। इसके अलावा, आपको मूल्य आंदोलन के पर्याप्त और उचित पूर्वानुमान के लिए फाइबोनैकी स्तरों को लागू करने का तरीका सीखना चाहिए। यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी संकेतक केवल कीमत के डेरिवेटिव हैं, और बदले में, यह प्राथमिक है। हाँ, यह संभव है। ऐसे उद्देश्यों के लिए, विशेष व्यापार प्रणाली विकसित की गई है। वे बहुत बढ़ने के सिद्धांत पर काम करते हैं, लेकिन केवल जोखिम में वृद्धि से आप लाभ में वृद्धि को छोटे जमा से प्राप्त कर सकते हैं। एक काम खोजने के लिए एक कठिन काम हैव्यापार प्रणाली, जो कई वर्षों तक व्यापारी के लिए स्थिर आय लाएगी। इस स्थिति से आउटपुट दो हो सकते हैंः तकनीकी और मौलिक विश्लेषण के क्षेत्र से ज्ञान का उपयोग करके अपनी खुद की व्यापार योजना तैयार करना, साथ ही तैयार तैयार प्रणाली खरीदना। तैयार व्यापार प्रणाली खुद में भालूकुछ जोखिम, लेकिन यह कुछ तत्वों को समायोजित करके अपना खुद का संस्करण बनाने की प्रक्रिया में एक अच्छी मदद हो सकता है, उदाहरण के लिए, धन प्रबंधन या सूचक अवधि।
व यहाँ इस प्रकार था -- गेहूँ का आटा रुपये का ४ सेर की का Iटा ६ सेर, बग्गू गोशा दो पैसे को एक आलू चार। आजी-तरकारी तो मिलती ही न थी । परन्तु कुछ दिन के वह तीन आने से मिल जाती पास ही जङ्गल है। वहाँ मे जतनी चाहो इकट्ठी करके उठा लाओ। और दूध, घी, मक्खन और धु यहाँ बहुत शुद्ध और सस्ते मिल जाते हैं । यहाँ गूजर गाय का गढ़ा दूध ढाई तीन आने से आपके सामने दुह कर दे जाते हैं । शुद्ध गौ का घी रूपये का १२ छटाँक और मक्खन रुपया अठारह है। इनमें मिलावट का नाम तक नहीं होता । मधु से भरे हुए छत्ते 'टाकू' (मिट्टी के प्याले) में रखकर बेचे जाते हैं । हम लोग २९ अगस्त की रात्रि को यहाँ पहुँचे थे। ३० तारीख को सारे दिन बादल छाये रहे और थोड़ी सी बूंदाबांदी भी हुई। ठंडक बहुत बढ़ गई । हम घबराये कि कहाँ आ गये। न आते तो अच्छा था । परन्तु ३१ को सवेरे उठे तो आकाश निर्मल था । कुछ ही देर में भगवान् भास्कर के दर्शन हुए। मुरझाई हुई तखिल उठी । लिद्दर उपत्यका सोने के रङ्ग में रँगी गई । ऐसे अच्छे मौसम में किसका जी सैर करने को न चाहेगा। सच तो यह है कि पहाड़ पर आकर जो मनुष्य घूमता-फिरता नहीं, उसका आना व्यर्थ है । वह तन्दुरुस्त नहीं रह सकता । दोपहर का भोजन करके मैं, दोनों बच्चों को साथ लेकर, नदी के पार पर्वत पर चढ़ने के लिए चल पड़ा। सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने का निश्चय किया । परन्तु वहाँ पहुँचने के लिए को रास्ता न था । बड़ी कठिनाई से घास और झाड़ियों को पकड़ पकड़ते पर्वत के शिखर पर पहुँचे । सारा पर्वत देवदारु के वृक्षों से लदा हुआ था । परन्तु चोटी बिलकुल नङ्गी थी । उस पर बहुत छोटी छोटी घास थी । चोटी ऐसी दीखती थी मानो किसी बड़े हाथी की पीठ हो । अच्छा खासा मैदान था । यहाँ हमें नाना वर्णों के सुन्दर पुष्प मिले । एक खदसू नाम की बेल मिली । वह बड़ी सुन्दर थी । एक मोटी डण्डी भूमि पर लेटी हुई थी । उस पर गहरे हरे रङ्ग के छोटे छोटे गोल पत्ते लगे हुए थे । वे इतने घने थे कि मोटी डण्डी बिलकुल न दिखाई देती थी । इन पत्तों में लाल रङ्ग के छोटे छोटे गोल फल लगे हुए थे । ये फल ऐसे सुन्दर जान पड़ते थे, मानो धानी मखमल पर किसी चतुर कारीगर ने क़ीमती लाल टाँक रक्खे हों । हम इसे उखाड़ लाये । हमारे पड़ोस में एक देवी ठहरी हुई थीं। उन्हें यह बेल बहुत पसन्द आई। मैंने यह उन्हीं को भेंट कर दी । आपने उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया । पर्वत से उतरने के लिए हम कोई पगडंडी खोजने लगे। जिस ओर से हम चढ़े थे उसके दूसरी और हमें एक रास्ता दिखाई दिया । हम उधर ही चल पड़े । यह रास्ता हमें महमल नाम के एक गाँव में ले गया । यहाँ का ग्राम्य- जीवन देखने के लिए हम एक घर में गये । समूचा घर लकड़ी का बना था । उसके निचले खण्ड में पशु बँधने थे । उनके मल-मूत्र की दुर्गन्ध या रही थी। ऊपर की छत के कमरे कबूतरों के दरवे के समान थे। भीतर अन्धकार था। धुएँ में छत काली हो रही थी। जिस प्रकार अँगरेज़ों को हमारे मकान गन्दे जान पड़ते हैं, वैसे ही यह मकान हमें कालकोठरी जान पड़ा। ऐसे स्वास्थ्यवर्धक प्रदेश में ऐसा स्वास्थ्य-नाशक मकान ! यह सत्र दरिद्रता की ही विडम्वना है । पंजाब टेक्स्ट बुक कमेटी, लाहौर के कार्यालयाध्यक्ष श्रीयुत हरदयाल जी भी पहलगाम आये हुए थे । वे पहले भी यहाँ अनेक बार आ चुके थे। उन्होंने हमें बताया कि यहाँ से कोई दस ग्यारह मील की दूरी पर दुलियन नाम का स्थान है । वहाँ सदा वफ़ रहती है । वह देखने योग्य है । हृदय का रोग होने के कारण वे आप उतनी उँचाई पर चढ़ नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने हमें कोई पथ-दर्शक ले लेने को कहा । उनके मुख से दुलियन के सौन्दर्य का वर्णन सुनकर हमारे मन में भी उसके दर्शनों की उत्कट लालसा उत्पन्न हुई । परन्तु बहुत यत्न करने पर भी कोई पथदर्शक न मिला । अन्त को हमने विना पथदर्शक के ही चल पड़ने का निश्चय कर लिया। २ सितम्बर १९२७ को सवेरे दूध पीकर और खाने की सामग्री साथ लेकर मैं, वेदव्रत, गार्गी, और श्री गुरुदत्त सिद्धान्तालङ्कार टुलि - यन के लिए चल पड़े । टुलियन लिद्दर नदी की बाईं ओर है। डाकघर के पास से पगडंडी जाती है। सड़क से ही चढ़ाई आरम्भ हो गई । हम लोग घने जंगल में से पर्वत पर चढ़ने लगे । कोई ढाई मील ऊपर जाकर एक छोटा-सा सुन्दर मैदान मिला । इसका नाम वायसरणं
व यहाँ इस प्रकार था -- गेहूँ का आटा रुपये का चार सेर की का Iटा छः सेर, बग्गू गोशा दो पैसे को एक आलू चार। आजी-तरकारी तो मिलती ही न थी । परन्तु कुछ दिन के वह तीन आने से मिल जाती पास ही जङ्गल है। वहाँ मे जतनी चाहो इकट्ठी करके उठा लाओ। और दूध, घी, मक्खन और धु यहाँ बहुत शुद्ध और सस्ते मिल जाते हैं । यहाँ गूजर गाय का गढ़ा दूध ढाई तीन आने से आपके सामने दुह कर दे जाते हैं । शुद्ध गौ का घी रूपये का बारह छटाँक और मक्खन रुपया अठारह है। इनमें मिलावट का नाम तक नहीं होता । मधु से भरे हुए छत्ते 'टाकू' में रखकर बेचे जाते हैं । हम लोग उनतीस अगस्त की रात्रि को यहाँ पहुँचे थे। तीस तारीख को सारे दिन बादल छाये रहे और थोड़ी सी बूंदाबांदी भी हुई। ठंडक बहुत बढ़ गई । हम घबराये कि कहाँ आ गये। न आते तो अच्छा था । परन्तु इकतीस को सवेरे उठे तो आकाश निर्मल था । कुछ ही देर में भगवान् भास्कर के दर्शन हुए। मुरझाई हुई तखिल उठी । लिद्दर उपत्यका सोने के रङ्ग में रँगी गई । ऐसे अच्छे मौसम में किसका जी सैर करने को न चाहेगा। सच तो यह है कि पहाड़ पर आकर जो मनुष्य घूमता-फिरता नहीं, उसका आना व्यर्थ है । वह तन्दुरुस्त नहीं रह सकता । दोपहर का भोजन करके मैं, दोनों बच्चों को साथ लेकर, नदी के पार पर्वत पर चढ़ने के लिए चल पड़ा। सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने का निश्चय किया । परन्तु वहाँ पहुँचने के लिए को रास्ता न था । बड़ी कठिनाई से घास और झाड़ियों को पकड़ पकड़ते पर्वत के शिखर पर पहुँचे । सारा पर्वत देवदारु के वृक्षों से लदा हुआ था । परन्तु चोटी बिलकुल नङ्गी थी । उस पर बहुत छोटी छोटी घास थी । चोटी ऐसी दीखती थी मानो किसी बड़े हाथी की पीठ हो । अच्छा खासा मैदान था । यहाँ हमें नाना वर्णों के सुन्दर पुष्प मिले । एक खदसू नाम की बेल मिली । वह बड़ी सुन्दर थी । एक मोटी डण्डी भूमि पर लेटी हुई थी । उस पर गहरे हरे रङ्ग के छोटे छोटे गोल पत्ते लगे हुए थे । वे इतने घने थे कि मोटी डण्डी बिलकुल न दिखाई देती थी । इन पत्तों में लाल रङ्ग के छोटे छोटे गोल फल लगे हुए थे । ये फल ऐसे सुन्दर जान पड़ते थे, मानो धानी मखमल पर किसी चतुर कारीगर ने क़ीमती लाल टाँक रक्खे हों । हम इसे उखाड़ लाये । हमारे पड़ोस में एक देवी ठहरी हुई थीं। उन्हें यह बेल बहुत पसन्द आई। मैंने यह उन्हीं को भेंट कर दी । आपने उसे प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया । पर्वत से उतरने के लिए हम कोई पगडंडी खोजने लगे। जिस ओर से हम चढ़े थे उसके दूसरी और हमें एक रास्ता दिखाई दिया । हम उधर ही चल पड़े । यह रास्ता हमें महमल नाम के एक गाँव में ले गया । यहाँ का ग्राम्य- जीवन देखने के लिए हम एक घर में गये । समूचा घर लकड़ी का बना था । उसके निचले खण्ड में पशु बँधने थे । उनके मल-मूत्र की दुर्गन्ध या रही थी। ऊपर की छत के कमरे कबूतरों के दरवे के समान थे। भीतर अन्धकार था। धुएँ में छत काली हो रही थी। जिस प्रकार अँगरेज़ों को हमारे मकान गन्दे जान पड़ते हैं, वैसे ही यह मकान हमें कालकोठरी जान पड़ा। ऐसे स्वास्थ्यवर्धक प्रदेश में ऐसा स्वास्थ्य-नाशक मकान ! यह सत्र दरिद्रता की ही विडम्वना है । पंजाब टेक्स्ट बुक कमेटी, लाहौर के कार्यालयाध्यक्ष श्रीयुत हरदयाल जी भी पहलगाम आये हुए थे । वे पहले भी यहाँ अनेक बार आ चुके थे। उन्होंने हमें बताया कि यहाँ से कोई दस ग्यारह मील की दूरी पर दुलियन नाम का स्थान है । वहाँ सदा वफ़ रहती है । वह देखने योग्य है । हृदय का रोग होने के कारण वे आप उतनी उँचाई पर चढ़ नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने हमें कोई पथ-दर्शक ले लेने को कहा । उनके मुख से दुलियन के सौन्दर्य का वर्णन सुनकर हमारे मन में भी उसके दर्शनों की उत्कट लालसा उत्पन्न हुई । परन्तु बहुत यत्न करने पर भी कोई पथदर्शक न मिला । अन्त को हमने विना पथदर्शक के ही चल पड़ने का निश्चय कर लिया। दो सितम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस को सवेरे दूध पीकर और खाने की सामग्री साथ लेकर मैं, वेदव्रत, गार्गी, और श्री गुरुदत्त सिद्धान्तालङ्कार टुलि - यन के लिए चल पड़े । टुलियन लिद्दर नदी की बाईं ओर है। डाकघर के पास से पगडंडी जाती है। सड़क से ही चढ़ाई आरम्भ हो गई । हम लोग घने जंगल में से पर्वत पर चढ़ने लगे । कोई ढाई मील ऊपर जाकर एक छोटा-सा सुन्दर मैदान मिला । इसका नाम वायसरणं
नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन (एनएमआरसी) सेक्टर-142 मेट्रो स्टेशन से बोटेनिकल गार्डन तक नई लिंक लाइन बनाने जा रही है। इसका अलाइमेंट नोएडा एक्सप्रेस-वे के दूसरी तरफ (दाहिनी ओर) बसी तमाम ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और दर्जनों गांव के निवासियों को सेवा देने के लिए वहां से गुजारी जा सकती है। डीएमआरसी अधिकारियों ने संशोधित डीपीआर पर प्रस्तुतिकरण एनएमआरसी की एमडी रितु माहेश्वरी के सामने दिया। जिसमें रूट अलाइमेंट, राइडरशिप, स्टेशन, आने वाले खर्च समेत तमाम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन रितु माहेश्ववरी ने कहा कि मेट्रो अधिक से अधिक लोगों की पहुंच में हो इसके लिए अलाइमेंट में कोई और बेहतर प्रयास करे। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) ने तैयार कर एनएमआरसी प्रबंधन को सौंप दिया है। पहले इस रूट पर लाइट मेट्रो संचालित करने का फैसला लिया गया था, लेकिन अब साधारण मेट्रो का संचालन होगा। सर्वे के अनुसार करीब 10 लाख मुसाफिर प्रतिमाह इस लाइन में सफर करेंगे। वर्ष 2016 में डीएमआरसी ने सेक्टर-142 से बोटेनिकल गार्डन तक एक्वा लाइन मेट्रो की लिंक लाइन की डीपीआर तैयार की थी। जिस पर 2826 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। अब संशोधित डीपीआर में करीब 700 करोड़ रुपये कम किए गए है। संशोधित डीपीआर में स्टेशनों की संख्या को न ही घटाया गया और न ही बढ़ाया गया है। सेक्टर-142 से बोटेनिकल गार्डन तक के विस्तार में कुल 11 किमी में छह स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें सेक्टर-136, सेक्टर-91, सेक्टर-93, सेक्टर-98, सेक्टर-125 व सेक्टर-94 को शामिल किया गया है। सेक्टर-142 ट्रेन का इंटरचेंज स्टेशन होगा, जबकि बोटेनिकल गार्डन इसका अंतिम स्टेशन होगा। इन दोनों स्टेशनों पर मेट्रो के लिए अलग से प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। बोटेनिकल गार्डन लिंक स्टेशन होगा। यहां से मुसाफिर मैजेंटा व ब्लू लाइन के लिए मेट्रो बदल सकेंगे। ग्रेटर नोएडा आने जाने वाले लोग इस लिंक का प्रयोग करेंगे। अभी एक्वा लाइन मेट्रो में सफर करने वालों को ग्रेटर नोएडा से नोएडा सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन आना पड़ता है। यहां से ब्लू लाइन के लिए सेक्टर-52 स्टेशन से मेट्रो पकड़ना पड़ता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन सेक्टर-एक सौ बयालीस मेट्रो स्टेशन से बोटेनिकल गार्डन तक नई लिंक लाइन बनाने जा रही है। इसका अलाइमेंट नोएडा एक्सप्रेस-वे के दूसरी तरफ बसी तमाम ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और दर्जनों गांव के निवासियों को सेवा देने के लिए वहां से गुजारी जा सकती है। डीएमआरसी अधिकारियों ने संशोधित डीपीआर पर प्रस्तुतिकरण एनएमआरसी की एमडी रितु माहेश्वरी के सामने दिया। जिसमें रूट अलाइमेंट, राइडरशिप, स्टेशन, आने वाले खर्च समेत तमाम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन रितु माहेश्ववरी ने कहा कि मेट्रो अधिक से अधिक लोगों की पहुंच में हो इसके लिए अलाइमेंट में कोई और बेहतर प्रयास करे। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने तैयार कर एनएमआरसी प्रबंधन को सौंप दिया है। पहले इस रूट पर लाइट मेट्रो संचालित करने का फैसला लिया गया था, लेकिन अब साधारण मेट्रो का संचालन होगा। सर्वे के अनुसार करीब दस लाख मुसाफिर प्रतिमाह इस लाइन में सफर करेंगे। वर्ष दो हज़ार सोलह में डीएमआरसी ने सेक्टर-एक सौ बयालीस से बोटेनिकल गार्डन तक एक्वा लाइन मेट्रो की लिंक लाइन की डीपीआर तैयार की थी। जिस पर दो हज़ार आठ सौ छब्बीस करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। अब संशोधित डीपीआर में करीब सात सौ करोड़ रुपये कम किए गए है। संशोधित डीपीआर में स्टेशनों की संख्या को न ही घटाया गया और न ही बढ़ाया गया है। सेक्टर-एक सौ बयालीस से बोटेनिकल गार्डन तक के विस्तार में कुल ग्यारह किमी में छह स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें सेक्टर-एक सौ छत्तीस, सेक्टर-इक्यानवे, सेक्टर-तिरानवे, सेक्टर-अट्ठानवे, सेक्टर-एक सौ पच्चीस व सेक्टर-चौरानवे को शामिल किया गया है। सेक्टर-एक सौ बयालीस ट्रेन का इंटरचेंज स्टेशन होगा, जबकि बोटेनिकल गार्डन इसका अंतिम स्टेशन होगा। इन दोनों स्टेशनों पर मेट्रो के लिए अलग से प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। बोटेनिकल गार्डन लिंक स्टेशन होगा। यहां से मुसाफिर मैजेंटा व ब्लू लाइन के लिए मेट्रो बदल सकेंगे। ग्रेटर नोएडा आने जाने वाले लोग इस लिंक का प्रयोग करेंगे। अभी एक्वा लाइन मेट्रो में सफर करने वालों को ग्रेटर नोएडा से नोएडा सेक्टर-इक्यावन मेट्रो स्टेशन आना पड़ता है। यहां से ब्लू लाइन के लिए सेक्टर-बावन स्टेशन से मेट्रो पकड़ना पड़ता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
एआर रहमान एक बार फिर से सुर्खियों बने हुए है। हाल ही में उनका एक कॉन्सर्ट रखा गया था, जिसे पुलिस ने डेडलाइन क्रॉस होने की वजह से रोक दिया। इस पर अब एआर रहमान का रिएक्शन सामने आया है। अपनी आवाज के चलते लोगों के बीच छाने वाले सिंगर और म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान हमेशा लोगों के बीच बने रहते हैं। सिंगर ए आर रहमान का हाल ही में पुणे के अंदर एक कॉन्सर्ट था, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक देने का काम कर दिया था। इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। पुलिस की इस हरकत के चलते लोग बुरी तरह से भड़क गई। इस चीज को लेकर अब एआर रहमान का रिएक्शन सामने आया है। ए आर रहमान का कॉन्सर्ट इसीलिए पुलिस ने रोक था क्योंकि उनका ये कहना था कि रात के 10 बजे के बाद गाने-बजाने की परिमशन नहीं है। अब एआर रहमान का पुणे वाले मामले में जो रिएक्शन आया है वो देखने लायक है। उन्होंने कॉन्सर्ट का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा- , 'क्या हम सभी के पास कल मंच पर "रॉकस्टार" पल था? मुझे लगता है हमने किया! हम दर्शकों के प्यार से भरे हुए थे और अधिक देना चाहते थे. . . पुणे, ऐसी यादगार शाम के लिए एक बार फिर आपका शुक्रिया। यहां हमारे रोलर कोस्टर की सवारी की एक छोटी सी झलक है। ' दरअसल एआर रहमान ने कैप्शन में इसीलिए रॉकस्टार का जिक्र किया कि म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान पुलिस आती है और उनकी परफॉर्मेंस रोक देती है। उन्होंने इस गाने को खुद डायरेक्टर करने का काम म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने किया है। इस पूरे मामले को लेकर बंडगार्डन पुलिस स्टेशन इंस्पेक्टर संतोष पाटिल ने अपने बयान में कहा, ' 10 बजे तक की ही डेडलाइन है। हमने एआर रहमान औऱ वहां मौजूद बाकी के आर्टिस्ट से शो को रोकने के लिए कहा था। उन्होंने हमारी बात मानी और तुरंत शो बंद कर दिया।
एआर रहमान एक बार फिर से सुर्खियों बने हुए है। हाल ही में उनका एक कॉन्सर्ट रखा गया था, जिसे पुलिस ने डेडलाइन क्रॉस होने की वजह से रोक दिया। इस पर अब एआर रहमान का रिएक्शन सामने आया है। अपनी आवाज के चलते लोगों के बीच छाने वाले सिंगर और म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान हमेशा लोगों के बीच बने रहते हैं। सिंगर ए आर रहमान का हाल ही में पुणे के अंदर एक कॉन्सर्ट था, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक देने का काम कर दिया था। इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। पुलिस की इस हरकत के चलते लोग बुरी तरह से भड़क गई। इस चीज को लेकर अब एआर रहमान का रिएक्शन सामने आया है। ए आर रहमान का कॉन्सर्ट इसीलिए पुलिस ने रोक था क्योंकि उनका ये कहना था कि रात के दस बजे के बाद गाने-बजाने की परिमशन नहीं है। अब एआर रहमान का पुणे वाले मामले में जो रिएक्शन आया है वो देखने लायक है। उन्होंने कॉन्सर्ट का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा- , 'क्या हम सभी के पास कल मंच पर "रॉकस्टार" पल था? मुझे लगता है हमने किया! हम दर्शकों के प्यार से भरे हुए थे और अधिक देना चाहते थे. . . पुणे, ऐसी यादगार शाम के लिए एक बार फिर आपका शुक्रिया। यहां हमारे रोलर कोस्टर की सवारी की एक छोटी सी झलक है। ' दरअसल एआर रहमान ने कैप्शन में इसीलिए रॉकस्टार का जिक्र किया कि म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान पुलिस आती है और उनकी परफॉर्मेंस रोक देती है। उन्होंने इस गाने को खुद डायरेक्टर करने का काम म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने किया है। इस पूरे मामले को लेकर बंडगार्डन पुलिस स्टेशन इंस्पेक्टर संतोष पाटिल ने अपने बयान में कहा, ' दस बजे तक की ही डेडलाइन है। हमने एआर रहमान औऱ वहां मौजूद बाकी के आर्टिस्ट से शो को रोकने के लिए कहा था। उन्होंने हमारी बात मानी और तुरंत शो बंद कर दिया।
स्वास्थ्य ही जीवन है. इस बात को हर कोई जानता [tps_header][/tps_header]और अच्छे से समझता भी है. लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में हम अपने हेल्थ को लेकर लापरवाह हो जाते हैं. रोजमर्रा के जीवन में सबसे ज्यादा जरुरी है भोजन. लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है भोजन करने का तरीका. भोजन करने के तरीके में अगर थोड़ा भी फेरबदल हो जाए तो हमारे स्वास्थ्य पर इसका बहुत हीं बुरा असर पड़ता है. भोजन के अहम नियमों में से सबसे अहम नियम होता है, भोजन के बाद का. कुछ ऐसी चीजें हैं जो भोजन के बाद करने से हमारे शरीर में जहर के समान कार्य करता है. हम आपको उन्हीं जरूरी चीजों के बारे में बता रहे हैं. भोजन के बाद पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसलिए कम - से - कम 1 घंटे तक पानी का सेवन ना करें. लेकिन अगर जरुरत हो तो गुनगुना पानी हीं जितना कम हो सके पिएं. ठंडे पानी का सेवन बिल्कुल भी ना करें क्योंकि खाना खाने के बाद हमारे शरीर का तापमान ज्यादा होता है और इस पर अगर हम ठंडा पानी पिएंगे तो वह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाएगा शरीर के लिए निशा गुनगुना पानी हूं फायदेमंद होता है इससे हमारे शरीर का टॉक्सिक पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते है. जो हमें कई बीमारियों से दूर रखने में सहायक होते हैं. जिन लोगों को धूम्रपान करने की आदत होती है, वो खाना खाने के तुरंत बाद धूम्रपान करने लगते हैं. जो सेहत के लिए बहुत हीं हानिकारक है. खाने के तुरंत बाद पीने वाला एक सिगरेट, 10 सिगरेट के बराबर नुकसान पहुंचाता है. भोजन के तुरंत बाद फल खाने से पेट में गैस बनता है, जो कई बीमारियों को पैदा करने में सहायक होता है. इसलिए कभी भी भोजन के 1 घंटे पहले, या 2 घंटे के बाद हीं फल का सेवन करना चाहिए. चुकी चाय की पत्ती में अम्ल की मात्रा ज्यादा होती है, जो भोजन में उपस्थित प्रोटीन को सख्त कर देता है, और भोजन को पचाने में मुश्किल हो जाती है. इसलिए कभी भी भोजन के तुरंत बाद चाय का सेवन नहीं करना चाहिए. भोजन के तुरंत बाद सोने से भोजन को पचाने में मुश्किल हो जाती है. तुरंत सोने से गैस की समस्या उत्पन्न होती है. रात को भोजन करने के 2 - 3 घंटे के बाद ही सोना चाहिए. लेकिन दिन के भोजन के बाद थोड़ा सा आराम अच्छा माना जाता है. भोजन के तुरंत बाद स्नान करने से पैर, हाथ और शरीर में खून का प्रभाव बढ़ जाता है और पेट के आस - पास यह कम हो जाता है. जो हमारे पाचन तंत्र को काफी हानि पहुंचाता है. भोजन के बाद ये चीज़ें जहर के समान है - तो दोस्तों इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से आप स्वस्थ और निरोगी बने रह सकते हैं. जो एक अच्छी जिंदगी के लिए बेहद आवश्यक होता है.
स्वास्थ्य ही जीवन है. इस बात को हर कोई जानता [tps_header][/tps_header]और अच्छे से समझता भी है. लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में हम अपने हेल्थ को लेकर लापरवाह हो जाते हैं. रोजमर्रा के जीवन में सबसे ज्यादा जरुरी है भोजन. लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है भोजन करने का तरीका. भोजन करने के तरीके में अगर थोड़ा भी फेरबदल हो जाए तो हमारे स्वास्थ्य पर इसका बहुत हीं बुरा असर पड़ता है. भोजन के अहम नियमों में से सबसे अहम नियम होता है, भोजन के बाद का. कुछ ऐसी चीजें हैं जो भोजन के बाद करने से हमारे शरीर में जहर के समान कार्य करता है. हम आपको उन्हीं जरूरी चीजों के बारे में बता रहे हैं. भोजन के बाद पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसलिए कम - से - कम एक घंटाटे तक पानी का सेवन ना करें. लेकिन अगर जरुरत हो तो गुनगुना पानी हीं जितना कम हो सके पिएं. ठंडे पानी का सेवन बिल्कुल भी ना करें क्योंकि खाना खाने के बाद हमारे शरीर का तापमान ज्यादा होता है और इस पर अगर हम ठंडा पानी पिएंगे तो वह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाएगा शरीर के लिए निशा गुनगुना पानी हूं फायदेमंद होता है इससे हमारे शरीर का टॉक्सिक पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते है. जो हमें कई बीमारियों से दूर रखने में सहायक होते हैं. जिन लोगों को धूम्रपान करने की आदत होती है, वो खाना खाने के तुरंत बाद धूम्रपान करने लगते हैं. जो सेहत के लिए बहुत हीं हानिकारक है. खाने के तुरंत बाद पीने वाला एक सिगरेट, दस सिगरेट के बराबर नुकसान पहुंचाता है. भोजन के तुरंत बाद फल खाने से पेट में गैस बनता है, जो कई बीमारियों को पैदा करने में सहायक होता है. इसलिए कभी भी भोजन के एक घंटाटे पहले, या दो घंटाटे के बाद हीं फल का सेवन करना चाहिए. चुकी चाय की पत्ती में अम्ल की मात्रा ज्यादा होती है, जो भोजन में उपस्थित प्रोटीन को सख्त कर देता है, और भोजन को पचाने में मुश्किल हो जाती है. इसलिए कभी भी भोजन के तुरंत बाद चाय का सेवन नहीं करना चाहिए. भोजन के तुरंत बाद सोने से भोजन को पचाने में मुश्किल हो जाती है. तुरंत सोने से गैस की समस्या उत्पन्न होती है. रात को भोजन करने के दो - तीन घंटाटे के बाद ही सोना चाहिए. लेकिन दिन के भोजन के बाद थोड़ा सा आराम अच्छा माना जाता है. भोजन के तुरंत बाद स्नान करने से पैर, हाथ और शरीर में खून का प्रभाव बढ़ जाता है और पेट के आस - पास यह कम हो जाता है. जो हमारे पाचन तंत्र को काफी हानि पहुंचाता है. भोजन के बाद ये चीज़ें जहर के समान है - तो दोस्तों इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से आप स्वस्थ और निरोगी बने रह सकते हैं. जो एक अच्छी जिंदगी के लिए बेहद आवश्यक होता है.
नई दिल्ली। आज से 101 साल पहले अमृतसर में एक ऐसी घटना घटी थी जिसकी टीस आज भी कायम है। 13 अप्रैल की तारीख जब दस्तक देती है तो न चाहते हुए वो खौफनाक मंजर आंखों के सामने से गुजर जाता है जिसमें खून आंखों के सामने पसरा नजर आता है तो बच्चों, युवा और बुजुर्गों और महिलाओं की चीख कानों में गूंजती रहती है। जलियांवाल के उस छोटे से बाग में हजारों की संख्या में लोग बैसाखी के मौके पर जुटे हुए थे। लेकिन ब्रितानी हुकुमत को लग रहा था कि लोगों की भीड़ रौलेट एक्ट की नाफरमानी कर रही है। पंजाब के गवर्नर ओ डायर ने आदेश दिया कि विरोध के सुर को सख्ती से कुचल दिया जाए, जबकि हकीकत में भीड़ का कोई भी हिस्सा रौलेट एक्ट के बारे में बात भी नहीं कर रहा था। गवर्नर के आदेश पर डायर उस जगह पहुंचा और बोला कि शहर में धारा 144 लागू है, इस लाइन के खत्म होते ही उसने अंधाधूंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। इस काम के लिए उसने ज्यादातर अंग्रेज सिपाहियों का इस्तेमाल किया था। कहा जाता है कि जब सिपाहियों की बंदूकों में गोलियां खत्म हो गईं तो नरसंहार रुका। जलियांवाला बाग दरअसल कोई बाग नहीं था। बल्कि चारों तरफ से इमारतों से घिरा हुआ छोटा सा मैदान था। उस मैदान से निकलने के लिए संकरी गली थी। मैदान में एक कुआं था। जब अंग्रेजों की तरफ से गोलियां चलनी शुरू हुई तो लोगों में भगदड़ मच गई और लोग कुएं में कूदने लगे थे। इस घटना का असर पूरे देश में दिखाई दिया। वाइसरॉय की काउंसिल से कई सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। महात्मा गांधी ने अपनी उपाधि वापस कर दी। रविंद्रनाथ टैगोर ने नोबल पुरस्कार को लौटा दिया जो उन्हें गीतांजलि के लिए मिला था। कांग्रेस के विरोध के बाद इस घटना की जांच के लिए हंटर कमीशन बनाया गया। कमीशन ने ब्रिटिश सरकार को क्लीन चिट दे दिया। लेकिन जनरल डायर की आलोचना की। कमीशन ने माना कि डायर जैसी सोच किसी की नहीं थी। बाद में डायर ने भी अपनी गलती स्वीकारी थी। इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध कि जिस लहर ने जन्म दिया था उसने आगे के रास्ते को प्रशस्त कर दिया। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
नई दिल्ली। आज से एक सौ एक साल पहले अमृतसर में एक ऐसी घटना घटी थी जिसकी टीस आज भी कायम है। तेरह अप्रैल की तारीख जब दस्तक देती है तो न चाहते हुए वो खौफनाक मंजर आंखों के सामने से गुजर जाता है जिसमें खून आंखों के सामने पसरा नजर आता है तो बच्चों, युवा और बुजुर्गों और महिलाओं की चीख कानों में गूंजती रहती है। जलियांवाल के उस छोटे से बाग में हजारों की संख्या में लोग बैसाखी के मौके पर जुटे हुए थे। लेकिन ब्रितानी हुकुमत को लग रहा था कि लोगों की भीड़ रौलेट एक्ट की नाफरमानी कर रही है। पंजाब के गवर्नर ओ डायर ने आदेश दिया कि विरोध के सुर को सख्ती से कुचल दिया जाए, जबकि हकीकत में भीड़ का कोई भी हिस्सा रौलेट एक्ट के बारे में बात भी नहीं कर रहा था। गवर्नर के आदेश पर डायर उस जगह पहुंचा और बोला कि शहर में धारा एक सौ चौंतालीस लागू है, इस लाइन के खत्म होते ही उसने अंधाधूंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। इस काम के लिए उसने ज्यादातर अंग्रेज सिपाहियों का इस्तेमाल किया था। कहा जाता है कि जब सिपाहियों की बंदूकों में गोलियां खत्म हो गईं तो नरसंहार रुका। जलियांवाला बाग दरअसल कोई बाग नहीं था। बल्कि चारों तरफ से इमारतों से घिरा हुआ छोटा सा मैदान था। उस मैदान से निकलने के लिए संकरी गली थी। मैदान में एक कुआं था। जब अंग्रेजों की तरफ से गोलियां चलनी शुरू हुई तो लोगों में भगदड़ मच गई और लोग कुएं में कूदने लगे थे। इस घटना का असर पूरे देश में दिखाई दिया। वाइसरॉय की काउंसिल से कई सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। महात्मा गांधी ने अपनी उपाधि वापस कर दी। रविंद्रनाथ टैगोर ने नोबल पुरस्कार को लौटा दिया जो उन्हें गीतांजलि के लिए मिला था। कांग्रेस के विरोध के बाद इस घटना की जांच के लिए हंटर कमीशन बनाया गया। कमीशन ने ब्रिटिश सरकार को क्लीन चिट दे दिया। लेकिन जनरल डायर की आलोचना की। कमीशन ने माना कि डायर जैसी सोच किसी की नहीं थी। बाद में डायर ने भी अपनी गलती स्वीकारी थी। इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध कि जिस लहर ने जन्म दिया था उसने आगे के रास्ते को प्रशस्त कर दिया। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
अध्याय १६ क्या कभी क्षण भर रुक कर आपने यह विचार किया है कि अन्य व्यक्तियों के पास इस संबंध में कितना कहने के लिए है कि आप क्या करते हैं ? यदि आप इक्कीस वर्ष के हो चुके हैं और माता-पिता के नियंत्रण से पर्याप्त मुक्त हैं, तो भी समाज के नियंत्रण से मुक्त नहीं हैं । इसका दबाव आपके संपूर्ण व्यवहार पर होता है, यहाँ तक कि किस सूट के साथ कौन-सी टाई लगानी होगी - जैसी साधारण बात से लेकर नैतिक जीवन के नियमों तक पर इसका प्रभाव रहता है। मंत्रीगण और बड़े लोग आपको नैतिक व्यवहार का उपदेश देते हैं, आपके नियोक्ता और पड़ोसी स्नेहपूर्वक रेड क्रॉस की सहायता करने का आपसे आग्रह करते हैं तथा बहुत कोमल ढंग से लोग आपको आदेश देते हैं कि आप कैसे वस्त्र पहनें, आप क्या पीएँ और अपना मनोरंजन आप कैसे करें । वस्तुतः जिस क्षण से हममें से प्रत्येक व्यक्ति जन्म लेता है, समाज हम पर प्रभाव डालता है, हमारा पथ-प्रदर्शन करता है, बरामर्श देता है और जीवन के सही तथा उपयुक्त ढंग को अपनाने के लिए हमें बाध्य करता है । जैसा कि रूभ बेनेडिक्ट नामक सामाजिक मानव-विज्ञानशास्त्री ( १९३४ ) ने कहा है : "किसी व्यक्ति का जीवन इतिहास सर्वप्रथम उसके सभाज द्वारा परंपरा से प्रदत्त प्रतिरूपों और मानकों से समझौता है। उसके जन्म के क्षण से, जिन रूढ़ियों में वह उत्पन्न होता है, वे उसके जीवनानुभव एवं व्यवहार को प्रभावित करती हैं । जब तक वह बोलना प्रारंभ करता है, वह अपनी संस्कृति का एक लघु प्राणी बन जाता है और जब वह बड़ा होता है, तो सामाजिक क्रियाओं में भाग लेने लगता है, समाज की आदतें उसकी आदतें बन जाती हैं तथा समाज के विश्वास उसके विश्वास, समाज के असंभाव्य उसके असंभाव्य । प्रत्येक शिशु, जो अपने समाज के परिवेश में उत्पन्न होता है, उसमें भाग लेता है और कोई बालक जो विश्व के दूसरे कोने में पैदा हुआ है, उसका सहस्रवाँ भाग भी उपलब्ध नहीं कर सकता ।"
अध्याय सोलह क्या कभी क्षण भर रुक कर आपने यह विचार किया है कि अन्य व्यक्तियों के पास इस संबंध में कितना कहने के लिए है कि आप क्या करते हैं ? यदि आप इक्कीस वर्ष के हो चुके हैं और माता-पिता के नियंत्रण से पर्याप्त मुक्त हैं, तो भी समाज के नियंत्रण से मुक्त नहीं हैं । इसका दबाव आपके संपूर्ण व्यवहार पर होता है, यहाँ तक कि किस सूट के साथ कौन-सी टाई लगानी होगी - जैसी साधारण बात से लेकर नैतिक जीवन के नियमों तक पर इसका प्रभाव रहता है। मंत्रीगण और बड़े लोग आपको नैतिक व्यवहार का उपदेश देते हैं, आपके नियोक्ता और पड़ोसी स्नेहपूर्वक रेड क्रॉस की सहायता करने का आपसे आग्रह करते हैं तथा बहुत कोमल ढंग से लोग आपको आदेश देते हैं कि आप कैसे वस्त्र पहनें, आप क्या पीएँ और अपना मनोरंजन आप कैसे करें । वस्तुतः जिस क्षण से हममें से प्रत्येक व्यक्ति जन्म लेता है, समाज हम पर प्रभाव डालता है, हमारा पथ-प्रदर्शन करता है, बरामर्श देता है और जीवन के सही तथा उपयुक्त ढंग को अपनाने के लिए हमें बाध्य करता है । जैसा कि रूभ बेनेडिक्ट नामक सामाजिक मानव-विज्ञानशास्त्री ने कहा है : "किसी व्यक्ति का जीवन इतिहास सर्वप्रथम उसके सभाज द्वारा परंपरा से प्रदत्त प्रतिरूपों और मानकों से समझौता है। उसके जन्म के क्षण से, जिन रूढ़ियों में वह उत्पन्न होता है, वे उसके जीवनानुभव एवं व्यवहार को प्रभावित करती हैं । जब तक वह बोलना प्रारंभ करता है, वह अपनी संस्कृति का एक लघु प्राणी बन जाता है और जब वह बड़ा होता है, तो सामाजिक क्रियाओं में भाग लेने लगता है, समाज की आदतें उसकी आदतें बन जाती हैं तथा समाज के विश्वास उसके विश्वास, समाज के असंभाव्य उसके असंभाव्य । प्रत्येक शिशु, जो अपने समाज के परिवेश में उत्पन्न होता है, उसमें भाग लेता है और कोई बालक जो विश्व के दूसरे कोने में पैदा हुआ है, उसका सहस्रवाँ भाग भी उपलब्ध नहीं कर सकता ।"
यदि आपके मन में अपना मकान बेचने का विचार है, तो उसे बाजार में उतार दें। आज ऐसा दिन है जिसमें आप पुराने सौदों को बेच सकते हैं। वे व्यक्ति जो आज अपना मकान बेचते हैं अथवा खरीदते हैं उनके लिए आज का दिन मुनाफा देने वाला है। ऐसे मुनाफे वाले दिन हमेशा नहीं आते अतः आपको इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। ऐसे मामलों के लिए जिस व्यवसाय के बारे में बातचीत जारी है, आपका दिन सर्वश्रेष्ट है। आज आपके घरेलु जीवन में कुछ उथल-पुथल हो सकती है। लेकिन परेशान ना हों जो होगा अच्छे के लिए ही होगा। घर पर मेहमानों के आने से शोर तो बढ़ेगा ही खुशियां भी बढ़ेंगी। अगर उनके साथ मजे करने के लिए आपको अपनी रात की नींद भी गंवानी पड़े तो भी तैयार रहें और एक दूसरे के साथ का पूरा आनंद उठाएं। किसी पारिवारिक काम से आपको शायद आज यात्रा करनी पड़े। आपको शायद विदेश यात्रा का मौका मिले इसलिए जिनके पास पासपोर्ट नहीं है वो इसके लिए आवेदन दे दें। आपकी इस यात्रा से आपको बहुत खुशी मिलेगी।
यदि आपके मन में अपना मकान बेचने का विचार है, तो उसे बाजार में उतार दें। आज ऐसा दिन है जिसमें आप पुराने सौदों को बेच सकते हैं। वे व्यक्ति जो आज अपना मकान बेचते हैं अथवा खरीदते हैं उनके लिए आज का दिन मुनाफा देने वाला है। ऐसे मुनाफे वाले दिन हमेशा नहीं आते अतः आपको इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। ऐसे मामलों के लिए जिस व्यवसाय के बारे में बातचीत जारी है, आपका दिन सर्वश्रेष्ट है। आज आपके घरेलु जीवन में कुछ उथल-पुथल हो सकती है। लेकिन परेशान ना हों जो होगा अच्छे के लिए ही होगा। घर पर मेहमानों के आने से शोर तो बढ़ेगा ही खुशियां भी बढ़ेंगी। अगर उनके साथ मजे करने के लिए आपको अपनी रात की नींद भी गंवानी पड़े तो भी तैयार रहें और एक दूसरे के साथ का पूरा आनंद उठाएं। किसी पारिवारिक काम से आपको शायद आज यात्रा करनी पड़े। आपको शायद विदेश यात्रा का मौका मिले इसलिए जिनके पास पासपोर्ट नहीं है वो इसके लिए आवेदन दे दें। आपकी इस यात्रा से आपको बहुत खुशी मिलेगी।
अगर आप आज खाने में कुछ बहुत ही चटपटा खाने के बारे में सोच रहे हैं तो आप चटपटी चाट बना सकते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं आलू-पनीर की चाट। यह बनाने में आसान है और खाकर आपको मजा आ जाएगा। आलू-पनीर की चाट बनाने की विधि- सबसे पहले एक बर्तन में उबले हुए आलू काट लें। उसके बाद पनीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इस बर्तन में कटा हुआ प्याज़ और टमाटर मिला ले। इसके बाद इस मिश्रण को अच्छे से मिला ले। अब एक कटोरी में सभी सूखे मसाले और इमली की चटनी और नींबू का रस मिला लें। इसके बाद कटोरी के मिश्रण को अच्छे से मिला ले और दोनों मिश्रण को मिला ले। लीजिये आपकी चाट तैयार है। आप इसे अनार के दानों और धनिया पत्ते से सजाएं।
अगर आप आज खाने में कुछ बहुत ही चटपटा खाने के बारे में सोच रहे हैं तो आप चटपटी चाट बना सकते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं आलू-पनीर की चाट। यह बनाने में आसान है और खाकर आपको मजा आ जाएगा। आलू-पनीर की चाट बनाने की विधि- सबसे पहले एक बर्तन में उबले हुए आलू काट लें। उसके बाद पनीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इस बर्तन में कटा हुआ प्याज़ और टमाटर मिला ले। इसके बाद इस मिश्रण को अच्छे से मिला ले। अब एक कटोरी में सभी सूखे मसाले और इमली की चटनी और नींबू का रस मिला लें। इसके बाद कटोरी के मिश्रण को अच्छे से मिला ले और दोनों मिश्रण को मिला ले। लीजिये आपकी चाट तैयार है। आप इसे अनार के दानों और धनिया पत्ते से सजाएं।
नई दिल्ली : सरकार द्वारा की गई नोट बन्दी से लोग परेशान हो रहे हैं. देश भर में लोग एटीएम और बैंको की कतार में लगे हुए है. ख़ास तौर से एटीएम से रुपए नहीं मिल रहे हैं. अधिकांश लोग एटीएम से खाली हाथ लौट रहे हैं, क्योंकि एटीएम जल्दी खाली हो रहे हैं. सरकार ने भले ही 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी कर दिए हैं लेकिन तकनीकी कारणों से वे एटीएम से नही निकल पा रहे है. इसलिए फ़िलहाल एटीएम से सिर्फ 100 रु. के ही नोट निकलेंगे. मिली जानकारी के अनुसार अगले कुछ सप्ताह तक पूरे देश में एटीएम सिर्फ 100 रुपये के नोट ही निकालेंगे. इसकी यदि गणना करें तो वर्तमान में एटीएम मशीनों में डाले जाने वाले सिर्फ 100 के नोटों की रकम 8. 8 लाख रुपये होती है. इस हिसाब से यदि एक एटीएम में 8. 8 लाख रुपये के 100 के नोट डाले जाते हैं और एक व्यक्ति दिन की अधिकतम सीमा यानी 2000 रुपये की निकासी करता है तो एक एटीएम से सिर्फ 440 लोग ही रुपए निकाल पाएंगे. इस प्रकार यह समस्या लंबे समय तक चलने वाली है, क्योंकि देश में एटीएम की संख्या कम होने से रोजाना एक एटीएम से एक दिन में सिर्फ 440 लोग ही लाभान्वित होंगे, हाँ यदि निकट भविष्य में नोटों की निकासी की सीमा बढाई जाती है और 500 और 2000 के नए नोट एटीएम से निकलना शुरू हो जाते हैं तो राहत मिल सकती है, अन्यथा परेशान होने का यह सिलसिला अभी जल्दी थमने वाला नहीं है.
नई दिल्ली : सरकार द्वारा की गई नोट बन्दी से लोग परेशान हो रहे हैं. देश भर में लोग एटीएम और बैंको की कतार में लगे हुए है. ख़ास तौर से एटीएम से रुपए नहीं मिल रहे हैं. अधिकांश लोग एटीएम से खाली हाथ लौट रहे हैं, क्योंकि एटीएम जल्दी खाली हो रहे हैं. सरकार ने भले ही पाँच सौ और दो हज़ार रुपयापये के नए नोट जारी कर दिए हैं लेकिन तकनीकी कारणों से वे एटीएम से नही निकल पा रहे है. इसलिए फ़िलहाल एटीएम से सिर्फ एक सौ रुपया. के ही नोट निकलेंगे. मिली जानकारी के अनुसार अगले कुछ सप्ताह तक पूरे देश में एटीएम सिर्फ एक सौ रुपयापये के नोट ही निकालेंगे. इसकी यदि गणना करें तो वर्तमान में एटीएम मशीनों में डाले जाने वाले सिर्फ एक सौ के नोटों की रकम आठ. आठ लाख रुपये होती है. इस हिसाब से यदि एक एटीएम में आठ. आठ लाख रुपये के एक सौ के नोट डाले जाते हैं और एक व्यक्ति दिन की अधिकतम सीमा यानी दो हज़ार रुपयापये की निकासी करता है तो एक एटीएम से सिर्फ चार सौ चालीस लोग ही रुपए निकाल पाएंगे. इस प्रकार यह समस्या लंबे समय तक चलने वाली है, क्योंकि देश में एटीएम की संख्या कम होने से रोजाना एक एटीएम से एक दिन में सिर्फ चार सौ चालीस लोग ही लाभान्वित होंगे, हाँ यदि निकट भविष्य में नोटों की निकासी की सीमा बढाई जाती है और पाँच सौ और दो हज़ार के नए नोट एटीएम से निकलना शुरू हो जाते हैं तो राहत मिल सकती है, अन्यथा परेशान होने का यह सिलसिला अभी जल्दी थमने वाला नहीं है.
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। सासनी के मोहल्ला छिपैटी से एक विवाहिता बीते दस दिनों से लापता है। विवाहिता के मायके वालों ने पुलिस को दी शिकायत में दहेज के लिए उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने विवाहिता की गुमशुदगी भी दर्ज कर ली है। अलीगढ़ के गोंडा थाना क्षेत्र के नगला दरबर के रहने वाले महेश कुमार गुप्ता ने इस साल 21 अप्रैल को अपनी बेटी जागृति की शादी सासनी के मोहल्ला छिपैटी के एक युवक से की थी। महेश के मुताबिक शादी में उन्होंने करीब 25 लाख रुपये खर्च किए थे। बावजूद इसके ससुराली 10 लाख रुपये की और मांग कर रहे थे और रुपये नहीं देने पर बेटी जागृति को प्रताड़ित किया जा रहा था। महेश गुप्ता का कहना है कि 20 अगस्त को उनकी आखिरी बार बेटी से बात हुई। इसके बाद कई दिन तक बेटी का फोन नहीं आया। 24 अगस्त को जागृति के ससुर ने फोन कर उन्हें उसके लापता होने की जानकारी दी। इस पर जब जागृति के परिजन उसकी ससुराल पहुंचे तो आरोपी ससुरालियों ने उन्हें भला-बुरा कहा और कहा कि जागृति को जहां जाना था, वहां पहुंचा दिया गया है। महेश कुमार का आरोप है कि ससुरालियों ने उनकी बेटी की हत्या कर दी है। वहीं इस मामले में सासनी कोतवाल दिनेश कुमार सिसौदिया का कहना है कि विवाहिता के लापता होने की सूचना पर उसकी गुमशुदगी 24 अगस्त को ही दर्ज कर ली गई है। विवाहिता का पता लगाया जा रहा है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। सासनी के मोहल्ला छिपैटी से एक विवाहिता बीते दस दिनों से लापता है। विवाहिता के मायके वालों ने पुलिस को दी शिकायत में दहेज के लिए उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने विवाहिता की गुमशुदगी भी दर्ज कर ली है। अलीगढ़ के गोंडा थाना क्षेत्र के नगला दरबर के रहने वाले महेश कुमार गुप्ता ने इस साल इक्कीस अप्रैल को अपनी बेटी जागृति की शादी सासनी के मोहल्ला छिपैटी के एक युवक से की थी। महेश के मुताबिक शादी में उन्होंने करीब पच्चीस लाख रुपये खर्च किए थे। बावजूद इसके ससुराली दस लाख रुपये की और मांग कर रहे थे और रुपये नहीं देने पर बेटी जागृति को प्रताड़ित किया जा रहा था। महेश गुप्ता का कहना है कि बीस अगस्त को उनकी आखिरी बार बेटी से बात हुई। इसके बाद कई दिन तक बेटी का फोन नहीं आया। चौबीस अगस्त को जागृति के ससुर ने फोन कर उन्हें उसके लापता होने की जानकारी दी। इस पर जब जागृति के परिजन उसकी ससुराल पहुंचे तो आरोपी ससुरालियों ने उन्हें भला-बुरा कहा और कहा कि जागृति को जहां जाना था, वहां पहुंचा दिया गया है। महेश कुमार का आरोप है कि ससुरालियों ने उनकी बेटी की हत्या कर दी है। वहीं इस मामले में सासनी कोतवाल दिनेश कुमार सिसौदिया का कहना है कि विवाहिता के लापता होने की सूचना पर उसकी गुमशुदगी चौबीस अगस्त को ही दर्ज कर ली गई है। विवाहिता का पता लगाया जा रहा है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दिल्ली में खेले गए आईपीएल 2019 के 16वें मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने दिल्ली कैपिटल्स को पांच विकेट से हराकर अंक तालिका में पहला स्थान हासिल कर लिया। दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर 129 रन बनाये, जिसके जवाब में सनराइजर्स हैदराबाद में 19वें ओवर में ही पांच विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। दिल्ली कैपिटल्स की यह पांच मैचों में तीसरी हार है। जॉनी बेयरस्टो को उनकी धुआंधार पारी के लिए मैन ऑफ़ द मैच चुना गया। भुवनेश्वर कुमार ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और दिल्ली कैपिटल्स ने हर्षल पटेल, आवेश खान और हनुमा विहारी की जगह टीम में इशांत शर्मा, राहुल तेवतिया और अक्षर पटेल को शामिल किया। हालाँकि टॉस हारने के बाद दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही और तीसरे ही ओवर में पृथ्वी शॉ (11) आउट हो गए। इसके बाद छठे ओवर में शिखर धवन (12) भी आउट हो गए और पावरप्ले के बाद स्कोर 36/2 था। पावरप्ले के बाद भी दिल्ली कैपिटल्स का रन रेट नहीं बढ़ पाया और नौवें ओवर में ऋषभ पंत (5) के आउट होने से मेजबानों को बड़ा झटका लगा। 10 ओवर के बाद स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर सिर्फ 56 था। 11वें ओवर में राहुल तेवतिया (5) और 14वें ओवर में कॉलिन इनग्राम (5) भी चलते बने और दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर 75/5 हो गया था। कप्तान श्रेयस अय्यर ने एक छोर संभाले रखा और 41 गेंदों में 43 रनों की पारी खेली, लेकिन 17वें ओवर में 93 के स्कोर पर उनके आउट होने से दिल्ली कैपिटल्स के मजबूत स्कोर तक पहुंचने की उम्मीदों को झटका दिया। 18वें ओवर में दिल्ली कैपिटल्स ने 100 का आंकड़ा पार किया, लेकिन 19वें ओवर में क्रिस मॉरिस (17) भी आउट हो गए। अक्षर पटेल ने अंत में 13 गेंदों में 23 रनों की तेज़ पारी खेली और उसी वजह 20 ओवर में स्कोर 129 तक पहुंच सका। सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से सिद्धार्थ कॉल, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद नबी ने 2-2 और संदीप शर्मा और राशिद खान ने एक-एक विकेट लिया। लक्ष्य के जवाब में जॉनी बेयरस्टो ने टीम को धुआंधार शुरुआत दिलाई और पावरप्ले में स्कोर 62/0 था। बेयरस्टो ने 28 गेंदों में 48 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, लेकिन सातवें ओवर में उनके आउट होने से मेहमानों को पहला झटका लगा। इसके बाद आठवें ओवर में डेविड वॉर्नर (18 गेंद 10) भी एक धीमी पारी खेलकर आउट हो गए और आज उनका बल्ला नहीं चला। मनीष पांडे का खराब फॉर्म जारी रहा और वह 13 गेंदों में 10 रन बनाकर आउट हुए। 14वें ओवर में हैदराबाद के 100 रन पूरे हुए और 15वें ओवर में विजय शंकर 16 रन बनाकर आउट हो गए। 16वें ओवर में दीपक हूडा (10) भी आउट हो गए और हैदराबाद का स्कोर 111/5 हो गया था। हालाँकि मोहम्मद नबी (9 गेंद 17) और युसूफ पठान (11 गेंद 9) ने दिल्ली कैपिटल्स को चमत्कार का कोई मौका नहीं दिया और टीम को नौ गेंद शेष रहते जीत दिला दी। दिल्ली की तरफ से कगिसो रबाडा, राहुल तेवतिया, इशांत शर्मा, संदीप लामिचाने और अक्षर पटेल ने एक-एक विकेट लिया। संक्षिप्त स्कोरकार्डः दिल्ली कैपिटल्सः 129/8 (श्रेयस अय्यर 43, मोहम्मद नबी 2/21) सनराइजर्स हैदराबादः 131/5 (जॉनी बेयरस्टो 48, राहुल तेवतिया 1/10)
दिल्ली में खेले गए आईपीएल दो हज़ार उन्नीस के सोलहवें मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने दिल्ली कैपिटल्स को पांच विकेट से हराकर अंक तालिका में पहला स्थान हासिल कर लिया। दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बीस ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ उनतीस रन बनाये, जिसके जवाब में सनराइजर्स हैदराबाद में उन्नीसवें ओवर में ही पांच विकेट खोकर जीत हासिल कर ली। दिल्ली कैपिटल्स की यह पांच मैचों में तीसरी हार है। जॉनी बेयरस्टो को उनकी धुआंधार पारी के लिए मैन ऑफ़ द मैच चुना गया। भुवनेश्वर कुमार ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया और दिल्ली कैपिटल्स ने हर्षल पटेल, आवेश खान और हनुमा विहारी की जगह टीम में इशांत शर्मा, राहुल तेवतिया और अक्षर पटेल को शामिल किया। हालाँकि टॉस हारने के बाद दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही और तीसरे ही ओवर में पृथ्वी शॉ आउट हो गए। इसके बाद छठे ओवर में शिखर धवन भी आउट हो गए और पावरप्ले के बाद स्कोर छत्तीस/दो था। पावरप्ले के बाद भी दिल्ली कैपिटल्स का रन रेट नहीं बढ़ पाया और नौवें ओवर में ऋषभ पंत के आउट होने से मेजबानों को बड़ा झटका लगा। दस ओवर के बाद स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर सिर्फ छप्पन था। ग्यारहवें ओवर में राहुल तेवतिया और चौदहवें ओवर में कॉलिन इनग्राम भी चलते बने और दिल्ली कैपिटल्स का स्कोर पचहत्तर/पाँच हो गया था। कप्तान श्रेयस अय्यर ने एक छोर संभाले रखा और इकतालीस गेंदों में तैंतालीस रनों की पारी खेली, लेकिन सत्रहवें ओवर में तिरानवे के स्कोर पर उनके आउट होने से दिल्ली कैपिटल्स के मजबूत स्कोर तक पहुंचने की उम्मीदों को झटका दिया। अट्ठारहवें ओवर में दिल्ली कैपिटल्स ने एक सौ का आंकड़ा पार किया, लेकिन उन्नीसवें ओवर में क्रिस मॉरिस भी आउट हो गए। अक्षर पटेल ने अंत में तेरह गेंदों में तेईस रनों की तेज़ पारी खेली और उसी वजह बीस ओवर में स्कोर एक सौ उनतीस तक पहुंच सका। सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से सिद्धार्थ कॉल, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद नबी ने दो-दो और संदीप शर्मा और राशिद खान ने एक-एक विकेट लिया। लक्ष्य के जवाब में जॉनी बेयरस्टो ने टीम को धुआंधार शुरुआत दिलाई और पावरप्ले में स्कोर बासठ/शून्य था। बेयरस्टो ने अट्ठाईस गेंदों में अड़तालीस रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, लेकिन सातवें ओवर में उनके आउट होने से मेहमानों को पहला झटका लगा। इसके बाद आठवें ओवर में डेविड वॉर्नर भी एक धीमी पारी खेलकर आउट हो गए और आज उनका बल्ला नहीं चला। मनीष पांडे का खराब फॉर्म जारी रहा और वह तेरह गेंदों में दस रन बनाकर आउट हुए। चौदहवें ओवर में हैदराबाद के एक सौ रन पूरे हुए और पंद्रहवें ओवर में विजय शंकर सोलह रन बनाकर आउट हो गए। सोलहवें ओवर में दीपक हूडा भी आउट हो गए और हैदराबाद का स्कोर एक सौ ग्यारह/पाँच हो गया था। हालाँकि मोहम्मद नबी और युसूफ पठान ने दिल्ली कैपिटल्स को चमत्कार का कोई मौका नहीं दिया और टीम को नौ गेंद शेष रहते जीत दिला दी। दिल्ली की तरफ से कगिसो रबाडा, राहुल तेवतिया, इशांत शर्मा, संदीप लामिचाने और अक्षर पटेल ने एक-एक विकेट लिया। संक्षिप्त स्कोरकार्डः दिल्ली कैपिटल्सः एक सौ उनतीस/आठ सनराइजर्स हैदराबादः एक सौ इकतीस/पाँच
आज की डील्स में फ्लिपकार्ट, इंटेक्स, लेनोवो ब्रांड आदि के पॉवर बैंक्स पर ये डिस्काउंट ऑफर्स मिल रहे हैं। फ्लिपकार्ट आज कुछ पॉवर बैंक्स पर बढ़िया डिस्काउंट ऑफर्स दे रहा है। पॉवर बैंक्स एक ऐसी एक्सेसरी है जिसकी ज़रूरत हमें कभी न कभी पड़ती ही है, खासकर जब हम सफर में हों और फोन को चार्ज करने का कोई सोर्स न हो या फिर आपके फोन की बैटरी ज्यादा देर नहीं चलती है और आप लगातार फोन का इस्तेमाल करते हैं। ये पॉवर बैंक्स अलग-अलग कीमत में आते हैं और अलग-अलग कैपेसिटी ऑफर करते हैं। अगर आप अपने लिए एक नया पॉवरबैंक खरीदना चाह रहे हैं तो फ्लिपकार्ट के इन ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं। Ambrane 10000 mAh Power Bank (P-1122, NA) इस पॉवर बैंक की कीमत वैसे तो 1,699 रूपये है लेकिन फ्लिपकार्ट के 58% डिस्काउंट के बाद आप इस पॉवर बैंक को 699 रूपये की कीमत में खरीद सकते हैं। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी 10000 mAh है और यह लिथियम-आयन बैटरी के साथ आता है। यहाँ से खरीदें। इस पॉवर बैंक की कीमत 2,799 रूपये है लेकिन 75% डिस्काउंट के बाद आप इसे 699 रूपये की कीमत में खरीद सकते हैं। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी 10400 mAh है और यह लिथियम-आयन बैटरी से लैस है। यहाँ से खरीदें। इस पॉवर बैंक पर फ्लिपकार्ट 52% डिस्काउंट दे रहा है जिसके बाद इस पॉवर बैंक की कीमत 1,799 रूपये से कम होकर 849 हो गई है। पॉवर सोर्स के लिए USB कनेक्टर मौजूद है और इसकी कैपेसिटी 10000 mAh है। यहाँ से खरीदें। Flipkart के इस पॉवर बैंक की कीमत 1,149 रूपये है लेकिन 40% डिस्काउं के बाद इसे 689 रूपये की कीमत में खरीदा जा सकता है। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी 10000 mAh है और यह AC एडाप्टर से लैस है। यहाँ से खरीदें। Intex के इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी 10000 mAh है और इसका वज़न 240 ग्राम है। आज फ्लिपकार्ट इस पॉवरबैंक की कीमत पर 65% डिस्काउंट दे रहा है जिसके बाद इस पावर बैंक को 799 रूपये की कीमत में खरीदा जा सकता है। यहाँ से खरीदें। लेनोवो के इस पॉवर बैंक की कीमत पर 70% डिस्काउंट मिल रहा है जिसके बाद यह पॉवर बैंक 2,999 रूपये के बजाए 899 रूपये की कीमत में उपलब्ध है। इसकी कैपेसिटी 10400 mAh है और यह AC एडाप्टर के साथ आता है। यहाँ से खरीदें।
आज की डील्स में फ्लिपकार्ट, इंटेक्स, लेनोवो ब्रांड आदि के पॉवर बैंक्स पर ये डिस्काउंट ऑफर्स मिल रहे हैं। फ्लिपकार्ट आज कुछ पॉवर बैंक्स पर बढ़िया डिस्काउंट ऑफर्स दे रहा है। पॉवर बैंक्स एक ऐसी एक्सेसरी है जिसकी ज़रूरत हमें कभी न कभी पड़ती ही है, खासकर जब हम सफर में हों और फोन को चार्ज करने का कोई सोर्स न हो या फिर आपके फोन की बैटरी ज्यादा देर नहीं चलती है और आप लगातार फोन का इस्तेमाल करते हैं। ये पॉवर बैंक्स अलग-अलग कीमत में आते हैं और अलग-अलग कैपेसिटी ऑफर करते हैं। अगर आप अपने लिए एक नया पॉवरबैंक खरीदना चाह रहे हैं तो फ्लिपकार्ट के इन ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं। Ambrane दस हज़ार mAh Power Bank इस पॉवर बैंक की कीमत वैसे तो एक,छः सौ निन्यानवे रूपये है लेकिन फ्लिपकार्ट के अट्ठावन% डिस्काउंट के बाद आप इस पॉवर बैंक को छः सौ निन्यानवे रूपये की कीमत में खरीद सकते हैं। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी दस हज़ार mAh है और यह लिथियम-आयन बैटरी के साथ आता है। यहाँ से खरीदें। इस पॉवर बैंक की कीमत दो,सात सौ निन्यानवे रूपये है लेकिन पचहत्तर% डिस्काउंट के बाद आप इसे छः सौ निन्यानवे रूपये की कीमत में खरीद सकते हैं। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी दस हज़ार चार सौ mAh है और यह लिथियम-आयन बैटरी से लैस है। यहाँ से खरीदें। इस पॉवर बैंक पर फ्लिपकार्ट बावन% डिस्काउंट दे रहा है जिसके बाद इस पॉवर बैंक की कीमत एक,सात सौ निन्यानवे रूपये से कम होकर आठ सौ उनचास हो गई है। पॉवर सोर्स के लिए USB कनेक्टर मौजूद है और इसकी कैपेसिटी दस हज़ार mAh है। यहाँ से खरीदें। Flipkart के इस पॉवर बैंक की कीमत एक,एक सौ उनचास रूपये है लेकिन चालीस% डिस्काउं के बाद इसे छः सौ नवासी रूपये की कीमत में खरीदा जा सकता है। इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी दस हज़ार mAh है और यह AC एडाप्टर से लैस है। यहाँ से खरीदें। Intex के इस पॉवर बैंक की कैपेसिटी दस हज़ार mAh है और इसका वज़न दो सौ चालीस ग्राम है। आज फ्लिपकार्ट इस पॉवरबैंक की कीमत पर पैंसठ% डिस्काउंट दे रहा है जिसके बाद इस पावर बैंक को सात सौ निन्यानवे रूपये की कीमत में खरीदा जा सकता है। यहाँ से खरीदें। लेनोवो के इस पॉवर बैंक की कीमत पर सत्तर% डिस्काउंट मिल रहा है जिसके बाद यह पॉवर बैंक दो,नौ सौ निन्यानवे रूपये के बजाए आठ सौ निन्यानवे रूपये की कीमत में उपलब्ध है। इसकी कैपेसिटी दस हज़ार चार सौ mAh है और यह AC एडाप्टर के साथ आता है। यहाँ से खरीदें।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और गैर सरकारी संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ कई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया है. उप मुख्यमंत्री ने कहा "कोई भी व्यक्ति जो मेघालय का निवासी नहीं है और राज्य में 24 घंटे से अधिक रहना चाहता है, उसे सरकार को दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. " केंद्र राज्य और जिला परिषदों के कर्मचारियों को अधिनियम के दायरे से छूट दी गई है. मेघालय निवासी, सुरक्षा और सुरक्षा अधिनियम 2016 (MRSSA) को तत्कालीन कांग्रेस ने MUA-II सरकार द्वारा इनर लाइन परमिट (ILP) के एवज में अवैध आव्रजन की जांच के लिए एक व्यापक तंत्र के हिस्से के रूप में पारित किया था. टाइनसॉन्ग ने कहा कि जब अधिनियम 2016 में पहली बार पारित किया गया था तो केंद्र बिंदु किरायेदारों पर था. उन्होंने कहा "हम पंजीकरण के लिए सरल प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा नियमों को फिर से तैयार करेंगे और ऑनलाइन पंजीकरण की अनुमति भी देंगे. एक बार नियम तैयार हो जाने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित उपायुक्तों के नेतृत्व वाले जिला कार्य बलों को और अधिक सक्रिय होना होगा".
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और गैर सरकारी संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ कई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया है. उप मुख्यमंत्री ने कहा "कोई भी व्यक्ति जो मेघालय का निवासी नहीं है और राज्य में चौबीस घंटाटे से अधिक रहना चाहता है, उसे सरकार को दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. " केंद्र राज्य और जिला परिषदों के कर्मचारियों को अधिनियम के दायरे से छूट दी गई है. मेघालय निवासी, सुरक्षा और सुरक्षा अधिनियम दो हज़ार सोलह को तत्कालीन कांग्रेस ने MUA-II सरकार द्वारा इनर लाइन परमिट के एवज में अवैध आव्रजन की जांच के लिए एक व्यापक तंत्र के हिस्से के रूप में पारित किया था. टाइनसॉन्ग ने कहा कि जब अधिनियम दो हज़ार सोलह में पहली बार पारित किया गया था तो केंद्र बिंदु किरायेदारों पर था. उन्होंने कहा "हम पंजीकरण के लिए सरल प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा नियमों को फिर से तैयार करेंगे और ऑनलाइन पंजीकरण की अनुमति भी देंगे. एक बार नियम तैयार हो जाने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित उपायुक्तों के नेतृत्व वाले जिला कार्य बलों को और अधिक सक्रिय होना होगा".
अगर आप सनी लियोन को डिफरेंट लुक में देखना चाहते हैं, तो आपका इंतजार अब खत्म हो चुका है. अब आप सनी लियोन को बिल्कुल ही नए लुक में देखेंगे. पोर्न फिल्मों की दुनिया को छोड़कर बॉलीवुड में खास मुकाम बना चुकी इस अभिनेत्री ने शरीर के एक हिस्से में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव के बाद सनी का लुक बिल्कुल ही बदल गया है. ऐसा लगता है कि अपने खास स्टाइल स्टेटमेंट और खूबसूरती के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री सनी लियोन अपने बालों के साथ प्रयोग करने के मूड में हैं. फिल्म 'मस्तीजादे' की अभिनेत्री ने अपने बालों का रंग गुलाबी करा लिया है. इससे पहले इस महीने की शुरुआत में उन्होंने अपने बालों को ब्लू और पर्पल रंग में रंगाया था. एक बार फिर सनी ने साबित कर दिया है कि वो एक्सपेरिमेंट करने से नहीं डरती है. उन्हें नए-नए हेयरस्टाइल और लेटेस्ट ट्रेंड आजमाना बेहद पसंद है. सनी ने रेन्बो हेयर के साथ एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत दिखाई है. इनके इस लुक की जितनी तारीफ की जाए कम है. 35 साल की इस ऐक्ट्रेस ने अपने नए ब्लू और पर्पल हेयर कलर की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा था- Nothing wrong with loving some blue hair! ! ! Lol thanks. उनके एक्सपेरिमेंट को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि वे ना सिर्फ स्क्रीन, बल्कि रियल लाइफ में भी बोल्ड होती जा रही हैं.
अगर आप सनी लियोन को डिफरेंट लुक में देखना चाहते हैं, तो आपका इंतजार अब खत्म हो चुका है. अब आप सनी लियोन को बिल्कुल ही नए लुक में देखेंगे. पोर्न फिल्मों की दुनिया को छोड़कर बॉलीवुड में खास मुकाम बना चुकी इस अभिनेत्री ने शरीर के एक हिस्से में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव के बाद सनी का लुक बिल्कुल ही बदल गया है. ऐसा लगता है कि अपने खास स्टाइल स्टेटमेंट और खूबसूरती के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री सनी लियोन अपने बालों के साथ प्रयोग करने के मूड में हैं. फिल्म 'मस्तीजादे' की अभिनेत्री ने अपने बालों का रंग गुलाबी करा लिया है. इससे पहले इस महीने की शुरुआत में उन्होंने अपने बालों को ब्लू और पर्पल रंग में रंगाया था. एक बार फिर सनी ने साबित कर दिया है कि वो एक्सपेरिमेंट करने से नहीं डरती है. उन्हें नए-नए हेयरस्टाइल और लेटेस्ट ट्रेंड आजमाना बेहद पसंद है. सनी ने रेन्बो हेयर के साथ एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत दिखाई है. इनके इस लुक की जितनी तारीफ की जाए कम है. पैंतीस साल की इस ऐक्ट्रेस ने अपने नए ब्लू और पर्पल हेयर कलर की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा था- Nothing wrong with loving some blue hair! ! ! Lol thanks. उनके एक्सपेरिमेंट को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि वे ना सिर्फ स्क्रीन, बल्कि रियल लाइफ में भी बोल्ड होती जा रही हैं.
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान एक बार फिर मुश्किल में फंसते दिखाई दे रहे हैं। उनपर आरोप लगा है कि उन्होंरने बच्चे के जन्म से पहले ही उसका लिंग परीक्षण कराया। पिछले दिनों खबर आई थी कि शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी एक बार फिर से माता-पिता बनने जा रहे हैं। वह सेरोगेसी के जरिए एक बच्चेा का जन्मस कराने जा रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि वे एक बेबी बॉय के पैरंट्स बनने वाले हैं। इस मामले में रेडियोलॉजिस्ट असोसिएशन ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग से खबरों की जांच करने को कहा है, जिनमें सरॉगसी के जरिए शाहरुख के होने वाले बच्चे को लड़का बताया गया है। राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, खुद शाहरुख या उनकी पत्नी गौरी ने तीसरे बच्चे के होने की खबर की अब तक न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। हालांकि शाहरुख ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वे और गौरी सरोगेसी के जरिए बेबी ब्वॉय एक्स पेक्ट् कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीसरे बच्चे का फैसला गौरी खान का था और वह सेरोगेसी के जरिए ऐसा करना चाहती थीं। सूत्रों के मुताबिक़ कहा जा रहा है कि बच्चा लड़का है, जबकि एक अन्यी रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे की डिलीवरी जुलाई के पहले सप्ता ह में होने वाली है। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक 47 वर्षीय शाहरुख और गौरी ने उसी डॉक्टर से संपर्क किया है, जिनसे आमिर खान और किरण राव भी अपनी सेरोगेसी के लिए संपर्क कर चुके हैं। बहरहालए सभी विवादों की परवाह न करते हुए शाहरुख और गौरी के साथ-साथ उनके बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं बहरहालए शाहरुख के बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं शाहरुख़ के घर मन्नत में भी इसके लिए विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। खबरों की मानें तो इस कपल ने एक बार फिर अपनी शादी में नया उमंग भरने के लिए तीसरे बच्चे की प्लानिंग की है। महाराष्ट्र पीसीपीएनडीटी कमेटी के डॉ.जिग्नेश ठक्कर ने बताया कि उन्होंनने राज्या के स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा है कि इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि शाहरुख खान को अपने अजन्मेल बच्चे के लिंग की जानकारी कैसे हुई। भारत में जन्म् के पूर्व बच्चेअ का लिंग परीक्षण पूरी तरह से गैरकानूनी है और जब अल्ट्रासाउंड किया जाता है तो इस बात पर सहमति ली जाती है कि लिंग परीक्षण नहीं कराया जाएगा। इस बारे में महाराष्ट्र के स्वाहस्य्र मंत्री सुरेश शेट्टी को भी शिकायती पत्र भेजा गया है। इससे पहले एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि किंग खान के करीबी एक सूत्र के मुताबिक आने वाला बेबी लड़का है और ये गौरी का फैसला था कि वो सरोगेट मदर के जरिए बच्चा पैदा करें। खबरें ये भी आ रही हैं कि इस मामले में शाहरुख-गौरी ने उसी डॉक्टर से सलाह ली थी जिसके पास आमिर खान और किरन राव अपने बच्चे आजाद के लिए गए थे, जो सरोगेट मदर के जरिए ही पैदा हुआ था। बहरहालए शाहरुख के बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं वहीं एसआरके के घर मन्नत में भी इसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। खबरों की मानें तो इस कपल ने एक बार फिर अपनी शादी को नया उत्साह लाने और एक.दूसरे के करीब आने के लिए तीसरे बच्चे का फैसला किया है।
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान एक बार फिर मुश्किल में फंसते दिखाई दे रहे हैं। उनपर आरोप लगा है कि उन्होंरने बच्चे के जन्म से पहले ही उसका लिंग परीक्षण कराया। पिछले दिनों खबर आई थी कि शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी एक बार फिर से माता-पिता बनने जा रहे हैं। वह सेरोगेसी के जरिए एक बच्चेा का जन्मस कराने जा रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि वे एक बेबी बॉय के पैरंट्स बनने वाले हैं। इस मामले में रेडियोलॉजिस्ट असोसिएशन ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग से खबरों की जांच करने को कहा है, जिनमें सरॉगसी के जरिए शाहरुख के होने वाले बच्चे को लड़का बताया गया है। राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, खुद शाहरुख या उनकी पत्नी गौरी ने तीसरे बच्चे के होने की खबर की अब तक न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। हालांकि शाहरुख ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वे और गौरी सरोगेसी के जरिए बेबी ब्वॉय एक्स पेक्ट् कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीसरे बच्चे का फैसला गौरी खान का था और वह सेरोगेसी के जरिए ऐसा करना चाहती थीं। सूत्रों के मुताबिक़ कहा जा रहा है कि बच्चा लड़का है, जबकि एक अन्यी रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे की डिलीवरी जुलाई के पहले सप्ता ह में होने वाली है। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक सैंतालीस वर्षीय शाहरुख और गौरी ने उसी डॉक्टर से संपर्क किया है, जिनसे आमिर खान और किरण राव भी अपनी सेरोगेसी के लिए संपर्क कर चुके हैं। बहरहालए सभी विवादों की परवाह न करते हुए शाहरुख और गौरी के साथ-साथ उनके बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं बहरहालए शाहरुख के बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं शाहरुख़ के घर मन्नत में भी इसके लिए विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। खबरों की मानें तो इस कपल ने एक बार फिर अपनी शादी में नया उमंग भरने के लिए तीसरे बच्चे की प्लानिंग की है। महाराष्ट्र पीसीपीएनडीटी कमेटी के डॉ.जिग्नेश ठक्कर ने बताया कि उन्होंनने राज्या के स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा है कि इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि शाहरुख खान को अपने अजन्मेल बच्चे के लिंग की जानकारी कैसे हुई। भारत में जन्म् के पूर्व बच्चेअ का लिंग परीक्षण पूरी तरह से गैरकानूनी है और जब अल्ट्रासाउंड किया जाता है तो इस बात पर सहमति ली जाती है कि लिंग परीक्षण नहीं कराया जाएगा। इस बारे में महाराष्ट्र के स्वाहस्य्र मंत्री सुरेश शेट्टी को भी शिकायती पत्र भेजा गया है। इससे पहले एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि किंग खान के करीबी एक सूत्र के मुताबिक आने वाला बेबी लड़का है और ये गौरी का फैसला था कि वो सरोगेट मदर के जरिए बच्चा पैदा करें। खबरें ये भी आ रही हैं कि इस मामले में शाहरुख-गौरी ने उसी डॉक्टर से सलाह ली थी जिसके पास आमिर खान और किरन राव अपने बच्चे आजाद के लिए गए थे, जो सरोगेट मदर के जरिए ही पैदा हुआ था। बहरहालए शाहरुख के बच्चे आर्यन और सुहाना भी नए मेहमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं वहीं एसआरके के घर मन्नत में भी इसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। खबरों की मानें तो इस कपल ने एक बार फिर अपनी शादी को नया उत्साह लाने और एक.दूसरे के करीब आने के लिए तीसरे बच्चे का फैसला किया है।
विद्या के साधन जो कि तप और उपासना आदिक हैं, उनके निरूपण करने के लिये अब इस बल्ली का आरम्भ करते हैं, सो प्रथम प्रिय पुत्र के प्रति ब्रह्म - विद्या का उपदेश करे, दूसरे के प्रति न करे, क्योंकि ब्रह्म-विद्या अकसर करके जो प्रियतम हैं उन्हीं के प्रति उपदेश की गई है, और इस ग्रन्थ में ब्रह्म - विद्या की स्तुति के लिये पितापुत्र के संवाद को लिखते हैं । भृगुरिति । भृगु-नाम करके प्रसिद्ध जो कि वरुण का पुत्र वारुणि है, वह ब्रह्मजिज्ञासु होकर वरुण अपने पिता के समीप जाकर कहता भया कि हे भगवन् ! सत्यादिरूप ब्रह्म को मेरे प्रति उपदेश करो, पुत्र की वार्ता को सुनकर पिता ने कहा कि हे पुत्र ! अन्न, प्राण, चक्षु, श्रोत्र, मन और वाग् को ब्रह्म जान, अन्न करके स्थूल शरीर का, प्राण करके पाँचों प्राणों का, चक्षु व श्रोत्र करके पाँचों ज्ञानेन्द्रियों का मन करके अन्तःकरण का, और वागिन्द्रिय करके पाँचों कर्मेन्द्रियों का ग्रहण है, ये सब ब्रह्म की उपलब्धि के द्वार हैं, इस प्रकार वरुण ने ' त्वं ' - पद का अर्थ कहा, अब तत्पद का अर्थ कहते हैं । जिस करके ब्रह्मा से लेकर स्तम्बपर्यंत संपूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, जिस करके जीते हैं, अर्थात् प्राणों को धारण करते हैं, और बढ़ते हैं, और फिर मर करके जिस कारण में प्रवेश करते हैं, और जो जगत् के जन्मादिकों का कारण है उसीको तू ब्रह्म करके जान, इस प्रकार वरुण ने अपने पुत्र भृगु के प्रति ब्रह्म का उपदेश किया, उस उपदेश के समझने में भृगु समर्थ न होकर विचारता भया, और जानता भया कि ॥ १ ॥ इति प्रथमोऽनुवाकः ॥ १ ॥ मूलम् । अनं ब्रह्मेति व्यजानात् अन्नाद्ध्येव खल्विमानि भू
विद्या के साधन जो कि तप और उपासना आदिक हैं, उनके निरूपण करने के लिये अब इस बल्ली का आरम्भ करते हैं, सो प्रथम प्रिय पुत्र के प्रति ब्रह्म - विद्या का उपदेश करे, दूसरे के प्रति न करे, क्योंकि ब्रह्म-विद्या अकसर करके जो प्रियतम हैं उन्हीं के प्रति उपदेश की गई है, और इस ग्रन्थ में ब्रह्म - विद्या की स्तुति के लिये पितापुत्र के संवाद को लिखते हैं । भृगुरिति । भृगु-नाम करके प्रसिद्ध जो कि वरुण का पुत्र वारुणि है, वह ब्रह्मजिज्ञासु होकर वरुण अपने पिता के समीप जाकर कहता भया कि हे भगवन् ! सत्यादिरूप ब्रह्म को मेरे प्रति उपदेश करो, पुत्र की वार्ता को सुनकर पिता ने कहा कि हे पुत्र ! अन्न, प्राण, चक्षु, श्रोत्र, मन और वाग् को ब्रह्म जान, अन्न करके स्थूल शरीर का, प्राण करके पाँचों प्राणों का, चक्षु व श्रोत्र करके पाँचों ज्ञानेन्द्रियों का मन करके अन्तःकरण का, और वागिन्द्रिय करके पाँचों कर्मेन्द्रियों का ग्रहण है, ये सब ब्रह्म की उपलब्धि के द्वार हैं, इस प्रकार वरुण ने ' त्वं ' - पद का अर्थ कहा, अब तत्पद का अर्थ कहते हैं । जिस करके ब्रह्मा से लेकर स्तम्बपर्यंत संपूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, जिस करके जीते हैं, अर्थात् प्राणों को धारण करते हैं, और बढ़ते हैं, और फिर मर करके जिस कारण में प्रवेश करते हैं, और जो जगत् के जन्मादिकों का कारण है उसीको तू ब्रह्म करके जान, इस प्रकार वरुण ने अपने पुत्र भृगु के प्रति ब्रह्म का उपदेश किया, उस उपदेश के समझने में भृगु समर्थ न होकर विचारता भया, और जानता भया कि ॥ एक ॥ इति प्रथमोऽनुवाकः ॥ एक ॥ मूलम् । अनं ब्रह्मेति व्यजानात् अन्नाद्ध्येव खल्विमानि भू
क्रिकेट न्यूजः इस मैच के बाद भारत के पूर्व बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने गौतम गंभीर का नाम लिए बिना इशारों में ही उनके बयान पर पलटवार किया है। दरअसल गावस्कर गौतम गंभीर के बयान इत्तेफाक नही रखते हैं। गावस्कर का कहना है की विश्वकप में भारतीय टीम को दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ी की सख्त जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि आप खिलाड़ी का चयन उनके फॉर्म को देखकर करें न की नाम और प्रतिष्ठा को देखकर। बता दें कि आईपीएल के शुरुआत से कार्तिक शानदार फार्म में चल रहे हैं, वह इस बार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेल रहे थे, इस दौरान उनके बल्ले से लगातार रन बरसे। कार्तिक निचले क्रम में बल्लेबाजी करने आते थेऔर अच्छे स्ट्राइक रेट से रन बना कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। कार्तिक का आईपीएल फॉर्म अभी भी बरकरार है उन्होनें भारत और साउथ अफ्रीका मुकाबले में निचले क्रम में उतरकर 27 बॉल पर 55 रन की मैच जीताऊ पारी खेली थी।
क्रिकेट न्यूजः इस मैच के बाद भारत के पूर्व बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने गौतम गंभीर का नाम लिए बिना इशारों में ही उनके बयान पर पलटवार किया है। दरअसल गावस्कर गौतम गंभीर के बयान इत्तेफाक नही रखते हैं। गावस्कर का कहना है की विश्वकप में भारतीय टीम को दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़ी की सख्त जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि आप खिलाड़ी का चयन उनके फॉर्म को देखकर करें न की नाम और प्रतिष्ठा को देखकर। बता दें कि आईपीएल के शुरुआत से कार्तिक शानदार फार्म में चल रहे हैं, वह इस बार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेल रहे थे, इस दौरान उनके बल्ले से लगातार रन बरसे। कार्तिक निचले क्रम में बल्लेबाजी करने आते थेऔर अच्छे स्ट्राइक रेट से रन बना कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। कार्तिक का आईपीएल फॉर्म अभी भी बरकरार है उन्होनें भारत और साउथ अफ्रीका मुकाबले में निचले क्रम में उतरकर सत्ताईस बॉल पर पचपन रन की मैच जीताऊ पारी खेली थी।
रेसलिंग जगत में ऐसे तो कई रेसलर्स हैं जिनसे लोग डरते हैं और वह चाहे कैरेक्टर में हों या फिर कैरेक्टर के बाहर, लोग उनका सामना नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, ऐसे रेसलर्स के बारे में बेहद कम लोग जानते होंगे जिनसे साथी रेसलर ही डरते थे और उनका सामना करने से कतराते थे। एक नजर पांच रेसलर्स पर जिनसे अन्य रेसलर्स भयभीत होते थे। रेसलिंग सर्किल में मेंज की कहानियां काफी शानदार हैं। यह व्यक्ति केवल मजबूत ही नहीं था बल्कि उसने मजबूती साबित करने का हर लेवल पार किया था। उनकी कहानियों में सबसे मशहूर कहानी है पुलिसवालों द्वारा हथकड़ी लगाया जाना और फिर उस हथकड़ी को तोड़ लेना। इसके अलावा उन्होंने एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति की नाक भी काट ली थी क्योंकि उसने रेसलिंग को फेक कहने की कोशिश की थी। जब एक व्यक्ति 7 फीट लंबा और उसी हिसाब से चौड़ा हो तो वह जो चाहे कर सकता है और शायद कोई उसे रोक नहीं पाए। ज़्यादातर समय के लिए आंद्रे काफी अच्छे व्यक्ति थे, लेकिन यदि एक बार उनका सिर घूम गया तो फिर अन्य लोगों को इसका भुगतान भरना पड़ता था। भले ही बहुत से लोगों ने आंद्रे के कैरेक्टर को प्यार किया, लेकिन ज़्यादातर लोग रिंग में उनका सामना करने से डरते थे। वास्तविक जिंदगी में अधिकतर समय ब्रोडी उस तरह के उत्पाती नहीं थे जैसा कि वह अपने कैरेक्टर में दिखते थे। हालांकि, जब वास्तव में ब्रोडी पर सनक सवार होता था तो उनसे खतरनाक शायद ही दूसरा कोई हो। उन्हें जो लोग पसंद नहीं थे उनके खिलाफ रिंग में उनका गैरजिम्मेदाराना रवैया सबको पता था। अपने करियर में उन्होंने कई लोगों के खिलाफ बेहद खतरनाक फाइट लड़ी थी। 1983 में जब रोड वारियर्स ने शुरुआत की थी तब वे रेसलिंग में कुछ खास नहीं थे। मेकअप करके और लेदर के आउटफिट पहनने वाले इन दो बड़े लोगों ने अन्य रेसलर्स को काफी ज़्यादा डराया था। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उन्होंने खुद को मजबूत दिखाया था और हर रेसलिंग मैच को फाइट के तौर पर लिया था। जॉबर्स को द वारियर्स का सामना करने में काफी डर लगता था क्योंकि उन्हें तगड़ी पिटाई का सामना करना पड़ता था।
रेसलिंग जगत में ऐसे तो कई रेसलर्स हैं जिनसे लोग डरते हैं और वह चाहे कैरेक्टर में हों या फिर कैरेक्टर के बाहर, लोग उनका सामना नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, ऐसे रेसलर्स के बारे में बेहद कम लोग जानते होंगे जिनसे साथी रेसलर ही डरते थे और उनका सामना करने से कतराते थे। एक नजर पांच रेसलर्स पर जिनसे अन्य रेसलर्स भयभीत होते थे। रेसलिंग सर्किल में मेंज की कहानियां काफी शानदार हैं। यह व्यक्ति केवल मजबूत ही नहीं था बल्कि उसने मजबूती साबित करने का हर लेवल पार किया था। उनकी कहानियों में सबसे मशहूर कहानी है पुलिसवालों द्वारा हथकड़ी लगाया जाना और फिर उस हथकड़ी को तोड़ लेना। इसके अलावा उन्होंने एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति की नाक भी काट ली थी क्योंकि उसने रेसलिंग को फेक कहने की कोशिश की थी। जब एक व्यक्ति सात फीट लंबा और उसी हिसाब से चौड़ा हो तो वह जो चाहे कर सकता है और शायद कोई उसे रोक नहीं पाए। ज़्यादातर समय के लिए आंद्रे काफी अच्छे व्यक्ति थे, लेकिन यदि एक बार उनका सिर घूम गया तो फिर अन्य लोगों को इसका भुगतान भरना पड़ता था। भले ही बहुत से लोगों ने आंद्रे के कैरेक्टर को प्यार किया, लेकिन ज़्यादातर लोग रिंग में उनका सामना करने से डरते थे। वास्तविक जिंदगी में अधिकतर समय ब्रोडी उस तरह के उत्पाती नहीं थे जैसा कि वह अपने कैरेक्टर में दिखते थे। हालांकि, जब वास्तव में ब्रोडी पर सनक सवार होता था तो उनसे खतरनाक शायद ही दूसरा कोई हो। उन्हें जो लोग पसंद नहीं थे उनके खिलाफ रिंग में उनका गैरजिम्मेदाराना रवैया सबको पता था। अपने करियर में उन्होंने कई लोगों के खिलाफ बेहद खतरनाक फाइट लड़ी थी। एक हज़ार नौ सौ तिरासी में जब रोड वारियर्स ने शुरुआत की थी तब वे रेसलिंग में कुछ खास नहीं थे। मेकअप करके और लेदर के आउटफिट पहनने वाले इन दो बड़े लोगों ने अन्य रेसलर्स को काफी ज़्यादा डराया था। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उन्होंने खुद को मजबूत दिखाया था और हर रेसलिंग मैच को फाइट के तौर पर लिया था। जॉबर्स को द वारियर्स का सामना करने में काफी डर लगता था क्योंकि उन्हें तगड़ी पिटाई का सामना करना पड़ता था।
इस सर्वे में यह पाया गया है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के 70 फीसदी से भी ज्यादा हिस्से का यह मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक मुद्दा है और कुटीर लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के मुकाबले बड़े उद्योगों में इस मसले को लेकर समझ ज्यादा गहरी है. महाराष्ट्र भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक केंद्रों में से एक है. इस राज्य ने देश के सामाजिक और राजनीतिक विकास और बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. फिलहाल ये राज्य कोविड से जूझता नजर आ रहा है लेकिन इस बीच यहां से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में एक राहत देती खबर सामने आ रही है. एक ताजा सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र में शामिल 65 प्रतिशत इकाइयां कारोबार को जलवायु परिवर्तन के खतरों से मुक्त किए जाने को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखती हैं. उनमें से अधिकांश इकाइयां यह भी मानती हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण उनके सेक्टर और कारोबार पर बहुत भारी असर पड़ा है. उत्पादकता, खर्च और मुनाफे तथा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका सीधा असर पड़ा है. प्रौद्योगिकी के क्षेत्न में कामगारों की सेहत पर असर का पहलू भी जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रत्यक्ष प्रभाव के तौर पर उभरा है. दूसरी ओर बड़े उद्योगों ने पर्याप्त समर्थन और मार्गदर्शन के बगैर ऊर्जा अनुकूलन और दक्षता रणनीतियों पर अधिक प्रयास और समय लगने को लेकर चिंता जाहिर की. बड़े उद्योगों के 59 फीसदी नीति निर्धारकों ने इसे एक चुनौती बताया. वहीं, एमएसएमई में 41 प्रतिशत नीति निर्धारकों ने भी ऐसी ही राय जाहिर की. इन बातों का खुलासा, जलवायु संवाद संबंधी संस्था, क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा महाराष्ट्र के औद्योगिक समुदाय पर किए गए अपनी तरह के पहले सर्वे की हाल ही में जारी रिपोर्ट में हुआ. यह रिपोर्ट उद्योग जगत में जलवायु परिवर्तन को लेकर व्याप्त धारणा के साथ-साथ जलवायु के प्रति मित्रवत तरीके से कारोबार करने की उसकी ख्वाहिश को भी जाहिर करती है. इस सर्वे में यह पाया गया है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के 70 फीसदी से भी ज्यादा हिस्से का यह मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक मुद्दा है और कुटीर लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के मुकाबले बड़े उद्योगों में इस मसले को लेकर समझ ज्यादा गहरी है. महाराष्ट्र के लोगों और उसकी अर्थव्यवस्था के लिहाज से उद्योगों के महत्व को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक बेसलाइन सर्वे किया, जिसका मकसद इस बात को समझना था कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों, प्रतिक्रियाओं और इससे निपटने के लिए राज्य की जरूरतों के सिलसिले में उद्योग जगत क्या सोचता है. इस सर्वे के दायरे में 404 कंपनियों को लिया गया, जिन्हें बड़े उद्योग तथा एमएसएमई में बराबर-बराबर बांटा गया. इस सर्वे की रिपोर्ट में साफ जाहिर होता है कि इस वक्त डीकाबरेनाइजेशन किए जाने की बेहद ज्यादा जरूरत है और कारोबार पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखता है.
इस सर्वे में यह पाया गया है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के सत्तर फीसदी से भी ज्यादा हिस्से का यह मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक मुद्दा है और कुटीर लघु एवं मझोले उद्योगों के मुकाबले बड़े उद्योगों में इस मसले को लेकर समझ ज्यादा गहरी है. महाराष्ट्र भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक केंद्रों में से एक है. इस राज्य ने देश के सामाजिक और राजनीतिक विकास और बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. फिलहाल ये राज्य कोविड से जूझता नजर आ रहा है लेकिन इस बीच यहां से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में एक राहत देती खबर सामने आ रही है. एक ताजा सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र में शामिल पैंसठ प्रतिशत इकाइयां कारोबार को जलवायु परिवर्तन के खतरों से मुक्त किए जाने को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखती हैं. उनमें से अधिकांश इकाइयां यह भी मानती हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण उनके सेक्टर और कारोबार पर बहुत भारी असर पड़ा है. उत्पादकता, खर्च और मुनाफे तथा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका सीधा असर पड़ा है. प्रौद्योगिकी के क्षेत्न में कामगारों की सेहत पर असर का पहलू भी जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रत्यक्ष प्रभाव के तौर पर उभरा है. दूसरी ओर बड़े उद्योगों ने पर्याप्त समर्थन और मार्गदर्शन के बगैर ऊर्जा अनुकूलन और दक्षता रणनीतियों पर अधिक प्रयास और समय लगने को लेकर चिंता जाहिर की. बड़े उद्योगों के उनसठ फीसदी नीति निर्धारकों ने इसे एक चुनौती बताया. वहीं, एमएसएमई में इकतालीस प्रतिशत नीति निर्धारकों ने भी ऐसी ही राय जाहिर की. इन बातों का खुलासा, जलवायु संवाद संबंधी संस्था, क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा महाराष्ट्र के औद्योगिक समुदाय पर किए गए अपनी तरह के पहले सर्वे की हाल ही में जारी रिपोर्ट में हुआ. यह रिपोर्ट उद्योग जगत में जलवायु परिवर्तन को लेकर व्याप्त धारणा के साथ-साथ जलवायु के प्रति मित्रवत तरीके से कारोबार करने की उसकी ख्वाहिश को भी जाहिर करती है. इस सर्वे में यह पाया गया है कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के सत्तर फीसदी से भी ज्यादा हिस्से का यह मानना है कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक मुद्दा है और कुटीर लघु एवं मझोले उद्योगों के मुकाबले बड़े उद्योगों में इस मसले को लेकर समझ ज्यादा गहरी है. महाराष्ट्र के लोगों और उसकी अर्थव्यवस्था के लिहाज से उद्योगों के महत्व को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक बेसलाइन सर्वे किया, जिसका मकसद इस बात को समझना था कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों, प्रतिक्रियाओं और इससे निपटने के लिए राज्य की जरूरतों के सिलसिले में उद्योग जगत क्या सोचता है. इस सर्वे के दायरे में चार सौ चार कंपनियों को लिया गया, जिन्हें बड़े उद्योग तथा एमएसएमई में बराबर-बराबर बांटा गया. इस सर्वे की रिपोर्ट में साफ जाहिर होता है कि इस वक्त डीकाबरेनाइजेशन किए जाने की बेहद ज्यादा जरूरत है और कारोबार पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखता है.
'लोग तो राशन की लाइन में भी मर सकते हैं' देश भर में 500 और 1000 के नोट बदलने के लिए बैंकों के सामने लग रही लंबी क़तारों और कुछ लोगों की मौत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने एक विवादित बयान दिया है. जब उनसे क़तार में लगे लोगों में से कुछ के दम तोड़ने के बारे में सवाल किया गया तो सहस्रबुद्धे ने कहा, "लोग राशन की लाइन में भी मर सकते हैं. " इसके फौरन बाद उन्होंने कहा कि इसे ठीक करने की कोशिश की जाएगी, ताकि ऐसी घटना न हो. सहस्रबुद्धे भोपाल में प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. मध्य प्रदेश के सागर में शनिवार को एक रिटायर्ड कर्मचारी की मौत बैंक की लाइन में नोट बदलवाने के दौरान हो गई थी. इसके अलावा बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य इलाक़ों से भी इस तरह की ख़बरें आई हैं. नोट बदलवाने के लिए इन दिनों लोगों को कई जगह ख़ासी दिक्क़तों का सामना करना पड़ रहा है. सहस्रबुद्धे ने कहा, "ये लड़ाई काले धन के ख़िलाफ है और एक जन आंदोलन है. " जब उनसे पूछा गया कि इन क़तारों में तो सिर्फ आम आदमी ही नज़र आ रहा है, जबकि नेता और अधिकारी पूरी तरह नदारद हैं तो उन्होंने कहा, "आम लोगों में कुछ हड़बड़ी देखी जा रही है, जो नहीं होनी चाहिए. नोट बदलवाने के लिए अभी काफी समय बचा है. "
'लोग तो राशन की लाइन में भी मर सकते हैं' देश भर में पाँच सौ और एक हज़ार के नोट बदलने के लिए बैंकों के सामने लग रही लंबी क़तारों और कुछ लोगों की मौत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने एक विवादित बयान दिया है. जब उनसे क़तार में लगे लोगों में से कुछ के दम तोड़ने के बारे में सवाल किया गया तो सहस्रबुद्धे ने कहा, "लोग राशन की लाइन में भी मर सकते हैं. " इसके फौरन बाद उन्होंने कहा कि इसे ठीक करने की कोशिश की जाएगी, ताकि ऐसी घटना न हो. सहस्रबुद्धे भोपाल में प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. मध्य प्रदेश के सागर में शनिवार को एक रिटायर्ड कर्मचारी की मौत बैंक की लाइन में नोट बदलवाने के दौरान हो गई थी. इसके अलावा बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य इलाक़ों से भी इस तरह की ख़बरें आई हैं. नोट बदलवाने के लिए इन दिनों लोगों को कई जगह ख़ासी दिक्क़तों का सामना करना पड़ रहा है. सहस्रबुद्धे ने कहा, "ये लड़ाई काले धन के ख़िलाफ है और एक जन आंदोलन है. " जब उनसे पूछा गया कि इन क़तारों में तो सिर्फ आम आदमी ही नज़र आ रहा है, जबकि नेता और अधिकारी पूरी तरह नदारद हैं तो उन्होंने कहा, "आम लोगों में कुछ हड़बड़ी देखी जा रही है, जो नहीं होनी चाहिए. नोट बदलवाने के लिए अभी काफी समय बचा है. "
वर्तमान समय में कैंसर की बीमारी मानो आम सी हो गयी, यह एक ऐसी बीमारी हैं जिसका यदि शुरुआती दौर में पता चल जाएँ तो इसका इलाज संभव हैं वरना इस बीमारी का अंत तो मौत के साथ ही होता हैं। ऐसे में इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कुछ घरेलू उपाय करके आप उसके आयु को 10-15 साल बड़ा सकते हैं। आइए जानते हैं वह कौन सा उपाय हैं जिसके करने से इस बीमारी से थोड़ा राहत मिल सकता हैं? वैसे तो नारियल पानी एक तरह से प्रकृति के तरफ से मनुष्यों के लिए दिया गया वरदान हैं परंतु यह वरदान उन मनुष्यों के लिए और भी खास हैं जो की कैंसर जैसे बीमारी से पीड़ित हैं. नारियल पानी पीने से कैंसर का मरीज भी 10-15 साल आराम से जी जाएगा। वैसे हम सब नारियल पानी का बहुत उपयोग करते हैं जिसके सेवन से पेट में होने वाली गर्मी को यह दूर करता है, और शरीर को स्वस्थ रखता है। यह शरीर कि पानी की समस्या को भी दूर करता है और जब डिहाइड्रेशन होता है तब नारियल पानी का ज्यादा उपयोग करना चाहिए। नारियल पानी में भरपूर मात्रा में खनिज व पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। जो कैंसर के सेल्स को लंबे समय तक बढ़ने से रोक सकते हैं।
वर्तमान समय में कैंसर की बीमारी मानो आम सी हो गयी, यह एक ऐसी बीमारी हैं जिसका यदि शुरुआती दौर में पता चल जाएँ तो इसका इलाज संभव हैं वरना इस बीमारी का अंत तो मौत के साथ ही होता हैं। ऐसे में इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कुछ घरेलू उपाय करके आप उसके आयु को दस-पंद्रह साल बड़ा सकते हैं। आइए जानते हैं वह कौन सा उपाय हैं जिसके करने से इस बीमारी से थोड़ा राहत मिल सकता हैं? वैसे तो नारियल पानी एक तरह से प्रकृति के तरफ से मनुष्यों के लिए दिया गया वरदान हैं परंतु यह वरदान उन मनुष्यों के लिए और भी खास हैं जो की कैंसर जैसे बीमारी से पीड़ित हैं. नारियल पानी पीने से कैंसर का मरीज भी दस-पंद्रह साल आराम से जी जाएगा। वैसे हम सब नारियल पानी का बहुत उपयोग करते हैं जिसके सेवन से पेट में होने वाली गर्मी को यह दूर करता है, और शरीर को स्वस्थ रखता है। यह शरीर कि पानी की समस्या को भी दूर करता है और जब डिहाइड्रेशन होता है तब नारियल पानी का ज्यादा उपयोग करना चाहिए। नारियल पानी में भरपूर मात्रा में खनिज व पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। जो कैंसर के सेल्स को लंबे समय तक बढ़ने से रोक सकते हैं।
रायपुरः प्रदेश के जरूरतमंद और गरीब वर्ग के लोगों को कम दर पर जेनेरिक दवाइयां एवं सर्जिकल सामान उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार ने धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना के तहत प्रदेशभर में कई स्थानों पर धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले हैं। रायपुरः प्रदेश के जरूरतमंद और गरीब वर्ग के लोगों को कम दर पर जेनेरिक दवाइयां एवं सर्जिकल सामान उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार ने धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना के तहत प्रदेशभर में कई स्थानों पर धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले हैं। रायपुर जिले में भी अब 19 धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स खोले जा चुके हैं। इन मेडिकल स्टोर्स में अब जरूरतमंद एवं गरीब वर्ग के लोग 52 प्रतिशत से लेकर 72 प्रतिशत तक कम दर पर आसानी से जेनेरिक दवाएं भी खरीदने लगे हैं, लेकिन जैसे-जैसे जेनेरिक दवाओं की डिमांड बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसका फायदा अब दवा कंपनियां भी उठाने लगी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में दवा की सप्लाई करने वाली कंपनियां अब डिमांड के अनुसार दवाओं की कीमत भी बढ़ा रही हैं। पिछले सालभर में कुछ कंपनियों ने कई प्रकार की दवाओं की कीमत एक रुपये से लेकर 16 रुपये तक बढ़ा दी है। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में विभिन्न बीमारियों की 355 प्रकार की जेनेरिक दवाइयां रखने के निर्देश दिए गए हैं। ये दवाइयां मेडिकल स्टोर्स 20 कंपनियों से खरीदी करती हैं, जिनमें सिपला, रनबैक्सी, सनफार्मा, केडिला, ग्लेनमार्क, डा. रेड्डीज, फाइजर, पिरामल, ल्यूपिन, सैंडोज, एलेंबिक, मेनकाइंड, एबॉट सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों में अब कुछ कंपनियां जिनकी दवाइयों की डिमांड मेडिकल स्टोर्स में ज्यादा है, उनके द्वारा अब धीरे-धीरे अपनी कंपनी की दवाइयों की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में मिलने वाली जेनेरिक दवाइयों में बुखार के साथ सबसे ज्यादा शुगर, बीपी, दर्द और जुकाम की दवाइयाें की बिक्री होती है। इन दवाइयों की बिक्री बढ़ने से अब कुछ दवा कंपनियां जैसे एबॉट ने शुगर की कुछ दवा में लगभग 16 रुपये तक वृद्धि की है। इसी प्रकार बीपी की दवा में 4 रुपये से लेकर 10 रुपये तक एवं दर्द एवं सर्दी-जुकाम की दवा की कीमत में भी 1 रुपये से लेकर 3 रुपये तक वृद्धि की गई है। एबॉट के साथ कुछ अन्य कंपनियाें ने भी इसी तरह कई दवाओं की कीमतें बढ़ा दी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में जेनेरिक की अन्य दवाइयों के साथ शुगर और बीपी की दवा भी जरूरतमंदों को काफी कम दर पर मिलती है, लेकिन डिमांड बढ़ने से कंपनियाें ने इनकी कीमत बढ़ा दी है, जिसके बाद अब लोगों को शुगर और बीपी की दवाइयां पहले से अधिक कीमत पर मिलने लगी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स की एक सेल्सगर्ल ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कंपनियां धीरे-धीरे हर महीने चलित दवाइयों की कीमत में बढ़ोतरी कर रही हैं। पिछले एक साल में एक से लेकर 5 प्रतिशत तक की वृद्धि कई दवाइयों में कर दी गई है। शुगर और बीपी की कीमत बढ़ने से अब इसके जरूरतमंद लोग यह सोचकर जेनेरिक दवाइयां लेने नहीं आते कि ऐलोपैथिक दवा और जेनेरिक की दवा की कीमत में ज्यादा फर्क नहीं है। नगर निगम के स्वास्थ विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में 19 धनवंतरी मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें रायपुर नगर निगम क्षेत्र में 8 धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स संचालित हो रहे हैं। ये मेडिकल स्टोर्स सुभाष स्टेडियम, अमलीडीह, आंबेडकर अस्पताल परिसर, अंतर्राज्यीय बसस्टैंड परिसर भाठागांव, आयुर्वेद कॉलेज के पास, पुरानीबस्ती, महोबा बाजार, केनाल रोड में खुले हुए हैं, वहीं एक और मेडिकल स्टोर का जल्द शुभारंभ सुपर स्पेशलिस्टी हास्पिटल डीकेएस परिसर में भी होने जा रहा है। एम्स रायपुर में भी धनवंतरी मेडिकल स्टोर के लिए टेंडर बुलाया गया है। जल्द ही यहां भी मेडिकल स्टोर खोला जाएगा।
रायपुरः प्रदेश के जरूरतमंद और गरीब वर्ग के लोगों को कम दर पर जेनेरिक दवाइयां एवं सर्जिकल सामान उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार ने धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना के तहत प्रदेशभर में कई स्थानों पर धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले हैं। रायपुरः प्रदेश के जरूरतमंद और गरीब वर्ग के लोगों को कम दर पर जेनेरिक दवाइयां एवं सर्जिकल सामान उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार ने धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना के तहत प्रदेशभर में कई स्थानों पर धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले हैं। रायपुर जिले में भी अब उन्नीस धनवंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स खोले जा चुके हैं। इन मेडिकल स्टोर्स में अब जरूरतमंद एवं गरीब वर्ग के लोग बावन प्रतिशत से लेकर बहत्तर प्रतिशत तक कम दर पर आसानी से जेनेरिक दवाएं भी खरीदने लगे हैं, लेकिन जैसे-जैसे जेनेरिक दवाओं की डिमांड बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसका फायदा अब दवा कंपनियां भी उठाने लगी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में दवा की सप्लाई करने वाली कंपनियां अब डिमांड के अनुसार दवाओं की कीमत भी बढ़ा रही हैं। पिछले सालभर में कुछ कंपनियों ने कई प्रकार की दवाओं की कीमत एक रुपये से लेकर सोलह रुपयापये तक बढ़ा दी है। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में विभिन्न बीमारियों की तीन सौ पचपन प्रकार की जेनेरिक दवाइयां रखने के निर्देश दिए गए हैं। ये दवाइयां मेडिकल स्टोर्स बीस कंपनियों से खरीदी करती हैं, जिनमें सिपला, रनबैक्सी, सनफार्मा, केडिला, ग्लेनमार्क, डा. रेड्डीज, फाइजर, पिरामल, ल्यूपिन, सैंडोज, एलेंबिक, मेनकाइंड, एबॉट सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों में अब कुछ कंपनियां जिनकी दवाइयों की डिमांड मेडिकल स्टोर्स में ज्यादा है, उनके द्वारा अब धीरे-धीरे अपनी कंपनी की दवाइयों की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में मिलने वाली जेनेरिक दवाइयों में बुखार के साथ सबसे ज्यादा शुगर, बीपी, दर्द और जुकाम की दवाइयाें की बिक्री होती है। इन दवाइयों की बिक्री बढ़ने से अब कुछ दवा कंपनियां जैसे एबॉट ने शुगर की कुछ दवा में लगभग सोलह रुपयापये तक वृद्धि की है। इसी प्रकार बीपी की दवा में चार रुपयापये से लेकर दस रुपयापये तक एवं दर्द एवं सर्दी-जुकाम की दवा की कीमत में भी एक रुपयापये से लेकर तीन रुपयापये तक वृद्धि की गई है। एबॉट के साथ कुछ अन्य कंपनियाें ने भी इसी तरह कई दवाओं की कीमतें बढ़ा दी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स में जेनेरिक की अन्य दवाइयों के साथ शुगर और बीपी की दवा भी जरूरतमंदों को काफी कम दर पर मिलती है, लेकिन डिमांड बढ़ने से कंपनियाें ने इनकी कीमत बढ़ा दी है, जिसके बाद अब लोगों को शुगर और बीपी की दवाइयां पहले से अधिक कीमत पर मिलने लगी हैं। धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स की एक सेल्सगर्ल ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कंपनियां धीरे-धीरे हर महीने चलित दवाइयों की कीमत में बढ़ोतरी कर रही हैं। पिछले एक साल में एक से लेकर पाँच प्रतिशत तक की वृद्धि कई दवाइयों में कर दी गई है। शुगर और बीपी की कीमत बढ़ने से अब इसके जरूरतमंद लोग यह सोचकर जेनेरिक दवाइयां लेने नहीं आते कि ऐलोपैथिक दवा और जेनेरिक की दवा की कीमत में ज्यादा फर्क नहीं है। नगर निगम के स्वास्थ विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में उन्नीस धनवंतरी मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें रायपुर नगर निगम क्षेत्र में आठ धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स संचालित हो रहे हैं। ये मेडिकल स्टोर्स सुभाष स्टेडियम, अमलीडीह, आंबेडकर अस्पताल परिसर, अंतर्राज्यीय बसस्टैंड परिसर भाठागांव, आयुर्वेद कॉलेज के पास, पुरानीबस्ती, महोबा बाजार, केनाल रोड में खुले हुए हैं, वहीं एक और मेडिकल स्टोर का जल्द शुभारंभ सुपर स्पेशलिस्टी हास्पिटल डीकेएस परिसर में भी होने जा रहा है। एम्स रायपुर में भी धनवंतरी मेडिकल स्टोर के लिए टेंडर बुलाया गया है। जल्द ही यहां भी मेडिकल स्टोर खोला जाएगा।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुयाना की राजधानी में जमैका के विदेश मंत्री कामिनाज स्मिथ के साथ चौथी भारत-कैरिकॉम मंत्रिस्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी G20 की अध्यक्षता के दौरान सभी अहम मुद्दों को सामने लाएगा और उस पर बात करेगा। साथ ही उन्होंने अफ्रीका को कम दाम वाली दवाएं मुहैया कराने पर भी बात की। गौरतलब है, विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को गुयाना पहुंचे हैं। यहां उन्होंने जमैका के विदेश मंत्री कामिना जॉनसन स्मिथ के साथ चौथी भारत-कैरीकॉम मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से निपटने सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने शनिवार को ट्वीट एफएम गुयाना ह्यूग टॉड को धन्यवाद किया। जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष हमें G20 की अध्यक्षता करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि हम न केवल अपने लिए बल्कि उन देशों के के मुद्दों को सामने रखेंगे जो जी 20 समूह का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए, हमने वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ पर विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ध्यान दे तो पिछले पांच वर्षों में कई बड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कोरोना महामारी, जलवायु परिवर्तन की बढ़ती घटनाएं, व्यापार तनाव, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा चिंताएं वास्तव में ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर बैठकर बात करने की जरूरत है। इन मसलों पर गहनता से विचार होना चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पता चलता है कि हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमें विचार करना चाहिए कि ऐसा क्या है जो हम और अधिक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास एक घरेलू पहल है जिसे हम वैश्विक मंच पर ले रहे हैं। इससे कम आय वाले उपभोक्ताओं को लाभ होगा। उन्होंने इस मौके पर कहा कि अगर आपको (कैरिबियाई देशों) लगता है कि यह रुचिपूर्ण है तो हम कम दाम वाली दवाएं मुहैया करा सकते हैं। हम उसके लिए एक क्षेत्रीय केंद्र बनाना चाहेंगे। ये सभी अमेरिका के एफडीए से अनुमति प्राप्त होंगे। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुयाना की राजधानी में जमैका के विदेश मंत्री कामिनाज स्मिथ के साथ चौथी भारत-कैरिकॉम मंत्रिस्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी Gबीस की अध्यक्षता के दौरान सभी अहम मुद्दों को सामने लाएगा और उस पर बात करेगा। साथ ही उन्होंने अफ्रीका को कम दाम वाली दवाएं मुहैया कराने पर भी बात की। गौरतलब है, विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को गुयाना पहुंचे हैं। यहां उन्होंने जमैका के विदेश मंत्री कामिना जॉनसन स्मिथ के साथ चौथी भारत-कैरीकॉम मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से निपटने सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने शनिवार को ट्वीट एफएम गुयाना ह्यूग टॉड को धन्यवाद किया। जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष हमें Gबीस की अध्यक्षता करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि हम न केवल अपने लिए बल्कि उन देशों के के मुद्दों को सामने रखेंगे जो जी बीस समूह का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए, हमने वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ पर विचार-विमर्श किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ध्यान दे तो पिछले पांच वर्षों में कई बड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कोरोना महामारी, जलवायु परिवर्तन की बढ़ती घटनाएं, व्यापार तनाव, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा चिंताएं वास्तव में ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर बैठकर बात करने की जरूरत है। इन मसलों पर गहनता से विचार होना चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पता चलता है कि हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत है। हमें विचार करना चाहिए कि ऐसा क्या है जो हम और अधिक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास एक घरेलू पहल है जिसे हम वैश्विक मंच पर ले रहे हैं। इससे कम आय वाले उपभोक्ताओं को लाभ होगा। उन्होंने इस मौके पर कहा कि अगर आपको लगता है कि यह रुचिपूर्ण है तो हम कम दाम वाली दवाएं मुहैया करा सकते हैं। हम उसके लिए एक क्षेत्रीय केंद्र बनाना चाहेंगे। ये सभी अमेरिका के एफडीए से अनुमति प्राप्त होंगे। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
कांग्रेस के सीनियर नेता अश्विनी कुमार (Ashwini Kumar) ने कांग्रेस पार्टी (Congress party) से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए ये एक बड़ा झटका है। वहीं वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी (leader Manish Tewari) ने पार्टी नेतृत्व पर अपने पूर्व सहयोगी अश्विनी कुमार की आलोचना का समर्थन किया है। एक दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कुमार ने दावा किया कि पार्टी के पास परिवर्तनकारी या प्रेरक नेतृत्व नहीं है। बता दें, बुधवार को लुधियाना (Ludhiana) में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आनंदपुर साहिब के सांसद ने भी कुमार पर कटाक्ष किया। हालांकि, उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। इसके अलावा, उन्होंने संकेत दिया कि पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री राज्यसभा की सीट के लिए तरस रहे थे। मनीष तिवारी ने कहा, "अश्वनी कुमार एक अच्छे इंसान और अच्छे वकील हैं जो अच्छी दलीलें देते हैं। उन्होंने जो कुछ कहा है वह सच है। बहुत से लोग इसके (नेतृत्व के मुद्दे) बारे में चिंतित हैं।" यह कहते हुए कि वह मुद्दों और विचारधारा की राजनीति में विश्वास करते हैं, तिवारी ने जोर देकर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें कभी भी पंजाब लोक कांग्रेस में शामिल होने के लिए नहीं कहा था। उन्होंने कहा, "कैप्टन साहब के साथ मेरा पहले भी रिश्ता था और आज भी है और कल भी रहेगा। यह अलग बात है। जहां तक मेरी राजनीति का सवाल है, मैं अपने लोकसभा क्षेत्र में और अपने लोकसभा क्षेत्र के बाहर कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहा हूं, जब भी कोई मुझे बुलाता है। यह बिल्कुल गलत है कि कैप्टन साहब ने मुझे ऑफर दिया है।" साल 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 117 सदस्यीय सदन में 77 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि शिरोमणि अकाली दल केवल 18 सीटें ही जीत सका था। दूसरी ओर, AAP 20 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भारी जनादेश के बावजूद कांग्रेस खेमे में अंदरूनी कलह शुरू हो गई, जिसके कारण अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। जैसा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा सिद्धू के बजाय मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मौजूदा सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को नामित करने के बाद से दरार बनी हुई है, AAP इस बार जीत हासिल करने पर नजर गड़ाए हुए है।
कांग्रेस के सीनियर नेता अश्विनी कुमार ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए ये एक बड़ा झटका है। वहीं वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व पर अपने पूर्व सहयोगी अश्विनी कुमार की आलोचना का समर्थन किया है। एक दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कुमार ने दावा किया कि पार्टी के पास परिवर्तनकारी या प्रेरक नेतृत्व नहीं है। बता दें, बुधवार को लुधियाना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आनंदपुर साहिब के सांसद ने भी कुमार पर कटाक्ष किया। हालांकि, उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। इसके अलावा, उन्होंने संकेत दिया कि पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री राज्यसभा की सीट के लिए तरस रहे थे। मनीष तिवारी ने कहा, "अश्वनी कुमार एक अच्छे इंसान और अच्छे वकील हैं जो अच्छी दलीलें देते हैं। उन्होंने जो कुछ कहा है वह सच है। बहुत से लोग इसके बारे में चिंतित हैं।" यह कहते हुए कि वह मुद्दों और विचारधारा की राजनीति में विश्वास करते हैं, तिवारी ने जोर देकर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें कभी भी पंजाब लोक कांग्रेस में शामिल होने के लिए नहीं कहा था। उन्होंने कहा, "कैप्टन साहब के साथ मेरा पहले भी रिश्ता था और आज भी है और कल भी रहेगा। यह अलग बात है। जहां तक मेरी राजनीति का सवाल है, मैं अपने लोकसभा क्षेत्र में और अपने लोकसभा क्षेत्र के बाहर कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहा हूं, जब भी कोई मुझे बुलाता है। यह बिल्कुल गलत है कि कैप्टन साहब ने मुझे ऑफर दिया है।" साल दो हज़ार सत्रह के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक सौ सत्रह सदस्यीय सदन में सतहत्तर सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि शिरोमणि अकाली दल केवल अट्ठारह सीटें ही जीत सका था। दूसरी ओर, AAP बीस सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भारी जनादेश के बावजूद कांग्रेस खेमे में अंदरूनी कलह शुरू हो गई, जिसके कारण अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। जैसा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा सिद्धू के बजाय मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मौजूदा सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को नामित करने के बाद से दरार बनी हुई है, AAP इस बार जीत हासिल करने पर नजर गड़ाए हुए है।
चर्चा में क्यों? 14 दिसंबर, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड ग्राम्य विकास विभाग ने प्रदेश के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में रसोई गैस सिलिंडर खत्म होने पर उसे रिफिल कराने के लिये 'मिनी गैस एजेंसी योजना' शुरू की है। - प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू होने के बाद घर-घर गैस सिलिंडर तो पहुँच गए हैं, लेकिन खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में अब भी सिलिंडर रिफिल कराने के लिये लंबा इंतजार करना पड़ता है या कई किमी. दूर जाना पड़ता है। इस समस्या से पार पाने के लिये ग्राम्य विकास विभाग ने मिनी गैस एजेंसी योजना शुरू की है। - अपर सचिव एवं ग्राम्य विकास विभाग आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया किमिनी गैस एजेंसी का संचालन स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ करेंगी, इन्हें 'ईंधन सखी' नाम दिया गया है। - पायलट प्रोजेक्ट के तौर चार ज़िलों में यह योजना शुरू हो चुकी है। शीघ्र ही योजना अन्य ज़िलों में भी शुरू होगी। अभी तक उत्तरकाशी की 40, टिहरी की 16 और हरिद्वार की पाँच महिलाओं सहित कुल 61 ईंधन सखी तैयार हो चुकी हैं। - एचपी कंपनी की ओर से महिलाओं को मिनी गैस एजेंसी संचालन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिये सरकार ने एचपी कंपनी से करार किया है। आने वाले दिनों में अन्य तेल कंपनियों से भी इस तरह के करार किये जाएंगे। - मिनी गैस एजेंसी में हर वक्त पाँच भरे हुए गैस सिलिंडर उपलब्ध रहेंगे। कंपनी की ओर से हर सिलिंडर पर ईंधन सखी को 20 रुपए तक कमीशन मिलेगा। बर्नर, चूल्हा, इसकी सर्विस, गैस पाइप, नए कनेक्शन देने, डीबीसी कनेक्शन पर भी कंपनी की ओर से कमीशन दिया जाएगा। गाँव-गाँव में प्रचार प्रसार करने पर एक हज़ार रुपए अलग से मिलेंगे। - ग्राम्य विकास विभाग आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि इस योजना के दो उद्देश्य हैं। पहला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय बढ़ाना और दूसरा सुदूर क्षेत्रों में आसानी से गैस पहुँचाना।
चर्चा में क्यों? चौदह दिसंबर, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड ग्राम्य विकास विभाग ने प्रदेश के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में रसोई गैस सिलिंडर खत्म होने पर उसे रिफिल कराने के लिये 'मिनी गैस एजेंसी योजना' शुरू की है। - प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू होने के बाद घर-घर गैस सिलिंडर तो पहुँच गए हैं, लेकिन खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में अब भी सिलिंडर रिफिल कराने के लिये लंबा इंतजार करना पड़ता है या कई किमी. दूर जाना पड़ता है। इस समस्या से पार पाने के लिये ग्राम्य विकास विभाग ने मिनी गैस एजेंसी योजना शुरू की है। - अपर सचिव एवं ग्राम्य विकास विभाग आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया किमिनी गैस एजेंसी का संचालन स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ करेंगी, इन्हें 'ईंधन सखी' नाम दिया गया है। - पायलट प्रोजेक्ट के तौर चार ज़िलों में यह योजना शुरू हो चुकी है। शीघ्र ही योजना अन्य ज़िलों में भी शुरू होगी। अभी तक उत्तरकाशी की चालीस, टिहरी की सोलह और हरिद्वार की पाँच महिलाओं सहित कुल इकसठ ईंधन सखी तैयार हो चुकी हैं। - एचपी कंपनी की ओर से महिलाओं को मिनी गैस एजेंसी संचालन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिये सरकार ने एचपी कंपनी से करार किया है। आने वाले दिनों में अन्य तेल कंपनियों से भी इस तरह के करार किये जाएंगे। - मिनी गैस एजेंसी में हर वक्त पाँच भरे हुए गैस सिलिंडर उपलब्ध रहेंगे। कंपनी की ओर से हर सिलिंडर पर ईंधन सखी को बीस रुपयापए तक कमीशन मिलेगा। बर्नर, चूल्हा, इसकी सर्विस, गैस पाइप, नए कनेक्शन देने, डीबीसी कनेक्शन पर भी कंपनी की ओर से कमीशन दिया जाएगा। गाँव-गाँव में प्रचार प्रसार करने पर एक हज़ार रुपए अलग से मिलेंगे। - ग्राम्य विकास विभाग आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि इस योजना के दो उद्देश्य हैं। पहला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय बढ़ाना और दूसरा सुदूर क्षेत्रों में आसानी से गैस पहुँचाना।
- 24 min ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! - 1 hr ago तो क्या बादशाह ने उड़ाया 'आदिपुरुष' का मजाक? कंटेस्टेंट को कहा- '600 करोड़ के बिना ही. . . ' Don't Miss! - News खबर आपके काम की, केवल एक बचा है शनिवार! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, टेलीविजन पर आज से तकरीबन 36 साल पहले रामानंद सागर की रामायण को प्रसारित किया गया था। जिसको दर्शकों द्वारा खूब प्यार मिला। इतना ही नहीं इस में दिखाए गए किरदारों को भी लोगों ने खूब प्यार दिया और आज तक उन्हें पूजनीय मानते रहे। कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन के समय पर भी दूरदर्शन पर इस सीरियल को एक बार फिर से प्रसारित किया गया था। आज भी दर्शकों के बीच इसका क्रेज़ बना हुआ है। इतना ही नहीं टीआरपी पर भी दूसरे टीवी सीरियल से यह काफी आगे रहा। लेकिन बहुत कम लोग इस बारे में जानते हैं कि रामायण के डायरेक्टर रामानंद सागर ने जब फिल्मों से हटकर ऐसे टीवी सीरियल्स को बनाना शुरू किया तो लोगों ने उन्हें बहुत ही कम सपोर्ट किया। ऐसा इसीलिए क्योंकि उस वक्त ऐसा माना जाता था कि टीवी पर बहुत ही ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता है। लेकिन इसके बावजूद भी रामानंद सागर ने किसी की एक नहीं सुनी। उन्होंने सीरियल बनाया और यह काफी सुपरहिट भी साबित हुआ। इसी के साथ-साथ आपको बता दें कि इस सीरियल के 52 एपिसोड किए गए थे। जिसे 3 बार एक्सटेंड करके 78 एपिसोड में तब्दील कर दिया गया। इतना ही नहीं इस सीरियल की शूटिंग 550 दिनों तक चलती रही। दर्शकों के बीच भी यह शो इतना ज्यादा लोकप्रिय साबित हुआ कि इस सीरियल को देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। बता दें कि उस वक्त इसकी व्यूअरशिप 82% बताई गई जो कि किसी भी टीवी सीरीज के लिए सबसे ज्यादा मानी जाती है। इस शो के हर एक एपिसोड से दूरदर्शन को तकरीबन 40 लाख की कमाई हो जाया करती थी। लेकिन अगर इस शो से एक एपिसोड के 40 लाख रुपए कमाए जा रहे हैं तो इस पर खर्च भी जबरदस्त किया गया है। बता दें कि दर्शकों को अच्छा अनुभव देने के लिए रामानंद सागर ने हर एक छोटी से छोटी चीज का बहुत ही ध्यान रखा। जिससे कि कोई भी दर्शक निराश ना हो। जानकारी के लिए आपको बता दें कि रामानंद सागर की रामायण का 1 एपिसोड बनाने के लिए 9 लाख रुपए का खर्चा आया करता था। जो कि यह उस समय काफी बड़ी बात हुआ करती थी। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
- चौबीस मिनट ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! - एक hr ago तो क्या बादशाह ने उड़ाया 'आदिपुरुष' का मजाक? कंटेस्टेंट को कहा- 'छः सौ करोड़ के बिना ही. . . ' Don't Miss! - News खबर आपके काम की, केवल एक बचा है शनिवार! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, टेलीविजन पर आज से तकरीबन छत्तीस साल पहले रामानंद सागर की रामायण को प्रसारित किया गया था। जिसको दर्शकों द्वारा खूब प्यार मिला। इतना ही नहीं इस में दिखाए गए किरदारों को भी लोगों ने खूब प्यार दिया और आज तक उन्हें पूजनीय मानते रहे। कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन के समय पर भी दूरदर्शन पर इस सीरियल को एक बार फिर से प्रसारित किया गया था। आज भी दर्शकों के बीच इसका क्रेज़ बना हुआ है। इतना ही नहीं टीआरपी पर भी दूसरे टीवी सीरियल से यह काफी आगे रहा। लेकिन बहुत कम लोग इस बारे में जानते हैं कि रामायण के डायरेक्टर रामानंद सागर ने जब फिल्मों से हटकर ऐसे टीवी सीरियल्स को बनाना शुरू किया तो लोगों ने उन्हें बहुत ही कम सपोर्ट किया। ऐसा इसीलिए क्योंकि उस वक्त ऐसा माना जाता था कि टीवी पर बहुत ही ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता है। लेकिन इसके बावजूद भी रामानंद सागर ने किसी की एक नहीं सुनी। उन्होंने सीरियल बनाया और यह काफी सुपरहिट भी साबित हुआ। इसी के साथ-साथ आपको बता दें कि इस सीरियल के बावन एपिसोड किए गए थे। जिसे तीन बार एक्सटेंड करके अठहत्तर एपिसोड में तब्दील कर दिया गया। इतना ही नहीं इस सीरियल की शूटिंग पाँच सौ पचास दिनों तक चलती रही। दर्शकों के बीच भी यह शो इतना ज्यादा लोकप्रिय साबित हुआ कि इस सीरियल को देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। बता दें कि उस वक्त इसकी व्यूअरशिप बयासी% बताई गई जो कि किसी भी टीवी सीरीज के लिए सबसे ज्यादा मानी जाती है। इस शो के हर एक एपिसोड से दूरदर्शन को तकरीबन चालीस लाख की कमाई हो जाया करती थी। लेकिन अगर इस शो से एक एपिसोड के चालीस लाख रुपए कमाए जा रहे हैं तो इस पर खर्च भी जबरदस्त किया गया है। बता दें कि दर्शकों को अच्छा अनुभव देने के लिए रामानंद सागर ने हर एक छोटी से छोटी चीज का बहुत ही ध्यान रखा। जिससे कि कोई भी दर्शक निराश ना हो। जानकारी के लिए आपको बता दें कि रामानंद सागर की रामायण का एक एपिसोड बनाने के लिए नौ लाख रुपए का खर्चा आया करता था। जो कि यह उस समय काफी बड़ी बात हुआ करती थी। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
कौन टेलीविजन का आविष्कार किया है, और क्या एक साल में? आज किसी को भी टीवी आश्चर्य नहीं। इस बॉक्स या यहां तक कि एक छोटे से सॉकेट, जो आप चित्रों को प्रदर्शित करने की अनुमति देता है ले जाया गया। इसके बाद उन्होंने एक सदी पहले, इस तकनीक सिद्धांत रूप में नहीं था कि सिर्फ एक छोटे से कल्पना करना मुश्किल है। अनुसंधान की एक बड़ी राशि के लिए केवल धन्यवाद हम टीवी का आनंद करने में सक्षम हैं। लोग हैं, जो हमें एक दूरी से छवियों हस्तांतरण करने के लिए, और इस लेख में चर्चा की जाएगी अवसर दिया बारे में। कौन टेलीविजन का आविष्कार किया है, और क्या एक साल में? लोगों का एक बहुत यह प्रश्न पूछा, लेकिन सभी के लिए उसे एक सटीक जवाब दे सकता है। यह अभी भी खुला है और जहां टेलीविजन आविष्कार किया गया था का सवाल। जवाब अद्वितीय नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोई भी व्यक्ति पहले टीवी का आविष्कार किया है। यह कई लोगों की कड़ी मेहनत है। यह कहाँ टेलीविजन आविष्कार किया गया था? देशों का एक बहुत से लड़ने के लिए इस अधिकार, जिनमें से प्रत्येक मैं इस मुद्दे पर काम किया वैज्ञानिकों की एक पूरी सेना के लिए। लेकिन सबसे पहली बात। बहुत पहले एक है जो टेलीविजन का आविष्कार किया, एक स्वीडिश जेंस बेरज़ेलियस नामित रसायनज्ञ माना जा सकता है। वैज्ञानिक प्रयोगशाला में प्रयोगों का एक बहुत डाल दिया गया है, ताकि यह एक पहले से अज्ञात तत्व है, जो "सेलेनियम" नामित किया गया था की खोज की थी। इस घटना के महत्व overemphasized नहीं किया जा सकता। यह उल्लेख किया था कि इस तत्व प्रकाश मात्रा उस पर अभिनय के आधार पर विद्युत धारा आयोजित करता है। इसके बिना, छवि स्थानांतरण संभव नहीं होगा। बोरिस लवोविच Rozing - बात यह है कि जो टेलीविजन का आविष्कार किया - इतिहासकारों द्वारा तर्क दिया जा जाएगा। और वहाँ सच्चाई से दूर हो जाएगा। भौतिक विज्ञानी और आविष्कारक, जो वास्तव में हमें नीले परदे पर शाम बिताना का अवसर दे दिया की जीवनी, यह और अधिक गहराई से जांच करने के लिए आवश्यक है। बोरिस लवोविच Rozing सेंट पीटर्सबर्ग में आठ सौ साठ-नौ साल हजार में हुआ था। लगभग अपनी सारी जिंदगी वह संस्थान के काम करने के लिए समर्पित कर दिया। यह तकनीक पीटर्सबर्ग और आर्कान्जेस्क वानिकी इंजीनियरिंग, और कई अन्य लोगों, जहां उन्होंने एक मानद व्याख्याता के रूप में आमंत्रित किया गया था। वैज्ञानिक अपने शोध का बचाव किया। उनका काम चुंबकत्व, रेडियो, बिजली, आणविक क्षेत्र, लौह-चुंबकीय सामग्री, क्वांटम भौतिकी, गतिशीलता के अध्ययन के लिए समर्पित किया गया है। विचार दूरी के लिए छवि हस्तांतरण से आठ सौ नब्बे-सातवें वर्ष हजार में Borisu Lvovichu लिए आया था। अपने प्रयोगों वह एक कैथोड-रे ट्यूब के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकी है, जो अभी आविष्कार हुआ था, साथ ही पढ़ाई फोटेलेक्ट्रिक प्रभाव भौतिक विज्ञानी की अलेक्सांद्रा Grigorevicha Stoletova। मुद्दे के अध्ययन में उनकी सफलताओं महान थे। दुनिया के उन्नीस सौ और सातवें वर्ष में पहले से ही प्रौद्योगिकी इमेजिंग एक फ्लोरोसेंट स्क्रीन के साथ एक कैथोड-रे ट्यूब का उपयोग कर और दर्पण घूर्णन द्वारा प्रतिनिधित्व किया था। आविष्कार भौतिकी पेटेंट और संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी में मान्यता दी गई है। अनुभव एक काली स्क्रीन पर ग्रे धारियों के एक प्रदर्शन किया गया था। यह बहुत आसान लगता है। लेकिन उस समय यह एक महान सफलता थी। के बारे में एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक दुनिया भर में बात कर। बस चार साल बाद भौतिक विज्ञानी एक दूरी से छवि को हस्तांतरण करने में सक्षम था। सबसे अधिक संभावना, पाठकों में से कोई भी कोई संदेह नहीं है जो टेलीविजन का आविष्कार किया है। वही हजार नौ सौ ग्यारहवें वर्ष में Rosing यांत्रिक से इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए संक्रमण बना दिया है। उन्नीस तीस-तीसरे वर्ष भौतिक विज्ञानी बना सकते हैं और अपने उपकरणों में सुधार के लिए रह गए हैं कभी नहीं में अपनी मृत्यु तक, मॉडुलन, ट्यूब और सर्किट डिजाइन के नए तरीकों का विकास किया। कौन कई शोधकर्ताओं के अनुसार, पहले टेलीविजन का आविष्कार किया, क्योंकि यह एक प्रसिद्ध अमेरिकी आविष्कारक, श्री केरी है। अपने प्रयोगों के परिणाम पहला ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसके माध्यम से वह अस्पष्ट संचारित करने में सक्षम था, लेकिन अभी भी छवि थी। के बारे में जो टेलीविजन का आविष्कार किया, आविष्कारक पॉल निपको का एक तर्क वंश शुरू हो सकता है। अपने अनुभवों ज्यादा, सुधार किया गया है, हालांकि डिवाइस के आपरेशन के सिद्धांत श्री केरी उपकरण के समान है। पॉल अपने आविष्कार "विस्तृत छवि" कहा जाता है दे दी है। आंगन में एक हजार आठ सौ अस्सी-चौथे वर्ष खड़ा था। शब्द "टेलीविजन" रूसी इंजीनियर Konstantin Dmitrievich फारसी का श्रेय जाता है। इससे पहले, वैज्ञानिकों "dalnovidenie" या "बिजली दूरबीन" की तरह जटिल भाव का इस्तेमाल किया है। यह माना जाता है कि वह पहले अगस्त 1900 में उपयोग में यह लागू करने के लिए किया गया था। यह पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय विद्युत तकनीकी कांग्रेस के ढांचे के भीतर किया गया था। वर्ड दलों पसंद आया, और वे जल्दी से घर वापस दोस्तों के अपने सर्कल में यह फैल गया। रिपोर्ट फ्रेंच में आयोजित "दूरी पर दृष्टि, के बारे में"। एक साल पहले, कोंसटेंटिन पर्स्की छवि संचरण के तरीकों में से एक के लिए एक पेटेंट प्राप्त किया। उनकी सफलता से प्रेरित होकर, इंजीनियर उत्साह से जबरदस्त अवसरों कि मानवता अपनी प्रौद्योगिकी दे सकता है के बारे में अपने यूरोपीय सहयोगियों से कहा। वैज्ञानिकों के बारे में एक बहुत कुछ पता है। Konstantin Dmitrievich एक कुलीन परिवार से आया है, अपने पूर्वजों बहुत महान राजकुमार दिमित्री डॉनस्कोय थे। आविष्कार के लिए अपना जीवन समर्पित करने से पहले, Persky Mikhailovsky आर्टिलरी अकादमी खत्म कर सकता है, और फिर ज्ञान रूसी-तुर्की युद्ध, जहां भी आदेश "बहादुरी के लिए" से सम्मानित किया गया के दौरान प्राप्त आवेदन किया। युद्ध के मैदान से लौटने के बाद Konstantin Dmitrievich विज्ञान के लिए सैन्य पथ शामिल होने के लिए और एक ही समय में सेंट पीटर्सबर्ग तकनीकी और बिजली के समुदायों के एक सक्रिय सदस्य बनने के लिए चुना है। अपने काम में सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि जिसका शीर्षक था "दूरी पर elektrovidenii के जारी होने की वर्तमान स्थिति" एक व्यापक रिपोर्ट, जो वह सफलतापूर्वक देश में और विदेशों में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रतिनिधित्व हो गया। हालांकि कब्जे के भौतिक विज्ञान एक वैज्ञानिक और सैन्य क्षेत्र में खेती करने में अच्छी तरह से करते हैं। विशेष रूप से, वह गुप्त कमरे में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा से चेतावनी उपकरण के शिकागो विश्व मेले की पदक प्राप्त किया। यह 1906 में एक आविष्कारक नहीं बन जाता है। की जब जॉन लोगी बेयर्ड टेलीविजन का आविष्कार प्रश्न पर, वहाँ अपनी प्रतिभा है, जो आत्मविश्वास से कहना है कि यह उन्नीस तेईसवें वर्ष है की प्रशंसक हैं। उसी समय से वैज्ञानिक मेरे सहकर्मी, चार्ल्स जेनकींस, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक स्थापित केबल की छवि को व्यक्त करने में सक्षम था। लेकिन टेलीविजन - यह तारों के माध्यम से विद्युत आवेगों के हस्तांतरण न केवल है। ताकि उन्हें पहली जगह में चलाने के लिए एक टीवी कैमरे की जरूरत है। विशेषज्ञों का विश्वास कहते हैं, अमेरिका के उद्यम Radiocorporations की सुविधाओं पर टीवी रूस व्लादिमीर ज़वोरिकिन नामित वैज्ञानिक, 1931 में आविष्कार किया। लेकिन यह एक विवादास्पद बात है क्योंकि लगभग एक ही समय में, एक और आविष्कारक, Fil Farnsuort, एक समान उपकरण डिजाइन। इतिहास में रूसी वैज्ञानिक, जो उसकी बहुत भविष्य और अविश्वसनीय विचार में विश्वास के प्रायोजक के नाम पर संरक्षित - यह डेविड अब्रामोविच Sarnov, अमेरिका सिग्नल कोर और व्यापारी है। यह धन्यवाद था करने के लिए दुनिया के बारे में उनकी वित्तीय सहायता आविष्कार व्लादिमीर ज़वोरिकिन के सबसे देखा है। पहली बार कैमरे "inkoskop" और नामित किया गया था "ठीक-संचारण ट्यूब। " अगले चौदह वर्षों में, डिवाइस गंभीर संशोधन से गुजरना होगा और एक संरचना आधुनिक उपकरणों में इस्तेमाल के समान होगा। वे कैथोड-रे ट्यूब की नींव, जिसके माध्यम से रखी, वास्तव में, छवि दर्शक के लिए फैलता है। कई लोगों का मानना है कि रंग सोवियत इंजीनियर Ovanesom Adamyanom द्वारा आविष्कार टेलीविजन। वापस उन्नीस सौ और आविष्कारक के आठवें वर्ष में एक पेटेंट प्राप्त किया है कि वह एक संकेत डिवाइस बनाई गई के लिए। आविष्कार उस समय केवल दो रंगों में संचारित कर सकते हैं। फिर भी, यह जॉन लॉग ब्रैड जो लोग रंग में टेलीविजन का आविष्कार विचार करने के लिए बुद्धिमान है। यह आदमी, हरा, नीला और लाल फिल्टर इतना है कि वे संयोजनों की एक किस्म संचारित कर सकते हैं शामिल हो गए। वक्ताओं काले और सफेद टेलीविजन हरी लिपस्टिक का उपयोग करें। स्क्रीन पर लाल रंग बहुत पीला देखा और बाहर धोया। प्रयोगों और परीक्षण का एक बहुत बाद निष्कर्ष यह है कि यह सबसे अधिक सामंजस्यपूर्ण रंग के लिए हरे रंग की है के लिए आया था। के बारे में जहां और ट्रांसमिशन की किस तरह पहले जारी किया गया था, विवादों रंग में हैं। सबसे आम राय यह है कि यह एक फुटबॉल मैच कार्लिंग था। पूर्ण स्थायी प्रसारण संयुक्त राज्य अमेरिका में उन्नीस सौ और चालीसवें वर्ष में शुरू कर दिया। पहला वाणिज्यिक आवेदन संयुक्त राज्य अमेरिका में 1951 में प्रकाशित किया गया था। यह सीबीएस पर हस्तियों के साथ एक मनोरंजक शो था। लेख में महान लोग हैं, जो विभिन्न देशों और महाद्वीपों की प्रयोगशालाओं में विभिन्न समय पर काम के कई के नाम देखते हैं। उनमें से प्रत्येक टेलीविजन के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन महान का काम करता है के बिना, प्रतिबद्ध लोगों चित्रों स्थानांतरित नहीं कर सकते। यह कोई एक आवंटित करने के लिए आवश्यक नहीं है। इन अध्ययनों के सभी को धन्यवाद, अब हम टीवी के रूप में इस तरह के एक आम का आनंद का अवसर है।
कौन टेलीविजन का आविष्कार किया है, और क्या एक साल में? आज किसी को भी टीवी आश्चर्य नहीं। इस बॉक्स या यहां तक कि एक छोटे से सॉकेट, जो आप चित्रों को प्रदर्शित करने की अनुमति देता है ले जाया गया। इसके बाद उन्होंने एक सदी पहले, इस तकनीक सिद्धांत रूप में नहीं था कि सिर्फ एक छोटे से कल्पना करना मुश्किल है। अनुसंधान की एक बड़ी राशि के लिए केवल धन्यवाद हम टीवी का आनंद करने में सक्षम हैं। लोग हैं, जो हमें एक दूरी से छवियों हस्तांतरण करने के लिए, और इस लेख में चर्चा की जाएगी अवसर दिया बारे में। कौन टेलीविजन का आविष्कार किया है, और क्या एक साल में? लोगों का एक बहुत यह प्रश्न पूछा, लेकिन सभी के लिए उसे एक सटीक जवाब दे सकता है। यह अभी भी खुला है और जहां टेलीविजन आविष्कार किया गया था का सवाल। जवाब अद्वितीय नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोई भी व्यक्ति पहले टीवी का आविष्कार किया है। यह कई लोगों की कड़ी मेहनत है। यह कहाँ टेलीविजन आविष्कार किया गया था? देशों का एक बहुत से लड़ने के लिए इस अधिकार, जिनमें से प्रत्येक मैं इस मुद्दे पर काम किया वैज्ञानिकों की एक पूरी सेना के लिए। लेकिन सबसे पहली बात। बहुत पहले एक है जो टेलीविजन का आविष्कार किया, एक स्वीडिश जेंस बेरज़ेलियस नामित रसायनज्ञ माना जा सकता है। वैज्ञानिक प्रयोगशाला में प्रयोगों का एक बहुत डाल दिया गया है, ताकि यह एक पहले से अज्ञात तत्व है, जो "सेलेनियम" नामित किया गया था की खोज की थी। इस घटना के महत्व overemphasized नहीं किया जा सकता। यह उल्लेख किया था कि इस तत्व प्रकाश मात्रा उस पर अभिनय के आधार पर विद्युत धारा आयोजित करता है। इसके बिना, छवि स्थानांतरण संभव नहीं होगा। बोरिस लवोविच Rozing - बात यह है कि जो टेलीविजन का आविष्कार किया - इतिहासकारों द्वारा तर्क दिया जा जाएगा। और वहाँ सच्चाई से दूर हो जाएगा। भौतिक विज्ञानी और आविष्कारक, जो वास्तव में हमें नीले परदे पर शाम बिताना का अवसर दे दिया की जीवनी, यह और अधिक गहराई से जांच करने के लिए आवश्यक है। बोरिस लवोविच Rozing सेंट पीटर्सबर्ग में आठ सौ साठ-नौ साल हजार में हुआ था। लगभग अपनी सारी जिंदगी वह संस्थान के काम करने के लिए समर्पित कर दिया। यह तकनीक पीटर्सबर्ग और आर्कान्जेस्क वानिकी इंजीनियरिंग, और कई अन्य लोगों, जहां उन्होंने एक मानद व्याख्याता के रूप में आमंत्रित किया गया था। वैज्ञानिक अपने शोध का बचाव किया। उनका काम चुंबकत्व, रेडियो, बिजली, आणविक क्षेत्र, लौह-चुंबकीय सामग्री, क्वांटम भौतिकी, गतिशीलता के अध्ययन के लिए समर्पित किया गया है। विचार दूरी के लिए छवि हस्तांतरण से आठ सौ नब्बे-सातवें वर्ष हजार में Borisu Lvovichu लिए आया था। अपने प्रयोगों वह एक कैथोड-रे ट्यूब के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकी है, जो अभी आविष्कार हुआ था, साथ ही पढ़ाई फोटेलेक्ट्रिक प्रभाव भौतिक विज्ञानी की अलेक्सांद्रा Grigorevicha Stoletova। मुद्दे के अध्ययन में उनकी सफलताओं महान थे। दुनिया के उन्नीस सौ और सातवें वर्ष में पहले से ही प्रौद्योगिकी इमेजिंग एक फ्लोरोसेंट स्क्रीन के साथ एक कैथोड-रे ट्यूब का उपयोग कर और दर्पण घूर्णन द्वारा प्रतिनिधित्व किया था। आविष्कार भौतिकी पेटेंट और संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी में मान्यता दी गई है। अनुभव एक काली स्क्रीन पर ग्रे धारियों के एक प्रदर्शन किया गया था। यह बहुत आसान लगता है। लेकिन उस समय यह एक महान सफलता थी। के बारे में एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक दुनिया भर में बात कर। बस चार साल बाद भौतिक विज्ञानी एक दूरी से छवि को हस्तांतरण करने में सक्षम था। सबसे अधिक संभावना, पाठकों में से कोई भी कोई संदेह नहीं है जो टेलीविजन का आविष्कार किया है। वही हजार नौ सौ ग्यारहवें वर्ष में Rosing यांत्रिक से इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए संक्रमण बना दिया है। उन्नीस तीस-तीसरे वर्ष भौतिक विज्ञानी बना सकते हैं और अपने उपकरणों में सुधार के लिए रह गए हैं कभी नहीं में अपनी मृत्यु तक, मॉडुलन, ट्यूब और सर्किट डिजाइन के नए तरीकों का विकास किया। कौन कई शोधकर्ताओं के अनुसार, पहले टेलीविजन का आविष्कार किया, क्योंकि यह एक प्रसिद्ध अमेरिकी आविष्कारक, श्री केरी है। अपने प्रयोगों के परिणाम पहला ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसके माध्यम से वह अस्पष्ट संचारित करने में सक्षम था, लेकिन अभी भी छवि थी। के बारे में जो टेलीविजन का आविष्कार किया, आविष्कारक पॉल निपको का एक तर्क वंश शुरू हो सकता है। अपने अनुभवों ज्यादा, सुधार किया गया है, हालांकि डिवाइस के आपरेशन के सिद्धांत श्री केरी उपकरण के समान है। पॉल अपने आविष्कार "विस्तृत छवि" कहा जाता है दे दी है। आंगन में एक हजार आठ सौ अस्सी-चौथे वर्ष खड़ा था। शब्द "टेलीविजन" रूसी इंजीनियर Konstantin Dmitrievich फारसी का श्रेय जाता है। इससे पहले, वैज्ञानिकों "dalnovidenie" या "बिजली दूरबीन" की तरह जटिल भाव का इस्तेमाल किया है। यह माना जाता है कि वह पहले अगस्त एक हज़ार नौ सौ में उपयोग में यह लागू करने के लिए किया गया था। यह पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय विद्युत तकनीकी कांग्रेस के ढांचे के भीतर किया गया था। वर्ड दलों पसंद आया, और वे जल्दी से घर वापस दोस्तों के अपने सर्कल में यह फैल गया। रिपोर्ट फ्रेंच में आयोजित "दूरी पर दृष्टि, के बारे में"। एक साल पहले, कोंसटेंटिन पर्स्की छवि संचरण के तरीकों में से एक के लिए एक पेटेंट प्राप्त किया। उनकी सफलता से प्रेरित होकर, इंजीनियर उत्साह से जबरदस्त अवसरों कि मानवता अपनी प्रौद्योगिकी दे सकता है के बारे में अपने यूरोपीय सहयोगियों से कहा। वैज्ञानिकों के बारे में एक बहुत कुछ पता है। Konstantin Dmitrievich एक कुलीन परिवार से आया है, अपने पूर्वजों बहुत महान राजकुमार दिमित्री डॉनस्कोय थे। आविष्कार के लिए अपना जीवन समर्पित करने से पहले, Persky Mikhailovsky आर्टिलरी अकादमी खत्म कर सकता है, और फिर ज्ञान रूसी-तुर्की युद्ध, जहां भी आदेश "बहादुरी के लिए" से सम्मानित किया गया के दौरान प्राप्त आवेदन किया। युद्ध के मैदान से लौटने के बाद Konstantin Dmitrievich विज्ञान के लिए सैन्य पथ शामिल होने के लिए और एक ही समय में सेंट पीटर्सबर्ग तकनीकी और बिजली के समुदायों के एक सक्रिय सदस्य बनने के लिए चुना है। अपने काम में सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि जिसका शीर्षक था "दूरी पर elektrovidenii के जारी होने की वर्तमान स्थिति" एक व्यापक रिपोर्ट, जो वह सफलतापूर्वक देश में और विदेशों में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रतिनिधित्व हो गया। हालांकि कब्जे के भौतिक विज्ञान एक वैज्ञानिक और सैन्य क्षेत्र में खेती करने में अच्छी तरह से करते हैं। विशेष रूप से, वह गुप्त कमरे में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा से चेतावनी उपकरण के शिकागो विश्व मेले की पदक प्राप्त किया। यह एक हज़ार नौ सौ छः में एक आविष्कारक नहीं बन जाता है। की जब जॉन लोगी बेयर्ड टेलीविजन का आविष्कार प्रश्न पर, वहाँ अपनी प्रतिभा है, जो आत्मविश्वास से कहना है कि यह उन्नीस तेईसवें वर्ष है की प्रशंसक हैं। उसी समय से वैज्ञानिक मेरे सहकर्मी, चार्ल्स जेनकींस, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक स्थापित केबल की छवि को व्यक्त करने में सक्षम था। लेकिन टेलीविजन - यह तारों के माध्यम से विद्युत आवेगों के हस्तांतरण न केवल है। ताकि उन्हें पहली जगह में चलाने के लिए एक टीवी कैमरे की जरूरत है। विशेषज्ञों का विश्वास कहते हैं, अमेरिका के उद्यम Radiocorporations की सुविधाओं पर टीवी रूस व्लादिमीर ज़वोरिकिन नामित वैज्ञानिक, एक हज़ार नौ सौ इकतीस में आविष्कार किया। लेकिन यह एक विवादास्पद बात है क्योंकि लगभग एक ही समय में, एक और आविष्कारक, Fil Farnsuort, एक समान उपकरण डिजाइन। इतिहास में रूसी वैज्ञानिक, जो उसकी बहुत भविष्य और अविश्वसनीय विचार में विश्वास के प्रायोजक के नाम पर संरक्षित - यह डेविड अब्रामोविच Sarnov, अमेरिका सिग्नल कोर और व्यापारी है। यह धन्यवाद था करने के लिए दुनिया के बारे में उनकी वित्तीय सहायता आविष्कार व्लादिमीर ज़वोरिकिन के सबसे देखा है। पहली बार कैमरे "inkoskop" और नामित किया गया था "ठीक-संचारण ट्यूब। " अगले चौदह वर्षों में, डिवाइस गंभीर संशोधन से गुजरना होगा और एक संरचना आधुनिक उपकरणों में इस्तेमाल के समान होगा। वे कैथोड-रे ट्यूब की नींव, जिसके माध्यम से रखी, वास्तव में, छवि दर्शक के लिए फैलता है। कई लोगों का मानना है कि रंग सोवियत इंजीनियर Ovanesom Adamyanom द्वारा आविष्कार टेलीविजन। वापस उन्नीस सौ और आविष्कारक के आठवें वर्ष में एक पेटेंट प्राप्त किया है कि वह एक संकेत डिवाइस बनाई गई के लिए। आविष्कार उस समय केवल दो रंगों में संचारित कर सकते हैं। फिर भी, यह जॉन लॉग ब्रैड जो लोग रंग में टेलीविजन का आविष्कार विचार करने के लिए बुद्धिमान है। यह आदमी, हरा, नीला और लाल फिल्टर इतना है कि वे संयोजनों की एक किस्म संचारित कर सकते हैं शामिल हो गए। वक्ताओं काले और सफेद टेलीविजन हरी लिपस्टिक का उपयोग करें। स्क्रीन पर लाल रंग बहुत पीला देखा और बाहर धोया। प्रयोगों और परीक्षण का एक बहुत बाद निष्कर्ष यह है कि यह सबसे अधिक सामंजस्यपूर्ण रंग के लिए हरे रंग की है के लिए आया था। के बारे में जहां और ट्रांसमिशन की किस तरह पहले जारी किया गया था, विवादों रंग में हैं। सबसे आम राय यह है कि यह एक फुटबॉल मैच कार्लिंग था। पूर्ण स्थायी प्रसारण संयुक्त राज्य अमेरिका में उन्नीस सौ और चालीसवें वर्ष में शुरू कर दिया। पहला वाणिज्यिक आवेदन संयुक्त राज्य अमेरिका में एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में प्रकाशित किया गया था। यह सीबीएस पर हस्तियों के साथ एक मनोरंजक शो था। लेख में महान लोग हैं, जो विभिन्न देशों और महाद्वीपों की प्रयोगशालाओं में विभिन्न समय पर काम के कई के नाम देखते हैं। उनमें से प्रत्येक टेलीविजन के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन महान का काम करता है के बिना, प्रतिबद्ध लोगों चित्रों स्थानांतरित नहीं कर सकते। यह कोई एक आवंटित करने के लिए आवश्यक नहीं है। इन अध्ययनों के सभी को धन्यवाद, अब हम टीवी के रूप में इस तरह के एक आम का आनंद का अवसर है।
नई दिल्ली । ददिननि के उप महापौर कैलाश सांकला और विधायक एम एस सिरसा ने आज पश्चिमी जोन के सात वार्डों में एक साथ मिल कर सात एफसीटीएस का धदघाटन किया। वार्ड 1, 2, 7, 9 ,11, 20 और 29 में द दि न नि ने ये एफसीटीएस लगाये हैं। स्थानीय निवासियों ने अपने क्षेत्र में इन्हें लगाये जाने पर खुशी जाहिर की है। निवासियों ने कहा कि इससे इलाके में सफाई का काम कारगर बनेगा और गंदगी दूर होगी। इस अवसर पर उप महापौर कैलाश सांकला ने कहा कि इन इलाकों में एफसीटी एस लगाये जाने की काफी समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। उन्होंने कहा कि इन के चालू हो जाने से कूड़े के संकलन, परिवहन और प्रबंधन की व्यवस्था सुचारू बन जायेगी। ये एफसीटीएस का स्थान लेंगे और जगह जगह बिखरा कूड़ा नहीं दिखायी देगा, बीमारियां फैलने की आशंका दूर होगी और सुदरता ब़ाने में मदद मिलेगी। श्री सांकला ने कहा कि द दि न नि ने एक साथ सात एफसीटी एस की मंजूरी दे कर स्वच्छता की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने लोगों से सफाई की आदत बनाने और घर में ही कूड़े को अलग अलग करने की अपील की ताकि इस की रिसाइकलिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि गीले कूड़े को हरे कूड़ेदान और सूखे कूड़े को नीले कूड़ेदान में डालें। श्री सांकला ने कहा हम सब मिल कर अपने निगम क्षेत्र को सबसे अधिक स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनायेंगे। श्री सिरसा ने कहा कि द दि न नि स्वच्छता के क्षेत्र में गंभीर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली को बेहतर बनाना हम सबका दायितिव और कर्त्तव्य है।
नई दिल्ली । ददिननि के उप महापौर कैलाश सांकला और विधायक एम एस सिरसा ने आज पश्चिमी जोन के सात वार्डों में एक साथ मिल कर सात एफसीटीएस का धदघाटन किया। वार्ड एक, दो, सात, नौ ,ग्यारह, बीस और उनतीस में द दि न नि ने ये एफसीटीएस लगाये हैं। स्थानीय निवासियों ने अपने क्षेत्र में इन्हें लगाये जाने पर खुशी जाहिर की है। निवासियों ने कहा कि इससे इलाके में सफाई का काम कारगर बनेगा और गंदगी दूर होगी। इस अवसर पर उप महापौर कैलाश सांकला ने कहा कि इन इलाकों में एफसीटी एस लगाये जाने की काफी समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। उन्होंने कहा कि इन के चालू हो जाने से कूड़े के संकलन, परिवहन और प्रबंधन की व्यवस्था सुचारू बन जायेगी। ये एफसीटीएस का स्थान लेंगे और जगह जगह बिखरा कूड़ा नहीं दिखायी देगा, बीमारियां फैलने की आशंका दूर होगी और सुदरता ब़ाने में मदद मिलेगी। श्री सांकला ने कहा कि द दि न नि ने एक साथ सात एफसीटी एस की मंजूरी दे कर स्वच्छता की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने लोगों से सफाई की आदत बनाने और घर में ही कूड़े को अलग अलग करने की अपील की ताकि इस की रिसाइकलिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि गीले कूड़े को हरे कूड़ेदान और सूखे कूड़े को नीले कूड़ेदान में डालें। श्री सांकला ने कहा हम सब मिल कर अपने निगम क्षेत्र को सबसे अधिक स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनायेंगे। श्री सिरसा ने कहा कि द दि न नि स्वच्छता के क्षेत्र में गंभीर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली को बेहतर बनाना हम सबका दायितिव और कर्त्तव्य है।
।Discussions Replied To (485) "आदरणीय रविकर जी सादर, सुन्दर छन्दों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें." "आदरणीय प्रदीप जी आपका आभार!" "आदरणीय रविकर जी बहुत बहुत धन्यवाद!" "आदरणीय रक्ताले साहब बहुत बहुत धन्यवाद!" "आदरणीय अविनाश जी आपका आभार!" "आदरणीया प्राची जी आपका आभार!" "दोहे शिव के शीश विराजती, उतरी धरा तरंग।। भागीरथ के वंश को, तार गई ये गंग।। गंगा..." "छंद विधा में लिखना आसान नहीं इसीलिए लोग इसे पुरातन बताकर इसे दरकिनार करने की कोशिश म..." Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" "आदरणीय आपका आशीर्वाद रहा तो निश्चित ही मैं प्रयास करूंगा कि आपको निराश न होना पड़े।" Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" "आपकी बात सच है। लगातार सीखते रहना ही जीवन में सफलता तक पहुंचाता है चाहे वह लेखन हो य..." Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"
।Discussions Replied To "आदरणीय रविकर जी सादर, सुन्दर छन्दों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें." "आदरणीय प्रदीप जी आपका आभार!" "आदरणीय रविकर जी बहुत बहुत धन्यवाद!" "आदरणीय रक्ताले साहब बहुत बहुत धन्यवाद!" "आदरणीय अविनाश जी आपका आभार!" "आदरणीया प्राची जी आपका आभार!" "दोहे शिव के शीश विराजती, उतरी धरा तरंग।। भागीरथ के वंश को, तार गई ये गंग।। गंगा..." "छंद विधा में लिखना आसान नहीं इसीलिए लोग इसे पुरातन बताकर इसे दरकिनार करने की कोशिश म..." Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" "आदरणीय आपका आशीर्वाद रहा तो निश्चित ही मैं प्रयास करूंगा कि आपको निराश न होना पड़े।" Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" "आपकी बात सच है। लगातार सीखते रहना ही जीवन में सफलता तक पहुंचाता है चाहे वह लेखन हो य..." Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"
भाजपा विधायक की बहू का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बहू नीतू सिंह ठाकुर ने पति और परिवार पर कई आरोप गलाए हैं. मध्य प्रदेश के एक भाजपा विधायक की बहू का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल (Viral Audio) हो रहा है. इसमें उन्होंने अपने पति और सुसुराल वालों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. वायरल आडियो में महिला ने खुद को विधायक की बहू नीतू सिंह ठाकुर (Nitu Singh Thakur) बताया है. साथ ही अपने परिवार और पति पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कई आरोप लगाए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल ऑडियो में उसने बताया कि मेरा नाम नीतू सिंह ठाकुर है और वह परिवार से अलग दिल्ली में रहकर नौकरी करती है और अदालत में तलाक के लिए फाइट कर रही हूं. बता दें कि विधायक के बेटे पर करीब 45 मामले दर्ज हैं और वर्तमान में एक केस में दोषी पाए जाने पर जेल में है. नीतू के मुताबिक, 2016 में 26 साल की उम्र में उसे रिश्ते की बात चली लेकिन उसने शादी के लिए मना कर दिया। लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उसने शादी के लिए हां कर दी. उसे बताया गया कि उसका पति सिगरेट या शराब नहीं पीता और ग्रेजुएशन और पीजी एमटी की है और सोशल वर्कर हैं. लेकिन शादी के बाद सारी सच्चाई पता चली कि उसके पति पर 45 आपराधिक मुकदमे हैं जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे आरोप शामिल हैं और उनके लिए महिलाओं का सम्मान कुछ भी माइने नहीं रखता और वह उन्हें भोग की वस्तु समझते हैं. वायरल ऑडियो में कहा गया कि सगाई के लिए जल्दबाजी की गई और रिश्तेदारों को कुछ भी न बताने की हिदायत दी गई. शादी से पहले मैं एक बार उनसे भोपाल में मिली थी. तो मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. मैंने मना किया तो नाराजगी जाहिर की और कहा कि अब तो हमारी शादी हो रही है मना कैसे कर सकती हो. इसके बाद मेरी ना उनकी इगो को हर्ट कर गई और मेरे कहीं भी आने-जाने पर रोक लगा दी. किसी से भी मिलने से मना कर दिया. शादी के चार महीने पहले विधायक के बेटे की गर्लफ्रेंड ने मुझे मैसेज किया और बहुत बदतमीजी से मुझसे बात की. कुछ पुरानी चैट मेरे साथ शेयर की. कुछ समय बाद कुछ और लड़कियों ने कॉन्टेक्ट करना शुरू किया, तो मेरा फेसबुक अकांउट बंद करवा दिया गया. आरोपी की गर्लफ्रेंड ने मुझसे दोबारा संपर्क किया और मुझसे बदतमीजी से बातें की, उसने मुझे बताया कि शादी के पहले से लेकर शादी के बाद तक मेरे पति और उस महिला का अफेयर चल रहा है. ऐसी कई बातें उसने मुझे बताई जो मेरे और मेरे पति से जुड़ी थीं. जब मैंने ये सारी बातें अपने पति को बताई तो उसने मेरे साथ 5 घंटे तक लगातार मारपीट की, मेरे साथ इतनी मारपीट की गई कि मेरे शरीर में हर जगह जख्म हो गए और लगातार खून बहने लगा, मारपीट के साथ ही मेरे पति ने फायरिंग भी की, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं मर जाउंगी. मेरी सास ने ये सारी चीजें देखी लेकिन बात दबाने के लिए कहा. जब भी कोई बात पता चलती मेरे साथ मारपीट की जाती थी. हर छोटी बात पर मेरे साथ मेरे पति मारपीट करते थे. मुझे हर समय यही लगता था कि मैं ये सब क्यों सह रही हूं. एक महीने बाद जब मैं अपने मायके आई तो एक लड़की का फोन आया और उसने मुझे बताया कि उसका मेरे पति से अफेयर चल रहा है, मैंने अपने पति को कॉन्फ्रेंस कॉल में लेकर जब सारी बातें पूछी तो उन्होंने स्वीकार किया, उन्हें नहीं पता था कि कॉन्फ्रेंस कॉल में उनसे बात की जा रही है. इस तरह से मेरे सामने सारी बातें आईं. मैंने उस समय अपने पति से तलाक मांगा था, मैंने कहा था कि आप अच्छे से रहिए लेकिन मुझे तलाक दे दीजिए, तब भी वह नहीं माने. महिला ने कई और आरोप भी लगाए हैं. हालांकि टीवी9 भारतवर्ष इस वायरल ऑडियो की पुष्टी नहीं करता है.
भाजपा विधायक की बहू का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बहू नीतू सिंह ठाकुर ने पति और परिवार पर कई आरोप गलाए हैं. मध्य प्रदेश के एक भाजपा विधायक की बहू का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने अपने पति और सुसुराल वालों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. वायरल आडियो में महिला ने खुद को विधायक की बहू नीतू सिंह ठाकुर बताया है. साथ ही अपने परिवार और पति पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कई आरोप लगाए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल ऑडियो में उसने बताया कि मेरा नाम नीतू सिंह ठाकुर है और वह परिवार से अलग दिल्ली में रहकर नौकरी करती है और अदालत में तलाक के लिए फाइट कर रही हूं. बता दें कि विधायक के बेटे पर करीब पैंतालीस मामले दर्ज हैं और वर्तमान में एक केस में दोषी पाए जाने पर जेल में है. नीतू के मुताबिक, दो हज़ार सोलह में छब्बीस साल की उम्र में उसे रिश्ते की बात चली लेकिन उसने शादी के लिए मना कर दिया। लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उसने शादी के लिए हां कर दी. उसे बताया गया कि उसका पति सिगरेट या शराब नहीं पीता और ग्रेजुएशन और पीजी एमटी की है और सोशल वर्कर हैं. लेकिन शादी के बाद सारी सच्चाई पता चली कि उसके पति पर पैंतालीस आपराधिक मुकदमे हैं जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे आरोप शामिल हैं और उनके लिए महिलाओं का सम्मान कुछ भी माइने नहीं रखता और वह उन्हें भोग की वस्तु समझते हैं. वायरल ऑडियो में कहा गया कि सगाई के लिए जल्दबाजी की गई और रिश्तेदारों को कुछ भी न बताने की हिदायत दी गई. शादी से पहले मैं एक बार उनसे भोपाल में मिली थी. तो मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. मैंने मना किया तो नाराजगी जाहिर की और कहा कि अब तो हमारी शादी हो रही है मना कैसे कर सकती हो. इसके बाद मेरी ना उनकी इगो को हर्ट कर गई और मेरे कहीं भी आने-जाने पर रोक लगा दी. किसी से भी मिलने से मना कर दिया. शादी के चार महीने पहले विधायक के बेटे की गर्लफ्रेंड ने मुझे मैसेज किया और बहुत बदतमीजी से मुझसे बात की. कुछ पुरानी चैट मेरे साथ शेयर की. कुछ समय बाद कुछ और लड़कियों ने कॉन्टेक्ट करना शुरू किया, तो मेरा फेसबुक अकांउट बंद करवा दिया गया. आरोपी की गर्लफ्रेंड ने मुझसे दोबारा संपर्क किया और मुझसे बदतमीजी से बातें की, उसने मुझे बताया कि शादी के पहले से लेकर शादी के बाद तक मेरे पति और उस महिला का अफेयर चल रहा है. ऐसी कई बातें उसने मुझे बताई जो मेरे और मेरे पति से जुड़ी थीं. जब मैंने ये सारी बातें अपने पति को बताई तो उसने मेरे साथ पाँच घंटाटे तक लगातार मारपीट की, मेरे साथ इतनी मारपीट की गई कि मेरे शरीर में हर जगह जख्म हो गए और लगातार खून बहने लगा, मारपीट के साथ ही मेरे पति ने फायरिंग भी की, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं मर जाउंगी. मेरी सास ने ये सारी चीजें देखी लेकिन बात दबाने के लिए कहा. जब भी कोई बात पता चलती मेरे साथ मारपीट की जाती थी. हर छोटी बात पर मेरे साथ मेरे पति मारपीट करते थे. मुझे हर समय यही लगता था कि मैं ये सब क्यों सह रही हूं. एक महीने बाद जब मैं अपने मायके आई तो एक लड़की का फोन आया और उसने मुझे बताया कि उसका मेरे पति से अफेयर चल रहा है, मैंने अपने पति को कॉन्फ्रेंस कॉल में लेकर जब सारी बातें पूछी तो उन्होंने स्वीकार किया, उन्हें नहीं पता था कि कॉन्फ्रेंस कॉल में उनसे बात की जा रही है. इस तरह से मेरे सामने सारी बातें आईं. मैंने उस समय अपने पति से तलाक मांगा था, मैंने कहा था कि आप अच्छे से रहिए लेकिन मुझे तलाक दे दीजिए, तब भी वह नहीं माने. महिला ने कई और आरोप भी लगाए हैं. हालांकि टीवीनौ भारतवर्ष इस वायरल ऑडियो की पुष्टी नहीं करता है.
रायगढ़ (निप्र)। जिले के सरकारी स्कूलों में न तो रेडियो है और न ही टीवी। दरअसल आगामी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पूरे देश के स्कूली बच्चों को पीएम नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। इसके लिए सभी स्कूलों में टीवी, रेडियो, एडूसेट व कंप्यूटर की व्यवस्था करने का फरमान जारी किया गया है। हालांकि जिले के स्कूलों में ऐसे एक भी संसाधन नहीं है। ऐसे में पीएम से स्कूली बच्चे कैसे रू-ब-रू होंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आगामी 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्कूली बच्चों को संबोधित करेंगे। इसके लिए शासन द्वारा सभी स्कूलों में टीवी, रेडियो, एडूसेट व कंप्यूटर व्यवस्था करने का फरमान जारी किया गया है। बताया जाता है कि पूर्व में झिलमिल कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के नाम पर रेडियो दिया गया था। हालांकि घटिया क्वालिटी का रेडियो सप्लाई होने के कारण एक दो दिन के बाद रेडियो या टूट गया या फिर बंद हो गया। इसके बाद अंग्रेजी सिखाने की योजना फेल हो गई। बाद में एडूसेट व कंप्यूटर दिया गया, लेकिन से संसाधन भी अब स्कूलों में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पीएम का संबोधन सुनने स्कूली बच्चों को स्कूल के बजाए दूसरों के घरों में जाना पड़ेगा। हालांकि स्कूलों में ही ये संसाधन व्यवस्था करने में शिक्षा विभाग जुटा हुआ है, लेकिन इतने कम समय में व्यवस्था होने की संभावना नहीं है। बताया जाता है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी बच्चे पीएम से रू-ब-रू हो सकें, इसके लिए इस तरह का आदेश दिया गया है। इसके लिए बकायदा केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है। ऐसे में शिक्षा विभाग के लिए शासन का ये फरमान सिर दर्द बन गया है। इस दिन बच्चों को पूरे दिन स्कूल में बिठाया जाएगा। इस दौरान 3 से 4. 45 तक पीएम नरेंद्र मोदी बच्चों को संबोधित करेंगे। पीएम का संबोधन सीधे दिल्ली से प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान सभी स्कूली बच्चों को मौजूद रहना होगा। पीएम की पूरी बात बच्चे स्पष्ट रूप से सून सके इसके लिए साउंड सिस्टम की व्यवस्था करने कहा गया है। स्कूली बच्चे भाषण से बोर हो जाते है। ऐसे में पीएम द्वारा दिए जाने वाले एक घंटा 45 मिनट का भाषण बच्चे सुनेंगे, इसकी गारंटी नहीं है। बताया जाता है कि 15 अगस्त, 26 जनवरी से लेकर ऐसे कई प्रोग्राम स्कूलों में आयोजित किए जाते है। इस दौरान लंबे समय भाषण से बच्चे उबकर भागने लगते है। ऐसे में बिना मनोरंजन केवल भाषण सुनने के लिए स्कूली बच्चे पौने दो घंटे बैठेंगे इसकी गारंटी नहीं है। स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करना है। सभी स्कूलों में रेडियो उपलब्ध है। गांव के हर घरों में टीवी मौजूद रहता है। किसी के घर में बच्चों को बैठाने की व्यवस्था की जा सकती है। अपने स्तर पर पूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
रायगढ़ । जिले के सरकारी स्कूलों में न तो रेडियो है और न ही टीवी। दरअसल आगामी पाँच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पूरे देश के स्कूली बच्चों को पीएम नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। इसके लिए सभी स्कूलों में टीवी, रेडियो, एडूसेट व कंप्यूटर की व्यवस्था करने का फरमान जारी किया गया है। हालांकि जिले के स्कूलों में ऐसे एक भी संसाधन नहीं है। ऐसे में पीएम से स्कूली बच्चे कैसे रू-ब-रू होंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आगामी पाँच सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्कूली बच्चों को संबोधित करेंगे। इसके लिए शासन द्वारा सभी स्कूलों में टीवी, रेडियो, एडूसेट व कंप्यूटर व्यवस्था करने का फरमान जारी किया गया है। बताया जाता है कि पूर्व में झिलमिल कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के नाम पर रेडियो दिया गया था। हालांकि घटिया क्वालिटी का रेडियो सप्लाई होने के कारण एक दो दिन के बाद रेडियो या टूट गया या फिर बंद हो गया। इसके बाद अंग्रेजी सिखाने की योजना फेल हो गई। बाद में एडूसेट व कंप्यूटर दिया गया, लेकिन से संसाधन भी अब स्कूलों में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पीएम का संबोधन सुनने स्कूली बच्चों को स्कूल के बजाए दूसरों के घरों में जाना पड़ेगा। हालांकि स्कूलों में ही ये संसाधन व्यवस्था करने में शिक्षा विभाग जुटा हुआ है, लेकिन इतने कम समय में व्यवस्था होने की संभावना नहीं है। बताया जाता है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी बच्चे पीएम से रू-ब-रू हो सकें, इसके लिए इस तरह का आदेश दिया गया है। इसके लिए बकायदा केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है। ऐसे में शिक्षा विभाग के लिए शासन का ये फरमान सिर दर्द बन गया है। इस दिन बच्चों को पूरे दिन स्कूल में बिठाया जाएगा। इस दौरान तीन से चार. पैंतालीस तक पीएम नरेंद्र मोदी बच्चों को संबोधित करेंगे। पीएम का संबोधन सीधे दिल्ली से प्रसारण किया जाएगा। इस दौरान सभी स्कूली बच्चों को मौजूद रहना होगा। पीएम की पूरी बात बच्चे स्पष्ट रूप से सून सके इसके लिए साउंड सिस्टम की व्यवस्था करने कहा गया है। स्कूली बच्चे भाषण से बोर हो जाते है। ऐसे में पीएम द्वारा दिए जाने वाले एक घंटा पैंतालीस मिनट का भाषण बच्चे सुनेंगे, इसकी गारंटी नहीं है। बताया जाता है कि पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी से लेकर ऐसे कई प्रोग्राम स्कूलों में आयोजित किए जाते है। इस दौरान लंबे समय भाषण से बच्चे उबकर भागने लगते है। ऐसे में बिना मनोरंजन केवल भाषण सुनने के लिए स्कूली बच्चे पौने दो घंटे बैठेंगे इसकी गारंटी नहीं है। स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करना है। सभी स्कूलों में रेडियो उपलब्ध है। गांव के हर घरों में टीवी मौजूद रहता है। किसी के घर में बच्चों को बैठाने की व्यवस्था की जा सकती है। अपने स्तर पर पूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
बीकानेर। बीकानेर जिले के पांचू पुलिस थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक युवक-युवती के शव पेड़ से लटके पाये गये। थानाधिकारी विकास बिश्नोई ने बताया कि सारुंडा गांव के पास रोही में दुपट्टे से एक युवक युवती के पेड़ से लटके होने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों को राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान पुखराज नायक व लीला नायक के रूप में की गई है। दोनों की उम्र लगभग 23 वर्ष है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों के बीच प्रेमप्रसंग चल रहा था लेकिन उनका परिवार इसके खिलाफ था, जिसके चलते दोनों सोमवार से घर से गायब थे। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये। पुलिस ने इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बीकानेर। बीकानेर जिले के पांचू पुलिस थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक युवक-युवती के शव पेड़ से लटके पाये गये। थानाधिकारी विकास बिश्नोई ने बताया कि सारुंडा गांव के पास रोही में दुपट्टे से एक युवक युवती के पेड़ से लटके होने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों को राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान पुखराज नायक व लीला नायक के रूप में की गई है। दोनों की उम्र लगभग तेईस वर्ष है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों के बीच प्रेमप्रसंग चल रहा था लेकिन उनका परिवार इसके खिलाफ था, जिसके चलते दोनों सोमवार से घर से गायब थे। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये। पुलिस ने इस मामले की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
न्यूज डेस्कः बिहार में मुनीम बनने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर हैं। क्यों की बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड में मुनीम के पदों पर भर्तियां निकाली हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन के सकते हैं। योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को स्नातक होना जरुरी हैं तभी आप इन पदों पर आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा। आयु सम्बंधित जानकारी के लिए आप बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के द्वारा निकाली गयी नोटिफिकेशन पढ़ें। कैसे करें आवेदन। बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के इन पदों पर आवेदन के लिए आप इसके आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें नोटिफिकेशन पढ़ने के बाद आवेदन करें।
न्यूज डेस्कः बिहार में मुनीम बनने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर हैं। क्यों की बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड में मुनीम के पदों पर भर्तियां निकाली हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन के सकते हैं। योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को स्नातक होना जरुरी हैं तभी आप इन पदों पर आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा। आयु सम्बंधित जानकारी के लिए आप बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के द्वारा निकाली गयी नोटिफिकेशन पढ़ें। कैसे करें आवेदन। बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के इन पदों पर आवेदन के लिए आप इसके आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें नोटिफिकेशन पढ़ने के बाद आवेदन करें।
हम तुम इतनी दूर हो गए, अब न मिल सकेंगे जीवन में ! और हमारे बीच घट गया, वह सब जिसकी रंच न हमने कभी कल्पना की थी ! जीर्ग भर गए शुष्क पत्र - से सपने ! फिर भी एक कसक सी बन कर, बात रह गई मेरे मन में ! 'सचमुच, मुझसे प्यार नहीं था ? थे सब मिथ्या वचन तुम्हारे, क्षणिक लहर की तरह हुए जो तरित तुम्हारे भावुक मन में ?? " जनम-जनम के हम साथी हैं ! अविच्छिन्न ये सूत्र हमारे ! " यही कहा जो उस दिन तुमने, सत्य न हो पाया जीवन में ! सुख-समाज, दैनिक जीवन के कोलाहल के बीच कभी जब, सहसा मेरी बात तुम्हारे मन की साँकल है खड़काती । तब क्या नहीं कभी क्षरण-भर- उस क्षरण तुमसे विमुक्त होते सब - 'तुम्हें नहीं मैं भूल सकी हूं !' अधरों तक लाकर रह जाती ? पर मैं तुम्हें जानता ! कब अपने से भी सच कह सकती हो ? लेकर गहरी साँस, स्वयं को काम स्वयं को काम काज में लय करती हो ?
हम तुम इतनी दूर हो गए, अब न मिल सकेंगे जीवन में ! और हमारे बीच घट गया, वह सब जिसकी रंच न हमने कभी कल्पना की थी ! जीर्ग भर गए शुष्क पत्र - से सपने ! फिर भी एक कसक सी बन कर, बात रह गई मेरे मन में ! 'सचमुच, मुझसे प्यार नहीं था ? थे सब मिथ्या वचन तुम्हारे, क्षणिक लहर की तरह हुए जो तरित तुम्हारे भावुक मन में ?? " जनम-जनम के हम साथी हैं ! अविच्छिन्न ये सूत्र हमारे ! " यही कहा जो उस दिन तुमने, सत्य न हो पाया जीवन में ! सुख-समाज, दैनिक जीवन के कोलाहल के बीच कभी जब, सहसा मेरी बात तुम्हारे मन की साँकल है खड़काती । तब क्या नहीं कभी क्षरण-भर- उस क्षरण तुमसे विमुक्त होते सब - 'तुम्हें नहीं मैं भूल सकी हूं !' अधरों तक लाकर रह जाती ? पर मैं तुम्हें जानता ! कब अपने से भी सच कह सकती हो ? लेकर गहरी साँस, स्वयं को काम स्वयं को काम काज में लय करती हो ?
कोरोना के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन्स प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं. लंदन. दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण के बीच एक हैरान करने वाली रिसर्च सामने आई है. नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि प्रेग्नेंसी के वक्त कोरोना से गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर प्रेग्नेंट महिला ने संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन नहीं ली, तो यह उसके बच्चे के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के वैज्ञानिकों का कहना है कि डिलीवरी डेट के 28 दिन पहले से प्रेग्नेंट महिलाओं को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. उन्होंने अपनी रिसर्च में पाया है कि मां को कोरोना होने पर बच्चा डिलीवरी डेट के पहले ही पैदा हो सकता है. इसके अलावा, संक्रमण से बच्चे की गर्भ में ही मौत हो सकती है. कुछ मामलों में जन्म के बाद नवजात बच्चों की मौत भी हुई है. उत्तरी आयरलैंड के चीफ मेडिकल ऑफिसर माइकल मैकब्राइड कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ्तों में कोरोना संक्रमण होने से मां और बच्चे दोनों की ही जान को खतरा हो सकता है. वे कहते हैं कि कोरोना वैक्सीन प्रेग्नेंट महिला और उसके बच्चे को गंभीर समस्याओं से बचाने में कारगर है. मैकब्राइड के अनुसार जो प्रेग्नेंट महिलाएं वैक्सीन से डर रही हैं, वे जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों खुराक पूरी करें. जिनके दो डोज पूरे हो चुके हैं, वे बूस्टर शॉट से न घबराएं. ये सलाह उन महिलाओं के लिए भी है जो प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं. रॉयल कॉलेज ऑफ मिडवाइव्स की कैरेन मुरे के मुताबिक, कोरोना के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन्स प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं. ये वायरस से डट कर मुकाबला करती हैं. मुरे कहती हैं कि आंकड़ों पर नजर डालें, तो कोरोना से हॉस्पिटलाइज हुईं अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाएं अनवैक्सीनेटेड ही पाई जाती हैं. . 200 रुपये से कम प्लान में लंबी वैलिडिटी, डेटा-कॉल सबकुछ, जिसने सुना वो रिचार्ज कराने दौड़ पड़ा! वो एक्टर जिसकी 'दस्तक' से, हिलने लगी थी अमिताभ बच्चन-दिलीप कुमार की 'दीवार', कैसे कहलाए 'एक्टर्स का रोल मॉडल'
कोरोना के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन्स प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं. लंदन. दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच एक हैरान करने वाली रिसर्च सामने आई है. नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि प्रेग्नेंसी के वक्त कोरोना से गंभीर समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर प्रेग्नेंट महिला ने संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन नहीं ली, तो यह उसके बच्चे के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के वैज्ञानिकों का कहना है कि डिलीवरी डेट के अट्ठाईस दिन पहले से प्रेग्नेंट महिलाओं को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. उन्होंने अपनी रिसर्च में पाया है कि मां को कोरोना होने पर बच्चा डिलीवरी डेट के पहले ही पैदा हो सकता है. इसके अलावा, संक्रमण से बच्चे की गर्भ में ही मौत हो सकती है. कुछ मामलों में जन्म के बाद नवजात बच्चों की मौत भी हुई है. उत्तरी आयरलैंड के चीफ मेडिकल ऑफिसर माइकल मैकब्राइड कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ्तों में कोरोना संक्रमण होने से मां और बच्चे दोनों की ही जान को खतरा हो सकता है. वे कहते हैं कि कोरोना वैक्सीन प्रेग्नेंट महिला और उसके बच्चे को गंभीर समस्याओं से बचाने में कारगर है. मैकब्राइड के अनुसार जो प्रेग्नेंट महिलाएं वैक्सीन से डर रही हैं, वे जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों खुराक पूरी करें. जिनके दो डोज पूरे हो चुके हैं, वे बूस्टर शॉट से न घबराएं. ये सलाह उन महिलाओं के लिए भी है जो प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं. रॉयल कॉलेज ऑफ मिडवाइव्स की कैरेन मुरे के मुताबिक, कोरोना के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन्स प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं. ये वायरस से डट कर मुकाबला करती हैं. मुरे कहती हैं कि आंकड़ों पर नजर डालें, तो कोरोना से हॉस्पिटलाइज हुईं अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाएं अनवैक्सीनेटेड ही पाई जाती हैं. . दो सौ रुपयापये से कम प्लान में लंबी वैलिडिटी, डेटा-कॉल सबकुछ, जिसने सुना वो रिचार्ज कराने दौड़ पड़ा! वो एक्टर जिसकी 'दस्तक' से, हिलने लगी थी अमिताभ बच्चन-दिलीप कुमार की 'दीवार', कैसे कहलाए 'एक्टर्स का रोल मॉडल'
नई दिल्लीः गुजरात में चुनावों के ऐलान से पहले पाटीदार समाज के नेता और हार्दिक पटेल के करीबी नरेन्द्र पटेल ने भाजपा में शामिल होने के लिए 1 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया है। नरेन्द्र पटेल ने दिन में भाजपा की सदस्यता ली और देर शाम को 10 लाख रुपया कैश लेकर मीडिया के सामने पहुंच गये। नरेन्द्र ने दावा किया कि दस लाख की रकम उनको एडवांस के तौर पर दी गई है। नरेन्द्र पटेल ने आरोप लगाया कि शनिवार को भाजपा का दामन थामने वाले वरुण पटेल ने ये दस लाख रुपए अपने घर पर बुलाकर दिये हैं। पिछले दो दिनों में हार्दिक पटेल के पांच करीबियों ने भाजपा का दामन थामा था। शनिवार को रेशमा और वरुण पार्टी में शामिल हुए। रविवार को नरेन्द्र पटेल के साथ रवि पटेल और महेश पटेल भी भाजपा में शामिल हो गये लेकिन नरेन्द्र ने पांच घंटे बाद ही आरोप लगा दिया कि उन्हें 1 करोड़ का ऑफर दिया गया था जिसमें से 10 लाख एडवांस दिया गया। नोटकांड की प्रेस कॉंफ्रेंस करते वक्त नरेन्द्र पटेल बार-बार ये कहते रहे कि वो पाटीदार समाज के लिए समर्पित हैं और भाजपा के खिलाफ किसी भी हद तक जाएंगे। वहीं वरुण भी दावा कर रहे हैं कि पाटीदारों का फायदा भाजपा के साथ जाने में ही है। वहीं भाजपा ने नरेन्द्र पटेल के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए जांच की मांग की है। भाजपा के नेता इसे कांग्रेस की साज़िश करार दे रहे हैं। गुजरात भाजपा के नेता भरत पांड्या ने कहा कि ये नरेन्द्र पटेल का पब्लिसिटी स्टंट है।
नई दिल्लीः गुजरात में चुनावों के ऐलान से पहले पाटीदार समाज के नेता और हार्दिक पटेल के करीबी नरेन्द्र पटेल ने भाजपा में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया है। नरेन्द्र पटेल ने दिन में भाजपा की सदस्यता ली और देर शाम को दस लाख रुपया कैश लेकर मीडिया के सामने पहुंच गये। नरेन्द्र ने दावा किया कि दस लाख की रकम उनको एडवांस के तौर पर दी गई है। नरेन्द्र पटेल ने आरोप लगाया कि शनिवार को भाजपा का दामन थामने वाले वरुण पटेल ने ये दस लाख रुपए अपने घर पर बुलाकर दिये हैं। पिछले दो दिनों में हार्दिक पटेल के पांच करीबियों ने भाजपा का दामन थामा था। शनिवार को रेशमा और वरुण पार्टी में शामिल हुए। रविवार को नरेन्द्र पटेल के साथ रवि पटेल और महेश पटेल भी भाजपा में शामिल हो गये लेकिन नरेन्द्र ने पांच घंटे बाद ही आरोप लगा दिया कि उन्हें एक करोड़ का ऑफर दिया गया था जिसमें से दस लाख एडवांस दिया गया। नोटकांड की प्रेस कॉंफ्रेंस करते वक्त नरेन्द्र पटेल बार-बार ये कहते रहे कि वो पाटीदार समाज के लिए समर्पित हैं और भाजपा के खिलाफ किसी भी हद तक जाएंगे। वहीं वरुण भी दावा कर रहे हैं कि पाटीदारों का फायदा भाजपा के साथ जाने में ही है। वहीं भाजपा ने नरेन्द्र पटेल के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए जांच की मांग की है। भाजपा के नेता इसे कांग्रेस की साज़िश करार दे रहे हैं। गुजरात भाजपा के नेता भरत पांड्या ने कहा कि ये नरेन्द्र पटेल का पब्लिसिटी स्टंट है।
Rafta Rafta Trailer out : YouTube की दुनिया में वन मेन आर्मी के नाम से जाने जाने वाले भुवन बाम (Bhuvan Bam) ने आज OTT पर भी अपनी पहचान बनान शुरू कर दी है। अब वह दुनियाभर में काफी मशहूर हैं। उनके फैन को भुवन के YouTube एपोसोड्स, शोर्ट फिल्म, सीरिज या फिर शो सभी का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। हाल ही में भुवन बाम की वेब सीरिज 'ताजा खबर' (Taaza Khabar) के रिलीज होने के बाद अब जल्द ही उनका एक नया वेब शो 'रफ्ता रफ्ता' (Rafta Rafta) आने वाला है। जिसका ट्रेलर आज रिलीज हो गया है। यह काफी गुद्गुदाने वाला है। इस ट्रेलर को आप YouTube सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देख सकते हो। 'रफ्ता रफ्ता' का ट्रेलर हुआ रिलीज : भुवन बाम 'ताजा खबर' (Taaza Khabar) से OTT प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर चुके हैं। जिसे दर्शकों ने काफी प्यार दिया है। वहीँ, अब भुवन के फैंस को उनके अगले वेब शो का बेसब्री से इंतज़ार है। जो 25 जनवरी को 'अमेजन मिनीटीवी' पर रिलीज होने वाला है। बता दें, आप YouTube की तरह ही इस पर भी इस शो को बिल्कुल मुफ्त में देख सकते हो। ट्रेलर को देख कर यह समझना बेहद आसान हो जाता है कि, यह कहानी करण (भुवन बाम) और नित्या (सृष्टि गांगुली) नाम के एक प्रेमी जोड़े की प्यार भरी, हंसने-खुश होने, रूठने-मनाने और खट्टी मीठी नोक-झोंक से भरी कहानी है। यह एक रोमांटिक-कॉमेडी ड्रामा शो होगा। क्या कहानी बयां करता है ट्रेलर ? 'रफ्ता रफ्ता' ट्रेलर में दिखाया गया है कि, कैसे करण (भुवन बाम) और नित्या (सृष्टि गांगुली) की मुलाकात होती है और उनके बीच प्यारी सी नोंकझोंक शुरू हो जाती है। इस शो की कहानी दो व्यक्तियों की लाइफ जर्नी को बयां करेगी कि, कैसे एक दम अलग-अलग स्वभाव के लड़का लड़की एक दूसरे के साथ जिंदगी भर रहने मतलब शादी करने का फैसला लेते हैं। अब यह देखना काफी इंट्रेस्टिंग होगा कि, एक दम अलग नेचर के होने के बाद दोनों में प्यार की शुरुआत कैसे होती ? और कैसे यह शादी करने का फैसला लेते हैं ? ट्रेलर में ये दिखाया गया है कि, दोनों शादीशुदा कपल है, लेकिन दोनों के बीच न प्यार है और न ही पति-पत्नी वाला रिश्ता। फिर भी दोनों एक साथ है। अब यह कैसे है क्यों है ? इसके लिए आपको यह शो पूरा देखना होगा। रफ्ता रफ्ता कास्ट : रफ्ता रफ्ता (Rafta Rafta Trailer Video) शो की कास्ट की बात करें तो इसमें आपको भुवन बाम के साथ सृष्टि गांगुली रिंदानी लीड रोल में नज़र आएंगी। इन दोनों के अलावा इस सीरीज में राकेश बेदी, अतुल श्रीवास्तव और कामिनी खन्ना जैसे स्टार्स भी देखने को मिलेंगे। रफ्ता रफ्ता का टीज़र और ट्रेलर भले आप YouTube पर देख सकते हैं, लेकिन इस शो को देखने के लिए आपको शॉपिंग ऐप Amazon (अमेजन) अपने फोन में डाउनलोड करना होगा। इस ऐप में आप फायर टीवी के अंदर अमेजन मिनी टीवी में जाकर आप इस शो को मुफ्त में आसानी से देख सकेंगे। बता दें, यह Amazon मिनी टीवी पर 25 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
Rafta Rafta Trailer out : YouTube की दुनिया में वन मेन आर्मी के नाम से जाने जाने वाले भुवन बाम ने आज OTT पर भी अपनी पहचान बनान शुरू कर दी है। अब वह दुनियाभर में काफी मशहूर हैं। उनके फैन को भुवन के YouTube एपोसोड्स, शोर्ट फिल्म, सीरिज या फिर शो सभी का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। हाल ही में भुवन बाम की वेब सीरिज 'ताजा खबर' के रिलीज होने के बाद अब जल्द ही उनका एक नया वेब शो 'रफ्ता रफ्ता' आने वाला है। जिसका ट्रेलर आज रिलीज हो गया है। यह काफी गुद्गुदाने वाला है। इस ट्रेलर को आप YouTube सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देख सकते हो। 'रफ्ता रफ्ता' का ट्रेलर हुआ रिलीज : भुवन बाम 'ताजा खबर' से OTT प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर चुके हैं। जिसे दर्शकों ने काफी प्यार दिया है। वहीँ, अब भुवन के फैंस को उनके अगले वेब शो का बेसब्री से इंतज़ार है। जो पच्चीस जनवरी को 'अमेजन मिनीटीवी' पर रिलीज होने वाला है। बता दें, आप YouTube की तरह ही इस पर भी इस शो को बिल्कुल मुफ्त में देख सकते हो। ट्रेलर को देख कर यह समझना बेहद आसान हो जाता है कि, यह कहानी करण और नित्या नाम के एक प्रेमी जोड़े की प्यार भरी, हंसने-खुश होने, रूठने-मनाने और खट्टी मीठी नोक-झोंक से भरी कहानी है। यह एक रोमांटिक-कॉमेडी ड्रामा शो होगा। क्या कहानी बयां करता है ट्रेलर ? 'रफ्ता रफ्ता' ट्रेलर में दिखाया गया है कि, कैसे करण और नित्या की मुलाकात होती है और उनके बीच प्यारी सी नोंकझोंक शुरू हो जाती है। इस शो की कहानी दो व्यक्तियों की लाइफ जर्नी को बयां करेगी कि, कैसे एक दम अलग-अलग स्वभाव के लड़का लड़की एक दूसरे के साथ जिंदगी भर रहने मतलब शादी करने का फैसला लेते हैं। अब यह देखना काफी इंट्रेस्टिंग होगा कि, एक दम अलग नेचर के होने के बाद दोनों में प्यार की शुरुआत कैसे होती ? और कैसे यह शादी करने का फैसला लेते हैं ? ट्रेलर में ये दिखाया गया है कि, दोनों शादीशुदा कपल है, लेकिन दोनों के बीच न प्यार है और न ही पति-पत्नी वाला रिश्ता। फिर भी दोनों एक साथ है। अब यह कैसे है क्यों है ? इसके लिए आपको यह शो पूरा देखना होगा। रफ्ता रफ्ता कास्ट : रफ्ता रफ्ता शो की कास्ट की बात करें तो इसमें आपको भुवन बाम के साथ सृष्टि गांगुली रिंदानी लीड रोल में नज़र आएंगी। इन दोनों के अलावा इस सीरीज में राकेश बेदी, अतुल श्रीवास्तव और कामिनी खन्ना जैसे स्टार्स भी देखने को मिलेंगे। रफ्ता रफ्ता का टीज़र और ट्रेलर भले आप YouTube पर देख सकते हैं, लेकिन इस शो को देखने के लिए आपको शॉपिंग ऐप Amazon अपने फोन में डाउनलोड करना होगा। इस ऐप में आप फायर टीवी के अंदर अमेजन मिनी टीवी में जाकर आप इस शो को मुफ्त में आसानी से देख सकेंगे। बता दें, यह Amazon मिनी टीवी पर पच्चीस जनवरी को रिलीज होने जा रही है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
पॉपुलर बॉलीवुड सिंगर शान की मां सोनाली मुखर्जी का निधन हो गया है। इस बात की जानकारी सिंगर कैलाश खेर ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी है। सोनाली मुखर्जी खुद भी एक शानदार सिंगर थीं, जिन्होंने बुधवार रात आखिरी सांस ली। हालांकि, उनका निधन किस कारण हुआ है, इसकी वजह का अभी तक पता नहीं लग पाया है। कैलाश खेर ने पोस्ट शेयर कर लिखा, "बड़े भाई शान की मां का देहावसान हो गया है। परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की सद्गति की प्रार्थनाएं। तीनों लोक के अधिपति भगवान शिव से प्रार्थना है कि हमारे शान भैया के परिवार को ये दुख सहन करने की शक्ति मिले। अनन्त प्रार्थना ॐ। " कैलाश खेर के इस पोस्ट पर फैंस समेत कई सेलेब्स ने कमेंट कर शान की मां के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बताया जाता है कि शान की मां सोनाली मुखर्जी ने गाना गा कर ही अपने बच्चों को पाला था। 13 साल की उम्र में शान के पिता के निधन के बाद से उनकी मां सोनाली पर ही घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई थी। सोनाली मुखर्जी ने 1970 से 2000 तक फिल्मी गानों के लिए कोरस सिंगर के रूप में काम किया था। पॉपुलर प्लेबैक सिंगर शान को 'चार कदम', 'कुछ तो हुआ है', 'आओ मिलो चलें', 'हे शोना', 'जब से तेरे नैना' और 'बहती हवा सा' जैसे गानों के लिए जाना जाता है। शान ने टीवी पर 'सा रे गा मा पा', 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' और 'स्टार वॉयस ऑफ इंडिया' जैसे सिंगिंग शो होस्ट भी किए हैं। बॉलीवुड फिल्मों में उनके गानों के लिए उन्हें अब तक कई आईफा और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पॉपुलर बॉलीवुड सिंगर शान की मां सोनाली मुखर्जी का निधन हो गया है। इस बात की जानकारी सिंगर कैलाश खेर ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दी है। सोनाली मुखर्जी खुद भी एक शानदार सिंगर थीं, जिन्होंने बुधवार रात आखिरी सांस ली। हालांकि, उनका निधन किस कारण हुआ है, इसकी वजह का अभी तक पता नहीं लग पाया है। कैलाश खेर ने पोस्ट शेयर कर लिखा, "बड़े भाई शान की मां का देहावसान हो गया है। परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की सद्गति की प्रार्थनाएं। तीनों लोक के अधिपति भगवान शिव से प्रार्थना है कि हमारे शान भैया के परिवार को ये दुख सहन करने की शक्ति मिले। अनन्त प्रार्थना ॐ। " कैलाश खेर के इस पोस्ट पर फैंस समेत कई सेलेब्स ने कमेंट कर शान की मां के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बताया जाता है कि शान की मां सोनाली मुखर्जी ने गाना गा कर ही अपने बच्चों को पाला था। तेरह साल की उम्र में शान के पिता के निधन के बाद से उनकी मां सोनाली पर ही घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई थी। सोनाली मुखर्जी ने एक हज़ार नौ सौ सत्तर से दो हज़ार तक फिल्मी गानों के लिए कोरस सिंगर के रूप में काम किया था। पॉपुलर प्लेबैक सिंगर शान को 'चार कदम', 'कुछ तो हुआ है', 'आओ मिलो चलें', 'हे शोना', 'जब से तेरे नैना' और 'बहती हवा सा' जैसे गानों के लिए जाना जाता है। शान ने टीवी पर 'सा रे गा मा पा', 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' और 'स्टार वॉयस ऑफ इंडिया' जैसे सिंगिंग शो होस्ट भी किए हैं। बॉलीवुड फिल्मों में उनके गानों के लिए उन्हें अब तक कई आईफा और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मोर पंख से जुड़े उपाय बहुत उपयोगी माने जाते हैं। इन्हें करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वरात्रि का पूजा-पाठ और व्रत बहुत नियमों के साथ किया जाता है। हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर वैसे तो देखने में खूबसूरत होता ही है,लेकिन उसके पंख देखने में कई ज्यादा सुंदर होते हैं।
मोर पंख से जुड़े उपाय बहुत उपयोगी माने जाते हैं। इन्हें करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वरात्रि का पूजा-पाठ और व्रत बहुत नियमों के साथ किया जाता है। हमारा राष्ट्रीय पक्षी मोर वैसे तो देखने में खूबसूरत होता ही है,लेकिन उसके पंख देखने में कई ज्यादा सुंदर होते हैं।
नई दिल्लीः कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के लिए वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया (Siddaramaiah) से कड़े मुकाबले के बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डी के शिवकुमार (DK Shivakumar) राज्य में सरकार गठन के मुद्दे पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करने के लिए मंगलवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए। कर्नाटक के CM को लेकर सस्पेंस कायम है। डीके शिवकुमार दोपहर 2 बजे तक दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली रवाना होने से पहले वह काफी उत्साहित दिखे। कर्नाटक चुनाव जितने के बाद से ही शिवकुमार काफी उत्साह में नजर आ रहे हैं। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि लोकसभा (Lok Sabha) में कर्नाटक से 20 सीटें जीतना हमारी अगली चुनौती है। उन्होंने कहा कि 20 सीटें जीतना (लोकसभा चुनाव में) हमारी अगली चुनौती है। हमारा संयुक्त सदन है, मैं यहां किसी को बांटना नहीं चाहता। मैं एक जिम्मेदार व्यक्ति हूं। मैं पीठ में छुरा भी नहीं लूंगा और मैं नहीं करूंगा। ब्लैकमेल भी। मैं गलत इतिहास में नहीं जाना चाहता। मैं एक बुरी टिप्पणी के साथ नहीं जाना चाहता। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने शिवकुमार और सिद्दरमैया दोनों को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया है। शिवकुमार ने शुरुआत में सोमवार शाम को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी के अपने दौरे को रद्द कर दिया था। मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस महासचिव ने मुझे अकेले आने का निर्देश दिया है, मैं अकेले दिल्ली जा रहा हूं। वहीं, सिद्धरमैया सोमवार से दिल्ली में हैं। शिवकुमार ने कहा कि मैं दिल्ली जा रहा हूं। कांग्रेस महासचिव ने मुझे अकेले आने का निर्देश दिया है। मैं अकेले दिल्ली जा रहा हूं। मेरा स्वास्थ्य अच्छा है। कांग्रेस पार्टी मेरा मंदिर है, कांग्रेस पार्टी हमारी सबसे बड़ी ताकत है इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। लोगों ने हमें (कांग्रेस) आशीर्वाद दिया है। हमें लोगों का भरोसा बनाए रखने तथा उसे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। कन्नड़ नाडु के लोग, मां भुवनेश्वरी और मां चामुंडेश्वरी संविधान की रक्षा करने तथा कर्नाटक को 'सर्व जनांगदा शांतिय तोटा' (बागीचा, जहां सभी समुदाय सौहार्द्रपूर्वक रहते हैं) बनाने के लिए हमें आशीर्वाद देती रहें।
नई दिल्लीः कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के लिए वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया से कड़े मुकाबले के बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डी के शिवकुमार राज्य में सरकार गठन के मुद्दे पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करने के लिए मंगलवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए। कर्नाटक के CM को लेकर सस्पेंस कायम है। डीके शिवकुमार दोपहर दो बजे तक दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली रवाना होने से पहले वह काफी उत्साहित दिखे। कर्नाटक चुनाव जितने के बाद से ही शिवकुमार काफी उत्साह में नजर आ रहे हैं। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि लोकसभा में कर्नाटक से बीस सीटें जीतना हमारी अगली चुनौती है। उन्होंने कहा कि बीस सीटें जीतना हमारी अगली चुनौती है। हमारा संयुक्त सदन है, मैं यहां किसी को बांटना नहीं चाहता। मैं एक जिम्मेदार व्यक्ति हूं। मैं पीठ में छुरा भी नहीं लूंगा और मैं नहीं करूंगा। ब्लैकमेल भी। मैं गलत इतिहास में नहीं जाना चाहता। मैं एक बुरी टिप्पणी के साथ नहीं जाना चाहता। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने शिवकुमार और सिद्दरमैया दोनों को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया है। शिवकुमार ने शुरुआत में सोमवार शाम को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी के अपने दौरे को रद्द कर दिया था। मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस महासचिव ने मुझे अकेले आने का निर्देश दिया है, मैं अकेले दिल्ली जा रहा हूं। वहीं, सिद्धरमैया सोमवार से दिल्ली में हैं। शिवकुमार ने कहा कि मैं दिल्ली जा रहा हूं। कांग्रेस महासचिव ने मुझे अकेले आने का निर्देश दिया है। मैं अकेले दिल्ली जा रहा हूं। मेरा स्वास्थ्य अच्छा है। कांग्रेस पार्टी मेरा मंदिर है, कांग्रेस पार्टी हमारी सबसे बड़ी ताकत है इसलिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। लोगों ने हमें आशीर्वाद दिया है। हमें लोगों का भरोसा बनाए रखने तथा उसे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। कन्नड़ नाडु के लोग, मां भुवनेश्वरी और मां चामुंडेश्वरी संविधान की रक्षा करने तथा कर्नाटक को 'सर्व जनांगदा शांतिय तोटा' बनाने के लिए हमें आशीर्वाद देती रहें।
यूपी के कानपुर में एक सड़क दुर्घटना में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब वे जिस बस में यात्रा कर रहे थे, वह तीन पहिया हल्के कैरिज ट्रक से टकरा गई। हादसा मंगलवार देर शाम सचेंडी इलाके में कानपुर-इलाहाबाद हाईवे पर हुआ। पुलिस के मुताबिक बस लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। पुलिस ने बताया कि घायलों को लाला लाजपत राय अस्पताल ले जाया गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिया और दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। यूनियन एचएम अमित शाह ने भी मौतों पर शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतक के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है और घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
यूपी के कानपुर में एक सड़क दुर्घटना में कम से कम सत्रह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब वे जिस बस में यात्रा कर रहे थे, वह तीन पहिया हल्के कैरिज ट्रक से टकरा गई। हादसा मंगलवार देर शाम सचेंडी इलाके में कानपुर-इलाहाबाद हाईवे पर हुआ। पुलिस के मुताबिक बस लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। पुलिस ने बताया कि घायलों को लाला लाजपत राय अस्पताल ले जाया गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिया और दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। यूनियन एचएम अमित शाह ने भी मौतों पर शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतक के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है और घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
शिवपुरी। पोहरी में एलआईसी के एजेण्ट राजेश जैन की धर्मपत्नी श्रीमती रागिनी जैन की मोटरसाइकिल से शिवपुरी आते समय दुर्घटना में मौत हो गई। पोहरी से शिवपुरी के बीच ग्राम परिच्छा के नजदीक सड़क के गड्ढों ने असमय ही युवती को मौत का शिकार बना दिया। रागिनी का अंतिम संस्कार आज पोहरी में शोकाकुल माहौल में किया गया। जानकारी के अनुसार राजेश जैन अपनी पत्नी रागिनी के साथ कल शाम पोहरी से शिवपुरी आ रहे थे। परिच्छा ग्राम के निकट उनकी मोटरसाइकिल सड़क के गड्ढे में जा गिरी और गड्ढा इतना गहरा था कि उनकी मोटरसाइकिल संतुलन बिगडऩे के कारण पलट गई और इसके साथ ही उनकी पत्नी भी सड़क पर आ गिरी तथा उन्होंने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया।
शिवपुरी। पोहरी में एलआईसी के एजेण्ट राजेश जैन की धर्मपत्नी श्रीमती रागिनी जैन की मोटरसाइकिल से शिवपुरी आते समय दुर्घटना में मौत हो गई। पोहरी से शिवपुरी के बीच ग्राम परिच्छा के नजदीक सड़क के गड्ढों ने असमय ही युवती को मौत का शिकार बना दिया। रागिनी का अंतिम संस्कार आज पोहरी में शोकाकुल माहौल में किया गया। जानकारी के अनुसार राजेश जैन अपनी पत्नी रागिनी के साथ कल शाम पोहरी से शिवपुरी आ रहे थे। परिच्छा ग्राम के निकट उनकी मोटरसाइकिल सड़क के गड्ढे में जा गिरी और गड्ढा इतना गहरा था कि उनकी मोटरसाइकिल संतुलन बिगडऩे के कारण पलट गई और इसके साथ ही उनकी पत्नी भी सड़क पर आ गिरी तथा उन्होंने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया।
महामहोपाध्याय पद्मश्री डा. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी (वागीश शास्त्री) के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गहरी शोक संवेदना जताई है। उनके पुत्र आशापति त्रिपाठी को संस्कृत भाषा में पत्र लिखकर पीएम ने संस्कृत के विद्वान को श्रद्धांजलि दी है। जागरण संवाददाता, वाराणसी : महामहोपाध्याय पद्मश्री डा. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी (वागीश शास्त्री) के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गहरी शोक संवेदना जताई है। उनके पुत्र आशापति त्रिपाठी को संस्कृत भाषा में पत्र लिखकर पीएम ने संस्कृत के विद्वान को श्रद्धांजलि दी है। उनके पुत्र को भेजे ई-मेल में प्रधानमंत्री ने लिखा है कि प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी के निधन के विषय में जानकर मुझे अत्यधिक दुख का अनुभव हुआ है। इस कष्टप्रद काल में मेरी संवेदना परिवार और शुभङ्क्षचतकों के साथ है। संस्कृत साहित्य, व्याकरण, काव्य, भाषा विज्ञान, भारतीय इतिहास, संस्कृति आदि अनेक विषयों पर प्रो. वागीश शास्त्री द्वारा रचित और संपादित विभिन्न ग्रन्थ अमूल्य हैं। 'तस्त संपूर्णं जीवनं समृद्धायाः संस्कृतभाषायाः संरक्षणे जनं जनं प्रति प्रापणे च समर्पितम आसीत अर्थात उनका संपूर्ण जीवन समृद्ध संस्कृत भाषा के संरक्षण में जन-जन तक पहुंचाने में समर्पित था। सरल विधि से संस्कृत शिक्षण की पद्धति का विकास करके उन्होंने भाषा के साथ नए लोगों को जोडऩे के लिए प्रो. वागीश शास्त्री का योगदान उल्लेखनीय है। संस्कृत सेवा के लिए उनके प्रयास सर्वथा याद किए जाएंगे। प्रो. वागीश शास्त्री आज शरीर से हमारे साथ नहीं हैं किंतु उनके संस्कार और जीवन मूल्य परिजनों के साथ हमेशा रहेंगे। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह दिवंगत की आत्मा की शांति प्रदान करें। शोक संतप्त पारिवारिक और शुभचिंतकों को इस दुख को सहन करने के लिए धैर्य और बल प्रदान करें। डा. वागीश शास्त्री के शिष्य विदेशों तक फैले हुए हैं। उनके निधन की खबर मिलने पर वह भी शोकमग्न हैं। स्विजरलैंड की नदिया चारलियर ने काशी में अपना मुंडन कराकर गुरुदेव को नमन किया।
महामहोपाध्याय पद्मश्री डा. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गहरी शोक संवेदना जताई है। उनके पुत्र आशापति त्रिपाठी को संस्कृत भाषा में पत्र लिखकर पीएम ने संस्कृत के विद्वान को श्रद्धांजलि दी है। जागरण संवाददाता, वाराणसी : महामहोपाध्याय पद्मश्री डा. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गहरी शोक संवेदना जताई है। उनके पुत्र आशापति त्रिपाठी को संस्कृत भाषा में पत्र लिखकर पीएम ने संस्कृत के विद्वान को श्रद्धांजलि दी है। उनके पुत्र को भेजे ई-मेल में प्रधानमंत्री ने लिखा है कि प्रो. भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी के निधन के विषय में जानकर मुझे अत्यधिक दुख का अनुभव हुआ है। इस कष्टप्रद काल में मेरी संवेदना परिवार और शुभङ्क्षचतकों के साथ है। संस्कृत साहित्य, व्याकरण, काव्य, भाषा विज्ञान, भारतीय इतिहास, संस्कृति आदि अनेक विषयों पर प्रो. वागीश शास्त्री द्वारा रचित और संपादित विभिन्न ग्रन्थ अमूल्य हैं। 'तस्त संपूर्णं जीवनं समृद्धायाः संस्कृतभाषायाः संरक्षणे जनं जनं प्रति प्रापणे च समर्पितम आसीत अर्थात उनका संपूर्ण जीवन समृद्ध संस्कृत भाषा के संरक्षण में जन-जन तक पहुंचाने में समर्पित था। सरल विधि से संस्कृत शिक्षण की पद्धति का विकास करके उन्होंने भाषा के साथ नए लोगों को जोडऩे के लिए प्रो. वागीश शास्त्री का योगदान उल्लेखनीय है। संस्कृत सेवा के लिए उनके प्रयास सर्वथा याद किए जाएंगे। प्रो. वागीश शास्त्री आज शरीर से हमारे साथ नहीं हैं किंतु उनके संस्कार और जीवन मूल्य परिजनों के साथ हमेशा रहेंगे। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह दिवंगत की आत्मा की शांति प्रदान करें। शोक संतप्त पारिवारिक और शुभचिंतकों को इस दुख को सहन करने के लिए धैर्य और बल प्रदान करें। डा. वागीश शास्त्री के शिष्य विदेशों तक फैले हुए हैं। उनके निधन की खबर मिलने पर वह भी शोकमग्न हैं। स्विजरलैंड की नदिया चारलियर ने काशी में अपना मुंडन कराकर गुरुदेव को नमन किया।
उस बलि को चारों तरफ फेंकने के बाद साधु को दे और साधु ले तो दोष है, अतिचार है। अमुक साधु आयेंगे तो उन्हें ही दूँगा, ऐसा सोचकर गृहस्थ ने आहार को अलग निकाल रखा हो और वही साधु ले तो स्थापना प्रभृतिका दोष लगता है। इससे बच्चों को और अन्य बाबा संन्यासियों को अन्तराय लगने की संभावना रहती है। जिस आहार में सचित्तादि की शंका हो तो उसकी उपेक्षा नहीं करे और न ही ऐसे आहार को ग्रहण करे। बहन को तकाजा करके कहना 'जल्दी बहरा' अपने हल्केपन को प्रकट करना है, यह भी दोष है। विकृत दही या वैसा ही अन्य पदार्थ जिसका रस चलित है, वह प्राण भोजन है। ऐसी भिक्षा नहीं लेनी चाहिए, ले तो अतिचार है । गृहस्थ के घर में जो वस्तु दिखाई दे उसकी ही याचना करनी चाहिए, अदृष्ट पदार्थ की याचना करने पर वह भक्तिवशात् अप्रासुक को प्रासुक बना कर देने की चेष्टा करेगा। इससे जीवों की विराधना होगी। गोचरी के विषय में एषणा के ३ भेद जानना साधु के लिए जरूरी हैं- १. गवेषणैषणा २. ग्रहणैषणा ३. परिभोगैषणा। गवेषणैषणा - ग्रहण करने के पहले शुद्धि-अशुद्धि की खोज करना। इसके १६ उद्गमादि दोष हैं, जो गृहस्थ की ओर से साधु को लगते हैं। आहार आदि ग्रहण करते समय शुद्धि-अशुद्धि का खयाल रखना ग्रहणैषणा है। इसके १६ दोष हैं, वे साधु की ओर से साधु को लगते हैं। ये ३२ दोष टालने योग्य हैं। नहीं टाला तो अतिचार है। परिभोगैषणा के शंका आदि १० दोष साधु और श्रावक दोनों की ओर से मिले-जुले लगते हैं। इन ४२ दोषों को छोड़कर भोजन ग्रहण करने से चारित्र रूपी चदरिया शुद्ध रह सकती है। इस गोचरचर्या का पाठ गोचरी लाने और करने के बाद अवश्य बोलना चाहिए। ऐसी बात कवि जी म.सा. वाले श्रमणसूत्र पुस्तक में पढ़ने को मिली। हमें गोचरी संबंधी सभी दोषों से बचने के लिए प्रतिक्रमण करना जरूरी है। ३. स्वाध्याय - प्रतिलेखना सूत्र इसके बाद श्रमण के लिए तीसरे पाठ में प्रेरणा दी गई है कि तू चारों काल स्वाध्याय कर और दोनों संध्याकाल में वस्त्र, पात्र, कम्बल, रजोहरण आदि की प्रतिलेखना अच्छी तरह से कर । यदि इस विषय में अतिक्रम, व्यतिक्रम, अतिचार, अनाचार लगता हो तो उस पाप का प्रतिक्रमण करना चाहिए। अंग्रेजी में कहा है- "Time is money" समय बहुमूल्य धन है। समय की इज्जत ने ही मानव को महान् बनाया है। समय का तिरस्कार मानव जीवन के विकास का तिरस्कार है । जिस काम के लिए जो समय निश्चित किया गया है, वह काम उसी समय कर लेना चाहिए। शास्त्रों में कहा- "काले कालं समायरे ।" जैसे एक सेनापति युद्ध के मोर्चे पर सदा सजग रहता है और शत्रुओं से लोहा लेता है ऐसे ही कर्मशत्रुओं से लोहा लेने के लिए साधक को हमेशा सजग रहना चाहिए। उत्तराध्ययन सूत्र के२९वें अध्ययन में गौतम स्वामी के प्रश्न पर भगवान् ने फरमाया- "कालपडिलेहणया णं भंते! जीवे किं जणयइ?, काल पडिलेहणया णं नाणावरणिज्जं कम्मं खवेइ ।" काल की प्रतिलेखना करने से क्या फल मिलता है ? भगवान ने फरमायाज्ञानावरणीय कर्म का क्षय होता है। प्रमाद के वशवर्ती बनकर यदि चारों काल स्वाध्याय न की हो या उसमें असावधानी रखी हो तथा दोनों काल प्रतिलेखन न किया हो तो उसके शुद्धीकरण के लिए प्रतिक्रमण किया जाता है। जैन धर्म में ही नहीं, किन्तु भारतीय संस्कृति में स्वाध्याय का गौरवशाली महत्त्व है। भारतीय विद्यार्थी जब गुरुकुल से पढ़ लिखकर निकलता था, तब गुरु कहते थे- 'स्वाध्यायान्माप्रमदः ।' स्वाध्याय में कभी प्रमाद मत करना । आज का विद्यार्थी भी बहुत पढ़ता है- कथा कहानियाँ, अश्लील गीत, उपन्यास आदि। जिनके पढ़ने से जीवन अपवित्र बनता है, विकार भड़कते हैं, ऐसा गन्दा साहित्य मत पढ़ो, पतन की ओर मत बढ़ो। पतन से बचने के लिए किसी महापुरुष के उच्चकोटि के आध्यात्मिक धर्मग्रन्थों को पढ़कर अपने आपको पापमुक्त बनावें । भगवान महावीर ने तो १२ प्रकार के तपों में स्वाध्याय को आभ्यन्तर तपों में स्थान दिया। अज्ञानी व्यक्ति जिन कर्मों को करोड़ वर्ष में भी नहीं खपा पाता उन कर्मों को ज्ञानी स्वाध्याय के बल पर, मन, वचन काया के संयम के बल पर एक श्वास भर में क्षय कर डालता है। अतः हम स्वाध्याय करें। उसमें प्रमाद न करें। अगर किया हो तो उस अतिचार का प्रतिक्रमण से शुद्धीकरण शीघ्र कर लेना चाहिए। ४. ३३ बोल का पाठ असंयम का प्रतिक्रमण- जैसे समुद्र में अनेक तरंगे उठती हैं वैसे ही मनुष्य के मन में कामनाओं की अनेक लहरें ज्वार भाटा की तरह आती रहती हैं। शास्त्रकारों ने कहा- "इच्छा हु आगाससमा अणंतिया।" इच्छाएँ आकाश की तरह अनन्त हैं। द्रौपदी के चीर की तरह उनका पार नहीं है। कामनाओं से आज तक किसी को सुख नहीं मिला। अगर सुखी बनना है तो कामनाओं से मुक्त होना होगा, इच्छाओं पर संयम करना पड़ेगा और असंयम से मुक्त होना होगा। वह असंयम एक प्रकार का है। संयम का पालन करते हुए भी प्रमादवश अगर असंयम हो गया तो उसका प्रतिक्रमण अवश्य करें। राग-द्वेष का प्रतिक्रमण- कर्म बन्धन के बीज राग द्वेष हैं। जीवन रूपी चदरिया को गन्दा बनाने का काम यही दोनों करते हैं। अतः साधना के क्षेत्र में प्रविष्ट श्रमण साधक से प्रमादवशात् भूल हो तो प्रतिक्रमण कर शुद्ध हो जाना चाहिए। दण्ड प्रतिक्रमण- दुष्प्रयुक्त मन, वचन, काया रूप तीन दंड हैं। शल्य एवं गर्व प्रतिक्रमण- जिनके कारण आत्मा नीरोग नहीं बन सकता ऐसे तीन शल्य हैं- मावाशल्य, निदानशल्य और मिथ्यादर्शनशल्य । आत्मा को संसार समुद्र में डुवाने वाले तीन गर्व है रिस और साता। ये हेव हैं, अतिचार हैं। इनका प्रतिक्रमण करना अनिवार्य है।
उस बलि को चारों तरफ फेंकने के बाद साधु को दे और साधु ले तो दोष है, अतिचार है। अमुक साधु आयेंगे तो उन्हें ही दूँगा, ऐसा सोचकर गृहस्थ ने आहार को अलग निकाल रखा हो और वही साधु ले तो स्थापना प्रभृतिका दोष लगता है। इससे बच्चों को और अन्य बाबा संन्यासियों को अन्तराय लगने की संभावना रहती है। जिस आहार में सचित्तादि की शंका हो तो उसकी उपेक्षा नहीं करे और न ही ऐसे आहार को ग्रहण करे। बहन को तकाजा करके कहना 'जल्दी बहरा' अपने हल्केपन को प्रकट करना है, यह भी दोष है। विकृत दही या वैसा ही अन्य पदार्थ जिसका रस चलित है, वह प्राण भोजन है। ऐसी भिक्षा नहीं लेनी चाहिए, ले तो अतिचार है । गृहस्थ के घर में जो वस्तु दिखाई दे उसकी ही याचना करनी चाहिए, अदृष्ट पदार्थ की याचना करने पर वह भक्तिवशात् अप्रासुक को प्रासुक बना कर देने की चेष्टा करेगा। इससे जीवों की विराधना होगी। गोचरी के विषय में एषणा के तीन भेद जानना साधु के लिए जरूरी हैं- एक. गवेषणैषणा दो. ग्रहणैषणा तीन. परिभोगैषणा। गवेषणैषणा - ग्रहण करने के पहले शुद्धि-अशुद्धि की खोज करना। इसके सोलह उद्गमादि दोष हैं, जो गृहस्थ की ओर से साधु को लगते हैं। आहार आदि ग्रहण करते समय शुद्धि-अशुद्धि का खयाल रखना ग्रहणैषणा है। इसके सोलह दोष हैं, वे साधु की ओर से साधु को लगते हैं। ये बत्तीस दोष टालने योग्य हैं। नहीं टाला तो अतिचार है। परिभोगैषणा के शंका आदि दस दोष साधु और श्रावक दोनों की ओर से मिले-जुले लगते हैं। इन बयालीस दोषों को छोड़कर भोजन ग्रहण करने से चारित्र रूपी चदरिया शुद्ध रह सकती है। इस गोचरचर्या का पाठ गोचरी लाने और करने के बाद अवश्य बोलना चाहिए। ऐसी बात कवि जी म.सा. वाले श्रमणसूत्र पुस्तक में पढ़ने को मिली। हमें गोचरी संबंधी सभी दोषों से बचने के लिए प्रतिक्रमण करना जरूरी है। तीन. स्वाध्याय - प्रतिलेखना सूत्र इसके बाद श्रमण के लिए तीसरे पाठ में प्रेरणा दी गई है कि तू चारों काल स्वाध्याय कर और दोनों संध्याकाल में वस्त्र, पात्र, कम्बल, रजोहरण आदि की प्रतिलेखना अच्छी तरह से कर । यदि इस विषय में अतिक्रम, व्यतिक्रम, अतिचार, अनाचार लगता हो तो उस पाप का प्रतिक्रमण करना चाहिए। अंग्रेजी में कहा है- "Time is money" समय बहुमूल्य धन है। समय की इज्जत ने ही मानव को महान् बनाया है। समय का तिरस्कार मानव जीवन के विकास का तिरस्कार है । जिस काम के लिए जो समय निश्चित किया गया है, वह काम उसी समय कर लेना चाहिए। शास्त्रों में कहा- "काले कालं समायरे ।" जैसे एक सेनापति युद्ध के मोर्चे पर सदा सजग रहता है और शत्रुओं से लोहा लेता है ऐसे ही कर्मशत्रुओं से लोहा लेने के लिए साधक को हमेशा सजग रहना चाहिए। उत्तराध्ययन सूत्र केउनतीसवें अध्ययन में गौतम स्वामी के प्रश्न पर भगवान् ने फरमाया- "कालपडिलेहणया णं भंते! जीवे किं जणयइ?, काल पडिलेहणया णं नाणावरणिज्जं कम्मं खवेइ ।" काल की प्रतिलेखना करने से क्या फल मिलता है ? भगवान ने फरमायाज्ञानावरणीय कर्म का क्षय होता है। प्रमाद के वशवर्ती बनकर यदि चारों काल स्वाध्याय न की हो या उसमें असावधानी रखी हो तथा दोनों काल प्रतिलेखन न किया हो तो उसके शुद्धीकरण के लिए प्रतिक्रमण किया जाता है। जैन धर्म में ही नहीं, किन्तु भारतीय संस्कृति में स्वाध्याय का गौरवशाली महत्त्व है। भारतीय विद्यार्थी जब गुरुकुल से पढ़ लिखकर निकलता था, तब गुरु कहते थे- 'स्वाध्यायान्माप्रमदः ।' स्वाध्याय में कभी प्रमाद मत करना । आज का विद्यार्थी भी बहुत पढ़ता है- कथा कहानियाँ, अश्लील गीत, उपन्यास आदि। जिनके पढ़ने से जीवन अपवित्र बनता है, विकार भड़कते हैं, ऐसा गन्दा साहित्य मत पढ़ो, पतन की ओर मत बढ़ो। पतन से बचने के लिए किसी महापुरुष के उच्चकोटि के आध्यात्मिक धर्मग्रन्थों को पढ़कर अपने आपको पापमुक्त बनावें । भगवान महावीर ने तो बारह प्रकार के तपों में स्वाध्याय को आभ्यन्तर तपों में स्थान दिया। अज्ञानी व्यक्ति जिन कर्मों को करोड़ वर्ष में भी नहीं खपा पाता उन कर्मों को ज्ञानी स्वाध्याय के बल पर, मन, वचन काया के संयम के बल पर एक श्वास भर में क्षय कर डालता है। अतः हम स्वाध्याय करें। उसमें प्रमाद न करें। अगर किया हो तो उस अतिचार का प्रतिक्रमण से शुद्धीकरण शीघ्र कर लेना चाहिए। चार. तैंतीस बोल का पाठ असंयम का प्रतिक्रमण- जैसे समुद्र में अनेक तरंगे उठती हैं वैसे ही मनुष्य के मन में कामनाओं की अनेक लहरें ज्वार भाटा की तरह आती रहती हैं। शास्त्रकारों ने कहा- "इच्छा हु आगाससमा अणंतिया।" इच्छाएँ आकाश की तरह अनन्त हैं। द्रौपदी के चीर की तरह उनका पार नहीं है। कामनाओं से आज तक किसी को सुख नहीं मिला। अगर सुखी बनना है तो कामनाओं से मुक्त होना होगा, इच्छाओं पर संयम करना पड़ेगा और असंयम से मुक्त होना होगा। वह असंयम एक प्रकार का है। संयम का पालन करते हुए भी प्रमादवश अगर असंयम हो गया तो उसका प्रतिक्रमण अवश्य करें। राग-द्वेष का प्रतिक्रमण- कर्म बन्धन के बीज राग द्वेष हैं। जीवन रूपी चदरिया को गन्दा बनाने का काम यही दोनों करते हैं। अतः साधना के क्षेत्र में प्रविष्ट श्रमण साधक से प्रमादवशात् भूल हो तो प्रतिक्रमण कर शुद्ध हो जाना चाहिए। दण्ड प्रतिक्रमण- दुष्प्रयुक्त मन, वचन, काया रूप तीन दंड हैं। शल्य एवं गर्व प्रतिक्रमण- जिनके कारण आत्मा नीरोग नहीं बन सकता ऐसे तीन शल्य हैं- मावाशल्य, निदानशल्य और मिथ्यादर्शनशल्य । आत्मा को संसार समुद्र में डुवाने वाले तीन गर्व है रिस और साता। ये हेव हैं, अतिचार हैं। इनका प्रतिक्रमण करना अनिवार्य है।
टोक्यो पैरालंपिक्स में टेबल टेनिस खिलाड़ी भविना पटेल ने सेमीफ़ाइनल में चीन की खिलाड़ी को हराकर फ़ाइनल में प्रवेश कर लिया है. इसके बाद वो रजत पदक की दावेदार हो गई हैं और फ़ाइनल में स्वर्ण पदक के लिए भिड़ेंगी. शुक्रवार को उन्होंने क्वार्टर फ़ाइल मुक़ाबले को जीतकर सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी. महिला टेबल टेनिस (क्लास 4) के सेमी फ़ाइनल मुक़ाबले में उन्होंने चांग मियाओ को 7-11, 11-7, 11-4, 9-11, 11-8 से हराया. अब रविवार को उनका फ़ाइनल में मुक़ाबला चीन की ही खिलाड़ी चाओ यिंग से होगा.
टोक्यो पैरालंपिक्स में टेबल टेनिस खिलाड़ी भविना पटेल ने सेमीफ़ाइनल में चीन की खिलाड़ी को हराकर फ़ाइनल में प्रवेश कर लिया है. इसके बाद वो रजत पदक की दावेदार हो गई हैं और फ़ाइनल में स्वर्ण पदक के लिए भिड़ेंगी. शुक्रवार को उन्होंने क्वार्टर फ़ाइल मुक़ाबले को जीतकर सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी. महिला टेबल टेनिस के सेमी फ़ाइनल मुक़ाबले में उन्होंने चांग मियाओ को सात-ग्यारह, ग्यारह-सात, ग्यारह-चार, नौ-ग्यारह, ग्यारह-आठ से हराया. अब रविवार को उनका फ़ाइनल में मुक़ाबला चीन की ही खिलाड़ी चाओ यिंग से होगा.
गाजीपुर में स्त्रियों की इजतें लूटी गई सम्मानित पुरुषों को पेशाब पीने के लिये दिया महात्मा गांधी और कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों को गिरफ्तारी के समाचार जब गाजीपुर मे पहुॅचे तो शहर में हड़ताल हो गई। बाद में जुलूस निकाला गया और सभा की गई। ६, १०, व ११ अगस्त को नगर मे तथा जिले के सभी प्रमुख नगरो मेात्मक प्रदर्शन होते रहे किन्तु जब देश के भिन्न-भिन्न भागो के आन्दोलन के समाचार गाजीपुर जिले में आये तो जनता एकदम क्रुद्ध हो गई। जिले भर मे यातायात के सभी साधनों को नष्ट भ्रष्ट कर देने के प्रयत्न किये गये । तार काट डाले गये और तार के खम्भे उखाड कर फेक दिये गये । जिले भर के प्रायः सभी डाकखाने जलाकर राख कर दिये । पुल भा जगह-जगह तोड़ डाले गये और रेल के सभी स्टेशन जलाकर राखकर दिये गये ।। शुरू मे तो रेला पर जनता का हो राज्य हो गया था यहाँ तक कि बिना जनता की आजा के ड्राइवर रेलगाडी तक नहीं ले जा सकता था । गाजीपुर को जनता ने रेलगाड़ी पर सवार होकर राजवाडा के हवाई अड्डे तथा जौनपुर के बहुत से स्टेशनो को नष्ट कर डाला था। बाद मे जनता ने कई एंजिनो को वेकार कर दिया तथा रेल की पटरियो को मीलो तक उखाड कर यात यात के साधन ही न2 कर दिये । जहाँ कही भी जनता को युद्ध सामग्री से भरी हुई रेलगाडी दखाई दी कि उसे नष्ट कर दिया गया । नन्दगज स्टेशन पर तो सैनिको के साथ जनता का गहरा संघर्प ही हो गया। सैनिको ने जनता पर मनमानी गोलियाँ चलाई जिसके फलस्वरूप कई ग्रादमियो की जाने गईं । जन ८० आदमी उस गोलीकाण्ड के शिकार हुए। सैकड़ ग्रादमी घायल भी हुए । जमानिया और सादात मुकामो पर भो गोलीकाण्ड हो गये। दोनो जगह एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई । इसके बाद जनता ने सरकारी इमारतों पर झएडा लहराने तथा पुलिस थानों पर अधिकार करने की बाद सोची । कई हजार व्यक्ति एक साथ प्रत्येक थाने पर हमला करते और प्रायः हर जनता के सामने पुलिस ग्राम समर्पण कर देती। कई थानों पर तो पुलिस ने अपने इथियार तक जनता को दे दिये। कई थानों की इमारतें जलाकर राख कर दी गई । १५ अगस्त को गाजीपुर थाने में विद्यार्थियों ने एक जुलूस निकाला । इस जुलूस का उद्देश्य कोतवाली पर झण्डा फहराना था। पुलिस ने जुलूस को रोक कर उस पर लाठीचार्ज कर दिया। जनता वहाँ से आगे बढ़ी तो सादात के थाने पर पुलिस ने गोलियां दागों। पर जब थाने की समस्त गोलियाँ ही खत्म हो गईं तो तमाम पुलिसवालो तथा थानेदार ने आत्मसमर्पण कर दिया। पर जनता बहुत ही क्रुद्ध हो चुकी थी इसलिये उसने थाने मे आग लगा दी । परिणाम यह हुआ कि थानेदार और एक सिपाही थाने में ही जल मरे । इसके बाद जनता का ध्यान कचहरियों पर गया। सैदपुर की कचहरी में घुसकर जनता ने उस इमारत पर तिरंगा झण्डा गाड दिया। तहसीलदार ) तथा सव डिवीजनल फीसर ने जनता के सामने आत्मसमर्पण कर दिया । महमूदाबाद मे भी जनता कचहरी पर झण्डा फहराना चाहती थी, पर यहाँ गोली काण्ड हो गया जिसमे ६ युवक मारे गये । गार्ज पुर जिले की कहानी अधूरी ही रह जायगी यदि उसमे शेरपुर के बलिदानो को छोड़ दिया जाय । आन्दोलन के दिनों में यहाँ बारिश हो रही थी। गंगा की बाढ़ के कारण पूरा ग्राम एक टापू बन गया था। इसीलिये यहाँ आन्दोलन की खबर बहुत ही देर से आई । १४ अगस्त को शेरपुर की जनता ने शहबाज कुली के हवाई अड्डे पर हमला किया। रेलवे स्टेशन पर अधिकार कर लिया । अड्डे पर पुलिस का जनता के साथ खघर्प हो गया । फल यह हुआ कि जनता के नेता श्री यमुनागिरि घायल होकर जमीन पर पड़े और गिरफ्तार कर लिये गये । जब यह खबर गाव मे पहुॅची तो लोग आग बबूला हो गये और उन्होंने हवाई अड्डे पर कब्जा करने का निश्चय ही कर लिया । अघीरात को बारिश में ही ५०० आदमी शेरपुर से
गाजीपुर में स्त्रियों की इजतें लूटी गई सम्मानित पुरुषों को पेशाब पीने के लिये दिया महात्मा गांधी और कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों को गिरफ्तारी के समाचार जब गाजीपुर मे पहुॅचे तो शहर में हड़ताल हो गई। बाद में जुलूस निकाला गया और सभा की गई। छः, दस, व ग्यारह अगस्त को नगर मे तथा जिले के सभी प्रमुख नगरो मेात्मक प्रदर्शन होते रहे किन्तु जब देश के भिन्न-भिन्न भागो के आन्दोलन के समाचार गाजीपुर जिले में आये तो जनता एकदम क्रुद्ध हो गई। जिले भर मे यातायात के सभी साधनों को नष्ट भ्रष्ट कर देने के प्रयत्न किये गये । तार काट डाले गये और तार के खम्भे उखाड कर फेक दिये गये । जिले भर के प्रायः सभी डाकखाने जलाकर राख कर दिये । पुल भा जगह-जगह तोड़ डाले गये और रेल के सभी स्टेशन जलाकर राखकर दिये गये ।। शुरू मे तो रेला पर जनता का हो राज्य हो गया था यहाँ तक कि बिना जनता की आजा के ड्राइवर रेलगाडी तक नहीं ले जा सकता था । गाजीपुर को जनता ने रेलगाड़ी पर सवार होकर राजवाडा के हवाई अड्डे तथा जौनपुर के बहुत से स्टेशनो को नष्ट कर डाला था। बाद मे जनता ने कई एंजिनो को वेकार कर दिया तथा रेल की पटरियो को मीलो तक उखाड कर यात यात के साधन ही नदो कर दिये । जहाँ कही भी जनता को युद्ध सामग्री से भरी हुई रेलगाडी दखाई दी कि उसे नष्ट कर दिया गया । नन्दगज स्टेशन पर तो सैनिको के साथ जनता का गहरा संघर्प ही हो गया। सैनिको ने जनता पर मनमानी गोलियाँ चलाई जिसके फलस्वरूप कई ग्रादमियो की जाने गईं । जन अस्सी आदमी उस गोलीकाण्ड के शिकार हुए। सैकड़ ग्रादमी घायल भी हुए । जमानिया और सादात मुकामो पर भो गोलीकाण्ड हो गये। दोनो जगह एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई । इसके बाद जनता ने सरकारी इमारतों पर झएडा लहराने तथा पुलिस थानों पर अधिकार करने की बाद सोची । कई हजार व्यक्ति एक साथ प्रत्येक थाने पर हमला करते और प्रायः हर जनता के सामने पुलिस ग्राम समर्पण कर देती। कई थानों पर तो पुलिस ने अपने इथियार तक जनता को दे दिये। कई थानों की इमारतें जलाकर राख कर दी गई । पंद्रह अगस्त को गाजीपुर थाने में विद्यार्थियों ने एक जुलूस निकाला । इस जुलूस का उद्देश्य कोतवाली पर झण्डा फहराना था। पुलिस ने जुलूस को रोक कर उस पर लाठीचार्ज कर दिया। जनता वहाँ से आगे बढ़ी तो सादात के थाने पर पुलिस ने गोलियां दागों। पर जब थाने की समस्त गोलियाँ ही खत्म हो गईं तो तमाम पुलिसवालो तथा थानेदार ने आत्मसमर्पण कर दिया। पर जनता बहुत ही क्रुद्ध हो चुकी थी इसलिये उसने थाने मे आग लगा दी । परिणाम यह हुआ कि थानेदार और एक सिपाही थाने में ही जल मरे । इसके बाद जनता का ध्यान कचहरियों पर गया। सैदपुर की कचहरी में घुसकर जनता ने उस इमारत पर तिरंगा झण्डा गाड दिया। तहसीलदार ) तथा सव डिवीजनल फीसर ने जनता के सामने आत्मसमर्पण कर दिया । महमूदाबाद मे भी जनता कचहरी पर झण्डा फहराना चाहती थी, पर यहाँ गोली काण्ड हो गया जिसमे छः युवक मारे गये । गार्ज पुर जिले की कहानी अधूरी ही रह जायगी यदि उसमे शेरपुर के बलिदानो को छोड़ दिया जाय । आन्दोलन के दिनों में यहाँ बारिश हो रही थी। गंगा की बाढ़ के कारण पूरा ग्राम एक टापू बन गया था। इसीलिये यहाँ आन्दोलन की खबर बहुत ही देर से आई । चौदह अगस्त को शेरपुर की जनता ने शहबाज कुली के हवाई अड्डे पर हमला किया। रेलवे स्टेशन पर अधिकार कर लिया । अड्डे पर पुलिस का जनता के साथ खघर्प हो गया । फल यह हुआ कि जनता के नेता श्री यमुनागिरि घायल होकर जमीन पर पड़े और गिरफ्तार कर लिये गये । जब यह खबर गाव मे पहुॅची तो लोग आग बबूला हो गये और उन्होंने हवाई अड्डे पर कब्जा करने का निश्चय ही कर लिया । अघीरात को बारिश में ही पाँच सौ आदमी शेरपुर से
प्रधान मंत्री मोदी ने बुधवार को एक आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित किया। साथ ही लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की नींव रखी। इसमें दाहोद में रेलवे उत्पादन इकाई में नौ हजार हार्स पावर के इलेक्ट्रिक इंजन के निर्माण की परियोजना भी शामिल है। पीएम मोदी ने कहा कि दाहोद अब मेक इन इंडिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां एक प्राचीन कहावत है कि हम जहां रहते हैं उसका हमारे जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। मेरे सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक कालखंड में उमरगांव से अम्बा जी तक आदिवासी भाइयों का क्षेत्र मेरा कार्यक्षेत्र था। आदिवासियों के बीच रहना, उनसे सीखना और समझना मैंने जाना है। मैं सर झुकाकर कह सकता हूं कि भारत का कोई भी आदिवासी क्षेत्र हो वहां आदिवासी भाई-बहनों का जीवन पानी जितना पवित्र होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज दाहोद और पंचमहाल के विकास से जुड़ी 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं में एक पेयजल से जुड़ी योजना भी शामिल है। दूसरी दाहोद को स्मार्ट सिटी बनाने से जुड़ी परियोजना है। पानी की इस परियोजना से दाहोद के सैंकड़ों गांवों की माताओं बहनों का जीवन बहुत आसान होने जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि दाहोद अब मेक इन इंडिया का भी बहुत बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। गुलामी के दौर में यहां स्टीम लोकोमोटिव के लिए एक वर्कशाप थी अब वह मेक इन इंडिया को गति देगी। दाहोद में 20 हजार करोड़ रुपये का कारखाना लगने जा रहा है। मेक इन इंडिया के साथ अब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जो नौ हजार हार्स पावर के शक्तिशाली इंजनों का निर्माण करते हैं।
प्रधान मंत्री मोदी ने बुधवार को एक आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित किया। साथ ही लगभग बाईस हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की नींव रखी। इसमें दाहोद में रेलवे उत्पादन इकाई में नौ हजार हार्स पावर के इलेक्ट्रिक इंजन के निर्माण की परियोजना भी शामिल है। पीएम मोदी ने कहा कि दाहोद अब मेक इन इंडिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां एक प्राचीन कहावत है कि हम जहां रहते हैं उसका हमारे जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। मेरे सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक कालखंड में उमरगांव से अम्बा जी तक आदिवासी भाइयों का क्षेत्र मेरा कार्यक्षेत्र था। आदिवासियों के बीच रहना, उनसे सीखना और समझना मैंने जाना है। मैं सर झुकाकर कह सकता हूं कि भारत का कोई भी आदिवासी क्षेत्र हो वहां आदिवासी भाई-बहनों का जीवन पानी जितना पवित्र होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज दाहोद और पंचमहाल के विकास से जुड़ी बाईस हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। इन परियोजनाओं में एक पेयजल से जुड़ी योजना भी शामिल है। दूसरी दाहोद को स्मार्ट सिटी बनाने से जुड़ी परियोजना है। पानी की इस परियोजना से दाहोद के सैंकड़ों गांवों की माताओं बहनों का जीवन बहुत आसान होने जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि दाहोद अब मेक इन इंडिया का भी बहुत बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। गुलामी के दौर में यहां स्टीम लोकोमोटिव के लिए एक वर्कशाप थी अब वह मेक इन इंडिया को गति देगी। दाहोद में बीस हजार करोड़ रुपये का कारखाना लगने जा रहा है। मेक इन इंडिया के साथ अब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जो नौ हजार हार्स पावर के शक्तिशाली इंजनों का निर्माण करते हैं।
एक बार फिर ओम प्रकाश राजभर के बयान से शियसात में सरगर्मियां बढ़ गई है। शिक्षा मित्र आज अपने संसद सदस्य के आवास पर जाकर अपना मांग पत्र देने पहुंचे और अपने अधिकार दिलाए जाने की बात कही। कृष्ण की नगरी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। 7 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। पढ़िए पूरी खबर.. बांदा चित्रकूट लोकसभा सीट जा सकती है अपना दल के खाते में ! देर रात हुए इस प्रशासनिक फेरबदल में आगरा, प्रयागराज, मथुरा, हमीरपुर, महोबा और मुरादाबाद में नए डीएम को तैनाती दी गई है. Social organization Asha Trust installed pictures of great freedom fighters in schools.
एक बार फिर ओम प्रकाश राजभर के बयान से शियसात में सरगर्मियां बढ़ गई है। शिक्षा मित्र आज अपने संसद सदस्य के आवास पर जाकर अपना मांग पत्र देने पहुंचे और अपने अधिकार दिलाए जाने की बात कही। कृष्ण की नगरी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। सात सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। पढ़िए पूरी खबर.. बांदा चित्रकूट लोकसभा सीट जा सकती है अपना दल के खाते में ! देर रात हुए इस प्रशासनिक फेरबदल में आगरा, प्रयागराज, मथुरा, हमीरपुर, महोबा और मुरादाबाद में नए डीएम को तैनाती दी गई है. Social organization Asha Trust installed pictures of great freedom fighters in schools.
टीवी सितारों की कमाई भले ही बॉलीवुड सितारों जितनी न हो, लेकिन इनका मेहनताना इतना होता है कि इनकी लाइफ में लग्जरी लाइफ जीने में कोई कमी नहीं आती है। कई टीवी स्टार्स के पास दुनिया के बड़े- बड़े ब्रांड्स की कार हैं। इनके भी बॉलीवुड सितारों की तरह बड़े बड़े शौक है. तो चलिए फिर बिना किसी देरी के जानते हैं कि किस टीवी कलाकार के पास कौन सी आलिशान कार है, तो चलिए जानते हैं पार्थ ने कौन सी कार ली है और अन्य बड़े टीवी सितारों के पास कौन सी गाड़ी है। 33 वर्षीय दीपिका कक्कड़ पॉपुलर टीवी शो 'ससुराल सिमर का' से फेमस हुई थी। इसके अलावा वे बिग बॉस 12 की विजेता भी रह चुकी है। दीपिका टीवी की दुनिया का फेमस फेस है। दीपिका कक्कड़ फिलहाल कहां हम कहां तुम सीरियल में नजर आ रही हैं। उन्होंने अपने टीवी करियर में बहुत पैसे कमाएं है। उनके पास एक ब्लू बीएमडब्ल्यू कार है। इसके अलावा अपने पति शोएब इब्राहीम के साथ मिलकर उन्होंने BMW X4 भी खरीदी थी। बता दें कि BMW ब्रांड की करें 60 लाख से शुरू होती है। कसौटी जिंदगी के 29 साल के एक्टर पार्थ समथान के पास मर्सेडीज बेंज है। वाइट कलर की इस लग्जरी कार की तस्वीर उन्होंने इंस्टाग्राम पर फैन्स के साथ शेयर की थी। इस ब्रांड की कारें 40 लाख से 2 करोड़ रुपए तक की आती है। टेलीविजन की मशहूर 25 वर्षीय एक्ट्रेस शिवांगी जोशी 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में नायरा का रोल निभाती हैं। हाल ही में शिवांगी ने खुद के जैगुआर की लेटेस्ट मॉडल कार खरीदी। इस कार की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये है। मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह के पास ब्लैक रंग की बीएमडब्ल्यू है। इसके अलावा उनके पास Mercedez Benz GL-350 भी है। इसमें कोई शक नहीं कि टीवी पर मौजूदा समय में फीमेल कमीडियन में से भारती सबसे ज्यादा कमाती हैं, ऐसे में खुद के लिए लग्जरी कार खरीदना तो बनता है। कॉमेडियन कपिल शर्मा के पास लग्जरी मर्सिडीज कार है जो कि उनकी महंगी चीजों में से एक है। इसकी कीमत 1. 19 करोड़ रुपए है। मर्सिडीज के अलावा कपिल के पास Volvo XC भी है। उनकी इस कार की कीमत 90 से 1. 3 करोड़ के करीब है। कुछ टाइम पहले ही कपिल ने अपनी न्यू वैनिटी वैन की फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की थीं। कहा जाता है कि कपिल की वैनिटी वैन इंडस्ट्री की सबसे महंगी वैनिटी वैन में से एक है ये शाहरुख खान की वैनिटी से भी ज्यादा कीमती है। कपिल शर्मा की वैनिटी वैन की कीमत 5. 5 करोड़ रुपए है। कॉमेडियन सुनील ग्रोवर टीवी पर डॉक्टर मशहूर गुलाटी के नाम से फेमस सुनील ग्रोवर अपनी कॉमेडी से हंसाने में हमेशा कामयाब रहे हैं। ये आपको जल्द सलमान खान की फिल्म 'भारत' में भी नजर आएंगे। इस एक्टर के पास व्हाइट कलर की बीएमडब्लू 5 सीरीज की कार है। इसकी शुरूआती कीमत 53 लाख से है। 37 वर्षीय अंतरा बिस्वास उर्फ़ मोनालिसा को हम 'नज़र' सीरियल में देख चुके हैं। इसके अलावा वे 'बिग बॉस 10' में भी दिखाई दी थी। मोनालिसा ने भोजपुरी फ़िल्में भी बहुत की है। उनके पास सफेद रंग की ऑडी कार है। इसकी एक तस्वीर भी वे सोशल मीडिया पर साझा कर चुकी है। ऑडी ब्रांड की कारें 50 लाख से लेकर 2 करोड़ तक की आती है। स्टार प्लस का पॉपुलर शो 'ये हैं महोब्बतें' की लीड एक्ट्रेस दिव्यांका भी मर्सेडीज कार की ओनर हैं। उन्होंने इस गाड़ी को 2018 में पति विवेक के साथ मिलकर खरीदा था। उनकी मर्सेडीज भी सफेद रंग की है। दिव्यांका ने 'बनूं मैं तेरी दुल्हन' से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा था हालांकि इसके बाद वो कई सीरीयल में नजर आ चुकी हैं। आपको बता दें, दिव्यांका 2003 में मिस भोपाल का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। वहीं विवेक 'ये है आशिकी' और 'एक वीर की अरदास वीरा' जैसे सीरीयल में काम कर चुके हैं। फिल्हाल विवेक 'कयामत की रात' में करिश्मा तन्ना के ओपोजिट बतौर लीड एक्टर का किरदार निभा रहे हैं। रोनित रॉय उन्हें आपने हर कैरेक्टर में देखा होगा। चाहे निगेटिव हो या एक केयरिंग फादर का किरदार, ये हर रोल में पसंद किए जाते हैं। उनकी काफी फैन फॉलोइंग है। इस एक्टर के पास ऑडी क्यू7 जिसकी कीत 85 लाख है और येलो ऑडी आर8 जिसकी कीमत 2 करोड़ रुपए है ऐसी कारें मौजूद हैं। चंदन प्रभाकर 'द कपिल शर्मा' शो में चंदू चाय वाले के नाम से फेमस चंदन प्रभाकर को भी महंगी गाड़ियों का शौक है। इनके पास बीएंडब्लू 3 सीरीज की कार है जिसकी कीमत 31 लाख रुपए के आस-पास है। शो में सिंपल रोल में नजर आने वाले चंदन का रियल लाइफस्टाइल काफी शानों-शौकत वाला है। कुशाल टंडन 'बेहद' और 'एक हजारों में मेरी बहना है' जैसे सीरियल में नजर आ चुके कुशाल टंडन छोटे पर्दे एक डैशिंग एक्टर में से एक हैं। उनके पास भी महंगी गाड़िया मौजूद हैं। उनकी इस लिस्ट में मर्सिडीज से लेकर ऑडी और बीएमडब्लू जैसी कारें शामिल हैं। राम कपूर 'घर एक मंदिर' से अपना टीवी सफर शुरू करने वाले राम कपूर ने काफी कम वक्त में घर-घर में अपनी पहचान बना ली। उन्होंने इसी सीरियल में रही अपनी कोस्टार गौतमी से शादी की है। इस एक्टर का भी कार कलेक्शन काफी शानदार है। उनके पास कई महंगी गाड़ियां हैं जिनमें बीएमडब्लू और पोर्श शामिल हैं। पोर्श की शुरूआती कीमत 80 लाख है।
टीवी सितारों की कमाई भले ही बॉलीवुड सितारों जितनी न हो, लेकिन इनका मेहनताना इतना होता है कि इनकी लाइफ में लग्जरी लाइफ जीने में कोई कमी नहीं आती है। कई टीवी स्टार्स के पास दुनिया के बड़े- बड़े ब्रांड्स की कार हैं। इनके भी बॉलीवुड सितारों की तरह बड़े बड़े शौक है. तो चलिए फिर बिना किसी देरी के जानते हैं कि किस टीवी कलाकार के पास कौन सी आलिशान कार है, तो चलिए जानते हैं पार्थ ने कौन सी कार ली है और अन्य बड़े टीवी सितारों के पास कौन सी गाड़ी है। तैंतीस वर्षीय दीपिका कक्कड़ पॉपुलर टीवी शो 'ससुराल सिमर का' से फेमस हुई थी। इसके अलावा वे बिग बॉस बारह की विजेता भी रह चुकी है। दीपिका टीवी की दुनिया का फेमस फेस है। दीपिका कक्कड़ फिलहाल कहां हम कहां तुम सीरियल में नजर आ रही हैं। उन्होंने अपने टीवी करियर में बहुत पैसे कमाएं है। उनके पास एक ब्लू बीएमडब्ल्यू कार है। इसके अलावा अपने पति शोएब इब्राहीम के साथ मिलकर उन्होंने BMW Xचार भी खरीदी थी। बता दें कि BMW ब्रांड की करें साठ लाख से शुरू होती है। कसौटी जिंदगी के उनतीस साल के एक्टर पार्थ समथान के पास मर्सेडीज बेंज है। वाइट कलर की इस लग्जरी कार की तस्वीर उन्होंने इंस्टाग्राम पर फैन्स के साथ शेयर की थी। इस ब्रांड की कारें चालीस लाख से दो करोड़ रुपए तक की आती है। टेलीविजन की मशहूर पच्चीस वर्षीय एक्ट्रेस शिवांगी जोशी 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में नायरा का रोल निभाती हैं। हाल ही में शिवांगी ने खुद के जैगुआर की लेटेस्ट मॉडल कार खरीदी। इस कार की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह के पास ब्लैक रंग की बीएमडब्ल्यू है। इसके अलावा उनके पास Mercedez Benz GL-तीन सौ पचास भी है। इसमें कोई शक नहीं कि टीवी पर मौजूदा समय में फीमेल कमीडियन में से भारती सबसे ज्यादा कमाती हैं, ऐसे में खुद के लिए लग्जरी कार खरीदना तो बनता है। कॉमेडियन कपिल शर्मा के पास लग्जरी मर्सिडीज कार है जो कि उनकी महंगी चीजों में से एक है। इसकी कीमत एक. उन्नीस करोड़ रुपए है। मर्सिडीज के अलावा कपिल के पास Volvo XC भी है। उनकी इस कार की कीमत नब्बे से एक. तीन करोड़ के करीब है। कुछ टाइम पहले ही कपिल ने अपनी न्यू वैनिटी वैन की फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की थीं। कहा जाता है कि कपिल की वैनिटी वैन इंडस्ट्री की सबसे महंगी वैनिटी वैन में से एक है ये शाहरुख खान की वैनिटी से भी ज्यादा कीमती है। कपिल शर्मा की वैनिटी वैन की कीमत पाँच. पाँच करोड़ रुपए है। कॉमेडियन सुनील ग्रोवर टीवी पर डॉक्टर मशहूर गुलाटी के नाम से फेमस सुनील ग्रोवर अपनी कॉमेडी से हंसाने में हमेशा कामयाब रहे हैं। ये आपको जल्द सलमान खान की फिल्म 'भारत' में भी नजर आएंगे। इस एक्टर के पास व्हाइट कलर की बीएमडब्लू पाँच सीरीज की कार है। इसकी शुरूआती कीमत तिरेपन लाख से है। सैंतीस वर्षीय अंतरा बिस्वास उर्फ़ मोनालिसा को हम 'नज़र' सीरियल में देख चुके हैं। इसके अलावा वे 'बिग बॉस दस' में भी दिखाई दी थी। मोनालिसा ने भोजपुरी फ़िल्में भी बहुत की है। उनके पास सफेद रंग की ऑडी कार है। इसकी एक तस्वीर भी वे सोशल मीडिया पर साझा कर चुकी है। ऑडी ब्रांड की कारें पचास लाख से लेकर दो करोड़ तक की आती है। स्टार प्लस का पॉपुलर शो 'ये हैं महोब्बतें' की लीड एक्ट्रेस दिव्यांका भी मर्सेडीज कार की ओनर हैं। उन्होंने इस गाड़ी को दो हज़ार अट्ठारह में पति विवेक के साथ मिलकर खरीदा था। उनकी मर्सेडीज भी सफेद रंग की है। दिव्यांका ने 'बनूं मैं तेरी दुल्हन' से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा था हालांकि इसके बाद वो कई सीरीयल में नजर आ चुकी हैं। आपको बता दें, दिव्यांका दो हज़ार तीन में मिस भोपाल का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। वहीं विवेक 'ये है आशिकी' और 'एक वीर की अरदास वीरा' जैसे सीरीयल में काम कर चुके हैं। फिल्हाल विवेक 'कयामत की रात' में करिश्मा तन्ना के ओपोजिट बतौर लीड एक्टर का किरदार निभा रहे हैं। रोनित रॉय उन्हें आपने हर कैरेक्टर में देखा होगा। चाहे निगेटिव हो या एक केयरिंग फादर का किरदार, ये हर रोल में पसंद किए जाते हैं। उनकी काफी फैन फॉलोइंग है। इस एक्टर के पास ऑडी क्यूसात जिसकी कीत पचासी लाख है और येलो ऑडी आरआठ जिसकी कीमत दो करोड़ रुपए है ऐसी कारें मौजूद हैं। चंदन प्रभाकर 'द कपिल शर्मा' शो में चंदू चाय वाले के नाम से फेमस चंदन प्रभाकर को भी महंगी गाड़ियों का शौक है। इनके पास बीएंडब्लू तीन सीरीज की कार है जिसकी कीमत इकतीस लाख रुपए के आस-पास है। शो में सिंपल रोल में नजर आने वाले चंदन का रियल लाइफस्टाइल काफी शानों-शौकत वाला है। कुशाल टंडन 'बेहद' और 'एक हजारों में मेरी बहना है' जैसे सीरियल में नजर आ चुके कुशाल टंडन छोटे पर्दे एक डैशिंग एक्टर में से एक हैं। उनके पास भी महंगी गाड़िया मौजूद हैं। उनकी इस लिस्ट में मर्सिडीज से लेकर ऑडी और बीएमडब्लू जैसी कारें शामिल हैं। राम कपूर 'घर एक मंदिर' से अपना टीवी सफर शुरू करने वाले राम कपूर ने काफी कम वक्त में घर-घर में अपनी पहचान बना ली। उन्होंने इसी सीरियल में रही अपनी कोस्टार गौतमी से शादी की है। इस एक्टर का भी कार कलेक्शन काफी शानदार है। उनके पास कई महंगी गाड़ियां हैं जिनमें बीएमडब्लू और पोर्श शामिल हैं। पोर्श की शुरूआती कीमत अस्सी लाख है।
एक बार फिर सलमान खान और शाहरुख खान के बीच अच्छी दोस्ती हो गई है। पिछले कुछ समय से ये दोनों अक्सर साथ नजर आते हैं। कभी पार्टी तो कभी टेलीविजन शोज और अब बात फिल्मों में एकसाथ काम करने की भी हो गई है। ये बात तो पहले ही साफ हो गई थी कि शाहरुख खान अपने दोस्त सलमान की फिल्म 'ट्यूबलाइट' का हिस्सा जरूर होंगे। अब उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है। आपको बता दें कि इस फिल्म में शाहरुख खान एक अहम रोल निभाने वाले हैं। सोशल मीडिया पर छाईं तस्वीरों में शाहरुख का लुक भी बेहतरीन लग रहा है। उनके चेहरे पर एक टैटू बना हुआ है। इन तस्वीरों को एक्टर नासिर खान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। वहीं उनके भाई काजिम काजी ने भी सलमान और शाहरुख के साथ तस्वीरें शेयर की हैं। अब शाहरुख के इस लुक और इन तस्वीरों को देखने के बाद उनके फैन्स इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल जल्द ही दोनों बिग बॉस शो में आने वाले हैं। इस शो में शाहरुख खान अपनी आने वाली फिल्म 'रईस' को प्रमोट करेंगे।
एक बार फिर सलमान खान और शाहरुख खान के बीच अच्छी दोस्ती हो गई है। पिछले कुछ समय से ये दोनों अक्सर साथ नजर आते हैं। कभी पार्टी तो कभी टेलीविजन शोज और अब बात फिल्मों में एकसाथ काम करने की भी हो गई है। ये बात तो पहले ही साफ हो गई थी कि शाहरुख खान अपने दोस्त सलमान की फिल्म 'ट्यूबलाइट' का हिस्सा जरूर होंगे। अब उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है। आपको बता दें कि इस फिल्म में शाहरुख खान एक अहम रोल निभाने वाले हैं। सोशल मीडिया पर छाईं तस्वीरों में शाहरुख का लुक भी बेहतरीन लग रहा है। उनके चेहरे पर एक टैटू बना हुआ है। इन तस्वीरों को एक्टर नासिर खान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। वहीं उनके भाई काजिम काजी ने भी सलमान और शाहरुख के साथ तस्वीरें शेयर की हैं। अब शाहरुख के इस लुक और इन तस्वीरों को देखने के बाद उनके फैन्स इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल जल्द ही दोनों बिग बॉस शो में आने वाले हैं। इस शो में शाहरुख खान अपनी आने वाली फिल्म 'रईस' को प्रमोट करेंगे।
ChatGPT और इस पर आधारित अन्य टूल्स की शुरुआत टेक्नोलॉजी जगत के लिए बड़े बदलाव की गवाह है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बुनियादी इनपुट को समझती है और उसका जवाब देती है। AI सोच भी सकती है और सूचनाओं के विभिन्न सेट भी जनरेट कर सकती है। यह समस्याओं के समाधान दे सकती है और यही क्षमता इसे शक्तिशाली बनाती हैं। इसके संभावित खतरे लोगों को चिंतित कर रहे हैं। आइये उन पर नजर डालते हैं। फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट ने हाल ही में सभी AI गतिविधियों को रोकने के लिए एक ओपन लेटर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब तक एक बेहतर फ्रेमवर्क नहीं तैयार हो जाता, तब तक AI का विकास रोक दिया जाना चाहिए। इस लेटर पर एलन मस्क, ऐपल के को-फाउंडर स्टीव वोज्नियाक, ट्यूरिंग पुरस्कार विजेता AI पायनियर योशुआ बेंगियो सहित कई लोगों ने साइन किए हैं। दूसरी तरफ बिल गेट्स ChatGPT जैसे चैटबॉट्स के समर्थन में है। कंटेंट जनरेट करने की क्षमता से लैस AI चैटबॉट बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में टेक्स्ट को मथने में सक्षम हैं। AI की यह क्षमता मनुष्यों की क्षमता से कई गुना आगे है और इसके चलते फेक न्यूज और गलत सूचनाओं से जूझ रही दुनिया के लिए खतरा और बढ़ सकता है। गलत कार्य करने वाले लोग इसके जरिए इंटरनेट पर गलत सूचनाओं की भरमार कर सकते हैं और इसमें सही जानकारी दब सकती है। AI मॉडल इनपुट के आधार पर तस्वीरें और वीडियो तैयार करने में भी सक्षम हैं। हालांकि, अभी ये टूल्स अपने शुरुआती अवस्था में हैं, लेकिन जल्द ही ये तैयार हो सकते हैं। इससे गलत सूचना के साथ ही नकली फोटो और वीडियो भी बनाया जा सकेगा। अभी बिना AI के ही कई घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर एजेंडा चलाया जाता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ता है। AI के जरिए तो और तेजी से ये काम हो सकता है। AI टूल्स के जरिए विश्वभर में नौकरियों में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका जताई जा रही है। ChatGPT को बनाने वाली कंपनी OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने खुद इसके जरिए नौकरी जाने का डर जाहिर किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ये राइटर, प्रूफ रीडर, ट्रांसलेटर, कस्टमर सर्विस आदि से जुड़े कई क्षेत्रों की नौकरियों की जगह ले सकता है। गोल्डमैन सेश की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर AI लगभग 70 प्रतिशत नौकरियों की जगह लेगा। अभी तक AI से जुड़ी जितनी चिंताओं पर बात की गई है, उनमें सबसे कम चिंता प्राइवेसी को लेकर है। अब इटली में ChatGPT पर बैन लगाए जाने के बाद इससे प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं। दरअसल, AI टूल्स के पास यूजर्स का डाटा होता है और यह इन भारी मात्रा में एकत्र डाटा को प्रोसेस कर यूजर्स की प्रोफाइल बना सकता है। इसके जरिए यूजर्स को खरीदारी करने कि लिए राजी करने की काफी संभावना है। ड्रोन और मिसाइल सहित कई सैन्य उपकरण और सिस्टम AI द्वारा संचालित हैं। हालांकि, सैन्य क्षेत्र में AI के उपयोग और उसकी क्षमता को बहुत सीमित करके इस्तेमाल किया जाता है। इसको दिए गए आदेशों को बायपास करने की अनुमति नहीं है, लेकिन यदि इसकी क्षमता को बढ़ा दिया जाए कि ये मानव इनपुट के बिना जीवन और मृत्यु की स्थितियों से जुड़े फैसले ले सके तो बड़ी समस्या पैदा कर सकता है और बड़े युद्ध हो सकते हैं। ब्रिटेन सरकार ने 2020 में साइबर सुरक्षा में AI की जरूरत पर एक रिपोर्ट जारी की। इसमें साइबर सुरक्षा में खतरों का पता लगाने और उन्हें कम करने के लिए मनुष्यों की क्षमता से अधिक स्पीड में काम करने की जरूरत महसूस की गई। AI मानव सुरक्षा को ऑनलाइन कंट्रोल करता है और तय करता है कि क्या खतरा है और क्या नहीं है, लेकिन यहां भी समस्या इसकी क्षमता तय करने को लेकर है।
ChatGPT और इस पर आधारित अन्य टूल्स की शुरुआत टेक्नोलॉजी जगत के लिए बड़े बदलाव की गवाह है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बुनियादी इनपुट को समझती है और उसका जवाब देती है। AI सोच भी सकती है और सूचनाओं के विभिन्न सेट भी जनरेट कर सकती है। यह समस्याओं के समाधान दे सकती है और यही क्षमता इसे शक्तिशाली बनाती हैं। इसके संभावित खतरे लोगों को चिंतित कर रहे हैं। आइये उन पर नजर डालते हैं। फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट ने हाल ही में सभी AI गतिविधियों को रोकने के लिए एक ओपन लेटर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब तक एक बेहतर फ्रेमवर्क नहीं तैयार हो जाता, तब तक AI का विकास रोक दिया जाना चाहिए। इस लेटर पर एलन मस्क, ऐपल के को-फाउंडर स्टीव वोज्नियाक, ट्यूरिंग पुरस्कार विजेता AI पायनियर योशुआ बेंगियो सहित कई लोगों ने साइन किए हैं। दूसरी तरफ बिल गेट्स ChatGPT जैसे चैटबॉट्स के समर्थन में है। कंटेंट जनरेट करने की क्षमता से लैस AI चैटबॉट बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में टेक्स्ट को मथने में सक्षम हैं। AI की यह क्षमता मनुष्यों की क्षमता से कई गुना आगे है और इसके चलते फेक न्यूज और गलत सूचनाओं से जूझ रही दुनिया के लिए खतरा और बढ़ सकता है। गलत कार्य करने वाले लोग इसके जरिए इंटरनेट पर गलत सूचनाओं की भरमार कर सकते हैं और इसमें सही जानकारी दब सकती है। AI मॉडल इनपुट के आधार पर तस्वीरें और वीडियो तैयार करने में भी सक्षम हैं। हालांकि, अभी ये टूल्स अपने शुरुआती अवस्था में हैं, लेकिन जल्द ही ये तैयार हो सकते हैं। इससे गलत सूचना के साथ ही नकली फोटो और वीडियो भी बनाया जा सकेगा। अभी बिना AI के ही कई घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर एजेंडा चलाया जाता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ता है। AI के जरिए तो और तेजी से ये काम हो सकता है। AI टूल्स के जरिए विश्वभर में नौकरियों में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका जताई जा रही है। ChatGPT को बनाने वाली कंपनी OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने खुद इसके जरिए नौकरी जाने का डर जाहिर किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ये राइटर, प्रूफ रीडर, ट्रांसलेटर, कस्टमर सर्विस आदि से जुड़े कई क्षेत्रों की नौकरियों की जगह ले सकता है। गोल्डमैन सेश की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर AI लगभग सत्तर प्रतिशत नौकरियों की जगह लेगा। अभी तक AI से जुड़ी जितनी चिंताओं पर बात की गई है, उनमें सबसे कम चिंता प्राइवेसी को लेकर है। अब इटली में ChatGPT पर बैन लगाए जाने के बाद इससे प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं। दरअसल, AI टूल्स के पास यूजर्स का डाटा होता है और यह इन भारी मात्रा में एकत्र डाटा को प्रोसेस कर यूजर्स की प्रोफाइल बना सकता है। इसके जरिए यूजर्स को खरीदारी करने कि लिए राजी करने की काफी संभावना है। ड्रोन और मिसाइल सहित कई सैन्य उपकरण और सिस्टम AI द्वारा संचालित हैं। हालांकि, सैन्य क्षेत्र में AI के उपयोग और उसकी क्षमता को बहुत सीमित करके इस्तेमाल किया जाता है। इसको दिए गए आदेशों को बायपास करने की अनुमति नहीं है, लेकिन यदि इसकी क्षमता को बढ़ा दिया जाए कि ये मानव इनपुट के बिना जीवन और मृत्यु की स्थितियों से जुड़े फैसले ले सके तो बड़ी समस्या पैदा कर सकता है और बड़े युद्ध हो सकते हैं। ब्रिटेन सरकार ने दो हज़ार बीस में साइबर सुरक्षा में AI की जरूरत पर एक रिपोर्ट जारी की। इसमें साइबर सुरक्षा में खतरों का पता लगाने और उन्हें कम करने के लिए मनुष्यों की क्षमता से अधिक स्पीड में काम करने की जरूरत महसूस की गई। AI मानव सुरक्षा को ऑनलाइन कंट्रोल करता है और तय करता है कि क्या खतरा है और क्या नहीं है, लेकिन यहां भी समस्या इसकी क्षमता तय करने को लेकर है।
वे अपनी पसंद का कोई भी स्मार्टफोन खरीद सकते हैं. उस फोन की कुल कीमत का 10 फीसदी और अधिकतम 1500 रुपए तक सरकार की ओर से किसान को दिया जाएगा. बाकी पैसा किसान को खुद देना होगा. बीते एक साल से दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस करने का ऐलान कर दिया है. बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसे वापस लेने के प्रस्तावों पर मुहर लग गई है और अब संसद के आगामी शीलकालीन सत्र में कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. केंद्र सरकार के इस फैसले को किसानों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. कई राज्य सरकारें भी अब किसानों के हित में फैसले ले रही हैं. इसी बीच गुजरात सरकार ने किसानों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए पैसे देने की घोषणा की है. स्मार्टफोन खरीदने के लिए हर किसान परिवार को राज्य सरकार 1500 रुपए देगी. गुजरात के किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार यह योजना सिर्फ गुजरात के किसानों के लिए है. जिन किसानों के पास गुजरात में अपनी जमीन है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. वे अपनी पसंद का कोई भी स्मार्टफोन खरीद सकते हैं. उस फोन की कुल कीमत का 10 फीसदी और अधिकतम 1500 रुपए तक सरकार की ओर से किसान को दिया जाएगा. बाकी पैसा किसान को खुद देना होगा. योजना के अनुसार प्रति परिवार केवल एक किसान को ही इस योजना का लाभ मिलेगा. प्रति संयुक्त जोत के मामले में भी, केवल एक लाभार्थी को ही योजना का लाभ मिलेगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए गुजरात के भूमिधारक किसान i-khedut पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसान को स्मार्टफोन खरीदना होगा और स्मार्टफोन के खरीद बिल की एक प्रति, मोबाइल का आईएमईआई नंबर, एक रद्द चेक और अन्य आवश्यक दस्तावेज विभाग को जमा करने होंगे. इसके बाद सरकार किसान के खाते में 1500 रुपए जमा भेजेगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में केवल स्मार्टफोन की कीमत शामिल है. इसमें पावर बैंक, ईयरफोन, चार्जर और अन्य कोई चीज शामिल नहीं है. सरकार का कहना है कि जब किसानों के पास स्मार्टफोन होंगे, तो वे कृषि, मौसम पूर्वानुमान और बीज-फसल में नई तकनीकों के उपयोग की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही साथ, वे राज्य और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में भी इसके जरिए आवेदन कर सकेंगे.
वे अपनी पसंद का कोई भी स्मार्टफोन खरीद सकते हैं. उस फोन की कुल कीमत का दस फीसदी और अधिकतम एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए तक सरकार की ओर से किसान को दिया जाएगा. बाकी पैसा किसान को खुद देना होगा. बीते एक साल से दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस करने का ऐलान कर दिया है. बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसे वापस लेने के प्रस्तावों पर मुहर लग गई है और अब संसद के आगामी शीलकालीन सत्र में कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. केंद्र सरकार के इस फैसले को किसानों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. कई राज्य सरकारें भी अब किसानों के हित में फैसले ले रही हैं. इसी बीच गुजरात सरकार ने किसानों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए पैसे देने की घोषणा की है. स्मार्टफोन खरीदने के लिए हर किसान परिवार को राज्य सरकार एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए देगी. गुजरात के किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार यह योजना सिर्फ गुजरात के किसानों के लिए है. जिन किसानों के पास गुजरात में अपनी जमीन है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. वे अपनी पसंद का कोई भी स्मार्टफोन खरीद सकते हैं. उस फोन की कुल कीमत का दस फीसदी और अधिकतम एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए तक सरकार की ओर से किसान को दिया जाएगा. बाकी पैसा किसान को खुद देना होगा. योजना के अनुसार प्रति परिवार केवल एक किसान को ही इस योजना का लाभ मिलेगा. प्रति संयुक्त जोत के मामले में भी, केवल एक लाभार्थी को ही योजना का लाभ मिलेगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए गुजरात के भूमिधारक किसान i-khedut पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसान को स्मार्टफोन खरीदना होगा और स्मार्टफोन के खरीद बिल की एक प्रति, मोबाइल का आईएमईआई नंबर, एक रद्द चेक और अन्य आवश्यक दस्तावेज विभाग को जमा करने होंगे. इसके बाद सरकार किसान के खाते में एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए जमा भेजेगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में केवल स्मार्टफोन की कीमत शामिल है. इसमें पावर बैंक, ईयरफोन, चार्जर और अन्य कोई चीज शामिल नहीं है. सरकार का कहना है कि जब किसानों के पास स्मार्टफोन होंगे, तो वे कृषि, मौसम पूर्वानुमान और बीज-फसल में नई तकनीकों के उपयोग की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही साथ, वे राज्य और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में भी इसके जरिए आवेदन कर सकेंगे.
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिमाचल प्रदेश के अपने दौरे पर आज बिलासपुर में एम्स की तथा ऊना में आईआईटी की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया है, प्रधानमंत्री आज हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जाएंगे। बिलासपुर में वह अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान एम्सा की आधारशिला रखेंगे। उसने लिखा है, 750 बिस्तर वाले इस अस्पताल का निर्माण करीब 1350 करोड़ रुपये की लागत से होगा। यहां स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा नर्सिंग, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मेडिकल शिक्षा भी मुहैया करायी जाएगी। उन्होंने लिखा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऊना में भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटा का शिलान्यास करेंगे। पीएमओ ने ट्वीट किया है, प्रधानमंत्री कांगड़ा के कंद्रोरी में स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया सेला की एक इस्पात प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन भी करेंगे। बाद में वह एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिमाचल प्रदेश के अपने दौरे पर आज बिलासपुर में एम्स की तथा ऊना में आईआईटी की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया है, प्रधानमंत्री आज हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जाएंगे। बिलासपुर में वह अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान एम्सा की आधारशिला रखेंगे। उसने लिखा है, सात सौ पचास बिस्तर वाले इस अस्पताल का निर्माण करीब एक हज़ार तीन सौ पचास करोड़ रुपये की लागत से होगा। यहां स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा नर्सिंग, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मेडिकल शिक्षा भी मुहैया करायी जाएगी। उन्होंने लिखा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऊना में भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटा का शिलान्यास करेंगे। पीएमओ ने ट्वीट किया है, प्रधानमंत्री कांगड़ा के कंद्रोरी में स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया सेला की एक इस्पात प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन भी करेंगे। बाद में वह एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई कर रही है. इस फिल्म की आठ दिनों की कुल कमाई 145 करोड़ बताई जा रही है. ये फिल्म 150 करोड़ से महज कुछ कदम ही दूर है. इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि 'कबीर सिंह' अगले एक या दो हफ्तों में 200 करोड़ के पार पहुंच जाएगी. इतनी शानदार कमाई के बावजूद शाहिद कपूर की इस फिल्म को काफी अलोचनाएं भी मिल रही हैं. इस फिल्म में शाहिद के बिगडैल किरदार को स्क्रीन पर दिखाने का अंदाज कई लोगों को पसंद नहीं आया है. वहीं अब 'कबीर सिंह' शाहिद की मां नीलिमा अजीम ने भी देख ली है. 'कबीर सिंह' में शाहिद कपूर का किरदार एक जीनियस सर्जन का है जो कि बेहद गुस्सैल होता है. कबीर सिंह नशे और गलत आदतों का आदी है. वो महिलाओं के साथ भी गलत एटीट्यूड के साथ पेश आता है. किरदार के इसी बर्ताव के चलते शाहिद पर निशाना साधा जा रहा है. वहीं शाहिद कपूर ने ऐसी आलोचना पर कोई खास रिएक्शन नहीं दिया है. वहीं अब शाहिद के बचाव में उनकी मां नीलिमा अजीम सामने आ गई हैं. नीलिमा अजीम ने 'कबीर सिंह' देख ली है और उनका कहना है कि 'फिल्म कलाकारों को विवादित पर्सनैलिटी वाले किरदारों को निभाने की आजादी होनी चाहिए'. नीलिमा अजीम ने एक इंटरव्यू में कहा 'मुझे लगता है कि नैतिकता के मामले में विवादित किरदारों को निभाने की आजादी मिलनी चाहिए. अगर कोई साइको किलर का कैरेक्टर प्ले करेगा तो क्या उसे लेकर विवाद नहीं होगा? दिलीप कुमार और राजेश खन्ना ने अमर और रेड रोज में ग्रे शेड्स प्ले किया था. . . क्या ऐसे ग्रे शेड्स खत्म कर देने चाहिए? ' नीलिमा ने कहा 'हॉलीवुड में ऐसे कैरेक्टर्स के लिए ऑस्कर मिलता है. अगर हम इस तरह की फिल्में नहीं बना सके तो मार्लन ब्रैंडो की फिल्म स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर, गॉडफादर और हीथ लेजर की फिल्म द डार्क नाइट को अमान्य कर देना चाहिए. दर्शकों को ये समझना होगा कि ये केवल एक कहानी है और नैतिकता पर कोई लैक्चर नहीं है. ' संदीप रेड्डी वांगा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में शाहिद कपूर के अभिनय को जमकर तारीफें मिल रही हैं. इस फिल्म में उन्होंने अपने किरदार को बारीकी के साथ निभाया है. शायद शाहिद कपूर की एक्टिंग का ही कमाल है कि 'कबीर सिंह' उनके करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म साबित हुई है. इस फिल्म ने 20. 21 करोड़ के शानदार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से ओपनिंग की थी. .
शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई कर रही है. इस फिल्म की आठ दिनों की कुल कमाई एक सौ पैंतालीस करोड़ बताई जा रही है. ये फिल्म एक सौ पचास करोड़ से महज कुछ कदम ही दूर है. इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि 'कबीर सिंह' अगले एक या दो हफ्तों में दो सौ करोड़ के पार पहुंच जाएगी. इतनी शानदार कमाई के बावजूद शाहिद कपूर की इस फिल्म को काफी अलोचनाएं भी मिल रही हैं. इस फिल्म में शाहिद के बिगडैल किरदार को स्क्रीन पर दिखाने का अंदाज कई लोगों को पसंद नहीं आया है. वहीं अब 'कबीर सिंह' शाहिद की मां नीलिमा अजीम ने भी देख ली है. 'कबीर सिंह' में शाहिद कपूर का किरदार एक जीनियस सर्जन का है जो कि बेहद गुस्सैल होता है. कबीर सिंह नशे और गलत आदतों का आदी है. वो महिलाओं के साथ भी गलत एटीट्यूड के साथ पेश आता है. किरदार के इसी बर्ताव के चलते शाहिद पर निशाना साधा जा रहा है. वहीं शाहिद कपूर ने ऐसी आलोचना पर कोई खास रिएक्शन नहीं दिया है. वहीं अब शाहिद के बचाव में उनकी मां नीलिमा अजीम सामने आ गई हैं. नीलिमा अजीम ने 'कबीर सिंह' देख ली है और उनका कहना है कि 'फिल्म कलाकारों को विवादित पर्सनैलिटी वाले किरदारों को निभाने की आजादी होनी चाहिए'. नीलिमा अजीम ने एक इंटरव्यू में कहा 'मुझे लगता है कि नैतिकता के मामले में विवादित किरदारों को निभाने की आजादी मिलनी चाहिए. अगर कोई साइको किलर का कैरेक्टर प्ले करेगा तो क्या उसे लेकर विवाद नहीं होगा? दिलीप कुमार और राजेश खन्ना ने अमर और रेड रोज में ग्रे शेड्स प्ले किया था. . . क्या ऐसे ग्रे शेड्स खत्म कर देने चाहिए? ' नीलिमा ने कहा 'हॉलीवुड में ऐसे कैरेक्टर्स के लिए ऑस्कर मिलता है. अगर हम इस तरह की फिल्में नहीं बना सके तो मार्लन ब्रैंडो की फिल्म स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर, गॉडफादर और हीथ लेजर की फिल्म द डार्क नाइट को अमान्य कर देना चाहिए. दर्शकों को ये समझना होगा कि ये केवल एक कहानी है और नैतिकता पर कोई लैक्चर नहीं है. ' संदीप रेड्डी वांगा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में शाहिद कपूर के अभिनय को जमकर तारीफें मिल रही हैं. इस फिल्म में उन्होंने अपने किरदार को बारीकी के साथ निभाया है. शायद शाहिद कपूर की एक्टिंग का ही कमाल है कि 'कबीर सिंह' उनके करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म साबित हुई है. इस फिल्म ने बीस. इक्कीस करोड़ के शानदार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से ओपनिंग की थी. .
डिंडौरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला मुख्यालय में रिश्तों को तार तार कर देने वाला मामला बुधवार को सामने आया है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मृत युवती कि अंतिम संस्कार के समय भी जब रिश्तेदारों ने साथ नही दिया जो शहर के कुछ समाजसेवियों व जागरुक लोगों की मदद से दस वर्षीय बालिका ने अपनी बड़ी बहन मृतिका पूजा का अंतिम संस्कार किया। शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार ने अंतरजातीय विवाह व प्रापर्टी के चलते अपने भाई, बहू व उसके बधाों से काफी पहले ही नाता तोड़ लिया था। जब पूजा जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी और अब उसकी मौत हो चुकी है तब भी उस प्रतिष्ठित परिवार के किसी भी सदस्यों का दिल नहीं पसीजा और मदद करना तो दूर कोई उसे देखने तक नहीं पहुंचा। गौरतलब है कि प्रदीप व अलका ने अंतरजातीय विवाह किया था। जिनकी चार संतानें थी। प्रदीप की मृत्यु लगभग दस वर्ष पहले हो चुकी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की एक एक कर तीन संतान की भी मौत हो गई। अलका मेहनत मजदूरी कर किसी तरह अपना व अपनी बेटियों का भरण पोषण कर रही थी। लगभग एक वर्ष पहले अलका ने अपनी बेटी पूजा की शादी की थी, लेकिन उसके पति ने भी पूजा को छोड़ दिया। उसी समय से पूजा अपनी मां अलका व बहन प्रीती के साथ रह रही थी। पिछले कुछ दिनों से पूजा बीमार थी जिसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। गत शाम इलाज के दौरान पूजा की मौत हो गई। अलका ने अपने ससुराल वालों से मदद मांगी, लेकिन परिवार के लोग उसे देखने तक नहीं पहुंचे। अलका ने बताया की उनके मृत पति के 11 भाई हैं और उनके पास करोड़ों रूपये की जायदाद है, जिसमें उनके पति प्रदीप का भी हिस्सा है। अंतरजातीय विवाह का हवाला देकर उसे जायदार से भी बेदखल कर दिया गया है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए वाहनों का अधिग्रहण किया गया है। बुधवार की शाम तक लगभग चार दर्जन से अधिक वाहनों को अधिग्रहित कर कलेक्ट्रेट खेल मैदान में खड़ा करा लिया गया है। गौरतलब है कि पहले चरण में 25 जून को जनपद शहपुरा और मेहंदवानी में पंच, सरपंच, जनपद व जिला पंचायत सदस्य के लिए मतदान होना है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिवहन शाखा से मिली जानकारी के अनुसार जनपद शहपुरा के लिए 46 बस व तीन तूफान वाहन और जनपद मेहंदवानी के लिए 29 बस व एक तूफान वाहन की जरूरत है। दोनों जनपद के लिए चार-चार बस और चार-चार तूफान वाहन रिर्जव रखे जाएंगे। इसके अलावा बोलेरो वाहनों का भी अधिग्रहण किया जा रहा है। जिला मुख्यालय में बुधवार को राज्य परिवहन बस स्टैंड में यातायात व राजस्व अमला वाहनों को अधिग्रहित करने में जुटा नजर आया।
डिंडौरी । जिला मुख्यालय में रिश्तों को तार तार कर देने वाला मामला बुधवार को सामने आया है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मृत युवती कि अंतिम संस्कार के समय भी जब रिश्तेदारों ने साथ नही दिया जो शहर के कुछ समाजसेवियों व जागरुक लोगों की मदद से दस वर्षीय बालिका ने अपनी बड़ी बहन मृतिका पूजा का अंतिम संस्कार किया। शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार ने अंतरजातीय विवाह व प्रापर्टी के चलते अपने भाई, बहू व उसके बधाों से काफी पहले ही नाता तोड़ लिया था। जब पूजा जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी और अब उसकी मौत हो चुकी है तब भी उस प्रतिष्ठित परिवार के किसी भी सदस्यों का दिल नहीं पसीजा और मदद करना तो दूर कोई उसे देखने तक नहीं पहुंचा। गौरतलब है कि प्रदीप व अलका ने अंतरजातीय विवाह किया था। जिनकी चार संतानें थी। प्रदीप की मृत्यु लगभग दस वर्ष पहले हो चुकी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की एक एक कर तीन संतान की भी मौत हो गई। अलका मेहनत मजदूरी कर किसी तरह अपना व अपनी बेटियों का भरण पोषण कर रही थी। लगभग एक वर्ष पहले अलका ने अपनी बेटी पूजा की शादी की थी, लेकिन उसके पति ने भी पूजा को छोड़ दिया। उसी समय से पूजा अपनी मां अलका व बहन प्रीती के साथ रह रही थी। पिछले कुछ दिनों से पूजा बीमार थी जिसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। गत शाम इलाज के दौरान पूजा की मौत हो गई। अलका ने अपने ससुराल वालों से मदद मांगी, लेकिन परिवार के लोग उसे देखने तक नहीं पहुंचे। अलका ने बताया की उनके मृत पति के ग्यारह भाई हैं और उनके पास करोड़ों रूपये की जायदाद है, जिसमें उनके पति प्रदीप का भी हिस्सा है। अंतरजातीय विवाह का हवाला देकर उसे जायदार से भी बेदखल कर दिया गया है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए वाहनों का अधिग्रहण किया गया है। बुधवार की शाम तक लगभग चार दर्जन से अधिक वाहनों को अधिग्रहित कर कलेक्ट्रेट खेल मैदान में खड़ा करा लिया गया है। गौरतलब है कि पहले चरण में पच्चीस जून को जनपद शहपुरा और मेहंदवानी में पंच, सरपंच, जनपद व जिला पंचायत सदस्य के लिए मतदान होना है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिवहन शाखा से मिली जानकारी के अनुसार जनपद शहपुरा के लिए छियालीस बस व तीन तूफान वाहन और जनपद मेहंदवानी के लिए उनतीस बस व एक तूफान वाहन की जरूरत है। दोनों जनपद के लिए चार-चार बस और चार-चार तूफान वाहन रिर्जव रखे जाएंगे। इसके अलावा बोलेरो वाहनों का भी अधिग्रहण किया जा रहा है। जिला मुख्यालय में बुधवार को राज्य परिवहन बस स्टैंड में यातायात व राजस्व अमला वाहनों को अधिग्रहित करने में जुटा नजर आया।
वर्ल्ड कप 2019 में भारत के 9 मैचों का विश्लेषणः विराट कोहली चैंपियन बनेंगे? क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 (ICC World Cup 2019) में हर टीम जीतना चाहेगी, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. खैर, ट्रॉफी किसे मिलेगी, ये 14 जुलाई को पता चल ही जाएगा. क्रिकेट के चाहने वालों को 4 सालों से जिस पल का इंतजार था, अब वह आ चुका है. वर्ल्ड कप चैंपियनशिप (ICC World Cup 2019) की शुरुआत हो गई है, जो 14 जुलाई तक चलेगा. टीमों के बीच में वार्म अप मैच भी खेले जा रहे हैं. वर्ल्ड कप में 10 टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी. 11 स्टेडियम में 46 दिनों में 48 मैच खेले जाएंगे. टॉप-4 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी और जो बेस्ट होगा, वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी उसकी. हर टीम इस ट्रॉफी को घर ले जाना चाहेगी, लेकिन ये किसके हाथ आएगी, अभी तो इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है. विराट कोहली से लोगों को उम्मीदें भी काफी विराट हैं. ऐसे में कोहली पर थोड़ा दबाव तो होगा, लेकिन उनका साथ देने के लिए टीम में धोनी भी हैं. ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. इसकी वजह ये है कि वर्ल्ड कप में एक दूसरे से टकरा रही टीमें एक से बढ़कर एक हैं. भले ही भारत दुनिया की नंबर-1 टीम है, लेकिन मैच में कब नंबरों का खेल बदल जाए, कहा नहीं जा सकता. खैर, वर्ल्ड कप की ट्रॉफी किसे मिलेगी, ये तो 14 जुलाई को पता चलेगा, लेकिन उससे पहले आइए एक नजर डालते हैं कुछ आंकड़ों पर और जानने की कोशिश करते हैं कि इस बार के वर्ल्ड कप में कौन जीत सकता है. ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. वर्ल्ड कप का पहला मैच दुनिया की नंबर-2 और नंबर-3 टीम के बीच हो रहा है. यानी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हो रहा है. ये मैच Southampton के Hampshire Bowl में होगा. आज तक वर्ल्ड कप 4 बार भारत और दक्षिण अफ्रीका का सामना हुआ है, जिसमें से 3 बार भारत हार गया है. यानी वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेलने के मामले में भारत का स्ट्राइक रेट 25 फीसदी है. वहीं दूसरी ओर 2015 के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक इन दोनों टीमों के बीच 12 मैच हुए हैं, जिनमें से 8 भारत जीता और 4 दक्षिण अफ्रीका. इस तरह यहां भारत का स्ट्राइक रेट 67 फीसदी है. भारत के लिए दक्षिण अफ्रीका से टक्कर लेना काफी मुश्किल होता है, लेकिन पिछले ही साल हमने उसे 5-1 से हराया है. विराट कोहली की बल्लेबाजी के साथ-साथ कुलदीप और चहल की गेंदबाजी ने उन्हें घुटनों पर ला दिया था. ऐसे में भारत भले ही थोड़े दबाव में खेले, लेकिन आत्मविश्वास की कमी नहीं रहेगी. लंदन के The Oval में 9 जून को भारत का मुकाबला देश की पांचवें नंबर की टीम ऑस्ट्रेलिया से होगा. भले ही भारत दूसरे नंबर की टीम हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत का प्रदर्शन हमेशा फीका ही रहा है. अब तक वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया से भारत का सामना 11 बार हुआ है, जिसमें से सिर्फ 3 बार ही भारत जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट यहां सिर्फ 27 फीसदी है. अगर 2015 वर्ल्ड कप के बाद से अब तक खेले गए अन्य मैचों की बात करें तो दोनों टीमें कुल 18 बार आमने-सामने आई हैं, जिनमें से 9 मैच भारत जीता और 9 मैच ऑस्ट्रेलिया. यानी यहां स्ट्राइक रेट 50 फीसदी है. ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत जब भी मैदान में उतरता है तो दोनों ही टीमों के बीच तगड़ी टक्कर होती है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर नहीं खेलते, बल्कि खिलाड़ियों के साथ एक माइंड गेम भी खेलते हैं. उनकी पूरी कोशिश रहती है कि किस तरह खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ा जाए. हालांकि, पिछले कुछ मैचों में तो भारत ने भी ऑस्ट्रेलिया का जवाब देने में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि वर्ल्ड कप में दोनों टीमों का मैदान पर प्रदर्शन कैसा रहता है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच 13 जून को Nottingham के Trent Bridge में होगा. जब कभी बात न्यूजीलैंड की आती है तो भले ही पहले भारत दबाव में खेलता रहा हो, लेकिन अब न्यूजीलैंड के मुकाबले भारत काफी मजबूत टीम बन चुकी है. अब तक भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल 7 वर्ल्डकप मैच हुए हैं, जिनमें से 3 मैच भारत जीता है और 4 न्यूजीलैंड जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट 43 फीसदी है. 2015 वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल 13 मैच हुए हैं, जिनमें से 9 मैच भारत जीता है. यानी यहां भारत का स्ट्राइक रेट 69 फीसदी है. जनवरी में ही हुई वन डे सीरीज में भारत ने न्यूजीलैंड को उसी की जमीन पर 4-1 से हराया था. उसके बाद तो भारत का आत्मविश्वास काफी अधिक बढ़ा हुआ है. हालांकि, मौजूदा समय में वर्ल्ड कप से पहले हो रहे वार्म अप मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को बुरी तरह से हराया है, जो खिलाड़ियों का मनोबल कमजोर भी कर सकता है. भारतीयों के लिए वर्ल्ड कप का सबसे अहम मैच होगा 16 जून को Manchester के Old Trafford में होने वाला मैच. ये मैच अहम इसलिए है, क्योंकि इसमें भारत और पाकिस्तान आमने सामने होंगे. अभी तक भारत और पाकिस्तान का मुकाबला वर्ल्ड कप में 6 बार हुआ है और हर बार भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी है. वहीं दूसरी ओर, 2015 के वर्ल्ड कप के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कुल 4 मैच हुए हैं, जिनमें से भी 3 भारत ही जीता है. इसी के साथ भारत का स्ट्राइक रेट 75 फीसदी बना हुआ है. हाल ही में चुनाव खत्म हुए हैं, जिसमें पाकिस्तान एक अहम मुद्दा रहा. चुनाव से पहले तो यहां तक चर्चा होने लगी थी कि भारत वर्ल्ड कप का ही बहिष्कार कर दे, ताकि पाकिस्तान के साथ मैन ना खेलना पड़े. ये भी बातें हो रही थीं कि पाकिस्तान पर वर्ल्ड कप में खेलने पर बैन लगा दिया जाए. भारत-पाकिस्तान का मैच सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जंग है. भारत वर्ल्डकप हार जाए तो लोगों को इतना दुख नहीं होगा, जितना इस बात पर होगा कि भारत पाकिस्तान से हार गया. यहां तक कि खिलाड़ियों के घरों के सामने प्रदर्शन तक शुरू हो जाते हैं. भारत और अफगानिस्तान के बीच 22 जून को Southampton के Hampshire Bowl में मैच होना है. भारत और अफगानिस्तान के बीच 2015 के वर्ल्ड कप के बाद सिर्फ एक मैच हुआ है, वो भी टाई हो गया है. वहीं दूसरी ओर किसी भी वर्ल्ड कप मैच में इन दोनों टीमों का आमना-सामना नहीं हुआ है. अफगानिस्तान से भले ही भारत का आमना-सामना कम हुआ है, लेकिन ये ऐसी टीम है कभी भी बाजी पलट देती है. वैसे भी, अफगानिस्तान से आमना-सामना ना होने की वजह से वहां के खिलाड़ियों के तरीकों को भारत सही से नहीं समझता. ऐसे में अफगानिस्तान से होने वाला मैच जीतना भी भारत के लिए एक चुनौती है. यहां आपको बता दें कि वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान की टीम को अमूल ने स्पॉन्सर किया है. यानी भले ही इन दोनों के मैच में भारत के हारने से पूरा देश दुखी हो, लेकिन अमूल को खुशी होगी. वेस्ट इंडीज से भारत का मुकाबला 27 जून को Manchester के Old Trafford में होने वाला है. अभी तक इन दोनों टीमों ने 8 वर्ल्ड कप मैच में एक दूसरे से मुकाबला किया है. इनमें से 5 में भारत ने जीत हासिल की है, जबकि 3 में वेस्ट इंडीज जीता है. इस तरह भारत का स्ट्राइक रेट 62 फीसदी है. वहीं दूसरी ओर 2015 के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल 10 मैच हुए हैं. इनमें से 6 भारत जीता है, 2 टाई हो गए और बाकी के दो वेस्ट इंडीज जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट यहां भी 60 फीसदी है. अगर देखा जाए तो वेस्ट इंडीज के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी है, लेकिन ये भी कहना गलत नहीं होगा कि वेस्ट इंडीज भारत को कड़ी टक्कर देता है. वैसे भी, वेस्ट इंडीज की टीम अगर चल जाती है तो मैच को एक अलग ही लेवल पर ले जाती है. भारत जब वेस्ट इंडीज के साथ मैच खेलेगा तो वह अपने स्ट्राइक रेट को देखकर भले ही आत्मविश्वास से लबरेज रहे, लेकिन भारत ये भी अच्छे से समझता है कि वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी कितना नुकसान कर सकते हैं. ये मुकाबला भारत के सबसे अधिक टेंशन देने वाला है. 30 जून को भारत और इंग्लैंड के बीच Birmingham के Edgbaston में मैच होगा. भारत के लिए ये मुकाबला कड़ा इसलिए रहेगा, क्योंकि उसका सामना दुनिया की नंबर-1 क्रिकेट टीम से होगा. अभी तक भारत और इंग्लैंड का वर्ल्ड कप में कुल 7 बार मुकाबला हुआ है. 3 भारत जीता है और 3 इंग्लैंड. एक मैच टाई हो गया है. यानी दोनों ही देशों का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी है. वहीं 2015 वर्ल्डकप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच 6 मैच हुए हैं, जिनमें से भी 3 भारत जीता है और 3 इंग्लैंड. यानी यहां भी स्ट्राइक रेट 50 फीसदी. भारत के लिए इंग्लैंड ही इस वर्ल्ड कप में सबसे भारी टीम होगी. दोनों के ही जीतने की संभावनाएं आधी-आधी हैं. देश की नंबर-1 टीम के साथ खेलना भारत की टीम के लिए दबाव भरा जरूर होगा, लेकिन विराट कोहली का जोश और महेंद्र सिंह धोनी की सूझबूझ वाली रणनीति टीम में दम भरने के लिए काफी है. भारत और बांग्लादेश के बीच 2 जुलाई को Birmingham के Edgbaston में वर्ल्डकप का मैच होगा. अब तक दोनों देश 3 बार वर्ल्ड कप में मिले हैं, जिनमें से 2 मैच भारत जीता है, जबकि 1 मैच बांग्लादेश जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट 67 फीसदी. वहीं दूसरी ओर, 2015 के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल 6 मैच हुए हैं, जिनमें से 4 मैच भारत जीता है और 2 बांग्लादेश. यानी यहां भी भारत का स्ट्राइक रेट 67 फीसदी है. जब भारत और बांग्लादेश की टीमें आमने-सामने होंगी, तो बेशक भारतीय खिलाड़ियों में एक आत्मविश्वास रहेगा. और ऐसा हो भी क्यों नहीं? 67 फीसदी का स्ट्राइक रेट होना आत्मविश्वास बढ़ाने वाला ही होता है. श्रीलंका के साथ जब-जब भारत वर्ल्ड कप में भिड़ा है, तो उसके परिणाम अधिकतर समय श्रीलंका के हक में ही रहे हैं. 6 जुलाई को दोनों देशों के बीच Leeds के Headingley में मैच होगा. इससे पहले अब तक भारत और श्रीलंका 8 वर्ल्ड कप मैच साथ खेल चुके हैं, जिनमें से सिर्फ 3 ही भारत जीता है, बाकी के 5 मैच श्रीलंका जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट सिर्फ 43 फीसदी है. वहीं दूसरी ओर, 2015 के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल 9 मैच हुए हैं, जिनमें से 6 भारत जीता और 3 श्रीलंका. यानी यहां भारत का स्ट्राइक रेट अधिक है, जो 78 फीसदी है. दोनों टीमों का अब तक का प्रदर्शन देखकर ये तो साफ है कि श्रीलंका वर्ल्ड कप में भारत के मुकाबले अच्छा खेलती है, लेकिन बाकी मैचों में भारत ताकतवर रहता है. अब क्योंकि ये वर्ल्ड कप का मुकाबला है तो बेशक भारत थोड़ा दबाव में तो रहेगा. IPL Final 2019: धोनी के रन आउट से अंबानी-मोदी का कनेक्शन!
वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस में भारत के नौ मैचों का विश्लेषणः विराट कोहली चैंपियन बनेंगे? क्रिकेट वर्ल्ड कप दो हज़ार उन्नीस में हर टीम जीतना चाहेगी, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. खैर, ट्रॉफी किसे मिलेगी, ये चौदह जुलाई को पता चल ही जाएगा. क्रिकेट के चाहने वालों को चार सालों से जिस पल का इंतजार था, अब वह आ चुका है. वर्ल्ड कप चैंपियनशिप की शुरुआत हो गई है, जो चौदह जुलाई तक चलेगा. टीमों के बीच में वार्म अप मैच भी खेले जा रहे हैं. वर्ल्ड कप में दस टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी. ग्यारह स्टेडियम में छियालीस दिनों में अड़तालीस मैच खेले जाएंगे. टॉप-चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी और जो बेस्ट होगा, वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी उसकी. हर टीम इस ट्रॉफी को घर ले जाना चाहेगी, लेकिन ये किसके हाथ आएगी, अभी तो इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है. विराट कोहली से लोगों को उम्मीदें भी काफी विराट हैं. ऐसे में कोहली पर थोड़ा दबाव तो होगा, लेकिन उनका साथ देने के लिए टीम में धोनी भी हैं. ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. इसकी वजह ये है कि वर्ल्ड कप में एक दूसरे से टकरा रही टीमें एक से बढ़कर एक हैं. भले ही भारत दुनिया की नंबर-एक टीम है, लेकिन मैच में कब नंबरों का खेल बदल जाए, कहा नहीं जा सकता. खैर, वर्ल्ड कप की ट्रॉफी किसे मिलेगी, ये तो चौदह जुलाई को पता चलेगा, लेकिन उससे पहले आइए एक नजर डालते हैं कुछ आंकड़ों पर और जानने की कोशिश करते हैं कि इस बार के वर्ल्ड कप में कौन जीत सकता है. ये देखना दिलचस्प होगा कि विराट कोहली और धोनी मिलकर इस बार वर्ल्ड कप भारत ला पाते हैं या नहीं. वर्ल्ड कप का पहला मैच दुनिया की नंबर-दो और नंबर-तीन टीम के बीच हो रहा है. यानी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हो रहा है. ये मैच Southampton के Hampshire Bowl में होगा. आज तक वर्ल्ड कप चार बार भारत और दक्षिण अफ्रीका का सामना हुआ है, जिसमें से तीन बार भारत हार गया है. यानी वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेलने के मामले में भारत का स्ट्राइक रेट पच्चीस फीसदी है. वहीं दूसरी ओर दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक इन दोनों टीमों के बीच बारह मैच हुए हैं, जिनमें से आठ भारत जीता और चार दक्षिण अफ्रीका. इस तरह यहां भारत का स्ट्राइक रेट सरसठ फीसदी है. भारत के लिए दक्षिण अफ्रीका से टक्कर लेना काफी मुश्किल होता है, लेकिन पिछले ही साल हमने उसे पाँच-एक से हराया है. विराट कोहली की बल्लेबाजी के साथ-साथ कुलदीप और चहल की गेंदबाजी ने उन्हें घुटनों पर ला दिया था. ऐसे में भारत भले ही थोड़े दबाव में खेले, लेकिन आत्मविश्वास की कमी नहीं रहेगी. लंदन के The Oval में नौ जून को भारत का मुकाबला देश की पांचवें नंबर की टीम ऑस्ट्रेलिया से होगा. भले ही भारत दूसरे नंबर की टीम हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत का प्रदर्शन हमेशा फीका ही रहा है. अब तक वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया से भारत का सामना ग्यारह बार हुआ है, जिसमें से सिर्फ तीन बार ही भारत जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट यहां सिर्फ सत्ताईस फीसदी है. अगर दो हज़ार पंद्रह वर्ल्ड कप के बाद से अब तक खेले गए अन्य मैचों की बात करें तो दोनों टीमें कुल अट्ठारह बार आमने-सामने आई हैं, जिनमें से नौ मैच भारत जीता और नौ मैच ऑस्ट्रेलिया. यानी यहां स्ट्राइक रेट पचास फीसदी है. ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत जब भी मैदान में उतरता है तो दोनों ही टीमों के बीच तगड़ी टक्कर होती है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर नहीं खेलते, बल्कि खिलाड़ियों के साथ एक माइंड गेम भी खेलते हैं. उनकी पूरी कोशिश रहती है कि किस तरह खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ा जाए. हालांकि, पिछले कुछ मैचों में तो भारत ने भी ऑस्ट्रेलिया का जवाब देने में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि वर्ल्ड कप में दोनों टीमों का मैदान पर प्रदर्शन कैसा रहता है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच तेरह जून को Nottingham के Trent Bridge में होगा. जब कभी बात न्यूजीलैंड की आती है तो भले ही पहले भारत दबाव में खेलता रहा हो, लेकिन अब न्यूजीलैंड के मुकाबले भारत काफी मजबूत टीम बन चुकी है. अब तक भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल सात वर्ल्डकप मैच हुए हैं, जिनमें से तीन मैच भारत जीता है और चार न्यूजीलैंड जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट तैंतालीस फीसदी है. दो हज़ार पंद्रह वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल तेरह मैच हुए हैं, जिनमें से नौ मैच भारत जीता है. यानी यहां भारत का स्ट्राइक रेट उनहत्तर फीसदी है. जनवरी में ही हुई वन डे सीरीज में भारत ने न्यूजीलैंड को उसी की जमीन पर चार-एक से हराया था. उसके बाद तो भारत का आत्मविश्वास काफी अधिक बढ़ा हुआ है. हालांकि, मौजूदा समय में वर्ल्ड कप से पहले हो रहे वार्म अप मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को बुरी तरह से हराया है, जो खिलाड़ियों का मनोबल कमजोर भी कर सकता है. भारतीयों के लिए वर्ल्ड कप का सबसे अहम मैच होगा सोलह जून को Manchester के Old Trafford में होने वाला मैच. ये मैच अहम इसलिए है, क्योंकि इसमें भारत और पाकिस्तान आमने सामने होंगे. अभी तक भारत और पाकिस्तान का मुकाबला वर्ल्ड कप में छः बार हुआ है और हर बार भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाई है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट एक सौ फीसदी है. वहीं दूसरी ओर, दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कुल चार मैच हुए हैं, जिनमें से भी तीन भारत ही जीता है. इसी के साथ भारत का स्ट्राइक रेट पचहत्तर फीसदी बना हुआ है. हाल ही में चुनाव खत्म हुए हैं, जिसमें पाकिस्तान एक अहम मुद्दा रहा. चुनाव से पहले तो यहां तक चर्चा होने लगी थी कि भारत वर्ल्ड कप का ही बहिष्कार कर दे, ताकि पाकिस्तान के साथ मैन ना खेलना पड़े. ये भी बातें हो रही थीं कि पाकिस्तान पर वर्ल्ड कप में खेलने पर बैन लगा दिया जाए. भारत-पाकिस्तान का मैच सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जंग है. भारत वर्ल्डकप हार जाए तो लोगों को इतना दुख नहीं होगा, जितना इस बात पर होगा कि भारत पाकिस्तान से हार गया. यहां तक कि खिलाड़ियों के घरों के सामने प्रदर्शन तक शुरू हो जाते हैं. भारत और अफगानिस्तान के बीच बाईस जून को Southampton के Hampshire Bowl में मैच होना है. भारत और अफगानिस्तान के बीच दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप के बाद सिर्फ एक मैच हुआ है, वो भी टाई हो गया है. वहीं दूसरी ओर किसी भी वर्ल्ड कप मैच में इन दोनों टीमों का आमना-सामना नहीं हुआ है. अफगानिस्तान से भले ही भारत का आमना-सामना कम हुआ है, लेकिन ये ऐसी टीम है कभी भी बाजी पलट देती है. वैसे भी, अफगानिस्तान से आमना-सामना ना होने की वजह से वहां के खिलाड़ियों के तरीकों को भारत सही से नहीं समझता. ऐसे में अफगानिस्तान से होने वाला मैच जीतना भी भारत के लिए एक चुनौती है. यहां आपको बता दें कि वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान की टीम को अमूल ने स्पॉन्सर किया है. यानी भले ही इन दोनों के मैच में भारत के हारने से पूरा देश दुखी हो, लेकिन अमूल को खुशी होगी. वेस्ट इंडीज से भारत का मुकाबला सत्ताईस जून को Manchester के Old Trafford में होने वाला है. अभी तक इन दोनों टीमों ने आठ वर्ल्ड कप मैच में एक दूसरे से मुकाबला किया है. इनमें से पाँच में भारत ने जीत हासिल की है, जबकि तीन में वेस्ट इंडीज जीता है. इस तरह भारत का स्ट्राइक रेट बासठ फीसदी है. वहीं दूसरी ओर दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल दस मैच हुए हैं. इनमें से छः भारत जीता है, दो टाई हो गए और बाकी के दो वेस्ट इंडीज जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट यहां भी साठ फीसदी है. अगर देखा जाए तो वेस्ट इंडीज के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी है, लेकिन ये भी कहना गलत नहीं होगा कि वेस्ट इंडीज भारत को कड़ी टक्कर देता है. वैसे भी, वेस्ट इंडीज की टीम अगर चल जाती है तो मैच को एक अलग ही लेवल पर ले जाती है. भारत जब वेस्ट इंडीज के साथ मैच खेलेगा तो वह अपने स्ट्राइक रेट को देखकर भले ही आत्मविश्वास से लबरेज रहे, लेकिन भारत ये भी अच्छे से समझता है कि वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी कितना नुकसान कर सकते हैं. ये मुकाबला भारत के सबसे अधिक टेंशन देने वाला है. तीस जून को भारत और इंग्लैंड के बीच Birmingham के Edgbaston में मैच होगा. भारत के लिए ये मुकाबला कड़ा इसलिए रहेगा, क्योंकि उसका सामना दुनिया की नंबर-एक क्रिकेट टीम से होगा. अभी तक भारत और इंग्लैंड का वर्ल्ड कप में कुल सात बार मुकाबला हुआ है. तीन भारत जीता है और तीन इंग्लैंड. एक मैच टाई हो गया है. यानी दोनों ही देशों का स्ट्राइक रेट पचास फीसदी है. वहीं दो हज़ार पंद्रह वर्ल्डकप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच छः मैच हुए हैं, जिनमें से भी तीन भारत जीता है और तीन इंग्लैंड. यानी यहां भी स्ट्राइक रेट पचास फीसदी. भारत के लिए इंग्लैंड ही इस वर्ल्ड कप में सबसे भारी टीम होगी. दोनों के ही जीतने की संभावनाएं आधी-आधी हैं. देश की नंबर-एक टीम के साथ खेलना भारत की टीम के लिए दबाव भरा जरूर होगा, लेकिन विराट कोहली का जोश और महेंद्र सिंह धोनी की सूझबूझ वाली रणनीति टीम में दम भरने के लिए काफी है. भारत और बांग्लादेश के बीच दो जुलाई को Birmingham के Edgbaston में वर्ल्डकप का मैच होगा. अब तक दोनों देश तीन बार वर्ल्ड कप में मिले हैं, जिनमें से दो मैच भारत जीता है, जबकि एक मैच बांग्लादेश जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट सरसठ फीसदी. वहीं दूसरी ओर, दो हज़ार पंद्रह के वर्ल्ड कप के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल छः मैच हुए हैं, जिनमें से चार मैच भारत जीता है और दो बांग्लादेश. यानी यहां भी भारत का स्ट्राइक रेट सरसठ फीसदी है. जब भारत और बांग्लादेश की टीमें आमने-सामने होंगी, तो बेशक भारतीय खिलाड़ियों में एक आत्मविश्वास रहेगा. और ऐसा हो भी क्यों नहीं? सरसठ फीसदी का स्ट्राइक रेट होना आत्मविश्वास बढ़ाने वाला ही होता है. श्रीलंका के साथ जब-जब भारत वर्ल्ड कप में भिड़ा है, तो उसके परिणाम अधिकतर समय श्रीलंका के हक में ही रहे हैं. छः जुलाई को दोनों देशों के बीच Leeds के Headingley में मैच होगा. इससे पहले अब तक भारत और श्रीलंका आठ वर्ल्ड कप मैच साथ खेल चुके हैं, जिनमें से सिर्फ तीन ही भारत जीता है, बाकी के पाँच मैच श्रीलंका जीता है. यानी भारत का स्ट्राइक रेट सिर्फ तैंतालीस फीसदी है. वहीं दूसरी ओर, दो हज़ार पंद्रह के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कुल नौ मैच हुए हैं, जिनमें से छः भारत जीता और तीन श्रीलंका. यानी यहां भारत का स्ट्राइक रेट अधिक है, जो अठहत्तर फीसदी है. दोनों टीमों का अब तक का प्रदर्शन देखकर ये तो साफ है कि श्रीलंका वर्ल्ड कप में भारत के मुकाबले अच्छा खेलती है, लेकिन बाकी मैचों में भारत ताकतवर रहता है. अब क्योंकि ये वर्ल्ड कप का मुकाबला है तो बेशक भारत थोड़ा दबाव में तो रहेगा. 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निकल जावे, तिस के पीछे शिकारी बंदूक प्रमुख शस्त्र लिये चला आता है, उन को मारने के वास्ते वो शिकारी साधु को पूछे कि तुमने अमुक जीव जाते देखे हैं ? तब साधु मौन कर जावे । जे कर मौन करने पर भी पीछान छोड़े, और साधु को मारे, तब साधु कह देवे, कि मैंने नहीं देखे । यद्यपि यह द्रव्य से झूठ है, परन्तु भाव से झूठ नहीं, क्योंकि जो कोई इंद्रियों की विषय तृप्ति के वास्ते तथा अपने लोभ के वास्ते झूठ बोले, तब भावतः झूठ होवे । परंतु यह तो जीवों की दया के वास्ते झूठ बोला है । अतः वास्तव में यह झूठ नहीं है। इसी तरे और जगे भी समझ लेना । यह प्रथम भंग । तथा दूसरा भंग कोई पुरुष मुख से तो कुछ नहीं बोलता परन्तु दूसरों के उगने के वास्ते मन में अनेक विकल्प करता है, यह दूसरा भंग । तथा तीसरे भंग में तो द्रव्य से भी झूठ बोलता है, अरु भाव से भी झूठ बोलता है । तिस का अभिप्राय भी महा छल कपट करने का है । क्योंकि मुख से भी झूठ बोलता है, अरु चित्त में भी दुष्टता है, यह तीसरा भंग, तथा चौथा भंग तो पूर्ववत् शून्य है । अथ चोरी के यही चार भंग कहते हैं । तहां प्रथम भंग में जैसे कोई स्त्री शीलवती है, और कोई दुष्ट राजा उस का शील भंग करना चाहता है, तब कोई धर्मश आदि पुरुष रात्रि में अथवा दिन में उस स्त्री के शील की रक्षा के
निकल जावे, तिस के पीछे शिकारी बंदूक प्रमुख शस्त्र लिये चला आता है, उन को मारने के वास्ते वो शिकारी साधु को पूछे कि तुमने अमुक जीव जाते देखे हैं ? तब साधु मौन कर जावे । जे कर मौन करने पर भी पीछान छोड़े, और साधु को मारे, तब साधु कह देवे, कि मैंने नहीं देखे । यद्यपि यह द्रव्य से झूठ है, परन्तु भाव से झूठ नहीं, क्योंकि जो कोई इंद्रियों की विषय तृप्ति के वास्ते तथा अपने लोभ के वास्ते झूठ बोले, तब भावतः झूठ होवे । परंतु यह तो जीवों की दया के वास्ते झूठ बोला है । अतः वास्तव में यह झूठ नहीं है। इसी तरे और जगे भी समझ लेना । यह प्रथम भंग । तथा दूसरा भंग कोई पुरुष मुख से तो कुछ नहीं बोलता परन्तु दूसरों के उगने के वास्ते मन में अनेक विकल्प करता है, यह दूसरा भंग । तथा तीसरे भंग में तो द्रव्य से भी झूठ बोलता है, अरु भाव से भी झूठ बोलता है । तिस का अभिप्राय भी महा छल कपट करने का है । क्योंकि मुख से भी झूठ बोलता है, अरु चित्त में भी दुष्टता है, यह तीसरा भंग, तथा चौथा भंग तो पूर्ववत् शून्य है । अथ चोरी के यही चार भंग कहते हैं । तहां प्रथम भंग में जैसे कोई स्त्री शीलवती है, और कोई दुष्ट राजा उस का शील भंग करना चाहता है, तब कोई धर्मश आदि पुरुष रात्रि में अथवा दिन में उस स्त्री के शील की रक्षा के
भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन-समाधान की ओर' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 21 और 22 नवंबर को होने जा रही है। इस संगोष्ठी में देशभर के लगभग छह सौ पर्यावरण विशेषज्ञ हिस्सा लेगें। राज्य की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ से पहले विभिन्न विषयों पर संवादों और मंथन का दौर जारी है। इसी क्रम में राजधानी भोपाल में यह दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का मकसद विश्व को पर्यावरण की समस्या से निपटने का संदेश देना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक संगोष्ठी में देश की प्रमुख संस्थाओं के करीब 579 वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग लेंगे। इसके अलावा विभिन्न राज्य सरकारों के जलवायु परिवर्तन नोडल अधिकारी, केन्द्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और महिला सरपंच हिस्सा लेंगे। बताया गया है कि संगोष्ठी में दो दिन में विभिन्न विषयों पर 15 सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आर्ट ऑफ लिंविग के रविशंकर होंगे। संगोष्ठी स्थल पर चार प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। ये प्रदर्शनियां सिंहस्थ, जलवायु परिवर्तन, मध्यप्रदेश के विकास और मध्यप्रदेश के पर्यटन पर केंद्रित होंगी।
भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन-समाधान की ओर' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी इक्कीस और बाईस नवंबर को होने जा रही है। इस संगोष्ठी में देशभर के लगभग छह सौ पर्यावरण विशेषज्ञ हिस्सा लेगें। राज्य की धार्मिक नगरी उज्जैन में अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ से पहले विभिन्न विषयों पर संवादों और मंथन का दौर जारी है। इसी क्रम में राजधानी भोपाल में यह दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का मकसद विश्व को पर्यावरण की समस्या से निपटने का संदेश देना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक संगोष्ठी में देश की प्रमुख संस्थाओं के करीब पाँच सौ उन्यासी वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग लेंगे। इसके अलावा विभिन्न राज्य सरकारों के जलवायु परिवर्तन नोडल अधिकारी, केन्द्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और महिला सरपंच हिस्सा लेंगे। बताया गया है कि संगोष्ठी में दो दिन में विभिन्न विषयों पर पंद्रह सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आर्ट ऑफ लिंविग के रविशंकर होंगे। संगोष्ठी स्थल पर चार प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। ये प्रदर्शनियां सिंहस्थ, जलवायु परिवर्तन, मध्यप्रदेश के विकास और मध्यप्रदेश के पर्यटन पर केंद्रित होंगी।
ही वश होय ह । अथानतर रथनूपुरका राजा जो इद्र उसके जीतिवेको रावण गमनको प्रवरत्या । सो जहा पाताल लकाविष खरदूषण बहणेऊ है, वहा जाय डेरा किया। पाताललकाके समीप डेरा भया । रात्रिका पुराण । समय था, खरदूषण शयन कर था सो चद्रनखा रावणको बहिनने जगाया । पाताललकासे निकसकरि रावणके निकट आया, रत्नोके अघ देय महा भक्तिसे परम उत्साहकरि रावणको पूजा करी । रावण ने भी बहणेऊपन के सोहकरि खरदूषणका बहुत सत्कार किया। जगतविष बहिन बहणेऊ समान और कोई सोहका पात्र नाही । खरदूषणो चौदह हजार विद्याधर मनवाछित नाना रूपके धारनहारे रावण को दिखाए । रावण खरदूषणको सेना देख बहुत प्रसन्न भए । आाप समान सेनापति किया । कसा ह खरदूषण ? महा शूरवीर ह । उसने अपने गुणोसे सव सामतोका चित्त वश किया है । हिडब, हहिडिंब, विकट, विजट, हयमाकोन, सुजट, टक, किहकधाधिपति, सुग्रीव तथा त्रिपुर, मलय, हेमपाल कोल, वसुदर इत्यादिक अनेक राजा नानाप्रकारके वाहननिपर चढे, नानाप्रकार शस्त्र विद्याविष प्रवीण, अोक शस्तनके अभ्यासी तिनकरि युक्त, पाताललकात खरदूषण रावणके कटकविष श्राया ? जसे पाताललोकसे असुरकुमारोके समूह करि युक्त चमरेंद्र श्रावे । या भाति प्रोक विद्याधर राजाप्रोके समूहकरि रावणका कटक पूर्ण होता भया । जस बिजली अर इंद्रधनुषकर युक्त मेघमालानिके समूह तिनकर श्रावणमास पूर्ण होय । ऐसे एकहजार ऊपर अधिक प्रक्षोहिणो दल रावणके होय चुका । दिन दिन बढता जाय ह । श्रर हजार हजार देवनिकरि सेवायोग्य रत्न, नानाप्रकार गुणनिके समूहके धारणहारे उनकर युक्त, अर चद्रकिरण समान उज्ज्वल चमर जापर दुर ह, उज्ज्वल छत्र सिरपर फिर है, जाका रूप सुदर है, महाबाहु महाबली पुष्पक नामा विमानपर चढा, सुमेरु समान स्थिर, सूयसमान ज्योति, अपने विमानादि बाहन सम्पदाकरि सूयमण्डलको आच्छादित करता हुवा इद्रका विध्वस मनमें विचारकर रावणने प्रयाण किया । कसा ह रावण ? प्रबल ह पराक्रम जाका, मानो श्राकाशको समुद्र समान करता भया, देवीप्यमान जे शस्त्र, सोई भई कलोल, अर हाथी घोडे प्यादे ये ही भए जलचर जीव, भर छत्र भवर भए, अर चमर तुरग भए, नानाप्रकारके रत्नोको ज्योति फल रही है, पर चमरो के वण्ड मीन भए- 'हे श्रेणिक । रावणकी विस्तीण सेनाका वणन कहाँलग करिये, जिसको देखकर पुराण देव डरें तो मनुष्यनिकी बात कहा ? इंद्रजीत मेघनाद कुम्भकण विभीषण खरदूषण निकुम्भ कु भ कुम इत्यादि बहुत सुजन रणमें प्रवीण, सिद्ध ह विद्या जिनको, महाप्रकाशवन्त, शस्त्र शास्त्र विद्यामें ह प्रवीण है, जिनको कीर्ति बडी है, महासेनाकरि युक्त, देवताओकी शोभा को जीतते हुए रावणके सग चाले । विध्याचल पवतके समीप सूर्य ग्रस्त भया । मानो रावणके तेजकरि विलखा होय तेज रहित भया । वहा सेनाका निवास भया, मानो विध्याचलने सेना सिरपर धारी ह । विद्याके बलसे नाना प्रकारके प्राश्रय लिये । फिर अपनी किरणनिकरि अधकार के समूहकू दूर करता सता चन्द्रमा उदय भया, मानो रावणके भयकरि रात्रि रत्नका दीपक लाई ह । श्रर मानो निशा स्त्री भई, चादनीकरि निमल जो प्रकाश सोई वस्त्र, उसको धर तारानिके जे समूह तेई सिरविष फूल गू थे ह, चद्रमा हो है वदन जाका, नाना प्रकारको कथाकर तथा निद्राकर सेनाके लोकनिने रात्रि पूर्ण करी । फिर प्रभात के वादित बाजे, मगल पाठ कर रावण जागे । प्रभात क्रिया करी, सूयका उदय भया, मानो सूय भुवनविष भमणकर किसी ठौर शरण न पाया तब रावणहीके शरण प्राया । पुन रावण नमवाके तट श्राए । कसी ह नमदा ? शुद्ध स्फटिक मणि समान ह जल जाका, अर उसके तोर अनेक बनके हाथी रह ह सो जलमें केलि कर है, उसकर शोभायमान है । अर नानाप्रकारके पक्षियोके समूह मधुर गान करे ह सो मानो परस्पर सभाषण ही कर है । फेन कहिए झागके पटल इन कर मडित ह तरगरूप जे भोह उनके विलास करि पूर्ण ह । भवर ही ह नाभि जाके, घर चचल जे मीन तेई ह नेत्र जाके, घर सुदर जे पुलिन तेई ह कटि जाके, नानाप्रकारके पुष्पनिकरि सयुक्त निमल जल ही ह वस्त्र जाका, मानो साक्षात सुन्दर स्त्री हो है । ताहि देखकर रावण बहुत प्रसन्न भए । प्रबल जे जलचर उनके
ही वश होय ह । अथानतर रथनूपुरका राजा जो इद्र उसके जीतिवेको रावण गमनको प्रवरत्या । सो जहा पाताल लकाविष खरदूषण बहणेऊ है, वहा जाय डेरा किया। पाताललकाके समीप डेरा भया । रात्रिका पुराण । समय था, खरदूषण शयन कर था सो चद्रनखा रावणको बहिनने जगाया । पाताललकासे निकसकरि रावणके निकट आया, रत्नोके अघ देय महा भक्तिसे परम उत्साहकरि रावणको पूजा करी । रावण ने भी बहणेऊपन के सोहकरि खरदूषणका बहुत सत्कार किया। जगतविष बहिन बहणेऊ समान और कोई सोहका पात्र नाही । खरदूषणो चौदह हजार विद्याधर मनवाछित नाना रूपके धारनहारे रावण को दिखाए । रावण खरदूषणको सेना देख बहुत प्रसन्न भए । आाप समान सेनापति किया । कसा ह खरदूषण ? महा शूरवीर ह । उसने अपने गुणोसे सव सामतोका चित्त वश किया है । हिडब, हहिडिंब, विकट, विजट, हयमाकोन, सुजट, टक, किहकधाधिपति, सुग्रीव तथा त्रिपुर, मलय, हेमपाल कोल, वसुदर इत्यादिक अनेक राजा नानाप्रकारके वाहननिपर चढे, नानाप्रकार शस्त्र विद्याविष प्रवीण, अोक शस्तनके अभ्यासी तिनकरि युक्त, पाताललकात खरदूषण रावणके कटकविष श्राया ? जसे पाताललोकसे असुरकुमारोके समूह करि युक्त चमरेंद्र श्रावे । या भाति प्रोक विद्याधर राजाप्रोके समूहकरि रावणका कटक पूर्ण होता भया । जस बिजली अर इंद्रधनुषकर युक्त मेघमालानिके समूह तिनकर श्रावणमास पूर्ण होय । ऐसे एकहजार ऊपर अधिक प्रक्षोहिणो दल रावणके होय चुका । दिन दिन बढता जाय ह । श्रर हजार हजार देवनिकरि सेवायोग्य रत्न, नानाप्रकार गुणनिके समूहके धारणहारे उनकर युक्त, अर चद्रकिरण समान उज्ज्वल चमर जापर दुर ह, उज्ज्वल छत्र सिरपर फिर है, जाका रूप सुदर है, महाबाहु महाबली पुष्पक नामा विमानपर चढा, सुमेरु समान स्थिर, सूयसमान ज्योति, अपने विमानादि बाहन सम्पदाकरि सूयमण्डलको आच्छादित करता हुवा इद्रका विध्वस मनमें विचारकर रावणने प्रयाण किया । कसा ह रावण ? प्रबल ह पराक्रम जाका, मानो श्राकाशको समुद्र समान करता भया, देवीप्यमान जे शस्त्र, सोई भई कलोल, अर हाथी घोडे प्यादे ये ही भए जलचर जीव, भर छत्र भवर भए, अर चमर तुरग भए, नानाप्रकारके रत्नोको ज्योति फल रही है, पर चमरो के वण्ड मीन भए- 'हे श्रेणिक । रावणकी विस्तीण सेनाका वणन कहाँलग करिये, जिसको देखकर पुराण देव डरें तो मनुष्यनिकी बात कहा ? इंद्रजीत मेघनाद कुम्भकण विभीषण खरदूषण निकुम्भ कु भ कुम इत्यादि बहुत सुजन रणमें प्रवीण, सिद्ध ह विद्या जिनको, महाप्रकाशवन्त, शस्त्र शास्त्र विद्यामें ह प्रवीण है, जिनको कीर्ति बडी है, महासेनाकरि युक्त, देवताओकी शोभा को जीतते हुए रावणके सग चाले । विध्याचल पवतके समीप सूर्य ग्रस्त भया । मानो रावणके तेजकरि विलखा होय तेज रहित भया । वहा सेनाका निवास भया, मानो विध्याचलने सेना सिरपर धारी ह । विद्याके बलसे नाना प्रकारके प्राश्रय लिये । फिर अपनी किरणनिकरि अधकार के समूहकू दूर करता सता चन्द्रमा उदय भया, मानो रावणके भयकरि रात्रि रत्नका दीपक लाई ह । श्रर मानो निशा स्त्री भई, चादनीकरि निमल जो प्रकाश सोई वस्त्र, उसको धर तारानिके जे समूह तेई सिरविष फूल गू थे ह, चद्रमा हो है वदन जाका, नाना प्रकारको कथाकर तथा निद्राकर सेनाके लोकनिने रात्रि पूर्ण करी । फिर प्रभात के वादित बाजे, मगल पाठ कर रावण जागे । प्रभात क्रिया करी, सूयका उदय भया, मानो सूय भुवनविष भमणकर किसी ठौर शरण न पाया तब रावणहीके शरण प्राया । पुन रावण नमवाके तट श्राए । कसी ह नमदा ? शुद्ध स्फटिक मणि समान ह जल जाका, अर उसके तोर अनेक बनके हाथी रह ह सो जलमें केलि कर है, उसकर शोभायमान है । अर नानाप्रकारके पक्षियोके समूह मधुर गान करे ह सो मानो परस्पर सभाषण ही कर है । फेन कहिए झागके पटल इन कर मडित ह तरगरूप जे भोह उनके विलास करि पूर्ण ह । भवर ही ह नाभि जाके, घर चचल जे मीन तेई ह नेत्र जाके, घर सुदर जे पुलिन तेई ह कटि जाके, नानाप्रकारके पुष्पनिकरि सयुक्त निमल जल ही ह वस्त्र जाका, मानो साक्षात सुन्दर स्त्री हो है । ताहि देखकर रावण बहुत प्रसन्न भए । प्रबल जे जलचर उनके
आप आगे अपने कैरियर में वृद्धि या एक प्रेरणादायक भविष्य की ओर सही रास्ते पर डाल रहे हैं, नेतृत्व में एक एमएससी प्राप्त करने पर विचार करें. इस प्रतिष्ठित डिग्री अपने को फिर से शुरू एक प्रतियोगी नौकरी बाजार में बाहर खड़ा है और व्यापार की दुनिया में अग्रणी एक रोमांचक काम के लिए तैयार कर सकते हैं. नेतृत्व में एक एमएससी क्या है? इस विशिष्ट कार्यक्रम एक आक्रामक कारोबारी माहौल में नियंत्रण लेने के लिए उन्हें तैयार करते समय छात्रों में नेतृत्व आदर्शों प्रकट करने पर केंद्रित है. एक मास्टर की के नेतृत्व में एक रचनात्मक प्रतिभा प्रभावी टीम दिशा देने और प्रबंधित करने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान दोनों प्रदान करता है. यह उच्च गुणवत्ता की शिक्षा भी छात्रों को एक विशिष्ट व्यापार संस्कृति के लिए लागू समाधान प्रदान करते हुए मानव संसाधन और प्रबंधन की दुनिया विकसित करने में मदद करता है. आपकी शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने और नेतृत्व में एक एमएससी प्राप्त करने के कई कारण हैं. अपने कैरियर को सहारा देने के लिए और अपने प्रत्यायन के साथ नियोक्ताओं को पटाने के अलावा, आप दुनिया भर में अनगिनत उद्योगों में उपयोग किया जा सकता है कि कई नेतृत्व proficiencies सीखना होगा. इस उत्तेजक कार्यक्रम अनुभव की लागत है कि आप चुन विशिष्ट कार्यक्रम के आधार पर भिन्न हो सकती है. से चुनने के लिए कई मान्यता प्राप्त स्कूलों के साथ, पूरी तरह से पहले एक विशेष विश्वविद्यालय के लिए करने के लिए, स्नातक करने के क्रम में किसी भी आवश्यक शुल्क के बारे में पूछताछ करने के लिए सुनिश्चित करें. नेतृत्व में एक एमएससी प्राप्त जो उन लोगों के लिए उपलब्ध कई कैरियर अवसर हैं. मानव संसाधन परामर्श से किसी भी क्षेत्र में प्रबंधन पदों के इन सम्मानित डिग्री रखने वालों के लिए बहुत ही अच्छे विकल्प हैं.वे बड़े निगमों और छोटे, निजी व्यवसायों में कामयाब होना कर सकते हैं. व्यवसाय नेतृत्व के कई घटकों के बारे में सीखने के लिए, अपनी रोमांचक यात्रा शुरू करने के क्रम में अभी साइन अप करें. विशेष रूप से ऑनलाइन इतने सारे कार्यक्रमों और उपलब्ध पाठ्यक्रमों के साथ, छात्रों को भी अपने दैनिक जीवन और करियर को बनाए रखने, जबकि उनके शिक्षाविदों में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम हैं. व्यापक डेटाबेस छात्रों को अपने कमरे में रहने वाले से एक वैश्विक शिक्षा के अधिकार के अनुभव हासिल करने के लिए अनुमति देता है, प्रतिस्पर्धी नेतृत्व कार्यक्रमों की पेशकश कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में शामिल है. नीचे अपने कार्यक्रम के लिए खोज और नेतृत्व में भरकर सीधे अपनी पसंद के स्कूल के प्रवेश कार्यालय से संपर्क फार्म.
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Chamtkari Devi Mandir: इन दिनों चैत्र नवरात्रि का पर्व चल रहा है। इन 9 दिनों में देवी के सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। देवी के कुछ मंदिर काफी रहस्यमयी हैं। इनसे जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक भी आज तक कुछ जान नहीं पाए। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वालादेवी मंदिर (Jwaladevi Temple Himachal Pradesh) 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी की किसी मूर्ति की नहीं बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही 9 ज्वालाओं की पूजा होती है। इन 9 ज्वालाओं को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी। मुगलकाल के दौरान कई बार इन ज्वालाओं को बुझाने की प्रयास किया गया, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वैज्ञानिक भी इन ज्वालाओं को लेकर कई बार शोध कर चुका है, लेकिन भी आज तक इस चमत्कार के बारे मेंसमझ नहीं पाएं हैं। असम राज्य के गुवाहाटी के निकट स्थित है कामाख्या मंदिर (Kamakhya Temple Guwahati)। ये मंदिर भी 52 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर को सिद्ध तंत्र पीठ माना जाता है। यहां दूर-दूर से भक्त तंत्र साधना करने आते हैं। यहां देवी को पशुओं की बलि भी दी जाती है। यहां देवी की योनी की पूजा की जाती है। साल में एक बार यहां मेले का आयोजन होता है, उस दौरान मंदिर बंद कर दिया जाता है। मान्यता है कि ये समय माता के मासिक धर्म का होता है। मंदिर बंद करने से पहले एक निश्चित स्थान पर सफेद कपड़ा रखा जाता है जो बाद में चमत्कारी रूप से लाल हो जाता है। इस लाल कपड़े को भी भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। सफेद कपड़ा अपने आप ही लाल कैसे हो जाता है, ये आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है। राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किमी दूर स्थित है करणी माता मंदिर (Karni Mata Temple Bikaner) । इस 'चूहों वाली माता' या 'चूहों वाला मंदिर' भी कहते हैं। इसका कारण है कि इस मंदिर में 20 हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं। इन्हें देवी का भक्त कहा जाता है। मंदिर में आने वाले भक्तों को चूहों का जूठा किया हुआ प्रसाद ही दिया जाता है, लेकिन खास बात ये है कि चूहों का जूठा प्रसाद खाने से आज तक कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ। ये चूहें यहां कैसे आए और ये इसी स्थान पर क्यों रहते हैं, ये रहस्य आज तक कोई भी समझ नहीं पाया। दूर-दूर से भक्त यहां माता के दर्शन करने आते हैं और इन चूहों को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं। राजस्थान के उदयपुर शहर के 60 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है ईडाणा माता मंदिर (Idana Mata Temple Udaipur)। इस मंदिर की न तो कोई छत है और न ही दीवारें। एक मंदिर एकदम खुले चौक में स्थित है। मंदिर का ये नाम उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मंदिर में महीने में 2-3 बार अपने आप ही अग्नि प्रज्जवलित हो जाती है। इस अग्नि में माता की मूर्ति और श्रृंगार को छोड़कर सभी कुछ भस्म हो जाता है। कहते हैं कि माता स्वयं अग्नि स्नान करती हैं। ये अग्नि अपने आप कैसे जल उठती है, इसका रहस्य आज तक कोई नहीं लगा पाया। बिहार के कैमूर जिले में स्थित है मुंडेश्वरी माता मंदिर (Mundeshwari Mata Temple Kaimur)। इसे भारत का सबसे पुराना देवी मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर परिसर में स्थित शिलालेखों से इस मंदिर की ऐतिहासिकता प्रमाणित होती है। यहां लगभग 1900 सालों से लगातार पूजा हो रही है। इस मंदिर का वर्णन कनिंघम ने भी अपनी पुस्तक में किया है। इस मंदिर में सात्विक बलि देने की प्रथा है। यानी बलि देते समय बकरे पर पवित्र जल छिड़का जाता है, जिससे बकरा थोड़ी देर के लिए बेहोश हो जाता है और कुछ देर बाद होश में आ जाता है। ऐसा चमत्कार कैसे होता है, ये भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य है। Ram Navami 2023: 300 से ज्यादा भाषाओं में लिखी गई है राम कथा, कौन-सी रामायण सबसे ज्यादा प्रचलित है? Traditions of Navratri: क्या आप जानते हैं नवरात्रि में क्यों करते हैं उपवास, क्यों बोते हैं जवारे, देवी के मंदिर पहाड़ों पर ही क्यों? Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
Chamtkari Devi Mandir: इन दिनों चैत्र नवरात्रि का पर्व चल रहा है। इन नौ दिनों में देवी के सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। देवी के कुछ मंदिर काफी रहस्यमयी हैं। इनसे जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक भी आज तक कुछ जान नहीं पाए। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वालादेवी मंदिर बावन शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी की किसी मूर्ति की नहीं बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है। इन नौ ज्वालाओं को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी। मुगलकाल के दौरान कई बार इन ज्वालाओं को बुझाने की प्रयास किया गया, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वैज्ञानिक भी इन ज्वालाओं को लेकर कई बार शोध कर चुका है, लेकिन भी आज तक इस चमत्कार के बारे मेंसमझ नहीं पाएं हैं। असम राज्य के गुवाहाटी के निकट स्थित है कामाख्या मंदिर । ये मंदिर भी बावन शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर को सिद्ध तंत्र पीठ माना जाता है। यहां दूर-दूर से भक्त तंत्र साधना करने आते हैं। यहां देवी को पशुओं की बलि भी दी जाती है। यहां देवी की योनी की पूजा की जाती है। साल में एक बार यहां मेले का आयोजन होता है, उस दौरान मंदिर बंद कर दिया जाता है। मान्यता है कि ये समय माता के मासिक धर्म का होता है। मंदिर बंद करने से पहले एक निश्चित स्थान पर सफेद कपड़ा रखा जाता है जो बाद में चमत्कारी रूप से लाल हो जाता है। इस लाल कपड़े को भी भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। सफेद कपड़ा अपने आप ही लाल कैसे हो जाता है, ये आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है। राजस्थान के बीकानेर से लगभग तीस किमी दूर स्थित है करणी माता मंदिर । इस 'चूहों वाली माता' या 'चूहों वाला मंदिर' भी कहते हैं। इसका कारण है कि इस मंदिर में बीस हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं। इन्हें देवी का भक्त कहा जाता है। मंदिर में आने वाले भक्तों को चूहों का जूठा किया हुआ प्रसाद ही दिया जाता है, लेकिन खास बात ये है कि चूहों का जूठा प्रसाद खाने से आज तक कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ। ये चूहें यहां कैसे आए और ये इसी स्थान पर क्यों रहते हैं, ये रहस्य आज तक कोई भी समझ नहीं पाया। दूर-दूर से भक्त यहां माता के दर्शन करने आते हैं और इन चूहों को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं। राजस्थान के उदयपुर शहर के साठ किमी दूर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है ईडाणा माता मंदिर । इस मंदिर की न तो कोई छत है और न ही दीवारें। एक मंदिर एकदम खुले चौक में स्थित है। मंदिर का ये नाम उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मंदिर में महीने में दो-तीन बार अपने आप ही अग्नि प्रज्जवलित हो जाती है। इस अग्नि में माता की मूर्ति और श्रृंगार को छोड़कर सभी कुछ भस्म हो जाता है। कहते हैं कि माता स्वयं अग्नि स्नान करती हैं। ये अग्नि अपने आप कैसे जल उठती है, इसका रहस्य आज तक कोई नहीं लगा पाया। बिहार के कैमूर जिले में स्थित है मुंडेश्वरी माता मंदिर । इसे भारत का सबसे पुराना देवी मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर परिसर में स्थित शिलालेखों से इस मंदिर की ऐतिहासिकता प्रमाणित होती है। यहां लगभग एक हज़ार नौ सौ सालों से लगातार पूजा हो रही है। इस मंदिर का वर्णन कनिंघम ने भी अपनी पुस्तक में किया है। इस मंदिर में सात्विक बलि देने की प्रथा है। यानी बलि देते समय बकरे पर पवित्र जल छिड़का जाता है, जिससे बकरा थोड़ी देर के लिए बेहोश हो जाता है और कुछ देर बाद होश में आ जाता है। ऐसा चमत्कार कैसे होता है, ये भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य है। Ram Navami दो हज़ार तेईस: तीन सौ से ज्यादा भाषाओं में लिखी गई है राम कथा, कौन-सी रामायण सबसे ज्यादा प्रचलित है? Traditions of Navratri: क्या आप जानते हैं नवरात्रि में क्यों करते हैं उपवास, क्यों बोते हैं जवारे, देवी के मंदिर पहाड़ों पर ही क्यों? Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
[५७-१ प्र.] भगवन् । देवेन्द्र देवराज ईशान, क्या देवेन्द्र देवराज शक के पास प्रकट होने (जाने) मे समर्थ है ? [५७ - १ उ.] हाँ गौतम । ईशानेन्द्र शकेन्द्र के पास जाने में समर्थ है । [२] से मंते ! कि आढायमाणे पन, अणाढायमाणे पन्नू ? गोयमा ! प्राढायमाणे वि पभू, अणाढायमाणे वि पभू । [ ५७ - २ प्र ] भगवन् ! ( जब ईशानेन्द्र शकेन्द्र के पास जाता है तो), क्या वह आदर करता हुश्रा जाता है, या अनादर करता हुभ्रा जाता है ? [ ५७ - २ उ ] गौतम । ( जब ईशानेन्द्र, शकेन्द्र के पास जाता है, तब ) वह आदर करता भी जा सकता है, और अनादर करता हुआ भी जा सकता है । ५८. पभू णं भंते ! सक्के वेबिदे देवराया ईसाणं देविदं देवराय सपक्खि सपडिविसि समभिलोएत्तए ? जहा पादुम्भवणा तहा दो वि आलावगा नेयन्दा । [५८ प्र ] भगवन् । क्या देवेन्द्र देवराज शक, देवेन्द्र देवराज ईशान के समक्ष (चारो दिशाओ मे) तथा सप्रतिदिश (चारो कोनो मे = सब ओर) देखने में समर्थ है ? [५८ ३ ] गौतम । जिस तरह से पास प्रादुर्भूत होने ( जाने ) ( के सम्बन्ध मे दो आलापक कहे है, उसी ) तरह से देखने के सम्बन्ध में भी दो आलापक कहने चाहिए । ५९. पभू णं भंते । सबके देविवे देवराया ईसाणेणं देविदेणं देवरण्णा सद्धि आलावं वा संलावं वा करेसए ? हंता, पभू । जहा पादुम्भवणा । [५९ प्र. ] भगवन् ! क्या देवेन्द्र देवराज शऋ, देवेन्द्र देवराज ईशान के साथ आलाप या सलाप (भाषण-सभाषण या बातचीत ) करने में समर्थ है [५९ उ ] हाँ, गौतम । वह लाप-सलाप करने में समर्थ है । जिस तरह पास जाने के सम्बन्ध में दो झालापक कहे हैं, ( उसी तरह आलाप सलाप के विषय मे भी दो आलापक कहने चाहिए । ) ६० [१] अस्थि णं भंते ! तेसि सक्कीसाणाणं देविदाणं देवराईणं किच्चाई करणिज्जाई समुप्पज्जंति ? [६०-१ प्र] भगवन् । उन देवेन्द्र देवराज शक और देवेन्द्र देवराज ईशान के बोच मे परस्पर कोई कृत्य (प्रयोजन) और करणीय (विधेय-करने योग्य ) समुत्पन्न होते हैं ? तृतीय शतक उद्देशक- १ । [६०-१ उ ] हाँ, गौतम । समुत्पन्न होते हैं । [२] से कहमिवाणि पकरेंति ? गोयमा ! ताहे चेव णं से सबके देविवे देवराया ईसाणस्स देविंदस्स देबरण्णो अंतियं पाउम्भवति, ईसाणे ण वेविंदे देवराया सक्कस्स देविवस्स देवरण्णो अंतियं पाउम्भवई - 'इति भो ! सक्का ! देविदा ! देवराया ! वाहिणडुलोगाहिवती !'; 'इति भो ! ईसाणा ! देविदा ! देवराया ! उत्तरड्ढलोगाहिवती !' । ' इति भो इति भो त्ति ते अन्नमन्नस्स किम्चाई करणिज्जाई पञ्चणुभवमाणा विहरति । [६० - २ प्र ] भगवन् । जब इन दोनो के कोई कृत्य (प्रयोजन ) या कैसे व्यवहार (कार्य ) करते है ? करणीय होते हैं, तब वे [६०-२ उ ] गौतम । जब देवेन्द्र देवराज शक को कार्य होता है, तब वह (स्वय ) देवेन्द्र देवराज ईशान के समीप प्रकट होता है, और जब देवेन्द्र देवराज ईशान को कार्य होता है, तब बह ( स्वय ) देवेन्द्र देवराज शक के निकट जाता है। उनके परस्पर सम्बोधित करने का तरीका यह है'ऐसा है, हे दक्षिणार्द्ध लोकाधिपति देवेन्द्र देवराज शक " (शकेन्द्र पुकारता है-) 'ऐसा है, हे उत्तरार्द्धलोकाधिपति देवेन्द्र देवराज ईशान ' ( यहाँ), दोनो घोर से 'इति भो इति भो ।' ( इस प्रकार के शब्दों से परस्पर ) सम्बोधित करके वे एक दूसरे के कृत्यो ( प्रयोजनो) और करणीयो ( कार्यों) को अनुभव करते हुए विचरते हैं, ( अर्थात् दोनो अपना-अपना कार्यानुभव करते रहते हैं।) ६१. [१] अत्थि णं भंते ! तेसि सक्कीसाणाणं देविदाणं देवराईणं विवादा समुप्पज्जंति ? हता, अस्थि । [६१-१ प्र ] भगवन् । क्या देवेन्द्र शक और देवेन्द्र देवराज ईशान, इन दोनो मे विवाद भी समुत्पन्न होता है ? [६१ १ उ ] हॉ, गौतम । ( इन दोनो इन्द्रो के बीच विवाद भी समुत्पन्न ) होता है । [२] से कहमिदाणि पकरेंति ? गोयमा । ताहे चेव णं ते सक्कोसाणा देविदं देवरायाणो सणकुमारं देविदे वेवराय मणसीकरेंति । तए णं से सणकुमारे देविदे देवराया तेहि सक्कोसाणेहि देविदेहि देवराईहि मणसीकए समाणे खिप्पामेव सक्कोसाणाण देविदाणं देवराईणं अंतियं पातुब्भवति । जं से वदई तस्स आणाउबवाय वयण-निद्देसे चिट्ठति । [६१ - २ प्र ] ( भगवन् ! जब उन दोनो इन्द्रो मे परस्पर विवाद उत्पन्न हो जाता है, ) तब वे क्या करते है ? [६१-२ उ ] गौतम । जब शकेन्द्र और ईशानेन्द्र मे परस्पर विवाद उत्पन्न हो जाता है, तब वे दोनो, देवेन्द्र देवराज सनत्कुमारेन्द्र का मन मे स्मरण करते है । देवेन्द्र देवराज शकेन्द्र मोर ईशानेन्द्र द्वारा स्मरण करने पर शीघ्र ही सनत्कुमारेन्द्र देवराज, शकेन्द्र और ईशानेन्द्र के निकट प्रकट होता (आता है । वह जो भी कहता है, ( उसे ये दोनो इन्द्र मान्य करते हैं । ) ये दोनों इन्द्र उसकी श्राज्ञा, सेवा, प्रदेश और निर्देश में रहते हैं ।
[सत्तावन-एक प्र.] भगवन् । देवेन्द्र देवराज ईशान, क्या देवेन्द्र देवराज शक के पास प्रकट होने मे समर्थ है ? [सत्तावन - एक उ.] हाँ गौतम । ईशानेन्द्र शकेन्द्र के पास जाने में समर्थ है । [दो] से मंते ! कि आढायमाणे पन, अणाढायमाणे पन्नू ? गोयमा ! प्राढायमाणे वि पभू, अणाढायमाणे वि पभू । [ सत्तावन - दो प्र ] भगवन् ! , क्या वह आदर करता हुश्रा जाता है, या अनादर करता हुभ्रा जाता है ? [ सत्तावन - दो उ ] गौतम । वह आदर करता भी जा सकता है, और अनादर करता हुआ भी जा सकता है । अट्ठावन. पभू णं भंते ! सक्के वेबिदे देवराया ईसाणं देविदं देवराय सपक्खि सपडिविसि समभिलोएत्तए ? जहा पादुम्भवणा तहा दो वि आलावगा नेयन्दा । [अट्ठावन प्र ] भगवन् । क्या देवेन्द्र देवराज शक, देवेन्द्र देवराज ईशान के समक्ष तथा सप्रतिदिश देखने में समर्थ है ? [अट्ठावन तीन ] गौतम । जिस तरह से पास प्रादुर्भूत होने तरह से देखने के सम्बन्ध में भी दो आलापक कहने चाहिए । उनसठ. पभू णं भंते । सबके देविवे देवराया ईसाणेणं देविदेणं देवरण्णा सद्धि आलावं वा संलावं वा करेसए ? हंता, पभू । जहा पादुम्भवणा । [उनसठ प्र. ] भगवन् ! क्या देवेन्द्र देवराज शऋ, देवेन्द्र देवराज ईशान के साथ आलाप या सलाप करने में समर्थ है [उनसठ उ ] हाँ, गौतम । वह लाप-सलाप करने में समर्थ है । जिस तरह पास जाने के सम्बन्ध में दो झालापक कहे हैं, साठ [एक] अस्थि णं भंते ! तेसि सक्कीसाणाणं देविदाणं देवराईणं किच्चाई करणिज्जाई समुप्पज्जंति ? [साठ-एक प्र] भगवन् । उन देवेन्द्र देवराज शक और देवेन्द्र देवराज ईशान के बोच मे परस्पर कोई कृत्य और करणीय समुत्पन्न होते हैं ? तृतीय शतक उद्देशक- एक । [साठ-एक उ ] हाँ, गौतम । समुत्पन्न होते हैं । [दो] से कहमिवाणि पकरेंति ? गोयमा ! ताहे चेव णं से सबके देविवे देवराया ईसाणस्स देविंदस्स देबरण्णो अंतियं पाउम्भवति, ईसाणे ण वेविंदे देवराया सक्कस्स देविवस्स देवरण्णो अंतियं पाउम्भवई - 'इति भो ! सक्का ! देविदा ! देवराया ! वाहिणडुलोगाहिवती !'; 'इति भो ! ईसाणा ! देविदा ! देवराया ! उत्तरड्ढलोगाहिवती !' । ' इति भो इति भो त्ति ते अन्नमन्नस्स किम्चाई करणिज्जाई पञ्चणुभवमाणा विहरति । [साठ - दो प्र ] भगवन् । जब इन दोनो के कोई कृत्य या कैसे व्यवहार करते है ? करणीय होते हैं, तब वे [साठ-दो उ ] गौतम । जब देवेन्द्र देवराज शक को कार्य होता है, तब वह देवेन्द्र देवराज ईशान के समीप प्रकट होता है, और जब देवेन्द्र देवराज ईशान को कार्य होता है, तब बह देवेन्द्र देवराज शक के निकट जाता है। उनके परस्पर सम्बोधित करने का तरीका यह है'ऐसा है, हे दक्षिणार्द्ध लोकाधिपति देवेन्द्र देवराज शक " 'ऐसा है, हे उत्तरार्द्धलोकाधिपति देवेन्द्र देवराज ईशान ' , दोनो घोर से 'इति भो इति भो ।' सम्बोधित करके वे एक दूसरे के कृत्यो और करणीयो को अनुभव करते हुए विचरते हैं, इकसठ. [एक] अत्थि णं भंते ! तेसि सक्कीसाणाणं देविदाणं देवराईणं विवादा समुप्पज्जंति ? हता, अस्थि । [इकसठ-एक प्र ] भगवन् । क्या देवेन्द्र शक और देवेन्द्र देवराज ईशान, इन दोनो मे विवाद भी समुत्पन्न होता है ? [इकसठ एक उ ] हॉ, गौतम । होता है । [दो] से कहमिदाणि पकरेंति ? गोयमा । ताहे चेव णं ते सक्कोसाणा देविदं देवरायाणो सणकुमारं देविदे वेवराय मणसीकरेंति । तए णं से सणकुमारे देविदे देवराया तेहि सक्कोसाणेहि देविदेहि देवराईहि मणसीकए समाणे खिप्पामेव सक्कोसाणाण देविदाणं देवराईणं अंतियं पातुब्भवति । जं से वदई तस्स आणाउबवाय वयण-निद्देसे चिट्ठति । [इकसठ - दो प्र ] तब वे क्या करते है ? [इकसठ-दो उ ] गौतम । जब शकेन्द्र और ईशानेन्द्र मे परस्पर विवाद उत्पन्न हो जाता है, तब वे दोनो, देवेन्द्र देवराज सनत्कुमारेन्द्र का मन मे स्मरण करते है । देवेन्द्र देवराज शकेन्द्र मोर ईशानेन्द्र द्वारा स्मरण करने पर शीघ्र ही सनत्कुमारेन्द्र देवराज, शकेन्द्र और ईशानेन्द्र के निकट प्रकट होता ये दोनों इन्द्र उसकी श्राज्ञा, सेवा, प्रदेश और निर्देश में रहते हैं ।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के ग्वादर शहर में जोरदार धमाका हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के ग्वादर शहर में हुए जोरदार विस्फोट में एक चीनी इंजीनियर समेत 10 लोगों की मौत हो गई है. गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सिंध प्रांत के भवन नगर इलाके में शिया समुदाय द्वारा निकाले जा रहे जुलूस पर आतंकी हमला किया गया था. इस घटना में शिया समुदाय के 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. वहीं करीब 40 लोग घायल हो गए। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान में हुई इस तरह की घटना ने शिया समुदाय के लिए चिंता बढ़ा दी है।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के ग्वादर शहर में जोरदार धमाका हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के ग्वादर शहर में हुए जोरदार विस्फोट में एक चीनी इंजीनियर समेत दस लोगों की मौत हो गई है. गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सिंध प्रांत के भवन नगर इलाके में शिया समुदाय द्वारा निकाले जा रहे जुलूस पर आतंकी हमला किया गया था. इस घटना में शिया समुदाय के पाँच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. वहीं करीब चालीस लोग घायल हो गए। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान में हुई इस तरह की घटना ने शिया समुदाय के लिए चिंता बढ़ा दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, प्रदेश सरकार अगले 3-4 वर्षों में लगभग 20 मिलियन युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार 'मिशन रोजगार' अभियान चला रही है, जिसके तहत अगले तीन-चार साल में दो करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। सीएम योगी ने लखनऊ में संबोधन के दौरान ये बात कही है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय 'लखनऊ कौशल महोत्सव' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के का कौशल विकास करके राज्य देश की अर्थव्यवस्था में विकास के इंजन के रूप में काम कर सकता है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने "सीएम अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग" शुरू की है और इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख युवाओं को लाभ होगा। उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में पढ़ने वाले युवाओं को अप्रेंटिसशिप योजना के तहत आधा मानदेय सरकार और आधा संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठान देंगे. उनको हम अनुभवजन्य कार्य और नये प्रशिक्षण के साथ जोड़ने का कार्य करेंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, प्रदेश सरकार अगले तीन-चार वर्षों में लगभग बीस मिलियन युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार 'मिशन रोजगार' अभियान चला रही है, जिसके तहत अगले तीन-चार साल में दो करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। सीएम योगी ने लखनऊ में संबोधन के दौरान ये बात कही है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय 'लखनऊ कौशल महोत्सव' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के का कौशल विकास करके राज्य देश की अर्थव्यवस्था में विकास के इंजन के रूप में काम कर सकता है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने "सीएम अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग" शुरू की है और इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख युवाओं को लाभ होगा। उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में पढ़ने वाले युवाओं को अप्रेंटिसशिप योजना के तहत आधा मानदेय सरकार और आधा संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठान देंगे. उनको हम अनुभवजन्य कार्य और नये प्रशिक्षण के साथ जोड़ने का कार्य करेंगे।
'सेव कल्चर सेव इंडिया' फाउंडेशन के फाउंडर उदय महूरकर ने 25 जून को सांस्कृतिक योद्धा पुरस्कार 2023 का आयोजन किया है। राहुल शिवशंकर इस चैनल के साथ वर्ष 2016 से जुड़े हुए थे। इन जिम्मेदारियों में ब्रैंड की ऑफलाइन (ओओएच, रेडियो, प्रिंट, टीवी) और ऑनलाइन मीडिया स्ट्रैटेजीज को चलाना शामिल होगा। इसके तहत लीडरशिप टीम में शामिल रूपाली शर्मा, हरबीर सिंह, सौरभ जैन, मनीष शर्मा, संचिता रॉय और रोहन चिंचोली को प्रमोट कर नई जिम्मेदारी दी गई है। 'वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन' की ओर से 'द बिग पिक्चर 2023' नाम से IIC के कमलादेवी ब्लॉक में लगाई गई इस प्रदर्शनी में देश भर के 66 फोटो पत्रकारों के 251 फोटोज को प्रदर्शित किया गया है। 'हवास मीडिया समूह' (havas media Group) इंडिया ने उदय मोहन और आर. वेंकटसुब्रमण्यन को प्रमोशन का तोहफा देते हुए उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। 'वायकॉम18' (Viacom18) ने गुरुवार को कहा कि उसने रिलायंस, बोधी ट्री सिस्टम्स और पैरामाउंट ग्लोबल के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए लेनदेन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वरिष्ठ पत्रकार और जानी-मानी साप्ताहिक राष्ट्रीय पत्रिका 'पांचजन्य' के संपादक हितेश शंकर ने मीडिया से जुड़े तमाम अहम पहलुओं को लेकर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है। इस मौके पर 'पांचजन्य' और भारत की 75 वर्ष की यात्रा, भारत का सांस्कृतिक विकास और भारत का आर्थिक विकास समेत तमाम अन्य प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में नामचीन हस्तियों के साथ चर्चा के अलावा गोवा मुक्ति आंदोलन पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्पेशल स्क्रीनिंग भी होगी। 'टाइम्स नाउ' के एडिटोरियल डायरेक्टर व एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने एक गोलमेज चर्चा के दौरान कहा कि BARC इस समय अपने मौजूदा अवतार में साफ-सुथरा है। अपराधियों ने एक पत्रकार पर जानलेवा हमला कर दिया। पत्रकार को निशाना बनाकर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग करने की बात सामने आयी है। एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 'ई4एम न्यूजनेक्स्ट' 2022 कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि सच्ची रिपोर्टिंग के लिए एक साझा न्यूनतम एजेंडा (common minimum agenda) होना चाहिए। 'भारतीय जनसंचार संस्थान' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक 'भारतबोध का नया समय' का लोकार्पण गुरुवार को नई दिल्ली में किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उदय शंकर कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभाएंगे।
'सेव कल्चर सेव इंडिया' फाउंडेशन के फाउंडर उदय महूरकर ने पच्चीस जून को सांस्कृतिक योद्धा पुरस्कार दो हज़ार तेईस का आयोजन किया है। राहुल शिवशंकर इस चैनल के साथ वर्ष दो हज़ार सोलह से जुड़े हुए थे। इन जिम्मेदारियों में ब्रैंड की ऑफलाइन और ऑनलाइन मीडिया स्ट्रैटेजीज को चलाना शामिल होगा। इसके तहत लीडरशिप टीम में शामिल रूपाली शर्मा, हरबीर सिंह, सौरभ जैन, मनीष शर्मा, संचिता रॉय और रोहन चिंचोली को प्रमोट कर नई जिम्मेदारी दी गई है। 'वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन' की ओर से 'द बिग पिक्चर दो हज़ार तेईस' नाम से IIC के कमलादेवी ब्लॉक में लगाई गई इस प्रदर्शनी में देश भर के छयासठ फोटो पत्रकारों के दो सौ इक्यावन फोटोज को प्रदर्शित किया गया है। 'हवास मीडिया समूह' इंडिया ने उदय मोहन और आर. वेंकटसुब्रमण्यन को प्रमोशन का तोहफा देते हुए उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। 'वायकॉमअट्ठारह' ने गुरुवार को कहा कि उसने रिलायंस, बोधी ट्री सिस्टम्स और पैरामाउंट ग्लोबल के साथ रणनीतिक साझेदारी के लिए लेनदेन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वरिष्ठ पत्रकार और जानी-मानी साप्ताहिक राष्ट्रीय पत्रिका 'पांचजन्य' के संपादक हितेश शंकर ने मीडिया से जुड़े तमाम अहम पहलुओं को लेकर समाचारचारमीडिया से खास बातचीत की है। इस मौके पर 'पांचजन्य' और भारत की पचहत्तर वर्ष की यात्रा, भारत का सांस्कृतिक विकास और भारत का आर्थिक विकास समेत तमाम अन्य प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में नामचीन हस्तियों के साथ चर्चा के अलावा गोवा मुक्ति आंदोलन पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्पेशल स्क्रीनिंग भी होगी। 'टाइम्स नाउ' के एडिटोरियल डायरेक्टर व एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने एक गोलमेज चर्चा के दौरान कहा कि BARC इस समय अपने मौजूदा अवतार में साफ-सुथरा है। अपराधियों ने एक पत्रकार पर जानलेवा हमला कर दिया। पत्रकार को निशाना बनाकर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग करने की बात सामने आयी है। एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 'ईचारएम न्यूजनेक्स्ट' दो हज़ार बाईस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि सच्ची रिपोर्टिंग के लिए एक साझा न्यूनतम एजेंडा होना चाहिए। 'भारतीय जनसंचार संस्थान' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक 'भारतबोध का नया समय' का लोकार्पण गुरुवार को नई दिल्ली में किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उदय शंकर कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभाएंगे।
भारतीय विधि आयोग संबंधी रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध कराई गई है। आप यहाँ गैर आवासीय परिवारों के लिए कानून, त्वरित न्याय , न्याय प्रक्रिया में सुधार, दुर्घटनाओं से निपटने के लिए बनाए गए सड़क कानूनों में सुधार, मुकदमों के शुल्क तथा कॉर्पोरेट मुकदमेबाजी इत्यादि विषयों पर रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। यह रिपोर्ट् हिंदी में भी उपलब्ध कराई गई है। पंजाब का राज्य महिला आयोग राज्य में महिलाओं से सम्बंधित मुद्दों को देखने के लिए पंजाब राज्य महिला आयोग अधिनियम के तहत गठित किया गया है। आयोग के संगठनात्मक ढांचे, कार्यों, बुनियादी आंकड़ों,शक्तियो के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। कल्याणकारी योजनाओं, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण अभिविन्यास कार्यक्रम और कानूनों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा विशिष्ट मामलों, जैसे - हिरासत में हुई मृत्यु, पुलिस द्वारा प्रताड़ित, फर्जी मुठभेड़, बंधुआ मजदूरी, सशस्त्र बल, दलितों एवं अल्प-संख्यकों पर हुए अत्याचार, महिला या बच्चों से संबंधित मामले इत्यादि की जानकारी यहाँ प्रदान की गई है। आप मानव अधिकारों के उल्लंघन के अन्य महत्वपूर्ण मामलों की भी जानकारी यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। विधि और न्याय मंत्रालय के बारे में जानकारी प्राप्त करें. आप अदालतों, न्यायिक मामले विभाग, विधायी विभाग, भारत के विधि आयोग और न्याय विभाग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. वाद सूचियों, दैनिक आदेशों, निर्णयों और कानूनों के बारे में जानकरी प्रदान की गई है। कानूनी मामलों के विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। विभाग की संगठनात्मक संरचना, कार्य वितरण, सदस्यों, कानूनी पेशे, मध्यस्थता, सलाह कार्य, मुकदमेबाजी और कानूनी सहायता के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। अनुदान सहायता, कर्मचारियों और अधीनस्थ विधान के विवरण उपलब्ध हैं। उपयोगकर्ता लेख्य प्रमाणक से भी संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नागालैंड राज्य महिला आयोग राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए कार्य करता है। आयोग, उसके कार्यों, मिशन और गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है। सदस्यों और उनके संपर्क विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। गैर सरकारी संगठनों और महिलाओं के कल्याण के लिए काम कर रहे अधिवक्ताओं की एक सूची भी उपलब्ध कराई गई है। भारत के विधि आयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करें? आप यहाँ भारत के विधि आयोग की शुरुआत, विभिन्न आयोगों की स्थापना, उसके कार्य इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । विभिन्न कानूनों से संबंधित रिपोर्ट एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी यहाँ उपलब्ध कराई गई है । आप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग की संरचना, अंतरराष्ट्रीय अनुबंध, शिकायत, प्रशिक्षण और शिक्षा एवं मानव अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) विवादों के निवारण के लिए सस्ती, त्वरित और पर सेवा प्रदान करता है। आप वाद सूचियों, निर्णयों, मुक़दमे की स्थिति, दैनिक निर्णयों, उपभोक्ता के अधिवक्ता और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग के सदस्यों, राज्य आयोगों,ज़िले के उपभोक्ता फोरम और उपभोक्ता संरक्षण कानून के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मेघालय राज्य महिला आयोग महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने और महिलाओं के लिए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन की जांच हेतु कार्य करता है। उपयोगकर्ता आयोग की संरचना, शक्तियों, उद्देश्यों, कार्यों, कल्याणकारी गतिविधियों और सार्वजनिक सुनवाई आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीतियों और कार्यक्रमों, महिलाओं के संरक्षण और सेमिनार आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। उपयोगकर्ता राज्य में मानव अधिकारों की रक्षा करने के लिए हरियाणा मानवाधिकार आयोग और इसके विभिन्न कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते है। मानव अधिकार, कानून, मानव अधिकार मामलों, घटनाओं आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई हैं। मानवाधिकार अधिनियम 1993 से भी सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सांख्यिकीय रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई गई हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के लिए के बारे में जानकारी प्राप्त करें। महिला के लिए कौशल विकास से संबंधित सूचना उपलब्ध है। प्रयोक्ता ऑनलाइन शिकायत और अनिवासी भारतीयों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत की स्थिति सुविधा भी दी गई है। एनसीडब्ल्यू कानूनी प्रकोष्ठ के बारे में विवरण प्रदान किए गए हैं।
भारतीय विधि आयोग संबंधी रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध कराई गई है। आप यहाँ गैर आवासीय परिवारों के लिए कानून, त्वरित न्याय , न्याय प्रक्रिया में सुधार, दुर्घटनाओं से निपटने के लिए बनाए गए सड़क कानूनों में सुधार, मुकदमों के शुल्क तथा कॉर्पोरेट मुकदमेबाजी इत्यादि विषयों पर रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। यह रिपोर्ट् हिंदी में भी उपलब्ध कराई गई है। पंजाब का राज्य महिला आयोग राज्य में महिलाओं से सम्बंधित मुद्दों को देखने के लिए पंजाब राज्य महिला आयोग अधिनियम के तहत गठित किया गया है। आयोग के संगठनात्मक ढांचे, कार्यों, बुनियादी आंकड़ों,शक्तियो के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। कल्याणकारी योजनाओं, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण अभिविन्यास कार्यक्रम और कानूनों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा विशिष्ट मामलों, जैसे - हिरासत में हुई मृत्यु, पुलिस द्वारा प्रताड़ित, फर्जी मुठभेड़, बंधुआ मजदूरी, सशस्त्र बल, दलितों एवं अल्प-संख्यकों पर हुए अत्याचार, महिला या बच्चों से संबंधित मामले इत्यादि की जानकारी यहाँ प्रदान की गई है। आप मानव अधिकारों के उल्लंघन के अन्य महत्वपूर्ण मामलों की भी जानकारी यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। विधि और न्याय मंत्रालय के बारे में जानकारी प्राप्त करें. आप अदालतों, न्यायिक मामले विभाग, विधायी विभाग, भारत के विधि आयोग और न्याय विभाग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. वाद सूचियों, दैनिक आदेशों, निर्णयों और कानूनों के बारे में जानकरी प्रदान की गई है। कानूनी मामलों के विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। विभाग की संगठनात्मक संरचना, कार्य वितरण, सदस्यों, कानूनी पेशे, मध्यस्थता, सलाह कार्य, मुकदमेबाजी और कानूनी सहायता के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। अनुदान सहायता, कर्मचारियों और अधीनस्थ विधान के विवरण उपलब्ध हैं। उपयोगकर्ता लेख्य प्रमाणक से भी संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नागालैंड राज्य महिला आयोग राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए कार्य करता है। आयोग, उसके कार्यों, मिशन और गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है। सदस्यों और उनके संपर्क विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। गैर सरकारी संगठनों और महिलाओं के कल्याण के लिए काम कर रहे अधिवक्ताओं की एक सूची भी उपलब्ध कराई गई है। भारत के विधि आयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करें? आप यहाँ भारत के विधि आयोग की शुरुआत, विभिन्न आयोगों की स्थापना, उसके कार्य इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । विभिन्न कानूनों से संबंधित रिपोर्ट एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी यहाँ उपलब्ध कराई गई है । आप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग की संरचना, अंतरराष्ट्रीय अनुबंध, शिकायत, प्रशिक्षण और शिक्षा एवं मानव अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग विवादों के निवारण के लिए सस्ती, त्वरित और पर सेवा प्रदान करता है। आप वाद सूचियों, निर्णयों, मुक़दमे की स्थिति, दैनिक निर्णयों, उपभोक्ता के अधिवक्ता और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग के सदस्यों, राज्य आयोगों,ज़िले के उपभोक्ता फोरम और उपभोक्ता संरक्षण कानून के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मेघालय राज्य महिला आयोग महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने और महिलाओं के लिए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन की जांच हेतु कार्य करता है। उपयोगकर्ता आयोग की संरचना, शक्तियों, उद्देश्यों, कार्यों, कल्याणकारी गतिविधियों और सार्वजनिक सुनवाई आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीतियों और कार्यक्रमों, महिलाओं के संरक्षण और सेमिनार आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। उपयोगकर्ता राज्य में मानव अधिकारों की रक्षा करने के लिए हरियाणा मानवाधिकार आयोग और इसके विभिन्न कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते है। मानव अधिकार, कानून, मानव अधिकार मामलों, घटनाओं आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई हैं। मानवाधिकार अधिनियम एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से भी सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सांख्यिकीय रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई गई हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए के बारे में जानकारी प्राप्त करें। महिला के लिए कौशल विकास से संबंधित सूचना उपलब्ध है। प्रयोक्ता ऑनलाइन शिकायत और अनिवासी भारतीयों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत की स्थिति सुविधा भी दी गई है। एनसीडब्ल्यू कानूनी प्रकोष्ठ के बारे में विवरण प्रदान किए गए हैं।
डड़से भाडूंडा नहीं, लवड़ डाम भाडने वाला नहीं है, टिण्टू जड़ि विड़ट्ट टोडी टो सब बाटें ठोल डूंडा, बहन टुमाड़े ढड़ में टमांठू उमाठू नहीं है? हैं वहन टुमने सोहन टो टमाठू पीना ट्यों नहीं सिठलाया ? लक्ष्मी-सोहन दूध का बच्चा है, वह क्या तमाकू पियेगा ? लबड़धू-ट्यों ट्यों ट्या डूढ पीने से टमाटू नहीं पीना ? बहन, मैं टुमाड़े ढड़ आया हू; डूढ भी पिऊंडा, टमाठू भी पिऊंडा । टमाठू पीना नहीं सीठने से लोडों टे पास टैसे बैठेडा ? गोमती-चलो अबेर हो गयी थोड़ीसी खिचड़ी बना दूं। लवड़धू - अब फिड़ टिचड़ी टी ट्या जलडी है, अभी टो ड़ष्टे में डो पैसेटा चबैना चाबटा फांटटा आया हू । अब टिचड़ी उचड़ी डड़टाड़ नहीं है । सोहन सोहन टुम ठोड़ासा टमाहू भड़ो टो भाई । टमाठू ट्या आप भड़ टे पीना होडा ? गोमती-कहां लक्ष्मी ! कहां तमाकू कहां हैं? बतलाओ तो बेटी । लक्ष्मी - सोहन उस कोठरी में चौकी के नीचे पड़ा
डड़से भाडूंडा नहीं, लवड़ डाम भाडने वाला नहीं है, टिण्टू जड़ि विड़ट्ट टोडी टो सब बाटें ठोल डूंडा, बहन टुमाड़े ढड़ में टमांठू उमाठू नहीं है? हैं वहन टुमने सोहन टो टमाठू पीना ट्यों नहीं सिठलाया ? लक्ष्मी-सोहन दूध का बच्चा है, वह क्या तमाकू पियेगा ? लबड़धू-ट्यों ट्यों ट्या डूढ पीने से टमाटू नहीं पीना ? बहन, मैं टुमाड़े ढड़ आया हू; डूढ भी पिऊंडा, टमाठू भी पिऊंडा । टमाठू पीना नहीं सीठने से लोडों टे पास टैसे बैठेडा ? गोमती-चलो अबेर हो गयी थोड़ीसी खिचड़ी बना दूं। लवड़धू - अब फिड़ टिचड़ी टी ट्या जलडी है, अभी टो ड़ष्टे में डो पैसेटा चबैना चाबटा फांटटा आया हू । अब टिचड़ी उचड़ी डड़टाड़ नहीं है । सोहन सोहन टुम ठोड़ासा टमाहू भड़ो टो भाई । टमाठू ट्या आप भड़ टे पीना होडा ? गोमती-कहां लक्ष्मी ! कहां तमाकू कहां हैं? बतलाओ तो बेटी । लक्ष्मी - सोहन उस कोठरी में चौकी के नीचे पड़ा
रावण वध के दिन यानी आठ अक्टूबर को सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। गांधी मैदान, भट्टाचार्य रोड, डाकबंगला व अन्य इलाकों से आने वाले वाहनों के गांधी मैदान की ओर जाने पर रोक लगा दी गई है। रावण वध के दिन दोपहर एक बजे से लेकर गांधी मैदान में भीड़ के खत्म होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। गांधी मैदान के आसपास भीड़ खत्म होने के बाद ही इस ओर यातायात का परिचालन सामान्य होगा। एंबुलेंस सहित अन्य इमरजेंसी गाड़ियों के आने पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। शहरी इलाकों में नवमी और रावण वध के दिन शाम चार बजे से सुबह पांच बजे तक बड़े व अन्य मालवाहक तथा यात्री वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। बांकीपुर बस स्टैंड, गांधी मैदान से चलने वाली सरकारी बसें मीठापुर बस स्टैंड से चलेंगी। दानापुर से अशोक राजपथ में बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। ये वाहन दानापुर कैंट से सगुना मोड़ होते हुए खगौल-दानापुर स्टेशन होकर जा सकेंगे। दानापुर स्टेशन से बिहटा की तरफ जाने वाले वाहन नेउरा होते हुए बिहटा-आरा जा सकेंगे। अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस बल तैनातः गांधी मैदान भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त यातायात पुलिस बल को तैनात किया गया है। सभी जवानों को नो इंट्री जोन में गाड़ियों को रोकने के निर्देश दिये गए हैं। पटना। गांधी मैदान में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच रावण वध समारोह मंगलवार की शाम 4. 30 से 5. 30 बजे के बीच संपन्न होगा। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का विशालकाय पुतला रविवार को तैयार हो गया। इसे सोमवार को खड़ा किया जाएगा। इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई पांच-पांच फुट बढ़ा दी गयी है। रावण का पुतला 75 फुट, कुंभकर्ण का 70 फुट एवं मेघनाद का पुतला 65 फुट का है। दशहरा कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल नोपानी के मुताबिक, राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदनमोहन झा आदि भी मौजूद रहेंगे। इस बार पटना में भीषण जलजमाव के मद्देनजर आठ अक्टूबर को रावण वध समारोह सादगी के साथ प्रतीकात्मक ढंग से होगा। छह-सात झांकियों के बदले केवल दो झांकियां ही निकलेंगी। बैंड बाजे का इस्तेमाल नहीं होगा। आतिशबाजी हल्के तरीके से की जाएगी। रावण वध के पहले यूथ हॉस्टल फ्रेजर रोड से राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान और सीता, हनुमान और वानर सेना की झांकी निकाली जाएगी, जो गांधी मैदान में पहुंचकर तीन चक्कर लगाएगी। नौ अक्टूबर को बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में भरत मिलाप के साथ दशहरा समारोह संपन्न होगा। बक्सर के श्रीमन्न नारायण टीम के कलाकार भरत मिलाप और रावण वध समारोह में शामिल होंगे। बुद्धमार्ग में कोतवाली टी से पुलिस लाइन तिराहा तक (गांधी मैदान) की ओर जाने वाले सभी मार्ग वाहनों के आवागन के लिए बंद रहेंगे। जो वाहन पटना सिटी से अशोक राजपथ होकर गांधी मैदान, पटना जंक्शन की ओर आएंगे, वे गांधी चौक से भिखना पहाड़ी मोड़ होते हुए बारीपथ, मछुआ टोली से दिनकर गोलंबर, नाला रोड, अप्सरा गोलंबर, सीडीए बिल्डिंग से पटना जंक्शन की ओर आ सकेंगे। रावध वध के दिन डाकबंगला से पूरब की ओर जाने वाले वाहनों को न्यू डाकबंगला, भट्टाचार्य मोड़ से राजेंद्र पथ की ओर जाने की छूट दी गई है, जबकि न्यू डाकबंगला से एसपी वर्मा रोड में वाहनों के आने-जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। जेपी गोलंबर से चिल्ड्रेन पार्क के बीच का मार्ग सुरक्षित रहेगा। इस मार्ग पर सामान्य वाहनों का परिचालन नहीं हो सकेगा। इसी प्रकार राम गुलाम चौक (गांधी मैदान दक्षिणी) से पश्चिम जेपी गोलंबर की ओर वाहनों का परिचालन नहीं होगा।
रावण वध के दिन यानी आठ अक्टूबर को सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। गांधी मैदान, भट्टाचार्य रोड, डाकबंगला व अन्य इलाकों से आने वाले वाहनों के गांधी मैदान की ओर जाने पर रोक लगा दी गई है। रावण वध के दिन दोपहर एक बजे से लेकर गांधी मैदान में भीड़ के खत्म होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। गांधी मैदान के आसपास भीड़ खत्म होने के बाद ही इस ओर यातायात का परिचालन सामान्य होगा। एंबुलेंस सहित अन्य इमरजेंसी गाड़ियों के आने पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। शहरी इलाकों में नवमी और रावण वध के दिन शाम चार बजे से सुबह पांच बजे तक बड़े व अन्य मालवाहक तथा यात्री वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। बांकीपुर बस स्टैंड, गांधी मैदान से चलने वाली सरकारी बसें मीठापुर बस स्टैंड से चलेंगी। दानापुर से अशोक राजपथ में बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। ये वाहन दानापुर कैंट से सगुना मोड़ होते हुए खगौल-दानापुर स्टेशन होकर जा सकेंगे। दानापुर स्टेशन से बिहटा की तरफ जाने वाले वाहन नेउरा होते हुए बिहटा-आरा जा सकेंगे। अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस बल तैनातः गांधी मैदान भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त यातायात पुलिस बल को तैनात किया गया है। सभी जवानों को नो इंट्री जोन में गाड़ियों को रोकने के निर्देश दिये गए हैं। पटना। गांधी मैदान में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच रावण वध समारोह मंगलवार की शाम चार. तीस से पाँच. तीस बजे के बीच संपन्न होगा। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का विशालकाय पुतला रविवार को तैयार हो गया। इसे सोमवार को खड़ा किया जाएगा। इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई पांच-पांच फुट बढ़ा दी गयी है। रावण का पुतला पचहत्तर फुट, कुंभकर्ण का सत्तर फुट एवं मेघनाद का पुतला पैंसठ फुट का है। दशहरा कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल नोपानी के मुताबिक, राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदनमोहन झा आदि भी मौजूद रहेंगे। इस बार पटना में भीषण जलजमाव के मद्देनजर आठ अक्टूबर को रावण वध समारोह सादगी के साथ प्रतीकात्मक ढंग से होगा। छह-सात झांकियों के बदले केवल दो झांकियां ही निकलेंगी। बैंड बाजे का इस्तेमाल नहीं होगा। आतिशबाजी हल्के तरीके से की जाएगी। रावण वध के पहले यूथ हॉस्टल फ्रेजर रोड से राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान और सीता, हनुमान और वानर सेना की झांकी निकाली जाएगी, जो गांधी मैदान में पहुंचकर तीन चक्कर लगाएगी। नौ अक्टूबर को बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में भरत मिलाप के साथ दशहरा समारोह संपन्न होगा। बक्सर के श्रीमन्न नारायण टीम के कलाकार भरत मिलाप और रावण वध समारोह में शामिल होंगे। बुद्धमार्ग में कोतवाली टी से पुलिस लाइन तिराहा तक की ओर जाने वाले सभी मार्ग वाहनों के आवागन के लिए बंद रहेंगे। जो वाहन पटना सिटी से अशोक राजपथ होकर गांधी मैदान, पटना जंक्शन की ओर आएंगे, वे गांधी चौक से भिखना पहाड़ी मोड़ होते हुए बारीपथ, मछुआ टोली से दिनकर गोलंबर, नाला रोड, अप्सरा गोलंबर, सीडीए बिल्डिंग से पटना जंक्शन की ओर आ सकेंगे। रावध वध के दिन डाकबंगला से पूरब की ओर जाने वाले वाहनों को न्यू डाकबंगला, भट्टाचार्य मोड़ से राजेंद्र पथ की ओर जाने की छूट दी गई है, जबकि न्यू डाकबंगला से एसपी वर्मा रोड में वाहनों के आने-जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। जेपी गोलंबर से चिल्ड्रेन पार्क के बीच का मार्ग सुरक्षित रहेगा। इस मार्ग पर सामान्य वाहनों का परिचालन नहीं हो सकेगा। इसी प्रकार राम गुलाम चौक से पश्चिम जेपी गोलंबर की ओर वाहनों का परिचालन नहीं होगा।
माताएं अपने पुत्र की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए तथा निस्संतान महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना लिए अहोई माता की पूजा करेंगी। इस बार अहोई अष्टमी पर्व आज मनाया जाएगा। इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। बता दे की अष्टमी को मनाने के लिए सोलन बाजार में महिलाओं ने अपने बच्चों के लिए खूब खरीदारी की। सोलन के मॉल रोड, चौक बाजार, लक्कड़ बाजार सहित अन्य जगहों पर रविवार को खरीदारी करती भारी संख्या में महिलाएं नजर आई। अहोई अष्टमी के व्रत को लेकर रविवार का दिन होने के बावजूद भी सोलन के बाजार में भारी भीड़ देखने को मिली। बता दे कि माताएं अहोई अष्टमी पर पूरा दिन उपवास रखती हैं और सायंकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई माता का पूजन करती हैं। इस दिन भगवान शिव के परिवार व अहोई माता की पूजा की जाती है। महिंलाएं इस दिन निर्जला व्रत रख, तारों को देखने के बाद जल ग्रहण करके व्रत का पारण करती हैं। इस बार अहोई अष्टमी के दिन सर्वार्थ सिध्दि योग बन रहा है जो बहुत शुभ है। कहा जाता है कि, जो महिलाएं इस योग में विध-विधान से पूरी निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन करती हैं उनको संतान की प्राप्ती होती है और संतान को कष्ट से मुक्ति मिलती है। इस दिन तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है। यह अहोई माता गेरु आदि के द्वारा दीवार पर बनाई जाती है अथवा किसी मोटे वस्त्र पर अहोई काढक़र पूजा के समय उसे दीवार पर टांगा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अहोई अष्टमी की पूजा करने से माता पार्वती अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। अहोई अष्टमी के दिन व्रत करने वाली महिलाएं तारों को देखकर ही व्रत पूरा करती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना के लिए पूरी निष्ठा और श्रद्धा से यह पूजा करती हैं ताकि अहोई माता से उन्हें संतान का आशीर्वाद मिल सके। अहोई अष्टमी का व्रत बहुत विधि-विधान वाला है। ऐसे में इस व्रत में कई सारी सामग्रियां भी लगती हैं। अहोई अष्टमी के व्रत के दिन प्रात उठकर स्नान करें। माता की पूजा करते हुए ये संकल्प करें कि मैं अपने पुत्र की लंबी आयु एवं सुखमय जीवन के लिए अहोई माता का व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरे सभी पुत्रों को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखी रखें। अहोई माता की पूजा के लिए लाल गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनाएं। साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों का चित्र अंकित करें। फिर उनके सामने चावल की कटोरी, मूली, सिंघाड़े रखें और सुबह दीपक जलाकर कहानी पढ़ें। कहानी पढ़ते समय जो चावल हाथ में लिए जाते हैं, उन्हें साड़ी के पल्लू में बांधें। ध्यान रखें, सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं। यह करवा, करवा चौथ में उपयोग किया हुआ होना चाहिए। इस करवे का पानी दिवाली के दिन पूरे घर में छिडक़ा जाता है। संध्या काल में इन अंकित चित्रों की पूजा करें। भोजन में इस दिन चौदह पूरी और आठ पुए का भोग अहोई माता को लगाएं। अहोई अष्टमी व्रत के दौरान महिलाओं के पास माता के लिए रोली, चूडिय़ां, काजल, लाल वस्त्र, सिंदूर, बिंदी, माता की तस्वीर, कागज पर बनी हुई फोटो को अपने पास जरूर रखें। इससे अलग महिलाओं के पास जल भरा हुआ कलश, कई तरह के फल-फूल, कलावा, कच्चे चावल, मिठाई, गाय का दूध, मिट्टी का दीपक, गाय का घी, सिंघाड़ा, करवा होना जरूरी है। इसके अलावा अहोई व्रत कथा की किताब का होना भी जरूरी है। इससे अलग महिलाओं को अपने हाथों से कुछ चीजें बनानी चाहिए. भगवान शिव और माता पार्वती को दूध भात का लगाया जाता है भोग पंडित मनोज शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को दूध भात का भोग लगाया जाता है। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाया जाता है। अहोई माता की पूजा करते समय सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। शिवलिंग का दूध से अभिषेक कर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
माताएं अपने पुत्र की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए तथा निस्संतान महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना लिए अहोई माता की पूजा करेंगी। इस बार अहोई अष्टमी पर्व आज मनाया जाएगा। इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। बता दे की अष्टमी को मनाने के लिए सोलन बाजार में महिलाओं ने अपने बच्चों के लिए खूब खरीदारी की। सोलन के मॉल रोड, चौक बाजार, लक्कड़ बाजार सहित अन्य जगहों पर रविवार को खरीदारी करती भारी संख्या में महिलाएं नजर आई। अहोई अष्टमी के व्रत को लेकर रविवार का दिन होने के बावजूद भी सोलन के बाजार में भारी भीड़ देखने को मिली। बता दे कि माताएं अहोई अष्टमी पर पूरा दिन उपवास रखती हैं और सायंकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई माता का पूजन करती हैं। इस दिन भगवान शिव के परिवार व अहोई माता की पूजा की जाती है। महिंलाएं इस दिन निर्जला व्रत रख, तारों को देखने के बाद जल ग्रहण करके व्रत का पारण करती हैं। इस बार अहोई अष्टमी के दिन सर्वार्थ सिध्दि योग बन रहा है जो बहुत शुभ है। कहा जाता है कि, जो महिलाएं इस योग में विध-विधान से पूरी निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन करती हैं उनको संतान की प्राप्ती होती है और संतान को कष्ट से मुक्ति मिलती है। इस दिन तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है। यह अहोई माता गेरु आदि के द्वारा दीवार पर बनाई जाती है अथवा किसी मोटे वस्त्र पर अहोई काढक़र पूजा के समय उसे दीवार पर टांगा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अहोई अष्टमी की पूजा करने से माता पार्वती अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। अहोई अष्टमी के दिन व्रत करने वाली महिलाएं तारों को देखकर ही व्रत पूरा करती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना के लिए पूरी निष्ठा और श्रद्धा से यह पूजा करती हैं ताकि अहोई माता से उन्हें संतान का आशीर्वाद मिल सके। अहोई अष्टमी का व्रत बहुत विधि-विधान वाला है। ऐसे में इस व्रत में कई सारी सामग्रियां भी लगती हैं। अहोई अष्टमी के व्रत के दिन प्रात उठकर स्नान करें। माता की पूजा करते हुए ये संकल्प करें कि मैं अपने पुत्र की लंबी आयु एवं सुखमय जीवन के लिए अहोई माता का व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरे सभी पुत्रों को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखी रखें। अहोई माता की पूजा के लिए लाल गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनाएं। साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों का चित्र अंकित करें। फिर उनके सामने चावल की कटोरी, मूली, सिंघाड़े रखें और सुबह दीपक जलाकर कहानी पढ़ें। कहानी पढ़ते समय जो चावल हाथ में लिए जाते हैं, उन्हें साड़ी के पल्लू में बांधें। ध्यान रखें, सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं। यह करवा, करवा चौथ में उपयोग किया हुआ होना चाहिए। इस करवे का पानी दिवाली के दिन पूरे घर में छिडक़ा जाता है। संध्या काल में इन अंकित चित्रों की पूजा करें। भोजन में इस दिन चौदह पूरी और आठ पुए का भोग अहोई माता को लगाएं। अहोई अष्टमी व्रत के दौरान महिलाओं के पास माता के लिए रोली, चूडिय़ां, काजल, लाल वस्त्र, सिंदूर, बिंदी, माता की तस्वीर, कागज पर बनी हुई फोटो को अपने पास जरूर रखें। इससे अलग महिलाओं के पास जल भरा हुआ कलश, कई तरह के फल-फूल, कलावा, कच्चे चावल, मिठाई, गाय का दूध, मिट्टी का दीपक, गाय का घी, सिंघाड़ा, करवा होना जरूरी है। इसके अलावा अहोई व्रत कथा की किताब का होना भी जरूरी है। इससे अलग महिलाओं को अपने हाथों से कुछ चीजें बनानी चाहिए. भगवान शिव और माता पार्वती को दूध भात का लगाया जाता है भोग पंडित मनोज शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को दूध भात का भोग लगाया जाता है। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाया जाता है। अहोई माता की पूजा करते समय सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। शिवलिंग का दूध से अभिषेक कर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
दमोह में कलेक्ट्रेट के पास अपने नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का पंडाल चोरी हो गया। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दमोह पहुंचने वाले हैं और इन महिलाओं ने खुले आसमान के नीचे अपना धरना जारी रखा है। उनका कहना है कि प्रशासन उनके साथ कितनी भी सख्ती बरत ले, लेकिन वह अपना धरना समाप्त नहीं लेगी। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती। शनिवार देर रात इन महिलाओं का पंडाल किसी ने चोरी कर लिया था। उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। रविवार दोपहर जब यह महिलाएं अपने धरना स्थल पर पहुंची तो इनका पंडाल गायब था। हालांकि उन्होंने अपना धरना जारी रखा। कड़ी धूप में छतरी लगाकर यह महिलाएं बैठी है। मुख्यमंत्री के आने का इंतजार कर रही हैं। दमोह पहुंचने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होमगार्ड मैदान के हेलीपैड से जबलपुर नाका क्षेत्र से होते हुए पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुंचेंगे। इसी रास्ते में कलेक्ट्रेट के सामने ही यह महिलाएं धरने पर बैठी हैं। निश्चित है कि इन महिलाओं पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर भी पड़ सकती है और हो सकता है वे यहां पर ठहरकर इन महिलाओं से कुछ बात भी कर लें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दमोह में कलेक्ट्रेट के पास अपने नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का पंडाल चोरी हो गया। आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दमोह पहुंचने वाले हैं और इन महिलाओं ने खुले आसमान के नीचे अपना धरना जारी रखा है। उनका कहना है कि प्रशासन उनके साथ कितनी भी सख्ती बरत ले, लेकिन वह अपना धरना समाप्त नहीं लेगी। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती। शनिवार देर रात इन महिलाओं का पंडाल किसी ने चोरी कर लिया था। उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। रविवार दोपहर जब यह महिलाएं अपने धरना स्थल पर पहुंची तो इनका पंडाल गायब था। हालांकि उन्होंने अपना धरना जारी रखा। कड़ी धूप में छतरी लगाकर यह महिलाएं बैठी है। मुख्यमंत्री के आने का इंतजार कर रही हैं। दमोह पहुंचने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होमगार्ड मैदान के हेलीपैड से जबलपुर नाका क्षेत्र से होते हुए पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुंचेंगे। इसी रास्ते में कलेक्ट्रेट के सामने ही यह महिलाएं धरने पर बैठी हैं। निश्चित है कि इन महिलाओं पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर भी पड़ सकती है और हो सकता है वे यहां पर ठहरकर इन महिलाओं से कुछ बात भी कर लें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पटना. सीएम नीतीश के सामने बिहार की शिक्षा और शराबबंदी की पोल खोलने वाले नालंदा के 11 साल के सोनू से पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी मिले। इस दौरान सुशील मोदी ने कहा कि सोनू का नामांकन नवोदय विद्यालय में होगा। साथ ही वे मैट्रिक तक प्रति माह दो हजार रुपये बच्चे के खाते में जमा करेंगे। यह जानकारी उन्होंने ट्विटर पर शेयर की है। सुशील मोदी ने ट्विटर पर लिखा, 'मुख्य मंत्री के समक्ष हिम्मत के साथ अपनी बात रखने वाले सोनू से उसके गाँव में जाकर मुलाक़ात की । नवोदय विद्यालय में नामांकन होगा । प्रति माह दो हज़ार रुपए उसके खाते में मैट्रिक तक सहयोग करूँगा। ' बता दें कि बीते 14 मई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने गृह क्षेत्र हरनौत स्व. पत्नी मंजू देवी की पुण्यतिथि पर आए थे। वहां पर वे गांव के लोगों से जनसंवाद किये थे। उस दौरान 11 साल के छात्र सोनू कुमार अपनी फरियाद लेकर पहुंचा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिक्षा की बदहाली एवं शराबबंदी की शिकायत की। साथ ही उनसे अपनी आपबीती बताते हुए अपनी शिक्षा के लिए सहयोग मांगा। सोनू ने सीएम से शिकायत की कि सरकारी स्कूल में शिक्षा का हाल बदतर है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है कि वे प्राइवेट स्कूल में पढ़ पाये। बच्चे ने सीएम से कहा उनके पिता शराब और ताड़ी पीता है, जिससे उसके घर में जो भी आय होती है, वे शराब पर खर्च हो जाती है। सीएम से फरियाद लगता बच्चे का यह वीडियो खुब वायरल हुआ।
पटना. सीएम नीतीश के सामने बिहार की शिक्षा और शराबबंदी की पोल खोलने वाले नालंदा के ग्यारह साल के सोनू से पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी मिले। इस दौरान सुशील मोदी ने कहा कि सोनू का नामांकन नवोदय विद्यालय में होगा। साथ ही वे मैट्रिक तक प्रति माह दो हजार रुपये बच्चे के खाते में जमा करेंगे। यह जानकारी उन्होंने ट्विटर पर शेयर की है। सुशील मोदी ने ट्विटर पर लिखा, 'मुख्य मंत्री के समक्ष हिम्मत के साथ अपनी बात रखने वाले सोनू से उसके गाँव में जाकर मुलाक़ात की । नवोदय विद्यालय में नामांकन होगा । प्रति माह दो हज़ार रुपए उसके खाते में मैट्रिक तक सहयोग करूँगा। ' बता दें कि बीते चौदह मई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने गृह क्षेत्र हरनौत स्व. पत्नी मंजू देवी की पुण्यतिथि पर आए थे। वहां पर वे गांव के लोगों से जनसंवाद किये थे। उस दौरान ग्यारह साल के छात्र सोनू कुमार अपनी फरियाद लेकर पहुंचा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिक्षा की बदहाली एवं शराबबंदी की शिकायत की। साथ ही उनसे अपनी आपबीती बताते हुए अपनी शिक्षा के लिए सहयोग मांगा। सोनू ने सीएम से शिकायत की कि सरकारी स्कूल में शिक्षा का हाल बदतर है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है कि वे प्राइवेट स्कूल में पढ़ पाये। बच्चे ने सीएम से कहा उनके पिता शराब और ताड़ी पीता है, जिससे उसके घर में जो भी आय होती है, वे शराब पर खर्च हो जाती है। सीएम से फरियाद लगता बच्चे का यह वीडियो खुब वायरल हुआ।
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने अपर मुख्य सचिव को अवगत कराया गया कि गन्ना, आईटीआई, निर्वाचन, बाल विकास महिला सशक्तिकरण एवं अर्थ संख्या इत्यादि विभागों में स्थानांतरण एक्ट में निहित प्रविधनाओं का अनुपालन नहीं किया गया है। साथ ही मनमाने स्थानांतरण कर दिए गए। जो कि अत्यंत ही आपत्तिजनक है। अपर मुख्य सचिव ने उक्त समस्त विभागों के प्रकरणों का संज्ञान लेते हुए सचिव, कार्मिक को तत्काल कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) परिषद नेताओं ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से कार्मिकों एवं पेंशनरों के गोल्डन कार्ड के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं के विषय में भी तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। इस पर अपर मुख्य सचिव ने जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गोल्डन कार्ड से संबंधित एक बैठक बुलाए जाने के लिए मुख्यमंत्री के निजी सचिव को निर्देशित किया है। ताकि कार्मिकों एवं पेंशनरों को गोल्डन कार्ड में निहित समस्त सुविधाओं का लाभ मिल पाए। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शाम को मुख्य सचिव महोदय डॉ. एसएस संधू से भी मुलाकात की। इसमें उनके द्वारा समस्त विभागों के प्रकरणों को मुख्य सचिव महोदय के समक्ष रखा। साथ ही तत्काल कार्यवाही किए जाने की मांग की गई। परिषद ने आरोप लगाया गया कि शासन से जारी आदेशो का धरातल पर अनुपालन नही किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने स्थानांतरण एक्ट के दुरुपयोग पर गंभीरता दिखाते हुए जल्द ही संबंधित विभागों को दिशानिर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया। परिषद के प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय अध्यक्ष पांडे के साथ, परिषद के प्रदेश प्रवक्ता आर पी जोशी, गन्ना संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री रामकृष्ण नौटियाल इत्यादि मौजूद रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने अपर मुख्य सचिव को अवगत कराया गया कि गन्ना, आईटीआई, निर्वाचन, बाल विकास महिला सशक्तिकरण एवं अर्थ संख्या इत्यादि विभागों में स्थानांतरण एक्ट में निहित प्रविधनाओं का अनुपालन नहीं किया गया है। साथ ही मनमाने स्थानांतरण कर दिए गए। जो कि अत्यंत ही आपत्तिजनक है। अपर मुख्य सचिव ने उक्त समस्त विभागों के प्रकरणों का संज्ञान लेते हुए सचिव, कार्मिक को तत्काल कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया है। परिषद नेताओं ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से कार्मिकों एवं पेंशनरों के गोल्डन कार्ड के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं के विषय में भी तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। इस पर अपर मुख्य सचिव ने जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गोल्डन कार्ड से संबंधित एक बैठक बुलाए जाने के लिए मुख्यमंत्री के निजी सचिव को निर्देशित किया है। ताकि कार्मिकों एवं पेंशनरों को गोल्डन कार्ड में निहित समस्त सुविधाओं का लाभ मिल पाए। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शाम को मुख्य सचिव महोदय डॉ. एसएस संधू से भी मुलाकात की। इसमें उनके द्वारा समस्त विभागों के प्रकरणों को मुख्य सचिव महोदय के समक्ष रखा। साथ ही तत्काल कार्यवाही किए जाने की मांग की गई। परिषद ने आरोप लगाया गया कि शासन से जारी आदेशो का धरातल पर अनुपालन नही किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने स्थानांतरण एक्ट के दुरुपयोग पर गंभीरता दिखाते हुए जल्द ही संबंधित विभागों को दिशानिर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया। परिषद के प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय अध्यक्ष पांडे के साथ, परिषद के प्रदेश प्रवक्ता आर पी जोशी, गन्ना संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री रामकृष्ण नौटियाल इत्यादि मौजूद रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, औली और हरसिल सहित ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हुई है. जवाहर टनल के आसपास बर्फबारी और रामबन जिले में कई स्थानों पर भूस्खलन होने से जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग को सोमवार को यातायात के लिए बंद कर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि घाटी को पूरे देश से जोड़ने वाली मुगल रोड भी बर्फबारी के कारण लगातार तीसरे दिन बंद है क्योंकि ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हुई है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मियों और मशीनों की सहायता से सड़क को साफ करने का काम जारी है. केंद्रशासित प्रदेश में भारी बर्फबारी और भूस्खलन के बाद रामबन जिले में महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया और कश्मीर में प्रशासन ने चार जिलों-कुपवाड़ा, बांदीपुर, बारामुला और गांदेरबल के लिए हिमस्खलन की चेतावनी जारी की. उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बीच केदारनाथ और यमुनोत्री धाम को सर्दी के लिए बंद कर दिया गया. जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले विभिन्न क्षेत्रों में बर्फ की चादर बिछ गयी है. पर्यटन स्थल कुफरी, मनाली और औली में मौसम की पहली बर्फबारी हुई. वहीं बारिश के बाद दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में तापमान गिर गया है. पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते राजस्थान में मौसम दीपावली के बाद अचानक बदल गया है और सर्दी अपना असर दिखाने लगी है. इससे न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है. राज्य में इस हफ्ते तापमान में और गिरावट का अनुमान है. मौसम विभाग जयपुर के प्रवक्ता ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सोमवार से खत्म हो जाएगा और अगले चार- पांच दिनों तक राजस्थान में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा. उत्तरी हवाओं के प्रभाव से दिन के अधिकतम तापमान तथा रात के न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री के गिरावट होने की संभावना है. राज्य के उत्तरी भागों में अगले 2 दिन के दौरान सुबह के समय हल्के दर्जे का कोहरा छाए रहने के आसार हैं. जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में बर्फबारी हुई है. मौसम विभाग ने दिल्ली में तापमान 10 डिग्री से नीचे जाने का अनुमान जताया है. आईएमडी ने बताया कि अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. आईएमडी ने बताया कि न्यूनतम तापमान शुक्रवार तक 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने की संभावना है. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'जैसा क्षेत्र से पश्चिमी विक्षोभ लौट रहा है और हवा अब उत्तरपश्चिम की ओर बहने लगेगी. पहाड़ों में ताजा बर्फबारी के बाद अब वहां से ठंडी हवाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तरफ बहना शुरू करेंगी. ' जम्मू कश्मीर के रामबन में पटनीटॉप और नत्थाटॉप में बर्फ की बरसात का लुत्फ उठाने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ है. उधर, जवाहर सुरंग के आसपास बर्फबारी की वजह से जम्मू-श्रीनगर हईवे ठप हो गया है और लोगों की मुस्किलें बढ गई हैं. नवंबर के महीने में पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी कई संकेत देती है. सबसे बड़ा संकेत ये कि उत्तर भारत के मैदानी हिस्से में ठंड बढ़ने वाली है. हिमाचल में बर्फबारी की वजह से तापमान लगातार गोते लगा रहा है. कई जगहों पर पारा ने शून्य से नीचे का रुख कर लिया है. शिमला का कुफरी सफेद चादर की आगोश में है. कुल्लू, मनाली और दूसरी ऊंचाई वाली जगहों पर जमकर बर्फ की बरसात हो रही है. उत्तराखंड में यमुनोत्री से लेकर गंगोत्री तक बर्फ का कब्जा है. उत्तरकाशी में दूर दूर तक बर्फ ही बर्फ नजर आ रही है. चोपता में सीजन की बर्फबारी की खबर ने लोगों को खींचना शुरू कर दिया है. चकराता में बर्फबारी की खबर मिलते ही सैलानियों की भीड़ पहुंचने लगी है. लिहाजा कारोबारियों के चेहरे पर खुशी तैर रही है. चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम बदला और जमकर बर्फबारी हुई जिसके साथ ही जिले भर में हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी का दौर शुरू हो गया है बद्रीनाथ धाम हेमकुंड साहिब औली और गैरसैण मैं जमकर बर्फबारी होने से ठंड बढ़ गई है. भारी बर्फबारी के बाद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग हनुमान चट्टी से लेकर बद्रीनाथ धाम तक बर्फ की सफेद चादर से ढक गया. वाहन बर्फ की मोटी चादर में रेंगते नजर आए. बड़ी मुश्किल से वाहन स्वामी अपने वाहनों को बद्रीनाथ धाम से जोशीमठ की ओर निकालने की कोशिश कर रहे थे. भारी बर्फबारी के बाद तीर्थ यात्रियों को बद्रीनाथ धाम पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बर्फबारी की वजह से ठंड का जबरदस्त प्रकोप बरपा है. साथ ही बद्रीनाथ धाम हेमकुंड साहिब औली और गैरसैण मैं जमकर बर्फबारी होने से ठंड बढ़ गई है. बद्रीनाथ धाम में लगभग आधा फीट तक बर्फ जम चुकी है. बद्रीनाथ धाम में मकानों पर बर्फ, गाड़ियों में बर्फ, मंदिर परिसर के आसपास बर्फ जमा है, पैदल रास्तों पर भी बर्फ का डेरा है. हिमाचल प्रदेश के मुख्य पर्यटन स्थलों कुफरी और मनाली में सोमवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटों में शिमला जिले के कुफरी में 7 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई जबकि कुल्लू जिले के मनाली में दो सेमी बर्फबारी हुई. उन्होंने बताया कि सांगला में 25 सेमी बर्फबारी हुई, जबकि गोंदला में 20 सेमी, खदराला में 18 सेमी, कल्पा में 5. 6 सेमी और केलांग में 4 सेमी बर्फबारी हुई. इसके अलावा, राजधानी शिमला सहित राज्य के कई अन्य क्षेत्रों में बारिश हुई. शिमला में 21. 6 मिलीमीटर बारिश हुई. मौसम अधिकारी ने बताया कि आदिवासी जिले लाहौल और स्पीति के प्रशासनिक केंद्र केलांग राज्य में सबसे ठंड स्थान रहा, जहां का तापमान शून्य से तीन डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया. कुफरी का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस पर आ गया. सिंह ने बताया कि शिमला का न्यूनतम तापमान 3. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, औली और हरसिल सहित ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हुई है. जवाहर टनल के आसपास बर्फबारी और रामबन जिले में कई स्थानों पर भूस्खलन होने से जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग को सोमवार को यातायात के लिए बंद कर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि घाटी को पूरे देश से जोड़ने वाली मुगल रोड भी बर्फबारी के कारण लगातार तीसरे दिन बंद है क्योंकि ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हुई है. सीमा सड़क संगठन के कर्मियों और मशीनों की सहायता से सड़क को साफ करने का काम जारी है. केंद्रशासित प्रदेश में भारी बर्फबारी और भूस्खलन के बाद रामबन जिले में महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया और कश्मीर में प्रशासन ने चार जिलों-कुपवाड़ा, बांदीपुर, बारामुला और गांदेरबल के लिए हिमस्खलन की चेतावनी जारी की. उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बीच केदारनाथ और यमुनोत्री धाम को सर्दी के लिए बंद कर दिया गया. जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले विभिन्न क्षेत्रों में बर्फ की चादर बिछ गयी है. पर्यटन स्थल कुफरी, मनाली और औली में मौसम की पहली बर्फबारी हुई. वहीं बारिश के बाद दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में तापमान गिर गया है. पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते राजस्थान में मौसम दीपावली के बाद अचानक बदल गया है और सर्दी अपना असर दिखाने लगी है. इससे न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है. राज्य में इस हफ्ते तापमान में और गिरावट का अनुमान है. मौसम विभाग जयपुर के प्रवक्ता ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव सोमवार से खत्म हो जाएगा और अगले चार- पांच दिनों तक राजस्थान में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा. उत्तरी हवाओं के प्रभाव से दिन के अधिकतम तापमान तथा रात के न्यूनतम तापमान में तीन से चार डिग्री के गिरावट होने की संभावना है. राज्य के उत्तरी भागों में अगले दो दिन के दौरान सुबह के समय हल्के दर्जे का कोहरा छाए रहने के आसार हैं. जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में बर्फबारी हुई है. मौसम विभाग ने दिल्ली में तापमान दस डिग्री से नीचे जाने का अनुमान जताया है. आईएमडी ने बताया कि अधिकतम तापमान छब्बीस डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. आईएमडी ने बताया कि न्यूनतम तापमान शुक्रवार तक दस डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने की संभावना है. मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'जैसा क्षेत्र से पश्चिमी विक्षोभ लौट रहा है और हवा अब उत्तरपश्चिम की ओर बहने लगेगी. पहाड़ों में ताजा बर्फबारी के बाद अब वहां से ठंडी हवाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तरफ बहना शुरू करेंगी. ' जम्मू कश्मीर के रामबन में पटनीटॉप और नत्थाटॉप में बर्फ की बरसात का लुत्फ उठाने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ है. उधर, जवाहर सुरंग के आसपास बर्फबारी की वजह से जम्मू-श्रीनगर हईवे ठप हो गया है और लोगों की मुस्किलें बढ गई हैं. नवंबर के महीने में पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी कई संकेत देती है. सबसे बड़ा संकेत ये कि उत्तर भारत के मैदानी हिस्से में ठंड बढ़ने वाली है. हिमाचल में बर्फबारी की वजह से तापमान लगातार गोते लगा रहा है. कई जगहों पर पारा ने शून्य से नीचे का रुख कर लिया है. शिमला का कुफरी सफेद चादर की आगोश में है. कुल्लू, मनाली और दूसरी ऊंचाई वाली जगहों पर जमकर बर्फ की बरसात हो रही है. उत्तराखंड में यमुनोत्री से लेकर गंगोत्री तक बर्फ का कब्जा है. उत्तरकाशी में दूर दूर तक बर्फ ही बर्फ नजर आ रही है. चोपता में सीजन की बर्फबारी की खबर ने लोगों को खींचना शुरू कर दिया है. चकराता में बर्फबारी की खबर मिलते ही सैलानियों की भीड़ पहुंचने लगी है. लिहाजा कारोबारियों के चेहरे पर खुशी तैर रही है. चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम बदला और जमकर बर्फबारी हुई जिसके साथ ही जिले भर में हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी का दौर शुरू हो गया है बद्रीनाथ धाम हेमकुंड साहिब औली और गैरसैण मैं जमकर बर्फबारी होने से ठंड बढ़ गई है. भारी बर्फबारी के बाद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग हनुमान चट्टी से लेकर बद्रीनाथ धाम तक बर्फ की सफेद चादर से ढक गया. वाहन बर्फ की मोटी चादर में रेंगते नजर आए. बड़ी मुश्किल से वाहन स्वामी अपने वाहनों को बद्रीनाथ धाम से जोशीमठ की ओर निकालने की कोशिश कर रहे थे. भारी बर्फबारी के बाद तीर्थ यात्रियों को बद्रीनाथ धाम पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बर्फबारी की वजह से ठंड का जबरदस्त प्रकोप बरपा है. साथ ही बद्रीनाथ धाम हेमकुंड साहिब औली और गैरसैण मैं जमकर बर्फबारी होने से ठंड बढ़ गई है. बद्रीनाथ धाम में लगभग आधा फीट तक बर्फ जम चुकी है. बद्रीनाथ धाम में मकानों पर बर्फ, गाड़ियों में बर्फ, मंदिर परिसर के आसपास बर्फ जमा है, पैदल रास्तों पर भी बर्फ का डेरा है. हिमाचल प्रदेश के मुख्य पर्यटन स्थलों कुफरी और मनाली में सोमवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले चौबीस घंटाटों में शिमला जिले के कुफरी में सात सेंटीमीटर बर्फबारी हुई जबकि कुल्लू जिले के मनाली में दो सेमी बर्फबारी हुई. उन्होंने बताया कि सांगला में पच्चीस सेमी बर्फबारी हुई, जबकि गोंदला में बीस सेमी, खदराला में अट्ठारह सेमी, कल्पा में पाँच. छः सेमी और केलांग में चार सेमी बर्फबारी हुई. इसके अलावा, राजधानी शिमला सहित राज्य के कई अन्य क्षेत्रों में बारिश हुई. शिमला में इक्कीस. छः मिलीमीटर बारिश हुई. मौसम अधिकारी ने बताया कि आदिवासी जिले लाहौल और स्पीति के प्रशासनिक केंद्र केलांग राज्य में सबसे ठंड स्थान रहा, जहां का तापमान शून्य से तीन डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया. कुफरी का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस पर आ गया. सिंह ने बताया कि शिमला का न्यूनतम तापमान तीन. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
संस्थापक चेयरमैन प्रदीप जैन के नेतृत्व में पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड 34 सालों के अनुभव के साथ देश के अग्रणी रियल एस्टेट एवं इंफ्रास्ट्रक्टर कंपनियों में से एक बन चुका है। देश के 14 सूबों के कुल 39 शहरों में इसकी मौजूदगी है। पार्श्वनाथ समूह ने सन् 1984 में रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश किया था। प्रदीप जैन ने यह कंपनी निचले स्तर से शुरू की और इसे सिर्फ तीन दशकों में एक विशाल रूप दे दिया। यह उनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच की वजह से हुआ कि कंपनी ने भारत की तरक्की के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा और भविष्य में बहुत से ऐसे अध्याय जोड़ने की तैयारी है।
संस्थापक चेयरमैन प्रदीप जैन के नेतृत्व में पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड चौंतीस सालों के अनुभव के साथ देश के अग्रणी रियल एस्टेट एवं इंफ्रास्ट्रक्टर कंपनियों में से एक बन चुका है। देश के चौदह सूबों के कुल उनतालीस शहरों में इसकी मौजूदगी है। पार्श्वनाथ समूह ने सन् एक हज़ार नौ सौ चौरासी में रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश किया था। प्रदीप जैन ने यह कंपनी निचले स्तर से शुरू की और इसे सिर्फ तीन दशकों में एक विशाल रूप दे दिया। यह उनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच की वजह से हुआ कि कंपनी ने भारत की तरक्की के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा और भविष्य में बहुत से ऐसे अध्याय जोड़ने की तैयारी है।
Nepal: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Narwane) 3 दिन की नेपाल यात्रा पर हैं। वो नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। नरवणे नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के न्यौते पर वहां गए हैं। नई दिल्ली। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Narwane) 3 दिन की नेपाल यात्रा पर हैं। वो नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। नरवणे नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के न्यौते पर वहां गए हैं। वो ऐसे समय में जब सीमा विवाद के चलते भारत और नेपाल के संबंध अच्छे नहीं हैं। आज सुबह उन्हें नेपाल सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आज वह एक कार्यक्रम में नेपाल सेना को चिकित्सा उपकरण और सामग्री सौंपेंगे। नेपालः नेपाल सेना मुख्यालय में भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को आज सुबह गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। नेपाल से सीमा विवाद के बाद सेना भारत के आर्मी चीफ पहली बार नेपाल गए हैं। यहां, नेपाली सेना के चीफ के साथ जनरल नरवणे की मीटिंग भी होगी। नरवणे नेपाल को भारत की ओर से दवाएं और मेडिकल उपकरण देंगे। दरअसल, 2 नवंबर 2019 को भारत ने अपना नया नक्शा जारी किया था। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी और कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख इलाके को अपना इलाका बताया था। इस साल 18 मई को नेपाल ने इन तीनों इलाकों को शामिल करते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे को अपनी संसद के दोनों सदनों में पास कराया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। मई-जून में नेपाल ने भारत से सटी सीमाओं पर सैनिक बढ़ा दिए। बिहार में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सैनिकों ने कुछ भारतीयों पर फायरिंग भी की थी। तब से दोनों देशों के बीच तनाव आ गया था।
Nepal: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे तीन दिन की नेपाल यात्रा पर हैं। वो नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। नरवणे नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के न्यौते पर वहां गए हैं। नई दिल्ली। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे तीन दिन की नेपाल यात्रा पर हैं। वो नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच चुके हैं। नरवणे नेपाल के आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा के न्यौते पर वहां गए हैं। वो ऐसे समय में जब सीमा विवाद के चलते भारत और नेपाल के संबंध अच्छे नहीं हैं। आज सुबह उन्हें नेपाल सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आज वह एक कार्यक्रम में नेपाल सेना को चिकित्सा उपकरण और सामग्री सौंपेंगे। नेपालः नेपाल सेना मुख्यालय में भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को आज सुबह गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। नेपाल से सीमा विवाद के बाद सेना भारत के आर्मी चीफ पहली बार नेपाल गए हैं। यहां, नेपाली सेना के चीफ के साथ जनरल नरवणे की मीटिंग भी होगी। नरवणे नेपाल को भारत की ओर से दवाएं और मेडिकल उपकरण देंगे। दरअसल, दो नवंबर दो हज़ार उन्नीस को भारत ने अपना नया नक्शा जारी किया था। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी और कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख इलाके को अपना इलाका बताया था। इस साल अट्ठारह मई को नेपाल ने इन तीनों इलाकों को शामिल करते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे को अपनी संसद के दोनों सदनों में पास कराया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। मई-जून में नेपाल ने भारत से सटी सीमाओं पर सैनिक बढ़ा दिए। बिहार में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सैनिकों ने कुछ भारतीयों पर फायरिंग भी की थी। तब से दोनों देशों के बीच तनाव आ गया था।