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बिहार ने अपनी 12. 6% व्यस्क आबादी को टीके की पहली डोज दी है, जबकि 2. 5% आबादी को दूसरी डोज मिली है. नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस (Coronavius Pandemic) को हराने के लिए केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन स्ट्रैटजी (Covid-19 Vaccination in India) में बड़े बदलाव किए हैं. सरकार ने 31 दिसंबर 2021 तक पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने के लिए सरकार को टीकाकरण की औसत दैनिक रफ्तार पांच गुना तक बढ़ानी होगी. एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है. देश में 16 जनवरी को टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी, जो लगातार जारी है. अभी रोजाना एक करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीनेट किया जा रहा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) ने अपनी एक रिपोर्ट में 2021 तक जनसंख्या कार्यालय की अनुमानित वयस्क आबादी का आकलन किया है. इसमें उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें, तो वहां 12% से भी कम वयस्क आबादी को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है. सिर्फ 2. 5% वयस्क आबादी दूसरी डोज भी ले चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में हर दिन 1. 4 लाख डोज की औसत रफ्तार है. ऐसे में यूपी में दिसंबर तक पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने के लिए 13. 2 लाख डोज की औसत दैनिक रफ्तार से टीकाकरण अभियान को बढ़ाना होगा. ये अब तक दैनिक लक्ष्य के मुकाबले 9 गुना से भी ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में अभी के रोजाना औसत टीकाकरण से 9 गुना, बिहार में 8 गुना, तमिलनाडु, झारखंड और असम को 7 गुना तेज काम करना होगा. वहीं, महाराष्ट्र की बात करें, तो उसे 4. 5 गुना औसत रफ्तार बढ़ाने की जरूरत होगी. बिहार ने अपनी 12. 6% व्यस्क आबादी को टीके की पहली डोज दी है, जबकि 2. 5% आबादी को दूसरी डोज मिली है. वहां की वयस्क आबादी के लिहाज से देखें तो शेष समय में बाकी लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीकाकरण अभियान की दैनिक रफ्तार 8. 4 गुना बढ़ाने की जरूरत है. राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश को दैनिक औसत टीकाकरण की रफ्तार तीन से चार गुना तक बढ़ानी होगी. इन सभी राज्यों के लिए यह लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश ने अपनी वयस्क आबादी के 38. 1% को पहली डोज और 7. 9% को दूसरी डोज दे दी है. इस लिहाज से उसे दैनिक 18,000 डोज का मौजूदा औसत बढ़ाकर 41,000 करना होगा, ताकि दिसंबर तक पूरी वयस्क आबादी को वैक्सीनेट किया जा सके. जबकि, केरल की 31% वयस्क आबादी को पहली डोज लग चुकी है. 8. 1% वयस्क आबादी को दोनों डोज दी जा चुकी है. .
बिहार ने अपनी बारह. छः% व्यस्क आबादी को टीके की पहली डोज दी है, जबकि दो. पाँच% आबादी को दूसरी डोज मिली है. नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस को हराने के लिए केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन स्ट्रैटजी में बड़े बदलाव किए हैं. सरकार ने इकतीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस तक पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने के लिए सरकार को टीकाकरण की औसत दैनिक रफ्तार पांच गुना तक बढ़ानी होगी. एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है. देश में सोलह जनवरी को टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी, जो लगातार जारी है. अभी रोजाना एक करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीनेट किया जा रहा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में दो हज़ार इक्कीस तक जनसंख्या कार्यालय की अनुमानित वयस्क आबादी का आकलन किया है. इसमें उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें, तो वहां बारह% से भी कम वयस्क आबादी को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है. सिर्फ दो. पाँच% वयस्क आबादी दूसरी डोज भी ले चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में हर दिन एक. चार लाख डोज की औसत रफ्तार है. ऐसे में यूपी में दिसंबर तक पूरी आबादी को वैक्सीनेट करने के लिए तेरह. दो लाख डोज की औसत दैनिक रफ्तार से टीकाकरण अभियान को बढ़ाना होगा. ये अब तक दैनिक लक्ष्य के मुकाबले नौ गुना से भी ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में अभी के रोजाना औसत टीकाकरण से नौ गुना, बिहार में आठ गुना, तमिलनाडु, झारखंड और असम को सात गुना तेज काम करना होगा. वहीं, महाराष्ट्र की बात करें, तो उसे चार. पाँच गुना औसत रफ्तार बढ़ाने की जरूरत होगी. बिहार ने अपनी बारह. छः% व्यस्क आबादी को टीके की पहली डोज दी है, जबकि दो. पाँच% आबादी को दूसरी डोज मिली है. वहां की वयस्क आबादी के लिहाज से देखें तो शेष समय में बाकी लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीकाकरण अभियान की दैनिक रफ्तार आठ. चार गुना बढ़ाने की जरूरत है. राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश को दैनिक औसत टीकाकरण की रफ्तार तीन से चार गुना तक बढ़ानी होगी. इन सभी राज्यों के लिए यह लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश ने अपनी वयस्क आबादी के अड़तीस. एक% को पहली डोज और सात. नौ% को दूसरी डोज दे दी है. इस लिहाज से उसे दैनिक अट्ठारह,शून्य डोज का मौजूदा औसत बढ़ाकर इकतालीस,शून्य करना होगा, ताकि दिसंबर तक पूरी वयस्क आबादी को वैक्सीनेट किया जा सके. जबकि, केरल की इकतीस% वयस्क आबादी को पहली डोज लग चुकी है. आठ. एक% वयस्क आबादी को दोनों डोज दी जा चुकी है. .
छत्तीसगढ़ में राजगामी संपदा न्यास समिति को लेकर मंत्री मोहम्मद अकबर सख्त नजर आ रहें हैं। मंत्री अकबर ने न्यास के सभी खर्चों का हिसाब मांगा। इसके साथ ही अब राजगामी सम्पदा न्यास के अध्यक्ष द्वारा की गई घोषणाओं को रद्द कर दिया गया है। इस बात को लेकर मंत्री अकबर ने अफसरों की बैठक भी ली। लेकिन इस बैठक में अध्यक्ष को भी नहीं बुलाया गया था। हिसाब, पर्यावरण, परिवहन वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने राजगामी सम्पदा न्यास के अधिकारियों और सदस्यों की मीटिंग लेकर उनसे न्यास के सभी खर्चों का हिसाब मांगा तो अधिकारी भी हैरान रह गए। दरअसल मंत्री अकबर का नाम ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर की खरीदी में सामने आया तो उन्होने अधिकारियों से जानकारी मांगी। अचानक न्यास के पदाधिकारियों के खर्चों को लेकर मंत्री मोहम्मद अकबर का सक्रिय होना न्यास में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहें हैं। मंत्री अकबर में इस बैठक में न्यास को अनियनित खर्चों को लेकर नाराजगी जताई है। विभागीय अधिकारियों के साथ उन्होंने गत दिनों बैठक लेकर अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की औऱ अधिकारीयों को निर्देश दिये की न्यास के अध्यक्ष द्वारा की गई घोषणाओं को भी रद्द किया जाए। यह बैठक चर्चा का विषय बनी हुई है। क्योंकि इस बैठक में अध्यक्ष को ही नहीं बुलाया गया था। दरअसल कोरोना के दौरान राजगामी सम्पदा के कोष से 13 लाख 44 हजार की लागत से 20 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदे गए। जिन पर मंत्री अकबर की मौखिक अनुमति की बात सामने आई। जिससे मंत्री अकबर काफी नाराज हुए। आज खरीदे गए ऑक्सीजन कॉन्स्ट्रेटर कबाड़ हो चुके हैं। इसके साथ ही न्यास के अध्यक्ष द्वारा आयोजनों में न्यास के मद से घोषणाएं करनी शुरू कर दी। दरअसल बीते माह राजनांदगांव में बौद्ध महासभा के दौरान हिन्दू संगठनो और भाजपा नेताओं ने राजगामी संपदा न्यास समिति के अध्यक्ष विवेक वासनिक पर कई आरोप लगाए थे। राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें इस बैठक में नहीं बुलाया गया था, बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई। इसकी जानकारी भी नहीं है। न्यास के सभी को आपस में मिलकर अच्छे से काम करने के निर्देश मंत्री ने दिए हैं।
छत्तीसगढ़ में राजगामी संपदा न्यास समिति को लेकर मंत्री मोहम्मद अकबर सख्त नजर आ रहें हैं। मंत्री अकबर ने न्यास के सभी खर्चों का हिसाब मांगा। इसके साथ ही अब राजगामी सम्पदा न्यास के अध्यक्ष द्वारा की गई घोषणाओं को रद्द कर दिया गया है। इस बात को लेकर मंत्री अकबर ने अफसरों की बैठक भी ली। लेकिन इस बैठक में अध्यक्ष को भी नहीं बुलाया गया था। हिसाब, पर्यावरण, परिवहन वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने राजगामी सम्पदा न्यास के अधिकारियों और सदस्यों की मीटिंग लेकर उनसे न्यास के सभी खर्चों का हिसाब मांगा तो अधिकारी भी हैरान रह गए। दरअसल मंत्री अकबर का नाम ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर की खरीदी में सामने आया तो उन्होने अधिकारियों से जानकारी मांगी। अचानक न्यास के पदाधिकारियों के खर्चों को लेकर मंत्री मोहम्मद अकबर का सक्रिय होना न्यास में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहें हैं। मंत्री अकबर में इस बैठक में न्यास को अनियनित खर्चों को लेकर नाराजगी जताई है। विभागीय अधिकारियों के साथ उन्होंने गत दिनों बैठक लेकर अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की औऱ अधिकारीयों को निर्देश दिये की न्यास के अध्यक्ष द्वारा की गई घोषणाओं को भी रद्द किया जाए। यह बैठक चर्चा का विषय बनी हुई है। क्योंकि इस बैठक में अध्यक्ष को ही नहीं बुलाया गया था। दरअसल कोरोना के दौरान राजगामी सम्पदा के कोष से तेरह लाख चौंतालीस हजार की लागत से बीस ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदे गए। जिन पर मंत्री अकबर की मौखिक अनुमति की बात सामने आई। जिससे मंत्री अकबर काफी नाराज हुए। आज खरीदे गए ऑक्सीजन कॉन्स्ट्रेटर कबाड़ हो चुके हैं। इसके साथ ही न्यास के अध्यक्ष द्वारा आयोजनों में न्यास के मद से घोषणाएं करनी शुरू कर दी। दरअसल बीते माह राजनांदगांव में बौद्ध महासभा के दौरान हिन्दू संगठनो और भाजपा नेताओं ने राजगामी संपदा न्यास समिति के अध्यक्ष विवेक वासनिक पर कई आरोप लगाए थे। राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें इस बैठक में नहीं बुलाया गया था, बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई। इसकी जानकारी भी नहीं है। न्यास के सभी को आपस में मिलकर अच्छे से काम करने के निर्देश मंत्री ने दिए हैं।
Jamshedpur (Sunil Pandey) : देशभक्ति से प्रेरित संस्था नमन के तत्वावधान में गुरूवार स्वामी विवेकानंद की जयंती साकची में मनाई गई. इस अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर सरदार इंद्रजीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण के लिए स्वामी जी ने अपने विचारों से युवाओं को राष्ट्रवाद, अध्यात्म व कर्तव्यपरायणता के लिए प्रेरित किया. श्री श्री 108 संतोष महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति व भारतीय अध्यात्म परंपरा को वैश्विक क्षितिज पर पुनर्स्थापित करने वाले महान संन्यासी स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं. वहीं श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के हरिबल्लभ सिंह आरसी ने कहा कि सभी युवा अपनी ऊर्जा का सकरात्मक उपयोग कर राष्ट्र निर्माण में अपना रचनात्मक योगदान देने का संकल्प लें. जबकि विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अभय सिंह ने विवेकानंद के सिद्धांत और विचारों का चिंतन करने पर जोर दिया. इस अवसर पर काले ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि - स्वामी विवेकानंद जी ज्ञान और संकल्प की प्रतिमूर्ति थे. उन्होंने भारतवर्ष की संस्कृति और ज्ञान का डंका पूरे विश्व में बजाया. उठो, जागो और बढ़ो उनके ये वाक्य पर आज की युवा पीढ़ी को ना केवल स्वयं में समाहित करना है. बल्कि इसी विचारधारा पर केंद्रित होते हुए अपने कर्तव्य का निर्वाहन करना होगा संघर्ष के पथ में बिना रुके अपने हौसलों को पंख देते हुए बाधित शक्तियों का दृढ़ता से सामना कर अपने सपनों को सकरात्मक परिवर्तन के लिए समर्पित करना ही उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष बिनोद सिंह, सैंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक के शैलेन्द्र सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र सिंह, युपी संघ के रामकेवल मिश्रा, भाजपा महिला मोर्चा पूर्व अध्यक्ष राजपति देवी सहित अन्य वरिय महानुभावों ने अपने विचार रखा. कार्यक्रम का संचालन धनुर्धर त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन जूगुन पांडे ने किया. जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी, वरिष्ठ पत्रकार बृजभूषण सिंह, व जयप्रकाश राय, समाजसेवी शिवशंकर सिंह, डॉ सुनीता सोरेन, पूर्व आरक्षी- उपाधीक्षक कन्हैया उपाध्याय, टाटा मोटर्स वर्कर्स युनियन के अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते, महामंत्री आरके सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रवींद्र (नट्टू) झा, विमला बडोडकर, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अध्यक्ष भगवान सिंह, पूर्व सैनिक परिषद के वरुण कुमार, जितेन्द्र यादव, विनय यादव, वरिय समाजसेवी कुलविंदर सिंह पन्नू, एस जी पी सी के हरदयाल सिंह, लता सिन्हा, साकची गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के उपाध्यक्ष राजू मारवाह, भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष नीरू सिंह, जंबो अखाड़ा के बंटी सिंह, जोगिंदर सिंह जोगी, सुखविंदर सिंह निक्कू, कराटे एसोसिएशन के सरजू राम, पी एन पांडे, बिपिन झा, राजेश सिंह बम, बलबीर मंडल सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं युवा उपस्थित थे.
Jamshedpur : देशभक्ति से प्रेरित संस्था नमन के तत्वावधान में गुरूवार स्वामी विवेकानंद की जयंती साकची में मनाई गई. इस अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर सरदार इंद्रजीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण के लिए स्वामी जी ने अपने विचारों से युवाओं को राष्ट्रवाद, अध्यात्म व कर्तव्यपरायणता के लिए प्रेरित किया. श्री श्री एक सौ आठ संतोष महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति व भारतीय अध्यात्म परंपरा को वैश्विक क्षितिज पर पुनर्स्थापित करने वाले महान संन्यासी स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं. वहीं श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के हरिबल्लभ सिंह आरसी ने कहा कि सभी युवा अपनी ऊर्जा का सकरात्मक उपयोग कर राष्ट्र निर्माण में अपना रचनात्मक योगदान देने का संकल्प लें. जबकि विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अभय सिंह ने विवेकानंद के सिद्धांत और विचारों का चिंतन करने पर जोर दिया. इस अवसर पर काले ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि - स्वामी विवेकानंद जी ज्ञान और संकल्प की प्रतिमूर्ति थे. उन्होंने भारतवर्ष की संस्कृति और ज्ञान का डंका पूरे विश्व में बजाया. उठो, जागो और बढ़ो उनके ये वाक्य पर आज की युवा पीढ़ी को ना केवल स्वयं में समाहित करना है. बल्कि इसी विचारधारा पर केंद्रित होते हुए अपने कर्तव्य का निर्वाहन करना होगा संघर्ष के पथ में बिना रुके अपने हौसलों को पंख देते हुए बाधित शक्तियों का दृढ़ता से सामना कर अपने सपनों को सकरात्मक परिवर्तन के लिए समर्पित करना ही उन्हें अपनी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष बिनोद सिंह, सैंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक के शैलेन्द्र सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र सिंह, युपी संघ के रामकेवल मिश्रा, भाजपा महिला मोर्चा पूर्व अध्यक्ष राजपति देवी सहित अन्य वरिय महानुभावों ने अपने विचार रखा. कार्यक्रम का संचालन धनुर्धर त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन जूगुन पांडे ने किया. जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी, वरिष्ठ पत्रकार बृजभूषण सिंह, व जयप्रकाश राय, समाजसेवी शिवशंकर सिंह, डॉ सुनीता सोरेन, पूर्व आरक्षी- उपाधीक्षक कन्हैया उपाध्याय, टाटा मोटर्स वर्कर्स युनियन के अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते, महामंत्री आरके सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रवींद्र झा, विमला बडोडकर, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अध्यक्ष भगवान सिंह, पूर्व सैनिक परिषद के वरुण कुमार, जितेन्द्र यादव, विनय यादव, वरिय समाजसेवी कुलविंदर सिंह पन्नू, एस जी पी सी के हरदयाल सिंह, लता सिन्हा, साकची गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के उपाध्यक्ष राजू मारवाह, भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष नीरू सिंह, जंबो अखाड़ा के बंटी सिंह, जोगिंदर सिंह जोगी, सुखविंदर सिंह निक्कू, कराटे एसोसिएशन के सरजू राम, पी एन पांडे, बिपिन झा, राजेश सिंह बम, बलबीर मंडल सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं युवा उपस्थित थे.
(१) केवली णं भंते ! इमं रयणप्पमं पुढवीं रयणप्पभापुढवीति जागड़ पासइ ? हंता जागड़ पासड़ । (२) जहा णं भंते ! केवली इमं रयणप्पभं पुढवीं रयणप्पभापुढवीति जागड़ पासइ तहा णं सिद्धे वि इमं रयप्पमं पुढवीं रयणप्पभा पुढवीति जागइ पासइ ? हंता, जाखड़ पासइ । (३) केवली णं भंते ! सकरप्पभ्रं पुढवीं सकरप्पभा पुढचीति जागइ पासइ ? एवं चेव, एवं (४) केवली णं भंते ! सोहम्मं कप्पं सोहम्मकप्पेत्ति जागइ पासइ ? हंता, जागइ पासइ, एवं चेव, एवं ईसाणं एवं जाव अच्चुर्य । (५) केवली गं भंते ! गेविज्ज विमाणे गेविज्जविमाणेत्ति जोगइ पासइ ? हंता, एवं चेव, एवं ऋणुत्तरविमाणे वि । (६) केवली गं भंते ! ईसिपन्भारं पुढवीं ईसिपन्भारापुढवी ति जागइ, पासइ? एवं चेव । (७) केवली णं भंते ! परमाणुपोग्गलं परमाणुपोग्गलेत्ति जाणइ पासइ ? एवं चेव; एवं दुपएसियं संवं, एवं जाव धिं । (८) जहा णं भंते ! केवणंत. पएसिए संवेत्ति जाणइ पास तहां णं सिद्धे विसियं जाव जागइ पासइ ? हंता जागइ पासइ । भगवती सूत्र शतक १४/१० अर्थ - (१) प्रश्न भगवन् ! क्या केवलीज्ञानी रत्नप्रभा पृथ्वी को 'यह रत्नप्रभा पृथ्वो है।' ऐसा जानते देखते है ? उत्तर - हॉ, गौतम ! जानते देखते हैं । (२) प्रश्न - भगवन् ! जिस प्रकार केवलज्ञानी रत्नप्रभा को 'यह रत्नप्रभो पृथ्वी है' इस तरह जानते देखते है, क्या इसी प्रकार सिद्ध भगवान् भो रत्नप्रभा पृथ्वी को 'यह रत्नप्रभा पृथ्वी है' इस तरह जानते देखते हैं । उत्तर - हाँ, गौतम ! जानते देखते है । (३) प्रश्न - भगवन् ! क्या केवलज्ञानी शर्कर प्रभा पृथ्वी को 'यह शर्करप्रभा पृथ्वी है' इस प्रकार जानते देखते हैं ? हाँ, गौतम ! जानते देखते है। इसी प्रकार तमस्तमः प्रभा नामक सातवीं नरक पृथ्वी तक कह देना चाहिए । इसी प्रकार सिद्ध भगवान् भी जानते देखते है । यह कह देना चाहिए । (४) प्रश्न - भगवन् ! क्या केवलज्ञानी सौधर्मकल्प नामक पहले देवलोक को 'यह सौधर्मकल्प है' इस तरह जानते देखते है ? हाँ, गौतम ! जानते देखते है। इसी प्रकार ईशानकल्प नामक दूसरे देवलोक से लेकर अच्युतकल्प नामक बारहवें देवलोक तक कह देना चाहिए । इसी प्रकार सिद्ध भगवान् के लिए भी कह देना चाहिये ।।
केवली णं भंते ! इमं रयणप्पमं पुढवीं रयणप्पभापुढवीति जागड़ पासइ ? हंता जागड़ पासड़ । जहा णं भंते ! केवली इमं रयणप्पभं पुढवीं रयणप्पभापुढवीति जागड़ पासइ तहा णं सिद्धे वि इमं रयप्पमं पुढवीं रयणप्पभा पुढवीति जागइ पासइ ? हंता, जाखड़ पासइ । केवली णं भंते ! सकरप्पभ्रं पुढवीं सकरप्पभा पुढचीति जागइ पासइ ? एवं चेव, एवं केवली णं भंते ! सोहम्मं कप्पं सोहम्मकप्पेत्ति जागइ पासइ ? हंता, जागइ पासइ, एवं चेव, एवं ईसाणं एवं जाव अच्चुर्य । केवली गं भंते ! गेविज्ज विमाणे गेविज्जविमाणेत्ति जोगइ पासइ ? हंता, एवं चेव, एवं ऋणुत्तरविमाणे वि । केवली गं भंते ! ईसिपन्भारं पुढवीं ईसिपन्भारापुढवी ति जागइ, पासइ? एवं चेव । केवली णं भंते ! परमाणुपोग्गलं परमाणुपोग्गलेत्ति जाणइ पासइ ? एवं चेव; एवं दुपएसियं संवं, एवं जाव धिं । जहा णं भंते ! केवणंत. पएसिए संवेत्ति जाणइ पास तहां णं सिद्धे विसियं जाव जागइ पासइ ? हंता जागइ पासइ । भगवती सूत्र शतक चौदह/दस अर्थ - प्रश्न भगवन् ! क्या केवलीज्ञानी रत्नप्रभा पृथ्वी को 'यह रत्नप्रभा पृथ्वो है।' ऐसा जानते देखते है ? उत्तर - हॉ, गौतम ! जानते देखते हैं । प्रश्न - भगवन् ! जिस प्रकार केवलज्ञानी रत्नप्रभा को 'यह रत्नप्रभो पृथ्वी है' इस तरह जानते देखते है, क्या इसी प्रकार सिद्ध भगवान् भो रत्नप्रभा पृथ्वी को 'यह रत्नप्रभा पृथ्वी है' इस तरह जानते देखते हैं । उत्तर - हाँ, गौतम ! जानते देखते है । प्रश्न - भगवन् ! क्या केवलज्ञानी शर्कर प्रभा पृथ्वी को 'यह शर्करप्रभा पृथ्वी है' इस प्रकार जानते देखते हैं ? हाँ, गौतम ! जानते देखते है। इसी प्रकार तमस्तमः प्रभा नामक सातवीं नरक पृथ्वी तक कह देना चाहिए । इसी प्रकार सिद्ध भगवान् भी जानते देखते है । यह कह देना चाहिए । प्रश्न - भगवन् ! क्या केवलज्ञानी सौधर्मकल्प नामक पहले देवलोक को 'यह सौधर्मकल्प है' इस तरह जानते देखते है ? हाँ, गौतम ! जानते देखते है। इसी प्रकार ईशानकल्प नामक दूसरे देवलोक से लेकर अच्युतकल्प नामक बारहवें देवलोक तक कह देना चाहिए । इसी प्रकार सिद्ध भगवान् के लिए भी कह देना चाहिये ।।
इन छुट्टियों के दिनों में आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ लोनार झील की सैर कर सकते हैं, आपको बता दें कि ये झील करीब 52 हजार साल पहले उल्कापिंड गिरने से बनी थी, इतना ही नहीं बल्कि यह झील इतनी सुंदर है कि इसे देखते ही पर्यटक इस झील के दीवाने हो जाते है। इसके आलावा भी इस झील से बनी और भी कहीं खास बातें है जो आज हम आपको बताने जा रहे है। आपको बता दें कि लोनार झील को देखने के लिए देशभर से पर्यटक आते हैं। प्राकृतिक सुंदर से परिपूर्ण यह झील महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित है। जी हां लोनार झील मुंबई से करीब 483 किमी और औरंगाबाद शहर से 148 किमी की दूरी पर है। इस झील की ऊंचाई करीब 1850 फीट है। इस झील का निर्माण प्लेइस्टोसिन युग में उल्कापिंड गिरने से हुआ था। बाद में यह गड्ढानुमा झील में तब्दील हो गई। इस झील का व्यास लगभग 4000 फीट है और गहराई लगभग 450 फीट है। इसे देखना वास्तव में बेहद अच्छा अनुभव है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस खूबसूरत झील की खोज एक ब्रिटिश अधिकारी ने की थी। बता दें कि यह अंडाकार झील पृथ्वी पर एक धूमकेतु के टकराने से बनी थी। इस झील को लेकर कहा जाता है कि कई पौराणिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र मिलता है। जी हां ऋग्वेद और स्कंद पुराण में इस झील का जिक्र मिलने की बात कही जाती है। इसके बारे में कहा जाता है कि पद्म पुराण और आईन-ए-अकबरी में भी लोनार झील का जिक्र किया गया है, इस झील का इतिहास बेहद खास और रोचक है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ साल पहले पानी के रंग बदलने की वजह से भी यह लोनार झील सुर्ख़ियों में आई थी। बता दें कि उस वक्त इस झील का पानी लाल हो गया था जिसे लोग चमत्कार मान रहे थे, हालांकि बाद में वैज्ञानिकों के शोध में पता चला कि यहां के पानी में हालोआर्चिया नामक जीवाणु बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जिस कारण इसका पानी लाल हुआ है, तो अगर आप भी घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो कई खास कहानियों से भरी खूबसूरत लोनार झील देखने जा सकते है।
इन छुट्टियों के दिनों में आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ लोनार झील की सैर कर सकते हैं, आपको बता दें कि ये झील करीब बावन हजार साल पहले उल्कापिंड गिरने से बनी थी, इतना ही नहीं बल्कि यह झील इतनी सुंदर है कि इसे देखते ही पर्यटक इस झील के दीवाने हो जाते है। इसके आलावा भी इस झील से बनी और भी कहीं खास बातें है जो आज हम आपको बताने जा रहे है। आपको बता दें कि लोनार झील को देखने के लिए देशभर से पर्यटक आते हैं। प्राकृतिक सुंदर से परिपूर्ण यह झील महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित है। जी हां लोनार झील मुंबई से करीब चार सौ तिरासी किमी और औरंगाबाद शहर से एक सौ अड़तालीस किमी की दूरी पर है। इस झील की ऊंचाई करीब एक हज़ार आठ सौ पचास फीट है। इस झील का निर्माण प्लेइस्टोसिन युग में उल्कापिंड गिरने से हुआ था। बाद में यह गड्ढानुमा झील में तब्दील हो गई। इस झील का व्यास लगभग चार हज़ार फीट है और गहराई लगभग चार सौ पचास फीट है। इसे देखना वास्तव में बेहद अच्छा अनुभव है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस खूबसूरत झील की खोज एक ब्रिटिश अधिकारी ने की थी। बता दें कि यह अंडाकार झील पृथ्वी पर एक धूमकेतु के टकराने से बनी थी। इस झील को लेकर कहा जाता है कि कई पौराणिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र मिलता है। जी हां ऋग्वेद और स्कंद पुराण में इस झील का जिक्र मिलने की बात कही जाती है। इसके बारे में कहा जाता है कि पद्म पुराण और आईन-ए-अकबरी में भी लोनार झील का जिक्र किया गया है, इस झील का इतिहास बेहद खास और रोचक है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ साल पहले पानी के रंग बदलने की वजह से भी यह लोनार झील सुर्ख़ियों में आई थी। बता दें कि उस वक्त इस झील का पानी लाल हो गया था जिसे लोग चमत्कार मान रहे थे, हालांकि बाद में वैज्ञानिकों के शोध में पता चला कि यहां के पानी में हालोआर्चिया नामक जीवाणु बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जिस कारण इसका पानी लाल हुआ है, तो अगर आप भी घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो कई खास कहानियों से भरी खूबसूरत लोनार झील देखने जा सकते है।
सिहुंता - तहसील मुख्यालय के मेन बाजार में रामलीला के स्टेज निर्माण के दौरान एक व्यक्ति की अनियंत्रित होकर जमीन पर गिरने से मौत हो गई। मृतक की पहचान गगन सिंह पुत्र नारायण सिंह के तौर पर की गई है। पुलिस ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समोट में शव का पोस्टमार्टम करवाने के उपरांत परिजनों को सौंप दिया। उपमंडलीय प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को दस हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। जानकारी के अनुसार सिहंुता का गगन सिंह सोमवार शाम बाजार में रामलीला के स्टेज निर्माण कार्य में जुटा हुआ था। इसी दौरान अचानक गगन सिंह के अचानक संतुलन खो देने से वह धड़ाम से जमीन पर आ गिरा, जिससे उसके सिर पर गहरी चोट आई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे वाहन में डालकर उपचार के लिए समोट लाया, जहां उपचार के दौरान गगन सिंह की मौत हो गई। बाद में घटना की सूचना पाते ही सिहंुता पुलिस चौकी से टीम ने समोट पहंुचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। मंगलवार को पुलिस ने परिजनों व गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया निपटाई। पुलिस ने आरंभिक जांच के आधार पर इस संदर्भ में सीआरपीसी की धारा-174 के तहत कार्रवाई अमल में लाई है। मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। उधर, एसपी चंबा डा. मोनिका भुटुंगरू ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरंभिक जांच में घटना एक हादसा आंकी गई है। फिलहाल घटना को लेकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई लाने के साथ रोजनामचे में इत्तला रपट डाल दी गई है।
सिहुंता - तहसील मुख्यालय के मेन बाजार में रामलीला के स्टेज निर्माण के दौरान एक व्यक्ति की अनियंत्रित होकर जमीन पर गिरने से मौत हो गई। मृतक की पहचान गगन सिंह पुत्र नारायण सिंह के तौर पर की गई है। पुलिस ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समोट में शव का पोस्टमार्टम करवाने के उपरांत परिजनों को सौंप दिया। उपमंडलीय प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को दस हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। जानकारी के अनुसार सिहंुता का गगन सिंह सोमवार शाम बाजार में रामलीला के स्टेज निर्माण कार्य में जुटा हुआ था। इसी दौरान अचानक गगन सिंह के अचानक संतुलन खो देने से वह धड़ाम से जमीन पर आ गिरा, जिससे उसके सिर पर गहरी चोट आई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे वाहन में डालकर उपचार के लिए समोट लाया, जहां उपचार के दौरान गगन सिंह की मौत हो गई। बाद में घटना की सूचना पाते ही सिहंुता पुलिस चौकी से टीम ने समोट पहंुचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। मंगलवार को पुलिस ने परिजनों व गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया निपटाई। पुलिस ने आरंभिक जांच के आधार पर इस संदर्भ में सीआरपीसी की धारा-एक सौ चौहत्तर के तहत कार्रवाई अमल में लाई है। मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। उधर, एसपी चंबा डा. मोनिका भुटुंगरू ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरंभिक जांच में घटना एक हादसा आंकी गई है। फिलहाल घटना को लेकर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई लाने के साथ रोजनामचे में इत्तला रपट डाल दी गई है।
गर्मियों के मौसम में लोग खीरे का उपयोग बहुत ज्यादा करते हैं. स्वस्थ के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है. खीरे में पाए जाने वाले कई विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट स्वस्थ को बहुत फायदा पहुंचाते हैं. इतने फायदे देखते हुए लोग गर्मी में रोज-रोज खीरा खरीद लाते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि खीरा जैसे ही सजकर प्लेट में सामने आता है और हम उसे खाते हैं तो वह कड़वा निकल जाता है. अक्सर ऐसा हो जाता है, जिसकी वजह से उसे फेंकने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होता है. आज हम आपको कुछ ऐसे ट्रिक्स बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप खीरे की कड़वाहट झट से दूर कर सकते हैं. खीरा खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लेना चाहिए . धोने के बाद उसे बिल्कुल बीच से चाकू से काट लें. खीरे के आगे और पीछे के हिस्से को हटा दें. अब खीरे को खाएं, यह कड़वा नहीं आएगा. यह तरीका काफी आसान है. खीरे की कड़वाहट दूर करने के लिए सबसे पहले दोनों तरफ से गोल-गोल काटकर साफ कर लें. अब चाकू से कटे हुए हिस्से पर आरी तिरछी कई लाइन बना दें. दोनों कटे हिस्सों को आपस में रगड़ें. जब झाग बन जाए तो आगे-पीछे से थोड़ा-थोड़ा काटकर अलग कर दें. अब आप खीरे को खा सकते हैं. इसमें कड़वाहट नहीं रहेगी. सबसे पहले खीरे के अगले और पिछले हिस्से को थोड़ा-थोड़ा काटकर उस पर नमक डाल दें. करीब दो मिनट बाद कटे हिस्से से इसे रगड़ लें. अब थोड़ा सा हिस्सा और काट लें. इसके बाद नमक वाले पानी में कुछ देर के लिए रख दें. इससे कड़वापन दूर हो जाएगा और आप मजे से इसे खा सकेंगे.
गर्मियों के मौसम में लोग खीरे का उपयोग बहुत ज्यादा करते हैं. स्वस्थ के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है. खीरे में पाए जाने वाले कई विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट स्वस्थ को बहुत फायदा पहुंचाते हैं. इतने फायदे देखते हुए लोग गर्मी में रोज-रोज खीरा खरीद लाते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि खीरा जैसे ही सजकर प्लेट में सामने आता है और हम उसे खाते हैं तो वह कड़वा निकल जाता है. अक्सर ऐसा हो जाता है, जिसकी वजह से उसे फेंकने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होता है. आज हम आपको कुछ ऐसे ट्रिक्स बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप खीरे की कड़वाहट झट से दूर कर सकते हैं. खीरा खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लेना चाहिए . धोने के बाद उसे बिल्कुल बीच से चाकू से काट लें. खीरे के आगे और पीछे के हिस्से को हटा दें. अब खीरे को खाएं, यह कड़वा नहीं आएगा. यह तरीका काफी आसान है. खीरे की कड़वाहट दूर करने के लिए सबसे पहले दोनों तरफ से गोल-गोल काटकर साफ कर लें. अब चाकू से कटे हुए हिस्से पर आरी तिरछी कई लाइन बना दें. दोनों कटे हिस्सों को आपस में रगड़ें. जब झाग बन जाए तो आगे-पीछे से थोड़ा-थोड़ा काटकर अलग कर दें. अब आप खीरे को खा सकते हैं. इसमें कड़वाहट नहीं रहेगी. सबसे पहले खीरे के अगले और पिछले हिस्से को थोड़ा-थोड़ा काटकर उस पर नमक डाल दें. करीब दो मिनट बाद कटे हिस्से से इसे रगड़ लें. अब थोड़ा सा हिस्सा और काट लें. इसके बाद नमक वाले पानी में कुछ देर के लिए रख दें. इससे कड़वापन दूर हो जाएगा और आप मजे से इसे खा सकेंगे.
Asus की ओर से इसका लेटेस्ट Smart Phone Asus Zenfone 10 लॉन्च के लिए तैयार है. यह टेलीफोन 29 जून को बाजार में लॉन्च होने वाला है. Asus Zenfone 10 के बारे में अभी तक जो जानकारी मौजूद है, उसके अनुसार इसमें 5. 9 इंच का OLED डिस्प्ले पैनल देखने को मिलने वाला है. इसमें 120Hz रिफ्रेश दर दिया जाएगा. टेलीफोन Qualcomm Snapdragon 8 Gen 2 से लैस होगा. इसमें 5000एमएएच की बड़ी बैटरी होगी जिसके साथ 67W फास्ट चार्ज सपोर्ट में होगा. टेलीफोन का एक और खास फीचर इसका कैमरा है. Asus Zenfone 10 में 200MP कैमरा दिया जा रहा है. यह इसका प्राइमरी लेंस होगा. इसके अतिरिक्त डिवाइस में 3. 5mm हेडफोन जैक भी उपस्थित होगा, जो आजकल लॉन्च हो रहे स्मार्टफोन्स में बहुत कम देखने को मिलता है. टेलीफोन को IP68 दर किया गया है, ऐसी जानकारी है. यह मेटल फ्रेम के साथ रियर में प्लास्टिक बिल्ड के साथ बताया गया है. कलर ऑप्शन रेड, ब्लैक, ग्रे, ग्रीन और व्हाइट के साथ आ सकते हैं. जून 2023 के लेटेस्ट Smart Phone (latest smartphone June 2023) में एक और नाम Vivo X90s का जुड़ने वाला है. यह Smart Phone 26 जून को चीन में दस्तक दे रहा है. इसे Vivo X90 का ही एक वेरिएंट बताया जा रहा है. दोनों में सिर्फ चिपसेट अलग मिलने वाला है. Vivo X90s में Dimesity 9200 Plus चिपसेट होने की बात सामने आई है. जिसके कारण इसकी परफॉर्मेंस Vivo X90 से कुछ मामलों में बेहतर पाई जा सकती है. Vivo X90s में 6. 78 इंच का कर्व्ड डिस्प्ले मिल सकता है जिसमें 120Hz का रिफ्रेश दर हो सकता है. टेलीफोन में ट्रिपल कैमरा सेटअप में 50 मेगापिक्सल का मेन लेंस, 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा और 12 मेगापिक्सल का ही टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है. टेलीफोन में स्टीरियो स्पीकर और 120W फास्ट चार्ज सपोर्ट भी बताया गया है. नए स्मार्टफोन्स और अन्य गैजेट्स की लेटेस्ट जानकारी के लिए गैजेट्स 360 के साथ जुड़े रहें.
Asus की ओर से इसका लेटेस्ट Smart Phone Asus Zenfone दस लॉन्च के लिए तैयार है. यह टेलीफोन उनतीस जून को बाजार में लॉन्च होने वाला है. Asus Zenfone दस के बारे में अभी तक जो जानकारी मौजूद है, उसके अनुसार इसमें पाँच. नौ इंच का OLED डिस्प्ले पैनल देखने को मिलने वाला है. इसमें एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश दर दिया जाएगा. टेलीफोन Qualcomm Snapdragon आठ Gen दो से लैस होगा. इसमें पाँच हज़ारएमएएच की बड़ी बैटरी होगी जिसके साथ सरसठ वाट फास्ट चार्ज सपोर्ट में होगा. टेलीफोन का एक और खास फीचर इसका कैमरा है. Asus Zenfone दस में दो सौMP कैमरा दिया जा रहा है. यह इसका प्राइमरी लेंस होगा. इसके अतिरिक्त डिवाइस में तीन. पाँच मिलीमीटर हेडफोन जैक भी उपस्थित होगा, जो आजकल लॉन्च हो रहे स्मार्टफोन्स में बहुत कम देखने को मिलता है. टेलीफोन को IPअड़सठ दर किया गया है, ऐसी जानकारी है. यह मेटल फ्रेम के साथ रियर में प्लास्टिक बिल्ड के साथ बताया गया है. कलर ऑप्शन रेड, ब्लैक, ग्रे, ग्रीन और व्हाइट के साथ आ सकते हैं. जून दो हज़ार तेईस के लेटेस्ट Smart Phone में एक और नाम Vivo Xनब्बे सेकंड का जुड़ने वाला है. यह Smart Phone छब्बीस जून को चीन में दस्तक दे रहा है. इसे Vivo Xनब्बे का ही एक वेरिएंट बताया जा रहा है. दोनों में सिर्फ चिपसेट अलग मिलने वाला है. Vivo Xनब्बे सेकंड में Dimesity नौ हज़ार दो सौ Plus चिपसेट होने की बात सामने आई है. जिसके कारण इसकी परफॉर्मेंस Vivo Xनब्बे से कुछ मामलों में बेहतर पाई जा सकती है. Vivo Xनब्बे सेकंड में छः. अठहत्तर इंच का कर्व्ड डिस्प्ले मिल सकता है जिसमें एक सौ बीस हर्ट्ज़ का रिफ्रेश दर हो सकता है. टेलीफोन में ट्रिपल कैमरा सेटअप में पचास मेगापिक्सल का मेन लेंस, बारह मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा और बारह मेगापिक्सल का ही टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है. टेलीफोन में स्टीरियो स्पीकर और एक सौ बीस वाट फास्ट चार्ज सपोर्ट भी बताया गया है. नए स्मार्टफोन्स और अन्य गैजेट्स की लेटेस्ट जानकारी के लिए गैजेट्स तीन सौ साठ के साथ जुड़े रहें.
वर्धते, अस्ति, विपरिणमते, अपक्षीयते, विनश्यति' - ये छः विकार होते हैं, उनकी पूर्ण स्वतन्त्रता कमी कैसे हो सकती है। पड्भावविकारवर्जित कूटस्थ आत्मा ही सर्वथा स्वतन्त्र है, फिर भी आपेक्षिक स्वतन्त्रता तो रज्जुमुक्तः गोवत्सादिकी भी स्वतन्त्रता में व्यवहृत होती है। वैसे कारागारमें वद प्राणी भी बहुत अंशों में स्वतन्त्र कहा जाता है। याँ राष्ट्र की पराधीनतासे भी प्राणी पराधीन कहा जाता है। वेदान्तकी दृष्टिसे स्थूल-सूक्ष्म-कारण-शरीरत्रयवर्जित होनेपर ही पूर्ण स्वतन्त्रताका व्यवहार होता है । कार्योंकी सुविधा के लिये श्रेणीविभाजन अनिवार्य ही है, सभीको सब कामका उत्तरदायित्व देनेसे कोई भी मुव्यवस्था नहीं बन सकती । वकील, इंजीनियर, चिकित्सक आदिसे कृषिका कार्य या मिलोंके करत्रे चलानेका काम करानेसे हानि ही है। इसीलिये प्राचीन कालमें प्रधानरूपसे ज्ञानार्जन, ज्ञानवितरणका काम ब्राह्मणोपर; बलार्जन, बलवितरण, राष्ट्ररक्षण आदिका काम क्षत्रियोंपर; कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य आदिद्वारा धनार्जन, धनवितरण आदिका काम वैश्य राष्ट्रोपयोगी विभिन्न कर्मों, शिलादि कलाओंके अर्जन, रक्षण आदिका भार शुद्रोपर डाला गया था। इससे उन उन विषयों के लोग निरन्तर विशेषता सम्पादनके लिये प्रयत्नशील रहते थे। आज भी शिल्प, चिकित्सा आदि विविध विषयोंमें विशेषज्ञता-सम्पादनके लिये 'स्पेशलिस्ट' तैयार किये जाते हैं। आज भी संग्राम लड़नेवाले सिपाही अलग होते हैं, विचारकर युद्धनीति निर्धारित करनेवाले अन्य होते हैं, वैज्ञानिक अनुसंधान करनेवाले दूसरे लोग होते हैं और अनुसंधान के फलभूत विविध यन्त्रोंके निर्माण तथा संचालन करनेवाले दूसरे लोग हुआ करते हैं। जैसे कोई अपने शारीरिक वलसे लाभ उठाता है, वैसे ही बौद्ध-बलसे फायदा उठानेका बुद्धिजीवियोंका अधिकार है ही। व्यावहारिक भौतिक जगत्मे कारणविहीन निरपेक्ष स्वतन्त्रता तो अध्यात्मवादी कभी नहीं मानते, इसके लिये विज्ञानकी खोज व्यर्थ है; किंतु सापेक्ष सकारण होनेपर भी इच्छा तथा कर्मोकी स्वतन्त्रता अवश्य मान्य है जिससे इच्छानुसार कर्तापर उत्तरदायित्व होता है और अपनी इच्छाओं तथा कर्मोंके सुपरिणाम दुष्परिणामको वह भोगता है। जहाँतक किसी ढंगकी राजव्यवस्था होगी, वहॉतक अपराध एवं दण्डविधानकी भी आवश्यकता रहेगी। फिर उन उन अपराधियोंकी इच्छाके आधारपर होनेवाले अपराधका उत्तरदायित्व भी उनपर मानना पड़ेगा, तमी दण्डविधान न्यायपूर्ण कहा जा सकेगा। ऐसी स्थितिमे इच्छाओं एवं कर्मोमें स्वतन्त्रता स्वीकार किये बिना निग्रहानुग्रहकी कोई भी व्यवस्था नहीं चलेगी। सभी लोग परिस्थितिके ही जिम्मे सच दोष डालकर बरी हो जानेका प्रयत्न करेंगे । द्वन्द्व न्याय और अन्तिम सत्य कहा जाता है इन्द्रमान किसी भी अन्तिम सत्यको नहीं मानता) इसके विपरीत आदर्शवादी दर्शन हर समय एक अन्तिम सत्यकी खोज करता रहता है । यह सत्य अनादि अनन्त और निर्विकार है; लेकिन इन्द्वात्मक भौतिकवाद इस परिवर्तनशील जगन्में अपरिवर्तनीय सत्यकी खोज नहीं करता । इस दृष्टिकोणकी कहीं अन्तिम समाप्ति नहीं है भूत-जगत् निरन्तर प्रवहमान है, कहीं विराम नहीं। हम व्यावहारिक सुविधा की दृष्टिसे और प्रकृतिको विचारपद्ध करनेकी दृष्टिमे वस्तुजगत्की किसी एक दिशाकी विशेषताओको अलग कर लेते हैं, लेकिन सनातन युक्तिका अनुसरणकर इनको अपरिवर्तनीय नहीं मानते। परमाणु गतिशील तरङ्गको तरह है, लेकिन यह केवल वस्तु जगत्के एक विशेष क्षेत्रके लिने ही सत्य है । दूसरे जगत्मे यही ठोस पदार्थका आकार ग्रहण करता है। चेतन और अचेतन पदार्थको हम पृथकरूप में देखते है और इस पार्थक्यकी आपेक्षिकताको भी देते है। चेतन पदार्थ के बीच भी अचेतन पदार्थका उपादान है। भूत-जगत् के अन्तर्निदित विरोधी गुण ही कभी चेतन और कभी अचेतन पदार्थकी सृष्टि करते हैं। एक अवस्था में परमाणु अविभाज्य और मौलिक दीखता है और फिर यही अपनी शक्ति से टूटकर नये परमाणुको जन्म देता है। पञ्चेन्द्रिय की क्षमताकी सीमाको हम देखते हैं, पुनः ये ही यन्त्रकी सहायता से अवश्यको दृश्यमान करते हैं । 'इनफरारेड' फोटो प्लेटमें बहरेके भीतरमे १५, २० मील दूरकी तम्वीर उतर जाती है। 'वस्तु-जगइके गतिववाद में कोई विराम नहीं है। एक ही वस्तुरी विरोधी शक्ति उसको एक जगइसे दूसरी जगह ले जाती है, कणिकासे तरङ्ग और अवेतनमें सचेतन हो रही है। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद इसी प्रकार वैज्ञानिक परीक्षा के क्षेत्र में प्रमाणित हो रहा है। 'बन्धी पगडण्डीपर चलनेपाटे बुर्जुमा, बुद्धिजीवी अवशाके साथ कहते हैं कि के सिद्धान्त तो रोज बदलते रहते हैं, उनी सत्यता कहाँ ? नासिकामर दृष्टि स्थिर पर जो योगदमे सत्र बुछ जान लेते हैं, उनके सिद्धान्त नहीं बदलते; क्योंकि उन्होंने तो अन्तिम सत्र अधिकार जमा लिया है, लेकिन वैज्ञानिक सिद्धान्त तो बदलते रहते हैं। व्यवहार में इन सिद्धान्तोको जाँच होती रहती है और यहींपर वैज्ञानिक सिद्धान्तकी सार्थकता है।" अध्यात्मवाद भौतिक पदार्थों की सत्यनाके अनेक तारतम्य हो सकते हैं। परंतु भौतिक प्रायस आधारभूत स्वप्रकाश चेतन अम्मा तो परमार्थ मुख्य ही है । अत्यन्ताराध्यता ही पारमार्थिक सत्ता है। सर्वाधिष्ठान, समाधी, अत्यन्वाबाध्य है ही साशीविद्दीन बाथ भी सिद्ध नहीं होता । जब सर्वदाया साक्षी होना अनिवार्य है हो और उस साक्षीका कोई नहीं है?
वर्धते, अस्ति, विपरिणमते, अपक्षीयते, विनश्यति' - ये छः विकार होते हैं, उनकी पूर्ण स्वतन्त्रता कमी कैसे हो सकती है। पड्भावविकारवर्जित कूटस्थ आत्मा ही सर्वथा स्वतन्त्र है, फिर भी आपेक्षिक स्वतन्त्रता तो रज्जुमुक्तः गोवत्सादिकी भी स्वतन्त्रता में व्यवहृत होती है। वैसे कारागारमें वद प्राणी भी बहुत अंशों में स्वतन्त्र कहा जाता है। याँ राष्ट्र की पराधीनतासे भी प्राणी पराधीन कहा जाता है। वेदान्तकी दृष्टिसे स्थूल-सूक्ष्म-कारण-शरीरत्रयवर्जित होनेपर ही पूर्ण स्वतन्त्रताका व्यवहार होता है । कार्योंकी सुविधा के लिये श्रेणीविभाजन अनिवार्य ही है, सभीको सब कामका उत्तरदायित्व देनेसे कोई भी मुव्यवस्था नहीं बन सकती । वकील, इंजीनियर, चिकित्सक आदिसे कृषिका कार्य या मिलोंके करत्रे चलानेका काम करानेसे हानि ही है। इसीलिये प्राचीन कालमें प्रधानरूपसे ज्ञानार्जन, ज्ञानवितरणका काम ब्राह्मणोपर; बलार्जन, बलवितरण, राष्ट्ररक्षण आदिका काम क्षत्रियोंपर; कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य आदिद्वारा धनार्जन, धनवितरण आदिका काम वैश्य राष्ट्रोपयोगी विभिन्न कर्मों, शिलादि कलाओंके अर्जन, रक्षण आदिका भार शुद्रोपर डाला गया था। इससे उन उन विषयों के लोग निरन्तर विशेषता सम्पादनके लिये प्रयत्नशील रहते थे। आज भी शिल्प, चिकित्सा आदि विविध विषयोंमें विशेषज्ञता-सम्पादनके लिये 'स्पेशलिस्ट' तैयार किये जाते हैं। आज भी संग्राम लड़नेवाले सिपाही अलग होते हैं, विचारकर युद्धनीति निर्धारित करनेवाले अन्य होते हैं, वैज्ञानिक अनुसंधान करनेवाले दूसरे लोग होते हैं और अनुसंधान के फलभूत विविध यन्त्रोंके निर्माण तथा संचालन करनेवाले दूसरे लोग हुआ करते हैं। जैसे कोई अपने शारीरिक वलसे लाभ उठाता है, वैसे ही बौद्ध-बलसे फायदा उठानेका बुद्धिजीवियोंका अधिकार है ही। व्यावहारिक भौतिक जगत्मे कारणविहीन निरपेक्ष स्वतन्त्रता तो अध्यात्मवादी कभी नहीं मानते, इसके लिये विज्ञानकी खोज व्यर्थ है; किंतु सापेक्ष सकारण होनेपर भी इच्छा तथा कर्मोकी स्वतन्त्रता अवश्य मान्य है जिससे इच्छानुसार कर्तापर उत्तरदायित्व होता है और अपनी इच्छाओं तथा कर्मोंके सुपरिणाम दुष्परिणामको वह भोगता है। जहाँतक किसी ढंगकी राजव्यवस्था होगी, वहॉतक अपराध एवं दण्डविधानकी भी आवश्यकता रहेगी। फिर उन उन अपराधियोंकी इच्छाके आधारपर होनेवाले अपराधका उत्तरदायित्व भी उनपर मानना पड़ेगा, तमी दण्डविधान न्यायपूर्ण कहा जा सकेगा। ऐसी स्थितिमे इच्छाओं एवं कर्मोमें स्वतन्त्रता स्वीकार किये बिना निग्रहानुग्रहकी कोई भी व्यवस्था नहीं चलेगी। सभी लोग परिस्थितिके ही जिम्मे सच दोष डालकर बरी हो जानेका प्रयत्न करेंगे । द्वन्द्व न्याय और अन्तिम सत्य कहा जाता है इन्द्रमान किसी भी अन्तिम सत्यको नहीं मानता) इसके विपरीत आदर्शवादी दर्शन हर समय एक अन्तिम सत्यकी खोज करता रहता है । यह सत्य अनादि अनन्त और निर्विकार है; लेकिन इन्द्वात्मक भौतिकवाद इस परिवर्तनशील जगन्में अपरिवर्तनीय सत्यकी खोज नहीं करता । इस दृष्टिकोणकी कहीं अन्तिम समाप्ति नहीं है भूत-जगत् निरन्तर प्रवहमान है, कहीं विराम नहीं। हम व्यावहारिक सुविधा की दृष्टिसे और प्रकृतिको विचारपद्ध करनेकी दृष्टिमे वस्तुजगत्की किसी एक दिशाकी विशेषताओको अलग कर लेते हैं, लेकिन सनातन युक्तिका अनुसरणकर इनको अपरिवर्तनीय नहीं मानते। परमाणु गतिशील तरङ्गको तरह है, लेकिन यह केवल वस्तु जगत्के एक विशेष क्षेत्रके लिने ही सत्य है । दूसरे जगत्मे यही ठोस पदार्थका आकार ग्रहण करता है। चेतन और अचेतन पदार्थको हम पृथकरूप में देखते है और इस पार्थक्यकी आपेक्षिकताको भी देते है। चेतन पदार्थ के बीच भी अचेतन पदार्थका उपादान है। भूत-जगत् के अन्तर्निदित विरोधी गुण ही कभी चेतन और कभी अचेतन पदार्थकी सृष्टि करते हैं। एक अवस्था में परमाणु अविभाज्य और मौलिक दीखता है और फिर यही अपनी शक्ति से टूटकर नये परमाणुको जन्म देता है। पञ्चेन्द्रिय की क्षमताकी सीमाको हम देखते हैं, पुनः ये ही यन्त्रकी सहायता से अवश्यको दृश्यमान करते हैं । 'इनफरारेड' फोटो प्लेटमें बहरेके भीतरमे पंद्रह, बीस मील दूरकी तम्वीर उतर जाती है। 'वस्तु-जगइके गतिववाद में कोई विराम नहीं है। एक ही वस्तुरी विरोधी शक्ति उसको एक जगइसे दूसरी जगह ले जाती है, कणिकासे तरङ्ग और अवेतनमें सचेतन हो रही है। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद इसी प्रकार वैज्ञानिक परीक्षा के क्षेत्र में प्रमाणित हो रहा है। 'बन्धी पगडण्डीपर चलनेपाटे बुर्जुमा, बुद्धिजीवी अवशाके साथ कहते हैं कि के सिद्धान्त तो रोज बदलते रहते हैं, उनी सत्यता कहाँ ? नासिकामर दृष्टि स्थिर पर जो योगदमे सत्र बुछ जान लेते हैं, उनके सिद्धान्त नहीं बदलते; क्योंकि उन्होंने तो अन्तिम सत्र अधिकार जमा लिया है, लेकिन वैज्ञानिक सिद्धान्त तो बदलते रहते हैं। व्यवहार में इन सिद्धान्तोको जाँच होती रहती है और यहींपर वैज्ञानिक सिद्धान्तकी सार्थकता है।" अध्यात्मवाद भौतिक पदार्थों की सत्यनाके अनेक तारतम्य हो सकते हैं। परंतु भौतिक प्रायस आधारभूत स्वप्रकाश चेतन अम्मा तो परमार्थ मुख्य ही है । अत्यन्ताराध्यता ही पारमार्थिक सत्ता है। सर्वाधिष्ठान, समाधी, अत्यन्वाबाध्य है ही साशीविद्दीन बाथ भी सिद्ध नहीं होता । जब सर्वदाया साक्षी होना अनिवार्य है हो और उस साक्षीका कोई नहीं है?
चित्र कथा दास और वास अमरुद तोड़ने गये। एक लड़का, उनके अमरुद ले भागने के लिये, पीछे चला। दास और वास ने एक टोकरे में अमरुद रखकर, उसे पेड़ के पीछे छुपा दिया। वास ने एक टहनी से खाली टोकरा लटका दिया। और दास से, उसे पत्थर से नीचे गिराने के लिए कहा। दास ने गिरा दिया। वह जाकर "टायगर के सिर पर पड़ा। वह जब भागा, तो लड़के ने सोचा, जो टोकरा उठाने ही वाला था, कि वह कोई अजीब पशु था - और वह "अरे, अरे ! " चिल्लाता चम्पत हो गया। Printed by B. NAGI REDDI at the B. N. K. Press Private Ltd... and Published by B. VENUGOPAL REDDI for Sarada Binding Works,
चित्र कथा दास और वास अमरुद तोड़ने गये। एक लड़का, उनके अमरुद ले भागने के लिये, पीछे चला। दास और वास ने एक टोकरे में अमरुद रखकर, उसे पेड़ के पीछे छुपा दिया। वास ने एक टहनी से खाली टोकरा लटका दिया। और दास से, उसे पत्थर से नीचे गिराने के लिए कहा। दास ने गिरा दिया। वह जाकर "टायगर के सिर पर पड़ा। वह जब भागा, तो लड़के ने सोचा, जो टोकरा उठाने ही वाला था, कि वह कोई अजीब पशु था - और वह "अरे, अरे ! " चिल्लाता चम्पत हो गया। Printed by B. NAGI REDDI at the B. N. K. Press Private Ltd... and Published by B. VENUGOPAL REDDI for Sarada Binding Works,
रसायन और उर्वरक मनसुख मांडविया ने राजयसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उर्वरक सहकारी संगठन इफको ने नैनो यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए दो निजी कंपनियों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और एक इकाई ने परिचालन शुरू कर दिया है। यह पूछे जाने पर कि क्या अन्य उर्वरकों के उत्पादन में नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, मांडविया ने कहा कि कई भारतीय वैज्ञानिक और कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नैनो डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) भी तैयार किया गया है और यह अभी निरीक्षण चरण में हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में नैनो डीएपी, नैनो जिंक नैनो सल्फर आदि भी आएंगे और भारत वैश्विक उर्वरक क्षेत्र में क्रांति लाएगा। मांडविया ने कहा कि इफको किसी भी निजी कंपनी से रॉयल्टी ले कर नैनो उर्वरक के उत्पादन की अनुमति दे सकता है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को इसके लिए रॉयल्टी का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इफको ने पहले ही नैनो यूरिया के उत्पादन के लिए दो निजी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं और एक संयंत्र चालू हो गया है।
रसायन और उर्वरक मनसुख मांडविया ने राजयसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उर्वरक सहकारी संगठन इफको ने नैनो यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए दो निजी कंपनियों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और एक इकाई ने परिचालन शुरू कर दिया है। यह पूछे जाने पर कि क्या अन्य उर्वरकों के उत्पादन में नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, मांडविया ने कहा कि कई भारतीय वैज्ञानिक और कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नैनो डाई-अमोनियम फॉस्फेट भी तैयार किया गया है और यह अभी निरीक्षण चरण में हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में नैनो डीएपी, नैनो जिंक नैनो सल्फर आदि भी आएंगे और भारत वैश्विक उर्वरक क्षेत्र में क्रांति लाएगा। मांडविया ने कहा कि इफको किसी भी निजी कंपनी से रॉयल्टी ले कर नैनो उर्वरक के उत्पादन की अनुमति दे सकता है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को इसके लिए रॉयल्टी का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इफको ने पहले ही नैनो यूरिया के उत्पादन के लिए दो निजी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं और एक संयंत्र चालू हो गया है।
इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सिद्धिपुरम कॉलोनी (द्वारकापुरी) में हुई नवविवाहिता की मौत के मामले में परिजन ने ससुरालवालों पर हत्या करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को डीआईजी ऑफिस के सामने हत्या का केस दर्ज करने और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया। पीपली बाजार (धार) निवासी परिजन के मुताबिक, दीपिका पुरोहित (20) की 8 दिसंबर 2010 को मयंक शर्मा से शादी हुई थी। मयंक और दीपिका की सास हंसा व ननद शालू ने उसे दहेज के लिए सताना शुरू कर दिया। 30 अगस्त को उसकी मौत की खबर आ गई कि उसने फांसी लगा ली। पति मयंक शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। परिजन का आरोप है कि दीपिका ने 29 अगस्त की रात दादी सुमन बाई व भाई को कॉल कर बताया था कि उसके साथ मारपीट की जा रही है। दूसरे दिन ही उसकी मौत की खबर आ गई।
इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सिद्धिपुरम कॉलोनी में हुई नवविवाहिता की मौत के मामले में परिजन ने ससुरालवालों पर हत्या करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को डीआईजी ऑफिस के सामने हत्या का केस दर्ज करने और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया। पीपली बाजार निवासी परिजन के मुताबिक, दीपिका पुरोहित की आठ दिसंबर दो हज़ार दस को मयंक शर्मा से शादी हुई थी। मयंक और दीपिका की सास हंसा व ननद शालू ने उसे दहेज के लिए सताना शुरू कर दिया। तीस अगस्त को उसकी मौत की खबर आ गई कि उसने फांसी लगा ली। पति मयंक शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। परिजन का आरोप है कि दीपिका ने उनतीस अगस्त की रात दादी सुमन बाई व भाई को कॉल कर बताया था कि उसके साथ मारपीट की जा रही है। दूसरे दिन ही उसकी मौत की खबर आ गई।
सहिता-प्रन्थो के अवलोकन से यह ज्ञात होगा कि अनेक ऋषियों ने रसायन का सेवन कर 'दीर्घायु' या 'दीर्घजीवन' प्राप्त किया। दीर्घायु से युग-प्रमाणोचित आयु का ग्रहण है । ' दूसरे स्वस्थस्योर्जस्कर विधान को 'वृप्य विधान' कहते हैं। इस विधान में मनुष्य के पुस्त्व-शक्ति को परिपुष्ट एव परिवृद्ध करने के उपाय वरिंगत हैं । ससार को समृद्ध करने के लिए प्रजनन कार्य का अवाध रूप मे चलते रहना भी आवश्यक है । यह कार्ये मानव-समाज मे शुक्र और शोरिणत मे ( वीर्य तथा रज ) के ऋतुकाल मे तथा शुद्ध नगर्भाशय मे सयोग से होता है । उक्त शुक्र तथा शोणित पुरुष तथा स्त्री के प्रजननेन्द्रियों के द्वारा उक्त गर्भाशय तक पहुंचता है। शुक्र तथा शोणित का निर्माण पुरुष तथा अथवा प्रजननावयवो मे एक विशिष्ट स्थान पर होता है । पुत्रीज तथा स्त्रोवीज निर्मित होते हैं उनका भी पोपरण हमारे आहार-रस से ही होता है । यदि उनका पोषण उपर्युक्त रूप से न हो तो ये अवयव पोषरण के अभाव मे उक्त वीर्य तथा रज को बनाने में समर्थ नहीं हो सकते । अत उनका उचित रूप मे पोषरण होते रहना परमावश्यक है । प्रजननार्थ जब स्त्री-पुरुष मिथुनकर्म मे प्रवृत्त होते हैं तथा उनके परस्पर सम्पर्क में आने से काम प्रवृत्ति होती हे और उस कामोत्तेजन से सम्पूर्ण शरीर मे स्थित पोषक वीर्य ( शुक्र ) रक्त द्वारा परिवाहित होकर उक्त प्रजननावयवो मे प्राप्त होता है और वे वहाँ पुवीज तथा स्त्रीबीज से सम्पन्न होकर प्रजननेन्द्रियो द्वारा उपर्युक्त गर्भाशय-मुख मे क्षरित होते है । यहाँ इस तथ्य पर ध्यान रखना परमावश्यक है कि स्त्री-पुरुष के परस्पर सम्पर्क मात्र से हो सुरत-कर्म सम्पन्न नहीं हो जाता । इस सम्पर्क मे कामुकता तथा प्रहर्ष का होना परमावश्यक है । वृप्य विधान में यह बतलाया गया है कि किस प्रकार या किन उपायो से कामुकता तथा प्रहपं होता है। इसके अतिरिक्त क्षरित शुक्र के पूर्ति तथा पोषरण के विधान भी वरिंगत हैं । अर्थात् वृष्यविधान में शुक्रवर्धक, कामोत्तेजक, प्रहर्पजनक तथा शुक्ररेचक आहार एवं औषधो का वर्णन है । मानव समाज मे सन्तान-हीन होना मनुष्य के लिए अति अपमानजनक माना गया है। शास्त्रकारो ने सन्तान होन की बडी भर्त्सना की है । अत सन्तानवान् होना भी मानव के लिए परमावश्यक 'यथाऽमराणाममृत यथा भोगवतां सुधा । तथाऽभवन्महर्षीणा रसायनविधि. पुरा ॥ न जरा न च दौर्बल्य नातुर्य निधन न च । जग्मुर्वर्षसहस्राणि रसायनपरा. पुरा ॥"
सहिता-प्रन्थो के अवलोकन से यह ज्ञात होगा कि अनेक ऋषियों ने रसायन का सेवन कर 'दीर्घायु' या 'दीर्घजीवन' प्राप्त किया। दीर्घायु से युग-प्रमाणोचित आयु का ग्रहण है । ' दूसरे स्वस्थस्योर्जस्कर विधान को 'वृप्य विधान' कहते हैं। इस विधान में मनुष्य के पुस्त्व-शक्ति को परिपुष्ट एव परिवृद्ध करने के उपाय वरिंगत हैं । ससार को समृद्ध करने के लिए प्रजनन कार्य का अवाध रूप मे चलते रहना भी आवश्यक है । यह कार्ये मानव-समाज मे शुक्र और शोरिणत मे के ऋतुकाल मे तथा शुद्ध नगर्भाशय मे सयोग से होता है । उक्त शुक्र तथा शोणित पुरुष तथा स्त्री के प्रजननेन्द्रियों के द्वारा उक्त गर्भाशय तक पहुंचता है। शुक्र तथा शोणित का निर्माण पुरुष तथा अथवा प्रजननावयवो मे एक विशिष्ट स्थान पर होता है । पुत्रीज तथा स्त्रोवीज निर्मित होते हैं उनका भी पोपरण हमारे आहार-रस से ही होता है । यदि उनका पोषण उपर्युक्त रूप से न हो तो ये अवयव पोषरण के अभाव मे उक्त वीर्य तथा रज को बनाने में समर्थ नहीं हो सकते । अत उनका उचित रूप मे पोषरण होते रहना परमावश्यक है । प्रजननार्थ जब स्त्री-पुरुष मिथुनकर्म मे प्रवृत्त होते हैं तथा उनके परस्पर सम्पर्क में आने से काम प्रवृत्ति होती हे और उस कामोत्तेजन से सम्पूर्ण शरीर मे स्थित पोषक वीर्य रक्त द्वारा परिवाहित होकर उक्त प्रजननावयवो मे प्राप्त होता है और वे वहाँ पुवीज तथा स्त्रीबीज से सम्पन्न होकर प्रजननेन्द्रियो द्वारा उपर्युक्त गर्भाशय-मुख मे क्षरित होते है । यहाँ इस तथ्य पर ध्यान रखना परमावश्यक है कि स्त्री-पुरुष के परस्पर सम्पर्क मात्र से हो सुरत-कर्म सम्पन्न नहीं हो जाता । इस सम्पर्क मे कामुकता तथा प्रहर्ष का होना परमावश्यक है । वृप्य विधान में यह बतलाया गया है कि किस प्रकार या किन उपायो से कामुकता तथा प्रहपं होता है। इसके अतिरिक्त क्षरित शुक्र के पूर्ति तथा पोषरण के विधान भी वरिंगत हैं । अर्थात् वृष्यविधान में शुक्रवर्धक, कामोत्तेजक, प्रहर्पजनक तथा शुक्ररेचक आहार एवं औषधो का वर्णन है । मानव समाज मे सन्तान-हीन होना मनुष्य के लिए अति अपमानजनक माना गया है। शास्त्रकारो ने सन्तान होन की बडी भर्त्सना की है । अत सन्तानवान् होना भी मानव के लिए परमावश्यक 'यथाऽमराणाममृत यथा भोगवतां सुधा । तथाऽभवन्महर्षीणा रसायनविधि. पुरा ॥ न जरा न च दौर्बल्य नातुर्य निधन न च । जग्मुर्वर्षसहस्राणि रसायनपरा. पुरा ॥"
परिच्छेद १५ द्वितीय वर्ग (ख) । मैगनीसियम वर्ग मैगनीसियम, यशद, कैडमियम, मैगनीसियम सङ्केत, Mg; परमाणु-भार = २४.० उपस्थिति । मैगनीसियम मुक्तावस्था में नहीं पाया जाता । इसके पाये जाते हैं। कार्बनेट के रूप में मैगनीसाइट MgCO3 के नाम से यह पाया जाता है । डोलोमाइट कालसियम कार्बनेट और मैगनीसियम कार्बनेट MgCO3, CaCO3 का यौगिक है। इपसम लवण (MgSO4, 7H2O) के नाम से सल्फेट के रूप में पाया जाता है। स्टास्फुर्ट निःक्षेप में कारनेलाइट MgCl2, KCl6H20 मैगनीसियम क्लोराइड और पोटासियम क्लोराइड के युग्म लवण के रूप में पाया जाता है । अस्बेस्टस, टाल्क इत्यादि में मैगनीसियम, सिलिकेट के रूप में रहता 1 समुद्र के जल में मैगनीसियम क्लोराइड रहता है । समुद्र के जल से नमक निकाल लेने पर जो विलयन बच जाता है उससे २३०० टन मैगनीसियम क्लोराइड कच्छ के रान नामक स्थान में १९२१ - १९२२ ई० में प्राप्त हुआ था । गुजरात के ध्रगन्द्रा में भी पर्याप्त मैगनीसियम क्लोराइड तैयार होता है। सलेम, मद्रास और मैसूर के निकट मैगनीसाइट का निःक्षेप विद्यमान है । इतना विस्तृत होने के कारण पौधों के तन्तुओं और पशुओं की हड्डियों में चूने के लवण के साथ-साथ मैगनीसियम का लवण भी पाया जाता - मैगनीसियम प्राप्त करना । पिघले हुए मैगनीसियम क्लोराइड के विद्युत्-विच्छेदन से बुंसेन द्वारा मैगनीसियम प्राप्त हुआ था। पीछे मैगनीसियम क्लोराइड को सोडियम धातु के साथ गरम करने से मैगनीसियम धातु प्राप्त हुई थी । MgC12 + 2 Na = 2NaCl + Mg इस प्रकार से प्राप्त धातु का स्रवण के द्वारा शोधन होता है । आजकल पिघले हुए कारनेलाइट के विद्युत् विच्छेदन से मैगनीसियम - प्राप्त होता है । लोहे के पात्र में कारनेलाइट को पिघलाते हैं । लोहे का यह पात्र ऋण विद्युत्द्वार होता है। चीनी की नली में प्रविष्ट कार्बन का छड़ धन - विद्युत्द्वार होता है । इस चीनी की नली द्वारा क्लोरीन गैस बाहर निकलती है । पात्र के पैदे में मैगनीसियम इकट्ठा होता है। इसको कारनेलाइट के साथ पिघलाने से यह शोधित होता है । इसे तब ढाँचे में ढालकर ईंट में प्राप्त करते हैं । मैगनीसियम चाँदी सी श्वेत धातु है जो शुष्क वायु में धुँधली गुण । नहीं होती पर वायु और जल वाष्प से उसके ऊपर आक्साइड का चढ़ जाता है । यह कुछ घनवर्धनीय और उच्च तापक्रम पर तन्य होता और सरलता से तार या रिबन में बनाया जा सकता है 1 रक्त-ताप पर यह पिघलता है और इससे उच्च तापक्रम पर स्रवित किया जा सकता है । वायु याक्सिजन में गरम करने से तीव्र प्रकाश के साथ यह जलता है। कार्बन डायक्साइड में गरम करने पर भी यह उसमें जलता और कार्बन पृथक् हो जाता है । मैगनीसियम तप्त जल को धीरे-धीरे विच्छेदित करता है। जल वाष्प में गरम करने से मैगनीसियम जलने लगता है। है इस प्रकार जलने से मैगनीसियम आक्साइड बनता है । मैगनीसियम शीघ्रता से तनुश्रमों में विलीन होता है और इससे हाइड्रोजन निकलता है । मैगनीसियम को नाइट्रोजन में गरम करने से मैगनीसियम नाइट्राइड Mg3 N2 बनता है। मैगनीसियम के द्वारा वायु का नाइट्रोजन इस प्रकार निकालकर आर्गन और इस वर्ग के अन्य गैसों को नाइट्रोजन से पृथक् करते हैं । उच्च तापक्रम पर धातुओं के आक्साइडों को मैगनीसियम के साथ गरम करने से उन आक्साइडों के को मैगनीसियम ले लेता है और इस प्रकार वे लध्वीकृत हो जाते हैं । रीति से बोरन और सिलिकन तत्त्व प्राप्त होते हैं । तीव्र प्रकाश उत्पन्न करने के कारण मैगनीसियम प्रकाश-चिह्न के लिए और प्रातशबाज़ी में प्रयुक्त होता है । मैगनीसियम आक्साइड, MgO । मैगनीसियम को वायुया क्सिजन में जलाने से मैगनीसियम आक्साइड प्राप्त होता है। मैगनीसियम कार्बनेट या नाइट्रेट के गरम करने से भी आक्साइड प्राप्त होता है । मैगनीसियम आक्साइड जल में कुछ-कुछ विलेय होता है । यह विलयन दुर्बल चारीय होता है । जल के साथ यह ाक्साइड मैगनीसियम हाइड्राक्साइड Mg (OH) 2 बनता है। मैगनीसियम क्लोराइड के विलयन में लकली चारों या अमोनिया के डालने से मैगनीसियम हाइड्राक्साइड अवक्षिप्त हो जाता है । श्रमोनियम कोराइड की उपस्थिति में अमोनिया से अवक्षेप नहीं आता । । मैगनीसियम हाइड्राक्साइड प्रायः ऋविलेय. होता है। मैगनीशिया ( मैगनीसियम क्साइड) औषधों में, अगलनीय होने के कारण घरिया ( मूषा ) बनाने में, भट्टियों में टिपकारी करने में और अग्निजित ईंटों के बनाने में प्रयुक्त होता है । ड्रमोंड प्रकाश में, पेंसिल के रूप में यह काम आता मैगनीसियम कार्बनेट, MgCO3 । मैगनीसाइट के नाम से मैगनीसियम कार्बनेट प्रकृति में पाया जाता है । मैगनीसियम लवण के विलयन में सोडियम कार्बनेट के विलयन से सामान्य लवण नहीं प्राप्त होता बल्कि भास्मिक लवण वक्षिप्त होता है । इस भास्मिक लवण का संगठन तापप्रतिकारकों के समाहरण से भिन्न भिन्न होता है । ऐसा मालूम होता है कि मैगनीसियम लवण और सोडियम कार्बनेट की क्रिया से पहले युग्म
परिच्छेद पंद्रह द्वितीय वर्ग । मैगनीसियम वर्ग मैगनीसियम, यशद, कैडमियम, मैगनीसियम सङ्केत, Mg; परमाणु-भार = चौबीस.शून्य उपस्थिति । मैगनीसियम मुक्तावस्था में नहीं पाया जाता । इसके पाये जाते हैं। कार्बनेट के रूप में मैगनीसाइट MgCOतीन के नाम से यह पाया जाता है । डोलोमाइट कालसियम कार्बनेट और मैगनीसियम कार्बनेट MgCOतीन, CaCOतीन का यौगिक है। इपसम लवण के नाम से सल्फेट के रूप में पाया जाता है। स्टास्फुर्ट निःक्षेप में कारनेलाइट MgClदो, KClछःHबीस मैगनीसियम क्लोराइड और पोटासियम क्लोराइड के युग्म लवण के रूप में पाया जाता है । अस्बेस्टस, टाल्क इत्यादि में मैगनीसियम, सिलिकेट के रूप में रहता एक समुद्र के जल में मैगनीसियम क्लोराइड रहता है । समुद्र के जल से नमक निकाल लेने पर जो विलयन बच जाता है उससे दो हज़ार तीन सौ टन मैगनीसियम क्लोराइड कच्छ के रान नामक स्थान में एक हज़ार नौ सौ इक्कीस - एक हज़ार नौ सौ बाईस ईशून्य में प्राप्त हुआ था । गुजरात के ध्रगन्द्रा में भी पर्याप्त मैगनीसियम क्लोराइड तैयार होता है। सलेम, मद्रास और मैसूर के निकट मैगनीसाइट का निःक्षेप विद्यमान है । इतना विस्तृत होने के कारण पौधों के तन्तुओं और पशुओं की हड्डियों में चूने के लवण के साथ-साथ मैगनीसियम का लवण भी पाया जाता - मैगनीसियम प्राप्त करना । पिघले हुए मैगनीसियम क्लोराइड के विद्युत्-विच्छेदन से बुंसेन द्वारा मैगनीसियम प्राप्त हुआ था। पीछे मैगनीसियम क्लोराइड को सोडियम धातु के साथ गरम करने से मैगनीसियम धातु प्राप्त हुई थी । MgCबारह + दो Na = दोNaCl + Mg इस प्रकार से प्राप्त धातु का स्रवण के द्वारा शोधन होता है । आजकल पिघले हुए कारनेलाइट के विद्युत् विच्छेदन से मैगनीसियम - प्राप्त होता है । लोहे के पात्र में कारनेलाइट को पिघलाते हैं । लोहे का यह पात्र ऋण विद्युत्द्वार होता है। चीनी की नली में प्रविष्ट कार्बन का छड़ धन - विद्युत्द्वार होता है । इस चीनी की नली द्वारा क्लोरीन गैस बाहर निकलती है । पात्र के पैदे में मैगनीसियम इकट्ठा होता है। इसको कारनेलाइट के साथ पिघलाने से यह शोधित होता है । इसे तब ढाँचे में ढालकर ईंट में प्राप्त करते हैं । मैगनीसियम चाँदी सी श्वेत धातु है जो शुष्क वायु में धुँधली गुण । नहीं होती पर वायु और जल वाष्प से उसके ऊपर आक्साइड का चढ़ जाता है । यह कुछ घनवर्धनीय और उच्च तापक्रम पर तन्य होता और सरलता से तार या रिबन में बनाया जा सकता है एक रक्त-ताप पर यह पिघलता है और इससे उच्च तापक्रम पर स्रवित किया जा सकता है । वायु याक्सिजन में गरम करने से तीव्र प्रकाश के साथ यह जलता है। कार्बन डायक्साइड में गरम करने पर भी यह उसमें जलता और कार्बन पृथक् हो जाता है । मैगनीसियम तप्त जल को धीरे-धीरे विच्छेदित करता है। जल वाष्प में गरम करने से मैगनीसियम जलने लगता है। है इस प्रकार जलने से मैगनीसियम आक्साइड बनता है । मैगनीसियम शीघ्रता से तनुश्रमों में विलीन होता है और इससे हाइड्रोजन निकलता है । मैगनीसियम को नाइट्रोजन में गरम करने से मैगनीसियम नाइट्राइड Mgतीन Nदो बनता है। मैगनीसियम के द्वारा वायु का नाइट्रोजन इस प्रकार निकालकर आर्गन और इस वर्ग के अन्य गैसों को नाइट्रोजन से पृथक् करते हैं । उच्च तापक्रम पर धातुओं के आक्साइडों को मैगनीसियम के साथ गरम करने से उन आक्साइडों के को मैगनीसियम ले लेता है और इस प्रकार वे लध्वीकृत हो जाते हैं । रीति से बोरन और सिलिकन तत्त्व प्राप्त होते हैं । तीव्र प्रकाश उत्पन्न करने के कारण मैगनीसियम प्रकाश-चिह्न के लिए और प्रातशबाज़ी में प्रयुक्त होता है । मैगनीसियम आक्साइड, MgO । मैगनीसियम को वायुया क्सिजन में जलाने से मैगनीसियम आक्साइड प्राप्त होता है। मैगनीसियम कार्बनेट या नाइट्रेट के गरम करने से भी आक्साइड प्राप्त होता है । मैगनीसियम आक्साइड जल में कुछ-कुछ विलेय होता है । यह विलयन दुर्बल चारीय होता है । जल के साथ यह ाक्साइड मैगनीसियम हाइड्राक्साइड Mg दो बनता है। मैगनीसियम क्लोराइड के विलयन में लकली चारों या अमोनिया के डालने से मैगनीसियम हाइड्राक्साइड अवक्षिप्त हो जाता है । श्रमोनियम कोराइड की उपस्थिति में अमोनिया से अवक्षेप नहीं आता । । मैगनीसियम हाइड्राक्साइड प्रायः ऋविलेय. होता है। मैगनीशिया औषधों में, अगलनीय होने के कारण घरिया बनाने में, भट्टियों में टिपकारी करने में और अग्निजित ईंटों के बनाने में प्रयुक्त होता है । ड्रमोंड प्रकाश में, पेंसिल के रूप में यह काम आता मैगनीसियम कार्बनेट, MgCOतीन । मैगनीसाइट के नाम से मैगनीसियम कार्बनेट प्रकृति में पाया जाता है । मैगनीसियम लवण के विलयन में सोडियम कार्बनेट के विलयन से सामान्य लवण नहीं प्राप्त होता बल्कि भास्मिक लवण वक्षिप्त होता है । इस भास्मिक लवण का संगठन तापप्रतिकारकों के समाहरण से भिन्न भिन्न होता है । ऐसा मालूम होता है कि मैगनीसियम लवण और सोडियम कार्बनेट की क्रिया से पहले युग्म
भारतीय संचार निगम लिमिटेड के यूजर्स को जल्द ही 5जी सर्विस का नया अपडेट मिलने वाला है। केंद्रीय दूरसंचार और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सरकार के स्वामित्व वाली बीएसएनएल की 4एच-आधारित तकनीक को अगले 5 से 7 महीनों के भीतर अपडेट कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत देश भर में कंपनी के 1. 35 लाख टेलीफोन टावरों से की जाएगी। कन्फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री प्रोग्राम में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने देश में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड को 4 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 हजार करोड़ रुपये करने की योजना बनाई है. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में बीएसएनएल टेलीकॉम के क्षेत्र में काफी मजबूत स्थिति में होगा। अश्विनी वैष्णव ने इस कार्यक्रम में कहा कि बीएसएनएल के पास अभी देश भर में 1 लाख 35 हजार टावर हैं। TCS (टाटा कंसल्टेंसी) देश में अपनी 5G सेवाओं को बढ़ाने में BSNL की सहायता करेगी। सूत्रों के मुताबिक बीएसएनएल ने अपनी 5जी सेवाओं की जांच के लिए टाटा से उपकरण मांगे हैं। इन उपकरणों के मिलने के बाद ही कंपनी देश में अपना 5जी ट्रायल शुरू करेगी। कहा जा रहा है कि जहां निजी टेलीकॉम कंपनियों का नेटवर्क नहीं पहुंच रहा है वहां बीएसएनएल की 5जी सेवाएं पहले मुहैया कराई जाएंगी। अब तक कहां पहुंची 5जी सेवा? Reliance Jio और Bharti Airtel ने पहले ही अपनी 5G सेवाओं की पेशकश शुरू कर दी है। वहीं, Vodafone Idea (VI) को अभी अपना 5G लॉन्च करना है। सूत्रों की मानें तो जियो ने दिल्ली-एनसीआर समेत गुजरात, कोलकाता, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु में 5जी सर्विस लॉन्च की है। वहीं, भारती एयरटेल ने भी दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, सिलीगुड़ी, नागपुर पानीपत, गुवाहाटी और पटना जैसे प्रमुख शहरों में अपनी 5जी सेवा शुरू की है।
भारतीय संचार निगम लिमिटेड के यूजर्स को जल्द ही पाँचजी सर्विस का नया अपडेट मिलने वाला है। केंद्रीय दूरसंचार और दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सरकार के स्वामित्व वाली बीएसएनएल की चारएच-आधारित तकनीक को अगले पाँच से सात महीनों के भीतर अपडेट कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत देश भर में कंपनी के एक. पैंतीस लाख टेलीफोन टावरों से की जाएगी। कन्फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री प्रोग्राम में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने देश में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड को चार हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर पाँच हजार करोड़ रुपये करने की योजना बनाई है. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में बीएसएनएल टेलीकॉम के क्षेत्र में काफी मजबूत स्थिति में होगा। अश्विनी वैष्णव ने इस कार्यक्रम में कहा कि बीएसएनएल के पास अभी देश भर में एक लाख पैंतीस हजार टावर हैं। TCS देश में अपनी पाँचG सेवाओं को बढ़ाने में BSNL की सहायता करेगी। सूत्रों के मुताबिक बीएसएनएल ने अपनी पाँचजी सेवाओं की जांच के लिए टाटा से उपकरण मांगे हैं। इन उपकरणों के मिलने के बाद ही कंपनी देश में अपना पाँचजी ट्रायल शुरू करेगी। कहा जा रहा है कि जहां निजी टेलीकॉम कंपनियों का नेटवर्क नहीं पहुंच रहा है वहां बीएसएनएल की पाँचजी सेवाएं पहले मुहैया कराई जाएंगी। अब तक कहां पहुंची पाँचजी सेवा? Reliance Jio और Bharti Airtel ने पहले ही अपनी पाँचG सेवाओं की पेशकश शुरू कर दी है। वहीं, Vodafone Idea को अभी अपना पाँचG लॉन्च करना है। सूत्रों की मानें तो जियो ने दिल्ली-एनसीआर समेत गुजरात, कोलकाता, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु में पाँचजी सर्विस लॉन्च की है। वहीं, भारती एयरटेल ने भी दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, सिलीगुड़ी, नागपुर पानीपत, गुवाहाटी और पटना जैसे प्रमुख शहरों में अपनी पाँचजी सेवा शुरू की है।
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के बीच ग्रामीण हावड़ा से भाईचारे की आपसी सौहार्द की तस्वीर सामने आयी है. हिंसा के बीच हिंदुओं ने मुस्लिम लड़की पाकिजा की धूमधाम से शादी करवाई. पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणियों के विरोध ((Prophet Controversy)) में पिछले दिनों हावड़ा सुलग रहा था, लेकिन सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के बीच ग्रामीण हावड़ा (Howrah Violence) से भाईचारे की आपसी सौहार्द की तस्वीर सामने आयी है. आपसी सौहार्द की यह मिसाल ग्रामीण हावड़ा अंतर्गत उलबेड़िया के खलीसानी इलाके की है, जहां हिंदुओं ने मिलकर एक मुस्लिम परिवार की लड़की की शादी (Muslim Family Marriage) कराकर उसे पूरी सुरक्षा के साथ ससुराल विदा किया. हिंसा से सुलग रहे हावड़ा में जब बेटी विदा हुई और परिवारवालों ने राहत की सांस ली. बता दें कि पिछले तीन दिनों से लगातार हिंसक घटनाएं होने के बाद राज्य सरकार ने हिंसाग्रस्त इलाकों समेत पूरे जिले में 144 धारा लागू कर दिया था और इंटरनेट सेवा भी बंद थी, हालांकि सोमवार से इंटरनेट सेवा फिर से शुरू कर दी गई है. पश्चिम बंगाल सरकार ने हिंसा पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है. पुलिस ने हिंसा के मद्देनजर करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया है और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी है, लेकिन इस बीच सांप्रदायिक सौहार्द की इस मिसाल के चारों ओर चर्चे हैं. उलबेड़िया के खलीसानी में इद्दुनशा मल्लिक अपने बच्चों के साथ रहती हैं. पति की मौत आठ साल पहले हो चुकी है. साइकिल गैरेज ही आय का एकमात्र जरिया है. बड़ी बेटी की शादी तीन साल पहले हो चुकी है. तीन महीने पहले मझली बेटी पाकिजा की शादी दक्षिण 24 परगना के बारूईपुर में मुक्किबर शेख के साथ तय हुई थी. दोनों परिवार की सहमति से शादी की तारीख 12 जून तय हुई. तैयारियां चल ही रही थी कि इसी दौरान नूपुर शर्मा द्वारा दी गयी विवादित बयान के विरोध में नौ जून यानि गुरुवार को अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग सड़क पर उतर गये और 11 घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग को अचल कर दिया. दूसरे दिन यानी शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद हजारों की संख्या में फिर से प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और पुलिस पर जमकर पथराव और बमबाजी की. उलबेड़िया में पुलिस बूथ और जीप में आग लगा दी गयी. ग्रामीण हावड़ा के उलबेड़िया से लेकर शहरी अंचल के डोमजूर तक प्रदर्शनकारियों ने जमकर तांडव मचाया. हालात बेकाबू होते देख राज्य सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी और 144 धारा लागू कर दिया. हालात बिगड़ते देख इद्दुनशा मल्लिक की बेचैनी बढ़ गयी. शादी में आने वाले परिजन भी नहीं आ सके. पाकिजा की मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने शादी की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला लिया. इसी बीच स्थानीय क्लब के सदस्य मसीहा बनकर सामने आये. क्लब के तापस, लक्ष्मीकांत, उत्तम सहित अन्य सदस्यों ने पाकिजा और उसकी मां का हिम्मत बढ़ाते हुए 12 जून को ही शादी करने के लिए कहा. क्लब के सदस्यों ने पुलिस से मदद मांगी. पुलिस ने भी हामी भर दी. क्लब के सदस्य और पुलिस की उपस्थिति में रविवार को बारात पहुंची. इसके बाद पाकिजा और मुक्किबर परिणय सूत्र में बंध गये.
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के बीच ग्रामीण हावड़ा से भाईचारे की आपसी सौहार्द की तस्वीर सामने आयी है. हिंसा के बीच हिंदुओं ने मुस्लिम लड़की पाकिजा की धूमधाम से शादी करवाई. पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणियों के विरोध ) में पिछले दिनों हावड़ा सुलग रहा था, लेकिन सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के बीच ग्रामीण हावड़ा से भाईचारे की आपसी सौहार्द की तस्वीर सामने आयी है. आपसी सौहार्द की यह मिसाल ग्रामीण हावड़ा अंतर्गत उलबेड़िया के खलीसानी इलाके की है, जहां हिंदुओं ने मिलकर एक मुस्लिम परिवार की लड़की की शादी कराकर उसे पूरी सुरक्षा के साथ ससुराल विदा किया. हिंसा से सुलग रहे हावड़ा में जब बेटी विदा हुई और परिवारवालों ने राहत की सांस ली. बता दें कि पिछले तीन दिनों से लगातार हिंसक घटनाएं होने के बाद राज्य सरकार ने हिंसाग्रस्त इलाकों समेत पूरे जिले में एक सौ चौंतालीस धारा लागू कर दिया था और इंटरनेट सेवा भी बंद थी, हालांकि सोमवार से इंटरनेट सेवा फिर से शुरू कर दी गई है. पश्चिम बंगाल सरकार ने हिंसा पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है. पुलिस ने हिंसा के मद्देनजर करीब दो सौ लोगों को गिरफ्तार किया है और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी है, लेकिन इस बीच सांप्रदायिक सौहार्द की इस मिसाल के चारों ओर चर्चे हैं. उलबेड़िया के खलीसानी में इद्दुनशा मल्लिक अपने बच्चों के साथ रहती हैं. पति की मौत आठ साल पहले हो चुकी है. साइकिल गैरेज ही आय का एकमात्र जरिया है. बड़ी बेटी की शादी तीन साल पहले हो चुकी है. तीन महीने पहले मझली बेटी पाकिजा की शादी दक्षिण चौबीस परगना के बारूईपुर में मुक्किबर शेख के साथ तय हुई थी. दोनों परिवार की सहमति से शादी की तारीख बारह जून तय हुई. तैयारियां चल ही रही थी कि इसी दौरान नूपुर शर्मा द्वारा दी गयी विवादित बयान के विरोध में नौ जून यानि गुरुवार को अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग सड़क पर उतर गये और ग्यारह घंटाटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग को अचल कर दिया. दूसरे दिन यानी शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद हजारों की संख्या में फिर से प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और पुलिस पर जमकर पथराव और बमबाजी की. उलबेड़िया में पुलिस बूथ और जीप में आग लगा दी गयी. ग्रामीण हावड़ा के उलबेड़िया से लेकर शहरी अंचल के डोमजूर तक प्रदर्शनकारियों ने जमकर तांडव मचाया. हालात बेकाबू होते देख राज्य सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी और एक सौ चौंतालीस धारा लागू कर दिया. हालात बिगड़ते देख इद्दुनशा मल्लिक की बेचैनी बढ़ गयी. शादी में आने वाले परिजन भी नहीं आ सके. पाकिजा की मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने शादी की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला लिया. इसी बीच स्थानीय क्लब के सदस्य मसीहा बनकर सामने आये. क्लब के तापस, लक्ष्मीकांत, उत्तम सहित अन्य सदस्यों ने पाकिजा और उसकी मां का हिम्मत बढ़ाते हुए बारह जून को ही शादी करने के लिए कहा. क्लब के सदस्यों ने पुलिस से मदद मांगी. पुलिस ने भी हामी भर दी. क्लब के सदस्य और पुलिस की उपस्थिति में रविवार को बारात पहुंची. इसके बाद पाकिजा और मुक्किबर परिणय सूत्र में बंध गये.
यूपी में जो सियासी लड़ाई गन्ना, जिन्ना से शुरू हुई थी अब वो जाति पर आ गई है. . . सवाल ये है कि चुनाव से पहले सभी नेता विकास को मुद्दा बताते हैं, महंगाई पर चुनाव लड़ने की बात करते हैं लेकिन यूपी से जाति है कि जाती नहीं. सीतापुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सिपाही को जमकर पीटा , जानिए क्या हैं वजह ? WB Panchayat Elections 2023: 'बंगाल हिंसा एक स्टेट स्पॉन्सर्ड मर्डर', बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, कहा- 'राज्य की माटी रक्तरंजित है' मिशन चंद्रयान-3 : 600 करोड़ खर्च करके चंद्रमा पर क्या हासिल करना चाहता है भारत?
यूपी में जो सियासी लड़ाई गन्ना, जिन्ना से शुरू हुई थी अब वो जाति पर आ गई है. . . सवाल ये है कि चुनाव से पहले सभी नेता विकास को मुद्दा बताते हैं, महंगाई पर चुनाव लड़ने की बात करते हैं लेकिन यूपी से जाति है कि जाती नहीं. सीतापुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सिपाही को जमकर पीटा , जानिए क्या हैं वजह ? WB Panchayat Elections दो हज़ार तेईस: 'बंगाल हिंसा एक स्टेट स्पॉन्सर्ड मर्डर', बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, कहा- 'राज्य की माटी रक्तरंजित है' मिशन चंद्रयान-तीन : छः सौ करोड़ खर्च करके चंद्रमा पर क्या हासिल करना चाहता है भारत?
हंसबेरी से जेली एक अद्भुत स्वादिष्ट और उपयोगी उपचार है, जिसे काफी जल्दी तैयार किया जाता है। इसे तैयार करने के बाद, आप निश्चित रूप से अपने मेहमानों और रिश्तेदारों को आश्चर्यचकित करेंगे। हम आपको बताएंगे कि घर पर हंसबेरी से जेली कैसे पकाएं और इसे अद्वितीय और मूल बनाएं। सामग्रीः - gooseberries - 1 किलो; - नींबू - 1 टुकड़ा; - दानेदार चीनी - स्वाद के लिए; - पानी - 1,25 एल। नींबू से रस निचोड़ें, और हंसबेरी तैयार और हिस्सों में काट लें। बर्तन में, पानी डालें, नींबू के रस को जोड़ें और जामुन फैलाएं। लगभग 20 मिनट तक धीमी आग पर द्रव्यमान को कुक करें। और इस समय तक हम एक चाकू लेते हैं, इसे गौज से ढंकते हैं, जो कई परतों में घिरे होते हैं। गर्म बेरी मिश्रण एक चाकू में डाल दिया जाता है और पूरी रात के लिए निकालने के लिए छोड़ दें। परिणामी रस एक सॉस पैन में डाला जाता है, 5 मिनट के लिए उच्च गर्मी पर स्वाद और फोड़ा करने के लिए चीनी डालें। फिर जेली को आग से हटा दें और तुरंत एक अच्छी छिद्र के माध्यम से फ़िल्टर करें। इसके अलावा हम तैयार जारों पर स्वादिष्टता डालना, उन्हें छिपाना और उन्हें ठंडा जगह में स्टोर करना। सामग्रीः - gooseberries - 2 किलो; - काला currant - 500 ग्राम; - चीनी - 1 किलो; - पानी - 1 बड़ा चम्मच। गोसबेरी और काले currants धोया जाता है, एक सॉस पैन में ढेर, पानी से भरा और एक छोटी आग पर भाप के लिए डाल दिया। जब तक वे रस नहीं देते हैं तब तक हम बेरीज को गर्म करते हैं। उसके बाद, प्लेट से पैन को हटा दें और इसे ठंडे पानी के बेसिन में ठंडा करने के लिए रखें। इसके बाद, सभी क्रश को अच्छी तरह से गूंध लें, परिणामस्वरूप द्रव्यमान को एक कोन्डर में गज के साथ बदलें और रस निचोड़ें। फिर हम इसका वजन करते हैं, इसे आग पर डालते हैं और इसे अपने मूल वजन का लगभग 40% वेल्ड करते हैं, लगातार घूमते हुए और घोटाले को हटाते हैं। अब 1 किलोग्राम रस की दर से चीनी छिड़कें - 1 किलो चीनी। सभी ध्यान से मिश्रण करें, जेली को उबाल लेकर 5-10 मिनट तक उबालें और बाँझ सूखे जार में डालें। उन्हें 2 दिनों तक पूरी तरह से ठंडा होने तक छोड़ दें, और फिर स्क्रू कैप्स के साथ बंद करें। सामग्रीः - gooseberries - 700 ग्राम; - चीनी - 500 ग्राम; - कीवी फल - 3 टुकड़े; - पेक्टिन झेलिक्स के साथ additive - 1 sachet। पहले सभी आवश्यक सामग्री तैयार करेंः हंसबेरी को peduncles से धोया और साफ किया जाता है, और कीवी के साथ, त्वचा काट लें। फिर हम एक मांस चक्की के माध्यम से बेरीज और फलों को मोड़ते हैं, चीनी डालते हैं और हलचल करते हैं। मिश्रण को एक सॉस पैन में रखो, उबाल लेकर आओ, पेक्टिन के साथ योजक फेंक दें और मोटी तक थोड़ा पकाएं। उसके बाद, जेली को जार में डालें और उन्हें रेफ्रिजरेटर में डाल दें।
हंसबेरी से जेली एक अद्भुत स्वादिष्ट और उपयोगी उपचार है, जिसे काफी जल्दी तैयार किया जाता है। इसे तैयार करने के बाद, आप निश्चित रूप से अपने मेहमानों और रिश्तेदारों को आश्चर्यचकित करेंगे। हम आपको बताएंगे कि घर पर हंसबेरी से जेली कैसे पकाएं और इसे अद्वितीय और मूल बनाएं। सामग्रीः - gooseberries - एक किलो; - नींबू - एक टुकड़ा; - दानेदार चीनी - स्वाद के लिए; - पानी - एक,पच्चीस एल। नींबू से रस निचोड़ें, और हंसबेरी तैयार और हिस्सों में काट लें। बर्तन में, पानी डालें, नींबू के रस को जोड़ें और जामुन फैलाएं। लगभग बीस मिनट तक धीमी आग पर द्रव्यमान को कुक करें। और इस समय तक हम एक चाकू लेते हैं, इसे गौज से ढंकते हैं, जो कई परतों में घिरे होते हैं। गर्म बेरी मिश्रण एक चाकू में डाल दिया जाता है और पूरी रात के लिए निकालने के लिए छोड़ दें। परिणामी रस एक सॉस पैन में डाला जाता है, पाँच मिनट के लिए उच्च गर्मी पर स्वाद और फोड़ा करने के लिए चीनी डालें। फिर जेली को आग से हटा दें और तुरंत एक अच्छी छिद्र के माध्यम से फ़िल्टर करें। इसके अलावा हम तैयार जारों पर स्वादिष्टता डालना, उन्हें छिपाना और उन्हें ठंडा जगह में स्टोर करना। सामग्रीः - gooseberries - दो किलो; - काला currant - पाँच सौ ग्राम; - चीनी - एक किलो; - पानी - एक बड़ा चम्मच। गोसबेरी और काले currants धोया जाता है, एक सॉस पैन में ढेर, पानी से भरा और एक छोटी आग पर भाप के लिए डाल दिया। जब तक वे रस नहीं देते हैं तब तक हम बेरीज को गर्म करते हैं। उसके बाद, प्लेट से पैन को हटा दें और इसे ठंडे पानी के बेसिन में ठंडा करने के लिए रखें। इसके बाद, सभी क्रश को अच्छी तरह से गूंध लें, परिणामस्वरूप द्रव्यमान को एक कोन्डर में गज के साथ बदलें और रस निचोड़ें। फिर हम इसका वजन करते हैं, इसे आग पर डालते हैं और इसे अपने मूल वजन का लगभग चालीस% वेल्ड करते हैं, लगातार घूमते हुए और घोटाले को हटाते हैं। अब एक किलोग्रामग्राम रस की दर से चीनी छिड़कें - एक किलो चीनी। सभी ध्यान से मिश्रण करें, जेली को उबाल लेकर पाँच-दस मिनट तक उबालें और बाँझ सूखे जार में डालें। उन्हें दो दिनों तक पूरी तरह से ठंडा होने तक छोड़ दें, और फिर स्क्रू कैप्स के साथ बंद करें। सामग्रीः - gooseberries - सात सौ ग्राम; - चीनी - पाँच सौ ग्राम; - कीवी फल - तीन टुकड़े; - पेक्टिन झेलिक्स के साथ additive - एक sachet। पहले सभी आवश्यक सामग्री तैयार करेंः हंसबेरी को peduncles से धोया और साफ किया जाता है, और कीवी के साथ, त्वचा काट लें। फिर हम एक मांस चक्की के माध्यम से बेरीज और फलों को मोड़ते हैं, चीनी डालते हैं और हलचल करते हैं। मिश्रण को एक सॉस पैन में रखो, उबाल लेकर आओ, पेक्टिन के साथ योजक फेंक दें और मोटी तक थोड़ा पकाएं। उसके बाद, जेली को जार में डालें और उन्हें रेफ्रिजरेटर में डाल दें।
SSC MTS 2019 Paper I Result: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) आज मंगलवार को पहले चरण के मल्टी टास्किंग स्टाफ भर्ती परीक्षा (Multi-Tasking Staff (MTS) Tier I) का रिजल्ट घोषित कर सकता है। रिजल्ट की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर की जाएगी। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार इस वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। पहले रिजल्ट घोषित करने के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी लेकिन बाद में रिजल्ट थोड़ी देरी से जारी करने का फैसला लिया गया। पेपर 1 की परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को दूसरे और तीसरे स्टेज की परीक्षा में शामिल होना होगा। दूसरे स्टेज की परीक्षा 24 नवंबर को होगी जिसके लिए एडमिट कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले यानी 20 नवंबर, 2019 को रिलीज कर दिए जाएंगे। कमीशन कैटेगरी-वाइज, स्टेट/यूनियन टेरीटरी-वाइज कटऑफ लिस्ट जारी करेगा। - आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। - होमपेज पर मौजूद "SSC MTS Result 2019" के लिंक पर क्लिक करें। - अब लॉगइन क्रेडेंशियल दर्ज करें। - अब SSC MTS Result 2019 आपकी स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा। - अब अपना रिजल्ट डाउनलोड कर लें या फिर इसका एक प्रिंट भविष्य के लिए जरूर रख लें।
SSC MTS दो हज़ार उन्नीस Paper I Result: कर्मचारी चयन आयोग आज मंगलवार को पहले चरण के मल्टी टास्किंग स्टाफ भर्ती परीक्षा Tier I) का रिजल्ट घोषित कर सकता है। रिजल्ट की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर की जाएगी। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार इस वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। पहले रिजल्ट घोषित करने के लिए पच्चीस अक्टूबर की तारीख तय की गई थी लेकिन बाद में रिजल्ट थोड़ी देरी से जारी करने का फैसला लिया गया। पेपर एक की परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को दूसरे और तीसरे स्टेज की परीक्षा में शामिल होना होगा। दूसरे स्टेज की परीक्षा चौबीस नवंबर को होगी जिसके लिए एडमिट कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले यानी बीस नवंबर, दो हज़ार उन्नीस को रिलीज कर दिए जाएंगे। कमीशन कैटेगरी-वाइज, स्टेट/यूनियन टेरीटरी-वाइज कटऑफ लिस्ट जारी करेगा। - आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। - होमपेज पर मौजूद "SSC MTS Result दो हज़ार उन्नीस" के लिंक पर क्लिक करें। - अब लॉगइन क्रेडेंशियल दर्ज करें। - अब SSC MTS Result दो हज़ार उन्नीस आपकी स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा। - अब अपना रिजल्ट डाउनलोड कर लें या फिर इसका एक प्रिंट भविष्य के लिए जरूर रख लें।
Central University of Haryana भर्ती के लिए आवेदन करें 2023 ऑनलाइन/ऑफ़लाइन 09/02/2023 से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Guest Faculty रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें Central University of Haryana, Mahendergarh में Rs. 50,000 - Rs. 50,000 Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। Central University of Haryana के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं। Central University of Haryana भर्ती 2023 के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में Central University of Haryana उपयुक्त योग्यता के साथ N/A की भर्ती कर रहा है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां Central University of Haryana Guest Faculty भर्ती 2023 का पूरा विवरण देख सकते हैं। Central University of Haryana भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 09/02/2023 है और Central University of Haryana भर्ती 2023 रिक्ति गणना 2 है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Central University of Haryana में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। Guest Faculty पर Central University of Haryana की भूमिका के लिए वेतन Rs. 50,000 - Rs. 50,000 Per Month होगा। चयन के बाद उम्मीदवारों को वेतन के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार या तो ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। Central University of Haryana Guest Faculty भर्ती 2023 के लिए नौकरी का स्थान Mahendergarh है। Central University of Haryana ने Guest Faculty रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और रिक्तियों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 09/02/2023 है। Central University of Haryana भर्ती 2023 walkin के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। वॉक इन इंटरव्यू की तिथि 09/02/2023 है। उम्मीदवार वॉकिंग प्रक्रिया का पालन करके ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
Central University of Haryana भर्ती के लिए आवेदन करें दो हज़ार तेईस ऑनलाइन/ऑफ़लाइन नौ फ़रवरी दो हज़ार तेईस से पहले। वे उम्मीदवार जिन्हें Guest Faculty रिक्तियों के लिए चुना गया है, उन्हें Central University of Haryana, Mahendergarh में Rs. पचास,शून्य - Rs. पचास,शून्य Per Month के वेतनमान के साथ रखा जाएगा। Central University of Haryana के स्थान, नौकरी का शीर्षक, रिक्तियों की संख्या, नियत तिथि, आधिकारिक लिंक आदि के बारे में विवरण निम्नलिखित हैं। Central University of Haryana भर्ती दो हज़ार तेईस के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में Central University of Haryana उपयुक्त योग्यता के साथ N/A की भर्ती कर रहा है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां Central University of Haryana Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस का पूरा विवरण देख सकते हैं। Central University of Haryana भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि नौ फ़रवरी दो हज़ार तेईस है और Central University of Haryana भर्ती दो हज़ार तेईस रिक्ति गणना दो है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें Central University of Haryana में Guest Faculty के रूप में रखा जाएगा। Guest Faculty पर Central University of Haryana की भूमिका के लिए वेतन Rs. पचास,शून्य - Rs. पचास,शून्य Per Month होगा। चयन के बाद उम्मीदवारों को वेतन के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार या तो ऑनलाइन / ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। Central University of Haryana Guest Faculty भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए नौकरी का स्थान Mahendergarh है। Central University of Haryana ने Guest Faculty रिक्तियों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है और रिक्तियों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि नौ फ़रवरी दो हज़ार तेईस है। Central University of Haryana भर्ती दो हज़ार तेईस walkin के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है। वॉक इन इंटरव्यू की तिथि नौ फ़रवरी दो हज़ार तेईस है। उम्मीदवार वॉकिंग प्रक्रिया का पालन करके ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
जाह्नवी कपूर, न्यासा देवगन और कई बॉलीवुड एक्ट्रेस के फेवरेट कहे जाने वाले ओरी हाल ही में मुंबई में नजर आए. ओरहान अवत्रमणि यानी ओरी को जैकलीन का हाथ पकड़कर जाते हुए स्पॉट किया गया. जैकलीन के साथ स्पॉट होने से एक दिन पहले ओरी एक फंक्शन में जान्हवी कपूर के साथ भी नजर आए थे. ओरी और जैकलीन काफी अट्रैक्टिव ड्रेस पहनी थीं. ओरी ने आर्यन खान के लक्जरी स्ट्रीटवियर ब्रांड डी'यावोल एक्स की काले रंग की प्रिंटेड हुडी पहनी थी जिसकी कीमत 44 हजार रुपये थी. ओकी ने जो बैगी कार्गो पैंट पहनी थी वह balenciaga ब्रांड की थी और उसकी कीमत करीब 1. 5 लाख थी. ओरी ने जो स्टाइलिश मोबाइल कवर डाला हुआ था, वह loewe ब्रांड का था जिसकी कीमत 25 हजार रुपये थी. ओरी ने जो शूज पहने थे वह balenciaga के ब्लैक ट्रेनर्स थे जिनकी कीमत करीब 90 हजार रुपये थी. वहीं जैकलीन ने एक लॉन्ग ब्लू शर्ट के साथ ब्लैक रंग का माइक्रो स्कर्ट पहना था. जैकलीन का यह आउटफिट Miu Miu लेबल का बताया जा रहा है. जैकलीन की कोबाल्ट ब्लू शर्ट में कॉलर वाली नेकलाइन, फ्रंट बटन क्लोजर, लूज सिल्हूट थीं. वहीं आस्तीन लंबी थीं और शोल्डर भी लूज थे. जैकलीन के माइक्रो स्कर्ट में जिपर पॉकेट हैं और कमर पर बेल्ट है. जैकलीन ने इस लुक को ब्लैक हाई-हील्स, मैचिंग ब्लैक शोल्डर चेन बैग और डेंटी ईयर स्टड्स से पूरा किया था. बैगी जूड़ा, लाल लिपस्टिक, मैचिंग आई शैडो, विंग्ड आईलाइनर, फेदर्ड ब्रो, डेवी बेस मेकअप और बीमिंग हाइलाइटर से उन्हें ग्लैम लुक मिला.
जाह्नवी कपूर, न्यासा देवगन और कई बॉलीवुड एक्ट्रेस के फेवरेट कहे जाने वाले ओरी हाल ही में मुंबई में नजर आए. ओरहान अवत्रमणि यानी ओरी को जैकलीन का हाथ पकड़कर जाते हुए स्पॉट किया गया. जैकलीन के साथ स्पॉट होने से एक दिन पहले ओरी एक फंक्शन में जान्हवी कपूर के साथ भी नजर आए थे. ओरी और जैकलीन काफी अट्रैक्टिव ड्रेस पहनी थीं. ओरी ने आर्यन खान के लक्जरी स्ट्रीटवियर ब्रांड डी'यावोल एक्स की काले रंग की प्रिंटेड हुडी पहनी थी जिसकी कीमत चौंतालीस हजार रुपये थी. ओकी ने जो बैगी कार्गो पैंट पहनी थी वह balenciaga ब्रांड की थी और उसकी कीमत करीब एक. पाँच लाख थी. ओरी ने जो स्टाइलिश मोबाइल कवर डाला हुआ था, वह loewe ब्रांड का था जिसकी कीमत पच्चीस हजार रुपये थी. ओरी ने जो शूज पहने थे वह balenciaga के ब्लैक ट्रेनर्स थे जिनकी कीमत करीब नब्बे हजार रुपये थी. वहीं जैकलीन ने एक लॉन्ग ब्लू शर्ट के साथ ब्लैक रंग का माइक्रो स्कर्ट पहना था. जैकलीन का यह आउटफिट Miu Miu लेबल का बताया जा रहा है. जैकलीन की कोबाल्ट ब्लू शर्ट में कॉलर वाली नेकलाइन, फ्रंट बटन क्लोजर, लूज सिल्हूट थीं. वहीं आस्तीन लंबी थीं और शोल्डर भी लूज थे. जैकलीन के माइक्रो स्कर्ट में जिपर पॉकेट हैं और कमर पर बेल्ट है. जैकलीन ने इस लुक को ब्लैक हाई-हील्स, मैचिंग ब्लैक शोल्डर चेन बैग और डेंटी ईयर स्टड्स से पूरा किया था. बैगी जूड़ा, लाल लिपस्टिक, मैचिंग आई शैडो, विंग्ड आईलाइनर, फेदर्ड ब्रो, डेवी बेस मेकअप और बीमिंग हाइलाइटर से उन्हें ग्लैम लुक मिला.
१५८ / व्रज का रास रगमंच दोहो के साथ आरभ मे जो पद गाये जाते है उनमे प्रायः व्रज-महिमा, प्रिया- प्रियतम की भक्तवत्सलता, रूप-शोभा, सुकुमारिता तथा कृपालुता के अलावा उनके ऐश्वर्य के वर्णनो की प्रधानता होती है । फिर मुख्य समाजी की वारी आती है और वह एक ध्रुपद गाकर इस समाज संगीत का समापन और राम का समारंभ करता है । रासारभ के साथ गाये जाने वाले कुछ प्रमुख ध्रुपदो के बोल ये हैं . व्रज समुद्र मथुरा कमल, वृदावन मकरंद । व्रज वनिता सब पुष्प है, मधुकर गोकुलचद ॥ वृदावन के विरछ को, मरम न जाने कोय । डार डार अरु पात पै, राधे राधे होय ।। आदि-आदि । वनीरी तोरे चारु चार चूरी करन ( स्वामी हरिदास जी ) वृदावन सघन कुज, माधुरी लतान तरे, जमुना पुलिन पै मधुर वाजी वाँसुरी ( नददास ) प्रथम मान ओकार, देवन मुनि महादेव, ग्यान माने गोरख, वेद मानें ब्रह्मा ( तानसेन) वन ठन कहाँ को चले हो, सामरे सुघर कन्हाई ( कृष्णदान ) ध्रुपद गायन की अतिम पक्ति प्रारंभ हो जाने पर उसकी समाप्ति से पूर्व ही सखिया अपने आसनो से उठकर आगे आकर राधा-कृष्ण के पार्श्व मे नीचे खडी हो जाती है । भीतर से उसी समय शृगारी आरती का थाल, जिसमे जलती हुई भारती होती है, लाकर मुख्य सखी के हाथो मे देता है । तब वह सखी प्रिया प्रियतम की आरती करती है । आरती के समय प्रिया- प्रियतम गलवाही डाल देते है और कृष्ण अपने ओष्ठो पर वासुरी रखकर उसके बजाने का अभिनटन करते है । आरती करने के उपरात मुख्य सन्वी आरती को एक ओर रस देती है । सभी सखियो द्वारा आरतो गाई जाती है । बीच-बीच मे समाजी भी आरती के वोलो को कभी-कभी दुहराते जाते हैं । रास मे गाई जाने वाली मुख्य आरतियो मे मे कुछ निम्न प्रकार हैं प्रथम आरती जय कृष्ण मनोहर योगतरे, यदुनंदन नदकिशोर हरे । जय रासरमेश्वरी पूर्णतमे वरदे वृषभानु किशोरि हरे ।। जयतीय कदम्ब तरे ललिता, कल वेणु समीरण गान लता । जय राधिकाया हरि एक मता, सत तनु तरुणीगण मध्य गता ।। द्वितीय आरती नित्य-रास का मंचीय स्वरूप / १५६ श्रिति कमला कुछ मंडल ए, धृत कुडल ए । कलिन ललित बनमाल, जय जयदेव हरे ।। दिनमणि मंडल मडन ए, भव खडन ए । मुनिजन मानस हस, जय जयदेव हरे । कालिय विषधर गजन ए, जनरजन ए । जयदेव हरे ।। मधु-मुर-नरक विनाशन ए, सुरकुल केलि निधान, जय अमल कमल दल लोचन ए, त्रिभुवन भवन निधान, जय तृतीय आरती गरुणासन ए । जयदेव हरे । भवमोचन ए । । जयदेव हरे ॥ जनक सुता कृत भूषण ए, जित दूषण ए । समर श्रमित दशकठ, जय जयदेव हरे ।। अभिनव जलधर सुदर ए, धृत मंदर ए श्रीमुख चद्र चकोर, जय जयदेव हरे । तव चरणे प्रणतावय ए, मिति भावय ए । कुरु कुशल प्रणतेषु, जय जयदेव हरे ॥ श्री जयदेव कवेरिद, कुरुते मंगलमुज्ज्वल गीत, जय सुघर मणि कमला सी गोरी, जुह्न अगनित इक ठौरी । तऊ तव चरण कज प्यारी, नखन दुति चदा उजियारी । तासु छवि लेशहु नहि पावै, सुकवि मुख निरखत रहि जावै । किशोरी अगम रूप बोरी, प्रेमनिधि उमगि सीन तोरी । ललित लीला अथाह प्यारी, अंग माधुयं उमगि बारी । कृपा करि अगीकृत कीजै, विनय बलि मेरी सुनि लीजै । चतुर्थ आरती भारती कुजबिहारी की, कि गिरधर कृष्ण मुरारी की । गले मे बैजंती माला, बजावें मुरली मधुर वाला । श्रवन में कुडल झलकाला, नद के नदहि नदलाला । कि गिरधर कृष्ण मुरारी की ॥ आरती० ॥ १६० / व्रज का रास रगमच गगन सम अग काति काली, कि राधा चमकि रही आली । कस्तूरी तिलक, चंद सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती गगन सो सुमन बहुत वरसें, देवता दरसन कूं तरसे । बजे मुँहचग और मिरदग, ग्वालिनी सग, लाज रख गोपकुमारी की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की आरती जहाँ ते निकसी भवगंगा, सकल दुख हरनी श्री गंगा, धरी शिव शीस, जटा के बीच, राधिका गौरश्याम मुख की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती पाचवी आरती आरती जुगल किशोर की कीजै । तन मन धन न्यौछावर कीजै । साँमरे श्याम गौर मुख राधा । जुगल स्वरूप ध्यान वर लीजै । मोर मुकुट, मुख बसी बिराजै । नटवर कला निरसि मन साज । कुज बिहारी लाला गिरवरधारी । जिनके चरनन पँ बलिहारी । फूलन सिंगार फूलन गल माला । निरखौ कुंमर नद कौ लाला । कचन थार कपूर की वाती । आरती करत सकल व्रजवासी । नद-नदन, वृषभानु किशोरी । परमानद स्वामी अविचल जोरी । राधाकृष्ण की जो आरती गावै । वह बँकुठ अमर पद पावै । इन पाचो आरतियो मे आजकल चतुर्थ आरती ही सर्वाधिक प्रचि । इसके उपरात प्रथम, द्वितीय और पाचवी आरतिगो का चलन है । तृतं आरती अब प्राय नही सुनी जाती । सखियो द्वारा नमस्कार और प्रशस्ति आरती का गायन समाप्त होने पर सब सखी क्रम से प्रिया- प्रियतम निकट आकर उनको नमस्कार करती और चरण छूती है । पहले नमस्कार समय संस्कृत श्लोक बोले जाया करते थे, परतु वह परपरा भी अब रास से गई है। प्राचीन परपरा के अनुसार पहले चार गोपी निम्न श्लोक को अप स्थान पर खडे खडे हो बोलकर वहा से प्रिया- प्रियतम को नमन करती थी। श्लोक निम्न प्रकार है : गोपी ( प्रथम ) - नमोस्तु वृदावन सुदराभ्याम् । " नमोस्तु वृदावन विभ्रमाभ्याम् ।
एक सौ अट्ठावन / व्रज का रास रगमंच दोहो के साथ आरभ मे जो पद गाये जाते है उनमे प्रायः व्रज-महिमा, प्रिया- प्रियतम की भक्तवत्सलता, रूप-शोभा, सुकुमारिता तथा कृपालुता के अलावा उनके ऐश्वर्य के वर्णनो की प्रधानता होती है । फिर मुख्य समाजी की वारी आती है और वह एक ध्रुपद गाकर इस समाज संगीत का समापन और राम का समारंभ करता है । रासारभ के साथ गाये जाने वाले कुछ प्रमुख ध्रुपदो के बोल ये हैं . व्रज समुद्र मथुरा कमल, वृदावन मकरंद । व्रज वनिता सब पुष्प है, मधुकर गोकुलचद ॥ वृदावन के विरछ को, मरम न जाने कोय । डार डार अरु पात पै, राधे राधे होय ।। आदि-आदि । वनीरी तोरे चारु चार चूरी करन वृदावन सघन कुज, माधुरी लतान तरे, जमुना पुलिन पै मधुर वाजी वाँसुरी प्रथम मान ओकार, देवन मुनि महादेव, ग्यान माने गोरख, वेद मानें ब्रह्मा वन ठन कहाँ को चले हो, सामरे सुघर कन्हाई ध्रुपद गायन की अतिम पक्ति प्रारंभ हो जाने पर उसकी समाप्ति से पूर्व ही सखिया अपने आसनो से उठकर आगे आकर राधा-कृष्ण के पार्श्व मे नीचे खडी हो जाती है । भीतर से उसी समय शृगारी आरती का थाल, जिसमे जलती हुई भारती होती है, लाकर मुख्य सखी के हाथो मे देता है । तब वह सखी प्रिया प्रियतम की आरती करती है । आरती के समय प्रिया- प्रियतम गलवाही डाल देते है और कृष्ण अपने ओष्ठो पर वासुरी रखकर उसके बजाने का अभिनटन करते है । आरती करने के उपरात मुख्य सन्वी आरती को एक ओर रस देती है । सभी सखियो द्वारा आरतो गाई जाती है । बीच-बीच मे समाजी भी आरती के वोलो को कभी-कभी दुहराते जाते हैं । रास मे गाई जाने वाली मुख्य आरतियो मे मे कुछ निम्न प्रकार हैं प्रथम आरती जय कृष्ण मनोहर योगतरे, यदुनंदन नदकिशोर हरे । जय रासरमेश्वरी पूर्णतमे वरदे वृषभानु किशोरि हरे ।। जयतीय कदम्ब तरे ललिता, कल वेणु समीरण गान लता । जय राधिकाया हरि एक मता, सत तनु तरुणीगण मध्य गता ।। द्वितीय आरती नित्य-रास का मंचीय स्वरूप / एक सौ छप्पन श्रिति कमला कुछ मंडल ए, धृत कुडल ए । कलिन ललित बनमाल, जय जयदेव हरे ।। दिनमणि मंडल मडन ए, भव खडन ए । मुनिजन मानस हस, जय जयदेव हरे । कालिय विषधर गजन ए, जनरजन ए । जयदेव हरे ।। मधु-मुर-नरक विनाशन ए, सुरकुल केलि निधान, जय अमल कमल दल लोचन ए, त्रिभुवन भवन निधान, जय तृतीय आरती गरुणासन ए । जयदेव हरे । भवमोचन ए । । जयदेव हरे ॥ जनक सुता कृत भूषण ए, जित दूषण ए । समर श्रमित दशकठ, जय जयदेव हरे ।। अभिनव जलधर सुदर ए, धृत मंदर ए श्रीमुख चद्र चकोर, जय जयदेव हरे । तव चरणे प्रणतावय ए, मिति भावय ए । कुरु कुशल प्रणतेषु, जय जयदेव हरे ॥ श्री जयदेव कवेरिद, कुरुते मंगलमुज्ज्वल गीत, जय सुघर मणि कमला सी गोरी, जुह्न अगनित इक ठौरी । तऊ तव चरण कज प्यारी, नखन दुति चदा उजियारी । तासु छवि लेशहु नहि पावै, सुकवि मुख निरखत रहि जावै । किशोरी अगम रूप बोरी, प्रेमनिधि उमगि सीन तोरी । ललित लीला अथाह प्यारी, अंग माधुयं उमगि बारी । कृपा करि अगीकृत कीजै, विनय बलि मेरी सुनि लीजै । चतुर्थ आरती भारती कुजबिहारी की, कि गिरधर कृष्ण मुरारी की । गले मे बैजंती माला, बजावें मुरली मधुर वाला । श्रवन में कुडल झलकाला, नद के नदहि नदलाला । कि गिरधर कृष्ण मुरारी की ॥ आरतीशून्य ॥ एक सौ साठ / व्रज का रास रगमच गगन सम अग काति काली, कि राधा चमकि रही आली । कस्तूरी तिलक, चंद सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती गगन सो सुमन बहुत वरसें, देवता दरसन कूं तरसे । बजे मुँहचग और मिरदग, ग्वालिनी सग, लाज रख गोपकुमारी की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की आरती जहाँ ते निकसी भवगंगा, सकल दुख हरनी श्री गंगा, धरी शिव शीस, जटा के बीच, राधिका गौरश्याम मुख की । कि गिरधर कृष्णमुरारी की ॥ आरती पाचवी आरती आरती जुगल किशोर की कीजै । तन मन धन न्यौछावर कीजै । साँमरे श्याम गौर मुख राधा । जुगल स्वरूप ध्यान वर लीजै । मोर मुकुट, मुख बसी बिराजै । नटवर कला निरसि मन साज । कुज बिहारी लाला गिरवरधारी । जिनके चरनन पँ बलिहारी । फूलन सिंगार फूलन गल माला । निरखौ कुंमर नद कौ लाला । कचन थार कपूर की वाती । आरती करत सकल व्रजवासी । नद-नदन, वृषभानु किशोरी । परमानद स्वामी अविचल जोरी । राधाकृष्ण की जो आरती गावै । वह बँकुठ अमर पद पावै । इन पाचो आरतियो मे आजकल चतुर्थ आरती ही सर्वाधिक प्रचि । इसके उपरात प्रथम, द्वितीय और पाचवी आरतिगो का चलन है । तृतं आरती अब प्राय नही सुनी जाती । सखियो द्वारा नमस्कार और प्रशस्ति आरती का गायन समाप्त होने पर सब सखी क्रम से प्रिया- प्रियतम निकट आकर उनको नमस्कार करती और चरण छूती है । पहले नमस्कार समय संस्कृत श्लोक बोले जाया करते थे, परतु वह परपरा भी अब रास से गई है। प्राचीन परपरा के अनुसार पहले चार गोपी निम्न श्लोक को अप स्थान पर खडे खडे हो बोलकर वहा से प्रिया- प्रियतम को नमन करती थी। श्लोक निम्न प्रकार है : गोपी - नमोस्तु वृदावन सुदराभ्याम् । " नमोस्तु वृदावन विभ्रमाभ्याम् ।
पीएमएलए की एक विशेष अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की न्यायिक हिरासत को 14 दिनों के लिए बढ़ाकर चार अप्रैल कर दिया है। हालांकि, विशेष अदालत ने उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें बिस्तर, गद्दा और कुर्सी प्रदान करने की उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है। 62 वर्षीय मलिक को 23 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने माफिया डान दाऊद इब्राहिम कास्कर से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। तब से लगातार हिरासत में रहने के बाद मलिक ने ईडी मामले को रद करने के लिए पिछले हफ्ते बांबे हाई कोर्ट का रुख किया था और 20 साल से अधिक पुराने मामले में उन्हें हिरासत में भेजने के विशेष पीएमएलए कोर्ट के फैसले को रद कर दिया था, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मलिक को उनके विभागों और दो जिलों के संरक्षक मंत्री पद से मुक्त करने का फैसला किया, जो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा अन्य कैबिनेट सहयोगियों को आवंटित किए जाएंगे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने पार्टी नेता और कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक के विभागों का बंटवारा पार्टी के दूसरे मंत्रियों के बीच करने का फैसला लिया है। वर्तमान में मनी लांड्रिंग के एक मामले में नवाब मलिक न्यायिक हिरासत में हैं। विभाग बंटवारे के बाद शिवसेना की अगुआई वाली महा विकास अघाडी सरकार में मलिक के पास कोई विभाग नहीं रह जाएगा। राकांपा ने मलिक से इस्तीफा नहीं मांगने का निर्णय लिया है, जबकि विपक्षी भाजपा ने उनसे इस्तीफा लेने की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार में मलिक के पास कौशल विकास एवं अल्पसंख्यक मामलों के विभाग हैं। इसके अलावा वह परभणी और गोंदिया जिलों के गार्जियन मंत्री भी हैं। कौशल विकास विभाग राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे को और अल्पसंख्यक मामले विभाग आवास मंत्री जितेंद्र अवहद को सौंपे जाएंगे। सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे को परभणी जिला सौंपा गया है। ऊर्जा राज्यमंत्री प्रजक्त तानपुरे गोंदिया जिले के नए गार्जियन मंत्री होंगे। महाराष्ट्र राज्य राकांपा के अध्यक्ष और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि मलिक के विभागों का बंटवारा करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री उसे राजभवन को अग्रसारित करेंगे।
पीएमएलए की एक विशेष अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की न्यायिक हिरासत को चौदह दिनों के लिए बढ़ाकर चार अप्रैल कर दिया है। हालांकि, विशेष अदालत ने उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें बिस्तर, गद्दा और कुर्सी प्रदान करने की उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है। बासठ वर्षीय मलिक को तेईस फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने माफिया डान दाऊद इब्राहिम कास्कर से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। तब से लगातार हिरासत में रहने के बाद मलिक ने ईडी मामले को रद करने के लिए पिछले हफ्ते बांबे हाई कोर्ट का रुख किया था और बीस साल से अधिक पुराने मामले में उन्हें हिरासत में भेजने के विशेष पीएमएलए कोर्ट के फैसले को रद कर दिया था, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मलिक को उनके विभागों और दो जिलों के संरक्षक मंत्री पद से मुक्त करने का फैसला किया, जो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा अन्य कैबिनेट सहयोगियों को आवंटित किए जाएंगे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पार्टी नेता और कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक के विभागों का बंटवारा पार्टी के दूसरे मंत्रियों के बीच करने का फैसला लिया है। वर्तमान में मनी लांड्रिंग के एक मामले में नवाब मलिक न्यायिक हिरासत में हैं। विभाग बंटवारे के बाद शिवसेना की अगुआई वाली महा विकास अघाडी सरकार में मलिक के पास कोई विभाग नहीं रह जाएगा। राकांपा ने मलिक से इस्तीफा नहीं मांगने का निर्णय लिया है, जबकि विपक्षी भाजपा ने उनसे इस्तीफा लेने की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार में मलिक के पास कौशल विकास एवं अल्पसंख्यक मामलों के विभाग हैं। इसके अलावा वह परभणी और गोंदिया जिलों के गार्जियन मंत्री भी हैं। कौशल विकास विभाग राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे को और अल्पसंख्यक मामले विभाग आवास मंत्री जितेंद्र अवहद को सौंपे जाएंगे। सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे को परभणी जिला सौंपा गया है। ऊर्जा राज्यमंत्री प्रजक्त तानपुरे गोंदिया जिले के नए गार्जियन मंत्री होंगे। महाराष्ट्र राज्य राकांपा के अध्यक्ष और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि मलिक के विभागों का बंटवारा करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री उसे राजभवन को अग्रसारित करेंगे।
हीरालाल सैन. जयपुर. राजस्थान पुलिस ने एक बार फिर सामाजिक सरोकार की अनूठी नजीर पेश की है. इस बार मामला जयपुर जिले के सांभरलेक पुलिस थाने से जुड़ा है. यहां पुलिस ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए गोद ली गई बेटी की शादी में मायरा भरकर अनूठा उदाहरण पेश किया है. शादी में मायरा भरने के दौरान इलाके के डीएसपी लक्ष्मी सुथार समेत सांभरलेक पुलिस थाने के पुलिसकर्मी मौजूद रहे. पुलिस के इस कदम की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है. जानकारी के अनुसार साल 2006 में थाना इलाके में 4 वर्षीय एक बालिका लावारिश हालत में मिली थी. उस समय तत्कालीन थानाप्रभारी रामफूल सिंह ने बालिका को गोद लेकर एक ढोली परिवार को लालन-पोषण के लिए सुपुर्द किया था. इस बच्ची का नाम देगी है. उसके बाद अब हाल ही में बालिका की शादी हुई है. इस पर सांभरलेक थाना पुलिस ने गोदी ली गई बेटी का मायरा भरा. मायरा भरने के लिए पुलिस पूरे लवाजमे के साथ उसके घर पहुंची. पुलिसकर्मियों ने गोद ली गई बेटी के मायरे में 51 हजार रुपये नगद और सोने -चांदी की ज्वेलरी भेंट की. डीएसपी लक्ष्मी सुथार ने गोद ली गई बेटी देगी को चुनरी ओढ़ाई. वहीं इलाके एम्बुलेंसकर्मियों ने भी मायरे में शिरकत की. उन्होंने मायरे में 11 हजार रुपये भेंट किए. इस दौरान देगी के परिजनों ने पुलिसकर्मियों का तिलक लगाकर स्वागत किया. पुलिसकर्मियों की ओर से मायरा भरे जाने पर देगी की आंखें भर आईं. उल्लेखनीय है कि राजस्थान में इससे पहले भी कई बार ऐसे मौके पर आ चुके हैं जब पुलिस ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए ऐसे ही लोगों का दिल जीता है. राजस्थान के कई थानों में कार्यरत सफाई कर्मचारी या कुक के परिवारों के प्रति स्थानीय थाना पुलिस ने पूरी सहानुभूति रखते हुए उनके बच्चों की शादियों में मायरे की रस्में निभाकर उनको आर्थिक संबल प्रदान किया है. कड़क वर्दी वाली पुलिस इस तरह का व्यवहार कर कई बार अपनी अलग छवि पेश कर चुकी है. .
हीरालाल सैन. जयपुर. राजस्थान पुलिस ने एक बार फिर सामाजिक सरोकार की अनूठी नजीर पेश की है. इस बार मामला जयपुर जिले के सांभरलेक पुलिस थाने से जुड़ा है. यहां पुलिस ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए गोद ली गई बेटी की शादी में मायरा भरकर अनूठा उदाहरण पेश किया है. शादी में मायरा भरने के दौरान इलाके के डीएसपी लक्ष्मी सुथार समेत सांभरलेक पुलिस थाने के पुलिसकर्मी मौजूद रहे. पुलिस के इस कदम की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है. जानकारी के अनुसार साल दो हज़ार छः में थाना इलाके में चार वर्षीय एक बालिका लावारिश हालत में मिली थी. उस समय तत्कालीन थानाप्रभारी रामफूल सिंह ने बालिका को गोद लेकर एक ढोली परिवार को लालन-पोषण के लिए सुपुर्द किया था. इस बच्ची का नाम देगी है. उसके बाद अब हाल ही में बालिका की शादी हुई है. इस पर सांभरलेक थाना पुलिस ने गोदी ली गई बेटी का मायरा भरा. मायरा भरने के लिए पुलिस पूरे लवाजमे के साथ उसके घर पहुंची. पुलिसकर्मियों ने गोद ली गई बेटी के मायरे में इक्यावन हजार रुपये नगद और सोने -चांदी की ज्वेलरी भेंट की. डीएसपी लक्ष्मी सुथार ने गोद ली गई बेटी देगी को चुनरी ओढ़ाई. वहीं इलाके एम्बुलेंसकर्मियों ने भी मायरे में शिरकत की. उन्होंने मायरे में ग्यारह हजार रुपये भेंट किए. इस दौरान देगी के परिजनों ने पुलिसकर्मियों का तिलक लगाकर स्वागत किया. पुलिसकर्मियों की ओर से मायरा भरे जाने पर देगी की आंखें भर आईं. उल्लेखनीय है कि राजस्थान में इससे पहले भी कई बार ऐसे मौके पर आ चुके हैं जब पुलिस ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए ऐसे ही लोगों का दिल जीता है. राजस्थान के कई थानों में कार्यरत सफाई कर्मचारी या कुक के परिवारों के प्रति स्थानीय थाना पुलिस ने पूरी सहानुभूति रखते हुए उनके बच्चों की शादियों में मायरे की रस्में निभाकर उनको आर्थिक संबल प्रदान किया है. कड़क वर्दी वाली पुलिस इस तरह का व्यवहार कर कई बार अपनी अलग छवि पेश कर चुकी है. .
भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में प्रशासन का कहना है कि सेना के तीन जवानों और दो पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जा रही है. इन सैनिकों और पुलिसकर्मयों पर आरोप है कि इनके चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध हैं. इन लोगों को तब गिरफ़्तार किया गया जब एक चरमपंथी से प्रशासन को जानकारी मिली कि इन लोगों ने लश्कर-ए-तैयबा की मदद की है. इन पर आरोप है कि इन्होंने चरमपंथी संगठन को सामान इत्यादि देने में मदद की है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तार लोगों से की गई पूछताछ में फ़िलहाल कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख गोपाल शर्मा ने समाचार माध्यमों को बताया है कि दोनो पुलिसकर्मी पुँछ ज़िले के हैं. बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में प्रशासन का कहना है कि सेना के तीन जवानों और दो पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जा रही है. इन सैनिकों और पुलिसकर्मयों पर आरोप है कि इनके चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध हैं. इन लोगों को तब गिरफ़्तार किया गया जब एक चरमपंथी से प्रशासन को जानकारी मिली कि इन लोगों ने लश्कर-ए-तैयबा की मदद की है. इन पर आरोप है कि इन्होंने चरमपंथी संगठन को सामान इत्यादि देने में मदद की है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गिरफ़्तार लोगों से की गई पूछताछ में फ़िलहाल कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख गोपाल शर्मा ने समाचार माध्यमों को बताया है कि दोनो पुलिसकर्मी पुँछ ज़िले के हैं. बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान चोटिल हुए ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मिशेल मार्श जल्द मैदान पर वापसी करने वाले हैं लेकिन एड़ी की चोट से उबरने के बाद मार्श स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर खेलेंगे और गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे। आईपीएल के 13वें सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ मैच में खेलते हुए मार्श के दाएं पैर की एड़ी में सिंडेसमोसिस इंजरी हो गए थी। जिसके बाद मार्श टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे और उन्हें यूएई से भारत लौटना पड़ा था। पर्थ पहुंचने के बाद मार्श का फिर से स्कैन करवाया गया था क्योंकि उनकी पहली स्कैन रिपोर्ट गुम हो गई थी। नई रिपोर्ट के मुताबिक मार्श को सर्जरी की जरूरत नहीं है, जैसा कि पहले लग रहा था लेकिन वो कुछ समय तक ऑलराउंडर के तौर पर नहीं खेल पाएंगे।
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान चोटिल हुए ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मिशेल मार्श जल्द मैदान पर वापसी करने वाले हैं लेकिन एड़ी की चोट से उबरने के बाद मार्श स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर खेलेंगे और गेंदबाजी नहीं कर पाएंगे। आईपीएल के तेरहवें सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ मैच में खेलते हुए मार्श के दाएं पैर की एड़ी में सिंडेसमोसिस इंजरी हो गए थी। जिसके बाद मार्श टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे और उन्हें यूएई से भारत लौटना पड़ा था। पर्थ पहुंचने के बाद मार्श का फिर से स्कैन करवाया गया था क्योंकि उनकी पहली स्कैन रिपोर्ट गुम हो गई थी। नई रिपोर्ट के मुताबिक मार्श को सर्जरी की जरूरत नहीं है, जैसा कि पहले लग रहा था लेकिन वो कुछ समय तक ऑलराउंडर के तौर पर नहीं खेल पाएंगे।
कच्चे तेल की कीमतों के 120 डॉलर प्रति बैरल को पार करने के बाद एशियाई बाजारों में सोने की कीमतों में उछाल आया है। इस साल अभी तक सोने की कीमतों में 5. 2 फीसदी का इजाफा हो चुका है जबकि इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 27 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी से सोने की कीमतों में बड़े स्तर पर तेजी आ सकती है। सिंगापुर में सोने की तुरंत डिलिवरी कीमतों में 0. 6 फीसदी की तेजी आई है और कीमतें 5. 03 डॉलर प्रति आउंस बढ़कर 881. 43 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई हैं। 17 मार्च को जब सोने की कीमतें 1,032 डॉलर प्रति आउंस के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं।
कच्चे तेल की कीमतों के एक सौ बीस डॉलर प्रति बैरल को पार करने के बाद एशियाई बाजारों में सोने की कीमतों में उछाल आया है। इस साल अभी तक सोने की कीमतों में पाँच. दो फीसदी का इजाफा हो चुका है जबकि इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में सत्ताईस फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी से सोने की कीमतों में बड़े स्तर पर तेजी आ सकती है। सिंगापुर में सोने की तुरंत डिलिवरी कीमतों में शून्य. छः फीसदी की तेजी आई है और कीमतें पाँच. तीन डॉलर प्रति आउंस बढ़कर आठ सौ इक्यासी. तैंतालीस डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई हैं। सत्रह मार्च को जब सोने की कीमतें एक,बत्तीस डॉलर प्रति आउंस के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं।
'सूरमा' फिल्म मशहूर हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की प्रेरणादाई कहानी को दिखाएगी। हॉकी लीजेंड संदीप सिंह की बॉयोपिक 'सूरमा' से अभी हाल ही में दिलजीत दोसांझ का फर्स्ट लुक रिवील किया गया था और अब मेकर्स ने तापसी पन्नू का एक मोशन पोस्टर जारी किया है। दलजीत और तापसी के पोस्टर फिल्म को लेकर उत्सुकता जगा रहे हैं। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ जहां संदीप सिंह के किरदार में नजर आएंगे, वहीं तापसी पन्नू भी एक हॉकी प्लेयर के किरदार में ही नजर आएंगी। इस फिल्म में तापसी पन्नू हरप्रीत उर्फ प्रीत का किरदार निभा रही हैं। जा सके। संदीप सिंह ने उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग दी है। अभिनेत्री ने अपने ट्विटर पर फिल्म का मोशन पोस्टर शेयर करते हुए लिखा- 'खेलों के लिए मेरे कभी न मरने वाले प्यार और देश के लिए।' पोस्टर को देखकर लग रहा है कि उनकी मेहनत जाया नहीं जाने वाली है। तापसी के फैंस के लिए भी उन्हें हॉकी खेलते हुए देखना सुखद अनुभव रहने वाला है। 'सूरमा' की बात करें तो यह फिल्म मशहूर हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की प्रेरणादाई कहानी को दिखाएगी। बता दें कि संदीप सिंह जब शताब्दी ट्रेन ने जर्मनी में होने वाले वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए अपनी टीम को ज्वाइन करने के लिए जा रहे थे, तब उन पर गोलियां दागी गई थी। इस हमले में वह गंभीर रूप से वह जख्मी हो गए थे। इस हमले के बाद संदीप सिंह तकरीबन दो हफ्तों के लिए व्हीलचेयर पर रहने को मजबूर हो गए थे। इस घटना के बाद संदीप न केवल स्वस्थ हुए बल्कि उन्होंने नेशनल टीम में जोरदार वापसी भी की। इस फिल्म को शाद अली निर्देशित कर रहे हैं। फिल्म में अंगद बेदी भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म 13 जुलाई को रिलीज हो रही है। इसी दिन अनिल कपूर, राजकुमार राव और ऐश्वर्या राय बच्चन की 'फन्ने खान' भी रिलीज होने जा रही है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
'सूरमा' फिल्म मशहूर हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की प्रेरणादाई कहानी को दिखाएगी। हॉकी लीजेंड संदीप सिंह की बॉयोपिक 'सूरमा' से अभी हाल ही में दिलजीत दोसांझ का फर्स्ट लुक रिवील किया गया था और अब मेकर्स ने तापसी पन्नू का एक मोशन पोस्टर जारी किया है। दलजीत और तापसी के पोस्टर फिल्म को लेकर उत्सुकता जगा रहे हैं। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ जहां संदीप सिंह के किरदार में नजर आएंगे, वहीं तापसी पन्नू भी एक हॉकी प्लेयर के किरदार में ही नजर आएंगी। इस फिल्म में तापसी पन्नू हरप्रीत उर्फ प्रीत का किरदार निभा रही हैं। जा सके। संदीप सिंह ने उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग दी है। अभिनेत्री ने अपने ट्विटर पर फिल्म का मोशन पोस्टर शेयर करते हुए लिखा- 'खेलों के लिए मेरे कभी न मरने वाले प्यार और देश के लिए।' पोस्टर को देखकर लग रहा है कि उनकी मेहनत जाया नहीं जाने वाली है। तापसी के फैंस के लिए भी उन्हें हॉकी खेलते हुए देखना सुखद अनुभव रहने वाला है। 'सूरमा' की बात करें तो यह फिल्म मशहूर हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की प्रेरणादाई कहानी को दिखाएगी। बता दें कि संदीप सिंह जब शताब्दी ट्रेन ने जर्मनी में होने वाले वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए अपनी टीम को ज्वाइन करने के लिए जा रहे थे, तब उन पर गोलियां दागी गई थी। इस हमले में वह गंभीर रूप से वह जख्मी हो गए थे। इस हमले के बाद संदीप सिंह तकरीबन दो हफ्तों के लिए व्हीलचेयर पर रहने को मजबूर हो गए थे। इस घटना के बाद संदीप न केवल स्वस्थ हुए बल्कि उन्होंने नेशनल टीम में जोरदार वापसी भी की। इस फिल्म को शाद अली निर्देशित कर रहे हैं। फिल्म में अंगद बेदी भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म तेरह जुलाई को रिलीज हो रही है। इसी दिन अनिल कपूर, राजकुमार राव और ऐश्वर्या राय बच्चन की 'फन्ने खान' भी रिलीज होने जा रही है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
फाइल फोटो (Photo Credit: फाइल फोटो) Darbhanga: मिशन 2024 के लिए बीजेपी ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नियमित अंतराल पर बिहार का दौरा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ दूसरे बीजेपी के दिग्गज भी लगातार बिहार का रुख कर रहे हैं. इस बीच जेडीयू की परेशानी उसके अपने ही नेता उपेंद्र कुशवाहा ना मीडिया में बयानबाजी करके बढ़ा चुके हैं. अब बीजेपी की चाहत ये है कि वह जेडीयू को दिल्ली की लड़ाई में पैदल कर दे. इसको लेकर अभी फार्मूला तय किया जा रहा है. बिहार बीजेपी ने दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है और बैठक की शुरुआत आज यानि 28 जनवरी 2023 से होगी. बैठक में बीच चुनावी तैयारी, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक आज से दरभंगा के लहरियासराय में होगी. बैठक में संगठनात्मक मामलों के अतिरिक्त बिहार की की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की जाएगी. बता दें की बीजेपी की बैठक साल में 4 बार आयोजित होती है. बैठक बिहार बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल की अध्यक्षता में होगी. मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी दो दिवसीय बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर चर्चा करेगी. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से प्रदेश कार्यसमिति के लिए राजनीतिक प्रस्ताव की जिम्मेवारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा के नेतृत्व में प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी को दी गई है. इसके अलावा कार्यसमिति के समापन का प्रस्ताव बनाने की जिम्मेदारी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी के साथ-साथ बिहार बीजेपी उपाध्यक्ष नीतीश मिश्र को दी गई है. बैठक आज दोपहर 2:00 बजे से शुरू होगी.
फाइल फोटो Darbhanga: मिशन दो हज़ार चौबीस के लिए बीजेपी ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. एक तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नियमित अंतराल पर बिहार का दौरा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ दूसरे बीजेपी के दिग्गज भी लगातार बिहार का रुख कर रहे हैं. इस बीच जेडीयू की परेशानी उसके अपने ही नेता उपेंद्र कुशवाहा ना मीडिया में बयानबाजी करके बढ़ा चुके हैं. अब बीजेपी की चाहत ये है कि वह जेडीयू को दिल्ली की लड़ाई में पैदल कर दे. इसको लेकर अभी फार्मूला तय किया जा रहा है. बिहार बीजेपी ने दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है और बैठक की शुरुआत आज यानि अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार तेईस से होगी. बैठक में बीच चुनावी तैयारी, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक आज से दरभंगा के लहरियासराय में होगी. बैठक में संगठनात्मक मामलों के अतिरिक्त बिहार की की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की जाएगी. बता दें की बीजेपी की बैठक साल में चार बार आयोजित होती है. बैठक बिहार बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल की अध्यक्षता में होगी. मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी दो दिवसीय बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर चर्चा करेगी. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से प्रदेश कार्यसमिति के लिए राजनीतिक प्रस्ताव की जिम्मेवारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा के नेतृत्व में प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी को दी गई है. इसके अलावा कार्यसमिति के समापन का प्रस्ताव बनाने की जिम्मेदारी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी के साथ-साथ बिहार बीजेपी उपाध्यक्ष नीतीश मिश्र को दी गई है. बैठक आज दोपहर दो:शून्य बजे से शुरू होगी.
बॉलीवुड के स्टार्स की लव स्टोरी से लेकर ब्रेकअप स्टोरी तक हर चीज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहती हैं। कभी किसी स्टार की लव अफेयर को जानकर लोग हैरान हो जाते हैं, तो कभी स्टार्स के ब्रेकअप की खबर लोगों को अंदर से तोड़ देती है। लेकिन बॉलीवुड लाइफ की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बॉलीवुड ऐसी लव स्टोरी के बारे में बताने वाले हैं, जो एक तरफा रही। बॉलीवुड के कई ऐसे स्टार्स रहे हैं, जो एक तरफा प्यार कर के अपना दिल तुड़वा चुके हैं। इस लिस्ट में गोविंदा से लेकर जानी-मानी एक्ट्रेस परवीन बाबी तक का नाम शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक परवीन बाबी महेश भट्ट के प्यार में पागल थीं।
बॉलीवुड के स्टार्स की लव स्टोरी से लेकर ब्रेकअप स्टोरी तक हर चीज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहती हैं। कभी किसी स्टार की लव अफेयर को जानकर लोग हैरान हो जाते हैं, तो कभी स्टार्स के ब्रेकअप की खबर लोगों को अंदर से तोड़ देती है। लेकिन बॉलीवुड लाइफ की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बॉलीवुड ऐसी लव स्टोरी के बारे में बताने वाले हैं, जो एक तरफा रही। बॉलीवुड के कई ऐसे स्टार्स रहे हैं, जो एक तरफा प्यार कर के अपना दिल तुड़वा चुके हैं। इस लिस्ट में गोविंदा से लेकर जानी-मानी एक्ट्रेस परवीन बाबी तक का नाम शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक परवीन बाबी महेश भट्ट के प्यार में पागल थीं।
Deoghar : देवघर की छात्रा ब्यूटी कुमारी युद्धग्रस्त यूक्रेन से सकुशल घर लौट आई है. घर वापसी आने पर उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी. बेटी को अपने बीच पाकर माता-पिता खुशी की आंसू रोक नहीं पा रहे थे. घर आने पर अपनी लाड़ली को माता-पिता ने मिठाईयां खिलाकर मुहं मीठा किया. यूक्रेन की आपबीती सुनाते हुए छात्रा ने कहा कि यूक्रेन में जब मुझे भारत सरकार के अधिकारी ने वतन वापसी के लिए संपर्क किया तो अपार खुशी हुई. जिस कॉलेज में मैं पढ़ाई कर रही थी उससे हज़ार किलोमीटर दूर फ्लाइट पकड़ने बॉर्डर पर जाना था. बॉर्डर पर भारतीयों के साथ मारपीट किए जाने की खबर भी सुन चुकी थी. इस वजह से डर लग रहा था. बॉर्डर पहुंचने पर पता चला कि फ्लाइट रद्द है. फ्लाइट रद्द होने का वजह जिस एयरपोर्ट से विमान उड़ान भरने वाला था, उसके समीप बम विस्फोट हो गया था. फिर बॉर्डर पर एकत्र भारतीय छात्रों ने भारतीय दूतावास से बातचीत की. इसके बाद हमलोगों की वापसी ऑपरेशन गंगा के तहत संभव हो सकी. ब्यूटी ने बताया कि होस्टल में 1500 विद्यार्थियों में करीब एक हज़ार भारतीय थे. उन्होंने वतन वापस आने पर भारत सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है. ब्यूटी बिहार के कटोरिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राज किशोर यादव उर्फ पप्पू यादव की बेटी है. राज किशोर ने अपनी बेटी की सकुशल वापसी पर पीएम मोदी के प्रति आभार जताया है. ब्यूटी कुमारी यूक्रेन के बोगोमोल्ट्स नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है.
Deoghar : देवघर की छात्रा ब्यूटी कुमारी युद्धग्रस्त यूक्रेन से सकुशल घर लौट आई है. घर वापसी आने पर उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी. बेटी को अपने बीच पाकर माता-पिता खुशी की आंसू रोक नहीं पा रहे थे. घर आने पर अपनी लाड़ली को माता-पिता ने मिठाईयां खिलाकर मुहं मीठा किया. यूक्रेन की आपबीती सुनाते हुए छात्रा ने कहा कि यूक्रेन में जब मुझे भारत सरकार के अधिकारी ने वतन वापसी के लिए संपर्क किया तो अपार खुशी हुई. जिस कॉलेज में मैं पढ़ाई कर रही थी उससे हज़ार किलोमीटर दूर फ्लाइट पकड़ने बॉर्डर पर जाना था. बॉर्डर पर भारतीयों के साथ मारपीट किए जाने की खबर भी सुन चुकी थी. इस वजह से डर लग रहा था. बॉर्डर पहुंचने पर पता चला कि फ्लाइट रद्द है. फ्लाइट रद्द होने का वजह जिस एयरपोर्ट से विमान उड़ान भरने वाला था, उसके समीप बम विस्फोट हो गया था. फिर बॉर्डर पर एकत्र भारतीय छात्रों ने भारतीय दूतावास से बातचीत की. इसके बाद हमलोगों की वापसी ऑपरेशन गंगा के तहत संभव हो सकी. ब्यूटी ने बताया कि होस्टल में एक हज़ार पाँच सौ विद्यार्थियों में करीब एक हज़ार भारतीय थे. उन्होंने वतन वापस आने पर भारत सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है. ब्यूटी बिहार के कटोरिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राज किशोर यादव उर्फ पप्पू यादव की बेटी है. राज किशोर ने अपनी बेटी की सकुशल वापसी पर पीएम मोदी के प्रति आभार जताया है. ब्यूटी कुमारी यूक्रेन के बोगोमोल्ट्स नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है.
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। मध्यप्रदेश में पिछले 3 दिनों से हो रही लगातार बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदी नाले उफान पर है। इस कारण जिले मैं आवागमन के रास्ते बंद हो गए हैं। इस कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। मध्यप्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदी नाले उफान पर है। इस कारण जिले मैं आवागमन के रास्ते बंद हो गए हैं। इस कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
GORAKHPUR: गोरखपुर महोत्सव के तहत स्पोर्ट्स कॉम्प्टीशन का दौर जारी है। शनिवार को रीजनल स्टेडियम में फुटबॉल, कबड्डी, जिम्नास्टिक, कुश्ती और बैडमिंटन का कॉम्प्टीशन ऑर्गनाइज किया गया, जबकि स्पोर्ट्स कॉलेज ग्राउंड पर हॉकी मुकाबले हुए। हर गेम्स में खुद को बेस्ट साबित करने के लिए जद्दोजहद होती रही। सुबह से शुरू हुए मुकाबलों का दौर देर शाम तक जारी रहा। रविवार को कुछ गेम्स के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले ऑर्गनाइज किए जाएंगे, जिसमें से चैंपियन का सेलेक्शन होगा। वॉलीबाल में बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने अयोध्या को शिकस्त देकर चैंपियनशिप पर कब्जा जमाया। फाइनल - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने अयोध्या को 26-24, 25-16 से हराया। सेमीफाइनल - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने डीवीए गोरखपुर को 25-20, 25-15 से हराया। सेमीफाइनल - अयोध्या ने एनई रेलवे को 25-23, 25-21 से हराया। - लखनऊ ने आजमगढ़ को 9-0 से मात दी। - गोरखपुर ने बांदा को 2-1 से हराया। - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने झांसी को 4-0 से शिकस्त दी। - सरमाउंट पब्लिक स्कूल ने सावित्री पब्लिक स्कूल को टाईब्रेकर में 3-0 से हराया। - केंद्रीय विद्यालय ने कोऑपरेटिव स्कूल को 4-0 से शिकस्त दी। - सरमाउंट पब्लिक स्कूल ने द्रोपदी देवी इंटर कॉलेज को 3-2 से शिकस्त दी। - इंद्रासन इंटर कॉलेज ने सरस्वती विद्या मंदिर को 38-19 से हराया। - विजय क्लब ने स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज को 22-5 से शिकस्त दी। - बापू इंटर कॉलेज इंटर कॉलेज ने स्टार क्लब को 30-16 से मात दी। - पहले क्वार्टर फाइनल में विजय क्लब ने मदन मोहन मालवीय को 37-28 से हराया। - विजय क्लब ने कस्तूरबा इंटर कॉलेज को 27-11 से शिकस्त दी। - गोरखपुर स्टेडियम ने मैना देवी इंटर कॉलेज को 44-14 से हराया। - पहले सेमीफाइनल लिटिल माउंट ने लक्ष्मी क्लब को 34-30 से हराया। - स्टेडियम गोरखपुर ने लिटिल माउंट को 40-22 से हराया। - अमित ने मुकेश को 6-4 से हराया। - विशाल ने हरिओम को चित किया। - अमित कुमार ने गोविंद को 4-2 से शिकस्त दी। - लल्लीभान ने अभिषेक पाल को 4-2 से हराया। - विनय पासवान ने अमित चौहान को 10-0 से मात दी। - हरिओम ने बृजेश यादव को 6-5 से हराया। - अमरनाथ ने विश्वजीत को 2-1 से हराया। - अमरजीत ने योगेश को 6-4 से हराया। - अजय कुमार ने वीरेंद्र कुमार को 4-2 से हराया। - अमन ने मोहित यादव को 4-3 से हराया। - मंगेश ने विवेक कुमार को 4-2 से शिकस्त दी। - विवेक कुमार ने संजय कुमार को 8-0 से मात दी। - विवेक कुमार ने अजीज को 4-2 से हराया। - अभिषेक ने भीम को 3-2 से मात दी। - किशन ने वंश को 21-13 को हराया। - परीक्षित ने उज्जवल को 21-19 से शिकस्त दी। - अनुभव ने जतिन को 22-20 से हराया। - अनुज ने सामर्थ को 21-1 से मात दी। - ज्योतप्रीत ने मयंक को 21-13 से हराया। - मारूफ ने दिव्यांश को 21-2 से हराया। - धीरज ने आदित्य को 21-7 से हराया।
GORAKHPUR: गोरखपुर महोत्सव के तहत स्पोर्ट्स कॉम्प्टीशन का दौर जारी है। शनिवार को रीजनल स्टेडियम में फुटबॉल, कबड्डी, जिम्नास्टिक, कुश्ती और बैडमिंटन का कॉम्प्टीशन ऑर्गनाइज किया गया, जबकि स्पोर्ट्स कॉलेज ग्राउंड पर हॉकी मुकाबले हुए। हर गेम्स में खुद को बेस्ट साबित करने के लिए जद्दोजहद होती रही। सुबह से शुरू हुए मुकाबलों का दौर देर शाम तक जारी रहा। रविवार को कुछ गेम्स के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले ऑर्गनाइज किए जाएंगे, जिसमें से चैंपियन का सेलेक्शन होगा। वॉलीबाल में बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने अयोध्या को शिकस्त देकर चैंपियनशिप पर कब्जा जमाया। फाइनल - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने अयोध्या को छब्बीस-चौबीस, पच्चीस-सोलह से हराया। सेमीफाइनल - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने डीवीए गोरखपुर को पच्चीस-बीस, पच्चीस-पंद्रह से हराया। सेमीफाइनल - अयोध्या ने एनई रेलवे को पच्चीस-तेईस, पच्चीस-इक्कीस से हराया। - लखनऊ ने आजमगढ़ को नौ-शून्य से मात दी। - गोरखपुर ने बांदा को दो-एक से हराया। - वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज ने झांसी को चार-शून्य से शिकस्त दी। - सरमाउंट पब्लिक स्कूल ने सावित्री पब्लिक स्कूल को टाईब्रेकर में तीन-शून्य से हराया। - केंद्रीय विद्यालय ने कोऑपरेटिव स्कूल को चार-शून्य से शिकस्त दी। - सरमाउंट पब्लिक स्कूल ने द्रोपदी देवी इंटर कॉलेज को तीन-दो से शिकस्त दी। - इंद्रासन इंटर कॉलेज ने सरस्वती विद्या मंदिर को अड़तीस-उन्नीस से हराया। - विजय क्लब ने स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज को बाईस-पाँच से शिकस्त दी। - बापू इंटर कॉलेज इंटर कॉलेज ने स्टार क्लब को तीस-सोलह से मात दी। - पहले क्वार्टर फाइनल में विजय क्लब ने मदन मोहन मालवीय को सैंतीस-अट्ठाईस से हराया। - विजय क्लब ने कस्तूरबा इंटर कॉलेज को सत्ताईस-ग्यारह से शिकस्त दी। - गोरखपुर स्टेडियम ने मैना देवी इंटर कॉलेज को चौंतालीस-चौदह से हराया। - पहले सेमीफाइनल लिटिल माउंट ने लक्ष्मी क्लब को चौंतीस-तीस से हराया। - स्टेडियम गोरखपुर ने लिटिल माउंट को चालीस-बाईस से हराया। - अमित ने मुकेश को छः-चार से हराया। - विशाल ने हरिओम को चित किया। - अमित कुमार ने गोविंद को चार-दो से शिकस्त दी। - लल्लीभान ने अभिषेक पाल को चार-दो से हराया। - विनय पासवान ने अमित चौहान को दस-शून्य से मात दी। - हरिओम ने बृजेश यादव को छः-पाँच से हराया। - अमरनाथ ने विश्वजीत को दो-एक से हराया। - अमरजीत ने योगेश को छः-चार से हराया। - अजय कुमार ने वीरेंद्र कुमार को चार-दो से हराया। - अमन ने मोहित यादव को चार-तीन से हराया। - मंगेश ने विवेक कुमार को चार-दो से शिकस्त दी। - विवेक कुमार ने संजय कुमार को आठ-शून्य से मात दी। - विवेक कुमार ने अजीज को चार-दो से हराया। - अभिषेक ने भीम को तीन-दो से मात दी। - किशन ने वंश को इक्कीस-तेरह को हराया। - परीक्षित ने उज्जवल को इक्कीस-उन्नीस से शिकस्त दी। - अनुभव ने जतिन को बाईस-बीस से हराया। - अनुज ने सामर्थ को इक्कीस-एक से मात दी। - ज्योतप्रीत ने मयंक को इक्कीस-तेरह से हराया। - मारूफ ने दिव्यांश को इक्कीस-दो से हराया। - धीरज ने आदित्य को इक्कीस-सात से हराया।
एक बार महाकाश्यप ने भगवान बुद्ध से पूछा था-भगवन् मन तो बड़ा चंचल है, यह सधे कैसे? यह निर्मल कैसे हो? इन प्रश्रों के उत्तर में भगवान चुप रहे। अगले दिन वह महाकाश्यप के साथ एक यात्रा के लिए निकले। एक बार महाकाश्यप ने भगवान बुद्ध से पूछा था-भगवन् मन तो बड़ा चंचल है, यह सधे कैसे? यह निर्मल कैसे हो? इन प्रश्रों के उत्तर में भगवान चुप रहे। अगले दिन वह महाकाश्यप के साथ एक यात्रा के लिए निकले। यात्रा में दोपहर के समय वह एक वृक्ष की छांव में विश्राम के लिए रुके। उन्हें प्यास लगी तो महाकाश्यप पास के पहाड़ी झरने से पानी लेने के लिए गए लेकिन झरने में से अभी बैलगाडिय़ां निकली थीं और उसका पानी गंदा हो गया था। महाकाश्यप ने सारी बात भगवान् को बताते हुए कहा-प्रभु! झरने का पानी गंदा है, मैं पीछे जाकर नदी से पानी ले आता हूं। लेकिन बुद्ध ने हंसते हुए कहा-नदी दूर है, तुम फिर से वापस झरने के मूल में जाओ और पानी लेकर आओ। उभर आती है। बस बात मन को साधने की है। मन को साधने की साधना करते हुए ही जीवन निर्मलता, सफलता एवं आध्यात्मिक विभूतियों का भंडार बन जाता है।
एक बार महाकाश्यप ने भगवान बुद्ध से पूछा था-भगवन् मन तो बड़ा चंचल है, यह सधे कैसे? यह निर्मल कैसे हो? इन प्रश्रों के उत्तर में भगवान चुप रहे। अगले दिन वह महाकाश्यप के साथ एक यात्रा के लिए निकले। एक बार महाकाश्यप ने भगवान बुद्ध से पूछा था-भगवन् मन तो बड़ा चंचल है, यह सधे कैसे? यह निर्मल कैसे हो? इन प्रश्रों के उत्तर में भगवान चुप रहे। अगले दिन वह महाकाश्यप के साथ एक यात्रा के लिए निकले। यात्रा में दोपहर के समय वह एक वृक्ष की छांव में विश्राम के लिए रुके। उन्हें प्यास लगी तो महाकाश्यप पास के पहाड़ी झरने से पानी लेने के लिए गए लेकिन झरने में से अभी बैलगाडिय़ां निकली थीं और उसका पानी गंदा हो गया था। महाकाश्यप ने सारी बात भगवान् को बताते हुए कहा-प्रभु! झरने का पानी गंदा है, मैं पीछे जाकर नदी से पानी ले आता हूं। लेकिन बुद्ध ने हंसते हुए कहा-नदी दूर है, तुम फिर से वापस झरने के मूल में जाओ और पानी लेकर आओ। उभर आती है। बस बात मन को साधने की है। मन को साधने की साधना करते हुए ही जीवन निर्मलता, सफलता एवं आध्यात्मिक विभूतियों का भंडार बन जाता है।
फिरोजाबाद जनपद के मक्खनपुर कस्बे में शुक्रवार को माथुर वैश्य शाखा सभा (Mathur Vaish Sabha) द्वारा होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर समाज के मेघावी स्टूडेंट्स को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम से पूर्व एक जुलूस भी निकाला गया जिसमें खूब गुलाल और अबीर उड़ाया गया। समारोह में 75 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शॉल उढ़ाकर सम्मामित किया गया। कार्यक्रम में गले मिलकर एक दूसरे को लोगों से शुभकामना दी। कार्यक्रम में संदीप गुप्ता, अखिलेश गुप्ता, रमाकान्त बजाज, रतनदास गुप्ता, राजेश गुप्ता, सुभाष गुप्ता, ब्रजकांत गुप्ता, राजेश गुप्ता, विजय गुप्ता, आनंद गुप्ता, विकास गुप्ता, एचडी गुप्ता मौजूद रहे।
फिरोजाबाद जनपद के मक्खनपुर कस्बे में शुक्रवार को माथुर वैश्य शाखा सभा द्वारा होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर समाज के मेघावी स्टूडेंट्स को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम से पूर्व एक जुलूस भी निकाला गया जिसमें खूब गुलाल और अबीर उड़ाया गया। समारोह में पचहत्तर साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शॉल उढ़ाकर सम्मामित किया गया। कार्यक्रम में गले मिलकर एक दूसरे को लोगों से शुभकामना दी। कार्यक्रम में संदीप गुप्ता, अखिलेश गुप्ता, रमाकान्त बजाज, रतनदास गुप्ता, राजेश गुप्ता, सुभाष गुप्ता, ब्रजकांत गुप्ता, राजेश गुप्ता, विजय गुप्ता, आनंद गुप्ता, विकास गुप्ता, एचडी गुप्ता मौजूद रहे।
राजस्थान में गहलोत-पायलट गुट में खींचतान बढ़ती जा रही है। सीएम अशोक गहलोत के बयान के बाद हेल्थ मिनिस्टर परसादी लाल मीणा ने शनिवार को फिर पायलट पर हमला बोला। कहा- पायलट पहले ये बताएं कि 35 दिन मानेसर में क्या कर रहे थे? यदि हमारे साथ 102 विधायक नहीं होते तो सरकार 2 साल पहले ही विदा हो चुकी होती। दिसंबर में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में एंट्री करेगी। यह यात्रा लालसोट विधानसभा क्षेत्र से होकर भी गुजरेगी। इसी को लेकर हेल्थ मिनिस्टर लालसोट विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। उन्होंने पायलट पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक गहलोत ने जो कहा है वह ठीक कहा है, सोच समझकर ही कहा है। गहलोत के पास कुछ जानकारी है, इसलिए बड़ी बात कही है। उस समय 102 विधायक नहीं रहते तो सरकार नहीं बचती, 2 साल पहले ही विदा हो जाती। जैसा एमपी, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुआ वैसे ही हमारी सरकार भी विदा हो जाती। जिन 102 विधायकों ने हमारी सरकार बचाई, निश्चित रूप से आज हम उनकी वजह से ही राज कर रहे हैं। उन्हीं की वजह से मंत्री और सीएम हैं। 102 विधायकों के कारण ही हम आज विकास के काम कर पा रहे हैं। मंत्री मीणा बोले कि पायलट को सामने आकर सफाई देनी चाहिए कि वह 35 दिन मानेसर होटल में क्यों रहे ? ये जनता को बताना चाहिए। जनता के गले उतरेगी तो निश्चित रूप से सचिन को ये काम करना चाहिए कि क्यों मानेसर में रहे और हमें 35 दिन क्यों जयपुर- जैसलमेर में रहना पड़ा। ये इंटरनल पार्टी का मामला था, तो पार्टी में ही बैठकर ठीक करते। पायलट ने खुद भी एक बार कहा था कि गहलोत की सरकार अल्पमत में आ गई है । आज हम जो कुछ भी हैं 102 विधायकों की वजह से हैं। यह पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी मंत्री मीणा पायलट को लेकर निशाना साध चुके हैं। मीणा ने 28 सितंबर को पायलट पर हमला बोलते हुए उन्हें अमित शाह का आदमी तक बता दिया था। परसादी लाल ने उस वक्त कहा था जो बीजेपी की गोद में जा बैठे, अमित शाह के ऑफिस में जा बैठे, हरियाणा पुलिस ने जिनको सुरक्षा दी, क्या उन्हें सीएम बना देंगे? उसके बाद क्या राजस्थान की जनता हमको छोड़ेगी, क्या हम जीत के आ जाएंगे दोबारा? कोई नहीं जीतेगा, यहां भी पंजाब जैसे हालात हो जाएंगे? ये तो एक तरह से अमित शाह के आदमी को मुख्यमंत्री बनाना हो गया। तीन दिन पहले 23 सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा था कि पायलट को कैसे CM बना सकते हैं। जिस आदमी के पास 10 विधायक नहीं हैं, जिसने बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं। गहलोत ने कहा कि जिसके कारण होटलों में बैठे रहे, ये सरकार गिरा रहे थे, अमित शाह भी शामिल थे। धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे। गहलोत ने NDTV न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बातें कहीं। गहलोत कैंप के द्वारा पायलट को स्वीकार नहीं करने के सवाल पर गहलोत ने कहा- जो आदमी गद्दारी कर चुका है, उसे हमारे MLA और मैंने खुद भुगता है, होटलों में रहे हैं, उनको वे कैसे स्वीकार करेंगे? गहलोत के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा था कि वे पहले भी मुझे नाकारा, निकम्मा और गद्दार कह चुके हैं, उन्होंने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेबुनियाद हैं। ये समय भाजपा से लड़ने का है, ऐसे झूठे आरोप लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के अनुभवी नेता हैं, उन्हें इतना असुरक्षित नहीं होना चाहिए। हम आज किसी पद पर है, तो जरूरी नहीं है कि हमेशा रहे। पता नहीं कौन मुख्यमंत्री को ऐसी सलाह दे रहा है। शनिवार को लालसोट विधानसभा क्षेत्र में दौरे के दौरान मंत्री मीणा ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान होने वाली नुक्कड़ सभा और जनसभा के चिह्नित स्थानों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंत्री ने कहा कि भारत जोड़ो ऐतिहासिक यात्रा होगी। आजादी के बाद किसी भी राजनेता ने पहले कभी न निकाली है और आगे भी कोई नहीं निकाल पाएगा। उन्होंने बताया कि देश में बढ़ रही महंगाई, भ्रष्टाचार और बीजेपी द्वारा की जा रही विधायकों की खरीद-फरोख्त के विरोध में भारत जोड़ो यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लालसोट विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यात्रा में शामिल होंगे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान आने से पहले कांग्रेस में एक बार फिर भारी खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि पायलट को कैसे CM बना सकते हैं। जिस आदमी के पास 10 विधायक नहीं हैं, जिसने बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं। (यहां पढ़ें पूरी खबर) 'गुजरात में AAP की एक सीट नहीं आएगी' This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान में गहलोत-पायलट गुट में खींचतान बढ़ती जा रही है। सीएम अशोक गहलोत के बयान के बाद हेल्थ मिनिस्टर परसादी लाल मीणा ने शनिवार को फिर पायलट पर हमला बोला। कहा- पायलट पहले ये बताएं कि पैंतीस दिन मानेसर में क्या कर रहे थे? यदि हमारे साथ एक सौ दो विधायक नहीं होते तो सरकार दो साल पहले ही विदा हो चुकी होती। दिसंबर में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में एंट्री करेगी। यह यात्रा लालसोट विधानसभा क्षेत्र से होकर भी गुजरेगी। इसी को लेकर हेल्थ मिनिस्टर लालसोट विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। उन्होंने पायलट पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक गहलोत ने जो कहा है वह ठीक कहा है, सोच समझकर ही कहा है। गहलोत के पास कुछ जानकारी है, इसलिए बड़ी बात कही है। उस समय एक सौ दो विधायक नहीं रहते तो सरकार नहीं बचती, दो साल पहले ही विदा हो जाती। जैसा एमपी, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुआ वैसे ही हमारी सरकार भी विदा हो जाती। जिन एक सौ दो विधायकों ने हमारी सरकार बचाई, निश्चित रूप से आज हम उनकी वजह से ही राज कर रहे हैं। उन्हीं की वजह से मंत्री और सीएम हैं। एक सौ दो विधायकों के कारण ही हम आज विकास के काम कर पा रहे हैं। मंत्री मीणा बोले कि पायलट को सामने आकर सफाई देनी चाहिए कि वह पैंतीस दिन मानेसर होटल में क्यों रहे ? ये जनता को बताना चाहिए। जनता के गले उतरेगी तो निश्चित रूप से सचिन को ये काम करना चाहिए कि क्यों मानेसर में रहे और हमें पैंतीस दिन क्यों जयपुर- जैसलमेर में रहना पड़ा। ये इंटरनल पार्टी का मामला था, तो पार्टी में ही बैठकर ठीक करते। पायलट ने खुद भी एक बार कहा था कि गहलोत की सरकार अल्पमत में आ गई है । आज हम जो कुछ भी हैं एक सौ दो विधायकों की वजह से हैं। यह पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी मंत्री मीणा पायलट को लेकर निशाना साध चुके हैं। मीणा ने अट्ठाईस सितंबर को पायलट पर हमला बोलते हुए उन्हें अमित शाह का आदमी तक बता दिया था। परसादी लाल ने उस वक्त कहा था जो बीजेपी की गोद में जा बैठे, अमित शाह के ऑफिस में जा बैठे, हरियाणा पुलिस ने जिनको सुरक्षा दी, क्या उन्हें सीएम बना देंगे? उसके बाद क्या राजस्थान की जनता हमको छोड़ेगी, क्या हम जीत के आ जाएंगे दोबारा? कोई नहीं जीतेगा, यहां भी पंजाब जैसे हालात हो जाएंगे? ये तो एक तरह से अमित शाह के आदमी को मुख्यमंत्री बनाना हो गया। तीन दिन पहले तेईस सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा था कि पायलट को कैसे CM बना सकते हैं। जिस आदमी के पास दस विधायक नहीं हैं, जिसने बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं। गहलोत ने कहा कि जिसके कारण होटलों में बैठे रहे, ये सरकार गिरा रहे थे, अमित शाह भी शामिल थे। धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे। गहलोत ने NDTV न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बातें कहीं। गहलोत कैंप के द्वारा पायलट को स्वीकार नहीं करने के सवाल पर गहलोत ने कहा- जो आदमी गद्दारी कर चुका है, उसे हमारे MLA और मैंने खुद भुगता है, होटलों में रहे हैं, उनको वे कैसे स्वीकार करेंगे? गहलोत के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा था कि वे पहले भी मुझे नाकारा, निकम्मा और गद्दार कह चुके हैं, उन्होंने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेबुनियाद हैं। ये समय भाजपा से लड़ने का है, ऐसे झूठे आरोप लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के अनुभवी नेता हैं, उन्हें इतना असुरक्षित नहीं होना चाहिए। हम आज किसी पद पर है, तो जरूरी नहीं है कि हमेशा रहे। पता नहीं कौन मुख्यमंत्री को ऐसी सलाह दे रहा है। शनिवार को लालसोट विधानसभा क्षेत्र में दौरे के दौरान मंत्री मीणा ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान होने वाली नुक्कड़ सभा और जनसभा के चिह्नित स्थानों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंत्री ने कहा कि भारत जोड़ो ऐतिहासिक यात्रा होगी। आजादी के बाद किसी भी राजनेता ने पहले कभी न निकाली है और आगे भी कोई नहीं निकाल पाएगा। उन्होंने बताया कि देश में बढ़ रही महंगाई, भ्रष्टाचार और बीजेपी द्वारा की जा रही विधायकों की खरीद-फरोख्त के विरोध में भारत जोड़ो यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लालसोट विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यात्रा में शामिल होंगे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान आने से पहले कांग्रेस में एक बार फिर भारी खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि पायलट को कैसे CM बना सकते हैं। जिस आदमी के पास दस विधायक नहीं हैं, जिसने बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं। 'गुजरात में AAP की एक सीट नहीं आएगी' This website follows the DNPA Code of Ethics.
जुमे की रात चांद दिखने के बाद मस्जिदों से पाक माह रमजान का एलान कर दिया गया। इसके साथ ही लोगों ने रोजे की तैयारियां शुरू कर दी। नमाज-ए-तरावीह शुरू हो गई। शनिवार को पहला रोजा है। जामा मस्जिद पुराना बाजार के इमाम मो. निजामुद्दीन ने कहा कि लॉकडाउन में पांच धार्मिक लोगों के सिवाय कोई भी व्यक्ति मस्जिद में नहीं रहेगा। हर मुसलमान रोजा रखे। यह वर्ष किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं। जो लोग समय को पाबंद लगाकर रोजे नहीं रखते थे। उनके लिए कुदरत ने लॉकडाउन के रुप में समय ही समय दे रखा है। इसलिए रोजा रखें, गुनाहों से तौबा करें, पांच वक्त नमाज, जुमा एवं तरावीह की नमाज घर ही में अदा करें। इफ्तार अपने परिवार के साथ करें। रमजान को लेकर सुबह से बाजार में गहमागहमी रही। हालांकि लॉकडाउन के कारण भीड़ नहीं उमड़ी। रमजान से जुड़ी सामग्री की खरीदारी लोग कई दिन पहले से ही कर रहे हैं। रमजान को लेकर फल के दाम में भी उछाल देखने को मिला। अंगूर जहां 70-80 रुपए प्रतिकिलो, संतरा 90 से एक सौ रुपए प्रति किलो बिका। खुजूर सहित अन्य मेवे लोगों ने राशन दुकान से खरीदे। इमाम मो. निजामुद्दीन कहते हैं कि इस्लाम में रमजान के महीनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। शुरुआती 10 दिन में अल्लाह की भरपूर रहमत बरसती है। इसके अगले 10 रोजे मगफिरत के कहे जाते हैं। इन 10 दिनों में रोजेदार खुदा से माफी मांगते हैं और बचे हुए आखिरी दिनों में लोग जन्नत की दुआ मांगते हैं। रमजान के महीने में सात साल की उम्र के बाद हर सेहतमंद मुसलमान के लिए रोजे रखना फर्ज है। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज दुआ को कबूल करते हैं और उन्हें गुनाहों से बरी करते हैं। इस महीने की गई इबादत का सवाब बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना मिलता है।
जुमे की रात चांद दिखने के बाद मस्जिदों से पाक माह रमजान का एलान कर दिया गया। इसके साथ ही लोगों ने रोजे की तैयारियां शुरू कर दी। नमाज-ए-तरावीह शुरू हो गई। शनिवार को पहला रोजा है। जामा मस्जिद पुराना बाजार के इमाम मो. निजामुद्दीन ने कहा कि लॉकडाउन में पांच धार्मिक लोगों के सिवाय कोई भी व्यक्ति मस्जिद में नहीं रहेगा। हर मुसलमान रोजा रखे। यह वर्ष किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं। जो लोग समय को पाबंद लगाकर रोजे नहीं रखते थे। उनके लिए कुदरत ने लॉकडाउन के रुप में समय ही समय दे रखा है। इसलिए रोजा रखें, गुनाहों से तौबा करें, पांच वक्त नमाज, जुमा एवं तरावीह की नमाज घर ही में अदा करें। इफ्तार अपने परिवार के साथ करें। रमजान को लेकर सुबह से बाजार में गहमागहमी रही। हालांकि लॉकडाउन के कारण भीड़ नहीं उमड़ी। रमजान से जुड़ी सामग्री की खरीदारी लोग कई दिन पहले से ही कर रहे हैं। रमजान को लेकर फल के दाम में भी उछाल देखने को मिला। अंगूर जहां सत्तर-अस्सी रुपयापए प्रतिकिलो, संतरा नब्बे से एक सौ रुपए प्रति किलो बिका। खुजूर सहित अन्य मेवे लोगों ने राशन दुकान से खरीदे। इमाम मो. निजामुद्दीन कहते हैं कि इस्लाम में रमजान के महीनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। शुरुआती दस दिन में अल्लाह की भरपूर रहमत बरसती है। इसके अगले दस रोजे मगफिरत के कहे जाते हैं। इन दस दिनों में रोजेदार खुदा से माफी मांगते हैं और बचे हुए आखिरी दिनों में लोग जन्नत की दुआ मांगते हैं। रमजान के महीने में सात साल की उम्र के बाद हर सेहतमंद मुसलमान के लिए रोजे रखना फर्ज है। इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज दुआ को कबूल करते हैं और उन्हें गुनाहों से बरी करते हैं। इस महीने की गई इबादत का सवाब बाकी महीनों के मुकाबले सत्तर गुना मिलता है।
की सहायक है, बाधक नही ।" नोबल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद २७ मार्च, १९०६ ई० को यूकेन ने स्टॉकहोम मे व्याख्यान देते हुए कहा था "हम लोग एक ऐसे जमाने से गुजर रहे है जब 'परम्परा एक सन्दिग्ध वस्तु मान ली गई है और हमारे जीवन का पथ प्रदर्शन करने के लिए नये विचारों मे सघर्ष हो रहा है ।" आगे चलकर 'जडवाद और श्रादर्शवाद' पर अपने विचार प्रकट करते हुए यूकेन ने वतलाया है कि जडवाद का मतलब 'मनुष्य के साथ प्रकृति के सम्बन्ध में विश्वास' है, आदर्शवाद इस विश्वास को स्वीकार करता है, किन्तु यह प्रश्न करता है कि क्या समस्त जीवन यही है, या इस (जीवन) का और भी कोई रूप है । उन्होने 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्' का प्रभाव स्वीकार किया है किन्तु केवल उपयोगितावाद की दृष्टि से नही । उन्होंने यह भी कहा कि जीवन केवल एक से सीमित तथ्य का प्रतिविम्ब न होकर कुछ ऊची चीज है, वह दूसरे 'लोक' मे जाता नही, वरन् उस ( दूसरे लोक ) का निर्मारण करता है। आदर्शवाद, जो दैनिक जीवन के प्रसार से कोई सम्बन्ध रखता है, कोई आदर्श नही रखता । आज कोई नया आदर्श ही नही रहा, क्योकि हम जडवाद की निर्दिष्ट सीमा को पार कर चुके है । हमे वरणस्थायी संस्कृति से ऊपर उठकर किसी अधिक हृदयग्राही और चिरस्थायी वस्तु की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है । यूकेन के उपर्युक्त आदर्शात्मक विचारों ने ही उन्हें शिक्षक, दार्शनिक और लेखक के रूप मे ऐसा प्रख्यात बना दिया कि अन्त में उन्हें नोबल पुरस्कार समिति ने पारितोषिक देने में अपनी प्रतिष्ठा समझी और इस प्रकार उनका सार्वभौम आदर बढाया । यूकेन महोदय का देहान्त १४ सितम्बर, १९२६ ई० को हुआ और इस प्रकार उन्होने दार्शनिक की पूर्ण अवस्था का उपभोग किया ।
की सहायक है, बाधक नही ।" नोबल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद सत्ताईस मार्च, एक हज़ार नौ सौ छः ईशून्य को यूकेन ने स्टॉकहोम मे व्याख्यान देते हुए कहा था "हम लोग एक ऐसे जमाने से गुजर रहे है जब 'परम्परा एक सन्दिग्ध वस्तु मान ली गई है और हमारे जीवन का पथ प्रदर्शन करने के लिए नये विचारों मे सघर्ष हो रहा है ।" आगे चलकर 'जडवाद और श्रादर्शवाद' पर अपने विचार प्रकट करते हुए यूकेन ने वतलाया है कि जडवाद का मतलब 'मनुष्य के साथ प्रकृति के सम्बन्ध में विश्वास' है, आदर्शवाद इस विश्वास को स्वीकार करता है, किन्तु यह प्रश्न करता है कि क्या समस्त जीवन यही है, या इस का और भी कोई रूप है । उन्होने 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्' का प्रभाव स्वीकार किया है किन्तु केवल उपयोगितावाद की दृष्टि से नही । उन्होंने यह भी कहा कि जीवन केवल एक से सीमित तथ्य का प्रतिविम्ब न होकर कुछ ऊची चीज है, वह दूसरे 'लोक' मे जाता नही, वरन् उस का निर्मारण करता है। आदर्शवाद, जो दैनिक जीवन के प्रसार से कोई सम्बन्ध रखता है, कोई आदर्श नही रखता । आज कोई नया आदर्श ही नही रहा, क्योकि हम जडवाद की निर्दिष्ट सीमा को पार कर चुके है । हमे वरणस्थायी संस्कृति से ऊपर उठकर किसी अधिक हृदयग्राही और चिरस्थायी वस्तु की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है । यूकेन के उपर्युक्त आदर्शात्मक विचारों ने ही उन्हें शिक्षक, दार्शनिक और लेखक के रूप मे ऐसा प्रख्यात बना दिया कि अन्त में उन्हें नोबल पुरस्कार समिति ने पारितोषिक देने में अपनी प्रतिष्ठा समझी और इस प्रकार उनका सार्वभौम आदर बढाया । यूकेन महोदय का देहान्त चौदह सितम्बर, एक हज़ार नौ सौ छब्बीस ईशून्य को हुआ और इस प्रकार उन्होने दार्शनिक की पूर्ण अवस्था का उपभोग किया ।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा ने चिल्लर ऐप पेश किया है जिससे ग्राहकों को फोनबुक में मौजूद किसी भी व्यक्ति को धन का तत्काल तथा सुरक्षित हस्तांतरण की सुविधा मिलेगी। बैंक ने बताया कि चिल्लर अपनी तरह की एक अनूठा एप्लीकेशन है जो ग्राहक के बैंक खाते से सीधे जुड़ा होता है और एक बार एप्लीकेशन डाउनलोड करने एवं पंजीकरण के बाद ग्राहक पूरे में किसी भी व्यक्ति को धनराशि हस्तांतरित कर सकता है। इस प्रक्रिया में ग्राहक को अपने फोनबुक में मौजूद प्राप्तकर्ता का चयन करना होता है। जितने पैसे भेजने हैं वह रकम दर्ज करनी होती है और एमपिन डालना होता है। इन तीन कदमों से प्राप्तकर्ता के पास धनराशि पहुंच जाती है। बैंक के डिजिटल बैंकिंग महाप्रबंधक के. वेंकटेश्वरुलु ने कहा कि चिल्लर के साथ भागीदारी कर यह सेवा शुरू की गई है। फिलहाल यह ऐप एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही यह आईओएस तथा विंडोज प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हो जाएगा। इसके जरिये ग्राहकों के लिए चिल्लर ऐप पर यूटिलिटी बिलों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान की सुविधा शीघ्र शुरू होगी। 'मनी का व्हाट्सऐप' के तौर पर प्रसिद्ध चिल्लर भारत का पहला मल्टी बैंक पेमेंट ऐप है। यह ग्राहक की फोनबुक में दर्ज किसी भी व्यक्ति को उसके बैंक खाते का ब्यौरा जाने बगैर तुरंत पैसा हस्तांतरण करना संभव बनाता है। इसके अलावा यह मोबाइल रीचार्ज, यूटिलिटी बिलों का भुगतान तथा ऑनलाइन-ऑफलाइन भंडारों पर भुगतान की सुविधा भी देता है।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा ने चिल्लर ऐप पेश किया है जिससे ग्राहकों को फोनबुक में मौजूद किसी भी व्यक्ति को धन का तत्काल तथा सुरक्षित हस्तांतरण की सुविधा मिलेगी। बैंक ने बताया कि चिल्लर अपनी तरह की एक अनूठा एप्लीकेशन है जो ग्राहक के बैंक खाते से सीधे जुड़ा होता है और एक बार एप्लीकेशन डाउनलोड करने एवं पंजीकरण के बाद ग्राहक पूरे में किसी भी व्यक्ति को धनराशि हस्तांतरित कर सकता है। इस प्रक्रिया में ग्राहक को अपने फोनबुक में मौजूद प्राप्तकर्ता का चयन करना होता है। जितने पैसे भेजने हैं वह रकम दर्ज करनी होती है और एमपिन डालना होता है। इन तीन कदमों से प्राप्तकर्ता के पास धनराशि पहुंच जाती है। बैंक के डिजिटल बैंकिंग महाप्रबंधक के. वेंकटेश्वरुलु ने कहा कि चिल्लर के साथ भागीदारी कर यह सेवा शुरू की गई है। फिलहाल यह ऐप एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही यह आईओएस तथा विंडोज प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हो जाएगा। इसके जरिये ग्राहकों के लिए चिल्लर ऐप पर यूटिलिटी बिलों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान की सुविधा शीघ्र शुरू होगी। 'मनी का व्हाट्सऐप' के तौर पर प्रसिद्ध चिल्लर भारत का पहला मल्टी बैंक पेमेंट ऐप है। यह ग्राहक की फोनबुक में दर्ज किसी भी व्यक्ति को उसके बैंक खाते का ब्यौरा जाने बगैर तुरंत पैसा हस्तांतरण करना संभव बनाता है। इसके अलावा यह मोबाइल रीचार्ज, यूटिलिटी बिलों का भुगतान तथा ऑनलाइन-ऑफलाइन भंडारों पर भुगतान की सुविधा भी देता है।
नाइजीरिया राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मौजूदा सदस्य स्टीफन इजे ने गुरुवार को इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की टीम जमशेदपुर एफसी के साथ करार किया। टीम ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी। 26 साल के इस खिलाड़ी ने नाइजीरिया के लिए 2016 में पदार्पण करने के बाद 13 मैच खेले हैं। टीम के मुख्य कोच ओवेन कोयले ने स्टीफन को लेकर कहा, "स्टीफन हमारे डिफेंस को मजबूत करने में काफी मददगार रहेंगे। वह एक जानी मानी शाख्सियत के तौर पर यहां आ रहे हैं। उन्होंने विश्व कप खेलने वाली नाइजीरिया जैसी टीम का प्रतिनिधत्व किया है। " उन्होंने कहा, "स्टीफन की ड्रेसिंग रूम में मौजूदगी टीम को आगे ले जाने में मददगार होगी। वह शानदार युवा खिलाड़ी हैं। " जमशेदपुर के साथ जुड़ने पर स्टीफन ने कहा, "मैं काफी करीब से आईएसएल को देख रहा था। यह काफी अच्छा टूर्नामेंट है। मैंने जमशेदपुर के फ्रशंसकों में जुनून देखा है इसलिए मैं टीम से जुड़ने के लिए उत्साहित हूं। मेरा लक्ष्य साधारण है, जीतना। "
नाइजीरिया राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मौजूदा सदस्य स्टीफन इजे ने गुरुवार को इंडियन सुपर लीग की टीम जमशेदपुर एफसी के साथ करार किया। टीम ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी। छब्बीस साल के इस खिलाड़ी ने नाइजीरिया के लिए दो हज़ार सोलह में पदार्पण करने के बाद तेरह मैच खेले हैं। टीम के मुख्य कोच ओवेन कोयले ने स्टीफन को लेकर कहा, "स्टीफन हमारे डिफेंस को मजबूत करने में काफी मददगार रहेंगे। वह एक जानी मानी शाख्सियत के तौर पर यहां आ रहे हैं। उन्होंने विश्व कप खेलने वाली नाइजीरिया जैसी टीम का प्रतिनिधत्व किया है। " उन्होंने कहा, "स्टीफन की ड्रेसिंग रूम में मौजूदगी टीम को आगे ले जाने में मददगार होगी। वह शानदार युवा खिलाड़ी हैं। " जमशेदपुर के साथ जुड़ने पर स्टीफन ने कहा, "मैं काफी करीब से आईएसएल को देख रहा था। यह काफी अच्छा टूर्नामेंट है। मैंने जमशेदपुर के फ्रशंसकों में जुनून देखा है इसलिए मैं टीम से जुड़ने के लिए उत्साहित हूं। मेरा लक्ष्य साधारण है, जीतना। "
हिंदू धर्म में गणेश जी को विशेष स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। ताकि सभी कार्यों को निर्विघ्न पूरा किया जा सके। गणेश जी का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। और इस दिन को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। गणेश महोत्सव 10 दिन तक चलता है। चतुर्थी के दिन घरों में बप्पा को विराजित किया जाता है। उनकी पूज-अर्चना की जाती है। गणपति की स्थापना के बाद उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि बप्पा प्रसन्न होकर भक्तों पर खूब कृपा बरसाते हैं। उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं और सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होने का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में इन 10 दिनों तक बप्पा की खूब सेवा की जाती है। उनकी प्रिय चीजें उन्हें अर्पित की जाती हैं। मोदक, लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। गमेश चतुर्थी पर बप्पा को घर लाने से पहले आप भी जान लें कि गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। घर में बप्पा की सही मूर्ति स्थापित करने पर ही गणपति पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। - ज्योतिष शास्त्र में गणेश जी की अलग-अलग मूर्तियों का अलग महत्व बताया गया है। साथ ही, बप्पा के आकार के हिसाबसे अलग जगह रखा जाता है। ज्योतिष अनुसार नौकरी या व्यवसाय से संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए गणेश जी की सिंदूरी स्वरूप वाली मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए। अगर आप ऐसे बप्पा की स्थापना करते हैं तो व्यक्ति के किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल जाते हैं। - गणपति की मूर्ति खरीदते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उनकी बैठे हुए वाली मूर्ति खरीदने चाहिए। गणेश चतुर्थी के दौरान इस तरह की मूर्ति की स्थापना करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि बप्पा की ऐसी मूर्ति की पूजा करने से स्थाई लाभ होता है। - वास्तु शास्त्र के अनुसार बप्पा की नृत्य करती हुई मूर्ति घर में बिल्कुल भी नहीं लानी चाहिए। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो इससे घर में कलह-कलेश बढ़ जाते हैं। और घर की शांति भंग होती है।
हिंदू धर्म में गणेश जी को विशेष स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। ताकि सभी कार्यों को निर्विघ्न पूरा किया जा सके। गणेश जी का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। और इस दिन को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। गणेश महोत्सव दस दिन तक चलता है। चतुर्थी के दिन घरों में बप्पा को विराजित किया जाता है। उनकी पूज-अर्चना की जाती है। गणपति की स्थापना के बाद उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि बप्पा प्रसन्न होकर भक्तों पर खूब कृपा बरसाते हैं। उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं और सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होने का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में इन दस दिनों तक बप्पा की खूब सेवा की जाती है। उनकी प्रिय चीजें उन्हें अर्पित की जाती हैं। मोदक, लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। गमेश चतुर्थी पर बप्पा को घर लाने से पहले आप भी जान लें कि गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। घर में बप्पा की सही मूर्ति स्थापित करने पर ही गणपति पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। - ज्योतिष शास्त्र में गणेश जी की अलग-अलग मूर्तियों का अलग महत्व बताया गया है। साथ ही, बप्पा के आकार के हिसाबसे अलग जगह रखा जाता है। ज्योतिष अनुसार नौकरी या व्यवसाय से संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए गणेश जी की सिंदूरी स्वरूप वाली मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए। अगर आप ऐसे बप्पा की स्थापना करते हैं तो व्यक्ति के किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल जाते हैं। - गणपति की मूर्ति खरीदते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उनकी बैठे हुए वाली मूर्ति खरीदने चाहिए। गणेश चतुर्थी के दौरान इस तरह की मूर्ति की स्थापना करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि बप्पा की ऐसी मूर्ति की पूजा करने से स्थाई लाभ होता है। - वास्तु शास्त्र के अनुसार बप्पा की नृत्य करती हुई मूर्ति घर में बिल्कुल भी नहीं लानी चाहिए। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो इससे घर में कलह-कलेश बढ़ जाते हैं। और घर की शांति भंग होती है।
नई दिल्ली, जर्मन कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने एक अक्टूबर से अपने यात्री वाहनों की कीमतों में 2 फीसदी इजाफा करने का ऐलान किया है। फॉक्सवैगन इंडिया ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि कंपनी की सभी पैसेंजर कार एक अक्टूबर, 2022 से महंगी हो जाएंगी। कंपनी ने बताया कि उसके वाहनों के दाम में दो फीसदी तक की बढ़ोतरी की जाएगी। कंपनी के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। कंपनी भारतीय बाजार में वर्टस, टाइगन और टिग्वान जैसे वाहनों की बिक्री करती है। फॉक्सवैगन के प्रवक्ता ने कहा कि जर्मन कंपनी फॉक्सवैगन इंडिया का घरेलू बाजार में ऑडी, स्कोडा और फॉक्सवेगन ब्रांड सबसे अधिक लोकप्रिय है।
नई दिल्ली, जर्मन कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने एक अक्टूबर से अपने यात्री वाहनों की कीमतों में दो फीसदी इजाफा करने का ऐलान किया है। फॉक्सवैगन इंडिया ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि कंपनी की सभी पैसेंजर कार एक अक्टूबर, दो हज़ार बाईस से महंगी हो जाएंगी। कंपनी ने बताया कि उसके वाहनों के दाम में दो फीसदी तक की बढ़ोतरी की जाएगी। कंपनी के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। कंपनी भारतीय बाजार में वर्टस, टाइगन और टिग्वान जैसे वाहनों की बिक्री करती है। फॉक्सवैगन के प्रवक्ता ने कहा कि जर्मन कंपनी फॉक्सवैगन इंडिया का घरेलू बाजार में ऑडी, स्कोडा और फॉक्सवेगन ब्रांड सबसे अधिक लोकप्रिय है।
- 7 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 8 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - News विदेश मंत्री बनने के बाद कितनी बढ़ी एस जयशंकर और उनकी पत्नी की संपत्ति? - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हाल फिलहाल बॉलीवुड के कई कलाकार ओटीटी प्लैटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा से लेकर ऋतिक रोशन, अजय देवगन ने भी कुछ धमाकेदार डील साइन की है। ऐसे में खबर आ रही थी कि शाहिद कपूर ने नेटफ्लिक्स के साथ एक जबरदस्त डील साइन की है। यह एक मल्टी प्रोजेक्ट डील है, जिसे शाहिद कपूर ने 100 करोड़ की भारी भरकम फीस पर साइन किया है। शाहिद न केवल नेटफ्लिक्स फिल्म या सीरीज के साथ अपना डिजिटल डेब्यू करेंगे बल्कि कई प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। बहरहाल, बॉलीवुड हंगामा में आए एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक नेटफ्लिक्स ने इस खबर से पूरी तरह से इंकार किया है और कहा कि किसी भी एक्टर के साथ 100 करोड़ की डील करना बहुत बड़ी बात है। इतने बड़े बजट पर डील संभव नहीं है। नेटफ्लिक्स ने शाहिद के साथ कोई डील साइन नहीं की है। हमें नहीं पता ये अफवाह कहां से शुरु हुई। शाहिद कपूर फिलहाल अपनी आगामी फिल्म 'जर्सी' की शूटिंग कर रहे हैं। शाहिद कपूर और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर शूटिंग के लिए उत्तराखंड आए हैं। 'जर्सी' में अभिनेता शाहिद कपूर एक क्रिकेटर की भूमिका में होंगे। यह तेलगू फिल्म 'जर्सी' की ही रीमेक है। वहीं, शाहिद का नाम शशांत खेतान की एक फिल्म से भी जुड़ रहा है। फिल्म का नाम है योद्धा और इसे डायरेक्ट करेंगे शशांक खेतान। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ रोमांस करती दिखाई देंगी दिशा पटानी।
- सात hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - आठ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - News विदेश मंत्री बनने के बाद कितनी बढ़ी एस जयशंकर और उनकी पत्नी की संपत्ति? - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हाल फिलहाल बॉलीवुड के कई कलाकार ओटीटी प्लैटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा से लेकर ऋतिक रोशन, अजय देवगन ने भी कुछ धमाकेदार डील साइन की है। ऐसे में खबर आ रही थी कि शाहिद कपूर ने नेटफ्लिक्स के साथ एक जबरदस्त डील साइन की है। यह एक मल्टी प्रोजेक्ट डील है, जिसे शाहिद कपूर ने एक सौ करोड़ की भारी भरकम फीस पर साइन किया है। शाहिद न केवल नेटफ्लिक्स फिल्म या सीरीज के साथ अपना डिजिटल डेब्यू करेंगे बल्कि कई प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। बहरहाल, बॉलीवुड हंगामा में आए एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक नेटफ्लिक्स ने इस खबर से पूरी तरह से इंकार किया है और कहा कि किसी भी एक्टर के साथ एक सौ करोड़ की डील करना बहुत बड़ी बात है। इतने बड़े बजट पर डील संभव नहीं है। नेटफ्लिक्स ने शाहिद के साथ कोई डील साइन नहीं की है। हमें नहीं पता ये अफवाह कहां से शुरु हुई। शाहिद कपूर फिलहाल अपनी आगामी फिल्म 'जर्सी' की शूटिंग कर रहे हैं। शाहिद कपूर और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर शूटिंग के लिए उत्तराखंड आए हैं। 'जर्सी' में अभिनेता शाहिद कपूर एक क्रिकेटर की भूमिका में होंगे। यह तेलगू फिल्म 'जर्सी' की ही रीमेक है। वहीं, शाहिद का नाम शशांत खेतान की एक फिल्म से भी जुड़ रहा है। फिल्म का नाम है योद्धा और इसे डायरेक्ट करेंगे शशांक खेतान। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ रोमांस करती दिखाई देंगी दिशा पटानी।
३८४ महामना मदन मोहन मालवीय जीवन और नेतृत्व हमें कौसिलो का उपयोग करना चाहिए, जहाँ संभव हो वहाँ सरकार से सहयोग किया जाय, जहा आवश्यक हो वहाँ उसका विरोध किया जाय। उनका विश्वास था कि न्याय पर आश्रित समझौता ही टिकाऊ हो सकता है, और वे उसके लिए सदा तैयार थे । वे मुसलमानो के साथ किसी हद तक उदारता का व्यवहार करना भी ठीक समझते थे, पर वे उनकी सब मागें मानने को तैयार नहीं थे। स्वतंत्रता के लिए सतत प्रयत्न करने के साथ-साथ हिन्दू हितो की रक्षा करना भी वे हिन्दू विधायको का कर्तव्य समझते थे। उन्हें दुःख था कि स्वराज्य पार्टी के हिन्दू सदस्य हिन्दू हितो की रक्षा के निमित्त अपने दिल की बात कहने से, अपने निर्वाचको की भावनाओं को व्यक्त करने से घबड़ाते है, जिसके कारण बहुत से महत्त्वपूर्ण प्रश्नो पर, जिनका हिन्दुओं के हितो और अधिकारों से गहरा सम्बन्ध होता है, ठीक तौर पर विधान कौंसिलो में विचार भी नही हो पाता । सन् १९२३ के चुनावो से कही अधिक सन् १९२६ के चुनावो ने मालवीयजी और मोतीलालजी के आपसी सम्बन्धो में कडवाहट पैदा कर दी। मालवीयजी मोतीलालजी से छ. मास छोटे थे । वे मालवीयजी पर, उनके रहने-सहने के ढंग पर, सदा फवतियां कसते रहते थे । पर मालवीयजी को सदा ध्यान रहता था कि मोतीलालजी उनसे वडे है और इसलिए जब वे उनसे मिलते उनके साथ "अदव का वर्ताव" करते थे । " जैसे कोई छोटा अपने बड़ो के सामने जाता है, वैसे ही वे उनके सामने जाते थे।"१ सन् १९२३ के चुनाव में स्वराज्य पार्टी के कार्यकर्ताओ ने मालवीयजी की उन सभामो को भंग करने की, मालवीयजी को अपमानित करने को भरसक चेष्टा की, जिनमें उन्होंने स्वराज्य पार्टी के उम्मीदवार के विरुद्ध प्रोफेसर पी० के० तेलग का समर्थन किया। मोतीलालजी ने स्वयं काशी की सार्वजनिक सभा में चुनाव के अवसर पर मालवीयजी पर फवतियाँ कसी । पर मालवीयजी ने इस सब की उपेक्षा करते हुए स्वराज्यपार्टी के उम्मीदवारों का दूसरे स्थानो पर समर्थन किया । सन् १९२६ में तनाव इतना बढ़ गया कि मालवीयजी स्वयं मोतीलालजी के विरुद्ध चुनाव में खड़ा होना चाहते थे, ताकि हिन्दू जनता निश्चय कर सके कि उसे किस नेता की नीतिरीति पसन्द है । पर काग्रेस के कतिपय कार्यकर्ताओ के अनुरोध पर मालवीयजी अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र से ही खडे हो गये । पर १. पुरुषोत्तमदास टंडन : देखिये, मालवीयजी, जीवन झलकिया, पू० ३ । इसके दो दिन बाद मोतीलालजी ने लाला लाजपत राय के विरुद्ध रायजादा हसराज को कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से खडा कर दिया। इस बात से क्षुब्ध हो लाला लाजपत राय ने अपने जालंधर निर्वाचन क्षेत्र के अतिरिक्त लाहौर निर्वाचन क्षेत्र से भी चुनाव लडने का निश्चय किया। इससे कडवाहट काफी बढ़ गयी । मोतीलालजी बार बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रायजादा हसराज और दीवान चम्मन लाल के समर्थन में जालंघर, लाहौर आदि स्थानो में मापण करते, और मालवीयजी वहाँ जा कर लाला लाजपत राय का समर्थन करते थे। दोनो ओर के कार्यकर्ता एक दूसरे पर फबती कसते, बुरा भला कहते । गालवीयजी को ये वाते पसद नही थी। उनकी उपस्थिति में जब एक वार अमृतसर की एक सार्वजनिक सभा में किमी कार्यकर्ता ने मोती लालजी पर छोटाकशी की तो मालवीयजी ने उसे रोक दिया, और आधे घंटे तक मोती लालजी की इतनी प्रशसा की कि लोग दंग रह गये । ' संयुक्त प्रान्त ( उत्तर प्रदेश) मे मालवीयजी के अतिरिक्त लाला लाजपत राय ने भी दौरा किया । ये दोनो उन सात नगरो मे भी गये जहा से मोती लालजी खडे थे । उन्होने वहा काग्रेस पार्टी की नीतिरीति का विरोध किया, अपनी पार्टी की नीतिरीति का समर्थत किया, प्रान्तीय कौंसिल के लिए खड़े किये गये अपनो पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की । पर उन्होने मोतीलालजी के व्यक्तित्व तथा उनकी उम्मीदवारी के विरुद्ध एक शब्द नही कहा । मेरठ की एक सार्वजनिक सभा में मालवीयजी को एक मानपत्र भेंट किया गया, और एक कवि ने उनकी प्रशंसा करते हुए पडित मोतीलाल नेहरू की निन्द करना शुरू की। मालवीयजी ने कवि को कविता पढ़ने से रोक कर कहा "मोतीलाल जी मेरे वडे भाई है, मैं उनकी शान के विरुद्ध कोई बात नही सुन सकता । " २ इस चुनाव मे पडित मोतीलाल नेहरू के विरुद्ध कोई साधु खडे हो गये थे । यह सज्जन मालवीयजी की पार्टी के उम्मीदवार नहीं थे। उन्होने और लाला लाजपत राय ने उनके समर्थन में कही कोई भाषण नहीं किया । मोतीलालजी की तुलना में उक्त सज्जन का व्यक्तित्व और कार्य नगण्य था, उनके समर्थक इसलिए काग्रेस की नीतिरीति के बजाय मोतीलालजी के व्यक्तित्व पर कीचड के फेंकते रहते थे । १. मालवीयजी, जीवन झलकिया, पृ० १९४ । २. सीताराम चतुर्वेदी : महामना मालवीयजी, पृ० १५५ । २५
तीन सौ चौरासी महामना मदन मोहन मालवीय जीवन और नेतृत्व हमें कौसिलो का उपयोग करना चाहिए, जहाँ संभव हो वहाँ सरकार से सहयोग किया जाय, जहा आवश्यक हो वहाँ उसका विरोध किया जाय। उनका विश्वास था कि न्याय पर आश्रित समझौता ही टिकाऊ हो सकता है, और वे उसके लिए सदा तैयार थे । वे मुसलमानो के साथ किसी हद तक उदारता का व्यवहार करना भी ठीक समझते थे, पर वे उनकी सब मागें मानने को तैयार नहीं थे। स्वतंत्रता के लिए सतत प्रयत्न करने के साथ-साथ हिन्दू हितो की रक्षा करना भी वे हिन्दू विधायको का कर्तव्य समझते थे। उन्हें दुःख था कि स्वराज्य पार्टी के हिन्दू सदस्य हिन्दू हितो की रक्षा के निमित्त अपने दिल की बात कहने से, अपने निर्वाचको की भावनाओं को व्यक्त करने से घबड़ाते है, जिसके कारण बहुत से महत्त्वपूर्ण प्रश्नो पर, जिनका हिन्दुओं के हितो और अधिकारों से गहरा सम्बन्ध होता है, ठीक तौर पर विधान कौंसिलो में विचार भी नही हो पाता । सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस के चुनावो से कही अधिक सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस के चुनावो ने मालवीयजी और मोतीलालजी के आपसी सम्बन्धो में कडवाहट पैदा कर दी। मालवीयजी मोतीलालजी से छ. मास छोटे थे । वे मालवीयजी पर, उनके रहने-सहने के ढंग पर, सदा फवतियां कसते रहते थे । पर मालवीयजी को सदा ध्यान रहता था कि मोतीलालजी उनसे वडे है और इसलिए जब वे उनसे मिलते उनके साथ "अदव का वर्ताव" करते थे । " जैसे कोई छोटा अपने बड़ो के सामने जाता है, वैसे ही वे उनके सामने जाते थे।"एक सन् एक हज़ार नौ सौ तेईस के चुनाव में स्वराज्य पार्टी के कार्यकर्ताओ ने मालवीयजी की उन सभामो को भंग करने की, मालवीयजी को अपमानित करने को भरसक चेष्टा की, जिनमें उन्होंने स्वराज्य पार्टी के उम्मीदवार के विरुद्ध प्रोफेसर पीशून्य केशून्य तेलग का समर्थन किया। मोतीलालजी ने स्वयं काशी की सार्वजनिक सभा में चुनाव के अवसर पर मालवीयजी पर फवतियाँ कसी । पर मालवीयजी ने इस सब की उपेक्षा करते हुए स्वराज्यपार्टी के उम्मीदवारों का दूसरे स्थानो पर समर्थन किया । सन् एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में तनाव इतना बढ़ गया कि मालवीयजी स्वयं मोतीलालजी के विरुद्ध चुनाव में खड़ा होना चाहते थे, ताकि हिन्दू जनता निश्चय कर सके कि उसे किस नेता की नीतिरीति पसन्द है । पर काग्रेस के कतिपय कार्यकर्ताओ के अनुरोध पर मालवीयजी अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र से ही खडे हो गये । पर एक. पुरुषोत्तमदास टंडन : देखिये, मालवीयजी, जीवन झलकिया, पूशून्य तीन । इसके दो दिन बाद मोतीलालजी ने लाला लाजपत राय के विरुद्ध रायजादा हसराज को कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से खडा कर दिया। इस बात से क्षुब्ध हो लाला लाजपत राय ने अपने जालंधर निर्वाचन क्षेत्र के अतिरिक्त लाहौर निर्वाचन क्षेत्र से भी चुनाव लडने का निश्चय किया। इससे कडवाहट काफी बढ़ गयी । मोतीलालजी बार बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रायजादा हसराज और दीवान चम्मन लाल के समर्थन में जालंघर, लाहौर आदि स्थानो में मापण करते, और मालवीयजी वहाँ जा कर लाला लाजपत राय का समर्थन करते थे। दोनो ओर के कार्यकर्ता एक दूसरे पर फबती कसते, बुरा भला कहते । गालवीयजी को ये वाते पसद नही थी। उनकी उपस्थिति में जब एक वार अमृतसर की एक सार्वजनिक सभा में किमी कार्यकर्ता ने मोती लालजी पर छोटाकशी की तो मालवीयजी ने उसे रोक दिया, और आधे घंटे तक मोती लालजी की इतनी प्रशसा की कि लोग दंग रह गये । ' संयुक्त प्रान्त मे मालवीयजी के अतिरिक्त लाला लाजपत राय ने भी दौरा किया । ये दोनो उन सात नगरो मे भी गये जहा से मोती लालजी खडे थे । उन्होने वहा काग्रेस पार्टी की नीतिरीति का विरोध किया, अपनी पार्टी की नीतिरीति का समर्थत किया, प्रान्तीय कौंसिल के लिए खड़े किये गये अपनो पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की । पर उन्होने मोतीलालजी के व्यक्तित्व तथा उनकी उम्मीदवारी के विरुद्ध एक शब्द नही कहा । मेरठ की एक सार्वजनिक सभा में मालवीयजी को एक मानपत्र भेंट किया गया, और एक कवि ने उनकी प्रशंसा करते हुए पडित मोतीलाल नेहरू की निन्द करना शुरू की। मालवीयजी ने कवि को कविता पढ़ने से रोक कर कहा "मोतीलाल जी मेरे वडे भाई है, मैं उनकी शान के विरुद्ध कोई बात नही सुन सकता । " दो इस चुनाव मे पडित मोतीलाल नेहरू के विरुद्ध कोई साधु खडे हो गये थे । यह सज्जन मालवीयजी की पार्टी के उम्मीदवार नहीं थे। उन्होने और लाला लाजपत राय ने उनके समर्थन में कही कोई भाषण नहीं किया । मोतीलालजी की तुलना में उक्त सज्जन का व्यक्तित्व और कार्य नगण्य था, उनके समर्थक इसलिए काग्रेस की नीतिरीति के बजाय मोतीलालजी के व्यक्तित्व पर कीचड के फेंकते रहते थे । एक. मालवीयजी, जीवन झलकिया, पृशून्य एक सौ चौरानवे । दो. सीताराम चतुर्वेदी : महामना मालवीयजी, पृशून्य एक सौ पचपन । पच्चीस
नई दिल्ली : सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने बुधवार को कहा कि वह एक खुला और पारदर्शी मंच बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है। वह लोगों को उसके मंच पर स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने की सुविधा देता रहेगा। सोशल मीडिया कंपनी के कथित राजनीतिक पूर्वाग्रह को लेकर जारी विवाद के बीच उसने यह बात कही है। फेसबुक की ओर से यह बयान उसके भारतीय परिचालन के प्रमुख अजीत मोहन के सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश होने के कुछ देर बाद आया। समिति सोशल मीडिया मंचों के कथित दुरुपयोग मामले को देख रही है। फेसबुक प्रवक्ता ने ई-मेल के जरिये दिए बयान में कहा कि हम माननीय संसदीय समिति के समय देने के लिए शुक्रगुजार हैं। हम खुद को एक खुला और पारदर्शी मंच बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही लोगों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने और उनकी आवाज उठाने की अनुमति देते रहेंगे। समिति की बंद दरवाजे में हुई इस सुनवाई की ज्यादा जानकारी बाहर नहीं आयी है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक को लेकर मीडिया की रुचि को देखते हुए मैं बस इतना कह सकता हूं, हमने फेसबुक के प्रतिनिधियों समेत इस मामले में करीब साढ़े तीन घंटे परिचर्चा की और इस पर आगे भविष्य में बातचीत को लेकर सहमत हुए। अमेरिका के वालस्ट्रीट जर्नल की एक खबर के बाद से फेसबुक पर सभी की निगाहें तनी हुई हैं। इस रिपोर्ट में फेसबुक की भारत को लेकर 'कंटेंट' नीति में सत्ताधारी पार्टी का कथित तौर पर पक्ष लेने की बात कही गई है। इसके बाद से सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच फेसबुक के कथित राजनीतिक झुकाव को लेकर तनातनी बढ़ गई है। सोमवार को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने फेसबुक और व्हाट्सएप के भारत के लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने पर हमला करने की करतूत का भंडाफोड़ किया है। व्हाट्सएप पर भी फेसबुक का मालिकाना हक है। मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर सोशल मीडिया कंपनी के कर्मचारियों द्वारा लगातार चुनावों में हार का सामना करने वाले राजनीतिक दल के समर्थकों और प्रधानमंत्री, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को अपशब्द कहने वालों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली : सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने बुधवार को कहा कि वह एक खुला और पारदर्शी मंच बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है। वह लोगों को उसके मंच पर स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने की सुविधा देता रहेगा। सोशल मीडिया कंपनी के कथित राजनीतिक पूर्वाग्रह को लेकर जारी विवाद के बीच उसने यह बात कही है। फेसबुक की ओर से यह बयान उसके भारतीय परिचालन के प्रमुख अजीत मोहन के सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश होने के कुछ देर बाद आया। समिति सोशल मीडिया मंचों के कथित दुरुपयोग मामले को देख रही है। फेसबुक प्रवक्ता ने ई-मेल के जरिये दिए बयान में कहा कि हम माननीय संसदीय समिति के समय देने के लिए शुक्रगुजार हैं। हम खुद को एक खुला और पारदर्शी मंच बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही लोगों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने और उनकी आवाज उठाने की अनुमति देते रहेंगे। समिति की बंद दरवाजे में हुई इस सुनवाई की ज्यादा जानकारी बाहर नहीं आयी है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक को लेकर मीडिया की रुचि को देखते हुए मैं बस इतना कह सकता हूं, हमने फेसबुक के प्रतिनिधियों समेत इस मामले में करीब साढ़े तीन घंटे परिचर्चा की और इस पर आगे भविष्य में बातचीत को लेकर सहमत हुए। अमेरिका के वालस्ट्रीट जर्नल की एक खबर के बाद से फेसबुक पर सभी की निगाहें तनी हुई हैं। इस रिपोर्ट में फेसबुक की भारत को लेकर 'कंटेंट' नीति में सत्ताधारी पार्टी का कथित तौर पर पक्ष लेने की बात कही गई है। इसके बाद से सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच फेसबुक के कथित राजनीतिक झुकाव को लेकर तनातनी बढ़ गई है। सोमवार को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने फेसबुक और व्हाट्सएप के भारत के लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने पर हमला करने की करतूत का भंडाफोड़ किया है। व्हाट्सएप पर भी फेसबुक का मालिकाना हक है। मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर सोशल मीडिया कंपनी के कर्मचारियों द्वारा लगातार चुनावों में हार का सामना करने वाले राजनीतिक दल के समर्थकों और प्रधानमंत्री, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को अपशब्द कहने वालों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
आगरा पुलिस कमिश्नरेट में 14 सर्किल बनाए गए हैं, पहले 12 थे। अब दो सर्किल बासौनी और सैंया बढ़े हैं। सैंया सर्किल के एसीपी पियूष कांत राय और बासौनी सर्किल के एसीपी आनंद पांडेय बनाए गए हैं। उम्मीद है कि नए साल से पहले पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और उपायुक्त जोन की कोर्ट भी जल्द शुरू हो जाएंगी। बासौनी सर्किल में बासौनी, निबोहरा और खेड़ा राठौर थाने आएंगे। बासौनी और खेड़ा राठौर थाना पहले बाह सर्किल में आते थे। वहीं निबोहरा फतेहाबाद सर्किल में आता था। मगर, अब यह नए सर्किल बासौनी में रहेंगे। हालांकि बासौनी को लेकर लोगों ने आपत्ति की थी। इसे अव्यावहारिक बताया था। दूरी अधिक होने की वजह से निबोहरा के लोगों को परेशानी होगी। इसके साथ ही सैंया सर्किल में सैंया, कागारौल और इरादतनगर थाना को शामिल किया है। सैंया और इरादतनगर पहले खेरागढ़ सर्किल में आते थे। वहीं कागारौल अछनेरा सर्किल में आता था। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि कमिश्नरेट में जल्द कोर्ट शुरू हो जाएंगी। इसके लिए कलक्ट्रेट और पुलिस लाइन में तैयारी पूरी हो गई हैं। अधिकारियों को पहले प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें एक्ट की जानकारी दी जा रही है। पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, उपायुक्त की कोर्ट शुरू कर दी जाएंगी। इसके बाद एसीपी की कोर्ट बनाने का काम पूरा किया जाएगा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
आगरा पुलिस कमिश्नरेट में चौदह सर्किल बनाए गए हैं, पहले बारह थे। अब दो सर्किल बासौनी और सैंया बढ़े हैं। सैंया सर्किल के एसीपी पियूष कांत राय और बासौनी सर्किल के एसीपी आनंद पांडेय बनाए गए हैं। उम्मीद है कि नए साल से पहले पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और उपायुक्त जोन की कोर्ट भी जल्द शुरू हो जाएंगी। बासौनी सर्किल में बासौनी, निबोहरा और खेड़ा राठौर थाने आएंगे। बासौनी और खेड़ा राठौर थाना पहले बाह सर्किल में आते थे। वहीं निबोहरा फतेहाबाद सर्किल में आता था। मगर, अब यह नए सर्किल बासौनी में रहेंगे। हालांकि बासौनी को लेकर लोगों ने आपत्ति की थी। इसे अव्यावहारिक बताया था। दूरी अधिक होने की वजह से निबोहरा के लोगों को परेशानी होगी। इसके साथ ही सैंया सर्किल में सैंया, कागारौल और इरादतनगर थाना को शामिल किया है। सैंया और इरादतनगर पहले खेरागढ़ सर्किल में आते थे। वहीं कागारौल अछनेरा सर्किल में आता था। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि कमिश्नरेट में जल्द कोर्ट शुरू हो जाएंगी। इसके लिए कलक्ट्रेट और पुलिस लाइन में तैयारी पूरी हो गई हैं। अधिकारियों को पहले प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें एक्ट की जानकारी दी जा रही है। पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, उपायुक्त की कोर्ट शुरू कर दी जाएंगी। इसके बाद एसीपी की कोर्ट बनाने का काम पूरा किया जाएगा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
- मैं नहीं जाऊंगी। -नहीं क्यों? जब सब जायेंगी तो तुम भी जाना । -परंतु अंत में तत्कालीन समाजपति चंद्र चाटुज्जे के पुत्र कैलाश चाटुज्जे ने गांव की किसी औरत को जाने की अनुमति नहीं दी। मुन्ना पिता के साथ गया और इतनी बड़ी प्रतिमा एवं यात्रा देखकर बहुत खुश हुआ। हेमंत के प्रारम्भ में एक दिन शाम को शिप्टन साहब ने हरकाली सुर डीवान, बड़ी गड़बड़ हो गयी । - क्या हुआ साहब? - अब नीलकोठी ठप्प हो जायेगी। को बुलाकर कहा - क्यों हुजूर? फिर कोई दंगा-फसाद ? -नहीं, वैसी कोई बात नहीं है। यह दूसरी ही बात है। एक देश है जर्मनी, तुम जानते हो? वहां से नीला रंग आया है इंडिया में और दूसरे देशों में भी बिक्री हुआ है। - उस देश में क्या नील की खेती होती है हुजूर ? -नहीं, तुम समझे नहीं । केमिकल नील बन रहा है. असली नहीं, नकली नील। पेड़ पर नहीं होता... दूसरी तरह होता है.... बाइ सिंथेटिक प्रोसेस तुम्हारी समझ में नहीं आयेगा । - हां साहब ! - इसके रंग से काम चल गया तो हमारा नील क्यों खरीदेंगे? - इसके क्या दाम हैं? - अच्छा नील है? - बहुत बढ़िया । मैंने वही दिखाने के लिये तुम्हें बुलाया है। यह देखो. कहकर शिप्टन ने हरकाली सुर के सामने एक नीले रंग की टिकिया रख दो! अभिज्ञ हरकाली ने घुमा-फिराकर उसे परखा और अबाक से रह गये। हंसकर शिप्टन ने कहा - यह बात पहले क्यों नहीं पूछी? मैं सोच रहा था कि डीवान का क्या डिमाग खराब हो गया? कितना हो सकता है - चार रुपये पाउंड । - एक रुपया पाउंड, ज्यादा से ज्यादा डेढ़ रुपया पाउंड होलसेल हंड्रेड-वेट नाइन्टी रुपीज - नब्वे रुपये। हमारा व्यापार तो मिट्टी हो गया, गॉन वेस्ट : हरकाली सुर की सारी जिंदगी इसी काम में निकली थी। समझ-बूझकर चुप हो गया। क्या कहता ? भविष्य का चित्र आंखों के सामने स्पष्ट हो गया था। खेती का नील अब बाजार में नहीं चलेगा और पूरा न पड़ने के कारण नील की खेती बंद हो जायेगी और साहब को बोरिया बिस्तर समेटना पड़ेगा। उस दिन शाम को शिप्टन ने जो भविष्यवाणी की थी, अक्षरशः सत्य हुई।
- मैं नहीं जाऊंगी। -नहीं क्यों? जब सब जायेंगी तो तुम भी जाना । -परंतु अंत में तत्कालीन समाजपति चंद्र चाटुज्जे के पुत्र कैलाश चाटुज्जे ने गांव की किसी औरत को जाने की अनुमति नहीं दी। मुन्ना पिता के साथ गया और इतनी बड़ी प्रतिमा एवं यात्रा देखकर बहुत खुश हुआ। हेमंत के प्रारम्भ में एक दिन शाम को शिप्टन साहब ने हरकाली सुर डीवान, बड़ी गड़बड़ हो गयी । - क्या हुआ साहब? - अब नीलकोठी ठप्प हो जायेगी। को बुलाकर कहा - क्यों हुजूर? फिर कोई दंगा-फसाद ? -नहीं, वैसी कोई बात नहीं है। यह दूसरी ही बात है। एक देश है जर्मनी, तुम जानते हो? वहां से नीला रंग आया है इंडिया में और दूसरे देशों में भी बिक्री हुआ है। - उस देश में क्या नील की खेती होती है हुजूर ? -नहीं, तुम समझे नहीं । केमिकल नील बन रहा है. असली नहीं, नकली नील। पेड़ पर नहीं होता... दूसरी तरह होता है.... बाइ सिंथेटिक प्रोसेस तुम्हारी समझ में नहीं आयेगा । - हां साहब ! - इसके रंग से काम चल गया तो हमारा नील क्यों खरीदेंगे? - इसके क्या दाम हैं? - अच्छा नील है? - बहुत बढ़िया । मैंने वही दिखाने के लिये तुम्हें बुलाया है। यह देखो. कहकर शिप्टन ने हरकाली सुर के सामने एक नीले रंग की टिकिया रख दो! अभिज्ञ हरकाली ने घुमा-फिराकर उसे परखा और अबाक से रह गये। हंसकर शिप्टन ने कहा - यह बात पहले क्यों नहीं पूछी? मैं सोच रहा था कि डीवान का क्या डिमाग खराब हो गया? कितना हो सकता है - चार रुपये पाउंड । - एक रुपया पाउंड, ज्यादा से ज्यादा डेढ़ रुपया पाउंड होलसेल हंड्रेड-वेट नाइन्टी रुपीज - नब्वे रुपये। हमारा व्यापार तो मिट्टी हो गया, गॉन वेस्ट : हरकाली सुर की सारी जिंदगी इसी काम में निकली थी। समझ-बूझकर चुप हो गया। क्या कहता ? भविष्य का चित्र आंखों के सामने स्पष्ट हो गया था। खेती का नील अब बाजार में नहीं चलेगा और पूरा न पड़ने के कारण नील की खेती बंद हो जायेगी और साहब को बोरिया बिस्तर समेटना पड़ेगा। उस दिन शाम को शिप्टन ने जो भविष्यवाणी की थी, अक्षरशः सत्य हुई।
वीर अर्जुन न्यूज नेटवर्प नई दिल्ली। महंगाई दर में मार्च, 2011 तक कमी की भविष्यवाणी कर रहे आर्थिक पंडितों के सारे अनुमान धरे रह गए। आज जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार सकल थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुदास्फीति मार्च 2011 में चढ कर 8. 98 प्रतिशत हो गयी जबकि रिजर्व बैंक ने इसके 8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया था। विनिर्मित वस्तुओं और साग-सब्जियों की महंगाई से मुदास्फीति को बल मिला है जबकि रिजर्व बैंक ने बाजार में सकल मांग पर अंकुश लगाने के लिए पिछले मार्च से लगातार कर्ज महंगा करने के नीतिगत कदम उ"ाता रहा है। फरवरी, 11 में मुदस्फीति 8. 31 प्रतिशत थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब सकल मुदास्फीति में वृद्धि दर्ज की गयी है। महंगाई दर बढने से 3 मई को पेश की जाने वाली मौदिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि किये जाने की संभावना बढ़ गयी है। पर इसका असर आर्थिक वृद्धि और रोजगार की संभावनाओं पर पड़ सकता है। फरवरी में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर मात्र 3. 6 प्रतिशत रह गयी जबकि इससे एक माह पूर्व यह 3. 7 प्रतिशत थी। औद्योगिक वृद्धि में गिरावट को ब्याज दरों में वृद्धि के साथ साथ तुलनात्मक आधार का प्रभाव भी बताया क्योंकि पछले वर्ष इसी दौर में औद्योगिक वृद्धि काफी उढंची थी। यहां आज जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दूध, सब्जी, फल एवं विनिर्मत उत्पादों के दाम बढ़ने के कारण महंगाई दर बढ़ी है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत चढ़ने से ईंधन लागत में वृद्धि के कारण भी मुदास्फीति चढ़ी है। इसके अलावा खाद्य मुदास्फीति दो अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 8. 28 प्रतिशत रही। थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की कीमत की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। प्राथमिक वस्तुओं-खाद्य, गैर-खाद्य वस्तु तथा खनिज-की कीमत में सालाना आधार पर 12. 96 प्रतिशत बढ़ी है। वार्षिक आधार पर खाद्य वस्तुओं की कीमत 9. 47 प्रतिशत, अनाज 3. 96 प्रतिशत, चावल और गेहूं का भाव क्रमशः 2. 69 प्रतिशत और 0. 75 प्रतिशत चढ़ा। दाल का भाव 4. 17 प्रतिशत उढंचा रहा। मार्च महीने में ईंधन और बिजली की दरें एक वर्ष पूर्व की तुलना में 12. 92 प्रतिशत उढंची थीं। आंकड़ों के अनुसार विनिर्मित उत्पाद समूह का सूचकांक सालाना आधार पर 6. 21 प्रतिशत बढ़ा। थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मित वस्तुओं का भारांश 64. 9 प्रतिशत है। इस बीच, थोक मूल्य सूचकांक के संशोधित आंकड़ों के अनुसार जनवरी माह में सकल मुदास्फीति 9. 35 प्रतिशत रही। प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर यह 8. 23 फीसद रहने का अनुमान जताया गया था। दूसरी तरफ खाद्य मुदास्फीति का आंकड़ा प्राथमिक वस्तुओं के समूह में शामिल अनाज और फल सब्जियों के एक वर्ग विशेष का ही प्रतिनिधित्व करता है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, मुदास्फीति लगातार चिंता का विषय रही है, मुझे जितनी उम्मीद थी यह उतनी नियंत्रित नहीं हो पाई। इसे नियंत्रण में लाने के लिये मौदिक और जहां कहीं जरूरत हो वहां वित्तीय उपाय किये जाने चाहिये।
वीर अर्जुन न्यूज नेटवर्प नई दिल्ली। महंगाई दर में मार्च, दो हज़ार ग्यारह तक कमी की भविष्यवाणी कर रहे आर्थिक पंडितों के सारे अनुमान धरे रह गए। आज जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार सकल थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुदास्फीति मार्च दो हज़ार ग्यारह में चढ कर आठ. अट्ठानवे प्रतिशत हो गयी जबकि रिजर्व बैंक ने इसके आठ प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया था। विनिर्मित वस्तुओं और साग-सब्जियों की महंगाई से मुदास्फीति को बल मिला है जबकि रिजर्व बैंक ने बाजार में सकल मांग पर अंकुश लगाने के लिए पिछले मार्च से लगातार कर्ज महंगा करने के नीतिगत कदम उ"ाता रहा है। फरवरी, ग्यारह में मुदस्फीति आठ. इकतीस प्रतिशत थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब सकल मुदास्फीति में वृद्धि दर्ज की गयी है। महंगाई दर बढने से तीन मई को पेश की जाने वाली मौदिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि किये जाने की संभावना बढ़ गयी है। पर इसका असर आर्थिक वृद्धि और रोजगार की संभावनाओं पर पड़ सकता है। फरवरी में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर मात्र तीन. छः प्रतिशत रह गयी जबकि इससे एक माह पूर्व यह तीन. सात प्रतिशत थी। औद्योगिक वृद्धि में गिरावट को ब्याज दरों में वृद्धि के साथ साथ तुलनात्मक आधार का प्रभाव भी बताया क्योंकि पछले वर्ष इसी दौर में औद्योगिक वृद्धि काफी उढंची थी। यहां आज जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दूध, सब्जी, फल एवं विनिर्मत उत्पादों के दाम बढ़ने के कारण महंगाई दर बढ़ी है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत चढ़ने से ईंधन लागत में वृद्धि के कारण भी मुदास्फीति चढ़ी है। इसके अलावा खाद्य मुदास्फीति दो अप्रैल को समाप्त सप्ताह में आठ. अट्ठाईस प्रतिशत रही। थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की कीमत की हिस्सेदारी करीब पंद्रह प्रतिशत है। प्राथमिक वस्तुओं-खाद्य, गैर-खाद्य वस्तु तथा खनिज-की कीमत में सालाना आधार पर बारह. छियानवे प्रतिशत बढ़ी है। वार्षिक आधार पर खाद्य वस्तुओं की कीमत नौ. सैंतालीस प्रतिशत, अनाज तीन. छियानवे प्रतिशत, चावल और गेहूं का भाव क्रमशः दो. उनहत्तर प्रतिशत और शून्य. पचहत्तर प्रतिशत चढ़ा। दाल का भाव चार. सत्रह प्रतिशत उढंचा रहा। मार्च महीने में ईंधन और बिजली की दरें एक वर्ष पूर्व की तुलना में बारह. बानवे प्रतिशत उढंची थीं। आंकड़ों के अनुसार विनिर्मित उत्पाद समूह का सूचकांक सालाना आधार पर छः. इक्कीस प्रतिशत बढ़ा। थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मित वस्तुओं का भारांश चौंसठ. नौ प्रतिशत है। इस बीच, थोक मूल्य सूचकांक के संशोधित आंकड़ों के अनुसार जनवरी माह में सकल मुदास्फीति नौ. पैंतीस प्रतिशत रही। प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर यह आठ. तेईस फीसद रहने का अनुमान जताया गया था। दूसरी तरफ खाद्य मुदास्फीति का आंकड़ा प्राथमिक वस्तुओं के समूह में शामिल अनाज और फल सब्जियों के एक वर्ग विशेष का ही प्रतिनिधित्व करता है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, मुदास्फीति लगातार चिंता का विषय रही है, मुझे जितनी उम्मीद थी यह उतनी नियंत्रित नहीं हो पाई। इसे नियंत्रण में लाने के लिये मौदिक और जहां कहीं जरूरत हो वहां वित्तीय उपाय किये जाने चाहिये।
परीक्षा पे चर्चा (Pariksha Pe Charcha) के छठे संस्करण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। उन्होंने बातचीत से पहले कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित छात्रों के प्रदर्शन को भी देखा। परीक्षा पे चर्चा की परिकल्पना प्रधानमंत्री द्वारा की गई है जिसमें छात्र, अभिभावक और शिक्षक उनके साथ जीवन और परीक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों पर बातचीत करते हैं। परीक्षा पे चर्चा के आयोजन में इस वर्ष 155 देशों से लगभग 38. 80 लाख पंजीकरण हुए हैं। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह पहली बार है कि परीक्षा पे चर्चा गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अन्य राज्यों से नई दिल्ली आने वालों को भी गणतंत्र दिवस की झलक मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए परीक्षा पे चर्चा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन लाखों सवालों की ओर इशारा किया जो कार्यक्रम के हिस्से के रूप में सामने आए। उन्होंने कहा, "परीक्षा पे चर्चा मेरी भी परीक्षा है। कोटि-कोटि विद्यार्थी मेरी परीक्षा लेते हैं और इससे मुझे खुशी मिलती है। यह देखना मेरा सौभाग्य है कि मेरे देश का युवा मन क्या सोचता है। " प्रधानमंत्री ने कहा, "ये सवाल मेरे लिए खजाने की तरह हैं। " उन्होंने यह भी कहा कि वे इन सभी प्रश्नों का संकलन करना चाहते हैं जिनका आने वाले वर्षों में सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषण किया जा सके और हमें ऐसे डायनैमिक टाइम में युवा छात्रों के दिमाग के बारे में एक विस्तृत थीसिस मिल सके। तमिलनाडु के मदुरै से केंद्रीय विद्यालय की छात्रा अश्विनी, दिल्ली के पीतमपुरा स्थित केवी से नवतेज और पटना से नवीन बालिका स्कूल से प्रियंका कुमारी के खराब अंक के मामले में पारिवारिक निराशा के बारे में एक प्रश्न का समाधान बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार के लोगों को बहुत अपेक्षाएं होना बहुत स्वाभाविक है और उसमें कुछ गलत भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि अगर परिवार के लोग अपेक्षाएं सोशल स्टेट्स के कारण कर रहे हैं तो वह चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर सफलता के साथ प्रदर्शन के बढ़ते मानकों और बढ़ती अपेक्षाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि आसपास की उम्मीदों के जाल में फंसना अच्छा नहीं है और व्यक्ति को अपने भीतर देखना चाहिए तथा उम्मीद को अपनी क्षमताओं, जरूरतों, इरादों और प्राथमिकताओं से जोड़ना चाहिए। क्रिकेट के उस खेल का उदाहरण देते हुए जहां भीड़ चौके-छक्के लगाने के लिए कहती है, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बल्लेबाज जो बल्लेबाजी करने जाता है, दर्शकों में इतने लोगों के एक छक्के या चौके के लिए अनुरोध करने के बाद भी वह बेफिक्र रहता है। प्रधानमंत्री ने क्रिकेट के मैदान पर बल्लेबाज के फोकस और छात्रों के दिमाग के बीच की कड़ी के बारे में चर्चा करते हुए कहा, "जिस तरह क्रिकेटर का ध्यान लोगों के चिल्लाने पर नहीं, बल्कि अपने खेल पर फोकस होता है। इसी तरह आप भी दबावों के दबाव में न रहें। " प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आप केन्द्रित रहते हैं तो अपेक्षाओं का दबाव खत्म हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों पर उम्मीदों का बोझ न डालें और छात्रों से कहा कि वे हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार खुद का मूल्यांकन करें। हालांकि, उन्होंने छात्रों से कहा कि वे दबावों का विश्लेषण करें और देखें कि क्या वे अपनी क्षमता के साथ न्याय कर रहे हैं। ऐसे में इन उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा मिल सकता है। केरल के कोझिकोड के एक छात्र ने कड़ी मेहनत बनाम स्मार्ट वर्क की आवश्यकता और महत्व के बारे में पूछा। प्रधानमंत्री ने स्मार्ट वर्क का उदाहरण देते हुए प्यासे कौए की कहानी पर प्रकाश डाला, जिसने अपनी प्यास बुझाने के लिए घड़े में पत्थर फेंके। उन्होंने बारीकी से विश्लेषण करने और काम को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया और कड़ी मेहनत, स्मार्ट तरीके से काम करने की कहानी से नैतिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हर काम की पहले अच्छी तरह से जांच की जानी चाहिए"। उन्होंने एक स्मार्ट वर्किंग मैकेनिक का उदाहरण दिया जिसने दो सौ रुपये में दो मिनट के भीतर एक जीप को ठीक कर दिया और कहा कि यह काम का अनुभव है जो काम करने में लगने वाले समय के बजाय मायने रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "कड़ी मेहनत से सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। " इसी प्रकार खेलों में भी विशिष्ट प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या किया जाना चाहिए। व्यक्ति को बुद्धिमानी के साथ उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। सेंट जोसेफ सेकेंडरी स्कूल, चंडीगढ़ के छात्र मन्नत बाजवा, अहमदाबाद के 12वीं कक्षा के छात्र कुमकुम प्रतापभाई सोलंकी और व्हाइटफील्ड ग्लोबल स्कूल, बैंगलोर के 12वीं कक्षा के छात्र आकाश दरिरा ने प्रधानमंत्री से नकारात्मक विचार रखने वाले लोगों से निपटने, उसके प्रति राय कायम करने और यह उन्हें कैसे प्रभावित करता है, इसके बारे में पूछा और दक्षिण सिक्किम के डीएवी पब्लिक स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र अष्टमी सेन ने भी मीडिया के आलोचनात्मक दृष्टिकोण से निपटने के बारे में इसी तरह का सवाल उठाया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वे इस सिद्धांत में विश्वास करते हैं कि समृद्ध लोकतंत्र के लिए आलोचना एक शुद्धि यज्ञ है। आलोचना एक समृद्ध लोकतंत्र की पूर्व-शर्त है। प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने एक प्रोग्रामर का उदाहरण दिया, जो सुधार के लिए ओपन सोर्स पर अपना कोड डालता है, और कंपनियां जो अपने उत्पादों को बाजार में बिक्री के लिए रखती हैं, ग्राहकों से उत्पादों की खामियों को खोजने के लिए कहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कौन आपके काम की आलोचना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आजकल माता-पिता रचनात्मक आलोचना के बजाय अपने बच्चों की क्षमता में बाधा डालने वाले बन गए हैं और उनसे इस आदत को छोड़ने का आग्रह किया क्योंकि बच्चों का जीवन प्रतिबंधात्मक तरीके से नहीं बदलेगा। प्रधानमंत्री ने संसद सत्र के उन दृश्यों पर भी प्रकाश डाला, जब सत्र को किसी खास विषय पर संबोधित कर रहा कोई सदस्य विपक्ष के सदस्यों द्वारा टोके जाने के बाद भी विचलित नहीं होता। दूसरे, प्रधानमंत्री ने एक आलोचक होने के नाते श्रम और अनुसंधान के महत्व पर भी प्रकाश डाला, "आलोचना करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, एनालिसिस करना पड़ता है। ज्यादातर लोग आरोप लगाते हैं, आलोचना नहीं करते। " प्रधानमंत्री ने कहा, "आरोपों और आलोचनाओं के बीच एक बड़ा अंतर है। " उन्होंने सभी से आग्रह किया कि आलोचना को आरोप समझने की गलती न करें। भोपाल से दीपेश अहिरवार, दसवीं कक्षा के छात्र आदिताभ ने इंडिया टीवी के माध्यम से अपना प्रश्न पूछा, कामाक्षी ने रिपब्लिक टीवी के माध्यम से अपना प्रश्न पूछा, और जी टीवी के माध्यम से मनन मित्तल ने ऑनलाइन गेम व सोशल मीडिया की लत और परिणाम में असर डालने के बारे में प्रश्न पूछे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला निर्णय यह तय करना है कि आप स्मार्ट हैं या आपका गैजेट स्मार्ट है। समस्या तब शुरू होती है जब आप गैजेट को अपने से ज्यादा स्मार्ट समझने लगते हैं। किसी की स्मार्टनेस स्मार्ट गैजेट को स्मार्ट तरीके से उपयोग करने में सक्षम बनाती है और उन्हें उत्पादकता में मदद करने वाले उपकरणों के रूप में व्यवहार करती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "स्क्रीन पर औसत समय का बढ़ना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। " उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक अध्ययन के अनुसार, एक भारतीय के लिए स्क्रीन पर होने का औसत समय छह घंटे तक है। ऐसे में गैजेट हमें गुलाम बना लेता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "ईश्वर ने हमें स्वतंत्र इच्छा और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व दिया है और हमें हमेशा अपने गैजेट्स का गुलाम बनने के बारे में सचेत रहना चाहिए। " उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि बहुत सक्रिय होने के बावजूद उन्हें मोबाइल फोन के साथ कम ही देखा जाता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी गतिविधियों के लिए एक निश्चित समय रखते हैं। तकनीक से परहेज नहीं करना चाहिए बल्कि खुद को जरूरत के हिसाब से उपयोगी चीजों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों के बीच पहाड़े को दोहराने के लिए क्षमता के नुकसान का उदाहरण भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें अपने मूल उपहारों को खोए बिना अपनी क्षमताओं में सुधार करने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में अपनी क्रिएटिविटी को बचाए रखने के लिए टेस्टिंग और लर्निंग करते रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने नियमित अंतराल पर 'टेक्नोलॉजी फास्टिंग' का सुझाव दिया। उन्होंने हर घर में एक 'प्रौद्योगिकी मुक्त क्षेत्र' के रूप में एक सीमांकित क्षेत्र का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे जीवन का आनंद बढ़ेगा और आप गैजेट्स की गुलामी के चंगुल से बाहर आएंगे। जम्मू के गवर्नमेंट मॉडल हाई सेकेंडरी स्कूल, जम्मू के 10वीं कक्षा के छात्र निदाह के सवालों का समाधान करते हुए, कड़ी मेहनत के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के तनाव को दूर करने और शहीद नायक राजेंद्र सिंह राजकीय स्कूल, पलवल, हरियाणा के कक्षा के छात्र प्रशांत के बारे में यह पूछे जाने पर कि तनाव परिणामों को कैसे प्रभावित करता है, प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा के बाद तनाव का मुख्य कारण इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करना है कि परीक्षा अच्छी हुई या नहीं। प्रधानमंत्री ने छात्रों के बीच तनाव पैदा करने वाले कारक के रूप में प्रतिस्पर्धा पर भी प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि छात्रों को अपनी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत करते हुए स्वयं और अपने परिवेश से जीना व सीखना चाहिए। जीवन के प्रति दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं है और परिणामों के बारे में अधिक सोचना दैनिक जीवन का विषय नहीं होना चाहिए। तेलंगाना के जवाहर नवोदय विद्यालय रंगारेड्डी की कक्षा 9वीं की छात्रा आर. अक्षरासिरी और राजकीय माध्यमिक विद्यालय, भोपाल की 12वीं कक्षा की छात्रा रितिका के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कि कोई और भाषा कैसे सीख सकता है और इससे उन्हें कैसे लाभ हो सकता है, प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत के बारे में कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि भारत सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों का देश है। उन्होंने कहा कि नई भाषा सीखना एक नया संगीत वाद्ययंत्र सीखने के समान है। प्रधानमंत्री ने कहा, "एक क्षेत्रीय भाषा सीखने का प्रयास करके, आप न केवल भाषा की अभिव्यक्ति बनने के बारे में सीख रहे हैं बल्कि क्षेत्र से जुड़े इतिहास और विरासत के द्वार भी खोल रहे हैं। " प्रधानमंत्री ने कहा कि दैनिक दिनचर्या पर बोझ के बिना एक नई भाषा सीखने पर जोर देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि दो हजार साल पहले बनाए गए देश के एक स्मारक पर नागरिक गर्व महसूस करते हैं, ठीक उसी तरह, देश को तमिल भाषा पर समान रूप से गर्व करना चाहिए, जो पृथ्वी पर सबसे पुरानी भाषा के रूप में जानी जाती है। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संगठनों के अपने पिछले संबोधन को याद किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उन्होंने विशेष रूप से तमिल के बारे में तथ्य सामने लाए, क्योंकि वह दुनिया को उस देश के लिए गर्व के बारे में बताना चाहते थे, जो सबसे पुरानी भाषा का स्थान है। प्रधानमंत्री ने उत्तर भारत के उन लोगों के बारे में बताया, जो दक्षिण भारत के व्यंजनों का सेवन करते हैं। प्रधानमंत्री ने मातृभाषा के अलावा भारत से कम से कम एक क्षेत्रीय भाषा जानने की आवश्यकता पर बल दिया और इस बात पर प्रकाश डाला कि जब आप उनसे बात करते हैं तो भाषा जानने वाले लोगों के चेहरे कैसे चमकते हैं। प्रधानमंत्री ने गुजरात में प्रवासी श्रमिक की 8 वर्षीय बेटी का उदाहरण दिया, जो बंगाली, मलयालम, मराठी और गुजरात जैसी कई अलग-अलग भाषाएं बोलती है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपनी विरासत, पंच प्रणों (पांच प्रतिज्ञाओं) में से एक पर गर्व करने पर प्रकाश डाला और कहा कि प्रत्येक भारतीय को भारत की भाषाओं पर गर्व करना चाहिए। . समाज में छात्रों के व्यवहार के बारे में नई दिल्ली की एक अभिभावक सुमन मिश्रा के प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि माता-पिता को समाज में छात्रों के व्यवहार के दायरे को सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें बच्चों को विस्तार देने का अवसर देना चाहिए, उन्हें बंधनों में नहीं बांधना चाहिए। अपने बच्चों को समाज के विभिन्न वर्गों में जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। समाज में छात्र के विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण होना चाहिए। " उन्होंने अपनी खुद की सलाह को याद किया कि छात्रों को अपनी परीक्षा के बाद बाहर यात्रा करने और अपने अनुभव रिकॉर्ड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्हें इस तरह आजाद करने से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलेगा। 12वीं की परीक्षा के बाद उन्हें अपने राज्यों से बाहर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से कहा कि वे अपने बच्चों को नए अनुभवों के लिए प्रेरित करते रहें। उन्होंने माता-पिता को अपनी स्थिति के अनुसार बच्चों के मूड और उनकी परिस्थिति के बारे में सतर्क रहने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा तब होता है जब माता-पिता खुद को बच्चों यानी भगवान के उपहार के संरक्षक के रूप में मानते हैं। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित सभी को धन्यवाद दिया और माता-पिता, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा के दौरान बनाए जा रहे तनावपूर्ण माहौल को अधिकतम सीमा तक कम करने का आग्रह किया। नतीजतन, परीक्षा छात्रों के जीवन को उत्साह से भरकर एक उत्सव में बदल जाएगी, और यही उत्साह छात्रों की उत्कृष्टता की गारंटी देगा।
परीक्षा पे चर्चा के छठे संस्करण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। उन्होंने बातचीत से पहले कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित छात्रों के प्रदर्शन को भी देखा। परीक्षा पे चर्चा की परिकल्पना प्रधानमंत्री द्वारा की गई है जिसमें छात्र, अभिभावक और शिक्षक उनके साथ जीवन और परीक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों पर बातचीत करते हैं। परीक्षा पे चर्चा के आयोजन में इस वर्ष एक सौ पचपन देशों से लगभग अड़तीस. अस्सी लाख पंजीकरण हुए हैं। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह पहली बार है कि परीक्षा पे चर्चा गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अन्य राज्यों से नई दिल्ली आने वालों को भी गणतंत्र दिवस की झलक मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिए परीक्षा पे चर्चा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन लाखों सवालों की ओर इशारा किया जो कार्यक्रम के हिस्से के रूप में सामने आए। उन्होंने कहा, "परीक्षा पे चर्चा मेरी भी परीक्षा है। कोटि-कोटि विद्यार्थी मेरी परीक्षा लेते हैं और इससे मुझे खुशी मिलती है। यह देखना मेरा सौभाग्य है कि मेरे देश का युवा मन क्या सोचता है। " प्रधानमंत्री ने कहा, "ये सवाल मेरे लिए खजाने की तरह हैं। " उन्होंने यह भी कहा कि वे इन सभी प्रश्नों का संकलन करना चाहते हैं जिनका आने वाले वर्षों में सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषण किया जा सके और हमें ऐसे डायनैमिक टाइम में युवा छात्रों के दिमाग के बारे में एक विस्तृत थीसिस मिल सके। तमिलनाडु के मदुरै से केंद्रीय विद्यालय की छात्रा अश्विनी, दिल्ली के पीतमपुरा स्थित केवी से नवतेज और पटना से नवीन बालिका स्कूल से प्रियंका कुमारी के खराब अंक के मामले में पारिवारिक निराशा के बारे में एक प्रश्न का समाधान बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवार के लोगों को बहुत अपेक्षाएं होना बहुत स्वाभाविक है और उसमें कुछ गलत भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि अगर परिवार के लोग अपेक्षाएं सोशल स्टेट्स के कारण कर रहे हैं तो वह चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर सफलता के साथ प्रदर्शन के बढ़ते मानकों और बढ़ती अपेक्षाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि आसपास की उम्मीदों के जाल में फंसना अच्छा नहीं है और व्यक्ति को अपने भीतर देखना चाहिए तथा उम्मीद को अपनी क्षमताओं, जरूरतों, इरादों और प्राथमिकताओं से जोड़ना चाहिए। क्रिकेट के उस खेल का उदाहरण देते हुए जहां भीड़ चौके-छक्के लगाने के लिए कहती है, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बल्लेबाज जो बल्लेबाजी करने जाता है, दर्शकों में इतने लोगों के एक छक्के या चौके के लिए अनुरोध करने के बाद भी वह बेफिक्र रहता है। प्रधानमंत्री ने क्रिकेट के मैदान पर बल्लेबाज के फोकस और छात्रों के दिमाग के बीच की कड़ी के बारे में चर्चा करते हुए कहा, "जिस तरह क्रिकेटर का ध्यान लोगों के चिल्लाने पर नहीं, बल्कि अपने खेल पर फोकस होता है। इसी तरह आप भी दबावों के दबाव में न रहें। " प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आप केन्द्रित रहते हैं तो अपेक्षाओं का दबाव खत्म हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों पर उम्मीदों का बोझ न डालें और छात्रों से कहा कि वे हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार खुद का मूल्यांकन करें। हालांकि, उन्होंने छात्रों से कहा कि वे दबावों का विश्लेषण करें और देखें कि क्या वे अपनी क्षमता के साथ न्याय कर रहे हैं। ऐसे में इन उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा मिल सकता है। केरल के कोझिकोड के एक छात्र ने कड़ी मेहनत बनाम स्मार्ट वर्क की आवश्यकता और महत्व के बारे में पूछा। प्रधानमंत्री ने स्मार्ट वर्क का उदाहरण देते हुए प्यासे कौए की कहानी पर प्रकाश डाला, जिसने अपनी प्यास बुझाने के लिए घड़े में पत्थर फेंके। उन्होंने बारीकी से विश्लेषण करने और काम को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया और कड़ी मेहनत, स्मार्ट तरीके से काम करने की कहानी से नैतिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हर काम की पहले अच्छी तरह से जांच की जानी चाहिए"। उन्होंने एक स्मार्ट वर्किंग मैकेनिक का उदाहरण दिया जिसने दो सौ रुपये में दो मिनट के भीतर एक जीप को ठीक कर दिया और कहा कि यह काम का अनुभव है जो काम करने में लगने वाले समय के बजाय मायने रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "कड़ी मेहनत से सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। " इसी प्रकार खेलों में भी विशिष्ट प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या किया जाना चाहिए। व्यक्ति को बुद्धिमानी के साथ उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। सेंट जोसेफ सेकेंडरी स्कूल, चंडीगढ़ के छात्र मन्नत बाजवा, अहमदाबाद के बारहवीं कक्षा के छात्र कुमकुम प्रतापभाई सोलंकी और व्हाइटफील्ड ग्लोबल स्कूल, बैंगलोर के बारहवीं कक्षा के छात्र आकाश दरिरा ने प्रधानमंत्री से नकारात्मक विचार रखने वाले लोगों से निपटने, उसके प्रति राय कायम करने और यह उन्हें कैसे प्रभावित करता है, इसके बारे में पूछा और दक्षिण सिक्किम के डीएवी पब्लिक स्कूल के ग्यारहवीं कक्षा के छात्र अष्टमी सेन ने भी मीडिया के आलोचनात्मक दृष्टिकोण से निपटने के बारे में इसी तरह का सवाल उठाया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वे इस सिद्धांत में विश्वास करते हैं कि समृद्ध लोकतंत्र के लिए आलोचना एक शुद्धि यज्ञ है। आलोचना एक समृद्ध लोकतंत्र की पूर्व-शर्त है। प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने एक प्रोग्रामर का उदाहरण दिया, जो सुधार के लिए ओपन सोर्स पर अपना कोड डालता है, और कंपनियां जो अपने उत्पादों को बाजार में बिक्री के लिए रखती हैं, ग्राहकों से उत्पादों की खामियों को खोजने के लिए कहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कौन आपके काम की आलोचना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आजकल माता-पिता रचनात्मक आलोचना के बजाय अपने बच्चों की क्षमता में बाधा डालने वाले बन गए हैं और उनसे इस आदत को छोड़ने का आग्रह किया क्योंकि बच्चों का जीवन प्रतिबंधात्मक तरीके से नहीं बदलेगा। प्रधानमंत्री ने संसद सत्र के उन दृश्यों पर भी प्रकाश डाला, जब सत्र को किसी खास विषय पर संबोधित कर रहा कोई सदस्य विपक्ष के सदस्यों द्वारा टोके जाने के बाद भी विचलित नहीं होता। दूसरे, प्रधानमंत्री ने एक आलोचक होने के नाते श्रम और अनुसंधान के महत्व पर भी प्रकाश डाला, "आलोचना करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, एनालिसिस करना पड़ता है। ज्यादातर लोग आरोप लगाते हैं, आलोचना नहीं करते। " प्रधानमंत्री ने कहा, "आरोपों और आलोचनाओं के बीच एक बड़ा अंतर है। " उन्होंने सभी से आग्रह किया कि आलोचना को आरोप समझने की गलती न करें। भोपाल से दीपेश अहिरवार, दसवीं कक्षा के छात्र आदिताभ ने इंडिया टीवी के माध्यम से अपना प्रश्न पूछा, कामाक्षी ने रिपब्लिक टीवी के माध्यम से अपना प्रश्न पूछा, और जी टीवी के माध्यम से मनन मित्तल ने ऑनलाइन गेम व सोशल मीडिया की लत और परिणाम में असर डालने के बारे में प्रश्न पूछे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला निर्णय यह तय करना है कि आप स्मार्ट हैं या आपका गैजेट स्मार्ट है। समस्या तब शुरू होती है जब आप गैजेट को अपने से ज्यादा स्मार्ट समझने लगते हैं। किसी की स्मार्टनेस स्मार्ट गैजेट को स्मार्ट तरीके से उपयोग करने में सक्षम बनाती है और उन्हें उत्पादकता में मदद करने वाले उपकरणों के रूप में व्यवहार करती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "स्क्रीन पर औसत समय का बढ़ना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। " उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक अध्ययन के अनुसार, एक भारतीय के लिए स्क्रीन पर होने का औसत समय छह घंटे तक है। ऐसे में गैजेट हमें गुलाम बना लेता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "ईश्वर ने हमें स्वतंत्र इच्छा और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व दिया है और हमें हमेशा अपने गैजेट्स का गुलाम बनने के बारे में सचेत रहना चाहिए। " उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि बहुत सक्रिय होने के बावजूद उन्हें मोबाइल फोन के साथ कम ही देखा जाता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी गतिविधियों के लिए एक निश्चित समय रखते हैं। तकनीक से परहेज नहीं करना चाहिए बल्कि खुद को जरूरत के हिसाब से उपयोगी चीजों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने छात्रों के बीच पहाड़े को दोहराने के लिए क्षमता के नुकसान का उदाहरण भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें अपने मूल उपहारों को खोए बिना अपनी क्षमताओं में सुधार करने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में अपनी क्रिएटिविटी को बचाए रखने के लिए टेस्टिंग और लर्निंग करते रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने नियमित अंतराल पर 'टेक्नोलॉजी फास्टिंग' का सुझाव दिया। उन्होंने हर घर में एक 'प्रौद्योगिकी मुक्त क्षेत्र' के रूप में एक सीमांकित क्षेत्र का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे जीवन का आनंद बढ़ेगा और आप गैजेट्स की गुलामी के चंगुल से बाहर आएंगे। जम्मू के गवर्नमेंट मॉडल हाई सेकेंडरी स्कूल, जम्मू के दसवीं कक्षा के छात्र निदाह के सवालों का समाधान करते हुए, कड़ी मेहनत के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के तनाव को दूर करने और शहीद नायक राजेंद्र सिंह राजकीय स्कूल, पलवल, हरियाणा के कक्षा के छात्र प्रशांत के बारे में यह पूछे जाने पर कि तनाव परिणामों को कैसे प्रभावित करता है, प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा के बाद तनाव का मुख्य कारण इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करना है कि परीक्षा अच्छी हुई या नहीं। प्रधानमंत्री ने छात्रों के बीच तनाव पैदा करने वाले कारक के रूप में प्रतिस्पर्धा पर भी प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि छात्रों को अपनी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत करते हुए स्वयं और अपने परिवेश से जीना व सीखना चाहिए। जीवन के प्रति दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं है और परिणामों के बारे में अधिक सोचना दैनिक जीवन का विषय नहीं होना चाहिए। तेलंगाना के जवाहर नवोदय विद्यालय रंगारेड्डी की कक्षा नौवीं की छात्रा आर. अक्षरासिरी और राजकीय माध्यमिक विद्यालय, भोपाल की बारहवीं कक्षा की छात्रा रितिका के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कि कोई और भाषा कैसे सीख सकता है और इससे उन्हें कैसे लाभ हो सकता है, प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत के बारे में कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि भारत सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों का देश है। उन्होंने कहा कि नई भाषा सीखना एक नया संगीत वाद्ययंत्र सीखने के समान है। प्रधानमंत्री ने कहा, "एक क्षेत्रीय भाषा सीखने का प्रयास करके, आप न केवल भाषा की अभिव्यक्ति बनने के बारे में सीख रहे हैं बल्कि क्षेत्र से जुड़े इतिहास और विरासत के द्वार भी खोल रहे हैं। " प्रधानमंत्री ने कहा कि दैनिक दिनचर्या पर बोझ के बिना एक नई भाषा सीखने पर जोर देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि दो हजार साल पहले बनाए गए देश के एक स्मारक पर नागरिक गर्व महसूस करते हैं, ठीक उसी तरह, देश को तमिल भाषा पर समान रूप से गर्व करना चाहिए, जो पृथ्वी पर सबसे पुरानी भाषा के रूप में जानी जाती है। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संगठनों के अपने पिछले संबोधन को याद किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उन्होंने विशेष रूप से तमिल के बारे में तथ्य सामने लाए, क्योंकि वह दुनिया को उस देश के लिए गर्व के बारे में बताना चाहते थे, जो सबसे पुरानी भाषा का स्थान है। प्रधानमंत्री ने उत्तर भारत के उन लोगों के बारे में बताया, जो दक्षिण भारत के व्यंजनों का सेवन करते हैं। प्रधानमंत्री ने मातृभाषा के अलावा भारत से कम से कम एक क्षेत्रीय भाषा जानने की आवश्यकता पर बल दिया और इस बात पर प्रकाश डाला कि जब आप उनसे बात करते हैं तो भाषा जानने वाले लोगों के चेहरे कैसे चमकते हैं। प्रधानमंत्री ने गुजरात में प्रवासी श्रमिक की आठ वर्षीय बेटी का उदाहरण दिया, जो बंगाली, मलयालम, मराठी और गुजरात जैसी कई अलग-अलग भाषाएं बोलती है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपनी विरासत, पंच प्रणों में से एक पर गर्व करने पर प्रकाश डाला और कहा कि प्रत्येक भारतीय को भारत की भाषाओं पर गर्व करना चाहिए। . समाज में छात्रों के व्यवहार के बारे में नई दिल्ली की एक अभिभावक सुमन मिश्रा के प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि माता-पिता को समाज में छात्रों के व्यवहार के दायरे को सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें बच्चों को विस्तार देने का अवसर देना चाहिए, उन्हें बंधनों में नहीं बांधना चाहिए। अपने बच्चों को समाज के विभिन्न वर्गों में जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। समाज में छात्र के विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण होना चाहिए। " उन्होंने अपनी खुद की सलाह को याद किया कि छात्रों को अपनी परीक्षा के बाद बाहर यात्रा करने और अपने अनुभव रिकॉर्ड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्हें इस तरह आजाद करने से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलेगा। बारहवीं की परीक्षा के बाद उन्हें अपने राज्यों से बाहर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से कहा कि वे अपने बच्चों को नए अनुभवों के लिए प्रेरित करते रहें। उन्होंने माता-पिता को अपनी स्थिति के अनुसार बच्चों के मूड और उनकी परिस्थिति के बारे में सतर्क रहने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा तब होता है जब माता-पिता खुद को बच्चों यानी भगवान के उपहार के संरक्षक के रूप में मानते हैं। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित सभी को धन्यवाद दिया और माता-पिता, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा के दौरान बनाए जा रहे तनावपूर्ण माहौल को अधिकतम सीमा तक कम करने का आग्रह किया। नतीजतन, परीक्षा छात्रों के जीवन को उत्साह से भरकर एक उत्सव में बदल जाएगी, और यही उत्साह छात्रों की उत्कृष्टता की गारंटी देगा।
दिल्ली से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां एक महिला ने एक फ़्लैट में 16 कुत्तों को बंद कर रखा हुआ था। बताया जा रहा है कि महिला भी वहीं कुत्तों के साथ रहती थी। हालांकि जब इसकी सूचना एमसीडी के अधिकारियों की मिली तो जांच-पड़ताल के कर्मचारी पहुंचे तो अंदर का नजारा देख हर कोई दंग रह गया। दिल्ली के जीके-I पुलिस थाना के अंतर्गत आने वाले जीके-I में मौजूद आईबीएचएएस सोसायटी (IBHAS Society) के बी-ब्लॉक में एक फ्लैट को लेकर एमसीडी को जानकारी मिली थी। फ़्लैट से आ रही दुर्गन्ध को लेकर लोग परेशान थे। जब एमसीडी के अधिकारियों ने महिला से बातचीत की और कुत्तों को इलाज के लिए सौंपने के लिए कहा तो वह तैयार नहीं हुई। महिला के इनकार के बाद एमसीडी ने सर्च वारंट जारी कर कानूनी रास्ता अपनाया और महिला के घर की तलाशी ली। अंदर का नजारा देख एमसीडी के अधिकारी भी हैरान रह गये। फ़्लैट से तेज दुर्गंध आ रही थी। हर तरफ कुत्तों की गंदगी फैली हुई थी। यहां तक कि कुत्तों की गंदगी सीढ़ियों पर भी पड़े हुए थे। बताया गया कि फ़्लैट से इतनी तेज दुर्गन्ध आ रही थी कि वहां पर खड़ा हो पाना भी मुश्किल हो रहा था। कुत्तों को ठीक से खाना ना मिल पाने के कारण उनकी हालत ठीक नहीं थी। एमसीडी ने कुत्तों को रेक्स्यू किया है और महिला पर FIR दर्ज की है। जानकारी के अनुसार, जीके-1 थाना में महिला के खिलाफ आईपीसी की धारा 269 और 291 में केस दर्ज किया गया है। महिला के फ्लैट में बिजली की सप्लाई भी नहीं थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे महिला तीन साल तक 16 कुत्तों के साथ रहती थी। दिल्ली एमसीडी को जब इसके बारे में जानकारी मिली तो महिला से सहयोग माँगा तो महिला ने इनकार कर दिया। इसके बाद एमसीडी के कर्मचारियों ने कानूनी रास्ता अपनाकर महिलाओं के घर की तलाशी ली है।
दिल्ली से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां एक महिला ने एक फ़्लैट में सोलह कुत्तों को बंद कर रखा हुआ था। बताया जा रहा है कि महिला भी वहीं कुत्तों के साथ रहती थी। हालांकि जब इसकी सूचना एमसीडी के अधिकारियों की मिली तो जांच-पड़ताल के कर्मचारी पहुंचे तो अंदर का नजारा देख हर कोई दंग रह गया। दिल्ली के जीके-I पुलिस थाना के अंतर्गत आने वाले जीके-I में मौजूद आईबीएचएएस सोसायटी के बी-ब्लॉक में एक फ्लैट को लेकर एमसीडी को जानकारी मिली थी। फ़्लैट से आ रही दुर्गन्ध को लेकर लोग परेशान थे। जब एमसीडी के अधिकारियों ने महिला से बातचीत की और कुत्तों को इलाज के लिए सौंपने के लिए कहा तो वह तैयार नहीं हुई। महिला के इनकार के बाद एमसीडी ने सर्च वारंट जारी कर कानूनी रास्ता अपनाया और महिला के घर की तलाशी ली। अंदर का नजारा देख एमसीडी के अधिकारी भी हैरान रह गये। फ़्लैट से तेज दुर्गंध आ रही थी। हर तरफ कुत्तों की गंदगी फैली हुई थी। यहां तक कि कुत्तों की गंदगी सीढ़ियों पर भी पड़े हुए थे। बताया गया कि फ़्लैट से इतनी तेज दुर्गन्ध आ रही थी कि वहां पर खड़ा हो पाना भी मुश्किल हो रहा था। कुत्तों को ठीक से खाना ना मिल पाने के कारण उनकी हालत ठीक नहीं थी। एमसीडी ने कुत्तों को रेक्स्यू किया है और महिला पर FIR दर्ज की है। जानकारी के अनुसार, जीके-एक थाना में महिला के खिलाफ आईपीसी की धारा दो सौ उनहत्तर और दो सौ इक्यानवे में केस दर्ज किया गया है। महिला के फ्लैट में बिजली की सप्लाई भी नहीं थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे महिला तीन साल तक सोलह कुत्तों के साथ रहती थी। दिल्ली एमसीडी को जब इसके बारे में जानकारी मिली तो महिला से सहयोग माँगा तो महिला ने इनकार कर दिया। इसके बाद एमसीडी के कर्मचारियों ने कानूनी रास्ता अपनाकर महिलाओं के घर की तलाशी ली है।
सेन जगत में प्रचलित हिन्दी शब्दों का ही प्रयोग किया गया है। जो अंग्रेजी के शब्द हिन्दी में खप गये हैं, उन्हें ज्यो कां-त्यों स्वीकार कर लिया गया है । फिर भी कुछ नए शब्द घड़ने को आवश्यकता पड़ी है। आशा है, वे सेलजगत को ग्राह्य होंगे। पाठकों की सुविधा के लिए पुस्तक में हिन्दी-अंग्रेजी शब्द-सूची भी दे दी गई है । डॉ. प्रकाश आतुर, डॉ. हरीश नारायण माथुर, श्री जयकृष्ण अप्रवाल और श्री कुलदीप माथुर ने इस कार्य मे मेरी बहुत सहायता की है, इसके लिए में उन सबको हार्दिक धन्यवाद देता है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड और उसके सदस्य संघों ने मुझे इस पुस्तक में संकलित सामग्री और फोटो सहपं प्रदान किए हैं, इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ । दिसम्बर, 1986 22- सुभाप बोस नगर, उदयपुर एल. एन. माथुर
सेन जगत में प्रचलित हिन्दी शब्दों का ही प्रयोग किया गया है। जो अंग्रेजी के शब्द हिन्दी में खप गये हैं, उन्हें ज्यो कां-त्यों स्वीकार कर लिया गया है । फिर भी कुछ नए शब्द घड़ने को आवश्यकता पड़ी है। आशा है, वे सेलजगत को ग्राह्य होंगे। पाठकों की सुविधा के लिए पुस्तक में हिन्दी-अंग्रेजी शब्द-सूची भी दे दी गई है । डॉ. प्रकाश आतुर, डॉ. हरीश नारायण माथुर, श्री जयकृष्ण अप्रवाल और श्री कुलदीप माथुर ने इस कार्य मे मेरी बहुत सहायता की है, इसके लिए में उन सबको हार्दिक धन्यवाद देता है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड और उसके सदस्य संघों ने मुझे इस पुस्तक में संकलित सामग्री और फोटो सहपं प्रदान किए हैं, इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ । दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ छियासी बाईस- सुभाप बोस नगर, उदयपुर एल. एन. माथुर
- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Sidharth-Kiara Wedding Update: सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी अपनी शादी की खबरों की वजह से सुर्खियों में हैं। कई रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंध सकते हैं। दोनों की शादी से जुड़ी कई अपडेट सामने आए हैं। कई मीडिया रिपोर्ट की मानें तो शादी के प्री-वेडिंग फंक्शन 4 और 5 फरवरी को होंगे और 6 फरवरी को दोनों शादी करेंगे। शादी के लिए राजस्थान के जैसलमेर पैलेस में शादी के बंधन में बंधंगे। मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ और कियारा की शादी में 100-125 लोग शामिल होंगे। उनकी शादी में करण जौहर, ईशा अंबानी समेत कई सेलेब्स शामिल होंगे। सूर्यगढ़ पैलेस में 84 लग्जरी कमरे और 70 गाड़ियां भी बुक की गई है। साथ ही होटल में सिक्योरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे बढ़ा दिए गए हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और आलिया भट्ट ने साथ-साथ 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' से डेब्यू किया था। फिल्म में दोनों के अलावा वरुण धवन भी थे। इसी फिल्म के सेट से आलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा का अफेयर शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ सालों के बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया। अब आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर से शादी कर ली है। जैकलीन फर्नांडिस के साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा ने 'ए जेंटलमैन' में काम किया था। उस समय दोनों के रिलेशनशिप की खबरें खूब सुर्खियों में रही थी। हालांकि, ये रिलेशनशिप अधिक नहीं चल सका। कैटरीना कैफ : सिद्धार्थ मल्होत्रा और कैटरीना कैफ ने साथ में 'बार बार देखो' फिल्म की थी। उस समय सिद्धार्थ और कैटरीना के रिलेशनशिप की खबरें भी खूब आई थी। हालांकि, उन्होंने कभी इसे कंफर्म नहीं किया था। सिद्धार्थ मल्होत्रा का निकोल मेयर के साथ भी अफेयर रह चुका है। निकोल मेयर दक्षिण अफ्रीका की जानी मानीं मॉडल हैं। हालांकि, दोनों का भी ब्रेकअप हो गया। कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा 'शेरशाह' के सेट पर पहली बार साथ में मिले थे। दोनों की नजदीकियां भी इसी दौरान बढ़ी और रिलेशनशिप में आ गए। साउथ अफ्रीका वेकेशन पर साथ-साथ जाने के बाद दोनों ने अपनी अलग-अलग तस्वीरें शेयर की थी और फैंस को दोनों के रिलेशनशिप के बारे में पता चल गया। अब दोनों अपने रिश्ते को आगे बढ़ाकर शादी करेंगे।
- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! Sidharth-Kiara Wedding Update: सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी अपनी शादी की खबरों की वजह से सुर्खियों में हैं। कई रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंध सकते हैं। दोनों की शादी से जुड़ी कई अपडेट सामने आए हैं। कई मीडिया रिपोर्ट की मानें तो शादी के प्री-वेडिंग फंक्शन चार और पाँच फरवरी को होंगे और छः फरवरी को दोनों शादी करेंगे। शादी के लिए राजस्थान के जैसलमेर पैलेस में शादी के बंधन में बंधंगे। मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ और कियारा की शादी में एक सौ-एक सौ पच्चीस लोग शामिल होंगे। उनकी शादी में करण जौहर, ईशा अंबानी समेत कई सेलेब्स शामिल होंगे। सूर्यगढ़ पैलेस में चौरासी लग्जरी कमरे और सत्तर गाड़ियां भी बुक की गई है। साथ ही होटल में सिक्योरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे बढ़ा दिए गए हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और आलिया भट्ट ने साथ-साथ 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' से डेब्यू किया था। फिल्म में दोनों के अलावा वरुण धवन भी थे। इसी फिल्म के सेट से आलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा का अफेयर शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ सालों के बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया। अब आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर से शादी कर ली है। जैकलीन फर्नांडिस के साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा ने 'ए जेंटलमैन' में काम किया था। उस समय दोनों के रिलेशनशिप की खबरें खूब सुर्खियों में रही थी। हालांकि, ये रिलेशनशिप अधिक नहीं चल सका। कैटरीना कैफ : सिद्धार्थ मल्होत्रा और कैटरीना कैफ ने साथ में 'बार बार देखो' फिल्म की थी। उस समय सिद्धार्थ और कैटरीना के रिलेशनशिप की खबरें भी खूब आई थी। हालांकि, उन्होंने कभी इसे कंफर्म नहीं किया था। सिद्धार्थ मल्होत्रा का निकोल मेयर के साथ भी अफेयर रह चुका है। निकोल मेयर दक्षिण अफ्रीका की जानी मानीं मॉडल हैं। हालांकि, दोनों का भी ब्रेकअप हो गया। कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा 'शेरशाह' के सेट पर पहली बार साथ में मिले थे। दोनों की नजदीकियां भी इसी दौरान बढ़ी और रिलेशनशिप में आ गए। साउथ अफ्रीका वेकेशन पर साथ-साथ जाने के बाद दोनों ने अपनी अलग-अलग तस्वीरें शेयर की थी और फैंस को दोनों के रिलेशनशिप के बारे में पता चल गया। अब दोनों अपने रिश्ते को आगे बढ़ाकर शादी करेंगे।
- 24 min ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' - 57 min ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...' Don't Miss! आखिरकार करीना कपूर खान ने एक इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि वो सीता बन रही हैं और 12 करोड़ की फीस भी ले रही हैं। करीना कपूर खान ने साफ किया कि उन्होंने इस फिल्म के लिए अपनी फीस क्यों बढ़ाई और लोगों को उनकी इस मांग का सम्मान क्यों करना चाहिए। करीना कपूर इस फिल्म पर काम करना शुरू कर रही हैं और ये फिल्म उनके 8 - 10 महीने डिमांड करेगी केवल ट्रेनिंग के लिए। इसके बाद करीना एक लंबा समय फिल्म की शूटिंग के लिए देंगी। गौरतलब है कि करीना कपूर खान काफी समय से हीरोइनों को भी हीरो जितनी फीस मिलने के मुद्दे पर बहस कर रही हैं। गुड न्यूज़ के प्रमोशन के दौरान भी करीना ने ये मुद्दा मज़ाक में उठाया और कहा कि मुझे भी अक्षय जितनी फीस चाहिए। लेकिन अक्षय ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था कि तुम फिल्म पर उतना पैसा लगाओ, जितना मैं प्रोड्यूसर के तौर पर लगाता हूं। करीना कपूर उन चंद हीरोइनों में से हैं जिन्होंने सबसे पहले, हीरोइनों की कम फीस पर अपनी अहसहमति जताते हुए, हीरो जितनी ही फीस की डिमांड की थी।एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो पहली हीरोइन थीं जिन्होंने ये असहमति खुलकर जताई। करीना का कहना था कि इस इंडस्ट्री में बहुत कुछ कहा जा चुका है और बहुत कुछ कहा जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि आपको समझ आता है जब आपको उतना अटेंशन नहीं मिलता जितना कि हीरो को मिलता है। आपको उतनी फीस नहीं दी जाती जितनी हीरो को दी जाती है। करीना ने बताया कि मैं ऐसी लड़की हूं जिसे खुद पर भरोसा है। मैंने अपना चार्म या अपना आत्मविश्वास कभी नहीं खोया है। इसलिए मैं लोगों को सलाह देती हूं कि अपने आत्मविश्वास को अपने चेहरे पर सजा कर रखना चाहिए। अपने संघर्षों पर बात करते हुए करीना ने बताया कि लोग मुझे करिश्मा की बहन के रूप में जानते थे और वो इमेज तोड़ना मेरे लिए किसी संघर्ष से कम नहीं था। मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैं करिश्मा कपूर की बहन हूं और लोग मुझे इस नाम से जानते हैं। करीना ने बताया कि उनके संघर्ष में उनके माता पिता ने काफी साथ दिया और हमेशा उन्हें सपोर्ट किया। वहीं करिश्मा की तारीफ करते हुए करीना ने बताया कि मैं आज जो कुछ भी हूं, लोलो की वजह से हूं। करीना कपूर का कहना है कि लोगों को लगता है कि स्टार किड होने के नाते हम कोई स्ट्रगल नहीं करते। हमारे संघर्ष को चुपचाप दबा दिया जाता है। लेकिन हर कोई संघर्ष करता है। करीना कपूर खान ने इसी इंटरव्यू में ये भी बताया था कि कि कई ऐसी फिल्में थीं जहां उन्होंने अपने हक की फीस मांगी लेकिन उन्हें उन फिल्मों से रिप्लेस कर दिया गया था। करीना कपूर खाना का मानना है कि पहले इन बातों पर कोई ध्यान नहीं देता था। लेकिन इसमें गलत क्या है। हीरोइनें भी फिल्म में उतनी ही मेहनत, उतना ही समय और उतना ही टैलेंट लगाती हैं जितना कि हीरो। अब जाकर लोगों ने इस बारे में बात शुरू की है। कुछ समय पहले तापसी पन्नू ने भी करीना कपूर खान का साथ देते हुए कहा कि ये करीना कपूर खान का हक है। कोई भी एक्टर अगर अपनी मेहनत के लिए पैसे मांग रहा है तो इसमें दिक्कत क्या है। करीना कपूर खान इस देश की सबसे बड़ी सुपरस्टार्स में से एक हैं। तापसी ने इसे बस भेदभाव बताते हुए कहा कि यही फीस अगर एक एक्टर मांगता है तो वो उसका हक हो जाता है और उसे मिलता भी है। लेकिन जब एक हीरोइन मांग लेती है तो हीरोइन को demanding और मुश्किलें खड़ी करने वाली कह दिया जाता है। ये बस हमारी मानसिकता दर्शाता है। इस समय बॉलीवुड में दो सीताएं फाईनल हैं। पहली हैं दीपिका पादुकोण जो मधु मंटेना द्वारा प्रोड्यूस की जा रही फिल्म में सीता बनेंगी। इस फिल्म को डायरेक्ट करेंगे नितेश तिवारी। वहीं बॉलीवुड की दूसरी फाईनल सीता हैं कृति सैनन जो आदिपुरूष में प्रभास के अपोज़िट दिखाई देंगी। दिलचस्प है कि इस फिल्म में रावण की भूमिका में दिखेंगे सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म में रावण की भूमिका में दिख सकते हैं ऋतिक रोशन। अब आखिरकार, करीना कपूर खान का नाम भी सीता के किरदार के लिए कंफर्म हो गया है। गौरतलब है कि बॉलीवुड में इस समय ढेरों पौराणिक फिल्मों की चर्चा चल रही हैं और इनमें से कई फिल्में तो रामायण पर ही आधारित हैं। एक रामायण पर आधारित फिल्म बना रहे हैं तान्हाजी फेम ओम राउत और एक रामायण बना रहे हैं, बजरंगी भाईजान और बाहुबली के लेखक केवी विजयेंद्र प्रसाद। इन तीनों फिल्मों में सीता के किरदारों के लिए कभी अनुष्का का नाम चर्चा में रहा तो कभी करीना कपूर खान का। कभी दीपिका पादुकोण का नाम चर्चा में रहा तो करीना कपूर खान के फिल्म के लिए 12 करोड़ की फीस मांगने के बाद तो बवाल ही हो गया। गौरतलब है कि जब से करीना कपूर खान की एक भव्य प्रोजेक्ट में सीता बनने के लिए 12 करोड़ रूपये फीस लेने की बात सामने आई थी तब से इस प्रोजेक्ट को लेकर ढेरों बातें हुई। ये फिल्म आधारित थी अलौकिक देसाई की किताब Sita: The Incarnation पर और इसे लिख रहे थे बाहुबली फेम केवी विजयेंद्र प्रसाद। अलौकिक देसाई इस फिल्म को डायरेक्ट भी कर रहे हैं। केवी विजयेंद्र ने कई बार साफ किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए किसी हीरोइन का नाम तय नहीं किया गया है। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
- चौबीस मिनट ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' - सत्तावन मिनट ago जब बिग बी के साथ रानी मुखर्जी ने दे दिया था लिप लॉक सीन, बोलीं- 'अमिताभ अंकल के साथ किसिंग सीन देना बहुत...' Don't Miss! आखिरकार करीना कपूर खान ने एक इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि वो सीता बन रही हैं और बारह करोड़ की फीस भी ले रही हैं। करीना कपूर खान ने साफ किया कि उन्होंने इस फिल्म के लिए अपनी फीस क्यों बढ़ाई और लोगों को उनकी इस मांग का सम्मान क्यों करना चाहिए। करीना कपूर इस फिल्म पर काम करना शुरू कर रही हैं और ये फिल्म उनके आठ - दस महीने डिमांड करेगी केवल ट्रेनिंग के लिए। इसके बाद करीना एक लंबा समय फिल्म की शूटिंग के लिए देंगी। गौरतलब है कि करीना कपूर खान काफी समय से हीरोइनों को भी हीरो जितनी फीस मिलने के मुद्दे पर बहस कर रही हैं। गुड न्यूज़ के प्रमोशन के दौरान भी करीना ने ये मुद्दा मज़ाक में उठाया और कहा कि मुझे भी अक्षय जितनी फीस चाहिए। लेकिन अक्षय ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था कि तुम फिल्म पर उतना पैसा लगाओ, जितना मैं प्रोड्यूसर के तौर पर लगाता हूं। करीना कपूर उन चंद हीरोइनों में से हैं जिन्होंने सबसे पहले, हीरोइनों की कम फीस पर अपनी अहसहमति जताते हुए, हीरो जितनी ही फीस की डिमांड की थी।एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो पहली हीरोइन थीं जिन्होंने ये असहमति खुलकर जताई। करीना का कहना था कि इस इंडस्ट्री में बहुत कुछ कहा जा चुका है और बहुत कुछ कहा जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि आपको समझ आता है जब आपको उतना अटेंशन नहीं मिलता जितना कि हीरो को मिलता है। आपको उतनी फीस नहीं दी जाती जितनी हीरो को दी जाती है। करीना ने बताया कि मैं ऐसी लड़की हूं जिसे खुद पर भरोसा है। मैंने अपना चार्म या अपना आत्मविश्वास कभी नहीं खोया है। इसलिए मैं लोगों को सलाह देती हूं कि अपने आत्मविश्वास को अपने चेहरे पर सजा कर रखना चाहिए। अपने संघर्षों पर बात करते हुए करीना ने बताया कि लोग मुझे करिश्मा की बहन के रूप में जानते थे और वो इमेज तोड़ना मेरे लिए किसी संघर्ष से कम नहीं था। मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैं करिश्मा कपूर की बहन हूं और लोग मुझे इस नाम से जानते हैं। करीना ने बताया कि उनके संघर्ष में उनके माता पिता ने काफी साथ दिया और हमेशा उन्हें सपोर्ट किया। वहीं करिश्मा की तारीफ करते हुए करीना ने बताया कि मैं आज जो कुछ भी हूं, लोलो की वजह से हूं। करीना कपूर का कहना है कि लोगों को लगता है कि स्टार किड होने के नाते हम कोई स्ट्रगल नहीं करते। हमारे संघर्ष को चुपचाप दबा दिया जाता है। लेकिन हर कोई संघर्ष करता है। करीना कपूर खान ने इसी इंटरव्यू में ये भी बताया था कि कि कई ऐसी फिल्में थीं जहां उन्होंने अपने हक की फीस मांगी लेकिन उन्हें उन फिल्मों से रिप्लेस कर दिया गया था। करीना कपूर खाना का मानना है कि पहले इन बातों पर कोई ध्यान नहीं देता था। लेकिन इसमें गलत क्या है। हीरोइनें भी फिल्म में उतनी ही मेहनत, उतना ही समय और उतना ही टैलेंट लगाती हैं जितना कि हीरो। अब जाकर लोगों ने इस बारे में बात शुरू की है। कुछ समय पहले तापसी पन्नू ने भी करीना कपूर खान का साथ देते हुए कहा कि ये करीना कपूर खान का हक है। कोई भी एक्टर अगर अपनी मेहनत के लिए पैसे मांग रहा है तो इसमें दिक्कत क्या है। करीना कपूर खान इस देश की सबसे बड़ी सुपरस्टार्स में से एक हैं। तापसी ने इसे बस भेदभाव बताते हुए कहा कि यही फीस अगर एक एक्टर मांगता है तो वो उसका हक हो जाता है और उसे मिलता भी है। लेकिन जब एक हीरोइन मांग लेती है तो हीरोइन को demanding और मुश्किलें खड़ी करने वाली कह दिया जाता है। ये बस हमारी मानसिकता दर्शाता है। इस समय बॉलीवुड में दो सीताएं फाईनल हैं। पहली हैं दीपिका पादुकोण जो मधु मंटेना द्वारा प्रोड्यूस की जा रही फिल्म में सीता बनेंगी। इस फिल्म को डायरेक्ट करेंगे नितेश तिवारी। वहीं बॉलीवुड की दूसरी फाईनल सीता हैं कृति सैनन जो आदिपुरूष में प्रभास के अपोज़िट दिखाई देंगी। दिलचस्प है कि इस फिल्म में रावण की भूमिका में दिखेंगे सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म में रावण की भूमिका में दिख सकते हैं ऋतिक रोशन। अब आखिरकार, करीना कपूर खान का नाम भी सीता के किरदार के लिए कंफर्म हो गया है। गौरतलब है कि बॉलीवुड में इस समय ढेरों पौराणिक फिल्मों की चर्चा चल रही हैं और इनमें से कई फिल्में तो रामायण पर ही आधारित हैं। एक रामायण पर आधारित फिल्म बना रहे हैं तान्हाजी फेम ओम राउत और एक रामायण बना रहे हैं, बजरंगी भाईजान और बाहुबली के लेखक केवी विजयेंद्र प्रसाद। इन तीनों फिल्मों में सीता के किरदारों के लिए कभी अनुष्का का नाम चर्चा में रहा तो कभी करीना कपूर खान का। कभी दीपिका पादुकोण का नाम चर्चा में रहा तो करीना कपूर खान के फिल्म के लिए बारह करोड़ की फीस मांगने के बाद तो बवाल ही हो गया। गौरतलब है कि जब से करीना कपूर खान की एक भव्य प्रोजेक्ट में सीता बनने के लिए बारह करोड़ रूपये फीस लेने की बात सामने आई थी तब से इस प्रोजेक्ट को लेकर ढेरों बातें हुई। ये फिल्म आधारित थी अलौकिक देसाई की किताब Sita: The Incarnation पर और इसे लिख रहे थे बाहुबली फेम केवी विजयेंद्र प्रसाद। अलौकिक देसाई इस फिल्म को डायरेक्ट भी कर रहे हैं। केवी विजयेंद्र ने कई बार साफ किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए किसी हीरोइन का नाम तय नहीं किया गया है। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
व्याकरण, काव्य, कोप, तर्क, जैन आगम आदि का वे अध्ययन करनेवाले हैं। साथ ही साथ भारतीय भाषाओं तथा महत्त्वपूर्ण वैदेशिक भाषाओं का भी वे अनुशीलन करते हैं 1 अपने आवश्यक आचार से सम्बद्ध क्रियाओं में वे जागरूक हैं । एकान्त में स्वाध्याय करते हैं। गुरु तथा अपने से दीक्षा में वृद्ध मुनियों को वे वन्दन आदि करते हैं। आचार्य की आज्ञा से वे परिषद् में प्रवचन करते हैं, समागत लोगों को शिक्षा देते हैं। अपने सम्मुख प्रस्तुत प्रश्नों का शास्त्रीय विधि से उत्तर देते हुए वे बुद्धिमान् मनुष्यों को परितुष्ट करते हैं। रात को अपने सुन्दर रजोहरण से पृथ्वी का शोधन कर अपने दोनों पैर रखते हैं। छोटे-छोटे जीवों से शून्य जल को भी छानकर पीते हैं ।
व्याकरण, काव्य, कोप, तर्क, जैन आगम आदि का वे अध्ययन करनेवाले हैं। साथ ही साथ भारतीय भाषाओं तथा महत्त्वपूर्ण वैदेशिक भाषाओं का भी वे अनुशीलन करते हैं एक अपने आवश्यक आचार से सम्बद्ध क्रियाओं में वे जागरूक हैं । एकान्त में स्वाध्याय करते हैं। गुरु तथा अपने से दीक्षा में वृद्ध मुनियों को वे वन्दन आदि करते हैं। आचार्य की आज्ञा से वे परिषद् में प्रवचन करते हैं, समागत लोगों को शिक्षा देते हैं। अपने सम्मुख प्रस्तुत प्रश्नों का शास्त्रीय विधि से उत्तर देते हुए वे बुद्धिमान् मनुष्यों को परितुष्ट करते हैं। रात को अपने सुन्दर रजोहरण से पृथ्वी का शोधन कर अपने दोनों पैर रखते हैं। छोटे-छोटे जीवों से शून्य जल को भी छानकर पीते हैं ।
कोरोना वायरस से हुई दिग्गज भारतीय खिलाड़ियों की मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. कोरोना वायरस (C0rona Virus) की मार खेलों और खिलाड़ियों पर भी पड़ी है. देश-विदेश के कई खिलाड़ी इस वैश्विक महामारी की चपेट में आने से जान गंवा चुके हैं. भारत के भी कई बड़े खिलाड़ी कोरोना वायरस की वजह से दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. इनमें क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल समेत अलग-अलग खेलों के 11 खिलाड़ी शामिल हैं. इसके तहत मॉस्को ओलंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के दो पूर्व खिलाड़ियों रविंदर पाल सिंह और एमके कौशिक का कोविड-19 से जूझने के बाद 8 मई को निधन हो गया. 60 साल के रविंदर पाल सिंह ने लगभग दो सप्ताह तक इस बीमारी से जूझने के बाद लखनऊ में आखिरी सांस ली. सिंह को 24 अप्रैल को विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वह कोरोना संक्रमण से उबर चुके थे और टेस्ट नेगेटिव आने के बाद कोरोना वॉर्ड से बाहर थे. 7 मई को उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. वहीं 66 साल के कौशिक को 17 अप्रैल को कोविड-19 के लिये पॉजिटिव पाया गया था. उन्हें दिल्ली के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था. कौशिक में पिछले महीने इस बीमारी के लक्षण दिखे थे लेकिन उनका आरटीपीसीआर और आरएटी जांच नेगेटिव आई थी. उनका सीटी स्कैन 24 अप्रैल को हुआ था जिसमें उनके कोविड निमोनिया से ग्रसित होने का पता चला था. कौशिक ने भारत की सीनियर पुरुष और महिला टीमों को कोचिंग दी थी. उनके कोच रहते हुए भारतीय पुरुष टीम ने बैंकॉक एशियाई खेल 1998 में स्वर्ण पदक जीता था. राजस्थान के पूर्व लेग स्पिनर और रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम के सदस्य रहे विवेक यादव का कोरोना वायरस से जुड़ी समस्याओं के कारण 6 मई को निधन हो गया. यादव का कैंसर का उपचार चल रहा था और वह कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल गए थे जहां वह परीक्षण में कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए. इसके बाद यादव का हालत बिगड़ गई. यादव ने 18 प्रथम श्रेणी मैच में 57 विकेट हासिल किए और 2010-11 में रणजी ट्रॉफी फाइनल खेले जो उनके घरेलू क्रिकेट करियर का सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला था. भारत के पूर्व क्रिकेटर और राजनेता चेतन चौहान का अगस्त 2020 में कोरोना से निधन हो गया था. कोरोना संक्रमित (Corona Infected) होने के चलते चेतन चौहान को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान किडनी फेल हो जाने के बाद उनका निधन हो गया. चेतन चौहान ने टीम इंडिया के लिए 1969 से 1978 के बीच 40 टेस्ट खेले थे. इनमें उन्होंने 31.54 की एवरेज से 2084 रन बनाए. उनका बेस्ट स्कोर 97 रन रहा. चेतन ने 7 वनडे में 153 रन बनाए. बीसीसीआई के पूर्व चयनकर्ता और राजस्थान के पूर्व कप्तान किशन रुंगटा का 2 मई को जयपुर के अस्पताल में कोविड-19 से जूझने के बाद निधन हुआ. वह 88 बरस के थे. यह अनुभवी प्रशासक पिछले हफ्ते कोरोना वायरस के लिए पॉजिटिव पाया गया था. रुंगट मध्य क्षेत्र से 1998 में चयनकर्ता रहे. उन्होंने 1953 से 1970 के बीच 59 प्रथम श्रेणी मैच खेले और 2717 रन बनाए. 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक खेलों में चौथे स्थान पर रहने वाली भारतीय फुटबॉल टीम के सदस्य रहे अहमद हुसैन का अप्रैल 2021 में कोरोना से निधन हुआ. वे 85 साल के थे. वे मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के कप्तान भी रहे. बाद में वे कोच और रेफरी के रूप में भी सक्रिय रहे. भारत के पूर्व फुटबॉलर निखिल का दिसंबर 2020 में कोरोना से निधन हुआ था. वे भी 1956 में मेलबर्न ओलिंपिक्स में चौथे नंबर पर रहने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. नंदी हाफ बैक के रूप में खेला करते थे. भारत के पूर्व पैरा एथलीट बैडमिंटन खिलाड़ी रमेश टीकाराम का जुलाई 2020 में कोरोना से निधन हुआ था. वे दो सप्ताह तक बेंगलुरु के एक अस्पताला में भर्ती रहे थे. वे 51 साल के थे. उन्होंने अर्जुन अवार्ड भी हासिल किया था. बैडमिंटन के अलावा उन्होंने जेवेलिन और शॉट पुट थ्रो में भी हिस्सा लिया था. महाराष्ट्र के पूर्व हॉकी खिलाड़ी विलियम डीसूजा का मार्च 2021 में कोरोना से देहांत हुआ था. वे पुणे में रहते थे और उनकी उम्र 53 साल की थी. वे गोलकीपर के रूप में खेला करते थे. महाराष्ट्र के पूर्व फुटबॉलर जॉन रोजारियो अल्फोंसो का अप्रैल 2021 में कोरोना के चलते निधन हुआ. वह 71 साल के थे. गोवा में जन्मे जॉन स्ट्राइकर के रूप में खेला करते थे. वे महाराष्ट्र के लिए 1974, 1975 और 1979 में संतोष ट्रॉफी में खेले थे. ई हमज़ा कोया ने कोरोना वायरस की वजह से जून 2020 में अंतिम सांस ली. वे महाराष्ट्र के लिए 1981 से 1986 तक संतोष ट्रॉफी में खेला करते थे. फिर नेहरू ट्रॉफी में नेशनल टीम का हिस्सा भी थे. इसके अलावा हमसाकोया मोहन बागान, रेलवे और टाटा स्पोर्ट्स के लिए भी खेले थे.
कोरोना वायरस से हुई दिग्गज भारतीय खिलाड़ियों की मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. कोरोना वायरस की मार खेलों और खिलाड़ियों पर भी पड़ी है. देश-विदेश के कई खिलाड़ी इस वैश्विक महामारी की चपेट में आने से जान गंवा चुके हैं. भारत के भी कई बड़े खिलाड़ी कोरोना वायरस की वजह से दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. इनमें क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल समेत अलग-अलग खेलों के ग्यारह खिलाड़ी शामिल हैं. इसके तहत मॉस्को ओलंपिक एक हज़ार नौ सौ अस्सी में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के दो पूर्व खिलाड़ियों रविंदर पाल सिंह और एमके कौशिक का कोविड-उन्नीस से जूझने के बाद आठ मई को निधन हो गया. साठ साल के रविंदर पाल सिंह ने लगभग दो सप्ताह तक इस बीमारी से जूझने के बाद लखनऊ में आखिरी सांस ली. सिंह को चौबीस अप्रैल को विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वह कोरोना संक्रमण से उबर चुके थे और टेस्ट नेगेटिव आने के बाद कोरोना वॉर्ड से बाहर थे. सात मई को उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. वहीं छयासठ साल के कौशिक को सत्रह अप्रैल को कोविड-उन्नीस के लिये पॉजिटिव पाया गया था. उन्हें दिल्ली के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था. कौशिक में पिछले महीने इस बीमारी के लक्षण दिखे थे लेकिन उनका आरटीपीसीआर और आरएटी जांच नेगेटिव आई थी. उनका सीटी स्कैन चौबीस अप्रैल को हुआ था जिसमें उनके कोविड निमोनिया से ग्रसित होने का पता चला था. कौशिक ने भारत की सीनियर पुरुष और महिला टीमों को कोचिंग दी थी. उनके कोच रहते हुए भारतीय पुरुष टीम ने बैंकॉक एशियाई खेल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में स्वर्ण पदक जीता था. राजस्थान के पूर्व लेग स्पिनर और रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम के सदस्य रहे विवेक यादव का कोरोना वायरस से जुड़ी समस्याओं के कारण छः मई को निधन हो गया. यादव का कैंसर का उपचार चल रहा था और वह कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल गए थे जहां वह परीक्षण में कोविड-उन्नीस पॉजिटिव पाए गए. इसके बाद यादव का हालत बिगड़ गई. यादव ने अट्ठारह प्रथम श्रेणी मैच में सत्तावन विकेट हासिल किए और दो हज़ार दस-ग्यारह में रणजी ट्रॉफी फाइनल खेले जो उनके घरेलू क्रिकेट करियर का सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला था. भारत के पूर्व क्रिकेटर और राजनेता चेतन चौहान का अगस्त दो हज़ार बीस में कोरोना से निधन हो गया था. कोरोना संक्रमित होने के चलते चेतन चौहान को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान किडनी फेल हो जाने के बाद उनका निधन हो गया. चेतन चौहान ने टीम इंडिया के लिए एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर से एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर के बीच चालीस टेस्ट खेले थे. इनमें उन्होंने इकतीस.चौवन की एवरेज से दो हज़ार चौरासी रन बनाए. उनका बेस्ट स्कोर सत्तानवे रन रहा. चेतन ने सात वनडे में एक सौ तिरेपन रन बनाए. बीसीसीआई के पूर्व चयनकर्ता और राजस्थान के पूर्व कप्तान किशन रुंगटा का दो मई को जयपुर के अस्पताल में कोविड-उन्नीस से जूझने के बाद निधन हुआ. वह अठासी बरस के थे. यह अनुभवी प्रशासक पिछले हफ्ते कोरोना वायरस के लिए पॉजिटिव पाया गया था. रुंगट मध्य क्षेत्र से एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में चयनकर्ता रहे. उन्होंने एक हज़ार नौ सौ तिरेपन से एक हज़ार नौ सौ सत्तर के बीच उनसठ प्रथम श्रेणी मैच खेले और दो हज़ार सात सौ सत्रह रन बनाए. एक हज़ार नौ सौ छप्पन के मेलबर्न ओलिंपिक खेलों में चौथे स्थान पर रहने वाली भारतीय फुटबॉल टीम के सदस्य रहे अहमद हुसैन का अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में कोरोना से निधन हुआ. वे पचासी साल के थे. वे मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के कप्तान भी रहे. बाद में वे कोच और रेफरी के रूप में भी सक्रिय रहे. भारत के पूर्व फुटबॉलर निखिल का दिसंबर दो हज़ार बीस में कोरोना से निधन हुआ था. वे भी एक हज़ार नौ सौ छप्पन में मेलबर्न ओलिंपिक्स में चौथे नंबर पर रहने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. नंदी हाफ बैक के रूप में खेला करते थे. भारत के पूर्व पैरा एथलीट बैडमिंटन खिलाड़ी रमेश टीकाराम का जुलाई दो हज़ार बीस में कोरोना से निधन हुआ था. वे दो सप्ताह तक बेंगलुरु के एक अस्पताला में भर्ती रहे थे. वे इक्यावन साल के थे. उन्होंने अर्जुन अवार्ड भी हासिल किया था. बैडमिंटन के अलावा उन्होंने जेवेलिन और शॉट पुट थ्रो में भी हिस्सा लिया था. महाराष्ट्र के पूर्व हॉकी खिलाड़ी विलियम डीसूजा का मार्च दो हज़ार इक्कीस में कोरोना से देहांत हुआ था. वे पुणे में रहते थे और उनकी उम्र तिरेपन साल की थी. वे गोलकीपर के रूप में खेला करते थे. महाराष्ट्र के पूर्व फुटबॉलर जॉन रोजारियो अल्फोंसो का अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में कोरोना के चलते निधन हुआ. वह इकहत्तर साल के थे. गोवा में जन्मे जॉन स्ट्राइकर के रूप में खेला करते थे. वे महाराष्ट्र के लिए एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर और एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में संतोष ट्रॉफी में खेले थे. ई हमज़ा कोया ने कोरोना वायरस की वजह से जून दो हज़ार बीस में अंतिम सांस ली. वे महाराष्ट्र के लिए एक हज़ार नौ सौ इक्यासी से एक हज़ार नौ सौ छियासी तक संतोष ट्रॉफी में खेला करते थे. फिर नेहरू ट्रॉफी में नेशनल टीम का हिस्सा भी थे. इसके अलावा हमसाकोया मोहन बागान, रेलवे और टाटा स्पोर्ट्स के लिए भी खेले थे.
- 1 hr ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन के भाई जरमाइन जैक्सन को शिल्पा शेट्टी ने रात्रि भोज पर आमंत्रित किया। जरमाइन भारत में आए हुए है वे अदनान सामी के साथ एक एलबम रिकार्ड कर रहे है। जरमाइन ने शिल्पा का आवेदन स्वीकार किया और उनके घर गए। वहां शिल्पा के प्रेमी राज कुंदरा, उनकी मां सुनंदा और कुछ दोस्तों से मुलाकात की। सब ने मिलकर बिग बॉस 3 की पहली कड़ी देखी जिसमें शिल्पा की बहन शमिता शेट्टी भाग ले रहीं है। गौरतलब हो कि बिग ब्रदर में भाग लेने के दौरान शिल्पा और जरमाइन में अच्छी दोस्ती हो गई थी। जब शिल्पा के साथ नस्लभेद का व्यवहार किया गया था तो उस वक्त जरमाइन ने उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया था। तब से दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई है। जेड गुडी के अंतिम संस्कार के समय भी दोनों की मुलकात हुई थी। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
- एक hr ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन के भाई जरमाइन जैक्सन को शिल्पा शेट्टी ने रात्रि भोज पर आमंत्रित किया। जरमाइन भारत में आए हुए है वे अदनान सामी के साथ एक एलबम रिकार्ड कर रहे है। जरमाइन ने शिल्पा का आवेदन स्वीकार किया और उनके घर गए। वहां शिल्पा के प्रेमी राज कुंदरा, उनकी मां सुनंदा और कुछ दोस्तों से मुलाकात की। सब ने मिलकर बिग बॉस तीन की पहली कड़ी देखी जिसमें शिल्पा की बहन शमिता शेट्टी भाग ले रहीं है। गौरतलब हो कि बिग ब्रदर में भाग लेने के दौरान शिल्पा और जरमाइन में अच्छी दोस्ती हो गई थी। जब शिल्पा के साथ नस्लभेद का व्यवहार किया गया था तो उस वक्त जरमाइन ने उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया था। तब से दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई है। जेड गुडी के अंतिम संस्कार के समय भी दोनों की मुलकात हुई थी। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
पृथ्वी दोनों में रह सकता है। यहां मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करके प्रभु यह स्पष्ट बतलाते हैं कि सदा सहायता करने वाले भगवान् भक्तों के कार्य स्वयं सिद्ध करते हैं । वराह - जब पृथ्वी के अधिकांश भाग का दर्शन होने लगा भगवान् का वराह अवतार हुआ क्योंकि वराह जल और स्थल दोनों का प्रेमी है। यहां यह दर्शाया कि स्मरण किये जाने पर भगवान् तुरन्त सहायक होते हैं । नृसिंह - पशुता का ह्रास तथा मानवता का विकास शुरू हुआ । तब मानव और पशु के समन्वित रूप में नृसिंहावतार हुआ । यहाँ भक्त प्रह्लाद की पुकार पर खम्भ में से प्रगट हो कर यह शिक्षा दी कि भगवान् को कहीं पर जाना नहीं पड़ता, में वह सर्वव्यापक हैं, कण-कण में व्यापक हैं। जहां चाहो, दर्शन हो सकते है । दुष्टों का नाश और भक्तों की रक्षा करते आये हैं । इस अवतार में भक्त के अटल विश्वास की महिमा दिखायी है । वामन - त्रेता युग में जब मानवता आगे बढ़ी, किन्तु पूर्ण विकसित नहीं हुई तब लघु देहधारी वामन भगवान् का अवतार हुआ। जब भौतिकवाद की पराकाष्ठा होती तब अध्यात्मवाद का उदय होता है । असुर राजा बलि के सारे वैभव को प्राध्यात्मिक मापदण्ड से नापने के लिये वामनावतार हुआ । 'मैं' और 'मेरा' की भेंट चढ़ाकर बलि ने आत्मसमर्पण की महिमा सिद्ध की । परशुराम- इसके बाद परशुराम के रूप में भगवान् ने पूरे मानव का शरीर धारण किया, किन्तु तत्कालीन लोकपीड़कों के दमन के लिये परशु का प्रयोग भी खूब हुआ । भाव है कि जो शक्ति के मद में होकर पूज्य ऋषि-मुनियों का अपमान करते हैं, उनका विनाश अवश्यंभावी है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम - मानव और मानवता का पूर्ण विकास श्रीरामा- वतार में स्पष्ट दीख पड़ता है । भगवान् राम ने रावण की राक्षसी प्रवृत्तियों का ग्रन्त किया । अयोध्या में राम-राज्य के रूप में धर्म और नीति की स्थापना की । साथ ही राजतिलक और वनवास मे समत्व भाव रखने का, पित्राज्ञा-पालन का, भ्रातृ-स्नेह का, प्रजारक्षण ग्रादि मर्यादाओं की रक्षा के प्रादर्श स्थापित किये । पूर्णावतार श्री कृष्ण - द्वापर के अन्त में श्री राम जी द्वारा स्थापित धर्म नीति के आधार पर निर्मित मानव-मर्यादा जब तमोगुणी लोगों के द्वारा तिरस्कृत हुई, तब राजनीतिज्ञों के परम गुरु पोडश कला सम्पूर्ण भगवान् श्री कृष्ण का प्रादुर्भाव हुआ इन्होंने मानव के समक्ष व्रज में प्रेम रस को बस कर, कैंस के प्रत्याचारों का ग्रन्त कर, सहपाठी दीन-हीन मित्र सुदामा से मैत्री निभाकर, राजनीति में विशारद वन के, गीतोपदेश द्वारा अनासक्ति योग का महत्त्व बताया। इस प्रकार भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में दक्षता प्रमाणित करके उन्होंने संसार को चकित कर दिया।
पृथ्वी दोनों में रह सकता है। यहां मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करके प्रभु यह स्पष्ट बतलाते हैं कि सदा सहायता करने वाले भगवान् भक्तों के कार्य स्वयं सिद्ध करते हैं । वराह - जब पृथ्वी के अधिकांश भाग का दर्शन होने लगा भगवान् का वराह अवतार हुआ क्योंकि वराह जल और स्थल दोनों का प्रेमी है। यहां यह दर्शाया कि स्मरण किये जाने पर भगवान् तुरन्त सहायक होते हैं । नृसिंह - पशुता का ह्रास तथा मानवता का विकास शुरू हुआ । तब मानव और पशु के समन्वित रूप में नृसिंहावतार हुआ । यहाँ भक्त प्रह्लाद की पुकार पर खम्भ में से प्रगट हो कर यह शिक्षा दी कि भगवान् को कहीं पर जाना नहीं पड़ता, में वह सर्वव्यापक हैं, कण-कण में व्यापक हैं। जहां चाहो, दर्शन हो सकते है । दुष्टों का नाश और भक्तों की रक्षा करते आये हैं । इस अवतार में भक्त के अटल विश्वास की महिमा दिखायी है । वामन - त्रेता युग में जब मानवता आगे बढ़ी, किन्तु पूर्ण विकसित नहीं हुई तब लघु देहधारी वामन भगवान् का अवतार हुआ। जब भौतिकवाद की पराकाष्ठा होती तब अध्यात्मवाद का उदय होता है । असुर राजा बलि के सारे वैभव को प्राध्यात्मिक मापदण्ड से नापने के लिये वामनावतार हुआ । 'मैं' और 'मेरा' की भेंट चढ़ाकर बलि ने आत्मसमर्पण की महिमा सिद्ध की । परशुराम- इसके बाद परशुराम के रूप में भगवान् ने पूरे मानव का शरीर धारण किया, किन्तु तत्कालीन लोकपीड़कों के दमन के लिये परशु का प्रयोग भी खूब हुआ । भाव है कि जो शक्ति के मद में होकर पूज्य ऋषि-मुनियों का अपमान करते हैं, उनका विनाश अवश्यंभावी है । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम - मानव और मानवता का पूर्ण विकास श्रीरामा- वतार में स्पष्ट दीख पड़ता है । भगवान् राम ने रावण की राक्षसी प्रवृत्तियों का ग्रन्त किया । अयोध्या में राम-राज्य के रूप में धर्म और नीति की स्थापना की । साथ ही राजतिलक और वनवास मे समत्व भाव रखने का, पित्राज्ञा-पालन का, भ्रातृ-स्नेह का, प्रजारक्षण ग्रादि मर्यादाओं की रक्षा के प्रादर्श स्थापित किये । पूर्णावतार श्री कृष्ण - द्वापर के अन्त में श्री राम जी द्वारा स्थापित धर्म नीति के आधार पर निर्मित मानव-मर्यादा जब तमोगुणी लोगों के द्वारा तिरस्कृत हुई, तब राजनीतिज्ञों के परम गुरु पोडश कला सम्पूर्ण भगवान् श्री कृष्ण का प्रादुर्भाव हुआ इन्होंने मानव के समक्ष व्रज में प्रेम रस को बस कर, कैंस के प्रत्याचारों का ग्रन्त कर, सहपाठी दीन-हीन मित्र सुदामा से मैत्री निभाकर, राजनीति में विशारद वन के, गीतोपदेश द्वारा अनासक्ति योग का महत्त्व बताया। इस प्रकार भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में दक्षता प्रमाणित करके उन्होंने संसार को चकित कर दिया।
Optical Illusion: इस तस्वीर में छिपे हैं कई सारे जानवर, 21 सेकंड में ढूंढ पाएंगे आप? Optical Illusion आज के ऑप्टिकल इल्यूजन में आपको एक तस्वीर में कई सारे अलग-अलग जानवर नजर आ रहे होंगे। आपको इस तस्वीर में छिपे सभी बड़े-छोटे जानवरों को ढूंढ निकालना होगा जिसके लिए आपके पास महज 21 सेकंड का समय है। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Optical Illusion: अपने दिमाग को तेज करने के लिए लोग कई तरकीब अपनाते हैं। कुछ लोग जहां बादाम और अखरोट का सेवन करते हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो माइंड एक्टिविटीज के जरिए अपने दिमाग को तेज करते हैं। माइंड एक्टिविटी दिमागी कसरत का एक बेहतरीन जरिया है, जिसकी वजह से आपका दिमाग एक्टिव बना रहता है। सोशल मीडिया पर दिमागी कसरत के लिए कई तरह की माइंड एक्टिविटीज मौजूद है। ऑप्टिकल इल्यूजन इन्हीं एक्टिविटीज में से एक है, जिसे इन दिनों और लोग काफी पसंद कर रहे हैं। बच्चे हो या बड़े इन दिनों हर कोई ऑप्टिकल इल्यूजन को काफी पसंद कर रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई तरह के इल्यूजन मौजूद हैं, जिन्हें लोग अपनी पसंद के हिसाब से सॉल्व करते हैं। ऑप्टिकल न सिर्फ आपके सोचने की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि आपकी याददाश्त भी तेज करता है। अगर आप भी ऑप्टिकल इल्यूजन के शौकीन है, तो आज हम आपके लिए एक और नई पहेली लेकर आए हैं। ऊपर नजर आ रही इस तस्वीर को बच्चों और वयस्कों सभी के लिए तैयार किया गया है। बेहद सिंपल सी नजर आ रही इस तस्वीर में आपको कुछ जानवर नजर आ रहे होंगे। इस तस्वीर में कई जानवर तो साफ नजर आ रहे हैं, लेकिन कुछ जानवर ऐसे भी हैं, जिन्हें ढूंढना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आपको इस तस्वीर पर ध्यान लगाकर इस में छिपे सभी जानवरों को ढूंढ निकालना है। तस्वीर को पहली नजर में देखने पर इसमें कुछ बड़ी आकृति वाले जानवर दिखाई दे रहे हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि तस्वीर में सिर्फ इतने ही जानवर हैं, तो आप बिल्कुल गलत हैं। तस्वीर में छोटे-बड़े जानवरों को इतनी बखूबी से छिपाया गया है कि ने ढूंढ पाना इतना भी आसान नहीं है। आपका आज का चैलेंज इन्हीं छोटे-बड़े सभी जानवरों को तय समय में खोज निकालना है। इस सॉल्व करने के लिए आपके पास 21 सेकंड का समय है। अगर आप साफ नजर आ रहे जानवर को ढूंढ चुके हैं, तो अब आप इसमें छोटे जानवरों को आप आसानी से ढूंढ निकालेंगे। अपने तेज दिमाग और पारखी नजर का इस्तेमाल करते हुए आप दिए हुए समय में इस इल्यूजन को सॉल्व कर सकते हैं। लेकिन अगर आप तस्वीर में छिपे अन्य जानवरों को ढूंढ नहीं पा रहे हैं, तो अब हम आपकी मदद कर देते हैं। तस्वीर को ध्यान से देखने पर आपको बता चलेगा कि इस फोटो में छोटे-बड़े कुल 9 जानवर छिपे हुए हैं। अगर अभी भी आप को तस्वीर में छिपे जानवर दिखाई नहीं दिए हैं, तो नीचे दी गई तस्वीर को देख सकते हैं।
Optical Illusion: इस तस्वीर में छिपे हैं कई सारे जानवर, इक्कीस सेकंड में ढूंढ पाएंगे आप? Optical Illusion आज के ऑप्टिकल इल्यूजन में आपको एक तस्वीर में कई सारे अलग-अलग जानवर नजर आ रहे होंगे। आपको इस तस्वीर में छिपे सभी बड़े-छोटे जानवरों को ढूंढ निकालना होगा जिसके लिए आपके पास महज इक्कीस सेकंड का समय है। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Optical Illusion: अपने दिमाग को तेज करने के लिए लोग कई तरकीब अपनाते हैं। कुछ लोग जहां बादाम और अखरोट का सेवन करते हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो माइंड एक्टिविटीज के जरिए अपने दिमाग को तेज करते हैं। माइंड एक्टिविटी दिमागी कसरत का एक बेहतरीन जरिया है, जिसकी वजह से आपका दिमाग एक्टिव बना रहता है। सोशल मीडिया पर दिमागी कसरत के लिए कई तरह की माइंड एक्टिविटीज मौजूद है। ऑप्टिकल इल्यूजन इन्हीं एक्टिविटीज में से एक है, जिसे इन दिनों और लोग काफी पसंद कर रहे हैं। बच्चे हो या बड़े इन दिनों हर कोई ऑप्टिकल इल्यूजन को काफी पसंद कर रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई तरह के इल्यूजन मौजूद हैं, जिन्हें लोग अपनी पसंद के हिसाब से सॉल्व करते हैं। ऑप्टिकल न सिर्फ आपके सोचने की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि आपकी याददाश्त भी तेज करता है। अगर आप भी ऑप्टिकल इल्यूजन के शौकीन है, तो आज हम आपके लिए एक और नई पहेली लेकर आए हैं। ऊपर नजर आ रही इस तस्वीर को बच्चों और वयस्कों सभी के लिए तैयार किया गया है। बेहद सिंपल सी नजर आ रही इस तस्वीर में आपको कुछ जानवर नजर आ रहे होंगे। इस तस्वीर में कई जानवर तो साफ नजर आ रहे हैं, लेकिन कुछ जानवर ऐसे भी हैं, जिन्हें ढूंढना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आपको इस तस्वीर पर ध्यान लगाकर इस में छिपे सभी जानवरों को ढूंढ निकालना है। तस्वीर को पहली नजर में देखने पर इसमें कुछ बड़ी आकृति वाले जानवर दिखाई दे रहे हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि तस्वीर में सिर्फ इतने ही जानवर हैं, तो आप बिल्कुल गलत हैं। तस्वीर में छोटे-बड़े जानवरों को इतनी बखूबी से छिपाया गया है कि ने ढूंढ पाना इतना भी आसान नहीं है। आपका आज का चैलेंज इन्हीं छोटे-बड़े सभी जानवरों को तय समय में खोज निकालना है। इस सॉल्व करने के लिए आपके पास इक्कीस सेकंड का समय है। अगर आप साफ नजर आ रहे जानवर को ढूंढ चुके हैं, तो अब आप इसमें छोटे जानवरों को आप आसानी से ढूंढ निकालेंगे। अपने तेज दिमाग और पारखी नजर का इस्तेमाल करते हुए आप दिए हुए समय में इस इल्यूजन को सॉल्व कर सकते हैं। लेकिन अगर आप तस्वीर में छिपे अन्य जानवरों को ढूंढ नहीं पा रहे हैं, तो अब हम आपकी मदद कर देते हैं। तस्वीर को ध्यान से देखने पर आपको बता चलेगा कि इस फोटो में छोटे-बड़े कुल नौ जानवर छिपे हुए हैं। अगर अभी भी आप को तस्वीर में छिपे जानवर दिखाई नहीं दिए हैं, तो नीचे दी गई तस्वीर को देख सकते हैं।
भारत देश स्वतन्त्रता के पश्च्यात धीरे-धीरे स्थापित होता गया। हर तरफ विकास की नींव रखी जा रही थी। हर जगह आजादी का बिगुल बज रहा था पर उस आजादी के बिगुल में एक जगह आज भी गुलामी की दास्ताँ भली भाँती नजर आती हैं। जिस आजादी का हम दम भरते हैं उसी आजादी में हमारे देश की महिलायें खुद को जंजीरों में जकड़ी हुई पाती हैं। आज हमारा देश विकास और आधुनिकता की ओर अग्रसर हैं। हर तरफ बदलाव नजर मंजर बना हुआ हैं पर जहाँ नारी का नाम आता हैं वहां हम चुप से नजर आते हैं। वह नारी जो परमपिता ब्रहमा जी के बाद इस संसार का निर्माण करती है। वह नारी जो हर घर को संवारती हैं। वह नारी जो जीवन के हर पथ में साथ निभाती हैं आज वही नारी खुद को अँधेरे में कोसती हुई नजर आती हैं। ऐसा क्यूँ ? क्या हम सभ्य नहीं या फिर हमारी सोच आज भी विकसित नहीं हुई ? नर और नारी दोनों एक रथ के दो पहिये हैं फिर इतनी असमानता क्यूँ भला ? जैसे रथ दोनों पहियें के बिना आगे नहीं बढ़ सकता, वैसे ही नर बिना नारी के किसी भी दहलीज पर खुद को खड़ा नहीं कर सकता। नारी के बिना नर हमेशा अधूरा हैं। फिर क्यों आज नारी असुरक्षित है ? क्यों वो खुद का विकास नहीं कर पा रही हैं ? जितना हक जिन्दगी जीने का नर को हैं उतना ही हक नारी को भी हैं। फिर भी उसके साथ भेदभाव हो रहा है। उसे हर कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। उससे उसके जिने का अधिकार छीना जा रहा है। अब हमें खुद को बदलना होगा और अंदर इंसानियत भरनी होगी। इस असमानता की खाई को हटाना होगा। नर और नारी दोनों को एक समान आंकना होगा। तभी हम आजादी का सही रूप से जश्न मना सकते हैं। आज जिस तरह से बेटियां हर क्षेत्र में अपना नाम कमा रही हैं और बेटों से हर स्तर पे आगे बढ़ रही हैं। घर के काम से लेकर देश, राज्यों की बागडोर तक सम्भाल रही है। वही कुछ घटिया सोच वाले लोग और उनका बनाया हुआ समाज आज भी बेटियों को बोझ समझता हैं। उन्हें इस दुनिया में आने से रोकता है। उनके साथ अत्याचार करता है। उसे भोग्या समझकर उसका हनन कर रहा है। प्रायः देखा जाए तो प्रकृति स्त्री और पुरुष के बीच कभी भेदभाव नहीं करती है। सामान्यतः रूप से जितने नर पैदा होते हैं लगभग उतनी ही नारी भी इस युग में पैदा होती है। फिर हम कौन होते हैं ? नर और नारी के बीच ये भेदभाव करने वाले। उनसे उनके जीने का अधिकार छिनने वाले। आज हमारी सोच इस तरह की विकसित क्यूँ हैं ? क्यूँ हम नारी को आगे बढ़ने के लिए रोकते हैं। क्या कारण हैं कि हमारी सोच का स्तर इतना निचे गिर गया हैं ? एक तरफ नारी आसमान की उच्चाईयां छू रही हैं तो एक तरफ बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता हैं। अगर नारी वहां से खुद को महफूज भी कर ले तो उसे शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रखने की कोशिश की जाती हैं। अगर लड़की का घर सभ्य हैं तो उसे शिक्षा तो मिल जाती हैं पर आज के असमाजिक तत्वों द्वारा नजरों की शिकार दिन-प्रतिदिन होती रहती हैं। उन्हें हर पल हवस की नजरों से देखा जाता हैं या फिर किसी अमानुष के द्वारा तेजाब का शिकार हो जाती हैं या फिर दहेज लोभी अंगारों में जलकर राख हो जाती हैं। मतलब हर तरफ नारी के दुश्मन अपने पंख फैलाएं बैठे हैं। हर पल नारी को कुछ डर, अपराध का हैं तो कुछ डर, भेदभाव का। यह भय सच में बहुत गहरा हैं। आज भी नारी पर अत्याचारों की श्रृंखलाएँ लदी हुई है। नारी भले ही कितनी ही पढ़ लिख जाए या फिर थोड़े समय के लिए समाज का नजरिया उसके प्रति बदल भी जाएँ तब भी वह अत्याचारों के कैदखाने में बंद है। ऐसे कई उदाहरण हैं जो रोजाना हमारी आँखों के सामने घूमते दिखाई देते हैं। जो स्पष्ट रूप से हमें दिखाई तो देते हैं लेकिन फिर भी हम कुछ नहीं कर पातें। अगर जन्म ले भी लिया तो बोझ समझ कर मार दिया जाता हैं। यहाँ भी बच गई वो तो वहशियों की गन्दी नजरो से नहीं बचती और अस्मत लूटाकर वो अपनी, चैन सुख से जी नही सकती। अगर मांगने जाए मदद पूलीस से तो वो रावणराज समझ कर मारने दौड़ती हैं। रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं तो बलात्कार जैसी घटना क्यों ना हो। मुजरिम बेखौफ जुर्म करता हैं और पकडे जाने पे पुलिस वालो का दामाद बन जाता है। अँधा कानून और राजनीति की माया ने चारो तरफ वहशियों का साया फैला दिया है। आज हम सबकी खामोशी के कारण मासूम बहन बेटियां हैवानियत की शिकार हो रही हैं। क्यों ? कब तक ? यु ही बैठ तमाशा देखेंगे। जागोगे तो ही सवेरा पाओगे वरना यु ही अँधेरे में हम सब अपनी बहन बेटियों की अस्मत लूटते आज नही तो कल देखेंगे। आज हर जगह बेटी बचाओं अभियान चलाया जा रहा हैं। जगह-जगह एन.जी.ओ. कन्या भूर्ण हत्या रोकने के लिए और समाज को जागरूक करने के लिए कार्य कर रहे हैं। अखबार, मिडिया, बहुत से धारावाहिको और लघु फिल्में, विज्ञापन, डॉक्यूमेंट्री और पब्लिक सर्विस एनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को जागृत करने के भरपूर प्रयास किए जा रहें हैं। हमें भी बदलाव की पहल करनी होगी और हमें हर हाल में विकसित इस घटिया सोच को बदलना होगा। नारी को सम्पूर्ण रूप से सम्मान दिलाने के लिए आवाज उठानी होगी। नारी के मन कुण्डली मारे बैठे भय को खत्म करना होगा। सबसे पहली शुरूवात हमें अपने घर से करनी होगी फिर हमें अपने आस-पास के माहौल को बदलना होगा। हमें अपने स्तर पर हर जगह, हर इलाके में जाकर कन्या भूर्ण हत्या को रोकने के लिए लोगों को जागरुक बनाना होगा। विशेषकर महिलाओं को जिससे वे इस घिनौने कृत्य के खिलाफ आवाज उठा सकें। क्योंकि जब तक नारी खुद के मान-सम्मान के लिए आवाज नहीं उठायेंगी तब तक बदलाव आना सम्भव नहीं और तब तक समाज के लोग नहीं बदलेंगे। उन्हें समझना होगा कि अपने साथ होते अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना कोई जुर्म नहीं हैं। अपने साथ होते अन्याय के लिए चुप रहना सबसे बड़ा जुर्म हैं जो नारी सदियों से करती आ रही हैं। अब इतिहास बदलना होगा। इसके लिए एक पहल की जरूरत हैं। कारवां तो अपने आप बन जाएगा। एक अच्छा अभियान बहुत कुछ बदल सकता हैं। एक अच्छा आन्दोलन इतिहास तक बदल देता है। नारी को खुद के मान-सम्मान के लिए लड़ना होगा। जब तक खुद के लिए वो नहीं लड़ेगी, तब तक बदलाव सम्भव नहीं होगा। तब तक अन्याय अपनी चरम सीमा पर जारी रहेगा और उनकी खामोशी से न जाने कितनी ही मासूमों का गर्भ में ही गला घोंट दिया जायेगा। अगर गलती से वे इस दुनिया में आ भी गई तो उनकी नन्ही आंखों को खुलने से पहले ही बंद कर दिया जायेगा। आज हर कोई नारी हनन को लेकर चिंतित है। जिस तरह से उस पर अन्याय हो रहे है उसे देखकर मन बहुत पिडि़त हैं। नारी का रूप धरती माँ बेटियों के साथ होते अन्याय को देखकर विलाप कर रही है। उनकी दर्द भरी आवाज सभ्य समाज से करुण पुकार कर रही हैं और कह रही है कि बेटियों को कोख में मत मार। कविता से साफ जाहिर हैं कि धरती माँ भी इस तरह के अत्याचारों से दुःखी हैं। आज नारी हनन को देखकर उनकी अन्तर्मन की पीड़ा सही भी है क्योंकि बेटी से परिवार पूर्ण होता हैं। बेटी खुशियों का उपहार हैं जिस घर में होती हैं वहां पर वात्सल्य का भण्डार लग जाता हैं। उन्हें कोख में मारकर आज हम खुद के जीवन को काँटों का हार पहना रहे है। बेटियां दर्द सहकर भी प्रेम देती हैं। जितनी दया और प्रेम की पात्र एक नारी होती हैं उतनी दया का पात्र शायद ही कोई हो। भारत में ईश्वर को स्त्रीवाचक शब्दों जैसे - दुर्गा माता, काली माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता से संबोधित किया है। अर्थात तुम ही हमारी माता हो और तुम ही हमारे पिता हो। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः । अर्थात जहां पर नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। जहां उनकी पूजा नहीं होती और उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां संपन्न किये गये हर कार्य सफल नहीं होते हैं । शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम् । न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा । अर्थात जिस कुल में स्त्रियाँ दुःखी और पिडि़त रहती हैं, वह कुल जल्द ही विनाश की ओर अग्रसर हो जाता है। जहां वो खुश और सुखी रहतीं है उस कुल की वृद्धि निश्चित होती है। यद् गृहे रमते नारी लक्ष्मीस्तद गृहवासिनी । देवता कोटिशो वत्स न त्यज्यंति गृहहितत । अर्थात जिस घर में सद्गुण सम्पन्न नारी सुखपूर्वक निवास करती है उस घर में माता लक्ष्मी जी भी निवास (बसर ) करती हैं। हे! मनुष्य (वत्स) करोड़ों देवता भी उस घर को नहीं त्यागते हैं। बिन घरनी घर भूत समाना। अर्थात जिस घर में नारी नहीं होती है वो घर भुतघर के समान हैं। पर इस संसार में इसके विपरीत ही कार्य हो रहे हैं। भारत के लोग जहाँ धन की प्राप्ति और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी जी की आराधना करते हैं, शक्ति पाने के लिए माँ दुर्गा जी के नाम का तप करते हैं, ज्ञान और विवेक के लिए माँ सरस्वती जी की उपासना करते हैं, अपने शत्रुओं पर विजय पाने के लिए माँ काली को प्रसन्न करते हैं। लेकिन जब यही देवियां नारी के रूप में उनके घर में आश्रय लेना चाहती हैं तब यह बात उनके गले नहीं उतरती है तब वे उन्हें गर्भ में ही मौत के घाट उतार देने का भरपुर प्रयत्न करते हैं। आज हमारे सभ्य समाज के लोग रोज बेटियों को दुत्कारते हैं और नारी का अपमान करते हैं, हर राह पर उन्हें लज्जित करते हैं। जब माता रानी के नवरात्रे या फिर कोई तीज-त्यौहार आते है तो घर-घर जाकर बेटियां खोजते हैं और उन्हें घर लाकर पूजते हैं उस वक्त उन्हें वो पूजनीय लगती हैं। सही कहूँ तो उन्हें ये देवियां सिर्फ मूर्तियों और फोटो में ही अच्छी लगती हैं, भला असल जिंदगी में उनका क्या काम। देवी समान ये बच्चियां उनके लिए महज एक बोझ, एक पीड़ा बन कर रह जाती हैं। प्राचीन भारत में नारी काफी उन्नत व सुदृढ़ थीं। समाज में जितना नर का महत्व था, वहीं पर नारी को समान अधिकार और सम्मान मिलता था। उपनिषद काल में पुरुषों के साथ स्त्रियों को भी शिक्षित किया जाता था। सहशिक्षा व्यापक रूप से दिखती है। भगवान श्री रामचन्द्र के पुत्र लव-कुश के साथ ऋषि अत्रि की पुत्री आत्रेयी पढ़ती थी। नारी भी सैनिक शिक्षा लेती थी। महाभारत काल से नारी का पतन होना शुरू हुआ तो मध्यकाल में आते-आते नारी पूरी तरह से पुरुषों की गुलाम, दासी और भोग्या बन गई। भारतीय समाज शुरू से ही पुरुष प्रधान रहा है। यहां महिलाओं को हमेशा से दूसरे दर्जे का माना जाता है। यहां महिलाओं को अपने मन से कुछ करने की सख्त मनाही हैं। परिवार और समाज के लिए वे एक आश्रित से ज्यादा कुछ नहीं समझी जाती हैं। ऐसा माना जाता हैं कि उसे हर कदम पर पुरुष के सहारे की जरूरत पड़ेगी। भारत में जहाँ एक तरफ नारी को दुत्कारा जा रहा हैं उन पर अत्याचार किये जा रहे हैं। वही दूसरी तरफ इस समय भारत में कई महत्वपूर्ण पदों पर कई नारियां आसीन है। जहां भारत के सर्वोच्च पद को एक महिला सुशोभित कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत में कन्या भुर्ण हत्या, अत्याचार एवं बलात्कार के बढ़ते मामले इस छवि को दागदार बना रहा हैं। रूढि़वादी मानसिकता के कारण भारत कुरुतियों का शिकार होता जा रहा है। दुर्भाग्य से यह कुरुतियाँ इस देश की लक्ष्मी पर ग्रहण लगा रही हैं। अगर ये कुरुतियाँ यूँ ही अग्रसर रही तो आने वाले समय में नारी शब्द धीरे-धीरे मिट जायेगा। वक्त रहते हमें समझना होगा की नारी का अस्त्वि हमारें लिए कितना महत्वपूर्ण है। अगर आज सुधार नहीं किया गया तो आने वाला समय हमारें लिए बहुत ही कष्टदायक होगा। हमें वक्त रहते नारी की किमत समझनी होगी। समझना होगा कि आज नारी किसी भी दिशा में नर से कम नहीं है। आज लड़कियां लड़कों के समकक्ष ही नहीं उनसे आगे भी निकल चुकी हैं। रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, महादेवी वर्मा, लता मंगेशकर, सरोजनी नायडू, किरण बेदी, किरण मजूमदार, कल्पना चावला, पीटी ऊषा, मैरी कॉम, सुनीता विलियम्स, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल ने सिर्फ भारत में नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त की है। हर जगह अपना परचम लहराया हैं। और नारी होने का गौरव प्राप्त किया हैं। भारत देश में हजारों महिलाओं ने अपने कर्म, व्यवहार, त्याग और बलिदान से विश्व में आदर्श प्रस्तुत किया है। प्राचीनकाल से ही भारत में पुरुषों के साथ महिलाओं को भी समान अधिकार और सम्मान मिला है इसीलिए भारतीय संस्कृति और धर्म में नारियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इन भारतीय महिलाओं ने संस्कृति, समाज और सभ्यता को नया मोड़ दिया हैं। भारतीय इतिहास में इन महिलाओं के योगदान को कभी भी भूला नहीं जा सकता। आज नारी घर की चार दीवारी में बंद एक अबला नहीं बल्कि एक सशक्त व्यक्त्तिव की मालकिन बन चुकी है। खेल जगत, व्यापार जगत, फिल्म जगत, राजनीति, वकालत, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में नारी शक्ति का भी बोलबाला है। हर तरफ नारी अपनी शक्ति का परचम लहरा रही है। कुछ वर्षो से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में भी महिलाओं के प्रतिशत में सुखद बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई सरकारी महाविद्यालयों और संस्थानों में भी महिलाओं के लिए कुछ सीट्स रिजर्व रखी जाने लगी हैं ताकि महिलाएं उच्च शिक्षा और रोजगार प्राप्त कर सकें। नारी को मिलती बढ़ोतरी के बाद भी हमारे समाज की सोच फिर भी पिछड़ी हुई हैं। नारी को आगे बढ़ता हुआ देखकर भी नारी के साथ भेदभाव हो रहा हैं। इतना सब होने के बावजूद भी कई लोग इसी सोच से ग्रसित हैं कि लड़का ही बेहतर है। अगर इसी तरह की सोच मन में व्याप्त रही तो वो दिन दूर नहीं जहाँ पुरुष शादी से वंचित रह जाएंगे और मजबूरन उन्हें अपनी जिंदगी अकेले ही गुजारना पड़ेगी। बिन नारी के संसार की कल्पना करना मुश्किल हैं इसलिए समझना होगा कि नारी बिन ये संसार निर्विहीन हैं। सोच बदलनी होगी। विचार बदलने होंगे। नारी को भी नर के बराबर दर्जा देना होगा। और समझाना होगा कि बिन बेटी के घर की हर दरो-दीवारें फीकी ही रह जाती हैं चाहे उन्हें कितना ही रंग से रंग लिया जाएँ। सरकार भी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास कर रही है। माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बेटी बचाओ अभियान की रुपरेखा प्रस्तुत की है। जगह-जगह कन्या बचाओ की शपथ दिलाई जा रही हैं। फिलहाल ही राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साथ लाखों लोगो ने कन्या भूर्ण हत्या के खिलाफ बेटी बचाओं की शपथ व संकल्प लिया गया हैं। बदलाव की मुहीम तो शुरू हो चुकी हैं पर हमारी सोच नहीं बदल रही हैं। जहाँ एक तरफ शपथ ली जाती हैं तो दूसरी तरफ झाडि़यों में मासूम बेटी मिल जाती हैं। जहाँ बदलाव का बोलबाला हैं वही दूसरी तरफ कन्या भूर्ण हत्या, बलात्कार एवं अत्याचार जैसे संगीन अपराध बढ़ते जा रहे हैं। जगह-जगह लिंगानुपात की यह असमानता हमें आखिर कहां ले जा रही है। हम किस ओर अग्रसर हैं। प्रायः सुनने को मिलता हैं कि यह सब उच्च शिक्षा के आभाव के कारण हो रहा हैं पर अगर देखा जाए तो आजकल के शिक्षित लोग के बिच यह विचारधारा ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। शिक्षित लोग ज्यादा भेदभाव करते पाए जाते हैं। आधुनिक समाज में मध्ययुगीन कुरुतियाँ सोचने को विवश करती हैं कि क्या आज भी भारत में बेटी का जन्म समाज में उतना ही स्वीकार्य तथा उत्सवी है जितना बेटों का। शिक्षा चाहे कितनी भी उच्च हो जाएँ जब तक मन मस्तिष्क में बैठे नारी के प्रति भेदभाव के शैतान को जब तक हटाया नहीं जायेगा तब तक इस तरह की घटाएं हमारे हृदय को चीरती रहेंगी और रोज घटित होती रहेंगी। शिक्षा और संपन्नता भले ही समाज के विकास के आधार माने जाते हों लेकिन पढ़े लिखे समाज में भी लिंग भेद को महत्व दिया जा रहा है। बेटियां बचाने के लिए आज जन आंदोलन की जरूरत है। बड़े से बड़े अभियान की जरूरत हैं। लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में गिरावट आने पर कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिस देश में नारी की पूजा करना परंपरा हो उसी देश में महिलाओं की संख्या में गिरावट आए तो ये सवाल सोच-विचार का बन जाता है कि हम किस ओर अग्रसर हैं ? हमारी सोच में इतना घिनौनापन क्यूँ हैं ? वक्त रहते हमें अब समझना चाहिए कि बेटियां बोझ नहीं होती हैं और जो लोग ऐसा सोचते हैं हमें मिलकर उसकी सोच बदलनी चाहिए और उसका मानसिक विकास कर नारी हनन पर रोक लगानी चाहिए। फिलहाल 2015 में हुवे गणतन्त्र दिवस पर महिला शक्ति का परिचय दिखाया गया। महिला सशक्तीकरण की बानगी देखने को मिली। वैसे हमारे देश में महिला सशक्तीकरण कई बार देखने को मिला चुका हैं। प्रधानमन्त्री के रूप में इंदिरा गांधी, राष्ट्रपति के रूप में प्रतिभा पाटिल और जगह-जगह पर मुख्यमंत्री के पद आसीन महिलाएं, तीनों सेना में उच्च पद पर आसीन महिलाएं जिन्होंने महिला सशक्तिकरण का उदाहरण दिया हैं। आज नारी न तो अबला है और न ही उसे पैरों की जूती कहा जा सकता है। आज की नारी अपने पैरों के ऊपर खड़ी हुई स्वावलम्बिनी है। वह किसी भी प्रकार से पुरुष पर आश्रित नहीं है और ना कभी होगी। बल्कि कभी परिचारिका बनकर तो कभी कार्यक्षेत्र की सहयोगिनी बनकर वह पुरुष वर्ग की मदद ही करती आई है। महिलाएं पुरुषों से किसी भी लिहाज से पीछे नहीं हैं। देश में करीब 2.70 करोड़ महिलाएं व्यापार और नौकरी कर धन अर्जित कर रही हैं और अपने दम पर परिवार चलाती हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की ताकत भी उसकी बेटियां ही है। बेटियों के विकास से ही समाज का विकास है। हर क्षेत्र में बेटियां आगे बढ़ रही है। इसके बाद भी रुढि़वादी मानसिकता के वजह उनको दुनिया में आने से रोका जा रहा है। जगह-जगह जहाँ नारी आगे बढ़ रही हैं तो जगह-जगह उनका हनन हो रहा हैं। हम सबको मिलकर लोगों की मानसिकता को बदलना चाहिए। आजकल पढ़े-लिखे वर्ग में केवल एक ही बच्चे को दुनिया में लाने का चलन सा हो गया है। इसे रिवाज कहें या विधाता की देन या फिर महंगाई की मजबूरी या फिर आजकल यह भी कहा जाने लगा है कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है। पर अधिकतर के अंतर्मन में एक बच्चे के रूप में बेटे की चाहत ज्यादा होती हैं। उनकी सोच में यही होता हैं कि बेटा होगा तो वंश चलाएगा लेकिन वो ये क्यूँ भूल जाते हैं कि बिन बेटी के वंश चलायेंगे कैसे ? बेटी ही वंश चलाती हैं और बेटी ही परिवार की सरंचना करती हैं। बेटा एक वंश चलाता है तो बेटी दो वंश कि संचालिका होती है। अब समय के अनुसार चलना होगा और अपने अंतर्मन को बदलना होगा। इस लिंग भेद को मिटाना होगा। कन्या भुर्ण हत्या करने से माँ, बहन, बेटी, पत्नी, दोस्त और अनेकों प्रकार के रिश्ते खत्म हो जाते हैं। सोचो अगर बेटी नहीं होगी तो आपके वंश को अपनी कोख में धारण करने वाला कौन होगा। अगर बेटी नहीं होगी तो माँ का आंचल कहाँ से लाओगे ? बेटी नहीं होगी तो हाथ पे स्नेह का धागा कौन बांधेगा ? बेटी नहीं होगी तो बहु कहा से लाओगे ? बेटी नहीं होगी तो घर में छन-छन की आवाज कहाँ से आएगी ? बेटी नहीं हुई तो जब पिता अपने काम से थक कर घर को आयेंगे तो उनके लिए पानी का गिलास कौन लायेगा ? माँ का रसोई में हाथ कौन बटाएगा ? भाई के जब बहन नहीं होगी तो रक्षाबंधन जैसा त्यौहार कैसे मनाओगे ? बेटियों के साथ होते अन्याय अगर इसी तरह गतिमान रहे तो ये संसार कैसे बच पायेगा ? बेटी से हर रिश्ते बनते हैं। बिन बेटी के किसी भी रिश्ते का निर्माण सम्भव नहीं हैं। अब हमें नवनिर्माण हेतु इस जड़ को सही रूप से तैयार करना होगा। जिससे हमारी गलतियों की वजह से बेटियों के ऊपर सितम ना हो। क्यूंकि बेटियां तुलसी का पौध होती हैं, जिनमें खुद भगवान बसता हैं। बेटी ओंस की बूंद जैसी होती है। बेटियां हैं तो घर आंगन में खुशियाँ महकती हैं। बेटियां त्याग की मूर्त हैं। बेटी है तो कल है, बेटी से ही इस संसार में सुनहरा पल हैं। बेटियां नयनों की ज्योति हैं और सपनों की अंतरज्योति हैं। बेटियां पावन दुआ हैं। बेटी चेतना का स्वरूप है माँ आदिशक्ति का रूप हैं। मतलब साफ हैं बेटियां पनाह हैं। बेटियां हर रिश्तें का आधार हैं। बेटियां हैं तो परिवार हैं वरना रिश्ते सिर्फ दो-चार हैं। जब तक घर में बेटी ना हो घर की दरों-दीवारों को चाहे कितना भी रंग लिया जाएँ वो रंग हमेशा फीका ही रहता हैं। जब-जब धरती पे पाप अपनी चरम सीमा पर होता है तब तब इंसान अपनी इंसानियत भूल के अपने सभी नैतिक व मानवीय मूल्यों कों भूल जाता है तो कुदरत उसे अपने तरीके से समझाने का प्रयत्न करती है। जब से नारी के साथ अत्याचार बढ़ा हैं तब से प्रकृति ने क्रोध के स्वर में मानव जाती को समझाया हैं। प्रकृति ने कई बार कुदरत के इशारें पर अपना त्राहिमाम रूप उजागर किया है और इस कारण पापियों के साथ कुछ अच्छे लोग भी इस त्राहिमाम में बलि चढ़ जाते है। आज हमारे नैतिक मूल्य और मानवीय मूल्य दोनो कफन ओढ़ चुके है जिस कारण आज हमारा भविष्य अंधकारमय हो गया है। प्रायः देखे तो इस युग में सभी मानव अपना सही मानवीय मूल्य को पहचानते हैं फिर भी मोह माया में मानवीय मूल्यों कों और इंसानियत कों परे रख देते है और स्वार्थी हो जाते है आज जरुरी है कि हम सभी फिर से इंसान बने और दया, समर्पण, मानवता की राह पर चले। तभी समाज में बदलाव सम्भव हैं। जैसे एक एक ईंट से घर कि दिवार खड़ी हो जाती है वैसे ही एक एक मनुष्य को शिक्षित करने से सुन्दर समाज का निर्माण हो सकता है। आज हमारे समाज में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं क्यूंकि हमारें समाज में मानव सभ्य नहीं हैं। मानव इसलिए सभ्य नहीं हैं क्यूंकि उनके अन्दर मानवता का स्तर खत्म हो रहा हैं। उनमें मानवता इसलिए नहीं हैं क्यूंकि शिक्षा का स्तर गिर चुका हैं। शिक्षा का स्तर इसलिए गिर चुका हैं क्यूंकि शिक्षा देंने वाले शिक्षिक अच्छे नहीं हैं। शिक्षिक इसलिए अच्छे नहीं हैं क्यूंकि सही लोगों का चयन नहीं किया जाता हैं। गलत लोगो का चयन इसलिए होता हैं क्यूंकि हमारे देश में आरक्षण रूपी राक्षस हावी रहता हैं और आरक्षण इसलिए हैं क्यूंकि बड़े-बड़े नेता लोग इसके पक्ष में खडे़ और अडे़ हैं नेता लोग इसलिए पक्ष में हैं क्यूंकि उन्हें वोट देकर हम ही विजयी बनाते हैं और विजयी भी हम योग्यता देखकर नहीं पार्टी, धर्म और जाती देखकर चुनते हैं और हमारा यही एक गलत फैसला किसी की जिंदगी तबाह कर रहा हैं। प्रायः देखा जाए तो आज कन्या भूर्ण हत्या का मुख्यतः कारण और भी बहुत हैं पहला कारण था लिंग भेदभाव। जहाँ बेटी को बेटे के आगे कम मानते हैं। पहले कारण में बेटे से वंश चलता हैं यही सोच थी। पर बहुत से और भी उदाहरण हैं जिससे माता-पिता बेटियों को इस संसार में आने से रोकने के लिए मजबूर हो जाते हैं या फिर जान बुझकर मजबुरी का हवाला देकर नारी का हनन कर रहे है। जब तक बेटी माँ की कोख में रहती हैं तब तक वो महफूज रहती हैं (अधिकतर जगह बेटियां तो माँ की कोख में भी सुरक्षित नहीं) जब वो संसार में आती हैं तो उसे अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं। पहले तो वो कोख में सुरक्षित नहीं। फिर भी वो जन्म लेती हैं तो बेटी होने का इल्जाम सहती हैं। जब यहाँ से भी वो खुद को सुरक्षित कर लेती हैं तो हमारे समाज में फैले असमाजिक तत्व उसे हवस की दृष्टि से देखने लगते हैं उसे हर राह पे, हर जगह पे उनकी गंदी नजरे खुरेचती हैं जिससे वो खुद को असहज महसूस करती हैं। उनकी नजरों से बच भी जाएँ तो किसी न किसी चैराहे पे या फिर किसी सुनसान गलियों में उसकी इज्जत तार-तार करने के लिए विकृत मानसिकता के तत्व ताक मैं बैठे रहते हैं। प्यार के नाम पर नारी को हवस का शिकार बनाने के लिए हर राह पर नरभक्षी खड़े हैं अगर प्यार में उसे पा नहीं सकते तो तेजाब से उसे यातना देने का प्रयत्न करते हैं। या फिर उसकी गन्दी तस्वीर, विडियों बनाकर उसे शोषित करता है। अगर वो उसके इशारों पे नहीं चलती है तो उसकी तस्वीरें, विडियों इन्टरनेट, मोबाइल के माध्यम से उसे बदनाम करने का प्रयत्न करता हैं। अगर यहाँ भी उसके भाग्य ने साथ दिया तो दहेज लोभी दानव उसे निगलने को तैयार बैठा हैं। मतलब साफ है कि नारी कहीं भी सुरक्षित नहीं है। आज देखा जाये तो प्रायः माता-पिता को इसी का भय ज्यादा सताने लगा हैं। इस वजह से भी बेटियों को गर्भ में ही मारने लगे हैं अगर हम चाहें तो हम सब मिलकर इस भय को दूर कर सकते हैं। क्यूंकि जब तक ये भय रहेगा तब तक बेटियां ना कोख में सुरक्षित हैं ना कोख के बहार। इसलिए सबसे पहले हमें समाज को शिक्षित करना होगा। हर घर में अच्छे संस्कारों का निर्माण कर, एक सभ्य समाज का निर्माण करना होगा। हमें बदलना होगा, हमें सम्भलना होगा, हर कदम पर नारी की रक्षा करनी होगी और नारी पे होते अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठानी होगी। पर हम तो बुजदिल हैं क्यूंकि हम अन्याय के विरुद्ध ना तो लड़ सकते हैं ना झगड़ सकते है ना ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते है ना ही उसके विरुद्ध खड़े हो सकते हैं। ये आज का सच हैं कि हर जगह वहशी फैल चुके हैं। हर जगह नारी को नोचा जा रहा हैं। जिस आंचल की छाव में पले बढ़े वहीं आज सरेआम उसे ही उतार रहे हैं। जहाँ कभी नजरों की शर्म हुआ करती थी आज उन्हीं नजरों से बहन बेटियों को ताड़ रहे हैं। कहीं पैसो के दम पर तो कहीं रुतबे के दम पर तो कहीं प्यार के नाम पर नारी को हवस का शिकार बनाया जा रहा हैं। यही एक भय हर माँ बाप को सताने लगा हैं इसी की वजह से बेटी का गला कोख में घोंटा जा रहा हैं। बेटी के साथ होने वाली अनहोनी के लिए भय रखना लाजमी हैं पर इस भय के लिए कन्या भूर्ण हत्या करना मतलब अन्याय के सामने घुटने टेक देना। हमें तो अन्याय के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। किसी के कारण हम बेटियों को इस संसार में आने से तो नहीं रोक सकते। अन्याय सहना सबसे बड़ा जुर्म हैं इसलिए इस गंदी सोच को हमें जड़ से उखाड़ना होगा और जो मन मस्तिष्क में भय बैठा हैं उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपनी बेटी के लिए चिंतिंत होना लाजमी हैं क्यूंकि जब बेटी पैदा होती हैं तब से लेकर जब तक वो सयानी होती है और जब बाहर अपना पहला कदम रखती है तो उसके लिए चिंता होने लगती है कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाएँ क्योंकि आज समाज की मानसिकता विकृत हो चुकी है। जिसके कई मुख्य कारण आप पढ़ चुके हैं। हमारा ये कैसा सभ्य समाज हैं जहाँ एक तरफ हम बेटी बचाओं का अभियान चलाते हैं तो एक तरफ बेटियों को सरेआम नोंचा जा रहा हैं। समझ में नहीं आता कि इन वहशियों को खत्म करने का अभियान कब चलेगा। कब ये घिनोने कृत्य रुकेंगे। कब नारी खुद को सुरक्षित महसूस करेगी। हर तरफ नारी के लिए खौफ पसरा हुआ हैं। जहाँ भी जाए उसे ये ही भय रहता हैं। नारी हर समय, हर जगह दर्द से कराह रही हैं। उसका दर्द, उसके अन्तर्मन कि पिड़ा समझने के लिए कौन आगे आयेगा ? द्रोपदी को चीर हरण से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था पर आज के युग में द्रोपदी असंख्य है और उन्हें बचाने के लिए भगवान अवतार नहीें लेंगे। आज अगर द्रोपदी को कोई बचा सकता है तो वो है खुद नारी। उसे माँ काली का रूप धरना होगा और विनाश करना होगा हर बुराई का। तभी वो खुद को सुरक्षित कर सकती है। हां आज के युग को देखकर अब आभास होने लगा है कि इस धरती पे अब खुदा नहीं रहता वरना जब जब धरती पे अन्याय हुआ है उसने अन्याय का पतन किया है। पर आज तो अन्याय ही सच्चाई और अच्छाई का पतन कर रहा हैं। हर तरफ इंसान और राहें लहुलुहान है। इसलिए नारी को खुदा के भरोसे नहीं खुद के भरोसे अन्याय से लड़ना होगा वरना अन्याय एक दिन इंसानियत का जड़ से पतन कर देगा। इसलिए अब नारी कोे माँ काली का रूप धरना ही होगा। आज नारी के साथ होने वाले अन्याय का एक मुख्य और बड़ा कारण कुछ महिलायें भी हैं जो महिला होकर भी नारी को मोह माया के लालच में आकर अपनी ही जाती को भोग्या के रूप में चित्रित कर रही हैं। जो नारी होकर भी नारी का दर्द नहीं समझती हैं। आज महिला ही महिला कि दुश्मन बन बैठी हैं। घर के पुरुष तो फिर भी बेटी होने पर भी संतुष्ट हो जाते हैं पर घर की और बाहर की कुछ महिलायें ही ताने मार-मार कर उस औरत का जीना मुश्किल कर देती हैं। मतलब हर तरफ नारी की हार नजर आती हैं। यहाँ तक अगर किसी नारी के बार-बार बेटियां ही हुई तो वो अपने बेटे की दूसरी शादी करवाने के लिए योजनाएं बनाने लग जाती हैं। अगर नारी माँ नहीं बन पाती है तो उसे बांझ होने का अहसास भी खुद नारी ही करवाती हैं। नारी को देह व्यापार में धकेलने के लिए पुरुष वर्ग के साथ महिला वर्ग भी शामिल हैं। नारी का दर्द खुद नारी भी महसूस नहीं करती। एक बेटी को कोख में मारने के लिए भी माँ ही हामी भरती हैं। वो खुद भूल जाती हैं कि मैं भी नारी हूँ और अगर उस समय मेरे माता-पिता मुझे कोख में मार देते तो मैं ये युग कहाँ से देखती। हर जगह बेटे की आकांक्षा मन में धरना दिए हुवे बैठी हैं। पर जब किसी गाय या भैंस के बछडी या कटड़ी का जन्म होता हैं तो कितने खुश होते हैं तब क्यों खुशी मनाई जाती हैं और वहीं जब घर की बहु कन्या को जन्म देती है तो कितनी मायूसी छा जाती हैं। कितना फर्क हैं ना हमारी सोच-विचार में। आज नारी खुद को कहीं भी सहज महसूस नहीं करती हैं। चुपचाप सितम सहती रहती हैं और उफ तक नहीं करती। नारी इतनी सहनशील हैं कि दर्द पाकर भी बदलें में प्यार देना पसंद करती हैं। पर कहीं ना कहीं उनके मन-मस्तिष्क में एक भय प्रायः उसके इर्द गिर्द घूमता रहता हैं। हर तरफ वो असुरक्षित हैं। कानून भी मजाक बन कर रह गया हैं। एक तरफ सभ्य समाज का नाम लेकर नारी पे अत्याचार करने वाले पुरुष वर्ग तो दूसरी तरफ स्त्री वर्ग भी नारी की दुश्मन बन कर बैठी हैं। मतलब हर तरफ भय ने अपना शिकंजा कसा हुआ हैं। महिलाओं के साथ हो रहे इन हादसों को देखकर व सुनकर मन बहुत चिंतित हो जाता हैं। ये कैसी विडंबना है कि हमारे देश में नारी सशक्तिकरण और नारी मुक्ति के जितने दावे किये जाते हैं उतना ही नारी शोषण और अत्याचारों की घटनाएँ बढती जा रही हैं। नारी के सशक्तिकरण की जब भी बात आती हैं, तब तब कहाँ जाता हैं की नारी को अगर इन अत्याचारों और शोषण से मुक्त करवाना हैं तो सबसे पहले नारी को शिक्षित करना होगा। पर अगर देखा जाएँ तो पिछड़ी और अशिक्षित महिलाओं की बात तो दूर जो आज शिक्षित महिलाएं भी असुरक्षित हैं क्यांेंकि निजी से लेकर सार्वजनिक जीवन में, घर से लेकर बाहर, विधालय से लेकर कार्यालय तक, खेल से लेकर फिल्मी जगत तक और राजनीति जैसे क्षेत्रों में भी महिलाएं उत्पीड़न और शोषण का शिकार हो रही हैं। हमारे देश में राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग जैसी बड़ी संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार और संसाधन मुहैया कराये गए हैं। लेकिन फिर भी आज भी हमारें देश कि नारियाँ इन्साफ के लिए खुद से और समाज से लड़ती रहती हैं और ताकती रहती हैं मुंह न्याय के लिए। नारी पे हो रहे हर अत्याचार और शोषण के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के कानून भी बनाएं गये हैं फिर भी उनके साथ अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। हर तरफ एक भय नारी के जीवन में व्याप्त होता जा रहा हैं। जहाँ एक तरफ नारी आसमान की उच्चाईयां छू रही हैं तो दूसरी तरफ उनके साथ भेदभाव, शोषण और अत्याचार किया जा रहा हैं। जिस तरह से नारी के साथ अत्याचार हो रहे हैं तो इन सबके लिए अगर कोई दोषी हैं तो वो हैं हमारी मानसिकता, समाज और सरकार में उच्चं पद पर आसीन अधिकारीयों का गैर जिम्मेदार व्यवहार। जो सब होते देखकर भी चुप रहते हैं। हमारे राजनेता जो आये दिन बेढंगे ब्यान देते रहते हैं और अपराध करने वालों के हौंसलें को बढ़ावा देते हैं। कानून कितना भी सख्त हो जाएँ पर जब तक हमारी मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक अत्याचार कम नहीं होंगे। प्रायः देखा जाता हैं कि जब भी नारी पर अत्याचार होता हैं तो अपराधी को सजा देने की जगह पीडि़त नारी को ही दोषी ठहरा दिया जाता हैं और उसे ही ताने और गंदी नजरों का शिकार होना पड़ता हैं। अगर नारी अपने साथ हुवे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाना भी चाहे तो घर वाले अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा का हवाला देकर उसे आवाज उठाने के लिए रोकते हैं और उसके साथ हुवे अत्याचारों को दबाने का प्रयत्न करते हैं और फिर भी वो आवाज उठाती हैं तो उसे डरा धमाका कर चुप करा दिया जाता हैं। नारी कितनी भी दुःखी हो उसका दर्द कोई नहीं समझना चाहता। उसके साथ हुवे अत्याचारों के लिए कोई आवाज नहीं उठाना चाहता। यहाँ तक माता-पिता भी उसे चुप करवा कर देते हैं। हमारे समाज के लोग नारी को सुरक्षा देने की जगह उसे भयभीत ज्यादा करते हैं। पीडि़ता को न्याय दिलाने कि जगह उसके चरित्र पे ही उँगलियाँ उठा दी जाती हैं। हमारे कानून में इतना लचीलापन हैं कि यहाँ दोषी को सजा देने के रास्ते कम, उसे जुर्म से बाहर निकलने के रास्ते ज्यादा उपलब्ध हैं। बाहुबली, रसूखदार और पैसेवालें पैसों के दम पर कानून को ही खरीद लेते हैं। जिससे अत्याचार के विरुद्ध उठाई गई आवाज वही दब कर रह जाती हैं। आज यही सब दर्द देखकर बेटियों को कोख में मारने का प्रयत्न हो रहा हैं पर ये सब सोचकर कोई कन्या भूर्ण हत्या करता हैं तो वो गलत हैं और वो गलत मानसिकता के शिकार हैं। बेटी को कोख में मारने की जगह बेटी को इतना मजबूत बनाओ की उसके साथ शोषण और अत्याचार करने के लिए कोई भी असमाजिक तत्व नजर ना उठा सके। जब माता-पिता एक बेटी को कोख में मरवाते है तो वो अनेक रिश्तो का पतन कर देते है। कन्या भुर्ण हत्या के पिछे ना जाने कितने रहस्य, दर्द छिपे होते है। जब कोख में एक बेटी पलती है तो आज के युग को देखकर माता-पिता का चिंतित होना लाजमी बन जाता है। तब वो भय इस कदर हावी हो जाता है कि जुर्म दस्तक देने लगता है। वो भय तभी खत्म हो सकता है जब उन्हें कोई जागरूक करें। एक छोटी सी दास्तान है जिसमें पिता अपनी बेटी को कोख में ही मरवाना चाहता है उसे उसकी पत्नी रोकने का प्रयास भी करती है लेकिन जब पति अपने अन्तर्मन की पिड़ा अपनी पत्नी को बताता है तो पत्नी निःशब्द हो जाती है कि तभी बेटी अपनी माँ की कोख में पुकार करती हैं और अपने मात-पिता से जीवन जीने की गुहार करती हैं। मेरी इस कविता का शीर्षक बस यही हैं कि कुछ लोग बेटी को बोझ समझते हैं तो कुछ इस खौफ से बेटी को जन्म नहीं देते कि दहेज के लोभी, वहशियों से कैसे बचायेंगे। पर उनको एक ही जवाब - बेटी को कायरता की जिन्दगी मत जीने दो, उसे भी बेटो जितना सम्मान दो, उसके हौसलों को ऊँची उड़ान दो। हम बदलेंगे तो समाज बदलेगा और जब समाज बदलेगा तो एक सुंदर संसार का निर्माण होगा। इस संसार में जीने का हक सबको हैं और ये हक छीनने का अधिकार ना तो इंसानों को है और ना ही इंसानों द्वारा बनाएं गए किसी समाज को हैं। बेटियां भी उड़ान भरना जानती हैं। आप बस उसका सहयोग करो और उसके हौंसलों को मजबूत बनाएं। राह वो खुद ब खुद बनालेगी। आज हमें बदलाव के लिए बहुत प्रयत्न करने होंगे और हर उस चीज का बहिष्कार करना होगा जिसके कारण नारी के साथ शोषण और अत्याचार बढ़ रहे हैं। हैवानियत का जो ये गंदा दौर चला हैं उसकी जड़ों को काटना होगा तभी नारी को खुले आसमान में पंख फैला कर जी सकेगी और उसे खुशियों से भरी जीने की राह मिलेगी। दुनियाभर में नारी को समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन हकीकत तो यही है कि उसे बचपन से लेकर बुढ़ापे तक जुल्मों का शिकार बनाया जाता है। भारत में तो भुर्ण हत्या, बाल-विवाह, बलात्कार , दहेज, सती, देवदासी और विधवाओं के प्रति हेय-दृष्टि जैसी पुरातन परम्पराओं के नाम पर नारी दासता के पन्नों पर हर रोज प्रताड़ना की नई कहानी लिखी जा रही है। आज जिस तरह से बेटी बचाओं अभियान, नारी पर अत्याचार बंद करों, हमें आजादी चाहिए जैसे अभियान होने के बावजूद भी अत्याचारों और शोषण में वृद्धि ही हुई हैं इसका मुख्य कारण हैं इन्टरनेट, मोबाइल और मिडिया (फिल्म और विज्ञापन) जिसमें नारी को सिर्फ भोग्या के रूप में परोसा जा रहा हैं। किसी भी वस्तु का प्रचार प्रसार करने के लिए नारी के देह का प्रदर्शन किया जा रहा हैं। जिसके कारण हमारे समाज में नारी के प्रति विकर्ष्ण और गंदी मानसिकता पैदा हो रही हैं जिसके कारण बलात्कार, अत्याचार और यौन उत्पीड़न जैसी गम्भीर समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही हैं। फिल्मों का जिस तरह स्तर गिरा हैं उससे साफ जाहिर होता हैं कि हमारी मानसिकता कितनी गिर चुकी हैं। और इस तरह के कार्य में नारी ही उनका साथ दे रही है चन्द दौलत और शोहरत के खातिर। पर उन नारियों को ऐसा करने के लिए बढ़ावा भी कुछ असमाजिक पुरूष वर्ग ही तो देता है। जिस वजह से खुद औरत दुसरी औरत के लिए खाई तैयार कर रही है। आजकल एक विज्ञापन आता हैं कि बेटे रोते नहीं। उसे बचपन से लेकर जवानी तक यही कहाँ जाता हैं और वो लड़का बड़ा होकर नारी पे हाथ उठाता हैं और अंत में कहाँ जाता हैं काश बेटे को बचपन में ये भी सिखाया जाता कि बेटे बेटियों को नहीं रुलाते हैं और ना ही उनपे हाथ उठाते हैं। अगर ऐसा बचपन में हो जाता तो शायद नारी पे अत्याचार नहीं होते। ये हकीकत हैं अगर हमे अच्छे संसार का निर्माण करना हैं तो सबसे पहले एक अच्छी नींव तैयार करनी होगी। बचपन से लेकर जवानी तक लड़कों के सामने बेटी को दोयम दर्जे का समझा जाता हैं। अगर बचपन में लड़कों को अच्छे संस्कार दिए जाएं और उन्हें लड़की का मान सम्मान करना सिखाया जाएँ तो इस तरह के गंभीर घटनाएँ उत्पन्न नहीं होगी। इसलिए बच्चों को अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा देनी बहुत जरूरी हैं। बेटियां अपने माता-पिता की आँखों में आंसू आने से पहले उनका दर्द पहचान लेती हैं। और वहीं दुसरी तरफ बेटे माता-पिता का दर्द समझने कि बात तो दूर वो उनकी आँखों में आंसू देने की वजह खुद बनते हैं। रोटी और बेटी दोनों का एक दुसरे के साथ बहुत गहरा सम्बन्ध हैं। जिस घर में बेटी होती हैं उस घर में रोटी मिलना तो निश्चित रहता हैं। अन्यथा बेटे चाहे चार-पांच ही हों, पर लड़ेंगें इस बात पर की माता-पिता को अपने पास कौन रखे। आजकल ऐसे दिन भी आ गये हैं कि हर शहर में वृद्धाश्रम खुलने लगे हैं क्यूंकि आजकल के आधुनिक युवाओं के लिए माता-पिता बोझ बन जाते हैं। ये सत्य हैं कि बेटियों के लिए माता-पिता कभी बोझ नहीं बनते हैं। आज आपके पास माँ, दादी, नानी, बहन, भुआ, काकी, भाभी, चाची, ताई, मौसी, पत्नी अनंत रिश्ते हैं। ये रिश्ते आज आपके पास क्यूँ हैं क्यूंकि बुजुर्गों ने कन्या भुर्ण हत्या को फैशन नहीं बनाया था। पुरुष चाहें किसी भी तरह स्त्री को सता लें, पीड़ा दें, या मानमर्दन करें। फिर भी चाहें अहोई अष्टमी में माँ हो या रक्षाबंधन में बहन हो या करवा चैथ में पत्नी हो नारी हर रूप में पुरुष की सुरक्षा, सुख एवं समृद्धि के लिए ही निरंतर तप और वृत करती रहती है। नारी दया और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं जिसें आज के सभ्य पुरुष समझ नहीं पा रहे हैं। पुरुष वर्ग को नारी का क्षमा, दया, अहिंसा, त्याग जैसा रूप ही पसंद आता हैं उन्हें नारी का अधिकार, संघर्ष, संग्राम, प्रतिशोध, हिंसा, दौड़-धुप, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाला रूप उन्हें पसंद नहीं आता हैं। मतलब साफ हैं पुरुष वर्ग (हमारा सभ्य समाज की हुंकार भरने वाले) को नारी का तितली जैसा रूप बिल्कुल पसंद नहीं आता हैं उन्हें नारी चुप और शांत रहने वाली पसंद हैं जो उनके किये हुवे अत्याचारों के सामने मौन रहें और सब अत्याचार सहती रहें। पर युग बदल रहा हैं हर तरफ बदलाव हो रहा हैं फिर नारी क्यूँ अशांत हैं उसे भी अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा होना हैं और उसे तितली का रूप के साथ मधुमक्खी का रूप भी धारण करना होगा जो अन्याय करने वालों को डस सके। नारी अपने साथ होते जुल्मों से परेशान हो चुकी है। कुछ मर्द जिनकी गिरी हुई मानसिकता के कारण उसके अन्तर्मन को बार बार अधात पहुंचता है। वो अपने मन की पीड़ा किसी से कह भी नहीं पाती हैं। मन ही मन में खुद कोसती हुई खुद से ही सवाल करती है। और जब जब वो खुद से सवाल करती है तो उसके मन में क्रोध उत्पन्न होता है। नारी का यु क्रोधित होना भी सही है और सच में आज के युग को देखते हुवे उसे एकदिन ये कदम उठाना पड़ेगा। क्योंकि आज नारी पे होने वालें अत्याचारों की संख्या अनगिनत हैं। रोज कोई ना कोई अपराध नारी के जीवन की डोर काट रहा हैं। हमें अब बदलाव के लिए नारी के जीवन की डोर को मजबूत करना होगा और नारी के साथ होने वालें अत्याचारों की जड़ काटनी होगी। जब तक नारी समाज में सुरक्षित नहीं तब तक हमें खुद को आजाद कहना गलत होगा। हम जिस समाज में रहते हैं अगर उस समाज में हमारी माँ, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं तो फिर हमें उस समाज में रहने का भी कोई अधिकार नहीं हैं। इसलिए बदलना होगा ये सब कुछ और करनी होगी नई शुरुवात। एक अच्छी दिशा का निर्माण करना होगा। जहाँ बेटियां कोख से लेकर हर राह पर सुरक्षित रहे। नारी का त्याग, बलिदान, प्रेम, स्नेह हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। आज जहाँ नारी अपने घर की दहलीज से बाहर निकल अपने माता-पिता का और खुद का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं हमें उनके इस हौंसले को सलाम करते हुवें उनका हर डगर पे साथ निभाना होगा। उनकी हिम्मत बन उनकों मजबूत बनाना होगा। हम चाहे तो इस समाज में बहुत कुछ बदल सकते हैं। सबसे पहले अगर कुछ बदलना हैं तो वो हमारी सोच। अगर हम अपनी सोच बदले तो बेटियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं होगा। कन्या भूर्ण हत्या और हैवानियत को रोकने के लिए हमें समाज को जागरूक करना होगा। हर घर को शिक्षित करना होगा। नारी के शौर्य, त्याग, बलिदान एवं उनके अभिमान की गाथाएँ सुनानी होंगी। हर घर में नारी के प्रति अपना व्यवहार बदलना होगा। हर घर को जागृत करना होगा और उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही बेटियों के लिए योजनाओं के बारें में बताना होगा। और उन्हें बताना होगा कि कन्या भूर्ण हत्या, दहेज मांगना, नारी से छेड़छाड़, उसका मानमर्दन करना, उसे प्रताडि़त और शोषित करना कितना बड़ा अपराध हैं। नारियों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध देश के प्रत्येक नागरिक को आगे आने की जरूरत है। नारियों के सशक्तिकरण में हर प्रकार का सहयोग देने की जरूरत है। इस काम की शुरूआत सबसे पहले अपने घर से होनी चाहिए क्योंकि जब तक हम खुद नहीं सुधरेंगे तब तक हमें सभ्य समाज कि परिकल्पना करनी नहीं चाहिए। नारी सृजन की शक्ति। यह शक्ति जिस रूप में प्रकट होती है, वह उसी रूप में परिलक्षित भी होती है। नारी हमारे बिच अनेकों में विघमान हैं उसके हर रूप को समझना होगा। जब नारी अपने बच्चें को दूध पिलाती है तो वह वात्सल्य व ममता का साकार रूप होती है। जब नारी अपने साथ हुवे अत्याचारों के खिलाफ खड़ी होकर हुंकार भरती है, तो वह माँ दुर्गा व माँ काली रूप विकराल रूप होती है और फिर उसके साहस व दृढ़ता के सामने ना तो कोई टिका है और ना ही कोई टिक सकता हैं। जब नारी अपनी सुकोमल संवेदनाओं के संग विचरती है तो सृष्टि में सौंदर्य की एक नई आशा, दिव्य प्रकाश के रूप में बिखर जाता है, परन्तु जब नारी अपने प्राकृतिक एवं पवित्र भाव को भूल जाती है तब वह भोग्या, अबला के रूप में शोषित, प्रताडि़त व दंडित की जाती है। आज नारी को खुद का उत्थान स्वयं ही करना होगा। तभी बदलाव सम्भव हैं। स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था - नारी का उत्थान स्वयं नारी ही करेगी, कोई और उसे उठा नहीं सकता। वह स्वयं उठेगी। बस, उसमें उसे सहयोग की आवश्यकता है और जब वह उठ खड़ी होगी तो दुनियां की कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। वह उठेगी और समस्त विश्व को अपनी जादुई कुशलता से चमत्कृत करेगी। आज नारी खुद को सम्भालें और अपना सही रूप पहचानें। अपने अंदर की आंतरिक शक्तियों को उभारें और उसे रचनात्मक कार्यों में लगा दें, जिससे नारी खुद को मजबूत बना सकेगी और फिर नारी शक्ति के रूप में आगे बढ़ सकेगी। उसे फिर शोषित बेडि़यों में नहीं बाँधा जा सकेगा। उसे स्वयं में साहस, शौर्य, पवित्रता को फिर से बढ़ाना होगा। जिससे कोई भी उसे अबला और भोग्या के रूप में ना देख सके। नारी खुद के रूप की पहचान जिस दिन कर लेगी उस दिन से उसका बाजारीकरण नहीं होगा और वह अश्लीलता की दहलीज पर बिकने से बच सकेगी। शुचिभ्राजा, उपसो नवेदा यशस्वतीर पस्युतो न सत्याः। अर्थात श्रध्दा, प्रेम, भक्ति, सेवा, समानता की प्रतीक नारी पवित्र, निष्कलंक, आचार के प्रकाश से सुशोभित, प्रातःकाल के समान ह्रदय को पवित्र करने वाली, लौकिक, कुटिलता से अनभिज्ञ, निष्पाप, उत्तम, यशमुक्त, नित्य, उत्तम कार्य की इच्छा करने वाली, संकर्मण्य और सत्य व्यवहार करने वाली देवी है। सही मायने में देखा जाएँ तो आप किसी भी ग्रन्थ को या किसी भी धार्मिक पुस्तक को शांत चित से पढेंगे तो उसमें आप नारी के अनेकों रूप के साथ उसकी ममता, त्याग, बलिदान, उनका निश्छल प्रेम, वात्सल्य इत्यादि के वर्णन से जरुर रूबरू होंगे। नारी ममता, वात्सल्य, दया, करुणा, सेवा, सहयोग, प्रेम और संवेदना की जीती जागती तस्वीर है। उसमें श्रद्धा, दया, भक्ति और त्याग का जीवित चित्रण है। कला चेतना उसमें विद्यमान है। पुरुष में बल, शौर्य, साहस, पराक्रम आदि गुण प्रधान होते है परन्तु नारी संवेदना की प्रधान होती है। वह ईश्वर की अनुपम कृति (रचना) है जो संसार में ममता, करुणा, प्रेम, संवेदना का संचार करती है। वह मातृत्व व वात्सल्य की विलक्षण विभूति है जो ईश्वर का प्रतिनिधित्व करती है। नारी के द्वारा ही संस्कृति जीवन्त रहती है उसी के द्वारा अगली पीढ़ी संचारित होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि दस उपाध्यायों से एक आचार्य श्रेष्ठ है और 100 आचार्यों से एक पिता श्रेष्ठ है लेकिन 1000 पिताओं से एक माता उत्तम है। नारी श्रद्धेय का रूप हैं जो एक धुप-अगरबत्ती की तरह होती है जो अपना सर्वस्व हवन कर सम्पूर्ण जगत को सुगन्धित करती है और अन्त में स्वयं भस्मीभूत होकर राख में प्रवर्तित हो जाती है। नारी प्राचीन काल से ही अपनी अदभुत शक्ति की प्रतिभा, चातुर्य, स्नेहशीलता, धैर्य, समझ, सौन्दर्य के कारण हर मोर्चे पर पुरुष से आगे रही है। जहां वह पति को पूज्य व देव तुल्य मानती है। नारी बेटी हैं, बहन हैं, पत्नी हैं, माता हैं, भाभी हैं, सहयोगी हैं, साथी हैं, प्रेमिका हैं। नारी एक ऐसा वृक्ष है जो छाया देकर भी सुगन्ध फैलाता है। नारी अपनी सन्तान के लिए ममता का भाव, पति के लिए त्याग व समपर्ण, मानवता के लिए दया के भाव और जीव-जन्तु के लिए करुणा के भाव रखने वाली नारी ही तो है। नारी संसार का हिस्सा ही नहीं अपितु नारी से ही संसार हैं। भारतीय समाज में नारी को एक देवी रूप माना हैं वह आदि-शक्ति का रूप हैं। नारी का सौन्दर्य, उसकी कोमलता और उसकी मोहकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं। बिना अपने आप को विज्ञापित किए, वह एक साथ कई तरह के मोर्चो की कमान संभाल लेती है। सन्तान उत्पत्ति से लेकर उसके पालन तक, प्रेम से लेकर विवाहित जीवन तक वह निरन्तर प्रेरणा की मिशाल बनी रहती है। आज बड़ा से बड़ा विद्वान, कलाकार, वीर योद्धा, उसी की कोख से उत्पन्न होते हैं। नारी केवल नर का मादा रूप मात्र नहीं है। नारी तो एक शाश्वत, चिरन्तन दिव्य रूप है। नारी के इतने सारे रूप होकर भी उसे अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, संगठित होना पड़ रहा है और उसे खुद के रूप को उजागर करने के लिए खुद से और इस समाज से लड़ना पड़ रहा है। पुरुष वर्ग नारियों पर अत्याचार करते हैं तो कहीं-कहीं नारी ही नारियों पर अत्याचार कर रही हैं। आखिर क्यों हो रहा हैं ये सब ? क्यूँ नारी शोषित हो रही हैं ? नारी को देवी का रूप जानकर भी उसे क्यों प्रताडि़त किया जा रहा हैं ? नारी को शोषित और प्रताडि़त होने का एक मुख्य कारण ये भी हैं कि उसे बचपन से ही माता-पिता प्रेम, स्नेह और दुलार के साथ-साथ उसके अन्तर्मन में पराया धन की भावना भर देते हैं। बंदिशों की बेडि़यों में जकड़ी नारी आजादी चाहती है। माँ-बाप के घर में जो हजारों बंदिशें उन पर होती है, वे सोचती है कि शादी के बाद उन बंदिशों से मुक्ति मिल जाएगी। पर ससुराल जाकर वो और ज्यादा बंदिशों और बेडि़यों में जकड़ दी जाती हैं। हिन्दुस्तान में एक समय ऐसा भी था, जब नारियों को अपना जीवन साथी चुनने की पूर्ण आजादी हुआ करती थी, लेकिन आधुनिक युग में इस आजादी को छीन लिया हैं। नारी हर तरह के कष्ट सह लेती हैं क्यूंकि उसे बचपन में शिक्षा के रूप में यही सिखाया जाता हैं। जिसके परिणाम स्वरूप वह हर तरह से शोषित होकर भी चुप रहती हैं। यही रुढि़वादी सोच की वजह से नारी को अबला और भोग्या के रूप में उसकी पहचान बनती रही। अब हमें पुरानी विचारधाराओं की जड़ को काटना होगा और उसमें अब नए पौध विकसित करने होंगे। समाज में एक अच्छी पहल कर नारी के प्रति सम्मान व स्नेह के भाव उजागर करने होंगे। नारी के साथ हो रही घरेलू हिंसा, अत्याचार, बलात्कार, कन्या भूर्ण हत्या, दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा जैसे घोर अपराधों को खत्म करना होगा। नारी को शिक्षित कर उसके अंदर आत्मविश्वास भरना होगा और उसे इतना मजबूत बनाना होगा कि कोई भी उसे शोषित करने से पहले हजार बार सोचे। हम सबको यह संकल्प लेना होगा कि अब और नहीं, अब किसी भी इंद्र के पाप का दंड अब किसी भी आहिल्या को नहीं भरना होगा। नारी के रूप का जितना वर्णन किया जाये उतना ही कम होगा। नारी ने इस सम्पूर्ण संसार की रचना की है। मैं ई्रश्वर कि इस महान कृति को किस-किस रूप में परिभाषित करू। किस तरह से हे! नारी तेरा में वर्णन करू। यें सत्य हैं कि नारी हमारी हर कश्ती की पतवार हैं और आज वो ही पतवार भंवर में फंसी हुई हैं। आओ मिलकर तुच्छ मानसिकता, लिंग भेदभाव, हवस, दौलत कि लालसा का वेग मन मष्तिस्क से हटाएं और संसार का निर्माण करने वाली नारी को भंवर में डुबने से बचायें। उसका सहयोग कर एक सुन्दर राष्ट्र का निर्माण करें और ये संकल्प लें कि ना बुरा करोंगे, ना बुरा देखोगे। जितना सम्मान धर की नारी का करतें हो उससे कहीं गुणा पराई स्त्री का भी करोगें। और नारी को भी अब अबला का रूप त्यागना होगा और लड़ना होगा अपने अधिकारों के लिए। समझना होगा उसे अपने दिव्य रूप को। अब समय आ गया है कि नारी तुम अपना प्रचंड रुप दिखाओं। अब याचना छोड़कर, अन्याय के विरूद्ध रण के लिए हुंकार भरो। जिस तरह तु घर सम्भाल सकती है वैसे ही तु देश भी सम्भाल सकती है। अब तुझे अपने कोमल हृदय को फुल के साथ कठोर पत्थर का भी बनाना होगा। आज तुम्हें संकल्प लेना होगा कि तुम ना नारी पे अत्याचार करोगी और ना ही अत्याचार सहोगी। अगर हम अब भी वक्त रहते नहीं सम्भले तो समय की रेत नारी के दिव्य रूप को तहस नहस कर देगा। क्योंकि आज समय प्रचण्ड रूप से गतिमान हैं। समय रहते ही अब हमें सम्भलना होगा। वरना तैयार हो जाओ समय की रेत के साथ धुमिल होने को।
भारत देश स्वतन्त्रता के पश्च्यात धीरे-धीरे स्थापित होता गया। हर तरफ विकास की नींव रखी जा रही थी। हर जगह आजादी का बिगुल बज रहा था पर उस आजादी के बिगुल में एक जगह आज भी गुलामी की दास्ताँ भली भाँती नजर आती हैं। जिस आजादी का हम दम भरते हैं उसी आजादी में हमारे देश की महिलायें खुद को जंजीरों में जकड़ी हुई पाती हैं। आज हमारा देश विकास और आधुनिकता की ओर अग्रसर हैं। हर तरफ बदलाव नजर मंजर बना हुआ हैं पर जहाँ नारी का नाम आता हैं वहां हम चुप से नजर आते हैं। वह नारी जो परमपिता ब्रहमा जी के बाद इस संसार का निर्माण करती है। वह नारी जो हर घर को संवारती हैं। वह नारी जो जीवन के हर पथ में साथ निभाती हैं आज वही नारी खुद को अँधेरे में कोसती हुई नजर आती हैं। ऐसा क्यूँ ? क्या हम सभ्य नहीं या फिर हमारी सोच आज भी विकसित नहीं हुई ? नर और नारी दोनों एक रथ के दो पहिये हैं फिर इतनी असमानता क्यूँ भला ? जैसे रथ दोनों पहियें के बिना आगे नहीं बढ़ सकता, वैसे ही नर बिना नारी के किसी भी दहलीज पर खुद को खड़ा नहीं कर सकता। नारी के बिना नर हमेशा अधूरा हैं। फिर क्यों आज नारी असुरक्षित है ? क्यों वो खुद का विकास नहीं कर पा रही हैं ? जितना हक जिन्दगी जीने का नर को हैं उतना ही हक नारी को भी हैं। फिर भी उसके साथ भेदभाव हो रहा है। उसे हर कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। उससे उसके जिने का अधिकार छीना जा रहा है। अब हमें खुद को बदलना होगा और अंदर इंसानियत भरनी होगी। इस असमानता की खाई को हटाना होगा। नर और नारी दोनों को एक समान आंकना होगा। तभी हम आजादी का सही रूप से जश्न मना सकते हैं। आज जिस तरह से बेटियां हर क्षेत्र में अपना नाम कमा रही हैं और बेटों से हर स्तर पे आगे बढ़ रही हैं। घर के काम से लेकर देश, राज्यों की बागडोर तक सम्भाल रही है। वही कुछ घटिया सोच वाले लोग और उनका बनाया हुआ समाज आज भी बेटियों को बोझ समझता हैं। उन्हें इस दुनिया में आने से रोकता है। उनके साथ अत्याचार करता है। उसे भोग्या समझकर उसका हनन कर रहा है। प्रायः देखा जाए तो प्रकृति स्त्री और पुरुष के बीच कभी भेदभाव नहीं करती है। सामान्यतः रूप से जितने नर पैदा होते हैं लगभग उतनी ही नारी भी इस युग में पैदा होती है। फिर हम कौन होते हैं ? नर और नारी के बीच ये भेदभाव करने वाले। उनसे उनके जीने का अधिकार छिनने वाले। आज हमारी सोच इस तरह की विकसित क्यूँ हैं ? क्यूँ हम नारी को आगे बढ़ने के लिए रोकते हैं। क्या कारण हैं कि हमारी सोच का स्तर इतना निचे गिर गया हैं ? एक तरफ नारी आसमान की उच्चाईयां छू रही हैं तो एक तरफ बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता हैं। अगर नारी वहां से खुद को महफूज भी कर ले तो उसे शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रखने की कोशिश की जाती हैं। अगर लड़की का घर सभ्य हैं तो उसे शिक्षा तो मिल जाती हैं पर आज के असमाजिक तत्वों द्वारा नजरों की शिकार दिन-प्रतिदिन होती रहती हैं। उन्हें हर पल हवस की नजरों से देखा जाता हैं या फिर किसी अमानुष के द्वारा तेजाब का शिकार हो जाती हैं या फिर दहेज लोभी अंगारों में जलकर राख हो जाती हैं। मतलब हर तरफ नारी के दुश्मन अपने पंख फैलाएं बैठे हैं। हर पल नारी को कुछ डर, अपराध का हैं तो कुछ डर, भेदभाव का। यह भय सच में बहुत गहरा हैं। आज भी नारी पर अत्याचारों की श्रृंखलाएँ लदी हुई है। नारी भले ही कितनी ही पढ़ लिख जाए या फिर थोड़े समय के लिए समाज का नजरिया उसके प्रति बदल भी जाएँ तब भी वह अत्याचारों के कैदखाने में बंद है। ऐसे कई उदाहरण हैं जो रोजाना हमारी आँखों के सामने घूमते दिखाई देते हैं। जो स्पष्ट रूप से हमें दिखाई तो देते हैं लेकिन फिर भी हम कुछ नहीं कर पातें। अगर जन्म ले भी लिया तो बोझ समझ कर मार दिया जाता हैं। यहाँ भी बच गई वो तो वहशियों की गन्दी नजरो से नहीं बचती और अस्मत लूटाकर वो अपनी, चैन सुख से जी नही सकती। अगर मांगने जाए मदद पूलीस से तो वो रावणराज समझ कर मारने दौड़ती हैं। रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं तो बलात्कार जैसी घटना क्यों ना हो। मुजरिम बेखौफ जुर्म करता हैं और पकडे जाने पे पुलिस वालो का दामाद बन जाता है। अँधा कानून और राजनीति की माया ने चारो तरफ वहशियों का साया फैला दिया है। आज हम सबकी खामोशी के कारण मासूम बहन बेटियां हैवानियत की शिकार हो रही हैं। क्यों ? कब तक ? यु ही बैठ तमाशा देखेंगे। जागोगे तो ही सवेरा पाओगे वरना यु ही अँधेरे में हम सब अपनी बहन बेटियों की अस्मत लूटते आज नही तो कल देखेंगे। आज हर जगह बेटी बचाओं अभियान चलाया जा रहा हैं। जगह-जगह एन.जी.ओ. कन्या भूर्ण हत्या रोकने के लिए और समाज को जागरूक करने के लिए कार्य कर रहे हैं। अखबार, मिडिया, बहुत से धारावाहिको और लघु फिल्में, विज्ञापन, डॉक्यूमेंट्री और पब्लिक सर्विस एनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को जागृत करने के भरपूर प्रयास किए जा रहें हैं। हमें भी बदलाव की पहल करनी होगी और हमें हर हाल में विकसित इस घटिया सोच को बदलना होगा। नारी को सम्पूर्ण रूप से सम्मान दिलाने के लिए आवाज उठानी होगी। नारी के मन कुण्डली मारे बैठे भय को खत्म करना होगा। सबसे पहली शुरूवात हमें अपने घर से करनी होगी फिर हमें अपने आस-पास के माहौल को बदलना होगा। हमें अपने स्तर पर हर जगह, हर इलाके में जाकर कन्या भूर्ण हत्या को रोकने के लिए लोगों को जागरुक बनाना होगा। विशेषकर महिलाओं को जिससे वे इस घिनौने कृत्य के खिलाफ आवाज उठा सकें। क्योंकि जब तक नारी खुद के मान-सम्मान के लिए आवाज नहीं उठायेंगी तब तक बदलाव आना सम्भव नहीं और तब तक समाज के लोग नहीं बदलेंगे। उन्हें समझना होगा कि अपने साथ होते अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना कोई जुर्म नहीं हैं। अपने साथ होते अन्याय के लिए चुप रहना सबसे बड़ा जुर्म हैं जो नारी सदियों से करती आ रही हैं। अब इतिहास बदलना होगा। इसके लिए एक पहल की जरूरत हैं। कारवां तो अपने आप बन जाएगा। एक अच्छा अभियान बहुत कुछ बदल सकता हैं। एक अच्छा आन्दोलन इतिहास तक बदल देता है। नारी को खुद के मान-सम्मान के लिए लड़ना होगा। जब तक खुद के लिए वो नहीं लड़ेगी, तब तक बदलाव सम्भव नहीं होगा। तब तक अन्याय अपनी चरम सीमा पर जारी रहेगा और उनकी खामोशी से न जाने कितनी ही मासूमों का गर्भ में ही गला घोंट दिया जायेगा। अगर गलती से वे इस दुनिया में आ भी गई तो उनकी नन्ही आंखों को खुलने से पहले ही बंद कर दिया जायेगा। आज हर कोई नारी हनन को लेकर चिंतित है। जिस तरह से उस पर अन्याय हो रहे है उसे देखकर मन बहुत पिडि़त हैं। नारी का रूप धरती माँ बेटियों के साथ होते अन्याय को देखकर विलाप कर रही है। उनकी दर्द भरी आवाज सभ्य समाज से करुण पुकार कर रही हैं और कह रही है कि बेटियों को कोख में मत मार। कविता से साफ जाहिर हैं कि धरती माँ भी इस तरह के अत्याचारों से दुःखी हैं। आज नारी हनन को देखकर उनकी अन्तर्मन की पीड़ा सही भी है क्योंकि बेटी से परिवार पूर्ण होता हैं। बेटी खुशियों का उपहार हैं जिस घर में होती हैं वहां पर वात्सल्य का भण्डार लग जाता हैं। उन्हें कोख में मारकर आज हम खुद के जीवन को काँटों का हार पहना रहे है। बेटियां दर्द सहकर भी प्रेम देती हैं। जितनी दया और प्रेम की पात्र एक नारी होती हैं उतनी दया का पात्र शायद ही कोई हो। भारत में ईश्वर को स्त्रीवाचक शब्दों जैसे - दुर्गा माता, काली माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता से संबोधित किया है। अर्थात तुम ही हमारी माता हो और तुम ही हमारे पिता हो। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः । अर्थात जहां पर नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। जहां उनकी पूजा नहीं होती और उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां संपन्न किये गये हर कार्य सफल नहीं होते हैं । शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम् । न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा । अर्थात जिस कुल में स्त्रियाँ दुःखी और पिडि़त रहती हैं, वह कुल जल्द ही विनाश की ओर अग्रसर हो जाता है। जहां वो खुश और सुखी रहतीं है उस कुल की वृद्धि निश्चित होती है। यद् गृहे रमते नारी लक्ष्मीस्तद गृहवासिनी । देवता कोटिशो वत्स न त्यज्यंति गृहहितत । अर्थात जिस घर में सद्गुण सम्पन्न नारी सुखपूर्वक निवास करती है उस घर में माता लक्ष्मी जी भी निवास करती हैं। हे! मनुष्य करोड़ों देवता भी उस घर को नहीं त्यागते हैं। बिन घरनी घर भूत समाना। अर्थात जिस घर में नारी नहीं होती है वो घर भुतघर के समान हैं। पर इस संसार में इसके विपरीत ही कार्य हो रहे हैं। भारत के लोग जहाँ धन की प्राप्ति और समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी जी की आराधना करते हैं, शक्ति पाने के लिए माँ दुर्गा जी के नाम का तप करते हैं, ज्ञान और विवेक के लिए माँ सरस्वती जी की उपासना करते हैं, अपने शत्रुओं पर विजय पाने के लिए माँ काली को प्रसन्न करते हैं। लेकिन जब यही देवियां नारी के रूप में उनके घर में आश्रय लेना चाहती हैं तब यह बात उनके गले नहीं उतरती है तब वे उन्हें गर्भ में ही मौत के घाट उतार देने का भरपुर प्रयत्न करते हैं। आज हमारे सभ्य समाज के लोग रोज बेटियों को दुत्कारते हैं और नारी का अपमान करते हैं, हर राह पर उन्हें लज्जित करते हैं। जब माता रानी के नवरात्रे या फिर कोई तीज-त्यौहार आते है तो घर-घर जाकर बेटियां खोजते हैं और उन्हें घर लाकर पूजते हैं उस वक्त उन्हें वो पूजनीय लगती हैं। सही कहूँ तो उन्हें ये देवियां सिर्फ मूर्तियों और फोटो में ही अच्छी लगती हैं, भला असल जिंदगी में उनका क्या काम। देवी समान ये बच्चियां उनके लिए महज एक बोझ, एक पीड़ा बन कर रह जाती हैं। प्राचीन भारत में नारी काफी उन्नत व सुदृढ़ थीं। समाज में जितना नर का महत्व था, वहीं पर नारी को समान अधिकार और सम्मान मिलता था। उपनिषद काल में पुरुषों के साथ स्त्रियों को भी शिक्षित किया जाता था। सहशिक्षा व्यापक रूप से दिखती है। भगवान श्री रामचन्द्र के पुत्र लव-कुश के साथ ऋषि अत्रि की पुत्री आत्रेयी पढ़ती थी। नारी भी सैनिक शिक्षा लेती थी। महाभारत काल से नारी का पतन होना शुरू हुआ तो मध्यकाल में आते-आते नारी पूरी तरह से पुरुषों की गुलाम, दासी और भोग्या बन गई। भारतीय समाज शुरू से ही पुरुष प्रधान रहा है। यहां महिलाओं को हमेशा से दूसरे दर्जे का माना जाता है। यहां महिलाओं को अपने मन से कुछ करने की सख्त मनाही हैं। परिवार और समाज के लिए वे एक आश्रित से ज्यादा कुछ नहीं समझी जाती हैं। ऐसा माना जाता हैं कि उसे हर कदम पर पुरुष के सहारे की जरूरत पड़ेगी। भारत में जहाँ एक तरफ नारी को दुत्कारा जा रहा हैं उन पर अत्याचार किये जा रहे हैं। वही दूसरी तरफ इस समय भारत में कई महत्वपूर्ण पदों पर कई नारियां आसीन है। जहां भारत के सर्वोच्च पद को एक महिला सुशोभित कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत में कन्या भुर्ण हत्या, अत्याचार एवं बलात्कार के बढ़ते मामले इस छवि को दागदार बना रहा हैं। रूढि़वादी मानसिकता के कारण भारत कुरुतियों का शिकार होता जा रहा है। दुर्भाग्य से यह कुरुतियाँ इस देश की लक्ष्मी पर ग्रहण लगा रही हैं। अगर ये कुरुतियाँ यूँ ही अग्रसर रही तो आने वाले समय में नारी शब्द धीरे-धीरे मिट जायेगा। वक्त रहते हमें समझना होगा की नारी का अस्त्वि हमारें लिए कितना महत्वपूर्ण है। अगर आज सुधार नहीं किया गया तो आने वाला समय हमारें लिए बहुत ही कष्टदायक होगा। हमें वक्त रहते नारी की किमत समझनी होगी। समझना होगा कि आज नारी किसी भी दिशा में नर से कम नहीं है। आज लड़कियां लड़कों के समकक्ष ही नहीं उनसे आगे भी निकल चुकी हैं। रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, महादेवी वर्मा, लता मंगेशकर, सरोजनी नायडू, किरण बेदी, किरण मजूमदार, कल्पना चावला, पीटी ऊषा, मैरी कॉम, सुनीता विलियम्स, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल ने सिर्फ भारत में नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त की है। हर जगह अपना परचम लहराया हैं। और नारी होने का गौरव प्राप्त किया हैं। भारत देश में हजारों महिलाओं ने अपने कर्म, व्यवहार, त्याग और बलिदान से विश्व में आदर्श प्रस्तुत किया है। प्राचीनकाल से ही भारत में पुरुषों के साथ महिलाओं को भी समान अधिकार और सम्मान मिला है इसीलिए भारतीय संस्कृति और धर्म में नारियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इन भारतीय महिलाओं ने संस्कृति, समाज और सभ्यता को नया मोड़ दिया हैं। भारतीय इतिहास में इन महिलाओं के योगदान को कभी भी भूला नहीं जा सकता। आज नारी घर की चार दीवारी में बंद एक अबला नहीं बल्कि एक सशक्त व्यक्त्तिव की मालकिन बन चुकी है। खेल जगत, व्यापार जगत, फिल्म जगत, राजनीति, वकालत, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में नारी शक्ति का भी बोलबाला है। हर तरफ नारी अपनी शक्ति का परचम लहरा रही है। कुछ वर्षो से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में भी महिलाओं के प्रतिशत में सुखद बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई सरकारी महाविद्यालयों और संस्थानों में भी महिलाओं के लिए कुछ सीट्स रिजर्व रखी जाने लगी हैं ताकि महिलाएं उच्च शिक्षा और रोजगार प्राप्त कर सकें। नारी को मिलती बढ़ोतरी के बाद भी हमारे समाज की सोच फिर भी पिछड़ी हुई हैं। नारी को आगे बढ़ता हुआ देखकर भी नारी के साथ भेदभाव हो रहा हैं। इतना सब होने के बावजूद भी कई लोग इसी सोच से ग्रसित हैं कि लड़का ही बेहतर है। अगर इसी तरह की सोच मन में व्याप्त रही तो वो दिन दूर नहीं जहाँ पुरुष शादी से वंचित रह जाएंगे और मजबूरन उन्हें अपनी जिंदगी अकेले ही गुजारना पड़ेगी। बिन नारी के संसार की कल्पना करना मुश्किल हैं इसलिए समझना होगा कि नारी बिन ये संसार निर्विहीन हैं। सोच बदलनी होगी। विचार बदलने होंगे। नारी को भी नर के बराबर दर्जा देना होगा। और समझाना होगा कि बिन बेटी के घर की हर दरो-दीवारें फीकी ही रह जाती हैं चाहे उन्हें कितना ही रंग से रंग लिया जाएँ। सरकार भी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास कर रही है। माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बेटी बचाओ अभियान की रुपरेखा प्रस्तुत की है। जगह-जगह कन्या बचाओ की शपथ दिलाई जा रही हैं। फिलहाल ही राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साथ लाखों लोगो ने कन्या भूर्ण हत्या के खिलाफ बेटी बचाओं की शपथ व संकल्प लिया गया हैं। बदलाव की मुहीम तो शुरू हो चुकी हैं पर हमारी सोच नहीं बदल रही हैं। जहाँ एक तरफ शपथ ली जाती हैं तो दूसरी तरफ झाडि़यों में मासूम बेटी मिल जाती हैं। जहाँ बदलाव का बोलबाला हैं वही दूसरी तरफ कन्या भूर्ण हत्या, बलात्कार एवं अत्याचार जैसे संगीन अपराध बढ़ते जा रहे हैं। जगह-जगह लिंगानुपात की यह असमानता हमें आखिर कहां ले जा रही है। हम किस ओर अग्रसर हैं। प्रायः सुनने को मिलता हैं कि यह सब उच्च शिक्षा के आभाव के कारण हो रहा हैं पर अगर देखा जाए तो आजकल के शिक्षित लोग के बिच यह विचारधारा ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। शिक्षित लोग ज्यादा भेदभाव करते पाए जाते हैं। आधुनिक समाज में मध्ययुगीन कुरुतियाँ सोचने को विवश करती हैं कि क्या आज भी भारत में बेटी का जन्म समाज में उतना ही स्वीकार्य तथा उत्सवी है जितना बेटों का। शिक्षा चाहे कितनी भी उच्च हो जाएँ जब तक मन मस्तिष्क में बैठे नारी के प्रति भेदभाव के शैतान को जब तक हटाया नहीं जायेगा तब तक इस तरह की घटाएं हमारे हृदय को चीरती रहेंगी और रोज घटित होती रहेंगी। शिक्षा और संपन्नता भले ही समाज के विकास के आधार माने जाते हों लेकिन पढ़े लिखे समाज में भी लिंग भेद को महत्व दिया जा रहा है। बेटियां बचाने के लिए आज जन आंदोलन की जरूरत है। बड़े से बड़े अभियान की जरूरत हैं। लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में गिरावट आने पर कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिस देश में नारी की पूजा करना परंपरा हो उसी देश में महिलाओं की संख्या में गिरावट आए तो ये सवाल सोच-विचार का बन जाता है कि हम किस ओर अग्रसर हैं ? हमारी सोच में इतना घिनौनापन क्यूँ हैं ? वक्त रहते हमें अब समझना चाहिए कि बेटियां बोझ नहीं होती हैं और जो लोग ऐसा सोचते हैं हमें मिलकर उसकी सोच बदलनी चाहिए और उसका मानसिक विकास कर नारी हनन पर रोक लगानी चाहिए। फिलहाल दो हज़ार पंद्रह में हुवे गणतन्त्र दिवस पर महिला शक्ति का परिचय दिखाया गया। महिला सशक्तीकरण की बानगी देखने को मिली। वैसे हमारे देश में महिला सशक्तीकरण कई बार देखने को मिला चुका हैं। प्रधानमन्त्री के रूप में इंदिरा गांधी, राष्ट्रपति के रूप में प्रतिभा पाटिल और जगह-जगह पर मुख्यमंत्री के पद आसीन महिलाएं, तीनों सेना में उच्च पद पर आसीन महिलाएं जिन्होंने महिला सशक्तिकरण का उदाहरण दिया हैं। आज नारी न तो अबला है और न ही उसे पैरों की जूती कहा जा सकता है। आज की नारी अपने पैरों के ऊपर खड़ी हुई स्वावलम्बिनी है। वह किसी भी प्रकार से पुरुष पर आश्रित नहीं है और ना कभी होगी। बल्कि कभी परिचारिका बनकर तो कभी कार्यक्षेत्र की सहयोगिनी बनकर वह पुरुष वर्ग की मदद ही करती आई है। महिलाएं पुरुषों से किसी भी लिहाज से पीछे नहीं हैं। देश में करीब दो.सत्तर करोड़ महिलाएं व्यापार और नौकरी कर धन अर्जित कर रही हैं और अपने दम पर परिवार चलाती हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की ताकत भी उसकी बेटियां ही है। बेटियों के विकास से ही समाज का विकास है। हर क्षेत्र में बेटियां आगे बढ़ रही है। इसके बाद भी रुढि़वादी मानसिकता के वजह उनको दुनिया में आने से रोका जा रहा है। जगह-जगह जहाँ नारी आगे बढ़ रही हैं तो जगह-जगह उनका हनन हो रहा हैं। हम सबको मिलकर लोगों की मानसिकता को बदलना चाहिए। आजकल पढ़े-लिखे वर्ग में केवल एक ही बच्चे को दुनिया में लाने का चलन सा हो गया है। इसे रिवाज कहें या विधाता की देन या फिर महंगाई की मजबूरी या फिर आजकल यह भी कहा जाने लगा है कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है। पर अधिकतर के अंतर्मन में एक बच्चे के रूप में बेटे की चाहत ज्यादा होती हैं। उनकी सोच में यही होता हैं कि बेटा होगा तो वंश चलाएगा लेकिन वो ये क्यूँ भूल जाते हैं कि बिन बेटी के वंश चलायेंगे कैसे ? बेटी ही वंश चलाती हैं और बेटी ही परिवार की सरंचना करती हैं। बेटा एक वंश चलाता है तो बेटी दो वंश कि संचालिका होती है। अब समय के अनुसार चलना होगा और अपने अंतर्मन को बदलना होगा। इस लिंग भेद को मिटाना होगा। कन्या भुर्ण हत्या करने से माँ, बहन, बेटी, पत्नी, दोस्त और अनेकों प्रकार के रिश्ते खत्म हो जाते हैं। सोचो अगर बेटी नहीं होगी तो आपके वंश को अपनी कोख में धारण करने वाला कौन होगा। अगर बेटी नहीं होगी तो माँ का आंचल कहाँ से लाओगे ? बेटी नहीं होगी तो हाथ पे स्नेह का धागा कौन बांधेगा ? बेटी नहीं होगी तो बहु कहा से लाओगे ? बेटी नहीं होगी तो घर में छन-छन की आवाज कहाँ से आएगी ? बेटी नहीं हुई तो जब पिता अपने काम से थक कर घर को आयेंगे तो उनके लिए पानी का गिलास कौन लायेगा ? माँ का रसोई में हाथ कौन बटाएगा ? भाई के जब बहन नहीं होगी तो रक्षाबंधन जैसा त्यौहार कैसे मनाओगे ? बेटियों के साथ होते अन्याय अगर इसी तरह गतिमान रहे तो ये संसार कैसे बच पायेगा ? बेटी से हर रिश्ते बनते हैं। बिन बेटी के किसी भी रिश्ते का निर्माण सम्भव नहीं हैं। अब हमें नवनिर्माण हेतु इस जड़ को सही रूप से तैयार करना होगा। जिससे हमारी गलतियों की वजह से बेटियों के ऊपर सितम ना हो। क्यूंकि बेटियां तुलसी का पौध होती हैं, जिनमें खुद भगवान बसता हैं। बेटी ओंस की बूंद जैसी होती है। बेटियां हैं तो घर आंगन में खुशियाँ महकती हैं। बेटियां त्याग की मूर्त हैं। बेटी है तो कल है, बेटी से ही इस संसार में सुनहरा पल हैं। बेटियां नयनों की ज्योति हैं और सपनों की अंतरज्योति हैं। बेटियां पावन दुआ हैं। बेटी चेतना का स्वरूप है माँ आदिशक्ति का रूप हैं। मतलब साफ हैं बेटियां पनाह हैं। बेटियां हर रिश्तें का आधार हैं। बेटियां हैं तो परिवार हैं वरना रिश्ते सिर्फ दो-चार हैं। जब तक घर में बेटी ना हो घर की दरों-दीवारों को चाहे कितना भी रंग लिया जाएँ वो रंग हमेशा फीका ही रहता हैं। जब-जब धरती पे पाप अपनी चरम सीमा पर होता है तब तब इंसान अपनी इंसानियत भूल के अपने सभी नैतिक व मानवीय मूल्यों कों भूल जाता है तो कुदरत उसे अपने तरीके से समझाने का प्रयत्न करती है। जब से नारी के साथ अत्याचार बढ़ा हैं तब से प्रकृति ने क्रोध के स्वर में मानव जाती को समझाया हैं। प्रकृति ने कई बार कुदरत के इशारें पर अपना त्राहिमाम रूप उजागर किया है और इस कारण पापियों के साथ कुछ अच्छे लोग भी इस त्राहिमाम में बलि चढ़ जाते है। आज हमारे नैतिक मूल्य और मानवीय मूल्य दोनो कफन ओढ़ चुके है जिस कारण आज हमारा भविष्य अंधकारमय हो गया है। प्रायः देखे तो इस युग में सभी मानव अपना सही मानवीय मूल्य को पहचानते हैं फिर भी मोह माया में मानवीय मूल्यों कों और इंसानियत कों परे रख देते है और स्वार्थी हो जाते है आज जरुरी है कि हम सभी फिर से इंसान बने और दया, समर्पण, मानवता की राह पर चले। तभी समाज में बदलाव सम्भव हैं। जैसे एक एक ईंट से घर कि दिवार खड़ी हो जाती है वैसे ही एक एक मनुष्य को शिक्षित करने से सुन्दर समाज का निर्माण हो सकता है। आज हमारे समाज में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं क्यूंकि हमारें समाज में मानव सभ्य नहीं हैं। मानव इसलिए सभ्य नहीं हैं क्यूंकि उनके अन्दर मानवता का स्तर खत्म हो रहा हैं। उनमें मानवता इसलिए नहीं हैं क्यूंकि शिक्षा का स्तर गिर चुका हैं। शिक्षा का स्तर इसलिए गिर चुका हैं क्यूंकि शिक्षा देंने वाले शिक्षिक अच्छे नहीं हैं। शिक्षिक इसलिए अच्छे नहीं हैं क्यूंकि सही लोगों का चयन नहीं किया जाता हैं। गलत लोगो का चयन इसलिए होता हैं क्यूंकि हमारे देश में आरक्षण रूपी राक्षस हावी रहता हैं और आरक्षण इसलिए हैं क्यूंकि बड़े-बड़े नेता लोग इसके पक्ष में खडे़ और अडे़ हैं नेता लोग इसलिए पक्ष में हैं क्यूंकि उन्हें वोट देकर हम ही विजयी बनाते हैं और विजयी भी हम योग्यता देखकर नहीं पार्टी, धर्म और जाती देखकर चुनते हैं और हमारा यही एक गलत फैसला किसी की जिंदगी तबाह कर रहा हैं। प्रायः देखा जाए तो आज कन्या भूर्ण हत्या का मुख्यतः कारण और भी बहुत हैं पहला कारण था लिंग भेदभाव। जहाँ बेटी को बेटे के आगे कम मानते हैं। पहले कारण में बेटे से वंश चलता हैं यही सोच थी। पर बहुत से और भी उदाहरण हैं जिससे माता-पिता बेटियों को इस संसार में आने से रोकने के लिए मजबूर हो जाते हैं या फिर जान बुझकर मजबुरी का हवाला देकर नारी का हनन कर रहे है। जब तक बेटी माँ की कोख में रहती हैं तब तक वो महफूज रहती हैं जब वो संसार में आती हैं तो उसे अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं। पहले तो वो कोख में सुरक्षित नहीं। फिर भी वो जन्म लेती हैं तो बेटी होने का इल्जाम सहती हैं। जब यहाँ से भी वो खुद को सुरक्षित कर लेती हैं तो हमारे समाज में फैले असमाजिक तत्व उसे हवस की दृष्टि से देखने लगते हैं उसे हर राह पे, हर जगह पे उनकी गंदी नजरे खुरेचती हैं जिससे वो खुद को असहज महसूस करती हैं। उनकी नजरों से बच भी जाएँ तो किसी न किसी चैराहे पे या फिर किसी सुनसान गलियों में उसकी इज्जत तार-तार करने के लिए विकृत मानसिकता के तत्व ताक मैं बैठे रहते हैं। प्यार के नाम पर नारी को हवस का शिकार बनाने के लिए हर राह पर नरभक्षी खड़े हैं अगर प्यार में उसे पा नहीं सकते तो तेजाब से उसे यातना देने का प्रयत्न करते हैं। या फिर उसकी गन्दी तस्वीर, विडियों बनाकर उसे शोषित करता है। अगर वो उसके इशारों पे नहीं चलती है तो उसकी तस्वीरें, विडियों इन्टरनेट, मोबाइल के माध्यम से उसे बदनाम करने का प्रयत्न करता हैं। अगर यहाँ भी उसके भाग्य ने साथ दिया तो दहेज लोभी दानव उसे निगलने को तैयार बैठा हैं। मतलब साफ है कि नारी कहीं भी सुरक्षित नहीं है। आज देखा जाये तो प्रायः माता-पिता को इसी का भय ज्यादा सताने लगा हैं। इस वजह से भी बेटियों को गर्भ में ही मारने लगे हैं अगर हम चाहें तो हम सब मिलकर इस भय को दूर कर सकते हैं। क्यूंकि जब तक ये भय रहेगा तब तक बेटियां ना कोख में सुरक्षित हैं ना कोख के बहार। इसलिए सबसे पहले हमें समाज को शिक्षित करना होगा। हर घर में अच्छे संस्कारों का निर्माण कर, एक सभ्य समाज का निर्माण करना होगा। हमें बदलना होगा, हमें सम्भलना होगा, हर कदम पर नारी की रक्षा करनी होगी और नारी पे होते अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठानी होगी। पर हम तो बुजदिल हैं क्यूंकि हम अन्याय के विरुद्ध ना तो लड़ सकते हैं ना झगड़ सकते है ना ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते है ना ही उसके विरुद्ध खड़े हो सकते हैं। ये आज का सच हैं कि हर जगह वहशी फैल चुके हैं। हर जगह नारी को नोचा जा रहा हैं। जिस आंचल की छाव में पले बढ़े वहीं आज सरेआम उसे ही उतार रहे हैं। जहाँ कभी नजरों की शर्म हुआ करती थी आज उन्हीं नजरों से बहन बेटियों को ताड़ रहे हैं। कहीं पैसो के दम पर तो कहीं रुतबे के दम पर तो कहीं प्यार के नाम पर नारी को हवस का शिकार बनाया जा रहा हैं। यही एक भय हर माँ बाप को सताने लगा हैं इसी की वजह से बेटी का गला कोख में घोंटा जा रहा हैं। बेटी के साथ होने वाली अनहोनी के लिए भय रखना लाजमी हैं पर इस भय के लिए कन्या भूर्ण हत्या करना मतलब अन्याय के सामने घुटने टेक देना। हमें तो अन्याय के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। किसी के कारण हम बेटियों को इस संसार में आने से तो नहीं रोक सकते। अन्याय सहना सबसे बड़ा जुर्म हैं इसलिए इस गंदी सोच को हमें जड़ से उखाड़ना होगा और जो मन मस्तिष्क में भय बैठा हैं उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपनी बेटी के लिए चिंतिंत होना लाजमी हैं क्यूंकि जब बेटी पैदा होती हैं तब से लेकर जब तक वो सयानी होती है और जब बाहर अपना पहला कदम रखती है तो उसके लिए चिंता होने लगती है कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाएँ क्योंकि आज समाज की मानसिकता विकृत हो चुकी है। जिसके कई मुख्य कारण आप पढ़ चुके हैं। हमारा ये कैसा सभ्य समाज हैं जहाँ एक तरफ हम बेटी बचाओं का अभियान चलाते हैं तो एक तरफ बेटियों को सरेआम नोंचा जा रहा हैं। समझ में नहीं आता कि इन वहशियों को खत्म करने का अभियान कब चलेगा। कब ये घिनोने कृत्य रुकेंगे। कब नारी खुद को सुरक्षित महसूस करेगी। हर तरफ नारी के लिए खौफ पसरा हुआ हैं। जहाँ भी जाए उसे ये ही भय रहता हैं। नारी हर समय, हर जगह दर्द से कराह रही हैं। उसका दर्द, उसके अन्तर्मन कि पिड़ा समझने के लिए कौन आगे आयेगा ? द्रोपदी को चीर हरण से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था पर आज के युग में द्रोपदी असंख्य है और उन्हें बचाने के लिए भगवान अवतार नहीें लेंगे। आज अगर द्रोपदी को कोई बचा सकता है तो वो है खुद नारी। उसे माँ काली का रूप धरना होगा और विनाश करना होगा हर बुराई का। तभी वो खुद को सुरक्षित कर सकती है। हां आज के युग को देखकर अब आभास होने लगा है कि इस धरती पे अब खुदा नहीं रहता वरना जब जब धरती पे अन्याय हुआ है उसने अन्याय का पतन किया है। पर आज तो अन्याय ही सच्चाई और अच्छाई का पतन कर रहा हैं। हर तरफ इंसान और राहें लहुलुहान है। इसलिए नारी को खुदा के भरोसे नहीं खुद के भरोसे अन्याय से लड़ना होगा वरना अन्याय एक दिन इंसानियत का जड़ से पतन कर देगा। इसलिए अब नारी कोे माँ काली का रूप धरना ही होगा। आज नारी के साथ होने वाले अन्याय का एक मुख्य और बड़ा कारण कुछ महिलायें भी हैं जो महिला होकर भी नारी को मोह माया के लालच में आकर अपनी ही जाती को भोग्या के रूप में चित्रित कर रही हैं। जो नारी होकर भी नारी का दर्द नहीं समझती हैं। आज महिला ही महिला कि दुश्मन बन बैठी हैं। घर के पुरुष तो फिर भी बेटी होने पर भी संतुष्ट हो जाते हैं पर घर की और बाहर की कुछ महिलायें ही ताने मार-मार कर उस औरत का जीना मुश्किल कर देती हैं। मतलब हर तरफ नारी की हार नजर आती हैं। यहाँ तक अगर किसी नारी के बार-बार बेटियां ही हुई तो वो अपने बेटे की दूसरी शादी करवाने के लिए योजनाएं बनाने लग जाती हैं। अगर नारी माँ नहीं बन पाती है तो उसे बांझ होने का अहसास भी खुद नारी ही करवाती हैं। नारी को देह व्यापार में धकेलने के लिए पुरुष वर्ग के साथ महिला वर्ग भी शामिल हैं। नारी का दर्द खुद नारी भी महसूस नहीं करती। एक बेटी को कोख में मारने के लिए भी माँ ही हामी भरती हैं। वो खुद भूल जाती हैं कि मैं भी नारी हूँ और अगर उस समय मेरे माता-पिता मुझे कोख में मार देते तो मैं ये युग कहाँ से देखती। हर जगह बेटे की आकांक्षा मन में धरना दिए हुवे बैठी हैं। पर जब किसी गाय या भैंस के बछडी या कटड़ी का जन्म होता हैं तो कितने खुश होते हैं तब क्यों खुशी मनाई जाती हैं और वहीं जब घर की बहु कन्या को जन्म देती है तो कितनी मायूसी छा जाती हैं। कितना फर्क हैं ना हमारी सोच-विचार में। आज नारी खुद को कहीं भी सहज महसूस नहीं करती हैं। चुपचाप सितम सहती रहती हैं और उफ तक नहीं करती। नारी इतनी सहनशील हैं कि दर्द पाकर भी बदलें में प्यार देना पसंद करती हैं। पर कहीं ना कहीं उनके मन-मस्तिष्क में एक भय प्रायः उसके इर्द गिर्द घूमता रहता हैं। हर तरफ वो असुरक्षित हैं। कानून भी मजाक बन कर रह गया हैं। एक तरफ सभ्य समाज का नाम लेकर नारी पे अत्याचार करने वाले पुरुष वर्ग तो दूसरी तरफ स्त्री वर्ग भी नारी की दुश्मन बन कर बैठी हैं। मतलब हर तरफ भय ने अपना शिकंजा कसा हुआ हैं। महिलाओं के साथ हो रहे इन हादसों को देखकर व सुनकर मन बहुत चिंतित हो जाता हैं। ये कैसी विडंबना है कि हमारे देश में नारी सशक्तिकरण और नारी मुक्ति के जितने दावे किये जाते हैं उतना ही नारी शोषण और अत्याचारों की घटनाएँ बढती जा रही हैं। नारी के सशक्तिकरण की जब भी बात आती हैं, तब तब कहाँ जाता हैं की नारी को अगर इन अत्याचारों और शोषण से मुक्त करवाना हैं तो सबसे पहले नारी को शिक्षित करना होगा। पर अगर देखा जाएँ तो पिछड़ी और अशिक्षित महिलाओं की बात तो दूर जो आज शिक्षित महिलाएं भी असुरक्षित हैं क्यांेंकि निजी से लेकर सार्वजनिक जीवन में, घर से लेकर बाहर, विधालय से लेकर कार्यालय तक, खेल से लेकर फिल्मी जगत तक और राजनीति जैसे क्षेत्रों में भी महिलाएं उत्पीड़न और शोषण का शिकार हो रही हैं। हमारे देश में राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग जैसी बड़ी संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार और संसाधन मुहैया कराये गए हैं। लेकिन फिर भी आज भी हमारें देश कि नारियाँ इन्साफ के लिए खुद से और समाज से लड़ती रहती हैं और ताकती रहती हैं मुंह न्याय के लिए। नारी पे हो रहे हर अत्याचार और शोषण के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के कानून भी बनाएं गये हैं फिर भी उनके साथ अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। हर तरफ एक भय नारी के जीवन में व्याप्त होता जा रहा हैं। जहाँ एक तरफ नारी आसमान की उच्चाईयां छू रही हैं तो दूसरी तरफ उनके साथ भेदभाव, शोषण और अत्याचार किया जा रहा हैं। जिस तरह से नारी के साथ अत्याचार हो रहे हैं तो इन सबके लिए अगर कोई दोषी हैं तो वो हैं हमारी मानसिकता, समाज और सरकार में उच्चं पद पर आसीन अधिकारीयों का गैर जिम्मेदार व्यवहार। जो सब होते देखकर भी चुप रहते हैं। हमारे राजनेता जो आये दिन बेढंगे ब्यान देते रहते हैं और अपराध करने वालों के हौंसलें को बढ़ावा देते हैं। कानून कितना भी सख्त हो जाएँ पर जब तक हमारी मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक अत्याचार कम नहीं होंगे। प्रायः देखा जाता हैं कि जब भी नारी पर अत्याचार होता हैं तो अपराधी को सजा देने की जगह पीडि़त नारी को ही दोषी ठहरा दिया जाता हैं और उसे ही ताने और गंदी नजरों का शिकार होना पड़ता हैं। अगर नारी अपने साथ हुवे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाना भी चाहे तो घर वाले अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा का हवाला देकर उसे आवाज उठाने के लिए रोकते हैं और उसके साथ हुवे अत्याचारों को दबाने का प्रयत्न करते हैं और फिर भी वो आवाज उठाती हैं तो उसे डरा धमाका कर चुप करा दिया जाता हैं। नारी कितनी भी दुःखी हो उसका दर्द कोई नहीं समझना चाहता। उसके साथ हुवे अत्याचारों के लिए कोई आवाज नहीं उठाना चाहता। यहाँ तक माता-पिता भी उसे चुप करवा कर देते हैं। हमारे समाज के लोग नारी को सुरक्षा देने की जगह उसे भयभीत ज्यादा करते हैं। पीडि़ता को न्याय दिलाने कि जगह उसके चरित्र पे ही उँगलियाँ उठा दी जाती हैं। हमारे कानून में इतना लचीलापन हैं कि यहाँ दोषी को सजा देने के रास्ते कम, उसे जुर्म से बाहर निकलने के रास्ते ज्यादा उपलब्ध हैं। बाहुबली, रसूखदार और पैसेवालें पैसों के दम पर कानून को ही खरीद लेते हैं। जिससे अत्याचार के विरुद्ध उठाई गई आवाज वही दब कर रह जाती हैं। आज यही सब दर्द देखकर बेटियों को कोख में मारने का प्रयत्न हो रहा हैं पर ये सब सोचकर कोई कन्या भूर्ण हत्या करता हैं तो वो गलत हैं और वो गलत मानसिकता के शिकार हैं। बेटी को कोख में मारने की जगह बेटी को इतना मजबूत बनाओ की उसके साथ शोषण और अत्याचार करने के लिए कोई भी असमाजिक तत्व नजर ना उठा सके। जब माता-पिता एक बेटी को कोख में मरवाते है तो वो अनेक रिश्तो का पतन कर देते है। कन्या भुर्ण हत्या के पिछे ना जाने कितने रहस्य, दर्द छिपे होते है। जब कोख में एक बेटी पलती है तो आज के युग को देखकर माता-पिता का चिंतित होना लाजमी बन जाता है। तब वो भय इस कदर हावी हो जाता है कि जुर्म दस्तक देने लगता है। वो भय तभी खत्म हो सकता है जब उन्हें कोई जागरूक करें। एक छोटी सी दास्तान है जिसमें पिता अपनी बेटी को कोख में ही मरवाना चाहता है उसे उसकी पत्नी रोकने का प्रयास भी करती है लेकिन जब पति अपने अन्तर्मन की पिड़ा अपनी पत्नी को बताता है तो पत्नी निःशब्द हो जाती है कि तभी बेटी अपनी माँ की कोख में पुकार करती हैं और अपने मात-पिता से जीवन जीने की गुहार करती हैं। मेरी इस कविता का शीर्षक बस यही हैं कि कुछ लोग बेटी को बोझ समझते हैं तो कुछ इस खौफ से बेटी को जन्म नहीं देते कि दहेज के लोभी, वहशियों से कैसे बचायेंगे। पर उनको एक ही जवाब - बेटी को कायरता की जिन्दगी मत जीने दो, उसे भी बेटो जितना सम्मान दो, उसके हौसलों को ऊँची उड़ान दो। हम बदलेंगे तो समाज बदलेगा और जब समाज बदलेगा तो एक सुंदर संसार का निर्माण होगा। इस संसार में जीने का हक सबको हैं और ये हक छीनने का अधिकार ना तो इंसानों को है और ना ही इंसानों द्वारा बनाएं गए किसी समाज को हैं। बेटियां भी उड़ान भरना जानती हैं। आप बस उसका सहयोग करो और उसके हौंसलों को मजबूत बनाएं। राह वो खुद ब खुद बनालेगी। आज हमें बदलाव के लिए बहुत प्रयत्न करने होंगे और हर उस चीज का बहिष्कार करना होगा जिसके कारण नारी के साथ शोषण और अत्याचार बढ़ रहे हैं। हैवानियत का जो ये गंदा दौर चला हैं उसकी जड़ों को काटना होगा तभी नारी को खुले आसमान में पंख फैला कर जी सकेगी और उसे खुशियों से भरी जीने की राह मिलेगी। दुनियाभर में नारी को समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन हकीकत तो यही है कि उसे बचपन से लेकर बुढ़ापे तक जुल्मों का शिकार बनाया जाता है। भारत में तो भुर्ण हत्या, बाल-विवाह, बलात्कार , दहेज, सती, देवदासी और विधवाओं के प्रति हेय-दृष्टि जैसी पुरातन परम्पराओं के नाम पर नारी दासता के पन्नों पर हर रोज प्रताड़ना की नई कहानी लिखी जा रही है। आज जिस तरह से बेटी बचाओं अभियान, नारी पर अत्याचार बंद करों, हमें आजादी चाहिए जैसे अभियान होने के बावजूद भी अत्याचारों और शोषण में वृद्धि ही हुई हैं इसका मुख्य कारण हैं इन्टरनेट, मोबाइल और मिडिया जिसमें नारी को सिर्फ भोग्या के रूप में परोसा जा रहा हैं। किसी भी वस्तु का प्रचार प्रसार करने के लिए नारी के देह का प्रदर्शन किया जा रहा हैं। जिसके कारण हमारे समाज में नारी के प्रति विकर्ष्ण और गंदी मानसिकता पैदा हो रही हैं जिसके कारण बलात्कार, अत्याचार और यौन उत्पीड़न जैसी गम्भीर समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही हैं। फिल्मों का जिस तरह स्तर गिरा हैं उससे साफ जाहिर होता हैं कि हमारी मानसिकता कितनी गिर चुकी हैं। और इस तरह के कार्य में नारी ही उनका साथ दे रही है चन्द दौलत और शोहरत के खातिर। पर उन नारियों को ऐसा करने के लिए बढ़ावा भी कुछ असमाजिक पुरूष वर्ग ही तो देता है। जिस वजह से खुद औरत दुसरी औरत के लिए खाई तैयार कर रही है। आजकल एक विज्ञापन आता हैं कि बेटे रोते नहीं। उसे बचपन से लेकर जवानी तक यही कहाँ जाता हैं और वो लड़का बड़ा होकर नारी पे हाथ उठाता हैं और अंत में कहाँ जाता हैं काश बेटे को बचपन में ये भी सिखाया जाता कि बेटे बेटियों को नहीं रुलाते हैं और ना ही उनपे हाथ उठाते हैं। अगर ऐसा बचपन में हो जाता तो शायद नारी पे अत्याचार नहीं होते। ये हकीकत हैं अगर हमे अच्छे संसार का निर्माण करना हैं तो सबसे पहले एक अच्छी नींव तैयार करनी होगी। बचपन से लेकर जवानी तक लड़कों के सामने बेटी को दोयम दर्जे का समझा जाता हैं। अगर बचपन में लड़कों को अच्छे संस्कार दिए जाएं और उन्हें लड़की का मान सम्मान करना सिखाया जाएँ तो इस तरह के गंभीर घटनाएँ उत्पन्न नहीं होगी। इसलिए बच्चों को अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा देनी बहुत जरूरी हैं। बेटियां अपने माता-पिता की आँखों में आंसू आने से पहले उनका दर्द पहचान लेती हैं। और वहीं दुसरी तरफ बेटे माता-पिता का दर्द समझने कि बात तो दूर वो उनकी आँखों में आंसू देने की वजह खुद बनते हैं। रोटी और बेटी दोनों का एक दुसरे के साथ बहुत गहरा सम्बन्ध हैं। जिस घर में बेटी होती हैं उस घर में रोटी मिलना तो निश्चित रहता हैं। अन्यथा बेटे चाहे चार-पांच ही हों, पर लड़ेंगें इस बात पर की माता-पिता को अपने पास कौन रखे। आजकल ऐसे दिन भी आ गये हैं कि हर शहर में वृद्धाश्रम खुलने लगे हैं क्यूंकि आजकल के आधुनिक युवाओं के लिए माता-पिता बोझ बन जाते हैं। ये सत्य हैं कि बेटियों के लिए माता-पिता कभी बोझ नहीं बनते हैं। आज आपके पास माँ, दादी, नानी, बहन, भुआ, काकी, भाभी, चाची, ताई, मौसी, पत्नी अनंत रिश्ते हैं। ये रिश्ते आज आपके पास क्यूँ हैं क्यूंकि बुजुर्गों ने कन्या भुर्ण हत्या को फैशन नहीं बनाया था। पुरुष चाहें किसी भी तरह स्त्री को सता लें, पीड़ा दें, या मानमर्दन करें। फिर भी चाहें अहोई अष्टमी में माँ हो या रक्षाबंधन में बहन हो या करवा चैथ में पत्नी हो नारी हर रूप में पुरुष की सुरक्षा, सुख एवं समृद्धि के लिए ही निरंतर तप और वृत करती रहती है। नारी दया और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं जिसें आज के सभ्य पुरुष समझ नहीं पा रहे हैं। पुरुष वर्ग को नारी का क्षमा, दया, अहिंसा, त्याग जैसा रूप ही पसंद आता हैं उन्हें नारी का अधिकार, संघर्ष, संग्राम, प्रतिशोध, हिंसा, दौड़-धुप, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने वाला रूप उन्हें पसंद नहीं आता हैं। मतलब साफ हैं पुरुष वर्ग को नारी का तितली जैसा रूप बिल्कुल पसंद नहीं आता हैं उन्हें नारी चुप और शांत रहने वाली पसंद हैं जो उनके किये हुवे अत्याचारों के सामने मौन रहें और सब अत्याचार सहती रहें। पर युग बदल रहा हैं हर तरफ बदलाव हो रहा हैं फिर नारी क्यूँ अशांत हैं उसे भी अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा होना हैं और उसे तितली का रूप के साथ मधुमक्खी का रूप भी धारण करना होगा जो अन्याय करने वालों को डस सके। नारी अपने साथ होते जुल्मों से परेशान हो चुकी है। कुछ मर्द जिनकी गिरी हुई मानसिकता के कारण उसके अन्तर्मन को बार बार अधात पहुंचता है। वो अपने मन की पीड़ा किसी से कह भी नहीं पाती हैं। मन ही मन में खुद कोसती हुई खुद से ही सवाल करती है। और जब जब वो खुद से सवाल करती है तो उसके मन में क्रोध उत्पन्न होता है। नारी का यु क्रोधित होना भी सही है और सच में आज के युग को देखते हुवे उसे एकदिन ये कदम उठाना पड़ेगा। क्योंकि आज नारी पे होने वालें अत्याचारों की संख्या अनगिनत हैं। रोज कोई ना कोई अपराध नारी के जीवन की डोर काट रहा हैं। हमें अब बदलाव के लिए नारी के जीवन की डोर को मजबूत करना होगा और नारी के साथ होने वालें अत्याचारों की जड़ काटनी होगी। जब तक नारी समाज में सुरक्षित नहीं तब तक हमें खुद को आजाद कहना गलत होगा। हम जिस समाज में रहते हैं अगर उस समाज में हमारी माँ, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं तो फिर हमें उस समाज में रहने का भी कोई अधिकार नहीं हैं। इसलिए बदलना होगा ये सब कुछ और करनी होगी नई शुरुवात। एक अच्छी दिशा का निर्माण करना होगा। जहाँ बेटियां कोख से लेकर हर राह पर सुरक्षित रहे। नारी का त्याग, बलिदान, प्रेम, स्नेह हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। आज जहाँ नारी अपने घर की दहलीज से बाहर निकल अपने माता-पिता का और खुद का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं हमें उनके इस हौंसले को सलाम करते हुवें उनका हर डगर पे साथ निभाना होगा। उनकी हिम्मत बन उनकों मजबूत बनाना होगा। हम चाहे तो इस समाज में बहुत कुछ बदल सकते हैं। सबसे पहले अगर कुछ बदलना हैं तो वो हमारी सोच। अगर हम अपनी सोच बदले तो बेटियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं होगा। कन्या भूर्ण हत्या और हैवानियत को रोकने के लिए हमें समाज को जागरूक करना होगा। हर घर को शिक्षित करना होगा। नारी के शौर्य, त्याग, बलिदान एवं उनके अभिमान की गाथाएँ सुनानी होंगी। हर घर में नारी के प्रति अपना व्यवहार बदलना होगा। हर घर को जागृत करना होगा और उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही बेटियों के लिए योजनाओं के बारें में बताना होगा। और उन्हें बताना होगा कि कन्या भूर्ण हत्या, दहेज मांगना, नारी से छेड़छाड़, उसका मानमर्दन करना, उसे प्रताडि़त और शोषित करना कितना बड़ा अपराध हैं। नारियों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध देश के प्रत्येक नागरिक को आगे आने की जरूरत है। नारियों के सशक्तिकरण में हर प्रकार का सहयोग देने की जरूरत है। इस काम की शुरूआत सबसे पहले अपने घर से होनी चाहिए क्योंकि जब तक हम खुद नहीं सुधरेंगे तब तक हमें सभ्य समाज कि परिकल्पना करनी नहीं चाहिए। नारी सृजन की शक्ति। यह शक्ति जिस रूप में प्रकट होती है, वह उसी रूप में परिलक्षित भी होती है। नारी हमारे बिच अनेकों में विघमान हैं उसके हर रूप को समझना होगा। जब नारी अपने बच्चें को दूध पिलाती है तो वह वात्सल्य व ममता का साकार रूप होती है। जब नारी अपने साथ हुवे अत्याचारों के खिलाफ खड़ी होकर हुंकार भरती है, तो वह माँ दुर्गा व माँ काली रूप विकराल रूप होती है और फिर उसके साहस व दृढ़ता के सामने ना तो कोई टिका है और ना ही कोई टिक सकता हैं। जब नारी अपनी सुकोमल संवेदनाओं के संग विचरती है तो सृष्टि में सौंदर्य की एक नई आशा, दिव्य प्रकाश के रूप में बिखर जाता है, परन्तु जब नारी अपने प्राकृतिक एवं पवित्र भाव को भूल जाती है तब वह भोग्या, अबला के रूप में शोषित, प्रताडि़त व दंडित की जाती है। आज नारी को खुद का उत्थान स्वयं ही करना होगा। तभी बदलाव सम्भव हैं। स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था - नारी का उत्थान स्वयं नारी ही करेगी, कोई और उसे उठा नहीं सकता। वह स्वयं उठेगी। बस, उसमें उसे सहयोग की आवश्यकता है और जब वह उठ खड़ी होगी तो दुनियां की कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। वह उठेगी और समस्त विश्व को अपनी जादुई कुशलता से चमत्कृत करेगी। आज नारी खुद को सम्भालें और अपना सही रूप पहचानें। अपने अंदर की आंतरिक शक्तियों को उभारें और उसे रचनात्मक कार्यों में लगा दें, जिससे नारी खुद को मजबूत बना सकेगी और फिर नारी शक्ति के रूप में आगे बढ़ सकेगी। उसे फिर शोषित बेडि़यों में नहीं बाँधा जा सकेगा। उसे स्वयं में साहस, शौर्य, पवित्रता को फिर से बढ़ाना होगा। जिससे कोई भी उसे अबला और भोग्या के रूप में ना देख सके। नारी खुद के रूप की पहचान जिस दिन कर लेगी उस दिन से उसका बाजारीकरण नहीं होगा और वह अश्लीलता की दहलीज पर बिकने से बच सकेगी। शुचिभ्राजा, उपसो नवेदा यशस्वतीर पस्युतो न सत्याः। अर्थात श्रध्दा, प्रेम, भक्ति, सेवा, समानता की प्रतीक नारी पवित्र, निष्कलंक, आचार के प्रकाश से सुशोभित, प्रातःकाल के समान ह्रदय को पवित्र करने वाली, लौकिक, कुटिलता से अनभिज्ञ, निष्पाप, उत्तम, यशमुक्त, नित्य, उत्तम कार्य की इच्छा करने वाली, संकर्मण्य और सत्य व्यवहार करने वाली देवी है। सही मायने में देखा जाएँ तो आप किसी भी ग्रन्थ को या किसी भी धार्मिक पुस्तक को शांत चित से पढेंगे तो उसमें आप नारी के अनेकों रूप के साथ उसकी ममता, त्याग, बलिदान, उनका निश्छल प्रेम, वात्सल्य इत्यादि के वर्णन से जरुर रूबरू होंगे। नारी ममता, वात्सल्य, दया, करुणा, सेवा, सहयोग, प्रेम और संवेदना की जीती जागती तस्वीर है। उसमें श्रद्धा, दया, भक्ति और त्याग का जीवित चित्रण है। कला चेतना उसमें विद्यमान है। पुरुष में बल, शौर्य, साहस, पराक्रम आदि गुण प्रधान होते है परन्तु नारी संवेदना की प्रधान होती है। वह ईश्वर की अनुपम कृति है जो संसार में ममता, करुणा, प्रेम, संवेदना का संचार करती है। वह मातृत्व व वात्सल्य की विलक्षण विभूति है जो ईश्वर का प्रतिनिधित्व करती है। नारी के द्वारा ही संस्कृति जीवन्त रहती है उसी के द्वारा अगली पीढ़ी संचारित होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि दस उपाध्यायों से एक आचार्य श्रेष्ठ है और एक सौ आचार्यों से एक पिता श्रेष्ठ है लेकिन एक हज़ार पिताओं से एक माता उत्तम है। नारी श्रद्धेय का रूप हैं जो एक धुप-अगरबत्ती की तरह होती है जो अपना सर्वस्व हवन कर सम्पूर्ण जगत को सुगन्धित करती है और अन्त में स्वयं भस्मीभूत होकर राख में प्रवर्तित हो जाती है। नारी प्राचीन काल से ही अपनी अदभुत शक्ति की प्रतिभा, चातुर्य, स्नेहशीलता, धैर्य, समझ, सौन्दर्य के कारण हर मोर्चे पर पुरुष से आगे रही है। जहां वह पति को पूज्य व देव तुल्य मानती है। नारी बेटी हैं, बहन हैं, पत्नी हैं, माता हैं, भाभी हैं, सहयोगी हैं, साथी हैं, प्रेमिका हैं। नारी एक ऐसा वृक्ष है जो छाया देकर भी सुगन्ध फैलाता है। नारी अपनी सन्तान के लिए ममता का भाव, पति के लिए त्याग व समपर्ण, मानवता के लिए दया के भाव और जीव-जन्तु के लिए करुणा के भाव रखने वाली नारी ही तो है। नारी संसार का हिस्सा ही नहीं अपितु नारी से ही संसार हैं। भारतीय समाज में नारी को एक देवी रूप माना हैं वह आदि-शक्ति का रूप हैं। नारी का सौन्दर्य, उसकी कोमलता और उसकी मोहकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं। बिना अपने आप को विज्ञापित किए, वह एक साथ कई तरह के मोर्चो की कमान संभाल लेती है। सन्तान उत्पत्ति से लेकर उसके पालन तक, प्रेम से लेकर विवाहित जीवन तक वह निरन्तर प्रेरणा की मिशाल बनी रहती है। आज बड़ा से बड़ा विद्वान, कलाकार, वीर योद्धा, उसी की कोख से उत्पन्न होते हैं। नारी केवल नर का मादा रूप मात्र नहीं है। नारी तो एक शाश्वत, चिरन्तन दिव्य रूप है। नारी के इतने सारे रूप होकर भी उसे अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, संगठित होना पड़ रहा है और उसे खुद के रूप को उजागर करने के लिए खुद से और इस समाज से लड़ना पड़ रहा है। पुरुष वर्ग नारियों पर अत्याचार करते हैं तो कहीं-कहीं नारी ही नारियों पर अत्याचार कर रही हैं। आखिर क्यों हो रहा हैं ये सब ? क्यूँ नारी शोषित हो रही हैं ? नारी को देवी का रूप जानकर भी उसे क्यों प्रताडि़त किया जा रहा हैं ? नारी को शोषित और प्रताडि़त होने का एक मुख्य कारण ये भी हैं कि उसे बचपन से ही माता-पिता प्रेम, स्नेह और दुलार के साथ-साथ उसके अन्तर्मन में पराया धन की भावना भर देते हैं। बंदिशों की बेडि़यों में जकड़ी नारी आजादी चाहती है। माँ-बाप के घर में जो हजारों बंदिशें उन पर होती है, वे सोचती है कि शादी के बाद उन बंदिशों से मुक्ति मिल जाएगी। पर ससुराल जाकर वो और ज्यादा बंदिशों और बेडि़यों में जकड़ दी जाती हैं। हिन्दुस्तान में एक समय ऐसा भी था, जब नारियों को अपना जीवन साथी चुनने की पूर्ण आजादी हुआ करती थी, लेकिन आधुनिक युग में इस आजादी को छीन लिया हैं। नारी हर तरह के कष्ट सह लेती हैं क्यूंकि उसे बचपन में शिक्षा के रूप में यही सिखाया जाता हैं। जिसके परिणाम स्वरूप वह हर तरह से शोषित होकर भी चुप रहती हैं। यही रुढि़वादी सोच की वजह से नारी को अबला और भोग्या के रूप में उसकी पहचान बनती रही। अब हमें पुरानी विचारधाराओं की जड़ को काटना होगा और उसमें अब नए पौध विकसित करने होंगे। समाज में एक अच्छी पहल कर नारी के प्रति सम्मान व स्नेह के भाव उजागर करने होंगे। नारी के साथ हो रही घरेलू हिंसा, अत्याचार, बलात्कार, कन्या भूर्ण हत्या, दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा जैसे घोर अपराधों को खत्म करना होगा। नारी को शिक्षित कर उसके अंदर आत्मविश्वास भरना होगा और उसे इतना मजबूत बनाना होगा कि कोई भी उसे शोषित करने से पहले हजार बार सोचे। हम सबको यह संकल्प लेना होगा कि अब और नहीं, अब किसी भी इंद्र के पाप का दंड अब किसी भी आहिल्या को नहीं भरना होगा। नारी के रूप का जितना वर्णन किया जाये उतना ही कम होगा। नारी ने इस सम्पूर्ण संसार की रचना की है। मैं ई्रश्वर कि इस महान कृति को किस-किस रूप में परिभाषित करू। किस तरह से हे! नारी तेरा में वर्णन करू। यें सत्य हैं कि नारी हमारी हर कश्ती की पतवार हैं और आज वो ही पतवार भंवर में फंसी हुई हैं। आओ मिलकर तुच्छ मानसिकता, लिंग भेदभाव, हवस, दौलत कि लालसा का वेग मन मष्तिस्क से हटाएं और संसार का निर्माण करने वाली नारी को भंवर में डुबने से बचायें। उसका सहयोग कर एक सुन्दर राष्ट्र का निर्माण करें और ये संकल्प लें कि ना बुरा करोंगे, ना बुरा देखोगे। जितना सम्मान धर की नारी का करतें हो उससे कहीं गुणा पराई स्त्री का भी करोगें। और नारी को भी अब अबला का रूप त्यागना होगा और लड़ना होगा अपने अधिकारों के लिए। समझना होगा उसे अपने दिव्य रूप को। अब समय आ गया है कि नारी तुम अपना प्रचंड रुप दिखाओं। अब याचना छोड़कर, अन्याय के विरूद्ध रण के लिए हुंकार भरो। जिस तरह तु घर सम्भाल सकती है वैसे ही तु देश भी सम्भाल सकती है। अब तुझे अपने कोमल हृदय को फुल के साथ कठोर पत्थर का भी बनाना होगा। आज तुम्हें संकल्प लेना होगा कि तुम ना नारी पे अत्याचार करोगी और ना ही अत्याचार सहोगी। अगर हम अब भी वक्त रहते नहीं सम्भले तो समय की रेत नारी के दिव्य रूप को तहस नहस कर देगा। क्योंकि आज समय प्रचण्ड रूप से गतिमान हैं। समय रहते ही अब हमें सम्भलना होगा। वरना तैयार हो जाओ समय की रेत के साथ धुमिल होने को।
आमतौर पर 2 साल का लड़का अपने जन्मदिन पर केक काटता है और पार्टी करता है। लेकिन 12 वर्षीय पिक्सी कर्टिस अपने 12वें जन्मदिन के लिए अपनी सेवानिवृत्ति पार्टी की योजना बना रही है । ये परेशान करने वाली बात है लेकिन बिल्कुल सच है. 12 साल की यह लड़की एक करोड़पति बिजनेसमैन है। वह इतनी कम उम्र में रिटायरमेंट क्यों लेना चाहते हैं? इस छोटी व्यवसायी लड़की पिक्सी पीआर गुरु में, रॉक्सी जैकेंको चाहती है कि उसकी बेटी अभी अपने स्कूल पर ध्यान केंद्रित करे। क्योंकि बिजनेस के चलते वह अपने स्कूल पर ध्यान नहीं दे पाती हैं. ऐसे में वह नौकरी छोड़कर रिटायर होने की योजना बना रही हैं। पिक्सी ने अपने बिजनेस से करोड़ों रुपए कमाए हैं लेकिन अब वह इस बिजनेस से ब्रेक लेना चाहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में जन्मी पिक्सी ने अपनी पार्टी प्लानिंग के बारे में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया। जिसमें उन्होंने शानदार गुडी बैग्स दिखाए जो वह पार्टी में अपने मेहमानों को देंगे। लक्जरी ऑस्ट्रेलियाई सौंदर्य ब्रांड MCoBeauty द्वारा प्रायोजित, यह पूरी तरह से पैक किया जाएगा। इसमें £41 (4000 रुपये) के उत्पाद होंगे। पिक्सी, जो कुछ समय के लिए सेवानिवृत्त होने की योजना बना रही है, अपनी ग्रीष्मकालीन यात्रा के वीडियो भी साझा करती रही है। जैसे प्राइवेट जेट से यूरोप घूमना या पेरिस में शॉपिंग के लिए जाना। ये बच्ची आम स्कूली बच्चों जैसी नहीं है. वह इतनी कम उम्र में बिजनेस करके करोड़पति बन गई हैं।
आमतौर पर दो साल का लड़का अपने जन्मदिन पर केक काटता है और पार्टी करता है। लेकिन बारह वर्षीय पिक्सी कर्टिस अपने बारहवें जन्मदिन के लिए अपनी सेवानिवृत्ति पार्टी की योजना बना रही है । ये परेशान करने वाली बात है लेकिन बिल्कुल सच है. बारह साल की यह लड़की एक करोड़पति बिजनेसमैन है। वह इतनी कम उम्र में रिटायरमेंट क्यों लेना चाहते हैं? इस छोटी व्यवसायी लड़की पिक्सी पीआर गुरु में, रॉक्सी जैकेंको चाहती है कि उसकी बेटी अभी अपने स्कूल पर ध्यान केंद्रित करे। क्योंकि बिजनेस के चलते वह अपने स्कूल पर ध्यान नहीं दे पाती हैं. ऐसे में वह नौकरी छोड़कर रिटायर होने की योजना बना रही हैं। पिक्सी ने अपने बिजनेस से करोड़ों रुपए कमाए हैं लेकिन अब वह इस बिजनेस से ब्रेक लेना चाहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में जन्मी पिक्सी ने अपनी पार्टी प्लानिंग के बारे में अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया। जिसमें उन्होंने शानदार गुडी बैग्स दिखाए जो वह पार्टी में अपने मेहमानों को देंगे। लक्जरी ऑस्ट्रेलियाई सौंदर्य ब्रांड MCoBeauty द्वारा प्रायोजित, यह पूरी तरह से पैक किया जाएगा। इसमें इकतालीस पाउंड के उत्पाद होंगे। पिक्सी, जो कुछ समय के लिए सेवानिवृत्त होने की योजना बना रही है, अपनी ग्रीष्मकालीन यात्रा के वीडियो भी साझा करती रही है। जैसे प्राइवेट जेट से यूरोप घूमना या पेरिस में शॉपिंग के लिए जाना। ये बच्ची आम स्कूली बच्चों जैसी नहीं है. वह इतनी कम उम्र में बिजनेस करके करोड़पति बन गई हैं।
कैसे करें पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन अप्लाई! ऑनलाइन 62 लाख में बिक रहे हैं पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ, खरीदना चाहेंगे आप! होली में बंपर सेल, यहां है स्मार्टफोन की बेस्ट डील! सेंसर बोर्ड ने बैन की ये फिल्में, लेकिन यूट्यूब पर हैं मौजूद! ऑनलाइन डेटिंग मतलब HIV संक्रमण! ये हैं ऑनलाइन छोटू चायवाला, घर पर पहुंचाते हैं चाय की प्याली! रेल बजट में हुए ये टेक एलान, अब यात्रियों को पहुंचेगा आराम! ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें पैनकार्ड! ऑनलाइन डाउनलोड करें अपना आधार कार्ड! दिल्ली के लोग ऐसे भरें ऑनलाइन बिजली का बिल!
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Corona Virus) के बढ़ते मामले के बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की है कि वे घर से बाहर न निकलें। यहां तक कि सुबह की सैर भी फिलहाल टाल दें। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम राजधानी में लॉकडाउन नहीं करने जा रहे है लेकिन अगर निकट भविष्य में आवश्यकता महसूस हुई तो इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी वे शहर को लॉकडाउन नहीं करने जा रहे है। इसके लिये किसी को घबराने की जरुरत नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि रविवार को जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिये सभी को प्रयास करना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम दिल्लीवासियों के सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। सीएम केजरीवाल ने कहा कि 5 व्यक्ति एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते। अगर जरुरत पड़ी तो कम से कम 1 मीटर की दूरी बनाकर चलें। हालांकि पहले 20 लोगों को एक जगह इकट्ठा होने पर रोक लगी हुई थी। बता दें कि देश भर में कोरोना वायरस का मामला बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार यथासंभव कदम उठा रही है। साथ ही लोगों से लगातार घर पर रहने की भी अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू के दौरान राजधानी में महज 50 फीसदी बस ही चलेगी। इसलिये सभी से निवेदन है कि अपने घरों पर ही बैठे। यहां तक कि मेट्रो को भी बंद रखा गया है।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के बढ़ते मामले के बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की है कि वे घर से बाहर न निकलें। यहां तक कि सुबह की सैर भी फिलहाल टाल दें। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम राजधानी में लॉकडाउन नहीं करने जा रहे है लेकिन अगर निकट भविष्य में आवश्यकता महसूस हुई तो इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी वे शहर को लॉकडाउन नहीं करने जा रहे है। इसके लिये किसी को घबराने की जरुरत नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि रविवार को जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिये सभी को प्रयास करना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम दिल्लीवासियों के सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। सीएम केजरीवाल ने कहा कि पाँच व्यक्ति एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते। अगर जरुरत पड़ी तो कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर चलें। हालांकि पहले बीस लोगों को एक जगह इकट्ठा होने पर रोक लगी हुई थी। बता दें कि देश भर में कोरोना वायरस का मामला बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार यथासंभव कदम उठा रही है। साथ ही लोगों से लगातार घर पर रहने की भी अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू के दौरान राजधानी में महज पचास फीसदी बस ही चलेगी। इसलिये सभी से निवेदन है कि अपने घरों पर ही बैठे। यहां तक कि मेट्रो को भी बंद रखा गया है।
मंजूरी, स्थिर आर्थिक विकास और 3. 6 प्रतिशत की बेरोजगारी दर शामिल हैं। अमेरिकी श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 3. 6 प्रतिशत का बेरोजगारी आंकड़ा 50 वर्षों तक नहीं देखा गया। अपनी सरकार की सफलताओं के बीच उन्होंने मेक्सिको सीमा पर दीवार के निर्माण का उल्लेख किया। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि नवंबर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में इन सभी उपलब्धियों का खतरा होगा क्योंकि व्हाइट हाउस के डेमोक्रेटिक दावेदार, जो हमने बनाया है उसे नष्ट करना चाहते हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं'
मंजूरी, स्थिर आर्थिक विकास और तीन. छः प्रतिशत की बेरोजगारी दर शामिल हैं। अमेरिकी श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार तीन. छः प्रतिशत का बेरोजगारी आंकड़ा पचास वर्षों तक नहीं देखा गया। अपनी सरकार की सफलताओं के बीच उन्होंने मेक्सिको सीमा पर दीवार के निर्माण का उल्लेख किया। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि नवंबर दो हज़ार बीस के राष्ट्रपति चुनाव में इन सभी उपलब्धियों का खतरा होगा क्योंकि व्हाइट हाउस के डेमोक्रेटिक दावेदार, जो हमने बनाया है उसे नष्ट करना चाहते हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं'
मध्यप्रदेश में भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूटा हुआ है। इस बीच हरदा के कुकरावद गांव से एक शर्मिंदा करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां प्रेंग्नेट महिला को ट्यूब के सहारे उफनती नदी पार कराई गई। नदी के दूसरे किनारे पर जननी एक्सप्रेस खड़ी थी। जहां तक पहुंचने का कोई अन्य साधन नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को ट्यूब का सहारा लेना पड़ा। हाल ही में हुई जोरदार बारिश की वजह से नदी के रपटे पर बाढ़ का पानी आ गया था। ऐसे में महिला को दूसरे किनारे तक पहुंचाने के लिए जुगाड़ से काम चलाना पड़ा। वहां पहुंचने के बाद महिला को एंबुलेंस की मदद से निजी नर्सिंग होम ले जाया गया। जहां महिला ने बेटे को जन्म दिया है। मामला मंगलवार का है। कुकरावद गांव के रहने वाले गणेश खोरे ने बताया कि मेरी पत्नी राजंती (25 वर्ष) को प्रसव पीड़ा हो रही थी। गांव के बाहर रपटे पर बाढ़ का पानी था। ऐसे में ग्रामीणों ने ट्यूब पर लकड़ी का पटिया बांधा और उस पर पत्नी को बैठाकर नदी पार कराई। दूसरे किनारे पर खड़ी एंबुलेंस से उसे अस्पताल भिजवाया गया। राजंती खोरे को मंगलवार सुबह करीब 10 बजे के आसपास प्रसव पीड़ा हुई। इस दौरान उसके परिजनों ने तत्काल गांव की आशा कार्यकर्ता को सूचना दी। आशा कार्यकर्ता की सूचना पर जननी एक्सप्रेस भी पहुंच गई, लेकिन नदी के रपटे पर करीब 3 से 4 फीट पानी होने के चलते जननी एक्सप्रेस गांव में नहीं आ पाई। इसके चलते जुगाड़ की नाव के सहारे महिला को नाव पार कराई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मध्यप्रदेश में भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूटा हुआ है। इस बीच हरदा के कुकरावद गांव से एक शर्मिंदा करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां प्रेंग्नेट महिला को ट्यूब के सहारे उफनती नदी पार कराई गई। नदी के दूसरे किनारे पर जननी एक्सप्रेस खड़ी थी। जहां तक पहुंचने का कोई अन्य साधन नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को ट्यूब का सहारा लेना पड़ा। हाल ही में हुई जोरदार बारिश की वजह से नदी के रपटे पर बाढ़ का पानी आ गया था। ऐसे में महिला को दूसरे किनारे तक पहुंचाने के लिए जुगाड़ से काम चलाना पड़ा। वहां पहुंचने के बाद महिला को एंबुलेंस की मदद से निजी नर्सिंग होम ले जाया गया। जहां महिला ने बेटे को जन्म दिया है। मामला मंगलवार का है। कुकरावद गांव के रहने वाले गणेश खोरे ने बताया कि मेरी पत्नी राजंती को प्रसव पीड़ा हो रही थी। गांव के बाहर रपटे पर बाढ़ का पानी था। ऐसे में ग्रामीणों ने ट्यूब पर लकड़ी का पटिया बांधा और उस पर पत्नी को बैठाकर नदी पार कराई। दूसरे किनारे पर खड़ी एंबुलेंस से उसे अस्पताल भिजवाया गया। राजंती खोरे को मंगलवार सुबह करीब दस बजे के आसपास प्रसव पीड़ा हुई। इस दौरान उसके परिजनों ने तत्काल गांव की आशा कार्यकर्ता को सूचना दी। आशा कार्यकर्ता की सूचना पर जननी एक्सप्रेस भी पहुंच गई, लेकिन नदी के रपटे पर करीब तीन से चार फीट पानी होने के चलते जननी एक्सप्रेस गांव में नहीं आ पाई। इसके चलते जुगाड़ की नाव के सहारे महिला को नाव पार कराई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आज का समय टेक्नोलाॅजी का समय है। आज के समय में अगर आप के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट है तो आप अपने अधिकतर काम घर पर बैठे ही कर सकते है। बिल जमा कराना, रिचार्ज करना, शांपिग करने जैसे कितने ही काम है जो स्मार्टफोन एप की सहायता से आसानी से किये जा सकते है। मोबाइल एप ने आज हमारे काम को कितना आसान बना दिया है। लेकिन तकनीक के इस युग में कई ऐसी एप भी मौजूद है जो आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती है। आज स्मार्टफोन के लिए ऐसे एप भी आ गये है जो किसी के भी शरीर को स्कैन कर उसकी न्यूड फोटो (body scanner app) तैयार कर सकते है। इस तरह की एप से कोई भी आपका नुकसान कर सकता है, इसलिए इस तरह की मोबाइल एप से बचना जरुरी है। इस तरह की कइ्र्र एप आज उपलब्ध है जो किसी के भी शरीर को कपडो के अंदर से स्कैन कर उसकी न्यूड फोटो (body scanner app) तैयार कर सकती है। इस तरह की कुछ एप के नाम न्यूड इट और न्यूड स्कैनर है। हालाकि इन एप्स को गूगल प्ले स्टोर पर जगह नही दी गई है। लेकिन फिर भी कइ्र्र साइट इन एप को एपीके फाइल के रुप में उपलब्ध करावा रहे है। इन एप्स के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह किसी भी व्यक्ति के बाॅडी को स्कैन कर सकती है। ये एप स्मार्टफोन के कैमरे से कनेक्ट होकर कपडो के भीतर न्यूड बाॅडी को स्कैन करते है। उसके बाद उस व्यक्ति की बिना कपडो के न्यूड फोटो तैयार कर देते है। ये एप्स एंड्राइड और आइओएस दोनो प्लेटफाॅर्म के लिए उपलब्ध करवाया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि ये एप किसी कि भी बाॅडी को स्कैन (body scanner app) नही कर सकती। यह केवल मजाक बनाने के लिए उपलब्ध एप है। इन एप्स में इंसान के अलग-अलग अंगो की ढ़ेर सारी फोटोज पहले से ही मौजूद होती है। होता यह है कि मजाक करने वाला व्यक्ति पहले किसी व्यक्ति की फोटो खीच लेता है। फिर इस एप की मदद से उसपर पहले से स्टोर बाॅडी पार्टस के न्यूड फोटो फिट कर दिए जाते है। फोटो देखने वाले व्यक्ति को यही लगेगा कि यह उसकी फोटो है लेकिन वास्तव में ऐसा नही होता। हालाकि यह केवल एक तरह का मजाक करने के लिए ही बनाई गई एप है। लेकिन फिर भी लोग इसका गलत फायदा भी उठा सकते है। या फिर आप मजाक का ही शिकार बन सकते है। इसलिए इस तरह की एप से सावधान रहे।
आज का समय टेक्नोलाॅजी का समय है। आज के समय में अगर आप के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट है तो आप अपने अधिकतर काम घर पर बैठे ही कर सकते है। बिल जमा कराना, रिचार्ज करना, शांपिग करने जैसे कितने ही काम है जो स्मार्टफोन एप की सहायता से आसानी से किये जा सकते है। मोबाइल एप ने आज हमारे काम को कितना आसान बना दिया है। लेकिन तकनीक के इस युग में कई ऐसी एप भी मौजूद है जो आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती है। आज स्मार्टफोन के लिए ऐसे एप भी आ गये है जो किसी के भी शरीर को स्कैन कर उसकी न्यूड फोटो तैयार कर सकते है। इस तरह की एप से कोई भी आपका नुकसान कर सकता है, इसलिए इस तरह की मोबाइल एप से बचना जरुरी है। इस तरह की कइ्र्र एप आज उपलब्ध है जो किसी के भी शरीर को कपडो के अंदर से स्कैन कर उसकी न्यूड फोटो तैयार कर सकती है। इस तरह की कुछ एप के नाम न्यूड इट और न्यूड स्कैनर है। हालाकि इन एप्स को गूगल प्ले स्टोर पर जगह नही दी गई है। लेकिन फिर भी कइ्र्र साइट इन एप को एपीके फाइल के रुप में उपलब्ध करावा रहे है। इन एप्स के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह किसी भी व्यक्ति के बाॅडी को स्कैन कर सकती है। ये एप स्मार्टफोन के कैमरे से कनेक्ट होकर कपडो के भीतर न्यूड बाॅडी को स्कैन करते है। उसके बाद उस व्यक्ति की बिना कपडो के न्यूड फोटो तैयार कर देते है। ये एप्स एंड्राइड और आइओएस दोनो प्लेटफाॅर्म के लिए उपलब्ध करवाया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि ये एप किसी कि भी बाॅडी को स्कैन नही कर सकती। यह केवल मजाक बनाने के लिए उपलब्ध एप है। इन एप्स में इंसान के अलग-अलग अंगो की ढ़ेर सारी फोटोज पहले से ही मौजूद होती है। होता यह है कि मजाक करने वाला व्यक्ति पहले किसी व्यक्ति की फोटो खीच लेता है। फिर इस एप की मदद से उसपर पहले से स्टोर बाॅडी पार्टस के न्यूड फोटो फिट कर दिए जाते है। फोटो देखने वाले व्यक्ति को यही लगेगा कि यह उसकी फोटो है लेकिन वास्तव में ऐसा नही होता। हालाकि यह केवल एक तरह का मजाक करने के लिए ही बनाई गई एप है। लेकिन फिर भी लोग इसका गलत फायदा भी उठा सकते है। या फिर आप मजाक का ही शिकार बन सकते है। इसलिए इस तरह की एप से सावधान रहे।
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के चलते किये गये। लाॅकडाउन से हवाई सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में आर्थिक समस्या से जूझ रही कंपनियों को अपने कर्मचारियों की संख्या घटानी पड़ रही है। अब यात्रियों से सबसे कम किराया लेने वाली कंपनी इंडिगा ने भी अपने 10 प्रतिशत कर्मचारी कम करने का फैसला किया है। कंपनी को चलाते रहने के लिए, इस आर्थिक संकट से निपट ने के लिए, हर उपाय पर गौर करने के बाद यह फैसला लिया है। इंडिगो के कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च 2019 को 23,531 थी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राॅन्ज्य दत्ता ने कहा कि इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को उनके सूचना पीरियड नौकरी छोड़ने या कर्मचारियों को कंपनी से निकालने का भुगतान भी किया जाएगा। इसकी गणना उनके वेतन पर आने वाली कंपनी की मासिक लागत 'काॅस्ट टू कंपनी- सीटीसी' के आधार पर की जाएगी। यह वेतन उनकी नौकरी की अवधि के हर साल के आधार पर न्यूनतम 12 महीने के लिए दिया जाएगा। कर्मचारी छह साल से इंडिगो के साथ है, तो उसे सीटीसी के हिसाब से छह माह का वेतन दिया जाएगा। कोरोना वायरस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्र यात्रा और पर्यटन ही रहे हैं। विमानन उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ा है। देश में चले करीब दो महीने के लाॅकडाउन और विदेशी सेवाओं पर रोक के चलते विमानन उद्योग के लिए अपने खर्चे पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है। देश में प्रत्येक विमानन कंपनी ने लागत कटौती के उपाय अपनाए हैं। इसमें कर्मचारियों की छंटनी से लेकर उन्हें बिना वेतन के अवकाश पर भेजने जैसे उपाय शामिल हैं। दत्ता ने कहा कि छंटनी से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को उनके सालाना बोनस और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि का भी भुगतान किया जाएगा। स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवर दिसंबर 2020 तक बरकरार रहेगा। इंडिगो के कर्मचारी अपने घर जाना चाहते हैं तो उन्हें किराया नहीं देना पड़ेगा।
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के चलते किये गये। लाॅकडाउन से हवाई सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में आर्थिक समस्या से जूझ रही कंपनियों को अपने कर्मचारियों की संख्या घटानी पड़ रही है। अब यात्रियों से सबसे कम किराया लेने वाली कंपनी इंडिगा ने भी अपने दस प्रतिशत कर्मचारी कम करने का फैसला किया है। कंपनी को चलाते रहने के लिए, इस आर्थिक संकट से निपट ने के लिए, हर उपाय पर गौर करने के बाद यह फैसला लिया है। इंडिगो के कर्मचारियों की संख्या इकतीस मार्च दो हज़ार उन्नीस को तेईस,पाँच सौ इकतीस थी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राॅन्ज्य दत्ता ने कहा कि इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को उनके सूचना पीरियड नौकरी छोड़ने या कर्मचारियों को कंपनी से निकालने का भुगतान भी किया जाएगा। इसकी गणना उनके वेतन पर आने वाली कंपनी की मासिक लागत 'काॅस्ट टू कंपनी- सीटीसी' के आधार पर की जाएगी। यह वेतन उनकी नौकरी की अवधि के हर साल के आधार पर न्यूनतम बारह महीने के लिए दिया जाएगा। कर्मचारी छह साल से इंडिगो के साथ है, तो उसे सीटीसी के हिसाब से छह माह का वेतन दिया जाएगा। कोरोना वायरस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्र यात्रा और पर्यटन ही रहे हैं। विमानन उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ा है। देश में चले करीब दो महीने के लाॅकडाउन और विदेशी सेवाओं पर रोक के चलते विमानन उद्योग के लिए अपने खर्चे पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है। देश में प्रत्येक विमानन कंपनी ने लागत कटौती के उपाय अपनाए हैं। इसमें कर्मचारियों की छंटनी से लेकर उन्हें बिना वेतन के अवकाश पर भेजने जैसे उपाय शामिल हैं। दत्ता ने कहा कि छंटनी से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को उनके सालाना बोनस और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि का भी भुगतान किया जाएगा। स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवर दिसंबर दो हज़ार बीस तक बरकरार रहेगा। इंडिगो के कर्मचारी अपने घर जाना चाहते हैं तो उन्हें किराया नहीं देना पड़ेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर एली मिडलेटन (Ellie Middleton) नाम के अकाउंट से लड़की ने खुद अपना कहानी शेयर की है और पूरी सच्चाई बयां की है. पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना (Coronavirus) महामारी ने पूरी दुनिया को बर्बाद करके रख दिया है. अब तक लाखों लोग इस महामारी में अपनी जान गंवा चुके हैं. ऐसे में लोग इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं और बचाव के सारे उपायों का सावधानीपूर्वक पालन भी कर रहे हैं, लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इसकी गंभीरता को अब तक नहीं समझ पाए हैं और इसे मजाक के तौर पर ले रहे हैं. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं, जो ऑफिस में झूठ बोलकर यानी ये कहकर छुट्टी ले ले रहे हैं कि वो कोरोना से संक्रमित हो गए हैं और उसके बाद वे क्या कर रहे हैं, कहां हैं, इसका ऑफिस को भी पता नहीं चल पाता. हाल ही में एक लड़की ने भी कुछ ऐसा ही किया. उसने कोरोना संक्रमित होने का बहाना बनाकर ऑफिस से छुट्टी ले ली, लेकिन उसका ये झूठ टिक नहीं पाया और वो पकड़ी गई, जिसके बाद उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर एली मिडलेटन (Ellie Middleton) नाम के अकाउंट से लड़की ने खुद अपना कहानी शेयर की है और पूरी सच्चाई बयां की है. उसने बताया कि उसने अपने बॉस से झूठ बोला कि वह कोरोना संक्रमित हो गई है और छुट्टी ले ली. इसके बाद वह नाइटक्लब में अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने चली गई. पर पता नहीं कैसे उसके बॉस को ये बात पता चल गई और उसने उसे मैसेज किया और साथ ही एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिससे उसके झूठ का खुलासा हो गया. दरअसल, एली ने सोचा था कि उसका झूठ पकड़ा नहीं जाएगा और वह आराम से रातभर पार्टी करेगी, पर बॉस तो आखिर बॉस होता है, किसी तरह उसे इसकी भनक लग गई. एली ने बताया कि उसके बॉस ने जो स्क्रीनशॉट भेजा था, उसके साथ टेक्स्ट भी लिखा था और पूछा था कि 'आप कहां हैं?'. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एली ने दोबारा से झूठ बोलते हुए अपने बॉस को कहा कि वह घर पर ही अलग-थलग रह रही है, क्योंकि वह कोरोना संक्रमित है. हालांकि स्क्रीनशॉट ने उसके झूठ का पर्दाफाश कर दिया था, इसलिए उसकी एक न चली. एली ने बाद में अपने झूठ पर सफाई देने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है. उसे उसका बॉस नौकरी से निकाल चुका था.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर एली मिडलेटन नाम के अकाउंट से लड़की ने खुद अपना कहानी शेयर की है और पूरी सच्चाई बयां की है. पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बर्बाद करके रख दिया है. अब तक लाखों लोग इस महामारी में अपनी जान गंवा चुके हैं. ऐसे में लोग इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं और बचाव के सारे उपायों का सावधानीपूर्वक पालन भी कर रहे हैं, लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इसकी गंभीरता को अब तक नहीं समझ पाए हैं और इसे मजाक के तौर पर ले रहे हैं. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं, जो ऑफिस में झूठ बोलकर यानी ये कहकर छुट्टी ले ले रहे हैं कि वो कोरोना से संक्रमित हो गए हैं और उसके बाद वे क्या कर रहे हैं, कहां हैं, इसका ऑफिस को भी पता नहीं चल पाता. हाल ही में एक लड़की ने भी कुछ ऐसा ही किया. उसने कोरोना संक्रमित होने का बहाना बनाकर ऑफिस से छुट्टी ले ली, लेकिन उसका ये झूठ टिक नहीं पाया और वो पकड़ी गई, जिसके बाद उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर एली मिडलेटन नाम के अकाउंट से लड़की ने खुद अपना कहानी शेयर की है और पूरी सच्चाई बयां की है. उसने बताया कि उसने अपने बॉस से झूठ बोला कि वह कोरोना संक्रमित हो गई है और छुट्टी ले ली. इसके बाद वह नाइटक्लब में अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने चली गई. पर पता नहीं कैसे उसके बॉस को ये बात पता चल गई और उसने उसे मैसेज किया और साथ ही एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिससे उसके झूठ का खुलासा हो गया. दरअसल, एली ने सोचा था कि उसका झूठ पकड़ा नहीं जाएगा और वह आराम से रातभर पार्टी करेगी, पर बॉस तो आखिर बॉस होता है, किसी तरह उसे इसकी भनक लग गई. एली ने बताया कि उसके बॉस ने जो स्क्रीनशॉट भेजा था, उसके साथ टेक्स्ट भी लिखा था और पूछा था कि 'आप कहां हैं?'. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एली ने दोबारा से झूठ बोलते हुए अपने बॉस को कहा कि वह घर पर ही अलग-थलग रह रही है, क्योंकि वह कोरोना संक्रमित है. हालांकि स्क्रीनशॉट ने उसके झूठ का पर्दाफाश कर दिया था, इसलिए उसकी एक न चली. एली ने बाद में अपने झूठ पर सफाई देने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है. उसे उसका बॉस नौकरी से निकाल चुका था.
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। किडनी के रोगों में क्रोनिक किडनी डिजीज (क्रोनिक किडनी फेल्योर) एक गंभीर रोग है, क्योंकि वर्तमान चिकित्सा विज्ञान में इस रोग को खत्म करने की कोई दवा उपलब्ध नहीं है। पिछले कई सालों से इस रोग के मरीजों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। दस में से एक व्यक्ति को किडनी की बीमारी होती है। डायाबिटीज, उच्च रक्तचाप, पथरी इत्यादि रोगों की बढ़ती संख्या इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है । इस प्रकार के किडनी डिजीज में किडनी खराब होने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है, जो महीनों या सालों तक चलती है। सीरम क्रीएटिनिन का स्तर यदि धीरे-धीरे बढ़ता है तो किडनी की कार्यक्षमता की इस रक्त परीक्षण से गणना की जा सकती है। eGFR नामक परीक्षण से क्रोनिक किडनी डिजीज के स्तर को हल्के, मध्यम या गंभीर रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। लम्बे समय के बाद मरीजों की दोनों किडनी सिकुड़कर एकदम छोटी हो जाती है और काम करना बंद कर देती है, जिसे किसी भी दवा, ऑपरेशन अथवा डायालिसिस से ठीक नहीं किया जा सकता है। सी.के.डी. को पहले क्रोनिक रीनल फेल्योर कहते थे, परन्तु फेल्योर शब्द एक गलत धारण देता है। सी.के.डी. की प्रारंभिक अवस्था में किडनी द्वारा कुछ हद तक कार्य संपादित होता है और अंतिम अवस्था में ही किडनी पूर्ण रूप से कार्य करना बंद कर देती है। क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज का प्राथमिक चरण उचित दवा देकर तथा खाने में परहेज से किया जा सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज में दोनों किडनी धीरे धीरे खराब होने लगती है। जब किडनी 90 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो जाती है अथवा पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है, तब उसे एन्ड स्टेज रीनल डिजीज कहते हैं । इस अवस्था में सही दवा और परहेज के बावजूद मरीज की तबियत बिगड़ती जाती है और उसे बचाने के लिए हमेंशा नियमित रूप से डायलिसिस कराने की अथवा किडनी प्रत्यारोपण कराने की जरूरत पडती है। क्रोनिक किडनी डिजीज में किडनी धीरे धीरे फिर से कभी ठीक न हो सके इस प्रकार खराब हो जाती है। किडनी को स्थायी नुकसान पहुँचाने के कई कारण हो सकते हैं पर मधुमेह और उच्च रक्तचाप इसके दो प्रमुख कारण हैं। सी.के.डी. के दो तिहाई मरीज इन दो बिमारियों से ग्रस्त होते हैं। प्रत्येक तरह के उपचार के बावजूद भी दोनों किडनी ठीक न हो सके, इस प्रकार के किडनी डिजीज के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं : ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। किडनी के रोगों में क्रोनिक किडनी डिजीज एक गंभीर रोग है, क्योंकि वर्तमान चिकित्सा विज्ञान में इस रोग को खत्म करने की कोई दवा उपलब्ध नहीं है। पिछले कई सालों से इस रोग के मरीजों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। दस में से एक व्यक्ति को किडनी की बीमारी होती है। डायाबिटीज, उच्च रक्तचाप, पथरी इत्यादि रोगों की बढ़ती संख्या इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है । इस प्रकार के किडनी डिजीज में किडनी खराब होने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है, जो महीनों या सालों तक चलती है। सीरम क्रीएटिनिन का स्तर यदि धीरे-धीरे बढ़ता है तो किडनी की कार्यक्षमता की इस रक्त परीक्षण से गणना की जा सकती है। eGFR नामक परीक्षण से क्रोनिक किडनी डिजीज के स्तर को हल्के, मध्यम या गंभीर रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। लम्बे समय के बाद मरीजों की दोनों किडनी सिकुड़कर एकदम छोटी हो जाती है और काम करना बंद कर देती है, जिसे किसी भी दवा, ऑपरेशन अथवा डायालिसिस से ठीक नहीं किया जा सकता है। सी.के.डी. को पहले क्रोनिक रीनल फेल्योर कहते थे, परन्तु फेल्योर शब्द एक गलत धारण देता है। सी.के.डी. की प्रारंभिक अवस्था में किडनी द्वारा कुछ हद तक कार्य संपादित होता है और अंतिम अवस्था में ही किडनी पूर्ण रूप से कार्य करना बंद कर देती है। क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज का प्राथमिक चरण उचित दवा देकर तथा खाने में परहेज से किया जा सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज में दोनों किडनी धीरे धीरे खराब होने लगती है। जब किडनी नब्बे प्रतिशत से ज्यादा खराब हो जाती है अथवा पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है, तब उसे एन्ड स्टेज रीनल डिजीज कहते हैं । इस अवस्था में सही दवा और परहेज के बावजूद मरीज की तबियत बिगड़ती जाती है और उसे बचाने के लिए हमेंशा नियमित रूप से डायलिसिस कराने की अथवा किडनी प्रत्यारोपण कराने की जरूरत पडती है। क्रोनिक किडनी डिजीज में किडनी धीरे धीरे फिर से कभी ठीक न हो सके इस प्रकार खराब हो जाती है। किडनी को स्थायी नुकसान पहुँचाने के कई कारण हो सकते हैं पर मधुमेह और उच्च रक्तचाप इसके दो प्रमुख कारण हैं। सी.के.डी. के दो तिहाई मरीज इन दो बिमारियों से ग्रस्त होते हैं। प्रत्येक तरह के उपचार के बावजूद भी दोनों किडनी ठीक न हो सके, इस प्रकार के किडनी डिजीज के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :
चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने अधिकारियों का आह्वान किया है कि वे जलवायु के बदलते परिदृश्य के मददनेजर हरियाणा में किसानों को गेहूं व धान के फसल चक्कर से निकलकर फसल विविधिकरण को अपनाने के लिए प्रेरित करें ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सकें। किसानों को कृषि, बागवानी के साथ-साथ पशुपालन के व्यवसाय को अपनाना चाहिए। इससे प्रदेश दूध, फल, फूल व सब्जी के कटोरे के रूप में उभरेगा। धनखड़ हरियाणा निवास में खरीफ फसल 2018-19 की तैयारियों को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बुलाई गई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी परिवर्तन का वाहक व नीति निर्धारण में एक टीम के रूप में कार्य करे और किसानों को तकनीकी, विपणन, जैविक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए एक नीतिगत निर्णय लें, और आगामी 10 वर्षों का फसल चक्कर कैसा हो इस कड़ी में कार्य करे। बैठक में धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे हरियाणा की भौगोलिक स्थिति व इसकी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ इसकी समीपता प्रदेश को एक बेहतरीन मार्केट उपलब्ध करवाती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पैरी एग्रीकल्चर अवधारणा के तहत विकसित किए जा रहें 340 बागवानी गांव व डेरी क्षेत्र की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करें, क्योंकि लगातार जमीन घट रही है इस क्षेत्र में जमीन के मूल्य अधिक है इसलिए घाटे की खेती करना कोई नहीं चाहता। इसलिए हमें भविष्य का एजेंटा तैयार करना है। उन्होंने कहा कि दस वर्षों के उपरान्त हमारा आदर्श फसल चक्कर कैसा हो, इसके लिए सोशल मीडिया पर व्हट्सअप ग्रुप बनाकर हम लोगों के सुझाव आसानी से प्राप्त कर सकते है। मृद्रा स्वास्थ्य भी एक चुनौती बन रहा है। धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जो किसान मृद्रा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप अपनी फसलों में खाद व कीटनाशकों का उपयोग करे, ऐसे किसानों की एक कार्यशाला चंडीगढ़ में बुलाई जाए। उन्होंने इस बात का भी सुझाव दिया कि खरीफ फसल 2018-19 वास्तविक आंकड़े अगस्त के प्रथम सप्ताह में एकत्रित करने के लिए हरसक या ड्रोन सर्व करवाकर सहायता ली जाएं। धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे रबी फसल 2018-19 की तैयारियों को लेकर बैठक सितम्बर, 2018 में जाए और इसके लिए पहले से पूरी तैयार कर लेनी चाहिए। बैठक में कृषि विभाग के निदेशक डी. के. बेहरा ने विभाग की तैयारियों पर एक प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, हैफेड के चैयरमेन हरविन्द्र कल्याण, सहकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती नवराज सन्धू, के अलावा अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे। अधिक जानकारियों के लिए बने रहिये पंजाब केसरी के साथ। (आहूजा)
चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने अधिकारियों का आह्वान किया है कि वे जलवायु के बदलते परिदृश्य के मददनेजर हरियाणा में किसानों को गेहूं व धान के फसल चक्कर से निकलकर फसल विविधिकरण को अपनाने के लिए प्रेरित करें ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सकें। किसानों को कृषि, बागवानी के साथ-साथ पशुपालन के व्यवसाय को अपनाना चाहिए। इससे प्रदेश दूध, फल, फूल व सब्जी के कटोरे के रूप में उभरेगा। धनखड़ हरियाणा निवास में खरीफ फसल दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस की तैयारियों को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बुलाई गई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी परिवर्तन का वाहक व नीति निर्धारण में एक टीम के रूप में कार्य करे और किसानों को तकनीकी, विपणन, जैविक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए एक नीतिगत निर्णय लें, और आगामी दस वर्षों का फसल चक्कर कैसा हो इस कड़ी में कार्य करे। बैठक में धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे हरियाणा की भौगोलिक स्थिति व इसकी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ इसकी समीपता प्रदेश को एक बेहतरीन मार्केट उपलब्ध करवाती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पैरी एग्रीकल्चर अवधारणा के तहत विकसित किए जा रहें तीन सौ चालीस बागवानी गांव व डेरी क्षेत्र की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करें, क्योंकि लगातार जमीन घट रही है इस क्षेत्र में जमीन के मूल्य अधिक है इसलिए घाटे की खेती करना कोई नहीं चाहता। इसलिए हमें भविष्य का एजेंटा तैयार करना है। उन्होंने कहा कि दस वर्षों के उपरान्त हमारा आदर्श फसल चक्कर कैसा हो, इसके लिए सोशल मीडिया पर व्हट्सअप ग्रुप बनाकर हम लोगों के सुझाव आसानी से प्राप्त कर सकते है। मृद्रा स्वास्थ्य भी एक चुनौती बन रहा है। धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जो किसान मृद्रा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप अपनी फसलों में खाद व कीटनाशकों का उपयोग करे, ऐसे किसानों की एक कार्यशाला चंडीगढ़ में बुलाई जाए। उन्होंने इस बात का भी सुझाव दिया कि खरीफ फसल दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस वास्तविक आंकड़े अगस्त के प्रथम सप्ताह में एकत्रित करने के लिए हरसक या ड्रोन सर्व करवाकर सहायता ली जाएं। धनखड़ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे रबी फसल दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस की तैयारियों को लेकर बैठक सितम्बर, दो हज़ार अट्ठारह में जाए और इसके लिए पहले से पूरी तैयार कर लेनी चाहिए। बैठक में कृषि विभाग के निदेशक डी. के. बेहरा ने विभाग की तैयारियों पर एक प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, हैफेड के चैयरमेन हरविन्द्र कल्याण, सहकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती नवराज सन्धू, के अलावा अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे। अधिक जानकारियों के लिए बने रहिये पंजाब केसरी के साथ।
जलेश्वर । आज 28 बी अन्तर्ऱाष्ट्रीय ज्येष्ठ नागरिक दिवस समारोह का आयोजन संस्था के महोत्तरी जिला अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी के अध्यक्षता में जलेश्वर के जिला ज्येष्ठ नागरिक संघ के प्रांगण में हुआ। जिस मे प्रमुख अतिथि के रूप में जिला विकास समिति के संयोजक श्री सुरेसप्रसाद सिंह जी मंचासीन थें तो विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री श्री गणेश नेपाली जी और अनुसंधाता तथा पूर्व डीन श्री नरेन्द्र चौधरी जी विराजमान थें। स्वागत मंतव्य देते हुए संस्था के श्रेष्ठ सदस्य श्री राजेश्वर ठाकुर जी ने वर्त्तमान पारिवारिक अवस्था में वृद्धों की दयनीय अवस्था पर प्रकास डालते हुए समस्या का हल समझदारी पूर्वक खोजने पर जोर दिया। संस्था के अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी ने वृद्ध पर हो रहे ज्यादती और हिंशा को केंद्र में रखकर मंतव्य प्रस्तुत और समाधान का उपाय अभिव्यक्त करने के लिए आग्रह किया। अपनी मंतव्य में श्री नरेन्द्र चौधरी जी ने संतो को राजनीति में आने और शुद्ध सांगठनिक रूप से आगे बढ़ने पर जोर देते हुए, दुसरे से वैसा व्यवहार न किया जाय जिसे हम पसंद नहीं करेंगे। बुजुर्गो का अनुभव सर्वोत्तम होता है एसा कहा, साथ ही कानूनी राज्य के गरिमा के लिए यूरोप अमेरिकी धटना परिघटना को भी समय सापेक्ष रूप में प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत किए। दुसरे वक्ता के रुपमे मैं (अजय कुमार) ने मैत्रीभाव फैलाने और बाबा पोते के बीच के दुरीको कम करने के लिए ज्येष्ठ नागरिक को विद्यालय से जुड़ने के लिए निवेदन किया। तीसरे वक्ता के रूप में ज्येष्ठ पत्रकार और ज्येष्ठ नागरिक कुवरकान्त झा जी और युवा पत्रकार प्रभु मिश्र ने वृद्धों को इज्जत और सेवा किए जा रहे परिवार को सम्मानित किए जाने की अपील की। इसी प्रकार पूर्व मंत्री श्री गणेश नेपाली जी ने अपनी राजनीतिक अनुभवको सम्प्रेषण करते हुए कहा की हम 2007 साल से अबतक जीतनी क्रांतियाँ हुई उसमे राजनैतिक सफलता तो मिली साथ ही राजनैतिक प्रदुषण को मैंने सदा आगे पाया,वैचारिक विचलन को सम्मानित होते पाया। न प्रधान मंत्रिय पद की न प्रधान न्यायिक पद की ही विश्वास जनता समक्ष कायम रहा।भ्रष्टाचार ही देस को निगलने पे लगा है।इसी प्रकार कोमल हृदय के स्वामि श्रद्धेय श्री बलराम शर्मा जी ने हम वृद्धों को अपनी गरिमा अपने कर्तव्य के जरिए ही मजबूत करना होगा। हमें कर्तव्यनिष्ठ रहना ही होगा। आज के प्रमुख अतिथि जिल्ला समन्वय समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश शिंह जी ने वृद्ध के प्रति हो रहे हिंशा वास्तव में हृदय विदारक है। लेकिन इसका दोषी भी हमही हैं। उन्होंने मेरे विचार को समर्थन करते हुए कहा की हम बच्चों को पैसा कमाने बाला मेसिन समझते हैं। और नैतिक मूल्यों को हम दरकिनार कर देतें हैं।जबकि हमें अपनी बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना एकदम आवश्यक हो गया है। अन्यथा हम बिखरते बिखरते पूर्णतःविखर जाएंगे। उन्होंने संस्था के लिए भौतिक व्यवस्था मिलाने के लिए पूरजोर प्रयास करने के वादा किया। साथ ही 86 वर्षीय ज्येष्ठ महिला श्रीमती रामपरी देवी को दोसल्ला ओढ़ा सम्मान के साथ साथ आशीष ग्रहण किए। कार्यक्रम के उदघोषण संस्था के सचिव श्री नरेन्द्रनारायण लाल कर्ण जी के द्वारा किया गया। समापन भाषण करते हुए अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी ने सबको धन्यवाद अर्पण करते हुए अब महोत्तरी के गली गली में जाकर ज्येष्ठ नागरिकों का हाल खबर लेते हुए जोड़ने का प्रयास करने की प्रतिज्ञा भी लिए।
जलेश्वर । आज अट्ठाईस बी अन्तर्ऱाष्ट्रीय ज्येष्ठ नागरिक दिवस समारोह का आयोजन संस्था के महोत्तरी जिला अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी के अध्यक्षता में जलेश्वर के जिला ज्येष्ठ नागरिक संघ के प्रांगण में हुआ। जिस मे प्रमुख अतिथि के रूप में जिला विकास समिति के संयोजक श्री सुरेसप्रसाद सिंह जी मंचासीन थें तो विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री श्री गणेश नेपाली जी और अनुसंधाता तथा पूर्व डीन श्री नरेन्द्र चौधरी जी विराजमान थें। स्वागत मंतव्य देते हुए संस्था के श्रेष्ठ सदस्य श्री राजेश्वर ठाकुर जी ने वर्त्तमान पारिवारिक अवस्था में वृद्धों की दयनीय अवस्था पर प्रकास डालते हुए समस्या का हल समझदारी पूर्वक खोजने पर जोर दिया। संस्था के अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी ने वृद्ध पर हो रहे ज्यादती और हिंशा को केंद्र में रखकर मंतव्य प्रस्तुत और समाधान का उपाय अभिव्यक्त करने के लिए आग्रह किया। अपनी मंतव्य में श्री नरेन्द्र चौधरी जी ने संतो को राजनीति में आने और शुद्ध सांगठनिक रूप से आगे बढ़ने पर जोर देते हुए, दुसरे से वैसा व्यवहार न किया जाय जिसे हम पसंद नहीं करेंगे। बुजुर्गो का अनुभव सर्वोत्तम होता है एसा कहा, साथ ही कानूनी राज्य के गरिमा के लिए यूरोप अमेरिकी धटना परिघटना को भी समय सापेक्ष रूप में प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत किए। दुसरे वक्ता के रुपमे मैं ने मैत्रीभाव फैलाने और बाबा पोते के बीच के दुरीको कम करने के लिए ज्येष्ठ नागरिक को विद्यालय से जुड़ने के लिए निवेदन किया। तीसरे वक्ता के रूप में ज्येष्ठ पत्रकार और ज्येष्ठ नागरिक कुवरकान्त झा जी और युवा पत्रकार प्रभु मिश्र ने वृद्धों को इज्जत और सेवा किए जा रहे परिवार को सम्मानित किए जाने की अपील की। इसी प्रकार पूर्व मंत्री श्री गणेश नेपाली जी ने अपनी राजनीतिक अनुभवको सम्प्रेषण करते हुए कहा की हम दो हज़ार सात साल से अबतक जीतनी क्रांतियाँ हुई उसमे राजनैतिक सफलता तो मिली साथ ही राजनैतिक प्रदुषण को मैंने सदा आगे पाया,वैचारिक विचलन को सम्मानित होते पाया। न प्रधान मंत्रिय पद की न प्रधान न्यायिक पद की ही विश्वास जनता समक्ष कायम रहा।भ्रष्टाचार ही देस को निगलने पे लगा है।इसी प्रकार कोमल हृदय के स्वामि श्रद्धेय श्री बलराम शर्मा जी ने हम वृद्धों को अपनी गरिमा अपने कर्तव्य के जरिए ही मजबूत करना होगा। हमें कर्तव्यनिष्ठ रहना ही होगा। आज के प्रमुख अतिथि जिल्ला समन्वय समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश शिंह जी ने वृद्ध के प्रति हो रहे हिंशा वास्तव में हृदय विदारक है। लेकिन इसका दोषी भी हमही हैं। उन्होंने मेरे विचार को समर्थन करते हुए कहा की हम बच्चों को पैसा कमाने बाला मेसिन समझते हैं। और नैतिक मूल्यों को हम दरकिनार कर देतें हैं।जबकि हमें अपनी बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना एकदम आवश्यक हो गया है। अन्यथा हम बिखरते बिखरते पूर्णतःविखर जाएंगे। उन्होंने संस्था के लिए भौतिक व्यवस्था मिलाने के लिए पूरजोर प्रयास करने के वादा किया। साथ ही छियासी वर्षीय ज्येष्ठ महिला श्रीमती रामपरी देवी को दोसल्ला ओढ़ा सम्मान के साथ साथ आशीष ग्रहण किए। कार्यक्रम के उदघोषण संस्था के सचिव श्री नरेन्द्रनारायण लाल कर्ण जी के द्वारा किया गया। समापन भाषण करते हुए अध्यक्ष श्री महेश्वर राय जी ने सबको धन्यवाद अर्पण करते हुए अब महोत्तरी के गली गली में जाकर ज्येष्ठ नागरिकों का हाल खबर लेते हुए जोड़ने का प्रयास करने की प्रतिज्ञा भी लिए।
अमेरिकी वायु सेना के 4 वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए इरादा विमान मुकाबला लेजर का पहला बड़े पैमाने पर परीक्षण 2024 में किया जाएगा। C4ISRNET द्वारा रिपोर्ट की गई। प्रकाशन के अनुसार, अमेरिकी वायु सेना अनुसंधान प्रयोगशाला जल्द ही प्रमुख विमान लेजर प्रणालियों में से एक प्राप्त करेगी, दो अन्य डेवलपर्स को इस वर्ष जुलाई में प्रदान करना चाहिए। परीक्षणों का विवरण प्रदान नहीं किया गया है। अमेरिकी वायु सेना के आदेश को मौजूदा विमान सुरक्षा के लिए अपर्याप्त माना गया और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और हीट ट्रैप के अलावा विमान पर हमला करने वाले विमानों के विनाश के लिए लेजर सिस्टम विकसित करने के प्रस्ताव के बाद सेल्फ-प्रोटेक्ट हाई एनर्जी लेजर डेमोंस्ट्रेटर (SHELELD) कार्यक्रम के ढांचे के भीतर काम करना शुरू हुआ। मिसाइलों। अमेरिकी कंपनियां लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन और बोइंग लेजर के विकास में शामिल हैं। लॉकहीड मार्टिन लेजर मॉड्यूल के विकास के लिए जिम्मेदार है, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन नियंत्रण प्रणाली बना रहा है, और बोइंग कंटेनर है जिसमें लड़ाकू लेजर रखा जाएगा। इससे पहले, यूएस वायु सेना ने बताया कि SHIELD परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित लेजर प्रतिष्ठानों को F-15E, F-15C, F-15EX ईगल और अमेरिकी वायु सेना के F-16 फाइटिंग फाल्कन प्राप्त करने चाहिए, साथ ही संभवतः , ए -10 सी थंडरबोल्ट II विमान हमला। पांचवीं पीढ़ी के एफ -22 और एफ -35 के विमान इस प्रणाली से लैस नहीं होंगे, ताकि उन पर स्थापित स्टाल्थ सिस्टम को नुकसान न पहुंचे।
अमेरिकी वायु सेना के चार वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए इरादा विमान मुकाबला लेजर का पहला बड़े पैमाने पर परीक्षण दो हज़ार चौबीस में किया जाएगा। CचारISRNET द्वारा रिपोर्ट की गई। प्रकाशन के अनुसार, अमेरिकी वायु सेना अनुसंधान प्रयोगशाला जल्द ही प्रमुख विमान लेजर प्रणालियों में से एक प्राप्त करेगी, दो अन्य डेवलपर्स को इस वर्ष जुलाई में प्रदान करना चाहिए। परीक्षणों का विवरण प्रदान नहीं किया गया है। अमेरिकी वायु सेना के आदेश को मौजूदा विमान सुरक्षा के लिए अपर्याप्त माना गया और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और हीट ट्रैप के अलावा विमान पर हमला करने वाले विमानों के विनाश के लिए लेजर सिस्टम विकसित करने के प्रस्ताव के बाद सेल्फ-प्रोटेक्ट हाई एनर्जी लेजर डेमोंस्ट्रेटर कार्यक्रम के ढांचे के भीतर काम करना शुरू हुआ। मिसाइलों। अमेरिकी कंपनियां लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन और बोइंग लेजर के विकास में शामिल हैं। लॉकहीड मार्टिन लेजर मॉड्यूल के विकास के लिए जिम्मेदार है, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन नियंत्रण प्रणाली बना रहा है, और बोइंग कंटेनर है जिसमें लड़ाकू लेजर रखा जाएगा। इससे पहले, यूएस वायु सेना ने बताया कि SHIELD परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित लेजर प्रतिष्ठानों को F-पंद्रहE, F-पंद्रह डिग्री सेल्सियस, F-पंद्रहEX ईगल और अमेरिकी वायु सेना के F-सोलह फाइटिंग फाल्कन प्राप्त करने चाहिए, साथ ही संभवतः , ए -दस सी थंडरबोल्ट II विमान हमला। पांचवीं पीढ़ी के एफ -बाईस और एफ -पैंतीस के विमान इस प्रणाली से लैस नहीं होंगे, ताकि उन पर स्थापित स्टाल्थ सिस्टम को नुकसान न पहुंचे।
भारत और दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेट टीमों ने पानी की कमी के गंभीर संकट से जूझ रहे केपटाउन शहर में पानी की बोतल पहुंचाने और बोरवेल बनवाने के लिए लगभग 8500 डॉलर (5. 6 लाख रुपये) दान किए। टी-20 सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली और दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने 100000 रैंड (करीब 5. 6 लाख रुपये) द गिफ्ट ऑफ द गिवर्स फाउंडेशन को दान में दिए। यह अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे बड़ा आपदा राहत संगठन है। मालूम हो कि केपटाउन में जब भारतीय टीम पहुंची तो उससे पानी की बचत करने में सहयोग देने के लिए कहा गया था। भारतीय टीम के खिलाड़ियों को नहाने के लिए सिर्फ दो मिनट लेने के लिए कहा गया। पानी की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कहा जा रहा था कि वहां पेड़-पौधों को भी देने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। केपटाउन शहर दो तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है लेकिन बारिश नहीं होने के कारण यहां पीने के पानी की किल्लत हो गई। इसके बाद प्रशासन ने नियम लागू करते हुए ज्यादा खपत करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान कर दिया। केपटाउन में लेवल छह संकट के चलते सबको पानी बचाने में योगदान देने के लिए कहा गया। लेवल छह का मतलब पेड़-पौधों में भी पानी नहीं दिया जा सकेगा। गर्मी के मौसम के चलते पीने के साथ नहाने के लिए भी पर्याप्त पानी की जरुरत रहती है लेकिन सूखे की वजह से हर व्यक्ति को दिन में 87 लीटर खपत की अनुमति है। आपको बता दें कि टीम इंडिया ने द. अफ्रीका के दौरे पर पहले टेस्ट मैच केपटाउन में ही खेला था। इसके साथ ही साथ टीम इंडिया ने अपने दौरे का अंत भी केपटाउन में ही तीसरा और आखिरी टी 20 मैच खेलकर किया। भारतीय टीम को दौरे पर टेस्ट सीरीज में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा, जबकि उसने मेजबान को वनडे सीरीज में एकतरफा 5-1 से हराया और टी-20 में 2-1 से जीत दर्ज की। फिलहाल भारत को श्री लंका दौरे पर त्रिकोणीय सीरीज खेलनी है। वहां तीसरी टीम बांग्लादेश होगी।
भारत और दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेट टीमों ने पानी की कमी के गंभीर संकट से जूझ रहे केपटाउन शहर में पानी की बोतल पहुंचाने और बोरवेल बनवाने के लिए लगभग आठ हज़ार पाँच सौ डॉलर दान किए। टी-बीस सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली और दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने एक लाख रैंड द गिफ्ट ऑफ द गिवर्स फाउंडेशन को दान में दिए। यह अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे बड़ा आपदा राहत संगठन है। मालूम हो कि केपटाउन में जब भारतीय टीम पहुंची तो उससे पानी की बचत करने में सहयोग देने के लिए कहा गया था। भारतीय टीम के खिलाड़ियों को नहाने के लिए सिर्फ दो मिनट लेने के लिए कहा गया। पानी की किल्लत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कहा जा रहा था कि वहां पेड़-पौधों को भी देने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। केपटाउन शहर दो तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है लेकिन बारिश नहीं होने के कारण यहां पीने के पानी की किल्लत हो गई। इसके बाद प्रशासन ने नियम लागू करते हुए ज्यादा खपत करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान कर दिया। केपटाउन में लेवल छह संकट के चलते सबको पानी बचाने में योगदान देने के लिए कहा गया। लेवल छह का मतलब पेड़-पौधों में भी पानी नहीं दिया जा सकेगा। गर्मी के मौसम के चलते पीने के साथ नहाने के लिए भी पर्याप्त पानी की जरुरत रहती है लेकिन सूखे की वजह से हर व्यक्ति को दिन में सत्तासी लीटरटर खपत की अनुमति है। आपको बता दें कि टीम इंडिया ने द. अफ्रीका के दौरे पर पहले टेस्ट मैच केपटाउन में ही खेला था। इसके साथ ही साथ टीम इंडिया ने अपने दौरे का अंत भी केपटाउन में ही तीसरा और आखिरी टी बीस मैच खेलकर किया। भारतीय टीम को दौरे पर टेस्ट सीरीज में दो-एक से हार का सामना करना पड़ा, जबकि उसने मेजबान को वनडे सीरीज में एकतरफा पाँच-एक से हराया और टी-बीस में दो-एक से जीत दर्ज की। फिलहाल भारत को श्री लंका दौरे पर त्रिकोणीय सीरीज खेलनी है। वहां तीसरी टीम बांग्लादेश होगी।
श्रीधर पाठक ने नीच जाति की स्त्रियों के लिए भी राष्ट्रीय गीत लिसे । उदा हरणार्थ मजदूरिनों के लिए लिखा गया एक पद देखिए भारत पैसैयो मै बति यति जाऊँ । बलि चलि जाऊँ, हियरा लगाऊँ, हरया बनाऊँ, घरमा सजाउँ । मेर जियरचा फा, तन का जिगरवा का, मन का, मंदिरया का प्यारा यसैया । में बलि चलि जाऊँ - भारत पे मैयो मे यति पनि जाऊं । (ख) गीतिकाव्य की शैलियाँ काव्यगत भाव और शैली की दृष्टि से गांति काव्यों को कई मेदों में निभाजित किया जा सकता है। पहला मेद व्यग्य गाति का है । व्यग्य-गीति-फाव्य की भाँति व्यग्य-काव्य भी होते हैं । 'शकर' का 'गर्भ रडा-रहस्य' व्यग्यप्रवध-काव्य हे । व्यग्य गीति हिन्दी में बहुत छ। कम है और जो भी उनमे कवित्व का प्रभाव है। नाथूराम 'शकर' ने कुछ उत्कृष्ट व्यग्य गीति-लिसे । गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही अपने 'कविराज से सत्रोधन' में ब्रजभाषा - कविया का व्यग्य उड़ाते है : मो भारती तुम्हारा चलन देस देख कर, नव नायिका से निस्य लगन देस देस कर, परकीया में लगा हुआ भन देख देख कर, उजड़ा हुथा स्वदेश का वन देख देख कर, श्राकुल थजस्र धार से थ्रोसू बहा रही, होकर अधीर धैर्य भवन है ढहा रही । [ त्रिशूल- सरग, पृ० - ७१ ] इसी प्रकार 'कृष्णोत्कर्ष' में नाथूराम 'शकर' ने हिन्दुओं के कृष्णावतार पर व्यंग्य लिखा । मैथिलीशरण गुप्त ने भी 'शकर' को देखा-देखो कुछ व्यग्य-गीति लिखे, परतु इनके व्यग्य में डक बिल्कुल भी नहीं है और इसी लिए उनका महत्त्व बहुत ही कम है । गीति-काव्य का दूसरा भेद पत्र - गीति ( Epistles) है, जिसमें पत्र के रूप में कविता लिखी जाती है । पुत्र-गीति बँगला के महाकवि माइकेल मधुसूदन दत्त की- 'वीरागना' के अनुकरण रूप में लिखे गए । मैथिलीशरण गुप्त ने 'पत्रावली' इसी शैली में लिखी । पत्र-शैली ठीक ठीक गीति-काव्य
श्रीधर पाठक ने नीच जाति की स्त्रियों के लिए भी राष्ट्रीय गीत लिसे । उदा हरणार्थ मजदूरिनों के लिए लिखा गया एक पद देखिए भारत पैसैयो मै बति यति जाऊँ । बलि चलि जाऊँ, हियरा लगाऊँ, हरया बनाऊँ, घरमा सजाउँ । मेर जियरचा फा, तन का जिगरवा का, मन का, मंदिरया का प्यारा यसैया । में बलि चलि जाऊँ - भारत पे मैयो मे यति पनि जाऊं । गीतिकाव्य की शैलियाँ काव्यगत भाव और शैली की दृष्टि से गांति काव्यों को कई मेदों में निभाजित किया जा सकता है। पहला मेद व्यग्य गाति का है । व्यग्य-गीति-फाव्य की भाँति व्यग्य-काव्य भी होते हैं । 'शकर' का 'गर्भ रडा-रहस्य' व्यग्यप्रवध-काव्य हे । व्यग्य गीति हिन्दी में बहुत छ। कम है और जो भी उनमे कवित्व का प्रभाव है। नाथूराम 'शकर' ने कुछ उत्कृष्ट व्यग्य गीति-लिसे । गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही अपने 'कविराज से सत्रोधन' में ब्रजभाषा - कविया का व्यग्य उड़ाते है : मो भारती तुम्हारा चलन देस देख कर, नव नायिका से निस्य लगन देस देस कर, परकीया में लगा हुआ भन देख देख कर, उजड़ा हुथा स्वदेश का वन देख देख कर, श्राकुल थजस्र धार से थ्रोसू बहा रही, होकर अधीर धैर्य भवन है ढहा रही । [ त्रिशूल- सरग, पृशून्य - इकहत्तर ] इसी प्रकार 'कृष्णोत्कर्ष' में नाथूराम 'शकर' ने हिन्दुओं के कृष्णावतार पर व्यंग्य लिखा । मैथिलीशरण गुप्त ने भी 'शकर' को देखा-देखो कुछ व्यग्य-गीति लिखे, परतु इनके व्यग्य में डक बिल्कुल भी नहीं है और इसी लिए उनका महत्त्व बहुत ही कम है । गीति-काव्य का दूसरा भेद पत्र - गीति है, जिसमें पत्र के रूप में कविता लिखी जाती है । पुत्र-गीति बँगला के महाकवि माइकेल मधुसूदन दत्त की- 'वीरागना' के अनुकरण रूप में लिखे गए । मैथिलीशरण गुप्त ने 'पत्रावली' इसी शैली में लिखी । पत्र-शैली ठीक ठीक गीति-काव्य
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बुधवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे, उनके कार्यालय ने कहा। धनखड़ वहां एक सभा को संबोधित करेंगे और बाद में कार्यक्रम स्थल पर सामूहिक योग प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। IDY 2023 का आदर्श वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग" है। नौ साल पहले, संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में एक संकल्प के माध्यम से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के रूप में मान्यता दी थी। उपराष्ट्रपति के सचिवालय ने कहा कि आईडीवाई 2023 के वैश्विक उत्सव का नेतृत्व न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, वहीं आईडीवाई 2023 के राष्ट्रीय उत्सव का नेतृत्व धनखड़ करेंगे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बुधवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे, उनके कार्यालय ने कहा। धनखड़ वहां एक सभा को संबोधित करेंगे और बाद में कार्यक्रम स्थल पर सामूहिक योग प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। IDY दो हज़ार तेईस का आदर्श वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग" है। नौ साल पहले, संयुक्त राष्ट्र ने दो हज़ार चौदह में एक संकल्प के माध्यम से इक्कीस जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी थी। उपराष्ट्रपति के सचिवालय ने कहा कि आईडीवाई दो हज़ार तेईस के वैश्विक उत्सव का नेतृत्व न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, वहीं आईडीवाई दो हज़ार तेईस के राष्ट्रीय उत्सव का नेतृत्व धनखड़ करेंगे।
जब हम सही की पहचान नहीं कर पाते तब हम देखते हुए भी अंधे हैं। जब हम निराश हो जाते हैं और मान लेते हैं कि मंजिल कभी नहीं मिल पाएगी, कभी सफल नहीं हो पाएंगे तब भी हम अंधे ही होते हैं। सीखिए उन लोगों से जिन्होंने नेत्र की ज्योति खो दी पर प्रज्ञा चक्षु से कहां पहुंच गए। साढ़े पांच सौ साल पहले से सूरदास का साहित्य हमें आश्वस्त कर रहा है। साढ़े तीन सौ साल पहले शेक्सपीयर के बाद प्रतिष्ठा पाने वाले अंग्रेज साहित्यकार जॉन मिल्टन ने पैराडाइज लॉस्ट नामक महाकाव्य लिखा और उसके बाद भी दो अद्भुत ग्रंथ लिखे, जबकि जॉन मिल्टन ज्योति खो चुके थे। एक नेत्रहीन ने कइयों की आंखें खोल दीं। और पुरानी बात मानकर अगर विश्वास न हो तो आज हम जगद्गुरु रामभद्राचार्यजी को याद कर सकते हैं। वे तो प्रज्ञा चक्षु के जीते-जागते उदाहरण हैं। इन सबने एक बात अच्छे से समझ ली थी कि बाहर की ज्योति चली जाए तो अंदर की ज्योति बहुत काम आती है। हमारे पास तो अभी भी अवसर है। हम यदि अंतर्ज्योति पर काम करें तो हमारे बाहर की ज्योति हमें बहुत सही मार्गदर्शन दे सकेगी। इन लोगों के पास तो अभाव था। हमारे पास सुविधा है और फिर भी हम चूक जाएं तो इसे सोचा-समझा अंधापन ही कहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जब हम सही की पहचान नहीं कर पाते तब हम देखते हुए भी अंधे हैं। जब हम निराश हो जाते हैं और मान लेते हैं कि मंजिल कभी नहीं मिल पाएगी, कभी सफल नहीं हो पाएंगे तब भी हम अंधे ही होते हैं। सीखिए उन लोगों से जिन्होंने नेत्र की ज्योति खो दी पर प्रज्ञा चक्षु से कहां पहुंच गए। साढ़े पांच सौ साल पहले से सूरदास का साहित्य हमें आश्वस्त कर रहा है। साढ़े तीन सौ साल पहले शेक्सपीयर के बाद प्रतिष्ठा पाने वाले अंग्रेज साहित्यकार जॉन मिल्टन ने पैराडाइज लॉस्ट नामक महाकाव्य लिखा और उसके बाद भी दो अद्भुत ग्रंथ लिखे, जबकि जॉन मिल्टन ज्योति खो चुके थे। एक नेत्रहीन ने कइयों की आंखें खोल दीं। और पुरानी बात मानकर अगर विश्वास न हो तो आज हम जगद्गुरु रामभद्राचार्यजी को याद कर सकते हैं। वे तो प्रज्ञा चक्षु के जीते-जागते उदाहरण हैं। इन सबने एक बात अच्छे से समझ ली थी कि बाहर की ज्योति चली जाए तो अंदर की ज्योति बहुत काम आती है। हमारे पास तो अभी भी अवसर है। हम यदि अंतर्ज्योति पर काम करें तो हमारे बाहर की ज्योति हमें बहुत सही मार्गदर्शन दे सकेगी। इन लोगों के पास तो अभाव था। हमारे पास सुविधा है और फिर भी हम चूक जाएं तो इसे सोचा-समझा अंधापन ही कहेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भारत-पाक में तनाव के बीच मीका सिंह का पाकिस्तान में स्टेज परफॉर्मेंस देना लोगों को रास नहीं आ रहा है। भारत-पाकिस्तान के बीच इस समय तनाव का मौहल चल रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद लगातार पाकिस्तान से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वहीं इंडिया की जनता में इस बात को लेकर काफी खुशी देखी जा सकती हैं। पाकिस्तान के द्विपक्षीय व्यवहार पर जहां लोग उनकी निंदा कर रहे हैं वहीं इंडस्ट्री ने पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाने की मांग भी की है। ऐसे में सिंगर मीका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वो लाइव परफॉर्मेंस करते दिख रहे हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि ये पाकिस्तान का वाडियो है जहां मीका सिंह अपनी शानदार परफॉर्मेंस दे रहे हैं। पाकिस्तान के करांची शहर के इस वीडियो पर लोग अपना रिएक्शन दे रहे हैं। भारत-पाक में तनाव के बीच मीका सिंह का पाकिस्तान में स्टेज परफॉर्मेंस देना लोगों को रास नहीं आ रहा है। लोग लगातार इन वीडियोज पर अपने कमेंट कर रहे हैं। मीका सिंह अक्सर ही अपने बयानों को लेकर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। मीका सिंह अक्सर ही अपने बयानों को लेकर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। लोगों को उनका पाकिस्तान जाना पसंद नहीं आया तभी तो लोगों का गुस्सा इस पर फूट पड़ा है।
भारत-पाक में तनाव के बीच मीका सिंह का पाकिस्तान में स्टेज परफॉर्मेंस देना लोगों को रास नहीं आ रहा है। भारत-पाकिस्तान के बीच इस समय तनाव का मौहल चल रहा है। कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाने के बाद लगातार पाकिस्तान से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वहीं इंडिया की जनता में इस बात को लेकर काफी खुशी देखी जा सकती हैं। पाकिस्तान के द्विपक्षीय व्यवहार पर जहां लोग उनकी निंदा कर रहे हैं वहीं इंडस्ट्री ने पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाने की मांग भी की है। ऐसे में सिंगर मीका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वो लाइव परफॉर्मेंस करते दिख रहे हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि ये पाकिस्तान का वाडियो है जहां मीका सिंह अपनी शानदार परफॉर्मेंस दे रहे हैं। पाकिस्तान के करांची शहर के इस वीडियो पर लोग अपना रिएक्शन दे रहे हैं। भारत-पाक में तनाव के बीच मीका सिंह का पाकिस्तान में स्टेज परफॉर्मेंस देना लोगों को रास नहीं आ रहा है। लोग लगातार इन वीडियोज पर अपने कमेंट कर रहे हैं। मीका सिंह अक्सर ही अपने बयानों को लेकर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। मीका सिंह अक्सर ही अपने बयानों को लेकर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। लोगों को उनका पाकिस्तान जाना पसंद नहीं आया तभी तो लोगों का गुस्सा इस पर फूट पड़ा है।
3. एक मिलाजुला संविधान ( Composite Constitution) ग्रेट ब्रिटेन का संविधान विकसित संविधान है । यह केवल मुख्य रूप से अलिखित ही नहीं बल्कि इसका निर्माण किसी एक संविधान सभा यां राजा द्वारा नहीं हुआ । इस कारण अंग्रेज़ी संविधान वास्तव में इतिहास की देन है। जिस प्रकार छोटी-छोटी नदिये मिल कर क्रमशः एक महान नदी का रूप धारण कर लेती हैं ठीक उसी प्रकार कई लोगों या जातियों की भिन्न-भिन्न देन ने मिलकर धीरे-धीरे आधुनिक अंग्रेजी संविधान को बनाया । प्रो. ऐडम्ज़ ( Adams ) के शब्दों में "अंग्रेजी राष्ट्र को अंग्रेजी भाषा की भांति अंग्रेजी संविधान भी अनेकों विभिन्न साधनों द्वारा निर्मित हुआ है । "I यह बात स्वयं सिद्ध है कि अंग्रेजी भाषा कई भाषाओं को मिलाकर बनी है । इसकी लिपी रोमन भाषा से ली गई है और इसमें केल्ट, (Celt) रोमन, जर्मन, फ्रांसीसी, लातीनी (Latin ) तथा अन्य कई भाषाओं से शब्द लिए गए हैं । इसी तरह अंग्रेज़ी राष्ट्र के लोग कई जातियों से सम्बन्ध रखते हैं। इनमें केल्ट, रोमन, फ्रांसीसी; जर्मन, एंगलो-सेक्सन तथा अन्य कई जातियों के लोग शामिल हैं। इस प्रकार अंग्रेजी संविधान या अंग्रेज़ी सरकार के ढांचे के निर्माण में कई जातियों ने योगदान दिया । केल्ट और रोमन जातियों ने इंगलैंड के संविधान के विकास में कोई सीधा भाग न लिया। एंगलो-सेक्सन, (Anglo-saxon ) तथा डैन्ज़ (Danes) जातियों ने आधुनिक अंग्रेजी सरकार के ढांचे का निर्माण किया। इस ढांचे के अनुसार राजा (King) सर्वेसर्वा था, परन्तु उसकी शक्तियों के प्रयोग करने में एक प्रसिद्ध सामन्तों की सभा सहायक थी, जिसका नाम वाईटां (Witan ) या विटनजेमूट था । इसके लगभग 50 और 60 के बीच सदस्य थे और यह सभा कार्यकारिणी, विधान पालिका तथा न्यायपालिका का काम करती थी, अर्थात इससे यह कहा जा सकता है कि शुरू से ही अंग्रेजी सरकार में पृथक्करण के सिद्धांत ( Separation of powers) को कोई विशेष जगह नहीं मिली। एंगलो-सेक्सन काल में इंगलैण्ड के स्थानीय सरकार के ढाँचे को भी बनाया गया जो आज भी मुख्य बातों में उसी रूप में काम कर रहा है । इस ढाँचे में शायर (Shire ) या जिला, हंडर्ड (Hundred) और छोटे-छोटे गांवों की सभाएं होती थीं । नार्मन विजय (Norman conquest) के साथ वाईटां के स्थान पर एक महान सभा (Curia Regis) का निर्माण हुआ । राजा राष्ट्र की एकता का प्रतीक वन गया। बाकी सरकार का ढांचा वैसे ही बना रहा। 1295 में ऐडवर्ड I ने आधुनिक पार्लियामेंट का प्रारम्भ किया । इस तरह कई विभिन्न स्रोतों से आधुनिक अंग्रेजी संविधान का क्रमशः निर्माण होता रहा है । 1. Adams, George B. "Constitutional History of England......P.5 "The English Constitution like the English nation and the English langnage was derived from a variety of sources." विकसित संविधान (British Constitution : a Growth) "संविधान" शब्द लातीनी भाषा के शब्द 'कांस्टीचूरे' (Constituere ) से बना है । इसका अर्थ " स्थापित करना " है । इस प्रकार संविधान किसी राज्य या राष्ट्र के उन मौलिक नियमों का संग्रह है जो सरकार के रूप और अलग-अलग प्रशासकीय संस्थाओं का निर्माण करते हैं । यह नियम यदि लिखित हों तो संविधान को लिखित कहा जाता है और यदि अलिखित हों तो संविधान को अलिखित कहा जाता है । संविधान के लिखित या अलिखित होने का कोई विशेष महत्त्व नहीं होता क्योंकि संसार का कोई भी संविधान लिखित तथा अलिखित नियमों के बिना नहीं चल सकता । इसलिए डा० फाईनर ( Herman Finer ) के मतानुसार "प्रत्येक राज्य का संविधान होता है, राजनैतिक संस्थाओं की वह श्रृंखला जो राज्य के अन्दर सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न हो ।" I मनरो (Munro ) का भी यही विचार है कि "यदि किसी देश के लोग कुछ ऐसे नियमों या धाराओं या रीति-रिवाजों को स्वीकार करते हों जो उनकी सरकार का आधार हो, तो वे नियम उन लोगों का संविधान बनाते हैं । इसका कोई महत्त्व नहीं कि वे मौलिक नियम किसी एक लेख - पत्र में लिखे गये हों या बहुत से लेखों में बटे हुये हों या कभी भी लिखे न गये हों ।" " अलिखित संविधान (Unwritten Constitution) संसार के अनेकों स्वतन्त्र देशों में अकेला ग्रेट ब्रिटेन का संविधान एक अलिखित संविधान है। इस समय संयुक्त राष्ट्र संघ (U. N. O.) के लगभग 124 देश सदस्य हैं । इनमें 123 देशों का संविधान लिखित है । केवल इंगलैंड का संविधान ही अलिखित है । लिखित संविधान की रचना तीन प्रकार से की जा सकती है । (I) संविधान किसी विशेष संविधानिक सभा (Constituent Assembly or Convention ) द्वारा एक लेख-पत्र के रूप में लिखा जाये, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका (U. S. A.) का 1. Finer, Herman: "Governments of Greater European Powers." ( Henry Holt, N. Y. - 1956) ...p. 42. "Every state has a constitution: the system of fundamental political institution having supreme authority in its territory." 2. Munro, W. B. "The Governments of Europe." (MacMillanN. Y.-1954) p. 18. "If certain rules, provisions, and customs are accepted by the people as the basis of government then they have a constitution. It matters little whether the basic rules are embodied in a single document, or in several documents, or in none at all." संसार को प्रमुख शासन प्रणालियां संविधान 1787 में उस समय की 13 रियासतों के प्रतिनिधियों की सभा (Convention ) द्वारा बनाया गया । इसी तरह भारतवर्ष का संविधान 1949 में एक संवैधानिक सभा द्वारा लिखा गया जो 1946 में बनाई गई थी । ( 2 ) संविधान का निर्माण कुछ एक विशेष महान व्यक्तियों द्वारा निर्मित किया जा सकता है, जैसे रूस (U. S. S. R.) का आधुनिक संविधान 1936 में स्टालिन (Stalin) ने कुछ_ साथियों के साथ बनाया । इस प्रकार नेपाल का संविधान डा० जैनिंगज़ ने लिखा था जो दुर्भाग्यवश इस समय लागू नहीं है । ( 3 ) कई बार लिखित संविधान किसी विदेशी सरकार या संस्था द्वारा भी बनाया जा सकता है, जैसा कि कैनेडा ( Canada) आस्ट्रेलिया (Australia) का संविधान अंग्रेजी पार्लियामैंट के एक्ट द्वारा बनाया गया था । जापान (Japan) के आधुनिक संविधान को जनरल मैकार्थर ( General MacArthur) के आधीन 1947 में मित्र राष्ट्रों की संस्था ने बनाया, जिसे बाद में जापान की शीदेश सरकार ( Shidehara Government) ने स्वीकार कर लिया । ग्रेट ब्रिटेन का आधुनिक संविधान ऊपर दिये गये किसी भी तरीके से नहीं बना । इस कारण दो ताकवैल (De Tocque ville ) ने यह कहा था कि इंगलैंड का कोई संविधान नहीं है, परन्तु यह वात ठीक नहीं है क्योंकि इंगलैंड के संविधान का एक लिखित संविधान की भांति निर्माण नहीं हुआ । इसके विपरीत इंगलैंड का संविधान विकसित संविधान है अर्थात् इंगलैंड का संविधान इंगलैंड के लम्बे चौड़े इतिहास की देन है । इस बात को ध्यान में रखते हुए एनसन (Anson ) अंग्रेजी संविधान की उचित व्याख्या करते हुए लिखता है " अंग्रेजो संविधान का ढांचा टेढ़ा मेढ़ा है । यह ऐसे भवन की तरह है जिसे कई मालिकों ने बारी बारी अपनाया है और जिसमें वे अपनी सुविधा के अनुसार या समय के फैशन के अनुसार बराबर लगातार परिवर्तन लाते रहे । इस कारण इस पर बहुत लोगों का प्रभाव पड़ा है और यह ( संविधान) क्रमबद्ध न होकर उपयोगी है। इसकी पारिभाषिक शब्दावली अव भी पुरानी है, परन्तु इनका अर्थ बदल चुका है.....! इसमें परिवर्तन अचेत्तन रूप से होते रहे हैं जिसके कारण कई स्थानों पर कानून और अभिसमयों, व्यवहार तथा सिद्धांत में काफ़ी अन्तर आ गया है । "1 1. Anson ; "Law and Customs of the Constitution"; Vol. I......p. 1. "The British Constitution is ..a somewhat rambling structure, and like a house which many successive owners have altered just so far as suited their immediate wants or the fashion of the time, it bears the marks of many hands, and is convenient rather than symmetrical. Forms and phrases survive which have long since lost their meaning, and the adoption of practice to convenience by a process of unconscious change has brought about in many cases a divergence of law and custom, of theory and practice". ग्रेट ब्रिटेन का संविधान पूर्ण रूप से अलिखित संविधान भी नहीं है । इसके कुछ तत्व या नियम लिखे हुए हैं। इस बात का उचित वर्णन करते हुए बिरच ( Birch) कहता है कि "बेशक इंगलैंड का संविधान अलिखित है परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि इंगलैंड में कोई संवैधानिक कानून ( a body of Constitutional Law) लिखित रूप में नहीं है ।" ऐसे कई अधिनियम (Acts) मौजूद हैं जो इंगलैंड की सरकार की विभिन्न संस्थानों के रूप, शक्तियों और कार्यों का वर्णन करते हैं। उदाहरणतयः विल आफ़ राईटस ( Bill of Rights 1689 ), ऐक्ट आफ़ सैटलमैंट (Act of Settlement, 1701) राजा की शक्तियों को सीमित करते हैं । इसी प्रकार 1911 और 1949 के पार्लियामैंट ऐक्ट (Parliament Acts 1911, 1949) लार्ड सभा (House of Lords) की शक्तियों को निश्चित करते हैं। इसी तरह 1928 और 1948 के निर्वाचन अधिनियम ( People's Representation Act of 1928 and 1948) इंगलैंड की आधुनिक चुनाव पद्धति (Electoral system) को निर्धारित करते हैं । " इस प्रकार ( ग्रेट ब्रिटेन की सरकार की कई विभिन्न संस्थाओं के सम्बन्ध में लिखित कानून मिलते हैं । यदि किसी बात का अभाव है तो वे ऐसे लिखित तथा कानूनी नियम हैं जो इन संस्थाओं के बीच निश्चित सम्बन्ध को निर्धारित करते हों । " . इस चर्चा से यह सिद्ध होता है कि इंगलैंड का आधुनिक संविधान अलिखित होते हुए भी आंशिक रूप से लिखित है । इसका निर्माण अन्य देशों के संविधानों की भांति किसी विशेष रीति द्वारा नहीं हुआ है । इसके विपरीत इसका निर्माण इतिहासिक विकास द्वारा हुआ है। यही कारण है कि मनरो (Munro ) अंग्रेज़ी संविधान को "संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा व्यावहारिक नियमों का अजीब मिला जुला रूप" कहता है । इसमें कई अधिनियम और शाही फ़रमान (Charters and Statutes ), न्यायाधीशों के निर्णय, देश का साधारण कानून, प्रथायें तथा अभिसमय शामिल हैं । यह किसी एक लेख पत्र (document) में नहीं लिखा हुआ वल्कि सैंकड़ों लेख पत्रों का संग्रह है । • इसका निर्माण किसी एक स्रोत से नहीं हुआ बल्कि बहुत से स्रोतों से हुआ है । यह अभी भी पूर्ण नहीं है बल्कि एक लगातार अटूट विकास है। यह बुद्धि और व्यवहारिक घटनाओं को सन्तान है जिसका विकास मार्ग कभी अकास्मिक घटनाओं और कभी 1. Birch, A. H. "The British System of Government." ( Allen and Unwin Ltd. London - 1967).p. 29. "There is no lack of statutory provisions regarding the various institutions of government, considered individually. What is lacking is a documentary and authoritative statement of the relations between these institutions." उच्चकोटि की निर्माण इस तथ्य को सकते हैं :संसार की प्रमुख शासन प्राणलियां क्रियाओं ने निर्धारित किया सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित उदाहरण दिए जा 1. संविधानिक राजतंत्र का विकास ( Development of Constitution Monarchy) :-कानूनी दृष्टि से ग्रेट ब्रिटेन की सरकार का प्रमुख राजा हैं । आजकल इंगलैंड के सिंहासन पर रानी ऐलिजबँथ द्वितिय (Elizbeth II) विराजमान है। राजा या रानी राज्य की सर्वोच्च सत्ता का आधार है। राजा ही देश की वास्तविक सरकार अर्थात मन्त्रिमण्डल के मुख्य प्रधान मन्त्री, को सरकार चलाने के लिए नियुक्त करता है । मन्त्रिमण्डल के अन्य मन्त्री भी राजा द्वारा प्रधान मन्त्री के परामर्श पर ही नियुक्त किए जाते हैं। इंगलैंड का मन्त्रिमण्डल रानी का मन्त्रिमण्डल कहलाता है। देश की सभी सेवायें भी रानी की सेवायें कहलाती हैं । इंगलैंड की फ़ौज रानी की सेना कहलाती है । हवाई सेना रानी की हवाई फ़ौज ( Royal Air Force) कहलाती है. और इंगलैंड के न्यायालय रानी के न्याय को लागू करते हैं । इंगलैंड के कानून रानी के हस्ताक्षर के साथ कानून बनते हैं जबकि उन कानूनों को पास करने का अधिकार पार्लियामेंट को है । किन्तु यह केवल कानूनी व्यवस्था है। वास्तव में रानी का कार्य केवल पार्लियामेंट द्वारा पास किए गए कानूनों पर हस्ताक्षर करने से अधिक नहीं । मन्त्रिमण्डल भी इसी प्रकार लोगों की चुनी हुई पार्लियामैंट में से चुना जाता है । रानी केवल लोक सदन ( House of Commons) में बहुमत प्राप्त करने वाले राजनैतिक दल के नेता को ही प्रधान मन्त्री मनोनीत करती है। इस प्रकार वास्तव में राज्य की प्रमुसत्ता पर आज जनता का अधिकार है । इंग्लैंड के इतिहास में यह परिवर्तन धीरे-धीरे हुआ । राजा की राजसत्ता संवैधानिक रूप में आज भी वैसे ही है जैसे इस देश के संवैधानिक इतिहास ( Constitutional History ) के आरम्भ में थी । परन्तु व्यवहारिक रूप में यह सत्ता आज लोगों के पास है । इंग्लैंड का संवैधानिक विकास ऐंगलो सैक्सन ( Anglo-Saxon ) काल से शुरू होता है । उस समय राजा सर्वेसर्वा था । परन्तु उसकी सहायता के लिए एक सभा होती थी जिसमें देश के बड़े-बड़े सामन्त शामिल थे। नार्मल विजन (Norman Conquest 1066) के बाद भी राजा का पद शक्तिशाली रहा । इतिहास की 1. Munro, Willium. B. and Avearst, M. "Governments of Europe" (Macmillan-4th ed. 1954)P. "It is a complex amalgam of institutions, principles, and prac tices,.........It is not derived from one source, but from several. It is not a completed thing, but a process of growth. It is a chiled of wisdom and of chance, whose course has been sometimes guided by accident and sometimes by high design." पहली मुख्य घटना, जिसने राजा की शक्ति को सीमित किया और आधुनिक संवैधानिक राजतन्त्र की नींव रखी, महान् पत्र (Magna Carta 1215) थी । मँगना कार्टा हासल करने में भले ही उस समय के सामन्तों का हाथ था, इंग्लैंड की जनता का नहीं, तो भी इस महान् पत्र ने दो प्रसिद्ध विचारों के साथ आधुनिक संवैधानिक सरकार की नींव रखी । ये दो सिद्धान्त न्यूमैन (Neumann ) के शब्दों में यह थे कि "राजा की शक्ति कानून द्वारा सीमित है, और प्रजा को यह अधिकार प्राप्त है कि वह शान्तिपूर्ण ढंग से ऐसी संस्था को बना सकें जो उनके अधिकारों को सुरक्षित रखें ( और राजा की शक्ति को सीमित करें) । यहां तक कि यदि शान्ति पूर्ण ढंग से यह न हो सके तो प्रजा संघर्ष से भी राजशक्ति को सीमित कर सकती है । इन्हीं दो सिद्धान्तों के महत्व को बतलाने के लिए स्तब्ज ( Bishop Stubbs) इंग्लैंड के संवैधानिक विकास के इतिहास ( English Constitutional History ) को मैगना कार्टा पर टीका टिप्पणी का एक लम्बा चौड़ा इतिहास कहता है ।" मैग़ना कार्टा के पास होने के बाद इतिहास में धीरे-धीरे इसका महत्व पता चला । 13वीं और 14वीं शताब्दी में इन्हीं सिद्धान्तों पर राजा और जनता में संघर्ष चलता रहा । इस संघर्ष में राजा एडवर्ड (Edward ) तथा रिचर्ड II (Richard II ) को सिंहासन से हाथ धोना पड़ा। 15वीं शताब्दी में लंकास्टरियन से ( Lancasterian) क्रान्ति के उपरान्त राजा की शक्ति सीमित हो गई और देश में संवैधानिक सरकार स्थापित हो गई । परन्तु टयूडर वंश (Tudro) के सिंहासन सम्भालने के वाद 16वीं शताब्दी में राजा की सत्ता फिर बढ़ गई और राजा और संसद में संघर्ष कुछ समय के लिए शान्त हो गया । किन्तु 17वीं शताब्दी में स्टुयर्ट ( Stuart ) वंश के सिंहासन सम्भालने के बाद यह संघर्ष बहुत बढ़ गया और गृह युद्ध (Civil war 1642-48) के बाद राजा की निरंकुश शक्ति को बहुत धक्का पहुँचा । अन्त में शानदार क्रांति ( Glorious Revolution, 1688) ने राजा की निरंकुश सत्ता को समाप्त कर दिया और संवैधानिक सरकार का निर्माण किया । इस क्रांति के बाद अभिसमयों ( Conventions ) द्वारा धीरे-धीरे राजा की सत्ता इंगलैंड के मन्त्री मण्डल को मिल गई जो जनता द्वारा चुनी हुई पार्लियामैंट के प्रति उत्तरदायी है । 1. Neumann, Robert. G. "European and Comparative Government." p 10. "......that the King was bound by the Law, and that his subjects had a right to set up machinery to enforce this obligation, if necessary by Civil War." 2. W. Stubbs. "The Constitutional History of England." Vol. II pp. 2.
तीन. एक मिलाजुला संविधान ग्रेट ब्रिटेन का संविधान विकसित संविधान है । यह केवल मुख्य रूप से अलिखित ही नहीं बल्कि इसका निर्माण किसी एक संविधान सभा यां राजा द्वारा नहीं हुआ । इस कारण अंग्रेज़ी संविधान वास्तव में इतिहास की देन है। जिस प्रकार छोटी-छोटी नदिये मिल कर क्रमशः एक महान नदी का रूप धारण कर लेती हैं ठीक उसी प्रकार कई लोगों या जातियों की भिन्न-भिन्न देन ने मिलकर धीरे-धीरे आधुनिक अंग्रेजी संविधान को बनाया । प्रो. ऐडम्ज़ के शब्दों में "अंग्रेजी राष्ट्र को अंग्रेजी भाषा की भांति अंग्रेजी संविधान भी अनेकों विभिन्न साधनों द्वारा निर्मित हुआ है । "I यह बात स्वयं सिद्ध है कि अंग्रेजी भाषा कई भाषाओं को मिलाकर बनी है । इसकी लिपी रोमन भाषा से ली गई है और इसमें केल्ट, रोमन, जर्मन, फ्रांसीसी, लातीनी तथा अन्य कई भाषाओं से शब्द लिए गए हैं । इसी तरह अंग्रेज़ी राष्ट्र के लोग कई जातियों से सम्बन्ध रखते हैं। इनमें केल्ट, रोमन, फ्रांसीसी; जर्मन, एंगलो-सेक्सन तथा अन्य कई जातियों के लोग शामिल हैं। इस प्रकार अंग्रेजी संविधान या अंग्रेज़ी सरकार के ढांचे के निर्माण में कई जातियों ने योगदान दिया । केल्ट और रोमन जातियों ने इंगलैंड के संविधान के विकास में कोई सीधा भाग न लिया। एंगलो-सेक्सन, तथा डैन्ज़ जातियों ने आधुनिक अंग्रेजी सरकार के ढांचे का निर्माण किया। इस ढांचे के अनुसार राजा सर्वेसर्वा था, परन्तु उसकी शक्तियों के प्रयोग करने में एक प्रसिद्ध सामन्तों की सभा सहायक थी, जिसका नाम वाईटां या विटनजेमूट था । इसके लगभग पचास और साठ के बीच सदस्य थे और यह सभा कार्यकारिणी, विधान पालिका तथा न्यायपालिका का काम करती थी, अर्थात इससे यह कहा जा सकता है कि शुरू से ही अंग्रेजी सरकार में पृथक्करण के सिद्धांत को कोई विशेष जगह नहीं मिली। एंगलो-सेक्सन काल में इंगलैण्ड के स्थानीय सरकार के ढाँचे को भी बनाया गया जो आज भी मुख्य बातों में उसी रूप में काम कर रहा है । इस ढाँचे में शायर या जिला, हंडर्ड और छोटे-छोटे गांवों की सभाएं होती थीं । नार्मन विजय के साथ वाईटां के स्थान पर एक महान सभा का निर्माण हुआ । राजा राष्ट्र की एकता का प्रतीक वन गया। बाकी सरकार का ढांचा वैसे ही बना रहा। एक हज़ार दो सौ पचानवे में ऐडवर्ड I ने आधुनिक पार्लियामेंट का प्रारम्भ किया । इस तरह कई विभिन्न स्रोतों से आधुनिक अंग्रेजी संविधान का क्रमशः निर्माण होता रहा है । एक. Adams, George B. "Constitutional History of England......P.पाँच "The English Constitution like the English nation and the English langnage was derived from a variety of sources." विकसित संविधान "संविधान" शब्द लातीनी भाषा के शब्द 'कांस्टीचूरे' से बना है । इसका अर्थ " स्थापित करना " है । इस प्रकार संविधान किसी राज्य या राष्ट्र के उन मौलिक नियमों का संग्रह है जो सरकार के रूप और अलग-अलग प्रशासकीय संस्थाओं का निर्माण करते हैं । यह नियम यदि लिखित हों तो संविधान को लिखित कहा जाता है और यदि अलिखित हों तो संविधान को अलिखित कहा जाता है । संविधान के लिखित या अलिखित होने का कोई विशेष महत्त्व नहीं होता क्योंकि संसार का कोई भी संविधान लिखित तथा अलिखित नियमों के बिना नहीं चल सकता । इसलिए डाशून्य फाईनर के मतानुसार "प्रत्येक राज्य का संविधान होता है, राजनैतिक संस्थाओं की वह श्रृंखला जो राज्य के अन्दर सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न हो ।" I मनरो का भी यही विचार है कि "यदि किसी देश के लोग कुछ ऐसे नियमों या धाराओं या रीति-रिवाजों को स्वीकार करते हों जो उनकी सरकार का आधार हो, तो वे नियम उन लोगों का संविधान बनाते हैं । इसका कोई महत्त्व नहीं कि वे मौलिक नियम किसी एक लेख - पत्र में लिखे गये हों या बहुत से लेखों में बटे हुये हों या कभी भी लिखे न गये हों ।" " अलिखित संविधान संसार के अनेकों स्वतन्त्र देशों में अकेला ग्रेट ब्रिटेन का संविधान एक अलिखित संविधान है। इस समय संयुक्त राष्ट्र संघ के लगभग एक सौ चौबीस देश सदस्य हैं । इनमें एक सौ तेईस देशों का संविधान लिखित है । केवल इंगलैंड का संविधान ही अलिखित है । लिखित संविधान की रचना तीन प्रकार से की जा सकती है । संविधान किसी विशेष संविधानिक सभा द्वारा एक लेख-पत्र के रूप में लिखा जाये, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का एक. Finer, Herman: "Governments of Greater European Powers." ...p. बयालीस. "Every state has a constitution: the system of fundamental political institution having supreme authority in its territory." दो. Munro, W. B. "The Governments of Europe." p. अट्ठारह. "If certain rules, provisions, and customs are accepted by the people as the basis of government then they have a constitution. It matters little whether the basic rules are embodied in a single document, or in several documents, or in none at all." संसार को प्रमुख शासन प्रणालियां संविधान एक हज़ार सात सौ सत्तासी में उस समय की तेरह रियासतों के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा बनाया गया । इसी तरह भारतवर्ष का संविधान एक हज़ार नौ सौ उनचास में एक संवैधानिक सभा द्वारा लिखा गया जो एक हज़ार नौ सौ छियालीस में बनाई गई थी । संविधान का निर्माण कुछ एक विशेष महान व्यक्तियों द्वारा निर्मित किया जा सकता है, जैसे रूस का आधुनिक संविधान एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में स्टालिन ने कुछ_ साथियों के साथ बनाया । इस प्रकार नेपाल का संविधान डाशून्य जैनिंगज़ ने लिखा था जो दुर्भाग्यवश इस समय लागू नहीं है । कई बार लिखित संविधान किसी विदेशी सरकार या संस्था द्वारा भी बनाया जा सकता है, जैसा कि कैनेडा आस्ट्रेलिया का संविधान अंग्रेजी पार्लियामैंट के एक्ट द्वारा बनाया गया था । जापान के आधुनिक संविधान को जनरल मैकार्थर के आधीन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में मित्र राष्ट्रों की संस्था ने बनाया, जिसे बाद में जापान की शीदेश सरकार ने स्वीकार कर लिया । ग्रेट ब्रिटेन का आधुनिक संविधान ऊपर दिये गये किसी भी तरीके से नहीं बना । इस कारण दो ताकवैल ने यह कहा था कि इंगलैंड का कोई संविधान नहीं है, परन्तु यह वात ठीक नहीं है क्योंकि इंगलैंड के संविधान का एक लिखित संविधान की भांति निर्माण नहीं हुआ । इसके विपरीत इंगलैंड का संविधान विकसित संविधान है अर्थात् इंगलैंड का संविधान इंगलैंड के लम्बे चौड़े इतिहास की देन है । इस बात को ध्यान में रखते हुए एनसन अंग्रेजी संविधान की उचित व्याख्या करते हुए लिखता है " अंग्रेजो संविधान का ढांचा टेढ़ा मेढ़ा है । यह ऐसे भवन की तरह है जिसे कई मालिकों ने बारी बारी अपनाया है और जिसमें वे अपनी सुविधा के अनुसार या समय के फैशन के अनुसार बराबर लगातार परिवर्तन लाते रहे । इस कारण इस पर बहुत लोगों का प्रभाव पड़ा है और यह क्रमबद्ध न होकर उपयोगी है। इसकी पारिभाषिक शब्दावली अव भी पुरानी है, परन्तु इनका अर्थ बदल चुका है.....! इसमें परिवर्तन अचेत्तन रूप से होते रहे हैं जिसके कारण कई स्थानों पर कानून और अभिसमयों, व्यवहार तथा सिद्धांत में काफ़ी अन्तर आ गया है । "एक एक. Anson ; "Law and Customs of the Constitution"; Vol. I......p. एक. "The British Constitution is ..a somewhat rambling structure, and like a house which many successive owners have altered just so far as suited their immediate wants or the fashion of the time, it bears the marks of many hands, and is convenient rather than symmetrical. Forms and phrases survive which have long since lost their meaning, and the adoption of practice to convenience by a process of unconscious change has brought about in many cases a divergence of law and custom, of theory and practice". ग्रेट ब्रिटेन का संविधान पूर्ण रूप से अलिखित संविधान भी नहीं है । इसके कुछ तत्व या नियम लिखे हुए हैं। इस बात का उचित वर्णन करते हुए बिरच कहता है कि "बेशक इंगलैंड का संविधान अलिखित है परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि इंगलैंड में कोई संवैधानिक कानून लिखित रूप में नहीं है ।" ऐसे कई अधिनियम मौजूद हैं जो इंगलैंड की सरकार की विभिन्न संस्थानों के रूप, शक्तियों और कार्यों का वर्णन करते हैं। उदाहरणतयः विल आफ़ राईटस , ऐक्ट आफ़ सैटलमैंट राजा की शक्तियों को सीमित करते हैं । इसी प्रकार एक हज़ार नौ सौ ग्यारह और एक हज़ार नौ सौ उनचास के पार्लियामैंट ऐक्ट लार्ड सभा की शक्तियों को निश्चित करते हैं। इसी तरह एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस और एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के निर्वाचन अधिनियम इंगलैंड की आधुनिक चुनाव पद्धति को निर्धारित करते हैं । " इस प्रकार अंग्रेज़ी संविधान को "संस्थाओं, सिद्धान्तों तथा व्यावहारिक नियमों का अजीब मिला जुला रूप" कहता है । इसमें कई अधिनियम और शाही फ़रमान , न्यायाधीशों के निर्णय, देश का साधारण कानून, प्रथायें तथा अभिसमय शामिल हैं । यह किसी एक लेख पत्र में नहीं लिखा हुआ वल्कि सैंकड़ों लेख पत्रों का संग्रह है । • इसका निर्माण किसी एक स्रोत से नहीं हुआ बल्कि बहुत से स्रोतों से हुआ है । यह अभी भी पूर्ण नहीं है बल्कि एक लगातार अटूट विकास है। यह बुद्धि और व्यवहारिक घटनाओं को सन्तान है जिसका विकास मार्ग कभी अकास्मिक घटनाओं और कभी एक. Birch, A. H. "The British System of Government." .p. उनतीस. "There is no lack of statutory provisions regarding the various institutions of government, considered individually. What is lacking is a documentary and authoritative statement of the relations between these institutions." उच्चकोटि की निर्माण इस तथ्य को सकते हैं :संसार की प्रमुख शासन प्राणलियां क्रियाओं ने निर्धारित किया सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित उदाहरण दिए जा एक. संविधानिक राजतंत्र का विकास :-कानूनी दृष्टि से ग्रेट ब्रिटेन की सरकार का प्रमुख राजा हैं । आजकल इंगलैंड के सिंहासन पर रानी ऐलिजबँथ द्वितिय विराजमान है। राजा या रानी राज्य की सर्वोच्च सत्ता का आधार है। राजा ही देश की वास्तविक सरकार अर्थात मन्त्रिमण्डल के मुख्य प्रधान मन्त्री, को सरकार चलाने के लिए नियुक्त करता है । मन्त्रिमण्डल के अन्य मन्त्री भी राजा द्वारा प्रधान मन्त्री के परामर्श पर ही नियुक्त किए जाते हैं। इंगलैंड का मन्त्रिमण्डल रानी का मन्त्रिमण्डल कहलाता है। देश की सभी सेवायें भी रानी की सेवायें कहलाती हैं । इंगलैंड की फ़ौज रानी की सेना कहलाती है । हवाई सेना रानी की हवाई फ़ौज कहलाती है. और इंगलैंड के न्यायालय रानी के न्याय को लागू करते हैं । इंगलैंड के कानून रानी के हस्ताक्षर के साथ कानून बनते हैं जबकि उन कानूनों को पास करने का अधिकार पार्लियामेंट को है । किन्तु यह केवल कानूनी व्यवस्था है। वास्तव में रानी का कार्य केवल पार्लियामेंट द्वारा पास किए गए कानूनों पर हस्ताक्षर करने से अधिक नहीं । मन्त्रिमण्डल भी इसी प्रकार लोगों की चुनी हुई पार्लियामैंट में से चुना जाता है । रानी केवल लोक सदन में बहुमत प्राप्त करने वाले राजनैतिक दल के नेता को ही प्रधान मन्त्री मनोनीत करती है। इस प्रकार वास्तव में राज्य की प्रमुसत्ता पर आज जनता का अधिकार है । इंग्लैंड के इतिहास में यह परिवर्तन धीरे-धीरे हुआ । राजा की राजसत्ता संवैधानिक रूप में आज भी वैसे ही है जैसे इस देश के संवैधानिक इतिहास के आरम्भ में थी । परन्तु व्यवहारिक रूप में यह सत्ता आज लोगों के पास है । इंग्लैंड का संवैधानिक विकास ऐंगलो सैक्सन काल से शुरू होता है । उस समय राजा सर्वेसर्वा था । परन्तु उसकी सहायता के लिए एक सभा होती थी जिसमें देश के बड़े-बड़े सामन्त शामिल थे। नार्मल विजन के बाद भी राजा का पद शक्तिशाली रहा । इतिहास की एक. Munro, Willium. B. and Avearst, M. "Governments of Europe" P. "It is a complex amalgam of institutions, principles, and prac tices,.........It is not derived from one source, but from several. It is not a completed thing, but a process of growth. It is a chiled of wisdom and of chance, whose course has been sometimes guided by accident and sometimes by high design." पहली मुख्य घटना, जिसने राजा की शक्ति को सीमित किया और आधुनिक संवैधानिक राजतन्त्र की नींव रखी, महान् पत्र थी । मँगना कार्टा हासल करने में भले ही उस समय के सामन्तों का हाथ था, इंग्लैंड की जनता का नहीं, तो भी इस महान् पत्र ने दो प्रसिद्ध विचारों के साथ आधुनिक संवैधानिक सरकार की नींव रखी । ये दो सिद्धान्त न्यूमैन के शब्दों में यह थे कि "राजा की शक्ति कानून द्वारा सीमित है, और प्रजा को यह अधिकार प्राप्त है कि वह शान्तिपूर्ण ढंग से ऐसी संस्था को बना सकें जो उनके अधिकारों को सुरक्षित रखें । यहां तक कि यदि शान्ति पूर्ण ढंग से यह न हो सके तो प्रजा संघर्ष से भी राजशक्ति को सीमित कर सकती है । इन्हीं दो सिद्धान्तों के महत्व को बतलाने के लिए स्तब्ज इंग्लैंड के संवैधानिक विकास के इतिहास को मैगना कार्टा पर टीका टिप्पणी का एक लम्बा चौड़ा इतिहास कहता है ।" मैग़ना कार्टा के पास होने के बाद इतिहास में धीरे-धीरे इसका महत्व पता चला । तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी में इन्हीं सिद्धान्तों पर राजा और जनता में संघर्ष चलता रहा । इस संघर्ष में राजा एडवर्ड तथा रिचर्ड II को सिंहासन से हाथ धोना पड़ा। पंद्रहवीं शताब्दी में लंकास्टरियन से क्रान्ति के उपरान्त राजा की शक्ति सीमित हो गई और देश में संवैधानिक सरकार स्थापित हो गई । परन्तु टयूडर वंश के सिंहासन सम्भालने के वाद सोलहवीं शताब्दी में राजा की सत्ता फिर बढ़ गई और राजा और संसद में संघर्ष कुछ समय के लिए शान्त हो गया । किन्तु सत्रहवीं शताब्दी में स्टुयर्ट वंश के सिंहासन सम्भालने के बाद यह संघर्ष बहुत बढ़ गया और गृह युद्ध के बाद राजा की निरंकुश शक्ति को बहुत धक्का पहुँचा । अन्त में शानदार क्रांति ने राजा की निरंकुश सत्ता को समाप्त कर दिया और संवैधानिक सरकार का निर्माण किया । इस क्रांति के बाद अभिसमयों द्वारा धीरे-धीरे राजा की सत्ता इंगलैंड के मन्त्री मण्डल को मिल गई जो जनता द्वारा चुनी हुई पार्लियामैंट के प्रति उत्तरदायी है । एक. Neumann, Robert. G. "European and Comparative Government." p दस. "......that the King was bound by the Law, and that his subjects had a right to set up machinery to enforce this obligation, if necessary by Civil War." दो. वाट. Stubbs. "The Constitutional History of England." Vol. II pp. दो.
चंबा - भाजपा महिला मोर्चा की चंबा जिला इकाई की बैठक का आयोजन शनिवार को मुख्यालय स्थित बचत भवन परिसर में किया गया। बैठक में महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष इंदू गोस्वामी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि अध्यक्षता जिला प्रधान कांता ठाकुर ने की। उन्होंने मुख्यातिथि को शाल व टोपी पहनाकर और स्मृति चिंह भेंटकर सम्मानित किया। इंदू गोस्वामी ने दीप प्रज्ज्वलित करके विधिवत तरीके से बैठक का शुभारंभ किया। बैठक में सदर विधायक पवन नैयर, भरमौर के विधायक जियालाल कपूर व जिला भाजपा प्रधान डीएस ठाकुर ने भी विशेष तौर से उपस्थिति दर्ज करवाई। बैठक के दौरान प्रदेशाध्यक्ष इंदू गोस्वामी ने महिला कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। महिला नेताओं व कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाना होगा। महिला कार्यकर्ताओं ने भी संकेत दिया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को घर- घर पहुंचाने और विरोधियों को जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इंदू गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए वचनबद्ध है। उनकी सरकार में विदेश एवं रक्षा सहित कई मंत्रालयों की कमान महिला नेताओं के पास है। बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ जैसी सशक्त योजनाओं के साथ सरकार सामाजिक परिवर्तन के लिए भी काम कर रही है। मोदी सरकार गांव-गांव में शौचालय एवं रसोई गैस को पहुंचाकर महिला स्वास्थ्य में सुधार के लिए कार्य कर रही है। मोदी सरकार ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार स्वरोजगार एवं शिक्षा के लिए जोभी कल्याणकारी कदम उठाए हैं। बैठक में नगर परिषद अध्यक्षा नीलम नैयर, पार्षद अंजलि मल्होत्रा, महिला मोर्चा चंबा की प्रधान सीमा कश्यप, पार्षद धन्नो देवी सहित काफी तादाद में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहे।
चंबा - भाजपा महिला मोर्चा की चंबा जिला इकाई की बैठक का आयोजन शनिवार को मुख्यालय स्थित बचत भवन परिसर में किया गया। बैठक में महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष इंदू गोस्वामी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि अध्यक्षता जिला प्रधान कांता ठाकुर ने की। उन्होंने मुख्यातिथि को शाल व टोपी पहनाकर और स्मृति चिंह भेंटकर सम्मानित किया। इंदू गोस्वामी ने दीप प्रज्ज्वलित करके विधिवत तरीके से बैठक का शुभारंभ किया। बैठक में सदर विधायक पवन नैयर, भरमौर के विधायक जियालाल कपूर व जिला भाजपा प्रधान डीएस ठाकुर ने भी विशेष तौर से उपस्थिति दर्ज करवाई। बैठक के दौरान प्रदेशाध्यक्ष इंदू गोस्वामी ने महिला कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। महिला नेताओं व कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाना होगा। महिला कार्यकर्ताओं ने भी संकेत दिया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को घर- घर पहुंचाने और विरोधियों को जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इंदू गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए वचनबद्ध है। उनकी सरकार में विदेश एवं रक्षा सहित कई मंत्रालयों की कमान महिला नेताओं के पास है। बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ जैसी सशक्त योजनाओं के साथ सरकार सामाजिक परिवर्तन के लिए भी काम कर रही है। मोदी सरकार गांव-गांव में शौचालय एवं रसोई गैस को पहुंचाकर महिला स्वास्थ्य में सुधार के लिए कार्य कर रही है। मोदी सरकार ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार स्वरोजगार एवं शिक्षा के लिए जोभी कल्याणकारी कदम उठाए हैं। बैठक में नगर परिषद अध्यक्षा नीलम नैयर, पार्षद अंजलि मल्होत्रा, महिला मोर्चा चंबा की प्रधान सीमा कश्यप, पार्षद धन्नो देवी सहित काफी तादाद में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहे।
चारधाम यात्रा पर बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों को एक ही छत पर सभी जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए एसडीएम ने बुधवार से यात्रा प्रशासन संगठन को चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र खोलकर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभी सहायता केंद्र में पुलिस कर्मी रह रहे हैं। मंगलवार को उपजिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय ने चारधाम यात्रा की तैयारियों के बाबत समीक्षा बैठक की। विभागीय अधिकारियों से पेयजल, सड़क, सफाई, वाहनों की स्थिति आदि मुद्दो पर चर्चा की। चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड में पेयजल की आपूर्ति सुचारू नहीं होने पर जलसंस्थान को 24 घंटे के भीतर व्यवस्था दुरस्त करने, नगर निगम को बस टर्मिनल कंपाउंड सहित अन्य सार्वजनिक स्थान जहां तीर्थयात्रियों की आवाजाही रहती है वहां सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यात्रा प्रशासन संगठन के व्यैक्तिक सचिव एके श्रीवास्तव से यात्री सुविधा केंद्र में बने चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र को पुलिस के कब्जे से खाली कराकर यात्रा से जुड़े विभागों के कर्मियों की डयूटी लगाने के निर्देश दिए। एसडीएम ने हिदायत दी कि जो भी कमियां हैं उसे 24 घंटे के अंदर दूर कर लिया जाए। कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौके पर सहायक नगर आयुक्त एलम दास, सहायक अभियंता नगर निगम आनंद सिंह मिश्रवाण, सहायक अभियंता पीडब्लूडी आरसी कैलखुरा, एआरटीओ प्रवर्तन पंकज श्रीवास्तव, यात्रा प्रशासन संगठन सचिव एके श्रीवास्तव, जलसंस्थान सहायक अभियंता एसपी सिंह, एजीएम रोडवेज पीके भारती, कोतवाल महेश जोशी आदि मौजूद रहे।
चारधाम यात्रा पर बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों को एक ही छत पर सभी जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए एसडीएम ने बुधवार से यात्रा प्रशासन संगठन को चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र खोलकर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभी सहायता केंद्र में पुलिस कर्मी रह रहे हैं। मंगलवार को उपजिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय ने चारधाम यात्रा की तैयारियों के बाबत समीक्षा बैठक की। विभागीय अधिकारियों से पेयजल, सड़क, सफाई, वाहनों की स्थिति आदि मुद्दो पर चर्चा की। चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड में पेयजल की आपूर्ति सुचारू नहीं होने पर जलसंस्थान को चौबीस घंटाटे के भीतर व्यवस्था दुरस्त करने, नगर निगम को बस टर्मिनल कंपाउंड सहित अन्य सार्वजनिक स्थान जहां तीर्थयात्रियों की आवाजाही रहती है वहां सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यात्रा प्रशासन संगठन के व्यैक्तिक सचिव एके श्रीवास्तव से यात्री सुविधा केंद्र में बने चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र को पुलिस के कब्जे से खाली कराकर यात्रा से जुड़े विभागों के कर्मियों की डयूटी लगाने के निर्देश दिए। एसडीएम ने हिदायत दी कि जो भी कमियां हैं उसे चौबीस घंटाटे के अंदर दूर कर लिया जाए। कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौके पर सहायक नगर आयुक्त एलम दास, सहायक अभियंता नगर निगम आनंद सिंह मिश्रवाण, सहायक अभियंता पीडब्लूडी आरसी कैलखुरा, एआरटीओ प्रवर्तन पंकज श्रीवास्तव, यात्रा प्रशासन संगठन सचिव एके श्रीवास्तव, जलसंस्थान सहायक अभियंता एसपी सिंह, एजीएम रोडवेज पीके भारती, कोतवाल महेश जोशी आदि मौजूद रहे।
मुंबई, 5 नवंबर (आईएएनएस)। 'रुस्तम' फेम लेखक विपुल के. रावल को उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'टोनी' की रिलीज के पहले मुंबई के वकील हरिशचंद्र सोमेश्वर ने कानूनी नोटिस भेजा है। वकील का दावा है कि फिल्म के पोस्टर ने ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। पोस्टर में पवित्र क्रॉस की तस्वीर को दिखाया गया है, जिसमें एक कटा हुआ हाथ जंजीर से बंधा हुआ है। नोटिस में कहा गया है कि निर्माताओं ने इस छवि का इस्तेमाल अनैतिक रूप से किया है और कैथोलिक समुदाय की भावना को आहत किया है। 'टॉनी' मनोविज्ञान के चार छात्रों की कहानी है, जो चर्च के कन्फेशन बॉक्स (जहां लोग ईश्वर के सामने अपना गुनाह कबूल करते हैं) में एक कैमरा लगा देते हैं और तब जाकर उन्हें सीरियल किलर टॉनी का पता चलता है जो पादरी के सामने हत्या करने के जुर्म को कबूल करता है। उनकी चारों की जिंदगी में उस वक्त एक मोड़ आता है जब उनकी मुलाकात टॉनी से होती है और वे टॉनी के इस सफर का हिस्सा बन जाते हैं। यह फिल्म 29 नवंबर को रिलीज होगी।
मुंबई, पाँच नवंबर । 'रुस्तम' फेम लेखक विपुल के. रावल को उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'टोनी' की रिलीज के पहले मुंबई के वकील हरिशचंद्र सोमेश्वर ने कानूनी नोटिस भेजा है। वकील का दावा है कि फिल्म के पोस्टर ने ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। पोस्टर में पवित्र क्रॉस की तस्वीर को दिखाया गया है, जिसमें एक कटा हुआ हाथ जंजीर से बंधा हुआ है। नोटिस में कहा गया है कि निर्माताओं ने इस छवि का इस्तेमाल अनैतिक रूप से किया है और कैथोलिक समुदाय की भावना को आहत किया है। 'टॉनी' मनोविज्ञान के चार छात्रों की कहानी है, जो चर्च के कन्फेशन बॉक्स में एक कैमरा लगा देते हैं और तब जाकर उन्हें सीरियल किलर टॉनी का पता चलता है जो पादरी के सामने हत्या करने के जुर्म को कबूल करता है। उनकी चारों की जिंदगी में उस वक्त एक मोड़ आता है जब उनकी मुलाकात टॉनी से होती है और वे टॉनी के इस सफर का हिस्सा बन जाते हैं। यह फिल्म उनतीस नवंबर को रिलीज होगी।
१. मंडल । २. कंकण । ३. चूड़ी । ४. वेष्ठन । ५. अठारह प्रकार के गलगंड रोगों में से एक । विशेष - इसमें कफ के कारण गले के अंदर उस नली में जिसमें से होकर अन्न जल पेट में जाता है, एक गाँठ उत्पन्न हो जाती है । यह गाँठ ऊँची और बड़ी होती है और अन्न जल के जाने का मार्ग रोक देती है । वैद्य लोग इसे असाध्य मानते हैं । ६. दंड व्यूह का एक भेद । सैनिकों की दो दो पंक्तियों में स्थिति । (कौटिल्य अर्थसास्त्र) । ८. कुंडल । बाला (को॰) । ९. कटिबंध । मेखला । कमरपेटी (को॰) । १०. प्राकार । चहारदीवारी (को॰) । ११. शाखा । डाली (को॰) । १२. शरीर की गोल हड्डियाँ । १३. प्राचुर्य । विविधता । आधिक्य (को॰) । Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या। Valay के पर्यायवाचीः Valay, Valay meaning in English. Valay in english. Valay in english language. What is meaning of Valay in English dictionary? Valay ka matalab english me kya hai (Valay का अंग्रेजी में मतलब ). Valay अंग्रेजी मे मीनिंग. English definition of Valay. English meaning of Valay. Valay का मतलब (मीनिंग) अंग्रेजी में जाने। Valay kaun hai? Valay kahan hai? Valay kya hai? Valay kaa arth. Hindi to english dictionary(शब्दकोश).वलय को अंग्रेजी में क्या कहते हैं. इस श्रेणी से मिलते जुलते शब्दः ये शब्द भी देखेंः synonyms of Valay in Hindi Valay ka Samanarthak kya hai? Valay Samanarthak, Valay synonyms in Hindi, Paryay of Valay, Valay ka Paryay, In "gkexams" you will find the word synonym of the Valay And along with the derivation of the word Valay is also given here for your enlightenment. Paryay and Samanarthak both reveal the same expressions. What is the synonym of Valay in Hindi?
एक. मंडल । दो. कंकण । तीन. चूड़ी । चार. वेष्ठन । पाँच. अठारह प्रकार के गलगंड रोगों में से एक । विशेष - इसमें कफ के कारण गले के अंदर उस नली में जिसमें से होकर अन्न जल पेट में जाता है, एक गाँठ उत्पन्न हो जाती है । यह गाँठ ऊँची और बड़ी होती है और अन्न जल के जाने का मार्ग रोक देती है । वैद्य लोग इसे असाध्य मानते हैं । छः. दंड व्यूह का एक भेद । सैनिकों की दो दो पंक्तियों में स्थिति । । आठ. कुंडल । बाला । नौ. कटिबंध । मेखला । कमरपेटी । दस. प्राकार । चहारदीवारी । ग्यारह. शाखा । डाली । बारह. शरीर की गोल हड्डियाँ । तेरह. प्राचुर्य । विविधता । आधिक्य । Hindi Dictionary. Devnagari to roman Dictionary. हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा शब्दकोष। देवनागरी और रोमन लिपि में। एक लाख शब्दों का संकलन। स्थानीय और सरल भाषा में व्याख्या। Valay के पर्यायवाचीः Valay, Valay meaning in English. Valay in english. Valay in english language. What is meaning of Valay in English dictionary? Valay ka matalab english me kya hai . Valay अंग्रेजी मे मीनिंग. English definition of Valay. English meaning of Valay. Valay का मतलब अंग्रेजी में जाने। Valay kaun hai? Valay kahan hai? Valay kya hai? Valay kaa arth. Hindi to english dictionary.वलय को अंग्रेजी में क्या कहते हैं. इस श्रेणी से मिलते जुलते शब्दः ये शब्द भी देखेंः synonyms of Valay in Hindi Valay ka Samanarthak kya hai? Valay Samanarthak, Valay synonyms in Hindi, Paryay of Valay, Valay ka Paryay, In "gkexams" you will find the word synonym of the Valay And along with the derivation of the word Valay is also given here for your enlightenment. Paryay and Samanarthak both reveal the same expressions. What is the synonym of Valay in Hindi?
पूर्णिया में शपथ से पहले ही एक सरपंच पति का तालिबानी चेहरा सामने आया है। प्रेम प्रसंग में फरार युवती को अपने आवास पर बुलाकर लड़के को छोड़ने के लिए जबरन दबाव बनाया। युवती के इंकार करने पर संरपच पति ने पहले तो थप्पड़ मारा फिर की कोड़े से पिटाई। जागरण संवाददाता, पूर्णिया। पंचायत चुनाव में जीत के बाद अभी सरपंच पद की जीती किरण चौधरी ने शपथ भी नहीं ली है कि उनके पति सुरेन्द्र चौधरी का तालिबानी चेहरा सामने आया है। सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी ने अपने प्रेमी के साथ फरार होने के बाद ना केवल लड़के को छोड़ देने का फरमान जारी किया बल्कि उस लड़के के साथ कोई संबंध नहीं है, यह लिखकर देने को भी कहा। युवती जब सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी के पैर पकड़कर कहती है वह लड़के के साथ रहना चाहती है तो पहले उसे चमड़ी उतार लेने की धमकी दी जाती है फिर थप्पड़ से मारा जाता है और फिर कौड़े निकाल कर पिटाई की जाती है। इसका वीडियो वारयल होने के बाद हड़कंप मच गया। यह मामला केनगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत का है। सबसे हैरत की बात यह है की इस मामले में न्याय मित्र नवल मंडल भी वीडियो में युवती से जबरन हस्ताक्षर करवाते हुए तथा यह कहते हुए नजर आ रहे हैं की तुम्हारे मां बाप ने हस्ताक्षर कर दिया है तुम भी साइन कर दो कुछ नहीं होगा। घटना के संबंध में बताया जाता है की केनगर के बैेरगाछी के रहने वाले युवक एवं पास के प्रखंड की एक युवती आपस में प्यार करते थे। वे भाग भी गए लेकिन यह मामला युवक के घरवालों को नागवार गुजरा क्योंकि युवक और युवती दो अलग- अलग जाति के थे। इसके बाद न्याय की उम्मीद में युवती सरपंच के घर पहुंची जहां सरपंच पति का तालिबानी चेहरा सामने आया। एसपी दयाशंकर ने बताया की इस मामले को लेकर जो वीडियो सामने आया है उसको जांच के लिए केनगर थाना भेजा गया है। वहीं सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी ने बताया की यह सब एक साजिश के तहत उनके साथ किया गया है। उनके यहां लड़की को लाकर योजना के तहत बीडियो तैयार किया गया। इसके बाद रविवार को उनको बैंरगाछी बुलाकर उनके साथ शाम में मारपीट कर जख्मी कर दिया गया। उनके वाहन को भी पिटाई करने वालों ने क्षतिग्रस्त कर छीन लिया वे जान बचाकर वहां से भागे हैं। केनगर थाना प्रभारी विकास कुमार आजाद ने बताया की संरपच पति के साथ मारपीट किए जाने की भी जानकारी मिली है। वहीं सरपंच पति का वीडियो भी आया है जिसकी जांच की जा रही है।
पूर्णिया में शपथ से पहले ही एक सरपंच पति का तालिबानी चेहरा सामने आया है। प्रेम प्रसंग में फरार युवती को अपने आवास पर बुलाकर लड़के को छोड़ने के लिए जबरन दबाव बनाया। युवती के इंकार करने पर संरपच पति ने पहले तो थप्पड़ मारा फिर की कोड़े से पिटाई। जागरण संवाददाता, पूर्णिया। पंचायत चुनाव में जीत के बाद अभी सरपंच पद की जीती किरण चौधरी ने शपथ भी नहीं ली है कि उनके पति सुरेन्द्र चौधरी का तालिबानी चेहरा सामने आया है। सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी ने अपने प्रेमी के साथ फरार होने के बाद ना केवल लड़के को छोड़ देने का फरमान जारी किया बल्कि उस लड़के के साथ कोई संबंध नहीं है, यह लिखकर देने को भी कहा। युवती जब सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी के पैर पकड़कर कहती है वह लड़के के साथ रहना चाहती है तो पहले उसे चमड़ी उतार लेने की धमकी दी जाती है फिर थप्पड़ से मारा जाता है और फिर कौड़े निकाल कर पिटाई की जाती है। इसका वीडियो वारयल होने के बाद हड़कंप मच गया। यह मामला केनगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत का है। सबसे हैरत की बात यह है की इस मामले में न्याय मित्र नवल मंडल भी वीडियो में युवती से जबरन हस्ताक्षर करवाते हुए तथा यह कहते हुए नजर आ रहे हैं की तुम्हारे मां बाप ने हस्ताक्षर कर दिया है तुम भी साइन कर दो कुछ नहीं होगा। घटना के संबंध में बताया जाता है की केनगर के बैेरगाछी के रहने वाले युवक एवं पास के प्रखंड की एक युवती आपस में प्यार करते थे। वे भाग भी गए लेकिन यह मामला युवक के घरवालों को नागवार गुजरा क्योंकि युवक और युवती दो अलग- अलग जाति के थे। इसके बाद न्याय की उम्मीद में युवती सरपंच के घर पहुंची जहां सरपंच पति का तालिबानी चेहरा सामने आया। एसपी दयाशंकर ने बताया की इस मामले को लेकर जो वीडियो सामने आया है उसको जांच के लिए केनगर थाना भेजा गया है। वहीं सरपंच पति सुरेन्द्र चौधरी ने बताया की यह सब एक साजिश के तहत उनके साथ किया गया है। उनके यहां लड़की को लाकर योजना के तहत बीडियो तैयार किया गया। इसके बाद रविवार को उनको बैंरगाछी बुलाकर उनके साथ शाम में मारपीट कर जख्मी कर दिया गया। उनके वाहन को भी पिटाई करने वालों ने क्षतिग्रस्त कर छीन लिया वे जान बचाकर वहां से भागे हैं। केनगर थाना प्रभारी विकास कुमार आजाद ने बताया की संरपच पति के साथ मारपीट किए जाने की भी जानकारी मिली है। वहीं सरपंच पति का वीडियो भी आया है जिसकी जांच की जा रही है।
लंदनः लंदन से न्यूयार्क की यात्रा करने वाले विमान यात्रियों के लिए साल 2017 में एक अच्छी खबर यह है कि अब वे अपनी हवाई यात्रा के दौरान काफी समय बचाने में कामयाब रह सकते हैं। 2017 में इसे ध्वनि की गति से भी तेज उड़ने वाले विमान 'बेबी बूम' के द्वारा संभव किया जा सकेगा। यूके की एयरोस्पे स कंपनी बूम ने इस छोटे विमान का प्रोटोटाइम तैयार कर लिया है। विमान की स्पीड को देखते हुए दावा किया जा रहा है कि इस विमान से लंदन से न्यूयॉर्क का सफर मात्र 3 घंटे 30 मिनट में पूरा किया जा सकता है और लगभग इतने ही समय की बचत भी की जा सकती है। एयरो स्पेस कंपनी के छोटे विमान बेबी बूम की स्पीड ध्वनि की गति से भी तेज बताई जा रही है और यह 2335 किमी की अधिकतम स्पीड से उड़ने में सक्षम बताया जा रहा है। बेबी बूम विमान से लंदन से न्यtयार्क की यात्रा करने वाले विमान यात्रियों को एक टिकट का 3 लाख 40 रुपए का भुगतान करना पड़ेगा। वर्जिन एयरलाइंस ने इस सबसे तेज गति वाले विमान के 10 आर्डर दे दिए है। उम्मीद जताई जा रही है कि अंतिम परीक्षणों के बाद यह विमान 2017 में उड़ान भर सकेगा।
लंदनः लंदन से न्यूयार्क की यात्रा करने वाले विमान यात्रियों के लिए साल दो हज़ार सत्रह में एक अच्छी खबर यह है कि अब वे अपनी हवाई यात्रा के दौरान काफी समय बचाने में कामयाब रह सकते हैं। दो हज़ार सत्रह में इसे ध्वनि की गति से भी तेज उड़ने वाले विमान 'बेबी बूम' के द्वारा संभव किया जा सकेगा। यूके की एयरोस्पे स कंपनी बूम ने इस छोटे विमान का प्रोटोटाइम तैयार कर लिया है। विमान की स्पीड को देखते हुए दावा किया जा रहा है कि इस विमान से लंदन से न्यूयॉर्क का सफर मात्र तीन घंटाटे तीस मिनट में पूरा किया जा सकता है और लगभग इतने ही समय की बचत भी की जा सकती है। एयरो स्पेस कंपनी के छोटे विमान बेबी बूम की स्पीड ध्वनि की गति से भी तेज बताई जा रही है और यह दो हज़ार तीन सौ पैंतीस किमी की अधिकतम स्पीड से उड़ने में सक्षम बताया जा रहा है। बेबी बूम विमान से लंदन से न्यtयार्क की यात्रा करने वाले विमान यात्रियों को एक टिकट का तीन लाख चालीस रुपयापए का भुगतान करना पड़ेगा। वर्जिन एयरलाइंस ने इस सबसे तेज गति वाले विमान के दस आर्डर दे दिए है। उम्मीद जताई जा रही है कि अंतिम परीक्षणों के बाद यह विमान दो हज़ार सत्रह में उड़ान भर सकेगा।
होते हैं । इन सबका वर्णन इस अंग में है। इनकी पद संख्या बानवे लाख चवालीस हजार है । १०. प्रश्न व्याकरणांग - - जो वस्तु खो गई है या मुट्ठी में है वा और कोई चिता का विषय हो, उन सब प्रश्नो को लेकर उनका पूर्ण यथार्थ व्याख्यान वा समाधान का वर्णन इस आग में है । इसकी पद सख्या तिरानवे लाख सोलह हजार है । ११. विपाक सूत्रांग- इसमे अशुभ कर्मो का उदय शुभ कर्मों का उदय तथा उनका फल वर्णन किया है। इसकी पद संख्या एक करोड चौरासी लाख है । इस प्रकार ग्यारह अगो की पद संख्या चार करोड़ पन्द्रह लाख दो हजार है । ऐसे श्रुतज्ञान को मै नमस्कार करता हू । १२. बारहवें अंग दृष्टिवाद के लक्षण और भेद-परिकर्म च सूत्रं च, स्तौमि, प्रथमानुयोग पूर्व गते । सार्द्ध चूलिकयापि च, पंचविधं दृष्टिवादं च ॥६॥ दृष्टिवाद नाम के बारहवे अग के पाच भेद है । १ परिकर्म, २. सूत्र, ३. प्रथमानुयोग, ४. पूर्वगत और ५. चूलिका इन सबको मै नमस्कार करता हूँ । १. परिकर्म - जिसमें गणित की व्याख्या कर उसका पूर्ण विचार किया हो उसको परिकर्म कहते है । इसके पाच भेद है -१ चन्द्र प्रज्ञप्ति, २ सूर्य प्रज्ञप्ति ३ जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति, ४. द्वीप सागर प्रज्ञप्ति और ५ व्याख्या प्रजाप्ति । चन्द्र प्रज्ञप्ति - इसमे चन्द्रमा की आयु, गति, परिवार, विभूति आदि का वर्णन है, इसकी पद सख्या छत्तीस लाख पाच हजार है । सूर्य प्रज्ञप्ति - इसमे सूर्य की आयु, गति, परिवार, विभूति ग्रहरण आदि का । इसकी पद संख्या पाच लाख तीन हजार है । जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति - इसमे जम्बूद्वीप सम्बन्धी सात क्षेत्र, कुलाचल पर्वत सरोवर नदियां आदि का वर्णन है । इसकी पद संख्या तीन लाख पच्चीस हजार है । द्वीपसागर प्रज्ञप्ति - इसमे असख्यात द्वीप समुद्रो का वर्णन है। उन द्वीप समुद्रो मे रहने वाले प्रकृत्रिम चैत्यालय ज्योतिष व्यतर आादि सवका वर्णन है । इसकी पद संख्या बावन लाख छत्तीस हजार है । वर्णन है व्याख्या प्रज्ञप्ति -- इसमे जीवाजीवादिक द्रव्यों का स्वरूप, उनका रूपी, अरूपीना आदि का वर्णन है । इसकी पद संख्या चौरासी लाख छत्तीस हजार है । अन्य गरणानुपस्थापन नामक प्रायश्चित की विधि स्वगरण अनुपस्थापन के समान हो है । परन्तु यह विशेषता है । अभिमानपूर्वक अपराध करने वाला साधु अपने दोपो की आचार्य के समक्ष आलोचना करता है । तदनन्तर उसकी आलोचना को सुनकर आचार्य उसको दूसरे आचार्य के समीप भेजते है । वह साधु दूसरे आचार्य के समीप जाकर अपने दोषो की आलोचना करता है, वह प्राचार्य भी उसकी ना सुनकर तीसरे आचार्य के समीप भेजते है । इस प्रकार सात आचार्य के समीप जाकर आलोचना करता है, उसको कोई भी प्राचार्य प्रायश्चित नही देते है । पुनः क्रम से सात आचार्यों के पास जाकर अपने आचार्य के समीप आता है । तब आचार्य उसको स्वगरणानुस्थापन विधि के अनुसार प्रायश्चित देते है । यह ग्रन्यगरणानुस्थापन नामक प्रायश्चित है स्वगरणानुस्थापन का अर्थ है - अपने गरण से बहिस्कृत करना । अपने घ की वसतिका से ३२ धनुष दूर रखना । अन्यगरणानुस्थापन का अर्थ है - दूसरे आचार्य के सघ में जाकर आलोचना करने पर भी प्रायश्चित देकर वे प्राचार्य साधु को अपने गरण में नहीं रखते है, इसलिये यह अन्यगरणानुस्थापन है । पारंचित प्रायश्चित की विधि -- स्वधर्म रहिते क्षेत्रे प्रायश्चिते पुरोदिते । चारः पारंचिकं जैनधर्मात्यन्तरतेर्मतम् ।।८३८॥ संघोर्वीश विरोधांतः पुरस्त्री गमनादिषु । दोषेष्ववंद्यः पाप्येष पातकीर्ति बहिः कृतः ॥८३६॥ चतुर्विधेन संघेन देशान्निष्कासितोप्यदः । चरत्येवाय वैराग्य सत्त्वज्ञान बलो व्रती ॥८४०॥ अपने धर्म से रहित क्षेत्र मे पूर्व मे कहे हुये प्रायश्चित में जैन धर्म में अत्यन्त लीन मुनि का बिहार पारचिक नामक प्रायश्चित माना है, सघ का राजा का विरोध, अत पुरकी स्त्री गमनादि दोष हो जाने पर यह प्रवदनीय है पापी है पातकी है, इस प्रकार बहिष्कृत तथा चतुर्विध संघ के द्वारा देश से निकाला हुआ भी यह श्रेष्ठ वैराग्य, तत्वज्ञान रूपी बल से युक्त साधु आचरण करता है । इस प्रायश्चित मे उपवासादि विधि तो अनुपस्थापन प्रायश्चित के समान है, परन्तु कुछ विशेषता है । जब कोई साधु सघ का, राजा का विरोधी होकरपुर की
होते हैं । इन सबका वर्णन इस अंग में है। इनकी पद संख्या बानवे लाख चवालीस हजार है । दस. प्रश्न व्याकरणांग - - जो वस्तु खो गई है या मुट्ठी में है वा और कोई चिता का विषय हो, उन सब प्रश्नो को लेकर उनका पूर्ण यथार्थ व्याख्यान वा समाधान का वर्णन इस आग में है । इसकी पद सख्या तिरानवे लाख सोलह हजार है । ग्यारह. विपाक सूत्रांग- इसमे अशुभ कर्मो का उदय शुभ कर्मों का उदय तथा उनका फल वर्णन किया है। इसकी पद संख्या एक करोड चौरासी लाख है । इस प्रकार ग्यारह अगो की पद संख्या चार करोड़ पन्द्रह लाख दो हजार है । ऐसे श्रुतज्ञान को मै नमस्कार करता हू । बारह. बारहवें अंग दृष्टिवाद के लक्षण और भेद-परिकर्म च सूत्रं च, स्तौमि, प्रथमानुयोग पूर्व गते । सार्द्ध चूलिकयापि च, पंचविधं दृष्टिवादं च ॥छः॥ दृष्टिवाद नाम के बारहवे अग के पाच भेद है । एक परिकर्म, दो. सूत्र, तीन. प्रथमानुयोग, चार. पूर्वगत और पाँच. चूलिका इन सबको मै नमस्कार करता हूँ । एक. परिकर्म - जिसमें गणित की व्याख्या कर उसका पूर्ण विचार किया हो उसको परिकर्म कहते है । इसके पाच भेद है -एक चन्द्र प्रज्ञप्ति, दो सूर्य प्रज्ञप्ति तीन जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति, चार. द्वीप सागर प्रज्ञप्ति और पाँच व्याख्या प्रजाप्ति । चन्द्र प्रज्ञप्ति - इसमे चन्द्रमा की आयु, गति, परिवार, विभूति आदि का वर्णन है, इसकी पद सख्या छत्तीस लाख पाच हजार है । सूर्य प्रज्ञप्ति - इसमे सूर्य की आयु, गति, परिवार, विभूति ग्रहरण आदि का । इसकी पद संख्या पाच लाख तीन हजार है । जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति - इसमे जम्बूद्वीप सम्बन्धी सात क्षेत्र, कुलाचल पर्वत सरोवर नदियां आदि का वर्णन है । इसकी पद संख्या तीन लाख पच्चीस हजार है । द्वीपसागर प्रज्ञप्ति - इसमे असख्यात द्वीप समुद्रो का वर्णन है। उन द्वीप समुद्रो मे रहने वाले प्रकृत्रिम चैत्यालय ज्योतिष व्यतर आादि सवका वर्णन है । इसकी पद संख्या बावन लाख छत्तीस हजार है । वर्णन है व्याख्या प्रज्ञप्ति -- इसमे जीवाजीवादिक द्रव्यों का स्वरूप, उनका रूपी, अरूपीना आदि का वर्णन है । इसकी पद संख्या चौरासी लाख छत्तीस हजार है । अन्य गरणानुपस्थापन नामक प्रायश्चित की विधि स्वगरण अनुपस्थापन के समान हो है । परन्तु यह विशेषता है । अभिमानपूर्वक अपराध करने वाला साधु अपने दोपो की आचार्य के समक्ष आलोचना करता है । तदनन्तर उसकी आलोचना को सुनकर आचार्य उसको दूसरे आचार्य के समीप भेजते है । वह साधु दूसरे आचार्य के समीप जाकर अपने दोषो की आलोचना करता है, वह प्राचार्य भी उसकी ना सुनकर तीसरे आचार्य के समीप भेजते है । इस प्रकार सात आचार्य के समीप जाकर आलोचना करता है, उसको कोई भी प्राचार्य प्रायश्चित नही देते है । पुनः क्रम से सात आचार्यों के पास जाकर अपने आचार्य के समीप आता है । तब आचार्य उसको स्वगरणानुस्थापन विधि के अनुसार प्रायश्चित देते है । यह ग्रन्यगरणानुस्थापन नामक प्रायश्चित है स्वगरणानुस्थापन का अर्थ है - अपने गरण से बहिस्कृत करना । अपने घ की वसतिका से बत्तीस धनुष दूर रखना । अन्यगरणानुस्थापन का अर्थ है - दूसरे आचार्य के सघ में जाकर आलोचना करने पर भी प्रायश्चित देकर वे प्राचार्य साधु को अपने गरण में नहीं रखते है, इसलिये यह अन्यगरणानुस्थापन है । पारंचित प्रायश्चित की विधि -- स्वधर्म रहिते क्षेत्रे प्रायश्चिते पुरोदिते । चारः पारंचिकं जैनधर्मात्यन्तरतेर्मतम् ।।आठ सौ अड़तीस॥ संघोर्वीश विरोधांतः पुरस्त्री गमनादिषु । दोषेष्ववंद्यः पाप्येष पातकीर्ति बहिः कृतः ॥आठ सौ छत्तीस॥ चतुर्विधेन संघेन देशान्निष्कासितोप्यदः । चरत्येवाय वैराग्य सत्त्वज्ञान बलो व्रती ॥आठ सौ चालीस॥ अपने धर्म से रहित क्षेत्र मे पूर्व मे कहे हुये प्रायश्चित में जैन धर्म में अत्यन्त लीन मुनि का बिहार पारचिक नामक प्रायश्चित माना है, सघ का राजा का विरोध, अत पुरकी स्त्री गमनादि दोष हो जाने पर यह प्रवदनीय है पापी है पातकी है, इस प्रकार बहिष्कृत तथा चतुर्विध संघ के द्वारा देश से निकाला हुआ भी यह श्रेष्ठ वैराग्य, तत्वज्ञान रूपी बल से युक्त साधु आचरण करता है । इस प्रायश्चित मे उपवासादि विधि तो अनुपस्थापन प्रायश्चित के समान है, परन्तु कुछ विशेषता है । जब कोई साधु सघ का, राजा का विरोधी होकरपुर की
राजधानी सहित प्रदेश भर में तीन दिन राशन वितरण बंद रहेगा। इससे प्रदेश के करीब चार करोड़ से अधिक हितग्राही प्रभावित होंगे। दरअसल, शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेता-प्रबंधक 7, 8 और 9 फरवरी को ऑल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर्स फेडरेशन के समर्थन में हड़ताल पर रहेंगे। भोपाल। राजधानी सहित प्रदेश भर में तीन दिन राशन वितरण बंद रहेगा। इससे प्रदेश के करीब चार करोड़ से अधिक हितग्राही प्रभावित होंगे। दरअसल, शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेता-प्रबंधक 7, 8 और 9 फरवरी को आॅल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर्स फेडरेशन के समर्थन में हड़ताल पर रहेंगे। इसके चलते सभी राशन दुकानों को बंद रखा जाएगा। इस संबंध में फेडरेशन की मप्र इकाई ने मुख्यमंत्री, सहकारिता मंत्री और खाद्य मंत्री को भी अवगत करा दिया है। राजधानी उपभोक्ता भंडार संचालक कल्याण समिति का कहना है कि वर्तमान में सेल्समैन को प्रति क्विंटल 70 रुपए कमीशन मिलता है। अप्रेल 2022 को यह कमीशन बढ़ाकर 90 रुपए कर दिया गया है, लेकिन वर्तमान समय तक बढ़ा हुआ कमीशन नहीं दिया गया। यहीं नहीं पीएमजीकेवाय का कमीशन भी किसी दुकानदार को नहीं दिया गया। इसके पहले 13 माह की अंतर राशि भी अटकी हुई है। राजधानी सहित प्रदेश भर में हर महीने की सात तारीख को अन्न उत्सव मनाया जाता है। फरवरी में यह परंपरा हड़ताल के चलते टूट रही है। इस बार 10, 11 और 13 फरवरी को अन्न उत्सव मनाया जाएगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षा के द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।
राजधानी सहित प्रदेश भर में तीन दिन राशन वितरण बंद रहेगा। इससे प्रदेश के करीब चार करोड़ से अधिक हितग्राही प्रभावित होंगे। दरअसल, शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेता-प्रबंधक सात, आठ और नौ फरवरी को ऑल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर्स फेडरेशन के समर्थन में हड़ताल पर रहेंगे। भोपाल। राजधानी सहित प्रदेश भर में तीन दिन राशन वितरण बंद रहेगा। इससे प्रदेश के करीब चार करोड़ से अधिक हितग्राही प्रभावित होंगे। दरअसल, शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेता-प्रबंधक सात, आठ और नौ फरवरी को आॅल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर्स फेडरेशन के समर्थन में हड़ताल पर रहेंगे। इसके चलते सभी राशन दुकानों को बंद रखा जाएगा। इस संबंध में फेडरेशन की मप्र इकाई ने मुख्यमंत्री, सहकारिता मंत्री और खाद्य मंत्री को भी अवगत करा दिया है। राजधानी उपभोक्ता भंडार संचालक कल्याण समिति का कहना है कि वर्तमान में सेल्समैन को प्रति क्विंटल सत्तर रुपयापए कमीशन मिलता है। अप्रेल दो हज़ार बाईस को यह कमीशन बढ़ाकर नब्बे रुपयापए कर दिया गया है, लेकिन वर्तमान समय तक बढ़ा हुआ कमीशन नहीं दिया गया। यहीं नहीं पीएमजीकेवाय का कमीशन भी किसी दुकानदार को नहीं दिया गया। इसके पहले तेरह माह की अंतर राशि भी अटकी हुई है। राजधानी सहित प्रदेश भर में हर महीने की सात तारीख को अन्न उत्सव मनाया जाता है। फरवरी में यह परंपरा हड़ताल के चलते टूट रही है। इस बार दस, ग्यारह और तेरह फरवरी को अन्न उत्सव मनाया जाएगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षा के द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।
सीरियल कसौटी जिंदगी के से कुछ समय के लिए गई हिना खान की शो में वापसी होने वाली है। हिना खान ने कसौटी जिंदगी के सेट से शो में वापसी की फोटो और वीडियो शेयर की हैं। हिना ने अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी करने और कांस फिल्म फेस्टिवल में जाने के लिए छुट्टी पर गई थीं। शो में हिना की वापसी पर सभी बहुत खुश है। सारे सितारे हिना की वापसी पर मस्ती करते नजर आए। साथ ही प्रेरणा के साथ कोमोलिका वीडियो शेयर की। अब शो में प्रेरणा और अनुराग को अलग करने के लिए मिस्टर बजाज के साथ कोमोलिका भी आ गई हैं। देखे वीडियोः
सीरियल कसौटी जिंदगी के से कुछ समय के लिए गई हिना खान की शो में वापसी होने वाली है। हिना खान ने कसौटी जिंदगी के सेट से शो में वापसी की फोटो और वीडियो शेयर की हैं। हिना ने अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी करने और कांस फिल्म फेस्टिवल में जाने के लिए छुट्टी पर गई थीं। शो में हिना की वापसी पर सभी बहुत खुश है। सारे सितारे हिना की वापसी पर मस्ती करते नजर आए। साथ ही प्रेरणा के साथ कोमोलिका वीडियो शेयर की। अब शो में प्रेरणा और अनुराग को अलग करने के लिए मिस्टर बजाज के साथ कोमोलिका भी आ गई हैं। देखे वीडियोः
लॉकडाउन में 33 साल बाद 'रामायण' के पुनः प्रसारण से लोगों की पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं। नई पीढ़ी से भी इस धारावाहिक जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। यही नहीं इसमें अभिनय करने वाले कलाकारों की भी फिर से चर्चा होने लगी। उस दौर में 'रामायण' के सभी कलाकार बेहद मशहूर हो गए थे, इन्हीं में से एक अभिनेता थे विजय अरोड़ा जिन्होंने रावण के बेटे मेघनाद का किरदार निभाया था। कहा जाता है कि विजय अरोड़ा एक दौर में इतने मशहूर हो गए थे कि राजेश खन्ना को भी अपनी लोकप्रियता के लिए खतरा महसूस होने लगा था। विजय अरोड़ा का जन्म 27 दिसंबर 1944 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। साल 1972 में उन्होंने फिल्म 'जरूरत' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में उनके साथ रीना रॉय थीं। रीना रॉय की भी ये पहली फिल्म थी। विजय अरोड़ा को असली लोकप्रियता मिली जीनत अमान के साथ फिल्म 'यादों की बरात' (1973) से। फिल्म का रोमांटिक हिट गाना 'चुरा लिया है तुमने' उन पर ही फिल्माया गया था। गाने में चॉकलेटी चेहरे वाले विजय अरोड़ा का अंदाज देख लड़कियां उनकी दीवानी हो गई थीं। जबकि उस वक्त राजेश खन्ना सुपरस्टार हुआ करते थे ऐसे में उन्हें भी अपने स्टारडम की चिंता सताने लगी थी। विजय अरोड़ा ने आशा पारेख से लेकर जीनत अमान, जया भादुड़ी, वहीदा रहमान, शबाना आजमी, तनुजा, परवीन बाबी और मौसमी चटर्जी जैसी अभिनेत्रियों के साथ काम किया और तमाम गुजराती और हिंदी नाटकों में भी काम किया।
लॉकडाउन में तैंतीस साल बाद 'रामायण' के पुनः प्रसारण से लोगों की पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं। नई पीढ़ी से भी इस धारावाहिक जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। यही नहीं इसमें अभिनय करने वाले कलाकारों की भी फिर से चर्चा होने लगी। उस दौर में 'रामायण' के सभी कलाकार बेहद मशहूर हो गए थे, इन्हीं में से एक अभिनेता थे विजय अरोड़ा जिन्होंने रावण के बेटे मेघनाद का किरदार निभाया था। कहा जाता है कि विजय अरोड़ा एक दौर में इतने मशहूर हो गए थे कि राजेश खन्ना को भी अपनी लोकप्रियता के लिए खतरा महसूस होने लगा था। विजय अरोड़ा का जन्म सत्ताईस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में उन्होंने फिल्म 'जरूरत' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में उनके साथ रीना रॉय थीं। रीना रॉय की भी ये पहली फिल्म थी। विजय अरोड़ा को असली लोकप्रियता मिली जीनत अमान के साथ फिल्म 'यादों की बरात' से। फिल्म का रोमांटिक हिट गाना 'चुरा लिया है तुमने' उन पर ही फिल्माया गया था। गाने में चॉकलेटी चेहरे वाले विजय अरोड़ा का अंदाज देख लड़कियां उनकी दीवानी हो गई थीं। जबकि उस वक्त राजेश खन्ना सुपरस्टार हुआ करते थे ऐसे में उन्हें भी अपने स्टारडम की चिंता सताने लगी थी। विजय अरोड़ा ने आशा पारेख से लेकर जीनत अमान, जया भादुड़ी, वहीदा रहमान, शबाना आजमी, तनुजा, परवीन बाबी और मौसमी चटर्जी जैसी अभिनेत्रियों के साथ काम किया और तमाम गुजराती और हिंदी नाटकों में भी काम किया।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अफगानिस्तान के मामले पर सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए रूस गए. इस रूस दौरे और पुतिन से मिलने की पाक में काफी चर्चा हो रही है. पाक जो अफगानिस्तान के मामले पर स्वयं को एक बड़ा स्टेकहोल्डर समझता है, इस बैठक से नदारद रहा. इस बारे में पाकिस्तानी जानकारों का बोलना है कि हिंदुस्तान बड़ी सावधानी से पाक को अफगानिस्तान मुद्दे में आइसोलेट यानी अलग थलग कर रहा है. रूस ने हाल ही में राजधानी मॉस्को में अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए पांचवीं बैठक बुलाई. इस बैठक में चीन, भारत, ईरान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान सहित कई राष्ट्रों को बुलाया गया था. हिंदुस्तान के एनएसए डोभाल ने बैठक में बोला कि अफगानिस्तान के लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करना हिंदुस्तान की पहली अहमियत है. डोभाल ने बोला कि अफगानिस्तान कठिनाई दौर से गुजर रहा है और आवश्यकता की इस घड़ी में हिंदुस्तान अफगानिस्तान के लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ेगा. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान ने अफगानिस्तान को 40,000 मीट्रिक टन गेहूं, 60 टन दवाइयां और पांच लाख कोविड टीके भेजकर उसकी सहायता की है. भारत ने अपने इस वर्ष के बजट में भी अफगानिस्तान के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. हिंदुस्तान अफगानिस्तान में विकास कार्यों के लिए 2. 5 करोड़ $ देगा. अफगानिस्तान पर हिंदुस्तान के इस रुख ने पाक को बड़ा हानि पहुंचाया है.
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अफगानिस्तान के मामले पर सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए रूस गए. इस रूस दौरे और पुतिन से मिलने की पाक में काफी चर्चा हो रही है. पाक जो अफगानिस्तान के मामले पर स्वयं को एक बड़ा स्टेकहोल्डर समझता है, इस बैठक से नदारद रहा. इस बारे में पाकिस्तानी जानकारों का बोलना है कि हिंदुस्तान बड़ी सावधानी से पाक को अफगानिस्तान मुद्दे में आइसोलेट यानी अलग थलग कर रहा है. रूस ने हाल ही में राजधानी मॉस्को में अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए पांचवीं बैठक बुलाई. इस बैठक में चीन, भारत, ईरान, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान सहित कई राष्ट्रों को बुलाया गया था. हिंदुस्तान के एनएसए डोभाल ने बैठक में बोला कि अफगानिस्तान के लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करना हिंदुस्तान की पहली अहमियत है. डोभाल ने बोला कि अफगानिस्तान कठिनाई दौर से गुजर रहा है और आवश्यकता की इस घड़ी में हिंदुस्तान अफगानिस्तान के लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ेगा. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान ने अफगानिस्तान को चालीस,शून्य मीट्रिक टन गेहूं, साठ टन दवाइयां और पांच लाख कोविड टीके भेजकर उसकी सहायता की है. भारत ने अपने इस वर्ष के बजट में भी अफगानिस्तान के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. हिंदुस्तान अफगानिस्तान में विकास कार्यों के लिए दो. पाँच करोड़ $ देगा. अफगानिस्तान पर हिंदुस्तान के इस रुख ने पाक को बड़ा हानि पहुंचाया है.
रायपुर। राजधानी में श्री अनंत साई हॉस्पिटल का शुभारंभ 22 दिसंबर को हो रहा है. तेलीबांधा रिंग रोड के पास स्थित इस अस्पताल का उदघाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत करेंगे. इसके अलावा कई मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे. डॉक्टर सुशील शर्मा और डॉक्टर पार्थ स्थापक ने मिलकर इस अस्पताल की शुरुआत की है. 18 वर्ष के अनुभवी ऑर्थोपेडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. सुशील शर्मा अपनी सेवा मरीजों को उपलब्ध कराएंगे. इसके साथ ही मुम्बई एवं दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों में हृदय रोग चिकित्सक के रूप में काम कर चुके वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पार्थ स्थापक के साथ विभिन्न विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा के साथ मरीजों को उन्नत चिकित्सा टेक्नोलॉजी के मशीन व उपकरणों का लाभ मिलेगा. श्री अनंत हास्पिटल में ऑर्थोपेडिक, कार्डियोलॉजी, गायनोकोलॉजी, गहन चिकित्सा एवं पेन क्लीनिक, काडियो थोरेसिक एंड वस्कुलर सर्जरी, आईवीएफ एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, जनरल मेडीसिन, जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, पिडियाट्रिक्स, चेस्ट एंड पल्मोनरी, न्यूरो सर्जरी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, नेफ्रोलॉजी, आप्थोमोलॉजी, ईएनटी, रेडियोलॉजी, ओरल एंड मेक्सीलोफेसियल, पैथोलॉजी, फिजियोथेरेपी एवं डायटीसियन की चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध है. श्री अनंत सांई हास्पिटल में उपलब्ध सुविधाओं में एडवांस फिलिप्स, कैथलैब, विश्वस्तरीय माडुलर ओटी, कार्डियक आईसीयू, एमआईसीयू, एसआईसीयू, हाई एंड इको कार्डियोग्राफी, कम्प्यूटराज्ड ट्रेड मिल, सीटी स्केन, 4डी सोनोग्राफी, डिजीटल एक्स-रे, पैथोलॉजी लेब, कार्डियक एम्बुलेंस, 24 घंटे फार्मेसी एवं केफेटेरिया शामिल है. श्री अनंत सांई हास्पिटल, एयरटेल ऑफिस के पीछे, रिंग रोड नं. 1, तेलीबांधा, रायपुर में 24/7 आपातकालीन सुविधा उपलब्ध रहेगी.
रायपुर। राजधानी में श्री अनंत साई हॉस्पिटल का शुभारंभ बाईस दिसंबर को हो रहा है. तेलीबांधा रिंग रोड के पास स्थित इस अस्पताल का उदघाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत करेंगे. इसके अलावा कई मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे. डॉक्टर सुशील शर्मा और डॉक्टर पार्थ स्थापक ने मिलकर इस अस्पताल की शुरुआत की है. अट्ठारह वर्ष के अनुभवी ऑर्थोपेडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. सुशील शर्मा अपनी सेवा मरीजों को उपलब्ध कराएंगे. इसके साथ ही मुम्बई एवं दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों में हृदय रोग चिकित्सक के रूप में काम कर चुके वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पार्थ स्थापक के साथ विभिन्न विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा के साथ मरीजों को उन्नत चिकित्सा टेक्नोलॉजी के मशीन व उपकरणों का लाभ मिलेगा. श्री अनंत हास्पिटल में ऑर्थोपेडिक, कार्डियोलॉजी, गायनोकोलॉजी, गहन चिकित्सा एवं पेन क्लीनिक, काडियो थोरेसिक एंड वस्कुलर सर्जरी, आईवीएफ एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, जनरल मेडीसिन, जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, पिडियाट्रिक्स, चेस्ट एंड पल्मोनरी, न्यूरो सर्जरी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, नेफ्रोलॉजी, आप्थोमोलॉजी, ईएनटी, रेडियोलॉजी, ओरल एंड मेक्सीलोफेसियल, पैथोलॉजी, फिजियोथेरेपी एवं डायटीसियन की चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध है. श्री अनंत सांई हास्पिटल में उपलब्ध सुविधाओं में एडवांस फिलिप्स, कैथलैब, विश्वस्तरीय माडुलर ओटी, कार्डियक आईसीयू, एमआईसीयू, एसआईसीयू, हाई एंड इको कार्डियोग्राफी, कम्प्यूटराज्ड ट्रेड मिल, सीटी स्केन, चारडी सोनोग्राफी, डिजीटल एक्स-रे, पैथोलॉजी लेब, कार्डियक एम्बुलेंस, चौबीस घंटाटे फार्मेसी एवं केफेटेरिया शामिल है. श्री अनंत सांई हास्पिटल, एयरटेल ऑफिस के पीछे, रिंग रोड नं. एक, तेलीबांधा, रायपुर में चौबीस/सात आपातकालीन सुविधा उपलब्ध रहेगी.
Bharat box office collection Day 17: सलमान खान की 'भारत' ने दूसरे वीक में 200 करोड़ कमाई का आंकड़ा पार कर लिया था। फिल्म ने 5 जून को सिनेमाघरों में दस्तक दी थी। बॉक्स ऑफिस पर पहले वीक में ताबड़तोड़ कमाई करने वाली भारत की कमाई में बीते कुछ दिनों में गिरावट देखने को मिली है। शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी की फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज होने से 'भारत' की स्क्रीन्स पर भी कमी आई है। ऐसे में 'भारत' का अबतक का कुल कलेक्शन केवल 204 करोड़ रुपए के आसपास पहुंचा है। ट्रेड पंडितों ने ऐसे कयास लगाए हैं कि भारत का लाइफटाइम कलेक्शन 205-210 करोड़ रुपए के करीब हो सकता है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने एक ट्वीट में लिखा था- 'भारत बॉक्स ऑफिस पर दोहरा शतक बनाने में कामयाब रही है। हालांकि नार्थ के अलावा सभी सर्किट्स में फिल्म को लेकर बज कम हो गया है। ' 'भारत' ने ओपनिंग डे पर ताबड़तोड़ कमाई करते हुए 2019 की ओपनिंग डे पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब जीत लिया है। फिल्म ने पहले दिन 42 करोड़ 30 लाख रुपए का कलेक्शन किया था। 'भारत' सलमान खान की छठी ऐसी फिल्म है, जिसने 200 करोड़ के क्लब में एंट्री मारी है। 200 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार करते ही भारत पर हिट का तमगा भी लग गया है। अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी 'भारत' को लेकर अब कहा जा रहा है कि कबीर सिंह के कारण फिल्म की कमाई पर ब्रेक लग सकता है। दरअसल दो वीक के लंबे गैप के बाद रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज हुई है। ऐसे में यूथ के बीच फिल्म को लेकर काफी बज है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'कबीर सिंह' ने ओपनिंग डे पर 20 करोड़ रुपए की कमाई की है।
Bharat box office collection Day सत्रह: सलमान खान की 'भारत' ने दूसरे वीक में दो सौ करोड़ कमाई का आंकड़ा पार कर लिया था। फिल्म ने पाँच जून को सिनेमाघरों में दस्तक दी थी। बॉक्स ऑफिस पर पहले वीक में ताबड़तोड़ कमाई करने वाली भारत की कमाई में बीते कुछ दिनों में गिरावट देखने को मिली है। शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी की फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज होने से 'भारत' की स्क्रीन्स पर भी कमी आई है। ऐसे में 'भारत' का अबतक का कुल कलेक्शन केवल दो सौ चार करोड़ रुपए के आसपास पहुंचा है। ट्रेड पंडितों ने ऐसे कयास लगाए हैं कि भारत का लाइफटाइम कलेक्शन दो सौ पाँच-दो सौ दस करोड़ रुपए के करीब हो सकता है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने एक ट्वीट में लिखा था- 'भारत बॉक्स ऑफिस पर दोहरा शतक बनाने में कामयाब रही है। हालांकि नार्थ के अलावा सभी सर्किट्स में फिल्म को लेकर बज कम हो गया है। ' 'भारत' ने ओपनिंग डे पर ताबड़तोड़ कमाई करते हुए दो हज़ार उन्नीस की ओपनिंग डे पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब जीत लिया है। फिल्म ने पहले दिन बयालीस करोड़ तीस लाख रुपए का कलेक्शन किया था। 'भारत' सलमान खान की छठी ऐसी फिल्म है, जिसने दो सौ करोड़ के क्लब में एंट्री मारी है। दो सौ करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार करते ही भारत पर हिट का तमगा भी लग गया है। अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी 'भारत' को लेकर अब कहा जा रहा है कि कबीर सिंह के कारण फिल्म की कमाई पर ब्रेक लग सकता है। दरअसल दो वीक के लंबे गैप के बाद रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'कबीर सिंह' रिलीज हुई है। ऐसे में यूथ के बीच फिल्म को लेकर काफी बज है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'कबीर सिंह' ने ओपनिंग डे पर बीस करोड़ रुपए की कमाई की है।
गेल रेडली पूर्वस्कूली से लेकर युवा वयस्कों के साथ-साथ विभिन्न लेखों और लघु कथाओं - ऑनलाइन और प्रिंट - युवाओं और उगाने सहित वयस्कों के लिए युवा लोगों के लिए बीस पुस्तकें लेखक हैं । वह फ्लोरिडा के डीलैंड में स्टेटसन विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्रों को अंग्रेजी सिखाती है। आपने छात्रावास के कमरे की व्यवस्था करने और आंसू अलविदा के माध्यम से संघर्ष करने में मदद की है। अब आपका पहला साल का कॉलेज छात्र कैंपस जीवन में खुशी से बस रहा है। आप आराम कर सकते हैं, आत्मविश्वास कर सकते हैं कि उसके प्रोफेसर उसे अपने सपने को एक सफल भविष्य में ढालने में मदद कर रहे हैं-या तो आप उम्मीद करते हैं। जबकि आप नए विस्टा के सुखद सपनों का मनोरंजन कर रहे हैं, तो उच्च एड उसके सामने खुल रहा है, आपका बच्चा प्रोफेसर के कार्यालय में आँसू में भंग हो सकता है। क्यूं कर? सात अनुमानित समस्याएं, अकेले या अक्सर - संयोजन में, अक्सर प्रथम वर्ष के कॉलेज के छात्रों के लिए उठती हैं, जो कॉलेज के बारे में सोचने वाले महान अनुभव को कमजोर करती हैं। और स्वीकृति पत्र और कैंपस पर्यटन की गुलाबी चमक के बाद पहना जाता है, वे सुनामी जैसे छात्रों को मार सकते हैं। Homesickness पहले साल के छात्रों को आश्चर्यचकित कर सकते हैं, खासकर जब उन्होंने एक खुशी से भरे कॉलेज अनुभव की कल्पना की। अपने जीवन में लगभग हर चीज को बदलने की वास्तविकता परेशान हो सकती है। कोई भी नहीं पूछता कि उनका दिन कैसा चल रहा है या जब वे महसूस कर रहे हैं तो एक इलाज प्रदान करता है। उनके समर्थन प्रणाली चले गए हैं और पर्यावरण विदेशी। अगर आपका बच्चा आँसू में बुलाता है, घर आने के लिए भीख मांगता है, उसे याद दिलाता है कि आप केवल एक फोन कॉल कर रहे हैं, और यह कि, हालांकि शिफ्ट कठिन है, वहीं घर की कमी कम हो जाएगी क्योंकि वह वहां अपने नए जीवन में निवेश करती है। अकेलापन अक्सर घर की कमी का हिस्सा होता है; किसी को हल करना दूसरे की देखभाल कर सकता है। कॉलेज के निचले भाग में हाई स्कूल में वरिष्ठ वर्ष से गुमनाम होने के लिए एक सदमे है। कई प्रथम वर्ष के छात्रों को लगता है कि वे बाहर खड़े हैं, हर किसी के बंधन को देखते हैं और मजा करते हैं। सच्चाई यह है कि, सबसे पहले साल के कॉलेज के छात्र डिस्कनेक्ट महसूस करते हैं; इसे स्वीकार करने के बजाय, कई आत्मनिर्भर दिखाई देने का प्रयास करते हैं। सुझाव दें कि कक्षा के शुरू होने की प्रतीक्षा करते समय, एक क्लब में शामिल हों, या एक अजनबी या दो कैफेटेरिया में बैठकर प्रतीक्षा करें। अधिकतर छात्र सहानुभूति देंगे क्योंकि वे भी दोस्तों की तलाश में हैं। चुनौतियों की भीड़ से अभिभूत महसूस करना भी आम है। भले ही नए लोग घर और अकेलेपन से पहले स्लाइड करें, अन्य चुनौतियां उभरती हैं। स्नूज़ बटन दबाए जाने पर कोई भी उन्हें कक्षा में नहीं लाएगा। उन्हें अपना खुद का कपड़े धोना चाहिए। अधिक वित्तीय दायित्वों को प्रबंधित करने के लिए जिम्मेदार होने के लिए कुछ लोगों की तुलना में अधिक धनराशि होती है। कठिन, लंबी अवधि के असाइनमेंट के साथ पाठ्यक्रम अधिक मांग कर रहे हैं। कॉलेज कक्षाओं के साथ आने वाली कठिनाइयों के बावजूद, वे अधिकांश भाग के लिए अपने स्वयं के अध्ययन कार्यक्रम निर्धारित करने के लिए बाएं हैं। जब पार्टियां आती हैं, तो उन्हें खुद को तय करना होगा कि वे समय बर्दाश्त कर सकते हैं। अपने बच्चों को पैसे का प्रबंधन करने और अग्रिम में कपड़े धोने जैसे कामों की देखभाल करने के लिए उन्हें स्वतंत्रता के लिए तैयार कर सकते हैं। उन्हें एक दिन योजनाकार दें और उन्हें दिखाएं कि उनकी परियोजनाओं के लिए बढ़ते कदमों में कैसे निर्माण किया जाए। कई कॉलेज समय प्रबंधन और अन्य सहायक कार्यशालाओं की पेशकश करते हैं। विशेष रूप से कॉलेज की शुरुआत में, निम्न ग्रेड की उम्मीद की जा सकती है। अधिकांश छात्र सोचते हैं कि वे हाई स्कूल में किए गए प्रदर्शन करेंगे और उसी पुरस्कार काट लेंगे। इसके बजाए, यदि वे हमेशा करते हैं जो वे करते हैं, तो वे आमतौर पर जो भी प्राप्त करते हैं उन्हें प्राप्त नहीं करेंगे। कई विद्यार्थियों के लिए इसे समझने और प्रभावी ढंग से जवाब देने में यह एक तेज़ सेमेस्टर या दो ले सकता है। यदि आपका छात्र कक्षाओं में भाग ले रहा है, असाइनमेंट को बनाए रखता है, और अकादमिक परिवीक्षा से परहेज करता है, तो गिरावट वाले ग्रेडों पर बहुत चिंतित न हों। उससे पूछें कि वह क्या सोचता है कि वह बूंद का कारण बनता है और वह अगले सेमेस्टर में अलग-अलग करने की योजना बना रहा है। उन्हें कंक्रीट रणनीतियों के साथ आने में मदद करें- बस "कड़ी मेहनत" से कहीं ज्यादा कुछ। छात्र अक्सर एक दूसरे की मदद करने के लिए अध्ययन समूह बनाते हैं और कई विषयों में मुफ्त शिक्षण संभवतः उपलब्ध है। अकादमिक सहायता विभाग परीक्षण और नोट लेने पर भी कार्यशालाओं की पेशकश कर सकते हैं। छात्रावास में नवीनतम बीमारी के लिए झुकाव समूह जीवित रहने के लिए एक प्रमुख नकारात्मक पक्ष है। ब्लैक प्लेग जैसे कैंपस के माध्यम से बीमारियां। जबकि कुछ छात्र कक्षाओं के लिए संघर्ष करते हैं, ऊतकों और गले के साथ सशस्त्र होते हैं, अन्य लोग अपने कमरे में लज्जित होते हैं, चिकन सूप के डिब्बे को पूरा करने के लिए रूममेट्स पर निर्भर करते हैं। घर से दूर बीमार होना मुश्किल है। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली सबसे अच्छी रक्षा है; घर से देखभाल पैकेज में विटामिन, ठंडे आपूर्ति, और स्वस्थ स्नैक्स शामिल हो सकते हैं। संभवतः अधिक महत्वपूर्ण है कि आपने उन्हें स्वस्थ रहने के बारे में सिखाए गए पाठों को याद रखनाः पर्याप्त नींद पाएं, अक्सर हाथ धोएं, कप, टूथब्रश या कुकी के काटने को साझा न करें, और अपनी सब्जियां खाएं। अनुस्मारक आंखों के रोल को प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन आखिर में मदद कर सकते हैं। "ताजा पंद्रह" - रात के खाने के पिज्जा पार्टियों और आधी रात के स्नैक्स के बाद पैदा हुए अनचाहे वजन का लाभ-कई छात्रों के पेट में खुद को जोड़ता है। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं के विश्वविद्यालय क्लाउडिया वेडबोनकोयर, निकोलस टाउनसेंड और चार्ली फोस्टर ने पुष्टि की कि कई अन्य लोगों ने क्या ध्यान दिया है कि पहला वर्ष वजन बढ़ाने के लिए एक प्रमुख समय है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, लगभग 61% ताजा लोग औसत 7½ पाउंड पर प्राप्त हुए। अपने छात्रों को याद दिलाएं कि उनके वर्तमान आकार को रखने के लिए उनके वर्तमान खाने और व्यायाम की आदतों को रखने की आवश्यकता है। अगर वे पहले बढ़ते हैं, तो उन्हें दूसरे को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। कॉलेज के छात्रों की तस्वीरों के पहले और बाद में कुछ गुस्से में काफी सावधानी बरतनी चाहिए। कॉलेज में उनके मूल्यों के खिलाफ जाने के लिए प्रलोभन । मध्यरात्रि में ठीक लग सकता है कि सुबह के अलार्म के छल्ले होने पर एक युवा व्यक्ति शर्मिंदा और शर्मिंदा हो सकता है। कॉलेज की अधिक स्वतंत्रता गलत तरीके की संभावना को जोड़ती है। अपने छात्र को जर्नल रखने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वह अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों पर प्रतिबिंबित हो सके। उसे बताएं कि प्रयोग करना और गलतियों को करना स्वाभाविक है। हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि वह स्थायी परिणामों के साथ गलतियों से बचें, ज्यादातर गलतियों को दूर किया जा सकता है। विश्वास करें कि आपने उसे अच्छी तरह से पढ़ाया है- यह नियंत्रण लेने का उसका समय है। लेकिन उसे पता चले कि वह हमेशा आपके साथ बात कर सकता है, कि आप अभी भी उसके लिए हैं। और जब वह करता है, शेल्फ पर निर्णय निर्धारित करें, अपनी युवा गलतियों को याद रखें, और सहानुभूति के साथ जवाब दें। कॉलेज के माध्यम से पूरी तरह से क्रूज। यह विकास का समय और स्वतंत्रता पर प्रयास करने का मतलब है। जो छात्र याद करते हैं कि वे कौन हैं और वे वहां क्यों हैं, वे रोडब्लॉक के माध्यम से धक्का देने और अनुभव से अधिक लाभ उठाने की संभावना रखते हैं।
गेल रेडली पूर्वस्कूली से लेकर युवा वयस्कों के साथ-साथ विभिन्न लेखों और लघु कथाओं - ऑनलाइन और प्रिंट - युवाओं और उगाने सहित वयस्कों के लिए युवा लोगों के लिए बीस पुस्तकें लेखक हैं । वह फ्लोरिडा के डीलैंड में स्टेटसन विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्रों को अंग्रेजी सिखाती है। आपने छात्रावास के कमरे की व्यवस्था करने और आंसू अलविदा के माध्यम से संघर्ष करने में मदद की है। अब आपका पहला साल का कॉलेज छात्र कैंपस जीवन में खुशी से बस रहा है। आप आराम कर सकते हैं, आत्मविश्वास कर सकते हैं कि उसके प्रोफेसर उसे अपने सपने को एक सफल भविष्य में ढालने में मदद कर रहे हैं-या तो आप उम्मीद करते हैं। जबकि आप नए विस्टा के सुखद सपनों का मनोरंजन कर रहे हैं, तो उच्च एड उसके सामने खुल रहा है, आपका बच्चा प्रोफेसर के कार्यालय में आँसू में भंग हो सकता है। क्यूं कर? सात अनुमानित समस्याएं, अकेले या अक्सर - संयोजन में, अक्सर प्रथम वर्ष के कॉलेज के छात्रों के लिए उठती हैं, जो कॉलेज के बारे में सोचने वाले महान अनुभव को कमजोर करती हैं। और स्वीकृति पत्र और कैंपस पर्यटन की गुलाबी चमक के बाद पहना जाता है, वे सुनामी जैसे छात्रों को मार सकते हैं। Homesickness पहले साल के छात्रों को आश्चर्यचकित कर सकते हैं, खासकर जब उन्होंने एक खुशी से भरे कॉलेज अनुभव की कल्पना की। अपने जीवन में लगभग हर चीज को बदलने की वास्तविकता परेशान हो सकती है। कोई भी नहीं पूछता कि उनका दिन कैसा चल रहा है या जब वे महसूस कर रहे हैं तो एक इलाज प्रदान करता है। उनके समर्थन प्रणाली चले गए हैं और पर्यावरण विदेशी। अगर आपका बच्चा आँसू में बुलाता है, घर आने के लिए भीख मांगता है, उसे याद दिलाता है कि आप केवल एक फोन कॉल कर रहे हैं, और यह कि, हालांकि शिफ्ट कठिन है, वहीं घर की कमी कम हो जाएगी क्योंकि वह वहां अपने नए जीवन में निवेश करती है। अकेलापन अक्सर घर की कमी का हिस्सा होता है; किसी को हल करना दूसरे की देखभाल कर सकता है। कॉलेज के निचले भाग में हाई स्कूल में वरिष्ठ वर्ष से गुमनाम होने के लिए एक सदमे है। कई प्रथम वर्ष के छात्रों को लगता है कि वे बाहर खड़े हैं, हर किसी के बंधन को देखते हैं और मजा करते हैं। सच्चाई यह है कि, सबसे पहले साल के कॉलेज के छात्र डिस्कनेक्ट महसूस करते हैं; इसे स्वीकार करने के बजाय, कई आत्मनिर्भर दिखाई देने का प्रयास करते हैं। सुझाव दें कि कक्षा के शुरू होने की प्रतीक्षा करते समय, एक क्लब में शामिल हों, या एक अजनबी या दो कैफेटेरिया में बैठकर प्रतीक्षा करें। अधिकतर छात्र सहानुभूति देंगे क्योंकि वे भी दोस्तों की तलाश में हैं। चुनौतियों की भीड़ से अभिभूत महसूस करना भी आम है। भले ही नए लोग घर और अकेलेपन से पहले स्लाइड करें, अन्य चुनौतियां उभरती हैं। स्नूज़ बटन दबाए जाने पर कोई भी उन्हें कक्षा में नहीं लाएगा। उन्हें अपना खुद का कपड़े धोना चाहिए। अधिक वित्तीय दायित्वों को प्रबंधित करने के लिए जिम्मेदार होने के लिए कुछ लोगों की तुलना में अधिक धनराशि होती है। कठिन, लंबी अवधि के असाइनमेंट के साथ पाठ्यक्रम अधिक मांग कर रहे हैं। कॉलेज कक्षाओं के साथ आने वाली कठिनाइयों के बावजूद, वे अधिकांश भाग के लिए अपने स्वयं के अध्ययन कार्यक्रम निर्धारित करने के लिए बाएं हैं। जब पार्टियां आती हैं, तो उन्हें खुद को तय करना होगा कि वे समय बर्दाश्त कर सकते हैं। अपने बच्चों को पैसे का प्रबंधन करने और अग्रिम में कपड़े धोने जैसे कामों की देखभाल करने के लिए उन्हें स्वतंत्रता के लिए तैयार कर सकते हैं। उन्हें एक दिन योजनाकार दें और उन्हें दिखाएं कि उनकी परियोजनाओं के लिए बढ़ते कदमों में कैसे निर्माण किया जाए। कई कॉलेज समय प्रबंधन और अन्य सहायक कार्यशालाओं की पेशकश करते हैं। विशेष रूप से कॉलेज की शुरुआत में, निम्न ग्रेड की उम्मीद की जा सकती है। अधिकांश छात्र सोचते हैं कि वे हाई स्कूल में किए गए प्रदर्शन करेंगे और उसी पुरस्कार काट लेंगे। इसके बजाए, यदि वे हमेशा करते हैं जो वे करते हैं, तो वे आमतौर पर जो भी प्राप्त करते हैं उन्हें प्राप्त नहीं करेंगे। कई विद्यार्थियों के लिए इसे समझने और प्रभावी ढंग से जवाब देने में यह एक तेज़ सेमेस्टर या दो ले सकता है। यदि आपका छात्र कक्षाओं में भाग ले रहा है, असाइनमेंट को बनाए रखता है, और अकादमिक परिवीक्षा से परहेज करता है, तो गिरावट वाले ग्रेडों पर बहुत चिंतित न हों। उससे पूछें कि वह क्या सोचता है कि वह बूंद का कारण बनता है और वह अगले सेमेस्टर में अलग-अलग करने की योजना बना रहा है। उन्हें कंक्रीट रणनीतियों के साथ आने में मदद करें- बस "कड़ी मेहनत" से कहीं ज्यादा कुछ। छात्र अक्सर एक दूसरे की मदद करने के लिए अध्ययन समूह बनाते हैं और कई विषयों में मुफ्त शिक्षण संभवतः उपलब्ध है। अकादमिक सहायता विभाग परीक्षण और नोट लेने पर भी कार्यशालाओं की पेशकश कर सकते हैं। छात्रावास में नवीनतम बीमारी के लिए झुकाव समूह जीवित रहने के लिए एक प्रमुख नकारात्मक पक्ष है। ब्लैक प्लेग जैसे कैंपस के माध्यम से बीमारियां। जबकि कुछ छात्र कक्षाओं के लिए संघर्ष करते हैं, ऊतकों और गले के साथ सशस्त्र होते हैं, अन्य लोग अपने कमरे में लज्जित होते हैं, चिकन सूप के डिब्बे को पूरा करने के लिए रूममेट्स पर निर्भर करते हैं। घर से दूर बीमार होना मुश्किल है। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली सबसे अच्छी रक्षा है; घर से देखभाल पैकेज में विटामिन, ठंडे आपूर्ति, और स्वस्थ स्नैक्स शामिल हो सकते हैं। संभवतः अधिक महत्वपूर्ण है कि आपने उन्हें स्वस्थ रहने के बारे में सिखाए गए पाठों को याद रखनाः पर्याप्त नींद पाएं, अक्सर हाथ धोएं, कप, टूथब्रश या कुकी के काटने को साझा न करें, और अपनी सब्जियां खाएं। अनुस्मारक आंखों के रोल को प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन आखिर में मदद कर सकते हैं। "ताजा पंद्रह" - रात के खाने के पिज्जा पार्टियों और आधी रात के स्नैक्स के बाद पैदा हुए अनचाहे वजन का लाभ-कई छात्रों के पेट में खुद को जोड़ता है। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं के विश्वविद्यालय क्लाउडिया वेडबोनकोयर, निकोलस टाउनसेंड और चार्ली फोस्टर ने पुष्टि की कि कई अन्य लोगों ने क्या ध्यान दिया है कि पहला वर्ष वजन बढ़ाने के लिए एक प्रमुख समय है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, लगभग इकसठ% ताजा लोग औसत सात½ पाउंड पर प्राप्त हुए। अपने छात्रों को याद दिलाएं कि उनके वर्तमान आकार को रखने के लिए उनके वर्तमान खाने और व्यायाम की आदतों को रखने की आवश्यकता है। अगर वे पहले बढ़ते हैं, तो उन्हें दूसरे को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। कॉलेज के छात्रों की तस्वीरों के पहले और बाद में कुछ गुस्से में काफी सावधानी बरतनी चाहिए। कॉलेज में उनके मूल्यों के खिलाफ जाने के लिए प्रलोभन । मध्यरात्रि में ठीक लग सकता है कि सुबह के अलार्म के छल्ले होने पर एक युवा व्यक्ति शर्मिंदा और शर्मिंदा हो सकता है। कॉलेज की अधिक स्वतंत्रता गलत तरीके की संभावना को जोड़ती है। अपने छात्र को जर्नल रखने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वह अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों पर प्रतिबिंबित हो सके। उसे बताएं कि प्रयोग करना और गलतियों को करना स्वाभाविक है। हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि वह स्थायी परिणामों के साथ गलतियों से बचें, ज्यादातर गलतियों को दूर किया जा सकता है। विश्वास करें कि आपने उसे अच्छी तरह से पढ़ाया है- यह नियंत्रण लेने का उसका समय है। लेकिन उसे पता चले कि वह हमेशा आपके साथ बात कर सकता है, कि आप अभी भी उसके लिए हैं। और जब वह करता है, शेल्फ पर निर्णय निर्धारित करें, अपनी युवा गलतियों को याद रखें, और सहानुभूति के साथ जवाब दें। कॉलेज के माध्यम से पूरी तरह से क्रूज। यह विकास का समय और स्वतंत्रता पर प्रयास करने का मतलब है। जो छात्र याद करते हैं कि वे कौन हैं और वे वहां क्यों हैं, वे रोडब्लॉक के माध्यम से धक्का देने और अनुभव से अधिक लाभ उठाने की संभावना रखते हैं।
करन और टियारा की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी। फिर दोनों के बीच दोस्ती हुई और अफेयर शुरू हो गया। 19 महीने डेटिंग के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की सोची और शादी का फैसला लिया। दोनों ने 2015 में सगाई की थी। टीवी रियलिटी शो बिग बॉस के 13वें सीजन में गरमाए माहौल के बीच में घरवालों को घर का नए कैप्टेन चुनने के लिए एक टास्क दिया जाता है, जिसमें घर को मंगल ग्रह बना दिया जाता है। मुंबई. टीवी सीरियल 'मेरी आशिकी तुमसे ही' फेम एक्ट्रेस स्मृति खन्ना के लिए बेबी शॉवर पार्टी रखी गई थी। ये पार्टी उनके दोस्तों ने सरप्राइज रखी थी। इसे सोमवार को एक्ट्रेस के खास दोस्तों ने आयोजित की थी। इस दौरान स्मृति अपने पति के साथ वहां पहुंची थीं। मुंबई. टीवी के पॉपुलर शो 'रामायण' में राम और सीता का किरदार निभाने वाले गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी कुछ दिनों पहले थाईलैंड में हॉलिडे एन्जॉय करते नजर आए थे। देबिना ने इस वेकेशन की फोटोज दोबारा इंस्टाग्राम पर शेयर की है। इन फोटोज में वे पति के साथ बिकिनी में नजर आ रही है। एक फोटो में पति-पत्नी दोनों पूल साइड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस फोटो पर कैप्शन लिखकर गुजरते साल को अलविदा कहा है। उन्होंने कैप्शन- With just a few days left of 2019. . so many goods and bads . And we faced it all together. . including all of you who are reading this. . a big thank you 💖. मुंबई. टीवी रियलिटी शो बिग बॉस के 13वें सीजन में इन दिनों रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला हॉट टॉपिक बने हुए हैं। इसके साथ ही शहनाज और सिद्धार्थ के बीच मनमुटाव भी देखने के लिए मिल रहा है। दोनों का एक वीडियो बिग बॉस के ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें देखने के लिए मिल रहा है कि वे आपस में बुरी तरह से झगड़ते हैं, जिसके बाद पंजाब की कैटरीना रोने लगती हैं। मुंबई. टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में संस्कारी बहू अक्षरा का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस हिना खान इन दिनों ब्वॉयफ्रेंड रॉकी जैसवाल के साथ मालदीव में छुट्टियां मना रही हैं। वहां से वो कोई ना कोई फोटोज और वीडियोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर रही हैं। अब हाल ही में एक्ट्रेस ने अपनी ब्वॉयफ्रेंड के साथ कुछ और फोटोज भी शेयर किए हैं। मुंबई. टीवी शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की एक्ट्रेस दिव्या भटनागर शादी के बंधन में बंध गई हैं। उन्होंने अपने लॉन्गटाइम ब्वॉयफ्रेंड गगन के साथ सात फेरे लिए। हालांकि, दिव्या ने ये शादी पेरेंट्स के खिलाफ जाकर की। बता दें कि दिव्या और गगन पिछले 5 सालों से एक दूसरे को डेट कर रहे थे। लंबे समय तक रिलेशलशिप में रहने के बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए हैं। चार पहले दोनों ने सगाई की थी। दिव्या और गगन ने मुंबई के गुरुद्वारे में फैमिली की गैरमौजूदगी में ही शादी की। उनकी शादी में सिर्फ कुछ करीबी दोस्त ही शामिल हुए। मुंबई/नई दिल्ली। 66वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयाजित किए गए। कार्यक्रम में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस दौरान 74 साल की एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी को फिल्म 'बधाई हो' में दादी का यादगार रोल निभाने के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा गया। सुरेखा सीकरी जब व्हीलचेयर पर अवॉर्ड लेने पहुंचीं तो उन्हें सम्मान देने के लिए लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। अवॉर्ड मिलने के बाद सुरेखा ने कहा- "मैं दिल से बहुत खुश हूं और यह खुशी दोस्तों और परिवारवालों के साथ मिलकर बांटूंगी। " मुंबई. टीवी की सिमर के नाम से फेमस दीपिका कक्कड़ ने अपनी ननद सबा इब्राहिम का बर्थडे सेलिब्रेट किया। दीपिका ने सबा को आधी रात को उठाकर बर्थडे विश किया। उन्होंने सबा को केक खिलाया और फिर गले लगाकर किस किया। ये सब देख सबा हैरान रह गई। वो भाभी से मिले इस सरप्राइज से बेहद खुश हुईं। दीपिका ने ननद के साथ वाली एक फोटो शेयर कर कैप्शन लिखा- 'Yess I Loveeeeee You My sweetheart @saba_ka_jahaan ❤️❤️❤️ A very very Happy Birthday to you! ! ! May you always be blessed with happiness and only happiness in your life 🤗🤗🤗'.
करन और टियारा की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी। फिर दोनों के बीच दोस्ती हुई और अफेयर शुरू हो गया। उन्नीस महीने डेटिंग के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की सोची और शादी का फैसला लिया। दोनों ने दो हज़ार पंद्रह में सगाई की थी। टीवी रियलिटी शो बिग बॉस के तेरहवें सीजन में गरमाए माहौल के बीच में घरवालों को घर का नए कैप्टेन चुनने के लिए एक टास्क दिया जाता है, जिसमें घर को मंगल ग्रह बना दिया जाता है। मुंबई. टीवी सीरियल 'मेरी आशिकी तुमसे ही' फेम एक्ट्रेस स्मृति खन्ना के लिए बेबी शॉवर पार्टी रखी गई थी। ये पार्टी उनके दोस्तों ने सरप्राइज रखी थी। इसे सोमवार को एक्ट्रेस के खास दोस्तों ने आयोजित की थी। इस दौरान स्मृति अपने पति के साथ वहां पहुंची थीं। मुंबई. टीवी के पॉपुलर शो 'रामायण' में राम और सीता का किरदार निभाने वाले गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी कुछ दिनों पहले थाईलैंड में हॉलिडे एन्जॉय करते नजर आए थे। देबिना ने इस वेकेशन की फोटोज दोबारा इंस्टाग्राम पर शेयर की है। इन फोटोज में वे पति के साथ बिकिनी में नजर आ रही है। एक फोटो में पति-पत्नी दोनों पूल साइड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस फोटो पर कैप्शन लिखकर गुजरते साल को अलविदा कहा है। उन्होंने कैप्शन- With just a few days left of दो हज़ार उन्नीस. . so many goods and bads . And we faced it all together. . including all of you who are reading this. . a big thank you 💖. मुंबई. टीवी रियलिटी शो बिग बॉस के तेरहवें सीजन में इन दिनों रश्मि देसाई और सिद्धार्थ शुक्ला हॉट टॉपिक बने हुए हैं। इसके साथ ही शहनाज और सिद्धार्थ के बीच मनमुटाव भी देखने के लिए मिल रहा है। दोनों का एक वीडियो बिग बॉस के ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें देखने के लिए मिल रहा है कि वे आपस में बुरी तरह से झगड़ते हैं, जिसके बाद पंजाब की कैटरीना रोने लगती हैं। मुंबई. टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में संस्कारी बहू अक्षरा का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस हिना खान इन दिनों ब्वॉयफ्रेंड रॉकी जैसवाल के साथ मालदीव में छुट्टियां मना रही हैं। वहां से वो कोई ना कोई फोटोज और वीडियोज अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर रही हैं। अब हाल ही में एक्ट्रेस ने अपनी ब्वॉयफ्रेंड के साथ कुछ और फोटोज भी शेयर किए हैं। मुंबई. टीवी शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की एक्ट्रेस दिव्या भटनागर शादी के बंधन में बंध गई हैं। उन्होंने अपने लॉन्गटाइम ब्वॉयफ्रेंड गगन के साथ सात फेरे लिए। हालांकि, दिव्या ने ये शादी पेरेंट्स के खिलाफ जाकर की। बता दें कि दिव्या और गगन पिछले पाँच सालों से एक दूसरे को डेट कर रहे थे। लंबे समय तक रिलेशलशिप में रहने के बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए हैं। चार पहले दोनों ने सगाई की थी। दिव्या और गगन ने मुंबई के गुरुद्वारे में फैमिली की गैरमौजूदगी में ही शादी की। उनकी शादी में सिर्फ कुछ करीबी दोस्त ही शामिल हुए। मुंबई/नई दिल्ली। छयासठवें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयाजित किए गए। कार्यक्रम में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस दौरान चौहत्तर साल की एक्ट्रेस सुरेखा सीकरी को फिल्म 'बधाई हो' में दादी का यादगार रोल निभाने के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा गया। सुरेखा सीकरी जब व्हीलचेयर पर अवॉर्ड लेने पहुंचीं तो उन्हें सम्मान देने के लिए लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। अवॉर्ड मिलने के बाद सुरेखा ने कहा- "मैं दिल से बहुत खुश हूं और यह खुशी दोस्तों और परिवारवालों के साथ मिलकर बांटूंगी। " मुंबई. टीवी की सिमर के नाम से फेमस दीपिका कक्कड़ ने अपनी ननद सबा इब्राहिम का बर्थडे सेलिब्रेट किया। दीपिका ने सबा को आधी रात को उठाकर बर्थडे विश किया। उन्होंने सबा को केक खिलाया और फिर गले लगाकर किस किया। ये सब देख सबा हैरान रह गई। वो भाभी से मिले इस सरप्राइज से बेहद खुश हुईं। दीपिका ने ननद के साथ वाली एक फोटो शेयर कर कैप्शन लिखा- 'Yess I Loveeeeee You My sweetheart @saba_ka_jahaan ❤️❤️❤️ A very very Happy Birthday to you! ! ! May you always be blessed with happiness and only happiness in your life 🤗🤗🤗'.
Karnataka SET Exam Notification 2020: यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर ने कर्नाटक सेट परीक्षा को टाल दिया है। लॉकडाउन के कारण परीक्षा को टाला गया है। इस परीक्षा का आयोजन 12 अप्रैल 2020 को किया जाना था। कर्नाटक सेट परीक्षा की नई तारीखों ऐलान नहीं किया गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक राज्य में स्थिति को देखने और सरकार से बात करने के बाद परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इस परीक्षा का आयोजन 41 विभिन्न विषयों में किया जाएगा। नीचे हम आपको ऑफिशल नोटिस का डायरेक्ट लिंक भी दे रहे हैं। जिन आवेदकों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है उन्हें ऑफिशल वेबसाइट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जाती है। कुल 300 अंको का होगा पेपर यह क्वालिफाइंग नेचर का एग्जाम है। इस पेपर को पास करने के बाद आवेदक असिस्टेंट प्रफेसर के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस परीक्षा में दो पेपर होंगे। दोनो पेपर 300 अंको के होंगे। पहले पेपर में 100 अंकों 50 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे वहीं दूसरे पेपर में 200 अंकों के 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा का आयोजन ऑफलाइन किया जाएगा।
Karnataka SET Exam Notification दो हज़ार बीस: यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर ने कर्नाटक सेट परीक्षा को टाल दिया है। लॉकडाउन के कारण परीक्षा को टाला गया है। इस परीक्षा का आयोजन बारह अप्रैल दो हज़ार बीस को किया जाना था। कर्नाटक सेट परीक्षा की नई तारीखों ऐलान नहीं किया गया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक राज्य में स्थिति को देखने और सरकार से बात करने के बाद परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा। इस परीक्षा का आयोजन इकतालीस विभिन्न विषयों में किया जाएगा। नीचे हम आपको ऑफिशल नोटिस का डायरेक्ट लिंक भी दे रहे हैं। जिन आवेदकों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है उन्हें ऑफिशल वेबसाइट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जाती है। कुल तीन सौ अंको का होगा पेपर यह क्वालिफाइंग नेचर का एग्जाम है। इस पेपर को पास करने के बाद आवेदक असिस्टेंट प्रफेसर के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस परीक्षा में दो पेपर होंगे। दोनो पेपर तीन सौ अंको के होंगे। पहले पेपर में एक सौ अंकों पचास बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे वहीं दूसरे पेपर में दो सौ अंकों के एक सौ बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा का आयोजन ऑफलाइन किया जाएगा।
इस्लामिक स्टेट ने पायलट को 'ज़िंदा जलाया' जॉर्डन के सरकारी टेलीविजन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों ने जिस पायलट को बंधक बनाया था उसकी हत्या कर दी गई है. आईएस ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें दिखाया गया है कि मोएज़ अल कसासबेह नाम के इस पायलट को तब तक जलाया गया जब तक कि उनकी मौत नहीं हो गई. वीडियो में एक लोहे के पिंजरे आग की लपटें उठ रही हैं और इसके भीतर नारंगी रंग के कपड़े पहने एक व्यक्ति है. इस वीडियो को ट्विटर पर जारी किया गया है. इस ट्विटर अकाउंट के ज़रिए ही आईएस अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करता है. कसासबेह को पिछले साल दिसंबर महीने में उस वक्त बंधक बनाया गया था जब उनका विमान सीरिया में रक़्क़ा के पास उड़ रहा था. ये विमान अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं की मदद के लिए जा रहा था. कसासबेह की मौत की ख़बर सुनते जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला ने अपनी अमरीका यात्रा को बीच में ही रोक दिया और वापस जॉर्डन आ गए. उन्होंने देश के लोगों से एकजुट रहने की अपील की है. हत्या के वीडियो पर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ओबामा ने कहा है,"अगर यह सही है तो ये आईएस की विचारधारा के दिवालिएपन को दिखाता है और इससे चरमपंथियों को नष्ट करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता और मज़बूत होगी. " इससे पहले, जॉर्डन ने कहा था कि वह चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से अपने पायलट को छुड़ाने के लिए हर प्रयास करेगा. जॉर्डन सरकार का यह बयान जापानी बंधक केंजी गोटो का सिर क़लम करने वाले वीडियो के जारी होने के बाद आया था. जॉर्डन ने कहा था कि वो पायलट की सुरक्षित वापसी के बदले एक इराक़ी क़ैदी को रिहा करने के लिए तैयार हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
इस्लामिक स्टेट ने पायलट को 'ज़िंदा जलाया' जॉर्डन के सरकारी टेलीविजन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों ने जिस पायलट को बंधक बनाया था उसकी हत्या कर दी गई है. आईएस ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें दिखाया गया है कि मोएज़ अल कसासबेह नाम के इस पायलट को तब तक जलाया गया जब तक कि उनकी मौत नहीं हो गई. वीडियो में एक लोहे के पिंजरे आग की लपटें उठ रही हैं और इसके भीतर नारंगी रंग के कपड़े पहने एक व्यक्ति है. इस वीडियो को ट्विटर पर जारी किया गया है. इस ट्विटर अकाउंट के ज़रिए ही आईएस अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करता है. कसासबेह को पिछले साल दिसंबर महीने में उस वक्त बंधक बनाया गया था जब उनका विमान सीरिया में रक़्क़ा के पास उड़ रहा था. ये विमान अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं की मदद के लिए जा रहा था. कसासबेह की मौत की ख़बर सुनते जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला ने अपनी अमरीका यात्रा को बीच में ही रोक दिया और वापस जॉर्डन आ गए. उन्होंने देश के लोगों से एकजुट रहने की अपील की है. हत्या के वीडियो पर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ओबामा ने कहा है,"अगर यह सही है तो ये आईएस की विचारधारा के दिवालिएपन को दिखाता है और इससे चरमपंथियों को नष्ट करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता और मज़बूत होगी. " इससे पहले, जॉर्डन ने कहा था कि वह चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से अपने पायलट को छुड़ाने के लिए हर प्रयास करेगा. जॉर्डन सरकार का यह बयान जापानी बंधक केंजी गोटो का सिर क़लम करने वाले वीडियो के जारी होने के बाद आया था. जॉर्डन ने कहा था कि वो पायलट की सुरक्षित वापसी के बदले एक इराक़ी क़ैदी को रिहा करने के लिए तैयार हैं.
• महँगे या डरावने पूर्व अनुभव की ज़रूरत होती है। विशेषज्ञतापूर्ण संसाधनों या मशीनों की ज़रूरत होती है, जिन्हें हासिल करना मुश्किल हो। किसी प्रोजेक्ट या काम में जितनी ज़्यादा झंझट होती है, लोग उसके आसान समाधान या उसे करने वाले व्यक्ति को पैसे देने को आम तौर पर उतने ही ज़्यादा तैयार होते हैं। एक उदाहरण देखें : किसी बंगले के मालिक को स्विमिंग पूल की सफ़ाई करनी है। लंबे समय तक चलने वाली सफ़ाई किट उसे 50 डॉलर में मिल सकती है, लेकिन इसमें झंझट यह है कि सफ़ाई की मेहनत उसे ख़ुद करनी होगी। दूसरी तरफ़, अगर वह स्विमिंग पूल किसी दूसरे व्यक्ति या सफ़ाई सेवा कंपनी से साफ़ कराएगा, तो उसे 100 डॉलर प्रति माह देने होंगे। दोनों ही मामलों में स्विमिंग पूल साफ़ हो जाएगा, लेकिन सफ़ाई सेवा बंगले के मालिक की झंझट दूर कर देती है। स्विमिंग पूल के मालिक को मनचाहा परिणाम हासिल करने के लिए कोई समय या मेहनत नहीं लगानी होती। इसके फलस्वरूप स्विमिंग पूल सफ़ाई सेवा कंपनी झंझट के प्रीमियम से फ़ायदा उठाती है और यह हर साल 1,200 डॉलर वसूल करती है - यह काम ख़ुद करने वाले विकल्प से 1,150 डॉलर ज़्यादा है क्योंकि यह स्विमिंग पूल मालिक के झंझट को दूर करती है। बहरहाल, एक सीमा है : स्विमिंग पूल की सफ़ाई सेवा के लिए हर महीने 10,000 डॉलर वसूल करना कामयाब नहीं होगा - ज़्यादातर मकान मालिक स्विमिंग पूल साफ़ रखने की इतनी ज़्यादा परवाह नहीं करते हैं। झंझट के प्रीमियम से फ़ायदा उठाने के लिए आपको यह समझाना चाहिए कि उस काम में संभावित ग्राहक के लिए कितनी झंझट है। झंझट जितनी ज़्यादा होती है, संभावित झंझट प्रीमियम उतना ही ज़्यादा होगा। यदि आप किसी नए कारोबारी विचार की तलाश कर रहे हैं, तो झंझट की तलाश करना शुरू करें। जहाँ भी झंझट है, वहाँ अवसर है। आप अपने ग्राहकों के जितने ज़्यादा झंझट दूर करते हैं, आपको उतनी ही ज़्यादा आमदनी होगी। इस अवधारणा को शेयर करें : http://book.personalmba.com/hasslepremium/ अनुभूत मूल्य लोग तब चीज़ों के लिए पैसे नहीं देते हैं, जब उन्हें अपना पैसा उन चीज़ों से ज़्यादा मूल्यवान लगता है।
• महँगे या डरावने पूर्व अनुभव की ज़रूरत होती है। विशेषज्ञतापूर्ण संसाधनों या मशीनों की ज़रूरत होती है, जिन्हें हासिल करना मुश्किल हो। किसी प्रोजेक्ट या काम में जितनी ज़्यादा झंझट होती है, लोग उसके आसान समाधान या उसे करने वाले व्यक्ति को पैसे देने को आम तौर पर उतने ही ज़्यादा तैयार होते हैं। एक उदाहरण देखें : किसी बंगले के मालिक को स्विमिंग पूल की सफ़ाई करनी है। लंबे समय तक चलने वाली सफ़ाई किट उसे पचास डॉलर में मिल सकती है, लेकिन इसमें झंझट यह है कि सफ़ाई की मेहनत उसे ख़ुद करनी होगी। दूसरी तरफ़, अगर वह स्विमिंग पूल किसी दूसरे व्यक्ति या सफ़ाई सेवा कंपनी से साफ़ कराएगा, तो उसे एक सौ डॉलर प्रति माह देने होंगे। दोनों ही मामलों में स्विमिंग पूल साफ़ हो जाएगा, लेकिन सफ़ाई सेवा बंगले के मालिक की झंझट दूर कर देती है। स्विमिंग पूल के मालिक को मनचाहा परिणाम हासिल करने के लिए कोई समय या मेहनत नहीं लगानी होती। इसके फलस्वरूप स्विमिंग पूल सफ़ाई सेवा कंपनी झंझट के प्रीमियम से फ़ायदा उठाती है और यह हर साल एक,दो सौ डॉलर वसूल करती है - यह काम ख़ुद करने वाले विकल्प से एक,एक सौ पचास डॉलर ज़्यादा है क्योंकि यह स्विमिंग पूल मालिक के झंझट को दूर करती है। बहरहाल, एक सीमा है : स्विमिंग पूल की सफ़ाई सेवा के लिए हर महीने दस,शून्य डॉलर वसूल करना कामयाब नहीं होगा - ज़्यादातर मकान मालिक स्विमिंग पूल साफ़ रखने की इतनी ज़्यादा परवाह नहीं करते हैं। झंझट के प्रीमियम से फ़ायदा उठाने के लिए आपको यह समझाना चाहिए कि उस काम में संभावित ग्राहक के लिए कितनी झंझट है। झंझट जितनी ज़्यादा होती है, संभावित झंझट प्रीमियम उतना ही ज़्यादा होगा। यदि आप किसी नए कारोबारी विचार की तलाश कर रहे हैं, तो झंझट की तलाश करना शुरू करें। जहाँ भी झंझट है, वहाँ अवसर है। आप अपने ग्राहकों के जितने ज़्यादा झंझट दूर करते हैं, आपको उतनी ही ज़्यादा आमदनी होगी। इस अवधारणा को शेयर करें : http://book.personalmba.com/hasslepremium/ अनुभूत मूल्य लोग तब चीज़ों के लिए पैसे नहीं देते हैं, जब उन्हें अपना पैसा उन चीज़ों से ज़्यादा मूल्यवान लगता है।
अस्पतालों में निशुल्क इलाज का ढिंढोरा खूब पीटा जा रहा है, मगर यह योजना पटरी पर नहीं आ पा रही है। कभी मरीज जांचों के लिए परेशान होते हैं तो कभी दवा के लिए भटकते हैं। इसी बीच मरीजों के लिए कम पैसे में दवा मिलने का काउंटर 'लाइफ लाइन' भी बंद करने की तैयारी की जा रही है। इधर, जिम्मेदार निशुल्क दवा योजना में लाइफ लाइन से डेढ़ गुना महंगी दवा खरीदकर सरकार को ही लाखों रुपए की चपत लगा रहे हैं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसएमएस अस्पताल में 60 से अधिक ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका दवा के अभाव में इलाज हो पा रहा है। किडनी ट्रासप्लांट में काम आने वाली सिक्यूलेेट और एटीजी, कैंसर की केनमेब, थाइराइड की ऑक्ट्रोटाइड जैसी दवाएं समय पर नहीं मिलने से गंभीर रोगियों को खतरा बढ़ रहा है। इधर, महंगी दवा के पीछे अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि जो भी खरीद की जा रही है, उसके लिए पहले टेंडर किए गए हैं। अब सवाल यह कि क्या इससे पहले अधिक दरों पर होने वाले टेंडर में रेेट कम नहीं कराई गई। वहीं अस्पताल प्रशासन अन्य विकल्प क्यों नहीं निकाल पा रहा। आर्थो वार्ड में गोविंद स्वामी और प्रीति भर्ती हैं, लेकिन पिछले दो दिन से दवा नहीं मिल रही है। परिजन सभी जगह चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन दवाओं की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। भास्कर के पास इनका इंडेट है, जिसमें बताया गया है कि ये दवाएं नहीं हैं। इसी तरह गेस्ट्रो में शालनी, न्यूरोलॉजी में निशांत, न्यूरोसर्जरी में हरफूल जैसे दर्जनों ऐसे मरीज हैं, जिन्हेें दवाएं नहीं मिल पा रही हैं और वे इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अस्पतालों में निशुल्क इलाज का ढिंढोरा खूब पीटा जा रहा है, मगर यह योजना पटरी पर नहीं आ पा रही है। कभी मरीज जांचों के लिए परेशान होते हैं तो कभी दवा के लिए भटकते हैं। इसी बीच मरीजों के लिए कम पैसे में दवा मिलने का काउंटर 'लाइफ लाइन' भी बंद करने की तैयारी की जा रही है। इधर, जिम्मेदार निशुल्क दवा योजना में लाइफ लाइन से डेढ़ गुना महंगी दवा खरीदकर सरकार को ही लाखों रुपए की चपत लगा रहे हैं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसएमएस अस्पताल में साठ से अधिक ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका दवा के अभाव में इलाज हो पा रहा है। किडनी ट्रासप्लांट में काम आने वाली सिक्यूलेेट और एटीजी, कैंसर की केनमेब, थाइराइड की ऑक्ट्रोटाइड जैसी दवाएं समय पर नहीं मिलने से गंभीर रोगियों को खतरा बढ़ रहा है। इधर, महंगी दवा के पीछे अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि जो भी खरीद की जा रही है, उसके लिए पहले टेंडर किए गए हैं। अब सवाल यह कि क्या इससे पहले अधिक दरों पर होने वाले टेंडर में रेेट कम नहीं कराई गई। वहीं अस्पताल प्रशासन अन्य विकल्प क्यों नहीं निकाल पा रहा। आर्थो वार्ड में गोविंद स्वामी और प्रीति भर्ती हैं, लेकिन पिछले दो दिन से दवा नहीं मिल रही है। परिजन सभी जगह चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन दवाओं की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। भास्कर के पास इनका इंडेट है, जिसमें बताया गया है कि ये दवाएं नहीं हैं। इसी तरह गेस्ट्रो में शालनी, न्यूरोलॉजी में निशांत, न्यूरोसर्जरी में हरफूल जैसे दर्जनों ऐसे मरीज हैं, जिन्हेें दवाएं नहीं मिल पा रही हैं और वे इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोरखपुर जिले के शाहपुर इलाके में छात्राओं से छेड़खानी के आरोपी कोचिंग संचालक राहुल गुप्ता को पुलिस ने बुधवार को जेल भिजवा दिया। आरोपी एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास कोचिंग सेंटर चलाता है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया था। जांच में मामला सही पाए जाने पर छेड़खानी, पॉक्सो एक्ट की धारा में केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजा गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
गोरखपुर जिले के शाहपुर इलाके में छात्राओं से छेड़खानी के आरोपी कोचिंग संचालक राहुल गुप्ता को पुलिस ने बुधवार को जेल भिजवा दिया। आरोपी एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास कोचिंग सेंटर चलाता है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया था। जांच में मामला सही पाए जाने पर छेड़खानी, पॉक्सो एक्ट की धारा में केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजा गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
फरीदाबाद। कोरोना की धीमी पडती रफ्तार और होम आइसोलेशन के मरीजों को घर पर आक्सीजन की आपूर्ति के बाद कोविड केयर सेंटर खाली होने लगे हैं। वहां करीब दस फीसदी ही मरीज भर्ती हैं, इनमें भी ऐसे कोविड सेंटर शामिल हैं, जहां जिला प्रशासन की तरफ से कोविड के मरीज को मुफ्त सुविधा दी जा रही है, जबकि जहां पर भर्ती मरीज से पैसे लिए जा रहे हैं, ऐसे कोविड सेंटरों लगभग खाली हो गए हैं। रेडक्रास सोसायटी के सचिव विकास का कहना है कि अब 90 फीसदी बेड खाली हैं। होम आइसोलेशन के मरीजों को घर पर आक्सीजन और किट की आपूर्ति शुरू होने के बाद लोगों ने राहत की सांस लेनी शुरू की है। विशेष बात यह है कि यह मुफ्त सुविधा है। जिला प्रशासन की तरफ 1650 मरीजों को घर पर ही आक्सीजन की आपूर्ति शनिवार तक की जा चुकी है और करीब 2450 लोगों ने आक्सीजन के लिए आवेदन किया। इनमें काफी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सरकार की तरफ से तय प्रारूप के हिसाब से जानकारी प्रशासन को नहीं दी। इसकी वजह से उनके फार्म रदद कर दिए गए। जिला रेडक्रास सोसायटी के सचिव विकास का कहना है कि जैसे-जैसे कोरोना अब कमजोर पडता जा रहा है, वैसे-वैसे आक्सीजन की मांग कम होती जा रही है। जिला रेडक्रास सोसायटी की तरफ से सेक्टर-14 के नशा मुक्ति केंद्र को कोविड केयर सेंटर में तब्दील किया गया। इसमें 75 बेड की व्यवस्था की गई। लेकिन यहां करीब दस लोग ही फिलहाल दाखिल हैं। इसके अलावा ग्रेटर फरीदाबाद में एक बिल्डर की तरफ से पचास बेड का कोविड केयर सेंटर बनाया गया। जिला रेडक्रास सोसायटी के सचिव का कहना है कि वहां अभी एक भी मरीज नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रेटर फरीदाबाद में दो सो बेड और एक शिक्षण संस्थान ने सौ बेड का कोविड सेंटर बनाया था, लेकिन अब हालात नियंत्रित होने की वजह से वहां भी मरीजों की संख्या ना के बराबर है। जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के चेयरमैन यशपाल ने शनिवार को जिला में कोविड-19 पीडित मरीजों के लिए बेहतर ढंग से ऑक्सीजन सप्लाई व उसके बेहतर उपयोग की निगरानी के लिए अधिकारियों की एक ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी का गठन किया है। कमेटी में अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान को चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इसके अलावा डिप्टी सीएमओ डॉक्टर गजराज, एनीस्थिटिस्ट महेश भाटी व एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रदीप संधू को सदस्य नियुक्त किया गया है। यह कमेटी प्रत्येक सप्ताह जिला में ऑक्सीजन सप्लाई व जरूरत से संबंधित रिपोर्ट उपायुक्त व फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को प्रस्तुत करेगी।
फरीदाबाद। कोरोना की धीमी पडती रफ्तार और होम आइसोलेशन के मरीजों को घर पर आक्सीजन की आपूर्ति के बाद कोविड केयर सेंटर खाली होने लगे हैं। वहां करीब दस फीसदी ही मरीज भर्ती हैं, इनमें भी ऐसे कोविड सेंटर शामिल हैं, जहां जिला प्रशासन की तरफ से कोविड के मरीज को मुफ्त सुविधा दी जा रही है, जबकि जहां पर भर्ती मरीज से पैसे लिए जा रहे हैं, ऐसे कोविड सेंटरों लगभग खाली हो गए हैं। रेडक्रास सोसायटी के सचिव विकास का कहना है कि अब नब्बे फीसदी बेड खाली हैं। होम आइसोलेशन के मरीजों को घर पर आक्सीजन और किट की आपूर्ति शुरू होने के बाद लोगों ने राहत की सांस लेनी शुरू की है। विशेष बात यह है कि यह मुफ्त सुविधा है। जिला प्रशासन की तरफ एक हज़ार छः सौ पचास मरीजों को घर पर ही आक्सीजन की आपूर्ति शनिवार तक की जा चुकी है और करीब दो हज़ार चार सौ पचास लोगों ने आक्सीजन के लिए आवेदन किया। इनमें काफी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सरकार की तरफ से तय प्रारूप के हिसाब से जानकारी प्रशासन को नहीं दी। इसकी वजह से उनके फार्म रदद कर दिए गए। जिला रेडक्रास सोसायटी के सचिव विकास का कहना है कि जैसे-जैसे कोरोना अब कमजोर पडता जा रहा है, वैसे-वैसे आक्सीजन की मांग कम होती जा रही है। जिला रेडक्रास सोसायटी की तरफ से सेक्टर-चौदह के नशा मुक्ति केंद्र को कोविड केयर सेंटर में तब्दील किया गया। इसमें पचहत्तर बेड की व्यवस्था की गई। लेकिन यहां करीब दस लोग ही फिलहाल दाखिल हैं। इसके अलावा ग्रेटर फरीदाबाद में एक बिल्डर की तरफ से पचास बेड का कोविड केयर सेंटर बनाया गया। जिला रेडक्रास सोसायटी के सचिव का कहना है कि वहां अभी एक भी मरीज नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रेटर फरीदाबाद में दो सो बेड और एक शिक्षण संस्थान ने सौ बेड का कोविड सेंटर बनाया था, लेकिन अब हालात नियंत्रित होने की वजह से वहां भी मरीजों की संख्या ना के बराबर है। जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के चेयरमैन यशपाल ने शनिवार को जिला में कोविड-उन्नीस पीडित मरीजों के लिए बेहतर ढंग से ऑक्सीजन सप्लाई व उसके बेहतर उपयोग की निगरानी के लिए अधिकारियों की एक ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी का गठन किया है। कमेटी में अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान को चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इसके अलावा डिप्टी सीएमओ डॉक्टर गजराज, एनीस्थिटिस्ट महेश भाटी व एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रदीप संधू को सदस्य नियुक्त किया गया है। यह कमेटी प्रत्येक सप्ताह जिला में ऑक्सीजन सप्लाई व जरूरत से संबंधित रिपोर्ट उपायुक्त व फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को प्रस्तुत करेगी।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए नियमों में संशोधन कर एक नई राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने 14 जनवरी को सर्कुलर जारी कर राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने के ऑब्जेक्शन अवधि को 30 दिन से कम कर 7 दिन कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों का ऐलान होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता है। नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए नियमों में संशोधन कर एक नई राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने 14 जनवरी को सर्कुलर जारी कर राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने के ऑब्जेक्शन अवधि को 30 दिन से कम कर 7 दिन कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों का ऐलान होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता है। पंजाब में आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए अकाली दल, कांग्रेस, बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर ने कोशिश की। जब नहीं रोक पाए तो सभी मिलकर षड्यंत्र रच रहे हैं। दूसरी राजनीतिक पार्टी अरविंद केजरीवाल की साफ राजनीति, ईमानदारी, केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस से डरती हैं। यह लोग कभी भी नहीं चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सहित देश के किसी भी राज्य में सरकार बने। राजनीतिक पार्टी को रजिस्टर करा कर इलेक्शन कमिशन और भाजपा किसके वोट काटना चाहती है? आम आदमी पार्टी के पंजाब सह प्रभारी और विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 13 जनवरी 2022 को खुलासा किया था कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया अपने कानूनों में संशोधन करके एक नए ग्रुप को पॉलिटिकल पार्टी में रजिस्टर करवाना चाह रहा है। सारे कानूनों और सारे नियमों को ताक पर रखकर एक मोर्चे को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत कर इलेक्शन सिंबल देना चाहता है। दो बड़े बदलाव चुनाव आयोग करने जा रहा है। पहला चुनाव आचार संहिता लगने के बाद राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। जबकि चुनाव आयोग का कानून है कि किसी भी पार्टी को पंजीकृत करने से पहले 30 दिन तक का नोटिस पीरियड देना होता है। चुनाव आयोग इस नोटिस पीरियड को 30 दिन से घटाकर 7 दिन करने जा रहा है। यह पहले ही कहा था कि ऐसा होने जा रहा है। आम आदमी पार्टी की भविष्यवाणी और शक यकीन में बदल गया। इलेक्शन कमिशन ने 14 जनवरी 2022 को सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा है कि एक पॉलीटिकल पार्टी को रजिस्टर करने के लिए 30 दिन की समय सीमा होती है, उसे कम करके 7 दिन कर रहे हैं। उन्होंने कारण दिया है कि कोविड-19 है तो राजनीतिक पार्टी को अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म दाखिल करने में कुछ दिक्कत आ रही थी। इसलिए उनको यह रियायत दी है। राघव चड्ढा ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि राजनीतिक पार्टी को रजिस्टर करा कर इलेक्शन कमिशन और भाजपा किसके वोट काटना चाहती है? भारतीय जनता पार्टी और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया किसके वोटों में सेंध लगाना चाहती है और कौन सी पार्टी को नुकसान पहुंचाना चाहती है। अगर यह पार्टी रजिस्टर्ड होती है तो पहला बड़ा सवाल है कि किस पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। दूसरा सवाल किस पार्टी को फायदा होगा। कौन से वो राजनीतिक लोग हैं जो आम आदमी पार्टी को हारता देखना चाहते हैं। हर कीमत पर सिर्फ अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की हार देखना चाहते हैं। यह सभी जानते हैं कि बीच चुनाव में इलेक्शन की डेट घोषित होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता। इसके अलावा नोटिस पीरियड भी कम नहीं किया जाता। राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी को बने भी बहुत समय नहीं हुआ है। आज से 7-8 साल पहले जब हम अपनी पार्टी रजिस्टर कराने गए तो हमें भी नोटिस पीरियड का पालन करना पड़ा। हमारे लिए कोई राहत नहीं थी और ना ही किसी पार्टी के लिए होती है। अब कानूनों को ताक पर रख कर शायद एक बहुत बड़े षड्यंत्र के तहत आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए एक नई पॉलिटिकल पार्टी को रजिस्टर्ड कराया जा रहा है। इलेक्शन कमिशन सारे कानूनों को ताक पर रखकर पब्लिक नोटिस पीरियड कम कर रातों रात एक नई पार्टी को पंजीकृत करने जा रहा है, ताकि वह आम आदमी पार्टी के वोट काटे। ऐसा लगता है कि इलेक्शन कमिशन सारे काम छोड़कर इस नए मोर्चे को रजिस्टर करने में लगा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब और देश के लोगों के सामने इन बातों को रख रहे हैं। दूसरी पार्टी वालों को अरविंद केजरीवाल की साफ राजनीति, ईमानदारी, केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस को देखकर डर लगता है। वह लोग कभी भी नहीं चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सहित देश के किसी भी राज्य में सरकार बने। पहले अकाली दल ने अरविंद केजरीवाल को रोकने की कोशिश की, लेकिन नहीं रोक पाए। कांग्रेस ने कोशिश की लेकिन नहीं रोक पाए। बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर भी मिलकर आम आदमी पार्टी को नहीं रोक पाए। अब सारे लोग मिलकर आम आदमी पार्टी को रोकने का। एक षड्यंत्र रच रहे हैं। आम आदमी पार्टी सीधे तौर पर आज इलेक्शन कमीशन से पूछना चाहती है कि किस पार्टी को रजिस्टर करने के लिए आप यह यह विशेष संशोधन करके रियायत दे रहे हैं। दूसरा सवाल इसके पंजीकृत होने से सबसे ज्यादा नुकसान किस पार्टी को होगा? तीसरा सवाल इस मोर्चे के रजिस्टर्ड होने से किस पार्टी को इसका फायदा होगा। चौथा सवाल ऐसी क्या जरूरत पड़ गई की बीच चुनाव में कानूनों को ताक पर रखकर सारे संशोधन करके एक नई पॉलिटिकल पार्टी को रजिस्टर कर रहे हैं। पांचवा सवाल क्या आज यह नहीं पूछा जाए कि कौन-कौन लोग हैं जो इस षड्यंत्र में हिस्सेदार हैं जो हर कीमत पर आम आदमी पार्टी को रोकना चाहते हैं। यह पांच सीधे सवाल आम आदमी पार्टी पूछ रही है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और भाजपा जवाब दे।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए नियमों में संशोधन कर एक नई राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने चौदह जनवरी को सर्कुलर जारी कर राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने के ऑब्जेक्शन अवधि को तीस दिन से कम कर सात दिन कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों का ऐलान होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता है। नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए नियमों में संशोधन कर एक नई राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने चौदह जनवरी को सर्कुलर जारी कर राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने के ऑब्जेक्शन अवधि को तीस दिन से कम कर सात दिन कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावों का ऐलान होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता है। पंजाब में आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए अकाली दल, कांग्रेस, बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर ने कोशिश की। जब नहीं रोक पाए तो सभी मिलकर षड्यंत्र रच रहे हैं। दूसरी राजनीतिक पार्टी अरविंद केजरीवाल की साफ राजनीति, ईमानदारी, केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस से डरती हैं। यह लोग कभी भी नहीं चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सहित देश के किसी भी राज्य में सरकार बने। राजनीतिक पार्टी को रजिस्टर करा कर इलेक्शन कमिशन और भाजपा किसके वोट काटना चाहती है? आम आदमी पार्टी के पंजाब सह प्रभारी और विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने तेरह जनवरी दो हज़ार बाईस को खुलासा किया था कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया अपने कानूनों में संशोधन करके एक नए ग्रुप को पॉलिटिकल पार्टी में रजिस्टर करवाना चाह रहा है। सारे कानूनों और सारे नियमों को ताक पर रखकर एक मोर्चे को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत कर इलेक्शन सिंबल देना चाहता है। दो बड़े बदलाव चुनाव आयोग करने जा रहा है। पहला चुनाव आचार संहिता लगने के बाद राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत किया जा रहा है। जबकि चुनाव आयोग का कानून है कि किसी भी पार्टी को पंजीकृत करने से पहले तीस दिन तक का नोटिस पीरियड देना होता है। चुनाव आयोग इस नोटिस पीरियड को तीस दिन से घटाकर सात दिन करने जा रहा है। यह पहले ही कहा था कि ऐसा होने जा रहा है। आम आदमी पार्टी की भविष्यवाणी और शक यकीन में बदल गया। इलेक्शन कमिशन ने चौदह जनवरी दो हज़ार बाईस को सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा है कि एक पॉलीटिकल पार्टी को रजिस्टर करने के लिए तीस दिन की समय सीमा होती है, उसे कम करके सात दिन कर रहे हैं। उन्होंने कारण दिया है कि कोविड-उन्नीस है तो राजनीतिक पार्टी को अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म दाखिल करने में कुछ दिक्कत आ रही थी। इसलिए उनको यह रियायत दी है। राघव चड्ढा ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि राजनीतिक पार्टी को रजिस्टर करा कर इलेक्शन कमिशन और भाजपा किसके वोट काटना चाहती है? भारतीय जनता पार्टी और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया किसके वोटों में सेंध लगाना चाहती है और कौन सी पार्टी को नुकसान पहुंचाना चाहती है। अगर यह पार्टी रजिस्टर्ड होती है तो पहला बड़ा सवाल है कि किस पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। दूसरा सवाल किस पार्टी को फायदा होगा। कौन से वो राजनीतिक लोग हैं जो आम आदमी पार्टी को हारता देखना चाहते हैं। हर कीमत पर सिर्फ अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की हार देखना चाहते हैं। यह सभी जानते हैं कि बीच चुनाव में इलेक्शन की डेट घोषित होने के बाद कभी भी किसी नए दल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जाता। इसके अलावा नोटिस पीरियड भी कम नहीं किया जाता। राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी को बने भी बहुत समय नहीं हुआ है। आज से सात-आठ साल पहले जब हम अपनी पार्टी रजिस्टर कराने गए तो हमें भी नोटिस पीरियड का पालन करना पड़ा। हमारे लिए कोई राहत नहीं थी और ना ही किसी पार्टी के लिए होती है। अब कानूनों को ताक पर रख कर शायद एक बहुत बड़े षड्यंत्र के तहत आम आदमी पार्टी के वोट काटने के लिए एक नई पॉलिटिकल पार्टी को रजिस्टर्ड कराया जा रहा है। इलेक्शन कमिशन सारे कानूनों को ताक पर रखकर पब्लिक नोटिस पीरियड कम कर रातों रात एक नई पार्टी को पंजीकृत करने जा रहा है, ताकि वह आम आदमी पार्टी के वोट काटे। ऐसा लगता है कि इलेक्शन कमिशन सारे काम छोड़कर इस नए मोर्चे को रजिस्टर करने में लगा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब और देश के लोगों के सामने इन बातों को रख रहे हैं। दूसरी पार्टी वालों को अरविंद केजरीवाल की साफ राजनीति, ईमानदारी, केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस को देखकर डर लगता है। वह लोग कभी भी नहीं चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सहित देश के किसी भी राज्य में सरकार बने। पहले अकाली दल ने अरविंद केजरीवाल को रोकने की कोशिश की, लेकिन नहीं रोक पाए। कांग्रेस ने कोशिश की लेकिन नहीं रोक पाए। बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर भी मिलकर आम आदमी पार्टी को नहीं रोक पाए। अब सारे लोग मिलकर आम आदमी पार्टी को रोकने का। एक षड्यंत्र रच रहे हैं। आम आदमी पार्टी सीधे तौर पर आज इलेक्शन कमीशन से पूछना चाहती है कि किस पार्टी को रजिस्टर करने के लिए आप यह यह विशेष संशोधन करके रियायत दे रहे हैं। दूसरा सवाल इसके पंजीकृत होने से सबसे ज्यादा नुकसान किस पार्टी को होगा? तीसरा सवाल इस मोर्चे के रजिस्टर्ड होने से किस पार्टी को इसका फायदा होगा। चौथा सवाल ऐसी क्या जरूरत पड़ गई की बीच चुनाव में कानूनों को ताक पर रखकर सारे संशोधन करके एक नई पॉलिटिकल पार्टी को रजिस्टर कर रहे हैं। पांचवा सवाल क्या आज यह नहीं पूछा जाए कि कौन-कौन लोग हैं जो इस षड्यंत्र में हिस्सेदार हैं जो हर कीमत पर आम आदमी पार्टी को रोकना चाहते हैं। यह पांच सीधे सवाल आम आदमी पार्टी पूछ रही है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और भाजपा जवाब दे।
फिल्म के बारे में हम आपको बताना चाहेंगे कि यह अरशद वारसी की जॉली एल.एल.बी. का सीक्वल है, जिसे सुभाष कपूर ही डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी के अलावा अनु कपूर और सौरभ शुक्ला मुख्य भूमिका निभाते दिखेंगे। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग लखनऊ में की गई है। इस साल अक्षय कुमार की 4 फिल्में रिलीज होनी हैं, जिनमें से यह उनकी पहली रिलीज होगी। जैसा कि फिल्म से उम्मीद की जा रही है, यह अक्षय की बेहतरीन शुरुआत करायेगी।
फिल्म के बारे में हम आपको बताना चाहेंगे कि यह अरशद वारसी की जॉली एल.एल.बी. का सीक्वल है, जिसे सुभाष कपूर ही डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी के अलावा अनु कपूर और सौरभ शुक्ला मुख्य भूमिका निभाते दिखेंगे। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग लखनऊ में की गई है। इस साल अक्षय कुमार की चार फिल्में रिलीज होनी हैं, जिनमें से यह उनकी पहली रिलीज होगी। जैसा कि फिल्म से उम्मीद की जा रही है, यह अक्षय की बेहतरीन शुरुआत करायेगी।