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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2019 Exam) के लिए नोटिफिकेशन दशहरे के बाद जारी कर दिया जाएगा. UPTET परीक्षा दिसंबर में आयोजित की जाएगी." कुल मिलाकर ये साफ हो गया है कि 8 अक्टूबर के बाद नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा. यूपीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट upbasiceduboard.gov.in और examregulatoryauthorityup.in पर जारी किया जाएगा. आप इन वेबसाइट्स पर जाकर नोटिफिकेशन डाउनलोड कर सकेंगे.
यूपीटेट परीक्षा पिछले कुछ सालों से अक्टूबर और नवंबर में आयोजित होती आ रही है. लेकिन इस बार परीक्षा में देरी हुई है. इस परीक्षा में हर साल लाखों की संख्या में उम्मीदवार भाग लेते हैं. UPTET एक राज्य स्तरीय परीक्षा है, जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में पास होने वालों को UPTET पात्रता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है जो कि 5 वर्षों के लिए वैध होता है. यूपीटेट में पास होने वालों के लिए वैकेंसी निकाली जाती है. जिसके बाद लिखित परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों के पदों पर नियुक्तियां होती हैं.
UPTET 2019 की परीक्षा में 2 पेपर होंगे. पहला पेपर प्राथमिक स्तर के लिए (कक्षा 1-5 शिक्षक) के लिए और दूसरा पेपर उच्च प्राथमिक स्तर के लिए (कक्षा 6-8 शिक्षक) के लिए होगा. परीक्षा में 150 सवाल होंगे. परीक्षा को पूरा करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंट और 30 मिनट का समय मिलेगा.
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन दशहरे के बाद जारी कर दिया जाएगा. UPTET परीक्षा दिसंबर में आयोजित की जाएगी." कुल मिलाकर ये साफ हो गया है कि आठ अक्टूबर के बाद नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा. यूपीटीईटी परीक्षा का नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट upbasiceduboard.gov.in और examregulatoryauthorityup.in पर जारी किया जाएगा. आप इन वेबसाइट्स पर जाकर नोटिफिकेशन डाउनलोड कर सकेंगे. यूपीटेट परीक्षा पिछले कुछ सालों से अक्टूबर और नवंबर में आयोजित होती आ रही है. लेकिन इस बार परीक्षा में देरी हुई है. इस परीक्षा में हर साल लाखों की संख्या में उम्मीदवार भाग लेते हैं. UPTET एक राज्य स्तरीय परीक्षा है, जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में पास होने वालों को UPTET पात्रता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है जो कि पाँच वर्षों के लिए वैध होता है. यूपीटेट में पास होने वालों के लिए वैकेंसी निकाली जाती है. जिसके बाद लिखित परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों के पदों पर नियुक्तियां होती हैं. UPTET दो हज़ार उन्नीस की परीक्षा में दो पेपर होंगे. पहला पेपर प्राथमिक स्तर के लिए के लिए और दूसरा पेपर उच्च प्राथमिक स्तर के लिए के लिए होगा. परीक्षा में एक सौ पचास सवाल होंगे. परीक्षा को पूरा करने के लिए उम्मीदवारों को दो घंटाट और तीस मिनट का समय मिलेगा.
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कैथल, 5 फरवरी (हप्र)
माकपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए लोकसभा में रखे गए बजट के विरोध में सर छोटू राम चौक पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता कामरेड महेंद्र सिंह ने की व संचालन जिला सचिव कामरेड प्रेम चंद ने किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पूंजीवादप्रस्त नीतियों को तीव्र गति से लागू किया जा रहा है। इसके चलते देश में आर्थिक विकास दर में गिरावट जारी है, कोरोना महामारी के दौर में यह संकट और भी गहरा हुआ है। महंगाई व बेरोजगारी के लगातार बढऩे से लोग त्राहिमाम हैं। ऐसे में देश के किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, महिलाएं, नौकरी पेशा व मध्यमवर्ग के लोग आम बजट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन मोदी सरकार ने कारपोरेटपरस्त बजट पेश करके आम लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस मौके पर सतपाल आनंद, सत्यवान, महेंद्र सिंह, नरेश कुमार, रामकली जांगड़ा ने भी संबोधित किया।
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कैथल, पाँच फरवरी माकपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए लोकसभा में रखे गए बजट के विरोध में सर छोटू राम चौक पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता कामरेड महेंद्र सिंह ने की व संचालन जिला सचिव कामरेड प्रेम चंद ने किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पूंजीवादप्रस्त नीतियों को तीव्र गति से लागू किया जा रहा है। इसके चलते देश में आर्थिक विकास दर में गिरावट जारी है, कोरोना महामारी के दौर में यह संकट और भी गहरा हुआ है। महंगाई व बेरोजगारी के लगातार बढऩे से लोग त्राहिमाम हैं। ऐसे में देश के किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, महिलाएं, नौकरी पेशा व मध्यमवर्ग के लोग आम बजट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन मोदी सरकार ने कारपोरेटपरस्त बजट पेश करके आम लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस मौके पर सतपाल आनंद, सत्यवान, महेंद्र सिंह, नरेश कुमार, रामकली जांगड़ा ने भी संबोधित किया।
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आजमगढ़ जिले के दीवानी न्यायालय परिसर में मेगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का उद्घाटन इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान जिला जज जितेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य न्यायिक अधिकारीगण व अधिवक्तागण मौजूद रहे। हॉल ऑफ जस्टिस में अपने संबोधन में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने कहा कि सभी न्यायिक अधिकारियों अधिवक्तागण को कांटों भरी राह में न्याय पथ पर चलना होगा। मुख्य उद्देश न्याय प्रिय फैसला होना चाहिए और इसमें न्यायिक अधिकारी को खुद संतुष्ट होना चाहिए कि वह सही है कि नहीं।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि कोर्ट द्वारा लिया जाने वाला फैंसला बाहरी दवाब से मुक्त होना चाहिए कि इस फैसले का क्या आगे असर होगा। न्यायमूर्ति का कहना है कि हाईकोर्ट खुद नहीं चाहता कि वह जिला सत्र न्यायालय के कार्यों में हस्तक्षेप करे पर कभी-कभी ऐसा करना पड़ता है। यही कार्य सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के लिए करता है। ऋषि दुर्वासा दत्तात्रेय और चंद्रमा ऋषि के इस पावन धरती पर जहां उन्होंने तप किया यहां आकर गर्व महसूस कर रहा हूं। शिवाजी को आगरा के किले की जेल से औरंगजेब के कब्जे से मुक्त कराने में यहां के लोगों काफी सहयोग रहा है, यह ऐतिहासिक धरती भी है।
इस धरती पर आने पर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। इससे पूर्व न्यायमूर्ति को कोर्ट परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया गया। लोक अदालत की शुरुआत के अलावा चीफ डिफेंस काउंसिल कार्यालय का भी उद्घाटन न्यायमूर्ति ने किया। लोक अदालत में लघु फौजदारी वाद, सिविल वाद भरण पोषण तथा अन्य वैवाहिक वाद, बैंक के लोन खातों से जुड़े एनपीए मामलों को सुलह समझौते तथा स्वीकारोक्ति के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। कुल 75 हजार मुकदमों के निबटारे का लक्ष्य तय किया गया है।
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आजमगढ़ जिले के दीवानी न्यायालय परिसर में मेगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का उद्घाटन इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान जिला जज जितेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य न्यायिक अधिकारीगण व अधिवक्तागण मौजूद रहे। हॉल ऑफ जस्टिस में अपने संबोधन में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने कहा कि सभी न्यायिक अधिकारियों अधिवक्तागण को कांटों भरी राह में न्याय पथ पर चलना होगा। मुख्य उद्देश न्याय प्रिय फैसला होना चाहिए और इसमें न्यायिक अधिकारी को खुद संतुष्ट होना चाहिए कि वह सही है कि नहीं। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि कोर्ट द्वारा लिया जाने वाला फैंसला बाहरी दवाब से मुक्त होना चाहिए कि इस फैसले का क्या आगे असर होगा। न्यायमूर्ति का कहना है कि हाईकोर्ट खुद नहीं चाहता कि वह जिला सत्र न्यायालय के कार्यों में हस्तक्षेप करे पर कभी-कभी ऐसा करना पड़ता है। यही कार्य सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के लिए करता है। ऋषि दुर्वासा दत्तात्रेय और चंद्रमा ऋषि के इस पावन धरती पर जहां उन्होंने तप किया यहां आकर गर्व महसूस कर रहा हूं। शिवाजी को आगरा के किले की जेल से औरंगजेब के कब्जे से मुक्त कराने में यहां के लोगों काफी सहयोग रहा है, यह ऐतिहासिक धरती भी है। इस धरती पर आने पर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। इससे पूर्व न्यायमूर्ति को कोर्ट परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया गया। लोक अदालत की शुरुआत के अलावा चीफ डिफेंस काउंसिल कार्यालय का भी उद्घाटन न्यायमूर्ति ने किया। लोक अदालत में लघु फौजदारी वाद, सिविल वाद भरण पोषण तथा अन्य वैवाहिक वाद, बैंक के लोन खातों से जुड़े एनपीए मामलों को सुलह समझौते तथा स्वीकारोक्ति के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। कुल पचहत्तर हजार मुकदमों के निबटारे का लक्ष्य तय किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्ली : कांग्रेस ने राज्य सभा में सरकार का बहुमत नहीं होने से तीन तलाक के बिल में अड़ंगा डालकर उसे लटका दिया, लेकिन उसके दुष्परिणाम इतनी जल्दी सामने आएँगे यह कांग्रेस ने नहीं सोचा था. तीन तलाक के खिलाफ बिल को राज्यसभा से पास नहीं होने देने पर देशभर की मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस से खफा हो गई हैं. मुस्लिम महिलाओं ने कांग्रेस पार्टी के बहिष्कार तक की घोषणा कर दी है. कांग्रेस को उसका डबल गेम भारी पड़ गया.
बता दें कि मुस्लिम महिलाओं ने कल कांग्रेस पार्टी के खिलाफ संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाए . कांग्रेस संसद के भीतर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एजेंट के तौर पर काम करती है. उसने बोर्ड के इशारे पर ही इस बिल को लटकाया है.
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिलाओं ने तो यहाँ तक कह दिया कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम महिला विरोधी है. ये सारा काम साजिश और सोची समझी रणनीति के तहत किया गया . लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जोर देकर कहा कि वो तीन तलाक के खिलाफ कानून बनवाकर ही दम लेंगी . प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इस बिल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया भी अदा किया.
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नई दिल्ली : कांग्रेस ने राज्य सभा में सरकार का बहुमत नहीं होने से तीन तलाक के बिल में अड़ंगा डालकर उसे लटका दिया, लेकिन उसके दुष्परिणाम इतनी जल्दी सामने आएँगे यह कांग्रेस ने नहीं सोचा था. तीन तलाक के खिलाफ बिल को राज्यसभा से पास नहीं होने देने पर देशभर की मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस से खफा हो गई हैं. मुस्लिम महिलाओं ने कांग्रेस पार्टी के बहिष्कार तक की घोषणा कर दी है. कांग्रेस को उसका डबल गेम भारी पड़ गया. बता दें कि मुस्लिम महिलाओं ने कल कांग्रेस पार्टी के खिलाफ संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाए . कांग्रेस संसद के भीतर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एजेंट के तौर पर काम करती है. उसने बोर्ड के इशारे पर ही इस बिल को लटकाया है. उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिलाओं ने तो यहाँ तक कह दिया कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम महिला विरोधी है. ये सारा काम साजिश और सोची समझी रणनीति के तहत किया गया . लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जोर देकर कहा कि वो तीन तलाक के खिलाफ कानून बनवाकर ही दम लेंगी . प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इस बिल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया भी अदा किया.
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देवरिया। बनकटा पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान आज बिहार अवैध रूप से शराब कार से ले जाते समय एक तस्कर को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई कर न्यायालय भेजा गया।
प्रभारी निरीक्षक थाना बनकटा द्वारा एक डगा पंडत के रोड के पास वाहन चेकिंग के दौरान चार पहिया स्विफ्ट डिजायर वाहन बीआर. 01 बीटी. 6538 की तलाशी के दौरान वाहन में छिपाकर रखी 07 पेटी अंग्रेजी शराब एवं 08 पेटी देशी शराब, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग एक लाख रूपए है।
पुलिस के पूछताछ के दौरान युवक ने अपना नाम पता बृजेश कुमार राजभर पुत्र रामलाल राजभर निवासी चित्र विश्राम थाना गुठनी जनपद सिवान (बिहार) बताया। पुलिस ने विधिक कार्यवाही कर न्यायालय भेजा है।
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देवरिया। बनकटा पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान आज बिहार अवैध रूप से शराब कार से ले जाते समय एक तस्कर को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई कर न्यायालय भेजा गया। प्रभारी निरीक्षक थाना बनकटा द्वारा एक डगा पंडत के रोड के पास वाहन चेकिंग के दौरान चार पहिया स्विफ्ट डिजायर वाहन बीआर. एक बीटी. छः हज़ार पाँच सौ अड़तीस की तलाशी के दौरान वाहन में छिपाकर रखी सात पेटी अंग्रेजी शराब एवं आठ पेटी देशी शराब, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग एक लाख रूपए है। पुलिस के पूछताछ के दौरान युवक ने अपना नाम पता बृजेश कुमार राजभर पुत्र रामलाल राजभर निवासी चित्र विश्राम थाना गुठनी जनपद सिवान बताया। पुलिस ने विधिक कार्यवाही कर न्यायालय भेजा है।
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जहाज पर से जो लोग समुद्र में गिर गए थे, वे काफी देर तक भूखे प्यासे, बर्फीली ठंड में जीने के लिए संघर्ष करते रहे, बर्फ में जमते रहे और मरते रहे ! कुछ गोताखोरों ने लाशों को उलट पलट कर भी देखा की कहीं कोई अंतिम सांश ले रहा है और उसे बचाया जा सकता है, इस प्रयास में चार लोग मिले जिनमें एक ने तो उठाते उठाते ही प्राण त्याग दिए ! नावों में सवार महिलाओं और बच्चों को बड़ी सावधानी से कार्पेथिया जहाज के सह कर्मियों ने जहाज में बिठाया ! यही एक मात्र जहाज था जो टाइटैनिक के बर्फीले सागर में फंसे यात्रियों को बचाने के लिए इस खतरनाक ज़ोन में पहुंचा था ! कुल २२०६ यात्री और टाइटैनिक के चालाक, क्रू मेंबर इस जहाज में सवार थे (विकिपेडिया के मुताबिक़ इसमें २४५३ सवारियां और ९०० क्रू मेंबरों के रहने का पूरा इंतजाम था ) जिनमें केवल ७०५ ही ज़िंदा बच पाए ! कुछ नव विवाहित जोड़ों में पत्नियां तो बच गयी क्यों की उन्हें नावों में बिठा कर भेज दिया गया था, लेकिन उनके पतियों को नहीं बचाया जा सका ! समाचार पत्र अलग अलग आंकड़े प्रकाशित कर रहे थे, इन आंकड़ो से लोग चिंतित हो रहे थे ! यात्रियों के भाई बंद रिश्तेदार बहुत बड़ी संख्या में न्यू यॉर्क डाक यार्ड पर एकत्रित हो गए थे अपने प्रियजनों के लौटने का बे सब्री से इन्तजार कर रहे थे, वे कल्पना कर रहे थे की " उनके प्रियजन, भाई, बहिन, मित्र जैसे ही जहाज से नीचे उतरेंगे वे उन्हें बाहों में भर लेंगे" ! कार्पेथिया जहाज टाइटैनिक के बचे हुए यात्रियों को लेकर यहाँ पहुँचने वाला था ! उसे घटना स्थल से न्यू यॉर्क आने में पूरे तीन घंटे लगे ! आखीर में जहाज पहुँच गया था डाकयार्ड पर, जहां ३०,००० लोग इन्तजार में खड़े थे, उनमें कुछ डाक्टर कुछ नर्सें भी थी जो बचे हुए घायलों को उचित मेडिकल सहायता देने के लिए उत्सुक थे ! जहाज खडा हुआ, उसमें से पहला जिन्दा इंसान उतरा, जो उस हादसे का गवाह था ! भीड़ में से लोग अपने रिश्तेदारों का नाम लेकर जहाज से निकलने वालों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे ! हैरोल्ड ब्राइड, वायरलेस आपरेटरों में अकेला बच पाया लेकिन उसके भी दोनों पाँव बर्फ के जख्मों से पीड़ित थे और दोनों बंधे पड़े थे ! बचे हुवों में दो कुत्ते भी थे जिन्हें कर्नल एस्टर ने टाइटनिक जहाज से मुक्त कर दिया था जब वह डूबने वाला था ! दो फ्रांसीसी बच्चे माइकल और एड्मोंड नवरातिल भी ज़िंदा बच गए, लेकिन उनके पापा नहीं बच पाए ! उनकी देख भाल वही महिला कर रही थी जिसके पास उन बच्चों के पापा उन बच्चों को सौंप गए थे ! समाचार पत्रों के माध्यम से और बच्चों की फोटो से जो समाचार पत्रों में छपी थी, माँ को बच्चों के बारे में पता लगा और इस तरह वह अपने बच्चों को पाने में सफल हुई ! बच्चों को अपनी माँ मिल गयी ! उनके मम्मी-पापा अलग अलग रहते थे, बाप बच्चों को उनकी माँ से चुरा कर ले गया था और उसने सबको बता रखा था की उनकी माँ मर चुकी है ! बचे हुवो में मिसेज एस्टर भी थीं ! उन्होंने आखरी वक्त में अपनी बोट को डूबते हुए टाइटैनिक से दूर ले जाने में नाविकों की मदद की ! जो लोग हादसे में मारे गए थे उनमें से बहुतों की पहिचान नहीं हो पायी ! लेकिन कर्नल एस्टर की पहिचान हो गयी थी उनके शर्ट के कालर पर उनके नामके अक्षर अंकित थे ! ३२८ लाशों के बीच कैप्टेन स्मिथ की बाडी नहीं मिल पायी ! कुछ लोगों का कहना था की जहाज के डूबने से पहले जहाज के अगले भाग में ब्रिज पर देखे गए थे ! २२०६ - ७०५ = १५०१ लोग या तो लापता हो गए थे या जल समाधी ले चुके थे ! उनमे से केवल ३२८ मृत्यकों की लाशें मिली बाकी १५०१ - ३२८ = 1173 लोगों की बौडी ढूँढने का प्रयास किया गया लेकिन उस विशाल बर्फीले सागर में जाने वे कहाँ समा गए होंगे !
था ! वैज्ञानिक जहाज के टूटने के कारण भी जान चुके हैं ! और भी साक्ष्य ढूंढें जा रहे हैं जो पूरी तरह टाइटैनिक हादसे के छिपे हुए राज को दुनिया के सामने ला सके ! समाप्त ( हरेन्द्र अमेरिका से )
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जहाज पर से जो लोग समुद्र में गिर गए थे, वे काफी देर तक भूखे प्यासे, बर्फीली ठंड में जीने के लिए संघर्ष करते रहे, बर्फ में जमते रहे और मरते रहे ! कुछ गोताखोरों ने लाशों को उलट पलट कर भी देखा की कहीं कोई अंतिम सांश ले रहा है और उसे बचाया जा सकता है, इस प्रयास में चार लोग मिले जिनमें एक ने तो उठाते उठाते ही प्राण त्याग दिए ! नावों में सवार महिलाओं और बच्चों को बड़ी सावधानी से कार्पेथिया जहाज के सह कर्मियों ने जहाज में बिठाया ! यही एक मात्र जहाज था जो टाइटैनिक के बर्फीले सागर में फंसे यात्रियों को बचाने के लिए इस खतरनाक ज़ोन में पहुंचा था ! कुल दो हज़ार दो सौ छः यात्री और टाइटैनिक के चालाक, क्रू मेंबर इस जहाज में सवार थे जिनमें केवल सात सौ पाँच ही ज़िंदा बच पाए ! कुछ नव विवाहित जोड़ों में पत्नियां तो बच गयी क्यों की उन्हें नावों में बिठा कर भेज दिया गया था, लेकिन उनके पतियों को नहीं बचाया जा सका ! समाचार पत्र अलग अलग आंकड़े प्रकाशित कर रहे थे, इन आंकड़ो से लोग चिंतित हो रहे थे ! यात्रियों के भाई बंद रिश्तेदार बहुत बड़ी संख्या में न्यू यॉर्क डाक यार्ड पर एकत्रित हो गए थे अपने प्रियजनों के लौटने का बे सब्री से इन्तजार कर रहे थे, वे कल्पना कर रहे थे की " उनके प्रियजन, भाई, बहिन, मित्र जैसे ही जहाज से नीचे उतरेंगे वे उन्हें बाहों में भर लेंगे" ! कार्पेथिया जहाज टाइटैनिक के बचे हुए यात्रियों को लेकर यहाँ पहुँचने वाला था ! उसे घटना स्थल से न्यू यॉर्क आने में पूरे तीन घंटे लगे ! आखीर में जहाज पहुँच गया था डाकयार्ड पर, जहां तीस,शून्य लोग इन्तजार में खड़े थे, उनमें कुछ डाक्टर कुछ नर्सें भी थी जो बचे हुए घायलों को उचित मेडिकल सहायता देने के लिए उत्सुक थे ! जहाज खडा हुआ, उसमें से पहला जिन्दा इंसान उतरा, जो उस हादसे का गवाह था ! भीड़ में से लोग अपने रिश्तेदारों का नाम लेकर जहाज से निकलने वालों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे ! हैरोल्ड ब्राइड, वायरलेस आपरेटरों में अकेला बच पाया लेकिन उसके भी दोनों पाँव बर्फ के जख्मों से पीड़ित थे और दोनों बंधे पड़े थे ! बचे हुवों में दो कुत्ते भी थे जिन्हें कर्नल एस्टर ने टाइटनिक जहाज से मुक्त कर दिया था जब वह डूबने वाला था ! दो फ्रांसीसी बच्चे माइकल और एड्मोंड नवरातिल भी ज़िंदा बच गए, लेकिन उनके पापा नहीं बच पाए ! उनकी देख भाल वही महिला कर रही थी जिसके पास उन बच्चों के पापा उन बच्चों को सौंप गए थे ! समाचार पत्रों के माध्यम से और बच्चों की फोटो से जो समाचार पत्रों में छपी थी, माँ को बच्चों के बारे में पता लगा और इस तरह वह अपने बच्चों को पाने में सफल हुई ! बच्चों को अपनी माँ मिल गयी ! उनके मम्मी-पापा अलग अलग रहते थे, बाप बच्चों को उनकी माँ से चुरा कर ले गया था और उसने सबको बता रखा था की उनकी माँ मर चुकी है ! बचे हुवो में मिसेज एस्टर भी थीं ! उन्होंने आखरी वक्त में अपनी बोट को डूबते हुए टाइटैनिक से दूर ले जाने में नाविकों की मदद की ! जो लोग हादसे में मारे गए थे उनमें से बहुतों की पहिचान नहीं हो पायी ! लेकिन कर्नल एस्टर की पहिचान हो गयी थी उनके शर्ट के कालर पर उनके नामके अक्षर अंकित थे ! तीन सौ अट्ठाईस लाशों के बीच कैप्टेन स्मिथ की बाडी नहीं मिल पायी ! कुछ लोगों का कहना था की जहाज के डूबने से पहले जहाज के अगले भाग में ब्रिज पर देखे गए थे ! दो हज़ार दो सौ छः - सात सौ पाँच = एक हज़ार पाँच सौ एक लोग या तो लापता हो गए थे या जल समाधी ले चुके थे ! उनमे से केवल तीन सौ अट्ठाईस मृत्यकों की लाशें मिली बाकी एक हज़ार पाँच सौ एक - तीन सौ अट्ठाईस = एक हज़ार एक सौ तिहत्तर लोगों की बौडी ढूँढने का प्रयास किया गया लेकिन उस विशाल बर्फीले सागर में जाने वे कहाँ समा गए होंगे ! था ! वैज्ञानिक जहाज के टूटने के कारण भी जान चुके हैं ! और भी साक्ष्य ढूंढें जा रहे हैं जो पूरी तरह टाइटैनिक हादसे के छिपे हुए राज को दुनिया के सामने ला सके ! समाप्त
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भोपाल । बूढ़े और जवानों के बीच जिस तरह से इंसानी समाज में वैचारिक द्वंद चलता रहता है, ठीक उसी तरह जंगल में जवान ताकतवर बाघ बूढ़े कमजोर बाघों के लिए खतरा बन जाते हैं। जवान और ताकतवर बाघ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए बूढ़े बाघों को ललकारते हैं। इस दौरान अगर दोनों के बीच संघर्ष होता है तो जवान बाघ बूढ़े बाघों पर भारी पड़ जाते हैं। यही कारण है कि बूढ़े बाघ अपनी अवस्था के अनुकूल व्यवहार करते हुए जंगल से किनारा करने लगते हैं। हाल ही में मानपुर के सेहरा बीट से बेदखल होकर एक बूढ़ा बाघ नौगंवा होते हुए उर्दना पहुंच गया है।
बांधवगढ़ के जंगल में 10 साल से ज्यादा उम्र के बाघों की संख्या 15 से ज्यादा है। ताला रेंज में 10 साल से ज्यादा उम्र के सबसे ज्यादा बाघ हैं। वहीं मानपुर, खितौली, मगधी, पतौर, पनपथा में भी दस साल से ज्यादा उम्र के बाघ देखने को मिलते हैं। इनमें से कई बाघ तो 12 साल से भी ज्यादा उम्र के हैं। बाघों की उम्र 12 से 15 साल तक होती है, हालांकि कई ऐसे अपवाद भी हैं, जिसमें बाघों ने अपनी उम्र 18 साल भी पार की है। बांधवगढ़ में बाघों की संख्या 130 से ज्यादा है, जिसमें दो साल से छह साल तक के बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि छह महीने से दो साल के शावकों की संख्या भी यहां अच्छी-खासी है।
जंगल के अंदर संघर्ष बाघों के बीच ही ज्यादा होता है। बाघिन से बाघ का संघर्ष तब होता हैं जब बाघिन के साथ उसके शावक होते हैं और बाघिन बाघ को अपने पास नहीं आने देती। इस इस स्थिति में बाघ शावकों पर हमला करने का प्रयास करता है और बाघिन बीच में आ जाती है। एक बाघ के साथ एक से ज्यादा बाघिन हो तो कोई झगड़ा नहीं होता, लेकिन जैसे ही दूसरा बाघ आता है। संघर्ष शुरू हो जाता है। अलग क्षेत्रों के जवान और बूढ़े बाघों के बीच ज्यादा संघर्ष होता है।
जंगल में पशु संग्राम का ज्यादा खतरा गर्मी के मौसम में होता है। दरअसल गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण बाघ अपना क्षेत्र छोडऩे लगते हैं और पानी की तलाश में खुले जंगल में निकल जाते हैं। जहां भी दूसरे बाघ से उनका सामना होता है वहीं संघर्ष शुरू हो जाता है। इसी तरह जल स्रोत पर कब्जे के लिए भी बाघों के बीच फाइटिंग होने लगती हैं। जंगल खुल जाता है और दूर-दूर तक का नाजारा साफ नजर इनका कहना है। एसडीओ सुधीर मिश्रा का कहना है कि जंगल में आमना-सामना होने पर बाघों के बीच फाइटिंग हो जाती है। इस तरह की फाइटिंग में कमजोर बाघ प्रभावित हो जाते हैं। बाघों के बीच फाइटिंग न हो इसके लिए जंगल में गश्त की जाने लगी है।
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भोपाल । बूढ़े और जवानों के बीच जिस तरह से इंसानी समाज में वैचारिक द्वंद चलता रहता है, ठीक उसी तरह जंगल में जवान ताकतवर बाघ बूढ़े कमजोर बाघों के लिए खतरा बन जाते हैं। जवान और ताकतवर बाघ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए बूढ़े बाघों को ललकारते हैं। इस दौरान अगर दोनों के बीच संघर्ष होता है तो जवान बाघ बूढ़े बाघों पर भारी पड़ जाते हैं। यही कारण है कि बूढ़े बाघ अपनी अवस्था के अनुकूल व्यवहार करते हुए जंगल से किनारा करने लगते हैं। हाल ही में मानपुर के सेहरा बीट से बेदखल होकर एक बूढ़ा बाघ नौगंवा होते हुए उर्दना पहुंच गया है। बांधवगढ़ के जंगल में दस साल से ज्यादा उम्र के बाघों की संख्या पंद्रह से ज्यादा है। ताला रेंज में दस साल से ज्यादा उम्र के सबसे ज्यादा बाघ हैं। वहीं मानपुर, खितौली, मगधी, पतौर, पनपथा में भी दस साल से ज्यादा उम्र के बाघ देखने को मिलते हैं। इनमें से कई बाघ तो बारह साल से भी ज्यादा उम्र के हैं। बाघों की उम्र बारह से पंद्रह साल तक होती है, हालांकि कई ऐसे अपवाद भी हैं, जिसमें बाघों ने अपनी उम्र अट्ठारह साल भी पार की है। बांधवगढ़ में बाघों की संख्या एक सौ तीस से ज्यादा है, जिसमें दो साल से छह साल तक के बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि छह महीने से दो साल के शावकों की संख्या भी यहां अच्छी-खासी है। जंगल के अंदर संघर्ष बाघों के बीच ही ज्यादा होता है। बाघिन से बाघ का संघर्ष तब होता हैं जब बाघिन के साथ उसके शावक होते हैं और बाघिन बाघ को अपने पास नहीं आने देती। इस इस स्थिति में बाघ शावकों पर हमला करने का प्रयास करता है और बाघिन बीच में आ जाती है। एक बाघ के साथ एक से ज्यादा बाघिन हो तो कोई झगड़ा नहीं होता, लेकिन जैसे ही दूसरा बाघ आता है। संघर्ष शुरू हो जाता है। अलग क्षेत्रों के जवान और बूढ़े बाघों के बीच ज्यादा संघर्ष होता है। जंगल में पशु संग्राम का ज्यादा खतरा गर्मी के मौसम में होता है। दरअसल गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण बाघ अपना क्षेत्र छोडऩे लगते हैं और पानी की तलाश में खुले जंगल में निकल जाते हैं। जहां भी दूसरे बाघ से उनका सामना होता है वहीं संघर्ष शुरू हो जाता है। इसी तरह जल स्रोत पर कब्जे के लिए भी बाघों के बीच फाइटिंग होने लगती हैं। जंगल खुल जाता है और दूर-दूर तक का नाजारा साफ नजर इनका कहना है। एसडीओ सुधीर मिश्रा का कहना है कि जंगल में आमना-सामना होने पर बाघों के बीच फाइटिंग हो जाती है। इस तरह की फाइटिंग में कमजोर बाघ प्रभावित हो जाते हैं। बाघों के बीच फाइटिंग न हो इसके लिए जंगल में गश्त की जाने लगी है।
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नई दिल्ली - दाल, आलू, प्याज तथा साग-सब्जी के दाम उतरने से चालू वर्ष के मई माह में थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 2. 17 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि इससे पिछले माह में यह आंकडा 3. 85 प्रतिशत रहा था। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकडों में बताया कि मई 2016, में थोक मुद्रास्फीति ऋणात्मक 0. 90 प्रतिशत रही थी। बिल्ड अप थोक मुद्रास्फीति अभी तक ऋणात्मक 0. 35 प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे पिछले वर्ष के इसी माह में यह दर 2. 51 प्रतिशत थी। आंकडों के अनुसार खाद्य पदार्थों में दाल के दाम में 19. 73 र्प्रतिशत, साग सब्जी में 18. 51 प्रतिशत, आलू में 44. 36 प्रतिशत और प्याज में 12. 86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। खाद्य वस्तु समूह में 1. 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस समूह में मछली और अंडा दस प्रतिशत, फल और सब्जी में दो प्रतिशत, काफी, राजमा, मूंग,मक्का और ज्वार में एक एक प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि इसी समूह में मटर चार प्रतिशत और चिकन में तीन प्रतिशत की तेजी आई है। आंकडों में बताया गया है कि गैर खाद्य वस्तु समूह में भी 1. 2 प्रतिशत की कमी आयी है। इस समूह में कच्ची रबड़ 10 प्रतिशत, बिनौला चार प्रतिशत, अरंडी, कच्चा जूट, सोयाबीन और मूंगफली तीन प्रतिशत, कच्चा कपास, कच्चा सिल्क, नारियल और सूरजमुखी दो दो प्रतिशत और चारा के दाम एक प्रतिशत गिरे हैं।
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नई दिल्ली - दाल, आलू, प्याज तथा साग-सब्जी के दाम उतरने से चालू वर्ष के मई माह में थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर दो. सत्रह प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि इससे पिछले माह में यह आंकडा तीन. पचासी प्रतिशत रहा था। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकडों में बताया कि मई दो हज़ार सोलह, में थोक मुद्रास्फीति ऋणात्मक शून्य. नब्बे प्रतिशत रही थी। बिल्ड अप थोक मुद्रास्फीति अभी तक ऋणात्मक शून्य. पैंतीस प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे पिछले वर्ष के इसी माह में यह दर दो. इक्यावन प्रतिशत थी। आंकडों के अनुसार खाद्य पदार्थों में दाल के दाम में उन्नीस. तिहत्तर र्प्रतिशत, साग सब्जी में अट्ठारह. इक्यावन प्रतिशत, आलू में चौंतालीस. छत्तीस प्रतिशत और प्याज में बारह. छियासी प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। खाद्य वस्तु समूह में एक. दो प्रतिशत की गिरावट आई है। इस समूह में मछली और अंडा दस प्रतिशत, फल और सब्जी में दो प्रतिशत, काफी, राजमा, मूंग,मक्का और ज्वार में एक एक प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि इसी समूह में मटर चार प्रतिशत और चिकन में तीन प्रतिशत की तेजी आई है। आंकडों में बताया गया है कि गैर खाद्य वस्तु समूह में भी एक. दो प्रतिशत की कमी आयी है। इस समूह में कच्ची रबड़ दस प्रतिशत, बिनौला चार प्रतिशत, अरंडी, कच्चा जूट, सोयाबीन और मूंगफली तीन प्रतिशत, कच्चा कपास, कच्चा सिल्क, नारियल और सूरजमुखी दो दो प्रतिशत और चारा के दाम एक प्रतिशत गिरे हैं। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
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नगर निगम शिमला चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस ने भी भरपूर ताकत झोंक दी। बुधवार को पार्टी के तमाम स्टार प्रचारक शिमला के सभी वार्डों में जनता के बीच वोट की आपील करते नज़र आए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अलावा परिवहन मंत्री जीएस बाली, पीसीसी अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और विद्या स्टोक्स समेत कई नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर जनसभाएं की।
सुक्खू और बाली एक साथ प्रचार की मुहिम को धार देते नज़र आए। चुनाव के आखिरी दिन अपने बड़े नेताओं को ग्राउंड जीरो पर देख कांग्रेस कार्यकर्ता भी ख़ासे जोश में दिखे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पहले ही म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव की ओपनिंग करते हुए जाखू और गंज बाजार में जनसभाएं की और कांग्रेस की जीत का दावा किया।
वहीं, बीजेपी की तरफ से भी तमाम राजनीतिक स्टालवॉर्ट पहले ही प्रचार मैदान में हैं। आज अखिरी दिन नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल भी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते दिखाई दिए।
शिमला नगर निगम के 34 वार्डों में 153 बूथ मतदान के लिए स्थापित किए गए हैं। इनमें से 23 बूथ अत्यधिक संवेदनशील, 56 बूथ संवेदनशील और 74 बूथ सामान्य हैं। शिमला नगर निगम चुनाव में 91000 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
निगम चुनावों में कुल 126 उमीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें 50 महिला जबकि 76 पुरुष अपना भाग्य अजमा रहे हैं। बीजेपी ने सभी 34 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें 16 पुरुष जबकि 18 महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने भी 16 पुरुष एवं 18 महिला उम्मीदवारों पर दांव खेला है। वहीं, माकपा ने नागरिक सभा के साथ मिलकर 12 पुरुषों एवं 14 महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। यदि शिमला की जनसंख्या की बात की जाए तो 2011 की जनगणना के मुताबिक शिमला शहर की कुल आवादी 1,69,578 है। इसमें 93152 पुरुष जबकि 76426 महिला हैं।
गौरतलब है कि चुनाव के आखिरी दिन ख़ासकर कांग्रेस के स्टार लीडरों के प्रचार में कूदने से अचानक ही लड़ाई दिलचस्प रूप ले चुकी है। इससे पहले सीपीएम और बीजेपी ही प्रमुख रूप से ताल ठोकते नज़र आ रहे थे।
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नगर निगम शिमला चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस ने भी भरपूर ताकत झोंक दी। बुधवार को पार्टी के तमाम स्टार प्रचारक शिमला के सभी वार्डों में जनता के बीच वोट की आपील करते नज़र आए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अलावा परिवहन मंत्री जीएस बाली, पीसीसी अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और विद्या स्टोक्स समेत कई नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर जनसभाएं की। सुक्खू और बाली एक साथ प्रचार की मुहिम को धार देते नज़र आए। चुनाव के आखिरी दिन अपने बड़े नेताओं को ग्राउंड जीरो पर देख कांग्रेस कार्यकर्ता भी ख़ासे जोश में दिखे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पहले ही म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव की ओपनिंग करते हुए जाखू और गंज बाजार में जनसभाएं की और कांग्रेस की जीत का दावा किया। वहीं, बीजेपी की तरफ से भी तमाम राजनीतिक स्टालवॉर्ट पहले ही प्रचार मैदान में हैं। आज अखिरी दिन नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल भी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते दिखाई दिए। शिमला नगर निगम के चौंतीस वार्डों में एक सौ तिरेपन बूथ मतदान के लिए स्थापित किए गए हैं। इनमें से तेईस बूथ अत्यधिक संवेदनशील, छप्पन बूथ संवेदनशील और चौहत्तर बूथ सामान्य हैं। शिमला नगर निगम चुनाव में इक्यानवे हज़ार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। निगम चुनावों में कुल एक सौ छब्बीस उमीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनमें पचास महिला जबकि छिहत्तर पुरुष अपना भाग्य अजमा रहे हैं। बीजेपी ने सभी चौंतीस वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें सोलह पुरुष जबकि अट्ठारह महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने भी सोलह पुरुष एवं अट्ठारह महिला उम्मीदवारों पर दांव खेला है। वहीं, माकपा ने नागरिक सभा के साथ मिलकर बारह पुरुषों एवं चौदह महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। यदि शिमला की जनसंख्या की बात की जाए तो दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के मुताबिक शिमला शहर की कुल आवादी एक,उनहत्तर,पाँच सौ अठहत्तर है। इसमें तिरानवे हज़ार एक सौ बावन पुरुष जबकि छिहत्तर हज़ार चार सौ छब्बीस महिला हैं। गौरतलब है कि चुनाव के आखिरी दिन ख़ासकर कांग्रेस के स्टार लीडरों के प्रचार में कूदने से अचानक ही लड़ाई दिलचस्प रूप ले चुकी है। इससे पहले सीपीएम और बीजेपी ही प्रमुख रूप से ताल ठोकते नज़र आ रहे थे।
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प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी हुई कोई ना कोई अपडेट साझा करती रहती हैं.
हाल ही में अदाकारा ने अपनी लाडली बेटी (Priyanka Chopra Baby) के साथ दो खूबसूरत तस्वीरें साझा की हैं, जो उनके फैंस को काफी पसंद आ रही है.
एक तस्वीर में उन्होंने मालती को अपनी गोद में बैठा रखा है, जिसमें मालती ने ग्रीन कलर का और प्रियंका ने ब्लैक कलर का नाइट शूट पहन रखा है.
अपनी इंस्टा स्टोरी पर प्रियंका ने पति निक जोनास को टैग करते हुए लिखा, 'ओह बॉय! ' मां बेटी की ये खूबसूरत तस्वीर सभी को पसंद आ रही है.
आपको बता दें कि दूसरी तस्वीर में प्रियंका लॉस एंजेलिस में एक कोरियन बार्बेक्यू रेस्टोरेंट के बाहर मालती (Malti Marie Chopra) को गोद में लिए खड़ी नजर आ रही हैं.
प्रियंका और निक ने इस साल जनवरी में सरोगेसी के जरिए अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनास का स्वागत किया है.
वर्क फ्रंट की बात करें तो, प्रियंका चोपड़ा आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ के साथ फिल्म जी ले जरा से बॉलीवुड में दोबारा अपनी वापसी कर रही हैं.
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प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी हुई कोई ना कोई अपडेट साझा करती रहती हैं. हाल ही में अदाकारा ने अपनी लाडली बेटी के साथ दो खूबसूरत तस्वीरें साझा की हैं, जो उनके फैंस को काफी पसंद आ रही है. एक तस्वीर में उन्होंने मालती को अपनी गोद में बैठा रखा है, जिसमें मालती ने ग्रीन कलर का और प्रियंका ने ब्लैक कलर का नाइट शूट पहन रखा है. अपनी इंस्टा स्टोरी पर प्रियंका ने पति निक जोनास को टैग करते हुए लिखा, 'ओह बॉय! ' मां बेटी की ये खूबसूरत तस्वीर सभी को पसंद आ रही है. आपको बता दें कि दूसरी तस्वीर में प्रियंका लॉस एंजेलिस में एक कोरियन बार्बेक्यू रेस्टोरेंट के बाहर मालती को गोद में लिए खड़ी नजर आ रही हैं. प्रियंका और निक ने इस साल जनवरी में सरोगेसी के जरिए अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनास का स्वागत किया है. वर्क फ्रंट की बात करें तो, प्रियंका चोपड़ा आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ के साथ फिल्म जी ले जरा से बॉलीवुड में दोबारा अपनी वापसी कर रही हैं.
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आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान कोई भी मांगलिक और शुभ काम नहीं किया जाता। कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहते हैं।
इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की योग निंद्रा से जागते हैं और भगवान विष्णु के जागने के साथ सभी शुभ मुहूर्त फिर से खुल जाते हैं। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम करने से पहले उसके लिए शुभ मुहूर्त देखना बेहद जरूरी माना जाता है ताकि कार्य में किसी भी तरह की कोई बाधा न आएं।
इस साल देवउठनी एकादशी 4 नवंबर को है। लेकिन इस दिन विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। लेकिन इस दिन विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन वृश्चिक राशि में सूर्य की अनुपस्थिति के कारण विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है।
हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद शुभ माना गया है। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आषाढ़ शुक्ल की एकादशी को भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योग निंद्रा में जाते हैं। जिस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता तुलसी और भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम का विवाह विवाह होता है।
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आषाढ़ माह में देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान कोई भी मांगलिक और शुभ काम नहीं किया जाता। कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निंद्रा से जागते हैं और भगवान विष्णु के जागने के साथ सभी शुभ मुहूर्त फिर से खुल जाते हैं। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम करने से पहले उसके लिए शुभ मुहूर्त देखना बेहद जरूरी माना जाता है ताकि कार्य में किसी भी तरह की कोई बाधा न आएं। इस साल देवउठनी एकादशी चार नवंबर को है। लेकिन इस दिन विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। लेकिन इस दिन विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन वृश्चिक राशि में सूर्य की अनुपस्थिति के कारण विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद शुभ माना गया है। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आषाढ़ शुक्ल की एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निंद्रा में जाते हैं। जिस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता तुलसी और भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम का विवाह विवाह होता है।
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ब्रह्मपुरी इलाके की डीएसपी सुचिता सिंह ने कहा कि पुलिस की टीमें इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं. उन्होंने बताया कि सुरंग कई दिनों से खोदी गई होगी और हम सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे.
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. जहां एक ज्वैलरी शॉप में सेंध लगाने के लिए चोरों के एक गिरोह ने नाले से 15 फुट लंबी सुरंग खोदी. लेकिन अंदर जाने के बाद वे तिजोरी को तोड़ने में असफल रहे. हालांकि, वो अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए. जब वे चोरी करने में नाकाम साबित हो गए तो उन्होंने वहां जाने से पहले दुकान के मालिक के लिए माफीनामा लिखा है. हमें खेद है,. उस लेटर पर उनमें से दो की पहचान चुन्नू, मुन्नू के रूप में की गई थी.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना मेरठ के रिठानी इलाके में ज्वैलरी शॉप की है. पुलिस के अनुसार, ज्वैलरी शॉप के मालिक दीपक कुमार ने बताया कि जब वो बीते गुरुवार सुबह दुकान खोलने गए तो उन्होंने देखा कि उनकी तिजोरी काटने की भी कोशिश हुई है. उस दौरान चोर दुकान में घुसे और गैस कटर से तिजोरी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. दीपक ने बताया कि उनकी दुकान के सीसीटीवी कैमरे भी टूटे मिले है, जिसमें से कुछ पर टेप लगे हुए हैं.
क्या है मामला?
वहीं, शॉप के मालिक दीपक का कहना है कि छानबीन के दौरान उनकी नजर काउंटर पर लिखे एक मैसेज पर पड़ी, जिसे अंग्रेजी में लिखा गया था. दीपक ने बताया कि चोर उनकी दुकान में चोरी करने आए थे, लेकिन नाकाम होने पर सॉरी बोल रहे थे. इसके बाद दीपक ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंच कर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरु कर दी है.
दीपक ने कहा कि उन्होंने दुकान खोली तो भगवान कृष्ण की एक मूर्ति दीवार के सामने थी. उन्होंने कहा कि चोर शायद भगवान को देखते हुए अपराध नहीं करना चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने मूर्ति को घुमा दिया था. इसके बाद मूर्ति में लगी चांदी की बांसुरी को अपने साथ ले गए हैं. उन्होंने बताया कि वे सीसीटीवी कैमरों के बारे में सावधान थे और उस हार्ड डिस्क को ले गए. जिस पर वीडियो रिकार्ड हुआ था.
इस घटना पर मेरठ में व्यापारी संगठन काफी गुस्से में हैं. वहीं, ब्रह्मपुरी इलाके की डीएसपी सुचिता सिंह ने कहा कि पुलिस की टीमें इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं. उन्होंने बताया कि सुरंग कई दिनों से खोदी गई होगी और हम सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे. हालांकि, इसके साथ ही इलाके में लोगों की आवाजाही को ट्रैक करके चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे.
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ब्रह्मपुरी इलाके की डीएसपी सुचिता सिंह ने कहा कि पुलिस की टीमें इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं. उन्होंने बताया कि सुरंग कई दिनों से खोदी गई होगी और हम सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. जहां एक ज्वैलरी शॉप में सेंध लगाने के लिए चोरों के एक गिरोह ने नाले से पंद्रह फुट लंबी सुरंग खोदी. लेकिन अंदर जाने के बाद वे तिजोरी को तोड़ने में असफल रहे. हालांकि, वो अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए. जब वे चोरी करने में नाकाम साबित हो गए तो उन्होंने वहां जाने से पहले दुकान के मालिक के लिए माफीनामा लिखा है. हमें खेद है,. उस लेटर पर उनमें से दो की पहचान चुन्नू, मुन्नू के रूप में की गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना मेरठ के रिठानी इलाके में ज्वैलरी शॉप की है. पुलिस के अनुसार, ज्वैलरी शॉप के मालिक दीपक कुमार ने बताया कि जब वो बीते गुरुवार सुबह दुकान खोलने गए तो उन्होंने देखा कि उनकी तिजोरी काटने की भी कोशिश हुई है. उस दौरान चोर दुकान में घुसे और गैस कटर से तिजोरी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. दीपक ने बताया कि उनकी दुकान के सीसीटीवी कैमरे भी टूटे मिले है, जिसमें से कुछ पर टेप लगे हुए हैं. क्या है मामला? वहीं, शॉप के मालिक दीपक का कहना है कि छानबीन के दौरान उनकी नजर काउंटर पर लिखे एक मैसेज पर पड़ी, जिसे अंग्रेजी में लिखा गया था. दीपक ने बताया कि चोर उनकी दुकान में चोरी करने आए थे, लेकिन नाकाम होने पर सॉरी बोल रहे थे. इसके बाद दीपक ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंच कर पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरु कर दी है. दीपक ने कहा कि उन्होंने दुकान खोली तो भगवान कृष्ण की एक मूर्ति दीवार के सामने थी. उन्होंने कहा कि चोर शायद भगवान को देखते हुए अपराध नहीं करना चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने मूर्ति को घुमा दिया था. इसके बाद मूर्ति में लगी चांदी की बांसुरी को अपने साथ ले गए हैं. उन्होंने बताया कि वे सीसीटीवी कैमरों के बारे में सावधान थे और उस हार्ड डिस्क को ले गए. जिस पर वीडियो रिकार्ड हुआ था. इस घटना पर मेरठ में व्यापारी संगठन काफी गुस्से में हैं. वहीं, ब्रह्मपुरी इलाके की डीएसपी सुचिता सिंह ने कहा कि पुलिस की टीमें इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं. उन्होंने बताया कि सुरंग कई दिनों से खोदी गई होगी और हम सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे. हालांकि, इसके साथ ही इलाके में लोगों की आवाजाही को ट्रैक करके चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे.
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वर्डसप कि दुन्यम , कतगा बानी-लिख्वार छन.
क्वी कविता-कानी-चुटकला, क्वी-गितार छन. .
क्वी छुयाळ, क्वी भलि-भलि बतौं का फौरवर्डर,
अर् क्वी- कै बि बाता, सटीक-टिप्पणीकार छन. .
खुलिक बात-रखणु, सबि बतौं कु स्वाद चखणु,
बाजि-2 सै बात, सै जगा रख्णां-कलाकार छन. .
रौजा हिसाब से-बात मिसाणु, नै टौपिक ल्याणु,
अपड़ि बात मनांणा, क्वी इना बि-बख्त्वार छन. .
सब लोग-खुला दिला छि, हैंसणु- हसांणु चलद,
म्यार देखणंल-यख, सब्यासबि-खिलक्वार छन. .
बग्त देखि-बात कनु, भलु सिखे-भलु जंड़े-जैंद,
उन यख-हम जना, नौसिख्यूं खूब-भरमार छन. .
'दीन' दिनभर वर्डसप चलै, टैम भलु कटि जांद,
ईं बातम-हम उत्तराखंण्यूं, इकनसि-बिचार छन. .
गाँव-माला भैंसोड़ा, पट्टी सावली, जोगीमढ़ी, पौड़ी गढ़वाल।
वर्तमान निवास-शशिगार्डन, मयूर बिहार, दिल्ली।
दिल्ली सरकार की नौकरी से वर्ष 2016 में हुए सेवानिवृत।
साहित्य-सन् 1973 से कविता लेखन। कई कविता संग्रह प्रकाशित।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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वर्डसप कि दुन्यम , कतगा बानी-लिख्वार छन. क्वी कविता-कानी-चुटकला, क्वी-गितार छन. . क्वी छुयाळ, क्वी भलि-भलि बतौं का फौरवर्डर, अर् क्वी- कै बि बाता, सटीक-टिप्पणीकार छन. . खुलिक बात-रखणु, सबि बतौं कु स्वाद चखणु, बाजि-दो सै बात, सै जगा रख्णां-कलाकार छन. . रौजा हिसाब से-बात मिसाणु, नै टौपिक ल्याणु, अपड़ि बात मनांणा, क्वी इना बि-बख्त्वार छन. . सब लोग-खुला दिला छि, हैंसणु- हसांणु चलद, म्यार देखणंल-यख, सब्यासबि-खिलक्वार छन. . बग्त देखि-बात कनु, भलु सिखे-भलु जंड़े-जैंद, उन यख-हम जना, नौसिख्यूं खूब-भरमार छन. . 'दीन' दिनभर वर्डसप चलै, टैम भलु कटि जांद, ईं बातम-हम उत्तराखंण्यूं, इकनसि-बिचार छन. . गाँव-माला भैंसोड़ा, पट्टी सावली, जोगीमढ़ी, पौड़ी गढ़वाल। वर्तमान निवास-शशिगार्डन, मयूर बिहार, दिल्ली। दिल्ली सरकार की नौकरी से वर्ष दो हज़ार सोलह में हुए सेवानिवृत। साहित्य-सन् एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर से कविता लेखन। कई कविता संग्रह प्रकाशित। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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Defence Expo 2022: गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो 2022 का आगाज हो गया है. पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया है. इस समारोह में PM Modi ने बिना नाम लिए Pakistan को चेतावनी दी है. इस एक्सपो में रणनीतिक, सामरिक हथियार प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन होगा. यह आयोजन का 12वां संस्करण है जो 'पथ से गौरव' विषय पर आयोजित किया गया है.
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Defence Expo दो हज़ार बाईस: गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो दो हज़ार बाईस का आगाज हो गया है. पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया है. इस समारोह में PM Modi ने बिना नाम लिए Pakistan को चेतावनी दी है. इस एक्सपो में रणनीतिक, सामरिक हथियार प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन होगा. यह आयोजन का बारहवां संस्करण है जो 'पथ से गौरव' विषय पर आयोजित किया गया है.
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राजामौली के ड्रीम प्रोजेक्ट 'महाभारत' में 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान होंगे कृष्ण?
फिल्म के डायरेक्टर अमिताभ बच्चन, मोहनलाल और आमिर खान के साथ अपने इस फिल्म को हरी झड़ी देना चाहते है। यह फिल्म 400 करोड़ के बड़े बजट के साथ बनायीं जायेंगी।
एस एस राजामौली की बहुचर्चित फिल्म बाहुबली 2 आखिरकार रिलीज़ हो गयी। जब से फिल्म रिलीज़ हुई हैं तब से लेकर अब तक फिल्म का ही बोलबाला है। इतना ही नहीं रिलीज़ होने के ठीक पहले उन्होंने अपनी महत्वकांशी फिल्म महाभारत का भी एलान कर दिया है। जी हाँ! आपने सही सुना राजामौली साहब अब बाहुबली के बाद अपने इस महा बजट फिल्म महाभारत को और भी भव्य तरीके से बनाने के बारे में सोच रहे है। फिल्म के डायरेक्टर अमिताभ बच्चन, मोहनलाल और आमिर खान के साथ अपने इस फिल्म को हरी झड़ी देना चाहते है। यह फिल्म 400 करोड़ के बड़े बजट के साथ बनायीं जायेंगी। फिल्म अगले साल यानी की साल 2018 में ऑन फ्लोर्स जाने के सम्भावना है। यह फिल्म भी बाहुबली की तरह तीन भाषाओ में बनायीं जायेंगी। साथ ही फिल्म में मोहनलाल, आमिर खान और रजनीकांत के साथ काम करने के बारे में मन बना चुके है। अपने एक इंटरव्यू में राजामौली ने इस खबर से अपना राज़ खोला। उन्होंने बताया की कुछ दिनों पहले उन्होंने आमिर खान के साथ मुलाकात की थी। उन्होंने कहा की वो महाभारत को करना चाहते है लेकिन अभी इसके बारे में वो पूरी तरह से प्रिपयेर नहीं है। मैं अभी फिलहाल सिर्फ बाहुबली के बारे में ही सोच रहा हूँ।
के विजेंद्र प्रसाद की लिखी गयी बाहुबली लगता हैं कुछ सालों तक ऐसे ही दिलों पर राज़ करने वाली है। फिल्म को भारत ही नहीं नहीं बल्कि यु एस में काफी अच्छी ओपनिंग मिली हैं। हर जगह बस बाहुबली की चर्चा है। बता दें की फिल्म 28 अप्रैल को रिलीज़ हुई थी। तब से लेकर अब तक बॉक्स ऑफिस पर बाहुबली का ही राज़ हैं। आने वाले दिनों में प्रभास की बाहुबली एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार हो चुकी है। फिल्म को क्रिटिक्स के साथ साथ दर्शको का खूब प्यार मिल रहा हैं। दर्शको पर प्रभास और अनुष्का शेट्टी की केमिस्ट्री खूब रंग ला रही है।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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राजामौली के ड्रीम प्रोजेक्ट 'महाभारत' में 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान होंगे कृष्ण? फिल्म के डायरेक्टर अमिताभ बच्चन, मोहनलाल और आमिर खान के साथ अपने इस फिल्म को हरी झड़ी देना चाहते है। यह फिल्म चार सौ करोड़ के बड़े बजट के साथ बनायीं जायेंगी। एस एस राजामौली की बहुचर्चित फिल्म बाहुबली दो आखिरकार रिलीज़ हो गयी। जब से फिल्म रिलीज़ हुई हैं तब से लेकर अब तक फिल्म का ही बोलबाला है। इतना ही नहीं रिलीज़ होने के ठीक पहले उन्होंने अपनी महत्वकांशी फिल्म महाभारत का भी एलान कर दिया है। जी हाँ! आपने सही सुना राजामौली साहब अब बाहुबली के बाद अपने इस महा बजट फिल्म महाभारत को और भी भव्य तरीके से बनाने के बारे में सोच रहे है। फिल्म के डायरेक्टर अमिताभ बच्चन, मोहनलाल और आमिर खान के साथ अपने इस फिल्म को हरी झड़ी देना चाहते है। यह फिल्म चार सौ करोड़ के बड़े बजट के साथ बनायीं जायेंगी। फिल्म अगले साल यानी की साल दो हज़ार अट्ठारह में ऑन फ्लोर्स जाने के सम्भावना है। यह फिल्म भी बाहुबली की तरह तीन भाषाओ में बनायीं जायेंगी। साथ ही फिल्म में मोहनलाल, आमिर खान और रजनीकांत के साथ काम करने के बारे में मन बना चुके है। अपने एक इंटरव्यू में राजामौली ने इस खबर से अपना राज़ खोला। उन्होंने बताया की कुछ दिनों पहले उन्होंने आमिर खान के साथ मुलाकात की थी। उन्होंने कहा की वो महाभारत को करना चाहते है लेकिन अभी इसके बारे में वो पूरी तरह से प्रिपयेर नहीं है। मैं अभी फिलहाल सिर्फ बाहुबली के बारे में ही सोच रहा हूँ। के विजेंद्र प्रसाद की लिखी गयी बाहुबली लगता हैं कुछ सालों तक ऐसे ही दिलों पर राज़ करने वाली है। फिल्म को भारत ही नहीं नहीं बल्कि यु एस में काफी अच्छी ओपनिंग मिली हैं। हर जगह बस बाहुबली की चर्चा है। बता दें की फिल्म अट्ठाईस अप्रैल को रिलीज़ हुई थी। तब से लेकर अब तक बॉक्स ऑफिस पर बाहुबली का ही राज़ हैं। आने वाले दिनों में प्रभास की बाहुबली एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार हो चुकी है। फिल्म को क्रिटिक्स के साथ साथ दर्शको का खूब प्यार मिल रहा हैं। दर्शको पर प्रभास और अनुष्का शेट्टी की केमिस्ट्री खूब रंग ला रही है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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समाचार फ़ीड देखने से देश और दुनिया में घटनाओं में रुचि होने के नाते, हम अक्सर चित्र, वीडियो देखने के प्राकृतिक आपदाओं के कीचड़ धंसना की वजह से। दुनिया में आपदाओं अधिक से अधिक हो जाता हैः ग्लोबल वार्मिंग को दोष देना, हो सकता है, मानव गतिविधि है, या हमारे ग्रह ही कुछ "आपत्तिजनक" कुछ अन्य कारणों से अपने इतिहास की अवधि के माध्यम से चला जाता है, लेकिन आपदाओं के प्रभाव को हमेशा एक ही कर रहे हैं। भयभीत लोग, शरणार्थियों, खो घरों और संपत्ति, पशु और विकृत परिदृश्य को मार डाला, केवल कल एक परी कथा लग रहा था, और आज सर्वनाश के विषय पर फिल्मों के चित्र के समान है। उसी तरह mudflow के बाद से, क्या मौत और विनाश से बचने के लिए, या आपदा न्यूनतम के परिणामों बनाने के लिए किया जा सकता है?
क्या प्रकृति में कृषि है?
शब्द अरबी जड़ है। अनुवाद का अर्थ है "अशांत प्रवाह"। भवनों, परिदृश्य, एक साथ अपने सभी निवासियों के साथ, पशुओं से मनुष्यों में - मैला कीचड़ वजन, बहुत तेज गति के साथ भागने, बुवाई मौत, दूर अपने रास्ते में सब कुछ स्वीप। बड़े और छोटे पत्थर, रॉक कणों, जो संयोगवश, कुल वजन का आधा से अधिक होना कर सकते हैंः mudflow कई कठिन समावेशन में शामिल है। एक लंबे समय के लिए वहाँ पहाड़ों में कई गांवों में, खुशी से प्राकृतिक आपदाओं से बचने, एक लंबा इतिहास है, लेकिन प्रकृति में वहाँ कुछ असामान्य, असाधारण (तेजी से और लंबे समय तक वर्षा, तेजी से वार्मिंग, बर्फ के बहुत तेजी से पिघलने, पहाड़ों में एक ग्लेशियर के साथ संयुक्त) है - और कुछ दुष्ट दिस वे आता है। बड़े पैमाने पर तत्व आमतौर पर अल्पकालिक, कई घंटे के लिए चलाता है, लेकिन यह पर्याप्त से अधिक कुछ वर्षों के भीतर प्रकृति और लोगों को नुकसान अपूरणीय पैदा करने के लिए, के रूप में उदाहरण के लिए, यह गया था के बाद 2013 कीचड़ धंसना जॉर्जिया में आया है। फिर, आपदा की वजह से यह पूरी तरह से यातायात पंगु कर दिया गया है। काफी गंभीर क्षति भी लाया जाता है और mudflow टाबा में (यह एक पल में दिखाता हूँ) है।
Mudflow एक बहुत ही उच्च चलती गति है। कीचड़ वजन अक्सर अचानक दिखाई देते हैं, काफी की इजाजत दी परिचालन उपाय करने के लिए समाज व प्रकृति की रक्षा के लिए बिना। हार्ड रॉक शामिल mudflow प्रति सेकंड 2. 4 6. 4 मीटर की दर से किया जाता है। आसपास के परिदृश्य से गायब हो जाने पूरी तरह से अलग रूपरेखा लग सकता है की एक परिणाम के रूप मेंः बस कुछ ही घंटों में पत्थरों नई नदी के किनारों और नदियों, मलबे की एक परत अतिक्रमण और गंदगी उपजाऊ Piedmont सादा फसलों और चराई उगाने के लिए इस्तेमाल को शामिल किया गया। Blooming घाटी मर चुका है और रहने और काम के लिए अयोग्य हो जाता है। Mudflow आगे आपदा के आकार में वृद्धि के प्रत्येक नई लहर के साथ, कई चरणों में जा सकते हैं।
इस प्राकृतिक घटना के कारण होते हैं?
- तूफानी और लंबे समय तक वर्षा। स्थानीय "दुनिया बाढ़" के मामले हैं, वे वास्तव में, पहाड़ों mudflows से उतरते लोगों और इमारतों अनित्य साथ देखा।
- तीव्र वार्मिंग, जो एक मौसमी चरित्र, या ऑफ सीजन है, जो बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने का कारण बन सकती है। ग्लेशियर गांव के अंतर्गत स्थित हमेशा एक बढ़ा जोखिम है।
- में एक बड़ी पूर्वाग्रह के साथ क्षेत्रों में नदी का ताल मलबे के साथ जमीन का एक महत्वपूर्ण भाग को संक्षिप्त कर सकते हैं और इस प्रकार जलाशय ब्लॉक, एक और, अप्रत्याशित तरीके से, ट्रिगर हिमस्खलन को भेजें।
क्या के रूप में अतिरिक्त कारकों सेवा कर सकते हैं, एक तबाही उत्तेजक?
वृक्ष की जड़ों में अच्छी तरह से मिट्टी की ऊपरी परत को मजबूत बनाने, चलती, तब भी जब भारी बारिश के प्रवाह के संपर्क में या वन वृक्षारोपण की वजह से अल्हड़ कटाई अपक्षय से रोकता है - मुख्य कारक बढ़ रही इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के खतरे में से एक। कटाव और भूम सफलता का एक परिणाम के रूप मेंः कारणों तीन समूहों में विभाजित कर रहे हैं पर बैठ गया।
कहाँ संभावित खतरनाक की फोकी कर रहे हैं?
लंबे समय में खतरनाक है, यह एक पहाड़ नदी, जो आसानी से पानी धाराओं मिट्टी, रॉक द्वारा ले जाया गया जम जाता है के किसी भी भाग हो सकता है। यह चीरों या ruts, साथ ही जेब बिखरे mudflow हो सकता है।
गड्ढे - ढलानों पर शिक्षा, रॉक, मैदान और अन्य सतहों के माध्यम से कटौती, वे लंबाई और गहराई में छोटे हैं, और एक खतरा पैदा नहीं करता है, धारा, जो चट्टानों के आंदोलन को जन्म दे सकता जब तक। चीरा - मोरैने जमा पर आधारित शिक्षा, ऊंचाई में तेज परिवर्तन के साथ जुड़ा। वे बहुत प्राचीन काल कर रहे हैं। युवा चीरों हाल ज्वालामुखी गतिविधि का एक परिणाम के रूप में हो सकता है, और भूस्खलन, भू-स्खलन की वजह से। गहराई और हद में बड़े गड्ढे चीरों। बिखरी हुई mudflow ऊंची पर्वत क्षेत्रों में जहां चट्टानों के टुकड़े का एक बहुत ध्यान केंद्रित किया, उत्पादों अपक्षय पर हो सकती है। इस तरह की सतह क्षेत्र काफी हाल ही में भूकंप, सक्रिय विवर्तनिक प्रक्रिया में दिख सकता है। इन खांचे की सतह के घावों, जिसमें उत्पादों धीरे-धीरे मलबे, जो, कुछ शर्तों के अधीन, एक चैनल में विलय करने के लिए कर सकते हैं और एक ढलान पर स्थित वस्तुओं के लिए अपनी शक्ति नीचे लाने के लिए जमा से आच्छादित है।
कैसे हिमस्खलन को रोकने के लिए?
पानी और मलबे प्रवाह सभा के लिए मुख्य कारणों में से एक के बाद से वन के नुकसान स्टैंड, समस्या वृक्षारोपण का समाधान हो सकता है। हाइड्रोलिक संरचनाओं (खाइयों, तटबंधों, अनुरेखण), डाइवर्ट संभावित खतरनाक धाराओं भी एक बड़ा सकारात्मक प्रदान कर सकते हैं। सड़क खतरनाक नदियों और खाड़ियों पर बांधों की स्थापना बड़े पैमाने पर, जो थोड़ा इसके विनाशकारी क्षमता को कमजोर कर रहा है की ढलान से समर्थन के हिस्से में देरी। किसी भी अन्य संरचनाओं (गड्ढ़े, ताल, बांधों) भी आपदा के खतरे को कम, यह shorelines मजबूत करने के लिए, उनके अतिरिक्त कटाव रोकने के लिए, खासकर अगर इमारत के किनारे पर स्थित महत्वपूर्ण है। से mudflows के पारित होने के अक्सर सड़क की सतह से ग्रस्त है, सुरक्षा के लिए, जिनमें से यह सलाह दी जाती सड़क पर या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में इसके तहत ट्रे (पत्थर या प्रबलित कंक्रीट) के निर्माण के लिए है।
- 17 से टायरॉल में 1891 अगस्त 18 को, ऑस्ट्रिया के आल्प्स में, एक बड़े mudflow उतराः लहर 18 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया, एक विशाल क्षेत्र मलबे प्रवाह बड़े पैमाने पर की एक मोटी परत के साथ कवर किया गया था।
- मार्च 1, 1938 लॉस एंजिल्स मारा, 200 से अधिक लोग मारे गए।
- जुलाई 8, 1921 फ़ीड अल्मा-अता (अब अल्मा-अता) मारा, कई तरंगों शहर में 35 लाख वर्ग मीटर ले आया। कठिन सामग्री हूँ।
- 1970 में, वहाँ पेरू में एक दुर्घटना थी, मलबे प्रवाह गतिविधि का एक परिणाम के रूप में 60,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई, और 800,000 विस्थापित हो गए, उनकी संपत्ति खो दिया है, उनके सिर के ऊपर एक छत के बिना छोड़ दिया गया।
- 24 जनवरी 2013 सोची में कीचड़ धंसना आया था। उन्होंने कहा कि समय पर की वजह से बंद कर दिया गया था और सुयोग्य शहर प्रशासन की किलेबंदी के निर्माण पर कार्य किया।
- मई 8, 2014 बारिश की वजह से मिस्र और इसराइल की सीमा पर कई होटल बाढ़ आ गई थी। तब टाबा में mudflow आया था, सड़क मारा। परिणाम एक सप्ताह के भीतर बाहर हो गया।
- मई 17, 2014 जॉर्जिया में कीचड़ धंसना आया था, निपटान Gveleti के पास। फ्लो टेरेक नदी अवरुद्ध कर दिया। सड़क खंड बंद कर दिया गया "व्लादिकाव्काज़-लार्स" कई गांवों में बाढ़ का आसन्न खतरा दिखाई दिया। मुसीबत बीत चुका है - पानी के लिए एक अस्थायी चैनल "मिला", और इसके स्तर खतरनाक स्तर को पार नहीं किया। जब लार्स में कीचड़ धंसना नीचे आया, आवश्यक उपाय समय में ले लिया गया है, स्थानीय आबादी तुरंत एक सुरक्षित क्षेत्र में खाली करा लिया।
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समाचार फ़ीड देखने से देश और दुनिया में घटनाओं में रुचि होने के नाते, हम अक्सर चित्र, वीडियो देखने के प्राकृतिक आपदाओं के कीचड़ धंसना की वजह से। दुनिया में आपदाओं अधिक से अधिक हो जाता हैः ग्लोबल वार्मिंग को दोष देना, हो सकता है, मानव गतिविधि है, या हमारे ग्रह ही कुछ "आपत्तिजनक" कुछ अन्य कारणों से अपने इतिहास की अवधि के माध्यम से चला जाता है, लेकिन आपदाओं के प्रभाव को हमेशा एक ही कर रहे हैं। भयभीत लोग, शरणार्थियों, खो घरों और संपत्ति, पशु और विकृत परिदृश्य को मार डाला, केवल कल एक परी कथा लग रहा था, और आज सर्वनाश के विषय पर फिल्मों के चित्र के समान है। उसी तरह mudflow के बाद से, क्या मौत और विनाश से बचने के लिए, या आपदा न्यूनतम के परिणामों बनाने के लिए किया जा सकता है? क्या प्रकृति में कृषि है? शब्द अरबी जड़ है। अनुवाद का अर्थ है "अशांत प्रवाह"। भवनों, परिदृश्य, एक साथ अपने सभी निवासियों के साथ, पशुओं से मनुष्यों में - मैला कीचड़ वजन, बहुत तेज गति के साथ भागने, बुवाई मौत, दूर अपने रास्ते में सब कुछ स्वीप। बड़े और छोटे पत्थर, रॉक कणों, जो संयोगवश, कुल वजन का आधा से अधिक होना कर सकते हैंः mudflow कई कठिन समावेशन में शामिल है। एक लंबे समय के लिए वहाँ पहाड़ों में कई गांवों में, खुशी से प्राकृतिक आपदाओं से बचने, एक लंबा इतिहास है, लेकिन प्रकृति में वहाँ कुछ असामान्य, असाधारण है - और कुछ दुष्ट दिस वे आता है। बड़े पैमाने पर तत्व आमतौर पर अल्पकालिक, कई घंटे के लिए चलाता है, लेकिन यह पर्याप्त से अधिक कुछ वर्षों के भीतर प्रकृति और लोगों को नुकसान अपूरणीय पैदा करने के लिए, के रूप में उदाहरण के लिए, यह गया था के बाद दो हज़ार तेरह कीचड़ धंसना जॉर्जिया में आया है। फिर, आपदा की वजह से यह पूरी तरह से यातायात पंगु कर दिया गया है। काफी गंभीर क्षति भी लाया जाता है और mudflow टाबा में है। Mudflow एक बहुत ही उच्च चलती गति है। कीचड़ वजन अक्सर अचानक दिखाई देते हैं, काफी की इजाजत दी परिचालन उपाय करने के लिए समाज व प्रकृति की रक्षा के लिए बिना। हार्ड रॉक शामिल mudflow प्रति सेकंड दो. चार छः. चार मीटर की दर से किया जाता है। आसपास के परिदृश्य से गायब हो जाने पूरी तरह से अलग रूपरेखा लग सकता है की एक परिणाम के रूप मेंः बस कुछ ही घंटों में पत्थरों नई नदी के किनारों और नदियों, मलबे की एक परत अतिक्रमण और गंदगी उपजाऊ Piedmont सादा फसलों और चराई उगाने के लिए इस्तेमाल को शामिल किया गया। Blooming घाटी मर चुका है और रहने और काम के लिए अयोग्य हो जाता है। Mudflow आगे आपदा के आकार में वृद्धि के प्रत्येक नई लहर के साथ, कई चरणों में जा सकते हैं। इस प्राकृतिक घटना के कारण होते हैं? - तूफानी और लंबे समय तक वर्षा। स्थानीय "दुनिया बाढ़" के मामले हैं, वे वास्तव में, पहाड़ों mudflows से उतरते लोगों और इमारतों अनित्य साथ देखा। - तीव्र वार्मिंग, जो एक मौसमी चरित्र, या ऑफ सीजन है, जो बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने का कारण बन सकती है। ग्लेशियर गांव के अंतर्गत स्थित हमेशा एक बढ़ा जोखिम है। - में एक बड़ी पूर्वाग्रह के साथ क्षेत्रों में नदी का ताल मलबे के साथ जमीन का एक महत्वपूर्ण भाग को संक्षिप्त कर सकते हैं और इस प्रकार जलाशय ब्लॉक, एक और, अप्रत्याशित तरीके से, ट्रिगर हिमस्खलन को भेजें। क्या के रूप में अतिरिक्त कारकों सेवा कर सकते हैं, एक तबाही उत्तेजक? वृक्ष की जड़ों में अच्छी तरह से मिट्टी की ऊपरी परत को मजबूत बनाने, चलती, तब भी जब भारी बारिश के प्रवाह के संपर्क में या वन वृक्षारोपण की वजह से अल्हड़ कटाई अपक्षय से रोकता है - मुख्य कारक बढ़ रही इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के खतरे में से एक। कटाव और भूम सफलता का एक परिणाम के रूप मेंः कारणों तीन समूहों में विभाजित कर रहे हैं पर बैठ गया। कहाँ संभावित खतरनाक की फोकी कर रहे हैं? लंबे समय में खतरनाक है, यह एक पहाड़ नदी, जो आसानी से पानी धाराओं मिट्टी, रॉक द्वारा ले जाया गया जम जाता है के किसी भी भाग हो सकता है। यह चीरों या ruts, साथ ही जेब बिखरे mudflow हो सकता है। गड्ढे - ढलानों पर शिक्षा, रॉक, मैदान और अन्य सतहों के माध्यम से कटौती, वे लंबाई और गहराई में छोटे हैं, और एक खतरा पैदा नहीं करता है, धारा, जो चट्टानों के आंदोलन को जन्म दे सकता जब तक। चीरा - मोरैने जमा पर आधारित शिक्षा, ऊंचाई में तेज परिवर्तन के साथ जुड़ा। वे बहुत प्राचीन काल कर रहे हैं। युवा चीरों हाल ज्वालामुखी गतिविधि का एक परिणाम के रूप में हो सकता है, और भूस्खलन, भू-स्खलन की वजह से। गहराई और हद में बड़े गड्ढे चीरों। बिखरी हुई mudflow ऊंची पर्वत क्षेत्रों में जहां चट्टानों के टुकड़े का एक बहुत ध्यान केंद्रित किया, उत्पादों अपक्षय पर हो सकती है। इस तरह की सतह क्षेत्र काफी हाल ही में भूकंप, सक्रिय विवर्तनिक प्रक्रिया में दिख सकता है। इन खांचे की सतह के घावों, जिसमें उत्पादों धीरे-धीरे मलबे, जो, कुछ शर्तों के अधीन, एक चैनल में विलय करने के लिए कर सकते हैं और एक ढलान पर स्थित वस्तुओं के लिए अपनी शक्ति नीचे लाने के लिए जमा से आच्छादित है। कैसे हिमस्खलन को रोकने के लिए? पानी और मलबे प्रवाह सभा के लिए मुख्य कारणों में से एक के बाद से वन के नुकसान स्टैंड, समस्या वृक्षारोपण का समाधान हो सकता है। हाइड्रोलिक संरचनाओं , डाइवर्ट संभावित खतरनाक धाराओं भी एक बड़ा सकारात्मक प्रदान कर सकते हैं। सड़क खतरनाक नदियों और खाड़ियों पर बांधों की स्थापना बड़े पैमाने पर, जो थोड़ा इसके विनाशकारी क्षमता को कमजोर कर रहा है की ढलान से समर्थन के हिस्से में देरी। किसी भी अन्य संरचनाओं भी आपदा के खतरे को कम, यह shorelines मजबूत करने के लिए, उनके अतिरिक्त कटाव रोकने के लिए, खासकर अगर इमारत के किनारे पर स्थित महत्वपूर्ण है। से mudflows के पारित होने के अक्सर सड़क की सतह से ग्रस्त है, सुरक्षा के लिए, जिनमें से यह सलाह दी जाती सड़क पर या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में इसके तहत ट्रे के निर्माण के लिए है। - सत्रह से टायरॉल में एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे अगस्त अट्ठारह को, ऑस्ट्रिया के आल्प्स में, एक बड़े mudflow उतराः लहर अट्ठारह मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया, एक विशाल क्षेत्र मलबे प्रवाह बड़े पैमाने पर की एक मोटी परत के साथ कवर किया गया था। - मार्च एक, एक हज़ार नौ सौ अड़तीस लॉस एंजिल्स मारा, दो सौ से अधिक लोग मारे गए। - जुलाई आठ, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस फ़ीड अल्मा-अता मारा, कई तरंगों शहर में पैंतीस लाख वर्ग मीटर ले आया। कठिन सामग्री हूँ। - एक हज़ार नौ सौ सत्तर में, वहाँ पेरू में एक दुर्घटना थी, मलबे प्रवाह गतिविधि का एक परिणाम के रूप में साठ,शून्य से अधिक लोगों की मौत हो गई, और आठ सौ,शून्य विस्थापित हो गए, उनकी संपत्ति खो दिया है, उनके सिर के ऊपर एक छत के बिना छोड़ दिया गया। - चौबीस जनवरी दो हज़ार तेरह सोची में कीचड़ धंसना आया था। उन्होंने कहा कि समय पर की वजह से बंद कर दिया गया था और सुयोग्य शहर प्रशासन की किलेबंदी के निर्माण पर कार्य किया। - मई आठ, दो हज़ार चौदह बारिश की वजह से मिस्र और इसराइल की सीमा पर कई होटल बाढ़ आ गई थी। तब टाबा में mudflow आया था, सड़क मारा। परिणाम एक सप्ताह के भीतर बाहर हो गया। - मई सत्रह, दो हज़ार चौदह जॉर्जिया में कीचड़ धंसना आया था, निपटान Gveleti के पास। फ्लो टेरेक नदी अवरुद्ध कर दिया। सड़क खंड बंद कर दिया गया "व्लादिकाव्काज़-लार्स" कई गांवों में बाढ़ का आसन्न खतरा दिखाई दिया। मुसीबत बीत चुका है - पानी के लिए एक अस्थायी चैनल "मिला", और इसके स्तर खतरनाक स्तर को पार नहीं किया। जब लार्स में कीचड़ धंसना नीचे आया, आवश्यक उपाय समय में ले लिया गया है, स्थानीय आबादी तुरंत एक सुरक्षित क्षेत्र में खाली करा लिया।
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मुंबईः देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टाटा मोटर्स ने नेक्सन ईवी में कुछ बदलाव किए हैं। या यूं कहा जाए की कंपनी ने इसमें कोस्ट कंटिंग का काम किया है। दरअसल, इस इलेक्ट्रिक SUV की मोटर को कवर की मदद से ढका जाता है। ये कवर प्लास्टिक मेटल या हाइब्रिड मटेरियल का बना होता है। ये कवर मोटर को धूल या दूसरी गंदगी से बचाता है। हालांकि, कंपनी ने अब नेक्सन EV के कुछ वैरिएंट से इस कवर को हटा दिया है। कवर को हटाने को लेकर कंपनी ने कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। इसे हटाने का कारण भी नहीं बताया है। इस कवर को अब एक्सेसरीज के पार्ट में शामिल किया गया है। कंपनी ने जिन वैरिएंट से कवर को हटाया है उसमें XM, XZ+ जेट, XZ+ और XZ+ डार्क एडिशन शामिल हैं। कंपनी कवर को अब सिर्फ XZ+ Lux और XZ+ Lux डार्क वैरिएंट में ही दे रही है। जिन वैरिएंट से कवर हटाया उनकी कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
बीते दिनों सामने आई बैटरी की कीमतः कर्नाटक के रहने वाले नेक्सन ईवी के एक ओनर ने इस सोशल मीडिया पर बैटरी के खर्च की डिटेल को पोस्ट किया था। इस पोस्ट के मुताबिक, नेक्सन में लगने वाली बैटरी की कीमत 4,47,489 रुपए है। जबकि नेक्सन EV मैक्स की शुरुआती कीमत 17. 74 लाख रुपए है। ओनर का कहना था कि उन्होंने इलेक्ट्रिक कार से दो साल में 68,000 किमी की दूरी तय की। जिसके बाद कार की रेंज काफी कम हो गई। बैटरी के 15% से कम होने पर कार रुक जाती थी। जिससे बाद उन्होंने कंपनी को इस प्रॉब्लम के बारे में बताया। कंपनी ने वारंटी के चलते टाटा नेक्सन ईवी की पुरानी बैटरी को नई बैटरी के साथ रिप्लेस कर दिया। कंपनी ने ओनर को बैटरी का बिल दिया उसमें इसकी कीमत 4,47,489 रुपए थी।
टाटा नेक्सन EV मैक्स का स्पेसिफिकेशंस और फीचर्सः
>> टाटा नेक्सन EV मैक्स में हाई वोल्टेज Ziptron टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह दो ट्रिम ऑप्शन नेक्सन ईवी मैक्स एक्सजेड+ और नेक्सन ईवी मैक्स एक्सजेड+ लक्स के साथ आती है। इसे 3 कलर ऑप्शन इंटेन्सी-टील, डेटोना ग्रे और प्रिस्टिन व्हाइट में पेश किया गया है। इसमें डुअल टोन बॉडी कलर स्टैंडर्ड के तौर पर दिए गए है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 17. 74 लाख रुपए है। जबकि हाई-एंड मॉडल की कीमत 19. 24 लाख रुपए है।
>> नेक्सन EV मैक्स 40. 5 kWh लिथियम-आयन बैटरी पैक से लैस है, जो 33 फीसदी अधिक बैटरी क्षमता प्रदान करती है। एक बार फुल चार्ज करने पर 437 किमी की ARAI सर्टिफाइड रेंज देती है। इसमें 3. 3 kW चार्जर या 7. 2 kW AC फास्ट चार्जर ऑप्शन दिए गए हैं। इसके 7. 2 kW AC फास्ट चार्जर को घर या ऑफिस में लगा सकते हैं। ये चार्जिंग समय को 6. 5 घंटे तक कम करने में मदद करता है। इसे 50 किलोवाट डीसी फास्ट चार्जर से सिर्फ 56 मिनट में 0-80 प्रतिशत तक चार्ज कर सकते हैं।
>> नेक्सन EV मैक्स में 3 ड्राइविंग मोड ईको, सिटी और स्पोर्ट दिए हैं। इसमें अपग्रेडेड ZConnect 2. 0 कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी दी गई है। जिसमें आठ नए फीचर्स मिलते हैं। ZConnect ऐप 48 कनेक्टेड कार फीचर्स ऑफर करता है। यह डीप ड्राइव एनालिटिक्स और डायग्नोस्टिक्स में मदद करेगा। एड-ऑन फीचर लिस्ट में स्मार्टवॉच इंटीग्रेशन, ऑटो/मैनुअल डीटीसी चेक, चार्जिंग की लिमिट तय करना, मंथली व्हीकल रिपोर्ट्स और एन्हांस्ड ड्राइव एनालिटिक्स शामिल हैं।
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मुंबईः देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टाटा मोटर्स ने नेक्सन ईवी में कुछ बदलाव किए हैं। या यूं कहा जाए की कंपनी ने इसमें कोस्ट कंटिंग का काम किया है। दरअसल, इस इलेक्ट्रिक SUV की मोटर को कवर की मदद से ढका जाता है। ये कवर प्लास्टिक मेटल या हाइब्रिड मटेरियल का बना होता है। ये कवर मोटर को धूल या दूसरी गंदगी से बचाता है। हालांकि, कंपनी ने अब नेक्सन EV के कुछ वैरिएंट से इस कवर को हटा दिया है। कवर को हटाने को लेकर कंपनी ने कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। इसे हटाने का कारण भी नहीं बताया है। इस कवर को अब एक्सेसरीज के पार्ट में शामिल किया गया है। कंपनी ने जिन वैरिएंट से कवर को हटाया है उसमें XM, XZ+ जेट, XZ+ और XZ+ डार्क एडिशन शामिल हैं। कंपनी कवर को अब सिर्फ XZ+ Lux और XZ+ Lux डार्क वैरिएंट में ही दे रही है। जिन वैरिएंट से कवर हटाया उनकी कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बीते दिनों सामने आई बैटरी की कीमतः कर्नाटक के रहने वाले नेक्सन ईवी के एक ओनर ने इस सोशल मीडिया पर बैटरी के खर्च की डिटेल को पोस्ट किया था। इस पोस्ट के मुताबिक, नेक्सन में लगने वाली बैटरी की कीमत चार,सैंतालीस,चार सौ नवासी रुपयापए है। जबकि नेक्सन EV मैक्स की शुरुआती कीमत सत्रह. चौहत्तर लाख रुपए है। ओनर का कहना था कि उन्होंने इलेक्ट्रिक कार से दो साल में अड़सठ,शून्य किमी की दूरी तय की। जिसके बाद कार की रेंज काफी कम हो गई। बैटरी के पंद्रह% से कम होने पर कार रुक जाती थी। जिससे बाद उन्होंने कंपनी को इस प्रॉब्लम के बारे में बताया। कंपनी ने वारंटी के चलते टाटा नेक्सन ईवी की पुरानी बैटरी को नई बैटरी के साथ रिप्लेस कर दिया। कंपनी ने ओनर को बैटरी का बिल दिया उसमें इसकी कीमत चार,सैंतालीस,चार सौ नवासी रुपयापए थी। टाटा नेक्सन EV मैक्स का स्पेसिफिकेशंस और फीचर्सः >> टाटा नेक्सन EV मैक्स में हाई वोल्टेज Ziptron टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह दो ट्रिम ऑप्शन नेक्सन ईवी मैक्स एक्सजेड+ और नेक्सन ईवी मैक्स एक्सजेड+ लक्स के साथ आती है। इसे तीन कलर ऑप्शन इंटेन्सी-टील, डेटोना ग्रे और प्रिस्टिन व्हाइट में पेश किया गया है। इसमें डुअल टोन बॉडी कलर स्टैंडर्ड के तौर पर दिए गए है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत सत्रह. चौहत्तर लाख रुपए है। जबकि हाई-एंड मॉडल की कीमत उन्नीस. चौबीस लाख रुपए है। >> नेक्सन EV मैक्स चालीस. पाँच किलोवाट-घंटा लिथियम-आयन बैटरी पैक से लैस है, जो तैंतीस फीसदी अधिक बैटरी क्षमता प्रदान करती है। एक बार फुल चार्ज करने पर चार सौ सैंतीस किमी की ARAI सर्टिफाइड रेंज देती है। इसमें तीन. तीन किलोवाट चार्जर या सात. दो किलोवाट AC फास्ट चार्जर ऑप्शन दिए गए हैं। इसके सात. दो किलोवाट AC फास्ट चार्जर को घर या ऑफिस में लगा सकते हैं। ये चार्जिंग समय को छः. पाँच घंटाटे तक कम करने में मदद करता है। इसे पचास किलोग्रामवाट डीसी फास्ट चार्जर से सिर्फ छप्पन मिनट में शून्य-अस्सी प्रतिशत तक चार्ज कर सकते हैं। >> नेक्सन EV मैक्स में तीन ड्राइविंग मोड ईको, सिटी और स्पोर्ट दिए हैं। इसमें अपग्रेडेड ZConnect दो. शून्य कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी दी गई है। जिसमें आठ नए फीचर्स मिलते हैं। ZConnect ऐप अड़तालीस कनेक्टेड कार फीचर्स ऑफर करता है। यह डीप ड्राइव एनालिटिक्स और डायग्नोस्टिक्स में मदद करेगा। एड-ऑन फीचर लिस्ट में स्मार्टवॉच इंटीग्रेशन, ऑटो/मैनुअल डीटीसी चेक, चार्जिंग की लिमिट तय करना, मंथली व्हीकल रिपोर्ट्स और एन्हांस्ड ड्राइव एनालिटिक्स शामिल हैं।
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विंश अध्याय
हमारे जाने की आवश्यकता है। हम किसी एक स्थान पर वाध्य होकर नहीं रह सकते । जहाँ तक हम से हो सकेगा सारे देश में वैदिक धर्म का प्रचार करेंगे ।
(१५ मई - १५ जुलाई) अमृतसर (६० शु० १४ श्राव० कृ०
१५ मई सन् १८ः८ को महाराज लाहौर से अमृतसर जा विराजे, सरदार भगवानसिंह का उद्यान उनके निवास के लिये स्थिर हुआ ।
इस बार भी उनके व्याख्यान मलवईबुङ्गे में ही हुए, जहाँ पहली बार के आगमनकाल में होते थे ।
एक दिन एक ब्राह्मण ने यह लीला की कि व्याख्यान के मध्य में उच्च स्वर से संस्कृत बोलना आरम्भ किया । महाराज ने उससे नम्र शब्दों में कहा कि आप शान्त रहिये, मैं व्याख्यान समाप्त कर तब आपसे वार्तालाप करूँगा, परन्तु वह चुप न हुआ । इस पर लोगों ने चुप कराकर उसे एक ओर को बिठा दिया । व्याख्यान समाप्त होने पर महाराज ने आसन पर बैठ कर कहा कि उन महाराज को बुलाओ। वह पास ही बैठे थे, बोले कि मैं उपस्थित हूं । महाराज ने उनसे पूछा आप कहाँ से पधारे हैं, तो कहा कि मैं कुरुक्षेत्र से केवल शास्त्रार्थ करने के लिये ही आया हूं। फिर उनमें निम्न प्रश्नोत्तर हुएः प्रश्न -- आपने वेद पढ़े हैं ? प्रश्न -- कौन-कौन से वेद पढ़े हैं ? प्रश्न - व्याकरण भी देखा है ?
प्रश्न - महाभाष्य भी पढ़ा है ?
उत्तर - हाँ ।
इस पर महाराज ने उनसे एक प्रश्न व्याकरण में किया, तो उन्होंने एक संस्कृत वाक्य पढ़ा और यह पूछने पर कि यह क्या है, उन्होंने कहा कि सूत्र है, महाराज ने उन्हें काग़ज़ पेंसिल देकर कहा कि इस वाक्य को भी लिख और यह भी लिख दो कि यह सूत्र है । इस पर वह महात्मा घबरा गये और फिर बात चीत करने से कतराने लगे और तो चले गये । पहली बार जब महाराज अमृतसर पधारे थे तो किसी पण्डित ने शास्त्रार्थ का नाम तक न लिया था और इस बार भी एक मास तक महाराज के व्याख्यान होते रहे, परन्तु किसी ने शास्त्रार्थ की चर्चा न की । जब उन्हें ज्ञात हुआ कि महाराज अमृतसर से जाने वाले हैं तो कहने लगे हम शास्त्रार्थ करेंगे। इस पर आर्यसमाज की ओर से उत्तर भेज दिया गया कि यदि शास्त्रार्थ करना है तो में आकर समय और नियमादि निश्चित करलें परन्तु कोई भी नया बल्कि अपनी ओर से ही बिना महाराज वा आसमाज की अनुमति के एक विज्ञापन छपाकर नगर में वितरित कर दिया कि १४, १५ जून सन् १८७८ को घण्टाघर और तंजासिंह के शिवालय में बसन्तगिरि साधु की मध्यस्थता में शास्त्रार्थ होगा । इसका उत्तर मन्त्री आर्यसमाज ने दे दिया कि उक्त स्थानों पर ही शास्त्रार्थ करना स्वीकार है, परन्तु यदि कोई उपद्रव हुआ तो उत्तरदायित्व पौराणिकों पर होगा । मध्यस्थ यदि वेद
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विंश अध्याय हमारे जाने की आवश्यकता है। हम किसी एक स्थान पर वाध्य होकर नहीं रह सकते । जहाँ तक हम से हो सकेगा सारे देश में वैदिक धर्म का प्रचार करेंगे । अमृतसर (साठ शुशून्य चौदह श्रावशून्य कृशून्य पंद्रह मई सन् अट्ठारहःआठ को महाराज लाहौर से अमृतसर जा विराजे, सरदार भगवानसिंह का उद्यान उनके निवास के लिये स्थिर हुआ । इस बार भी उनके व्याख्यान मलवईबुङ्गे में ही हुए, जहाँ पहली बार के आगमनकाल में होते थे । एक दिन एक ब्राह्मण ने यह लीला की कि व्याख्यान के मध्य में उच्च स्वर से संस्कृत बोलना आरम्भ किया । महाराज ने उससे नम्र शब्दों में कहा कि आप शान्त रहिये, मैं व्याख्यान समाप्त कर तब आपसे वार्तालाप करूँगा, परन्तु वह चुप न हुआ । इस पर लोगों ने चुप कराकर उसे एक ओर को बिठा दिया । व्याख्यान समाप्त होने पर महाराज ने आसन पर बैठ कर कहा कि उन महाराज को बुलाओ। वह पास ही बैठे थे, बोले कि मैं उपस्थित हूं । महाराज ने उनसे पूछा आप कहाँ से पधारे हैं, तो कहा कि मैं कुरुक्षेत्र से केवल शास्त्रार्थ करने के लिये ही आया हूं। फिर उनमें निम्न प्रश्नोत्तर हुएः प्रश्न -- आपने वेद पढ़े हैं ? प्रश्न -- कौन-कौन से वेद पढ़े हैं ? प्रश्न - व्याकरण भी देखा है ? प्रश्न - महाभाष्य भी पढ़ा है ? उत्तर - हाँ । इस पर महाराज ने उनसे एक प्रश्न व्याकरण में किया, तो उन्होंने एक संस्कृत वाक्य पढ़ा और यह पूछने पर कि यह क्या है, उन्होंने कहा कि सूत्र है, महाराज ने उन्हें काग़ज़ पेंसिल देकर कहा कि इस वाक्य को भी लिख और यह भी लिख दो कि यह सूत्र है । इस पर वह महात्मा घबरा गये और फिर बात चीत करने से कतराने लगे और तो चले गये । पहली बार जब महाराज अमृतसर पधारे थे तो किसी पण्डित ने शास्त्रार्थ का नाम तक न लिया था और इस बार भी एक मास तक महाराज के व्याख्यान होते रहे, परन्तु किसी ने शास्त्रार्थ की चर्चा न की । जब उन्हें ज्ञात हुआ कि महाराज अमृतसर से जाने वाले हैं तो कहने लगे हम शास्त्रार्थ करेंगे। इस पर आर्यसमाज की ओर से उत्तर भेज दिया गया कि यदि शास्त्रार्थ करना है तो में आकर समय और नियमादि निश्चित करलें परन्तु कोई भी नया बल्कि अपनी ओर से ही बिना महाराज वा आसमाज की अनुमति के एक विज्ञापन छपाकर नगर में वितरित कर दिया कि चौदह, पंद्रह जून सन् एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर को घण्टाघर और तंजासिंह के शिवालय में बसन्तगिरि साधु की मध्यस्थता में शास्त्रार्थ होगा । इसका उत्तर मन्त्री आर्यसमाज ने दे दिया कि उक्त स्थानों पर ही शास्त्रार्थ करना स्वीकार है, परन्तु यदि कोई उपद्रव हुआ तो उत्तरदायित्व पौराणिकों पर होगा । मध्यस्थ यदि वेद
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Jharkhand News : झारखंड में सियासी हलचल एकबार फिर तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक झारखंड सरकार में शामिल यूपीए के विधायक आज शाम 4. 30 बजे रायपुर रवाना हो जाएंगे। इन विधायकों के लिए इंडिगो की फ्लाइट बुक की गई है। यूपीए के विधायकों की आज भी एक बैठक मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के आवास पर हुई। सूत्रों के मुताबिक अब यूपीए के विधायकों को रायपुर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है।
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों के साथ शनिवार को अचानक खूंटी के लिए रवाना हो गए थे। सोरेन मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों एवं सभी विधायकों को तीन बसों में लेकर दोपहर लगभग दो बजे अपने आवास से निकले थे और खूंटी जिले के इस पर्यटन स्थल पर लगभग तीन घंटे रुकने और आनंद उठाने के बाद सभी शाम छह बजे वापस रांची के लिए रवाना हो गये थे।
झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन के पास 81 सदस्यीय विधानसभा में कुल 49 विधायक अपने हैं और उन्हें कुछ अन्य विधायकों का भी सरकार चलाने के लिए समर्थन प्राप्त है। राज्य विधानसभा में झामुमो के 30, कांग्रेस के 18 और राजद के एक विधायक हैं। इसके विपरीत मुख्य विपक्षी भाजपा के कुल 26 विधायक हैं और उसके सहयोगी आज्सू के दो विधायक हैं और उन्हें सदन में दो अन्य विधायकों को समर्थन प्राप्त है।
ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो सकती है। चुनाव आयोग ने माइनिंग लीज केस में गवर्नर को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। गवर्नर को इस संबंध में आखिरी फैसला लेना है। मामले में याचिकाकर्ता बीजेपी है जिसने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 9 ए का उल्लंघन करने के लिए सोरेन को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत, किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन के किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित कोई मामला आता है तो इसे गवर्नर के पास भेजा जाएगा और उनका फैसला अंतिम होगा। इसमें कहा गया है, 'ऐसे किसी भी मामले पर कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल निर्वचन आयोग की राय लेंगे और उस राय के अनुसार कार्य करेंगे। ' ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका अर्द्धन्यायिक निकाय की तरह होती है।
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Jharkhand News : झारखंड में सियासी हलचल एकबार फिर तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक झारखंड सरकार में शामिल यूपीए के विधायक आज शाम चार. तीस बजे रायपुर रवाना हो जाएंगे। इन विधायकों के लिए इंडिगो की फ्लाइट बुक की गई है। यूपीए के विधायकों की आज भी एक बैठक मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के आवास पर हुई। सूत्रों के मुताबिक अब यूपीए के विधायकों को रायपुर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों के साथ शनिवार को अचानक खूंटी के लिए रवाना हो गए थे। सोरेन मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों एवं सभी विधायकों को तीन बसों में लेकर दोपहर लगभग दो बजे अपने आवास से निकले थे और खूंटी जिले के इस पर्यटन स्थल पर लगभग तीन घंटे रुकने और आनंद उठाने के बाद सभी शाम छह बजे वापस रांची के लिए रवाना हो गये थे। झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन के पास इक्यासी सदस्यीय विधानसभा में कुल उनचास विधायक अपने हैं और उन्हें कुछ अन्य विधायकों का भी सरकार चलाने के लिए समर्थन प्राप्त है। राज्य विधानसभा में झामुमो के तीस, कांग्रेस के अट्ठारह और राजद के एक विधायक हैं। इसके विपरीत मुख्य विपक्षी भाजपा के कुल छब्बीस विधायक हैं और उसके सहयोगी आज्सू के दो विधायक हैं और उन्हें सदन में दो अन्य विधायकों को समर्थन प्राप्त है। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो सकती है। चुनाव आयोग ने माइनिंग लीज केस में गवर्नर को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। गवर्नर को इस संबंध में आखिरी फैसला लेना है। मामले में याचिकाकर्ता बीजेपी है जिसने जन प्रतिनिधि कानून की धारा नौ ए का उल्लंघन करने के लिए सोरेन को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। संविधान के अनुच्छेद एक सौ बानवे के तहत, किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन के किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित कोई मामला आता है तो इसे गवर्नर के पास भेजा जाएगा और उनका फैसला अंतिम होगा। इसमें कहा गया है, 'ऐसे किसी भी मामले पर कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल निर्वचन आयोग की राय लेंगे और उस राय के अनुसार कार्य करेंगे। ' ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका अर्द्धन्यायिक निकाय की तरह होती है।
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२/४/३७-३८] चतुर्थोऽध्यायः (वैकुण्ठः)
वर्णाश्रमका आचार ग्रहण किया और किसीने दीक्षाके लक्षणस्वरूप मुद्रादिको धारण किया ॥३७॥
दिग्दर्शिनी टीका - किञ्च, केचिदिति द्वाभ्याम् । नरा नराकाराः; एवं वानरादयः सर्वेऽप्यूह्याः । सच्चिदानन्दविग्रहाणां श्रीवैकुण्ठवासिनां वस्तुतो नरत्वाद्यसम्भवात् । वर्णानां ब्राह्मणादीनाम् आश्रमाणाञ्च ब्रह्मचर्यादीनां य आचारो व्यवहारः, तथा दीक्षायाः सावित्र्यादिविषयकाया भगवन्मन्त्रविषयकायाश्च यानि लक्षणानि, क्रमेण यज्ञोपवीत-कमण्डलुधारणादीनि, तथा कुश - शृङ्गादि- तुलसीमाला - मुद्रादिधारणादीनि तानि धर्त्तुं शीलमेषामिति तथा ते ॥३७॥
भावानुवाद- तदुपरान्त कह रहे हैं - कोई नरमूर्त्ति, कोई वानरमूर्त्ति, कोई देवमूर्त्ति, कोई दैत्यमूर्ति और कोई ऋषिमूर्ति धारण किये हुए थे। परन्तु वे सभी पूज्य थे, क्योंकि सच्चिदानन्द - विग्रहयुक्त श्रीवैकुण्ठवासियोंकी वस्तुतः नर आदि होनेकी सम्भावना नहीं होती । फिर कोई ब्राह्मणादि वर्ण और कोई ब्रह्मचर्यादि आश्रमका आचरण ग्रहण किये हुए थे। कोई सावित्री आदि विषयक दीक्षाके लक्षण अर्थात् यज्ञोपवीत और कमण्डलु धारण किये हुए थे और कोई भगवान्के मन्त्र - विषयक दीक्षाके लक्षण अर्थात् कुशासन, तुलसी - माला और विविध मुद्रादिको धारण किये हुए थे ॥३७॥
चतुर्भुजाः सहस्रास्याः केचिदष्टभुजास्तथा ॥ ३८ ॥
श्लोकानुवाद - कोई-कोई इन्द्र और चन्द्रादि देवताओंके समान दिख रहे थे तथा कोई त्रिनेत्र (शिव), कोई चतुरानन ( ब्रह्मा), कोई चतुर्भुज, कोई अष्टभुज और कोई सहस्र - मुख मूर्ति धारण किये हुए थे ॥ ३८ ॥
दिग्दर्शिनी टीका - इन्द्रः सहस्रनेत्रः वज्रहस्तत्वादिलक्षणवान्; एवमन्योऽपि ज्ञेयः। आदि-शब्दात् सूर्याग्नि-वाय्वादयः। तथाशब्दस्य समुच्चयार्थत्वात् केचिदित्यस्य सर्वैरपीन्द्रादिभिः सम्बन्धः कार्यः । ततश्च केचिदिन्द्रसदृशाः केचिच्चन्द्रादिसदृशाः, केचित् त्रिनेत्रा इत्यूह्यम् । इन्द्रादीनां प्रायो भगवदवतारत्वाभावेन केवलं रूपसाम्येन वैकुण्ठवासिनां तत्सादृश्यमुक्तम् । त्रिनेत्रादीनाञ्च स्वतोऽपि भगवदवतारत्वेन रूपभेदमात्रनिर्देशः ॥ ३८ ॥
भावानुवाद - कोई वैकुण्ठवासी इन्द्रके समान सहस्रलोचन (हजार नेत्रयुक्त) और वज्रको हाथमें लिए हुए लक्षणोंसे युक्त थे तथा कोई चन्द्रादि देवताओंके समान आकार धारण किये हुए थे। 'आदि' शब्दसे सूर्य, अग्नि, वायु जैसे देवताओंको भी जानना होगा । इस प्रकार उन्होंने समस्त देवताओंके सदृश ही आकार धारण किया हुआ था - ऐसा समझना होगा । उन वैकुण्ठवासियोंमें कोई इन्द्रके समान, कोई चन्द्रके समान, कोई त्रिनेत्र (शिव) हैं । इन्द्रादि समस्त देवता प्राय भगवान्के अवतार नहीं हैं, अतः इस उक्तिमें जो 'सदृश' (समान) कहा गया है, वह केवल रूपकी समानतावशतः ही वैकुण्ठवासियोंका देवताओंके साथ सादृश जानना होगा। किन्तु त्रिनेत्रादि (शिव और ब्रह्मादि) के स्वतः ही भगवान्के गुणावतार होनेके कारण उनके रूपोंमें भेदमात्र निर्देश हुआ है ॥३८॥
एतत्परमवैचित्रीहेतुं वक्ष्यामि तेऽग्रतः । कृष्णभक्तिरसास्वादवतां किं स्यान्न सुन्दरम् ॥ ३९ ॥
श्लोकानुवाद - इस परम विचित्रताका कारण बादमें कहूँगा । कृष्णभक्तिरसका आस्वादन करनेसे क्या सुन्दर नहीं होता है ? ॥३९॥
दिग्दर्शिनी टीका - ननु भगवत्सारूप्यप्राप्त्या चतुर्भूजत्वादिकमुचितमेव, नरवानराद्याकारप्राप्तौ तु किं कारणमित्यपेक्षायामाह - एतदिति । एतस्या उक्तायाः परमवैचित्र्या हेतुमग्रतः श्रीनारदोक्तसिद्धान्ते ते त्वां वक्ष्यामि । ननु भवतु नाम तत्र हेतुः, तथापि वानराद्याकाराः सौन्दर्याभावात्तत्र नोपयुज्यन्ते तत्राह - कृष्णेति । लोकेऽपि रसविशेषसेविनां सौन्दर्य-सिद्धि - प्रसिद्धेः। अन्यथा श्रीहनूमज्जाम्बवदादिषु प्रीतिविशेषहान्यापत्तेः॥३९॥
भावानुवाद - यदि आपत्ति हो कि भगवान्का सारूप्य प्राप्त करनेके कारण श्रीभगवान्की भाँति चतुर्भुज रूप ही सङ्गत होता है, किन्तु वैकुण्ठमें मनुष्यमूर्ति विशेषतः वानरादिके समान तुच्छ मूर्ति किसलिए दृष्ट हुई? इसकी आशंकासे 'एतत्' इत्यादि श्लोक कह रहे हैं। इस प्रकारकी विचित्रताका कारण आगे श्रीनारद द्वारा कहे जानेवाले सिद्धान्तमें प्रकाशित होगा । पुनः यदि कहो कि वैकुण्ठमें नाना-प्रकारकी वैचित्री रहने पर भी वानरादि जैसे सौन्दर्य रहित आकार सङ्गत नहीं
होते। इसके लिए कहते हैं कि कृष्णभक्तिका रसास्वादन होनेसे क्या सुन्दर नहीं होता? जगतमें भी प्रसिद्ध है कि किसी विशेष रसके सेवनसे सौन्दर्य प्राप्त होता है, अर्थात् दिव्य रूपादि प्राप्त होता है। इसके सम्बन्धमें श्रीहनुमान और श्रीजाम्बवान आदिको प्रमाण जानों । श्रीभगवान्के प्रति प्रीति विशेषकी हानि न होनेके कारण ही वे स्वेच्छासे वैसा स्वरूप ग्रहण करते हैं, अर्थात् उनका वानरादि रूप भी श्रीभगवान् और उनके भक्तोंके लिए प्रीतिकर होता है ॥ ३९ ॥
सर्वप्रपञ्चातीतानां तेषां वैकुण्ठवासिनाम् ।
तस्य वैकुण्ठलोकस्य तस्य तन्नायकस्य च ॥ ४० ॥ तानि माहात्म्यजातानि प्रपञ्चान्तर्गतैः किल । दृष्टान्तैर्नोपयुज्यन्ते न शक्यन्ते च भाषितुम् ॥ ४९ ॥
श्लोकानुवाद - समस्त प्रपञ्चसे अतीत उन वैकुण्ठवासियोंका, उस वैकुण्ठलोकका तथा उन वैकुण्ठनायकका असीम माहात्म्य प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा कभी भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वैसे दृष्टान्त अपनी युक्ति और भाषा द्वारा उनके माहात्म्यका वर्णन नहीं कर सकते हैं॥४०-४१॥
दिग्दर्शिनी टीका - नन्वेवं बहुविधेन भेदेन महातारतम्यापत्तेः स्वर्गवासिनामिवैषामपि विचित्रवैषम्यं स्यात्, तच्चात्र न युज्यते; सच्चिदानन्दविग्रहत्वेनैकस्वभावादित्याशंक्य तत्परिहाराय तेषु तत्त्वं निरूपयितुं लौकिकदृष्टान्तोपन्यासेन अपराधाद्विभ्यद्भगवन्तं प्रार्थयते - सर्वेति चतुर्भिः। सर्वप्रपञ्चमतीतानामतिक्रान्तानामित्यस्य लिङ्गवचनव्यत्ययेनापि सर्वैरेवान्वयः। अतस्तेषामिति अनिर्वचनीयानामित्यर्थः । इदञ्च पूर्ववत्, अतएव तानि माहात्म्यजातानि स्वाभाविकमहिमवृन्दानि प्रपञ्चान्तर्गतैर्दृष्टान्तैर्भाषितुं निरूपयितुं नोपयुज्यन्ते, परमासदृशत्वात् भाषितुं न शक्यन्ते च सम्यग्बोधनसामर्थ्याभावादिति द्वाभ्यामन्वयः। तन्नायकस्य श्रीवैकुण्ठनाथस्य ॥४०-४१॥
भावानुवाद - यदि आपत्ति हो कि ऐसे बहुत प्रकारके भेद होनेके कारण वैकुण्ठमें महातारतम्यका तथा स्वर्गवासियों में विद्यमान विचित्र विषमतावशतः मात्सर्यादिका दोष भी होता है ? इसके उत्तरमें कहते हैं कि वैकुण्ठमें ऐसे दोषोंकी सम्भावना नहीं है। सच्चिदानन्द विग्रहमें अनेक प्रकारके स्वभावादिकी आशंकाको दूर करनेके लिए तथा उस
सच्चिदानन्द तत्त्वका निरूपण करनेके लिए लौकिक दृष्टान्तोंकी अवतारणारूप अपराधकी आशंकामें वक्ता श्रीभगवान्के निकट क्षमा प्रार्थना करते हुए 'सर्व प्रपञ्च' इत्यादि चार श्लोक कह रहे हैं। समस्त प्रपञ्चके अतीत उन वैकुण्ठवासियोंका, उस वैकुण्ठलोकका तथा उन श्रीवैकुण्ठनाथका माहात्म्य प्रपञ्चसे सम्बन्धित दृष्टान्त द्वारा कभी भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता, तथापि प्रपञ्चगत दृष्टान्तके बिना कोई इसे समझ भी नहीं सकता। इसलिए विद्वानजन उस तत्त्वको साधारणजनोंके चित्तमें प्रवेश करवानेके लिए जगतसे सम्बन्धित दृष्टान्त प्रस्तुत करते हैं, किन्तु उसमें प्रपञ्चके अतीत लिङ्ग-वचनादिका परिवर्त्तन संघटित हो सकता है, क्योंकि वैकुण्ठ और वैकुण्ठस्थित समस्त वस्तुएँ अनिर्वचनीय हैं अर्थात् प्राकृत मन, बुद्धि और वाक्यके अगोचर हैं। अतएव वैकुण्ठकी स्वाभाविक महिमा प्रपञ्चसे सम्बन्धित दृष्टान्तों द्वारा निरूपण करना विडम्बना मात्र है, क्योंकि परम असमानता हेतु उसे भाषामें प्रकाश भी नहीं किया जा सकता है, अथवा किञ्चित् प्रकाश करनेकी चेष्टा करने पर भी भलीभाँति बोधकी असमर्थताके कारण कोई भी उसकी धारणा नहीं कर सकता है ॥४०-४१ ॥
तथापि भवतो ब्रह्मन् प्रपञ्चान्तर्गतस्य हि । प्रपञ्चपरिवारान्तर्दृष्टिगर्भितचेतसः
तद्दृष्टान्तकुलेनैव तत्तत् स्याद्बोधितं सुखम् । तथेत्युच्येत यत् किञ्चित् तदागः क्षमतां हरिः ॥४३॥
श्लोकानुवाद - तथापि हे ब्रह्मन् ! आप प्रपञ्चके अन्तर्गत रहते हैं, इसलिए आपकी चित्तवृत्ति या अन्तर्दृष्टि प्रपञ्चकी वस्तुओंको ही ग्रहण कर सकती है। अतएव प्रपञ्चसे सम्बन्धित अनुकूल दृष्टान्त होनेसे आपको यह विषय सहज ही बोध होगा, इसीलिए प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा आपको वैकुण्ठलोकके सम्बन्धमें समझाया है। यदि इसमें मेरा कोई अपराध हो तो समस्त अपराधोंका हरण करनेवाले श्रीहरि मुझे क्षमा करेंगे ॥४२-४३॥
२/४/४२-४४] चतुर्थोऽध्यायः (वैकुण्ठः)
दिग्दर्शिनी टीका - भो ब्रह्मन् ! साक्षावेदमूर्त्ते! तथापि भवतः भवन्तं प्रति यत्तथा तेन प्रपञ्चान्तर्गतद्रव्यदृष्टान्तदर्शनप्रकारेण तन्माहात्म्यानां किञ्चिदुच्येत, तेन यत् आगोऽपराधस्तत् हरिः सर्वदोषादिहर्ता भगवान् क्षम्यतामिति द्वाभ्यामन्वयः । अयोग्यत्वेऽशक्यत्वे च सत्यपि तथोक्तौ हेतुःप्रपञ्चान्तर्गतस्य भवतस्तस्य प्रपञ्चस्य दृष्टान्तकुलेनैव किञ्चिदित्यत्राप्यकर्षणीयं सुखं यथा स्यात् तथा किञ्चित्तन्माहात्म्यं बोधितं स्यात्। कुतः ? प्रपञ्चस्य परिवाराणां सचेतना-चेतनादि-द्रव्याणामन्तरन्तरे या दृष्टिर्ज्ञानं तया गर्भितमावृतं चेतो यस्य तस्य; अतएव चक्रवर्तिवदित्युक्तम् । द्वितीयार्थे षष्ठ्यः॥४२-४३॥
भावानुवाद - हे ब्रह्मन् ! आप साक्षात् वेदमूर्ति होकर भी प्रपञ्चके अन्तर्गत रह रहे हैं तथा आपका चित्त चेतन- अचेतन प्रापञ्चिक वस्तुओंमें बद्ध होनेके कारण आपकी अन्तर्दृष्टि भी उसीमें निमग्न हो गयी है। इसलिए प्रपञ्चसे सम्बन्धित वस्तुओंके दृष्टान्त द्वारा ही मैंने आपको प्रपञ्चसे अतीत वैकुण्ठलोककी कुछ बातें बतलायीं हैं। यदि इसमें मेरा कोई अपराध हुआ हो तो समस्त अपराधोंका हरण करनेवाले श्रीहरि मुझे क्षमा करेंगे। प्रपञ्चके भीतर स्थित चेतन और अचेतन द्रव्योंमें जिनकी दृष्टि और मन एकाग्र हुआ है, वे कदापि प्रपञ्चातीत वस्तुका तत्त्व नहीं समझ सकते हैं। अतएव वैकुण्ठवस्तुको समझनेमें आपकी अयोग्यता और शक्तिहीनता होने पर भी उसके सम्बन्धमें कुछ कहनेका कारण यह है कि प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा प्रपञ्चातीत वस्तुमें चित्तको प्रवेश करानेसे क्रमशः चित्तसे प्रापञ्चिक भाव या माया दूर हो जायेगी। इसलिए श्लोक ३३ में श्रीवैकुण्ठनाथका वैभव समझानेके लिए इस जगतसे सम्बन्धित 'चक्रवर्तीके समान' शब्दका व्यवहार किया गया है ॥४२-४३॥
तत्रत्यानाञ्च सर्वेषां तेषां साम्यं परस्परम् ।
तारतम्यञ्च लक्ष्येत न विरोधस्तथापि च ॥४४ ॥
श्लोकानुवाद - समस्त वैकुण्ठवासियोंमें परस्पर समानता और तारतम्य दोनों ही लक्षित होते हैं, इसमें किसी प्रकारका विरोध नहीं देखा जाता है ॥४४॥
दिग्दर्शिनी टीका - उच्यत इति यत् प्रतिज्ञातं तत्तत्त्वनिरूपणमेव करोतितत्रत्यानामिति नवभिः । तेषां पूर्वोद्दिष्टानां वैकुण्ठवासिनां परस्परं साम्यं समानता, प्रत्येकं सर्वसामर्थ्यत्त्वात् तारतम्यञ्च न्यूनाधिकता महदल्पतया निजवैभवादिप्रकटनात् लक्ष्येत तत्तल्लक्षणैर्दृश्येत, न च तथापि विरोधो भवति; लक्ष्यत इत्यनेनैवान्वयः। सर्वेषामपि प्रत्येकं स्वेच्छया सर्ववैभवप्रकटन-सामर्थ्यदर्शनात् ॥४४ ॥
भावानुवाद - अब वैकुण्ठमें विरुद्ध प्रतीत होनेवाले तत्त्वका निरूपण 'तत्रत्यानाम्' इत्यादि नौ श्लोकों द्वारा कर रहे हैं । यद्यपि पूर्वोक्त समस्त वैकुण्ठवासियोंमें परस्पर समानता और प्रत्येकके सर्व-सामर्थ्यवान् होनेके कारण उनमें न्यून अधिकका तारतम्य लक्षित होता है, तथापि विरोध लक्षित नहीं होता । परस्पर समान धर्मी या समान सामर्थ्ययुक्त होकर भी उनमें से किसीने महान वैभव प्रकट किया है और किसीने अल्प वैभव प्रकट किया है। इसलिए जो तारतम्य देखा जाता है, उसमें कोई वैषम्य (विरोध) नहीं है, क्योंकि उनमें से प्रत्येक ही स्वेच्छासे समस्त प्रकारका वैभव प्रकट करनेमें समर्थ हैं ॥४४॥
न मात्सर्यादयो दोषाः सन्ति कस्यापि तेषु हि । गुणाः स्वाभाविका भान्ति नित्याः सत्याः सहस्रशः ॥ ४५ ॥ श्लोकानुवाद - वहाँ किसीमें भी मात्सर्य आदि दोष नहीं है, अपितु उनमें सौहार्द, विनय और सम्मानादि हजारों गुण वर्त्तमान हैं तथा ये गुण नित्य और सत्य हैं ॥ ४५ ॥
दिग्दर्शिनी टीका - एवं तत्त्वतस्तारतम्यं नास्त्येव, आस्तां वा बहिर्दृष्ट्या, तथापि कापि हानिः कुत्रापि नास्तीत्याह - नेति । मत्सरः परोत्कर्षासहनं, स आदिर्येषां स्पर्धासूया - तिरस्कारादीनां ते दोषा हि यस्मात्तेषु वैकुण्ठवासिषु मध्ये कस्यापि न सन्ति, अथ च गुणा अन्योऽन्यसौहार्द - विनय-सम्मानादयः सहस्रशो भान्ति विराजन्ते। कीदृशाः ? नित्याः । ननु मायाया अनादित्वेन मायिकानामपि नित्यत्वं सिध्यतीत्याशंक्याह - सत्या इति न तु मायिका इत्यर्थः; यतः स्वाभाविकाः सहजाः। यथोक्तं श्रीब्रह्मणा तृतीयस्कन्धे (श्रीमद्भा० ३/१५/१८-१९) - 'पारावतान्यभृतसारसचक्रवाक-दात्यूह - हंस - शुक - तित्तिर- वर्हिणां यः । कोलाहलो विरमतेऽचिरमात्रमुच्चैर्भृङ्गाधिपे हरिकथामिव गायमाने ॥ मन्दारकुन्द-कुरवोत्पलचम्पकार्ण-पुन्नागनागबकुलाम्बुज-पारिजाताः । गन्धेऽर्चिते तुलसिकाभरणेन तस्या, यस्मिंस्तपः सुमनसो
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दो अप्रैल सैंतीस-अड़तीस] चतुर्थोऽध्यायः वर्णाश्रमका आचार ग्रहण किया और किसीने दीक्षाके लक्षणस्वरूप मुद्रादिको धारण किया ॥सैंतीस॥ दिग्दर्शिनी टीका - किञ्च, केचिदिति द्वाभ्याम् । नरा नराकाराः; एवं वानरादयः सर्वेऽप्यूह्याः । सच्चिदानन्दविग्रहाणां श्रीवैकुण्ठवासिनां वस्तुतो नरत्वाद्यसम्भवात् । वर्णानां ब्राह्मणादीनाम् आश्रमाणाञ्च ब्रह्मचर्यादीनां य आचारो व्यवहारः, तथा दीक्षायाः सावित्र्यादिविषयकाया भगवन्मन्त्रविषयकायाश्च यानि लक्षणानि, क्रमेण यज्ञोपवीत-कमण्डलुधारणादीनि, तथा कुश - शृङ्गादि- तुलसीमाला - मुद्रादिधारणादीनि तानि धर्त्तुं शीलमेषामिति तथा ते ॥सैंतीस॥ भावानुवाद- तदुपरान्त कह रहे हैं - कोई नरमूर्त्ति, कोई वानरमूर्त्ति, कोई देवमूर्त्ति, कोई दैत्यमूर्ति और कोई ऋषिमूर्ति धारण किये हुए थे। परन्तु वे सभी पूज्य थे, क्योंकि सच्चिदानन्द - विग्रहयुक्त श्रीवैकुण्ठवासियोंकी वस्तुतः नर आदि होनेकी सम्भावना नहीं होती । फिर कोई ब्राह्मणादि वर्ण और कोई ब्रह्मचर्यादि आश्रमका आचरण ग्रहण किये हुए थे। कोई सावित्री आदि विषयक दीक्षाके लक्षण अर्थात् यज्ञोपवीत और कमण्डलु धारण किये हुए थे और कोई भगवान्के मन्त्र - विषयक दीक्षाके लक्षण अर्थात् कुशासन, तुलसी - माला और विविध मुद्रादिको धारण किये हुए थे ॥सैंतीस॥ चतुर्भुजाः सहस्रास्याः केचिदष्टभुजास्तथा ॥ अड़तीस ॥ श्लोकानुवाद - कोई-कोई इन्द्र और चन्द्रादि देवताओंके समान दिख रहे थे तथा कोई त्रिनेत्र , कोई चतुरानन , कोई चतुर्भुज, कोई अष्टभुज और कोई सहस्र - मुख मूर्ति धारण किये हुए थे ॥ अड़तीस ॥ दिग्दर्शिनी टीका - इन्द्रः सहस्रनेत्रः वज्रहस्तत्वादिलक्षणवान्; एवमन्योऽपि ज्ञेयः। आदि-शब्दात् सूर्याग्नि-वाय्वादयः। तथाशब्दस्य समुच्चयार्थत्वात् केचिदित्यस्य सर्वैरपीन्द्रादिभिः सम्बन्धः कार्यः । ततश्च केचिदिन्द्रसदृशाः केचिच्चन्द्रादिसदृशाः, केचित् त्रिनेत्रा इत्यूह्यम् । इन्द्रादीनां प्रायो भगवदवतारत्वाभावेन केवलं रूपसाम्येन वैकुण्ठवासिनां तत्सादृश्यमुक्तम् । त्रिनेत्रादीनाञ्च स्वतोऽपि भगवदवतारत्वेन रूपभेदमात्रनिर्देशः ॥ अड़तीस ॥ भावानुवाद - कोई वैकुण्ठवासी इन्द्रके समान सहस्रलोचन और वज्रको हाथमें लिए हुए लक्षणोंसे युक्त थे तथा कोई चन्द्रादि देवताओंके समान आकार धारण किये हुए थे। 'आदि' शब्दसे सूर्य, अग्नि, वायु जैसे देवताओंको भी जानना होगा । इस प्रकार उन्होंने समस्त देवताओंके सदृश ही आकार धारण किया हुआ था - ऐसा समझना होगा । उन वैकुण्ठवासियोंमें कोई इन्द्रके समान, कोई चन्द्रके समान, कोई त्रिनेत्र हैं । इन्द्रादि समस्त देवता प्राय भगवान्के अवतार नहीं हैं, अतः इस उक्तिमें जो 'सदृश' कहा गया है, वह केवल रूपकी समानतावशतः ही वैकुण्ठवासियोंका देवताओंके साथ सादृश जानना होगा। किन्तु त्रिनेत्रादि के स्वतः ही भगवान्के गुणावतार होनेके कारण उनके रूपोंमें भेदमात्र निर्देश हुआ है ॥अड़तीस॥ एतत्परमवैचित्रीहेतुं वक्ष्यामि तेऽग्रतः । कृष्णभक्तिरसास्वादवतां किं स्यान्न सुन्दरम् ॥ उनतालीस ॥ श्लोकानुवाद - इस परम विचित्रताका कारण बादमें कहूँगा । कृष्णभक्तिरसका आस्वादन करनेसे क्या सुन्दर नहीं होता है ? ॥उनतालीस॥ दिग्दर्शिनी टीका - ननु भगवत्सारूप्यप्राप्त्या चतुर्भूजत्वादिकमुचितमेव, नरवानराद्याकारप्राप्तौ तु किं कारणमित्यपेक्षायामाह - एतदिति । एतस्या उक्तायाः परमवैचित्र्या हेतुमग्रतः श्रीनारदोक्तसिद्धान्ते ते त्वां वक्ष्यामि । ननु भवतु नाम तत्र हेतुः, तथापि वानराद्याकाराः सौन्दर्याभावात्तत्र नोपयुज्यन्ते तत्राह - कृष्णेति । लोकेऽपि रसविशेषसेविनां सौन्दर्य-सिद्धि - प्रसिद्धेः। अन्यथा श्रीहनूमज्जाम्बवदादिषु प्रीतिविशेषहान्यापत्तेः॥उनतालीस॥ भावानुवाद - यदि आपत्ति हो कि भगवान्का सारूप्य प्राप्त करनेके कारण श्रीभगवान्की भाँति चतुर्भुज रूप ही सङ्गत होता है, किन्तु वैकुण्ठमें मनुष्यमूर्ति विशेषतः वानरादिके समान तुच्छ मूर्ति किसलिए दृष्ट हुई? इसकी आशंकासे 'एतत्' इत्यादि श्लोक कह रहे हैं। इस प्रकारकी विचित्रताका कारण आगे श्रीनारद द्वारा कहे जानेवाले सिद्धान्तमें प्रकाशित होगा । पुनः यदि कहो कि वैकुण्ठमें नाना-प्रकारकी वैचित्री रहने पर भी वानरादि जैसे सौन्दर्य रहित आकार सङ्गत नहीं होते। इसके लिए कहते हैं कि कृष्णभक्तिका रसास्वादन होनेसे क्या सुन्दर नहीं होता? जगतमें भी प्रसिद्ध है कि किसी विशेष रसके सेवनसे सौन्दर्य प्राप्त होता है, अर्थात् दिव्य रूपादि प्राप्त होता है। इसके सम्बन्धमें श्रीहनुमान और श्रीजाम्बवान आदिको प्रमाण जानों । श्रीभगवान्के प्रति प्रीति विशेषकी हानि न होनेके कारण ही वे स्वेच्छासे वैसा स्वरूप ग्रहण करते हैं, अर्थात् उनका वानरादि रूप भी श्रीभगवान् और उनके भक्तोंके लिए प्रीतिकर होता है ॥ उनतालीस ॥ सर्वप्रपञ्चातीतानां तेषां वैकुण्ठवासिनाम् । तस्य वैकुण्ठलोकस्य तस्य तन्नायकस्य च ॥ चालीस ॥ तानि माहात्म्यजातानि प्रपञ्चान्तर्गतैः किल । दृष्टान्तैर्नोपयुज्यन्ते न शक्यन्ते च भाषितुम् ॥ उनचास ॥ श्लोकानुवाद - समस्त प्रपञ्चसे अतीत उन वैकुण्ठवासियोंका, उस वैकुण्ठलोकका तथा उन वैकुण्ठनायकका असीम माहात्म्य प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा कभी भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वैसे दृष्टान्त अपनी युक्ति और भाषा द्वारा उनके माहात्म्यका वर्णन नहीं कर सकते हैं॥चालीस-इकतालीस॥ दिग्दर्शिनी टीका - नन्वेवं बहुविधेन भेदेन महातारतम्यापत्तेः स्वर्गवासिनामिवैषामपि विचित्रवैषम्यं स्यात्, तच्चात्र न युज्यते; सच्चिदानन्दविग्रहत्वेनैकस्वभावादित्याशंक्य तत्परिहाराय तेषु तत्त्वं निरूपयितुं लौकिकदृष्टान्तोपन्यासेन अपराधाद्विभ्यद्भगवन्तं प्रार्थयते - सर्वेति चतुर्भिः। सर्वप्रपञ्चमतीतानामतिक्रान्तानामित्यस्य लिङ्गवचनव्यत्ययेनापि सर्वैरेवान्वयः। अतस्तेषामिति अनिर्वचनीयानामित्यर्थः । इदञ्च पूर्ववत्, अतएव तानि माहात्म्यजातानि स्वाभाविकमहिमवृन्दानि प्रपञ्चान्तर्गतैर्दृष्टान्तैर्भाषितुं निरूपयितुं नोपयुज्यन्ते, परमासदृशत्वात् भाषितुं न शक्यन्ते च सम्यग्बोधनसामर्थ्याभावादिति द्वाभ्यामन्वयः। तन्नायकस्य श्रीवैकुण्ठनाथस्य ॥चालीस-इकतालीस॥ भावानुवाद - यदि आपत्ति हो कि ऐसे बहुत प्रकारके भेद होनेके कारण वैकुण्ठमें महातारतम्यका तथा स्वर्गवासियों में विद्यमान विचित्र विषमतावशतः मात्सर्यादिका दोष भी होता है ? इसके उत्तरमें कहते हैं कि वैकुण्ठमें ऐसे दोषोंकी सम्भावना नहीं है। सच्चिदानन्द विग्रहमें अनेक प्रकारके स्वभावादिकी आशंकाको दूर करनेके लिए तथा उस सच्चिदानन्द तत्त्वका निरूपण करनेके लिए लौकिक दृष्टान्तोंकी अवतारणारूप अपराधकी आशंकामें वक्ता श्रीभगवान्के निकट क्षमा प्रार्थना करते हुए 'सर्व प्रपञ्च' इत्यादि चार श्लोक कह रहे हैं। समस्त प्रपञ्चके अतीत उन वैकुण्ठवासियोंका, उस वैकुण्ठलोकका तथा उन श्रीवैकुण्ठनाथका माहात्म्य प्रपञ्चसे सम्बन्धित दृष्टान्त द्वारा कभी भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता, तथापि प्रपञ्चगत दृष्टान्तके बिना कोई इसे समझ भी नहीं सकता। इसलिए विद्वानजन उस तत्त्वको साधारणजनोंके चित्तमें प्रवेश करवानेके लिए जगतसे सम्बन्धित दृष्टान्त प्रस्तुत करते हैं, किन्तु उसमें प्रपञ्चके अतीत लिङ्ग-वचनादिका परिवर्त्तन संघटित हो सकता है, क्योंकि वैकुण्ठ और वैकुण्ठस्थित समस्त वस्तुएँ अनिर्वचनीय हैं अर्थात् प्राकृत मन, बुद्धि और वाक्यके अगोचर हैं। अतएव वैकुण्ठकी स्वाभाविक महिमा प्रपञ्चसे सम्बन्धित दृष्टान्तों द्वारा निरूपण करना विडम्बना मात्र है, क्योंकि परम असमानता हेतु उसे भाषामें प्रकाश भी नहीं किया जा सकता है, अथवा किञ्चित् प्रकाश करनेकी चेष्टा करने पर भी भलीभाँति बोधकी असमर्थताके कारण कोई भी उसकी धारणा नहीं कर सकता है ॥चालीस-इकतालीस ॥ तथापि भवतो ब्रह्मन् प्रपञ्चान्तर्गतस्य हि । प्रपञ्चपरिवारान्तर्दृष्टिगर्भितचेतसः तद्दृष्टान्तकुलेनैव तत्तत् स्याद्बोधितं सुखम् । तथेत्युच्येत यत् किञ्चित् तदागः क्षमतां हरिः ॥तैंतालीस॥ श्लोकानुवाद - तथापि हे ब्रह्मन् ! आप प्रपञ्चके अन्तर्गत रहते हैं, इसलिए आपकी चित्तवृत्ति या अन्तर्दृष्टि प्रपञ्चकी वस्तुओंको ही ग्रहण कर सकती है। अतएव प्रपञ्चसे सम्बन्धित अनुकूल दृष्टान्त होनेसे आपको यह विषय सहज ही बोध होगा, इसीलिए प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा आपको वैकुण्ठलोकके सम्बन्धमें समझाया है। यदि इसमें मेरा कोई अपराध हो तो समस्त अपराधोंका हरण करनेवाले श्रीहरि मुझे क्षमा करेंगे ॥बयालीस-तैंतालीस॥ दो अप्रैल बयालीस-चौंतालीस] चतुर्थोऽध्यायः दिग्दर्शिनी टीका - भो ब्रह्मन् ! साक्षावेदमूर्त्ते! तथापि भवतः भवन्तं प्रति यत्तथा तेन प्रपञ्चान्तर्गतद्रव्यदृष्टान्तदर्शनप्रकारेण तन्माहात्म्यानां किञ्चिदुच्येत, तेन यत् आगोऽपराधस्तत् हरिः सर्वदोषादिहर्ता भगवान् क्षम्यतामिति द्वाभ्यामन्वयः । अयोग्यत्वेऽशक्यत्वे च सत्यपि तथोक्तौ हेतुःप्रपञ्चान्तर्गतस्य भवतस्तस्य प्रपञ्चस्य दृष्टान्तकुलेनैव किञ्चिदित्यत्राप्यकर्षणीयं सुखं यथा स्यात् तथा किञ्चित्तन्माहात्म्यं बोधितं स्यात्। कुतः ? प्रपञ्चस्य परिवाराणां सचेतना-चेतनादि-द्रव्याणामन्तरन्तरे या दृष्टिर्ज्ञानं तया गर्भितमावृतं चेतो यस्य तस्य; अतएव चक्रवर्तिवदित्युक्तम् । द्वितीयार्थे षष्ठ्यः॥बयालीस-तैंतालीस॥ भावानुवाद - हे ब्रह्मन् ! आप साक्षात् वेदमूर्ति होकर भी प्रपञ्चके अन्तर्गत रह रहे हैं तथा आपका चित्त चेतन- अचेतन प्रापञ्चिक वस्तुओंमें बद्ध होनेके कारण आपकी अन्तर्दृष्टि भी उसीमें निमग्न हो गयी है। इसलिए प्रपञ्चसे सम्बन्धित वस्तुओंके दृष्टान्त द्वारा ही मैंने आपको प्रपञ्चसे अतीत वैकुण्ठलोककी कुछ बातें बतलायीं हैं। यदि इसमें मेरा कोई अपराध हुआ हो तो समस्त अपराधोंका हरण करनेवाले श्रीहरि मुझे क्षमा करेंगे। प्रपञ्चके भीतर स्थित चेतन और अचेतन द्रव्योंमें जिनकी दृष्टि और मन एकाग्र हुआ है, वे कदापि प्रपञ्चातीत वस्तुका तत्त्व नहीं समझ सकते हैं। अतएव वैकुण्ठवस्तुको समझनेमें आपकी अयोग्यता और शक्तिहीनता होने पर भी उसके सम्बन्धमें कुछ कहनेका कारण यह है कि प्रपञ्चके दृष्टान्त द्वारा प्रपञ्चातीत वस्तुमें चित्तको प्रवेश करानेसे क्रमशः चित्तसे प्रापञ्चिक भाव या माया दूर हो जायेगी। इसलिए श्लोक तैंतीस में श्रीवैकुण्ठनाथका वैभव समझानेके लिए इस जगतसे सम्बन्धित 'चक्रवर्तीके समान' शब्दका व्यवहार किया गया है ॥बयालीस-तैंतालीस॥ तत्रत्यानाञ्च सर्वेषां तेषां साम्यं परस्परम् । तारतम्यञ्च लक्ष्येत न विरोधस्तथापि च ॥चौंतालीस ॥ श्लोकानुवाद - समस्त वैकुण्ठवासियोंमें परस्पर समानता और तारतम्य दोनों ही लक्षित होते हैं, इसमें किसी प्रकारका विरोध नहीं देखा जाता है ॥चौंतालीस॥ दिग्दर्शिनी टीका - उच्यत इति यत् प्रतिज्ञातं तत्तत्त्वनिरूपणमेव करोतितत्रत्यानामिति नवभिः । तेषां पूर्वोद्दिष्टानां वैकुण्ठवासिनां परस्परं साम्यं समानता, प्रत्येकं सर्वसामर्थ्यत्त्वात् तारतम्यञ्च न्यूनाधिकता महदल्पतया निजवैभवादिप्रकटनात् लक्ष्येत तत्तल्लक्षणैर्दृश्येत, न च तथापि विरोधो भवति; लक्ष्यत इत्यनेनैवान्वयः। सर्वेषामपि प्रत्येकं स्वेच्छया सर्ववैभवप्रकटन-सामर्थ्यदर्शनात् ॥चौंतालीस ॥ भावानुवाद - अब वैकुण्ठमें विरुद्ध प्रतीत होनेवाले तत्त्वका निरूपण 'तत्रत्यानाम्' इत्यादि नौ श्लोकों द्वारा कर रहे हैं । यद्यपि पूर्वोक्त समस्त वैकुण्ठवासियोंमें परस्पर समानता और प्रत्येकके सर्व-सामर्थ्यवान् होनेके कारण उनमें न्यून अधिकका तारतम्य लक्षित होता है, तथापि विरोध लक्षित नहीं होता । परस्पर समान धर्मी या समान सामर्थ्ययुक्त होकर भी उनमें से किसीने महान वैभव प्रकट किया है और किसीने अल्प वैभव प्रकट किया है। इसलिए जो तारतम्य देखा जाता है, उसमें कोई वैषम्य नहीं है, क्योंकि उनमें से प्रत्येक ही स्वेच्छासे समस्त प्रकारका वैभव प्रकट करनेमें समर्थ हैं ॥चौंतालीस॥ न मात्सर्यादयो दोषाः सन्ति कस्यापि तेषु हि । गुणाः स्वाभाविका भान्ति नित्याः सत्याः सहस्रशः ॥ पैंतालीस ॥ श्लोकानुवाद - वहाँ किसीमें भी मात्सर्य आदि दोष नहीं है, अपितु उनमें सौहार्द, विनय और सम्मानादि हजारों गुण वर्त्तमान हैं तथा ये गुण नित्य और सत्य हैं ॥ पैंतालीस ॥ दिग्दर्शिनी टीका - एवं तत्त्वतस्तारतम्यं नास्त्येव, आस्तां वा बहिर्दृष्ट्या, तथापि कापि हानिः कुत्रापि नास्तीत्याह - नेति । मत्सरः परोत्कर्षासहनं, स आदिर्येषां स्पर्धासूया - तिरस्कारादीनां ते दोषा हि यस्मात्तेषु वैकुण्ठवासिषु मध्ये कस्यापि न सन्ति, अथ च गुणा अन्योऽन्यसौहार्द - विनय-सम्मानादयः सहस्रशो भान्ति विराजन्ते। कीदृशाः ? नित्याः । ननु मायाया अनादित्वेन मायिकानामपि नित्यत्वं सिध्यतीत्याशंक्याह - सत्या इति न तु मायिका इत्यर्थः; यतः स्वाभाविकाः सहजाः। यथोक्तं श्रीब्रह्मणा तृतीयस्कन्धे - 'पारावतान्यभृतसारसचक्रवाक-दात्यूह - हंस - शुक - तित्तिर- वर्हिणां यः । कोलाहलो विरमतेऽचिरमात्रमुच्चैर्भृङ्गाधिपे हरिकथामिव गायमाने ॥ मन्दारकुन्द-कुरवोत्पलचम्पकार्ण-पुन्नागनागबकुलाम्बुज-पारिजाताः । गन्धेऽर्चिते तुलसिकाभरणेन तस्या, यस्मिंस्तपः सुमनसो
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गरेना (Garena) हर दो महीने में एक नया वर्जन पेश करता है, जिससे खिलाड़ियों को ढेर सारे रिवॉर्ड को एक्सेस करने की सुविधा मिलती है। बता दें कि OB37 अपडेट 16 नवंबर, 2022 को शुरू हुआ। अपडेट मेंटेनेंस ब्रेक के बाद लगभग 9:30 AM IST पर शुरू हुआ और लगभग 6:00 PM IST पर समाप्त हुआ। हर अपडेट से पहले गरेना सलेक्टेड खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के लिए डेडिकेटेड क्लाइंट, एडवांस सर्वर पेश करता है। एडवांस सर्वर मुख्य रूप से सलेक्टेड प्लेयर को उन खास फीचर्स को समीक्षा करने की अनुमति देता है, जिसे बाद में गेम में शामिल किया जाता है। इसलिए पिछले सीजन को कैलकुलेट करें, तो OB38 अपडेट जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह के आसपास रिलीज हो सकता है।
गरेना ने OB37 Update में जोम्बी हंट और फुटबॉल सोशल मोड्स को फिर से पेश किया, जिससे खिलाड़ियों को इस सर्दी में कुछ अलग करने का मौका मिलेगी। यहां पर फ्री फायर मैक्स (Free Fire MAX) के लेटेस्ट वर्जन का डाउनलोड लिंक दिया गया है। इसे सफलतापूर्वक डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करेंः
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गरेना हर दो महीने में एक नया वर्जन पेश करता है, जिससे खिलाड़ियों को ढेर सारे रिवॉर्ड को एक्सेस करने की सुविधा मिलती है। बता दें कि OBसैंतीस अपडेट सोलह नवंबर, दो हज़ार बाईस को शुरू हुआ। अपडेट मेंटेनेंस ब्रेक के बाद लगभग नौ:तीस AM IST पर शुरू हुआ और लगभग छः:शून्य PM IST पर समाप्त हुआ। हर अपडेट से पहले गरेना सलेक्टेड खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के लिए डेडिकेटेड क्लाइंट, एडवांस सर्वर पेश करता है। एडवांस सर्वर मुख्य रूप से सलेक्टेड प्लेयर को उन खास फीचर्स को समीक्षा करने की अनुमति देता है, जिसे बाद में गेम में शामिल किया जाता है। इसलिए पिछले सीजन को कैलकुलेट करें, तो OBअड़तीस अपडेट जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह के आसपास रिलीज हो सकता है। गरेना ने OBसैंतीस Update में जोम्बी हंट और फुटबॉल सोशल मोड्स को फिर से पेश किया, जिससे खिलाड़ियों को इस सर्दी में कुछ अलग करने का मौका मिलेगी। यहां पर फ्री फायर मैक्स के लेटेस्ट वर्जन का डाउनलोड लिंक दिया गया है। इसे सफलतापूर्वक डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करेंः - गरेना फ्री फायर मैक्स को को डाउनलोड करने के लिए आपको गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। - लिंक पर क्लिक करने के बाद प्लेयर को गूगल प्ले स्टोर पर 'अपडेट' बटन को दबाना होगा। - गेम अपडेट डाउनलोड करना शुरू कर देगा और डिवाइस पर अपने आप इंस्टॉल हो जाएगा। - यूजर्स को अपडेट को इंस्टॉल करने के लिए आवश्यक अनुमति देना होगा। गेम को चलान के लिए कम से कम दोGB फ्री स्टोरेज होना चाहिए। गेमर्स के पास हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए। लेटेस्ट Free Fire MAX OBसैंतीस अपडेट को डाउनलोड करने के लिए वाईफाई कनेक्शन बेहतर हो सकता है।
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टेक्नो जल्द ही भारत में अपना Tecno Pop 6 Pro फोन लॉन्च करने जा रही है. जिसे इस साल की शुरुआत में भारत में 8,499 रुपये में लॉन्च किया गया था. Tecno Pop 6 Pro दो कलर ऑप्शन में आएगा. अपकमिंग Tecno Pop 6 Pro एक एंट्री-लेवल स्मार्टफोन होगा और भारत में इसे एक्सक्लूसिवली Amazon पर बेचा जाएगा।
टेक्नो इंडिया ने अपकमिंग टेक्नो पॉप सीरीज हैंडसेट को सोशल मीडिया पर टीज करना शुरू कर दिया है। कंपनी द्वारा शेयर किए गए टीजर से डिवाइस के डिजाइन और कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशन सामने आ गए हैं। Tecno Pop 6 Pro फोन 5,000 एमएएच की बैटरी से लैस होगा. स्मार्टफोन एंड्रॉइड 12 गो एडिशन पर चलेगा, जिसके ऊपर HiOS 8. 6 स्किन होगी. स्मार्टफोन पीसफुल ब्लू और पोलर ब्लैक कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा.
अमेजन माइक्रोसाइट के अनुसार टेक्नो पॉप 6 प्रो में 6. 5 इंच का डिस्प्ले होगा जो एचडी + रिजोलूशन, 480 निट्स पीक ब्राइटनेस और वाटरड्रॉप नॉच की पेशकश करेगा. फोन में फिंगरप्रिंट स्कैनर भी मिलेगा. साथ ही अमेजन पर फोन की डेडिकेटेड माइक्रो साइट भी लाइव हो गई है।
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टेक्नो जल्द ही भारत में अपना Tecno Pop छः Pro फोन लॉन्च करने जा रही है. जिसे इस साल की शुरुआत में भारत में आठ,चार सौ निन्यानवे रुपयापये में लॉन्च किया गया था. Tecno Pop छः Pro दो कलर ऑप्शन में आएगा. अपकमिंग Tecno Pop छः Pro एक एंट्री-लेवल स्मार्टफोन होगा और भारत में इसे एक्सक्लूसिवली Amazon पर बेचा जाएगा। टेक्नो इंडिया ने अपकमिंग टेक्नो पॉप सीरीज हैंडसेट को सोशल मीडिया पर टीज करना शुरू कर दिया है। कंपनी द्वारा शेयर किए गए टीजर से डिवाइस के डिजाइन और कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशन सामने आ गए हैं। Tecno Pop छः Pro फोन पाँच,शून्य एमएएच की बैटरी से लैस होगा. स्मार्टफोन एंड्रॉइड बारह गो एडिशन पर चलेगा, जिसके ऊपर HiOS आठ. छः स्किन होगी. स्मार्टफोन पीसफुल ब्लू और पोलर ब्लैक कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा. अमेजन माइक्रोसाइट के अनुसार टेक्नो पॉप छः प्रो में छः. पाँच इंच का डिस्प्ले होगा जो एचडी + रिजोलूशन, चार सौ अस्सी निट्स पीक ब्राइटनेस और वाटरड्रॉप नॉच की पेशकश करेगा. फोन में फिंगरप्रिंट स्कैनर भी मिलेगा. साथ ही अमेजन पर फोन की डेडिकेटेड माइक्रो साइट भी लाइव हो गई है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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भी लोग पौने दो रुपयासे अधिक नहीं लगाते।" मैंने कहा'अच्छा चले चलो, पौने तीन रुपया ही देवेंगे।" वह खुशी से कटराकी धर्मशाला में गाड़ीको लकड़ी रखने लगा। मैंने कहा'काटकर रक्खो।' वह बोला - 'काटनेके दो आना और दो।" मैंने कहा- 'हमने पौने तीन रुपया दिये । सच कहो क्या पौने तीन रुपयाकी गाड़ी है।' वह बोला- 'नहीं, पौने दो रुपयासे अधिक की नहीं, परन्तु आपने पौने तीन रुपया में ठहरा ली इसमें मेरा कौन सा अपराध है ? आपने उस समय यह तो नहीं कहा था कि काटना पड़ेगा ।' मैंने कहा - 'नहीं।' वह बोला - 'तब दो आना के लिये क्यों बेईमानी करते हो ?" मैं एकदम बोला-'अच्छा नहीं काटना चाहता है तो चला जा, मुझे नहीं चाहिये ।" वह बोला'आपकी इच्छा । मैं तो काटकर रखे देता हूँ, पर आप अपनी भूल पर पछताओगे । परन्तु यह संसार है, भूलोंका घर है ।" अन्तमें उसने लकड़ी काटकर रख दी। मैंने पौने तीन रुपया उसे दे दिया। यह चल गया। जब मैं भोजन करनेके लिये बैठा। आधे भोजनके बाद मुझे अपनी भूल याद आई । मैंने एकदम भोजनको छोड़ हाथ धो लिये । बाईजीने कहा- 'बेटा ! अन्तराय हो गया ?" मैंने कहा - 'नहीं।' लकड़ीवालेकी सब कथा सुनाई । बाईजीने कहा'तुमने बड़ी गलती को जब पोने दो रुपयाके स्थान पर पौने तीन रुपया दिये तब दो आना और दे देता ।"
अन्त में एक सेर पक्वान्न और दो आना लेकर चला । दो मोल चलनेके बाद वह गाड़ीवाला मिला। मैंने उसे दो आने और पक्वान्न दिया । वह खुश हुआ । मुझे आशीर्वाद देता हुआ बोला- 'देखो, जो काम करो, विवेकसे करो । आपने पौने दो रुपयेके स्थानमें पौने तीन रुपया दिये यह भूल की। पौने दो रुपया ही देना थे । यदि मेरा उपकार करना था तो एक रुपया स्वतन्त्र देते तथा दो आनाके लिये वेईमान न बनना पड़ता । अब भविष्य
बिहीकी समाधि
में ऐसी भूल न करना । जितना सुख आपको एक रुपया देनेका नहीं हुआ उतना दुःख इस दो आनाकी भूलका होगा। व्यबहारमें यथार्थ बुद्धिसे काम लो। यों ही आवेगमें आकर न ठगा जाओ तथा दानको पद्धतिमें योग्य अयोग्यका विचार अवश्य रक्खो। आशा है अब ऐसी भूल न करोगे ।।
बिल्लीकी समाधि
सागरकी ही घटना है। हम जिस धर्मशाला में रहते थे उसमें एक बिल्लीका बच्चा था। उसकी मां मर गई । मैं बच्चेको दूध पिलाने लगा। बाईजी बोलीं- 'यह हिंसक जन्तु है। इसे मत पालो ।' मैं बोला- 'इसकी मां मर गई, अतः दूध पिला देता हूँ। क्या अनर्थ करता हूँ ?? बाईजी बोलीं- 'प्रथम तो तुम आगमकी आज्ञाके विरुद्ध काम करते हो । दूसरे संसार है। तुम किस किस की रक्षा करोगे ?"
मैं नहीं माना। उसे दूध पिलाता रहा। जब वह चार मासका हुआ तब एक दिन उसने एक छोटासा चूहा पकड़ लिया। मैंने हरचन्द्र कोशिश की कि वह चूहेको छोड़ देवे पर उसने न छोड़ा । मैंने उसे बहुत डरवाया पर वह चूहा खा गया ।
इस घटनासे जब मैं आता था तब वह डरकर भाग जाता था, परन्तु जब बाईजी भोजन करती थीं तब आ जाता था और जब तक बाईजी उसे दूध रोटी न दे देतीं तब तक नहीं भागता था । बाईजीसे उसका अत्यन्त परिचय हो गया। जब बाईजी बरुवासागर या कहीं अन्यत्र जातो थीं तब वह एक दिन पहलेसे भोजन छोड़ देता था और जब तांगा पर बैठकर स्टेशन जाती थीं तब वहीं खड़ा रहता था। तांगा जानेके बाद ही वह धर्मशाला
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भी लोग पौने दो रुपयासे अधिक नहीं लगाते।" मैंने कहा'अच्छा चले चलो, पौने तीन रुपया ही देवेंगे।" वह खुशी से कटराकी धर्मशाला में गाड़ीको लकड़ी रखने लगा। मैंने कहा'काटकर रक्खो।' वह बोला - 'काटनेके दो आना और दो।" मैंने कहा- 'हमने पौने तीन रुपया दिये । सच कहो क्या पौने तीन रुपयाकी गाड़ी है।' वह बोला- 'नहीं, पौने दो रुपयासे अधिक की नहीं, परन्तु आपने पौने तीन रुपया में ठहरा ली इसमें मेरा कौन सा अपराध है ? आपने उस समय यह तो नहीं कहा था कि काटना पड़ेगा ।' मैंने कहा - 'नहीं।' वह बोला - 'तब दो आना के लिये क्यों बेईमानी करते हो ?" मैं एकदम बोला-'अच्छा नहीं काटना चाहता है तो चला जा, मुझे नहीं चाहिये ।" वह बोला'आपकी इच्छा । मैं तो काटकर रखे देता हूँ, पर आप अपनी भूल पर पछताओगे । परन्तु यह संसार है, भूलोंका घर है ।" अन्तमें उसने लकड़ी काटकर रख दी। मैंने पौने तीन रुपया उसे दे दिया। यह चल गया। जब मैं भोजन करनेके लिये बैठा। आधे भोजनके बाद मुझे अपनी भूल याद आई । मैंने एकदम भोजनको छोड़ हाथ धो लिये । बाईजीने कहा- 'बेटा ! अन्तराय हो गया ?" मैंने कहा - 'नहीं।' लकड़ीवालेकी सब कथा सुनाई । बाईजीने कहा'तुमने बड़ी गलती को जब पोने दो रुपयाके स्थान पर पौने तीन रुपया दिये तब दो आना और दे देता ।" अन्त में एक सेर पक्वान्न और दो आना लेकर चला । दो मोल चलनेके बाद वह गाड़ीवाला मिला। मैंने उसे दो आने और पक्वान्न दिया । वह खुश हुआ । मुझे आशीर्वाद देता हुआ बोला- 'देखो, जो काम करो, विवेकसे करो । आपने पौने दो रुपयेके स्थानमें पौने तीन रुपया दिये यह भूल की। पौने दो रुपया ही देना थे । यदि मेरा उपकार करना था तो एक रुपया स्वतन्त्र देते तथा दो आनाके लिये वेईमान न बनना पड़ता । अब भविष्य बिहीकी समाधि में ऐसी भूल न करना । जितना सुख आपको एक रुपया देनेका नहीं हुआ उतना दुःख इस दो आनाकी भूलका होगा। व्यबहारमें यथार्थ बुद्धिसे काम लो। यों ही आवेगमें आकर न ठगा जाओ तथा दानको पद्धतिमें योग्य अयोग्यका विचार अवश्य रक्खो। आशा है अब ऐसी भूल न करोगे ।। बिल्लीकी समाधि सागरकी ही घटना है। हम जिस धर्मशाला में रहते थे उसमें एक बिल्लीका बच्चा था। उसकी मां मर गई । मैं बच्चेको दूध पिलाने लगा। बाईजी बोलीं- 'यह हिंसक जन्तु है। इसे मत पालो ।' मैं बोला- 'इसकी मां मर गई, अतः दूध पिला देता हूँ। क्या अनर्थ करता हूँ ?? बाईजी बोलीं- 'प्रथम तो तुम आगमकी आज्ञाके विरुद्ध काम करते हो । दूसरे संसार है। तुम किस किस की रक्षा करोगे ?" मैं नहीं माना। उसे दूध पिलाता रहा। जब वह चार मासका हुआ तब एक दिन उसने एक छोटासा चूहा पकड़ लिया। मैंने हरचन्द्र कोशिश की कि वह चूहेको छोड़ देवे पर उसने न छोड़ा । मैंने उसे बहुत डरवाया पर वह चूहा खा गया । इस घटनासे जब मैं आता था तब वह डरकर भाग जाता था, परन्तु जब बाईजी भोजन करती थीं तब आ जाता था और जब तक बाईजी उसे दूध रोटी न दे देतीं तब तक नहीं भागता था । बाईजीसे उसका अत्यन्त परिचय हो गया। जब बाईजी बरुवासागर या कहीं अन्यत्र जातो थीं तब वह एक दिन पहलेसे भोजन छोड़ देता था और जब तांगा पर बैठकर स्टेशन जाती थीं तब वहीं खड़ा रहता था। तांगा जानेके बाद ही वह धर्मशाला
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Latehar: लातेहार जिला के महुआडाड़ प्रखंड कार्यालय सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. स्वयंसेवी संस्था वन जीवन ग्रामीण विकास समिति व स्विच ऑन फाउंडेशन की ओर से सोलर पंप के लाभुकों के लिए शिविर लगाया गया. जिसमे वन जीवन ग्रामीण विकास समिति संस्था के ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर अफसाना खातून ने लाभुकों को सोलर पंप के रख-रखाव व सरकार द्वारा मिलने वाली छूट की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किसानों को 95 प्रतिशत अनुदान पर सोलर वाटर पंप दिया जा रहा है. यह पर्यावरण के अनुकूल है. संस्था के निदेशक महेन्द्र सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में जिस तरह से पेट्रोल-डीजल का उपयोग हो रहा है, वो जल्द ही समाप्त हो जायेंगे. ऐसे में सोलर एनर्जी ही काम आयेगी. सोलर वाटर पंप लगाने के लिए कम लागत की जरूरत होती है. ग्राम पुटरूंगी में सोलर पंप के 9 लाभुक 125 एकड़ में लगे आम बागवानी में सिंचाई कर रहे हैं.
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Latehar: लातेहार जिला के महुआडाड़ प्रखंड कार्यालय सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. स्वयंसेवी संस्था वन जीवन ग्रामीण विकास समिति व स्विच ऑन फाउंडेशन की ओर से सोलर पंप के लाभुकों के लिए शिविर लगाया गया. जिसमे वन जीवन ग्रामीण विकास समिति संस्था के ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर अफसाना खातून ने लाभुकों को सोलर पंप के रख-रखाव व सरकार द्वारा मिलने वाली छूट की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किसानों को पचानवे प्रतिशत अनुदान पर सोलर वाटर पंप दिया जा रहा है. यह पर्यावरण के अनुकूल है. संस्था के निदेशक महेन्द्र सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में जिस तरह से पेट्रोल-डीजल का उपयोग हो रहा है, वो जल्द ही समाप्त हो जायेंगे. ऐसे में सोलर एनर्जी ही काम आयेगी. सोलर वाटर पंप लगाने के लिए कम लागत की जरूरत होती है. ग्राम पुटरूंगी में सोलर पंप के नौ लाभुक एक सौ पच्चीस एकड़ में लगे आम बागवानी में सिंचाई कर रहे हैं.
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Rajasthan News: सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हर साल महाराणा प्रताप की जयंती समारोह मनाने से युवा पीढ़ी उनके त्याग, बलिदान, शौर्य व पराक्रम से प्रेरित हो रही है। उनके शौर्य व बलिदान की गाथा राजस्थान ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी लोगों को स्वाभिमान की भावना से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
सीएम गहलोत सोमवार को मेवाड़ क्षत्रिय महासभा एवं नगर निगम द्वारा सुखाड़िया रंगमंच पर आयोजित महाराणा प्रताप की 483वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह आने वाली पीढ़ी को यह गौरवशाली शौर्यगाथा विरासत में सौंपे।
हमें मानवता की सेवा के लिए ही कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े स्थल चावण्ड, गोगुन्दा, हल्दीघाटी आदि मेवाड़ की पहचान को विशिष्ट बनाते हैं।
मुख्यमंत्री ने समारोह में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप बोर्ड बनाने की घोषणा की। यह बोर्ड प्रताप के शौर्य के बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करेगा। बोर्ड पाठ्यक्रम सामग्री, धरोहर संरक्षण, नवनिर्माण, विभिन्न भाषाओं में शोध कार्य, प्रकाशन का प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, व्याख्यान, कवि सम्मेलन आदि कार्यों के लिए योजना तैयार करेगा। यह नई पीढ़ी के लिए भी माहौल तैयार करेगा।
सीएम ने महाराणा प्रताप की समाधि, राजतिलक स्थली और अन्य स्थलों के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य कराने, मीरा मेदपाट बालिका छात्रावास के समीप की भूमि को छात्रावास के लिए आवंटित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि चावण्ड में 4 करोड़ रुपए की लागत से महाराणा प्रताप पेनोरमा बनाने की घोषणा की जा चुकी है जिसके कार्यादेश जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे केन्द्रीय मंत्री रहे, तब मेवाड़ कॉम्पलेक्स की घोषणा की गई थी। इसके तहत महाराणा प्रताप से जुड़े सभी स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास शुरू हुआ। देशी-विदेशी पर्यटकों को इन स्थानों पर गौरवशाली इतिहास की जानकारी प्राप्त हो सके, इसके प्रयास किए गए। गहलोत ने कहा कि मेवाड़ कॉम्पलेक्स को प्रभावी बनाया जाए तो यह इतिहास के संरक्षण में कारगर साबित होगा।
उन्होंने चित्तौड़गढ़ सांसद से आग्रह किया कि वे केन्द्र सरकार से कॉम्पलेक्स से संबंधित पुरानी फाइलों को पुनः निकलवाएं और इसी के तहत विकास कार्य सम्पादित करवाएं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह करेंगे।
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Rajasthan News: सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हर साल महाराणा प्रताप की जयंती समारोह मनाने से युवा पीढ़ी उनके त्याग, बलिदान, शौर्य व पराक्रम से प्रेरित हो रही है। उनके शौर्य व बलिदान की गाथा राजस्थान ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी लोगों को स्वाभिमान की भावना से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सीएम गहलोत सोमवार को मेवाड़ क्षत्रिय महासभा एवं नगर निगम द्वारा सुखाड़िया रंगमंच पर आयोजित महाराणा प्रताप की चार सौ तिरासीवीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह आने वाली पीढ़ी को यह गौरवशाली शौर्यगाथा विरासत में सौंपे। हमें मानवता की सेवा के लिए ही कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े स्थल चावण्ड, गोगुन्दा, हल्दीघाटी आदि मेवाड़ की पहचान को विशिष्ट बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने समारोह में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप बोर्ड बनाने की घोषणा की। यह बोर्ड प्रताप के शौर्य के बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करेगा। बोर्ड पाठ्यक्रम सामग्री, धरोहर संरक्षण, नवनिर्माण, विभिन्न भाषाओं में शोध कार्य, प्रकाशन का प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, व्याख्यान, कवि सम्मेलन आदि कार्यों के लिए योजना तैयार करेगा। यह नई पीढ़ी के लिए भी माहौल तैयार करेगा। सीएम ने महाराणा प्रताप की समाधि, राजतिलक स्थली और अन्य स्थलों के विकास के लिए पाँच करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य कराने, मीरा मेदपाट बालिका छात्रावास के समीप की भूमि को छात्रावास के लिए आवंटित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि चावण्ड में चार करोड़ रुपए की लागत से महाराणा प्रताप पेनोरमा बनाने की घोषणा की जा चुकी है जिसके कार्यादेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे केन्द्रीय मंत्री रहे, तब मेवाड़ कॉम्पलेक्स की घोषणा की गई थी। इसके तहत महाराणा प्रताप से जुड़े सभी स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास शुरू हुआ। देशी-विदेशी पर्यटकों को इन स्थानों पर गौरवशाली इतिहास की जानकारी प्राप्त हो सके, इसके प्रयास किए गए। गहलोत ने कहा कि मेवाड़ कॉम्पलेक्स को प्रभावी बनाया जाए तो यह इतिहास के संरक्षण में कारगर साबित होगा। उन्होंने चित्तौड़गढ़ सांसद से आग्रह किया कि वे केन्द्र सरकार से कॉम्पलेक्स से संबंधित पुरानी फाइलों को पुनः निकलवाएं और इसी के तहत विकास कार्य सम्पादित करवाएं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह करेंगे।
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पटना । बिहार विधानसभा में (In Bihar Legislative Assembly) गुरुवार को सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली पार्टी (Party Supporting the Government from Outside) भाकपा (माले) के सदस्यों (Members of the CPI (ML)) ने विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) विजय कुमार सिन्हा पर (On Vijay Kumar Sinha) सदन को 'गुमराह' करने का आरोप लगाते हुए (Accusing 'Misleading' the House) हंगामा कर (Created Ruckus) सदन से माफी मांगने की मांग की (Demanded An Apology from House) ।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले सदन से बाहर विधानसभा गेट पर भाकपा माले के सदस्य एक बड़े बैनर के साथ एकत्रित हुए और विपक्ष के नेता विजय सिन्हा से माफी मांगने की मांग करते हुए नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। इसके बाद जब सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई तब भी भाकपा माले के सदस्य हंगामा करने लगे और वेल में आ गए। भाकपा माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने आरोप लगाया कि सिन्हा ने कुछ दिनों पहले प्रवासियों पर हमला करने का एक 'फर्जी' वीडियो दिखाकर सदन को 'गुमराह' करने की कोशिश की थी।
विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने विपक्ष के नेता सिन्हा को इस मामले में बयान देने को कहा तब उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष चाहे तो वे किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। सिन्हा ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए यह एक चाल है। इसके बाद अध्यक्ष ने भाकपा माले के सदस्यों को अपनी सीट पर जाने का आग्रह किया और इसके बाद प्रश्नकाल जारी रहाShare:
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पटना । बिहार विधानसभा में गुरुवार को सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली पार्टी भाकपा के सदस्यों ) ने विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा पर सदन को 'गुमराह' करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर सदन से माफी मांगने की मांग की । सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले सदन से बाहर विधानसभा गेट पर भाकपा माले के सदस्य एक बड़े बैनर के साथ एकत्रित हुए और विपक्ष के नेता विजय सिन्हा से माफी मांगने की मांग करते हुए नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। इसके बाद जब सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई तब भी भाकपा माले के सदस्य हंगामा करने लगे और वेल में आ गए। भाकपा माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने आरोप लगाया कि सिन्हा ने कुछ दिनों पहले प्रवासियों पर हमला करने का एक 'फर्जी' वीडियो दिखाकर सदन को 'गुमराह' करने की कोशिश की थी। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने विपक्ष के नेता सिन्हा को इस मामले में बयान देने को कहा तब उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष चाहे तो वे किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। सिन्हा ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए यह एक चाल है। इसके बाद अध्यक्ष ने भाकपा माले के सदस्यों को अपनी सीट पर जाने का आग्रह किया और इसके बाद प्रश्नकाल जारी रहाShare:
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बंगलुरु. बंगलुरु में 26 साल के अकाउंटेंट को ट्रैफिक पुलिस कॉन्सटेबल और होमगार्ड के साथ मारपीट करने पर गिरफ्तार किया गया. रंगानाथ नाम के इस शख्स ने मंगलवार को वेस्ट ऑफ कॉर्ड रोड के मोदी आई हास्पिटल के पास कॉन्सटेबल और होमगार्ड को लात-घूंसों से मारा. रंगनाथ राजाजी नगर के पास गायत्रीनगर के रहने वाले हैं. उन्हें विजय नगर ट्रैफिक पुलिस के कॉन्सटेबल शशिकुमार केबी की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया है. शशिकुमार और होमगार्ड महेश मोदी ब्रिज पर ट्रैफिक का संचालन कर रहे थे.
दरअसल शशिकुमार और महेश को मालूम हुआ कि बीएमटीसी बस और ऑटो के बीच एक्सीडेंट के चलते सड़क बाधित हो गई है. इसके बाद दोनों ने ट्रैफिक क्लीन करने की कोशिश में जुट गए. इस बीच दो लोग बाइक पर आए और ट्रैफिक जल्दी खुलावाने के लिए कहने लगे. शशिकुमार ने कहा वही तो कर रहा हूं. इसपर रंगनाथ को गुस्सा आ गया और उन्होंने महेश की नाम का मुक्का मार दिया. इसके अलावा उसने शशिकुमार के पेट में भी लात मारी.
बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब सड़क पर परेशानी का गुस्सा किसी ने ट्रैफिक पुलिस पर उतारा हो. बल्कि पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं.
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बंगलुरु. बंगलुरु में छब्बीस साल के अकाउंटेंट को ट्रैफिक पुलिस कॉन्सटेबल और होमगार्ड के साथ मारपीट करने पर गिरफ्तार किया गया. रंगानाथ नाम के इस शख्स ने मंगलवार को वेस्ट ऑफ कॉर्ड रोड के मोदी आई हास्पिटल के पास कॉन्सटेबल और होमगार्ड को लात-घूंसों से मारा. रंगनाथ राजाजी नगर के पास गायत्रीनगर के रहने वाले हैं. उन्हें विजय नगर ट्रैफिक पुलिस के कॉन्सटेबल शशिकुमार केबी की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया है. शशिकुमार और होमगार्ड महेश मोदी ब्रिज पर ट्रैफिक का संचालन कर रहे थे. दरअसल शशिकुमार और महेश को मालूम हुआ कि बीएमटीसी बस और ऑटो के बीच एक्सीडेंट के चलते सड़क बाधित हो गई है. इसके बाद दोनों ने ट्रैफिक क्लीन करने की कोशिश में जुट गए. इस बीच दो लोग बाइक पर आए और ट्रैफिक जल्दी खुलावाने के लिए कहने लगे. शशिकुमार ने कहा वही तो कर रहा हूं. इसपर रंगनाथ को गुस्सा आ गया और उन्होंने महेश की नाम का मुक्का मार दिया. इसके अलावा उसने शशिकुमार के पेट में भी लात मारी. बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब सड़क पर परेशानी का गुस्सा किसी ने ट्रैफिक पुलिस पर उतारा हो. बल्कि पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं.
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अज्ञोजंतुरनीशोयमात्मनःसुखदुःखयोः । ईश्वरप्रेरितोगच्छेत्स्वर्गनरकमेवच ॥ २७ ॥ यथावायोस्तृणामाणिवशंयांतिवलीयसः घातुरेववशंयांतिसर्वभूतानिभारत ॥ २८ ॥
अर्थ इस विषय में पुरातन इतिहास कहते हैं जिसमकार जीवईश्वरके बशमें रह ते हैं कि अपने २१ निश्चय सबका स्वामी ईश्वरही पूर्वकर्म बीजक अनुसार प्राणियोंको सुखदुःख और प्रिय अप्रियको नियत करता है २२ हे नरवीर जिसप्रकार काष्ठकी पुत्तली सूत्रधारके हाथ में स्थापित की हुई अंग को हिलाती है, उसी प्रकार यह मजा ईश्वरसे प्रेरित हस्तपादादि अंगोंको प्रचलित करती है २३ हे भरतवंशी वोह ईश्वर आकाशके समान प्राणियोको व्याप्त करकेउनके शुभाशुभ कर्मों को इस लोक में नियत करता है २४ निश्चय यह असमर्थ जीव तन्तुबद्ध पक्षीकी समान ईश्वरके वश में स्थित है, न दूसरोंकेमें और आप अपने आत्माका स्वामी नहीं है मणि सूत्रकी समान पिरोया हुआ है, जैसे बैल नासिकामें सूत्रस नाथा जाता है २५ बोह धाताकी अज्ञापर चलता है उसके आधीन और उसके अर्पण है, यह मनुष्य स्वाधीन किसीप्रकार नहीं है, किन्तुकाल नाम ईश्वर के आधीन है २६ अपनें सुख दुःखका न जान्नेवाला असमर्थ यह जीव ईश्वरसे प्रेरित स्वर्ग अथवा नर कको जाता है, जैसे नदीके तटसे गिरा और उसके मध्य में विद्यमान वृक्ष २७ हे भरतवंशी जैसे तृणोंकेअग्र वलवान वायुके वशको प्राप्त होते हैं, इसीप्रकार सब प्राणी ईश्वरके वशको प्राप्त होते हैं २८ पुनः वनपर्वणि
यद्ययं पुरुषः किंचित्कुरुते वै शुभाशुभम् ।
तद्धातृ विहितंविद्धि पूर्वकर्मफलोदयम् अ. ३० श्लो २२
यह पुरुष निश्चय जो कुछ शुभाशुभ कर्म को करता है उसको पूर्वकर्मफल काउदय ईश्वरसे किया हुआ जानी २२ पुनः वनपर्वणीअ ३२ लो० ८
वार्यमाणोषिपापेभ्यः पापात्मापापमिच्छति चोद्यमानोपिपापेन शुभात्माशुभभिच्छति
पापात्मा पुरुष पापोंसे रोकाहुआभी पाप कर्म करता है शुभारमा मनुष्य पापसे मेरित करनेंसेभी शुभकर्म करताहै पुनः उद्योगपर्व ●
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अज्ञोजंतुरनीशोयमात्मनःसुखदुःखयोः । ईश्वरप्रेरितोगच्छेत्स्वर्गनरकमेवच ॥ सत्ताईस ॥ यथावायोस्तृणामाणिवशंयांतिवलीयसः घातुरेववशंयांतिसर्वभूतानिभारत ॥ अट्ठाईस ॥ अर्थ इस विषय में पुरातन इतिहास कहते हैं जिसमकार जीवईश्वरके बशमें रह ते हैं कि अपने इक्कीस निश्चय सबका स्वामी ईश्वरही पूर्वकर्म बीजक अनुसार प्राणियोंको सुखदुःख और प्रिय अप्रियको नियत करता है बाईस हे नरवीर जिसप्रकार काष्ठकी पुत्तली सूत्रधारके हाथ में स्थापित की हुई अंग को हिलाती है, उसी प्रकार यह मजा ईश्वरसे प्रेरित हस्तपादादि अंगोंको प्रचलित करती है तेईस हे भरतवंशी वोह ईश्वर आकाशके समान प्राणियोको व्याप्त करकेउनके शुभाशुभ कर्मों को इस लोक में नियत करता है चौबीस निश्चय यह असमर्थ जीव तन्तुबद्ध पक्षीकी समान ईश्वरके वश में स्थित है, न दूसरोंकेमें और आप अपने आत्माका स्वामी नहीं है मणि सूत्रकी समान पिरोया हुआ है, जैसे बैल नासिकामें सूत्रस नाथा जाता है पच्चीस बोह धाताकी अज्ञापर चलता है उसके आधीन और उसके अर्पण है, यह मनुष्य स्वाधीन किसीप्रकार नहीं है, किन्तुकाल नाम ईश्वर के आधीन है छब्बीस अपनें सुख दुःखका न जान्नेवाला असमर्थ यह जीव ईश्वरसे प्रेरित स्वर्ग अथवा नर कको जाता है, जैसे नदीके तटसे गिरा और उसके मध्य में विद्यमान वृक्ष सत्ताईस हे भरतवंशी जैसे तृणोंकेअग्र वलवान वायुके वशको प्राप्त होते हैं, इसीप्रकार सब प्राणी ईश्वरके वशको प्राप्त होते हैं अट्ठाईस पुनः वनपर्वणि यद्ययं पुरुषः किंचित्कुरुते वै शुभाशुभम् । तद्धातृ विहितंविद्धि पूर्वकर्मफलोदयम् अ. तीस श्लो बाईस यह पुरुष निश्चय जो कुछ शुभाशुभ कर्म को करता है उसको पूर्वकर्मफल काउदय ईश्वरसे किया हुआ जानी बाईस पुनः वनपर्वणीअ बत्तीस लोशून्य आठ वार्यमाणोषिपापेभ्यः पापात्मापापमिच्छति चोद्यमानोपिपापेन शुभात्माशुभभिच्छति पापात्मा पुरुष पापोंसे रोकाहुआभी पाप कर्म करता है शुभारमा मनुष्य पापसे मेरित करनेंसेभी शुभकर्म करताहै पुनः उद्योगपर्व ●
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को महंगाई एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर बुलडोजर चलाना चाहिए, लेकिन भाजपा के बुलडोजर पर तो नफरत और दहशत सवार है।
एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को महंगाई एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर बुलडोजर चलाना चाहिए, लेकिन भाजपा के बुलडोजर पर तो नफरत और दहशत सवार है।
सरकार को लोगों की इन समस्याओं पर bulldozer चलाना चाहिए।
मगर भाजपा के bulldozer पर तो नफ़रत और दहशत सवार है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि, भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है जिसका मतलब पवित्रता का प्रतीक होता है। राम नवमी पर असहिष्णुता, हिंसा और घृणा के कृत्य किए जा रहे हैं। उन्होंने सत्ता में शीर्ष पर विराजमान लोगों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, देश के शीर्ष नेता नफरत के प्रसार को देखने और सुनने से इनकार करते हैं। वे मौन हैं।
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को महंगाई एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर बुलडोजर चलाना चाहिए, लेकिन भाजपा के बुलडोजर पर तो नफरत और दहशत सवार है। एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को महंगाई एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर बुलडोजर चलाना चाहिए, लेकिन भाजपा के बुलडोजर पर तो नफरत और दहशत सवार है। सरकार को लोगों की इन समस्याओं पर bulldozer चलाना चाहिए। मगर भाजपा के bulldozer पर तो नफ़रत और दहशत सवार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि, भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है जिसका मतलब पवित्रता का प्रतीक होता है। राम नवमी पर असहिष्णुता, हिंसा और घृणा के कृत्य किए जा रहे हैं। उन्होंने सत्ता में शीर्ष पर विराजमान लोगों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, देश के शीर्ष नेता नफरत के प्रसार को देखने और सुनने से इनकार करते हैं। वे मौन हैं।
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लखनऊ। बीते दिनों लखीमपुर खीरी में आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन रेस्क्यू आपरेशन के बाद अब लखनऊ चिड़ियाघर की रौनक बढ़ा रही है.
मालूम हो कि बीते दिनों लखीमपुर खीरी में आदमखोर बाघिन का आतंक फैला हुआ था, उसे रेस्क्यू करने के लिए लखनऊ जू की टीम गई थी बाघिन को बेहोश करने के निर्देश दिए गए थे। फिलहाल बाघिन रेस्क्यू कर अब लखनऊ चिड़याघर लाया जा चुका है. बाघिन के दो दांत टूटे हुए हैं।
बता दें कि हाल ही में लखीमपुर खीरी के तिकुनिया वन क्षेत्र के खैरटिया गांव में एक बाघिन ने हमला कर दिया, जिससे मंदिर के पुजारी व गांव के एक बच्चे की मौत हो गई। बाघिन का आतंक बढ़ने पर उसे बेहोश कर पकड़ने के निर्देश प्रधान मुख्य वन संरक्षक की ओर से दिए गए थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लखीमपुर खीरी के जंगलों से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ पहले से ही लखनऊ जू में हैं। साल 2009 में किशनपुर सेंचुरी से किशन को रेस्क्यू किया गया था। वर्ष 2013 में मैलानी से बाघिन रेस्क्यू की गई थी। इसके अलावा छेदी व वर्ष 2018 में निघासन रेंज में ग्रामीणों के हमले में घायल हुई बाघिन रेनू है। वहीं तीन शावकों को भी लाया गया था, जिनकी मां का शिकार हो गया था।
फिलहाल आतंक का पर्याय बनी लखीमपुर के तिकुनिया की आदमखोर बाघिन को रेस्क्यू कर लखनऊ चिड़याघर लाया जा चुका है। बाघिन के दो दांत टूटे हुए हैं।
बता दें कि लखीमपुर के तिकुनिया में दुधवा नेशनल पार्क की बाघिन के हमले में तीन लोगों की मौत हुई थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान से जू चिकित्सक डॉ. ब्रजेंद्र मणि सहित दो सदस्य रेस्क्यू के लिए रवाना हुए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक केपी दुबे ने बताया कि उसे लखनऊ प्राणि उद्यान लाया गया है, बाघिन के चिड़याघर आने से इनकी संख्या में वृद्धि होगी।
बड़ी निजात मिलीः
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लखनऊ। बीते दिनों लखीमपुर खीरी में आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन रेस्क्यू आपरेशन के बाद अब लखनऊ चिड़ियाघर की रौनक बढ़ा रही है. मालूम हो कि बीते दिनों लखीमपुर खीरी में आदमखोर बाघिन का आतंक फैला हुआ था, उसे रेस्क्यू करने के लिए लखनऊ जू की टीम गई थी बाघिन को बेहोश करने के निर्देश दिए गए थे। फिलहाल बाघिन रेस्क्यू कर अब लखनऊ चिड़याघर लाया जा चुका है. बाघिन के दो दांत टूटे हुए हैं। बता दें कि हाल ही में लखीमपुर खीरी के तिकुनिया वन क्षेत्र के खैरटिया गांव में एक बाघिन ने हमला कर दिया, जिससे मंदिर के पुजारी व गांव के एक बच्चे की मौत हो गई। बाघिन का आतंक बढ़ने पर उसे बेहोश कर पकड़ने के निर्देश प्रधान मुख्य वन संरक्षक की ओर से दिए गए थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लखीमपुर खीरी के जंगलों से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ पहले से ही लखनऊ जू में हैं। साल दो हज़ार नौ में किशनपुर सेंचुरी से किशन को रेस्क्यू किया गया था। वर्ष दो हज़ार तेरह में मैलानी से बाघिन रेस्क्यू की गई थी। इसके अलावा छेदी व वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में निघासन रेंज में ग्रामीणों के हमले में घायल हुई बाघिन रेनू है। वहीं तीन शावकों को भी लाया गया था, जिनकी मां का शिकार हो गया था। फिलहाल आतंक का पर्याय बनी लखीमपुर के तिकुनिया की आदमखोर बाघिन को रेस्क्यू कर लखनऊ चिड़याघर लाया जा चुका है। बाघिन के दो दांत टूटे हुए हैं। बता दें कि लखीमपुर के तिकुनिया में दुधवा नेशनल पार्क की बाघिन के हमले में तीन लोगों की मौत हुई थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान से जू चिकित्सक डॉ. ब्रजेंद्र मणि सहित दो सदस्य रेस्क्यू के लिए रवाना हुए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक केपी दुबे ने बताया कि उसे लखनऊ प्राणि उद्यान लाया गया है, बाघिन के चिड़याघर आने से इनकी संख्या में वृद्धि होगी। बड़ी निजात मिलीः
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भारत (India) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) के बीच गुरुवार से चार टेस्ट मैचों की सीरीज की शुरुआत होने वाली है. एडिलेड (Adelaide) में दोनों टीमों के बीच खेला जाना वाला यह पहला टेस्ट मैच डे-नाइट होने वाला है. भारतीय टीम ने बुधवार को ही टीम की प्लेइंग इलेवन का ऐलान कर दिया. इस मुकाबले को विराट कोहली (Virat Kohli) बनाम स्टीव स्मिथ भी माना जा रहा है.
टीम इंडिया ऑस्ट्रेलियाई स्टार खिलाड़ी स्टीव स्मिथ (Steve Smith) को रोकने की कोशिश में होगें वहीं कंगारुओं के निशाने पर भारत के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) होंगे. बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी के लिए सीरीज के इस पहले मुकाबले में ऋद्धिमान साहा को ही विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, युवा पृथ्वी शॉ को भी शामिल किया गया है जबकि लोकेश राहुल को बाहर रखा गया है.
भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच कहां खेला जाएगा? भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच 19 दिसंबर से एडिलेड में खेला जाएगा.
भारत-ऑस्ट्रेलिया के पहले टेस्ट मैच की टाइमिंग क्या होगी?
भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा. वहीं मैच का टॉस भारतीय समयानुसार सुबह नौ बजे शुरू होगा.
भारत-ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच का लाइव टेलीकास्ट कहां होगा?
भारत- ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग कहां देख सकते हैं?
भारत- ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सोनी लिव, जियो टीवी और एयरटेल एक्सट्रीम पर देखी जा सकती है. इसके अलावा स्कोरबोर्ड और मैच से जुड़ी अपडेट के लिए आप tv9bharatvarsh.com पर भी लॉग इन कर सकते हैं.
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गुरुवार से चार टेस्ट मैचों की सीरीज की शुरुआत होने वाली है. एडिलेड में दोनों टीमों के बीच खेला जाना वाला यह पहला टेस्ट मैच डे-नाइट होने वाला है. भारतीय टीम ने बुधवार को ही टीम की प्लेइंग इलेवन का ऐलान कर दिया. इस मुकाबले को विराट कोहली बनाम स्टीव स्मिथ भी माना जा रहा है. टीम इंडिया ऑस्ट्रेलियाई स्टार खिलाड़ी स्टीव स्मिथ को रोकने की कोशिश में होगें वहीं कंगारुओं के निशाने पर भारत के कप्तान विराट कोहली होंगे. बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी के लिए सीरीज के इस पहले मुकाबले में ऋद्धिमान साहा को ही विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, युवा पृथ्वी शॉ को भी शामिल किया गया है जबकि लोकेश राहुल को बाहर रखा गया है. भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच कहां खेला जाएगा? भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच उन्नीस दिसंबर से एडिलेड में खेला जाएगा. भारत-ऑस्ट्रेलिया के पहले टेस्ट मैच की टाइमिंग क्या होगी? भारत-ऑस्ट्रेलिया का पहला टेस्ट मैच सुबह नौ बजकर तीस मिनट से शुरू होगा. वहीं मैच का टॉस भारतीय समयानुसार सुबह नौ बजे शुरू होगा. भारत-ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच का लाइव टेलीकास्ट कहां होगा? भारत- ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग कहां देख सकते हैं? भारत- ऑस्ट्रेलिया पहले टेस्ट मैच की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सोनी लिव, जियो टीवी और एयरटेल एक्सट्रीम पर देखी जा सकती है. इसके अलावा स्कोरबोर्ड और मैच से जुड़ी अपडेट के लिए आप tvनौbharatvarsh.com पर भी लॉग इन कर सकते हैं.
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उन्होंने कहा की सरकार किसान आंदोलन से निपटने के लिए खुले मन से चर्चा कर रही है। किसानों की मांगों पर सरकार तीनों कानूनों में संशोधन के लिए भी तैयार हो गई है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। किसान भी अपनी बात रख रहे हैं और सरकार उन्हें सुन भी रही है। राजस्थान में भी किसानों की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और जिला परिषदों व पंचायत समिति सदस्यों के चुनावों में गांवों में मतदाताओं ने भाजपा पर विश्वास प्रकट किया है। वह भी तब, जब यहां के मंत्री खुद अपने इलाकों में पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में घूम रहे थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का निर्वाचन क्षेत्र हो या फिर पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का क्षेत्र टोंक, सभी स्थानों पर मतदाताओं ने कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को ठुकरा दिया। ये आने वाले समय का संकेत है कि मतदाता किस तरफ जा रहा है।
कांग्रेस ने परिसीमन किया, पैसों का जोर दिखाया, फिर भी राजस्थान चुनाव में इस बार हमारी जीत और उनकी हार का अंतर काफी ज्यादा रहा। जावड़ेकर ने ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव के नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को 49 सीटें मिलीं, जबकि सत्ताधारी टीआरएस को 55 सीटें मिलीं, लेकिन बड़ी बात यह है कि बीजेपी को टीआरएस से भी ज्यादा वोट मिले। नतीजे दिखाते हैं कि तेलंगाना में जनता बीजेपी को पसंद करने लगी है। हैदराबाद के अलावा अरुणाचल में भी बीजेपी को भारी सफलता मिली है। ग्राम पंचायत की 8291 सीटों में से 5410 सीटें बीजेपी को निर्विरोध मिल गई हैं। बीजेपी के सामने इन सीटों पर कोई चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि जनता ने बीजेपी को पंसद किया।
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उन्होंने कहा की सरकार किसान आंदोलन से निपटने के लिए खुले मन से चर्चा कर रही है। किसानों की मांगों पर सरकार तीनों कानूनों में संशोधन के लिए भी तैयार हो गई है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। किसान भी अपनी बात रख रहे हैं और सरकार उन्हें सुन भी रही है। राजस्थान में भी किसानों की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और जिला परिषदों व पंचायत समिति सदस्यों के चुनावों में गांवों में मतदाताओं ने भाजपा पर विश्वास प्रकट किया है। वह भी तब, जब यहां के मंत्री खुद अपने इलाकों में पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में घूम रहे थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का निर्वाचन क्षेत्र हो या फिर पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का क्षेत्र टोंक, सभी स्थानों पर मतदाताओं ने कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को ठुकरा दिया। ये आने वाले समय का संकेत है कि मतदाता किस तरफ जा रहा है। कांग्रेस ने परिसीमन किया, पैसों का जोर दिखाया, फिर भी राजस्थान चुनाव में इस बार हमारी जीत और उनकी हार का अंतर काफी ज्यादा रहा। जावड़ेकर ने ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव के नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को उनचास सीटें मिलीं, जबकि सत्ताधारी टीआरएस को पचपन सीटें मिलीं, लेकिन बड़ी बात यह है कि बीजेपी को टीआरएस से भी ज्यादा वोट मिले। नतीजे दिखाते हैं कि तेलंगाना में जनता बीजेपी को पसंद करने लगी है। हैदराबाद के अलावा अरुणाचल में भी बीजेपी को भारी सफलता मिली है। ग्राम पंचायत की आठ हज़ार दो सौ इक्यानवे सीटों में से पाँच हज़ार चार सौ दस सीटें बीजेपी को निर्विरोध मिल गई हैं। बीजेपी के सामने इन सीटों पर कोई चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि जनता ने बीजेपी को पंसद किया।
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मोबाइल फोन आज के समय में एक जरूरत बन गया है। ऐसे में हम पूरे दिन अपने फोन को कई बार छूते हैं जिस कारण अनजाने में हमारे हाथों पर मौजूद कीटाणु फोन की स्क्रीन पर आ जाते हैं फिर जब हम उस फोन को कान से लगाते हैं तो यह हमारे चेहरे पर। इसलिए फोन को समय-समय पर कीटाणुमुक्त और साफ करना बेहद जरूरी होता है। चलिए जानते हैं मोबाइल फोन को आसानी से साफ करने का तरीका।
आमतौर पर लोग फोन को साफ करने के लिए हल्के गीले कपड़े का इस्तेमाल करते हैं, जो फोन को साफ करने का सही तरीका नहीं है। अगर आप फोन को सच में कीटाणुमुक्त करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने फोन के बैक कवर को हटा दें क्योंकि कवर और फोन के बीच काफी गैप होता है जहां गंदगी और कीटाणु रह जाते हैं। इसके बाद किसी साफ और सूखे कपड़े से फोन को पोंछे।
जैसा कि हम जानते ही हैं कि फोन एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है इसलिए उसे साफ करने के लिए पानी का इस्तेमाल न करें। आप चाहें तो फोन को साफ करने के लिए एक क्लीनिंग सॉल्यूशन तैयार कर सकते हैं। बस इसके लिए आधा कप पानी में एक बूंद लिक्विड सोप डालकर मिलाएं। अब इस मिश्रण में एक माइक्रोफाइबर कपड़ा डुबोएं और अतिरिक्त पानी को अच्छे से निचोड़ लें। ध्यान रहें कि कपड़े में बिल्कुल भी पानी नहीं होना चाहिए।
अब माइक्रोफाइबर कपड़े से मोबाइल के कवर और फोन के हार्ड एरिया और गैर-चिकनी सतहों को रगड़ें। हालांकि, इसकी सफाई के दौरान ध्यान रखें कि मॉइश्चर फोन पोर्ट में बिल्कुल भी न जाए क्योंकि इससे फोन के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद जरूरी है कि फोन को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह सुखाया जाए। इसलिए इसे 5-10 मिनट के लिए हवा में सूखने दें ताकि फोन में किसी तरह की नमी न रह जाए।
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मोबाइल फोन आज के समय में एक जरूरत बन गया है। ऐसे में हम पूरे दिन अपने फोन को कई बार छूते हैं जिस कारण अनजाने में हमारे हाथों पर मौजूद कीटाणु फोन की स्क्रीन पर आ जाते हैं फिर जब हम उस फोन को कान से लगाते हैं तो यह हमारे चेहरे पर। इसलिए फोन को समय-समय पर कीटाणुमुक्त और साफ करना बेहद जरूरी होता है। चलिए जानते हैं मोबाइल फोन को आसानी से साफ करने का तरीका। आमतौर पर लोग फोन को साफ करने के लिए हल्के गीले कपड़े का इस्तेमाल करते हैं, जो फोन को साफ करने का सही तरीका नहीं है। अगर आप फोन को सच में कीटाणुमुक्त करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने फोन के बैक कवर को हटा दें क्योंकि कवर और फोन के बीच काफी गैप होता है जहां गंदगी और कीटाणु रह जाते हैं। इसके बाद किसी साफ और सूखे कपड़े से फोन को पोंछे। जैसा कि हम जानते ही हैं कि फोन एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है इसलिए उसे साफ करने के लिए पानी का इस्तेमाल न करें। आप चाहें तो फोन को साफ करने के लिए एक क्लीनिंग सॉल्यूशन तैयार कर सकते हैं। बस इसके लिए आधा कप पानी में एक बूंद लिक्विड सोप डालकर मिलाएं। अब इस मिश्रण में एक माइक्रोफाइबर कपड़ा डुबोएं और अतिरिक्त पानी को अच्छे से निचोड़ लें। ध्यान रहें कि कपड़े में बिल्कुल भी पानी नहीं होना चाहिए। अब माइक्रोफाइबर कपड़े से मोबाइल के कवर और फोन के हार्ड एरिया और गैर-चिकनी सतहों को रगड़ें। हालांकि, इसकी सफाई के दौरान ध्यान रखें कि मॉइश्चर फोन पोर्ट में बिल्कुल भी न जाए क्योंकि इससे फोन के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके बाद जरूरी है कि फोन को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह सुखाया जाए। इसलिए इसे पाँच-दस मिनट के लिए हवा में सूखने दें ताकि फोन में किसी तरह की नमी न रह जाए।
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दिल्ली. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में 15 से 24 नवंबर तक वीमंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप आयोजित की जाएगी लेकिन इससे पहले मैरीकाॅम तैयारियों में जुटती हुईं नजर आ रही हैं. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो शेयर किया जिसमें वह खेल मंत्री और ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के साथ बॉक्सिंग करते दिख रही हैं.
राज्यवर्धन सिंह राठौर मुक्केबाजी की उस्ताद मैरीकॉम से बचते नजर आए. एक तरफ जहां मैरी उनपर पंच पर पंच बरसा रही थीं तो वहीं राज्यवर्धन उनके प्रहार को रोक भी नहीं पा रहे थे. सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है.
पिछली बार भारत में वर्ल्ड चैंपियनशिप 2006 में हुई थी, जहां मैरी ने गोल्ड जीता था. इस बार मैरी को इस 10वें वर्ल्ड चैंपियनशिप का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया है.
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दिल्ली. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में पंद्रह से चौबीस नवंबर तक वीमंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप आयोजित की जाएगी लेकिन इससे पहले मैरीकाॅम तैयारियों में जुटती हुईं नजर आ रही हैं. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो शेयर किया जिसमें वह खेल मंत्री और ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के साथ बॉक्सिंग करते दिख रही हैं. राज्यवर्धन सिंह राठौर मुक्केबाजी की उस्ताद मैरीकॉम से बचते नजर आए. एक तरफ जहां मैरी उनपर पंच पर पंच बरसा रही थीं तो वहीं राज्यवर्धन उनके प्रहार को रोक भी नहीं पा रहे थे. सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है. पिछली बार भारत में वर्ल्ड चैंपियनशिप दो हज़ार छः में हुई थी, जहां मैरी ने गोल्ड जीता था. इस बार मैरी को इस दसवें वर्ल्ड चैंपियनशिप का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया है.
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न्यूयार्क। अमेरिका के पेंसिल्वेनिया से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक महिला टीचर को अपने नाबालिग छात्र के साथ संबंध बनाते रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
बताया जा रहा है कि गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप के बहाने टीचर नाबालिग छात्र का लगातार यौन शोषण करती रही। हालांकि उसे ऐसा करते कुछ अन्य छात्रों ने देख लिया और पूरे मामले की जानकारी स्कूल के प्रिंसिपल को दी। प्रिंसिपल की शिकायत पर आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के अनुसार, वर्नी नाम की एक महिला टीचर ने अपने नाबालिग छात्र के साथ पूरी गर्मी की छुट्टियों के दौरान संबंध बनाए और अश्लील हरकतें की। जब वह पकड़ी कई तो उसने ऐसी किसी भी घटना से इंकार कर दिया।
बाद में जब पुलिस ने छात्र से पूछताछ की तो उसने सारा सच बता दिया। पुलिस ने छात्र के बयान के आधार पर आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया है।
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न्यूयार्क। अमेरिका के पेंसिल्वेनिया से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक महिला टीचर को अपने नाबालिग छात्र के साथ संबंध बनाते रंगे हाथों पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप के बहाने टीचर नाबालिग छात्र का लगातार यौन शोषण करती रही। हालांकि उसे ऐसा करते कुछ अन्य छात्रों ने देख लिया और पूरे मामले की जानकारी स्कूल के प्रिंसिपल को दी। प्रिंसिपल की शिकायत पर आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के अनुसार, वर्नी नाम की एक महिला टीचर ने अपने नाबालिग छात्र के साथ पूरी गर्मी की छुट्टियों के दौरान संबंध बनाए और अश्लील हरकतें की। जब वह पकड़ी कई तो उसने ऐसी किसी भी घटना से इंकार कर दिया। बाद में जब पुलिस ने छात्र से पूछताछ की तो उसने सारा सच बता दिया। पुलिस ने छात्र के बयान के आधार पर आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया है।
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अभिनेत्री काजल ने अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को खूब एंजॉय किया है. बेटे के जन्म के बाद से काजल अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं, हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टा पर एक प्यारा सा पोस्ट शेयर किया है. पोस्ट में काजल ने अपनी प्रेगनेंसी का अनुभव शेयर किया है.
साउथ फिल्म इंडस्ट्री की मश्हूर अभिनेत्री काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal) हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है. अपनी प्रेगनेंसी के अनुभव को अभिनेत्री आए दिन सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं. काजल ने अपने प्रेग्नेंसी पीरियड (Pregnancy period) को खूब एंजॉय किया है. वो हमेशा से ही अपने होने वाले बच्चे को लेकर काफी एक्साइटेड रहती थीं. वह अक्सर सोशल मीडिया पर अपना बेबी बंप फ्लॉन्ट (Baby Bump Flaunt) करती नजर आती थीं. वहीं, अब काजल अग्रवाल ने अपने ऑफिशियल इंस्टा हैंडल पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है. तस्वीर के साथ उन्होंने एक प्यारा सा कैप्शन भी दिया है. इस तस्वीर में काजल की प्यारी सी स्माइल हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
पोस्ट के साथ जुड़ा उनका ये प्यारा सा मैसेज इस दुनिया में आए उनके बच्चे के नाम है. साथ ही, इस कैप्शन में उन्होंने अपने प्रेगनेंसी पीरियड के बारे में भी बताया है. वो अपने बच्चे नील का इस दुनिया में स्वागत करने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं. वो लिखती हैं कि ये जन्म उत्साहजनक, भारी, लंबा था, फिर भी सबसे संतोषजनक अनुभव साबित हुआ! उन्होंने लिखा इस बच्चे की वजह से उन्होंने प्यार की सबसे गहरी क्षमता को समझा है. साथ ही, इस दौरान काजल ने जबरदस्त कृतज्ञता का अनुभव किया और एक ही वक्त में शरीर के बाहर अपने दिल की जिम्मेदारी का भी एहसास किया.
उन्होंने अपने प्रेगनेंसी के अनुभव को सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए बताया कि बेशक यह उनके लिए आसान नहीं था- 3 रातों की नींद हराम, सुबह-सुबह खून बहना, कुंडी और डकार लेना सीखना, पेट दर्द और खिंची हुई त्वचा, जमे हुए पैड, स्तन पंप, अनिश्चितता इन सबके बावजूद लगातार चिंता अलग. उन्होंने हर वो अनुभव लिखा जो एक गर्भवती मां अपने प्रेगनेंसी के दौरान महसूस करती है.
साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि इतनी तकलीफों के बावजूद यह भी ऐसे पल हैं जो दर्द में भी मीठे लगते हैं. सुबह-सुबह गले मिलना, एक-दूसरे की आंखों में आत्मविश्वास से भरी पहचान, मनमोहक छोटे चुंबन, शांत पल जब सिर्फ हम दोनों होते हैं, बढ़ रहे हैं, सीख रहे हैं, एक-दूसरे को खोज रहे हैं और एक साथ इस अद्भुत यात्रा को नेविगेट कर रहे हैं. अपने पोस्ट के अंत में एक्ट्रेस ने लिखा वास्तव में, प्रसवोत्तर (Pregnancy) ग्लैमरस नहीं है लेकिन यह निश्चित रूप से सुंदर हो सकती है!
काजल की ओर से यह खूबसूरत पोस्ट हर उस मां के लिए है जो अपने प्रेगनेंसी का अनुभव कर रही है और इस दुनिया में अपने आने वाले बच्चे को महसूस कर रही हैं. काजल अग्रवाल के इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है. इस तस्वीर में मां की ममता साफ झलक रही है, जिससे लोग अपने आप को इमोनली कनेक्ट कर पा रहे हैं.
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अभिनेत्री काजल ने अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को खूब एंजॉय किया है. बेटे के जन्म के बाद से काजल अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं, हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टा पर एक प्यारा सा पोस्ट शेयर किया है. पोस्ट में काजल ने अपनी प्रेगनेंसी का अनुभव शेयर किया है. साउथ फिल्म इंडस्ट्री की मश्हूर अभिनेत्री काजल अग्रवाल हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है. अपनी प्रेगनेंसी के अनुभव को अभिनेत्री आए दिन सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं. काजल ने अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को खूब एंजॉय किया है. वो हमेशा से ही अपने होने वाले बच्चे को लेकर काफी एक्साइटेड रहती थीं. वह अक्सर सोशल मीडिया पर अपना बेबी बंप फ्लॉन्ट करती नजर आती थीं. वहीं, अब काजल अग्रवाल ने अपने ऑफिशियल इंस्टा हैंडल पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है. तस्वीर के साथ उन्होंने एक प्यारा सा कैप्शन भी दिया है. इस तस्वीर में काजल की प्यारी सी स्माइल हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. पोस्ट के साथ जुड़ा उनका ये प्यारा सा मैसेज इस दुनिया में आए उनके बच्चे के नाम है. साथ ही, इस कैप्शन में उन्होंने अपने प्रेगनेंसी पीरियड के बारे में भी बताया है. वो अपने बच्चे नील का इस दुनिया में स्वागत करने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं. वो लिखती हैं कि ये जन्म उत्साहजनक, भारी, लंबा था, फिर भी सबसे संतोषजनक अनुभव साबित हुआ! उन्होंने लिखा इस बच्चे की वजह से उन्होंने प्यार की सबसे गहरी क्षमता को समझा है. साथ ही, इस दौरान काजल ने जबरदस्त कृतज्ञता का अनुभव किया और एक ही वक्त में शरीर के बाहर अपने दिल की जिम्मेदारी का भी एहसास किया. उन्होंने अपने प्रेगनेंसी के अनुभव को सोशल प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए बताया कि बेशक यह उनके लिए आसान नहीं था- तीन रातों की नींद हराम, सुबह-सुबह खून बहना, कुंडी और डकार लेना सीखना, पेट दर्द और खिंची हुई त्वचा, जमे हुए पैड, स्तन पंप, अनिश्चितता इन सबके बावजूद लगातार चिंता अलग. उन्होंने हर वो अनुभव लिखा जो एक गर्भवती मां अपने प्रेगनेंसी के दौरान महसूस करती है. साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि इतनी तकलीफों के बावजूद यह भी ऐसे पल हैं जो दर्द में भी मीठे लगते हैं. सुबह-सुबह गले मिलना, एक-दूसरे की आंखों में आत्मविश्वास से भरी पहचान, मनमोहक छोटे चुंबन, शांत पल जब सिर्फ हम दोनों होते हैं, बढ़ रहे हैं, सीख रहे हैं, एक-दूसरे को खोज रहे हैं और एक साथ इस अद्भुत यात्रा को नेविगेट कर रहे हैं. अपने पोस्ट के अंत में एक्ट्रेस ने लिखा वास्तव में, प्रसवोत्तर ग्लैमरस नहीं है लेकिन यह निश्चित रूप से सुंदर हो सकती है! काजल की ओर से यह खूबसूरत पोस्ट हर उस मां के लिए है जो अपने प्रेगनेंसी का अनुभव कर रही है और इस दुनिया में अपने आने वाले बच्चे को महसूस कर रही हैं. काजल अग्रवाल के इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है. इस तस्वीर में मां की ममता साफ झलक रही है, जिससे लोग अपने आप को इमोनली कनेक्ट कर पा रहे हैं.
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PATNA : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जातीय जनगणना के मसले पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू कर दी है. पार्टी कार्यालय में तेजस्वी यादव इस वक्त मीडिया से बातचीत कर रहे हैं. लेकिन बड़ी खबर यह है कि तेजस्वी यादव की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जगदानंद सिंह नहीं पहुंचे हैं. आज सुबह जब तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया था. उस वक्त यह माना जा रहा था कि संभवत प्रदेश कार्यालय में वापस लौट आएंगे. लेकिन जगदानंद सिंह ने तेजस्वी यादव की प्रेस वार्ता से भी दूरी बना ली है.
तेजस्वी यादव की प्रेस वार्ता में उनके साथ पूर्व विधायक भोला यादव और पूर्व मंत्री अशोक सिंह मौजूद हैं. तस्वीर यादव ने जातीय जनगणना के मसले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. आपको बता दें कि जगदानंद सिंह तेज प्रताप यादव के बयान से नाराज होने के बाद लगातार पार्टी कार्यालय से दूरी बनाए हुए हैं. सोमवार से लेकर अब तक के जगदा बाबू प्रदेश कार्यालय नहीं पहुंचे हैं.
तेजस्वी यादव ने जब ऐलान किया था कि वह प्रेस वार्ता पार्टी कार्यालय में करेंगे. तो यह उम्मीद जताई गई थी कि शायद अब जगदानंद सिंह की वापसी हो जाए लेकिन इस बार जगदानंद सिंह ने तेज प्रताप के बयान को लेकर खूंटा गाड़ दिया है.
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PATNA : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जातीय जनगणना के मसले पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू कर दी है. पार्टी कार्यालय में तेजस्वी यादव इस वक्त मीडिया से बातचीत कर रहे हैं. लेकिन बड़ी खबर यह है कि तेजस्वी यादव की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जगदानंद सिंह नहीं पहुंचे हैं. आज सुबह जब तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया था. उस वक्त यह माना जा रहा था कि संभवत प्रदेश कार्यालय में वापस लौट आएंगे. लेकिन जगदानंद सिंह ने तेजस्वी यादव की प्रेस वार्ता से भी दूरी बना ली है. तेजस्वी यादव की प्रेस वार्ता में उनके साथ पूर्व विधायक भोला यादव और पूर्व मंत्री अशोक सिंह मौजूद हैं. तस्वीर यादव ने जातीय जनगणना के मसले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. आपको बता दें कि जगदानंद सिंह तेज प्रताप यादव के बयान से नाराज होने के बाद लगातार पार्टी कार्यालय से दूरी बनाए हुए हैं. सोमवार से लेकर अब तक के जगदा बाबू प्रदेश कार्यालय नहीं पहुंचे हैं. तेजस्वी यादव ने जब ऐलान किया था कि वह प्रेस वार्ता पार्टी कार्यालय में करेंगे. तो यह उम्मीद जताई गई थी कि शायद अब जगदानंद सिंह की वापसी हो जाए लेकिन इस बार जगदानंद सिंह ने तेज प्रताप के बयान को लेकर खूंटा गाड़ दिया है.
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- #India Vs AustraliaIND vs Aus: भारत के लिए बोझ बना यह क्रिकेटर, फ्लॉप प्रदर्शन से सभी को किया निराश, टीम से छुट्टी तय!
- #India Vs Australiaटेस्ट कप्तानीः रोहित को एक और मौका, 40 दिन बाद क्या धोनी की तरह ले पाएंगे विदाई?
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का आगाज 9 फरवरी से नागपुर में हो रहा है। सीरीज के पहले टेस्ट मैच की तैयारी दोनों टीमें जोरशोर से कर रही हैं। सीरीज के आगाज से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम को दो बड़े झटके तो लग चुके हैं। टीम के दो स्पेशल गेंदबाज मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड चोट के कारण पहला टेस्ट मैच नहीं खेल पाएंगे, लेकिन इसके बावजूद भी ऑस्ट्रेलियाई बहुत मजबूत नजर आ रही है। टीम का बैटिंग लाइन अप अभी भी इतना खतरनाक है कि भारतीय गेंदबाजों की उनके सामने कड़ी परीक्षा होगी। वॉर्नर और स्मिथ की जोड़ी से निपटने के लिए भारतीय गेंदबाजों को खास तैयारी की जरूरत है।
डेविड वॉर्नर का हालिया टेस्ट फॉर्म बहुत ही शानदार है। वॉर्नर ने दिसंबर 2022 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच में डबल सेंचुरी लगाई थी। वो मैच वॉर्नर के टेस्ट करियर का 100वां टेस्ट था। उससे पहले वॉर्नर फॉर्म हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन वॉर्नर अब फॉर्म में लौट आए हैं। ऐसे में टीम इंडिया को वॉर्नर पर लगाम लगाने की सोचनी होगी। वॉर्नर को बांध कर रखने के लिए भारतीय कप्तान रोहित शर्मा आर अश्विन का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि अश्विन के सामने वॉर्नर का बल्ला खामोश रहता है। अश्विन के खिलाफ वॉर्नर के आंकड़े कुछ यही बयां करते हैं।
आपको बता दें कि डेविड वॉर्नर का अश्विन के खिलाफ रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा नहीं है। टेस्ट मैच की 18 पारियों में अश्विन ने वॉर्नर को 10 बार आउट किया है, जबकि वॉर्नर ने अश्विन के खिलाफ 20 से भी कम की औसत से रन बनाए हैं। वॉर्नर का अश्विन के खिलाफ औसत सिर्फ 18. 2 का है। डेविड वॉर्नर को टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा बार आउट करने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के नाम है। उन्होंने वॉर्नर को 14 बार आउट किया है। अश्विन इस मामले में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने वॉर्नर को 10 बार आउट किया है।
वैसे डेविड वॉर्नर भी खुद इस बात को जानते हैं कि उन्हें अश्विन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ता है और इस बार वो इस बैटल के लिए खास तैयारी भी कर रहे हैं। बेंगलुरु में डेविड वॉर्नर अपने ट्रेनिंग कैंप में एक स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे हैं, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में वॉर्नर बाएं हाथ के अलावा दाएं हाथ से भी बल्लेबाजी करने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। वॉर्नर के इस तरीके से साफ है कि वो भारतीय स्पिनरों के खिलाफ एक खास तैयारी में जुटे हैं। हो सकता है स्पिनर्स के खिलाफ वॉर्नर अधिक से अधिक रिवर्स स्वीप शॉट खेलें।
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- #India Vs AustraliaIND vs Aus: भारत के लिए बोझ बना यह क्रिकेटर, फ्लॉप प्रदर्शन से सभी को किया निराश, टीम से छुट्टी तय! - #India Vs Australiaटेस्ट कप्तानीः रोहित को एक और मौका, चालीस दिन बाद क्या धोनी की तरह ले पाएंगे विदाई? बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का आगाज नौ फरवरी से नागपुर में हो रहा है। सीरीज के पहले टेस्ट मैच की तैयारी दोनों टीमें जोरशोर से कर रही हैं। सीरीज के आगाज से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम को दो बड़े झटके तो लग चुके हैं। टीम के दो स्पेशल गेंदबाज मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड चोट के कारण पहला टेस्ट मैच नहीं खेल पाएंगे, लेकिन इसके बावजूद भी ऑस्ट्रेलियाई बहुत मजबूत नजर आ रही है। टीम का बैटिंग लाइन अप अभी भी इतना खतरनाक है कि भारतीय गेंदबाजों की उनके सामने कड़ी परीक्षा होगी। वॉर्नर और स्मिथ की जोड़ी से निपटने के लिए भारतीय गेंदबाजों को खास तैयारी की जरूरत है। डेविड वॉर्नर का हालिया टेस्ट फॉर्म बहुत ही शानदार है। वॉर्नर ने दिसंबर दो हज़ार बाईस में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच में डबल सेंचुरी लगाई थी। वो मैच वॉर्नर के टेस्ट करियर का एक सौवां टेस्ट था। उससे पहले वॉर्नर फॉर्म हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन वॉर्नर अब फॉर्म में लौट आए हैं। ऐसे में टीम इंडिया को वॉर्नर पर लगाम लगाने की सोचनी होगी। वॉर्नर को बांध कर रखने के लिए भारतीय कप्तान रोहित शर्मा आर अश्विन का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि अश्विन के सामने वॉर्नर का बल्ला खामोश रहता है। अश्विन के खिलाफ वॉर्नर के आंकड़े कुछ यही बयां करते हैं। आपको बता दें कि डेविड वॉर्नर का अश्विन के खिलाफ रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा नहीं है। टेस्ट मैच की अट्ठारह पारियों में अश्विन ने वॉर्नर को दस बार आउट किया है, जबकि वॉर्नर ने अश्विन के खिलाफ बीस से भी कम की औसत से रन बनाए हैं। वॉर्नर का अश्विन के खिलाफ औसत सिर्फ अट्ठारह. दो का है। डेविड वॉर्नर को टेस्ट करियर में सबसे ज्यादा बार आउट करने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के नाम है। उन्होंने वॉर्नर को चौदह बार आउट किया है। अश्विन इस मामले में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने वॉर्नर को दस बार आउट किया है। वैसे डेविड वॉर्नर भी खुद इस बात को जानते हैं कि उन्हें अश्विन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ता है और इस बार वो इस बैटल के लिए खास तैयारी भी कर रहे हैं। बेंगलुरु में डेविड वॉर्नर अपने ट्रेनिंग कैंप में एक स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे हैं, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में वॉर्नर बाएं हाथ के अलावा दाएं हाथ से भी बल्लेबाजी करने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। वॉर्नर के इस तरीके से साफ है कि वो भारतीय स्पिनरों के खिलाफ एक खास तैयारी में जुटे हैं। हो सकता है स्पिनर्स के खिलाफ वॉर्नर अधिक से अधिक रिवर्स स्वीप शॉट खेलें।
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सत्यजित् ने तीसरा धनुष उठाया ही था कि अर्जुन ने उसकी प्रत्यंचा भी काट दी । भीम ने अपनी गदा उठाई और एक क्षण का भी विलंब होता तो सत्यजित् के रथ के घोड़ों में से एक अवश्य ही मार दिया होता । सत्यजित् का सारथि, भीम की गदा से अधिक गतिशील निकला । उसने रथ मोड़ा और उसे सुरक्षित निकालकर अपनी सेना में जा छिपा
द्रुपद ने देखा, अब पांडवों को रोकने वाला कोई नहीं था । निश्चित रूप से उन्हें इस प्रकार निर्विरोध रूप से आगे बढ़ने नहीं दिया जा सकता था; अन्यथा वे सारे कांपिल्य को अपने पैरों तले रौंद सकते थे । द्रुपद के मन में, इन भाइयों के लिए प्रशंसा का भाव जागा : कहाँ वे दुर्योधन, कर्ण, शकुनि, दुःशासन और विकर्ण अपनी समस्त सेना के साथ भीत मूषिक के समान भाग गए थे; और कहाँ ये चार भाई मात्र अपने बल, वीरता और रण-कौशल पर, पांचालों के काल बने हुए हैं। किंतु यह सराहना का समय नहीं था, अन्यथा सारी पांचाल सेना ध्वस्त हो जाएगी.
द्रुपद ने अपना रथ लाकर अर्जुन के सम्मुख खड़ा कर दिया। द्रुपद को लगा कि उसने अर्जुन को चाहे कितनी भी सराहना क्यों न की हो, किंतु उसने, उसके वल को कम ही आँका था । अर्जुन के धनुर्संचालन में स्पष्ट रूप से द्रोण के प्रशिक्षण की छाप थी । द्रुपद ने स्वयं द्रोण के शस्त्र - गुरु ऋषि अग्निवेश से शस्त्र - विद्या प्राप्त की थी। उन दिनों धनुर्धर के रूप में वह किसी भी प्रकार द्रोण से तनिक भी अशक्त नहीं था; किंतु लगता था, द्रोण ने उसके पश्चात अपना बहुत विकास किया था । इस विकास का अनुभव द्रुपद ने धृष्टद्युम्न और शिखंडी के प्रशिक्षण में भी अनुभव किया था । किंतु शायद घृष्टद्युम्न और शिखंडी ने भी द्रोण से वह सब नही पाया था, जो अर्जुन ने प्राप्त किया था बहुत संभव है कि द्रोण ने यह सब भार्गव परशुराम से पाया हो । या फिर द्रोण का यह अपना अभ्यास भी हो सकता है । द्रुपद को लगा, उसका शस्त्र-ज्ञान शायद उतना ही था, जितना वह. गुरुकुल से लेकर निकला था। उसके पश्चात के युद्धों में उसने अपना अभ्यास बढ़ाया था, ज्ञान नहीं । अभ्यास में उसने कुछ विषयों में स्वयं को पारंगत कर लिया था, तो कुछ विधियों की उपेक्षा भी की थी; किंतु उसने अपने ज्ञान का विकास नहीं किया था । आज उसके गुरुभाई द्रोण का यह शिष्य, उसके सम्मुख खड़ा, अपने बाण-संधान से यह प्रकट कर रहा था कि द्रोण ने गुरुकुल छोड़ने के पश्चात के इन वर्षों में क्या-क्या उपलब्ध कर लिया था। यह अपने वाणों से अपने गुरु की उपलब्धियों की यशोगाथा अंकितं कर रहा था । और फिर पंचालराज द्रुपद का वह वय भी नहीं रहा । अर्जुन का वय धृष्टद्युम्न के लगभग ही रहा होगा। उसकी स्फूर्ति, उसकी शक्ति, उसकी ऊर्जा कितना अच्छा होता यदि धृष्टद्युम्न और शिखंडी आज यहाँ होते...
306 / महासमर - 2
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सत्यजित् ने तीसरा धनुष उठाया ही था कि अर्जुन ने उसकी प्रत्यंचा भी काट दी । भीम ने अपनी गदा उठाई और एक क्षण का भी विलंब होता तो सत्यजित् के रथ के घोड़ों में से एक अवश्य ही मार दिया होता । सत्यजित् का सारथि, भीम की गदा से अधिक गतिशील निकला । उसने रथ मोड़ा और उसे सुरक्षित निकालकर अपनी सेना में जा छिपा द्रुपद ने देखा, अब पांडवों को रोकने वाला कोई नहीं था । निश्चित रूप से उन्हें इस प्रकार निर्विरोध रूप से आगे बढ़ने नहीं दिया जा सकता था; अन्यथा वे सारे कांपिल्य को अपने पैरों तले रौंद सकते थे । द्रुपद के मन में, इन भाइयों के लिए प्रशंसा का भाव जागा : कहाँ वे दुर्योधन, कर्ण, शकुनि, दुःशासन और विकर्ण अपनी समस्त सेना के साथ भीत मूषिक के समान भाग गए थे; और कहाँ ये चार भाई मात्र अपने बल, वीरता और रण-कौशल पर, पांचालों के काल बने हुए हैं। किंतु यह सराहना का समय नहीं था, अन्यथा सारी पांचाल सेना ध्वस्त हो जाएगी. द्रुपद ने अपना रथ लाकर अर्जुन के सम्मुख खड़ा कर दिया। द्रुपद को लगा कि उसने अर्जुन को चाहे कितनी भी सराहना क्यों न की हो, किंतु उसने, उसके वल को कम ही आँका था । अर्जुन के धनुर्संचालन में स्पष्ट रूप से द्रोण के प्रशिक्षण की छाप थी । द्रुपद ने स्वयं द्रोण के शस्त्र - गुरु ऋषि अग्निवेश से शस्त्र - विद्या प्राप्त की थी। उन दिनों धनुर्धर के रूप में वह किसी भी प्रकार द्रोण से तनिक भी अशक्त नहीं था; किंतु लगता था, द्रोण ने उसके पश्चात अपना बहुत विकास किया था । इस विकास का अनुभव द्रुपद ने धृष्टद्युम्न और शिखंडी के प्रशिक्षण में भी अनुभव किया था । किंतु शायद घृष्टद्युम्न और शिखंडी ने भी द्रोण से वह सब नही पाया था, जो अर्जुन ने प्राप्त किया था बहुत संभव है कि द्रोण ने यह सब भार्गव परशुराम से पाया हो । या फिर द्रोण का यह अपना अभ्यास भी हो सकता है । द्रुपद को लगा, उसका शस्त्र-ज्ञान शायद उतना ही था, जितना वह. गुरुकुल से लेकर निकला था। उसके पश्चात के युद्धों में उसने अपना अभ्यास बढ़ाया था, ज्ञान नहीं । अभ्यास में उसने कुछ विषयों में स्वयं को पारंगत कर लिया था, तो कुछ विधियों की उपेक्षा भी की थी; किंतु उसने अपने ज्ञान का विकास नहीं किया था । आज उसके गुरुभाई द्रोण का यह शिष्य, उसके सम्मुख खड़ा, अपने बाण-संधान से यह प्रकट कर रहा था कि द्रोण ने गुरुकुल छोड़ने के पश्चात के इन वर्षों में क्या-क्या उपलब्ध कर लिया था। यह अपने वाणों से अपने गुरु की उपलब्धियों की यशोगाथा अंकितं कर रहा था । और फिर पंचालराज द्रुपद का वह वय भी नहीं रहा । अर्जुन का वय धृष्टद्युम्न के लगभग ही रहा होगा। उसकी स्फूर्ति, उसकी शक्ति, उसकी ऊर्जा कितना अच्छा होता यदि धृष्टद्युम्न और शिखंडी आज यहाँ होते... तीन सौ छः / महासमर - दो
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मयंक के बाद श्रीकर भारत ने 77 गेंदों में पांच चौके और चार छक्कों की मदद से 64 रनों की पारी खेली। हनुमा विहारी ने 108 गेंदों की पारी में 53 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल है। अक्षर पटेल 33 रनों पर नाबाद लौटे।
अपनी दूसरी पारी खेलने उतरी साउथ अफ्रीका-ए को मोहम्मद सिराज ने अच्छी शुरुआत से वंचित रखा। सिराज ने सारेल इरवी (3), पीटर मलान (0) और कप्तान खाया जोंडो को छह के कुल स्कोर पर अपने तीन ओवरों में पवेलियन भेज मेहमान टीम को दबाव में ला दिया।
जुबेर हमजा (नाबाद 46) और सेनुरान मुथुसामी (नाबाद 41) ने चौथे विकेट के लिए 86 रनों की साझेदारी कर टीम को कुछ राहत दी। सिराज ने सेनुरान को 92 के कुल स्कोर पर इस साझेदारी को तोड़ा। हमजा के साथ रूडी सेकेंड चार रन बनाकर खड़े हुए हैं।
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मयंक के बाद श्रीकर भारत ने सतहत्तर गेंदों में पांच चौके और चार छक्कों की मदद से चौंसठ रनों की पारी खेली। हनुमा विहारी ने एक सौ आठ गेंदों की पारी में तिरेपन रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल है। अक्षर पटेल तैंतीस रनों पर नाबाद लौटे। अपनी दूसरी पारी खेलने उतरी साउथ अफ्रीका-ए को मोहम्मद सिराज ने अच्छी शुरुआत से वंचित रखा। सिराज ने सारेल इरवी , पीटर मलान और कप्तान खाया जोंडो को छह के कुल स्कोर पर अपने तीन ओवरों में पवेलियन भेज मेहमान टीम को दबाव में ला दिया। जुबेर हमजा और सेनुरान मुथुसामी ने चौथे विकेट के लिए छियासी रनों की साझेदारी कर टीम को कुछ राहत दी। सिराज ने सेनुरान को बानवे के कुल स्कोर पर इस साझेदारी को तोड़ा। हमजा के साथ रूडी सेकेंड चार रन बनाकर खड़े हुए हैं।
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रेडमी इंडिया ने भारत में जल्द लॉन्च होने वाले Xiaomi Redmi K20 Pro को लेकर खुलासा किया है। कंपनी का इस फोन का टीजर लॉन्च किया है और दावा किया है कि ये 'दुनिया का सबसे फास्ट फोन' है। वहीं कंपनी के टीजर जारी करने से इस बात की पुष्टि हो गई है कि यह फोन अगले महीने लॉन्च होने जा रहा है।
कंपनी Xiaomi Redmi K20 Pro फोन को Redmi K20 के साथ ही लॉन्च करेगी। शाओमी Xiaomi Redmi K20 Pro को पिछले महीने चीन में लांच कर चुकी है। शाओमी के ग्लोबल वाइस प्रेसीडेंट और शाओमी इंडिया के एमडी मनु कुमार जैन ने पहले ही एलान किया था कि इन दोनों स्मार्टफोन को जल्द ही लांच किया जाएगा।
वहीं अपने टीजर में शाओमी ने OnePlus 7 Pro पर तंज कसते हुए लिखा है 'कुछ सेलिब्रेशंस की उम्र बेहद छोटी होती है'। इसे साबित होता है रेडमी फ्लैगशिप OnePlus 7 Pro फ्लैगशिप पर भारी पड़ने वाला है।
कंपनी ने चीन में जब Redmi K20 Pro को लांच किया था, तब इसके 6जीबी रैम और 64जीबी स्टोरेज वाले वर्जन की कीमत 24999 युआन यानी तकरीबन 25 हजार रुपये रखी थी। वहीं 6जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वर्जन की कीमत 2799 युआन यानी 28 हजार रुपये रखी थी। जबकि 8जीबी रैम और 256जीबी वर्जन वाले फोन की कीमत 2999 युआन यानी 30 हजार भारतीय रुपये रखी थी।
भारत में लॉन्च होने वाले Redmi K20 Pro में वहीं फीचर हो सकते हैं, चीन में लॉन्च हुए फोन में हैं। इस फोन में 12340×1080 पिक्सल्स रिजॉल्यूशन के साथ 6. 39 इंच की फुल एचडी एमोल्ड डिस्प्ले, 19:5:9 अस्पेक्ट रेशियो और इऩ-डिस्प्ले फिंगर प्रिंट सेंसर दिया गया है। साथ ही इसमें 20एमपी का पॉप-अप सेल्फी कैमरा कैमरा और 3. 5एमएम हेडफोन जैक भी मिलेगा।
इस डिवाइस में क्वैलकॉम स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर मिलेगा और 8जीबी की रैम और 256जीबी की इंटरनल स्टोरेज मिलेगी। फोन में ट्रिपल रिअर कैमरा मिलेगा, जिसमें f/1. 75 अपरचर के साथ 48एमपी का प्राइमरी सेंसर, 13 एमपी का वाइड-एंगल लेंस और 2X जूम के साथ 8एमपी का टेलीफोटो लेंस मिलेगा। फोन में 4,000mAh बैटरी के साथ 27W की फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी मिलेगी।
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रेडमी इंडिया ने भारत में जल्द लॉन्च होने वाले Xiaomi Redmi Kबीस Pro को लेकर खुलासा किया है। कंपनी का इस फोन का टीजर लॉन्च किया है और दावा किया है कि ये 'दुनिया का सबसे फास्ट फोन' है। वहीं कंपनी के टीजर जारी करने से इस बात की पुष्टि हो गई है कि यह फोन अगले महीने लॉन्च होने जा रहा है। कंपनी Xiaomi Redmi Kबीस Pro फोन को Redmi Kबीस के साथ ही लॉन्च करेगी। शाओमी Xiaomi Redmi Kबीस Pro को पिछले महीने चीन में लांच कर चुकी है। शाओमी के ग्लोबल वाइस प्रेसीडेंट और शाओमी इंडिया के एमडी मनु कुमार जैन ने पहले ही एलान किया था कि इन दोनों स्मार्टफोन को जल्द ही लांच किया जाएगा। वहीं अपने टीजर में शाओमी ने OnePlus सात Pro पर तंज कसते हुए लिखा है 'कुछ सेलिब्रेशंस की उम्र बेहद छोटी होती है'। इसे साबित होता है रेडमी फ्लैगशिप OnePlus सात Pro फ्लैगशिप पर भारी पड़ने वाला है। कंपनी ने चीन में जब Redmi Kबीस Pro को लांच किया था, तब इसके छःजीबी रैम और चौंसठजीबी स्टोरेज वाले वर्जन की कीमत चौबीस हज़ार नौ सौ निन्यानवे युआन यानी तकरीबन पच्चीस हजार रुपये रखी थी। वहीं छःजीबी रैम और एक सौ अट्ठाईसजीबी स्टोरेज वर्जन की कीमत दो हज़ार सात सौ निन्यानवे युआन यानी अट्ठाईस हजार रुपये रखी थी। जबकि आठजीबी रैम और दो सौ छप्पनजीबी वर्जन वाले फोन की कीमत दो हज़ार नौ सौ निन्यानवे युआन यानी तीस हजार भारतीय रुपये रखी थी। भारत में लॉन्च होने वाले Redmi Kबीस Pro में वहीं फीचर हो सकते हैं, चीन में लॉन्च हुए फोन में हैं। इस फोन में बारह हज़ार तीन सौ चालीस×एक हज़ार अस्सी पिक्सल्स रिजॉल्यूशन के साथ छः. उनतालीस इंच की फुल एचडी एमोल्ड डिस्प्ले, उन्नीस:पाँच:नौ अस्पेक्ट रेशियो और इऩ-डिस्प्ले फिंगर प्रिंट सेंसर दिया गया है। साथ ही इसमें बीसएमपी का पॉप-अप सेल्फी कैमरा कैमरा और तीन. पाँचएमएम हेडफोन जैक भी मिलेगा। इस डिवाइस में क्वैलकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन प्रोसेसर मिलेगा और आठजीबी की रैम और दो सौ छप्पनजीबी की इंटरनल स्टोरेज मिलेगी। फोन में ट्रिपल रिअर कैमरा मिलेगा, जिसमें f/एक. पचहत्तर अपरचर के साथ अड़तालीसएमपी का प्राइमरी सेंसर, तेरह एमपी का वाइड-एंगल लेंस और दोX जूम के साथ आठएमपी का टेलीफोटो लेंस मिलेगा। फोन में चार,शून्यmAh बैटरी के साथ सत्ताईस वाट की फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी मिलेगी।
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राधिका मर्चेंट भी उद्योगपति घरानों से ताल्लुक रखती हैं। वो एनकोर हेल्थकेयर के सीईओ विरेन मर्चेंट और शैला मर्चेंट की बेटी हैं। राधिका मर्चेंट बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस को खूबसूरती और फिटनेस में मात देती हैं।
राधिका और अनंत अंबानी की सगाई उदयपुर से 48 किलोमीटर दूर राजस्थान के नाथवाड़ा में स्थित श्रीनाथ मंदिर में सगाई हुई। दोनों परिवार के करीबी लोग सगाई समारोह में शामिल हुए।
राधिका मर्चेंट के एजुकेशन की बात करें तो उनकी स्कूलिंग मुंबई में हुई। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पॉलीटिक्स और इकॉनोमिक की पढ़ाई की है। इसके बाद वो सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में करियर की शुरुआत की।
साल 2017 में उन्होंने लग्जरी विला चेन इस्प्रावा (Isprava) में सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम शुरू किया।
राधिका और अनंत बचपन से एक दूसरे को जानते हैं। राधिका अंबानी परिवार के घर में होने वाले हर फंक्शन में शामिल होती रही हैं।
24 साल की राधिका भरतनाट्यम में महारत हासिल की हुई हैं। जून2022 में अंबानी परिवार ने उनके लिए अरंगेत्रम सेरेमनी रखी थी। यह प्रशिक्षित भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार राधिका की पहली मंचीय नृत्य प्रस्तुति या 'अरंगेत्रम' थी।
राधिका मर्चेंट काफी स्टाइलिश हैं। वो इंडियन और वेस्टर्न दोनों तरफ के कपड़ों में काफी खूबसूरत लगती हैं। सोशल मीडिया पर आए दिन उनकी तस्वीरें वायरल होती रहती हैं।
राधिका मर्चेंट आधुनिक होने के साथ-साथ धार्मिक प्रवृति की भी हैं। वो आए दिन मंदिर में पूजा अर्चना करती दिखाई देती हैं।
राधिका मर्चेंट काफी मिलनसार नेचर की हैं। मदर्स डे पर वो अपनी मां को विश करने के साथ-साथ अपनी होने वाली सासू मां नीता अंबानी को भी तस्वीरों के साथ शेयर की थीं।
तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि राधिका मर्चेंट कितना अनंत अंबानी को प्यार करती हैं। वो कितना उनकी फैमिली में पहले से ही घुलमिल चुकी हैं। अंबानी परिवार अपनी होने वाली बहू की स्वागत में जुट गई है। लोगों को इंतजार अब इनके सात फेरे लेने की है।
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राधिका मर्चेंट भी उद्योगपति घरानों से ताल्लुक रखती हैं। वो एनकोर हेल्थकेयर के सीईओ विरेन मर्चेंट और शैला मर्चेंट की बेटी हैं। राधिका मर्चेंट बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस को खूबसूरती और फिटनेस में मात देती हैं। राधिका और अनंत अंबानी की सगाई उदयपुर से अड़तालीस किलोग्राममीटर दूर राजस्थान के नाथवाड़ा में स्थित श्रीनाथ मंदिर में सगाई हुई। दोनों परिवार के करीबी लोग सगाई समारोह में शामिल हुए। राधिका मर्चेंट के एजुकेशन की बात करें तो उनकी स्कूलिंग मुंबई में हुई। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पॉलीटिक्स और इकॉनोमिक की पढ़ाई की है। इसके बाद वो सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में करियर की शुरुआत की। साल दो हज़ार सत्रह में उन्होंने लग्जरी विला चेन इस्प्रावा में सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में काम शुरू किया। राधिका और अनंत बचपन से एक दूसरे को जानते हैं। राधिका अंबानी परिवार के घर में होने वाले हर फंक्शन में शामिल होती रही हैं। चौबीस साल की राधिका भरतनाट्यम में महारत हासिल की हुई हैं। जूनदो हज़ार बाईस में अंबानी परिवार ने उनके लिए अरंगेत्रम सेरेमनी रखी थी। यह प्रशिक्षित भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाकार राधिका की पहली मंचीय नृत्य प्रस्तुति या 'अरंगेत्रम' थी। राधिका मर्चेंट काफी स्टाइलिश हैं। वो इंडियन और वेस्टर्न दोनों तरफ के कपड़ों में काफी खूबसूरत लगती हैं। सोशल मीडिया पर आए दिन उनकी तस्वीरें वायरल होती रहती हैं। राधिका मर्चेंट आधुनिक होने के साथ-साथ धार्मिक प्रवृति की भी हैं। वो आए दिन मंदिर में पूजा अर्चना करती दिखाई देती हैं। राधिका मर्चेंट काफी मिलनसार नेचर की हैं। मदर्स डे पर वो अपनी मां को विश करने के साथ-साथ अपनी होने वाली सासू मां नीता अंबानी को भी तस्वीरों के साथ शेयर की थीं। तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि राधिका मर्चेंट कितना अनंत अंबानी को प्यार करती हैं। वो कितना उनकी फैमिली में पहले से ही घुलमिल चुकी हैं। अंबानी परिवार अपनी होने वाली बहू की स्वागत में जुट गई है। लोगों को इंतजार अब इनके सात फेरे लेने की है। और पढ़ेंः
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नई दिल्ली :
Sushmita Sen In Lakme Fashion Week : बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन को हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था, जिसके चलते उनके फैंस काफी ज्यादा परेशान थे. हाल ही में उन्होंने लैक्मे फैशन वीक में रैंप वॉक (Sushmita Sen Ramp Walk) किया था, जिसकी चर्चा जोरों-शोरों से हो रही है. अभिनेत्री डिजाइनर अनुश्री रेड्डी के लिए शो स्टॉपर बनी थीं. विशेष दिन के लिए उन्होंने येलो कलर का लहंगा पहन रखा था. एक्ट्रेस का लुक लोगों को काफी पसंद आया. उस दौरान सुष्मिता को एक पंजाबी गाने पर थिरकते हुए भी देखा गया और उन्हें फ्लॉवर के साथ भी रैंप वॉक करते हुए देखा गया. उनके लुक की चर्चा काफी ज्यादा हो रही है.
अगर सुष्मिता के लहंगे की बात करें तो, इसमें एम्बेलिश्ड चोली, मैचिंग हैवी एम्बेलिश्ड लहंगा और उनके चारों ओर खूबसूरत तरीके से लिपटा हुआ नेट का दुपट्टा था, जिसको उन्होंने शानदार मेकअप के साथ पूरा किया था. उनका लुक फैंस को हर बार लुभाने में कामयाब होता है. यह पहली दफा नहीं है, जब अदाकारा के लुक की चर्चा हो रही है. इसके साथ ही रैंप वॉक (Sushmita Sen In Lakme Fashion Week) का वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हो गया है, जिसे 10 मिनट में 700 के करीब लाइक्स मिल चुके है. मिस यूनिवर्स के लेटेस्ट अवतार को फैंस दिल खोलकर एक्सेप्ट कर रहे हैं.
सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) को हाल ही में बड़े पैमाने पर दिल का दौरा पड़ा और उन्हें एंजियोप्लास्टी और स्टेंट लगाने के लिए नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद उनके चाहने वाले और करीबी उनके ठीक होने की दुआ कर रहे थे. हालांकि अब वो ठीक हैं. यही वजह है कि उनके फैंस काफी ज्यादा खुश हैं.
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नई दिल्ली : Sushmita Sen In Lakme Fashion Week : बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन को हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था, जिसके चलते उनके फैंस काफी ज्यादा परेशान थे. हाल ही में उन्होंने लैक्मे फैशन वीक में रैंप वॉक किया था, जिसकी चर्चा जोरों-शोरों से हो रही है. अभिनेत्री डिजाइनर अनुश्री रेड्डी के लिए शो स्टॉपर बनी थीं. विशेष दिन के लिए उन्होंने येलो कलर का लहंगा पहन रखा था. एक्ट्रेस का लुक लोगों को काफी पसंद आया. उस दौरान सुष्मिता को एक पंजाबी गाने पर थिरकते हुए भी देखा गया और उन्हें फ्लॉवर के साथ भी रैंप वॉक करते हुए देखा गया. उनके लुक की चर्चा काफी ज्यादा हो रही है. अगर सुष्मिता के लहंगे की बात करें तो, इसमें एम्बेलिश्ड चोली, मैचिंग हैवी एम्बेलिश्ड लहंगा और उनके चारों ओर खूबसूरत तरीके से लिपटा हुआ नेट का दुपट्टा था, जिसको उन्होंने शानदार मेकअप के साथ पूरा किया था. उनका लुक फैंस को हर बार लुभाने में कामयाब होता है. यह पहली दफा नहीं है, जब अदाकारा के लुक की चर्चा हो रही है. इसके साथ ही रैंप वॉक का वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हो गया है, जिसे दस मिनट में सात सौ के करीब लाइक्स मिल चुके है. मिस यूनिवर्स के लेटेस्ट अवतार को फैंस दिल खोलकर एक्सेप्ट कर रहे हैं. सुष्मिता सेन को हाल ही में बड़े पैमाने पर दिल का दौरा पड़ा और उन्हें एंजियोप्लास्टी और स्टेंट लगाने के लिए नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद उनके चाहने वाले और करीबी उनके ठीक होने की दुआ कर रहे थे. हालांकि अब वो ठीक हैं. यही वजह है कि उनके फैंस काफी ज्यादा खुश हैं.
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अष्टादशस्मृतयःदिनद्वयं च नाभीयात्कृच्छ्राद्धं तद्विधीयते । प्रायश्चित्तं लघुष्वेतपापेषु तु यथार्हतः ॥ ४३ ॥
जो मनुष्य चांडलको छूकर जल पीता है वह अहोरात्र उपवास करके त्रिकाल स्नान करनेसे शुद्ध होता है ।। ४१ ॥ अहोरात्र ( एक दिन ) सायंकाल और प्रातःकाल भोजन करे इसको पादकृछ्र कहते हैं; और एक दिन सायंकाल अथवा प्रातः काल में भोजन न करे, और दो दिन विना मांगे जो मिले उसे भोजन करे ॥ ४२ ॥ और दो दिन उपवास करे उसे कृच्छ्रार्द्ध कहते हैं लघु पापों में यह प्रायश्चित्त उचित है ॥ १३ ॥
[ आपस्तम्बकृष्णाजिनतिलग्राही हस्त्यश्वानां च विक्रयी ॥ प्रेतनिर्यातकश्चैव न भूयः पुरुषो भवेत् ॥ ९ ॥ इत्यापस्तंबीये धर्मशास्त्रे नवमोऽध्यायः ॥ ९ ॥
काली मृगछाला और तिल इनका दान लेनेवाला, हाथी और घोडेको बेचनेवाला और मृतकदेहको मोल लेकर उठानेवाला पुरुष इनकी उत्पत्ति पुनः पुरुषों में नहीं होती ॥ ४४॥ इति आपस्तंबीये धर्मशास्त्रे भाषाटीकायां नवमोऽध्यायः ॥ ९ ॥
दशमोऽध्यायः १०.
आचांतोऽप्यनुचिस्तावद्यावनोद्धियते जलम् ॥ उद्धृतेऽप्यशुचिस्त।वद्यावभूभिर्न लिप्यते ॥ १ ॥ भूमावपि च लिप्तायां तावत्स्यादशुचिः पुमान् ।। आसनादुत्थितस्तस्माद्यावन्नाक्रमते महीम् ॥ २ ॥
आचमन करनेके पीछे मनुष्य तबतक अशुद्ध रहता है जबतक पृथ्वी परसे वह जल न उठाया जाय, और पृथ्वी विना लिपे अशुद्ध रहती है ॥ १ ॥ पृथ्वीके लीपेजानेपर भी तबतक अशुद्ध रहता है जबतक कि आचमन के आसनसे उठकर उस लीपी हुई पृथ्वीपर न बैठे ॥ २ न यमं यममित्यादुरात्मा वै यम उच्यते ॥
आत्मा संयमितो येन तं यमः किं करिष्यति ॥ ३ ॥
यमराजको यम कहकर नहीं पुकारते परन्तु अपनी आत्माको हो यम कहते हैं, जिस मनुष्यने मनको अपने वश में कर लिया है, यमराज उसका क्याकर सकता है ? ॥ ३ ॥
न चैवासिस्तथा तीक्ष्णः सर्पों वा दुरधिष्ठितः ॥
यथा क्रोधो हि जंतूनां शरीरस्थो विनाशकः ॥ ४ ॥
खड़ भी ऐसा तीक्ष्ण नहीं है, और सर्प भी ऐसा भयंकर नहीं है जैसा कि प्राणियोंके शरीरमें क्रोध उनका नाश करनेवाला है [ इस कारण सब भांतिसे क्रोधको त्याग दे ] ॥ ४ ॥
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अष्टादशस्मृतयःदिनद्वयं च नाभीयात्कृच्छ्राद्धं तद्विधीयते । प्रायश्चित्तं लघुष्वेतपापेषु तु यथार्हतः ॥ तैंतालीस ॥ जो मनुष्य चांडलको छूकर जल पीता है वह अहोरात्र उपवास करके त्रिकाल स्नान करनेसे शुद्ध होता है ।। इकतालीस ॥ अहोरात्र सायंकाल और प्रातःकाल भोजन करे इसको पादकृछ्र कहते हैं; और एक दिन सायंकाल अथवा प्रातः काल में भोजन न करे, और दो दिन विना मांगे जो मिले उसे भोजन करे ॥ बयालीस ॥ और दो दिन उपवास करे उसे कृच्छ्रार्द्ध कहते हैं लघु पापों में यह प्रायश्चित्त उचित है ॥ तेरह ॥ [ आपस्तम्बकृष्णाजिनतिलग्राही हस्त्यश्वानां च विक्रयी ॥ प्रेतनिर्यातकश्चैव न भूयः पुरुषो भवेत् ॥ नौ ॥ इत्यापस्तंबीये धर्मशास्त्रे नवमोऽध्यायः ॥ नौ ॥ काली मृगछाला और तिल इनका दान लेनेवाला, हाथी और घोडेको बेचनेवाला और मृतकदेहको मोल लेकर उठानेवाला पुरुष इनकी उत्पत्ति पुनः पुरुषों में नहीं होती ॥ चौंतालीस॥ इति आपस्तंबीये धर्मशास्त्रे भाषाटीकायां नवमोऽध्यायः ॥ नौ ॥ दशमोऽध्यायः दस. आचांतोऽप्यनुचिस्तावद्यावनोद्धियते जलम् ॥ उद्धृतेऽप्यशुचिस्त।वद्यावभूभिर्न लिप्यते ॥ एक ॥ भूमावपि च लिप्तायां तावत्स्यादशुचिः पुमान् ।। आसनादुत्थितस्तस्माद्यावन्नाक्रमते महीम् ॥ दो ॥ आचमन करनेके पीछे मनुष्य तबतक अशुद्ध रहता है जबतक पृथ्वी परसे वह जल न उठाया जाय, और पृथ्वी विना लिपे अशुद्ध रहती है ॥ एक ॥ पृथ्वीके लीपेजानेपर भी तबतक अशुद्ध रहता है जबतक कि आचमन के आसनसे उठकर उस लीपी हुई पृथ्वीपर न बैठे ॥ दो न यमं यममित्यादुरात्मा वै यम उच्यते ॥ आत्मा संयमितो येन तं यमः किं करिष्यति ॥ तीन ॥ यमराजको यम कहकर नहीं पुकारते परन्तु अपनी आत्माको हो यम कहते हैं, जिस मनुष्यने मनको अपने वश में कर लिया है, यमराज उसका क्याकर सकता है ? ॥ तीन ॥ न चैवासिस्तथा तीक्ष्णः सर्पों वा दुरधिष्ठितः ॥ यथा क्रोधो हि जंतूनां शरीरस्थो विनाशकः ॥ चार ॥ खड़ भी ऐसा तीक्ष्ण नहीं है, और सर्प भी ऐसा भयंकर नहीं है जैसा कि प्राणियोंके शरीरमें क्रोध उनका नाश करनेवाला है [ इस कारण सब भांतिसे क्रोधको त्याग दे ] ॥ चार ॥
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फिर ३० लक्ष क्रोड सांगर बाद श्रावस्ति नगरी के जीतारी राजा की सेनादेवी रानी से तीसरे तीर्थकर 'श्री सम्भवनाथजी का जन्म हुआ. इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, अश्व का लक्षण, देहमान ४०० धनुष्य का आयुष्ध ६० लक्ष पूर्व का. जिसमें ५९ लक्ष पूर्व गृह : वास में रहे एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुयके साथ मोक्ष गये.
४ फिर १ लक्ष क्रोड सागर बाद बनीता नगरी के संवर राजा की सिद्धार्थ रानी से चौथे तीर्थंकर 'श्री अभिनन्दनजी' का जन्म हुआ. इन का शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला कपि ( बंदर ) का लक्षण देहमान ३५० धनुष्य को. आयुष्य ५० लक्ष पूर्व का. जिसमें ४९ लक्ष पूर्व गृहवास में रहे. एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुयों के साथ मोझ गये.
५ फिर ९ लक्ष कोड सागर बाद कंचनपुर नगर के मेघरथ राजा की सुमंगला रानी से पांचवें 'श्री सुमतिनाथजी' तीर्थंकर का जन्म हुआ इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, कोंच पक्ष का लक्षण, देहमान - ३०० धनुष्य का, आयुष्य ४० लक्ष पूर्व का, जिसमें ३९ लक्ष पूर्व गृहवास में रहे एक पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्ष गये ।
६ फिर ९० हजार क्रोड सागर बाद कौसम्मी नगरी के श्रीधेर राजा की सुसिमा रानी से छट्टे तीर्थंकर 'श्री पद्मप्रभुजी का जन्म हुआ. इनकें शरीर का वर्ण मानक जैसा लाल, पद्म कमल का लक्षण, देहमान २५० धनुष्य का, आयुष्य ३० लक्ष पूर्व का, जिसमें २९ लक्ष पूर्व गृहवास में रहे. एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्ष गये ।
७ फिर ९ हजार क्रोड सागर के बाद बाणारसी नगरी के प्रतिष्टं राजा की पृथ्वी देवी रानी से सातवें तीर्थंकर 'श्री सुपार्श्वनाथजी का जन्म हुआ. इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, स्वस्तिक का लक्षण, देहमान २०० धनुष्य का, आयुष्य २० लक्ष पूर्व का, जिसमें १ ९ लक्ष पूर्व गृहवास में रहे एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्षकी गये.
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फिर तीस लक्ष क्रोड सांगर बाद श्रावस्ति नगरी के जीतारी राजा की सेनादेवी रानी से तीसरे तीर्थकर 'श्री सम्भवनाथजी का जन्म हुआ. इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, अश्व का लक्षण, देहमान चार सौ धनुष्य का आयुष्ध साठ लक्ष पूर्व का. जिसमें उनसठ लक्ष पूर्व गृह : वास में रहे एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुयके साथ मोक्ष गये. चार फिर एक लक्ष क्रोड सागर बाद बनीता नगरी के संवर राजा की सिद्धार्थ रानी से चौथे तीर्थंकर 'श्री अभिनन्दनजी' का जन्म हुआ. इन का शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला कपि का लक्षण देहमान तीन सौ पचास धनुष्य को. आयुष्य पचास लक्ष पूर्व का. जिसमें उनचास लक्ष पूर्व गृहवास में रहे. एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुयों के साथ मोझ गये. पाँच फिर नौ लक्ष कोड सागर बाद कंचनपुर नगर के मेघरथ राजा की सुमंगला रानी से पांचवें 'श्री सुमतिनाथजी' तीर्थंकर का जन्म हुआ इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, कोंच पक्ष का लक्षण, देहमान - तीन सौ धनुष्य का, आयुष्य चालीस लक्ष पूर्व का, जिसमें उनतालीस लक्ष पूर्व गृहवास में रहे एक पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्ष गये । छः फिर नब्बे हजार क्रोड सागर बाद कौसम्मी नगरी के श्रीधेर राजा की सुसिमा रानी से छट्टे तीर्थंकर 'श्री पद्मप्रभुजी का जन्म हुआ. इनकें शरीर का वर्ण मानक जैसा लाल, पद्म कमल का लक्षण, देहमान दो सौ पचास धनुष्य का, आयुष्य तीस लक्ष पूर्व का, जिसमें उनतीस लक्ष पूर्व गृहवास में रहे. एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्ष गये । सात फिर नौ हजार क्रोड सागर के बाद बाणारसी नगरी के प्रतिष्टं राजा की पृथ्वी देवी रानी से सातवें तीर्थंकर 'श्री सुपार्श्वनाथजी का जन्म हुआ. इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण जैसा पीला, स्वस्तिक का लक्षण, देहमान दो सौ धनुष्य का, आयुष्य बीस लक्ष पूर्व का, जिसमें एक नौ लक्ष पूर्व गृहवास में रहे एक लक्ष पूर्व संयमपाल एक हजार साधुर्यो के साथ मोक्षकी गये.
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यूपी बोर्ड के 100 वर्ष के इतिहास में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त करने की तैयारी है। वहीं, परीक्षा के लिए पंजीकृत सभी छात्र-छात्रओं को कक्षा 11 में प्रोन्नति मिल सकती है। बोर्ड प्रशासन की वेबसाइट पर नौवीं कक्षा के विषयवार अंक अपलोड होना शुरू हो गए हैं। गुरुवार देर शाम तक करीब डेढ़ लाख परीक्षार्थियों के अंक अपलोड किए जाने की सूचना है। इस पर अभी शासन की मुहर लगना बाकी है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) कोरोना संक्रमण की वजह से हाईस्कूल की परीक्षा न कराने की दिशा में प्रयासरत है। सीबीएसई सहित देशभर के कई शिक्षा बोर्ड इस ओर पहले ही कदम बढ़ा चुके हैं। यूपी बोर्ड में देरी की वजह परीक्षा प्रणाली दुरुस्त न होना है। असल में कई दिन तक उस फॉर्मूले की तलाश हुई, जिसमें परीक्षार्थियों को दिए जाने वाले विषयवार अंक निर्विवाद हों।
सभी को अंक देना इसलिए जरूरी है कि आगे मेरिट से चयन में छात्र-छात्रओं को परेशानी न हो। हर किसी की जन्म तारीख का हाईस्कूल का प्रमाणपत्र अहम रिकॉर्ड भी है। बोर्ड की ओर से नौवीं वार्षिक परीक्षा के विषयवार अंक मांगे जाने पर कई कालेजों ने 13 अप्रैल, 2020 के शासनादेश का हवाला दिया था। उनका कहना था कि पिछले साल सभी प्रमोट हुए थे, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि परीक्षा क्यों नहीं कराई।
★ 10 वर्ष के परिणाम पर नजर (नोट- परिणाम फीसद में।)
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यूपी बोर्ड के एक सौ वर्ष के इतिहास में पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त करने की तैयारी है। वहीं, परीक्षा के लिए पंजीकृत सभी छात्र-छात्रओं को कक्षा ग्यारह में प्रोन्नति मिल सकती है। बोर्ड प्रशासन की वेबसाइट पर नौवीं कक्षा के विषयवार अंक अपलोड होना शुरू हो गए हैं। गुरुवार देर शाम तक करीब डेढ़ लाख परीक्षार्थियों के अंक अपलोड किए जाने की सूचना है। इस पर अभी शासन की मुहर लगना बाकी है। माध्यमिक शिक्षा परिषद कोरोना संक्रमण की वजह से हाईस्कूल की परीक्षा न कराने की दिशा में प्रयासरत है। सीबीएसई सहित देशभर के कई शिक्षा बोर्ड इस ओर पहले ही कदम बढ़ा चुके हैं। यूपी बोर्ड में देरी की वजह परीक्षा प्रणाली दुरुस्त न होना है। असल में कई दिन तक उस फॉर्मूले की तलाश हुई, जिसमें परीक्षार्थियों को दिए जाने वाले विषयवार अंक निर्विवाद हों। सभी को अंक देना इसलिए जरूरी है कि आगे मेरिट से चयन में छात्र-छात्रओं को परेशानी न हो। हर किसी की जन्म तारीख का हाईस्कूल का प्रमाणपत्र अहम रिकॉर्ड भी है। बोर्ड की ओर से नौवीं वार्षिक परीक्षा के विषयवार अंक मांगे जाने पर कई कालेजों ने तेरह अप्रैल, दो हज़ार बीस के शासनादेश का हवाला दिया था। उनका कहना था कि पिछले साल सभी प्रमोट हुए थे, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि परीक्षा क्यों नहीं कराई। ★ दस वर्ष के परिणाम पर नजर
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PM modi reached bhopal: भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी भोपाल पहुंच गए है। वायु सेना का प्लेन लैंड हो चुका है। पीएम मोदी अपने समय पर भोपाल पहुंच चुके है। स्टेट हैंगर पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए सीएम शिवराज सहित कई दिग्गज नेता मौजूद है। पीएम मोदी की कार्केट स्टेट हैंगर से रवाना होकर बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी पहुंचेंगे। पीएम मोदी खराब मौसम होने के चलते सड़क के रास्ते रानी कमलापति स्टेशन के लिए निकलेंगे। पीएम का काफिला जल्द ही सड़क मार्ग के माध्ययम से रवाना होगा।
PM modi reached bhopal: मौसम खराब होने के चलते पीएम के कार्यक्रम में कुछ बदलाव हो सकता है। बीयू से पीएम का कार्केट रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगा। पीएम के स्वागत के लिए राजयपाल मंगूभाई पटेल स्टेशन पर पहुंच चुकें है। पीएम मोदी यहां से 5 नई वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसमें से 2 वंदे भारत ट्रेन को पीएम फ्लैग आउट करेंगे। इसके अलावा 3 ट्रेन को वर्चुएली रवाना करेंगे।
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PM modi reached bhopal: भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी भोपाल पहुंच गए है। वायु सेना का प्लेन लैंड हो चुका है। पीएम मोदी अपने समय पर भोपाल पहुंच चुके है। स्टेट हैंगर पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए सीएम शिवराज सहित कई दिग्गज नेता मौजूद है। पीएम मोदी की कार्केट स्टेट हैंगर से रवाना होकर बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी पहुंचेंगे। पीएम मोदी खराब मौसम होने के चलते सड़क के रास्ते रानी कमलापति स्टेशन के लिए निकलेंगे। पीएम का काफिला जल्द ही सड़क मार्ग के माध्ययम से रवाना होगा। PM modi reached bhopal: मौसम खराब होने के चलते पीएम के कार्यक्रम में कुछ बदलाव हो सकता है। बीयू से पीएम का कार्केट रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगा। पीएम के स्वागत के लिए राजयपाल मंगूभाई पटेल स्टेशन पर पहुंच चुकें है। पीएम मोदी यहां से पाँच नई वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसमें से दो वंदे भारत ट्रेन को पीएम फ्लैग आउट करेंगे। इसके अलावा तीन ट्रेन को वर्चुएली रवाना करेंगे।
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सुरेंद्र कुमार दास के जहर खाने के मामले की जांच शुक्रवार को एसपी क्राइम राजेश कुमार यादव ने शुरू कर दी थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कुमार जब तनाव में होते थे या पत्नी से तनातनी होती थी तब फालोअर और अन्य कर्मचारियों को घर से बाहर कर देते थे। कैंट पुलिस ने फिलहाल उनके आवास में ताला लगा दिया है। चाभी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। अफसरों का कहना है कि जांच या किसी साक्ष्य जुटाने की जरूरत हुई तो एसपी के आवास को खुलवाकर जांच की जाएगी।
उन्होंने किन घरेलू कलह के चलते यह कदम उठाया, किसी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए उत्प्रेरित तो नहीं किया, यह जांच की जा रही है। टीम में शामिल एक अफसर ने सुरेंद्र के आवास में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की। कर्मचारियों ने बताया कि जब साहब तनाव में होते थे या मेम साहब से कुछ विवाद होता था तो सबको घर से बाहर कर दिया जाता था। कई बार तो उन लोगों को घंटों तक बाहर बैठना पड़ता था। एसपी क्राइम ने बताया कि मामला काफी संवेदनशील है। जांच शुरू कर दी है।
सुरेंद्र कुमार दास के भाई नरेंद्र कुमार दास ने कहा कि भाई ने जहर क्यों खाया, उस रात क्या विवाद हुआ इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। भाई से कब से बात नहीं हुई, दोनों के बीच विवाद था, जैसे सवालों पर वह चुप्पी साधे रहे।
सब कुछ गलत है, समय आने दें, सब सच्चाई बता दूंगा। मेरी बेटी पूरी तरह से टूट गई है। यह बात आईपीएस सुरेंद्र सिंह के ससुर डॉ. रावेंद्र सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कही। उन्होंने पति-पत्नी के बीच विवाद न होने की बात कही। अगर पति पत्नी में विवाद नहीं था तो सुरेंद्र ने जहर क्यों खाया? इस पर डॉ. रावेंद्र चुप्पी साध गए। बोले, कि सही समय पर सबकुछ बता देंगे।
ईएसआई के सरकारी परिसर में निवास करने वाले डॉ. रावेंद्र सिंह के घर पर भी सन्नाटा है। वहां पहुंचने पर रायबरेली से रिश्तेदारी में आए लड़के ने घर पर किसी के न होेने की जानकारी दी। पूछने पर बोला, मुझे किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए मना किया गया है।
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सुरेंद्र कुमार दास के जहर खाने के मामले की जांच शुक्रवार को एसपी क्राइम राजेश कुमार यादव ने शुरू कर दी थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कुमार जब तनाव में होते थे या पत्नी से तनातनी होती थी तब फालोअर और अन्य कर्मचारियों को घर से बाहर कर देते थे। कैंट पुलिस ने फिलहाल उनके आवास में ताला लगा दिया है। चाभी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। अफसरों का कहना है कि जांच या किसी साक्ष्य जुटाने की जरूरत हुई तो एसपी के आवास को खुलवाकर जांच की जाएगी। उन्होंने किन घरेलू कलह के चलते यह कदम उठाया, किसी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए उत्प्रेरित तो नहीं किया, यह जांच की जा रही है। टीम में शामिल एक अफसर ने सुरेंद्र के आवास में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की। कर्मचारियों ने बताया कि जब साहब तनाव में होते थे या मेम साहब से कुछ विवाद होता था तो सबको घर से बाहर कर दिया जाता था। कई बार तो उन लोगों को घंटों तक बाहर बैठना पड़ता था। एसपी क्राइम ने बताया कि मामला काफी संवेदनशील है। जांच शुरू कर दी है। सुरेंद्र कुमार दास के भाई नरेंद्र कुमार दास ने कहा कि भाई ने जहर क्यों खाया, उस रात क्या विवाद हुआ इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। भाई से कब से बात नहीं हुई, दोनों के बीच विवाद था, जैसे सवालों पर वह चुप्पी साधे रहे। सब कुछ गलत है, समय आने दें, सब सच्चाई बता दूंगा। मेरी बेटी पूरी तरह से टूट गई है। यह बात आईपीएस सुरेंद्र सिंह के ससुर डॉ. रावेंद्र सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कही। उन्होंने पति-पत्नी के बीच विवाद न होने की बात कही। अगर पति पत्नी में विवाद नहीं था तो सुरेंद्र ने जहर क्यों खाया? इस पर डॉ. रावेंद्र चुप्पी साध गए। बोले, कि सही समय पर सबकुछ बता देंगे। ईएसआई के सरकारी परिसर में निवास करने वाले डॉ. रावेंद्र सिंह के घर पर भी सन्नाटा है। वहां पहुंचने पर रायबरेली से रिश्तेदारी में आए लड़के ने घर पर किसी के न होेने की जानकारी दी। पूछने पर बोला, मुझे किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए मना किया गया है।
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पुलिस ने बताया कि 38 वर्षीय रवि डबास के रूप में हुई है, जो कंझावला का निवासी है। अधिकारियों के मुताबिक एमसीडी स्कूल शिक्षक और सहायक प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में पूरी सुरक्षा के बावजूद पुलिस को परीक्षा में बहुत से अभ्यर्थियों के स्थान पर किसी और व्यक्ति को बैठाने की सूचना मिली थी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) और शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक से रिकॉर्ड एकत्र किए गए। इस अधिकारी ने बताया कि वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करने पर पाया गया कि एमसीडी में प्राथमिक शिक्षक के पद पर चयनित डबास ना तो परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर दिखा और ना ही परीक्षा कक्ष में दिखा। लेकिन अधिकारी ने बताया कि एमसीडी के सहायक प्राथमिक शिक्षक पद पर डबास का चयन हो गया और इसके बद उसने 22 अक्टूबर, 2019 को फिरोजशाह कोटला स्थित एसडीएमसी के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक के रूप में काम शुरू किया।
एक अधिकारी के मुताबिक डीएसएसबी ने प्रवेश पत्र की दूसरी कॉपी पर सभी अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा कक्ष में अंगूठा लगाना अनिवार्य कर दिया है, जिसे सुरक्षित रखा जाता है।
अपराध शाखा के उपपुलिस आयुक्त राजेश देव ने कहा कि जब डबास के अंगूठे के निशान को प्रवेश पत्र पर कक्ष निरीक्षक के समक्ष लगाए गए परीक्षार्थी के अंगूठे के निशान से मिलाया गया, तो वह मेल नहीं खाया।
डीसीपी ने बताया कि इस पर डबास को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद डबास ने कबूल कर लिया कि उसने फॉर्म भरते समय एक पुराने फोटोग्राफ का इस्तेमाल किया था जिसमें उसकी दाढ़ी-मूंछ नहीं है। उसने बताया कि जिस व्यक्ति को अपनी जगह उसने परीक्षा में बैठाया था उसकी दाढ़ी थी, जिसके कारण उसके चेहरे का अंतर ढंक गया। डबास ने एमडीयू, रोहतक से स्नातक किया है।
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पुलिस ने बताया कि अड़तीस वर्षीय रवि डबास के रूप में हुई है, जो कंझावला का निवासी है। अधिकारियों के मुताबिक एमसीडी स्कूल शिक्षक और सहायक प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में पूरी सुरक्षा के बावजूद पुलिस को परीक्षा में बहुत से अभ्यर्थियों के स्थान पर किसी और व्यक्ति को बैठाने की सूचना मिली थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड और शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक से रिकॉर्ड एकत्र किए गए। इस अधिकारी ने बताया कि वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करने पर पाया गया कि एमसीडी में प्राथमिक शिक्षक के पद पर चयनित डबास ना तो परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर दिखा और ना ही परीक्षा कक्ष में दिखा। लेकिन अधिकारी ने बताया कि एमसीडी के सहायक प्राथमिक शिक्षक पद पर डबास का चयन हो गया और इसके बद उसने बाईस अक्टूबर, दो हज़ार उन्नीस को फिरोजशाह कोटला स्थित एसडीएमसी के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक के रूप में काम शुरू किया। एक अधिकारी के मुताबिक डीएसएसबी ने प्रवेश पत्र की दूसरी कॉपी पर सभी अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा कक्ष में अंगूठा लगाना अनिवार्य कर दिया है, जिसे सुरक्षित रखा जाता है। अपराध शाखा के उपपुलिस आयुक्त राजेश देव ने कहा कि जब डबास के अंगूठे के निशान को प्रवेश पत्र पर कक्ष निरीक्षक के समक्ष लगाए गए परीक्षार्थी के अंगूठे के निशान से मिलाया गया, तो वह मेल नहीं खाया। डीसीपी ने बताया कि इस पर डबास को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद डबास ने कबूल कर लिया कि उसने फॉर्म भरते समय एक पुराने फोटोग्राफ का इस्तेमाल किया था जिसमें उसकी दाढ़ी-मूंछ नहीं है। उसने बताया कि जिस व्यक्ति को अपनी जगह उसने परीक्षा में बैठाया था उसकी दाढ़ी थी, जिसके कारण उसके चेहरे का अंतर ढंक गया। डबास ने एमडीयू, रोहतक से स्नातक किया है।
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गिरिडीह, (हि.स.)। पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी किशोर का मेडिकल चेकअप कराया गया। मुफस्सिल थाना पुलिस सोमवार सुबह आरोपी को उसके परिजनों के साथ सदर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसका मेडिकल चेकअप किया गया। गौरतलब है कि दो दिनों पूर्व इस थाना के चुंगलो गांव में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना घटी थी। मामले में 12-13 वर्ष के एक किशोर पर ही दुष्कर्म का आरोप लगा है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी किशोर को हिरासत में लिया और आरोपी को उसके परिजनों के साथ थाना में रखा गया। थाना प्रभारी आरएन चौधरी ने बताया कि आरोपी किशोर का मेडिकल चेकअप कराया गया है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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गिरिडीह, । पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी किशोर का मेडिकल चेकअप कराया गया। मुफस्सिल थाना पुलिस सोमवार सुबह आरोपी को उसके परिजनों के साथ सदर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसका मेडिकल चेकअप किया गया। गौरतलब है कि दो दिनों पूर्व इस थाना के चुंगलो गांव में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना घटी थी। मामले में बारह-तेरह वर्ष के एक किशोर पर ही दुष्कर्म का आरोप लगा है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी किशोर को हिरासत में लिया और आरोपी को उसके परिजनों के साथ थाना में रखा गया। थाना प्रभारी आरएन चौधरी ने बताया कि आरोपी किशोर का मेडिकल चेकअप कराया गया है। जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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केंद्र में एनडीए सरकार ने गुरुवार (26 मई) को अपने दो साल पूरे कर लिए। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में रैली को संबोधित किया।
बता दें कि इसके बाद वे ओडिशा के बालासोर, एक राजस्थान, एक कर्नाटक और एक मेघालय में भी रैली को संबोधित करेंगे।
-केंद्र और राज्य सरकार के डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 साल होगी।
-बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सभी जातियों और समुदायों के लिए है।
-बेटियां कम पैदा होती हैं क्योंकि उन्हें मां के गर्भ में ही मार दिया जाता है।
-दो साल पहले के अखबार, टीवी याद करिए। आए दिन एक नए भ्रष्टाचार की खबर, बड़े-बड़े लोगों के भ्रष्टाचार में होने की चर्चा होती थी।
-हमारे विरोधियों ने कभी आरोप लगाया है? दो साल पहले किसी की हिम्मत नहीं थी कि लाखों लोगों के बीच खड़ा होकर अपना हिसाब दे सके।
-मेरी सरकार गरीबों के लिए काम करने को लेकर प्रतिबद्ध है। मैं यहां अपने दो साल के काम का हिसाब देने आया हूं।
-देश बदल रहा है लेकिन कुछ लोगों का दिमाग नहीं बदल रहा।
-सरकारें आती हैं, जाती हैं, चुनाव होते हैं... लेकिन सरकार बनती है जन सामान्य के सपनों को पूरा करने के लिए।
-मैं यूपी वाला हूं, यूपी का सांसद हूं, इसके नाते मेरा स्वभाविक मन करता है आपका आशीर्वाद प्राप्त करने का।
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केंद्र में एनडीए सरकार ने गुरुवार को अपने दो साल पूरे कर लिए। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में रैली को संबोधित किया। बता दें कि इसके बाद वे ओडिशा के बालासोर, एक राजस्थान, एक कर्नाटक और एक मेघालय में भी रैली को संबोधित करेंगे। -केंद्र और राज्य सरकार के डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र पैंसठ साल होगी। -बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सभी जातियों और समुदायों के लिए है। -बेटियां कम पैदा होती हैं क्योंकि उन्हें मां के गर्भ में ही मार दिया जाता है। -दो साल पहले के अखबार, टीवी याद करिए। आए दिन एक नए भ्रष्टाचार की खबर, बड़े-बड़े लोगों के भ्रष्टाचार में होने की चर्चा होती थी। -हमारे विरोधियों ने कभी आरोप लगाया है? दो साल पहले किसी की हिम्मत नहीं थी कि लाखों लोगों के बीच खड़ा होकर अपना हिसाब दे सके। -मेरी सरकार गरीबों के लिए काम करने को लेकर प्रतिबद्ध है। मैं यहां अपने दो साल के काम का हिसाब देने आया हूं। -देश बदल रहा है लेकिन कुछ लोगों का दिमाग नहीं बदल रहा। -सरकारें आती हैं, जाती हैं, चुनाव होते हैं... लेकिन सरकार बनती है जन सामान्य के सपनों को पूरा करने के लिए। -मैं यूपी वाला हूं, यूपी का सांसद हूं, इसके नाते मेरा स्वभाविक मन करता है आपका आशीर्वाद प्राप्त करने का।
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बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियों के बीच कैटफाइट देखने को मिलती हैं। करीना और प्रियंका के बीच लंबे समय से सबकुछ ठीक नहीं रहा है। अब एक बार फिर करीना के बयान से ये जाहिर हुआ जब उन्होंने प्रियंका के ऊपर कटाक्ष किया।
एक इंटरव्यू के दौरान करीना से सवाल पूछा गया कि 'बॉलीवुड में 50 साल का हीरो 20 साल की हीरोइन के साथ रोमांस कर रहा होता है लेकिन 50 साल की एक हीरोइन को पर्दे पर हीरो की तरह रोमांस करने का मौका नहीं मिलता क्योंकि उस जोड़ी को अजीब कहा जाता है। ' इस सवाल के जवाब में करीना ने प्रियंका और निक का उदाहरण दिया।
करीना ने कहा कि 'यह लोगों की माइंड सेट की वजह से है। लोग इसी तरह की सोच रखते हैं। उनको लगता है कि 50 साल की औरत है तो तलाकशुदा होगी। अब मैं भी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच रही हूं। मैं जरूर फिल्मों में इस तरह के किरदार करूंगी और उस सोच को बदलूंगी। '
करीना आगे कहती हैं कि 'मुझे उम्मीद है कि इस सोच को मैं तोड़ूंगी। यह असल जिंदगी में भी होता है। अब देखिए प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस दोनों अलग-अलग जनरेशन के हैं लेकिन दोनों में प्यार हुआ है न। सैफ और मैं, अलग जनरेशन के हैं लेकिन हम दोनों को भी प्यार हुआ। इसमें क्या बड़ी बात है। समाज में ये हो रहा है। अब निर्माताओं का भी माइंड सेट होना जरूरी है। 'बधाई हो' जैसी फिल्मों से बदलाव हो भी रहा है। '
करीना और प्रियंका के बीच लंबे समय से अनबन की खबरें आती रही हैं। साल 2018 में 'कॉफी विद करण' में भी जब दोनों साथ पहुंचे तो एक दूसरे पर तंज कसते हुए दिखे थे। करीना ने प्रियंका के बोलने के अंदाज को लेकर कहा था कि 'यह एक्सेंट कहां से मिला? ' इस पर प्रियंका ने भी करारा जवाब देते हुए कहा था- 'वहीं से जहां सैफ अली खान को मिला। ' बता दें कि प्रियंका और निक के बीच करीब 10 साल का फासला है। प्रियंका, निक से 10 साल बड़ी हैं। शुरुआत में दोनों के रिश्ते को बहुत ट्रोल भी किया गया लेकिन दोनों ही बखूबी इसे निभा रहे हैं। वहीं करीना, सैफ से उम्र में 10 साल छोटी हैं।
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बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियों के बीच कैटफाइट देखने को मिलती हैं। करीना और प्रियंका के बीच लंबे समय से सबकुछ ठीक नहीं रहा है। अब एक बार फिर करीना के बयान से ये जाहिर हुआ जब उन्होंने प्रियंका के ऊपर कटाक्ष किया। एक इंटरव्यू के दौरान करीना से सवाल पूछा गया कि 'बॉलीवुड में पचास साल का हीरो बीस साल की हीरोइन के साथ रोमांस कर रहा होता है लेकिन पचास साल की एक हीरोइन को पर्दे पर हीरो की तरह रोमांस करने का मौका नहीं मिलता क्योंकि उस जोड़ी को अजीब कहा जाता है। ' इस सवाल के जवाब में करीना ने प्रियंका और निक का उदाहरण दिया। करीना ने कहा कि 'यह लोगों की माइंड सेट की वजह से है। लोग इसी तरह की सोच रखते हैं। उनको लगता है कि पचास साल की औरत है तो तलाकशुदा होगी। अब मैं भी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच रही हूं। मैं जरूर फिल्मों में इस तरह के किरदार करूंगी और उस सोच को बदलूंगी। ' करीना आगे कहती हैं कि 'मुझे उम्मीद है कि इस सोच को मैं तोड़ूंगी। यह असल जिंदगी में भी होता है। अब देखिए प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस दोनों अलग-अलग जनरेशन के हैं लेकिन दोनों में प्यार हुआ है न। सैफ और मैं, अलग जनरेशन के हैं लेकिन हम दोनों को भी प्यार हुआ। इसमें क्या बड़ी बात है। समाज में ये हो रहा है। अब निर्माताओं का भी माइंड सेट होना जरूरी है। 'बधाई हो' जैसी फिल्मों से बदलाव हो भी रहा है। ' करीना और प्रियंका के बीच लंबे समय से अनबन की खबरें आती रही हैं। साल दो हज़ार अट्ठारह में 'कॉफी विद करण' में भी जब दोनों साथ पहुंचे तो एक दूसरे पर तंज कसते हुए दिखे थे। करीना ने प्रियंका के बोलने के अंदाज को लेकर कहा था कि 'यह एक्सेंट कहां से मिला? ' इस पर प्रियंका ने भी करारा जवाब देते हुए कहा था- 'वहीं से जहां सैफ अली खान को मिला। ' बता दें कि प्रियंका और निक के बीच करीब दस साल का फासला है। प्रियंका, निक से दस साल बड़ी हैं। शुरुआत में दोनों के रिश्ते को बहुत ट्रोल भी किया गया लेकिन दोनों ही बखूबी इसे निभा रहे हैं। वहीं करीना, सैफ से उम्र में दस साल छोटी हैं।
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बात तब की है जब गाँधीजी 12-13 साल के या उससे भी छोटे थे। गाँधीजी के चाचा को सिगरेट पीने की आदत थी और उनको देखकर गाँधीजी और उनके एक रिश्तेदार, दोनों को धूम्रपान का शौक़ चर्राया। पैसे तो होते नहीं थे उनके पास सो वे चाचा द्वारा फेंके गए सिगरेट के टोटों को जलाकर पीने लगे। लेकिन एक तो ये टोटे हमेशा मिलते नहीं थे, दूसरे जब मिलते थे तो उन आख़िर के बचे हुए टुकड़ों से धुएँ के छल्ले नहीं निकलते थे जैसा कि वे निकालना चाहते थे।
सो उन दोनों ने नौकर के कुर्ते की जेब से पैसे निकालने शुरू कर दिए और उनसे बीड़ियाँ ख़रीदने लगे। कुछ हफ़्तों तक यह चोरी चलती रही। बीच में उन्होंने यह भी सुना कि कुछ पौधों की डालियों के भीतर छोटे-छोटे छेद होते हैं और उनको भी बीड़ी-सिगरेट की तरह पीया जा सकता है। कुछ दिन उन्होंने इस प्रकार के धूम्रपान का भी आनंद लिया।
लेकिन इन सबमें उनको मज़ा नहीं आ रहा था। यह भी क्या ज़िंदगी थी कि बड़ों की अनुमति के बिना कुछ कर ही नहीं सकते। ऐसी जीने का भला क्या फ़ायदा। इस ग़ुलामी के जीवन से तो बेहतर है कि आदमी मर जाए।
यही सोचकर दोनों ने तय कर लिया कि वे आत्महत्या कर लेंगे। लेकिन कैसे करें? ज़हर कहाँ से मिलेगा? उन्होंने सुन रखा था कि धतूरे के बीज विषैले होते हैं। एक दिन वे इन बीजों की तलाश में जंगल में गए और उन्हें मिल भी गए। आत्महत्या के लिए उन्होंने शाम का वक़्त चुना। फिर वे एक मंदिर में गए, वहाँ मंदिर के दीए में घी डाला, भगवान के दर्शन किए और कोई सूनी जगह खोजने लगे।
लेकिन धीरे-धीरे उनकी हिम्मत जवाब देने लगी। उन्होंने सोचा, 'अगर हम तुरंत नहीं मरे तो? और वैसे भी मरने से क्या लाभ? थोड़ी-बहुत आज़ादी नहीं भी है तो कौन-सी आफ़त है? ' लेकिन फिर भी दोनों ने दो या तीन बीज तो निगल ही डाले। ज़्यादा लेने का साहस नहीं हुआ।
गाँधीजी और उनके एक रिश्तेदार, दोनों मौत से डर गए और ख़ुद को शांत करने तथा आत्महत्या के ख़्याल से मुक्ति पाने के लिए रामजी के मंदिर चले गए।
'मैंने महसूस किया कि आत्महत्या के बारे में सोचना-विचारना तो आसान है लेकिन उसपर अमल करना बहुत मुश्किल है। इसलिए उसके बाद जब कभी मैंने किसी को ख़ुदकुशी की धमकी देते हुए सुना तो उसका असर मुझपर बहुत कम हुआ या बिल्कुल ही नहीं हुआ। '
लेकिन इस आत्महत्या के निष्फल प्रयास का इतना असर ज़रूर हुआ कि उन्होंने सिगरेट के टोटे पीने या बीड़ियों के लिए नौकर की जेब से पैसे चुराने बंद कर दिए।
मगर एक बार कोई चोरी करने में कामयाब हो जाए और पकड़ा न जाए तो दूसरी बार चोरी करने की हिम्मत और बढ़ जाती है। अगली बार गाँधीजी ने चोरी तब की जब वह 15 साल के थे और इस बार सोने की चोरी थी। यह चोरी उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि अपने मँझले भाई के लिए की थी जो चोरी-छुपे माँस खाने का आदी हो चुका था और जिसपर 25 रुपये की उधारी हो गई थी। उस उधार को चुकाने के लिए मँझले भाई के सोने के बाज़ूबंद से कुछ हिस्सा निकाल लिया।
उधार तो चुक गया लेकिन गाँधीजी की नींद उड़ गई। उन्होंने क़सम खाई कि अब आगे से चोरी नहीं करेंगे। लेकिन यह काफ़ी नहीं था - पिछली चोरी की ग्लानि तो बाक़ी ही थी। और उसके बाद गाँधीजी ने वह काम किया जो वही कर सकते थे और जिसकी वजह से वह बाद में महात्मा कहलाए। उन्होंने तय किया कि वह पिताजी को सबकुछ बता देंगे। लेकिन कैसे? पिताजी से बोलने की हिम्मत तो थी नहीं, इसलिए नहीं कि उनको उनके हाथ से पिटने का डर था क्योंकि गाँधीजी के पिता ने कभी किसी बच्चे को पीटा नहीं था। गाँधीजी को डर था तो उस पीड़ा का जो उनके पिता को यह जानकर होगी कि उनके बेटों ने चोरी की है।
लेकिन चाहे जितना दुख पहुँचे, यह जोखिम तो मोल लेना ही था क्योंकि जैसा कि गाँधीजी लिखते हैं - शुद्ध मन से अपनी ग़लती स्वीकार किए बिना पाप का यह मैल धुल नहीं सकता था।
गाँधीजी ने तय किया कि वह लिखकर अपना अपराध क़बूल करेंगे और पिता से क्षमा माँगेंगे। उन्होंने काग़ज़ के एक टुकड़े पर सारी कहानी लिखी, साथ ही अपने किए की सज़ा भी माँगी और यह अनुरोध भी किया कि मेरे अपराध के लिए आप ख़ुद को दंडित न करें।
पिता ने क्यों फाड़ दी चिट्ठी?
जब गाँधीजी ने यह पत्र पिता को दिया तो उनका सारा शरीर काँप रहा था। उन दिनों उनके पिता बीमार थे और चौकी पर लेटे रहते थे। गाँधीजी पत्र देने के बाद उस चौकी के सामने ही बैठ गए। उन्होंने पूरी चिट्ठी पढ़ी और उनके गालों से आँसुओं की धारा बह निकली जिससे गाँधीजी का वह पत्र भी भींग गया। एक पल के लिए उन्होंने चिंतन की मुद्रा में आँखें बंद कीं और फिर वह चिट्ठी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। चिट्ठी पढ़ने के लिए उनको बैठना पड़ा था। वह फिर से लेट गए। उनके साथ-साथ गाँधीजी भी रो रहे थे। वह देख पा रहे थे कि पिताजी को उनकी चिट्ठी से कितनी पीड़ा हुई है।
मगर पिता का यह व्यवहार गाँधीजी के अनुमान से विपरीत था। वह सोच रहे थे कि पिताजी ग़ुस्सा होंगे, बुरा-भला कहेंगे और अपना सर पीटेंगे। लेकिन वह तो आश्चर्यजनक रूप से शांत थे। और इसका एक ही कारण था - उनकी निर्मल स्वीकारोक्ति।
जब किसी अपराध की स्वीकारोक्ति उस व्यक्ति के सामने की जाए जिसके प्रति यह अपराध हुआ है, और इस वादे के साथ की जाए कि भविष्य में यह अपराध कभी भी दोहराया नहीं जाएगा, तो उससे शुद्धतर प्रायश्चित्त और कोई हो नहीं सकता। मैं जानता हूँ कि मेरी स्वीकारोक्ति के बाद पिताजी मुझको लेकर बिल्कुल निश्चिंत हो गए और मेरे प्रति उनका स्नेह अपरिमित रूप से बढ़ गया।
गाँधीजी आगे चलकर जब बैरिस्टर बने और अपनी वकालत शुरू की तो कई लोग कहते थे कि वकालत में तो झूठ-सच सब चलता है और यदि झूठ, चोरी और बेईमानी के प्रति उनका यही विरोधी रवैया रहा तो उनको तो मुवक्किल मिलने से रहे। मगर गाँधीजी अपने सिद्धांतों पर डटे रहे। वह अपने मुवक्किल से पहले ही कह देते थे कि यदि वह कोई झूठा मुक़दमा लड़ रहा है तो किसी और वकील के पास चला जाए।
सत्य और ईमानदारी पर चलते हुए गाँधीजी कैसे एक कामयाब वकील बने, और किस तरह उन्होंने अपने मुवक्किलों को भी अपने रंग में रंग डाला, इसके बारे में चर्चा बाद की कड़ी में। अगली कड़ी में हम जानेंगे कि कैसे गाँधीजी ने सबसे छुपाकर माँस खाना शुरू किया और क्यों।
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बात तब की है जब गाँधीजी बारह-तेरह साल के या उससे भी छोटे थे। गाँधीजी के चाचा को सिगरेट पीने की आदत थी और उनको देखकर गाँधीजी और उनके एक रिश्तेदार, दोनों को धूम्रपान का शौक़ चर्राया। पैसे तो होते नहीं थे उनके पास सो वे चाचा द्वारा फेंके गए सिगरेट के टोटों को जलाकर पीने लगे। लेकिन एक तो ये टोटे हमेशा मिलते नहीं थे, दूसरे जब मिलते थे तो उन आख़िर के बचे हुए टुकड़ों से धुएँ के छल्ले नहीं निकलते थे जैसा कि वे निकालना चाहते थे। सो उन दोनों ने नौकर के कुर्ते की जेब से पैसे निकालने शुरू कर दिए और उनसे बीड़ियाँ ख़रीदने लगे। कुछ हफ़्तों तक यह चोरी चलती रही। बीच में उन्होंने यह भी सुना कि कुछ पौधों की डालियों के भीतर छोटे-छोटे छेद होते हैं और उनको भी बीड़ी-सिगरेट की तरह पीया जा सकता है। कुछ दिन उन्होंने इस प्रकार के धूम्रपान का भी आनंद लिया। लेकिन इन सबमें उनको मज़ा नहीं आ रहा था। यह भी क्या ज़िंदगी थी कि बड़ों की अनुमति के बिना कुछ कर ही नहीं सकते। ऐसी जीने का भला क्या फ़ायदा। इस ग़ुलामी के जीवन से तो बेहतर है कि आदमी मर जाए। यही सोचकर दोनों ने तय कर लिया कि वे आत्महत्या कर लेंगे। लेकिन कैसे करें? ज़हर कहाँ से मिलेगा? उन्होंने सुन रखा था कि धतूरे के बीज विषैले होते हैं। एक दिन वे इन बीजों की तलाश में जंगल में गए और उन्हें मिल भी गए। आत्महत्या के लिए उन्होंने शाम का वक़्त चुना। फिर वे एक मंदिर में गए, वहाँ मंदिर के दीए में घी डाला, भगवान के दर्शन किए और कोई सूनी जगह खोजने लगे। लेकिन धीरे-धीरे उनकी हिम्मत जवाब देने लगी। उन्होंने सोचा, 'अगर हम तुरंत नहीं मरे तो? और वैसे भी मरने से क्या लाभ? थोड़ी-बहुत आज़ादी नहीं भी है तो कौन-सी आफ़त है? ' लेकिन फिर भी दोनों ने दो या तीन बीज तो निगल ही डाले। ज़्यादा लेने का साहस नहीं हुआ। गाँधीजी और उनके एक रिश्तेदार, दोनों मौत से डर गए और ख़ुद को शांत करने तथा आत्महत्या के ख़्याल से मुक्ति पाने के लिए रामजी के मंदिर चले गए। 'मैंने महसूस किया कि आत्महत्या के बारे में सोचना-विचारना तो आसान है लेकिन उसपर अमल करना बहुत मुश्किल है। इसलिए उसके बाद जब कभी मैंने किसी को ख़ुदकुशी की धमकी देते हुए सुना तो उसका असर मुझपर बहुत कम हुआ या बिल्कुल ही नहीं हुआ। ' लेकिन इस आत्महत्या के निष्फल प्रयास का इतना असर ज़रूर हुआ कि उन्होंने सिगरेट के टोटे पीने या बीड़ियों के लिए नौकर की जेब से पैसे चुराने बंद कर दिए। मगर एक बार कोई चोरी करने में कामयाब हो जाए और पकड़ा न जाए तो दूसरी बार चोरी करने की हिम्मत और बढ़ जाती है। अगली बार गाँधीजी ने चोरी तब की जब वह पंद्रह साल के थे और इस बार सोने की चोरी थी। यह चोरी उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि अपने मँझले भाई के लिए की थी जो चोरी-छुपे माँस खाने का आदी हो चुका था और जिसपर पच्चीस रुपयापये की उधारी हो गई थी। उस उधार को चुकाने के लिए मँझले भाई के सोने के बाज़ूबंद से कुछ हिस्सा निकाल लिया। उधार तो चुक गया लेकिन गाँधीजी की नींद उड़ गई। उन्होंने क़सम खाई कि अब आगे से चोरी नहीं करेंगे। लेकिन यह काफ़ी नहीं था - पिछली चोरी की ग्लानि तो बाक़ी ही थी। और उसके बाद गाँधीजी ने वह काम किया जो वही कर सकते थे और जिसकी वजह से वह बाद में महात्मा कहलाए। उन्होंने तय किया कि वह पिताजी को सबकुछ बता देंगे। लेकिन कैसे? पिताजी से बोलने की हिम्मत तो थी नहीं, इसलिए नहीं कि उनको उनके हाथ से पिटने का डर था क्योंकि गाँधीजी के पिता ने कभी किसी बच्चे को पीटा नहीं था। गाँधीजी को डर था तो उस पीड़ा का जो उनके पिता को यह जानकर होगी कि उनके बेटों ने चोरी की है। लेकिन चाहे जितना दुख पहुँचे, यह जोखिम तो मोल लेना ही था क्योंकि जैसा कि गाँधीजी लिखते हैं - शुद्ध मन से अपनी ग़लती स्वीकार किए बिना पाप का यह मैल धुल नहीं सकता था। गाँधीजी ने तय किया कि वह लिखकर अपना अपराध क़बूल करेंगे और पिता से क्षमा माँगेंगे। उन्होंने काग़ज़ के एक टुकड़े पर सारी कहानी लिखी, साथ ही अपने किए की सज़ा भी माँगी और यह अनुरोध भी किया कि मेरे अपराध के लिए आप ख़ुद को दंडित न करें। पिता ने क्यों फाड़ दी चिट्ठी? जब गाँधीजी ने यह पत्र पिता को दिया तो उनका सारा शरीर काँप रहा था। उन दिनों उनके पिता बीमार थे और चौकी पर लेटे रहते थे। गाँधीजी पत्र देने के बाद उस चौकी के सामने ही बैठ गए। उन्होंने पूरी चिट्ठी पढ़ी और उनके गालों से आँसुओं की धारा बह निकली जिससे गाँधीजी का वह पत्र भी भींग गया। एक पल के लिए उन्होंने चिंतन की मुद्रा में आँखें बंद कीं और फिर वह चिट्ठी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। चिट्ठी पढ़ने के लिए उनको बैठना पड़ा था। वह फिर से लेट गए। उनके साथ-साथ गाँधीजी भी रो रहे थे। वह देख पा रहे थे कि पिताजी को उनकी चिट्ठी से कितनी पीड़ा हुई है। मगर पिता का यह व्यवहार गाँधीजी के अनुमान से विपरीत था। वह सोच रहे थे कि पिताजी ग़ुस्सा होंगे, बुरा-भला कहेंगे और अपना सर पीटेंगे। लेकिन वह तो आश्चर्यजनक रूप से शांत थे। और इसका एक ही कारण था - उनकी निर्मल स्वीकारोक्ति। जब किसी अपराध की स्वीकारोक्ति उस व्यक्ति के सामने की जाए जिसके प्रति यह अपराध हुआ है, और इस वादे के साथ की जाए कि भविष्य में यह अपराध कभी भी दोहराया नहीं जाएगा, तो उससे शुद्धतर प्रायश्चित्त और कोई हो नहीं सकता। मैं जानता हूँ कि मेरी स्वीकारोक्ति के बाद पिताजी मुझको लेकर बिल्कुल निश्चिंत हो गए और मेरे प्रति उनका स्नेह अपरिमित रूप से बढ़ गया। गाँधीजी आगे चलकर जब बैरिस्टर बने और अपनी वकालत शुरू की तो कई लोग कहते थे कि वकालत में तो झूठ-सच सब चलता है और यदि झूठ, चोरी और बेईमानी के प्रति उनका यही विरोधी रवैया रहा तो उनको तो मुवक्किल मिलने से रहे। मगर गाँधीजी अपने सिद्धांतों पर डटे रहे। वह अपने मुवक्किल से पहले ही कह देते थे कि यदि वह कोई झूठा मुक़दमा लड़ रहा है तो किसी और वकील के पास चला जाए। सत्य और ईमानदारी पर चलते हुए गाँधीजी कैसे एक कामयाब वकील बने, और किस तरह उन्होंने अपने मुवक्किलों को भी अपने रंग में रंग डाला, इसके बारे में चर्चा बाद की कड़ी में। अगली कड़ी में हम जानेंगे कि कैसे गाँधीजी ने सबसे छुपाकर माँस खाना शुरू किया और क्यों।
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पटना, 3 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार के राज्यपाल फागू चैहान ने यहां बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जो सपना देखा है, उसे देश के युवाओं को ही साकार करना है। उन्होंने कहा कि भारत में एकता, अनुशासन के जिन उद्देश्यांे को लेकर एनसीसी की स्थापना हुई थी, यह संगठन उन लक्ष्यों को पूरा करने में पूरी तत्परता और निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आज एनसीसी के माध्यम से ऐसे लाखों युवा हमारे देश में तैयार हो रहे हैं, जो हमारी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समानता, साझी सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध हैं।
राज्यपाल बुधवार को राजभवन परिसर में आयोजित एनसीसी कैडेट्स की एट होम कार्यक्रम में कैडेट्स को संबोधित करते संतोष एवं प्रसन्नता व्यक्त की, कि एनसीसी सेना के तीनों अंगों के उद्देश्यों से जुड़ी तैयारियां कराता है। इसके माध्यम से सामूहिकता, सामाजिकता और जीवन में सामंजस्य की भी शिक्षा दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि एट होम कार्यक्रम नई दिल्ली में सम्पन्न 72वें गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेकर लौटे बिहार, झारखंड के एनसीसी कैडेट्स को पुरस्कृत करने के लिए आयोजित किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि कोरोना से जुड़ी सावधानियों एवं सुरक्षा, उपायों से लोगों को अवगत कराने, सार्वजनिक स्थलों पर सोशल डिस्टेन्सिंग के प्रोटोकॉल का पालन कराने जैसे कार्यों में स्थानीय प्रशासन को सहयोग करने में पिछले दिनों कैडेटों की भूमिका सराहनीय रही है।
समारोह में रंगमय सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिसमें राष्ट्रीय एकता और सद्भावना तथा बिहार और झारखंड की लोक संस्कृति की विशेषताओं की शानदार झलक देखने को मिली।
राज्यपाल ने सभी कलाकारों को उम्दा प्रदर्शन के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान एनसीसी बिहार-झारखंड की उपलब्धियांे पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया तथा भारत की सैन्य शक्ति के विकास से संबंधित आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम मंे उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, विधान पार्षद नीरज कुमार, अपर महानिदेशक एनसीसी (बिहार-झारखंड) मेजर एम इन्द्रबालन सहित कई लोग मौजूद रहे।
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पटना, तीन फरवरी । बिहार के राज्यपाल फागू चैहान ने यहां बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जो सपना देखा है, उसे देश के युवाओं को ही साकार करना है। उन्होंने कहा कि भारत में एकता, अनुशासन के जिन उद्देश्यांे को लेकर एनसीसी की स्थापना हुई थी, यह संगठन उन लक्ष्यों को पूरा करने में पूरी तत्परता और निष्ठा के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज एनसीसी के माध्यम से ऐसे लाखों युवा हमारे देश में तैयार हो रहे हैं, जो हमारी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समानता, साझी सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध हैं। राज्यपाल बुधवार को राजभवन परिसर में आयोजित एनसीसी कैडेट्स की एट होम कार्यक्रम में कैडेट्स को संबोधित करते संतोष एवं प्रसन्नता व्यक्त की, कि एनसीसी सेना के तीनों अंगों के उद्देश्यों से जुड़ी तैयारियां कराता है। इसके माध्यम से सामूहिकता, सामाजिकता और जीवन में सामंजस्य की भी शिक्षा दी जाती है। उल्लेखनीय है कि एट होम कार्यक्रम नई दिल्ली में सम्पन्न बहत्तरवें गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेकर लौटे बिहार, झारखंड के एनसीसी कैडेट्स को पुरस्कृत करने के लिए आयोजित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना से जुड़ी सावधानियों एवं सुरक्षा, उपायों से लोगों को अवगत कराने, सार्वजनिक स्थलों पर सोशल डिस्टेन्सिंग के प्रोटोकॉल का पालन कराने जैसे कार्यों में स्थानीय प्रशासन को सहयोग करने में पिछले दिनों कैडेटों की भूमिका सराहनीय रही है। समारोह में रंगमय सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिसमें राष्ट्रीय एकता और सद्भावना तथा बिहार और झारखंड की लोक संस्कृति की विशेषताओं की शानदार झलक देखने को मिली। राज्यपाल ने सभी कलाकारों को उम्दा प्रदर्शन के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान एनसीसी बिहार-झारखंड की उपलब्धियांे पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया तथा भारत की सैन्य शक्ति के विकास से संबंधित आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम मंे उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, विधान पार्षद नीरज कुमार, अपर महानिदेशक एनसीसी मेजर एम इन्द्रबालन सहित कई लोग मौजूद रहे।
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Ranchi : सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने देश भर में 8 बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझाई है. इनमें झारखंड का भी एक बहुचर्चित मामला शामिल है. सीबीआई ने जिन आठ बड़े बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझा ली है, उनमें रिया मर्डर केस, सत्यम कंप्यूटर घोटाला, असम सीरियल बम ब्लास्ट केस, पायल सुरेखा मर्डर केस, रांची बीटेक छात्रा दुष्कर्म के बाद हत्या केस, सीनियर ऑडिटर पीसीडीए केस, फाल्स मोटर एक्सीडेंट केस और गोवा पुलिस हिरासत केस शामिल हैं.
सीबीआई ने देशभर में जिन आठ बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझाई है, उनमें से एक झारखंड की राजधानी रांची का भी मामला है. यह मामला राजधानी के सदर थाना क्षेत्र के बूटी बस्ती में 15 दिसंबर 2016 की रात का है. जब बीटेक छात्रा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद तार से गला घोंट कर हत्या कर दी गई थी. मोबिल छिड़ककर चेहरा जला दिया गया था. इस मामले को लेकर रांची में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुआ था और यह मामला काफी चर्चित रहा. छात्रा की मौत के मामले में 28 मार्च 2018 को सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले में पहले सीबीआई ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इससे पहले मामले की जांच झारखंड पुलिस की जांच एजेंसी सीआइडी कर रही थी.
सीबीआई ने झारखंड पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ली. जांच के दौरान मामले का पता लगाने के लिए कई तकनीकी और ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल भी किया. जांच के दौरान सीबीआई को यह जानकारी मिली कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला एक व्यक्ति राहुल कुमार था, जो घटना की तारीख से दो-तीन महीने पहले से पास के इलाके में रह रहा था. और फिर वहां से चला गया. आगे की जांच में पता चला कि राहुल कुमार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के धुरगांव का रहने वाला है. उसने अपनी पहचान छुपाई थी और अपना नाम कभी राहुल राज उर्फ आर्यन उर्फ रॉकी राज उर्फ राज श्रीवास्तव उर्फ अमित उर्फ अंकित का इस्तेमाल किया था.
सीबीआई को जांच के दौरान यह पता चला कि राहुल बिहार के पटना और नालंदा में दुष्कर्म, साइबर अपराध और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित गंभीर अपराधों में भी वांछित था. काफी मशक्कत के बाद लखनऊ से उसका पता लगा लिया गया. आरोपी की जांच की गई और डीएनए जांच के लिए उसके रक्त का नमूना लिया गया. आरोपी का डीएनए नमूना एकत्र किया गया और छात्रा के नाखून काटने और अन्य अंगों से मिले फॉरेंसिक जैविक साक्ष्य के साथ मिलान करने के लिए सीएफएसएल नई दिल्ली भेजा गया. जांच के बाद उसका मिलान भी किया गया. जिसके बाद सीबीआइ 23 वर्षीय अभियुक्त को लखनऊ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर 22 जून 2019 को रांची लेकर पहुंची.
सीबीआई द्वारा पेश की गई ठोस जांच और सबूतों के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया और उसे 21 दिसंबर 2019 को मौत की सजा सुनाई. अदालत ने यह भी देखा कि यह मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस की श्रेणी में आता है. इसलिए, मृत्युदंड अपराधी के लिए न्याय के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक उचित सजा है. कोर्ट ने कहा, कोई अन्य सजा बिल्कुल अपर्याप्त है. अपराध के अत्याचार और समाज पर इसके दंडात्मक प्रभाव और गंभीर तथ्य कुछ ऐसे विशेष कारण हैं, जो मृत्युदंड को लागू करने की आवश्यकता को पूरा करते हैं.
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Ranchi : सीबीआई ने देश भर में आठ बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझाई है. इनमें झारखंड का भी एक बहुचर्चित मामला शामिल है. सीबीआई ने जिन आठ बड़े बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझा ली है, उनमें रिया मर्डर केस, सत्यम कंप्यूटर घोटाला, असम सीरियल बम ब्लास्ट केस, पायल सुरेखा मर्डर केस, रांची बीटेक छात्रा दुष्कर्म के बाद हत्या केस, सीनियर ऑडिटर पीसीडीए केस, फाल्स मोटर एक्सीडेंट केस और गोवा पुलिस हिरासत केस शामिल हैं. सीबीआई ने देशभर में जिन आठ बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझाई है, उनमें से एक झारखंड की राजधानी रांची का भी मामला है. यह मामला राजधानी के सदर थाना क्षेत्र के बूटी बस्ती में पंद्रह दिसंबर दो हज़ार सोलह की रात का है. जब बीटेक छात्रा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद तार से गला घोंट कर हत्या कर दी गई थी. मोबिल छिड़ककर चेहरा जला दिया गया था. इस मामले को लेकर रांची में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुआ था और यह मामला काफी चर्चित रहा. छात्रा की मौत के मामले में अट्ठाईस मार्च दो हज़ार अट्ठारह को सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले में पहले सीबीआई ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इससे पहले मामले की जांच झारखंड पुलिस की जांच एजेंसी सीआइडी कर रही थी. सीबीआई ने झारखंड पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ली. जांच के दौरान मामले का पता लगाने के लिए कई तकनीकी और ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल भी किया. जांच के दौरान सीबीआई को यह जानकारी मिली कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला एक व्यक्ति राहुल कुमार था, जो घटना की तारीख से दो-तीन महीने पहले से पास के इलाके में रह रहा था. और फिर वहां से चला गया. आगे की जांच में पता चला कि राहुल कुमार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के धुरगांव का रहने वाला है. उसने अपनी पहचान छुपाई थी और अपना नाम कभी राहुल राज उर्फ आर्यन उर्फ रॉकी राज उर्फ राज श्रीवास्तव उर्फ अमित उर्फ अंकित का इस्तेमाल किया था. सीबीआई को जांच के दौरान यह पता चला कि राहुल बिहार के पटना और नालंदा में दुष्कर्म, साइबर अपराध और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित गंभीर अपराधों में भी वांछित था. काफी मशक्कत के बाद लखनऊ से उसका पता लगा लिया गया. आरोपी की जांच की गई और डीएनए जांच के लिए उसके रक्त का नमूना लिया गया. आरोपी का डीएनए नमूना एकत्र किया गया और छात्रा के नाखून काटने और अन्य अंगों से मिले फॉरेंसिक जैविक साक्ष्य के साथ मिलान करने के लिए सीएफएसएल नई दिल्ली भेजा गया. जांच के बाद उसका मिलान भी किया गया. जिसके बाद सीबीआइ तेईस वर्षीय अभियुक्त को लखनऊ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर बाईस जून दो हज़ार उन्नीस को रांची लेकर पहुंची. सीबीआई द्वारा पेश की गई ठोस जांच और सबूतों के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया और उसे इक्कीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस को मौत की सजा सुनाई. अदालत ने यह भी देखा कि यह मामला रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस की श्रेणी में आता है. इसलिए, मृत्युदंड अपराधी के लिए न्याय के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक उचित सजा है. कोर्ट ने कहा, कोई अन्य सजा बिल्कुल अपर्याप्त है. अपराध के अत्याचार और समाज पर इसके दंडात्मक प्रभाव और गंभीर तथ्य कुछ ऐसे विशेष कारण हैं, जो मृत्युदंड को लागू करने की आवश्यकता को पूरा करते हैं.
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पटनाः बिहार में सात जुलाई से अनलॉक-4 का ऐलान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक के बाद इसके लिए नई गाइडलाइन का ऐलान किया। नए निर्देशों के मुताबिक बिहार के सभी सरकारी और गैर सरकारी दफ्तरों में अब पूरी क्षमता से काम होगा।50 प्रतिशत बैठने की क्षमता के साथ रेस्टोरेंट और खानपान की दुकानें भी खुलेंगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों, सभी कॉलेजों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, सरकारी प्रशिक्षण संस्थान, 11वीं और 12 वीं तक के विद्यालयों को भी 50% छात्रों की उपस्थिति के साथ खोलने की इजाजत दे दी गई है।बिहार में अनलॉक-3 छह जुलाई को खत्म हो रहा है। सोमवार को अनलॉक-3 तक के परिणामों की समीक्षा क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में की गई। समीक्षा में पाया गया कि राज्य में कोरोना के मामलों में लगातार कमी आ रही है। इसके साथ ही कुछ मामलों में अभी भी सावधानी की जरूरत है।सोमवार को सीएम नीतीश ने अपने अधिकारिक ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट के जरिए बजाया कि बिहार में सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों को सामान्य रूप से खोलने का निर्णय लिया गया है। टीका प्राप्त आगंतुक कार्यालय में प्रवेश पा सकेंगे। रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान का संचालन 50% बैठने की क्षमता के साथ हो सकेगा। अभी भी सावधानी की जरूरत है। विश्वविद्यालय, सभी कॉलेज, तकनीकि शिक्षण संस्थान, सरकारी प्रशिक्षण संस्थान, ग्यारहवीं एवं बारहवीं तक के विद्यालय 50% छात्रों की उपस्थिति के साथ खुलेंगे। शैक्षणिक संस्थानों के व्यस्क छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मियों के लिए टीकाकरण की विशेष व्यवस्था होगी।सिर्फ टीका लगवा चुके कर्मचारी ही पाएंगे प्रवेशअनलॉक-4 में सभी सरकारी, गैर सरकारी दफ्तर सभी कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए खोल तो दिए गए हैं लेकिन इनमें सिर्फ टीका लगवा चुके लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। जाहिर है हर कर्मचारी-अधिकारी के लिए कोरोना का टीका लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य में विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। छात्रों शिक्षकों को लगेगा टीकाविश्वविद्यालयों, स्कूलों-कालेजों में भी सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और व्यस्क छात्र-छात्राओं को टीका लगवाया जाएगा। इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं को देखते हुए स्कलों-कालेजों-विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में अभी सिर्फ 50 प्रतिशत उपस्थिति की अनुमति दी गई है। शिक्षण संस्थाओं में सभी को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
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पटनाः बिहार में सात जुलाई से अनलॉक-चार का ऐलान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक के बाद इसके लिए नई गाइडलाइन का ऐलान किया। नए निर्देशों के मुताबिक बिहार के सभी सरकारी और गैर सरकारी दफ्तरों में अब पूरी क्षमता से काम होगा।पचास प्रतिशत बैठने की क्षमता के साथ रेस्टोरेंट और खानपान की दुकानें भी खुलेंगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों, सभी कॉलेजों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, सरकारी प्रशिक्षण संस्थान, ग्यारहवीं और बारह वीं तक के विद्यालयों को भी पचास% छात्रों की उपस्थिति के साथ खोलने की इजाजत दे दी गई है।बिहार में अनलॉक-तीन छह जुलाई को खत्म हो रहा है। सोमवार को अनलॉक-तीन तक के परिणामों की समीक्षा क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में की गई। समीक्षा में पाया गया कि राज्य में कोरोना के मामलों में लगातार कमी आ रही है। इसके साथ ही कुछ मामलों में अभी भी सावधानी की जरूरत है।सोमवार को सीएम नीतीश ने अपने अधिकारिक ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट के जरिए बजाया कि बिहार में सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों को सामान्य रूप से खोलने का निर्णय लिया गया है। टीका प्राप्त आगंतुक कार्यालय में प्रवेश पा सकेंगे। रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान का संचालन पचास% बैठने की क्षमता के साथ हो सकेगा। अभी भी सावधानी की जरूरत है। विश्वविद्यालय, सभी कॉलेज, तकनीकि शिक्षण संस्थान, सरकारी प्रशिक्षण संस्थान, ग्यारहवीं एवं बारहवीं तक के विद्यालय पचास% छात्रों की उपस्थिति के साथ खुलेंगे। शैक्षणिक संस्थानों के व्यस्क छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मियों के लिए टीकाकरण की विशेष व्यवस्था होगी।सिर्फ टीका लगवा चुके कर्मचारी ही पाएंगे प्रवेशअनलॉक-चार में सभी सरकारी, गैर सरकारी दफ्तर सभी कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए खोल तो दिए गए हैं लेकिन इनमें सिर्फ टीका लगवा चुके लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। जाहिर है हर कर्मचारी-अधिकारी के लिए कोरोना का टीका लगाना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य में विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। छात्रों शिक्षकों को लगेगा टीकाविश्वविद्यालयों, स्कूलों-कालेजों में भी सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और व्यस्क छात्र-छात्राओं को टीका लगवाया जाएगा। इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं को देखते हुए स्कलों-कालेजों-विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में अभी सिर्फ पचास प्रतिशत उपस्थिति की अनुमति दी गई है। शिक्षण संस्थाओं में सभी को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
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नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर के ऊपर आसमान में आज अचानक धूल उड़ती नजर आ रही है। सड़कों पर देखने के लिए कुछ भी नहीं है। देर रात को तेज हवा चली, लेकिन सुबह इतनी धूल थी कि बिना मास्क के निकलना मुश्किल था। धूल के कारण शहर में विजिबिलिटी कम हो गई। बाहर जाने वाले लोगों को सांस लेने में भी काफी परशानी हो रही है।
इस मामले में मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है। अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि कल सोमवार को आसमान बिल्कुल साफ था तो रात में आसमान में धूल की मोटी परत कैसे जम गई? इसके पीछे का जवाब बेहद ही आसान है। आइए आपको बताते हैः
➨ आसमान में इतनी धूल क्यों है?
सोमवार की रात तेज हवा चली, तो शहरों में हर तरफ धूल ही धूल नजर आ रही है। दूसरी ओर, पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में जलती हुई पराली आसमान के काले होने का एक प्रमुख कारण है। अभी रबी की फसल कट रही है। इसलिए पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस मामले में हरियाणा और पंजाब पुलिस की तरफ से 3 हजार मामले दर्ज किए गए हैं। बता दें कि ये मामले पिछले साल के मुकाबले तो काफी कम हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की मानें तो,पश्चिमी यूपी में कुछ जगहों पर तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है, जबकि पूर्वी यूपी में मौसम शुष्क रहने के आसार है। दिल्ली एनसीआर के आसपास के इलाकों में आज तेज आंधी की भी उम्मीद है। वहीं, मध्य प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल उप-हिमालय के अधिकांश हिस्सों में बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने के कयास लगाए जा रहे है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में अलग-अलग स्थानों पर बिजली गिरने के साथ बारिश की भी उम्मीद है।
➨दिल्ली में बारिश कब होगी?
मौसम विभाग के मुताबिक आज दिल्ली में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं अगर तापमान की बात करें तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री और अधिकतम तापमान 41 डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है। वहीं, 17 मई को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। साथ ही अधिकतम तापमान 42 डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है। 18 मई को नई दिल्ली में गरज के साथ बारिश होगी। 18 मई को अधिकतम तापमान 40 डिग्री रिकॉर्ड किया जाएगा।
यह भी पढ़ेंः
उर्फी ने पहनी एयरपोर्ट पर ब्रा, लोग बोले ये क्या है......?
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नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर के ऊपर आसमान में आज अचानक धूल उड़ती नजर आ रही है। सड़कों पर देखने के लिए कुछ भी नहीं है। देर रात को तेज हवा चली, लेकिन सुबह इतनी धूल थी कि बिना मास्क के निकलना मुश्किल था। धूल के कारण शहर में विजिबिलिटी कम हो गई। बाहर जाने वाले लोगों को सांस लेने में भी काफी परशानी हो रही है। इस मामले में मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है। अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि कल सोमवार को आसमान बिल्कुल साफ था तो रात में आसमान में धूल की मोटी परत कैसे जम गई? इसके पीछे का जवाब बेहद ही आसान है। आइए आपको बताते हैः ➨ आसमान में इतनी धूल क्यों है? सोमवार की रात तेज हवा चली, तो शहरों में हर तरफ धूल ही धूल नजर आ रही है। दूसरी ओर, पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में जलती हुई पराली आसमान के काले होने का एक प्रमुख कारण है। अभी रबी की फसल कट रही है। इसलिए पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस मामले में हरियाणा और पंजाब पुलिस की तरफ से तीन हजार मामले दर्ज किए गए हैं। बता दें कि ये मामले पिछले साल के मुकाबले तो काफी कम हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो,पश्चिमी यूपी में कुछ जगहों पर तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है, जबकि पूर्वी यूपी में मौसम शुष्क रहने के आसार है। दिल्ली एनसीआर के आसपास के इलाकों में आज तेज आंधी की भी उम्मीद है। वहीं, मध्य प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल उप-हिमालय के अधिकांश हिस्सों में बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने के कयास लगाए जा रहे है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में अलग-अलग स्थानों पर बिजली गिरने के साथ बारिश की भी उम्मीद है। ➨दिल्ली में बारिश कब होगी? मौसम विभाग के मुताबिक आज दिल्ली में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं अगर तापमान की बात करें तो न्यूनतम तापमान छब्बीस डिग्री और अधिकतम तापमान इकतालीस डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है। वहीं, सत्रह मई को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। साथ ही अधिकतम तापमान बयालीस डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है। अट्ठारह मई को नई दिल्ली में गरज के साथ बारिश होगी। अट्ठारह मई को अधिकतम तापमान चालीस डिग्री रिकॉर्ड किया जाएगा। यह भी पढ़ेंः उर्फी ने पहनी एयरपोर्ट पर ब्रा, लोग बोले ये क्या है......?
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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भाजपा बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और सरदार पटेल के बाद अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को साधने में जुट गई है। इस क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अक्टूबर को आजाद हिंद फौज की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले के भीतर आयोजित कार्यक्रम में तिरंगा फहराएंगे।
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भाजपा बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और सरदार पटेल के बाद अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को साधने में जुट गई है। इस क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इक्कीस अक्टूबर को आजाद हिंद फौज की पचहत्तरवीं वर्षगांठ पर लाल किले के भीतर आयोजित कार्यक्रम में तिरंगा फहराएंगे। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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कोरोना के संक्रमण के चैन को तोड़ने के लिए पीएम मोदी लगातार लोगों से बातचीत कर रहे हैं। सोमवार को पीएम ने भिन्न-भिन्न सोशल वेल्फेयर संगठनों के सदस्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की।
नई दिल्ली. कोरोना वायरस से जारी जंग के बीच पीएम मोदी ने खुज मोर्चा संभाला हुई है। पीएम मोदी लगातार प्रत्येक स्थतियों की समीक्षा कर रहे हैं। कोरोना के संक्रमण के चैन को तोड़ने के लिए पीएम मोदी लगातार लोगों से बातचीत कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने आज सोमवार को भिन्न-भिन्न सोशल वेल्फेयर संगठनों के सदस्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की।
'गरीबों की सेवा करना राष्ट्र की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है'
पीएम मोदी ने कहा कि पूरा देश COVID-19 का सामना करने में धैर्य दिखा रहा है। महात्मा गांधी कहते थे कि गरीबों की सेवा करना राष्ट्र की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है, उन्होंने मानवता की सेवा करने के लिए सहभागी संगठन के समर्पण की प्रशंसा की थी।
कोरोना वायरस जिस प्रकार तेजी से पांव पसार रहा है। उससे पार पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई पर सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए पीएम रोजाना 200 से अधिक लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं। पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस तरह के संवाद में राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों को किये जाने वाले फोन कॉल शामिल हैं।
भारत में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। सोमवार को देश के अलग-अलग राज्यों में 4 लोगों की मौत हुई है। जिससे मौत का आंकड़ा 34 तक पहुंच गया है। वहीं, देश के 25 से ज्यादा राज्यों में कोरोना का संक्रमण फैला है जिससे लगभग 1200 मरीज पॉजिटिव मिले हैं।
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कोरोना के संक्रमण के चैन को तोड़ने के लिए पीएम मोदी लगातार लोगों से बातचीत कर रहे हैं। सोमवार को पीएम ने भिन्न-भिन्न सोशल वेल्फेयर संगठनों के सदस्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। नई दिल्ली. कोरोना वायरस से जारी जंग के बीच पीएम मोदी ने खुज मोर्चा संभाला हुई है। पीएम मोदी लगातार प्रत्येक स्थतियों की समीक्षा कर रहे हैं। कोरोना के संक्रमण के चैन को तोड़ने के लिए पीएम मोदी लगातार लोगों से बातचीत कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने आज सोमवार को भिन्न-भिन्न सोशल वेल्फेयर संगठनों के सदस्यों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। 'गरीबों की सेवा करना राष्ट्र की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है' पीएम मोदी ने कहा कि पूरा देश COVID-उन्नीस का सामना करने में धैर्य दिखा रहा है। महात्मा गांधी कहते थे कि गरीबों की सेवा करना राष्ट्र की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है, उन्होंने मानवता की सेवा करने के लिए सहभागी संगठन के समर्पण की प्रशंसा की थी। कोरोना वायरस जिस प्रकार तेजी से पांव पसार रहा है। उससे पार पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई पर सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए पीएम रोजाना दो सौ से अधिक लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं। पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस तरह के संवाद में राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों को किये जाने वाले फोन कॉल शामिल हैं। भारत में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। सोमवार को देश के अलग-अलग राज्यों में चार लोगों की मौत हुई है। जिससे मौत का आंकड़ा चौंतीस तक पहुंच गया है। वहीं, देश के पच्चीस से ज्यादा राज्यों में कोरोना का संक्रमण फैला है जिससे लगभग एक हज़ार दो सौ मरीज पॉजिटिव मिले हैं।
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देश में बेरोजगारी की स्थिति का पता लगाने के लिए लेबर ब्यूरो तीन सर्वे कराएगा. ये सर्वे माइग्रेशन, घरेलू कामगारों और पेशवर संगठनों पर होंगे ताकि उनके रोजगार की स्थिति का पता चल सके. कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से बेरोजगारी में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए ये सर्वेक्षण कराए जाएंगे. सर्वे के लिए बने तीन एक्सपर्ट ग्रुप की गुरुवार को श्रम मंत्री संतोष गंगवार के साथ बैठक हुई.
सर्वे के लिए एक्सपर्ट ग्रुप का गठन एक्सपर्ट ग्रुप की अध्यक्षता कोलकाता यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसपी मुखर्जी करेंगे. इसमें अर्थशास्त्री और सांख्यिकीविद भी होंगे. एक्सपर्ट की ओर से इकट्ठा आंकड़ों का इस्तेमाल रोजगार के अवसर तैयार करने में होगा. सरकार इस सर्वे के जरिये आप्रवासी मजदूरों और उनसे जुड़े मुद्दों का अंदाजा लगाएगी. इस डेटाबेस के जरिये सरकार उनके मुताबिक रोजगार प्रोग्राम लाएगी.
घरेलू कामगारों का भी होगा सर्वे इस पैनल से घरेलू कामगारों के भी आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए कहा गया गया है. देश में कुल कामगारों में लगभग 3 फीसदी घरेलू कामगार हैं. यह पहला मौका होगा, जब लेबर ब्यूरो के किसी सर्वे के जरिये घरेलू कामगारों के आंकड़े इकट्ठा किए जाएंगे. इसी तरह प्रोफेशनल बॉडीज का भी सर्वे होगा.
चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकीलों और डॉक्टरों के यहां कितने लोगों को रोजगार मिल रहा है इसका भी पता इस सर्वे के जरिये किया जाएगा. सरकार इस सर्वे को काफी महत्व दे रही है. इसलिए एक्सपर्ट्स ग्रुप को सारी तकनीकी तैयारी जल्द से जल्द करने को कहा गया है. सरकार बगैर किसी देरी के इस सर्वे को शुरू कराना चाह रही है.
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देश में बेरोजगारी की स्थिति का पता लगाने के लिए लेबर ब्यूरो तीन सर्वे कराएगा. ये सर्वे माइग्रेशन, घरेलू कामगारों और पेशवर संगठनों पर होंगे ताकि उनके रोजगार की स्थिति का पता चल सके. कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से बेरोजगारी में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए ये सर्वेक्षण कराए जाएंगे. सर्वे के लिए बने तीन एक्सपर्ट ग्रुप की गुरुवार को श्रम मंत्री संतोष गंगवार के साथ बैठक हुई. सर्वे के लिए एक्सपर्ट ग्रुप का गठन एक्सपर्ट ग्रुप की अध्यक्षता कोलकाता यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसपी मुखर्जी करेंगे. इसमें अर्थशास्त्री और सांख्यिकीविद भी होंगे. एक्सपर्ट की ओर से इकट्ठा आंकड़ों का इस्तेमाल रोजगार के अवसर तैयार करने में होगा. सरकार इस सर्वे के जरिये आप्रवासी मजदूरों और उनसे जुड़े मुद्दों का अंदाजा लगाएगी. इस डेटाबेस के जरिये सरकार उनके मुताबिक रोजगार प्रोग्राम लाएगी. घरेलू कामगारों का भी होगा सर्वे इस पैनल से घरेलू कामगारों के भी आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए कहा गया गया है. देश में कुल कामगारों में लगभग तीन फीसदी घरेलू कामगार हैं. यह पहला मौका होगा, जब लेबर ब्यूरो के किसी सर्वे के जरिये घरेलू कामगारों के आंकड़े इकट्ठा किए जाएंगे. इसी तरह प्रोफेशनल बॉडीज का भी सर्वे होगा. चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकीलों और डॉक्टरों के यहां कितने लोगों को रोजगार मिल रहा है इसका भी पता इस सर्वे के जरिये किया जाएगा. सरकार इस सर्वे को काफी महत्व दे रही है. इसलिए एक्सपर्ट्स ग्रुप को सारी तकनीकी तैयारी जल्द से जल्द करने को कहा गया है. सरकार बगैर किसी देरी के इस सर्वे को शुरू कराना चाह रही है.
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कार्तिक मासमें कृष्णपक्षकी द्वितीया, षष्टी और द्वादशी इस प्रकार छः उपवास किये जाते हैं। आचार्यके मतानुसार प्रत्येक मासके शुक्लपक्षकी तीन तिथियाँ तथा प्रत्येक मासके कृष्णपक्षकी तीन तिथियाँ लेनी चाहिए । मास गणना अमावस्यासे लेकर अमावस्यतक ली जाती है । एक वर्षम कुल ७२ उपवास करने पड़ते हैं। मासिक कनकावलीमें केवल छः उपवास किये जाते हैं। मास गणना अमान्त ली जाती है ।
रत्नावलीव्रतकी विधि
कनकावली चैवमेव रत्नावली, तस्यामाश्विनशुक्ले तृतीया पञ्चमी, अष्टमी, कार्तिक कृष्णे द्वितीया, पञ्चमी, अष्टमी एवं एतद्दिवसेषु सर्वेषु मासेषु द्विसप्ततिरुपवासाः कार्याः । प्रत्येक मासे षडुपवासाः भवन्ति । इयं द्वादशमासभवा रत्नावली । सावधिका मासिका रत्नावली न भवति ।
अर्थ - कनकावली व्रतके समान रत्नावली व्रत भी करना चाहिए । इसमें भी आश्विन शुक्ला तृतीया, पञ्चमी, अष्टमी, तथा कार्तिक कृष्णा द्वितीया, पञ्चमी और अष्टमी इस प्रकार प्रत्येक महीनेमें छः उपवास करने चाहिए । बारह महीनोमे कुल ७२ उपवास उपर्युक्त तिथियामें ही करने पड़ते हैं । यह द्वादश मासवाली रत्नावली है। सावधिक मासिक रत्नावली व्रत नहीं होता है ।
विवेचन कनकावलीके समान रत्नावली व्रतमें भी मास गणना अमावस्यासे ग्रहण की गयी है। अमान्तसे लेकर दूसरे अमान्त एक मास माना जाता है। व्रतका आरम्भ आश्विन के अमान्तके पश्चात् किया जाता है तथा कनकावली और रखावली दोनों व्रतोंके लिए वर्ष गणना आश्विन के अमान्तसे ग्रहण की जाती है। रलावली व्रत मासिक नहीं होता है, वार्षिक ही किया जाता है। प्रत्येक महीनेमें उपर्युक्त तिथियोंमें छः उपवास होते हैं, इस प्रकार एक वर्ष में कुल ७२ उपवास हो जाते हैं। उपवासके दिन अभिषेक, पूजन आदि कार्य पूर्ववत् ही
किये जाते हैं। 'ओ ह्रीं त्रिकालसम्बन्धिचतुर्विंशतितीर्थंकरेभ्यो नमः' इस मन्त्रका जाप इन दोनों व्रतों में उपवासके दिन करना चाहिए ।
पुष्पाञ्जलि व्रत की विधि
पुष्पाञ्जलिस्तु भाद्रपदशुक्लां पञ्चमीमारभ्य शुक्लानवमीपर्यन्तं यथाशक्ति पञ्चोपवासाः भवन्ति ॥
अर्थ- पुष्पाञ्जलिव्रत भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से नवमी पर्यन्त किया जाता है। इसमें पाँच उपवास अपनी शक्तिके अनुसार किये जाते हैं ।
विवेचन-भादों सुदी पञ्चमीसे नवमी तक पाँच दिन पंचमेरु की स्थापना करके चौबीस तीर्थकरोकी पूजा करनी चाहिए । अभिषेक भी प्रतिदिन किया जाता है। पाँच अष्टक और पाँच जयमाल पढ़ी जाती । 'ॐ ह्रीं पञ्चमेरुसम्बन्ध्यशीतिजिनालयेभ्यो नमः' मन्त्र का प्रतिदिन तीन बार जाप किया जाता है। यदि शक्ति हो तो पाँचों उपवास, अन्यथा पञ्चमीको उपवास, शेष चार दिन रस त्याग कर एकाशन करना चाहिए। रात्रि जागरण विषय ऋषायोंको अल्प करनेका प्रयत्न एवं आरम्भ-परिग्रहका त्याग करने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए । विकथाओंको कहने और सुननेका त्याग भी इस व्रतके पालनेवालेको करना आवश्यक है। इस व्रतका पालन पाँच वर्ष तक करना चाहिए, तत्पश्चात् उद्यापन करके व्रतकी समाप्ति कर दी जाती है ।
लब्धिविधान व्रतकी विधि
लब्धिविधानस्तु भाद्रपदमाघचैत्रशुक्ल प्रतिपदमारभ्य तृती यापर्यन्तं दिनत्रयं भवति । दिनहानौ तु दिनमेकं प्रथमं कार्यम्, वृद्धौ स एव क्रमः स्मर्तव्यः ।
अर्थ - भाद्रपद, माघ और चैत्र मासमें शुक्लपक्षकी प्रतिपदासे लेकर तृतीयातक तीन दिन पर्यन्त लब्धिविधान व्रत किया जाता है । तिथि हानि होनेपर एक दिन पहलेसे व्रत करना होता है और तिथि वृद्धि
होनेपर पहलेवाला क्रम अर्थात् वृद्धिंगत तिथि छः घटीसे अधिक हो तो एक दिन व्रत अधिक करना चाहिए ।
विवेचन - भादों, माघ और चैत्र सुदी प्रतिपदासे तृतीयातक लब्धिविधान व्रत करनेका नियम है। इस व्रतकी धारणा पूर्णिमाको तथा पारणा चतुर्थी को करनी होती है। यदि शक्ति हो तो तीनों दिनोंका अष्टमोपवास करनेका विधान है। शक्ति के अभाव में प्रतिपदाको उपवास, द्वितीयाको ऊनोदर एवं तृतीयाको उपवास या कांजी-छाछ या छाछसे निर्मित महेरी अथवा माड़भात लेना होता है। व्रतके दिनोंमें महावीर स्वामीकी प्रतिमाका पूजन, अभिषेक किया जाता है तथा 'ॐ ह्रीं महावीरस्वामिने नमः' मन्त्रका जाप प्रतिदिन तीन बार किया जाता है। त्रिकाल सामायिक करनेका भी विधान है। रात्रि जागरण तथा स्तोत्र पाठ, भजन गान आदि भी व्रतके दिनोकी रात्रियों में किये जाते हैं ।
आवश्यकता पड़ने अथवा आकुलता होनेपर मध्यरात्रिमें अल्प निद्रा ली जा सकती है। कषाय और आरम्भ परिग्रहको घटाना, विकथाओंकी चर्चाका त्याग करना एवं धर्मध्यानमें लीन होना आवश्यक है ।
कर्मनिर्जर व्रत की विधि
कर्मनिर्जरस्तु भाद्रपदशुक्लामेकादशीमारभ्य चतुर्दशीपर्यन्तं भवति । हानिवृद्धौ च स एव क्रमः ज्ञातव्यः ।
अर्थ-कर्मनिर्जराघ्रत भादों सुदी एकादशीसे लेकर भादों सुदी चतुर्दशीतक चार दिन किया जाता है । तिथि हानि और तिथि वृद्धि होनेपर पूर्वोक्त क्रम ही व्रतकी व्यवस्था के लिए ग्रहण किया गया है ।
विवेचन -कर्मनिर्जरा व्रतके सम्बन्धमें दो मान्यताएँ प्रचलित हैंप्रथम मान्यता भादों सुदी एकादशीसे लेकर चतुर्दशी तक व्रत करनेकी है । दूसरी मान्यताके अनुसार आषाद सुदी चतुर्दशी, श्रावण सुदी चतुदशी, भादों सुदी चतुर्दशी एवं आश्विन सुदी चतुर्दशी इन चार तिथियों
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कार्तिक मासमें कृष्णपक्षकी द्वितीया, षष्टी और द्वादशी इस प्रकार छः उपवास किये जाते हैं। आचार्यके मतानुसार प्रत्येक मासके शुक्लपक्षकी तीन तिथियाँ तथा प्रत्येक मासके कृष्णपक्षकी तीन तिथियाँ लेनी चाहिए । मास गणना अमावस्यासे लेकर अमावस्यतक ली जाती है । एक वर्षम कुल बहत्तर उपवास करने पड़ते हैं। मासिक कनकावलीमें केवल छः उपवास किये जाते हैं। मास गणना अमान्त ली जाती है । रत्नावलीव्रतकी विधि कनकावली चैवमेव रत्नावली, तस्यामाश्विनशुक्ले तृतीया पञ्चमी, अष्टमी, कार्तिक कृष्णे द्वितीया, पञ्चमी, अष्टमी एवं एतद्दिवसेषु सर्वेषु मासेषु द्विसप्ततिरुपवासाः कार्याः । प्रत्येक मासे षडुपवासाः भवन्ति । इयं द्वादशमासभवा रत्नावली । सावधिका मासिका रत्नावली न भवति । अर्थ - कनकावली व्रतके समान रत्नावली व्रत भी करना चाहिए । इसमें भी आश्विन शुक्ला तृतीया, पञ्चमी, अष्टमी, तथा कार्तिक कृष्णा द्वितीया, पञ्चमी और अष्टमी इस प्रकार प्रत्येक महीनेमें छः उपवास करने चाहिए । बारह महीनोमे कुल बहत्तर उपवास उपर्युक्त तिथियामें ही करने पड़ते हैं । यह द्वादश मासवाली रत्नावली है। सावधिक मासिक रत्नावली व्रत नहीं होता है । विवेचन कनकावलीके समान रत्नावली व्रतमें भी मास गणना अमावस्यासे ग्रहण की गयी है। अमान्तसे लेकर दूसरे अमान्त एक मास माना जाता है। व्रतका आरम्भ आश्विन के अमान्तके पश्चात् किया जाता है तथा कनकावली और रखावली दोनों व्रतोंके लिए वर्ष गणना आश्विन के अमान्तसे ग्रहण की जाती है। रलावली व्रत मासिक नहीं होता है, वार्षिक ही किया जाता है। प्रत्येक महीनेमें उपर्युक्त तिथियोंमें छः उपवास होते हैं, इस प्रकार एक वर्ष में कुल बहत्तर उपवास हो जाते हैं। उपवासके दिन अभिषेक, पूजन आदि कार्य पूर्ववत् ही किये जाते हैं। 'ओ ह्रीं त्रिकालसम्बन्धिचतुर्विंशतितीर्थंकरेभ्यो नमः' इस मन्त्रका जाप इन दोनों व्रतों में उपवासके दिन करना चाहिए । पुष्पाञ्जलि व्रत की विधि पुष्पाञ्जलिस्तु भाद्रपदशुक्लां पञ्चमीमारभ्य शुक्लानवमीपर्यन्तं यथाशक्ति पञ्चोपवासाः भवन्ति ॥ अर्थ- पुष्पाञ्जलिव्रत भाद्रपद शुक्ल पञ्चमी से नवमी पर्यन्त किया जाता है। इसमें पाँच उपवास अपनी शक्तिके अनुसार किये जाते हैं । विवेचन-भादों सुदी पञ्चमीसे नवमी तक पाँच दिन पंचमेरु की स्थापना करके चौबीस तीर्थकरोकी पूजा करनी चाहिए । अभिषेक भी प्रतिदिन किया जाता है। पाँच अष्टक और पाँच जयमाल पढ़ी जाती । 'ॐ ह्रीं पञ्चमेरुसम्बन्ध्यशीतिजिनालयेभ्यो नमः' मन्त्र का प्रतिदिन तीन बार जाप किया जाता है। यदि शक्ति हो तो पाँचों उपवास, अन्यथा पञ्चमीको उपवास, शेष चार दिन रस त्याग कर एकाशन करना चाहिए। रात्रि जागरण विषय ऋषायोंको अल्प करनेका प्रयत्न एवं आरम्भ-परिग्रहका त्याग करने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए । विकथाओंको कहने और सुननेका त्याग भी इस व्रतके पालनेवालेको करना आवश्यक है। इस व्रतका पालन पाँच वर्ष तक करना चाहिए, तत्पश्चात् उद्यापन करके व्रतकी समाप्ति कर दी जाती है । लब्धिविधान व्रतकी विधि लब्धिविधानस्तु भाद्रपदमाघचैत्रशुक्ल प्रतिपदमारभ्य तृती यापर्यन्तं दिनत्रयं भवति । दिनहानौ तु दिनमेकं प्रथमं कार्यम्, वृद्धौ स एव क्रमः स्मर्तव्यः । अर्थ - भाद्रपद, माघ और चैत्र मासमें शुक्लपक्षकी प्रतिपदासे लेकर तृतीयातक तीन दिन पर्यन्त लब्धिविधान व्रत किया जाता है । तिथि हानि होनेपर एक दिन पहलेसे व्रत करना होता है और तिथि वृद्धि होनेपर पहलेवाला क्रम अर्थात् वृद्धिंगत तिथि छः घटीसे अधिक हो तो एक दिन व्रत अधिक करना चाहिए । विवेचन - भादों, माघ और चैत्र सुदी प्रतिपदासे तृतीयातक लब्धिविधान व्रत करनेका नियम है। इस व्रतकी धारणा पूर्णिमाको तथा पारणा चतुर्थी को करनी होती है। यदि शक्ति हो तो तीनों दिनोंका अष्टमोपवास करनेका विधान है। शक्ति के अभाव में प्रतिपदाको उपवास, द्वितीयाको ऊनोदर एवं तृतीयाको उपवास या कांजी-छाछ या छाछसे निर्मित महेरी अथवा माड़भात लेना होता है। व्रतके दिनोंमें महावीर स्वामीकी प्रतिमाका पूजन, अभिषेक किया जाता है तथा 'ॐ ह्रीं महावीरस्वामिने नमः' मन्त्रका जाप प्रतिदिन तीन बार किया जाता है। त्रिकाल सामायिक करनेका भी विधान है। रात्रि जागरण तथा स्तोत्र पाठ, भजन गान आदि भी व्रतके दिनोकी रात्रियों में किये जाते हैं । आवश्यकता पड़ने अथवा आकुलता होनेपर मध्यरात्रिमें अल्प निद्रा ली जा सकती है। कषाय और आरम्भ परिग्रहको घटाना, विकथाओंकी चर्चाका त्याग करना एवं धर्मध्यानमें लीन होना आवश्यक है । कर्मनिर्जर व्रत की विधि कर्मनिर्जरस्तु भाद्रपदशुक्लामेकादशीमारभ्य चतुर्दशीपर्यन्तं भवति । हानिवृद्धौ च स एव क्रमः ज्ञातव्यः । अर्थ-कर्मनिर्जराघ्रत भादों सुदी एकादशीसे लेकर भादों सुदी चतुर्दशीतक चार दिन किया जाता है । तिथि हानि और तिथि वृद्धि होनेपर पूर्वोक्त क्रम ही व्रतकी व्यवस्था के लिए ग्रहण किया गया है । विवेचन -कर्मनिर्जरा व्रतके सम्बन्धमें दो मान्यताएँ प्रचलित हैंप्रथम मान्यता भादों सुदी एकादशीसे लेकर चतुर्दशी तक व्रत करनेकी है । दूसरी मान्यताके अनुसार आषाद सुदी चतुर्दशी, श्रावण सुदी चतुदशी, भादों सुदी चतुर्दशी एवं आश्विन सुदी चतुर्दशी इन चार तिथियों
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7 साल के बच्चे के लिए एक टैबलेट में निम्नलिखित प्रोग्राम होने चाहिएः
शांत और सकारात्मक गेम पहले ही इंस्टॉल हो चुके हैंअग्रिम में माता-पिता को केवल उन्हें सॉर्ट करना होगा, उनके स्वाद के लिए कुछ जोड़ना। आखिरकार, कई वयस्क "ईविल पक्षी", "टेट्रिस" या "मजेदार रेस" खेलने से इंकार नहीं करेंगे।
प्राथमिक विद्यालय के बच्चे पूछने लगे हैंमहान आंकड़ों पर छोटी रिपोर्ट या वनस्पति या जीव के प्रतिनिधि के साथ परिचित होने के लिए अपने आप से पूछें एक बच्चे की गोली की सहायता से, यह काम सुखपूर्वक, दिलचस्प और सबसे महत्वपूर्ण बात, जल्दी से करना है आखिरकार, आधुनिक होम प्रिंटर वाई-फाई से लैस हैं, जो एक तैयार स्कूल की नियुक्ति के मुद्रण को सरल करता है।
आज के बच्चों में महत्वपूर्ण हैस्कूल, कई अतिरिक्त खेल या रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं, इसलिए 15-30 मिनट बस एक शांत खेल खेलते हैं, बच्चों की फिल्म देखते हैं या बच्चे को संज्ञानात्मक स्थानान्तरण आवश्यक है।
गोलियां एक कैमरे के साथ सुसज्जित हैं जो काफी अच्छी गुणवत्ता की तस्वीरें लेती हैं। एक बच्चा सुंदर स्थानों की तस्वीरें ले सकता है जहां उन्होंने दौरा किया था।
सभी प्रोग्राम जो अतिरिक्त रूप से इंस्टॉल किए जाते हैं,एक उम्र पुरानी फुटनोट होना चाहिए जब बच्चे या इस खेल को स्थापित करते हैं, तो इन उम्र प्रतिबंधों का पालन करें। "12 +" चिह्न के साथ खेल खेलने के लिए सात वर्ष के छात्र का पालन न करें।
7 साल के बच्चे के लिए एक टेबलेट निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होगाः
- बच्चे को वर्ल्ड वाइड वेब में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने के अवसरों की कमी।
- वाई-फाई के माध्यम से अपडेट करने की क्षमता के साथ प्री-इंस्टॉल किए गए प्रोग्राम (शिक्षण, विकास, मनोरंजन)
- स्क्रीन प्रत्येक उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए छवि समायोजित करने के लिए समायोज्य चमक के साथ एक स्पष्ट तस्वीर प्रदर्शित करनी चाहिए।
- मेनू सरल, सहज ज्ञान युक्त होना चाहिए, उन चिह्नों के साथ जो पूरी तरह से उनके पीछे क्या पता चलता है।
- अतिरिक्त गैजेट के लिए बच्चों के टैबलेट को कनेक्टर्स से लैस किया जाना चाहिए।
- कैमरे की उपस्थिति बच्चों के टैबलेट और माता-पिता स्मार्टफोन के माध्यम से बच्चे के साथ वीडियो संचार के लिए अवसर प्रदान करेगी।
- जब खरीदते हैं, तो वजन पर ध्यान दें - डिवाइस भारी नहीं होना चाहिए।
- मूल डिजाइन भविष्य के मालिकों की आंखों में 7 साल के बच्चे के लिए टैबलेट अधिक आकर्षक बना देगा।
- मामले के प्रभाव प्रतिरोध की जांच करें। क्योंकि वह बच्चे पर गिर जाएगा, वह निश्चित रूप से है। एल्यूमीनियम मामले, एक सिलिकॉन मामले में संलग्न है, और भी बेहतर है, सिलिकॉन एक विरोधी पर्ची भूमिका निभाएगा।
बच्चे के लिए सबसे अच्छा टैबलेट भी दैनिक घरों और निजी काम के लिए माता-पिता को थोड़ा सा समय देगा।
बच्चों के लिए एक प्रशिक्षण टैबलेट एक बोतल में एक ट्यूटर और गेमिंग स्टेशन दोनों हो सकता है।
बच्चों के लिए गोली विकसित करना शुरू हो सकता हैवास्तव में दिलचस्प और तीन साल की उम्र से समझ में आया। तीन साल के बच्चों के लिए, चयन और सॉर्टिंग के साथ खेल, उदाहरण के लिए, एक रंग के साथ बास्केट में बहु रंगीन गेंदों में डाल सकते हैं।
4 साल की उम्र में बच्चे की गोली पहले से संभव हैगणितीय पूर्वाग्रह के साथ आर्केड गेम और विकास कार्यक्रम प्रदान करें इसके अलावा चार वर्ष की उम्र में, कोई भी एक विदेशी वर्णमाला सीखना शुरू कर सकता है, उस समय बच्चे का मस्तिष्क उसकी सारी जानकारी का 90% याद रख सकता है।
6 साल की उम्र में, प्रशिक्षण पर जोर दिया जा सकता हैस्कूल में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ विशेष ई-किताबें और कार्यपुस्तिकाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां आपको समस्याओं को हल करने के लिए तर्क और समझदार उपयोग करने की आवश्यकता है।
फर्स्ट-ग्रेडर पहले से ही साहित्य जोड़ सकते हैं, जिसे बहिर्वाहिक पढ़ने के लिए कहा जाता है। लेकिन आप टेबलेट को केवल उच्च गुणवत्ता वाले प्रदर्शन के साथ ई-बुक के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
खेल के बच्चों के लिए टैबलेट पर अपलोड किया जाना चाहिए, सभी अनुशंसित आयु प्रतिबंधों का सख्ती से पालन करना, जो एनोटेशन में संकेतित हैं।
विकासशील अभिविन्यास के साथ खेल को वरीयता दें, ताकि बच्चे का शगल अधिकतम लाभ ला सके।
चयन करते समय, इस डिवाइस को दूरस्थ रूप से नियंत्रित करने की क्षमता पर ध्यान दें। यदि आवश्यक हो, तो अपने मनोरंजन के लिए एक छोटा गेमर का चयन न करें, लेकिन इसे बंद कर दें।
यदि डिवाइस खो गया था, तो "अभिभावकीय नियंत्रण" फ़ंक्शन आपको मूल कंप्यूटर का उपयोग करके गैजेट को दूरस्थ रूप से लॉक करने की अनुमति देगा, और स्क्रीन पर किसी भी सामग्री का टेक्स्ट प्रदर्शित करेगा।
इस डिवाइस को खरीदने से पहले, के बारे में पढ़ेंसमीक्षा के विभिन्न मॉडल। अधिकतम प्रतिक्रिया वाले बच्चे के लिए एक टैबलेट माता-पिता के धन को सबसे अनुकूल और सुखद तरीके से निवेश करने में मदद करेगा।
सभी प्रकार की समीक्षाओं को इकट्ठा करने और व्यवस्थित करने के उद्देश्य से साइटों को वरीयता दें, जहां राय यथासंभव सत्य हो।
- उस मॉडल पर फ़ोकस करें जिसमें एक आसान इंटरफ़ेस है, आइकन स्पष्ट छवि के साथ होना चाहिए।
- फंक्शन बटन के स्थान के साथ-साथ बटन का स्थान देखें, जिसमें बच्चों के लिए टैबलेट पर एक कैमरा शामिल है।
- पहले से स्थापित खेलों को उम्र उचित होना चाहिए।
- खरीदने से पहले, बच्चों के टैबलेट पर अतिरिक्त गेम और अन्य कार्यक्रम स्थापित करने की संभावना की जांच करें।
टैबलेट बच्चों के छोटे मोटर कौशल विकसित करता हैउंगलियों, जो बदले में, पूर्वस्कूली उम्र में भाषण के विकास को बढ़ावा देता है। स्कूल की उम्र में, बच्चों के लिए गेम टैबलेट ठीक मोटर कौशल पर काम करते हैं और एक सही, समझने योग्य और सुंदर हस्तलेख के विकास पर लाभकारी प्रभाव डालते हैं।
प्राथमिक विद्यालय में, टैबलेट के उपयोग में एक सीखने का चरित्र होना चाहिए। इसका उपयोग करके, आप उस छात्र को समझा सकते हैं जो पाठ में स्पष्ट नहीं था, और नई चीजें सीखने के लिए भी।
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सात साल के बच्चे के लिए एक टैबलेट में निम्नलिखित प्रोग्राम होने चाहिएः शांत और सकारात्मक गेम पहले ही इंस्टॉल हो चुके हैंअग्रिम में माता-पिता को केवल उन्हें सॉर्ट करना होगा, उनके स्वाद के लिए कुछ जोड़ना। आखिरकार, कई वयस्क "ईविल पक्षी", "टेट्रिस" या "मजेदार रेस" खेलने से इंकार नहीं करेंगे। प्राथमिक विद्यालय के बच्चे पूछने लगे हैंमहान आंकड़ों पर छोटी रिपोर्ट या वनस्पति या जीव के प्रतिनिधि के साथ परिचित होने के लिए अपने आप से पूछें एक बच्चे की गोली की सहायता से, यह काम सुखपूर्वक, दिलचस्प और सबसे महत्वपूर्ण बात, जल्दी से करना है आखिरकार, आधुनिक होम प्रिंटर वाई-फाई से लैस हैं, जो एक तैयार स्कूल की नियुक्ति के मुद्रण को सरल करता है। आज के बच्चों में महत्वपूर्ण हैस्कूल, कई अतिरिक्त खेल या रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं, इसलिए पंद्रह-तीस मिनट बस एक शांत खेल खेलते हैं, बच्चों की फिल्म देखते हैं या बच्चे को संज्ञानात्मक स्थानान्तरण आवश्यक है। गोलियां एक कैमरे के साथ सुसज्जित हैं जो काफी अच्छी गुणवत्ता की तस्वीरें लेती हैं। एक बच्चा सुंदर स्थानों की तस्वीरें ले सकता है जहां उन्होंने दौरा किया था। सभी प्रोग्राम जो अतिरिक्त रूप से इंस्टॉल किए जाते हैं,एक उम्र पुरानी फुटनोट होना चाहिए जब बच्चे या इस खेल को स्थापित करते हैं, तो इन उम्र प्रतिबंधों का पालन करें। "बारह +" चिह्न के साथ खेल खेलने के लिए सात वर्ष के छात्र का पालन न करें। सात साल के बच्चे के लिए एक टेबलेट निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होगाः - बच्चे को वर्ल्ड वाइड वेब में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने के अवसरों की कमी। - वाई-फाई के माध्यम से अपडेट करने की क्षमता के साथ प्री-इंस्टॉल किए गए प्रोग्राम - स्क्रीन प्रत्येक उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए छवि समायोजित करने के लिए समायोज्य चमक के साथ एक स्पष्ट तस्वीर प्रदर्शित करनी चाहिए। - मेनू सरल, सहज ज्ञान युक्त होना चाहिए, उन चिह्नों के साथ जो पूरी तरह से उनके पीछे क्या पता चलता है। - अतिरिक्त गैजेट के लिए बच्चों के टैबलेट को कनेक्टर्स से लैस किया जाना चाहिए। - कैमरे की उपस्थिति बच्चों के टैबलेट और माता-पिता स्मार्टफोन के माध्यम से बच्चे के साथ वीडियो संचार के लिए अवसर प्रदान करेगी। - जब खरीदते हैं, तो वजन पर ध्यान दें - डिवाइस भारी नहीं होना चाहिए। - मूल डिजाइन भविष्य के मालिकों की आंखों में सात साल के बच्चे के लिए टैबलेट अधिक आकर्षक बना देगा। - मामले के प्रभाव प्रतिरोध की जांच करें। क्योंकि वह बच्चे पर गिर जाएगा, वह निश्चित रूप से है। एल्यूमीनियम मामले, एक सिलिकॉन मामले में संलग्न है, और भी बेहतर है, सिलिकॉन एक विरोधी पर्ची भूमिका निभाएगा। बच्चे के लिए सबसे अच्छा टैबलेट भी दैनिक घरों और निजी काम के लिए माता-पिता को थोड़ा सा समय देगा। बच्चों के लिए एक प्रशिक्षण टैबलेट एक बोतल में एक ट्यूटर और गेमिंग स्टेशन दोनों हो सकता है। बच्चों के लिए गोली विकसित करना शुरू हो सकता हैवास्तव में दिलचस्प और तीन साल की उम्र से समझ में आया। तीन साल के बच्चों के लिए, चयन और सॉर्टिंग के साथ खेल, उदाहरण के लिए, एक रंग के साथ बास्केट में बहु रंगीन गेंदों में डाल सकते हैं। चार साल की उम्र में बच्चे की गोली पहले से संभव हैगणितीय पूर्वाग्रह के साथ आर्केड गेम और विकास कार्यक्रम प्रदान करें इसके अलावा चार वर्ष की उम्र में, कोई भी एक विदेशी वर्णमाला सीखना शुरू कर सकता है, उस समय बच्चे का मस्तिष्क उसकी सारी जानकारी का नब्बे% याद रख सकता है। छः साल की उम्र में, प्रशिक्षण पर जोर दिया जा सकता हैस्कूल में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ विशेष ई-किताबें और कार्यपुस्तिकाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां आपको समस्याओं को हल करने के लिए तर्क और समझदार उपयोग करने की आवश्यकता है। फर्स्ट-ग्रेडर पहले से ही साहित्य जोड़ सकते हैं, जिसे बहिर्वाहिक पढ़ने के लिए कहा जाता है। लेकिन आप टेबलेट को केवल उच्च गुणवत्ता वाले प्रदर्शन के साथ ई-बुक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। खेल के बच्चों के लिए टैबलेट पर अपलोड किया जाना चाहिए, सभी अनुशंसित आयु प्रतिबंधों का सख्ती से पालन करना, जो एनोटेशन में संकेतित हैं। विकासशील अभिविन्यास के साथ खेल को वरीयता दें, ताकि बच्चे का शगल अधिकतम लाभ ला सके। चयन करते समय, इस डिवाइस को दूरस्थ रूप से नियंत्रित करने की क्षमता पर ध्यान दें। यदि आवश्यक हो, तो अपने मनोरंजन के लिए एक छोटा गेमर का चयन न करें, लेकिन इसे बंद कर दें। यदि डिवाइस खो गया था, तो "अभिभावकीय नियंत्रण" फ़ंक्शन आपको मूल कंप्यूटर का उपयोग करके गैजेट को दूरस्थ रूप से लॉक करने की अनुमति देगा, और स्क्रीन पर किसी भी सामग्री का टेक्स्ट प्रदर्शित करेगा। इस डिवाइस को खरीदने से पहले, के बारे में पढ़ेंसमीक्षा के विभिन्न मॉडल। अधिकतम प्रतिक्रिया वाले बच्चे के लिए एक टैबलेट माता-पिता के धन को सबसे अनुकूल और सुखद तरीके से निवेश करने में मदद करेगा। सभी प्रकार की समीक्षाओं को इकट्ठा करने और व्यवस्थित करने के उद्देश्य से साइटों को वरीयता दें, जहां राय यथासंभव सत्य हो। - उस मॉडल पर फ़ोकस करें जिसमें एक आसान इंटरफ़ेस है, आइकन स्पष्ट छवि के साथ होना चाहिए। - फंक्शन बटन के स्थान के साथ-साथ बटन का स्थान देखें, जिसमें बच्चों के लिए टैबलेट पर एक कैमरा शामिल है। - पहले से स्थापित खेलों को उम्र उचित होना चाहिए। - खरीदने से पहले, बच्चों के टैबलेट पर अतिरिक्त गेम और अन्य कार्यक्रम स्थापित करने की संभावना की जांच करें। टैबलेट बच्चों के छोटे मोटर कौशल विकसित करता हैउंगलियों, जो बदले में, पूर्वस्कूली उम्र में भाषण के विकास को बढ़ावा देता है। स्कूल की उम्र में, बच्चों के लिए गेम टैबलेट ठीक मोटर कौशल पर काम करते हैं और एक सही, समझने योग्य और सुंदर हस्तलेख के विकास पर लाभकारी प्रभाव डालते हैं। प्राथमिक विद्यालय में, टैबलेट के उपयोग में एक सीखने का चरित्र होना चाहिए। इसका उपयोग करके, आप उस छात्र को समझा सकते हैं जो पाठ में स्पष्ट नहीं था, और नई चीजें सीखने के लिए भी।
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भोपाल। भाजपा की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के विज्ञापन चौकीदार चोर है के आडियो एवं वीडियो प्रसारण पर रोक लगा दी है।
भाजपा की शिकायत पर निर्वाचन आयोग की राज्य स्तरीय मीडिया प्रमाणन तथा अनुवीक्षण समिति द्वारा इस विज्ञापन के प्रसारण पर रोक लगाई गयी है। निर्वाचन आयोग के संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मप्र के राजेश कौल ने जारी आदेश में कहा, लोकसभा निर्वाचन-2019 के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रसारित करवाये जा रहे विज्ञापन शीर्षक- चौकीदार चोर है को राज्य स्तरीय मीडिया प्रमाणन तथा अनुवीक्षण समिति द्वारा 14 अप्रैल 2019 के आदेश क्रमांक 9264 द्वारा निरस्त किया गया है। अतः इसके प्रसारण पर रोक लगाई जाए। इससे पहले भाजपा ने निर्वाचन आयोग को इस संबंध में की गयी शिकायत में कहा था कि इस विज्ञापन में चौकीदार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है तथा यहां चौकीदार से आशय देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से है। भाजपा ने कहा कि इस विज्ञापन से व्यक्ति विशेष को निशाने पर लिया गया है। भाजपा ने कहा कि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका को मंजूर किया है। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को 22 अप्रैल तक उत्तर देने का निर्देश दिया है। मप्र भाजपा के उपाध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी असत्य और अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
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भोपाल। भाजपा की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के विज्ञापन चौकीदार चोर है के आडियो एवं वीडियो प्रसारण पर रोक लगा दी है। भाजपा की शिकायत पर निर्वाचन आयोग की राज्य स्तरीय मीडिया प्रमाणन तथा अनुवीक्षण समिति द्वारा इस विज्ञापन के प्रसारण पर रोक लगाई गयी है। निर्वाचन आयोग के संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मप्र के राजेश कौल ने जारी आदेश में कहा, लोकसभा निर्वाचन-दो हज़ार उन्नीस के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रसारित करवाये जा रहे विज्ञापन शीर्षक- चौकीदार चोर है को राज्य स्तरीय मीडिया प्रमाणन तथा अनुवीक्षण समिति द्वारा चौदह अप्रैल दो हज़ार उन्नीस के आदेश क्रमांक नौ हज़ार दो सौ चौंसठ द्वारा निरस्त किया गया है। अतः इसके प्रसारण पर रोक लगाई जाए। इससे पहले भाजपा ने निर्वाचन आयोग को इस संबंध में की गयी शिकायत में कहा था कि इस विज्ञापन में चौकीदार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है तथा यहां चौकीदार से आशय देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से है। भाजपा ने कहा कि इस विज्ञापन से व्यक्ति विशेष को निशाने पर लिया गया है। भाजपा ने कहा कि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका को मंजूर किया है। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बाईस अप्रैल तक उत्तर देने का निर्देश दिया है। मप्र भाजपा के उपाध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी असत्य और अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
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आप सभी को बता दें कि वर्तमान में इंसान अधिक से अधिक 100 वर्ष जी सकता है और प्राकृतिक रूप से व्यक्ति की उम्र 125 वर्ष तक ही हो सकती है. ऐसे में रहस्य की देवहरा बाबा 750 वर्ष तक जिंदा रहे और उनकी मौत 1990 में हो गई थी. आप सभी को बता दें कि त्रैलंग स्वामी जिन्हें 'गणपति सरस्वती' भी कहते हैं, उनकी उम्र 286 वर्ष की थी. कहते हैं त्रैलंग स्वामी का जन्म नृसिंह राव और विद्यावती के घर 1601 को हुआ था. आप सभी को बता दें कि वह वाराणसी में 1737-1887 तक रहे और इसी तरह शिवपुरी बाबा थे, जो 27 सितंबर 1826 में जन्मे और जनवरी 1963 में उन्होंने देह त्याग दी. आप सभी को बता दें कि बंगाल के संत लोकनाथजी का जन्म 31 अगस्त 1730 को हुआ और 3 जून 1890 को उन्होंने देह छोड़ दी.
ऐसे में आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार मनुष्य की आयु लगभग 120 वर्ष बताई गई है लेकिन वह अपने योगबल से लगभग 150 वर्षों से ज्यादा जी सकता है. कहा जाता है प्राचीन मानव की सामान्य उम्र 300 से 400 वर्ष हुआ करती थी, क्योंकि तब धरती का वातावरण व्यक्ति को उक्त काल तक जिंदा बनाए रखने के लिए था और पौराणिक और संस्कृत ग्रंथों के अनुसार भारत में ऐसे कई लोग हुए हैं, जो हजारों वर्षों से जीवित हैं. आपको बता दें कि हिमालय में आज भी ऐसे कई ऋषि और मुनि हैं जिनकी आयु लगभग 600 वर्ष से अधिक होने का दावा किया जाता है.
ऐसे में हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सदियों पहले ऐसे कई देवपुरुष थे, जो सैकड़ों और हजारों वर्षों तक जीवित रहे थे. पुराणों के अनुसार अश्वत्थामा, बलि, व्यास, जामवंत, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि के अलावा अन्य कई ऐसे लोग हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे आज भी जीवित हैं. इसका उल्लेख पुराणों में साफ़ मिलता है.
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आप सभी को बता दें कि वर्तमान में इंसान अधिक से अधिक एक सौ वर्ष जी सकता है और प्राकृतिक रूप से व्यक्ति की उम्र एक सौ पच्चीस वर्ष तक ही हो सकती है. ऐसे में रहस्य की देवहरा बाबा सात सौ पचास वर्ष तक जिंदा रहे और उनकी मौत एक हज़ार नौ सौ नब्बे में हो गई थी. आप सभी को बता दें कि त्रैलंग स्वामी जिन्हें 'गणपति सरस्वती' भी कहते हैं, उनकी उम्र दो सौ छियासी वर्ष की थी. कहते हैं त्रैलंग स्वामी का जन्म नृसिंह राव और विद्यावती के घर एक हज़ार छः सौ एक को हुआ था. आप सभी को बता दें कि वह वाराणसी में एक हज़ार सात सौ सैंतीस-एक हज़ार आठ सौ सत्तासी तक रहे और इसी तरह शिवपुरी बाबा थे, जो सत्ताईस सितंबर एक हज़ार आठ सौ छब्बीस में जन्मे और जनवरी एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में उन्होंने देह त्याग दी. आप सभी को बता दें कि बंगाल के संत लोकनाथजी का जन्म इकतीस अगस्त एक हज़ार सात सौ तीस को हुआ और तीन जून एक हज़ार आठ सौ नब्बे को उन्होंने देह छोड़ दी. ऐसे में आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार मनुष्य की आयु लगभग एक सौ बीस वर्ष बताई गई है लेकिन वह अपने योगबल से लगभग एक सौ पचास वर्षों से ज्यादा जी सकता है. कहा जाता है प्राचीन मानव की सामान्य उम्र तीन सौ से चार सौ वर्ष हुआ करती थी, क्योंकि तब धरती का वातावरण व्यक्ति को उक्त काल तक जिंदा बनाए रखने के लिए था और पौराणिक और संस्कृत ग्रंथों के अनुसार भारत में ऐसे कई लोग हुए हैं, जो हजारों वर्षों से जीवित हैं. आपको बता दें कि हिमालय में आज भी ऐसे कई ऋषि और मुनि हैं जिनकी आयु लगभग छः सौ वर्ष से अधिक होने का दावा किया जाता है. ऐसे में हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सदियों पहले ऐसे कई देवपुरुष थे, जो सैकड़ों और हजारों वर्षों तक जीवित रहे थे. पुराणों के अनुसार अश्वत्थामा, बलि, व्यास, जामवंत, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि के अलावा अन्य कई ऐसे लोग हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे आज भी जीवित हैं. इसका उल्लेख पुराणों में साफ़ मिलता है.
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सीसीएल के द्वारा इस टोले को बिजली कनेक्शन दिया गया है. दरअसल सीसीएल और राज्य सरकार के विद्युत ट्रांसफार्मर अलग अलग होती है. राज्य सरकार का ट्रांसफार्मर सीसीएल के विद्युत कनेक्शन के अनुरूप नहीं होती है, लिहाजा उसे सीसीएल के अनुरूप बनाया जाता है. यहां के ग्रामीण सीसीएल के अधिकारियों से संपर्क किया और विद्युत ट्रांसफार्मर बनाने का अनुरोध किया है. सीसीएल के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पायी है.
ग्रामीण रामेश्वर यादव, जगदीश यादव, लखन यादव, मंटू यादव ,पूर्व मुखिया धनंजय सिंह ने पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद से मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराया. जिसके बाद पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने सीसीएल कथारा क्षेत्र के जीएम से बात कर ट्रांसफार्मर बनाने के लिए कहा है. जीएम हर्षद कातार ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को ट्रांसफार्मर बनाने का आदेश दिया है. ग्रामीणों ने बताया कि ट्रांसफार्मर बन रही है लेकिन लगभग एक माह दस दिन से अधिक हो गई है और वे अंधेरे में रहने को विवश हैं. बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तबाह हो गई है. यहां तक की मोबाइल चार्ज नहीं होने के कारण सगे संबंधियों और जरूरत के लोगों से संपर्क टूट गया है. कुछ लोग दूसरे क्षेत्र में जाकर मोबाइल चार्ज कर लाते हैं तब वह बात कर पाते हैं.
लोगों ने कहा कि चारों ओर बिजली के चकाचौंध है और यहां के ग्रामीण दिन की गर्मी और रात को को मच्छरों के बीच जिंदगी गुजारने को विवश हैं. ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन से अनुरोध किया है कि जल्द ट्रांसफार्मर बनाने का कार्य करे, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत मिल सकेगा.
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सीसीएल के द्वारा इस टोले को बिजली कनेक्शन दिया गया है. दरअसल सीसीएल और राज्य सरकार के विद्युत ट्रांसफार्मर अलग अलग होती है. राज्य सरकार का ट्रांसफार्मर सीसीएल के विद्युत कनेक्शन के अनुरूप नहीं होती है, लिहाजा उसे सीसीएल के अनुरूप बनाया जाता है. यहां के ग्रामीण सीसीएल के अधिकारियों से संपर्क किया और विद्युत ट्रांसफार्मर बनाने का अनुरोध किया है. सीसीएल के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो पायी है. ग्रामीण रामेश्वर यादव, जगदीश यादव, लखन यादव, मंटू यादव ,पूर्व मुखिया धनंजय सिंह ने पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद से मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराया. जिसके बाद पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने सीसीएल कथारा क्षेत्र के जीएम से बात कर ट्रांसफार्मर बनाने के लिए कहा है. जीएम हर्षद कातार ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को ट्रांसफार्मर बनाने का आदेश दिया है. ग्रामीणों ने बताया कि ट्रांसफार्मर बन रही है लेकिन लगभग एक माह दस दिन से अधिक हो गई है और वे अंधेरे में रहने को विवश हैं. बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तबाह हो गई है. यहां तक की मोबाइल चार्ज नहीं होने के कारण सगे संबंधियों और जरूरत के लोगों से संपर्क टूट गया है. कुछ लोग दूसरे क्षेत्र में जाकर मोबाइल चार्ज कर लाते हैं तब वह बात कर पाते हैं. लोगों ने कहा कि चारों ओर बिजली के चकाचौंध है और यहां के ग्रामीण दिन की गर्मी और रात को को मच्छरों के बीच जिंदगी गुजारने को विवश हैं. ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन से अनुरोध किया है कि जल्द ट्रांसफार्मर बनाने का कार्य करे, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत मिल सकेगा.
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महानतम महिला एथलीट सेरेना विलियम्स ने बहुत सोच-समझकर टेनिस से रिटायर होने का फैसला किया है। वे अपनी बेटी ओलंपिया का जिक्र करते हुए कहती हैं, ओलंपिया को मेरा टेनिस खेलना पसंद नहीं है। जब सेरेना ने ओलंपिया को बताया कि वह जल्द टेनिस कोर्ट से विदा ले रही हैं तो वह बेहद खुश हुई। न्यूयॉर्क शहर के एक होटल की लायब्रेरी में अपनी कुर्सी पर झुके हुए सेरेना कहती हैं, बच्चे नहीं समझ पाते कि उनके माता-पिता उनके साथ क्यों नहीं हैं।
टाइम मैग्जीन से विशेष बातचीत में सेरेना ने कहा- 'ओलंपिया चाहती है कि उसकी एक छोटी बहन भी हो। इसलिए मैंने बदलाव का निर्णय लिया है। महिला खिलाड़ी को इस रास्ते का चुनाव करने के लिए वह सब करना पड़ता है जो सुपरस्टार पुरुष खिलाड़ियों को नहीं करना पड़ा है। फुटबॉल खिलाड़ी टॉम ब्रैडी तीन बच्चों के पिता हैं। वे रिटायर होने के बाद 44 वर्ष की आयु में वापस लौट सकते हैं। 3 बच्चों के पिता बास्केटबॉल स्टार लेब्रॉन जेम्स ने 37 साल की आयु में 774 करोड़ रुपए में दो साल का करार किया है। '
उनका कहना है- 'महिलाएं परिवार बढ़ाना चाहती हैं तो उन्हें कई बार पुरुषों से अलग फैसला करना होता है। 41 वर्ष की होने जा रहीं सेरेना का कहना है, महिला को इस पार या उस पार का निर्णय करना पड़ता है। सेरेना कहती हैं, फिर भी मैं अपने फैसले से संतुष्ट हूं। '
सेरेना ने कई मौकों पर नई बहस को जन्म दिया है। ओलंपिया के जन्म के बाद सेरेना का जीवन सांस में तकलीफ की वजह से खतरे में पड़ गया था। इसके कुछ माह बाद 2018 में विंबलडन फाइनल तक पहुंचकर सेरेना ने दुनियाभर की करोड़ों माताओं को प्रेरित किया। यूएस ओपन के फाइनल में सेरेना को हराने वाली जापान की नाओमी ओसाका कहती हैं- 'मुझे सेरेना को खेलते देखकर टेनिस खेलने की प्रेरणा मिली है। '
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अफ्रीकन अमेरिकन स्टडीज की प्रोफेसर टेरा हंटर का कहना है- 'टेनिस की दुनिया अश्वेत लड़कियों (सेरेना और उनकी बहन वीनस) को अपनी खास स्टाइल के साथ देखने की आदी नहीं थी। विलियम्स बहनों ने नई शुरुआत की है। केवल महिलाओं को नहीं, बल्कि युवा कार रेस ड्राइवर लुइस हेमिल्टन को भी सेरेना, वीनस ने प्रेरित किया है। हेमिल्टन कहते हैं, मेरे लिए वे बड़ी प्रेरणा हैं। मैं अपने खेल में अकेला अश्वेत था। इसलिए दोनों अश्वेत बहनों को देखकर मुझे आत्मविश्वास हासिल हुआ। '
2017 में आस्ट्रेलियन ओपन से ठीक पहले सेरेना को अहसास हुआ कि वे गर्भवती हैं। उनके पति वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर और रेडिट के को-फाउंडर अलेक्स ओहेनियन बताते हैं, डॉक्टर ने कहा कि आपको सावधानी बरतनी होगी। सेरेना ने कहा कि मैं संभाल लूंगी।
सेरेना ने अपने पति को बताया कि उन्होंने टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया, क्योंकि वे जानती थीं कि बच्चे के लिए जल्द मैच खत्म करना अच्छा रहेगा। ओलंपिक गोल्ड मैडल जीतने वाली अमेरिका एथलीट एलिसन फेलिक्स ने सेरेना को देखकर ट्रेनिंग करने और मुकाबलों में हिस्सा लेने का निर्णय लिया था।
सेरेना ने रंगभेद और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने अश्वेतों की समानता और न्याय के लिए संघर्ष करने वाले संगठन इक्वल जस्टिस इनिशिएटिव के लिए पैसा जुटाया। ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन की प्रमुख एलिसिया गर्जा कहती हैं, सेरेना हमले और प्रहार झेलती हैं और जमकर पलटवार भी करती हैं।
विलियम्स बहनों ने टेनिस खेलने का तरीका बदला है। सेरेना ने रंगभेदी तानों के बीच सौंदर्य के प्रतिमान भी बदले हैं। सेरेना कहती हैं, बहुत लोग सोचते हैं कि काला या सांवला रंग होने के कारण वे सुंदर नहीं हैं। लेकिन मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया है।
सेरेना ने अपने 23 में से दस खिताब 30 वर्ष की आयु के बाद जीते हैं। इस उम्र में अधिकतर खिलाड़ी रिटायर हो जाते हैं या उनकी रैंकिंग नीचे आ जाती है। सेरेना ने महिला एथलीटों के व्यवहार के बारे में लोगों की अपेक्षाओं को बदला है। उन्होंने ताकत, जुनून और जज्बा दिखाकर हर कार्यक्षेत्र में महिलाओं के लिए नई जगह बनाई है। उन्होंने महिला देह की इमेज को नए सिरे से गढ़ा है। जब विशेषज्ञ और नस्लभेदी लोग उनके शारीरिक गठन को पुरुषों जैसा बताकर उनकी हंसी उड़ाते थे, तब उन्होंने लगातार फोटो शूट किए।
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महानतम महिला एथलीट सेरेना विलियम्स ने बहुत सोच-समझकर टेनिस से रिटायर होने का फैसला किया है। वे अपनी बेटी ओलंपिया का जिक्र करते हुए कहती हैं, ओलंपिया को मेरा टेनिस खेलना पसंद नहीं है। जब सेरेना ने ओलंपिया को बताया कि वह जल्द टेनिस कोर्ट से विदा ले रही हैं तो वह बेहद खुश हुई। न्यूयॉर्क शहर के एक होटल की लायब्रेरी में अपनी कुर्सी पर झुके हुए सेरेना कहती हैं, बच्चे नहीं समझ पाते कि उनके माता-पिता उनके साथ क्यों नहीं हैं। टाइम मैग्जीन से विशेष बातचीत में सेरेना ने कहा- 'ओलंपिया चाहती है कि उसकी एक छोटी बहन भी हो। इसलिए मैंने बदलाव का निर्णय लिया है। महिला खिलाड़ी को इस रास्ते का चुनाव करने के लिए वह सब करना पड़ता है जो सुपरस्टार पुरुष खिलाड़ियों को नहीं करना पड़ा है। फुटबॉल खिलाड़ी टॉम ब्रैडी तीन बच्चों के पिता हैं। वे रिटायर होने के बाद चौंतालीस वर्ष की आयु में वापस लौट सकते हैं। तीन बच्चों के पिता बास्केटबॉल स्टार लेब्रॉन जेम्स ने सैंतीस साल की आयु में सात सौ चौहत्तर करोड़ रुपए में दो साल का करार किया है। ' उनका कहना है- 'महिलाएं परिवार बढ़ाना चाहती हैं तो उन्हें कई बार पुरुषों से अलग फैसला करना होता है। इकतालीस वर्ष की होने जा रहीं सेरेना का कहना है, महिला को इस पार या उस पार का निर्णय करना पड़ता है। सेरेना कहती हैं, फिर भी मैं अपने फैसले से संतुष्ट हूं। ' सेरेना ने कई मौकों पर नई बहस को जन्म दिया है। ओलंपिया के जन्म के बाद सेरेना का जीवन सांस में तकलीफ की वजह से खतरे में पड़ गया था। इसके कुछ माह बाद दो हज़ार अट्ठारह में विंबलडन फाइनल तक पहुंचकर सेरेना ने दुनियाभर की करोड़ों माताओं को प्रेरित किया। यूएस ओपन के फाइनल में सेरेना को हराने वाली जापान की नाओमी ओसाका कहती हैं- 'मुझे सेरेना को खेलते देखकर टेनिस खेलने की प्रेरणा मिली है। ' प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अफ्रीकन अमेरिकन स्टडीज की प्रोफेसर टेरा हंटर का कहना है- 'टेनिस की दुनिया अश्वेत लड़कियों को अपनी खास स्टाइल के साथ देखने की आदी नहीं थी। विलियम्स बहनों ने नई शुरुआत की है। केवल महिलाओं को नहीं, बल्कि युवा कार रेस ड्राइवर लुइस हेमिल्टन को भी सेरेना, वीनस ने प्रेरित किया है। हेमिल्टन कहते हैं, मेरे लिए वे बड़ी प्रेरणा हैं। मैं अपने खेल में अकेला अश्वेत था। इसलिए दोनों अश्वेत बहनों को देखकर मुझे आत्मविश्वास हासिल हुआ। ' दो हज़ार सत्रह में आस्ट्रेलियन ओपन से ठीक पहले सेरेना को अहसास हुआ कि वे गर्भवती हैं। उनके पति वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर और रेडिट के को-फाउंडर अलेक्स ओहेनियन बताते हैं, डॉक्टर ने कहा कि आपको सावधानी बरतनी होगी। सेरेना ने कहा कि मैं संभाल लूंगी। सेरेना ने अपने पति को बताया कि उन्होंने टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया, क्योंकि वे जानती थीं कि बच्चे के लिए जल्द मैच खत्म करना अच्छा रहेगा। ओलंपिक गोल्ड मैडल जीतने वाली अमेरिका एथलीट एलिसन फेलिक्स ने सेरेना को देखकर ट्रेनिंग करने और मुकाबलों में हिस्सा लेने का निर्णय लिया था। सेरेना ने रंगभेद और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने अश्वेतों की समानता और न्याय के लिए संघर्ष करने वाले संगठन इक्वल जस्टिस इनिशिएटिव के लिए पैसा जुटाया। ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन की प्रमुख एलिसिया गर्जा कहती हैं, सेरेना हमले और प्रहार झेलती हैं और जमकर पलटवार भी करती हैं। विलियम्स बहनों ने टेनिस खेलने का तरीका बदला है। सेरेना ने रंगभेदी तानों के बीच सौंदर्य के प्रतिमान भी बदले हैं। सेरेना कहती हैं, बहुत लोग सोचते हैं कि काला या सांवला रंग होने के कारण वे सुंदर नहीं हैं। लेकिन मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया है। सेरेना ने अपने तेईस में से दस खिताब तीस वर्ष की आयु के बाद जीते हैं। इस उम्र में अधिकतर खिलाड़ी रिटायर हो जाते हैं या उनकी रैंकिंग नीचे आ जाती है। सेरेना ने महिला एथलीटों के व्यवहार के बारे में लोगों की अपेक्षाओं को बदला है। उन्होंने ताकत, जुनून और जज्बा दिखाकर हर कार्यक्षेत्र में महिलाओं के लिए नई जगह बनाई है। उन्होंने महिला देह की इमेज को नए सिरे से गढ़ा है। जब विशेषज्ञ और नस्लभेदी लोग उनके शारीरिक गठन को पुरुषों जैसा बताकर उनकी हंसी उड़ाते थे, तब उन्होंने लगातार फोटो शूट किए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मनमोहक झंकार मेरे चंचल मन को एकाग्र कर देती थी, उसमें मुझे अपार शान्ति मिलती थी, परन्तु अब तो सितार भी बेबस हो गया है, वह भी मुझे शान्त नहीं कर सकता, मेरी शान्ति का आधार अब मेरे सितार बजाने पर नहीं रहा।"
उर्मिला सब कुछ समझ रही थी। उसने फिर हाथ छुड़ाने का प्रयास किया । युवक ने उसे नहीं छोड़ा और विद्युत वेग से उसे अपने प्यासे होठों से लगा लिया । उर्मिला के समस्त शरीर में आग - सी दौड़ गयी । उसने हाथ छुड़ा लिया और भाग गयी ।
"फिर कब दर्शन होंगे?"
उर्मिला ने कुछ उत्तर नहीं दिया । वह अपने कमरे में आ गयी और पलंग पर लेट कर रोने लगी । पक्षी जाल में फंस चुका था और अब मुक्त होने के लिए छटपटा रहा था ।
कितनी देर तक वह लेटे-लेटे रोती रही । उसे रह-रहकर अपने पति की निष्ठुरता का ध्यान आता था । आत्मग्लानि से उस का हृदय जला जा रहा था । वह इस मार्ग को छोड़ देना चाहती थी । पश्चाताप को आग उसे जलाये डालती थी । वह चाहती थी, उसका पति आ जाये, उसके पास बैठे, उससे प्रेम करे और वह उस के चरणों में बैठ कर इतना रोये, इतना रोये कि उसका पाषाण - हृदय पानी पानी हो जाये ।
उठ कर वह रामदयाल के पुस्तकालय में गयी । एक छोटी-सी मेज़ पर एक कोने में उसके पति का एक फोटो चौखटे में जड़ा रखा था। उस ने उसे उठाया, कई बार चूमा और उसकी आंखों से आंसू बह निकले ।
रामदयाल के पैरों की चाप से उसके विचारों का क्रम टूट गया । वह उठी और सच्चे हृदय से उस का स्वागत करने को तैयार हो गयी। उस समय उसका मन साफ था । विशुद्ध - प्रेम का एक सागर वहां उमड़ा आ रहा था, जिसके पानी को पश्चाताप की आग ने स्वच्छ और निर्मल कर दिया था ।
वह रसोई-घर से पानी ले आयी और रामदयाल के सामने जा खड़ी हुई । उसकी आंखें सजल थीं और मन आशा के तार से बंधा डोल रहा था। उसने देखा, रामदयाल ने उसके हाथ से गिलास ले कर मुंह धो लिया और फिर उसे कुछ नाश्ता लाने को कहा और जब वह मिठाई ले आयी तो रामदयाल ने तश्तरी लेने के बदले उसे अपनी भुजाओं में ले कर उसके मुंह में मिठाई का एक टुकड़ा रख दिया । निमिष भर के लिए उसके मुख पर स्वर्गीय आनन्द की ज्योति चमक उठी। उसने सिर उठाया, देखा रामदयाल उसी तरह बैठा है । और वह उसी तरह गिलास लिये खड़ी है । आशा का तार टूट गया, मादक कल्पना हवा हो गयी । सत्य सामने था कितना कितना भयानक? कटु,
रामदयाल ने इशारे से उसे चले जाने को कहा । वह चुपचाप पुतली की भांति चली आयी मानो वह सजीव नारी न हो कर अपने आविष्कारक के संकेत पर चलने वाली एक निर्जीव मूर्ति हो । अपने कमरे में आ कर उसने पानी का गिलास अंगीठी पर रख दिया और धरती पर लोट कर रोने लगी। धरती में, मूक और ठण्डी धरती में उसे कुछ आत्मीयता का आभास हुआ, एक बहनापा-सा महसूस हुआ और वह उसके अंक में लिपट कर रोयी । खूब रोयी । ऐसे मानो एक दुखी बहन अपनी सुखी बहन के गले लिपट कर आंसू बहा रही हो ।
कई दिन तक वह अपने कमरे के बाहर न निकली । रामदयाल दासी से कह गया था, "मैं और पन्द्रह दिन घर न आ सकूंगा, इसलिए तुम सावधानी से रहना ।' उर्मिला को अपने पति की निर्दयता पर रोना आता था । वह पाप की नदी में बहे जा रही थी और उसका पति उसे बचाने को हाथ तक न हिलाता था । भ्रान्ति की विकराल लहरें लपलपाती हुई उस की ओर बढ़ी आ रही थीं और उसका पति निश्चेष्ट और निष्क्रिय एक ओर खड़ा तमाशा देख रहा था ।
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मनमोहक झंकार मेरे चंचल मन को एकाग्र कर देती थी, उसमें मुझे अपार शान्ति मिलती थी, परन्तु अब तो सितार भी बेबस हो गया है, वह भी मुझे शान्त नहीं कर सकता, मेरी शान्ति का आधार अब मेरे सितार बजाने पर नहीं रहा।" उर्मिला सब कुछ समझ रही थी। उसने फिर हाथ छुड़ाने का प्रयास किया । युवक ने उसे नहीं छोड़ा और विद्युत वेग से उसे अपने प्यासे होठों से लगा लिया । उर्मिला के समस्त शरीर में आग - सी दौड़ गयी । उसने हाथ छुड़ा लिया और भाग गयी । "फिर कब दर्शन होंगे?" उर्मिला ने कुछ उत्तर नहीं दिया । वह अपने कमरे में आ गयी और पलंग पर लेट कर रोने लगी । पक्षी जाल में फंस चुका था और अब मुक्त होने के लिए छटपटा रहा था । कितनी देर तक वह लेटे-लेटे रोती रही । उसे रह-रहकर अपने पति की निष्ठुरता का ध्यान आता था । आत्मग्लानि से उस का हृदय जला जा रहा था । वह इस मार्ग को छोड़ देना चाहती थी । पश्चाताप को आग उसे जलाये डालती थी । वह चाहती थी, उसका पति आ जाये, उसके पास बैठे, उससे प्रेम करे और वह उस के चरणों में बैठ कर इतना रोये, इतना रोये कि उसका पाषाण - हृदय पानी पानी हो जाये । उठ कर वह रामदयाल के पुस्तकालय में गयी । एक छोटी-सी मेज़ पर एक कोने में उसके पति का एक फोटो चौखटे में जड़ा रखा था। उस ने उसे उठाया, कई बार चूमा और उसकी आंखों से आंसू बह निकले । रामदयाल के पैरों की चाप से उसके विचारों का क्रम टूट गया । वह उठी और सच्चे हृदय से उस का स्वागत करने को तैयार हो गयी। उस समय उसका मन साफ था । विशुद्ध - प्रेम का एक सागर वहां उमड़ा आ रहा था, जिसके पानी को पश्चाताप की आग ने स्वच्छ और निर्मल कर दिया था । वह रसोई-घर से पानी ले आयी और रामदयाल के सामने जा खड़ी हुई । उसकी आंखें सजल थीं और मन आशा के तार से बंधा डोल रहा था। उसने देखा, रामदयाल ने उसके हाथ से गिलास ले कर मुंह धो लिया और फिर उसे कुछ नाश्ता लाने को कहा और जब वह मिठाई ले आयी तो रामदयाल ने तश्तरी लेने के बदले उसे अपनी भुजाओं में ले कर उसके मुंह में मिठाई का एक टुकड़ा रख दिया । निमिष भर के लिए उसके मुख पर स्वर्गीय आनन्द की ज्योति चमक उठी। उसने सिर उठाया, देखा रामदयाल उसी तरह बैठा है । और वह उसी तरह गिलास लिये खड़ी है । आशा का तार टूट गया, मादक कल्पना हवा हो गयी । सत्य सामने था कितना कितना भयानक? कटु, रामदयाल ने इशारे से उसे चले जाने को कहा । वह चुपचाप पुतली की भांति चली आयी मानो वह सजीव नारी न हो कर अपने आविष्कारक के संकेत पर चलने वाली एक निर्जीव मूर्ति हो । अपने कमरे में आ कर उसने पानी का गिलास अंगीठी पर रख दिया और धरती पर लोट कर रोने लगी। धरती में, मूक और ठण्डी धरती में उसे कुछ आत्मीयता का आभास हुआ, एक बहनापा-सा महसूस हुआ और वह उसके अंक में लिपट कर रोयी । खूब रोयी । ऐसे मानो एक दुखी बहन अपनी सुखी बहन के गले लिपट कर आंसू बहा रही हो । कई दिन तक वह अपने कमरे के बाहर न निकली । रामदयाल दासी से कह गया था, "मैं और पन्द्रह दिन घर न आ सकूंगा, इसलिए तुम सावधानी से रहना ।' उर्मिला को अपने पति की निर्दयता पर रोना आता था । वह पाप की नदी में बहे जा रही थी और उसका पति उसे बचाने को हाथ तक न हिलाता था । भ्रान्ति की विकराल लहरें लपलपाती हुई उस की ओर बढ़ी आ रही थीं और उसका पति निश्चेष्ट और निष्क्रिय एक ओर खड़ा तमाशा देख रहा था ।
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कई लड़कियों, निराशा में गिर जाते हैं जब वहाँ उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव के लिए केशविन्यास का विकल्प है - शादी। बेटी लेने के लिए एक उपयुक्त पैकिंग बहुत मुश्किल है, लेकिन अगर लंबे बालों के मालिक किसी भी तरह कम इस स्कोर पर चिंतित है, छोटे बाल के साथ लड़कियों क्या इस तरह के ताले के साथ क्या करना कई बार सोचना। जो लोग नहीं जानते हैं, क्या शादी "वर्ग", आप चुन सकते के लिए केशविन्यास के लिए, यह सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से कुछ पर विचार के लायक है। "वर्ग" पर बाल रूप अलग हो सकता हैः एक लम्बी, एक केश "बॉब", शास्त्रीय और चिकनी के आधार पर। प्रजातियों के आधार पर चयन किया और एक उपयुक्त केश किया जाना है।
यह शादी केशविन्यास की बात आती है, तो तुरंत शब्द "परिशोधन" "शैली", दिमाग में लाता है "कृपा। " शादी केशविन्यास आकार, इसलिए, हमेशा की तरह शाम से बहुत अलग है एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए वहाँ दिलचस्प विकल्प pilings हैं।
सभी शादी केशविन्यास कई समूहों में विभाजित किया गया हैः
- Splayed।
- उच्च, उठाया।
- एकत्र।
- परिसर (कृत्रिम किस्में जोड़ने)।
- संयोजन (कई तकनीकों को जोड़ती है)।
उनमें से प्रत्येक में योग्य विकल्प है कि किसी भी दुल्हन की उपस्थिति सुशोभित कर सकते हैं, छोटे बाल की भी मालिकों की एक बहुत कुछ कर रहे हैं। तो क्या शादी "वर्ग" के लिए केशविन्यास पर विचार के लायक है?
सबसे लोकप्रिय विकल्प - एक किरण के साथ कर्ल का एक संयोजन। हालांकि छोटे बाल, किरण छोटे पता चला है, लेकिन सही रूप को चुनने, यह तीन आयामी लग रहा है। लेकिन मुस्कराते हुए का लाभ यह है कि वे कर्ल, घुंघराले ताले, और दुल्हन के साथ मैच के लिए आसान कर रहे हैं, वे विशेष रूप से स्त्री देखो। कुछ ही चरणों में इस तरह के पैकिंग कर दिया।
- कंघी बाल कर्ल और कर्ल (उपकरण के आधार पर, चयन curlers या कर्लिंग पर गिर सकती है)।
- बाल 3 बराबर भागों में क्षैतिज विदाई पर गिर जाते हैं।
- नीचे, पहले मुड़ बीम पर।
- पर मध्यम लंबाई के बाल ऊन है, बालों के लिए मात्रा देने के लिए।
- शीर्ष किनारा बालों पर आरोपित और आधार बीम से जुड़ा हुआ है।
- बाल लालित्य, स्त्रीत्व देने के लिए, कुछ ताले अग्रिम तकिया के लिए और अंडाकार चेहरे की विशेषताओं में उपलब्ध हैं।
- केश वार्निश के साथ तय की और कुछ चमकीले गौण के साथ सजाया।
लेकिन "वर्ग" के लिए शादी केशविन्यास अन्य रूपों ले सकते हैं। घुंघराले बाल से सुंदर, बुनाई तीन आयामी चोटी या एक किनारे स्थित "कील", और एक छोटी सी किरण में टिप मोड़। कुछ किस्में बाहर करने के लिए छुट्टी दे दी, एक छोटे से rastrepannosti का प्रभाव पैदा।
छोटे बाल के बाद से, तो आ रहे हैं के साथ बहुत जटिल रूप से असंभव है। एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए एक ही केश में बहुत स्टाइलिश और सुरुचिपूर्ण देखो इसकी संरचना में असर केवल कर्ल कर सकते हैं। घुंघराले बाल छोटे बाल अपने वजन के बाद से सबसे लंबे समय तक रखा, वे छोटे और लगभग फैला नहीं, नहीं भारी बाल हैं।
चाहे दुल्हन या दुर्लभ की मोटी किस्मेंः करने के लिए स्टाइल सुंदर और फिट एक पोशाक का चयन करने के देखा, तो आप खाते में बाल के प्रकार के लेने के लिए की जरूरत है। दुल्हन दूसरे प्रकार का है, तो केश एक ऊन के बिना पूरा हो गया है। केवल इस आइटम की बचत कर सकते हैं विरल बाल और सही मात्रा में दे। खुद को ताले करना काफी सरल हैः पेशेवरों का उपयोग करें, और बाल curlers और कर्लिंग लोहा।
नहीं कर्ल की तरह सभी लड़कियों, और उनमें से कई नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि दुल्हन अक्सर शादी के रूप में चुना है केशविन्यास चिकना और चिकनी स्टाइल है। उनके आकार बहुत ही विविध और संरचना की दृष्टि से सरल हैं। एक छोटी "बॉब" के लिए शादी केश दिलचस्प और यहां तक कि संज्ञा कर्ल के बिना हो सकता है।
चिकना स्टाइल - आकार के कुछ प्रकार में एकत्र किया जाता है, सीधे बाल। कई बार, फिर से यहाँ वहाँ bouffant। सबसे लोकप्रिय विकल्प - एक चिकनी "खोल। "
इसका आकार निष्पादित करने के लिए बहुत सरल है। सभी ताले ध्यान से कंघी और (ऊपर से सिर के पीछे के बीच के पास करने के लिए) वापस लंबे बाल क्लिप या संदंश पर एकत्र। एकत्र बाल के छोर ध्यान से कंघी, और स्पिन, लेकिन नीचे से ऊपर (कैसे सुविधाजनक या इसके विपरीत,) से और दाईं से बाईं ओर नहीं। सिर के आधार पर मुड़ "खोल" और अदृश्य stabs। अंदर "खोल" एक उज्ज्वल और एक महान गौण डाल दिया। उसके बाल के अंत में उदारतापूर्वक स्प्रे फिक्सिंग छिड़क और बाहर और ताले चिपके हुए किसी भी बाल डाल दिया।
यह प्रतीत होता है कि क्या अभी भी "वर्ग" पर एक शादी केश के साथ आ सकते हैं? कई दुल्हनों की तस्वीरें न केवल स्टाइलिस्ट के महान कल्पना, लेकिन यह भी इन केशविन्यास चोटियों में उपस्थिति, और उलझनों से सभी प्रकार का प्रदर्शन। फार्म चोटियों, निश्चित रूप से विस्तृत नहीं होगा, तथ्य यह है कि छोटे किस्में दिया। आमतौर पर तीन किस्में की बुनाई का सबसे आसान प्रकार, "कील" चुना। लेकिन वहाँ कल्पना के लिए कमरे का एक बहुत है। बाल किनारे पर एक तरफ और लड़खड़ाते हुए चलना करने के लिए कंघी जा सकता है। "मकई के कान" की नोक सर्पिल में मुड़ और कुछ सजावट में डाला जाता है। शादी के लिए केशविन्यास विशिष्ट कृत्रिम फूल हैं।
कर्ल के साथ पूरी तरह बुनाई, और इस मामले में, किसी भी चोटी चोटी अनुमापी और स्त्री लग रहा है।
आप छोटे बाल के मालिक हैं, और आप भी हाशिये पर है, तो आप एक बाल कटवाने और विभिन्न विकल्पों में से एक बहुत कुछ के साथ आने कर सकते हैं। इस तरह के बाल मुकुट के लिए सबसे लोकप्रिय गहने रहने - छोटे मुकुट कि एक धमाके के साथ "वर्ग" के लिए किसी भी शादी केशविन्यास सजाने। pilings की तस्वीरें एक मुख्य बिंदु दिखानेः हाशिये पर हमेशा पूरी तरह से चिकनी है, लेकिन यह कुछ भी हो सकता पीछे।
अक्सर चारों ओर bouffant बाल बनाने के लिए और एक बड़े किरण इकट्ठा (फोम आवेषण का उपयोग कर और उन्हें चिकनी बाल के शीर्ष पर तय)। इस तरह के बिछाने बहुत लोकप्रिय है क्योंकि वे लंबे किस्में के प्रभाव पैदा करते हैं।
मुकुट सीधे सिर के शीर्ष पर डाला जाता है, हाशिये और बालों के बाकी के बीच। देखो इन केशविन्यास राजकुमारियों की तरह हमेशा से रहे हैं।
लेकिन बैंग्स अतिरिक्त सजावट के बिना पूरी तरह से अच्छी तरह से मौजूद कर सकते हैं, मुख्य बात यह है कि यह मामूली मोटी और सीधे था।
उन चिकनी रूपों और आदर्श मुस्कराते हुए, "वर्ग" के लिए अस्त-व्यस्त सूट शादी केशविन्यास बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, जो के लिए। pilings की तस्वीरें हमें यह समझना होगा कि केशविन्यास का मुख्य तत्व कर्ल कर रहे हैं अनुमति देते हैं। कर्ल और केश - एक महान संयोजन, और यदि आप एक मामूली लापरवाही देना चाहते हैं, एकत्र केशविन्यास बड़े करीने से हटा दिया tucked अवरोधित करता है। इसके अलावा एक और अधिक तीन आयामी और "सरल" केश बनाने के लिए कम से कम लाह और बालों के लिए मूस के लिए इस्तेमाल किया,। "वर्ग" बालों के लिए ये शादी केशविन्यास भी बुनाई जोड़ सकते हैं। यह क्योंकि "spikelets" बालों की किस्में खींच और लापरवाही, आराम और रोमांस की प्रभावी बनाने के लिए सबसे आसान की है।
बाल आकार के साथ एक महिला बाल चयनित है, वे तुरंत बड़े पैमाने पर विभिन्न hairpins, hairpins खरीदते हैं। कंघी, स्प्रे और कुछ उज्ज्वल गौणः शादी केशविन्यास का चयन, आप न्यूनतम सेट सीमित कर सकते हैं "बॉब बॉब" करने के लिए। छोटे बाल गहने के प्रचुर मात्रा में पसंद नहीं है, भले ही वह एक होने के लिए बेहतर है, लेकिन दस से अधिक छोटे। केश के आकार पर निर्भर करता है, उसके प्रकार और सजावट का चयन किया। roses, daisies और तरह - कड़े चिकनी रूपों चमकदार सामान, बाल क्लिप, और एक अस्त-व्यस्त केशविन्यास सफलता के लिए पूरी तरह से अनुकूल का बेहतर उपयोग करने के लिए।
वृद्धि कैसे केश तरह दिखेगा पर निर्भर करता हैः यदि आप बालों के फार्म के लिए अधिक ध्यान देते हैं करना चाहते हैं, तो गहने छोटा होना चाहिए। आप सजावट पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, बड़े आकार - यह सबसे उपयुक्त विकल्प है।
शादी केशविन्यास भी एक बाल कटवाने किसी भी तरह की "वर्ग" मूल हो सकता है। इस मुद्दे में मुख्य बात - एक नाई या स्टाइलिस्ट हैं और नियुक्ति के उपयुक्त रूप का निर्धारण और यहां तक कि सबसे जटिल विचारों को लागू करने में सक्षम हो जाएगा मिल रहा है।
शादी केशविन्यास सत्यापन की आवश्यकता है, इसलिए यह वांछनीय है बहुत पहले से उत्सव परीक्षण संस्करण बनाने की कोशिश करने के लिएः यह, पोशाक के साथ जोड़ा जाएगा चुना सजावट देखने के लिए फायदेमंद हो सकता है। शादी - इस दिन जब सब कुछ सही होना चाहिए। इस अवसर याद आती है और सबसे अच्छा शादी एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए बिछाने न चुनें।
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कई लड़कियों, निराशा में गिर जाते हैं जब वहाँ उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव के लिए केशविन्यास का विकल्प है - शादी। बेटी लेने के लिए एक उपयुक्त पैकिंग बहुत मुश्किल है, लेकिन अगर लंबे बालों के मालिक किसी भी तरह कम इस स्कोर पर चिंतित है, छोटे बाल के साथ लड़कियों क्या इस तरह के ताले के साथ क्या करना कई बार सोचना। जो लोग नहीं जानते हैं, क्या शादी "वर्ग", आप चुन सकते के लिए केशविन्यास के लिए, यह सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से कुछ पर विचार के लायक है। "वर्ग" पर बाल रूप अलग हो सकता हैः एक लम्बी, एक केश "बॉब", शास्त्रीय और चिकनी के आधार पर। प्रजातियों के आधार पर चयन किया और एक उपयुक्त केश किया जाना है। यह शादी केशविन्यास की बात आती है, तो तुरंत शब्द "परिशोधन" "शैली", दिमाग में लाता है "कृपा। " शादी केशविन्यास आकार, इसलिए, हमेशा की तरह शाम से बहुत अलग है एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए वहाँ दिलचस्प विकल्प pilings हैं। सभी शादी केशविन्यास कई समूहों में विभाजित किया गया हैः - Splayed। - उच्च, उठाया। - एकत्र। - परिसर । - संयोजन । उनमें से प्रत्येक में योग्य विकल्प है कि किसी भी दुल्हन की उपस्थिति सुशोभित कर सकते हैं, छोटे बाल की भी मालिकों की एक बहुत कुछ कर रहे हैं। तो क्या शादी "वर्ग" के लिए केशविन्यास पर विचार के लायक है? सबसे लोकप्रिय विकल्प - एक किरण के साथ कर्ल का एक संयोजन। हालांकि छोटे बाल, किरण छोटे पता चला है, लेकिन सही रूप को चुनने, यह तीन आयामी लग रहा है। लेकिन मुस्कराते हुए का लाभ यह है कि वे कर्ल, घुंघराले ताले, और दुल्हन के साथ मैच के लिए आसान कर रहे हैं, वे विशेष रूप से स्त्री देखो। कुछ ही चरणों में इस तरह के पैकिंग कर दिया। - कंघी बाल कर्ल और कर्ल । - बाल तीन बराबर भागों में क्षैतिज विदाई पर गिर जाते हैं। - नीचे, पहले मुड़ बीम पर। - पर मध्यम लंबाई के बाल ऊन है, बालों के लिए मात्रा देने के लिए। - शीर्ष किनारा बालों पर आरोपित और आधार बीम से जुड़ा हुआ है। - बाल लालित्य, स्त्रीत्व देने के लिए, कुछ ताले अग्रिम तकिया के लिए और अंडाकार चेहरे की विशेषताओं में उपलब्ध हैं। - केश वार्निश के साथ तय की और कुछ चमकीले गौण के साथ सजाया। लेकिन "वर्ग" के लिए शादी केशविन्यास अन्य रूपों ले सकते हैं। घुंघराले बाल से सुंदर, बुनाई तीन आयामी चोटी या एक किनारे स्थित "कील", और एक छोटी सी किरण में टिप मोड़। कुछ किस्में बाहर करने के लिए छुट्टी दे दी, एक छोटे से rastrepannosti का प्रभाव पैदा। छोटे बाल के बाद से, तो आ रहे हैं के साथ बहुत जटिल रूप से असंभव है। एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए एक ही केश में बहुत स्टाइलिश और सुरुचिपूर्ण देखो इसकी संरचना में असर केवल कर्ल कर सकते हैं। घुंघराले बाल छोटे बाल अपने वजन के बाद से सबसे लंबे समय तक रखा, वे छोटे और लगभग फैला नहीं, नहीं भारी बाल हैं। चाहे दुल्हन या दुर्लभ की मोटी किस्मेंः करने के लिए स्टाइल सुंदर और फिट एक पोशाक का चयन करने के देखा, तो आप खाते में बाल के प्रकार के लेने के लिए की जरूरत है। दुल्हन दूसरे प्रकार का है, तो केश एक ऊन के बिना पूरा हो गया है। केवल इस आइटम की बचत कर सकते हैं विरल बाल और सही मात्रा में दे। खुद को ताले करना काफी सरल हैः पेशेवरों का उपयोग करें, और बाल curlers और कर्लिंग लोहा। नहीं कर्ल की तरह सभी लड़कियों, और उनमें से कई नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि दुल्हन अक्सर शादी के रूप में चुना है केशविन्यास चिकना और चिकनी स्टाइल है। उनके आकार बहुत ही विविध और संरचना की दृष्टि से सरल हैं। एक छोटी "बॉब" के लिए शादी केश दिलचस्प और यहां तक कि संज्ञा कर्ल के बिना हो सकता है। चिकना स्टाइल - आकार के कुछ प्रकार में एकत्र किया जाता है, सीधे बाल। कई बार, फिर से यहाँ वहाँ bouffant। सबसे लोकप्रिय विकल्प - एक चिकनी "खोल। " इसका आकार निष्पादित करने के लिए बहुत सरल है। सभी ताले ध्यान से कंघी और वापस लंबे बाल क्लिप या संदंश पर एकत्र। एकत्र बाल के छोर ध्यान से कंघी, और स्पिन, लेकिन नीचे से ऊपर से और दाईं से बाईं ओर नहीं। सिर के आधार पर मुड़ "खोल" और अदृश्य stabs। अंदर "खोल" एक उज्ज्वल और एक महान गौण डाल दिया। उसके बाल के अंत में उदारतापूर्वक स्प्रे फिक्सिंग छिड़क और बाहर और ताले चिपके हुए किसी भी बाल डाल दिया। यह प्रतीत होता है कि क्या अभी भी "वर्ग" पर एक शादी केश के साथ आ सकते हैं? कई दुल्हनों की तस्वीरें न केवल स्टाइलिस्ट के महान कल्पना, लेकिन यह भी इन केशविन्यास चोटियों में उपस्थिति, और उलझनों से सभी प्रकार का प्रदर्शन। फार्म चोटियों, निश्चित रूप से विस्तृत नहीं होगा, तथ्य यह है कि छोटे किस्में दिया। आमतौर पर तीन किस्में की बुनाई का सबसे आसान प्रकार, "कील" चुना। लेकिन वहाँ कल्पना के लिए कमरे का एक बहुत है। बाल किनारे पर एक तरफ और लड़खड़ाते हुए चलना करने के लिए कंघी जा सकता है। "मकई के कान" की नोक सर्पिल में मुड़ और कुछ सजावट में डाला जाता है। शादी के लिए केशविन्यास विशिष्ट कृत्रिम फूल हैं। कर्ल के साथ पूरी तरह बुनाई, और इस मामले में, किसी भी चोटी चोटी अनुमापी और स्त्री लग रहा है। आप छोटे बाल के मालिक हैं, और आप भी हाशिये पर है, तो आप एक बाल कटवाने और विभिन्न विकल्पों में से एक बहुत कुछ के साथ आने कर सकते हैं। इस तरह के बाल मुकुट के लिए सबसे लोकप्रिय गहने रहने - छोटे मुकुट कि एक धमाके के साथ "वर्ग" के लिए किसी भी शादी केशविन्यास सजाने। pilings की तस्वीरें एक मुख्य बिंदु दिखानेः हाशिये पर हमेशा पूरी तरह से चिकनी है, लेकिन यह कुछ भी हो सकता पीछे। अक्सर चारों ओर bouffant बाल बनाने के लिए और एक बड़े किरण इकट्ठा । इस तरह के बिछाने बहुत लोकप्रिय है क्योंकि वे लंबे किस्में के प्रभाव पैदा करते हैं। मुकुट सीधे सिर के शीर्ष पर डाला जाता है, हाशिये और बालों के बाकी के बीच। देखो इन केशविन्यास राजकुमारियों की तरह हमेशा से रहे हैं। लेकिन बैंग्स अतिरिक्त सजावट के बिना पूरी तरह से अच्छी तरह से मौजूद कर सकते हैं, मुख्य बात यह है कि यह मामूली मोटी और सीधे था। उन चिकनी रूपों और आदर्श मुस्कराते हुए, "वर्ग" के लिए अस्त-व्यस्त सूट शादी केशविन्यास बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, जो के लिए। pilings की तस्वीरें हमें यह समझना होगा कि केशविन्यास का मुख्य तत्व कर्ल कर रहे हैं अनुमति देते हैं। कर्ल और केश - एक महान संयोजन, और यदि आप एक मामूली लापरवाही देना चाहते हैं, एकत्र केशविन्यास बड़े करीने से हटा दिया tucked अवरोधित करता है। इसके अलावा एक और अधिक तीन आयामी और "सरल" केश बनाने के लिए कम से कम लाह और बालों के लिए मूस के लिए इस्तेमाल किया,। "वर्ग" बालों के लिए ये शादी केशविन्यास भी बुनाई जोड़ सकते हैं। यह क्योंकि "spikelets" बालों की किस्में खींच और लापरवाही, आराम और रोमांस की प्रभावी बनाने के लिए सबसे आसान की है। बाल आकार के साथ एक महिला बाल चयनित है, वे तुरंत बड़े पैमाने पर विभिन्न hairpins, hairpins खरीदते हैं। कंघी, स्प्रे और कुछ उज्ज्वल गौणः शादी केशविन्यास का चयन, आप न्यूनतम सेट सीमित कर सकते हैं "बॉब बॉब" करने के लिए। छोटे बाल गहने के प्रचुर मात्रा में पसंद नहीं है, भले ही वह एक होने के लिए बेहतर है, लेकिन दस से अधिक छोटे। केश के आकार पर निर्भर करता है, उसके प्रकार और सजावट का चयन किया। roses, daisies और तरह - कड़े चिकनी रूपों चमकदार सामान, बाल क्लिप, और एक अस्त-व्यस्त केशविन्यास सफलता के लिए पूरी तरह से अनुकूल का बेहतर उपयोग करने के लिए। वृद्धि कैसे केश तरह दिखेगा पर निर्भर करता हैः यदि आप बालों के फार्म के लिए अधिक ध्यान देते हैं करना चाहते हैं, तो गहने छोटा होना चाहिए। आप सजावट पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, बड़े आकार - यह सबसे उपयुक्त विकल्प है। शादी केशविन्यास भी एक बाल कटवाने किसी भी तरह की "वर्ग" मूल हो सकता है। इस मुद्दे में मुख्य बात - एक नाई या स्टाइलिस्ट हैं और नियुक्ति के उपयुक्त रूप का निर्धारण और यहां तक कि सबसे जटिल विचारों को लागू करने में सक्षम हो जाएगा मिल रहा है। शादी केशविन्यास सत्यापन की आवश्यकता है, इसलिए यह वांछनीय है बहुत पहले से उत्सव परीक्षण संस्करण बनाने की कोशिश करने के लिएः यह, पोशाक के साथ जोड़ा जाएगा चुना सजावट देखने के लिए फायदेमंद हो सकता है। शादी - इस दिन जब सब कुछ सही होना चाहिए। इस अवसर याद आती है और सबसे अच्छा शादी एक बाल कटवाने "वर्ग" के लिए बिछाने न चुनें।
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ग्रहण की थी । श्रतएव योगमार्गियों से सम्बन्धित होने पर भी कवीर भक्तिमार्गी थे। विगत परिच्छेद में कबीर और सरदास के पदों को उद्धृत कर हमने उनमें जो विचार समता प्रदर्शित की है, उस समता का प्रमुख कारण यही मक्ति मार्ग है। योग परक तत्वों का जो उल्लस अधिकाशतः कबीर में थोर कहीं कहीं सूर में पाया जाता है, वह नाथपथ के कारण है, पर जैसे करीर अपने उत्तरकालीन जीवन में हठयोग को अनावश्यक ही नहीं, निरर्थक भी समझने लगे थे, उसी प्रकार प्राचार्य वल्लभ से दोक्षित होने के पश्चात् मूरदास ने भी भ्रमरगीत में हटयोग की- ग्रासन ध्यान जमाना, प्राणायाम करना, मूँदना, सिंगी रखना, भस्म रमाना ग्रादि क्रिया की निःसारता सिद्ध की है । इस निर्गुण पथी प्रभाव और आचार्य बल्लभ द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्गीय भक्ति के ग्रहण के बीच सूर का वह जीवन है, जिसमें उन्होंने निवृत्ति परायण भगवद्भक्ति से सम्बन्ध रखने वाली रचनायें की है, जिनमें कहीं विनय है, कहीं रुदन है, कहीं विराग है, कही पश्चात्ताप है और कहीं अपनी दीनताहीनता का वर्णन है, पापमयी प्रवृत्ति का उल्लस है, श्रात्मनिवेदन है। सूरदास ने ऐसी ही रचनायें प्राचार्य बल्लभ को श्राज्ञा से उनके सामने गाकर सुनाई थीं, जिन्हें सुनकर वे कहने लगे थेः- "सूर है के ऐमो काहे चू घिघियातु है, कल्लु भगवत्लीला वर्णन करि ।" इसके पश्चात् सूर का जैसे कायाकल्प हो गया, बिनय एव दास्य भक्ति का घिधियाना एकदम वन्द हो गया। वे प्रवृत्तिपरक हरि लीला वर्णन में तन्मय हो गये और जीवन के अन्तिम क्षण तक उसी में तल्लीन बने रहे। इस हरिलीला का वर्णन ग्रगामी परिच्छेदों में होगा। इस परिच्छेद में हम उनको ऐसी रचनाओं पर विचार करना चाहते है, जिनमें निवृत्तिमूलक वैष्णव दास्य भक्ति का निरूपण है श्रोर जो श्राचार्य बल्लभ से मिलने के पूर्व ही लिखी जा चुकी थीं ।
गीता (७ १६) में भक्त चार प्रकार के कहे गये हैं - श्रा, र्यार्थी, जिज्ञासु और शानी । इन चारो में ज्ञानी भक्त को ही भगवान ने श्रेष्ठ स्वीकार किया है। सनक, सनन्दन, सनत्कुमार औौर नारद ऐसे ही ज्ञानी मक्त थे - प्रशान्त श्रीर गम्भीर । ज्ञानी भक्त उच्चकोटि के विरागी भी होते हैं । श्रतः वैष्णव भक्ति में ज्ञान और वैराग्य की निन्दा तो नहीं है, पर उसे भक्ति का सहायक धौर उससे वर कोटि का अवश्य माना गया है। गीता में भी ज्ञानी शब्द भक्त का विशेषण है, अर्थात् ज्ञान रूपी साधन के द्वारा वह भक्त बना है । गोसामी तुलसीदास "ज्ञानहिं भगतिहिं नहिं कलु भेदा । उभय हरदि भव
संभव खेदा ।।" कहकर ज्ञान और भक्ति का एक ही परिणाम सिद्ध करते हैं, पर इसी की आगे वाली पक्तियों में भक्ति को ज्ञान से ऊपर उठा देते हैं ज्ञान के पंथ कृपान की धारा । परत खगेश होइ नहिं बारा ।। भगति करत बिनुजतन प्रयासा । संसृतिमूल अविद्यानासा ।। अर्थात् ज्ञान का मार्ग कृपाण की तेज धार है, जिस पर पैर रख कर मनुष्य बच नहीं पाता, परन्तु भक्ति करते हुए बिना किसी यत्न और प्रयास के संसार के मूल कारण विद्या को नष्ट कर देता हैःसूरदास ने भी भक्ति के साधक ज्ञान की प्रशंसा की है। यह ज्ञान ज्ञानरूपी अन्धकार को नष्ट करता है - भगवान और भक्त के वीच पड़े हुये परदे को दूर करता है । 'प्रतः यह भक्ति रूपी साध्य के लिए साधन का कार्य करता है । इसके पश्चात् भक्ति फिर साधन बन जाती है, जिससे परम साध्य भगवान प्राप्त होते हैं। सूर की नीचे लिखी पंक्तियाँ इसी तथ्य पर प्रकाश डालती हैः सूरदास तब ही तम नासै ज्ञान अगिनि झर फुटै ॥१६॥ सूरसागर (ना० प्र० स० ३६२ ) सूर मिटै ध्यज्ञान मूरछा ज्ञान मूल के खाये ।।३२।। द्वितीय स्कन्ध सूरसागर ( ना० प्र० स० ३७५ )
सकाम और निष्काम भक्ति - सूर ने तृतीय स्कन्ध के ग्यारहवें पद में भक्ति के दो भेद किए हैं : सकाम और निष्काम । श्रार्त, श्रर्थार्थी और जिज्ञासु तीनों प्रकार के भक्तों की भक्ति सकाम होती है। सकाम भक्ति द्वारा भी भक्त क्रमशः उद्धार पा जाता है। धीरे-धीरे वह ब्रह्म (हिरण्यगर्भ - ब्रह्मा) तक पहुँचता है और ब्रह्मा के साथ विष्णु-पद में लीन हो जाता है। निष्काम भक्ति द्वारा भक्त सीधा बैकुण्ठ में पहुंचता है और फिर जन्म-मरण के चक्र में नहीं पड़ता। भक्ति के ये भेद श्रीमद्भभागवत के अनुसार हैं । भक्ति की इस श्रवस्था में भक्त को न प्रशन वमन की चिन्ता रहती है, न पुत्र स्त्री यादि के पारिवारिक हित-संबंध का विचार रहता है। किसी के जाने का शोक और न किसी के आने का श्रानन्द होता है, वचनों में कोमलता और नम्रता रहती है तथा सदैव प्रभु-प्रेम में सम्न रहने से मुदिता भूमिका का भान होता रहता है ।
१ - भक्ति पंथ को जो अनुसरें ।
पुत्र कलन सो हित परिहरै । अन्न वसन की चिन्तन करै ॥२॥२० सूरसागर (ना०प्र० स० ३६४)
गये सोच आये नहिं श्रानन्द, ऐमो मारग गहिये । कोमल वचन दीनता सचनों सदा नंदित रहिये ।।२।१८।।
सूरमागर ( ना०प्र०स० ३६१ )
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ग्रहण की थी । श्रतएव योगमार्गियों से सम्बन्धित होने पर भी कवीर भक्तिमार्गी थे। विगत परिच्छेद में कबीर और सरदास के पदों को उद्धृत कर हमने उनमें जो विचार समता प्रदर्शित की है, उस समता का प्रमुख कारण यही मक्ति मार्ग है। योग परक तत्वों का जो उल्लस अधिकाशतः कबीर में थोर कहीं कहीं सूर में पाया जाता है, वह नाथपथ के कारण है, पर जैसे करीर अपने उत्तरकालीन जीवन में हठयोग को अनावश्यक ही नहीं, निरर्थक भी समझने लगे थे, उसी प्रकार प्राचार्य वल्लभ से दोक्षित होने के पश्चात् मूरदास ने भी भ्रमरगीत में हटयोग की- ग्रासन ध्यान जमाना, प्राणायाम करना, मूँदना, सिंगी रखना, भस्म रमाना ग्रादि क्रिया की निःसारता सिद्ध की है । इस निर्गुण पथी प्रभाव और आचार्य बल्लभ द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्गीय भक्ति के ग्रहण के बीच सूर का वह जीवन है, जिसमें उन्होंने निवृत्ति परायण भगवद्भक्ति से सम्बन्ध रखने वाली रचनायें की है, जिनमें कहीं विनय है, कहीं रुदन है, कहीं विराग है, कही पश्चात्ताप है और कहीं अपनी दीनताहीनता का वर्णन है, पापमयी प्रवृत्ति का उल्लस है, श्रात्मनिवेदन है। सूरदास ने ऐसी ही रचनायें प्राचार्य बल्लभ को श्राज्ञा से उनके सामने गाकर सुनाई थीं, जिन्हें सुनकर वे कहने लगे थेः- "सूर है के ऐमो काहे चू घिघियातु है, कल्लु भगवत्लीला वर्णन करि ।" इसके पश्चात् सूर का जैसे कायाकल्प हो गया, बिनय एव दास्य भक्ति का घिधियाना एकदम वन्द हो गया। वे प्रवृत्तिपरक हरि लीला वर्णन में तन्मय हो गये और जीवन के अन्तिम क्षण तक उसी में तल्लीन बने रहे। इस हरिलीला का वर्णन ग्रगामी परिच्छेदों में होगा। इस परिच्छेद में हम उनको ऐसी रचनाओं पर विचार करना चाहते है, जिनमें निवृत्तिमूलक वैष्णव दास्य भक्ति का निरूपण है श्रोर जो श्राचार्य बल्लभ से मिलने के पूर्व ही लिखी जा चुकी थीं । गीता में भक्त चार प्रकार के कहे गये हैं - श्रा, र्यार्थी, जिज्ञासु और शानी । इन चारो में ज्ञानी भक्त को ही भगवान ने श्रेष्ठ स्वीकार किया है। सनक, सनन्दन, सनत्कुमार औौर नारद ऐसे ही ज्ञानी मक्त थे - प्रशान्त श्रीर गम्भीर । ज्ञानी भक्त उच्चकोटि के विरागी भी होते हैं । श्रतः वैष्णव भक्ति में ज्ञान और वैराग्य की निन्दा तो नहीं है, पर उसे भक्ति का सहायक धौर उससे वर कोटि का अवश्य माना गया है। गीता में भी ज्ञानी शब्द भक्त का विशेषण है, अर्थात् ज्ञान रूपी साधन के द्वारा वह भक्त बना है । गोसामी तुलसीदास "ज्ञानहिं भगतिहिं नहिं कलु भेदा । उभय हरदि भव संभव खेदा ।।" कहकर ज्ञान और भक्ति का एक ही परिणाम सिद्ध करते हैं, पर इसी की आगे वाली पक्तियों में भक्ति को ज्ञान से ऊपर उठा देते हैं ज्ञान के पंथ कृपान की धारा । परत खगेश होइ नहिं बारा ।। भगति करत बिनुजतन प्रयासा । संसृतिमूल अविद्यानासा ।। अर्थात् ज्ञान का मार्ग कृपाण की तेज धार है, जिस पर पैर रख कर मनुष्य बच नहीं पाता, परन्तु भक्ति करते हुए बिना किसी यत्न और प्रयास के संसार के मूल कारण विद्या को नष्ट कर देता हैःसूरदास ने भी भक्ति के साधक ज्ञान की प्रशंसा की है। यह ज्ञान ज्ञानरूपी अन्धकार को नष्ट करता है - भगवान और भक्त के वीच पड़े हुये परदे को दूर करता है । 'प्रतः यह भक्ति रूपी साध्य के लिए साधन का कार्य करता है । इसके पश्चात् भक्ति फिर साधन बन जाती है, जिससे परम साध्य भगवान प्राप्त होते हैं। सूर की नीचे लिखी पंक्तियाँ इसी तथ्य पर प्रकाश डालती हैः सूरदास तब ही तम नासै ज्ञान अगिनि झर फुटै ॥सोलह॥ सूरसागर सूर मिटै ध्यज्ञान मूरछा ज्ञान मूल के खाये ।।बत्तीस।। द्वितीय स्कन्ध सूरसागर सकाम और निष्काम भक्ति - सूर ने तृतीय स्कन्ध के ग्यारहवें पद में भक्ति के दो भेद किए हैं : सकाम और निष्काम । श्रार्त, श्रर्थार्थी और जिज्ञासु तीनों प्रकार के भक्तों की भक्ति सकाम होती है। सकाम भक्ति द्वारा भी भक्त क्रमशः उद्धार पा जाता है। धीरे-धीरे वह ब्रह्म तक पहुँचता है और ब्रह्मा के साथ विष्णु-पद में लीन हो जाता है। निष्काम भक्ति द्वारा भक्त सीधा बैकुण्ठ में पहुंचता है और फिर जन्म-मरण के चक्र में नहीं पड़ता। भक्ति के ये भेद श्रीमद्भभागवत के अनुसार हैं । भक्ति की इस श्रवस्था में भक्त को न प्रशन वमन की चिन्ता रहती है, न पुत्र स्त्री यादि के पारिवारिक हित-संबंध का विचार रहता है। किसी के जाने का शोक और न किसी के आने का श्रानन्द होता है, वचनों में कोमलता और नम्रता रहती है तथा सदैव प्रभु-प्रेम में सम्न रहने से मुदिता भूमिका का भान होता रहता है । एक - भक्ति पंथ को जो अनुसरें । पुत्र कलन सो हित परिहरै । अन्न वसन की चिन्तन करै ॥दो॥बीस सूरसागर गये सोच आये नहिं श्रानन्द, ऐमो मारग गहिये । कोमल वचन दीनता सचनों सदा नंदित रहिये ।।दो।अट्ठारह।। सूरमागर
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शुक्रवार की सुबह लाल सागर में सऊदी तट के निकट ईरानी ऑयल टैंकर पर हुए संदिग्ध दो रॉकेट हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में अब तक 2 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।
लाल सागर में ईरान के एक तेल टैंकर में शुक्रवर को एक धमाका हुआ और इस बात की आशंका है कि यह धमाका मीज़ाइल लगने की वजह से हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्री ने अपने एक लेख में हुर्मुज़ शांति पहल की तरफ़ इशारा करते हुए फ़ार्स की खाड़ी में अनाक्रमण और हस्तक्षेप न करने की संधि पर दस्तख़त का प्रस्ताव पेश किया है।
नये तुर्की रिपब्लकिन के संस्थापक " मुस्तफा अतातुर्क" का एक कथन है जिसे तुर्की की यूनिवर्सिटियों में भी पढ़ाया जाता है। इसमें " अतातुर्क" कहते हैं कि " युद्ध आरंभ करना अपराध है जब तक कि देश की जनता का जीवन खतरे में न पड़ जाए। "
इस्राईली टीकाकार, लीमूर समीमियान दाराश ने अपनी एक लेख में ईरान के सामने इस्राईल की 5 बुनियादी हार का जायज़ा लिया है।
आईआरजीसी के कमांडर इनचीफ़ ने कहा है कि हम जहां भी क़दम रखते हैं, अमरीका तुरंत पीछे हट जाता है और उसकी मेज़ पर रखे हुए विकल्प कमज़ोर पड़ चुके हैं।
विदेश मंत्री ने कहा है कि फ़ार्स की खाड़ी की सुरक्षा को विभाजित नहीं किया जा सकता है।
अमरीका ने पहले तो सीरिया में कुर्द फ़ोर्सेज़ का गठन करके उन्हें अपने सैनिक मिशन में प्रयोग किया और अब तुर्की ने हमला शुरू किया है तो वह कुर्दों को छोड़कर किनारे हो गया है। इसके बाद अब ट्रम्प ने ज़्यादा ज़ोरदार थप्पड़ अपने अरब घटकों और शायद इस्राईलियों को भी जड़ दिया है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने परमाणु बम के इस्तेमाल के धार्मिक दृष्टि से हराम होने के बारे में ईरान की साहसिक नीति की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि ईरान, एटम बम बनाने और उसके रख-रखाव पर पैसे ख़र्च नहीं करेगा।
विदेश मंत्री ने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ अमरीका के क़दमों को युद्धक कार्यवाही बताते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध में अमरीका ने, असैनिकों को अपना मुख्य लक्ष्य बना रखा है।
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शुक्रवार की सुबह लाल सागर में सऊदी तट के निकट ईरानी ऑयल टैंकर पर हुए संदिग्ध दो रॉकेट हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में अब तक दो प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। लाल सागर में ईरान के एक तेल टैंकर में शुक्रवर को एक धमाका हुआ और इस बात की आशंका है कि यह धमाका मीज़ाइल लगने की वजह से हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री ने अपने एक लेख में हुर्मुज़ शांति पहल की तरफ़ इशारा करते हुए फ़ार्स की खाड़ी में अनाक्रमण और हस्तक्षेप न करने की संधि पर दस्तख़त का प्रस्ताव पेश किया है। नये तुर्की रिपब्लकिन के संस्थापक " मुस्तफा अतातुर्क" का एक कथन है जिसे तुर्की की यूनिवर्सिटियों में भी पढ़ाया जाता है। इसमें " अतातुर्क" कहते हैं कि " युद्ध आरंभ करना अपराध है जब तक कि देश की जनता का जीवन खतरे में न पड़ जाए। " इस्राईली टीकाकार, लीमूर समीमियान दाराश ने अपनी एक लेख में ईरान के सामने इस्राईल की पाँच बुनियादी हार का जायज़ा लिया है। आईआरजीसी के कमांडर इनचीफ़ ने कहा है कि हम जहां भी क़दम रखते हैं, अमरीका तुरंत पीछे हट जाता है और उसकी मेज़ पर रखे हुए विकल्प कमज़ोर पड़ चुके हैं। विदेश मंत्री ने कहा है कि फ़ार्स की खाड़ी की सुरक्षा को विभाजित नहीं किया जा सकता है। अमरीका ने पहले तो सीरिया में कुर्द फ़ोर्सेज़ का गठन करके उन्हें अपने सैनिक मिशन में प्रयोग किया और अब तुर्की ने हमला शुरू किया है तो वह कुर्दों को छोड़कर किनारे हो गया है। इसके बाद अब ट्रम्प ने ज़्यादा ज़ोरदार थप्पड़ अपने अरब घटकों और शायद इस्राईलियों को भी जड़ दिया है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने परमाणु बम के इस्तेमाल के धार्मिक दृष्टि से हराम होने के बारे में ईरान की साहसिक नीति की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि ईरान, एटम बम बनाने और उसके रख-रखाव पर पैसे ख़र्च नहीं करेगा। विदेश मंत्री ने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ अमरीका के क़दमों को युद्धक कार्यवाही बताते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध में अमरीका ने, असैनिकों को अपना मुख्य लक्ष्य बना रखा है।
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होता है। वहाँ यक्षिनी को नैवेद्य लगाने के बाद भोजन करने से यक्षिनी के प्रसाद से पुरुष की ब्रहाहत्या छूट जाती है ।
मणिनाग तीर्थ ( राजगृह के समीप होना चाहिये ) में जाने से हजार गोदान का फल होता है। जो पुरुष मणिनाग तीर्थ में उत्पन्न हुई वस्तुओं के खाता है उसे सर्प काटने का विष नहीं चढ़ता। वहाँ एक रात रहने से हज़ार गोदान का फल होता है। यहाँ से महापि गौतम के वन में जाना उचित है। वहाँ ग्रहल्या कुण्ड में स्नान करने से सद्गति प्राप्त होती है।
[ श्री सुनतनाथ मुनि, बीसवें तीर्थकर थे । थापकी माता का नाम श्यामा और पिता का नाम सुमन्त था। कछुआ का चिन्ह है। राजगृह में ग्रापके गर्भ, जन्म और दीक्षा तथा कैवल्यज्ञान कल्याणक हुये थे और पार्श्वनाथ में निर्माण हुआ था । ]
व० ६० राजगृह की पहाड़ियाँ लगभग १००० फ़ीट ऊँची हैं। उनमें वैभार ( महाभारत का वैहार ), विपुलाचल ( महाभारत का घेतक ), रत्नगिरि ( महाभारत का ऋषिगरि ), उदयगिरि और सोनगिरि प्रसिद्ध है। ये वे पांच पहाड़ियाँ हैं जो राजगृह को चारों ओर से घेरे हैं। समीप चार मील दक्षिण वाणगङ्गा पहाड़ी नदी है जिसके पार की चहार दीवारी जरासन्ध का बांध कहलाती है। यणगङ्गा से उत्तर रङ्गभूमि है । लोग कहते हैं कि भीमसेन ने जरासन्ध को इसी जगह पर चीर डाला था ।
राजगृह में सरस्वती नामक नदी दक्षिण-पश्चिम से वैभार पर्वत के पूर्वोत्तर बदाकुण्ड के पूर्व ई है। ब्रहह्मकुद के पास सरस्वती को प्राची सरस्वती कुण्ड कहते हैं । सरस्वती कुण्ड से पश्चिम वैभार पर्वत के पूर्वोत्तर पांच के पास मार्कण्डेय क्षेत्र है ।
सरस्वती कुंड से एक मोल दक्षिण-पश्चिम ११ गज लम्बी और ५॥ गज चौड़ी सोनभण्डार की प्रसिद्ध गुफा है । इस गुफा भोजन करने के उपरान्त भगवान बुद्ध दिन में शयन करते थे। इसी पहाड़ी के उत्तर भाग में सोनभण्डार गुफा से एक मील दूर सत्तपानी गुफा थी जिसके सामने प्रथम बौद्ध सभा हुई थी।
राजगृह से १८ मील दूर जेठियन नामक स्थान है जिसका प्राचीन नाम यष्टियन है। भगवान बुद्ध ने यहीं कई चमत्कार प्रदर्शित किये थे तथा सम्राट विविगार को २६ वर्ष की आयु में यहीं बौद्ध बनाया था ।
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होता है। वहाँ यक्षिनी को नैवेद्य लगाने के बाद भोजन करने से यक्षिनी के प्रसाद से पुरुष की ब्रहाहत्या छूट जाती है । मणिनाग तीर्थ में जाने से हजार गोदान का फल होता है। जो पुरुष मणिनाग तीर्थ में उत्पन्न हुई वस्तुओं के खाता है उसे सर्प काटने का विष नहीं चढ़ता। वहाँ एक रात रहने से हज़ार गोदान का फल होता है। यहाँ से महापि गौतम के वन में जाना उचित है। वहाँ ग्रहल्या कुण्ड में स्नान करने से सद्गति प्राप्त होती है। [ श्री सुनतनाथ मुनि, बीसवें तीर्थकर थे । थापकी माता का नाम श्यामा और पिता का नाम सुमन्त था। कछुआ का चिन्ह है। राजगृह में ग्रापके गर्भ, जन्म और दीक्षा तथा कैवल्यज्ञान कल्याणक हुये थे और पार्श्वनाथ में निर्माण हुआ था । ] वशून्य साठ राजगृह की पहाड़ियाँ लगभग एक हज़ार फ़ीट ऊँची हैं। उनमें वैभार , विपुलाचल , रत्नगिरि , उदयगिरि और सोनगिरि प्रसिद्ध है। ये वे पांच पहाड़ियाँ हैं जो राजगृह को चारों ओर से घेरे हैं। समीप चार मील दक्षिण वाणगङ्गा पहाड़ी नदी है जिसके पार की चहार दीवारी जरासन्ध का बांध कहलाती है। यणगङ्गा से उत्तर रङ्गभूमि है । लोग कहते हैं कि भीमसेन ने जरासन्ध को इसी जगह पर चीर डाला था । राजगृह में सरस्वती नामक नदी दक्षिण-पश्चिम से वैभार पर्वत के पूर्वोत्तर बदाकुण्ड के पूर्व ई है। ब्रहह्मकुद के पास सरस्वती को प्राची सरस्वती कुण्ड कहते हैं । सरस्वती कुण्ड से पश्चिम वैभार पर्वत के पूर्वोत्तर पांच के पास मार्कण्डेय क्षेत्र है । सरस्वती कुंड से एक मोल दक्षिण-पश्चिम ग्यारह गज लम्बी और पाँच॥ गज चौड़ी सोनभण्डार की प्रसिद्ध गुफा है । इस गुफा भोजन करने के उपरान्त भगवान बुद्ध दिन में शयन करते थे। इसी पहाड़ी के उत्तर भाग में सोनभण्डार गुफा से एक मील दूर सत्तपानी गुफा थी जिसके सामने प्रथम बौद्ध सभा हुई थी। राजगृह से अट्ठारह मील दूर जेठियन नामक स्थान है जिसका प्राचीन नाम यष्टियन है। भगवान बुद्ध ने यहीं कई चमत्कार प्रदर्शित किये थे तथा सम्राट विविगार को छब्बीस वर्ष की आयु में यहीं बौद्ध बनाया था ।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि नैतिक मूल्यों मे आ रही गिरावट के कारण हिन्दू सनातन संस्कृति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि तीर्थों की परंपराओं व आध्यात्मिक विरासत को ताक पर रखकर तीर्थांटन को पाश्चात्य शैली के पर्यटन के रूप में बढ़ावा दिए जाने से सनातन संस्कृति के यह ऊर्जा के क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इनमें विक्षोभ पैदा हो रहा है और प्रकृति पराशक्ति दैवीय आपदा के रूप में कहर ढा रही है। उत्तराखंड देवभूमि के श्री केदारनाथ तीर्थ के साथ ही अन्य तीनों धामों में आए जल प्रलय के कारणों पर प्रकाश डालते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में स्थित चारों धामों के साथ ही इस क्षेत्र का प्रत्येक स्थान सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक विरासत को अपने में संजोए हुए हैं। जिस कारण यह पुण्य तीर्थ अनंतकाल से हिन्दू सनातन संस्कृति के लिए अनंत ऊर्जा के स्रोत रहे हैं। उन्होंने तीर्थों को परंपराओं में मर्यादाओं में हुए क्षरण को जल प्रलय का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि श्री केदार नाथ तीर्थ के साथ ही अन्य तीनों धामों की अपनी अलग-अलग आलौकिक रीति-रिवाज एवं आध्यात्मिक परंपराएं हैं जिनके अनादकाल से परंपरागत रूप से निर्वहन ने हिन्दू सनातन संस्कृति को जहां वैभवशाली बनाया वहीं समाज को धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से परिपुष्ट करते हुए सुख समृद्धि विकास और आंतरिक चेतना को नई उंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि तीर्थों की प्राचीन परंपराओं का निर्वहन स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि पुण्य तीर्थों में जल प्रलय के कारण हुए असंख्य श्रद्धालुओं, हक हक्कूकधारियों एवं स्थानीय जनों की असामाजिक, देहवसान ने आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विद्वत समाज के साथ ही पूरे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया है। इसलिए यह नितांत चिंतन का विषय बन गया है और इस पुण्य तीर्थों को परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने अपरिहार्थ हो गए हैं। उन्होंने चारों धामों में अनादिकाल से चली आ रही हक हक्कूकधारियों के हितों की सुरक्षा को प्रभावी बनाए जाने की पहल पर जोर देते हुए कहा कि हकों की आड़ में परंपरागत मर्यादाओं का उल्लंघन न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। तीर्थ धामों में पाश्चात्य संस्कृति की तर्ज पर विकसित होटलों की जगह धर्मशालाओं को निर्माण को अधिक प्रभावी बनाए जाने की मांग करते हुए कहा कि तीर्थों में त्याग समर्पण और परंपराओं के अनुरूप आचरण ही फलदायक होता है। उन्होंने कहा कि तीर्थों में त्याग, सेवा, समर्पण, दान, जप एवं तप का ही महत्व है और इन्हीं के अवलम्बन से मनुष्य अपना जीवन समृद्ध कर सकता है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ में जल प्रलय में असमय काल का ग्रॉस बने श्रद्धालुओं की दाह-संस्कार वैदिक सनातन संस्कृति के अनुरूप ही किया जाना चाहिए तथा नारायणवलि, इशगात्र, पिण्डदान एवं तर्पण आदि वैदिक कर्मकांड विधिपूर्वक सम्पन्न किए जाने पर ही दिवंगत आत्माओं को मुक्ति एवं शांति मिलेगी। अन्यथा आत्माएं भटकेंगी तो तीर्थ में विक्षोभ पैदा होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिन्दू सनातन संस्कृति के अनुरूप केदार तीर्थ में प्रकृति मार में असमय शरीर छोड़ने वाले श्रद्धालुओं के वैदिक कर्मकांड संस्कार केदारनाथ में ही किए जाने चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि हिन्दू सनातन संस्कृति में शरीर छोड़ने वाले प्रत्येक मतावलंबी की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए वैदिक परंपराओं के अनुसार यज्ञ नहीं बल्कि अंतिम क्रियाकर्म एवं कर्मकांड संस्कार महत्वपूर्ण है। शंकराचार्य ने श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के साथ ही चारों धामों की मंदिर समितियों में राजनैतिक हस्तक्षेप व प्रभावी होती दलीय राजनीति का कड़ा विरोध करते हुए समिति में धार्मिक एवं आध्यात्मिक विद्वानों को जोड़ने की पहल को अधिक प्रभावी बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति पीठों पर प्रभावी होती राजनीति तीर्थों को मर्यादाओं पर भारी पड़ रही है। चारों धामों के विकास को व्यापक रूप दिए जाने की मांग करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार की तर्ज पर सेंचुरी क्षेत्रों में स्थिति चारों धामों का सीमांकन किया जाना आवश्यक है।
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हमारे संवाददाता नई दिल्ली। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि नैतिक मूल्यों मे आ रही गिरावट के कारण हिन्दू सनातन संस्कृति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि तीर्थों की परंपराओं व आध्यात्मिक विरासत को ताक पर रखकर तीर्थांटन को पाश्चात्य शैली के पर्यटन के रूप में बढ़ावा दिए जाने से सनातन संस्कृति के यह ऊर्जा के क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इनमें विक्षोभ पैदा हो रहा है और प्रकृति पराशक्ति दैवीय आपदा के रूप में कहर ढा रही है। उत्तराखंड देवभूमि के श्री केदारनाथ तीर्थ के साथ ही अन्य तीनों धामों में आए जल प्रलय के कारणों पर प्रकाश डालते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में स्थित चारों धामों के साथ ही इस क्षेत्र का प्रत्येक स्थान सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक विरासत को अपने में संजोए हुए हैं। जिस कारण यह पुण्य तीर्थ अनंतकाल से हिन्दू सनातन संस्कृति के लिए अनंत ऊर्जा के स्रोत रहे हैं। उन्होंने तीर्थों को परंपराओं में मर्यादाओं में हुए क्षरण को जल प्रलय का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि श्री केदार नाथ तीर्थ के साथ ही अन्य तीनों धामों की अपनी अलग-अलग आलौकिक रीति-रिवाज एवं आध्यात्मिक परंपराएं हैं जिनके अनादकाल से परंपरागत रूप से निर्वहन ने हिन्दू सनातन संस्कृति को जहां वैभवशाली बनाया वहीं समाज को धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से परिपुष्ट करते हुए सुख समृद्धि विकास और आंतरिक चेतना को नई उंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि तीर्थों की प्राचीन परंपराओं का निर्वहन स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि पुण्य तीर्थों में जल प्रलय के कारण हुए असंख्य श्रद्धालुओं, हक हक्कूकधारियों एवं स्थानीय जनों की असामाजिक, देहवसान ने आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विद्वत समाज के साथ ही पूरे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया है। इसलिए यह नितांत चिंतन का विषय बन गया है और इस पुण्य तीर्थों को परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने अपरिहार्थ हो गए हैं। उन्होंने चारों धामों में अनादिकाल से चली आ रही हक हक्कूकधारियों के हितों की सुरक्षा को प्रभावी बनाए जाने की पहल पर जोर देते हुए कहा कि हकों की आड़ में परंपरागत मर्यादाओं का उल्लंघन न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। तीर्थ धामों में पाश्चात्य संस्कृति की तर्ज पर विकसित होटलों की जगह धर्मशालाओं को निर्माण को अधिक प्रभावी बनाए जाने की मांग करते हुए कहा कि तीर्थों में त्याग समर्पण और परंपराओं के अनुरूप आचरण ही फलदायक होता है। उन्होंने कहा कि तीर्थों में त्याग, सेवा, समर्पण, दान, जप एवं तप का ही महत्व है और इन्हीं के अवलम्बन से मनुष्य अपना जीवन समृद्ध कर सकता है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ में जल प्रलय में असमय काल का ग्रॉस बने श्रद्धालुओं की दाह-संस्कार वैदिक सनातन संस्कृति के अनुरूप ही किया जाना चाहिए तथा नारायणवलि, इशगात्र, पिण्डदान एवं तर्पण आदि वैदिक कर्मकांड विधिपूर्वक सम्पन्न किए जाने पर ही दिवंगत आत्माओं को मुक्ति एवं शांति मिलेगी। अन्यथा आत्माएं भटकेंगी तो तीर्थ में विक्षोभ पैदा होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिन्दू सनातन संस्कृति के अनुरूप केदार तीर्थ में प्रकृति मार में असमय शरीर छोड़ने वाले श्रद्धालुओं के वैदिक कर्मकांड संस्कार केदारनाथ में ही किए जाने चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि हिन्दू सनातन संस्कृति में शरीर छोड़ने वाले प्रत्येक मतावलंबी की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए वैदिक परंपराओं के अनुसार यज्ञ नहीं बल्कि अंतिम क्रियाकर्म एवं कर्मकांड संस्कार महत्वपूर्ण है। शंकराचार्य ने श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के साथ ही चारों धामों की मंदिर समितियों में राजनैतिक हस्तक्षेप व प्रभावी होती दलीय राजनीति का कड़ा विरोध करते हुए समिति में धार्मिक एवं आध्यात्मिक विद्वानों को जोड़ने की पहल को अधिक प्रभावी बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति पीठों पर प्रभावी होती राजनीति तीर्थों को मर्यादाओं पर भारी पड़ रही है। चारों धामों के विकास को व्यापक रूप दिए जाने की मांग करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार की तर्ज पर सेंचुरी क्षेत्रों में स्थिति चारों धामों का सीमांकन किया जाना आवश्यक है।
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मेरी देह से अलग हो रहे होते हैं,
मेरी देह के टुकड़े।
कुछ टूट कर बिखरता है,
कर पाने के दुख में।
मेरे शरीर से मांस के लोथड़े,
मेरे रक्त का अंश,
और अपनों का अपनत्व भी।
पुरानी परंपरा में,
अछूत भी कहलाई।
तिमिर जो दूर तक है,
स्त्री होने का।
लाल रंग जो तुम्हें देता पौरुष,
तिलक लगा लाल,
कहलाते हो वीर।
मिट्टी होती कीचड़,
होती लाल- फिर सृजन प्रतीक।
तुमने दिया था मुझे श्वेत,
नौ माह कोख में रख कर,
किया समर्पित तुम्हें।
फिर तुम्हें मिला तुम्हारा 'लाल'।
पूरित, सम्मानित, गर्वित।
तुम्हारी खिलखिलाहट,
गुम हो जाती हो जब तुम,
नीलाभ बन कर,
शब्दों का सृजन करते हुए।
देह से टूट कर बिखरना,
सच में कष्टकारी होता है,
उन चार दिनों में।
तुम भी करती हो,
अपने मन में,
मनुष्यता का पाठ।
अंश अपनी देह का,
अपने मन की कोख में,
रचता हूं नया संसार मैं भी,
बटोर लेता हूं अपना पुरुषार्थ,
तुमसे ही, तुम्हारे लिए।
सृजन का प्रतीक,
सही कहा तुमने,
सृष्टि रचती लाल क्षिति,
नीलाभ की धवलता से,
फिर कैसे कहूं अछूत तुम्हें?
उन चार दिनों में,
स्वप्निल, निर्मल और कोमल।
दूर तक उस तिमिर में,
जहां संघर्ष कर रही होती हो तुम,
तिरस्कृत स्त्रियों के लिए।
सदियों पुरानी परंपरा से,
मन के किसी कोने में।
मैं अक्सर वहीं चला आता हूं,
नीलाभ की सिंदूरी सुबह,
तुमसे ही है,
सम्मान भी तुम से ही है,
लाल चादर,
पुलकित होकर।
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मेरी देह से अलग हो रहे होते हैं, मेरी देह के टुकड़े। कुछ टूट कर बिखरता है, कर पाने के दुख में। मेरे शरीर से मांस के लोथड़े, मेरे रक्त का अंश, और अपनों का अपनत्व भी। पुरानी परंपरा में, अछूत भी कहलाई। तिमिर जो दूर तक है, स्त्री होने का। लाल रंग जो तुम्हें देता पौरुष, तिलक लगा लाल, कहलाते हो वीर। मिट्टी होती कीचड़, होती लाल- फिर सृजन प्रतीक। तुमने दिया था मुझे श्वेत, नौ माह कोख में रख कर, किया समर्पित तुम्हें। फिर तुम्हें मिला तुम्हारा 'लाल'। पूरित, सम्मानित, गर्वित। तुम्हारी खिलखिलाहट, गुम हो जाती हो जब तुम, नीलाभ बन कर, शब्दों का सृजन करते हुए। देह से टूट कर बिखरना, सच में कष्टकारी होता है, उन चार दिनों में। तुम भी करती हो, अपने मन में, मनुष्यता का पाठ। अंश अपनी देह का, अपने मन की कोख में, रचता हूं नया संसार मैं भी, बटोर लेता हूं अपना पुरुषार्थ, तुमसे ही, तुम्हारे लिए। सृजन का प्रतीक, सही कहा तुमने, सृष्टि रचती लाल क्षिति, नीलाभ की धवलता से, फिर कैसे कहूं अछूत तुम्हें? उन चार दिनों में, स्वप्निल, निर्मल और कोमल। दूर तक उस तिमिर में, जहां संघर्ष कर रही होती हो तुम, तिरस्कृत स्त्रियों के लिए। सदियों पुरानी परंपरा से, मन के किसी कोने में। मैं अक्सर वहीं चला आता हूं, नीलाभ की सिंदूरी सुबह, तुमसे ही है, सम्मान भी तुम से ही है, लाल चादर, पुलकित होकर।
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नोटबंदी के खिलाफ आरबीआई के दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर और अन्य पार्टी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस नेता राज्य की राजधानी में आरबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। केरल में कांग्रेस नोटंबदी के फैसले के तरीके का विरोध कर रही है।
नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत पार्टी की केरल इकाई के हजारों कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राज्य भर में केंद्र सरकार के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के सामने अपनी गिरफ्तारी दी। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से आहूत राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों और नोटबंदी से प्रभावित आम आदमी की समस्याओं को हल करने में विफल रहने के खिलाफ बूथ स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक प्रदर्शन शामिल हैं।
वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, सांसदों और एआईसीसी प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के विभिन्न दफ्तरों के बाहर धरना दिया जिसमें प्रधान डाकघर भी शामिल हैं। चेन्नीथला की अगुवाई में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने राज्य की राजधानी में रिजर्व बैंक के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। सांसद शशि थरूर, विधायक वीएस शिवकुमार सहित वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शन में शिरकत की। इस तरह की खबरें हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस अवरोध तोड़ने और कार्यालय परिसरों में प्रवेश करने की कोशिश की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कोझीकोड में प्रधान डाकघर के सामने आंदोलन का नेतृत्व किया जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वीएम सुधीरन ने त्रिसूर में प्रदर्शन की अगुवाई की।
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नोटबंदी के खिलाफ आरबीआई के दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर और अन्य पार्टी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस नेता राज्य की राजधानी में आरबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। केरल में कांग्रेस नोटंबदी के फैसले के तरीके का विरोध कर रही है। नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत पार्टी की केरल इकाई के हजारों कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राज्य भर में केंद्र सरकार के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के सामने अपनी गिरफ्तारी दी। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से आहूत राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों और नोटबंदी से प्रभावित आम आदमी की समस्याओं को हल करने में विफल रहने के खिलाफ बूथ स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक प्रदर्शन शामिल हैं। वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, सांसदों और एआईसीसी प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के विभिन्न दफ्तरों के बाहर धरना दिया जिसमें प्रधान डाकघर भी शामिल हैं। चेन्नीथला की अगुवाई में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने राज्य की राजधानी में रिजर्व बैंक के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। सांसद शशि थरूर, विधायक वीएस शिवकुमार सहित वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शन में शिरकत की। इस तरह की खबरें हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस अवरोध तोड़ने और कार्यालय परिसरों में प्रवेश करने की कोशिश की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कोझीकोड में प्रधान डाकघर के सामने आंदोलन का नेतृत्व किया जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वीएम सुधीरन ने त्रिसूर में प्रदर्शन की अगुवाई की।
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2 . प्रदूषण से दूर रहें, आज के समय में ज्यादा तर खुजली की समस्या प्रदूषण के कारण होता हैं। प्रदूषण की वजह से शरीर पर कई तरह के बैक्टीरिया एकत्रित हो जाते हैं। जिसके कारण शरीर में खुजली की समस्या जन्म ले लेती हैं। इससे इंसान का सेहत भी ख़राब हो जाता हैं। इसलिए अगर आप खुजली की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं और अपने शरीर को सेहतमंद बनाना चाहते हैं तो आप प्रदूषण से दूर रहें।
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दो . प्रदूषण से दूर रहें, आज के समय में ज्यादा तर खुजली की समस्या प्रदूषण के कारण होता हैं। प्रदूषण की वजह से शरीर पर कई तरह के बैक्टीरिया एकत्रित हो जाते हैं। जिसके कारण शरीर में खुजली की समस्या जन्म ले लेती हैं। इससे इंसान का सेहत भी ख़राब हो जाता हैं। इसलिए अगर आप खुजली की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं और अपने शरीर को सेहतमंद बनाना चाहते हैं तो आप प्रदूषण से दूर रहें।
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दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बुर्किना फासो लगभग सात सालों से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. पिछले महीने भी यहां दो आतंकी हमले हुए थे. इसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी.
पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में जिहादी हमला हुआ है. इसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है. इनमें से ज्यातादर लोग आर्म फोर्स को सपोर्ट करने वाले थे. समाचार एजेंसी एएफपी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से कहा कि यह जिहादी हमला बुधवार को मध्य-उत्तर क्षेत्र के बोआला में हुआ, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई.
दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बुर्किना फासो लगभग सात सालों से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. पिछले महीने भी यहां दो आतंकी हमले हुए थे. इसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी.
तख्तापलट के बाद से बुर्किना फासो की स्थिति और खराब हो गई है. यहां लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं. यहां फिलहाल सेना का शासन है. यहां आम लोगों की जीना मुहाल हो गया है. लोग खौफ के साये में जी रहे हैं. कब और कहां हमला हो जाए, यह कहना मुश्किल है. डर के मारे लाखों लोग यहां से पलायन कर चुके हैं.
पिछले महीने बुर्किना फासो में दो बड़े आतंकी हमले हुए थे. इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालो में सेना के 8 जवान भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि हथियारों से लैस आतंकियों ने 21 नवंबर को तड़के एक गांव पर हमला बोल दिया था. इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई.
बता दें कि बुर्किना फासो 2015 से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. इस दौरान हजारों नागरिक और सुरक्षाबल मारे गए हैं. आर्थिक संकट के चलते बुर्किना फासो के लोग खाने-पीने को तरस रहे हैं.
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दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बुर्किना फासो लगभग सात सालों से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. पिछले महीने भी यहां दो आतंकी हमले हुए थे. इसमें कम से कम चौदह लोगों की मौत हो गई थी. पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में जिहादी हमला हुआ है. इसमें कम से कम बारह लोगों की मौत हो गई है. इनमें से ज्यातादर लोग आर्म फोर्स को सपोर्ट करने वाले थे. समाचार एजेंसी एएफपी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से कहा कि यह जिहादी हमला बुधवार को मध्य-उत्तर क्षेत्र के बोआला में हुआ, जिसमें कम से कम बारह लोगों की मौत हो गई. दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बुर्किना फासो लगभग सात सालों से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. पिछले महीने भी यहां दो आतंकी हमले हुए थे. इसमें कम से कम चौदह लोगों की मौत हो गई थी. तख्तापलट के बाद से बुर्किना फासो की स्थिति और खराब हो गई है. यहां लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं. यहां फिलहाल सेना का शासन है. यहां आम लोगों की जीना मुहाल हो गया है. लोग खौफ के साये में जी रहे हैं. कब और कहां हमला हो जाए, यह कहना मुश्किल है. डर के मारे लाखों लोग यहां से पलायन कर चुके हैं. पिछले महीने बुर्किना फासो में दो बड़े आतंकी हमले हुए थे. इन हमलों में कम से कम चौदह लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालो में सेना के आठ जवान भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि हथियारों से लैस आतंकियों ने इक्कीस नवंबर को तड़के एक गांव पर हमला बोल दिया था. इस हमले में चौदह लोगों की मौत हो गई. बता दें कि बुर्किना फासो दो हज़ार पंद्रह से जिहादी हमलों से जूझ रहा है. इस दौरान हजारों नागरिक और सुरक्षाबल मारे गए हैं. आर्थिक संकट के चलते बुर्किना फासो के लोग खाने-पीने को तरस रहे हैं.
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कौन व्यक्ति हाल ही में, HCL कम्पनी के नए प्रबंध निदेशक बने है?
हाल ही में, HCL कंपनी के शिव नादर की जगह मौजूदा अध्यक्ष और CEO सी विजयकुमार को कंपनी का नया प्रबंध निदेशक (MD) बनाया है। पाठकों को बता दे की विजयकुमार 20 जुलाई 2021 से पांच साल की अवधि के लिए कंपनी के CEO & MD के पद पर रहेंगे।
Haal Hee Me , HCL Company Ke Shiv Naadar Ki Jagah maujooda Adhyaksh Aur CEO Si विजयकुमार Ko Company का Naya Prabandh Nideshak (MD) Banaya Hai . Pathakon Ko Bata De Ki विजयकुमार 20 July 2021 Se Panch Sal Ki Awadhi Ke Liye Company Ke CEO & MD Ke Pad Par Rahenge .
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कौन व्यक्ति हाल ही में, HCL कम्पनी के नए प्रबंध निदेशक बने है? हाल ही में, HCL कंपनी के शिव नादर की जगह मौजूदा अध्यक्ष और CEO सी विजयकुमार को कंपनी का नया प्रबंध निदेशक बनाया है। पाठकों को बता दे की विजयकुमार बीस जुलाई दो हज़ार इक्कीस से पांच साल की अवधि के लिए कंपनी के CEO & MD के पद पर रहेंगे। Haal Hee Me , HCL Company Ke Shiv Naadar Ki Jagah maujooda Adhyaksh Aur CEO Si विजयकुमार Ko Company का Naya Prabandh Nideshak Banaya Hai . Pathakon Ko Bata De Ki विजयकुमार बीस जुलाईy दो हज़ार इक्कीस Se Panch Sal Ki Awadhi Ke Liye Company Ke CEO & MD Ke Pad Par Rahenge .
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सुदर्शन अपने बारे में बता रहा था औऱ मैं अपने रूम की खिड़की से पश्चिम दिशा की औऱ सरकते सूरज को देख रहीं थीं।
सुदर्शन के साथ हुई बातचीत से मुझें समझ आ गया था कि यह मेरे सपनों का राजकुमार नहीं हैं ।
सुदर्शन ने मेरे हाथ में सोने के कंगन को देखकर मुहँ को सिकोड़ते हुए कहा - " यू लाइक गोल्ड " ?
मैंने कहा - " हाँ " पर ये कंगन मम्मी के हैं।
हाऊ ओल्ड फ़ैशन ? इस बार तो सुदर्शन ने ऐसा मुहँ बनाया जैसे सोने के कंगन नहीं कोई बहुत ही बुरी सी चीज़ हों । वह बोला - मुझें तो प्लेटिनम पसन्द हैं। तुम्हें भी प्लेटिनम पहनना चाहिए। औऱ इस शूट की बजाय तुम बॉडी हगिंग ड्रेस पहनती तो औऱ भी खूबसूरत लगतीं । स्लिम फिगर हो इसलिए तुम हाई नेक औऱ पफ़ी शोल्डर वाला फ्लोर लेंथ गाउन पहन सकती थीं । अच्छा लगता तुम पर ।
सुदर्शन ख़ुद को ट्रेंडी बताने के लिए मुझें अपनी पहनी हर चीज़ के बारे में बताने लगा। ये जो घड़ी हैं न मोवाडो अल्ट्रा स्लिम ये 70 हज़ार की हैं । औऱ ये शूज़ शायद मालदीव से लिए थे प्योर लैदर 50 हजार के हैं । परफ्यूम तो मुझें फॉरेन के ही पसन्द हैं ।
सुदर्शन की बातें सुनकर मुझें लग रहा था जैसे मैं किसी शॉपिंग मॉल में हुँ औऱ सेल्समेन मुझें सामान दिखा रहा हैं उनकी कीमतों के साथ ।
मैं सुदर्शन की बातें अनमने मन से सुनती रहीं । औऱ कोई चारा भी तो नहीं था मेरे पास। आज अस्ताचल की औऱ बढ़ते सूरज की गति भी मुझें बहुत धीमी लग रहीं थीं। लगता हैं सूरज भी मेरी सगाई पक्की करके ही चेन की सांस लेगा। अभी तो 4 ही बजे हैं। सूरज तो अपने समय पर ही ढलेगा न ? मेरे मन ने मुझसे बड़ी मासूमियत से कहा ।
कमरे में मम्मी ने प्रवेश किया। ट्रे में चाय लेकर प्रफुल्लित मन से मम्मी अपने कदम ऐसे बड़ा रहीं थीं मानो सुदर्शन नहीं साक्षात विष्णुजी ही आज हमारे घर आ गए हो।
मम्मी के आने से मैंने राहत की सांस ली। मम्मी सुदर्शन से बात करने लगीं औऱ मैं चाय की चुस्कियों में खो गई। चाय खत्म करके हम लोग हॉल में आ गए।
15 - 20 मिनट बात करने के बाद उन लोगों ने हमसे विदा लीं। उनकी तरफ से रिश्ता पक्का था।
मम्मी - पापा उन्हें गेट तक छोड़ने गए। मैं सोफ़े पर बैठी रहीं।
अब सिर्फ मेरे हाँ कहने भर की देरी थीं औऱ चट मंगनी पट ब्याह हो जाता। मैंने मम्मी- पापा से स्पष्ट शब्दों में कह दिया - " यह मेरे जीवन से जुड़ा फैसला हैं। मैं जल्दबाज़ी में कुछ भी नहीं कहूँगी। मुझें थोड़ा वक़्त चाहिए "
यह कहकर मैं अपने रूम में आ गई । मन माफ़िक़ कोई काम या चर्चा न हो तो उसमें शामिल होंने पर हम बिना किसी श्रम के भी बहुत थक जाते है । आज की दिनचर्या ने मुझें भी थका दिया था। मैं ड्रेस चेंज करने के बाद सो गई।
शाम के 6 बजे मेरी नींद मंदिर की घण्टी बजने से खुली। मैं हाथ-मुहँ धोकर नीचे हॉल में गई । मम्मी दियाबत्ती कर रहे थे औऱ पापा टीवी देख रहे थे जिसमें राम कथा का प्रसारण चल रहा था। कितना सुखद पल था ये। बैंगलोर में तो इस समय मैं ऑफिस में रहतीं औऱ वहाँ कहाँ सुनाई देतीं हैं मंदिर की घण्टियाँ ? वहाँ तो बस फ़ोन की रिंगटोन , ऑफिस की टेबल पर रखी बेल की ट्रिन- ट्रिन , गाडियों के बजते हॉर्न ही इन कानो को नसीब हुआ करते हैं।
मैं भी सोफ़े पर बैठकर राम कथा सुनने लगीं । थोड़ी देर बाद ही मम्मी चाय लेकर आई ? मुझें चाय का कप थमाते समय मैंने मम्मी की आँखों मे कई प्रश्नों का सैलाब देखा। मानो मुझसे उनकी आँखे पूछ रहीं हों - क्या हुआ , कुछ सोचा ?
मेरा अनुमान बिल्कुल ठीक निकला। मम्मी ने सोफ़े पर बैठते हुए मुझसें वहीं प्रश्न किया जिसकी मुझें उम्मीद थीं। मैं कुछ कहती उसके पहले ही राम कथा में कथावाचक ने भजन गाना शुरू कर दिया जो बिल्कुल मेरी स्थिति से मेल खा रहा था।
" सोने की लंका न मिले माँ ....अवधपुरी की धूल मिले "
भजन ने मेरे मनोबल को इस क़दर बढ़ा दिया कि मैंने हिम्मत करके सच कह दिया ।
" मुझें सुदर्शन पसन्द नहीं हैं मम्मी " - कहकर मैंने अपनी गर्दन नीचे कर ली औऱ चुपचाप चाय पीने लगीं ।
ज़ाहिर सी बात हैं मम्मी - पापा मेरे इस जवाब से उदास हुए होंगे । शायद दोनों ने उदास नज़रों से एक- दूसरे की औऱ देखा भी होगा। मैं गर्दन नीचे किए हुए ही चाय के घुट पीती रहीं । अब लग रहा था कि जीवनभर दुःख के घुट पीने से मैं बच गई ।
" आप मेरे मन मुताबिक लड़के से शादी करके मुझें खुश देखना चाहते हैं ? या अपने मन मुताबिक लड़के से शादी करवा कर अपनी ख़ुशी चाहते हैं ? "
मम्मी ने प्यारभरी निगाहों से मेरी औऱ देखा औऱ मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा - बेटा तेरी खुशी मायने रखतीं हैं ।
" क्या मैं अभी ख़ुश नहीं हूँ " ? मैंने मम्मी से अगला प्रश्न किया ।
मैंने मम्मी को यक़ीन दिलाते हुए कहा - मुझें भी आजीवन अकेले नहीं रहना हैं। मैं भी चाहती हूँ मेरी शादी हो ,मेरा परिवार हो , मैं भी पर्दे औऱ कुशन खरीदूं । पर मुझें सिर्फ़ किसी रस्म औऱ रिवाज़ की तरह शादी नहीं करना हैं । चंद मिनटों में किसी अजनबी से हुई बात के आधार पर अपनी पूरी जिंदगी का फैसला नहीं कर सकती।
मैंने हमेशा आप दोनों की हर बात मानी। क़भी ऐसा कुछ नहीं किया जिसकी वजह से आपकी नजरें नीची हों । फिर आप सिर्फ लोग क्या कहेंगे ? यह सोचकर मुझें किसी के भी साथ बांध देना चाहते हो तो मैं कभी ख़ुश नहीं रहूँगी। सुदर्शन अच्छा लड़का हैं पर मेरे लिए नहीं बना हैं।
मम्मी - पापा दोनों पहली बार मुझसे सहमत दिखाई दिए। दोनों की आंखों में एक चमक थीं । शायद उन्हें गर्व था कि उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं जिसके लिए उसके जैसा ही कोई राजकुमार आएगा।
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सुदर्शन अपने बारे में बता रहा था औऱ मैं अपने रूम की खिड़की से पश्चिम दिशा की औऱ सरकते सूरज को देख रहीं थीं। सुदर्शन के साथ हुई बातचीत से मुझें समझ आ गया था कि यह मेरे सपनों का राजकुमार नहीं हैं । सुदर्शन ने मेरे हाथ में सोने के कंगन को देखकर मुहँ को सिकोड़ते हुए कहा - " यू लाइक गोल्ड " ? मैंने कहा - " हाँ " पर ये कंगन मम्मी के हैं। हाऊ ओल्ड फ़ैशन ? इस बार तो सुदर्शन ने ऐसा मुहँ बनाया जैसे सोने के कंगन नहीं कोई बहुत ही बुरी सी चीज़ हों । वह बोला - मुझें तो प्लेटिनम पसन्द हैं। तुम्हें भी प्लेटिनम पहनना चाहिए। औऱ इस शूट की बजाय तुम बॉडी हगिंग ड्रेस पहनती तो औऱ भी खूबसूरत लगतीं । स्लिम फिगर हो इसलिए तुम हाई नेक औऱ पफ़ी शोल्डर वाला फ्लोर लेंथ गाउन पहन सकती थीं । अच्छा लगता तुम पर । सुदर्शन ख़ुद को ट्रेंडी बताने के लिए मुझें अपनी पहनी हर चीज़ के बारे में बताने लगा। ये जो घड़ी हैं न मोवाडो अल्ट्रा स्लिम ये सत्तर हज़ार की हैं । औऱ ये शूज़ शायद मालदीव से लिए थे प्योर लैदर पचास हजार के हैं । परफ्यूम तो मुझें फॉरेन के ही पसन्द हैं । सुदर्शन की बातें सुनकर मुझें लग रहा था जैसे मैं किसी शॉपिंग मॉल में हुँ औऱ सेल्समेन मुझें सामान दिखा रहा हैं उनकी कीमतों के साथ । मैं सुदर्शन की बातें अनमने मन से सुनती रहीं । औऱ कोई चारा भी तो नहीं था मेरे पास। आज अस्ताचल की औऱ बढ़ते सूरज की गति भी मुझें बहुत धीमी लग रहीं थीं। लगता हैं सूरज भी मेरी सगाई पक्की करके ही चेन की सांस लेगा। अभी तो चार ही बजे हैं। सूरज तो अपने समय पर ही ढलेगा न ? मेरे मन ने मुझसे बड़ी मासूमियत से कहा । कमरे में मम्मी ने प्रवेश किया। ट्रे में चाय लेकर प्रफुल्लित मन से मम्मी अपने कदम ऐसे बड़ा रहीं थीं मानो सुदर्शन नहीं साक्षात विष्णुजी ही आज हमारे घर आ गए हो। मम्मी के आने से मैंने राहत की सांस ली। मम्मी सुदर्शन से बात करने लगीं औऱ मैं चाय की चुस्कियों में खो गई। चाय खत्म करके हम लोग हॉल में आ गए। पंद्रह - बीस मिनट बात करने के बाद उन लोगों ने हमसे विदा लीं। उनकी तरफ से रिश्ता पक्का था। मम्मी - पापा उन्हें गेट तक छोड़ने गए। मैं सोफ़े पर बैठी रहीं। अब सिर्फ मेरे हाँ कहने भर की देरी थीं औऱ चट मंगनी पट ब्याह हो जाता। मैंने मम्मी- पापा से स्पष्ट शब्दों में कह दिया - " यह मेरे जीवन से जुड़ा फैसला हैं। मैं जल्दबाज़ी में कुछ भी नहीं कहूँगी। मुझें थोड़ा वक़्त चाहिए " यह कहकर मैं अपने रूम में आ गई । मन माफ़िक़ कोई काम या चर्चा न हो तो उसमें शामिल होंने पर हम बिना किसी श्रम के भी बहुत थक जाते है । आज की दिनचर्या ने मुझें भी थका दिया था। मैं ड्रेस चेंज करने के बाद सो गई। शाम के छः बजे मेरी नींद मंदिर की घण्टी बजने से खुली। मैं हाथ-मुहँ धोकर नीचे हॉल में गई । मम्मी दियाबत्ती कर रहे थे औऱ पापा टीवी देख रहे थे जिसमें राम कथा का प्रसारण चल रहा था। कितना सुखद पल था ये। बैंगलोर में तो इस समय मैं ऑफिस में रहतीं औऱ वहाँ कहाँ सुनाई देतीं हैं मंदिर की घण्टियाँ ? वहाँ तो बस फ़ोन की रिंगटोन , ऑफिस की टेबल पर रखी बेल की ट्रिन- ट्रिन , गाडियों के बजते हॉर्न ही इन कानो को नसीब हुआ करते हैं। मैं भी सोफ़े पर बैठकर राम कथा सुनने लगीं । थोड़ी देर बाद ही मम्मी चाय लेकर आई ? मुझें चाय का कप थमाते समय मैंने मम्मी की आँखों मे कई प्रश्नों का सैलाब देखा। मानो मुझसे उनकी आँखे पूछ रहीं हों - क्या हुआ , कुछ सोचा ? मेरा अनुमान बिल्कुल ठीक निकला। मम्मी ने सोफ़े पर बैठते हुए मुझसें वहीं प्रश्न किया जिसकी मुझें उम्मीद थीं। मैं कुछ कहती उसके पहले ही राम कथा में कथावाचक ने भजन गाना शुरू कर दिया जो बिल्कुल मेरी स्थिति से मेल खा रहा था। " सोने की लंका न मिले माँ ....अवधपुरी की धूल मिले " भजन ने मेरे मनोबल को इस क़दर बढ़ा दिया कि मैंने हिम्मत करके सच कह दिया । " मुझें सुदर्शन पसन्द नहीं हैं मम्मी " - कहकर मैंने अपनी गर्दन नीचे कर ली औऱ चुपचाप चाय पीने लगीं । ज़ाहिर सी बात हैं मम्मी - पापा मेरे इस जवाब से उदास हुए होंगे । शायद दोनों ने उदास नज़रों से एक- दूसरे की औऱ देखा भी होगा। मैं गर्दन नीचे किए हुए ही चाय के घुट पीती रहीं । अब लग रहा था कि जीवनभर दुःख के घुट पीने से मैं बच गई । " आप मेरे मन मुताबिक लड़के से शादी करके मुझें खुश देखना चाहते हैं ? या अपने मन मुताबिक लड़के से शादी करवा कर अपनी ख़ुशी चाहते हैं ? " मम्मी ने प्यारभरी निगाहों से मेरी औऱ देखा औऱ मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा - बेटा तेरी खुशी मायने रखतीं हैं । " क्या मैं अभी ख़ुश नहीं हूँ " ? मैंने मम्मी से अगला प्रश्न किया । मैंने मम्मी को यक़ीन दिलाते हुए कहा - मुझें भी आजीवन अकेले नहीं रहना हैं। मैं भी चाहती हूँ मेरी शादी हो ,मेरा परिवार हो , मैं भी पर्दे औऱ कुशन खरीदूं । पर मुझें सिर्फ़ किसी रस्म औऱ रिवाज़ की तरह शादी नहीं करना हैं । चंद मिनटों में किसी अजनबी से हुई बात के आधार पर अपनी पूरी जिंदगी का फैसला नहीं कर सकती। मैंने हमेशा आप दोनों की हर बात मानी। क़भी ऐसा कुछ नहीं किया जिसकी वजह से आपकी नजरें नीची हों । फिर आप सिर्फ लोग क्या कहेंगे ? यह सोचकर मुझें किसी के भी साथ बांध देना चाहते हो तो मैं कभी ख़ुश नहीं रहूँगी। सुदर्शन अच्छा लड़का हैं पर मेरे लिए नहीं बना हैं। मम्मी - पापा दोनों पहली बार मुझसे सहमत दिखाई दिए। दोनों की आंखों में एक चमक थीं । शायद उन्हें गर्व था कि उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं जिसके लिए उसके जैसा ही कोई राजकुमार आएगा।
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स्पष्टतः दिखलाई पड़ती है। अनेक दोहों में संतों और भक्तों की उदार विचारावली का प्रभाव है। परंतु बिहारी का काव्यमुख्यतः उस समन्वय का दर्पण है जो हिन्दू-मुसलमान राजदरबारों में चल रहा था। ईरानी भाषा, ईरानी भाव. ईरानी उपमाएँ उत्प्रेक्षाएँ, श्रम और विलास के नये ईरानी ढंग बिहारी के काव्य में प्रतिफलित हैं। नायक पतंग उड़ाता है तो नायिका शीतलता पाने के लिए उसकी छाया के साथ लगी फिरती है । प्रेमिका की प्रिय-वियोगजन्य कृशता इतनी बढ़ गई है कि मृत्यु भी उसे ढूँढ़ नहीं पाती - आँखों पर चश्मा लगा कर भी । इस प्रकार की कितनी ही सूक्तियाँ ईरानी कविता का प्रभाव सूचित करती हैं। हिन्दू समाज के ऊपर के वर्ग में ईरान भाव किस तेजी से फैल रहे थे, बिहारी का काव्य इसका प्रमाण है ।
बिहारी के युग ( १६००-१६७५ ) की संस्कृति का अध्ययन करने के लिए उस युग की चित्रकला, वास्तुकला, संगीत और साहित्य को समझना भी आवश्यक है। अकबर के समय से ईरानी और भारतीय कला प्रतीकों का जो समन्वय आरंभ हुआ था, वह शाहजहाँ के समय में सर्वोच्च शिखर पर जा पहुँचा । आगरे का ताजमहज जिस कला का प्रतीक है, उसी कला का साहित्यिक स्वरूप हमें बिहारी सतसई में मिलता है। थोड़े में बहुत कहना ( समास-पद्धति), छोटे-छोटे चित्रों को सावधानपूर्ण नकाशो (miniature paniting) अलंकृत सज्जा, कला का कौशल रूप- ये बातें ताजमहल और 'सतसई' में सामान्य रूप में पाई जाती है। हमारे सारे साहित्य में कला का इतना माहू-मुबरा, इतना संवारा रूप कहीं नहीं मिलेगा । इसके विपरीत हमारे साहित्य में सूरदास और तुलसीदास की विशद चित्रपटी मिलती है जो हमें हरिदास और तानसेन की
मिलाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि देश में धनधान्य की कमी नहीं थी। परंतु इस महान् संपत्ति को भोगने वाले लोग इने-गिने थे, इसमें भी सन्देह नहीं । दिल्ली-सम्राट, प्रादेशिक गवर्नर और देशी राज्य इस संपत्ति के सबसे अधिक भाग को अपनी मौज और आराम के लिए खर्च करते थे। उनके विलास की कोई सीमा नहीं थी । इटालियन यात्री निकोलो मुनकि ने १६५६ ई० -- १७०१ ई० तक भारतवर्ष का विस्तृत अध्ययन किया। 'स्टोरिया' नाम की अपनी यात्रा- पुस्तक में उसने मुग़लराजमहलों के जीवन का विशद वर्णन किया है। वह लिखता है ~~ "राजमहल का खर्चा एक करोड़ से कम न होता था । यद्यपि इस खर्च में सराया और उन खिलतों का व्यय भी शामिल था जिन्हें बादशाह अपने सेनापतियों और उच्चाधिकारियों को दिया करता था। इतना खर्च होने का एक प्रमुख कारण इत्र और सुगंधित तैलों का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया जाना भी था । पान के ऊपर भी बहुत व्यय होता था। इसके अलावा जवाहरात और आभूषणों पर भी बहुत व्यय किया जाता था । गहने आदि इतने बनते थे कि सुनारों का काम रातदिन चालू ही रहता था। सबसे बहुमूल्य और वेशकीमती आभूषण बेग़मों और शाहजादियों के हुआ करते थे।" "उनके गहनों में सभी प्रकार के बहुमूल्य पत्थर वा मोती आदि देखने को मिल सकते थे । उनके आभूषणों के मोती और लाल फलों के आकार तक के होते थे। वेगमें और शाहजादियाँ लालों को छेदकर और मुक्ता की तरह कड़ियों में पिरोकर पहना करती थीं। दोनों वाहों पर लालों की मालाएँ पहनी जाती थीं। लालों के साथ मुक्त की तीन लड़ियाँ भी पिरो ली जाती थीं।" "वेगमों और शाहजादियों को पोशाक बहुत ही बेशकीमती तथा सुन्दर और गुलाब के फूलों के इन से सुरभित हुआ करती थी ।"
उन अनेक हिन्दु राजदरवारों में हुई जो कवियों का एकमात्र हो गये थे । वास्तव में मुगलकाल में राज्याश्रयों की सांस्कृतिक परिस्थिति वही थी जो सिद्ध-सामंत युग के राजाश्रयों की थी । अतः एक सी परिस्थिति के कारण लेखकों और कवियों का ध्यान इस युग की संस्कृत और अपभ्रंश की मुक्तक कविता को ओर जाना अनिवार्य था । एक प्रकार से १६०० ई० से १५०० ई० तक के रीतिकाल में सिद्ध सामंत युग के राज्याश्रयों की संस्कृत कविताओं की पुनरुक्ति ही हुई, केवल भाषा ही बदली थी, और सूरदास, विद्यापति और जयदेव के काव्य के कुछ प्रभाव भी ग्रहण कर लिये गये थे । जब हम रीतिकाव्य, विशेषतः विहारी, की कविता की बात सोचते हैं तो हमें यह समझ लेना चाहिये कि यह कविता जनता की कविता नहीं थी । सामंतों, वनी-मानी वर्गों अमीर गृहस्थों की कविता थी और इसे हम जनता का प्रतिनिधि काव्य नहीं कह सकते । इसमें जिस संस्कृति का हमें चित्र मिलता है उसे हम सामंती (Feudal) संस्कृति कह सकते हैं । इसमें साधारण नायकनायिका को राधा-कृष्ण के रूप में उपस्थित किया गया है तो यह पिछले दिनों के धार्मिक आन्दोलनों का प्रभाव है। विद्यापति और जयदेव ने जैसे रोति (शृंगार ) लिखने के लिए कृष्णकथा का आश्रय लिया था, वही बात इस बार भी थी ।
३ - आर्थिक और सामाजिक अवस्था
इस समय भारत समृद्ध था । मुग़ल-राज्य के ऐश्वर्य की कहानियाँ यूरप में गूंज रही थीं । जहाँगीर ने सोने का घंटा लगवा कर जिस न्यायप्रियता की घोषणा की थी उसे सुनकर हम सहसा कह उठेंगे - "वह वस्तुतः राम राज्य था।" आज की आर्थिक संपदा के आँकड़ों को उस युग की संपदा के आँकड़ों से
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स्पष्टतः दिखलाई पड़ती है। अनेक दोहों में संतों और भक्तों की उदार विचारावली का प्रभाव है। परंतु बिहारी का काव्यमुख्यतः उस समन्वय का दर्पण है जो हिन्दू-मुसलमान राजदरबारों में चल रहा था। ईरानी भाषा, ईरानी भाव. ईरानी उपमाएँ उत्प्रेक्षाएँ, श्रम और विलास के नये ईरानी ढंग बिहारी के काव्य में प्रतिफलित हैं। नायक पतंग उड़ाता है तो नायिका शीतलता पाने के लिए उसकी छाया के साथ लगी फिरती है । प्रेमिका की प्रिय-वियोगजन्य कृशता इतनी बढ़ गई है कि मृत्यु भी उसे ढूँढ़ नहीं पाती - आँखों पर चश्मा लगा कर भी । इस प्रकार की कितनी ही सूक्तियाँ ईरानी कविता का प्रभाव सूचित करती हैं। हिन्दू समाज के ऊपर के वर्ग में ईरान भाव किस तेजी से फैल रहे थे, बिहारी का काव्य इसका प्रमाण है । बिहारी के युग की संस्कृति का अध्ययन करने के लिए उस युग की चित्रकला, वास्तुकला, संगीत और साहित्य को समझना भी आवश्यक है। अकबर के समय से ईरानी और भारतीय कला प्रतीकों का जो समन्वय आरंभ हुआ था, वह शाहजहाँ के समय में सर्वोच्च शिखर पर जा पहुँचा । आगरे का ताजमहज जिस कला का प्रतीक है, उसी कला का साहित्यिक स्वरूप हमें बिहारी सतसई में मिलता है। थोड़े में बहुत कहना , छोटे-छोटे चित्रों को सावधानपूर्ण नकाशो अलंकृत सज्जा, कला का कौशल रूप- ये बातें ताजमहल और 'सतसई' में सामान्य रूप में पाई जाती है। हमारे सारे साहित्य में कला का इतना माहू-मुबरा, इतना संवारा रूप कहीं नहीं मिलेगा । इसके विपरीत हमारे साहित्य में सूरदास और तुलसीदास की विशद चित्रपटी मिलती है जो हमें हरिदास और तानसेन की मिलाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि देश में धनधान्य की कमी नहीं थी। परंतु इस महान् संपत्ति को भोगने वाले लोग इने-गिने थे, इसमें भी सन्देह नहीं । दिल्ली-सम्राट, प्रादेशिक गवर्नर और देशी राज्य इस संपत्ति के सबसे अधिक भाग को अपनी मौज और आराम के लिए खर्च करते थे। उनके विलास की कोई सीमा नहीं थी । इटालियन यात्री निकोलो मुनकि ने एक हज़ार छः सौ छप्पन ईशून्य -- एक हज़ार सात सौ एक ईशून्य तक भारतवर्ष का विस्तृत अध्ययन किया। 'स्टोरिया' नाम की अपनी यात्रा- पुस्तक में उसने मुग़लराजमहलों के जीवन का विशद वर्णन किया है। वह लिखता है ~~ "राजमहल का खर्चा एक करोड़ से कम न होता था । यद्यपि इस खर्च में सराया और उन खिलतों का व्यय भी शामिल था जिन्हें बादशाह अपने सेनापतियों और उच्चाधिकारियों को दिया करता था। इतना खर्च होने का एक प्रमुख कारण इत्र और सुगंधित तैलों का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया जाना भी था । पान के ऊपर भी बहुत व्यय होता था। इसके अलावा जवाहरात और आभूषणों पर भी बहुत व्यय किया जाता था । गहने आदि इतने बनते थे कि सुनारों का काम रातदिन चालू ही रहता था। सबसे बहुमूल्य और वेशकीमती आभूषण बेग़मों और शाहजादियों के हुआ करते थे।" "उनके गहनों में सभी प्रकार के बहुमूल्य पत्थर वा मोती आदि देखने को मिल सकते थे । उनके आभूषणों के मोती और लाल फलों के आकार तक के होते थे। वेगमें और शाहजादियाँ लालों को छेदकर और मुक्ता की तरह कड़ियों में पिरोकर पहना करती थीं। दोनों वाहों पर लालों की मालाएँ पहनी जाती थीं। लालों के साथ मुक्त की तीन लड़ियाँ भी पिरो ली जाती थीं।" "वेगमों और शाहजादियों को पोशाक बहुत ही बेशकीमती तथा सुन्दर और गुलाब के फूलों के इन से सुरभित हुआ करती थी ।" उन अनेक हिन्दु राजदरवारों में हुई जो कवियों का एकमात्र हो गये थे । वास्तव में मुगलकाल में राज्याश्रयों की सांस्कृतिक परिस्थिति वही थी जो सिद्ध-सामंत युग के राजाश्रयों की थी । अतः एक सी परिस्थिति के कारण लेखकों और कवियों का ध्यान इस युग की संस्कृत और अपभ्रंश की मुक्तक कविता को ओर जाना अनिवार्य था । एक प्रकार से एक हज़ार छः सौ ईशून्य से एक हज़ार पाँच सौ ईशून्य तक के रीतिकाल में सिद्ध सामंत युग के राज्याश्रयों की संस्कृत कविताओं की पुनरुक्ति ही हुई, केवल भाषा ही बदली थी, और सूरदास, विद्यापति और जयदेव के काव्य के कुछ प्रभाव भी ग्रहण कर लिये गये थे । जब हम रीतिकाव्य, विशेषतः विहारी, की कविता की बात सोचते हैं तो हमें यह समझ लेना चाहिये कि यह कविता जनता की कविता नहीं थी । सामंतों, वनी-मानी वर्गों अमीर गृहस्थों की कविता थी और इसे हम जनता का प्रतिनिधि काव्य नहीं कह सकते । इसमें जिस संस्कृति का हमें चित्र मिलता है उसे हम सामंती संस्कृति कह सकते हैं । इसमें साधारण नायकनायिका को राधा-कृष्ण के रूप में उपस्थित किया गया है तो यह पिछले दिनों के धार्मिक आन्दोलनों का प्रभाव है। विद्यापति और जयदेव ने जैसे रोति लिखने के लिए कृष्णकथा का आश्रय लिया था, वही बात इस बार भी थी । तीन - आर्थिक और सामाजिक अवस्था इस समय भारत समृद्ध था । मुग़ल-राज्य के ऐश्वर्य की कहानियाँ यूरप में गूंज रही थीं । जहाँगीर ने सोने का घंटा लगवा कर जिस न्यायप्रियता की घोषणा की थी उसे सुनकर हम सहसा कह उठेंगे - "वह वस्तुतः राम राज्य था।" आज की आर्थिक संपदा के आँकड़ों को उस युग की संपदा के आँकड़ों से
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पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) इन दिनों बकरीद की जमकर तैयारियां कर रहे हैं. 12 अगस्त को बकरीद है और कुर्बानी देने के लिए उन्होंने एक बैल भी खरीद लिया है. सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) ने बकरीद से पहले एक फोटो भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है जिसपर फैंस उन्हें काफी ज्यादा ट्रोल कर रहे हैं. सरफराज ने फोटो पर कैप्शन लिखा है, 'तैयारियां मुकम्मल हैं, स्टेज सेट है, कुर्बान होने के लिए हमारे बछड़े भी तैयार और बेताब हैं. अल्लाह ताला सबकी कुर्बानी और तैयारियां कुबूल फर्माए. '
सरफराज का ये पोस्ट भारतीय फैंस को बिलकुल पसंद नहीं आया रहा है, वो पाकिस्तान के कप्तान को जानवरों पर जुल्म ना करने की बात कह रहे हैं.
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'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद इन दिनों बकरीद की जमकर तैयारियां कर रहे हैं. बारह अगस्त को बकरीद है और कुर्बानी देने के लिए उन्होंने एक बैल भी खरीद लिया है. सरफराज अहमद ने बकरीद से पहले एक फोटो भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है जिसपर फैंस उन्हें काफी ज्यादा ट्रोल कर रहे हैं. सरफराज ने फोटो पर कैप्शन लिखा है, 'तैयारियां मुकम्मल हैं, स्टेज सेट है, कुर्बान होने के लिए हमारे बछड़े भी तैयार और बेताब हैं. अल्लाह ताला सबकी कुर्बानी और तैयारियां कुबूल फर्माए. ' सरफराज का ये पोस्ट भारतीय फैंस को बिलकुल पसंद नहीं आया रहा है, वो पाकिस्तान के कप्तान को जानवरों पर जुल्म ना करने की बात कह रहे हैं. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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माना चाहिए । दाल का व्यवहार दस-बारहवें दिन से शुरू करना चाहिए । दाल गाड़ी और छिलक के साथ यानी पूरे दाने की हो और बहुत थोड़ी हो। पहले भूग, तब मसूर और साव झाठ दिनों के बाद उड़द मा भरहर, इस क्रम से दाल खानी चाहिए ।
इसी तरह फलाहार के बाद राटी मानी शुरू करने में मरुद मामी न करनी चाहिए ।
( ६ ) सनपुरुस्ती की हालत में, ( विकिस्सा के समय में नहीं ) प्रत्येक दिन के भोजन में स्वारमय पदाय की मात्रा सीन-चौथाई से भी अधिक हो । सटाई पैदा करने वाल पदाथ एक बीधाई से भी कम हो । नमूने के लिए एक साधारण सनदुरुस्त आदमी को, जो कचहरी में काम करता है या स्कूल-कॉलेज में पढ़ने जाता है, इस प्रकार खाना चाहिए -
सुबह-नाश्ता, मरसक कुछ नहीं, खासकर अगर १० बजे स्कूल या दप्तर जाना हो। सारी रात पेट लाए हुए भोजन के पचाने में लगा रहता है, इसलिए सबेरे पेट का भाराम देना चाहिए । हो, एक बात की जा सकती है। रात को एक-डे-टांक साफ और पुती किशमिश पाव-डेढ़ पाय पानी में दी मायें और उसी समय उसमें भाषे नींबू का रस निचोड़ दिया जाय। शीश के बर्तन में ऐसा करना ठोक होगा। सुबह इस पानी का एक चमचे से अच्छी तरह बलाकर और पानी को बर्तन में निकाल कर उसे पो सकते हैं। किशमिश ६ बजे साठे समय खा सकते हैं। यह रस महा लाभदायक है। यह खून साफ करता दे और पाखाना साफ लाने में मदद पहुँचाता है, पुष्टिकारक है और तबीयत में ताजगी मनाये रखता है। इस रस को हर हालत में पी
है ।
सुबह भरपेट नाश्ते का रिवाज बहुत बुरा और रोगों का उत्पादक है। , अगर भोजन देर से - १२ बजे दोपहर में मिलता हो तो
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माना चाहिए । दाल का व्यवहार दस-बारहवें दिन से शुरू करना चाहिए । दाल गाड़ी और छिलक के साथ यानी पूरे दाने की हो और बहुत थोड़ी हो। पहले भूग, तब मसूर और साव झाठ दिनों के बाद उड़द मा भरहर, इस क्रम से दाल खानी चाहिए । इसी तरह फलाहार के बाद राटी मानी शुरू करने में मरुद मामी न करनी चाहिए । सनपुरुस्ती की हालत में, प्रत्येक दिन के भोजन में स्वारमय पदाय की मात्रा सीन-चौथाई से भी अधिक हो । सटाई पैदा करने वाल पदाथ एक बीधाई से भी कम हो । नमूने के लिए एक साधारण सनदुरुस्त आदमी को, जो कचहरी में काम करता है या स्कूल-कॉलेज में पढ़ने जाता है, इस प्रकार खाना चाहिए - सुबह-नाश्ता, मरसक कुछ नहीं, खासकर अगर दस बजे स्कूल या दप्तर जाना हो। सारी रात पेट लाए हुए भोजन के पचाने में लगा रहता है, इसलिए सबेरे पेट का भाराम देना चाहिए । हो, एक बात की जा सकती है। रात को एक-डे-टांक साफ और पुती किशमिश पाव-डेढ़ पाय पानी में दी मायें और उसी समय उसमें भाषे नींबू का रस निचोड़ दिया जाय। शीश के बर्तन में ऐसा करना ठोक होगा। सुबह इस पानी का एक चमचे से अच्छी तरह बलाकर और पानी को बर्तन में निकाल कर उसे पो सकते हैं। किशमिश छः बजे साठे समय खा सकते हैं। यह रस महा लाभदायक है। यह खून साफ करता दे और पाखाना साफ लाने में मदद पहुँचाता है, पुष्टिकारक है और तबीयत में ताजगी मनाये रखता है। इस रस को हर हालत में पी है । सुबह भरपेट नाश्ते का रिवाज बहुत बुरा और रोगों का उत्पादक है। , अगर भोजन देर से - बारह बजे दोपहर में मिलता हो तो
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भातकुली/दि. 1-शुक्रवार 30 जून से वर्ष 2023-24 के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बडे उत्साह के साथ हुई. पहले दिन पहली कक्षा में प्रवेश लेनेवाले विद्यार्थियों का गुलाब पुष्प देकर स्वागत किया गया. साथ ही गणवेश, पाठ्यपुस्तक वितरण के साथ स्वादिष्ट भोजन भी दिया गया.
जिप प्राथमिक शाला उत्तमसरा में शाला प्रवेशोत्सव मनाया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तमसरा के सरपंच धर्मेंद्र मेहरे ने की. प्रमुख अतिथि के रुप में शाला व्यवस्थापन समिति उपाध्यक्ष सविता जुनघरे, नीलेश जुनघरे, गणोरी केंद्र की प्रमुख नीता सोमवंशी, शाला की मुख्याध्यापिका मीनाक्षी इंगले, जिप हाईस्कूल के मुख्याध्यापक संतोष कुर्हेकर उपस्थित थे. क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा का पूजन का उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर मान्यवरों ने मार्गदर्शन किया. जिप प्राथमिक शिक्षणाधिकारी बुद्धभूषण सोनोने, जिप नियोजन अधिकारी प्रितम गणगणे, भातकुली गट शिक्षणाधिकारी दीपक कोकतरे, शालेय पोषण आहार अधीक्षक नरेंद्र गायकवाड ने शाला को भेंट देकर शालेय पोषण आहार, गणवेश, पुस्तक व शाला नियोजन की जानकारी लेकर समाधान व्यक्त किया. इस अवसर पर शाला की मुख्याध्यापिका मीनाक्षी इंगले, सहायक शिक्षक गजानन येलोने, राजेश सावरकर, अर्पणा झाडे, एकता शेवतकर, संगीता कराले, मंदाताई सवाई का सहयोग मिला. संचालन गजानन येलोने ने, प्रास्ताविक मीनाक्षी इंगले ने तथा आभार प्रदर्शन राजेश सावरकर ने किया.
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भातकुली/दि. एक-शुक्रवार तीस जून से वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बडे उत्साह के साथ हुई. पहले दिन पहली कक्षा में प्रवेश लेनेवाले विद्यार्थियों का गुलाब पुष्प देकर स्वागत किया गया. साथ ही गणवेश, पाठ्यपुस्तक वितरण के साथ स्वादिष्ट भोजन भी दिया गया. जिप प्राथमिक शाला उत्तमसरा में शाला प्रवेशोत्सव मनाया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तमसरा के सरपंच धर्मेंद्र मेहरे ने की. प्रमुख अतिथि के रुप में शाला व्यवस्थापन समिति उपाध्यक्ष सविता जुनघरे, नीलेश जुनघरे, गणोरी केंद्र की प्रमुख नीता सोमवंशी, शाला की मुख्याध्यापिका मीनाक्षी इंगले, जिप हाईस्कूल के मुख्याध्यापक संतोष कुर्हेकर उपस्थित थे. क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा का पूजन का उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर मान्यवरों ने मार्गदर्शन किया. जिप प्राथमिक शिक्षणाधिकारी बुद्धभूषण सोनोने, जिप नियोजन अधिकारी प्रितम गणगणे, भातकुली गट शिक्षणाधिकारी दीपक कोकतरे, शालेय पोषण आहार अधीक्षक नरेंद्र गायकवाड ने शाला को भेंट देकर शालेय पोषण आहार, गणवेश, पुस्तक व शाला नियोजन की जानकारी लेकर समाधान व्यक्त किया. इस अवसर पर शाला की मुख्याध्यापिका मीनाक्षी इंगले, सहायक शिक्षक गजानन येलोने, राजेश सावरकर, अर्पणा झाडे, एकता शेवतकर, संगीता कराले, मंदाताई सवाई का सहयोग मिला. संचालन गजानन येलोने ने, प्रास्ताविक मीनाक्षी इंगले ने तथा आभार प्रदर्शन राजेश सावरकर ने किया.
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। जिले में नक्सलियों ने दो युवकों की हत्या कर दी है।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों (Naxalites) ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। जिले में नक्सलियों ने दो युवकों की हत्या कर दी है। मृतकों का शव जिले के मिलापल्ली गांव से बरामद हुआ है। जानकारी के अनुसार, नक्सलियों (Naxalites) ने पुलिस के लिए मुखबिरी करने के शक में इन दोनों युवकों की हत्या की है। मृतकों में एक 21 वर्षीय युवक और दूसरा 15 वर्षीय लड़का है। 21 वर्षीय युवक का भाई बस्तर बटालियन में जवान है। बताया जाता है कि नक्सली इस इलाके के लोगों को पुलिस की नौकरी छोड़ने की धमकी देते हैं। वहीं, 15 वर्षीय स्कूली छात्र ताती हड़मा के पिता सहायक आरक्षक रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। जिले में नक्सलियों ने दो युवकों की हत्या कर दी है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। जिले में नक्सलियों ने दो युवकों की हत्या कर दी है। मृतकों का शव जिले के मिलापल्ली गांव से बरामद हुआ है। जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने पुलिस के लिए मुखबिरी करने के शक में इन दोनों युवकों की हत्या की है। मृतकों में एक इक्कीस वर्षीय युवक और दूसरा पंद्रह वर्षीय लड़का है। इक्कीस वर्षीय युवक का भाई बस्तर बटालियन में जवान है। बताया जाता है कि नक्सली इस इलाके के लोगों को पुलिस की नौकरी छोड़ने की धमकी देते हैं। वहीं, पंद्रह वर्षीय स्कूली छात्र ताती हड़मा के पिता सहायक आरक्षक रहे हैं।
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कहा गया है कि ये लक्षण यदि म्लेच्छ में भी मिलते हैं, तो वह भी शिवस्वरूप ही माना जाता है। यहाँ भक्ति की प्रधानता मानी गई है। भक्ति के लक्षणों और भेदों को बताकर उसकी महिमा बताई गई है। शिवयोगियों की चर्या और उनकी महिमा भी वर्णित है। शिवधर्म के ज्ञान, क्रिया, चर्या और योग नामक चार मार्गों का स्वरूप बताते हुए कहा गया है कि इस शिवमार्ग का अनुसरण शिवज्ञान की प्राप्ति के लिये आवश्यक है। पंचाक्षर मन्त्र की इसमें सर्वोपरि उपयोगिता है। चन्द्रज्ञानागम (१.१.१०-१३) और कूर्मपुराण (२.१-११) में स्थित ईश्वरगीता के ६-७ अध्यायों की पद्धति से यहाँ पति, पशु और पाश का स्वरूप वर्णित है और बताया गया है कि त्रिविध पाशों के छेदन के लिये वीरशैव-दीक्षा आवश्यक है। जीवों की श्रेष्ठता का क्रम बताते हुए कहा गया है कि शिवनाम का स्मरण पाशों को काटने का सर्वोत्तम उपाय है। इसके लिये श्रद्धा अपेक्षित है। श्रद्धा के रहने पर ही भक्ति का उदय होता है और भक्तिसम्पन्न व्यक्ति ही वीरशैव-दीक्षा का अधिकारी बन पाता है। इस प्रकार यहाँ कर्म, ज्ञान और भक्ति का निरूपण कर अन्त में सभी प्रकार के शैवों के लिये पालनीय सामान्य सदाचार तथा वीरशैवों के लिये विशेष सदाचारों का निरूपण किया गया है।
तेरहवें पटल में प्रधानतः करपंकज पर इष्टलिंग की पूजा का विधान वर्णित है। प्रथमतः यहाँ अन्य पीठों की अपेक्षा पाणिपीठ की विशेषता बताई गई है। पाणिपीठ का स्वरूप बताते हुए यहाँ कहा गया है कि हाथ की पांच अंगुलियों में पंचब्रह्म और पंचाग्नि की भावना करनी चाहिये । पाणिपीठ की कमल के रूप में भावना कर उसमें समस्त देवताओं और शास्त्रों की भावना का विधान बताकर इस करपंकज में इष्टलिंग की पूजा का क्रम, पालनीय नियम और उनकी महिमा बताई गई है। इष्टलिंग के अभिषेक का, उसके लिये आवश्यक पात्रों का और अभिषेकार्ह जल का विधान बताकर अभिषेक के बाद की पूजा के क्रम को बताते हुए कहा गया है कि इष्टलिंग की पूजा करते समय शिवभक्त को बीच में उठना नहीं चाहिये। करपीठ पर इष्टलिंग की पूजा का अनन्तगुणित फल मिलता है, इतना बताकर यहाँ कहा गया है कि पूजा का क्रम गुरुमुख से ही जानना चाहिये। इस करपीठ में सभी देवता और तीर्थ निवास करते हैं (१३.७३), यह बताकर यहाँ पटल समाप्ति पर्यन्त विस्तार से पाणिपंकज पर पूजा की महिमा गाई गई है।
चौदहवें पटल में दो विषय मुख्यतः वर्णित हैं- एक तो अष्टबन्ध (स्थावर) लिंग का लक्षण और दूसरे गुरु की उपासना का क्रम। पंचसूत्र-प्रमाण लिंग का विधान पहले भी बताया जा चुका है। उसी का यहाँ पुनः निरूपण हुआ है। साथ ही यहाँ लिंग के सखंड, अखंड आदि भेदों का स्वरूप बताकर कहा गया है कि अपनी योग्यता के अनुसार इनकी उपासना करनी चाहिये। भक्ति का इसमें विशेष स्थान है। इष्टलिंग के प्रमाण को और उसके धारण करने की विधि को बताकर यहाँ कहा गया है कि धारित लिंग के नष्ट हो जाने पर उसका प्रायश्चित्त करना पड़ता है। पूजोपयोगी पात्रों का तथा शिवपात्र का लक्षण बताकर कहा गया है कि इन पात्रों में तीर्थों का आवाहन करना चाहिये। बिना आधार के पात्रों का पूजा में उपयोग वर्जित है, अतः यहाँ इन आधारों की भी चर्चा की गई है। इतना बता देने के बाद यहाँ पाणिलिंग की पूजा के नियम
वर्णित हैं। कामना के अनुसार पूजा की दिशा का भी यहाँ निर्देश है। इष्टलिंग के निर्माण और पूजा का सारा विधान बताने के बाद यहाँ कहा गया है कि गुरु और देवता की अभिन्न रूप में भावना करनी चाहिये। इसके बाद सद्गुरु के स्मरण, पूजन, ध्यान आदि का विधान बताकर श्रीगुरु की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। सद्गुरु की उपासना से संबद्ध यहाँ के कुछ श्लोक गुरुगीता में भी उपलब्ध हैं।
पन्द्रहवें पटल में वीरशैवों के त्रिविध भेदों का निरूपण है। यहाँ देवी भगवान् से अन्य मतों की अपेक्षा वीरशैव मत की अपनी विशेषताओं के विषय में प्रश्न करती है। भगवान् देवी के इस प्रश्न की प्रशंसा करते हैं और कहते हैं कि वीरशैव मत के रहस्य को न जानने वाले मनुष्य इस संसार में ही डूबते-उतराते रहते हैं। वीरशैव मत की विशेषताओं को बताते हुए वे पहले वीरशैवों के अधिकार-भेद से होने वाले जिन तीन भेदों का उल्लेख करते हैं, वे हैं- सामान्य वीरशैव, विशेष वीरशैव और निराभारी वीरशैव २०। बाद में यहाँ क्रमशः इन तीनों के लक्षणों का विस्तार से निरूपण हुआ है। इसके बाद कहा गया है कि इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर निराभारी वीरशैव को प्राणत्याग कर देना चाहिये। निराभारी व्रत को स्वीकार कर उसको छोड़ देने वाला पाप का भागी होता है और इसका पालन करने वाला शिवस्वरूप को प्राप्त कर सदा आनन्दसागर में लीन रहता है। इसीलिये निराभारी के लिये पालनीय नियमों का इस पटल के अन्तिम भाग में विस्तार से वर्णन है।
सोलहवें पटल के प्रारंभ में षड्विध लिंगों का वर्णन है। भगवती पारद आदि से निर्मित लिंगों के विषय में प्रश्न करती है और भगवान् प्रश्न का उत्तर देते हुए स्थिर, चर, स्थिरचर, चरस्थिर, स्थिरस्थिर और चरचर नामक छः प्रकार के लिंगों का निर्देश करते हैं। यहाँ पंचविध लिंगों का तो नामोल्लेखपूर्वक वर्णन मिलता है, किन्तु स्थिरस्थिर नामक लिंग का विवरण उपलब्ध नहीं होता। ऐसा लगता है कि "चराचरात्मकं विश्वम्" (१६.२१-२२) इत्यादि श्लोकों में लिंगतत्त्व के रूप में उसीका वर्णन हुआ है। इस प्रकार षड्विध लिंगों का निरूपण कर यहाँ बताया गया है कि प्रपंच (जगत्), लिंग और देह में साधक को कोई भेद नहीं करना चाहिये। आगे संक्षेप में निराभारी की चर्या को बताकर पुनः पंचसूत्र-प्रमाण लिंग की संक्षिप्त चर्चा है। अलग-अलग रंग के शिवसूत्र (दोरक) का अलग-अलग फल होता है, यह बताकर आगे कहा गया है कि समर्थ व्यक्ति ही निराभारी वीरशैव व्रत में प्रवेश करे। निराभारी के द्वारा पालनीय नियमों का विस्तार से वर्णन करने के बाद यहाँ कहा गया है कि इसके लिये सबसे कठिन व्रत यह है कि इसको इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर देह त्याग करना पड़ता है। यह किसी की अगवानी नहीं करता, किसी को प्रणाम नहीं करता। ऐसे निराभारी शिवयोगी की सेवा-शुश्रूषा अनन्त फलदायक मानी गई है। इस निराभारी शिवयोगी की पर्यन्तावस्था में प्रकट होने वाले लक्षणों का भी यहाँ वर्णन किया गया है और कहा गया है कि इनका पूजन करने वाले को अनन्त सुख की प्राप्ति होती है। पटल के अन्त में तुर्यवीर व्रत की प्रशंसा की गई है। २०. इन त्रिविध वीरशैवों का निरूपण सूक्ष्मागम (७.३०-७९) तथा चन्द्रज्ञानागम (१.१०.३५-४८) में भी मिलता है। चन्द्रज्ञानागम (१.१०.४२-४४) में स्वतन्त्र और वैदिक के रूप में निराभारी के भी दो भेद किये हैं।
सत्रहवें पटल में वीरशैव ब्राह्मण की दिनचर्या निरूपित है। अनादि और आदि मत को छोड़कर यहाँ शेष शुद्धशैव आदि पांच मतों का स्वरूप बताकर तुर्य वीरशैव की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए शैवागम-संमत ३६ तत्त्वों का २१ निरूपण किया गया है। विरक्त शैवों के दस गुणों का परिगणन भी यहाँ (१७.३३-३४) किया गया है। देवी के प्रश्न के उत्तर में भगवान् शिव शैवों के द्वारा प्रति दिन संपादनीय कार्यों (आह्निकों) २ का निरूपण करते हुए स्नानविधि, भस्मनिर्माणविधि, भस्मधारणविधि, भस्ममहिमा, रुद्राक्षमालाधारण, पाणिपीठ पर इष्टलिंग पूजन, विरक्त शिवयोगी के लिये भिक्षाटन के नियम आदि का स्वरूप बताते हैं और कहते हैं कि देहपात पर्यन्त शिवयोगी वीरव्रत का पालन करता रहे। वीर माहेश्वरों के पांच यज्ञों२३ का भी यहाँ निरूपण किया गया है और अन्त में इनके आठ विशेष लक्षणों को बताते हुए कहा गया है कि इन लक्षणों से सम्पन्न २४ म्लेच्छ भी भगवान् शिव को अतिप्रिय है।
अठारहवें पटल में निर्याण याग का विधान है, जो कि वैदिक वाङ्मय में पितृमेध के नाम से वर्णित है। जब शिवभक्त यह समझे कि मेरा अन्तकाल निकट है, तो उस समय उसे क्या करना चाहिये, इस विषय को बताकर कहा गया है कि देह से प्राण का उत्क्रमण हो जाने पर शिष्य अथवा पुत्र उसका और्ध्वदेहिक कृत्य करे, विमान द्वारा मृतदेह को समाधि स्थल पर ले जाय। यहाँ मृत देह के संस्कार के लिये बनाये जाने वाले गर्त (समाधि) की निर्माण विधि का और उसमें शव के निक्षेप का पूरा विधान विस्तार से बताया गया है। पत्नी के सहगमन की विधि का भी यहाँ वर्णन है। संस्कार-स्थल पर समाधि बनाने, वहाँ प्रारंभ में मृत्तिका-लिंग की तथा बाद में उस स्थल पर शिवालय के निर्माण की और पूजनक्रम की विधि को बताने के साथ समाधिस्थल की पूजा का स्थायी प्रबन्ध करने का भी निर्देश मिलता है। लिंग-मुद्रा से अंकित वृषभ के उत्सर्ग की विधि का तथा निर्याण याग में दीक्षित व्यक्ति के कर्तव्यों का भी निरूपण कर यहाँ बताया गया है कि अपनी शक्ति के अनुसार समाधि स्थल पर बगीचा लगाना चाहिये। निर्याण याग के अनुष्ठान के फल का वर्णन करने के साथ यहाँ कार्तिक मास के में करणीय विशेष कृत्यों का भी निरूपण किया गया है। वापी, कूप, तटाक आदि के निर्माण का तथा दीप प्रज्वालन का भी विधान यहाँ प्रदर्शित है।
२१. यहाँ (१७.२९-३३) परिगणित तत्त्वों की नामावली कुछ भिन्न प्रकार की है।
२२. इस विषय का विस्तार चन्द्रज्ञानागम क्रियापाद एकादश पटल, मकुटागम क्रियापाद द्वितीय पटल तथा कारणागम तृतीय पटल में देखिये।
मनुस्मृति (३.७०-७२) के अनुसार ब्रह्मयज्ञ (स्वाध्याय), पितृयज्ञ (तर्पण-श्राद्ध), देवयज्ञ (होम), ये पंचयज्ञ के नाम से प्रसिद्ध हैं। भूतयज्ञ (बलि-वैश्वदेव) और नृयज्ञ (अतिथिपूजन) - सिद्धान्तशिखामणि (९.२१-२५) आदि वीरशैव मत के ग्रन्थों में तप, कर्म, जप, ध्यान और ज्ञान की पंचविध शिवयज्ञ के रूप में मान्यता है। मकुटागम में (१.२.३९) मनुस्मृति-संमत तथा प्रस्तुत आगम में (१२.१३-१९; १७.८०-८२) वीरशैव मत-संमत पंचयज्ञों का विधान है। सूक्ष्मागम (६. २६-३५) में भी इन्हीं का प्रतिपादन हुआ है। शिवपुराण वायवीय संहिता के उत्तर भाग (१०. ४८-५४) में ये पाशुपत व्रत के रूप में चर्चित हैं। पाशुपत मत के ग्रन्थों में इनका क्रियालक्षण योग में अन्तर्भाव है।
२४. ऊपर की १९ संख्या की टिप्पणी देखिये।
उन्नीसवें पटल में विशेषतः सिद्धिदिवस (मृत्युतिथि) पर किये जाने वाले कर्तव्यों का निरूपण है। गुरु-शिष्य परम्परा की व्याख्या करते हुए यहाँ बताया गया है कि यह परम्परा निरन्तर चलती रहती है, अतः आज का शिष्य ही कल गुरु कहलाने लगता है। विभिन्न गतियों का निरूपण करते हुए यहाँ कहा गया है कि गुरु के ऋण से मुक्ति पाने के लिये उसे अपने पूर्वजों की समाधि-स्थली पर मण्डप आदि का निर्माण कराना चाहिये, जिससे कि सामान्य जन को भी उचित सुविधा मिले। बिना जातिभेद के सबको समान समझ कर उनकी सहायता करनी चाहिये। समर्थ व्यक्ति ही यह सब कर सकता है। असमर्थ व्यक्ति के लिये भी उसके शारीरिक श्रम से सम्पन्न होने वाले परोपकार के कार्यों का वर्णन किया गया है। नारी के लिये बताया गया है कि वह अपने पति की समाधि की यावज्जीवन पूजा करे। पिता, गुरु आदि की मृत्युतिथि पर किये जाने वाले धार्मिक कृत्यों को बताकर यहाँ कहा गया है कि ये सब कार्य पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ करने चाहिये। व्यक्ति यहाँ जो कुछ भी अच्छा या बुरा करता है, उसमें करने वाला, कराने वाला, प्रेरणा देने वाला और उसका अनुमोदन करने वाला- इन चारों की समान भागीदारी रहती है। अतः व्यक्ति को भले काम में स्वयं भी लगना चाहिये और दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिये। समाधि स्थल पर दान की महिमा को बताते हुए कहा गया है कि यहाँ विद्वानों को बसाना चाहिये। विधवा स्त्री के कर्तव्यों के निरूपण के साथ यह पटल समाप्त होता है।
बीसवें पटल में दीक्षाभेदों का विधान निरूपित है। देवी प्रश्न करती है कि अनुशैव आदि छः प्रकार के शैवों की दीक्षा एक सरीखी है या इनमें परस्पर अन्तर है ? प्रश्न का समाधान करते हुए शिव कहते हैं कि अनधिकारी व्यक्ति को दीक्षा नहीं देनी चाहिये। दीक्षा के अधिकारी का लक्षण बताते हुए वे कहते हैं कि अनुशैव आदि छः प्रकार के शैवों को एककलशा दीक्षा दी जाती है। इसके साथ वीरशैव मत में प्रवेश के अधिकारी का लक्षण विस्तार से बताकर कहा गया है कि सामान्य वीरशैव और विशेष वीरशैव को त्रिकलशा दीक्षा और तुर्य (निराभारी) वीरशैव को पंचकलशा दीक्षा दी जाती है। इनके स्वरूप का संक्षेप में उल्लेख करने के साथ यहाँ कहा गया है कि तुर्य वीरशैव विधि और निषेध से ऊपर उठ जाता है। तुर्य वीरशैव की चर्या की और इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर उसके देहत्याग की पुनः यहाँ चर्चा की गई है। अष्टांग मैथुन के त्याग और दीक्षांग होम की विधि के प्रदर्शन के बाद तुर्य वीरशैव के स्वच्छन्द विचरण का यहाँ उल्लेख है। आगे देवी के प्रश्न के उत्तर में शिव कहते हैं कि योग्यतासम्पन्न व्यक्ति को व्युत्क्रम से भी दीक्षा दी जा सकती है, किन्तु सामान्यतः इन दीक्षाओं को क्रम से ही देना चाहिये। अन्त में यहाँ इन सभी दीक्षाओं की अपनी-अपनी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।
इक्कीसवें पटल में ज्ञानयोग का निरूपण है। देवी ज्ञानयोग के विषय में प्रश्न करती है और उसके उत्तर में भगवान् शिव कहते हैं कि इसी तरह का प्रश्न पहले वटपत्रशायी भगवान् कृष्ण ने मुझसे किया था। उस समय मैंने उनको जो उत्तर दिया.
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कहा गया है कि ये लक्षण यदि म्लेच्छ में भी मिलते हैं, तो वह भी शिवस्वरूप ही माना जाता है। यहाँ भक्ति की प्रधानता मानी गई है। भक्ति के लक्षणों और भेदों को बताकर उसकी महिमा बताई गई है। शिवयोगियों की चर्या और उनकी महिमा भी वर्णित है। शिवधर्म के ज्ञान, क्रिया, चर्या और योग नामक चार मार्गों का स्वरूप बताते हुए कहा गया है कि इस शिवमार्ग का अनुसरण शिवज्ञान की प्राप्ति के लिये आवश्यक है। पंचाक्षर मन्त्र की इसमें सर्वोपरि उपयोगिता है। चन्द्रज्ञानागम और कूर्मपुराण में स्थित ईश्वरगीता के छः-सात अध्यायों की पद्धति से यहाँ पति, पशु और पाश का स्वरूप वर्णित है और बताया गया है कि त्रिविध पाशों के छेदन के लिये वीरशैव-दीक्षा आवश्यक है। जीवों की श्रेष्ठता का क्रम बताते हुए कहा गया है कि शिवनाम का स्मरण पाशों को काटने का सर्वोत्तम उपाय है। इसके लिये श्रद्धा अपेक्षित है। श्रद्धा के रहने पर ही भक्ति का उदय होता है और भक्तिसम्पन्न व्यक्ति ही वीरशैव-दीक्षा का अधिकारी बन पाता है। इस प्रकार यहाँ कर्म, ज्ञान और भक्ति का निरूपण कर अन्त में सभी प्रकार के शैवों के लिये पालनीय सामान्य सदाचार तथा वीरशैवों के लिये विशेष सदाचारों का निरूपण किया गया है। तेरहवें पटल में प्रधानतः करपंकज पर इष्टलिंग की पूजा का विधान वर्णित है। प्रथमतः यहाँ अन्य पीठों की अपेक्षा पाणिपीठ की विशेषता बताई गई है। पाणिपीठ का स्वरूप बताते हुए यहाँ कहा गया है कि हाथ की पांच अंगुलियों में पंचब्रह्म और पंचाग्नि की भावना करनी चाहिये । पाणिपीठ की कमल के रूप में भावना कर उसमें समस्त देवताओं और शास्त्रों की भावना का विधान बताकर इस करपंकज में इष्टलिंग की पूजा का क्रम, पालनीय नियम और उनकी महिमा बताई गई है। इष्टलिंग के अभिषेक का, उसके लिये आवश्यक पात्रों का और अभिषेकार्ह जल का विधान बताकर अभिषेक के बाद की पूजा के क्रम को बताते हुए कहा गया है कि इष्टलिंग की पूजा करते समय शिवभक्त को बीच में उठना नहीं चाहिये। करपीठ पर इष्टलिंग की पूजा का अनन्तगुणित फल मिलता है, इतना बताकर यहाँ कहा गया है कि पूजा का क्रम गुरुमुख से ही जानना चाहिये। इस करपीठ में सभी देवता और तीर्थ निवास करते हैं , यह बताकर यहाँ पटल समाप्ति पर्यन्त विस्तार से पाणिपंकज पर पूजा की महिमा गाई गई है। चौदहवें पटल में दो विषय मुख्यतः वर्णित हैं- एक तो अष्टबन्ध लिंग का लक्षण और दूसरे गुरु की उपासना का क्रम। पंचसूत्र-प्रमाण लिंग का विधान पहले भी बताया जा चुका है। उसी का यहाँ पुनः निरूपण हुआ है। साथ ही यहाँ लिंग के सखंड, अखंड आदि भेदों का स्वरूप बताकर कहा गया है कि अपनी योग्यता के अनुसार इनकी उपासना करनी चाहिये। भक्ति का इसमें विशेष स्थान है। इष्टलिंग के प्रमाण को और उसके धारण करने की विधि को बताकर यहाँ कहा गया है कि धारित लिंग के नष्ट हो जाने पर उसका प्रायश्चित्त करना पड़ता है। पूजोपयोगी पात्रों का तथा शिवपात्र का लक्षण बताकर कहा गया है कि इन पात्रों में तीर्थों का आवाहन करना चाहिये। बिना आधार के पात्रों का पूजा में उपयोग वर्जित है, अतः यहाँ इन आधारों की भी चर्चा की गई है। इतना बता देने के बाद यहाँ पाणिलिंग की पूजा के नियम वर्णित हैं। कामना के अनुसार पूजा की दिशा का भी यहाँ निर्देश है। इष्टलिंग के निर्माण और पूजा का सारा विधान बताने के बाद यहाँ कहा गया है कि गुरु और देवता की अभिन्न रूप में भावना करनी चाहिये। इसके बाद सद्गुरु के स्मरण, पूजन, ध्यान आदि का विधान बताकर श्रीगुरु की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। सद्गुरु की उपासना से संबद्ध यहाँ के कुछ श्लोक गुरुगीता में भी उपलब्ध हैं। पन्द्रहवें पटल में वीरशैवों के त्रिविध भेदों का निरूपण है। यहाँ देवी भगवान् से अन्य मतों की अपेक्षा वीरशैव मत की अपनी विशेषताओं के विषय में प्रश्न करती है। भगवान् देवी के इस प्रश्न की प्रशंसा करते हैं और कहते हैं कि वीरशैव मत के रहस्य को न जानने वाले मनुष्य इस संसार में ही डूबते-उतराते रहते हैं। वीरशैव मत की विशेषताओं को बताते हुए वे पहले वीरशैवों के अधिकार-भेद से होने वाले जिन तीन भेदों का उल्लेख करते हैं, वे हैं- सामान्य वीरशैव, विशेष वीरशैव और निराभारी वीरशैव बीस। बाद में यहाँ क्रमशः इन तीनों के लक्षणों का विस्तार से निरूपण हुआ है। इसके बाद कहा गया है कि इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर निराभारी वीरशैव को प्राणत्याग कर देना चाहिये। निराभारी व्रत को स्वीकार कर उसको छोड़ देने वाला पाप का भागी होता है और इसका पालन करने वाला शिवस्वरूप को प्राप्त कर सदा आनन्दसागर में लीन रहता है। इसीलिये निराभारी के लिये पालनीय नियमों का इस पटल के अन्तिम भाग में विस्तार से वर्णन है। सोलहवें पटल के प्रारंभ में षड्विध लिंगों का वर्णन है। भगवती पारद आदि से निर्मित लिंगों के विषय में प्रश्न करती है और भगवान् प्रश्न का उत्तर देते हुए स्थिर, चर, स्थिरचर, चरस्थिर, स्थिरस्थिर और चरचर नामक छः प्रकार के लिंगों का निर्देश करते हैं। यहाँ पंचविध लिंगों का तो नामोल्लेखपूर्वक वर्णन मिलता है, किन्तु स्थिरस्थिर नामक लिंग का विवरण उपलब्ध नहीं होता। ऐसा लगता है कि "चराचरात्मकं विश्वम्" इत्यादि श्लोकों में लिंगतत्त्व के रूप में उसीका वर्णन हुआ है। इस प्रकार षड्विध लिंगों का निरूपण कर यहाँ बताया गया है कि प्रपंच , लिंग और देह में साधक को कोई भेद नहीं करना चाहिये। आगे संक्षेप में निराभारी की चर्या को बताकर पुनः पंचसूत्र-प्रमाण लिंग की संक्षिप्त चर्चा है। अलग-अलग रंग के शिवसूत्र का अलग-अलग फल होता है, यह बताकर आगे कहा गया है कि समर्थ व्यक्ति ही निराभारी वीरशैव व्रत में प्रवेश करे। निराभारी के द्वारा पालनीय नियमों का विस्तार से वर्णन करने के बाद यहाँ कहा गया है कि इसके लिये सबसे कठिन व्रत यह है कि इसको इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर देह त्याग करना पड़ता है। यह किसी की अगवानी नहीं करता, किसी को प्रणाम नहीं करता। ऐसे निराभारी शिवयोगी की सेवा-शुश्रूषा अनन्त फलदायक मानी गई है। इस निराभारी शिवयोगी की पर्यन्तावस्था में प्रकट होने वाले लक्षणों का भी यहाँ वर्णन किया गया है और कहा गया है कि इनका पूजन करने वाले को अनन्त सुख की प्राप्ति होती है। पटल के अन्त में तुर्यवीर व्रत की प्रशंसा की गई है। बीस. इन त्रिविध वीरशैवों का निरूपण सूक्ष्मागम तथा चन्द्रज्ञानागम में भी मिलता है। चन्द्रज्ञानागम में स्वतन्त्र और वैदिक के रूप में निराभारी के भी दो भेद किये हैं। सत्रहवें पटल में वीरशैव ब्राह्मण की दिनचर्या निरूपित है। अनादि और आदि मत को छोड़कर यहाँ शेष शुद्धशैव आदि पांच मतों का स्वरूप बताकर तुर्य वीरशैव की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए शैवागम-संमत छत्तीस तत्त्वों का इक्कीस निरूपण किया गया है। विरक्त शैवों के दस गुणों का परिगणन भी यहाँ किया गया है। देवी के प्रश्न के उत्तर में भगवान् शिव शैवों के द्वारा प्रति दिन संपादनीय कार्यों दो का निरूपण करते हुए स्नानविधि, भस्मनिर्माणविधि, भस्मधारणविधि, भस्ममहिमा, रुद्राक्षमालाधारण, पाणिपीठ पर इष्टलिंग पूजन, विरक्त शिवयोगी के लिये भिक्षाटन के नियम आदि का स्वरूप बताते हैं और कहते हैं कि देहपात पर्यन्त शिवयोगी वीरव्रत का पालन करता रहे। वीर माहेश्वरों के पांच यज्ञोंतेईस का भी यहाँ निरूपण किया गया है और अन्त में इनके आठ विशेष लक्षणों को बताते हुए कहा गया है कि इन लक्षणों से सम्पन्न चौबीस म्लेच्छ भी भगवान् शिव को अतिप्रिय है। अठारहवें पटल में निर्याण याग का विधान है, जो कि वैदिक वाङ्मय में पितृमेध के नाम से वर्णित है। जब शिवभक्त यह समझे कि मेरा अन्तकाल निकट है, तो उस समय उसे क्या करना चाहिये, इस विषय को बताकर कहा गया है कि देह से प्राण का उत्क्रमण हो जाने पर शिष्य अथवा पुत्र उसका और्ध्वदेहिक कृत्य करे, विमान द्वारा मृतदेह को समाधि स्थल पर ले जाय। यहाँ मृत देह के संस्कार के लिये बनाये जाने वाले गर्त की निर्माण विधि का और उसमें शव के निक्षेप का पूरा विधान विस्तार से बताया गया है। पत्नी के सहगमन की विधि का भी यहाँ वर्णन है। संस्कार-स्थल पर समाधि बनाने, वहाँ प्रारंभ में मृत्तिका-लिंग की तथा बाद में उस स्थल पर शिवालय के निर्माण की और पूजनक्रम की विधि को बताने के साथ समाधिस्थल की पूजा का स्थायी प्रबन्ध करने का भी निर्देश मिलता है। लिंग-मुद्रा से अंकित वृषभ के उत्सर्ग की विधि का तथा निर्याण याग में दीक्षित व्यक्ति के कर्तव्यों का भी निरूपण कर यहाँ बताया गया है कि अपनी शक्ति के अनुसार समाधि स्थल पर बगीचा लगाना चाहिये। निर्याण याग के अनुष्ठान के फल का वर्णन करने के साथ यहाँ कार्तिक मास के में करणीय विशेष कृत्यों का भी निरूपण किया गया है। वापी, कूप, तटाक आदि के निर्माण का तथा दीप प्रज्वालन का भी विधान यहाँ प्रदर्शित है। इक्कीस. यहाँ परिगणित तत्त्वों की नामावली कुछ भिन्न प्रकार की है। बाईस. इस विषय का विस्तार चन्द्रज्ञानागम क्रियापाद एकादश पटल, मकुटागम क्रियापाद द्वितीय पटल तथा कारणागम तृतीय पटल में देखिये। मनुस्मृति के अनुसार ब्रह्मयज्ञ , पितृयज्ञ , देवयज्ञ , ये पंचयज्ञ के नाम से प्रसिद्ध हैं। भूतयज्ञ और नृयज्ञ - सिद्धान्तशिखामणि आदि वीरशैव मत के ग्रन्थों में तप, कर्म, जप, ध्यान और ज्ञान की पंचविध शिवयज्ञ के रूप में मान्यता है। मकुटागम में मनुस्मृति-संमत तथा प्रस्तुत आगम में वीरशैव मत-संमत पंचयज्ञों का विधान है। सूक्ष्मागम में भी इन्हीं का प्रतिपादन हुआ है। शिवपुराण वायवीय संहिता के उत्तर भाग में ये पाशुपत व्रत के रूप में चर्चित हैं। पाशुपत मत के ग्रन्थों में इनका क्रियालक्षण योग में अन्तर्भाव है। चौबीस. ऊपर की उन्नीस संख्या की टिप्पणी देखिये। उन्नीसवें पटल में विशेषतः सिद्धिदिवस पर किये जाने वाले कर्तव्यों का निरूपण है। गुरु-शिष्य परम्परा की व्याख्या करते हुए यहाँ बताया गया है कि यह परम्परा निरन्तर चलती रहती है, अतः आज का शिष्य ही कल गुरु कहलाने लगता है। विभिन्न गतियों का निरूपण करते हुए यहाँ कहा गया है कि गुरु के ऋण से मुक्ति पाने के लिये उसे अपने पूर्वजों की समाधि-स्थली पर मण्डप आदि का निर्माण कराना चाहिये, जिससे कि सामान्य जन को भी उचित सुविधा मिले। बिना जातिभेद के सबको समान समझ कर उनकी सहायता करनी चाहिये। समर्थ व्यक्ति ही यह सब कर सकता है। असमर्थ व्यक्ति के लिये भी उसके शारीरिक श्रम से सम्पन्न होने वाले परोपकार के कार्यों का वर्णन किया गया है। नारी के लिये बताया गया है कि वह अपने पति की समाधि की यावज्जीवन पूजा करे। पिता, गुरु आदि की मृत्युतिथि पर किये जाने वाले धार्मिक कृत्यों को बताकर यहाँ कहा गया है कि ये सब कार्य पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ करने चाहिये। व्यक्ति यहाँ जो कुछ भी अच्छा या बुरा करता है, उसमें करने वाला, कराने वाला, प्रेरणा देने वाला और उसका अनुमोदन करने वाला- इन चारों की समान भागीदारी रहती है। अतः व्यक्ति को भले काम में स्वयं भी लगना चाहिये और दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिये। समाधि स्थल पर दान की महिमा को बताते हुए कहा गया है कि यहाँ विद्वानों को बसाना चाहिये। विधवा स्त्री के कर्तव्यों के निरूपण के साथ यह पटल समाप्त होता है। बीसवें पटल में दीक्षाभेदों का विधान निरूपित है। देवी प्रश्न करती है कि अनुशैव आदि छः प्रकार के शैवों की दीक्षा एक सरीखी है या इनमें परस्पर अन्तर है ? प्रश्न का समाधान करते हुए शिव कहते हैं कि अनधिकारी व्यक्ति को दीक्षा नहीं देनी चाहिये। दीक्षा के अधिकारी का लक्षण बताते हुए वे कहते हैं कि अनुशैव आदि छः प्रकार के शैवों को एककलशा दीक्षा दी जाती है। इसके साथ वीरशैव मत में प्रवेश के अधिकारी का लक्षण विस्तार से बताकर कहा गया है कि सामान्य वीरशैव और विशेष वीरशैव को त्रिकलशा दीक्षा और तुर्य वीरशैव को पंचकलशा दीक्षा दी जाती है। इनके स्वरूप का संक्षेप में उल्लेख करने के साथ यहाँ कहा गया है कि तुर्य वीरशैव विधि और निषेध से ऊपर उठ जाता है। तुर्य वीरशैव की चर्या की और इष्टलिंग के नष्ट हो जाने पर उसके देहत्याग की पुनः यहाँ चर्चा की गई है। अष्टांग मैथुन के त्याग और दीक्षांग होम की विधि के प्रदर्शन के बाद तुर्य वीरशैव के स्वच्छन्द विचरण का यहाँ उल्लेख है। आगे देवी के प्रश्न के उत्तर में शिव कहते हैं कि योग्यतासम्पन्न व्यक्ति को व्युत्क्रम से भी दीक्षा दी जा सकती है, किन्तु सामान्यतः इन दीक्षाओं को क्रम से ही देना चाहिये। अन्त में यहाँ इन सभी दीक्षाओं की अपनी-अपनी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। इक्कीसवें पटल में ज्ञानयोग का निरूपण है। देवी ज्ञानयोग के विषय में प्रश्न करती है और उसके उत्तर में भगवान् शिव कहते हैं कि इसी तरह का प्रश्न पहले वटपत्रशायी भगवान् कृष्ण ने मुझसे किया था। उस समय मैंने उनको जो उत्तर दिया.
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जयंत चौधरी ने बोला कि बेंगलुरु दिल्ली से थोड़ी दूर है, लेकिन हम सभी को दिल्ली वापस आने का रास्ता खोजना होगा. उन्होंने बोला कि पूरे विपक्ष को मिलकर काम करने की आवश्यकता है और हिंदुस्तान के आम नागरिकों के लिए दिल्ली का रास्ता बनाना होगा, जिनके लिए यह गवर्नमेंट आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है.
केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी (भाजपा) गवर्नमेंट के विरूद्ध एकजुट मोर्चा पेश करने के अपने प्रयासों के अनुसार कम से कम 26 विपक्षी दलों के नेता 17-18 जुलाई को बेंगलुरु के एक होटल में जुटेंगे. बैठक में शामिल होने को लेकर विपक्षी दल के नेता बेंगलुरु पहुंचने भी लगे हैं. इस बार की बैठक में राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी भी शामिल हुए हैं. वह 23 जून को पटना में हुए बैठक में शामिल नहीं हो पाये थे. बेंगलुरु रवाना होने से पहले जयंत चौधरी का बड़ा बयान भी सामने भी आ गए हैं.
जयंत चौधरी ने बोला कि बेंगलुरु दिल्ली से थोड़ी दूर है, लेकिन हम सभी को दिल्ली वापस आने का रास्ता खोजना होगा. उन्होंने बोला कि पूरे विपक्ष को मिलकर काम करने की आवश्यकता है और हिंदुस्तान के आम नागरिकों के लिए दिल्ली का रास्ता बनाना होगा, जिनके लिए यह गवर्नमेंट आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है. चौधरी ने बोला कि हमें उन लोगों तक पहुंचने की आवश्यकता है. हम सब मिलकर एक नयी राह बनाएंगे. मैं बहुत आशावान और सकारात्मक हूं. मैं पटना की पिछली बैठक में शामिल नहीं हो पाया था. इसलिए, इस स्तर पर यह मेरी पहली वार्ता है और मैं सुनूंगा कि अन्य नेता क्या कहते हैं. इसके साथ ही उन्होंने बोला कि ऐसा मत सोचिए कि जो लोग पहले से ही यहां हैं, उनके अतिरिक्त किसी से संचार नहीं होगा या दरवाजे बंद हैं. दरवाज़े खुले हुए हैं। समान विचारधारा वाले दल और नेता एक साथ आएंगे.
इस बीच, जिन अन्य लोगों के भाग लेने की आशा है उनमें कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बिहार के सीएम और जेडीयू नेता नीतीश कुमार, डीएमके नेता और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, जेएमएम नेता और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और AAP के अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे शामिल हैं. दो दिवसीय सत्र की आरंभ कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया द्वारा आयोजित रात्रिभोज बैठक से होगी, जिसके बाद मंगलवार को एक औपचारिक बैठक होगी.
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जयंत चौधरी ने बोला कि बेंगलुरु दिल्ली से थोड़ी दूर है, लेकिन हम सभी को दिल्ली वापस आने का रास्ता खोजना होगा. उन्होंने बोला कि पूरे विपक्ष को मिलकर काम करने की आवश्यकता है और हिंदुस्तान के आम नागरिकों के लिए दिल्ली का रास्ता बनाना होगा, जिनके लिए यह गवर्नमेंट आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है. केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी गवर्नमेंट के विरूद्ध एकजुट मोर्चा पेश करने के अपने प्रयासों के अनुसार कम से कम छब्बीस विपक्षी दलों के नेता सत्रह-अट्ठारह जुलाई को बेंगलुरु के एक होटल में जुटेंगे. बैठक में शामिल होने को लेकर विपक्षी दल के नेता बेंगलुरु पहुंचने भी लगे हैं. इस बार की बैठक में राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी भी शामिल हुए हैं. वह तेईस जून को पटना में हुए बैठक में शामिल नहीं हो पाये थे. बेंगलुरु रवाना होने से पहले जयंत चौधरी का बड़ा बयान भी सामने भी आ गए हैं. जयंत चौधरी ने बोला कि बेंगलुरु दिल्ली से थोड़ी दूर है, लेकिन हम सभी को दिल्ली वापस आने का रास्ता खोजना होगा. उन्होंने बोला कि पूरे विपक्ष को मिलकर काम करने की आवश्यकता है और हिंदुस्तान के आम नागरिकों के लिए दिल्ली का रास्ता बनाना होगा, जिनके लिए यह गवर्नमेंट आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है. चौधरी ने बोला कि हमें उन लोगों तक पहुंचने की आवश्यकता है. हम सब मिलकर एक नयी राह बनाएंगे. मैं बहुत आशावान और सकारात्मक हूं. मैं पटना की पिछली बैठक में शामिल नहीं हो पाया था. इसलिए, इस स्तर पर यह मेरी पहली वार्ता है और मैं सुनूंगा कि अन्य नेता क्या कहते हैं. इसके साथ ही उन्होंने बोला कि ऐसा मत सोचिए कि जो लोग पहले से ही यहां हैं, उनके अतिरिक्त किसी से संचार नहीं होगा या दरवाजे बंद हैं. दरवाज़े खुले हुए हैं। समान विचारधारा वाले दल और नेता एक साथ आएंगे. इस बीच, जिन अन्य लोगों के भाग लेने की आशा है उनमें कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बिहार के सीएम और जेडीयू नेता नीतीश कुमार, डीएमके नेता और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, जेएमएम नेता और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और AAP के अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे शामिल हैं. दो दिवसीय सत्र की आरंभ कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया द्वारा आयोजित रात्रिभोज बैठक से होगी, जिसके बाद मंगलवार को एक औपचारिक बैठक होगी.
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शनिवार को श्रीनगर के सनत नगर इलाके में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ 132 बीएन पर हमला किया. हमले में एक जवान घायल हो गया.
स्वतंत्रता दिवस से पहले आतंकी लगातार किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी के तहत आज शनिवार को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर (Srinagar) में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ पर ग्रेनेड से हमला किया (Grenade Attack on CRPF) . हमले में सीआरपीएफ का एक जवान घायल हो गया. वहीं इलाके की तलाशी की जा रही है.
सीआरपीएफ की ओर से जानकारी दी गई कि शनिवार को श्रीनगर के सनत नगर (Sanat Nagar) इलाके में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ 132 बीएन पर हमला किया. हमला ग्रेनेड फेंक कर किया गया. जिसमें एक जवान घायल हो गया. इससे पहले शनिवार को ही सुरक्षाबलों को आजादी के जश्न से पहले एक बड़ी सफलता हाथ लगी. सुरक्षाबलों ने 4 आतंकियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है.
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मंसूबों पर पानी फेरते हुए जानकारी के मुताबिक, इन चारों का काम देश के अलग-अलग हिस्से में ड्रोन के जरिए सीमा पार गिराए गए हथियारों की खेप को जमा करना था. जिसके बाद ये उन्हें घाटी में एक्टिव आतंकियों तक इस पहुंचाने की योजना बना रहे थे. इनका मकसद 15 अगस्त से पहले जम्मू में व्हीकल बेस्ड IED लगाना और अन्य टारगेट के बारे में जानकारी जुटाना था.
वहीं शुक्रवार को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन (Joint Operation) के दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया था. डोडा जिले के सरोला जंगल में यह ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया गया था. भारतीय सेना ने बताया कि जंगल में एक गुप्त जगह से एक चीनी पिस्टल, एक 12 बोर राइफल, दो देसी हैंडगन, पांच चीनी ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद किया गया है.
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शनिवार को श्रीनगर के सनत नगर इलाके में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ एक सौ बत्तीस बीएन पर हमला किया. हमले में एक जवान घायल हो गया. स्वतंत्रता दिवस से पहले आतंकी लगातार किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी के तहत आज शनिवार को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ पर ग्रेनेड से हमला किया . हमले में सीआरपीएफ का एक जवान घायल हो गया. वहीं इलाके की तलाशी की जा रही है. सीआरपीएफ की ओर से जानकारी दी गई कि शनिवार को श्रीनगर के सनत नगर इलाके में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ एक सौ बत्तीस बीएन पर हमला किया. हमला ग्रेनेड फेंक कर किया गया. जिसमें एक जवान घायल हो गया. इससे पहले शनिवार को ही सुरक्षाबलों को आजादी के जश्न से पहले एक बड़ी सफलता हाथ लगी. सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मंसूबों पर पानी फेरते हुए जानकारी के मुताबिक, इन चारों का काम देश के अलग-अलग हिस्से में ड्रोन के जरिए सीमा पार गिराए गए हथियारों की खेप को जमा करना था. जिसके बाद ये उन्हें घाटी में एक्टिव आतंकियों तक इस पहुंचाने की योजना बना रहे थे. इनका मकसद पंद्रह अगस्त से पहले जम्मू में व्हीकल बेस्ड IED लगाना और अन्य टारगेट के बारे में जानकारी जुटाना था. वहीं शुक्रवार को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया था. डोडा जिले के सरोला जंगल में यह ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया गया था. भारतीय सेना ने बताया कि जंगल में एक गुप्त जगह से एक चीनी पिस्टल, एक बारह बोर राइफल, दो देसी हैंडगन, पांच चीनी ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद किया गया है.
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बैलेंस शीट एक निश्चित समय में एक कंपनी की वित्तीय स्थिति है। इस कथन को प्रतिबिंबित करने के लिए, बैलेंस शीट परिसंपत्तियों (संगठन के पास क्या है), देनदारियों (उनके ऋण) और उनके बीच अंतर ( निवल मूल्य ) को दर्शाता है।
इसलिए, बैलेंस शीट एक तरह की तस्वीर है, जो एक निश्चित तिथि पर कंपनी की लेखा स्थिति को चित्रित करती है। इस दस्तावेज़ के लिए धन्यवाद, उद्यमी अपने व्यवसाय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करता है, जैसे कि धन की उपलब्धता और उसके ऋण की स्थिति।
कंपनी की परिसंपत्तियों में नकदी और बैंकों, प्राप्य, कच्चे माल, मशीनों, वाहनों, इमारतों और भूमि में मौजूद धन होता है।
संपत्ति के मामले में हमें इस बात पर जोर देना होगा कि इन्हें आमतौर पर तीन स्पष्ट प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता हैः
वर्तमान संपत्ति। इनमें वे तत्व हैं जो आसानी से नकदी बनने में सक्षम हैं। इसलिए, इस टाइपोलॉजी के भीतर वह धन है जो बैंक में है और वह धन जो कंपनी में ही उपलब्ध है, जो खाते ग्राहकों से प्राप्त किए जा सकते हैं, वे चेक जिन्हें एकत्र किया जाना है और आविष्कारक माल क्या हैं (सामग्री) प्रीमियम, तैयार उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया में उत्पाद ...)।
अचल संपत्ति। इस संप्रदाय के तहत सभी अचल संपत्ति और व्यक्तिगत संपत्ति शामिल हैं, जो कंपनी के पास है और जो उनकी गतिविधि के प्रदर्शन के लिए बुनियादी हैं। इस तरह, इस प्रकार की संपत्ति के उदाहरण वाहन, फर्नीचर, भूमि, भवन या मशीनरी, अन्य हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि इन परिसंपत्तियों को मूल्यह्रास के नाम से जाना जाता है, अर्थात्, पहनने और आंसू का उपयोग करने से नुकसान होता है।
अन्य संपत्ति इस वर्गीकरण में वे संपत्तियाँ शामिल हैं जो उपरोक्त वर्णित दो श्रेणियों में से किसी भी श्रेणी से संबंधित नहीं हैं। इसके उदाहरण वे खर्च होंगे जो पहले से भुगतान किए जाते हैं।
दूसरी ओर, देनदारी, अन्य मुद्दों के साथ देय ऋण, बैंक दायित्वों और करों के होते हैं।
देनदारियों के मामले में इन्हें भी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः
दीर्घकालिक देनदारियाँ। वे वे हैं जिन्हें कंपनी को एक वर्ष से अधिक की अवधि में भुगतान करना होगा।
अन्य दायित्व वे वे हैं जो पिछले दो वर्गीकरणों में से किसी में शामिल नहीं हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बैलेंस शीट को बैलेंस शीट के रूप में भी जाना जाता है। दस्तावेज़ में आमतौर पर अलग-अलग कॉलम होते हैं, जो मानों को सक्रिय या निष्क्रिय के अनुसार व्यवस्थित करते हैं। इन दोनों के बीच का अंतर नेट वर्थ है, यानी कंपनी के पास क्या है और क्या बकाया है।
इस तथ्य से परे कि बैलेंस शीट कंपनियों के मालिकों के लिए उपयोगी हैं, उनकी तैयारी आमतौर पर लेखांकन विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। लेखाकार संख्याओं के विश्लेषण के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें संतुलन में डंप करते हैं। एक बार शेष राशि बंद हो जाने के बाद, इसे नियोक्ता या संबंधित प्रबंधक को प्रस्तुत किया जाता है, जो वह है जो कंपनी के प्रबंधन के लिए संबंधित निर्णय करेगा।
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बैलेंस शीट एक निश्चित समय में एक कंपनी की वित्तीय स्थिति है। इस कथन को प्रतिबिंबित करने के लिए, बैलेंस शीट परिसंपत्तियों , देनदारियों और उनके बीच अंतर को दर्शाता है। इसलिए, बैलेंस शीट एक तरह की तस्वीर है, जो एक निश्चित तिथि पर कंपनी की लेखा स्थिति को चित्रित करती है। इस दस्तावेज़ के लिए धन्यवाद, उद्यमी अपने व्यवसाय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करता है, जैसे कि धन की उपलब्धता और उसके ऋण की स्थिति। कंपनी की परिसंपत्तियों में नकदी और बैंकों, प्राप्य, कच्चे माल, मशीनों, वाहनों, इमारतों और भूमि में मौजूद धन होता है। संपत्ति के मामले में हमें इस बात पर जोर देना होगा कि इन्हें आमतौर पर तीन स्पष्ट प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता हैः वर्तमान संपत्ति। इनमें वे तत्व हैं जो आसानी से नकदी बनने में सक्षम हैं। इसलिए, इस टाइपोलॉजी के भीतर वह धन है जो बैंक में है और वह धन जो कंपनी में ही उपलब्ध है, जो खाते ग्राहकों से प्राप्त किए जा सकते हैं, वे चेक जिन्हें एकत्र किया जाना है और आविष्कारक माल क्या हैं प्रीमियम, तैयार उत्पाद, उत्पादन की प्रक्रिया में उत्पाद ...)। अचल संपत्ति। इस संप्रदाय के तहत सभी अचल संपत्ति और व्यक्तिगत संपत्ति शामिल हैं, जो कंपनी के पास है और जो उनकी गतिविधि के प्रदर्शन के लिए बुनियादी हैं। इस तरह, इस प्रकार की संपत्ति के उदाहरण वाहन, फर्नीचर, भूमि, भवन या मशीनरी, अन्य हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि इन परिसंपत्तियों को मूल्यह्रास के नाम से जाना जाता है, अर्थात्, पहनने और आंसू का उपयोग करने से नुकसान होता है। अन्य संपत्ति इस वर्गीकरण में वे संपत्तियाँ शामिल हैं जो उपरोक्त वर्णित दो श्रेणियों में से किसी भी श्रेणी से संबंधित नहीं हैं। इसके उदाहरण वे खर्च होंगे जो पहले से भुगतान किए जाते हैं। दूसरी ओर, देनदारी, अन्य मुद्दों के साथ देय ऋण, बैंक दायित्वों और करों के होते हैं। देनदारियों के मामले में इन्हें भी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः दीर्घकालिक देनदारियाँ। वे वे हैं जिन्हें कंपनी को एक वर्ष से अधिक की अवधि में भुगतान करना होगा। अन्य दायित्व वे वे हैं जो पिछले दो वर्गीकरणों में से किसी में शामिल नहीं हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बैलेंस शीट को बैलेंस शीट के रूप में भी जाना जाता है। दस्तावेज़ में आमतौर पर अलग-अलग कॉलम होते हैं, जो मानों को सक्रिय या निष्क्रिय के अनुसार व्यवस्थित करते हैं। इन दोनों के बीच का अंतर नेट वर्थ है, यानी कंपनी के पास क्या है और क्या बकाया है। इस तथ्य से परे कि बैलेंस शीट कंपनियों के मालिकों के लिए उपयोगी हैं, उनकी तैयारी आमतौर पर लेखांकन विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। लेखाकार संख्याओं के विश्लेषण के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें संतुलन में डंप करते हैं। एक बार शेष राशि बंद हो जाने के बाद, इसे नियोक्ता या संबंधित प्रबंधक को प्रस्तुत किया जाता है, जो वह है जो कंपनी के प्रबंधन के लिए संबंधित निर्णय करेगा।
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वंदना सिंह की गाड़ियों का रेला.
आजमगढ़. कई बार नेताओं का स्वागत करने में सहयोगी इतने तल्लीन हो जाते हैं कि सही गलत भी भूल जाते हैं. कई बार सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए जाते हैं. हाल ही एक ऐसा मामला आजमगढ़ में देखने को मिला. दरअसल हाल ही भाजपा के खेमे में शामिल होने के बाद सागड़ी विधायक वंदना सिंह जनपद पहुंचीं. उनका भव्य स्वागत किया गया और स्वागत में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी गई. लेकिन स्वागत में कुछ लोग ऐसे मशरूफ हो गए कि यह भूल गए कि वे कौन हैं और उनका पद क्या है?
याद दिला दें कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही सख्त आदेश दिया था कि अब कोई भी मंत्री अपनी गाड़ी में हूटर नहीं लगाएगा, न ही लाल बत्ती लगाएगा. लेकिन जब मैडम साहिबा की गाड़ियों का रेला हूटर बजाते हुए निकला तो किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा करने वाले बीजेपी के पदाधिकारी आंखें मूंदकर खड़े रहे.
गाड़ियों के इस स्पेशल रेले के आने के बाद सबके दिमाग में यही सवाल आ रहा है कि आखिर मैडम को पार्टी ने ऐसा कौन-सा पद दे दिया कि गाड़ियां यूं हूटर बजाते हुए चल रही थीं. वंदना सिंह को भाजपा का दामन थामे हुए अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है. गाड़ियों पर नंबर भी वीआईपी नहीं थे, ताकि यह माना जा सके कि यह सब नियमों के अंतर्गत किया गया. इन सब सवालों के जवाब तो अब जनपद के आलाधिकारी ही दे सकते हैं. इस रेले के बाद परेशान लोगों का कहना था कि क्या योगी सरकार के अधिकारी सिर्फ आम लोगों को ही कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाते हैं? आम जनता और नेताओं में ऐसा फर्क क्यों है? फिलहाल इस पूरे कार्यक्रम और वंदना सिंह की चर्चा जोर-शोर से हो रही है.
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वंदना सिंह की गाड़ियों का रेला. आजमगढ़. कई बार नेताओं का स्वागत करने में सहयोगी इतने तल्लीन हो जाते हैं कि सही गलत भी भूल जाते हैं. कई बार सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए जाते हैं. हाल ही एक ऐसा मामला आजमगढ़ में देखने को मिला. दरअसल हाल ही भाजपा के खेमे में शामिल होने के बाद सागड़ी विधायक वंदना सिंह जनपद पहुंचीं. उनका भव्य स्वागत किया गया और स्वागत में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी गई. लेकिन स्वागत में कुछ लोग ऐसे मशरूफ हो गए कि यह भूल गए कि वे कौन हैं और उनका पद क्या है? याद दिला दें कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही सख्त आदेश दिया था कि अब कोई भी मंत्री अपनी गाड़ी में हूटर नहीं लगाएगा, न ही लाल बत्ती लगाएगा. लेकिन जब मैडम साहिबा की गाड़ियों का रेला हूटर बजाते हुए निकला तो किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा करने वाले बीजेपी के पदाधिकारी आंखें मूंदकर खड़े रहे. गाड़ियों के इस स्पेशल रेले के आने के बाद सबके दिमाग में यही सवाल आ रहा है कि आखिर मैडम को पार्टी ने ऐसा कौन-सा पद दे दिया कि गाड़ियां यूं हूटर बजाते हुए चल रही थीं. वंदना सिंह को भाजपा का दामन थामे हुए अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है. गाड़ियों पर नंबर भी वीआईपी नहीं थे, ताकि यह माना जा सके कि यह सब नियमों के अंतर्गत किया गया. इन सब सवालों के जवाब तो अब जनपद के आलाधिकारी ही दे सकते हैं. इस रेले के बाद परेशान लोगों का कहना था कि क्या योगी सरकार के अधिकारी सिर्फ आम लोगों को ही कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाते हैं? आम जनता और नेताओं में ऐसा फर्क क्यों है? फिलहाल इस पूरे कार्यक्रम और वंदना सिंह की चर्चा जोर-शोर से हो रही है. .
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सारांश निश्चय रहित ज्ञान को मन का कार्य कहते हैं । किंतु जो ज्ञान निश्चित रहता है वह बुद्धि का कार्य है । बुद्धि के विषय में यह भी कहा गया है किः२४
या यदिंद्रियमास्थाय जंतोर्बुद्धिः प्रवर्तते । याति सा तेन निर्देशं मनसा च मनोभवा ।। भेदात्कार्येद्रियार्थानां बव्ह्यो वै बुद्धयःस्मृताः । आत्मेंद्रिय मनोऽर्थाना मकैका सन्निकर्षजा ।। अंगुल्यंगुष्टतलजस्तंत्री वीणानखोद्भवः । दृष्टःशब्दो यथा बुद्धिर्दृष्टा संयोगजा तथा ॥ अंत में आत्मवादी कहते हैं किः
बुद्धींद्रिय मनोर्थानां विद्याद्योगधरंपरम् । चतुर्विंशक इत्येष राशिः पुरुषसंज्ञकः ।। रजस्तमोभ्यां युक्तस्य संयोगोऽयमनंतवान् । ताभ्यांनिराकृताभ्यांतु सत्वया निवर्तते ।
अर्थात उक्त बुद्धयादि भावों का योगधर वह आत्मा ही है। जो इनके सब के परे रहता है। इस तरह चोवीस धातु ओं के इस राशि को समुदायात्मक, हेतुज अथवा मोहेच्छाद्वोष कर्मज पुरुष कहते हैं । संसार में जो अनंत पुरुष (प्राणी ) दिखाई देते हैं उसका कारण रजोगुण व तमोगुण इनके न्यूनातिरेक से उक्त समुदाय के होने वाले अनंत प्रभेद हैं ।
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सारांश निश्चय रहित ज्ञान को मन का कार्य कहते हैं । किंतु जो ज्ञान निश्चित रहता है वह बुद्धि का कार्य है । बुद्धि के विषय में यह भी कहा गया है किःचौबीस या यदिंद्रियमास्थाय जंतोर्बुद्धिः प्रवर्तते । याति सा तेन निर्देशं मनसा च मनोभवा ।। भेदात्कार्येद्रियार्थानां बव्ह्यो वै बुद्धयःस्मृताः । आत्मेंद्रिय मनोऽर्थाना मकैका सन्निकर्षजा ।। अंगुल्यंगुष्टतलजस्तंत्री वीणानखोद्भवः । दृष्टःशब्दो यथा बुद्धिर्दृष्टा संयोगजा तथा ॥ अंत में आत्मवादी कहते हैं किः बुद्धींद्रिय मनोर्थानां विद्याद्योगधरंपरम् । चतुर्विंशक इत्येष राशिः पुरुषसंज्ञकः ।। रजस्तमोभ्यां युक्तस्य संयोगोऽयमनंतवान् । ताभ्यांनिराकृताभ्यांतु सत्वया निवर्तते । अर्थात उक्त बुद्धयादि भावों का योगधर वह आत्मा ही है। जो इनके सब के परे रहता है। इस तरह चोवीस धातु ओं के इस राशि को समुदायात्मक, हेतुज अथवा मोहेच्छाद्वोष कर्मज पुरुष कहते हैं । संसार में जो अनंत पुरुष दिखाई देते हैं उसका कारण रजोगुण व तमोगुण इनके न्यूनातिरेक से उक्त समुदाय के होने वाले अनंत प्रभेद हैं ।
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'गीता' (५१२२) वा सिद्धान्त है कि सुख ही दुस में परिणत होता है और दुःख, सुख में। इस अद्भुत प्रतीत होने वाली प्रनिया का कारण भी सब को सहज ही में जा है। उसका वारण है वाह्य या आभ्यन्तर उपाधि । इस वाह्याभ्यन्तर उपाधि को श्रीकृष्ण ने जर्जुन को विस्तार से समझाया था और उसके बाद अर्जुन घे हृदय से दुस-सुन के अनुभव करने वाले मस्कार बुझ गये थे । श्रीकृष्ण ने कहा था 'हे अर्जुन, विषयेन्द्रिय सम्बन्धजन्य सुखदु खानुभवरूप भोग दुखो के ही कारण है और उत्पत्ति नियुक्त है। बुद्धिमान् उन भोगो मे मन नहीं लगाते'. ये हि संसगंजा भोगा दु.लयोनय एवं ते । आयन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥
लिए भक्ति, कर्म, उपासना और ज्ञान ये चार साधन भगवान् को शरणागति के साधन है। क्योंकि श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है 'हे अर्जुन, परम श्रद्धा से मुझ मे मन को लगाकर जो निरन्तर उपासना करते हैं, वे ही उत्तम साधक है ।' 'जो भक्त अपने किये हुए सभी कर्मो
मेरे अर्पण करके एकाग्रमन होकर मेरी उपासना करते हैं, उन अपने भक्तो का मै इस मृत्युम्पी ससार से शीघ्र ही उद्धार कर देता हूँ । इसलिए मय्येव मन आपत्स्व भयि बुद्धिं निवेशय ।
निवसिष्यति मध्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥
ओ मेरे भक्त, मन और बुद्धि को स्थिर रूप से मुझ में लगा दे। तब तुझे असशय अवगत होगा तू मुझ आनन्दमिन्धु में ही निवास कर रहा है । ति
वैज्ञानिक भौतिकवाद
भौतिकवादी विचारधारा का उदय
भारत के प्राचीन इतिहास का अध्ययन करने पर स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ की सामाजिक एव वैचारिक मान्यतायें दो भागो में विभक्त थी । एक विचारधारा के प्रतिनिधि थे आर्य और दूसरी के अनार्य । ये दोना जाति समूह सम सामयिन थे । आर्य समूह वैदिक धर्म का अनुयायी था और अनार्य समूह भौतिक मान्यताओं पर विश्वास करता था । इसी लिए बहुसरयक वैदिक धर्मानुयायी समाज ने आर्यों को अवैदिक भी कहा । वैदिक साहित्य के अन्तिम भाग उपनिषद् ग्रन्थो में इन दोनो जाति-समूहो वे परस्पर विरोधी विचारो का व्यापक रूप से प्रतिपादन हुआ मिलता है ।
इस दृष्टि से यदि हम अथर्ववेद में निर्दिष्ट टोने-टोटके और तत्र मन आदि के मूल उद्देश्यों पर विचार करते है तो हमें लगता है वैदिक युग में ही एक ऐसे समाज का जन्म हो चुका था, जो भारतीय विचारधारा में नयी अभीप्साओं का निर्माण कर रहा था । ये विचार समाज के उस समूह के थे, जो परम्पराओं तथा रूडियो का विरोधी था और दृष्ट तथा अनुभूत सत्यो का समर्थक । प्रत्येक पदार्थ और वस्तु को वह सम्भव और असम्भव, इन दो दृष्टियों से परीक्षा करता था। ये विचारक आर्यों को वैदिक परम्परा से सम्बन्ध तोड वर जीवन तथा जगत् को पहेलियो को अपने निरा ढंग से हल करने के लिए उद्यत थे ।
अपनी ओर आकर्षित करने पर लगे थे । इन कारणों से समाज में पुरोहितो का प्रभाव कम होने लगा था। इन विरोधी विचारको ने स्पष्ट रूप से वर्मकाण्ड और यज्ञो वा विरोध कर यह आवाज लगायी कि अपनी दक्षिणा के लोभ से पुरोहित, समाज को परलोक वा झूठा प्रलोभन देवर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं ।
ठीक इसी समय ब्रह्मनिष्ठ याज्ञवल्क्य और उनके गुरु आरुणि ने अपनी प्रभावशाली विचारधारा से लोगों में ब्राह्मणानुराग बनाये रखने के लिए बड़ा थन दिया, किन्तु साथ ही उन्होंने कर्म को गौण और ज्ञान को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने इस विचारधारा का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया कि ज्ञानरहित वनं फलदायी हो ही नहीं सकता है ।
ऐसा सम्भवत इसलिए हुआ कि उस युग म दास और स्वामी वा समाज में जो वैपम्य चला आ रहा था उसको समाप्त किया जाय । आर्य-अनार्य तथा दास स्वामी के बीच वर्ण विभेद सम्बन्धी जिन नरान्तिकारी विचारा का उदय हुआ उनके मूल प्रतिनिधि थे वृहस्पति, चार्वाक, कपिल महावीर और युद्ध । उपनिषदो में भौतिकवादी विचार
जिस युग में उपनिषदा का निर्माण हुआ उसके बहुत समय वाद उपनिषदा का ज्ञान प्रकाश में आया। उपनिषदो मे निहित तात्त्विक, तकपूर्ण आदि अनेक प्रकार के विचारा का सूत्र लेकर बाद में बडे-बड़े दशन- सम्प्रदाया का जन्म हुआ। तथागत बुद्ध के समय तक लगभग ऐसे ६२ दार्शनिक सिद्धान्ता का आविर्भाव हा चुका था, जिनका इतिहास तथा प्रमाण ब्रह्मजालसुत्त नाभव वौद्धग्रंथ प्रस्तुत करता है ।
[उपनिषदग्रन्था वी विचारधारा को लेकर प्रमुख दो दशन-सम्प्रदायाया जन्म हुआ आस्तिक और नास्तिक । ये दोना सम्प्रदाय समान रूप से आगे बढे । वैदिक युग म इन्द्र वरुण आदि देवताओं का एकाधिपत्य या ब्राह्मण युग में उनके स्थान पर प्रभापति आदि देवताओं की प्रतिष्ठा हुई । यही प्रजापति ब्रह्मा कहलाये । तदनन्तर महाभारत व युग में ब्रह्मा के अतिरिक्त विष्णु और शिव की प्रधानता हावर, इस निमूर्ति का अर्चन-पूजन हुआ। इसी समय भागवत धर्म का उदय हुआ, जिसका विवास वासुदेव वृष्ण की सवा-भक्ति के रूप में हुआ ।
यद्यपि ब्राह्मण धर्म की पशुहिंमा के विरोध में उपनिपदो के ऋपियो ने बहुत कुछ कहा, किन्तु उपनिषदा के दूसरे बहुसत्यव ऋपिया ने निर्गुण ब्रह्म का प्रतिपादन करने में हो स्वयं को केन्द्रित रखा । पलत उपनिषदा की विचारधारा सवसाधारण की समझ से बहुत दूर हट गयी । जैसा कि सम्भव और उचित भी था कि साधारण समाज ने उसका समर्थन नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्म और ज्ञान की जा द्विधायें परम्परा से चली आ रही थी उनकी भिनताएँ अधिन स्पष्ट रूप में सामने आयो ।
'महाभारत एवं 'गीता' में कम तथा ज्ञान के अतिरिक्त भक्ति को भी सर्व साधारण मानव व कल्याण का मार्ग धताया गया । वर्म, ज्ञान और भक्ति, तीनो माग यद्यपि संद्धान्तिक दृष्टि से भिन भित थे, किन्तु उनके मूल म जा एक ही भावना कार्य कर रही थी यह थी किसी सार्वभौमिक अदृष्ट शक्ति की साज के लिए निरंतर चष्टा करत रहना। इन तीना मान्यताओं के याग या समन्वय से एक चायी विचारधारा का उदय हुआ। उसने यौगिक कियाओ द्वारा जीव
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'गीता' वा सिद्धान्त है कि सुख ही दुस में परिणत होता है और दुःख, सुख में। इस अद्भुत प्रतीत होने वाली प्रनिया का कारण भी सब को सहज ही में जा है। उसका वारण है वाह्य या आभ्यन्तर उपाधि । इस वाह्याभ्यन्तर उपाधि को श्रीकृष्ण ने जर्जुन को विस्तार से समझाया था और उसके बाद अर्जुन घे हृदय से दुस-सुन के अनुभव करने वाले मस्कार बुझ गये थे । श्रीकृष्ण ने कहा था 'हे अर्जुन, विषयेन्द्रिय सम्बन्धजन्य सुखदु खानुभवरूप भोग दुखो के ही कारण है और उत्पत्ति नियुक्त है। बुद्धिमान् उन भोगो मे मन नहीं लगाते'. ये हि संसगंजा भोगा दु.लयोनय एवं ते । आयन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥ लिए भक्ति, कर्म, उपासना और ज्ञान ये चार साधन भगवान् को शरणागति के साधन है। क्योंकि श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है 'हे अर्जुन, परम श्रद्धा से मुझ मे मन को लगाकर जो निरन्तर उपासना करते हैं, वे ही उत्तम साधक है ।' 'जो भक्त अपने किये हुए सभी कर्मो मेरे अर्पण करके एकाग्रमन होकर मेरी उपासना करते हैं, उन अपने भक्तो का मै इस मृत्युम्पी ससार से शीघ्र ही उद्धार कर देता हूँ । इसलिए मय्येव मन आपत्स्व भयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यति मध्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥ ओ मेरे भक्त, मन और बुद्धि को स्थिर रूप से मुझ में लगा दे। तब तुझे असशय अवगत होगा तू मुझ आनन्दमिन्धु में ही निवास कर रहा है । ति वैज्ञानिक भौतिकवाद भौतिकवादी विचारधारा का उदय भारत के प्राचीन इतिहास का अध्ययन करने पर स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ की सामाजिक एव वैचारिक मान्यतायें दो भागो में विभक्त थी । एक विचारधारा के प्रतिनिधि थे आर्य और दूसरी के अनार्य । ये दोना जाति समूह सम सामयिन थे । आर्य समूह वैदिक धर्म का अनुयायी था और अनार्य समूह भौतिक मान्यताओं पर विश्वास करता था । इसी लिए बहुसरयक वैदिक धर्मानुयायी समाज ने आर्यों को अवैदिक भी कहा । वैदिक साहित्य के अन्तिम भाग उपनिषद् ग्रन्थो में इन दोनो जाति-समूहो वे परस्पर विरोधी विचारो का व्यापक रूप से प्रतिपादन हुआ मिलता है । इस दृष्टि से यदि हम अथर्ववेद में निर्दिष्ट टोने-टोटके और तत्र मन आदि के मूल उद्देश्यों पर विचार करते है तो हमें लगता है वैदिक युग में ही एक ऐसे समाज का जन्म हो चुका था, जो भारतीय विचारधारा में नयी अभीप्साओं का निर्माण कर रहा था । ये विचार समाज के उस समूह के थे, जो परम्पराओं तथा रूडियो का विरोधी था और दृष्ट तथा अनुभूत सत्यो का समर्थक । प्रत्येक पदार्थ और वस्तु को वह सम्भव और असम्भव, इन दो दृष्टियों से परीक्षा करता था। ये विचारक आर्यों को वैदिक परम्परा से सम्बन्ध तोड वर जीवन तथा जगत् को पहेलियो को अपने निरा ढंग से हल करने के लिए उद्यत थे । अपनी ओर आकर्षित करने पर लगे थे । इन कारणों से समाज में पुरोहितो का प्रभाव कम होने लगा था। इन विरोधी विचारको ने स्पष्ट रूप से वर्मकाण्ड और यज्ञो वा विरोध कर यह आवाज लगायी कि अपनी दक्षिणा के लोभ से पुरोहित, समाज को परलोक वा झूठा प्रलोभन देवर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं । ठीक इसी समय ब्रह्मनिष्ठ याज्ञवल्क्य और उनके गुरु आरुणि ने अपनी प्रभावशाली विचारधारा से लोगों में ब्राह्मणानुराग बनाये रखने के लिए बड़ा थन दिया, किन्तु साथ ही उन्होंने कर्म को गौण और ज्ञान को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने इस विचारधारा का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया कि ज्ञानरहित वनं फलदायी हो ही नहीं सकता है । ऐसा सम्भवत इसलिए हुआ कि उस युग म दास और स्वामी वा समाज में जो वैपम्य चला आ रहा था उसको समाप्त किया जाय । आर्य-अनार्य तथा दास स्वामी के बीच वर्ण विभेद सम्बन्धी जिन नरान्तिकारी विचारा का उदय हुआ उनके मूल प्रतिनिधि थे वृहस्पति, चार्वाक, कपिल महावीर और युद्ध । उपनिषदो में भौतिकवादी विचार जिस युग में उपनिषदा का निर्माण हुआ उसके बहुत समय वाद उपनिषदा का ज्ञान प्रकाश में आया। उपनिषदो मे निहित तात्त्विक, तकपूर्ण आदि अनेक प्रकार के विचारा का सूत्र लेकर बाद में बडे-बड़े दशन- सम्प्रदाया का जन्म हुआ। तथागत बुद्ध के समय तक लगभग ऐसे बासठ दार्शनिक सिद्धान्ता का आविर्भाव हा चुका था, जिनका इतिहास तथा प्रमाण ब्रह्मजालसुत्त नाभव वौद्धग्रंथ प्रस्तुत करता है । [उपनिषदग्रन्था वी विचारधारा को लेकर प्रमुख दो दशन-सम्प्रदायाया जन्म हुआ आस्तिक और नास्तिक । ये दोना सम्प्रदाय समान रूप से आगे बढे । वैदिक युग म इन्द्र वरुण आदि देवताओं का एकाधिपत्य या ब्राह्मण युग में उनके स्थान पर प्रभापति आदि देवताओं की प्रतिष्ठा हुई । यही प्रजापति ब्रह्मा कहलाये । तदनन्तर महाभारत व युग में ब्रह्मा के अतिरिक्त विष्णु और शिव की प्रधानता हावर, इस निमूर्ति का अर्चन-पूजन हुआ। इसी समय भागवत धर्म का उदय हुआ, जिसका विवास वासुदेव वृष्ण की सवा-भक्ति के रूप में हुआ । यद्यपि ब्राह्मण धर्म की पशुहिंमा के विरोध में उपनिपदो के ऋपियो ने बहुत कुछ कहा, किन्तु उपनिषदा के दूसरे बहुसत्यव ऋपिया ने निर्गुण ब्रह्म का प्रतिपादन करने में हो स्वयं को केन्द्रित रखा । पलत उपनिषदा की विचारधारा सवसाधारण की समझ से बहुत दूर हट गयी । जैसा कि सम्भव और उचित भी था कि साधारण समाज ने उसका समर्थन नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्म और ज्ञान की जा द्विधायें परम्परा से चली आ रही थी उनकी भिनताएँ अधिन स्पष्ट रूप में सामने आयो । 'महाभारत एवं 'गीता' में कम तथा ज्ञान के अतिरिक्त भक्ति को भी सर्व साधारण मानव व कल्याण का मार्ग धताया गया । वर्म, ज्ञान और भक्ति, तीनो माग यद्यपि संद्धान्तिक दृष्टि से भिन भित थे, किन्तु उनके मूल म जा एक ही भावना कार्य कर रही थी यह थी किसी सार्वभौमिक अदृष्ट शक्ति की साज के लिए निरंतर चष्टा करत रहना। इन तीना मान्यताओं के याग या समन्वय से एक चायी विचारधारा का उदय हुआ। उसने यौगिक कियाओ द्वारा जीव
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ई० स० १८६६ ता० १६ फ़रवरी (वि० सं० १९२५ फाल्गुन सुदि ८ ) को फ़ोर्ट विलियम (कलकत्ता) में भारत के वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल ने इस अहदनामे की तस्दीक़ की' ।
( दस्तखत ) डवल्यू० एस० सेटनकर,
सेक्रेटरी, भारत गवर्नमेंट, वैदेशिक विभाग । अट्ठारह वर्ष बाद इस अनामे की एक शर्त में परिवर्त्तन हुआ, जो नीचे लिखे अनुसार हैई० स० १८६६ ता० १६ फ़रवरी को अपराधियों के सौंपने के संबंध में अंग्रेज सरकार एवं प्रतापगढ़ राज्य के बीच जो अहदनामा हुआ था, उसमें अंग्रेज़ी इलाक़े से भागकर प्रतापगढ़ राज्य में शरण लेने वाले अपराधियों को सौंप देने के लिए जो तजवीज़ हुई थी, वह अनुभव से वृटिश भारत में प्रचलित क़ानूनी अमल से कम आसान और कम कारगर पाई गई । इसलिए इस इक़रारनामे के द्वारा अंग्रेज़ सरकार तथा प्रतापगढ़ राज्य के बीच स्थिर हुआ है कि भविष्य में श्रहदनामे की शर्तें, जिनमें अभियुक्तों की सुपुर्दगी की बाबत तजवीज़ हुई है, वह वृटिश भारत से भागकर प्रतापगढ़ राज्य में आश्रय लेनेवाले अपराधियों की सुपुर्दगी के विषय में लागू न होंगी और इस समय ऐसे प्रत्येक मामले में अपराधियों को सौंपने के संबंध में वृटिश भारत में जो क़ानूनी श्रमल जारी है, उसकी पाबंदी करनी होगी।
ई० स० १८८७ ता० २६ अगस्त (वि० सं० १९४४ भाद्रपद सुदि ११) को प्रतापगढ़ में दस्तखत हुए ।
( दस्तखत, हिन्दी भाषा में )
महाराषत उदयसिंह
महारावत प्रतापगढ़ ।
( दस्तखत ) ए० एफ० पिन्हे, लेफ्टनेन्ट, असिस्टेन्ट पोलिटिकल एजेंट,
बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ ।
ई० स० १८८८ ता० २८ मार्च (वि० सं० १६४५ द्वितीय चैत्र वदि १)
( १ ) पुचिसन, ट्रीटीज़, एंगेजमेंट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जि० ३, पृ० ४६३-२ । ।
को फ़ोर्ट विलियम में हिन्दुस्तान के वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल ने इस अहदनामे को मंजूर कर इसकी तसदीक़ की' ।
( दस्तखत ) एचू० एम्० डयूरंड,
सेक्रेटरी, भारत गवर्नमेंट, फ़ॉरेन विभाग । प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा राज्य की सीमाएं मिली हुई होने से कभीकभी इन दोनों राज्यों के बीच सीमा संबंधी झगड़े और उपद्रव होकर विरोध हो जाया करता था। उन दिनों (बांसवाड़ा के महारावल लक्ष्मण सिंह के राज्य समय ) बांसवाड़ावालों ने प्रतापगढ़ राज्य के रायपुर ठिकाने के चोरी, रीछड़ी आदि गांवों का नवीन झगड़ा उठाया, जो प्रतापगढ़ राज्य के अधिकार में बहुत वर्षों से चले आते थे । इस झगड़े ने बड़ा भीषण रूप धारण किया और वि० सं० १९२३ आश्विन सुदि ६ ( ई० स० १८६६ ता० १४ टोवर) को रात्रि के समय वांसवाड़ावालों ने एक बड़ी सेना के साथ जाकर रायपुर के ठाकुर पर, जो उस समय वहां के थाने पर सीमा की रक्षा के लिए प्रतापगढ़ की तरफ़ से नियत था, आक्रमण कर दिया । रायपुर के ठाकुर और उसके साथी ( प्रतापगढ़ के सरदार ) उस समय श्रावधान थे, इसलिए वांसवाड़ावालों का आक्रमण वे सह न सके और उनके श्रादमियों में से श्रीराम के ठाकुर का पुत्र केसरीसिंह, रायपुर का अजीतसिंह, हिम्मतसिंह चौहान लक्ष्मणसिंह, हम्मीरसिंह आदि ३५ व्यक्ति मारे गये और ५६ घायल हुए तथा बांसवाड़ावाले वहां से कई हज़ार रुपयों का माल भी लूट ले गये । इस झगड़े में बांसवाड़ा राज्य के दो आदमी मारे गये और चार घायल हुए । फिर पोलिटिकल अफ़सरोंद्वारा इस मुकदमे की तहक़ीक़ात होने पर चांसवाड़ा राज्य की ज्यादती प्रमाणित हुई और बांसवाड़ा राज्य के कामदार कोठारी चिमनलाल पर एक हज़ार रुपये जुरमाना होकर वह दस वर्ष के लिए बांसवाड़ा राज्य से निर्वासित कर दिया गया एवं पांच दूसरे अहलकार, जो इस झगड़े में ( १ ) एचिसन, टीटीज़, एंगेजमेट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जि० ३, पृ० ४६५ ।
महागवत उदयसिंह
शामिल थे, पांच-पांच वर्ष के लिए क़ैद कर उदयपुर के जेलखाने में रखे गये । अंत में मेवाड़ भील कोर के कमांडेंट मेजर गर्निग ने मौके पर जाकर वि० सं० १९३१ ( ई० स० १८७५) में उचित फ़ैसला कर दोनों राज्यों की सीमा पर मीनारे खड़े करवा दिये । इस फ़ैसले से तनाज़े की ३६ वर्ग मील भूमि पर प्रतापगढ़ राज्य का अधिकार बहाल रहा और इस मुकदमे में प्रतापगढ़ राज्य के कामदार ओंकारलाल व्यास, मोतमिद अमृतराव दक्षिणी तथा बड़ा सेलारपुरा के ठाकुर विशनसिंह की कारगुज़ारी अच्छी रही, जिसकी मेंजर गनिंग ने महारावत के पास प्रशंसा लिख भेजी ।
इसी प्रकार एक दूसरा झगड़ा प्रतापगढ़ राज्य के सांडनी गांव के नील के पठार नामक खेतों के सम्बन्ध में बांसवाड़ा राज्य के सेमलिया पट्टे के सूरजपुरा गांव के वीच वि० सं० १९२६ ( ई० स० १८७२ ) में उत्पन्न हुआ । उसमें भी बांसवाड़ावालों ने अपनी सेना भिजवाकर प्रतापगढ़ राज्य के दो आदमियों को मार डाला । उसका फ़ैसला ई० स० १८७४ ता० १६ सितम्बर (वि० सं० १९३१ भाद्रपद सुदि ५) को मेवाड़ के असिस्टेन्ट पोलि टिकल एजेंट पारसी फ़्रामर्जी भीकाजी ने, जो वांसवाड़ा में नियत था, किया । उसके अनुसार नील के पठार के क्षेत्रों का अधिकार प्रतापगढ़ राज्य का स्वीकार किया गया और सांडनी तथा सूरजपुरा गांव की सीमाएं निर्धारित कर मीनारे खड़े करवा दिये गये। इस मुकदमे में महारावत के कामदार ओंकारलाल व्यास, मोतमिद शाह जोधकरण और अर्जुनसिंह की कारगुज़ारी अच्छी रही ।
वांसवाड़ा राज्य ने प्रतापगढ़ राज्य के अजंदा गांव को वि० सं० १६१७ ( ई० स० १८६० ) में बलपूर्वक दवा लिया था, जिसका मुकदमा में महारावत दलपतसिंह के समय से ही चल रहा था। उसका भी उन्हीं दिनों
( १ ) ज्वालासहाय, वक़ाये राजपूताना, जि० १, पृ० २२८ तथा ३४७ । ठक्क पुस्तक में प्रतापगढ़ राज्य की तरफ़ से इस झगड़े में मारे जानेवाले व्यक्ति की संख्या २६ औौर घायलों की ५४ दी है। "वीरविनोद" (द्वितीय भाग, पृ० १०३६) में बांसवाड़ा के कामदार चिमनलाल कोठारी पर दस हजार रुपये जुरमाना होने का उल्लेख है ।
फ़ैसला हुआ, जिसमें उक्त गांव पर प्रतापगढ़ राज्य का अधिकार कराया गया और बांसवाड़ा राज्य की ओर से सुबूत में जो पत्र आदि पेश किये गये वे जाली माने गये । इस घटना से अंग्रेज़ सरकार का बांसवाड़ा के महारावल लक्ष्मणसिंह के प्रति विलकुल विश्वास उठ गया और उसकी बहुत बदनामी हुई । फलस्वरूप अंग्रेज़ सरकार ने छः वर्ष तक के लिए उसकी सलामी की चार तोपें घटा दीं, जो पीछी ई० स० १८७६ ( वि० सं० १६३६ ) तक न बढ़ीं ।
वि० सं० १९३२ ( ई० स० १८७५ नवंबर ) में भारत का वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल लॉर्ड नॉर्थब्रुक बम्बई से मालवे की तरफ़ होकर उदयमहारावत का नीमच जाकर पुर गया । उस समय नीमच के मुक़ाम पर महावाइसरॉय लॉर्ड नॉर्थब्रुक से रावत उदयसिंह ने जाकर उक्त वाइसरॉय से मुलाक़ात की और फ़रवरी ई० स० १८७६ ( वि० सं० १६३२ ) में उसने राजपूताना के एजेंट गवर्नर-जेनरल सर ए० सी० लॉयल से भी नीमच जाकर मुलाकात की ।
मेवाड़ तथा टोंक राज्य के नींबाहेड़ा परगने में बसनेवाले मोधिये बड़े जरायम पेशा थे । उन दिनों वे अवसर पाकर प्रतापगढ़ राज्य में जा घुसे और वहां श्रवाद होने का विचार कर कुछ चौकीदारों में नौकर हो गये । इसकी इत्तला महारावत को मिलने पर उसने ऐसे जरायम पेशा लोगों को अपने राज्य में आबाद करने में हानि समझ, वहां उनको न ठहरने दिया, जिससे उसके राज्य में चोरी-धाड़ों का भय कम हो गया ।
( १ ) ज्वालासहाय, वक़ाये राजपूताना; जि० १, पृ० ५५० । वीरविनोद, द्वितीय भाग, पृ० १०३६ । चर्सकिन, गैजेटियर भव् घांसवाड़ा स्टेट; पृ० १६५ । एचिसन ; ट्रीटीज़, एंगेजमेंट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जि० ३, पृ० ४४५-६ ।
( २ ) ज्वालासहाय, वक्काये राजपूताना, जि० १, पृ. २६४ ।
महारावत का कामदार ओंकारलाल व्यास कारगुज़ार व्यक्ति था । वि० सं० १६३२ ( ई० स० १८७५ ) में उसको एक बदमाश सिपाही ने तलवार का प्रहार कर घायल कर दिया, जिससे वह कुछ दिनों पीछे मर गया । घातक उसी समय मार डाला गया और उसके शामिल रहनेवाले व्यक्तियों को क़ैद की सज़ा दी गई । महारावत ने उस ( ओंकारलाल ) के पुत्र कोमलराम के प्रति सहानुभूति प्रकट कर उसको अपने यहां ही रक्खा और उससे राज्य का काम लेने लगे, किन्तु वस्तुतः राज्य का सब कार्य महारावत की श्राज्ञानुसार ही होता था' ।
प्रतापगढ़ राज्य की अधिकांश ज़मीन पैदावार के लिए बहुत ही उपयोगी है। वहां पहले अफ़ीम की काश्त अधिकता से होती थी, जो श्रच्छी जात की होती थी एवं अनाज की पैदावारी भी अच्छी थी । महारावत के उदार विचार और प्रयत्न से वहां के ऊजड़ गांव फिर बस गये और काश्तकारों को रियायतें और तसल्ली देने से वहां की तमाम ज़मीन में खेती होने लगी तथा कृषि योग्य भूमि में से कुछ भी खाली न बची । केवल एक गांव बांसवाड़ा के भीलों की ज्यादती से वीरान था । बांसघाड़ा के भील प्रतापगढ़ की प्रजा से चौथ लेने का दावा करते थे । ई० स० १८७४ ( वि० सं० १९३१ ) में मेवाड़ राज्य के धरियावद पट्टे की तरफ़ के गांगा की पाल के मीणों ने कप्तान चार्ल्स स्ट्रेटन पर हमला भी किया; किंतु महारावत के अच्छे प्रबन्ध से प्रतापगढ़ राज्य के निवासी भील-मीणे
( १ ) ज्वालासहाय, चक़ाये राजपूताना, जि० १, पृ० १६०, २६२-४ ओंकारलाल व्यास जाति का श्रौदीच्य ब्राह्मण था। उसने कई वर्षों तक रतलाम राज्य में काम किया था, जिससे उसको अच्छा अनुभव हो गया था । वि० सं० १६३२ वैशाख यदि ३ ( ई० स० १८७५ ता० २३ अप्रैल ) को महारावत ने उसको बांसलाही गांव प्रदान किया, जो अद्यावधि उसके वंशजों के पास विद्यमान है ।
किसी भी उपद्रव में सम्मिलित न हुए और वे शांतिप्रिय बने रहे ।
श्रीमती महाराणी विक्टोरिया ने भारत का राज्याधिकार अपने हाथ में लेने के पीछे "सम्राची" (Empress of India) पदवी धारण की । दिल्ली दरवार के उपलक्ष्य उस सम्बन्ध में ई० स० १८७७ ता० १ जनवरी में महारावत को झंडा ( वि०सं० १९३३ माघ वदि २ ) सोमवार को भारत मिलना के तत्कालीन गवर्नर जेनरल और वाइसरॉय लॉर्ड लिटन ने दिल्ली नगर में एक वृहत् दरबार करना निश्चित किया । इस अवसर पर भारत के नरेशों को भी दरबार में सम्मिलित होने के लिए निमन्त्रण पत्र भेजे गये । तदनुसार भारत के कई नरेश दिल्ली जाकर उक्त दरवार में सम्मिलित हुए । कारण विशेष से महारावत उदयसिंह दरबार में सम्मिलित नहीं हुआ, उसके लिए वाइसरॉय लॉर्ड लिटन
ने शाही झंडा ( निशान ) भेजना स्थिर किया, जो वि० सं० १९३६ ( ई० स० १८७६ ) में मेवाड़ का पोलिटिकल एजेंट मेजर टी० केडिल प्रतापगढ़ लेकर गया और एक बड़े दरवार में वह महारावत को दिया
गया ।
वि० सं० १९३७ ( ई० स० १८८१ ) के शीतकाल में इस राज्य में प्रथम वार मनुष्य - गणना हुई। इस अवसर पर उदयपुर राज्य में भीलों
का उपद्रव हो गया था। प्रतापगढ़ राज्य, मेवाड़ राज्य से मिला हुआ है और वहां के अधिकांश निवासी भील, मीरो हैं, जिससे वहां भी उपद्रव हो जोन की आशंका हुई; परन्तु महारावत उत्तम प्रबन्ध से प्रतापगढ़ राज्य में ऐसा उपद्रव न हुआ और शांतिपूर्वक मनुष्य गणना का कार्य होकर वहां की जन संख्या में ७६५६८ व्यक्तियों की गणना हुई।
इसके दो वर्ष पीछे वि० सं० १६३६ ( ई० स० १८८३) में महारावत नीमच की छावनी गया, जहां उस समय इंदौर का भूतपूर्व महाराजा
( १ ) अर्सकिन; गैजेटियर ऑॉव् प्रतापगढ़ स्टेट; पृ० २०१ ।
तुकोजीराव होल्कर ( द्वितीय ) भी गया हुआ था । वहां उपर्युक्त नरेश से उसकी कई मुलाकाते हुई। फिर महाराजा के वहां से लौटने पर महारावत अपनी राजधानी में दाखिल हुआ ।
वि० सं० १९४३ ( ई० स० १८८६) में महारावत ने मन्त्री पद पर पारसी फ्रामजी भीकाजी को नियत किया, जिसने कई वर्षों तक अंग्रेज़
सरकार के राजनैतिक विभाग में दायित्वपूर्ण पदों पर रहकर सेवाएं की थीं तथा मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट के असिस्टेंट के पद पर रहकर बांसवाड़ा तथा प्रतापगढ़ राज्यों के बीच होनेवाले सीमा संबंधी झगड़ों को निपटाया था। उसके और महारावत के बनी नहीं, जिससे उसकी जगह मिर्ज़ा मुहम्मदी वेग वहां का कामदार बनाया गया ।
उसी वर्ष फाल्गुन सुदि ६ ( ई० स० १८८७ ता० १ मार्च) मंगलवार को सैलानेवाली मंझली महाराणी जुहारकुंवरी के उदर से महाराजकुमार अर्जुनसिंह का जन्म हुआ । महारावत के प्रथम राजकुमार का परलोकवास हो जाने के पीछे १७ वर्ष तक कोई संतान न होने से उत्तराधिकारी के विषय में वहां की प्रजा चिंतित थी । अतएव राजकुमार का जन्म होने से उनकी प्रसन्नता का पारावार न रहा। महारावत उक्त राजकुमार के उत्पन्न होने की प्रसन्नता में सहस्रों रुपये व्यय किये और अपने सगे संबंधी नरेशों में से सैलाना और सीतामऊ के राजाओं तथा कानोड़, आसींद (मेवाड़ राज्य) और कुशलगढ़ के सरदारों को अपने यहां निमंत्रित कर पुत्र जन्मोत्सव मनाया; किंतु वह राजकुमार केवल डेढ़ वर्ष की आयु में ही काल कवलित हो गया, जिसका उक्त महारावत के शरीर पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा और संसार से उसको एकवार ही विरक्ति हो गई।
वि० सं० १९४४ में महाराणी विक्टोरिया को शासन सूत्र हाथ में लिये पचास वर्ष पूरे हो गये, जिसके उपलक्ष्य में इंग्लैंड और भारत मे
स्वर्ण जयंती मनाना निश्चित हुआ । तदनुसार महारावत ने भी अपने यहां दरबार कर स्वर्ण जयन्ती महोत्सव मनाया और इस शुभ दिवस के स्मार्थ राजधानी प्रतापगढ़ में आबादी से पूर्व की तरफ़ मंदसोर जानेचाले मार्ग में एक नाले पर पक्का पुल बनवाया ।
उसी वर्ष महाराणी विक्टोरिया के तृतीय शाहजादे ड्यूक
कनाट का नीमच में आगमन हुआ । उस अवसर पर महारावत ने नीमच जाकर उक्त शाहज़ादे से मुलाक़ात की ।
महारावत उदयसिंह के समय वि० सं० १९२४ ( ई० स० १८६७ ) में प्रतापगढ़ में रोगियों की चिकित्सा के लिए डिस्पेंसरी खोली गई' ।
महारावत का नीमच जाकर ड्यूक ऑव् कनाट से मुलाकात
शीतला रोग से बचने के लिए उक्त महारावत के समय वि० सं० १९२७ ( ई० स० १८७० ) में टीका लगवाने की व्यवस्था हुई । बालकों की शिक्षा के लिए वि० सं० १९३२ ( ई० स० १८७५ ) में वहां पाठशाला की स्थापना की गई । स्टांपोर्ट फ़ीस का कायदा बनाया जाकर वि० सं० १९४० ( ई० स० १८८३) में वहां जारी किया गया। उसने अपने यहां सेना को बाकायदा क़वायद सिखलाने की भी व्यवस्था की थी। बांसवाड़ा राज्य और प्रतापगढ़ राज्य के सीमा संबंधी मुकदमे भी उसके समय में तय हुए, जिससे झगड़े मिट गये । पुलिस और गिराई की भी उसके समय में वहां कुछ-कुछ व्यवस्था हुई और वि० सं० १९४१ ( ई० स० १८८४ ) में वहां अंग्रेज़ी डाकखाना भी खोला गया ।
( १ ) अर्सकिन, गैजेटियर ऑष् प्रतापगढ़ स्टेट, पृ० २२१ ।
( ४ ) ज्वालासहाय; वनाये राजपूताना; जि० १, पृ० ५६४ ।
( ५ ) असेकिन, गैजेटियर ऑव् प्रतापगढ़ स्टेट, पृ० २१२ ।
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ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ छयासठ ताशून्य सोलह फ़रवरी को फ़ोर्ट विलियम में भारत के वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल ने इस अहदनामे की तस्दीक़ की' । डवल्यूशून्य एसशून्य सेटनकर, सेक्रेटरी, भारत गवर्नमेंट, वैदेशिक विभाग । अट्ठारह वर्ष बाद इस अनामे की एक शर्त में परिवर्त्तन हुआ, जो नीचे लिखे अनुसार हैईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ छयासठ ताशून्य सोलह फ़रवरी को अपराधियों के सौंपने के संबंध में अंग्रेज सरकार एवं प्रतापगढ़ राज्य के बीच जो अहदनामा हुआ था, उसमें अंग्रेज़ी इलाक़े से भागकर प्रतापगढ़ राज्य में शरण लेने वाले अपराधियों को सौंप देने के लिए जो तजवीज़ हुई थी, वह अनुभव से वृटिश भारत में प्रचलित क़ानूनी अमल से कम आसान और कम कारगर पाई गई । इसलिए इस इक़रारनामे के द्वारा अंग्रेज़ सरकार तथा प्रतापगढ़ राज्य के बीच स्थिर हुआ है कि भविष्य में श्रहदनामे की शर्तें, जिनमें अभियुक्तों की सुपुर्दगी की बाबत तजवीज़ हुई है, वह वृटिश भारत से भागकर प्रतापगढ़ राज्य में आश्रय लेनेवाले अपराधियों की सुपुर्दगी के विषय में लागू न होंगी और इस समय ऐसे प्रत्येक मामले में अपराधियों को सौंपने के संबंध में वृटिश भारत में जो क़ानूनी श्रमल जारी है, उसकी पाबंदी करनी होगी। ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ सत्तासी ताशून्य छब्बीस अगस्त को प्रतापगढ़ में दस्तखत हुए । महाराषत उदयसिंह महारावत प्रतापगढ़ । एशून्य एफशून्य पिन्हे, लेफ्टनेन्ट, असिस्टेन्ट पोलिटिकल एजेंट, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ । ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ अठासी ताशून्य अट्ठाईस मार्च पुचिसन, ट्रीटीज़, एंगेजमेंट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जिशून्य तीन, पृशून्य चार सौ तिरेसठ-दो । । को फ़ोर्ट विलियम में हिन्दुस्तान के वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल ने इस अहदनामे को मंजूर कर इसकी तसदीक़ की' । एचूशून्य एम्शून्य डयूरंड, सेक्रेटरी, भारत गवर्नमेंट, फ़ॉरेन विभाग । प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा राज्य की सीमाएं मिली हुई होने से कभीकभी इन दोनों राज्यों के बीच सीमा संबंधी झगड़े और उपद्रव होकर विरोध हो जाया करता था। उन दिनों बांसवाड़ावालों ने प्रतापगढ़ राज्य के रायपुर ठिकाने के चोरी, रीछड़ी आदि गांवों का नवीन झगड़ा उठाया, जो प्रतापगढ़ राज्य के अधिकार में बहुत वर्षों से चले आते थे । इस झगड़े ने बड़ा भीषण रूप धारण किया और विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ तेईस आश्विन सुदि छः को रात्रि के समय वांसवाड़ावालों ने एक बड़ी सेना के साथ जाकर रायपुर के ठाकुर पर, जो उस समय वहां के थाने पर सीमा की रक्षा के लिए प्रतापगढ़ की तरफ़ से नियत था, आक्रमण कर दिया । रायपुर के ठाकुर और उसके साथी उस समय श्रावधान थे, इसलिए वांसवाड़ावालों का आक्रमण वे सह न सके और उनके श्रादमियों में से श्रीराम के ठाकुर का पुत्र केसरीसिंह, रायपुर का अजीतसिंह, हिम्मतसिंह चौहान लक्ष्मणसिंह, हम्मीरसिंह आदि पैंतीस व्यक्ति मारे गये और छप्पन घायल हुए तथा बांसवाड़ावाले वहां से कई हज़ार रुपयों का माल भी लूट ले गये । इस झगड़े में बांसवाड़ा राज्य के दो आदमी मारे गये और चार घायल हुए । फिर पोलिटिकल अफ़सरोंद्वारा इस मुकदमे की तहक़ीक़ात होने पर चांसवाड़ा राज्य की ज्यादती प्रमाणित हुई और बांसवाड़ा राज्य के कामदार कोठारी चिमनलाल पर एक हज़ार रुपये जुरमाना होकर वह दस वर्ष के लिए बांसवाड़ा राज्य से निर्वासित कर दिया गया एवं पांच दूसरे अहलकार, जो इस झगड़े में एचिसन, टीटीज़, एंगेजमेट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जिशून्य तीन, पृशून्य चार सौ पैंसठ । महागवत उदयसिंह शामिल थे, पांच-पांच वर्ष के लिए क़ैद कर उदयपुर के जेलखाने में रखे गये । अंत में मेवाड़ भील कोर के कमांडेंट मेजर गर्निग ने मौके पर जाकर विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ इकतीस में उचित फ़ैसला कर दोनों राज्यों की सीमा पर मीनारे खड़े करवा दिये । इस फ़ैसले से तनाज़े की छत्तीस वर्ग मील भूमि पर प्रतापगढ़ राज्य का अधिकार बहाल रहा और इस मुकदमे में प्रतापगढ़ राज्य के कामदार ओंकारलाल व्यास, मोतमिद अमृतराव दक्षिणी तथा बड़ा सेलारपुरा के ठाकुर विशनसिंह की कारगुज़ारी अच्छी रही, जिसकी मेंजर गनिंग ने महारावत के पास प्रशंसा लिख भेजी । इसी प्रकार एक दूसरा झगड़ा प्रतापगढ़ राज्य के सांडनी गांव के नील के पठार नामक खेतों के सम्बन्ध में बांसवाड़ा राज्य के सेमलिया पट्टे के सूरजपुरा गांव के वीच विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में उत्पन्न हुआ । उसमें भी बांसवाड़ावालों ने अपनी सेना भिजवाकर प्रतापगढ़ राज्य के दो आदमियों को मार डाला । उसका फ़ैसला ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर ताशून्य सोलह सितम्बर को मेवाड़ के असिस्टेन्ट पोलि टिकल एजेंट पारसी फ़्रामर्जी भीकाजी ने, जो वांसवाड़ा में नियत था, किया । उसके अनुसार नील के पठार के क्षेत्रों का अधिकार प्रतापगढ़ राज्य का स्वीकार किया गया और सांडनी तथा सूरजपुरा गांव की सीमाएं निर्धारित कर मीनारे खड़े करवा दिये गये। इस मुकदमे में महारावत के कामदार ओंकारलाल व्यास, मोतमिद शाह जोधकरण और अर्जुनसिंह की कारगुज़ारी अच्छी रही । वांसवाड़ा राज्य ने प्रतापगढ़ राज्य के अजंदा गांव को विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ सत्रह में बलपूर्वक दवा लिया था, जिसका मुकदमा में महारावत दलपतसिंह के समय से ही चल रहा था। उसका भी उन्हीं दिनों ज्वालासहाय, वक़ाये राजपूताना, जिशून्य एक, पृशून्य दो सौ अट्ठाईस तथा तीन सौ सैंतालीस । ठक्क पुस्तक में प्रतापगढ़ राज्य की तरफ़ से इस झगड़े में मारे जानेवाले व्यक्ति की संख्या छब्बीस औौर घायलों की चौवन दी है। "वीरविनोद" में बांसवाड़ा के कामदार चिमनलाल कोठारी पर दस हजार रुपये जुरमाना होने का उल्लेख है । फ़ैसला हुआ, जिसमें उक्त गांव पर प्रतापगढ़ राज्य का अधिकार कराया गया और बांसवाड़ा राज्य की ओर से सुबूत में जो पत्र आदि पेश किये गये वे जाली माने गये । इस घटना से अंग्रेज़ सरकार का बांसवाड़ा के महारावल लक्ष्मणसिंह के प्रति विलकुल विश्वास उठ गया और उसकी बहुत बदनामी हुई । फलस्वरूप अंग्रेज़ सरकार ने छः वर्ष तक के लिए उसकी सलामी की चार तोपें घटा दीं, जो पीछी ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर तक न बढ़ीं । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में भारत का वाइसरॉय और गवर्नर जेनरल लॉर्ड नॉर्थब्रुक बम्बई से मालवे की तरफ़ होकर उदयमहारावत का नीमच जाकर पुर गया । उस समय नीमच के मुक़ाम पर महावाइसरॉय लॉर्ड नॉर्थब्रुक से रावत उदयसिंह ने जाकर उक्त वाइसरॉय से मुलाक़ात की और फ़रवरी ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में उसने राजपूताना के एजेंट गवर्नर-जेनरल सर एशून्य सीशून्य लॉयल से भी नीमच जाकर मुलाकात की । मेवाड़ तथा टोंक राज्य के नींबाहेड़ा परगने में बसनेवाले मोधिये बड़े जरायम पेशा थे । उन दिनों वे अवसर पाकर प्रतापगढ़ राज्य में जा घुसे और वहां श्रवाद होने का विचार कर कुछ चौकीदारों में नौकर हो गये । इसकी इत्तला महारावत को मिलने पर उसने ऐसे जरायम पेशा लोगों को अपने राज्य में आबाद करने में हानि समझ, वहां उनको न ठहरने दिया, जिससे उसके राज्य में चोरी-धाड़ों का भय कम हो गया । ज्वालासहाय, वक़ाये राजपूताना; जिशून्य एक, पृशून्य पाँच सौ पचास । वीरविनोद, द्वितीय भाग, पृशून्य एक हज़ार छत्तीस । चर्सकिन, गैजेटियर भव् घांसवाड़ा स्टेट; पृशून्य एक सौ पैंसठ । एचिसन ; ट्रीटीज़, एंगेजमेंट्स एण्ड सनद्ज्ञ, जिशून्य तीन, पृशून्य चार सौ पैंतालीस-छः । ज्वालासहाय, वक्काये राजपूताना, जिशून्य एक, पृ. दो सौ चौंसठ । महारावत का कामदार ओंकारलाल व्यास कारगुज़ार व्यक्ति था । विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ बत्तीस में उसको एक बदमाश सिपाही ने तलवार का प्रहार कर घायल कर दिया, जिससे वह कुछ दिनों पीछे मर गया । घातक उसी समय मार डाला गया और उसके शामिल रहनेवाले व्यक्तियों को क़ैद की सज़ा दी गई । महारावत ने उस के पुत्र कोमलराम के प्रति सहानुभूति प्रकट कर उसको अपने यहां ही रक्खा और उससे राज्य का काम लेने लगे, किन्तु वस्तुतः राज्य का सब कार्य महारावत की श्राज्ञानुसार ही होता था' । प्रतापगढ़ राज्य की अधिकांश ज़मीन पैदावार के लिए बहुत ही उपयोगी है। वहां पहले अफ़ीम की काश्त अधिकता से होती थी, जो श्रच्छी जात की होती थी एवं अनाज की पैदावारी भी अच्छी थी । महारावत के उदार विचार और प्रयत्न से वहां के ऊजड़ गांव फिर बस गये और काश्तकारों को रियायतें और तसल्ली देने से वहां की तमाम ज़मीन में खेती होने लगी तथा कृषि योग्य भूमि में से कुछ भी खाली न बची । केवल एक गांव बांसवाड़ा के भीलों की ज्यादती से वीरान था । बांसघाड़ा के भील प्रतापगढ़ की प्रजा से चौथ लेने का दावा करते थे । ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ चौहत्तर में मेवाड़ राज्य के धरियावद पट्टे की तरफ़ के गांगा की पाल के मीणों ने कप्तान चार्ल्स स्ट्रेटन पर हमला भी किया; किंतु महारावत के अच्छे प्रबन्ध से प्रतापगढ़ राज्य के निवासी भील-मीणे ज्वालासहाय, चक़ाये राजपूताना, जिशून्य एक, पृशून्य एक सौ साठ, दो सौ बासठ-चार ओंकारलाल व्यास जाति का श्रौदीच्य ब्राह्मण था। उसने कई वर्षों तक रतलाम राज्य में काम किया था, जिससे उसको अच्छा अनुभव हो गया था । विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ बत्तीस वैशाख यदि तीन को महारावत ने उसको बांसलाही गांव प्रदान किया, जो अद्यावधि उसके वंशजों के पास विद्यमान है । किसी भी उपद्रव में सम्मिलित न हुए और वे शांतिप्रिय बने रहे । श्रीमती महाराणी विक्टोरिया ने भारत का राज्याधिकार अपने हाथ में लेने के पीछे "सम्राची" पदवी धारण की । दिल्ली दरवार के उपलक्ष्य उस सम्बन्ध में ईशून्य सशून्य एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर ताशून्य एक जनवरी में महारावत को झंडा सोमवार को भारत मिलना के तत्कालीन गवर्नर जेनरल और वाइसरॉय लॉर्ड लिटन ने दिल्ली नगर में एक वृहत् दरबार करना निश्चित किया । इस अवसर पर भारत के नरेशों को भी दरबार में सम्मिलित होने के लिए निमन्त्रण पत्र भेजे गये । तदनुसार भारत के कई नरेश दिल्ली जाकर उक्त दरवार में सम्मिलित हुए । कारण विशेष से महारावत उदयसिंह दरबार में सम्मिलित नहीं हुआ, उसके लिए वाइसरॉय लॉर्ड लिटन ने शाही झंडा भेजना स्थिर किया, जो विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में मेवाड़ का पोलिटिकल एजेंट मेजर टीशून्य केडिल प्रतापगढ़ लेकर गया और एक बड़े दरवार में वह महारावत को दिया गया । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ सैंतीस के शीतकाल में इस राज्य में प्रथम वार मनुष्य - गणना हुई। इस अवसर पर उदयपुर राज्य में भीलों का उपद्रव हो गया था। प्रतापगढ़ राज्य, मेवाड़ राज्य से मिला हुआ है और वहां के अधिकांश निवासी भील, मीरो हैं, जिससे वहां भी उपद्रव हो जोन की आशंका हुई; परन्तु महारावत उत्तम प्रबन्ध से प्रतापगढ़ राज्य में ऐसा उपद्रव न हुआ और शांतिपूर्वक मनुष्य गणना का कार्य होकर वहां की जन संख्या में छिहत्तर हज़ार पाँच सौ अड़सठ व्यक्तियों की गणना हुई। इसके दो वर्ष पीछे विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ छत्तीस में महारावत नीमच की छावनी गया, जहां उस समय इंदौर का भूतपूर्व महाराजा अर्सकिन; गैजेटियर ऑॉव् प्रतापगढ़ स्टेट; पृशून्य दो सौ एक । तुकोजीराव होल्कर भी गया हुआ था । वहां उपर्युक्त नरेश से उसकी कई मुलाकाते हुई। फिर महाराजा के वहां से लौटने पर महारावत अपनी राजधानी में दाखिल हुआ । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में महारावत ने मन्त्री पद पर पारसी फ्रामजी भीकाजी को नियत किया, जिसने कई वर्षों तक अंग्रेज़ सरकार के राजनैतिक विभाग में दायित्वपूर्ण पदों पर रहकर सेवाएं की थीं तथा मेवाड़ के पोलिटिकल एजेंट के असिस्टेंट के पद पर रहकर बांसवाड़ा तथा प्रतापगढ़ राज्यों के बीच होनेवाले सीमा संबंधी झगड़ों को निपटाया था। उसके और महारावत के बनी नहीं, जिससे उसकी जगह मिर्ज़ा मुहम्मदी वेग वहां का कामदार बनाया गया । उसी वर्ष फाल्गुन सुदि छः मंगलवार को सैलानेवाली मंझली महाराणी जुहारकुंवरी के उदर से महाराजकुमार अर्जुनसिंह का जन्म हुआ । महारावत के प्रथम राजकुमार का परलोकवास हो जाने के पीछे सत्रह वर्ष तक कोई संतान न होने से उत्तराधिकारी के विषय में वहां की प्रजा चिंतित थी । अतएव राजकुमार का जन्म होने से उनकी प्रसन्नता का पारावार न रहा। महारावत उक्त राजकुमार के उत्पन्न होने की प्रसन्नता में सहस्रों रुपये व्यय किये और अपने सगे संबंधी नरेशों में से सैलाना और सीतामऊ के राजाओं तथा कानोड़, आसींद और कुशलगढ़ के सरदारों को अपने यहां निमंत्रित कर पुत्र जन्मोत्सव मनाया; किंतु वह राजकुमार केवल डेढ़ वर्ष की आयु में ही काल कवलित हो गया, जिसका उक्त महारावत के शरीर पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा और संसार से उसको एकवार ही विरक्ति हो गई। विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में महाराणी विक्टोरिया को शासन सूत्र हाथ में लिये पचास वर्ष पूरे हो गये, जिसके उपलक्ष्य में इंग्लैंड और भारत मे स्वर्ण जयंती मनाना निश्चित हुआ । तदनुसार महारावत ने भी अपने यहां दरबार कर स्वर्ण जयन्ती महोत्सव मनाया और इस शुभ दिवस के स्मार्थ राजधानी प्रतापगढ़ में आबादी से पूर्व की तरफ़ मंदसोर जानेचाले मार्ग में एक नाले पर पक्का पुल बनवाया । उसी वर्ष महाराणी विक्टोरिया के तृतीय शाहजादे ड्यूक कनाट का नीमच में आगमन हुआ । उस अवसर पर महारावत ने नीमच जाकर उक्त शाहज़ादे से मुलाक़ात की । महारावत उदयसिंह के समय विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ चौबीस में प्रतापगढ़ में रोगियों की चिकित्सा के लिए डिस्पेंसरी खोली गई' । महारावत का नीमच जाकर ड्यूक ऑव् कनाट से मुलाकात शीतला रोग से बचने के लिए उक्त महारावत के समय विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में टीका लगवाने की व्यवस्था हुई । बालकों की शिक्षा के लिए विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में वहां पाठशाला की स्थापना की गई । स्टांपोर्ट फ़ीस का कायदा बनाया जाकर विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ चालीस में वहां जारी किया गया। उसने अपने यहां सेना को बाकायदा क़वायद सिखलाने की भी व्यवस्था की थी। बांसवाड़ा राज्य और प्रतापगढ़ राज्य के सीमा संबंधी मुकदमे भी उसके समय में तय हुए, जिससे झगड़े मिट गये । पुलिस और गिराई की भी उसके समय में वहां कुछ-कुछ व्यवस्था हुई और विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में वहां अंग्रेज़ी डाकखाना भी खोला गया । अर्सकिन, गैजेटियर ऑष् प्रतापगढ़ स्टेट, पृशून्य दो सौ इक्कीस । ज्वालासहाय; वनाये राजपूताना; जिशून्य एक, पृशून्य पाँच सौ चौंसठ । असेकिन, गैजेटियर ऑव् प्रतापगढ़ स्टेट, पृशून्य दो सौ बारह ।
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Russia Ukraine War: बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको (Alexander Lukashenko) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के करीबी संबंध हैं.
यूक्रेन (Ukraine) ने दावा किया है कि बेलारूस (Belarus) के सैनिकों ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है. यूक्रेन के नॉर्थ टेरिटोरियल डिफेंस फोर्सेज के प्रवक्ता विटाली क्यारीलोव ने कहा कि बेलारूस के सैनिक मंगलवार सुबह उत्तर-पूर्वी यूक्रेन के चेर्निहाइव शहर में घुस गए. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको (Alexander Lukashenko) ने स्वीकार किया कि बेलारूस के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए सीमा पर तैनाती समूहों को भेजा गया है. लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि उनके सैनिकों ने भी युद्ध में हिस्सा ले लिया है. दोनों पक्षों के बीच छिड़ी लड़ाई में अभी तक व्यापक रूप से नुकसान हुआ है.
यहां गौर करने वाली बात ये है कि रक्षा विशेषज्ञों ने बहुत पहले ही इस बात को कहा था कि बेलारूस रूस के साथ मिलकर यूक्रेन पर हमला कर सकता है. ऐसे में अब ये बात सच साबित हो गई है. बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के करीबी संबंध हैं. बेलारूस ने सोमवार को ही रूसी परमाणु हथियारों और सैनिकों को अपने यहां तैनात करने की मंजूरी दी. ऐसे में इस बात का अंदाजा लगा लिया गया था जल्द ही कुछ ऐसा हो सकता है. वहीं, इस बात की भी जानकारी सामने आई थी कि रूस-यूक्रेन के बीच हुई शांति वार्ता का हल नहीं निकलता है, तो बेलारूस यूक्रेन में अपने सैनिक भेज सकता है.
इसी बीच, नाटो प्रमुख ने कहा है कि रूस की धमकियों के बावजूद गठबंधन को अपनी परमाणु अस्त्र चेतावनी के स्तर को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं दिखती. गठबंधन के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा के साथ यूरोपीय सुरक्षा पर बातचीत के बाद समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बात की. वे मध्य पोलैंड के लस्क में एक एयरबेस पर मिले, जहां नाटो के पोलैंड और अमेरिकी लड़ाकू जेट विमान मौजूद हैं.
स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, 'हम हमेशा वही करेंगे जो हमारे सहयोगियों की रक्षा और बचाव के लिए आवश्यक है, लेकिन हमें नहीं लगता कि नाटो के परमाणु बलों के चेतावनी स्तर को बदलने की कोई आवश्यकता है.' क्रेमलिन ने परमाणु युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सप्ताहांत के आदेश के बाद उसके भूमि, वायु और समुद्री परमाणु बल हाई अलर्ट पर हैं. नाटो के पास स्वयं कोई परमाणु अस्त्र नहीं है, लेकिन इसके तीन सदस्यों-अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु अस्त्रों का भंडार है.
टीवी 9 भारतवर्ष काफी समय से जो कह रहा था, आखिर वही हुआ. यूक्रेन की लड़ाई वर्ल्ड वॉर की तरफ आ ही गई. देखिये वॉर जोन से LIVE हाल अभिषेक उपाध्याय और चेतन शर्मा के साथ.
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Russia Ukraine War: बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी संबंध हैं. यूक्रेन ने दावा किया है कि बेलारूस के सैनिकों ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है. यूक्रेन के नॉर्थ टेरिटोरियल डिफेंस फोर्सेज के प्रवक्ता विटाली क्यारीलोव ने कहा कि बेलारूस के सैनिक मंगलवार सुबह उत्तर-पूर्वी यूक्रेन के चेर्निहाइव शहर में घुस गए. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने स्वीकार किया कि बेलारूस के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए सीमा पर तैनाती समूहों को भेजा गया है. लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि उनके सैनिकों ने भी युद्ध में हिस्सा ले लिया है. दोनों पक्षों के बीच छिड़ी लड़ाई में अभी तक व्यापक रूप से नुकसान हुआ है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि रक्षा विशेषज्ञों ने बहुत पहले ही इस बात को कहा था कि बेलारूस रूस के साथ मिलकर यूक्रेन पर हमला कर सकता है. ऐसे में अब ये बात सच साबित हो गई है. बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी संबंध हैं. बेलारूस ने सोमवार को ही रूसी परमाणु हथियारों और सैनिकों को अपने यहां तैनात करने की मंजूरी दी. ऐसे में इस बात का अंदाजा लगा लिया गया था जल्द ही कुछ ऐसा हो सकता है. वहीं, इस बात की भी जानकारी सामने आई थी कि रूस-यूक्रेन के बीच हुई शांति वार्ता का हल नहीं निकलता है, तो बेलारूस यूक्रेन में अपने सैनिक भेज सकता है. इसी बीच, नाटो प्रमुख ने कहा है कि रूस की धमकियों के बावजूद गठबंधन को अपनी परमाणु अस्त्र चेतावनी के स्तर को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं दिखती. गठबंधन के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा के साथ यूरोपीय सुरक्षा पर बातचीत के बाद समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बात की. वे मध्य पोलैंड के लस्क में एक एयरबेस पर मिले, जहां नाटो के पोलैंड और अमेरिकी लड़ाकू जेट विमान मौजूद हैं. स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, 'हम हमेशा वही करेंगे जो हमारे सहयोगियों की रक्षा और बचाव के लिए आवश्यक है, लेकिन हमें नहीं लगता कि नाटो के परमाणु बलों के चेतावनी स्तर को बदलने की कोई आवश्यकता है.' क्रेमलिन ने परमाणु युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सप्ताहांत के आदेश के बाद उसके भूमि, वायु और समुद्री परमाणु बल हाई अलर्ट पर हैं. नाटो के पास स्वयं कोई परमाणु अस्त्र नहीं है, लेकिन इसके तीन सदस्यों-अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु अस्त्रों का भंडार है. टीवी नौ भारतवर्ष काफी समय से जो कह रहा था, आखिर वही हुआ. यूक्रेन की लड़ाई वर्ल्ड वॉर की तरफ आ ही गई. देखिये वॉर जोन से LIVE हाल अभिषेक उपाध्याय और चेतन शर्मा के साथ.
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कांकेर, 9 फरवरी। जिले के एक वन अफसर ने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की। उन्हें जिला कोमलदेव अस्पताल कांकेर में भर्ती कराया गया है। शाम 7 बजे समाचार के लिखे जाने तक उनकी हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार उन्होंने घर में रखे हुए एक बॉटल कीटनाशक को पी लिया है। टीआई शरद दुबे ने बताया कि अभी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। रेंजर की हालत जानने वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेई व अन्य वन विभाग के अधिकारी जिला चिकात्सालय पहुंचे हैं। जहर सेवन का कारण अज्ञात है।
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कांकेर, नौ फरवरी। जिले के एक वन अफसर ने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की। उन्हें जिला कोमलदेव अस्पताल कांकेर में भर्ती कराया गया है। शाम सात बजे समाचार के लिखे जाने तक उनकी हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार उन्होंने घर में रखे हुए एक बॉटल कीटनाशक को पी लिया है। टीआई शरद दुबे ने बताया कि अभी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। रेंजर की हालत जानने वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेई व अन्य वन विभाग के अधिकारी जिला चिकात्सालय पहुंचे हैं। जहर सेवन का कारण अज्ञात है।
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ई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत (India) और चीन (China) के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि LAC की गलवान (Galwan) घाटी के पास चीन ने एक प्लान तैयार किया था। जिसमें सरकार ने गलवान घाटी की योजना बनाई थी। इस योजना में पहले ही जवानों के जान गवाने की भी आशंका लगाई गई थी।
इस रिपोर्ट के अनुसार गलवान में हुई हिंसक झड़प से एक हफ्त पहले चीन के रक्षा मंत्री ने सैन्य ताकत के इस्तेमाल की बात कही थी। जिसके बाद यह घटना घटी थी। बता दें 1975 के बाद पहली बार भारत और चीन की सीमा पर हिंसक झड़प हुई थी। जिसमें किसी की जान भी गई थी।
बता दें जिन भारतीय सैनिकों को सीमा पर तैनात किया गया है। उनमें से अधिकतर को पहले से ही ठंड़े इलाको में तैनाती का अच्छा खासा अनुभव है। सेना ने लद्दाख सेक्टर, सियाचिन ग्लेशियर या अधिक ऊंचाई इलाके में तैनात सैनिकों को ही अग्रिम चौकियों पर लगाया है। इन चौकियों पर तैनात सैनिकों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है क्योंकि वह पहले से ही अनुभव रखते हैं।
इस बीच, दोनों देशों में सैन्य स्तर की बातचीत चल रही है। दोनों देशों के सैन्य कमांडर 8 दौर की बातचीत कर चुके हैं, और जल्द ही नौवें दौर की भी बातचीत होनी है। हालांकि, चीन की चालाकियों की वजह से अभी तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। बातचीत शुरू होने से पहले 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीनी पक्ष को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन अभी तक उन्होंने मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।
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ई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि LAC की गलवान घाटी के पास चीन ने एक प्लान तैयार किया था। जिसमें सरकार ने गलवान घाटी की योजना बनाई थी। इस योजना में पहले ही जवानों के जान गवाने की भी आशंका लगाई गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार गलवान में हुई हिंसक झड़प से एक हफ्त पहले चीन के रक्षा मंत्री ने सैन्य ताकत के इस्तेमाल की बात कही थी। जिसके बाद यह घटना घटी थी। बता दें एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के बाद पहली बार भारत और चीन की सीमा पर हिंसक झड़प हुई थी। जिसमें किसी की जान भी गई थी। बता दें जिन भारतीय सैनिकों को सीमा पर तैनात किया गया है। उनमें से अधिकतर को पहले से ही ठंड़े इलाको में तैनाती का अच्छा खासा अनुभव है। सेना ने लद्दाख सेक्टर, सियाचिन ग्लेशियर या अधिक ऊंचाई इलाके में तैनात सैनिकों को ही अग्रिम चौकियों पर लगाया है। इन चौकियों पर तैनात सैनिकों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है क्योंकि वह पहले से ही अनुभव रखते हैं। इस बीच, दोनों देशों में सैन्य स्तर की बातचीत चल रही है। दोनों देशों के सैन्य कमांडर आठ दौर की बातचीत कर चुके हैं, और जल्द ही नौवें दौर की भी बातचीत होनी है। हालांकि, चीन की चालाकियों की वजह से अभी तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है। बातचीत शुरू होने से पहले पंद्रह जून को दोनों देशों के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें बीस भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीनी पक्ष को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन अभी तक उन्होंने मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है।
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Swara Bhaskar Husband: स्वरा ने जिस शख्स से शादी रचाई है, उनका नाम फहाद अहमद है। अहमद और स्वरा दोनों के राजनीतिक विचार एक जैसे हैं।
Swara Bhaskar Husband: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर सिने जगत के उन कलाकरों में शुमार हैं, जो अपनी राय बड़ी बेबाकी से रखती है। स्वरा अपने एक्टिंग से ज्यादा अपने पॉलिटिकल स्टैंड को लेकर चर्चा में रही हैं। मौजूदा केंद्र सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आक्रमक रूख रखने वाली फिल्म अभिनेत्री को इसका नुकसान भी हुआ है लेकिन फिर भी वह अपने विचारों से डिगी नहीं हैं। यही वजह है कि कोई बड़ी फिल्म न करने के बावजूद वो सुर्खियों में बनी हुई हैं। स्वरा भास्कर फिलहाल तो अपनी शादी को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।
उनके प्रशंसकों और विरोधियों में ये जानने की काफी उत्सुकता है कि आखिर इस मशहूर अदाकार ने किस शख्स को अपने जीवनसाथी के लिए चुना है। स्वरा ने जिस शख्स से शादी रचाई है, उनका नाम फहाद अहमद है। अहमद और स्वरा दोनों के राजनीतिक विचार एक जैसे हैं, जिसने उन्हें करीब लाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है। तो आइए एक नजर फहाद अहमद पर डालते हैं।
फहाद अहमद का पूरा नाम फहाद जिरार अहमद है। उनका जन्म यूपी के बरेली जिले के बहेड़ी में 2 फरवरी 1992 को हुआ था। उनके पिता का नाम जिरार अहमद है, जो अलीगढ़ में समाजवादी पार्टी की तरफ से राजनीति करते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद फहाद ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से सोशल वर्क में एमफिल किया। यहीं उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। साल 2017 और 2018 में फहाद को TISS छात्रसंघ का महासचिव चुना गया था। फिलहाल वह वहीं से पीएचडी भी कर रहे हैं।
टीआईएसएस छात्रसंघ के महासचिव रहने के दौरान फहाद अहमद ने एससी/एसटी और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ संस्थान के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। इसी प्रदर्शऩ को लेकर वे पहली चर्चा में आए थे। ये आंदोलन एससी/एसटी और पिछड़े वर्ग के छात्रों की फीस माफी को खत्म करने के फैसले के खिलाफ था। इसके अलावा उन्होंने सीएए के खिलाफ मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में आयोजित विरोध-प्रदर्शऩों में हिस्सा लिया था।
फहाद अहमद ने टीआईएसएस के दीक्षांत समारोह में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन एस. रामादुरई के हाथों एमफिल की डिग्री लेने से इनकार कर दिया था। उनके साथ कई और छात्रों ने डिग्री लेने से मना कर दिया था। जिसे टाटा इंस्टीट्यूट ने संस्थान का अपमान बताया था। इंस्टीट्यूट ने पीएचडी में उनका रजिस्ट्रेशन भी बैन कर दिया था। फहाद अहमद अब छात्र राजनीति से निकलकर एक्टिव पॉलिटिक्स में उतर चुके हैं। उन्होंने साल 2021 के जुलाई सपा को ज्वाइन किया। वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी की युवा ईकाई की महाराष्ट्र और मुंबई अध्यक्ष हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वरा भास्कर के पति फहाद जिरार अहमद लोकप्रियता के साथ - साथ संपत्ति के मामले में भी अपनी पत्नी से पीछे हैं। स्वरा भास्कर के पास करोड़ों की संपत्ति है। उनकी नेटवर्थ साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, 35 करोड़ रूपये है। दिल्ली के अलावा मुंबई में भी उनका घर है। मुंबई में करोड़ों की फ्लैट में रहने वाला स्वरा भास्कर के पास लग्जरी कार बीएमडब्ल्यू एक्स 1 है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वरा किसी फिल्म में लीड किरदार के लिए 4-5 करोड़ रूपये की फीस लेती हैं। वहीं, उनके पति फहाद अहमद की संपत्ति के बारे में फिलहाल सार्वजनिक रूप से बेहद कम जानकारी उपलब्ध है।
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Swara Bhaskar Husband: स्वरा ने जिस शख्स से शादी रचाई है, उनका नाम फहाद अहमद है। अहमद और स्वरा दोनों के राजनीतिक विचार एक जैसे हैं। Swara Bhaskar Husband: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर सिने जगत के उन कलाकरों में शुमार हैं, जो अपनी राय बड़ी बेबाकी से रखती है। स्वरा अपने एक्टिंग से ज्यादा अपने पॉलिटिकल स्टैंड को लेकर चर्चा में रही हैं। मौजूदा केंद्र सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आक्रमक रूख रखने वाली फिल्म अभिनेत्री को इसका नुकसान भी हुआ है लेकिन फिर भी वह अपने विचारों से डिगी नहीं हैं। यही वजह है कि कोई बड़ी फिल्म न करने के बावजूद वो सुर्खियों में बनी हुई हैं। स्वरा भास्कर फिलहाल तो अपनी शादी को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। उनके प्रशंसकों और विरोधियों में ये जानने की काफी उत्सुकता है कि आखिर इस मशहूर अदाकार ने किस शख्स को अपने जीवनसाथी के लिए चुना है। स्वरा ने जिस शख्स से शादी रचाई है, उनका नाम फहाद अहमद है। अहमद और स्वरा दोनों के राजनीतिक विचार एक जैसे हैं, जिसने उन्हें करीब लाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है। तो आइए एक नजर फहाद अहमद पर डालते हैं। फहाद अहमद का पूरा नाम फहाद जिरार अहमद है। उनका जन्म यूपी के बरेली जिले के बहेड़ी में दो फरवरी एक हज़ार नौ सौ बानवे को हुआ था। उनके पिता का नाम जिरार अहमद है, जो अलीगढ़ में समाजवादी पार्टी की तरफ से राजनीति करते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद फहाद ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से सोशल वर्क में एमफिल किया। यहीं उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा। साल दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार अट्ठारह में फहाद को TISS छात्रसंघ का महासचिव चुना गया था। फिलहाल वह वहीं से पीएचडी भी कर रहे हैं। टीआईएसएस छात्रसंघ के महासचिव रहने के दौरान फहाद अहमद ने एससी/एसटी और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ संस्थान के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। इसी प्रदर्शऩ को लेकर वे पहली चर्चा में आए थे। ये आंदोलन एससी/एसटी और पिछड़े वर्ग के छात्रों की फीस माफी को खत्म करने के फैसले के खिलाफ था। इसके अलावा उन्होंने सीएए के खिलाफ मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में आयोजित विरोध-प्रदर्शऩों में हिस्सा लिया था। फहाद अहमद ने टीआईएसएस के दीक्षांत समारोह में यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन एस. रामादुरई के हाथों एमफिल की डिग्री लेने से इनकार कर दिया था। उनके साथ कई और छात्रों ने डिग्री लेने से मना कर दिया था। जिसे टाटा इंस्टीट्यूट ने संस्थान का अपमान बताया था। इंस्टीट्यूट ने पीएचडी में उनका रजिस्ट्रेशन भी बैन कर दिया था। फहाद अहमद अब छात्र राजनीति से निकलकर एक्टिव पॉलिटिक्स में उतर चुके हैं। उन्होंने साल दो हज़ार इक्कीस के जुलाई सपा को ज्वाइन किया। वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी की युवा ईकाई की महाराष्ट्र और मुंबई अध्यक्ष हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वरा भास्कर के पति फहाद जिरार अहमद लोकप्रियता के साथ - साथ संपत्ति के मामले में भी अपनी पत्नी से पीछे हैं। स्वरा भास्कर के पास करोड़ों की संपत्ति है। उनकी नेटवर्थ साल दो हज़ार इक्कीस के आंकड़ों के मुताबिक, पैंतीस करोड़ रूपये है। दिल्ली के अलावा मुंबई में भी उनका घर है। मुंबई में करोड़ों की फ्लैट में रहने वाला स्वरा भास्कर के पास लग्जरी कार बीएमडब्ल्यू एक्स एक है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वरा किसी फिल्म में लीड किरदार के लिए चार-पाँच करोड़ रूपये की फीस लेती हैं। वहीं, उनके पति फहाद अहमद की संपत्ति के बारे में फिलहाल सार्वजनिक रूप से बेहद कम जानकारी उपलब्ध है।
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कॉमेडी शो 'इंडियाज लाफ्टर चैंपियन' को अपना पहला विजेता मिल चुका है। जी हां. . शनिवार को हुए ग्रैंड फिनाले में बेस्ट कॉमेडियन रजत सूद को इस का खिताब मिला है और ट्रॉफी के साथ-साथ उन्हें 25 लाख रुपए मनी प्राइस के रूप में मिले हैं। बता दें इसके फाइनल राउंड में विजय सचिन, उज्जैन के हिमांशु बवंडर, विग्नेश पांडे, नीतीश शेट्टी और रजत सूद पहुंचे थे। हालाँकि इन सब को पीछे छोड़ रजत इस ट्रॉफी को अपने नाम करने में कामयाब रहे।
बता दें, जहां रजत को 2500000 रुपए के चेक के साथ चमचमाती ट्रॉफी दी गई तो वहीं मुंबई के नितेश शेट्टी फर्स्ट रनर अप रहे। वही मुंबई से जय विजय सचिन और बिजनेस पांडे को सेकंड रन अप का खिताब मिला। बता दे ग्रैंड फिनाले में मशहूर अभिनेता विजय देवराकोंडा और अनन्या पांडे अपनी फिल्म 'लाइगर' के प्रमोशन में पहुंचे थे।
वही शो जीतने के बाद रजत काफी खुश हैं और उन्होंने बताया कि, कुछ मिनट के लिए तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि वह इस शो का खिताब अपने नाम कर चुके हैं।
बता दें, इंडियन लाफ्टर चैंपियन का हिस्सा बनने से पहले रजत ने साल 2021 में आया दूरदर्शन के कॉमेडी 'सो करोड़ का कवि' में भी हिस्सा लिया था और वो इसके फाइनलिस्ट में भी शामिल हुए थे। लेकिन वह इस शो का खिताब अपने नाम नहीं कर पाए। 'सो करोड़ का कवि' देश का पहला कविता का रियलिटी शो था जिसमें पटना के अमनदीप सिंह विजेता बने थे, जबकि रजत को दूसरा स्थान मिला था। हालाँकि अब रजत इंडिया लाफ्टर चैंपियन का खिताब अपने नाम करने में कामयाब रहे और खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
गौरतलब है कि इस शो के जज शेखर सुमन और अर्चना पूरन सिंह थीं।
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कॉमेडी शो 'इंडियाज लाफ्टर चैंपियन' को अपना पहला विजेता मिल चुका है। जी हां. . शनिवार को हुए ग्रैंड फिनाले में बेस्ट कॉमेडियन रजत सूद को इस का खिताब मिला है और ट्रॉफी के साथ-साथ उन्हें पच्चीस लाख रुपए मनी प्राइस के रूप में मिले हैं। बता दें इसके फाइनल राउंड में विजय सचिन, उज्जैन के हिमांशु बवंडर, विग्नेश पांडे, नीतीश शेट्टी और रजत सूद पहुंचे थे। हालाँकि इन सब को पीछे छोड़ रजत इस ट्रॉफी को अपने नाम करने में कामयाब रहे। बता दें, जहां रजत को पच्चीस लाख रुपयापए के चेक के साथ चमचमाती ट्रॉफी दी गई तो वहीं मुंबई के नितेश शेट्टी फर्स्ट रनर अप रहे। वही मुंबई से जय विजय सचिन और बिजनेस पांडे को सेकंड रन अप का खिताब मिला। बता दे ग्रैंड फिनाले में मशहूर अभिनेता विजय देवराकोंडा और अनन्या पांडे अपनी फिल्म 'लाइगर' के प्रमोशन में पहुंचे थे। वही शो जीतने के बाद रजत काफी खुश हैं और उन्होंने बताया कि, कुछ मिनट के लिए तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि वह इस शो का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। बता दें, इंडियन लाफ्टर चैंपियन का हिस्सा बनने से पहले रजत ने साल दो हज़ार इक्कीस में आया दूरदर्शन के कॉमेडी 'सो करोड़ का कवि' में भी हिस्सा लिया था और वो इसके फाइनलिस्ट में भी शामिल हुए थे। लेकिन वह इस शो का खिताब अपने नाम नहीं कर पाए। 'सो करोड़ का कवि' देश का पहला कविता का रियलिटी शो था जिसमें पटना के अमनदीप सिंह विजेता बने थे, जबकि रजत को दूसरा स्थान मिला था। हालाँकि अब रजत इंडिया लाफ्टर चैंपियन का खिताब अपने नाम करने में कामयाब रहे और खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। गौरतलब है कि इस शो के जज शेखर सुमन और अर्चना पूरन सिंह थीं।
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रायपुर। महासमुंद जिले में प्रेम प्रसंग के चलते प्रेमिका की गोली मारकर हत्या कर दी है। आरोपी उसका प्रेमी ही है, आरोपी का नाम चंद्रशेखर परमार 21 वर्ष है और महासमुंद गोराड़ी का रहने वाला है।
मृतिका प्रेमी का नाम रूपा धीवर है जो अपनी बड़ी बहन के साथ मेडिकल दवाई खरीदने के लिए पहुंची हुई थी। इस दौरान जब वो दवाई खरीद कर घर लौट रही थी तभी, बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे और अपने पास रखी पिस्टल से रूपा धीवर पर तापड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में रूपा की मौके पर ही गोली लगाने से मौत हो गई है। इस घटना पर पीएम समर्थक हेमलाल साहू ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 21 वर्षीय युवती को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किया जाना काफी चिंताजनक है। मेरा मानना है कि छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन काफी मेहनत किया जाता है। अपराधिक तत्वों ऊपर कार्यवाही लगातार किया जा रहा है।
इसके बाद भी इस प्रकार की घटना घटित हो रही है। इस बारे में राजनीति नहीं होना चाहिए जो अपराधिक किस्म के लोग हैं। कोई भी संस्था से जुड़ा हुआ हो उसके ऊपर पुलिस प्रशासन सख्त कार्यवाही किया जाए।
जिससे प्रदेश के अंतर्गत अप्रिय घटना किसी प्रकार की ना घटे। इस संबंध में राज्य सरकार को भी पुलिस प्रशासन को पर बहुत भरोसा रखते हुए पुलिस प्रशासन को उनके हिसाब से कार्य किया जाने की आदेशित किया जाए। जिससे पुलिस प्रशासन के द्वारा अपने हिसाब से कार्य किया जाने पर प्रदेश के अंतर्गत अपराधिक जब तक लोगों में काफी लगाम लग सकते हैं।
मेरा मानना है कि आज भी छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन काफी मेहनत एवं लगन के साथ रात दिन कार्य किया जा रहा है। इनके बावजूद भी अप्रिय घटना घट जाना हम सभी लोगों को चिंता की बात है। पुलिस महानिदेशक आपसे निवेदन है कि अपराधिक तत्वों के कोई भी पार्टी और कोई भी समाज का हो उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्यवाही किया जाए।
जिससे छत्तीसगढ़ प्रदेश में शांति व्यवस्था सुचारू रूप से चलता रहे आपसे निवेदन है सभी पुलिस अधिकारीगण पुलिस अधीक्षक अपने अपने जिला में अपराधिक तत्वों के लोगों पर निगरानी बनाए रखें। जिससे हमारे छत्तीसगढ़ भारत के लोकप्रिय है। शांति व्यवस्था बनाए रखने में सभी को सहयोग की आवश्यकता है।
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रायपुर। महासमुंद जिले में प्रेम प्रसंग के चलते प्रेमिका की गोली मारकर हत्या कर दी है। आरोपी उसका प्रेमी ही है, आरोपी का नाम चंद्रशेखर परमार इक्कीस वर्ष है और महासमुंद गोराड़ी का रहने वाला है। मृतिका प्रेमी का नाम रूपा धीवर है जो अपनी बड़ी बहन के साथ मेडिकल दवाई खरीदने के लिए पहुंची हुई थी। इस दौरान जब वो दवाई खरीद कर घर लौट रही थी तभी, बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे और अपने पास रखी पिस्टल से रूपा धीवर पर तापड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में रूपा की मौके पर ही गोली लगाने से मौत हो गई है। इस घटना पर पीएम समर्थक हेमलाल साहू ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इक्कीस वर्षीय युवती को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किया जाना काफी चिंताजनक है। मेरा मानना है कि छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन काफी मेहनत किया जाता है। अपराधिक तत्वों ऊपर कार्यवाही लगातार किया जा रहा है। इसके बाद भी इस प्रकार की घटना घटित हो रही है। इस बारे में राजनीति नहीं होना चाहिए जो अपराधिक किस्म के लोग हैं। कोई भी संस्था से जुड़ा हुआ हो उसके ऊपर पुलिस प्रशासन सख्त कार्यवाही किया जाए। जिससे प्रदेश के अंतर्गत अप्रिय घटना किसी प्रकार की ना घटे। इस संबंध में राज्य सरकार को भी पुलिस प्रशासन को पर बहुत भरोसा रखते हुए पुलिस प्रशासन को उनके हिसाब से कार्य किया जाने की आदेशित किया जाए। जिससे पुलिस प्रशासन के द्वारा अपने हिसाब से कार्य किया जाने पर प्रदेश के अंतर्गत अपराधिक जब तक लोगों में काफी लगाम लग सकते हैं। मेरा मानना है कि आज भी छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन काफी मेहनत एवं लगन के साथ रात दिन कार्य किया जा रहा है। इनके बावजूद भी अप्रिय घटना घट जाना हम सभी लोगों को चिंता की बात है। पुलिस महानिदेशक आपसे निवेदन है कि अपराधिक तत्वों के कोई भी पार्टी और कोई भी समाज का हो उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्यवाही किया जाए। जिससे छत्तीसगढ़ प्रदेश में शांति व्यवस्था सुचारू रूप से चलता रहे आपसे निवेदन है सभी पुलिस अधिकारीगण पुलिस अधीक्षक अपने अपने जिला में अपराधिक तत्वों के लोगों पर निगरानी बनाए रखें। जिससे हमारे छत्तीसगढ़ भारत के लोकप्रिय है। शांति व्यवस्था बनाए रखने में सभी को सहयोग की आवश्यकता है।
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हम रोज़ जन्म और मरते देते हैं। फिर उसे मर अविनाश कैसे कह सकते हैं । तो भगवान हैं । हम देखते हैं कि देश में रहने वाले "देवा" का मानदेह में बिना किसी दल के बचपन, जवानी रात तरह की अवस्थायें हो जाती है। शरीर की अवस्थायें बदलती रहती हैं, परन्तु शरीर के अन्दर रहने वाला जीवात्मा जैसा का जैसा बना रहता है,. यानी शरीर की अवरूदल ने पर उसकी अवस्था में कुछ भी फेरफार नहीं होता बचपन के अन्त में वह मर नहीं जाता और जवानी वस्था के शुरु में क जन्म नहीं देता। यह बिना किसी तली के बचपन से जवानी और अपनी से बुढापे के शरीर में चलाता है। ऐसे समय पर सनुष्य यह समझ किरा वर्तमान शरीर तो का ही हुआ है केवल शरर की अवस्थचे तदा गई है. रंज नहीं करता, किन्तु वर्तमान के एक दम छोड़ने के समय उसे लोहे के कारण शो होता है। परन्तु यह शोक सेवन्द्र अशानियों को होता है. शोक करते की आवश्य ही क्या है ? पुराने सरे
गल रोग पूर्ण शरीर के छु इते ही दूसरा दया ताजा शरीर निश्चय ही मिलता है फिर इस में शोक की कौन सी बात है, समझ में नहीं छाता ।
जब कि हम जवानी के हृष्टः पुष्ट सुन्दर बलवान शरीर को खो कर बुढापे काः कुरूप, निवन्न और रोग पूर्ण शरीर पाते हैं तो इन सड़े गल्ले शरीर से ही हमः सन्तुष्ट हैं। जब हम जयानी के अपने शरीर को पाकर शोक नहीं करते, तब हमारा बुढाप के इस निर्वत सड़े गये 'शरीर के लिये शोक करना महान तादानी है, बल्कि हमें ऐसे समय पर अति प्रसन्न होना चाहिये क्योंकि पुराने के बदले में नया शरीर मिलेगा शरीर के अन्दर रहने वाला आत्मा मुसाफिर है, और यह शरीर जिसमें बह रहता है सराय के समान है जिस तरह मुकाफिर को एक सराय से इमरी सराय बदल ने में कोई रंज नहीं होता, उसी तरह एक शरीर को छोड़ कर दूसरे शरीर में जाने के समय रंज न करना चाहिये मानलो देवदत्त एक ऐसे मकान में रहता है जो एक दम मैला है और जगह
जगह पानी चुता है और जिस में शिवाय दुःख के जग भी गम नहींः । अगर उस के जिये उसका पिता सर्व सुख सम्पन्न एक नया मकानः बनवादे और उसको चाज्ञा देदे कि तुम उस नये संकान में चले जाओो तो देवदत्त को उस सड़े ग्ले- मैले कुचले मकान को छोड़ने में क्या दुःख होगा. कदापि नहीं, बल्कि महान प्रसन्न होगा। बम ऐसी सब बातों को विचार कर बुद्धिमान पुरुष एक शरीर छोड़ कर दूसरे में जाने के लमय ज़्ग़मीः रंज नहीं करता । तव अर्जुन भगवान से पूछते हुए कि अगर हम कहें कि इस शरीर के सिवा और आत्मा है ही नहीं तो आप क्या करेंगे।
( उत्तर ) अगर देह के मियाय दह में होने वाला और कोई श्रात्मा न होता, तो ऐसा अनुभव न होता कि मैं पहले वचपन के छोटे से शरीर में था, इस समय जावानी के शरीर में हूं। मैं पहले जो जवाना के शरीर में था, अब बूढे विगडे हुए शरीर में रहने वाला हूं, उसे ही बचपन, जवानी बुढाप श्रादि का अनुभव होता है। जिसे ऐसा ज्ञान और अनुभव है वह कोई [चतन्य वस्तु है और वह शरीर से जुदा है, क्योंकि शरीर अचेतन है उसे ऐसी अवस्थाओं की तब्दीली का ज्ञान नहीं हो सकता है बल्कि माँ के पेट से बाहर आते ही भूख आदि की शान्ति के लिये चेष्ठा करता है । "उसको पैदा होते हीनको प्रकार की चेष्टाएँ करते देखकर अनुमान होता कि शरीर में एक चैतन वस्तु है और वह अपने पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण काम कर रही है। क्योंकि शरीर जो अचेतम्य है ऐसी चेष्टाएँ नहीं
कर सकता । शरीर का अर्थ यहां पर स्थल; ढांचे इन्द्रियों तथा मन से है ।
जानी है तथा बुढापा है, यह ज्ञान शरीर इन्द्रियों तथा मन
को महीं होता, किन्तु यह ज्ञान का अनुभव एक और डी पदार्थ को होता है।
और जिसे यह ज्ञान का अनुभव होता है वही, चैतन्य और बही आत्मा है जिस का कभी नाश नहीं होता
.( मश्न' बचपन, जवानी. बुढ़ापे इन अस्थाओं में तो वास्तविक यह ज्ञान होता है कि मैं बही हुं मैं जो बचपन के शरीर में या वही जवानी और बुढ़ापे में हूं । मगर मरने पर दूसरे शरीर में तो यह ज्ञान नही रहता कि अमुक अमुक शरीर में रहने वाला मैं वहीं इस शरीर में हूं, इस ले ज्ञान पड़ता है कि शरीर के साथ कोई ग्रात्मा या चैतन्य वस्तु तो पैदा होता है पर शरीर के नाश होने के साथ वह भी नारा होजाती है। इस शंका को और समाधान कोजिये ।
( उत्तर ) माँ के पेट से निकलते ही बालक को हर्प, शोक भय आदि होने लगते हैं । इस संसार का तो उप तत्कान के पैदा हुये बालक को जा भी अनुभव नहीं होता, फिर वह क्यों रोत, हता और डरता है इसने और रोने प्रभृति कानों से मालूम होता है । कि वह अपनी पहला देह छोड़कर इस नये शरीर में भाया है। उसे अपने पहले जन्म की हर्ष, शोक भय पैदा करने वाली वा तें याद हैं, इसी से बह हसता, सेता औ डरता है । अगर हाल का पैदा हुआ वाक बिलकुल नया जन्म लेता यानी उपका पूर्व जन्म न हुआ होता अर्थात अपने पहले जन्म न लिया होता. तो वह पैदा होते ही अपनी भूख बुझाने को मां के मेन लग जाता । यह नियम है कि चेतन प्राणी जो करते हैं अपनी भलाई बुराई विचार कर करते हैं। बच्चे ने पहले अनेकः : बार जन्म लिये हैं । उसने प्रत्येक चार जन्म लेने के समय अपना शरीर पुष्टि के लिये माताओं के स्तनपान किये हैं, इस बार भी उसे अपने पहले जन्म की बात याद है, उसे स्तनों द्वारा दूध पाने का अनुभव हैं उसे दूध पीने से लाभ होगा उम्र का ज्ञान है, इसी से वह इस जन्म में पैदा होते ही चिना किसी के सिखाये बिना अनुभव किये ही स्तन पीने लगता है. इस से प्रगट होता है कि इस हाल के पैदा हुए बच्चे के अन्दर चैतन्यः
वस्तु आत्मा है और वह पहले अन्य में भी था, उसी आत्मा पहला पुगना शरीर त्याग क नये शहर में प्रवेश किया है। साथ चैतन्य वस्तु प्रात्मा नाश नहीं हो ज्यता, यह पुगने शरीन को छोड़ कर नये नये शरीर धारण करता है । आत्मा तो वही एक है किन्तु शरीर बहुत में हैं, शरीर नाश हो जाते हैं मग आत्मा का कभी नाश नहीं होता ।
सहन शीलता ज्ञान की एक अवस्था है ।
इतना समझाने पर भी अर्जुन के मन में ऐसी ऐसी शंकाएं उठती हैं । ( १ ) हे कृष्ल ! आप ने जो कुछ कहा है बिलकुल सच है । आप के समझाने से मैं समझ गया, कि शात्मा अविनाशी है, और शरीर के नाश होने से जो हानि होती है वह कुछ भी हानि नहीं है, क्यों कि एक शरीर के नाश होने पर अच्छा नया ताजा शरीर मिल जाता है इस लिये भीष्म द्रोण आदि के लिये शोक करना वृथा है, क्योंकि उन का शरीर नाश होजायगा पर वे स्वयं नाश न होंगे परन्तु एक बात का दुःख मुझे अवश्य होगा कि मैं उन्हें देख न सकूंगा, उन्हें अलिंगन न करें सकूंगा और उन से बात चीत न कर सकूंगा, क्योंकि उन्हें देखने, मिलने जुलने और बात चीत करने से मुझे सुख होता है साथ ही उनका कटाः फटा अंग हीन शरीर देख कर मुझे दुखि होगा । .
( २ ) आप के समझाने से मुझे इस बात का तो निश्चय होगया कि इस शरीर के छोड़ने पर दूसरा अच्छा शरीर मिलेगा । परन्तु यह संदेह है कि दूसरा शरीर अच्छा मिले या बुग मिले उसमें गरमी संरदी का आराम हो या न हो, ऐसे उत्तम उत्तम पदार्थ फिर उस देह में मिले या न मिलें, इसी कारण मुझे प्यारे पदार्थों की जुदाई के ख्याल से दुख होता है, क्योंकि ये सब तो देह के नाश होते ही मुझ से छूट जायगे ।
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हम रोज़ जन्म और मरते देते हैं। फिर उसे मर अविनाश कैसे कह सकते हैं । तो भगवान हैं । हम देखते हैं कि देश में रहने वाले "देवा" का मानदेह में बिना किसी दल के बचपन, जवानी रात तरह की अवस्थायें हो जाती है। शरीर की अवस्थायें बदलती रहती हैं, परन्तु शरीर के अन्दर रहने वाला जीवात्मा जैसा का जैसा बना रहता है,. यानी शरीर की अवरूदल ने पर उसकी अवस्था में कुछ भी फेरफार नहीं होता बचपन के अन्त में वह मर नहीं जाता और जवानी वस्था के शुरु में क जन्म नहीं देता। यह बिना किसी तली के बचपन से जवानी और अपनी से बुढापे के शरीर में चलाता है। ऐसे समय पर सनुष्य यह समझ किरा वर्तमान शरीर तो का ही हुआ है केवल शरर की अवस्थचे तदा गई है. रंज नहीं करता, किन्तु वर्तमान के एक दम छोड़ने के समय उसे लोहे के कारण शो होता है। परन्तु यह शोक सेवन्द्र अशानियों को होता है. शोक करते की आवश्य ही क्या है ? पुराने सरे गल रोग पूर्ण शरीर के छु इते ही दूसरा दया ताजा शरीर निश्चय ही मिलता है फिर इस में शोक की कौन सी बात है, समझ में नहीं छाता । जब कि हम जवानी के हृष्टः पुष्ट सुन्दर बलवान शरीर को खो कर बुढापे काः कुरूप, निवन्न और रोग पूर्ण शरीर पाते हैं तो इन सड़े गल्ले शरीर से ही हमः सन्तुष्ट हैं। जब हम जयानी के अपने शरीर को पाकर शोक नहीं करते, तब हमारा बुढाप के इस निर्वत सड़े गये 'शरीर के लिये शोक करना महान तादानी है, बल्कि हमें ऐसे समय पर अति प्रसन्न होना चाहिये क्योंकि पुराने के बदले में नया शरीर मिलेगा शरीर के अन्दर रहने वाला आत्मा मुसाफिर है, और यह शरीर जिसमें बह रहता है सराय के समान है जिस तरह मुकाफिर को एक सराय से इमरी सराय बदल ने में कोई रंज नहीं होता, उसी तरह एक शरीर को छोड़ कर दूसरे शरीर में जाने के समय रंज न करना चाहिये मानलो देवदत्त एक ऐसे मकान में रहता है जो एक दम मैला है और जगह जगह पानी चुता है और जिस में शिवाय दुःख के जग भी गम नहींः । अगर उस के जिये उसका पिता सर्व सुख सम्पन्न एक नया मकानः बनवादे और उसको चाज्ञा देदे कि तुम उस नये संकान में चले जाओो तो देवदत्त को उस सड़े ग्ले- मैले कुचले मकान को छोड़ने में क्या दुःख होगा. कदापि नहीं, बल्कि महान प्रसन्न होगा। बम ऐसी सब बातों को विचार कर बुद्धिमान पुरुष एक शरीर छोड़ कर दूसरे में जाने के लमय ज़्ग़मीः रंज नहीं करता । तव अर्जुन भगवान से पूछते हुए कि अगर हम कहें कि इस शरीर के सिवा और आत्मा है ही नहीं तो आप क्या करेंगे। अगर देह के मियाय दह में होने वाला और कोई श्रात्मा न होता, तो ऐसा अनुभव न होता कि मैं पहले वचपन के छोटे से शरीर में था, इस समय जावानी के शरीर में हूं। मैं पहले जो जवाना के शरीर में था, अब बूढे विगडे हुए शरीर में रहने वाला हूं, उसे ही बचपन, जवानी बुढाप श्रादि का अनुभव होता है। जिसे ऐसा ज्ञान और अनुभव है वह कोई [चतन्य वस्तु है और वह शरीर से जुदा है, क्योंकि शरीर अचेतन है उसे ऐसी अवस्थाओं की तब्दीली का ज्ञान नहीं हो सकता है बल्कि माँ के पेट से बाहर आते ही भूख आदि की शान्ति के लिये चेष्ठा करता है । "उसको पैदा होते हीनको प्रकार की चेष्टाएँ करते देखकर अनुमान होता कि शरीर में एक चैतन वस्तु है और वह अपने पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण काम कर रही है। क्योंकि शरीर जो अचेतम्य है ऐसी चेष्टाएँ नहीं कर सकता । शरीर का अर्थ यहां पर स्थल; ढांचे इन्द्रियों तथा मन से है । जानी है तथा बुढापा है, यह ज्ञान शरीर इन्द्रियों तथा मन को महीं होता, किन्तु यह ज्ञान का अनुभव एक और डी पदार्थ को होता है। और जिसे यह ज्ञान का अनुभव होता है वही, चैतन्य और बही आत्मा है जिस का कभी नाश नहीं होता . माँ के पेट से निकलते ही बालक को हर्प, शोक भय आदि होने लगते हैं । इस संसार का तो उप तत्कान के पैदा हुये बालक को जा भी अनुभव नहीं होता, फिर वह क्यों रोत, हता और डरता है इसने और रोने प्रभृति कानों से मालूम होता है । कि वह अपनी पहला देह छोड़कर इस नये शरीर में भाया है। उसे अपने पहले जन्म की हर्ष, शोक भय पैदा करने वाली वा तें याद हैं, इसी से बह हसता, सेता औ डरता है । अगर हाल का पैदा हुआ वाक बिलकुल नया जन्म लेता यानी उपका पूर्व जन्म न हुआ होता अर्थात अपने पहले जन्म न लिया होता. तो वह पैदा होते ही अपनी भूख बुझाने को मां के मेन लग जाता । यह नियम है कि चेतन प्राणी जो करते हैं अपनी भलाई बुराई विचार कर करते हैं। बच्चे ने पहले अनेकः : बार जन्म लिये हैं । उसने प्रत्येक चार जन्म लेने के समय अपना शरीर पुष्टि के लिये माताओं के स्तनपान किये हैं, इस बार भी उसे अपने पहले जन्म की बात याद है, उसे स्तनों द्वारा दूध पाने का अनुभव हैं उसे दूध पीने से लाभ होगा उम्र का ज्ञान है, इसी से वह इस जन्म में पैदा होते ही चिना किसी के सिखाये बिना अनुभव किये ही स्तन पीने लगता है. इस से प्रगट होता है कि इस हाल के पैदा हुए बच्चे के अन्दर चैतन्यः वस्तु आत्मा है और वह पहले अन्य में भी था, उसी आत्मा पहला पुगना शरीर त्याग क नये शहर में प्रवेश किया है। साथ चैतन्य वस्तु प्रात्मा नाश नहीं हो ज्यता, यह पुगने शरीन को छोड़ कर नये नये शरीर धारण करता है । आत्मा तो वही एक है किन्तु शरीर बहुत में हैं, शरीर नाश हो जाते हैं मग आत्मा का कभी नाश नहीं होता । सहन शीलता ज्ञान की एक अवस्था है । इतना समझाने पर भी अर्जुन के मन में ऐसी ऐसी शंकाएं उठती हैं । हे कृष्ल ! आप ने जो कुछ कहा है बिलकुल सच है । आप के समझाने से मैं समझ गया, कि शात्मा अविनाशी है, और शरीर के नाश होने से जो हानि होती है वह कुछ भी हानि नहीं है, क्यों कि एक शरीर के नाश होने पर अच्छा नया ताजा शरीर मिल जाता है इस लिये भीष्म द्रोण आदि के लिये शोक करना वृथा है, क्योंकि उन का शरीर नाश होजायगा पर वे स्वयं नाश न होंगे परन्तु एक बात का दुःख मुझे अवश्य होगा कि मैं उन्हें देख न सकूंगा, उन्हें अलिंगन न करें सकूंगा और उन से बात चीत न कर सकूंगा, क्योंकि उन्हें देखने, मिलने जुलने और बात चीत करने से मुझे सुख होता है साथ ही उनका कटाः फटा अंग हीन शरीर देख कर मुझे दुखि होगा । . आप के समझाने से मुझे इस बात का तो निश्चय होगया कि इस शरीर के छोड़ने पर दूसरा अच्छा शरीर मिलेगा । परन्तु यह संदेह है कि दूसरा शरीर अच्छा मिले या बुग मिले उसमें गरमी संरदी का आराम हो या न हो, ऐसे उत्तम उत्तम पदार्थ फिर उस देह में मिले या न मिलें, इसी कारण मुझे प्यारे पदार्थों की जुदाई के ख्याल से दुख होता है, क्योंकि ये सब तो देह के नाश होते ही मुझ से छूट जायगे ।
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